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ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा: वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप की सख्त चेतावनी, नौसैनिक नाकाबंदी का संकेत

ट्रंप द्वारा शेयर किए गए ‘Just the News’ के आर्टिकल में दावा किया गया है कि यदि ईरान अमेरिका की मांगें नहीं मानता, तो उसके खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू की जा सकती है।

देशबन्धु 12 Apr 2026 2:08 pm

मिशन आर्टेमिस-2 में भारतीय मूल के अमित क्षत्रिय ने निभाई अहम भूमिका, जानें उनके बारे में

क्षत्रिय ने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी से गणित में बैचलर आफ साइंस की डिग्री प्राप्त की है। वह पहले एक साफ्टवेयर और रोबोटिक्स इंजीनियर थे और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस ) के फ्लाइट डायरेक्टर के रूप में भी काम किया है, जहां उन्होंने वैश्विक टीमों का नेतृत्व किया।

देशबन्धु 12 Apr 2026 11:51 am

आरएसएस-भाजपा संविधान को कमजोर करना चाहते हैं : राहुल गांधी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को 'रन फॉर अंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' मैराथन की शुरुआत की

देशबन्धु 12 Apr 2026 10:19 am

अमेरिका-ईरान में 20 घंटे से ज्यादा हुई चर्चा, नहीं हुई कोई डील: जेडी वेंस

पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर 20 घंटे से भी ज्यादा समय तक बातचीत हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला

देशबन्धु 12 Apr 2026 9:59 am

भारत का 'विजन 2047' नीतियों पर आधारित : विनय क्वात्रा

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने टेक्सास में एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक 'विकसित राष्ट्र' बनने की भारत की यात्रा शैक्षणिक और नीतिगत विमर्श पर आधारित है

देशबन्धु 12 Apr 2026 9:49 am

मार्को रुबियो ने ईरान से जुड़े तीन व्यक्तियों के ग्रीन कार्ड रद्द किए

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तीन ईरानी नागरिकों का कानूनी स्थायी निवासी दर्जा खत्म कर दिया है। इन लोगों के ईरान की सरकार से जुड़े लोगों से संबंध बताए जा रहे हैं

देशबन्धु 12 Apr 2026 9:45 am

संडे जज्बात-मैंने नक्सली बने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने झकझोर दिया था

मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा पर स्थित चित्रकुंडा इलाका उस वक्त नक्सलियों के एकतरफा कंट्रोल में था। 19 दिसंबर 1998 की रात, चित्रकुंडा थाने के अंतर्गत आने वाली मल्लिगुड़ा जुडाम पोस्ट पर नक्सलियों ने हमला कर दिया। हमले में पोस्ट पर तैनात सभी पुलिसकर्मी मारे गए। इसके बाद पुलिस प्रशासन चिंतित हो गया। हालात पर काबू पाने के लिए एक स्थानीय आदिवासी पुलिस अधिकारी की तलाश शुरू हुई, जो इलाके की भौगोलिक बनावट को अच्छी तरह जानता हो और स्थानीय भाषा समझता-बोलता हो। साथ ही नक्सलियों के बीच का आदमी हो। उस वक्त मैं ओडिशा के कोरापुट जिले में तैनात था। मुझे इस जिम्मेदारी के लिए सबसे बेहतर पाया गया और बुलाकर वहां तैनात किया गया। हालांकि, मैं वहां बिल्कुल नहीं जाना चाहता था, क्योंकि वह मेरा अपना इलाका था और वहां के लोग अपने थे। मैं सोच रहा था- अपने ही लोगों के सामने एक पुलिस अफसर बनकर कैसे खड़ा हो पाऊंगा? अगर गोली चलानी पड़ी, तो कैसे चलाऊंगा? एक तरफ ड्यूटी थी, तो दूसरी तरफ अपने लोग। आखिरकार, मैंने ड्यूटी को चुना। दरअसल, नक्सलियों ने चित्रकोंडा थाने के तहत 1962 में बने बालिमेला बांध के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया था और इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए थे। उन्होंने आस-पास के गांवों और ओडिशा के दंडकारण्य क्षेत्र में लोगों को प्रशासन के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया। मजदूरों के अधिकार के नाम पर गांव वालों को अपने साथ जोड़ने लगे और धीरे-धीरे उन्हें नक्सल आंदोलन में शामिल करने लगे। बांध के खिलाफ उन्होंने एक तरह से संगठित मुहिम ही छेड़ दी। उस वक्त हमारी मल्लिगुड़ा पोस्ट पर कुल 35 सुरक्षा बल के जवान तैनात थे। वहां शौच की बड़ी समस्या थी- करीब 500 मीटर दूर एक नाले के पास जाना पड़ता था। साल 2001 की बात है। उस दिन हमारा एक सिपाही उसी नाले के पास शौच के लिए गया। वहां नक्सलियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और उसे 28 गोलियां मारीं। यह हमला एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया था। दरअसल, नक्सलियों को उम्मीद थी कि एक सिपाही पर हमला होने की खबर मिलते ही बाकी सुरक्षा बल भी मौके पर पहुंच जाएगा और फिर हम सभी को जमीन में बिछाई अपनी एंटी-बारूदी सुरंग यानि लैंडमाइन से एक साथ उड़ा देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीएसएफ ने हमें इस घटना की जानकारी दे दी थी। सभी पुलिस मुख्यालय अलर्ट हो गए थे। उसके बाद फोर्स के कमांडेंट, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, एंटी-नक्सल फोर्स और बाकी पुलिस अधिकारी मौके पर अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए तैयार हुए। वहां जाने के दो रास्ते थे- एक सड़क के जरिए और दूसरा मोटर लॉन्च के जरिए। हमने मोटर लॉन्च वाला रास्ता चुना। लेकिन उस पूरे रास्ते में नक्सलियों ने जगह-जगह लैंडमाइन बिछा रखी थीं। हम आगे बढ़ते रहे। जाते समय तो सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन लौटते वक्त अचानक रास्ते में बिछी बारूदी सुरंगें फटने लगीं। मेरी मोटर लॉन्च आगे निकल चुकी थी, इसलिए मैं और मेरे कुछ साथी बच गए। पीछे मुड़कर देखा, तो दिल दहल गया- पीछे आ रही हमारे साथियों की गाड़ियां एक-एक कर धमाकों में उड़ रही थीं। कुछ ही पलों में सब खत्म हो गया… सभी साथी मार दिए गए। उसके बाद नक्सलियों ने हमारा पीछा किया और हम पर फायरिंग शुरू कर दी। उस वक्त भागने के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं था। अगर मैं भावनाओं में बहकर साथियों के लिए वापस लौटता, तो जिंदा न बचता। उस दिन अपने साथियों को पीछे छोड़कर भागना मेरे लिए सबसे दर्दनाक फैसला था। उसके बाद कई दिनों तक नींद नहीं आई। आंखें बंद करता, तो वही मंजर सामने आ जाता- साथियों की मौत, धमाकों की आवाजें… सब कुछ। उस दौरान जब भी फील्ड में जाता, उन साथियों की याद बार-बार लौट आती। आज भी वही होता है। आज भी अगर मेरे पीछे अचानक कोई गाड़ी आती दिखती है, तो चौंक जाता हूं- एक पल के लिए लगता है, कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं। आखिर वह हमला मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बन गया। मैंने तय कर लिया कि अब नक्सलियों को नहीं छोड़ूंगा। अब तक मैं बातचीत का रास्ता अपना रहा था, लेकिन यह तरीका कारगर साबित नहीं हो रहा था। मैंने प्लान तैयार करना शुरू किया। मैं उन्हीं के बीच पला-बढ़ा था और उनका मुझ पर भरोसा था, इसलिए मैंने उसी भरोसे को ताकत बनाया। सबसे पहले उनके इलाकों में अपनी खुफिया टीमें तैयार करनी शुरू की और उन्हें अलग-अलग जगहों पर तैनात करना शुरू किया। वे टीमें मुझे नक्सलियों की हर गतिविधि की जानकारी देने लगीं- कौन कहां जा रहा है, किस इलाके में उनकी मौजूदगी है, वगैरह-वगैरह। हालांकि, भले ही रिटायर हो चुका हूं, फिर भी एनकाउंटर की पूरी रणनीति आपसे साझा नहीं कर सकता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। फिलहाल, उन जानकारियों के आधार पर मैं अपनी रणनीति तैयार करता और एक-एक करके उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करता। उस दौरान हमने नक्सली बने अपने लगभग 20 लोगों का एनकाउंटर किया। यहीं से ओडिशा में नक्सलवाद के खात्मे की शुरुआत हुई। मैं जिस तरह एक के बाद एक एनकाउंटर कर रहा था, उससे नक्सलियों के निशाने पर आ गया। उन्हीं के बीच का आदमी था- उनकी चाल, उनका तरीका, सब जानता था… और शायद यही वजह थी कि वे भी मुझे किसी भी हालत में खत्म करना चाहते थे। कई बार तो मेरी पुलिस चौकी उड़ाने की कोशिश की। हर बार लगा कि अब बचना मुश्किल है… लेकिन किसी तरह बच जाता था। जब वह मुझे नहीं मार पाए तो मेरे परिवार को निशाना बनाने लगे। 2006 में उन्होंने सबसे पहले मेरे पिता जी को निशाना बनाया। वह एक गाड़ी से जा रहे थे। तभी, अचानक, नक्सलियों ने उनकी गाड़ी में विस्फोट कर दिया। धमाका इतना जोरदार था कि गाड़ी पलट गई। उस गाड़ी में सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई… और मेरे पिता जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी। इसके बाद भी मेरे परिवार के कई लोगों पर हमले हुए। कोई बुरी तरह घायल हुआ, कोई किसी तरह बचा। दरअसल, अब नक्सली मेरा हौसला तोड़ में जुट गए थे। वे जानते थे कि सीधे मुझ तक पहुंचना मुश्किल है… इसलिए उन्होंने मेरे अपने लोगों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसी बीच… एक और घटना हुई, जिसने मुझे फिर से अंदर तक झकझोर दिया। एक लड़का जो कि कोई मुखबिर नहीं था। बस इलाके के एक गांव का जवान लड़का था। सीधा-सादा… और, सच कहूं, इंसानियत के नाते मेरी मदद कर रहा था। उस दिन वह मुझसे मिलने आया था। हम मिले, थोड़ी बात हुई… और फिर वह वापस अपने गांव लौट गया। मुझे क्या पता था कि यही मुलाकात उसकी जिंदगी की आखिरी मुलाकात बन जाएगी। रास्ते में… नक्सलियों ने उसे घेर लिया। उसे कोई मौका नहीं दिया। वहीं उसकी हत्या कर दी। जब मुझे ये खबर मिली… मैं कुछ पल के लिए बिल्कुल सन्न रह गया। एक ही बात दिमाग में घूमने लगी- क्या उसकी मौत की वजह मैं हूं? सच बताऊं, उस दिन पहली बार मुझे लगा कि ये लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं रही… इसमें अब बेगुनाह लोग भी कुर्बान हो रहे हैं। दरअसल, जंगल में काम करते-करते ऐसा होता है। लोग आपके करीब आ जाते हैं। हर कोई मुखबिर नहीं होता… हर कोई खुफिया नहीं होता। कई लोग तो बस इसलिए मदद करते हैं क्योंकि वे इस हिंसा से परेशान होते हैं… क्योंकि वे चाहते हैं कि हालात बदलें। ऐसा नहीं है कि उस दौरान मैं केवल एनकाउंटर ही कर रहा था। मैंने कई नक्सलियों की गिरफ्तारियां भी कराईं और कई लोगों को आत्मसमर्पण भी करवाया। ऐसे ही एक नक्सली की कहानी है, जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाया। मैंने एक बड़े नक्सली नेता को गिरफ्तार किया था। उसका नाम नहीं बता सकता। वह अपने ग्रुप का सी-कमांडर था। दरअसल, उसके घर में चोरी हो गई थी। वह बार-बार पुलिस स्टेशन जा रहा था, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिल रही थी। आखिरकार वह नक्सलियों के पास पहुंचा। नक्सलियों न सिर्फ उसका चोरी हुआ सामान बरामद करवाया, बल्कि हर तरह से उसका साथ दिया। जिसके बाद वह भी नक्सलियों बन गया। इसके अलावा नक्सल प्रभावित इलाकों में न तो ठीक से स्कूल हैं, न साफ पानी की व्यवस्था और न ही बाकी बुनियादी सुविधाएं। इन्हीं समस्याओं के नाम पर नक्सली लोगों को बरगलाते हैं और अपने गुट में शामिल करते हैं। लिहाजा, यही कहूंगा कि कुछ गलतियां हमारी भी हैं, जिनका नक्सली फायदा उठाते हैं। अगर इन चीजों को ठीक किया जाए, तो नक्सलवाद काफी हद तक अपने आप खत्म हो जाएगा। फिलहाल, आखिर में कहूंगा कि अपने काम से तो संतुष्ट हूं, लेकिन अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ने का मुझे अफसोस भी है। न चाहते हुए भी उन पर गोलियां चलानी पड़ीं। (शरतचंद्र बुरुदा ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-उन्होंने हेलिकॉप्टर से लाश भेजी, हम ट्रेनें भर देंगे:दिल्ली वालों ने पीट-पीटकर मार डाला मेरा बेटा, क्योंकि हमारी शक्ल अलग है मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 12 Apr 2026 4:57 am

करुणानिधि की सीट पर डेढ़ लाख उत्तर भारतीय, मारवाड़ी पार्षद:चेन्नई के राजस्थानी बोले- हम तमिल बोलते हैं, तमिलों को हिंदी सिखा दी

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की मिंट स्ट्रीट पर एक बाजार है- सौकार पेठ। यहां घूमते हुए एक महिला की आवाज सुनाई देती है- ‘भाया, यो केले कतो में दियो? थोड़ो सस्तो लगाओ, रोज रो काम है।’ राजस्थान में सुनी ये मारवाड़ी भाषा चेन्नई में सुनकर मैं चौंक जाता हूं। ज्यादा चौंकाने वाली बात ये कि फल बेच रहा लोकल तमिल शख्स हिंदी में जवाब देता है। मारवाड़ी बोल रही महिला का नाम निर्मला राजपुरोहित है। वे बचपन में ही मां के साथ चेन्नई आई थीं। अब इस परिवार की दूसरी पीढ़ी यहां रह रही है। निर्मला के पति का एक्सपोर्ट का बिजनेस है। सौकार पेठ इलाके में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के करीब डेढ़ लाख लोग रहते हैं। हिंदी विरोध की राजनीति करने वाली DMK ने यहां से मारवाड़ी को पार्षद का टिकट दिया, वे जीते भी। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। इस बार भी मुकाबला DMK अलायंस और BJP+AIADMK के बीच है। 200 साल से रह रहे उत्तर भारतीय, करुणानिधि को दो बार जितायाब्रिटिश दौर में चेन्नई आधुनिक शहर की तरह बसना शुरू हुआ। पोर्ट सिटी होने की वजह से ये इलाका दक्षिण भारत में कारोबार का बड़ा केंद्र बना। राजस्थान और गुजरात के मारवाड़ी कारोबारी यहां आए और साहूकारी, यानी फाइनेंसिंग का काम करने लगे। इसी साहूकारी की वजह से इलाके का नाम सौकार पेठ पड़ गया। ये इलाका हार्बर विधानसभा सीट में आता है। 1977 से सिर्फ एक बार छोड़ दें, तो ये सीट DMK ही जीतती आई है। DMK चीफ रहे एम. करुणानिधि भी दो बार जीते। सिर्फ 2011 में AIADMK को जीत मिली। 2016 और 2021 में ये सीट DMK के पास ही रही। पीके शेखर बाबू यहां से विधायक हैं। इस बार भी DMK ने उन्हें ही टिकट दिया है। 2021 में BJP कैंडिडेट यहां दूसरे नंबर पर रहे थे। अब उत्तर भारतीयों की बातनागौर के अगरचंद बैलगाड़ी से 2200 किमी चलकर चेन्नई पहुंचे सौकार पेठ में हमारी मुलाकात अगरचंद मानमल परिवार से हुई। अगरचंद 1820 में राजस्थान के नागौर के कुचैरा गांव से बैलगाड़ी से चेन्नई आए थे। उस वक्त राजस्थान में अकाल पड़ा था। परिवार के पन्नालाल चौगड़िया बताते हैं कि मेरे पूर्वजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी में भी नौकरी की थी। पन्नालाल का अभी फार्मा सेक्टर में करोड़ों का बिजनेस है। उनके मुताबिक, अगरचंद उत्तर भारत से चेन्नई पहुंचने वाले संभवत: पहले मारवाड़ी जैन थे। उनके बाद उत्तर भारत से कारोबारियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। अगली पीढ़ी में मानमल जी ने बिजनेस शुरू किया। इस परिवार ने मारवाड़ी जैनों को चेन्नई में बसने में मदद की। ‘हम खुद को नॉर्थ इंडियन नहीं कहते, तमिल बोलते हैं’पन्नालाल आगे बताते हैं, ‘अब हम खुद को नॉर्थ इंडियन नहीं बोलते। हमें यहां 200 साल हो गए हैं। चेन्नई में रहने वाले ज्यादातर तमिल इतने वक्त से यहां नहीं रहते। हमें जितनी अच्छी हिंदी आती है, उससे ज्यादा तमिल आती है।’ मुझे नहीं लगता कि नॉर्थ इंडियंस के लिए तमिलनाडु से ज्यादा सुरक्षित जगह कोई हो सकती है। DMK के करुणानिधि हों, या AIADMK के एमजी रामचंद्रन, वे हमारे दादाजी के पैर छूकर ही चुनाव प्रचार शुरू करते थे। भाषाई विवाद और इस पर होने वाली राजनीति पर पन्नालाल के बड़े भाई कहते हैं, 'मीडिया ये मुद्दा उछालती है। हमें इसकी वजह से कोई दिक्कत नहीं हुई। तमिलों के बीच रहते हुए कभी महसूस नहीं हुआ कि हम बाहर से हैं।’ DMK के सपोर्ट से पार्षद बने राजेश जैन, बोले- तमिल पर गर्व इस इलाके के पार्षद राजेश जैन हैं। वे मध्यप्रदेश के इंदौर के दोंदवाड़ा से रहने वाले हैं। वे बताते हैं, ‘10वीं तक पढ़ाई के बाद मैं 1987 में चेन्नई आ गया था। शुरू में चाय की दुकान में काम किया। फिर नौकरी की। नौकरी से मोहभंग हुआ, तो खुद का बिजनेस शुरू किया। अब रियल्टी और टेक्सटाइल का कारोबार करता हूं। करोड़ों का बिजनेस है।’ राजेश स्टालिन की पार्टी DMK से पार्षद चुने गए। वे चेन्नई के इकलौते उत्तर भारतीय पार्षद हैं। राजेश कहते हैं कि इससे पहले कभी तमिलनाडु की स्थानीय पार्टी ने उत्तर भारतीयों को सपोर्ट नहीं किया, लेकिन DMK ने मुझे टिकट दिया और मैं चुनाव जीतकर आया। DMK हिंदी विरोधी नहीं है, बल्कि तमिल भाषा पर गर्व करते हैं और ये उनका अधिकार है। बीकानेर से घूमने आए थे मनीष, फिर यहीं रह गए, अब तीन दुकानें राजस्थान के बीकानेर से चेन्नई आकर बसे मनीष पारिक की भी ऐसी ही कहानी है। वे बताते हैं, ‘2003 में दादा-दादी के साथ चेन्नई आया था। ये शहर पसंद आ गया। पहले छोटी-मोटी नौकरी की। 23 साल से चेन्नई में हूं। मेरी तीन दुकानें हैं। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। वे नॉर्थ की तरह बेवजह परेशान नहीं करते। चेन्नई आने के दो साल में ही मैंने तमिल सीख ली। अब तमिल में कस्टमर से डील करता हूं।’ निर्मला 53 साल से चेन्नई में, पहनावा अब भी मारवाड़ी मनीष की दुकान के पास हमें निर्मला राजपुरोहित मिलीं। वे 1973 में परिवार के साथ राजस्थान के जालोर से चेन्नई आई थीं। निर्मला बताती हैं, ‘राजस्थान तो पीछे छूट गया, लेकिन पहनावा हो या खाना-पीना, सब मारवाड़ी ही है।' 'मुझे तो आज तक भाषा या फिर किसी भी वजह से परेशान नहीं किया गया। यहां रात को 11 बजे भी निकलो, तो डर नहीं लगता। हमने तो यहां तमिलों को हिंदी और मारवाड़ी सिखा दी। हमारे घर में नाश्ता भी इडली-सांभर ही होता है।’ विकास के पिता 20 दिन के लिए आए थे, अब 20 हजार करोड़ रुपए की कंपनी सौकार पेठ में ज्वेलरी की सबसे बड़ी दुकान विकास मेहता की है। उनके दादा राजस्थान में मेथी दाने का कारोबार करते थे। एक बार विकास के पिता पेमेंट लेने चेन्नई आए थे। डीलर ने कहा कि पेमेंट में टाइम लगेगा। वे 20 दिन के लिए यहीं रुक गए। इसी दौरान एक सुनार के यहां काम करने लगे। मन लगा तो पूरा काम समझ लिया। 1971 में अपनी ज्वेलरी शॉप खोली। आज इस परिवार की जोहरी ज्वेलर्स नाम से 20 हजार करोड़ रुपए की कंपनी है। विकास की पढ़ाई चेन्नई में ही हुई है। वे फर्राटेदार तमिल बोलते हैं। कहते हैं कि धंधे में भाषा सीखना जरूरी है। तमिलनाडु में DMK+ Vs AIADMK, एक फेज में चुनाव असम और केरलम में वोटिंग हो चुकी हैं, पढ़िए यहां कौन आगे...1.असम में हिमंता आगे, 90 सीटें जीत सकता है NDA, कांग्रेस को 15-20 सीटों के आसार असम में फिर हिमंता सरकार बन सकती है। BJP और सहयोगी पार्टियां 90 सीटों पर आगे नजर आ रही हैं। 2021 में NDA को 75 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को 15 से 20 सीटें मिलने के आसार हैं। बदरुद्दीन अजमल की AIUDF, TMC और बाकी पार्टियों को 1 से 2 सीटें तक मिल सकती हैं। पढ़ें पूरी खबर... 2. केरलम में कांग्रेस+ को 70-80 सीटों के आसार, लेफ्ट को मिल सकती हैं 60 से 70 सीटें केरलम में 9 अप्रैल को 140 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। यहां लेफ्ट के गठबंधन LDF और कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के बीच नेक टू नेक फाइट है। UDF को 70 से 80 और LDF को 60 से 70 सीटें मिल सकती हैं। BJP को 3 से 5 सीटें मिलने के आसार हैं। BJP लोकल बॉडी इलेक्शन में जीत के बाद भी 20 से 25 सीटों पर ही फाइट दे रही है। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 12 Apr 2026 4:53 am

बांग्लादेश में नियुक्तियों पर विवाद, रुमीन फरहाना ने बीएनपी सरकार पर साधा निशाना

बांग्लादेश की स्वतंत्र सांसद रुमीन फरहाना ने सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार पर अहम पदों पर पार्टी से जुड़े लोगों की नियुक्ति को लेकर तीखा हमला बोला है

देशबन्धु 12 Apr 2026 4:50 am

ईरान पर नेतन्याहू का वार: लड़ाई जारी रखने का ऐलान

ईरानी मीडिया के हवाले से आई खबर के अनुसार ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू हो गई है

देशबन्धु 12 Apr 2026 4:40 am

लेबनान में 'अब कोई सुरक्षित जगह नहीं: यूनिसेफ

लेबनान में आसमान से बरसते बम भारी तबाही लेकर आ रहे हैं। रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है

देशबन्धु 11 Apr 2026 11:33 pm

ट्रंप की ईरान पर नए हमले की तैयारी? इस्लामाबाद में बातचीत के साथ ही अमेरिका क्यों बढ़ा रहा सैन्य जमावड़ा, समझें

अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। कई फाइटर जेट और हमलावर विमान पहले ही तैनात किए जा चुके हैं, जबकि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की तैयारी जारी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी सेना की 28वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 1500 से 2000 सैनिकों को जल्द ही मध्य पूर्व भेजा जा सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना भी बड़े स्तर पर सक्रिय हो गई है।

देशबन्धु 11 Apr 2026 3:56 pm

चेहरा बिगड़ा, पैरों में गंभीर चोट... 28 फरवरी के अटैक में बुरी तरह घायल हो गए थे मुज्तबा खामेनेई

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को सेंट्रल तेहरान में स्थित सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कंपाउंड पर अमेरिका और इजरायल द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था। इस हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई, जबकि उनके परिवार के कई अन्य सदस्य भी मारे गए।

देशबन्धु 11 Apr 2026 2:51 pm

इस्लामाबाद वार्ता पर संकट: ईरान की शर्तें, पाकिस्तान के बयान और इजराइल की तैयारी से बढ़ा तनाव

इस वार्ता के भविष्य पर सबसे बड़ा सवाल ईरान की सख्त शर्तों के कारण खड़ा हुआ है। तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक इजराइल लेबनान में अपने सैन्य अभियान नहीं रोकता, तब तक वह किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं होगा।

देशबन्धु 11 Apr 2026 9:15 am

ट्रंप का अल्टीमेटम: ईरान चाहे या न चाहे, होरमुज़ खुलेगा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि शनिवार को पाकिस्तान में ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर बातचीत करेंगे

देशबन्धु 11 Apr 2026 9:00 am

ऐतिहासिक मिशन आर्टेमिस II संपन्न, अंतरिक्ष यात्रियों की धरती पर सुरक्षित लैंडिंग

नासा का आर्टेमिस II मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह अंतरिक्ष की गहराई से खोज में मानवता की वापसी की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है

देशबन्धु 11 Apr 2026 8:52 am

अमेरिका-ईरान वार्ता का संयुक्त राष्ट्र ने किया स्वागत, शांति और स्थायी समझौते की अपील

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस्लामाबाद में शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने यह जानकारी दी

देशबन्धु 11 Apr 2026 8:50 am

सोनिया ने 9 दिन इंतजार कराया, बागी हो गईं ममता:बंगाल में कभी 39% वोट पाने वाली कांग्रेस, 2.9% पर सिमटी; क्या जानबूझकर हार रहे राहुल

1947 में देश के बंटवारे के साथ बंगाल का भी विभाजन हो गया। भारत को पश्चिम बंगाल मिला और पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में चला गया, जो बाद में बांग्लादेश बना। तब बंगाल का 67% हिस्सा पाकिस्तान को और 37% हिस्सा भारत को मिला। 1952 में पहली बार पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए। 238 में से 150 सीटें कांग्रेस ने जीत ली। सीपीआई वाले लेफ्ट फ्रंट को 41 और जनसंघ वाले राइट ब्लॉक को 13 सीट मिलीं। पीएम जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी के पर्सनल डॉक्टर रहे बिधान चंद्र रॉय मुख्यमंत्री बने। पश्चिम बंगाल में लगातार 20 साल और कुल 25 साल कांग्रेस सरकार में रही, लेकिन 1977 के बाद वो अपना सीएम नहीं बना पाई। अब उसका कोई विधायक भी नहीं है। कभी 39% से ज्यादा वोट शेयर भी सिमटकर 3% से कम हो गया। आखिर पश्चिम बंगाल में सत्ता से दूर कैसे हुई कांग्रेस और आज भी सरकार बनाने की दौड़ से बहुत पीछे क्यों है; इलेक्शन एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… तारीख- 18 अप्रैल 1975, जय प्रकाश नारायण यानी जेपी का काफिला कलकत्ता विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम से गुजर रहा था। जेपी एंबेसेडर कार में थे। अचानक 20 साल की एक लड़की भीड़ से निकली और उनकी कार के बोनट पर चढ़कर नाचने लगी। वो लड़की थीं- ममता बनर्जी। जेपी का काफिला रोककर ममता, रातों-रात इंदिरा की आंखों का तारा बन गईं। 1984 के लोकसभा चुनाव में महज 29 साल की ममता ने दिग्गज वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी को हरा दिया। उसी साल उन्हें प्रदेश युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया। 8 साल बाद यानी 1992 में ममता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में भी उतर गईं। सामने थे कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी के चहेते सोमेन मित्रा। ममता चुनाव हार गईं, लेकिन उनका बढ़ता कद प्रणब मुखर्जी, सोमेन मित्रा, प्रियरंजन दासमुंशी जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताओं को चुभने लगा। आखिरकार ममता को युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। फिर आई तारीख 9 अगस्त 1997, कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था। ममता को इसमें नहीं बुलाया गया। नाराज ममता ने स्टेडियम के बाहर रैली बुला ली। सीनियर जर्नलिस्ट कल्याणी शंकर अपनी किताब ‘Pandora's Daughters’ में लिखती हैं- ‘सीताराम केसरी ने ममता की रैली रोकने की पूरी कोशिश की। कई नेताओं को मनाने के लिए भेजा, पर ममता अड़ी रहीं। ममता की रैली में हजारों लोग पहुंचे। भीड़ देखकर ममता गदगद दिखीं और उन्होंने एलान किया- हमारी रैली में आने वाले ही असली ग्रासरूट कांग्रेस (तृणमूल कांग्रेस) वर्कर हैं।’ ममता की रैली से घबराए कांग्रेस नेताओं ने आनन-फानन में उनकी सोनिया गांधी से मीटिंग कराई। दिल्ली में आधी रात को ममता, सोनिया से मिलीं। बैठक के बाद ममता ने ऐलान किया- ‘मैं पार्टी से अलग नहीं हो रही हूं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस को तभी भंग करूंगी, जब सोनिया गांधी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगी।’ हालांकि, तब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनीं। आखिरकार ममता बनर्जी का सब्र टूट गया। एक रोज उन्होंने एलान किया- ‘अब मैं सोनिया गांधी या कांग्रेस से बात करने से बहुत नफरत करती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझसे समझौता करने के लिए 9 दिन इंतजार कराया। मुझसे बात करने का वादा किया, लेकिन बात नहीं की। बदले में मुझे क्या मिला? पार्टी से निष्कासन।’ 1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाई और अगले ही चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी बन गईं। कांग्रेस का करीब 30% वोट झपट लिया। उसके बाद कांग्रेस पश्चिम बंगाल में कभी नहीं लौट सकी। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पतन की 3 बुनियादी वजहें हैं... 1. सामाजिक वजह: भद्रलोक बनाम सर्वहारा के संघर्ष ने लेफ्ट का जनाधार बढ़ा दिया 2. राजनीतिक वजह: इंदिरा की केंद्रीकरण नीति और कांग्रेस में दरार 3. आर्थिक वजह: केंद्र की भेदभावपूर्ण नीतियां क्या कांग्रेस के पास पश्चिम बंगाल में वापसी का कोई रोडमैप है? 2021 विधानसभा में कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ गठबंधन किया था। वह 92 सीटों पर लड़ी, लेकिन कोई सीट नहीं जीत पाई। इस बार सभी सीटों पर कांग्रेस अकेले लड़ रही है। सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य बताते हैं… -------------------------- चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- 'शूद्र' महिलाओं से संबंध बनाते थे नंबूदरी ब्राह्मण: नस्ल सुधारने के नाम पर जन्मे बच्चों से दूर रहते, केरलम की राजनीति में कितना असर केरलम का त्रावणकोर इलाका। एक ब्राह्मण पुरुष तैयार होकर नायर बस्ती में जाता है। वहां एक घर के बाहर नहाता है। कपड़े बदलता है। एक अन्य ब्राह्मण उसे खाना परोसता है। फिर वह खाना खाता है। कुछ देर बाद वह घर के बाहर चप्पल उतार कर अंदर चला जाता है, जहां एक महिला उसका इंतजार कर रही होती है। जब महिला का पति लौटता है और उसे घर के बाहर एक आदमी की चप्पल दिखती है, तो बिना कुछ कहे लौट जाता है। क्योंकि वो समझ जाता है कि उसकी पत्नी एक नंबुदरी ब्राह्मण पुरुष के साथ संबंधम में है। ये किस्सा केरलम की दशकों पुरानी परंपरा ‘संबंधम’ का है, जिसमें नंबूदरी ब्राह्मण नायर महिलाओं से शारीरिक संबंध बना सकते थे। जानिए कहानी इसी ‘संबंधम’ परंपरा की…

दैनिक भास्कर 11 Apr 2026 5:32 am

कैप्टन बाबा-एकनाथ शिंदे में 17 बार कॉल क्यों हुई:CM बदलने के लिए पूजा का दावा कितना सच, खरात के 8 नेताओं से कनेक्शन

पूजा-पाठ के नाम पर रेप के आरोपों में घिरे कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के बड़े नेताओं से कनेक्शन सामने आए हैं। सोशल एक्टिविस्ट अंजलि दमानिया का दावा है कि खरात की महाराष्ट्र के पूर्व CM एकनाथ शिंदे से 17 बार बात हुई थी। खरात और महाराष्ट्र महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रुपाली चाकणकर के बीच 177 बार फोन कॉल हुई। ये बात खरात के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) से पता चली है। अंजलि के मुताबिक, कॉल डेटा रिकॉर्ड से 8 नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। इनमें NCP (अजित गुट) के सुनील तटकरे, BJP के चंद्रकांत पाटिल और आशीष शेलार, शिवसेना (शिंदे गुट) के संजय शिरसाट, दीपक लोंढे और शिवसेना (उद्धव गुट) के मिलिंद नार्वेकर शामिल हैं। दावा- अजित पवार के प्लेन क्रैश से एक दिन पहले और बाद में खरात के अकाउंट में 73 बार ट्रांजैक्शनअंजलि का दावा है, ‘अजित पवार के प्लेन क्रैश के एक दिन पहले, यानी 27 जनवरी, हादसे वाले दिन और एक दिन बाद अशोक खरात ने समता पटसनस्थे बैंक खाते में कई बड़े लेनदेन किए थे। हादसे वाले दिन ट्रांजैक्शन के 28 मैसेज, एक दिन पहले 17 और एक दिन बाद यानी 29 जनवरी को 13 मैसेज आए।’ अंजलि कहती हैं, ‘21 से 29 जनवरी तक कुल 92 बार अकाउंट में क्रेडिट के मैसेज आए। ये मैसेज तभी आते हैं, जब बैंक खाते में पैसे भेजे गए हों। अगर इन मैसेज का सोर्स पता चले तो बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो सकता है। मैंने SIT से इस लेनदेन की जांच करने की मांग की है।’ अनजान शख्स ने भेजी कॉल डिटेल रिपोर्ट, किसने भेजी सरकार जांच कराएगीअंजलि कहती हैं, ‘मुझे वॉट्सएप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया। इसमें अशोक खरात के कॉल डेटा रिकॉर्ड्स थे। मैंने AI की मदद से पता लगाया कि खरात के मोबाइल फोन से कब, किसे और कितनी बार कॉल किया गया। इसी से पूर्व CM एकनाथ शिंदे से फोन पर 17 बार बातचीत होने का पता चला।’ ‘कॉल डेटा से ये भी पता चला कि राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रुपाली चाकणकर और खरात के बीच 33,727 सेकेंड तक बात हुई। उनकी बहन प्रतिभा चाकणकर ने खरात को 236 बार कॉल किया।‘ अंजलि ने CDR के बारे में SIT से बात की है। DGP सदानंद दाते को इसकी जानकारी देने के लिए समय मांगा है। क्या इस लिस्ट में BJP-NDA से जुड़े बड़े लीडर भी हैं? अंजलि कहती हैं, ‘मैंने CDR में देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन, प्रवीण दरेकर और प्रसाद लाड जैसे बड़े नेताओं के नाम तलाशे, लेकिन उनसे जुड़ी कोई कॉल डिटेल नहीं मिली।‘ CDR से जुडे़ खुलासों पर CM देवेंद्र फडणवीस प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि CDR लीक होना संवेदनशील मुद्दा है। सरकार पता लगाएगी कि अंजलि को ये जानकारी किसने और कैसे पहुंचाई। दरअसल, अंजलि का बैकग्राउंड पॉलिटिकल रहा है। वे आम आदमी पार्टी में थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में नागपुर सीट से AAP के टिकट पर नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं थीं। कैप्टन बाबा के मंदिर गए शिंदे, शिवसेना नेता बोले- धार्मिक कार्यक्रम में गए थेउद्धव सरकार गिरने के बाद नवंबर 2022 में तब CM रहे एकनाथ शिंदे मीरगांव पहुंचे थे। अशोक खरात के साथ पूजा करते उनकी फोटो भी वायरल हुई हैं। इस पर शिवसेना (शिंदे गुट) के नासिक जिलाध्यक्ष अजय बोरास्ते कहते हैं, 'शिंदे साहब को विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। इसीलिए वे गए थे। अगर कोई मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम में जा रहा है, तो इसमें गलत क्या है।' अंजलि की CDR को फेक करार देते हुए अजय आगे कहते हैं, 'वे पहले ये बताएं कि उन्हें CDR किसने दी। अगर वे इसका सबूत दे सकती हैं, तो हमारी पार्टी इसका जवाब देगी।' ट्रस्ट मेंबर्स के डॉक्यूमेंट में राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली का नाम18 मार्च को खरात की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की फोटो वायरल हुईं। इनमें वे खरात के पैर धोते और छाता पकड़े दिख रही थीं। रुपाली अभी मीडिया के सामने नहीं आ रही हैं। अपने बचाव में उन्होंने बयान जारी कर कहा था, ‘शिवनिका संस्थान महादेव मंदिर से जुड़ा ट्रस्ट है। मैं जनप्रतिनिधि होने के नाते इससे जुड़ी हूं। मुझे अशोक खरात पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी नहीं है।’ NCP नेता का दावा- खरात ने CM बदलने के लिए अनुष्ठान किया 25 मार्च को महाराष्ट्र विधानसभा में NCP (शरद पवार) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि 35 विधायकों और नेताओं ने CM बदलने के लिए अशोक खरात से तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था। इस पूजा में शामिल लोगों ने अपनी उंगली पर कट लगाया गया था। आव्हाड के दावों की सच्चाई जानने के लिए हमने खरात बाबा के पास गए नेताओं और अंजलि दमानिया की CDR में बताए गए नामों से जुड़ी लगभग 200 फोटो देखीं। इनमें NCP (अजित गुट) के नेता सुनील तटकरे और रूपाली की उंगलियों पर सफेद बैंडेज लगा दिखा। हमने दोनों के हाथ पर इन कट मार्क की वजह जानने की कोशिश की। रुपाली और सुनील दोनों से संपर्क नहीं हो पाया। इसी दौरान NCP (अजित गुट) के प्रवक्ता सूरज चौहान से बात हुई। सुनील तटकरे को लगी चोट पर वे बताते हैं कि उनकी उंगली दरवाजे में फंस गई थी। मैं खुद उन्हें हॉस्पिटल लेकर गया था। खरात के भक्तों में DCP-ACP रैंक के अधिकारी भी18 मार्च को खरात की गिरफ्तारी के बाद से अब तक उस पर 13 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें 8 सेक्शुअल हैरेसमेंट, 4 आर्थिक धोखाधड़ी और एक मनी लॉन्ड्रिंग का है, जो ED ने दर्ज कराया है। नासिक SIT ने कैप्टन बाबा का नेटवर्क खंगालने के लिए अब तक 30 गवाहों से पूछताछ की है। जांच में 160 GB डिजिटल डेटा रिकवर किया गया है। शिरडी पुलिस ने खरात की अवैध संपत्ति की छानबीन करते हुए 56 लोगों के नाम पर खुले 100 बैंक एकाउंट्स का खुलासा किया है। इसमें परिवहन विभाग के 2 अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। ये भी पता चला है कि नासिक में तैनात DCP और ACP रैंक की 2 महिला पुलिस अफसरों ने मनचाही पोस्टिंग के लिए खरात से संपर्क किया था। इन पर जांच जारी है, इसलिए हम नामों का खुलासा नहीं कर रहे। ……………………… अशोक खरात पर ये स्टोरी भी पढ़ें… 1. ‘बेटी हो, कन्यादान करूंगा बोलकर 3 साल रेप किया‘, कैप्टन बाबा के ऑफिस का सच ‘पहली बार मिली, तो बोला कि तू मेरी बेटी है। तेरा कन्यादान मैं खुद करूंगा। शादी से पहले मुझे ऑफिस में बुलाया और रेप किया।’ ये आपबीती कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के खिलाफ पहली FIR कराने वाली महिला की है। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित और उनका परिवार बदनामी की वजह से सामने नहीं आना चाहता। ज्यादातर घर छोड़कर जा चुकी हैं। पढ़ें पूरी खबर… 2. कैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 11 Apr 2026 5:30 am

नेपाल में नई पीढ़ी की दस्तक, 26 साल की रुबी ठाकुर बनीं सबसे युवा डिप्टी स्पीकर

नेपाल की राजनीति में नई पीढ़ी की मजबूत एंट्री देखने को मिली है। 26 वर्षीय रुबी कुमारी ठाकुर को शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा का उपसभामुख (डिप्टी स्पीकर) चुना गया

देशबन्धु 11 Apr 2026 4:40 am

नेतन्याहू का कड़ा संदेश: इजरायल विरोधियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक सख्त बयान में कहा कि इजरायल अपने खिलाफ किसी भी हमले या विरोध के सामने चुप नहीं रहेगा

देशबन्धु 10 Apr 2026 10:51 pm

सीजफायर वार्ता से ईरान का किनारा: लेबनान में शांति से पहले नहीं होगी बातचीत

गौरतलब है कि 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी। इसी समझौते के तहत दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को स्थान चुना गया था।

देशबन्धु 10 Apr 2026 4:33 pm

कुवैत बेस हमले पर अमेरिका के घायल सैनिकों ने उगल दी सच्चाई, कहा-ईरान ने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया

CBS को दिए इंटरव्यू में एक सैनिक ने बताया कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि ईरान ने पूरी रणनीति के साथ इसे अंजाम दिया था। सैनिक के मुताबिक, “हम जानते थे कि यह बेस निशाने पर हो सकता है। खुफिया रिपोर्ट में पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।”

देशबन्धु 10 Apr 2026 3:52 pm

पत्नी के चक्कर में गई मंत्री की कुर्सी, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 15 दिन में ही कैबिनेट से हटाया

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह को उनके पद से हटा दिया गया है। यह निर्णय सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की सिफारिश पर लिया गया।

देशबन्धु 10 Apr 2026 3:31 pm

72 घंटे में 8 देशों के संघर्ष पर विराम: दुनिया को मिली अस्थायी राहत, शांति की कोशिशें तेज

Iran America Israel Conflict, Ceasefire in 8 Nation, Russia Ukraine War, Israel Lebanon War, Pakistan Afghanistan War, US Israel Iran War, Donald Trump, Vladimir Putin

देशबन्धु 10 Apr 2026 1:00 pm

विदेशों में चीन को टक्कर देने के लिए निजी क्षेत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा अमेरिका

संयुक्त राज्य अमेरिका को वैश्विक बाजारों में अपने निजी क्षेत्र को अधिक आक्रामक तरीके से उतारना चाहिए ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके

देशबन्धु 10 Apr 2026 9:22 am

ईरान की चेतावनी: नेतन्याहू को रोकें ट्रंप

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया को खत्म करने की इजाजत न दे

देशबन्धु 10 Apr 2026 8:50 am

विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मार्को रुबियो की मुलाकात, भारत दौरे पर आने का दिया संकेत

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले महीने भारत दौरे पर आ सकते हैं। यह संकेत उस समय मिला जब उन्होंने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ व्हाइट हाउस में एक सकारात्मक बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और अहम तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का जिक्र किया गया

देशबन्धु 10 Apr 2026 8:40 am

राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों से शुल्क वसूले जाने की रिपोर्टों पर ईरान को दी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की शिपमेंट को सीमित करके संघर्ष-विराम (सीजफायर) की सहमति का उल्लंघन करने का आरोप लगाया

देशबन्धु 10 Apr 2026 8:35 am

लेबनान में बैंडेज, एंटीबायोटिक्स की किल्लत, जल्द हो जाएंगे ये जरूरी सामान खत्म: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि लेबनान के कुछ अस्पतालों में जीवन बचाने वाली ट्रॉमा मेडिकल किट कुछ ही दिनों में खत्म हो सकते हैं

देशबन्धु 10 Apr 2026 4:00 am

इजरायल ने भारत के रुख की सराहना की, होर्मुज में फ्री समुद्री आवाजाही पर दिया जोर

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि भारत मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच भी अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है

देशबन्धु 10 Apr 2026 3:40 am

चीन ने इंटरनेट सेवा के लिए उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया

चीन ने थाइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से लॉन्ग मार्च-6ए रॉकेट का उपयोग करके अपनी इंटरनेट सेवा के लिए गुरुवार की सुबह 3.38 बजे 21वें ग्रुप के निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया

देशबन्धु 9 Apr 2026 11:35 pm

शी चिनफिंग ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के उद्घाटन समारोह में भाषण दिया

चीन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 8 अप्रैल की सुबह राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में शुरू हुआ

देशबन्धु 9 Apr 2026 11:28 pm

चीन में लघु व मझौले उद्यमों के लिए विकास वातावरण में लगातार सुधार जारी

चीन के लघु एवं मझौले आकार के उद्यमों के विकास को बढ़ावा देने वाले केंद्र ने लघु एवं मझौले आकार के उद्यमों के विकास वातावरण पर 2025 मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की

देशबन्धु 9 Apr 2026 11:16 pm

नेतन्याहू का बड़ा ऐलान: लेबनान से सीधी वार्ता को मंजूरी

ईरान-इजरायल तनाव के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है

देशबन्धु 9 Apr 2026 10:43 pm

युद्धविराम पर संकट के बादल, लेबनान में इजरायली हमले में 254 लोगों की मौत, ईरान की कड़ी चेतावनी

लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि यदि इजरायल ने अपने हमले जारी रखे, तो तेहरान युद्धविराम से पीछे हट सकता है।

देशबन्धु 9 Apr 2026 1:28 pm

होर्मुज पर टोल की तैयारी: ईरान का बड़ा आर्थिक दांव, अरबों डॉलर की कमाई का अनुमान

ईरान हर बैरल तेल पर करीब 1 डॉलर का ट्रांजिट शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। यदि यह लागू होता है, तो अनुमान है कि ईरान को सालाना 70 से 80 बिलियन डॉलर (लगभग 6.4 से 7.4 लाख करोड़ रुपये) की कमाई हो सकती है! यह आय उसके पारंपरिक तेल निर्यात से होने वाली कमाई से भी ज्यादा हो सकती है।

देशबन्धु 9 Apr 2026 11:37 am

नाटो से निकलने पर विचार कर रहे हैं ट्रंप, चर्चा को गठबंधन के महासचिव मार्क रूटे से की मुलाकात

ईरान के साथ संघर्ष के बीच नाटो और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सरकार की कार्रवाई से नाटो देश बेहद नाराज नजर आ रहे हैं

देशबन्धु 9 Apr 2026 9:29 am

मंदी के बाद बांग्लादेश की ग्रोथ में तेजी आने की उम्मीद

वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में मंदी के दौर के बाद धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है, जिसे घरेलू मांग में सुधार और स्थिर होती स्थितियों से मदद मिलेगी

देशबन्धु 9 Apr 2026 9:19 am

घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था को बना रहे मजबूत, कर सुधारों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं के निर्यात में लचीलापन और लगातार सुधारों के दम पर तेजी से आगे बढ़ रही है

देशबन्धु 9 Apr 2026 9:09 am

व्हाइट हाउस: अमेरिका-ईरान समझौता वार्ता के ल‍िए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जाएंगे इस्लामाबाद

व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि दो-सप्ताह के संघर्ष-विराम पर अमेरिका की जीत हुई है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सेना ने संभव बनाया

देशबन्धु 9 Apr 2026 7:58 am

ब्लैकबोर्ड-वो बेटी जैसी थी, उसके पिता बोले-तुने इसका रेप किया:मैं पागल हो गया था, 25 साल बाद बरी हुआ, लगता है- कोई मारने आ रहा

57 साल के आजाद खान अपने भाई की किराने की दुकान पर बेसुध बैठे हुए हैं। तीन महीने पहले ही 25 साल बाद जेल से बाइज्जत बरी होकर आए हैं। अकेले में कुछ बुदबुदा रहे हैं। पूछने पर कहते हैं- पूरी जिंदगी काल-कोठरी में गुजार दी। अब किसी से क्या ही बात करूं, क्या ही बचा है! मैंने पूछा- पूरी जिंदगी जेल में गुजार दी, किसी का मर्डर किए थे क्या? ‘नहीं-नहीं, डकैती का झूठा मुकदमा था। कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सोचिए जरा- डकैती के मामले में आजीवन कारावास!’ तभी पीछे से आजाद की भाभी आशा बेन बोल पड़ती हैं, ‘बेकसूर थे। झूठे मुकदमे में गांव के एक परिवार ने फंसा दिया था। सब बर्बाद हो गया।’ स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज झूठे मुकदमों में फंसाए गए लोगों की कहानी, जिनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई और आखिर में बाद कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। मैं उत्तर प्रदेश के मैनपुरी शहर से 22 किलोमीटर दूर ब्योंती कटरा गांव पहुंचा हूं। 25 साल बाद जेल से बाइज्जत बरी होकर आए आजाद खान से मिलने। यहां संकरी गली और खुले में बहते एक गंदे नाले के बीच आजाद खान का छप्पर का घर है। इसकी हालत इतनी खराब है कि हल्की आंधी आए तो उड़ जाए। इससे सटा इनके भाई मस्तान खान का घर है। एक छोटा-सा बिना प्लास्टर वाला ईंट का बना। सामने दो-तीन मवेशी बंधे हुए हैं। यहीं पर मस्तान खान की दुकान है। उसके बाहर बैठ जाता हूं और अपने भाई आजाद खान को बुलाने के लिए कहता हूं, लेकिन आजाद मुझसे बात करने के लिए सामने नहीं आ रहे। पहले इनके भाई ने बुलाया और फिर भतीजा कई बार बुलाने गया तब आने को तैयार हुए। दुकान से बाहर आकर यहां रखे तख्त पर बैठ जाते हैं। अब भी काफी सहमे हुए नजर आ रहे हैं। बार-बार इधर-उधर देख रहे हैं। उसी तख्त के बगल बैठी इनकी भाभी आशा बेन कहती हैं- जेल जाने से मानसिक हालत खराब हो गई है। तीन महीने पहले 21 जनवरी 2026 को जब सुबह-सुबह मेरे बेटे और पति इन्हें जेल से रिहा कराकर घर लाए, तो गांव की बदली गली और घर देखकर चौंक गए। इन्हें सब बदला-बदला लग रहा था। धीमी आवाज में बोले- भाभी सब बदल गया न! मैं इनकी पीठ पर हाथ सहलाते हुए बोली- हां, सब बदल गया। अब जेल से छूटकर आ गए हो। डरो मत। मैं तुम्हारी मां जैसी हूं। जब ये जेल गए थे, तो 30 बरस के थे। 25 साल सलाखों के पीछे रहने के बाद 55 साल के हो गए हैं। इनकी पूरी जिंदगी जेल में चौपट कर दी गई। यह बताते हुए आशा बेन की आंखें भर आती हैं और दुपट्टे से आंसू पोछने लगती हैं। थोड़ी देर रुककर फिर कहती हैं- मुझे ब्याहकर आए 10 साल हुए थे। आजाद अपने 5 भाइयों में सबसे छोटे हैं। शुरू से थोड़ा अड़ियल मिजाज के रहे हैं। किसी से डरते नहीं थे। इसी वजह से गांव वालों की नजर में चढ़े हुए थे। 22 अक्टूबर 2000 को दिवाली का दिन था। हम लोग गहरी नींद में सो रहे थे। आजाद उस वक्त दिल्ली में सिलाई का काम करते थे। सुबह के 3 बजे, अचानक गांव में हल्ला मचा कि- डाका पड़ गया है। चोरी हो गई है। शोर-शराबा सुनकर हम भी उठकर दौड़े। हमारे गांव के एक ब्राह्मण परिवार के यहां चोरी हो गई थी। उनके यहां शादी की तैयारी चल रही थी, लिहाजा उनके घर में काफी गहने रखे थे, जो चोरी हो चुके थे। मामले की पुलिस से शिकायत की गई। फौरन हमारे एऊल थाना की पुलिस छानबीन में जुट गई। तीन-चार दिनों बाद अचानक पुलिस हमारे घर आई। गाली देते हुए बोली- उस रात डकैती में तुम्हारा देवर आजाद खान भी शामिल था। यह सुनकर हम हैरान हो गए। मैंने कहा- साहेब, वह तो दिल्ली में सिलाई का काम करते हैं। वो यहां कैसे आ गए? पुलिस कहने लगी- झूठ मत बोले। तुम लोगों ने उसे यहां से भगा दिया। उसके खिलाफ गवाही मिली है। तुरंत उसे बुलाकर थाने में पेश करो, वर्ना सभी को जेल में डाल दूंगा। हम लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं। मेहनत-मजदूरी करके घर चलाते हैं। उस दौरान गांव वाले हमारी हंसी उड़ाने लगे। कहने लगे- और चलो ठसक में! अब भुगतो अपनी करनी का फल। आखिर गांव वाले भी हमें ही गलत मान रहे थे। उसके बाद हमने आजाद को चिट्ठी लिखी और बताया- पुलिस आपको खोज रही है। घर आ जाइए। आपके ऊपर गांव के घर में डाका डालने का केस दर्ज है। इस बातचीत के दौरान तख्त पर ही मुरझाया चेहरा लिए, मटमैली पीली बनयान और पैजामा में आशा बेन के पति मस्तान खान भी बैठे हैं। कहने लगे- आजाद ने अपनी जवाबी चिट्ठी में लिखा- मैं तो दिल्ली में हूं। मैंने कौन-सा अपराध किया है, जो पुलिस के सामने सरेंडर करूं? आजाद अभी तक घर नहीं आए थे। इसी बीच, पुलिस घर की कुर्की-जब्ती का नोटिस लेकर आ गई। दीवार पर नोटिस चिपकाते ही घर में चीख-पुकार मच गई। हम पांच भाई, मेरे तीन बच्चे। कहां जाते। घर न बचता, तो सड़क पर आ जाते। उसके बाद हमने कर्ज लिया और वकील को 20 हजार रुपए दिए, तब कुछ दिनों के लिए कुर्की-जब्ती से मोहलत मिली। उसके बाद फौरन अपने भाई आजाद खान से मिलने दिल्ली निकल गया। उसे पूरी बात बताई, तब वह कोर्ट में सरेंडर करने को राजी हुआ। वह आया और कोर्ट में सरेंडर कर दिया। करीब महीनेभर बाद नवंबर 2001 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। फिर सुनवाई चली और सेशन कोर्ट ने 25 साल जेल की सजा सुनाई। अब जाकर तीन महीने पहले यह बाइज्जत बरी होक बाहर आया है। आजाद की न शादी हुई, न घर बसा। पूरी जवानी जेल में खप दिया। अब किसी काम का नहीं बचा है। सोच-सोचकर मानसिक रूप से बीमार हो गया। यह कहते हुए मस्तान खान फूट-फूटकर रोने लगते हैं। आंख मलते हुए बोलते हैं, ‘जेल में इससे मिलने के लिए हजार-पांच सौ रुपए पुलिस वालों को देने होते थे। मेर पास जब भी कुछ रुपए जमा होते, तब इससे मिलने चला जाता था। आखिर मेरा छोटा भाई है। जेल के दौरान मैंने कई बार कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई, लेकिन खारिज होती रही। वकील ने कहा- 50 हजार रुपए दो, तब जमानत करवाऊंगा, लेकिन उस वक्त मेरे पास उतने पैसे नहीं थे। किसी तरह से जमींदारों के खेत में दिहाड़ी-मजदूरी करके पैसे जुटाता, फिर साल-दो साल में वकील के पास जा पाता। वकील पैसे तो ले लेता, लेकिन जमानत नहीं करवाता था। एक बार तो रमजान का महीना था। 5 हजार रुपए लेकर मैनपुरी शहर से खाने-पीने का कुछ सामान खरीदने गया था। साथ में भाई की जमानत के लिए वकील से मिलकर बात करनी थी। उस दिन वकील ने मेरे सारे पैसे ले लिए। त्योहार का कोई सामान नहीं खरीद पाया। यहां तक कि इतना भी पैसा नहीं बचा कि बस का किराया दे सकूं। उस दिन पैदल ही मैनपुरी से अपने गांव आया था। इस बातचीत के दौरान बीच-बीच में आजाद खान कुछ-कुछ बुदबुदा रहे हैं। उनसे बात शुरू किया तो कहने लगे- जेल में मैं खूंखार कैदियों के बीच रह रहा था। एक बार तो वे सारे मिलकर मुझे मारने की योजना बना लिए थे। उन्होंने एक थैले में कई सारी खुरपियां जुटाई। एक कैदी ने तो मेरे हाथ पर खुरपी से हमला भी कर दिया था। मौके पर जेल अधिकारी पहुंच गए थे और किसी तरह बचाया था। उस दिन बच गया था, लेकिन इतना डर गया कि मानसिक रूप से बीमार रहने लगा। मन में एक खौफ बस गया। हर वक्त लगने लगा कि- कोई मुझे मारने आ रहा है। ऐसा लगने लगा कि जेल से बाहर जाऊंगा तो गांव वाले मार देंगे। मेरी खराब हालत खराब होने लगी। उसके बाद जेल प्रशासन मुझे बरेली सेंट्रल जेल से बनारस के मेंटल हॉस्पिटल लेकर गया। वहां मेरा दो साल इलाज चला। हाथ में कोर्ट-कचहरी के कागज पलटते हुए आजाद खान ये बातें बताते हैं। इस दौरान वह इधर-उधर देखते हुए अक्सर मुठभेड़-मुठभेड़ कहते हैं। पूछने पर कुछ नहीं बताते। फिर थोड़ा जोर देता हूं तो कहते हैं- हमारे गांव में दो समुदायों के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़े होते थे। 1999 की बात है। गांव में झगड़ा हुआ और पुलिस पहुंच गई। हमारी पुलिस से हाथापाई हो गई। मेरे कुछ साथियों ने पुलिस पर गोली चला दी। अटैंप्ट टू मर्डर का केस चला, मुझे भी 10 साल की सजा हुई थी। कुछ महीने जेल में रहा था, फिर जमानत पर छूटकर आया था। उसके बाद दिल्ली कमाने चला गया था और फिर यह डकैती का झूठा केस मुझ पर लाद दिया गया। यह कहते हुए आजाद खान अजीबोगरीब बातें करने लगते हैं। कुछ का कुछ बताने लगते हैं। पास में ही बैठी इनकी भाभी कहती हैं- अब आप इनसे मत बात कीजिए। इनकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। कई बार गाली-गलौज भी करने लगते हैं। 25 साल जेल के दौरान इन्हें अकेले काल-कोठरी में रखा गया था। वहां इन्हें टॉर्चर किया गया था, उसके बाद से बड़बड़ाने लगे हैं। हम लोग कुछ कर नहीं पा रहे थे। एक NGO ने हमारी मदद की। मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां मामले को झूठा पाया गया। सोचिए एक झूठे केस में इंसान की पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी गई। पागल बना दिया गया। जब तक हम लोग जिंदा हैं, इनकी देखभाल करेंगे, हमारे मरने के बाद इनका क्या होगा, पता नहीं। आजाद खान की इस स्याह कहानी को जानने के बाद मैं मैनपुरी से दिल्ली पहुंचा। यहां किराड़ी इलाके के प्रेम नगर में रामदास का परिवार रहता है। रामदास यहां चप्पल की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। 9 हजार रुपए महीना कमाते हैं। पड़ोसियों ने एक बच्ची के रेप के झूठा केस में फंसा दिया। पॉक्सो एक्ट तहत जेल गए। 7 साल जेल काटी और 2021 में बाइज्जत बरी बाहर आए हैं। रामदास बताते हैं- मुझ पर रेप का मुकदमा दर्ज था। अभी 60 साल का हूं। जब जेल गया था, तब 50 साल का था। मेरा दो बेटे-दो बेटियों समेत पूरा परिवार है। पड़ोसी ने मेरी जाति से नफरत करते थे, इसलिए मुझे फर्जी केस में फंसा दिया। एक ऐसी बच्ची का रेप करने और उसे गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया, जिसे मैं अपनी पोती मानता था। मई 2015 की बात है। मेरी सिलाई मशीन की फैक्ट्री थी। उसमें काम करने के बाद बैंक में गार्ड की नौकरी भी करता था। एक दिन शाम को घर आया, तो पड़ोसी मेरे परिवार से लड़ाई कर रहे थे। पता चला था कि गेट पर किसी कुत्ते ने पॉटी कर दी थी, जिसको लेकर मेरे परिवार से गाली-गलौज कर रहे थे। मैंने रोका तो मुझ पर टूट पड़े। घसीटते हुए कहने लगे- बहुत शान में चलता है न तू। ऐसा लगता है, जैसे कोई बड़ा रईस हो। कितनी बड़ी नौकरी करता है रे। आज हम तुझ पर केस करेंगे। अगले दिन सुबह-सुबह पुलिस मेरे घर आई और मुझे उठाकर ले गई। थाने में बताया कि मुझ पर रेप का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मुझे पीटते हुए बोली- तुम पर केस करने के लिए तुम्हारे पड़ोसी 50 हजार रुपए दिए हैं। अगर इस केस को खत्म करना है, तुम्हें एक लाख रुपए देने होंगे। मेरे पास उतने रुपए नहीं थे। नहीं दे पाया और पुलिस ने केस को बड़ा बनाकर मुझे जेल भेज दिया। इसके बाद तारीख पर तारीख शुरू हुई। मैंने कभी पॉक्सो एक्ट… के बारे में सुना तक नहीं था। उधर, मेरे जेल जाते ही मेरे बेटे-बहू, पत्नी सब दर-दर ठोकर खाने लगे। उस वक्त बहू गर्भवती थी। केस लड़ने के लिए मेरे बेटे ने एक-एक करके बहू की सारी ज्वैलरी बेच दी। हर तारीख पर 3 से 5 हजार रुपए खर्च हो रहे थे। जब गहने के पैसे खत्म हो गए तो मैंने जज से कहा था कि- साहब जो भी फैसला देना है दे दीजिए, नहीं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा। पास में बैठे रामदास के बेटे जोगिंदर दास भी ये बाते सुन रहे थे। वह कहते हैं- एक तरफ मेरी पत्नी गर्भवती थी, दूसरी तरफ पापा जेल में थे। जब भी वकील के पास जमानत के लिए जाता, वह कहता- 50 हजार रुपए दो, तभी जमानत की अर्जी लगवाऊंगा। जब पत्नी के सारे गहने बिक गए, तब फैक्ट्री की 5 सिलाई मशीनें भी बेच दी। उसके बाद पैसे कम पड़ने लगे। तो गांव जाकर घर की जमीन बेची। मामले में 10 लाख से ज्यादा खर्च हो गए थे। जब जेल में पापा से मिलने जाता, तो हम एक-दूसरे को देखकर रोते। उस वक्त यही सोचता जैसे भी पापा को जेल बाहर निकालूंगा। आखिर में किसी तरह पैसे दे-लेकर फाइनल सुनवाई हुई। तीस हजारी कोर्ट ने 2021 में पापा को 7 साल की जेल के बाद बरी कर दिया। दिल्ली सरकार को एक लाख रुपए मुआवजा देने को भी कहा। लेकिन जब हम ये पैसे लेने हम दिल्ली सचिवालय गए, तो वहां अधिकारी एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस का चक्कर कटवाने लगे। अब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। इस एक लाख को पाने के चक्कर मेंल हमारे ढाई लाख खर्च हो चुके हैं। केवल अपील पर अपील चल रही है। जोगिंदर की ये बातें सुनकर रामदास लंबी सांस लेते हुए बोलते हैं- जेल में गीता पढ़कर और पेंटिंग करके जिंदगी काट रहा था। वहां बाकी कैदी मुझे देखकर पूछते- चाचा, आप कौन-से जुर्म में जेल आए हो? मैं जैसे ही कहता- रेप केस में। वे पुलिस को गाली देते हुए कहते- आपकी उम्र भी तो देख लेते पुलिस वाले। उन्होंने ऐसी ही फर्जी केस में फंसाकर हमें अपराधी बनने को मजबूर किया है। रामदास कहते हैं- इस तरह 7 साल जेल में बेनुनाह होते हुए भी गुजारे। अब जेल से चले आने के बाद भी क्या बचा है। जमीन, गहने बिक गए। पूरी कमाई कोर्ट-कचहरी में लुटा दी। --------------------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-हट्टा-कट्टा भर्ती हुआ, फौज ने विकलांग बनाकर भेज दिया:8 महीने कोमा में रहा, होश आया तो पता चला- मुझे आर्मी से निकाल दिया ‘डेढ़ महीने से मुझे ‘महाराजा’ पनिशमेंट दी जा रही थी, जिसमें सिर के बल डेढ़-डेढ़ घंटे रहना होता था। एक दिन मैं बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रहा था। तभी एक जोरदार पंच मेरे सिर पर लगा और मैं गिर पड़ा। अफसर चिल्लाए- चेतन, उठो और लड़ो। मैंने कहा- अब नहीं लड़ पाऊंगा, सर। लेकिन उन्होंने कहा- नहीं चेतन, तुम्हें भिड़ना होगा। पूरी कहानी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- सिर्फ पीरियड्स में नहा पाती हैं महिलाएं:कम खाती हैं, ताकि शौच न जाना पड़े; बोलीं- नमक के खेत में ही पैदा हुए, इसी में मर जाएंगे चिलचिलाती धूप में दूर तक फैला नमक का मैदान इतनी तेज चमक रहा है कि आंखों में चुभ रहा है। दूर तक कहीं छांव नहीं। अचानक एक महिला, रमिला, काम छोड़कर धीरे से कहती हैं- ‘दिन में हम शौच नहीं जाते… लोग देख लेंगे। इसलिए खाना भी कम खाते हैं… ताकि बार-बार जाना न पड़े…पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 9 Apr 2026 5:16 am

पुडुचेरी क्यों मनाता है दो बार स्वतंत्रता दिवस:अंग्रेजों के बजाय फ्रांस का गुलाम कैसे बना; तीन राज्यों में फैले मिनी फ्रांस में आज वोटिंग

बात 18 अक्टूबर 1954 की है। सुबह का वक्त था और जगह पुडुचेरी का कीझूर इलाका। एक सरकारी इमारत के कमरे में काफी हलचल थी। एक कोने में पप्पा गौबार्ट नाम से मशहूर इंडो-फ्रेंच नेता एडौर्ड गौबार्ट खड़े थे। सफेद खादी के कुर्ते में लिपटे गौबार्ट कभी फ्रांसीसी प्रशासन का दाहिना हाथ माने जाते थे। उनके सामने फ्रांसीसी कमिश्नर का प्रतिनिधि पसीने पोंछते हुए फाइलों में उलझा था। बाहर हजारों की भीड़ देशभक्ति के नारे लगा रही थी। 178 लोग लाइन में लगे थे। सबके हाथ में मतपत्र था। वे एक-एक करके पेटी में वोट डाल रहे थे। जैसे ही आखिरी वोट डला, गौबर्ट बाहर निकले, उन्होंने अपना हाथ हवा में लहराया और देखते ही देखते कीझूर की धूल भरी सड़क 'जय हिंद' के नारों से गूंज उठी। 178 में से 170 लोगों ने पुडुचेरी के भारत में विलय के लिए वोट किया। इसके बाद पुडुचेरी भारत का हिस्सा बन गया, लेकिन फ्रेंच सरकार को इसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में 8 साल लग गए। 1962 में पुडुचेरी कानूनी तौर पर भारत में शामिल हो गया। आज, यानी 9 अप्रैल को पुडुचेरी में वोटिंग है। ऐसे में आज कहानी, मिनी फ्रांस कहे जाने वाले पुडुचेरी, यानी पांडिचेरी की जो साल में दो बार आजादी मनाता है… 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा ने भारत का रास्ता खोजा। इसके बाद यूरोप में होड़ मच गई। वजह थी- भारत के मसाले, रेशम, सोना और दौलत। डच, अंग्रेज और फ्रेंच भी दौड़ में जुट गए। 1665 में फ्रेंच अफसर फ्रांसिस कैरो भारत आए। 1668 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूरत में पहला ट्रेड सेंटर खोला। इसके बाद फ्रांसीसी पांडिचेरी की ओर बढ़े। तब पांडिचेरी मछली पकड़ने वाला छोटा गांव था। यह बीजापुर रियासत में आता था। 1673 में फ्रेंच अफसर फ्रांस्वा मार्टिन ने बीजापुर के सुल्तान के सूबेदार शेर खान लोधी से पांडिचेरी को लीज पर ले लिया। उन्होंने यहां ट्रेड सेंटर खोला। धीरे-धीरे यह शहर बन गया। 18वीं सदी के आखिर में फांसीसियों ने पांडिचेरी के साथ-साथ यनम, माहे और कराईकल पर भी कब्जा कर लिया। ये इलाके दूर थे, लेकिन समुद्र किनारे थे। पांडिचेरी पर कई बार अंग्रेजों ने भी राज किया, लेकिन हर बार फ्रांसीसी इसे वापस ले लेते थे। आखिरकार 1816 में फ्रांसिसियों ने पांडिचेरी में खूंटा गाड़ दिया और फिर कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आया। फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी को एक नहर के सहारे दो हिस्सों में बांट दिया। पहला- 'विले ब्लांश' यानी वाइट टाउन, जहां फ्रेंच अधिकारी, व्यापारी और भारतीय ईसाई रहते थे। दूसरा- 'विले नोयर' यानी ब्लैक टाउन, जहां आम भारतीय रहते। फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी में नेवल बेस बनाया। टेक्सटाइल इंडस्ट्री खोली, जिससे फ्रांस को भारी मुनाफा हुआ। सालाना 1.95 लाख डॉलर की कमाई होती। यानी आज के हिसाब से करीब 40 करोड़ रुपए। 17 साल के लड़के ने शुरू किया आंदोलन फ्रेंच अफसर पांडिचेरी की कपड़ा मिल के मजदूरों से पूरे हफ्ते जी-तोड़ मेहनत करवाते और महीने में मुश्किल से 1 रुपए तनख्वाह देते। मजदूर गुस्से में थे। उनमें क्रांति की आग सुलग रही थी। 1908 में मशहूर लेखक और क्रांतिकारी सुब्रमण्यम भारती अंग्रेजों से बचते हुए मद्रास से भागकर पांडिचेरी आ गए। फ्रेंच कॉलोनी होने के कारण यह ब्रितानी हुकूमत के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इसका फायदा भारतीय क्रांतिकारी उठाते। सुब्रमण्यम ने पांडिचेरी से 'इंडिया' नाम की विकली मैगजीन निकाली। इसने ब्रिटिश भारत के साथ पांडिचेरी में भी क्रांति जगा दी। 1910 में पांडिचेरी के सवाना कपड़ा मिल के मजदूरों ने वेतन बढ़वाने के लिए हड़ताल की, लेकिन फ्रेंच पुलिस ने इसे बेरहमी से कुचल दिया। 17-18 साल तक ऐसा ही चला, लेकिन मजदूरों की हालत नहीं सुधरी। फिर आया साल 1928, 10वीं में पढ़ने वाले 17 साल के एक लड़के ने पांडिचेरी के कालवे कॉलेज में स्टूडेंट मूवमेंट खड़ा कर दिया। उसका नाम था- वरदराजुलु सुब्बैया उर्फ वी सुब्बैया। वे जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और रूसी क्रांति की सोच से प्रेरित थे। आंदोलन 3 महीने चला। खत्म होने पर सुब्बैया को 6 महीने के लिए सस्पेंड किया गया। जैसे-तैसे उन्हें 10वीं की परीक्षा देने को मिली। फिर वे नौकरी के लिए मद्रास चले गए। जब 12 मौतों के बाद मजदूरों को हक मिला 1933 में वी सुब्बैया पांडिचेरी लौटे। उन्होंने महात्मा गांधी के 'हरिजन सेवक संघ' की एक शाखा पांडिचेरी में खोली। दलितों और मजदूरों को जोड़ा। साथ ही 'सुदंतीरम' नाम की मंथली मैगजीन निकाली। 14 फरवरी 1935 को सुब्बैया ने सवाना मिल में हड़ताल शुरू की। मांग रखी कि काम के 10 घंटे तय हों, बाल मजदूरी रुके, वेतन 6 आने हो और गर्भवती महिलाओं को वेतन के साथ छुट्टी मिले। 84 दिनों की हड़ताल के बाद मजदूरों की मांगें मानी गईं। सुब्बैया दलितों और मजदूरों में मशहूर हो गए। जुलाई 1936 में सुब्बैया ने पांडिचेरी की रोडिए, सवाना और एली मिल के मजदूरों के साथ आंदोलन शुरू किया। उनकी मांग थी कि मजदूरों को ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार मिले। 29 जुलाई को सुब्बैया के भाषण के दौरान फ्रेंच पुलिस ने गोलीबारी कर दी। 12 मजदूर मारे गए। गुस्साए मजदूरों ने सवाना मिल को आग लगा दी। दुनियाभर में इसकी चर्चा हुई। विरोध प्रदर्शन हुए। फ्रेंच पीएम लियों ब्लम से दखल की मांग गुई। फ्रेंच संसद में भी ये मुद्दा उठा। सरकार ने सुब्बैया को मिलने बुलाया। जवाहरलाल नेहरू की सलाह पर सुब्बैया पेरिस गए। फ्रेंच सरकार ने मांगें मानीं। मजदूरों को ट्रेड यूनियन का अधिकार मिला। पांडिचेरी एशिया की पहली जगह बनी, जहां काम के 8 घंटे तय हुए। ‘पप्पा गौबार्ड’ की बगावत से कमजोर हुए फ्रांसीसी वी सुब्बैया आजादी के लिए स्ट्रैटजी बना रहे थे, लेकिन 1938 में गिरफ्तार कर लिए गए। 1942 में रिहा होने के बाद उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ पांडिचेरी बनाई, लेकिन एक साल के लिए उन्हें पांडिचेरी से निकाल दिया गया। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। अब पांडिचेरी में भी आजादी का आंदोलन तेज हो गया। मांग थी कि पांडिचेरी का भारत में विलय हो, लेकिन फ्रांसीसी इसे छोड़ना नहीं चाहते थे। जनवरी 1950 में फ्रेंच पुलिस पांडिचेरी की सड़कों पर उतर गई। सुब्बैया के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हो गया। कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जाने लगा। सुब्बैया का घर जला दिया गया, जहां कम्युनिस्ट पार्टी का दफ्तर भी था। सुब्बैया अंडरग्राउंड होकर कई बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की टॉप लीडरशिप से मिले। उन्हें मिली कि आंदोलन को गांव-गांव तक फैलाएं। 1952 में उन्होंने वापस आकर हथियारबंद दस्ते बनाए। आंदोलन को गांव-गांव फैलाया। इसी बीच एक और बड़ी घटना हुई। फ्रेंच नेशनल असेंबली में पांडिचेरी के प्रतिनिधि एडौर्ड गौबार्ट की फ्रांसीसी अधिकारियों से अनबन हो गई। नाराज पप्पा गौबार्ट ने बगावत कर दी। मार्च 1954 में गौबार्ट फ्रांस से पांडिचेरी आ गए। उन्होंने ‘समानांतर सरकार’ बना ली। वैचारिक मतभेद होने के बावजूद सुब्बैया ने इस सरकार को समर्थन दिया। यहां से पांडिचेरी पर फ्रांस की पकड़ ढीली पड़ने लगी। 7 अप्रैल 1954 को कम्युनिस्ट पार्टी ने 'डायरेक्ट एक्शन' का ऐलान कर दिया। कम्युनिस्टों ने तिरूबुवानी इलाके को आजाद करा लिया। पुलिस से हथियार छीने और थाने पर राष्ट्रीय झंडा फहरा दिया। धीरे-धीरे कई इलाके आजाद करा लिए। भारत की आजादी के 15 साल बाद स्वतंत्र हुआ पांडिचेरी भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि कूटनीति से मसला सुलझे, ताकि फ्रांस से रिश्ते खराब न हों। सो भारत, फ्रांस और पांडिचेरी के बीच कई बैठकें हुईं। आखिरकार 13 अक्टूबर 1954 को फ्रेंच पीएम पियरे मेंडेस फ्रांसे पांडिचेरी छोड़ने को तैयार हो गए। 18 अक्टूबर 1954 को पांडिचेरी के कीझूर में भारत के साथ विलय के लिए वोटिंग हुई। 178 स्थानीय प्रतिनिधियों में से 170 ने विलय के पक्ष में वोट दिया। 1 नवंबर 1954 को फ्रांस ने पांडिचेरी, यनम, माहे और कराईकल इलाकों का प्रशासनिक नियंत्रण भारत को दे दिया। पांडिचेरी को ‘डि फैक्टो’ आजादी मिल गई। यानी वास्तव या व्यवहार में आजाद हो गया, लेकिन फ्रांस ने अब भी कानूनी संप्रभुता नहीं छोड़ी थी। इस बीच फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता आ गई। जल्दी-जल्दी सरकारें बदलने लगीं। वहीं अल्जीरिया में आजादी की मांग होने लगी। युद्ध जैसे हालात बन गए। लेकिन अब भी कानूनी बात नहीं बनी। फिर फ्रांस की सत्ता पर काबिज हुए जनरल चार्ल्स डी गॉल। उन्हें लगा कि फ्रेंच कॉलोनियों को लंबे वक्त तक कंट्रोल में नहीं रखा जा सकता। इसके चलते मई 1956 में भारत-फ्रांस के बीच एक ट्रीटी हुई, जिसमें फ्रांस ने भारत को अपने कब्जे वाले इलाके सौंपने को लेकर हामी भरी। लेकिन इसे फ्रांसीसी संसद से मंजूरी मिलने में 6 साल लग गए। मई 1962 में फ्रांसीसी संसद ने इस पर मुहर लगाई। 16 अगस्त 1962 को फ्रांस ने ये दस्तावेज भारत को सौंपे। इसी दिन पांडिचेरी को ‘डि ज्यूर’ आजादी मिल गई। यानी कानूनन पांडिचेरी आजाद हो गया और भारत का हिस्सा बन गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने पांडिचेरी की जनता से वादा किया था कि कोई बाहरी उन पर शासन नहीं करेगा। इसीलिए पांडिचेरी को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया और विधानसभा गठित की गई। गौबार्ट पांडिचेरी के पहले सीएम बने, जबकि सुब्बैया विपक्ष में बैठे। पीले फ्रेंच क्वार्टर, फ्रेंच लैंग्वेज, फ्रेंच फूड आज भी मौजूद जैसे हर साल 15 अगस्त को पूरे भारत में आजादी का जश्न मनाया जाता है, वैसे पांडिचेरी में भी होता है। हालांकि 16 अगस्त को डि ज्यूर ट्रांसफर डे और 1 नवंबर को लिबरेशन डे भी मनाया जाता है। अक्टूबर 2006 में पांडिचेरी का नाम ‘पुडुचेरी’ कर दिया गया। ये दो तमिल शब्दों से मिलकर बना है- 'पुदु' यानी नया और 'चेरी' यानी गांव। प्राचीन तमिल साहित्य में इस इलाके का नाम 'पुडुचेरी' ही था, लेकिन फ्रेंच अफसरों को बोलने में कठिनाई होती थी, तो उन्होंने इसे बिगाड़कर पांडिचेरी कर दिया। आज भी यहां फ्रेंच कॉलोनी की निशानियां मौजूद हैं। ‘वाइट टाउन’ में आज भी पीले दीवारों, ऊंची खिड़कियों और बोगनवेलिया के फूलों से लदी बालकनियों के साथ फ्रेंच क्वार्टर मौजूद हैं। गलियों के नाम आज भी 'रुई' से शुरू होते हैं, जैसे 'रुई ड्यूमास' या 'रुई रोमां रोलां'। फ्रेंच भाषा में सड़कों को रूई कहते हैं। पुडुचेरी के कैफे, रेस्टोरेंट, होटल में दक्षिण भारतीय इडली-डोसा के साथ फ्रेंच डिश क्रॉसों, बैगेट, क्रेप्स और रैटटौई वगैरह भी मिलते हैं। फ्रेंच वाइन आज भी यहां के लोगों की पसंद है। फ्रेंच कॉलोनी के दौर में यहां की पुलिस 'कैपी' नाम की मशहूर लाल टोपी पहनती थी। आज भी ये बरकरार है। तमिल भले ही यहां की प्राइमरी ऑफिशियल लैंग्वेज है, लेकिन अग्रेंजी और फ्रेंच को भी ये दर्जा मिला है। यहां रहने वाले लोग फ्रेंच, तमिल, हिंदी और अंग्रेजी बोल सकते हैं। पुडुचेरी में रचे-बसे फ्रेंच कल्चर के कारण लोग बोल-चाल में इसे ‘मिनी फ्रांस’ तक कहते हैं। केंद्र शासित प्रदेश और तीन राज्यों में फैले होने के कारण पुडुचेरी की राजनीति केंद्र सरकार के प्रभाव में और स्थानीय गठबंधनों के हिसाब से चलती है। यहां 30 विधानसभा सीट हैं, जिनके लिए वोटिंग होती है। जबकि 3 अन्य सीटों पर केंद्र सरकार के नॉमिनेटेड विधायक होते हैं। अभी यहां एन. रंगासामी की सरकार है। उनकी पार्टी AINRC का बीजेपी के साथ अलायंस है, यानी NDA में है। 10 सीट पर AINRC और 6 पर बीजेपी काबिज है। बीजेपी के पास 3 नॉमिनेटेड विधायक भी हैं, यानी बीजेपी के पास कुल 9 विधायक हैं। वहीं एमके स्टालिन की DMK के पास 6 और कांग्रेस के 2 सीटें हैं। 6 पर निर्दलीय विधायक हैं। कल, यानी 9 अप्रैल को पुडुचेरी में वोटिंग होनी है। NDA के खिलाफ कांग्रेस और एमके स्टालिन की DMK का गठजोड़ चुनावी मैदान में है। फिर भी वैसे तो संभावना है कि ‘AINRC-बीजेपी बनाम कांग्रेस-DMK’ के बीच ही मुकाबला होगा, लेकिन माना जा रहा है कि तमिल एक्टर विजय की पार्टी TVK की एंट्री से समीकरण बदल सकते हैं। ******* चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 'शूद्र' महिलाओं से संबंध बनाते थे नंबूदरी ब्राह्मण: नस्ल सुधारने के नाम पर जन्मे बच्चों से दूर रहते, केरलम की राजनीति में कितना असर केरलम का त्रावणकोर इलाका। एक ब्राह्मण पुरुष तैयार होकर नायर बस्ती में जाता है। वहां एक घर के बाहर नहाता है। कपड़े बदलता है। खाना खाता है। फिर घर के बाहर चप्पल उतार कर अंदर जाता है, जहां एक महिला उसका इंतजार कर रही होती है। जब उसका पति लौटता है और उसे एक आदमी की चप्पल दिखती है, तो बिना कुछ कहे लौट जाता है। क्योंकि वो समझ जाता है कि उसकी पत्नी एक नंबुदरी ब्राह्मण पुरुष के साथ संबंधम में है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 9 Apr 2026 5:16 am