300 साल पहले कौन थे आपके पूर्वज, पूरा बही-खाता है यहां

बिहार के गया ( gaya ) में पिंडदान के लिए प्रमुख व महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां पितरों की आत्मा की मुक्ति के लिए पिंडदान ( pind daan ) कर्मकांड कराने लोग विदेशों से भी आते हैं। कहा जाता है कि यहां कर्माकांड करवाने वाले पंडे आज भी हमारे पितरों के नाम जानते हैं। वे अपने बही-खातों में पूर्वजों के बारे में सब-कुछ बता देते हैं। इसके पास 250 से 300 साल के पुराने बही खातों का विवरण मिल जाता है। यहां पिंडदान करवाने पहुंचे लोगों ने बताया कि यदि आप अपने पूर्वजों के बारे में कुछ नहीं जानते हैं लेकिन आपको उनके बारे में जनने की उत्सुकता है और उनकी मोक्ष प्राप्ति के लिए वहां पहुंचे हैं तो वहां मौजूद पंडे आपको आपके पूर्वजों की सारी जानकारी दे देते हैं। लेकिन शर्त ये हैं कि आपके पूर्वज कभी गया में आए हों और उन्होंने पिंडदान किया हो। पंडों के पास पोथियों की तीन स्तर पर होती है व्यवस्था यहां पहुंचने वाले लोगों का नाम पंडों के पास सुरक्षित रहता है। क्योंकि जब भी कोई नया व्यक्ति पिंडदान के लिए गया पहुंचता है तो यहां पंड़ों द्वारा एक फॉर्म भरवाया जाता है जिसमें कि उनका नाम गोत्र से लेकर सभी चीज़ें लिखी होती है। बाद में उसे पोथियों के साथ रख दिया जाता है। इसी प्रकार यहां आकर पिंडदान कराने वाले सभी लोगों का नाम किसी न किसी पंडा के पास सुरक्षित 'पंडा-पोथी' में दर्ज है, जिसे पंडा बहुत आसानी से खोज निकालता है। यहां के पंडों का दावा है कि उनके पास 250 से 300 सालों तक के बही-खाते सुरक्षित हैं। यही कारण है कि कई विदेशी या NRI अपने पूर्वजों की खोज के लिए भी इन पंडा-पोथी का सहारा लेते हैं। पंडों के मुताबिक गया के पंड़ों के पास पोथियों की तीन स्तरिय व्यवस्था होती है। जिससे वे आसानी से पूर्वजों की पोथी ढ़ूढ़ लेते हैं।   पहली पोथी इंडेक्स की तरह होती है, जिसमें सबंधित व्यक्ति के जिले, गांव और क्षेत्र का नाम होता है। उस पोथी में 250 से ज्यादा साल से उस गांव से आए लोगों के बारे में पूरी जानकारी होती है जिसमें व्यक्ति का पता, व्यवसाय और पिंडदान के लिए गया आने की तिथि लिखी होती है।   दूसरी पोथी हस्ताक्षर की होती है, जिसमें पंडों द्वारा लोगों से हस्ताक्षर करवाए जाते हैं और गया आए लोगों की जानकारी के साथ आने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर भी होते हैं। इसमें व्यक्ति का नाम, नंबर और पृष्ठ की संख्या दर्ज रहती है।   तीसरी पोथी में वर्तमान कार्यस्थल तक की जानकारी होती है। इस पोथी में किसी गांव के रहने वाले लोग अब कहां रह रहे हैं और क्या कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी इसमें होती है। पिंडदान के लिए आने वाले लोग अपने वंशज के मिल जाने के बाद सहजता से उस पंडे द्वारा कर्मकांड करवाते हैं और अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करते हैं। लाल कपड़े में सुरक्षित होती है पोथियां पुजारी के मुताबिक पोथियों को रासायनिक पदार्थों का उपयोग कर सुरक्षित रखा जाता है। इसके अलावा उन्हें लाल कपड़े में बांधकर रखा जाता है, जिससे की वो सुरक्षित रहे। बरसात से पहले सभी पोथियों को धूप में रखा जाता है, ताकि नमी के कारण पोथियां खराब ना हो जाएं।

पत्रिका 17 Sep 2019 11:14 pm