शिक्षा के क्षेत्र में पूर्णिया जिले का नवाचार अब पूरे बिहार के लिए एक मॉडल बनने जा रहा है। 'पूर्णिया लाइव क्लासेस' की सफलता को देखते हुए, इसे अब पूरे राज्य में 'बिहार लाइव क्लासेस' के रूप में विस्तारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गुरुवार को पूर्णिया लाइव क्लासेस का डेमो देखा। इससे प्रभावित होकर मुख्यमंत्री ने इसे 15 अगस्त तक सम्पूर्ण बिहार के सभी स्कूलों में लागू करने का निर्देश दिया है। पहले चरण में पूर्णिया स्थित अत्याधुनिक हब स्टूडियो से लाइव कक्षाओं का प्रसारण पटना जिले के 150 सरकारी विद्यालयों में किया गया। आने वाले समय में इसे राज्य के सभी जिलोंके सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने की योजना है। इसका उद्देश्य सरकारीविद्यालयों के विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। हजारों छात्रों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने बताया कि वर्तमान में पूर्णिया के 265 विद्यालय इस व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से कक्षा 9, 10 और 12वीं के विद्यार्थियों के साथ-साथ आईआईटी (IIT) और नीट (NEET) जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जा रही है। इस पहल का परिणाम वर्ष 2024 की परीक्षाओं में साफ दिखा है। पूर्णिया के छात्रों ने न केवल बोर्ड और इंटर की परीक्षाओं में बिहार टॉपर बनकर जिले का नाम रोशन किया, बल्कि मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट सफलता हासिल की है। जिला स्कूल परिसर में नए पुस्तकालय का निर्माण लाइव क्लासेस के निरीक्षण के बाद, जिलाधिकारी ने जिला स्कूल परिसर में निर्माणाधीन पुस्तकालय के कार्यों का जायजा लिया। काम की गति और गुणवत्ता को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए । पुस्तकालय का उद्घाटन आगामी 25 जुलाई 2026 को किया जाएगा । पुस्तकालय में छात्रों के लिए सभी आवश्यक संसाधनों की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें अध्ययन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
शुभारंभ:खानपुर में ‘शिक्षा सेतु’ निशुल्क कोचिंग शुरू
सामाजिक संस्था मातृ शक्ति की ओर से संचालित ‘शिक्षा सेतु’ निशुल्क कोचिंग का शुभारंभ गुरुवार शाम गोवर्धननाथ मंदिर हॉल में हुआ। मुख्य अतिथि एसडीएम रजत कुमार विजयवर्गीय ने उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा देने की पहल सराहनीय है। प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग देने की बात भी कही गई। विशिष्ट अतिथि शकुंतला उपाध्याय ने संस्था के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कोचिंग के संचालन में सहयोग का भरोसा दिलाया। गायत्री शक्तिपीठ की मुख्य ट्रस्टी हेमा गोयल ने कहा कि यह पहल जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मविश्वास देगी। संस्था के अनुसार कोचिंग शुक्रवार से नियमित रूप से चलेगी। अभी तक करीब 36 विद्यार्थियों का पंजीयन हो चुका है। छह शिक्षित महिलाएं निशुल्क अध्यापन करेंगी। कार्यक्रम में विद्यार्थी, अभिभावक और नगर के नागरिक मौजूद रहे।
उच्च शिक्षा विभाग:यूजी-पीजी में प्रवेश 31 जुलाई तक ले सकेंगे
हरदा | उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए द्वितीय चरण की कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब विद्यार्थी प्रदेश के शासकीय, अनुदान प्राप्त अशासकीय, अशासकीय महाविद्यालयों में यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में 31 जुलाई तक प्रवेश ले सकेंगे। वहीं प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित अन्य सभी नियम, शर्तें और दिशा-निर्देश पूर्ववत लागू रहेंगे।
शिक्षा विभाग में 19395 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मनचाहे स्थान पर पोस्टिंग मिलेगी। उन्हें पोस्टिंग के लिए नेताओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विभाग की ओर से काउंसलिंग के जरिए इनको पोस्टिंग मिलेगी। काउंसलिंग के दौरान वे इच्छित स्कूल का चयन कर सकेंगे। विभाग उन्हें उसी स्कूल में पोस्टिंग देगा। अन्य विभागों में काउंसलिंग का सिस्टम नहीं है। इसलिए वहां मनचाही पोस्टिंग के लिए चयनितों को नेताओं के चक्कर काटने पड़ेंगे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती से विभाग को 19395 चयनित आवंटित हुए हैं। इनमें से 16411 नॉन टीएसपी के है और 2984 टीएसपी के हैं। काउंसलिंग से पहले विभाग इनको मेरिट के आधार पर जिला आवंटन करेगा। जिला आवंटन के लिए चयनितों से जिले का विकल्प मांगा गया है। चयनित अभ्यर्थी 17 से 21 जुलाई तक अॉनलाइन जिले का विकल्प भर सकेंगे। विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जिला आवंटन के लिए शाला दर्पण पोर्टल के जरिए अॉनलाइन विकल्प भरा जा सकता है। अभ्यर्थी प्राथमिकता के आधार पर जिले का चयन कर सकेंगे। अगर कोई चयनित जिले का विकल्प नहीं भरता है तो विभाग उसको जिला आवंटन के लिए स्वतंत्र रहेगा। जिला विकल्प भरते समय चयनित के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी जाएगा। अगर ओटीपी नहीं जाता है तो अभ्यर्थी माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को एक प्रार्थना पत्र व स्वहस्ताक्षरित आधार कार्ड का छाया प्रति विभाग की ओर से जारी की गई मेलआईडी पर भिजवानी पड़ेगी। विकल्प भरने की अंतिम तिथि के दो दिन के भीतर चयनितों को जिला आवंटन कर दिया जाएगा। आवंटित जिले में काउंसलिंग के जरिए पोस्टिंग दी जाएगी। निदेशक सीताराम जाट के अनुसार विभाग सभी जिलों में 31 जुलाई तक नियुक्ति आदेश जारी कर देगा। यह है टाइम फ्रेम यह होती है काउंसलिंग प्रक्रिया काउंसलिंग की प्रक्रिया में चयनितों को स्कूलों के खाली पद बताए जाते हैं। उन्हीं से पूछा जाता है कि इनमें से वे कहां पोस्टिंग चाहते हैं। वे जिस स्कूल का चयन करते हैं। उसी में उसको पोस्टिंग दी जाती है। काउंसलिंग में जितने चयनितों को पोस्टिंग दी जाएगी। उससे अधिक स्कूलों के खाली पद दर्शाए जाते हैं। मेरिट के आधार पर चयनितों को स्कूल चयन के लिए बुुलाया जाता है। सबसे पहले विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांगों को वरियता दी जाती है। फिर महिला अभ्यर्थी और अंत में पुरुष अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर बुलाया जाता है। इस व्यवस्था में चयनित खुद मेरिट के आधार पर स्कूल का चयन करते हैं। उन्हें किसी की सिफारिश कराने की जरूरत नहीं पड़ती।
धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए : केजरीवाल
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचकर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया और केंद्र सरकार से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग की। केजरीवाल ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे कथित […] The post धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए : केजरीवाल appeared first on Sabguru News .
सिरसा जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में छात्राओं से मजदूरी कराने का आरोप लगा है। विद्यालय परिसर में छात्राओं से काम करवाते हुए एक वीडियो भी सामने आया है। जिसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले का संज्ञान लिया है। वीडियो में रात करीब 9 बजे छात्राओं को विद्यालय परिसर में काम करते हुए दिखाया गया है। इस घटना को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्राओं का समय उनकी पढ़ाई, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए होना चाहिए, न कि उनसे किसी प्रकार का श्रम कराया जाए। शिक्षिका बोलीं- रंगोली बनाने के लिए कराई सफाई विद्यालय की शिक्षिका अमनदीप ने आरोपों पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बताया कि गांव की गोशाला में राम कथा कार्यक्रम चल रहा था। जिसके तहत प्रभात फेरी से पहले पूरे गांव में रंगोली सजाई जाती है। शिक्षिका के अनुसार, एक गोभक्त के अनुरोध पर हॉस्टल वार्डन रात करीब 9:30 बजे कुछ छात्राओं के साथ विद्यालय के मुख्य गेट पर थोड़ी घास साफ करवाकर रंगोली बनाने लगी थीं। 'घटनाक्रम की जानकारी लेकर साक्ष्य जुटाए जा रहे' अमनदीप ने आगे बताया कि इसी दौरान गांव के लोगों ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी वायरल वीडियो से ही मिली। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारी बोले- प्रिंसिपल से स्पष्टीकरण मांगा खंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र जाखड़ ने बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने विद्यालय के प्रिंसिपल से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। जाखड़ ने इस मामले को गंभीर बताया और कहा कि इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा - गोविंद सिंह डोटासरा जब शिक्षा मंत्री थे, तब ट्रांसफर में पैसे चलते थे। उस समय के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डोटासरा की मौजूदगी में शिक्षकों से पूछा था कि क्या तबादलों में पैसे लिए जा रहे हैं, तो शिक्षकों ने खड़े होकर जोर-जोर से कहा था कि हाँ, भ्रष्टाचार हो रहा है। इसलिए जो व्यक्ति जैसा होता है, वैसा ही दूसरों के बारे में सोचता है। उन्होंने सोचा होगा कि उनके समय पैसे लिए जा रहे थे तो बीजेपी में भी लिए जा रहे होंगे। लेकिन हमारे यहाँ ऐसा नहीं है, हमारे यहाँ ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) है। जरूरतमंद व्यक्ति का काम किया जा रहा है, सबके काम नहीं हो पा रहे हैं, यह बात बिल्कुल सही है। लेकिन हमारी यथासंभव कोशिश रहती है कि अध्यापकों को संतुष्ट किया जा सके। मदन राठौड़ ने आज ये बातें प्रदेश बीजेपी कार्यालय में कहीं। मदन राठौड़ ने कहा- हम संविधान के रक्षक हैं, हमारे यहां विधिवत आम आदमी के मौलिक अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाता है। कानून-व्यवस्था मजबूत है और विकास हो रहा है। हमारी स्थिति कांग्रेस की तरह नहीं है। हम बहुत मजबूत स्थिति में हैं और व्यवस्थित तरीके से सरकार चला रहे हैं। उनके समय में जो टांग-खिंचाई होती थी, वैसी हमारे यहाँ नहीं है। डोटासरा भी आरएसएस जॉइन कर सकते हैं मदन राठौड़ ने कहा कि डोटासरा आरएसएस और बीजेपी के बारे में क्या जानें, आरएसएस एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, जो राष्ट्रीय चरित्रयुक्त नागरिक तैयार करता है। उन्होंने कहा कि डोटासरा चाहें तो आरएसएस जॉइन कर सकते हैं। वे एक बार आरएसएस जाएं और देखें कि वहाँ क्या काम होता है। महात्मा गांधी भी आरएसएस के कार्यक्रम में गए थे और उन्होंने वहाँ जाकर आरएसएस की तारीफ की थी। पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर मदन राठौड़ ने कहा कि हम पूरी तरह से चुनाव के लिए तैयार हैं। हम कोर्ट की अवमानना नहीं करते हैं, कोर्ट का सम्मान करना अपना कर्तव्य समझते हैं। हमें चुनाव से भागने की ज़रूरत नहीं है। जो लोग ऐसा कह रहे हैं, वे अब तक हुए उपचुनावों के परिणामों को देख लें; बीजेपी ने अब तक हुए उपचुनावों में 85 प्रतिशत सीटों पर जीत दर्ज की है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर से शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग रख कर युवाओं के अंदर उम्मीद की नई किरण जगा दी है। गुरुवार को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाए। लेकिन पीएम मोदी ऐसा करेंगे नहीं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं सोनम वांगचुक शिक्षा में कोई क्रांति न ला दें। देश की सड़ चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक क्रांतिकारी कदम ही ठीक कर सकता है। इसलिए देश को सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री के साथ ही क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। इस दौरान सांसद संजय सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। 'टीचर्स को तरह-तरह से टॉर्चर किया गया' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए पूरे देश के युवा जो कॉकरोच आंदोलन के बैनर तले इकट्ठे हुए हैं, मैं उन सब लोगों को सलाम करता हूं। मैं सोनम वांगचुक को सलाम करता हूं जो अपने लिए नहीं, बल्कि युवाओं और हमारे देश के बच्चों के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर पिछले 19 दिन से अनशन कर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने बताया कि हमारे देश में ऐसे बहुत सारे टीचर्स हैं जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ अपने-अपने शहर से आवाज उठाई, लेकिन उनको गिरफ्तार कर लिया गया। उन टीचर्स को तरह-तरह से टॉर्चर किया गया और उनके खिलाफ एफआईआर की गई, मैं उन सब लोगों को भी सलाम करता हूं। सोनम वांगचुक एक बहुत बड़े शिक्षाविद् हैं। उन्होंने पहले भी लद्दाख और देश के लिए कई बार अनशन किए हैं और आज उन्होंने देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाई हुई है। 'अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर अपना भविष्य बनाएंगे' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब कोई बच्चा कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने जाता है तो वह सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि उसके लिए एक सपना होता है। जब वह एग्जामिनेशन हॉल में घुसता है तो उसे विश्वास होता है कि मैं अपनी मेहनत और अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर अपना भविष्य बनाऊंगा। मैंने भी आईआईटी के पेपर दिए थे और उसमें सफल होकर आईआईटी गया था, लेकिन उन दिनों पेपर लीक नहीं होते थे। अगर उन दिनों पेपर लीक हो रहे होते तो शायद मेरा आईआईटी देने का विश्वास ही नहीं बनता। मेरे दोनों बच्चे भी आईआईटी से हैं और उनके समय पर भी पेपर लीक नहीं होते थे। 'बच्चों का यह लड़खड़ाता हुआ आत्म विश्वास सही नहीं है' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ सालों से जिस तरह से देश में पेपर लीक होने लगे हैं, उससे बच्चे का वह आत्म विश्वास लड़खड़ाने लगा है कि अगर वह मेहनत करेगा और इंटेलिजेंट है तो अमीरों के बच्चों को भी पीछे छोड़ देगा। आज बच्चों का यह लड़खड़ाता हुआ आत्म विश्वास सही नहीं है और देश के लिए बहुत खतरनाक बात है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब हर साल पेपर लीक हो रहे हैं। साल 2024 में जो पेपर लीक हुआ था, सरकार ने उसके मास्टरमाइंड को बेल दिला दी। अब यह एक सिस्टम बन गया है कि हर साल पेपर लीक होते हैं, कमेटी बैठती हैं, जांच होती है, एफआईआर होती है, गिरफ्तारी होती है, बेल हो जाती है और अगले साल के पेपर लीक होने की फिर तैयारी शुरू हो जाती है। देश का युवा और ये बच्चे इसे कब तक बर्दाश्त करेंगे? 'जो बच्चे सुसाइड कर रहे हैं वे हमारे घरों के बच्चे थे' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट पेपर लीक के बाद 20 से ज्यादा बच्चों ने सुसाइड कर लिया, लेकिन सरकार को कोई अक्ल नहीं आई। इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती, चाहे जितने बच्चे सुसाइड कर लें। जो बच्चे सुसाइड कर रहे हैं वे हमारे घरों के बच्चे थे, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। सीबीएसई में पूरा इवैल्यूएशन सिस्टम गड़बड़ा गया, गिरफ्तार करना तो दूर की बात है, सरकार ने जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की। इतने बड़े स्तर पर पूरे देश में आंदोलन चल रहा है, फिर भी सरकार ने कोई ऐसा सिस्टम में बदलाव नहीं किया, जिससे अगले साल पेपर लीक न हों। अगले साल फिर पेपर लीक होंगे और हमारे बच्चे फिर मरेंगे, फिर आत्महत्या करेंगे। यह सिस्टम कब बदलेगा? इस सिस्टम को बदलना ही पड़ेगा। 'युवाओं के कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात सुन ले सरकार' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यही जंतर-मंतर था, 4 अप्रैल 2011 का दिन था और यहीं अन्ना हजारे बैठे हुए थे। उस वक्त की सरकार को भी बड़ा अहंकार था, लेकिन तीन साल के बाद वह सरकार अपने अहंकार की वजह से नहीं बची और डूब गई। आज 2026 है और मैं सरकार को कहना चाहता हूं कि वह युवाओं के कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात सुन ले, नहीं तो आज से तीन साल बाद उनका भी यही हश्र होगा, जो 2014 में उस अहंकारी सरकार का हुआ था। इस सरकार को अक्ल नहीं आ रही है और ये भी बहुत ज्यादा अहंकार में डूबे हुए हैं। 'सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफा देना ही चाहिए, लेकिन सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। मैं पीएम मोदी जी से कहना चाहता हूं कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाओ और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाओ। मुझे पता है कि पीएम मोदी सुनने वाले नहीं हैं। पीएम मोदी सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री नहीं बनाएंगे, क्योंकि उन्हें डर लगता है कि कहीं सोनम वांगचुक कोई क्रांतिकारी चीज न कर दे। आज शिक्षा व्यवस्था जितनी खराब हो गई है, उसे ठीक करने के लिए हमें क्रांतिकारी कदम ही चाहिए। बिना क्रांति के शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं होने वाली है। इसके लिए हमें सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री और क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि 20 जुलाई को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जंतर-मंतर आना है और शांतिपूर्ण संसद मार्च को सफल बनाना है। संजय सिंह ने लोगों से की जंतर-मंतर आने की अपील इस दौरान “आप” के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकर’ की पंक्तियों ‘समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध’ का जिक्र करते हुए घरों में बैठे लोगों से अपील की कि वे बाहर निकलकर जंतर-मंतर पहुंचें। लोगों को सोनम वांगचुक की आवाज में आवाज मिलाकर भारत सरकार और नरेंद्र मोदी को झुकने के लिए मजबूर करना है। संजय सिंह ने आगे कहा कि मोदी जी से बड़ा नौटंकीबाज पूरी दुनिया में कोई नहीं मिलेगा। जब देश में कोरोना आया और नोटबंदी में लोग मर गए, तब वे रोने लगे। देश के पीएम मोदी दिन-रात सिर्फ झूठ बोलने का काम करते हैं। इसलिए मैं यकीन दिलाकर जा रहा हूं कि 20 जुलाई से संसद के अंदर सभी साथी सांसदों से बात करके हम लोग युवाओं के लिए लड़ाई लड़ने का काम करेंगे। 20 जुलाई को सोनम वांगचुक के आह्वान पर मैं भी एक कार्यकर्ता और साथी के रूप में इस आंदोलन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर आऊंगा और हमारे अन्य साथी भी यहां पहुंचेंगे। आंदोलन को हर तरीके से अपना समर्थन देंगे- संजय संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भरोसा दिलाया है कि हम इस आंदोलन को हर तरीके से अपना समर्थन देंगे। हम अन्य राजनीतिक दलों और जन आंदोलनों से भी इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील करते हैं, क्योंकि सोनम वांगचुक कोई अपनी निजी लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि देश के करोड़ों नौजवानों, हिंदुस्तान के भविष्य और आने वाले कल की लड़ाई लड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र-छात्राओं को उच्च ...
बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल ने गुरुवार को कटिहार समाहरणालय के सामने वित्त रहित शिक्षा नीति के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान वित्त रहित डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के समायोजन की मांग उठाई गई। कार्यक्रम का संचालन जुनैद खान ने किया। शिक्षकों के हितों की रक्षा की उठाई मांग धरने को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठन डॉ. संजय यादव ने कहा कि वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी वर्षों से आर्थिक उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने, संस्थानों का समायोजन करने तथा शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। कांग्रेस नेताओं और शिक्षकों की रही मौजूदगी धरना-प्रदर्शन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय कुमार सिंह, नगर अध्यक्ष पुतुल सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रो. विनोद यादव, अफरोज खान, संजय कुमार, सुतापा भदुरी, लक्ष्मी कुमारी, अहमद राजा खान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और समर्थक शामिल हुए। राज्य सरकार के नाम सौंपा ज्ञापन धरना समाप्त होने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने, वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के समायोजन तथा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की लंबित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की गई।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ सहायक संचालक पूनम तिवारी चैन स्नैचिंग का शिकार हो गईं। थाने के सामने बाइक सवार दो बदमाशों ने उनके गले से करीब 3 तोला वजनी सोने की चैन झपट ली और फरार हो गए। चैन की कीमत करीब 4 लाख रुपए आंकी गई है। पूरी वारदात पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसमें बदमाश वारदात को अंजाम देकर भागते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि सहायक संचालक पूनम तिवारी लंच के बाद घर से दफ्तर जा रही थीं, तभी वे चैन स्नैचिंग का शिकार हो गईं। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। स्कूटी खड़ी करते ही बदमाशों ने झपटी चैन जानकारी के अनुसार, पूनम तिवारी गुरुवार दोपहर में लंच के लिए घर गई थीं। दोपहर करीब 2:45 से 3 बजे के बीच वे स्कूटी से वापस जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचीं। स्कूटी खड़ी करने के बाद जैसे ही वे पैदल कार्यालय की ओर बढ़ीं, तभी बाइक सवार दो युवक उनके पास पहुंचे। बदमाशों ने बाइक की रफ्तार धीमी की और उनके गले से सोने की चैन झपटकर फरार हो गए। वारदात इतनी तेजी से हुई कि पूनम तिवारी कुछ समझ पातीं, उससे पहले ही दोनों आरोपी गुरुनानक चौक की ओर भाग निकले। थाने के सामने वारदात घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोतवाली थाना और सीएसपी कार्यालय के सामने स्थित है। ऐसे में थाने के सामने दिनदहाड़े हुई चैन स्नैचिंग की घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। CCTV खंगाल रही पुलिस पुलिस ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में हेलमेट पहने बाइक सवार बदमाश चैन छीनकर फरार होते नजर आए। साइबर सेल की मदद से शहर के अन्य कैमरों की भी जांच की गई। कुछ स्थानों पर संदिग्ध नकाबपोश युवकों की तस्वीरें मिली हैं। पुलिस उनकी पहचान कर आरोपियों की तलाश में जुटी है। कीमत करीब 4 लाख पूनम तिवारी के पति और शिक्षक मनोज तिवारी ने बताया कि उन्होंने सोने की चैन का बिल पुलिस को सौंप दिया है और मामले की शिकायत भी दर्ज करा दी गई है। उनके अनुसार, चैन करीब 3 तोले की थी, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 4 लाख रुपए है। पुलिस बोली- आरोपियों की तलाश जारी इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जल्द ही पुलिस दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लेगी। …………………… क्राइम से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… गोलबाजार में मासूम के गले से चेन चोरी... VIDEO: मां की गोद में थी बच्ची, CCTV में कैद हुई संदिग्ध महिला; तलाश में जुटी पुलिस राजधानी रायपुर के सबसे व्यस्त बाजारों में शामिल गोलबाजार में चेन स्नेचिंग की चौंकाने वाली घटना सामने आई है। खरीदारी करने पहुंची एक महिला पत्रकार की मासूम बेटी के गले से एक अज्ञात महिला ने सोने की चेन चोरी कर ली। पूरी वारदात बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है। पढ़ें पूरी खबर…
डिंडौरी के चंद्र विजय कॉलेज में भारतीय शिक्षा दिवस के अवसर पर 'आत्मनिर्भर भारत में युवाओं की भूमिका' विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं को कौशल विकास और नवाचार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। अतिरिक्त संचालक बोले- रोजगार देने वाले बनें युवा मुख्य अतिथि और जबलपुर संभाग के उच्च शिक्षा अतिरिक्त संचालक डॉ. अल्केश चतुर्वेदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश के युवा नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने वाले बनेंगे। उन्होंने छात्रों से स्टार्टअप संस्कृति को अपनाने की अपील की। नई शिक्षा नीति है मजबूत नींव मुख्य वक्ता डॉ. नीलेश पाण्डेय ने नई शिक्षा नीति को आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि यह नीति युवाओं को कौशल और उद्यमिता से जोड़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने का आग्रह किया। स्वावलंबी युवा तैयार करना लक्ष्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ए.एस. उददे ने कहा कि महाविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो स्वावलंबी हों और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के करीबी तबादलों के नाम पर पैसे की वसूली कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जो बातें कही हैं, वे सही हैं। डोटासरा ने बेनीवाल समर्थकों पर मुकदमे दर्ज करने के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया और सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। डोटासरा जयपुर में कांग्रेस ओबीसी विभाग के सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। डोटासरा ने शिक्षा विभाग में हुए तबादलों में भ्रष्टाचार का लगाया आरोप डोटासरा ने शिक्षा विभाग में हुए तबादलों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और सरकार पर निशाना साधा है। डोटासरा ने कहा- तबादलों में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। शिक्षा विभाग का हाल सबसे खराब है, शिक्षा मंत्री के नजदीकी लोग तबादलों में जमकर वसूली में लगे हैं। शिक्षक तबादलों में जमकर पैसा लिया गया है। सरकार में हिम्मत है तो शिक्षा मंत्री के पीए, पीएसओ के नजदीक रहने वालों के फोन टैप करवाकर देख लीजिए पता लग जाएगा। डोटासरा ने कहा- शिक्षा मंत्री के दलाल बने हुए हैं, वे ट्रांसफर में लूट रहे हैं। स्कूल बर्बाद हो रही हैं। तबादला उद्योग में आरएसएस तांडव नृत्य कर रहा है। पैसे ले लेकर भ्रष्टाचार चल रहा है इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता। समसा में इंटरव्यू की पोस्टों में पैसा लेकर पोस्टिंग दी जा रही है। मंत्री के इर्द गिर्द के लोग खुलेआम पैसे ले रहे हैं। भ्रष्टाचार का खुला नाच हो रहा है,कोई सुनने पूछने वाला नहीं है। बीजेपी के विधायक तक रो रहे हैं। वसुंधरा राजे दुखी आत्मा, उन्होंने ने कल अच्छी बातें कहीं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के राजनीति से सामाकि रिश्तों को अलग रखने के बयान पर डोटासरा ने कहा- वसुंधराजी दुखी आत्मा हैं, दुखी आत्मा से जो निकलता है, वो सच निकलता है। कल उन्होंने राजेंद्र राठौड़ और सीएम की तरफ देखा, उनकी क्या बात चुभ गई? उनके खिलाफ कौन षडयत्र कर रहा है, लेकिन वसुंधरा राजे ने कल जो कहा वे अच्छी बाते हैं। हमें राजनीति में इतना भी वैर भाव नहीं रखना चाहिए कि हम आंख भी नहीं मिला सकें। मेरे परिवार और रिश्तेदार कर्मचारियों का बांसवाड़ा-बाड़मेर किया ट्रांसफर डोटासरा ने कहा- पूर्व विधायक पंडित रामकिशन शर्मा ने भी कल सही कहा कि पहले विरोध में बोलकर भी साथ बैठकर चाय पीते थे, लेकिन आजकल तो एक्सीडेंट करवा दें। आजकल तो मैंने मुख्यमंत्री के खिलाफ कुछ बोल दिया तो मेरे सभी पहचान वालों और रिश्तेदारों तक सबके ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि तबादलों से मैं झुकने वाला नहीं हूं। 2028 में इनका नाम लेने वाला बच जाए तो मुझे बता देना। बेनीवाल के लोगों के खिलाफ रंजिश निकालने दर्ज किए जा रहे मुकदमे डोटासरा ने कहा- विपक्ष की आवाज को आप दबाना चाहते हैं। विपक्ष के लोगों को परेशान करो,उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दो, बताइए यह कौनसा तरीका है? आज हनुमान बेनीवाल और उनके लोगों पर कितने मुकदमे दर्ज करवा दिए? बेनीवाल मेरे लिए अच्छा बोले ना बोले कोई फर्क नहीं पड़ता। बेनीवाल ने दो साल पहले भी कहीं आंदोलन किया तो दो साल बाद भी आज उनके खिलाफ और उनके लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। अगर बेनीवान का नाम लिखा हुआ गाड़ी पर मिल गया तो उनको भी अंदर डाल दो, यह कौन सी राजनीति है ? इनको पता है कि कांग्रेस पार्टी बदले की राजनीति नहीं करती इसका ये नाजायज फायदा उठाते हैं।
लखीसराय जिले के बरियारपुर से घोंघी-कोडाशी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बंद होने से क्षेत्र के कई गांवों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। कजरा सोलर पावर प्लांट के निर्माण कार्य के दौरान यह मार्ग बंद किया गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया और प्रशासन से सड़क को तत्काल चालू करने या वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की। 2 दिन पहले डीएम को लिखित आवेदन दिया ग्रामीणों को जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के क्षेत्र में आने की सूचना मिली, वे बंद सड़क पर एकत्र होकर विरोध-प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले भी जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क बंद होने से घोंघी-कोडाशी सहित आसपास के कई गांवों का संपर्क बाधित हो गया है। इससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी असुविधा हो रही है। सड़क बंद होने स्कूली बच्चों को दिक्कत ग्रामीण धेना सोरेन ने बताया कि यह मार्ग गांव तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता था। सड़क बंद होने के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो सकती है, जिससे आपात स्थिति में गंभीर परेशानी उत्पन्न होने की आशंका है। सोरेन ने यह भी कहा कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि विद्यालय तक पहुंचना कठिन हो गया है। स्थानीय महिला मतिया देवी ने बताया कि बरियारपुर स्थित विद्यालय जाने का यही मुख्य मार्ग था, और इसके बंद होने से छात्र-छात्राओं की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है। दैनिक आवागमन में लोगों को परेशानी मतिया देवी ने बताया कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी सेविका संजू कुमारी ने जानकारी दी कि सड़क बाधित होने के कारण सोमवार से आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन प्रभावित है, जिससे बच्चों का पोषण और प्रारंभिक शिक्षा संबंधी गतिविधियां रुक गई हैं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि विकास परियोजनाओं के साथ आम लोगों की मूलभूत सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सड़क चालू नहीं की गई या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
पंजाब को हर क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज होशियारपुर के मुकेरियां में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। सीएम मान ने साफ शब्दों में कहा कि उनका लक्ष्य सत्ता का सुख भोगना नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों के जीवन में खुशहाली लाना है। जनता के भारी जनसमर्थन के बीच उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और समाज कल्याण के क्षेत्र में किए गए हर वादे को ज़मीनी स्तर पर सच कर दिखाया है। विरोधी दलों पर बोला तीखा हमला मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर जमकर राजनीतिक तीर चलाए। उन्होंने विपक्षी दलों की अंदरूनी कलह और उनके पिछले शासनकाल पर सवाल खड़े किए: कांग्रेस की अंतर्कलह पर तंज: कांग्रेस केवल सत्ता की मलाई चाटने के लिए लड़ रही है। इनके नेता एक-दूसरे के साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं क्योंकि हर किसी को सिर्फ सीएम की कुर्सी चाहिए। राहुल गांधी जिस बस यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे, उसमें सवार नेता आपस में ही लड़कर ज़ख्मी हो जाएंगे। सीएम मान ने यह भी दावा किया कि कांग्रेसी नेताओं ने सत्ता में आने पर जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद करने की बात कही है। अकालियों को घेरा: अकाली दल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब के समझदार लोगों ने अकालियों को राजनीतिक गुमनामी में धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अकालियों ने अपने निजी स्वार्थों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया, माफियाओं और गैंगस्टरों को पनाह दी और युवाओं को नशे के दलदल में धकेला। उन्होंने संकल्प दोहराया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के ज़िम्मेदार लोगों को कभी माफ नहीं किया जाएगा और वे सलाखों के पीछे जाएंगे। नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला: शिक्षा में पंजाब देश में अव्वल मुख्यमंत्री ने शिक्षा को गरीबी और सामाजिक समस्याओं का एकमात्र स्थायी समाधान बताते हुए कहा कि - नीति आयोग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पछाड़कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह पिछले चार वर्षों में शिक्षकों के आधुनिक प्रशिक्षण, स्मार्ट क्लासरूम और बेहतर बुनियादी ढांचे पर किए गए हमारे काम का नतीजा है। 'आप' सरकार की प्रमुख उपलब्धियां और योजनाएं सीएम भगवंत मान ने मंच से अपनी सरकार की रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कई बड़ी घोषणाओं और आंकड़ों को जनता के सामने रखा: 'मांवां-धीयां सत्कार योजना' पर बड़ा अपडेट महिलाओं के सशक्तिकरण का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि… जो महिलाएं जुलाई महीने में किसी कारणवश पंजीकरण (Registration) नहीं करा सकीं, उन्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है। अगस्त में उन्हें तीन महीने की राशि एक साथ दी जाएगी। जब तक हमारी सरकार है, यह योजना कभी बंद नहीं होगी। 'एक्स' (Twitter) पर साझा किया जनता के प्रति आभार जनसभा के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा— “मुकेरियां की पवित्र धरती पर मुझे जो प्रेम, स्नेह और विश्वास मिला है, वही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मुफ्त बिजली, बेहतर स्कूल, महिलाओं को वित्तीय सहायता और स्वास्थ्य सेवाएं अब पंजाब की वास्तविकता बन चुके हैं। आइए, हम सब मिलकर पंजाब को फिर से देश का नंबर एक राज्य बनाने की इस यात्रा को आगे बढ़ाएं।”
पटना के 150 सरकारी स्कूलों में आज से स्मार्ट क्लास की शुरुआत हुई है। पटना के राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय शास्त्री नगर के स्कूल से CM सम्राट चौधरी ने इसकी शुरुआत की। मुख्यमंत्री स्टूडेंट्स के साथ क्लास में बैठे और कोशिका-सेल के फंक्शन को समझा। इसके बाद क्लास में मौजूद स्टूडेंट्स ने विषय से जुड़े सवाल किए। शिक्षकों ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री स्कूल के अलग-अलग क्लासरूम में पहुंचे। यहां स्टूडेंट्स ने मुख्यमंत्री को अपने प्रजेंटेशन के बारे में जानकारी दी। CM ने भी छात्रों से सवाल किए। मुख्यमंत्री करीब 7 से 8 क्लासरूम में गए। 30 मिनट तक वे छात्रों से मिले। इस दौरान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी CM के साथ रहे, लेकिन उन्होंने किसी छात्र से ना कोई सवाल किया ना किसी का प्रजेंटेशन देखा। वो। वो क्लासरूम में अपनी घड़ी में टाइम देखते नजर आए। कक्षा 9 से 12 के छात्रों को मिलेगी डिजिटल शिक्षा इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी प्राइवेट स्कूलों जैसी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से छात्रों को लाइव ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल कंटेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए लाइव और इंटरैक्टिव क्लासेज आयोजित की जाएंगी। छात्र विशेषज्ञ शिक्षकों से सीधे ऑनलाइन जुड़कर पढ़ाई कर सकेंगे और अपनी स्ट्रीम का समाधान भी कर पाएंगे। इसके अलावा डिजिटल स्टडी मैटेरियल, नोट्स, रिकॉर्डेड लेक्चर और नियमित मॉक टेस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रों की पढ़ाई अधिक आसान और प्रभावी होगी। JEE, NEET और CUET की तैयारी भी स्कूल से होगी बिहार स्कूल लाइव क्लासेज के जरिए केवल बोर्ड परीक्षा ही नहीं, बल्कि JEE, NEET और CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जाएगी। विशेषज्ञ शिक्षकों की मदद से छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं का पाठ्यक्रम, अभ्यास प्रश्न और टेस्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूलों के छात्र भी देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग, मेडिकल और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने में सफल हों। गरीब और ग्रामीण छात्रों को मिलेगी मुफ्त कोचिंग सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों के लिए भी बड़ी घोषणा की है। पटना के 10 मॉडल स्कूलों में JEE और NEET की पूरी तरह निःशुल्क कोचिंग शुरू की जा रही है। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में इस सुविधा का विस्तार राज्य के 146 मॉडल स्कूलों तक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक गरीब छात्रों को इसका लाभ मिल सके। पटना के 150 सरकारी स्कूलों से शुरूआत वहीं, बिहार स्कूल लाइव क्लासेज योजना का पहला चरण फिलहाल पटना के 150 सरकारी स्कूलों में शुरू किया गया है। सरकार का लक्ष्य जुलाई के अंत तक इसे पटना के सभी 422 हाई स्कूलों तक पहुंचाना है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इस मॉडल को पूरे बिहार में लागू करने की योजना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का समान अवसर मिलेगा। -------------- ये खबर भी पढ़िए… बिहार के 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज की शुरुआत:अपराधियों को सम्राट की चेतावनी- बिहार छोड़ना होगा; 5 साल में 1 करोड़ राशन कार्ड बनेंगे भागलपुर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को बिहार के 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज की शुरुआत की। काशील गांव में मंच से CM ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ये आजादी के बाद सबसे बड़ा कदम है। इन डिग्री कॉलेजों की लगातार मॉनिटरिंग होगी। अगले 1 साल में नई जगह पर विक्रमशिला यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। भागलपुर में AI और कंप्यूटर साइंड के लिए एक और कॉलेज खोलेंगे। मुख्यमंत्री ने बिहार से बाहर रह रहे लोगों से लौटने की अपील की। CM ने अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि आप लोगों के लिए एक ही ऑप्शन है भागलपुर जेल या बिहार छोड़कर चले जाइए। पूरी खबर पढ़िए
शिक्षा मंत्री का पुतला जलाकर शिक्षकों ने जताया आक्रोश, 17 को संभाग मुख्यालय पर रैली निकालेंगे
राजस्थान शिक्षक संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर बुधवार को शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री का पुतला जलाकर आक्रोश जताया तथा कलेक्ट्रेट के आगे प्रदर्शन कर सीएम के नाम ज्ञापन दिया। इससे पहले जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सीगड़ की अध्यक्षता में हुई सभा में वक्ताओं ने सरकार की मनमानी, प्रतिशोधात्मक व अमानवीय स्थानांतरण नीति की आलोचना करते हुए सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास बताया। प्रांतीय महामंत्री विजय पोटलिया ने कहा कि सरकार ने तबादलों के नाम पर पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। ऐसी नीतियां शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर करती हैं। प्रांतीय उपाध्यक्ष भंवरलाल कस्वा ने कहा कि सीकर के लक्ष्मणगढ़ की घटना सरकार की नीतियों पर करारा तमाचा है। जिस शिक्षक ने एक साधारण स्कूल को मॉडल स्कूल बनाया, नामांकन को 75 से बढ़ाकर 250 तक पहुंचाया, उसका स्थानान्तरण किए जाने से ग्रामीण व छात्राएं सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर है। प्रांतीय संयुक्त मंत्री शुभकरण नैण ने कहा कि सरकार ने स्थानांतरण को प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रताड़ना का माध्यम बना दिया है। उन्होंने बताया कि अब 17 जुलाई को संभाग मुख्यालय चूरू में इंद्रमणि पार्क से संयुक्त निदेशक कार्यालय तक रैली निकालकर शिक्षा मंत्री का पुतला जलाया जाएगा। जिला मंत्री वेदपाल मलिक ने कहा कि सरकार यदि समय रहते नहीं चेती, तो इसका खामियाजा लाखों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा। इस दौरान प्रांतीय संगठन मंत्री रतनसिंह पूनिया, प्रांतीय समिति सदस्य गौरीशंकर सिहाग, रणवीर सारण, लिखमाराम नायक, निहाल सिंह स्वामी, महेंद्र पूनिया, चौथमल चीनिया व गुरुदेव गोदारा आदि ने भी विचार व्यक्त किए तथा अन्यायपूर्ण आदेश वापस नहीं लिए जाने पर आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी। जिला सभाध्यक्ष हवासिंह, संघर्ष समिति संयोजक यूनुस अली ने 17 जुलाई को अधिकाधिक संख्या में संभाग मुख्यालय पहुंचने का आह्वान किया। इस मौके पर जिला कार्यकारिणी सदस्य अमरचंद सांडेला, राजेंद्र धेतरवाल, सरदारशहर ब्लॉक अध्यक्ष माया चौधरी, मंत्री गजानंद मेघवाल, तारानगर अध्यक्ष बनवारी फगेडिया, मंत्री इंद्राज स्वामी, राजगढ़ अध्यक्ष संजय खीचड़, चूरू अध्यक्ष अनिल लांबा, मंत्री खादिम अली, रतनगढ़ मंत्री मुरलीधर अजमेरिया, संघर्ष समिति संयोजक बजरंग बिस्सू, उपाध्यक्ष राकेश खीचड़, सुजानगढ़ मंत्री शिवपाल थालोड़, सुधींद्र जोशी, वरिष्ठ शिक्षक नेता ओमप्रकाश पूनिया, ओमप्रकाश मुहाल, गोपीचंद खीचड़ आदि मौजूद रहे।
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव(ACS) राजेश यादव ने बुधवार को दौसा क्षेत्र के दौरे पर रहे। उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भण्डाना और पालावास का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल भवनों की सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता, कक्षाओं और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लेकर निर्देश दिए। एसीएस ने एक स्कूल की छत पर चढ़कर निरीक्षण किया। इससे पहले कलक्ट्रेट में शिक्षा अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर स्कूलों की सुरक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भवनों की गुणवत्ता जांच के लिए एनडीटी कराए बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जर्जर स्कूल भवनों को तत्काल ध्वस्त किया जाए, क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाए और निर्माणाधीन भवनों की गुणवत्ता जांच के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट (एनडीटी) कराया जाए। यदि कोई भवन गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसका पुनर्निर्माण कराया जाएगा। प्राइवेट स्कूलों की डिजिटल मॉनिटरिंग करें एसीएस ने सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, किसी भी बच्चे को स्कूल से बाहर नहीं रहने देने, शौचालयों की नियमित साफ-सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं हर समय उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि राजशाला संबलन ऐप के माध्यम से प्राइवेट स्कूलों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाए, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रभावी मूल्यांकन हो सके। साथ ही 'एसीएस एजुकेशन संपर्क फॉर्म' के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा का भी अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
जोधपुर में निजी स्कूल संचालकों ने राइट टू एजुकेशन (आरटीई) की बकाया राशि और शाला संबलन मोबाइल ऐप से आ रही समस्याओं के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समिति के सदस्यों ने दावा किया कि बुधवार को शहर की सभी निजी स्कूल बंद रही। गैर सरकारी विद्यालय बचाओ समिति के बैनर तले बुधवार शाम को निजी स्कूल संचालक कलेक्ट्रेट में इकट्ठे हुए और आदेश के विरोध में नारेबाजी की। इसके बाद एडीएम को मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। समिति के सदस्य जोगेन्द्र सिंह गौड़ ने बताया कि शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार शाला संबलन मोबाइल एप के माध्यम से गैर-सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण,अवलोकन एवं विभिन्न बिंदुओं पर जांच किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश व्यवहारिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इससे प्रदेश के हजारों गैर-सरकारी विद्यालयों में अनावश्यक भय, असमंजस एवं प्रशासनिक बोझ उत्पन्न होगी। गैर-सरकारी विद्यालयों को विभाग द्वारा सभी आवश्यक मानकों, नियमों एवं अधिनियमों की जांच के बाद ही मान्यता प्रदान की जाती है। विद्यालयों की मान्यता के समय भवन, भूमि, आधारभूत सुविधाएं, स्टाफ, सुरक्षा सहित अन्य सभी आवश्यक मापदण्डों का विस्तृत परीक्षण किया जाता है। ऐसे में पुनः उन्हीं विषयों पर बार-बार विस्तृत निरीक्षण एवं जांच करना न केवल अव्यवहारिक है बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य से भी भटकाने वाला कदम है। इंस्पेक्टर राज को मिलेगा बढ़ावा उन्होंने कहा कि यह आदेश लागू होने से इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा, अनावश्यक हस्तक्षेप एवं भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ेगी। इससे विद्यालय संचालकों का समय विद्यार्थियों की शिक्षा, शिक्षण व्यवस्था एवं विद्यालय विकास के बजाय कागजी औपचारिकताओं एवं निरीक्षणों में व्यतीत होगा, जिसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस प्रकार की अनावश्यक जांच एवं औपचारिकताओं में उन्हें उलझाना शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं है, बल्कि इससे छोटे विद्यालयों का संचालन और अधिक कठिन हो जाएगा। भय का नहीं, विश्वास एवं संवाद का हो वातावरण गौड़ ने कहा- हमारा मानना है कि विभाग एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के मध्य सहयोग, विश्वास एवं संवाद का वातावरण होना चाहिए। न कि भय एवं अनावश्यक निरीक्षण का। यदि किसी विद्यालय के विरुद्ध कोई विशिष्ट एवं प्रमाणित शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी नियमानुसार जांच की जा सकती है लेकिन सभी विद्यालयों पर इस प्रकार का व्यापक निरीक्षण थोपना न्यायोचित एवं व्यवहारिक नहीं है। ज्ञापन में रखी ये मांग
बक्सर में बुधवार, 15 जुलाई को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दिन रहा। चक्की, चौगाई, केसठ और ब्रह्मपुर प्रखंडों में चार नए डिग्री महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र का विधिवत शुभारंभ किया गया। इन कॉलेजों से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों, विशेषकर छात्राओं को स्नातक की पढ़ाई के लिए अब दूर शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। राज्य स्तर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के कुल 211 नए डिग्री कॉलेजों में एक साथ शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ किया। इसी कड़ी में बक्सर जिले के इन चारों नए महाविद्यालयों में भी पढ़ाई शुरू हुई। जिले का मुख्य उद्घाटन समारोह केसठ प्रखंड की रघुनाथपुर पंचायत स्थित केएचके प्लस-2 उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी साहिला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। जिला पदाधिकारी साहिला ने कहा कि इन नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत से जिले में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। ग्रामीण विद्यार्थियों को अब अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्नातक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को होने वाले लाभ पर जोर दिया। अब उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूर के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे शिक्षा के साथ-साथ बेटियों की उच्च शिक्षा में भागीदारी भी बढ़ेगी। जिला पदाधिकारी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि ये चारों नए डिग्री महाविद्यालय भविष्य में बक्सर जिले को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, सहायक समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी डुमरांव और विशेष कार्य पदाधिकारी सहित कई जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे। जिले के चारों प्रखंडों में भी स्थानीय स्तर पर उत्साह के साथ उद्घाटन समारोह आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
निजी स्कूल संघ खैरथल-तिजारा जिले ने मुख्य सचिव शिक्षा विभाग राजेश यादव के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में निजी स्कूलों की प्रस्तावित जांच प्रक्रिया पर रोकने की मांग की गई है। सही नियम बनाकर निरीक्षण करवाने की मांग संघ के पदाधिकारियों ने बताया- निजी स्कूलों की जांच शुरू करने से पहले स्कूल संगठनों के साथ चर्चा की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि व्यवहारिक नियम बनाए जाने के बाद ही निरीक्षण की कार्रवाई की जानी चाहिए। शिक्षा विभाग द्वारा जारी जांच संबंधी निर्देशों में कई ऐसे प्रावधान शामिल हैं, जिनका पालन व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। संघ का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण निजी स्कूल संचालकों में अनावश्यक भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है। बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है असर संघ ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें लाखों स्टूडेंट पढ़ते हैं। ऐसे में चर्चा के बिना जांच अभियान चलाने से शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। संगठन ने मांग की है कि जब तक निजी स्कूल संगठनों के साथ चर्चा करके स्पष्ट और व्यवहारिक दिशा-निर्देश तय नहीं किए जाते, तब तक जांच की कार्रवाई स्थगित रखी जाए। इस दौरान निजी स्कूल संघ के पदाधिकारियों और विद्यालय संचालकों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर अपनी सहमति व्यक्त की और मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
समस्तीपुर के पांच प्रखंडों खानपुर, कल्याणपुर, सिंघिया, विथान और विद्यापतिनगर में बुधवार को नए महाविद्यालयों का विधिवत शुभारंभ हो गया। बिहार सरकार की पहल पर स्थापित इन महाविद्यालयों में आज से नियमित पठन-पाठन भी प्रारंभ हो गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों छात्र-छात्राओं को अब अपने ही प्रखंड में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। राज्यस्तरीय कार्यक्रम के तहत माननीय मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन नवस्थापित महाविद्यालयों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही, सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर भी उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किए गए। पांचों महाविद्यालयों में भी समारोहपूर्वक कार्यक्रम हुए, जिनमें जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल विद्यापतिनगर स्थित नवस्थापित महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री के उद्घाटन कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा और उसके बाद फीता काटकर महाविद्यालय का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने महाविद्यालय परिसर का निरीक्षण किया और उपलब्ध शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रखंड स्तर पर महाविद्यालयों की स्थापना राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को भी अब कम खर्च में अपने क्षेत्र में ही स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ेगा, छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और जिले का शैक्षणिक वातावरण और अधिक मजबूत होगा। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी नए महाविद्यालयों के शुभारंभ पर खुशी जताते हुए इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इन प्रखंडों में महाविद्यालय की मांग की जा रही थी, जिसके पूरा होने से अब युवाओं को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलेंगे और उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच आसान होगी।
संभल में राज्य कर विभाग के जिला स्तरीय कार्यालय एवं आवासीय परिसर का मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भूमि पूजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी मुख्य अतिथि रहीं। भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी हरेंद्र सिंह रिंकू समेत विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। जनपद की तहसील संभल के गांव किसौली में एक हेक्टेयर (करीब 16 बीघा) भूमि पर बनने वाले इस कार्यालय और आवासीय परिसर के निर्माण पर 13.70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शासन ने निर्माण कार्य के लिए कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी, मुरादाबाद को पहली किस्त के रूप में 3.45 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। उपायुक्त (प्रशासन) राज्य कर लल्लन प्रसाद यादव ने बताया कि भूमि पूजन के साथ ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। कार्यक्रम में मंत्री गुलाब देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष और मेंथा उद्योगपति फूल प्रकाश ने शिलान्यास किया। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य अवधेश प्रताप सिंह, जिला कोषाध्यक्ष अंकित जैन, मंडल अध्यक्ष अंकुर अग्रवाल सहित कई अधिकारी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि जनवरी 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कार्यालय निर्माण के लिए भूमि की पैमाइश कराई थी। ग्राम समाज से भूमि हस्तांतरित होने के बाद कार्यालय और आवासीय भवन का नक्शा तैयार किया गया। वर्तमान में राज्य कर विभाग के जिला स्तरीय कार्यालय संभल और चंदौसी से संचालित हो रहे हैं। संभल कार्यालय किराए के भवन में संचालित है। नया परिसर बनने के बाद चंदौसी कार्यालय को यहां स्थानांतरित किया जाएगा, जबकि संभल कार्यालय यथावत रहेगा। राज्यमंत्री गुलाब देवी ने कहा कि यह जिला स्तरीय राज्य कर कार्यालय जनपद के केंद्र बिंदु पर बन रहा है, जिससे सभी विधानसभा क्षेत्रों के लोगों और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला यह परिसर विभागीय कार्यों को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाएगा।
शेखपुरा जिले में छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बुधवार को चार प्रखंडों में राजकीय डिग्री महाविद्यालयों का समारोहपूर्वक शिलान्यास और शुभारंभ किया गया। राज्य सरकार के इस कदम से स्थानीय युवाओं को अब उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। मुख्य कार्यक्रम शेखोंपुरसराय प्रखंड की बेलाव पंचायत में आयोजित किया गया। यहां बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने राजकीय डिग्री महाविद्यालय का विधिवत शिलान्यास किया। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने और इसे हर घर तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री चौधरी ने आश्वासन दिया कि महाविद्यालय में पठन-पाठन का कार्य यथाशीघ्र शुरू करा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय बच्चों का भविष्य संवरेगा। कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी शेखर आनंद ने मंत्री को अंगवस्त्र और 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के प्रतीक चिन्ह के रूप में पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष निर्मला सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए महाविद्यालय परिसर में एक पौधा भी लगाया। बेलाव के साथ-साथ जिले के तीन अन्य प्रखंडों में भी इन उच्च शिक्षा केंद्रों की आधारशिला रखी गई। घाटकुसुभा प्रखंड स्थित बाऊघाट में विधान पार्षद ललन महतो और एसडीओ प्रियंका कुमारी की मौजूदगी में महाविद्यालय का शुभारंभ हुआ। वहीं, अरियरी प्रखंड की ससवहना पंचायत में शेखपुरा के विधायक रणधीर कुमार सोनी और डीडीसी राकेश कुमार ने राजकीय डिग्री महाविद्यालय का शिलान्यास किया। चेवाड़ा में एडीएम लखींद्र पासवान और डीटीओ बेबी कुमार की उपस्थिति में नगर पंचायत के चेयरमैन लट्टू यादव ने इसका शुभारंभ किया। जिले के विभिन्न चार प्रखंडों में आयोजित इन शुभारंभ समारोहों में कई प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
खगड़िया जिले के मानसी, बेलदौर और चौथम प्रखंडों को मंगलवार को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई सुविधा मिली। मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से तीनों नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन किया। इससे अब हजारों छात्र-छात्राओं को स्नातक की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय या दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। मानसी प्रखंड के घरारी स्थित नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेज के उद्घाटन समारोह में खगड़िया सदर विधायक बबलू कुमार मंडल ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान मानसी में डिग्री कॉलेज खोलने का वादा किया था, जिसे विधानसभा में लगातार उठाने और सरकार से आग्रह के बाद पूरा किया जा सका है। विधायक मंडल ने जोर दिया कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है। स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए खगड़िया या अन्य शहरों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। बबलू मंडल ने अपनी प्राथमिकताओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई और रोजगार जैसे जनहित के मुद्दों पर लगातार काम करने की बात कही। कार्यक्रम के बाद विधायक ने मानसी में महिलाओं के लिए संचालित पिंक बस सेवा को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उद्घाटन समारोह में जिलाधिकारी विक्रम विरकर, उप विकास आयुक्त श्वेता भारती, जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार गोंड, प्रखंड एवं अंचल प्रशासन के अधिकारी, भाजपा जिलाध्यक्ष शत्रुघ्न भगत, जदयू प्रदेश महासचिव उमेश सिंह पटेल, जदयू प्रखंड अध्यक्ष राजनीति प्रसाद, भाजपा नेता जितेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इसी क्रम में बेलदौर और चौथम प्रखंडों में भी राजकीय डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ हुआ। बेलदौर में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय विधायक पन्नालाल सिंह पटेल सहित प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों ने इन कॉलेजों को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। प्रखंडों में डिग्री कॉलेज शुरू होने से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को अपने घर के आसपास ही उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में खगड़िया को नई पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने आज बिहार में 211 डिग्री कॉलेजों का एक साथ उद्घाटन किया। इसी कड़ी में पूर्वी चंपारण जिले के 15 प्रखंडों में भी डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ हुआ है। इससे जिले में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। पूर्वी चंपारण में तुरकौलिया प्रखंड के जयसिंहपुर में उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक कृष्णनंदन पासवान तथा जिला पदाधिकारी सौरभ सुमन यादव सहित कई प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सामूहिक उद्घाटन मुख्यमंत्री ने पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी कॉलेजों का सामूहिक उद्घाटन किया, जबकि स्थानीय कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और छात्र-छात्राएं मौजूद थे। वक्ताओं ने इसे ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। पूर्व मंत्री कृष्णनंदन पासवान ने कहा कि 15 प्रखंडों में एक साथ डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अब दूर के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। इस पहल से शिक्षा का स्तर बेहतर होगा-DM जिला पदाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने कहा कि इस पहल से शिक्षा का स्तर बेहतर होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इन कॉलेजों से स्थानीय युवाओं को अच्छी शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी। यह पहल पूर्वी चंपारण और पूरे बिहार में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे हजारों छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
हनुमानगढ़ में शिक्षा संबलन योजना के तहत निजी स्कूलों की प्रस्तावित विशेष जांच के विरोध में बुधवार को जिले के अधिकांश निजी स्कूल बंद रहे। एसआरएस प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने जिला कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री सहित उच्चाधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने विशेष जांच के आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए इसे स्कूलों पर अनावश्यक प्रशासनिक बोझ बताया, जिससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई। विशेष जांच पर जताई आपत्ति एसोसिएशन ने ज्ञापन में बताया कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने 3 जुलाई 2026 को राजएप के माध्यम से निजी शिक्षण संस्थानों की विशेष जांच के निर्देश जारी किए थे। संगठन का कहना है कि निजी स्कूल पहले से ही विभिन्न विभागीय नियमों का पालन कर रहे हैं। ऐसे में बार-बार निरीक्षण और अतिरिक्त जांच से शिक्षण कार्य की बजाय समय कागजी औपचारिकताओं में अधिक खर्च होगा। आरटीई सत्यापन का दिया हवाला पदाधिकारियों ने कहा कि आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत निजी स्कूलों का प्रतिवर्ष भौतिक सत्यापन पहले से किया जाता है। ऐसे में अलग से विशेष जांच की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों को अनावश्यक प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखा जाना चाहिए। प्री-प्राइमरी भुगतान का मुद्दा भी उठाया एसोसिएशन ने ज्ञापन में आरटीई के अंतर्गत संचालित प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने मांग की कि पूर्व व्यवस्था के अनुसार इन कक्षाओं का भुगतान नियमित रूप से जारी रखा जाए, ताकि निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव न बढ़े और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलती रहें। सरकार से पुनर्विचार की मांग संगठन ने राज्य सरकार से शिक्षा संबलन योजना के तहत प्रस्तावित विशेष जांच संबंधी आदेश पर पुनर्विचार कर उसे तत्काल वापस लेने का आग्रह किया। पदाधिकारियों ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थान प्रदेश में शिक्षा के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए सरकार को सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए स्कूलों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। ये रहे मौजूद इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल जूनेजा, जिला अध्यक्ष सुरेश चंद शर्मा, जिला महासचिव भारत भूषण कौशिक, अशोक सुथार, संगठन मंत्री राजेश मिढ्ढा सहित जिले की विभिन्न तहसीलों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
नालंदा के छात्रों के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। जिले के नौ अलग-अलग प्रखंडों में नवनिर्मित राजकीय डिग्री कॉलेजों में आज से विधिवत शैक्षणिक गतिविधियों का शुभारंभ हो गया है। भागलपुर से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री विजय चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन कॉलेजों का शुभारंभ किया। इस विशेष अवसर पर जिले के सभी नौ डिग्री कॉलेजों में उद्घाटन समारोह का लाइव प्रसारण किया गया, जिससे ग्रामीण अंचल के छात्र भी इस महत्वपूर्ण क्षण के साक्षी बनें। स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा का सपना साकार लंबे समय से इन नौ प्रखंडों के छात्र उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय बिहारशरीफ या अन्य शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर थे। अब इन प्रखंडों—रहूई, नूरसराय, नगरनौसा, बिंद, कतरीसराय, थरथरी, करायपरसुराय, परवलपुर और सरमेरा—में राजकीय डिग्री कॉलेजों के खुलने से हजारों छात्रों को अपने घर के नजदीक ही स्नातक स्तर की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। पहले चरण में इन कॉलेजों में 400 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपना नामांकन भी करा लिया है, जो स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के प्रति छात्रों के उत्साह को दर्शाता है। कॉलेजों में पढ़ाई को सुचारू बनाने के लिए बेंच-डेस्क और जरूरी फर्नीचर की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। मात्र तीन स्टाफ के भरोसे शुरू हुई व्यवस्था हालांकि, इन कॉलेजों की शुरुआत एक बड़े प्रशासनिक संकट के साथ हुई है। फिलहाल हर कॉलेज को चलाने के लिए मात्र एक हेड मास्टर, एक शिक्षक और एक क्लर्क की प्रतिनियुक्ति की गई है। यह स्थिति तब है जब इन कॉलेजों में छह विषयों की पढ़ाई होनी है। इतने सीमित स्टाफ के साथ सभी विषयों की नियमित और गुणवत्तापूर्ण कक्षाएं संचालित करना शिक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो रही है। जानिए कहां कौन प्रतिनिधि रहे मौजूद… नूरसराय और थरथरी डिग्री कॉलेज में सांसद कौशलेंद्र कुमार,नगरनौसा कॉलेज में विधायक हरिनारायण सिंह, रहुई कॉलेज में डॉक्टर सुनील कुमार और कतरीसराय, बिंद और सरमेरा राजकीय डिग्री कॉलेज में विधायक डॉक्टर जितेंद्र कुमार कार्यक्रम में शामिल हुए। नगरनौसा डिग्री कॉलेज में विधायक हरिनारायण रहे मौजूद राजकीय डिग्री महाविद्यालय नगरनौसा जो शुरू से हैं काफी विवादों में रहा आज उसका भी लोदीपुर में शुभारंभ हो गया। इस मौके पर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि मनोज कुमार, हरनौत विधायक हरिनारायण सिंह, राजकीय डिग्री महाविद्यालय के प्रचार्य डॉक्टर संजय कुमार समेत कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक गण मौजूद रहे। हरनौत विधायक हरि नारायण सिंह ने बिहार के 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज के उद्घाटन को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल अस्थाई व्यवस्था के तहत कॉलेज शुरू किए गए हैं, जिन्हें भविष्य में भूमि उपलब्ध होने पर स्थायी भवन में स्थानांतरित किया जाएगा। शिक्षकों की कमी पर उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार और आयोग ने नियुक्ति प्रक्रिया तय कर ली है, और अगस्त महीने तक सभी नए कॉलेजों में शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को राज्य के 211 नए डिग्री कॉलेजों में पठन-पाठन कार्यों का वर्चुअल शुभारंभ किया। यह कदम बिहार सरकार की उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया है। इसी कड़ी में जहानाबाद जिले में भी एक नए डिग्री कॉलेज का विधिवत उद्घाटन किया गया। जहानाबाद में आयोजित उद्घाटन समारोह में बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, खान एवं भूतत्व तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार (चंद्रवंशी) उपस्थित रहे। इनके साथ जहानाबाद के सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव और जिलाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया सहित कई जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे। अतिथियों ने फीता काटकर महाविद्यालय का विधिवत उद्घाटन किया। उपस्थित मंत्रियों ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है। नए डिग्री कॉलेजों के खुलने से अब आसपास के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों या शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और आर्थिक संसाधनों की बचत होगी, साथ ही अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा। मंत्रियों ने जानकारी दी कि फिलहाल इस महाविद्यालय में छह विषयों में पठन-पाठन शुरू किया जा रहा है। आने वाले समय में नए विषयों को भी जोड़ा जाएगा और आवश्यकतानुसार शिक्षकों की बहाली की जाएगी। बिहार सरकार इस पहल को उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मान रही है। जहानाबाद में नए महाविद्यालय के शुरू होने से स्थानीय छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे, जो विकसित बिहार के निर्माण में सहायक होगा।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इंदौर निवासी सौरभ त्रिपाठी ने 2025 की कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, जिससे लाखों बच्चों का शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता सौरभ त्रिपाठी ने याचिका में कहा कि प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। वर्ष 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट होने के बावजूद हजारों स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। इससे बच्चों के शिक्षा के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। हाईकोर्ट ने सरकार और शिक्षा विभाग को भेजा नोटिस मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सरकार से शिक्षक नियुक्ति, बजट के उपयोग और कैग रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत जवाब मांगा गया है। परीक्षा परिणामों पर भी पड़ा असर याचिका में कहा गया है कि शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का असर छात्रों के परीक्षा परिणामों पर भी साफ दिखाई देता है। सत्र 2018-19 में हाईस्कूल का पास प्रतिशत 67.74% था, जो 2021-22 में घटकर 38.53% रह गया। अब सरकार को देना होगा जवाब प्राथमिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि शिक्षक नियुक्तियों, बजट खर्च और सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
भदोही में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शिवम पांडेय ने मंगलवार देर शाम जिले के सात खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। शिक्षा में सुधार और शैक्षिक कार्यों को गति देने के उद्देश्य से यह स्थानांतरण सूची रात 8:15 बजे जारी की गई। बीएसए ने सभी स्थानांतरित खंड शिक्षा अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने और अपने दायित्वों का निर्वहन करने का निर्देश दिया है। जारी सूची के अनुसार, खंड शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव को जनपद मुख्यालय से नगर क्षेत्र भदोही भेजा गया है। यशवंत सिंह को सुरियावां से भदोही, रमाकांत सिंह को औराई से ज्ञानपुर मुख्यालय, और सुमन केसरवानी को जनपद भदोही से अभोली में तैनात किया गया है। इसी क्रम में, वेद प्रकाश यादव को अभोली से औराई, मनोज कुमार सिंह को ज्ञानपुर से डीघ, और चंद्रशेखर आजाद को भदोही से सुरियावां में स्थानांतरित किया गया है।
गुरुगोष्ठी में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर िदया जोर
भरनो|कन्या मध्य विद्यालय के सभागार में प्रखंड स्तरीय शिक्षकों की गुरुगोष्ठी का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) घनश्याम चौबे ने की, जिसमें प्रखंड के सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने अनिवार्य रूप से भाग लिया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाना था। बीईईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रधानाध्यापक अपने विद्यालयों से संबंधित आवश्यक प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराएं। बैठक के दौरान छात्र-केंद्रित योजनाओं पर विशेष चर्चा की गई, जिनमें बच्चों के आधार सीडिंग, बैंक खाता विवरण को कक्षावार अपडेट करना और चाइल्ड प्रोफाइल 2026-27 का कार्य शामिल है। इसके अतिरिक्त, यू-डाइस प्लस एंट्री, पुस्तक वितरण, इभीभी पर डेटा एंट्री, एमडीएम (मध्याह्न भोजन) का सुचारू संचालन और अपार आईडी निर्माण को लेकर गंभीरता बरतने का निर्देश दिया गया। पीटीएम लिंक एंट्री, एसआईआर रिपोर्ट, शिक्षकों और छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति (अटेंडेंस), तथा आईसीटी लैब व स्मार्ट क्लास के प्रभावी उपयोग पर भी विस्तृत चर्चा हुई।बीईईओ ने सभी शिक्षकों को विद्यालय प्रबंधन में सुधार और सरकारी योजनाओं का लाभ हर बच्चे तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
कॉलेज केवल उच्च शिक्षा या डिग्री के लिए नहीं, व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला : प्रो. डागा
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संघटक कॉमर्स कॉलेज में चल रहे स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम के दूसरे दिन नए विद्यार्थियों को कॅरिअर, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास के गुर सिखाए गए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कुलपति प्रो. कैलाश डागा ने छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कॉलेज सिर्फ उच्च शिक्षा या डिग्री हासिल करने की जगह नहीं है, बल्कि यह छात्र के संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण की एक प्रयोगशाला है। विद्यार्थियों को हमेशा अच्छी संगति, अनुशासन और मजबूत नैतिक संस्कारों को चुनना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन का समापन लक्ष्य में पहुंचे पथिक, बिना पथ में विश्राम कैसा की प्रेरक पंक्तियों से किया। मुख्य अतिथि प्रो. जी.एन. पुरोहित ने विद्यार्थियों को भविष्य के कॉमर्स सेक्टर का लीडर बनने की सीख दी और उन्हें स्टार्टअप व उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) अपनाने के लिए प्रेरित किया। डीन प्रो. शूरवीर एस. भानावत ने कॉलेज लाइफ को कॅरिअर का स्वर्णिम अवसर बताते हुए सभी गतिविधियों में सक्रिय रहने का आह्वान किया। एसोसिएट डीन डॉ. शिल्पा वर्डिया ने नियमित उपस्थिति और समय के सदुपयोग को सफलता की कुंजी बताया। उद्घाटन सत्र का आभार डॉ. देवेंद्र श्रीमाली ने जताया, जबकि मंच संचालन डॉ. गरिमा कोठारी व डॉ. प्रियंका जैन ने किया। सफलता के 3डी, अनुशासन के 7 पिलर्स और सीखे 6 लाइफ हैक्स इंडक्शन प्रोग्राम के तकनीकी सत्रों में नए छात्रों को प्रैक्टिकल और मॉडर्न अप्रोच के साथ भविष्य की राह दिखाई गई। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशा शर्मा ने विद्यार्थियों को सफलता के 3डी (डिटरमिनेशन, डेडिकेशन और डिसिप्लिन) का महत्व समझाया, साथ ही अनुशासित जीवन के 7 पिलर्स की जानकारी दी। वहीं, डॉ. सचिन गुप्ता ने रोचक और इंटरेक्टिव सेशन में 6 लाइफ हैक्स के जरिए प्रभावी ढंग से सीखने और आगे बढ़ने के व्यावहारिक सूत्र साझा किए। छात्रों को कॉलेज के अन्य आयामों से जोड़ते हुए डॉ. देवेन्द्र श्रीमाली ने शैक्षणिक अवसरों, डॉ. रेखा बैरवा ने लाइब्रेरी सुविधाओं और सब लेफ्टिनेंट डॉ. विनोद कुमार मीना ने कॉमर्स में क्रिएटिविटी व एनसीसी कैडेट्स की उपलब्धियों को सामने रखा। डॉ. पुष्पराज मीना व डॉ. रेनु शर्मा ने सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में एनएसएस की भूमिका से अवगत कराया। एमएलएसयू विज्ञान महाविद्यालय : बीएससी प्रथम सेमेस्टर के लिए एकदिवसीय इंडक्शन कार्यक्रम मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के विज्ञान महाविद्यालय में बीएससी प्रथम सेमेस्टर (सत्र 2026-2027) के नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए 16 जुलाई को एकदिवसीय इंडक्शन कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम जीव विज्ञान और गणित समूह के विद्यार्थियों के लिए दो अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा। अधिष्ठाता मनोज कुमार जैन के अनुसार इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय व महाविद्यालय की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक वातावरण और सह-शैक्षणिक अवसरों से परिचित कराना है। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित पाठ्यक्रम, विषय चयन, परीक्षा योजना, क्रेडिट अर्जन और मूल्यांकन प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। वरिष्ठ प्राध्यापक अनुशासन, शैक्षणिक उत्कृष्टता, व्यक्तिगत विकास और राष्ट्र विकास में विज्ञान के योगदान पर मार्गदर्शन देंगे।
कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में आयोजित दैनिक भास्कर प्रतिभा सम्मान-2026 समारोह में मंगलवार को 500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान हुआ। समारोह में सीबीएसई, आईसीएसई और एमपी बोर्ड की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ शामिल हुए। मुख्य अतिथि उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग के मंत्री इंदर सिंह परमार रहे। इस अवसर पर आरएनटीयू की प्रो. चांसलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, सेज ग्रुप की एमडी आर्किटेक्ट शिवानी अग्रवाल, ओरिएंटल ग्रुप की प्रबंध निदेशक सोनिया ठकराल, सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंजी. कोपल सलूजा तथा विक्रमादित्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन आदित्य नारोलिया उपस्थित रहे। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि सही दिशा और आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण भी है। शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी हैं। छात्रों को परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियां निभाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। भारत में शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी समान बल दिया जाता है। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। स्टूडेंट्स ने जीते इनामआयोजन विद्यार्थियों के लिए करियर मार्गदर्शन का प्रभावी मंच भी बना। विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और विभिन्न करियर विकल्पों पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा उन्हें खुलकर सवाल पूछने का अवसर मिला। कार्यक्रम में आयोजित क्विज प्रतियोगिता में भी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आकर्षक पुरस्कार जीते। आरएनटीयू प्रेजेंटिंग पार्टनरसमारोह का प्रेजेंटिंग पार्टनर रबींद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी (आरएनटीयू) रहा, जबकि सेज यूनिवर्सिटी (इंदौर-भोपाल) को-प्रेजेंटिंग पार्टनर रही। ओरिएंटल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स पावर्ड बाय पार्टनर तथा एलएनसीटी यूनिवर्सिटी को-स्पॉन्सर रही। एसआरके एजुकेशन, सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी और विक्रमादित्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स पार्टिसिपेटिंग इंस्टीट्यूशन्स के रूप में शामिल रहे।
नालंदा खुला विश्वविद्यालय के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (से.नि.) का आगमन प्रस्तावित है। अपने इस दौरे के दौरान राज्यपाल विश्वविद्यालय में नवनिर्मित दो अत्याधुनिक स्टूडियोज का विधिवत उद्घाटन करेंगे। शिक्षा के डिजिटलीकरण को मिलेगी नई उड़ान विश्वविद्यालय प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्यपाल की ओर से जिन दो स्टूडियो का लोकार्पण किया जाना है, उनमें पहला 'ऑनलाइन क्लास स्टूडियो' और दूसरा 'मास कम्युनिकेशन स्टूडियो' है। इन स्टूडियोज का निर्माण विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने और डिजिटल माध्यम से छात्रों तक शिक्षा की पहुंच को और अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया है। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे स्टूडियो 'ऑनलाइन क्लास स्टूडियो' के माध्यम से अब दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्र-छात्राएं भी घर बैठे सीधे कक्षाओं से जुड़ सकेंगे, जिससे ओपन और डिस्टेंस लर्निंग व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। वहीं, 'मास कम्युनिकेशन स्टूडियो' पत्रकारिता और जनसंचार के विद्यार्थियों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। यहां छात्र अत्याधुनिक उपकरणों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करियर बनाने के लिए जरूरी कौशल सीखने में मदद मिलेगी। विश्वविद्यालय में उत्साह का माहौल महामहिम के आगमन और स्टूडियोज के लोकार्पण को लेकर नालंदा खुला विश्वविद्यालय में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इन सुविधाओं के शुरू होने से न केवल पठन-पाठन का माहौल बेहतर होगा, बल्कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय एक कदम और आगे बढ़ेगा। उद्घाटन समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर शैक्षणिक जगत में भी काफी उत्साह है, क्योंकि इन स्टूडियो के लोकार्पण से बिहार में ओपेन लर्निंग के आधुनिक युग की शुरुआत मानी जा रही है।
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के सीनेट हॉल में मंगलवार को आधुनिक युग में युवा शक्ति सफलता एवं प्रसन्नता का मार्ग विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। गीता शोधपीठ, दीनदयाल शोध केंद्र, स्कूल ऑफ लैंग्वेजस और स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम हुआ। जिसमें चिन्मय मिशन के स्वामी प्रबुद्धानंद ने विद्यार्थियों को सफलता, सकारात्मक सोच और भारतीय जीवन मूल्यों का संदेश दिया। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने स्वामी प्रबुद्धानंद का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और वेदांत की शिक्षाएं आज के युवाओं के लिए होनी चाहिए। कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थियों के लिए वेदांत की क्लास शुरू किए जाने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के साथ नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा भी युवाओं के विकास के लिए जरूरी है। जीवन में सफलता के लिए '3S फॉर्मूला' बताया स्वामी प्रबुद्धानंद ने युवाओं को जीवन में सफलता के लिए '3S फॉर्मूला' बताया। उन्होंने कहा कि हर युवा को गति, कौशल और रणनीति को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गति का मतलब केवल तेजी से आगे बढ़ना नहीं, बल्कि माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों के आशीर्वाद के साथ सही दिशा में आगे बढ़ना है। उनका आशीर्वाद ऐसी अदृश्य शक्ति है, जो जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में मदद करता है। युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनने पर दिया जोर उन्होंने कहा कि युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनना चाहिए। स्वस्थ शरीर, अनुशासित जीवनशैली को सफलता की ओर ले जाती है। रणनीति को सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि अच्छा आचरण, सकारात्मक व्यवहार और सही निर्णय लेने की क्षमता ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचाती है। कार्यक्रम में गीता शोधपीठ के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, प्रो. डी.सी. श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार और डॉ. उमेश पालीवाल ने स्वामी प्रबुद्धानंद का सम्मान किया। स्वागत भाषण डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. मनोज अवस्थी ने किया।
वारिसलीगंज में शिक्षा संवाद आयोजित:छात्रों ने पेपर लीक, व्यवस्था पर उठाई आवाज
नवादा जिले के वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में 'शक्ति अभियान' के तहत 'शिक्षा संवाद' का आयोजन किया गया। यह संवाद शिक्षा में बढ़ती धांधली, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर केंद्रित था। रेणु कुमारी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षाओं तथा बेहतर शैक्षणिक अवसरों की मांग की। इंडियन यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और शक्ति अभियान बिहार की स्टेट लीड रीचा सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक और शिक्षा में अनियमितताओं ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। रीचा सिंह ने जोर दिया कि शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार और धांधली से मुक्त कर प्रत्येक छात्र-छात्रा को समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रभाकर झा ने कहा कि यह शिक्षा के न्याय की आवाज है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'डबल इंजन' की सरकार ने बिहार सहित देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। श्री झा ने छात्र शक्ति को निखारने के लिए सुलभ शिक्षा व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली और पद्धति की आवश्यकता पर बल दिया। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष सूरज यादव ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और छात्र-छात्राओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में इंटक जिला अध्यक्ष मनीष कुमार, जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष गोपाल कुमार, सत्येंद्र प्रसाद कुशवाहा और वारिसलीगंज प्रखंड अध्यक्ष पंकज कुमार ने युवाओं से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संगठित होकर अपनी आवाज उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
गुमला जिला के लोहरदगा रोड स्थित समाहरणालय में संचालित जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में मंगलवार शाम करीब 4 बजे एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने छापेमारी की। इस कार्रवाई से कार्यालय में हड़कंप मच गया। एसीबी टीम ने कार्यालय को सील कर दिया और किसी को भी अंदर आने-जाने की अनुमति नहीं दी गई। छापेमारी के दौरान एसीबी की टीम ने शिक्षा विभाग में कार्यरत प्रधान लिपिक रंजीत कुजूर और सेवानिवृत्त शिक्षक वत्स रविकांत को हिरासत में लिया। उन्हें 50 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। एसीबी टीम दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए रांची ले गई है। जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त शिक्षकों के एरियर की राशि जारी करने के एवज में मोटी रकम की मांग की गई थी। इसी शिकायत के आधार पर एसीबी ने यह कार्रवाई की। रांची से आई एसीबी टीम का नेतृत्व कर रहे डीएसपी ने बताया कि रिश्वत के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी रांची स्थित एसीबी कार्यालय से जारी की जाएगी।
अखिल विश्व गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार और राज्य सरकार के तत्वावधान में आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के लिए गायत्री शक्ति पीठ ओसियां ने स्थानीय विद्यालयों में पुस्तकों का वितरण किया। यह वितरण अभियान विद्यालयों से संपर्क स्थापित कर किया गया। टीचर और छात्रों को नैतिक शिक्षा का महत्व बताया इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मनमोहन पुरोहित ने उपस्थित अध्यापकों और छात्रों को नैतिक शिक्षा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की प्रथम और देव संस्कृति है, जो 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत पर आधारित है। मोबाइल पर ज्यादा निर्भरता पर जताई चिंता पुरोहित ने आधुनिक युग में युवा वर्ग के सोशल मीडिया और मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता पर चिंता व्यक्त की, जिससे उनमें सामान्य ज्ञान की कमी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि समय बदल रहा है और पूर्वजों की पुरानी संस्कृति धीरे-धीरे वापस आ रही है। स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन के लिए अपनी संस्कृति को अपनाना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में भाग लेने की अपील इस दौरान परीक्षा संयोजक मोतीलाल सोनी ने सभी छात्रों से गायत्री परिवार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में भाग लेने का आग्रह किया। गायत्री परिवार के सांगीदान पालीवाल ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित 'नव युग का संविधान' भी वितरित किया। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में विद्यालय के राधेश्याम मेघवाल, गिरीराज पुरोहित, विकास वैष्णव, सत्यनारायण पालीवाल, बंशीलाल जयपाल, अशोक बिश्नोई, मीना जोशी सहित समस्त अध्यापक और छात्र उपस्थित थे।
प्रदेश कांग्रेस द्वारा इंदौर से शुरू की गई साइक्लोथॉन यात्रा मंगलवार को देवास पहुंची। यात्रा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी शामिल रहे। देवास पहुंचने पर रसलपुर से भोपाल चौराहे तक 50 से अधिक मंचों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। देवास में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी ने देश में शिक्षा को लेकर जन-जागरूकता का अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि प्रदेश और देश में केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा लागू की जाए, क्योंकि यह वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों में बार-बार भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। उनके अनुसार, पेपर लीक की घटनाओं के कारण कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ। मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले 25 वर्षों से भाजपा की सरकार है, लेकिन आज भी गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को सरल और मुफ्त शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में करीब 50 प्रतिशत पद खाली हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौती बना हुआ है। पटवारी ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार मुख्यमंत्री से सवाल पूछ रही है, लेकिन जवाब नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार सरकार की कार्यप्रणाली का हिस्सा बन चुका है और जनता के सामने इसकी सच्चाई उजागर होना चाहिए। पटवारी ने कहा कि साइक्लोथॉन यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की जनता तक यह संदेश पहुंचाना है कि हर परिवार के बच्चों को केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग भी की।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े 'विश्वविद्यालय सेवा आयोग' (University Service Commission) को पुनर्जीवित करने का आदेश देते हुए सीएम ने साफ कर दिया है कि अगले 15 दिनों के भीतर आयोग पूरी तरह से कार्यशील हो जाएगा। सरकार के इस फैसले को राज्य के शैक्षणिक जगत में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। आयोग के सक्रिय होने से न केवल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में रिक्त पड़े प्राध्यापकों के हजारों पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ होगा, बल्कि राज्य की गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार की उम्मीद जगी है।खाली पदों पर नियुक्ति का रास्ता हुआ साफ, युवाओं में खुशीपिछले कई वर्षों से राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई थी, जिसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा था। विश्वविद्यालय सेवा आयोग के बंद रहने के कारण नियुक्तियां रुकी हुई थीं, जिससे हजारों योग्य अभ्यर्थी रोजगार की बाट जोह रहे थे। सीएम हेमंत सोरेन द्वारा दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम के बाद अब शैक्षणिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आयोग के सक्रिय होते ही सबसे पहले उन रिक्त पदों की सूची तैयार की जाएगी जो सालों से खाली पड़े हैं। इसके बाद पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे राज्य के कॉलेजों में पठन-पाठन की व्यवस्था फिर से पटरी पर आ सकेगी।शिक्षा व्यवस्था में होंगे बड़े बदलाव, गुणवत्ता पर रहेगा जोरइस फैसले का मुख्य उद्देश्य केवल नियुक्तियां करना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाना है। सीएम हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया है कि आयोग न केवल नियुक्तियों का कार्य करेगा, बल्कि विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक सत्र को नियमित करने और शोध (Research) कार्यों को बढ़ावा देने के लिए भी नई नियमावली तैयार करेगा। विश्वविद्यालय सेवा आयोग का पुनर्गठन होने से अब अकादमिक कार्यों में राजनीतिक हस्तक्षेप कम होगा और योग्य शिक्षकों को तरजीह मिलेगी। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि आयोग अपने तय समय सीमा में कार्य शुरू कर देता है, तो झारखंड के शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग में सुधार होना निश्चित है।स्थानीय स्तर पर प्रभाव और प्रशासनिक हलचलजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर बात करें तो रांची से लेकर दुमका, हजारीबाग और जमशेदपुर तक के सरकारी कॉलेजों के छात्र लंबे समय से इस मांग को उठा रहे थे। स्थानीय स्तर पर छात्र संगठनों ने सीएम के इस निर्णय का स्वागत किया है। प्रशासनिक स्तर पर, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने आयोग को सक्रिय करने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि आयोग के कार्यालय से लेकर स्टाफ की नियुक्ति तक की प्रक्रिया को 15 दिनों के भीतर पूरा करने के लिए एक डेडिकेटेड टीम गठित कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन इसे एक बड़े 'रिफॉर्म' के रूप में देख रहा है जो आने वाले समय में राज्य के युवाओं के भविष्य को संवारने में बड़ी भूमिका निभाएगा।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर क्यों ट्रेंड कर रहा है ये फैसला?आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल डेटा के अनुसार, 'Jharkhand Education Reform News' इस समय गूगल और बिंग जैसे एआई सर्च इंजनों पर शिक्षा जगत से जुड़ी सबसे बड़ी सुर्खियों में है। एआई सर्च इंजन इस निर्णय को 'सुशासन की दिशा में एक कड़ा कदम' बता रहे हैं। छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा लगातार 'विश्वविद्यालय सेवा आयोग भर्ती 2026' और 'झारखंड प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली' जैसे कीवर्ड्स खोज रहे हैं। एआई मॉडल्स के अनुसार, सीएम का यह 15 दिन का लक्ष्य प्रशासन की कार्यक्षमता की परीक्षा भी है। जैसे ही यह आयोग धरातल पर उतरेगा, शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड के लिए एक नया युग शुरू हो सकता है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है। इससे व्यापार बढ़ेगा, निवेश के नए अवसर बनेंगे और भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड के साथ ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र के बाजारों तक पहुंच आसान होगी। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वहीं न्यूजीलैंड कृषि, डेयरी, शिक्षा, तकनीक और सुशासन के लिए जाना जाता है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। ऐसे में FTA दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। भारतीय कंपनियों को मिलेगा नया बाजार ग्लोबल फाइनेंस सर्विसेज लिमिटेड केसंस्थापक एवं निदेशक अजय कुमार के मुताबिक, FTA लागू होने पर भारतीय IT, फार्मा, इंजीनियरिंग, मेडिकल उपकरण, टेक्सटाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और स्टार्टअप सेक्टर को न्यूजीलैंड के बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। साथ ही भारतीय कंपनियां न्यूजीलैंड के जरिए ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों में भी कारोबार बढ़ा सकेंगी। वहीं न्यूजीलैंड की कृषि, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, शिक्षा, पर्यटन और हाई-टेक कंपनियों को भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार तक पहुंच मिलेगी। भारतीय युवाओं के लिए बढ़ सकते हैं रोजगार के अवसर अजय कुमार कहते हैं- न्यूजीलैंड में स्वास्थ्य, शिक्षा, इंजीनियरिंग, निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की कमी है। अगर FTA के तहत पेशेवर योग्यताओं को पारस्परिक मान्यता मिलती है और वर्क परमिट की प्रक्रिया आसान होती है, तो भारतीय डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, शिक्षक और IT प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। कृषि और डेयरी में मिलेगा तकनीकी सहयोग न्यूजीलैंड आधुनिक डेयरी प्रबंधन, पशुपालन और टिकाऊ कृषि तकनीक के लिए दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों का उपयोग भारत में होने से किसानों की उत्पादकता बढ़ सकती है, डेयरी सेक्टर मजबूत होगा और फूड प्रोसेसिंग उद्योग को भी गति मिलेगी। तकनीक और स्टार्टअप सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिनटेक, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल पेमेंट और स्टार्टअप इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं। इससे दोनों देशों के स्टार्टअप और रिसर्च संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ेगा। निवेश बढ़ने की भी उम्मीद न्यूजीलैंड राजनीतिक स्थिरता, पारदर्शी प्रशासन और निवेशकों के अनुकूल नीतियों के लिए जाना जाता है। ऐसे में भारतीय उद्योगपतियों और निवेशकों के लिए वहां कारोबार बढ़ाने और वैश्विक विस्तार के नए अवसर बन सकते हैं। छोटे उद्योगों और किसानों के हितों का भी रखना होगा ध्यान विशेषज्ञों का कहना है कि FTA का पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब सरकार घरेलू उद्योगों, MSME, किसानों और सेवा क्षेत्र के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। साथ ही गुणवत्ता मानकों, सीमा शुल्क प्रक्रिया और नियमों को भी सरल बनाना होगा। प्रवासी भारतीय निभा सकते हैं अहम भूमिका न्यूजीलैंड में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, व्यापार और सेवा क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यह समुदाय दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। क्या है FTA? मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) दो देशों के बीच ऐसा व्यापारिक समझौता होता है, जिसमें आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या खत्म किया जाता है। इसका उद्देश्य व्यापार बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होता है। (लेखक अजय कुमार, ग्लोबल फाइनेंस सर्विसेज लिमिटेड, ऑकलैंड (न्यूज़ीलैंड) के संस्थापक एवं निदेशक हैं। आर्टिकल में व्यक्त विचार उनके निजी हैं।)
PGI-D रिपोर्ट:रायगढ़ बेस्ट जिला, डिजिटल शिक्षा में रायपुर अव्वल; सीखने की गुणवत्ता बढ़ाना चुनौती
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स (PGI-D) 2025-26 रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा की मिश्रित तस्वीर सामने आई है। रायगढ़ 329 अंकों के साथ प्रदेश में पहले, सरगुजा (324) दूसरे और बीजापुर (323) तीसरे स्थान पर रहे। राजधानी रायपुर डिजिटल लर्निंग श्रेणी में प्रदेश में अव्वल रहा। हालांकि प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ जिला भी 600 में केवल 329 अंक ही हासिल कर सका, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की बड़ी गुंजाइश स्पष्ट होती है। देशभर के 784 जिलों में से 473 के स्कोर में सुधार हुआ और 89 जिलों ने ग्रेड में प्रगति की। इसके बावजूद लगातार दूसरे वर्ष भी कोई जिला समग्र प्रदर्शन में ‘उत्कर्ष’ या ‘उत्तम-1’ ग्रेड तक नहीं पहुंच सका, जबकि 19 जिले ‘उत्तम-2’ ग्रेड में पहुंचे। रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश: बच्चों का सीखना ही असली पैमाना PGI-D में कुल 600 अंकों में से 290 अंक केवल आउटकम्स के लिए निर्धारित हैं। यानी कुल मूल्यांकन का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि बच्चे कितना सीख रहे हैं, उनकी शैक्षणिक उपलब्धि कैसी है और शिक्षा तक उनकी पहुंच कितनी प्रभावी है। इसके बाद प्रभावी कक्षा संचालन, शिक्षक उपलब्धता, बुनियादी ढांचा, डिजिटल लर्निंग, स्कूल सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था का मूल्यांकन किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि रिपोर्ट का सबसे बड़ा फोकस भवन या संसाधनों से अधिक शिक्षा की गुणवत्ता पर है। रायपुर समग्र प्रदर्शन में शीर्ष तीन जिलों में नहींरायगढ़ ने समग्र प्रदर्शन में प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया, जबकि सरगुजा और बीजापुर भी 320 से अधिक अंक लेकर शीर्ष तीन जिलों में शामिल रहे। वहीं रायपुर ने डिजिटल लर्निंग श्रेणी में 50 में से 24 अंक हासिल कर प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। इसके बावजूद राजधानी समग्र प्रदर्शन में शीर्ष तीन जिलों में जगह नहीं बना सकी। इससे संकेत मिलता है कि डिजिटल संसाधनों के साथ-साथ सीखने के परिणाम, कक्षा शिक्षण और अन्य मानकों में भी समान सुधार आवश्यक है। 70 संकेतकों पर हुई जिलों की परखPGI-D में जिलों का मूल्यांकन 70 संकेतकों और छह प्रमुख श्रेणियों के आधार पर किया गया। इनमें परिणाम (290 अंक), प्रभावी कक्षा संचालन (90), बुनियादी ढांचा एवं छात्र सुविधाएं (51), स्कूल सुरक्षा (35), डिजिटल लर्निंग (50) तथा शासन प्रक्रिया (84) शामिल हैं। रिपोर्ट का उद्देश्य केवल अंक देना नहीं, बल्कि यह बताना है कि किस जिले को किस क्षेत्र में सुधार की सबसे अधिक आवश्यकता है। बुनियादी ढांचा बेहतर, डिजिटल लर्निंग कमजोरबस्तर संभाग के जिलों में दंतेवाड़ा ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। उसे कुल 292 अंक मिले तथा बुनियादी ढांचा एवं छात्र सुविधाओं की श्रेणी में 51 में से 43 अंक हासिल हुए। दूसरी ओर सुकमा को कुल 255 अंक मिले। डिजिटल लर्निंग में सुकमा को 50 में से केवल 6 अंक और नारायणपुर को 7 अंक मिले। इससे स्पष्ट है कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा का विस्तार अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
शिक्षकों के तबादलों से विद्यालयों में पढ़ाई न हो प्रभावित: शिक्षा निदेशक
प्रदेश में हाल ही में बड़े पैमाने पर शिक्षकों के तबादले हुए हैं। इसके बाद स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था सुचारू रखने के लिए सरकार अलर्ट हो गई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि तबादलों के कारण बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं होना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा राजस्थान के निदेशक और समसा के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक सीताराम जाट ने इसे लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी संयुक्त निदेशकों, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को प्राथमिकता से काम करने को कहा है। . तुरंत एक्शन: शिक्षण प्रक्रिया प्रभावित होने पर शिक्षा अधिकारियों को तुरंत एक्शन लेना होगा। .नियमित मॉनिटरिंग: संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी स्कूलों की लगातार मॉनिटरिंग करेंगे।
राजस्थान में गिग इकोनॉमी और त्वरित कमाई का बढ़ता आकर्षण अब उच्च शिक्षा पर असर दिखाने लगा है। उच्च शिक्षा विभाग के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (2025-26) के विश्लेषण में सामने आया है कि यूजी-पीजी में नामांकन इस सत्र में 4.23% घटकर 12.55 लाख रह गया। यह लगातार दूसरा साल है, जब उच्च शिक्षा में निगेटिव ग्रोथ दर्ज हुई है। महामारी के दौरान बढ़ा नामांकन भी अब सिकुड़ चुका है। सबसे ज्यादा असर लड़कों पर दिखा है, जिनके नामांकन में 5.60% की गिरावट आई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि गिग सेक्टर में तेजी से बढ़ते अवसर युवाओं को सीधे वर्कफोर्स की ओर खींच रहे हैं। इस गिरावट के बीच उदयपुर संभाग मजबूत अपवाद बनकर उभरा है। प्रदेश में प्रति कॉलेज औसतन 513 विद्यार्थी हैं, जबकि उदयपुर के सुविवि से संबद्ध कॉलेजों में यह आंकड़ा लगभग दोगुना 1,030 विद्यार्थी प्रति कॉलेज है। डिग्री का दबदबा, 71% विद्यार्थी सिर्फ आर्ट्स में प्रदेश के 71.10% विद्यार्थी अकेले कला संकाय में नामांकित हैं। भीड़ की प्रमुख वजह कम फीस और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पात्रता है। रोजगार की गारंटी नहीं होने के बावजूद यह संकाय सबसे अधिक विद्यार्थियों को आकर्षित कर रहा है। लड़कों के नामांकन में 5.60 प्रतिशत की बड़ी गिरावट : विभागाध्यक्ष सुविवि के लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष डॉ. गिरिराज सिंह चौहान के अनुसार उच्च शिक्षा में सबसे चिंताजनक संकेत लड़कों के नामांकन में 5.60% और लड़कियों में 3.12% की गिरावट है। वर्तमान में कुल नामांकन में 55.91% हिस्सेदारी छात्राओं की है। डॉ. चौहान के अनुसार आर्थिक दबाव और त्वरित कमाई की चाहत के चलते बड़ी संख्या में युवा लॉजिस्टिक्स, रिटेल, सिक्योरिटी सर्विसेज, डिलीवरी और राइड-शेयरिंग जैसे गिग सेक्टर में जा रहे हैं। संविदा व अस्थायी नौकरियों के बढ़ते अवसरों से वे बीए-बीकॉम जैसी तीन वर्षीय डिग्री के बजाय सीधे रोजगार चुन रहे हैं। उम्मीद बाकी...उदयपुर संभाग बना हाई इनरोलमेंट मॉडल उच्च शिक्षा में उदयपुर संभाग हाई इनरोलमेंट-लो इंस्टीट्यूशनल शेयर मॉडल का उदाहरण बनकर उभरा है। राज्य के कुल महाविद्यालयों में इसकी हिस्सेदारी महज 5.3% (207 कॉलेज) है, लेकिन कुल छात्र नामांकन में संभाग अकेले करीब 8% (2.25 लाख) का भार संभाल रहा है। आदिवासी बहुल यह क्षेत्र अपने जिलों के साथ-साथ सिरोही तथा गुजरात और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आकर्षित कर रहा है। कम कॉलेजों में अधिक छात्र होने से यहां संसाधनों का उपयोग राज्य में सबसे अधिक है। प्रदेश में हर 100 लड़कों पर 129 लड़कियां उच्च शिक्षा में...आंकड़ों का दूसरा बड़ा संकेत जेंडर गैप का उलटना है। अब राज्य में हर 100 लड़कों पर 129 लड़कियां उच्च शिक्षा में नामांकित हैं।
शिक्षा-समाजसेवा की विरासत छोड़ गए आसपुरा, श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा सैलाब
श्री भवानी निकेतन शिक्षा समिति ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक तथा महाराव शेखा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष ठाकुर जालिम सिंह आसपुरा के निधन पर रविवार को सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ, जयपुर और शेखावाटी क्षेत्र से हजारों लोग पहुंचे और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। 96 वर्षीय ठाकुर जालिम सिंह आसपुरा का 11 जुलाई को निधन हो गया था। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा, समाज सेवा और संगठन निर्माण के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने जीवनकाल में शैक्षणिक संस्थाओं के विकास और सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियां भी उठाती रहेंगी। सभा में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़, राजपालसिंह शेखावत, आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्रसिंह राठौड़, पूर्व सांसद गोपालसिंह शेखावत, राजपूत सभा के अध्यक्ष रामसिंह चंदलाई, सभा के महामंत्री धीर सिंह शेखावत, डॉ. नरपतसिंह शेखावत, श्री भवानी निकेतन शिक्षा समिति के अध्यक्ष नगेन्द्रसिंह बगड़, सचिव सुदर्शनसिंह सुरपुरा, श्यामसिंह मंढ़ा, जालिमसिंह हुड़ील, सम्पतसिंह धमोरा, गुलाबसिंह मेड़तिया, दिलीपसिंह छापोली, महेन्द्रसिंह जैसलाण, प्रो. भवानीसिंह व शिवपाल सिंह नांगल सहित अन्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
झारखंड सरकार ने राज्य की उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में व्यापक बदलाव की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बीआईटी सिंदरी को यूनिटरी यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित करने पर सैद्धांतिक सहमति दी। इसके लिए आवश्यक विधेयक तैयार करने और संस्थान की डिजिटल प्रेजेंटेशन बनाने का निर्देश दिया। साथ ही अगले 15 दिनों के भीतर झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को पूरी तरह कार्यरत करने और रोजगारपरक कोचिंग संस्थानों के नियमन के लिए कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को ‘माइनिंग से माइंड’ की ओर ले जाने में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अधिकारियों से शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने तथा रोजगारोन्मुखी और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों पर विशेष फोकस रखने को कहा। गुरुजी क्रेडिट कार्ड का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाएंगुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि अब तक 2888 पात्र विद्यार्थियों को स्वीकृति दी गई है, जबकि 243 छात्र-छात्राओं को विभिन्न बैंकों के माध्यम से करीब 64 करोड़ रुपए का शिक्षा ऋण मिला है। मुख्यमंत्री ने कल्याण विभाग के साथ समन्वय बढ़ाकर अधिक पात्र विद्यार्थियों तक योजना पहुंचाने और दुमका फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ देने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ समय पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।
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बालाघाट। जिले के शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर एनएसयूआई ने दोपहर में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने महाविद्यालय प्रबंधन को एक ज्ञापन सौंपा और सीट वृद्धि के समर्थन में नारेबाजी भी की। एनएसयूआई के अनुसार, बालाघाट एक पिछड़ा जिला है जहां अधिकांश युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। हालांकि, महाविद्यालय में विभिन्न संकायों में सीटों की कमी के कारण कई छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पाता है। इससे उन्हें महंगी शिक्षा के लिए निजी विश्वविद्यालयों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ता है। एनएसयूआई ने महाविद्यालय प्रबंधन से विभिन्न संकायों में सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की है, ताकि प्रवेश से वंचित हो रहे विद्यार्थियों को अवसर मिल सके। एनएसयूआई प्रतिनिधि ऋषभ सहारे ने बताया कि आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के छात्र पहले बड़े कॉलेजों में प्रवेश का इंतजार करते हैं। वहां प्रवेश न मिलने पर वे प्रतिशत के आधार पर बालाघाट के महाविद्यालय में प्रवेश ले लेते हैं। इससे उन स्थानीय छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पाता है जिनके लिए आर्थिक समस्याओं या कम अंकों के कारण बाहर जाकर पढ़ाई करना संभव नहीं होता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में अधिकारियों की उपस्थिति में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, बजटीय प्रावधानों औी घोषणाओं की कार्य प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड (GSCC) स्कीम के तहत उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए अब तक 2888 पात्र स्टूडेंट्स को ऋण उपलब्ध कराए जाने पर विभाग की सहमति मिली है, जिसमें 243 छात्र-छात्राओं के बीच 64 करोड़ रुपए राशि का ऋण विभिन्न बैंकों द्वारा उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कल्याण विभाग से समन्वय स्थापित कर गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत अधिक से अधिक पात्र स्टूडेंट्स को ऋण उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिविल एविएशन विभाग से समन्वय स्थापित कर दुमका फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों को भी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष कार्य योजना बनाएं। बैठक में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार भी मौजूद रहे। स्कॉलरशिप योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने पर जोर मुख्यमंत्री ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा द्वारा संचालित विद्यार्थी कल्याण से जुड़ी 'गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना', मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना, मानकी मुंडा छात्रवृत्ति योजना सहित स्कॉलरशिप स्कीम से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ छात्र-छात्राओं तक तेजी से पहुंचाने पर जोर दिया। शीघ्र झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को कार्यरत करें मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगले 15 दिनों के अंदर झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को कार्यरत करें। मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लाइव ऑनलाइन क्लास के माध्यम से राज्य के विश्वविद्यालय में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्रदान करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि इस संबंध में विभाग द्वारा तैयारी की गई है और पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रथम चरण में झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय एवं बीबीएमके धनबाद से यह पहल शुरू की जा रही है, इसकी पूर्ण तैयारी की जा चुकी है। कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी को सक्रिय करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने हायर एजुकेशन एवं रोजगारपरक कोचिंग के लिए 15 दिन के अंदर कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी को पूर्ण रूप से कार्यरत करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। बीआईटी सिंदरी बनेगी नई Unitary University मुख्यमंत्री एवं अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श के उपरांत बी.आई.टी. सिंदरी को Unitary University के रूप में अपग्रेड के लिए सहमति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने तकनीकी एजुकेशन ट्रांसफॉर्मेशन के तहत बी.आई.टी. सिंदरी की संपूर्ण डिजिटल प्रजेंटेशन तैयार करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने इस पर जल्द विभागीय प्रक्रियाओं को पूरा करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। तकनीकी शिक्षा क्लस्टर होगी तैयार बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के भीतर चिन्हित जिलों में तकनीकी शिक्षा क्लस्टर तैयार किए जाएं, विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई की राज्य के 9 जिले पलामू, गिरिडीह, रामगढ़, गुमला, रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा एवं साहिबगंज में तकनीकी कलेक्टर बनाए जाने की कार्ययोजना प्रस्तावित है, जल्द इस योजना को मूर्त रूप दिया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा को दृष्टिगत रखते हुए कोर्स का संचालन करना आवश्यक मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय को झारखंड इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तथा राजकीय प्रौद्योगिकी महाविद्यालयों को बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रूप में विकसित कर वहां एनआईआईटी एवं आईआईटी के तर्ज पर इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स एंड शिपिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल एवं सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की पढ़ाई प्रारंभ करें ताकि आने वाले समय में इन कोर्स माध्यम से युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकें। बीआईटी एवं जेआईटी को चलाने के किए बनेगी नई सरकारी सोसाइटी मुख्यमंत्री ने राज्य में काउंसिल फॉर इंस्टीट्यूट्स ऑफ एमिनेंस की स्थापना करते हुए आईआईटी के तर्ज पर गवर्निंग काउंसिल, रीजनल कलेक्टर एवं इंडस्ट्रियल गवर्निंग बॉडी गठित किए जाने का निर्देश दिया। राज्य में रोबोटिक्स फेस्टिवल की शुरुआत मुख्यमंत्री के समक्ष अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्य के उच्च और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के छात्रों के लिए पहली बार झारखंड रोबोटिक्स फेस्टिवल की शुरुआत हुई है। इसका उद्देश्य युवाओं को एआई और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों में आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस तरह स्कीमों के सभी पहलुओं पर गंभीरता से अध्यन कर योजनाओं का मूल्यांकन करते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा ब्लॉक शिक्षा कार्यालय (बीईओ) में हुए 20.47 करोड़ रुपए के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी कमल राठौर ने घोटाले की रकम से धार जिले में अवैध कॉलोनी विकसित की थी। ईडी ने इस कॉलोनी के 56 आवासीय प्लॉट कुर्क कर लिए हैं, जिनकी बाजार कीमत 6 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। ईडी के इंदौर उप-आंचलिक कार्यालय ने मामले में कमल राठौर सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट इंदौर में पूरक अभियोजन शिकायत (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) भी दाखिल की है। अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं। फर्जी बिलों से निकाले गए थे 20.47 करोड़ रुपए ईडी के अनुसार वर्ष 2018 से 2023 के बीच कट्ठीवाड़ा ब्लॉक शिक्षा कार्यालय और आलीराजपुर कोषागार में मिलीभगत कर फर्जी बिलों के जरिए 20.47 करोड़ रुपए के सरकारी धन का गबन किया गया था। जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी कमल राठौर ने इस रकम को छिपाने के लिए अपने और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। बाद में खातों से बड़ी मात्रा में नकदी निकालकर धार जिले के गंधवानी क्षेत्र में कृषि भूमि खरीदी गई। 'श्री बालाजी धाम' नाम से बसाई कॉलोनी ईडी के मुताबिक अवैध रूप से अर्जित धन को वैध दिखाने के उद्देश्य से खरीदी गई कृषि भूमि पर 'श्री बालाजी धाम' नाम से आवासीय प्लॉटिंग परियोजना विकसित की गई। अब ईडी ने इस कॉलोनी के 56 आवासीय भूखंडों को कुर्क कर लिया है। कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल ईडी ने 9 जुलाई 2026 को विशेष पीएमएलए न्यायालय इंदौर में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। कोर्ट ने शिकायत स्वीकार करते हुए आरोपियों के खिलाफ नोटिस जारी कर दिए हैं। पहले भी 4.43 करोड़ रुपए की संपत्ति हो चुकी है कुर्क यह मामला कट्ठीवाड़ा थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी की जांच में सामने आया था। जांच के दौरान ईडी ने कई स्थानों पर तलाशी लेकर दस्तावेज जब्त किए और बैंक खाते फ्रीज किए थे। इससे पहले भी ईडी आरोपियों की 4.43 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है, जिसकी पुष्टि 10 मार्च 2026 को पीएमएलए के निर्णायक प्राधिकरण ने कर दी थी। ईडी का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी। ये खबर भी पढ़िए… BEO ऑफिस से 20 करोड़ गबन मामले में आरोपी गिरफ्तार करीब 11 महीने पहले अलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को 20.47 करोड़ रुपए के गबन मामले में बड़ी कार्रवाई की थी। इंदौर ED के सब जोनल ऑफिस ने मुख्य आरोपी कमल राठौर को इंदौर से गिरफ्तार किया था। पढ़ें पूरी खबर…
भिलाई के खम्हरिया स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल (सेजेस) में छात्राओं द्वारा अजीब हरकत करने, चीखने-चिल्लाने के साथ ही तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। पिछले तीन दिनों में 9वीं-ए की 8 छात्राएं अचानक असामान्य व्यवहार करने लगीं। कुछ छात्राएं चीखने-चिल्लाने लगीं, कुछ बेहोश हो गईं, जबकि कुछ के हाथ-पैर अकड़ गए और आंखों से लगातार पानी निकलने लगा। घटना के बाद छात्राओं को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जांच में किसी तरह की शारीरिक बीमारी सामने नहीं आई। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही छात्राओं की काउंसलिंग कराने के लिए साइकोलॉजिकल टीम भी बुलाई गई है। 9 जुलाई से चल रहा पूरा मामलास्कूल की प्रिंसिपल सुनीता दीवान ने बताया कि पहली घटना 9 जुलाई को शाम करीब 4 से 4:30 बजे के बीच हुई। एक छात्रा को अचानक चक्कर आया, जिसके बाद उसे स्टाफ रूम ले जाया गया। कुछ ही देर बाद दूसरी छात्रा जोर-जोर से चीखने लगी। दोनों के परिजनों को बुलाकर उन्हें घर भेज दिया गया। प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि किसी भी छात्रा को पेट या दूसरी शारीरिक शिकायत नहीं हुई। फिलहाल शिक्षा विभाग की जांच और विशेषज्ञों की काउंसलिंग के बाद ही पूरे मामले की असली वजह सामने आ सकेगी। हाथ पैर अकड़ गया, ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी छात्राएंउन्होंने बताया कि इसके बाद उसी दिन तीन और छात्राएं क्लास में बेहोश हो गईं। उनके हाथ-पैर अकड़ गए, आंखों से पानी निकलने लगा और वे ठीक से बोल भी नहीं पा रही थीं। पहले 108 एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन समय लगने की बात कहने पर छात्राओं को ऑटो से शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां करीब डेढ़ घंटे बाद सभी छात्राएं सामान्य हो गईं। डॉक्टरों की जांच में कोई गंभीर शारीरिक समस्या नहीं मिली। पहले दिन सबसे ज्यादा पांच छात्राएं हुई प्रभावित प्रिंसिपल के मुताबिक 9 जुलाई को पांच छात्राएं प्रभावित हुई थीं। इसके बाद 11 जुलाई को दो और छात्राओं की तबीयत इसी तरह बिगड़ी। इनमें से एक को अस्पताल ले जाया गया, जबकि दूसरी कुछ देर बाद स्कूल में ही सामान्य हो गई। इसके बाद फिर एक और छात्रा के साथ ऐसी ही घटना हुई, जिसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां भी वह थोड़ी देर में सामान्य हो गई। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि अब तक यह स्थिति सिर्फ डे-शिफ्ट में पढ़ने वाली 9वीं-ए की छात्राओं के साथ ही सामने आई है। सुबह की शिफ्ट में पढ़ने वाले बच्चों या स्कूल के किसी शिक्षक को ऐसी कोई परेशानी नहीं हुई है। सभी की मेडिकल रिपोर्ट सामान्यप्रिंसिपल ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट सामान्य आने के बाद शुरुआती तौर पर मामला मनोवैज्ञानिक कारणों से जुड़ा लग रहा है। हालांकि अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता। जिला शिक्षा अधिकारी को पूरी जानकारी दे दी गई है और उनकी ओर से छात्राओं की काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। एहतियात के तौर पर स्कूल ने 9वीं-ए का क्लासरूम भी बदल दिया है। शनिवार को स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठक में छात्राओं के अभिभावकों से भी चर्चा की गई। परिजनों ने बच्चों का मनोबल बढ़ाने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के शारीरिक शिक्षा विभाग के पूर्व HOD भगत सिंह राठी के ऑफिस में नए HOD डॉ. जितेंद्र ने चार्ज संभालते ही कार्रवाई कर दी। यूनिवर्सिटी की तरफ से बनाई जांच कमेटी ने ऑफिस का ताला खोलकर अंदर से 36830 रुपए बरामद किए, जिन्हें यूनिवर्सिटी अकाउंट में जमा करवाया गया। शारीरिक शिक्षा विभाग के पूर्व HOD डॉ. भगत सिंह राठी पर छात्रों से फेयरवेल पार्टी के नाम से अवैध वसूली की गई थी, जिसकी शिकायत विभाग के ही प्रोफेसरों ने वीसी प्रो. मिलाप सिंह पूनिया से की। वीसी ने तुरंत एक्शन लेते हुए कार्यकारी परिषद की मीटिंग में भगत सिंह राठी को सस्पेंड करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह को नया HOD बनाया था। चार्ज संभालते ही HOD ने की कार्रवाई शारीरिक शिक्षा विभाग के HOD डॉ. जितेंद्र सिंह ने कमेटी के साथ मिलकर पहले दिन ही कार्रवाई कर दी। डॉ. जितेंद्र ने कमेटी के सामने ऑफिस का दरवाजा खोला और अंदर अलमारी से पैसों का एक पैकेट बरामद किया, जिसमें 36830 रुपए मिले। इस पूरे मामले की वीडियोग्राफी भी करवाई गई। यूनिवर्सिटी अकाउंट में जमा करवाई राशिडॉ. जितेंद्र ने कमेटी के सामने पैसों की गिनती करवाई और रिपोर्ट तैयार करके कमेटी के साइन करवाए। साथ ही बरामद की गई राशि को यूनिवर्सिटी के अकाउंट में जमा करवा दिया। रुपयों के बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन ही कोई फैसला लेगा। ऑफिस से फाइल लेकर गया भगत सिंह राठी एमडीयू के शहीद भगत सिंह छात्र संगठन के अध्यक्ष प्रदीप मोटा ने HOD रहे भगत सिंह राठी की एक वीडियो बनाई, जिसमें भगत सिंह राठी शनिवार को अपने साथ ऑफिस से फाइल लेकर गाड़ी में रख रहे है। भगत सिंह राठी दोबारा वापस आते, उससे पहले ही अन्य प्रोफेसर एकत्रित हो गए, जिसके बाद ऑफिस पर नए HOD ने अपना ताला लगा दिया था। वीसी ने संज्ञान लेते हुए की कार्रवाई छात्र नेता प्रदीप मोटा ने बताया कि छात्रों ने डॉ. भगत सिंह राठी के खिलाफ कई बार शिकायत दी है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही थी। वीसी प्रो. मिलाप सिंह पूनिया ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की और भगत सिंह राठी को सस्पेंड करके एक जांच कमेटी बनाई, जिसने आज ऑफिस खोलकर रुपए बरामद किए है। कमेटी ने ऑफिस से बरामद की राशिकमेटी के सदस्य कुलताज ने बताया कि पूर्व एचओडी भगत सिंह राठी पर छात्रों से अवैध वसूली करने के आरोप लगे है, जिस मामले में कमेटी ने ऑफिस का दरवाजा खोलकर 36830 रुपए बरामद कर लिए है। इसकी रिपोर्ट वीसी को भेज दी है। साथ ही बरामद रुपयों को यूनिवर्सिटी अकाउंट में जमा करवाया गया है।
राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, जवाबदेही के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे सुधारने की जरूरत बताई। उन्होंने पेपर लीक, छात्रों पर बढ़ते दबाव और जवाबदेही के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा।
समग्र शिक्षा कार्यालय, सीडीईओ कार्यालय सिरोही में बलवीर सिंह सिसोदिया ने सहायक निदेशक का पदभार ग्रहण कर लिया है। उनके पदभार संभालने पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया। वरिष्ठ कर्मचारी नेता गोपाल सिंह राव पोसालिया ने बताया कि सिरोही शिक्षा विभाग में लंबे समय से कई महत्वपूर्ण पद रिक्त थे, जिससे प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। राज्य सरकार द्वारा इन रिक्त पदों पर नियुक्तियां किए जाने से विभागीय कार्यों में गति आएगी। इससे स्कूलों के निरीक्षण, पर्यवेक्षण एवं शैक्षिक गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन को बल मिलेगा, जिससे जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। बलवीर सिंह सिसोदिया के कार्यभार ग्रहण करने के अवसर पर अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) ईश्वर लाल पुरोहित, भंवर लाल पुरोहित, प्रिंसिपल नरेश परमार, तरुण बैरवा, रूपाराम चौहान, दुर्गेश गर्ग, त्रिभुवन सिंह देवड़ा, भंवर सिंह राव, सुरेन्द्र सिंह, ईश्वर सिंह और महेंद्र सिंह सहित अनेक अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। उपस्थित अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि बलवीर सिंह सिसोदिया के अनुभव, नेतृत्व क्षमता एवं प्रशासनिक दक्षता से समग्र शिक्षा की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा। इससे स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग और जिले के शैक्षिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
लाडनूं में शिक्षा और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। यहां महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल (लाडनूं) और महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल (जयपुर) के शिक्षक और स्टाफ ने जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें गुरुदेव आचार्यश्री महाश्रमण जी से मुलाकात की। इस दौरान शिक्षकों ने आचार्यश्री और अन्य संतों से मिलकर उनका मंगल आशीर्वाद लिया। संतों के सान्निध्य से दोनों स्कूलों के स्टाफ में एक नई सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ। शिक्षक ही समाज को सही दिशा देता है: आचार्यश्री शिक्षकों को संबोधित करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण जी ने कहा- शिक्षा का असली मकसद सिर्फ बच्चों को साक्षर (पढ़ा-लिखा) बनाना नहीं है, बल्कि उनके भीतर नैतिकता, अहिंसा और मानवीय संवेदनाएं जगाना है। शिक्षक उस मूर्तिकार की तरह है जो विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण कर पूरे समाज को एक नई और सही दिशा देता है। इस दौरान साध्वी प्रमुखाश्री विश्रुतविभा जी, मुनिश्री महावीर कुमार जी, साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी और मुनिश्री कीर्ति कुमार जी ने भी शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। संतों ने कहा- स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला हैं, जहां बच्चों का सर्वांगीण विकास प्रेम और आत्मीयता के माहौल में होना चाहिए। प्रिंसिपल्स ने लिया बच्चों में संस्कार डालने का संकल्प दोनों स्कूलों की प्राचार्याओं (प्रिंसिपल्स) ने भी संतों के सामने अपने विचार रखे। लाडनूं स्कूल की प्रिंसिपल नीलिमा सिंह ने कहा- गुरुदेव से मिली यह आध्यात्मिक ऊर्जा बच्चों को एक बेहतर और संवेदनशील नागरिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, जयपुर स्कूल की प्रिंसिपल मधु शेखावत ने कहा- जयपुर से लाडनूं तक की यह यात्रा उनके लिए बेहद खास रही। वे अब स्कूल में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उच्च संस्कारों को भी जोड़ेंगी। प्रबंधन ने जताया आभारकार्यक्रम में मौजूद एजुकेशनल कन्वीनर गौरव जैन मांडोत, प्रवीण बराड़िया, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़ और सचिव सलिल लोढ़ा ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से शिक्षकों में सकारात्मकता आई है जो बच्चों के भविष्य को संवारने में काम आएगी। अंत में सभी शिक्षकों ने संतों के आशीर्वाद से शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने और एक अच्छे समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
लाडनूं में शिक्षा और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। यहां महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल (लाडनूं) और महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल (जयपुर) के शिक्षक और स्टाफ ने जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें गुरुदेव आचार्यश्री महाश्रमण जी से मुलाकात की। इस दौरान शिक्षकों ने आचार्यश्री और अन्य संतों से मिलकर उनका मंगल आशीर्वाद लिया। संतों के सान्निध्य से दोनों स्कूलों के स्टाफ में एक नई सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ। शिक्षक ही समाज को सही दिशा देता है: आचार्यश्री शिक्षकों को संबोधित करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण जी ने कहा- शिक्षा का असली मकसद सिर्फ बच्चों को साक्षर (पढ़ा-लिखा) बनाना नहीं है, बल्कि उनके भीतर नैतिकता, अहिंसा और मानवीय संवेदनाएं जगाना है। शिक्षक उस मूर्तिकार की तरह है जो विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण कर पूरे समाज को एक नई और सही दिशा देता है। इस दौरान साध्वी प्रमुखाश्री विश्रुतविभा जी, मुनिश्री महावीर कुमार जी, साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी और मुनिश्री कीर्ति कुमार जी ने भी शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। संतों ने कहा- स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला हैं, जहां बच्चों का सर्वांगीण विकास प्रेम और आत्मीयता के माहौल में होना चाहिए। प्रिंसिपल्स ने लिया बच्चों में संस्कार डालने का संकल्प दोनों स्कूलों की प्राचार्याओं (प्रिंसिपल्स) ने भी संतों के सामने अपने विचार रखे। लाडनूं स्कूल की प्रिंसिपल नीलिमा सिंह ने कहा- गुरुदेव से मिली यह आध्यात्मिक ऊर्जा बच्चों को एक बेहतर और संवेदनशील नागरिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, जयपुर स्कूल की प्रिंसिपल मधु शेखावत ने कहा- जयपुर से लाडनूं तक की यह यात्रा उनके लिए बेहद खास रही। वे अब स्कूल में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उच्च संस्कारों को भी जोड़ेंगी। प्रबंधन ने जताया आभारकार्यक्रम में मौजूद एजुकेशनल कन्वीनर गौरव जैन मांडोत, प्रवीण बराड़िया, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़ और सचिव सलिल लोढ़ा ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से शिक्षकों में सकारात्मकता आई है जो बच्चों के भविष्य को संवारने में काम आएगी। अंत में सभी शिक्षकों ने संतों के आशीर्वाद से शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने और एक अच्छे समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
जबलपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक स्कूल बस में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई है। अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शिकायत में बताया कि यह वीडियो सुंदरपुर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल की बस (क्रमांक एमपी-20 डीए-1365) का है। आरोप है कि बस चालक राजेश ठाकुर प्रतिदिन क्षमता से अधिक बच्चों को बस में ठूंस-ठूंसकर स्कूल लाता और छोड़ता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस बस में 20 से 25 बच्चों के बैठने की क्षमता है, उसमें उससे कहीं अधिक बच्चों को बैठाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह मोटर वाहन अधिनियम के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। यदि ऐसी लापरवाही के दौरान कोई हादसा होता है, तो बड़ी जनहानि हो सकती है। वीडियो सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई के लिए परिवहन विभाग को पत्र लिखने की बात कही है।
वल्लभनगर के 14 सरकारी स्कूलों में कम नामांकन:25 से भी कम स्टूडेंट्स; शिक्षा विभाग कर सकता है समायोजन
वल्लभनगर ब्लॉक के 14 सरकारी स्कूलों में छात्रों का नामांकन निर्धारित सीमा से काफी कम पाया गया है। शिक्षा विभाग की साल 2026 की नामांकन रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इन स्कूलों में अधिकतर सरकारी प्राथमिक स्कूल शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा विभाग ने यह सूची उन स्कूलों की पहचान के लिए तैयार की है जहां छात्र संख्या बहुत कम है। भविष्य में इन स्कूलों के संबंध में विभाग स्तर पर समायोजन, संसाधनों के बेहतर उपयोग या अन्य प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकते हैं। कम नामांकन वाले स्कूलों की सूची सामने आने के बाद क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा फिर से तेज हो गई है।
सरकार शिक्षा में सुधार, नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने के दावे कर रही है, लेकिन स्कूलों में स्टाफ की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। शाला दर्पण पोर्टल के 1 जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में शिक्षा विभाग के मंजूर 4 लाख 13 हजार 910 पदों में से 2 लाख 93 हजार 760 पदों पर ही कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 1 लाख 20 हजार 150 पद खाली पड़े हैं। टोंक जिले में भी 3588 मंजूर पदों में से 2547 पद भरे हुए हैं, जबकि 1041 पद खाली हैं। स्कूलों में शिक्षक, प्रिंसिपल, प्रयोगशाला सहायक, लाइब्रेरियन और सहायक कर्मचारियों की कमी के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता, नामांकन और बच्चों के स्कूल में बने रहने पर असर पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि पर्याप्त स्टाफ के बिना शिक्षा सुधार के लक्ष्य कैसे पूरे होंगे। एक शिक्षक को पढ़ानी पड़ रही कई कक्षाएं राज्य के सरकारी स्कूलों में मानव संसाधनों की भारी कमी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। कई स्कूलों में शिक्षक कम होने के कारण एक ही शिक्षक को कई कक्षाएं पढ़ानी पड़ रही हैं। वहीं कई जगहों पर विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में स्थिति और ज्यादा गंभीर है। कई स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पा रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ के बिना शिक्षा सुधार की योजनाएं जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाएंगी। भर्ती के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुश्किल शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि जब तक स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद नहीं भरे जाएंगे, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग को जल्द नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। साथ ही बकाया वरिष्ठ अध्यापक और लेक्चरर पदोन्नति, स्टाफिंग पैटर्न, पदोन्नत प्रिंसिपल और उप प्रिंसिपल की काउंसलिंग प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर खाली पद भरने चाहिए। नामांकन और ठहराव पर भी पड़ रहा असर सरकार की ओर से नामांकन बढ़ाने के लिए अलग-अलग अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और गतिविधियां नहीं होने के कारण बच्चों का स्कूल से जुड़ाव कमजोर पड़ जाता है। जहां शिक्षक कम होते हैं वहां पढ़ाई नियमित नहीं हो पाती। गतिविधियां सीमित रह जाती हैं और बच्चों की पढ़ाई में रुचि कम होने लगती है। ऐसी स्थिति में कई बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं या नियमित रूप से स्कूल नहीं आते। राजस्थान में शिक्षा विभाग में पदों की स्थिति टोंक जिले में पदों की स्थिति सहायक कर्मचारियों की कमी भी बनी परेशानी स्कूलों में केवल शिक्षकों की ही नहीं बल्कि प्रशासनिक और सहायक कर्मचारियों की कमी भी कामकाज को प्रभावित कर रही है। कनिष्ठ सहायक, वरिष्ठ सहायक, प्रयोगशाला परिचारक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हजारों पद खाली हैं। इसके कारण कई स्कूलों में शिक्षकों को ही कार्यालय और प्रबंधन से जुड़े काम भी संभालने पड़ते हैं। इससे पढ़ाई के लिए मिलने वाला समय कम हो जाता है और शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है।
शेखपुरा के नगर परिषद क्षेत्र के कटनीकोल (वार्ड संख्या-15) में रविवार को केंद्रीय विद्यालय निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत हो गई। जमुई लोकसभा क्षेत्र के सांसद अरुण भारती ने दीप प्रज्वलित कर और शिलापट्ट का अनावरण करते हुए परियोजना का शिलान्यास किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही। यह निर्माण कार्य सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत कराया जा रहा है। पहले चरण में विद्यालय परिसर तक पक्के पहुंच पथ का निर्माण, परिसर का सौंदर्यीकरण, बाउंड्री वॉल और बुनियादी सुविधाओं के विकास का कार्य किया जाएगा। इस चरण के लिए करीब 14.99 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है। आधुनिक सुविधाओं से विकसित होगा परिसर परियोजना के तहत केंद्रीय विद्यालय के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी। विद्यालय तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बनाई जाएगी, जिससे छात्रों और शिक्षकों को आने-जाने में सुविधा होगी। इसके साथ ही परिसर का सौंदर्यीकरण, सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल तथा आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के अनुरूप बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। 'बच्चों के भविष्य के लिए मील का पत्थर' शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए सांसद अरुण भारती ने कहा कि शेखपुरा में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना क्षेत्र के बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है। कटनीकोल में बनने वाला यह विद्यालय केवल शेखपुरा ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराएगा। उन्होंने बताया कि पहले चरण में स्वीकृत 14.99 लाख रुपये से पहुंच पथ और सौंदर्यीकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा, ताकि विद्यालय शुरू होने से पहले छात्रों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। जनप्रतिनिधियों ने सराहा प्रयास कार्यक्रम में विधायक रणधीर कुमार सोनी, विधान पार्षद ललन महतो, एडीएम (विभागीय जांच), जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, एसडीओ प्रियंका कुमारी समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं नागरिक भी समारोह में शामिल हुए। विशिष्ट अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्रीय विद्यालय की स्थापना से क्षेत्र में शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और स्थानीय स्तर पर विकास की नई संभावनाएं भी पैदा होंगी। उनका कहना था कि बेहतर शैक्षणिक संस्थान बनने से रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से सांसद अरुण भारती सहित अन्य अतिथियों का बुके और अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया। समारोह के दौरान लोगों ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय विद्यालय के निर्माण से शेखपुरा के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
उरांव समाज के लोगों के बीच शिक्षा और नशामुक्ति का दिया संदेश
भास्कर न्यूज | सतबरवा नारायण सेवा समिति ट्रस्ट, सतबरवा की ओर से रविवार को हरातू पंचायत के रमनदाग गांव में सामाजिक सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उरांव समाज के सैकड़ों जरूरतमंद लोगों के बीच साड़ी, धोती और अन्य वस्त्रों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्दोष कुमार उर्फ अकलू बाबा ने लोगों को शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए बच्चों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास और बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। साथ ही उन्होंने युवाओं और ग्रामीणों से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों को कमजोर करता है। उन्होंने सभी से स्वस्थ, शिक्षित और नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग देने की अपील की। भास्कर न्यूज | पाटन पाटन प्रखंड के पैक्सों के माध्यम से किसानों के लिए धान, अरहर, तिल, मक्का, उड़द एवं मूंगफली (बदाम) के बीज उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि इन फसलों की बुआई के लिए आवश्यक डीएपी खाद समय पर उपलब्ध नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। कृषि विभाग की ओर से पैक्सों में डीएपी के बजाय यूरिया और नैनो यूरिया उपलब्ध कराया गया है। इस समय किसानों को सबसे अधिक जरूरत डीएपी खाद की है। पैक्स की इस व्यवस्था पर किसानों ने नाराजगी जताई है। किसानों का आरोप है कि डीएपी खाद की आपूर्ति में अनियमितता बरती जा रही है। इससे उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। इस संबंध में पाटन पैक्स अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने बताया कि वर्तमान में धान समेत अधिकांश खरीफ फसलों की बुआई चल रही है। इसमें डीएपी खाद की आवश्यकता होती है। लेकिन विभाग ने पैक्सों में डीएपी की जगह यूरिया उपलब्ध कराया है। किसान इस समय इसे खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
राजधानी के 33 आत्मानंद स्कूलों में संविदा के 152 पद अब भी खाली हैं। कुछ महीने पहले इन पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इसके लिए 26 मई को पात्र-अपात्र सूची भी जारी कर दी गई थी। अभ्यर्थी मेरिट सूची का इंतजार कर ही रहे थे कि 30 मई को डीपीआई ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी जिलों में आत्मानंद स्कूलों की चल रही संविदा भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी। पत्र में कहा गया कि अब भर्ती प्रक्रिया डीपीआई स्तर से कराई जाएगी। हालांकि भर्ती प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी, जबकि 16 जून से प्रदेश के सभी स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। स्कूल खुलने के लगभग एक माह होने वाला है, लेकिन डीपीआई की ओर से भर्ती को लेकर कोई नई जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में आत्मानंद स्कूलों का संचालन आधे-अधूरे स्टाफ के भरोसे हो रहा है। कई स्कूलों में आधे से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं। इसका असर पढ़ाई पर पड़ रहा है और कुछ अभिभावक बच्चों का दूसरे स्कूलों में प्रवेश कराने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में भास्कर की पड़ताल में कई अहम तथ्य सामने आए। इधर... भनपुरी और गुढ़ियारी स्कूल में 11-11 पद भी खालीशहर में 33 आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालित हैं। वर्ष 2023 से शशिबाला स्कूल गुढ़ियारी, सप्रे स्कूल बूढ़ापारा, काशीराम स्कूल भनपुरी, गवर्नमेंट स्कूल रायपुरा और गवर्नमेंट स्कूल त्रिमूर्ति नगर को आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल के रूप में संचालित किया जा रहा है। इनमें भनपुरी और शशिबाला स्कूल सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। दोनों स्कूलों में 11-11 पद खाली हैं। इनमें हिंदी, संस्कृत, कॉमर्स, बायोलॉजी, आर्ट्स और फिजिक्स के व्याख्याता, हिंदी और अंग्रेजी शिक्षक, सहायक शिक्षक, लैब अटेंडेंट तथा पीटीआई के पद शामिल हैं। सप्रे स्कूल में हुआ था विवाद...छात्र-पैरेंट्स नाराजपिछले महीने बूढ़ापारा स्थित आत्मानंद (सप्रे) स्कूल में 12वीं कॉमर्स और आर्ट्स के छात्रों को शिक्षक नहीं होने के कारण दूसरे स्कूल में प्रवेश लेने की सलाह दी गई थी। इससे छात्र और अभिभावक नाराज हो गए थे। पहले यहां डीएमएफ फंड से शिक्षकों की भर्ती की गई थी। कार्यकाल समाप्त होने पर वे चले गए। पद खाली होने के बाद स्कूल प्रबंधन ने छात्रों को दूसरे स्कूल में प्रवेश लेने की सलाह दी थी। विरोध के बाद डीईओ ने फिर डीएमएफ फंड से शिक्षकों की नियुक्ति कराई। ऐसी तैयारी...अब तक मेरिट से भर्ती, आगे हो सकती है परीक्षाअब तक आत्मानंद स्कूलों में संविदा भर्ती लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बिना होती थी। स्नातक और स्नातकोत्तर के अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाती थी। इसके बाद प्रत्येक पद के लिए 10-10 अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाकर अंतिम सूची जारी की जाती थी। सूत्रों के अनुसार अब डीपीआई भर्ती के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) आयोजित कर सकता है। हालांकि इसे लेकर अभी तक किसी तरह के निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। इस संबंध में डीपीआई रितुराज रघुवंशी से कई बार मोबाइल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, पर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। उनकी तरफ से मैसेज का भी रिप्लाई नहीं किया गया।
लखनऊ के इको गार्डन में रविवार को शिक्षा सुधार, निष्पक्ष भर्ती और युवाओं के अधिकारों की मांग को लेकर 'इंडिविजुअल सत्याग्रह 2.0' के समर्थन में प्रदर्शन किया गया। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुई यह पदयात्रा लखनऊ में समाप्त हुई, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र,युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। सत्याग्रही मनीष मौर्या और लकी मौर्या ने लगभग 600 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की, जिसमें उन्होंने पांच जिलों की सीमाएं पार कीं।इस यात्रा के दौरान उन्हें विभिन्न स्थानों पर छात्रों,युवाओं और आम लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ।आंदोलनकारियों ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना है। शिक्षा व्यवस्था को छात्र हितैषी बनाया जाए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लाखों अभ्यर्थी वर्षों से परीक्षा,परिणाम और भर्तियों में देरी के साथ-साथ पेपर लीक जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।उन्होंने मांग की कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र हितैषी बनाया जाए।यूथ इंकलाब टीम उत्तर प्रदेश ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। टीम के प्रमुख श्रेयांश यशस्वी ने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं,बल्कि युवाओं के अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए एक जनआंदोलन है,जिसे प्रदेश के हर जिले तक पहुंचाया जाएगा। आंदोलनकारीयों ने प्रमुख मांगे रखी आंदोलन के दौरान कई विशिष्ट मांगें उठाई गईं। इनमें शिक्षा पर कुल बजट का 10 प्रतिशत खर्च करना, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के स्थान पर एक स्वतंत्र संवैधानिक परीक्षा आयोग का गठन, अनुभवी शिक्षा मंत्री की नियुक्ति,टीजीटी-पीजीटी सहित शिक्षक भर्तियों को प्रतिवर्ष आयोजित करना,कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना, प्राथमिक शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करना और पेपर लीक से प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाना शामिल है। सरकार से मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील अधिवक्ता सिद्धार्थ सिंह शाक्य और उनकी टीम ने आंदोलन को कानूनी सहायता प्रदान की,जबकि ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (एआईएसए) ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया।आयोजकों का दावा है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों युवाओं की उपस्थिति ने शिक्षा सुधार और निष्पक्ष भर्ती के मुद्दे को एक जनआंदोलन का रूप दे दिया है। उन्होंने सरकार से मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील करते हुए चेतावनी दी।
ग्वालियर में भारतीय युवा कांग्रेस के देशव्यापी अभियान छात्रों की गूंज के तहत रविवार शाम ग्वालियर के 15 विधानसभा क्षेत्र में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी ओजपूर्ण, व्यंग्यात्मक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों, बढ़ती बेरोजगारी और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। कवि सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देशभर में बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों मेहनती विद्यार्थियों का विश्वास तोड़ा है। वर्षों तक कठिन परिश्रम करने वाले छात्र जब परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होने लगते हैं तो उनके भविष्य और मनोबल दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के एटा से आईं कवयित्री योगिता चौहान ने अपनी कविता के माध्यम से वर्तमान परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए कहा— देश में ये कैसा मातम छा रहा है। किस दिशा से ये अंधेरा आ रहा है। क्यों घिनौने खेल सत्ता खेलती है। साजिशें तो सिर्फ जनता झेलती है। कितने छात्रों का जनाजा जा रहा है। किस दिशा में देश जा रहा है। वहीं रीवा के कवि अमित शुक्ला ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को अपनी कविता में प्रमुखता से उठाते हुए कहा— नीट परीक्षा लीक होने से जो बच्चे फांसी पर झूल गए,तुम ही बताओ उन बच्चों का हत्यारा कौन है? कार्यक्रम में कवि अजय अंजाम (औरैया), अर्जुन अल्लड़ (कोटा, राजस्थान), अरविंद पोटा (मुरैना) और हेमंत शर्मा ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं, बेरोजगारी और केंद्र सरकार की नीतियों पर अपने विचार व्यक्त किए। कई कविताओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की गई। अभियान का उद्देश्य छात्रों तक आवाज पहुंचना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छात्रों की गूंज अभियान के संयोजक मितेंद्र दर्शन सिंह यादव ने कहा कि देश का युवा अब अपने भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्थाओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे में छात्रों की गूंज अभियान का उद्देश्य छात्रों की आवाज़ को समाज और सरकार तक पहुंचाना तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित कराना है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक व्यापक जनजागरण अभियान है। भारतीय युवा कांग्रेस छात्रों के अधिकारों, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग को लेकर लगातार संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने छात्रों और युवाओं से इस अभियान से जुड़ने तथा अपनी आवाज़ लोकतांत्रिक तरीके से बुलंद करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित छात्रों और युवाओं ने निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर कविता के माध्यम से अपनी बात रखने वाले कवियों की प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने सराहा।
वाराणसी के कमच्छा स्थित श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के परिसर में रविवार शाम 7:30 बजे आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के सानिध्य में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में देशभर से आए नागा साधु, महामंडलेश्वर, श्रीमहंत और अखाड़े के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान आगामी अर्धकुंभ, सिंहस्थ कुंभ, आषाढ़ शिवरात्रि, गुप्त नवरात्र और शिक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में अखाड़े द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के विकास, विद्यालय प्रबंधन समिति के चुनाव और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने की रणनीति पर भी मंथन हुआ। संतों ने धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा और समाज सेवा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। पहले बाबा काल भैरव और काशी विश्वनाथ के किए दर्शन बैठक में शामिल होने से पहले आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने बाबा काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का रुद्राभिषेक किया। दर्शन के बाद वे कमच्छा स्थित सभा स्थल पहुंचे, जहां संत-महात्माओं ने उनका स्वागत किया। शिक्षा को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर बैठक में जूना अखाड़े द्वारा संचालित भारती कॉलेज और भारतीय विद्यालय की शैक्षणिक व प्रशासनिक गतिविधियों की समीक्षा की गई। संतों ने ग्रामीण, पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए नई योजनाओं पर चर्चा की। शिक्षा के विस्तार को अखाड़े की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया गया। हरि गिरि महाराज ने बताया बैठक का उद्देश्य जूना अखाड़े के संरक्षक हरि गिरि महाराज ने कहा कि आषाढ़ मास की शिवरात्रि और गुप्त नवरात्र साधु-संतों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। उन्होंने कहा कि बैठक का उद्देश्य केवल प्रशासनिक निर्णय लेना नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन भी है। उन्होंने कहा कि संत समाज बाबा विश्वनाथ और बाबा काल भैरव से समाज में न्याय, निर्भयता और सद्बुद्धि की कामना करता है। धर्म और सत्य की स्थापना के लिए सभी संत मिलकर कार्य कर रहे हैं। पांच साल बाद होगा विद्यालय प्रबंधन समिति का चुनाव बैठक में भारतीय विद्यालय की प्रबंधन समिति के चुनाव पर भी चर्चा हुई। हरि गिरि महाराज ने बताया कि पांच साल बाद यह चुनाव कराया जा रहा है। चुनाव शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा। सोमवार सुबह 11 बजे तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ नियुक्त चुनाव प्रभारी की निगरानी में कराया जाएगा। अर्धकुंभ और सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां शुरू बैठक में मोहन भारती ने आगामी अर्धकुंभ और सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरिद्वार में भूमि आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। नवंबर तक टेंट और अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष हरिद्वार में अर्धकुंभ और नासिक में सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को देखते हुए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। देशभर से पहुंचे संत-महात्मा बैठक में अखाड़ा परिषद के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, जूना अखाड़े के संरक्षक हरि गिरि महाराज, प्रेम गिरि महाराज, उमाशंकर भारती सहित कई महामंडलेश्वर, श्रीमहंत, नागा साधु और अखाड़े के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने धार्मिक परंपराओं के संरक्षण, शिक्षा के प्रसार और कुंभ की तैयारियों को लेकर अपने सुझाव दिए। जूना अखाड़े का ऐतिहासिक महत्व श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा देश के सबसे बड़े और प्राचीन अखाड़ों में से एक माना जाता है। इसका मुख्य मठ वाराणसी के हनुमान घाट पर स्थित है। परंपरा के अनुसार इसकी स्थापना 13वीं शताब्दी के आसपास मानी जाती है, जबकि सरकारी अभिलेखों में इसका पंजीकरण वर्ष 1860 में दर्ज है। वर्ष 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का गठन किया गया था, जिसके बाद विभिन्न अखाड़ों के बीच समन्वय की व्यवस्था बनाई गई।
सेवा भारती समिति ने दो बाल संस्कार केंद्र शुरू किए:बोले- शिक्षा और संस्कार पर दिया जाए जोर
सेवा भारती समिति जालोर द्वारा रविवार को शहर की विभिन्न बस्तियों में दो नए बाल संस्कार केंद्रों का शुभारंभ किया गया। शांति नगर में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सेवा प्रमुख नटवरराज नागौर ने दीप प्रज्वलित कर केंद्रों का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सेवा भारती देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सेवा के क्षेत्र में शिक्षा केंद्र, छात्रावास, एम्बुलेंस, चल चिकित्सा केंद्र तथा सिलाई केंद्र जैसे अनेक सेवा प्रकल्प संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को शिक्षित, स्वावलंबी, स्वाभिमानी और स्वस्थ बनाना ही सेवा भारती का उद्देश्य है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि नव प्रारंभ हुए बाल संस्कार केंद्र बस्ती विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में विभाग सेवा प्रमुख भूपेंद्र, जिला सेवा प्रमुख मीठालाल, नगर सेवा प्रमुख जितेश, सेवा भारती जालोर के कोषाध्यक्ष जीतू भाई सोनी, केंद्र संचालिका रिंकू और बस्ती के अनेक लोग उपस्थित रहे।
थाली बजाकर सपा महिला सभा का प्रदर्शन:शिक्षा, रोजगार और महिला सुरक्षा पर सरकार को घेरा
बरेली में समाजवादी पार्टी (सपा) महिला सभा ने रविवार को प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष स्मिता यादव के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ताओं ने सपा कार्यालय से अयूब खां चौराहे तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान शिक्षा, रोजगार, महंगाई और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा गया। प्रदर्शन से पहले, सपा कार्यालय में एक मासिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन विस्तार पर चर्चा हुई। कई महिलाओं ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और उन्हें संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इसके बाद, बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सड़क पर उतरीं और नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान जिला अध्यक्ष स्मिता यादव ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने थाली बजाओ, शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार लाओ के नारे के माध्यम से जनसमस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। स्मिता यादव ने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। सरकार पर निशाना साधा महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी स्मिता यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावे धरातल पर दिखाई नहीं देते। उन्होंने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए अपराध की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। स्मिता यादव ने महंगाई, राशन वितरण और इतिहास से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता बदलाव का फैसला करेगी और समाजवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलेगा। इस कार्यक्रम में जिला महासचिव मिथलेश कुमारी, जिला उपाध्यक्ष हूरिया रहमान, शशि चंद्रा, ममता सागर, ऊषा यादव, नीलम वर्मा, आसमां पाशा, सीमा यादव, निष्ठा पटेल, शबाना, रेशमा, सीमा परवीन, कविता, दुर्गा, पूनम, समर खान, रुबीना खान, शबीना खान, आलिया, अर्शमान, आइज़ा, रेखा, शिफा और रीना सहित बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
उदयपुर के पलाना खुर्द स्थित रामपुरिया गाँव में बुनियादी शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। 'आयरन लेडी फाउंडेशन' की प्रमुख राशी मेहता ने गाँव के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक नए स्कूल भवन के निर्माण की पूरी जिम्मेदारी ली है। शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, फाउंडेशन द्वारा स्कूल परिसर में एक आधुनिक पानी की टंकी और शौचालय का निर्माण भी करवाया गया है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है। कार्यक्रम का सफल संचालन स्कूल के शिक्षक प्रदीप सिंह ने किया। उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया और 'आयरन लेडी फाउंडेशन' की प्रमुख राशी मेहता का आभार व्यक्त किया। इस परियोजना को साकार करने में 'मंत्रा फॉर चेंज फाउंडेशन' की संतोष जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर गाँव की जागरूक शिक्षिका आरती बेनीवाल और मधु लता शर्मा भी उपस्थित रहीं। रामपुरिया गाँव में इस नई शुरुआत को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में गांव के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ-साथ मातृशक्ति ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रमुख रूप से इन्द्रा भील, प्रभु लाल खटीक, कनक खटीक और सविना बाई मौजूद रहे। समारोह में उपस्थित अतिथियों और फाउंडेशन की प्रमुख राशी मेहता ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए एक विशेष अपील की। उन्होंने माता-पिता और अभिभावकों से अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों की शिक्षा पर पूरा ध्यान देने का आग्रह किया। मेहता ने कहा कि बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजकर उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाएं, ताकि वे अपने गाँव और समाज का नाम रोशन कर सकें।
बिजनौर में सरकार के एक पेड़ माँ के नाम वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के अंतर्गत समग्र विद्यालय गड़ाना में एक पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रमेन्द्र रायसान ने किया। कार्यक्रम में नहटौर के विधायक ओम कुमार और खंड शिक्षा अधिकारी देवमल प्रभात कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर विधायक ओम कुमार ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित जीवन प्रदान करने का आधार भी हैं। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प लेने का आह्वान किया। खंड शिक्षा अधिकारी प्रभात कुमार ने कहा कि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने आज लगाए गए प्रत्येक पौधे को भविष्य की अमूल्य धरोहर बताया। प्रमेन्द्र रायसान ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्ष मानव जीवन का आधार हैं। उन्होंने जोर दिया कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा जब प्रत्येक व्यक्ति लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प ले। कार्यक्रम में एआरपी हल्दौर नितिन बालियान, नरेश कुमार, अरुण कुमार, कनिका गुप्ता सहित शिक्षक हरगोविन्द, अनुराग विशनोई, मो इरफान, रंजीत सिंह, सचिन राजपूत, मुहम्मद जावेद, तरुण गुप्ता, कंचन कुमार, संजीव कुमार, सुहेल अख्तर बेग, सुधीर शर्मा, भूपेंद्र सिंह, अमर सिंह, विष्णु कुमार, अल्फिया अफजाल, मोनिका अग्रवाल, असमा बेबी, दीशु और विकास खंड हल्दौर के अनेक शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक पौधरोपण किया। सभी उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
व्यावहारिक शिक्षा से संवर रहा भविष्य
भास्कर न्यूज | जालंधर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में टूरिज्म, एविएशन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ शानदार व्यावहारिक अनुभव दिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी छात्रों को इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स, सिमुलेशन और यूनि होटल में वास्तविक मेहमानों की सेवा के जरिए नौकरी के लिए तैयार कर रही है। एलपीयू में बीबीए (टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी एंड इवेंट मैनेजमेंट), बीएससी (एयरलाइंस, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी) और बैचलर इन होटल मैनेजमेंट जैसे कई कोर्स संचालित हैं। छात्रों को आधुनिक तकनीकों जैसे एआई-आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म, अमेडस, गैलिलियो और ओपेरा सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण दिया जाता है। वैश्विक स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए यूनिवर्सिटी ने 80 से अधिक देशों की 550 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज के साथ समझौता किया है, जिससे छात्रों को सेमेस्टर एक्सचेंज और इंटरनेशनल क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधाएं मिलती हैं। बेहतरीन ट्रेनिंग के बूते यहां के छात्रों को एयर इंडिया, इंडिगो, कतर एयरवेज, द ओबेरॉय और आईटीसी जैसी नामी कंपनियों में नियुक्तियां मिली हैं। छात्रों को अधिकतम 37 लाख रुपये का वार्षिक पैकेज और अंतरराष्ट्रीय इंटर्नशिप के दौरान 3.4 लाख रुपये तक का मासिक स्टाइपेंड मिला है। साथ ही, 'अर्न योर फीस बैक' योजना से छात्र पढ़ाई के साथ कमाई भी कर रहे हैं। हाल ही में यहाँ के होटल मैनेजमेंट विभाग ने 10,829 तिरंगे मैकरॉन बनाकर 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' में भी अपना नाम दर्ज कराया है।
शिक्षा विभाग के दो वरिष्ठ अफसरों की विदाई, सम्मानित भी किया गया
भास्कर न्यूज | जांजगीर केरा रोड स्थित कर्मचारी भवन में बलौदा विकासखंड के शिक्षा विभाग द्वारा विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शिक्षा संभाग बिलासपुर के सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक आरपी आदित्य और राजीव गांधी शिक्षा मिशन जांजगीर के पूर्व जिला परियोजना समन्वयक हरिराम जायसवाल के सम्मान में रखा गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वर्तमान संयुक्त संचालक अश्वनी भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित थे। अपने प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए आर. पी. आदित्य ने कहा कि यदि आप अनुशासन का पालन करते हैं और दैनिक कार्यों की योजना बनाकर चलते हैं, तो कोई भी काम समय पर पूरा करना कठिन नहीं है। उन्होंने कहा कि लंबे सेवाकाल में विभिन्न उच्च पदों पर रहने के बावजूद उन्हें कभी किसी बड़ी समस्या या शिकायत का सामना नहीं करना पड़ा। वहीं, हरिराम जायसवाल ने अपने 43 वर्षों के दीर्घकालिक और बेदाग शिक्षक जीवन के अनुभव साझा करते हुए सेवामुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त की। वर्तमान संयुक्त संचालक अश्वनी भारद्वाज ने जांजगीर को अपना प्रिय जिला बताते हुए यहां के अधिकारियों और शिक्षकों के आपसी तालमेल की प्रशंसा की। बलौदा बीईओ रवि गौतम ने स्वागत भाषण में कहा कि विभागीय दायित्वों से मुक्त होते समय शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना ही दोनों अधिकारियों के समर्पण को दर्शाता है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू होने के छह वर्ष बाद छत्तीसगढ़ में इसके क्रियान्वयन की तस्वीर सामने आई है। इस अवधि में राज्य में करीब 1404 करोड़ रुपए खर्च किए गए। सबसे अधिक निवेश कौशल आधारित शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और बालिका शिक्षा पर हुआ, लेकिन शिक्षक प्रशिक्षण, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और डिजिटल संसाधनों के विस्तार जैसे अहम क्षेत्रों में खर्च अपेक्षाकृत कम रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि हजारों बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं और सीखने के स्तर में आई गिरावट दूर करना बड़ी चुनौती बनी हुई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अब निवेश का फोकस शिक्षक प्रशिक्षण और शुरुआती कक्षाओं पर बढ़ाना होगा। एनईपी के तहत कुल 32,767.34 लाख रुपए के बजट में केंद्र सरकार ने 19,660.43 लाख रुपए (करीब 60%) और राज्य सरकार ने 13,106.92 लाख रुपए (करीब 40%) का योगदान दिया। प्रदेश में ये बदलाव हुए शिक्षाविद की राय: एनईपी पर कई पुस्तकें लिख चुके दानीराम वर्मा के मुताबिक केवल पुरानी व्यवस्था में नए प्रावधान जोड़ने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। शिक्षा प्रणाली में व्यापक संरचनात्मक बदलाव जरूरी हैं। छत्तीसगढ़ की शुरुआती उपलब्धियां उत्साहजनक हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता, समावेशिता और शिक्षक क्षमता निर्माण पर लंबा काम बाकी है। जहां सबसे ज्यादा निवेश हुआ जहां सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत
उच्च शिक्षा का संकट:रोजगार की गारंटी वाले 32 कोर्स तीसरे साल फ्लॉप, दो कॉलेज बंद होने जा रहे
पहले विश्वविद्यालय छात्रों की मांग देखकर नए कोर्स शुरू करते थे, लेकिन अब कोर्स शुरू कर छात्रों का इंतजार कर रहे हैं। बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (एयू) की मौजूदा प्रवेश प्रक्रिया ने उच्च शिक्षा की इस बड़ी विडंबना को उजागर कर दिया है। उद्योग और बाजार की जरूरतों का हवाला देकर तीन साल पहले शुरू किए गए विश्वविद्यालय के 32 डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स छात्रों को आकर्षित करने में नाकाम रहे हैं। अधिकांश पाठ्यक्रमों में महज दो से सात आवेदन ही आए हैं, जबकि कुछ में तो खाता तक नहीं खुला है। यह केवल एक विश्वविद्यालय का संकट नहीं है, बल्कि बदलती छात्र-मानसिकता और उच्च शिक्षा की योजनाओं के बीच बढ़ती दूरी का संकेत है। सरकार जहां एक ओर रोजगार आधारित शिक्षा पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र उन्हीं पाठ्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं जिन्हें ‘रोजगारपरक’ बताकर प्रचारित किया गया था। आधी सीटें भी नहीं भर सकीं, संस्थानों के अस्तित्व पर संकट एयू से संबद्ध 110 कॉलेजों में इस वर्ष कुल 35,255 सीटें उपलब्ध हैं। अब तक 16 हजार के आसपास ही आवेदन ही मिले हैं। यानी आधी सीटों के लिए भी छात्र नहीं जुट पाए हैं। इसके अलावा, यूजी और पीजी की कुल 55,180 सीटों पर पहली मेरिट सूची जारी होने के बाद अब तक सिर्फ 364 छात्रों (कुल सीटों का लगभग 1%) ने ही प्रवेश लिया है। छात्रों की इस घटती संख्या का सीधा असर अब शिक्षण संस्थानों के वजूद पर दिखने लगा है। ओरिएंटल कॉलेज और कोरबा कंप्यूटर कॉलेज ने विश्वविद्यालय से अपनी संबद्धता समाप्त करने (बंद होने) का आवेदन दे दिया है। सरकारी कॉलेजों और सीयू का भी यही हाल रोजगार आधारित पाठ्यक्रमों के प्रति यह उदासीनता केवल एयू तक सीमित नहीं है। पिछले सत्र में बिलासा गर्ल्स कॉलेज में बीएससी क्लीनिकल न्यूट्रीशन की 140 सीटें, बीएससी फूड साइंस की 135 सीटें और फैशन डिजाइनिंग की 25 सीटें खाली रह गईं। बेसिक एंड एडवांस स्पोर्ट्स फिटनेस की 40 सीटों के लिए केवल 17 आवेदन आए। इसी तरह, केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) में भी एमएससी रूरल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोबायोलॉजी, बीलिब, बीपीएड, एमसीए और फॉरेंसिक साइंस जैसे कोर्स अपनी पूरी क्षमता तक नहीं भर सके। इन प्रमुख कोर्सों से छात्रों ने बनाई दूरी विश्वविद्यालय ने तीन साल पहले साइबर सिक्योरिटी, होटल मैनेजमेंट, फूड प्रोसेसिंग, जीएसटी, ई-कॉमर्स, रिटेल मैनेजमेंट, टूरिज्म, बायोफ्यूल, फूड सेफ्टी और इंग्लिश कम्युनिकेशन जैसे 32 नए कोर्स इस उम्मीद के साथ शुरू किए थे कि हर साल प्रवेश बढ़ेंगे। लेकिन स्थिति साल-दर-साल खराब होती गई। भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. सुधीर शर्मा, पूर्व कुलसचिव, एयू छात्रों ने विश्वविद्यालय से ज्यादा बाजार को पढ़ लिया छात्रों ने विश्वविद्यालय से ज्यादा बाजार को पढ़ लिया है। इस बार का सबसे बड़ा संदेश यह है कि छात्र विश्वविद्यालयों की योजना से नहीं, नौकरी के बाजार से अपना भविष्य तय कर रहे हैं। बीए में इसलिए भीड़ है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी है। लॉ इसलिए पसंद है, क्योंकि करियर स्पष्ट दिखता है। कंप्यूटर साइंस और बीसीए इसलिए क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी सेक्टर अभी भी अवसर दे रहा है। लेकिन जिन कोर्सों में नौकरी का रास्ता साफ नहीं है। उस दिशा में छात्र जाना ही नहीं चाहते।
चावल और हल्दी से लिखा पहला अक्षर, रॉकवुड्स में नन्हों ने शिक्षा जगत में रखा कदम
उदयपुर | रॉकवुड्स हाई स्कूल में नर्सरी के विद्यार्थियों के लिए पारंपरिक अध्याक्षरम् 2026-27 समारोह का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम के दौरान नन्हे विद्यार्थियों ने भारतीय परंपरा के अनुसार पहले चावल पर और फिर हल्दी से कागज पर अपना पहला अक्षर लिखकर शिक्षा के क्षेत्र में शुभारंभ किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात ऑन्कोलोजिस्ट डॉ. मनोज महाजन रहे, जबकि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अंबिका सोलंकी और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राहुल चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के प्रमोशन और प्रोन्नत वेतनमान (प्रमोटेड पे-स्केल) को लेकर विधान परिषद सचिवालय ने बेसिक शिक्षा विभाग से जवाब–तलब किया है। प्रदेश के वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर जिलों में पिछले 5 सालों से एक भी शिक्षक को प्रोन्नत वेतनमान नहीं मिला है। ये मामला विधान परिषद की आश्वासन समिति में उठाया गया था। विधान परिषद के संयुक्त सचिव मुनेश कुमार ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर इस मामले में एक महीने के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। क्या है पूरा मामला? विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा (वाराणसी खंड स्नातक) ने 13 फरवरी 2026 को सदन में तारांकित प्रश्न संख्या-12 के जरिए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से पूछा था कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान दिया जा रहा है या नहीं? उन्होंने पिछले 5 वर्षों में वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर में लाभ पाने वाले और लंबित पड़े मामलों का पूरा विवरण मांगा था। सरकार ने कहा था, 5 साल में नहीं दिया प्रोन्नत वेतनमान बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने सदन में जो लिखित उत्तर दिया, वह चौंकाने वाला था। उन्होंने जवाब में कहा था कि वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर जिलों में भी पिछले 5 वर्ष में किसी शिक्षक को प्रोन्नत वेतनमान नहीं दिया गया। सरकार ने सदन को आश्वासन दिया था कि इन चारों जनपदों के लंबित मामलों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। नियम क्या कहता है?
अयोध्या जिले के परिषदीय विद्यालयों में नए छात्रों के नामांकन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रेरणा पोर्टल की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 690 परिषदीय विद्यालयों में नए नामांकन 10 से भी कम हैं। इस पर बेसिक शिक्षा अधिकारी लालचंद ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित प्रधानाध्यापकों को अंतिम चेतावनी जारी की है। बीएसए लालचंद ने 11 जुलाई 2026, शनिवार को यह चेतावनी जारी की। प्रेरणा पोर्टल की समीक्षा में सामने आया है कि इन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और स्टाफ ने नामांकन बढ़ाने के लिए न तो कोई प्रभावी कार्ययोजना बनाई और न ही सार्थक प्रयास किए। विभाग ने इसे शासन के निर्देशों की अवहेलना और कार्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना है। बीएसए लालचंद ने बताया कि कम नामांकन वाले विद्यालयों को नोटिस जारी किया जाएगा और संबंधित के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विद्यालयों को प्रधानाध्यापक, शिक्षक, विद्यालय प्रबंध समिति और मातृ समूह के साथ बैठक कर तत्काल नामांकन बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घर-घर संपर्क अभियान चलाकर नए बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करने को कहा है। बीएसए ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर नामांकन में संतोषजनक वृद्धि नहीं होती है तो संबंधित प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी तय करते हुए विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसकी संपूर्ण जवाबदेही संबंधित विद्यालय प्रमुख की होगी।
जौनपुर के तिलकधारी सिंह इंटर कॉलेज में शनिवार को एक पुरातन छात्र सम्मेलन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, नैतिकता और व्यक्तित्व निर्माण का मंदिर होता है। यह सम्मेलन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चला, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके बड़ी संख्या में पूर्व छात्र शामिल हुए। विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसके बाद अतिथियों ने ठाकुर तिलकधारी सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए अपने छात्र जीवन की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा, लगभग साठ वर्षों बाद अपने उस विद्यालय की धरती पर आने का सौभाग्य मिला है, जहाँ से हमने शिक्षा ग्रहण कर जीवन की दिशा और संस्कार प्राप्त किए। इस विद्यालय से जुड़ी अनगिनत स्मृतियां आज भी मेरे हृदय में जीवित हैं। श्री सिंह ने विद्यालय परिवार द्वारा आयोजित इस पुरातन छात्र सम्मेलन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सभी के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करते हैं, जिससे पुराने विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों एवं सहपाठियों से पुनः मिलने का अवसर मिलता है। साथ ही, वर्तमान छात्रों को अपने वरिष्ठों के अनुभवों से प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति की सफलता की पहली नींव उसके विद्यालय में ही रखी जाती है। श्री सिंह ने अपनी वर्तमान स्थिति का श्रेय तिलकधारी सिंह इंटर कॉलेज के शिक्षकों के मार्गदर्शन, अनुशासन और शिक्षा को दिया। अंत में, कृपाशंकर सिंह ने विद्यालय प्रबंधन समिति, प्रधानाचार्य और समस्त शिक्षकों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम को पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर, श्याम सिंह यादव, धनंजय सिंह, ज्ञानप्रकाश सिंह और सुरेंद्र सिंह सहित अन्य लोगों ने भी संबोधित किया।
उत्तर प्रदेश के 330 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 2,107 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। प्रयागराज स्थित उच्च शिक्षा निदेशालय ने इन पदों का ऑनलाइन अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को भेज दिया है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि एडेड महाविद्यालयों के रिक्त पदों का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। अब भर्ती का विज्ञापन जारी करने और आवेदन लेने की प्रक्रिया आयोग द्वारा संचालित की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले महाविद्यालयों में प्राचार्य के 111 पदों पर भर्ती का अधियाचन भेजा जा चुका है, जिसका विज्ञापन 15 जुलाई के आसपास जारी होने की संभावना है। वर्तमान में, वर्ष 2022 में जारी विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 34 विषयों के लिए 1017 पदों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इसकी परीक्षा के परिणाम हाल ही में जारी किए थे। सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार 21 जुलाई से शुरू होंगे, जिसके बाद अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा। यह भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा। 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना जरूरी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, नेट (NET) उत्तीर्ण होना भी आवश्यक है। यदि कोई अभ्यर्थी नेट उत्तीर्ण नहीं है, तो यूजीसी के नियमानुसार उसके पास पीएचडी (Ph.D.) की डिग्री होनी चाहिए। प्रदेश में बेसिक से लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों तक में शिक्षकों की भर्ती के लिए वर्ष 2023 में गठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अब चयन प्रक्रिया में तेजी ला रहा है। आयोग वर्तमान में लंबित भर्तियों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसके बाद नई भर्तियों के विज्ञापन जारी किए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति में की गई गड़बड़ी पर सख्ती दिखाई है। राजनीति शास्त्र के उम्मीदवार की याचिका पर हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा सचिव और पीएससी को जांच कर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए 120 दिन का समय दिया गया है। याचिका के अनुसार बिना एनओसी के राजनीति शास्त्र के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को नियुक्ति दे दी गई है। रायगढ़ जिले के अली हसन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2019 में सहायक प्राध्यापक (राजनीति शास्त्र) के 59 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। वर्ष 2021 में जारी अंतिम चयन परिणाम में रायगढ़ के अली हसन को अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहला स्थान मिला। बगैर एनओसी हरियाणा के असिस्टेंट प्रोफेसर को दी नियुक्ति याचिकाकर्ता ने बताया कि, चयन सूची का बारीकी से अध्ययन करने पर हसन को पता चला कि मुख्य सूची में चयनित रंजन तिवारी पहले से ही हरियाणा सरकार के उच्चतर शिक्षा निदेशालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। जिस पर याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत हरियाणा सरकार से जानकारी मांगी। इसमें पता चला कि रंजन तिवारी 13 फरवरी 2020 से हरियाणा के महेंद्रगढ़ शासकीय महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने सीजीपीएससी की परीक्षा में शामिल होने या कार्यभार ग्रहण करने के लिए अपने नियोक्ता से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं लिया था। इसके बावजूद, 29 अप्रैल 2022 को रंजन तिवारी की नियुक्ति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटापारा, जिला बलौदाबाजार में कर दी गई। नियमों की अनदेखी का आरोप जस्टिस राकेश मोहन पांडे की सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट ने तर्क दिया कि सरकारी या अर्ध-सरकारी विभागों में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए कार्यभार ग्रहण करते समय नियोक्ता का अनापत्ति प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। नियमों के तहत यदि किसी अभ्यर्थी के प्रमाण पत्र या जानकारियां गलत पाई जाती हैं, तो उन्हें बिना पूर्व सूचना के सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है और आईपीसी के के तहत कार्रवाई हो सकती है। कॉलेज के प्राचार्य ने माना- एनओसी नहीं मिला अली हसन द्वारा 18 मई 2022 को भाटापारा कॉलेज में लगाई गई सूचना के अधिकार के जवाब में प्राचार्य ने स्वीकार किया था कि रंजन तिवारी ने 23 मई 2022 को कार्यभार तो ग्रहण कर लिया, लेकिन कार्यालय में कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा नहीं किया।
टोंक समेत प्रदेशभर में राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग) के तहत चल रहे ओबीसी सर्वे में लगे शिक्षा विभाग के कार्मिकों को फिलहाल कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार सर्वे में नोडल अधिकारी, संदर्भ व्यक्ति और प्रगणक के रूप में लगे कार्मिकों को सर्वे पूरा होने या 31 जुलाई 2026 तक, जो भी पहले हो, कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जारी किए आदेश माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर के निदेशक सीताराम जाट ने राज्य के सभी संयुक्त निदेशक, सभी संभाग और सभी जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक एवं प्रारम्भिक को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि ओबीसी सर्वे में लगे शिक्षा विभाग के कार्मिकों को वर्तमान में कार्यमुक्त नहीं किया जाए। नोडल अधिकारी, संदर्भ व्यक्ति और प्रगणक के रूप में लगी है ड्यूटी राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग) की ओर से करवाए जा रहे सर्वे में शिक्षा विभाग के कार्मिकों को नोडल अधिकारी, संदर्भ व्यक्ति और प्रगणक के रूप में लगाया गया है। ऐसे में उनके कार्यमुक्त होने से सर्वे कार्य प्रभावित हो सकता है। हाल ही में हुए हैं शिक्षा विभाग में तबादले ज्ञात रहे कि प्रशासनिक सुधार विभाग के आदेश के बाद शिक्षा विभाग को 3 जुलाई को स्थानान्तरण में शिथिलता दी गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग के सैकड़ों अधिकारियों और कार्मिकों के तबादला आदेश जारी किए गए। इनमें कई ऐसे कार्मिक भी शामिल हैं जिनकी ड्यूटी वर्तमान में ओबीसी सर्वे में लगी हुई है। 31 जुलाई या सर्वे पूरा होने तक नहीं होगी कार्यमुक्ति इसको लेकर निदेशक सीताराम जाट ने शुक्रवार शाम को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि ओबीसी सर्वे कार्य में लगे कार्मिकों को सर्वे पूरा होने तक या 31 जुलाई 2026 तक, जो भी पहले हो, कार्यमुक्त नहीं किया जाए और आदेशों की पालना सुनिश्चित की जाए। शिक्षक संघ ने आदेश का किया स्वागत शिक्षक संघ रेसटा राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि जिन शिक्षकों का तबादला हुआ है और जो वर्तमान में ओबीसी सर्वे में नियुक्त हैं, उन्हें निदेशक के आदेशानुसार सर्वे कार्य पूरा होने अथवा 31 जुलाई तक कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, जिससे सर्वे का काम तय समय में पूरा हो सके।
बिहार सरकार की ई-शिक्षाकोष आधारित ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था में गंभीर अनियमितता सामने आई है। शिक्षा विभाग ने ठाकुरगंज प्रखंड के पांच शिक्षकों और एक प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि वे अपने विद्यालयों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहते हुए भी ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर रहे थे। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) नासिर हुसैन के निर्देश पर की गई समीक्षा में यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) द्वारा 14 मई 2026 को ई-शिक्षाकोष पोर्टल के आंकड़ों की विस्तृत जांच की गई थी। इस जांच में कई शिक्षकों की लोकेशन और उपस्थिति संदिग्ध पाई गई। 1097 किलोमीटर दूर रहकर लगाया अटेंडेंस सबसे गंभीर मामला मध्य विद्यालय भोगडाबर के विशिष्ट शिक्षक मो. नाहिद रजा का सामने आया। विभागीय जांच में पाया गया कि उन्होंने विद्यालय से लगभग 1097 किलोमीटर दूर रहते हुए भी पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज की थी। विभाग ने इसे प्रथम दृष्टया फर्जी उपस्थिति मानते हुए मो. नाहिद रजा को निलंबित कर दिया। इसके अतिरिक्त, उत्क्रमित मध्य विद्यालय डांगीबस्ती की शिक्षिका सोनम राय, नया प्राथमिक विद्यालय गिधिन गोला पासवान टोला के विशिष्ट शिक्षक प्रवीण कुमार, उत्क्रमित मध्य विद्यालय दुराघाटी के प्रधानाध्यापक महबूब आलम और उच्च माध्यमिक विद्यालय बरचोंदी के विद्यालय अध्यापक लोकेश कुमार के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है। सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला शिक्षा विभाग ने इस कृत्य को गंभीर अनुशासनहीनता, कर्तव्य के प्रति लापरवाही और सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला माना है। विभाग के आदेश में कहा गया है कि विद्यालय से अत्यधिक दूरी पर रहते हुए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना बिहार सेवा नियमों और विभागीय अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। आरोपित शिक्षकों के खिलाफ आरोप-पत्र गठित विभाग ने बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली, 2024 के तहत सभी आरोपित शिक्षकों के खिलाफ आरोप-पत्र गठित कर नियमित विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। निलंबन अवधि के दौरान संबंधित शिक्षकों और प्रधानाध्यापक का मुख्यालय भी निर्धारित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ई-शिक्षाकोष प्रणाली में किसी भी प्रकार की हेराफेरी या फर्जी उपस्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
औरैया में जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने एक दिव्यांग बालिका दीपिका को ट्राईसाइकिल प्रदान की। अजीतमल ब्लॉक के नबले का पुर्वा गांव निवासी जितेंद्र कुमार की पुत्री दीपिका ने कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी से सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। दीपिका एक दिव्यांग बालिका है, जिसका विद्यालय उसके घर से लगभग दो किलोमीटर दूर है। विद्यालय आने-जाने में उसे काफी कठिनाई होती थी, लेकिन वह नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त करना चाहती है। उसकी स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल मामले का परीक्षण कराया। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जिलाधिकारी ने अपने कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय कक्ष में दीपिका को यह सहायक उपकरण उपलब्ध कराया। ट्राईसाइकिल मिलने के बाद दीपिका और उसके परिजनों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। दीपिका के माता-पिता ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब उनकी बेटी को स्कूल आने-जाने में सुविधा होगी, जिससे वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक, सामाजिक या शारीरिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन और जरूरतमंद व्यक्तियों को समय पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और सहायक उपकरणों का लाभ समय पर मिले, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि पात्र दिव्यांगजन विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित विभाग से संपर्क करें। साथ ही, किसी भी समस्या के समाधान के लिए जनता दर्शन और जनसुनवाई व्यवस्था का उपयोग करें।
सीधी जिले के मझौली जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंजारी में सड़क पर कक्षा संचालित करने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध होने के कारण शिक्षकों ने छात्रों को सड़क पर बैठाकर पढ़ाया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वायरल वीडियो और समाचार प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग ने शुक्रवार देर रात दो शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह नोटिस जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र सीधी द्वारा प्राथमिक शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक देवेश कुमार द्विवेदी और माध्यमिक शिक्षक रामदत्त पनिका को जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि शिक्षकों ने विद्यालय पहुंच मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में विभागीय या प्रशासनिक अधिकारियों को पूर्व सूचना दिए बिना बरसात के मौसम में विद्यार्थियों को खुले और असुरक्षित स्थान पर बैठाकर कक्षाएं संचालित कीं। विभाग ने इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत गंभीर लापरवाही माना है। कलेक्टर ने भी बुलाया दोनों शिक्षकों को 13 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। शिक्षकों ने बताया कि विद्यालय तक पहुंचने वाले दोनों रास्ते भूमि स्वामियों द्वारा बंद कर दिए गए थे। उनका कहना था कि बरसात के दौरान हर वर्ष यही स्थिति बनती है और विद्यालय तक पहुंचने का कोई स्थायी मार्ग नहीं है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण मजबूरी में सड़क पर कक्षा लगाकर विरोध दर्ज कराया गया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख (Result-oriented) बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ( ACS), बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने एक विशेष यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से सीधा संवाद किया और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं को साझा किया।इस संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों (सरकारी स्कूलों) के संचालन, शिक्षकों के कल्याण और छात्र नामांकन को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की गई है।गर्मी के कारण पढ़ाई के नुकसान की भरपाई: अब हर साल 25 जून से खुलेंगे स्कूलअपर मुख्य सचिव ने बताया कि अक्सर अत्यधिक गर्मी और लू के कारण बार-बार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता है।220 शिक्षण दिवस का लक्ष्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानदंडों के अनुरूप बच्चों के लिए न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना अनिवार्य है।नया नियम: इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे (यानी आज से स्कूल खुल चुके हैं)। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूल आने वाले बच्चों का आत्मीय स्वागत करें और भीषण गर्मी को देखते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा का विशेष प्रबंध करें।1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण: ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोरराज्य में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (Dropout) बच्चों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए सरकार नई रणनीति अपना रही है:स्थानीय डेटा की मदद: 1 जुलाई से शुरू हो रहे 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण में स्कूल से बाहर (Out of School) रह गए बच्चों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं की मदद ली जाएगी।निर्बाध प्रवेश: कक्षा 5 पास करने वाले प्रत्येक छात्र का कक्षा 6 में निर्बाध और अनिवार्य दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। जो बच्चे सीखने में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष 'कैच-अप शिक्षण' (Catch-up Classes) संचालित किए जाएंगे।निपुण भारत मिशन का कक्षा 5 तक विस्तार: 6 जुलाई को 'निपुण संकल्प'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने वाले 'निपुण भारत मिशन' को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है:दायरा बढ़ा: पहले यह मिशन शुरुआती कक्षाओं के लिए था, लेकिन अब इसका दायरा कक्षा 5 तक बढ़ा दिया गया है। अब कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के स्पष्ट लर्निंग आउटकम (अधिगम लक्ष्य) तय किए गए हैं।शिक्षकों की ट्रेनिंग: इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है, जो ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। आगामी 6 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में 'निपुण संकल्प कार्यशाला' का आयोजन होगा, जिसमें पूरे प्रशासनिक और अकादमिक तंत्र को झोंककर 'निपुण जनपद' बनाने का संकल्प लिया जाएगा।'DEAR' अभियान और वर्ष में दो बार मिलेगी होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्टअपर मुख्य सचिव ने स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर करने के लिए कई नए निर्देश दिए हैं:DEAR अभियान: स्कूलों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां एक निश्चित समय के लिए सभी काम रोककर सिर्फ किताबें पढ़ने की संस्कृति विकसित की जाएगी।अभिभावक सहभागिता: बच्चों की 'होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट' (Holistic Progress Report) को अब और अधिक प्रभावी बनाकर वर्ष में दो बार अभिभावकों (Parents) के साथ अनिवार्य रूप से साझा किया जाएगा ताकि वे भी बच्चे की प्रगति का हिस्सा बन सकें।शिक्षकों के लिए बड़ी सौगात: ₹5 लाख की कैशलेस इलाज सुविधा और 21,000 नई भर्तियांमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षा विभाग के मानव संसाधन को मजबूत करने और शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:श्रेणी / योजनामुख्य विवरण और लाभकैशलेस चिकित्सा सुविधासभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा।नगरीय क्षेत्रों में नई भर्तीशहरी क्षेत्रों के स्कूलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।मुंशी प्रेमचंद का संदेश: संवाद के अंत में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए सभी शिक्षकों से निरंतर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक बेहतर शिक्षक वही है जो खुद हमेशा पढ़ता रहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षकों की निष्ठा के दम पर उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगी।
शिक्षा में एक नये युग एवं शैक्षिक क्रांति की आहट
आज पूरी दुनिया शिक्षा के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां ज्ञान का विस्तार तो अभूतपूर्व हुआ है, लेकिन जीवन मूल्यों का क्षरण भी उतनी ही तेजी से दिखाई देता है। विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधासंपन्न बनाया है, लेकिन मानसिक तनाव, हिंसा, प्रतिस्पर्धा, नैतिक संकट और मानवीय संवेदनाओं के क्षय जैसी ... Read more
विमान दुर्घटना स्थल को नयी पहचान ,स्वास्थ्य-शिक्षा केंद्र बनाने की तैयारी :प्रफुल पंशेरिया
गांधीनगर/अहमदाबाद गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार उस जगह पर दो बड़े संस्थान विकसित करेगी, जहां पिछले साल हुए विमान हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी और अहमदाबाद में आस-पास के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा था।
बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिलें
बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026 हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। ... Read more
त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज
भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह ... Read more
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।

