मावली में समग्र शिक्षा के तहत सामुदायिक मुखियाओं के प्रशिक्षण हेतु एक दिवसीय संयुक्त केआरपी कार्यशाला का सफल आयोजन हुआ। सीबीईओ सुख लाल गुर्जर के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण में दक्ष प्रशिक्षकों ने नामांकन, वित्तीय प्रबंधन, पीएम श्री योजना और डिजिटल नवाचारों पर प्रकाश डाला। मावली और खेमली ब्लॉक के 60 से अधिक पीईईओ और अधिकारियों ने विद्यालय विकास और सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।
कोटा की शिक्षा सहकारी सभा 696 को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा के लिए 'हरित योद्धा' एवं 'हाड़ौती गौरव सम्मान' से नवाजा गया है। प्रकाश जायसवाल के नेतृत्व में संस्था ने पौधारोपण, स्कूल विकास और रक्तदान जैसे क्षेत्रों में मिसाल पेश की है। जानें कैसे यह संस्था सरकारी स्कूलों और पर्यावरण की तस्वीर बदल रही है।
जयपुर के एमपीएस इंटरनेशनल स्कूल में रोटरी क्लब के सहयोग से 'समावेशी शिक्षा' पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों द्वारा ऑटिज्म और विकास संबंधी अक्षमताओं वाले बच्चों के लिए 'हेल्दी एनवायरनमेंट' बनाने हेतु शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस लेख में सीबीएसई गाइडलाइन, एनईपी और विशेष बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
स्कूली बच्चों की पहचान से जुड़े अहम दस्तावेज अपार आईडी को लेकर नालंदा जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आई है। एक साल से चल रही इस मुहिम में जिले के सवा दो लाख से अधिक बच्चे अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं। विभाग की इस सुस्ती पर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 25 जनवरी तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का सख्त निर्देश जारी किया है। जमीनी हकीकत चौंकाने वाली विभाग के आधिकारिक आंकड़े स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। नालंदा जिले में कुल 5,77,248 नामांकित छात्रों में से अब तक महज 3,52,314 का ही अपार कार्ड बन सका है। यानी पूरे 2,24,934 बच्चों का काम अभी भी लंबित पड़ा है। यह संख्या कुल नामांकन का करीब 39 फीसदी है, जो विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 1,26,132 ऐसे छात्र हैं जिनके पास आधार कार्ड उपलब्ध होने के बावजूद उनकी अपार आईडी नहीं बनाई गई है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करता है। इसके अलावा 98,802 बच्चों के पास तो आधार कार्ड ही नहीं है, जिससे समस्या और भी जटिल हो गई है। एक सप्ताह में शून्य प्रगति, विभाग में हड़कंप विभाग की ओर से जारी साप्ताहिक रिपोर्ट(30 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026) ने कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 5 जनवरी को जिले में एक भी बच्चे का अपार कार्ड जनरेट नहीं किया गया। यह शून्य प्रगति विभाग के लिए शर्मनाक स्थिति है। राज्य स्तर पर भी पूरे एक सप्ताह में महज 11,410 कार्ड ही बन पाए, जिसे राज्य परियोजना निदेशक ने अत्यंत खेदजनक और निराशाजनक करार दिया है। दो चरणों में पूरा करना होगा लक्ष्य राज्य परियोजना निदेशक ने जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन बच्चों के पास आधार कार्ड मौजूद है, उनका अपार कार्ड 15 जनवरी तक प्राथमिकता के आधार पर बना लिया जाए। वहीं, जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, उनका पहले आधार बनवाकर फिर 25 जनवरी तक अपार आईडी की प्रक्रिया पूरी की जाए। यह समय सीमा बेहद कड़ी है और विभाग के सामने अब समय की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है। राज्यभर में 85 लाख बच्चे वंचित यह समस्या केवल नालंदा तक सीमित नहीं है। जारी पत्र के मुताबिक, पूरे बिहार में अभी भी लगभग 85 लाख बच्चों का अपार आईडी बनना शेष है। हालांकि, नालंदा जिले की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक मानी जा रही है, जहां केवल 61.05 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। क्यों जरूरी है अपार आईडी अपार आईडी 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' की अवधारणा पर आधारित है। यह एक डिजिटल शैक्षणिक पहचान पत्र है जिसमें छात्र की पूरी शैक्षणिक कुंडली, परीक्षा परिणाम, छात्रवृत्ति और अन्य उपलब्धियों का संपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। इस आईडी के अभाव में भविष्य में छात्रों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, स्कूल ट्रांसफर और छात्रवृत्ति आवेदन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
हरियाणा सरकार के लोक निर्माण एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा आज सिरसा में आएंगे। इस दौरान कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा वीरवार प्रातः 11.50 बजे डबवाली स्थित लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में वीबी-जी राम जी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ) के संबंध में योजना को लेकर पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे। कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा मनरेगा योजना के बदलाव पर जानकारी देंगे और कांग्रेस पार्टी द्वारा मनरेगा का नाम बदलाव पर जानकारी सांझा करेंगे। इसे लेकर आमजन भी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचेंगे। उनके साथ भाजपा जिलाध्यक्ष यतिंद्र सिंह व अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। इससे पहले कल बुधवार को शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा सिरसा आए थे और उन्होंने मनरेगा के वीबी-जी राम जी नाम बदलकर संशोधन पर जानकारी दी। मंत्री ढांडा ने कांग्रेस पर निशाना साधा था कि कांग्रेस सिर्फ नाम के लिए राजनीति कर रही है।
सावित्री बाई फुले शिक्षा क्रांति की बेहतरीन मिसाल'
भास्कर न्यूज| अमृतसर पंजाब स्त्री सभा अमृतसर द्वारा एक विशेष समारोह का आयोजन कर देश की 3 महान विभूतियों सावित्री बाई फुले, फातिमा शेख और गीता मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष नरिंदर पाल पाली, परवीन और डॉ. इकबाल कौर सौंध ने संयुक्त रूप से की। सभा की प्रदेश अध्यक्ष राजिंदर पाल कौर ने मंच संचालन करते हुए कहा कि सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख ने उस दौर में महिलाओं और दलितों की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब इसे पाप माना जाता था। सामाजिक बहिष्कार और अपमान सहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लड़कियों के लिए स्कूल खोलकर महिला सशक्तिकरण की नींव रखी। वहीं, स्वतंत्रता सेनानी और सांसद गीता मुखर्जी को याद करते हुए वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने ही 1996 में पहली बार संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का बिल पेश किया था। समारोह के दौरान डॉ. इंदिरा विर्क, समित सिंह और अन्य वक्ताओं ने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने देश में बढ़ती महिला विरोधी घटनाओं, भ्रष्टाचार, शिक्षा के भगवाकरण, बेरोजगारी और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई। साथ ही, कॉरपोरेट घरानों को जल, जंगल और जमीन सौंपने की नीतियों का पुरजोर विरोध किया गया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि हमने प्रकृति और पर्यावरण को नहीं बचाया, तो आने वाले समय में मानवीय जीवन संकट में पड़ जाएगा। इस चर्चा में प्रिंसिपल मनप्रीत कौर, सरबजीत कौर और सूरत सिंह बल ने भी हिस्सा लिया। अंत में कामरेड सुखचैन सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए इन महान महिलाओं के क्रांतिकारी जीवन को सलाम किया। उन्होंने अपील की कि समाज में व्याप्त गैर-बराबरी और सांप्रदायिकता को खत्म करने के लिए इन महापुरुषों के विचारों को घर-घर पहुंचाना अनिवार्य है।
नवादा जिले के कौआकोल प्रखंड के इंटर विद्यालय में बुधवार को विधायक बिनीता मेहता की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें प्रखंड के सभी माध्यमिक और इंटर विद्यालयों की प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य तथा प्राचार्य शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करना और विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाना था। विधायक बिनीता मेहता ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने सभी प्राचार्यों और प्रभारी प्राचार्यों से परिचय प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और उनकी समस्याओं को सुना। प्रभारी बीईओ सह बीसीओ अजित कुमार ने बैठक के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। बैठक में विधायक बिनीता मेहता ने स्पष्ट किया कि शिक्षा समाज की उन्नति का आधार है। उन्होंने कहा कि इसे बेहतर बनाने के लिए वे निरंतर प्रयासरत हैं। विधायक ने जोर देकर कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए हरसंभव प्रयास का आश्वासन दिया। इस अवसर पर 20 सूत्री अध्यक्ष दिलीप कुशवाहा, उपाध्यक्ष अंकित विश्वकर्मा, इंटर विद्यालय कौआकोल के प्रभारी प्राचार्य श्याम कुमार वर्मा, बापू इंटर विद्यालय के अजय कुमार और गायत्री प्रोजेक्ट बालिका इंटर विद्यालय के संदीप कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति और शिक्षाविद उपस्थित थे।
उदयपुर में आयोजित भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने 2025 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। राज्यपाल ने शिक्षा को गरीबी दूर करने का सबसे सशक्त माध्यम बताते हुए महाराणा भूपाल सिंह के योगदान और मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का स्मरण किया। 'विकसित भारत 2047' के संकल्प के साथ युवाओं को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया गया।
दौसा जिले में कड़ाके की ठंड के चलते जिले में संचालित राजकीय एवं गैर राजकीय विद्यालयों में प्री-प्राइमरी कक्षा से कक्षा 8 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों का 8 और 9 जनवरी का अवकाश घोषित किया गया है। सीडीईओ द्वारा जारी आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए सभी सीबीईओ, पीईईओ और यूसीईईओ को निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक विद्यालय स्टाफ यथावत विद्यालय में उपस्थित रहकर विभागीय कार्य सम्पादित करेंगे। इससे पहले प्राइमरी से कक्षा 8 तक 6 और 7 जनवरी की भी छुट्टी घोषित की गई थी। बता दें कि जिले में कड़ाके की ठंड और शीतलहर से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। यहां न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास स्थिर बना हुआ है।
नवादा के सरकारी विद्यालयों में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने 539 शिक्षक-शिक्षिकाओं और प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। विभागीय निर्देशों के गंभीर उल्लंघन पर डीईओ सख्त डीईओ नवादा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, ई-शिक्षाकोष पोर्टल से प्राप्त ऑनलाइन उपस्थिति रिपोर्ट में जिले के कुल 539 सरकारी शिक्षक/शिक्षिका, प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक, विद्यालय अध्यापक, विशिष्ट एवं नियोजित शिक्षकों द्वारा उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। इसे विभागीय निर्देशों का गंभीर उल्लंघन माना गया है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर समय पर उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी दीपक कुमार ने सभी संबंधित शिक्षकों और विद्यालय प्रधानों को पत्र जारी कर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर समय पर उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जारी आदेश में उल्लेख है कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में विद्यालयों द्वारा उपस्थिति दर्ज नहीं किया जाना अत्यंत खेदजनक है। यह न केवल कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि विभागीय आदेशों की अवहेलना भी दर्शाता है। संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर होगी कठोर कार्रवाई जिला शिक्षा पदाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्पष्ट और संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो संबंधित शिक्षकों एवं विद्यालय प्रधानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसे सभी गंभीरता से लें और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित करें। इस आदेश की प्रतिलिपि सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को भी भेजी गई है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विद्यालयों की निगरानी करें और ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित कराएं। साथ ही विद्यालय प्रधानों को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षकों को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश दें। शिक्षा विभाग के इस सख्त रुख से जिले के विद्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कोटा: शिक्षा सहकारी 696 को मिला दोहरा सम्मान, 'हरित योद्धा' और 'हाड़ौती गौरव' से नवाजी गई संस्था
कोटा की शिक्षा सहकारी सभा 696 को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा के लिए 'हरित योद्धा' एवं 'हाड़ौती गौरव' सम्मान से नवाजा गया है। प्रकाश जायसवाल के नेतृत्व में संस्था ने हजारों वृक्षारोपण और सरकारी स्कूलों के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पढ़ें पूरी खबर और जानें कैसे इस सहकारी संस्था ने हाड़ौती क्षेत्र में सेवा की नई मिसाल पेश की है।
लुधियाना के प्राइवेट स्कूलों को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के आदेशों की परवाह नहीं है। DEO ने प्राइवेट स्कूल संचालकों को आदेश दिए थे कि चार जनवरी तक सभी राइट टू एजुकेशन एक्ट(RTE) के तहत मिली एनओसी को विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करें। 6 जनवरी तक लुधियाना जिले में 395 प्राइवेट स्कूल संचालकों ने आरटीई के तहत मिली एनओसी को विभाग की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने एनओसी अपलोड न करने वालों की सूची जारी की और उन्हें सख्त हिदायतें दी कि सात जनवरी तक अपलोड कर दें नहीं तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग के पास नहीं है एनओसी का ऑनलाइन डेटा शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर विभाग की तरफ से प्राइवेट स्कूलों को जारी की एनओसी का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। एक-एक स्कूल का डेटा वेबसाइट पर अपलोड करना विभाग के लिए अपने स्तर पर संभव नहीं है। ऐसे में विभाग ने स्कूल संचालकों को अपने स्तर पर एनओसी अपलोड करने का ऑप्शन दिया। विभाग उन्हें वेरिफाई फाइनल अप्रूवल देगा। क्या है आरटीई की एनओसी? प्राइवेट स्कूल खोलने या चलाने के लिए स्कूल संचालकों को शिक्षा विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेनी होती है। 2009 में आरटीई एक्ट लागू होने के बाद 2011 से एनओसी जारी करने का सिस्टम शुरू किया गया। 2011 से 2023 तक विभाग हर साल स्कूल संचालकों को टेंपरेरी एनओसी जारी करता था। 2024 में स्कूल संघ पंजाब ने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की और उसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को परमानेंट एनओसी जारी करने के आदेश दिए। विभाग ने उस दौरान स्कूल संचालकों को नई एनओसी देने के बाद एक कॉमन लेटर जारी कर दिया और कहा कि जिनके पास टेंपरेरी एनओसी है उसे अब परमानेंट एनओसी समझा जाए। उसके बाद विभाग के पास कोई डेटा उपलब्ध नहीं था कि कितने स्कूल संचालकों के पास परमानेंट एनओसी हे। विभाग ने इसीलिए गूगल फार्म जारी कर स्कूल संचालकों को एनओसी की कॉपी अपलोड करने को कहा। एनओसी अपलोड नहीं की तो होगी कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी का कहना स्कूल संचालकों को पर्याप्त समय दिया गया था। बड़ी संख्या में स्कूल संचालकों ने एनओसी अपलोड कर दी है लेकिन 395 स्कूलों ने एनओसी अपलोड नहीं की। उन्होंने कहा कि आज स्कूल संचालकों ने एनओसी अपलोड नहीं की तो उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे और उसके बाद सख्त एक्शन लिया जाएगा।
आमेट में समग्र शिक्षा अभियान और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के तत्वावधान में ब्लॉक स्तरीय शिक्षक सेमिनार का आयोजन किया गया। पीएम श्री राउमावि में आयोजित इस कार्यक्रम में 20 पंचायतों के 44 शिक्षकों ने भाग लिया। ज्योति जीनगर और ज्ञान प्रकाश शर्मा सहित कई शिक्षकों ने प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचारों पर अपने अनुभव साझा किए, जिससे शिक्षण स्तर को सुधारने की नई राह प्रशस्त हुई।
10th board exams 2026: 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें?
10th board exams 2026: 10वीं बोर्ड की परीक्षा आपके शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। सही रणनीति और अनुशासन के साथ आप न केवल अच्छे अंक ला सकते हैं, बल्कि अपना आत्मविश्वास भी बढ़ा सकते हैं। यहीं से तय होता है छात्रों के करियर चुनने का रास्ता और ...
डीग: मुढ़िया में जिला कलेक्टर की रात्रि चौपाल, अतिक्रमण और शिक्षा में लापरवाही पर कड़ा प्रहार
डीग के मुढ़िया में जिला कलेक्टर उत्सव कौशल की रात्रि चौपाल ने प्रशासनिक सतर्कता की नई मिसाल पेश की है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, सरकारी रास्तों से अतिक्रमण हटाने और अंडरपास जल-भराव के स्थाई समाधान के लिए कलेक्टर ने कड़े निर्देश दिए। पूरन प्रकाश बंसल की यह रिपोर्ट सरकारी तंत्र की जवाबदेही और जन-अभाव अभियोगों के त्वरित निस्तारण की पूरी गाथा बयां करती है।
नवादा के रजौली प्रखंड मुख्यालय से लगभग 8-10 किलोमीटर दूर चितरकोली पंचायत में मंगलवार को 'भारत पढ़ेगा' बैनर तले जन शिक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा चलाए गए इस अभियान के दौरान छात्राओं ने संस्कृत शिक्षक की कमी और मनचलों से होने वाली परेशानियों को उजागर किया। यह अभियान पंचायत के छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और मोबाइल के सही उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। यूनिवर्सिटी के छात्र रौशन कुमार यादव ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम होते हैं, इसलिए उन्होंने छुट्टी में अपने गांव आकर पंचायत के सामाजिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए यह पहल की है। संस्कृत के शिक्षक नहीं होने से कठिनाई छात्राओं ने शिकायत की कि चितरकोली विद्यालय में संस्कृत के शिक्षक नहीं होने से उन्हें पढ़ाई में कठिनाई हो रही है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक पुष्कर कुमार ने बताया कि उन्होंने विभागीय पत्राचार किया है और जल्द ही संस्कृत शिक्षक की पदस्थापना होने की उम्मीद है। छात्राओं ने यह भी बताया कि गांव के मनचले बाइक से उनका पीछा करते हैं और उन पर भद्दी फब्तियां कसते हैं। सड़क किनारे स्थित यात्री शेड के पास भी मनचलों का जमावड़ा रहता है, जिसके कारण छात्राओं को अपने भविष्य संवारने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों से बच्चों की देखभाल करने की अपील अभियान में शामिल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने ग्रामीणों से अपने बच्चों की देखभाल करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आने वाले समय में इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे स्थानीय चौकीदार और थाना को लिखित आवेदन देकर कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।
जालोर में लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड और शीतलहर को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्टूडेंट्स के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। जालोर में प्रि-प्राइमरी से कक्षा पांच तक के स्टूडेंट्स के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में 7 से 10 जनवरी 2026 तक छुट्टी घोषित किया गया है। यह निर्णय ठंड से बच्चों को होने वाली संभावित स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। जिला शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार यह छुट्टी शीतलहर के प्रभाव को देखते हुए एहतियातन दिया गया है। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी सीबीईओ, पीईईओ और यूसीईईओ को निर्देश दिए हैं कि वे आदेश की सख्ती से पालना सुनिश्चित कराएं। आदेश न मानने पर सख्त कार्रवाई। यह आदेश जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। स्टाफ को रहना होगा उपस्थित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छुट्टी केवल विद्यार्थियों के लिए रहेगा। इस दौरान विद्यालयों का समस्त शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टाफ पूर्व की तरह स्कूल में उपस्थित रहेगा और विभागीय कार्य नियमित रूप से संपादित करेगा। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि यह आदेश सक्षम स्तर से अनुमोदित है और तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। जिले में सर्दी का असर तेज जालोर में सर्दी का असर लगातार बना हुआ है। बुधवार सुबह वाहनों के शीशों और पेड़ पौधों की पत्तियों पर ओस की बूंदें जमी नजर आईं। सुबह करीब 10 बजे तक कोहरा छाया रहा, जिससे लोगों को वाहन चलाने में परेशानी हुई। दिन में धूप खिली, लेकिन ठंडी हवाओं के कारण लोग दिन में भी ठिठुरते नजर आए। शाम होते ही एक बार फिर सर्दी तेज हो गई और सड़कों पर आवाजाही कम रही। तापमान में उतार चढ़ाव मौसम के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को न्यूनतम तापमान 9.3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 23.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सोमवार की तुलना में न्यूनतम तापमान में 0.9 डिग्री की बढ़ोतरी हुई, जबकि अधिकतम तापमान में 1.1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। शीतलहर के चलते आने वाले दिनों में भी ठंड का असर बने रहने की संभावना है।
IIM इंदौर में विविधता से समृद्ध कक्षाओं के माध्यम से भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को तैयार किया जा रहा है। यह संस्थान आज समावेशी और आधुनिक प्रबंधन शिक्षा का सशक्त उदाहरण बन चुका है। दो वर्षीय MBA कार्यक्रम में इस वर्ष 54 प्रतिशत छात्राएं हैं, जबकि 55 प्रतिशत विद्यार्थी नॉन-इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आते हैं। कभी इंजीनियरिंग और पुरुष छात्रों के वर्चस्व के लिए पहचाना जाने वाला ॥M इंदौर, अब अवसरों की समानता और विविधता को बढ़ावा देने वाला संस्थान बन गया है। यह कहना है आईआईएम के निदेशक प्रो हिमांशु राय का। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसे उभरते क्षेत्रों में नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। पाठ्यक्रमों का निर्माण रोजगार बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में IIM इंदौर ने 40 से अधिक एमओयू किए हैं और शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तार छह गुना तक हुआ है। दो वर्षीय और एक वर्षीय कार्यक्रमों के साथ-साथ कई सर्टिफिकेट कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल, डेंवर, ग्लासगो और एरिजोना जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग के माध्यम से लीडरशिप, एंटरप्रेन्योरशिप, हेल्थकेयर और एक्सपोर्ट से जुड़े कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। IIM इंदौर में शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां संवाद, तर्क और आलोचनात्मक सोच को विशेष महत्व दिया जाता है। युवाओं को आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रखने और उद्योग की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जाता है। राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाते हुए संस्थान आय असमानता, ग्रामीण-शहरी समस्याओं, पर्यावरण और उद्यमशीलता जैसे विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इन प्रयासों के माध्यम से IIM इंदौर समाज और देश के लिए जिम्मेदार नेतृत्व तैयार कर रहा है। राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाते हुए IIM इंदौर पांच प्रमुख समस्याओं पर कार्य कर रहा है, जिनमें आय असमानता, ग्रामीण समस्याएं, शहरी चुनौतियां, पर्यावरण और उद्यमशीलता की कमी शामिल हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) पर रणनीतियां तैयार की जा रही हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत हरदा में बांस उद्योग से जुड़े लोगों, लखनऊ में चिकन साडी कारीगरों तथा इंदौर में आलू आधारित गतिविधियों पर कार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त, लापता लोगों से संबंधित परियोजनाएं और महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयास भी इसमें शामिल हैं। इन पहलों के माध्यम से संस्थान सामाजिक विकास और समावेशी प्रगति में अपना योगदान सुनिश्चित कर रहा है।
दतिया जिले के सरकारी स्कूलों की दीवारों पर निजी संस्थाओं के विज्ञापन लिखे जाने के मामले में शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में बिना अनुमति कोचिंग, प्राइवेट स्कूल और दुकानों के विज्ञापन पुतवा दिए गए हैं। विभाग ने इसे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग माना है। अब जल्द ही सभी प्रधानाध्यापकों (HM) को निर्देश जारी कर ऐसे विज्ञापन लिखवाने वालों पर कार्रवाई करने को कहा जाएगा। शहरी क्षेत्र के शासकीय कन्या उमावि हाथीखाना, तलैया मोहल्ला और मुड़ियन का कुआं स्थित स्कूलों की दीवारों पर बड़े-बड़े विज्ञापन नजर आ रहे हैं। यही हाल सेंवढ़ा, भांडेर और इंदरगढ़ क्षेत्र के स्कूलों का भी है। कई जगह तो शिक्षाप्रद संदेशों और पाठ्य सामग्री की जगह इन विज्ञापनों ने ले ली है, जिससे विद्यालय का स्वरूप बिगड़ रहा है। BRCC बोले- दीवारों पर सिर्फ शिक्षा के संदेश होंगे बीआरसीसी अखिलेश राजपूत ने कहा कि स्कूल की दीवारें केवल शिक्षा और सामाजिक संदेशों के लिए होती हैं, न कि किसी निजी व्यापार के प्रचार के लिए। विभाग सभी प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर रहा है। निर्देश होंगे कि बिना अनुमति दीवार लेखन कराने वालों के खिलाफ विधि संगत कार्रवाई की जाए। भविष्य में शिकायत मिलने पर संबंधित हेडमास्टर से भी जवाब मांगा जाएगा। बच्चों की मानसिकता पर पड़ता है गलत असर नियमानुसार सरकारी इमारतों पर बिना अनुमति निजी विज्ञापन लिखना पूरी तरह गलत है। जानकारों का मानना है कि स्कूल की दीवारों पर इस तरह के व्यापारिक विज्ञापन बच्चों की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसी को देखते हुए विभाग ने तत्काल कदम उठाने का फैसला किया है।
स्वास्थ्य शिक्षा में भूचाल, जम्मू-कश्मीर के MBBS कोर्स पर बड़ा एक्शन
जम्मू-कश्मीर में चिकित्सा शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है, जहां कुछ मेडिकल कॉलेजों के MBBS कोर्स की मान्यता रद्द कर 50 सीटों पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई शैक्षणिक मानकों और स्वास्थ्य शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा आज सिरसा के रानियां पहुंचेंगे। वे यहां श्री दुर्गा कीर्तन मंदिर कमेटी और हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रतिभाशाली छात्र सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। यह कार्यक्रम 7 जनवरी बुधवार को दोपहर 12:15 बजे शहर के दीप पैलेस में आयोजित किया जाएगा। समारोह में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा मुख्य अतिथि होंगे, जबकि श्री गौशाला कमेटी रानियां के प्रधान संदीप मित्तल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। रानियां के पूर्व विधायक रामचंद्र कंबोज भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रधान सोनू ग्रोवर करेंगे। यह उनका नए साल का पहला दौरा है। श्री दुर्गा कीर्तन मंदिर कमेटी के कार्यकारी प्रधान अमित कुक्कड़, उपप्रधान संजय आहुजा और गुरमीत मान ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी और निजी विद्यालयों के उन होनहार छात्रों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। आर्थिक रूप से कमजोर ऐसे बच्चे जिन्होंने अपने परिश्रम से मुकाम हासिल किया है, उनके नाम भी सम्मान सूची में शामिल हैं। इसके अलावा दसवीं कक्षा में टॉप करने वाले छात्रों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।
प्रधानाध्यापकों को शिक्षा को प्रभावी बनाने के दिए गए टिप्स
भास्कर न्यूज | प्रतापपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय के प्रांगण में मंगलवार को गुरुगोष्ठी का आयोजन किया गया ।जिसकी अध्यक्षता प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी किशोर कुमार तथा संचालन बीपीओ अजय दास के द्वारा किया गया। बैठक में सावित्री बाई फुले,डहर सर्वे,मुख्यमंत्री सामान्य जाति छात्रवृति,पी टी एम लिंक, ई- कल्याण छात्रवृति, शिक्षक उपस्थिति, छात्र उपस्थिति , एमडीएम एसएमएस,छात्र - छात्राओं का आधार/ खाता,स्टेट रेल,विद्यालय भूमि प्रतिवेदन सहित कई मुख्य बिन्दुओं पर बारी- बारी से गहनता पूर्वक चर्चा किया गया ।वही उपर्युक्त विषयों पर कार्य को निष्ठा पूर्वक व जिम्मेवारी से कार्य को पुरा करते हुए विभाग को रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक/ प्रभारी प्रधानाध्यापक को दिया गया ।मौके पर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी किशोर कुमार ने बताया कि गैर जिम्मेवारी लोगों के ऊपर कार्रवाई किया जाएगा । मौके पर सोनु कुमार, अनिल कुमार, हेमलता कुमारी, बीरेन्द्र कुमार,चितरंजन सिंह, मंजर हसन,रंजीत दास, रामफाल प्रसाद,शंकर प्रसाद, उमेश कुमार,तैयब खान, रियाज अंसारी, प्रमोद कुमार,अनिरूद्ध दांगी,अरूण कुमार, र णविजय सिंह, कुमार,रवि कुमार, रामप्रित साहु, अर्जुन यादव, मुकेश सिंह,परशराम महतो,मैनुअल टोप्पो,अरूण कुमार, संजय यादव, सुशील कुमार,सुबोध रमन,अनिल कुमार पांडेय,ए के पाठक,अजय कुमार, सुरेश यादव, जितेन्द्र वर्मा, गणेश यादव,संतोष कुमार, समेत सभी सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक व प्रभारी प्रधानाध्यापक मौजूद थे।
शिक्षा से ही समाप्त होंगी डायन कुप्रथा : डॉ. रामेश्वर उरांव
लोहरदगा|डायन कुप्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित हो जाए, तो ऐसी कुरीतियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी। उक्त बातें लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव ने कही। वे महिला, बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से आयोजित अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशा ला को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला नया नगर भवन, लोहरदगा में आयोजित की गई। विधायक डॉ. उरांव ने कहा कि आज भी बाल विवाह और डायन प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयां समाज में मौजूद हैं और कई लोग इन्हें गलत नहीं मानते। उपायुक्त डॉ. ताराचंद ने कहा कि समाज से कुरीतियों को खत्म करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक करना आवश्यक है। जिला प्रशासन द्वारा ‘पंचाइत कर गोइठ’ कार्यक्रम के माध्यम से पंचायत स्तर पर मुखिया और जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों के साथ संवाद स्थापित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है और डायन कुप्रथा व बाल विवाह के उन्मूलन पर विशेष चर्चा की जाती है। कार्यशाला में डीडीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, डालसा सचिव राजेश कुमार, एसडीपीओ वेदांत शंकर, आईटीडीए परियोजना निदेशक सुषमा नीलम सोरेंग ने भी अपने विचार रखे।
क्षेत्रीय-जनजातीय भाषाओं पर आज से बहुभाषी शिक्षा कॉन्क्लेव
रांची| क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को बढ़ावा देने तथा राज्य की भाषा नीति तैयार करने को लेकर बुधवार और गुरुवार को राजधानी रांची में राष्ट्रीय बहुभाषी शिक्षा कॉन्क्लेव का आयोजन होगा। कॉन्क्लेव का उद्घाटन उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार करेंगे। इसमें झारखंड, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, राजस्थान, त्रिपुरा, हरियाणा, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से आए प्रमुख शिक्षाविद, शिक्षक और भाषा विशेषज्ञ शामिल होंगे। कॉन्क्लेव में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों के शिक्षाविद एक साथ मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रभावी भाषा नीति पर चर्चा करेंगे। कार्यशाला में जनजातीय और मातृभाषा आधारित शिक्षण से जुड़ी उपलब्धियों और चुनौतियों पर भी मंथन होगा। तकनीकी सत्रों में एनसीईआरटी की प्रो. उषा शर्मा, एलएलएफ के डॉ. धीर झिंगरन और यूनिसेफ की पारुल शर्मा शामिल होंगी। वहीं पैनल चर्चा में प्रो. रामानुजन मेघनाथन, अनुभव राजेश और डॉ. महेंद्र मिश्र तथा शिक्षक वक्ताओं में रमेनी मुंडा, दिलीप कुमार किस्कू और दमयंती बिरुआ अपने विचार रखेंगे। आयोजन में शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह, झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक शशि रंजन, प्राथमिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार रंजन समेत एनसीईआरटी, यूनिसेफ, लैंग्वेज लर्निंग फाउंडेशन के प्रतिनिधि, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विशेषज्ञ, प्रख्यात शिक्षाविद और विभिन्न राज्यों के शिक्षक शामिल होंगे।
जमीन का पूरा सिस्टम होगा डिजिटल उच्च शिक्षा का बजट 50 फीसदी बढ़ा
प्रदेश के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि जमीन से जुड़े सभी सिस्टम का जल्द डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसके तहत भू-आधार कार्ड,ऑनलाइन नामांतरण आैर ड्रोन सर्वे की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वहीं उच्च शिक्षा विभाग का बजट 50 फीसदी तक बढ़ाया गया है। वर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में अपने विभाग के दो साल की उपलब्धियां गिनाते हुए यह बातें कहीं। वर्मा ने कहा कि एग्रीस्टेक के तहत प्रदेश में जियो-रिफरेंसिंग, फार्मर रजिस्ट्रेशन और डिजिटल क्रॉप सर्वे की शुरुआत हो चुकी है। इसके तहत अब हर खेत और हर भूखंड डिजिटल नक्शे से जुड़ेगा। पटवारी नक्शों के जियो-रिफरेंसिंग के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। भू-नक्शों को डिजिटल आधार से जोड़ते हुए प्रत्येक भूमि को यूनिक यूएल-पिन दिया जाएगा और मालिक को भू-आधार कार्ड जारी किया जाएगा। इससे फर्जी रजिस्ट्री, दोहरी बिक्री और सीमाविवाद पर प्रभावी रोक लगेगी। सरकार ने जमीन से जुड़े कामों को सरल करने के लिए स्व-नामांतरण की सुविधा शुरू की है। अब वारिस या खरीदार खुद ऑनलाइन नाम चढ़ा सकेंगे। इसी तरह भूमि व्यपवर्तन की प्रक्रिया भी ऑनलाइन करने के लिए 2 करोड़ रुपए रखे गए हैं। भू-अर्जन के मामलों में अब छोटे टुकड़े कर ज्यादा मुआवजा लेने पर रोक लगाई गई है। वर्मा ने बताया कि राजस्व मामलों के निराकरण के लिए रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में तहसीलदार व नायब तहसीलदार के अतिरिक्त न्यायालय बनाए जाएंगे। भास्कर इनसाइट शहरी क्षेत्रों में 5 डिसमिल से कम जमीन की बिक्री पर रोक राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में 5 डिसमिल से कम जमीनों की खरीदी बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ जन आवास योजना के तहत 2 से 10 एकड़ तक भूमि का पंजीयन कर छोटे प्लॉट बेचने की अनुमति दी गई है जबकि कॉलोनियों और अपार्टमेंट की सड़क, गार्डन और सामुदायिक भवन की जमीन अब संयुक्त नाम से दर्ज होगी। वहीं जमीन से जुड़े काम को डिजिटल करने के लिए पटवारी नक्शा जियो-रिफरेंसिंग के लिए 25 करोड़, चांदा-मुनारा व शहरी सीमांकन के लिए 16 करोड़, ऑनलाइन भूमि व्यपवर्तन के लिए 2 करोड़, नई तहसील-उप तहसील भवन के लिए 10 करोड़, तहसीलों में कंप्यूटर-प्रिंटर के लिए 115 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के 80 हजार हितग्राहियों को स्वामित्व कार्ड प्रदान किया जा चुका है। प्रदेश के 9 विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति लागू उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा निवेश और संरचनात्मक सुधार शुरू किया है। दो साल में उच्च शिक्षा का बजट करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। प्रदेश के 9 में से 7 राजकीय विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू कर दी गई है। इसके तहत गार्डनिंग, मल्टीमीडिया-एनिमेशन जैसे 42 स्किल एन्हांसमेंट, 108 जेनेरिक इलेक्टिव और एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स शुरू किए गए हैं। इंडस्ट्री से जुड़ाव बढ़ाने के लिए रिसर्च क्वालिटी इंडस्ट्री-एकेडमिया सेल का गठन किया गया है। 366 सहायक प्राध्यापक प्रोफेसर बने, जबकि 151 स्नातक और 7 स्नातकोत्तर प्राचार्यों को पदोन्नति दी गई।
स्वायत्त शिक्षा प्रणाली जरूरी : डोटासरा
जयपुर | पिसार संस्था की कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित सेमिनार में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि बहुजन समावेशी नीतियों, स्वायत्त शिक्षा प्रणाली, सहिष्णुता व लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता हैं। उन्होंने समाज और शासन को दिशा देने एवं परिवर्तन लाने में बुद्धिजीवियों की भूमिका को रेखांकित किया। पिसार अध्यक्ष प्रो. मंजू सिंह ने स्वागत किया। डॉ. लाधू राम चौधरी ने बौद्धिक विमर्श का सारांश प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता प्रो. एन. सुकुमार थे। डॉ राहुल चौधरी ने आभार जताया।
सरकार जल्द ही शिक्षामित्रों को केशलैस इलाज और बढ़ा हुआ मानदेय देगी। उनकी लंबित मांगों को बहुत जल्द निस्तारित किया जाएगा। सरकार उनके हित से जुड़े कई अन्य जरूरी फैसले भी बहुत जल्द लेगी। यह कहना है बेसिक शिक्षामंत्री संदीप सिंह का। वो मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के विश्वसरैया सभागार में आयोजित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रान्तीय सम्मेलन में बोल रहे थे। इस दौरान शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों ने बेसिक शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। सभी ने प्रदेश सरकार के शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों को केशलैस चिकित्सा में शामिल करने एवं शिक्षामित्र को मूल विद्यालय वापसी की कार्रवाई शुरू किए जाने पर शिक्षामंत्री का स्वागत कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में मौजूद एमएलसी शिक्षक क्षेत्र मेरठ सहारनपुर एवं प्रदेश संयोजक शिक्षक प्रकोष्ठ भाजपा श्रीचंद शर्मा, एमएलसी शिक्षक प्रकोष्ठ लखनऊ उमेश द्विवेदी, मएलसी प्रयागराज झांसी शिक्षक प्रकोष्ठ बाबूलाल तिवारी एवं एमएलसी आगरा अलीगढ़ स्नातक क्षेत्र के मानवेंद सिंह गुरु ने शिक्षामित्रों का समर्थन किया। 10 हजार में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला और प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार यादव ने कहा कि शिक्षामित्र और अनुदेशक किसान एवं गरीब बच्चों को पढ़ा रहे हैं। सरकार शिक्षामित्रों को सिर्फ 10 हजार रुपए प्रति माह के हिसाब से 11 माह का मानदेय देती है। इसमें परिवार का खर्च चलाना काफी मुश्किल है। बहुत से शिक्षामित्र स्नातक के साथ बीटीसी उत्तीर्ण हैं। करीब 60 हजार शिक्षामित्र टीईटी और सीटीईटी उत्तीर्ण हैं। एनसीटीई के मानक पूरा करने वाले शिक्षामित्र शिक्षक बनने की योग्यता रखते हैं। इस मौके पर संगठन के प्रदेश संयोजक पुनीत चौधरी, भूपेंद सिंह,विमलेश पटेल, अनिल यादव, मुन्नू निषाद, प्रवीण श्रीवास्तव, चरण सिंह, खुर्शीद अहमद,गिरीश यादव, अमित शर्मा समेत अन्य मौजूद रहे। यह हैं प्रमुख मांगें
आर्यभट्ट ज्ञान यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ स्टेम सेल टेक्नोलॉजी एवं स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी में पढ़ाई और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लेवल के लैब का निर्माण किया जाएगा। साथ ही यूनिवर्सिटी परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों के लिए ऑडिटोरियम और छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। ये सारे एजेंडों पर आज की बैठक में स्वीकृति मिली है। आज आर्यभट्ट ज्ञान यूनिवर्सिटी में 29वीं बैठक का आयोजन किया गया था। इसमें शिक्षा मंत्री सुनील कुमार भी मौजूद रहे। सुनील कुमार को मिला सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री का पुरस्कार इस बैठक में सुनील कुमार को इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एजुकेटर्स फॉर वर्ल्ड पीस द्वारा वर्ष के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मंत्री ने अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अवधारणा के अनुरूप इस विश्वविद्यालय में शोध कार्य और शैक्षणिक प्रदर्शन किए जाने का परामर्श दिया गया। मंत्री द्वारा विश्वविद्यालय के आधारभूत संरचना के विकास के लिए बिहार सरकार के तरफ से हर संभव सहयोग प्रदान किए जाने का आश्वासन दिया गया। इसके साथ ही मंत्री ने कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव के द्वारा विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों में वृद्धि के लिए सराहना की। पटना विश्वविद्यालय में NAAC मान्यता की तैयारी को लेकर हुई बैठक पटना विश्वविद्यालय में नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) मान्यता की तैयारी को लेकर आज बैठक की गई। इस बैठक के एजेंडे में विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेज द्वारा AQAR (एनुअल क्वालिटी एश्योरेंस रिपोर्ट) की स्थिति की समीक्षा, NAAC द्वारा प्रस्तावित नई बाइनरी और मैच्योरिटी आधारित ग्रेडिंग प्रणाली के अंतर्गत आवश्यक बिंदुओं पर प्रस्तुति दिया गया। विभागों और कॉलेज द्वारा तैयार किए जाने वाले दस्तावेजों पर भी चर्चा की गयी जिसमें NAAC द्वारा मान्यता प्राप्त करने के लिए उठाए जाने वाले आवश्यक कदम शामिल हैं।
पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब के थाना कबरवाला पुलिस ने अपनी ही बेटी की निर्मम हत्या करने वाले पिता को गिरफ्तार कर लिया है। यह वारदात दो दिन पहले 4 जनवरी को गांव मिड्डा में सामने आई थी जहां पिता ने बेटी पर कस्सी से हमला कर उसकी जान ले ली। पुलिस ने बताया कि 4 जनवरी 2026 को गांव मिड्डा में चमनदीप कौर नामक युवती की उसके पिता हरपाल सिंह द्वारा कस्सी से हमला कर हत्या कर दी गई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मृतका की मां जसविंदर कौर के बयान दर्ज किए गए। बयान के आधार पर आरोपी पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। बेटी की सोच से था नाराज पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी हरपाल सिंह अपनी बेटी की पढ़ाई और उसकी आगे बढ़ने की सोच से नाराज था। वह बेटी की स्वतंत्र सोच और शिक्षा को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, जिस कारण उसने गुस्से में आकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। हत्या के बाद आरोपी कस्सी समेत मौके से फरार हो गया था। मां के बयान पर केस दर्ज इस मामले में थाना कबरवाला की एसएचओ हरप्रीत कौर ने बताया कि पुलिस ने मृतका की मां के बयान पर आरोपी पिता हरपाल सिंह उर्फ पाला के खिलाफ केस दर्ज किया था और अब उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई कस्सी भी बरामद कर ली गई है। एसएचओ हरप्रीत कौर ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश किया जा रहा है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
रोहतक जिला मार्च 2026 तक प्राथमिक शिक्षा में 100 प्रतिशत निपुण दर्जा हासिल कर लेगा। मार्च 2026 तक पूर्ण निपुण जिला बनकर समावेशी, परिणामोन्मुखी एवं समग्र शिक्षा का एक मानक स्थापित करेगा। डीसी सचिन गुप्ता ने निपुण जिला बनाने को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी किए। डीसी सचिन गुप्ता ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन मोड में कार्य करते हुए गति बनाए रखें, ताकि कक्षा पहली से पांचवीं तक के सभी बच्चे आयु के अनुरूप पठन, लेखन एवं बुनियादी गणितीय दक्षता प्राप्त कर सकें। आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की रीढ़ है और रोहतक की यह पहल शिक्षा सुधार का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। निपुण रोहतक के तहत मजबूत प्रगति जिला मूल्यांकन आंकड़ों के अनुसार पिछली समीक्षा में निर्धारित लक्ष्यों को योजनाबद्ध तरीके से प्राप्त कर लिया गया है। एक माह के दौरान 1014 विद्यार्थियों ने निर्धारित समय-सीमा में दक्षता के एक स्तर से अगले उच्च स्तर तक प्रगति करते हुए निपुण मानकों को प्राप्त किया है। 1888 विद्यार्थी वर्तमान में केंद्रित सुधारात्मक शिक्षण के अंतर्गत हैं और अगले चरण में उनकी दक्षता में अपेक्षित सुधार होने की संभावना है। जीरो पीरियड - रोहतक की नवाचार पहल अब पूरे प्रदेश में लागू जीरो पीरियड पहल के अंतर्गत सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में प्रतिदिन 40 मिनट का विशेष शिक्षण समय निर्धारित किया गया है, जिसमें केवल पठन दक्षता और संख्यात्मक कौशल पर ध्यान दिया जाता है। इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए अब रोहतक का यह मॉडल पूरे राज्य में लागू किया गया है। प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी डिजिटल स्किल पासबुक के माध्यम से की जा रही है। शिक्षक प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रम डीसी सचिन गुप्ता ने डाइट मदीना के सहयोग से संचालित शिक्षक प्रशिक्षण पहलों की समीक्षा की तथा प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन किया। नींव कार्यक्रम के तहत कक्षा 9वीं व 10वीं के विद्यार्थियों में विज्ञान विषय की दक्षता बढ़ाने हेतु डिजिटल होमवर्क और विषय आधारित वीडियो सहायता प्रदान की जा रही है। शैक्षणिक समृद्धि एवं प्रतिभा विकास डीसी सचिन गुप्ता ने निर्देश दिए कि सुपर-40 कार्यक्रम (सुपर-100 मॉडल पर आधारित) के तहत कक्षाएं एक माह के भीतर शुरू की जाएं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग, अध्ययन सामग्री, टेस्ट एवं मेंटरशिप उपलब्ध कराई जाएगी।
'शिक्षा से ही समाज की उन्नति संभव':कुरैशी महासभा ने फिजूलखर्ची रोकने और जागरूकता पर दिया बल
डीडवाना में कुरैशी महासभा संस्थान की ओर से हाल ही में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले की सभी तहसीलों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर सभी तहसील अध्यक्षों का माला और साफा पहनाकर अभिनंदन किया गया। कुरैशी महासभा संस्थान के जिला डीडवाना-कुचामन संघ के देहात अध्यक्ष अब्दुर्रहमान भाटी ने इस दौरान अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की उन्नति शिक्षा के बिना संभव नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा की नींव पर ही राष्ट्र की उन्नति, प्रगति, सौहार्द और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। भाटी ने कार्यकारिणी के विस्तार के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक वास्तविक सुधार संभव नहीं है।छोटी खाटू तहसील अध्यक्ष सरवर कुरैशी ने शादियों में अत्यधिक खर्च पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गरीब तबका अमीरों की देखा-देखी कर्ज लेकर फिजूलखर्ची कर रहा है, जिसे रोकने की आवश्यकता है। परबतसर तहसील अध्यक्ष अबरार अहमद कुरैशी ने सुझाव दिया कि छोटे-छोटे सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। समारोह में मकराना अध्यक्ष इलियास कुरैशी, कुचामन अध्यक्ष जावेद गोरी, मौलासर अध्यक्ष जाकिर खत्री और महा सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव मोहम्मद रफीक भाटी ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर गुलाम नबी, जिकरद्दीन, खलील तंवर, फजलु भाटी, आदिल तबाक, मोहम्मद असलम भाटी, शकील कुरैशी, शाबीर भाटी, जमील कुरैशी सहित बड़ी संख्या में समाज बंधु उपस्थित थे।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की दसवीं और बारहवीं क्लास के फाइनल एग्जाम 12 फरवरी से शुरू होने वाले है, इससे ठीक एक महीने पहले शिक्षा विभाग ने सौ से ज्यादा प्रिंसिपल के ट्रांसफर कर दिए हैं और करीब इतने ही प्रिंसिपल की लिस्ट अभी आनी शेष है। करीब दो महीने पहले हुए ट्रांसफर के बाद सिफारिश के दम पर कई शिक्षकों ने अपना तबादला कैंसिल करवा लिया है, वहीं कई प्रिंसिपल को शिकायत के आधार पर इधर-उधर किया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी ये लिस्ट भी करीब एक महीने पहले ही शिक्षा निदेशालय से जयपुर सचिवालय पहुंच गई थी। इसके बाद पांच जनवरी को सचिवालय ने निदेशालय को ट्रांसफर की स्वीकृति दी। मंगलवार को निदेशक ने इस आशय की लिस्ट को जारी कर दिया। ये दो लिस्ट है। एक में 39 प्रिंसिपल के नाम है, जबकि दूसरी लिस्ट में 78 प्रिंसिपल को इधर से उधर किया गया है। हालांकि इन 117 प्रिंसिपल के बाद भी बड़ी संख्या में प्रिंसिपल अपने ट्रांसफर की कवायद में जुटे हुए हैं। एक से दूसरे जिले में ट्रांसफर इस लिस्ट की खास बात ये है कि इसमें पचास फीसदी से ज्यादा ट्रांसफर तो एक से दूसरे जिले में ही किए गए हैं। वहीं अधिकांश के ट्रांसफर उनके आवेदन पर हुए हैं, ऐसे में उन्हें टीए और डीए देय नहीं होगा। वहीं कुछ को ट्रांसफर होने पर टीए और डीए देय है, यानी उन्होंने ट्रांसफर के लिए आवेदन नहीं किया था। ऐसे में ऐसे अधिकारियों को बीच सत्र में स्कूल छोड़कर अन्यत्र जाना पड़ा है। रिटायरमेंट पोस्ट पर एडवांस ट्रांसफर जो प्रिंसिपल 31 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं, उनकी पोस्ट पर एडवांस में ही दूसरे प्रिंसिपल का ट्रांसफर कर दिया गया है। ऐसे ट्रांसफर के आगे आदेश एक फरवरी से प्रभावी होने का रिमार्क लिखा गया है। ऐसे पांच से ज्यादा प्रिंसिपल के ट्रांसफर हैं। सारा काम जयपुर, बीकानेर में सिर्फ हस्ताक्षर ट्रांसफर का सारा काम जयपुर स्थित शिक्षा संकुल से हुआ है, जबकि बीकानेर ये फाइल सिर्फ हस्ताक्षर के लिए ही आई। निदेशालय स्तर पर सिर्फ ये देखा गया कि लिस्ट में कोई खामी तो नहीं है। इस बार भी संबंधित अनुभाग से सिर्फ लिस्ट चैक ही करवाई गई। निदेशालय ने भी आदेश में साफ लिखा है कि राज्य सरकार से मिले पत्र के आधार पर ट्रांसफर किया जा रहा है।
डॉ. पुष्पेंद्र, डॉ. सतना सिंह को शिक्षा भूषण सम्मान:राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने जयपुर में किया सम्मानित
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किशन राव बागड़े ने डॉ. पुष्पेंद्र सिंह और डॉ. सतना सिंह को 'शिक्षा भूषण सम्मान' से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें भारतीय संस्कृति, शिक्षा, साहित्य और भाषा के प्रचार-प्रसार में उनके सराहनीय योगदान के लिए दिया गया। सम्मान समारोह राजभवन राजस्थान में आयोजित एक राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के दौरान हुआ। बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया एवं भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता राज्यपाल हरिभाऊ किशन राव बागड़े ने की। इसमें बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा और भारतीय शिक्षण मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आर.ए. शर्मा मुख्य वक्ता रहे। इस अवसर पर डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने अपनी बेस्ट सेलर पुस्तकें 'शैक्षिक नवाचार' और 'बेटियाँ' की प्रतियां राज्यपाल को भेंट कीं। ये पुस्तकें गत वर्ष विश्व पुस्तक मेला प्रगति मैदान नई दिल्ली और कोलकाता इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल में बेस्ट सेलर रही थीं। राज्यपाल ने इन पुस्तकों की हस्ताक्षरित प्रतियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ किशन राव बागड़े ने कहा कि शिक्षा समाज को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने शिक्षकों के नवाचारों की सराहना करते हुए उनकी उत्तरोत्तर प्रगति की कामना की और नव वर्ष 2026 की शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल के हाथों 'शिक्षा भूषण सम्मान' से अलंकृत होने पर डॉ. पुष्पेंद्र सिंह और डॉ. सतना सिंह को बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों, जिनमें डॉ. संजय यादव, डॉ. कंचन कामिनी, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. केशव सिंह पटेल, डॉ. अमित कुमार, डॉ. विजयलक्ष्मी यादव, सुनील आनंद, शिवाली जायसवाल और कादंबरी कुशवाहा शामिल हैं, ने बधाई दी।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा कल रानियां में प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित करेंगे। यह सम्मान समारोह श्री दुर्गा कीर्तन मंदिर कमेटी और हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम शहर के दीप पैलेस में 7 जनवरी, बुधवार (कल) को दोपहर सवा 12 बजे शुरू होगा। इस कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। श्री गोशाला कमेटी रानियां के प्रधान संदीप मित्तल विशिष्ट अतिथि होंगे, जबकि रानियां के पूर्व विधायक रामचंद्र कंबोज भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रधान सोनू ग्रोवर करेंगे। 10वीं में टॉप करने वाले छात्र भी होंगे सम्मानित श्री दुर्गा कीर्तन मंदिर कमेटी के कार्यकारी प्रधान अमित कुक्कड़, उपप्रधान संजय आहुजा और गुरमीत मान ने बताया कि समारोह में सरकारी और निजी विद्यालयों के उन होनहार छात्रों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। आर्थिक रूप से कमजोर वे बच्चे जिन्होंने अपनी मेहनत से मुकाम हासिल किया है, उन्हें भी पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, 10वीं कक्षा में टॉप करने वाले छात्रों को भी सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सवाई माधोपुर में शिक्षा क्षेत्र की कायाकल्प करने वाले दानदाताओं के सम्मान में 6 फरवरी 2026 को चतुर्थ जिला स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित होगा। भविष्य की उड़ान नवाचार के तहत 35 करोड़ का सहयोग देने वाले भामाशाहों को जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया जाएगा। जानें इस भव्य आयोजन और स्कूलों के विकास में सामुदायिक सहभागिता की पूरी रिपोर्ट।
शिक्षा निदेशालय में मारपीट पर 15 कर्मचारी तलब:केंटीन के पास प्रदर्शन पर भी सवाल, आज होगी पूछताछ
बीकानेर के शिक्षा निदेशालय परिसर में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के साथ मारपीट और सोशल मीडिया कमेंट के मामले में जांच तेज हो गई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के आदेश पर संयुक्त निदेशक ने इस मामले से जुड़े 15 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर दोपहर में तलब किया है। जांच के दौरान केंटीन के पास कर्मचारियों द्वारा किए गए प्रदर्शन भी सवाल। वहीं दूसरी ओर, इस घटना को लेकर बीछवाल थाने में दर्ज FIR की जांच भी पुलिस कर रही है। 24 दिसंबर की घटना को लेकर जांच संयुक्त निदेशक जयदीप ने प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों को अलग अलग नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में 24 दिसंबर 2025 की दोपहर सहायक प्रशासनिक अधिकारी और समाज शिक्षा के अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के बीच हुई गाली गलौच और मारपीट की घटना को लेकर जानकारी और साक्ष्य मांगे गए हैं। दोपहर 2 बजे बुलाए गए कर्मचारी सभी कर्मचारियों को दोपहर 2 बजे माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे पूछा जाएगा कि घटना के समय उन्होंने क्या देखा, क्या सुना और उनके पास क्या साक्ष्य हैं। केंटीन के पास प्रदर्शन पर भी सवाल जांच के दौरान केंटीन के पास कर्मचारियों द्वारा किए गए प्रदर्शन को भी शामिल किया गया है। ज्ञापन देने वाले कर्मचारियों से भी इस संबंध में पूछताछ की जा रही है। तलब किए गए कर्मचारियों में अधिकांश कर्मचारी नेता शामिल हैं। इन कर्मचारियों को भेजा गया नोटिस प्रारम्भिक शिक्षा में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश गोस्वामी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी जितेंद्र पडिहार, अनिल कुमार पुरोहित, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी उमेश आचार्य, मनीष कुमार रंगा और राजेश व्यास को नोटिस जारी कर बुलाया गया है।
समकालीन शिक्षा पर आधारित द मॉडर्न एजुकेटर पुस्तक का विमोचन
भास्कर न्यूज |लुधियाना डॉ. दीपू कुमार सिंह की कृति का देश भगत यूनिवर्सिटी में भव्य विमोचन मंडी गोबिंदगढ़ स्थित देश भगत यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित भव्य पुस्तक विमोचन समारोह में शिक्षाविद डॉ. दीपू कुमार सिंह द्वारा लिखित पुस्तक द मॉडर्न एजुकेटर का औपचारिक विमोचन किया गया। यह पुस्तक समकालीन शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है और वर्तमान युग के अध्यापकों के लिए एक दिशा-सूचक एवं मार्गदर्शक ग्रंथ के रूप में उभर कर सामने आई है। इस अवसर पर डॉ. दीपू कुमार सिंह ने कहा कि आज का शिक्षक केवल विषयवस्तु तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उसे तकनीक, नवाचार और बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन करना होगा। उन्होंने बताया कि द मॉडर्न एजुकेटर पुस्तक में शिक्षण-अधिगम की आधुनिक अवधारणाओं, शिक्षक की भूमिका, मूल्य आधारित शिक्षा तथा कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग को अत्यंत सरल और व्यावहारिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। डॉ. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पुस्तक न केवल विद्यालय स्तर के शिक्षकों के लिए उपयोगी है, बल्कि महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा शैक्षणिक प्रशासकों के लिए भी समान रूप से लाभकारी सिद्ध होगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता देश भगत यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जोर सिंह ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, पंजाबी यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। पुस्तक विमोचन समारोह का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
भास्कर न्यूज | देवरी बंगला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टटेंगा में रविवार को वार्षिक उत्सव एवं स्नेह सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक कुंवर सिंह निषाद थे। समारोह की अध्यक्षता शाला विकास समिति के अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य टुमन साहू ने की। वार्षिक उत्सव में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, गीत, नृत्य और प्रश्नोत्तरी के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही खेल, शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और संस्कार देना किसी भी विद्यालय की पहचान है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक विद्यालय के वार्षिक उत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं की रूचि, प्रगति और उनके प्रयासों का मूल्यांकन करना भी होता है। ऐसे आयोजन छात्रों को नई प्रेरणा और उत्साह प्रदान करते हैं। और विधायक कुंवर सिंह ने शाला परिसर में डोम शेड एवं मंच निर्माण की घोषणा की । इस अवसर पर कार्यक्रम में कोदूराम दिल्लवार, जिला कांग्रेस महामंत्री केशव शर्मा, जिला पंचायत सदस्य प्रभा नायक, किशोरी साहू, रमेश सोनवानी, सरपंच दीप्ति साहू, घनश्याम ठाकुर, सागर साहू, तरुण पारकर, सुरेश साहू, पुरुषोत्तम उर्वशा, चंद्रशेखर उर्वशा, प्राचार्य आर.के. देवांगन, शाला परिवार और ग्रामीण उपस्थित रहे।
अनूपपुर में स्कूलों का समय बदला:सुबह 11 बजे से लगेंगी कक्षाएं, जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किया आदेश
अनूपपुर जिले में कड़ाके की ठंड को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है, जो 5 जनवरी 2026 से लागू हो गया है। यह फैसला बच्चों को ठंड से बचाने के लिए लिया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के समय में फेरबदल किया गया है। जो स्कूल दो पालियों में लगते हैं, उनमें पहली पाली सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगी। वहीं, एक पाली में चलने वाले स्कूल अब सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक लगेंगे। कलेक्टर ने दी मंजूरी बच्चों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिए गए इस फैसले को कलेक्टर ने भी मंजूरी दे दी है। जिला शिक्षा अधिकारी तुलाराम आर्मो ने जिले के सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि इस नए समय का सख्ती से पालन किया जाए।
आमेट में महिला एवं बाल विकास विभाग और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा 143 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। सेठ तख़त मल कछारा स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों के भाषाई, संज्ञानात्मक और रचनात्मक विकास के लिए खेल-खेल में शिक्षा देने के आधुनिक गुर सिखाए गए। विशेषज्ञों ने कहानी और गतिविधियों के माध्यम से नौनिहालों का भविष्य संवारने पर जोर दिया।
राजसमंद के खमनोर ब्लॉक शिक्षा कार्यालय में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता का मामला गरमाया। मुख्यमंत्री कार्यालय और विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ तक पहुंची शिकायतों के बाद जांच तेज। शिक्षक मनोज सोलिया और मुरलीधर नागौरी पर गंभीर आरोप, 83 से अधिक शिक्षक वसूली के दायरे में। भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
झाड़ोल में पटेल प्रजापति समाज का भव्य संगम: प्रतिभाओं का सम्मान और शिक्षा के नए संकल्प का उदय
झाड़ोल में पटेल प्रजापति समाज द्वारा आयोजित भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह 2025 में कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी और राजराणा गुणवंत सिंह झाला की उपस्थिति में 150 से अधिक मेधावी छात्र सम्मानित हुए। 'समाज दर्पण' पुस्तक का विमोचन और शिक्षा पर जोर देते इस कार्यक्रम ने समाज में विकास की नई लहर पैदा की है। जानें इस गौरवशाली आयोजन की पूरी रिपोर्ट।
चूरू में शिक्षा, चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक मोहर सिंह राठौड़ को मरणोपरांत स्वामी गोपालदास पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह कार्यक्रम 9 जनवरी को आयोजित होगा, जिसमें वरिष्ठ लेखक-पत्रकार त्रिभुवन मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल होंगे। समिति के संयोजक दलीप सरावग ने बताया कि वरिष्ठ समाजसेवी हनुमानमल कोठारी की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने यह फैसला किया है। समिति ने वर्ष 2026 के लिए यह पुरस्कार मोहर सिंह राठौड़ को देने का निर्णय लिया, जिन्होंने स्वामी गोपालदास द्वारा प्रज्ज्वलित शिक्षा, चिकित्सा, समाज सेवा और गौ सेवा की लौ को आगे बढ़ाया। सरावग ने बताया कि यह कार्यक्रम शुक्रवार, 9 जनवरी को स्वामी गोपालदास की पुण्यतिथि पर आयोजित होगा। सुबह सवा 11 बजे गोपालदास चौक स्थित सर्वहितकारिणी भवन के सामने स्वामी गोपालदास की मूर्ति परिसर में श्रद्धांजलि सभा होगी। इसमें राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन मुख्य वक्ता होंगे। स्वामी गोपालदास संस्थान, चूरू के सौजन्य से यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसमें इक्कीस हजार रुपए नकद, शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति-पत्र शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि यह वार्षिक पुरस्कार इससे पहले भी कई गणमान्य व्यक्तियों को दिया जा चुका है। वर्ष 2019 में इतिहासकार गोविंद अग्रवाल, 2020 में सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्रता सेनानी चंदनमल बहड़, 2021 में शिक्षाविद् डॉ. घासीराम वर्मा, 2022 में वंचितों के सामाजिक उत्थान के लिए रावतराम आर्य, 2023 में स्वतंत्रता सेनानी हनुमान सिंह बुढानिया, 2024 में शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान के लिए सेठ कन्हैयालाल लोहिया और 2025 में भामाशाह बनवारी लाल सोती को यह सम्मान प्रदान किया गया था।
जयपुर के साइंस पार्क में आयोजित 7वें राष्ट्रीय स्तरीय सावित्री बाई फुले सम्मान समारोह-2026 में करौली की समाजसेवी दीपिका गुर्जर को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। शिक्षा, पर्यावरण और नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके योगदान को सराहते हुए पल्लवी शर्मा और डॉ. अर्चना शर्मा सहित गणमान्य अतिथियों ने उन्हें अवार्ड प्रदान किया। दीपिका गुर्जर की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर है।
कैथल जिले के राजौंद क्षेत्र के गांव कुकरकंडा में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सीएचओ अनीश खान, एएनएम पूजा, एएनएम मंजू, सुमन, गुरप्रीत, मीना, सेवापति संतोष, आशा कार्यकर्ता सौरभ और प्रदीप ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण पर बलकार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को संबोधित करते हुए एएनएम मंजू और सीएचओ अनीश खान ने कहा कि आज के समय में महिलाएं और बेटियां किसी भी क्षेत्र में कमजोर नहीं हैं। वे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं। संकीर्ण सोच से बाहर आने की अपीलवक्ताओं ने कहा कि समाज में आज भी कुछ लोग संकीर्ण मानसिकता रखते हैं, जिसके कारण बेटियां उचित शिक्षा और मार्गदर्शन से वंचित रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को शिक्षा और समान अवसर देना समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। हर क्षेत्र में बेटियों की भागीदारीविशेषज्ञों ने बताया कि आज गांव हो या शहर, हर जगह बेटियां अपनी मेहनत और योग्यता से सफलता हासिल कर रही हैं। चाहे सेना हो, अर्धसैनिक बल हों या अन्य क्षेत्र, बेटियां हर जगह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारीकार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और बेटियों की शिक्षा व सुरक्षा को लेकर जागरूकता का संकल्प लिया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
गंगापुर सिटी में वर्धमान हॉस्पिटल सद्भावना क्रिकेट प्रतियोगिता का रोमांचक समापन हुआ। दिशा क्रिकेट क्लब ने शानदार गेंदबाजी और साजिद खान के नाबाद अर्धशतक की बदौलत स्कूल शिक्षा परिवार को हराकर खिताब जीता। विधायक रामकेश मीणा की मौजूदगी में आयोजित इस फाइनल मुकाबले की पूरी रिपोर्ट और विजेताओं की सूची यहाँ पढ़ें।
उदयपुर के कविता में अखिल भारतीय मेवाड़ राजपूत महासभा का वार्षिक सम्मेलन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में 298 मेधावी छात्रों और 56 नवनियुक्त सरकारी अधिकारियों का सम्मान किया गया। समाज सुधार के संकल्प के साथ फिजूलखर्ची रोकने और शिक्षा के प्रसार पर जोर दिया गया। आयोजन में रक्तदान शिविर और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध ठोस प्रस्ताव पारित किए गए।
शिक्षा ही समाज के विकास की सबसे मजबूत कड़ी है
भास्क्र न्यूज| सिमडेगा गोंड आदिवासी समाज में शिक्षा,स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों को लेकर जागरूकता लगातार मजबूत हो रही है। समाज के बुजुर्गों से लेकर महिलाएं,युवा और बच्चे तक शिक्षा को प्राथमिकता देने,स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने को लेकर सजग नजर आए। समाज के लोगों को बच्चों की नियमित पढ़ाई,बालिकाओं की उच्च शिक्षा,स्वच्छता अपनाने,नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास की सबसे मजबूत कड़ी है,जबकि बेहतर स्वास्थ्य से ही समग्र उन्नति संभव है। इसके साथ ही समाज की पारंपरिक संस्कृति,रीति–रिवाजो ं और पहचान को संरक्षित रखने पर जोर दिया गया। कहा गया कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बचाना आवश्यक है,ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी पहचान न खोए। सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं आवास,पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृत्ति और स्वरोजगार की जानकारी भी समाज के लोगों को दी गई। लोगों से अपील की गई कि वे योजनाओं की सही जानकारी लेकर पात्रता के अनुसार आवेदन करें,ताकि किसी भी लाभ से वंचित न रहें। पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को मिले अधिकारों,स्थानीय स्वशासन,जल–जंगल–जमीन की सुरक्षा और आदिवासी हितों से जुड़े प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने,संशोधन कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई। ठंड के मौसम को देखते हुए बुजुर्गों और महिलाओं के बीच कंबल का वितरण किया गया,जिससे जरूरतमंदों को राहत मिली। इस पहल को समाज के लोगों ने सराहा। इन सभी सामाजिक विषयों को लेकर यह चर्चा झारखंड प्रदेश गोंड आदिवासी महासभा के तत्वावधान में कोचेडेगा प्रखंड अंतर्गत मांझीटोली में आयोजित एक सामाजिक बैठक के दौरान की गई। लोगों को अपनी सभ्यता और संस्कृति को संरक्षित करने की जरूरत:विमलामहासभा अध्यक्ष विमला प्रधान ने कहा कि गोंड समाज को शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होकर संगठित रूप से आगे बढ़ने की जरूरत है। पेसा कानून के तहत मिले अधिकारों की जानकारी से ही समाज अपने संस्कृति,परम्परा और सभ्यता की प्रभावी सुरक्षा कर सकता है। शिक्षा के प्रति भी जागरूकता जरूरी है।
शिक्षा विहार परिवार ने मनाया नववर्ष, नई कार्यकारिणी चुनी
जयपुर | जगतपुरा स्थित शिक्षा विहार कॉलोनी में पौषबड़ा और नववर्ष महोत्सव मनाया गया। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए। महिलाओं ने कृष्ण भजनों की प्रस्तुति दी। रामनगरिया थानाधिकारी चंद्रभान सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए और कॉलोनीवासियों को शुभकामनाएं दीं। डॉ. पारीक बने कॉलोनी के निर्विरोध अध्यक्ष : इस मौके पर शिक्षा विहार कॉलोनी के निर्विरोध चुनाव भी संपन्न हुए। इसमें डॉ. शंकर सहाय पारीक को अध्यक्ष, बाबूलाल शर्मा को उपाध्यक्ष, चरणजीत सचिव, हर्षा शर्मा को संयुक्त सचिव, अनिल शर्मा कोषाध्यक्ष, राकेश गुप्ता सह कोषाध्यक्ष, नीतू मीणा सांस्कृतिक सचिव और सीमा शर्मा को संयुक्त सांस्कृतिक सचिव चुना गया। इसके साथ ही अनिल भार्गव व गोपाल शर्मा को कॉलोनी के विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजनों की जिम्मेदारी दी गई। नव निर्वाचित कार्यकारिणी ने कॉलोनी में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है।
प्रदेश में 2540 वनवासी ग्रामों में चल रहे एकल विद्यालय, 75 हजार बच्चे ले रहे शिक्षा
वनबन्धु परिषद जयपुर चैप्टर की ओर से रविवार को महाराणा प्रताप सभागार में वार्षिकोत्सव एवं दानदाता सम्मान समारोह हुआ। इस दौरान ‘भारत के रंग-एकल के संग’ कार्यक्रम ने ग्रामीण एवं आदिवासी भारत के उत्थान को समर्पित राष्ट्रसेवा की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि अर्जुन दास सेतिया रहे। कार्यक्रम में फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल सोसायटी, जयपुर चैप्टर के सदस्यों, दानदाताओं एवं जनसमूह सहित 500 से अधिक लोगों की सहभागिता रही। विद्यालय संचालन में सहयोग करने वाले 150 दानदाताओं को सम्मानित किया। कलाकार करुणा ठाकुर की टीम ने श्रीरामचरितमानस पर आधारित नृत्य-नाटिका पेश की। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, ओडिशा सहित अन्य राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों के युवा कलाकार शामिल थे। चैप्टर के अध्यक्ष प्रदीप बाहेती ने बताया कि एकल अभियान का ध्येय आओ जलाएं दीप वहां, जहां अब भी अंधेरा है के मंत्र के साथ ग्रामीण भारत के अंतिम छोर तक शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास एवं सांस्कृतिक जागृति की रोशनी पहुंचाना है। एकल अभियान का उद्देश्य दूरस्थ ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में समग्र ग्राम विकास और आत्मनिर्भरता लाना है, जिससे वंचित बच्चों को घर-द्वार पर शिक्षा मिल सके और वे मुख्यधारा से जुड़ सकें। संयोजक मनमोहन महिपाल एवं संगीता गुप्ता, सचिव पुष्पेन्द्र चौधरी, वनबन्धु परिषद के संरक्षक विमल चन्द सुराणा, आरडी बाहेती, सुरेश पोद्दार, राजेन्द्र सेतिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे। { एकल अभियान द्वारा संपूर्ण भारत में एक गांव, एक शिक्षक, एक विद्यालय, 30 हजार रुपए प्रति वर्ष प्रति विद्यालय दान के माध्यम से राजस्थान में 2540 वनवासी ग्रामों में एकल विद्यालय पंचमुखी शिक्षा के माध्यम से कार्य कर रहा है। { राजस्थान में 75,900 बच्चे प्राथमिक शिक्षा ले रहे हैं। { संस्था के द्वारा देश में 24 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है। 8 हजार से अधिक ग्रामीण कार्यकर्ताओं, 90 हजार शिक्षकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रीरामचरितमानस पर आधारित नृत्य-नाटिका पेश करते कलाकार।
विद्यार्थियों को भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करने और सही कॅरियर चुनने में मदद के लिए शिक्षा विभाग ने ‘माय कॅरियर एडवाइजर‘ मोबाइल एप लॉन्च किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार यह एप विद्यार्थियों के लिए कॅरियर की जागरूकता बढ़ाने और बेहतर योजना बनाने में मददगार साबित होगा। इसका सबसे अधिक फायदा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को होगा। साथ ही शिक्षक और काउंसलर्स के लिए भी यह एप उपयोगी साबित होगा। विद्यार्थी तीन प्रमुख मूल्यांकनों के माध्यम से अपना सेल्फ-रिव्यू कर सकते हैं। एप्टीट्यूड टेस्ट (20 मिनट), इंटरेस्ट टेस्ट (12 मिनट) व वैल्यूज टेस्ट (14 मिनट) के माध्यम से विद्यार्थियों का परीक्षण हो सकेगा। एप पर छात्रों को 1500 से अधिक करियर विकल्पों और जॉब रोल्स की जानकारी दी गई है। एंड्रॉयड और आईओएस दोनों पर उपलब्ध; इस एप को एंड्रॉयड प्ले स्टोर पर https://play.google.com/store/apps/details?id=com.wadhwani.careerhl=en_IN व आईओएस एप स्टोर पर https://apps.apple.com/in/app/my-career-advisor-by-moe/id6738484430 लिंक से डाउनलोड किया जा सकता है। बिना डिग्री जॉब विकल्प इस एप में कॉलेज डिग्री के साथ-साथ बिना डिग्री के जॉब ऑप्शन भी उपलब्ध रहेंगे। इससे हर प्रकार के विद्यार्थी को मार्गदर्शन मिल सके। विद्यार्थी प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं। अपनी सेल्फ-रिव्यू रिपोर्ट, मैच्ड रोल्स और फेवरिट्स को अभिभावकों, शिक्षकों और सलाहकारों के साथ साझा भी कर सकते हैं, जिससे कॅरियर संबंधी निर्णय और प्रभावी हो जाता है।
इंटर की पढ़ाई के लिए बन रहा हाई स्कूलों के अपग्रेडेशन का प्रस्ताव राज्य में 10वीं तक के 1711 हाई स्कूल अब प्लस टू में अपग्रेड होंगे। इस पर लगभग 2000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे। इन स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय और अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण किया जाएगा। नए शिक्षकों की नियुक्तियां भी होंगी। राज्य के विभिन्न जिलों में अभी 1158 प्लस टू स्कूल चल रहे हैं। ऐसे में 10वीं तक के 1711 हाई स्कूलों के अपग्रेड होने के बाद राज्य में प्लस टू स्कूलों की संख्या 2869 हो जाएगी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग यह प्रस्ताव बना रहा है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार की ओर से केंद्र को यह प्रस्ताव भेजा जाएगा। अपग्रेडेड प्लस टू स्कूलों में विज्ञान, कला और कॉमर्स तीनों संकाय की पढ़ाई होगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने पूर्व में केंद्र सरकार को झारखंड के हर जिले के 15 हाईस्कूलों को प्लस टू में अपग्रेड करने का प्रस्ताव भेजा था। एनईपी में नौंवीं से 12वीं तक की पढ़ाई एक साथ होनी है नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में स्पष्ट उल्लेख है कि नौंवीं से 12वीं तक की पढ़ाई एक साथ होगी। चूंकि डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई बंद हो चुकी है। ऐसे में 10वीं पास करने वाले बच्चे 12वीं तक उसी स्कूल में पढ़ाई करें, इसके लिए हाई स्कूलों का अपग्रेडेशन जरूरी है। इन अपग्रेडेशन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को अपने ही इलाके में उच्च शिक्षा जारी रखने का अवसर देना, स्कूल छोड़ने की दर को कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को बढ़ाना भी है। माध्यमिक आचार्य की योग्यता एमए/एमएससी बीएड होगी प्लस टू स्कूलों में 20-22 शिक्षकों की नियुक्ति होती है। पूर्व से हाई स्कूलों में जितने शिक्षक हैं, उनके अलावा जितने शिक्षकों की आवश्यकता हो, उन सबकी नियुक्ति करनी होगी। झारखंड में माध्यमिक आचार्य बनने के लिए, संबंधित विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री (कम से कम 45-50% अंकों के साथ) और बीएड की डिग्री भी होनी चाहिए। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा पास होना भी आवश्यक है। यह योग्यताएं माध्यमिक (कक्षा 9-12) शिक्षकों के लिए है। 40 स्कूलों को तय सीटों से अधिक एडमिशन लेना पड़ा डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई बंद कर दी गई है। ऐसे में इंटर के छात्रों को इस बार एडमिशन और फिर रजिस्ट्रेशन के लिए काफी चक्कर लगाना पड़ा। राज्य के 40 वित्त रहित स्कूलों में इस बार निर्धारित सीट से अधिक एडमिशन लेना पड़ा। जैक से अनुमति नहीं मिलने के कारण इनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा था। भारी दबाव के बाद सीट में वृद्धि करने की अनुमति दी गई है। हाई स्कूलों के प्लस टू में अपग्रेडेशन के बाद यह समस्या समाप्त हो जाएगी। पांच साल में तैयार होंगे सभी अपग्रेडेड प्लस टू स्कूल यदि इन सभी 1711 हाईस्कूलों को अपग्रेड करने की स्वीकृति मिलती है, तो भी इसे तैयार होने में कम से कम पांच साल लगेंगे। अगर समय पर पैसे उपलब्ध नहीं हुए, तो फिर अवधि और आगे बढ़ सकती है। अपग्रेडेड प्लस टू स्कूलों में कम से कम 6 और अधिकतम 10 वर्ग कक्षों का और निर्माण किया जाएगा। प्रयोगशाला, पुस्तकालय और शौचालय का निर्माण भी कराया जाएगा। इसके अलावा हर क्लास के लिए बेंच-डेस्क की भी आवश्यकता होगी।
गोंडा जिले के एडेड कॉलेज में तैनात रहे पूर्व लिपिक स्वयं प्रकाश शुक्ला और उनके सहयोगी अवधेश शुक्ला पर जिला प्रशासन और पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। नगर कोतवाल विवेक त्रिवेदी की शिकायत पर नगर कोतवाली में दोनों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, स्वयं प्रकाश शुक्ला शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का सरगना है। उसके खिलाफ गोंडा जिले के इटियाथोक, कटरा बाजार और नगर कोतवाली थानों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के कुल छह मुकदमे पहले से दर्ज हैं। आर्थिक लाभ के लिए लोगों को नौकरी का झांसा नगर कोतवाल विवेक त्रिवेदी ने बताया कि स्वयं प्रकाश शुक्ला (निवासी- बेंदुली, थाना इटियाथोक, वर्तमान पता- रघुकुल हॉस्टल के सामने, सिविल लाइन) और अवधेश कुमार शुक्ला (निवासी- पूरे शुक्ल चरहुवा, थाना परसपुर, वर्तमान पता- सिविल लाइन) ने मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया था। यह गिरोह अंतरजनपदीय स्तर पर सक्रिय रहकर शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूल करता था। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य अभ्यस्त अपराधी हैं और लंबे समय से इस तरह की ठगी में लिप्त थे। 10 लाख की ठगी, सिर्फ 4 लाख लौटाए पुलिस के मुताबिक, रमेश कुमार मौर्य ने 2 सितंबर 2025 को शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपियों ने नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे 10 लाख रुपये मांगे। इसमें से 6 लाख रुपये आरोपी के ड्राइवर उमाशंकर के सामने नकद दिए गए, जबकि 4 लाख रुपये RTGS के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। नौकरी न लगने पर दबाव बनाने पर आरोपियों ने केवल 4 लाख रुपये लौटाए और शेष 6 लाख रुपये हड़प लिए। इस मामले में थाना नगर कोतवाली में मु०अ०सं० 679/25 धारा 420 IPC के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। शिक्षक भर्ती के नाम पर 16 लाख की वसूली एक अन्य मामले में दीपक कुमार ने 1 जुलाई 2025 को पुलिस को सूचना दी कि आरोपियों ने शिक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर नकद और चेक के माध्यम से कुल 16 लाख रुपये लिए थे। नौकरी न मिलने पर जब दीपक ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में थाना नगर कोतवाली में मु०अ०सं० 519/25 धारा 420/406/506 IPC के तहत मुकदमा दर्ज है। गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई, डीएम ने किया गैंग चार्ट अनुमोदित पुलिस विवेचना में यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह आर्थिक और भौतिक लाभ के लिए लोगों को ठगने का अभ्यस्त है। समाज में इनके भय और आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए इनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 (गैंगस्टर एक्ट) की धारा 3(1) के तहत कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी गोंडा ने 2 जनवरी 2026 को गिरोह के खिलाफ गैंग चार्ट को अनुमोदन दिया। वर्तमान में पुलिस कई मामलों में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित कर चुकी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। एसपी बोले— जिलेभर के मामलों की हो रही समीक्षा गोंडा के पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बताया कि नगर कोतवाल की तहरीर पर दोनों आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी गिरोह बनाकर नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे थे। जिला मजिस्ट्रेट के अनुमोदन के बाद यह कार्रवाई की गई है। जिले के विभिन्न थानों में दर्ज अन्य मुकदमों की भी समीक्षा कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
अलवर में खंडेलवाल शिक्षा समिति के चुनाव में अध्यक्ष पद पर नारायण बाजरगान ने जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद के लिए हुए मुकाबले में नारायण बाजरगान ने रिषिकांत को 143 वोटों के अंतर से पराजित किया। अध्यक्ष पद के लिए कुल दो उम्मीदवार मैदान में थे। इससे पहले समिति के अध्यक्ष योगेश बड़ाया थे, जिन्होंने इस बार चुनाव नहीं लड़ा। चुनाव प्रक्रिया खंडेलवाल स्कूल परिसर में सुबह से शुरू हुई थी। शाम 5 बजे के बाद अध्यक्ष पद की मतगणना हुई। इसमें नारायण बाजरगान की जीत की पुष्टि हुई। अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित होने के बाद अब समिति के 13 सदस्यों के चुनाव की मतगणना जारी है, जिनके परिणाम आना अभी बाकी हैं। अध्यक्ष बोले- शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर रहेगा फोकस अध्यक्ष पद पर विजयी रहे नारायण बाजरगान ने पदभार संभालने के बाद शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा- समिति का अध्यक्ष बनने के बाद अब उनका पूरा फोकस शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर रहेगा। पिछले कार्यकाल में जो भी कमियां रह गई थीं, उन्हें चिह्नित कर उन पर गंभीरता से काम किया जाएगा, ताकि खंडेलवाल शिक्षा समिति को और अधिक प्रगतिशील बनाया जा सके। नारायण बाजरगान ने कहा- विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन और सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता रहेगी। साथ ही शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि समिति के सभी निर्णय पारदर्शिता और सामूहिक सहमति से लिए जाएंगे। नारायण बाजरगान अलवर की अनाज मंडी में चावल के प्रमुख व्यापारी हैं और वर्तमान में वहां उपाध्यक्ष पद पर भी कार्यरत हैं।
टोंक में कोली समाज की 100 प्रतिभाएं सम्मानित:बालिका शिक्षा और मेधावी छात्रों का सम्मान गर्व का विषय
जिला मुख्यालय पर रविवार को अखिल भारतीय कोली समाज टोंक के तत्वावधान में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान निर्वाचन आयोग, जयपुर के सचिव (आईएएस) राजेश महावर रहे। उन्होंने बालिका शिक्षा एवं उन्नत प्रतिभाओं को सम्मानित करने को गौरव का विषय बताते हुए कहा कि समाज की महिलाओं का राज्य की सेवाओं में अमूल्य योगदान रहा है, जो प्रेरणादायी है। विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. सुनील कुमार महावर ने स्वास्थ्य को अमूल्य निधि बताते हुए संतुलित एवं प्रोटीनयुक्त आहार अपनाने पर जोर दिया। सुश्री तपस्या कोली, प्रदेश अध्यक्ष महिला विंग ने मंच से महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए मील का पत्थर बताया। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. पप्पूराम कोली ने कहा कि प्रतिभाएं समाज का गौरव हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर माता-पिता व समाज का नाम रोशन किया। डॉ. धनराज कोली ने मानव मन व शरीर के संतुलन तथा नियमित स्वास्थ्य देखभाल पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने समाज की कुरीतियों व अशिक्षा को दूर करने के सतत प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। 100 स्टूडेंट्स को किया सम्मानित समारोह में जयपुर स्थित छात्रावास की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि समाज से 6 आरएएस में चयन हुआ है। कार्यक्रम में कक्षा 10वीं-12वीं, खेलकूद, विभिन्न प्रोफेशन एवं राजकीय सेवा में चयनित लगभग 100 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर लेखराज महावर, दिनेश बुंदेल, पंकज महावर, पूर्व पार्षद राजेंद्र महावर, प्रवीण महावर (अधिवक्ता), हीरालाल महावर, लालचंद महावर, महावीर गजेंद्र महावर, जसवंत महावर, सत्यनारायण महावर, चौथमल महावर, रमेश महावर (पूर्व पार्षद), कमल महावर सहित महिला विंग से संगीता महावर, शीलू बुंदेल, सीमा, सीता बुंदेल आदि उपस्थित रहे।
डीग में श्री हिंदी पुस्तकालय समिति ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को दानदाताओं और प्रतिभाओं के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां वाणी के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ किया। बृजेश शर्मा ने मंत्रोच्चार किया, जबकि सुनील सरल ने मां वाणी की वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंजीनियर लक्ष्मण शर्मा ने अपने संबोधन में शिक्षा, संस्कार और पुस्तकों के महत्व पर जोर दिया। शर्मा ने समिति के शताब्दी वर्ष को एक गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। सिद्धपीठ पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी कौशल किशोर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय समाज को बौद्धिक रूप से समृद्ध करने का एक सशक्त माध्यम हैं और युवाओं को इनसे जुड़ना चाहिए। बॉम्बे हॉस्पिटल जयपुर के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नीरज शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अध्ययन को आवश्यक बताया। लोहागढ़ ग्रुप ऑफ कंपनी भरतपुर के डायरेक्टर भगत सिंह दूसरे विशिष्ट अतिथि थे। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं के सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को समाज की मजबूती का आधार बताया। भगत सिंह ने समिति को एक लाख रुपये देने की भी घोषणा की। श्री हिंदी पुस्तकालय समिति के सभापति मानसिंह यादव ने अतिथियों का परिचय दिया और स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। समिति के प्रधानमंत्री के.के. मुदगल ने कार्यक्रम का विस्तृत विवरण दिया। कवि सुरेंद्र सार्थक ने मंच संचालन किया। सभापति यादव ने समिति के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्री हिंदी पुस्तकालय समिति डीग की स्थापना वर्ष 1927 में एक किराए के कमरे से हुई थी। यह लगभग दस वर्षों तक वहीं से संचालित हुई। वर्ष 1937 में समिति का अपना भवन बनकर तैयार हुआ, जहां यह पुस्तकालय आज भी चल रहा है।
नालंदा के ऐतिहासिक पावापुरी जल मंदिर के पास आज बिहार कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति का प्रखंड स्तरीय अधिवेशन और चुनाव हुआ। लोकतांत्रिक परंपरा का निर्वाह करते हुए गिरियक प्रखंड के लिए नए पदाधिकारियों का निर्विरोध चुनाव किया गया। समिति के जिला अध्यक्ष सुबोध पंडित और जिला सचिव संजीव कुमार बिट्टू की देखरेख में संपन्न हुई इस चुनाव प्रक्रिया में राज कुमार पंडित को प्रखंड अध्यक्ष, सुरेंद्र पंडित को सचिव और प्रदीप कुमार बिंदु को कोषाध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा दुखन पंडित उपाध्यक्ष, मित्तू देवी महिला अध्यक्ष, पूनम देवी महिला सचिव और रानी देवी महिला कोषाध्यक्ष के पद पर निर्वाचित हुईं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अमन राज ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए समाज के उत्थान के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। एकजुटता और शिक्षा पर जोर अधिवेशन को संबोधित करते हुए जिला सचिव संजीव कुमार बिट्टू ने प्रजापति समाज के सदस्यों से एकजुट रहने, शिक्षित होने और सामाजिक चेतना जगाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की सच्ची ताकत उसकी एकजुटता में निहित है। हमें नियमित बैठकों में भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए और सामूहिक निर्णयों का पालन करना चाहिए। शिक्षा और जागरूकता ही हमारे समाज को आगे ले जा सकती है। जिला अध्यक्ष सुबोध पंडित ने संगठन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि संगठन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। समाज को इसे हमेशा बनाए रखना चाहिए। बिखरे हुए लोग कभी भी अपने अधिकारों के लिए प्रभावी ढंग से आवाज नहीं उठा सकते। उत्पीड़न के खिलाफ खुद लड़नी होगी लड़ाई जिला युवा सचिव प्रवेश पंडित ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रजापति समाज पर लगातार उत्पीड़न हो रहा है, लेकिन शासन-प्रशासन से अपेक्षित न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां यह बताती हैं कि हमें अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी होगी। इसके लिए हमारा संगठित रहना अत्यंत आवश्यक है। केवल मजबूत संगठन ही समाज के हितों की रक्षा कर सकता है।
कोरबा आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष केआर शाह ने प्रदेश की अलग-अलग जेलों में बंद आदिवासियों को रिहा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिषद ऐसे आदिवासियों की सूची तैयार करेगी, जो जानकारी के अभाव, आर्थिक तंगी या बेवजह अपराध से अधिक सजा काट रहे हैं। शाह ने बताया कि परिषद इन आदिवासियों की रिहाई के लिए कानूनी सहायता प्रदान करेगी, जिसमें वकीलों का पूरा खर्च भी शामिल होगा। इसका मुख्य उद्देश्य उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। मीडिया से चर्चा करते हुए शाह ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने सभी आदिवासी क्षेत्रों में डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) की तर्ज पर हाई स्कूल खोलने की वकालत की, ताकि हर वर्ग के लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके। बस्तर को अलग राज्य बनाने पर सहमति जताई इसके अलावा शाह ने बस्तर को अलग राज्य बनाने पर भी अपनी सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों के गठन से क्षेत्र का विकास होता है, इसमें कोई संदेह नहीं है। केआर शाह कोरबा में जयपाल सिंह मुंडा की जयंती की तैयारियों के सिलसिले में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई परिषद की छह प्रमुख मांगों में से एक है।
भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग के 606 उम्मीदवारों को सौंपे नियुक्ति पत्र
‘मिशन रोज़गार’ के तहत आज मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से शिक्षा विभाग के 606 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र देने के साथ पंजाब में पहली बार चार सालों में युवाओं को 61,000 से अधिक सरकारी नौकरियां मिलने का नया रिकॉर्ड स्थापित हुआ
भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती उदयपुर में सर्व ओबीसी समाज महापंचायत ट्रस्ट और ज्योतिबा फुले टीटी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में मनाई गई। इस अवसर पर माली कॉलोनी स्थित द फॉर्च्यून पार्क होटल गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में 200 प्रतिभावान छात्राओं और समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उदयपुर जिले के ओंगणा, झाड़ोल, सलूंबर सहित कई गांवों से आईं 200 प्रतिभावान छात्राओं और समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को अतिथियों द्वारा उपरणा, प्रशंसा पत्र और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकेश चौधरी ने की। वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी मुख्य अतिथि रहे, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी प्रतिभा गुप्ता भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। सेवानिवृत्त एसडीएम शंकरलाल मालवीय, मोटिवेशनल स्पीकर नवनीत नागर और दिनेश चौधरी विशिष्ट अतिथि थे। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलाधिपति भंवरलाल गुर्जर मुख्य वक्ता थे। सभी अतिथियों का स्वागत पगड़ी, उपरणा और स्मृति चिन्ह भेंटकर अध्यक्ष लोकेश चौधरी ने किया। संस्थापक दिनेश माली ने अपने संबोधन में बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले की प्रेरणा से सावित्रीबाई फुले ने 17 वर्ष की आयु में 1 जनवरी 1848 को पुणे के भिड़ेवाड़ा में भारत का पहला बालिका विद्यालय खोला। शुरुआत में इसमें केवल 9 लड़कियां पढ़ने को तैयार हुई थीं। उन्होंने 1851 तक तीन और बालिका विद्यालय खोले। ज्योतिबा फुले का उद्देश्य महिलाओं की दशा सुधारना और उन्हें समाज में पहचान दिलाना था। विधायक उदयलाल डांगी ने अपने उद्बोधन में कहा कि नारी शिक्षा से ही समाज का विकास संभव है। मोटिवेशनल स्पीकर नवनीत नागर ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा में अच्छे अंक नौकरी में सफलता की गारंटी नहीं होते। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता निरंतर और धैर्य के साथ तैयारी करने से मिलती है। इस अवसर पर संस्थापक दिनेश माली, प्रदेश महिला प्रदेश अध्यक्ष मणि बहन पटेल, कोषाध्यक्ष गंगा देवी माली, अध्यक्ष लोकेश चौधरी, महामंत्री सूर्य प्रकाश सुहालका, प्रवक्ता नरेश पूर्बिया, संयोजक भेरुलाल कलाल, युवा प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर माली, महिला प्रदेश महामंत्री शर्मिला माली, पीएस पटेल, बालकृष्ण सुहालका, डीपी लक्ष्कार, दिनेश कुमार माली, पूजा टेलर, जयमाला टेलर, मंजू माली (आईटी सेल) सहित 22 समाजों के अध्यक्ष व पदाधिकारी, कलावती पूर्बिया, कोमल पूर्बिया और ललिता पूर्बिया जैसे कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
वित्त विभाग:शिक्षा विभाग-वित्त विभाग के बीच फंसे 5 हजार शिक्षक, 100 करोड़ वसूली होगी
प्रदेश के 5 हजार से अधिक शिक्षक वित्त विभाग के एक आदेश को लेकर असमंजस में हैं। शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को बिना पद सृजित किए ही शहर के स्कूलों में पोस्टिंग दे दी। वेतन ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों के खाली पड़े पदों से दिया गया। अब वित्त विभाग ने इन शिक्षकों को दिए गए शहरी क्षेत्र का मकान किराया भत्ता तथा शहरी क्षतिपूर्ति को गलत बताते हुए वसूली के आदेश जारी किए हैं। आदेश के बाद 5 हजार शिक्षकों से करीब 100 करोड़ रुपए वसूल करने की तैयारी है। अब शिक्षक परेशान है कि उनको शिक्षा विभाग ने पोस्टिंग दी थी। वेतन की जिम्मेदारी भी शिक्षा विभाग की थी। इसमें उनकी क्या गलती है। वित्त विभाग के आदेश के कारण इन शिक्षकों का 3 माह से वेतन भी अटका हुआ है। वित्त विभाग के आदेश के अनुसार ग्रामीण इलाके के खाली पदों से उठाए गए वेतन के साथ शहरी क्षेत्र का मकान किराया भत्ता तथा शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता शामिल नहीं होगा। अगर किसी शिक्षक को भुगतान किया गया है तो उनसे वसूली की जाएगी। विभाग ने अप्रैल 2023 के बाद दिए गए भत्ते की वसूली के आदेश जारी किए हैं। प्रत्येक शिक्षक से 1.75 लाख से लेकर 2 लाख तक की वसूली हो सकती है। यह आंकड़ा 100 करोड़ रुपए के करीब है। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने शिक्षकों की यह समस्या शिक्षा सचिव तक पहुंचाई है। प्रदेश महामंत्री महेंद्र लखारा और अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल का कहना है कि वित्त विभाग के आदेश से शिक्षकों में रोष है। यह है मामला : पिछली सरकार में इन शिक्षकों को चयन के बाद काउंसलिंग के लिए महात्मा गांधी स्कूलों में स्थायी पोस्टिंग दी गई थी। तब विभाग की ओर से कहा गया था कि इन स्कूलों में पद सृजित करेंगे। अभी तक शिक्षकों के पद सृजित नहीं हुए हैं। इन शिक्षकों का वेतन दूसरे स्कूलों से ही उठ रहा है। अब वित्त विभाग के आदेश ने इन शिक्षकों की नींद उड़ा दी है। पद सृजित करने का काम शिक्षा विभाग का है। हम शहरी क्षेत्र में काम कर रहे हैं तो हमें शहरी क्षेत्र का मकान किराया भत्ता तथा शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता मिला है। वेतन देना विभाग का काम है। इनका कहना है...शहरी क्षेत्र में काम करने पर शिक्षक शहरी क्षेत्र का मकान किराया भत्ता व शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता लेने के हकदार है। वित्त विभाग इनसे वसूली नहीं कर सकता। पद सृजित करने को लेकर अधिकारियों की लापरवाही की सजा शिक्षकों को नहीं भुगतने देंगे। वित्त विभाग आदेश वापस लें। -रामकृष्ण अग्रवाल, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु) शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने और पूरे मामले की मुझे अभी जानकारी नहीं है। पता कर उचित कार्रवाई की जाएगी। -सीताराम जाट, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा
अमृतसर रासा यूनिट की बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर मंथन
अमृतसर रासा यूनिट की एक महत्वपूर्ण बैठक अजन्ता सीनियर सेकेंडरी स्कूल ढाब खटीकां में आयोजित की गई। बैठक के दौरान स्कूलों से जुड़े विभिन्न अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने शिक्षा के क्षेत्र में आ रही चुनौतियों, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, शिक्षण पद्धतियों में सुधार तथा स्कूल प्रबंधन से संबंधित विषयों पर अपने-अपने सुझाव रखे। सभी सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने अमृतसर के समस्त निवासियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और आने वाले नए साल को सुख-समृद्धि व खुशहाली से भरपूर बनाने की कामना की। बैठक में विनोद कपूर, जगजीत सिंह, सुजीत शर्मा बबलू, दविंदर पिपलानी, सुशील अग्रवाल, अरुण मंसोतरा, मयंक कपूर, समीर भाटिया, पुनीत गुप्ता, सुमित पुरी, कुनाल कपूर, नरेंद्रपाल सिंह, यादविंदर, दिनेश कपूर, गौरव अरोड़ा, कुलविंदर सिंह तथा जगजीत उपस्थित रहे। बैठक आपसी सहमति, भाईचारे और सकारात्मक वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसमें भविष्य में भी इसी तरह मिलकर शिक्षा सुधार के लिए कार्य करने का संकल्प लिया गया।
69वें नेशनल स्कूल गेम्स का शिक्षा मंत्री बैंस करेंगे उद्घाटन
एजुकेशन डिपार्टमेंट की तरफ से छह जनवरी से 11 जनवरी तक लुधियाना में 69वें नेशनल स्कूल गेम्स करवाए जा रहे हैं। इसका उद्घाटन शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस गुरु नानक स्टेडियम लुधियाना में सुबह 11:30 बजे करेंगे जिसमें अलग-अलग राज्यों के 937 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इस महाकुंभ में लुधियाना के अलग-अलग खेल के मैदानों में जूडो, ताइक्वांडो और गतका के रोमांचक मुकाबले करवाए जाएंगे। इन गेम्स की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ये जानकारी डिप्टी डायरेक्टर स्पोर्ट्स सुनील कुमार, डीईओ सेकेंडरी डिंपल मदान, डिप्टी डीईओ अमनदीप सिंह, जिला स्पोर्ट्स कोऑर्डिनेटर कुलवीर सिंह और कोच अजीतपाल सिंह ने सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पीएयू लुधियाना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने कहा कि नेशनल स्कूल गेम्स की तैयारियों के लिए प्रिंसिपलों और स्कूल प्रमुखों की अलग-अलग कमेटियां बनाई गई हैं और ड्यूटी लगाई गई हैं। इसके अलावा खेलों को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए पूरे पंजाब से 300 खेल शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई हैं। इन खेलों में देशभर के 937 स्कूली खिलाड़ियों के साथ लगभग 150 अधिकारी और कोच भी पहुंच रहे हैं। जूडो अंडर-14 लड़के और लड़कियों के मुकाबले बीसीएम आर्य स्कूल शास्त्री नगर लुधियाना में होंगे, ताइक्वांडो अंडर-14 लड़कियों के मुकाबले सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पीएयू लुधियाना में होंगे। गतका अंडर-19 लड़के और लड़कियों के मुकाबले ओपन थियेटर पीएयू लुधियाना में होंगे। उन्होंने आगे कहा कि लुधियाना के 36 स्कूलों में खिलाड़ियों के रहने का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा, रेलवे और बस स्टैंड लुधियाना से खिलाड़ियों को स्कूल लाने के लिए बसों का इंतजाम किया गया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सुविधा के लिए पीएयू स्कूल लुधियाना में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। ताकि खिलाड़ियों को कोई दिक्कत न हो। उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ियों को पीएयू स्कूल में लाने और छोड़ने, खाने-पीने के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा दी गई है। उन्होंने कहा कि खेल मुकाबलों के दौरान वीडियोग्राफी का भी इंतजाम किया गया है और मैचों के दौरान खेल की टेक्निकल टीम भी मौजूद रहेगी। जरूरत पड़ने पर खिलाड़ियों के लिए मेडिकल टीमों का भी इंतजाम किया गया है। 6 जनवरी को उद्घाटन समारोह के दौरान, अलग-अलग स्कूलों के स्टूडेंट्स कल्चरल प्रोग्राम पेश करेंगे। इस मौके पर प्रिंसिपल कंवलजोत कौर, प्रिंसिपल विश्वकीरत कौर, प्रिंसिपल करमजीत कौर, प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप कुमार मौजूद रहे।
महिलाओं ने शिक्षा के प्रसार का लिया संकल्प
भास्कर न्यूज | विभूतिपुर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) द्वारा देश की प्रथम महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती चांदसुरारी स्थित पूर्व मुखिया सुलेखा कुमारी के आवासीय परिसर में समारोह पूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता देव कुमारी देवी ने की। समारोह की शुरुआत में उपस्थित महिलाओं ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर जनवादी महिला समिति की अंचल सचिव सुलेखा कुमारी ने उनके संघर्षों को याद करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले ने समाज की तमाम प्रताड़नाओं और कुरीतियों को सहते हुए महिला शिक्षा की जो अलख जगाई थी, आज उसी का परिणाम है कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का परचम लहरा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनके पदचिन्हों पर चलते हुए समाज में शिक्षा और जागरूकता फैलाने का संकल्प लेना चाहिए। समारोह को संगीता कुमारी, अनीता देवी, बसंती देवी, पनमा देवी, रामदाय देवी, रंजू देवी, रिचा कुमारी और अन्नू कुमारी सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के महत्व पर बल दिया।
तरियानी : महिलाओं को शिक्षा का हक दिलाया
भास्कर न्यूज| सीतामढ़ी प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस क्रम में जननायक कर्पूरी ठाकुर अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास, सीतामढ़ी के सभागार में राष्ट्रमाता माता सावित्री बाई फूले की जयंती बिनोद बिहारी मंडल, छात्रावास अधीक्षक की अध्यक्षता में धूमधाम से मनाया गया। समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। समारोह के मुख्य अतिथि फूले अम्बेडकरी विचारधारा के प्रमुख स्तंभ प्रो. शशिभूषण प्रसाद सिंह ने कहा कि आधुनिक भारत की पहली महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फूले ने अपने पति महात्मा ज्योतिबा राव फूले से प्रेरणा लेकर सदियों से शिक्षा एवं मौलिक अधिकारों से वंचित कमजोर वर्गों के लिए बालिका विद्यालय की स्थापना कर शिक्षा का द्वार सबके लिए खोला। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियां अंधविश्वास, पाखंड, रूढ़िवादिता, छुआछूत, के खिलाफ सत्य शोधक समाज की स्थापना कर लोगों को जागृत किया। विधवा विवाह को प्रोत्साहित किया। जीवन पर्यन्त रोगियों की सेवा करती रही। उनके जीवन संघर्ष को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कृषि सहायक संजय पासवान ने कहा कि भारत में सबके लिए शिक्षा का द्वार खोलने के लिए तत्कालीन अंग्रेजी सरकार से 1848 ई. चार्टर एक्ट के माध्यम से कानून बनवाया। पुणे में पहला आवासीय बालिका विद्यालय की स्थापना की। छात्रावास अधीक्षक बिनोद बिहारी मंडल ने कहा कि जो देश एवं समाज अपने महापुरुषों के इतिहास एवं बलिदान को भूल जाता है, वह गुलाम हो जाता हैं। उन्होंने माता सावित्री बाई फूले के द्वारा समाज सुधार के लिए चलाए गए आंदोलन को आगे बढ़ाने की अपील की। जयंती समारोह को नागेंद्र पासवान, कमल किशोर, धनंजय साहनी, राजकपूर, साजन कुमार, राजीव कुमार, सुनील सहनी, पिंकू मंडल, शैलेन्द्र कुमार, सुधीर कुमार, अनीश कुमार, संजीत कुमार, गोविंद कुमार, नंदकिशोर कुमार, हरिश्चंद्र कुमार, नीरज कुमार, सिद्धांत कुमार, सुबोध कुमार, रौशन कुमार सहित दर्जनों छात्र एवं अभिभावक उपस्थित थे। तरियानी|सावित्रीबाई फुले की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वो भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और कवयित्री थीं। उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में हुआ था। उनके पिता का नाम खंदोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। सावित्रीबाई ने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर 1848 में बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और उन्हें शिक्षा का हक दिलाया। उन्होंने विधवाओं के लिए एक आश्रय स्थल की स्थापना की और बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाया। सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पुरनहिया| नेचर फाउंडेशन के तत्वावधान में मध्य विद्यालय अशोगी में जयंती मनाई गई। इस अवसर पर उनके जीवन संघर्ष और महिलाओं को शिक्षा से जोड़ने में उनके योगदान पर चर्चा की गई। बताया गया कि उन्होंने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। बाल विवाह का शिकार होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने का संकल्प लिया और महिलाओं को शिक्षित करने के उद्देश्य से स्कूल खोले। इस जयंती समारोह में स्कूल के शिक्षक और शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। नेचर फाउंडेशन के अध्यक्ष रंजीत कुमार, सचिव कुणाल कंचन, सदस्य यतेन्द्र भगत, रामदयाल भगत, निरंजन राय आदि थे।
सीवान शहर के कसेरा टोली स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय गणेश स्मारक में शनिवार को विशिष्ट शिक्षक जितेंद्र कुमार उपाध्याय के सेवानिवृत्ति सह विदाई समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में विद्यालय परिवार के साथ-साथ आसपास के शिक्षकों ने भी शिरकत कर उनके लंबे, समर्पित और प्रेरणादायी सेवाकाल को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य प्रीति कुमारी ने की, जबकि मंच संचालन राजकीय मध्य विद्यालय नगर पालिका स्कूल के शिक्षक संजय पर्वत ने किया। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं स्वागत संबोधन के साथ हुई। इस अवसर पर प्राचार्य प्रीति कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक जितेंद्र कुमार उपाध्याय का कार्यकाल विद्यालय के शैक्षणिक विकास के लिए मील का पत्थर रहा है। उन्होंने न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिया, बल्कि अनुशासन, संस्कार और छात्रों के सर्वांगीण विकास को भी नई दिशा दी। समारोह में उपस्थित अन्य शिक्षकों ने भी अपने-अपने वक्तव्य में उनके योगदान की सराहना की। शिक्षकों ने कहा कि जितेंद्र कुमार उपाध्याय विद्यार्थियों के बीच एक आदर्श शिक्षक के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे। उनका व्यवहार, शिक्षण शैली और मार्गदर्शन छात्रों के साथ-साथ सहकर्मी शिक्षकों के लिए भी प्रेरणास्रोत रहा। अपने विदाई संबोधन में सेवानिवृत्त शिक्षक जितेंद्र कुमार उपाध्याय ने भावुक शब्दों में कहा कि किसी भी क्षेत्र में कार्य की एक निश्चित समय-सीमा होती है, लेकिन शिक्षक की भूमिका जीवनभर बनी रहती है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है, जबकि शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों के माध्यम से समाज में सदैव जीवित रहता है। उन्होंने विद्यालय परिवार से मिले मान-सम्मान और सहयोग के लिए सभी शिक्षकों एवं कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने सहकर्मी शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दें, ताकि छात्र अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें और अपने शिक्षकों का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उसके द्वारा पढ़ाए गए छात्र समाज में अच्छा मुकाम हासिल करें।
रामानुजगंज में माली मालाकार कल्याण संघर्ष मोर्चा इंडिया फाउंडेशन ने सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती मनाई। शनिवार, 3 जनवरी को आमंत्रण धर्मशाला परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सेवा भावना को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में एसडीओपी रामानुजगंज बाजीलाल सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में सहायक खंड शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी, ओमप्रकाश गुप्ता, सुरेंद्र मालाकार, राजेंद्र मालाकार (जिला पलामू), रंजीत मालाकार, अवधेश मालाकार (जिला गढ़वा) और सर्व रवि समाज के जिला अध्यक्ष सत्य प्रकाश रवि शामिल थे। कार्यक्रम का शुभारंभ सावित्रीबाई फुले के छायाचित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। इसके बाद बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। न्यू स्मार्ट पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने शिक्षा जागरूकता पर आधारित नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को प्रेरित किया। 84 जरूरतमंद बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर बढ़ाया उत्साह इस अवसर पर 84 जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को गर्म कपड़े वितरित किए गए। मुख्य अतिथि बाजीलाल सिंह ने स्वयं बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर उनका उत्साहवर्धन किया। समाज और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों लाल बिहारी चौबे, लक्ष्मण ठाकुर, शिवकुमार यादव, अनिरुद्ध दास, वेद प्रकाश केसरी, प्रहलाद सोनी, लालमन सोनी और शिक्षिका शीला गुप्ता को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य के लिए शिक्षिका बिंदी सिंह और निजी विद्यालयों के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी सम्मानित किया गया। पत्रकारों को परंपरागत रूप से डायरी और कलम भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन शिक्षक लक्ष्मी सोनी और मंटू ठाकुर ने किया। इस कार्यक्रम का सफल संचालन प्रकाश मालाकार के नेतृत्व में हुआ, जिसमें सर्व रवि दास समाज जनकल्याण ब्लॉक रामानुजगंज का पूर्ण सहयोग रहा। विनोद भगत, सतीश मालाकार, राजेंद्र मालाकार, सुरेंद्र मालाकार, रंजीत मालाकार, पिंटू मालाकार, देव शंकर मालाकार, संजय गुप्ता, शीला मालाकार, मीना गुप्ता और विक्रांत मालाकार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम के माध्यम से सावित्रीबाई फुले के शिक्षा और सामाजिक समानता के विचारों को आत्मसात करने का संदेश दिया गया।
कटिहार के हसनगंज प्रखंड में शनिवार को सावित्री बाई फुले जयंती मनाई गई। इस अवसर पर जन जागरण शक्ति संगठन ने एक जन-जागरूकता रैली और कार्यक्रम का आयोजन किया। रैली बलुआ पंचायत भवन से शुरू हुई और छोटकी रटनी, डीह रटनी तथा बड़की रटनी गांवों से होते हुए छोटकी रटनी गांव में एक सभा में परिवर्तित हो गई। इस रैली में शहरपुरा, पनसेरवा, बरुवा टोला, भतौरिया, छोटकी रटनी, बड़की रटनी और डीह रटनी सहित कई गांवों से युवा क्लबों के सैकड़ों बच्चों और महिलाओं ने भाग लिया। पदयात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने गीत-संगीत और नारों के जरिए शिक्षा तथा सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। सावित्री बाई फुले थीं देश की पहली महिला शिक्षिका सभा को संबोधित करते हुए फूलकुमारी दीदी ने सावित्री बाई फुले के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सावित्री बाई फुले देश की पहली महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक थीं, जिन्होंने भारत में महिलाओं के लिए पहला स्कूल खोलकर शिक्षा की नींव रखी। उनके प्रयासों के कारण ही आज देश की बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रही हैं। शिक्षा ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती उषा दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होने से समाज की आधी आबादी को आगे बढ़ने का अवसर मिला है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है। उषा दीदी ने एक गीत के माध्यम से सभी से पढ़ने और जीवन में आगे बढ़ने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान युवा टीम ने हम लोग हैं दीवाने और हम होंगे कामयाब जैसे प्रेरक गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण की भावना के साथ हुआ। इस अवसर पर स्थानीय कार्यकर्ता फूलकुमारी, उषा दीदी, लक्ष्मीकांत प्रसाद और साहिल सहित युवा टीम के सदस्य आरती, प्रियंका, सुनील, चाँद, माला, सबरी, योगिता, ज्योति, खुशबू तथा सैकड़ों अन्य बच्चे और महिलाएं उपस्थित रहे।
कौशांबी में सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई:सांसद ने कहा- उनकी प्रारंभिक शिक्षा कठिनाइयों भरी थी
कौशांबी के नगर पालिका परिषद भरवारी के गिरसा चौराहे पर शनिवार शाम को शिक्षा की देवी माता सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी नेताओं ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। कौशांबी सांसद पुष्पेन्द्र सरोज ने भी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने माता सावित्रीबाई फुले अमर रहें के नारे लगाए और उपस्थित लोगों को जयंती की बधाई दी। सांसद सरोज ने माता सावित्रीबाई फुले के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 1831 में महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अत्यंत कठिनाइयों भरी थी। उन्होंने नारी शिक्षा के लिए अथक प्रयास किए। सावित्रीबाई फुले ने गाँव-गाँव जाकर नारी शिक्षा और बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई और कई बालिका विद्यालय खोले। सांसद ने कहा कि नारी शिक्षा के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा याद रखे जाएंगे। कार्यक्रम में आयोजक लव कुश मौर्य, अंजनी कुशवाहा, सभासद विक्रम सिंह एडवोकेट, अरुण कुमार, सीताराम कुशवाहा, शंकर लाल केशरवानी, संतोष कुमार केसरवानी, सपा नेता गुलाम हुसैन और भारत सिंह लोधी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
देश की पहली महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारक और नारी मुक्ति आंदोलन की अग्रदूत सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) ने प्रदेश के सभी जिलों में श्रद्धांजलि सभा एवं विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसी क्रम में मेरठ दक्षिण विधानसभा के गुर्जर चौक, गाँव लिसाड़ी नूर नगर में भी कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सावित्रीबाई फुले के संघर्ष, शिक्षा-दृष्टि और सामाजिक समानता के विचारों पर विस्तार से चर्चा की। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में लड़कियों की शिक्षा की अलख जगाई, जब समाज का बड़ा हिस्सा महिलाओं को पढ़ने-लिखने का अधिकार देने के खिलाफ था। उन्होंने जोर दिया कि सावित्रीबाई फुले का जीवन इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा ही सामाजिक बदलाव का सबसे मजबूत हथियार है। चौधरी ने आगे कहा कि आज भी जब बेटियों की पढ़ाई, दलित-पिछड़ों के अधिकार और सामाजिक न्याय पर हमले हो रहे हैं, तब फुले के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य किया, बल्कि जाति और लिंग आधारित भेदभाव के खिलाफ भी निर्भीक संघर्ष किया। अंकुश चौधरी ने सरकारों से अपील की कि वे सिर्फ जयंती मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय को लेकर सावित्रीबाई फुले की सोच को नीतियों में उतारें। उन्होंने कहा कि महिलाओं, गरीबों और वंचितों को समान अवसर दिलाना ही सावित्रीबाई फुले को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आज जब शिक्षा महंगी और असमान होती जा रही है, तब फुले के विचार हमें एक समान, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
जगदीशपुर में सावित्रीबाई फुले जयंती मनाई गई:महिला शिक्षा और सामाजिक सुधार में योगदान को याद किया गया
महिला शिक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक सुधार की अग्रदूत सावित्रीबाई फुले की जयंती कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और मध्य विद्यालय जगदीशपुर में सम्मानपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत सावित्रीबाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। इस अवसर पर शिक्षिकाओं को सम्मानित भी किया गया। प्रधानाध्यापक आशुतोष चंद्र मिश्र ने सावित्रीबाई फुले के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने बालिका शिक्षा के लिए कठिन संघर्ष किया और समाज को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि मध्य विद्यालय जगदीशपुर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है और इससे संबद्ध कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में प्रखंड की लगभग सौ छात्राएं अध्ययनरत हैं। यह विद्यालय सावित्रीबाई फुले के विचारों को व्यवहार में उतारने का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय की छात्राएं शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य स्तर पर पहचान बना रही हैं। कार्यक्रम में वार्डेन सपना कुमारी, शिक्षिकाएं फूल कुमारी, वीणा कुमारी, प्रतिमा मिश्रा, पुष्पलता कुमारी, वीवी नाहिदा, भारती कुमारी और मीनाक्षी कुमारी सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। विद्यालय कर्मियों और बड़ी संख्या में छात्राओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को महिला शिक्षा के महत्व, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समानता का संदेश दिया गया।
गया में पहली बार लगेगा शिक्षा मेला:10-11 जनवरी को होगा आयोजन, 30-35 शिक्षण संस्थान होंगे शामिल
गयाजी में पहली बार दो दिवसीय शिक्षा मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला 10 और 11 जनवरी, 2026 को नगमतिया रोड स्थित एक निजी होटल में होगा। इसका आयोजन कॉलेज आप्तक, गया और डेस्टिनी एजुकेशन ज़ोन एंड सोशल वेलफेयर फाउंडेशन, पटना के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। मेले में देशभर के 30-35 प्रतिष्ठित कॉलेज और विश्वविद्यालय भाग लेंगे। इस मेले का मुख्य उद्देश्य छात्रों को देशभर के प्रतिष्ठित महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों की विस्तृत जानकारी देना और उन्हें सही मार्गदर्शन देना है। इसमें भाग लेने वाले शिक्षण संस्थानों के उच्च पदाधिकारी और प्रतिनिधि विद्यार्थियों को विभिन्न कोर्स, प्रवेश प्रक्रिया, छात्रवृत्ति, तकनीकी शिक्षा और करियर विकल्पों के बारे में सामने से जानकारी देंगे। मुफ्त प्रवेश की विशेष व्यवस्था शिक्षा मेले में सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत या उत्तीर्ण मैट्रिक, इंटरमीडिएट और स्नातक स्तर के छात्र-छात्राओं के लिए निशुल्क प्रवेश की विशेष व्यवस्था की गई है। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि उन्हें एक ही स्थान पर देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। इस शिक्षा मेले में कॉलेज आप्तक, गया की ओर से श्री विकास कुमार सिन्हा और डेस्टिनी एजुकेशन ज़ोन एंड सोशल वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से शम्स तबरेज अख्तर सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, सेवियर एजुकेशन के अनिल कुमार सिन्हा, धनबाद के शिक्षाविद जावेद अंसारी, आरा के शिक्षा सलाहकार संदीप कुमार और जननेता टिंकू गोस्वामी भी इसमें सहभागिता करेंगे। आयोजकों ने बताया कि गया जिले के सभी मुखिया, सरपंच और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में यह आयोजन गया के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में योगदान देना है।
भिवानी जिले के लोहारू स्थित स्वर्ण जयंती पार्क में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर उनके महिला सशक्तिकरण और समानता के संदेश को याद किया। इस मौके पर लोगों ने शिक्षा और समानता के लिए काम करने का संकल्प लिया। इसके साथ महिला उत्थान की दिशा में काम करने की बात कही। उनका कहना है कि यह सावित्री बाई फूले की प्रेरणा है। चेयरमैन प्रदीप बंटी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पालिका चेयरमैन प्रदीप बंटी तायल ने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में शिक्षा की मशाल थामी, जब महिलाओं का पढ़ना सामाजिक अपराध माना जाता था। उन्होंने भारी विरोध और विषम परिस्थितियों के बावजूद वंचित वर्गों और बालिकाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोले। आज के युग में उनके विचार और भी अधिक प्रासंगिक हैं। आयोजक रामसिंह सैनी की बड़ी पहल कार्यक्रम के आयोजक रामसिंह सैनी ने इस मौके पर एक अनुकरणीय घोषणा की। उन्होंने सावित्रीबाई फुले के जीवन से प्रेरणा लेते हुए अपने निजी शिक्षण केंद्र में जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने का निर्णय लिया। उन्होंने इसके लिए बाकायदा सहमति पत्र भी प्रस्तुत किया, जिसकी उपस्थित लोगों ने मुक्तकंठ से सराहना की। प्रेरणादायी रहा संबोधन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व पार्षद कन्हैयालाल सैनी ने कहा कि सावित्रीबाई का जीवन संघर्ष और साहस का प्रतीक है। वहीं, राजीव वत्स ने नारी शिक्षा के क्षेत्र में उनके क्रांतिकारी कार्यों को आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बताया। इस अवसर पर उपप्रधान प्रतिनिधि विपिन सैनी, पवन स्वामी और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
खैरागढ़ गंडई छुईखदान जिले में फर्जी नियुक्ति प्रकरण में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य शिक्षा आयोग के नाम से जारी फर्जी आदेशों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में 4 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद शामिल हैं। विभागीय जांच में यह सामने आया कि साल 2021 में सहायक ग्रेड-3 और संबंधित पदों पर इनकी नियुक्तियां जिन आदेशों के आधार पर हुई थीं, वे आधिकारिक रूप से जारी ही नहीं किए गए थे। दस्तावेजों की सत्यता जांचने पर पता चला कि पत्र क्रमांक और हस्ताक्षर विभागीय अभिलेखों से मेल नहीं खाते थे। इससे स्पष्ट हुआ कि नियुक्ति आदेश फर्जी थे। मामले का खुलासा होने के बाद सभी संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि, उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए स्पष्टीकरण और दस्तावेज अपनी नियुक्ति को वैध साबित नहीं कर सके। इसके बाद, शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए चारों कर्मचारियों को सेवा से पृथक करने का आदेश जारी किया। इस प्रकरण के सामने आने से विभागीय नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल उठ गए हैं।
हरियाणा के नूंह जिले में प्रस्तावित विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर नगीना खंड के गांव नांगल मुबारिकपुर को चुने जाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। गांव के सैकड़ों पंच-सरपंचों, जिला पार्षदों, ब्लॉक समिति सदस्यों और गोत्र पाल के चौधरियों ने कहा कि ग्राम पंचायत नांगल मुबारिकपुर के पास लगभग 800 एकड़ पंचायत भूमि उपलब्ध है। फरवरी 2019 में पंचायत द्वारा विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 180 एकड़ भूमि निशुल्क देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। गांव का एक प्रतिनिधिमंडल ने नूंह जिला उपायुक्त अखिल पिलानी से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप चुका है। पंचायत प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में विश्वविद्यालय के विस्तार के लिए और भूमि की आवश्यकता पड़ी तो पंचायत पूरा सहयोग करेगी। गांव नांगल मुबारिकपुर के सरपंच अजहरुद्दीन, बिलाल अहमद, अजीज हुसैन और राजूद्दीन ने बताया कि यह गांव मेवात नूंह जिले के बिल्कुल मध्य में स्थित है। उन्होंने कहा कि जिले के तीनों प्रमुख क्षेत्रों नूंह, पुन्हाना और फिरोजपुर झिरका से इसकी दूरी लगभग समान है, जिससे विश्वविद्यालय तक सभी विद्यार्थियों की पहुंच आसान होगी। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से 3 किलोमीटर रहेगी गांव की दूरी प्रतिनिधियों ने बताया कि नांगल मुबारिकपुर नगीना बड़कली चौक के नजदीक है और जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां मीठे पानी की उपलब्धता, शुद्ध हवा और दोनों ओर अरावली की हरियाली मौजूद है, जो किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। प्रतिनिधियों ने बताया कि गांव दिल्ली-अलवर हाईवे 248-ए से करीब 3 किलोमीटर, नगीना कस्बे के पास, नगीना-तिजारा रोड से 4 किलोमीटर तथा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के मरोड़ा कट से लगभग 9 किलोमीटर दूर स्थित है। पूरे जिले के लिए सुविधाजनक रहेगी यूनिवर्सिटी इसके साथ ही पिनगवां से 15 किलोमीटर और पुन्हाना, नूंह, फिरोजपुर झिरका व तावडू से 20 से 45 किलोमीटर के दायरे में होने के कारण यह स्थान पूरे जिले के लिए सुविधाजनक है। डीसी ने यह स्वीकार किया कि नांगल मुबारिकपुर जिले के बीचों-बीच स्थित है, जो स्थल चयन के लिए एक अहम बिंदु है। इस अवसर पर चौधरी आस मोहम्मद जमादार ने जिलेवासियों और सभी जनप्रतिनिधियों से नांगल मुबारिकपुर में विश्वविद्यालय स्थापना के लिए सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि नगीना क्षेत्र मेवात का केंद्र है और यहां विश्वविद्यालय बनने से शिक्षा, रोजगार और विकास के नए अवसर खुलेंगे।
59 वर्षीय मीना क्षेत्री ने 2016 में पासपोर्ट बनवाया था। अब उसे रिन्यू कराना है, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी वे सफल नहीं हो पा रहीं। खुद को भारतीय नागरिक बताने के लिए उन्होंने आधार कार्ड, पैन कार्ड, समग्र आईडी, वोटर कार्ड, एसआईआर की जानकारी, नई मतदाता सूची में अपना नाम... ये सभी जानकारी पुलिस को दे दी है। पर पुलिस का कहना है कि जब तक नागरिकता प्रमाण पत्र पेश नहीं किया जाएगा, तब तक पासपोर्ट रिन्यू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी। ये स्थिति तब है जब मीना का जन्म ग्वालियर में हुआ। पूरी शिक्षा यहीं से ली और विवाह भी ग्वालियर में हुआ। पिता बटालियन में आरक्षक और पति सूबेदार रहे... 26 जुलाई 1967 को ग्वालियर में जन्मी मीना क्षेत्री के पिता शेर बहादुर ठकुरी ग्वालियर में विशेष सशस्त्र बल की 13वीं बटालियन में आरक्षक थे। 11 फरवरी 1985 को नौकरी के दौरान उनके पिता का निधन हो गया। मीना का विवाह भीम बहादुर क्षेत्री से हुआ, जो पीटीएस तिघरा से 31 जनवरी 2025 को सूबेदार के पद से रिटायर हुए थे। जुलाई 2016 में मीना का पासपोर्ट बना, जिसमें मीना को भारतीय नागरिक बताया गया है। इनसे जुड़े सभी दस्तावेज वे पुलिस को दे चुकी हैं। पुलिस के अधिकारी इस मामले में जवाब देने से कतराते नजर आए। 1987 से पहले जन्म हुआ तो प्रमाण पत्र जरूरी नहीं एडवोकेट अंकुश जैन ने बताया कि नागरिक भारतीय संहिता 1955 के अनुसार, जिन भी नागरिक का जन्म 1987 से पूर्व भारत में हुआ है। उन्हें नागरिकता प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं है। वे सभी लोग भारत के ही नागरिक माने जाएंगे। महिला के बयान दर्ज कर एसपी ऑफिस भेज दिए हैं गुरुवार को मीना क्षेत्री के कथन दर्ज किए गए उसकी रिपोर्ट बनाकर एसपी ऑफिस फॉरवर्ड कर दी गई है। मामले की जानकारी टीआई के संज्ञान में है। मीना क्षेत्री मूलरूप से नेपाल की हैं। - दीवान सुल्तान सिंह लहारिया, पुलिस थाना गिरवाई क्या मेरी कोई शिकायत हुई है, जो वर्जन क्यों दूं इस मामले में जब गिरवाई थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव से बात की गई तो उनका कहना था कि क्या मेरी कोई शिकायत हुई है। जो मैं इस मामले में वर्जन दूं।
राजधानी रायपुर के भविष्य को लेकर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की राय एक साझा दिशा की ओर इशारा करती है। ट्रैफिक, अधोसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी नियोजन... हर मोर्चे पर ठोस और दीर्घकालीन योजना की जरूरत बताई जा रही है। रोड इंजीनियरिंग से लेकर मेट्रो, इंडस्ट्री, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्ता आधारित शिक्षा और सस्टेनेबल शहरी विकास तक, विशेषज्ञ मानते हैं कि समन्वित प्रयासों के बिना रायपुर स्मार्ट और रहने योग्य शहर नहीं बन सकता। संसाधनों के सही उपयोग, मजबूत पब्लिक सिस्टम और पर्यावरण संतुलन के साथ ही राजधानी का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। सुरेंद्र कुमार जैन, इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्टअब हमारे रायपुर को चाहिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, तभी बनेगा स्मार्ट शहर राजधानी के सर्वांगीण विकास में अधोसंरचना की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। किसी भी शहर या राज्य की प्रगति उसके संसाधनों के सही उपयोग और दीर्घकालीन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। हालांकि, वर्तमान में एक बड़ी चुनौती यह है कि राज्य के अधिकांश संसाधन मुफ्त योजनाओं और वेतन-भत्तों पर खर्च हो रहे हैं, जिससे अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। नवा रायपुर का समग्र विकास, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर, मेट्रो या मोनोरेल परियोजना, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार, औद्योगिक हब और आईटी पार्क का निर्माण प्रमुख हैं। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार भी जनहित में आवश्यक बताया गया है। इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय को अनिवार्य बताया गया है। वित्तीय निरंतरता को भी एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को इसका सकारात्मक उदाहरण बताया गया है, जो आज भी निरंतर रूप से संचालित हो रही है। वहीं, पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण की समस्या और गिरते भूजल स्तर जैसी बाधाएं भी अधोसंरचना विकास में चुनौती बनी हैं। रायपुर को लॉजिस्टिक और रिटेल पावरहाउस के रूप में विकसित कर सार्वजनिक-निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे विकास को नई दिशा मिलेगी। बाधा या बदलाव - स्काईवॉक ने रोका फ्लाईओवर का रास्ता, गार्डन से आगे बनेगा राजधानी रायपुर में पीडब्ल्यूडी स्काईवॉक का निर्माण कर रहा है। इसके साथ ही यहां फ्लाईओवर के निर्माण का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया है। राज्य सरकार ने हाल ही में गांधी उद्यान (गुरु तेगबहादुर उद्यान) से तेलीबांधा (नेताजी सुभाष चौक/गुरुनानक चौक) तक 173 करोड़ रुपए की लागत से 4-लेन फ्लाईओवर को मंजूरी दी है। स्काईवॉक का ढांचा नहीं होता तो यह फ्लाईओवर फाफाडीह चौक, देवेंद्र नगर, शास्त्री चौक और घड़ी चौक को जोड़कर बनाया जा सकता था। समर पाटनी, रोड इंजीनियरिंग एक्सपर्टट्रैफिक नियमों के पालन से ही जाम से राहत, बायपास सड़क की भी जरूरत राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव के पीछे लोगों में ट्रैफिक सेंस की कमी बड़ी वजह है। यदि वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का पालन करें, तो कई जगहों पर जाम की स्थिति ही पैदा न हो। इसके साथ ही स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य और नई सड़कों की भी आवश्यकता है। शहर के भीतर एक बायपास सड़क की जरूरत बताई गई है, जिससे ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके। मोवा-सड्डू क्षेत्र की ओर नई सड़क या लंबा ओवरब्रिज बनाया जाना चाहिए, क्योंकि शहर का विस्तार इसी दिशा में तेजी से हो रहा है। टाटीबंध से जोरा तक एक्सेस कंट्रोल हाईवे बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। इस मार्ग पर दोनों ओर सर्विस रोड और अंडरपास का निर्माण किया जाना चाहिए। नया एक्सप्रेसवे बनाकर बिलासपुर रोड को सीधे एयरपोर्ट से जोड़ा जाए, ताकि बाहरी क्षेत्रों से आने-जाने वाले वाहनों का समय बचे। वहीं, नवा रायपुर के प्रमुख जंक्शनों का सर्वे कर उन्हें सिग्नल फ्री जंक्शन में बदले जाने की जरूरत है, जिसके लिए अभी से योजना और तैयारी शुरू करनी होगी। शहर में निजी वाहनों का दबाव कम करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करना भी जरूरी है। इसके तहत एसी बसें चलाई जाएं और हर रूट पर सिटी बस सेवा उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा सिलतरा बायपास को बिलासपुर रोड से जोड़ने के लिए नई एक्सेस कंट्रोल सड़क बनाई जाए, जिससे दुर्ग और रायपुर के बीच ट्रैफिक दबाव कम हो सके। मनीष पिल्लीवार, टाउन प्लानर एंड आर्किटेक्टटिकाऊ, समावेशी व जल-संवेदनशील शहर हो वर्ष 2026 तक रायपुर को सस्टेनेबल (टिकाऊ), समावेशी और जल-संवेदनशील शहर के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई जा रही है। इसके लिए शहर में वॉक-फ्रेंडली सड़कें, चौड़े फुटपाथ और साइकिल ट्रैक को अनिवार्य रूप से विकसित किया जाना चाहिए। इससे निजी वाहनों की संख्या घटेगी, जाम की समस्या कम होगी और ध्वनि व वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसके तहत अधिक से अधिक ई-बसों की सुविधा विकसित की जानी चाहिए, ताकि लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं। इसके साथ ही नई इमारतों में रेन-वॉटर हार्वेस्टिंग, सोलर रूफ और नेचुरल वेंटिलेशन जैसी व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। शहर के तालाब, नाले और हरित कॉरिडोर को शहरी डिजाइन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे। मिश्रित भूमि उपयोग को बढ़ावा देने से ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सकता है। वहीं, पब्लिक स्पेस, बस-स्टॉप और बाजारों को मानव-केंद्रित डिजाइन के तहत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। यही भविष्य का रायपुर होगा-एक स्वच्छ, सुरक्षित और रहने योग्य शहर। डॉ. जवाहर सूरी सेट्टी, वरिष्ठ शिक्षाविद्डिग्री पर नहीं, बल्कि शिक्षा पर हो फोकस समय तेजी से बदल रहा है और तकनीक लगातार नई दिशा ले रही है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है, जिसमें केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं रह गया है। ऐसे में प्रदेश में अब शिक्षा व्यवस्था का फोकस डिग्री के बजाय गुणवत्ता आधारित शिक्षा पर होना चाहिए। स्कूली स्तर पर कौशल विकास और समानांतर शिक्षा को प्रभावी रूप से वर्ष 2026 से लागू किया जाना आवश्यक है। प्रदेश में आईआईटी, ट्रिपल आईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं, लेकिन इनमें प्रदेश के महज एक प्रतिशत विद्यार्थी ही प्रवेश पा रहे हैं। इसे देखते हुए जरूरी है कि प्रदेश के निजी और सरकारी दोनों तरह के शैक्षणिक संस्थानों को कम से कम एनआईटी स्तर की गुणवत्ता के साथ विकसित किया जाए, ताकि अधिक संख्या में छात्रों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके। इसके साथ ही बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ शारीरिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है। तकनीकी युग में बच्चों की आउटडोर गतिविधियां लगातार कम होती जा रही हैं, जिससे शारीरिक समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में प्रदेश में पर्याप्त खेलकूद के संसाधन विकसित कर अनुकूल माहौल बनाना जरूरी होगा। ताकि बच्चों को स्वस्थ और संतुलित विकास का अवसर मिले। डॉ विवेक चौधरी, कैंसर विशेषज्ञ व डीन मेडिकल कॉलेज, रायपुरमेकाहारा से उम्मीद, पर पुरानी मशीनें बनीं चुनौती डॉ. भीमराव अंबेडकर अपस्ताल केवल राजधानी रायपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के मरीजों की उम्मीदों का केंद्र है। यहां एक्स-रे से लेकर सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई और कैंसर इलाज तक की सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं। हालांकि, अस्पताल में लगी अधिकांश जांच और उपचार से जुड़ी मशीनें पुरानी हो चुकी हैं या अपनी निर्धारित उम्र पूरी करने के करीब हैं, जिसके चलते मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पुरानी मशीनों को तत्काल बदले जाने की जरूरत है, ताकि जांच और इलाज की गुणवत्ता में सुधार हो सके। इसके अलावा जिला अस्पताल और हमर क्लीनिकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। यदि विशेषज्ञों की नियमित पोस्टिंग हो जाए, तो सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था काफी हद तक पटरी पर आ सकती है। इसका सीधा असर अंबेडकर अस्पताल पर भी पड़ेगा, जहां मरीजों की भीड़ कम होगी और इलाज के स्तर में सुधार संभव होगा। राजधानी के निजी अस्पतालों में वर्तमान में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाएं उपलब्ध हैं। किडनी के साथ-साथ लीवर ट्रांसप्लांट के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं, शहर के बीच स्थित डॉ. खूबचंद बघेल (डीकेएस) सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अंग प्रत्यारोपण शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधन मौजूद बताए जा रहे हैं।
बयान-1 ‘अशोक चौधरी के असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से जुड़े कागजात विश्वविद्यालय आयोग को भेजे गए हैं। प्रमाण पत्रों में कुछ कमियां थीं।’- सुनील कुमार, मंत्री शिक्षा विभाग बयान-2 ‘अशोक चौधरी से जुड़ी शिकायत मेरे पास नहीं आई है। आयोग की ओर से चयन करने के बाद की सूची शिक्षा विभाग को भेजी गई। वह लौट कर नहीं आई है।- गिरिश कुमार चौधरी, अध्यक्ष विश्वविद्यालय सेवा आयोग बिहार के शिक्षा विभाग से जुड़े दो आला अधिकारियों का एक मंत्री पर दिए दो अलग-अलग बयान के बाद दो तरह के सवाल उठ रहे हैं? इस पूरे विवाद को समझने के लिए हमने बिहार के शिक्षा विभाग के मंत्री, विश्वविद्यालय चयन आयोग और एक्सपर्ट से मामले को समझा। दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरी में पढ़िए आखिर विवाद कहां से शुरू हुआ, क्यों हुआ और आगे क्या कार्रवाई हो सकती है? पहले बात नियुक्ति और डिग्री पर विवाद की विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने 2020 में 52 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के लिए विज्ञापन निकाला था। 57 साल के मंत्री ने पॉलिटिकल साइंस विषय के लिए आवेदन भरा था। इस विषय के लिए 17 जून से 22 जून 2025 तक इंटरव्यू चला। रिजल्ट 24 जून 2025 को जारी हुआ। 280 पदों के लिए भर्ती होनी थी। 274 के लिए अभ्यर्थियों के नाम चुनकर सिफारिश की गई। SC वर्ग में 10वें स्थान पर अशोक चौधरी का नाम था। अनुभव प्रमाण पत्र की जांच पूरी नहीं होने के चलते बाकी अनारक्षित कैटेगरी के 2 अभ्यर्थियों को वेटिंग में रखा गया। बाद में आरोप लगे कि अशोक चौधरी के सर्टिफिकेट में कमियां हैं। इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बच रहे हैं। 29 दिसंबर को जब शिक्षा मंत्री सुनील कुमार से अशोक चौधरी की नियुक्ति रोकने के संबंध में सवाल पूछा गया तो, उन्होंने कहा, ‘कुछ कमियां मिली हैं। हमने मामले को विश्वविद्यालय सेवा आयोग को भेजा है। हर बात को गहराई से देख रहे हैं।’ अब आयोग के अध्यक्ष से समझिए पूरा मामला भास्कर ने विश्वविद्यालय सेवा आयोग के चेयरमैन डॉ. गिरीश कुमार चौधरी से बात की। उन्होंने कहा, ‘हमने शिक्षा विभाग को सभी अभ्यर्थियों से जुड़े कागजात भेज दिए हैं। हमसे किसी ने अशोक चौधरी से जुड़ी शिकायत नहीं की है।’ गिरीश कुमार ने कहा, ‘शिकायत मिलने पर जांच कराते हैं। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होती है और उस अभ्यर्थी का चयन आयोग के स्तर से रद्द कर दिया जाता है। पॉलिटिकल साइंस विषय से जुड़े अभ्यर्थियों की लिस्ट नियम के अनुसार चयन कर शिक्षा विभाग को भेजी जा चुकी है।’ अब आगे क्या होगा? मामला शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय सेवा आयोग के बीच फंसा हुआ है। काफी किच-किच होने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है। अशोक चौधरी से जुड़े कागजात पूरे पाए जाएंगे और कोई गड़बड़ी नहीं मिलेगी तो नियुक्ति भी संभव है। चौधरी का नाम और पीएचडी दोनों सही अशोक चौधरी की नियुक्ति रोकने के पीछे दो तरह की बात कही जा रही है। पहला उनके दो नाम और दूसरा पीएचडी में गड़बड़ी। भास्कर ने दोनों मुद्दों की पड़ताल की। ये सच है कि अशोक चौधरी के दो नाम हैं, लेकिन सभी डॉक्यूमेंट पर यही लिखा हुआ है। भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक, अशोक चौधरी के पासपोर्ट में अशोक कुमार उर्फ अशोक चौधरी लिखा है। SDO के स्तर से जारी किए गए उनके जाति प्रमाण पत्र में भी उनका नाम अशोक कुमार उर्फ अशोक चौधरी लिखा है। इसके बाद हमने मगध यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर शशि प्रताप शाही से बात की। चौधरी इन्हीं के अंडर में पीएचडी की डिग्री ली है। इनकी पीएचडी का विषय था- ‘बिहार विधानसभा में दलित महिलाओं की भूमिका’। शाही ने कहा, ‘पीएचडी का विषय समाज में महिलाओं की भूमिका में बदलाव से जुड़ा है। यह साफ है कि पीएचडी से जुड़ा कोई मामला नहीं है।’ नियुक्ति से पहले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया नियुक्ति से पहले विश्वविद्यालय सेवा आयोग की एक्सपर्ट कमेटी अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए कागजातों की जांच करती है। इसके बाद अभ्यर्थी को अंक दिए जाते हैं। इसके आधार पर अभ्यर्थी को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इंटरव्यू के बाद आयोग अभ्यर्थी की नियुक्ति के लिए सिफारिश करता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद रिजल्ट में अशोक चौधरी का नाम था। ये था ऑफिशियल अब पॉलिटिकल विवाद समझिए… क्यों अशोक चौधरी की बहाली पर हुआ विवाद? 2 पॉइंट मामला केवल एकेडमिक तक सीमित नहीं है। सूत्रों की मानें तो अशोक चौधरी की बहाली को लेकर हो रहे विवाद में राजनीति भी है। इसे 2 पॉइंट में समझिए… अशोक चौधरी के मामले में हो रही छीछालेदर को जेडीयू की इंटरनल पॉलिटिक्स का हिस्सा भी माना जा रहा है। अशोक चौधरी का कद दलित नेता के रूप में उभरा है। उनकी एक बेटी शांभवी चौधरी लोकसभा सांसद हैं। दूसरी बेटी की शादी एक बड़े नेता के बेटे से होने की बात चल रही है। इस सब को देखते हुए सूत्र बता रहे हैं दूसरी बेटी की शादी के बाद अशोक चौधरी की धाक जेडीयू में और बढ़ सकती है। ऐसे में कइयों को दिक्कत हो सकती है। इसलिए दलित पॉलिटिक्स के चलते भी उनकी ज्वॉइनिंग में रोड़ा अटकाया जा रहा हो। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जेडीयू में अशोक चौधरी के बढ़ते कद के चलते कुछ नेताओं में असुरक्षा की भावना बनी रहती है। बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग की इस बार की वैकेंसी में बाहरी की जगह बिहारी को ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। पहले इंटरव्यू बोर्ड में ज्यादातर एक्सपर्ट बाहर के होते थे। इस बार कई एक्सपर्ट बिहार के थे। नतीजा बाहर के लोगों की भौंहे आयोग पर तनी हुई हैं। छोटी-छोटी गलतियों पर आलोचना हो रही है। ये लोग साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि बहाली नीट एंड क्लीन नहीं है। जानकारी है कि एक बाहरी लॉबी इस काम में लगी है। क्या हैं जेडीयू की इंटरनल पॉलिटिक्स के मायने? जेडीयू में अशोक चौधरी की गिनती नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में होती है। कुछ दिनों से अशोक चौधरी के परिवार और नीतीश कुमार के बेटे निशांत के बीच करीबी ज्यादा दिख रही है। 28 दिसंबर को सीएम हाउस में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया गया था। उसमें अशोक चौधरी की बेटी और दामाद भी पहुंचे थे। निशांत के साथ तस्वीर सामने आई थी। यह सब एक तरफ और दूसरी तरफ इसकी चर्चा खूब है कि निशांत बिहार की राजनीति में कब एक्टिव होंगे। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था, ‘पार्टी के लोग और समर्थक चाहते हैं कि निशांत पार्टी में आकर काम करें। यह फैसला उनको लेना है कि कब पार्टी में कामकाज शुरू करते हैं।’ अशोक चौधरी कह चुके हैं कि ‘जिस दिन नीतीश कुमार और निशांत चाहेंगे, उस दिन से निशांत पार्टी में एक्टिव हो जाएंगे।’ जेडीयू में ये खास नेता दलित वर्ग से आते हैं श्याम रजक: जेडीयू में श्याम रजक की पहचान बड़े दलित नेता के रूप में है। वह आरजेडी में जाकर वापस आए हैं। फुलवारीशरीफ विधानसभा से विधायक हैं। नई सरकार में मंत्री नहीं बनाए गए हैं। खरमास के बाद मंत्रिमंडल विस्तार में श्याम रजक को शामिल किया जा सकता है। रजक कई बार मंत्री बने। सुनील कुमार: शिक्षा मंत्री और पूर्व आईपीएस सुनील कुमार पिछली नीतीश सरकार में भी शिक्षा मंत्री थे। एक दिन पहले सुनील कुमार को इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एजुकेटर्स फॉर वर्ल्ड पीस की तरफ से बेस्ट एजुकेशन मिनिस्टर ऑफ द ईयर अवॉर्ड दिया गया है। अशोक चौधरी: श्याम रजक जब जेडीयू छोड़कर आरजेडी में गए तब बतौर दलित नेता अशोक चौधरी का कद जेडीयू में बढ़ा। अब दोनों जेडीयू में हैं। अशोक चौधरी के पास अभी ग्रामीण कार्य विभाग है। नीतीश कुमार पर बेटी शांभवी के साथ मिलकर एक किताब लिख चुके हैं। डॉ. आलोक कुमार सुमन: गोपालगंज से लोकसभा सांसद हैं। 2019 और 2024 में भी उन्होंने लोकसभा का चुनाव जीता था। महेश्वर हजारी: समस्तीपुर के कल्याणपुर से जेडीयू के विधायक हैं। बिहार सरकार मंत्री रह चुके हैं। नई सरकार में मंत्री पद नहीं मिला है। रत्नेश सदा: सहरसा के सोनवर्षा से जेडीयू विधायक हैं। पहले मंत्री रह चुके हैं, लेकिन इस बार मंत्री पद नहीं मिला है। अशोक राम: लंबे समय तक कांग्रेस के नेता रहे। छह बार विधान सभा का चुनाव जीते। मंंत्री भी रहे। अगस्त 2025 में कांग्रेस छोड़ जेडीयू में शामिल हो गए। नीतीश कुमार ने दलित कार्ड खेलने के लिए अशोक राम के लिए जेडीयू का दरवाजा खोला था। इन्होंने दरभंगा के कुशेश्वर स्थान से अपने बेटे अतिरेक कुमार को जेडीयू का टिकट दिलवाया। वह चुनाव जीत गए हैं। राजद की मांग- मंत्री पद से इस्तीफा दें अशोक चौधरी राजद ने राजभवन को पत्र लिखा है। मांग की है कि अशोक चौधरी मंत्री पद से इस्तीफा दें। निष्पक्ष जांच के लिए उनका इस्तीफा जरूरी है। आरजेडी ने मुख्य रूप से अशोक चौधरी के नाम और पीएचडी की डिग्री पर सवाल उठाया है। राज्यपाल को पत्र लिखने वाले आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. नवल किशोर यादव से भास्कर ने बात की। पूछा कि आपने अशोक चौधरी की पीएचडी डिग्री की जांच की मांग की है। क्या आधार है? नवल किशोर ने कहा, ‘मैंने नहीं देखा है कि उनके किस डॉक्यूमेंट में गड़बड़ी है। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि कागजात में कमियां पाई गई हैं।’ अशोक चौधरी ने साधी चुप्पी, टाल दी प्रेस कॉन्फ्रेंस अशोक चौधरी ने इस मामले में चुप्पी साध ली है। वह वोकल नेता रहे हैं। चुप बैठने वालों में उनकी गिनती नहीं होती। अशोक चौधरी मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे, लेकिन ऐसा नहीं किया। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा, ‘मंत्री अशोक चौधरी जवाब दें कि उनकी डिग्री फर्जी नहीं है। पीएचडी पूर्णकालिक डिग्री है। अशोक चौधरी ने कब इसके लिए क्लास किया?’ पिता का सपना पूरा करना चाहते हैं अशोक चौधरी अशोक चौधरी पॉलिटिक्स में काफी समय से एक्टिव हैं। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि वह बिहार सरकार के मंत्री रहने के बाद भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर क्यों बहाल होना चाहते हैं? यह मामला अशोक चौधरी के सेंटिमेंट से जुड़ा है। उनके करीबी बताते हैं कि अशोक चौधरी के पिता महावीर चौधरी पॉलिटिकल साइंस से एमए थे। पॉलिटिक्स की अनिश्चितता से वे वाकिफ थे। उन्होंने बेटे से कहा था कि प्रोफेसर की नौकरी के लिए प्रयास करें। असिस्टेंट प्रोफेसर बनना अशोक चौधरी के लिए पिता का सपना पूरा करने जैसा है। नोट- भास्कर रिपोर्ट ने अशोक चौधरी को फोन किया। जवाब मिला कि एक दिन बाद उनसे बात हो सकती है। उनका पक्ष आने पर अपडेट किया जाएगा।
हरदोई में मल्लावां-बिलग्राम विधानसभा क्षेत्र के विधायक आशीष कुमार सिंह 'आशु' के पिता, शिक्षाविद एवं लोकतंत्र सेनानी स्व. शिवराज सिंह की सातवीं पुण्यतिथि मनाई गई। शुक्रवार को दिव्य आलोक सेवा फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. आलोक सिंह 'नीलू' की पुण्य स्मृति भी की गई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने स्व. शिवराज सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अपने संबोधन में विधायक आशीष सिंह 'आशु' को इस आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन भी किया। दिव्य आलोक सेवा फाउंडेशन ने इस पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान कई सेवा कार्य भी किए। इनमें निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, सब्जी बीज वितरण और दिव्यांगों के लिए ट्राई साइकिल वितरण शामिल थे। उपस्थित अतिथियों ने फाउंडेशन द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने जनहित में किए जा रहे इन कार्यों की सराहना की। विधायक आशीष कुमार सिंह 'आशु' ने मल्लावां पहुंचने पर दिनेश जी और सतीश महाना का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता द्वारा दिखाए गए सेवा के मार्ग पर चलना ही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि है। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध वर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उपस्थित रहे।
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
फलोदी में जिला कलक्टर श्वेता चौहान की अध्यक्षता में आज जिला निष्पादन समिति की बैठक हुई। इस बैठक में शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा की गई। जिला कलक्टर ने बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं की तैयारियों की प्रगति की जानकारी ली। स्कूली शिक्षा को लेकर दिए निर्देशकलेक्टर ने निर्देश दिए कि बोर्ड परीक्षाओं की सभी तैयारियां समय पर पूरी की जाएं। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से टेस्ट आयोजित करने और उनकी कमियों को दूर करने पर जोर दिया। साप्ताहिक टेस्ट की रिपोर्ट नियमित रूप से जिला कार्यालय को भेजने के भी आदेश दिए गए। बैठक में विशेष रूप से विज्ञान और गणित विषयों में कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य इन विषयों में छात्रों के प्रदर्शन में सुधार लाना है। जिला कलक्टर ने राजकीय विद्यालयों में विद्युत और पेयजल कनेक्शन की स्थिति, आवश्यक मरम्मत कार्य और शौचालयों की वस्तुस्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट समय पर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी उपखंड अधिकारियों, विकास अधिकारियों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को शीतकालीन अवकाश के बाद अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों का औचक निरीक्षण करने का आदेश दिया। स्कूलों को देनी होगी रिपोर्टनिरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की दर्ज संख्या, उपस्थिति, शिक्षकों की पदस्थापना और उनके द्वारा पढ़ाए जा रहे विषयों की स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। कलक्टर ने शिक्षकों को निर्देशित किया कि वे विद्यार्थियों को रुचिकर ढंग से पढ़ाएं, नियमित होमवर्क दें, अभ्यास करवाएं, यूनिट टेस्ट लें और कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर विशेष ध्यान दें। इस बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी सोहन राम विश्नोई सहित संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हरियाणा में लंबे अंतराल के बाद शिक्षकों के ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू होने के बीच पूर्व शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने हरियाणा टीचर्स ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी-2025 पर पुनर्विचार करने और आवश्यक संशोधन की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा को पत्र लिखकर नीति के एक प्रावधान पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कंवरपाल गुर्जर ने पत्र में लिखा कि नई नीति के अनुसार, किसी ब्लॉक में लगातार 15 वर्ष सेवा पूरी कर चुके या करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य रूप से ट्रांसफर प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। इससे कई शैक्षणिक ब्लॉकों खासकर पहाड़ी क्षेत्रों के निकटवर्ती इलाकों में शिक्षकों का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। 35 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों के पद खाली पूर्व मंत्री ने विशेष रूप से छछरौली, सढौरा, नारायणगढ़ और कालका जैसे पहाड़ी इलाकों से सटे क्षेत्रों का जिक्र किया। इन इलाकों में शिक्षक अक्सर ट्रांसफर के बहाने चले जाते हैं, लेकिन बदले में नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होती। गुर्जर ने अपने कार्यकाल (शिक्षा मंत्री के रूप में) का हवाला देते हुए बताया कि 2004, 2007 और 2011 बैच के शिक्षकों को उन्होंने जिला आवंटन कर दिया था। इसके बाद सभी अपने-अपने जिलों में चले गए। लेकिन जब दोबारा ट्रांसफर का समय आया, तो देरी के कारण वे खाली पदों पर नहीं लौट सके। नतीजा? आज छछरौली क्षेत्र के स्कूलों में 35 प्रतिशत से अधिक शिक्षक पद खाली पड़े हैं। पहाड़ी क्षेत्र के स्कूल होंगे प्रभावित नई पॉलिसी से यह संख्या और बढ़ जाएगी। पहाड़ी क्षेत्रों के स्कूल सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जहां पहले से ही शिक्षकों की कमी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि छछरौली विकास के लिहाज से ब्लॉक तो बन गया, लेकिन शिक्षा ब्लॉक अभी तक नहीं बना। ऐसे में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे उन्होंने जोर देकर कहा कि वे पॉलिसी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके नकारात्मक प्रभावों को रोकने के लिए संशोधन जरूरी है। उन्होंने कहा कि 15 साल की शर्त पर शिक्षा मत्री को पुनर्विचार करना चाहिए। गुर्जर ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि मंत्री इस पर गंभीरता से विचार करेंगे और छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
शिक्षकों का समायोजन करना बेसिक शिक्षा विभाग में कठिन रहा है। फिरभी अब तक जो भी समायोजन हुए हैं, उनको लेकर बहुत सवाल नहीं उठाए जा सके थे। लेकिन इस बार दिसंबर के अंतिम सप्ताह में जो सूची जारी की गई है, वह गंभीर सवालों से घिरी है। इस सूची के जारी होने के बाद से ही हंगामा मचा है। शिक्षक संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं और कई शिक्षकों ने लिखित रूप से अपना विरोध जताया है। सबसे बड़ी कमी यह है कि इस सूची में नियमों की एकरूपता ही नजर नहीं आती। एक ही जिले में अलग-अलग नियम नजर आ रहे हैं। पहले जहां सार्वजनिक रूप से काउंसिलिंग के जरिए सूची को अंतिम रूप दिया जाता था, वहीं इस बार बंद कमरे में सूची तैयार कर सीधे सार्वजनिक कर दी गई। इस सूची को जब शिक्षकों ने देखा तो उनके होश उड़ गए। इस सूची में प्रभावशाली शिक्षकों को बचाने का जतन भी नजर आता है। फिलहाल शिक्षक संगठन इसको लेकर आंदोलन की तैयारी में हैं। पहले जानिए किस तरह की कमियां नजर आ रही हैंअलग-अलग ब्लाकों में अलग-अलग नियम नजर आ रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक जिस विद्यालय पर 150 छात्र से कम होंगे, वहां प्रधानाध्यापक का पद नहीं होगा। यानी यहां से यदि किसी सीनियर शिक्षक को समायोजित करना होगा तो वह प्रधानाध्यापक का कार्यभार देख रहा शिक्षक ही होगा। लेकिन भटहट ब्लाक में 150 से कम शिक्षक संख्या वाले स्कूल पर सबसे वरिष्ठ शिक्षक को छोड़ दिया गया और ब्रह्मपुर ब्लाक में सबसे वरिष्ठ यानी प्रधानाध्यापक का कार्यभार देख रही महिला शिक्षक को गैर ब्लाक में समायोजित कर दिया गया।एक महिला शिक्षक ने जिले के कैंपियरगंज ब्लाक में 2013 में ज्वाइन किया था लेकिन जब सूची आयी तो उसे 2009 में ज्वाइन दिखाकर सबसे वरिष्ठ बताकर समायोजित कर दिया गया। जबकि 2009 में उसकी ज्वाइनिंग महराजगंज जिले में थी और 2013 में अंतरजनपदीय स्थानांतरण के जरिए वह गोरखपुर आयी थीं। यानी इस जिले में उनकी ज्वाइनिंग 2013 से मानी जानी चाहिए। इसी विद्यालय पर उनसे सीनियर शिक्षक हैं और उनको बचा लिया गया। एक ब्लाक में छात्रों की संख्या के अनुपात में कई शिक्षक सरप्लस हैं लेकिन वहां के शिक्षकों को इस समायोजन से बाहर रखा गया है। किसी विद्यालय पर कुल 4 अध्यापक हैं तो वहांसरप्लस की सूची में 6 अध्यापक दिखा दिए और दो अध्यापकों को समायोजन में डाल दिया गया। यह भी आरोप लग रहे हैं कि पिछले एक सप्ताह में कुछ विद्यालयों की छात्र संख्या बदल दी गई, जिससे वहां कुछ शिक्षक बच सकें। किसी विद्यालय पर एक अध्यापक को सरप्लस दिखाया लेकिन समायोजन दो लोगों का कर दिया। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि वरिष्ठता सूची का निराकरा किए बिना ही समायोजन कर दिया गया। अलग-अलग जिलों में अलग-अलग नियम है। किसी जिले ने वरिष्ठ शिक्षकों को समायोजित किया है तो कहीं जूनियर शिक्षकों को उनके विद्यालयों से हटाया गया है। बंद व एकल विद्यालय पर पहले नहीं तैनात हुए शिक्षकजुलाई 2025 में गैर जनपद से जो शिक्षक आए थे उन्हें बंद व एकल विद्यालयों पर समायोजित नहीं किया गया। इस समायोजन के पीछे बंद व एकल विद्यालयों पर शिक्षकों की संख्या बढ़ाने का तर्क दिया जा रहा है। शहर से सटे ब्लाकों के शिक्षकों को दूरस्थ ब्लाकों में भेजा गया है। कोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षकइस समायोजन नीति के विरोध में कई शिक्षक कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। वे कई तरह की कमियां उजागर कर रहे हैं। बीएसए कार्यालय पर भी शिक्षक नेताओं का जमावड़ा लगा है। वे नियमों मे एक रूपता व इस सूची को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।
यूपी की योगी सरकार ने देर रात 8 महिला अफसरों समेत 21 IAS का ट्रांसफर किया है। इनमें ज्यादातर प्रमोशन आए अफसर हैं, जिन्हें नई तैनाती मिली है। सचिव से प्रमुख सचिव बनने वाले दो और विशेष सचिव से सचिव बने कुछ अफसरों को भी नई तैनाती दी गई है। इसके अलावा, 3 महिला IAS अफसरों को राजस्व की जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा भी महिला अफसरों को सौंपा गया है। साथ ही निर्वाचन, वित्त, राजस्व, नगर विकास, चिकित्सा शिक्षा और महिला कल्याण जैसे विभागों के अफसरों में भी फेरबदल किया गया है। अपर्णा यू को प्रमुख सचिव राजस्व, एसवीएस रंगाराव को प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय राष्ट्रीय एकीकरण तथा सामान्य प्रशासन बनाया है। इसके अलावा अखंड प्रताप सिंह विशेष सचिव निर्वाचन से उसी विभाग में सचिव बनाए गए हैं। नेहा शर्मा को प्रभारी महानिरीक्षक निबंधक से महानिरीक्षक निबंधक की जिम्मेदारी दी गई। डॉ. सारिका मोहन को सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा बनाया गया है। पूरी लिस्ट देखिए- महिला अफसरों को मिली प्राइम पोस्टिंग IAS ट्रांसफर सूची में महिला अफसरों को प्राइम पोस्टिंग दी गई है। अर्पणा यू को राजस्व विभाग का प्रमुख सचिव, सुधा वर्मा को राजस्व विभाग का सचिव, मोनिका रानी को स्कूल शिक्षा महानिदेशक, सारिका मोहन को चिकित्सा शिक्षा विभाग का महानिदेशक, नेहा शर्मा को महानिदेशक निबंधन, डॉ. वंदना शर्मा को निदेशक महिला कल्याण विभाग और संदीप कौर को वित्त विभाग में सचिव नियुक्त किया गया है। राजस्व विभाग की कमान महिला अफसरों के हाथ राजस्व विभाग की कमान अब पूरी तरह महिला अफसरों के हाथ रहेगी। राजस्व परिषद की रजिस्ट्रार कंचन वर्मा हैं। अब अपर्णा यू और सुधा वर्मा की तैनाती से विभाग की कमान पूरी तरह से महिलाओं के हाथ आ गई है। योगेश कुमार को लंबे समय बाद मिली अच्छी पोस्टिंग IAS योगेश कुमार को लंबे समय बाद अच्छी पोस्टिंग मिली है। उन्हें सहकारिता विभाग का निबंधक और आयुक्त बनाया गया है। 2017 के बाद से योगेश कुमार मनरेगा, ग्राम्य विकास विभाग, कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा और गृह विभाग में विशेष सचिव पद पर तैनात रहे। उन्हें केवल बांदा और अमेठी में ही जिलाधिकारी बनने का मौका मिला। नवीन कुमार को हटाया ट्रांसफर सूची में जीएस नवीन कुमार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सचिव पद से हटाकर राजस्व परिषद में सदस्य नियुक्त किया गया है। प्रशासनिक हलकों में इसे साइड-लाइन वाली पोस्टिंग माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक, किसी परियोजना को लेकर उनकी विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिल गर्ग से नहीं बन रही थी। अनिल गर्ग और विभागीय मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की सिफारिश पर उन्हें हटाया गया है। ------------------------- ये खबर भी पढ़िए यूपी में बूंदाबांदी, 4 दिन भयंकर ठंड पड़ेगी:30 जिलों में कोहरा, इटावा में ट्रक टकराए, ड्राइवर जलकर कंकाल हुआ उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का कहर जारी है। शिमला, मनाली और नैनीताल जैसे हिल स्टेशनों से भी ज्यादा सर्दी पड़ रही है। इस बीच नए साल पर पश्चिमी यूपी में मथुरा, हाथरस, बदायूं और फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में हुई बूंदाबांदी ने ठिठुरन बढ़ा दी। प्रदेश में सीजन में पहली बार रात के वक्त न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पूरी खबर पढ़िए
शिक्षक संघ ने शिक्षा मंत्री से मिलकर शैक्षिक सुधार के लिए दिए सुझाव
बालोतरा | राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश अध्यक्ष रमेशचंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में बुधवार को शिक्षा मंत्री मदनलाल दिलावर से शिष्टाचार भेंट की। संगठन के बालोतरा जिलाध्यक्ष लाखसिंह डूंगरोत ने बताया कि आज प्रदेश अध्यक्ष के साथ शिक्षा मंत्री मदनलाल से भेंट कर प्रदेश में शिक्षा और शिक्षकों से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इनमें शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार की ओर से प्रदेश में शिक्षक संघों को मान्यता देने के विषय पर संगठन का मत रखते हुए बताया कि शिक्षा विभाग राजस्थान में लगभग 5 लाख शिक्षक पद स्वीकृत है जो कि राजस्थान सरकार के कुल कार्मिकों का 55% है। शिक्षकों की विभिन्न समस्या रखने के लिए उचित मंच प्रदान किया जाना चाहिए। केरल, तमिलनाडु, गुजरात आदि राज्यों में सर्वाधिक सदस्य संख्या वाले शिक्षक संघ को मंच प्रदान करते हुए शिक्षा विभाग से मान्यता प्रदान की है। इसी प्रकार राजस्थान में भी शिक्षा विभाग में मान्यता देने के लिए शीघ्र प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए गिरदावरी से मान्यता प्रदान की जावें। शिक्षक कल्याण के लिए एक बोर्ड का गठन किया जाएं, ताकि शिक्षक कल्याण की योजनाएं एवं सुझाव राज्य सरकार को समय-समय पर प्रेषित कर सके। सभी शिक्षक संवर्गों की पदोन्नति शीघ्र करते हुए आगामी 2 माह में पदोन्नति पश्चात पदस्थापन किए जाएं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेशचंद्र पुष्करणा ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में स्टाफिंग पैटर्न किया जा रहा है, जिसमें बिना किसी भेदभाव के समान मापदंड रखते हुए अंग्रेजी माध्यम महात्मा गांधी स्कूल एवं हिंदी माध्यम के स्कूलों में पदों को स्वीकृत किया जाएं। वरिष्ठ व्याख्याता केडर (संवर्ग) नहीं बनाने, टीएसपी क्षेत्र से नॉन टीएसपी क्षेत्र व नॉन टीएसपी क्षेत्र से टीएसपी क्षेत्र में शिक्षकों को उनके गृह जिलों में पदस्थापित किया जाएं। समसा में प्रतिनियुक्ति से संबंधित जिला स्तर एवं ब्लॉक स्तर के साक्षात्कार एक साथ जनवरी माह में पूर्ण करवा कर पदस्थापन आदेश जारी किए जाएं।
वित्त रहित और सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में नामांकन को लेकर फंसे करीब 50 हजार छात्रों को बड़ी राहत मिलने वाली है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीट वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। स्कूली शिक्षा विभाग जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी करेगा। इसके बाद वर्ष 2025-27 सत्र के लिए निर्धारित सीटों से अधिक नामांकन लेने वाले इंटर कॉलेजों में छात्रों का रजिस्ट्रेशन संभव हो सकेगा। राज्य के वित्त रहित इंटर कॉलेजों में विज्ञान और कला दोनों संकायों की सीटें बढ़ाई जाएंगी। संभावना जताई जा रही है कि विज्ञान की तुलना में कला संकाय में अधिक सीटें बढ़ेंगी। 2025-27 सत्र में करीब 40 वित्त रहित इंटर कॉलेजों ने निर्धारित सीमा से अधिक नामांकन लिया था। नियमानुसार प्रति संकाय 128 सीटों पर नामांकन होना था, लेकिन कई कॉलेजों में तीन से पांच गुना तक एडमिशन ले लिया गया। इन संस्थानों ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) से अनुमति मिलने की उम्मीद में नामांकन किया था। हालांकि, 18 दिसंबर से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद जैक ने अब तक अनुमति नहीं दी थी। इससे हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया था। अब सीट बढ़ने के बाद रजिस्ट्रेशन का रास्ता साफ हो जाएगा। जैक अध्यक्ष नटवा हांसदा ने बताया कि शिक्षा विभाग को छात्रों से जुड़ी पूरी रिपोर्ट भेजी गई थी और सीट बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। 40 संस्थानों में सीटों से ज्यादा नामांकन राज्य के 40 से अधिक वित्त रहित इंटर कॉलेजों ने 2025-27 सत्र के लिए निर्धारित सीटों से अधिक नामांकन लिया था। इससे करीब 50 हजार छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए। कई संस्थानों में इसे लेकर हंगामे की स्थिति भी बनी। राज्य में कुल 195 स्वीकृत इंटर कॉलेज हैं, जबकि 50 से अधिक स्थापना अनुमति प्राप्त संस्थान हैं। इनमें से करीब 40 कॉलेजों में रजिस्ट्रेशन नहीं होने से छात्रों की परेशानी बढ़ी थी। डीईओ ने पहले ही भेज दी थी जांच रिपोर्ट विभिन्न जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) ने सितंबर-अक्टूबर में ही इन कॉलेजों की भौतिक जांच कर रिपोर्ट जैक को सौंप दी थी। जैक ने डीईओ से यह जांच कराई थी कि संबंधित संस्थानों में आधारभूत संरचना और पढ़ाई की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं।
उच्च शिक्षा के लिए भारतीय छात्रों की कौन सा देश है पहली पसंद, नीति आयोग ने जारी की रिपोर्ट
नीति आयोग की उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण शीर्षक से जारी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में कनाडा 4,27,000 भारतीय छात्रों के साथ शीर्ष अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा गंतव्य रहा।
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म

