यहां पर अपने ही कटे सिर को हाथ में लेकर रक्तपान कराती हैं मां

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार मां भगवती अपनी सहेलियां जया और विजया के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने गईं थी। स्नान करने के बाद भूख से उनका शरीर काला पड़ गया। सहेलियां भोजन मांगने लगीं, इस पर मां भगवती ने उनसे कुछ प्रतीक्षा करने को कहा लेकिन उनकी सहेलियां भूख से तड़पने लगीं। सहेलियों का तड़प उनसे देखा नहीं गया और उनकी भूख मिटाने के लिए मां ने अपना सिर काट लिया। यहां पर है मंदिरों की श्रृंखला मां का अंतिम विश्राम स्थल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान को मां का अंतिम विश्राम स्थल भी माना गया है। यहां पर कतार से बने महाविद्या के मंदिर उनके रूप को और रहस्यमयी बना देते हैं। इन मंदिरों में तारा, षोडिषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, बंगला, कमला, मतंगी और घूमावती मुख्य हैं।

पत्रिका 25 Sep 2019 11:33 pm