दरभंगा में भाकपा माले मिथिला जोन की बैठक रविवार को लहेरियासराय स्थित पार्टी के जिला कार्यालय में हुई। 20 अगस्त को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली छात्र-युवा संसद की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। पार्टी नेताओं ने शिक्षा, रोजगार, लोकतांत्रिक अधिकारों और जनसरोकारों के मुद्दों को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाने और छात्र-युवा संसद को बड़ी भागीदारी के साथ सफल बनाने का आह्वान किया। इसके बाद दिवंगत साथियों की स्मृति में 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बैठक में खेग्रामस एवं किसान महासभा के सदस्यता अभियान की समीक्षा की गई। साथ ही पार्टी संगठन को मजबूत करने, कमेटियों और शाखाओं के विस्तार, पार्टी पत्रिका ‘लोकयुद्ध’ की वार्षिक सदस्यता बढ़ाने और फंड संग्रह अभियान को लेकर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता दरभंगा जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, मधुबनी जिला सचिव ध्रुव नारायण कर्ण एवं समस्तीपुर जिला सचिव उमेश कुमार ने संयुक्त रूप से की, जबकि मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा ने पर्यवेक्षण किया। 'सरकार का रवैया गरीब विरोधी है' मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा ने कहा कि छात्र-युवाओं के आंदोलन के बाद दलित-गरीबों का राज्यव्यापी अनशन-सत्याग्रह भी संपन्न हुआ है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर राज के खिलाफ पीपी एक्ट 1947 के तहत गरीबों के वास-आवास का सवाल महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। आंदोलन के दबाव में सरकार ने बासगीत पर्चा देने की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन सरकार का रवैया गरीब विरोधी है। डेढ़ डिसमिल जमीन में गरीब परिवार अपना घर बनाने के साथ मवेशियों को कहां रखेंगे। सरकार 5 डिसमिल जमीन देने के वादे से पीछे हट रही है। उन्होंने कहा कि हर भूमिहीन परिवार को जमीन और पहले से सरकारी जमीन पर बसे परिवारों को बासगीत पर्चा दिलाने के लिए निर्णायक संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने मिथिला में सूखे की स्थिति और पेयजल संकट का मुद्दा उठाते हुए उत्तर बिहार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने, पीने के पानी की व्यवस्था करने की मांग की। 'दलित-वंचित समुदायों पर बढ़ते हमलों की भी निंदा की' बैठक में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और रोजगार के सवाल पर चल रहे आंदोलनों के प्रति एकजुटता जताई गई। संगठन ने सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन की व्यवस्था बेहतर बनाने को भी प्रमुख मुद्दा बनाने का निर्णय लिया। साथ ही 20 अगस्त को मिथिला विश्वविद्यालय में होने वाली छात्र-युवा संसद को सफल बनाने का आह्वान किया गया। बैठक में दलित-वंचित समुदायों पर बढ़ते हमलों की भी निंदा की गई। बैठक में बंदना सिंह, गंगा मंडल, सत्यनारायण पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, श्याम पंडित, विशंभर कामत, ललन कुमार, दिनेश कुमार, रंजीत राम, ललन पासवान, विनोद कुमार सिंह, अमित कुमार, रौशन कुमार, अभिषेक कुमार, शनिश्चरी देवी, लोकेश राज सहित दरभंगा, मधुबनी एवं समस्तीपुर जिले के कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
शिक्षा के लिए केंद्र सरकार का बड़ा संबल: नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर खुला आवेदनों का द्वार
देशभर के मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा और स्कूली पढ़ाई को बिना किसी वित्तीय रुकावट के जारी रखने का शानदार अवसर सामने आया है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित एकीकृत प्लेटफॉर्म 'नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल' (National Scholarship Portal - NSP) पर शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, यूजीसी (UGC), एआईसीटीई (AICTE) और राज्य सरकारों की दर्जनों छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।कक्षा 9वीं और 10वीं के प्री-मैट्रिक विद्यार्थियों से लेकर 11वीं-12वीं, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), मेडिकल, इंजीनियरिंग और पीएचडी स्तर के शोधार्थियों तक के लिए स्कॉलरशिप के दरवाजे खुले हैं। पोर्टल पर आवेदन की अंतिम तिथि अधिकांश पोस्ट-मैट्रिक और उच्च शिक्षा योजनाओं के लिए 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष आवेदन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सरल और फर्जीवाड़े से मुक्त बनाने के लिए बायोमेट्रिक व फेस-ऑथेंटिकेशन आधारित 'वन-टाइम रजिस्ट्रेशन' (OTR) प्रणाली को अनिवार्य कर दिया है।31 अक्टूबर तक का समय: प्रमुख तिथियां और वेरिफिकेशन का टाइमलाइनछात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को पोर्टल पर निर्धारित समय सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि समय सीमा समाप्त होने के बाद पोर्टल स्वचालित रूप से बंद हो जाता है:छात्रों द्वारा ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026 (पोस्ट-मैट्रिक, कॉलेज/यूनिवर्सिटी और टॉप क्लास स्कीम्स के लिए)।दोषपूर्ण आवेदनों (Defective Applications) के सुधार की अंतिम तिथि: 15 नवंबर 2026।शिक्षण संस्थान स्तर पर सत्यापन (Institute Verification): 15 नवंबर 2026 तक।जिला/राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी सत्यापन (DNO/SNO/L2 Verification): 30 नवंबर 2026 तक।OTR (One Time Registration) हुआ अनिवार्य: फेस-ऑथेंटिकेशन से बनेगी 14 अंकों की परमानेंट आईडीNSP पोर्टल पर स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने से पहले प्रत्येक विद्यार्थी के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करना अनिवार्य है। यह एक 14-अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर होता है, जो छात्र के पूरे शैक्षणिक जीवनकाल (Academic Career) के लिए मान्य रहता है।ओटीआर रजिस्ट्रेशन की मुख्य प्रक्रिया:आधार/ईआईडी सत्यापन: विद्यार्थी अपने आधार नंबर या आधार एनरोलमेंट आईडी (EID) के जरिए ओटीआर पोर्टल पर पंजीकरण शुरू करेंगे। यदि छात्र नाबालिग (Minor) है और उसके पास आधार नहीं है, तो अभिभावक के आधार का इस्तेमाल किया जा सकता है।NSP OTR और Face RD ऐप: ओटीआर जनरेट करने के लिए छात्रों को गूगल प्ले स्टोर से 'NSP OTR App' और यूआईडीएआई का 'Aadhaar Face RD App' डाउनलोड करना होगा।लाइव फेस-ऑथेंटिकेशन: मोबाइल कैमरे के सामने लाइव फेस ऑथेंटिकेशन पूरा होते ही सिस्टम द्वारा एक परमानेंट OTR नंबर और पासवर्ड छात्र के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाता है।सिंगल आईडी से सभी लाभ: एक बार ओटीआर बनने के बाद छात्र हर साल बिना बार-बार बेसिक डिटेल भरे उसी आईडी से सीधे छात्रवृत्ति के लिए अप्लाई या रिन्यू कर सकते हैं।मंत्रालयों और प्रमुख स्कॉलरशिप योजनाओं की लिस्ट: स्कूल से लेकर रिसर्च तक अवसरनेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर भारत सरकार के एक दर्जन से अधिक मंत्रालयों की सैकड़ों योजनाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं:उच्च शिक्षा विभाग (Ministry of Education):PM-USP (केंद्रीय क्षेत्र की छात्रवृत्ति योजना - CSSS): 12वीं कक्षा में संबंधित बोर्ड के टॉप 20th परसेंटाइल में आने वाले मेधावी कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों के लिए ₹12,000 से ₹20,000 सालाना की सहायता।पीएम-यूएसपी विशेष छात्रवृत्ति योजना (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के छात्रों के लिए)।सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice):पीएम यशस्वी (PM YASASVI) योजना: ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC) और डीएनटी (DNT) श्रेणी के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और टॉप-क्लास स्कूल शिक्षा छात्रवृत्ति।अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम।जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs):एसटी (ST) वर्ग के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति और फेलोशिप (National Fellowship & Scholarship)।दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD):40% या अधिक दिव्यांगता वाले छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और टॉप क्लास एजुकेशन स्कॉलरशिप।अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE):प्रगति स्कॉलरशिप (Pragati Scheme): तकनीकी डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत मेधावी छात्राओं के लिए प्रति वर्ष ₹50,000 की वित्तीय सहायता।सक्षम एवं स्वनाथ स्कॉलरशिप (Saksham & Swanath): दिव्यांग छात्रों और अनाथ/शहीद परिवारों के बच्चों के लिए विशेष तकनीकी शिक्षा सहायता।गृह मंत्रालय व रेल मंत्रालय:सीएपीएफ (CAPF), असम राइफल्स, रेलवे और नक्सल/आतंकी हमलों में शहीद पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए 'प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप स्कीम' (PMSS)।पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria): कौन-कौन से छात्र कर सकते हैं आवेदन?यद्यपि प्रत्येक योजना के विस्तृत पात्रता नियम अलग-अलग हैं, लेकिन अधिकांश केंद्रीय योजनाओं के लिए बुनियादी शर्तें इस प्रकार हैं:नागरिकता व शैक्षणिक स्थिति: आवेदक भारत का मूल नागरिक होना चाहिए और यूजीसी/एआईसीटीई/सीबीएसई या राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में नियमित (Regular) रूप से नामांकित होना चाहिए।शैक्षणिक योग्यता: पिछली अंतिम उत्तीर्ण परीक्षा (जैसे 10वीं, 12वीं या ग्रेजुएशन) में न्यूनतम 50% से 60% अंक (योजना के अनुसार) होना आवश्यक है।पारिवारिक आय सीमा (Annual Income):अधिकांश पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट-कम-मीन्स योजनाओं के लिए माता-पिता की कुल वार्षिक आय ₹2.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।पीएम-यूएसपी (CSSS) और टॉप क्लास कॉलेज योजनाओं के लिए पारिवारिक आय की ऊपरी सीमा ₹4.50 लाख से ₹8.00 लाख प्रति वर्ष तक हो सकती है।सिंगल मेरिट स्कीम नियम: नए नियमों (AY 2026-27) के तहत एक छात्र एक समय में केवल एक 'मेरिट-बेस्ड' स्कॉलरशिप और आवश्यकतानुसार एक या अधिक 'वेलफेयर-बेस्ड' इंसेंटिव का लाभ ले सकता है।आधार सीडिंग और NPCI मैपिंग: बैंक खाते में सीधे DBT से आएगी छात्रवृत्तिस्कॉलरशिप का पैसा सुरक्षित और बिना किसी बिचौलिए के सीधे छात्र के बैंक खाते में भेजने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम (APBS) का उपयोग किया जाता है।मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि छात्र का बैंक खाता केवल आधार कार्ड से लिंक (Link) होना ही काफी नहीं है, बल्कि वह भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के सर्वर पर 'एनपीसीआई आधार सीडेड' (NPCI Aadhaar Seeded / Mapped) होना अनिवार्य है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने छात्रों की सुविधा के लिए 'भारत आधार सीडिंग इनेबलर' (BASE) प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जिसके जरिए छात्र घर बैठे अपने बैंक खाते की सीडिंग स्थिति जांच सकते हैं या नजदीकी बैंक शाखा व कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर इसे एक्टिवेट करवा सकते हैं। खाता माइनर (संयुक्त) होने के बजाय छात्र के अपने नाम का सक्रिय (Active) एकल बचत खाता होना चाहिए।ऑनलाइन आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों की चेकलिस्टफॉर्म भरने से पहले विद्यार्थी निम्नलिखित दस्तावेजों की स्पष्ट डिजिटल प्रतियां (स्कैन कॉपी) तैयार रखें:छात्र का आधार कार्ड या आधार एनरोलमेंट स्लिप (EID)।आधार से लिंक एक्टिव मोबाइल नंबर (ओटीपी सत्यापन के लिए)।पासपोर्ट साइज रंगीन फोटोग्राफ।पिछली कक्षा की अंकतालिका (Marksheet)।सक्षम राजस्व अधिकारी (तहसीलदार/एसडीएम) द्वारा जारी वैध आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)।जाति प्रमाण पत्र (SC/ST/OBC/EBC - यदि लागू हो)।मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate)।वर्तमान कॉलेज/स्कूल की फीस रसीद और बोनाफाइड छात्र प्रमाण पत्र (Bonafide Certificate)।दिव्यांगता प्रमाण पत्र (Disability Certificate - यदि लागू हो)।बैंक पासबुक की प्रति (खाता संख्या और IFSC कोड स्पष्ट दिखने चाहिए)।NSP Scholarship 2026 के लिए स्टेप-बाय-स्टेप कैसे करें आवेदन?छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन और निःशुल्क है:स्टेप 1 (पोर्टल पर जाएं): सबसे पहले नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट scholarships.gov.in पर जाएं।स्टेप 2 (OTR जनरेट करें): होमपेज पर 'Apply for One Time Registration (OTR)' पर क्लिक करें। मोबाइल नंबर डालें, ओटीपी सत्यापित करें और आधार ई-केवाईसी व फेस आरडी ऐप से फेस-ऑथेंटिकेशन पूरा करके अपना 14 अंकों का OTR नंबर प्राप्त करें।स्टेप 3 (लॉगिन करें): OTR आईडी और पासवर्ड की मदद से स्टूडेंट डैशबोर्ड में लॉगिन करें।स्टेप 4 (योजना का चयन): अपनी शैक्षणिक योग्यता, वर्ग और आय के आधार पर पोर्टल पर प्रदर्शित 'Eligible Schemes' की सूची में से संबंधित स्कॉलरशिप स्कीम का चयन करें।स्टेप 5 (विवरण भरें व दस्तावेज अपलोड करें): शैक्षणिक रिकॉर्ड, कॉलेज रोल नंबर, फीस विवरण भरें और मांगे गए आवश्यक प्रमाण पत्रों को अपलोड करें।स्टेप 6 (फाइनल सबमिट व प्रिंट): भरे हुए फॉर्म को दोबारा जांचें और 'Final Submit' करें। आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी का प्रिंटआउट निकालकर अपने संस्थान (स्कूल/कॉलेज) के स्कॉलरशिप नोडल अधिकारी के पास सत्यापन के लिए तुरंत जमा करें।आवेदन करते समय इन गलतियों से बचें: फॉर्म रिजेक्शन से बचने के टिप्सअक्सर छोटी-मोटी मानवीय भूलों के कारण छात्रों का स्कॉलरशिप फॉर्म रिजेक्ट या डिफेक्टिव हो जाता है। इससे बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतें:डेटा मिसमैच से बचें: छात्र का नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम 10वीं की मार्कशीट और आधार कार्ड में 100% एक समान (स्पेलिंग सहित) होना चाहिए।संस्थान सत्यापन सुनिश्चित करें: फॉर्म ऑनलाइन जमा करने के बाद अपने कॉलेज के नोडल अधिकारी से संपर्क करें और सुनिश्चित करें कि वे 15 नवंबर से पहले आपके आवेदन को पोर्टल पर 'Approved' मार्क कर दें।फर्जी बैंक विवरण न दें: बंद पड़े खाते या जनधन खाते की लिमिट के कारण कई बार राशि अटक जाती है। हमेशा एक्टिव सेविंग्स अकाउंट ही दर्ज करें।नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल केंद्र सरकार की एक अत्यंत कल्याणकारी पहल है जो प्रतिभा को धन के अभाव में दबने नहीं देती। इच्छुक और पात्र विद्यार्थी अंतिम दिनों की सर्वर व्यस्तता से बचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 से काफी पहले अपना OTR और ऑनलाइन आवेदन पूरा कर लें। किसी भी सहायता या प्रश्न के लिए विद्यार्थी राष्ट्रीय हेल्पलाइन 0120-6619540 या आधिकारिक ईमेल helpdesk@nsp.gov.in पर संपर्क कर सकते हैं।
जयपुर में एम. डी. चोपदार ने कहा- बड़े इरादों से ही बड़े संस्थान खड़े होते हैं। उन्होंने कहा- करीब दो साल पहले रखे गए विचार को रविवार को जयपुर में एक संस्थान के रूप में साकार किया गया है। HKZ IAS RAS Academy का रविवार को शुभारंभ संतों के सान्निध्य, शिक्षाविदों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों की मौजूदगी में हुआ। कार्यक्रम के साथ ही जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के क्षेत्र में पहल की शुरुआत हुई। वहीं वक्ताओं ने शिक्षा के महत्व और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में पीर सैय्यद गुलाम हुसैन जिलानी और कृष्ण दास महाराज, आमीन खान मौजूद रहे। 300 विद्यार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था एम. डी. चोपदार ने बताया- एकेडमी में 300 सीटों का प्लान तैयार किया गया है। इसमें 150 लड़कियों और 150 लड़कों के अलग-अलग बैच से पढ़ाई कराई जाएगी। विद्यार्थियों को देशभर के प्रसिद्ध शिक्षकों एवं प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने की व्यवस्था की गई है। एकेडमी में इन-हाउस लाइब्रेरी की सुविधा के साथ शिक्षकों के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। कार्यक्रम में पूर्व आईएएस ललित मेहरा, पूर्व आईएएस जाकिर हुसैन, एडिशनल एसपी अमजद अली खान, पूर्व आरएएस फतेह मोहम्मद खान, पूर्व आरएएस मुकर्रम शाह, प्रोफेसर महमूद अली खान आदि लोग मौजूद रहे।
कोटपूतली में किसान केसरी' के नाम से विख्यात भूतपूर्व विधायक स्वर्गीय रामकरण सिंह कसाना की 99वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। यह आयोजन श्री देवनारायण गुर्जर समाज कल्याण समिति के तत्वावधान में देवनारायण मंदिर, पुतली में हुआ। इस मौके पर सर्वसमाज के लोगों ने उनके सामाजिक योगदान, किसान हितों और राजनीतिक जागृति के प्रयासों को याद किया। किसानों के हित में किए उल्लेखनीय कार्य: रामस्वरूप कसाना पूर्व संसदीय सचिव एवं विधायक रामस्वरूप कसाना ने कहा कि रामकरण सिंह कसाना ने सामाजिक सुधार और किसानों के हितों के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। विरोधियों को भी साथ लेकर चलते थे कसाना: रामचंद्र रावत पूर्व विधायक रामचंद्र रावत ने रामकरण सिंह कसाना के राजनीतिक जीवन को याद करते हुए बताया कि वे चुनाव के बाद भी राजनीतिक विरोधियों को गले लगाकर सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। उनका व्यक्तित्व आपसी सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक था। बेटियों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत: मंजू रावत मंजू रावत ने महिला शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज की प्रगति के लिए बेटियों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। संस्कृति और विरासत से जुड़ने का आह्वान जीकैप के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान के अध्यक्ष पी.डी. गुर्जर तथा वरिष्ठ आरएएस अधिकारी महाराम गुर्जर ने नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, विरासत और सामाजिक इतिहास से जुड़कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा और संस्थागत विकास को प्राथमिकता देना आवश्यक है। ये रहे मौजूद इस जयंती समारोह में कैलाश दास, रामनिवास यादव, हंसराज कसाना, रोहिताश्व किसान नेता, दाताराम गिरदावर, रामावतार मेडिकल, रामावतार कसाना (प्रिंसिपल), मास्टर बाबूलाल कसाना, हंसराज रावत पनियाला, ओमप्रकाश जांगल, ख्यालीराम सरपंच, लालचंद कसाना डेलीगेट, जयराम कसाना पुतली, बरफा पुतली, गिरिराज मेडिकल, एडवोकेट रामसिंह, बाबूलाल कंपाउंडर, दारा पुतली, विनोद अवाना, एडवोकेट राधेश्याम, रणवीर रावत, नरेंद्र रावत, रामोतार खटाना, बुधराम कसाना, रामनिवास राहेड़ा, विजेंदर रावत, विक्रम घांघल, इंद्राज कसाना सुंदरपुरा, मंदिर प्रबंधन समिति अध्यक्ष पन्ना लाल कसाना, कमलेश छावड़ी, हर सहाय छावड़ी, राजीव कसाना, रोहिताश पंच, प्रकाश पंच, रोशन लाल कसाना, मुंशी कसाना, पायलट राजेश कसाना, जगमाल कसाना, पूरण कसाना, हवासिंह कसाना, प्रकाश कसाना, महावीर कसाना सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं सर्वसमाज के लोग उपस्थित रहे।
यमुनानगर में प्राइवेट स्कूलों पर बढ़ती फीस, किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक खर्चों का आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने मॉडल टाउन स्थित नेहरू पार्क के मुख्य गेट के सामने प्रदर्शन किया। “एक देश-एक किताब-एक समान फीस” अभियान के तहत किए गए प्रदर्शन में अभिभावकों ने शिक्षा व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, लेकिन निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और किताबों समेत अन्य खर्चों के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उनका कहना था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आर्थिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग नहीं होनी चाहिएं। फीस और किताबों के खर्च पर उठाए सवाल अभिभावकों ने कहा कि निजी स्कूलों में फीस के अलावा किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य मदों में होने वाले खर्च से परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर शिक्षा सभी बच्चों का समान अधिकार है तो आर्थिक स्थिति के आधार पर उसकी पहुंच अलग-अलग क्यों हो रही है। संजीव नंदा, संजय राघव, जय राम सैनी, अंकुश बख्शी, नीरज कुमार, सुशील बत्रा ने निजी स्कूलों की फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों में पारदर्शिता लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि किताबों के नाम पर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए और “एक देश-एक किताब-एक समान फीस” जैसी व्यवस्था पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। बोले- किसी संस्था के खिलाफ नहीं आंदोलन अभिभावकों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मांगों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने “शिक्षा अधिकार है-व्यापार नहीं”, “एक देश-एक किताब”, “एक समान फीस-हर बच्चे का अधिकार” और “गरीब हो या अमीर-शिक्षा मिले सबको समान” जैसे नारे लगाए।
गोपालगंज में भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि मनाई गई। शहर के अरार मोड़ स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद किया। इस अवसर पर बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और सदर विधायक सुभाष सिंह सहित कई छोटे-बड़े भाजपा नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने अटल जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर माल्यार्पण किया और उनके प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की। अटल जी भारतीय राजनीति के अजातशत्रु थेमाल्यार्पण के बाद शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि अटल जी भारतीय राजनीति के अजातशत्रु थे। उनकी भाषण शैली, दूरदर्शिता और विपक्ष का सम्मान करने की कला उन्हें अद्वितीय बनाती थी। उन्होंने देश में सुशासन की नींव रखी और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा परमाणु परीक्षण जैसे ऐतिहासिक फैसलों से भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। उनके विचार आज भी प्रेरणास्रोतमिथिलेश तिवारी और सुभाष सिंह सहित अन्य नेताओं ने कहा कि अटल जी के आदर्श और उनके विचार आज भी हर कार्यकर्ता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है। इस अवसर पर अरार मोड़ का पूरा परिसर 'अटल बिहारी वाजपेयी अमर रहें' के नारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने अटल जी के पदचिन्हों पर चलने और उनके सपनों के भारत को साकार करने का संकल्प लिया।
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Nainital Bank SO Recruitment: नैनीताल बैंक में बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। बैंक ने स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) के 37 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बीकानेर के शिक्षा निदेशालय में करीब 1 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी मीटिंग हॉल 7 साल से अधूरा पड़ा है। भवन का स्ट्रक्चर करीब 4 साल पहले तैयार हो चुका, लेकिन फर्नीचर तक नहीं लगाया गया। इस्तेमाल शुरू होने से पहले ही दीमक ने स्टेयर, दीवारों और टॉयलेट को नुकसान पहुंचा दिया, जबकि खिड़कियों के कांच भी टूट चुके हैं। खास बात यह है कि यह भवन निदेशालय परिसर में अधिकारियों की सीट से महज 100 मीटर दूर है, फिर भी इसे पूरा कराने की सुध नहीं ली गई। तत्कालीन विधायक गोपाल कृष्ण जोशी ने 20 लाख की मांग के बजाय 50 लाख रुपए विधायक कोटे से दिए थे। अब करीब एक करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भवन को उपयोग में लाने की जगह उसके खंडहर बनने का खतरा है। सात साल पहले शुरू हुआ काम, करीब एक करोड़ रुपए खर्चबीकानेर के शिक्षा निदेशालय परिसर में अधिकारियों की बैठकों के लिए मीटिंग हॉल बनाने का काम करीब सात साल पहले शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत तत्कालीन शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल के प्रयासों से हुई। उन्होंने तत्कालीन भाजपा विधायक गोपाल कृष्ण जोशी से विधायक कोटे से 10 से 20 लाख रुपए देने का आग्रह किया था। प्रोजेक्ट को बेहतर मानते हुए जोशी ने 20 लाख की जगह 50 लाख रुपए दिए और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बजट देने का आश्वासन भी दिया। इसके बाद डिडेल का ट्रांसफर हो गया और भवन निर्माण की जिम्मेदारी PWD को मिल गई। करीब चार साल पहले भवन का स्ट्रक्चर तैयार हो गया और अब तक करीब एक करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। आधुनिक सुविधाओं के साथ बनाया गया था हॉल हॉल का निर्माण आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया गया था। इसमें स्टेयर बनाई गई थी, ताकि पीछे बैठने वाले लोग भी मंच पर मौजूद व्यक्ति को आसानी से देख सकें। हर चेयर के आगे माइक लगाने की व्यवस्था की गई थी। टॉयलेट और अन्य कमरे भी बनाए गए हैं। तत्कालीन विधायक गोपाल कृष्ण जोशी ने 50 लाख रुपए देने के साथ हर सीट पर माइक सिस्टम लगाने के लिए भी कहा था। यानी भवन को इस तरह तैयार किया गया था कि इसमें अधिकारियों की नियमित बैठकों के साथ बड़े अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और मंत्री या मुख्यमंत्री के कार्यक्रम भी हो सकें। चार साल से स्ट्रक्चर तैयार, फर्नीचर का इंतजारभवन का स्ट्रक्चर तैयार होने के करीब चार साल बाद भी इसमें फर्नीचर तक नहीं लगाया जा सका है। मुख्य रूप से अब फर्नीचर का काम बाकी है। फर्नीचर लगने के बाद हॉल का उपयोग शुरू किया जा सकता है। लेकिन जिस जगह टेबल-कुर्सियां लगनी थीं और अधिकारियों की बैठकें होनी थीं, वहां लंबे समय से काम बंद पड़ा है। इस दौरान खिड़कियों के कांच टूट चुके हैं। स्टेयर, दीवारों और टॉयलेट में दीमक लग चुकी है। यानी जिस हॉल को बैठकों के लिए तैयार किया गया था, वह उपयोग शुरू होने से पहले ही खराब होने लगा है। निदेशालय के अपने परिसर में बना भवन, फिर भी नहीं हुआ पूरायह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि भवन शिक्षा निदेशालय के अपने परिसर में है। अधिकारियों की सीट से महज करीब 100 मीटर दूर होने के बावजूद सात साल में इसका काम पूरा नहीं हो पाया। हाल ही में रिटायर हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट करीब दो साल तक निदेशालय में रहे, लेकिन इस दौरान भी भवन को पूरा करवाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। सवाल है कि जब भवन का अधिकांश काम पूरा हो चुका था तो चार साल से फर्नीचर क्यों नहीं लगाया गया? निर्माण के दौरान और उसके बाद भवन की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? लंबे समय तक बंद सरकारी भवन के रखरखाव की जिम्मेदारी कौन लेगा? रिटायर संयुक्त निदेशक बोले- विभाग अब ध्यान नहीं दे रहारिटायर संयुक्त निदेशक रमेश हर्ष का कहना है कि यह भवन तत्कालीन निदेशक नथमल डिडेल और तत्कालीन विधायक गोपाल कृष्ण जोशी के प्रयासों से बना था। अब विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इस हॉल का उपयोग DEO और DD स्तर के अधिकारियों की मीटिंग के लिए किया जा सकता है। मंत्री या मुख्यमंत्री के बीकानेर आने पर भी यह हॉल उपयोगी साबित हो सकता है। उनका कहना है कि जिस उद्देश्य से यह भवन बनाया गया था, उसका फायदा अब तक नहीं मिल पाया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और विकास को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सवालों पर पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में नकल माफिया को बढ़ावा मिला और ...
Rajasthan Safai Karmchari Bharti: राजस्थान में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। स्वायत्त शासन विभाग ने सफाई कर्मचारी भर्ती 2026 के तहत 24,752 पदों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
(गजाल हबीबयार, ओटावा विश्वविद्यालय) ओटावा, 15 अगस्त (द कन्वरसेशन) तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में वापस लौटने के कुछ ही हफ्तों के भीतर लड़कियों के कक्षा छह से आगे की पढ़ाई करने पर रोक लगा दी थी। यह प्रतिबंध अब तक नहीं हटाया गया है। अफगानिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है, जहां लड़कियों और महिलाओं को औपचारिक रूप से माध्यमिक और उच्च शिक्षा प्राप्त करने से रोका गया है। इसके बाद के वर्षों में, अफगानिस्तान की महिलाओं को उन ज्यादातर क्षेत्रों में काम करने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया, जहां वे पहले कार्यरत थीं। लगभग 22 लाख किशोरियों को लगभग 1,800 दिनों से माध्यमिक विद्यालय जाने से रोका गया है। यूनिसेफ के 2026 के एक विश्लेषण के अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण 2030 तक अफगानिस्तान में 20,000 महिला शिक्षकों और 5,400 स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है। इन पाबंदियों की वजह से देश को पहले ही हर साल अनुमानित 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हो रहा है। सितंबर, 2025 से तालिबान बलों ने संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों समेत अफगान महिलाओं को संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों में प्रवेश करने से भी रोक दिया है। जनवरी 2026 में महिला सरकारी कर्मचारियों को 2021 से घर पर रहने के लिए मिल रहा कम किया गया वेतन भी बंद कर दिया गया। मैंने ऐसा कुछ पहले भी एक बार होते हुए देखा था। तब मैं 1996 में छोटी लड़की थी, जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था। इस दूसरी पाबंदी (2021 से लगाई गई) के बारे में जो बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है, वह यह नहीं है कि ऐसा दोबारा हुआ। बल्कि यह है कि इस बार दुनिया की विफलता जागरूकता की कमी के कारण नहीं है। हर कोई जानता है कि अफगान लड़कियों के साथ क्या हो रहा है। विफलता यह है कि इस सच्चाई को जानने के बावजूद तालिबान को इसकी कोई वास्तविक कीमत नहीं चुकानी पड़ी है। तालिबान के सत्ता में आने के कुछ ही दिनों के भीतर, अफगान महिलाएं काबुल की सड़कों पर “रोटी, काम, आजादी” के नारे लगाते हुए उतर आई थीं। तब से वे जोखिम उठाते हुए लगातार यही मांग करती आ रही हैं। अफगान महिलाओं के समूहों ने लगातार विरोध प्रदर्शन किए हैं और प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि इसके जवाब में उन्हें गिरफ्तारियों और यातनाओं का सामना करना पड़ा है। फरवरी 2026 में भी काबुल की लड़कियों ने सड़कों पर उतरकर शिक्षा के अधिकार की मांग की थी। लेकिन जहां विरोध प्रदर्शन करना बहुत खतरनाक हो गया है, वहां अफगान महिलाओं ने इसके बजाय एक शांत तरीका अपनाया है: उन्होंने घरों से संचालित भूमिगत स्कूलों का अनौपचारिक नेटवर्क बनाया है, जहां उन लड़कियों को पढ़ाया जाता है, जिनके पास अन्यथा कक्षा में पढ़ने का कोई अवसर नहीं होता। तालिबान के साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क का मुख्य माध्यम संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में चल रही दोहा प्रक्रिया है। वर्ष 2023 से तालिबान के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, जिनका उद्देश्य अंततः अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में फिर से शामिल करना है—जिसमें सामान्य राजनयिक संबंध, तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता और देश की अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तथा व्यापार में सामान्य रूप से फिर से भागीदारी शामिल है। तालिबान के आग्रह पर महिलाओं और अफगान नागरिक समाज के समूहों को मुख्य वार्ताओं से बाहर रखा गया है। इसके बजाय, वे अलग से और मुख्य वार्ताओं से इतर मुलाकात करते हैं। वर्ष 1996 में मेरी उम्र कम थी और मेरी अंतिम परीक्षाएं होने में कुछ ही सप्ताह बाकी थे, तभी तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया। उस रात बिजली नहीं थी, इसलिए हम रेडियो के आसपास इकट्ठा हुए और सुना कि हमें अगली कक्षा में प्रोन्नत कर दिया गया है, लेकिन लड़कियों के लिए स्कूल अगली सूचना तक बंद किए जा रहे हैं। शुरुआत में, मैं समझ नहीं पाई कि इसका क्या मतलब था। एक छोटी छात्रा होने के नाते, अंतिम परीक्षाएं रद्द होने की खबर से मैं खुश थी, इसलिए मैं यह बात अपनी दादी को बताने के लिए दौड़ पड़ी। लेकिन अंधेरे गलियारे में कुछ दूर जाने के बाद मुझे असलियत समझ में आई: अगले साल स्कूल नहीं होगा। मैं वहीं बैठ गई और रोने लगी। मेरे माता-पिता मेरी बहन और मुझे पाकिस्तान ले गए ताकि हम अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। ऐसा फैसला कई अफगान परिवारों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं था। हमारे लिए भी यह आसान नहीं था। विदेश में रहने वाले हमारे रिश्तेदारों ने हमारी पढ़ाई का खर्च उठाकर हमारा समर्थन किया। मेरी कुछ सहेलियां स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाईं और, जहां तक मुझे पता है, इसके बजाय उनकी शादी कर दी गई। आगे चलकर मैं अफगान सरकार में खान एवं पेट्रोलियम मंत्रालय की निदेशक, फिर उपमंत्री और उसके बाद कार्यवाहक मंत्री के पद पर सेवा देने वाली पहली महिला बनी। मेरी पीढ़ी के लिए वे परिस्थितियां बदल गई थीं। लेकिन इस पीढ़ी के लिए भी वे बदलेंगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है—सिर्फ जागरूकता से यह बदलाव नहीं आएगा। अफगान महिलाएं पिछले पांच साल से लगातार विरोध और संघर्ष करके यह दिखा रही हैं कि वे लड़कियों की शिक्षा पर लगे प्रतिबंध को हमेशा के लिए स्वीकार नहीं करेंगी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि बाकी दुनिया ने तालिबान के इस प्रतिबंध के खिलाफ इतना कम प्रयास करके ही संतोष क्यों कर लिया है।
बरेली के छावनी क्षेत्र का आरएन टैगोर इंटर कॉलेज शिक्षा के नया आयाम गढ़ रहा है। यहां स्थापित ड्रोन और रोबोटिक्स लैब आकर्षण का केंद्र हैं।
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या घटने से पीएम पोषण योजना के तहत खाद्यान्न आवंटन में 20.1% की कमी आई है। राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग को नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि इस समस्या का समाधान हो सके।
पूर्व प्रधानाचार्य लोकेंद्र सिंह की मौत:हॉर्ट अटैक से गई जान, 35 साल शिक्षा के क्षेत्र में दी सेवाएं
शामली के पूर्व प्रधानाचार्य और वरिष्ठ शिक्षाविद् कैप्टन लोकेंद्र कुमार की हॉर्ट अटैक से मौत हो गई। उनके निधन की खबर से शिक्षा जगत, पूर्व विद्यार्थियों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन को शिक्षा, एनसीसी और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया है। 35 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में दी सेवाएं कैप्टन लोकेंद्र कुमार ने करीब 35 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दीं। उन्होंने 1 अगस्त 1990 से 6 नवंबर 2014 तक राष्ट्रीय किसान इंटर कॉलेज में ड्राइंग प्रवक्ता के रूप में कार्य किया। इसके बाद 7 नवंबर 2014 से 31 मार्च 2025 तक प्रधानाचार्य के पद पर सेवाएं देते हुए सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले वर्ष 1988 से 1990 तक उन्होंने दिल्ली जल निगम में भी सेवा की थी। उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से एमए ड्राइंग एंड पेंटिंग और एमए भारतीय इतिहास की शिक्षा प्राप्त की थी। एनसीसी में कैप्टन के रूप में किया मार्गदर्शन लोकेंद्र कुमार वर्ष 1999 से 2023 तक लगातार एनसीसी अधिकारी रहे और कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने कई सौ कैडेट्स को सेना, सुरक्षा बलों और पुलिस में भर्ती होने के लिए मार्गदर्शन दिया। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए कई कैडेट आज विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। राष्ट्रीय किसान इंटर कॉलेज की एनसीसी इकाई का प्रदर्शन भी लगातार उत्कृष्ट रहा। कई वर्षों तक कॉलेज के कैडेट गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होते रहे। कैप्टन लोकेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सैन्य परंपरा से जुड़ा था परिवार कैप्टन लोकेंद्र कुमार का जन्म 10 जनवरी 1965 को मुजफ्फरनगर जिले के बरवाला गांव में महावीर सिंह और शांति देवी के परिवार में हुआ था। उनका परिवार सैन्य परंपरा से जुड़ा रहा। उनके पिता, चाचा, ताऊ और दादा सेना में रहे। परिवार के सदस्यों ने प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध तथा 1999 के कारगिल युद्ध में भाग लिया था। उनके दादा और ताऊ स्वतंत्रता सेनानी भी रहे। स्काउट एवं गाइड से भी जुड़े रहे लोकेंद्र कुमार भारत स्काउट एवं गाइड के आजीवन सदस्य रहे और वर्तमान में जिला उपायुक्त के दायित्व का निर्वहन कर रहे थे। ड्राइंग विषय में भी उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम लगातार बेहतर रहा। सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के थे धनी विद्यालय के प्रधानाध्यापक पुष्पेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि लोकेंद्र कुमार सरल, सहज और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ उनका व्यवहार हमेशा आत्मीय रहा। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनसे जुड़े लोगों के अनुसार, उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उनके व्यवहार से प्रभावित होता था। वे मुलाकात के दौरान जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें साझा करते और युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करते थे। दो पुत्र और 96 वर्षीय पिता को छोड़ गए लोकेंद्र कुमार अपने पीछे दो पुत्रों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके 96 वर्षीय पिता भी जीवित हैं। उनके निधन पर नीरज कुमार बेनीवाल, श्रवण तोमर, योगेंद्र सिंह, मलिक नवाब सिंह मलिक, सुधीर कुमार निर्वाल, पवित्र चौधरी समेत अनेक शिक्षकों, पूर्व विद्यार्थियों और सामाजिक लोगों ने शोक व्यक्त किया। शिक्षा, एनसीसी, अनुशासन और युवाओं के मार्गदर्शन के क्षेत्र में कैप्टन लोकेंद्र कुमार के योगदान को विद्यार्थी, शिक्षक और क्षेत्र के लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
स्वतंत्रता दिवस: ओडिशा के सीएम माझी ने शिक्षा, युवाओं और किसानों के लिए प्रमुख पहलों की घोषणा की
भुवनेश्वर, 15 अगस्त . Odisha के Chief Minister मोहन चरण माझी ने Saturday को Odisha सिविल सेवा परीक्षा में छह प्रयासों की सीमा को समाप्त करने और कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकों की घोषणा की. स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा, युवा रोजगार और कृषि क्षेत्र में कई ... Read more
एआई शिक्षा से बदलेगा भारत का भविष्य, पीएम मोदी की घोषणा का भारतीय शिक्षा बोर्ड ने किया स्वागत
हरिद्वार, 15 अगस्त . भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एनपी सिंह ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर Prime Minister Narendra Modi द्वारा एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रशिक्षण देने की घोषणा का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि एआई 21वीं सदी की सबसे तेजी से विकसित हो रही तकनीकों में से एक है, जो ... Read more
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने अखिलेश यादव के शिक्षा और विकास संबंधी सवालों पर पलटवार किया है। उन्होंने सपा सरकार पर नकल माफिया को बढ़ावा देने और शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने का आरोप लगाया।
बाबा रामदेव का बड़ा बयान, जेन-जी की जीवनशैली, राजनीति और शिक्षा व्यवस्था पर उठाये तीखे सवाल
योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के मौजूदा हालात, युवा पीढ़ी यानी जेन-जी (Gen-Z), राजनीतिक परिदृश्य और शिक्षा व्यवस्था पर बेबाक अंदाज में अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने एक तरफ जहां देश के युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था की कमियों और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर तीखा प्रहार करते हुए बड़े आंदोलन तक की चेतावनी दे डाली। बाबा रामदेव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के युवाओं को किसी एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि आज की युवा पीढ़ी में एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के दम पर देश का नाम रोशन कर रहा है।जेन-जी की कार्यशैली और बदलती जीवनशैली पर रामदेव की टिप्पणीयुवाओं के बारे में बात करते हुए योग गुरु ने कहा कि देश के कई जेन-जी युवा बेहद शानदार काम कर रहे हैं और नई ऊंचाइयां छू रहे हैं, लेकिन साथ ही युवाओं का एक ऐसा वर्ग भी है जो गलत आदतों और भटकाव की ओर तेजी से आकर्षित हो रहा है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ युवा हिंसा जैसी गतिविधियों में लिप्त हैं, कई-कई बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड बनाने जैसी आधुनिक जीवनशैली अपना रहे हैं, तथा बीड़ी-सिगरेट और शराब के सेवन जैसी बुरी लतों का शिकार हो रहे हैं। बाबा रामदेव ने इन तमाम बुराइयों की कड़ी निंदा करते हुए देश के सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं और अच्छी आदतों को अपनाकर देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।राजनीतिक निराशा और पीएम पद के दावेदारों पर तंजदेश के वर्तमान राजनीतिक माहौल पर बात करते हुए बाबा रामदेव ने उन तमाम विपक्षी नेताओं और आलोचकों को आड़े हाथों लिया जो अक्सर यह दावा करते रहते हैं कि देश में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने बिना नाम लिए कटाक्ष किया कि कुछ लोग राजनीतिक रूप से पूरी तरह हताश हो चुके हैं और दिन-रात सिर्फ प्रधानमंत्री की कुर्सी पाने का सपना देख रहे हैं। उन्होंने ऐसे राजनेताओं को सलाह देते हुए कहा कि यदि देश की जनता को आपको प्रधानमंत्री बनाना होगा, तो वे खुद आपको यह मौका देंगे, इसलिए नेताओं को थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। रामदेव ने सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों से अपील की कि वे देश में जाति, वर्ग या किसी भी समुदाय के आधार पर सामाजिक विभाजन पैदा करने की कोशिशों से बचें। उन्होंने माना कि वैचारिक और राजनीतिक विरोध होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इस विरोध को कभी भी व्यक्तिगत दुश्मनी या नफरत में नहीं बदलना चाहिए।शिक्षा प्रणाली की बदहाली और पेपर लीक पर आंदोलन की चेतावनीदेश की शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बाबा रामदेव ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि देश के स्कूलों और परीक्षा तंत्र में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वह इसके खिलाफ एक बड़ा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे। देश भर के छोटे और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि व्यवस्थाएं कितनी लाचार हैं जहां बच्चे योग्य शिक्षकों, बिजली, पीने के पानी और बुनियादी शौचालयों जैसी सुविधाओं की कमी के कारण स्कूल छोड़ने पर विवश हैं। उन्होंने सरकारी परीक्षा प्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि स्कूलों में कई बार किताबें होती हैं तो शिक्षक नहीं होते, और अगर शिक्षक होते हैं तो किताबें गायब मिलती हैं। इसके अलावा, यदि सब कुछ ठीक हो भी जाए, तो परीक्षा के पेपर लीक हो जाते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।बोर्ड परीक्षाओं की प्रासंगिकता और सरकारी नौकरियों में पक्षपातअपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बाबा रामदेव ने 10वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं की आज के समय में प्रासंगिकता और उपयोगिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले पूरी तरह से प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं पर निर्भर हो चुके हैं, जिसके कारण छात्रों के कोमल मन पर बेवजह मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सरकारी नौकरियों के चयन और इंटरव्यू प्रक्रिया पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाले लगभग 90 से 99 प्रतिशत साक्षात्कार पक्षपातपूर्ण या भेदभाव से भरे होते हैं, जहां योग्यता को दरकिनार करके केवल अपनी विचारधारा, जाति और पहचान के लोगों को ही अनुचित तरीके से प्राथमिकता दी जाती है।
कौन हैं IAS दीप्ति गौर मुखर्जी, उच्च शिक्षा सचिव के साथ मिला UGC चेयरमैन का जिम्मा
IAS ऑफिसर दीप्ति गौर मुखर्जी ने हायर एजुकेशन सेक्रेटरी के तौर पर अपॉइंटमेंट के बाद UGC चेयरमैन का एडिशनल चार्ज संभाला है। यह बदलाव नरेश पाल गंगवार के अपॉइंटमेंट के विवाद की वजह से रुकने के बाद हुआ है।
स्वतंत्रता दिवस पर मायावती बोलीं- युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार मिले, पहले संवैधानिक संस्थाएं निभाएं जिम्मेदारी
कैथल जिले में राजौंद क्षेत्र के जखौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सब-सेंटर सोंगल गांव में बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी डॉ. संदीप के दिशा निर्देशों पर हुआ। कार्यक्रम में बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी सुमन रानी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अमनप्रीत, आशा कार्यकर्ता कौशल्या, मीनू, सुदेश और कमलेश सहित सभी आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को कन्या भ्रूण हत्या रोकने और बेटियों को अच्छी शिक्षा व संस्कार देने के लिए जागरूक करना था। वक्ता बोले- लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं वक्ताओं ने बताया कि आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं हैं। उन्होंने सुनीता विलियम्स, कल्पना चावला, सानिया मिर्जा, बबीता और विनेश फोगाट जैसे सफल महिलाओं के उदाहरण दिए, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन किया है। सेना में कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिक सिंह जैसे नाम भी सामने रखे गए। इस अवसर पर अमीन खान ने पीएनडीटी एक्ट के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या या लिंग जांच करते पाए जाने पर तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने सभी से बेटियों को जीने का अधिकार देने की अपील की।
शिक्षा संकुल में राज्य परियोजना निदेशक रश्मि शर्मा ने किया ध्वजारोहण
राज्य परियोजना निदेशक रश्मि शर्मा ने स्वतन्त्रता दिवस पर शिक्षा संकुल जयपुर में ध्वजारोहण किया।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने फतेहाबाद में शिक्षकों की बहुप्रतीक्षित तबादला नीति (ट्रांसफर पॉलिसी) में हो रही देरी पर बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से कोई कमी नहीं है, बल्कि कानूनी अड़चनों के कारण यह प्रक्रिया बार-बार बाधित हो रही है। मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि उन्होंने शिक्षकों से तबादलों का वादा किया था। उन्होंने कहा कि मैंने शिक्षकों से कहा था कि एक घोषणा करके, एक बटन दबाकर ट्रांसफर कर दूंगा। शिक्षक भी सोच रहे होंगे कि मैंने अपना वादा पूरा नहीं किया। ढांडा ने आगे कहा कि, हमने अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी से तैयारी की थी, लेकिन जब कोई मामला कोर्ट में चला जाता है और कोर्ट की अड़चन आ जाती है, तो कई जगह हम लोगों के भी हाथ बंध जाते हैं। शिक्षा विभाग तीन बार कर चुका ट्रांसफर की तैयारी : ढांडा मंत्री महिपाल ढांडा ने तबादला प्रक्रिया की जटिलता समझाते हुए बताया कि विभाग ने अब तक तीन बार अपनी तरफ से पूरी तैयारी की है। उन्होंने कहा कि जब कोर्ट किसी चीज को ठीक करने को कहता है, तो पूरी ट्रांसफर पॉलिसी की प्रक्रिया को पूरा करने में 108 से 109 दिन लग जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब भी सब कुछ पूरा करके कोर्ट में जाते हैं, तो कोई न कोई नई चीज निकलकर आ जाती है और हमें सारा प्रोसेस दोबारा शुरू करना पड़ता है। हालांकि, शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को निराश न होने का संदेश देते हुए उम्मीद जताई। उन्होंने आश्वस्त किया कि मुझे पूरी उम्मीद है कि इस बार हम लोग इस काम को (तबादलों को) पूरा कर देंगे।
Bhopal , 15 अगस्त . स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर Madhya Pradesh कांग्रेस अध्यक्ष प्रमुख जीतू पटवारी ने पार्टी कार्यालय में झंडा फहराया. इस दौरान उन्होंने केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की मांग की. पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के महापर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों और देशवासियों को शुभकामनाएं देता ... Read more
बहुजन समाज(बसपा) मायावती ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को बधाई देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की जनता स्वतंत्रता दिवस का जश्न जरूर मनाए, लेकिन ‘विकसित भारत’ और ‘मेरा भारत महान’ का सपना तभी साकार होगा, जब सरकारें जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाएं। उन्होंने सरकारों से संवैधानिक जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने की मांग की। मायावती ने कहा कि देश में अनेक समस्याओं से घिरे लोग स्वतंत्रता दिवस का जश्न हर्ष-उल्लास के साथ जरूर मनाएं, लेकिन विकसित भारत का सपना साकार करने की क्षमता रखने वाली युवा पीढ़ी अब सरकारों से जवाबदेही मांगने लगी है। ऐसे में सरकारों को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा। ‘चेक एंड बैलेंस’ व्यवस्था प्रभावी हो बसपा प्रमुख ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भारतीय संविधान में विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं के बीच ‘चेक एंड बैलेंस’ की बेहतर व्यवस्था की थी। इसका उद्देश्य यह था कि कोई भी संस्था निरंकुश होकर काम न कर सके। उन्होंने कहा कि इस संवैधानिक व्यवस्था को सही मायने में प्रभावी बनाना जरूरी है, ताकि कोई भी ‘डिक्टेटर’ या निरंकुश व्यक्ति पैदा न हो सके। इससे देश और समाज के सर्वसमाज के लोग सही तरीके से आगे बढ़ सकेंगे। 52% आबादी 30 साल से कम, युवाओं को क्या मिला? मायावती ने कहा कि वर्तमान में भारत की आबादी का लगभग 52% हिस्सा 30 वर्ष से कम उम्र का है। ऐसे में सरकारों को यह देखना जरूरी है कि देश का युवा वर्ग अपने जीवन में असमानता और असमान अवसरों का अनुभव क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारें युवाओं को बेहतर भविष्य देने के लिए लगातार वादे करती हैं, लेकिन जब उनका सही लाभ नहीं मिल पाता तो व्यवस्था में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगने के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर होते हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि युवाओं को बेहतर स्कूल, अस्पताल, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस काम होना चाहिए। उन्होंने सभी सरकारों से सतर्क होने की मांग की। दलितों से लेकर किसानों-मजदूरों तक का मुद्दा उठाया मायावती ने अपने संदेश में दलितों, आदिवासियों, पीड़ितों और अन्य उपेक्षित वर्गों के साथ गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और बेरोजगारों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकारों को इन वर्गों के करोड़ों मेहनतकश लोगों को बार-बार उनके ‘दायित्व’ की याद दिलाने के बजाय अपने संवैधानिक दायित्व, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश और जनहित के प्रति सरकारों को अपनी शपथ को पहले सही तरीके से निभाना चाहिए। इसके बाद ही जनता को भी अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का नैतिक अधिकार सरकारों को होगा। मायावती बोलीं-सिर्फ जश्न नहीं, जवाबदेही भी जरूरी मायावती के स्वतंत्रता दिवस संदेश का फोकस सिर्फ शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने एक ओर देश की युवा आबादी और उसके भविष्य का मुद्दा उठाया, वहीं दूसरी ओर संविधान में तय संस्थागत संतुलन और सरकारों की जवाबदेही को केंद्र में रखा। बसपा प्रमुख ने साफ संकेत दिया कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि सरकारों के कामकाज और जनता के अधिकारों की समीक्षा का भी समय है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को युवाओं, गरीबों, किसानों, महिलाओं और वंचित वर्गों के वास्तविक विकास से जोड़ने की बात कही।
फतेहाबाद में शनिवार को स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने जिला स्तरीय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और राष्ट्रीय ध्वज फहराया। हालांकि, देशभक्ति के इस जश्न और शहर की सजावट के बीच चरमराई सफाई व्यवस्था ने एक बड़ी विडंबना पेश की। मुख्य समारोह से पूर्व, शिक्षा मंत्री ढांडा ने शहीद स्मारक पहुंचकर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर अमर बलिदानियों को नमन किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात, उन्होंने मुख्य समारोह स्थल पर तिरंगा फहराया और शानदार मार्च पास्ट की सलामी ली। इस अवसर पर उन्होंने मंच से सभी जिलावासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यहां देखें फोटो… सजावट के साथ लगे दिखाई दिए कूडे़ के ढेर स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर शहर को देशभक्ति के रंग में रंगने का प्रयास किया गया था। शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों को तिरंगे की आकर्षक सजावट से रोशन किया गया था। लेकिन, इस भव्य सजावट के ठीक नीचे कूड़े के ढेर लगे हुए थे, जो एक निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहे थे। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा जब रेस्ट हाउस से कार्यक्रम स्थल के लिए निकले, तो उनका काफिला रेस्ट हाउस के पास ही लगे कूड़े के ढेरों के पास से गुजरा। यह दृश्य शहर की सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति को दर्शाता था। शहर में सफाई व्यवस्था ठप होने का मुख्य कारण नगर परिषद कर्मचारियों की चल रही हड़ताल थी। इस हड़ताल के चलते पूरे शहर में कूड़े का अंबार लगा हुआ था।
बिहार में 15 अगस्त 2026 से 3 बड़े बदलाव, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में होगा सुधार
बिहार में स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलावों की घोषणा हुई है। अस्पतालों में नई रेफरल नीति और शिक्षकों के अवकाश नियम 15 अगस्त 2026 से लागू होंगे, जबकि स्कूलों में ई-लर्निंग व्यवस्था शुरू हो गई है।
औरैया के भाग्यनगर ब्लॉक स्थित बीआरसी केंद्र पर स्वतंत्रता दिवस के दिन ध्वजारोहण की प्रक्रिया को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) दाताराम और शिक्षामित्र रमाकांत मिश्रा के बीच विवाद हो गया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। विवाद के दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हुई। मौके पर मौजूद अन्य शिक्षकों और कर्मचारियों ने बीच-बचाव का प्रयास किया। घटना 15 अगस्त की सुबह करीब 8:01 बजे बाबा परमहंस स्थित दिबियापुर बीआरसी भाग्यनगर में हुई। शिक्षामित्र रमाकांत मिश्रा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय ध्वज को नीचे से ऊपर खींचकर फहराने के बजाय पहले से ही छत पर बांध दिया गया था। इसके बाद उसे खोलकर ध्वजारोहण किया गया। शिक्षामित्र ने इसी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। वीडियो बनाने पर बढ़ी बहस रमाकांत मिश्रा के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज को नीचे से ऊपर ले जाकर फहराया जाता है, जबकि पहले से ऊपर बांधे गए ध्वज को खोलना अलग प्रक्रिया है। आपत्ति जताने के बाद उन्होंने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि वीडियो बनाए जाने को लेकर बीईओ और शिक्षामित्र के बीच तीखी बहस होने लगी। बीईओ ने वीडियो बनाने से रोकने का किया प्रयास शिक्षामित्र का आरोप है कि बीईओ दाताराम ने उन्हें वीडियो बनाने से रोकने का प्रयास किया और अपने विद्यालय जाने को कहा। वहीं, शिक्षामित्र ध्वजारोहण की प्रक्रिया को लेकर नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाते रहे। विवाद बढ़ने पर वहां मौजूद कुछ शिक्षक और कर्मचारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया। वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा तेज विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना को लेकर शिक्षकों और आम लोगों के बीच चर्चा है। लोगों का कहना है कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और ध्वजारोहण के नियमों की जानकारी दी जाती है, ऐसे में सरकारी अधिकारियों के कार्यक्रम में भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका मामले में बीएसए संजीव कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं, बीईओ दाताराम ने भी फोन नहीं उठाया। अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की स्थिति और ध्वजारोहण की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्वामी रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल, कही ये बात
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराने के बाद योग गुरु राम देव ने देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी, नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं के साथ-साथ सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार पर चिंता जताई. बाबा रामदेव ने कहा कि अगर शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो युवाओं में असंतोष बढ़ेगा और उन्हें देशहित में एक बार फिर अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
दतिया में स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के दौरान एक छात्र की मौत हो गई। लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल की छत पर तिरंगा लगाते समय 16 वर्षीय राज कुशवाह 11 हजार केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच कराने की बात कही है। जिला शिक्षा अधिकारी विद्या मिश्रा ने बताया कि यह घटना उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डीईओ मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल संचालकों को छात्रों से किसी भी प्रकार का काम न कराने के निर्देश जारी किए जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम भी नहीं हुआघटना के बाद लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल बंद रहा और वहां स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम भी आयोजित नहीं किया गया। शनिवार सुबह राज के शव का जिला अस्पताल में पोस्टमॉर्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। छात्र के परिजनों ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार को स्कूल संचालक ने करीब डेढ़ बजे छुट्टी के बाद राज को वापस बुलाया था और उसे झंडा लगाने के लिए छत पर भेजा था। तभी हादसा हुआ और उसकी मौके पर ही उसकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि हादसे के बाद स्कूल प्रबंधन ने उन्हें तत्काल सूचना नहीं दी। राज के चचेरे भाई ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि परिवार को किसी मुआवजे की जरूरत नहीं है, दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। शरीर गंभीर रूप से झुलस गया थाकोतवाली थाना प्रभारी दिनेश राजपूत ने बताया कि छात्र का शरीर गंभीर रूप से झुलस गया था। शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। परिजन की शिकायत के बाद घटना की जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस पूरे मामले में स्कूल संचालक नंदकिशोर कुशवाह की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Digital India की शक्ति से Free Online Coaching: PM Modi ने Gen Z के लिए खोला शिक्षा का नया द्वार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कक्षाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली में छात्रों के बड़े विरोध-प्रदर्शन के बीच 'जेन-ज़ी' (Gen Z) तक अपनी बात पहुंचाते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार गरीब और मध्यम वर्ग की मदद करना चाहती है ताकि वे महंगी कोचिंग कक्षाओं पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ रुपये बचा सकें। इसे भी पढ़ें: RSS Chief Mohan Bhagwat का बड़ा बयान, लोकतंत्र में Protest और Debate जरूरी, पर नागरिक कर्तव्य न भूलें पीएम मोदी ने कहा कि कोचिंग क्लास को लेकर चल रही होड़ मिडिल-क्लास परिवारों के लिए एक बड़ा बोझ बन गई है। हर माता-पिता को लगता है कि अगर वे अपने बच्चे को कोचिंग सेंटर नहीं भेजते हैं, तो वे किसी तरह पीछे रह जाएंगे या उन्हें एक सम्मानित परिवार का नहीं माना जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को अपने परिवारों के करीब रहने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, इसलिए, हमने अपने युवाओं के लिए अलग-अलग कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं की मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग देने का फ़ैसला किया है। हमारे पास डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है और हमारे पास बहुत प्रतिभाशाली शिक्षक और एजुकेटर हैं। सरकार के 'विकसित भारत' के संकल्प के अनुरूप, प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप्स को अपने इनोवेटिव आइडियाज़ लाने के लिए आमंत्रित किया और साथ ही घोषणा की कि उन्हें रिसर्च और डेवलपमेंट में मदद के लिए 1 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मैं देश के युवाओं से कहना चाहता हूँ: अपने सपने लेकर आइए, हम संसाधनों की कोई कमी नहीं होने देंगे। हमने आपके विचारों और क्षमताओं को मज़बूती देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का एक सिस्टम बनाया है। इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat बोले: सही मार्गदर्शन मिले तो युवा देश की ताकत, वरना बन सकते हैं बोझ पीएम मोदी ने सरकार के मेक इन इंडिया अभियान पर ज़ोर देते हुए फिर कहा कि देश में बहुत सारे संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि रिसर्च के लिए नए मौके बने हैं। डिजिटल इंडिया और सस्ते डेटा ने युवाओं को सशक्त बनाया है। अगर दुनिया में कहीं सस्ता डेटा है, तो वह भारत की धरती पर है। और इसने देश के युवाओं को नई ताकत दी है।
स्वतंत्रता दिवस पर योगगुरु रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और सरकारी भर्ती में कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। उन्होंने सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
PC: Jagran स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) ने जूनियर एसोसिएट (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) के पद पर भर्ती के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेस शुरू कर दिया है, जिसे आमतौर पर SBI क्लर्क पद के रूप में जाना जाता है। बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने में दिलचस्पी रखने वाले कैंडिडेट ऑफिशियल SBI रिक्रूटमेंट पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के ज़रिए कुल 9,124 जूनियर एसोसिएट पद भरे जाएंगे। योग्य कैंडिडेट 31 अगस्त, 2026 तक अपने एप्लीकेशन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। SBI क्लर्क एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया जूनियर एसोसिएट पद के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट के पास भारत में किसी मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूशन या यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। जो लोग अभी अपने ग्रेजुएशन प्रोग्राम के आखिरी साल में हैं, वे भी रिक्रूटमेंट नोटिफिकेशन में बताई गई शर्तों के तहत अप्लाई करने के योग्य हो सकते हैं। कैंडिडेट की उम्र 1 अप्रैल, 2026 के हिसाब से कैलकुलेट की जाएगी। एप्लिकेंट की उम्र 20 से 28 साल के बीच होनी चाहिए। रिजर्व्ड कैटेगरी के कैंडिडेट को सरकारी नियमों के अनुसार ऊपरी उम्र सीमा में छूट मिलेगी। OBC कैंडिडेट्स को 3 साल, SC/ST कैंडिडेट्स को 5 साल और PwBD कैटेगरी के कैंडिडेट्स को 10 साल की छूट मिलेगी। SBI क्लर्क सिलेक्शन प्रोसेस जूनियर एसोसिएट्स के लिए सिलेक्शन प्रोसेस तीन स्टेज में होगा — प्रीलिमिनरी एग्जाम, मेन एग्जाम और लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट। प्रिलिमिनरी एग्जाम में 100 सवाल होंगे जिनके 100 मार्क्स होंगे। इंग्लिश लैंग्वेज, न्यूमेरिकल एबिलिटी और रीज़निंग एबिलिटी से सवाल पूछे जाएंगे। एग्जाम एक घंटे का होगा। कैंडिडेट्स यह भी ध्यान दें कि हर गलत जवाब के लिए एक-चौथाई नंबर काटे जाएंगे। जो कैंडिडेट्स प्रीलिमिनरी एग्जाम में क्वालिफाई करेंगे, वे मेन एग्जाम में जाएंगे। मेन एग्जाम 200 मार्क्स का होगा। जो लोग मेन एग्जाम में ज़रूरी क्राइटेरिया क्लियर करेंगे, उन्हें बाद में लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। SBI क्लर्क सैलरी जूनियर एसोसिएट पोस्ट के लिए चुने गए कैंडिडेट्स को SBI के नियमों के मुताबिक हर महीने लगभग ₹24,050 से ₹64,480 की सैलरी मिलेगी, साथ ही दूसरे लागू फायदे और अलाउंस भी मिलेंगे। एप्लीकेशन फीस एप्लीकेशन फीस कैंडिडेट की कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग होती है: SC, ST और PwBD कैंडिडेट्स: कोई फीस नहीं जनरल, OBC और EWS कैंडिडेट्स: ₹750 एलिजिबल कैंडिडेट्स को डेडलाइन से पहले अपना एप्लीकेशन पूरा कर लेना चाहिए और फॉर्म जमा करने से पहले सभी डिटेल्स ध्यान से वेरिफाई कर लेनी चाहिए।
TNPSC recruitment 2026: 821 ग्रुप 2 और 2A पदों पर निकली भर्ती, इस तरह करें आवेदन
PC: kalingatv तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (TNPSC) ने तमिलनाडु में एडमिनिस्ट्रेटिव, एग्जीक्यूटिव और सुपरवाइजरी रोल के लिए 821 ग्रुप 2 और 2A पोस्ट के लिए रिक्रूटमेंट नोटिफिकेशन जारी किया है। रिक्रूटमेंट नोटिफिकेशन 11 अगस्त को जारी किया गया था और एप्लीकेशन प्रोसेस शुरू हो गया है। इंटरेस्टेड और एलिजिबल कैंडिडेट अपने ऑफिशियल TNPSC एग्जामिनेशन पोर्टल के जरिए जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। भर्ती के लिए परीक्षा नवंबर महीने में होगी और उम्मीदवार 9 सितंबर तक एप्लीकेशन भर सकते हैं। ज़रूरी तारीखें: नोटिफ़िकेशन और एप्लीकेशन: 11 अगस्त अप्लाई करने की आखिरी तारीख: 9 सितंबर करेक्शन विंडो: 13–15 सितंबर प्रीलिमिनरी परीक्षा: 1 नवंबर वैकेंसी : ग्रुप 2 इंटरव्यू पोस्ट: 41 ग्रुप 2 A नॉन-इंटरव्यू पोस्ट: 780 एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया: मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन डिग्री उम्र सीमा: जनरल – 1 जुलाई को 18-32 साल SC/ST/MBC/BC/BCM: कोई उम्र सीमा नहीं सिलेक्शन प्रोसेस: प्रीलिमिनरी परीक्षा, मेन रिटन परीक्षा, सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन काउंसलिंग परीक्षा : एक प्रीलिमिनरी परीक्षा ऑफ़लाइन मोड में OMR शीट का इस्तेमाल करके आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है। इसके बाद, जो लोग प्रीलिमिनरी एग्जाम पास करेंगे, वे संबंधित पोस्ट के लिए मेन रिटन एग्जाम पेपर देंगे। आखिर में, सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन और काउंसलिंग होगी। अप्लाई कैसे करें: ऑफिशियल TNPSC एग्जामिनेशन पोर्टल पर जाएं। रजिस्टर्ड ID और पासवर्ड का इस्तेमाल करके वन-टाइम रजिस्ट्रेशन प्रोफाइल में लॉग इन करें। अगर पहली बार रजिस्ट्रेशन सिस्टम से अप्लाई कर रहे हैं तो आधार लिंकिंग पूरी करें। कंबाइंड सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन-II z चुनें और अप्लाई नाउ पर क्लिक करें। जरूरी डिटेल्स डालें और लेटेस्ट फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। लागू एप्लीकेशन फीस पे करें और एप्लीकेशन फॉर्म सबमिट करें। आगे के रेफरेंस के लिए एक कॉपी डाउनलोड करके सेव कर लें।
IOCL Executive Recruitment 2026: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 470 एक्जीक्यूटिव पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। बीई/बीटेक, एमबीए, एलएलबी या डिप्लोमा योग्यता रखने वाले उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आजादी का मतलब अराजकता, पिछड़ेपन, गरीबी, अशिक्षा, असमानता से सर्वथा मुक्तिः मुख्यमंत्री
लखनऊ, 15 अगस्तः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर अपने सरकारी आवास (5, कालिदास मार्ग) पर ध्वजारोहण किया। उन्होंने राष्ट्रनायकों और देश के लिए शहीद होने वाले रणबांकुरों के प्रति श्रद्धा निवेदित की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वाधीनता दिवस की बधाई दी। कहा कि आजादी का मतलब केवल राजनीतिक आजादी नहीं है, बल्कि उस अराजकता, पिछड़ेपन, गरीबी, अशिक्षा, असमानता से भी सर्वथा मुक्ति है, जिसे कारण देश लगातार कमजोर होता गया। हम सब आजादी के 79वर्ष पूरे कर चुके हैं और 80वें स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम से जुड़े हैं। यह दिवस केवल हमें समारोह तक सीमित रखने का अवसर नहीं दे रहा, बल्कि हमें संपूर्ण आजादी के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों में नागरिक के रूप में कर्तव्य करने की भी प्रेरणा प्रदान कर रहा है। हर नागरिक का आह्वान करते हुए सीएम योगी ने कहा कि आजादी को लंबे समय तक बनाए रखना है तो एक व्यक्ति, जाति, संप्रदाय नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों को अपने-अपने क्षेत्र में समान रूप से योगदान देना होगा।देश को विदेशी दासता से मुक्त कराना ही था रणबांकुरों का ध्येयमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कहा कि लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप 1947 में आज ही के दिन भारत को स्वाधीनता प्राप्त हुई। हर भारतवासी जिस उन्मुक्त वातावरण में स्वाधीनता का अहसास कर रहा है, वह भारत माता के महान सपूतों, बलिदानियों के त्याग, तपस्या व बलिदान का परिणाम है। देश अंतरविरोधों व षडयंत्रों के कारण गुलाम हुआ, लेकिन इसने मन-मस्तिष्क से गुलामी को कभी स्वीकार नहीं किया। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में गुलामी के खिलाफ अलग-अलग समय में संघर्ष और आंदोलन हुए। 1857 का प्रथम स्वातंत्र्य समर सामूहिक रूप से देश की स्वाधीनता के लिए किए गए प्रयास का महत्वपूर्ण पड़ाव था, जब बैरकपुर में मंगल पांडेय, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई, मेरठ में धनसिंह कोतवाल आदि रणबांकुरों के नेतृत्व में हर गांव, जनपद, प्रांत में स्वाधीनता की लौ जलती दिखाई दे रही थी। उस समय सभी के मन में एक ही भाव था कि हमें देश को विदेशी दासता से मुक्त कराना है।हर व्यक्ति के जीवन को सहज और सरल बनाने के लिए किए जाने वाले परिवर्तनों के परिणाम भी दिख रहेमुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश के सामने जो अराजकता, अशिक्षा, पिछड़ापन, असमानता थी, उसमें से बहुत सारी समस्याओं का पिछले 8 दशक में समाधान हुआ है। इसी का परिणाम है कि देश में बहुआयामी गरीबी से 25 करोड़ लोग मुक्त हुए हैं। शिक्षा का दायरा बढ़ा है और बिना भेदभाव शासन का लाभ समाज के प्रत्येक तबके को मिलना प्रारंभ हुआ है। विश्वस्तरीय अवस्थापना सुविधाओं का विकास हुआ है। हर व्यक्ति के जीवन को सहज और सरल बनाने के लिए किए जाने वाले परिवर्तनों के परिणाम भी अब दिखाई देते हैं।देश को कमजोर करने वाली ताकतों से रहना होगा सतर्कसीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देशवासियों से किए गए आह्वान का भी जिक्र किया। कहा कि अराजकता, असमानता, अशिक्षा पर विजय प्राप्त करनी है तो देश को कमजोर करने वाली ताकतों से सतर्क रहना होगा। पीएम ने कहा था कि देश में केवल चार जातियों (गरीब, युवा, महिला, किसान) को फोकस करते हुए कार्य करेंगे तो अच्छे परिणाम आएंगे। पिछले 12 वर्ष में इन्हीं चार तबकों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनीं। इस कार्ययोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार की इच्छाशक्ति भी दिखाई दी, जिसका परिणाम रहा कि आमजन को शासन की योजना से जुड़ने में मदद मिली है। डायरेक्टर बेनिफिट स्कीम के माध्यम से शासन की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ उपलब्ध कराने का कार्य हुआ। मिशन रोजगार से लेकर मॉडर्न टेक्नोलॉजी के अनुरूप युवा खुद को तैयार कर सकें, इसके लिए नए-नए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए गए, संस्थान बनाए गए। स्वास्थ्य की अच्छी सुविधा के लिए देश में मेडिकल कॉलेज, एम्स की नई श्रृंखला खड़ी हुई, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ। रेलवे की कनेक्टिविटी बढ़ी, मेट्रो व रैपिड रेल जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हुईं। अमृत भारत, वंदे भारत, नमो भारत जैसी आधुनिक विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त बेहतरीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास बढ़े।हर क्षेत्र में नए प्रतिमानों को स्थापित करने में आगे बढ़ा भारतमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत हर क्षेत्र में नए प्रतिमानों को स्थापित करने में आगे बढ़ा है। जब देश के पास यशस्वी नेतृत्व होता है और सामूहिकता के साथ देश की ताकत एक स्वर में बोलती है तो परिणाम सामने आते हैं। देश की आजादी की लड़ाई भी ध्यानाकर्षित करती है तो जब हम बंटे थे तो आजादी के लिए संघर्ष होता था। राजस्थान में महाराणा प्रताप, पंजाब से गुरु गोविंद सिंह, महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे नेतृत्व प्रदान किया। सभी का उद्देश्य एक ही था कि हर हाल में विदेशी दासता से मुक्ति मिले, लेकिन सामूहिक रूप से किया गया प्रयास 1857 में देखने को मिला। इसके बाद लगातार संघर्ष को जीवंतता बनाए रखने के लिए क्रांतिकारियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में संघर्षों को जन्म दिया। गोरखपुर में चौरीचौरा, लखनऊ में काकोरी ट्रेन एक्शन आदि संघर्ष अनवरत रूप से बढ़ता रहा।देश की सीमा/आंतरिक सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले जवानों को किया नमनसीएम योगी ने कहा कि भारत मां के जिन वीर बलिदानियों, क्रांतिकारियों ने आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया, उन्हें देश स्मरण कर रहा है। सीएम ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आदि के प्रति श्रद्धा भी व्यक्त की। सीएम ने आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदों को चूमने वाले क्रांतिकारियों और स्वतंत्र भारत में देश की सीमा/आंतरिक सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले जवानों को भी नमन किया।मुख्यमंत्री ने कीर्ति चक्र से सम्मानित इंस्पेक्टर सुनील कुमार के बलिदान को भी किया यादमुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश पुलिस के जांबाज इंस्पेक्टर सुनील कुमार को कीर्ति चक्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने उप्र में कानून व्यवस्था स्थापित करने, अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के संकल्प को बढ़ाने के लिए बलिदान हुए इंस्पेक्टर सुनील कुमार को भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। सीएम ने राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार पाने वाले उप्र के अन्य अधिकारियों व कार्मिकों को भी बधाई दी। सीएम ने उम्मीद जताई कि आत्मनिर्भर व विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों की कड़ी को अपने- अपने क्षेत्र में आगे बढ़ाएंगे तो स्वाधीनता अनंत काल तक भारत की यात्रा को और भी यशस्वी तरीके से आगे बढ़ाने में सफल होगी।
Video: रिज पर 13 टुकड़ियों ने किया भव्य मार्च पास्ट, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने की अध्यक्षता
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स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद जीतू पटवारी ने कांग्रेस के आगामी संघर्षों का खाका रखा। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान तेज करने, केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा के लिए लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।
शिक्षा पर गुणवत्ता कमेटी, हाईकोर्ट जज करेंगे परीक्षा की निगरानी; सीएम सम्राट Gen Z पर मेहरबान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि राज्य में शिक्षा में सुधार लाने के लिए गुणवत्ता कमेटी का गठन किया जाएगा। परीक्षाओं की निगरानी के लिए हाईकोर्ट जज के नेतृत्व में कमेटी बनाई जाएगी।
योगगुरु बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हरिद्वार में शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्तियों और युवाओं के बढ़ते आंदोलनों को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने दावा किया कि देश में युवाओं के असंतोष की बड़ी वजह शिक्षा और भर्ती व्यवस्था की कमियां हैं। बाबा रामदेव ने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू […] The post बाबा रामदेव का बड़ा बयान: ‘इंटरव्यू में जाति-धर्म देखकर नौकरी मिलती है’, भर्ती और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल appeared first on https://rajsattaexpress.com .
फतेहाबाद में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने फहराया तिरंगा, ली परेड की सलामी
फतेहाबाद में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने फहराया तिरंगा, ली परेड की सलामी
East Coast Railway GDCE Vacancy 2026: ईस्ट कोस्ट रेलवे ने सामान्य विभागीय प्रतियोगी परीक्षा 2026 के तहत 1,421 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। पात्र उम्मीदवार 14 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
सड़क, राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के विस्तार से सामान्य हो रहा जीवन
जगरगुंडा कभी बस्तर में नक्सलियों की राजधानी के नाम से पहचानी जाती थी। यहां के बाजार में शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता था। सड़कें सूनी रहती थीं। विकास की रफ्तार सुरक्षा के साए में थम गई थी। अब करीब चार दशक बाद काले झंडे की जगह इस 15 अगस्त को तिरंगा झंडे के साथ यहां स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। जगरगुंडा की पहचान सिर्फ एक पंचायत की नहीं, बल्कि बस्तर की आदिवासी संस्कृति और जंगल से जुड़ी जीवनशैली की भी है। मुरिया और गोंड समाज की परंपराएं, पारंपरिक पहनावा, स्थानीय खान-पान, लोकगीत और नृत्य यहां के ग्रामीण जीवन का हिस्सा हैं। आसपास के गांवों के लिए जगरगुंडा का हाट-बाजार लंबे समय से खरीदारी और वनोपज के कारोबार का प्रमुख केंद्र रहा है। महुआ, इमली, तेंदूपत्ता समेत अन्य स्थानीय उत्पाद यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। लंबे समय तक नक्सल हिंसा ने इसकी पहचान पर भय की परत चढ़ा दी। शाम होते ही बाजार की गतिविधियां थम जाती थीं। सरकारी सुविधाओं की पहुंच और सामान्य आवाजाही भी प्रभावित रही। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ ग्रामीणों की आवाजाही बढ़ी है। सड़क संपर्क में सुधार से आसपास के गांवों तक पहुंच आसान हुई है। बाजार में भी गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं। इलाके में कभी नक्सलियों की दहशत का इस कदर... जगरगुंडा कभी नक्सलियों का बड़ा केंद्र रहा। यहां हमलों में कई जान गई। 2023 की कुंदेड़ मुठभेड़ में 3 डीआरजी जवान शहीद हुए। दिसंबर में सीआरपीएफ के एसआई की शहादत हुई। आईईडी हमले में दो कोबरा जवान शहीद हुए। नक्सलियों ने ग्रामीणों को भी नहीं बख्शा। मुखबिरी के आरोप में जन अदालत लगाकर कई ग्रामीणों की हत्या की। 2023 में दुलेड़ के उप सरपंच माड़वी गंगा, शिक्षादूत कवासी सुक्का की हत्या ने दहशत बढ़ाई। सिलगेर के शिक्षादूत लक्ष्मण बारसे, गोंदपल्ली के शिक्षादूत की हत्या भी इसी दौर की घटनाएं हैं। जगरगुंडा की सबसे बड़ी कहानी यहां हो रहा बदलाव है। कभी नक्सल गतिविधियों के कारण जिस इलाके में सरकारी पहुंच और सामान्य जीवन बाधित था, वहां अब सुरक्षा के साथ विकास की बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। सड़क, राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं की मौजूदगी ग्रामीणों के लिए सिर्फ सुविधा नहीं है। यह सामान्य जीवन की वापसी का संकेत है। इस बदलाव के बीच जगरगुंडा अपनी पुरानी पहचान भी वापस पा रहा है। इसका हाट-बाजार आसपास के ग्रामीणों को जोड़ता है। जंगल से मिलने वाली वनोपज यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। महुआ, इमली और तेंदूपत्ता जैसे उत्पादों से जुड़ी गतिविधियां गांवों की आजीविका से सीधे जुड़ी हैं।
देश और दुनिया में एक ओर शिक्षा एआई के दौर तक पहुंच चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर के कई हिस्सों में सही मायने में शिक्षा अब जाकर पहुंची है। बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सलवाद के खौफ ने शिक्षा की राह रोक दी थी, वहां अब बदलाव की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। स्कूलों में फिर से बच्चों की आवाज गूंज रही है, शिक्षक पहुंच रहे हैं और गांवों में पढ़ाई का माहौल बन रहा है। 31 मार्च 2026 के बाद नक्सल प्रभाव खत्म होने के साथ बीजापुर और नारायणपुर के उन इलाकों में शिक्षा व्यवस्था दोबारा खड़ी की जा रही है, जहां वर्षों से स्कूल बंद थे। दोनों जिलों में कुल 52 स्कूल फिर से संचालित किए गए हैं और इनमें 1375 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें बीजापुर के 38 स्कूलों में करीब 1100 और नारायणपुर के 14 स्कूलों में 275 बच्चे अध्ययनरत हैं। नारायणपुर में चार स्कूल आजादी के बाद पहली बार खुलेनारायणपुर में भी नक्सल प्रभाव के कारण लंबे समय से बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया गया है। जिले में कुल 14 स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 10 स्कूल ऐसे हैं, जो करीब 12 साल बाद फिर खुले हैं। वहीं 4 गांव ऐसे हैं, जहां आजादी के बाद पहली बार स्कूल शुरू हुआ है। इन स्कूलों में करीब 275 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। जिन गांवों में कभी स्कूल तक पहुंचना चुनौती था, वहां अब शिक्षक और बच्चे एक साथ नजर आ रहे हैं। शेष पेज 7 पर दंतेवाड़ा में पेड़ के नीचे शुरू हुई पढ़ाईदंतेवाड़ा में भी नक्सलवाद का प्रभाव खत्म होने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव सामने आया है। जिले के लावा, बड़ेपल्ली और बैनपाल गांव में आजादी के बाद पहली बार स्कूल शुरू हो पाए हैं। इन तीनों स्कूलों में करीब 40 बच्चों का पहली बार दाखिला हुआ है। इन गांवों में अभी स्कूल भवन तैयार नहीं हुए हैं। इसके बावजूद शिक्षा शुरू करने में इंतजार नहीं किया गया। पेड़ के नीचे ही शाला प्रवेश उत्सव आयोजित कर बच्चों को स्कूल से जोड़ा गया। अब इन गांवों में स्कूल भवन निर्माण की स्वीकृति भी मिल चुकी है। यानी फिलहाल पेड़ की छांव में शुरू हुई पढ़ाई जल्द अपने भवन में पहुंचेगी। दंतेवाड़ा के मुलेर सहित कुछ अन्य गांवों में सुरक्षा कारणों से दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किए गए स्कूलों को भी अब उनके मूल गांवों में वापस शुरू किया गया है। इससे ग्रामीणों के बच्चों को अपने गांव में ही पढ़ाई की सुविधा मिल रही है। जिन्हें बम से उड़ाया, वहां नए भवन में फिर शुरू हुई पढ़ाईनक्सलवाद के दौर में बस्तर के चारों जिलों में स्कूल और आश्रम भी हिंसा की चपेट में आए। कई स्कूल भवनों को नक्सलियों ने बम से उड़ा दिया, तो कई जगह भवनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इसका सबसे सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा। कई इलाकों में स्कूल बंद हुए और शिक्षक व सरकारी अमला भी अंदरूनी गांवों तक नहीं पहुंच सका। अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद इन इलाकों में सरकारी व्यवस्थाओं की वापसी हो रही है। सुकमा के बुर्कलंका क्षेत्र का गच्छनपल्ली गांव इसके उदाहरण हैं। कभी माओवादियों की पीएलजीए बटालियन-1 का मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में अब नया स्कूल भवन तैयार हो चुका है। नक्सलियों द्वारा तोड़े गए पुराने स्कूल की जगह नए भवन में पढ़ाई शुरू होना गांव के लिए बदलाव की बड़ी तस्वीर है।
Yamuna Nagar News: विद्यार्थियों को दी राष्ट्रीय शिक्षा नीति की जानकारी
मुकंद लाल नेशनल कॉलेज में बीए, बीएससी और बीकॉम के विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ. रचना अग्रवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली की जानकारी दी।
डिजिटल अरेस्ट : पहलगाम हमले से संबंध बता शिक्षा विभाग की रिटायर्ड महिला अफसर से सवा करोड़ की ठगी
गाजियाबाद। साइबर ठगों ने बेसिक शिक्षा विभाग की रिटायर्ड महिला अफसर को पहलगाम हमले में उनका नाम आने की बात कहकर डिजिटल अरेस्ट करके उनसे सवा करोड़ रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।
कांगड़ा पर्यटन की राजधानी, हमीरपुर को शिक्षा की राजधानी के रूप में करेंगे विकसित : सुक्खू
We will develop Kangra as the tourism capital and Hamirpur as the education capital: Sukhu
भाजपा की सरकार शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध : वित्त मंत्री
शाहजहांपुर। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि भाजपा की सरकार शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। डबल इंजन की सरकार में शिक्षकों के हित के लिए कई योजनाएं चलाई गईं हैं।
प्रदेशभर के वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत लगभग 44 हजार शिक्षकों और उनके आश्रितों को अब मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का सीधा लाभ मिलेगा। बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने इस संबंध में सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसके साथ ही योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। निदेशक ने बताया कि प्रदेश में कुल 1.60 लाख बेसिक और जूनियर हाईस्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 4.50 लाख शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से 4,600 वित्तविहीन बेसिक और जूनियर हाईस्कूलों में तैनात 44,000 शिक्षक भी अब इस योजना के दायरे में आ गए हैं। यह कदम वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत है। योजना का लाभ उठाने के लिए शिक्षकों को तय नियमों के तहत ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। शिक्षकों को सबसे पहले http://cmtcts-upsdc-gov-in पर जाकर अपना पंजीकरण करना होगा। पोर्टल पर उन्हें स्वयं और अपने सभी आश्रितों की पूरी जानकारी उनके आधार कार्ड के अनुसार ही दर्ज करनी होगी। शिक्षक के आवेदन से लेकर अंतिम स्वीकृति तक की प्रक्रिया चार स्तरों पर पूरी की जाएगी। सबसे पहले संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा ऑनलाइन आवेदन का सत्यापन और अनुमोदन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक यह जांच करेंगे कि शिक्षक की नियुक्ति नियमानुसार है या नहीं और वे निरंतर कार्यरत हैं या नहीं। इसके बाद आवेदन को खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के पास अग्रसारित किया जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा अनुमोदन मिलने के बाद फाइल अंतिम स्वीकृति के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के समक्ष भेजी जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आवेदन स्वीकार किए जाने के साथ ही सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। शिक्षा निदेशक ने निर्देश दिए हैं कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों से संबंधित सत्यापित एवं हस्ताक्षरित सूचना 07 दिवस के भीतर शिक्षा निदेशक कार्यालय को हार्ड और सॉफ्ट कॉपी में उपलब्ध कराई जाए।
जयपुर के स्कूल में पेटीज खाने के बाद छात्र की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. अभिभावक संघ ने 3 दिन का शिक्षा विभाग को अल्टीमेटम दिया है. अगर कार्रवई नहीं बड़ा प्रदर्शन होगा.
अभिजीत दीपके ने ऐलान किया है कि जल्द ही जंतर-मंतर पार्ट 2 शुरू किया जाएगा। इस बीच उन्होंने देशभर के जेन-जी और जेन-अल्फा से स्कूलों की अव्यवस्था का वीडियो बनाकर भेजने और वायरल करने का अनुरोध किया है, ताकि कॉकरोच टीम उसकी लड़ाई लड़ सकें।
मावली की नवपदस्थापित सीबीईओ प्रेरणा नौसालिया का शिक्षक संघ अंबेडकर ने अभिनंदन किया, शिक्षा और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा।
स्वतंत्रता दिवस पर जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए राम किंकर शाही मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से शिक्षा और केयर किट का वितरण किया गया। शुक्रवार को पटना के सी.पी. ठाकुर लेन, फ्रेजर रोड में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री के साथ खाद्य सामग्री और भारतीय तिरंगा भी दिया गया। कॉपी, पेन-पेंसिल समेत जरूरी सामग्री दी सीतामढ़ी के मेदनीपुर निवासी स्वर्गीय राम किंकर प्रसाद शाही की स्मृति में स्थापित फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को कॉपी, पेंसिल, पेन सहित अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री दी गई। इसके अलावा बच्चों को खाद्य सामग्री भी दी गई। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बच्चों को तिरंगा देकर उनमें देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का संदेश दिया गया। शिक्षा में आर्थिक अभाव को बाधा नहीं बनने देंगे फाउंडेशन के निदेशक सतीश कुमार ने कहा, आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बनना चाहिए। जरूरतमंद बच्चों को सहयोग देकर उन्हें बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन इसी उद्देश्य के साथ लगातार जनकल्याणकारी कार्य कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में जारी रहेगा काम सतीश कुमार ने बताया कि राम किंकर शाही मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से जरूरतमंद लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जाएंगे। फाउंडेशन का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों और परिवारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।
बाबू चंदू सिंह स्मारक पथ का उद्घाटन:शिक्षा मंत्री ने सहरसा नगर निगम की व्यवस्थाओं की सराहना की
सहरसा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 11 स्थित नया बाजार में शुक्रवार को बाबू चंदू सिंह स्मारक पथ का उद्घाटन किया गया। सूबे के शिक्षा मंत्री सह सहरसा जिले के प्रभारी मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिलापट्ट का अनावरण कर सड़क का लोकार्पण किया। इस अवसर पर नगर निगम क्षेत्र के विकास और जनसुविधाओं से संबंधित कार्यों पर चर्चा हुई, जिसमें जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिलाधिकारी दीपेश कुमार, नगर निगम की महापौर बैन प्रिया, नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा, उप नगर आयुक्त, स्वच्छता प्राधिकारी, रोकड़पाल और वार्ड पार्षद प्रतिनिधियों सहित नगर निगम के कई अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत किया गया और स्थानीय विकास कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की गई। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस अवसर पर नगर निगम द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने शहर में स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, यातायात प्रबंधन और कार्यक्रम की तैयारियों के लिए नगर निगम के अधिकारियों एवं कर्मियों को धन्यवाद दिया। मंत्री तिवारी ने कहा कि शहर के विकास के लिए केवल सड़क और भवन निर्माण ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए स्वच्छता, बेहतर यातायात व्यवस्था, सौंदर्यीकरण और नागरिक सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नगर निगम इन क्षेत्रों में कार्य कर शहर के समग्र विकास को गति दे रहा है। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय से आम लोगों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। नगर निगम के अधिकारियों ने इस दौरान शहर में चल रहे विभिन्न विकास और जनसुविधा संबंधी कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सहरसा शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए निगम लगातार प्रयासरत है। नगर निगम प्रशासन ने नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और शहर के समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस सड़क के उद्घाटन से स्थानीय लोगों में भी खुशी का माहौल देखा गया। निगम ने स्वच्छ, सुंदर और विकसित सहरसा के संकल्प को आगे बढ़ाने की बात कही।
शिक्षित बेटियों से डरती है भाजपा, इसलिए शिक्षा योजनाओं पर चला रही कैंची: टीकाराम जूली
जूली ने कहा कि दरअसल भाजपा शिक्षित समाज, खासतौर पर शिक्षित बच्चियों से डरती है, क्योंकि शिक्षा व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक, सवाल पूछने वाला और सही-गलत में फर्क करने वाला बनाती है। यही वजह है कि भाजपा सरकार बेटियों की शिक्षा को मजबूत करने वाली योजनाओं में कटौती कर रही है।
हरियालो राजस्थान की दिशा में बढ़ा कदम, शिक्षा सहकारी-स्काउट गाइड वाटिका का हुआ उद्घाटन
कोटा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दसलाना में ‘शिक्षा सहकारी-स्काउट गाइड वाटिका’ का उद्घाटन हुआ। ‘हरियालो राजस्थान’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर संरक्षण का संकल्प लिया गया।
प्रदेश में तीन लाख से अधिक शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों द्वारा शाम को छुट्टी के समय एक साथ लॉग आउट करने के चलते सर्वर पर बढ़ा लोड शुक्रवार को भी असरकारी रहा। इसे देखते हुए विभाग ने सभी शिक्षकों को एसएमएस भेजकर बगैर लॉग आउट किए ही शाम की अटेंडेंस लगने की सुविधा दे दी। अब अगले तीन दिनों में सर्वर की कैपिसटी बढ़ाने का काम पूरा कर लिया जाएगा ताकि एक साथ लॉग आउट की स्थिति में भी शिक्षकों की अटेंडेंस आसानी से लग सके। आज स्कूल पहुंचे शिक्षकों को विभाग ने मैसेज भेजकर जानकारी दी कि ई अटेंडेंस के सफलतापूर्वक लॉग इन करने वाले सभी कर्मचारियों को 14 अगस्त को स्वत: लॉग आउट कर दिया जाएगा। इसलिए कर्मचारियों की मैन्युअली लॉगआउट करने की आवश्यकता नहीं है। इस मामले में लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि सर्वर की कैपिसटी बढ़ाने का काम किया जा रहा है। अगले दो तीन दिनों में कैपिसिटी बढ़ाने का काम हो जाएगा। इसके बाद लॉग आउट समय पर एक साथ लोड बढ़ने पर भी दिक्कत नहीं होगी। बैरसिया के सोहाया हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंचे कमिश्नर जन विश्वास अभियान के चलते लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह आज शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोहाया, भोपाल का आकस्मिक निरीक्षण करने पहुंचे। यहां उन्होंने विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से शिक्षण व्यवस्था, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संबंध में चर्चा की। कमिश्नर ने क्लास में बच्चों को पढ़ाने के तरीके और विद्यालय की गतिविधियों को भी दो घंटे से अधिक समय तक मौजूद रहकर देखा। निरीक्षण के दौरान भोपाल जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य एवं एपीसी विनोद गुप्ता उपस्थित रहे। समस्याओं के निराकरण का आयुक्त ने दिया आश्वासन लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के विद्यालय निरीक्षण के बाद नवीन शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति, क्रमोन्नति, टीईटी परीक्षा, ई-अटेंडेंस एवं अन्य सेवा संबंधी समस्याओं के संबंध में चर्चा कर उनका ध्यान आकर्षित कराया गया। आयुक्त ने आश्वस्त किया कि शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि आयुक्त सिंह ने कहा कि आगामी माह में पदोन्नति एवं टीईटी परीक्षा से संबंधित समस्याओं के निराकरण की दिशा में कार्रवाई पूर्ण होने की संभावना है। वहीं ई-अटेंडेंस में तकनीकी त्रुटि के कारण किसी भी शिक्षक को अनुपस्थिति के आधार पर वेतन कटौती की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा, ऐसा आश्वासन भी दिया गया।
असम उच्च शिक्षा परिषद संस्थानों को देगा नई मजबूती, राज्य के छात्रों को भी मिलेगी बेहतर शिक्षा
गुवाहाटी, 14 अगस्त . असम के Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर दिया. उनके मुताबिक, हम राज्य में शिक्षा प्रणाली को प्रस्तावित ‘असम उच्च शिक्षा परिषद’ के तहत संगठित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम रहे हैं. सीएम सरमा ने कहा कि परिषद उच्च शिक्षा प्रणाली ... Read more
pc: jagran यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) के तहत प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पदों के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के पास एप्लीकेशन प्रोसेस पूरा करने के लिए सिर्फ़ 14 अगस्त तक का समय है। जो लोग एलिजिबल हैं और जिन्होंने अभी तक अपने एप्लीकेशन जमा नहीं किए हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे आखिरी समय तक इंतज़ार किए बिना प्रोसेस पूरा कर लें। एप्लीकेंट UPSC की ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in के ज़रिए अपने फॉर्म जमा कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स रिक्रूटमेंट डिटेल्स के मुताबिक, UPSC कुल 124 प्रिंसिपल पद भरेगा। इनमें से 72 पद पुरुष कैंडिडेट्स के लिए और 52 महिला कैंडिडेट्स के लिए रिज़र्व हैं। रिक्रूटमेंट ड्राइव में 704 वाइस प्रिंसिपल पद भी भरे जाएंगे। इसमें पुरुष कैंडिडेट्स के लिए 364 पद और महिला कैंडिडेट्स के लिए 340 पद शामिल हैं। एज लिमिट प्रिंसिपल पद के लिए, कैंडिडेट्स की उम्र ज़्यादा से ज़्यादा 50 साल होनी चाहिए। वाइस प्रिंसिपल पद के लिए, ज़्यादा से ज़्यादा उम्र 35 साल है। रिज़र्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को लागू सरकारी नियमों के मुताबिक उम्र में छूट मिलेगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन इन पोस्ट के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के पास तय ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। एप्लिकेंट्स को एप्लीकेशन सबमिट करने से पहले डिटेल्ड एजुकेशनल और एलिजिबिलिटी रिक्वायरमेंट के लिए ऑफिशियल रिक्रूटमेंट नोटिफिकेशन को ध्यान से देखना चाहिए। UPSC प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल रिक्रूटमेंट 2026 के लिए अप्लाई कैसे करें एलिजिबल कैंडिडेट्स इन स्टेप्स को फॉलो करके अपना एप्लीकेशन पूरा कर सकते हैं: ऑफिशियल UPSC वेबसाइट, upsc.gov.in पर जाएं। होमपेज पर अवेलेबल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सेक्शन में जाएं। UPSC प्रिंसिपल वाइस प्रिंसिपल रिक्रूटमेंट 2026 लिंक ढूंढें और सेलेक्ट करें। सभी ज़रूरी पर्सनल, एजुकेशनल और दूसरी डिटेल्स ध्यान से डालें। जानकारी देखने के बाद एप्लीकेशन फॉर्म सबमिट करें। एप्लीकेशन सक्सेसफुली सबमिट हो जाने के बाद, भविष्य के लिए एप्लीकेशन फॉर्म का एक प्रिंटआउट डाउनलोड करके रख लें। कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे डेडलाइन से पहले एप्लीकेशन प्रोसेस पूरा कर लें और फॉर्म में दी गई सभी जानकारी को ध्यान से वेरिफाई कर लें। उन्हें डिटेल्ड एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स और रिक्रूटमेंट से जुड़ी दूसरी जानकारी के लिए ऑफिशियल UPSC नोटिफिकेशन भी देखना चाहिए।
जनगणना 2027 में क्या-क्या पूछा जाएगा? नाम, उम्र, धर्म, जाति, शिक्षा, नौकरी से लेकर बैंक खाते तक पूछे जाएंगे 40 सवाल, देखे लिस्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में डीईओ-बीईओ बनाने को लेकर चल रहे विवाद का पटाक्षेप कर दिया है। जस्टिस बीडी गुरु ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कहा है कि केवल सीनियरिटी के आधार पर कोई भी अधिकारी उच्च पद पर दावा नहीं कर सकता। जूनियर को प्रभारी डीईओ और बीईओ बनाना शासन का प्रशासनिक फैसला है, जिस पर हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं नहीं करेगा। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने गरियाबंद में जूनियर को प्रभारी डीईओ नियुक्त करने के खिलाफ याचिका को खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा- वरिष्ठ को ही प्रभार देने कोई नियम नहीं जस्टिस गुरु ने कहा है कि केवल सीनियारिटी के आधार पर कोई भी अधिकारी उच्च पद के प्रभार पर दावा नहीं कर सकता। वर्तमान प्रभार देना एक अस्थायी व्यवस्था है। जब तक कोई नियम या कानून यह अनिवार्य न करे कि वरिष्ठ अधिकारी को ही प्रभार दिया जाएगा, तब तक केवल सीनियारिटी के बल पर किसी पद का प्रभार हासिल करने का कोई कानूनी या लागू कराने योग्य अधिकार नहीं बनता। बिलासपुर सहित कई जिलों में डीईओ नियुक्ति का रास्ता साफ हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बिलासपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में डीईओ और बीईओ की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि बिलासपुर में जूनियर को प्रभारी डीईओ नियुक्त करने के खिलाफ याचिका लगी है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान जस्टिस गुरु ने शासन के नियुक्ति आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके चलते यहां डीईओ नियुक्ति का मामला अधर में है। उनका महत्वपूर्ण फैसला आदेश के बाद अब बिलासपुर सहित अन्य जिलों में जूनियर को प्रभार देने का रास्ता खुल गया है। जूनियर को डीईओ बनाने के खिलाफ याचिका, हाईकोर्ट ने की खारिजदरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने 10 जून 2026 को एक आदेश जारी कर प्राचार्य राजेश चंद्राकर को गरियाबंद का प्रभारी डीईओ नियुक्त कर दिया। इस आदेश के खिलाफ गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक में पदस्थ बीईओ किशुन लाल मातवाले ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। बताया कि वे वर्ष 1995 से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं और राजेश चंद्रकर से काफी वरिष्ठ हैं। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा नियम 2026 के तहत वे डीईओ पद की पात्रता रखते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि शासन ने वरिष्ठता को नजरअंदाज कर कनिष्ठ अधिकारी को प्रभार सौंप दिया, जो कि सरकार के निर्देशों के खिलाफ है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि किसी अधिकारी को उच्च पद का प्रभार देने से पूर्व उसकी कार्यशैली और उपयुक्तता का आकलन करते समय सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस तरह के तथ्यों पर विचार करना पूरी तरह जायज है। कोर्ट ने कहा कि प्रभार सौंपने के लिए वरिष्ठता के अलावा प्रशासनिक आवश्यकता, अनुभव और अधिकारी की समग्र उपयुक्तता देखना जरूरी है। नियम उल्लंघन या दुर्भावना साबित न होने पर हाईकोर्ट प्रशासनिक फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
हर घर तिरंगा अभियान: पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर में अपने आवास पर फहराया राष्ट्रीय ध्वज
HNBGUL Recruitment 2026: हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने गैर-शिक्षण पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती के लिए 17 अगस्त से आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती से जुड़ा विस्तृत विवरण नीचे पढ़ सकते हैं।
हरियाणा में महेंद्रगढ़ जिला के कनीना स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से निलंबित प्राचार्य नरेश कुमार को हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने दोबारा कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा उनके निलंबन आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद की गई है। शिक्षा निदेशालय की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल को जारी पत्र में बताया गया है कि प्राचार्य नरेश कुमार को 19 जुलाई 2026 को निलंबित किया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सीडब्ल्यूपी (CWP) नंबर 23505/2026, नरेश कुमार बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य शीर्षक से याचिका दायर की। सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान हुए थे निलंबित प्राचार्य नरेश कुमार को सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान उनके स्कूली बच्चों द्वारा स्कूल के बाहर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करने तथा सीजेपी प्रोटेस्ट का समर्थन करने पर निलंबित किया गया था। यह प्रोटेस्ट बच्चों ने स्कूल के बाहर जाकर किया था। इस पर प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया था। जिसके खिलाफ जिला भर के शिक्षा अधिकारियों ने निलंबिन वापस लेने के लिए डीसी को ज्ञापन भी दिया था। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल देव सिंह की उपस्थिति दर्ज करने के बाद जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और अगली सुनवाई 10 फरवरी 2027 निर्धारित की है। साथ ही अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए 19 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश पर रोक (स्टे) बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं पदभार करेंगे ग्रहण हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल को निर्देश दिए हैं कि प्राचार्य नरेश कुमार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में पुनः कार्यभार ग्रहण कराया जाए तथा इसकी सूचना निदेशालय को भेजी जाए। शिक्षा निदेशालय का यह आदेश 13 अगस्त 2026 को पंचकूला से जारी किया गया है।
12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाली छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। देश के जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी अजीम प्रेमजी के नेतृत्व वाले 'अजीम प्रेमजी फाउंडेशन' (Azim Premji Foundation) ने वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए 'अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026' (Azim Premji Scholarship 2026) के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली मेधावी छात्राओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके सपनों को नई उड़ान देना है। इस छात्रवृत्ति योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी गई है और योग्य छात्राएं 31 अगस्त 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकती हैं।अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026: क्या है योजना और कितनी मिलेगी सहायता राशि?अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संचालित यह स्कॉलरशिप प्रोग्राम देश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा में लड़कियों के ड्रॉप-आउट रेट (पढ़ाई छोड़ने की दर) को कम करने के लिए शुरू किया गया एक क्रांतिकारी कदम है। इस योजना के तहत चुनी गई प्रत्येक पात्र छात्रा को उनकी उच्च शिक्षा की पूरी अवधि के लिए सालाना ₹30,000 की वित्तीय सहायता राशि प्रदान की जाती है।सालाना छात्रवृत्ति: ₹30,000 प्रति वर्ष।कोर्स की अवधि: 2 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक के अंडरग्रेजुएट (UG) डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए सहायता मिलेगी।कुल वित्तीय मदद: यदि कोई छात्रा 3 साल का ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स कर रही है, तो उसे कुल ₹90,000 मिलेंगे, जबकि 5 साल के प्रोफेशनल/एकीकृत कोर्स (जैसे BA LLB, B.Tech आदि) के लिए कुल सहायता राशि ₹1,50,000 तक होगी।भुगतान का माध्यम: स्कॉलरशिप की राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थी छात्रा के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।उपयोग की स्वतंत्रता: प्राप्त छात्रवृत्ति राशि का उपयोग छात्राएं अपनी कॉलेज ट्यूशन फीस, किताबें, हॉस्टल खर्च या पढ़ाई से जुड़े किसी भी व्यक्तिगत खर्च को पूरा करने के लिए कर सकती हैं।निशुल्क आवेदन: फाउंडेशन द्वारा इस पूरी आवेदन प्रक्रिया के लिए किसी भी स्तर पर कोई आवेदन शुल्क या प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती है।कौन सी छात्राएं हैं पात्र? जानिए योग्यता की पूरी शर्तेंअजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026 के लिए पात्रता मानदंड बेहद सरल और सुलभ रखे गए हैं, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लड़कियां इसका लाभ उठा सकें। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह किसी जाति, धर्म, पारिवारिक आय या केवल बोर्ड परीक्षा के अंकों (मेरिट) के आधार पर सीमित नहीं है।शैक्षणिक पृष्ठभूमि: छात्रा ने अपनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा किसी मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूल या सरकारी कॉलेज से नियमित (Regular) छात्रा के रूप में पास की हो।कॉलेज प्रवेश: सत्र 2026-27 में किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी विश्वविद्यालय/कॉलेज में अंडरग्रेजुएट (UG) डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के प्रथम वर्ष (First Year) में नियमित प्रवेश लिया हो।योग्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश: यह स्कॉलरशिप योजना देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, जिनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली (NCT), आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और पुडुचेरी शामिल हैं।अपात्रता की स्थिति: जो छात्राएं ओपन/डिस्टेंस लर्निंग (दूरस्थ शिक्षा) से पढ़ाई कर रही हैं या जो पहले से ही द्वितीय, तृतीय या चतुर्थ वर्ष में हैं, वे नए आवेदक के रूप में पात्र नहीं होंगी। इसके अलावा अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी या विप्रो की अन्य स्कॉलरशिप पाने वाली छात्राएं इसके दायरे से बाहर रहेंगी।आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज हैं जरूरी?ऑनलाइन फॉर्म भरते समय अभ्यर्थियों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी अपलोड करनी होगी। ध्यान रहे कि सभी दस्तावेज स्पष्ट और निर्दिष्ट साइज में ही अपलोड किए जाएं।आवेदक छात्रा की हाल की पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर।आधार कार्ड (पहचान पत्र के रूप में)।10वीं कक्षा की मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट।12वीं कक्षा की मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट।वर्तमान कॉलेज/यूनिवर्सिटी में प्रवेश का प्रमाण (फीस रसीद या बोनाफाइड सर्टिफिकेट)।बैंक खाता विवरण (पासबुक के पहले पन्ने की कॉपी या कैंसिल चेक)।ध्यान दें कि अपलोड किए जाने वाले सभी दस्तावेज केवल PDF, PNG या JPG फॉर्मेट में होने चाहिए, जिनका साइज 30 KB से 500 KB के बीच होना आवश्यक है।ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियास्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक छात्राएं नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके अपना फॉर्म जमा कर सकती हैं:सबसे पहले अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट azimpremjifoundation.org पर जाएं।होमपेज पर दिए गए 'Azim Premji Scholarship' सेक्शन के अंतर्गत 'Register New Applicants Cohort 2026' लिंक पर क्लिक करें।अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी (OTP) के जरिए सत्यापन करें।अपना यूजर आईडी और मजबूत पासवर्ड बनाकर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरा करें।अब अपने आईडी व पासवर्ड से लॉगिन करें और आवेदन पत्र में मांगी गई व्यक्तिगत, शैक्षणिक और बैंक संबंधी सभी जानकारियां सही-सही भरें।मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेजों को निर्धारित फॉर्मेट और साइज में स्कैन करके अपलोड करें।फॉर्म को अच्छी तरह री-चेक करें और 'Submit' बटन पर क्लिक करके आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।भविष्य के संदर्भ के लिए भरे गए आवेदन पत्र का एक प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।महत्वपूर्ण तारीखें और आगे की समय-सारणीअजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने पहले चरण के लिए आवेदन की समय-सीमा तय कर दी है:राउंड 1 आवेदन शुरू होने की तिथि: 10 अगस्त 2026राउंड 1 आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अगस्त 2026राउंड 2 आवेदन अवधि: 10 जनवरी 2027 से 31 जनवरी 2027 तकपुराने छात्रों के लिए रिन्यूअल की तिथि: सितंबर 2026 में रिन्यूअल विंडो खुलेगी।महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदमअजीम प्रेमजी फाउंडेशन का लक्ष्य प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक लड़कियों को इस स्कॉलरशिप के माध्यम से उच्च शिक्षा से जोड़ना है। फाउंडेशन का मानना है कि जब एक लड़की शिक्षित होती है, तो वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारती है, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यदि आप या आपके परिचित में कोई योग्य छात्रा है जिसने हाल ही में 12वीं पास करके कॉलेज में दाखिला लिया है, तो 31 अगस्त 2026 से पहले इस योजना में आवेदन करके इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।
गलत आदेश पारित कर रहे जिला विद्यालय निरीक्षक:हाईकोर्ट ने कहा- निदेशक माध्यमिक शिक्षा हाजिर हों
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्य पद के वेतन भुगतान से जुड़े मामलों में जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा बार-बार गलत आदेश पारित किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने इसे गंभीर और अवमाननापूर्ण करार दिया। क्या है मामला जानिये याची स्मित तिवारी के अधिवक्ता ने बताया कि पहले अदालत ने वीरेश चंद्र मिश्रा प्रकरण में तय कानून के आधार पर डीआईओएस को याची को प्रधानाचार्य पद का बकाया व वर्तमान वेतन तीन माह में देने का आदेश दिया था। लेकिन डीआईओएस-2, कानपुर नगर ने सिंगल जज के उस पुराने फैसले के आधार पर आदेश पारित कर दिया, जिसे स्पेशल अपील में पहले ही संशोधित किया जा चुका था। निदेशक व्यक्तिगत रूप पेश हों अदालत ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मिलते-जुलते मामले आ रहे हैं जहां विभिन्न डीआईओएस निर्देशों के बावजूद गलत आदेश जारी कर रहे हैं। इससे पहले प्रमोद कुमार व अन्य मामले में भी अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को हलफनामा दाखिल करने को कहा था, और सुनील कुमार मिश्रा मामले में भी इस मुद्दे पर संज्ञान लिया गया था। अदालत ने निर्देश दिया है कि निदेशक, शिक्षा (माध्यमिक) अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करें कि अधिकारी अदालत के आदेशों और वीरेश चंद्र मिश्रा प्रकरण में तय कानूनी स्थिति की खुलेआम अवहेलना क्यों कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे होगी।
पाली के बांगड़ कॉलेज में अब स्टूडेंट जर्मन भाषा सीख सकेंगे। कॉलेज में गुरुवार से जर्मन भाषा की कक्षाओं की शुरुआत की गई। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि विदेशी भाषा सीखने से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ रोजगार और कॅरियर के नए अवसर मिलेंगे। जर्मनी में पढ़ाई और रोजगार के अवसर मिलेंगे कॉलेज प्राचार्य डॉ. विनीता कोका ने बताया कि वर्तमान समय में विदेशी भाषाओं का ज्ञान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के साथ उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी उपयोगी साबित हो रहा है। जर्मन भाषा सीखने से स्टूडेंट को जर्मनी सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा, रोजगार और कॅरियर के नए अवसर हासिल करने में मदद मिलेगी। भाषा के साथ जर्मनी की संस्कृति भी सीखेंगे कॉलेज के फॉरेन लैंग्वेज संयोजक सहायक आचार्य गोमाराम ने बताया कि स्टूडेंट में जर्मन भाषा सीखने को लेकर खासा उत्साह है। कक्षाओं में भाषा सिखाने के साथ विद्यार्थियों को जर्मनी की संस्कृति, संवाद कौशल और व्यावहारिक भाषा से भी परिचित कराया जाएगा। नई भाषा से नई सोच और अवसरों से जुड़ेंगे प्राचार्य डॉ. विनीता कोका ने स्टूडेंट को इस पहल का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नई भाषा सीखना केवल नए शब्द सीखना नहीं है, बल्कि नई संस्कृति, नई सोच और नए अवसरों की दुनिया से जुड़ना भी है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की पहल कॉलेज प्रशासन के अनुसार जर्मन भाषा की कक्षाओं की शुरुआत स्टूडेंट को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे शिक्षा को कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड में तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा, मुख्य सचिव ने रोडमैप तैयार करने के दिए निर्देश
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने उत्तराखंड में तकनीकी शिक्षा को रोजगारपरक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थानों के बीच के अंतर को कम करने, इंटर्नशिप व रोजगार मेलों को बढ़ावा देने और 5-6 तकनीकी शिक्षा हब विकसित करने पर जोर दिया।
RRB JE Recruitment 2026 का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे भर्ती बोर्ड ने जूनियर इंजीनियर, डिपो मटेरियल सुपरिटेंडेंट और केमिकल एंड मेटालर्जिकल असिस्टेंट के 4098 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने मदरसों का रिकॉर्ड किया तलब, 30 सितंबर तक लेनी होगी मान्यता
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने मदरसों से 30 सितंबर तक मान्यता लेने को कहा है, जिसके बाद अवैध मदरसों पर कार्रवाई की जाएगी। धार्मिक शिक्षा के लिए नए नियम भी प्रभावी हो गए हैं।
मानदेय भुगतान को लेकर मां बाड़ी शिक्षा सहयोगी संघ ने सौंपा ज्ञापन
किशनगंज| स्वच्छ परियोजना के तहत जिले भर में चल रहे मां बाड़ी और डे-केयर केंद्रों के शिक्षा सहयोगियों ने बकाया मानदेय भुगतान की मांग उठाई। मां बाड़ी शिक्षा सहयोगी संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र दीवान के नेतृत्व में गुरुवार को शिक्षा सहयोगी जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्टर बालमुकुंद असावा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के दौरान राजेंद्र दीवान ने कहा कि पिछले 2 माह से रुका मानदेय एक साथ दिलाया जाए। स्वच्छ परियोजना कार्यालय में रिक्त परियोजना अधिकारी पद पर अधिकारी की नियुक्ति की जाए। संघ ने चेतावनी दी कि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो 17 अगस्त से जिले के मां बाड़ी और डे-केयर केंद्र बंद कर कलमबंद हड़ताल की जाएगी। ज्ञापन देने वालों में हरिओम, कालूराम, रामप्रसाद, शिवप्रसाद, राधेश्याम, सोनू, संजय, धनराज, गुरदीप, सेवाराम, रामलाल, सुनील, हरिमोहन आदि शामिल रहे।
Lucknow News: पुनर्वास विवि के छह विद्यार्थियों का डीएसएसएसबी से शिक्षा सेवा में चयन
पुनर्वास विवि के छह विद्यार्थियों का डीएसएसएसबी से शिक्षा सेवा में चयन
कुंभ राशिवालों का सम्मान बढ़ेगा, शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलेगी, जानें दैनिक राशिफल
Aquarius Daily Horoscope, 14 August 2026 Aaj Ka Kumbh Rashifal in Hindi: मेहनत का अच्छा फल मिलेगा, अचानक कोई अच्छी खबर मिलेगी, आपका सम्मान बढ़ेगा, शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलेगी, धन कमाने के नए रास्ते तलाशने का समय है.
Kanpur News: नगर निगम विद्यालयों की बालिकाओं को मिलेगी एआई आधारित शिक्षा
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने गुरुवार को फिक्की फ्लो के पदाधिकारियों के साथ दो एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
Mahoba News: शिक्षा के 10 मानकों का अध्यापक करेंगे पालन
महोबा। निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई के 10 नए मानक तय किए हैं।
Children will not carry school bags on Saturdays; learning will take place through activity-based education.
Fatehpur News: किताबी ज्ञान संग व्यावहारिक कौशल सीखकर कमाई करेंगे आईटीआई प्रशिक्षार्थी
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में प्रशिक्षार्थियों को कौशल के साथ आय का अवसर उपलब्ध कराने के लिए अर्न व्हाइल यू लर्न इनिशिएटिव शुरू किया जा रहा है।
योगी सरकार बेटियों की शिक्षा में बाधा न आए, इसके लिए स्कूलों में सुरक्षित और संवेदनशील माहौल बना रही है। मासिक धर्म स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए, प्रदेश के 75 जिलों में मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं ताकि छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो।
शिक्षक भर्ती (TRE-4) विज्ञापन में देरी से नाराज अभ्यर्थियों ने 18 अगस्त से पटना के गर्दनीबाग में महाआंदोलन और आमरण अनशन की घोषणा की है।
सीएम राइज प्रस्तावित स्कूल का निरीक्षण:जिला शिक्षा अधिकारी ने गंदगी, अव्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी
निवाड़ी जिले के तरीचर कलां स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में गुरुवार को जिला शिक्षा अधिकारी उन्मेष श्रीवास्तव ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान स्कूल की साफ-सफाई, बिजली, पेयजल, शौचालय और विद्यार्थियों की उपस्थिति सहित कई व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां पाई गईं। अव्यवस्थाएं देखकर जिला शिक्षा अधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की और स्कूल प्रबंधन को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी ने अलग-अलग कक्षाओं का दौरा किया और विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा पढ़ाई की स्थिति का जायजा लिया। कई जगहों पर गंदगी मिली और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति भी कम पाई गई। आधुनिक शिक्षा के लिए तैयार की गई कक्षाओं में बिजली न होने के कारण उपकरण बंद थे। विद्यार्थियों ने पंखे न चलने से गर्मी और उमस की शिकायत की। पेयजल और शौचालय की व्यवस्थाओं में भी कमी पाई गई। कक्षा 12वीं के एक कमरे में गुटखा थूका हुआ मिलने से स्कूल की अनुशासन व्यवस्था पर सवाल उठे। डीईओ उन्मेष श्रीवास्तव ने बताया कि यह स्कूल सीएम राइज योजना के लिए प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि स्टाफ उपस्थित था, लेकिन पुरानी बिल्डिंग में सफाई व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। सुधार के दिए निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी ने क्लासरूम की दीवारों की पुताई, साफ-सफाई और छत से पानी के लीकेज को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही, शिक्षकों और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने को भी कहा गया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने भी स्कूल की व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याएं अधिकारी के सामने रखीं। इनमें विद्यार्थियों के निर्धारित यूनिफॉर्म में नहीं आने और अनुशासन व्यवस्था से संबंधित मुद्दे शामिल थे।
दरभंगा में बिना रेगुलेशन वाले पीएचडी धारक ही बना रहे उच्च शिक्षा के नियम, यूजीसी पर गंभीर सवाल
आरटीआई से खुलासा हुआ है कि यूजीसी के जिन सदस्यों ने पीएचडी की मान्यता पर फैसले लिए, उन्होंने स्वयं बिना केंद्रीय रेगुलेशन के पीएचडी की थी। शिक्षाविदों ने पार्ट-टाइम और फुल-टाइम पीएचडी को समान मानने पर आपत्ति जताई है।
पटना में TRE-4, लाइब्रेरियन, AEDO, BSSC, BPSC और बिहार पुलिस भर्ती समेत विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों की महाबैठक गुरुवार को कृष्णा घाट पर हुई। छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में आयोजित बैठक में भर्ती प्रक्रिया और लंबित विज्ञापनों को लेकर आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक खत्म होने के बाद छात्रों ने 18 अगस्त से पटना के गर्दनीबाग में आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया। वहां पर 5 दिनों के अंदर मांग पूरी नहीं हुई तो शिक्षा मंत्री के आवास और विधानसभा का घेराव होगा। TRE-4 के विज्ञापन को लेकर छात्रों में नाराजगी छात्रों की प्रमुख मांगों में TRE-4 का विज्ञापन जारी करना शामिल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे छात्रों को नई भर्ती का इंतजार है। TRE-4 के विज्ञापन में हो रही देरी से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ रही है। छात्रों ने जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग बैठक में छात्रों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई। छात्रों का कहना है कि शिक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है। 18 अगस्त से आमरण अनशन का ऐलान बैठक के बाद छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा, 18 अगस्त से पटना में छात्र आमरण अनशन पर बैठेंगे। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन में TRE-4 के अलावा लाइब्रेरियन, AEDO, BSSC, BPSC, दारोगा, सिपाही और सिविल कोर्ट चपरासी भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के शामिल होने की बात कही गई है। दिल्ली और झारखंड के बाद पटना में प्रदर्शन की तैयारी छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा, छात्रों ने सरकार से मांगों पर जल्द पहल करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो 18 अगस्त से प्रस्तावित आमरण अनशन को बड़े आंदोलन में बदला जाएगा।
झांसी में प्रदेश सरकार की कैबिनेट के उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर योगेंद्र उपाध्याय ने जंतर मंतर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को जायज ठहराया है। बोले, पैलेट गन क्यों दी गई है?। जब प्रदर्शन में देशद्रोही शामिल हो गए थे, जिन्होंने भारत को गाली दी, महापुरुषों को गाली दी, भारत के भगवानों को गाली दी। हमारे प्रधानमंत्री के लिए अमर्यादित शब्द इस्तेमाल किए ऐसे में क्या करना चाहिए था। बोले हिंसा के खिलाफ हर कदम को मैं जायज मानता हूं। पहले 2 तस्वीर देखिए… उच्च शिक्षा मंत्री झांसी की बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में आयोजित 31वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। यहां कार्यक्रम के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं है। वहीं, दिल्ली के जंतर मंतर और उसके बाद झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर कहा कि पेपर लीक नहीं होने चाहिए। बोले उत्तर प्रदेश में पहले पेपर लीक की पूरी श्रृंखला चलती थी, उन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त था। अब जब से योगी जी सत्ता में आए हैं पेपर लीक होना न के बराबर हो गया है। इसके अलावा लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कानून बनाया है वह इतना कड़ा और अच्छा है कि पेपर लीक करने वालों के होश ठिकाने रहेंगे। जब उनसे दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान चली पैलेट गन के आरोपों और आरटीआई में इसकी पुष्टि को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि आप बताएं पैलेट गन क्यों दी गई है ? बोले अगर कोई हिंसा करेगा, राष्ट्रद्रोही शामिल हो गए थे उस आंदोलन में। कहा छात्र आंदोलन था, जंतर मंतर पर उन्होंने अनुशासित ढंग से अपनी मांग को रखा। लेकिन जब उसमें आवश्यक लोग शामिल हो गए, जो भारतीय संस्कृति को गरिया रहे थे, भारतीय महापुरुषों को गाली दे रहे थे, भारत के भगवानों को गाली दे रहे थे और प्रधानमंत्री के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कर रहे थे, तब क्या करना चाहिए था।जब उनसे पूछा गया कि वह पैलेट गन के इस्तेमाल को जायज मानते हैं तो बोले, मैं हर चीज को जायज मानता हूं, कोई अगर हिंसा करेगा तो हर चीज जायज है।
बिहार में माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) का रिजल्ट जारी होने के बाद ही बीपीएससी टीआरई 4 शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन होगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गुरुवार को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि टीआरई 4 के लिए एसटीईटी में बैठने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे।
कांवड़ लेकर फीस माफी की मांगी थी दुआ; DM ने भाई-बहनों की फ्री शिक्षा की व्यवस्था कर दी
कांवड़ यात्रा के दौरान स्कूल फीस माफ होने की मन्नत मांगने वाले मथुरा के चार बच्चों की डीएम ने सुध ली। कलक्ट्रेट में बच्चों को ड्रेस, बैग, किताबें समेत जरूरी सामग्री दी गई। एसडीएम छाता ने चारों को गोद लेकर उनकी पूरी शिक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी संभाली है। अब बच्चों से स्कूल फीस नहीं ली जाएगी।
इंडियन ओवरसीज बैंक में लोकल बैंक ऑफिसर पदों पर आवेदन शुरू
जो भी अभ्यर्थी भर्ती के लिए पात्रता पूरी करते हैं वे ऑनलाइन माध्यम से ऑफिशियल वेबसाइट www.iob.in या डायरेक्ट पोर्टल पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं। अन्य किसी भी प्रकार से फॉर्म स्वीकार नहीं किये जायेंगे।
जहानाबाद में गुरुवार को एक बैठक की गई जिसमें आगामी 29 अगस्त को गया में होने वाले छात्र युवा संसद सम्मेलन की तैयारियों को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शिक्षा के निजीकरण और बढ़ती फीस के खिलाफ आवाज उठाई गई, साथ ही छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। शहर के एक निजी हॉल में आयोजित इस बैठक का नेतृत्व इंकलाबी नौजवान सभा (RYA) के जिला संयोजक डॉ. धनंजय कुमार और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के संयोजक नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। बैठक में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। वक्ताओं ने शिक्षा के बढ़ते निजीकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। बैठक में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में बदलाव, परीक्षा में पेपर लीक की घटनाओं पर रोक और लगातार बढ़ रही फीस पर नियंत्रण की मांग की गई। छात्र नेताओं ने जोर दिया कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों की अनदेखी और उनके शोषण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने छात्रों के अधिकार, सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए छात्र-युवा आंदोलन को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के दौरान, सभी छात्रों और युवाओं से 29 अगस्त को गया में आयोजित होने वाले छात्र युवा संसद सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की गई, ताकि जहानाबाद से भी बड़ी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के मौके ढूंढ रही महिलाओं के पास एक और ऑप्शन है। राज्य के अलग-अलग ज़िलों में आंगनवाड़ी वर्कर और आंगनवाड़ी हेल्पर के पदों के लिए भर्ती चल रही है। कुछ ज़िलों में एप्लीकेशन पहले से ही चल रहे हैं, जबकि कई दूसरे ज़िलों में रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गया है। जिन योग्य महिलाओं ने Class 12 पास कर ली है, वे अपने ज़िले के लिए बताए गए शेड्यूल के हिसाब से ऑनलाइन अप्लाई कर सकती हैं। क्योंकि भर्ती ज़िले के हिसाब से हो रही है, इसलिए एप्लिकेंट को अपना फॉर्म जमा करने से पहले संबंधित नोटिफिकेशन को ध्यान से देख लेना चाहिए। एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया यह भर्ती सिर्फ़ महिला कैंडिडेट के लिए है। एप्लिकेंट को उस ज़िले का परमानेंट निवासी होना चाहिए जहाँ से वे अप्लाई कर रहे हैं। कैंडिडेट को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से Class 12 पास होना चाहिए। भर्ती नियमों के तहत पोस्टग्रेजुएट क्वालिफिकेशन को ज़्यादा से ज़्यादा एजुकेशनल क्वालिफिकेशन माना जा सकता है। कम से कम उम्र 18 साल है, जबकि ज़्यादा से ज़्यादा उम्र 35 साल है। रिज़र्व कैटेगरी की महिलाओं को लागू सरकारी नियमों के हिसाब से उम्र में छूट मिल सकती है। जिले के अनुसार आवेदन की लास्ट डेट एवं पदों की संख्या घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई करें योग्य कैंडिडेट मोबाइल फ़ोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल करके ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेस पूरा कर सकते हैं। अप्लाई करने के लिए, ऑफिशियल रिक्रूटमेंट वेबसाइट पर जाएं और रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को फॉलो करें। सबसे पहले, upanganwadibharti.in खोलें और नया आंगनवाड़ी रिक्रूटमेंट रजिस्ट्रेशन ऑप्शन चुनें। रजिस्ट्रेशन पूरा करने के लिए ज़रूरी पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स डालें। रजिस्ट्रेशन के बाद, लॉग इन करें और बाकी जानकारी ध्यान से भरें। पूरा किया हुआ एप्लीकेशन सबमिट करें और भविष्य के लिए एक प्रिंटआउट या डिजिटल कॉपी अपने पास रखें। कोई एप्लीकेशन फीस नहीं इस रिक्रूटमेंट का एक बड़ा फायदा यह है कि महिला कैंडिडेट्स को एप्लीकेशन फीस नहीं देनी होगी। सभी कैटेगरी के एप्लीकेंट अपने फॉर्म फ्री में जमा कर सकते हैं। बिना रिटर्न एग्जाम के सिलेक्शन आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर पोस्ट के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स को रिटन एग्जाम या इंटरव्यू नहीं देना होगा। सिलेक्शन मुख्य रूप से रिक्रूटमेंट प्रोसेस में तय एलिजिबिलिटी और मेरिट क्राइटेरिया के आधार पर होगा। मेरिट के आधार पर शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स को बाद में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा। ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन और सभी लागू शर्तों को पूरा करने के बाद फाइनल सिलेक्शन किया जाएगा।
GPSTR Recruitment 2026: 15000 स्कूल टीचर पदों पर निकली भर्ती, जानें डिटेल्स और करें आवेदन
pc: Safety Course at NISHE कर्नाटक स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी डिपार्टमेंट ने 12 अगस्त को ग्रेजुएट प्राइमरी स्कूल टीचर जॉब्स के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। रिक्रूटमेंट के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस 18 अगस्त से शुरू होगा। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव में ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर (GPT), असिस्टेंट मास्टर (AM), प्राइमरी स्कूल टीचर (PST), फिजिकल एजुकेशन टीचर (PET), कंप्यूटर साइंस टीचर (CST) पोस्ट के साथ 15,000 वैकेंसी शामिल हैं। इससे 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए सरकारी प्राइमरी और हाई स्कूलों के लिए टीचर्स की भर्ती की जाएगी। इंटरेस्टेड और एलिजिबल कैंडिडेट ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ सकते हैं, देख सकते हैं कि वे एलिजिबल हैं या नहीं और schooleducation.karnataka.gov.in पर 7 सितंबर तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। ज़रूरी तारीखें: नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख: 12 अगस्त एप्लीकेशन शुरू होने की तारीख: 18 अगस्त एप्लीकेशन खत्म होने की तारीख: 7 सितंबर एप्लीकेशन मोड: ऑनलाइन फीस पेमेंट की आखिरी तारीख: 10 सितंबर एडमिट कार्ड जारी होने की तारीख: अभी अनाउंस नहीं हुई है लिखित परीक्षा की तारीख: अभी अनाउंस नहीं हुई है वैकेंसी: कुल: 15,000 GPSTR: 8,500 असिस्टेंट मास्टर (AM): 4,500 प्राइमरी स्कूल टीचर (PST): 900 फिजिकल एजुकेशन टीचर (PET): 600 कंप्यूटर साइंस टीचर (CST): 500 एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया: कैंडिडेट के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या इंस्टीट्यूशन से 12वीं, डिप्लोमा, डिग्री, ग्रेजुएशन होना चाहिए। पोस्ट के हिसाब से सब्जेक्ट की क्वालिफिकेशन की ज़रूरत जानने के लिए schooleducation.karnataka.gov.in वेबसाइट पर ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ें। कैंडिडेट भारत का नागरिक होना चाहिए। उम्र सीमा: जनरल: 21-40 साल 2A, 2B, 3A, 3B: 3 साल की छूट (43 साल तक) SC/ST: 5 साल की छूट (45 साल तक) एप्लीकेशन फीस: जनरल और पिछड़ा वर्ग: Rs 750 SC, ST और PwD: Rs 500 सिलेक्शन प्रोसेस: कॉम्पिटिटिव रिटन एग्जाम (कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट) फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट / फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (फिजिकल एजुकेशन टीचर के लिए) डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स: एजुकेशनल क्वालिफिकेशन सर्टिफिकेट और मार्कशीट TET सर्टिफिकेट (अगर लागू हो) आधार कार्ड या कोई दूसरा वैलिड पहचान का सबूत तालुक/जिले का डोमिसाइल/रेजिडेंस सर्टिफिकेट जाति सर्टिफिकेट (अगर रिजर्व्ड कैटेगरी में अप्लाई कर रहे हैं) पासपोर्ट-साइज़ फोटो ऑफिशियल नोटिफिकेशन में बताया गया कोई दूसरा डॉक्यूमेंट अप्लाई कैसे करें: कर्नाटक स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं schooleducation.karnataka.gov.in. कर्नाटक टीचर रिक्रूटमेंट 2026 एप्लीकेशन लिंक ढूंढें। वैलिड मोबाइल नंबर और ईमेल ID का इस्तेमाल करके रजिस्ट्रेशन पूरा करें। लॉग इन करें और सभी पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स भरें। ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स, फोटोग्राफ और सिग्नेचर बताए गए फॉर्मेट में अपलोड करें। ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से एप्लीकेशन फीस भरें। फाइनल सबमिशन से पहले सभी भरी हुई डिटेल्स को ध्यान से देखें। एप्लीकेशन सबमिट करें और कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करें। आगे के रेफरेंस के लिए सबमिट किए गए एप्लीकेशन का प्रिंटआउट या सॉफ्ट कॉपी रखें।

