काम से ब्रेक लेकर मालदीव पहुंचे करण टैकर, शेयर की वेकेशन की खूबसूरत तस्वीरें
Mumbai , 24 सितंबर . Actor करण टैकर हाल ही में काम से समय निकाल कर मालदीव में वैकेशन मनाने गए. Thursday को Actor ने अपनी इस वैकेशन की झलक पोस्ट कीं, जिसमें आइलैंड की खूबसूरत लोकेशन पर बिताए समय की एक झलक दिखी. Actor ने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें वह अपनी ... Read more
भारत में परिवहन और आवागमन का परिदृश्य बीते कुछ वर्षों में बुनियादी तौर पर बदल चुका है। कभी एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए जाम, टूटी सड़कें और सुस्त रफ्तार वाली रेलगाड़ियां यात्रियों के घंटों बर्बाद कर देती थीं। आज वही सफर विश्वस्तरीय एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे और स्वदेशी सेमी-हाईस्पीड ट्रेनों के जरिए फर्राटेदार और बेहद सुगम बन चुका है। केंद्र सरकार की 'भारतमाला परियोजना', 'गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान' और भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान ने मिलकर देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और धार्मिक केंद्रों के बीच की दूरियों को समय के पैमाने पर आधा कर दिया है।एक्सप्रेसवे क्रांति: सड़कों पर 100 से 120 किमी/घंटा की निर्बाध रफ्तारदेश में आधुनिक एक्सप्रेसवे का बढ़ता नेटवर्क केवल कंक्रीट की सड़कें नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की नई जीवनरेखा बन चुका है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, समृद्धि महामार्ग (मुंबई-नागपुर), और बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स ने अंतर-शहर यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है। इन 6 से 8 लेन वाले नियंत्रित-पहुंच मार्गों पर बिना किसी ट्रैफिक सिग्नल या स्थानीय रुकावट के वाहन 100 से 120 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ते हैं। उदाहरण के तौर पर, लखनऊ से गाजीपुर तक 340 किलोमीटर से अधिक लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बनने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों की दूरी जो पहले 10 से 12 घंटे लेती थी, अब घटकर महज 4 से 5 घंटे रह गई है। इसी तरह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के तालमेल ने राजधानी लखनऊ से दिल्ली तक का सड़क मार्ग का सफर 6 से 7 घंटे के भीतर समेट दिया है।वंदे भारत और नमो भारत: रेलवे के बदलते ट्रैक और घटते घंटेसड़क परिवहन के साथ-साथ भारतीय रेलवे ने भी गति और आराम के मामले में लंबी छलांग लगाई है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों ने देश के कोने-कोने में लंबी दूरी के सफर को घंटों छोटा कर दिया है। 130 से 160 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति वाली इन चेयर-कार और स्लीपर ट्रेनों ने यात्रियों को हवाई यात्रा जैसा अनुभव पटरियों पर दिया है। दिल्ली से वाराणसी, दिल्ली से कटरा, मुंबई से अहमदाबाद, और चेन्नई से मैसूरु जैसे व्यस्त रेल रूटों पर यात्रा समय में 25% से 40% तक की भारी कटौती दर्ज की गई है। इसके समानांतर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में संचालित 'नमो भारत' (RRTS - रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) ने दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के बीच आवागमन को अभूतपूर्व गति दी है, जिससे दैनिक यात्रियों को जाम से पूरी मुक्ति मिली है।लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और व्यापारिक गतिविधियों को मिला बूस्टएक्सप्रेसवे और तेज रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ देश की अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिल रहा है। पहले जहां भारी ट्रकों और मालवाहक वाहनों को एक राज्य से दूसरे राज्य जाने में टोल नाकों, खराब सड़कों और शहरी जाम के कारण कई दिन लग जाते थे, वहीं अब समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor - DFC) और एक्सप्रेसवे के जरिए माल ढुलाई का समय 50% तक कम हो गया है। समय की बचत से ईंधन की भारी खपत घटी है, वाहनों का रखरखाव खर्च कम हुआ है और देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर वैश्विक मानकों के करीब लाने में बड़ी सफलता मिल रही है। औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) के एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और विनिर्माण इकाइयों को नई गति मिली है।टियर-2 और टियर-3 शहरों का मेट्रो शहरों से सीधा जुड़ावइस बुनियादी ढांचे की क्रांति ने देश के छोटे शहरों की किस्मत बदल दी है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, और वाराणसी जैसे शहर अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से इतने करीब महसूस होते हैं कि लोग सुबह निकलकर शाम तक अपना काम निपटाकर वापस लौट सकते हैं। दक्षिण भारत में बेंगलुरु और चेन्नई के बीच नए एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से दोनों आईटी हब के बीच की दूरी महज दो से तीन घंटे की रह जाएगी। पश्चिमी भारत में मुंबई और नागपुर के बीच का फासला समृद्धि महामार्ग के कारण 16 घंटे से घटकर लगभग 8 घंटे पर आ चुका है। इस तेज कनेक्टिविटी ने न केवल पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा तक आम जनता की पहुंच को आसान बनाया है, बल्कि रियल एस्टेट और स्थानीय उद्योगों में भी भारी उछाल ला दिया है।
छत्तीसगढ़ का बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद और हिंसा के संदर्भ में चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र आज प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और आतिथ्य के कारण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बदलते माहौल के साथ बस्तर में पर्यटन, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के नए अवसर आकार ले रहे हैं। बस्तर की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रकृति और संस्कृति का संगम है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर और कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनूठा अनुभव देते हैं। यहां आने वाला पर्यटक केवल दर्शनीय स्थल नहीं देखता, बल्कि स्थानीय जीवन, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत से भी जुड़ता है। यही वजह है कि बस्तर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव आधारित पर्यटन के एक खास क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। कनेक्टिविटी से खुल रहे विकास के नए रास्ते पर्यटन के विस्तार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। बस्तर में सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने के प्रयास पर्यटन की संभावनाओं को नई गति दे रहे हैं। ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसी योजनाएं भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाएं रखती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ केवल पर्यटकों को नहीं मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर संपर्क और युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। होमस्टे से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान का अनुभव देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। होमस्टे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच सकता है। पर्यटकों के ठहरने के साथ भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए आसपास के अन्य परिवारों के लिए भी आय के अवसर बन रहे हैं। बस्तर में नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपए और पहले से बने कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा 50 हजार रुपए की सहायता का प्रावधान है। न्यूनतम एक और अधिकतम नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था से ग्रामीण परिवार अपनी क्षमता के अनुसार पर्यटन गतिविधियों से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों के अनुदान के लिए बैंकों को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, जबकि 27 होमस्टे पहले से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं। संस्कृति बनी पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत बस्तर की जनजातीय संस्कृति उसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी और बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, नृत्य, संगीत और खान-पान देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच दे रहे हैं। वर्ष 2026 के बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और करीब 55 हजार आदिवासी लोगों की सहभागिता हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया। आस्था से एडवेंचर तक पर्यटन की कई संभावनाएं बस्तर में धार्मिक, सांस्कृतिक, इको और एडवेंचर पर्यटन की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को आधार देते हैं। वहीं कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति और रोमांच आधारित पर्यटन के लिए नए अवसर दे रहे हैं। धुड़मारास में एडवेंचर पर्यटन, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना है। गांव का यूएन टूरिज्म बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन भी ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दे रहा है। पर्यटन से रोजगार और स्थानीय समृद्धि बस्तर के पर्यटन विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय समुदाय तक इसका लाभ पहुंचाना है। होमस्टे संचालक, पर्यटन गाइड, स्थानीय ड्राइवर, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और साहसिक पर्यटन से जुड़े युवा इस नई पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं। बस्तर के पर्यटन रोडमैप के तहत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर स्थानीय कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयास सामने आते हैं। बस्तर की बदलती तस्वीर बस्तर का पर्यटन ऐसा मॉडल तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिसमें प्रकृति सुरक्षित रहे, जनजातीय संस्कृति की मौलिकता बनी रहे और पर्यटन से होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। सड़कें बस्तर को जोड़ रही हैं, हवाई संपर्क दूरी कम कर रहा है, रेल कनेक्टिविटी की संभावनाएं विस्तार पा रही हैं, होमस्टे गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इसकी सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने ला रहे हैं। बस्तर अब केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह संभावनाओं का नया अध्याय है, जहां जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की सुंदरता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी मिलकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई दिशा दे रही है। बस्तर की नई पहचान अब उसके अतीत से नहीं, बल्कि शांति, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की नई संभावनाओं से लिखी जा रही है।
दुनिया के 120 से ज्यादा देशों में घूम चुके हरियाणा के ट्रैवल व्लॉगर परमवीर बेनीवाल को अमेरिका में नस्लीय टिप्पणी का सामना करना पड़ा। लास वेगास में दो अमेरिकन युवकों ने बेनीवाल को रोककर कमेंट किए और इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की। अमेरिकन युवकों ने मजाक उड़ाते हुए कहा- क्या 7-इलेवन में कैशियर बनोगे असल में 7-इलेवन कन्वीनियंस स्टोर चेन है, जिसमें काफी संख्या में भारतीय कैशियर-क्लर्क जैसे जॉब करते हैं, जिन्हें अमूमन अमेरिकन यूथ जॉब के तौर पर पसंद नहीं करते। इसे कम दर्जे वाली जॉब मानते हैं। अचानक हुई इस तरह की टिप्पणी पर परमवीर घबराए नहीं बल्कि करार जवाब दिया। परमवीर ने कहा- तुम मुझे अफॉर्ड नहीं कर पाओगे ये सुनकर अमेरिकन युवक सन्न रह गए और कोई जवाब नहीं दे पाए। फिर वो डोंट-डोंट करते रहे। परमवीर ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने यूटयूब चैनल पैसेंजर परमवीर पर अपलोड किया है, जो काफी वायरल हो रहा है। पहले जानिये…लास वेगास का पूरा घटनाक्रम वीडियो वायरल होते ही दबाव में आया वेब स्ट्रीमर परमवीर का वीडियो वायरल होने के बाद कमेंट करने वाले अमेरिकन वेब स्ट्रीमर की ओर से भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया सामने आई है। इंस्टा अकाउंट @fore1gnxprime पर डाली वीडियो क्लिप्स के मुताबिक, उसने कहा कि हम पर भारतीयों का हमला हो गया है। उसने माना कि उसने “गलत इन्फ्लुएंसर से पंगा ले लिया”। यह भी कहा कि उसे लगता है कि वह भारत में बड़ा इन्फ्लुएंसर है, इसलिए अब भारतीय यूजर्स उसके अकाउंट्स पर स्पैम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय यूजर्स स्ट्रीमर के इंस्टाग्राम अकाउंट पर पहुंचकर उसके डायरेक्ट मैसेज (डीएम) में उसकी हरकत की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। एक क्लिप में स्ट्रीमर ने अपने फॉलोअर्स से कहा कि आगे की कुछ वीडियोज़ में वह 7-इलेवन रेज बेटिंग (यानी लोगों को भड़काने वाला कंटेंट) वापस लाएगा। उसने यह भी कहा कि तुम लोगों ने गलत इंसान से पंगा लिया है। यानी माफी मांगने या अपने व्यवहार पर खेद जताने के बजाय उसने उसी तरह का कंटेंट दोबारा बनाने की बात कही। क्या है 7-इलेवन वाला ताना परमवीर ने बताया कि अमेरिका में भारतीयों और अन्य दक्षिण एशियाई लोगों को अक्सर कन्वीनियंस स्टोर के कैशियर या कैब ड्राइवर के स्टीरियोटाइप में बांधकर मजाक बनाया जाता है। उनके मुताबिक, भारतीयों के लिए 7-इलेवन और अरब मूल के लोगों के लिए 9/11 जैसे तंज कसे जाते हैं। असल में 9/11 अमेरिका पर हुए आतंकी हमले का दिन रहा है। 7-इलेवन दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल-कन्वीनियंस स्टोर चेन में से एक है। सॉफ्ट रेसिज्म रोज झेलना पड़ता है परमवीर ने वीडियो में कहा कि उन पर इस घटना का ज्यादा असर नहीं पड़ा, क्योंकि विदेशों में सॉफ्ट रेसिज्म का सामना वे रोज करते हैं। उनका कहना था कि भारतीय मेहनत और कानूनी तरीके से कमाकर उन देशों की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं रुकनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से लोग ऐसे तंज समझ ही नहीं पाते और नस्लभेद का शिकार होकर चुप रह जाते हैं। वीडियो को मिले 32 लाख से ज्यादा व्यूज परमवीर ने यह पूरा वाकया 22 सितंबर को अपने चैनल पर साझा किया। वीडियो लास एंजिल्स के वेनिस बीच से लास वेगास तक के सफर पर आधारित है। खबर लिखे जाने तक इसे 32 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका था और 54 हजार से ज्यादा लाइक मिल चुके थे। परमवीर के यूट्यूब पर करीब 28.4 लाख सब्सक्राइबर हैं।
Travel Tips: राजस्थान में घूमने के लिए बढ़िया हैं ये हिल स्टेशन, जा सकते हैं आप भी
इंटरनेट डेस्क। अब सर्दियों के मौसम की शुरूआत होने वाली हैं और इसके साथ ही आपको भी घूमने जाने का मन हैं तो आप राजस्थान जा सकते है। आपको बता रहे है राजस्थान के उस हिल स्टेशन के बारे में जहां आप जा सकते है। माउंट आबू राजस्थान का हिल स्टेशन माउंट आबू लोगांे की पहली पसंद है। ये ऐसी जगह पर है जहां लोग घूमने जाते है और एंजोय करते है, ऐसा इसलिए की यहां एक से बढ़कर एक जगह देखने को मिलती है। वैसे बता दें की यह राजस्थान और गुजरात के बॉर्डर पर है। ऐसे में यहां दोनों ही राज्यों के खूब लोग पहुंचते है। जा सकते है आप बता दें की आप अगर अपनी छुट्टियां बिताने के लिए जयपुर, उदयपुर टूर पर हैं तो कुछ दूरी पर स्थित राजस्थान के इस खूबसूरत हिल स्टेशन पर जा सकते है। यहां आप अपना वीकेंड स्पेंड कर सकते है। बता दें की माउंट आबू को राजस्थान का शिमला भी कहते हैं। pc- gnttv.com
Flight Crew Visa: क्या Pilot और Air Hostess को भी हर देश के लिए Visa चाहिए? जानें International Travel के नियम
क्या होता है वर्क वेकेशन? जिस पर इस कपल ने ₹96,600 खर्च किए, ट्रेंड कर रहा लद्दाख का Video
क्या होता है वर्क वेकेशन? जिस पर इस कपल ने ₹96,600 खर्च किए, ट्रेंड कर रहा लद्दाख का Video
कूनो नेशनल पार्क में बनेगा नया रिकॉर्ड: नए पर्यटन सत्र में पहली बार खुले जंगल में दिखेंगे 16 चीते
कूनो नेशनल पार्क में बनेगा नया रिकॉर्ड: नए पर्यटन सत्र में पहली बार खुले जंगल में दिखेंगे 16 चीते
बिहार पर्यटन विभाग थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के पर्यटकों के लिए अपनी समृद्ध बौद्ध विरासत को बढ़ावा दे रहा है। एक थाई प्रतिनिधिमंडल ने बिहार का दौरा किया और पर्यटन सहयोग, कनेक्टिविटी और व्यापार साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की।
चूरू सहित शेखावाटी की विशिष्ट भित्तिचित्र कला को भारत की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने की तैयारी है। भारत सरकार के संगीत नाटक अकादमी व संस्कृति मंत्रालय ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कला परंपरा को सूची में 65वें क्रमांक पर स्थान दिया गया है। इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण व राष्ट्रीय पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। राष्ट्रीय पहचान मिलने से अंचल में पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। राजस्थान कला, संस्कृति एवं विरासत संरक्षण अभियान समिति की ओर से शेखावाटी की हवेलियों में उकेरे गए भित्तिचित्रों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे थे। संस्था ने संबंधित विभागों को लगातार पत्राचार किया और शोध सामग्री उपलब्ध कराई। इसके बाद संस्कृति मंत्रालय ने सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की। {जिला मुख्यालय पर 1870 में बनी सुराणा हवेली को चूरू का हवामहल कहा जाता है। इसमें 1133 खिड़की-दरवाजे हैं। यह हवेली फिल्मों की शूटिंग के लिए भी जानी जाती है। सुजानगढ़ में साहित्यकार कन्हैयालाल सेठिया की 135 वर्ष पुरानी हवेली स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है। वहीं रतनगढ़ में पोद्दार परिवार द्वारा निर्मित गजकेशरी हवेली स्थापत्य कला व भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। जिले में 400+ हवेलियां ऐसी हैं, जिनका सौंदर्यीकरण करवाकर पर्यटन के रूप में उपयोग किया जा सकता है। हालांकि अधिकतर के मालिक बाहर रहते हैं। जिला प्रशासन ने भित्ति चित्रों से सजी व स्थापत्य कला के रूप में विशिष्ट पहचान रखने वाली जिले की 112 हवेलियों को सूची तैयार करवाई है। इनमें सर्वाधिक सरदारशहर की 35, सुजानगढ़ की 24, छापर की 15, चूरू की 12, तारानगर की 9 व रतनगढ़ की 7 हवेलियां हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चूरू की सुराणा हवेली, कोठारी हवेली, पारख हवेली, बांठिया हवेली, बोथरा हवेली, रावतमल हवेली, नगरश्री व कोठारी हवेली पर क्यूआर कोड लगाए है, जिन्हें स्कैन कर अंदर के भित्तिचित्र देखे जा सकते हैं। शेखावाटी की सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। यह कला व विरासत प्रेमियों, शोधकर्ताओं, स्थानीय समुदायों व वर्षों से इस धरोहर को बचाने में जुटे लोगों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। -नितिन बजाज, संयोजक, राजस्थान कला, संस्कृति व विरासत संरक्षण अभियान समिति
दिवेर विजय महोत्सव का समापन 26 को, केंद्रीय पर्यटन मंत्री शेखावत व उप मुख्यमंत्री बैरवा आएंगे
प्रताप गौरव केंद्र में चल रहे 10 दिवसीय ‘दिवेर विजय महोत्सव’ का भव्य समापन समारोह 26 सितंबर को शाम 4 बजे केंद्र परिसर स्थित कुंभा सभागार में आयोजित किया जाएगा। महोत्सव के संयोजक रमन सूद ने बताया कि इस समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत होंगे। वहीं, राजस्थान के उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। समारोह की अध्यक्षता धरोहर के चेयरमैन एवं न्यासी संजय सिंघल करेंगे और नगर निगम उदयपुर के महापौर पारस सिंघवी विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। प्रताप गौरव केंद्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि महोत्सव के तहत चल रही कार्यशालाएं अब अंतिम चरण में हैं। चित्रकार अपनी कृतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं और जल्द ही प्रतियोगिताओं के परिणाम जारी किए जाएंगे। सहसंयोजक डॉ. देवेंद्र श्रीमाली के अनुसार, गुरुवार शाम 6 बजे पद्मिनी सभागार में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के तत्वावधान में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा, जिसमें भरतनाट्यम, कथक और कालबेलिया नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। सहसंयोजक हरीश राजानी ने बताया कि समापन व्यवस्थाओं को लेकर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा और महामंत्री दीपक शुक्ल के नेतृत्व में बैठक हुई। इसके अलावा, गुरुवार शाम पानेरियों की मादड़ी की मयूरवन कॉलोनी स्थित नर्बदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में ‘दिवेर का रणघोष’ नुक्कड़ नाटक का भी मंचन किया जाएगा।
प्रदेश में आयुर्वेद और वेलनेस सेवाओं के विस्तार के लिए बुधवार को 184 करोड़ रुपए की 25 आयुष परियोजनाओं की शुरुआत हुई। 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 आयुष भवनों का लोकार्पण किया, जबकि 13 भवनों, चिकित्सालयों और आयुर्वेद महाविद्यालयों का भूमिपूजन किया। प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जाएंगे। इन्हें ‘आयुष आरोग्यम धाम’ नाम दिया गया है। महाविद्यालय परिसर में तैयार स्टेट कंपोजिट हर्बल गार्डन का मुख्यमंत्री ने लोकार्पण किया। यहां आने वाले लोग पौधों के सामने लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर उनके बारे में जानकारी ले सकेंगे।डिंडौरी में 102 करोड़ का आयुर्वेद कॉलेज डिंडौरी में 102 करोड़ रुपए की लागत से बने आयुर्वेद महाविद्यालय का शुभारंभ हुआ। इसके साथ प्रदेश में आयुष महाविद्यालयों की संख्या 9 हो गई है। वहीं, 8 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय निर्माणाधीन हैं। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के मुताबिक प्रदेश में 1,773 आयुर्वेदिक औषधालय, 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 58 आयुष विंग संचालित हैं।आयुष इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष मंत्री से चर्चा के बाद निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्द शुभ समाचार मिलेगा।
मुनि की रेती क्षेत्र में बुधवार को गंगा की लहरों पर रोमांच का दौर शुरू हो गया। रिवर राफ्टिंग के नए सीजन का विधिवत शुभारंभ गंगा पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ।
लाल आतंक से मुक्ति, पर्यटन से समृद्धि; 'बस्तर 2.0' से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर
बस्तर अब नक्सलवाद की पहचान छोड़कर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और आतिथ्य के कारण पर्यटन का नया केंद्र बन रहा है। 'बस्तर 2.0' ब्लूप्रिंट, बेहतर कनेक्टिविटी और होमस्टे नीति के माध्यम से यह क्षेत्र स्थानीय समृद्धि और रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है।
Priyanka Gandhi ने Wayanad में सुरक्षा इंतजामों पर जताई नाराजगी, यात्रा योजना साझा न करने की चेतावनी
(फोटो के साथ)मलप्पुरम (केरलम), 23 सितंबर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने बुधवार को वायनाड लोकसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान किए गए व्यापक सुरक्षा इंतजामों पर आपत्ति जताई और कहा कि अगर ऐसी व्यवस्था जारी रही तो वह सुरक्षा कर्मियों के साथ अपनी यात्रा योजनाएं साझा करना बंद कर देंगी। वाद्रा ने सुरक्षा कर्मियों से दूरी बनाए रखने को कहा और कहा कि ऐसा नहीं होने पर वह उन्हें अपनी यात्रा योजनाओं की जानकारी देना बंद कर देंगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा, ‘‘कृपया अपने सुरक्षाकर्मियों से थोड़ी दूरी बनाए रखने को कहें।’’कांग्रेस सांसद ने दिन के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न स्थानों का दौरा किया, जिनमें जिले में हाल में आई बाढ़ में मारे गए छह लोगों में से एक सजीता का घर भी शामिल था। उन्होंने सजीता के परिवार से उनकी जरूरतों के बारे में पूछा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह सहानुभूतिपूर्वक हस्तक्षेप करेंगी। वाद्रा ने संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार से मिलने वाली आठ लाख रुपये की वित्तीय सहायता के अलावा वह परिवार की मदद करेंगी। उन्होंने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करने वाले श्रमिकों, ऑटोरिक्शा चालकों और वानीयमपुझा बस्ती के उन आदिवासियों से बातचीत की, जो 2019 की बाढ़ में विस्थापित हो गए थे। वानीयमपुझा बस्ती से विस्थापित हुए आदिवासियों के संबंध में वाद्रा ने कहा कि उनका पुनर्वास प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को जमीन मिल चुकी है, उनके लिए घरों का निर्माण कार्य तेज किया जाना चाहिए। क्षेत्र में मानव-पशु संघर्ष को लेकर कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है, जिसका कोई तत्काल समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं और इस मुद्दे पर चर्चा के लिए इस सप्ताह एक बैठक आयोजित की जाएगी। वाद्रा ने कहा कि समस्या के समाधान के तरीकों पर चर्चा के लिए बैठक में विशेषज्ञ शामिल होंगे। ‘वीबी-जी राम जी’ के तहत काम करने वाले श्रमिकों के साथ अपनी बैठक के दौरान उन्होंने सांसद को बताया कि काम से जुड़ी आवश्यकताएं, जैसे पोर्टल पर दिन में दो बार तस्वीरें अपलोड करना, उत्पीड़न के समान हैं और इनके कारण उनके काम के दिन कम हो रहे हैं। श्रमिकों की चिंताएं सुनने के बाद वाद्रा ने कहा कि नयी योजना रोजगार गारंटी अधिनियम की मूल भावना को कमजोर कर रही है और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस पहल को विफल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने श्रमिकों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को केंद्र सरकार के संज्ञान में लाया जाएगा और समाधान खोजने के लिए उस पर दबाव बनाया जायेगा। ऑटोरिक्शा चालकों ने सांसद के समक्ष अपनी चिंताओं को रखा और कहा कि ईंधन की ऊंची कीमतें तथा कलपुर्जों की लागत उनके लिए मुश्किलें पैदा कर रही हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने अन्य उपायों के अलावा तत्काल कदम के तौर पर ईंधन पर सब्सिडी देने की मांग की।
चीन में ग्रामीण पर्यटन सम्मेलन का दक्षिण इलाके में मुख्य स्थल का कार्यक्रम शुरू
बीजिंग, 23 सितंबर . चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के तत्वावधान और चीनी पर्यटन संघ के सह आयोजन में ‘चीन में ग्रामीण पर्यटन सम्मेलन यानी ग्रामीण सांस्कृतिक पर्यटन से खपत का प्रोत्साहन’ कार्यक्रम के देश के दक्षिणी इलाके में मुख्य स्थल का कार्यक्रम 22 सितंबर को चच्यांग प्रांत के हूचो शहर में शुरू हुआ. इस मौके ... Read more
AI की हुकूमत, अजीबोगरीब तकनीक; साल 6000 के ‘टाइम ट्रैवलर’ के ये दावे उड़ा देंगे नींद!
AI की हुकूमत, अजीबोगरीब तकनीक; साल 6000 के ‘टाइम ट्रैवलर’ के ये दावे उड़ा देंगे नींद!
Best Adventure Bikes: लंबी Road Trip के लिए ये 3 Adventure Bikes बन सकती हैं पहली पसंद
आज के दौर में एडवेंचर मोटरसाइकल सिर्फ बाइक नहीं, बल्कि रोमांच से भरी यात्राओं का साथी बन चुकी हैं। लंबी रोड ट्रिप, पहाड़ी सफर, पथरीले रास्ते या ऑफ-रोडिंग का शौक रखने वाले राइडर्स के बीच Adventure Bikes की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। SUV जहां आरामदायक सफर देती है, वहीं ADV बाइक राइडर को रास्ते के साथ सीधे जुड़ने और हर मोड़ को महसूस करने का अलग अनुभव देती है। मुश्किल रास्तों के लिए क्यों खास हैं Adventure Bikes? एडवेंचर मोटरसाइकल को खास तौर पर अलग-अलग तरह की सड़कों और कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इनमें ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस, मजबूत सस्पेंशन, दमदार इंजन और बेहतर राइडिंग एर्गोनॉमिक्स मिलते हैं। यही खूबियां इन्हें टूटे-फूटे रास्तों, गड्ढों और पहाड़ी ट्रेल्स पर सामान्य मोटरसाइकलों से ज्यादा सक्षम बनाती हैं। हालांकि, अलग-अलग मॉडल की ऑफ-रोड क्षमता अलग होती है, इसलिए बाइक चुनते समय अपने इस्तेमाल को ध्यान में रखना जरूरी है। इसे भी पढ़ें: KTM 160 Duke vs Yamaha MT-15 V2: 2 लाख से कम में कौन सी बाइक है बेस्ट? 1. BMW R 1300 GS: प्रीमियम एडवेंचर का दमदार नाम BMW R 1300 GS उन राइडर्स के लिए शानदार विकल्प है, जो पावर, तकनीक और लंबी दूरी के आराम को एक साथ चाहते हैं। इसमें 1,300cc का बॉक्सर इंजन मिलता है, जो मजबूत टॉर्क के साथ हाईवे और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर प्रभावशाली प्रदर्शन देने के लिए जाना जाता है। इसके एडवांस फीचर्स में राइडिंग मोड्स, क्रूज कंट्रोल और इलेक्ट्रॉनिक सस्पेंशन जैसी तकनीकें शामिल हैं। लंबी यात्राओं के साथ कठिन रास्तों पर भी इसकी क्षमता इसे प्रीमियम ADV सेगमेंट की खास बाइक बनाती है। 2. Triumph Tiger 1200: स्पीड और रोमांच का मेल Triumph Tiger 1200 उन लोगों को आकर्षित करती है जिन्हें एडवेंचर के साथ स्पोर्टी राइडिंग भी पसंद है। इसका तीन-सिलेंडर इंजन हाईवे पर शानदार प्रदर्शन देने के लिए जाना जाता है। बड़ा 21-इंच फ्रंट व्हील, शाफ्ट ड्राइव और लॉन्ग-ट्रैवल सस्पेंशन इसे कठिन रास्तों के लिए तैयार करते हैं। इसके कुछ वेरिएंट में बड़ा फ्यूल टैंक और ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस भी मिलता है। लंबी दूरी की यात्रा और ऑफ-रोड रोमांच के बीच संतुलन चाहने वाले राइडर्स के लिए यह आकर्षक विकल्प है। 3. Royal Enfield Himalayan: पहाड़ों का भरोसेमंद साथी Royal Enfield Himalayan एडवेंचर बाइक की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम है। इसका फोकस सिर्फ तेज रफ्तार पर नहीं, बल्कि कठिन इलाकों में सहज और नियंत्रित राइडिंग पर भी है। मजबूत डिजाइन, उपयोगी ग्राउंड क्लीयरेंस और लंबी यात्रा के अनुकूल एर्गोनॉमिक्स इसे पहाड़ी सफर और ऑफ-रोडिंग के लिए उपयोगी बनाते हैं। हिमालयी रास्तों से लेकर पथरीले ट्रैक तक, यह बाइक अपने संतुलित व्यवहार और मजबूत सस्पेंशन के कारण एडवेंचर राइडर्स के बीच लोकप्रिय है। यही वजह है कि बजट और उपयोग के हिसाब से यह बड़े प्रीमियम ADV मॉडल्स का व्यावहारिक विकल्प बन सकती है। सफर के हिसाब से चुनें अपनी बाइक अगर आपका फोकस प्रीमियम फीचर्स और दमदार टूरिंग पर है तो BMW R 1300 GS आकर्षक विकल्प है। स्पोर्टी अंदाज और लंबी दूरी के रोमांच के लिए Triumph Tiger 1200 बेहतर लग सकती है, जबकि व्यावहारिक एडवेंचर और पहाड़ी यात्राओं के लिए Himalayan पर विचार किया जा सकता है। बाइक खरीदने से पहले कीमत, वजन, सर्विस लागत, सीट हाइट और अपने वास्तविक इस्तेमाल को जरूर ध्यान में रखें। - डॉ. अनिमेष शर्मा
एक ही दिन में दो ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराने की सुविधा वाली महाकाल और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच की आध्यात्मिक सर्किट सेवा श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनती जा रही है।
सितंबर में विदेश घूमने का है प्लान? तो अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल करें ये 5 बेहद खूबसूरत डेस्टिनेशन
गर्मी के मौसम की चिलचिलाती धूप और उमस भरे दिनों के बाद जब साल के नौवें महीने यानी सितंबर की शुरुआत होती है, तो मौसम में एक सुहावना बदलाव देखने को मिलता है। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में सितंबर का महीना यात्रा प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मानसून अपने अंतिम चरण में होता है या कई जगहों पर सुहावनी शरद ऋतु की शुरुआत हो रही होती है। यदि आप भी इस सितंबर के महीने में अपने परिवार, पार्टनर या दोस्तों के साथ विदेश यात्रा (International Trip) पर जाने का मन बना रहे हैं, और समझ नहीं पा रहे हैं कि किस बेहतरीन जगह का चुनाव किया जाए, तो यह लेख आपके लिए बेहद खास है। समुद्र की नीली लहरें, सफेद रेत वाले बीच, सुनहरे सूर्यास्त और शांत वातावरण पसंद करने वाले सैलानियों के लिए बीच डेस्टिनेशन (Beach Destinations) हमेशा से पहली पसंद रहे हैं। सितंबर के महीने में दुनिया के कई खूबसूरत द्वीपों और समुद्र तटों पर पर्यटकों की भीड़ कम होती है, जिससे आपको शांति और सुकून के साथ छुट्टियां बिताने का शानदार मौका मिलता है। इस विशेष रिपोर्ट के माध्यम से हम विस्तार से जानेंगे कि सितंबर में विदेश घूमने के लिए कौन सी 5 सबसे बेहतरीन और पॉकेट-फ्रेंडली बीच जगहें आपके ट्रिप को हमेशा के लिए यादगार बना सकती हैं।1. बाली, इंडोनेशिया: प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और बजट फ्रेंडली बीच वेकेशन का सबसे बेहतरीन ठिकानाभारतीय पर्यटकों के बीच जब भी विदेश में बीच डेस्टिनेशन पर घूमने की बात आती है, तो सबसे पहला नाम इंडोनेशिया के खूबसूरत द्वीप बाली (Bali) का आता है। सितंबर का महीना बाली की यात्रा करने के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान यहां का मौसम बेहद सुहाना होता है, बारिश कम होती है और उमस भी न के बराबर होती है। बाली अपने प्राचीन हिंदू मंदिरों, हरे-भरे चावल के खेतों, पारंपरिक नृत्यों और दुनिया के सबसे खूबसूरत सनसेट वाले बीच के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां के कुटा बीच, सेमिन्याक बीच और उलूवातु मंदिर के आसपास के समुद्र तट सर्फिंग और वाटर स्पोर्ट्स के शौकीन लोगों के लिए स्वर्ग के समान हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय नागरिकों के लिए यहां ऑन-अराइवल वीजा की सुविधा उपलब्ध है और अन्य पश्चिमी देशों की तुलना में यहां रहना, खाना और घूमना काफी किफायती यानी पॉकेट-फ्रेंडली पड़ता है। यदि आप सितंबर में विदेश जाकर समंदर की लहरों के बीच रिलैक्स करना चाहते हैं, तो बाली आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।2. फुकेट, थाईलैंड: थ, नाइटलाइफ और रोमांचक वाटर स्पोर्ट्स का परफेक्ट कॉम्बिनेशनथैंकेस्ट एशियन कंट्री थाईलैंड का सबसे बड़ा द्वीप फुकेट (Phuket) अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच पार्टी कैपिटल और बीच टूरिज्म का एक बहुत बड़ा केंद्र है। हालांकि, जुलाई और अगस्त के दौरान यहां भारी मानसूनी बारिश होती है, लेकिन सितंबर के मध्य आते-आते मौसम साफ होने लगता है और पर्यटकों को कम खर्च में शानदार डील मिलने शुरू हो जाती हैं। फुकेट के पातोंग बीच, काटा बीच और करोन बीच अपनी सफेद रेत और क्रिस्टल क्लियर पानी के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। यहां आप स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, पैरासेलिंग और आइलैंड हॉपिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भरपूर आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा यहां के प्रसिद्ध फी फी आइलैंड्स (Phi Phi Islands) की बोट राइड आपके पूरे ट्रिप में चार चांद लगा देगी। भारतीय पर्यटकों के लिए थाईलैंड की यात्रा करना जेब के लिहाज से भी काफी आसान है और यहां का लजीज स्ट्रीट फूड पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है।3. मॉरीशस: हिंद महासागर के इस जन्नतनुमा द्वीप पर मनाएं शांत और रोमांटिक छुट्टियांयदि आप भीड़भाड़ से दूर किसी बेहद शांत, लक्जरी और प्राकृतिक रूप से समृद्ध द्वीप देश की तलाश में हैं, तो हिंद महासागर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित मॉरीशस (Mauritius) आपके लिए एक आदर्श विकल्प है। सितंबर के महीने में मॉरीशस में सर्दियों का मौसम चल रहा होता है, जिसके कारण यहां का तापमान बहुत ही सुहावना, ठंडा और आरामदायक रहता है। नीले और फिरोजी रंग का समंदर, विशाल कोरल रीफ और चारों ओर फैली हरियाली इस देश की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है। ब्लैक रिवर गॉर्ज नेशनल पार्क, इलेक्स सेरफ्स (Ile aux Cerfs) और मणौक द्वीप यहां के मुख्य आकर्षण हैं। मॉरीशस हनीमून मनाने वाले जोड़ों और परिवार के साथ छुट्टियां बिताने वालों के दोनों के लिए बेहद लोकप्रिय है। भारतीय नागरिकों के लिए इस देश की यात्रा के लिए वीजा की कोई झंझट नहीं है, जिससे प्लानिंग करना और भी आसान हो जाता है।4. सेशेल्स: अनछुए और कुदरती सौंदर्य से भरपूर 115 द्वीपों का यह अनोखा द्वीप समूहपूर्वी अफ्रीका के तट के पास हिंद महासागर में फैला सेशेल्स (Seychelles) दुनिया के सबसे खूबसूरत और कम भीड़भाड़ वाले द्वीप समूहों में गिना जाता है। यह देश 115 छोटे-बड़े ग्रेनाइट और प्रवाल द्वीपों से मिलकर बना है, जहां की प्राकृतिक सुंदरता आज भी अपनी मूल और अछूती अवस्था में मौजूद है। सितंबर का महीना सेशेल्स जाने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है क्योंकि इस दौरान यहां की हवाएं शांत होती हैं और समुद्र का पानी तैराकी तथा सेलिंग के लिए बिल्कुल अनुकूल रहता है। ला डाइग द्वीप का 'Anse Source d'Argent' बीच दुनिया के सबसे खूबसूरत और सबसे ज्यादा फोटोग्राफ किए जाने वाले समुद्र तटों में शुमार है। विशाल ग्रेनाइट चट्टानों के बीच फैला यह बीच और यहां का पारदर्शी पानी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यदि आप प्रकृति के बिल्कुल करीब रहकर कुछ दिन शांति और विलासिता के साथ बिताना चाहते हैं, तो सेशेल्स का यह सफर आपके लिए जीवन भर का सबसे हसीन अनुभव साबित होगा।5. लंकावी, मलेशिया: प्राकृतिक हरियाली, केबल कार और समुद्री सफारी का अद्भुत संगममलेशिया के उत्तर-पश्चिम तट पर अंडमान सागर में स्थित लंकावी (Langkawi) लगभग 99 द्वीपों का एक खूबसूरत और शांत द्वीपसमूह है। यदि आप बजट में रहते हुए एक अंतरराष्ट्रीय बीच वेकेशन का आनंद लेना चाहते हैं, तो लंकावी आपके लिए एकदम सही जगह है। सितंबर के महीने में यहां हल्की-फुल्की बारिश के बीच हर तरफ हरियाली अपने चरम पर होती है, जो देखने में बेहद मनमोहक लगती है। लंकावी का प्रसिद्ध 'स्काई ब्रिज' (Langkawi Sky Bridge) और ओरिएंटल विलेज पर्यटकों के बीच सबसे मुख्य आकर्षण का केंद्र है, जहां से बादलों और पहाड़ों के बीच समंदर का नजारा बेहद भव्य दिखाई देता है। चन्नांग बीच (Chenang Beach) पर वाटर स्पोर्ट्स का आनंद लेने के साथ-साथ आप मैंग्रोव फॉरेस्ट की बोट सफारी का भी लुत्फ उठा सकते हैं। मलेशिया सरकार द्वारा भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा मुक्त प्रवेश की सुविधा दिए जाने के बाद से लंकावी जाना और भी अधिक आसान और किफायती हो गया है।
तन-मन दोनों को चाहिए ब्रेक? भारत की ये 5 जादुई जगहें हैं परफेक्ट डिटॉक्स वेकेशन के लिए
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, काम का अंतहीन तनाव, शहर का प्रदूषण और हर वक्त डिजिटल स्क्रीन से चिपके रहने की आदत आज के दौर में इंसानी शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर बेहद बुरा असर डाल रही है। सुबह की भागदौड़ से लेकर रात के लेट नाइट वर्क तक, हमारा दिमाग और शरीर लगातार थकावट महसूस करता है, जिसके कारण अनिद्रा, चिंता, क्रॉनिक फटीग और ऊर्जा की कमी आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में जब शरीर और मन पूरी तरह थक जाते हैं, तो उन्हें एक ऐसे ब्रेक की सख्त जरूरत होती है जो केवल बाहरी सैर-सपाटा न हो, बल्कि भीतर से पूरी तरह हील कर सके। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए 'डिटॉक्स वेकेशन' (Detox Vacation) का ट्रेंड आज पूरी दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। भारत में ऐसी कई अद्भुत और नैसर्गिक जगहें मौजूद हैं जहां आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, ध्यान और प्राचीन भारतीय जीवन पद्धतियों के जरिए आपके तन और मन को पूरी तरह रीसेट किया जा सकता है। इस विशेष रिपोर्ट के माध्यम से हम विस्तार से जानेंगे कि भारत की वे कौन सी शीर्ष 5 डिटॉक्स जगहें हैं जहां जाकर आप अपनी थकी हुई जीवनशैली को अलविदा कह सकते हैं और एक नई ऊर्जा से भर सकते हैं।1. ऋषिकेश, उत्तराखंड: योग, अध्यात्म और गंगा किनारे मानसिक शांति का सबसे बड़ा केंद्रभारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में 'योग की राजधानी' के रूप में प्रसिद्ध उत्तराखंड का ऋषिकेश (Rishikesh) तन और मन को डिटॉक्स करने के लिए सबसे पहला और बेहतरीन विकल्प माना जाता है। हिमालय की गोद से निकलती पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा यह शहर सदियों से ऋषियों और मुनियों की साधना स्थली रहा है। यहां आपको दुनिया के सबसे बेहतरीन आयुष केंद्र, प्रमाणित योग आश्रम और विश्व स्तरीय आयुर्वेद व नेचुरोपैथी रिजॉर्ट मिल जाएंगे। सुबह-ससुबह गंगा की लहरों के बीच ध्यान करना, प्राणयाम सीखना और प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा लेना आपके शरीर के सभी टॉक्सिन्स को बाहर निकाल देता है। इसके अलावा यहां का सात्विक और ऑर्गेनिक भोजन आपके पाचन तंत्र को पूरी तरह विश्राम देता है। यदि आप अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से तंग आ चुके हैं और कुछ दिन पूरी तरह खुद के साथ बिताना चाहते हैं, तो ऋषिकेश का यह आध्यात्मिक वातावरण आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।2. अट्टापडी और पलक्कड़, केरल: प्रकृति की गोद में प्रामाणिक आयुर्वेदिक पंचकर्म और कायाकल्पजब बात शरीर की पूरी तरह शुद्धि और प्राकृतिक चिकित्सा की आती है, तो केरल (Kerala) का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। केरल के पलक्कड़ जिले में स्थित अट्टापडी (Attappadi) और पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के बीच फैले घने जंगल डिटॉक्स वेकेशन के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। यहां पारंपरिक आयुर्वेद की जड़ें बहुत गहरी हैं और योग्य चिकित्सकों की देखरेख में विशेष पंचकर्म (Panchakarma) थेरेपी दी जाती है। तेल मालिश, शिरोधारा, नवरकंजी और हर्बल स्टीम बाथ जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के जरिए शरीर की नसों और कोशिकाओं से सारे विषैले तत्व बाहर निकाल दिए जाते हैं। यहां के रिसॉर्ट्स और वैलनेस सेंटर पूरी तरह से प्राकृतिक और शांत वातावरण में बने होते हैं, जहां मोबाइल और इंटरनेट के शोर से दूर केवल पक्षियों की चहचहाहट और हवाओं की सरसराहट सुनाई देती है। यह जगह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह रीबूट करने की क्षमता रखती है।3. मुन्नार, केरल: चाय के हरे-भरे बागानों के बीच बादलों की छांव में मानसिक सुकूनकेरल का एक और खूबसूरत पर्वतीय स्थल मुन्नार (Munnar) अपनी अनूठी प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए पर्यटकों के बीच विशेष स्थान रखता है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर फैले मीलों लंबे चाय के हरे-भरे बागान, ठंडी हवाएं और चारों तरफ छाई धुंध आपके मन को पल भर में मोह लेती है। मुन्नार में डिटॉक्स वेकेशन का मतलब केवल घूमना नहीं है, बल्कि प्रकृति के सबसे करीब बैठकर अपने मानसिक तनाव को कोसो दूर भगाना है। यहां कई ऐसे इको-फ्रेंडली वेलनेस रिट्रीट हैं जो ऑर्गेनिक फार्मिंग, हर्बल टी थेरेपी, प्रकृति की गोद में लंबी ट्रैकिंग और मेडिटेशन सेशन की सुविधा प्रदान करते हैं। जब आप सुबह उठकर खिड़की से बाहर देखते हैं तो बादलों को छूते हुए पहाड़ दिखाई देते हैं, जो आपकी आंखों और दिमाग को एक असीम शांति प्रदान करते हैं। ताजी हवा और प्रदूषण मुक्त वातावरण आपके रेस्पिरेटरी सिस्टम और फेफड़ों को नेचुरल डिटॉक्स देने का काम करता है।4. धर्मशाला और मैक्लोडगंज, हिमाचल प्रदेश: तिब्बती बौद्ध दर्शन, ध्यान और हिमालयी हवाओं का संगमयदि आप पहाड़ों की ऊंचाई पर जाकर बौद्ध दर्शन, ध्यान (Meditation) और तिब्बती हीलिंग पद्धतियों के जरिए अपने मन को शांत करना चाहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश में स्थित धर्मशाला और मैक्लोडगंज (Dharamshala and McLeod Ganj) आपके लिए सबसे परफेक्ट जगह है। दलाई लामा का यह निवास स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से ओत-प्रोत है। यहां कई ऐसे प्रसिद्ध मेडिटेशन सेंटर और मठ हैं जहां विपश्यना, बौद्ध ध्यान और माइंडफुलनेस वर्कशॉप आयोजित की जाती हैं। हिमालय की ठंडी और शुद्ध हवा आपके फेफड़ों को तरोताजा कर देती है, जबकि यहां का तिब्बती हर्बल मेडिसिन सिस्टम और एक्यूपंचर थेरेपी शरीर के दर्दों को दूर करने में बेहद असरदार मानी जाती है। यहां के शांत कैफे में मिलने वाला हर्बल टी, ऑर्गेनिक फूड और ढोलाधार पर्वत श्रृंखलाओं का मनमोहक नजारा आपके मानसिक तनाव को पूरी तरह छूमंतर कर देता है।5. उदयपुर के आसपास के वैलनेस रिसॉर्ट्स, राजस्थान: शाही आतिथ्य के साथ वेलनेस और मेडिटेशनझीलों की नगरी उदयपुर (Udaipur) और उसके आसपास का शांत ग्रामीण परिवेश अब देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लग्जरी डिटॉक्स और वैलनेस टूरिज्म के एक बड़े हब के रूप में उभर रहा है। यदि आप बहुत अधिक दुर्गम पहाड़ों पर जाने की बजाय किसी शांत, आरामदायक और शाही माहौल में अपने तन-मन को डिटॉक्स करना चाहते हैं, तो उदयपुर के अरावली पहाड़ियों और झीलों के किनारे बने वेलनेस रिसॉर्ट्स बेहतरीन विकल्प हैं। यहां प्राचीन राजस्थानी जड़ी-बूटियों, आधुनिक स्पा थेरेपी, योग सत्र और हेल्दी डाइट प्लान का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है। झील के शांत पानी को निहारते हुए सूर्योदय या सूर्यास्त के समय मेडिटेशन करना मानसिक एकाग्रता को कई गुना बढ़ा देता है। यह वेकेशन उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है जो आराम और विलासिता के साथ-साथ अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना चाहते हैं।
जालंधर के रहने वाले हरदीप कुमार करीब तीन साल बाद कंबोडिया से भारत लौट आए हैं। उन्हें एक ट्रैवल एजेंट ने विदेश भेजने के नाम पर ठगा था। हरदीप के परिवार ने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद मांगी थी, जिसके बाद विदेश मंत्रालय और दूसरे अधिकारियों से संपर्क किया गया। स्वदेश लौटै हरदीप के परिवार ने बताया कि एक ट्रैवल एजेंट ने हरदीप को पुर्तगाल भेजने का लालच देकर करीब 7.5 लाख रुपए लिए थे। आरोप है कि एजेंट ने उसे पुर्तगाल भेजने के बजाय पहले थाईलैंड और फिर कंबोडिया भेज दिया। कंबोडिया पहुंचने पर हरदीप का पासपोर्ट भी उसे वापस नहीं मिला। मई 2025 में उसका वीजा भी खत्म हो गया, जिससे उसकी परेशानियां और बढ़ गईं। सड़क हादसे में टूटा पैर निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचे हरदीप कुमार ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि कंबोडिया में रहते हुए उनका एक सड़क हादसा हो गया था। इसमें उनका पैर टूट गया। हादसे के बाद उन्हें लंबे समय तक सही इलाज और जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाईं। परिवार के मुताबिक, उन्होंने करीब 15 महीने तक बहुत मुश्किल हालात झेले। हरदीप कुमार के परिवार ने 9 जून 2026 को राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद मांगी। उन्होंने हरदीप को कंबोडिया से सुरक्षित भारत वापस लाने की अपील की। मामले की गंभीरता को देखते हुए संत सीचेवाल ने तुरंत विदेश मंत्रालय को ईमेल भेजकर दखल देने को कहा। राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल ने उठाया मामला परिवार ने बताया कि जब उम्मीद के मुताबिक कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला फिर से विदेश मंत्रालय के सामने उठाया गया। साथ ही, कंबोडिया में भारतीय दूतावास से भी हरदीप की मदद और सुरक्षित वापसी के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया। लगातार कोशिशों के बाद अधिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई की। आखिरकार, 29 अगस्त 2026 को हरदीप कुमार अपने परिवार के पास सुरक्षित भारत लौट आए। परिवार ने सीचेवाल का जताया आभार हरदीप कुमार की सुरक्षित वापसी के बाद परिवार ने संत बलबीर सिंह सीचेवाल का आभार जताया। परिवार ने कहा कि उन्होंने मामले को विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के साथ-साथ लगातार फॉलो-अप किया, जिसके चलते हरदीप की भारत वापसी संभव हो सकी। संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि नौकरी और बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश जाने वाले युवाओं को ट्रैवल एजेंटों के झूठे वादों और गैर-कानूनी तरीकों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं और उनके परिवारों से अपील की कि विदेश जाने से पहले एजेंट और पूरी प्रक्रिया की अच्छी तरह जांच-पड़ताल करें तथा केवल कानूनी और सरकार द्वारा मंजूर माध्यमों से ही विदेश जाने की प्रक्रिया पूरी करें।
मोहाली आरटीओ ने पंजाब का टैक्स चुकाए बिना सड़कों पर दौड़ रहे प्राइवेट टूरिस्ट बसों और अन्य कमर्शियल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग को लंबे समय से ऐसे वाहनों की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान 13 वाहनों के चालान किए गए, जिनकी कुल राशि करीब 7 लाख रुपए है। चेकिंग के दौरान सामने आया कि कुछ टूरिस्ट बसें पंजाब का टैक्स जमा किए बिना यहां चल रही थीं। इससे परिवहन नियमों का उल्लंघन होने के साथ सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था। कार्रवाई के दौरान 8 टूरिस्ट बसों और 3 टेंपो ट्रैवलर्स के चालान किए गए। इसके अलावा कागजात और टैक्स से जुड़ी कमियां मिलने पर 10 से 12 वाहनों को अलग-अलग पुलिस थानों में जब्त करवाया गया। कुछ चालान मौके पर भरे, वाहन छोड़े कार्रवाई के दौरान कुछ वाहन चालकों ने मौके पर ही चालान और बकाया टैक्स जमा कर दिया। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनके वाहनों को छोड़ दिया गया। वहीं, जिन वाहनों के मामलों का मौके पर निपटारा नहीं हो सका, उन्हें पुलिस थानों में खड़ा करवाया गया। लालड़ू और लेहली थाने में जब्त वाहन असिस्टेंट आरटीओ गगनदीप ने बताया कि कार्रवाई में पकड़ी गई कुछ बसों को लालड़ू और कुछ को लेहली पुलिस स्टेशन में जब्त करवाया गया है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट बसों और अन्य कमर्शियल वाहनों की चेकिंग लगातार जारी रहेगी। जरूरत के अनुसार दिन के साथ रात में भी अभियान चलाया जाएगा। टैक्स बकाया या नियमों की अनदेखी मिलने पर वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Varanasi News: युवा पर्यटन क्लब ने जानी तुलसी और कबीर की संत परंपरा
Youth Tourism Club explored the saintly traditions of Tulsidas and Kabir
Viral Video: सारा अली खान का एडवेंचर वीडियो वायरल, खतरनाक अंदाज और खूबसूरत नजारे ने जीता लोगों का ध्यान
कीरतपुर-मनाली फोरलेन की सुरंगों के मुहानों पर दिखेगी हिमाचली परंपरा और पर्यटन स्थलों की झलक
कीरतपुर-मनाली फोरलेन की सुरंगों को हिमाचल की समृद्ध लोक-संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के चित्रों से सजाया गया है। यह कलाकृति पर्यटकों को राज्य की परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता से रूबरू कराएगी।
महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर का आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की योजना है। 15 एकड़ में बनने वाले इस श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू काॅम्प्लेक्स पर तिहत्तर करोड़ से अधिक की राशि खर्च होगी। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड अठारह महीने के भीतर इस भव्य परियोजना को पूरा करेगा।
मंगलवार को ललितपुर पहुंचे प्रशिक्षु पीसीएस अधिकारियों के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में एक बैठक और ब्रीफिंग सेशन रखा गया। इसकी अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दिनेश कुमार ने की। बैठक की शुरुआत में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) और कोषाधिकारी ने प्रशिक्षु पीसीएस अधिकारियों के दल नायक नितिन कुमार और अन्य सभी अधिकारियों का बुके देकर स्वागत किया। इसके बाद अपर जिलाधिकारी ने उन्हें ललितपुर जिले की भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से बताया। उपजिलाधिकारी ज्ञानेंद्र विक्रम ने जिले के प्रशासनिक मामलों, राजस्व संबंधी प्रकरणों, कृषि व्यवस्था और स्थानीय औषधीय वातावरण पर जानकारी दी। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता भूपेश सुहेरा ने पीपीटी के जरिए जिले के जल संसाधनों और प्रमुख बांधों की स्थिति के बारे में बताया। पर्यटन अधिकारी हेमलता ने ललितपुर जिले को पर्यटन के लिहाज से बहुत खास बताया। उन्होंने यहां के पुरातात्विक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का सचित्र प्रेजेंटेशन दिया। जीएसटी कमिश्नर हीरालाल ने जीएसटी विभाग के कामकाज और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी। कोषाधिकारी राहुल यादव ने जिले की ट्रेजरी प्रणाली, वित्तीय संचालन और प्रशासनिक गतिविधियों से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक के बाद ट्रेनी पीसीएस अधिकारियों के दल ने जिलाधिकारी सत्य प्रकाश से मुलाकात की। उन्होंने जिले के भ्रमण की रणनीति पर चर्चा की। इस मौके पर खंड विकास अधिकारी जखौरा सौरभ वर्णवाल समेत प्रशासन और अलग-अलग विभागों के कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश कार्मिक विभाग ने दो आईएएस अधिकारियों का तबादला किया है। अनुराग चंद्र शर्मा को पर्यटन विकास निगम का प्रबंध निदेशक बनाया गया है, जबकि डॉ. राजीव कुमार को अगली तैनाती का इंतजार है।
सुजान गंगा को पुनः जीवनदायिनी बनाकर पर्यटन का प्रमुख केंद्र विकसित किया जाएः सीताराम गुप्ता
गुप्ता ने कहा कि सुजान गंगा पर विगत वर्षों में किए गए कार्यों, प्रस्तावित कार्यों तथा वर्तमान स्थिति को प्रमुखता से उठाया गया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि कई स्थानों पर गंदगी, जलकुंभी और कचरे की समस्या बनी हुई है, तो यह संकेत है कि समस्या का समाधान केवल निर्माण एवं सफाई कार्यों से नहीं होगा।
New Delhi, 22 सितंबर . कुआलालंपुर स्थित भारतीय उच्चायोग ने Tuesday को एक एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों को आगाह किया है कि वे रोजगार की तलाश में मलेशिया जाने के लिए वहां की 30 दिन की वीजा-मुक्त प्रवेश सुविधा का दुरुपयोग न करें. उच्चायोग ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर वीजा अवधि ... Read more
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स अब प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होंगे: अश्विनी वैष्णव
फिल्मों और पर्यटन को जोड़ने के लिए सरकार की नई पहल; राज्यों से मांगे गए प्रस्ताव, पहला आयोजन एकता नगर में संभव।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुजरात के अहमदाबाद में नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स को भारत की प्रमुख पर्यटन जगहों तक ले जाने की पहल की गई है।
लंबी छुट्टी नहीं, छोटी-छोटी ट्रिप्स! Gen Z ने कैसे बदला ट्रैवल ट्रैंड?
Gen Z के बीच ट्रैवल का तरीका बदल रहा है. Airbnb की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 10 में से 7 युवा एक लंबी सालाना छुट्टी के बजाय तीन छोटी ट्रिप पसंद करते हैं. 95% चाहते हैं कि यात्रा पर्सनल और अलग हो, जबकि 87% मानते हैं कि उनका ट्रैवल स्टाइल उनकी पर्सनैलिटी दिखाता है. क्या अब साल में एक बड़ी छुट्टी का इंतजार पुराना हो गया है?
छत्तीसगढ़ में पर्यटन का ट्रेंड तेजी से धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ रहा है। 2025 में प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर 4.05 करोड़ यात्राएं दर्ज की गई। इनमें अकेले राजिम और डोंगरगढ़ की हिस्सेदारी 1.96 करोड़ यानी 48.4% रही। यानी प्रदेश में दर्ज लगभग हर दूसरी पर्यटन यात्रा इन दोनों धार्मिक स्थलों की रही। नए धार्मिक केंद्र भी बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, शिवरीनारायण, गिरौदपुरी धाम, कुदरगढ़ और चंद्रहासिनी मंदिर को 2025 में पर्यटन केंद्रों की सूची में शामिल किया गया। पहले ही साल इन पांच जगहों पर 95 लाख से ज्यादा यात्राएं दर्ज की गई। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर 3.15 करोड़ यात्राएं दर्ज हुई थीं। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 4.05 करोड़ हो गया। यानी महज एक साल में 90 लाख या 28.6% की वृद्धि हुई। उपलब्ध पिछले सात वर्षों के आंकड़ों में यह सबसे बड़ी वार्षिक संख्या है। राजिम और डोंगरगढ़ में सबसे ज्यादा फुटफॉल दर्ज किया गया। 2024 में राजिम में 78 लाख यात्राएं हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 1.12 करोड़ हो गई। यानी एक साल में 34 लाख की बढ़ोतरी। पहली बार सूची में 5 धार्मिक केंद्र, पहले साल 95 लाख पार छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 2025 में कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, शिवरीनारायण, गिरौदपुरी धाम, कुदरगढ़ और चंद्रहासिनी मंदिर चंद्रपुर को पर्यटन केंद्रों की सूची में शामिल किया। पहले ही साल इन स्थलों पर कुल 95 लाख से ज्यादा यात्राएं दर्ज हुईं। टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों का अनुमान है कि 2026 में इन पांच केंद्रों का आंकड़ा एक करोड़ के पार जा सकता है। बढ़ते फुटफॉल को देखते हुए यहां पर्यटक सुविधाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है। कौशल्या धाम में बने कॉटेज को लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू की गई है और इसके लिए जल्द टेंडर जारी करने की तैयारी है। दूसरे धार्मिक केंद्रों पर भी सुविधाएं और बुनियादी ढांचा बढ़ाने की योजना है। 2025 में प्रमुख केंद्रों पर बढ़ा फुटफॉल “छत्तीसगढ़ में अब अनुभव आधारित पर्यटन, होमस्टे, राम वन गमन परिपथ, जनजातीय व ईको टूरिज्म, बुनियादी ढांचे और पीपीपी के जरिए नए निजी निवेश पर काम कर रहे हैं। लक्ष्य पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाने व उनका खर्च भी बढ़ाना है।” —सौमिल रंजन चौबे, एमडी, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड
मारवाड़ ट्रेवल मार्ट से मारवाड़-थार को मिलेगा नया पर्यटन बाजार, जोधपुर में आगाज
जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में पहले मारवाड़ ट्रेवल मार्ट का आगाज हुआ। मारवाड़-थार की विरासत, संस्कृति, डेस्टिनेशन वेडिंग, ग्रामीण पर्यटन और आतिथ्य को देश के पर्यटन बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया।
MP Tourism का नया रिकॉर्ड, इंदौर-उज्जैन बने सबसे बड़े हब; 2025 में 21 करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे
मध्य प्रदेश में 2025 में पर्यटन ने रिकॉर्ड बनाया। पर्यटकों की संख्या 21.05 करोड़ पहुंची। इंदौर, उज्जैन और धार्मिक स्थलों ने पर्यटन वृद्धि में अहम योगदान दिया।
Kangra News: स्टेडियम के बाद चाय बागान बने नया पर्यटन केंद्र
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लिए दुनिया भर में मशहूर पर्यटन नगरी धर्मशाला में अब चाय के बागान सैलानियों के आकर्षण का नया केंद्र बनकर उभरे हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को एक दिवसीय दौरे पर नीमच पहुंचे। वे तय समय से करीब दो घंटे की देरी से दोपहर लगभग 2 बजे नीमच आए, जहां सीआरपी परिसर में बने हेलीपैड पर स्थानीय नेताओं और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। हेलीपैड से मुख्यमंत्री रोड शो करते हुए कामा बाई रोड स्थित अग्रोहा भवन पहुंचे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर आयोजित 'सेवा संकल्प अभियान' के कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कई योजनाओं के तहत लोगों को मदद पहुंचाई और स्कूली छात्रों को स्कूटी सहित अन्य सामान बांटे। गांधी सागर में चीता प्रोजेक्ट से पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा नीमच में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पर्यावरण को बचाते हुए रोजगार के नए साधन तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि नीमच में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। सीएम ने कहा कि बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता को गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ना इस पूरे इलाके के लिए बड़ी सौगात है, जिससे यहां पर्यटन के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। इससे पहले उन्होंने उज्जैन में बन रहे आईटी पार्क और विकास कार्यों का जायजा भी लिया था।
मुजफ्फरपुर के हजरत दाता कंबल शाह चिश्ती दरगाह शरीफ पर रविवार को चादरपोशी कार्यक्रम हुआ। पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने चिश्ती दरगाह शरीफ पर चादर चढ़ाई। देश-राज्य में अमन-चैन, भाईचारा, सामाजिक सौहार्द और सभी नागरिकों के कल्याण की दुआ मांगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। मौके पर बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस कार्यक्रम का मकसद समाज में एकता और समरसता का संदेश फैलाना था। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक भाजपा के जिला प्रवक्ता जुनैद खान थे। अध्यक्षता भाजपा मुजफ्फरपुर पूर्वी के जिलाध्यक्ष विवेक कुमार ने की। बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता खास मेहमान के तौर पर मौजूद रहे। एकता का दिया संदेश बीजेपी के नेताओं ने कहा कि मुजफ्फरपुर की धरती गंगा-जमुनी तहजीब, भाईचारे और सामाजिक समरसता के लिए जानी जाती है। यह संस्कृति पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे आयोजनों से समाज के अलग-अलग वर्गों में विश्वास, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री समेते पार्टी के नेता रहे मौजूद दाता कंबल शाह मजार के सचिव तनवीर आलम ने पूरी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधिवत इबादत और दुआएं कराई। जिसके बाद चादरपोशी की रस्म को विधि-विधान से संपन्न किया गया। इस क्षण में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष सैयद अफरीदी रहमान भी प्रमुखता से शामिल रहे। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविन्द्र प्रसाद सिंह, जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार, फेकु राम, जिला महामंत्री मनोज तिवारी, जिला मंत्री कृष्णा महतो, जिला मीडिया प्रभारी डॉ. साकेत शुभम ठाकुर, कार्यालय मंत्री दिलीप कुमार, मोहम्मद निजाम सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अमेरिकी दूतावासों ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अलर्ट जारी किए है।
विश्व पर्यटन दिवस 2026: सितंबर के आखिर में घूमने के लिए ये 5 जगहें हैं परफेक्ट
Places to Visit in September In India: हर साल 27 सितंबर को विश्व टूरिज्म डे मनाया जाता है। ऐसे में इस मौके पर हम आपको भारत की पांच ऐसी जगहों की जानकारी देंगे, यहां आप इस महीने के आखिर में घूमने जा सकते हैं।
शिमला: आईटीएचएम में खेल प्रतियोगिताओं के साथ पर्यटन सप्ताह 2026 का आगाज, टूरिज्म प्रीमियर लीग में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह
धामी सरकार की होम स्टे नीति: गांवों में पर्यटन को मिली नई रफ्तार, रिवर्स पलायन को मिली नई दिशा
धामी सरकार की होम स्टे नीति ने उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में पर्यटन को नई गति दी है, साथ ही रिवर्स पलायन को भी बढ़ावा मिला है। इस पहल से युवा और प्रवासी स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।
मध्य प्रदेश में पर्यटन...:हर 2 में से एक यात्रा उज्जैन-इंदौर की
मध्य प्रदेश में पर्यटन यात्राएं 2024 के 13.33 करोड़ से बढ़कर 2025 में 21.05 करोड़ हो गईं। यानी एक साल में 7.72 करोड़ या 57.9% की बढ़ोतरी। मप्र टूरिज्म बोर्ड के केंद्रवार आंकड़ों की पड़ताल बताती है कि कुल यात्राओं में आधे से ज्यादा हिस्सा सिर्फ उज्जैन-इंदौर का है। उज्जैन में 8.40 करोड़ और इंदौर में 2.81 करोड़ यात्राएं दर्ज हुईं। दोनों को मिलाकर यह 11.21 करोड़ यानी प्रदेश की कुल यात्राओं का 53.3% है। इस बढ़ोतरी में नए धार्मिक केंद्रों का जुड़ना भी अहम है। 2025 के आंकड़ों में शामिल कुबेरेश्वर धाम, रतनगढ़ माता मंदिर, बगलामुखी मंदिर, श्री पीतांबरा पीठ और बागेश्वर धाम में ही करीब 3.51 करोड़ यात्राएं दर्ज हुईं। उज्जैन में यात्राएं 7.32 करोड़ से बढ़कर 8.40 करोड़ हुईं, यानी 1.08 करोड़ ज्यादा। इंदौर में यह संख्या 1.03 करोड़ से बढ़कर 2.81 करोड़ हो गई। यहां 1.78 करोड़ की बढ़ोतरी हुई। भोपाल में 17.24 लाख से बढ़कर 24.63 लाख यात्राएं दर्ज हुईं। कुबेरेश्वर जैसे नए केंद्रों से जुड़ी 3.51 करोड़ यात्राएं... कुबेरेश्वर धाम में 1.50 करोड़ और रतनगढ़ माता मंदिर में 1 करोड़ यात्राएं दर्ज हुईं। बगलामुखी मंदिर में 51.69 लाख, श्री पीतांबरा पीठ में 40 लाख और बागेश्वर धाम में 9 लाख यात्राएं हुईं। ये केंद्र 2025 की पर्यटन सूची में पहली बार शामिल हैं। इसलिए सालाना बढ़ोतरी को पुराने पर्यटन केंद्रों की बढ़ी आवाजाही नहीं माना जा सकता। मप्र में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। अनुभव आधारित, ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे, संग्रहालय, बुनियादी ढांचे और नए होटल ब्रांड पर काम है। लक्ष्य पर्यटन की गुणवत्ता और पर्यटकों का खर्च बढ़ाना है। -इलैया राजा टी, एमडी, मप्र टूरिज्म बोर्ड
Ballia News: मां परमेश्वरी धाम में पर्यटन के विकास के लिए 1.20 करोड़ की योजना मंजूर
Scheme worth 1.20 crore approved for tourism development at Maa Parameshwari Dham.
अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग श्री अमृत अभिजात ने दीपोत्सव महोत्सव-2026 की तैयारियों के संबंध में अयोध्या के विभिन्न कार्यक्रम स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने सरयू अतिथि गृह, हेलीपैड, राम कथा पार्क, पार्किंग स्थल, तुलसी उद्यान, राम की पैड़ी सहित कई स्थलों का निरीक्षण किया। अपर मुख्य सचिव ने नगर विकास विभाग से संबंधित दीपोत्सव के निर्माणाधीन कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने को कहा। राम की पैड़ी पर यूपीपीसीएल द्वारा कराए जा रहे कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यक्रम स्थलों पर पेयजल, घाटों की साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, बैरिकेडिंग एवं श्रद्धालुओं के आवागमन सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि दीपोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आयुक्त सभागार में दीपोत्सव की तैयारियों की गहन समीक्षा स्थलीय निरीक्षण के उपरांत अपर मुख्य सचिव ने आयुक्त सभागार में मंडल एवं जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ दीपोत्सव महोत्सव-2026 की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष दीपोत्सव को गत वर्ष की अपेक्षा और अधिक भव्य एवं आकर्षक स्वरूप में आयोजित किया जाए तथा सभी आवश्यक तैयारियां निर्धारित समय से पूर्ण कर ली जाएं। इसी के साथ ही अयोध्या में दीपोत्सव-2026 को पहले से अधिक भव्य और आकर्षक बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार 28 लाख से अधिक दीप जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। दीपों के साथ इलेक्ट्रॉनिक दीपक भी आकर्षण का केंद्र होंगे। आयोजन में आम नगरवासियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के साथ देश के विभिन्न राज्यों की रामलीलाओं और दक्षिण भारतीय रामलीला को भी शामिल किया जाएगा। मुख्य आयोजन स्थल राम की पैड़ी की री-मॉडलिंग के साथ प्रकाश, सुरक्षा, श्रद्धालुओं के आवागमन और दर्शकों की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं को नया स्वरूप दिया जा रहा है। राम की पैड़ी पर यूपीपीसीएल की ओर से कराए जा रहे कार्यों में तेजी लाने और अधिकारियों को दिन-रात काम करने के निर्देश दिए गए। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग, यातायात और आवागमन व्यवस्था प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर मंडलायुक्त राजेश कुमार, डीआईजी सोमेन बर्मा, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अनुराज जैन, नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग एवं डायरेक्टर, मृदुल चौधरी, डिप्टी डायरेक्टर, कीर्ति, जिला पर्यटन अधिकारी, पारिजात पांडेय सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। शहरवासियों को भी जोड़ा जाएगादीपोत्सव की गतिविधियों में आम नगरवासियों की सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया है। तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से व्यवस्थाएं, राजमार्गों व प्रमुख मार्गों पर आकर्षक लाइटिंग, पास व्यवस्था, ड्रोन लाइट और आतिशबाजी की तैयारियां समय से पूरी करने को कहा गया।दक्षिण भारतीय रामलीला होगी आकर्षणस्थलीय निरीक्षण के बाद बैठक में तैयारियों की समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव ने झांकियों की गुणवत्ता व प्रस्तुतीकरण बेहतर करने तथा श्रीरामलीला और भरत मिलाप मंच की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए। देश के अनेक राज्यों की रामलीलाओं, मठ-मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन और मुख्य कार्यक्रम में दक्षिण भारतीय रामलीला के साथ अन्य आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए।
Jhansi News: रात में 60 की रफ्तार तक नहीं कटेगा चालान, 15 करोड़ की पर्यटन परियोजनाएं मंजूर
रात में 60 की रफ्तार तक नहीं कटेगा चालान, 15 करोड़ की पर्यटन परियोजनाएं मंजूर
मोहाली में ट्रैवल फर्मों पर कार्रवाई : एक लाइसेंस रद्द, एक बहाल
Action against travel firms in Mohali: One license cancelled, one restored
पंजाब के पर्यटन मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने बताया कि 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा स्कीम' के तहत 5,10,807 श्रद्धालुओं ने मुफ्त में विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन किए हैं।
यूपी: ब्रिक्स सम्मेलन के बाद यूपी पर्यटन में नई संभावनाओं पर वाराणसी में मंथन, कई मुद्दों पर चर्चा
सत्र के दौरान पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्रांडिंग और आतिथ्य उद्योग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
Travel Tips: Karnataka के Hampi में घूमें ऐतिहासिक मंदिर और Stone Chariot, ऐसे बनाएं टूर प्लान
अगर आप भी किसी ऐतिहासिक जगह पर घूमना चाहती हैं, जहां पर आप पुराने खंडहर, मंदिर, इतिहास और खूबसूरत पहाड़ देखना चाहती हैं। तो आपको कर्नाटक के हम्पी जाना चाहिए। कर्नाटक में तुंगभद्रा नदी के किनारे बसा हम्पी कभी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। आज भी आपको यहां पर बाजार, राजमहल, पुराने मंदिर और पत्थरों से बनी कई शानदार इमारतों के अवशेष दिखेंगे। हम्पी की खासियत यह है कि यहां पर सिर्फ इतिहास नहीं बल्कि बड़े-बड़े ग्रेनाइट पत्थरों से बने बेहद खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे। देश-विदेश से लोग यहां घूमने के लिए आते हैं। ऐसे में ज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको यहां जाने से लेकर घूमने तक की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Foreign Travel Mistakes: पहली विदेश यात्रा को आसान बनाने के लिए इन जरुरी नियमों को पहले ही जान लें हम्पी की खासियत हम्पी को देखकर ऐसा महसूस होगा, जैसे आप किसी पुराने शहर के बीच आ चुकी हैं। कभी हम्पी विजयनगर साम्राज्य की बड़ी और अमीर राजधानी थी। 14वीं से 16वीं सदी के दौरान यहां पर अच्छी खासी रौनक देखने को मिलती थी। यहां पर आज भी पुराने बाजार, मंदिर, राजघराने से जुड़ी इमारतें और दूसरी ऐतिहासिक जगहों के अवशेष देखने को मिलेंगे। हम्पी में जरूर देखें ये जगहें विरुपाक्ष मंदिर यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह यहां के खास मंदिरों में से एक है और आज भी यहां पर पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर का ऊंचा गोपुरम आपको दूर से ही नजर आएगा। यह मंदिर हम्पी बाजार के पास है। विजय विट्ठल मंदिर और स्टोन चैरियट इस मंदिर की गिनती हम्पी के सबसे शानदार ऐतिहासिक जगहों में की जाती है। मंदिर में खूबसूरत नक्काशी वाले कई खंबे देखने को मिलेंगे। इस जगह की सबसे बड़ी खूबसूरती स्टोन चैरियट यानी पत्थर का रथ है। इसको ग्रेनाइट से बनाया गया है, जोकि भगवान विष्णु के वाहन गरुण को समर्पित है। फिर इसके आगे आपको हाथियों की मूर्तियां भी बनी हैं। यह भारत के 50 रुपए के नोट पर भी दिखता है। लोटस महल आप यहां आने के दौरान लोटस महल जा सकते हैं। यह महल रॉयल सेंटर में हैं और इसका डिजाइन खिले हुए कमल की तरह है। इस कारण इसको लोटस महल कहा जाता है। इसकी बालकनी, मेहराब और पूरी डिजाइन ही इसको अन्य इमारतों से एकदम अलग बनाता है। हाथी अस्तबल आप हाथी अस्तबल भी जा सकते हैं। विजयनगर साम्राज्य के दौरान हाथियों को रखने के लिए इस जगह का इस्तेमाल होता था। इसमें लंबी इमारत में 11 बड़े गुंबददार कमरे बने हैं। क्वीन बाथ यह उस दौरान शाही परिवार के लिए एक पर्सनल क्वीन बाथ बनाया गया था। भले ही यह इमारत बाहर से सिंपल लगे, लेकिन अंदर जाने पर बड़ा सा चौकोर पूल, मेहराब और बालकनी देखने को मिलेगी। मातंगा हिल अगर आपको पूरा हम्पी देखना है, तो मातंगा हिल जाने का प्लान कर सकती हैं। यह हम्पी की सबसे ऊंची जगह है। यहां पर आपको तुंगभद्रा नदी, चट्टानों और खंडहर का बेहद शानदार नजारा दिखता है। यहां पर आपको सनराइज या सनसेट के समय पर जाना चाहिए। उग्र नरसिंह प्रतिमा हम्पी में एक ही ग्रेनाइट पत्थर से उग्र नरसिंह की बड़ी सी प्रतिमा बनाई गई है, जिसकी ऊंचाई करीब 6.7 मीटर है। इस प्रतिमा की खासियत यह है कि यह हम्पी की सबसे बड़े एक पत्थर से बनी मूर्ती में से एक है। हेमकूट हिल आप यहां पर हेमकूट हिल भी जा सकती है। यहां पर आपको कई छोटे मंदिर मिलेंगे। यहां से हम्पी के खंडहर और आसपास का इलाका देख सकते हैं। सुबह और शाम के समय यहां जाना बेस्ट है। हम्पी बाजार विजयनगर साम्राज्य के समय हम्पी बाजार एक बड़ा व्यापारिक इलाका था। यहां की बाजार वाली सड़क पर आपको आज भी पत्थर के पुराने मंडप देखने को मिलेंगी। उस दौरान हम्पी बाजार में हीरे, मोती, घोड़ों औऱ मसाले आदि का व्यापार होता है। चट्टानों वाला इलाका हम्पी में आपको सिर्फ पुराने मंदिर ही नहीं बल्कि जगह-जगह पर बड़े-बड़े ग्रेनाइट के पत्थर दिखेंगे। हम्पी में क्या-क्या करें आप यहां पर तुंगभद्रा नदी में कोरकल राइड का मजा ले सकते हैं। आप साइकिल लेकर यहां की अलग-अलग ऐतिहासिक जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। चट्टानों के कारण यहां पर आप बोल्डरिंग और रॉक क्लाइंबिंग भी की जाती है। आप मातंगा हिल से सनराइज या फिर सनसेट का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। तुंगभद्रा नदी के दूसरी ओर विरुपापुर गड्डे हैं, इसको हिप्पी आइलैंड भी कहा जाता है। ऐसे पहुंचे हम्पी अगर आप फ्लाइट से जाना चाहती हैं, तो हम्पी के लिए सबसे नजदीक जिंदल विजयनगर एयरपोर्ट है, जोकि करीब 40 किमी दूर है। वहीं बेंगलुरु का केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अच्छा ऑप्शन हो सकता है। अगर आप ट्रेन से जाना चाहती हैं, तो हम्पी के पास रेलवे स्टेशन होसपेट जंक्शन नजदीक है। यह करीब 13 किमी दूर है। यहां से आगे जाने के लिए टैक्सी, बस और दूसरी सवारी से हम्पी पहुंच सकते हैं। वहीं सड़क से हम्पी की दूरी करीब 340 किमी है। आपको बस या कार से पहुंचने में करीब 6-7 घंटे का समय लग सकता है। अगर आप बेंगलुरु या आसपास से हम्पी जा रही हैं, रोड ट्रिप भी अच्छा रहेगा। आसपास घूमने की जगहें हम्पी से तुंगभद्रा डैम करीब 15 किमी दूर है। तुंगभद्रा नदी के दूसरी ओर अनेगुंडी एक ऐतिहासिक गांव है। जोकि हम्पी से भी पुराना है और इस गांव का संबंध रामायण की कथाओं से है। हम्पी से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर दारोजी स्लॉथ बियर सेंचुरी स्थित है, ऐसे में आप यहां भी जा सकती है। सनापुर लेक का नजारा देखने के अलावा आप कोरकल राइड और सनराइज भी देख सकती हैं।
Foreign Travel Mistakes: पहली विदेश यात्रा को आसान बनाने के लिए इन जरुरी नियमों को पहले ही जान लें
हर किसी का सपना होता है कि एक दिन विदेश घूमने जा रहे हैं। नई संस्कृति, अलग खानपान और खूबसूरत जगहों को देखने का उत्साह अलग ही होता है। कई बार लोग पहली बार फॉरेन ट्रिप पर जाते समय कई सारी गलतियां कर देते हैं। इन्हीं गलतियों के कारण विदेशी यात्रा का मजा थोड़ा खराब हो जाता है। आइए आपको बताते हैं आप इन गलतियों से कैसे बचाव करें। जरूर डॉक्यूमेंट्स साथ रखें अगर आप पहली बार विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, तो पासपोर्ट, वीजा, ट्रैवल इंश्योरेंस और इंपोर्टेंट डॉक्यूमेंट्स की पूरी जांच करनी चाहिए। अक्सर लोग सिर्फ पासपोर्ट लेकर ही यात्रा पर निकल जाते हैं, बल्कि कुछ देशों में एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट भी जरुरी होते हैं। विदेश यात्रा से पहले पासपोर्ट की वैधता, वीजा के नियम और दूसरों जरुरी दस्तावेजों की जांच कर लें। इसके साथ ही उनकी डिजिटल और प्रिंट कॉपी भी अपने पास रख लें। बजट की सही प्लानिंग गौरतलब है कि विदेश में खर्च अक्सर उम्मीद से ज्यादा होता है। कई बार लोग होटल, लोकल ट्रांसपोर्ट, फूड और शॉपिंग के खर्च का सही अनुमान नहीं लगाते हैं। डेस्टिनेशन पर जाने से पहले खर्चों के बारे में रिसर्च कर लें। इसके लिए एक अनुमानित बजट बनाकर चलें और एक्स्ट्रा खर्च के लिए पैसे अलग रख लें। लोकल कल्चर की जानकारी न होना हर एक देश की अपनी संस्कृति, नियम और सामाजिक व्यवहार का तरीका होता है। पर्यटक अक्सर अनजाने में गलती कर देते है कि जो वहां असभ्य मानी जाती है। इसलिए किसी भी देश में जाने से पहले वहां की संस्कृति, पहनावे, पब्लिक बिहेवियर और स्थानीय नियमों के बारे में जान लें। जरूरत से ज्यादा सामान पैक करना जब पहली बार विदेश के लिए जाते हैं, तो जरुरत से ज्यादा कपड़े और सामान पैक कर लिए जाते हैं। इससे आपका बैग भारी हो जाता है और एयरलाइन के बैगेज नियमों की वजह से एक्स्ट्रा फीस देनी पड़ती है। खासतौर पर मौसम और ट्रिप के अनुसार ही जरुरी सामान ही पैक करें। लाइटवेट और स्मार्ट तरीके से पैकिंग करें, जिससे यात्रा आरामदायक बन जाएगी। लोकल ट्रांसपोर्ट की जानकारी न होना अक्सर लोग यही सोचते हैं कि विदेश जाकर वहां का सब समझ आ जाएगा। लेकिन लोकल ट्रांसपोर्ट, मैप्स और इंटरनेट कनेक्टिविटी की जानकारी न होने से परेशानी हो सकती है। इसलिए पहले से लोकल ट्रांसपोर्ट, मेट्रो कार्ड, ट्रैक्सी ऐप्स और इंटरनेट सिम या इंटरनेशनल रोमिंग के बारे में जानकारी अपने पास रखें।
Travel Tips: Trishla Farmhouse
इंटरनेट डेस्क। देशभर में 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाएगा। इसके लिए लोगों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। आज हम आपको एक शानदार जगह के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जहां पर आप परिवार के साथ शानदार तरीके से गणेश उत्सव का आयोजन कर सकते हैं। आज हम आपको त्रिशला फार्महाउस के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। गोनेर रिंग रोड के पास खिजूरिया ब्राहम्णान में स्थित इस फार्महाउस पर आप शानदार तरीके से इस उत्सव का आयोजन कर सकते हैं। यहां पर आप शानदार इनडोर और आउटडोर गेम एरिया, मजेदार पूल पार्टीज, स्वादिष्ट खाने और ताजी हवा के साथ लग्ज़री का अनुभव कर सकेंगे। आपको आज ही इसके लिए ये फार्महाउस को बुक करवा लेना चाहिए। आपको कम बजट पर कई सुविधाएं यहां पर मिलेंगी। व्हाट्सएप नंबर से हासिल करें ऑफर की जानकारी आप त्रिशला फार्महाउस में इस दौरान आप कम बजट में कई एक्टिविटीज का मजा ले सकते हैं। ऑफर से जुड़ी पूरी जानकारी के लिए व्हाट्सएप नंबर 9784461221 पर मैसेज करके हासिल की जा सकती है। इस प्रकार से पहुंचे आप जयपुर एयरपोर्ट से त्रिशला फार्महाउस आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां से इसकी दूरी केवल 22 किमी दूर ही है। जयपुर एयरपोर्ट से टैक्सी के माध्यम से आप आसानी से पहुंच सकते हैं। जयपुर रेलवे स्टेशन और बस स्टेंड से भी आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। इन स्थानों से भी टैक्सी के माध्यम से पहुंच सकते हैं। अक्षयपात्र जगतपुरा से तो त्रिशला फार्महाउस की दूरी केवल 15 किलोमीटर ही है। यहां से भी आसानी से यहां पर पहुंच सकते हैं। PC:livehindustan,trishla अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें View this post on Instagram A post shared by Trishla Farmhouse (@trishlafarmhouse)
Travel Tips: मणिपुर की सांस्कृतिक सुंदरता का प्रतीक है Kangla Fort, जानें कैसे पहुंचे Imphal
इंफाल एयरपोर्ट पर उतरते ही खुला आसमान और हवा की ताजगी आपका मोह लेगी। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हवाई अड्डा इतना सहज है कि विमान से उतरने के बाद पैदल भवन में एंटर किया जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर बसा इंफाल शहर अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा के लिए जाना जाता है। जहां एक तरफ युवा आधुनिक लिबास में नजर आते हैं। वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे पारंपरिक आउटफिट में दिखाई देती हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उन महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। इमा मार्केट यह समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक है। शहर के बीचो-बीच इमा मार्केट स्थित है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला मार्केट। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं। इसे भी पढ़ें: IRCTC Kashi Tirtha Yatra Package: 17 हजार में वाराणसी और Ayodhya घूमने का बजट फ्रेंडली अवसर पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे ब्लाउज, फनेक, दुपट्टे, शॉल, चादर, गमछे और अन्य कई तरह की चीजें शामिल हैं। वहीं एक हिस्से सिर्फ पूजा का सामान है। कांगला किला की सैर इसके अलावा इंफाल में आपको दो जगहें और देखनी चाहिए। जिनमें पहला कांगला किला और दूसरा लोकताल लेक है। कांगला फोर्ट शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे है। मेतेई भाषा में कांगला का अर्थ होता है जमीन का मुख्य भाग। मेतेई वर्तमान मणिपुर का मूल नाम है। मणिपुरी भाषा भी भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। आज भी मणिपुर के निवासियों के िए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां लगी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। यहां पर घूमने के लिए गोल्फ कार्ट की सुविधा मौजूद थी। लेकिन हमने पैदल घूमने का फैसला किया। इसके अंदर कई संग्रहालय हैं। कांगला संग्रहालय यहां प्राचीन शासकों से संबंधित वस्तुएं और इसका इतिहास देख सकते हैं। बोट म्यूजियम यहां पर प्राचीन शासकों की नावें और उनसे संबंधित जानकारी देखने को मिलेगी। पुरातत्व संग्रहालय पुरातत्व संग्रहालय को देखने से हमें मणिपुर के इतिहास के बारे में गहराई से जानकारी मिलती है। सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर सबसे सुंदर सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर लगे। सानामाही मेतेई वास्तुकला का उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी हुई है। जिसको मेतेई लोग शुभ और पवित्र मानते हैं। यहां पर कई और दर्शनीय स्थल है। जैसे - महाराजा नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति और राजा बोधचंद्र की समाधि है। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट में है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर का निर्माण कराया गया है। यह इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। जरूरी बातें ट्रेन से इंफाल पहुंचने के लिए आपको दीमापुर या गुवाहाटी जाना होगा। यहां से आप इंफाल के लिए बस ले सकते हैं। इसके अलावा देश के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा भी यहां पर आप सीधे पहुंच सकते हैं। यहां पर जाने के लिए सिंतबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है। क्योंकि इस दौरान मौसम काफी सुहावना होता है। मणिपुर राज्य में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइन परमिट लेना जरूरी है। हालांकि यह सुविधा अब ऑनलाइन भी है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से भी इसको प्राप्त किया जा सकता है। यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मौजूद है। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की प्रति जरूरी है। इसका शुल्क 100 रुपए है। विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होती है।
सफर से पहले याद रखें ये 15 ट्रैवल हैक्स, ट्रिप को हमेशा बना देंगे कम्फर्टेबल
किसी भी ट्रिप को आरामदायक बनाने के लिए उसे सही तरह से प्लान करना बहुत जरूरी है। ऐसे में यहां हम 15 ट्रैवल हैक्स शेयर कर रहे हैं, जो आपके लिए ट्रिप को कम्फर्टेबल बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं। देखिए, क्या हैं वह हैक्स।
UGC NET Re Exam 2026: दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को ट्रैफिक डायवर्जन के चलते NTA ने UGC NET री-एग्जाम के अभ्यर्थियों के लिए एडवाइजरी जारी कर समय से 2 घंटे पहले परीक्षा केंद्र की ओर निकलने की सलाह दी है।
Travel Tips: अगस्त-सितंबर में फूलों की घाटी की करें सैर, जानें Cost और Itinerary
उत्तराखंड में घूमने के लिहाज से एक से बढ़कर एक कई बेहतरीन जगहे हैं। वहीं उत्तराखंड के गढ़वाल की गोद में बसी खूबसूरत घाटी को 'Valley of Flowers' कहा जाता है। ऐसे में अगर आप भी रोजाना की भागदौड़ भरी जिंदगी से थक चुके हैं और पहाड़ों पर जाकर सुकून की तलाश में हैं। तो IRCTC का यह टूर पैकेज आपके लिए बेस्ट है। IRCTC आपके लिए 6 दिनों का टूर पैकेज आपके लिए बेस्ट है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस टूर पैकेज के बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं। वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक अगस्त-सिंतबर में होने वाली इस वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक की अवधि 6 दिन है। इस दौरान करीब 37 किमी की ट्रेकिंग करना होता है। वहीं ट्रेक का मैक्सिमम एल्टीट्यूड लेवल करीब 14,100 फीट है। इसकी डिफिकल्टी लेवल को ईजी टू मॉडरेट बताया गया है। इस ट्रिप की खासियत है कि प्रति व्यक्ति किराया 12,450 रखी गई है। इसे भी पढ़ें: Solo Traveler Safety Guide: अकेले घूमने से पहले जान लें ये 5 Essential Rules ट्रिप की जानकारी यह ट्रिप सुबह 06:00 बजे से ऋषिकेश के तपोवन स्थित बैक स्टेज होटल से शुरू होगी। वहीं पहले दिन करीब 9-10 घंटे की रोड ट्रिप तय करने के बाद आप 1,340 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पीपलकोटी पहुंचेंगे। यहां एक्स्ट्रा सामान को छोड़ने के लिए यहां पर क्लॉकरूम भी मौजूद है। इसके अगले दिन गोविंदघाट और पुलना तक गाड़ी से जाने के बाद आपका पैदल ट्रैक शुरू होगा। 9 किमी की ट्रैकिंग करने के बाद आप घांघरिया पहुंचेंगे। फिर अगले कुछ दिनों तक आपका यहीं पर स्टे होगा। फिर ट्रिप के तीसरे दिन आपको फूलों की घाटी के नजारे से रूबरू कराया जाएगा। यहां ब्लू पॉपी, हिमालयन रोज, रिवर एनेमोन और डॉग फ्लावर जैसे अद्भुत फूल आपका स्वागत करेंगे। वहीं ट्रिप के चौथे दिन पवित्र हेमकुंड साहिब की ट्रेकिंग करेंगे। ट्रिप के 5वें दिन घांघरिया से वापसी होगी। वहीं अच्छी बात यह है कि रास्ते में बिना किसी एक्स्ट्रा फेयर के आपको बद्रीनाथ धाम के दर्शन का भी मौका मिलेगा। वहीं ट्रिप के छठे दिन शाम को 06:30 से 07:30 बजे तक यात्रियों को वापस ऋषिकेश छोड़ दिया जाएगा। पहाड़ों पर मौसम कभी भी बिगड़ सकता है। इसलिए अपने टूर में 1 बफर डे जरूर रखें। वापसी की ट्रेन या फ्लाइट को छठे दिन की रात में 08:00 बजे के बाद ही बुक करें। फिटनेस है जरूरी अगर आपकी उम्र 9 साल या इससे ज्यादा है, वहीं आप पहली बार ट्रेकिंग कर रहे हैं, तो भी आप इस ट्रिप का हिस्सा बन सकते हैं। आप 45 मिनट में 5 किमी की जॉगिंग या 30 मिनट में 10 किमी साइकिल चलाने का दम रखते हों। अपना 10 से 12 किलो का बैग खुद उठाने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा आपका पल्स, बीपी और ब्रीदिंग रेट एकदम नॉर्मल होना चाहिए। दिल की बीमारी, अस्थमा, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह ट्रेक नहीं है। वहीं असामान्य BMI या साइनस वाले लोग ट्रिप की बुकिंग से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर ले लें। पैकेज में मिलने वाली सुविधाएं बता दें कि पीपलकोटी के हेस्ट हाउस और घांघरिया में सेफ टेंट में रहने की व्यवस्था है। पहले दिन के डिनर से लेकर 5वें दिन तक बेहतरीन वेज खाने के साथ चाय-स्नैक्स की व्यवस्था मिलेगी। सेफ्टी के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट-एड किट और तजुर्बेकार ट्रेक लीडर व शेफ रहेंगे। मुख्य सामान को उठाने के लिए खच्चर और ट्रेक पूरा करने पर एक सर्टिफिकेट मिलेगा। जानिए बुकिंग कैंसल करने के नियम अगर आप ट्रिप से 25 दिन पहले अपनी बुकिंग कैंसिल करते हैं, तो 5% कटौती होगी। वहीं 15 से 24 दिन के अंदर ट्रिप की बुकिंग कैंसिल करने पर 30% की कटौती होगी। 10 से 14 दिन पर बुकिंग कैंसिल करने पर 50% का नुकसान उठाना होगा। वहीं अगर आप ट्रिप शुरू होने से 9 दिन या इससे कम दिनों के अंदर अपनी बुकिंग को कैंसिल करते हैं, तो आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा। इसलिए प्लान हमेशा सोच-समझकर बनाएं। यहां तक कैसे आएं बता दें कि देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट या ऋषिकेश रेलवे स्टेशन यहां आने के बेस्ट ऑप्शन है। इसके अलावा आप दिल्ली से सरकारी या प्राइवेट बस से भी ऋषिकेश पहुंच सकते हैं।
Solo Traveler Safety Guide: अकेले घूमने से पहले जान लें ये 5 Essential Rules
आजकल सोलो ट्रिप का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। लोगो घूमने के लिए कहीं न कहीं पहुंच ही जाते हैं। अकेले घूमते हुए आप बिना किसी दबाव या जल्दबाजी के आराम से घूम सकते हैं। जब आप अकेले घूमते हैं, तो बिना किसी दबाव या जल्दबाजी के आराम से घूम सकते हैं। वहीं, सोलो ट्रिप पर जाने से आपकी फैसले लेने की क्षमता और चुनौतियों का सामना करने की सूझ-बूझ भी बढ़ती है, लेकिन इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है। वैसे तो सोलो ट्रिप मजेदार होती है, लेकिन इस दौरान कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए पहले से सावधानी और जानकारी बेहद जरुरी है। आइए आपको आपको बताते हैं सोलो ट्रिप पर जाने के लिए किन बातों का ध्यान रखें। सही डेस्टिनेशन और रिसर्च यदि आप पहली बार सोलो ट्रिप पर जा रहे हैं, तो ऐसी जगह का चयन करें, जो सेफ हो और वहां आना-जाना काफी आसान हो। ट्रिप शुरु करने से पहले उस जगह का मौसम, संस्कृति, खान-पान, भाषा और परिवहन के साधनों के बारे में अच्छी तरह से जानकारी इकट्ठा कर लें। इसके साथ ही यह जान लें कि किन जगहों पर जाना एकदम सुरक्षित नहीं है और किन जगहों पर जाने से बचें। घर वालों के साथ ट्रैवल आइटिनररी शेयर अकेले ट्रैवल करना काफी मजेदार माना जाता है। हालांकि, इसके लिए काफी ध्यान रखना पड़ता है। आप कहां रुक रहे हैं, आपकी फ्लाइट या ट्रेन का समय, आप कहां-कहां जा रहे हैं, ये सभी जरुरी जानकारियां अपने किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्यों के साथ जरुर शेयर करें। रोजाना अपनी लोकेशन को घर वाले से जरुर शेयर करें। जरूरी डॉक्यूमेंट और इमरजेंसी कैश सोलो ट्रिप पर जाने के लिए अपना आई-डी प्रूफ, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, होटल बुकिंग आदि की हार्ड कॉपी के साथ-साथ डिजिटल कॉपी भी ईमेल पर जरुर सेव करें। पैसों के मामले में पूरी तरह ऑनलाइन पेमेंट पर निर्भर न रहें और अपने साथ कुछ इमरजेंसी कैश जरुर रखें। इस बात का ध्यान रखें कि सारा कैश एक जगह पर बिल्कुल न रखें। कुछ अपनी जेब में, तो कुछ बैग में छिपाकर रखें। जिससे नेटवर्क न रहने की स्थिति में आपको परेशान न हो। लाइट पैकिंग करें असल में सोलो ट्रिप पर जाने के लिए आपको सारा सामान खुद ही उठाना पड़ता है। इसलिए सिर्फ जरुरत का सामान अपने साथ रखें। रुकने के लिए महंगे होटलों की जगह हॉस्टल्स या डोर्मेट्री ऑप्शन दिया गया है। इनसे आपके पैसे भी बचेंगे और आपको दूसरे सोलो ट्रैवलर्स से भी मिलने का मौका मिलेगा। गट फीलिंग पर भरोसा रखें अक्सर ट्रिप पर आपको कई सारे लोग देखने को मिलेंगे। कुछ लोग आपकी मदद करेंगे, तो कुछ से आपको नेगेटिव वाइब्स भी आ सकती है। यदि आपको किसी इंसान या जगह पर अनकम्फर्टेबल महसूस हो सकता है, तो तुरंत वहां से दूर हो जाएं। फिर अपनी गट फीलिंग्स को ओवर थिंकिंग समझकर नजरअंदाज न करें।
चाहत खन्ना की मालदीव वेकेशन की तस्वीरें इंटरनेट पर छाईं
टीवी एक्ट्रेस चाहत खन्ना की मालदीव वेकेशन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उन्होंने बीच और पूल से अपनी छुट्टियों की कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह वेकेशन एन्जॉय करती नजर आईं।
September Travel Plan: राजस्थान की Shekhawati Haveli में देखें कला और रॉयल्टी का बेजोड़ संगम
सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से बेहद खास होता है क्योंकि इस महीने में न ज्यादा गर्मी होती है और न ज्यादा बारिश होती है। ऊपर से मौसम भी सुहावना होता है। इस दौरान लोग घूमने के लिए कहीं न कहीं जरुर जाते हैं। अगर आप भी घूमने का प्लान बना रही हैं और समझ नहीं आ रहा है, कहां जाएं, तो यह लेख आपके लिए है। इस बार सितंबर में इतिहास, कला और राजशाही ठाट-बाट से भरपूर इन हवेलियों का दीदार जरुर करें। शेखावाटी की प्रसिद्ध हवेलियां सितंबर के महीने में घूमने के लिए शेखावाटी की ये भव्य हवेलियां सबसे बेस्ट हैं। यहां पर आपको सैकड़ों साल पुराने राजसी दौर की झलक देखने को मिलेगी। आइए आपको बताते हैं शेखावाटी की इन चुनिंदा हवेलियों और अनोखी वास्तुकला के बारे में बताते हैं- मंडावा की कलात्मक हवेलियां शेखावाटी के मंडावा शहर की हर गली में आपको शानदार कलाकृति और अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं। यहां आप मंडावा किला, हवेली, मुरमुरिया हवेली और चौखानी हवेली जैसी कई शानदार हवेलियों को देख सकते हैं। इन हवेलियों की बाहरी दीवारों पर बनीं सुंदर पेंटिंग्स देखने लायक है। नवलगढ़ की ऐतिहासिक हवेलियां यदि आपको फोटग्राफी का सबसे ज्यादा क्रेज और शौक है, तो आप नवलगढ़ की पोद्दार हवेली और आनंदीलाल पोद्दार हवेली देखने जरुर जाएं। यहां पर आपको दीवारों पर बेहतरीन रंगों और सोने-चांदी की नक्काशी से बनी पेंटिंग फोटोग्राफी देखने को मिलेगी। वहीं, आपको यहां पर राजस्थानी की लोक संस्कृति और वास्तुकला की भी पूरी जानकारी मिलेगी। फतेहपुर शेखावाटी की नादिन ले प्रिंस हवेली अगर आप फ्रांसीसी कला का शानदार अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप फतेहपुर कीनादिन ले प्रिंस हवेली' जरुर विजिट करें, यहां पर आपको राजस्थानी रॉयल्टी देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, आप यहां द्वारकाधीश हवेली और सिंघानिया हवेली के दर्शन करने जरुर जा सकते हैं। शेखावाटी की हवेलियों तक कैसे पहुंचे? - यहां जाने के लिए आप सबसे नजदीकी एयरपोर्ट 'जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट' जाएं। यहां से फिर मंडावा और नवलगढ़ से करीब 150 से 170 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से बाहर आते ही आपको कैब या टैक्सी मिल जाएगी, जो आपको इस लोकेशन पर पहुंचा देगी। - इसके अलावा, आप नवलगढ़, मुकुंदगढ़ या झुंझुनू रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं। ये तीनों रेलवे स्टेशन शेखावाटी के काफी नजदीक है। स्टेशन से बाहर आते ही आपको आसानी से लोकल बस या टैक्सी यहां पर जाने के लिए मिल जाएंगी।
कैमूर: प्रमुख पर्यटन स्थल करमचट डैम में दिखा मगरमच्छ, मोटरबोट की सुविधा वाले जलाशय में बढ़ा खतरा
3 सितंबर, गुरुवार: कैमूर के करमचट डैम में मगरमच्छ तैरता दिखाई दिया। डैम में मोटरबोट की सुविधा होने से पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
दिल थोड़ा डेयरिंग है? भारत में ये 5 एडवेंचर एक्टिविटी जरूर ट्राई करें
अगर आपको घूमने के साथ थोड़ा रोमांच भी पसंद है, तो भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां आप स्कीइंग से लेकर स्काइडाइविंग तक का मजा ले सकते हैं। ये 5 एडवेंचर जिंदगी में एक बार जरूर ट्राई करें।
Travel Tips: जन्माष्टमी पर द्वारकाधीश दर्शन के लिए जानें Train और Flight रूट
जन्माष्टमी के पर्व को लोग तरह-तरह की प्लानिंग करते हैं। कोई घरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकी को बनाता है, तो कुछ मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी का पर्व मनाने के लिए जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी इस जन्माष्टमी श्रीकृष्ण के दर्शन के प्लान बना रही हैं, तो आप गुजरात से लेकर द्वारका तक भगवान श्रीकृष्ण के कुछ फेमस मंदिरों के दर्शन के साथ एक यादगार ट्रिप प्लान कर सकती हैं। द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है, यहां पर जन्माष्टमी के मौके पर खास रौनक देखने को मिलती है। द्वारका में कहां-कहां घूमें द्वारका सिर्फ मंदिर घूमने की जगह नहीं है, बल्कि यहां पुराने मंदिर, समुद्र, बीच और आसपास के कई धार्मिक स्थल हैं, जिनको आप एक्सप्लोर कर सकती हैं। अगर आप दिल्ली से सिर्फ 2 से 3 दिन के लिए ट्रिप प्लान करती हैं, तो दर्शन के साथ-साथ यहां घूमने-फिरने का भी मजा ले सकती हैं। यहां द्वारकाधीश मंदिर के अलावा नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका, रुक्मिणी देवी मंदिर और शिवराजपुर बीच फेमस है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस पूरे ट्रिप के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Janmashtami 2026 | इस बार बनाएं खास प्लान, भारत के इन 5 प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में लें दिव्य दर्शन का आनंद | Best Krishna Temples India द्वारकाधीश मंदिर में करें दर्शन जब आप द्वारका पहुंच जाएं, तो होटल में चेकइन करें। फिर फ्रेश होकर सबसे पहले द्वारकाधीश मंदिर जाएं। इसको जगत मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इसकी स्थापना भगवान श्रीकृ्ष्ण के पोते वज्रनाभ ने कराया था। यह मंदिर एक ऊंचाई पर बना है, यहां तक पहुंचने के लिए 50 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। मंदिर के दर्शन का समय सुबह 07 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम को 05:00 बजे से 09:00 बजे तक है। वहीं जन्माष्टमी के मौके पर आम दिनों से ज्यादा भीड़ होती है, इसलिए समय में बदलाव हो सकता है। मंदिर में क्या खास देखें मंदिर में दर्शन करने के अलावा बहुत कुछ देख सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश रूप के दर्शन करें। मंदिर की खूबसूरत नक्काशी और ऊंचा शिखर देख सकते हैं। मंदिर के आसपास बने छोटे मंदिर देख सकते हैं। अरब सागर के पास का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। गोमती क्रीक के पास सुदामा सेतु देख सकते हैं। दिल्ली से ऐसे पहुंचे द्वारका दिल्ली से द्वारका काफी दूर है। इसलिए आपको ट्रिप की सही प्लानिंग करनी होगी। आप ट्रेन से द्वारका पहुंचने के लिए दिल्ली से ट्रेन ले सकती हैं। यह बजट फ्रेंडली ऑप्शन है। दिल्ली से द्वारका की दूरी करीब 1325 से 1335 किमी है। ऐसे में आपको द्वारका पहुंचने के लिए 23 से 24 घंटे का समय लग सकता है। इसके अलावा आप फ्लाइट से भी द्वारका जा सकती हैं। द्वारका का सबसे नजदीकी एयर कनेक्शन जामनगर और पोरबंदर है। द्वारका से पोरबंदर एयरपोर्ट की दूरी करीब 136 किमी है। वहीं जामनगर एयरपोर्ट की दूरी 105 किमी है। यहां पहुंचकर आप बस या कैब से द्वारका जा सकती हैं। वहीं अगर आप फ्लाइट या ट्रेन से नहीं जाना चाहती हैं, तो रोड ट्रिप प्लान कर सकती हैं। हालांकि रोड ट्रिप थोड़ा थकान भरी रह सकती है। क्योंकि इसकी दूरी करीब 1450 से 1460 किमी है। इन जगहों को भी करें एक्स्प्लोर अब आप द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने के बाद यहां और भी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। बेट द्वारका मंदिर में दर्शन करने के बाद आप बेट द्वारका भी जा सकती हैं। यह समुद्र के पास बसा एक आइलैंड है और यहां पर मंदिर भी है। माना जाता है कि यह श्रीकृष्ण का निवास स्थान है। यहां पर विष्णु, शिव, लक्ष्मी-नारायण और हनुमान आदि के मंदिर है। ध्यान रकें कि शाम के समय यहां घूमने के लिए न जाएं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका में आप भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी कर सकती हैं। मंदिर के पास गोपी तालाब तीर्थ भी है। यह जगह भगवान कृष्ण और गोपियों से जुड़ी है। अगर आप धार्मिक जगहों में दिलचस्पी रखती हैं, तो द्वारका ट्रिप में इसे जरूर शामिल करें। रुक्मिणी देवी मंदिर द्वारका जाने पर आप रुक्मिणी देवी मंदिर के दर्शन भी करें। मंदिर की बाहरी दीवारों पर आपके देवी-देवताओं और अलग-अलग आकृतियों की नक्काशी देखने को मिलेगी। माना जाता है कि यह मंदिर 12वीं सदी से है। शिवराजपुर बीच आप मंदिर और धार्मिक जगहों को एक्सप्लोर करने के बाद शिवराजपुर बीच भी जा सकती हैं। यह द्वारका से करीब 12 किमी की दूरी पर है। अगर आप भी एडवेंचर के शौकीन हैं, तो यहां पर स्नॉर्कलिंग, बनाना राइड, स्कूबा डाइविंग जैसी एक्टिविटी कर सकती हैं। यहां पर जाने का समय सुबह 8 बजे से शाम के 7 बजे तक हैं। वहीं एंट्री के लिए आपको 30 रुपए का टिकट लेना होगा। जानिए द्वारका में कहां रुकें द्वारका में रुकने के लिए आपको आप होटल और टूरिस्ट स्टे मिल जाएंगे। लेकिन जन्माष्टमी के मौके पर भीड़ अधिक रहती है। इसलिए होटल आदि पहले से बुक कर लें। ध्यान रहे कि होटल मंदिर से ज्यादा दूर न हो। ऐसी जगह पर स्टे लें, जहां से मंदिर और अन्य जगहों तक आसानी से पहुंच सकें। खाने में क्या ट्राई करना चाहिए द्वारका में आप गुजरात का लोकल खाने का स्वाद ले सकती हैं। गुजराती थाली, खमण, जलेबी-फाफड़ा और दूसरी गुजराती चीजों को ट्राई करें। इससे आपकी ट्रिप अधिक मजेदार हो जाएगी। वहीं अगर आप जन्माष्टमी के मौके पर व्रत रखती हैं, तो बता दें कि आपको होटल या आसपास के भोजनालय में फलाहार खाना भी मिल जाएगा। इन बातों का रखें ध्यान जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में अधिक भीड़ हो सकती है, इसलिए समय से पहुंचें। ट्रेन, होटल या फ्लाइट आदि की बुकिंग पहले से कर लें। बेट द्वारका जाने के दौरान वापसी की टैक्सी भी पहले बुक कर लें। समुद्र के किनारे जाने के दौरान नियमों का पालन करें। गर्मी और उसम को देखते हुए पानी भी अपने साथ रखें।
Tripura Tourism Plan: जानिए क्यों खास हैं उनाकोटी की रहस्यमयी मूर्तियां और Ujjayanta Palace
भारत में विविधता का देश है और यहां पर घूमने के लिए कई सारी जगहें मौजूद है। अगर आप नॉर्थ-ईस्ट जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप त्रिपुरा जरुर जाएं। यहां पर आपकों संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के नजारे देखने को मिलेंगे। त्रिपुरा में एकदम शांत वातावरण देखने को मिलता है। हरी-भरी पहाड़ियों का एक अलग ही अनुभव देता है। आइए आपको त्रिपुरा के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं। त्रिपुरा की खूबसूरत जगहें त्रिपुरा के इतिहास और विरासत जानने के लिए आपको यहां उज्जयंत पैलेस देखने को मिलेगा। रुद्रसागर झील के बीचों-बीच स्थित नीरमहल एक बेहद सुंदर वॉटर पैलेस है और भारत का सबसे बड़ा जल महल है। उनाकोटी त्रिपुरा का प्राचीन रॉक-कट तीर्थ स्थल है। यहां भगवान शिव की विशाल मूर्तियां हैं, जो घने जंगलों के बीच पत्थरों पर उकेरी गई हैं। यह जगह बेहद ही खूबसूरत है। त्रिपुरा की कला और हस्तशिल्प त्रिपुरा की कला की बात करें, तो यहां मुख्य रुप से बांस और बेत के काम पर आधारित कला है। यहां के लोकल कारीगर बांस के फर्नीचर, बास्केट, डेकोरेशन पीस और बर्तन बनाते हैं, इसके अलावा, त्रिपुरा में रेशा नाम का एक पारंपरिक बुना हुआ कपड़ा काफी मशहूर है। इसको महिलाएं ऊपरी वस्त्र के तौर पर पहनती हैं। वहीं यहां का खान-पान काफी सदा होता है। त्रिपुरा की पारंपरिक डिश मुई बोरोक बेहद ही स्वादिष्ट होती है। इसे फर्मेंट की गई मछली के पेस्ट से बनाया जाता है। बांगुई राइस भी यहां के खान-पान का मुख्य हिस्सा है।
अगर आपकी सेक्स लाइफ थोड़ी बोरिंग या एक जैसी हो गई है, तो पार्टनर के साथ कहीं घूमने जाना अच्छा आइडिया हो सकता है। रोज की भागदौड़ से दूर छुट्टियों का माहौल आपको और आपके पार्टनर को एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का मौका देता है। नए माहौल में रोमांस और नजदीकियां रिश्ते में एक नई ताजगी ला सकती हैं। लेकिन छुट्टियों में इंटीमेसी को बेहतर बनाने के लिए कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसे ही 10 आसान टिप्स, जो आपके कपल टाइम को और खास बना सकते हैं। अपनी पसंद की चीजें साथ लेकर जाएं अगर आपके लिए कोई खास चीज रोमांटिक माहौल बनाने में मदद करती है, तो उसे ट्रिप पर साथ ले जा सकते हैं। यह आपकी पसंद की कोई रोमांटिक एक्सेसरी, परफ्यूम, आरामदायक नाइटवियर या दूसरी पसंदीदा चीज हो सकती है। ध्यान रखें कि जो भी चीज आप इस्तेमाल करें, उसमें दोनों पार्टनर की सहमति और सहजता सबसे जरूरी है। सिर्फ बेड तक सीमित न रहें होटल का कमरा सिर्फ सोने के लिए नहीं होता। छुट्टियों में आप कमरे के माहौल को थोड़ा अलग और रोमांटिक बना सकते हैं। कमरे की लाइटिंग, खुशबू और म्यूजिक जैसी छोटी चीजें भी मूड को बेहतर कर सकती हैं। हालांकि, किसी भी तरह की एक्टिविटी में होटल की संपत्ति और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। इसे भी पढ़ें: Long Distance Relationship में बढ़ रही हैं दूरियां? नजदीकियां बढ़ाने में मदद कर सकता है Phone Sex दोपहर का समय भी आजमाएं रोजमर्रा की जिंदगी में कपल्स अक्सर अपनी व्यस्त दिनचर्या के हिसाब से ही इंटीमेट होते हैं। छुट्टियों में आपके पास समय की थोड़ी ज्यादा आजादी होती है। इसलिए अगर आमतौर पर आपके पास सिर्फ रात या सुबह का समय होता है, तो छुट्टी के दौरान दिन में भी एक-दूसरे के साथ रोमांटिक समय बिताया जा सकता है। जल्दबाजी न करें काम, घर और रोज की जिम्मेदारियों के बीच कपल्स के पास अक्सर एक-दूसरे के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। छुट्टियां इस रफ्तार को थोड़ा धीमा करने का अच्छा मौका देती हैं। एक-दूसरे के साथ आराम से समय बिताएं, बातचीत करें और बिना किसी जल्दबाजी के पल को एंजॉय करें। यहां मकसद किसी तरह का दबाव बनाना नहीं, बल्कि साथ में अच्छा समय बिताना है। छुट्टियों में काम को थोड़ा दूर रखें अगर आप छुट्टियों पर भी लगातार ईमेल, ऑफिस चैट या काम के मैसेज चेक करते रहेंगे, तो आपका दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाएगा। इसलिए जहां संभव हो, काम से ब्रेक लें। लैपटॉप और ऑफिस नोटिफिकेशन को कुछ समय के लिए दूर रखना आपको और आपके पार्टनर को एक-दूसरे पर ध्यान देने में मदद कर सकता है। अपने शरीर और भावनाओं पर ध्यान दें छुट्टियां खुद को रिलैक्स करने और अपने पार्टनर के साथ जुड़ने का अच्छा समय होती हैं। अपने आसपास के माहौल को महसूस करें और पार्टनर के साथ बिताए जा रहे समय पर ध्यान दें। नए माहौल, नई जगह और पार्टनर की मौजूदगी को महसूस करने से रोमांटिक कनेक्शन और बेहतर हो सकता है। ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं इंटीमेसी के दौरान ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल आराम और सुविधा बढ़ाने में मदद कर सकता है। खासतौर पर अगर ड्रायनेस या असहजता महसूस हो रही हो, तो सही ल्यूब्रिकेंट उपयोगी हो सकता है। ट्रिप पर जाने से पहले इसे साथ रखना भी एक अच्छा विकल्प है। अगर किसी प्रोडक्ट से जलन या परेशानी हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें। खुद को पूरी तरह रिलैक्स रखें कई बार इंटीमेसी के दौरान लोग काम, तनाव या दूसरी बातों के बारे में सोचते रहते हैं। इससे वे उस पल को पूरी तरह एंजॉय नहीं कर पाते। छुट्टियों में खुद को थोड़ा रिलैक्स करने की कोशिश करें। किसी तरह की परफॉर्मेंस या उम्मीद का दबाव न बनाएं और अपने पार्टनर के साथ सहज तरीके से समय बिताएं। इसे भी पढ़ें: Couples Special: बोरिंग Sex Life को रोमांचक बनाने के लिए ट्राई करें ये 4 नई Sex Positions यह न गिनें कि कितनी बार इंटीमेट हुए छुट्टियों में ज्यादा रोमांस होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको हर दिन या बार-बार इंटीमेट होना ही चाहिए। हर कपल की पसंद और कम्फर्ट अलग होता है। इसलिए खुद पर या पार्टनर पर कोई दबाव न डालें। अगर छुट्टी के माहौल में ढलने में थोड़ा समय लग रहा है, तो यह बिल्कुल सामान्य है। कुछ नया आजमाने की कोशिश करें छुट्टियां रिश्ते में कुछ नया करने का अच्छा मौका हो सकती हैं। आप कोई नया रोमांटिक आइडिया, नई एक्टिविटी या ऐसी चीज आजमा सकते हैं जिसे दोनों पार्टनर पहले से करने की इच्छा रखते हों। लेकिन यहां भी दोनों की सहमति और सहजता सबसे जरूरी है। अगर किसी एक पार्टनर को कोई चीज पसंद नहीं है, तो उसे करने का दबाव नहीं होना चाहिए। छुट्टियों में रोमांस का असली मतलब वेकेशन सेक्स या छुट्टियों में इंटीमेसी का मतलब सिर्फ सेक्स नहीं है। असल में यह अपने पार्टनर के साथ बिना रोजमर्रा के तनाव के क्वालिटी टाइम बिताने और रिश्ते में नजदीकी बढ़ाने का मौका है। इसलिए छुट्टी के दौरान खुद पर किसी तरह का दबाव न डालें। साथ में घूमना, बातें करना, एक-दूसरे को समय देना और छोटे-छोटे रोमांटिक पल भी रिश्ते को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
Budget Friendly Travel: कम बजट में घूमें ये 8 शानदार जगहें, सितंबर के महीने में न मिलेगी भीड़ और न गर्मी
Travel Tips: शिमला-मनाली के बजाय Jibhi के Offbeat Locations बन रहे पर्यटकों की पहली पसंद
हिमाचल प्रदेश का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में सबसे पहले शिमला और मनाली का नाम आता है। इसके अलावा लोग और दूसरी जगहों के बारे में बहुत कम जानते हैं। ऐसे में अगर आप भी हिमाचल प्रदेश घूमने का मन बना रही हैं, तो आप हिमाचल की ऑफबीट लोकेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हिमाचल प्रदेश की छिपे खजाने जिभी के बारे में बताने जा रह हैं। ऑफबीट लोकेशन जिभी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बंजार घाटी स्थिति जिभी आपको सुकून का एहसास दिलाएगा। क्योंकि 5000 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद यह जगह अन्य टूरिस्ट स्पॉट की तरह भीड़भाड़ वाली नहीं है। वहीं दूरी की बात की जाए, तो यह जगह मनाली से करीब 100 किमी दूर और मंदिर से करीब 50 किमी दूर है। इसे भी पढ़ें: Travel Plan Breakdown: दिल्ली से ₹5000 के बजट में घूमें ये 3 शहर, जानें ट्रांसपोर्ट और होटल का पूरा खर्च जिभी कैबाइन्स नामक ट्री हाउस, लकड़ी और घने देवदार के जंगलों के लिए जानी जाती है। आप आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करते हैं, तो जिभी के सुंदर झरने और प्राकृतिक नजारे आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। जिभी में इन जगहों को करें एक्सप्लोर दुनिया की भीड़भाड़ से दूर हिमाचल प्रदेश की यह ऑफबीट लोकेशन कई मायनों में बेहद खास है। तो आइए जानते हैं कि आप जिभी में क्या-क्या एक्सप्लोर कर सकते हैं। रघुपुर किला रघुपुर किला वैसे तो अब खंडहरों में गिना जाता है। लेकिन 11,155 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस किले से कुल्लू और मंडी के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाया जा सकता है। जालोरी पास जिभी से करीब 12-14 किमी दूर और करीब 10 हजार फीट स्थित जालोरी पास एक माउंटेन है। यहां पर बर्फ से ढकी पहाड़ियां हसीन वादियों से कम नहीं लगती हैं। श्रृंग ऋषि मंदिर जिभी से थोड़ी ही दूर पर बग्गी गांव में स्थित श्रृंग ऋषि मंदिर है। जो यहां के स्थानीय देवता श्रृंग ऋषि को समर्पित है। श्रृंग ऋषि को कुल्लू के 18 देवताओं में से एक माना जाता है। जिनका संबंध रामायण काल से है। यही कारण है कि इस मंदिर में दर्शन के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग भीड़ उमड़ती है। सेरोलसर झील जालोरी से करीब 5 किमी दूर सेरोलसर झील है। जिसके बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि इस झील के पानी में औषधीय गुण हैं। झील के किनारे बैठकर बहुत सुकून मिलता है। ऐसे में प्रकृति प्रेमियों को यहां आकर निराशा नहीं होगी।
घुमक्कड़ लोग हमेशा घूमने के लिए तैयार रहते हैं। यह लोग हमेशा कही न कहीं का प्लान बनाते रहते हैं। सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से खास माना जाता है। इस दौरान कई जगहों पर बारिश होती है, इसलिए मौसम सुहाना होता है। बरसात के बाद से हर जगह खूबसूरती चरम पर पहुंच जाती है और आसपास का नजारा काफी फ्रेश नजर आता है। परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ कुछ दिनों की छुट्टी पर जाना अच्छा हो सकता है। आइए आपको बताते हैं करीब 5000 रुपये में बजट में आप कहां घूम सकते हैं। पुष्कर, राजस्थान यदि आप पहाड़ों की जगह पर किसी झील और मंदिर वाली जगहों को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आप राजस्थान के पुष्कर जा सकते हैं। यहां की झीलें घूमना, ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करना और बाजारों में घूमना आपको मजेदार लगेगा। इस मौसम में यहां गर्मी कम होती है। - दिल्ली से दूरी-करीब 430 किमी है। - समय- लगभग 7-9 घंटे का समय लग जाता है। - घूमने के लिए पुष्कर झील, ब्रह्मा मंदिर, घाट और लोकल बाजार घूमने जा सकते हैं। बजट फ्रेंडली होटल लें, लोकल स्ट्रीट से खाना खाएं। होटल को बुकिंग ऑनलाइन ही करें। ऋषिकेश, उत्तराखंड योग नगरी ऋषिकेश धार्मिक दृष्टि से तो खास है, लेकिन यह जगह एडवेंचर के लिए भी काफी लोकप्रिय है। सुबह की आरती से लेकर मंदिरों के दर्शन तक, यहां पर आप सब कुछ देख सकते है। रिवर राफ्टिंग कर सकते हैं और भी कई एक्टिविटीज कर सकते हैं। - दिल्ली से दूरी करीब 240 किमी। - समय- लगभग 5 से 6 घंटे का समय लग जाता है। - होटल के लिए कम से कम 1200 से 1500 रुपये में रुम मिल जाएगा। - 5000 हजार में ट्रिप को करने के लिए पैदल या शेयरिगं ऑटो से घूमें और महंगे कैफे से बचें। अमृतसर, पंजाब बजट फ्रेंडली ट्रिप के लिए आप पंजाब घूमने जा सकते हैं। अमृतसर में धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों तरह की जगहें देखने को मिल जाएगी। सबसे फेमस यहां पर स्वर्ण मंदिर है, जिसकी खूबसूरती काफी देखने के लायक है और माहौल भी शांत देखने को मिलेगा। वहीं, आप अटारी-वाघा बॉर्डर भी घूमने जा सकते हैं। -दिल्ली से दूरी- लगभग 450 किमी -समय- लगभग 7 से 8 घंटे लग सकते हैं। इस ट्रिप के दौरान आप खाने पर खर्च बचा सकते हैं, गुरुद्वारे में खाना खा सकते हैं। वहीं, आप लोकल स्ट्रीट पर फूड खा सकते हैं। महंगे होटल पर खाना खाने से बचें।
भारत में कई अद्भुत चमत्कार और रहस्यमय मंदिरों का खजाना है। यहां पर आपको कई प्राचीन मंदिर देखने को मिलेंगे। हर मंदिर की एक अलग विशेषता है। राजस्थान के सीकर जिले में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शता है। इस मंदिर का नाम है जीणा माता। यह मंदिर मां जीण भवानी को समर्पित है। रक्षाबंधन पर अपने भाई के साथ यहां दर्शन के लिए आप जरुर जा सकते हैं। यह मंदिर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है और यहां मां जीण माता के साथ उनके भाई हर्ष की भी पूजा की जाती है। आइए आपको इस मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बताते हैं। राजस्थान में कहां स्थित है भाई-बहन को समर्पित जीण माता का मंदिर? राजस्थान के सीकर जिले में जीणमाता गांव में यह मंदिर स्थित है। यहां पर मुख्य रुप से मां जीण की पूजा होती है। राखी के समय यहां लोग दर्शन के लिए जरुर जाते हैं। इस दौरान यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर खाटू श्याम से 25-30 किमी की दूरी पर स्थित है। कैसे पहुंचे? - अगर आप सीकर शहर से यहां जाएंगे, तो आपको 29 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। यदि आप जयपुर से जा रहे हैं, तो आपको 110 किमी का सफर तय करना होगा। जयपुर से पहुंचने के लिए करीब 3 घंटे का समय लगेगा। - जो भाई-बहन दूसरे शहरों से आने का प्लान कर रहे हैं, वह ट्रेन से जा सकते हैं। इसके लिए आपको रींगस जंक्शन तक ट्रेन टिकट बुक करानी पड़ेगी। - सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर एयरपोर्ट है, यहां से आप मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए बस की क्या सुविधा है? - राजस्थान से आपको सीकर जिले से मंदिर के लिए बस मिल जाएगी। आसपास के शहरों से भी सीकर जिले के लिए बस जाती है। - जयपुर से आप सीकर के लिए पहले बस लें। इसके बाद सीकर पहुंचकर जीण माता मंदिर के लिए शेयरिंग टैक्सी या ऑटो बुक कर सकते हैं। जीण माता मंदिर यह मंदिर भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है, इसलिए रक्षाबंधन के समय भीड़ थोड़ी देखने को मिल सकती है। किसी भी साधन से जा रहे हैं, तो समय का जरुर ध्यान रखें। जीण माता मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, इसलिए जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 200 से 300 मीटर पैदल चलना पड़ता है। रास्ते में करीब 200 सीढ़िया मिलेगी। इन्हें चढ़ने में आधे घंटे का समय लग जाएगा। View this post on Instagram A post shared by Aryan Parashar (@aryanpujari_jeenmata)
प्रेग्नेंट दीपिका और बेटी दुआ को लेकर वेकेशन पर निकले रणवीर सिंह! बेबी बंप फोटोज देख चहक उठे फैंस
Ranveer Singh Deepika Padukone Photos Fact Check:
Gaurav Khanna माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर निकले, बारिश में फंसे तो ऐसे किया एन्जॉय
एक्टर गौरव खन्ना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। एक्टर लगातार अपने फैंस के साथ अपनी जिंदगी से जुड़े अपडेट शेयर कर रहे हैं। हाल ही में गौरव ने एक नया वीडियो शेयर कर बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर गए हैं। गौरव ने वीडियो में उस कार की झलक भी दिखाई, जिसमें वह अपनी मां और पिता के साथ सफर कर रहे हैं। पहाड़ों की ओर जाते हुए गौरव काफी खुश नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा, बादलों के बीच में जाते हुए। इस वीडियो के साथ उन्होंने मसूरी का नाम भी लिखा। बारिश में फंसे गौरव खन्ना मसूरी पहुंचने के बाद गौरव ने एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बारिश का मजा लेते नजर आए। उन्होंने बताया कि वहां बारिश काफी तेज हो रही थी। गौरव ने कहा कि उन्होंने छतरी भी ली थी, लेकिन तेज बारिश की वजह से उनके हाल खराब हो गए। इसके बाद गौरव एक रेस्टोरेंट में चाय पीते नजर आए। उन्होंने कहा कि ट्रिप पर इतनी बारिश में आएंगे तो ऐसा होना ही है, लेकिन यही तो ट्रिप का मजा है। वीडियो के आखिर में गौरव ने मजाकिया अंदाज में कहा, मजा भी है। इसे भी पढ़ें: Tumbbad 2 की रेकी के दौरान हुआ बड़ा खुलासा: उसी खौफनाक हवेली में टीम को मिला 8 साल पुराना रहस्यमयी खजाना! फैंस ने गौरव के वेकेशन को बताया जरूरी गौरव खन्ना के ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फैंस को उनका अपने माता-पिता के साथ समय बिताना काफी पसंद आ रहा है। कई फैंस का मानना है कि गौरव को इस तरह के ब्रेक और वेकेशन की जरूरत थी। कुछ फैंस ने गौरव और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के रिश्ते को लेकर भी कमेंट किए। फैंस का कहना है कि आकांक्षा से अलग रहने के बाद गौरव के लिए परिवार के साथ समय बिताना और घूमना अच्छा है। इसे भी पढ़ें: Pune में घर खरीदने के बाद अब शादी की जिम्मेदारियों पर क्या बोले Parth Samthaan गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का अभी तक नहीं हुआ तलाक गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला की शादी और तलाक को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। लॉकअप 2 में गौरव, आकांक्षा को सपोर्ट करने पहुंचे थे। उस दौरान एक्टर ने बताया था कि दोनों अभी भी कानूनी तौर पर शादीशुदा हैं और उनका तलाक नहीं हुआ है। वहीं, लॉकअप 2 के बाद आकांक्षा चमोला ने भी बताया था कि अभी तक तलाक के पेपर साइन नहीं हुए हैं। फिलहाल दोनों अपने-अपने प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं। इस बीच गौरव अपने माता-पिता के साथ मसूरी ट्रिप का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
कड़कड़ाती सर्दी में बिकिनी पहन पूल में उतरीं रुबीना दिलैक, जापान वेकेशन की दिखाई झलक
टीवी की संस्कारी बहू रुबीना दिलैक रियल लाइफ में काफी ग्लैमरस हैं। वह अक्सर फैंस के साथ अपनी हॉट एंड सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। रुबीना वह छोटे पर्दे की हाई पेड एक्ट्रेसेस में शुमार है। हाल ही में रुबीना ने अपनी जापान ट्रिप की तस्वीरें फैंस ...
स्विमिंग पूल किनारे मोनालिसा का सिजलिंग अंदाज, वेकेशन से शेयर की बोल्ड तस्वीरें
भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा हिंदी टीवी इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी मोनालिसा की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। वह अपनी ग्लैमरस तस्वीरों से तहलका मचाती रहती हैं। मोनालिसा इन दिनों थाइलैंड में वेकेशन एंजॉय कर रही ...
गोवा में वेकेशन एंजॉय कर रहीं कृष्णा श्रॉफ, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
कृष्णा श्रॉफ निश्चित रूप से जानती हैं कि लोगों का ध्यान कैसे आकर्षित करना है- चाहे वह उनकी MMA चॉप्स हों या उनकी वेकेशन की तस्वीरें। कृष्णा इस दिनों गोवा की धूप और बीच पर छुट्टियां मना रही हैं। इसी बीच कृष्णा श्रॉफ ने सोशल मीडिया पर अपनी ट्रॉपिकल ...
कैंसर के ट्रीटमेंट जंग के बीच वेकेशन मनाने मालदीव पहुंचीं हिना खान, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
शादी के तीन महीने बाद हनीमून पर निकलेRakul Preet Singh औरJackky Bhagnani, वेकेशन से वायरल हुई एक्ट्रेस की तस्वीरें
एक बार फिर सिनेमा घरो में दस्तक देने जा रही है क्रिस्टोफ़र नोलन की स्पेस एडवेंचर फिल्मInterstellar,10वीं सालगिरह पर होगी री-रिलीज़

