राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) ने कक्षा 12वीं का परिणाम मंगलवार को जारी किया। उदयपुर जिले का प्रदर्शन इस बार मिश्रित रहा। विज्ञान संकाय में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कॉमर्स और कला संकाय ने बेहतर प्रदर्शन किया। तीनों संकायों का कुल परिणाम 96 प्रतिशत से अधिक रहा, जो जिले की शिक्षा गुणवत्ता को दर्शाता है। विज्ञान संकाय का परिणाम 96.32 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष के 98.64 प्रतिशत के मुकाबले 2.32 प्रतिशत कम है। वहीं, कॉमर्स में 0.12 प्रतिशत और कला संकाय में 0.01 प्रतिशत की हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले वर्ष कॉमर्स का परिणाम 98.96 प्रतिशत और कला का 97.13 प्रतिशत रहा था। इस बार विज्ञान संकाय में छात्रों और छात्राओं के परिणाम में क्रमशः 2.86 प्रतिशत और 2.26 प्रतिशत की कमी आई है। इसके विपरीत, कॉमर्स में छात्रों का परिणाम 0.19 प्रतिशत और छात्राओं का 0.58 प्रतिशत बढ़ा है। कला संकाय में भी छात्रों का परिणाम 0.71 प्रतिशत और छात्राओं का 0.33 प्रतिशत बढ़ा है। प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की बात करें तो कला संकाय में सबसे अधिक 5573 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में पास हुए। विज्ञान में 5278 और कॉमर्स में 967 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी हासिल की। सफलता की कहानियां: संघर्ष और संकल्प शिक्षा मंत्री ने उदयपुर से जारी किया रिजल्ट राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) ने मंगलवार को कक्षा 12वीं के सभी संकायों और वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने उदयपुर कलेक्ट्रेट स्थित डीओआईटी सभागार से वर्चुअली बटन दबाकर परिणाम घोषित किया। इस वर्ष समेकित परीक्षा परिणाम 96.45 प्रतिशत रहा है। आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने मार्च महीने में ही 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए हैं शिक्षा मंत्री ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के कारण ही यह संभव हो पाया है। गौरतलब है कि इस बार 10वीं का परिणाम भी 24 मार्च को ही जारी किया जा चुका है।शिक्षा मंत्री ने भविष्य की योजनाओं और नियमों में बदलाव को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इसके अनुसार आगामी सत्र से विद्यार्थियों को वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा, जिससे मानसिक तनाव कम होगा और सुधार का अवसर बढ़ेगा। नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। इससे कार्यदिवसों की संख्या 235 से बढ़कर 244 हो जाएगी। इसके अलावा तीन विषयों में री-चेकिंग करवाई जा सकेगी। पहले केवल गणित में यह सुविधा थी। अब विज्ञान और अंग्रेजी में भी विद्यार्थी री-चेकिंग करा सकेंगे। इसी सत्र से बीकानेर और सीकर में सैनिक स्कूल शुरू होंगे, साथ ही संभाग स्तर पर वेद विद्यालयों का संचालन किया जाएगा। अनुशासन और सुविधाओं पर सख्तीमंत्री दिलावर ने स्पष्ट किया कि शिक्षण के दौरान शिक्षकों द्वारा मोबाइल फोन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही, प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान और सूर्य नमस्कार को संस्कार निर्माण का आधार बताया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी जर्जर भवन में कक्षाएं संचालित न की जाएं। विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वच्छ पेयजल हमारी प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को दी बधाई परिणाम जारी करने के बाद मंत्री दिलावर ने विभिन्न संकायों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से फोन पर बात कर उन्हें और उनके परिजनों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, सलूम्बर विधायक शांतादेवी और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी मौजूद रहे।
जेसन्स एकेडमी के डायरेक्टर जैसन जोसफ ने दैनिक भास्कर और IIM इंदौर द्वारा आयोजित ‘उद्यम संवाद’ लीडरशिप प्रोग्राम में भाग लेकर अपनी लीडरशिप स्किल्स को नई मजबूती दी। उन्होंने कहा कि यह प्रोग्राम उनके लिए प्रेरणादायक और परिवर्तनकारी अनुभव रहा, जिसने उन्हें शिक्षा क्षेत्र को नए विजन के साथ देखने की दिशा दी। जेसन्स एकेडमी के डायरेक्टर जैसन जोसफ ने दैनिक भास्कर और IIM इंदौर द्वारा आयोजित ‘उद्यम संवाद’ लीडरशिप प्रोग्राम में हिस्सा लेकर लीडरशिप और मैनेजमेंट से जुड़ी महत्वपूर्ण सीख हासिल की। उन्होंने बताया कि IIM इंदौर का यह प्रोग्राम उनके लिए पहला ऐसा अनुभव रहा, जिसने उन्हें नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और स्पष्ट दिशा प्रदान की। उनके अनुसार, इस प्रोग्राम ने उन्हें अपने कार्य को अधिक समर्पण और उत्साह के साथ करने की प्रेरणा दी। यहां से उन्होंने पांच महत्वपूर्ण सिद्धांतों को अपनाया, जिन्हें वे अपने संस्थान में लागू कर रहे हैं। पहली सीख समय की पाबंदी (Punctuality) की रही, जिसे उन्होंने किसी भी संस्थान की सफलता की आधारशिला बताया। दूसरी, निरंतरता (Consistency), क्योंकि लगातार प्रयास ही स्थायी परिणाम सुनिश्चित करते हैं। तीसरी सीख समर्पण (Dedication) की रही, जहां लक्ष्य प्राप्ति के लिए पूर्ण निष्ठा आवश्यक होती है। चौथी, फोकस (Focus), यानी लक्ष्य पर स्पष्ट ध्यान बनाए रखना सफलता की कुंजी है। पांचवीं और विशेष सीख कड़ी मेहनत के साथ राष्ट्रभावना और जिम्मेदारी को जोड़ने की रही। उनके अनुसार, शिक्षा केवल करियर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम ने उन्हें यह समझाया कि लीडरशिप का अर्थ केवल टीम का नेतृत्व करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देना भी है। एक सफल लीडर के लिए स्पष्ट विजन, ज्ञान और दृढ़ संकल्प बेहद जरूरी हैं। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने शॉर्टकट से दूर रहने, कड़ी मेहनत अपनाने और सही तरीके से सीखने पर जोर दिया। वहीं अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘उद्यम संवाद’ ने उनके विजन को विस्तार दिया और उन्हें एक बेहतर एजुकेशन लीडर बनने की दिशा प्रदान की।
लवन परिक्षेत्र के झेरिया यादव समाज के वार्षिक अधिवेशन में शिक्षा पर जोर दिया
लाहोद| लवन परिक्षेत्र झेरिया यादव समाज का वार्षिक अधिवेशन ग्राम चंगोरी पुरीधाम में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सामाजिक एकता संगठन की मजबूती और शिक्षा के स्तर को सुधारने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई अधिवेशन के दौरान समाज के भविष्य को संवारने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। समाज ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी सत्र से कक्षा 10वीं और 12वीं में सर्वोच्च (अधिकतम) अंक प्राप्त करने वाले यादव समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा ताकि युवाओं में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़े कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुजेराम यादव (वकील) एवं संरक्षक झेरिया यादव समाज जिला बलौदाबाजार-भाटापारा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शंकर लाल यादव ने की इस अवसर पर मेलाराम यादव (उपाध्यक्ष, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा) रामनाथ यादव (अध्यक्ष) लच्छमण यादव (उपाध्यक्ष आदि थे।
शिक्षा संस्कार केंद्र के बच्चों को एक साल के लिए गोद लिया
भैरूंदा| नगर पालिका अध्यक्ष मारुति शिशिर ने सिद्धपुर सेवा भारती के सेवा निधि संग्रह अभियान के तहत सबरी बस्ती के देवी अहिल्याबाई शिक्षा संस्कार केंद्र के बच्चों को एक साल के लिए गोद लिया। उन्होंने दिवंगत माता-पिता की स्मृति में केंद्र संचालन के लिए 20 हजार रुपए की राशि दी। समाजसेवी संतोष वर्मा ने केशव बस्ती के वाल्मीकि शिक्षा संस्कार केंद्र के बच्चों को एक साल के लिए गोद लिया। उन्होंने स्वर्गीय पिता नर्मदा प्रसाद वर्मा की स्मृति में 20 हजार रुपए सेवा भारती को सौंपे। इस मौके पर सिद्धपुर सेवा भारती समिति, सीहोर ने दोनों के प्रति आभार जताया। समिति सदस्यों ने कहा कि ऐसे सहयोग से वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा, संस्कार का मौका मिलता है। भविष्य की नींव मजबूत होती है। समिति ने समाज के अन्य लोगों से आगे आने की अपील की। जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा, संस्कार की रोशनी पहुंचाने की बात कही।
शिक्षा मंत्री को ज्ञापन, रखीं 12 मांगें
उदयपुर | पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान के निर्देश पर जिलाध्यक्ष कमलेश शर्मा के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को सर्किट हाउस में ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में उच्च माध्यमिक बने विद्यालयों में पद स्वीकृति, वाइस प्रिंसिपल की पोस्टिंग, थर्ड ग्रेड डीपीसी जल्द कराने और कम नामांकन वाले स्कूलों से अधिशेष शिक्षकों का समायोजन करने की मांग की गई। इसके अलावा जर्जर भवन, शौचालय, कक्षा कक्षों के लिए बजट, कुक-कम-हेल्पर मानदेय बढ़ाने, निशुल्क ड्रेस, खेल सामग्री, ऑफलाइन प्रवेश प्रक्रिया और प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने की मांग रखी गई। प्रदेश उपाध्यक्ष नवीन व्यास, प्रदेश संगठन मंत्री भैरूलाल कलाल, प्रेम सिंह भाटी आदि मौजूद थे।
राजस्थान का सबसे बड़ा शिक्षक संघ हुआ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा)
जयपुर। राजस्थान में सबसे बड़ा शिक्षकों का संगठन राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय अब अखिल भारतीय संगठन के रूप में कार्य करेगा। संगठन के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि राजस्थान में शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी हित में कार्य करने वाले प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षक संगठन राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) 10192 संकुल 402 […] The post राजस्थान का सबसे बड़ा शिक्षक संघ हुआ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) appeared first on Sabguru News .
'स्वबोध आधारित शिक्षा' राष्ट्र निर्माण का आधार: बी. आर. शंकरानंद
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में भारतीय शिक्षण मंडल के 57वें स्थापना दिवस पर 'भारतीय शिक्षण बोध' पत्रिका का विमोचन और शिक्षा में मूल्यों पर चर्चा हुई।
कानपुर देहात के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एकल ऑन व्हील्स कंप्यूटर बस-2 का लोकार्पण किया गया। रनिया स्थित फैक्ट्री परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन (एकल कानपुर चैप्टर) और फ्रंटियर एलॉय स्टील्स लिमिटेड ने सहयोग किया। इस अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन आलोक सिंह, जिलाधिकारी कपिल सिंह, पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पाण्डेय और मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने फीता काटकर और हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया। अपर पुलिस महानिदेशक आलोक सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कंप्यूटर ऑन व्हील्स जैसी योजनाएं ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने डिजिटल साक्षरता के साथ साइबर सुरक्षा की जानकारी को भी महत्वपूर्ण बताया। सिंह ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की शिक्षा देना समय की आवश्यकता है। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इस बस को वंचित बच्चों के लिए अवसरों का द्वार बताया। उन्होंने कहा कि यह समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पाण्डेय ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने बच्चों में नैतिकता, अनुशासन और जागरूकता पर जोर दिया। पाण्डेय ने सुझाव दिया कि प्रशिक्षण में साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी भी शामिल की जानी चाहिए। मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल ने इस पहल को ग्रामीण विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने प्रशिक्षण के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करने पर बल दिया। फ्रंटियर एलॉय स्टील्स लिमिटेड के प्रवर्तक निदेशक कुंदन लाल भाटिया ने जानकारी दी कि उनकी कंपनी सामाजिक दायित्वों के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण उत्थान के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन के प्रेसीडेंट डॉ. ए.एस. प्रसाद ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा, “यदि बच्चे विद्यालय नहीं आ सकते, तो विद्यालय को बच्चों तक पहुंचना होगा।” उन्होंने बताया कि इस बस में 8 लैपटॉप के माध्यम से एक समय में 16 बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में बच्चों को कंप्यूटर का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा तथा प्रतिदिन दो गांवों में सुबह-शाम कक्षाएं संचालित होंगी। बस में सोलर पैनल की व्यवस्था इसे पर्यावरण अनुकूल बनाती है।कार्यक्रम के दौरान छात्राओं आयुषी, कीर्ति एवं कृतिका ने डिजिटल शिक्षा का सजीव प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित लोगों को इस पहल की उपयोगिता का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ।उल्लेखनीय है कि इस अभियान के तहत अब तक 52 बसें संचालित हो रही हैं और नई बस के जुड़ने से यह पहल और व्यापक हो गई है। “एकल ऑन व्हील्स” ग्रामीण भारत में डिजिटल साक्षरता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सवाई माधोपुर: ओबेरॉय ग्रुप ने 80 लाख से बनाया स्कूल भवन, शिक्षा विभाग को सौंपा
भविष्य की उड़ान पहल के तहत ओबेरॉय वन्य विलास ने आधुनिक सुविधाओं से युक्त राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कर प्रशासन को सुपुर्द किया।
गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड स्थित प्राचीन देवपहाड़ी मठ इन दिनों वैदिक शिक्षा के केंद्र के रूप में उभरा है। यहां संचालित जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम में वर्तमान में 93 छात्र चारों वेदों की निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही 50 नए बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे छात्रों की संख्या बढ़ने की संभावना है। गुरुकुल के महंत ब्रह्मचारी स्वामी गौरवानंद जी महाराज और आचार्य अमितोश द्विवेदी ने बताया कि इस गुरुकुल की स्थापना लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को वैदिक ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संस्कार देना और सनातन धर्म के प्रति जागरूक बनाना है। उनका कहना है कि यह गुरुकुल आधुनिक शिक्षा के दौर में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित और आगे बढ़ा रहा है। आधुनिक शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है यहां केवल वेदों की शिक्षा ही नहीं दी जाती, बल्कि आधुनिक शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इसका लक्ष्य छात्रों को समय के साथ कदम मिलाकर चलने और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। गुरुकुल में अनुशासन, संस्कार, योग और दैनिक दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे बच्चों के व्यक्तित्व का समग्र विकास हो सके। गुरुकुल प्रबंधन ने सरकार और समाज के लोगों से अपील की है कि वे यहां आकर शिक्षा व्यवस्था का अवलोकन करें और इस पुनीत कार्य में सहयोग प्रदान करें, ताकि यह परंपरा निरंतर फलती-फूलती रहे। अभिभावकों ने बच्चों के भविष्य को लेकर संतोष व्यक्त किया बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों से अपने बच्चों का नामांकन कराने पहुंचे अभिभावकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। अभिभावक संजय पांडेय और सोनू पांडेय ने बताया कि उन्हें इस गुरुकुल की शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन और माहौल अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप लगा। उन्होंने महंत और आचार्यों के समर्पण की सराहना करते हुए बच्चों के भविष्य को लेकर संतोष व्यक्त किया। गौरतलब है कि विभिन्न जिलों से आए छात्र मठ परिसर में रहकर गुरु-शिष्य परंपरा के तहत वेद, संस्कार और अनुशासन की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक निर्धारित दिनचर्या के अनुसार अध्ययन, साधना और अन्य गतिविधियां संचालित होती हैं। इससे न केवल बच्चों में ज्ञान का विकास हो रहा है, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी समझ भी विकसित हो रही है। इस पहल से गिरिडीह सहित आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को नई पहचान मिल रही है और लोग फिर से गुरुकुल परंपरा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष और कम्पोजिट विद्यालय भादर प्रथम के प्रधानाध्यापक शिव सिंह 33 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए हैं। 31 मार्च को अवकाश होने के कारण उन्होंने 30 मार्च को ही कार्यभार सौंपते हुए अवकाश ग्रहण किया। उनके सम्मान में सोमवार को एक विदाई समारोह आयोजित किया गया। अपने 33 वर्षीय सेवाकाल में उन्होंने सहायक अध्यापक और प्रधानाध्यापक के रूप में कुल छह विद्यालयों में अपनी सेवाए दीं। खंड शिक्षा अधिकारी शिव कुमार यादव ने उन्हें सम्मानित किया और उनके सुखी, निरोग तथा स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए समाज को अपनी सेवाएँ जारी रखने की अपील की। शिव सिंह ने वर्ष 1993 में प्राथमिक विद्यालय मनीपुर, गौरीगंज में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। दो साल बाद उनका स्थानांतरण प्राथमिक विद्यालय खरगपुर, भादर में हुआ। इसके बाद उन्होंने प्राथमिक विद्यालय रघईपुर में 12 वर्षों तक सेवा दी। उनकी पदोन्नति सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय घोरहा में हुई। प्रधानाध्यापक के रूप में पदोन्नति मिलने पर वर्ष 2015 में उन्हें उच्च प्राथमिक विद्यालय दहियांवा में तैनात किया गया। यहां से वे जुलाई 2023 में कम्पोजिट विद्यालय भादर प्रथम में प्रधानाध्यापक के रूप में आए और 30 मार्च तक सेवारत रहे। अपने सेवाकाल के दौरान शिव सिंह ने दस वर्षों तक उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में शिक्षकों का नेतृत्व भी किया। सोमवार को उन्होंने वरिष्ठ सहायक अध्यापक संजीव कुमार को कार्यभार सौंपकर अवकाश प्राप्त किया। विद्यालय परिवार ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। विदाई और सम्मान समारोह को भादर के ग्राम प्रधान राम चन्द्र सिंह ने प्रमुख रूप से संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष कपिलेश यादव, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक काली सहाय सिंह, विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष रीता मौर्य प्रधान प्रतिनिधि शुभम् सिंह देवांशु सिंह, अवनीश वर्मा, विजय प्रताप यादव, संध्या गुप्ता, गणेश प्रसाद शर्मा, लालती देवी, शिवकरन गुप्ता, कौशलेंद्र सिंह, स्नेहा शुक्ल, प्रतिभा ओझा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री आशा देवी, आभा सिंह, रेखा, सतीश शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति और सहकर्मी मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में संपत्ति हड़पने के इरादे से छोटे भाई ने सुपारी देकर बड़े भाई को मरवा दिया। दामोदर सिंह (62) रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी थे। उनके पास लगभग 4 करोड़ की प्रॉपटी और 30 तोला सोना था, जो वह हड़पना चाहता था। मर्डर के लिए उसने गांव के ही युवक से 10 लाख रुपए और 50 डिसमिल जमीन देने की डील की थी और साढ़े 4 लाख रुपए एडवांस भी दे भी दिए थे। मामला लालपुर थाना क्षेत्र का है। वारदात में 15 लोग शामिल थे। 21 मार्च को दामोदर को बुलाकर गमछे से उसका गला घोंटा गया, लाश घटनास्थल से 60km दूर जंगल ले जाकर रेत में दफनाया गया, फिर मोबाइल नदी में बहा दिया था। 8 दिन बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें पूर्व कांग्रेस नेता समेत 4 नाबालिग और परिवार के ही सदस्य है। वारदात से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए… बेटे के साथ चल रहा था जमीनी विवाद दरअसल, दामोदर सिंह राजपूत (62) शिक्षा विभाग में लेखा अधिकारी थे। जो रिटायर के बाद मुंगेली में किराए के मकान में रह रहे थे। जांच में सामने आया कि दामोदर सिंह का अपने इकलौते बेटे संजय राजपूत के साथ संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। इसी पारिवारिक कलह का फायदा उठाकर आरोपियों ने प्रॉपटी और सोना हड़पने की साजिश रची। पहले भी की थी मारने की कोशिश आरोपियों ने एक फर्जी नोटरी तैयार करवाया था, जिसमें यह दर्शाया गया था कि दामोदर अपनी संपत्ति भाइयों और भतीजों को बेच रहे हैं और अपने बेटे से कोई संबंध नहीं रखना चाहते। जांच में यह भी पता चला कि 2025 में दामोदर सिंह को मारने की कोशिश एक सड़क हादसे के जरिए की गई थी। पूजा के नाम पर बुलाया, गला घोंटकर जंगल में दफनाया 21 मार्च को प्लानिंग के तहत छोटे भाई रणजीत ने अपने भाई दामोदर को दुर्गा पूजा के बहाने झाफल बुलाया। रास्ते में मनोहरपुर के सुनसान इलाके में संजय यादव और उसके साथियों (प्रिंस, योगेश और एक नाबालिग) ने दामोदर की गाड़ी रोककर गमछे से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। पहली कार खराब हुई तो दूसरे से ठिकाने लगाया आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे कार में भरा। रास्ते में कार खराब होने पर देवराज साहू की कार मंगवाई गई और शव को शिफ्ट कर कवर्धा के देक्सय जंगल में नदी के पास गड्डा खोदकर रेत में दफना दिया पुलिस को गुमराह करने के लिए मोबाइल प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) भेजकर गंगा नदी में फिंकवा दिया। घर नहीं पहुंचे को परिजनों ने तलाश शुरू की 21 मार्च को दामोदर सिंह अपने पैतृक गांव झाफल में जंवारा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे। अगले दिन परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। इस दौरान ग्राम मनोहरपुर राइस मिल के पास उनकी बाइक लावारिस हालत में मिली, जिसके बाद परिजनों फौरन लालपुर थाने में पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। अलग-अलग टीमें गठित की गई। जांच के दौरान, पुलिस ने मुंगेली जिले के सभी एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स और सरहदी इलाकों के CCTV खंगाले। इस दौरान एक संदिग्ध कार (CG 10 AC 8986) दामोदर सिंह राजपूत की बाइक का पीछा करते हुए दिखाई दी। गांव के ही रहने वाले युवक दी सुपारी पुलिस ने कार मालिक देवचरण साहू से पूछताछ की तो पता चला कि ग्राम झाफल के रहने वाले संजय यादव ने किराए पर ली थी। पुलिस ने संजय यादव को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। पूछताछ में पता चला कि छोटे भाई रणजीत, साला पालेश्वर सिंह और चचेरे भाई रामपाल राजपूत ने हत्या की सुपारी दी थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से 2 कार, बाइक, मोपेड और 96 हजार कैश जब्त किया है। सभी बालिग आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। जबकि 4 नाबालिगों को बाल संप्रेषण गृह भेजा गया है। ……………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कवर्धा में रिटायर्ड लेखाधिकारी का शव जंगल से बरामद: मुंगेली के रहने वाले थे, 21 मार्च को बाइक से घर जाने के लिए निकले थे मुंगेली के रहने वाले रिटायर्ड लेखा अधिकारी का शव रविवार को कवर्धा के जंगलों से बरामद किया गया है, जो 21 मार्च से लापता थे। हत्या के बाद उनके शव को दफनाया दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने 6 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पढ़ें पूरी खबर…
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने मंगलवार सुबह करीब 10 बजे 12वीं आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस स्ट्रीम का परिणाम घोषित कर दिया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इन परिणामों की घोषणा की। इस वर्ष का कुल परिणाम प्रतिशत पिछले साल के मुकाबले कम रहा। 12वीं की परीक्षाओं के लिए कुल 9 लाख 10 हजार 9 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जिनकी परीक्षाएं 11 मार्च को समाप्त हुई थीं। बोर्ड के इतिहास में यह पहली बार है कि 12वीं का परिणाम मार्च महीने में घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भी पहली बार हुआ है कि 12वीं के परिणामों से पहले 10वीं कक्षा का परिणाम जारी किया गया। बोर्ड ने 10वीं का रिजल्ट 24 मार्च को घोषित किया था। इस साल और पिछले साल का रिजल्ट प्रतिशत भास्कर डिजिटल एप पर पब्लिश होगी फोटो दैनिक भास्कर एप पर 12वीं बोर्ड राजस्थान में 95 प्रतिशत या इससे ज्यादा नंबर लाने वाले बच्चों के फोटो, वीडियो के साथ उनके इंटरव्यू भी पब्लिश होंगे। रिजल्ट के साथ ही बच्चों के इंटरव्यू और एनालिसिस भी एप पर पढ़ने को मिलेगा। 95 प्रतिशत से ज्यादा नंबर लाने वाले डीग जिले के स्टूडेंट्स इन नंबर 9529009554 पर अपनी डिटेल शेयर करे।
4 सालों में शिक्षा बजट बढ़ाकर 19,279 करोड़ रुपए किया, 60 स्कूल ऑफ एमिनेंस खोले, 740 विद्यार्थियों ने जेईई परीक्षा और 1284 ने नीट परीक्षा पास की: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
झज्जर जिले के गांव ढाकला में जमीन विवाद ने खौफनाक मोड़ ले लिया, जहां एक बेटे ने अपने ही 65 वर्षीय पिता को गोली मार दी। घायल की पहचान ईश्वर के रूप में हुई है, जो दिल्ली पुलिस से रिटायर्ड हैं। जानकारी के अनुसार, देर शाम पिता-पुत्र के बीच जमीन को लेकर कहासुनी हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी बेटे सतीश ने गुस्से में आकर अपने पिता पर फायरिंग कर दी। गोली ईश्वर के कंधे और एक पैर में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हालत गंभीर, पीजीआई रोहतक रेफर घटना के बाद परिजनों ने घायल ईश्वर को तुरंत झज्जर के नागरिक अस्पताल पहुंचाया। यहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया, जहां फिलहाल उनका इलाज जारी है। आरोपी बेटा शिक्षा विभाग में क्लर्क बताया जा रहा है कि आरोपी सतीश शिक्षा विभाग में क्लर्क के पद पर तैनात है। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। गांव में दहशत का माहौल घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। रिश्तों को शर्मसार करने वाली इस वारदात ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
शिक्षा, समाजसेवा के लिए सरोज तिवारी सम्मानित
बेमेतरा| राजधानी में वर्ल्ड ब्राहम्ण फेडरेशन के बैनर तले आयोजित महिला शिखर सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 33 महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ग्राम धनगांव निवासी शिक्षिका सरोज तिवारी को शिक्षा एवं समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। सरोज तिवारी, फेडरेशन बेमेतरा की जिला सचिव भी हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, रायपुर महापौर मिलन चौबे, भाजपा प्रवक्ता शताब्दी पांडे, डीसीपी अर्चना झा, प्रदेश अध्यक्ष अरविंद ओझा और हेमलता शर्मा उपस्थित रहे।
अधिकारों की मजबूती के लिए शिक्षा और राजनीति का ज्ञान होना जरूरी
जालंधर | मुस्लिम समाज को अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर अधिक सजग होना होगा। लोकतंत्र में वही समाज प्रभावी होता है जो शिक्षा, जागरूकता और राजनीतिक सहभागिता के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है।' यह बात मुस्लिम डेमोक्रेटिक फ्रंट पंजाब के अध्यक्ष अख्तर सलमानी ने कही। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल मतदान तक सीमित न रहें, बल्कि नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी के लिए आगे आएं। उन्होंने शिक्षा को समाज की वास्तविक ताकत बताते हुए कहा कि बेहतर शिक्षा, आधुनिक ज्ञान और नई सोच से सकारात्मक बदलाव संभव है। सलमानी ने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रशासनिक सेवाओं और तकनीकी शिक्षा की ओर प्रेरित करने, सामाजिक एकता बनाए रखने और आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षित, संगठित और राजनीतिक रूप से जागरूक समाज ही आने वाले समय में अपनी पहचान मजबूत कर पाएगा।
महावीर की शिक्षाओं और आदर्शों को याद किया
लुधियाना| एसडीपी सभा और कॉलेज प्रबंधक समिति के सभाध्यक्ष बलराज कुमार भसीन के नेतृत्व में भाषा विभाग (हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी) की तरफ से महावीर जयंती बड़े उत्साह और आध्यात्मिक श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस उत्सव का उद्देश्य भगवान महावीर की शिक्षाओं और आदर्शों को याद करना था, जिसमें अहिंसा, सत्य, करुणा और आत्म-अनुशासन जैसे मूल्यों पर जोर दिया गया। इस अवसर को और भी जीवंत बनाते हुए, छात्राओं ने पोस्टर बनाने की गतिविधि के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। इस गतिविधि ने न केवल छात्राओं की कलात्मक प्रतिभा को उजागर किया, बल्कि उन्हें अपने जीवन में नैतिक और सदाचार संबंधी मूल्यों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। कार्यकारिणी प्राचार्या, डॉ. रंजना सूद ने सभी विभागों के प्रवक्ताओं और छात्राओं के प्रयासों की सराहना की और उन्हें ऐसी मूल्य-आधारित गतिविधियों में लगातार भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया ।
आज अंतिम कार्य दिवस, शिक्षा विभाग के कार्यालय खुलेंगे
उदयपुर | राज्य सरकार के शिक्षा (ग्रुप-1) विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन को लेकर अहम आदेश जारी किया है। इसके तहत 31 मार्च को अंतिम कार्य दिवस घोषित करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सभी कार्यालय खुले रहेंगे। हालांकि, विद्यालयों को इससे छूट दी गई है। आदेश में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष के समापन के मद्देनजर आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों के निष्पादन के लिए यह व्यवस्था की गई है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर उपस्थित रहकर लंबित कार्यों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) भोपाल से जुड़े विवादों और अनियमितताओं के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन और मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आगे विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ मामला यह मामला एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार द्वारा की गई शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में आया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय द्वारा “भोपाल” नाम का उपयोग किए जाने से अन्य राज्यों के छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बनती है। रवि परमार ने यह भी कहा कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विश्वविद्यालय की वास्तविक लोकेशन को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, जिससे बाहर से आने वाले छात्र-छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। व्यवस्थागत कमियों और सुविधाओं पर सवाल शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में मूलभूत सुविधाओं की कमी, प्रशासनिक अव्यवस्था और छात्रों की समस्याओं के निराकरण में लापरवाही जैसे गंभीर मुद्दे भी उठाए गए हैं। रवि परमार ने आरोप लगाया कि परिसर में कथित अवैध क्लीनिक संचालित होने और अन्य अनियमितताओं को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन उन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दो सप्ताह में मांगा गया जवाब एनएचआरसी ने यूजीसी चेयरमैन और मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (उच्च शिक्षा) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामले में आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित संस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है। पहले भी हो चुका है बड़ा छात्र आंदोलन भोपाल एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने बताया कि इससे पहले भी विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं ने बड़े स्तर पर आंदोलन किया था। उस दौरान परिसर में भारी आक्रोश की स्थिति बन गई थी और आगजनी व तोड़फोड़ जैसी घटनाएं सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि छात्रों का आरोप था कि प्रशासन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है, जिसके कारण उन्हें विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा। यह मामला प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा। “छात्रहित और पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम” अक्षय तोमर ने कहा कि एनएचआरसी की यह कार्रवाई छात्रहित और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संबंधित संस्थाएं जवाबदेही से बचने की कोशिश करती हैं, तो एनएसयूआई प्रदेशव्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी। अब सभी की नजर यूजीसी और राज्य सरकार के जवाब पर टिकी है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो एनएचआरसी सख्त कदम उठा सकता है। इस पूरे मामले में आयोग की सक्रियता के बाद यह तय माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय होने की दिशा में कार्रवाई तेज होगी।
हरदा में शिक्षा के बढ़ते खर्च को लेकर अब विरोध तेज होने लगा है। जमना जैसानी फाउंडेशन ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस और महंगी किताबों के खिलाफ आवाज उठाते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। फाउंडेशन के सदस्य शांति कुमार जैसानी ने बताया कि निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा एडमिशन, वार्षिक शुल्क, एक्टिविटी और ट्रांसपोर्ट के नाम पर अभिभावकों से भारी राशि वसूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि महंगी किताबों का अतिरिक्त बोझ अभिभावकों पर पड़ रहा है। हर वर्ष किताबें बदलने की परंपरा से मध्यम और सामान्य वर्ग के परिवार आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। सरकार से सख्त नियंत्रण की मांग फाउंडेशन ने मांग की है कि किताबों के दामों पर नियंत्रण लगाया जाए, हर साल किताब बदलने की परंपरा रोकी जाए और निजी स्कूलों की फीस तय करने के लिए कड़े नियम बनाए जाएं। एडमिशन, एक्टिविटी और ट्रांसपोर्ट शुल्क में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ स्कूलों में बुक बैंक और सस्ती किताबों की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई है। फाउंडेशन ने कहा कि शिक्षा को मुनाफे का जरिया नहीं बनाया जा सकता। समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो शिक्षा केवल अमीरों तक सीमित रह जाएगी।
मध्य प्रदेश के अध्यापक संगठनों ने 29 मार्च को भोपाल के गांधी भवन में एक संयुक्त बैठक की। इस बैठक में सभी प्रदेश अध्यक्षों की सहमति से एक प्रदेश स्तरीय चरणबद्ध आंदोलन पर निर्णय लिया गया। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा गणना और टीईटी (TET) परीक्षा को निरस्त करवाना है। साथ ही, सरकार से सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष रखने की मांग भी की गई है। मोर्चा के सदस्य ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने बताया कि आंदोलन के तहत 8 अप्रैल को जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर धरना आयोजित कर जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। अंत में, 18 अप्रैल को भोपाल में एक सामूहिक धरना प्रदर्शन करने पर सहमति बनी है। इस संयुक्त मोर्चे में कई प्रमुख अध्यापक संगठन और उनके पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें शिल्पी सिवान (प्रदेश अध्यक्ष, आजाद अध्यापक संघ), मनोहर दुबे (प्रदेश अध्यक्ष, प्रांतीय शिक्षक संघ), जगदीश यादव (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य शिक्षक संघ), राकेश दुबे (प्रदेश अध्यक्ष, शासकीय शिक्षक संगठन), भरत पटेल (प्रदेश अध्यक्ष, आजाद अध्यापक शिक्षक संघ), राकेश नायक (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य शिक्षक कांग्रेस), शालिगराम चौधरी (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य अध्यापक संघ), परमानंद डेहरिया (प्रदेश अध्यक्ष, NMOPS), डीके सिंगोर (प्रदेश अध्यक्ष, ट्रायबल वेलफेयर एसोसिएशन), राकेश पटेल (प्रदेश अध्यक्ष, गुरुजी शिक्षक संघ), रमाशंकर पांडे (प्रदेश अध्यक्ष, नवीन शिक्षक गुरुजी संघ), विनोद राठौर (महासचिव, PMUMS), पवन खरे (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, PMUMS), राजिक कुरैशी (प्रदेश अध्यक्ष, मध्यप्रदेश शिक्षक अध्यापक संघ), वीरेंद्र पटेल, भरत भार्गव (प्रदेश अध्यक्ष, अध्यापक अधिकार संघ), महेश भादे (प्रदेश अध्यक्ष, अध्यापक संघर्ष समिति) और राजा भैय्या गुर्जर (प्रदेश अध्यक्ष, क्रांतिकारी जनशिक्षक मोर्चा) प्रमुख हैं। मंडी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने भी संयुक्त शिक्षा मोर्चा को अपना सहयोग और समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि वे कर्मचारी हित में शिक्षकों के साथ खड़े हैं।
पंजाब के स्कूलों में 1 अप्रैल से नया अब्सेंट सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके तहत यदि कोई छात्र गैरहाजिर रहता है, तो उसके माता-पिता के मोबाइल पर तुरंत मैसेज भेजा जाएगा। वहीं, किसी शिक्षक के अनुपस्थित रहने पर इसकी सूचना जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को दी जाएगी। इस बात की जानकारी सीएम भगवंत मान ने चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू होगा और सभी स्कूलों में किताबें पहले ही पहुंचाई जा चुकी हैं। सीएम ने परीक्षा प्रणाली पर बोलते हुए कहा कि गुजरात में पेपर लीक की घटनाएं ज्यादा होती हैं, जिसे वहां “पेपर फूटा” कहा जाता है, जबकि पंजाब में अब तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पहले एक क्षेत्र के सभी छात्र टॉपर आए थे, जिसके बाद सरकार ने दोबारा परीक्षा करवाई। दलियां खाने के लिए बना दी इमारते सीएम ने कहा कि जिन देशों ने शिक्षा को प्राथमिकता दी, वे आज विकसित देशों में शामिल हैं। भारत में दो तरह की शिक्षा व्यवस्था है। एक अमीरों के लिए महंगी प्राइवेट शिक्षा और दूसरी आम लोगों के लिए सरकारी स्कूल है। पहले सरकारी स्कूलों की इमारतें केवल मिड-डे मील (दलिया) तक सीमित कर दी गई थीं। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया और अब पंजाब में भी उसी दिशा में काम हो रहा है, ताकि सरकारी और निजी स्कूलों के बीच का अंतर खत्म किया जा सके। जनगणना में टीचरों की डयूटी न लगाने का आग्रह सीएम ने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों से केवल पढ़ाई का काम लिया जाएगा और उन्हें अन्य जिम्मेदारियां नहीं दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में जनगणना भी होनी है, जिसके लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है कि शिक्षकों की ड्यूटी इसमें न लगाई जाए। इसके बजाय सरकार अन्य कर्मचारियों की सेवाएं उपलब्ध करवाएगी। 25 सकूलों के नाम शहीदों के नाम पर 25 स्कूलों का नाम शहीदों और महान हस्तियों के नाम पर रखा गया है। वहीं, उनके संगरूर स्थित गांव के स्कूल का नाम जगसीर हवलदार के नाम पर है। छात्रों में उद्यमिता बढ़ाने के लिए “बिजनेस ब्लास्टर” स्कीम शुरू की गई है, जिसके तहत बच्चों ने 70 करोड़ रुपए तक की कमाई के आइडिया विकसित किए हैं। 19,279 करोड़ का बजट रखा गया सरकार ने बीते 4 साल में शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव करते हुए सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर लाने का दावा किया है। 2026-27 के लिए शिक्षा बजट 19 हजार 279 करोड़ रुपए रखा गया है, जो पिछले साल से 7% ज्यादा है। “शिक्षा क्रांति” का दूसरा चरण भी शुरू किया गया है, जिसके तहत 3 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रोग्राम लॉन्च किया गया है। नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2024 में पंजाब के स्कूलों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए केरल को भी पीछे छोड़ा। साथ ही, 118 “स्कूल ऑफ एमिनेंस” स्थापित किए जा चुके हैं।
सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार रविवार को भिलाई पहुंचे, जहां उन्होंने रूंगटा यूनिवर्सिटी के टेक-फेस्ट व्योम प्रोग्राम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने स्टूडेंट्स को जीवन में कड़ी मेहनत करने और देश के लिए कुछ बड़ा करने का मंत्र दिया। आनंद कुमार ने सुपर-30 के संघर्ष की कहानी बयां की और बताया कि कैसे एक छोटे से विचार ने सैकड़ों गरीब बच्चों की जिंदगी बदल दी। आनंद कुमार ने सुपर-30 फिल्म के उस सीन का भी जिक्र किया, जिसमें एक बच्चा रेस्टोरेंट में काम करते हुए पढ़ाई करता था। आनंद कुमार ने बताया कि उस बच्चे से उनकी मुलाकात रेस्टोरेंट के बाहर हुई थी। इसके बाद उन्होंने 29 और बच्चों को खोजा और उन्हें पढ़ाई करवाई। आनंद कुमार ने सभी की सफलता की कहानियां भी साझा कीं। आनंद कुमार ने बताया कि उन्हें देश के लगभग हर बड़े पॉडकास्टर और द कपिल शर्मा शो जैसे बड़े प्लेटफॉर्म से बुलावा आया है, लेकिन वे कहीं नहीं जाते। उन्होंने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा कि वे फिलहाल एक मिशन पर काम कर रहे हैं। वे एक ऐसा ऑनलाइन क्लास प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं, जिसे देखकर देश को गर्व महसूस होगा। आनंद कुमार ने बताया कि वे जिस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे हैं, वह पारंपरिक डिजिटल बोर्ड और माइक वाली साधारण क्लास जैसा नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पूरी कोशिश की गई है कि दुनिया में आज तक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नहीं बना हो। प्लेटफॉर्म सभी के लिए पूरी तरह निशुल्क होगा। आनंद कुमार ने कहा कि जल्द ही इसका यूट्यूब लिंक जारी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चे इसका लाभ उठा सकें। AI पर उन्होंने कहा कि जो शिक्षक बहुत स्किल्ड होंगे, आगे वही सर्वाइव कर पाएंगे। इसके अलावा एक दिन के शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर कहा कि टीचर्स ट्रेनिंग कानून बनाएंगे। पढ़िए ‘दैनिक भास्कर डिजिटल’ से खास बातचीत क्या कुछ कहा… सवाल: AI आने वाले समय में शिक्षा के स्तर में क्या प्रभाव डालेगा? जवाब: शिक्षा का स्तर और बढ़ेगा। शिक्षकों को और कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ेगा। जो बहुत स्किल्ड होंगे, वही सर्वाइव कर पाएंगे। कंप्यूटर आ रहा था तो लोग डरे हुए थे, परेशान थे, लेकिन कंप्यूटर आने से चीजें और अच्छी हुई हैं। इसलिए एआई का स्वागत करना चाहिए। साथ ही सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि उस पर किस तरह से नियंत्रण रखें कि तुरंत बेरोजगारी की समस्या न हो। यह देश के आईटी सेल का काम है। सवाल: क्या सुपर- 30 मॉडल सरकारी स्कूलों में, कोचिंग में या प्राइवेट संस्थानों में लागू किया जा सकता है? जवाब: कई सरकारें लागू कर रही हैं। छत्तीसगढ़ गवर्नमेंट, मध्य प्रदेश गवर्नमेंट, हिमाचल, असम सब लोग कोशिश कर रहे हैं। अच्छा होगा और अच्छी बात है कि कई प्राइवेट कंपनी भी बढ़-चढ़कर हाथ बटा रहे हैं। यह सब देखकर, सुनकर अच्छा लगता है। सवाल: ऐसा कभी लगा क्या सुपर- 30 में कोई बच्चा आना चाह रहा हो और आपने रिजेक्ट कर दिया हो, बाद में आपको ऐसा लगा हो कि नहीं, यह कुछ गलत हो गया, ऐसा कभी...? जवाब: ईमानदारी से बोलें तो ऐसा कभी इसलिए नहीं लगा, क्योंकि 30 बच्चों के अलावा भी कभी-कभी कुछ बच्चों को हम मौका दे देते हैं, मदद करते हैं और आने वाले भविष्य में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को मौका मिले, इसकी कोशिश जारी है। सवाल: फिल्म में ऐसी कौन सी चीजें हैं जो छूट गई थीं? जो कभी ऐसा लगा कि आपको दोबारा कोई ऐसी बायोपिक बने तो उस पार्ट को आना चाहिए? जवाब: बहुत सारी ऐसी बातें हैं। अभी विकास बहल (डायरेक्टर) से बातचीत चल रही है, आने वाले टाइम में आप वेब सीरीज भी देख सकते हैं, जिसमें छूटी बातें, अधूरी कहानी पूरी होगी। सवाल: आपको अगर एक दिन के लिए शिक्षा मंत्री बना दिया जाए या शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए आपको एक मौका दिया जाए तो क्या व्यवस्था लागू करेंगे? जवाब: अगर एक दिन के लिए या कुछ मौका दिया जाए, तो सबसे ज्यादा ध्यान देंगे, ऐसा कानून बनाएंगे जिसमें जबरदस्त टीचर्स ट्रेनिंग हो। सवाल: स्टूडेंट्स के लिए कुछ नई तकनीक आ रही है, आपने जिक्र किया था? जवाब: हम लोग ऐसा करेंगे कि कुछ नए प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चों का बेहतर मार्गदर्शन कर सकें। हमारी कोशिश है कि अमीर-गरीब सभी बच्चे इंटरनेट के जरिए सीख सकें। भिलाई के छात्रों को दिया सफलता का मंत्र आनंद कुमार ने स्टूडेंट्स को सफलता के चार मंत्र भी बताए। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाना चाहिए। उन्होंने पुराने छात्रों की सफलता की कहानियां सुनाते हुए बताया कि कैसे अभावों में पले-बढ़े बच्चे आज बड़े पदों पर बैठकर देश की सेवा कर रहे हैं। …………………… यह इंटरव्यू भी पढ़िए… निकिता बोलीं- छत्तीसगढ़ी फिल्मों में गाने की इच्छा: कहा- एआर रहमान के साथ काम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जैसा, 'राब्ता' गर्ल की परफॉर्मेंस पर झूमे फैन्स बॉलीवुड की मशहूर प्लेबैक सिंगर निकिता गांधी शनिवार को भिलाई पहुंचीं, जहां उन्होंने लाइव कॉन्सर्ट में शानदार परफॉर्मेंस देकर ऑडियंस का दिल जीत लिया। उन्होंने एक के बाद एक अपने सुपरहिट गाने गाकर युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित ब्रिलियंट पब्लिक और नारायणा टेक्नो स्कूल में CBSE कोर्स की पढ़ाई कराने के बाद स्टूडेंट्स को सीजी बोर्ड का एग्जाम दिलाया गया। इसे लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने मामले में शिक्षा सचिव को शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है। केस की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी। दरअसल, राज्य सरकार ने इस बार 5वीं और 8वीं के एग्जाम बोर्ड स्तर पर आयोजित करने का आदेश जारी किया। ऐसे में वो प्राइवेट स्कूल जिन्हें CBSE की मान्यता नहीं है, उनके बच्चों को पांचवीं और आठवीं कक्षा में सीजी बोर्ड का एग्जाम देना पड़ा। जबकि स्कूल प्रबंधन ने इन बच्चों के लिए लोकल एग्जाम पहले ही आयोजित कर लिया था। ऐसे में पेरेंट्स ने कलेक्टर बंगला का भी घेराव किया था। दोबारा एग्जाम लेने पर भड़के पेरेंट्स शासन के आदेश का हवाला देकर ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायाणा टेक्नो स्कूल प्रबंधन ने भी पांचवीं और आठवीं के बच्चों को दोबारा सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने कहा। यह सुनकर स्टूडेंट्स के पेरेंट्स भड़क गए, उनका कहना था कि उनसे CBSE मान्यता के नाम पर एक्स्ट्रा फीस ली गई है। जब बच्चों को सीजी बोर्ड का एग्जाम देना था तो वो ऐसे महंगे स्कूल में दाखिला क्यों दिलाते। इसके विरोध में पेरेंट्स ने स्कूल और कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इसके साथ ही कलेक्टर बंगला घेरा, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं निकला। स्कूल प्रबंधन की मनमानी का खामियाजा स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ा और उन्हें मजबूरी में सीजी बोर्ड का एग्जाम देना पड़ा। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान हाईकोर्ट में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूल में प्रवेश नहीं देने को लेकर जनहित याचिका की सुनवाई चल रही है। इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच को बताया गया कि प्रदेश में स्कूल प्रबंधन की मनमानी चल रही है। वकीलों ने ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायाणा टेक्नो स्कूल की जानकारी दी। साथ ही बताया कि पेरेंट्स को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा। सालभर CBSE की पढ़ाई करते रहे स्टूडेंट्स कोर्ट को बताया गया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से इन स्टूडेंट्स को सालभर तक CBSE कोर्स की पढ़ाई कराई गई। पेरेंट्स एक साल तक उसकी तैयारी भी कराते रहे। स्कूल प्रबंधन ने फरवरी में लोकल स्तर पर एग्जाम भी ले लिया। लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन को जब पता चला कि राज्य सरकार पांचवीं-आठवीं कक्षा का बोर्ड एग्जाम ले रहा है, तब स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने के लिए दबाव बनाया। हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव से शपथपत्र के साथ मांगा जवाब इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से बताया कि CBSE ने अपने मान्यता के नियम को सख्त कर दिया है। इसके तहत CBSE उन स्कूलों को ही मान्यता देगा, जहां 12वीं कक्षा तक स्कूल संचालित है। जिन प्राइवेट स्कूलों को CBSE से मान्यता नहीं है, वो राज्य शासन के नियम और निर्देशों के तहत संचालित है। इस पर डिवीजन बेंच ने शिक्षा सचिव को शपथपत्र के साथ इस मामले में जवाब पेश करने के लिए कहा है। ………………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बिलासपुर में मान्यता के बगैर CBSE कोर्स की पढ़ाई: पेरेंट्स के बवाल के बाद जांच टीम बनाई गई; 7 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट बिलासपुर में बगैर मान्यता के सीबीएसई कोर्स की पढ़ाई कराने और 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्रों को सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने को लेकर अब शिक्षा विभाग ने जांच के लिए कमेटी बना दी है। कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा किया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
हरदोई की दो महिलाओं को मानद डॉक्टरेट:मथुरा समारोह में तीन को सावित्रीबाई फुले शिक्षा सम्मान
मथुरा में आयोजित एक महिला सम्मान समारोह में हरदोई जनपद की प्रतिभाओं ने जिले का मान बढ़ाया। सोमनाथ नक्षत्र वाटिका ट्रस्ट और कोलंबिया पेसिफिक ग्लोबल ऑनर्स काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें देश भर से कुल 20 लोगों को मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी गई, जबकि 19 महिलाओं को सावित्रीबाई फुले शिक्षा सम्मान से सम्मानित किया गया। हरदोई से समाजसेविका निरमा देवी, जो कुबेर लाल जन सेवा संस्थान की संस्थापिका हैं, को समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट से नवाजा गया। साहित्य के क्षेत्र में अपने लेखन से समाज को सकारात्मक दिशा देने वाली अमिता मिश्रा ‘मीतू’ को भी मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाने और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाली विजयलक्ष्मी सिंह जादौन को सावित्रीबाई फुले शिक्षा सम्मान से सम्मानित किया गया। निरमा देवी और अमिता मिश्रा ‘मीतू’ को भी उनके योगदान के लिए इसी सम्मान से अलंकृत किया गया। इस समारोह में देशभर से आई महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना की गई, उन्हें समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बताया गया। मथुरा में हरदोई की इन प्रतिभाओं को मिला सम्मान पूरे जनपद के लिए गर्व का विषय बन गया है।
बुरहानपुर में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) की ब्लॉक स्तरीय बैठक रविवार को नेपानगर के नेहरू स्टेडियम में आयोजित की गई। इस बैठक में क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई और भविष्य के आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की गई। बैठक में मुख्य रूप से बिजली, पानी, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया। सदस्यों ने बताया कि शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने इस स्थिति को सुधारने और आम जनता को योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह भी निर्णय लिया गया कि यदि आने वाले समय में इन समस्याओं का समाधान स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों द्वारा नहीं किया जाता है, तो प्रभावित नागरिकों की आवाज को आगे बढ़ाने के लिए कलेक्टर कार्यालय परिसर में आंदोलन किया जाएगा। चर्चा के दौरान बाकड़ी क्षेत्र में शिक्षा से जुड़ी गंभीर समस्या प्रमुखता से सामने आई। यहां हाईस्कूल की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उच्च शिक्षा की सुविधा न होने से कई बच्चे आगे की पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा कुछ दिन पहले हाईस्कूल की मांग उठाई गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नेपानगर ग्रामीण क्षेत्रों में कई समस्याएं हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं
मेरठके सकौती में आयोजित महाराजा सूरजमल की मूर्ती अनावरण के कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के संसथापाक रामावतार पलसानिया द्वारा जाट समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए। कार्यक्रम में सामाजिक सुधार, शिक्षा, एकता और आरक्षण जैसे मुद्दों पर विशेष जोर देने के साथ कुल 11 प्रस्ताव सर्वसम्मति से रखे गए। जिनका उद्देश्य जाट समाज को संगठित, शिक्षित और जागरूक बनाना बताया गया। युवाओं और शिक्षा पर विशेष फोकससभा में जाट समाज के युवाओं को अपने इतिहास से जोड़ने पर बल दिया गया। प्रस्ताव रखा गया कि युवाओं को जाट महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि मनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे उनमें सामाजिक गर्व और जागरूकता बढ़े। इसके साथ ही युवाओं को टेक्निकल और स्किल एजुकेशन के साथ उच्च शिक्षा एवं स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने का संकल्प लिया गया।समाज सुधार और नशा मुक्ति अभियाननशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए “नशा मुक्त जाट समाज” अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा गया। युवाओं में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही समाज में भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए 36 बिरादरियों के साथ सामंजस्य बनाने और किसी भी अन्य समाज के खिलाफ टिप्पणी न करने का संकल्प भी लिया गया। राजनीतिक और सामाजिक मांगेंसभा में दीनबंधु सर चौधरी छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। इसके अलावा जिन राज्यों में जाट समाज को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है, वहां इसके लिए प्रयास तेज करने का प्रस्ताव भी रखा गया। जाट महापुरुषों के इतिहास को CBSE, NCERT सहित राज्य और केंद्रीय पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग भी की गई।एकता और नेतृत्व पर जोरकार्यक्रम में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि जाट समाज के नेता और उच्च पदों पर बैठे अधिकारी निःस्वार्थ भाव से समाज के लोगों की मदद करें। क्षेत्रवाद और गोत्रवाद से ऊपर उठकर वैश्विक स्तर पर जाट एकता स्थापित करने का आह्वान किया गया। सभा में अंतरजातीय विवाह पर पूर्ण विराम लगाने का प्रस्ताव रखा गया, वहीं बच्चों की शादी 23 से 25 वर्ष की आयु में करने की बात भी सामने आई।कार्यक्रम के अंत में सभी प्रस्तावों को समाज के हित में बताते हुए उन्हें लागू करने की दिशा में कार्य करने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, एकता और जागरूकता के जरिए ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।
पर्दा शिक्षा और सपनों के बीच नहीं होनी चाहिए। अगर परिवार साथ दें, तो एक लड़की पर्दा में रह कर दुनिया जीत सकती है। लोगों को लगता है कि लड़की पर्दे में रह कर क्या ही करेगी। मैंने भी भेद भाव झेला है। लोग कहते थे कि ये स्कूल जाकर क्या करेगी। ये कहना बेंगलुरु में एक मस्जिद में इमाम की बेटी नाहिद का है। जिन्होंने मैट्रिक की परीक्षा में स्टेट में दूसरा स्थान हासिल किया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से जारी 10वीं के नतीजों में बेगूसराय की नाहिद सुल्तान ने अपनी मेधा का परचम लहराया है। इन्होंने 489 नंबर लाकर पूरे प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल किया है। भगवानपुर प्रखंड के बनवारीपुर हाई स्कूल की छात्रा नाहिद की ये जीत केवल अंकों की नहीं, बल्कि उन सामाजिक बेड़ियों के खिलाफ भी है जो अक्सर बेटियों की राह रोकती हैं। नाहिद सुल्तान ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद मुस्लिम समाज में व्याप्त पर्दा प्रथा और लड़कियों की शिक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया है। नाहिद ने कहा कि उनके समाज में आज भी लड़कियों को घर की दहलीज तक सीमित रखने की कोशिश की जाती है। मुस्लिम समाज में पर्दा प्रथा एक बहुत बड़ा अंधविश्वास बन चुका है। पर्दे में रह कर दुनिया जीत सकती लड़की उन्होंने कहा है कि आज भी लोग सोचते हैं कि लड़कियां पर्दे में रहकर क्या करेंगी या वे बाहर नहीं निकल सकती। मेरा मानना है कि पर्दा संस्कारों और आंखों में होना चाहिए, न कि हमारी शिक्षा और सपनों के बीच होनी चाहिए। पर्दे में रहकर भी एक लड़की दुनिया जीत सकती है, बस उसे परिवार का साथ मिलना चाहिए। तैयार होकर स्कूल जाना, स्कूल जाते समय मुस्लिम लड़की के संबंध में तरह-तरह की बातें सुनना, रोज होता था। महिलाएं कहती थी कि स्कूल जाकर क्या करोगी, लेकिन हमने सभी की बात को नजर अंदाज किया और नियमित स्कूल जाती रही। सुबह 5:30 बजे उठ जाती थी, फिर 2 घंटा पढ़ने के बाद नाश्ता करती थी। उसके बाद ऑनलाइन क्लास और ऑफलाइन क्लास होता था। फिर खाना खाकर सेल्फ स्टडी करते थे। शाम में थोड़ा घूमने के बाद फिर दिन भर पढ़ी गई चीजों का रिवीजन करते थे, यही मेरा रोज का रूटीन रहा। नाहिद ने आगे कहा कि उनके समाज के लोगों को यह समझना होगा कि शिक्षा पर सबका बराबर हक है और बेटियां भी परिवार के साथ-साथ देश का नाम रोशन कर सकती हैं। पिता सोहराब आलम बेंगलुरु में इमाम नाहिद सुल्तान के पिता सोहराब आलम बेंगलुरु में एक मस्जिद में इमाम हैं। अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर वे बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। नाहिद तीन भाइयों के बीच इकलौती बहन है। उसकी मां नूर सबा एक गृहिणी हैं। नाहिद ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के अटूट विश्वास और स्कूल के शिक्षकों को दिया है। भविष्य के बारे में बात करते हुए नाहिद ने बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान देखा कि किस तरह इलाज के अभाव में लोग असमय मौत के मुंह में चले गए। उस बेबसी ने मुझे बहुत आहत किया। मैं मेडिकल की पढ़ाई कर गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सेवा करना चाहती हूं। नाहिद ने किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली। उन्होंने बताया कि वह रोजाना 6 से 7 घंटे की सेल्फ स्टडी करती थीं। उन्होंने डिजिटल इंडिया का फायदा उठाते हुए ऑनलाइन क्लासेस और यूट्यूब के जरिए अपनी तैयारी को धार दी। सोशल साइंस में मिले 100 नंबर बोर्ड के इंटरव्यू के दौरान उसकी राइटिंग चेक की गई और कुछ गहन प्रश्न पूछे गए, जिनका उसने बिना किसी हिचकिचाहट आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। अगर नाहिद को विभिन्न विषयों में मिले मिले नंबर की बात करें तो उर्दू में 99 नंबर और गणित में 99 नंबर मिले हैं। जबकि साइंस में 95 नंबर और हिंदी में 96 नंबर हासिल हुए है। जबकि, सोशल साइंस इसने पूरे 100 नंबर हासिल किए हैं। नाहिद ने यह साबित कर दिया कि यदि हौसले बुलंद हो तो कोई भी सामाजिक परंपरा या रुकावट शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने अपनी सफलता से उन तमाम लोगों को जवाब दिया है, जो बेटियों की शिक्षा को सीमित दायरे में देखते हैं। नाहिद की यह कहानी बिहार के उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा है, जो अभावों और सामाजिक चुनौतियों के बीच अपने सपनों को हकीकत में बदलने की हिम्मत रखते हैं।
बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को मैन्युअल छुट्टी लेने पर रोक लग गई है। अब छुट्टी के लिए शिक्षकों को ई शिक्षा कोष पोर्टल पर आवेदन देना होगा। पोर्टल पर छुट्टी का कारण, दिन और अन्य जानकारी देनी होगी। छुट्टी के लिए मैन्युअल आवेदन करने वाले शिक्षकों की छुट्टी मान्य नहीं होगी। इसके तहत इमरजेंसी लीव से लेकर अदेय अवकाश तक दिया जाएगा। ई शिक्षा कोष पोर्टल पर छुट्टी के आवेदन के बाद उसकी मंजूरी भी डिजिटल ही होगी। इस दौरान डीईओ, प्रधानाध्यापक, शिक्षक के साथ ही मुख्यालय स्तर पर अधिकारी भी उसे देख सकेंगे। इस दौरान महिलाओं को मातृत्व अवकाश के दौरान हर महीने वेतन दिया जाएगा। पहले अवकाश से आने के बाद वेतन दिया जाता था। प्रधान शिक्षक और प्रभारी प्रधानाध्यापक की छुट्टियों की मंजूरी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी करेंगे। सहायक और विशेष शिक्षक की छुट्टी की मंजूरी प्रधान शिक्षक देंगे। ई शिक्षा कोष पोर्टल पर छुट्टी के लिए शिक्षकों का आवेदन करना होगा। इससे छुट्टी मिलने में शिक्षकों का आसानी होगी। इसके साथ ही पारदर्शिता भी बनी रहेगी। छ़ुट्टी का कारण पता चलते ही ऑनलाइन उसे स्वीकृत दिया जाएगा। -सुनील कुमार, शिक्षा मंत्री, बिहार
सलूम्बर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) की जिला स्तरीय बैठक रविवार को दूदर स्थित जिला कार्यालय में आयोजित हुई। इसमें शिक्षकों की समस्याओं, संगठन विस्तार और आगामी कार्ययोजना पर गहन विचार-विमर्श किया गया। जिलाध्यक्ष हिमांशु भट्ट ने बैठक की अध्यक्षता की, जबकि संभाग संगठन मंत्री राजेन्द्र सिंह सारंगदेओत मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। सारंगदेओत ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है। उन्होंने संगठन की मजबूती को शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा की नींव बताया। उन्होंने 'राष्ट्र हित में शिक्षा' के ध्येय को अपनाते हुए कार्य करने का आह्वान किया। सदस्यता पंजिकाओं का वितरण बैठक में आगामी सत्र के लिए सदस्यता अभियान की शुरुआत की गई। सारंगदेओत ने सदस्यता पंजिकाओं का वितरण किया और हर विद्यालय तक संगठन की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जिला मंत्री कमल आमेटा ने जानकारी दी कि 31 मार्च, 3 अप्रैल और 5 अप्रैल को विभिन्न खंडों में संकुल कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संगठन विस्तार के तहत संकुल संयोजक और सह-संयोजकों की नियुक्ति पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान 'नव संवत्सर' और 'प्रधानाचार्य संवाद' जैसे हालिया कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। साथ ही, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए आगामी योजनाओं की रूपरेखा भी तय की गई। समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया जिलेभर के शिक्षकों की व्यावहारिक और विभागीय समस्याओं का संकलन कर उनके शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया गया। जिलाध्यक्ष और कार्यकारिणी ने आश्वासन दिया कि शिक्षकों की समस्याओं को लेकर सक्षम अधिकारियों से संवाद स्थापित कर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में विभिन्न खंडों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अंत में सभी सदस्यों ने संगठन के अनुशासन और उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया। खंड स्तर पर दस्तावेज एवं कोष हस्तांतरण प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) आज रविवार को मैट्रिक यानी 10वीं का रिजल्ट जारी करने जा रहा है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार दोपहर 1:15 में पटना स्थित बिहार बोर्ड कार्यालय में आधिकारिक रूप से रिजल्ट घोषित करेंगे। इस मौके पर बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर भी मौजूद रहेंगे। नालंदा में कुल 45,324 परीक्षार्थियों ने एग्जाम दिया है। जिसमें छात्र और छात्राओं की भागीदारी लगभग बराबर रही। 22,666 छात्र और 22,658 छात्राएं शामिल हुए थे। एग्जाम के लिए 36 सेंटर बने थे। जिनमें बिहारशरीफ में 18, राजगीर में 9 और हिलसा में 9 केंद्र शामिल रहे। छात्राओं की विशेष सुविधा के लिए 15 केंद्र और छात्रों के लिए 21 अलग-अलग केंद्र निर्धारित किए गए थे। पूरे प्रदेश भर में करीब 15 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था। 17 फरवरी से 26 फरवरी के बीच आयोजित हुई इस परीक्षा के लिए राज्य भर में कुल 1762 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। स्टूडेंट इन वेबसाइट्स पर देख सकते हैं रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र ऑनलाइन इन वेबसाइट्स पर अपना परिणाम देख सकेंगे। biharboardonline.bihar.gov.in results.biharboardonline.com bsebexam.com matricbiharboard.com SMS से भी देख सकेंगे रिजल्ट जिन छात्रों के पास इंटरनेट या स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है, वे SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट देख सकते हैं। इसके लिए मोबाइल के मैसेजिंग ऐप में जाकर टाइप करें– BIHAR10 ROLLNUMBER (उदाहरण: BIHAR10 123456)। इसे 56263 नंबर पर भेज दें। कुछ ही समय में स्कोरकार्ड आपके मोबाइल पर आ जाएगा।
मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी विंग में एक के बाद एक बड़े खरीदी घोटाले सामने आ रहे हैं। लगातार शिकायतों और विभागीय मंत्री उदय प्रताप सिंह की सख्ती के बाद पांच मामलों में से पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा जारी किए गए करीब 100 करोड़ के टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। इसके तहत फर्नीचर खरीदा जाना था, जबकि 149 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच शुरू करवा दी गई। लेकिन अभी माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा की गई 95 करोड़ रुपए की खरीदी, लोक शिक्षण संचालनालय में हुई करीब 86 करोड़ रुपए के इंटरएक्टिव पैनल की खरीदी में जांच तक शुरू हो नहीं हो पाई। जानकारी मिली है कि इन मामलों की जांच के लिए पहले एक सीनियर आईएएस की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जानी थी, लेकिन अब मामला पेंडिंग कर दिया गया है। अब जानकारी सामने आ रही है कि लगातार गड़बडिय़ों के चलते स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय गोयल और लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता को हटाया जा सकता है। इसके पहले स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा नोटशीट लिखने के बाद बमुश्किल डीपीआई संचालक डीएस कुशवाह को हटाकर राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान भेजा गया है। वहीं प्रमोद कुमार सिंह को नया संचालक बनाया और उप संचालक पी.के. सिंह बघेल को भी हटा दिया गया। इन पांच मामलों में आई गड़बड़ी सामने
जिला विधिक शिविर में कानून की शिक्षा दी
अशोकनगर | जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने शनिवार को गांधी पार्क स्थित कुटुंब न्यायालय परिसर में विधिक साक्षरता शिविर लगाया। लोगों को उनके कानूनी अधिकार बताए गए निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा, कलेक्टर साकेत मालवीय, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय केशवा मणि सिंहल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किरण तुमराची धुर्वे, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ चंद्रशेखर साहू उपस्थित रहे।
शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों को दी गई कंपोजिट ग्रांट राशि खर्च करने के लिए सख्त टाइमलाइन जारी कर दी गई है। विभागीय निर्देशों के अनुसार स्कूलों को अब महज 3 दिन के भीतर करीब 1 करोड़ 55 लाख रुपए की राशि खर्च करनी होगी। वहीं, शनिवार को सर्वर न चलने से स्कूलों के संस्था प्रधान भी परेशान हैं कि बिना सर्वर कैसे इतने समय में काम हो सकेगा। वहीं, आदेश के बाद विद्यालय प्रशासन में हलचल तेज हो गई है और वे आवश्यक कार्यों को तेजी से पूरा करने की जुगत में जुट गए हैं। कार्यक्रम अधिकारी जेपी शर्मा ने बताया कि 27 मार्च की दोपहर 12:30 बजे सीनियर सैकंडरी स्कूलों के खातों में कंपोजिट ग्रांट की राशि पहुंची। इसके बाद से ही विद्यालय स्तर पर खर्च की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। वहीं दूसरी ओर 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है, जिसे लेकर शिक्षक नामांकन, कक्षा व्यवस्था, पाठ्यपुस्तक वितरण और अन्य शैक्षणिक तैयारियों में भी जुटे हुए हैं। कंपोजिट ग्रांट के तहत विद्यालयों में मरम्मत कार्य, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल सुविधा, खेल सामग्री, फर्नीचर, बिजली व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों पर खर्च किया जाना है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा में राशि का उपयोग कर ऑनलाइन पोर्टल पर बिल एवं विवरण अपलोड करना होगा। निर्धारित समय सीमा में राशि खर्च नहीं करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध जवाबदेही तय की जाएगी। वहीं अचानक मिली कम समय सीमा के कारण प्रधानाध्यापक एवं विद्यालय स्टाफ आवश्यक सामग्री की खरीद और कार्यों को पूरा कराने में जुट गए हैं। इस राशि का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से स्वच्छता एक्शन प्लान पर खर्च करना होगा। ग्रांट का उपयोग दरी-पट्टी, बिजली बिल, पेयजल व्यवस्था, स्टेशनरी, चॉक-डस्टर, खेल सामग्री, प्रयोगशाला रखरखाव और इंटरनेट संबंधी कार्यों के लिए किया जा सकेगा। “ग्रांट जुलाई, अगस्त तक आ जानी चाहिए। तभी जाकर इस ग्रांट का सही उपयोग हो पाएगा। आखिरी समय पर ग्रांट आने से संस्था प्रधान फर्जी बिल लगाने का काम करेंगे, जो चीजें उपयोग में नहीं है उसके भी बिल तैयार किए जाएंगे। आखिरी समय पर सर्वर भी दिक्कत करने लगता है।” -होतीलाल जेमन, सियाराम संगठन, जिलाध्यक्ष
शिक्षा मंत्री दिलावर 31 को आएंगे
उदयपुर | शिक्षा मंत्री मदन दिलावर 31 मार्च को उदयपुर दौरे पर रहेंगे। वे 30 मार्च की रात जयपुर से ट्रेन से रवाना होंगे। उनके सुबह 6:55 बजे उदयपुर पहुंचने की संभावना है। प्रवास के दौरान मंत्री आईआईएफएल फाउंडेशन द्वारा निर्मित राउमावी वाटी, राबाउमावि बड़गांव और राबाउमावि बेदला के नए भवनों का उद्घाटन करेंगे। साथ ही गौरेश्वर स्थित राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय में कक्षा-कक्ष, कंप्यूटर लैब और लाइब्रेरी का लोकार्पण भी करेंगे। यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे होगा। कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे। दिलावर रात 9:50 बजे उदयपुर से जयपुर के लिए रवाना होंगे। प्रशासन ने दौरे को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं।
सीबीईओ पर कार्रवाई को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक के विरोध में उतरे शिक्षक
जयपुर| शिक्षा विभाग के अधिकारी फिर अपने आदेश को लेकर चर्चा में हैं। ताजा मामले में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट के आदेश पर बवाल मच गया। जाट अपने ही पिछले आदेश को भूल गए और उन्हीं के आदेश का पालना कर रहे सांगानेर ग्रामीण ब्लॉक के सीबीईओ को निलंबित करने के निर्देश जारी कर दिए। इसको लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू किया है और निलंबन आदेश नहीं निकालने की मांग की है। मामले के अनुसार निदेशक सीताराम जाट ने 13 फरवरी को आदेश निकाला था कि वाक्पीठ संगोष्ठियों का आयोजन 27-28 मार्च को किया जाएगा। इसी आदेश की पालना में सांगानेर ग्रामीण के सीबीईओ सीताराम गुप्ता ने 27 मार्च को संगोष्ठी का आयोजन कर लिया। इस दिन जब निदेशक सीताराम जाट प्रवेशोत्सव का निरीक्षण करने सांगानेर ग्रामीण ब्लॉक में पहुंचे तो वाक्पीठ संगोष्ठी के आयोजन पर नाराज हो गए। वे भूल गए कि यह आदेश उन्हीं का है। उन्होंने वाक्पीठ संगोष्ठी के आयोजन को प्रवेशोत्सव में लापरवाही मानते हुए सीबीईओ को निलंबित करने के निर्देश जारी कर दिए। इसके बाद जाट के आदेश का विरोध शुरू हो गया।
शेखपुरा में जिलाधिकारी शेखर आनंद ने शनिवार को शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की। समाहरणालय में आयोजित इस बैठक में जिले की शैक्षणिक व्यवस्था और छात्र-हित से जुड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी शेखर आनंद ने छात्र-छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति की वर्तमान स्थिति पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रवृत्ति के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी। संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया इसके अतिरिक्त, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं को पोशाक, पाठ्य-पुस्तकें और अन्य आवश्यक संसाधनों जैसी मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर बनाने के उद्देश्य से, जिलाधिकारी ने पेयजल और विद्युत आपूर्ति को दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने विद्यालय भवनों और अन्य भौतिक सुविधाओं की समस्याओं के समाधान हेतु ठोस कार्ययोजना बनाने को भी कहा। संतोषजनक उत्तर नहीं दिए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की समीक्षा के दौरान, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान) द्वारा योजनाओं की अद्यतन स्थिति पर संतोषजनक उत्तर नहीं दिए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पदाधिकारी को पूरी तैयारी के साथ अगली बैठक में उपस्थित होने का निर्देश दिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान), जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जिनमें मो. तनवीर आलम भी शामिल थे, और अन्य संबंधित विभागीय कर्मी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी दामोदर सिंह राजपूत पिछले 8 दिनों से लापता हैं। पुलिस को अब तक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी का कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार वाले किसी अनहोनी की आशंका से चिंतित हैं और अब सामाजिक स्तर पर उग्र आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। यह मामला लोरमी थाना क्षेत्र का है। झाफल निवासी 62 वर्षीय दामोदर सिंह राजपूत 21 मार्च की सुबह अचानक लापता हो गए थे। वे शिक्षा विभाग में वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद से कुछ महीने पहले ही रिटायर हुए थे और अपनी पत्नी के साथ मुंगेली में रहते थे। नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान, दामोदर सिंह 21 मार्च की सुबह लगभग 10 बजे अपने गांव झाफल जाने के लिए मोटरसाइकिल से निकले थे। उन्होंने सुबह 10 बजकर 52 मिनट पर अपने बड़े भाई बलबीर सिंह से बात की और जल्द ही गांव पहुंचने की जानकारी दी थी। मनोहरपुर के पास लावारिस मिली बाइक हालांकि, जब देर शाम तक दामोदर घर नहीं पहुंचे, तो परिवार वालों ने उनके फोन पर कॉल किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद बताने लगा। देर रात तक उनका कहीं कोई पता नहीं चला। अगले दिन उनकी खोजबीन करने पर उनकी बाइक मनोहरपुर के पास लावारिस हालत में पड़ी मिली। मोटरसाइकिल में एक बैग भी लटका हुआ था, जिसे दामोदर सिंह अपने साथ लेकर घर से निकले थे। पुलिस ने मोटरसाइकिल जब्त कर थाने ले आई। बेटे से संपत्ति को लेकर चल रहा था विवाद परिवार वालों ने मामले की रिपोर्ट लालपुर थाना में दर्ज कराई है। दामोदर के भाइयों के अनुसार, लापता दामोदर सिंह का अपने इकलौते बेटे संजय सिंह से संपत्ति को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इस विवाद को लेकर पहले भी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 21 मार्च से लापता हुए दामोदर का 8 दिन गुजर जाने के बाद भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस की साइबर टीम दामोदर के मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। परिवार वाले अब इस मामले पर उग्र आंदोलन करने की बात कह रहे हैं, जबकि पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच करने का भरोसा दिला रही है।
डूंगरपुर में रामकृष्ण विवेकानंद सेवा संस्थान का 33वां दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन शनिवार को प्रारंभ हुआ। रामकृष्ण विवेकानंद भाव प्रचार परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विभिन्न संत-महात्माओं का स्वागत किया गया। सम्मेलन में रामकृष्ण आश्रम खेतड़ी के स्वामी आत्मनिष्ठानंद महाराज, रामकृष्ण आश्रम शिमला के स्वामी रत्नमिहिरानंद महाराज और रामकृष्ण आश्रम सादड़ी के स्वामी कृष्णानंदपुरी महाराज उपस्थित रहे। संस्था पदाधिकारियों ने माल्यार्पण एवं उपरना पहनाकर उनका स्वागत किया। राजस्थान सरकार के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर के.के. गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। डॉ. विश्वनाथ दास, कनु भाई और जितेंद्र ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर वासुदेव पडया भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में वागड़ गांधी स्वर्गीय भोगीलाल पंड्या को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्य अतिथि के.के. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि वे स्वामी विवेकानंद के आशीर्वाद और प्रेरणा से ही अपने जीवन में कार्य कर पा रहे हैं। स्वामी आत्मनिष्ठानंद ने रामकृष्ण परमहंस के जीवन और उनके आध्यात्मिक संदेशों पर प्रकाश डालते हुए सत्संग के महत्व को बताया। स्वामी रत्नमिहिरानंद ने स्वामी विवेकानंद के जीवन आदर्शों पर चर्चा करते हुए महिला शिक्षा को राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। वहीं, स्वामी कृष्णानंदपुरी ने माता शारदा के जीवन पर प्रकाश डाला और सभी में अच्छाई देखने तथा भक्ति-ध्यान के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संदेश दिया। इस वार्षिक सम्मेलन में उदयपुर, किशनगढ़, कोटा, सादड़ी, जालोर, गंगानगर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संस्था अध्यक्ष ललित शुक्ला ने आभार व्यक्त किया।
कानपुर में एक अप्रैल से स्कूल चलो अभियान चलाया जाएगा। अभियान की तैयारी को लेकर शनिवार को सीडीओ दीक्षा जैन की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में सभी संबंधित विभागों को गांव-गांव विशेष अभियान चलाकर हर बच्चे को विद्यालय से जोड़ने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रतिदिन होने वाले नामांकन की रिपोर्ट जनपद स्तर पर अनिवार्य रूप से साझा की जाए, जिससे अभियान की नियमित समीक्षा की जा सके। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी, पंचायती राज और श्रम विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रवेश के समय जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड न होने की स्थिति में किसी भी बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसे बच्चों की पहचान करें जो स्कूल से बाहर सीडीओ ने कहा कि गांव स्तर पर घर-घर संपर्क स्थापित कर ऐसे बच्चों की पहचान की जाए जो अभी तक विद्यालय से बाहर हैं। छह वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले सभी बच्चों का कक्षा एक में प्रवेश सुनिश्चित कराया जाए और इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए।सीडीओ दीक्षा जैन ने कहा कि स्कूल चलो अभियान का उद्देश्य है कि जनपद का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें और प्रत्येक पात्र बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित कराएं। सूची की जाएगी तैयार उन्होंने आमजन से भी अनुरोध किया कि यदि किसी को अपने आसपास कोई बच्चा स्कूली शिक्षा से वंचित दिखे तो उसका दाखिला निकटवर्ती प्राथमिक विद्यालय में अवश्य कराएं। इस अभियान की सफलता के लिए जन भागीदारी आवश्यक है। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि कक्षा पांच उत्तीर्ण बच्चों का कक्षा छह तथा कक्षा आठ उत्तीर्ण बच्चों का कक्षा नौ में नामांकन सुनिश्चित कराया जाए। गांवों में परिवार सर्वेक्षण कर ऐसे बच्चों की सूची तैयार की जाएगी जो विद्यालय से बाहर हैं। श्रमिक परिवार के बच्चे जाएंगे स्कूल बैठक में निर्देश दिए गए कि झुग्गी-झोपड़ियों, ईंट भट्ठों और श्रमिक परिवारों के बच्चों को विशेष अभियान चलाकर विद्यालय से जोड़ा जाएगा। श्रम विभाग को दस हजार बच्चों के नामांकन का लक्ष्य दिया गया है। सीएमओ हरिदत्त नेमी ने कहा कि विद्यालयों में स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और पोषण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा। बैठक में डीआईओएस डॉ. संतोष राय, बीएसए सुरजीत कुमार सिंह आदि रहे।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी आज अपना वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने जा रही है। इस बजट में धर्म प्रचार, शिक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खास फोकस रहेगा। अमृतसर के SGPC दफ्तर में स्थित तेजा सिंह समुंदरी हाल में दोपहर 12 बजे बजट इजलास शुरू होगा। इसकी अध्यक्षता एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी करेंगे, जबकि महासचिव शेर सिंह मंडवाला बजट पेश करेंगे। बजट में 9% की बढ़ोतरी, 1500 करोड़ का अनुमान इस बार का बजट पिछले साल के मुकाबले करीब 9 प्रतिशत ज्यादा बताया जा रहा है। 2025-26 में जहां बजट 1386 करोड़ रुपय था, वहीं अब करीब 1500 करोड़ रुपय हो सकता है। बजट में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। धर्म, शिक्षा और सेवा को मजबूत करने का बड़ा कदम साथ ही सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब समेत अन्य गुरुद्वारों से जुड़ी सरायों के निर्माण और विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। कुल मिलाकर, यह बजट धर्म, शिक्षा और सेवा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
समस्तीपुर के मोरवा प्रखंड स्थित मल्लाहों के तीर्थ स्थल बाबा केबल धाम में राजकीय मेले का आयोजन किया जा रहा है। वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी रामनवमी के अवसर पर शुक्रवार देर रात केवल धाम पहुंचे। विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। बाबा के चरणों में मत्था टेककर देश की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद मुकेश सहनी ने आम जनता को संबोधित किया। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि एक रोटी कम खाइए, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाइए। पढ़ाई बहुत जरूरी है। शिक्षा से बढ़कर कोई हथियार नहीं है। सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया मुकेश सहनी ने आगे कहा कि बाबा केबल महाराज ने अपनी वीरता से अनेक खतरों का सामना किया। समाज को एक नई दिशा दी। उनका जीवन हिन्दू- मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है । विशेष बात यह है की बाबा केबल महाराज का जन्म और निर्वाण दोनों ही रामनवमी के दिन ही हुआ था।
योग शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों का धरना पांचवें दिन भी जारी
सागर | स्वर्ण जयंती सभागार के सामने योग शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों की क्रमिक भूख हड़ताल शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रही। विद्यार्थियों का कहना है कि विभाग को जर्जर भवन में स्थानांतरित किए जाने के निर्णय के विरोध में वे धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख से उनमें असंतोष बढ़ रहा है। आंदोलनकारियों ने बताया कि वे संयम बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक परंपरा के तहत सद्बुद्धि यज्ञ के बाद हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं और विभाग की अस्मिता बचाए रखने की मांग पर डटे हैं। इसी क्रम में विद्यार्थियों ने सागर लोकसभा क्षेत्र की सांसद लता वानखेड़े से मुलाकात कर पूर्व में सौंपे गए ज्ञापन की याद दिलाई और आंदोलन की चरणबद्ध रूपरेखा से अवगत कराया। सांसद ने बताया कि उन्होंने पहले भी कुलपति से चर्चा कर विभाग के हित में आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद विभाग खाली करने के आदेश जारी होने और भूख हड़ताल की जानकारी मिलने पर उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि अब इस मुद्दे पर उच्च अधिकारियों और मंत्रालय स्तर पर चर्चा कर कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा। प्रदर्शन स्थल पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों ने पहुंचकर विद्यार्थियों से समस्याओं पर बातचीत की और उनके स्वास्थ्य व हालचाल की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने शिक्षकों के संगठन से भी सहयोग की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। भूख हड़ताल को पूर्व छात्रों का समर्थन भी मिला।
माता कर्मा की जयंती पर विधायक ने शिक्षा पर जोर देने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया
भास्कर न्यूज | खरोरा धरसीवां विधानसभा के ग्राम मुरा बंगोली में भक्त माता कर्मा की जयंती का पर्व बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर क्षेत्रीय विधायक अनुज शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने माता कर्मा की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि माता कर्मा केवल साहू समाज की आराध्य देवी नहीं हैं, बल्कि वे पूरी मानवता के लिए भक्ति और साहस की प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि ईश्वर भी भक्त के अधीन हो जाते हैं। जैसे माता कर्मा ने भगवान जगन्नाथ को खिचड़ी खिलाई, यह प्रमाण है कि यदि भक्ति सच्ची हो, तो ईश्वर भी भक्त के वश में होते हैं। विधायक ने कहा कि माता कर्मा ने हमें अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा दी है। आज के समय में हमें अपनी छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपराओं और बोली-भाषा पर गर्व होना चाहिए। जिस समाज ने अपनी संस्कृति को भुला दिया, उसने अपना अस्तित्व खो दिया। उन्होंने साहू समाज की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज न केवल अपनी परंपराओं को सहेजकर रखे हुए है, बल्कि शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विधायक अनुज शर्मा ने नशापान और सामाजिक कुरीतियों को त्याग कर एक स्वस्थ समाज की नींव रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, समाज की असली उन्नति तब होगी जब हमारे हर बेटे और बेटी के हाथ में किताब होगी। आज हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम माता कर्मा के बताए सत्य, भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलेंगे। समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद करना ही माता के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा होगी। इस अवसर पर विधायक ने प्रदेश की खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि माता कर्मा का आशीर्वाद छत्तीसगढ़ के हर किसान और नागरिक पर बना रहे। साथ ही विधायक ने साहू समाज भवन में शेड निर्माण की घोषणा की। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, साहू समाज के पदाधिकारी, ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
अजमेर में एक शिक्षक को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना भारी पड़ गया। शिक्षक ने एक संत पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। इसके बाद मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी कर टीचर को एपीओ कर दिया। अब मामले की जांच मुख्यालय की ओर से की जाएगी। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी गोविंद प्रसाद शर्मा ने बताया- राजकीय प्राथमिक विद्यालय किशनपुरा में पदस्थापित टीचर गोवर्धन चौधरी के सोशल मीडिया फेसबुक अकाउंट पर की गई पोस्ट शुक्रवार सुबह मिली। पोस्ट में टीचर ने एक संत के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मामले के गंभीरता को देखते हुए टीचर गोवर्धन लाल चौधरी को एपीओ कर दिया गया है। इसके बाद अरांई के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भास्कर व्यास ने आदेश की पालना करते हुए संबंधित शिक्षक को तत्काल प्रभाव से कार्य मुक्त कर दिया।
मंडला जिला मुख्यालय में जनसुनवाई के दौरान एक युवक ने सीधे आईएएस अधिकारी बनने की मांग की थी। प्रशासन ने अब उसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई है। यह युवक बिछिया तहसील के ग्राम मांद निवासी अंकित श्रीवास है। अंकित श्रीवास ने जनसुनवाई में बताया था कि वह बीएससी स्नातक है और कई वर्षों से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करना चाहता है। उसने पूर्व में भी 2-3 बार प्रशासन से किताबें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। अंकित बोला- किताबों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित संसाधनों के अभाव के कारण उसकी पढ़ाई प्रभावित हुई और लगभग 9 वर्ष व्यर्थ हो गए। आर्थिक तंगी के चलते वह इस वर्ष यूपीएससी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया था। युवक की मांग पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने सहयोग देने के निर्देश दिए। इन निर्देशों के बाद गुरुवार को शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम युवक के घर पहुंची। टीम ने अंकित को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी पुस्तकें प्रदान कीं। आईएएस बनकर मंडला विकास कार्य करना चाहता इस टीम में तहसीलदार अंजनिया अजय श्रीवास्तव, सहायक संचालक शिक्षा विभाग एल.एस. मसराम और एपीसी मुकेश पांडेय शामिल थे। अंकित ने अपनी मंशा व्यक्त करते हुए कहा था कि वह आईएएस बनकर मंडला जिले में रहकर विकास कार्य करना चाहता है। उसका उद्देश्य बेहतर सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। ये खबर भी पढ़े… युवक की मांग, सीधे IAS अधिकारी बनाएं: UPSC की तैयारी के लिए किताबें नहीं मंडला जिला मुख्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक अजीब मामला सामने आया। बिछिया तहसील के ग्राम मांद से आए एक युवक ने कलेक्टर से मांग की है कि उसे सीधे आईएएस अधिकारी बना दिया जाए। युवक ने अपना नाम अंकित श्रीवास बताया और कहा कि वह बीएससी कर चुका है। पढ़े पूरी खबर…
मास्टर कैडर यूनियन पंजाब ने सामाजिक शिक्षा की ऑनलाइन मार्किंग रद्द करने की मांग की
भास्कर न्यूज | लुधियाना सामाजिक शिक्षा के ऑनलाइन स्क्रीनिंग पेपर मार्किंग में परेशानियों को देखते हुए टीचर्स ने रद्द करने की मांग की है। मास्टर कैडर यूनियन पंजाब के स्टेट उप प्रधान जगजीत सिंह साहनेवाल और जिला इकाई लुधियाना के महासचिव गुरप्रीत सिंह दोराहा ने बताया कि शिक्षा विभाग समय-समय पर शिक्षा क्रांति के नाम पर नए तजुर्बे कर रहा है, जिसके तहत पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं बोर्ड परीक्षा के सामाजिक शिक्षा विषय की उत्तर पत्रिकाओं की ऑनलाइन मार्किंग के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं। इस मौके पर जिला लुधियाना इकाई के सीनियर उप प्रधान नवदीप सिंह, उप प्रधान राजविंदर सिंह, वित्त सचिव स्वर्ण सिंह और प्रेस सचिव मनोज कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि अध्यापकों को ऑनलाइन मार्किंग के दौरान कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें मुख्य रूप से इंटरनेट प्रॉब्लम, पेपर मार्किंग की स्लो स्पीड और कई दूसरी टेक्निकल दिक्कतों की वजह से अध्यापकों को मानसिक परेशानी हो रही है। मास्टर कैडर यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष प्रभजोत सिंह, हरजिंदर सिंह खन्ना, नवीन कपिला, हरविंदर सिंह पुरैन, जगमीत सिंह, सिमरजोत सिंह, जिला महिला इकाई की वरिष्ठ उप प्रधान कंवलजीत कौर, सुपरजीत कौर, जसवीर कौर, मनजीत कौर, सुषमा शर्मा ने शिक्षा मंत्री पंजाब और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस ऑनलाइन प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाए और केवल ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से पेपरों की मार्किंग की जाए, ताकि पेपरों की मार्किंग समय पर और सुचारू रूप से हो सके।
परिक्षेत्र झेरिया यादव समाज के अधिवेशन में समाज के विकास के लिए शिक्षा पर दिया जोर
भास्कर न्यूज | लाहोद लवन परिक्षेत्र झेरिया यादव समाज का वार्षिक अधिवेशन ग्राम चंगोरी पुरीधाम में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सामाजिक एकता संगठन की मजबूती और शिक्षा के स्तर को सुधारने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई अधिवेशन के दौरान समाज के भविष्य को संवारने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। समाज ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी सत्र से कक्षा 10वीं और 12वीं में सर्वोच्च (अधिकतम) अंक प्राप्त करने वाले यादव समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा ताकि युवाओं में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़े कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुजेराम यादव (वकील) एवं संरक्षक झेरिया यादव समाज जिला बलौदाबाजार- भाटापारा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शंकर लाल यादव ने की इस अवसर पर मेलाराम यादव (उपाध्यक्ष, जिला बलौदाबाजार भाटापारा), रामनाथ यादव (अध्यक्ष), लच्छमण यादव (उपाध्यक्ष), रामनारायण यादव (कोषाध्यक्ष), मुन्ना यादव (सचिव) ,कृष्ण कुमार, मल्होच्छ राम, मोहन यादव, मदन यादव, राम यादव, कोमल यादव, कंडे राम यादव,भोज यादव, राजाराम यादव, चिंतामणी यादव सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन सुशील यादव एवं डॉ. गन्नू यादव द्वारा किया गया।
बीपीएस के निदेशक कैप्टन रामचंद्र यादव का निधन, शिक्षा जगत में शोक
सिटी रिपोर्टर | बोकारो बोकारो पब्लिक स्कूल सेक्टर-3 के संस्थापक निदेशक सह शिक्षाविद कैप्टन रामचंद्र यादव का गुरुवार को पटना स्थित पारस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से बोकारो सहित पूरे शैक्षणिक क्षेत्र में गहरा शोक है। कैप्टन यादव एक अनुशासित सैनिक, दूरदर्शी शिक्षाविद और समर्पित समाजसेवी के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर रहते हुए देश की सेवा की और 1962 के भारत-चीन युद्ध के साथ-साथ 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई। सेवानिवृति के बाद उन्होंने शिक्षा क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि बनाया। बोकारो पब्लिक स्कूल की स्थापना कर उन्होंने हजारों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी। पटना स्थित रामकृष्णा चेस्ट हॉस्पिटल में रखे उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचे। विद्यार्थियों, शिक्षकों आदि ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार पटना में गंगा तट पर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा। इसके बाद 13 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान बोकारो स्थित उनके निवास पर संपन्न होंगे। विद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुधा शेखर ने शोक व्यक्त किया है।
चंपारन सत्याग्रह महोत्सव का आयोजन:स्कूली बच्चों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, शिक्षा पर विशेष ध्यान
मोतिहारी के कोटवा प्रखंड स्थित पट्टी जसौली गांव में चंपारण सत्याग्रह महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और स्कूली बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक स्मृतियों को ताजा करना और नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ना था। लोकनृत्य और देशभक्ति नाटकों की प्रस्तुतियां हुईं महोत्सव के दौरान विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने पारंपरिक गीत-संगीत, लोकनृत्य और देशभक्ति नाटकों की प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और स्वतंत्रता आंदोलन की यादें ताजा कीं। बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटकों में चंपारण सत्याग्रह के संघर्ष और महात्मा गांधी के नेतृत्व को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। छात्राओं ने लगाई पेंटिंग प्रदर्शनी मध्य विद्यालय सुंदरापुर की छात्राओं ने अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए एक पेंटिंग प्रदर्शनी भी लगाई। इन पेंटिंग्स के जरिए चंपारण सत्याग्रह के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया। छात्राओं ने गांधी जी की चंपारण यात्रा, पट्टी जसौली गांव में उनके भ्रमण और प्रवास के दौरान उनके साथियों के चित्रों को चित्रित किया। इन चित्रों ने दर्शकों का ध्यान खींचा और ऐतिहासिक पलों को प्रस्तुत किया। ग्रामीणों ने स्टॉलों से जानकारी प्राप्त की इस महोत्सव में शिक्षा और संस्कृति के साथ-साथ जन जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम स्थल पर कृषि, बाल विकास, बिजली, सौर ऊर्जा और स्वास्थ्य सहित लगभग 20 विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीकों और स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों ने इन स्टॉलों में सक्रिय रूप से जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता लाने और युवाओं को देश के इतिहास से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। महोत्सव ने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ विकास और जागरूकता का संदेश भी दिया।
यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र में छापेमारी की है। यहां शिक्षा बोर्ड और यूनिवर्सिटी की मार्कशीट सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर सर्टिफिकेट के साथ दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 217 विभिन्न फर्जी शिक्षा बोर्ड यूनिवर्सिटी की मार्कशीट सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद किया गया है। उनके पास से 42 फर्जी मोहर और 10 मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनकी पहचान आजमगढ़ के बरहद थाना के शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा उर्फ शनि पुत्र हरिशंकर राय और ठेकमा गांव के मनीष कुमार राय पुत्र महेन्द्र राय के रूप में हुई है। फर्जी वेबसाइट बनाकर किया रिजल्ट अपलोड किया जाता था यूपी एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया की माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट www.upmsp.edu.in है। जबकि कतिपय अवांछित तत्वों / व्यक्तियों की ओर से फर्जी वेबसाइट www.upmsp-edu.in एवं www.upms ponline.in चलाई जा रही थी। इस बेवसाइट को अधिकारिक बेवसाइट से मिलता-जुलता बनाया गया था। इससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती थी। इस सम्बन्ध में सचिव, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रयागराज के साइबर थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसी कड़ी में एसटीएफ के डीएसपी शुधान्शु शेखर की निगरानी में टीम गठित कर अभिसूचना संकलन किया जा रहा था। इसी कड़ी में STF की टीम आजमगढ़ पहुंची। यहां विश्वनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का सरगना शशि प्रकाश राय है, जो अपने घर पर मौजूद है। इस सूचना पर एसटीएफ टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली से बीएससी पास, उसके बाद बनाया कॉल सेंटर गिरफ्तार अभियुक्त शशि प्रकाश राय ने पूछताछ पर बताया कि उसने दिल्ली से B.Sc किया है। इसका एक गिरोह है। जो विभिन्न प्रकार के फर्जी / कूटरचित दस्तावेज तैयार करता है। इसके पहले यह आगरा में भी काम कर चुका है। वर्ष 2022 में जनपद जौनपुर में एक काॅल सेंटर खोला, जिसमें सोशल मीडिया के माध्यम इस तरह के दस्तावेज बनाने आदि का पोस्ट डाला जाता था। लोग सम्पर्क करते थे, जिसके बाद शशि प्रकाश अपने ममेरे भाई मनीष राय को आवश्यकता अनुसार डिटेल बताता था। इसके बता डिटेल के अनुसार मनीष राय फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। फर्जी बेवसाइट पर कूटरचित मार्कशीट का रिजल्ट भी अपलोड कर दिया जाता था। जिससे लोग वेबसाइट पर रोल नंबर डालकर रिजल्ट ऑनलाइन चेक करते थे, जो वह दस्तावेज (शिक्षा बोर्ड / यूनिर्वसिटी) असली प्रतीत होता था। फर्जी मार्कशीट के आधार पर लोग विभिन्न संस्थानों में नौकरी पा जाते है तो उनका ऑनलाइन / ऑफलाइन वेरीफिकेशन भी कर देता था। फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने के लिए नाम पर होती थी 15 से 20 हजार की वसूलीफर्जी मार्कशीट व अन्य प्रपत्र आदि बनवाने के लिए 15 से 20 हजार रुपये लेता था। जिसे सभी लोग आपस में बांट लेते थे। लोगों को फर्जी दस्तावेज कोरियर के माध्यम से भेजते थे। अब तक लगभग 6-7 हजार से अधिक विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार किया जा चुका है। यूपी एसटीएफ आरोपियों के लिंकेज की भी तलाश कर रही है।
बूंदी में शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री ने डाइट परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश दिया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश विरोधी शिक्षा देने वाली शिक्षण संस्थाओं को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने बूंदी के शिक्षकों व शिक्षाविदों द्वारा रचित पुस्तक 'हाड़ी रानी गमक' का विमोचन भी किया। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में मंत्री ने छुआछूत और जातिवादी मानसिकता को पूरी तरह खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिर में सभी वर्गों का समान अधिकार है और यहां कोई ऊंचा या नीचा नहीं होता। उन्होंने समाज के पिछड़े और दलित वर्गों को मुख्यधारा में साथ लेकर चलने का आह्वान किया। इसके साथ ही, उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी उत्पाद खरीदने पर जोर दिया।
महासमुंद जिले के बागबाहरा जनपद पंचायत के सभाकक्ष में ग्राम पंचायत शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार के लिए रूपरेखा तैयार की गई। बैठक में जनपद अध्यक्ष ने सरपंचों को गांव का अभिभावक बताते हुए शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अब रटने की परंपरा छोड़कर बच्चों में आत्मविश्वास और कौशल विकास पर जोर दिया जाना चाहिए। 'थिंक टैंक' बनाया जाएजनपद पंचायत उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार और सभापति मधुलिका चंद्राकर ने सुझाव दिया कि पंचायत स्तर पर शिक्षित युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी से एक सशक्त 'थिंक टैंक' बनाया जाए। यह थिंक टैंक शिक्षकों और अभिभावकों के साथ मिलकर बच्चों की पढ़ाई और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करेगा। गांव के विकास की नींव नशा मुक्ति पर टिकी मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एस. मरावी ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए विकास कार्यों के लिए धन की कमी न होने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि जल्द ही राशि पंचायतों को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा भी गांव के वास्तविक विकास की नींव नशा मुक्ति पर टिकी होती है और इसके बिना प्रगति संभव नहीं है। जर्जर भवन हटाने और पेयजल व्यवस्था के निर्देश बैठक में जमीनी मुद्दों पर भी गंभीरता से निर्णय लिए गए। सरपंचों को निर्देश दिया गया कि जर्जर और खतरनाक स्कूल भवनों को तत्काल हटाया जाए। इसके साथ ही गर्मी के मौसम को देखते हुए सभी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया।
अयोध्या की बीकापुर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए डॉ. अमित कुमार सिंह चौहान ने अपने चार वर्षों के कार्यकाल को विकास के लिहाज से ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में व्यापक काम हुए हैं, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिला है। बीकापुर, मसौधा, सोहावल और हैरिंग्टनगंज के गांवों को जोड़ने के लिए 100 से अधिक सड़कों का निर्माण कराया। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से जरूरतमंद मरीजों के इलाज के लिए चार वर्षों में 3.50 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दिलाई गई। उन्होंने कहा कि हैरिंग्टनगंज में डिग्री कॉलेज का निर्माण, बीकापुर में ड्रग वेयर हाउस की स्थापना और एक मानसिक मंदित प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है। विधायक का दावा है कि उनके कार्यकाल में बिकापुर विधानसभा क्षेत्र में जितना विकास काम हुआ है, उतना पिछले कई वर्षों में कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि जनता ने उनके कामकाज पर भरोसा जताते हुए उन्हें विजयी बनाया था। उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐतिहासिक काम पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ योजनाओं के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। पढ़िए सवाल-जवाब में डॉ. अमित सिंह चौहान का इंटरव्यू… सवाल: अपने चार साल के कार्यकाल को आप 10 में से कितने अंक देंगे?जवाब: 2017 से पहले और उसके बाद के समय में बड़ा अंतर आया है। पहले जनप्रतिनिधि और जनता के बीच दूरी रहती थी, जिसे हमने खत्म करने का काम किया। पिछले नौ वर्षों (माता शोभा सिंह चौहान के कार्यकाल सहित) में हमने लगातार जनता के बीच रहकर काम किया है। हम खुद को अंक नहीं दे सकते, यह जनता तय करेगी। हैरिंग्टनगंज में डिग्री कॉलेज बनकर तैयार है। बीकापुर में ड्रग वेयर हाउस बन गया है, जहां पूरे जिले की दवाएं स्टोर हो रही हैं। इसके अलावा मानसिक मंदित प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां दिव्यांग बच्चों के रहने की सुविधा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हमने महत्वपूर्ण कार्य किया है। मेरी कोशिश रही कि कोई भी गरीब परिवार इलाज से वंचित न रहे। जिनके पास आर्थिक संसाधन नहीं थे, उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाई गई। चार वर्षों में 3.50 करोड़ रुपए की मदद जरूरतमंदों को दिलाई गई। सवाल: आपके क्षेत्र में सबसे बड़ा काम कौन सा रहा?जवाब: पहले क्षेत्र में अधिकांश सड़कें कच्ची थीं और गांवों के बीच संपर्क का अभाव था। हमारी प्राथमिकता कनेक्टिविटी बढ़ाना थी। ढेमवा पुल से सोहावल तक सड़क निर्माण कराया गया। सुचित्तागंज बाजार की सड़क का चौड़ीकरण किया गया। बड़ा गांव-ढेवड़ी होते हुए मिल्कीपुर मार्ग का विस्तार हुआ। सोहावल-ढेवड़ी-रौनाही मार्ग का निर्माण हुआ। इसके अलावा सुचित्तागंज से मसौधा चीनी मिल तक सड़क का चौड़ीकरण और उच्चीकरण किया गया। बीकापुर में जलालपुर-चनहा और जलालपुर-शाहगंज मार्ग का निर्माण कराया गया।कुल मिलाकर 100 से अधिक सड़कों का निर्माण हुआ, जिससे आम जनता और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जो अभी पूरा नहीं हो सका?जवाब: विकास कार्यों की कोई सीमा नहीं होती। पिलखांवा से ढेवड़ी जाने वाले मार्ग और भरतकुंड से जुड़ने वाली सड़क का निर्माण अभी बाकी है। रूसिया माफी पुल भी एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिससे मसौधा से भदरसा होते हुए बीकापुर की दूरी 10 से 14 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके अलावा लखनऊ-अयोध्या रोड से देवराकोट, सारंगापुर, रामकोट ग्रंट, सीबार से हनुमान मंदिर तक और बड़ा गांव बाजार की सड़क पर जल्द काम शुरू होगा। इसके अलावा कुछ और कार्य शासन को भेजे गए है। सवाल: क्या 2027 में पार्टी आपको फिर से उम्मीदवार बनाएगी?जवाब: मैं भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं। 2022 में पार्टी ने मुझे मौका दिया और जनता ने आशीर्वाद दिया। 2027 में पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे पूरी पिष्ठा और ईमानदारी से निभाऊंगा। सवाल: क्षेत्र के पौराणिक और आध्यात्मिक स्थलों का कितना विकास हुआ?जवाब: हमारी विधानसभा में कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं, जहां देशभर से श्रद्धालु आते हैं। भरतकुंड के विकास के लिए 2 करोड़ रुपए स्वीकृत कराए गए हैं। सीता कुंड का विकास कार्य जारी है। मां ज्वाला देवी मंदिर और महादेवपुर मंदिर का भी विकास कराया गया है। महादेवपुर में गेस्ट हाउस की सुविधा भी विकसित की गई है। इसके अलावा कई अन्य मंदिरों और पौराणिक स्थलों का भी विकास हुआ है। सवाल: रसोई गैस की किल्लत को लेकर लोग परेशान हैं?जवाब: इस समस्या को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। जल्द ही समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। सवाल: UGC को लेकर सामान्य वर्ग में विरोध की स्थिति दिख रही है?जवाब: भाजपा सरकार सर्व समाज के हित में काम करती है। किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार इस मुद्दे पर बातचीत कर रही है और सभी वर्गों का ध्यान रखा जाएगा। डॉ. अमित सिंह चौहान का दावा है कि बीकापुर विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। वहीं, अधूरे कार्यों को जल्द पूरा करने का भरोसा भी उन्होंने जताया है।
सम्भल में बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन और उनकी बेहतर देखभाल को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। “गरिमा और देखभाल के लिए शिक्षा” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारियों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान की रिसर्च ऑफिसर तान्या सेन गुप्ता ने कहा कि बुजुर्गों को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। सेन गुप्ता ने यह भी बताया कि बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता की शुरुआत परिवार से होनी चाहिए, ताकि यह सोच पूरे समाज में प्रसारित हो सके। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें प्रस्तुत शोध पत्रों और निष्कर्षों के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना का निर्धारण होगा। सम्मेलन में वक्ता नेहा ठाकुर ने चिंता जताई कि आज के समय में कई बुजुर्गों को अकेला छोड़ दिया जाता है अथवा उन्हें वृद्धाश्रम भेजा जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को स्कूली स्तर से ही बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल की शिक्षा दी जानी चाहिए। इससे नई पीढ़ी में संवेदनशीलता विकसित होगी और पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी को कम किया जा सकेगा। इस दौरान वक्ताओं ने 'एजिंग इन प्लेस' की अवधारणा पर भी बल दिया, जिसका अर्थ है कि बुजुर्गों को अपने घर और परिवार के बीच सम्मानपूर्वक जीवन जीने की सुविधा मिलनी चाहिए। सम्मेलन में यह भी कहा गया कि तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और घटती सक्रिय जनसंख्या के बीच संतुलन स्थापित करना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सम्मेलन का निष्कर्ष यह रहा कि बुजुर्गों की देखभाल केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है। सामूहिक प्रयासों से वरिष्ठ नागरिकों का जीवन अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बनाया जा सकता है।
सिंगरौली जिले में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के वितरण के लिए प्रशासन ने एक नई प्राथमिकता व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य आवश्यक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना है। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, कमर्शियल गैस वितरण को चार श्रेणियों में बांटा गया है। पहली प्राथमिकता में 30 प्रतिशत आवंटन शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को दिया जाएगा। इन संस्थानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस, जेल और जरूरी सेवाओं को 35% गैस आवंटन दूसरी प्राथमिकता में 35 प्रतिशत गैस पुलिस, जेल, सुरक्षा बल, महिला एवं बाल विकास और सामाजिक न्याय विभाग के आवासीय संस्थानों, एयरपोर्ट, रेलवे सेवाओं और दीनदयाल रसोई योजना को उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरी प्राथमिकता के तहत 25 प्रतिशत गैस होटल, रेस्टोरेंट, केटरिंग सेवाओं, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए निर्धारित की गई है। वहीं, चौथी प्राथमिकता में 5 प्रतिशत गैस फार्मास्युटिकल, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री फीड और बीज प्रसंस्करण उद्योगों को दी जाएगी। अन्य संस्थानों और उद्योगों के लिए आवश्यकतानुसार अलग से निर्णय लिया जाएगा। गैस कालाबाजारी पर सख्ती, नियमित जांच के निर्देश कलेक्टर गौरव बैनल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के अवैध भंडारण, कम वजन, कालाबाजारी और घरेलू उपयोग में अवैध डायवर्जन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करें, ताकि आमजन को कोई परेशानी न हो और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
अमृतसर ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में शिक्षा रत्न सम्मान समारोह
अमृतसर| अमृतसर ग्रुप ऑफ कॉलेजेस और सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स के सहयोग से श्री गुरु रामदास ऑडिटोरियम में ‘शिक्षा रत्न सम्मान समारोह’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पंजाब विधानसभा के स्पीकर सरदार कुलतार सिंह संधवां और सीबीएसई लुधियाना के क्षेत्रीय अधिकारी संजय कुमार बिष्ट विशेष रूप से शामिल हुए। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए एमवीएन स्कूल की प्रिंसिपल रीना ठाकुर को ‘शिक्षा रत्न सम्मान' से नवाजा गया। समारोह में शिक्षा जगत की कई नामी हस्तियों ने भाग लिया और शिक्षकों के समर्पण की सराहना की।
शाजापुर में 16 मई से 1 जून तक संघ शिक्षा वर्ग
शाजापुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग 16 मई से 1 जून तक होगा। वर्ग स्थल सरस्वती विद्या मंदिर, दुपाड़ा रोड रहेगा। मालवा प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री ने शिक्षा वर्ग की तैयारियों की शुरुआत कर भूमिपूजन किया। संघ शिक्षा वर्ग देशभर में कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए लगाए जाते हैं। इन वर्गों में संघ की कार्य पद्धति का प्रशिक्षण दिया जाता है। शारीरिक प्रशिक्षण होता है।
शिक्षा समिति की बैठक में सीसीटीवी की मांग
भास्कर न्यूज | समस्तीपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय बेला पंचरुखी में विद्यालय शिक्षा समिति की बैठक अध्यक्ष अनीता देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विद्यालय की सुरक्षा, पोषण वाटिका निर्माण और मध्याह्न भोजन व्यवस्था सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।इस दौरान समिति की सचिव कंचन देवी ने विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। सदस्यों ने प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार से विद्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगाने की मांग की, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। बैठक में शिक्षिका खुशबू राय द्वारा पोषण वाटिका के नवनिर्माण में सहयोग का आग्रह किया गया, जिसे सभी सदस्यों ने सहमति दी। साथ ही सहजन के पौधे विद्यालय परिसर के बाहर भी लगाने का निर्णय लिया गया, ताकि अधिक हरियाली और पोषण का लाभ मिल सके। गैस की समस्या के बावजूद मध्याह्न भोजन योजना को बाधित नहीं होने दें।
किताबों से आगे बढ़ी शिक्षा...अब स्किल, रिसर्च व वैल्यू पर फोकस
गैप को भर पाना आसान नहीं हमारे पास अभी जो एजुकेशन पॉलिसी है, आने वाले समय में वह एजुकेशन पॉलिसी बदल जाएगी। साल 2047 तक जब हम एनईपी 2020 को अचीव कर लेंगे, तब विश्व कोई दूसरा एजुकेशन पॉलिसी में आगे बढ़ चुका होगा। इस गैप को भर पाना आसान नहीं है। -एसके सिन्हा, डिप्टी डायरेक्टर, चिरंजीवी कंसेप्ट स्कूल बच्चों-पेरेंट्स की काउंसलिंग बच्चों में मेंटल हेल्थ की समस्या का सबसे बड़ा कारण स्क्रीन टाइम है। बच्चें आज रील्स देखते हैं जिससे उनकी मेमोरी शॉर्ट हो गई है और वे अकेला महसूस करते है। बच्चे फोन का इस्तेमाल सिर्फ एक घंटे करें व पेरेंट्स की निगरानी में करें। स्कूलों में भी बच्चों और पेरेंट्स की काउंसलिंग होती है। -रंजना स्वरूप, डायरेक्टर एकेडमिक्स, शारदा ग्लोबल स्कूल फीमेल रोल मॉडल की कमी नहीं हमारे समाज में फीमेल रोल मॉडल की कोई कमी नहीं है, हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी क्षमता साबित की है। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि उनकी शिक्षा को और मजबूत किया जाए, ताकि वे आगे बढ़कर समाज को नई दिशा दे सकें। -किरण यादव, प्रिंसिपल, नीरजा सहाय डीएवी स्कूल पेरेंट्स पढ़ाई में भागीदार हों एनईपी के तहत स्कूल बाल-वाटिका के माध्यम से बच्चों को जादुई-पिटारा की तरह पढ़ा रहे है। बच्चों पर पढ़ाई का दबाव नहीं है। पैरेंट्स भी बच्चो की पढ़ाई में भागीदारी निभा रहे है। आज सीनियर क्लास के ज्यादातर बच्चे एआई, यूट्यूब से चीजें देख रहे हैं। बाल वाटिका से पेरेंट्स की भागीदारी हो। -शालिनी विजय, प्रिंसिपल, गुरुगोविंद सिंह स्कूल मानसिक स्वास्थ्य जरूरी बच्चों की शिक्षा में स्कूल के साथ-साथ पैरेंट्स का भी योगदान होता है। पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ समय बिताएं। उनके साथ रात का खाना खाएं और पूरे दिन क्या-क्या हुआ उसपर बात करें। इससे मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को कम किया जा सकता है। -सूरज लाल, वाइस प्रिंसिपल, सलूजा गोल्ड स्कूल वैल्यू आधारित एजुकेशन नई शिक्षा नीति वैल्यू आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती है। इसमें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है। नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार, विश्वविद्यालय, शिक्षक और छात्रों के बीच बेहतर समन्वय के साथ-साथ पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा। -कुमार अभिषेक, अरका जैन यूनिवर्सिटी स्कूलों में बुनियादी सुविधा हो झारखंड के अनेक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पर्याप्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाओं की कमी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। -डॉ. रवि प्रकाश तिवारी, प्रिंसिपल, डीएवी नंदराज अपनी मातृभाषा जानना जरूरी एनईपी में मातृभाषा में शिक्षा देने की बात कही गई है लेकिन एक क्लास में इतने सारे बच्चे होते हैं, सबकी मातृभाषा समान नहीं होती है। ऐसे में मातृभाषा में पढ़ा पाना टीचर और स्कूल दोनों के लिए संभव नहीं है। सभी को अपनी मातृभाषा जानना जरूरी है लेकिन आज के दौर में अंग्रेजी जानना सबसे ज्यादा जरूरी है। -अभिषेक हरित, लेडी केसी रॉय मेमोरियल स्कूल बच्चे बगैर डरे अपनी बात रखें स्कूलों में बच्चों को लाइफ स्किल व इमोशनल एजुकेशन देने की बहुत ज्यादा जरूरत है। वर्तमान समय में बच्चे जिस तरह से सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं, बहुत कुछ सीख रहे हैं अच्छा-बुरा। हमें बच्चों को अच्छा माहौल देने की जरूरत है, ताकि बच्चे अपनी समस्या बता सकें। -मोनिका श्रीवास्तव, सच्चिदानंद मॉडल पब्लिक स्कूल शिक्षक शोध पर ध्यान दें नई नीति में शोध को प्राथमिकता दी गई है। लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संस्थानों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों से मुक्त कर उन्हें शिक्षण और शोध पर अधिक ध्यान देने का अवसर देना चाहिए। टीचिंग क्षमता बढ़ाने कार्यक्रमों में शामिल करना चाहिए। -शारदा सिन्हा, एचआर विशेषज्ञ, एक्सएलआरआई सॉफ्ट स्किल पर ध्यान दें नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में समन्वय की कमी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने सॉफ्ट स्किल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छात्रों के समग्र विकास के लिए इसे पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाना जरूरी है। वर्तमान में हार्ड स्किल पर अधिक फोकस दिया जाता है। -डॉ अभिषेक त्रिपाठी, एमिटी यूनिवर्सिटी मल्टीपल एंट्री व एक्जिट सिस्टम नई शिक्षा नीति 2020 शिक्षा व्यवस्था की पुरानी कमियों-खामियों को दूर करने का प्रयास है। सिर्फ सख्ती के साथ कार्यान्वित करने की जरूरत है। इसमें सिलेबस को उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे छात्रों को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। -प्रो. गोपाल पाठक, डायरेक्टर जनरल, सरला बिरला यूनिवर्सिटी पढ़ाई से संबंधित कई योजनाएं हैं एजुकेशन कॉन्क्लेव-2026 में चर्चा करते विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपल-डायरेक्टर। शहरी व ग्रामीण स्कूल में काफी फर्क है एआई का कब और कितना इस्तेमाल करें सुविधा के अनुसार पढ़ाई जारी रख सकेंगे आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। पढ़ाई से संबंधित सरकार की बहुत सारी योजनाएं है उन योजनाओं के बारे में उन्हें जागरूक रहने की जरूरत है, ताकी भविष्य में उन्हें परेशानी ना हो और वे हर क्षेत्र का नेतृत्व करें। -नेहा दास, एकेडमिक हेड, ओडीएम सफायर ग्लोबल स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में स्थित स्कूल और शहरी क्षेत्रों में मौजूद स्कूल की शिक्षण प्रणाली में फर्क देखने को मिलता है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में पैरेंट्स भी ज्यादा जागरूक नहीं होते है ऐसे में बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स को भी समझाने में ज्यादा समय लगता है। -सीमा चितलांगिया, प्रिंसिपल, सृजन वैली स्कूल आज स्कूलों में लोवर क्लास से ही एआई का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन ऐसे में स्कूलों की जिम्मेदारी बनती है कि एआई के इस्तेमाल पर सीमाएं भी हों। यह टीचर के साथ पेरेंट्स को बताना होगा कि एआई का कब और कितना इस्तेमाल करें। -संतोष कुमार, संत जेवियर्स स्कूल, डोरंडा मल्टीपल एंट्री और एक्जिट सिस्टम शिक्षा को अधिक लचीला बनाएगा। इससे छात्र अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई जारी रख सकेंगे। एजुकेशन के लेकर बच्चे या शिक्षक ही नहीं पेरेंट्स को भी कॉन्शस होना होगा। मदद करनी होगी। -प्रो. एसपी अग्रवाल, कुलपति, साईंनाथ यूनिवर्सिटी झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर इंसान बनाना है। सच्ची शिक्षा वह है, जो भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता, समानता और संवेदनशीलता की सीख दे।बालिका शिक्षा में आए बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि साइकिल से स्कूल जाती बच्चियां नए भारत की तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए कहा कि त्वरित लाभ की मानसिकता से विकास कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिसका असर आम लोगों को भुगतना पड़ता है। स्कूल जाती बच्चियां नए भारत की तस्वीर सिटी रिपोर्टर} भारतीय शिक्षा व्यवस्था एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। अब किताबों तक सीमित ज्ञान के बजाय स्टूडेंट्स को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। बदलते समय में यह साफ हो गया है कि केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि कौशल, नवाचार, रिसर्च और मानवीय मूल्यों से लैस शिक्षा ही भविष्य की जरूरत है। ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ इसी सोच को केंद्र में रखकर तैयार की गई है, जो शिक्षा को न केवल लचीला और समावेशी बनाती है, बल्कि इसे रोजगार और समाज से भी सीधे जोड़ती है। बुधवार को रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में दैनिक भास्कर रांची ने ‘एजुकेशन कॉन्क्लेव-2026’ के तहत नई शिक्षा नीति 2020 या ‘एनईपी-2020’ विषयक कार्यक्रम में वित्त मंत्री, कुलपतियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने इस नीति के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। दैनिक भास्कर एजुकेशन कॉन्क्लेव-2026
मेगा पीटीएम से शुरू हुआ प्रवेशोत्सव, पहले दिन अभिभावकों को शिक्षा के महत्व समझाए
प्रदेशभर में शैक्षिक सत्र 2026–27 के प्रवेशोत्सव अभियान की शुरुआत बुधवार से हो गई। पहले दिन सभी सरकारी स्कूलों में मेगा पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) आयोजित की गई। इसमें बड़ी संख्या में अभिभावकों को विद्यालयों में आमंत्रित कर प्रवेश प्रक्रिया, विभिन्न योजनाओं और बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा से जोड़े रखने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अभिभावकों को बताया गया कि बच्चों का नामांकन किस प्रकार किया जाएगा, उन्हें किन-किन सुविधाओं का लाभ मिलेगा तथा उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में परिवार की क्या भूमिका रहेगी। अभियान को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, जिसमें 3 से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों को स्कूल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। 26 मार्च, गुरुवार को जिला एवं ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें प्रवेशोत्सव की तैयारियों, पाठ्यपुस्तकों के वितरण, नामांकन बढ़ाने के प्रयासों और विद्यालयों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद 27 मार्च को मैदानी निरीक्षण होगा। अधिकारी स्कूलों का दौरा कर सुनिश्चित करेंगे कि सभी गतिविधियां प्रभावी ढंग से संचालित हो रही हैं। 28 से 31 मार्च तक घर-घर सर्वे किया जाएगा, जिसमें 3 से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की पहचान कर उनका डेटा एकत्र किया जाएगा। ड्रॉपआउट और कभी स्कूल न गए बच्चों को चिन्हित कर नामांकन के लिए प्रेरित किया जाएगा। शिक्षकों द्वारा बच्चों की जानकारी डिजिटल ऐप में दर्ज की जाएगी। पंचायत स्तर तक यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

