ऑस्ट्रेलिया में पहली बार महिला बनीं आर्मी चीफ, 125 साल के बाद आया ये मौका; किसे मिली कमान?
रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने लेफ्टिनेंट जनरल सुसान कोयले को देश की थल सेना का प्रमुख नियुक्त करने का ऐलान किया। 125 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब कोई महिला इस सर्वोच्च पद पर पहुंची है।
ईरान संघर्ष के बाद बदला वैश्विक समीकरण: अमेरिका कमजोर, चीन-रूस को मिला रणनीतिक लाभ
इस संघर्ष का सबसे सीधा असर मध्य पूर्व में अमेरिका की भूमिका पर पड़ा है। दशकों से इस क्षेत्र में सुरक्षा गारंटर माने जाने वाले अमेरिका की विश्वसनीयता पर अब सवाल उठने लगे हैं।
ट्रंप बनाम पोप लियो: ईरान नीति पर बयान से बढ़ा टकराव, दोनों के बीच तीखी जुबानी जंग
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब पोप लियो ने अमेरिका की ईरान नीति और युद्ध को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाया। उन्होंने इस संघर्ष को “अन्यायपूर्ण” बताया और अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाए।
हंगरी में महाउलटफेर16 साल बाद सत्ता से बाहर हुए ट्रंप के करीबी विक्टर ओर्बन, विपक्ष की ऐतिहासिक जीत
अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में ईरान के पास 'कोई दांव नहीं' बचा : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने कहा है कि ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो चुकी है और बातचीत में उसके पास अब कोई मजबूत विकल्प नहीं बचा है
पूर्व अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की चेतावनी, 'रणनीतिक विफलता' की ओर बढ़ रहा है अमेरिका
वाशिंगटन की हालिया सैन्य सफलता भविष्य में बड़ी रणनीतिक समस्या बन सकती है
अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद निक्की हेली बोलीं- तेहरान के साथ बातचीत समय की बर्बादी है
भारतीय मूल की रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने कहा कि अमेरिका का ईरान के साथ बातचीत से पीछे हटना सही था
ट्रंप का दावा: ईरान बातचीत में पूरी तरह बेदम
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने कहा है कि ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो चुकी है और बातचीत में उसके पास अब कोई मजबूत विकल्प नहीं बचा है
राजस्थान की राजधानी जयपुर से 80 किमी दूर रामपुरा कस्बा। अक्षय और अशोक नाम के दो भाई घर के आंगन में अक्सर क्रिकेट खेलते। बड़े भाई की गेंद कभी छोटे की छाती पर लगती तो कभी सिर पर। बदला लेने के लिए अशोक तेज गेंद फेंकने की खूब प्रैक्टिस करता। कुछ सालों में ही उसकी बॉलिंग का खौफ पूरे इलाके में फैल गया। घर में पैसों की तंगी थी। पिता खेती करके और अखबार बेचकर महीने के महज 10 हजार रुपए कमाते थे। इसलिए एक बेटे को ही एकेडमी भेज सकते थे। बड़े भाई ने कहा- तू खेल। अशोक ने जयपुर की अरावली क्रिकेट एकेडमी जॉइन कर ली। वहां कोच विवेक यादव खूब सपोर्ट करते। कोविड-19 में कोच की मौत हो गई तो अशोक ने एकेडमी और क्रिकेट दोनों छोड़ दिए। पिता के साथ खेतों में समय बिताने लगा। उसी अशोक शर्मा ने IPL के इस सीजन की सबसे तेज गेंद फेंकी है। स्पीड- 154.2 किमी/घंटे। IPL 2026 ने अभी 25% रास्ता ही तय किया है और अशोक शर्मा जैसे कई राइजिंग स्टार्स सामने आ चुके हैं; मंडे मेगा स्टोरी में ऐसे ही 7 खिलाड़ियों की सुनी-अनसुनी रोचक कहानी... ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह -------- IPL से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… IPL में कैसा खेल रहे टी-20 वर्ल्ड चैंपियंस:सैमसन ने शतक लगाया, चक्रवर्ती-बुमराह को विकेट नहीं मिल रहे; रिंकू, हार्दिक और अर्शदीप फ्लॉप IPL में 19वें सीजन के 18 मैच खत्म हो चुके हैं। भारत को टी-20 वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले 15 प्लेयर्स अलग-अलग टीमों में खेल रहे हैं। प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट संजू सैमसन ने शनिवार को ही शतक लगा दिया। उनके साथी अभिषेक शर्मा ने भी 74 रन की पारी खेली। पूरी खबर पढ़िए…
ईरानी संस्था का दावा, संघर्ष के दौरान मारे गए तीन हजार से ज्यादा लोग
ईरान संघर्ष के दौरान तीन हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा ईरान की एक संस्था ने किया है। इसमें महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की संख्या ज्यादा है
गालिबाफ ने बताया आखिर क्यों विफल हुई इस्लामाबाद शांति वार्ता? कहा- अमेरिका पर भरोसा नहीं
वार्ता के खत्म होते ही ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने खुलकर अमेरिका पर निशाना साधा और बातचीत के असफल होने के लिए सीधे तौर पर वॉशिंगटन को जिम्मेदार ठहराया।
ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा: वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप की सख्त चेतावनी, नौसैनिक नाकाबंदी का संकेत
ट्रंप द्वारा शेयर किए गए ‘Just the News’ के आर्टिकल में दावा किया गया है कि यदि ईरान अमेरिका की मांगें नहीं मानता, तो उसके खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू की जा सकती है।
मिशन आर्टेमिस-2 में भारतीय मूल के अमित क्षत्रिय ने निभाई अहम भूमिका, जानें उनके बारे में
क्षत्रिय ने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी से गणित में बैचलर आफ साइंस की डिग्री प्राप्त की है। वह पहले एक साफ्टवेयर और रोबोटिक्स इंजीनियर थे और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस ) के फ्लाइट डायरेक्टर के रूप में भी काम किया है, जहां उन्होंने वैश्विक टीमों का नेतृत्व किया।
आरएसएस-भाजपा संविधान को कमजोर करना चाहते हैं : राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को 'रन फॉर अंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' मैराथन की शुरुआत की
अमेरिका-ईरान में 20 घंटे से ज्यादा हुई चर्चा, नहीं हुई कोई डील: जेडी वेंस
पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर 20 घंटे से भी ज्यादा समय तक बातचीत हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला
भारत का 'विजन 2047' नीतियों पर आधारित : विनय क्वात्रा
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने टेक्सास में एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक 'विकसित राष्ट्र' बनने की भारत की यात्रा शैक्षणिक और नीतिगत विमर्श पर आधारित है
मार्को रुबियो ने ईरान से जुड़े तीन व्यक्तियों के ग्रीन कार्ड रद्द किए
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तीन ईरानी नागरिकों का कानूनी स्थायी निवासी दर्जा खत्म कर दिया है। इन लोगों के ईरान की सरकार से जुड़े लोगों से संबंध बताए जा रहे हैं
ईरान के साथ बातचीत के बीच ट्रंप ने किया अमेरिका की जीत का दावा
अमेरिका इस समय पाकिस्तान और ईरान के साथ इस्लामाबाद में आमने-सामने उच्च स्तर की त्रिपक्षीय बातचीत कर रहा है
मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा पर स्थित चित्रकुंडा इलाका उस वक्त नक्सलियों के एकतरफा कंट्रोल में था। 19 दिसंबर 1998 की रात, चित्रकुंडा थाने के अंतर्गत आने वाली मल्लिगुड़ा जुडाम पोस्ट पर नक्सलियों ने हमला कर दिया। हमले में पोस्ट पर तैनात सभी पुलिसकर्मी मारे गए। इसके बाद पुलिस प्रशासन चिंतित हो गया। हालात पर काबू पाने के लिए एक स्थानीय आदिवासी पुलिस अधिकारी की तलाश शुरू हुई, जो इलाके की भौगोलिक बनावट को अच्छी तरह जानता हो और स्थानीय भाषा समझता-बोलता हो। साथ ही नक्सलियों के बीच का आदमी हो। उस वक्त मैं ओडिशा के कोरापुट जिले में तैनात था। मुझे इस जिम्मेदारी के लिए सबसे बेहतर पाया गया और बुलाकर वहां तैनात किया गया। हालांकि, मैं वहां बिल्कुल नहीं जाना चाहता था, क्योंकि वह मेरा अपना इलाका था और वहां के लोग अपने थे। मैं सोच रहा था- अपने ही लोगों के सामने एक पुलिस अफसर बनकर कैसे खड़ा हो पाऊंगा? अगर गोली चलानी पड़ी, तो कैसे चलाऊंगा? एक तरफ ड्यूटी थी, तो दूसरी तरफ अपने लोग। आखिरकार, मैंने ड्यूटी को चुना। दरअसल, नक्सलियों ने चित्रकोंडा थाने के तहत 1962 में बने बालिमेला बांध के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया था और इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए थे। उन्होंने आस-पास के गांवों और ओडिशा के दंडकारण्य क्षेत्र में लोगों को प्रशासन के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया। मजदूरों के अधिकार के नाम पर गांव वालों को अपने साथ जोड़ने लगे और धीरे-धीरे उन्हें नक्सल आंदोलन में शामिल करने लगे। बांध के खिलाफ उन्होंने एक तरह से संगठित मुहिम ही छेड़ दी। उस वक्त हमारी मल्लिगुड़ा पोस्ट पर कुल 35 सुरक्षा बल के जवान तैनात थे। वहां शौच की बड़ी समस्या थी- करीब 500 मीटर दूर एक नाले के पास जाना पड़ता था। साल 2001 की बात है। उस दिन हमारा एक सिपाही उसी नाले के पास शौच के लिए गया। वहां नक्सलियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और उसे 28 गोलियां मारीं। यह हमला एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया था। दरअसल, नक्सलियों को उम्मीद थी कि एक सिपाही पर हमला होने की खबर मिलते ही बाकी सुरक्षा बल भी मौके पर पहुंच जाएगा और फिर हम सभी को जमीन में बिछाई अपनी एंटी-बारूदी सुरंग यानि लैंडमाइन से एक साथ उड़ा देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीएसएफ ने हमें इस घटना की जानकारी दे दी थी। सभी पुलिस मुख्यालय अलर्ट हो गए थे। उसके बाद फोर्स के कमांडेंट, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, एंटी-नक्सल फोर्स और बाकी पुलिस अधिकारी मौके पर अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए तैयार हुए। वहां जाने के दो रास्ते थे- एक सड़क के जरिए और दूसरा मोटर लॉन्च के जरिए। हमने मोटर लॉन्च वाला रास्ता चुना। लेकिन उस पूरे रास्ते में नक्सलियों ने जगह-जगह लैंडमाइन बिछा रखी थीं। हम आगे बढ़ते रहे। जाते समय तो सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन लौटते वक्त अचानक रास्ते में बिछी बारूदी सुरंगें फटने लगीं। मेरी मोटर लॉन्च आगे निकल चुकी थी, इसलिए मैं और मेरे कुछ साथी बच गए। पीछे मुड़कर देखा, तो दिल दहल गया- पीछे आ रही हमारे साथियों की गाड़ियां एक-एक कर धमाकों में उड़ रही थीं। कुछ ही पलों में सब खत्म हो गया… सभी साथी मार दिए गए। उसके बाद नक्सलियों ने हमारा पीछा किया और हम पर फायरिंग शुरू कर दी। उस वक्त भागने के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं था। अगर मैं भावनाओं में बहकर साथियों के लिए वापस लौटता, तो जिंदा न बचता। उस दिन अपने साथियों को पीछे छोड़कर भागना मेरे लिए सबसे दर्दनाक फैसला था। उसके बाद कई दिनों तक नींद नहीं आई। आंखें बंद करता, तो वही मंजर सामने आ जाता- साथियों की मौत, धमाकों की आवाजें… सब कुछ। उस दौरान जब भी फील्ड में जाता, उन साथियों की याद बार-बार लौट आती। आज भी वही होता है। आज भी अगर मेरे पीछे अचानक कोई गाड़ी आती दिखती है, तो चौंक जाता हूं- एक पल के लिए लगता है, कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं। आखिर वह हमला मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बन गया। मैंने तय कर लिया कि अब नक्सलियों को नहीं छोड़ूंगा। अब तक मैं बातचीत का रास्ता अपना रहा था, लेकिन यह तरीका कारगर साबित नहीं हो रहा था। मैंने प्लान तैयार करना शुरू किया। मैं उन्हीं के बीच पला-बढ़ा था और उनका मुझ पर भरोसा था, इसलिए मैंने उसी भरोसे को ताकत बनाया। सबसे पहले उनके इलाकों में अपनी खुफिया टीमें तैयार करनी शुरू की और उन्हें अलग-अलग जगहों पर तैनात करना शुरू किया। वे टीमें मुझे नक्सलियों की हर गतिविधि की जानकारी देने लगीं- कौन कहां जा रहा है, किस इलाके में उनकी मौजूदगी है, वगैरह-वगैरह। हालांकि, भले ही रिटायर हो चुका हूं, फिर भी एनकाउंटर की पूरी रणनीति आपसे साझा नहीं कर सकता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। फिलहाल, उन जानकारियों के आधार पर मैं अपनी रणनीति तैयार करता और एक-एक करके उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करता। उस दौरान हमने नक्सली बने अपने लगभग 20 लोगों का एनकाउंटर किया। यहीं से ओडिशा में नक्सलवाद के खात्मे की शुरुआत हुई। मैं जिस तरह एक के बाद एक एनकाउंटर कर रहा था, उससे नक्सलियों के निशाने पर आ गया। उन्हीं के बीच का आदमी था- उनकी चाल, उनका तरीका, सब जानता था… और शायद यही वजह थी कि वे भी मुझे किसी भी हालत में खत्म करना चाहते थे। कई बार तो मेरी पुलिस चौकी उड़ाने की कोशिश की। हर बार लगा कि अब बचना मुश्किल है… लेकिन किसी तरह बच जाता था। जब वह मुझे नहीं मार पाए तो मेरे परिवार को निशाना बनाने लगे। 2006 में उन्होंने सबसे पहले मेरे पिता जी को निशाना बनाया। वह एक गाड़ी से जा रहे थे। तभी, अचानक, नक्सलियों ने उनकी गाड़ी में विस्फोट कर दिया। धमाका इतना जोरदार था कि गाड़ी पलट गई। उस गाड़ी में सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई… और मेरे पिता जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी। इसके बाद भी मेरे परिवार के कई लोगों पर हमले हुए। कोई बुरी तरह घायल हुआ, कोई किसी तरह बचा। दरअसल, अब नक्सली मेरा हौसला तोड़ में जुट गए थे। वे जानते थे कि सीधे मुझ तक पहुंचना मुश्किल है… इसलिए उन्होंने मेरे अपने लोगों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसी बीच… एक और घटना हुई, जिसने मुझे फिर से अंदर तक झकझोर दिया। एक लड़का जो कि कोई मुखबिर नहीं था। बस इलाके के एक गांव का जवान लड़का था। सीधा-सादा… और, सच कहूं, इंसानियत के नाते मेरी मदद कर रहा था। उस दिन वह मुझसे मिलने आया था। हम मिले, थोड़ी बात हुई… और फिर वह वापस अपने गांव लौट गया। मुझे क्या पता था कि यही मुलाकात उसकी जिंदगी की आखिरी मुलाकात बन जाएगी। रास्ते में… नक्सलियों ने उसे घेर लिया। उसे कोई मौका नहीं दिया। वहीं उसकी हत्या कर दी। जब मुझे ये खबर मिली… मैं कुछ पल के लिए बिल्कुल सन्न रह गया। एक ही बात दिमाग में घूमने लगी- क्या उसकी मौत की वजह मैं हूं? सच बताऊं, उस दिन पहली बार मुझे लगा कि ये लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं रही… इसमें अब बेगुनाह लोग भी कुर्बान हो रहे हैं। दरअसल, जंगल में काम करते-करते ऐसा होता है। लोग आपके करीब आ जाते हैं। हर कोई मुखबिर नहीं होता… हर कोई खुफिया नहीं होता। कई लोग तो बस इसलिए मदद करते हैं क्योंकि वे इस हिंसा से परेशान होते हैं… क्योंकि वे चाहते हैं कि हालात बदलें। ऐसा नहीं है कि उस दौरान मैं केवल एनकाउंटर ही कर रहा था। मैंने कई नक्सलियों की गिरफ्तारियां भी कराईं और कई लोगों को आत्मसमर्पण भी करवाया। ऐसे ही एक नक्सली की कहानी है, जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाया। मैंने एक बड़े नक्सली नेता को गिरफ्तार किया था। उसका नाम नहीं बता सकता। वह अपने ग्रुप का सी-कमांडर था। दरअसल, उसके घर में चोरी हो गई थी। वह बार-बार पुलिस स्टेशन जा रहा था, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिल रही थी। आखिरकार वह नक्सलियों के पास पहुंचा। नक्सलियों न सिर्फ उसका चोरी हुआ सामान बरामद करवाया, बल्कि हर तरह से उसका साथ दिया। जिसके बाद वह भी नक्सलियों बन गया। इसके अलावा नक्सल प्रभावित इलाकों में न तो ठीक से स्कूल हैं, न साफ पानी की व्यवस्था और न ही बाकी बुनियादी सुविधाएं। इन्हीं समस्याओं के नाम पर नक्सली लोगों को बरगलाते हैं और अपने गुट में शामिल करते हैं। लिहाजा, यही कहूंगा कि कुछ गलतियां हमारी भी हैं, जिनका नक्सली फायदा उठाते हैं। अगर इन चीजों को ठीक किया जाए, तो नक्सलवाद काफी हद तक अपने आप खत्म हो जाएगा। फिलहाल, आखिर में कहूंगा कि अपने काम से तो संतुष्ट हूं, लेकिन अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ने का मुझे अफसोस भी है। न चाहते हुए भी उन पर गोलियां चलानी पड़ीं। (शरतचंद्र बुरुदा ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-उन्होंने हेलिकॉप्टर से लाश भेजी, हम ट्रेनें भर देंगे:दिल्ली वालों ने पीट-पीटकर मार डाला मेरा बेटा, क्योंकि हमारी शक्ल अलग है मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
बांग्लादेश में नियुक्तियों पर विवाद, रुमीन फरहाना ने बीएनपी सरकार पर साधा निशाना
बांग्लादेश की स्वतंत्र सांसद रुमीन फरहाना ने सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार पर अहम पदों पर पार्टी से जुड़े लोगों की नियुक्ति को लेकर तीखा हमला बोला है
ईरान पर नेतन्याहू का वार: लड़ाई जारी रखने का ऐलान
ईरानी मीडिया के हवाले से आई खबर के अनुसार ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू हो गई है
लेबनान में 'अब कोई सुरक्षित जगह नहीं: यूनिसेफ
लेबनान में आसमान से बरसते बम भारी तबाही लेकर आ रहे हैं। रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है
अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। कई फाइटर जेट और हमलावर विमान पहले ही तैनात किए जा चुके हैं, जबकि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की तैयारी जारी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी सेना की 28वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 1500 से 2000 सैनिकों को जल्द ही मध्य पूर्व भेजा जा सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना भी बड़े स्तर पर सक्रिय हो गई है।
चेहरा बिगड़ा, पैरों में गंभीर चोट... 28 फरवरी के अटैक में बुरी तरह घायल हो गए थे मुज्तबा खामेनेई
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को सेंट्रल तेहरान में स्थित सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कंपाउंड पर अमेरिका और इजरायल द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था। इस हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई, जबकि उनके परिवार के कई अन्य सदस्य भी मारे गए।
पाकिस्तान पर भरोसा नहीं! ईरान ने चली डिकॉय चाल, इस्लामाबाद पहुंचीं तीन फ्लाइट्स पर असली टीम किसमें?
चीन और ईरान की सीक्रेट हथियार डील का खुलासा ,अमेरिकी एजेंसी की रिपोर्ट ने उड़ाई दुनिया की नींद
भारत के बिना अधूरा है अमेरिका का सपना ,क्वाड बैठक से पहले मार्को रुबियो का बड़ा बयान
इस्लामाबाद वार्ता पर संकट: ईरान की शर्तें, पाकिस्तान के बयान और इजराइल की तैयारी से बढ़ा तनाव
इस वार्ता के भविष्य पर सबसे बड़ा सवाल ईरान की सख्त शर्तों के कारण खड़ा हुआ है। तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक इजराइल लेबनान में अपने सैन्य अभियान नहीं रोकता, तब तक वह किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं होगा।
आर्टेमिस II की ऐतिहासिक वापसी: चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित
नासा का आर्टेमिस ।। मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस मिशन में शामिल सभी अंतरिक्ष यात्री 10 दिन की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद ओरियन अंतरिक्ष यान के जरिए सुरक्षित रूप से समुद्र में उतर गए
ट्रंप का अल्टीमेटम: ईरान चाहे या न चाहे, होरमुज़ खुलेगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि शनिवार को पाकिस्तान में ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर बातचीत करेंगे
अमेरिका-ईरान वार्ता का संयुक्त राष्ट्र ने किया स्वागत, शांति और स्थायी समझौते की अपील
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस्लामाबाद में शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने यह जानकारी दी
1947 में देश के बंटवारे के साथ बंगाल का भी विभाजन हो गया। भारत को पश्चिम बंगाल मिला और पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में चला गया, जो बाद में बांग्लादेश बना। तब बंगाल का 67% हिस्सा पाकिस्तान को और 37% हिस्सा भारत को मिला। 1952 में पहली बार पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए। 238 में से 150 सीटें कांग्रेस ने जीत ली। सीपीआई वाले लेफ्ट फ्रंट को 41 और जनसंघ वाले राइट ब्लॉक को 13 सीट मिलीं। पीएम जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी के पर्सनल डॉक्टर रहे बिधान चंद्र रॉय मुख्यमंत्री बने। पश्चिम बंगाल में लगातार 20 साल और कुल 25 साल कांग्रेस सरकार में रही, लेकिन 1977 के बाद वो अपना सीएम नहीं बना पाई। अब उसका कोई विधायक भी नहीं है। कभी 39% से ज्यादा वोट शेयर भी सिमटकर 3% से कम हो गया। आखिर पश्चिम बंगाल में सत्ता से दूर कैसे हुई कांग्रेस और आज भी सरकार बनाने की दौड़ से बहुत पीछे क्यों है; इलेक्शन एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… तारीख- 18 अप्रैल 1975, जय प्रकाश नारायण यानी जेपी का काफिला कलकत्ता विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम से गुजर रहा था। जेपी एंबेसेडर कार में थे। अचानक 20 साल की एक लड़की भीड़ से निकली और उनकी कार के बोनट पर चढ़कर नाचने लगी। वो लड़की थीं- ममता बनर्जी। जेपी का काफिला रोककर ममता, रातों-रात इंदिरा की आंखों का तारा बन गईं। 1984 के लोकसभा चुनाव में महज 29 साल की ममता ने दिग्गज वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी को हरा दिया। उसी साल उन्हें प्रदेश युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया। 8 साल बाद यानी 1992 में ममता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में भी उतर गईं। सामने थे कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी के चहेते सोमेन मित्रा। ममता चुनाव हार गईं, लेकिन उनका बढ़ता कद प्रणब मुखर्जी, सोमेन मित्रा, प्रियरंजन दासमुंशी जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताओं को चुभने लगा। आखिरकार ममता को युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। फिर आई तारीख 9 अगस्त 1997, कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था। ममता को इसमें नहीं बुलाया गया। नाराज ममता ने स्टेडियम के बाहर रैली बुला ली। सीनियर जर्नलिस्ट कल्याणी शंकर अपनी किताब ‘Pandora's Daughters’ में लिखती हैं- ‘सीताराम केसरी ने ममता की रैली रोकने की पूरी कोशिश की। कई नेताओं को मनाने के लिए भेजा, पर ममता अड़ी रहीं। ममता की रैली में हजारों लोग पहुंचे। भीड़ देखकर ममता गदगद दिखीं और उन्होंने एलान किया- हमारी रैली में आने वाले ही असली ग्रासरूट कांग्रेस (तृणमूल कांग्रेस) वर्कर हैं।’ ममता की रैली से घबराए कांग्रेस नेताओं ने आनन-फानन में उनकी सोनिया गांधी से मीटिंग कराई। दिल्ली में आधी रात को ममता, सोनिया से मिलीं। बैठक के बाद ममता ने ऐलान किया- ‘मैं पार्टी से अलग नहीं हो रही हूं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस को तभी भंग करूंगी, जब सोनिया गांधी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगी।’ हालांकि, तब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनीं। आखिरकार ममता बनर्जी का सब्र टूट गया। एक रोज उन्होंने एलान किया- ‘अब मैं सोनिया गांधी या कांग्रेस से बात करने से बहुत नफरत करती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझसे समझौता करने के लिए 9 दिन इंतजार कराया। मुझसे बात करने का वादा किया, लेकिन बात नहीं की। बदले में मुझे क्या मिला? पार्टी से निष्कासन।’ 1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाई और अगले ही चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी बन गईं। कांग्रेस का करीब 30% वोट झपट लिया। उसके बाद कांग्रेस पश्चिम बंगाल में कभी नहीं लौट सकी। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पतन की 3 बुनियादी वजहें हैं... 1. सामाजिक वजह: भद्रलोक बनाम सर्वहारा के संघर्ष ने लेफ्ट का जनाधार बढ़ा दिया 2. राजनीतिक वजह: इंदिरा की केंद्रीकरण नीति और कांग्रेस में दरार 3. आर्थिक वजह: केंद्र की भेदभावपूर्ण नीतियां क्या कांग्रेस के पास पश्चिम बंगाल में वापसी का कोई रोडमैप है? 2021 विधानसभा में कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ गठबंधन किया था। वह 92 सीटों पर लड़ी, लेकिन कोई सीट नहीं जीत पाई। इस बार सभी सीटों पर कांग्रेस अकेले लड़ रही है। सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य बताते हैं… -------------------------- चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- 'शूद्र' महिलाओं से संबंध बनाते थे नंबूदरी ब्राह्मण: नस्ल सुधारने के नाम पर जन्मे बच्चों से दूर रहते, केरलम की राजनीति में कितना असर केरलम का त्रावणकोर इलाका। एक ब्राह्मण पुरुष तैयार होकर नायर बस्ती में जाता है। वहां एक घर के बाहर नहाता है। कपड़े बदलता है। एक अन्य ब्राह्मण उसे खाना परोसता है। फिर वह खाना खाता है। कुछ देर बाद वह घर के बाहर चप्पल उतार कर अंदर चला जाता है, जहां एक महिला उसका इंतजार कर रही होती है। जब महिला का पति लौटता है और उसे घर के बाहर एक आदमी की चप्पल दिखती है, तो बिना कुछ कहे लौट जाता है। क्योंकि वो समझ जाता है कि उसकी पत्नी एक नंबुदरी ब्राह्मण पुरुष के साथ संबंधम में है। ये किस्सा केरलम की दशकों पुरानी परंपरा ‘संबंधम’ का है, जिसमें नंबूदरी ब्राह्मण नायर महिलाओं से शारीरिक संबंध बना सकते थे। जानिए कहानी इसी ‘संबंधम’ परंपरा की…
पूजा-पाठ के नाम पर रेप के आरोपों में घिरे कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के बड़े नेताओं से कनेक्शन सामने आए हैं। सोशल एक्टिविस्ट अंजलि दमानिया का दावा है कि खरात की महाराष्ट्र के पूर्व CM एकनाथ शिंदे से 17 बार बात हुई थी। खरात और महाराष्ट्र महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रुपाली चाकणकर के बीच 177 बार फोन कॉल हुई। ये बात खरात के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) से पता चली है। अंजलि के मुताबिक, कॉल डेटा रिकॉर्ड से 8 नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। इनमें NCP (अजित गुट) के सुनील तटकरे, BJP के चंद्रकांत पाटिल और आशीष शेलार, शिवसेना (शिंदे गुट) के संजय शिरसाट, दीपक लोंढे और शिवसेना (उद्धव गुट) के मिलिंद नार्वेकर शामिल हैं। दावा- अजित पवार के प्लेन क्रैश से एक दिन पहले और बाद में खरात के अकाउंट में 73 बार ट्रांजैक्शनअंजलि का दावा है, ‘अजित पवार के प्लेन क्रैश के एक दिन पहले, यानी 27 जनवरी, हादसे वाले दिन और एक दिन बाद अशोक खरात ने समता पटसनस्थे बैंक खाते में कई बड़े लेनदेन किए थे। हादसे वाले दिन ट्रांजैक्शन के 28 मैसेज, एक दिन पहले 17 और एक दिन बाद यानी 29 जनवरी को 13 मैसेज आए।’ अंजलि कहती हैं, ‘21 से 29 जनवरी तक कुल 92 बार अकाउंट में क्रेडिट के मैसेज आए। ये मैसेज तभी आते हैं, जब बैंक खाते में पैसे भेजे गए हों। अगर इन मैसेज का सोर्स पता चले तो बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो सकता है। मैंने SIT से इस लेनदेन की जांच करने की मांग की है।’ अनजान शख्स ने भेजी कॉल डिटेल रिपोर्ट, किसने भेजी सरकार जांच कराएगीअंजलि कहती हैं, ‘मुझे वॉट्सएप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया। इसमें अशोक खरात के कॉल डेटा रिकॉर्ड्स थे। मैंने AI की मदद से पता लगाया कि खरात के मोबाइल फोन से कब, किसे और कितनी बार कॉल किया गया। इसी से पूर्व CM एकनाथ शिंदे से फोन पर 17 बार बातचीत होने का पता चला।’ ‘कॉल डेटा से ये भी पता चला कि राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रुपाली चाकणकर और खरात के बीच 33,727 सेकेंड तक बात हुई। उनकी बहन प्रतिभा चाकणकर ने खरात को 236 बार कॉल किया।‘ अंजलि ने CDR के बारे में SIT से बात की है। DGP सदानंद दाते को इसकी जानकारी देने के लिए समय मांगा है। क्या इस लिस्ट में BJP-NDA से जुड़े बड़े लीडर भी हैं? अंजलि कहती हैं, ‘मैंने CDR में देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन, प्रवीण दरेकर और प्रसाद लाड जैसे बड़े नेताओं के नाम तलाशे, लेकिन उनसे जुड़ी कोई कॉल डिटेल नहीं मिली।‘ CDR से जुडे़ खुलासों पर CM देवेंद्र फडणवीस प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि CDR लीक होना संवेदनशील मुद्दा है। सरकार पता लगाएगी कि अंजलि को ये जानकारी किसने और कैसे पहुंचाई। दरअसल, अंजलि का बैकग्राउंड पॉलिटिकल रहा है। वे आम आदमी पार्टी में थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में नागपुर सीट से AAP के टिकट पर नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं थीं। कैप्टन बाबा के मंदिर गए शिंदे, शिवसेना नेता बोले- धार्मिक कार्यक्रम में गए थेउद्धव सरकार गिरने के बाद नवंबर 2022 में तब CM रहे एकनाथ शिंदे मीरगांव पहुंचे थे। अशोक खरात के साथ पूजा करते उनकी फोटो भी वायरल हुई हैं। इस पर शिवसेना (शिंदे गुट) के नासिक जिलाध्यक्ष अजय बोरास्ते कहते हैं, 'शिंदे साहब को विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। इसीलिए वे गए थे। अगर कोई मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम में जा रहा है, तो इसमें गलत क्या है।' अंजलि की CDR को फेक करार देते हुए अजय आगे कहते हैं, 'वे पहले ये बताएं कि उन्हें CDR किसने दी। अगर वे इसका सबूत दे सकती हैं, तो हमारी पार्टी इसका जवाब देगी।' ट्रस्ट मेंबर्स के डॉक्यूमेंट में राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली का नाम18 मार्च को खरात की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की फोटो वायरल हुईं। इनमें वे खरात के पैर धोते और छाता पकड़े दिख रही थीं। रुपाली अभी मीडिया के सामने नहीं आ रही हैं। अपने बचाव में उन्होंने बयान जारी कर कहा था, ‘शिवनिका संस्थान महादेव मंदिर से जुड़ा ट्रस्ट है। मैं जनप्रतिनिधि होने के नाते इससे जुड़ी हूं। मुझे अशोक खरात पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी नहीं है।’ NCP नेता का दावा- खरात ने CM बदलने के लिए अनुष्ठान किया 25 मार्च को महाराष्ट्र विधानसभा में NCP (शरद पवार) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि 35 विधायकों और नेताओं ने CM बदलने के लिए अशोक खरात से तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था। इस पूजा में शामिल लोगों ने अपनी उंगली पर कट लगाया गया था। आव्हाड के दावों की सच्चाई जानने के लिए हमने खरात बाबा के पास गए नेताओं और अंजलि दमानिया की CDR में बताए गए नामों से जुड़ी लगभग 200 फोटो देखीं। इनमें NCP (अजित गुट) के नेता सुनील तटकरे और रूपाली की उंगलियों पर सफेद बैंडेज लगा दिखा। हमने दोनों के हाथ पर इन कट मार्क की वजह जानने की कोशिश की। रुपाली और सुनील दोनों से संपर्क नहीं हो पाया। इसी दौरान NCP (अजित गुट) के प्रवक्ता सूरज चौहान से बात हुई। सुनील तटकरे को लगी चोट पर वे बताते हैं कि उनकी उंगली दरवाजे में फंस गई थी। मैं खुद उन्हें हॉस्पिटल लेकर गया था। खरात के भक्तों में DCP-ACP रैंक के अधिकारी भी18 मार्च को खरात की गिरफ्तारी के बाद से अब तक उस पर 13 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें 8 सेक्शुअल हैरेसमेंट, 4 आर्थिक धोखाधड़ी और एक मनी लॉन्ड्रिंग का है, जो ED ने दर्ज कराया है। नासिक SIT ने कैप्टन बाबा का नेटवर्क खंगालने के लिए अब तक 30 गवाहों से पूछताछ की है। जांच में 160 GB डिजिटल डेटा रिकवर किया गया है। शिरडी पुलिस ने खरात की अवैध संपत्ति की छानबीन करते हुए 56 लोगों के नाम पर खुले 100 बैंक एकाउंट्स का खुलासा किया है। इसमें परिवहन विभाग के 2 अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। ये भी पता चला है कि नासिक में तैनात DCP और ACP रैंक की 2 महिला पुलिस अफसरों ने मनचाही पोस्टिंग के लिए खरात से संपर्क किया था। इन पर जांच जारी है, इसलिए हम नामों का खुलासा नहीं कर रहे। ……………………… अशोक खरात पर ये स्टोरी भी पढ़ें… 1. ‘बेटी हो, कन्यादान करूंगा बोलकर 3 साल रेप किया‘, कैप्टन बाबा के ऑफिस का सच ‘पहली बार मिली, तो बोला कि तू मेरी बेटी है। तेरा कन्यादान मैं खुद करूंगा। शादी से पहले मुझे ऑफिस में बुलाया और रेप किया।’ ये आपबीती कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के खिलाफ पहली FIR कराने वाली महिला की है। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित और उनका परिवार बदनामी की वजह से सामने नहीं आना चाहता। ज्यादातर घर छोड़कर जा चुकी हैं। पढ़ें पूरी खबर… 2. कैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर…
नेपाल में नई पीढ़ी की दस्तक, 26 साल की रुबी ठाकुर बनीं सबसे युवा डिप्टी स्पीकर
नेपाल की राजनीति में नई पीढ़ी की मजबूत एंट्री देखने को मिली है। 26 वर्षीय रुबी कुमारी ठाकुर को शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा का उपसभामुख (डिप्टी स्पीकर) चुना गया
नेतन्याहू का कड़ा संदेश: इजरायल विरोधियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक सख्त बयान में कहा कि इजरायल अपने खिलाफ किसी भी हमले या विरोध के सामने चुप नहीं रहेगा
सीजफायर वार्ता से ईरान का किनारा: लेबनान में शांति से पहले नहीं होगी बातचीत
गौरतलब है कि 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी। इसी समझौते के तहत दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को स्थान चुना गया था।
इजरायल का ऑपरेशन रोरिंग लायन 18,000 बम और 4,000 टारगेट, लेबनान से ईरान तक दहला मिडिल ईस्ट
अंटार्कटिका से आई डराने वाली खबर विलुप्त होने की कगार पर एम्परर पेंगुइन, IUCN की रेड लिस्ट में शामिल
कुवैत बेस हमले पर अमेरिका के घायल सैनिकों ने उगल दी सच्चाई, कहा-ईरान ने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया
CBS को दिए इंटरव्यू में एक सैनिक ने बताया कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि ईरान ने पूरी रणनीति के साथ इसे अंजाम दिया था। सैनिक के मुताबिक, “हम जानते थे कि यह बेस निशाने पर हो सकता है। खुफिया रिपोर्ट में पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।”
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह को उनके पद से हटा दिया गया है। यह निर्णय सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की सिफारिश पर लिया गया।
72 घंटे में 8 देशों के संघर्ष पर विराम: दुनिया को मिली अस्थायी राहत, शांति की कोशिशें तेज
Iran America Israel Conflict, Ceasefire in 8 Nation, Russia Ukraine War, Israel Lebanon War, Pakistan Afghanistan War, US Israel Iran War, Donald Trump, Vladimir Putin
ग्लोबल पीसमेकर बना पाकिस्तान कर्ज में डूबा देश आखिर कैसे बना अमेरिका-ईरान का संकटमोचक?
ईरान की चेतावनी: नेतन्याहू को रोकें ट्रंप
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया को खत्म करने की इजाजत न दे
विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मार्को रुबियो की मुलाकात, भारत दौरे पर आने का दिया संकेत
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले महीने भारत दौरे पर आ सकते हैं। यह संकेत उस समय मिला जब उन्होंने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ व्हाइट हाउस में एक सकारात्मक बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और अहम तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का जिक्र किया गया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की शिपमेंट को सीमित करके संघर्ष-विराम (सीजफायर) की सहमति का उल्लंघन करने का आरोप लगाया
कतर में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, एलएनजी सप्लाई पर करेंगे अहम बातचीत
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी अपनी दो दिवसीय यात्रा पर दोहा पहुंचे। हवाई अड्डे पर भारत के कतर स्थित राजदूत विपुल और कतर एनर्जी के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया

