Jind News: रामधन जैन को मिला नेशन बिल्डर अवॉर्ड, 32 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में दे रहे योगदान
सम्मान समारोह इंजीनियरिंग कॉलेज (जाइट) कैंपस में आयोजित किया गया। समारोह में रोटरी क्लब यमुनानगर के चार्टर गवर्नर संदीप जैन मुख्य रूप से शिरकत की।
शिक्षा का ध्यान सिर्फ करियर पर नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण पर होना चाहिए: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री
अगरतला, 6 सितंबर . त्रिपुरा के Chief Minister माणिक साहा ने Sunday को कहा कि समाज को आकार देने और एक विकसित व ज्ञान-आधारित India के निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का ध्यान केवल छात्रों को करियर के लिए तैयार करने के बजाय उनके चरित्र-निर्माण ... Read more
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बेंगलुरु में श्री श्री रविशंकर से बिहार की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और संस्कार से जोड़ने में सहयोग मांगा।
मंत्री सुदिव्य कुमार की पहल पर झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 लागू हुआ, जिससे कुलपतियों की नियुक्ति का अधिकार सरकार को मिला और विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण बढ़ा। निजी शिक्षण व कोचिंग संस्थानों की मनमानी फीस पर अंकुश लगाने के लिए भी कानून बनाए गए।
बरकतउल्ला और भोज विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों में नियमित शिक्षकों की कमी के कारण अतिथि विद्वानों से काम चलाया जा रहा है।
विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को भी परीक्षा का अवसर देने की मांग, परीक्षा तीन नवंबर को प्रस्तावित
Special UP TET 2026:विशेष टीईटी में शामिल होने का अवसर मिलने से बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों को अपनी पात्रता पूरी करने का मौका मिल सकता है।
झारखंड में मंत्री पद पर रहते हुए अब तक चार झामुमो नेताओं का निधन हुआ है, जिनमें हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार शामिल हैं। इनमें से तीन नेताओं के निधन के बाद हुए उपचुनावों में झामुमो ने अपनी सीटें बरकरार रखीं।
झारखंड में दुखद संयोग, हेमंत सोरेन सरकार में 2023 से शिक्षा मंत्री रहते हुए 3 नेताओं की हो गई मौत
झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन के साथ झारखंड में एक दुखद संयोग सामने आया है। वह 2023 के बाद राज्य में शिक्षा विभाग से जुड़े तीसरे ऐसे मंत्री थे, जिनका निधन हुआ है।
मल्हारगढ़ में रविवार शाम उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय के नए भवन का लोकार्पण किया। भवन के निर्माण के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल मुरारीलाल अग्रवाल ने 1 करोड़ रुपए का दान दिया है। कार्यक्रम में देवड़ा ने सेवा कार्यों में योगदान देने वालों की सराहना की। देवड़ा बोले- संस्कार शिक्षा का अहम हिस्सा उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के व्यवहार से उनकी शिक्षा और संस्कारों का स्तर पता चलता है। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर में विद्यार्थियों को संस्कृति से जुड़े संस्कार दिए जाते हैं। देवड़ा ने विद्यार्थियों के अच्छे भविष्य की कामना करते हुए नए भवन के लोकार्पण पर शुभकामनाएं दीं। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि देश के विकास और नए भारत के निर्माण में सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। विद्यालय के विकास में सहयोग की अपील कार्यक्रम में अखिलेश मिश्रा ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर में देशभक्ति की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने लोगों से विद्यालय के विकास के लिए अपनी क्षमता के अनुसार दान करने की अपील की। साथ ही नए भवन का बेहतर संचालन करने की बात कही। कार्यक्रम में सांसद सुधीर गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश दीक्षित, लेफ्टिनेंट कर्नल मुरारीलाल अग्रवाल, गोपाल काकानी, जनभागीदारी समिति सदस्य राजेश दीक्षित, ओमप्रकाश बटवाल, दिनेश प्रजापति, दिनेश परिहार, अंतिम तंवर और मनीष पाटीदार समेत भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी मौजूद रहे।
दिल्ली: सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने पर शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जताया दुख
New Delhi, 6 सितंबर . दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्या निकेतन इलाके में Sunday दोपहर एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई. हादसे के बाद इलाके में बड़ी संख्या में लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हादसे पर गहरा दुख जताया है. ... Read more
मां गंगा विप्र कल्याण संघ, जिला इकाई रायपुर की ओर से रविवार को सिविल लाइंस स्थित वृंदावन भवन में विप्र शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले 111 शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। सम्मान पांच अलग-अलग श्रेणियों में दिया गया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त आईपीएस सुशील चंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि और डॉ. वेद प्रकाशाचार्य महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। देखिए तस्वीरें… कार्यरत शिक्षिकाओं की संख्या सबसे ज्यादा सम्मान समारोह में सबसे ज्यादा संख्या कार्यरत शिक्षिकाओं की रही। इस श्रेणी में 65 शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। कार्यरत शिक्षकों की श्रेणी में 28 शिक्षक शामिल रहे। इसके अलावा 11 सेवानिवृत्त शिक्षकों और 7 सेवानिवृत्त शिक्षिकाओं को भी सम्मानित किया गया। स्वर्गीय शिक्षक की श्रेणी में प्रधान पाठक संजय उपाध्याय का नाम शामिल किया गया। संघ की ओर से जारी सूची में सभी सम्मानित शिक्षक-शिक्षिकाओं के नाम उनकी श्रेणी के साथ प्रकाशित किए गए हैं। सेवानिवृत्त शिक्षिकाओं में 7 नाम सेवानिवृत्त शिक्षिकाओं में डॉ. अर्चना चौबे, चंद्रप्रभा दुबे, राधा द्विवेदी, मंजू तिवारी, डॉ. सुगमता शुक्ला, डॉ. प्रभा शुक्ला और डॉ. शैल शर्मा शामिल हैं। वहीं सेवानिवृत्त शिक्षकों की श्रेणी में राजेंद्र प्रसाद मिश्र, कृष्ण कुमार शुक्ला और शीतला प्रसाद मिश्र समेत कुल 11 शिक्षकों का सम्मान किया गया। 28 कार्यरत शिक्षकों का भी सम्मान कार्यरत शिक्षकों में प्रदीप कुमार पांडेय, डॉ. कुलदीप दुबे और कृष्ण कांत चौबे समेत 28 शिक्षक शामिल रहे। कार्यरत शिक्षिकाओं की सूची में डॉ. उर्मिला पांडेय से लेकर प्रियंका गौतम तक 62 नाम शामिल हैं। शिक्षकों के योगदान को किया याद समारोह में अतिथियों ने शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के योगदान की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उनके व्यक्तित्व निर्माण और समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों का सम्मान समाज में शिक्षा और संस्कार के महत्व को मजबूत करता है। मां गंगा विप्र कल्याण संघ की जिला इकाई रायपुर की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। समारोह के समापन पर संघ ने सभी सम्मानित शिक्षकों और कार्यक्रम में शामिल अतिथियों का आभार जताया।
रोहतक की जनता कॉलोनी स्थित माता धनपति देवी चैरिटेबल ट्रस्ट पिछले 20 सालों से गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का काम कर रहा है। ट्रस्ट ने अपना स्थापना दिवस समारोह मनाया, जिसमें बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया। ट्रस्ट के चेयरमैन हरिप्रकाश गुप्ता ने बताया कि माता धनपति देवी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना 2006 में 17 बच्चों के साथ की गई थी। लेकिन आज ट्रस्ट में 320 बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे है। अभाव ग्रस्त बच्चों को शिक्षित करके समाज की मुख्य धारा में लाने का जो उद्देश्य रखा गया था, वो आज सार्थक हो रहा है। 300 बच्चे अच्छे पदों पर कार्यरत हरिप्रकाश गुप्ता ने बताया कि ट्रस्ट से शिक्षा ग्रहण करने वाले 300 के करीब बच्चे सरकारी व प्राइवेट नौकरियों में अच्छे पदों पर काम कर रहे है। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर व सरकारी नौकरी में अधिकारी भी शामिल है। ट्रस्ट में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को सैलरी मिलती है, जबकि बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण करते हैं। युवा पीढ़ी को ट्रस्ट कर रहा संस्कारित समाजसेवी गोबिंदराम सिंघल ने कहा कि शिक्षा व संस्कार देकर ट्रस्ट युवा पीढ़ी को सही दिशा देने का काम करता है। हरिप्रकाश गुप्ता ने अपने घर के कमरे से शुरूआत की थी, आज एक बिल्डिंग भी बन गई और बच्चों को सभी सुविधाएं भी मिल रही है, क्योंकि शिक्षा से बड़ा कोई दान नहीं है। आज 300 से अधिक बच्चों को शिक्षित व संस्कारवान बनाया जा रहा है। बच्चों के सपनों को मिल रही उड़ान ट्रस्ट के सदस्य सतीश भारद्वाज ने बताया कि ट्रस्ट के माध्यम से बच्चे अपने सपनों को पूरा करके देशहित में अपनी सेवाएं दे रहे है। सरकारी नौकरियों के साथ प्राइवेट नौकरी में भी अच्छे पदों पर है। नौकरी के बाद भी बच्चे ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं और अन्य बच्चों को शिक्षित करने के लिए अपना योगदान भी दे रहे हैं। ट्रस्ट ने अपने उद्देश्य को किया सार्थक ट्रस्ट सेक्रेटरी अजेश गुप्ता ने बताया कि ट्रस्ट का उद्देश्य यही है कि बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाए। जो बच्चे आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई को बीच में छोड़ देते हैं या उनके अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते, ऐसे बच्चो को ट्रस्ट शिक्षा देने का काम करता है। यहां तक कि उनके स्कूल की फीस भी ट्रस्ट ही वहन करता है। ट्रस्ट के बच्चे बोर्ड परीक्षाओं में भी अच्छे अंकों से पास होते हैं।
योगी सरकार 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत स्कूली छात्रों को रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण देगी। इसका लक्ष्य 2026-27 तक 3,000 से अधिक विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करना है।
शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाने वाले छात्र इस देश के आम नागरिक की पहचान बनें: नेहा बोरा
Patna, 6 सितंबर . बिहार में ‘जेनजी राइजिंग’ कार्यक्रम में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल हुई. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की पहचान शिक्षा, रोजगार और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले छात्रों से होनी चाहिए. Patna में से बातचीत में जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन ... Read more
पानसेमल के कन्या शिक्षा परिसर में 9वीं कक्षा की छात्रा निर्जला वास्कले की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने बताया कि छात्रा का शव होस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिलने की बाते सामने आई थी और मृतिका को अस्पताल लाया गया था।
नशा और अशिक्षा के कारण आदिवासी बहुल जशपुर जिले में बढ़ रहा है कुप्रथाओं का दायरा
जशपुर जिले में 'ढुकू प्रथा' (लीव-इन) और कम उम्र में संबंध बनाने के कारण किशोरियों की जान जाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नशा, अशिक्षा और जागरूकता की कमी को इसका मुख्य कारण बताया गया है। स्वयंसेवी संगठन 'समर्पित' द्वारा इसके खिलाफ एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है, जबकि जिले में बाल श्रम के मामले भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। अब निजी कालेजों को भौतिक पैकेट भेजने के बजाय परीक्षा से ठीक पहले पासवर्ड सुरक्षित ईमेल के माध्यम से प्रश्नपत्र भेजे जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकी जा सके।
वाराणसी के बड़ागांव में 6 सितम्बर को केयर रेयर इंडिया द्वारा ग्राम पंचायत धनंजयपुर में मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संस्था के संस्थापक एवं सीईओ कमलेश कुमार पाल तथा अन्य सदस्यों के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हाई स्कूल, इंटरमीडिएट एवं अन्य परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया, ताकि उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया जा सके। ग्राम सभा के विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत सम्मानित व्यक्तियों ने मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया और अपने अनुभवों से बच्चों का उत्साहवर्धन किया। छात्र-छात्राओं का चयन ग्राम सभा के सम्मानित नागरिकों के सहयोग से किया गया। यह प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के पूरी की गई, जिससे केवल योग्य बच्चों को सम्मान मिल सके। कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से राजू प्रसाद प्रजापति और मंत्री प्रसाद ने जनसंपर्क एवं समन्वय स्थापित करने में योगदान दिया। संस्था इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी सहयोगियों, अतिथियों और ग्रामवासियों का धन्यवाद ज्ञापित करती है।
CBSE ने विभिन्न शिक्षा पदों के लिए जारी किया KVS और NVS का रिजल्ट, ऐसे करें चेक
जानकारी के लिए बता दें कि टियर-2 परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल कर सीबीएसई भर्ती आवेदन पोर्टल पर आसानी से अपना रिजल्ट और शॉर्टलिस्टिंग स्टेटस चेक कर सकते हैं.
उत्तर प्रदेश को पत्र जारी कर 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
6 सितंबर, रविवार: अररिया में जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षक दिवस पर समारोह आयोजित किया, शिक्षकों की चुनौतियों पर चर्चा हुई।
झारखंड की राजनीति से इस वक्त की बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहां हेमंत सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से निधन हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से दो बार के विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहद करीबी माने जाने वाले सुदिव्य कुमार सोनू की शनिवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें तुरंत गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पार्टी सहित पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जताया गहरा शोक और दी भावुक विदाईअपने करीबी सहयोगी और कैबिनेट मंत्री के असामयिक निधन पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बेहद भावुक होते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में लिखा कि सोनू भैया केवल एक वरिष्ठ सहयोगी या राजनीतिक साथी नहीं बल्कि उनके लिए बड़े भाई की तरह थे जो हर मुश्किल वक्त में मजबूती से उनके साथ खड़े रहे। झामुमो पार्टी ने भी आधिकारिक तौर पर बयान जारी करते हुए इसे पार्टी, सरकार और पूरे झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने हमेशा झारखंड की पहचान, अधिकारों और जनहित के मुद्दों के लिए कड़ा संघर्ष किया, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। हाल ही में वे सरकारी कामकाज और कई महत्वपूर्ण बैठकों में पूरी तरह सक्रिय नजर आए थे, जिससे उनका यकायक यूं चले जाना हर किसी को स्तब्ध कर गया है।राजनीतिक सफर और झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था पर असरगिरिडीह सीट से लगातार शानदार जीत दर्ज कर राजनीतिक फलक पर छाए सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन कैबिनेट के सबसे भरोसेमंद और प्रमुख मंत्रियों में गिने जाते थे। उनके पास उच्च शिक्षा, नगर विकास, पर्यटन, कला-संस्कृति और खेलकूद जैसे कई अहम विभागों की जिम्मेदारी थी, जिन्हें वे पूरी निष्ठा के साथ संभाल रहे थे। पिछले दिनों राज्य में आए छात्र आंदोलनों और विभिन्न नियुक्तियों से जुड़े मसलों को सुलझाने में भी उनकी भूमिका बेहद निर्णायक रही थी। उनके निधन से जहां एक तरफ प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ा खालीपन आ गया है, वहीं दूसरी ओर उनके पैतृक आवास और अस्पतालों में शोक व्यक्त करने वाले समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का तांता लगा हुआ है। प्रशासन द्वारा उनके अंतिम संस्कार और राजकीय सम्मान की तैयारियों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, जबकि पूरा प्रदेश इस समय अपने एक जांबाज जननेता को नम आंखों से अंतिम विदाई दे रहा है
जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री परगट सिंह ने 1158 असिस्टेंट प्रोफेसरों की गिरफ्तारी को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के बाहर अपनी नौकरी से जुड़े सवाल उठाने पहुंचे प्रोफेसरों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। परगट सिंह ने शिक्षक दिवस पर हुई इस कार्रवाई को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस दिन शिक्षकों के योगदान को सम्मानित किया जाना चाहिए, उसी दिन अपने रोजगार और भविष्य की मांग को लेकर आवाज उठाने वाले प्रोफेसरों को हिरासत में लेना सरकार की कथित ‘शिक्षा क्रांति’ की वास्तविक तस्वीर सामने लाता है। वर्ष 2021 में पारदर्शी तरीके से पूरी हुई भर्ती कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पोस्ट में 1158 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि यह भर्ती वर्ष 2021 में पारदर्शी तरीके से पूरी की गई थी। उनके अनुसार, करीब 30 साल बाद सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसरों की भर्ती हुई थी, जिससे उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी थी। परगट सिंह ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद इस भर्ती प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया। इसके चलते चयनित उम्मीदवार लंबे समय से अपने रोजगार और नियुक्ति को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। गिरफ्तार किए प्रोफेसरों को तत्काल रिहा करने की मांग उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों से बातचीत करनी चाहिए, न कि पुलिस कार्रवाई के जरिए उनकी आवाज दबानी चाहिए। उन्होंने गिरफ्तार किए गए सभी प्रोफेसरों को तत्काल रिहा करने और 2021 की भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा कर चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की मांग की।
'शिक्षा-रोजगार मांगने पर गोली मार दी?', घायल छात्रों से मिले राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार के सीवान में प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की. छात्रों ने पुलिस पर बिना उकसावे गोलीबारी और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग का आरोप लगाया. राहुल गांधी ने X पोस्ट में छात्रों की चोटों और टूटे सपनों को लेकर सवाल उठाए.
झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में चार मंत्रियों का निधन हो चुका है। इनमें हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू शामिल हैं। खास बात यह है कि इन चार में तीन मंत्री सीधे शिक्षा विभाग से जुड़े रहे। जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के मंत्री रहे, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू के पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग था। यानी करीब साढ़े तीन साल के भीतर शिक्षा से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन हुआ है। यह किसी कारण का दावा नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति में सामने आया एक असामान्य और दुखद संयोग है। सुदिव्य के निधन से झामुमो ने संगठन से लंबे समय तक जुड़े रहे एक जमीनी नेता को खो दिया है। उनके निधन से सरकार और पार्टी दोनों को बड़ा झटका लगा है। सुदिव्य के अंतिम दर्शन के लिए गिरिडीह में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। हाजी हुसैन अंसारी : कोरोना ने छीना अनुभवी नेता, बेटे ने संभाली विरासत मधुपुर के विधायक हाजी हुसैन अंसारी हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री थे। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद उनका निधन हुआ। उनके निधन से मधुपुर विधानसभा सीट खाली हुई और उपचुनाव कराया गया। इसमें उनके बेटे हफीजुल हसन अंसारी ने जीत दर्ज की। इसके साथ ही हाजी हुसैन अंसारी की राजनीतिक विरासत उनके बेटे ने संभाली। उनके निधन के बाद पहली बार हेमंत सरकार के मंत्रिमंडल को अपने एक प्रमुख सदस्य को खोना पड़ा था। जगरनाथ महतो : बीमारी से लंबी लड़ाई, फेफड़े का प्रत्यारोपण भी हुआ डुमरी के विधायक जगरनाथ महतो सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। कोरोना संक्रमण के बाद उनकी हालत गंभीर हुई और लंबे समय तक इलाज चला। इलाज के दौरान उनका फेफड़ा ट्रांसप्लांट भी किया गया, लेकिन स्वास्थ्य में स्थायी सुधार नहीं हो सका। 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। जगरनाथ महतो को झारखंड की राजनीति में जमीन से जुड़े और मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में जाना जाता था। उनके निधन के बाद डुमरी में उपचुनाव हुआ, जिसमें उनकी पत्नी बेबी देवी ने जीत हासिल की और विधानसभा पहुंचीं। रामदास सोरेन और सुदिव्य : शिक्षा विभाग से जुड़े दो और चेहरे घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन भी हेमंत सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हुआ। उनके निधन पर राज्य सरकार ने राजकीय शोक घोषित किया था। जगरनाथ महतो के बाद शिक्षा विभाग संभाल रहे एक और मंत्री का जाना सरकार के लिए बड़ा झटका था। इसके बाद सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से यह सिलसिला फिर चर्चा में आ गया। सुदिव्य ने 1989 में झामुमो की सदस्यता लेकर संगठन में काम शुरू किया था। शुरुआती दौर में वह दीवार लेखन, पोस्टर लगाने और पार्टी का झंडा लेकर गांव-गांव संगठन खड़ा करने में जुटे रहे। 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हुए वह गिरिडीह जिला अध्यक्ष बने। 2019 में गिरिडीह से विधायक बने और 2024 में लगातार दूसरी जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें हेमंत सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य और नगर विकास एवं आवास विभाग की जिम्मेदारी मिली।
पीएमबीआई ने 178 संविदा पदों पर भर्ती निकाली है। फार्मेसी से लेकर बीटेक और एलएलबी तक की योग्यता रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 1.58 लाख रुपये तक मासिक वेतन मिल सकता है।
125 साल पुराना वाटसन हाई स्कूल: शिक्षा और प्रशासन का केंद्र
वाटसन हाई स्कूल, जो 125 साल से अधिक पुराना है, मधुबनी, बिहार में शिक्षा और प्रशासन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसकी ऐतिहासिक इमारत और शैक्षणिक विरासत इसे विशेष बनाती है। स्कूल ने कई प्रमुख नेताओं को जन्म दिया है और आज भी यह जिले की गतिविधियों में सक्रिय है। जानें इस स्कूल की यात्रा और इसके योगदान के बारे में।
अमर उजाला शिक्षक सम्मान समारोह में निर्वाचित शिक्षकों को हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा रविवार को सम्मानित करेंगे।
कुल्लू: पुस्तक मेले में जुटे खरीदार, लेखकों और शिक्षाविदों ने कहा- प्रदर्शनी फायदेमंद
कुल्लू: पुस्तक मेले में जुटे खरीदार, लेखकों और शिक्षाविदों ने कहा- प्रदर्शनी फायदेमंद
झारखंड की सियासत में दुखद संयोग, साढ़े 3 साल में राज्य ने खोए 3 शिक्षा मंत्री
Jharkhand Minister Sudivya Sonu: झारखंड में पिछले साढ़े तीन सालों में 3 मंत्रियों के असमय निधन से राज्य के शिक्षा विभाग में एक दुखद संयोग बना है. क्योंकि यह तीनों मंत्री शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
रेलवे ने सेवा के दौरान मृत रेलकर्मियों के नाबालिग बच्चों को बाल शिक्षा भत्ता (CEA) देने पर स्थिति स्पष्ट की है।
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों को लिखा खत, पूरी निष्ठा से काम करने की अपील
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों को लिखा खत, पूरी निष्ठा से काम करने की अपील
शिक्षक दिवस के मौके पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के लिए गौरव का पल रहा। बरमकेला ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाजा गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सुनीता यादव छत्तीसगढ़ से इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पाने वाली अकेली शिक्षिका हैं। सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुनीता यादव को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चयनित शिक्षकों के कार्यों पर आधारित लघु फिल्में भी प्रदर्शित की गईं। सुनीता यादव को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान, नवाचार और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों के लिए यह सम्मान मिला है। साहित्य, तकनीक और क्रिएटिविटी को बनाया पढ़ाई का हिस्सा सुनीता यादव ने ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल में बच्चों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने साहित्य, तकनीक, रचनात्मकता और अनुभव आधारित गतिविधियों को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया। पढ़ाई में पीछे रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने खेल-खेल में पढ़ाने समेत कई नए तरीकों का इस्तेमाल किया। लघु फिल्मों से कठिन विषयों को समझाना कठिन विषयों को आसान तरीके से समझाने के लिए सुनीता यादव खुद बच्चों के साथ मिलकर लघु फिल्में तैयार करती हैं। इन फिल्मों का उपयोग वह कक्षा में पढ़ाने के लिए करती हैं। इसके अलावा दीक्षा ऐप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसे तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर बच्चों की पढ़ाई को रोचक और प्रभावी बनाने का प्रयास करती हैं। उनके प्रयासों में शिक्षा के साथ रोजगार संबंधी जानकारी और डिजिटल साक्षरता को जोड़ना भी शामिल है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य का भी रखती हैं ध्यान सुनीता यादव की संवेदनशीलता कक्षा तक सीमित नहीं है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए वह अपने खर्च पर उन्हें रोज दूध देती हैं। साथ ही समाज के लोगों को भी बच्चों को अधिक से अधिक न्योता भोजन कराने के लिए प्रेरित करती हैं। आदिवासी बच्चों के लिए चलाया निशुल्क समर कैंप शिक्षा से वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप चलाया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को अध्यापन कराया और उन्हें पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर किया शोध राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलाव और उसके प्रभावों पर सुनीता यादव ने शोध पत्र तैयार किया है। वह जिले की पहली महिला शिक्षिका हैं, जिन्होंने इस विषय पर शोध पत्र तैयार किया है। पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ीं शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों में भी सुनीता यादव सक्रिय रही हैं। प्रकृति संरक्षण के लिए सीड बॉल तैयार करने और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के लिए राखी बनाने जैसे कार्यों के जरिए उन्होंने विद्यार्थियों में सामाजिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया। पहले भी मिल चुका है राज्य और साहित्यिक सम्मान शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए सुनीता यादव को पहले भी सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्हें राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया था। वहीं, वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र में उन्हें पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से नवाजा गया। अब राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान उनके निरंतर प्रयासों और प्राथमिक शिक्षा में किए गए नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिला संवाद का अवसर राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित शिक्षकों को अपने आवास पर आमंत्रित कर बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस दौरान शिक्षिका सुनीता यादव ने प्रधानमंत्री को अपने शिक्षण कार्य, नवाचारों और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके नियमित अध्यापन के साथ शिक्षा में नवाचार, तकनीक और रचनात्मक माध्यमों के उपयोग की सराहना की। ग्रामीण क्षेत्र के छोटे से विद्यालय में लघु फिल्मों, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट और स्मार्ट क्लास के जरिए शिक्षण के उनके प्रयासों ने विद्यालय को नवाचार आधारित शिक्षा का उदाहरण बनाया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव का क्षण सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने पर जिले के प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा, कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि जिले की शिक्षिका का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव की बात है। उनके नवाचारपूर्ण कार्य दूसरे शिक्षकों को भी नई सोच के साथ शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे। प्रभारी मंत्री ने कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़ने का प्रयास सराहनीय है। यह उपलब्धि सुनीता यादव के साथ पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। शिक्षक परिवार में हुआ जन्म, पढ़ाई के बाद चुना शिक्षण सुनीता यादव का जन्म महासमुंद जिले के सांकरा में शिक्षक परिवार में हुआ। छात्र जीवन से ही वह मेधावी रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा में हुई। इसके बाद उन्होंने कला महाविद्यालय पिथौरा से स्नातक और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर से बीएड करने के बाद उन्होंने शिक्षण को अपना कर्मक्षेत्र चुना। बरमकेला के व्यवसायी नंदकुमार यादव से विवाह के बाद भी उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सक्रियता और रचनात्मकता को जारी रखा। उनकी पुत्री सृजना यादव गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार की छात्रा हैं। छोटे स्कूल से राष्ट्रीय मंच तक पहुंची पहचान राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान सुनीता यादव की उस निरंतर यात्रा की राष्ट्रीय पहचान है, जिसमें उन्होंने एक छोटे से ग्रामीण विद्यालय की कक्षा को नवाचार, साहित्य, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़कर बच्चों के लिए सीखने का जीवंत मंच बनाया।
वाराणसी में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की तकनीकी शिक्षा (अध्यापन) सेवा परीक्षा-2025 शुरू हो गई है। परीक्षा में 16,129 अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इसके लिए शहर में 36 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की गई है। पहली शिफ्ट का एग्जाम जारीपहली शिफ्ट की परीक्षा सुबह 9 से 11 बजे तक चल रही है। अभ्यर्थियों को सुबह 7:30 बजे तक सेंटर पहुंचना था। सेंटर के गेट पर एंट्री से पहले अभ्यर्थियों की जांच और बायोमीट्रिक सत्यापन किया गया। दूसरी शिफ्ट में भी हजारों अभ्यर्थी होंगे शामिल दूसरी शिफ्ट की परीक्षा दोपहर 2:30 से शाम 5 बजे तक होगी। इसके लिए अभ्यर्थियों को दोपहर 1 बजे तक सेंटर पर पहुंचना होगा। दोनों शिफ्ट में मिलाकर कुल 16,129 अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं। तीन स्तर की जांच के बाद एंट्रीपरीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा को लेकर खास इंतजाम किए गए हैं। अभ्यर्थियों की तीन स्तर पर जांच की जा रही है। बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद पुलिस और परीक्षा निरीक्षक की अनुमति से ही उन्हें अंदर जाने दिया जा रहा है। 36 सेक्टर और 36 स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनातपरीक्षा की निगरानी के लिए 36 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 36 स्टेटिक मजिस्ट्रेट लगाए गए हैं। परीक्षा केंद्रों के आसपास भी निगरानी रखी जा रही है। 200 मीटर के दायरे में फोटो कॉपी की दुकानें बंदपरीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में फोटो कॉपी की दुकानें बंद कराई गई हैं।
यूपी: 3890 परिषदीय स्कूलों के ऊपर से अब भी नहीं हटी एचटी लाइन, बेसिक शिक्षा विभाग ने मांगी रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में अब भी 3890 परिषदीय विद्यालयों के ऊपर से बिजली की हाइटेंशन लाइन गुजर रही है।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में झज्जर जिले के बेरी स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका बबीता अहलावत को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। बबीता अहलावत का कहना है कि यह सम्मान व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके विद्यार्थियों और अभिभावकों के विश्वास का परिणाम है। विद्यार्थियों को परिवार का हिस्सा मानकर पढ़ाया बबीता अहलावत पिछले 9 वर्षों से बेरी के सरकारी प्राथमिक स्कूल में सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया। उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयास किए और प्रवासी परिवारों के बच्चों को भी स्कूल से जोड़ने पर जोर दिया। बारिश में स्कूल परिसर में भर जाता था पानी बबीता अहलावत ने बताया कि जब उन्होंने बेरी के स्कूल में कार्यभार संभाला था, तब बारिश के दौरान स्कूल परिसर में करीब 4 फीट तक पानी भर जाता था। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने स्थानीय दानदाताओं के सहयोग से करीब 7 लाख रुपये जुटाए। इस राशि से स्कूल परिसर में मिट्टी भरवाई गई और टाइल्स लगवाई गईं, जिससे जलभराव की समस्या का समाधान हुआ। 28 साल से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं बबीता अहलावत करीब 28 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं। उनके समर्पण और प्रयासों से स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध करवाने की दिशा में काम हुआ। उन्होंने कहा कि शिक्षक का काम केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें परिवार का हिस्सा मानकर उनके भविष्य को संवारना है। उनके अनुसार बच्चों को सिर्फ छात्र नहीं समझना चाहिए, बल्कि उनके अभिभावकों के विश्वास को भी अपनी जिम्मेदारी मानना चाहिए। सम्मान को बताया टीम की मेहनत का परिणाम राज्य पुरस्कार मिलने पर बबीता अहलावत ने कहा कि यह सम्मान उनके अकेले का नहीं है। यह स्कूल स्टाफ, विद्यार्थियों, अभिभावकों और सहयोग करने वाले लोगों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उनकी इस उपलब्धि पर बेरी क्षेत्र में खुशी का माहौल है और क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई दी है।
झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य के लिए रविवार की सुबह एक अत्यंत दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर लेकर आई। हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के कद्दावर मंत्री और गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से तेजतर्रार विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 56 वर्ष की अल्पायु में हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) से असामयिक निधन हो गया। मिली जानकारी के अनुसार, उन्हें देर रात अचानक सीने में तेज दर्द और सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस हुई, जिसके बाद उनके परिजन और सुरक्षाकर्मी उन्हें तत्काल नजदीकी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, डॉक्टरों के भरसक प्रयासों और सीपीआर दिए जाने के बावजूद उनकी नब्ज वापस नहीं लौट सकी और चिकित्सकों के पैनल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। महज 56 वर्ष की आयु में इस ऊर्जावान, मिलनसार और संघर्षशील नेता के अचानक चले जाने की खबर मिलते ही समूचे झारखंड के प्रशासनिक, राजनीतिक और आम जनमानस में गहरा सन्नाटा पसर गया। राजधानी रांची से लेकर उनके गृह क्षेत्र गिरिडीह तक हर आंख नम हो गई और किसी को भी इस अप्रत्याशित क्षति पर सहसा विश्वास नहीं हो रहा है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खोया अपना सबसे विश्वस्त सिपहसालार: सियासी जगत में छाया मातमसुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) परिवार और राज्य सरकार को असहनीय झटका लगा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अपनी व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति बताया। भावुक होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केवल अपनी कैबिनेट का एक काबिल और कर्मठ शिक्षा मंत्री ही नहीं खोया, बल्कि अपने छात्र जीवन का एक सच्चा भाई, मार्गदर्शक और सबसे भरोसेमंद सिपहसालार खो दिया है। हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू विपरीत से विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में चट्टान की तरह पार्टी और उनके साथ खड़े रहे। झारखंड के राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष और कैबिनेट के तमाम मंत्रियों ने गहरा दुख जताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों और अन्य राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने भी दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर सुदिव्य कुमार के असामयिक देहावसान पर शोक संवेदनाएं प्रकट की हैं। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय शोक (State Mourning) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज झुका रहेगा और सभी आधिकारिक उत्सव स्थगित कर दिए गए हैं।गिरिडीह के 'सोनू दा' का बेदाग सफर: छात्र आंदोलन से निकलकर कैबिनेट तक बनाई मजबूत पहचानझारखंड के कोयला और अभ्रकंचल क्षेत्र गिरिडीह की जनता के दिलों में 'सोनू दा' के नाम से लोकप्रिय रहे सुदिव्य कुमार का राजनीतिक सफर जमीन से जुड़े एक सच्चे जननायक की मिसाल रहा है। उनका जन्म और पालन-पोषण गिरिडीह के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था, लेकिन उनकी पहचान हमेशा आम जनता के बीच जमीन पर संघर्ष करने वाले नेता की रही। छात्र जीवन से ही वे अविभाजित बिहार के दौर में अलग झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन और छात्र राजनीति में सक्रिय रूप से कूद पड़े थे। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विचारों से गहराई से प्रभावित होकर उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा को अपना कर्मक्षेत्र चुना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अपनी पूरी जवानी खपा दी। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गिरिडीह विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अपनी सियासी ताकत का लोहा मनवाया था। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे प्रशासनिक प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंचते थे। गिरिडीह के सुदूर ग्रामीण इलाकों में विकास योजनाओं को पहुंचाना, बिजली, सड़क, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहा, जिसके चलते वे हर वर्ग और समुदाय के लोगों के चहेते बने रहे।शिक्षा विभाग में क्रांतिकारी बदलाव: शिक्षकों की समस्याओं और सरकारी स्कूलों के उन्नयन पर दिया था जोरस्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का प्रभार संभालने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड की लचर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में नई जान फूंकने का संकल्प लिया था। वे मानते थे कि राज्य के गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शिक्षा दिलाना ही झारखंड के नवनिर्माण का असली रास्ता है। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में 'सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' (CM School of Excellence) के विस्तार को नई गति मिली, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी कॉन्वेंट की तर्ज पर सीबीएसई पैटर्न पर अंग्रेजी माध्यम में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकें। पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) के मानदेय, सेवा शर्तों और लंबित मांगों के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने कई उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की और संवाद के जरिए दशकों पुराना गतिरोध खत्म करने का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त, सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुधारने, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की सुरक्षा सुदृढ़ करने और शिक्षकों की पारदर्शी पदस्थापना व प्रोन्नति के नियमों को लागू करने में उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी भी फाइल को बेवजह लटकाने के सख्त खिलाफ थे और त्वरित निर्णयों के लिए जाने जाते थे।गिरिडीह में उमड़ा जनसैलाब: पैतृक आवास पर अंतिम दर्शन और राजकीय सम्मान से विदाई की तैयारीमंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर जैसे ही गिरिडीह शहर और ग्रामीण इलाकों में फैली, हजारों की संख्या में लोग उनके पैतृक आवास की ओर दौड़ पड़े। बाजार, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्वतः स्फूर्त रूप से बंद हो गए और पूरा शहर शोक में डूब गया। उनके आवास पर विलाप कर रहे परिजनों को सांत्वना देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। रांची में पोस्टमार्टम और अन्य औपचारिकताओं के बाद उनके पार्थिव शरीर को झारखंड विधानसभा परिसर में दर्शनार्थ रखा जाएगा, जहां मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, सभी दलों के विधायक और वरिष्ठ नौकरशाह उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके उपरांत उनके पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सड़क मार्ग से गिरिडीह ले जाया जाएगा, ताकि उनके गृह क्षेत्र की जनता अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन कर सके। प्रशासन ने अंतिम यात्रा और दाह संस्कार के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन के इंतजाम किए हैं। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ गिरिडीह के मोक्षधाम में संपन्न किया जाएगा, जहां पुलिस बल द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।50 की उम्र के बाद बढ़ते कार्डियक अरेस्ट के मामले: राजनीतिक तनाव और जीवनशैली पर विशेषज्ञों की चिंतासुदिव्य कुमार सोनू का महज 56 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट से अचानक चले जाना एक बार फिर उस गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करता है जो इन दिनों भारतीय पुरुषों, विशेष रूप से सार्वजनिक जीवन में अत्यधिक सक्रिय लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का कहना है कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों पर मानसिक तनाव, लगातार यात्राएं, नींद की अनियमितता और खान-पान में असंतुलन का भारी दबाव रहता है। अक्सर सीने में होने वाली हल्की जलन, भारीपन, जबड़े या बाएं हाथ में होने वाले दर्द को लोग सामान्य गैस्ट्रिक समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में 'मैसिव हार्ट अटैक' या 'सडन कार्डियक अरेस्ट' का रूप ले लेता है। डॉक्टरों की सलाह है कि 40 की उम्र पार करते ही प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल, ईसीजी, टीएमटी और कार्डियक चेकअप कराना चाहिए और तनाव प्रबंधन के साथ 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद सुनिश्चित करनी चाहिए। सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक जाना न केवल झारखंड की राजनीति के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले वर्षों में कर पाना बेहद कठिन होगा।
Jharkhand के उच्च शिक्षा मंत्री Sudivya Kumar का 56 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से निधन
रांची, छह सितंबर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता और राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार का निधन हो गया। पार्टी ने शनिवार को यह जानकारी दी। वह 56 वर्ष के थे। झामुमो के एक नेता ने बताया कि कुमार को शनिवार देर रात यहां एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और आज तड़के करीब चार बजे उनका हृदयाघात के कारण निधन हो गया। गिरिडीह से विधायक कुमार के पास पर्यटन, कला एवं संस्कृति तथा खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की भी जिम्मेदारी थी। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो और कई अन्य नेताओं ने कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। सोरेन ने कहा, ‘‘ मुझे अपने बड़े भाई और हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार जी के निधन की हृदयविदारक खबर मिली। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद मुश्किल है। सोनू भैया के चले जाने से मेरी जिंदगी में ऐसी कमी पैदा हो गई है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।’’सोरेन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि कुमार उनके लिए सिर्फ एक वरिष्ठ सहयोगी या राजनीतिक साथी नहीं थे, बल्कि ‘‘एक बड़े भाई की तरह थे - स्नेही, मार्गदर्शन देने वाले और हर मुश्किल समय में मजबूती से मेरे साथ खड़े रहने वाले। उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा मेरे साथ रहेंगी।’’मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दिनों से ही कुमार ने बाबा दिशोम गुरुजी (झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन) के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से कदम से कदम मिलाकर काम किया। उन्होंने कहा कि झामुमो के एक समर्पित सिपाही के रूप में कुमार ने अपना पूरा जीवन झारखंड की पहचान, अधिकार और गौरव की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया। सोरेन ने कहा कि ‘झारखंडियत’ के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उनका अडिग जज्बा हमेशा याद किया जाएगा। सोरेन ने कहा, ‘‘आज जब मैं उन्हें याद कर रहा हूं, तो मेरा मन बार-बार सोच रहा है कि जिंदगी कितनी नश्वर है। जो आवाज कल तक हमारे बीच थी, वह अब सिर्फ यादों में रह गई है। सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। मैं आपके स्नेह, आपके संघर्ष और झारखंड के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को जीवनभर याद रखूंगा।’’झामुमो ने कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए ‘‘अपूरणीय क्षति’’ बताया। पार्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार झामुमो के समर्पित साथी और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन से स्तब्ध और बेहद दुखी है।’’पार्टी ने कुमार के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कुमार पहली बार 2019 में गिरिडीह से झारखंड विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। मुख्यमंत्री सोरेन के करीबी सहयोगी माने जाने वाले कुमार ने झामुमो के भीतर कई संकटों के हल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनमें 2024 में कथित भूमि धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में सोरेन की गिरफ्तारी के दौरान पार्टी के सामने आया संकट भी शामिल है। कुमार इसी सप्ताह कर्नाटक से लौटे थे, जहां उन्होंने झारखंड में पर्यटन बुनियादी ढांचे के प्रबंधन को बेहतर बनाने के तरीके तलाशने संबंधी राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। उन्होंने कर्नाटक के पर्यटन मंत्री के. जे. जॉर्ज से मुलाकात की और दोनों राज्यों के बीच पर्यटन तथा वन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
Jharkhand के उच्च शिक्षा मंत्री Sudivya Kumar का 56 साल की उम्र में निधन
रांची, छह सितंबर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता और राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार का निधन हो गया। पार्टी ने शनिवार को यह जानकारी दी। वह 56 वर्ष के थे। झामुमो के एक नेता ने बताया कि कुमार का निधन हृदयाघात के कारण हुआ। गिरिडीह से विधायक कुमार के पास पर्यटन, कला एवं संस्कृति तथा खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की भी जिम्मेदारी थी। झामुमो ने कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए ‘‘अपूरणीय क्षति’’ बताया। पार्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार झामुमो के समर्पित साथी और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन से स्तब्ध और बेहद दुखी है।’’पार्टी ने कुमार के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कुमार पहली बार 2019 में गिरिडीह से झारखंड विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगी माने जाने वाले कुमार ने झामुमो के भीतर कई संकटों के हल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनमें 2024 में कथित भूमि धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में सोरेन की गिरफ्तारी के दौरान पार्टी के सामने आया संकट भी शामिल है। कुमार इसी सप्ताह कर्नाटक से लौटे थे, जहां उन्होंने झारखंड में पर्यटन बुनियादी ढांचे के प्रबंधन को बेहतर बनाने के तरीके तलाशने संबंधी राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। उन्होंने कर्नाटक के पर्यटन मंत्री के. जे. जॉर्ज से मुलाकात की और दोनों राज्यों के बीच पर्यटन तथा वन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। कुमार के अचानक निधन से झामुमो और झारखंड सरकार में शोक की लहर है।
Sudivya Kumar Dies: झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार (5 सितंबर) देर रात निधन हो गया। वह 56 वर्ष के थे। बताया गया कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए गिरिडीह के एक निजी अस्पताल मर्सी ले जाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सुदिव्य कुमार गिरिडीह विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे थे। शनिवार रात उनके आवास पर अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। हालांकि डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।हेमंत सोरेन सरकार में संभाली थीं कई अहम जिम्मेदारियांसुदिव्य कुमार झारखंड सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास नगर विकास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेल और युवा कार्य जैसे विभाग भी थे। वह झारखंड की राजनीति में JMM के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। सुदिव्य कुमार संगठन के लिए लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।JMM ने जताया गहरा दुखसुदिव्य कुमार के आकस्मिक निधन पर JMM ने गहरा शोक जताया। राज्य में सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि अपने समर्पित नेता के असमय निधन से पूरा JMM परिवार स्तब्ध और बेहद दुखी है। पार्टी ने कहा कि सुधिव्या कुमार का जाना पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके संघर्ष, सेवा और योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। JMM ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और उनके परिवार को इस कठिन समय में शक्ति मिलने की प्रार्थना की।JMM के आधिकारिक एक्स हैंडल से कहा गया, जिंदगी की क्षणभंगुरता…कल तक जो साथी हमारे बीच थे, आज उनकी स्मृतियां ही हमारे साथ हैं। जीवन की अनिश्चितता हमें एक बार फिर गहरे दुःख और शोक में छोड़ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्पित साथी एवं झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन से पूरा झामुमो परिवार स्तब्ध और मर्माहत है। उनका जाना पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके संघर्ष, सेवा और योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार एवं सभी साथियों को इस कठिन घड़ी में संबल दें। अंतिम जोहार।परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ हुए भावुकझारखंड सरकार के परिवहन मंत्री और JMM नेता दीपक बिरुआ ने भी सुदिव्य सोनू के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अपने सहयोगी और झारखंड सरकार में साथी मंत्री सुधिव्या सोनू के निधन से वह बेहद दुखी हैं। दीपक बिरुआ के मुताबिक, सुदिव्य सोनू की तबीयत रात में अचानक बिगड़ी और अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की कामना की।उन्होंने भावुक संदेश में इसे JMM परिवार के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया और अपने दिवंगत साथी को अश्रुपूर्ण अंतिम 'जोहार' कहा। सुदिव्य कुमार के अचानक निधन की खबर सामने आने के बाद झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। महज 56 वर्ष की उम्र में उनका निधन JMM और राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके निधन से पार्टी ने एक सक्रिय वरिष्ठ नेता और सरकार ने एक महत्वपूर्ण मंत्री खो दिया है।झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने भी जताया शोक, बताया बड़ा भाईझारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने X पर लिखा, देर रात अपने बड़े भाई, हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन का दुःखद समाचार मिला। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद कठिन है। सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। सोनू भैया मेरे लिए सिर्फ एक वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे। वे बड़े भाई की तरह थे - स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और हर कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले। उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा मेरे साथ रहेंगी।मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, झारखंड आंदोलन के दौर से ही वे स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया। झारखंडियत के प्रति उनका समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी।ये भी पढ़ें- Iran-America War Update: अमेरिका-ईरान की जंग ने लिया खतरनाक मोड़! ईरानी सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी युद्धपोतों को बनाया निशानासोरेन ने कहा, आज उन्हें याद करते हुए मन बार-बार यही सोचता है कि ज़िंदगी कितनी क्षणभंगुर है। कल तक जो आवाज़ हमारे बीच थी, आज वह सिर्फ स्मृतियों में रह गई है। सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। आपके स्नेह, आपके संघर्ष और झारखंड के लिए आपकी प्रतिबद्धता को मैं जीवनभर अपने साथ लेकर चलूंगा। आप हमेशा याद आएंगे भैया....
दुखद संयोगः साढ़े तीन साल में झारखंड सरकार में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन
रांची, 6 सितंबर . Jharkhand Government के कैबिनेट मंत्री और Jharkhand मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू के Saturday देर रात आकस्मिक निधन के साथ राज्य की राजनीति में एक असामान्य और दुखद संयोग जुड़ गया है. पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों में Jharkhand Government के शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों ... Read more
शिक्षक दिवस : संस्कृति का प्रदर्शन, शिक्षा से संवाद तक स्कूलों में मंथन
कांगड़ा जिले के शिक्षण संस्थानों में शनिवार को शिक्षक दिवस पर समृद्ध संस्कृति की छटा बिखरने के साथ ही शिक्षा से लेकर अभिभावक संवाद तक व्यापक मंथन हुआ।
झारखंड के शिक्षा मंत्री का निधन: हेमंत सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू नहीं रहे, झामुमो ने क्या कहा?
गोरखपुर के जिला कारागार में शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षाविद भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बंदियों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया गया। इस दौरान साक्षर हुए बंदियों को प्रमाण पत्र दिए गए, जबकि अगले बैच में पढ़ाई शुरू करने वाले निरक्षर बंदियों को शैक्षणिक किट वितरित की गई। मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत कारागार अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित करके की। इसके बाद सिद्धदोष बंदी पप्पू राय और उनके सहयोगियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बंदियों ने देशभक्ति गीत भी प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों से जेल परिसर का माहौल उत्साह और देशभक्ति से भर गया। बंदी सुधार और पुनर्वास अभियान के तहत शिव नाडर फाउंडेशन के सातवें बैच में साक्षर हुए बंदियों को कार्यक्रम में प्रमाण पत्र दिए गए। इन प्रमाण पत्रों का उद्देश्य बंदियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करना है। इसके साथ ही आने वाले अष्टम बैच में शामिल होने वाले निरक्षर बंदियों को शैक्षणिक किट भी दी गई। इससे वे जेल में रहकर अपनी पढ़ाई की शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के बाद करियर को लेकर दिया मार्गदर्शन कार्यक्रम में कैरियर काउंसलर अमित आनंद ने बंदियों को संबोधित किया। उन्होंने रिहाई के बाद आगे की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए करियर और रोजगार से जुड़े विकल्पों की जानकारी दी। उन्होंने बंदियों को समझाया कि जेल से बाहर निकलने के बाद वे अपनी शिक्षा, हुनर और मेहनत के जरिए नई शुरुआत कर सकते हैं। शिक्षा और सही दिशा के जरिए जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। शिक्षाविदों ने बंदियों को किया प्रेरित कार्यक्रम में कई शिक्षाविद और विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. मोहम्मद हसन, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के क्षसमन्वयक डॉ. प्रवीण कुमार, कैरियर काउंसलर अमित आनंद, सेंट्रल एकेडमी के प्रधानाहैचार्य डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और शिव नाडर फाउंडेशन के सहायक प्रबंधक कार्तिकेय पांडेय ने बंदियों को संबोधित किया। वक्ताओं ने बंदियों को शिक्षा, नैतिक मूल्यों और अच्छे आचरण के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने प्रयासों से जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर बेहतर जीवन शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। डॉ. राधाकृष्णन के जीवन से सीख लेने की अपील कारागार अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. राधाकृष्णन ने शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने तिरुत्तनी में जन्म से लेकर ऑक्सफोर्ड में अध्यापन, सोवियत संघ में भारत के राजदूत के रूप में जिम्मेदारी निभाने और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक द इंडियन फिलॉसफी सहित उनके कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पढ़ना-लिखना सीखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे मजबूत माध्यम भी है। बंदियों को शिक्षा से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया गया। अतिथियों को अंगवस्त्र देकर किया गया स्वागत कार्यक्रम में पहुंचे सभी विशिष्ट अतिथियों का कारागार अधीक्षक की ओर से अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान बंदियों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक और देशभक्ति कार्यक्रमों की भी सराहना की गई। जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की रही मौजूदगी कार्यक्रम का मंच संचालन जेल विजिटर अमृताधीर मेहरोत्रा ने किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की देखरेख कारागार अध्यापक राजीव चौरसिया ने की। इस अवसर पर जेलर कुंज बिहारी सिंह, उप जेलर विजय कुमार, आदित्य कुमार, कृष्णा कुमारी, कारागार अध्यापक राजीव चौरसिया सहित अन्य कारागार कर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में कारागार अधीक्षक ने सभी अतिथियों का आभार जताया और कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। शिक्षक दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि शिक्षा और सही मार्गदर्शन के जरिए बंदियों को सुधार और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल:शिक्षकों पर पोर्टल में डाटा अपलोड से लेकर सर्वे व एमडीएम तक की जिम्मेदारी
शिक्षक दिवस पर शनिवार को देशभर में शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम हुए। उन्हें राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बताया गया। लेकिन सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के शिक्षकों के सामने सवाल कुछ और है- वे बच्चों को पढ़ाएं या विभाग के 86 तरह के काम पूरे करें? शिक्षकों की ओर से बताई गई जिम्मेदारियों की सूची देखें तो शिक्षक सिर्फ कक्षा में पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं रह गया है। उसे ऑनलाइन डाटा भरने, पोर्टल संभालने, सर्वे करने, बैठकों में जाने, अभियान चलाने और एमडीएम का हिसाब देखने वाला भी बनना पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षकों का बड़ा समय कक्षा के बाहर के कामों में चला जाता है। बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए उनके पास समय बहुत कम बचता है। डाटा अपलोड का काम ड्रॉप बॉक्स कार्य, यू-डायस प्लस की फैसिलिटी, टीचर और स्टूडेंट मॉड्यूल, छात्रों का आधार सत्यापन, अपार और डीबीटी डाटा के काम करने होते हैं। इसके बाद ईको क्लब पोर्टल, ई-कल्याण, उल्लास ऐप पर असाक्षरों की एंट्री और प्रशस्त एेप से संबंधित जिम्मेदारियां हैं। इनकी जानकारी जुटाने, उसे सत्यापित कर अपलोड करने में समय लगता है। शिक्षक किन कामों में अधिक व्यस्त रहते हैं हर सप्ताह कोई न कोई गतिविधि: शिक्षकों को हर सप्ताह एसएचडब्ल्यूपी कक्षा, दवा वितरण, ईको क्लब बैठक, बाल संसद, एसएमसी और अभिभावक-शिक्षक बैठक करनी होती है। सीपीडी प्रशिक्षण, जूम मीटिंग, मूल्यांकन, रीडिंग कैंपेन और पुस्तकालय संचालन जैसे काम भी जिम्मे हैं। खेल, प्रतियोगिता और प्रदर्शनी का जिम्मा: स्कूल रुआर, डहर कार्य, शिशु गणना, खेलो झारखंड लिटिल चैंपियनशिप, सुब्रतो कप, बैंगल्स डे और इंस्पायर अवॉर्ड जैसी गतिविधियों की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर है। विज्ञान प्रदर्शनी और खेल महोत्सव में बच्चों की तैयारी से लेकर भागीदारी तक करानी होती है। पखवाड़ा खत्म नहीं होता, नया अभियान शुरू: स्वच्छता, स्वास्थ्य और जल पखवाड़े से लेकर पृथ्वी दिवस, ग्लोबल वार्मिंग डे और साक्षरता दिवस तक के आयोजन कराने होते हैं। विकसित भारत बिल्डथॉन, शिक्षा सप्ताह, साधना सप्ताह, ग्राम शिक्षा संगम, पोषण, बाल सुरक्षा सप्ताह जैसे अभियान चलते रहते हैं स्कूल रैंकिंग व प्रमाणन शिक्षकों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार, स्वच्छ हरित विद्यालय रेटिंग और विद्यालय प्रमाणीकरण जैसे कार्य भी वे करते हैं। स्कूल में निर्धारित गतिविधियां कराना, रिकॉर्ड रखना और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना। यानि शिक्षक से सिर्फ यह नहीं पूछा जाता कि बच्चों ने कितना सीखा, बल्कि स्कूल की गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड भी तैयार रखना पड़ता है। टीचर बोले- शिक्षक को हर काम का कर्मचारी बना दिया अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि शिक्षक का मूल दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और उनका सर्वांगीण विकास करना है। लेकिन शिक्षकों को लगातार विभागीय, प्रशासनिक, ऑनलाइन और अभियान आधारित जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इन गतिविधियों के वीडियो रोज पोस्ट करने का दबाव भी है। शिक्षकों को अनावश्यक बोझ से मुक्त किया जाना चाहिए।
निपुण कक्षा प्रोजेक्ट से बदलेगी प्राथमिक शिक्षा की तस्वीर
प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के लिए विदिशा जिले में निपुण कक्षा प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता की पहल पर नीति आयोग से स्वीकृत यह प्रोजेक्ट फिलहाल जिले में ही लागू किया गया है। इसके तहत कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों की शैक्षणिक दक्षता का हर तीन माह में स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से मूल्यांकन कराया जाता है। मूल्यांकन में यदि किसी स्कूल के 80 प्रतिशत बच्चे निर्धारित मापदंडों पर दक्ष पाए जाते हैं तो संबंधित स्कूल को 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस राशि का उपयोग स्कूल में शैक्षणिक सामग्री, टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) और गुणवत्ता सुधार से जुड़े अन्य संसाधन जुटाने में किया जा सकता है। खेल-खेल में पढ़ाई पर जोर : प्रोजेक्ट लागू होने के बाद स्कूलों में पढ़ाई के तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। शिक्षक बच्चों को खेल-खेल में और रोचक गतिविधियों के माध्यम से पढ़ा रहे हैं, ताकि प्राथमिक स्तर पर सीखना बच्चों के लिए बोझ न बने। वहीं बाहरी एजेंसी से मूल्यांकन होने के कारण बच्चों की दक्षता का आकलन भी पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं सामने ^कलेक्टर अंशुल गुप्ता के प्रयासों से नीति आयोग से इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिली है। इसके लागू होने के बाद शिक्षकों और बच्चों में उत्साह बढ़ा है। स्कूलों में पढ़ाने के नए और रोचक तरीके अपनाए जा रहे हैं तथा इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। - आरपी लखेर, डीपीसी, विदिशा
Gorakhpur News: 44 केंद्रों पर जिले में आज होगी प्राविधिक शिक्षा अध्यापन परीक्षा
Technical education teaching examination to be held today at 44 centers in the district.
शिक्षा सुधार के साथ शिक्षक कल्याण पर भी जोर : गुलाब देवी
Emphasis on teacher welfare alongside education reform: Gulab Devi
शिक्षक दिवस : जोनल शिक्षा अधिकारी ने चार शिक्षकों को सम्मानित किया
शिक्षक दिवस : जोनल शिक्षा अधिकारी ने चार शिक्षकों को सम्मानित किया
Kushinagar News: नियमितीकरण के लिए कलक्ट्रेट में गरजे टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्र
26 वर्ष से सेवा देने के बाद भी नियमित शिक्षक का दर्जा नहीं मिलने से नाराज टीईटी और सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्र शनिवार को कलक्ट्रेट पहुंचे।
Kaushambi News: बेहतर शिक्षा के प्रयासों ने सुमन कुशवाहा को दिलाया राज्य शिक्षक पुरस्कार
Efforts towards better education earned Suman Kushwaha the State Teacher Award.
Lucknow News: प्राविधिक शिक्षा सेवा परीक्षा आज
प्राविधिक शिक्षा सेवा परीक्षा आज
Sambhal News: टेट पास शिक्षामित्रों ने मांगा नियमितीकरण और आरक्षण
शिक्षक दिवस पर टेट उत्तीर्ण शिक्षामित्र उत्थान समिति ने बहजोई कलक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा।
12 secondary and 50 council school teachers were honored for fostering innovation in education.
Una News: अगले वर्ष से कांगड़ स्कूल में शुरू होंगी संगीत शिक्षा की कक्षाएं
उपमुख्यमंत्री ने विजेता एवं उपविजेता टीमों तथा खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किए।
Sultanpur News: 65 शिक्षक-शिक्षामित्रों का सम्मान, ब्लड बैंक में रक्तदान
65 शिक्षक-शिक्षामित्रों का सम्मान, ब्लड बैंक में रक्तदान
Jaunpur News: प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध मौर्य को शिक्षा में योगदान के लिए सम्मान
प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध मौर्य को शिक्षा में योगदान के लिए सम्मान
Dehradun News: शिक्षा मंत्री से मिला नैनीताल बैंक का प्रतिनिधिमंडल
एक सशक्त एवं विकसित समाज की आधारशिला गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समर्पित शिक्षक ही हैं।
प्राविधिक शिक्षा अध्यापन परीक्षा-2026 को लेकर गोरखपुर जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। रविवार, 6 सितंबर को जिले के 44 परीक्षा केंद्रों पर 19,496 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा दो पालियों में आयोजित होगी। परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा, निगरानी, यातायात और परीक्षा केंद्रों पर जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पूरी कर ली है।दो पालियों में होगी परीक्षाबड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने को देखते हुए परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी। दोनों पालियों में परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए अलग-अलग सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने-अपने क्षेत्र के परीक्षा केंद्रों का लगातार निरीक्षण करेंगे। परीक्षा शुरू होने से पहले भी अधिकारी केंद्रों पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की जांच करेंगे। परीक्षा के दौरान किसी तरह की समस्या सामने आने पर संबंधित अधिकारी तत्काल कार्रवाई करेंगे।सीसी कैमरों से होगी निगरानीपरीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसी कैमरों के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है। परीक्षा के दौरान केंद्रों के अंदर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।नोडल परीक्षा अधिकारी और एडीएम सिटी गजेन्द्र कुमार ने बताया कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और शुचिता के साथ कराने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियां बता दी गई हैं।हर केंद्र पर तैनात रहेंगे अधिकारीप्रत्येक परीक्षा केंद्र पर केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने निर्धारित केंद्रों पर पहुंचकर परीक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे।अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न हो। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और निर्धारित नियमों का पालन कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल19 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने को देखते हुए सभी केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास भी पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।पुलिस की ओर से केंद्रों के आसपास भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। नकल या किसी अन्य अनुचित गतिविधि को रोकने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखा गया है।परीक्षा केंद्रों के बाहर भी रहेगी निगरानीपरीक्षा के दौरान सिर्फ केंद्रों के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। अभ्यर्थियों के साथ आने वाले लोगों की वजह से परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ न लगे, इसके लिए पुलिस और प्रशासन की टीम तैनात रहेगी।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि परीक्षा केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाएं और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।ट्रैफिक व्यवस्था पर भी रहेगा विशेष ध्यानएक साथ हजारों अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने और परीक्षा खत्म होने के बाद वापस लौटने से शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इसे देखते हुए यातायात पुलिस ने भी विशेष इंतजाम किए हैं।प्रमुख परीक्षा केंद्रों और उनके आसपास के रास्तों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। कोशिश रहेगी कि अभ्यर्थियों के आने-जाने के दौरान जाम की स्थिति न बने।प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें, ताकि अंतिम समय में होने वाली भीड़ और यातायात की परेशानी से बचा जा सके।केंद्रों पर बिजली, पानी और सफाई की व्यवस्थाजिला प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का भी इंतजाम किया है। केंद्रों पर बिजली, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के दिन भी इन व्यवस्थाओं पर नजर रखें। किसी केंद्र पर कोई समस्या आती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाए।अभ्यर्थियों को इन बातों का रखना होगा ध्यानप्रशासन ने परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से कहा है कि वे परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पर्याप्त पहले पहुंचें। अभ्यर्थी अपने साथ जरूरी पहचान पत्र और परीक्षा से जुड़े निर्धारित दस्तावेज जरूर लेकर जाएं।परीक्षा केंद्र पर प्रतिबंधित सामग्री लेकर न पहुंचें और प्रवेश से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक सभी निर्धारित नियमों का पालन करें।लापरवाही पर होगी कार्रवाईएडीएम सिटी गजेन्द्र कुमार ने कहा कि प्राविधिक शिक्षा अध्यापन परीक्षा-2026 को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। परीक्षा से जुड़े सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि सुरक्षा, यातायात और परीक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता या अनुचित गतिविधि सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मऊ को अब कट्टे की नहीं कंप्यूटर की जरूरत, शिक्षा की नई इबादत लिखेगी नई पीढ़ी : कैबिनेट मंत्री
Mau now needs computers, not country-made pistols; the new generation will script a new chapter in education: Cabinet Minister.
Budaun News: नवाचार से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने वाले 42 शिक्षक सम्मानित
बदायूं। शिक्षक दिवस के अवसर पर कलक्ट्रेट में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसार शिक्षकों दिखाया गया। इसके बाद में बेसिक के 32 और माध्यमिक शिक्षा परिषद के 10 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
Under-19 sports competition kicks off across six education blocks; 1,708 players are participating.
Una News: सुक्खू सरकार के शिक्षा सुधार के दावों पर उठाए सवाल
विधानसभा में सामने आए ये आंकड़े सरकार के शिक्षा सुधार के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करते हैं।
गोरखनाथ इलाके के पुराना गोरखपुर मोहल्ले में नौकरी दिलाने के नाम पर महिला से 4 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रबंधकीय कोटे से सहायक अध्यापिका बनाने का लालच देकर 4 लाख रुपये हड़प लिए गए। जब फर्जीवाड़े की पोल खुली तो आरोपी ने पैसे लौटाने से मना कर दिया और जान से मारने की धमकी देने लगा। पीड़िता की तहरीर पर थाना गोरखनाथ पुलिस ने शनिवार को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। पड़ोसी महिला ने भतीजे से कराई पहचानगोरखनाथ मोहल्ले के पंकज शुक्ला की पत्नी पीड़िता बिनीता शुक्ला ने बताया कि घर के पास ही किराए पर रहने वाली हेमा श्रीवास्तव से करीब एक साल पहले जान-पहचान हुई थी। हेमा ने अपने भतीजे गीडा के तेनुआ के रहने वाले सत्यम श्रीवास्तव से मिलवाया। हेमा ने बताया कि सत्यम को उसने बचपन से पाला है। वह शिक्षा विभाग में काम करता है और उसकी विभाग में अच्छी पकड़ है। वर्तमान में सत्यम गोरखपुर में ही किराए पर रहता है और भटहट बीआरसी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में तैनात है। जवाहर इंटर कॉलेज के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्रआरोप है कि सत्यम ने बिनीता और उनके पति को झांसे में लेकर प्रबंधकीय कोटे से जवाहर इंटर कॉलेज, पादरी बाजार में सहायक अध्यापिका के पद पर नियुक्ति दिलाने का झांसा दिया। इसके लिए उसने नकद और ऑनलाइन अपने व अपने करीबी के खातों में कुल 4 लाख रुपये ले लिए। कुछ दिन बाद आरोपी ने जवाहर इंटर कॉलेज का नियुक्ति पत्र लाकर दे दिया। पीड़िता जब कॉलेज में ज्वाइनिंग के लिए पहुंची। वहां पता चला कि पूरा नियुक्ति पत्र फर्जी और कूटरचित है। DIOS का फर्जी कार्यमुक्त आदेश भी थमायाजब पीड़िता ने आपत्ति जताई तो आरोपी ने दूसरा दांव चला। उसने जिला विद्यालय निरीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर वाला कार्यमुक्त आदेश तैयार कर थमा दिया। जांच में वह आदेश भी फर्जी निकला। इसके बाद जब पीड़िता ने अपना पैसा वापस मांगा तो आरोपी पहले टालमटोल करता रहा। फिर फोन पर गंदी-गंदी गालियां देने लगा और जान से मारने की धमकी देने लगा। पीड़िता का आरोप है कि सत्यम फ्रॉड किस्म का व्यक्ति है और कई लोगों से इसी तरह नौकरी के नाम पर ठगी कर चुका है। इसकी जानकारी उसकी बुआ हेमा और परिवार के अन्य लोगों को भी है। पीड़िता ने एसएसपी को तहरीर देकर FIR दर्ज कर पैसे वापस दिलाने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। मामले की जांच गोरखनाथ थाने के एसआई राजेश कुमार पांडेय को सौंपी गई है।
'विश्वस्तरीय शिक्षा से ही बनेगा विकसित भारत', शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर कहा कि विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था से ही विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है, जिसमें शिक्षकों की अहम भूमिका है।
इंडिया पोस्ट में GDS के 23,757 पदों पर भर्ती, 10वीं पास बिना परीक्षा दे सकते हैं आवेदन
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। भारतीय डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवक के कुल 23,757 पदों पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है...
बंगाल में भारतीय शिक्षा-दृष्टि को बल देने की अनुकरणीय घोषणा
पश्चिम बंगाल में शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख शैक्षणिक प्रकल्प विद्या भारती के कम से कम एक हजार नए विद्यालय स्थापित करने का लक्ष्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की घोषणा नहीं है, बल्कि इसे राज्य की शिक्षा-दृष्टि में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के संकेत के ... Read more
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के चलते सागर के राहतगढ़ में यादव समाज ने प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम से पहले नगर के प्रमुख मार्गों से भव्य रैली निकाली गई। रैली में जिलेभर से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। रैली का जगह-जगह स्वागत किया गया। इसके बाद आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों के साथ प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत शामिल हुए। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को पुरस्कार व सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि मेहनत, लगन और शिक्षा ही सफलता का सबसे मजबूत आधार है। समाज के प्रतिभाशाली बच्चों को प्रोत्साहित करने से उनमें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास पैदा होता है। यादव समाज अपने बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, यह पूरे समाज के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राहतगढ़ में जल्द संदीपनी विद्यालय का निर्माण होगा। यह सर्वसुविधायुक्त विद्यालय 35 करोड़ की लागत से बनेगा। समाज की असली ताकत युवा पीढ़ी उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके जरिए बच्चे अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने सभी समाजों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को अधिक से अधिक शिक्षा से जोड़ें और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग करें। समाज की असली ताकत उसकी युवा पीढ़ी है और जब युवा शिक्षा एवं संस्कार से जुड़ते हैं तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होते हैं।इस दौरान पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव, पूर्व मंत्री हर्ष यादव, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष रामकुमार यादव, शिवशंकर यादव जिलाध्यक्ष, हृदय यादव, जिला उपाध्यक्ष बब्बू यादव प्रमोद यादव पथरिया, अनिरुद्ध यादव, सुनील यादव पढ़ा, वीरसिंह यादव, ब्रजेश यादव, राजकुमार यादव, मनोहर यादव, रामबाबू यादव, अजीत यादव, मुंशीलाल यादव समेत बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे।
3 साल में 45 हजार शिक्षक भर्ती, शिक्षा पर 12000 करोड़ होंगे खर्च; कहां हुआ ये ऐलान
ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने 45,000 शिक्षक भर्तियों का ऐलान किया है। साथ ही राज्य में 'केजी से पीजी' तक मुफ्त शिक्षा देने की शानदार शुरुआत की है।
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और भावी शिक्षकों को तैयार करने वाले प्रशिक्षण संस्थानों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है। राज्य में विद्यालयी शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने और शिक्षण संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के कुल 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों यानी डायट (DIET) में वरिष्ठता के आधार पर नए प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां की गई हैं और उन्हें इस पद का प्रभार सौंपा गया है। इसके साथ ही प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए, इसके लिए एटा, इटावा और मऊ जनपदों के डायट में तीन अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार के इस दूरदर्शी फैसले से न केवल शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदेश के दूरदराज के जिलों में चल रहे शैक्षणिक प्रशिक्षण अभियानों को भी एक नई दिशा और प्रभावी नेतृत्व प्राप्त होगा।एससीईआरटी के निदेशक को जारी किए गए निर्देश, वरिष्ठता क्रम के आधार पर मिला प्रभारइस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव यतीन्द्र कुमार ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश के निदेशक को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में कार्यरत वरिष्ठ प्रवक्ताओं को उनकी वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रधानाचार्य पद का प्रभार तुरंत प्रभाव से सौंपा जाए। शासन स्तर पर इस पूरे मामले पर लंबे समय से मंथन चल रहा था और सम्यक विचारोपरांत ही यह निर्णय लिया गया है कि इन संस्थानों का संचालन बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से चलता रहे। निदेशक एससीईआरटी को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित वरिष्ठ प्रवक्ताओं को पदभार ग्रहण कराने से जुड़ी सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं समय पर पूरी करें, ताकि अकादमिक सत्र प्रभावित न हो।शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की रीढ़ हैं डायट, प्रभावी नेतृत्व से मजबूत होगी शैक्षणिक गुणवत्ताशिक्षा विशेषज्ञों का हमेशा से यह मानना रहा है कि किसी भी राज्य में स्कूली शिक्षा की नींव तब तक मजबूत नहीं हो सकती जब तक कि शिक्षकों को तैयार करने वाले संस्थान बेहतरीन स्थिति में न हों। डायट (DIET) यानी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश की पूरी शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य कड़ी माने जाते हैं। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से लैस करना, उनके कौशल का विकास करना, शैक्षणिक सहयोग प्रदान करना और विद्यालयी शिक्षा में नित नए नवाचारों (Innovations) को प्रभावी ढंग से लागू करने में इन्हीं संस्थानों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। ऐसे प्रमुख संस्थानों में लंबे समय से खाली चल रहे नेतृत्व के पदों पर वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रभार सौंपे जाने से इन संस्थानों की कार्यप्रणाली में तेजी आएगी और संस्थागत रूप से पूरी शिक्षण व्यवस्था को एक मजबूत आधार मिलेगा।जानिए किन 17 जिलों के डायट में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को सौंपी गई है प्रधानाचार्य पद की कमानशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार उत्तर प्रदेश के जिन 17 प्रमुख जिलों के डायट में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, उनमें कई अनुभवी शिक्षाविद शामिल हैं। इस सूची के मुताबिक राजेश कुमार सिंह को बहराइच डायट, राम प्रताप सिंह कोश्रावस्ती डायट, विनोद कुमार को हमीरपुर डायट, मुक्तेश कुमार को फिरोजाबाद डायट, संजय कुमार को फर्रुखाबाद डायट, नवाब वर्मा को हाथरस डायट, दीपक श्रीवास्तव को ललितपुर डायट, अश्वनी प्रताप सिंह को जालौन डायट और विश्वदीपक त्रिपाठी को चंदौली डायट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा विमलेश कुमार त्रिपाठी (मिर्जापुर), सुश्री रिद्धि पाण्डेय (सोनभद्र), सुनील कुमार (बलिया), कुलदीप नारायण सिंह (देवरिया), दीनानाथ (कुशीनगर), नरेन्द्र सिंह (संतकबीर नगर), आशीष चौहान (शाहजहांपुर) और नन्दित कुमार (झांसी) को भी उनके संबंधित डायट संस्थानों में प्रधानाचार्य पद का प्रभार मिला है।एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया है विशेष अतिरिक्त प्रभारमुख्य 17 जिलों के अलावा प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए तीन अन्य महत्वपूर्ण जनपदों में अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की व्यवस्था की गई है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार आराध्य उपाध्याय, जो कि डायट अलीगढ़ में वरिष्ठ प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं, उन्हें डायट एटा के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अतुल कुमार सिंह, जो वर्तमान में इटावा के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के पद पर सेवा दे रहे हैं, उन्हें डायट इटावा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त अतुल कुमार तिवारी, जो डायट मऊ में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर हैं, उन्हें डायट मऊ के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के लिए तमाम आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है। इन नियुक्तियों से यह तय हो गया है कि प्रदेश के हर जिले में भावी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का कार्य पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता रहेगा।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग की है। संघ ने शनिवार को मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के जरिए भेजा। इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर 15 सितंबर तक शासनादेश में बदलाव कर प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के महामंत्री सुनील तिवारी और अध्यक्ष वसीम अहमद ने बताया कि शिक्षामित्र पिछले 26 सालों से परिषदीय स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। वे जनगणना, बालगणना, चुनाव ड्यूटी, बोर्ड परीक्षा ड्यूटी और दूसरे राष्ट्रीय कामों को भी पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब परिषदीय स्कूलों के दूसरे अध्यापकों, विशेष शिक्षकों, संविदा और डेलीवेजेज पर काम करने वाले स्पेशल एजुकेटर्स को स्पेशल टीईटी में शामिल किया गया है, तो प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखना सही नहीं है। संघ ने 2 सितंबर 2026 को जारी शासनादेश में बदलाव की मांग की है। इसमें कहा गया है कि स्नातक और बीटीसी की योग्यता रखने वाले सेवारत शिक्षामित्रों को भी स्पेशल टीईटी परीक्षा में शामिल किया जाए। नेताओं ने फिर चेतावनी दी कि अगर 15 सितंबर तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया, तो शिक्षामित्र अपने हक के लिए आंदोलन करेंगे।
पानसेमल थाना क्षेत्र में कन्या शिक्षा परिसर में एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। इस मामले में छात्रा के परिजनों ने हंगामा कर गंभीर आरोप लगाए हैं। निष्पक्ष जांच व कार्रवाई के लिए स्वजनों ने मांग की है।
यूपी के शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव, 17 डायट में नए प्रधानाचार्य नियुक्त; 3 को मिला अतिरिक्त प्रभार
उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्यालयी शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने के लिए 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य का प्रभार सौंपा है। इसके अतिरिक्त, एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं/अधिकारियों को प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
शिक्षक दिवस पर शनिवार शाम सर्व ब्राह्मण समाज संगठन ने जिले के शिक्षकों का सम्मान किया। रेवा गार्डन में ‘श्रीपरशुराम शिक्षा रत्न सम्मान समारोह’ हुआ। यह कार्यक्रम संगठन के संरक्षक रहे स्व. मनोहरलाल शर्मा की स्मृति में रखा गया था। समारोह में जिलेभर के रिटायर्ड, सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षक शामिल हुए। उन्हें श्रीफल, स्मृति चिह्न और सम्मान-पत्र दिए गए। पंडितों, ज्योतिषाचार्यों और आचार्यों का भी सम्मान किया गया। मंत्रोच्चार के बीच युवा संगठन के सदस्यों ने शिक्षकों पर फूल बरसाकर उनका सम्मान किया। पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रभु शंकर शुक्ल ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देते हैं। उनके समर्पण से नई पीढ़ी को सही राह मिलती है। जिलाध्यक्ष सुनील तिवारी ने शिक्षकों की तुलना दीपक, पारस और चंदन से की। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान, मेहनत और संस्कारों से विद्यार्थियों को निखारते हैं। डिजिटल दौर में भी शिक्षक की भूमिका अहम है। कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद शुक्ला, पंडित प्रह्लाद अग्निहोत्री, आचार्य ओमप्रकाश पुरोहित, पंडित राजेश शर्मा और भाजपा मंडल अध्यक्ष नितेश बादर मौजूद रहे। युवा और महिला संगठन के पदाधिकारियों ने भी शिक्षकों का सम्मान किया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ संस्कार, अनुशासन, मानवीय मूल्य और जिम्मेदारी भी सिखाते हैं।
शिक्षक दिवस पर सुकमा में प्रशासन का संवेदनशील चेहरा देखने को मिला। जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले 4 शिक्षादूतों के परिजनों को सम्मानित किया गया। शबरी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर अमित कुमार, एसपी मयंक गुर्जर और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर ने परिजनों को शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मान दिया। सम्मानित शिक्षादूतों में प्राथमिक शाला मंडीमरका के स्वर्गीय बारसे लक्ष्मण, प्राथमिक शाला बैनपल्ली के स्वर्गीय मुचाकी लिंगा, प्राथमिक शाला गोंदपल्ली के स्वर्गीय डोडी अर्जुन और प्राथमिक शाला ताड़मेटला के स्वर्गीय कवासी सुक्का शामिल हैं। प्रशासन के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2025 के बीच नक्सल हिंसा में इनकी हत्या कर दी गई थी। सम्मान के बाद परिजनों के साथ बैठकर किया भोजन कार्यक्रम के बाद प्रशासन ने सम्मान को औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा। कलेक्टर, एसपी और जिला पंचायत CEO ने सर्किट हाउस में इन शिक्षादूतों के परिजनों के साथ बैठकर भोजन किया। इस दौरान अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी पारिवारिक परिस्थितियों, जरूरतों और समस्याओं की जानकारी ली। कलेक्टर, एसपी और CEO ने स्वर्गीय बारसे लक्ष्मण की पत्नी शांति कोरसा, स्वर्गीय मुचाकी लिंगा के भाई मुचाकी महेश, स्वर्गीय डोडी अर्जुन की मां डोडी जोगी और स्वर्गीय कवासी सुक्का की पत्नी कवासी जोगी से चर्चा की। जरूरत के अनुसार मदद का भरोसा अधिकारियों ने परिजनों की बातें सुनने के बाद उनकी जरूरतों के अनुसार हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। यह पहल उन परिवारों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाती है, जिन्होंने नक्सल हिंसा में अपने करीबी को खोया है। दुर्गम इलाकों में शिक्षा की जिम्मेदारी निभाने वालों को किया याद शिक्षा के लिए दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले इन शिक्षादूतों के योगदान और साहस को शिक्षक दिवस पर याद किया गया। सम्मान के साथ अधिकारियों का परिजनों के बीच बैठकर भोजन करना और उनकी समस्याएं सुनना कार्यक्रम का खास पहलू रहा।
योगी सरकार उत्तर प्रदेश के गांवों को आधुनिक डिजिटल सुविधाओं और सामाजिक केंद्रों से जोड़कर 'स्मार्ट' बना रही है। इसके तहत गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी और बहुउद्देशीय पंचायत भवन बनाए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को शिक्षा और ग्रामीणों को सामाजिक आयोजन के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
शिक्षा में राजनीति का कोई स्थान नहीं : सीएम योगी
CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कि शिक्षा में राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। राजनीति के चश्मे से देखने वालों को 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया आमूलचूल परिवर्तन दिखाई नहीं देगा। उन्होंने प्रदेशभर के शिक्षकों का ...
अमृतसर: गरीब परिवार के बच्चों की शिक्षा पर जोर, शिक्षकों ने कहा- देश की मजबूत नींव तैयार होगी
अमृतसर, 5 सितंबर . शिक्षक दिवस के अवसर पर अमृतसर के निष्काम सेवा पब्लिक स्कूल के शिक्षकों ने शिक्षा के महत्व और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए. स्कूल की अध्यापिका संतोष और शिक्षक सरदार सिंह ने कहा कि देश की नई पीढ़ी को बेहतर बनाने ... Read more
गया शहर के हरिदास सेमिनरी ऑडिटोरियम में शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक संवाद और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों की भूमिका को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। समारोह में शिक्षा जगत से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि के तौर पर अतरी विधायक रोमित कुमार और बिहार विधान परिषद गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य एमएलसी जीवन कुमार मौजूद रहे। इसके अलावा जगजीवन कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सत्येंद्र प्रजापति, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रोफेसर दिलीप कुमार केशरी, कुलसचिव डॉ. प्रोफेसर विनोद कुमार मंगलम, कोंच विधायक अजय दांगी, जिला शिक्षा पदाधिकारी कृष्ण मुरारी गुप्ता, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी माध्यमिक शिक्षा आनंद कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना सुमित कुमार सौरभ, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एसएसए एवं प्राथमिक शिक्षा नित्यम कुमार गौरव और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी योजना गौरव राज सहित अन्य अधिकारी व गणमान्य लोग उपस्थित रहे। एमएलसी जीवन कुमार ने शिक्षकों को किया सम्मानित शिक्षक दिवस के मौके पर एमएलसी जीवन कुमार ने मौजूद शिक्षकों को शॉल देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का योगदान समाज और राष्ट्र निर्माण की बुनियाद है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बिना विकसित बिहार की कल्पना नहीं की जा सकती। कार्यक्रम में शिक्षकों से बातचीत करते हुए उनकी भूमिका, चुनौतियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरतों पर चर्चा की गई। वित्त रहित शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा को बताया अहम कदम समारोह में बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हुए जरूरी बदलावों के बारे में भी जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था से जुड़े शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा को बड़ा कदम बताया गया। वक्ताओं के अनुसार इस मांग को लेकर करीब 40 वर्षों से संघर्ष चला था। नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दिए जाने को भी शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव बताया गया। वक्ताओं के अनुसार इससे शिक्षकों की आर्थिक परेशानियां कम हुई हैं और वेतन भुगतान की व्यवस्था में सुधार आया है। हालांकि कुछ शिक्षक अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं, जिनके लिए समाधान तलाशने की बात कही गई। स्थानांतरण नीति से शिक्षकों को मिली राहत कार्यक्रम में शिक्षकों की लंबे समय से लंबित स्थानांतरण नीति लागू किए जाने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इसके माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षक अपने गृह जिले और प्रखंड में वापस लौट सके हैं। वर्षों से घर से दूर रहकर सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए इसे बड़ी राहत बताया गया। इसके साथ ही प्राचार्यों और अतिथि शिक्षकों को स्थानांतरण नीति में शामिल करने, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा नियमों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अगले तीन साल में शिक्षा की गुणवत्ता पर रहेगा फोकस कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र के लिए आने वाले तीन वर्षों की प्राथमिकताओं पर विशेष जोर दिया गया। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मॉडल स्कूलों का विकास और प्रखंड स्तर पर कॉलेजों का विस्तार प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि प्रखंड स्तर पर उच्च शिक्षा के संस्थानों का विस्तार होने से विशेष रूप से छात्राओं को फायदा होगा। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए 50 से 80 किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी कम होगी। बेहतर कार्य वातावरण और सुविधाएं देने पर जोर समारोह में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षकों को सम्मान, बेहतर कार्य वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी जरूरी है। वक्ताओं ने बिहार को देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बेहतर मॉडल बनाने के लक्ष्य के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। समारोह ने शिक्षकों में नई ऊर्जा और जिम्मेदारी का संदेश दिया।
शेखपुरा में शिक्षक दिवस पर एक सम्मान समारोह हुआ। इसमें 'प्रोजेक्ट स्वाभिमान' के तहत 12 शिक्षकों और 6 शिक्षा सेवकों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए दिया गया। यह कार्यक्रम शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर के मंथन सभागार में हुआ। एडीएम लखींद्र पासवान ने सभी सम्मानित लोगों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र दिए। एडीएम लखींद्र पासवान ने कहा कि ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना बहुत मुश्किल काम है। उन्होंने बताया कि 'प्रोजेक्ट स्वाभिमान' के जरिए ये शिक्षक और शिक्षा सेवक इन बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजाला फैला रहे हैं। वे सही मायनों में समाज सुधारक की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी कर्मचारियों के समर्पण और लगन की तारीफ की। जिन शिक्षकों और शिक्षा सेवकों को सम्मानित किया गया, उनमें विमल भारती, गुड़िया खातून और उदय मांझी मुख्य रूप से शामिल थे। इनके अलावा दूसरे शिक्षकों और शिक्षा सेवकों को भी बच्चों की नियमित उपस्थिति और अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया गया। इस कार्यक्रम में जिले के बड़े प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि और कई खास लोग भी शामिल थे।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने शनिवार को नारनौल में आयोजित ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सम्मेलन में प्रदेश सरकार पर शिक्षा और खेल नीति को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नायब सैनी सरकार दोनों ही क्षेत्रों में पूरी तरह विफल साबित हुई है। सम्मेलन में उन्होंने सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों के हजारों रिक्त पदों और खिलाड़ियों के साथ हो रहे कथित अन्याय का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सम्मेलन का आयोजन नारनौल ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मनपाल यादव की ओर से किया गया, जबकि अध्यक्षता जिला कांग्रेस अध्यक्ष सत्यवीर झुकिया ने की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कॉलेजों में शिक्षकों के पद रिक्त राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) से सामने आया है कि प्रदेश के सरकारी डिग्री कॉलेजों में 7,986 स्वीकृत शिक्षण पदों में से केवल 3,354 पदों पर ही नियमित नियुक्तियां हैं, जबकि 4,632 पद खाली पड़े हैं। इन रिक्तियों के कारण शिक्षण व्यवस्था अतिथि और एक्सटेंशन लेक्चररों के भरोसे चल रही है। प्राचार्यों के पद भी पड़े खाली उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के कार्यभार के अनुसार प्रदेश में 8,572 शिक्षकों की आवश्यकता है। अंग्रेजी, भूगोल, वाणिज्य, गणित और रसायन विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों में सैकड़ों पद रिक्त हैं, जबकि पर्यावरण विषय के सभी 22 पद खाली हैं। एडिड कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों और प्राचार्यों के पद रिक्त हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें रिक्त पदों को निर्धारित समय सीमा में भरने और उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को प्रस्तावित है। खिलाड़ियों के हितों की अनदेखी राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों के हितों की भी अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एचसीएस और एचपीएस में खिलाड़ियों को नियुक्ति का लाभ दिलाने के मामले में सरकार को बार-बार हाईकोर्ट में हार का सामना करना पड़ा, इसके बावजूद सरकार ने भविष्य में खिलाड़ियों को यह लाभ नहीं देने का नीतिगत फैसला कर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी तथा सरकार से रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां और खिलाड़ियों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने की मांग करती है। इस मौके पर महिला जिला अध्यक्ष डा. राजवति यादव भी मौजूद रही।
शिक्षक समाज के मार्गदर्शक, इनके सम्मान से बढ़ता है शिक्षा का गौरव : विद्यार्थी परिषद
मधुबनी — (श्रवण प्रधान) शिक्षक दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मधुबनी की ओर से शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह […] The post शिक्षक समाज के मार्गदर्शक, इनके सम्मान से बढ़ता है शिक्षा का गौरव : विद्यार्थी परिषद first appeared on नवसंचार समाचार .कॉम .
करौली के जिला मुख्यालय स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले उच्च माध्यमिक स्कूल में शनिवार को शिक्षक दिवस पर एक कार्यक्रम हुआ। इसमें महान शिक्षाविद् और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी गई। उनके शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद किया गया। संस्था ने विद्यालय के सभी शिक्षकों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था निदेशक प्रेमसिंह माली, संस्था प्रधान धर्मसिंह, व्याख्याताओं और शिक्षकों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर फूलमाला चढ़ाकर की। इस दौरान शिक्षकों ने डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा के प्रति समर्पण और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में उनके योगदान को याद किया। संस्था निदेशक प्रेमसिंह माली ने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने के साथ-साथ उनमें शिक्षक के प्रति सम्मान और शिक्षा के मूल्यों की समझ पैदा करना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि शिक्षक समाज और विद्यार्थियों का भविष्य बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रेमसिंह माली ने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानें और उन्हें बेहतर शिक्षा व सही मार्गदर्शन दें। उन्होंने शिक्षक की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में संस्था ने सभी शिक्षकों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया। सम्मान पाकर शिक्षकों ने खुशी जताई और विद्यार्थियों के पढ़ाई व पूरे विकास के लिए लगातार कोशिश करने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में संस्था प्रधान धर्मसिंह, व्याख्याता राधामोहन सिंघल, माहिर खान, सीमा, रामकुमार, नरेश, हेमेंद्र, आमिर, जनक सिंह और शिवकुमार समेत विद्यालय का पूरा स्टाफ मौजूद था।
शिक्षकों के समर्थन में नीलम पार्क पहुंचे जीतू पटवारी, शिक्षक अभ्यर्थियों से संवाद किया और मांगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखने का भरोसा दिया।
आज जब पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा था उस समय गुरदासपुर के मेरिटोरियस स्कूल के शिक्षकों ने पंजाब सरकार का पुतला फूंककर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षक मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। शिक्षकों ने बताया कि वे पिछले 12 सालों से अस्थायी नौकरी कर रहे हैं। पंजाब के मेरिटोरियस स्कूलों के ये शिक्षक बेहतरीन नतीजे देते हैं, लेकिन उनकी सेवाएं नियमित करने की मांग पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। शिक्षक संदीप सैनी और दविंदर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा क्रांति के दावे तो करती है, लेकिन उन्हें शिक्षा विभाग में नियमित करने की बजाय सिर्फ टालमटोल कर रही है। शिक्षा मंत्री ने दिया था आश्वासन उन्होंने यह भी बताया कि सरकार बनने के बाद शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने शिक्षकों को 100 दिनों के अंदर नियमित करने का भरोसा दिया था। हालांकि, अब साढ़े चार साल बीत चुके हैं और उनकी मांग पूरी नहीं हुई है। शिक्षक दिवस को 'काला दिवस' के रूप में मनाया मेरिटोरियस स्कूलों के शिक्षक आज शिक्षक दिवस को 'काला दिवस' के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने पंजाब सरकार का पुतला फूंका और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार से जल्द से जल्द अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की।
हरियाणा राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष मीना परमार शनिवार को हांसी पहुंचीं। यहां उन्होंने हांसी प्राइवेट स्कूल संघ द्वारा आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले 96 स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षा से जुड़ी हस्तियों को सम्मानित किया गया। मीना परमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सबसे ऊपर है। वर्तमान समय में और ज्यादा बढ़ी शिक्षकों की जिम्मेदारी : मीना उन्होंने बताया कि आज सोशल मीडिया, नशे और दूसरी सामाजिक चुनौतियों के समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। शिक्षकों को चाहिए कि वे छात्रों को शिक्षा के साथ संस्कार, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी भी सिखाएं। परमार ने छात्रों से शिक्षकों का सम्मान करने और उनकी बातों को जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपना लक्ष्य तय करें और मेहनत व अनुशासन से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि युवा सिर्फ नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान मीना परमार ने युवाओं को नशे से दूर रहने और नई तकनीक के हिसाब से अपने हुनर को बढ़ाने का संदेश भी दिया। समारोह में छात्रों ने गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षक के महत्व पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए, जिससे सभी प्रभावित हुए। इस मौके पर सीडीएलयू के रजिस्ट्रार सुनील शर्मा, हांसी प्राइवेट स्कूल संघ के प्रधान रविंद्र अत्री के साथ कई शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, शिक्षक, छात्र, अभिभावक और शिक्षा से जुड़े कई खास लोग मौजूद थे।
Teachers' Day in India: Why did Justice Markandey Katju raise serious questions about the education system and teachers?
कन्नौज के माध्यमिक और प्राइमरी स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे टीचरों के साथ ही इस बार शिक्षामित्र और अनुदेशक का भी सम्मान किया गया। ये सम्मान उन्हें माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर जीआईसी उमर्दा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया। सम्मान पाकर शिक्षामित्र ने खुशी का इजहार किया। टीचर्स-डे पर शनिवार दोपहर उमर्दा स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 11 टीचर माध्यमिक के और 3 टीचर बेसिक शिक्षा विभाग के शामिल हैं। इसके अलावा कन्नौज के प्राथमिक विद्यालय युसुफपुर भगवान की शिक्षामित्र अनीता देवी, उच्चतर प्राथमिक विद्यालय जसौली के अनुदेशक शैलेन्द्र कुमार राणा और हसेरन के विशेष शिक्षक संजीव कुमार को भी सम्मानित किया गया। उन्हें ये सम्मान विभाग की ओर से पहली बार दिया गया। शिक्षामित्र अनीता देवी ने सम्मान पाकर खुशी का इजहार किया। हालांकि यहां मुख्य अतिथि के रूप में ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश राजपूत और डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री को पहुंचना था, लेकिन वह नहीं पहुंचे। ऐसे में डीआईओएस पप्पू सरोज ने शिक्षकों को सम्मानित किया। इन शिक्षकों का हुआ सम्मान- राजकीय हाईस्कूल रामखेड़ा के प्रधानाध्यापक हर्ष दीपांकर तिवारी, भारतीय शिक्षा सदन इंटर कॉलेज सिकंदरपुर के प्रवक्ता डॉ. केके झा, पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कालेज फतेहपुर जसोदा के प्रवक्ता सस्मित कुमार द्विवेदी, राजकीय इंटर कॉलेज उमर्दा की सहायक अध्यापक मंजू वर्मा, गोमती देवी इंटर कॉलेज की सहायक अध्यापक स्नेहलता, राजकीय हाईस्कूल गुगरापुर सहायक अध्यापक रश्मि राठौर, राजकीय अभिनव विद्यालय गंगधरापुर के अध्यापक देवऋषि मिश्रा, पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कालेज बिरौली के व्यायाम शिक्षक कोषांक यादव, पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कालेज फतेहपुर जसोदा के व्यायाम शिक्षक आकाश गुप्ता, राजकीय इंटर कॉलेज उमर्दा के सहायक अध्यापक देवेश गुप्ता, श्याम लाल खंडेलवाल इंटर कॉलेज विशुनगढ़ के अध्यापक अनुज कुमार द्विवेदी शामिल हैं। इसके अलावा उच्चतर प्राथमिक विद्यालय हैबतपुर कटरा की अध्यापक स्नेहलता द्विवेदी, कम्पोजिट विद्यालय फतेहपुर जसोदा के सहायक अध्यापक पंकज त्रिवेदी और प्राथमिक विद्यालय कल्याणपुर की प्रधानाध्यापक पूजा पांडेय को भी सम्मानित किया गया।
शनिवार को कांग्रेस पार्टी द्वारा नारनौल में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की...
धौलपुर में शिक्षक दिवस पर चकोली शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास समिति ने एक सम्मान समारोह किया। यह कार्यक्रम शनिवार को श्याम कॉम्पलेक्स में हुआ। इसमें 80 प्रतिशत या उससे ज्यादा नंबर लाने वाले 36 होनहार छात्रों को छात्रवृत्ति और सम्मान दिया गया। साथ ही शिक्षा, समाजसेवा और खेल के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले खास लोगों को भी सम्मानित किया गया। राजकीय महाविद्यालय धौलपुर के प्रिंसिपल डॉ. गिर्राज सिंह मीणा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज का आइना होता है। शिक्षक अपने व्यवहार और संस्कारों से आने वाली पीढ़ी के साथ पूरे समाज की दिशा तय करते हैं। समाज बनाने में शिक्षक की भूमिका बहुत जरूरी है। 'स्कॉलरशिप देकर हौसला बढ़ाना है अच्छी पहल'पूर्व वाइस चांसलर डॉ. मनरूप सिंह मीणा ने समिति के काम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद और होनहार छात्रों को छात्रवृत्ति देकर उनका हौसला बढ़ाना एक बढ़िया पहल है। डॉ. ए.के. बेरी ने कहा कि बदलते समाज में शिक्षकों की जिम्मेदारी ज्यादा हो गई है। छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों की शिक्षा देना भी जरूरी है। समिति के कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि भविष्य में और ज्यादा छात्रों को छात्रवृत्ति देने की योजना है। ताकि पैसे की कमी के कारण किसी भी होनहार छात्र की पढ़ाई पर असर न पड़े। समारोह में पूर्व उप प्राचार्य प्रोफेसर अनिल कुमार बेरी, सेवानिवृत्त शिक्षक विशंभर दयाल शर्मा और जिला फुटबॉल संघ के अध्यक्ष गुरमीत मान को शिक्षा एवं खेल क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों में निशा कुमारी, लवी, मनजीत सिंह जादौन, उपासना, कीर्ति चौहान, पूजा, मनोज कुमार, कंचन, छवि सोनी, आशु, शिवानी, खुशबू परमार, रक्षा सैन, मधु कुमारी, राखी प्रजापति, पवन, मधु, सौरभ राजपूत, जानवी मुद्गल, तरंग, राखी, साक्षी, अनु, प्राची, सलोनी, सुखदेवी, अलीशा, नीलम, विष्णु, स्नेहा, वर्षा, खुशी पाराशर, सुधा कुमारी, वैष्णवी और अनन्या शर्मा शामिल रहे।

