रिपोर्ट के अनुसार हमले से पहले ट्रंप प्रशासन के भीतर यह धारणा थी कि इस सैन्य कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने फरवरी में कहा था कि उन्हें तेल बाजार में बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है।
ट्रंप का बड़ा ऐलान: रिलायंस बनेगी अमेरिकी रिफाइनरी की साझेदार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है उनके देश में पचास साल बाद बनने वाली 300 अरब डॉलर की पहली तेल रिफाइनरी में भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ समूह साझेदार होगी।
ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट : व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे यूएस मिलिट्री कैंपेन से पैदा हुई दिक्कतों के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने की एक बड़ी कोशिश के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट को मंजूरी दी है।
ईरान संघर्ष में 140 अमेरिकी सैनिक घायल: पेंटागन
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर पेंटागन ने बड़ी जानकारी दी। पेंटागन ने बताया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान से जुड़े लगातार हमलों के पहले 10 दिनों के दौरान लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं
व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को तब समाप्त किया जाएगा, जब ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के सभी सैन्य लक्ष्य पूरी तरह हासिल हो जाएंगे
अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध : व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है
2026 की फरवरी पिछले 125 सालों में सबसे गर्म और सूखी रही। अब मार्च में भी मौसम के वही तेवर बरकरार हैं। मार्च की गर्मी ने दिल्ली में 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के 14 शहरों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। आखिर इतनी जल्दी क्यों पड़ने लगी गर्मी और मार्च इतना गर्म तो अप्रैल-मई में क्या होगा; भास्कर एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: गर्मी ने मार्च की शुरुआत में ही कहां भीषण दस्तक दी है? जवाब: मौसम विभाग के मुताबिक मार्च के शुरुआती 10 दिनों में ही गर्मी ने अप्रैल-मई जैसे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं… सवाल-2: आखिर इतनी जल्दी मौसम गर्म होने की क्या वजह है? जवाब: प्राइवेट वेदर फॉरकास्ट कंपनी स्काईमेट और जोमैटो के वेदर डिपार्टमेंट में प्रोग्राम मैनेजर नवदीप दहिया, इसके 3 मुख्य कारण बताते हैं… 1. कोई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव नहीं 2. पश्चिम से गर्म हवाएं आ रही हैं 3. एंटी साइक्लोन सिस्टम एक्टिव है सवाल-3: अगले कुछ दिन किन इलाकों में गर्मी और बढ़ेगी? जवाब: 14 मार्च 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नए पश्चिमी विक्षोभ के आने की संभावना है। इससे तापमान गिरेगा। मौसम विभाग ने 10 मार्च को बताया कि… सवाल-4: अगर मार्च इतना गर्म है, तो अप्रैल-मई में क्या होगा? जवाब: इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट यानी IMD के मुताबिक मार्च से मई 2026 के बीच भारत के ज्यादातर हिस्सों में मैक्सिमम टेम्परेचर सामान्य से ज्यादा रहेगा। इस दौरान हीट वेव भी ज्यादा चलेगी। IMD के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय मोहपात्रा के मुताबिक… इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर: पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिण और पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में हीटवेव सामान्य से ज्यादा दिन चलेगी। IMD के मुताबिक, 'गर्मी के दौरान, लू चलने की संभावना बढ़ने से पब्लिक हेल्थ, जल संसाधन, बिजली की मांग और आवश्यक सेवाओं के लिए जोखिम पैदा हो सकते हैं। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, बाहर काम करने वाले और पहले से बीमार लोग ज्यादा प्रभावित होंगे। जून में अल-नीनो से मानसून भी प्रभावित होगा वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन यानी WMO ने मई से जुलाई में भारत में ‘एल-नीनो’ की स्थिति बनने की आशंका जताई है। ‘एल-नीनो’ से बारिश कम होती है और गर्मी बढ़ती है। यह स्थिति भारत में मानसून को प्रभावित करती है… सवाल-5: ज्यादा गर्मी पड़ने से फसलों पर क्या असर पड़ सकता है? जवाब: मार्च में पड़ रही ज्यादा गर्मी से गेहूं की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। कैथल हरियाणा में किसान कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रविंदर सिंह के मुताबिक, मार्च में बढ़ते तापमान से अनाज भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। गेहूं के दाने छोटे और हल्के होंगे, जिससे कुल उत्पादन पर असर पड़ेगा। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ले रिसर्च’ के डायरेक्टर रतन तिवारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में बोई गई गेहूं की फसल पर मार्च की गर्मी का असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह बीज अभी इतने बड़े हो गए हैं कि गर्मी झेल लें। लेकिन जो फसल दिसंबर में बोई गई है, उन पर असर पड़ सकता है। फसल को बचाने के लिए किसान फसल की अच्छे से सिंचाई करें, जिससे उसमें नमी बनी रहे। जब तेज हवाएं चल रही हों, तब सिंचाई न करें, इससे फसल को नुकसान हो सकता है। मध्य प्रदेश और गुजरात में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। बाकी राज्यों में भी कई इलाकों में कटाई हो रही है। इसलिए अभी देश में किसानों को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। --------- ये खबर भी पढ़िए… MP में 'लू' जैसी तपिश, उज्जैन-ग्वालियर-चंबल में चढ़ा पारा:टेम्परेचर सामान्य से 4.63 डिग्री ज्यादा; दिन में तेज धूप, रात में रहेगी ठंडक मध्य प्रदेश में इन दिनों दो तरह का मौसम है। दिन इतने गर्म है कि पारा 39 डिग्री के पार पहुंच गया है, जबकि रात और सुबह ठंडक है। एक्सपर्ट के मुताबिक, ये मौसम लोगों की सेहत भी बिगाड़ रहा है। अस्पतालों में सर्दी, जुकाम, एलर्जी के मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए…
कश्मीर के अनंतनाग में रहने वाले बिलाल अहमद भट्ट की बेटी ईरान की राजधानी तेहरान में MBBS की पढ़ाई कर रही है। 9 मार्च की रात ३ बजे बिलाल के पास उसका फोन आया। वो रो रही थी। बिलखते हुए बोली- ‘अब्बू, मेरे हॉस्टल के पास मिसाइलें गिरने की आवाज आ रही हैं, बमबारी हो रही है। पता नहीं आज रात बचूंगी या नहीं। मुझे बचा लो’ बिलाल कहते हैं, ‘ऐसे फोन कॉल ईरान में रहने वाले भारतीयों की नियति बन गए है। हर सुबह इस सुकून से होती है कि रात गुजर गई, लेकिन हर पल फिक्र रहती है कि आगे क्या होगा।’ ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का आज 12वां दिन है। ईरान में 1,255 मौतें हो चुकी हैं। युद्ध थमने के आसार नजर नहीं आ रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से कहा है कि वो बिना शर्त सरेंडर करेे। वहीं ईरान लगातार इजराइल और मिडिल ईस्ट के देशों में बने अमेरिकी बेस पर हमले कर रहा है। 12 हजार भारतीयों ने देश लौटने की अर्जी लगाईइस युद्ध में भारत ने आधिकारिक तौर पर किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया है, लेकिन उसके दो हित दांव पर लगे हैं। पहला, मिडिल ईस्ट के देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और उन्हें बाहर निकालना। दूसरा, खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस की सप्लाई पर संकट। इन देशों में करीब 90 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें से करीब 12 हजार ने भारत सरकार के पास देश लौटने की अर्जी लगाई है। वापसी के लिए सबसे ज्यादा एप्लीकेशन संयुक्त राज्य अमीरात यानी UAE से आए हैं। ईरान में फंसे करीब दो हजार कश्मीरी स्टूडेंटलौटते हैं कश्मीर के रहने वाले बिलाल अहमद के पास। बिलाल अपनी बेटी का नाम और पहचान उजागर नहीं करना चाहते। उन्हें डर है कि मीडिया पर दिखने की वजह से बेटी को निशाना बनाया जा सकता है। बिलाल बताते हैं, ‘बेटी नाजिया (बदला हुआ नाम) का 25 फरवरी को एग्जाम था। हम एग्जाम खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। 3 मार्च को उसकी वापसी की टिकट थी। उससे पहले ही जंग शुरू हो गई।’ ‘नाजिया तेहरान में फंसी है। पिछले 10 दिन से कभी-कभार ही बात होती है। नाजिया जिस बिल्डिंग में रहती है, वहां भी मिसाइल अटैक हुए थे। उसके बाद से हम बहुत डर गए हैं। सरकार को सभी भारतीय स्टूडेंट्स को एयरलिफ्ट करके वापस लाना चाहिए। हमारे पास आखिरी जानकारी यही है कि भारतीय दूतावास ने नाजिया और उसकी भारतीय दोस्तों को हॉस्टल से निकाल लिया है। उन्हें किसी सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दिया है।’ ‘ईरान में अब रहने लायक हालात नहीं’24 साल की महक हसन ईरान की उरमिया यूनिवर्सिटी एंड मेडिकल साइंस में चौथे सेमेस्टर में पढ़ रही हैं। जम्मू-कश्मीर के बडगाम की रहने वाली हैं। महक कहती हैं कि ईरान में अब रहने लायक हालात नहीं हैं। हर पल खौफ में गुजर रहा है। हमसे ज्यादा फैमिली हमारी जान की फिक्र कर रही है। महक बताती हैं, ‘एंबेसी ने कहा है कि जैसे निकल सकते हो, निकल जाओ। अब ये तो हमारे हाथ में नहीं है। हमें नहीं पता कि कैसे निकलें।’ ‘हर दिन के साथ उम्मीद जवाब दे रही’जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के रहने वाले राजा आसिफ की बेटी तेहरान में MBBS की पढ़ाई कर रही है। युद्ध के बीच बीतते हर दिन के साथ उनकी उम्मीद जवाब दे रही है। ईरान के हालात के बारे में बात करते हुए सांसें फूलने लगती हैं। राजा आसिफ कहते हैं, ‘हमारे बच्चे पढ़ने के लिए गए थे। अब मौत के मुंह में हैं। बेटी से बात होती है, तो वो कहती है कि चारों तरफ बारूद ही बारूद है। हम विदेश मंत्री से गुजारिश करते हैं कि स्टूडेंट्स को पहले बचाकर लाया जाए।’ ‘भारतीय छात्र डरे हुए, तुरंत निकाला जाए’जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स यूनियन के नेशनल कन्वीनर नासिर खुलनेमानी बताते हैं कि उरमिया शहर में अभी हवाई हमले हुए हैं। इसके बाद से दहशत का माहौल है। हमने उरमिया यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों से बात की थी। उन्होंने बताया कि मिसाइल हमला उनके हॉस्टल से सिर्फ 300 मीटर दूर हुआ था। धमाके से पूरी बिल्डिंग हिल गई। नासिर कहते हैं कि हालात बहुत नाजुक हैं। छात्रों का कहना है कि आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाज सुनाई दे रही है। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग हमलों के डर से शहर छोड़कर जा रहे हैं। पूरे शहर में खौफ है। हमने विदेश मंत्रालय से कहा है कि ईरान की सरकार से मदद करने के लिए कहे। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने खाड़ी देशों में अपने दूतावासों से डेटा इकट्ठा करने के लिए कहा था कि कितने भारतीय ईरान छोड़कर भारत आना चाहते हैं। करीब १२ हजार लोगों ने अर्जी दी है। सरकार उन्हें निकालने के अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है। विदेश मंत्रालय ने अलग से डेस्क बनाई है। ये डेस्क इन लोगों को निकालने के लिए प्लान तैयार करेगी। ‘ईरान और लेबनान से भारतीयों को निकालना सबसे मुश्किल’अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मोहसिन रजा खान कहते हैं कि भारत के लिए ईरान में फंसे नागरिकों को निकालना सबसे मुश्किल काम होगा। ईरान में न एयरपोर्ट काम कर रहे हैं, न एयरस्पेस खुला है। ईरान से निकलने के लिए पहले जमीनी रास्ते से अजरबैजान जाना होगा। इसके अलावा इराक वाला रास्ता है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान का रास्ता सुरक्षित नहीं होगा। ईरानी नागरिक भी अजरबैजान के रास्ते देश छोड़ रहे हैं। मोहसिन रजा खान आगे कहते हैं कि भारत की छवि बनी है कि वो इजराइल और अमेरिका के साथ है। ईरान पर हमले से दो दिन पहले भारत के प्रधानमंत्री इजराइल में थे। हालांकि, इससे भारतीयों के रेक्क्यू पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। ये मानवीय आधार पर किया जाएगा। कोई देश इसमें रुकावट पैदा नहीं करेगा। ‘ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा युद्ध, सीजफायर हो सकता है’हालांकि, मोहसिन रजा खान कहते हैं, ‘ये युद्ध अब ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जंग से बाहर निकलने के रास्ते देख रहे हैं। अमेरिका दो वजहों से जंग में है। पहला, ईरान कोई एग्जिट ऑप्शन नहीं दे रहा। दूसरा- न्यूक्लियर मटीरियल अब तक हासिल नहीं हो सका है।’ ‘अमेरिका अब ईरान में सत्ता बदलने की बात भी उतनी मजबूती के साथ नहीं उठा रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मुजतबा खामेनेई भी कट्टरपंथी माने जाते हैं।’ ‘भारत को ईरान युद्ध रोकने के लिए एक्टिव भूमिका निभानी होगी’जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में प्रोफेसर राजन राज कहते हैं कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच फंसे भारतीयों की जान बचाना सबसे बड़ी समस्या है। वहां करीब 90 लाख भारतीय हैं। ये किसी देश की आबादी के बराबर है। इतने लोगों को निकालना नामुमकिन है। खाड़ी देशों जैसे कतर, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत में ईरान के हमले तेज हो रहे हैं। ‘1990 में खाड़ी युद्ध के वक्त भी भारत के लिए अपने नागरिकों को निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गया था।’ राजन राज आगे कहते हैं, ‘फिलहाल युद्ध रुकने की संभावना नजर नहीं आ रही है। ईरान में रहने वाले लोगों को तुरंत निकालना जरूरी होता जा रहा है। ईरान के अलावा UAE, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब की सरकारें भारत के साथ सहयोग के लिए तैयार हैं। हालांकि, एयरस्पेस बंद है। होर्मूज की खाड़ी पर ईरान का कंट्रोल है। कोई भी जहाज खाड़ी से नहीं गुजरने दिया जा रहा।’ ‘अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत को दोनों पक्षों पर कुछ वक्त के लिए युद्ध रोकने का दबाव बनाना होगा। यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच भारत ने दोनों सरकार से स्पेशल परमिशन ली थी। हालांकि, यूक्रेन और रूस में भारतीयों की संख्या बहुत कम थी।’ राजन कहते हैं कि भारत को खाड़ी देशों को एकजुट कर युद्ध रोकने की मांग करनी चाहिए। भारत ईरान युद्ध में रूस-यूक्रेन युद्ध की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। उसे एक्टिव भूमिका निभानी होगी। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत के लिए तेल के दाम बढ़ेंगे, रुपया कमजोर होगा। भारत को सीजफायर करवाने के लिए पहल करनी चाहिए। अगर खाड़ी में काम करने वाले लोग स्थायी तौर पर वापस आते हैं, तो उनके रोजगार की बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती है। अब ईरान का हाल दिल्ली जैसी भीड़ वाले तेहरान में सन्नाटातेहरान शहर की आबादी लगभग 96 लाख है। पूरे मेट्रो रीजन को मिला दें तो आबादी करीब 1.6 करोड़ हो जाती है। ये दिल्ली की कुल आबादी 2.2 करोड़ से 60 लाख ही कम है। तेहरान में रहने वाले कियान कहते हैं कि सब बहुत डरे हुए हैं। बाहर जाने में भी डर लगता है और घर के अंदर भी। खाने-पीने की चीजें 30 से 35% तक महंगी हो गई हैं। कियान के मुताबिक, अब हमले से पहले सायरन नहीं बजता। खुद ही अंदाजा लगाना पड़ता है कि हमला हुआ है। ईरान पर इजराइल के पिछले हमले में मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आवाज आती थी, इस बार सीधे धमाका होता है और सब तबाह हो जाता है। तेहरान में ही रहने वाले हुसैन बताते हैं कि उनकी नींद सुबह धमाकों से टूटती है। एक अजीब सी गूंज सुनाई दी, ये 3-4 मिनट तक चलती रही और फिर धमाका हुआ। खिड़कियां और पर्दे हिल रहे थे। मैं पहले बीमार रहता था। जंग के तनाव की वजह से बीमारी दोबारा उभर आई है। अब दिन में 9 गोलियां खाता हूं। डॉक्टर ने कहा है कि मेरा तनाव जानलेवा हो गया है। इजराइली हमलों के बाद ईरान में काली बारिशइजराइल और अमेरिका ने ईरान के तेल भंडारों पर हमले किए हैं। तेहरान की रिफाइनरी पर हमलों के बाद आग लग गई। रिफाइनरी से निकला तेल शहर की नालियों में पहुंच गया। इससे सड़कों के किनारे आग लग गई। आसमान में बादल छा गए। तेहरान में काली बारिश हुई। तेल मिला होने की वजह से पानी काला दिखाई दिया। दरअसल, लाखों गैलन कच्चा तेल जलता है, तो वह भारी मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (PM) और कालिख पैदा करता है। आमतौर पर धुआं ऊपर जाकर बिखर जाता है, लेकिन हमलों के दौरान तेहरान के ऊपर से एक्स्ट्रा ट्रॉपिकल स्टॉर्म (तूफान) गुजर रहा था। इसकी वजह से उठने वाली तेज हवा ने धुएं और अधजले तेल के कणों को बादलों के भीतर खींच लिया। बादलों में मौजूद नमी तेल के कणों के चारों ओर जमा हुई, तो वे भारी होकर बारिश बनकर गिरने लगे। इन बूंदों में कार्बन और हाइड्रोकार्बन (तेल) मिला हुआ था, इसलिए इनका रंग काला हो गया। ………………………ये खबर भी पढ़ें अमेरिका बोला- ईरान पर सबसे बड़ा हमला करेंगे, ईरान का जवाब- धमकी से नहीं डरते अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के 11 दिन हो चुके हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान पर अब तक के सबसे बड़े हमले किए जाएंगे। ईरान ने भी जवाब देते हुए कहा कि वह धमकियों से डरने वाला नहीं है और जो लोग ईरान को खत्म करने की बात करते हैं, उन्हें अपने अंजाम के बारे में सोच लेना चाहिए। पढ़िए पूरी खबर...
पुतिन और ईरान राष्ट्रपति की फोन वार्ता, मध्य पूर्व संघर्ष पर जोर
मध्य पूर्व संघर्ष में जारी संघर्ष के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने फोन पर बातचीत की है
कतर में फंसे एक हजार भारतीय नागरिकों की हुई सुरक्षित वतन वापसी
भारतीय दूतावास ने कतर में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए कतर एयरवेज और सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ समन्वय जारी रखा है
भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमा पार की सैन्य कार्रवाई से निर्दोष नागरिकों की जान जा रही है और इससे मानवीय संकट और गंभीर होता जा रहा है। इसलिए सभी देशों को संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की जरूरत है।
क्या अब थम जाएगा ईरान युद्ध? जानें ट्रंप-पुतिन की बातचीत में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार तेज हो रहा है और वैश्विक स्तर पर इसके असर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। रूस की ओर से बताया गया कि बातचीत खुली, विस्तृत और रचनात्मक माहौल में हुई, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिका में राजनीतिक विवाद
अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच वहां के डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ चल रही जंग की कड़ी आलोचना की है
ईरान के खिलाफ सैन्य संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अमेरिका और इजराइल को “निर्णायक बढ़त” मिल रही है
ट्रंप की नई धमकी, होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त चेतावनी
ईरान को चेतावनी, तेल मार्ग रोकने पर बीस गुना हमला अमेरिकी नौसेना तैयार, खाड़ी में जहाजों की तैनाती वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडरा रहा संकट का साया चीन समेत एशियाई देशों के लिए अमेरिका का सुरक्षा वादा वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चेतावनी जारी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले महत्वपूर्ण तेल मार्ग को रोकने या उसमें बाधा डालने की कोई भी कोशिश की गई, तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, “अगर ईरान कुछ ऐसा करता है जिससे होर्मुज स्ट्रेट में तेल का फ्लो रुक जाता है, तो अमेरिका उन पर अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज्यादा जोरदार हमला करेगा।” उन्होंने इस चेतावनी के साथ ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करने की धमकी भी दी और कहा, “इसके अलावा, हम आसानी से नष्ट किए जा सकने वाले टारगेट को खत्म कर देंगे, जिससे ईरान के लिए एक देश के तौर पर फिर से बनना लगभग नामुमकिन हो जाएगा, लेकिन मुझे उम्मीद है और मैं प्रार्थना करता हूं कि ऐसा न हो!” इससे पहले, ट्रंप ने मियामी में ट्रंप नेशनल डोरल में रिपोर्टरों से कहा कि अमेरिका ईरान को दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी कॉरिडोर में से एक को खतरे में डालने की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने कहा, “जैसा कि हम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जारी रखे हुए हैं, हम दुनिया में एनर्जी और तेल का फ्लो बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहे हैं, और मैं किसी आतंकवादी सरकार को दुनिया को बंधक बनाने और दुनिया की तेल सप्लाई को रोकने की कोशिश नहीं करने दूंगा।” ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिकी सुरक्षा के तहत खुला रहेगा। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहेगा। वहां हमारी नौसेना के बहुत सारे जहाज हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पानी के रास्ते को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी नौसेना की ताकत और माइन-क्लियरिंग क्षमता को तैयार किया जा रहा है। हमारे पास दुनिया के सबसे अच्छे उपकरण हैं, जो माइन की जांच कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि स्ट्रेट में ईरान की कोई भी हरकत लड़ाई के मैदान से कहीं आगे तक असर डालेगी। उन्होंने कहा, अगर वे कुछ भी करते हैं, तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका कमर्शियल शिपिंग के संचालन को सीधे समर्थन देने के लिए तैयार है। ट्रंप ने कहा, “इस बीच, इस छोटी सी रुकावट के दौरान अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे किसी भी टैंकर को राजनीतिक जोखिम बीमा दे रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर खतरा बढ़ता है तो अमेरिका और उसकी साथी सेनाएं जहाजों को इस पतले पानी के रास्ते से एस्कॉर्ट कर सकती हैं। ट्रंप ने तर्क दिया कि रास्ता खुला रखना खुद अमेरिका की तुलना में एशिया और दूसरे एनर्जी-इम्पोर्ट करने वाले इलाकों के लिए ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, “इससे हम पर कोई खास असर नहीं पड़ता। हमारे पास बहुत ज्यादा तेल और गैस है, हमारी जरूरत से कहीं ज्यादा।” लेकिन उन्होंने कहा कि कई दूसरे देश इस रास्ते पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, खासकर चीन। ट्रंप ने कहा, “यह अमेरिका की तरफ से चीन और उन सभी देशों के लिए एक तोहफा है जो होर्मुज स्ट्रेट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। हम सच में यहां चीन और दूसरे देशों की मदद कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी बहुत सारी एनर्जी देशों से मिलती है।” ट्रंप ने कहा कि सरकार तेल बाजारों से जुड़े कुछ समय के लिए लगे प्रतिबंधों में राहत देने पर भी विचार कर रही है ताकि कीमतों में तेजी को रोका जा सके। उन्होंने ईरान के साथ बड़े संघर्ष में होर्मुज स्ट्रेट को एक मुख्य मोर्चे के तौर पर पेश किया और कहा कि वाशिंगटन कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरों को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, हाल के सालों में, सरकार और उसके आतंकी एजेंटों ने सैकड़ों कमर्शियल जहाजों पर हमले किए हैं। हम इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म कर रहे हैं। बता दें, होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा मार्ग है और इसे दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी के तेल उत्पादक देशों से निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए बड़ी चिंता पैदा कर सकता है।
ईरान की सरकारी शिपिंग कंपनी के दो जहाज चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए हैं। भीषण जंग के बीच ईरान की तरफ बढ़ते जहाजों से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन पर ऐसा मिलिट्री केमिकल लदा हो सकता है, जो रॉकेट बनाने में इस्तेमाल होगा। अगर ऐसा हुआ तो ईरानी हमले जारी रह सकते हैं और जंग लंबी खींच सकती है। क्या वाकई इन जहाजों में रॉकेट बनाने का सामान, ईरान की मदद क्यों कर रहे जिनपिंग और क्या अमेरिका इन कंटेनर्स को रास्ते में ही उड़ा सकता है; भास्कर एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: चीन से रवाना हुए ईरानी जहाजों में क्या लदा है? जवाब: ईरान की सरकारी कंपनी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स यानी IRISL के 2 जहाज- शब्दीस और बर्जिन चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से इसकी पुष्टि हुई… सवाल-2: क्या अमेरिका इन जहाजों को ईरान तक पहुंचने देगा? जवाब: फिलहाल दोनों जहाज साउथ चाइना सी पार करके मलक्का स्ट्रेट के करीब पहुंच गए हैं… दोनों को ईरान पहुंचने के लिए होर्मुज स्ट्रेट पार करना होगा, जहां अमेरिकी और ईरानी बेड़े तैनात हैं। यहां हमले भी हो रहे हैं। वहीं, चाबहार पोर्ट पर भी हमले हुए हैं। हाल ही में बंदर अब्बास के आसपास काले धुएं के गुबार देखे गए हैं। इसके अलावा 4 मार्च को अमेरिकी नेवी की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के पास हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को Mk-48 टॉरपीडो से डुबो दिया। ये फ्रिगेट युद्धक्षेत्र से करीब 3 हजार किमी दूर था और जंग में शामिल भी नहीं था। फिर भी ऐसा हुआ। अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में एशिया मैरीटाइम ट्रांसपिरेंसी इनिशिएटिव के डिप्टी डायरेक्टर हैरिसन प्रेटैट के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद से हॉर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद है। पहले रोजाना औसतन 153 जहाज गुजरते थे, लेकिन 1 मार्च के बाद से ये आंकड़ा 13 हो गया है। चीन तक के दर्जनों जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हैं। यानी अगर शब्दीस और बर्जिन हॉर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़े तो अमेरिकी नेवी इन पर हमला कर सकती है। इस आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि अगर इन जहाजों पर लदा समान ईरान के लिए इतना अहम है तो फिर संभावना है कि IRGC की नेवल फ्लीट इन्हें एस्कॉर्ट करें। ऐसा हुआ तो अगले हफ्ते तक दोनों जहाज ईरानी बंदरगाहों तक सुरक्षित पहुंच सकते हैं। हाल ही में बंदर अब्बास पोर्ट की ओर जा रहे 3 ईरानी जहाजों- हमुना, अबियान और अर्जिन ने रास्ता बदला है। उन्होंने तय रास्तों से इतर खुले समुद्री रास्तों का इस्तेमाल किया। 7 मार्च को ये ईरान के पास मंडराते हुए दिखे। हालाकिं इसको लेकर अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट ‘पेंटागन’, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और व्हाइट हाउस ने कोई बयान जारी नहीं किया है। सवाल-3: जंग के बीच ईरान को सोडियम परक्लोरेट क्यों दे रहा है चीन? जवाब: जंग के बीच में चीन की ओर से सोडियम परक्लोरेट की खेप ईरान भेजने के पीछे 4 बड़ी वजहें हो सकती हैं… अमेरिकी थिंकटैंक वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो ग्रांट रमली के मानते हैं कि चीन के लिए ईरान केवल एनर्जी सोर्स नहीं, बल्कि रणनीतिक ढाल भी है। अगर ईरान से तेल सप्लाई रुकी, तो चीन की निर्भरता सऊदी अरब या रूस पर बढ़ेगी। ऐसा चीन नहीं चाहता। सवाल-4: तो क्या चीन ने जंग में खुलकर ईरान का खेमा चुन लिया है? जवाब: अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले की चीन ने निंदा की थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सीजफायर करने और बातचीत से मामला सुलझाने की अपील की थी। ऐसे में चीनी खेप का ईरान के लिए रवाना होना सवाल उठता है कि क्या चीन खुलकर ईरान के साथ है? अमेरिकी थिंकटैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में चाइना स्टडीज के सीनियर फेलो आइसैक कार्डन के मुताबिक, 'चीन इन जहाजों को कुछ और दिन पोर्ट पर रोक सकता था। उनकी वापसी में प्रशासनिक देरी कर सकता था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। चीन सभी के सामने कहता है कि वो शांति चाहता है, लेकिन युद्ध के समय ऐसे फैसले ले रहा है।' ग्रांट रमली मानते हैं कि चीन ऐसा रुख असमान्य और साहसिक है। क्योंकि अभी ईरान खाड़ी देशों पर मिसाइले दाग रहा है। ऐसे समय में ईरान की मदद करने से चीन के अरब देशों से रिश्ते खराब होने की आशंका है। सवाल-5: आखिर चीन की मिडिल-ईस्ट को लेकर क्या स्ट्रैटजी है? जवाब: चीन की ज्यादा दिलचस्पी इसमें नहीं है कि ईरान की मौजूदा सत्ता बनी रहे। वो ईरान और मिडिल ईस्ट में अपने निवेश सुरक्षित रखना चाहता है। उसकी एनर्जी सप्लाई प्रभावित न हो। चीन का आधा तेल मिडिल ईस्ट से आता है। वो सउदी अरब, कुवैत, इराक, ईरान और UAE से तेल खरीदता है। चीन को चिंता है कि ईरान पूरे मिडिल ईस्ट में रीजनल वॉर छेड़ देगा। इससे खाड़ी देशों से आने वाला तेल प्रभावित होगा। यहां चीन का काफी निवेश है। ईरान के हमलों से इन्हें भी नुकसान होगा। इसके अलावा चीन ने खुद को दुनिया के समाने अमेरिका का ऑप्शन बताया है। दोनों का टकराव किसी से छिपी नहीं है। मिडिल-ईस्ट में चीन ने ईरान से रिश्ते इसलिए बनाए क्योंकि अमेरिका के बाकी अरब देशों से मजबूत हैं और ईरान उसके लिए सबसे बड़ी दिक्कत है। हालांकि चीन कभी खुलकर अमेरिका की निंदा नहीं करता, बल्कि उससे डिप्लोमैटिक रिश्ते बनाकर चलता है। अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन का दौरा करने वाले हैं। ईरान जंग के चलते अमेरिका की मिलिट्री और फंड्स मिडिल-ईस्ट में शिफ्ट हो गए हैं। चीन यही चाहता है। ब्रिटिश थिंकटैंक चैटम हाउस में मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका प्रोग्राम के असोसिएट फेलो अहमद अबूदू के मुताबिक, 'चीन, ईरान की मिसाइल और ड्रोन स्ट्रैटजी मजबूत करने के लिए जरूरी तकनीक साझा कर सकता है। वो अमेरिका और चीन के मौजूदा रिश्ते खराब किए बिना ईरान की मदद करना चाहता है, जिससे उसके लॉन्ग टर्म गोल पूरे हो सकें।' ------------- ईरान जंग से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए… खामेनेई के बेटे को ईरान की कमान, कभी मुजतबा के मरने की दुआएं मांगी गईं; पिता क्यों नहीं बनाना चाहते थे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे मुजतबा अब ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। 17 साल की उम्र में जंग लड़ी, 30 की उम्र में मदरसा पढ़ने गए और 56 साल में ईरान के सर्वोच्च नेता बन गए। मुजतबा को ईरान की राजनीति का सबसे रहस्यमयी चेहरा कहा जाता है। पूरी खबर पढ़िए…
‘मैं और मेरा परिवार गांव में अकेला हो गया है। शादी मैंने की थी, अब उससे बाहर भी आना चाहती हूं, लेकिन फिर भी सजा मिल रही है। छोटे भाई का स्कूल छूट गया क्योंकि कोई ऑटो वाला उसे ले जाने को तैयार नहीं है। खेतों में लगी आलू की फसल खराब हो गई क्योंकि उसे निकालने के लिए कोई मजदूर तैयार नहीं। मेरा परिवार मुसीबत में है।‘ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। मीता ने दो साल पहले एक मुस्लिम लड़के से लव मैरिज की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन अलग धर्म में शादी करने की ‘सजा’ मीता और उनके परिवार को अब तक मिल रही है। गांववालों का कहना है कि मीता मुसलमान हो गई है। दो साल बाद इसलिए गांव आई है, ताकि लड़के-लड़कियों का धर्म बदलवा सके। ‘न कोई दुकानदार राशन देगा, न मंदिर में मिलेगी एंट्री’मीता का गांव कोलकाता से करीब 250 किमी दूर है। परिवार गांव के आखिरी छोर पर रहता है। बुजुर्ग माता-पिता के अलावा छह साल का भाई है। सोशल बायकॉट की वजह से परिवार ज्यादातर घर के अंदर ही रहता है। परिवार का हाल पूछने पर मीता बांग्ला में लिखा पैम्फलेट पढ़कर सुनाती हैं, जिसमें उनके पिता के नाम के साथ बायकॉट के पॉइंट्स लिखे हैं। पैम्फलेट में लिखा है, ‘गांव के लोग सुदीप घोष के परिवार से कोई संपर्क नहीं रखेंगे। उनके किसी कार्यक्रम में नहीं जाएंगे। घोष परिवार न मंदिर में पूजा कर सकेगा और न कोई दुकान वाला इन्हें राशन देगा। किसी धार्मिक कार्यक्रम में भी शामिल नहीं किया जाएगा।‘ इसे पढ़ते हुए मीता भावुक हो जाती हैं। वे बताती हैं, ‘मैंने 2024 में एक मुस्लिम लड़के से शादी की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली। जुलाई 2025 में घर लौट आई। इसके बाद गांव में दिक्कतें शुरू हुईं। आसपास के लोगों ने बहुत बवाल किया। हमारे घर पर पत्थर फेंके। बाबा ने सबसे माफी मांगी। मंदिर जाकर समाज के सामने हाथ जोड़े, लेकिन गांव वाले नहीं माने। वे बस यही चाहते हैं कि मैं गांव में न रहूं।‘ ‘गांववालों ने बाबा से कहा कि अगर बेटी को घर में रखोगे तो पूरे परिवार को बाहर निकाल देंगे। ये सुनकर मैं डर गई। मैंने बाबा से कहा कि मुझे शहर छोड़ दो। गांव के हालात देखते हुए बाबा ने मुझे करीब 10 किमी दूर दुबराजपुर में हॉस्टल भेज दिया। छह महीने बाद हॉस्टल भी खाली हो गया। अब मेरे पास घर लौटने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।‘ ढोल बजाकर गांव में मुनादी- नियम तोड़े तो 5 हजार जुर्माना लगेगामीता आगे बताती हैं, ‘बाबा फरवरी के पहले हफ्ते में मुझे घर वापस ले आए। गांववालों का विरोध फिर शुरू हो गया। चासपाड़ा के लोगों ने ढोल बजाकर पूरे गांव में कहा कि कोई भी घोष परिवार से संबंध नहीं रखेगा। पूरे गांव में पर्चे बांटे गए, जिसमें नियम तोड़ने वाले पर 5 हजार रुपए जुर्माने का आदेश था।‘ हमने मीता से पति से अलग होने की वजह पूछी। उन्होंने कोई साफ वजह तो नहीं बताई, सिर्फ इतना कहा कि माता-पिता के बिना नहीं रह सकती, इसलिए घर वापस आ गई। मीता ने अब तलाक के लिए अर्जी लगाई है। इस साल जुलाई में आपसी रजामंदी से तलाक हो जाएगा। हमने मीता से पूछा, घर की जरूरत का सामान कहां से लाते हैं? वे कहती हैं, ‘सामान तो हम शहर से ले आते हैं, कभी ताऊ के बेटे ले आते हैं। समस्या ये है कि अगर कोई बीमार पड़ जाए तो गांव के डॉक्टर दवा नहीं देंते। दिन में कुछ होगा तो शहर चले जाएंगे, लेकिन रात में हुआ तो क्या करेंगे। हमें अब भी डर लगता है कि कोई हमला न कर दे। पहले ही पत्थर मारकर खिड़कियां तोड़ दी थीं, अब पता नहीं क्या करेंगे।‘ ‘बेटी से गलती हुई, माफी मांगी, लेकिन सब बदल नहीं सकते’मीता के बगल में उनके पिता सुदीप घोष (बदला हुआ नाम) बैठे थे। वे हिंदी नहीं बोल पाते। बंगाली में कहते हैं, ‘गांव वालों ने हमारा जीना मुश्किल कर दिया है। हालत ये है कि मेरा छह साल का बेटा स्कूल नहीं जा सकता। लोगों ने स्कूल वैन वाले को धमकाया है। इसलिए वो स्कूल नहीं जा पा रहा है। पढ़ाई में कोई रुकावट न हो, इसलिए अभी भाई की बहू के पास ट्यूशन जाता है।‘ ‘खेत में आलू लगे हैं, लेकिन उसे निकालने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। पहले जो लोग हमारी एक बोली पर खेत में काम करने आ जाते थे, आज वो बात करने को भी राजी नहीं हैं।‘ सुदीप आगे कहते हैं, ‘बेटी से गलती हो गई, मैंने पूरे गांव से हाथ जोड़कर माफी भी मांग ली है। इससे ज्यादा अब क्या कर सकता हूं, जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता।‘ अब गांववालों की बात…हमने मीता से विरोध करने वालों के बारे में पूछा तो उन्होंने गांव में रहने वाले पंकज चौधरी और आशीष मंडल का नाम लिया। उनसे मिलने के लिए गांव में आगे बढ़े। करीब सौ कदम दूर मनसा मंदिर पहुंचे। यहां बैठे लोगों से सुदीप घोष के बारे में पूछा। वे कुछ बोलने को राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि जो भी फैसला लिया है, वो सही है। इसके बाद हम आशीष मंडल के घर पहुंचे। वे घर पर नहीं थे। उनके भाई की पत्नी मिलीं, लेकिन कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं थी। उन्होंने बस इतना कहा कि आशीष हार्ट के मरीज हैं। कुछ वक्त पहले ही उनका ऑपरेशन हुआ है। घोष फैमिली के बायकॉट से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले में पूरा गांव शामिल है। घोष परिवार सिर्फ कुछ लोगों को टारगेट कर रहा है। ‘बेटी भागी तो थाना घिरवाया, लौट आई तो बताया भी नहीं’गली में आगे पंकज चौधरी का घर है। मिट्टी के मकान का ज्यादातर हिस्सा धान और दूसरी फसलों से भरा है। घर पर हमें पंकज के बुजुर्ग माता-पिता मिले। घोष फैमिली के सोशल बायकॉट के बारे में पूछने पर पिता तारापोदो चौधरी कहते हैं, ‘इसमें सिर्फ मेरा बेटा ही शामिल नहीं है, पूरा गांव विरोध कर रहा है। इस विरोध के कई कारण भी हैं।‘ कारण पूछने पर बताते हैं, ‘दो साल पहले घोष की बेटी मुस्लिम लड़के के साथ चली गई। तब गांव के हर घर से एक व्यक्ति थाने गया था। सब परिवार के साथ खड़े थे, ताकि लड़की समाज में लौट आए। वो वापस नहीं आई। लड़की बालिग थी, इसलिए जोर जबरदस्ती भी नहीं की जा सकी। उस मुश्किल वक्त में पूरे गांव ने घोष परिवार का साथ दिया।‘ ‘दो साल बाद लड़की अचानक गांव में वापस आ गई। तब उसके पिता ने किसी को ये बताना भी जरूरी नहीं समझा। गांव के लोगों को पता चला तो वे नाराज हुए। लोगों ने घोष को मंदिर पर बुलाया और लड़की को गांव से बाहर रखने के लिए कहा।‘ ‘दूसरी सबसे बड़ी बात ये है कि मीता ने मुस्लिम लड़के के साथ शादी की है। अब वो हिंदू समाज का हिस्सा नहीं है। आने वाले समय में गांव के बाकी लड़के-लड़कियां भी ऐसा काम न करें, इसलिए ये फैसला लिया गया।‘ ‘बायकॉट जरूरी, ताकि कोई और ये गलती न दोहराए’सोशल बायकॉट के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘पूरे गांव का यही फैसला है कि कोई भी शादी, प्रोग्राम, पूजा-पाठ या बाकी किसी आयोजन में उनके परिवार को शामिल नहीं करेगा। अगर उन्हें मंदिर में पूजा करनी है, तो वे अलग से जाकर करें।‘ गांव से राशन नहीं लेने वाली बात पूछने पर तारापोदो कहते हैं ‘ये सब झूठ है। मीता की नानी का घर इसी गांव में है। पूरा परिवार उनसे मिलता है और उनका सारा काम भी हो रहा है। विरोध इस बात का है कि कहीं भविष्य में कोई बच्चा समाज से बाहर जाने की गलती न करें।‘ घोष परिवार के विरोध में बांटे गए पैम्फलेट में लिखा था कि गांव से उन्हें किसी तरह की सुविधा नहीं दी जाएगी। इसे पुख्ता करने के लिए हम गांव के ही चैताली स्टोर में गए। दुकान मालिक समीर दास से बायकॉट के बारे पूछा। उन्होंने कहा, ‘सोशल बायकॉट का फैसला तो लिया गया है। फिर भी वे समान लेने आएंगे तो मैं दूंगा। अब तक तो समान लेने नहीं आए।‘ मीता अब मुसलमान, धर्मांतरण करने गांव में आईहमने आशीष मंडल और पंकज चौधरी से दोबारा मिलने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं मिले। आखिर में हमने पंकज चौधरी से फोन पर बात की। उनकी एक एडवरटाइजमेंट एजेंसी है। उनका मानना है कि गांव में माहौल सही रहे, इसलिए बायकॉट जरूरी है। हमने पूछा कि लव मैरिज करना या तलाक लेने का अधिकार तो संविधान देता है। क्या आप संविधान को नहीं मानते हैं? इसके जवाब में पंकज कहते हैं, ‘संविधान मानते हैं, लेकिन गांव के भी कुछ नियम-कायदे होते हैं, जिन्हें सभी को मानना होता है। मीता ने मुस्लिम लड़के से शादी की।’ सोशल बायकॉट नहीं हटा तो केस करेंगेगांव में ही रहने वाले धर्म जागरण समन्वय के सह संयोजक डॉ. रंजन बनर्जी इस मामले को पहले दिन से देख रहे हैं। उनकी राय गांव वालों से अलग है। वे कहते हैं, ‘मीता किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कर रही है। वो खुद पीड़ित है। उसने एक शादी की, जो नहीं चल सकी। इसके भी कई कारण है, क्योंकि दोनों का समाज और संस्कृति अलग-अलग है।‘ ‘रही बायकॉट की बात तो इसकी अनुमति न तो हिंदू धर्म देता है और न ही कानून। इसलिए हमने इसके खिलाफ मीता से पहले DM और फिर लोकल पुलिस स्टेशन में मेल करवाया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। हमने कोलकाता हाईकोर्ट में सोशल बायकॉट के खिलाफ नोटिस दिया है। अगर ये नहीं हटा, तो केस करेंगे।‘ इसके बाद हम गांव के प्रधान गौतम मंडल से मिले। वे कहते हैं, ‘जिस दिन ये घटना हुई, उस दिन मैं गांव में नहीं था। सुदीप घोष ने मुझे बाद में बताया। इसे लेकर गांव के लोगों से भी बात की, लेकिन कोई नहीं माना। दुबराजपुर थाना के पुलिस अफसरों ने आशीष मंडल और पंकज चौधरी के साथ कुछ लोगों को थाने बुलाकर समझाया था, लेकिन बात नहीं बनी।‘ मीता ने भी हमें मेल दिखाए थे। उस पर अधिकारियों का कोई रिप्लाई नहीं था। हमने केस की स्थिति जानने के लिए DM से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन जवाब नहीं मिला। वकील बोले- शादी निजी मामला, इसमें सोशल बायकॉट गैरकानूनीसोशल बायकॉट को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील सब्यसाची चटर्जी कहते हैं, ‘बंगाल में खासकर बांग्लादेश के साथ बॉर्डर साझा करने वाले इलाकों में अंतरधार्मिक विवाह का चलन पहले से है। पिछले कुछ साल में आदिवासी और बॉर्डर वाले इलाके में बड़े स्तर पर हिंदुत्व का प्रचार हुआ। इस कारण यहां धर्म को लेकर बड़ा भेदभाव दिखता है।‘ ‘किस इंसान को किसके साथ शादी करनी है, ये उसका निजी मामला है। इसमें समाज का कोई दखल नहीं होना चाहिए। अगर कोई इस आधार पर सोशल बायकॉट कर रहा है, तो ये गैर कानूनी है। संविधान के अनुसार विवाह धारा-21 के तहत मौलिक अधिकार है। अगर कोई इसमें किसी तरह की अड़चन डालता है तो सजा का प्रावधान है। साथ ही धारा-15 और 17 सोशल बायकॉट के खिलाफ है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘अपनी मर्जी से शादी करने के लिए किसी का भी बहिष्कार नहीं किया जा सकता है। इसमें भी अगर व्यक्ति शेड्यूल कास्ट से आता है, तो उसके खिलाफ ऐसा करने पर SC/ST एक्ट 1989 के मुताबिक सजा का प्रावधान है, जो गैर जमानती है।‘ ………………ये खबर भी पढ़ें… मॉरीशस में चलते शिप से कैसे गायब हुआ सार्थक 3 फरवरी रात करीब 8:30 बजे ओडिशा के भुवनेश्वर में रहने वाली रश्मिता साहू के पास एक कॉल आया। बताया गया कि उनका बेटा सार्थक लापता है। सार्थक मर्चेंट नेवी में इंटर्न है। 14 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर तैनात हुआ था। जब गायब हुआ, तब शिप मॉरीशस के पास समुद्री इलाके में था। पढ़िए पूरी खबर…
नेपाल में बालेन शाह होंगे पहले मधेशी प्रधानमंत्री, पुराने दलों को किया खारिज, पीएम मोदी ने की बात
इस जीत के साथ ही काठमांडू के मेयर और लोकप्रिय नेता बालेंद्र (बालेन) शाह देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो वह नेपाल के पहले मधेशी प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
तेहरान के आसमान में काला धुआं, तेल ठिकानों पर हमलों के बाद ‘जहरीली बारिश’ का खतरा
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हालिया हमलों के बाद जहरीली एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने की संभावना है, जो लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी प्रतिबंधों को खत्म करने के लिए अमेरिकी संसद में विधेयक पेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच-1बी से जुड़ी घोषणा के खिलाफ एक एक डेमोक्रेटिक सांसद ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पेश किया है
यूएई एयर डिफेंस ने ईरानी मिसाइलों को रोका, दुबई मरीना में टावर पर गिरा मलबा
यूएई ने ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, जिनका मलबा दुबई मरीना में टावर पर जाकर गिरा। इससे बिल्डिंग के सामने के हिस्से से धुआं उठने लगा और इलाके में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया
ईरान से संघर्ष के बीच अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरू मध्य की सुरक्षा का लिया संकल्प
संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुक्त प्रवाह को बनाए रखेगा क्योंकि ईरान के साथ संघर्ष तेज होता जा रहा है
पश्चिम एशिया में युद्ध का नया मोड़, ईरान के भीषण हमले में अमेरिकी 'थाड' रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने न केवल इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि जॉर्डन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर में स्थित कुछ महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भी प्रभावित किया है।
ईरान के मिनाब शहर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नौसैनिक अड्डे पर हुए हमले से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है
ईरान ने ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला होने पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी
ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने क्षेत्र के मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे अमेरिका और इजराइल को ईरान के ईंधन और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करने से रोकें
वैश्विक तेल बाजार स्थिर करने के लिए भारत से की तेल खरीद की बात: अमेरिकी ऊर्जा मंत्री
अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए भारत से उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने को कहा, जो अभी चीन के रिफ़ाइनरियों पर अनलोड होने के लिए इंतजार कर रहे थे।
UAE Air Defense: ईरानी ड्रोन को आसमान में किया ध्वस्त
यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए ईरानी यूएवी (ड्रोन) को रोककर नष्ट कर दिया, जो देश को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा था
2026 का टी20 वर्ल्ड कप सिर्फ भारत के वर्चस्व की कहानी नहीं, बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट के बदलते पैटर्न की कहानी भी है। कैसे? जानिए मंडे मेगा स्टोरी में… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अंकुर बंसल रिसर्च: ब्रज पांडे -------- क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 28 मार्च से शुरू होगा IPL 2026:टी-20 वर्ल्डकप फाइनल से पहले ऐलान, बंगाल-तमिलनाडु समेत 5 राज्यों में चुनावों के चलते शेड्यूल बदला IPL 2026 की शुरुआत 28 मार्च को होगी। इसकी घोषणा रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाले भारत-न्यूजीलैंड टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल से पहले ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स ने की। पहले टूर्नामेंट 26 मार्च से शुरू होना था। पूरी खबर पढ़िए…
मॉरीशस में चलती शिप से कैसे गायब हुआ सार्थक:34 दिन बाद भी पता नहीं, मां बोली- कंपनी कुछ छिपा रही
3 फरवरी रात करीब 8:30 बजे ओडिशा के भुवनेश्वर में रहने वाली रश्मिता साहू के पास एक कॉल आया। बताया गया कि उनका बेटा सार्थक लापता है। सार्थक मर्चेंट नेवी में इंटर्न है। 14 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर तैनात हुआ था। जब गायब हुआ, तब शिप मॉरीशस के पास समुद्री इलाके में थी। 4 फरवरी को दो लोग रश्मिता के घर पहुंचे। ये कैप्टन देबाशीष पटनायक और कैप्टन दासगुप्ता थे। दोनों उसी एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से आए थे, जिसकी शिप से सार्थक गायब हुआ। दोनों ने फैमिली को एक लेटर सौंपा, जिसमें सार्थक की गुमशुदगी की ऑफिशियल जानकारी थी। सार्थक को लापता हुए अब एक महीना गुजर चुका है लेकिन कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार परेशान है। मां का कहना है कि कंपनी जरूर कुछ छिपा रही है। मामला इंटरनेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी से जुड़ा है इसलिए MRCC मॉरीशस इस सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर रही है। इसमें एक और वेसल शिप की भी मदद ली जा रही है। सार्थक की गुमशुदगी को लेकर फैमिली और उसके दोस्तों का क्या कहना है? शिप मैनेजमेंट कंपनी ने अब तक क्या बताया, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची। शिप के सिंगापुर लौटने से 9 दिन पहले गायब हुआ सार्थक भद्रक जिले के केस्पुर गांव के रहने वाले हैं। बीते लगभग 11 साल से मां और नाना-नानी के साथ भुवनेश्वर में किराए के मकान में रह रहे थे। मां रश्मिता साहू निजी अस्पताल में असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट हैं। वहीं पिता सत्यजीत महापात्रा राउरकेला में एक निजी कंपनी में काम करते हैं और वहीं रहते हैं। परिवार के मुताबिक, 12 जुलाई 2025 को सार्थक भुवनेश्वर से मुंबई के लिए निकला था। 16 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर सवार हुआ। उसके साथ 23 क्रू मेंबर सवार थे। शिप हांगकांग से घाना होते हुए 11 फरवरी को सिंगापुर लौट रहा था। 2 फरवरी को जब शिप सिंगापुर के करीब था, तब सार्थक की मां और परिवार के बाकी लोगों से बात भी हुई थी। फिर 3 फरवरी की रात करीब 8:30 बजे परिवार को उसकी गुमशुदगी की खबर मिली हैं। बताया गया कि जिस जगह उसके लापता होने का पता चला, वो मॉरीशस कोस्ट स्टेशन के सबसे नजदीक है। मां बोलीं- चलते शिप से कोई कैसे गायब हो जाएगारश्मिता बताती हैं, ‘जब मुझे बताया गया कि सार्थक अपने कमरे और शिप में नहीं मिला तो मेरे लिए ये मानना मुश्किल था। मुझे सबसे पहले ये शंका हुई कि मेरे बेटे के साथ कुछ गलत हुआ है। क्योंकि चलती शिप से भला कोई व्यक्ति कैसे गायब हो सकता है। ‘1 फरवरी की रात करीब 9 बजे से 11 बजे तक सार्थक से मेरी फोन पर लंबी बातचीत हुई थी। उसमें किसी डर की बात सामने नहीं आई थी। अगले दिन फिर दोपहर और रात में हमारी फिर बात हुई। तब भी सब कुछ सामान्य था। वो बस मेरी तबीयत को लेकर परेशान था। अभी स्किन ट्यूबरकुलोसिस का इलाज चल रहा है। वहीं, डायबिटीज और थायरॉइड मुझे पहले से है।‘ फिर 2 फरवरी की ही रात रश्मिता के पास अनजान नंबर से दो से तीन बार फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को सार्थक का दोस्त बताया और कहा कि वो ओडिशा घूमने आना चाहता है। उसने घर का पता भी पूछा। ये बात उन्हें असहज लगी। लिहाजा उन्होंने घर का पता देने से मना कर दिया। हालांकि रश्मिता ने सार्थक को मैसेज कर इसकी जानकारी दे दी। वो बताती हैं, ‘बेटे को काफी देर तक मैसेज डिलीवर नहीं हुआ। पहले मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और सोचा नेटवर्क में नहीं होगा इसलिए नहीं पहुंचा होगा। जब 3 फरवरी को भी सार्थक ने फोन नहीं उठाया और न कॉलबैक आया। तब बेचैनी बढ़ने लगी।‘ कैसे-किन हालात में गायब हुआ बेटा, कंपनी छिपा रहीरश्मिता आगे बताती हैं, ‘3 फरवरी की शाम कंपनी से कैप्टन देबाशीष पटनायक का फोन आया। उन्होंने बताया कि सार्थक गायब हो गया है। वो सुबह करीब 6.20 बजे अपने कमरे में गया था लेकिन जब उसके लिए नाश्ता भेजा गया, तब वो कमरे में नहीं था।‘ ‘कोलकाता से आए कैप्टन दासगुप्ता और देबाशीष पटनायक ने भी कंपनी का लेटर देते वक्त यही बात दोहराई थी। जब हमने जानना चाहा कि जांच कैसे हो रही, किस स्तर तक पहुंची और इसमें कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल हैं, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला।‘ ‘मुझे ये भी नहीं बताया गया कि सार्थक कैसे लापता हुआ और ये सब किन हालात में हुआ। अगर सही तरह से खोजबीन की जाए तो वो शिप में ही मिल सकता है। लापता होने की बात बहुत जल्दी और बिना किसी ठोस आधार के फैला दी गई।‘ CCTV में आखिरी बार दिखने का दावा, फुटेज मांगने पर पलटी कंपनीरश्मिता आगे कहती हैं, ‘हमने शिप के चीफ अफसर से सीधे बात करने की भी कोशिश की लेकिन नहीं हो सकी। जब मैंने दासगुप्ता से इसकी शिकायत की तो कहा गया कि कंपनी के नियमों के तहत वो परिवार से सीधे बात नहीं कर सकते। काफी गुजारिश के बाद हमें वीडियो कॉल करके सार्थक का कमरा और आसपास का हाल दिखाया गया।‘ ‘कंपनी ने कहा था कि CCTV में सार्थक को फोन पर बात करते हुए रूम से बाहर जाते देखा गया है। जब हमने CCTV फुटेज मांगा, तब हमें वीडियो कॉल करके दिखाया गया कि वहां कोई कैमरा ही नहीं लगा है। जब हमने सवाल किया फिर उसे किस कैमरे में देखा गया तो कंपनी ने कुछ क्लियर नहीं किया। हर बार अलग-अलग बात कही गई।‘ सार्थक का परिवार अब सरकार से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। उन्हें कुछ जनप्रतिनिधियों ने केस में जल्द मदद का भरोसा दिलाया है। सार्थक के घर पहुंचे तो उसकी गुमशुदगी की खबर मिली इसके बाद हम सार्थक के बचपन के दोस्त शाश्वत महालिक से भी मिले। दोनों नर्सरी क्लास से साथ हैं। गांव में इनका घर भी अगल-बगल है। शाश्वत के मुताबिक, पढ़ाई और काम के बावजूद वे लगातार एक-दूसरे से बात करते और जिंदगी की हर बड़ी-छोटी बात शेयर करते हैं। वे बताते हैं, ‘2 फरवरी को रात करीब 10 बजे हमारी फोन पर बात हुई थी। सार्थक अच्छे मूड में था। वो दोस्तों का हालचाल पूछ रहा था। मुझसे भी आगे का प्लान पूछा और अपने प्लान भी शेयर किए। उसकी 18 महीनों की इंटर्नशिप लगभग पूरी होने वाली है। उसने एक कोर्स में भी दाखिला लिया है ताकि उसे पास करके प्रमोशन मिल सके।‘ ’उस रात सार्थक बस आंटी (अपनी मां) की तबीयत लेकर परेशान था। इसलिए चाहता था कि हम दोस्त घर जाकर एक बार उनसे मिल आएं। उसके कहने पर हम अगले ही दिन (3 फरवरी) आंटी से मिलने सार्थक के घर पहुंचे। तभी हमें उसके लापता होने का पता चला।’ अब कंपनी सार्थक की मेंटल कंडीशन पर सवाल उठा रही शाश्वत और उनके साथियों ने एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की लेकिन सीधा संपर्क नहीं हो सका। बस कंपनी के हेड ऑफिस से सार्थक की गुमशुदगी का एक मेल मिला। शाश्वत सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘आखिर चलती हुई शिप से सार्थक कैसे गायब हो सकता है। कैडेट को एक छोटा सा कमरा मिलता है। वहां से बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं होता। फिर वो कहां गायब हो गया। हम चाहते हैं कि शिप में लगे CCTV कैमरों के फुटेज और VDR (वॉयस डेटा रिकॉर्डर) दिए जाएं। इसी में शिप की गतिविधियां और आवाजें रिकॉर्ड होती हैं, जो किसी भी घटना की जांच में अहम होती हैं। हालांकि अभी कंपनी से कोई जवाब नहीं मिला है।‘ वे आगे बताते हैं, ‘सार्थक के शिप पर सभी से अच्छे संबंध थे। उसकी गुमशुदगी की खबर लेकर आए कंपनी के अफसर भी ये बात मान रहे हैं। फिर भी कंपनी ये दिखाने की कोशिश में लगी है कि सार्थक की मानसिक हालत ठीक नहीं थी। वो मां को याद कर रहा था और मानसिक रूप से कमजोर पड़ गया था। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल अलग है।’ अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी शाश्वत कहते हैं, ‘कंपनी ने बताया कि 2 फरवरी की रात सार्थक सोया नहीं था, इसलिए सुबह 4 बजे से 8 बजे वाली ड्यूटी भी नहीं कर सका। जब वो मेस भी नहीं पहुंचा तो 8.30 बजे नाश्ता उसके कमरे भेजा गया था लेकिन वहां भी नहीं मिला।‘ हालांकि शाश्वत इसे लेकर सवाल खड़े करते हैं। वे पूछते हैं कि अगर सार्थक सोया नहीं था, तो रात भर कहां था, किसके साथ था और क्या कर रहा था। कंपनी इन सवालों के जवाब क्यों नहीं दे रही है। कंपनी ने ये भी साफ नहीं किया कि वो डेक के पास गया था या शिप के किसी दूसरे हिस्से में। अफसर बोले- मुमकिन है कि सार्थक ने छलांग लगा दीकेस की जांच को लेकर हमने एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि देबाशीष पटनायक से भी बात की। वे बताते हैं कि इस मामले में फिलहाल कोई बड़ा अपडेट नहीं है। न ही सार्थक की मानसिक स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी है। देबाशीष ने दावा किया कि वे कंफर्म हैं कि सार्थक ने ओवरबोर्ड छलांग लगाई है। क्योंकि शिप से किसी का लापता होना बिल्कुल नामुमकिन है। ये भी संभव नहीं कि कोई किसी को उठाकर समुद्र में फेंक दे। हमने पूछा क्या शिप पर किसी तरह की निगरानी नहीं होती? इस पर देबाशीष बताते हैं, ‘निगरानी का काम ब्रिज पर होता है। वेसल स्टाफ को कोई अलग से मॉनीटर नहीं करता क्योंकि वे सभी एम्प्लॉयी होते हैं। अगर सार्थक ने वास्तव में छलांग लगाई होगी, तो समुद्र में उसकी लाश मिलना भी लगभग नामुमकिन है। क्योंकि बड़े से बड़ा तैराक भी ज्यादा से ज्यादा चार घंटे ही पानी में रह सकता है।‘ क्या सार्थक के केबिन में होने की कोई संभावना है? देबाशीष इसे सिरे से खारिज करते हैं और कहते हैं, ‘अगर केबिन में होता तो अब तक मिल चुका होता। सभी CCTV फुटेज रिट्रीव कर लिए गए हैं। उसी से पता चला है कि सार्थक फोन लेकर कमरे से बाहर निकला था। ये फुटेज जल्द ही परिवार को भी भेजा जाएगा।‘ थर्ड ऑफिसर से हुए विवाद के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘शिप में छोटे-मोटे विवाद होते रहते हैं। इसे लेकर कोई इतना बड़ा कदम नहीं उठाता। वैसे भी सार्थक को सभी पसंद करते थे। मुझे किसी केसाथ उसके गंभीर विवाद की जानकारी नहीं है।‘ फिलहाल MRCC मॉरीशस, सार्थक की तलाश में शुरू हुए अभियान को लीड कर रहा है। इसमें शानडोंग सिविलाइजेशन नाम के एक और वेसल शिप की मदद ली जा रही है। ओडिशा सरकार ने मदद के लिए पहल कीसार्थक के लापता होने के मामले में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार के कई अहम विभागों से दखल देने की मांग की है। सरकार ने शिपिंग महानिदेशालय और पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय से संपर्क कर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली स्थित ओडिशा के चीफ रेजिडेंट कमिश्नर ऑफिस से जारी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, ये मामला तब सामने आया, जब सार्थक की मां रश्मिता साहू ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने CM को लिखे पत्र में बताया कि उनका बेटा ड्यूटी के दौरान रहस्यमय हालात में गायब हो गया है। इधर ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने भी सार्थक के लापता होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि खोज और बचाव अभियान तेज किया जाए, ताकि सार्थक को जल्द से जल्द सुरक्षित तलाशा जा सके। अपने बयान में नवीन पटनायक ने भारत सरकार के शिपिंग महानिदेशालय और विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि वे इस मामले में तुरंत मदद करें और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर परिवार को सहयोग दें। साथ ही तलाशी अभियान में तेजी लाएं।………………….ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में पत्नी की मौत, पति ने मांगे 100 करोड़ 8 सितंबर 2025, नेपाल में सरकार के खिलाफ जेन जी प्रोटेस्ट शुरू हुआ। अगले ही दिन प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। सरकारी इमारतें, होटल और दुकानें प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गए। राजधानी काठमांडू में होटल हयात रीजेंसी को भी निशाना बनाया गया। चारों तरफ गोलियों की आवाज और आग की लपटें थीं। इसी होटल में भारत के गाजियाबाद से आए रामबीर सिंह गोला और उनकी पत्नी राजेश देवी रुके थे। पढ़िए पूरी खबर…
पश्चिम एशिया संघर्ष से बांग्लादेश में बिगड़े हालात, तेल संकट से महंगाई बढ़ने की आशंका
पश्चिम एशिया में संघर्ष का दौर जारी है। इस दौरान ईरान ने कतर के कई प्लांटों पर घातक हमले किए हैं, जिसके बाद कतर की तरफ से उठाए गए बड़े कदम के बाद एशियाई आपूर्ति बाधित हो गई है
ईरान के परमाणु भंडार पर कब्जे की तैयारी?: अमेरिका-इस्राइल उतार सकता है विशेष बल, रिपोर्ट में दावा
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के परमाणु भंडार को सुरक्षित करने का यह संभावित मिशन मौजूदा युद्ध के अगले चरण में किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी यह केवल एक रणनीतिक विकल्प के रूप में विचाराधीन है और इसे तभी लागू किया जाएगा जब युद्ध की परिस्थितियां उस दिशा में आगे बढ़ेंगी।
अमेरिकी खुफिया जानकारी से परिचित अधिकारियों के अनुसार, रूस द्वारा साझा की गई जानकारी से ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों, सैन्य विमानों और अन्य रक्षा संसाधनों की गतिविधियों के बारे में अहम संकेत मिल सकते हैं।
Nepal PM : काठमांडू की सड़कों पर बालेन-बालेन की धूम, युवाओं के पसंदीदा नेता बने बालेंद्र शाह
काठमांडू: नेपाल की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम तेजी से उभरकर सामने आया है—बालेंद्र शाह (बालेन शाह)। राजधानी काठमांडू की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह “बालेन-बालेन” की चर्चा सुनाई दे रही है। महज 35 वर्ष की उम्र में बालेंद्र शाह (Balendra Shah) देश के युवाओं के बीच बदलाव के प्रतीक बनकर उभरे हैं। नेपाल के युवा वर्ग को उनमें ऐसा नेता दिखाई दे रहा है जो पारंपरिक राजनीति से अलग होकर व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता ला सकता है। यही वजह है कि हाल के चुनावों में जनता ने पुराने राजनीतिक चेहरों से दूरी बनाते हुए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में समर्थन दिया। निर्दलीय मेयर से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर बालेंद्र शाह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 2022 में काठमांडू के मेयर चुनाव से की थी। उन्होंने यह चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और अप्रत्याशित जीत हासिल की। मेयर बनने के बाद उन्होंने राजधानी काठमांडू के प्रशासन में कई बदलाव किए। शहर के विकास, सफाई व्यवस्था, यातायात सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर उन्होंने सक्रिय कदम उठाए। चार वर्षों के भीतर उनके कामकाज की शैली ने आम लोगों का भरोसा जीत लिया। लोगों को लगने लगा कि पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से अलग भी एक ईमानदार और परिणाम देने वाला नेतृत्व संभव है। टाइम मैगजीन की सूची में मिली पहचान बालेंद्र शाह की लोकप्रियता सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही। 2023 में प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 उभरते हुए नेताओं की सूची में शामिल किया। नेपाल जैसे सीमित संसाधनों वाले देश के एक युवा नेता के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मानी गई। इस सम्मान के बाद बालेंद्र शाह की पहचान वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई। ‘जेन जी आंदोलन’ के दौरान बढ़ी लोकप्रियता नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव 2025 के ‘जेन जी आंदोलन’ के दौरान देखने को मिला। इस आंदोलन में देश के युवाओं ने भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई। इस आंदोलन के दबाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से हटना पड़ा। उस समय देश में कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बालेंद्र शाह का नाम भी चर्चा में आया था। हालांकि उस समय विभिन्न दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया। मेयर पद छोड़कर आरएसपी में शामिल हुए जनता के बढ़ते समर्थन को देखते हुए बालेंद्र शाह ने जनवरी 2026 में काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए। इसके बाद देश में जब ओली सरकार ने आलोचना को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध लगाया, तब बालेंद्र शाह युवाओं की आवाज बनकर सामने आए। उन्होंने खुलकर इस फैसले का विरोध किया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। इससे उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने बालेन आरएसपी ने बालेंद्र शाह की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। हाल के चुनावों में पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली और लंबे समय बाद नेपाल की राजनीति में किसी नई पार्टी ने इतना मजबूत प्रदर्शन किया। यह नतीजा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नेपाल की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व से हटकर नई पीढ़ी के नेताओं को मौका देना चाहती है। इंजीनियर से रैपर और फिर राजनेता बालेंद्र शाह का जीवन सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वह मूल रूप से सिविल इंजीनियर हैं, लेकिन युवावस्था में उन्होंने रैप संगीत के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। उनके रैप गीतों में अक्सर सामाजिक समस्याओं, भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था की खामियों पर तीखा व्यंग्य देखने को मिलता था। यही कारण था कि नेपाल के युवाओं ने उनके संगीत में अपनी आवाज महसूस की। धीरे-धीरे उनका यह अंदाज उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाता गया और बाद में वही लोकप्रियता उनकी राजनीतिक ताकत बन गई। दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ा नेपाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय नेता जैसे केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और कमल थापा जैसे दिग्गजों के मुकाबले बालेंद्र शाह एक नए चेहरे के रूप में सामने आए। चुनाव में उन्होंने खुद चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके ही क्षेत्र में लगभग 50 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ी घटना मानी जा रही है। निजी जीवन भी चर्चा में राजनीतिक जीवन के साथ-साथ बालेंद्र शाह का निजी जीवन भी चर्चा में रहता है। उन्होंने 2018 में सबीना से विवाह किया था और उनकी लगभग तीन साल की एक बेटी भी है। नेपाल के युवा उन्हें केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने जैसे साधारण पृष्ठभूमि से आए व्यक्ति के रूप में देखते हैं, जिसने मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बनाई है। नेपाल की राजनीति में बदलाव की उम्मीद विश्लेषकों का मानना है कि बालेंद्र शाह का उभार नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। युवाओं की बड़ी आबादी वाले इस देश में अब ऐसी राजनीति की मांग बढ़ रही है जो पारदर्शिता, विकास और नई सोच पर आधारित हो। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बालेंद्र शाह वास्तव में उन उम्मीदों को पूरा कर पाते हैं, जिनके कारण आज नेपाल की जनता उन्हें बदलाव का प्रतीक मान रही है।
VIDEO: बांग्लादेश के कोमिल्ला में मंदिर के पास सिलसिलेवार पेट्रोल बम धमाके, पुजारी समेत तीन घायल
घटना कलागाछितला मंदिर और उसके पास की सड़क के आसपास हुई, जहां हमलावरों ने एक के बाद एक कई विस्फोट किए। घायलों में मंदिर के पुजारी केशव चक्रवर्ती, स्थानीय निवासी अब्दुल बारेक और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
ईरान के ट्रांजिशन प्लान में भारत के साथ संबंधों और चाबहार पोर्ट के फिर से शुरू होने पर जोर
ईरान के विपक्षी नेताओं ने एक ब्लू प्रिंट तैयार किया है, जिसमें भारत के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है
ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म, 70 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर तबाह : ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि एक हफ्ते से जारी सैन्य संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य ताकत लगभग पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है
ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद ईरान ने इजरायली रिफाइनरी पर किया हमला
ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद ईरान ने इजरायली रिफाइनरी पर हमला किया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने जानकारी दी
मैं योगिता श्री। एक ऐसी मां हूं, जो ईश्वर से अपने से पहले बेटे की मौत मांगती हूं। कोई भी मां ऐसी दुआ कभी नहीं कर सकती, लेकिन बेटे की पीड़ा देखकर यही कहती हूं- हे भगवान, हमसे पहले मेरे बेटे को उठा लेना। नहीं तो, हमारे बाद इसका क्या होगा? कौन इसकी देखभाल करेगा? यह सब सोचकर आंख भर आती है, लेकिन बेटे के सामने कभी नहीं रोती। अगर रोऊंगी, तो उसे लगेगा कि वह हमारे लिए बोझ है। अब तो उसकी तकलीफ दिन-पर-दिन बढ़ती ही जा रही है। हम गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले हैं। 5 साल पहले मेरा बेटा हितांशु दोनों हाथों और पैर के सहारे चलता था। फिर उसकी कमर और हाथ-पैर दोनों ने काम करना बंद कर दिया। अब तो हाल यह है कि वह खुद से खिसक भी नहीं सकता। अपने सिर के बाल तक नहीं खुजला सकता। शरीर पर बैठा मच्छर तक नहीं भगा पाता। हमें पता है कि आने वाले दिनों में हमारे बेटे का क्या हाल होगा। अभी तो उसके हाथ-पैरों ने काम करना बंद किया है। कुछ साल बाद वह ‘जिंदा लाश’ बन जाएगा, बिस्तर पर पड़ा रहेगा। सिर्फ सांस चलेगी। ऐसी जिंदगी किस काम की…। एक मां होकर मैं ये सारी बातें नहीं बोल सकती, लेकिन ये सच है कि ऐसी औलाद भगवान किसी को न दे। लेकिन फिर भी कभी-कभी खुद को समझाती हूं- मेरे पास एक औलाद तो है! ऊपर वाले ने मुझे मां बनने का सुख तो दिया है न! गोद तो सूनी नहीं रखी! बहुत परिवार तो औलाद के लिए भी तरस जाते हैं। न जाने किन-किन देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। इस समय मेरा बेटा हितांशु 18 साल का है, लेकिन इसकी देखभाल 6 महीने के बच्चे से भी ज्यादा करनी पड़ती है। 6 महीने या सालभर का कोई बच्चा बिस्तर पर पेशाब-पॉटी करता है, तो मां-बाप को उसे साफ करना बुरा नहीं लगता, लेकिन 18 साल का बच्चा जब ऐसा करे… तो दिल अंदर तक टूट जाता है। हितांशु का वजन इतना है कि हम उसे अकेले नहीं उठा सकते। मेरे पति अविनाश और मैं, मिलकर उसे पेशाब-पॉटी कराते हैं। उस वक्त तीन-चार तकियों के सहारे उसे बैठाना पड़ता है। पेट, पीठ की तरफ निकलता जा रहा है। थोड़ी देर ही सो पाता है, उसके बाद शरीर में तेज दर्द कारण उठकर बैठ जाता है। हम पति-पत्नी उसे उठाकर वॉशरूम ले जाते हैं। भले ही वह शरीर से विक्लांग है, लेकिन उम्र की वजह से हमसे झेप जाता है, शर्माता है। कहने लगता है- ‘मैं तुम्हारे सामने पॉटी कैसे करूं?’ आप लोगों को परेशान कर रहा हूं? ये बातें सुनकर कलेजा बैठ जाता है। इसे समझाती हूं- हम तुम्हारे मां-बाप हैं, दोस्त की तरह हैं, लेकिन इसे अच्छा नहीं लगता। मन-ही-मन इसे लगता है कि हमारे लिए बोझ बन गया है। कुछ दिन पहले की बात है, इसने आवाज देकर मुझे उठाया था। मैं गहरी नींद में थी। झल्लाकर बोल पड़ी- थोड़ी सी नींद तो लेने दो। हर वक्त मम्मी-मम्मी करता रहता है। तुम्हें कभी पानी पीना है, कभी करवट बदलना है, कभी उठकर बैठना है, कभी वॉशरूम जाना है, कभी पॉटी करनी होती है। मैं भी तो इंसान ही हूं, मशीन तो नहीं। तुम्हारी वजह से हमें 24 घंटे जागते रहना पड़ता है। देख रहे हो न हमारी हालत…। सुनकर बोला था- मुझे पता है कि तुम लोग मेरी वजह से तंग आ चुके हो, लेकिन क्या करूं, जब तक भगवान मुझे उठा नहीं लेता, तुम लोगों को तकलीफ तो देता ही रहूंगा न! यह सुनते ही मैं और इसके पापा फफक-फफककर रोने लगे। इसके पापा सो रहे होते हैं, और यह अचानक बोल पड़ता है- ‘मुझे वॉशरूम जाना है’ या ‘हाथ पर कीड़ा बैठ गया है'। वह तुरंत नींद से उठ जाते हैं। अब तो इसके पापा का चेहरा ऐसे दिखता है, जैसे वह हर वक्त नींद में हों। वह दिन में कुछ ही घंटे सो पाते हैं। पूरी रात टैक्सी चलाते हैं। अब बेटे की इसमें क्या ही गलती है। भगवान ने इसे ऐसा ही शरीर दिया है। हम भी सोचते हैं कि भगवान ने कुछ सोचकर ही इसे हमारे घर भेजा है। जब तक हम लोगों से सेवा करवानी है, करवा लेगा, फिर भगवान के पास हमसे पहले चला जाए, यही हमारे लिए अच्छा होगा! यह मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में धीरे-धीरे शरीर के अंग काम करना बंद करने लगते हैं। 2007 की बात है। मेरी शादी उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले अविनाश सिंह से हुई थी। अविनाश 13 साल की उम्र में ही अपने पिता के साथ अहमदाबाद आकर रहने लगे थे। शादी के एक साल बाद बेटे हितांशु का जन्म हुआ। मेरे पति तीन भाइयों में से एक हैं। उनमें यह पहला बेटा था। हर कोई खुश था कि घर का पहला चिराग आ गया। दो साल का था, तब यह अक्सर चलते-चलते गिर जाता था। तब हमें लगता था कि बच्चा है, बच्चे ऐसे ही गिर जाते हैं। शायद पैर कमजोर होंगे, मालिश या दवा की जरूरत होगी। फिर हम डॉक्टर को दिखाकर विटामिन की दवाएं लेकर आते। इसकी नानी और दादी सुबह-शाम इसकी मालिश करती थीं। जब 4 साल का हुआ तो इसके पैर थोड़े टेढ़े होने लगे। ऐसा लग रहा था कि पैरों में जान ही नहीं है। सीढ़ियां चढ़ने में इसे तकलीफ होती थी। मेरा भाई डॉक्टर है। वह समझ गया कि इसे कोई गंभीर या अलग तरह की बीमारी है। उसने 2012 में करीब 12 हजार रुपए खर्च करके इसका ब्लड टेस्ट करवाया। दो हफ्ते बाद जब रिपोर्ट आई, तो वो दिन हमारे लिए काला दिन जैसा था। भाई ने बताया, आगे चलकर इसके शरीर के अंग काम करना बंद कर देंगे। इसे मांसपेशियों की बीमारी है। यह पूरी तरह बिस्तर पर पड़ जाएगा। सुनते ही कई दिनों तक तो हम सो नहीं पाए। लोग जिस भी डॉक्टर को दिखाने को कहते, वहां लेकर चले जाते। शुरुआत में एक-दो डॉक्टरों ने इलाज की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पोलियो फाउंडेशन में जब दिखाया तो उन्होंने साफ कहा- इसे घर ले जाओ। जब तक है, तब तक इसकी सेवा करो। अब इसका कुछ नहीं हो सकता। एक डॉक्टर ने तो फाइल तक नहीं देखी। सीधे बोले- रिपोर्ट सब बोलती है। यह जिंदगीभर ऐसे ही रहेगा। अब देश में ऐसी कोई दवा ही नहीं है, तो हम क्या कर सकते हैं। उस दिन तो हमारा दिल बैठ गया। उस वक्त मेरा बेटा स्कूल में पढ़ रहा था। 11 साल का था। स्कूल की दूसरी मंजिल पर इसका क्लासरूम था। तेज गर्मी में यह दोनों हाथ-पैर के सहारे रेंगकर सीढ़ियां चढ़ता था। सीढ़ी गर्म रहती थी, जिसके कराण इसके दोनों हाथ जल जाते थे। एक दिन स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा- हमारी नौकरी का सवाल है। इसे घर पर रखिए। यह पढ़-लिखकर क्या ही कर लेगा। स्कूल के बच्चे भी इसे लंगड़ा-लंगड़ा कहकर चिढ़ाते थे। उसके बाद हमें इसका नाम कटवाना पड़ा। तब से यह कभी स्कूल नहीं गया। जब स्कूल से इसका नाम कटवाया और घर पर रहने लगा, तो हर रोज कहता- मम्मी, मुझे स्कूल जाना अच्छा लगता था। अब क्या मैं कभी स्कूल नहीं जा पाऊंगा? जब बच्चों के स्कूल जाने का समय होता था तो यह खिड़की से सड़क की तरफ नजरें गड़ाए देखता रहता। अब जब घर के बरामदे में बैठती हूं और बाहर स्कूल जाते बच्चों को देखती हूं, तो अपने बेटे को निहारने लगती हूं। काश! यह भी अच्छा होता, तो स्कूल जा पाता। हमारे बुढ़ापे का सहारा बनता। लेकिन क्या करें, जो किस्मत में है, उसे भुगतना ही पड़ेगा! शायद पिछले जन्मों के हमारे बुरे कर्म होंगे, जो इस जन्म में भुगत रहे हैं। अब तो यह भी अपनी जिंदगी से थक चुका है, लेकिन फिर भी कहता है- मेरा एक ही सपना है, बड़ा होकर खूब पैसे कमाना। इसके दोनों हाथों में मोबाइल पकड़ा देती हूं, तो धीरे-धीरे मोबाइल चलाकर वीडियो देखकर पढ़ाई करता है। आजकल तीसरी क्लास का सिलेबस देख रहा है। शुरू में आस-पड़ोस के लोग आकर मेरे बेटे को बेचारा और लाचार कहते थे। कहते थे- हाय! भगवान ने तुम्हें कैसी किस्मत दे दी। इससे अच्छा तो बेऔलाद ही रहते। कुछ लोगों ने कहा- दूसरे बच्चे का प्लान कर लो। यह सब सुनकर बुरा लगता, लेकिन किस-किस का मुंह बंद कराती? दूसरा बच्चा न पैदा करने की भी वजह है। हम इसे एक डॉक्टर को दिखाने ले गए थे। उन्होंने कहा, इसे जेनेटिक बीमारी है। आगे आपने बच्चा पैदा किया तो ऐसे दो और बच्चे पैदा हो सकते हैं। सोचने लगी कि ऐसा एक बच्चा संभालना हमारे लिए पहाड़ जैसा है, दो और ऐसे बच्चे कैसे संभालूंगी? दरअसल, हमारे मामा के बेटे को यही बीमारी थी। उसे एक परिवार से मिली थी, जिसके दोनों बच्चों को यह बीमारी थी। इसलिए हमने दूसरे बच्चे का सपना ही छोड़ दिया। सोचिए जरा, जब हमारी शादी हुई, तभी से इसके पापा ने ठान रखा था- एक ही बच्चा करेंगे। चाहे बेटा पैदा हो या बेटी। जब यह पैदा हुआ, तो इसके पापा ने संतोष कर लिया। अब यह जैसा भी है, हम केवल इसी के लिए जी रहे हैं। यह व्हीलचेयर पर चले, इसके पापा को अच्छा नहीं लगता। वह कहते हैं- मेरे पास फोर व्हीलर गाड़ी है और यह व्हीलचेयर पर चले, अच्छा नहीं लगता। यह जो भी मांगता है, लाकर देते हैं। एक बार तो इसे मॉल लेकर गए। वहां इसने कह दिया- पापा, क्या आपको मुझे व्हीलचेयर में बिठाकर चलाने में शर्म आती है? लेकिन इसे क्या पता कि हकीकत क्या है? कई बार हम थक-हारकर चुप रह जाते हैं। यह ऐसी बातें हमसे कहता रहता है। हम हां, हां करते रहते हैं। क्या करें। 24 घंटे इसी में कैसे लगे रहें। इसे नहलाना, सुलाना, करवट बदलना, सारी चीजें करना…। बहुत मुश्किल जिंदगी हो चुकी है हमारी। अब यह बिस्तर पर लेटे-लेटे 24 घंटे में से लगभग 16 घंटे छत के पंखे को निहारता रहता है। इसकी आंख से टप-टप आंसू बहते रहते हैं। इसका दिल ही जानता होगा कि यह क्या महसूस कर रहा है। ज्यादा बोलने पर इसका ऑक्सीजन लेवल घटने लगता है। इसलिए हर दिन ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट चेक कराना पड़ता है और अलग से ऑक्सीजन देनी पड़ती है। हर दिन इसके हाथ-पैर की मालिश करनी पड़ती है। अब इसके दोनों पैर तिकोने आकार में मुड़ गए हैं। हाथ भी धीरे-धीरे टेढ़े हो रहे हैं। कमर पूरी तरह से मुड़ चुकी है। बैठाने पर सिर झूलने लगता है। यह सब देखकर मैं टूट जाती हूं। तब इसके पापा एक ही बात कहते हैं, भगवान ने कुछ सोचकर ही इसे हमारे घर भेजा होगा। जितना हो पाए, इसकी सेवा करते रहो। जब तक यह हमारे घर है, इसे किसी चीज की कमी या तकलीफ न होने पाए। बस, अब तो कलेजे पर पत्थर रखकर हर वक्त एक ही दुआ करती हूं- हे ईश्वर, हमसे पहले मेरे बेटे को उठा लेना…। (हितांशु की मां योगिता श्री ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर नीरज झा से साझा किए) ------------------------------------- 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
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