शराब के नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक! परिसर में ही पीने का आरोप, सीधी में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
शराब के नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक! परिसर में ही पीने का आरोप, सीधी में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पेपर लीक: राज ठाकरे ने सरकार की आलोचना की, शिक्षा प्रणाली और कोचिंग संस्कृति पर उठाए सवाल
नासिक, 7 अगस्त . नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने पर देशव्यापी आक्रोश और दिल्ली के जंतर-मंतर पर 40 दिनों तक चले छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद Maharashtra नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने Friday को Maharashtra के नासिक में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र Government, कोचिंग संस्थानों और शिक्षा प्रणाली ... Read more
सिरोही में जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने शिवगंज एवं सिरोही क्षेत्र के मतदान केंद्रों के निरीक्षण के दौरान राजकीय विद्यालय नारदरा एवं वाण का दौरा कर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने शिक्षा, अनुशासन और लक्ष्य निर्धारण का संदेश देते हुए छात्रों के सवालों के जवाब भी दिए।
कोटा के सुवि नेत्र चिकित्सालय में मेडिकल रेटिना फेलोशिप का प्रशिक्षण पूरा हुआ। देशभर के युवा नेत्र चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
दिल्ली कैबिनेट ने शुक्रवार को प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंज़ूरी दे दी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंज़ूरी दी है, जिससे राजधानी में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ के खुलने का रास्ता साफ़ हो गया है। उन्होंने कहा कि कई सालों से देखा जा रहा है कि दिल्ली के छात्र अच्छी हायर एजुकेशन के लिए देश के दूसरे हिस्सों या विदेश जाते हैं, जिसमें काफ़ी खर्च होता है। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद यह पक्का करना है कि अच्छी शिक्षा की यह ज़रूरत दिल्ली में ही पूरी हो और छात्रों को उनके अपने शहर में ही बेहतर मौके मिलें। इसे भी पढ़ें: JPSC-JSSC विवाद पर BJP सांसद Nishikant Dubey का अल्टीमेटम: युवाओं को न्याय नहीं मिला तो मैं भूख हड़ताल पर बैठूंगा उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने आज इस बिल को मंज़ूरी दे दी है और इसे जल्द ही दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक बार जब विधानसभा में इस बिल पर चर्चा हो जाएगी और इसे पास कर दिया जाएगा, तो दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ खोलने का रास्ता साफ़ हो जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि NEP 2020 लागू होने के बाद, दिल्ली सरकार नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के मुताबिक़ आगे बढ़ रही है और दिल्ली में खुलने वाली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ भी NEP 2020 के नियमों का पालन करेंगी। उन्होंने कहा कि हमारा पक्का इरादा है कि इन यूनिवर्सिटीज़ में दिल्ली के छात्रों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि राजधानी के छात्रों को अपने ही शहर में बेहतरीन क्वालिटी वाली हायर एजुकेशन के मौके मिल सकें। प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल की मुख्य बातें जानें - प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने के लिए ज़मीन खुद खरीदनी होगी; सरकार ज़मीन नहीं देगी। - दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित होंगी। - सरकार फीस पर नज़र रखेगी और एक रेगुलेटरी कमेटी बनाएगी। - NEP के नियमों का पालन करना ज़रूरी होगा। दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ बिल की मुख्य बातें: - दिल्ली सरकार एक नोटिफिकेशन के ज़रिए प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ बनाने की मंज़ूरी दे सकेगी। - यूनिवर्सिटीज़ को UGC और दूसरे रेगुलेटरी निकायों (नियम बनाने वाली संस्थाओं) द्वारा तय किए गए स्टैंडर्ड्स का पालन करना होगा। - यूनिवर्सिटीज़ सिर्फ़ 'यूनिटरी मॉडल' पर काम करेंगी; यानी, वे दूसरे कॉलेजों को अपने साथ नहीं जोड़ (एफिलिएट नहीं कर) सकेंगी। - ज़रूरत के हिसाब से दिल्ली में अतिरिक्त कैंपस, रीजनल सेंटर और स्टडी सेंटर खोले जा सकेंगे। इसे भी पढ़ें: BJP को RSS Chief Mohan Bhagwat की सलाह माननी चाहिए, NEET पर बोले दीपके प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने के लिए शर्तें - स्पॉन्सर करने वाली संस्था के पास ज़मीन होनी चाहिए या कम से कम 30 साल के लिए लीज़ (पट्टे) पर ज़मीन होनी चाहिए। - एकेडमिक बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी, डिजिटल रिसोर्स और स्टूडेंट्स के लिए सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। - फैकल्टी और दूसरे एकेडमिक स्टाफ़ की नियुक्ति UGC के स्टैंडर्ड्स के अनुसार करनी होगी। दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षण - हर कोर्स में दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान। - इन सीटों पर दाखिला GNCTD की मौजूदा आरक्षण नीति के तहत होगा। सरकार की मज़बूत निगरानी - उच्च शिक्षा मंत्री यूनिवर्सिटी के 'विज़िटर' होंगे। - विज़िटर के पास जानकारी मांगने, निरीक्षण का आदेश देने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निर्देश जारी करने का अधिकार होगा। - ज़रूरत पड़ने पर प्रशासनिक, शैक्षणिक और वित्तीय मामलों की जांच की जा सकती है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
बिहार में शिक्षकों के तबादले के बीच शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान, 31 अक्टूबर तक सभी मांगों और शिकायतों के समाधान का दावा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को ब्रिक्स सहयोग के प्रति भारत की जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 70 हजार प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) सितंबर के अंत या अक्टूबर में आयोजित की जाएगी।
जनकल्याण, रोजगार, शिक्षा, श्रमिक हित और आधारभूत विकास को नई गति: धामी कैबिनेट के ऐतिहासिक फैसले
उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जनकल्याण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, श्रमिक कल्याण, शिक्षा, न्यायिक आधारभूत संरचना, खेल, पर्यटन, पेयजल तथा औद्योगिक विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन निर्णयों की जानकारी महानिदेशक सूचना एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मीडिया को दी।
दिव्यांग छात्रों ने उठाई आवाज़, शिक्षा-सुविधाओं की मांग
देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) के छात्रों ने स्कॉलरशिप, ब्रेल सामग्री, स्वास्थ्य सुविधाओं, मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर्स और पढ़ाई से जुड़े मुद्दों पर अपनी समस्याएं सामने रखीं. संस्थान के प्रिंसिपल ने फिलहाल इस मामले पर टिप्पणी नहीं की है. आजतक ने स्टूडेंट्स के आरोपों और मांगों पर संस्थान के प्रिंसिपल से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की.
नवादा जिले के वारिसलीगंज थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी ने एक मानवीय पहल करते हुए 8 वर्षीय अनाथ मोहम्मद फैयाज आलम की शिक्षा का पूरा जिम्मा उठाया है। उन्होंने बच्चे का सफीगंज स्थित ऑक्सफोर्ड इंग्लिश पब्लिक स्कूल में नामांकन कराया। संवेदनशीलता दिखाते हुए बच्चे की मदद का फैसला लगभग एक माह पूर्व थाना क्षेत्र के मसूदा गांव निवासी राजमिस्त्री मोहम्मद फिरोज हुसैन की मकनपुर मुसहरी में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। परिवार का एकमात्र सहारा छिन जाने से आर्थिक संकट गहरा गया था, जिससे आठ वर्षीय मोहम्मद फैयाज आलम की पढ़ाई और पालन-पोषण एक चुनौती बन गया था। परिस्थिति की जानकारी मिलने पर थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बच्चे की मदद का फैसला किया। बच्चे के भविष्य के लिए नई उम्मीद जगी मंगलवार को वे व्यक्तिगत रूप से स्कूल पहुंचे और मोहम्मद फैयाज आलम का नामांकन सुनिश्चित कराया। उन्होंने स्कूल प्रशासन से बच्चे की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने का आश्वासन भी लिया। थानाध्यक्ष के इस मानवीय कदम से पीड़ित परिवार को राहत मिली है और बच्चे के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद जगी है। क्षेत्र के लोगों में थानाध्यक्ष की इस पहल की व्यापक चर्चा हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने पंकज कुमार सैनी की सराहना करते हुए इसे पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत करने वाला बताया है।
केंद्र सरकार और भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। सातवें वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने के बाद अब बाल शिक्षा भत्ता और हॉस्टल सब्सिडी में भी 25 प्रतिशत का इजाफा कर दिया गया है।
बेगूं के शहीद रूपाजी कृपाजी राजकीय महाविद्यालय में ABVP कार्यकर्ताओं ने छात्रसंघ चुनाव बहाली सहित उच्च शिक्षा से जुड़ी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग उठाई गई।
इंटरेनट डेस्क। जयपुर में थर्ड ग्रेड शिक्षकों का धरना प्रदर्शन आश्वासन के बाद गुरुवार को समाप्त हो गया है। जानकारी के अनुसार शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षकों को आश्वासन दिया है, जिसके बाद शिक्षकों ने धरना खत्म करने का ऐलान किया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और शिक्षा सचिव से मुलाकात करने के लिए शिक्षकों का एक डेलीगेशन पहुंचा था, जिसके बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने राजस्थान में स्थानांतरण नीति का आश्वासन दिया है। कैबिनेट मंजूरी के लागू होगी नीति मीडिया रिपोटर्स की माने तो शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि शिक्षकों से बात हुई है। मुख्यमंत्री जी से बात करके इसका समाधान किया जाएगा, मदन दिलावर ने कहा कि राजस्थान सरकार ट्रांसफर नीति बना रही है, जल्द ही मुख्यमंत्री और कैबिनेट की मंजूरी के बाद उस नीति को लागू किया जाएगा। इससे पहले प्रशासन पर आरोप लगे थे कि शिक्षकों के धरने को जबरदस्ती खत्म करवाने की कोशिश की जा रही है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि धरना स्थल पर बिजली बंद कर दी गई, साथ ही पानी की व्यवस्था रोक दी गई है और शौचालय भी बंद करवा दिए गए हैं। pc- ndtv raj
बेगूसराय सदर। शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की नीमा चांदपूरा इकाई ने सदर प्रखंड के अझौर गांव में जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, कलम और किताबें वितरित कीं। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम का नेतृत्व एबीवीपी नीमा चांदपूरा इकाई के मंत्री शशि राज ने किया। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा समाज के विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण बाधित नहीं होनी चाहिए। राज ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद केवल छात्र हितों के लिए संघर्ष करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि शिक्षा, सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ समाज के हर वर्ग के बीच कार्य करता है। परिषद नियमित रूप से जरूरतमंदों की सहायता, शैक्षणिक जागरूकता और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करती है। उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से विद्यालय जाने, मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ देखी जा सकती थी। स्थानीय लोगों ने एबीवीपी की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम बताया। इस अवसर पर एबीवीपी के कार्यकर्ता पिंटू कुमार, चीकू कुमार, सोनू कुमार, आदर्श कुमार, मोनू कुमार, रूपेश कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे।
इसरो में असिस्टेंट-स्टेनोग्राफर, क्लर्क समेत विभिन्न पदों पर हो रही भर्ती
जो भी उम्मीदवार इसरो में सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं और इस भर्ती के लिए पात्रता रखते हैं वे निर्धारित अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से ऑफिशियल वेबसाइट isro.gov.in पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं।
गरीबी या मजबूरी: पन्ना के नौनिहालों के हाथ में कलम की जगह काल, कहां गुम हो गया शिक्षा का अधिकार
भूख और गरीबी की मजबूरी इंसान से क्या-क्या नहीं करवाती। इसकी एक तस्वीर पन्ना जिले पवई नगर मे शुक्रवार को दोपहर लगभग 11 बजे देखने को मिली, जहां परिवार वालों ने छोटे-छोटे नौनिहालों को स्कूल भेजने और हाथों में कलम और कॉपी की जगह सपेरों की टोकरी थमा दी गई है।
मां से ली आकृति कक्कड़ ने शास्त्रीय संगीत की शुरुआती शिक्षा
मुंबई, किसी फिल्म को हिट बनाने में गाने की भूमिका अहम होती है। ये दर्शकों को कहानी से जोड़ने के साथ उससे भावनात्मक जुड़ाव बनाने में मदद करते हैं।
शराब पीकर स्कूल आने और छात्रों की पिटाई करने के दोषी शिक्षक मोहिंदर सिंह को शिक्षा विभाग ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है।
CJP ने शुरू किया क्या बोलती पब्लिकअभियान, शिक्षा सुधार और बेरोजगारी पर रहेगा फोकस
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने देशव्यापी 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान का एजेंडा जारी करते हुए शिक्षा सुधार, बेरोज़गारी, संस्थागत जवाबदेही और नागरिक समाज के संगठनों के साथ सहयोग को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। पार्टी का यह जनसंपर्क अभियान सितंबर से शुरू होगा और इसका उद्देश्य देशभर के युवाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आकांक्षाओं और सुझावों को समझना है। यह घोषणा छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के बाद की गई। CJP के अनुसार, अभियान के दौरान जुटाए गए सुझावों के आधार पर एक 'यूथ रिफॉर्म चार्टर' तैयार किया जाएगा, जिसे नागरिकों की भागीदारी से विकसित किया जाएगा। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि संगठन का उद्देश्य फिलहाल चुनावी वादे करना नहीं, बल्कि लोगों की बात सुनना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधार और बेरोज़गारी पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में हैं। इसके साथ ही संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी संगठन लगातार आवाज़ उठाएगा। दास के अनुसार, लोकतंत्र तभी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है जब संस्थाएं अपने कार्यों और निर्णयों के प्रति जवाबदेह हों। उन्होंने यह भी कहा कि देश में न्याय और सामाजिक बदलाव के लिए कार्य कर रहे विभिन्न संगठनों, आंदोलनों और नागरिक समूहों के साथ मिलकर काम करना आवश्यक है, क्योंकि किसी एक संगठन के लिए अकेले व्यापक परिवर्तन लाना संभव नहीं है। इसे भी पढ़ें: Saurabh Das ने आवास में यूट्यूबरों के घुसने का लगाया आरोप, Delhi Police से मांगी सुरक्षा अभियान के चार प्रमुख स्तंभ पार्टी द्वारा जारी दस्तावेज़ों के अनुसार, 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान चार प्रमुख विषयों पर केंद्रित रहेगा— प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक व्यापक शिक्षा सुधार। शिक्षा और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय, जिसमें कौशल विकास और बाज़ार की मांग के अनुरूप रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मीडिया, निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका सहित विभिन्न संस्थानों की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे। छात्र संगठनों, नागरिक समाज संस्थाओं और युवा-केंद्रित सुधारों का समर्थन करने वाले अन्य समूहों के साथ सहयोग। पार्टी ने बताया कि उसका नेतृत्व 1 सितंबर से देशभर की यात्रा करेगा और विभिन्न राज्यों में लोगों से संवाद स्थापित करेगा। 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान के साथ ही CJP ने देशव्यापी सदस्यता अभियान की भी घोषणा की है। पार्टी ने छात्रों, युवा पेशेवरों, श्रमिकों और अन्य नागरिकों से संगठन से जुड़ने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि नए सदस्य आगामी अभियानों और अगले छह महीनों में विभिन्न राज्यों में संगठन के विस्तार को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। इसे भी पढ़ें: CJP संस्थापक अभिजीत दिपके की विदेश में पढ़ाई के खर्च पर विवाद, पिता की आय की जांच के लिए RTI कार्यकर्ता ने खोला मोर्चा हालांकि, CJP ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वह किसी भी प्रकार का सार्वजनिक चंदा स्वीकार नहीं कर रही है। संगठन ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई उसके नाम पर धन की मांग करे तो सतर्क रहें। पार्टी ने कहा कि भविष्य में आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित सोशल मीडिया खातों के माध्यम से वित्तीय योगदान संबंधी जानकारी साझा की जाएगी। चुनावी राजनीति की योजना नहीं सौरव दास ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि समर्थकों की मांग के बावजूद संगठन की तत्काल चुनावी राजनीति में उतरने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समय संगठन का पूरा ध्यान जमीनी स्तर पर जनजागरण, लोकतांत्रिक सुधारों और नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करने पर है। उनके अनुसार, CJP फिलहाल स्वयं को एक 'जन दबाव समूह' (People's Pressure Group) के रूप में ही आगे बढ़ाएगी। इसे भी पढ़ें: Delhi Police कॉजपा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं करेगी दंडात्मक कार्रवाई इस अभियान की घोषणा गुरुवार को CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने की थी। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती स्कूल, कॉलेज और कोचिंग की फीस के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है, इसलिए शिक्षा सुधार संगठन की सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगा। दिपके ने कहा कि विशेष रूप से स्नातक युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी भी संगठन के अभियान का प्रमुख मुद्दा होगी। उन्होंने संकेत दिया कि यदि युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि CJP हाल ही में कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और अन्य समूहों के साथ मिलकर काम करेगी। दिपके के अनुसार, संगठन अपनी वैचारिक प्रेरणा भारतीय संविधान के साथ-साथ डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के विचारों से लेगा। #Important : Here is our agenda. This September, the Cockroach Janta Party begins its ‘Kya Bolti Public’ listening tour. We are taking this movement to the grassroots to listen. We want to hear the aspirations, anxieties, and ideas of India’s young generation and the together… pic.twitter.com/hvPLsFx88r — Saurav Das (@SauravDassss) August 6, 2026
दो दिन तक चले धरने और सरकार से दो दौर की वार्ता के बाद तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। शिक्षा मंत्री ने ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने का आश्वासन दिया, हालांकि शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि वादा पूरा नहीं होने पर दोबारा आंदोलन होगा।
SHS Bihar Specialist Doctor Recruitment 2026: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए अच्छी खबर है।
अभिजीत दीपके ने कहा कि देश के सामने बेरोजगारी सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है और इसे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के सामने रोजगार के अवसर लगातार सीमित हो रहे हैं, जबकि शिक्षा की लागत तेजी से बढ़ रही है।
किसी भी राष्ट्र की तरक्की और उसके भविष्य की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपनी आने वाली पीढ़ियों के ज्ञान, कौशल और अनुसंधानों पर कितना निवेश करता है। आज के तकनीक-संचालित दौर में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वैज्ञानिक अनुसंधान, उन्नत बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी के निर्माण का सबसे सशक्त जरिया बन चुकी है। यही वजह है कि दुनिया के तमाम समृद्ध और विकसित देश अपनी अर्थव्यवस्था यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक बड़ा हिस्सा अपने एजुकेशन सिस्टम पर न्योछावर कर देते हैं।नॉर्डिक और विकसित देश: शिक्षा को मानते हैं सर्वांगीण विकास का मूलमंत्रजब वैश्विक स्तर पर शिक्षा पर होने वाले सरकारी खर्च का विश्लेषण किया जाता है, तो उत्तरी यूरोप के नॉर्डिक देश हमेशा इस सूची में शीर्ष पायदान पर नजर आते हैं। स्वीडन, आइसलैंड, डेनमार्क और फिनलैंड जैसे देश अपनी जीडीपी का लगभग 6.4 प्रतिशत से लेकर 7.3 प्रतिशत तक का भारी-भरकम हिस्सा शिक्षा पर खर्च करते हैं।इन देशों में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शोध तक की व्यवस्था न केवल पूरी तरह से विश्वस्तरीय है, बल्कि अधिकांश नागरिकों के लिए लगभग नि:शुल्क या बेहद रियायती दरों पर उपलब्ध है। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन (UK) अपनी जीडीपी का लगभग 5.3 प्रतिशत, फ्रांस 5.2 प्रतिशत और अमेरिका लगभग 4.9 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा प्रणाली पर व्यतीत करता है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों का मुख्य फोकस उच्च शिक्षा, अत्याधुनिक लैब्स, यूनिवर्सिटी रिसर्च और पेटेंट फाइलिंग पर होता है, जिससे वे दुनिया भर के मेधावी छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहते हैं।एशियाई महाद्वीप का गणित: चीन, जापान और अन्य पड़ोसियों का रुखएशियाई अर्थव्यवस्थाओं की बात करें तो यहां शिक्षा पर होने वाले खर्च का पैटर्न थोड़ा भिन्न और दिलचस्प नजर आता है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन अपनी जीडीपी का लगभग 3.6 से 4.0 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा क्षेत्र में लगाता है। हालांकि, चीन की विशाल जीडीपी के कारण यह राशि मौद्रिक मूल्य में बहुत बड़ी होती है, जो मुख्य रूप से वोकेशनल ट्रेनिंग और सेमीकंडक्टर-टेक्नोलॉजी रिसर्च में जाती है।दूसरी ओर, अत्यधिक विकसित माना जाने वाला जापान अपनी जीडीपी का लगभग 3.3 प्रतिशत हिस्सा ही शिक्षा पर सरकारी तौर पर खर्च करता है। हालांकि जापान में निजी क्षेत्र और परिवारों का शिक्षा पर व्यक्तिगत योगदान काफी अधिक होता है। दक्षिण एशिया के अन्य पड़ोसी देशों में भूटान अपनी जीडीपी का 7.5 प्रतिशत और कजाकिस्तान लगभग 7.2 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करके आश्चर्यजनक रूप से काफी आगे बने हुए हैं।भारत की वास्तविक स्थिति: यूनेस्को रिपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय मानकयूनेस्को (UNESCO) की हालिया वैश्विक रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अपनी जीडीपी का औसतन 4.1 प्रतिशत से लेकर 4.6 प्रतिशत तक हिस्सा शिक्षा के क्षेत्र में आवंटित किया है। यूनेस्को का 'एजुकेशन 2030 फ्रेमवर्क फॉर एक्शन' दुनिया के सभी देशों को अपनी जीडीपी का कम से कम 4 से 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करने का सुझाव देता है। इस अंतरराष्ट्रीय मानक के पैमाने पर भारत अपनी स्थिति को सफलतापूर्वक संतुलित रखे हुए है।जीडीपी प्रतिशत के आधार पर देखा जाए तो भारत का यह आवंटन चीन और जापान जैसे बड़े एशियाई देशों के सरकारी जीडीपी खर्च के अनुपात से भी अधिक नजर आता है। भारत अपने कुल सरकारी खर्च का लगभग 13.5 प्रतिशत से 17.2 प्रतिशत तक हिस्सा शिक्षा सेवाओं, बुनियादी ढांचे, मध्याह्न भोजन योजना (PM POSHAN) और प्राथमिक साक्षरता अभियानों पर खर्च करता है, जो संयुक्त राष्ट्र के 15 से 20 प्रतिशत के अनुशंसित दायरे के काफी करीब है।राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और 6% जीडीपी का महत्वाकांक्षी लक्ष्यभारत सरकार द्वारा घोषित 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' (NEP 2020) में यह स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से देश के शिक्षा बजट को बढ़ाकर जीडीपी के 6 प्रतिशत तक पहुंचाया जाएगा। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के साझा बजटीय योगदान से देश में डिजिटल कक्षाओं, पीएम श्री (PM SHRI) स्कूलों, नए आईआईटी (IITs), आईआईएम (IIMs) और मेडिकल कॉलेजों का जाल बिछाया जा रहा है।भारत में शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च को दो स्तरों पर देखा जाता है—पहला केंद्र सरकार का बजट आवंटन और दूसरा राज्य सरकारों का योगदान। चूंकि शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, इसलिए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का एक बड़ा आर्थिक बोझ राज्य सरकारों के कंधों पर होता है। दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्य शिक्षा पर अपने बजट का अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा खर्च करते हैं, जबकि अन्य राज्यों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बजटीय सहायता की लगातार आवश्यकता बनी हुई है।क्वालिटी वर्सेस क्वांटिटी: खर्च के साथ गुणवत्ता में सुधार की चुनौतीशिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जीडीपी का प्रतिशत बढ़ा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खर्च की जाने वाली राशि का प्रभावी और पारदर्शी उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में मुख्य चुनौती केवल स्कूलों और कॉलेजों का निर्माण करना नहीं, बल्कि शोध एवं नवाचार (R&D), शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) और कौशल विकास (Skill Development) में सुधार करना है।वर्तमान में भारत अपनी जीडीपी का एक सीमित हिस्सा ही शोध और विकास (Research & Development) पर खर्च करता है, जो अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे अग्रणी देशों की तुलना में कम है। यदि भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के साथ-साथ 'ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था' (Knowledge Economy) के रूप में स्थापित होना है, तो उच्च शिक्षा में इनोवेशन, पेटेंट फाइलिंग और रिसर्च स्कॉलरशिप पर खर्च को तेजी से बढ़ाना होगा।भविष्य का रोडमैप: एआई और डिजिटल शिक्षा का नया दौरआने वाले वर्षों में वैश्विक शिक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग, रोबोटिक्स और डिजिटल साक्षरता अब प्राथमिक स्तर से ही पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे में भारत को अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल असमानता (Digital Divide) को समाप्त करने पर केंद्रित करना होगा।भारत सरकार द्वारा 'समग्र शिक्षा अभियान' और 'अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' (ANRF) जैसी पहलों के माध्यम से बजटीय आवंटन को परिणाम-उन्मुख बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। यदि भारत NEP 2020 के तहत अपनी जीडीपी के 6 प्रतिशत खर्च के लक्ष्य को पूर्ण रूप से हासिल कर लेता है, तो यह न केवल देश की साक्षरता दर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की युवा मानव पूंजी को सबसे प्रतिस्पर्धी और कुशल ताकत के रूप में स्थापित करेगा।
भोजपुर जिले में गुरुवार की शाम शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर हुए जानलेवा हमले से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रतनपुर ओवरब्रिज के समीप कार सवार आधा दर्जन से अधिक हमलावरों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान) राहुल कुमार और उनके साथ मौजूद दो अन्य कर्मियों पर लाठी-डंडों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमलावरों ने उनकी सरकारी गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। देर शाम बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मुफस्सिल थाना पहुंचे। आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। लाठी-डंडे से किया हमला जानकारी के अनुसार जिला कार्यक्रम पदाधिकारी राहुल कुमार अपने दो सहयोगियों के साथ कार्यालय का काम समाप्त कर सरकारी वाहन से लौट रहे थे। शाम करीब छह बजे रतनपुर ओवरब्रिज के पास एक कार ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक कर रोक लिया। इसके बाद कार से उतरे आधा दर्जन से अधिक लोगों ने बिना किसी बातचीत के लाठी-डंडों से हमला शुरू कर दिया। अचानक हुए हमले से तीनों अधिकारी संभल भी नहीं सके और गंभीर रूप से घायल हो गए। हमलावरों ने वाहन में भी तोड़फोड़ की। अधिकारियों के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक सभी हमलावर फरार हो चुके थे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक और जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के एक कर्मी की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनका अस्पताल में उपचार चल रहा है। 'जान से मारने की नीयत से पहुंचे थे हमलावर' घायलों ने बताया कि हमला पूरी तरह सुनियोजित था और हमलावर उन्हें जान से मारने की नीयत से आए थे। हालांकि स्थानीय लोगों के समय पर पहुंच जाने के कारण उनकी जान बच गई। घटना की सूचना मिलते ही जिला शिक्षा पदाधिकारी मानवेंद्र कुमार राय भी मुफस्सिल थाना पहुंचे। उन्होंने बताया कि तीन लोग घायल हुए हैं। सभी का इलाज कराया जा रहा है। सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस इधर, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और हमलावरों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है तथा दोषियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है।
भोजपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित रतनपुर ओवरब्रिज के पास शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर अज्ञात बदमाशों ने हमला कर दिया। हमले में सर्व शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम प्रबंधक राहुल रंजन समेत तीन लोग घायल हुए हैं।
NICL Recruitment 2026: नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में असिस्टेंट के 500 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन करने का आज आखिरी मौका है। इच्छुक ग्रेजुएट उम्मीदवार जिन्होंने अभी तक फॉर्म नहीं भरा है
सोीनपत जिले के लोगों की लंबित शिकायतों और जनसमस्याओं के समाधान के लिए आज, 7 अगस्त (शुक्रवार) को सोनीपत के लघु सचिवालय में जिला ग्रीवेंस कमेटी की मासिक बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा करेंगे। इस दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों की सुनवाई की जाएगी और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। बैठक में सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। डीसी नेहा सिंह ने बताया कि 7 अगस्त को सुबह 11 बजे लघु सचिवालय के तीसरे तल स्थित सभागार में जिला ग्रीवेंस कमेटी की मासिक बैठक आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री एवं जिला ग्रीवेंस कमेटी के अध्यक्ष महिपाल ढांडा करेंगे। शिकायतों की होगी सुनवाई, मौके पर दिए जाएंगे निर्देश बैठक के दौरान आमजन अपनी समस्याएं और शिकायतें मंत्री के समक्ष रख सकेंगे। शिकायतों की सुनवाई के बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, ताकि समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके। सभी विभागों के अधिकारी रहेंगे मौजूद डीसी ने बताया कि ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहेंगे। इससे विभागवार शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने और लोगों को राहत देने में आसानी होगी। लोगों को मिलेगा त्वरित समाधान का अवसर प्रशासन का कहना है कि ग्रीवेंस कमेटी का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और प्रभावी समाधान करना है। बैठक में प्राप्त शिकायतों पर मंत्री स्वयं समीक्षा करेंगे और जरूरत के अनुसार मौके पर ही निर्णय लेकर अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति 2026 में चयनित उम्मीदवारों के लिए पारस्परिक (म्यूचुअल) जिला परिवर्तन की सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला किया है। यह सुविधा उन अभ्यर्थियों के लिए शुरू की गई है, जिन्हें पारिवारिक, सामाजिक, चिकित्सीय अथवा अन्य कारणों से चयन के बाद आवंटित जिले एवं विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने या नियमित रूप से सेवाएं देने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि समान श्रेणी (Category) के दो चयनित अभ्यर्थी यदि आपसी सहमति से अपने आवंटित जिले (आवंटित विद्यालय सहित) का परिवर्तन करना चाहते हैं, तो वे 10 एवं 11 अगस्त 2026 को TRC पोर्टल पर पारस्परिक जिला परिवर्तन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। अन्य उम्मीदवारों के अधिकारों पर नहीं पड़ेगा प्रभाव लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया से किसी अन्य अभ्यर्थी के चयन, मेरिट, आरक्षण व्यवस्था या अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। केवल आवेदन करने से जिला परिवर्तन का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होगा। अंतिम निर्णय आयुक्त, लोक शिक्षण द्वारा लिया जाएगा। संचालनालय ने सभी पात्र अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे इस सुविधा का उपयोग केवल वास्तविक आवश्यकता होने पर ही करें तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करें।
फिल्म 'आर्यभट्ट का जीरो' के प्रमोशन के दौरान अभिनेता हिमांश कोहली, अभिनेत्री सोनाली सहगल और निर्देशक कमल चंद्रा ने सोनम वांगचुक के समर्थन, NEET-UG समेत विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर अपनी राय रखी। हिमांश ने कहा कि देश और आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठाने वालों को सुना जाना चाहिए। सोनाली ने मुद्दे को राजनीति से ऊपर बताते हुए सकारात्मक नतीजे की उम्मीद जताई। कमल चंद्रा ने कहा कि सिर्फ सरकार को दोष देने से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि सिस्टम की जड़ तक पहुंचना जरूरी है। सवाल: आपने सोनम वांगचुक के समर्थन में पोस्ट किया था और उनके स्वास्थ्य के लिए भी प्रार्थना की थी। इसे आप कैसे देखते हैं? युवाओं से आपका यह जुड़ाव कैसा है? जवाब (हिमांश कोहली): मेरे करियर में युवाओं का हमेशा बड़ा योगदान रहा है। मेरे टीवी शो से लेकर फिल्म 'आर्यभट्ट का जीरो' तक, मेरा काम युवाओं को प्रेरित करने की कोशिश करता है। बेहतर शिक्षा और देश के भविष्य के लिए आवाज उठाने वाले युवाओं को सुना जाना चाहिए। मैं सोनम वांगचुक का बहुत सम्मान करता हूं। उन्होंने देश, खासकर भारतीय सेना और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी सोच और काम ने मुझे भी प्रेरित किया है। आज की Gen-Z अपनी बात हिम्मत से रखती है। हमारी पीढ़ी में लोग इतनी खुलकर अपनी बात नहीं कह पाते थे। युवा सिर्फ बहादुर ही नहीं, बल्कि रचनात्मक भी हैं। अगर उनकी मांग देश के बेहतर भविष्य और अच्छी शिक्षा के लिए है तो मैं उनके साथ खड़ा हूं। मेरी कामना है कि सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान तक पहुंचें। सवाल: बॉलीवुड के कलाकारों से लोग उम्मीद करते हैं कि वे ऐसे मुद्दों पर खुलकर बोलें। आपने सबसे पहले समर्थन किया था। क्या कहना चाहेंगे? जवाब (हिमांश कोहली): मुझे याद है कि उस समय शायद सबसे पहले मैंने ही पोस्ट किया था और इसके लिए मुझे ट्रोल भी किया गया। लेकिन अगर बात सच्चाई और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की हो, तो चुप नहीं रहना चाहिए। हम सभी चाहते हैं कि बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर अवसर मिलें। इसके लिए आवाज उठाना जरूरी है। यह आवाज शांतिपूर्ण होनी चाहिए और सुनी भी जानी चाहिए। सवाल: आपको लगता है कि यह आवाज सरकार तक पहुंची? जवाब (हिमांश कोहली): जी, मुझे लगता है कि बात सरकार तक पहुंची है। उम्मीद है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा और आने वाली पीढ़ी को अपनी पसंद का करियर चुनने के बेहतर अवसर मिलेंगे। सोनाली सहगल: मुझे भी लगता है कि इस मुद्दे का सकारात्मक परिणाम निकलना चाहिए। इसे राजनीतिक बहस बनाने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए। जब कोई आंदोलन होता है तो उसका सार्थक निष्कर्ष भी निकलना चाहिए। प्रधानमंत्री भी इस मुद्दे पर बोल चुके हैं। हमें उम्मीद है कि आगे बेहतर बदलाव देखने को मिलेगा। सवाल: दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात हो रही है। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब (हिमांश कोहली): यह अच्छी बात है। हर इंसान की तीन बुनियादी जरूरतें हैं- अच्छी शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और भोजन। अच्छी शिक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है और इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। कमल चंद्रा: हर बात को राजनीतिक बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पेपर लीक की जड़ तक पहुंचना होगा। कोई मंत्री खुद पेपर लीक नहीं करता, बीच में कुछ भ्रष्ट लोग होते हैं। असली जरूरत सिस्टम की खामियों को दूर करने की है। मैंने एक छात्र की कहानी देखी थी जिसने तीन-चार साल तक 16-17 घंटे पढ़ाई की। उसे 550 अंक मिले और वह खुश था कि उसकी मेहनत रंग लाई। लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद वह मानसिक रूप से टूट गया और आखिरकार उसने आत्महत्या कर ली। यह बेहद दुखद है। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है। सिर्फ आरोप लगाने से नहीं, बल्कि सिस्टम की कमियों को दूर करने से बदलाव आएगा। सरकार को इस दिशा में सख्त कदम उठाने चाहिए, क्योंकि यह लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है। _________________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया फिल्म 'आर्य भट्ट का जीरो' खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि 'यारियां' के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
Shahjahanpur News: प्राथमिक शिक्षा की नींव जर्जर...बच्चों के सिर से छिनी छत
शाहजहांपुर। परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जिले में प्राथमिक शिक्षा की हकीकत इससे अलग है।
Faridabad News: शिक्षा को रोचक बनाने के गुर सीखकर लौटे मास्टर ट्रेनर
Master trainers return after learning techniques to make education engaging.
Mumbai , 6 अगस्त . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने Thursday को Mumbai में आईआईएमयूएन यानी इंडिया इंटरनेशनल म्यून द्वारा आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में जेन-जी’ और जेन-अल्फा से खुलकर बातचीत की. इस एक घंटे तक चले इंटरैक्टिव सत्र में शिक्षा, राजनीति, लैंगिक समानता, एलजीबीटीक्यू अधिकार, देश की युवा भूमिका और ... Read more
देवरिया, 6 अगस्त . Chief Minister योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा की तस्वीर तेजी से बदली है. एक समय जहां Governmentी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, वहीं आज देवरिया के सहवा स्थित पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय राज्य के मॉडल स्कूलों में शुमार हो गया है. यहां पढ़ाई के साथ-साथ ... Read more
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में दस्तावेज सत्यापन के समय स्कूल शिक्षा विभाग की एक हठधर्मिता पूरी चयन प्रक्रिया को फंसा सकती है।
यूपी में अब डिजिटल होगी परिषदीय शिक्षा, स्कूलों में चलेगी स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के माध्यम से डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षकों को तकनीक आधारित शिक्षण का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर सकें।
अभिजीत दिपके ने लॉन्च किया 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान, कहा- शिक्षा कमाई का जरिया नहीं
Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को 'क्या बोलती पब्लिक' नाम से देशभर में एक जन-संपर्क अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद नागरिकों से सीधे जुड़ना और उनकी परेशानियों व मुद्दों को करीब से समझना है। इस दौरान दिपके ने स्कूल-कॉलेजों में बढ़ती फीस को लेकर भी चिंता जताई।अभियान की शुरुआत की घोषणा करते हुए दिपके ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार इस अभियान की पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूल, कॉलेज और कोचिंग की बढ़ती फीस के कारण आम परिवारों के लिए अच्छी शिक्षा पाना मुश्किल होता जा रहा है।शिक्षा में सुधार पहला मुद्दा होगाउन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार हमारा पहला मुद्दा होगा जिस पर हम काम करेंगे। दिपके ने कहा, हमारा मानना है कि देश में शिक्षा महंगी हो गई है। पहली कक्षा के लिए सालाना फीस 1 लाख से 2 लाख रुपये के बीच है, और इसके अलावा डोनेशन भी देना पड़ता है।मध्यम और कम आय वाले परिवारों के लिए इतनी महंगी शिक्षा का खर्च उठाना कितना मुश्किल है, इस पर सवाल उठाते हुए दिपके ने कहा कि कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं।उन्होंने कहा, “जिन परिवारों की आमदनी इतनी नहीं है, वे इतना पैसा कहां से लाएंगे?”माता-पिता कर्ज लेने को मजबूरदिपके ने यह भी दावा किया कि कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की बढ़ती फीस के कारण कई माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं।उन्होंने कहा, “कॉलेज और कोचिंग की फीस भी लगातार बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह से कई परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। हम परिवारों को इस बोझ से मुक्त करना चाहते हैं। अगर माता-पिता अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं, तो उन पर बोझ नहीं पड़ना चाहिए।”दिपके ने अंबेडकर का किया जिक्रडॉ. बी.आर. अंबेडकर का जिक्र करते हुए, दिपके ने तर्क दिया कि शिक्षा को एक व्यावसायिक गतिविधि के बजाय एक मौलिक अधिकार बने रहना चाहिए।उन्होंने कहा, डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार यह एक मौलिक अधिकार है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह मुनाफा कमाने का एक व्यापार बन गया है।यह भी पढ़ें:गुरुग्राम में भारी बारिश का कहर! सड़कों पर जलभराव होने से ट्रैफिक ठप, प्रशासन ने वर्क फ्रॉम होम की दी सलाह
जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) राष्ट्रीय औसत 30% से काफी पीछे, केवल 21.5% है। वहीं दिल्ली- हरियाणा आगे हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के नियमित शिक्षकों के तबादले में गेस्ट टीचरों के पदों को रिक्त मानने की मांग पर शिक्षा विभाग के पूर्व आदेश को रद्द कर दिया है।
झारखंड : जेपीएससी को लेकर प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी, छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को बदतर बताया
नीति आयोग की रिपोर्ट ने युवा विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा व्यवस्था की हकीकतों को उजागर किया: शिवसेना (यूबीटी)
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को चार प्रमुख मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसमें समान पदनाम, कंप्यूटर साइंस फीस, पदोन्नति और एसएमसी प्रवक्ताओं के नियमितीकरण की मांग शामिल है।
प्राविधिक शिक्षा विभाग के बिखरे हुए कार्यालयों को अब एक छत के नीचे लाने की तैयारी शुरू हो गई है। विभाग लखनऊ में एकीकृत कार्यालय का निर्माण कराएगा, जहां प्रमुख सचिव, महानिदेशक समेत सभी प्रमुख अधिकारियों के कार्यालय होंगे।
हिमाचल शिक्षा विभाग जिला स्तर पर संयुक्त निदेशक का पद करेगा सृजित, क्यों बदली जा रही व्यवस्था?
हिमाचल शिक्षा विभाग हर जिले में संयुक्त निदेशक का पद सृजित करने जा रहा है, जिससे उपनिदेशक एक ही अधिकारी के अधीन होंगे। यह पुनर्गठन प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा।
मंडी में शिक्षा विभाग के लैब अटेंडेंट महेश्वर सिंह को चरस तस्करी में संलिप्तता के कारण नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। लाखों के लेनदेन का भी खुलासा हुआ था।
एक और छात्र आंदोलन: शिक्षा-परीक्षा तंत्र में बीमारी की गहरी पैठ, आरोप-प्रत्यारोप से परे धांधलीमुक्त बनना जरूरी
Gorakhpur News: शिक्षिकाओं से बोलीं राज्यपाल, शिक्षा के साथ सामाजिक बदलाव की भी लें जिम्मेदारी
गोरखपुर विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में 35 शिक्षिकाओं से किया संवाद
Prayagraj News: स्कूलाें में भविष्य बनने से पहले मुरझाई शिक्षा
स्कूलाें में भविष्य बनने से पहले मुरझाई शिक्षा
Yamuna Nagar News: मौलिक शिक्षा निदेशक से मिले अध्यापक सौंपा मांंग पत्र
मौलिक शिक्षा निदेशक से मिले अध्यापक सौंपा मांंग पत्र
Bahraich News: शिक्षा की राह में पानी ने खींची लक्ष्मण रेखा
शिक्षा की राह में पानी ने खींची लक्ष्मण रेखा
वादाखिलाफी के विरोध में अतिथि अध्यापकों का प्रदर्शन, दहन करेंगे शिक्षा मंत्री का पुतला
CJP सियासत से दूर: शिक्षा के साथ ई-20 पेट्रोल पर आंदोलन, जंतर-मंतर के बाद महाराष्ट्र में बनी नई रणनीति क्या?--CJP to Function as a Public Pressure Group, Not a Political Party; New Strategy Under Discussion
Udham Singh Nagar News: समस्याओं के संबंध में उच्च शिक्षा सचिव को सौंपा ज्ञापन
समस्याओं के संबंध में उच्च शिक्षा सचिव को सौंपा ज्ञापन
5 अगस्त, बुधवार, सीवान: भाकपा (माले) की प्रतिवाद सभा में महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने छात्र-युवा आंदोलन का उल्लेख करते हुए बिहार बंद के दौरान पुलिस फायरिंग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
शिक्षा से जुड़ी जान जोखिम में डालने वाली चिन्ताजनक मजबूरियां
वास्तव में किसी भी राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक मापदंड उसकी गगनचुंबी इमारतें, चौड़ी सड़कें अथवा डिजिटल सुविधाएँ नहीं होतीं, बल्कि यह होता है कि उस देश का सबसे अंतिम, सबसे कमजोर और सबसे गरीब बच्चा कितनी सुरक्षा और सम्मान के साथ शिक्षा प्राप्त कर पा रहा है। यदि किसी बच्चे को विद्यालय पहुँचने के लिए उफनती नदी, बहते नाले, टूटी पुलिया, जर्जर The post शिक्षासेजुड़ी जान जोखिम में डालने वाली चिन्ताजनक मजबूरियां appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
हिमाचल प्रदेश प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में 15 मिनट शारीरिक व्यायाम अनिवार्य किया है। जानें नए निर्देश, पीटी की जिम्मेदारी और स्कूलों पर असर।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र को मजबूत किया है, जिसमें बेसिक, तकनीकी, उच्च और व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है।
जयपुर के शिक्षा संकुल में व्यावसायिक शिक्षकों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। शिक्षक स्थायी जॉब पॉलिसी, ठेका प्रथा समाप्त करने, लंबित वेतन भुगतान और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहुंचा भारत, भुवनेश्वर के ब्रिक्स शिक्षा बैठक में लेगा हिस्सा
ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहुंचा भारत, भुवनेश्वर के ब्रिक्स शिक्षा बैठक में लेगा हिस्सा
Updates: बंगाल में CJP के अभिजीत और सौरभ के खिलाफ जीरो FIR; आज से ओडिशा में BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक
असम शिक्षा विभाग ने नई स्कूल प्रबंधन समितियां बनाने का दिया निर्देश
असम के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत राज्य के सभी सरकारी और प्रोविंशियलाइज्ड स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के अनुसार, हर एकेडमिक ईयर शुरू होने के एक महीने के भीतर स्कूल मैनेजमेंट कमेटियां (एसएमसी) बनाएं और मौजूदा स्कूल मैनेजमेंट डेवलपमेंट कमेटियों (एसएमडीसी) की जगह इन्हें लागू करें।
Mandi News: 400 स्कूलों में नहीं प्रधानाचार्य, शिक्षा व्यवस्था प्रभावित
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला मंडी ने शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार से प्रधानाचार्य पदोन्नति सूची शीघ्र जारी करने की मांग की है।
नशे से दूर रहकर कौशल और शिक्षा को अपनाएं : नरेश ढांडा
मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस विभाग की एंटी ड्रग्स सेल के उप निरीक्षक नरेश ढांडा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है।
निपुण मिशन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, शिक्षा की गुणवत्ता पर दें ध्यान : एडीसी
एडीसी प्रदीप कुमार ने कहा कि निपुण हरियाणा मिशन के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Hisar News: बदली व्यवस्था...बास शिफ्ट हुआ खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय
बास। शिक्षा विभाग की प्रशासनिक सेवाओं को लोगों के और करीब पहुंचाने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय को हांसी से बास स्थानांतरित कर दिया गया है।
कोल्हान प्रमंडल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: वर्षों से जमे 35 शिक्षा लिपिकों का एक साथ तबादला
कोल्हान प्रमंडल के शिक्षा विभाग में लंबे समय से जमे 35 लिपिकों का स्थानांतरण किया गया है। क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक निशु कुमारी ने आदेश जारी किया है।
'2028 शैक्षणिक सत्र से नया पाठ्यक्रम लागू होगा', पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन
'2028 शैक्षणिक सत्र से नया पाठ्यक्रम लागू होगा', पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन
बचपन की ज़ुबान पर गालियों के असली दोषी कौन? बच्चे, समाज,समय या शिक्षा?
बचपन की ज़ुबान पर गालियों के असली दोषी The post बचपन की ज़ुबान पर गालियों के असली दोषी कौन?बच्चे,समाज,समय या शिक्षा? appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
झारखंड के 24 जिलों में AI आधारित शिक्षा की शुरुआत, 6वीं से 12वीं तक के छात्रों को मिलेगा लाभ
विकास भारती बिशुनपुर और ग्लोबसलर्न ने झारखंड के 24 जिलों में प्रेप्जी नामक एआई-आधारित शिक्षण मंच शुरू करने के लिए समझौता किया है। यह पहल कक्षा 6-12 के ग्रामीण और जनजातीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण व्यक्तिगत शिक्षा प्रदान करेगी, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा का विस्तार होगा।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बोले-मदरसे से शिक्षा प्राप्त करने वालों की सोच आतंकवादी जैसी
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बोले-मदरसे से शिक्षा प्राप्त करने वालों की सोच आतंकवादी जैसी
शिक्षाविद और पूर्व राज्यपाल डॉ. डीवाई पाटिल का निधन, एकनाथ शिंदे और सुप्रिया सुले ने जताया शोक
शिक्षाविद और पूर्व राज्यपाल डॉ. डीवाई पाटिल का निधन, एकनाथ शिंदे और सुप्रिया सुले ने जताया शोक
पद्म श्री से सम्मानित शिक्षाविद, राजनेता और समाजसेवी DY Patil का निधन, कल होगा अंतिम संस्कार
प्रख्यात शिक्षाविद, समाजसेवी और पूर्व राज्यपाल डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव (डी. वाई.) पाटिल का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
UP Monsoon Session: केशव मौर्य बोले- आतंकी हमले मदरसा शिक्षा का प्रमाण
UP Monsoon Session: केशव मौर्य बोले- आतंकी हमले मदरसा शिक्षा का प्रमाण
अपने पहले बजट में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की घोषणा कर सकती है तमिलनाडु सरकार
अपने पहले बजट में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की घोषणा कर सकती है तमिलनाडु सरकार
UGC की मंजूरी से भारत में खुलेंगे 15 विदेशी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा का होगा विस्तार
भारत में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इन संस्थानों में ऑस्ट्रेलिया, इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के विश्वविद्यालय शामिल हैं। कहां खुलेंगे नए कैंपस? ये विदेशी विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख शहरों में अपने परिसर स्थापित करेंगे। स्वीकृत शहरों में बेंगलुरु, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई और चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण शैक्षिक और व्यावसायिक केंद्र शामिल हैं। यह कदम भारत को एक वैश्विक शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। UGC की मंजूरी और प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इन विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपनी शाखाएं खोलने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों का पालन करने वाले विश्वविद्यालयों को ही मंजूरी दी गई है। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत में खुलने वाले विदेशी कैंपस उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करें और स्थानीय नियामक निकायों के मानकों का पालन करें। शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर इन विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खुलने से भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल विदेशी शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या कम होगी, बल्कि यह भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा। साथ ही, यह विभिन्न देशों के साथ शैक्षिक सहयोग को भी बढ़ावा देगा। क्या होंगे फायदे? यह पहल भारत को उच्च शिक्षा के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में मदद करेगी। छात्रों को विभिन्न देशों के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और शोध के अवसरों तक पहुंच मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा और भारत में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की छात्रवृत्ति योजना के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही बेटियों को प्रतिवर्ष तीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन दस से इकतीस अगस्त तक किए जा सकेंगे। सरकारी स्कूलों से पढ़कर स्नातक में प्रवेश लेने वाली छात्राएं इसका लाभ उठा सकती हैं।
राज्यपाल ने शिक्षा में AI और तकनीकी कौशल पर दिया जोर, कोर विवि रुड़की ने प्रस्तुत की योजनाएं
राज्यपाल गुरमीत सिंह से कोर विश्वविद्यालय रुड़की की कुलपति प्रो. अनुभा सिंह ने भेंट कर एआइ व आधुनिक प्रौद्योगिकी पहलों पर प्रस्तुतीकरण दिया। राज्यपाल ने शिक्षा में नवाचार, अनुसंधान और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए कौशल व तकनीकी दक्षता से लैस करने पर जोर दिया।
धामी सरकार ने शिक्षा, पेयजल और पर्यटन के लिए 150 करोड़ रुपये मंजूर किए
इसमें वीर चंद्र सिंह गढ़वाली विश्वविद्यालय, डुंडेश्वर महादेव मंदिर का सौंदर्यीकरण और सहस्त्रधारा पेयजल योजना जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिससे प्रदेश में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी।
Auraiya News: मूल विद्यालय वापसी की मांग पर शिक्षामित्रों ने सौंपा ज्ञापनो
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Bijnor News: अपनी मांगों के हकों में शिक्षामित्रों ने किया प्रदर्शन
Shiksha Mitras staged a protest in support of their demands.
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जगद्गुरु कृपालु यूनिवर्सिटी आधुनिक शिक्षा और भारतीय मूल्यों का संगम, ओडिशा बनेगा वैश्विक शिक्षा केंद्र : सीएम माझी
पंजाब: बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की परीक्षा में नकल में लिप्त हरियाणा का गिरोह, हाईटेक उपकरणों का इस्तेमाल: शिक्षा मंत्री
उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल, डॉ. सयाना बने निदेशक
उत्तराखंड शासन ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में फेरबदल करते हुए डॉ. आशुतोष सयाना को चिकित्सा शिक्षा निदेशक बनाया है। पांच मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों को भी बदला गया है, जिनमें श्रीनगर, हल्द्वानी, रुद्रपुर, अल्मोड़ा और हरिद्वार शामिल हैं।
शिक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा उठेगा, हमारा संगठन छात्रों के साथ खड़ा रहेगा: अभिजीत दिपके
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3 जुलाई, सोमवार, गोपालगंज: सावन के अवसर पर सिंहासनी स्थित बाबा धनेश्वरनाथ महादेव मंदिर में करीब 60 हजार श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी पूजा कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। श्रावणी मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
संत रविदास की शिक्षाएं पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत : अनुराग
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

