विश्वकर्मा जयंती 2019 : भगवान विश्वकर्मा देव की आरती एवं चालीसा

विश्वकर्मा जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के बाद श्री विश्वकर्मा चालीसा का पाठ एवं चालीसा के बाद आरती का पाठ करने से श्री विश्वकर्मा देव की पूजा पूर्ण मानी जाती है। इस साल 2019 में श्री विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर दिन मंगलवार को है।   Vishwakarma Jayanti 2019 : इस शुभ मुहूर्त में ऐसे करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा ।। भगवान विश्वकर्मा की आरती ।। 1- ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा । सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ।। 2- आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया । शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ।। 3- ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई । ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई ।। 4- रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना । संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना ।। 5- जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 6- एकानन चतुरानन, पंचानन राजे द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे ।। 7- ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे । मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे ।। 8- श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे । कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। आरती के बाद इस चालीसा का पाठ श्रद्धा पूर्व करने से नवीन निर्माण की शक्ति मिलती हैं । ।। विश्वकर्मा जी की चालीसा ।। दोहा – श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊँ, चरणकमल धरिध्य़ान । श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान ।। 1- जय श्री विश्वकर्म भगवाना । जय विश्वेश्वर कृपा निधाना ।। शिल्पाचार्य परम उपकारी । भुवना-पुत्र नाम छविकारी ।। अष्टमबसु प्रभास-सुत नागर । शिल्पज्ञान जग कियउ उजागर ।। अद्रभुत सकल सुष्टि के कर्त्ता । सत्य ज्ञान श्रुति जग हित धर्त्ता ।। 3-शिल्पशास्त्र अरु शंख अनूपा । सोहत सूत्र माप अनुरूपा ।। धमुष वाण अरू त्रिशूल सोहे । नौवें हाथ कमल मन मोहे ।। दसवाँ हस्त बरद जग हेतू । अति भव सिंधु माँहि वर सेतू ।। सूरज तेज हरण तुम कियऊ । अस्त्र शस्त्र जिससे निरमयऊ ।। 5- अमृत घट के तुम निर्माता । साधु संत भक्तन सुर त्राता ।। लौह काष्ट ताम्र पाषाना । स्वर्ण शिल्प के परम सजाना ।। विद्युत अग्नि पवन भू वारी । इनसे अद् भुत काज सवारी ।। खान पान हित भाजन नाना । भवन विभिषत विविध विधाना ।। 7- भे आतुर प्रभु लखि सुर–शोका । कियउ काज सब भये अशोका ।। अद् भुत रचे यान मनहारी । जल-थल-गगन माँहि-समचारी ।। शिव अरु विश्वकर्म प्रभु माँही । विज्ञान कह अतंर नाही ।। बरनै कौन स्वरुप तुम्हारा । सकल सृष्टि है तव विस्तारा ।। 9- मनु मय त्वष्टा शिल्पी तक्षा । सबकी नित करतें हैं रक्षा ।। पंच पुत्र नित जग हित धर्मा । हवै निष्काम करै निज कर्मा ।। प्रभु तुम सम कृपाल नहिं कोई । विपदा हरै जगत मँह जोइ ।। जै जै जै भौवन विश्वकर्मा । करहु कृपा गुरुदेव सुधर्मा ।। 10- इक सौ आठ जाप कर जोई । छीजै विपति महा सुख होई ।। पढाहि जो विश्वकर्म-चालीसा । होय सिद्ध साक्षी गौरीशा ।। विश्व विश्वकर्मा प्रभु मेरे । हो प्रसन्न हम बालक तेरे ।। मैं हूँ सदा उमापति चेरा । सदा करो प्रभु मन मँह डेरा ।। दोहा – करहु कृपा शंकर सरिस, विश्वकर्मा शिवरुप । श्री शुभदा रचना सहित, ह्रदय बसहु सुरभुप ।।

पत्रिका 16 Sep 2019 11:53 pm