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72 घंटे में 8 देशों के संघर्ष पर विराम: दुनिया को मिली अस्थायी राहत, शांति की कोशिशें तेज

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देशबन्धु 10 Apr 2026 1:00 pm

ईरान की चेतावनी: नेतन्याहू को रोकें ट्रंप

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया को खत्म करने की इजाजत न दे

देशबन्धु 10 Apr 2026 8:50 am

विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मार्को रुबियो की मुलाकात, भारत दौरे पर आने का दिया संकेत

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले महीने भारत दौरे पर आ सकते हैं। यह संकेत उस समय मिला जब उन्होंने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ व्हाइट हाउस में एक सकारात्मक बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और अहम तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का जिक्र किया गया

देशबन्धु 10 Apr 2026 8:40 am

राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों से शुल्क वसूले जाने की रिपोर्टों पर ईरान को दी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की शिपमेंट को सीमित करके संघर्ष-विराम (सीजफायर) की सहमति का उल्लंघन करने का आरोप लगाया

देशबन्धु 10 Apr 2026 8:35 am

कतर में पेट्रोल‍ियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, एलएनजी सप्लाई पर करेंगे अहम बातचीत

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी अपनी दो दिवसीय यात्रा पर दोहा पहुंचे। हवाई अड्डे पर भारत के कतर स्थित राजदूत विपुल और कतर एनर्जी के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया

देशबन्धु 10 Apr 2026 6:00 am

लेबनान में बैंडेज, एंटीबायोटिक्स की किल्लत, जल्द हो जाएंगे ये जरूरी सामान खत्म: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि लेबनान के कुछ अस्पतालों में जीवन बचाने वाली ट्रॉमा मेडिकल किट कुछ ही दिनों में खत्म हो सकते हैं

देशबन्धु 10 Apr 2026 4:00 am

चीन ने इंटरनेट सेवा के लिए उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया

चीन ने थाइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से लॉन्ग मार्च-6ए रॉकेट का उपयोग करके अपनी इंटरनेट सेवा के लिए गुरुवार की सुबह 3.38 बजे 21वें ग्रुप के निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया

देशबन्धु 9 Apr 2026 11:35 pm

शी चिनफिंग ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के उद्घाटन समारोह में भाषण दिया

चीन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 8 अप्रैल की सुबह राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में शुरू हुआ

देशबन्धु 9 Apr 2026 11:28 pm

चीन में लघु व मझौले उद्यमों के लिए विकास वातावरण में लगातार सुधार जारी

चीन के लघु एवं मझौले आकार के उद्यमों के विकास को बढ़ावा देने वाले केंद्र ने लघु एवं मझौले आकार के उद्यमों के विकास वातावरण पर 2025 मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की

देशबन्धु 9 Apr 2026 11:16 pm

नेतन्याहू का बड़ा ऐलान: लेबनान से सीधी वार्ता को मंजूरी

ईरान-इजरायल तनाव के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है

देशबन्धु 9 Apr 2026 10:43 pm

इजरायल ने हिजबुल्लाह प्रमुख के भतीजे को किया ढेर, बेरूत पर किए हवाई हमले में बनाया निशाना

इजरायली सेना ने बुधवार को हिजबुल्लाह के गढ़ दाहियेह के बाहर बेरूत के तल्लेत खयात इलाके में हर्शी को निशाना बनाकर हमला किया। इसका फुटेज भी सामने आया है, जिसमें एक बहुमंजिला इमारत आंशिक रूप से ढह गई।

देशबन्धु 9 Apr 2026 2:49 pm

युद्धविराम पर संकट के बादल, लेबनान में इजरायली हमले में 254 लोगों की मौत, ईरान की कड़ी चेतावनी

लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि यदि इजरायल ने अपने हमले जारी रखे, तो तेहरान युद्धविराम से पीछे हट सकता है।

देशबन्धु 9 Apr 2026 1:28 pm

नाटो से निकलने पर विचार कर रहे हैं ट्रंप, चर्चा को गठबंधन के महासचिव मार्क रूटे से की मुलाकात

ईरान के साथ संघर्ष के बीच नाटो और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सरकार की कार्रवाई से नाटो देश बेहद नाराज नजर आ रहे हैं

देशबन्धु 9 Apr 2026 9:29 am

घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था को बना रहे मजबूत, कर सुधारों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं के निर्यात में लचीलापन और लगातार सुधारों के दम पर तेजी से आगे बढ़ रही है

देशबन्धु 9 Apr 2026 9:09 am

व्हाइट हाउस: अमेरिका-ईरान समझौता वार्ता के ल‍िए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जाएंगे इस्लामाबाद

व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि दो-सप्ताह के संघर्ष-विराम पर अमेरिका की जीत हुई है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सेना ने संभव बनाया

देशबन्धु 9 Apr 2026 7:58 am

ब्लैकबोर्ड-वो बेटी जैसी थी, उसके पिता बोले-तुने इसका रेप किया:मैं पागल हो गया था, 25 साल बाद बरी हुआ, लगता है- कोई मारने आ रहा

57 साल के आजाद खान अपने भाई की किराने की दुकान पर बेसुध बैठे हुए हैं। तीन महीने पहले ही 25 साल बाद जेल से बाइज्जत बरी होकर आए हैं। अकेले में कुछ बुदबुदा रहे हैं। पूछने पर कहते हैं- पूरी जिंदगी काल-कोठरी में गुजार दी। अब किसी से क्या ही बात करूं, क्या ही बचा है! मैंने पूछा- पूरी जिंदगी जेल में गुजार दी, किसी का मर्डर किए थे क्या? ‘नहीं-नहीं, डकैती का झूठा मुकदमा था। कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सोचिए जरा- डकैती के मामले में आजीवन कारावास!’ तभी पीछे से आजाद की भाभी आशा बेन बोल पड़ती हैं, ‘बेकसूर थे। झूठे मुकदमे में गांव के एक परिवार ने फंसा दिया था। सब बर्बाद हो गया।’ स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज झूठे मुकदमों में फंसाए गए लोगों की कहानी, जिनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई और आखिर में बाद कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। मैं उत्तर प्रदेश के मैनपुरी शहर से 22 किलोमीटर दूर ब्योंती कटरा गांव पहुंचा हूं। 25 साल बाद जेल से बाइज्जत बरी होकर आए आजाद खान से मिलने। यहां संकरी गली और खुले में बहते एक गंदे नाले के बीच आजाद खान का छप्पर का घर है। इसकी हालत इतनी खराब है कि हल्की आंधी आए तो उड़ जाए। इससे सटा इनके भाई मस्तान खान का घर है। एक छोटा-सा बिना प्लास्टर वाला ईंट का बना। सामने दो-तीन मवेशी बंधे हुए हैं। यहीं पर मस्तान खान की दुकान है। उसके बाहर बैठ जाता हूं और अपने भाई आजाद खान को बुलाने के लिए कहता हूं, लेकिन आजाद मुझसे बात करने के लिए सामने नहीं आ रहे। पहले इनके भाई ने बुलाया और फिर भतीजा कई बार बुलाने गया तब आने को तैयार हुए। दुकान से बाहर आकर यहां रखे तख्त पर बैठ जाते हैं। अब भी काफी सहमे हुए नजर आ रहे हैं। बार-बार इधर-उधर देख रहे हैं। उसी तख्त के बगल बैठी इनकी भाभी आशा बेन कहती हैं- जेल जाने से मानसिक हालत खराब हो गई है। तीन महीने पहले 21 जनवरी 2026 को जब सुबह-सुबह मेरे बेटे और पति इन्हें जेल से रिहा कराकर घर लाए, तो गांव की बदली गली और घर देखकर चौंक गए। इन्हें सब बदला-बदला लग रहा था। धीमी आवाज में बोले- भाभी सब बदल गया न! मैं इनकी पीठ पर हाथ सहलाते हुए बोली- हां, सब बदल गया। अब जेल से छूटकर आ गए हो। डरो मत। मैं तुम्हारी मां जैसी हूं। जब ये जेल गए थे, तो 30 बरस के थे। 25 साल सलाखों के पीछे रहने के बाद 55 साल के हो गए हैं। इनकी पूरी जिंदगी जेल में चौपट कर दी गई। यह बताते हुए आशा बेन की आंखें भर आती हैं और दुपट्टे से आंसू पोछने लगती हैं। थोड़ी देर रुककर फिर कहती हैं- मुझे ब्याहकर आए 10 साल हुए थे। आजाद अपने 5 भाइयों में सबसे छोटे हैं। शुरू से थोड़ा अड़ियल मिजाज के रहे हैं। किसी से डरते नहीं थे। इसी वजह से गांव वालों की नजर में चढ़े हुए थे। 22 अक्टूबर 2000 को दिवाली का दिन था। हम लोग गहरी नींद में सो रहे थे। आजाद उस वक्त दिल्ली में सिलाई का काम करते थे। सुबह के 3 बजे, अचानक गांव में हल्ला मचा कि- डाका पड़ गया है। चोरी हो गई है। शोर-शराबा सुनकर हम भी उठकर दौड़े। हमारे गांव के एक ब्राह्मण परिवार के यहां चोरी हो गई थी। उनके यहां शादी की तैयारी चल रही थी, लिहाजा उनके घर में काफी गहने रखे थे, जो चोरी हो चुके थे। मामले की पुलिस से शिकायत की गई। फौरन हमारे एऊल थाना की पुलिस छानबीन में जुट गई। तीन-चार दिनों बाद अचानक पुलिस हमारे घर आई। गाली देते हुए बोली- उस रात डकैती में तुम्हारा देवर आजाद खान भी शामिल था। यह सुनकर हम हैरान हो गए। मैंने कहा- साहेब, वह तो दिल्ली में सिलाई का काम करते हैं। वो यहां कैसे आ गए? पुलिस कहने लगी- झूठ मत बोले। तुम लोगों ने उसे यहां से भगा दिया। उसके खिलाफ गवाही मिली है। तुरंत उसे बुलाकर थाने में पेश करो, वर्ना सभी को जेल में डाल दूंगा। हम लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं। मेहनत-मजदूरी करके घर चलाते हैं। उस दौरान गांव वाले हमारी हंसी उड़ाने लगे। कहने लगे- और चलो ठसक में! अब भुगतो अपनी करनी का फल। आखिर गांव वाले भी हमें ही गलत मान रहे थे। उसके बाद हमने आजाद को चिट्ठी लिखी और बताया- पुलिस आपको खोज रही है। घर आ जाइए। आपके ऊपर गांव के घर में डाका डालने का केस दर्ज है। इस बातचीत के दौरान तख्त पर ही मुरझाया चेहरा लिए, मटमैली पीली बनयान और पैजामा में आशा बेन के पति मस्तान खान भी बैठे हैं। कहने लगे- आजाद ने अपनी जवाबी चिट्ठी में लिखा- मैं तो दिल्ली में हूं। मैंने कौन-सा अपराध किया है, जो पुलिस के सामने सरेंडर करूं? आजाद अभी तक घर नहीं आए थे। इसी बीच, पुलिस घर की कुर्की-जब्ती का नोटिस लेकर आ गई। दीवार पर नोटिस चिपकाते ही घर में चीख-पुकार मच गई। हम पांच भाई, मेरे तीन बच्चे। कहां जाते। घर न बचता, तो सड़क पर आ जाते। उसके बाद हमने कर्ज लिया और वकील को 20 हजार रुपए दिए, तब कुछ दिनों के लिए कुर्की-जब्ती से मोहलत मिली। उसके बाद फौरन अपने भाई आजाद खान से मिलने दिल्ली निकल गया। उसे पूरी बात बताई, तब वह कोर्ट में सरेंडर करने को राजी हुआ। वह आया और कोर्ट में सरेंडर कर दिया। करीब महीनेभर बाद नवंबर 2001 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। फिर सुनवाई चली और सेशन कोर्ट ने 25 साल जेल की सजा सुनाई। अब जाकर तीन महीने पहले यह बाइज्जत बरी होक बाहर आया है। आजाद की न शादी हुई, न घर बसा। पूरी जवानी जेल में खप दिया। अब किसी काम का नहीं बचा है। सोच-सोचकर मानसिक रूप से बीमार हो गया। यह कहते हुए मस्तान खान फूट-फूटकर रोने लगते हैं। आंख मलते हुए बोलते हैं, ‘जेल में इससे मिलने के लिए हजार-पांच सौ रुपए पुलिस वालों को देने होते थे। मेर पास जब भी कुछ रुपए जमा होते, तब इससे मिलने चला जाता था। आखिर मेरा छोटा भाई है। जेल के दौरान मैंने कई बार कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई, लेकिन खारिज होती रही। वकील ने कहा- 50 हजार रुपए दो, तब जमानत करवाऊंगा, लेकिन उस वक्त मेरे पास उतने पैसे नहीं थे। किसी तरह से जमींदारों के खेत में दिहाड़ी-मजदूरी करके पैसे जुटाता, फिर साल-दो साल में वकील के पास जा पाता। वकील पैसे तो ले लेता, लेकिन जमानत नहीं करवाता था। एक बार तो रमजान का महीना था। 5 हजार रुपए लेकर मैनपुरी शहर से खाने-पीने का कुछ सामान खरीदने गया था। साथ में भाई की जमानत के लिए वकील से मिलकर बात करनी थी। उस दिन वकील ने मेरे सारे पैसे ले लिए। त्योहार का कोई सामान नहीं खरीद पाया। यहां तक कि इतना भी पैसा नहीं बचा कि बस का किराया दे सकूं। उस दिन पैदल ही मैनपुरी से अपने गांव आया था। इस बातचीत के दौरान बीच-बीच में आजाद खान कुछ-कुछ बुदबुदा रहे हैं। उनसे बात शुरू किया तो कहने लगे- जेल में मैं खूंखार कैदियों के बीच रह रहा था। एक बार तो वे सारे मिलकर मुझे मारने की योजना बना लिए थे। उन्होंने एक थैले में कई सारी खुरपियां जुटाई। एक कैदी ने तो मेरे हाथ पर खुरपी से हमला भी कर दिया था। मौके पर जेल अधिकारी पहुंच गए थे और किसी तरह बचाया था। उस दिन बच गया था, लेकिन इतना डर गया कि मानसिक रूप से बीमार रहने लगा। मन में एक खौफ बस गया। हर वक्त लगने लगा कि- कोई मुझे मारने आ रहा है। ऐसा लगने लगा कि जेल से बाहर जाऊंगा तो गांव वाले मार देंगे। मेरी खराब हालत खराब होने लगी। उसके बाद जेल प्रशासन मुझे बरेली सेंट्रल जेल से बनारस के मेंटल हॉस्पिटल लेकर गया। वहां मेरा दो साल इलाज चला। हाथ में कोर्ट-कचहरी के कागज पलटते हुए आजाद खान ये बातें बताते हैं। इस दौरान वह इधर-उधर देखते हुए अक्सर मुठभेड़-मुठभेड़ कहते हैं। पूछने पर कुछ नहीं बताते। फिर थोड़ा जोर देता हूं तो कहते हैं- हमारे गांव में दो समुदायों के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़े होते थे। 1999 की बात है। गांव में झगड़ा हुआ और पुलिस पहुंच गई। हमारी पुलिस से हाथापाई हो गई। मेरे कुछ साथियों ने पुलिस पर गोली चला दी। अटैंप्ट टू मर्डर का केस चला, मुझे भी 10 साल की सजा हुई थी। कुछ महीने जेल में रहा था, फिर जमानत पर छूटकर आया था। उसके बाद दिल्ली कमाने चला गया था और फिर यह डकैती का झूठा केस मुझ पर लाद दिया गया। यह कहते हुए आजाद खान अजीबोगरीब बातें करने लगते हैं। कुछ का कुछ बताने लगते हैं। पास में ही बैठी इनकी भाभी कहती हैं- अब आप इनसे मत बात कीजिए। इनकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। कई बार गाली-गलौज भी करने लगते हैं। 25 साल जेल के दौरान इन्हें अकेले काल-कोठरी में रखा गया था। वहां इन्हें टॉर्चर किया गया था, उसके बाद से बड़बड़ाने लगे हैं। हम लोग कुछ कर नहीं पा रहे थे। एक NGO ने हमारी मदद की। मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां मामले को झूठा पाया गया। सोचिए एक झूठे केस में इंसान की पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी गई। पागल बना दिया गया। जब तक हम लोग जिंदा हैं, इनकी देखभाल करेंगे, हमारे मरने के बाद इनका क्या होगा, पता नहीं। आजाद खान की इस स्याह कहानी को जानने के बाद मैं मैनपुरी से दिल्ली पहुंचा। यहां किराड़ी इलाके के प्रेम नगर में रामदास का परिवार रहता है। रामदास यहां चप्पल की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। 9 हजार रुपए महीना कमाते हैं। पड़ोसियों ने एक बच्ची के रेप के झूठा केस में फंसा दिया। पॉक्सो एक्ट तहत जेल गए। 7 साल जेल काटी और 2021 में बाइज्जत बरी बाहर आए हैं। रामदास बताते हैं- मुझ पर रेप का मुकदमा दर्ज था। अभी 60 साल का हूं। जब जेल गया था, तब 50 साल का था। मेरा दो बेटे-दो बेटियों समेत पूरा परिवार है। पड़ोसी ने मेरी जाति से नफरत करते थे, इसलिए मुझे फर्जी केस में फंसा दिया। एक ऐसी बच्ची का रेप करने और उसे गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया, जिसे मैं अपनी पोती मानता था। मई 2015 की बात है। मेरी सिलाई मशीन की फैक्ट्री थी। उसमें काम करने के बाद बैंक में गार्ड की नौकरी भी करता था। एक दिन शाम को घर आया, तो पड़ोसी मेरे परिवार से लड़ाई कर रहे थे। पता चला था कि गेट पर किसी कुत्ते ने पॉटी कर दी थी, जिसको लेकर मेरे परिवार से गाली-गलौज कर रहे थे। मैंने रोका तो मुझ पर टूट पड़े। घसीटते हुए कहने लगे- बहुत शान में चलता है न तू। ऐसा लगता है, जैसे कोई बड़ा रईस हो। कितनी बड़ी नौकरी करता है रे। आज हम तुझ पर केस करेंगे। अगले दिन सुबह-सुबह पुलिस मेरे घर आई और मुझे उठाकर ले गई। थाने में बताया कि मुझ पर रेप का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मुझे पीटते हुए बोली- तुम पर केस करने के लिए तुम्हारे पड़ोसी 50 हजार रुपए दिए हैं। अगर इस केस को खत्म करना है, तुम्हें एक लाख रुपए देने होंगे। मेरे पास उतने रुपए नहीं थे। नहीं दे पाया और पुलिस ने केस को बड़ा बनाकर मुझे जेल भेज दिया। इसके बाद तारीख पर तारीख शुरू हुई। मैंने कभी पॉक्सो एक्ट… के बारे में सुना तक नहीं था। उधर, मेरे जेल जाते ही मेरे बेटे-बहू, पत्नी सब दर-दर ठोकर खाने लगे। उस वक्त बहू गर्भवती थी। केस लड़ने के लिए मेरे बेटे ने एक-एक करके बहू की सारी ज्वैलरी बेच दी। हर तारीख पर 3 से 5 हजार रुपए खर्च हो रहे थे। जब गहने के पैसे खत्म हो गए तो मैंने जज से कहा था कि- साहब जो भी फैसला देना है दे दीजिए, नहीं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा। पास में बैठे रामदास के बेटे जोगिंदर दास भी ये बाते सुन रहे थे। वह कहते हैं- एक तरफ मेरी पत्नी गर्भवती थी, दूसरी तरफ पापा जेल में थे। जब भी वकील के पास जमानत के लिए जाता, वह कहता- 50 हजार रुपए दो, तभी जमानत की अर्जी लगवाऊंगा। जब पत्नी के सारे गहने बिक गए, तब फैक्ट्री की 5 सिलाई मशीनें भी बेच दी। उसके बाद पैसे कम पड़ने लगे। तो गांव जाकर घर की जमीन बेची। मामले में 10 लाख से ज्यादा खर्च हो गए थे। जब जेल में पापा से मिलने जाता, तो हम एक-दूसरे को देखकर रोते। उस वक्त यही सोचता जैसे भी पापा को जेल बाहर निकालूंगा। आखिर में किसी तरह पैसे दे-लेकर फाइनल सुनवाई हुई। तीस हजारी कोर्ट ने 2021 में पापा को 7 साल की जेल के बाद बरी कर दिया। दिल्ली सरकार को एक लाख रुपए मुआवजा देने को भी कहा। लेकिन जब हम ये पैसे लेने हम दिल्ली सचिवालय गए, तो वहां अधिकारी एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस का चक्कर कटवाने लगे। अब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। इस एक लाख को पाने के चक्कर मेंल हमारे ढाई लाख खर्च हो चुके हैं। केवल अपील पर अपील चल रही है। जोगिंदर की ये बातें सुनकर रामदास लंबी सांस लेते हुए बोलते हैं- जेल में गीता पढ़कर और पेंटिंग करके जिंदगी काट रहा था। वहां बाकी कैदी मुझे देखकर पूछते- चाचा, आप कौन-से जुर्म में जेल आए हो? मैं जैसे ही कहता- रेप केस में। वे पुलिस को गाली देते हुए कहते- आपकी उम्र भी तो देख लेते पुलिस वाले। उन्होंने ऐसी ही फर्जी केस में फंसाकर हमें अपराधी बनने को मजबूर किया है। रामदास कहते हैं- इस तरह 7 साल जेल में बेनुनाह होते हुए भी गुजारे। अब जेल से चले आने के बाद भी क्या बचा है। जमीन, गहने बिक गए। पूरी कमाई कोर्ट-कचहरी में लुटा दी। --------------------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-हट्टा-कट्टा भर्ती हुआ, फौज ने विकलांग बनाकर भेज दिया:8 महीने कोमा में रहा, होश आया तो पता चला- मुझे आर्मी से निकाल दिया ‘डेढ़ महीने से मुझे ‘महाराजा’ पनिशमेंट दी जा रही थी, जिसमें सिर के बल डेढ़-डेढ़ घंटे रहना होता था। एक दिन मैं बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रहा था। तभी एक जोरदार पंच मेरे सिर पर लगा और मैं गिर पड़ा। अफसर चिल्लाए- चेतन, उठो और लड़ो। मैंने कहा- अब नहीं लड़ पाऊंगा, सर। लेकिन उन्होंने कहा- नहीं चेतन, तुम्हें भिड़ना होगा। पूरी कहानी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- सिर्फ पीरियड्स में नहा पाती हैं महिलाएं:कम खाती हैं, ताकि शौच न जाना पड़े; बोलीं- नमक के खेत में ही पैदा हुए, इसी में मर जाएंगे चिलचिलाती धूप में दूर तक फैला नमक का मैदान इतनी तेज चमक रहा है कि आंखों में चुभ रहा है। दूर तक कहीं छांव नहीं। अचानक एक महिला, रमिला, काम छोड़कर धीरे से कहती हैं- ‘दिन में हम शौच नहीं जाते… लोग देख लेंगे। इसलिए खाना भी कम खाते हैं… ताकि बार-बार जाना न पड़े…पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 9 Apr 2026 5:16 am

पुडुचेरी क्यों मनाता है दो बार स्वतंत्रता दिवस:अंग्रेजों के बजाय फ्रांस का गुलाम कैसे बना; तीन राज्यों में फैले मिनी फ्रांस में आज वोटिंग

बात 18 अक्टूबर 1954 की है। सुबह का वक्त था और जगह पुडुचेरी का कीझूर इलाका। एक सरकारी इमारत के कमरे में काफी हलचल थी। एक कोने में पप्पा गौबार्ट नाम से मशहूर इंडो-फ्रेंच नेता एडौर्ड गौबार्ट खड़े थे। सफेद खादी के कुर्ते में लिपटे गौबार्ट कभी फ्रांसीसी प्रशासन का दाहिना हाथ माने जाते थे। उनके सामने फ्रांसीसी कमिश्नर का प्रतिनिधि पसीने पोंछते हुए फाइलों में उलझा था। बाहर हजारों की भीड़ देशभक्ति के नारे लगा रही थी। 178 लोग लाइन में लगे थे। सबके हाथ में मतपत्र था। वे एक-एक करके पेटी में वोट डाल रहे थे। जैसे ही आखिरी वोट डला, गौबर्ट बाहर निकले, उन्होंने अपना हाथ हवा में लहराया और देखते ही देखते कीझूर की धूल भरी सड़क 'जय हिंद' के नारों से गूंज उठी। 178 में से 170 लोगों ने पुडुचेरी के भारत में विलय के लिए वोट किया। इसके बाद पुडुचेरी भारत का हिस्सा बन गया, लेकिन फ्रेंच सरकार को इसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में 8 साल लग गए। 1962 में पुडुचेरी कानूनी तौर पर भारत में शामिल हो गया। आज, यानी 9 अप्रैल को पुडुचेरी में वोटिंग है। ऐसे में आज कहानी, मिनी फ्रांस कहे जाने वाले पुडुचेरी, यानी पांडिचेरी की जो साल में दो बार आजादी मनाता है… 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा ने भारत का रास्ता खोजा। इसके बाद यूरोप में होड़ मच गई। वजह थी- भारत के मसाले, रेशम, सोना और दौलत। डच, अंग्रेज और फ्रेंच भी दौड़ में जुट गए। 1665 में फ्रेंच अफसर फ्रांसिस कैरो भारत आए। 1668 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूरत में पहला ट्रेड सेंटर खोला। इसके बाद फ्रांसीसी पांडिचेरी की ओर बढ़े। तब पांडिचेरी मछली पकड़ने वाला छोटा गांव था। यह बीजापुर रियासत में आता था। 1673 में फ्रेंच अफसर फ्रांस्वा मार्टिन ने बीजापुर के सुल्तान के सूबेदार शेर खान लोधी से पांडिचेरी को लीज पर ले लिया। उन्होंने यहां ट्रेड सेंटर खोला। धीरे-धीरे यह शहर बन गया। 18वीं सदी के आखिर में फांसीसियों ने पांडिचेरी के साथ-साथ यनम, माहे और कराईकल पर भी कब्जा कर लिया। ये इलाके दूर थे, लेकिन समुद्र किनारे थे। पांडिचेरी पर कई बार अंग्रेजों ने भी राज किया, लेकिन हर बार फ्रांसीसी इसे वापस ले लेते थे। आखिरकार 1816 में फ्रांसिसियों ने पांडिचेरी में खूंटा गाड़ दिया और फिर कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आया। फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी को एक नहर के सहारे दो हिस्सों में बांट दिया। पहला- 'विले ब्लांश' यानी वाइट टाउन, जहां फ्रेंच अधिकारी, व्यापारी और भारतीय ईसाई रहते थे। दूसरा- 'विले नोयर' यानी ब्लैक टाउन, जहां आम भारतीय रहते। फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी में नेवल बेस बनाया। टेक्सटाइल इंडस्ट्री खोली, जिससे फ्रांस को भारी मुनाफा हुआ। सालाना 1.95 लाख डॉलर की कमाई होती। यानी आज के हिसाब से करीब 40 करोड़ रुपए। 17 साल के लड़के ने शुरू किया आंदोलन फ्रेंच अफसर पांडिचेरी की कपड़ा मिल के मजदूरों से पूरे हफ्ते जी-तोड़ मेहनत करवाते और महीने में मुश्किल से 1 रुपए तनख्वाह देते। मजदूर गुस्से में थे। उनमें क्रांति की आग सुलग रही थी। 1908 में मशहूर लेखक और क्रांतिकारी सुब्रमण्यम भारती अंग्रेजों से बचते हुए मद्रास से भागकर पांडिचेरी आ गए। फ्रेंच कॉलोनी होने के कारण यह ब्रितानी हुकूमत के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इसका फायदा भारतीय क्रांतिकारी उठाते। सुब्रमण्यम ने पांडिचेरी से 'इंडिया' नाम की विकली मैगजीन निकाली। इसने ब्रिटिश भारत के साथ पांडिचेरी में भी क्रांति जगा दी। 1910 में पांडिचेरी के सवाना कपड़ा मिल के मजदूरों ने वेतन बढ़वाने के लिए हड़ताल की, लेकिन फ्रेंच पुलिस ने इसे बेरहमी से कुचल दिया। 17-18 साल तक ऐसा ही चला, लेकिन मजदूरों की हालत नहीं सुधरी। फिर आया साल 1928, 10वीं में पढ़ने वाले 17 साल के एक लड़के ने पांडिचेरी के कालवे कॉलेज में स्टूडेंट मूवमेंट खड़ा कर दिया। उसका नाम था- वरदराजुलु सुब्बैया उर्फ वी सुब्बैया। वे जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और रूसी क्रांति की सोच से प्रेरित थे। आंदोलन 3 महीने चला। खत्म होने पर सुब्बैया को 6 महीने के लिए सस्पेंड किया गया। जैसे-तैसे उन्हें 10वीं की परीक्षा देने को मिली। फिर वे नौकरी के लिए मद्रास चले गए। जब 12 मौतों के बाद मजदूरों को हक मिला 1933 में वी सुब्बैया पांडिचेरी लौटे। उन्होंने महात्मा गांधी के 'हरिजन सेवक संघ' की एक शाखा पांडिचेरी में खोली। दलितों और मजदूरों को जोड़ा। साथ ही 'सुदंतीरम' नाम की मंथली मैगजीन निकाली। 14 फरवरी 1935 को सुब्बैया ने सवाना मिल में हड़ताल शुरू की। मांग रखी कि काम के 10 घंटे तय हों, बाल मजदूरी रुके, वेतन 6 आने हो और गर्भवती महिलाओं को वेतन के साथ छुट्टी मिले। 84 दिनों की हड़ताल के बाद मजदूरों की मांगें मानी गईं। सुब्बैया दलितों और मजदूरों में मशहूर हो गए। जुलाई 1936 में सुब्बैया ने पांडिचेरी की रोडिए, सवाना और एली मिल के मजदूरों के साथ आंदोलन शुरू किया। उनकी मांग थी कि मजदूरों को ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार मिले। 29 जुलाई को सुब्बैया के भाषण के दौरान फ्रेंच पुलिस ने गोलीबारी कर दी। 12 मजदूर मारे गए। गुस्साए मजदूरों ने सवाना मिल को आग लगा दी। दुनियाभर में इसकी चर्चा हुई। विरोध प्रदर्शन हुए। फ्रेंच पीएम लियों ब्लम से दखल की मांग गुई। फ्रेंच संसद में भी ये मुद्दा उठा। सरकार ने सुब्बैया को मिलने बुलाया। जवाहरलाल नेहरू की सलाह पर सुब्बैया पेरिस गए। फ्रेंच सरकार ने मांगें मानीं। मजदूरों को ट्रेड यूनियन का अधिकार मिला। पांडिचेरी एशिया की पहली जगह बनी, जहां काम के 8 घंटे तय हुए। ‘पप्पा गौबार्ड’ की बगावत से कमजोर हुए फ्रांसीसी वी सुब्बैया आजादी के लिए स्ट्रैटजी बना रहे थे, लेकिन 1938 में गिरफ्तार कर लिए गए। 1942 में रिहा होने के बाद उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ पांडिचेरी बनाई, लेकिन एक साल के लिए उन्हें पांडिचेरी से निकाल दिया गया। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। अब पांडिचेरी में भी आजादी का आंदोलन तेज हो गया। मांग थी कि पांडिचेरी का भारत में विलय हो, लेकिन फ्रांसीसी इसे छोड़ना नहीं चाहते थे। जनवरी 1950 में फ्रेंच पुलिस पांडिचेरी की सड़कों पर उतर गई। सुब्बैया के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हो गया। कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जाने लगा। सुब्बैया का घर जला दिया गया, जहां कम्युनिस्ट पार्टी का दफ्तर भी था। सुब्बैया अंडरग्राउंड होकर कई बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की टॉप लीडरशिप से मिले। उन्हें मिली कि आंदोलन को गांव-गांव तक फैलाएं। 1952 में उन्होंने वापस आकर हथियारबंद दस्ते बनाए। आंदोलन को गांव-गांव फैलाया। इसी बीच एक और बड़ी घटना हुई। फ्रेंच नेशनल असेंबली में पांडिचेरी के प्रतिनिधि एडौर्ड गौबार्ट की फ्रांसीसी अधिकारियों से अनबन हो गई। नाराज पप्पा गौबार्ट ने बगावत कर दी। मार्च 1954 में गौबार्ट फ्रांस से पांडिचेरी आ गए। उन्होंने ‘समानांतर सरकार’ बना ली। वैचारिक मतभेद होने के बावजूद सुब्बैया ने इस सरकार को समर्थन दिया। यहां से पांडिचेरी पर फ्रांस की पकड़ ढीली पड़ने लगी। 7 अप्रैल 1954 को कम्युनिस्ट पार्टी ने 'डायरेक्ट एक्शन' का ऐलान कर दिया। कम्युनिस्टों ने तिरूबुवानी इलाके को आजाद करा लिया। पुलिस से हथियार छीने और थाने पर राष्ट्रीय झंडा फहरा दिया। धीरे-धीरे कई इलाके आजाद करा लिए। भारत की आजादी के 15 साल बाद स्वतंत्र हुआ पांडिचेरी भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि कूटनीति से मसला सुलझे, ताकि फ्रांस से रिश्ते खराब न हों। सो भारत, फ्रांस और पांडिचेरी के बीच कई बैठकें हुईं। आखिरकार 13 अक्टूबर 1954 को फ्रेंच पीएम पियरे मेंडेस फ्रांसे पांडिचेरी छोड़ने को तैयार हो गए। 18 अक्टूबर 1954 को पांडिचेरी के कीझूर में भारत के साथ विलय के लिए वोटिंग हुई। 178 स्थानीय प्रतिनिधियों में से 170 ने विलय के पक्ष में वोट दिया। 1 नवंबर 1954 को फ्रांस ने पांडिचेरी, यनम, माहे और कराईकल इलाकों का प्रशासनिक नियंत्रण भारत को दे दिया। पांडिचेरी को ‘डि फैक्टो’ आजादी मिल गई। यानी वास्तव या व्यवहार में आजाद हो गया, लेकिन फ्रांस ने अब भी कानूनी संप्रभुता नहीं छोड़ी थी। इस बीच फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता आ गई। जल्दी-जल्दी सरकारें बदलने लगीं। वहीं अल्जीरिया में आजादी की मांग होने लगी। युद्ध जैसे हालात बन गए। लेकिन अब भी कानूनी बात नहीं बनी। फिर फ्रांस की सत्ता पर काबिज हुए जनरल चार्ल्स डी गॉल। उन्हें लगा कि फ्रेंच कॉलोनियों को लंबे वक्त तक कंट्रोल में नहीं रखा जा सकता। इसके चलते मई 1956 में भारत-फ्रांस के बीच एक ट्रीटी हुई, जिसमें फ्रांस ने भारत को अपने कब्जे वाले इलाके सौंपने को लेकर हामी भरी। लेकिन इसे फ्रांसीसी संसद से मंजूरी मिलने में 6 साल लग गए। मई 1962 में फ्रांसीसी संसद ने इस पर मुहर लगाई। 16 अगस्त 1962 को फ्रांस ने ये दस्तावेज भारत को सौंपे। इसी दिन पांडिचेरी को ‘डि ज्यूर’ आजादी मिल गई। यानी कानूनन पांडिचेरी आजाद हो गया और भारत का हिस्सा बन गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने पांडिचेरी की जनता से वादा किया था कि कोई बाहरी उन पर शासन नहीं करेगा। इसीलिए पांडिचेरी को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया और विधानसभा गठित की गई। गौबार्ट पांडिचेरी के पहले सीएम बने, जबकि सुब्बैया विपक्ष में बैठे। पीले फ्रेंच क्वार्टर, फ्रेंच लैंग्वेज, फ्रेंच फूड आज भी मौजूद जैसे हर साल 15 अगस्त को पूरे भारत में आजादी का जश्न मनाया जाता है, वैसे पांडिचेरी में भी होता है। हालांकि 16 अगस्त को डि ज्यूर ट्रांसफर डे और 1 नवंबर को लिबरेशन डे भी मनाया जाता है। अक्टूबर 2006 में पांडिचेरी का नाम ‘पुडुचेरी’ कर दिया गया। ये दो तमिल शब्दों से मिलकर बना है- 'पुदु' यानी नया और 'चेरी' यानी गांव। प्राचीन तमिल साहित्य में इस इलाके का नाम 'पुडुचेरी' ही था, लेकिन फ्रेंच अफसरों को बोलने में कठिनाई होती थी, तो उन्होंने इसे बिगाड़कर पांडिचेरी कर दिया। आज भी यहां फ्रेंच कॉलोनी की निशानियां मौजूद हैं। ‘वाइट टाउन’ में आज भी पीले दीवारों, ऊंची खिड़कियों और बोगनवेलिया के फूलों से लदी बालकनियों के साथ फ्रेंच क्वार्टर मौजूद हैं। गलियों के नाम आज भी 'रुई' से शुरू होते हैं, जैसे 'रुई ड्यूमास' या 'रुई रोमां रोलां'। फ्रेंच भाषा में सड़कों को रूई कहते हैं। पुडुचेरी के कैफे, रेस्टोरेंट, होटल में दक्षिण भारतीय इडली-डोसा के साथ फ्रेंच डिश क्रॉसों, बैगेट, क्रेप्स और रैटटौई वगैरह भी मिलते हैं। फ्रेंच वाइन आज भी यहां के लोगों की पसंद है। फ्रेंच कॉलोनी के दौर में यहां की पुलिस 'कैपी' नाम की मशहूर लाल टोपी पहनती थी। आज भी ये बरकरार है। तमिल भले ही यहां की प्राइमरी ऑफिशियल लैंग्वेज है, लेकिन अग्रेंजी और फ्रेंच को भी ये दर्जा मिला है। यहां रहने वाले लोग फ्रेंच, तमिल, हिंदी और अंग्रेजी बोल सकते हैं। पुडुचेरी में रचे-बसे फ्रेंच कल्चर के कारण लोग बोल-चाल में इसे ‘मिनी फ्रांस’ तक कहते हैं। केंद्र शासित प्रदेश और तीन राज्यों में फैले होने के कारण पुडुचेरी की राजनीति केंद्र सरकार के प्रभाव में और स्थानीय गठबंधनों के हिसाब से चलती है। यहां 30 विधानसभा सीट हैं, जिनके लिए वोटिंग होती है। जबकि 3 अन्य सीटों पर केंद्र सरकार के नॉमिनेटेड विधायक होते हैं। अभी यहां एन. रंगासामी की सरकार है। उनकी पार्टी AINRC का बीजेपी के साथ अलायंस है, यानी NDA में है। 10 सीट पर AINRC और 6 पर बीजेपी काबिज है। बीजेपी के पास 3 नॉमिनेटेड विधायक भी हैं, यानी बीजेपी के पास कुल 9 विधायक हैं। वहीं एमके स्टालिन की DMK के पास 6 और कांग्रेस के 2 सीटें हैं। 6 पर निर्दलीय विधायक हैं। कल, यानी 9 अप्रैल को पुडुचेरी में वोटिंग होनी है। NDA के खिलाफ कांग्रेस और एमके स्टालिन की DMK का गठजोड़ चुनावी मैदान में है। फिर भी वैसे तो संभावना है कि ‘AINRC-बीजेपी बनाम कांग्रेस-DMK’ के बीच ही मुकाबला होगा, लेकिन माना जा रहा है कि तमिल एक्टर विजय की पार्टी TVK की एंट्री से समीकरण बदल सकते हैं। ******* चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 'शूद्र' महिलाओं से संबंध बनाते थे नंबूदरी ब्राह्मण: नस्ल सुधारने के नाम पर जन्मे बच्चों से दूर रहते, केरलम की राजनीति में कितना असर केरलम का त्रावणकोर इलाका। एक ब्राह्मण पुरुष तैयार होकर नायर बस्ती में जाता है। वहां एक घर के बाहर नहाता है। कपड़े बदलता है। खाना खाता है। फिर घर के बाहर चप्पल उतार कर अंदर जाता है, जहां एक महिला उसका इंतजार कर रही होती है। जब उसका पति लौटता है और उसे एक आदमी की चप्पल दिखती है, तो बिना कुछ कहे लौट जाता है। क्योंकि वो समझ जाता है कि उसकी पत्नी एक नंबुदरी ब्राह्मण पुरुष के साथ संबंधम में है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 9 Apr 2026 5:16 am

‘बेटी हो, कन्यादान करूंगा बोलकर 3 साल रेप किया‘:पीड़िता बोली- पति की मौत की धमकी दी, कैप्टन बाबा के ऑफिस का सच

‘पहली बार मिली, तो बोला कि तू मेरी बेटी है। तेरा कन्यादान मैं खुद करूंगा। शादी से पहले मुझे ऑफिस में बुलाया और रेप किया।’ ये आपबीती कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के खिलाफ पहली FIR कराने वाली महिला की है। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़िता और उनका परिवार बदनामी की वजह से सामने नहीं आना चाहता। ज्यादातर घर छोड़कर जा चुकी हैं। खरात पर अब तक 12 FIR दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 8 सेक्शुअल हैरेसमेंट की हैं। पुलिस को 58 अश्लील वीडियो मिले हैं। जांच में सामने आया है कि 150 से ज्यादा महिलाएं रेप और सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकार हो सकती हैंI दैनिक भास्कर ने नासिक SIT से बाबा के खिलाफ शिकायत करने वाली पहली पीड़िता की आपबीती जानी और वकीलों से बात की। पहली पीड़िता से कॉन्टैक्ट करते पुलिस का फोन आया, कहा- उनसे बात न करेंनासिक पुलिस ने अशोक खरात को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ पहली FIR प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली 30 साल की महिला ने करवाई थी। महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े एक सोर्स के जरिए हमें विक्टिम की लोकेशन और फोन नंबर मिला। जब संपर्क किया, तो घरवालों ने रॉन्ग नंबर बताकर फोन काट दिया। फोन कटने के कुछ देर बाद SIT में शामिल एक इंस्पेक्टर का फोन आया। उन्होंने हमारी पहचान पूछी और पीड़िता को फोन करने की वजह जानी। वे कहती हैं, ‘नासिक पुलिस हर महिला की गोपनीयता का ध्यान रख रही है। उनसे संपर्क न करें। पीड़ितों के साथ हुआ अपराध बेहद गंभीर है। इसलिए परिवारों की लगातार काउंसलिंग हो रही है।’ पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर किसी के पास इस मामले से जुड़े वीडियोज हैं, तो तुरंत हटा दें और फॉरवर्ड न करें। ऐसा करने पर लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और मुकदमे का प्रावधान है। बेटी बोलकर भरोसे में लिया, 78 हजार रुपए में दो पत्थर दिए, फिर रेपपहली FIR कराने वाली महिला तक पहुंचना मुश्किल था, इसलिए हमने उनके वकील और पुलिस को दिए बयान खंगाले। इसके जरिए कैप्टन बाबा का महिलाओं के फंसाने का तरीका समझने की कोशिश की। हमें उसकी 17 मार्च की FIR मिली। पुलिस को दिए बयान में महिला ने 4 अहम बातें कही हैं: 1. पीड़िता 2019 में रिश्तेदार के जरिए बाबा से मिली। वो शादी को लेकर परेशान थी।2. खरात ने दैवीय शक्ति होने का झूठा दावा किया और बेटी बोलकर भरोसे में लिया।3. 50 हजार और 28 हजार रुपए के खास पत्थर दिए। दोनों ताबीज की तरह पहनने के लिए कहा।4. नशीला पदार्थ पिलाकर नवंबर 2022 से दिसंबर 2025 तक रेप किया। पीड़िता ने आगे बताया, ‘मैं 2019 में पहली बार खरात से मिली। बाबा ने कहा कि तू चिंता मत कर, तुझे पुखराज पत्थर देता हूं। उसे खंडोबा मंदिर ले जाना। वहां भगवान को 11 नारियल चढ़ाकर पत्थर गले में लॉकेट बनाकर पहन लेना। तेरी शादी अच्छी जगह हो जाएगी।’ 'नवंबर 2022 में मेरी सगाई हुई। मंगेतर के साथ बाबा से आशीर्वाद लेने गई। बाबा ने कहा कि शादी से पहले ईशान्येश्वर महादेव मंदिर में सिद्धपूजा करनी होगी। मंदिर में होने वाले पूजा विधान के बारे में बताने के लिए ऑफिस बुलाया। यहीं पहली बार रेप किया। इसके बाद तीन साल तक कई बार रेप किया।’ पीड़िता के मुताबिक, शादी के बाद भी पति की मौत और बदनामी का डर दिखाकर खरात धार्मिक पूजा के लिए ऑफिस बुलाता था। तंग आकर 17 मार्च 2026 को मैंने सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करा दी। हिरासत में खरात लेकिन डर कायम, पीड़िता सामने नहीं आ रहींनासिक कोर्ट में वकीलों के जरिए हमें पीड़ित महिला के वकील एमवाई काले का नंबर मिला। उनका कहना है कि इस केस ने पीड़ित महिलाओं की जिंदगी पर गहरा असर डाला है। डर से कई गवाह और पीड़िताएं चुप हैं, इसलिए जांच में रुकावट आ रही है। काले दावा करते हैं कि खरात के खिलाफ जितने मामले सामने आए हैं, वो उसके अपराध की तुलना में बहुत कम हैं। अभी उस पर दर्ज पहली FIR पर ही जांच शुरू हुई है। हमने खरात पर लगे आरोपों पर उसके वकील सचिन भाटे से भी बात की। उन्होंने मामला कोर्ट में होने का हवाला देकर कुछ कहने से इनकार कर दिया। खरात का ऑफिस, जहां 58 महिलाओं के अश्लील वीडियो बनाए गए…10x12 का ऑफिस, दीवार पर लिखा- ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’हम नासिक टाउन में खरात के ऑफिस पहुंचे, जहां वो महिलाओं को बुलाता था। उससे जुड़े 58 अश्लील वीडियो इसी ऑफिस के हैंI ये ऑफिस नासिक के कनाडा कॉर्नर इलाके में हैं। यहां बड़े अक्षरों में लिखा है- 'ओकस प्रॉपर्टी डीलर्स एंड डेवलपर्स'। 1998 में खरात रियल एस्टेट एजेंट का काम करता था। जमीन के सौदों के दौरान रसूखदार लोगों के संपर्क में आया। उसे अंकशास्त्र में दिलचस्पी थी। धीरे-धीरे उसने भविष्य बताना शुरू कर दिया। 2014 में खरात ने कनाडा कॉर्नर इलाके में 10 बाई 12 का ये ऑफिस खोला। 6 साल में नासिक का जाना-माना भविष्यवक्ता बन गया। कोरोना के दौरान 2021 में उसके पास आने वालों की संख्या बढ़ने लगी। 2024 में हालत ये हो गई कि अपॉइंटमेंट के लिए 10 से 25 हजार रुपए लेने लगा। तब भी 3 महीने बाद मिलने का नंबर आता था। खरात के ऑफिस के सामने एसएस कंस्ट्रक्शन नाम की रियल एस्टेट फर्म है। यहां मिले सागर डाउकर कहते हैं, ‘खरात के ऑफिस में हर शनिवार सुबह 8 बजे से ही लोगों की लाइन लगने लगती थी। पूरा ऑफिस 2 हिस्से में बंटा है। पहले वेटिंग एरिया है। खरात का केबिन इससे सटा हुआ है। केबिन के चारों तरफ काले रंग के शीशे की दीवारें हैं। इससे अंदर क्या हो रहा है, ये बाहर बैठे लोगों को दिखाई नहीं देता था।’ आस-पास के लोगों ने बताया कि खरात के दफ्तर में एंट्री पॉइंट पर तिरंगा लगा था। दीवार पर ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती’ जैसी मोटिवेशनल लाइन लिखी थी। 28 मार्च को SIT ने ऑफिस सील कर दिया। ऑफिस स्टाफ ने बाबा के ऑफिस में लगाया खुफिया कैमराहमने अशोक खरात के पुराने ऑफिस स्टाफ से संपर्क करने की कोशिश की। वो पिछले साल तक अशोक खरात के ऑफिस में असिस्टेंट था। खरात उसे 8 हजार रुपए सैलरी देता था। SIT को दिए बयान में स्टाफ ने बताया, ‘2023 में प्रेग्नेंट पत्नी को लेकर मैं खरात के पास गया था ताकि बच्चा स्वस्थ पैदा हो। उसने धार्मिक पूजा के बहाने पत्नी से छेड़छाड़ की। इस घटना के बाद से ही मैंने खरात की करतूतों पर नजर रखनी शुरू कर दी। उसका पर्दाफाश करने के लिए दोस्त की मदद से ऑफिस में एक हिडन कैमरा लगाया। फिर बाबा का सच सामने आ गया।’ ‘कैप्टन बाबा 100 रुपए प्रति किलो के भाव से इमली के बीज खरीदता था। फिर उन्हें पॉलिश करके भक्तों को 10 हजार से लेकर एक लाख रुपए प्रति मुट्ठी के भाव से बेचता था। उसने धर्म के नाम पर कई महिलाओं के साथ गलत किया।’ महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े एक सोर्स के मुताबिक, 29 दिसंबर 2025 को खरात ने 2 लोगों के खिलाफ पांच करोड़ की वसूली का केस दर्ज करवाया था। खरात ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग उसका अश्लील AI मॉर्फ वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर रहे हैं। तब बाबा के असिस्टेंट पर भी शक जताया गया था। खरात की FIR के डेढ़ महीने बाद 18 फरवरी को 24 साल की युवती ने उसी असिस्टेंट के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। उसने असिस्टेंट पर उसकी अश्लील फोटो शेयर करने का आरोप लगाया था। तब से खरात का असिस्टेंट महाराष्ट्र पुलिस की निगरानी में है। 18 दिन में 12 FIR, महिलाओं के फंसाने का खास पैटर्ननासिक SIT से जुड़े एक सीनियर अफसर कहते हैं, ‘अशोक खरात के खिलाफ दर्ज रेप की सभी शिकायतों में एक कॉमन पैटर्न है। मुकदमा दर्ज करवाने वाली ज्यादातर महिलाओं का कहना है कि बाबा तंत्र पूजा करने के बाद उन्हें धमकाता था। उनके दिमाग में ये बात डालने की कोशिश करता कि अगर वो ये बात किसी से कहेंगी, तो उनके बच्चों के साथ बुरा होगा या परिवार में कोई अनहोनी हो सकती है।’ अशोक खरात मामले की जांच के लिए बनाई गई नासिक पुलिस की SIT टीम में 24 लोग शामिल हैं। इनमें 2 DSP, 3 SI, 3 ASI, 10 इंस्पेक्टर और 6 अतिरिक्त पुलिसकर्मी शामिल हैं। ये टीम तकनीकी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर खरात के नेटवर्क और क्राइम को खंगाल रहा है।…………….अशोक खरात पर ये स्टोरी भी पढ़ें…कैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 9 Apr 2026 5:16 am

आईएमएफ के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने में पाकिस्तान सरकार नाकाम, टैक्स कलेक्शन में बड़ा अंतर

पाकिस्तान सरकार के राजस्व संग्रह में कमी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कार्यक्रम के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। राजस्व लक्ष्य इस कार्यक्रम की आधारशिला हैं

देशबन्धु 9 Apr 2026 3:10 am

क्यों अफगानिस्तान में मौसम इतना जानलेवा होता जा रहा है?

अफगानिस्तान में एक बार फिर भारी बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड का जानलेवा मेल तबाही मचा रहा है

देशबन्धु 8 Apr 2026 10:43 am

ओरबान को जिताने में जुटे ट्रंप, हंगरी चुनाव में अमेरिका की इतनी दिलचस्पी क्यों?

हंगरी के पीएम ओरबान सबसे मुश्किल चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी हार के आसार हैं. ट्रंप ओरबान को जिताने की कोशिश कर रहे हैं

देशबन्धु 8 Apr 2026 10:38 am

ईरान-अमेरिका सीजफायर : शहबाज शरीफ ने 'इस्लामाबाद वार्ता' का दिया न्योता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है

देशबन्धु 8 Apr 2026 10:35 am

ट्रंप-ईरान वार्ता: 14 दिन का युद्धविराम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक मोड़ सामने आया है

देशबन्धु 8 Apr 2026 10:26 am

ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: युद्ध खत्म करने की शर्तें तय

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि अमेरिका के साथ दो हफ्ते का सीजफायर युद्ध के खत्म होने का संकेत नहीं है

देशबन्धु 8 Apr 2026 10:24 am

ईरान-अमेरिका तनाव: पाक प्रधानमंत्री ने ट्रंप से सैन्य कार्रवाई टालने का किया अनुरोध

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सार्वजनिक रूप से अपील की है कि वे एक अहम समय-सीमा को दो हफ्ते के लिए बढ़ा दें, ताकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बातचीत का रास्ता खुला रह सके

देशबन्धु 8 Apr 2026 10:21 am

अमेरिका-भारत व्यापारिक सहयोग में एआई साझेदारी और निवेश बढ़ाने पर जोर

भारत में संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने यूनाइटेड स्टेट्स सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स हॉवर्ड लुटनिक के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें अमेरिका-भारत व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा की गई

देशबन्धु 8 Apr 2026 8:50 am

अफगानिस्तान में बारिश का कहर, दीवार और छत गिरने से कई लोगों की मौत

अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के बाद एक दीवार गिरने से तीन महिलाओं की मौत हो गई और दो बच्चे घायल हो गए

देशबन्धु 8 Apr 2026 8:20 am

इस्तीफा देने वाले ट्रंप के अधिकारी की सलाह, 'ईरान नहीं अमेरिका खतरे में, सभ्यता मिटाने से इकबाल बुलंद नहीं होगा'

'जमीर को गवारा नहीं' कह कर शीर्ष पद से इस्तीफा देने वाले जो केंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को गैर जरूरी और हलका करार दिया है

देशबन्धु 8 Apr 2026 5:40 am

असम में हिमंता आगे, 90 सीटें जीत सकता है NDA:कांग्रेस को 15-20 सीटों के आसार, मियां मुस्लिम से ज्यादा महिला फैक्टर मजबूत

असम में विधानसभा की 126 सीटों पर कल 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। दैनिक भास्कर असम के एक छोर बांग्लादेश बॉर्डर से दूसरे छोर अरुणाचल बॉर्डर तक पहुंचा। दो सवालों के जवाब तलाशे… जवाब के लिए आम लोगों, सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट से बात की। इससे ये 3 बातें समझ आईं… 1. असम में फिर हिमंता सरकार बन सकती है। BJP और सहयोगी पार्टियां 90 सीटों पर आगे नजर आ रही हैं। इसकी एक वजह ओरुनोडोई योजना है, जिसके तहत 60 लाख महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए। 2. कांग्रेस को 15 से 20 सीटें मिलने के आसार हैं। इसकी वजह पार्टी की कमजोर लीडरशिप है, गौरव गोगोई इकलौते पॉपुलर लीडर हैं। 3. बदरुद्दीन अजमल की AIUDF, TMC और बाकी पार्टियों को 1 से 2 सीटें तक मिल सकती हैं। इसकी वजह BJP का मजबूत होना है। परिसीमन की वजह से भी मुस्लिम वोट बैंक बंट सकता है। तीन हिस्सों में बंटा राज्य, निचले असम में सबसे ज्यादा 50 सीटेंअसम में 2016 से BJP की सरकार है। 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने तब CM रहे सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। BJP को 60 और सहयोगी पार्टियों को 15 सीटें मिली थीं। कांग्रेस गठबंधन 50 सीटों पर सिमट गया था। चुनाव के बाद BJP ने हिमंता को CM बनाया। पार्टी उनके नेतृत्व में पहली बार चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने पूर्व CM तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को कमान सौंपी है। मई 2025 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। असम तीन हिस्सों ऊपरी असम, निचला असम और बराक घाटी में बंटा है। ऊपरी असम में 46 सीटें हैं। यहां चाय बागान और असमिया पहचान सबसे बड़ा मुद्दा हैं। निचले असम में 50 सीटें हैं। बांग्लादेश बॉर्डर वाले इस इलाके में मियां मुसलमानों की आबादी ज्यादा है। बराक घाटी और आसपास के इलाके में 30 सीटें हैं। ये इलाका भाषाई और जनजातीय पहचान के लिए जाना जाता है। हमारी टीम तीनों हिस्सों में पहुंची और यहां के मुद्दे समझे। 1. हश्वती शर्मा, Gen Z उम्र: 20 साल, गुवाहाटी‘अभी सिर्फ कम्युनल पॉलिटिक्स का सीजन है। हमें नौकरी चाहिए, लेकिन सारा फोकस हिंदू-मुस्लिम पर है।’ 2. तौफीक हुसैन मियां, मुस्लिम वोटरउम्र: 29 साल, धुबरी‘मुसलमानों को निशाना बनाकर CM सिर्फ अपनी कुर्सी बचा रहे हैं। हम स्कूल-अस्पताल के नाम पर वोट देंगे।’ 3. कृष्णा लाल गौढ़, बुजुर्गउम्र: 75 साल, अपर असम‘हिमंता का काम अच्छा है। इस बार BJP को जीतना चाहिए। वे अच्छा काम कर रहे हैं। बस इलाके में फैक्ट्री लग जाएं, तो लोगों को काम मिले।’ एक्सपर्ट बोले- महिला वोटर BJP की सबसे बड़ी ताकत असम में 37 साल से पत्रकारिता कर रहे इकबाल अहमद कहते हैं, ‘ओरुनोडोई योजना के जरिए हिमंता सरकार ने महिलाओं के खाते में हर महीने 1250 रुपए भेजे हैं। इसका असर दिखेगा।’इकबाल के मुताबिक, ये मुद्दे भी असर करेंगे… ‘एंटी इनकम्बेंसी नहीं, ग्राउंड पर BJP मजबूत’ एक एक्सपर्ट की राय अलगपॉलिटिकल एक्सपर्ट उत्पल बोरा अलग दावा करते हैं। वे कहते हैं कि लोग मौजूदा सरकार से संतुष्ट नहीं हैं। पार्टी के पुराने नेता हिमंता से खफा हैं। वे कह रहे हैं कि जिन कांग्रेसियों पर घोटालों के आरोप थे, वही अब BJP चला रहे हैं। पार्टियां क्या कह रहीं…BJP के राज्य महासचिव और असम पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष रितुपर्णा बरुआ कहते हैं कि पार्टी जीत के लिए 100% आश्वस्त है। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल शर्मा कहते हैं कि इस बार कांग्रेस सहयोगी पार्टियों के साथ सरकार बनाएगी। …………………………असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. घर-मदरसे टूटे, हिमंता से नाराज मुस्लिम बोले- ज्यादतियां याद रखेंगे धुबरी के संतोषपुर में रहने वाले अफसर अली कपड़े की दुकान चलाते हैं। 8 जुलाई, 2025 को अफसर के अलावा 1400 और घर तोड़ दिए गए। करीब 12 हजार लोग बेघर हो गए। अफसर हिमंता पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाते हैं। कहते हैं कि मेरा घर मुस्लिम होने की वजह से तोड़ा गया। और ऐसा कहने वाले वे अकेले नहीं हैं। पढ़िए पूरी खबर… 2. गांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 8 Apr 2026 5:07 am

केरलम में टफ फाइट, कांग्रेस+ को 70-80 सीटों के आसार:लेफ्ट को मिल सकती हैं 60 से 70 सीटें , BJP 3 से 5 सीटों पर आगे

केरलम में 9 अप्रैल को 140 सीटों पर वोटिंग है। यहां LDF और UDF के बीच नेक टू नेक फाइट है। UDF को 70 से 80 और LDF को 60 से 70 सीटें मिल सकती हैं। BJP को 3 से 5 सीटें मिलने के आसार हैं। केरलम में वोटिंग से पहले दैनिक भास्कर ने लोगों, एक्सपर्ट और पॉलिटिकल पार्टियों से बात कर हवा का रूख जाना। ये 4 बातें समझ आईं…1. पिनराई विजयन 10 साल से CM हैं। उनके खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी है। 2. CPM में CM विजयन के बाद सेकेंड लाइन लीडरशिप की कमी है। कई लीडर BJP-कांग्रेस में शामिल हो गए। कैडर नाराज है। पार्टी लीडर्स का मानना है कि अगर मंत्री रहीं केके शैलजा को कमान मिलती, तो सत्ता में वापसी मुमकिन थी।3. कांग्रेस CM फेस पर खींचतान में फंसी रही। पार्टी राहुल गांधी के नाम पर चुनाव लड़ रही है और क्रिश्चियन-मुस्लिम के सहारे है। सबरीमाला मुद्दे पर भी सरकार को घेरकर हिंदू वोट बैंक में सेंध लगा रही है। 4. BJP लोकल बॉडी इलेक्शन में जीत के बाद भी 20 से 25 सीटों पर ही फाइट दे रही है। वोट शेयर बढ़ने और सिंगल डिजिट में सीट आने से ज्यादा की उम्मीद नहीं है। तिरुवनंतपुरम, पलक्कड़, कासरगोड और त्रिशूर में पार्टी जीत सकती है। लोग बोले- CM से खुश नहीं, उन्होंने सिर्फ केंद्र सरकार की स्कीम के नाम बदलेकोच्चि में एक चर्च के बाहर मिले जैकब कहते हैं, ‘लोग विजयन सरकार से खुश नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस इसका ज्यादा फायदा नहीं उठा पाई। वे आपस में लड़ते रहे।’ एर्नाकुलम के श्रीजेत कहते हैं ‘विजयन ने सिर्फ मोदी की स्कीम्स के नाम बदले हैं और कुछ नहीं किया। यहां हाईवे भी केंद्र सरकार ने बनवाए हैं।‘ 46 लाख कुडुंबश्री LDF की सबसे बड़ी ताकत50 साल की सुनिता तिरुवनंतपुरम में कैंटीन चलाती हैं। वे सरकार की योजना कुडुंबश्री से जुड़ी हैं। इस योजना में राज्य की 46 लाख महिलाएं शामिल हैं और विजयन सरकार की सबसे बड़ी ताकत हैं। सुनिता कहती हैं, ‘इस बार BJP अच्छी फाइट में है। तिरुवनंतपुरम में तीन सीटों पर मजबूत है। हालांकि, कुडुंबश्री की महिलाएं LDF को ही वोट देंगी।‘ तिरुवनंतपुरम के सीनियर जर्नलिस्ट अजय कुमार बताते हैं कि कुडुंबश्री की शुरुआत के बाद ज्यादातर LDF की सरकार रही है। उसने समय-समय पर फंड भी बढ़ाया है। ऐसे में कुडुंबश्री का बड़ा तबका LDF और विजयन सरकार को ही वोट करेगा। ये उनके लिए फायदे का मिशन है। एक्सपर्ट बोले- BJP का वोट शेयर बढ़ा, इससे CPM को नुकसान सीनियर जर्नलिस्ट बृजेश कुमार कहते हैं, ‘केरलम में किसे-कितनी सीटें मिलेगी, अभी कहना मुश्किल है। यहां वोटर्स आखिरी वक्त में तय करते हैं। UDF और LDF के बीच टफ फाइट है। LDF तीसरी बार सत्ता में लौट सकती है। वायनाड की सीनियर जर्नलिस्ट नीनू मोहन का कहना है, ‘केरल में पॉलिटिक्स बहुत अलग है। आखिरी 24 घंटे में पिक्चर बदल जाती है। 2021 में यही हुआ था। तब भी UDF की सरकार बन रही थी, इस बार भी हालात कुछ वैसे ही हैं।’ तिरुवंतपुरुम में केरल यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. जय प्रसाद कहते हैं, ‘BJP के लिए ये चुनाव टेस्ट केस होगा। हर सीट पर 25 से 35% मुस्लिम वोट उसके लिए चैलेंज हैं। इस बार BJP को 22 से 25% वोट शेयर मिलने की उम्मीद है। CPM के 90 से 95% कार्यकर्ता हिंदू हैं। उसे लगता है कि RSS और BJP उसके वोट छीन रही है। क्रिश्चियन कम्युनिटी करीब 18 से 20% है। इनमें BJP का सपोर्ट बढ़ा है।‘ सीनियर जर्नलिस्ट कैलाश बताते हैं, ‘BJP का वोट शेयर नेचुरली बढ़ रहा है। अभी 20% है। पार्टी को सरकार बनाने में कम से कम 10 साल और लगेंगे, लेकिन ये क्रिश्चियन वोट के बिना संभव नहीं है।‘ UDF को एंटी-इनकम्बेंसी का फायदा लेकिन बहुमत नहीं सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. धनुराज बताते हैं, ‘कई सर्वे बता रहे हैं कि इस बार माइनॉरिटी एकजुट होकर UDF को वोट करने वाली है। पिछले इलेक्शन में ये वोट LDF को मिला था। UDF पहली बार लगातार 10 साल से अपोजिशन में है। लोकल बॉडी इलेक्शन में कांग्रेस के नेतृत्व में उसे जीत मिली। जिन 5 से 7 जिलों में बड़ी जीत हुई, वहां माइनॉरिटी वोट ज्यादा है। 7 जिले हिंदू डॉमिनेंट हैं, वहां LDF और BJP जीती। कम्युनल पॉलिटिक्स की वजह से UDF का बहुमत ला पाना आसान नहीं है।‘ BJP बोली- LDF-UDF लोगों को बेवकूफ बना रहेBJP के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर कहते हैं, ‘राज्य में LDF और UDF दोनों साथ हैं। 27 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में दोनों साथ राजनीति करते हैं। यहां लोगों को भड़काने और बेवकूफ बनाने का नाटक करते हैं, इसलिए यहां BJP ही विकल्प है।‘ CPM बोली- विजयन फिर मुख्यमंत्री बनेंगेCPM के पूर्व सांसद और सीनियर लीडर सेबिस्टियन पॉल कहते हैं, ‘पिनराई विजयन तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। परफॉर्मेंस ही एक वजह है। सेकेंड लीडरशिप में पूर्व हेल्थ मिनिस्टर केके शैलजा बड़ा चेहरा हैं। UDF का दावा- 100 से ज्यादा सीटें जीतेंगे केरलम में विपक्ष के नेता वीडी. सतीशन के मुताबिक, विजयन सरकार के 12 से ज्यादा मंत्री हारने वाले हैं। वे दावा करते हैं कि UDF को 100 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। ………………केरलम चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए 1. 46 लाख कुडुंबश्री दीदियां लेफ्ट की वोटर, कैसे सेंध लगाएगी BJP केरलम सरकार की कुडुंबश्री योजना से 46 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, यानी राज्य के हर दूसरे घर में एक कुडुंबश्री मेंबर है। ये महिलाएं बिजनेस तो चलाती ही हैं, साथ में चुनाव लड़ती भी हैं और हार-जीत तय भी करती हैं। 2021 में चुनाव जीतने वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF को 48% महिलाओं ने वोट दिए थे। BJP इनमें सेंधमारी की कोशिश कर रही है। पढ़िए पूरी खबर... 2. केरलम CM की बेटी की मुस्लिम से शादी चुनावी मुद्दा, 5000 लड़कियों के कन्वर्जन का दावा केरलम चुनाव में फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ मुद्दा है, लेकिन लोग और नेता इस पर बंटे हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे BJP की प्रोपेगैंडा फिल्म बताते हुए बैन कर दिया। BJP विजयन की बेटी की मुस्लिम से शादी का मुद्दा उठाती रहती है। धर्म परिवर्तन के दावे करने वाले संगठनों का कहना है कि किरदार और किस्से अलग हो सकते हैं, लेकिन ऐसी कहानियां यहां भरी पड़ी हैं। यहां 5 हजार से ज्यादा लड़कियों को धर्म परिवर्तन किया गया है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 8 Apr 2026 5:07 am

ईरान को मिली सख़्त डेडलाइन: आज रात तक समझौते का मौका

ईरान के पास अमेर‍िका से समझौते के ल‍िए रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम, यानी भारत में बुधवार की सुबह 5:30 बजे तक) का समय है

देशबन्धु 8 Apr 2026 4:29 am

ईरान ने अपना रवैया नहीं बदला तो और भी साधन हैं, उम्‍मीद है तय समय सीमा से पहले मिलेगा जवाब: जेडी वेंस

हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा क‍ि ईरान को अब अपनी मंशाओं से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी

देशबन्धु 8 Apr 2026 4:00 am

ईरान में भारतीयों को दूतावास की सलाह, 48 घंटे तक सुरक्षित जगह पर रहें

पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी और इजरायल के हमलों के बीच ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। लोगों को अगले 48 घंटे तक बाहर जाने से बचने की सलाह दी गई है

देशबन्धु 7 Apr 2026 11:07 pm

Artemis II ने रचा इतिहास: चंद्रमा के अनदेखे हिस्से तक पहुंचा इंसान, तोड़ा Apollo 13 का 50 साल पुराना रिकॉर्ड

सोमवार को अंतरिक्षयात्री उस बिंदु तक पहुंच गए, जो मानव इतिहास में अब तक की सबसे अधिक दूरी मानी जा रही है। आने वाले घंटों में यह दूरी बढ़कर लगभग 252,760 मील तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

देशबन्धु 7 Apr 2026 11:45 am

ऊर्जा संकट से जूझ रहा पाकिस्तान: रात 8 बजे तक मॉल और बाजार बंद, सरकार ने सख्त पाबंदियां लागू कीं

नई गाइडलाइंस के तहत केवल बाजार ही नहीं, बल्कि होटल और खानपान से जुड़े व्यवसाय भी प्रभावित होंगे। रेस्टोरेंट, बेकरी, तंदूर और फूड आउटलेट को रात 10 बजे तक बंद करना होगा। मैरिज हॉल और शादी समारोहों को भी इसी समय सीमा के भीतर समाप्त करना अनिवार्य किया गया है।

देशबन्धु 7 Apr 2026 10:47 am

बड़ा हमला: IRGC के अंडरग्राउंड ठिकाने पर B-2 बॉम्बर्स की डबल स्ट्राइक, कई कमांडरों के मारे जाने की आशंका

रिपोर्ट के अनुसार, यह ऑपरेशन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के निर्देश पर अंजाम दिया गया। कई B-2 बॉम्बर विमानों ने अमेरिका के व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से उड़ान भरी और करीब 36 घंटे की लंबी यात्रा के बाद तेहरान में अपने लक्ष्य पर हमला किया।

देशबन्धु 7 Apr 2026 9:43 am

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने आईआरजीसी खुफिया प्रमुख की हत्या की निंदा की

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने आईआरजीसी के एक वरिष्ठ जनरल की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ईरानी नेतृत्व के खिलाफ हत्याएं और अपराध देश की प्रगति को नहीं रोकेंगे

देशबन्धु 7 Apr 2026 9:40 am

ईरानी बुनियादी ढांचों पर हमले की अमेरिकी धमकी से संयुक्त राष्ट्र चिंतित; प्रवक्ता ने जताई आपत्ति

संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका के उस बयान पर चिंता जताई है, जिसमें ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले की धमकी दी गई थी। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की भाषा को लेकर संगठन चिंतित है

देशबन्धु 7 Apr 2026 8:36 am

ईरान ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकराया, 'स्थायी समाधान' के लिए 10-सूत्रीय योजना पेश की

ईरान ने अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और कहा है कि वह संघर्ष का स्थायी अंत चाहता है

देशबन्धु 7 Apr 2026 8:34 am

पिता की लाश का सिर काटकर दफन करता है बेटा:शादी से पहले 3 महीने प्रेग्नेट होना जरूरी; शिकारी जनजाति वांचों की कहानी

एक पहाड़ी पर सुबह 8 बजे का वक्त। एक बूढ़े की लाश पड़ी है। वह पूरी तरह काली पड़ चुकी है। लाश के बगल में 24-25 साल का लड़का घुटने के बल बैठा है। फूट-फूटकर रो रहा है। तभी कुछ महिलाएं आईं और लाश के पास बैठ गईं। एक खास तरह के पेड़ के पत्तों से लाश का चेहरा साफ करने लगीं। उनमें से एक महिला ने दूर खड़े बुजुर्ग को कुछ इशारा किया। बुजुर्ग ने उस लड़के की तरफ एक धारदार छोटी तलवार बढ़ाई। लड़के ने कांपते हाथों से तलवार थामी और धीरे-धीरे लाश का गला रेतने लगा। कुछ ही देर में लाश का सिर धड़ से अलग हो गया। ये लाश लड़के के पिता की है, जो डेढ़ महीने से इस पहाड़ी पर पड़ी थी। दरअसल, ये बेटा अपने पिता का अंतिम संस्कार कर रहा है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं वांचो जनजाति की कहानी। अरुणाचल प्रदेश की लोंगडिंग इलाके में बसी इस जनजाति की आबादी सिर्फ 40 हजार है… लौटते हैं अंतिम संस्कार की प्रथा पर। बूढ़े की लाश का गला कटते ही दो शख्स मटकेनुमा मिट्टी का बर्तन लेकर आए। उन्होंने कटे हुए सिर को हाथ में उठाया और गौर से देखने लगे, जैसे नाप रहे हों। फिर मिट्टी के बर्तन को औंधा करके उसे करीने से पत्थर से तोड़ने लगे, ताकि सिर उसमें समा जाए। फिर उसी बर्तन में सिर डालकर लड़के को थमा दिया। धड़ जस का तस यहीं पड़ा रहा। सभी लोग सिर को लेकर पहाड़ी के दूसरे हिस्से की तरफ चल दिए। वहां जगह-जगह पर छोटे-छोटे मिट्टी के चबूतरे जैसे बने हैं। सभी पर वैसे ही मटके रखे हैं जैसे मटके में सिर है। लड़का एक खाली चबूतरे की तरफ बढ़ा और मटका रख दिया। फिर मटके के ऊपर पत्थर रख दिया। भीड़ से एक शख्स शराब की बोतल और खाना लेकर आया और लड़के की ओर बढ़ दिया। लड़के ने कुछ बुदबुदाते हुए शराब और खाना इसी चबूतरे पर चढ़ा दिया। उधर, बिना सिर की लाश वहीं पड़ी रही। धीरे-धीरे सभी लोग अपने गांव लौट गए। वांचो लोगों में प्राकृतिक मौत होने पर लाश को इसी तरह डेढ़ महीने के लिए पहाड़ी पर छोड़ देते हैं। कोई जानवर लाश को न खा जाए इसलिए बारी-बारी से लोग रखवाली करते हैं। फिर सिर काटकर अंतिम संस्कार किया जाता है। दिलचस्प बात ये है कि इस तरह से अंतिम संस्कार सिर्फ प्राकृतिक मौत होने पर ही करते हैं। दुर्घटना या हत्या होने पर ये लोग लाश को पहाड़ी पर ही फेंक देते हैं। जिसे जानवर नोच-नोचकर खा जाते हैं। दरअसल, इनका मानना है कि आत्मा सिर में बसती है। इसलिए सिर को सुरक्षित रखा जाता है, ताकि पूर्वजों के दर्शन होते रहें। जब कोई शख्स अप्राकृतिक मौत मरता है तो उसकी आत्मा उसी वक्त निकल जाती है। वांचो लोग जिस तलवार से लाश का गला रेतते हैं, उसे चंग कहते हैं। जहां लाश का धड़ पड़ा रहता है, उसे जुकथो कहते हैं। जिस जगह पर मिट्टी का प्लेटफॉर्म बनाकर सिर रखा जाता है वो जालो है। वांचो लोग अरुणाचल प्रदेश की पटकाई की पहाड़ियों में बसते हैं। ये जगह लोंगडिंग जिले में आती है जो गुवाहाटी से 350 किलोमीटर दूर है। इनको जानने मैं पहुंची हूं पटकाई की पहाड़ियों पर। मेरे साथ हैं इस समुदाय को जानने वाले एंथ्रोपोलोजिस्ट नोट्‌टोई वांगसाहम। जो लोंगडिंग से ही साथ आए हैं। दोपहर के 12 बजे थे। हम पहाड़ी से पैदल ही गांव की तरफ बढ़ने लगे। रास्ते में नोट्‌टोई ने बताया कि- ‘वांचो लोगों में आज भी राजा का शासन है। इनसे मिलने के लिए राजा की इजाजत जरूरी है। इसलिए हमें सबसे पहले राजा के सामने जाकर हाजिरी लगानी होगी। तभी बस्ती में घुस पाएंगी।’ ‘कौन है यहां के राजा?’ मैंने पूछा ‘पहले तो जितवंग वाहम यहां के राजा थे लेकिन, चार साल पहले उनकी मौत हो गई। अब रानी का राज है।’ ‘तो राजा की जगह रानी से इजाजत लेनी पड़ती है?’ ‘हां, अभी तो रानी ही सब देखती हैं लेकिन, उनके बेटे को अब लोग राजा कहने लगे हैं।’ अब तक हम 5 किलोमीटर चल चुके थे। कुछ ही दूर बांस से बने घर नजर आने लगे। किसी की टीन की छत चमक रही थी तो किसी की छत यहां के स्थानीय पेड़ टोको लीफ से बनी थी। यहां सिर्फ एक घर ऐसा दिखा जो आधा सीमेंट और आधा बांस से बना है। ये घर काफी बड़ा है। नोट्‌टोई ने बताया कि ‘यही रानी का घर है।’ जैसे ही रानी के घर के सामने पहुंचे, एक महिला हमें अंदर ले गई। नजरें घुमाकर देखा तो दीवारों पर जानवरों की खाल और खोपड़ियां टंगी हैं। मैंने नोट्‌टोई से इशारे में पूछा तो कहने लगे- ‘पहले के समय में वांचो जंगली जानवरों का शिकार करते थे। ये ऐसे ही शिकार किए हुए जानवरों की खाल हैं। नोट्‌टोई बताते हैं कि ‘वांचो लोग कबीले की शान बढ़ाने के लिए दुश्मनों के सिर, बाजू और टांग काटकर ले आते थे। हर वांचो बस्ती में म्यूजियम की तरह एक जगह होती थी, जिसे ‘साउतुंग’ कहते थे। यहीं दुश्मन के कटे हुए सिर सजाए जाते थे। साल में एक बार उन्हें शराब और खाना चढ़ाकर पूजा भी की जाती थी। अब यहां लोग क्रिश्चियैनिटी को मानने लगे हैं। इसलिए धीरे-धीरे ये सब बंद हो गया और साउतुंग भी खत्म हो गए। अब सिर्फ जानवरों के सिर और खाल बची हैं।’ हम लोग ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठकर रानी सेंगम वांग्चा वांचो का इंतजार करने लगे। दीवार पर चीते की खाल टंगी है। पास ही बंदूकें और जंगली सुअर के सिर भी। तभी एक महिला कमरे में आती हैं, सफेद रंग की शॉर्ट कुर्ती और नीले रंग की शॉलनुमा लॉन्ग स्कर्ट लपेटे। गले में चांदी के सिक्कों की माला और माथे पर रंग-बिरंगे मोतियों से बनी पट्टी पहने। पहनावा देखकर पता चल रहा है कि यही रानी हैं। मैंने रानी से सबसे पहले उनके कपड़ों के बारे में पूछा, वो बताने लगीं कि- ‘ये शॉलनुमा स्कर्ट हमारी पारंपरिक पोषाक है। इसे नीथो कहते हैं।’ मैंने दीवार पर टंगे जंगली सुअर के सिर को देखकर पूछा, ‘इसका शिकार राजा ने किया था?’ रानी बताती हैं कि- ‘बस्ती में जब भी कोई जंगली सुअर का शिकार करता है, तो उसका सिर और रीढ़ की हड्डी के पास का मांस हमारे घर भेजते हैं। बाकि जानवरों का केवल सिर ही राजा के घर भेजते हैं। उसके बाद ही वो खुद खा सकते हैं। अगर कोई ऐसा नहीं करता तो उसे बस्ती से निकाल दिया जाता है।’ ‘रीढ़ की हड्डी का मांस?’ ‘हां, इसे हम घरों में लटकाकर सुखाते हैं और जब मन हो पका लेते हैं।’ ये कहते हुए रानी मुझे रसोई में ले गईं। यहां एक लकड़ी से सहारे छत से मांस के लंबे और चपटे टुकड़े लटक रहे हैं। कुछ तो एकदम ताजे हैं लेकिन कुछ सूख हुए। यहीं नोट्‌टोई बताते हैं कि ‘वांचो की हर बस्ती का एक राजा होता है। बस्तियों के राजा मिलकर एक चीफ चुनते हैं, जो वांचो लोगों से जुड़े सभी अहम फैसले लेता है।’ आखिर में रानी से बस्ती में जाने की इजाजत लेते हुए हम यहां से निकल पड़े। टीन की छत वाले घर के बाहर एक शख्स बैठा है। उसने गले में मोतियों की माला और किसी जानवर की खोपड़ी जैसा कुछ पहना है। नोट्‌टोई उनसे मिलवाने ले गए। शख्स का नाम है एल जेवंग वांगसु। मैंने सबसे पहले उनके पहनावे के बारे में पूछा, वो बोले- ‘ये बंदर का सिर है। इसका कपाल लकड़ी से बना है, लेकिन इसपर चढ़ी चमड़ी असली बंदर की है। इसके अलावा माला में जानवरों के नाखून और दांत भी पिरोए हुए हैं। सिर पर जो पहना है वो भालू के बाल से बना है। इसे खोहम कहते हैं।’ जेवंग की पत्नी मंगखाऊ वांगसु अंदर आने के लिए कहती हैं। घुसते ही मछली पकने की महक आने लगी। नजरें घुमाकर देखा तो फर्श से लेकर दीवारें तक सब बांस का बना है। छत से मांस के लंबे, चपटे टुकड़े लटक रहे हैं। कमरे के एक कोने में साड़ी का झूला बंधा है। महिलाओं के शरीर पर गुदे टैटू से पता चलती है उम्र मंगखाऊ के पैर के निचले हिस्से में बना टैटू देखकर मैंने उसका मतलब पूछा। वो कहने लगीं- ‘टैटू हम वांचो महिलाओं की पहचान है। इससे महिलाओं की उम्र का पता लगता है। जब लड़की किशोरावस्था में कदम रखती है तो नाभि के पास टैटू बनाया जाता है। पैर के निचले हिस्से पर टैटू का मतलब वो जवान हो गई यानी रजस्वला हो चुकी है। जांघ पर बने टैटू का मतलब है कि अब लड़की जीवनसाथी चुन सकती है। महिलाओं के छाती पर बने टैटू का मतलब है कि वे शादीशुदा हैं।’ ‘लड़कियां अपना जीवनसाथी कैसे चुनती हैं?’ मैंने पूछा वो बताने लगीं- ‘ज्यादातर प्रेम विवाह होते हैं। लड़की को जब कोई लड़का पसंद आता है तो उसे एक झुमका देती है। जिसे माएपो कहते हैं। यही विवाह का प्रस्ताव माना जाता है। इसके बाद लड़के वाले, लड़की के घर जाते हैं। उन्हें- पान, तंबाकू और स्थानीय पेड़ की छाल पेनखोन और केकखोन देते हैं। इससे होंठ लाल हो जाते हैं। फिर लड़का-लड़की एकदूसरे को माला पहनाते हैं। यह रस्म ‘हिंगहो एलाई’ कही जाती है।’ लड़की की मां को घर बुलाकर शराब परोसते हैं लड़के वाले जेवांग बताते हैं कि ‘कुछ दिन बाद लड़के वाले लड़की की मां को घर बुलाते हैं। मेहमाननवाजी करते हैं। वहां हमारी खास शराब यानी ‘जू’ के साथ मछली और तरह-तरह के जानवरों का मांस परोसा जाता हैं। लड़की की मां वापस घर जाकर बेटी की शादी तय होने का ऐलान करती है। फिर लड़के की मां को बुलाकर यही रस्म लड़की वाले निभाते हैं।’ बीच में ही जेवांग की पत्नी मंगखाऊ, चाय ले आईं। ये लाल रंग की है। बिना दूध वाली। ये जड़ी-बूटी से बनी है, इसे खलप कहते हैं। स्वाद थोड़ा कड़वा सा है, ब्लैक टी जैसा। रिश्ता तय होने के बाद लड़का-लड़की बना सकते हैं संबंध जेवांग शादी की परंपरा के बारे में बताते हैं- ‘जब दोनों तरफ से रिश्ता तय होने का ऐलान होता है, तब ‘टोईकट’ परंपरा होती है। इसमें लड़के वाले लड़की और उसकी सहेलियों को घर बुलाते हैं। लड़का सबको अपने खेत दिखाने ले जाता है। वहां नाच-गाना भी होता है। फिर लड़का सभी लड़कियों को कपड़े और गहने तोहफे में देता है। इसके बाद से लड़का-लड़की जब चाहें मिल सकते हैं। एक-दूसरे के घर जा सकते हैं। अगर घर पर न मिलना हो, तो बस्ती के कम्युनिटी हॉल में भी जा सकते हैं। जिसे ‘जिप्सम नाइलो’ कहते हैं। यहां कपल्स जब चाहें आ सकते हैं और संबंध भी बना सकते हैं। प्रेग्नेंट होने के बाद मिलता है बहू का दर्जा जब लड़की प्रेग्नेंट हो जाती है तो तीसरे महीने लड़के के घर जाती है। तब खोकम की रस्म होती है, यानी लड़की के छाती के बीचों-बीच ‘खाहू’ नाम का टैटू बनाया जाता है। फिर पूजा होती है, जिसमें अंडा, अदरक और शराब चढ़ाई जाती है। इस रस्म के बाद पुजारी ऐलान करता है कि ‘ये लड़की आज से लड़के के परिवार का हिस्सा है।’ इसके बाद भैंसा या बड़ा सुअर काटा जाता है। जानवर की खाल के छोटे-छोटे टुकड़े साफ कर के लड़की के घर भेज देते हैं। जिसे पूरे गांव में बांटा जाता है, जैसे-शादी के बाद मिठाई बांटी जाती है। खोकम के बाद रिश्ते को तोड़ना आसान नहीं होता। अगर पति या पत्नी में से कोई अलग होना चाहे, तो उसे कीमत चुकानी पड़ती है- कभी सूअर देकर तो कभी जमीन देकर।’ लकड़ी की तलवार से काटी जाती है बच्चे की नाल मेरे साथी नोट्टोई बच्चे के जन्म से जुड़ी परंपरा के बारे में बताते हैं कि- बच्चे के जन्म के समय एक बुजुर्ग महिला को बुलाया जाता है। वो बांस से बनी चाकू से नाल काटती है, फिर उसे ओनोक नाम के पेड़ से बांध देती है। बड़ी बेटी को गहने और बड़े बेटे को मिलती है जमीन जायदाद वांचो लोगों में घर की बागडोर महिलाओं के हाथ में होती है। मां के गहने सबसे बड़ी बेटी को मिलते हैं। जमीन-जायदाद सबसे बड़े बेटे के हिस्से जाती है। बाकी बच्चों को कुछ भी नहीं दिया जाता है। हां, अगर परिवार थोड़ा संपन्न हो, तो उन्हें भी थोड़ा-बहुत हिस्सा दे दिया जाता है। यहां आज भी शिकार की परंपरा है। लोग कभी समूह में, तो कभी अकेले शिकार पर निकलते हैं। शिकार के बाद जानवर की पूजा होती है। फिर उसका सिर राजा को दिया जाता है और बाकी मांस पूरी बस्ती में बांट दिया जाता है। यहां से निकलकर हम दूसरी वांचो बस्ती की ओर गए। यहां एक खास तरह की पोषाक में कुछ मर्द खड़े हैं। सभी के सिर पर बांस की टोपी है। यह हॉर्नबिल पक्षी के पंखों से सजी है। इसमें भालू, बंदर, बकरी के बाल लगे हैं। गले में मोतियों की माला है, जिसमें जंगली सूअर के दांत, भालू के नाखून, शेर के दांत या बंदर की चमड़ी से बनी चीजें लगी हैं। शरीर के निचले हिस्से में लंगोट की तरह कुछ पहना हुआ है, जिससे केवल प्राइवेट पार्ट ढका है। परेशानी दूर करने के लिए पुजारी चढ़ाता है बलि वांचो लोग आत्माओं में विश्वास करते हैं। अगर किसी के साथ कुछ बुरा होता है तो पुजारी को बताते हैं। फिर वो सपना देखकर समस्या का कारण बताता है। कई बार पुजारी को घर भी बुलाया जाता है। रास्ते में उसको शराब पिलाई जाती है। परेशानी दूर करने के लिए कुत्ता, बकरी या मुर्गा-मुर्गी की बलि दी जाती है। वांचो लोगों के पास खेती ही कमाई का कोई साधन नहीं है। ये लोग धान के अलावा कई तरह के मिलेट की खेती करते हैं। जैसे- मीखा, कामई, पोलोम, कच्चू, मनसा, जोक, विक्वप, विकुअत, बाह और शिनेई। बच्चों के लिए प्राइमरी स्कूल तो गांव में ही लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए लोंगडिंग जाना पड़ता है। इनके ज्यादातर बच्चे सरकारी नौकरी में हैं। कई घरों के बच्चे आर्मी में भी हैं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए ऐसे ही अनोखे मैतेई लोगों की कहानी…. ---------------------------------------------------- 1- 100 किलो का पत्थर उठाया, लड़की बोली- तुमसे करूंगी शादी:औरतें 5 पति भी रख सकती हैं, 1800 अनोखे ‘टोडा’ लोगों की कहानी सुबह की हल्की धुंध अभी पहाड़ियों से हटी नहीं है। घास पर जमी ओस चमक रही है। मैदान के किनारे जंगल में एक पुराने पेड़ के नीचे लोग जमा हुए हैं। इसी पेड़ के नीचे एक बड़ा इम्तिहान होने वाला है। पूरी कहानी यहां पढ़ें 2- शरीर के ऊपरी हिस्से पर कपड़े नहीं पहनतीं बोंडा महिलाएं:शादी ठुकराने पर लड़कीवालों का घर तोड़ देते हैं, मृत्युभोज में खाते हैं गाय का मांस सुबह करीब 10 बजे का वक्त। मिट्टी से लिपा-पुता एक कच्चा घर। बाहर सिर मुंडाए दो महिलाएं बैठी हैं। उम्र करीब 38-40 साल। ऊपरी बदन लगभग नंगा। बाकी शरीर पर नाम मात्र के कपड़े। छाती छिपाने के लिए मोतियों और कौड़ियों से बनी मालाएं। पूरी कहानी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 7 Apr 2026 5:11 am

जब असमी उग्रवादियों को फिरौती देने में फंसी टाटा टी:नामी उद्योगपतियों के टेप्स लीक हुए; आज भी 45 सीटों पर चाय बागानों का असर

साल 1997 और महीना जून का। जगह थी नई दिल्ली का इंटरनेशनल एयरपोर्ट। एक फ्लाइट लैंड की, जिस पर लिखा था- ‘रॉयल भूटान एयरलाइन्स’। ये फ्लाइट भूटान की राजधानी थिंपू से आई थी। फ्लाइट से 3 लोग उतरे- प्रेग्नेंट महिला, उसकी सहेली और एक आदमी, जो आर्मी अफसर जैसा दिखता था। एयरपोर्ट पर टैक्सी उनका इंतजार कर रही थी। तीनों टैक्सी में बैठकर एक होटल पहुंचे। वहां बोंटी बरुआ के नाम पर उनके लिए एक कमरा बुक था। कुछ देर कमरे में आराम करने के बाद तीनों बाजार घूमने निकल गए। बाजार में उनसे एक शख्स मिला। उसने इन तीनों से कहा, ‘आपके मुंबई जाने का इंतजाम हो गया है। वहां के जसलोक अस्पताल में इलाज के लिए बात हो गई है।’ जब चारों आपस में बात कर रहे थे, तब एक पांचवां व्यक्ति सुन रहा था। वो था- एक पुलिस अफसर, जो सिविल ड्रेस में प्रेग्नेंट महिला और उसके साथियों का पीछा कर रहा था। ये प्रेग्नेंट महिला कोई और नहीं, बल्कि एक उग्रवादी थी, जो यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम, यानी ULFA की मेंबर थी। नाम था- प्रणति डेका। ULFA एक उग्रवादी संगठन था, जो बंदूक के दम पर असम से बंगाली और हिंदी भाषी लोगों को भगा रहा था। असम को आजाद कराने के लिए सैकड़ों लोगों की हत्या कर चुका था। तब असम के हालात भी उग्रवाद झेल रहे पंजाब जैसे हो गए थे। इनकी दहशत का आलम ये था कि असम के लोगों को सरकार के अलावा ULFA को भी टैक्स देना पड़ता था। दरअसल, उग्रवादी प्रणति अपने दो साथियों के साथ इलाज कराने दिल्ली पहुंची थी। जो शख्स बाजार में इनसे मिला था, वो टाटा टी कंपनी के सीनियर वेलफेयर अफसर डॉ. ब्रोजेन गोगोई थे। उन्होंने टाटा टी कंपनी की तरफ से महिला के इलाज, फ्लाइट और ठहरने की पूरी व्यवस्था की थी। तब सवाल उठा कि असम में दहशत फैलाने और सैकड़ों लोगों की हत्या करने वाले संगठन के उग्रवादियों के लिए आखिर टाटा जैसी देश की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी वीआईपी इंतजाम क्यों कर रही थी? दो दिन बाद यानी 9 अप्रैल को असम में वोटिंग है। आज भी असम की 126 में से 45 सीटों पर इन्हीं चाय बागानों का असर है। आज कहानी उग्रवादी संगठन ULFA और टाटा टी कंपनी से उसके रिश्ते की… ULFA का मकसद- असम की आजादी और बाहरी भगाओ साल 1971… पाकिस्तान दो टुकड़ों में बंट गया और बांग्लादेश बना। लाखों शरणार्थी असम में घुसे। असमिया बोलने वालों को डर था कि उनकी आबादी माइनॉरिटी में बदल जाएगी। 1905 के बंगाल विभाजन और 1947 के भारत-पाकिस्तान बंटवारे के चलते असम में पहले से ही भारी संख्या में शरणार्थी थे। इसे रोकने के नाम पर अप्रैल 1979 में असम के शिवसागर जिले में कुछ छात्रों ने एक हथियारबंद संगठन शुरू किया। नाम रखा- यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम, यानी ULFA. शुरुआत में तो इन्होंने जैसे-तैसे हथियार जुटाए, लेकिन 1990 के दशक आते-आते पूरे असम में दहशत फैल गई। ULFA का नारा था- 'आजाद असम' और 'बाहरी भगाओ'। ULFA का तिनसुकिया से लेकर डिब्रूगढ़ तक दहशत फैल चुकी थी। ये पूरब के वो इलाके हैं, जहां से असम के चाय बागानों की शुरुआत होती है और पश्चिम तक जाती है। ULFA वाले यूपी, बिहार से आए हिंदी भाषी मजदूरों को कतार में खड़ा करके मार देते थे। इस तरह करीब 300 लोग मारे जा चुके थे। असम को बाकी देश से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 37 से गुजरने वाले ट्रकों से ULFA पैसा वसूलता था। जो नहीं देता, तो उसका ट्रक जला दिया जाता या ड्राइवर गायब हो जाता। कुल मिलाकर ULFA असम में समानांतर सरकार चला रहा था। आगे चलकर ULFA को हथियारों और पैसे की जरूरत पड़ने लगी। ऐसे में ULFA ने पैसा उगाहने का फैसला किया। फरमान निकाला कि हर एक किलो चाय पर एक रुपए की फिरौती दी जाए और ऐसा नहीं करने वाला अंजाम के लिए तैयार रहे। दरअसल, उस वक्त दुनिया की 17% चाय असम में उगती थी। ULFA के आतंक को देखते हुए असम की छोटी चाय कंपनियां फिरौती देने के लिए तैयार हो गईं। लेकिन टाटा टी ने फिरौती देने से मना कर दिया। उसकी जगह अस्पताल, स्कूल वैगरह बनाने की पेशकश की। टसल के बावजूद जैसे-तैसे काम चलता रहा। मैनेजर के अपहरण के बाद टाटा टी ने घुटने टेके साल 1993… टाटा टी के रीजनल मैनेजर बोलिन बोर्डोलोई का अपहरण हो गया। करीब एक साल तक उनकी रिहाई नहीं हो पाई। ये काम ULFA का नहीं, बल्कि नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड यानी NDFB का था। ये संगठन 1986 में असम की बोडो जनजाति को बचाने के लिए बना था, लेकिन धीरे-धीरे इसने भी आतंक फैलाना शुरू कर दिया था। NDFB ने टाटा टी से बोलिन की रिहाई के लिए एक करोड़ की फिरौती मांगी। टाटा टी ने अपने मैनेजर को बचाने के लिए ऐसा किया भी। लेकिन इससे ULFA भड़क गया। उसने टाटा पर दबाव डाला और कहा कि NDFB को पैसा दे रहे हो, तो हमें क्यों नहीं दे रहे? कंपनी ने फिर से वही ऑफर दिया और कहा कि डिब्रुगढ़ जिले के चाबुआ में चाय बागान के कर्मचारियों के लिए हम एक अस्पताल बनाएंगे। लेकिन ULFA राजी नहीं हुआ। 1995 में ULFA के को-फाउंडर परेश बरुआ ने टाटा टी के मैनेजिंग डायरेक्टर आरके कृष्ण कुमार को एक खत लिखा और मांग रखी- ‘हमें 100 वाकी टॉकी चाहिए।’ अगले साल असम में विधानसभा चुनाव होने थे। कंपनी को लग रहा था कि असम गण परिषद यानी AGP चुनाव जीत सकती है और ये पार्टी भी असम को शरणार्थियों से बचाने के लिए बनी है। पहले भी 1985-90 तक AGP की ही सरकार थी। सीनियर जर्नलिस्ट राजीव भट्टाचार्य अपनी किताब ‘ULFA-द मिराज ऑफ डॉन’ में लिखते हैं, ‘AGP सरकार के दौर में ULFA जैसे उग्र गुटों की जड़ें गहरी हुई थीं। टाटा टी को लगता था कि AGP सरकार का रवैया ULFA पर नरम रह सकता है और उस पर लगा बैन भी हट सकता है। ऐसे में ULFA की मांगों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।’ इसके अलावा टाटा टी का ज्यादातर चाय कारोबार असम से ही होता था। यहां उसके 70 से ज्यादा चाय बगान थे। 150 साल पुराना चाय कारोबार का इकोसिस्टम यहां था। ऐसे में टाटा टी कहीं और नहीं जा सकती थी। इन्हीं वजहों के चलते टाटा टी राज्य सरकार के पास गुहार लगाने पहुंची। कंपनी ने ULFA की चिट्ठियां असम सरकार को दीं। तब के मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया ने कंपनी को ULFA से दूर रहने को कहा, लेकिन इतने में चुनाव आ गया। कंपनी का डर भी सच हो गया। 1996 में सरकार बदल गई और प्रफुल्ल कुमार महंत की पार्टी AGP सत्ता पर काबिज हुई। टाटा ने बैंकॉक में ULFA से मीटिंग की AGP की सरकार बनने के बाद ULFA के को-फाउंडर परेश बरुआ ने टाटा टी कंपनी को बैंकॉक में मीटिंग के लिए न्यौता भेजा। कंपनी मीटिंग के लिए राजी हो गई, लेकिन इसकी तैयारी में एक साल लग गए। दरअसल, दिसंबर 1995 में ULFA ने टाटा टी कंपनी से 100 पेयर वॉकी-टॉकी की मांग की। कंपनी पहले ही उल्फा पर भारी-भरकम पैसे खर्च कर चुकी थी। ऐसे में अब कंपनी ने असम के गृह सचिव को एक चिट्ठी लिखी और पूरी बात बता दी, पर सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया। तब कंपनी ने दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी की मदद ली। IB के एडिशनल डायरेक्टर रतन सहगल और टाटा टी कंपनी की मीटिंग हुई। रतन सहगल ने कंपनी से कहा कि वो बैंकॉक में ULFA से मीटिंग करे। साथ ही हिदायत भी दी कि वो ULFA को ना तो कैश दे ना ही कोई इक्विपमेंट। सबसे जरूरी बात- वो इसकी जानकारी राज्य सरकार को भी ना दे। 25-26 मई 1997 को बैंकॉक में मीटिंग हुई। मीटिंग में कंपनी की तरफ से चार अधिकारी शामिल हुए। इनमें सीनियर वेलफेयर अफसर डॉ. ब्रोजेन गोगोई भी थे। कंपनी ने ULFA की 6 मांगें मान लीं जैसे- अस्पताल बनवाना, युवाओं को ट्रेनिंग देना और ULFA के लोगों के असम से बाहर इलाज का इंतजाम करना। एक मुखबिरी से टाटा और ULFA के खेल का खुलासा हुआ अब लौटते हैं उस कहानी पर जिसका जिक्र हमने शुरुआत में किया है। बैंकॉक की मीटिंग के तुरंत बाद, मई 1997 की बात है। भूटान की राजधानी थिंपू में एक मीटिंग हुई। इसमें तय हुआ कि ULFA के फाइनेंस सेक्रेटरी चित्रबान हजारिका की पत्नी प्रणति का इलाज दिल्ली और मुंबई में कराया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी ULFA के फणिंद्र मेधी को दी गई। आर्मी अफसर जैसा दिखने वाला मेधी, प्रणति और उसकी सहयोगी मृदुला चांगमाई को लेकर दिल्ली पहुंचा। तीनों होटल में ठहरे, जहां टाटा कंपनी की तरफ से डॉ. ब्रोजेन गोगोई उनसे मिलने आए। गोगोई ने कहा कि मुंबई में इलाज के इंतजाम में कुछ समय लगेगा। प्रणति, मेधी और मृदुला उत्तम नगर में एक मकान किराए पर लेकर रहने लगे। कुछ दिन बाद गोगोई फिर उनसे मिले। गोगोई ने बताया कि मुंबई जाने की व्यवस्था हो गई है। फिर तीनों फ्लाइट से मुंबई रवाना हुए। गोगोई ने ही उन्हें रिसीव किया और जसलोक अस्पताल ले गए। पहली जांच के बाद दो महीने बाद फिर बुलाया गया। इसके बाद वे दिल्ली लौट गए। तीनों अगले दो महीने दिल्ली में किराए के मकान में रहे। इस बीच मेधी एक दिन के लिए गुवाहाटी आया। वो उल्फा के मेंबर मुन्ना मिश्रा से मिला। बातचीत में मेधी ने मुन्ना को बता दिया कि वह भूटान से दिल्ली और मुंबई का सफर क्यों कर रहा था। मेधी से यहीं गलती हो गई। दरअसल, कुछ महीने पहले मुन्ना असम पुलिस का मुखबिर बन गया था और ये बात मेधी को नहीं पता थी। जब तक मेधी वापस दिल्ली पहुंचा, तब तक मुन्ना ने पुलिस को सब बता दिया। पुलिस ने दिल्ली के होटल, उत्तम नगर के घर से लेकर मुंबई के जसलोक अस्पताल तक नजर रखना शुरू कर दिया। गोगोई भी उनकी नजर में आ गए। अगस्त के महीने में प्रणति ने एक बेटे को जन्म दिया। 23 अगस्त को बच्चे के साथ तीनों मुंबई के सांता क्रूज एयरपोर्ट पर दिल्ली की फ्लाइट पकड़ने पहुंचे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि पुलिस उनका इंतजार कर रही थी। पुलिस ने मौका पाते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ के लिए गुवाहाटी ले आई। धीरे-धीरे पुलिस ने तमाम सबूत जुटा लिए। टाटा के खर्च का हिसाब, होटलों और अस्पताल को लिखे लेटर जमा कर लिए। टाटा टी के 3 अधिकारियों से भी पूछताछ की। वहीं डॉ. ब्रोजेन गोगोई फरार थे। दरअसल, मुन्ना मिश्रा की मुखबरी से पहले ही असम पुलिस को बैंकॉक में हुई मीटिंग की भनक पड़ चुकी थी। वहीं असम के मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत को मलाल था कि टाटा ग्रुप ने चुनाव में भरपूर चंदा नहीं दिया, उल्टे वो ULFA का खर्च उठाता रहा। 7 सितंबर 1997 को असम के DGP, के ऋषिकेशन, ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने दावा किया कि टाटा ग्रुप की कंपनी ‘टाटा टी’ ULFA को फंडिंग कर रही थी। इस खबर के बाद असम से लेकर दिल्ली-मुंबई तक हड़कंप मच गया। टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा से लेकर केंद्र की इंद्र कुमार गुजराल सरकार तक चौंक गई। टाटा टेप्स लीक हुए, फिर भी मामला दब गया 12 सितंबर 1997 को टाटा ग्रुप ने प्रेस नोट जारी कर सारे आरोपों को खारिज कर दिया। टाटा ने बताया उसने IB डायरेक्टर को ULFA से डील के बारे में सबकुछ बता दिया था। किताब ‘ULFA-द मिराज ऑफ डॉन’ के मुताबिक, असम के डीजीपी को केंद्र से गृह सचिव का फोन आया कि इस मामले को वे ज्यादा तूल न दें। टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने भी दिल्ली में मुख्यमंत्री महंत से मुलाकात की और बताया कि प्रणति का मामला स्थानीय स्तर की चूक के अलावा और कुछ नहीं है। अक्टूबर 1997 में मीडिया में कुछ कॉलिंग टेप्स जस के तस छप गए। इनमें कॉर्पोरेट जगत के दिग्गजों की फोन पर की गई बातचीत थी। बॉम्बे डाइंग के चेयरमैन नुस्ली वाडिया का फोन उस वक्त टैप था। इन कॉलिगं टेप्स में वाडिया टाटा टी को बचाने के लिए कई लोगों से बात करते पकड़े गए, जिनमें रतन टाटा, महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी के चेयरमैन केशब महिंद्रा, सांसद और उद्योगपति जयंत मल्होत्रा और फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ जैसे नाम शामिल थे। मीडिया में ये कांड ‘टाटा टेप्स’ के नाम से मशहूर हुआ और इसी से पता चला कि टाटा ग्रुप को इस डील के बारे में पता था। रतन टाटा ने खुद गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता और गृह सचिव पद्मनाभैया से बात की। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और एच डी देवेगौड़ा से असम सरकार के साथ सुलह कराने की मदद मांगी। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु तक गुवाहाटी पहुंच गए। किताब ‘ULFA-द मिराज ऑफ डॉन’ के मुताबिक, सीएम महंत को मैसेज पहुंच गया कि वे टाटा टी से जीत चुके और उन्हें अब इस मसले को छोड़ देना चाहिए। महंत भी ज्यादा दिन ये लड़ाई नहीं लड़ना चाहते थे। इसके चलते डॉ. ब्रोजेन गोगोई के खिलाफ कोई चार्जशीट पेश नहीं की गई। तीन महीने की जेल के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। पूरा मामला दब गया। ULFA के खात्मे के लिए सरकार ने शुरू किया सुल्फा ‘असमिया बनाम बाहरी’ आज भी मुद्दा, 45 सीटों पर चाय बागानों का असर असम की राजनीति को करीब से देखने वालीं सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी बताती हैं, ‘ULFA की सोच आज भी असम राजनीति पर असर डालती है। ‘असमिया बनाम बाहरी’ के मुद्दे का चुनाव पर प्रभाव पड़ता है। क्योंकि असमिया लोगों को लगता है कि बाहरियों के आने से उनकी पहचान और संस्कृति को खतरा है।’ ***** Reference… ULFA: द मिराज ऑफ डॉन- राजीव भट्टाचार्य ----------- असम चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… ऐसा मंदिर जहां देवी का योनि रूप पूजते हैं: ‘रजस्वला’ में लाल हुए कपड़े के लिए मचती है होड़; चुनाव जीतने के लिए तंत्र-मंत्र करवा रहे नेता चारों तरफ धधकती चिताएं। इनके बीच कई तांत्रिक समाधि में बैठे साधना कर रहे हैं। सबके अपने तरीके हैं। कोई जोर-जोर से मंत्र पढ़ रहा, तो कोई ठंडी चिता पर धूनी रमाए हुए है। थोड़ी दूर दो तांत्रिक एक ही चिता पर मंत्र जाप कर रहे हैं। उनके हाव-भाव से लग रहा मानो कोई अकेले में बात कर रहा हो। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 7 Apr 2026 5:11 am

420 मौतें, उजड़ी बस्तियां; वायनाड से राहुल-प्रियंका गायब:लैंडस्लाइड पीड़ित बोले- वोट सिर्फ कांग्रेस को, 7 में से 5 सीटों पर आगे

केरल में 2 दिन बाद वोटिंग है, लेकिन वायनाड के लोगों को अपनी सांसद प्रियंका गांधी का इंतजार है। 2024 में हुए उपचुनाव में 4.1 लाख वोट से जीतीं प्रियंका गांधी चुनाव में कम एक्टिव दिखी हैं। पहली रैली 2 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम में की थी। फिर 6 अप्रैल को कन्नूर पहुंचीं। दो बार सांसद रहे राहुल गांधी केरलम में तो प्रचार कर रहे हैं, लेकिन वायनाड नहीं गए। वायनाड में दो साल पहले हुई लैंडस्लाइड में चार गांव मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा बर्बाद हो गए थे। 420 लोग मारे गए। 118 का पता ही नहीं चला। तब सांसद रहे राहुल गांधी ने पीड़ितों को 100 घर देने का वादा किया था। 19 महीने हो गए, अब तक उनकी नींव भी नहीं पड़ी। इस त्रासदी में चूरलमाला की सुनेरा के परिवार के 6 लोग मारे गए थे। सुनेरा बताती हैं कि सरकार से पैसे की मदद तो मिली, लेकिन हमारा नाम घर वाली लिस्ट में नहीं है। राहुल और प्रियंका गांधी आए थे। घर दिलाने का वादा किया था, लेकिन मिला नहीं। फिर भी हम कांग्रेस को ही वोट देंगे। केरलम की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होनी है। घर देने के वादे पर कांग्रेस और CPM आमने-सामने हैं। वायनाड लोकसभा सीट में विधानसभा की 7 सीटें हैं। 2021 में कांग्रेस के गठबंधन UDF को 4 और लेफ्ट के गठबंधन LDF को 3 सीटें मिली थीं। इस बार UDF 5 सीटों पर आगे दिख रहा है। लैंडस्लाइड से प्रभावित इलाके कलपेट्टा विधानसभा सीट में आते हैं। यहां LDF ने सहयोगी पार्टी RJD को टिकट दिया है। कांग्रेस से मौजूदा विधायक टी. सिद्दीकी चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 से वायनाड नहीं हारी कांग्रेस, सांसद प्रियंका असम की प्रभारी प्रियंका गांधी को कांग्रेस ने असम चुनाव की कमान सौंपी है। असम में केरलम के साथ 9 अप्रैल को ही वोटिंग होनी है। सीनियर जर्नलिस्ट बृजेश कुमार के मुताबिक, वायनाड में चर्चा होती है कि राहुल और प्रियंका यहां बहुत कम आते हैं। वे इसे सेफ प्लेस के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। फिर भी वायनाड में कांग्रेस का हमेशा से दबदबा रहा है। इसलिए वह इन सब बातों पर बहुत ध्यान नहीं देती। वायनाड लोकसभा सीट पर कांग्रेस 2009 के बाद कोई चुनाव नहीं हारी है। 2019 में राहुल गांधी यहां से 4.3 लाख वोट से जीते। 2024 में करीब 3.6 लाख वोट से जीत मिली। उनके सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में प्रियंका गांधी ने पहला चुनाव यहीं से लड़ा। जीत का मार्जिन 4.1 लाख, यानी राहुल की पिछली जीत से ज्यादा रहा। राहुल ने वायनाड छोड़ने के बाद यहां के लोगों के लिए लेटर लिखा था। उन्होंने लिखा कि आप मेरे परिवार का हिस्सा हैं। मैं आपके लिए हमेशा मौजूद रहूंगा। हालांकि, फिलहाल वे वायनाड से दूरी बनाए हुए हैं। 2 साल बाद भी त्रासदी से नहीं उबर पाया वायनाड, हर जगह तबाही के निशान वायनाड 2 साल पहले आई लैंडस्लाइड की त्रासदी से अब तक उबर नहीं पाया है। पीड़ित परिवारों को फिर से बसाने का काम चल रहा है। लैंडस्लाइड के बाद कांग्रेस ने पीड़ितों के लिए फंड जुटाया था। सरकार चला रहा गठबंधन LDF इसके इस्तेमाल पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ के मुताबिक, फंड के लिए खोले अकाउंट में करीब 5.38 करोड़ रुपए आए हैं। इससे पीड़ितों के घर बनाने के लिए जमीन खरीदी गई है। कलपेट्टा से करीब 22 किमी दूर चूरलमाला में घुसते ही एक होर्डिंग दिखता है। इस पर लैंडस्लाइड में मारे गए लोगों की फोटो लगी हैं। लैंडस्लाइड से सबसे ज्यादा तबाही चूरलमाला में ही हुई थी। कुछ कदम आगे बढ़ते ही लैंडस्लाइड से हुई तबाही के निशान दिखने लगते हैं। यहां से आगे गाड़ियां नहीं ले जा सकते। एक तरफ कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। लैंडस्लाइड वाली जगह पर आम लोगों की एंट्री मना है। यहां जगह–जगह लाल झंडे लगाए गए हैं। खतरे की वजह से आगे जाने के लिए कलेक्टर से परमिशन लेनी होती है। चूरलमाला में टूरिस्ट दोबारा आने लगे हैं। वे त्रासदी के वक्त आर्मी के बनाए पुल पर फोटो खिंचवाते हैं। इलाके में बना ग्लास ब्रिज दोबारा खुल गया है। वहां जाने के लिए प्राइवेट जीप बुक करनी होती है। गांव में जगह–जगह बुकिंग सेंटर खुले हैं। आसपास के चाय बगानों में चहल-पहल दिखने लगी है। टूरिज्म भले पटरी पर आ रहा हो, लेकिन लोग अब तब उस हादसे को नहीं भूले हैं। पीड़ित 1 : सुनीश‘पत्नी अब भी सदमे में, बारिश होते ही घबरा जाती है’सुनीश चूरलमाला में अपने उजड़े हुए घर को देखने आए थे। हमें घर के अंदर एक कमरे में ले गए। बोले कि मैं यहीं सो रहा था। एक दिन पहले लगा था कि तेज बारिश होने वाली है। रात में ऐसा प्रलय आएगा, ये नहीं सोचा था। देखिए घर का क्या हाल है। सुनीश बताते हैं, ‘हमने घर मजबूत बनवाया था, इसलिए बहने से बच गया। नींद खुली तो पहली मंजिल डूब चुकी थी। हम दूसरी मंजिल पर चले गए। हमारे सामने आसपास के घर गिर रहे थे। लोग और सामान बह रहे थे।’ सुनीश से बात करने के दौरान ही हल्की बारिश होने लगी। वे बोले, ‘मुझे घर जाना पड़ेगा। पत्नी अब भी सदमे में हैं। बारिश होने पर घबरा जाती हैं। कई बार आधी रात को उठ जाती हैं। हम कलपेट्टा में किराए के मकान में रहते हैं। सरकार किराए के लिए 6 हजार रुपए देती हैं। मदद के तौर पर हर महीने 19 हजार रुपए और मिलते हैं।’ पीड़ित 2: सुनेरा और नासिर‘परिवार और रिश्तेदार मिलाकर 31 लोग मारे गए, राहुल ने कहा था- घर दिलाएंगे’चूरलमाला में रहने वाले सुनेरा और नासिर केले की चिप्स बेचते हैं। त्रासदी वाली रात पहाड़ पर दूसरी तरफ चढ़कर जान बचाई थी। सुनेरा बताती हैं, ‘परिवार के 6 लोग मारे गए थे। दो का तो पता ही नहीं चला। पूरे परिवार और रिश्तेदारों को मिला दें, तो 31 लोगों की जान गई। अब तक बेघर हैं। राहुल-प्रियंका ने कहा था कि घर दिलाएंगे, लेकिन पता चला है कि अब तक नींव भी नहीं पड़ी।’ सरकार पीड़ितों के लिए टाउनशिप बनवा रही, 178 घर सौंपेराज्य सरकार कलपेट्टा में पीड़ितों के लिए टाउनशिप बनवा रही है। यह जगह लैंडस्लाइड वाली जगह से करीब 30 किमी दूर है। यहां 159 एकड़ जमीन पर 410 घर, एक मेडिकल सेंटर और पार्क बन रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 1 मार्च को 178 लोगों को घर सौंपे हैं। 26 फरवरी को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी वायनाड आए थे। उन्होंने त्रासदी वाली जगह से करीब 11 किमी दूर मेप्पड़ी पंचायत के कुन्नमपेटा में घरों की आधारशिला रखी। ये घर लगभग 1100 वर्गफीट के होंगे। ‘CPM सरकार ने लोगों काे घर दिया, प्रियंका जवाब से बचने के लिए नहीं आ रहीं’ LDF की तरफ से चुनाव लड़ रहे RJD कैंडिडेट पीके अनिल कुमार कहते हैं, ‘तेजस्वी यादव के आने के बाद से हमारा कैंपेन तेजी से चला है। सरकार ने चूरलमाला के लोगों को घर बनाकर दिया है। टनल बनवा रहे हैं। लैंडस्लाइड के बाद से सरकार लोगों को किराया दे रही है। मोदीजी आए, लेकिन फोटो खिंचवाकर चले गए।’ ‘कांग्रेस प्रेसिडेंट ने कहा कि हमारे पास घर बनाने के लिए पैसा नहीं है। प्रियंका गांधी अब तक नहीं आईं। उन्होंने घर देने का वादा किया था। नहीं दिया तो जवाब देना पड़ेगा। हो सकता है कि इसलिए नहीं आ रही हों।’ एक्सपर्ट बोले- सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी, UDF को फायदा मिलेगासेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. धनुराज बताते हैं, ‘सर्वे बता रहे हैं कि इस बार माइनॉरिटी एकजुट होकर UDF को वोट दे सकते हैं। पिछली बार ऐसा नहीं हुआ था। उन्होंने LDF को वोट किया था। यहां एंटी इनकम्बेंसी है, लेकिन नेक टू नेक फाइट भी है। ‘यहां CPM कैडर सबसे अहम भूमिका निभाने वाला है। कई हिस्सों में लीडरशिप में बदलाव से कार्यकर्ता नाराज हैं। हालांकि, UDF भी कमजोर ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर और कार्यकर्ताओं की कमी से जूझ रहा है। वे सरकार की नाकामियां उजागर करने में नाकाम रहे हैं।’ सीनियर जर्नलिस्ट नीनू मोहन कहती हैं कि वायनाड की ज्यादातर सीटों पर UDF का दबदबा है। यहां माइनॉरिटी और एसटी-एससी आबादी ज्यादा है। ये हमेशा से कांग्रेस के वोटबैंक रहे हैं। वायनाड जिले की तीन में से दो सीटों पर कांग्रेस लगातार जीतती आ रही है। पिछली बार एक सीट CPM ने जीती थी। वायनाड लोकसभा सीट की कुछ सीटें कोझिकोड और मल्लपुरम जिले में हैं। वहां मुस्लिम लीग और कांग्रेस दोनों का दबदबा है। …………………………. केरलम चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए 1. 46 लाख कुडुंबश्री दीदियां लेफ्ट की वोटर, कैसे सेंध लगाएगी BJP केरलम सरकार की कुडुंबश्री योजना से 46 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, यानी राज्य के हर दूसरे घर में एक कुडुंबश्री मेंबर है। ये महिलाएं बिजनेस तो चलाती ही हैं, साथ में चुनाव लड़ती भी हैं और हार-जीत तय भी करती हैं। 2021 में चुनाव जीतने वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF को 48% महिलाओं ने वोट दिए थे। BJP इनमें सेंधमारी की कोशिश कर रही है। पढ़िए पूरी खबर... 2. केरलम CM की बेटी की मुस्लिम से शादी चुनावी मुद्दा, 5000 लड़कियों के कन्वर्जन का दावा केरलम चुनाव में फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ मुद्दा है, लेकिन लोग और नेता इस पर बंटे हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे BJP की प्रोपेगैंडा फिल्म बताते हुए बैन कर दिया। BJP विजयन की बेटी की मुस्लिम से शादी का मुद्दा उठाती रहती है। धर्म परिवर्तन के दावे करने वाले संगठनों का कहना है कि किरदार और किस्से अलग हो सकते हैं, लेकिन ऐसी कहानियां यहां भरी पड़ी हैं। यहां 5 हजार से ज्यादा लड़कियों को धर्म परिवर्तन किया गया है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 7 Apr 2026 5:07 am

पाकिस्तान में 5जी लॉन्च, नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ी चुनौती : र‍िपोर्ट

पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में 5जी सर्विस शुरू होना एक बड़ा कदम है, लेकिन देश की आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों के कारण यह टेक्नोलॉजी अभी ज्यादातर मार्केटिंग स्टोरी लगती है

देशबन्धु 7 Apr 2026 5:00 am

‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ पर बन सकती है सहमति, सीजफायर की कोशिशें तेज, लेकिन ईरान ने होर्मुज पर फंसाया पेच

इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने का भी प्रावधान शामिल है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य किया जा सके। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिकी और ईरानी नेताओं के साथ रातभर बातचीत कर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।

देशबन्धु 6 Apr 2026 2:59 pm

मिडिल ईस्ट में हो सकता है 45 दिन का सीजफायर, जंग पर नई रिपोर्ट, ईरान-अमेरिका में चल रही बात

ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन के सीजफायर को लेकर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर बड़े हमले किए जा सकते हैं, जिसकी तैयारी अमेरिका और इजराइल ने कर ली है।

देशबन्धु 6 Apr 2026 11:33 am

हमलों में खाड़ी देशों की संलिप्तता के बारे में कोई जानकारी नहीं है: ईरान

मिस्र में ईरानी के राजनयिक मिशन के प्रमुख मोजतबा फेरदोसीपुर ने कहा् है कि ईरान के पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि खाड़ी के देश इस्लामिक गणराज्य के क्षेत्र पर हुए हमलों में शामिल हैं

देशबन्धु 6 Apr 2026 10:25 am

ट्रंप की तबीयत पर अटकलों का अंत, प्रेस ब्रीफिंग तय

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्वास्थ्य को लेकर रविवार शाम से ऐसी खबरें आ रही थी कि उनकी तबीयत खराब है

देशबन्धु 6 Apr 2026 10:11 am

ट्रंप की धमकी से होर्मुज स्ट्रेट पर संकट गहराया

ईरान के साथ-साथ होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति शृंखलाएं दबाव में आ रही हैं

देशबन्धु 6 Apr 2026 9:46 am

ईरान में दुर्घटनाग्रस्त विमान के पायलट को बचाने के अमेरिकी अभियान में शामिल था उच्च जोखिम

कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी बलों ने ईरान के भीतर गिराए गए एक अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए एक उच्च जोखिम वाला अभियान चलाया

देशबन्धु 6 Apr 2026 9:37 am

ईरान के विदेश मंत्री की भारतीय और रूसी समकक्षों के साथ फोन पर बातचीत, युद्ध के हालातों पर हुई चर्चा

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष पर रूस और भारत के विदेश मंत्रियों से बातचीत की

देशबन्धु 6 Apr 2026 8:55 am