स्कंद षष्ठी 3 अक्टूबर 2019 : कार्तिकेय स्वामी की पूजा और इस मंत्र जप से ज्ञात-अज्ञात सभी शत्रु हो जाते हैं पराजित

शत्रुओं एवं अन्य बाधाओं से मुक्ति के लिए स्कंद षष्ठी की पूजा की जाती है। इस दिन शत्रुओं के संहारक देव सेनापति श्री कार्तिकेय जी की पूजा करने का विधान है। शास्त्रों में इस पूजा को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। स्कंद षष्ठी के दिन उपवास रखकर भगवान कार्तिकेय की श्रद्धा पूर्वक पूजा करने के बाद उनके नीचे दिए गए मंत्र का जप करने से ज्ञात-अज्ञात सभी शत्रुओं से मिल जाती है मुक्ति। अक्टूबर माह में स्कंद षष्ठी 3 अक्टूबर दिन गुरुवार को है।   इस नवरात्र नौजवानों की हर समस्या होगी दूर एक बार जरूर कर लें ये उपाय स्कंद षष्ठी को कुमार षष्ठी भी कहा जाता है। माँ दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में जाना जाता है। नवरात्री के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। कहतें है इस दिन पूजा और व्रत करने से भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त होती है और मनुष्य के सभी दुःख, रोग और दरिद्रता दूर होते हैं।   दुर्गा सप्तशती के केवल ये 8 मंत्र ही दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए है काफी स्कन्द पुराण के अनुसार जब कामदेव भगवान शिवजी के क्रोधाग्नि से भस्म हुए थे तब महादेव के अंश छह भागो में बंट कर गंगा नदी में गिर गए थे। तब देवी गंगा ने उन छह अंशो को जंगल में रखा और उनसे छह पुत्रों का जन्म हुआ। बाद में माता पार्वती ने एक एक कर भगवान कार्तिकेय के छह रूपों को बनाया। इन्ही भगवान ने दुष्ट राक्षस तारकासुर और अन्य राक्षसों का वध करके देवताओं का उद्धार किया और उन्हें उनके आतंक से बचाया।   इन चीजों का भोग सबसे अधिक पसंद है माता रानी को, जल्द प्रसन्न हो जाती है दुर्गा भवानी   स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के इस एक दिव्य मंत्र का जप कम से कम ग्यारह सौ बार जप कर लिया जाये तो ज्ञात अज्ञात सभी तरह के शत्रुओं का नाश हो जाता हैं । मंत्र जप के पूर्व पंचोपचार पूजन करने से पूजा शीघ्र फलदायी होने लगती है । इस मंत्र का करें जप ।। ॐ तत्पुरुषाय विधमहे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंदा प्रचोदयात ।।

पत्रिका 2 Oct 2019 3:18 pm