धर्म कर्म है, वक्तव्य नहीं - ओशो

चित्त जब सब पकड़ छोड़ देता है- सब नाम-रूप के बंधन तोड़ देता है, तब वही आपमें शेष रह जाता है

दैनिक जागरण 9 Jun 2019 7:13 am