यहां होती है योनि की पूजा, शक्ति साधना का सबसे बड़ा केंद्र है यह शक्तिपीठ

मंदिर का नाम कामाख्या क्यों पड़ा अजीबो गरीब प्रसाद बताया जाता है कि जब मां को तीन दिन का रजस्वला होता है, तो सफेद रंग का कपड़ा मंदिर के अंदर डाल दिया जाता है। तीन दिन बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब वह वस्त्र माता के रज से लाल हो जाता है। इस कपड़े को अम्बूवाची वस्त्र कहते है। इसे ही भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

पत्रिका 30 Sep 2019 11:14 am