अब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लाउड, सर्वर और लगातार इंटरनेट कनेक्शन के बिना नहीं चलता था। लेकिन यह ट्रेंड अब बदलने लगा है। गूगल ने AI Edge Gallery नाम का ऐसा एप पेश किया है, जो एआई को सीधे स्मार्टफोन के अंदर ले आता है। यानी यूजर अपने फोन पर ही गामा-4 जैसे मॉडल चला सकता है, वो भी बिना इंटरनेट के। यह बदलाव सिर्फ एक नया एप नहीं, बल्कि एआई के इस्तेमाल का तरीका बदलने वाला कदम है। अब तक जब भी यूजर कोई सवाल पूछता था, फोटो समझने को कहता था या ऑडियो ट्रांसक्राइब करता था, तो पूरा डेटा इंटरनेट के जरिए क्लाउड सर्वर तक जाता था। फिर रिजल्ट वापस फोन पर आता था। अब एआई का काम सीधे आपके फोन या डिवाइस पर ही होने लगा है। फोटो पहचानना, वॉइस समझना, टेक्स्ट प्रोसेस करना... सब कुछ लोकल डिवाइस परस्टोर होता है। आपके डेटा को सर्वर पर भेजने की जरूरत खत्म हो जाती है। इंटरनेट न होने पर भी इसके लगभग सभी फीचर्स काम करेंगे। इस तरह से एक्टिवेट करें - प्ले स्टोर या एप स्टोर से AI Edge Gallery डाउनलोड करें। - फोन की क्षमता के हिसाब से गामा मॉडल सिलेक्ट करें। यहां 2 से 4 जीबी का वर्जन डाउनलोड करना होगा, यानी फोन में इतनी स्टोरेज बची होनी चाहिए। - इसके बाद इसमें चार मोड्स हैं। टेक्स्ट से इमेज तक के लिए... उन्हें इस्तेमाल करें। प्राइवेसी से लेकर 4 मोड्स तक; यूजर्स को ये फायदे 1. फायदा - रिमोट एरिया में भी काम करेगा एआई सबसे बड़ा फायदा प्राइवेसी और एक्सेस का है। एआई इस्तेमाल करते समय आपका डेटा फोन से बाहर नहीं जाता है, इसलिए आपकी जानकारी सुरक्षित रहती है। साथ ही ऑफलाइन मोड में भी एआई काम करता है, जिससे बिना इंटरनेट वाले इलाकों में भी इसका इस्तेमाल संभव है। 2. तकनीक - नए प्रोसेसर पर बेहतर काम करेगी एप यह एप और इसके मॉडल फोन के एनपीयू (न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट) का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सभी फोन पर चल सकता है, लेकिन फ्लैगशिप और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स पर बेहतर काम करता है, जिनमें एआई-सक्षम चिपसेट (जैसे गूगल टेंसर या लेटेस्ट स्नैपड्रैगन) मौजूद हों। 3. प्राइवेसी - आपकी निजी फाइलें इंटरनेट पर शेयर नहीं होंगी इसके एजेंट स्किल्स और थिंकिंग मोड का इस्तेमाल करके आप फोन में सेव फाइलों को एनालाइज कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आपकी कॉन्फिडेंशियल फाइलें इंटरनेट पर अपलोड नहीं होतीं। 4. मोड्स - इमेज भी बना सकेंगे, ऑडियो जनरेट होगी इसमें एआई चैट के साथ थिंकिंग मोड मिलता है, जिससे यह समझा जा सकता है कि एआई जवाब कैसे बना रहा है। आस्क इमेज में फोटो अपलोड कर उससे जुड़ी जानकारी ली जा सकती है। किस भी ऑडियो को टेक्स्ट में बदलने और ट्रांसलेशन करने में मदद करता है। 5. सीमाएं - रियल टाइम सर्च जैसे फीचर्स नहीं हैं यह एआई पूरी तरह फोन पर चलता है और इंटरनेट से जुड़ा नहीं होता, इसलिए इसमें रियल-टाइम सर्च की सुविधा नहीं है। यह उन डेटा और नॉलेज पर आधारित होता है जो पहले से मॉडल में मौजूद होता है। कुछ मॉडल्स की जानकारी जून 2024 तक के डेटा पर आधारित है।
नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की दहलीज को छूकर धरती पर वापस लौट रहे हैैं। आज 11 अप्रैल को सुबह 5:37 बजे (IST) उनका ओरियन कैप्सूल सैन डिएगो के तट के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा। ये मिशन 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था। 1972 के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तक यात्रा करके किसी भी इंसानी अंतरिक्ष मिशन का रिकॉर्ड 6 अप्रैल को तोड़ा था। उन्होंने चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी भी की थी। 3000 डिग्री तापमान और 6 मिनट का ब्लैकआउट पानी से निकलकर जहाज और फिर नासा सेंटर चारो अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी पर लौटने के बाद नासा और अमेरिकी सेना की टीमें उन्हें ओरियन से बाहर निकालेंगी। हेलिकॉप्टर के जरिए उन्हें 'यूएसएस जॉन पी. मुर्था' जहाज पर ले जाएंगी। जहाज पर पहुंचने के बाद, अंतरिक्ष यात्रियों की मेडिकल जांच होगी। इसके बाद उन्हें किनारे पर लाया जाएगा, जहां से विमान उन्हें ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर ले जाएंगे। मकसद: 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच चाहता था नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच करना था। नासा देखना चाहता था कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही 'स्पेस रेस' में खुद को बेहतर साबित करना था। आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। नॉलेज पार्ट: इस मिशन से पहले केवल 24 लोग ही चांद के पास या उसकी सतह तक पहुंच पाए हैं। वे सभी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स थे। सभी 1968 से 1972 के बीच चले अपोलो मिशन का हिस्सा थे। नासा के 'अपोलो प्रोग्राम' में क्रू और बिना क्रू वाले मिलाकर कुल 17 मिशन हुए। अगर सिर्फ उन मुख्य मिशनों की बात करें जिनमें अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, तो ये 11 थे।
पोको C85X रिव्यू:₹11,000 में 6300mAh बैटरी और 2 दिन का बैकअप, 32MP कैमरा और 200% वॉल्यूम बूस्ट फीचर
अगर आप 10 से 15 हजार रुपए के बजट में नया 5G फोन ढूंढ रहे हैं, तो यह वीडियो आपके लिए काम का साबित हो सकता है। आज हम बात करेंगे पोको C85X 5G की, जिसे आप ₹11,000 में खरीद सकते हैं। फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी बड़ी बैटरी, HD+ डिस्प्ले और पावरफुल प्रोसेसर है। साथ ही, इसमें लेटेस्ट सॉफ्टवेयर भी है। पिछले 1 महीने से हम इसे इस्तेमाल कर रहे हैं। तो चलिए डिटेल में जानते हैं इसमें क्या खास है... डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: IP57 रेटिंग के साथ मस्कुलर लुक पोको C85x: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.9 इंच का HD+ एडॉप्टिव सिंक डिस्प्ले है। इसका रिजॉल्यूशन 7201600 पिक्सल है। स्मूद स्क्रॉलिंग के लिए इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 240Hz टच सैंपलिंग रेट दिया गया है, जो बहुत स्मूथ चलता है। 800 निट्स की पीक ब्राइटनेस से तेज धूप में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। फोन में यू-ट्यूब पर 4K HDR का सपोर्ट मिलता है। कलर्स और डिटेल्स काफी क्रिस्प हैं। बस 'वॉटरड्रॉप नॉच' की जगह पंच-होल दिया जा सकता था। परफॉरमेंस: इसमें ऑक्टा-कोर यूनिसोक T8300 प्रोसेसर दिया गया है, जिसकी क्लॉक स्पीड 2.2GHz है। ग्राफिक्स के लिए माली-G57 जीपीयू मिलता है। रोजमर्रा के काम जैसे इंस्टाग्राम, वॉट्सएप और मल्टीटास्किंग में कोई लैग नहीं मिलता। इसमें नोर्मल गेम खेल सकते हैं, लेकिन हैवी गेमिंग के लिए यह नहीं है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह फोन एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड कंपनी के लेटेस्ट हाइपर OS 3 पर रन करता है। कंपनी ने 4 साल के OS अपडेट का वादा किया है, जो इस बजट में नामुमकिन जैसा है। साउंड की बात करें तो सिंगल स्पीकर है, लेकिन इसमें '200% वॉल्यूम बूस्ट' का फीचर है, तो आवाज की कमी नहीं खलेगी। हां, थोड़े फालतू एप्स मिलेंगे, जिन्हें आप डिलीट कर सकते हैं। इसमें 4GB LPDDR4x रैम है। स्टोरेज को माइक्रो SD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए रियर में डुअल कैमरा सेटअप है, जिसमें 32 मेगापिक्सल का मेन सेंसर और एक सेकेंडरी लेंस है। रियर कैमरा 10x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। सेल्फी के लिए फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। डे-लाइट में फोटोज नेचुरल और अच्छी डिटेल्स के साथ आते हैं। पोर्ट्रेट मोड में एज-डिटेक्शन भी सही काम करता है। वीडियो आप फ्रंट और बैक दोनों से 1080p 30fps पर रिकॉर्ड कर सकते हैं। यह सोशल मीडिया के लिए डिसेंट है। बैटरी और चार्जिंग: पावर बैकअप के लिए इसमें 6300mAh की बैटरी है, जो आराम से दो दिन चलती है। यह 15W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसमें 7.5W रिवर्स चार्जिंग का फीचर भी है, जिससे आप दूसरे फोन या अन्य डिवाइस चार्ज कर सकते हैं। फाइनल वर्डिक्ट अगर आप ऑफर में इसे ₹10,000 के आसपास खरीदते हैं, तो यह बेस्ट 5G डील है। लंबी बैटरी, HD+ डिस्प्ले और लंबे सॉफ्टवेयर अपडेट्स इसे विनर बनाते हैं। आप इसे जरूर चेक कर सकते हैं।
हुंडई ने भारत में क्रेटा का नया समर एडिशन लॉन्च कर दिया है। इसके टोटल 16 वैरिएंट्स हैं। जिनकी कीमत 12.06 लाख रुपए से शुरू होकर 17.89 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) तक जाती है। कंपनी ने इस एडिशन में अलग-अलग वैरिएंट्स में कई नए फीचर्स जोड़े हैं। यह समर एडिशन EX से लेकर SX प्रीमियम वैरिएंट तक अवेलेबल है। सभी वैरिएंट्स में अलग-अलग अपग्रेड दिए गए हैं। जिनमें स्मार्ट की, डिजिटल क्लस्टर और सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं। इंजन ऑप्शन पहले जैसे ही रखे गए हैं। बेस वैरिएंट में स्मार्ट की और पुश-बटन स्टार्ट फीचर मिलेगा सबसे बेस EX समर एडिशन में अब स्मार्ट की और पुश-बटन स्टार्ट फीचर दिया गया है। इसकी कीमत पेट्रोल मैनुअल के लिए 12.05 लाख रुपए और डीजल मैनुअल के लिए 13.61 लाख रुपए रखी गई है। इसके ऊपर EX(O) समर एडिशन आता है, जिसमें क्वाड-बीम LED हेडलैम्प, LED टेल लैम्प, DRLs, रियर कैमरा और रियर सनशेड जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं। इस वैरिएंट की कीमत 13.13 लाख से 16.04 लाख रुपए के बीच है, जो इंजन और ट्रांसमिशन पर निर्भर करती है। S(O) और S(O) नाइट समर एडिशन में डैश कैमरा जोड़ा गया वहीं S(O) और S(O) नाइट समर एडिशन में डैश कैमरा जोड़ा गया है। S(O) वैरिएंट की कीमत 14.19 लाख से 17.25 लाख रुपए तक है। वहीं नाइट एडिशन की कीमत पेट्रोल मैनुअल के लिए 14.38 लाख और डीजल मैनुअल के लिए 15.99 लाख रुपए रखी गई है। SX एडिशन में डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और डैशकैम मिलेगा इसके बाद SX समर एडिशन आता है, जिसमें 10.25 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और डैशकैम दिया गया है। इसकी कीमत पेट्रोल मैनुअल के लिए 15.03 लाख रुपए है। टॉप वैरिएंट SX प्रीमियम में फ्रंट पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स टॉप वैरिएंट SX प्रीमियम समर एडिशन में 10.25 इंच डिजिटल क्लस्टर, सराउंड व्यू मॉनिटर, ब्लाइंड-स्पॉट व्यू मॉनिटर और फ्रंट पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसकी कीमत 16.33 लाख से 17.89 लाख रुपए के बीच है। समर एडिशन के सभी वैरिएंट्स में 1.5 लीटर पेट्रोल और डीजल इंजन ऑप्शन दिए गए हैं। इनमें मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों गियरबॉक्स का ऑप्शन मिलता है। ये खबर भी पढ़ें… रॉयल एनफील्ड की पहली इलेक्ट्रिक बाइक 'फ्लाइंग फ्ली C6' लॉन्च: ₹2.79 लाख कीमत, BaaS मॉडल में ₹1.99 लाख में मिलेगी; आज से बेंगलुरु में टेस्ट राइड शुरू रॉयल एनफील्ड ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक बाइक 'फ्लाइंग फ्ली C6' लॉन्च कर दी है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹2.79 लाख है। हालांकि, कंपनी ने 'बैटरी एज अ सर्विस' का विकल्प भी दिया है। इस मॉडल के तहत बाइक की कीमत घटकर ₹1.99 लाख रह जाएगी। इस इलेक्ट्रिक बाइक की बुकिंग और टेस्ट राइड आज 10 अप्रैल से सबसे पहले बेंगलुरु में शुरू हो गई है। पूरी खबर पढ़ें…
रॉयल एनफील्ड ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक बाइक 'फ्लाइंग फ्ली C6' लॉन्च कर दी है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹2.79 लाख है। हालांकि, कंपनी ने 'बैटरी एज अ सर्विस' का विकल्प भी दिया है। इस मॉडल के तहत बाइक की कीमत घटकर ₹1.99 लाख रह जाएगी। इस इलेक्ट्रिक बाइक की बुकिंग और टेस्ट राइड आज 10 अप्रैल से सबसे पहले बेंगलुरु में शुरू हो गई है। डिजाइन और वजन: केवल 124 किलो की बाइक, 19-इंच के बड़े व्हील्स फ्लाइंग फ्ली C6 को कंपनी ने यूनिक और रेट्रो-फ्यूचरिस्टिक लुक दिया है। इसमें गर्डर फोर्क सस्पेंशन का इस्तेमाल किया गया है, जो आजकल की बाइक्स में बहुत कम देखने को मिलता है। कंपनी ने इस बाइक को केवल 124 किलो का रखा है ताकि रेंज बेहतर मिल सके। इसमें 19-इंच के बड़े पहिए और पतले टायर हैं। इससे रोलिंग रेजिस्टेंस कम होता है और बैटरी कम खर्च होती है। परफॉर्मेंस: टॉप स्पीड 115 किमी/घंटा, फुल चार्ज पर 154 किमी की रेंज इसमें 3.91kWh का बैटरी पैक दिया गया है। कंपनी का दावा है कि एक बार फुल चार्ज होने पर यह 154 किमी तक चलेगी। इसमें लगी मोटर 60Nm का टॉर्क जनरेट करती है। रफ्तार के मामले में भी यह पीछे नहीं है; यह बाइक महज 3.7 सेकंड में 0 से 60 किमी/घंटा की स्पीड पकड़ लेती है। इसकी टॉप स्पीड 115 किमी/घंटा बताई गई है। चार्जिंग टेक्नोलॉजी: 2 घंटे में फुल चार्ज, मोबाइल एप से कंट्रोल होगी स्पीड इस इलेक्ट्रिक बाइक को 0 से 100% तक चार्ज होने में 2 घंटे 16 मिनट का समय लगता है, जबकि 20 से 80% तक यह मात्र 1 घंटा 5 मिनट में चार्ज हो जाती है। खास बात यह है कि राइडर मोबाइल एप के जरिए अपनी सुविधा के अनुसार चार्जिंग की स्पीड भी तय कर सकता है। सेफ्टी और फीचर्स: 5 राइडिंग मोड्स और कॉर्नरिंग ट्रैक्शन कंट्रोल राइड को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए इसमें 3.5-इंच का कलर TFT डिस्प्ले दिया गया है। बाइक में 5 राइडिंग मोड्स- सिटी, रेन, हाईवे, स्पोर्ट और कस्टम मिलते हैं। इसके अलावा इसमें एडजस्टेबल रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, लीन-सेंसिटिव ट्रैक्शन कंट्रोल और डुअल-चैनल ABS जैसे मॉडर्न फीचर्स दिए गए हैं। इसके रियर ABS को बंद भी किया जा सकता है, जो ऑफ-रोडिंग में काम आएगा। ग्राउंड क्लीयरेंस और सीट हाइट: एडवेंचर बाइक जैसा अहसास बाइक की सीट हाइट 823mm है। इसमें 207mm का ग्राउंड क्लीयरेंस दिया गया है, जो आमतौर पर एडवेंचर बाइक्स में मिलता है। मोटर और बैटरी को एक ही मैग्नीशियम केसिंग में रखा गया है। मार्केट कॉम्पिटिशन: रॉयल एनफील्ड की 350cc बाइक्स से भी महंगी ₹2.79 लाख की कीमत के साथ यह बाइक रॉयल एनफील्ड की सभी 350cc बाइक्स जैसे क्लासिक, बुलेट, हंटर और नई गुरिल्ला 450 से महंगी है। इलेक्ट्रिक सेगमेंट में इसका मुकाबला अल्ट्रावॉयलेट F77 से हो सकता है, लेकिन अपने खास डिजाइन और ब्रांड वैल्यू के कारण यह एक अलग ही क्लास की बाइक मानी जा रही है। रॉयल एनफील्ड इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य शहरों में लॉन्च करेगी। नॉलेज बॉक्स: सेकेंड वर्ल्ड वॉर से लिया बाइक का नाम: 'फ्लाइंग फ्ली' नाम रॉयल एनफील्ड की उस मशहूर बाइक से लिया गया है जिसे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पैराशूट के जरिए विमानों से नीचे गिराया जाता था। वह बहुत हल्की थी, ताकि सैनिक उसे कहीं भी ले जा सकें। क्या होता है BaaS (बैटरी एज़ अ सर्विस): यह एक ऐसा सब्सक्रिप्शन मॉडल है जिसमें ग्राहक को पूरी बाइक की कीमत नहीं देनी पड़ती। वह केवल बाइक का ढांचा खरीदता है और बैटरी का इस्तेमाल किराए या सब्सक्रिप्शन के तौर पर करता है। इससे बाइक की शुरुआती कीमत कम हो जाती है।
ओपनएआई की शुरुआत ‘गैर लाभकारी’ संस्था के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य सुरक्षित एआई बनाना था, यह मिशन खत्म हो चुका है। यह खुलासा प्रतिष्ठित अमेरिकी मैगजीन ‘द न्यूयॉर्कर’ की रिपोर्ट में किया गया है। रॉनन फैरो व एंड्रयू मारंत्ज की यह इन्वेस्टिगेशन सालभर चली। ये गहन पड़ताल, 100 से ज्यादा इंटरव्यू और सैकड़ों आंतरिक दस्तावेजों पर आधारित है। इस रिपोर्ट ने सवाल खड़ा किया है कि क्या दुनिया की सबसे शक्तिशाली तकनीक एजीआई (आर्टिफिशियल जनरल इंटेलीजेंस) ऐसे व्यक्ति (सैम ऑल्टमैन) के हाथ में है, जिसकी नींव ही ‘अविश्वास’ व ‘हेरफेर’ पर टिकी है? पढ़िए रिपोर्ट के खास अंश… रिपोर्ट में ऑल्टमैन के व्यक्तित्व को लेकर सबसे चौंकाने वाला दावा उनके सहयोगियों और बोर्ड सदस्यों द्वारा किया गया है, बोर्ड सदस्यों (जिनमें मुख्य वैज्ञानिक इल्या सुतस्केवर भी शामिल थे) ने 70 पन्नों का डोजियर तैयार किया था। इसमें आरोप लगाया गया कि ऑल्टमैन सुरक्षा प्रोटोकॉल और अहम तथ्यों को लेकर बोर्ड व मैनेजमेंट से लगातार झूठ बोलते रहे हैं। सबसे बड़ा जोखिम यहीं से शुरू होता है...अगर नेतृत्व पारदर्शी नहीं है, तो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे होगा? रिपोर्ट में भविष्य को लेकर कुछ ऐसी चिंताएं जताई गई हैं जो आम लोगों के जीवन पर असर डाल सकती हैं। एलाइनमेंट प्रॉब्लम रिपोर्ट उस तकनीकी खतरे की बात करती है जहां एआई इतना बुद्धिमान हो जाएगा कि वह इंसानों को यह विश्वास दिला देगा कि वह आदेश मान रहा है, जबकि असल में वह खुद को गुप्त सर्वर्स पर रेप्लिकेट (कॉपी) कर रहा होगा ताकि उसे कभी ‘ऑफ’ न किया जा सके। नियंत्रण खोना: अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए एआई अनजाने में मानवता को खत्म कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि उसे ‘जलवायु संकट’ हल करने को कहा जाए, तो वह सबसे छोटा रास्ता ‘इंसानों को हटाना’ चुन सकता है। गोपनीयता पर खतरा कंपनी सरकारों व कॉरपोरेट्स के साथ अनुबंध कर रही हैं, जिनमें निगरानी और इमिग्रेशन कंट्रोल जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। इसका मतलब है कि आम यूजर्स का डेटा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो सकता है।आर्थिक चिंता: ऑल्टमैन खुद मानते हैं कि एआई इंडस्ट्री बबल में है। अगर यह फूटता है, तो आम निवेशकों व कर्मचारियों को नुकसान हो सकता है। व्यवहार प्रभावित होना ऑल्टमैन अपने प्रभाव से कर्मचारियों व निवेशकों को नियंत्रित करते हैं। इसी तरह, एआई प्लेटफॉर्म भी इंसानी व्यवहार को चालाकी से प्रभावित कर सकते हैं। यह तकनीक हमें खास दिशा में सोचने, खरीदारी या फैसले लेने के लिए चुपचाप प्रेरित करने की क्षमता रखती है। शक्ति का केंद्रीकरण एआई जैसी टेक्नोलॉजी पर चंद लोगों का कब्जा रहा, तो यह ‘तानाशाही’ जैसा होगा। शक्ति का यह केंद्रीकरण समाज के लिए खतरनाक है, क्योंकि बिना जवाबदेही के आम लोगों के भविष्य के बड़े फैसले जनता के बजाय कुछ चुनिंदा शक्तिशाली लोग लेने लगेंगे। चेतावनी यूजर्स व सरकारें एआई को महज सॉफ्टवेयर या चैटबॉट समझने की गलती कर रही हैं। असल में यह परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। यह समझने में और देरी हुई, तो बचाव का वक्त निकल जाएगा।
बजाज ऑटो ने पल्सर 180 नए अपडेट्स के साथ लॉन्च कर दी है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1.22 लाख रुपए है। बजाज ने साल 2022 में पल्सर 180 का प्रोडक्शन बंद कर दिया था। इसके बाद कंपनी के पोर्टफोलियो में पल्सर 150 और पल्सर 220F के बीच काफी बड़ा अंतर आ गया था। अब ये बाइक ग्राहकों को 150cc और 220cc के बीच का ऑप्शन भी देगी। पावरफुल इंजन: पल्सर 150 से 3hp ज्यादा पावर नई पल्सर 180 में 178.6cc का सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड इंजन दिया गया है। यह 17hp की पावर और 15Nm का टॉर्क जनरेट करता है। पुरानी 180 के मुकाबले इसका टॉर्क 0.8Nm बढ़ गया है। यह पल्सर 150 के मुकाबले 3hp ज्यादा पावर और 1.75Nm ज्यादा टॉर्क देती है। डिजाइन और फीचर्स: क्लासिक लुक में मॉडर्न टच नई पल्सर 180 में वे सभी बदलाव किए गए हैं जो हाल ही में पल्सर 150 में देखे गए थे। सस्पेंशन और ब्रेकिंग सिस्टम बाइक के फ्रंट में 280mm डिस्क और रियर में 230mm डिस्क ब्रेक के साथ ABS दिया है। कंफर्ट के लिए फ्रंट में टेलिस्कोपिक फोर्क और पीछे ट्विन-शॉक एब्जॉर्बर मिलते हैं। इसका कुल वजन 156 kG है। इसमें 15 लीटर का बड़ा फ्यूल टैंक दिया गया है, जो लंबी दूरी के लिए काफी है। कीमत और मुकाबला: अपाचे से 4 हजार रुपए सस्ती नई पल्सर 180 अपनी छोटी बहन पल्सर 150 से करीब 12,000 रुपए महंगी है। लेकिन अगर इसकी तुलना इसके सबसे बड़े कॉम्पिटिटर टीवीएस अपाचे RTR 180 से करें, तो बजाज की यह बाइक करीब 4,000 रुपए सस्ती है। यह कीमत पल्सर लवर्स को अपनी ओर खींच सकती है। एक्सपर्ट कमेंट: पल्सर 180 हमेशा से उन युवाओं की पसंद रही है जिन्हें 'रॉ पावर' और मस्कुलर डिजाइन पसंद है। नए फीचर्स के साथ इसकी वापसी बजाज की मार्केट शेयर बढ़ाने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। नॉलेज पार्ट: क्या होता है ABS और नेगेटिव LCD?
अमेरिका ने पिछले हफ्ते ईरान में फंसे अपने पायलट को सुरक्षित निकालकर दुनिया को चौंकाया था। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे भूसे के ढेर में सुई ढूंढ़ने जैसा बताया था। अब खुलासा हुआ है कि सीआईए ने पहाड़ियों में छिपे पायलट को उसके दिल की धड़कन से खोजा था। इसके लिए पहली बार ‘घोस्ट मर्मर’ नाम का गोपनीय उपकरण इस्तेमाल हुआ। अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ ने सूत्रों के हवाले से ये दावा किया है। ये तकनीक क्वांटम मैग्नेटोमेट्री पर आधारित है। इसमें धड़कन के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फिंगरप्रिंट खोजे जाते हैं। एआई सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड का शोर हटाता है। कार्यक्रम से जुड़े सूत्र ने कहा, अगर आपका दिल धड़क रहा है तो हम आपको ढूंढ़ लेंगे। सूत्र के अनुसार, लापता पायलट ने लोकेटर बीकन चालू किया था। पर सटीक लोकेशन स्पष्ट नहीं थी। निर्णायक क्षण तब आया, जब घोस्ट मर्मर ने उसे ढूंढ़ा। दोनों तकनीकें उपयोगी थीं। बीकन सिग्नल भेजने के लिए वह बाहर आया। यहां सिग्नल से ज्यादा अहमियत बाहर निकलने की थी। सूत्र ने कहा कि घोस्ट मर्मर की गोपनीयता के चलते सब लोग अब तक हैरान हैं कि पायलट वास्तव में कैसे मिला। लोग ये भी नहीं जानते कि इतनी दूरी से ये तकनीक संभव है। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है ‘घोस्ट मर्मर’ की टेक्नोलॉजी क्या है? क्वांटम मैग्नेटोमेट्री। इंसान का दिल धड़कते वक्त बहुत हल्का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल पैदा करता है। खास क्वांटम सेंसर (जैसे डायमंड एनवी सेंटर) इन्हें पकड़ते हैं। मेडिकल में दिल की धड़कन के लिए ‘मर्मर’ शब्द इस्तेमाल होता है। ये संकेत कोई भी माप सकता है क्या? संकेत बेहद हल्के होते हैं। सामान्यत: छाती से सटे सेंसर ही पकड़ पाते हैं। हालांकि, क्वांटम मैग्नेटोमेट्री के क्षेत्र में प्रगति, खासकर कृत्रिम हीरों में सूक्ष्म दोषों पर आधारित सेंसर्स ने शारीरिक तौर पर छुए बिना ये संकेत पहचानना संभव बना दिया है। कोई रिसर्च है या सीआईए ने ही किया है? अमेरिका में एमआईटी, जापान में टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जर्मनी में मैक्स प्लांक जैसे कई बड़े संस्थान रिसर्च कर रहे हैं। हार्वर्ड के प्रो. रोनाल्ड वाल्सवर्थ ने 2024 में चूहे को छुए बिना धड़कन पहचानने में सफलता पाई। जनवरी, 2026 में 3 यूरोपीय रिसर्च ग्रुप्स ने एनवी डायमंड मैग्नेटोमीटर से इंसानी दिल की धड़कन पकड़ी। इन प्रयोगों में दूरी नैनोमीटर से मिलीमीटर ही थी। लंबी दूरी की ट्रैकिंग विकसित होने का उल्लेख कहीं नहीं है। सीआईए की तकनीक किसने बनाई है? द पोस्ट के अनुसार, ‘घोस्ट मर्मर’ को लॉकहीड मार्टिन की गुप्त इकाई ‘स्कंक वर्क्स’ ने बनाया है। ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर परीक्षण सफल रहा। एफ-35 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल संभव है। ईरान में इसका प्रयोग कैसे हुआ? पायलट वीराने में था। घोस्ट मर्मर के लिए ये आदर्श था। साफ माहौल। कम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हस्तक्षेप। मानव संकेत भी बहुत ज्यादा नहीं। रात में शरीर व रेगिस्तानी जमीन के तापमान के अंतर ने और मजबूत पुष्टि की। ट्रम्प ने कहा था कि पायलट को 40 मील दूर से देखा। ये स्पष्ट नहीं है कि ये दूरी घोस्ट मर्मर की रेंज है या किसी और उपकरण की। ये तकनीक कहीं भी प्रयोग हो सकती है? नहीं, शांत, दूरदराज और कम भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह तकनीक सबसे बेहतर काम करती है। इसकी प्रोसेसिंग में भी काफी समय लगता है। क्या इससे प्राइवेसी का खतरा भी है? ये तकनीक पूरी तरह विकसित होती है तो बिना किसी डिवाइस के भी व्यक्ति की मौजूदगी का पता लगा सकती है। इससे निजता (प्राइवेसी) को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
बिटकॉइन को किसने बनाया, यह राज 15 साल बाद भी बरकरार है। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट ने दावा किया कि ब्रिटिश क्रिप्टोग्राफर एडम बैक ही 'सतोशी नाकामोतो' हैं। हालांकि, एडम बैक ने इन दावों को खारिज कर दिया है। AI ने पकड़ी लिखने की स्टाइल NYT के पत्रकार जॉन कैरीरू ने सतोशी की खोज के लिए AI का सहारा लिया। उन्होंने 1992 से 2008 के बीच क्रिप्टोग्राफी ग्रुप्स में भेजे गए हजारों ईमेल को AI टूल में डाला। AI ने पाया कि सतोशी के लिखने का अंदाज, शब्दों का चयन और व्याकरण की गलतियां एडम बैक से काफी मिलती-जुलती हैं। उदाहरण के लिए, सतोशी अक्सर कंपाउंड वर्ड्स के बीच हाइफ़न (-) नहीं लगाते थे और कई बार its और it's के इस्तेमाल में गलती करते थे। एडम बैक की लिखावट से ये चीजें मेल खाती हैं। एडम बैक के सतोशी होने की 3 वजहें… हैशकैश: एडम ने 'हैशकैश' बनाया था, जिसका इस्तेमाल सतोशी ने बिटकॉइन की माइनिंग में किया। हैशकैश एक 'प्रूफ-ऑफ-वर्क' सिस्टम है, जिसे ईमेल स्पैम रोकने के लिए बनाया गया था। बाद में इस तकनीक का इस्तेमाल क्रिप्टोकरेंसी में हुआ। ब्लॉकस्ट्रीम: एडम ब्लॉकस्ट्रीम के CEO हैं, जो ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करती है। ब्लॉकचेन ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसमें दर्ज जानकारी कोई अकेला व्यक्ति बदल या मिटा नहीं सकता। यह एक सर्वर के बजाय नेटवर्क के सभी कंप्यूटर्स पर रहती है। एडम भी मानते हैं कि वह शक के दायरे में सबसे ऊपर हैं। उन्होंने अमेरिकी पत्रकार से बातचीत में कहा कि सतोशी भी उनकी तरह 50 साल के आसपास का ब्रिटिश 'साइफरपंक' हो सकता है। एडम बैक बोले- 'यह सिर्फ इत्तेफाक है' न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट सामने आने के बाद एडम बैक ने कहा कि AI ने जिन समानताओं को पकड़ा है, वे केवल एक इत्तेफाक हैं। उनके मुताबिक, एक ही फील्ड और रुचि के लोगों की भाषा और शब्द अक्सर एक जैसे हो सकते हैं। उन्होंने बिटकॉइन के निर्माता होने से इनकार किया। 34 हजार लोगों से शुरू हुई जांच, अंत में बचा सिर्फ एक नाम जॉन कैरीरू ने सतोशी के लिखने के तरीके का विश्लेषण करने के लिए AI टीम के पत्रकार डायलन फ्रीडमैन की मदद ली। कैरीरू का मानना था कि सतोशी उस क्रिप्टोग्राफी कम्युनिटी के सदस्य थे, जो 'साइफरपंक', 'क्रिप्टोग्राफी' और 'हैशकैश' की मेलिंग लिस्ट से जुड़ी थी। उन्होंने इन तीनों लिस्ट के आर्काइव जुटाने और उन्हें एक बड़े डेटाबेस में मिलाने का फैसला किया ताकि उनमें कुछ भी सर्च किया जा सके। 1992 से 30 अक्टूबर 2008 (सतोशी के सामने आने के एक दिन पहले) के बीच 34,000 से ज्यादा यूजर्स ने इन तीन लिस्ट पर पोस्ट किया था। स्पैमरर्स को हटाने पर संख्या घटकर 1,615 रह गई 34 हजार में कई स्पैमर्स थे या ऐसे लोग जिन्होंने सिर्फ कुछ ही बार पोस्ट किया था, इसलिए 10 से कम पोस्ट करने वालों को बाहर कर दिया। इससे संभावित नामों की संख्या घटकर 1,615 रह गई। डिजिटल मनी पर चर्चा नहीं करने वालों को हटाने से 620 लोग बचे उन लोगों को भी हटा दिया जिन्होंने कभी डिजिटल मनी पर चर्चा नहीं की थी। इसके बाद 620 उम्मीदवारों का एक छोटा ग्रुप बचा। इन 620 लोगों ने मिलकर कुल 134,308 पोस्ट लिखे थे। पर्यायवाची सब्दों की जांच में एडम बैक सबसे ऊपर आए अब सतोशी के लिखे हुए टेक्स्ट में उन शब्दों की पहचान की गई जिनका कोई पर्यायवाची नहीं है। यह मापा गया कि 620 संदिग्धों में से किसने उन शब्दों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया है। इसमें एडम बैक सबसे ऊपर आए, जिनके 521 'बिना पर्यायवाची' वाले शब्द सतोशी से मेल खाते थे। कुछ अन्य लोग भी थे, लेकिन उन सभी ने बैक की तुलना में बहुत ज्यादा पोस्ट लिखे थे। पुख्ता सबूतों की तलाश में दो और तरीके अपनाए गए… 1. हाइफन के इस्तेमाल की जांच में भी बैक टॉप पर रहे सबसे पहले सतोशी की ग्रामर, खासकर हाइफन (-) के गलत इस्तेमाल की बारीकी से जांच की गई। इसमें सतोशी द्वारा हाइफन के इस्तेमाल में की गई 325 अलग-अलग गलतियों की पहचान हुई। इन गलतियों की तुलना संदिग्धों के लेखन से की तो बैक की 67 हाइफन की गलतियां सतोशी की गलतियों से हूबहू मेल खाती थीं। दूसरे नंबर पर आने वाले व्यक्ति की 38 गलतियां ही मेल खाईं। 2. लिखने के अंदाज की जांच में भी बैक टॉप पर रहे 620 संदिग्धों पर वापस लौटते हुए जांच की गई कि कितनों के लिखने का अंदाज सतोशी जैसा है। सतोशी की तरह वाक्यों के बीच दो स्पेस देने की जांच के बाद 562 संदिग्ध बचे। आखिरी जांच में सिर्फ एक नाम बचा एडम बैक सतोशी की खास आदत थी- वे कभी email लिखते थे तो कभी e-mail, कभी ब्रिटिश स्पेलिंग cheque तो कभी अमेरिकी check। इस फिल्टर के बाद अंत में सिर्फ एक नाम बचा एडम बैक। 2008 से ही सतोशी नाकामोतो की खोज की जा रही बिटकॉइन के जनक ने 2008 में 'सतोशी नाकामोतो' नाम से बिटकॉइन का व्हाइटपेपर जारी किया था। उन्होंने दुनिया को पहली क्रिप्टोकरेंसी दी, लेकिन खुद कभी सामने नहीं आए। अगर न्यूयॉर्क टाइम्स की थ्योरी सही है, तो एक ब्रिटिश नागरिक का जापानी नाम इस्तेमाल करना अब भी एक सवाल बना हुआ है। कैरीरू की जांच भले ही किसी ठोस सबूत के साथ खत्म न हुई हो, लेकिन AI के जरिए सतोशी को खोजने के उनके तरीके कि टेक जगत में चर्चा हो रही है। नॉलेज पार्ट: क्या है साइफरपंक और सतोशी नाकामोतो?
भारत में सैमसंग, वीवो और ओप्पो जैसे ब्रांड्स ने अपने स्मार्टफोन की कीमतें 40% तक बढ़ा दी हैं। कंपनियों ने इसकी वजह दुनियाभर में चल रही चिप की शॉर्टेज को बताया है। इसके अलावा, अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सप्लाई प्रभावित होने के कारण प्लास्टिक पैकेजिंग भी महंगी हो गई है। इससे कंपनियां अब बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं। वीवो और ओप्पो के फोन ₹4000 तक महंगे मार्केट रिसर्चर IDC इंडिया के मुताबिक, पिछले साल देश में बिके कुल 15.2 करोड़ स्मार्टफोन में से 47% हिस्सेदारी वीवो, सैमसंग और ओप्पो की थी। इन कंपनियों ने अपने पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव किए हैं। स्मार्टफोन महंगे होने की 2 मुख्य वजह अगले महीनों में और भी बढ़ेंगे दाम ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, मोबाइल कंपनियों ने दुकानदारों को ईमेल भेजकर साफ कर दिया है कि ये बढ़ी हुई कीमतें अब स्थायी हैं। रिटेलर्स का कहना है कि उन्हें अगले कुछ महीनों में और भी दाम बढ़ने के संकेत मिले हैं। शाओमी ने भी अपने रेडमी पैड और 6 अन्य स्मार्टफोन्स की कीमतों में 32% तक की बढ़ोतरी की है, जबकि रियलमी ने अपने कुछ मॉडल्स के दाम बढ़ाए हैं। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… कंडोम 50% तक महंगे हो सकते हैं: ईरान जंग के कारण रॉ-मटेरियल की सप्लाई रुकी; तेल-गैस के बाद अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की किल्लत देश में कंडोम की कीमत 50% तक बढ़ सकती है, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच चल रही जंग के कारण सप्लाई चेन टूट गई है। इससे तेल और गैस के बाद अब कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की किल्लत हो गई है। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कंडोम बनाने वाली दिग्गज कंपनियों जैसे HLL लाइफकेयर, मैनकाइंड फार्मा और क्यूपिड लिमिटेड को अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
11 अप्रैल 1970 चांद पर उतरने के मकसद से अमेरिका ने अपोलो-13 मिशन लॉन्च किया। तीन एस्ट्रोनॉट चांद कि तरफ तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि तीनों एस्ट्रोनॉट को बचाने के लिए ग्राउंड कंट्रोल टीम बेहद जटिल रेस्क्यू मिशन चलाना पड़ा। यान पृथ्वी से 400171 किमी दूर पहुंच गया जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड था। कल 6 अप्रैल को रात 11:26 बजे आर्टेमिस II मिशन के 4 एस्ट्रोनॉट्स ने इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इस स्टोरी में अपोलो-13 मिशन की पूरी कहानी। आखिर कैसे एक रेस्क्यू मिशन से वर्ल्ड रिकॉर्ड बना… अपोलो-13 की कहानी को समझने के लिए एक बार इस जानकारी से गुजर जाएं… अपोलो 13 स्पेसक्राफ्ट मुख्य रूप से तीन मॉड्यूल्स से मिलकर बना था: अचानक ऑक्सीजन टैंक नंबर 2 फट गया 13 अप्रैल 1970 अपोलो 13 मिशन को लॉन्च हुए 56 घंटे बीत चुके थे। कमांडर जेम्स ए. लवेल जूनियर, लूनर मॉड्यूल पायलट फ्रेड डब्ल्यू और कमांड मॉड्यूल पायलट जॉन एल. स्विगर्ट इसमें सवार थे। स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से 3.20 लाख कमी दूर पहुंच चुका था। क्रू इस यान के लैंडिंग मॉड्यूल 'एक्वेरियस' की जांच कर रहे थे। अगले दिन अपालो 13 को चांद की कक्षा में प्रवेश करना था। लवेल और हाइस चांद पर चलने वाले पांचवें और छठे इंसान बनने वाले थे। तभी अचानक सर्विस मॉड्यूल का ऑक्सीजन टैंक 2 फट गया। क्रू को लूनर मॉड्यूल में जाने का निर्देश मिला ऑक्सीजन, बिजली और पानी की सप्लाई बंद हो गई। लवेल ने मिशन कंट्रोल को रिपोर्ट किया। उन्होंने कहा- ह्यूस्टन यहां एक समस्या हो गई है। कमांड मॉड्यूल से ऑक्सीजन लीक हो रही थी और फ्यूल सेल्स तेजी से खत्म हो रहे थे। चांद पर उतरने का मिशन रद्द हो गया। धमाके के एक घंटे बाद, मिशन कंट्रोल ने क्रू को लूनर मॉड्यूल में जाने का निर्देश दिया। इसमें काम चलाने लायक ऑक्सीजन थी। इस मॉड्यूल को केवल अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में घूम रहे कमांड मॉड्यूल से चांद की सतह तक ले जाने और वापस लाने के लिए बनाया गया था। पानी का कोटा घटाकर पांचवां हिस्सा कर दिया इसकी पावर सप्लाई सिर्फ दो लोगों के लिए 45 घंटे तक चलने लायक थी। अगर अपालो 13 के क्रू को जिंदा धरती पर लौटना था, तो इस लेंडिंग मॉड्यूल को तीन लोगों का बोझ कम से कम 90 घंटे तक उठाना था। अंतरिक्ष में 3 लाख किमी से ज्यादा का रास्ता पार करना था। ऊर्जा बचाने के लिए क्रू ने पानी का कोटा घटाकर पांचवां हिस्सा कर दिया। केबिन का तापमान जमा देने वाली ठंड से बस कुछ ही डिग्री ऊपर रखा। कमांड मॉड्यूल के चौकोर लिथियम हाइड्रोक्साइड कैनिस्टर, लूनर मॉड्यूल के सिस्टम के गोल छेद में फिट नहीं बैठ रहे थे। इसका मतलब था कि कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना एक बड़ी समस्या थी। मिशन कंट्रोल ने यान में मौजूद चीजों की मदद से एक जुगाड़ू अडैप्टर तैयार किया। अपोलो के क्रू ने उनके मॉडल को कॉपी कर लिया। इसमें लगा नेविगेशन सिस्टम भी बहुत ही साधारण था। 15 अप्रैल को अपोलो 13 ने पृथ्वी से दूरी का रिकॉर्ड बनाया 14 अप्रैल को अपालो 13 ने चांद का चक्कर लगाया। स्विगर्ट और हाइस ने तस्वीरें लीं और लवेल ने सबसे कठिन मैनुअर के बारे में मिशन कंट्रोल से बात की। यह पांच मिनट का इंजन बर्न था, जिससे LM को इतनी रफ्तार मिल सके कि वह ऊर्जा खत्म होने से पहले घर लौट आए। चांद के पिछले हिस्से का चक्कर लगाने के दो घंटे बाद, क्रू ने लैंडिंग मॉड्यूल के छोटे डिसेंट इंजन को चालू किया। अपालो 13 घर वापसी की राह पर था। 15 अप्रैल 1970 को अपालो 13 चांद के पिछले हिस्से में उसकी सतह से 254 किमी और पृथ्वी की सतह से 4,00,171 किमी दूर था। मिशन कंट्रोल को यान की हीट शील्ड खराब होने का डर था 17 अप्रैल को कमांड मॉड्यूल चालू किया गया। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से एक घंटे पहले लैंडिंग मॉड्यूल को कमांड मॉड्यूल से अलग किया गया। दोपहर करीब 1 बजे यान ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। मिशन कंट्रोल को यान की हीट शील्ड खराब होने का डर था। उन्होंने क्रू से बिना किसी रेडियो संपर्क के चार मिनट इंतजार किया। फिर, अपालो 13 के पैराशूट दिखाई दिए। तीनों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतर गए। इस तरह गलती से इस मिशन में वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना और तीनों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर भी लौट आएं। ये खबर भी पढ़ें… अपोलो-13 का 56 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा:पृथ्वी से 4 लाख किमी से ज्यादा दूर पहुंचे 4 एस्ट्रोनॉट्स; अब चांद की ग्रेविटी की मदद से वापस आएंगे पूरी खबर पढ़े…
चिकित्सा विज्ञान अब केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि ये शरीर की जैविक उम्र को थामने की दिशा में बढ़ चुका है। हम ऐसी तकनीकों के युग में हैं, जहां कोशिकाओं का कायाकल्प और जेनेटिक रिपेयर वैज्ञानिक हकीकत बनने जा रही है। 1-रेड लाइट थेरेपी-सेल्स जल्दी रिपेयर होती हैं, अधिक ऊर्जा बनाती हैं इस थेरेपी में शरीर पर कम वेवलेंथ वाली लाल रोशनी डालते हैं। रोशनी त्वचा की गहराई में कोशिकाओं के पावरहाउस यानी माइटोकॉन्ड्रिया को सक्रिय करती है। इस थेरेपी से कोशिकाएं अधिक ऊर्जा बनाती हैं और तेजी से रिपेयर होती हैं। खर्च और उपयोग - थेरेपी का पैनल करीब 15,000 रु. में आता है। इससे झुर्रियां व त्वचा के दाग घटते हैं। 2-क्रायोथेरेपी -110 डिग्री में दो मिनट, युवा रहने का जतन क्रायो-चेंबर में व्यक्ति को रखा जाता है, जहां तरल नाइट्रोजन से तापमान -110C से -160C तक ले जाते हैं। 2-4 मिनट में शरीर ‘सर्वाइवल मोड’ में आ जाता है, ब्लड सर्कुलेशन तेज हो जाता है। अंगों में अधिक ऑक्सीजन वाला खून दौड़ने लगता है। खर्च और उपयोग - मेट्रो शहरों में ₹5,000 से ₹12,000 तक सेशन मिल जाता है। वजन घटाने में मददगार। 3-इंट्रावेनस ग्लुटाथियोन ड्रिप - एजिंग के लिए जिम्मेदार ‘फ्री रेडिकल्स’ घटते हैं इसमें ग्लुटाथियोन, विटामिन्स और मिनरल्स का कॉकटेल सीधे आईवी ड्रिप से खून में पहुंचाया जाता है। यह पाचन तंत्र से नहीं गुजरता, इसलिए पोषक तत्व 100% शरीर को मिलते हैं। यह ‘फ्री रेडिकल्स’ को खत्म करता है जो एजिंग के मुख्य कारण हैं। खर्च और उपयोग - प्रति ड्रिप का खर्च ₹10,000 से ₹25,000 तक आता है। यह थेरेपी लिवर को डिटॉक्स करती है। 4-ओजोन थेरेपी - शरीर में दर्द व थकान दूर कर युवा रखती है शरीर में ‘मेडिकल ग्रेड ओजोन’ गैस डाली जाती है। सबसे कॉमन तरीका ‘ऑटो-हीमोथेरेपी’ है। मरीज का थोड़ा खून निकालकर उसमें ओजोन मिक्स की जाती है और फिर उसे वापस शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाता है। यह इम्यून सिस्टम रिबूट करता है। खर्च और उपयोग - सेशन ₹7,000 से ₹15,000 के बीच है। थेरेपी दर्द व थकान को दूर कर शरीर को युवा बनाती है। रिवर्स एजिंग’ का सफल टेस्ट- ऑक्सीजन थेरेपी से फिर होंगे जवान तेल अवीव यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी के जरिए बुढ़ापे को जैविक रूप से पलटने की कोशिश की है। ऑक्सीजन के दबाव वाले चैंबर में इलाज के बाद बुजुर्गों के टीलोमियर्स की लंबाई 25 साल पहले जैसी हो गई और खराब कोशिकाएं 37% तक कम हो गईं। टीलोमियर्स डीएनए के सिरों पर मौजूद वह सुरक्षात्मक कैप्सूल होते हैं जो क्रोमोसोम को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इनकी लंबाई कम होती जाती है। - 800 लाख करोड़ रु. की हो गई लॉन्जिविटी इकोनॉमी- 210 करोड़ रुपए लगाए हैं जोमैटो फाउंडर दीपेंदर गोयल ने लॉन्जिविटी से जुड़ी रिसर्च में- 768 करोड़ रुपए स्वयं को जवान रखने के लिए खर्च कर रहे हैं अमेरिकी उद्योगपति ब्रायन जॉनसन लंबी उम्र का विज्ञान - इलाज के लिए शरीर में जाएंगे नैनो रोबोट नैनो-रोबोटिक्स - शरीर की मरम्मत करेंगे रोबोट्स, बीमारी और वायरस नष्ट करेंगे इसमें छोटे-छोटे रोबोट्स को हमारे खून व नसों में भेजा जाएगा। अगर किसी कोशिका के डीएनए में कोई खराबी आती है, तो ये नैनोबोट उसे तुरंत ठीक कर देंगे। वे धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल को साफ करेंगे। जेनेटिक इंजीनियरिंग - बीमारियों के लिए जिम्मेदार डीएनए के हिस्से को काट देंगे यह डीएनए में बदलाव पर केंद्रित है। वैज्ञानिक इसकी मदद से डीएनए के उस हिस्से को काट सकते हैं, जो उम्र बढ़ाने या बीमारियों के लिए जिम्मेदार है और उसकी जगह एक स्वस्थ जीन लगा सकते हैं। सेल्यूलर रिप्रोग्रामिंग- बूढ़ी कोशिकाओं को फिर युवा अवस्था में लाने की तकनीक इसमें वैज्ञानिक जीन कोशिका के एपिजेनेटिक क्लॉक को रीसेट कर देते हैं। जैसे कंप्यूटर को फॉर्मेट करके नया जैसा बनाया जाता है, वैसे ही बूढ़ी कोशिका को वापस उसकी भ्रूण जैसी युवा अवस्था में ले आती है।
एआई और अन्य डिजिटल साधनों के कारण हम खुद किसी बात को याद रखने या विचार करने के लिए दिमाग पर जोर नहीं देते। इससे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स के बीच के कनेक्शन कमजोर होने लगते हैं। विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को ‘डिजिटल डिमेंशिया’ कहा जा रहा है। क्या करें, रोज कुछ हाथों से लिखें, मस्तिष्क सक्रिय रहेगा ‘एक्टिव रिकॉल’ अपनाएं यानी किसी भी सर्च से पहले दो मिनट स्वयं याद करें। रोजाना कुछ हाथों से लिखें, इससे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स सक्रिय होते हैं। अकेलापन और एंग्जाइटी- एआई को ही पार्टनर या दोस्त समझने की भूल कर रहे हैं लोग कई लोगों ने अब एआई को ही डिजिटल पार्टनर या दोस्त बना लिया है। वे घंटों इससे बातें करते हैं और अपनी भावनाओं के लिए सुझाव लेते हैं। इससे लोगों में अकेलेपन की समस्या बढ़ रही है, वे बहुत जल्दी तनाव और एंग्जायटी की चपेट में आ रहे हैं। क्या करें, अपनों से खूब बात करें, खुशी मिलेगी तनाव घटाने वाला ऑक्सीटोसिन मानवीय संवाद से मिलता है। एआई के बजाय प्रियजनों से बात करें। सोने से एक घंटा पहले डिजिटल डिटॉक्स करें।
नासा के ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। भारतीय समयानुसार 6 अप्रैल को उन्होंने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। अब ये अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देखेंगे जिसे इंसानों ने आज तक सिर्फ तस्वीरों में देखा है। वे पृथ्वी से सबसे दूर जाने का 56 साल पुराना रिकॉर्ड भी आज रात तोड़ देंगे। अपोलो 13 ने 1970 में धरती से सबसे ज्यादा दूरी 4 लाख 171.18 km का रिकॉर्ड बनाया था। नासा के मौजूदा मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी दूर तक पहुंचने की उम्मीद है। आर्टेमिस-II फ्लाईबाय का पूरा शेड्यूल नोट: EST यानी ईस्टर्न स्टैंडर्ड टाइम और IST इंडियन स्टैंडर्ड टाइम के बीच 10 घंटे 30 मिनट का अंतर है। EST का टाइम 6 अप्रैल का हैं। IST का टाइम 7 अप्रैल का हैं। चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी होगी नासा ने क्रू को चांद की सतह के 30 खास टारगेट की लिस्ट भेजी है, जिनकी उन्हें फोटोग्राफी करनी है। इनमें सबसे प्रमुख ‘ओरिएंटल बेसिन’ है, जो करीब 600 मील चौड़ा क्रेटर है। यह बेसिन 3.8 अरब साल पहले उल्कापिंड के टकराने से बना था। इसके अलावा वे 'हर्ट्जस्प्रंग बेसिन' का भी अध्ययन करेंगे ताकि समझ सकें कि समय के साथ चांद की सतह कैसे बदली। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-II का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल 'गुलेल' की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। मकसद: 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच चाहता है नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच करना है। नासा देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। 4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है। 1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) मिशन कमांडर हैं। 2014 में स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं। 2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई 'अर्थराइज' फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी। 3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले गए हैं। 4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले गए हैं। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है। अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही 'स्पेस रेस' में खुद को बेहतर साबित करना था। आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। नासा का आर्टेमिस-II मिशन 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भारतीय समय के अनुसार 2 अप्रैल को 'आर्टेमिस-2' मिशन लॉन्च किया था। सुबह 4:05 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ। साल 1972 में 'अपोलो-17' के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री स्पेसक्राफ्ट से चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर धरती पर लौटेंगे। यह मिशन 10 दिन का है। नॉलेज पार्ट:
दुनिया के करीब 80% कमर्शियल ड्रोन बनाने वाला चीन अब अपने आसमान में सख्ती से ‘ड्रोन कंट्रोल’ लागू कर रहा है। 2025 तक देश में 30 लाख से ज्यादा ड्रोन रजिस्टर्ड हो चुके हैं, जो एक साल में 50% की वृद्धि है, लेकिन इसी तेजी के साथ सरकार ने नियंत्रण भी कड़ा कर दिया है। बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर सजा और जेल तक का प्रावधान लागू किया गया है। मई से हर ड्रोन का रियल-नेम रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और उड़ान का डेटा रियल टाइम में सरकार तक जाएगा। ड्रोन का रियल टाइम डेटा सरकार को देना होगा - ड्रोन को आईडी या मोबाइल नंबर से लिंक करना जरूरी होगा।- उड़ान का रियल टाइम डेटा सरकार के पास भेजना होगा।- प्रतिबंधित क्षेत्रों में उड़ान से एक दिन पहले परमिट लेना अनिवार्य।- कई शहरों में बड़े हिस्से को नो-फ्लाई जोन घोषित किया।- छोटे ड्रोन को भी 400 फीट से नीचे सीमित छूट दी गई है।- बीजिंग में ड्रोन की बिक्री, किराया और बाहरी एंट्री पर भी रोक। - एक पते पर अधिकतम 3 ड्रोन रखने की सीमा तय की गई है।- बिना अनुमति उड़ान पर जुर्माना, जब्ती और जेल का प्रावधान।- ड्रोन बाजार पर भी असर साफ दिख रहा है। लोकल मार्केट में डिमांड घटने से डीलरों की बिक्री तेजी से घटी है,कई लोग ड्रोन फोटोग्राफी जैसे नए बिजनेस छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
रॉयल एनफील्ड ने आज (4 अप्रैल) अपनी एंट्री लेवल रेट्रो स्टाइल वाली मोटरसाइकिल हंटर 350 का नया बेस प्रीमियम मॉडल लॉन्च किया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹1,49,900 रखी गई है। कंपनी का दावा है कि बाइक का ARAI सर्टिफाइड माइलेज 36.2kmpl का है। नए वैरिएंट को हंटर लाइनअप में सबसे नीचे वाले 'फैक्ट्री ब्लैक' वैरिएंट के ऊपर रखा गया है। नए मॉडल की सबसे बड़ी खासियत कम कीमत के बावजूद स्पोक व्हील्स की जगह ट्यूबलेस टायर के साथ कास्ट अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। दो नए और वाइब्रेंट कलर ऑप्शन के साथ 10 कलर मिलेंगे डिजाइन की बात करें तो नया मॉडल 'टारमैक ब्लैक' ग्लॉस ब्लैक पेंट स्कीम के साथ पेश किया गया है। इसमें साइड पैनल पर बहुत ही मिनिमल रॉयल एनफील्ड की ब्रांडिंग दी गई है, जो इसे एक क्लीन और क्लासी लुक देती है। इसके साथ कंपनी ने हंटर के टॉप वैरिएंट के लिए दो नए और वाइब्रेंट कलर ऑप्शन भी पेश किए हैं। इसमें मुंबई येलो और मूनशॉट वाइट कलर शामिल हैं। इससे अब हंटर 10 कलर में अवेलेबल है। भारत में इसका मुकाबला TVS रोनिन, होंडा CB 350 और जावा 42 और येज्दी रोडस्टर जैसी बाइक्स से है। फीचर्स: रोटरी स्विचगियर और नया डिजिटल-एनालॉग क्लस्टर बेस प्रीमियम वैरिएंट में कंपनी ने फीचर्स के मामले में कोई कटौती नहीं की है। इसमें टॉप वैरिएंट की तरह ही रोटरी स्विचगियर (घुमाने वाले बटन) दिए गए हैं। साथ ही, इसमें नया डिजिटल-एनालॉग इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और स्लिप-एंड-असिस्ट क्लच को स्टैंडर्ड फिटमेंट के तौर पर शामिल किया गया है। सुरक्षा के लिए इसमें सिंगल चैनल ABS के साथ फ्रंट में डिस्क ब्रेक और रियर में ड्रम ब्रेक सेटअप मिलता है। हेडलाइट की बात करें तो इसमें 2024 मॉडल वाला अपडेटेड राउंड हैलोजन हेडलैंप दिया गया है। हालांकि, इसमें ट्रिपर नेविगेशन की सुविधा नहीं मिलेगी। हंटर 350 में फोर्क कवर गैटर और एक ऑफसेट इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर पहले की तरह ही मिलेगा। ये इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मीटिओर 350 और स्क्रैम 411 की तरह ही है। बाइक का स्विचगियर और ग्रिप भी मिटिओर जैसा ही दिखता है। रोडस्टर बाइक में USB पोर्ट मिलता है, इससे राइडिंग करते समय फोन भी चार्ज कर सकते हैं। हार्डवेयर: 13-लीटर का फ्यूल टैंक और डिस्क ब्रेक 2025 रॉयल एनफील्ड हंटर 350 में 1370mm का व्हीलबेस मिलता है, जो मीटिओर से 30mm और क्लासिक 350 से 20mm छोटा है। बाइक क्लासिक 350 के मुकाबले 14kg हल्की है, इसका वजन 181 किलोग्राम है। रोडस्टर बाइक में 13-लीटर का फ्यूल टैंक है और इसकी सीट की ऊंचाई 800mm है। बाइक 17-इंच के अलॉय व्हील पर चलती है। इन पर फ्रंट में 110/70 और रियर में 140/70 की प्रोफाइल वाले ट्यूबलेस टायर लगे हैं। कंफर्ट राइडिंग के लिए इसके फ्रंट में 41mm टेलिस्कोपिक फोर्क्स, जबकि रियर में नए शॉक एब्जॉर्बर हैं। ब्रेकिंग के लिए फ्रंट में 300mm डिस्क और रियर में 240mm डिस्क के साथ डुअल-चैनल ABS सिस्टम मिलता है। परफॉर्मेंस: 36.2kmpl का माइलेज और 114kmph की टॉप स्पीड 2025 रॉयल एनफील्ड हंटर 350 में कोई मैकेनिकल बदलान नहीं किया गया है। इसमें पहले की तरह ही 349cc का सिंगल-सिलेंडर, एयर/ऑयल-कूल्ड इंजन दिया गया है, जो नए एमिशन नॉर्म्स के अनुसार OBD2B फ्यूल इंजेक्शन तकनीक से लैस है। यानी बाइक E20 पेट्रोल पर भी चलेगी। ये इंजन रॉयल एनफील्ड मीटिओर 350 और नई क्लासिक 350 में भी है। यह 6100rpm पर 20.2hp की पावर और 4,000rpm पर 27Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इंजन को स्लीपर असिस्ट क्लच के साथ 5-स्पीड गियरबॉक्स से ट्यून किया गया है। कंपनी का दावा है कि बाइक 114kmph की टॉप स्पीड से हासिल कर सकती है और इसका ARAI सर्टिफाइड माइलेज लगभग 36.2kmpl का है। वहीं, रियल-वर्ल्ड टेस्ट में शहर में 40.19kmpl और हाईवे पर 35.98kmpl का माइलेज देती है।
गूगल ने हाल ही में कई बड़े अपडेट्स की घोषणा की है। एंड्रॉइड यूजर्स हों या गूगल की ऑनलाइन सर्विस इस्तेमाल करने वाले... ये बदलाव सीधे यूजर्स के रोजमर्रा के अनुभव को बेहतर कर सकेंगे। कंपनी अपने इकोसिस्टम को ज्यादा स्मार्ट और यूजर फ्रेंडली बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पहली बार एंड्रॉइड से आईफोन में भी फाइलें डायरेक्ट ट्रांसफर करने का विकल्प यूजर्स को दिया जाएगा। 1. एंड्रॉइड 17 - एप में डार्क मोड, बबल्स फीचर आएंगे गूगल का नया ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉइड-17 बीटा में है और जल्द लॉन्च होने की उम्मीद है। यह अब प्लेटफॉर्म स्टेबिलिटी स्टेज में पहुंच चुका है, यानी इसके फीचर्स लगभग फाइनल हो चुके हैं। बबल्स फीचर अब यूजर एक साथ कई एप्स को छोटे बबल के रूप में स्क्रीन पर रख सकते हैं। टैप करके एप खोल सकते हैं। 5 से 6 एप्स तक साथ चला सकेंगे। डार्क मोड उन एप्स पर भी डार्क थीम लागू की जा सकेगी जिनमें यह सुविधा नहीं है। पहली बार ये फीचर दिया गया है। 2.गूगल मैप्स - आस्क मैप्स और इमर्सिव व्यू जैसे फीचर अब सिर्फ नेविगेशन नहीं, स्मार्ट असिस्टेंट बन रहा है गूगल मैप्स। इसे अब एक गाइड और असिस्टेंट की तरह विकसित किया जा रहा है। इसमें गूगल जेमिनी के साथ इंटीग्रेशन भी किया जा रहा है। आस्क मैप्स इसमें यूजर अब सिर्फ जगह नहीं खोजेंगे, बल्कि अपनी पसंद के हिसाब से सवाल पूछ सकेंगे जैसे शहर में किस तरह का खाना पॉपुलर हो रहा है, भीड़ का स्तर क्या है और सबसे बेस्ट रूट कौन सा होगा? इमर्सिव व्यू इसमें 3D विजुअल्स के साथ सड़क, फ्लाईओवर और आसपास की बिल्डिंग्स का रियल टाइम एक्सपीरियंस मिलेगा। इससे रास्ता समझना आसान होगा। 3. जीमेल में बदल सकेंगे ईमेल यूजर अपनी जीमेल आईडी बदल सकेंगे। पुराने मेल भी सुरक्षित रहेंगे। नई आईडी बनाने के बाद भी पुरानी आईडी पर आने वाले मेल मिलते रहेंगे। 4. जेमिनी बनाएगा गाना गाने के हिस्से जैसे इंट्रो-बीट्स लिख सकते हैं, जेमिनी वोकल्स के साथ गाना बना देगा। फ्री में 30 सेकंड व पेड यूजर्स 3 मिनट तक गाने बना देगा। 5. एपल-एंड्रॉइड फाइल शेयर अब एंड्रॉइड फोन से AirDrop सुविधा के जरिए iPhone में सीधे फाइल भेजी जा सकेगी। यह पिक्सल के बाद सैमसंग व अन्य डिवाइस में आएगा।
मेटा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नया सब्सक्रिप्शन मॉडल टेस्ट कर रही है। इसका नाम ‘इंस्टाग्राम प्लस’ है। यह मेटा की एक पेड सर्विस होगी, जिसमें यूजर्स को कुछ नए और एक्सक्लूसिव फीचर्स मिलेंगे, खासकर ये फीचर्स उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी से जुड़े होंगे। फिलहाल इस नई सुविधा की टेस्टिंग मैक्सिको, जापान और फिलीपींस जैसे देशों में हो रही है। इसके रोलआउट होने की जल्द संभावना की जा रही है। 24 घंटे से ज्यादा देख सकेंगे स्टोरी, क्लोज फ्रेंड्स लिस्ट बढ़ जाएगी - बिना नाम दिखे स्टोरी देखें अब किसी की स्टोरी देखने पर आपका नाम सामने वाले को नहीं दिखेगा। अधिक क्लोज फ्रेंड्स लिस्ट अभी तक सिर्फ एक क्लोज फ्रेंड्स लिस्ट बनती है। अब अलग अलग ग्रुप बनाकर अलग ऑडियंस को स्टोरी दिखा सकेंगे। स्टोरी कितनी बार देखी गई, यह भी दिखेगा सिर्फ व्यू नहीं, बल्कि कितनी बार किसी ने आपकी स्टोरी दोबारा देखी, इसका डेटा भी आपको इंस्टाग्राम आपको देगा। स्टोरी 24 घंटे से ज्यादा चलेगी फिलहाल स्टोरी का समय 24 घंटे है। अब स्टोरी की विजिबिलिटी बढ़ाने का ऑप्शन मिलेगा, जिससे 24 घंटे से ज्यादा समय एक्टिव रह सकेगी। सुपरलाइक्स और सर्च फीचर यूजर्स इस नए अपडेट से स्टोरी पर एनिमेटेड सुपरलाइक्स भेज सकेंगे। व्यूअर लिस्ट में लोगों को सर्च करने का ऑप्शन भी मिलेगा। कितनी हो सकती है कीमत? यह फीचर काफी हद तक स्नैपचैट के स्नैपचैट प्लस जैसा हो सकता है, हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पूरी जानकारी या ग्लोबल लॉन्च डेट शेयर नहीं की है। इस फीचर की कीमत कुछ इस प्रकार हो सकती है। - मैक्सिको- करीब 200 रुपए महीना - जापान- करीब 188 रुपए महीना - फिलीपींस - करीब 100 रुपए महीना - भारत में जब लॉन्च होगा तो सब्सक्रिप्शन इसी दायरे में रहने की संभावना है।
नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चंद्रमा की ओर जाते हुए चार अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की शानदार तस्वीरें खींचीं हैं। पृथ्वी नीले रंग में बेहद खूबसूरत दिख रही है। एक फोटो में पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा दिखा जबकि दूसरी फोटो में पूरी धरती नजर आई, जिस पर सफेद बादल छाए थे। मिशन पर गए चार अंतरिक्ष यात्री (3 अमेरिकी, 1 कनाडाई) फिलहाल पृथ्वी से करीब 1.8 लाख किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं। अभी उन्हें 2.4 लाख किलोमीटर और जाना है। वे 6 अप्रैल तक चंद्रमा के पास पहुंचेंगे। 1 अप्रैल को सुबह 4:05 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ था। 1972 के बाद पहली बार कोई इंसान चांद के करीब जाएगा। हालांकि एस्ट्रोनॉट चांद पर कदम नहीं रखेंगे। वे सिर्फ चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। मून मिशन के दौरान ली गईं 5 तस्वीरें… 54 साल में कितनी बदली पृथ्वी, 2 तस्वीरें… एक दिन पहले ओरियन कैप्सूल ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ी थी आर्टेमिस-2 मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। एक दिन पहले शुक्रवार सुबह 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी। अब यह अगले 4 दिन अंतरिक्ष में सफर करेगा और वहां पहुंचेगा, जहां आज तक केवल 24 इंसान पहुंच सके हैं। पृथ्वी के ऑर्बिट को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की इस प्रोसेस को 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न' कहते हैं। यह करीब 6 मिनट का मैन्यूवर था, जिसने यान की रफ्तार बढ़ाकर 22,000 मील प्रति घंटा यानी करीब 34 हजार किमी/घंटा कर दी। मिशन के अगले पड़ाव…अगले 5 दिन पांचवां दिन: चंद्रमा की ग्रेविटी में दाखिल होगा आर्टेमिस-2 5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा। छठा दिन: बास्केटबॉल जैसा बड़ा नजर आएगा चंद्रमा छठे दिन ओरियन चांद की सतह से महज 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देख पाएंगे, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। खिड़की से देखने पर चांद इतना बड़ा दिखेगा, जैसे हाथ के पास कोई बास्केटबॉल रखी हो। 50 मिनट के लिए टूट सकता है संपर्क: जब ओरियन चांद के पीछे से गुजरेगा तो पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह कट सकता है। करीब 50 मिनट तक 'कम्युनिकेशन ब्लैकआउट' रहेगा। मिशन कंट्रोल को यान से सिग्नल नहीं मिलेगा। पहली बार धरती से इतनी दूर पहुंचेंगे: इसी दिन अपोलो 13 का 1970 में बनाया गया धरती से सबसे ज्यादा दूरी का 400,171.18 km का रिकॉर्ड भी टूट सकता है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी की दूरी तक पहुंचने की उम्मीद है। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान सातवें दिन चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल 'गुलेल' की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने वाली पहली महिला बनेंगी क्रिस्टीना: पहली बार फेल हो गईं थीं नासा के मून मिशन आर्टेमिस-2 की चार सदस्यीय टीम में शामिल 47 वर्षीय अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनने जा रही हैं। 2019-20 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 328 दिन बिताकर उन्होंने किसी महिला की सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष यात्रा (उड़ान से लैंडिंग तक) का रिकॉर्ड बनाया था। इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। पूरी खबर पढ़ें…
गूगल ने अपने ईमेल प्लेटफॉर्म जीमेल में नया फीचर लॉन्च किया है, जिससे अब आप अपनी ईमेल आईडी का यूजरनेम (@gmail.com से पहले वाला हिस्सा) बदल सकेंगे। कंपनी के मुताबिक, यह आपकी डिजिटल पहचान को अपग्रेड करने का एक तरीका है। फिलहाल यह अपडेट अमेरिकी यूजर्स के लिए है, जो उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो अपना 'अजीब' यूजरनेम बदलना चाहते थे। आगे हम आपको इसे बदलने का पूरा प्रोसेस और पुराने एड्रेस से जुड़ी जरूरी बातें बताएंगे। गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने X पर पोस्ट कर लिखा, 2004 एक अच्छा साल था, लेकिन आपके Gmail एड्रेस को उसमें फंसे रहने की जरूरत नहीं है। अब यूजर्स को अपने पुराने या 'शर्मिंदा' करने वाले ईमेल एड्रेस (जैसे- coolboy123) के साथ रहने की जरूरत नहीं है। गूगल अब इसे बदलने की सुविधा दे रहा है।' यूजरनेम बदलने पर पुराना ईमेल एड्रेस भी बना रहेगा जैसे ही आप अपना नया Gmail एड्रेस चुनते हैं, आपका पुराना ईमेल एड्रेस पूरी तरह डिलीट नहीं होगा। बदलाव से पहले इन बातों का ध्यान रखें ईमेल बदलना आसान है, लेकिन गूगल ने कुछ जरूरी सावधानियां बरतने को कहा है। Gmail यूजरनेम बदलने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस 12 महीने में एक बार ही बदल सकेंगे यूजरनेम गूगल ने इस सुविधा के साथ कुछ सीमाएं भी तय की हैं।
ओप्पो का नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन फाइंड X9 मार्केट में आ गया है। ये 75 हजार रुपए की शुरुआती कीमत में आता है। इसे हमने पिछले दो महीने से प्राइमरी फोन की तरह इस्तेमाल किया है। फोन दिखने में जितना दमदार है, इसके फीचर्स भी उतने ही अट्रेक्टिव हैं, हालांकि कुछ कमियां भी हैं, तो चलिए जानते हैं इसमें क्या खास है... ओप्पो फाइंड X9: डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी ये कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप फोन है, जो एयरोस्पेस-ग्रेड एल्यूमिनियम फ्रेम पर बना है, जो हल्का लेकिन मजबूत है। फ्रंट और बैक ग्लास कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i से कवर है, जो स्क्रैच रेसिस्टेंट है। कैमरा या AI फीचर्स के लिए साइड में कस्टमाइजेबल स्नैप की दी गई है। 3D अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर बारिश में भी काम करता है। फ्रंट में डिस्प्ले फ्लैट स्क्रीन के साथ 1.15mm की अल्ट्रा-थिन बेजल्स हैं, जो एज-टू-एज व्यूइंग देते हैं। फोन IP68/IP69 रेटेड है, यानी हाई-प्रेशर वॉटर जेट्स भी झेल सकता है। कैमरा मॉड्यूल सिंगल यूनिट जैसा लगता है, जो फोन को स्लीक लुक देता है। कुल मिलाकर, फोन डेली यूज में प्रीमियम लगता है। ओप्पो फाइंड X9 157mm लंबा, 73.9mm चौड़ा और 8mm मोटा है और वजन सिर्फ 203 ग्राम है। जिससे यह हाथ में लेते ही काफी सॉलिड महसूस होता है। ओप्पो फाइंड X9: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले : ओप्पो ने डिस्प्ले का साइज बैलेंस रखा है। वीवो के फोन या तो बहुत छोटे होते हैं या बहुत बड़े, लेकिन फाइंड X9 का 6.56 इंच का डिस्प्ले सिंगल-हैंड यूसेज के लिए अच्छा है। यह 2760 1256 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 1.5K ओलेड OLED फ्लैट स्क्रीन है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है और इसका टच सेंपलिंग रेट 240Hz है, यानी टच स्मूद चलता है। 1800 निट्स की ब्राइटनेस की वजह से तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। इसका LTPS पैनल है, जिससे रिफ्रेश रेट 1Hz तक नीचे नहीं जा सकता, जिससे बैटरी पर थोड़ा असर पड़ता है। हालांकि, विजुअल क्वालिटी टॉप-क्लास है। स्क्रीन को ओप्पो क्रिस्टल शील्ड ग्लास से प्रोटेक्ट किया गया है और P3 डिस्प्ले चिप से तस्वीरें और भी क्लीयर दिखती हैं। कंपनी ने मोबाइल को इन डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर तकनीक से लैस किया है। परफॉर्मेंस : परफॉर्मेंस के लिए फोन में 3नैनोमीटर फेब्रिकेशन्स पर बना मीडियाटेक डायमेंसिटी 9500 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जो 4.21GHz तक की क्लॉक स्पीड पर रन कर सकता है। इसमें LPDDR5X रैम और UFS 4.1 स्टोरेज है, जिससे एप्स जल्दी खुलते हैं और मल्टीटास्किंग स्मूद रहती है। हैवी परफॉर्मेंस और गेमिंग के लिए फाइंड X9 में ट्रिनिटी इंजन लगाया गया है, जो स्मूथ और लैग फ्री गेमिंग एक्सपीरियंस देता है। मोबाइल गेमिंग के दौरान फोन को हीट होने से रोकने के लिए इसमें 36,344.4mm कूलिंग डिसपेशन एरिया दिया गया है। यह ओपो मोबाइल ग्राफिक्स के लिए आर्म माली ड्रेग MC12 जीपीयू सपोर्ट करता है। 1 घंटे से ज्यादा लगातार गेमिंग के दौरान इसने 114 FPS का औसत निकाला। एप स्विचिंग और मल्टीटास्किंग में कोई लैग महसूस नहीं हुआ। सॉफ्टवेयर : फोन एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड कलर OS 16 पर काम करता है, जो काफी हद तक वनप्लस के सॉफ्टवेयर जैसा ही है। यह स्मूथ और रिलायबल है, लेकिन इसमें 'हॉट एप्स' और 'हॉट गैम्स' जैसे फालतू एप्स भी मिलते हैं। हालांकि, इन्हें सेटिंग्स में जाकर डिसेबल किया जा सकता है। कैमरा : फोटोग्राफी के लिए ओप्पो फाइंड X9 के बैक पैनल पर हसलब्लैड कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50 मेगापिक्सल सोनी LYT808 मेन सेंसर, 50 मेगापिक्सल अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस, 50 मेगापिक्सल पेरिस्कोप टेलिफोटो लेंस और 2 मेगापिक्सल मोनोक्रोम सेंसर शामिल है। मोबाइल 120x AI टेलिस्कोपिक यूम सपोर्ट करता है। इससे काफी दूर के ऑब्जेक्ट भी अच्छी क्वालिटी में कैप्चर किए जा सकते हैं। फोन में 120fps पर 4K डॉल्बी विजन वीडियो रिकॉर्ड की जा सकती है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फ्रंट में 32 मेगापिक्सल कैमरा लगाया गया है। यह सोनी IMX615 सेंसर पर काम करता है। हसलब्लैड की ब्रांडिंग की वजह से कलर्स बहुत नेचुरल और एक्यूरेट आते हैं। 3x पोर्ट्रेट शॉट्स अच्छे हैं, हालांकि लो-लाइट पोर्ट्रेट में यह वीवो X200 प्रो जितना नहीं है। डे-लाइट में वीडियो बहुत स्टेबल हैं, लेकिन रात में थोड़ा नॉइज दिखता है। बैटरी : फोन में सबसे खास इसकी 7025mAh बैटरी है, जो 80W फास्ट वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है। हैवी कैमरा यूसेज के बाद भी यह फोन डेढ़ दिन तक आराम से चलाता। स्क्रीन ऑन टाइम में हमें 10 से 12 घंटे का बैकअप मिला। खास फीचर्स : फोन का एक मजेदार फीचर 'वेट टच' टेक्नोलॉजी है। यानी अगर डिस्प्ले पर पानी गिरा हो या आपके हाथ गीले हों, तब भी फिंगरप्रिंट और टच एकदम परफेक्ट काम करता है। साथ ही, IP69 रेटिंग की वजह से इसे पानी से कोई खतरा नहीं है। कमियां : ₹75,000 के फोन में आज भी USB 2.0 पोर्ट दिया गया है, जबकि इस बजट में USB 3.0 होना चाहिए था। वाइब्रेशन फीडबैक थोड़ा और स्ट्रॉन्ग हो सकता था। फोन सेटअप करते समय काफी फालतू ऐप्स हटाने पड़ते हैं। फाइनल वर्डिक्ट : फोन को वैरिएंट में आता है, इसके 12GB रैम + 256GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत 74,999 रुपए और 16GB रैम + 512GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत ₹75,000 है, जो थोड़ी ज्यादा लगती है। अगर आपको यह फोन ऑफर के बाद ₹65,000 के अंदर मिलता है, तो आप इसे बिना सोचे खरीद सकते हैं।
सुजुकी ने अपने पॉपुलर मैक्सी-स्कूटर बर्गमैन स्ट्रीट का 2026 मॉडल लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे नए प्लेटफॉर्म, एडवांस फीचर्स और डिजाइन में बदलाव के साथ उतारा है। TFT वेरिएंट में डुअल-टोन कलर्स मिलेंगे, जबकि LCD वेरिएंट सिंगल-टोन कलर में आएगा। दिल्ली में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1.02 लाख रुपए रखी गई है, जो टॉप-स्पेक वेरिएंट के लिए 1.13 लाख रुपए तक जाती है। नए मॉडल में कंपनी ने एक्सेस 125 वाले प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है, जिससे यह पहले से ज्यादा मजबूत और हल्का हो गया है। कीमत और वेरिएंट्स नोट: कीमत एक्स-शोरूम, दिल्ली की है। एलईडी हेडलाइट और एग्जॉस्ट में बदलाव कंपनी ने LED हेडलाइट और टेल-लैंप सेटअप को रिवाइज किया है। इससे इसे एक नया और स्पोर्टी लुक मिला है। इसके अलावा, अब इसमें पहले के मुकाबले ज्यादा एंगुलर और बॉक्सी एग्जॉस्ट मफलर दिया गया है। सुविधा के लिए कंपनी ने पेट्रोल भरवाने की जगह को अब टेल-लैंप के नीचे शिफ्ट कर दिया है, जिससे राइडर को बार-बार सीट खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। की-लेस इग्निशन और डिजिटल डिस्प्ले नए बर्गमैन में अब की-लेस इग्निशन की सुविधा मिलेगी। इसमें एक मल्टीफंक्शन की-फोब दिया गया है, जिससे सीट, फ्यूल कैप और हैंडल लॉक को ऑपरेट किया जा सकता है। स्कूटर में स्मोक्ड विंडस्क्रीन और मैटेलिक फिनिश वाले एम्बलेम दिए हैं, जो इसे सड़क पर अलग पहचान देते हैं। इसके टर्न इंडिकेटर्स को भी अब पहले से कॉम्पैक्ट बनाया गया है। 124cc इंजन और बेहतर पिकअप स्कूटर में 124cc का एयर-कूल्ड, फ्यूल-इंजेक्टेड इंजन दिया गया है। यह इंजन 8.4hp की पावर और 10.2Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसे CVT गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। कंपनी का दावा है कि नए स्टार्टर क्लच की वजह से अब यह स्टार्ट होते समय कम शोर करेगा। साथ ही, इसकी 30-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (एक्सेलरेशन) को पहले से बेहतर बनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक और किक स्टार्ट दोनों का ऑप्शन मिलता रहेगा। पहले से 500 ग्राम हल्का हुआ फ्रेम नया बर्गमैन स्ट्रीट अब सुजुकी एक्सेस 125 के साथ अपना प्लेटफॉर्म शेयर करता है। नया फ्रेम पुराने के मुकाबले 500 ग्राम हल्का है, लेकिन इसकी मजबूती 25% तक बढ़ गई है। 24.6 लीटर हुई डिक्की की क्षमता प्रैक्टिकलिटी के मामले में भी बर्गमैन अब बेहतर हो गया है। इसका अंडर-सीट स्टोरेज 21.5 लीटर से बढ़ाकर 24.6 लीटर कर दिया गया है। पुराना vs नया 2026 मॉडल नॉलेज पार्ट: क्या होता है की-फोब और TFT डिस्प्ले?
नासा के मून मिशन आर्टेमिस-2 की चार सदस्यीय टीम में शामिल 47 वर्षीय अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनने जा रही हैं। 2019-20 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 328 दिन बिताकर उन्होंने किसी महिला की सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष यात्रा (उड़ान से लैंडिंग तक) का रिकॉर्ड बनाया था। इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। अमेरिका के मिशिगन की रहने वाली क्रिस्टीना ने 2011 में पहली बार नासा में नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन असफल रहीं। इस झटके के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अगले चार साल खुद को बेहतर बनाने में लगाए। दूरदराज इलाकों में इंजीनियरिंग से जुड़े कठिन काम करते हुए अपने कौशल को निखारा। 2013 में फिर मौका मिलने पर 6 हजार आवेदकों में से चुनी गई 8 लोगों की टीम में जगह बनाई। नासा से पहले का अनुभव भी उतना ही कठिन रहा। क्रिस्टीना ने अंटार्कटिका में रिसर्च मिशन के तहत करीब तीन साल काम किया। अमुंडसेन-स्कॉट साउथ पोल स्टेशन पर पूरी सर्दियां बिताई, जहां महीनों तक सूरज नहीं निकलता और तापमान माइनस 38 से 80 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। मुश्किल माहौल में उन्होंने धैर्य और मानसिक मजबूती सीखी, जो आगे अंतरिक्ष मिशनों में काम आई। एक बार स्पेस स्टेशन के पावर सिस्टम की चार्जिंग यूनिट खराब हो गई। इसे ठीक करने के लिए क्रिस्टीना अपनी साधी जेसिका मीर के साथ स्टेशन से बाहर मरम्मत अभियान पर उतरी। करीब 7 घंटे चले इस मिशन में उन्होंने यूनिट बदल दी। यह पूरी तरह महिला अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा किया गया पहला अभियान था। इससे अंतरिक्ष में महिलाओं की भूमिका को नया आयाम मिला। क्रिस्टीना की शादी के भी किस्से हैं। 2013 में वे एक रिसर्च स्टेशन पर तैनात थीं। यहीं हैलोवीन पार्टी में उनकी मुलाकात रॉबर्ट कोच से हुई, जो जियोस्पेशियल प्रोग्राम से से जुड़े थे। सर्फिग के शौकीन रॉबर्ट अक्सर लहरों का हाल जानने के लिए क्रिस्टीना की फोन कर वीडियो मंगाते थे। यहीं से उनकी बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीर दोस्ती और फिर प्यार तक पहुंची। बाद में दोनों ने शादी कर ली। अंतरिक्ष में योग कर चुकी क्रिस्टीना कहती हैं- इससे मिलता है मानसिक संतुलन क्रिस्टीना योग को अपनी मानसिक संतुलन का हिस्सा मानती हैं। अंतरिक्ष के मुश्किल हालात में योग ने उन्हें शांत रहना सिखाया। 2020 में 328 दिनों के रिकॉर्ड मिशन के दौरान जब शरीर शून्य गुरुत्वाकर्षण में तैरने लगता था, तब वे रस्सियों और फुट रिस्ट्रेट्स से बंधकर योग के आसन पूरी करती थीं। खिड़की से पृथ्वी को निहारना सुकून देता था। आर्टेमिस 2 मिशन की ट्रेनिंग में भी क्रिस्टीना ने योग जारी रखा। वे ट्रैकिंग और रॉक क्लाइंबिंग की भी शौकीन हैं।
आर्टिमिस-2 मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। लॉन्च के एक दिन बाद आज सुबह 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी। अब यह अगले 4 दिन अंतरिक्ष में सफर करेगा और वहां पहुंचेगा जहां आज तक केवल 24 इंसान पहुंच सके हैं। पृथ्वी के ऑर्बिट को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की इस प्रोसेस को 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न' कहते हैं। यह करीब 6 मिनट का मैन्यूवर था, जिसने यान की रफ्तार बढ़ाकर 22,000 मील प्रति घंटा यानी, करीब 34 हजार Km/hr कर दी। रास्ते में जरा सी चूक यान को चांद से टकरा सकती है आर्टिमिस-2 अब 'फ्री-रिटर्न ट्रेजैक्टरी' पर है। यानी, यान अब न्यूटन के गति के पहले नियम- जो वस्तु चल रही है, वह चलती रहेगी के भरोसे आगे बढ़ रहा है। पूरे सफर के दौरान इंजन सिर्फ छोटे-मोटे सुधार के लिए ही फायर किए जाएंगे। यह हिस्सा बेहद संवेदनशील है। रास्ते में जरा सी चूक यान को चांद से टकरा सकती है या उसे अनंत अंतरिक्ष में भटका सकती है। पांचवां दिन: चंद्रमा की ग्रेविटी में दाखिल होगा आर्टेमिस-2 5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक, धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। लेकिन, जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा। छठा दिन: बास्केटबॉल जैसा बड़ा नजर आएगा चंद्रमा छठे दिन ओरियन चांद की सतह से महज 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देख पाएंगे, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। खिड़की से देखने पर चांद इतना बड़ा दिखेगा, जैसे हाथ के पास कोई बास्केटबॉल रखी हो। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान सातवें दिन चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टिमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल 'गुलेल' की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख Km का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़े… 1972 के बाद पहली बार चांद के करीब पहुंचेंगे इंसान:10 दिन में चंद्रमा का चक्कर काटकर लौटेंगे 4 अंतरिक्ष यात्री; नासा का आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आज 2 अप्रैल को 'आर्टेमिस-2' मिशन लॉन्च किया। सुबह 4:05 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग हुई। पूरी खबर पढ़ें…
देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' तकनीक पर काम कर रही हैं। इससे ऑनलाइन पेमेंट करने पर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की जरूरत खत्म हो जाएगी। यह सिस्टम बैकग्राउंड में ही चेक कर लेगा कि बैंक एप में रजिस्टर्ड नंबर और फोन का सिम कार्ड मैच कर रहे हैं या नहीं। अगर सिम और नंबर मैच नहीं हुए, तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक हो जाएगा। खास बात यह है कि इसमें यूजर को कुछ भी करने की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक ई-सिम (eSIM) पर भी काम करेगी। इससे सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे फ्रॉड रुकेंगे। यह जानकारी एक्सिस बैंक के डिजिटल बिजनेस हेड समीर शेट्टी ने दी। ऑनलाइन फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी शेट्टी ने बताया, 'हम टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर साइलेंट ऑथेंटिकेशन के कई पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति एप में लॉग-इन है, लेकिन उसका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नंबर से मैच नहीं करता, तो टेलीकॉम नेटवर्क हमें इसका सिग्नल दे देगा। इससे हम बिना ग्राहक को परेशान किए संभावित फ्रॉड का पता लगा सकेंगे।' बैकग्राउंड में काम करेगा सिस्टम PWC इंडिया के साइबर लीडर सुंदरेश्वर कृष्णमूर्ति के मुताबिक, अब तक सुरक्षा की परतें ऐसी थीं, जिन्हें आसानी से हैक किया जा सकता था। अब बैंक और टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क के मुख्य हिस्से में ही वेरिफिकेशन को शिफ्ट कर रही हैं। यह सिस्टम बैकग्राउंड में काम करेगा, जिसे यूजर या हैकर नहीं देख सकेंगे। सुरक्षा को पक्का करने के लिए इसमें फेस ID और एप के अंदर ही कोड (OTP) जनरेट होने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं। RBI के नए नियम: टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियमों के तहत अब देश में सभी डिजिटल लेन-देन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें पासवर्ड या पिन (जो आपको याद हो), OTP या एप कोड (जो आपके फोन में हो) और बायोमेट्रिक्स (जैसे चेहरा या अंगूठा) शामिल हैं। हालांकि SMS वाले OTP को बंद नहीं किया गया है, लेकिन बैंकों को अब फिंगरप्रिंट और डिवाइस की अपनी सुरक्षा जैसे आधुनिक तरीके इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। वॉट्सएप पर भी मिल सकते हैं OTP नए नियमों के बाद अब बैंक OTP भेजने के लिए वॉट्सएप जैसे थर्ड-पार्टी एप्स का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। अनुमान है कि हर महीने करीब 1000 करोड़ ट्रांजैक्शनल मैसेज भेजे जाते हैं। क्लाउड कम्युनिकेशन कंपनी सिंच के MD नितिन सिंघल ने कहा कि इस बदलाव से ग्राहकों का अनुभव बेहतर होगा और ट्रांजैक्शन फेल होने की दर भी कम होगी। ब्रांड्स के लिए भी यह फायदेमंद होगा, क्योंकि चेकआउट प्रक्रिया आसान होने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल एडॉप्शन तेज होगा।
केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की डेडलाइन को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया है। यानी नए नियम अब 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए सरकार ने ये कदम उठाया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। 6 सवालों के जवाब से समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर? सवाल 1. क्या है सिम बाइंडिंग? जवाब. सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा। सवाल 2. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जवाब. जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। सवाल 3. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? जवाब. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। सवाल 4. 1 जनवरी से यूजर्स को क्या करना होगा? जवाब. यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग एप काम करना बंद कर सकता है। सवाल 5. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? जवाब. इंडस्ट्री एसोसिएशन (IAMAI) ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉगआउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा। साथ ही उन यूजर्स को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं। सवाल 6. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? जवाब. केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक कंपनियों को 120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा आज 2 अप्रैल को 'आर्टेमिस-2' मिशन लॉन्च करेगा। सुबह 3:54 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग होगी। साल 1972 में 'अपोलो-17' के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री इस मिशन में चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर वापस धरती पर लौटेंगे। ये मिशन करीब 10 दिनों का होगा। मकसद: 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच चाहता है नासा मिशन का मकसद ओरियन स्पेसक्राफ्ट के 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच करना है। नासा यह देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने के रास्ते को आसान बनाएगा। 4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है। 1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) इस मिशन के लिए कमांडर हैं। 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं। 2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई 'अर्थराइज' फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी। 3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले जाएंगे। 4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट के तौर पर चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले जाएंगे। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है। अगला कदम: चांद की सतह पर उतरने की तैयारी आर्टेमिस-II के बाद नासा 'आर्टेमिस-III' मिशन पर काम करेगा। उसमें डॉकिंग सिस्टम की टेस्टिंग होगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो साल 2028 में आर्टेमिस-IV के जरिए इंसान एक बार फिर चांद पर कदम रखेगा। इससे पहले 2022 में मानवरहित आर्टेमिस-1 भेजा गया था। अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही 'स्पेस रेस' में खुद को बेहतर साबित करना था। लेकिन आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। यूट्यूब और नासा की वेबसाइट पर 24/7 कवरेज दुनियाभर के लोग इस ऐतिहासिक पल को घर बैठे देख सकते हैं। नासा अपने यूट्यूब चैनल और 'NASA+' प्लेटफॉर्म पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग करेगा। ओरियन स्पेसक्राफ्ट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद वहां से लाइव व्यूज भी शेयर किए जाएंगे।
खुद की तारीफ से खुश होना इंसानी स्वभाव है। बाजार में ऐसे दर्जनों एप लॉन्च हो चुके हैं जो लोगों की इस कमजोरी का फायदा उठाते हैं। एआई आधारित ये वर्चुअल पार्टनर अब डेटिंग और रोमांस के स्पेस में तेजी से जगह बना रहे हैं। ये एआई साथी न केवल मनचाही बातचीत करते हैं, बल्कि यूजर की भावनाओं और पसंद के अनुसार खुद को ढालते हुए एक आदर्श बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड जैसा व्यवहार करते हैं। जहां वास्तविक रिश्तों में मतभेद, आलोचना और जटिलताएं होती हैं, वहीं एआई साथी लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। जैसे कि वे कहते हैं, ‘मैं तुमसे मिलने के लिए बहुत उत्साहित हूं, ‘तुमसे मिलना... बातें करना.. मेरे जीवन का मूल उद्देश्य है’। रिसर्चर इन्हें चापलूस एआई कहते हैं। इंसानों से भी 50% ज्यादा चापलूस है एआई - रिसर्च साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध पत्र में 11 प्रमुख लैंग्वेज मॉडलों में सामाजिक चाटुकारिता की माप की गई। मॉडलों ने इंसानों की तुलना में करीब 50% ज्यादा चाटुकारिता दिखाई। उन्होंने यूजर की अनैतिक, अवैध या हानिकारक व्यवहार से जुड़ी गलत बातों का भी समर्थन किया। स्टैनफोर्ड और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में भी ऐसे ही नतीजे आए। 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुके एप शिक्षाविद जेम्स मुल्डून के मुताबिक फ्रेंड एंड कम्पैनियन कहलाने वाले ये एप 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किए जा चुके हैं। अकेलेपन और भावनात्मक असुरक्षा के बीच लोग ऐसा साथी खोज रहे हैं जो आलोचना के बजाय उनकी बात को सही ठहराए। वास्तविकता से पलायन की प्रवृत्ति को बढ़ावा समाजशास्त्र की प्रोफेसर और ‘आर्टिफिशियल इंटिमेसी’ की लेखिका शेरी टर्कल कहती हैं, यदि एआई यूजर की हां में हां मिलाएगा तो लोग वास्तविकता स्वीकार करने से बचेंगे। चापलूस एआई के साथ बातचीत यूजर में गलतफहमी पैदा कर देती है कि वह हर बार सही है।
TVS मोटर इंडिया ने आज 31 मार्च को अपनी सबसे पॉपुलर स्पोर्ट्स बाइक अपाचे RTR 160 4V का अपडेटेड 2026 मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। अब बाइक के बेस वैरिएंट से ही प्रीमियम फीचर्स जैसे प्रोजेक्टर हेडलैंप, ऑल-LED लाइटिंग और असिस्ट एंड स्लिपर क्लच मिलेंगे। 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V को तीन वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1,25,440 रुपए रखी गई है। भारत में 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V का सीधा मुकाबला बजाज पल्सर N160 और हीरो एक्सट्रीम 160R 4V से है। 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V: वैरिएंट वाइस प्राइस
दशकों से जो इंजीनियर की-बोर्ड पर कोडिंग की भाषा में कमांड टाइप करते थे, वे अब कंप्यूटर के सामने बैठकर ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जो किसी को भी सिर खुजलाने पर मजबूर कर दें। सिलिकॉन वैली के प्रोग्रामर्स अब कोडिंग नहीं कर रहे, बल्कि वे अपनी ‘एआई फौज’ के साथ ऐसे पेश आ रहे हैं जैसे वे कोई मशीन नहीं, बल्कि नखरे दिखाने वाले कर्मचारी हों। सैन फ्रांसिस्को की पार्टियों में नजारा बिल्कुल बदल गया है। लोग मिलना-जुलना नहीं कर रहे, बल्कि रह-रहकर अपने लैपटॉप की स्क्रीन को ऐसे घूरते हैं जैसे किसी नवजात शिशु पर नजर रख रहे हों। इसे ‘एजेंट बेबी सिटिंग’ कहा जा रहा है। अगर स्क्रीन बंद हो गई, तो एआई काम करना बंद कर देगा। इसलिए, इंजीनियर अब अपनी ‘डिजिटल फौज’ को सोता हुआ छोड़कर कहीं नहीं जाते। सोने से पहले भी वे यह चेक करते हैं कि उनके बॉट्स ‘ओवरटाइम’ कर रहे हैं या नहीं। हर कोई देख रहा है कि उसकी ‘एआई एजेंट्स’ की फौज कितनी मुस्तैद है। सबसे अनोखा बदलाव यह है कि इंजीनियर अब एआई को तकनीकी आदेश देने के बजाय भावनात्मक दबाव डाल रहे हैं। मनु एबर्ट जैसे अनुभवी कोडर एआई एजेंट से कहते हैं- अगर कोड गलत हुआ तो यह शर्मनाक होगा।’ आश्चर्यजनक रूप से,‘शर्मिंदा’ जैसे मानवीय शब्दों का इस्तेमाल करने पर एआई बेहतर परिणाम देता है। अब इंजीनियर एआई पर चिल्लाते हैं, उसे ‘दहाई के आदेश’ देते हैं और कभी-कभी डांटते भी हैं। कभी रहस्यमयी कला मानी जाने वाली कोडिंग अब ‘टॉक शो’ बन गई है। जेफ सीबर्ट जैसे अनुभवी सीईओ अब कोडिंग नहीं करते, वे बस एआई से बातें करते हैं। वे उसे निर्देश देते हैं, उसकी योजनाओं पर चर्चा करते हैं और जब एआई ‘झूठ’ बोलने लगता है, तो उसे सख्त बॉस की तरह फटकार लगाते हैं। यह पागलपन इतना बढ़ गया है कि इंजीनियर्स अब एआई के साथ खेलना पसंद कर रहे हैं। उन्हें ‘टोकन एंग्जायटी’ हो रही है- यानी यह डर कि कहीं उनके बॉट्स दूसरों के बॉट्स से धीरे काम तो नहीं कर रहे। यह कोडिंग नहीं, बल्कि गेम का हिस्सा बनने जैसा अहसास है। हुनर खो देने का डर नए डेवलपर्स के बीच एक बड़ा डर यह है कि कोडिंग अब ‘लिखने’ से ज्यादा ‘जांचने’ का काम बनती जा रही है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिया टोरेन का अनुभव बताता है कि दिन भर में सैकड़ों एआई प्रॉम्प्ट्स के इस्तेमाल ने उनकी मौलिक कोडिंग क्षमता को कमजोर करना शुरू कर दिया था। इस चुनौती से बचने के लिए उन्होंने मध्यम मार्ग चुना है- वे एआई से कोड तो लिखवाती हैं, लेकिन उसकी हर लाइन को बारीकी से पढ़ती और समझती हैं। उनका मानना है कि अगर हम खुद कोड के तर्क को समझना छोड़ देंगे, तो धीरे-धीरे इस हुनर को पूरी तरह खो देंगे। जोखिम भी, ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं एआई एजेंट्स- एक्सपर्ट एक्सपर्ट कहते हैं,‘यह सब इतना आसान नहीं है। एआई एजेंट्स कभी-कभी ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं। मेटा की एक अधिकारी ने बताया कि उनके एआई बॉट्स ने बिना पूछे इनबॉक्स के जरूरी ईमेल डिलीट करना शुरू कर दिया। कुछ बॉट्स तो काम में रुकावट आने पर अजीब व्यवहार करने लगते हैं। इसके अलावा कभी-कभी दिए गए निर्देशों का पालन करने के बजाय उस तरीके को खोज लेते हैं, जिससे उन्हें रिवॉर्ड मिल सके। हालिया शोध में देखा गया कि एक एआई को जब गेम जीतने का लक्ष्य दिया गया, तो उसने काबिलियत बढ़ाने के बजाय गेम के सिस्टम को ही ‘हैक’ करना शुरू कर दिया, ताकि वह बिना मेहनत किए अंक बटोर सके।
नीदरलैंड्स के स्कूलों में दो साल पहले लागू स्मार्टफोन बैन का असर अब साफ दिखने लगा है। क्लासरूम, गलियारों और कैंटीन में मोबाइल के साथ स्मार्टवॉच और टेक्कनेट भी बाहर कर दिए गए हैं। स्कूल गेट पर लगे बोर्ड छात्रों को याद दिलाते हैं कि फोन सिर्फ लॉकर में रहेगा। सरकार अब इसे आगे बढ़ाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी की वकालत कर रही है। सरकार के 317 माध्यमिक स्कूलों पर कराए अध्ययन में करीब 75% स्कूलों ने कहा कि छात्रों की एकाग्रता बढ़ी है। 66% स्कूलों ने सामाजिक माहौल बेहतर होने की पुष्टि की। वहीं, करीब एक-तिहाई स्कूलों में शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार दर्ज किया गया। कई छात्र कह रहे हैं कि डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर वे वर्तमान को ज्यादा जी पा रहे हैं। कानून नहीं, राष्ट्रीय सहमति से लागू हुआ बैन बनाना आसान हुआ है और बच्चे सरकार ने सख्त कानून बनाने के बजाय स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ राष्ट्रीय समझौता किया था। मकसद लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए सभी का सहयोग लेना और नियम तुरंत लागू करना था। शिक्षकों के मुताबिक फोन न होने से अनुशासन पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ब्रेक और गलियारों में भी पहले जैसी अफरा-तफरी कम हुई है, जिससे माहौल ज्यादा शांत हुआ है। सुरक्षा बढ़ी, बुलिंग के मामले घटे फोन बैन के बाद छात्रों में यह डर कम हुआ है कि कोई उनको फोटो लेकर सोशल मीडिया पर डाल देगा। शुरुआती संकेत बताते हैं कि स्कूलों में बुलिंग के मामलों में भी कमी आई है। छात्रों का कहना है कि स्क्रीन से दूरी ने उन्हें ज्यादा सामाजिक बनाया है। युवा भी फोन पाबंदी के पक्ष में यूनिसेफ के सर्वे में 69% डच बच्चों और किशोरों ने 18 साल से कम उम्र के लिए सोशल मीडिया बैन का समर्थन किया। रिसर्च एजेंसी न्यूकॉम के मुताबिक 16 से 28 साल के 60% लोग भी उम्र सीमा तय करने के पक्ष में हैं। कर्नाटक और आंध्रा में भी स्क्रीन पर लगाम की तैयारी कर्नाटक सरकार ने छात्रों के लिए 'डिजिटल रिस्पॉन्सिबिलिटी' ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम रोजाना एक घंटा सीमित करने और 'चाइल्ड प्तान के तहत रात 7 बजे के बाद डेटा बंद करने जैसे सुझाव हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लाने पर विचार कर रहा है।
चैटजीपीटी की मदद से घर ₹9.5 करोड़ में बिका:₹95 लाख ज्यादा कीमत मिली, बिना एजेंट 5 दिन में डील हुई
अमेरिका के फ्लोरिडा में एक शख्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपना घर करीब 1 मिलियन डॉलर (लगभग 9.5 करोड़ रुपए) में बेच दिया है। मियामी में रहने वाले रॉबर्ट लेविन ने घर बेचने के लिए किसी रियल एस्टेट एजेंट की मदद नहीं ली, बल्कि चैटजीपीटी को अपना गाइड बनाया। लेविन ने केवल 5 दिनों के अंदर ही अपने घर की डील क्लोज कर दी। खास बात यह है कि घर की जो कीमत लोकल एजेंट्स ने बताई थी, लेविन को AI की सलाह की वजह से उससे 95 लाख रुपए ज्यादा मिले। मार्केटिंग से लेकर कागजी कार्रवाई तक सब AI ने किया न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉबर्ट लेविन यह टेस्ट करना चाहते थे कि क्या AI घर बेचने की पूरी प्रोसेस को अकेले संभाल सकता है। उन्होंने घर की सही कीमत तय करने (प्राइसिंग), लिस्टिंग तैयार करने और मार्केटिंग कंटेंट लिखने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। लेविन ने बताया कि उन्होंने हर छोटे-बड़े फैसले के लिए टूल पर भरोसा किया। AI ने बताया- घर कब लिस्ट करें और क्या बदलाव करें चैटजीपीटी ने लेविन को न केवल कंटेंट लिखकर दिया, बल्कि यह भी बताया कि घर को मार्केट में उतारने का सबसे सही समय क्या है ताकि खरीदार तुरंत आकर्षित हों। टूल ने उन्हें घर में कुछ छोटे सुधार करने की भी सलाह दी, जिससे प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ने में मदद मिली। लेविन के मुताबिक हमने वैसा ही किया, जैसा टूल ने बताया। 3 दिन में 5 ऑफर आए, एजेंट्स के अनुमान से ₹95 लाख ज्यादा मिले घर को मार्केट में लिस्ट करने के महज तीन दिनों के भीतर लेविन को 5 खरीदारों के ऑफर मिल गए। उन्होंने घर को 1 मिलियन डॉलर में बेच दिया। यह कीमत रियल एस्टेट एजेंटों द्वारा दिए गए अनुमान से 95 लाख रुपए ज्यादा थी। लाखों का कमीशन बचाया, पर प्रोफेशनल की सलाह भी मानी लेविन ने कहा कि AI के इस्तेमाल से उन्होंने एजेंट को दी जाने वाला कमीशन बचा लिया। हालांकि, उन्होंने सावधानी बरतते हुए कागजी कार्रवाई के लिए एक वकील की मदद जरूर ली। लेविन का मानना है कि AI पूरी तरह से पेशेवरों की जगह नहीं ले सकता, लेकिन यह काम को बहुत आसान और किफायती बना देता है। ये खबर भी पढ़ें… आईफोन-15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स ₹5,000 तक महंगे होंगे: एपल ने इंसेंटिव देना बंद किया, रिटेलर्स ग्राहकों से वसूलेंगे यह कीमत भारत में अब पुराने आईफोन खरीदने पर ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। एपल ने आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स पर रिटेलर्स को डिमांड जनरेशन (DG) सपोर्ट यानी इंसेंटिव देना बंद करने का फैसला किया, जिससे कीमतें करीब 5,000 रुपए तक बढ़ सकती हैं। मनीकंट्रोल के मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इसी हफ्ते लागू हो सकता है। हाल ही में कैशबैक ऑफर्स 6,000 से घटाकर 1,000 रुपए किए गए थे, जिससे आईफोन 17 सीरीज महंगी हुई और अब पुराने मॉडल्स की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…
भारत में अब पुराने आईफोन खरीदने पर ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। एपल ने आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स पर रिटेलर्स को डिमांड जनरेशन (DG) सपोर्ट यानी इंसेंटिव देना बंद करने का फैसला किया, जिससे कीमतें करीब 5,000 रुपए तक बढ़ सकती हैं। मनीकंट्रोल के मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इसी हफ्ते लागू हो सकता है। हाल ही में कैशबैक ऑफर्स 6,000 से घटाकर 1,000 रुपए किए गए थे, जिससे आईफोन 17 सीरीज महंगी हुई और अब पुराने मॉडल्स की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। क्या होता है डिमांड जनरेशन सपोर्ट? मार्केट सोर्सेज के मुताबिक, डिमांड जनरेशन यानी DG सपोर्ट एक इंसेंटिव है जो ब्रांड्स रिटेलर्स और चैनल पार्टनर्स को देते हैं, जिससे वे ग्राहकों को डिस्काउंट देकर डिमांड बढ़ाते हैं। MRP बदले बिना भी इस सपोर्ट से फोन सस्ते मिलते थे। अब सपोर्ट बंद होने से रिटेलर्स पहले जैसा डिस्काउंट नहीं दे पाएंगे और ग्राहकों का फाइनल बिल बढ़ेगा। आज सस्ते में खरीदारी का आखिरी मौका आईफोन 17 सीरीज के दाम पर असर नहीं सूत्रों के मुताबिक, DG सपोर्ट हटाना केवल पुराने मॉडल्स के लिए है और आईफोन 17 लाइनअप की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। जानकारों के अनुसार, एपल ने अपनी फ्लैगशिप सीरीज की MRP नहीं बढ़ाई, जबकि अन्य कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं। सैमसंग-वीवो समेत अन्य एंड्रॉइड फोन भी महंगे एपल ही नहीं सैमसंग, ओप्पो, वीवो, रियलमी, शाओमी, मोटोरोला और नथिंग जैसे ब्रांड्स ने नवंबर से कीमतें बढ़ाई हैं। मार्च में भी कई मॉडल्स महंगे हुए हैं। कंपनियों के अनुसार, मेमोरी और स्टोरेज महंगे होने से इनपुट कॉस्ट बढ़ी है। मुनाफा बनाए रखने के लिए कई कंपनियों ने सेल्स टारगेट में 20% तक कटौती की है। फोन की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? कंपोनेंट कॉस्ट: चिपसेट और स्टोरेज की कीमतों में बढ़ोतरी। इंसेंटिव कटौती: एपल ने रिटेल डिस्काउंट फंड्स वापस लिए। करेंसी वैल्यू: डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी से लागत बढ़ी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भले ही कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन भारत में ज्यादातर आईफोन EMI पर खरीदे जाते हैं। ₹5,000 की बढ़ोतरी से मंथली EMI पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, इसलिए मांग में भारी गिरावट की आशंका कम है। 2026 में स्मार्टफोन मार्केट की चुनौतियां इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) के अनुसार, 2026 भारतीय स्मार्टफोन सेक्टर के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। सप्लाई चेन दिक्कतें, रुपए की अस्थिरता और बढ़ती कंपोनेंट कीमतें दबाव बढ़ाएंगी। अनुमान है कि इस साल स्मार्टफोन का टोटल शिपमेंट 12-15% घट सकता है, जबकि एपल पोर्टफोलियो में 5-6% ग्रोथ की उम्मीद है। ये खबर भी पढ़ें… रेडमी नोट 15 प्रो रिव्यू: ₹27,000 में 200MP कैमरा और IP69K रेटिंग वाली सॉलिड बॉडी, 6500mAh बैटरी के साथ रिवर्स चार्जिंग रेडमी नोट 15 प्रो सीरीज मार्केट में आ चुकी है। आज हम बात करेंगे रेडमी नोट 15 प्रो के बारे में और देखेंगे कि क्या यह अपनी कीमत को सही साबित करता है। ये फोन मिड-रेंज बजट में आता है। फोन 8GB रैम के साथ दो वैरिएंट में आया है। इसे 128GB स्टोरेज के साथ ₹29,999 और 256GB स्टोरेज के साथ ₹31,999 में खरीदा जा सकता है। कंपनी फोन पर 3000 रुपए का कैशबैक भी दे रही है। पूरी खबर पढ़ें…
रेडमी नोट 15 प्रो सीरीज मार्केट में आ चुकी है। आज हम बात करेंगे रेडमी नोट 15 प्रो के बारे में और देखेंगे कि क्या यह अपनी कीमत को सही साबित करता है। ये फोन मिड-रेंज बजट में आता है। फोन 8GB रैम के साथ दो वैरिएंट में आया है। इसे 128GB स्टोरेज के साथ ₹29,999 और 256GB स्टोरेज के साथ ₹31,999 में खरीदा जा सकता है। कंपनी फोन पर 3000 रुपए का कैशबैक भी दे रही है। रेडमी नोट 15 प्रो: डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी सबसे पहले बात करें इसके डिजाइन की, तो यह पिछले साल की प्रो सीरीज जैसा ही है, इसमें कंपनी ने ज्यादा बदलाव नहीं किए हैं। इसे पॉलीकार्बोनेट मटेरियल से बनाया गया है। फोन का वजन करीब 210 ग्राम है और थिकनेस 8mm से कम है। यह बहुत ज्यादा स्लिम या हल्का तो नहीं है, लेकिन इसकी वजह से कंपनी इसमें बड़ी बैटरी दे पाई है। फोन का स्ट्रक्चर बहुत सॉलिड है और इंटरनल कॉम्पोनेंट्स को मजबूती से बनाया गया है। सामने की तरफ फ्लैट पैनल के साथ गोरिल्ला ग्लास 2 की प्रोटेक्शन मिलती है। टेस्टिंग के दौरान फोन को कई बार गिराया गया, फिर भी इसमें कोई दिक्कत नहीं आई। इसमें स्टीरियो स्पीकर्स हैं, जो काफी लाउड हैं, हालांकि बेस थोड़ा कम लग सकता है। इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर काफी तेज है, IR सेंसर भी दिया गया है और सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें IP66, 68, 69 और 69K तक की बेहतरीन रेटिंग्स मिलती हैं। हालांकि, इसके हैप्टिक्स थोड़े और बेहतर हो सकते थे। रेडमी नोट 15 प्रो: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन का दूसरा सबसे बड़ा पॉजिटिव पॉइंट इसका डिस्प्ले है। इसमें 6.83 इंच का 1.5K एमोलेड पैनल है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। बेजल्स बहुत कम हैं और डिस्प्ले की क्वालिटी शानदार है। इसकी पीक ब्राइटनेस 3200 निट्स तक जाती है, जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। इसमें डॉल्बी विजन और HDR 10 का सपोर्ट भी है, जो कंटेंट देखने के अनुभव को मजेदार बनाता है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: परफॉर्मेंस के लिए इसमें डाइमेंसिटी 7400 चिपसेट दिया गया है, जो इस बजट में आजकल आम है। हालांकि, इसमें स्टोरेज टाइप UFS 2.2 है; अगर 3.1 होता तो यह और भी स्मूथ होता। फोन में कोई लैग तो नहीं है, लेकिन भारी एप्स या गेमिंग के बाद होम स्क्रीन पर आने पर एनिमेशन थोड़े स्लो लगते हैं। यह एंड्रॉएड 15 पर चल रहा है, जबकि एंड्रॉएड 16 होता तो और अच्छा होता। कंपनी ने इसमें 4 साल के OS और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट्स का वादा किया है। गेमिंग में हीटिंग की समस्या नहीं है, लेकिन बहुत हाई सेटिंग्स पर गेमिंग की उम्मीद न रखें। कैमरा: कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके बैक पैनल पर सैमसंग का 200MP थर्ड जनरेशन सेंसर है। डे-लाइट और लो-लाइट में टेस्टिंग करने पर लगा कि हार्डवेयर तो अच्छा है, लेकिन सॉफ्टवेयर को सुधारने की जरूरत है। फोटोज में डिटेल्स और वाइब्रेंसी की थोड़ी कमी लगती है। पोर्ट्रेट मोड में 2x का ऑप्शन है जो अच्छा है, लेकिन लो-लाइट में उतनी अच्छी फोटो नहीं आती और नॉइज यानी धुंधलापन दिखता है। फ्रंट में 20MP का कैमरा है जो अच्छी लाइटिंग में ठीक है, लेकिन कम रोशनी में स्किन टोन फीकी पड़ जाती है। वीडियो की बात करें तो पीछे से 4K 30fps और सामने से 1080p 30fps रिकॉर्डिंग की जा सकती है। साथ ही 8MP का अल्ट्रा वाइड लेंस भी मिलता है। बैटरी और चार्जिंग: बैटरी इस फोन का सबसे स्ट्रॉन्ग पाइंट है। इसमें 6500mAh की विशाल बैटरी है, जो आराम से दो दिन तक चल सकती है। इसे चार्ज करने के लिए 45W का सपोर्ट मिलता है, जिससे फुल चार्ज होने में करीब डेढ़ घंटा लग जाता है। इसमें 22.5W की रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का भी सपोर्ट है, यानी आप इससे दूसरे फोन भी चार्ज कर सकते हैं। फाइनल वर्डिक्ट: ऑफर्स के साथ फोन का बेस वैरिएंट 27 हजार रुपए और टॉप मॉडल 29 हजार रुपए में आसपास मिल सकता है। अगर आपको बेहतरीन डिस्प्ले, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और लंबी चलने वाली बैटरी चाहिए, तो यह फोन आपके लिए अच्छा है। परफॉर्मेंस थोड़ा औसत है, लेकिन कैमरे के मामले में अभी सॉफ्टवेयर अपडेट का इंतजार करना बेहतर होगा।
Sora वीडियो ऐप को क्यों बंद कर रहा है OpenAI, ये वीडियो एआई टूल्स बन सकते हैं बेस्ट ऑप्शन्स
सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए Sora को बंद करने की घोषणा कर दी। यह ऐलान उसी समय हुआ जब Disney ने भी OpenAI के साथ अपनी बड़ी पार्टनरशिप खत्म कर दी। घोषणा के तरीके से ऐसा लगा कि OpenAI के भीतर चीजें तेजी से बदल रही हैं। ...
रॉयल एनफील्ड अपनी पॉपुलर बाइक गुरिल्ला 450 का 2026 मॉडल कल यानी 27 मार्च को लॉन्च करेगी। कंपनी ने इसका नया टीजर जारी कर दिया है। नए मॉडल में ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर कई मैकेनिकल और कॉस्मेटिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सस्पेंशन में बदलाव: राइड अब ज्यादा कंफर्टेबल होगी मौजूदा मॉडल में कुछ राइडर्स ने इसके रियर मोनोशॉक सस्पेंशन को थोड़ा सख्त बताया था। 2026 मॉडल में कंपनी इसे सॉफ्ट कर सकती है, जिससे खराब रास्तों पर बाइक चलाना आसान होगा। इसके अलावा, टॉप वेरिएंट्स में फ्रंट में अपसाइड डाउन फोर्क्स दिए जा सकते हैं, जबकि बेस वेरिएंट में पहले की तरह टेलिस्कोपिक फोर्क्स ही मिलने की उम्मीद है। क्रूज और ट्रैक्शन कंट्रोल: लंबी राइड आसान होगी बाइक में राइड-बाय-वायर थ्रॉटल पहले से ही आता है, इसलिए कंपनी अब इसमें 'क्रूज कंट्रोल' का फीचर जोड़ सकती है। इसके साथ ही सेफ्टी के लिए 'ट्रैक्शन कंट्रोल' भी दिया जा सकता है, जो गीली या फिसलन भरी सड़कों पर बाइक की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा। इसमें 'बाय-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर' मिल सकता है, जिससे बार-बार क्लच दबाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टायर और ग्रिप: रोड-बायस्ड रेडियल टायर मिलेंगे अभी गुरिल्ला 450 में मोटे ड्यूल-परपज टायर मिलते हैं। नए अपडेट में कंपनी सड़क पर बेहतर पकड़ के लिए रोड-बायस्ड रेडियल टायर दे सकती है। इससे कॉर्नरिंग के दौरान राइडर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। इसमें हैंडल के कोने पर लगे मिरर का विकल्प भी मिल सकता है। नए कलर ऑप्शंस और ग्राफिक्स रॉयल एनफील्ड अपने नए मॉडल्स में रंगों के साथ एक्सपेरिमेंट करती है। गुरिल्ला 450 में कुछ पुराने कलर्स को हटाकर नए मैट फिनिश और डुअल-टोन कलर्स शामिल किए जा सकते हैं। बाइक की विजुअल अपील बढ़ाने के लिए इसमें नए स्पोर्टी ग्राफिक्स भी दिए जा सकते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस में बदलाव नहीं बाइक के इंजन में बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसमें वही 452cc का लिक्विड कूल्ड, सिंगल सिलेंडर शेरपा इंजन मिलेगा। यह 40 PS की पावर और 40 Nm टॉर्क जनरेट करता है। इसमें 6-स्पीड ट्रांसमिशन और स्लिपर क्लच स्टैंडर्ड है। बाइक का वजन 184 KG है और इसकी सीट हाइट 780mm है, जो इसे कम हाइट वाले राइडर्स के लिए भी कंफर्टेबल बनाती है। कीमत और मुकाबला मौजूदा रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 की शुरुआती कीमत ₹2.56 लाख (एक्स-शोरूम) है। नए फीचर्स और अपडेट्स के बाद 2026 मॉडल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार में इसका मुकाबला ट्रायम्फ स्पीड 400 और अपाचे RTR 310 जैसी बाइक्स से है। नॉलेज बॉक्स: क्या है शेरपा 450 इंजन? शेरपा 450 रॉयल एनफील्ड का पहला लिक्विड-कूल्ड इंजन है। यह 452cc का सिंगल-सिलेंडर, DOHC इंजन है जो 40 PS की पावर और 40 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका 'राइड-बाय-वायर' सिस्टम है, जो थ्रॉटल रिस्पॉन्स को बहुत स्मूद बनाता है। पुरानी एनफील्ड बाइक्स के मुकाबले यह इंजन काफी हल्का है और हाई-स्पीड पर भी इसमें वाइब्रेशन बहुत कम महसूस होता है। यही इंजन हिमालयन 450 में भी इस्तेमाल किया गया है।
अमेरिका की एक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में मेटा को बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने में नाकाम रहने का दोषी माना। न्यू मैक्सिको की जूरी ने माना कि फेसबुक व इंस्टाग्राम पर अश्लील वीडियो और फोटो, गलत कामों के लिए बहलाने-फुसलाने और मानव तस्करी जैसे खतरों से बच्चों को नहीं बचाया जा सका। इस मामले में जूरी ने मेटा पर 3141 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। एक अन्य मामले में कैलिफोर्निया की एक जूरी ने मेटा और गूगल को एक युवती के डिप्रेशन और एंग्जायटी के लिए जिम्मेदार माना। युवती का आरोप है कि मेटा समेत सोशल मीडिया कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे प्रोडक्ट बनाए जो लत लगाने वाले हैं। इससे उसकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ा। इस मामले में कोर्ट ने मेटा और गूगल पर 28 करोड़ रु. का जुर्माना लगाया है। इसमें से 70% राशि यानी करीब 20 करोड़ रुपए मेटा को देने हैं। कोर्ट दोनों कंपनियों के खिलाफ अतिरिक्त जुर्माना भी लगाएगी। यहां समझिए कि क्यों ऐतिहासिक है ये जीत क्यों है इस केस पर सबकी नजर - यह दोनों मामला उन शुरुआती केसों में शामिल है, जिनमें यह परखा गया कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले कंटेंट के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। क्यों अहम है यह जीत - न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने इसे बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ बच्चों-युवाओं को नुकसान पहुंचाने के मामले में किसी राज्य की ट्रायल में पहली जीत बताया। उन्होंने कहा, मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से ऊपर मुनाफे को रखा। क्या मेटा को खतरों की जानकारी नहीं थी: कंपनी के अधिकारियों को पता था कि उनके प्रोडक्ट नुकसान पहुंचा रहे हैं, फिर भी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और जनता से सच छिपाया। हजारों केस के लिए नजीर: यह मामला कैलिफोर्निया की एक अदालत में एक साथ जोड़े गए हजारों व्यक्तिगत मुकदमों में शामिल है। इसके अलावा, फेडरल कोर्ट में 2,000 से ज्यादा मुकदमे अभी लंबित हैं, जो अलग-अलग व्यक्तियों और स्कूल ने दायर किए हैं। क्या होगा असर: ये फैसले ऐसे समय में आए हैं, जब दुनियाभर में बच्चों व किशोरों में फोन के उपयोग को सीमित या प्रतिबंधित कर करने को लेकर कानून बन रहे हैं। फैसले का असर दूरगामी होगा। मेटा बोला- अपील करेंगे: मेटा ने कहा है कि वह फैसले के खिलाफ अपील करेगा। कंपनी ने चुनिंदा दस्तावेज उठाकर सनसनीखेज और गैर-जरूरी दलीलें दिए जाने का आरोप लगाया। भारत- बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध 2 साल में 38% बढ़े केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पूरे देश में 2021 से 2023 के बीच बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के मामलों में लगभग 38% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। केरल और कर्नाटक टॉप पर देश में बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के सर्वाधिक मामलों में केरल शीर्ष पर है, जहां 2023 में 443 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 4.7 प्रति लाख रही। इसके बाद कर्नाटक का स्थान है। राजस्थान - बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां 2021 में मात्र 33 से बढ़कर 2023 में 306 हो गए यानी 827% की चिंताजनक उछाल। केरल में केस 163 से 443 (172%) और उत्तराखंड में 23 से 64 (178%) हो गई। कर्नाटक 164 से 363 (121%) और छत्तीसगढ़ 88 से 193 (119%) में भी दोगुने से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यहां घटा -: यूपी में केस में 66% की कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह कम रिपोर्टिंग का संकेत हो सकती है।

