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सीमा पार आतंकवाद से निपटने को झारखंड पुलिस तैयार, 5000 जवानों को सीखे अनुसंधान के हाईटेक गुर

झारखंड पुलिस सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए अपने जवानों और अधिकारियों को तकनीकी अनुसंधान और कार्रवाई के गुर सिखा रही है।

जागरण 25 Aug 2026 3:08 pm

आतंकवाद प्रायोजक देशों में शाम‍िल नहीं सीर‍िया, अमेरिकी सूची से नाम हटाए जाने का क‍िया स्वागत

आतंकवाद प्रायोजक देशों में शामिल नहीं सीरिया, अमेरिकी सूची से नाम हटाए जाने का किया स्वागत

समाचार नामा 25 Aug 2026 9:45 am

Women Empowerment In Defense | देश में पहली बार... NSG में महिला कर्मियों के लिए ‘कमांडो कन्वर्जन कोर्स’ की शुरुआत

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने सोमवार को कहा कि उसने राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की महिला कर्मियों के लिए पहली बार ‘कमांडो कन्वर्जन कोर्स’ शुरू किया है। एनएसजी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बारह सप्ताह का यह गहन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम कठोर शारीरिक प्रशिक्षण, हथियारों के इस्तेमाल और निशानेबाजी, सामरिक हस्तक्षेप, बंधक बचाव और आतंकवाद-रोधी अभियानों के अन्य विशेष पहलुओं में प्रशिक्षण के जरिए शारीरिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से दक्ष और अभियान के लिए तैयार महिला कमांडो तैयार करने के लिए बनाया गया है।’’ पहला महिला ‘कमांडो कन्वर्जन कोर्स’ हरियाणा के मानेसर स्थित एनएसजी के प्रशिक्षण केंद्र में शुरू हुआ। यह प्रशिक्षण 14 नवंबर को पूरा होगा। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने Devendra Fadnavis को लिखा पत्र, आदिवासी छात्रों की मांग उठाई प्रशिक्षण के मुख्य पहलू इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य शारीरिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से दक्ष और हर प्रकार के ऑपरेशन्स के लिए तैयार महिला कमांडो तैयार करना है। प्रशिक्षण के दौरान इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा: कठोर शारीरिक प्रशिक्षण: सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक ट्रेनिंग। हथियारों का इस्तेमाल और निशानेबाजी: आधुनिक हथियारों को चलाने और एडवांस शूटिंग स्किल्स का अभ्यास। सामरिक हस्तक्षेप (Tactical Intervention): जटिल परिस्थितियों में रणनीतिक रूप से कार्रवाई करने की कला। बंधक बचाव (Hostage Rescue): आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान बंधकों को सुरक्षित निकालने की विशेष तकनीक। आतंकवाद-रोधी अभियान: हाई-रिस्क ऑपरेशन्स और काउंटर-टेररिज्म के विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण। NSG के इस कदम से न केवल सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई मिलेगी, बल्कि देश की आतंकवाद-रोधी क्षमताएं भी अधिक मजबूत होंगी। इसे भी पढ़ें: Jyotiraditya Scindia ने पेश किया Dak Seva App, घर बैठे मिलेंगी डाक विभाग की सुविधाएं कमांडो कोर्स क्या है? कमांडो कोर्स एक बेहद कठिन और विशिष्ट सैन्याभ्यास प्रशिक्षण है, जिसका मुख्य उद्देश्य सामान्य सैनिकों या पुलिसकर्मियों को अत्यधिक विषम परिस्थितियों और हाई-रिस्क ऑपरेशन्स के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से सक्षम योद्धा बनाना होता है। इस कोर्स के तहत जवानों को 20 से 30 किलोग्राम वजन के साथ दर्जनों किलोमीटर दौड़ने, बाधाओं (obstacles) को पार करने, और बिना हथियार के आमने-सामने की लड़ाई (unarmed combat) का कठोर अभ्यास कराया जाता है। इसके अलावा, प्रशिक्षणार्थियों को आधुनिक हथियारों से सटीक निशानेबाजी (marksmanship), आतंकवाद-रोधी अभियानों (counter-terrorism), बंधक बचाव तकनीक (hostage rescue), और सीमित संसाधनों में जंगल या दुर्गम इलाकों में जीवित रहने (survival skills) की विशेष कला सिखाई जाती है। भारत में NSG, घातक, मार्कोस (MARCOS) और कोबरा जैसी विशेष इकाइयों के लिए यह कोर्स 12 से 14 सप्ताह तक चलता है, जो जवानों में अदम्य साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और देश की सुरक्षा के लिए हर समय तत्पर रहने का जज्बा पैदा करता है।

प्रभासाक्षी 25 Aug 2026 8:22 am