आज से शारदीय नवरात्र, पहले दिन ऐसे करें मां शैलपुत्री को प्रसन्न

शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से शुरू हो रहा है। नवरात्र मां दुर्गा के प्रति आस्था और विश्वास प्रकट करने वाला पर्व है। इस दौरान माता के भक्त नौ दिनों तक जप, तप जैसे विभिन्न अनुष्ठानों से माता को प्रसन्न कर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। नवरात्र में ऐसे करें पूजा नवरात्र में सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शुद्घ जल से स्नान करें। इसके बाद घर के किसी पवित्र स्थान पर स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं। वेदी में जौ और गेहूं दोनों को मिलाकर बोएं। वेदी के पास धरती मां का पूजन कर वहां कलश स्थापित करें। इसके बाद सबसे पहले प्रथम पूज्य श्रीगणेश की पूजा करें, फिर वेदी के किनारे पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवी मां की प्रतिमा स्थापित करें। मां दुर्गा की कुमकुम, चावल, पुष्प, इत्र इत्यादि से विधिपूर्वक पूजा करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। नवरात्रि में ये न करें नवरात्रि में 9 दिन दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाई जाती है। इन दिनों नाखून काटने के लिए भी मना किया जाता है। जो व्रतधारी नवरात्रि में कलश स्थापना करते हैं और माता की चौकी स्थापित करते हैं, वे इन 9 दिनों में घर खाली छोडक़र कहीं नहीं जाएं। नवरात्रि में प्याज, लहसुन और मांसाहार (नॉन-वेज) पर पाबंदी होती है। इसके अलावा व्रत रखने वालों को नौ दिन तक नींबू काटने पर रोक रहती है। व्रत रखने वालों को 9 दिन काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। उन्हें बेल्ट, चप्पल-जूते, बैग जैसी चमड़े की चीजों के इस्तेमाल से भी बचना चाहिए। नवरात्र में व्रतधारी नौ दिनों तक खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोने, तम्बाकू चबाने और ब्रह्मचर्य का पालन न करने से भी व्रत का फल नहीं मिलता है। पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाती है, इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय के घर में पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। इनकी उपासना से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मां शैलपुत्री का स्वरुप आदि शक्ति ने अपने इस रूप में शैलपुत्र हिमालय के घर जन्म लिया था, इसी कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। शैलपुत्री नंदी नाम के वृषभ पर सवार होती हैं और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प रहता है। मां शैलपुत्री की पूजा विधि मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें और उसके नीचे लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। इसके ऊपर केशर से शं लिखें और उसके ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें। इसके बाद हाथ में लाल पुष्प लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें और मंत्र बोलें... मंत्र: 'ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:' मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका व मां की तस्वीर के ऊपर छोड दें। इसके बाद भोग प्रसाद अर्पित करें और मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें। यह जप कम से कम 108 बार करना चाहिए। मंत्र: 'ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।' मंत्र संख्या पूर्ण होने के बाद मां के चरणों में अपनी मनोकामना को व्यक्त करते हुए मां से प्रार्थना करें और श्रद्धा से आरती कीर्तन करें। मां शैलपुत्री को ये लगाएं भोग मां शैलपुत्री के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनका मन एवं शरीर निरोगी रहता है।

पत्रिका 29 Sep 2019 9:59 am