“पर्यावरण दिवस”पर एक नई ग़ज़ल

कुदरत से खेल कर बिगाड़ दी आबो- हवा तुमने दुनिया में फैला दी है कैसी घातक बवा तुमने…. मांगनी थीं दुआएं जिस क़ायनात के लिए उस हसीन शय को लगा दी कैसी बद्दुआ तुमने…. अब ज़लज़लों, तूफ़ानों में घिरी हुई है ज़मीं भुगतो अब सज़ाएं, जो किया है गुनाह तुमने… कहते थे दानिशवर ज़िन्दगी, नेमत ... Read more

Continue Reading