रामराजा लोक बनने से ओरछा में बढ़ेगा पर्यटन : मोहन
ओरछा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निवाड़ी जिले के प्रवास के दौरान सोमवार को ओरछा में भगवान श्री रामराजा सरकार के दर्शन किए।
Tripura Tourism Plan: जानिए क्यों खास हैं उनाकोटी की रहस्यमयी मूर्तियां और Ujjayanta Palace
भारत में विविधता का देश है और यहां पर घूमने के लिए कई सारी जगहें मौजूद है। अगर आप नॉर्थ-ईस्ट जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप त्रिपुरा जरुर जाएं। यहां पर आपकों संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के नजारे देखने को मिलेंगे। त्रिपुरा में एकदम शांत वातावरण देखने को मिलता है। हरी-भरी पहाड़ियों का एक अलग ही अनुभव देता है। आइए आपको त्रिपुरा के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं। त्रिपुरा की खूबसूरत जगहें त्रिपुरा के इतिहास और विरासत जानने के लिए आपको यहां उज्जयंत पैलेस देखने को मिलेगा। रुद्रसागर झील के बीचों-बीच स्थित नीरमहल एक बेहद सुंदर वॉटर पैलेस है और भारत का सबसे बड़ा जल महल है। उनाकोटी त्रिपुरा का प्राचीन रॉक-कट तीर्थ स्थल है। यहां भगवान शिव की विशाल मूर्तियां हैं, जो घने जंगलों के बीच पत्थरों पर उकेरी गई हैं। यह जगह बेहद ही खूबसूरत है। त्रिपुरा की कला और हस्तशिल्प त्रिपुरा की कला की बात करें, तो यहां मुख्य रुप से बांस और बेत के काम पर आधारित कला है। यहां के लोकल कारीगर बांस के फर्नीचर, बास्केट, डेकोरेशन पीस और बर्तन बनाते हैं, इसके अलावा, त्रिपुरा में रेशा नाम का एक पारंपरिक बुना हुआ कपड़ा काफी मशहूर है। इसको महिलाएं ऊपरी वस्त्र के तौर पर पहनती हैं। वहीं यहां का खान-पान काफी सदा होता है। त्रिपुरा की पारंपरिक डिश मुई बोरोक बेहद ही स्वादिष्ट होती है। इसे फर्मेंट की गई मछली के पेस्ट से बनाया जाता है। बांगुई राइस भी यहां के खान-पान का मुख्य हिस्सा है।
अगर आपकी सेक्स लाइफ थोड़ी बोरिंग या एक जैसी हो गई है, तो पार्टनर के साथ कहीं घूमने जाना अच्छा आइडिया हो सकता है। रोज की भागदौड़ से दूर छुट्टियों का माहौल आपको और आपके पार्टनर को एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का मौका देता है। नए माहौल में रोमांस और नजदीकियां रिश्ते में एक नई ताजगी ला सकती हैं। लेकिन छुट्टियों में इंटीमेसी को बेहतर बनाने के लिए कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसे ही 10 आसान टिप्स, जो आपके कपल टाइम को और खास बना सकते हैं। अपनी पसंद की चीजें साथ लेकर जाएं अगर आपके लिए कोई खास चीज रोमांटिक माहौल बनाने में मदद करती है, तो उसे ट्रिप पर साथ ले जा सकते हैं। यह आपकी पसंद की कोई रोमांटिक एक्सेसरी, परफ्यूम, आरामदायक नाइटवियर या दूसरी पसंदीदा चीज हो सकती है। ध्यान रखें कि जो भी चीज आप इस्तेमाल करें, उसमें दोनों पार्टनर की सहमति और सहजता सबसे जरूरी है। सिर्फ बेड तक सीमित न रहें होटल का कमरा सिर्फ सोने के लिए नहीं होता। छुट्टियों में आप कमरे के माहौल को थोड़ा अलग और रोमांटिक बना सकते हैं। कमरे की लाइटिंग, खुशबू और म्यूजिक जैसी छोटी चीजें भी मूड को बेहतर कर सकती हैं। हालांकि, किसी भी तरह की एक्टिविटी में होटल की संपत्ति और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। इसे भी पढ़ें: Long Distance Relationship में बढ़ रही हैं दूरियां? नजदीकियां बढ़ाने में मदद कर सकता है Phone Sex दोपहर का समय भी आजमाएं रोजमर्रा की जिंदगी में कपल्स अक्सर अपनी व्यस्त दिनचर्या के हिसाब से ही इंटीमेट होते हैं। छुट्टियों में आपके पास समय की थोड़ी ज्यादा आजादी होती है। इसलिए अगर आमतौर पर आपके पास सिर्फ रात या सुबह का समय होता है, तो छुट्टी के दौरान दिन में भी एक-दूसरे के साथ रोमांटिक समय बिताया जा सकता है। जल्दबाजी न करें काम, घर और रोज की जिम्मेदारियों के बीच कपल्स के पास अक्सर एक-दूसरे के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। छुट्टियां इस रफ्तार को थोड़ा धीमा करने का अच्छा मौका देती हैं। एक-दूसरे के साथ आराम से समय बिताएं, बातचीत करें और बिना किसी जल्दबाजी के पल को एंजॉय करें। यहां मकसद किसी तरह का दबाव बनाना नहीं, बल्कि साथ में अच्छा समय बिताना है। छुट्टियों में काम को थोड़ा दूर रखें अगर आप छुट्टियों पर भी लगातार ईमेल, ऑफिस चैट या काम के मैसेज चेक करते रहेंगे, तो आपका दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाएगा। इसलिए जहां संभव हो, काम से ब्रेक लें। लैपटॉप और ऑफिस नोटिफिकेशन को कुछ समय के लिए दूर रखना आपको और आपके पार्टनर को एक-दूसरे पर ध्यान देने में मदद कर सकता है। अपने शरीर और भावनाओं पर ध्यान दें छुट्टियां खुद को रिलैक्स करने और अपने पार्टनर के साथ जुड़ने का अच्छा समय होती हैं। अपने आसपास के माहौल को महसूस करें और पार्टनर के साथ बिताए जा रहे समय पर ध्यान दें। नए माहौल, नई जगह और पार्टनर की मौजूदगी को महसूस करने से रोमांटिक कनेक्शन और बेहतर हो सकता है। ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं इंटीमेसी के दौरान ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल आराम और सुविधा बढ़ाने में मदद कर सकता है। खासतौर पर अगर ड्रायनेस या असहजता महसूस हो रही हो, तो सही ल्यूब्रिकेंट उपयोगी हो सकता है। ट्रिप पर जाने से पहले इसे साथ रखना भी एक अच्छा विकल्प है। अगर किसी प्रोडक्ट से जलन या परेशानी हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें। खुद को पूरी तरह रिलैक्स रखें कई बार इंटीमेसी के दौरान लोग काम, तनाव या दूसरी बातों के बारे में सोचते रहते हैं। इससे वे उस पल को पूरी तरह एंजॉय नहीं कर पाते। छुट्टियों में खुद को थोड़ा रिलैक्स करने की कोशिश करें। किसी तरह की परफॉर्मेंस या उम्मीद का दबाव न बनाएं और अपने पार्टनर के साथ सहज तरीके से समय बिताएं। इसे भी पढ़ें: Couples Special: बोरिंग Sex Life को रोमांचक बनाने के लिए ट्राई करें ये 4 नई Sex Positions यह न गिनें कि कितनी बार इंटीमेट हुए छुट्टियों में ज्यादा रोमांस होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको हर दिन या बार-बार इंटीमेट होना ही चाहिए। हर कपल की पसंद और कम्फर्ट अलग होता है। इसलिए खुद पर या पार्टनर पर कोई दबाव न डालें। अगर छुट्टी के माहौल में ढलने में थोड़ा समय लग रहा है, तो यह बिल्कुल सामान्य है। कुछ नया आजमाने की कोशिश करें छुट्टियां रिश्ते में कुछ नया करने का अच्छा मौका हो सकती हैं। आप कोई नया रोमांटिक आइडिया, नई एक्टिविटी या ऐसी चीज आजमा सकते हैं जिसे दोनों पार्टनर पहले से करने की इच्छा रखते हों। लेकिन यहां भी दोनों की सहमति और सहजता सबसे जरूरी है। अगर किसी एक पार्टनर को कोई चीज पसंद नहीं है, तो उसे करने का दबाव नहीं होना चाहिए। छुट्टियों में रोमांस का असली मतलब वेकेशन सेक्स या छुट्टियों में इंटीमेसी का मतलब सिर्फ सेक्स नहीं है। असल में यह अपने पार्टनर के साथ बिना रोजमर्रा के तनाव के क्वालिटी टाइम बिताने और रिश्ते में नजदीकी बढ़ाने का मौका है। इसलिए छुट्टी के दौरान खुद पर किसी तरह का दबाव न डालें। साथ में घूमना, बातें करना, एक-दूसरे को समय देना और छोटे-छोटे रोमांटिक पल भी रिश्ते को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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फिरोजाबाद में बाबा नीब करौरी महाराज की जन्मस्थली ग्राम पंचायत नागऊ के गांव अकबरपुर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। सोमवार को पर्यटन विभाग की टीम ने गांव में किसानों के साथ खुली बैठक कर प्रस्तावित परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण पर सहमति ली। बैठक में 20 से अधिक किसानों ने विकास कार्यों के लिए अपनी जमीन देने की लिखित सहमति दी। पर्यटन अधिकारी विशाल श्रीवास्तव की मौजूदगी में हुई बैठक में किसानों को प्रस्तावित परियोजना की जानकारी दी गई। पर्यटन विभाग की योजना के तहत अकबरपुर में बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़ी आस्था को केंद्र में रखते हुए पार्क, मंदिर, धर्मशाला और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े अन्य विकास कार्य कराए जाने प्रस्तावित हैं। परियोजना के लिए करीब 60 से 70 बीघा भूमि अधिग्रहित किए जाने की योजना है। इसमें बाबा नीब करौरी महाराज के स्वजनों की भूमि भी शामिल है। पर्यटन अधिकारी के अनुसार परियोजना के लिए कम से कम पांच हेक्टेयर या उससे अधिक भूमि की आवश्यकता है। सर्किल रेट का चार गुना मिलेगा मुआवजा बैठक में किसानों को बताया गया कि अधिग्रहित भूमि के एवज में शासन की ओर से सर्किल रेट का करीब चार गुना मुआवजा दिए जाने का प्रस्ताव है। किसानों की सहमति की रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी। शासन से स्वीकृति मिलने और नियमानुसार अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। खुली बैठक में बाबा नीब करौरी महाराज की छह पौत्रियां भी मौजूद रहीं। उन्होंने भी अपनी भूमि को प्रस्तावित विकास कार्यों में शामिल करने के संबंध में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, उनकी ओर से बाबा के पैतृक मकान को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में एक शिकायती पत्र भी दिया गया है। धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान परियोजना के पूरा होने के बाद अकबरपुर में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार होने की उम्मीद है। इससे बाबा नीब करौरी महाराज की जन्मस्थली को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है। फिलहाल पर्यटन विभाग की प्राथमिकता किसानों की सहमति जुटाकर रिपोर्ट शासन को भेजना है, ताकि स्वीकृति के बाद परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके।
यूपी पर्यटन विभाग ने शुरू किया 'विजिट माय स्टेट' अभियान, 60 सेकंड की रील बनाएंगे युवा
‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत पर्यटन विभाग ने युवाओं से आह्वान किया है कि वे अपने शहर की अनकही कहानियों, स्थानीय संस्कृति और खास पहचान को अपनी आवाज में महज 60 सेकंड की रील के जरिए दुनिया के सामने लाएं। डिजिटल दुनिया में जेन-जी की पसंद और उनकी आवाज संस्कृति एवं यात्रा के नए रुझान तय कर रही है। इसी बदलते दौर को देखते हुए राज्य सरकार ने युवाओं को अपने-अपने शहरों की संस्कृति, विरासत और खासियतों का प्रतिनिधि बनाने की पहल की है। एक बयान के मुताबिक शहर की विरासत से जुड़ी अनकही कहानियां हों या स्थानीय व्यंजन का स्वाद, सदियों पुरानी परंपराएं हों या फिर पर्यटकों की नजरों से अब तक दूर रहे अल्पज्ञात स्थल, ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान के जरिए राज्य को उन लोगों की नजर से दिखाने की तैयारी है, जो अपने शहर और उसकी पहचान को सबसे करीब से जानते हैं। बयान के अनुसार स्थानीय निवासी खुद कैमरे के सामने आकर अपने शहर के विशेष अनुभव और विशेषताओं की कहानी के रूप में साझा कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य किसी स्थान की पहचान को केवल तस्वीरों और सूचनाओं तक सीमित न रखकर वहां के लोगों की आवाज और अनुभवों के जरिए उसकी असली कहानी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है। युवाओं के बीच पर्यटन स्थलों को खोजने और जानने के बदलते तरीकों को देखते हुए पर्यटन विभाग ने इस अभियान को रील के माध्यम से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इन दिनों यात्रा की योजना बनाने से पहले युवा छोटे वीडियो, लोगों के अनुभवों और ‘कंटेंट क्रिएटर्स’ की राय को तेजी से महत्व दे रहे हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, ‘‘उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान केवल उसके प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। हर जिले, शहर और गांव की अपनी अलग कहानी और पहचान है। यहां की स्थानीय खान-पान की परंपराएं, हस्तशिल्प, त्योहार, रीति-रिवाज, लोग और उनसे जुड़ी कहानियां उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाती हैं।’’उन्होंने कहा कि विजिट माय स्टेट अभियान के जरिए जेन-जी एवं अन्य युवाओं को अपने-अपने शहरों का सांस्कृतिक दूत बनाने की पहल की जा रही है। अभियान में भाग लेने की प्रक्रिया को भी युवाओं के लिए बेहद सरल रखा गया है। प्रतिभागियों को अपने शहर की खास पहचान और उसकी कहानी अपनी आवाज में अधिकतम 60 सेकंड की रील के माध्यम से प्रस्तुत करनी होगी। वीडियो में प्रतिभागी का स्वयं कैमरे के सामने आना जरूरी होगा, जिसमें उनका चेहरा स्पष्ट दिखाई दे और आवाज साफ सुनाई दे। रील की शूटिंग खुले स्थान पर की जाए, जहां पृष्ठभूमि में शहर का कोई प्रमुख पर्यटन स्थल अथवा उसकी पहचान से जुड़ा खास स्थान नजर आए। प्रतिभागी हिंदी या अंग्रेजी, किसी भी में अपनी रील तैयार कर सकते हैं। प्रत्येक वीडियो के अंत में ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ कहना अनिवार्य होगा। अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात ने बताया कि विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश अभियान स्थानीय निवासियों को अपने शहर और आसपास के पर्यटन स्थलों की कहानी कहने के लिए प्रेरित करता है। अमृत अभिजात ने कहा कि युवाओं की ओर से सामने आने वाली ऐसी छोटी-छोटी कहानियां मिलकर उत्तर प्रदेश की आस्था, समृद्ध विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, व्यंजन और हस्तशिल्प की विविधता को एक समग्र यात्रा अनुभव के रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगी।
Travel Tips: राजस्थान के इस खूबसूरत किले को देख आप भी हो जाएंगे खुश, जरूर जाएं एक बार
इंटरनेट डेस्क। शाही अंदाज और रॉयल लाइफ आपने फिल्मों में देखी होगी। लेकिन आप भी अगर राजा महाराजाओं की शानो शौकत को देखना चाहते हैं तो ट्यूर बना ले राजस्थान का और घूमना चाहिए आपको यहां पर। यहां आपको एक से बढ़कर एक किले दिखाई देंगे, जिन्हें देखकर आप खुश हो जाएंगे, तो आए जानते है उनके बारे में। कुंभलगढ़ किला आप इस बार घूमने के लिए झीलों के शहर उदयपुर के पास कुंभलगढ़ आ सकते है। यह उदयपुर से 82 किलोमीटर दूर है। बता दें की शाही कुंभलगढ़ किला अपने आप में खास है। ऐसे में आप यहां की यात्रा करेंगे तो आप यहां के इतिहास को संस्कृति को देख खुश हो जाएंगे। क्या है खास बता दें की राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में चित्तौड़गढ़ के बाद यह राज्य का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण फोर्ट है। शाम के समय यहां का नजारा देखने लायक होता है। साथ ही ढलते सूर्य की छांव में इस किले को देखना वाकई एक अलग अनुभव होता है। pc- clubmahindra.com
मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने से रोजगार का सृजन : मोहन यादव
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य के प्रमुख तीर्थस्थलों का समग्र विकास किया जाएगा
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का आज दूसरा दिन है। इस बीच निवाड़ी के ओरछा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को रामराजा सरकार के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने रामराजा लोक में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान CM ने ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और प्राचीन निर्माण शैली को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने जहांगीर महल का नाम बदलकर ‘वीर सिंह महल’ करने के संकेत भी दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी शामिल थे। निर्माण कार्यों का जायजा लिया दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने रामराजा लोक में चल रहे विकास कार्यों का निरिक्षण किया। उन्होंने राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश को परियोजना और चल रहे कामों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओरछा की पुरानी इमारतें बुंदेला राजाओं की समृद्ध विरासत हैं। इनका मूल स्वरूप बनाए रखने के लिए पुराने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री का ही उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए कुशल कारीगर काम कर रहे हैं। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने ओरछा में रामराजा लोक का निर्माण मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। उज्जैन के महाकाल लोक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां विकास के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों का विकास किया जाएगा। ओरछा, चित्रकूट, पशुपतिनाथ और मंदसौर समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर भी विकास कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। चूने से निर्माण पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने समय में बने भवनों की निर्माण शैली का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने सीमेंट के बजाय चूने से दीवारें बनाने पर जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पुराने भवन गर्मी में ठंडे और सर्दी में गर्म रहते हैं। इनमें उस समय की निर्माण तकनीक का इस्तेमाल हुआ था। सरकार इसी तकनीक को समझकर आगे काम करेगी। मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक जहांगीर महल का नाम बदलकर ‘वीर सिंह महल’ किए जाने की बात कही। राम से जुड़े स्थानों के विकास की बात मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के मध्यप्रदेश से जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में से 12 वर्ष मध्यप्रदेश में गुजारे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राम से जुड़े ऐसे सभी स्थानों को विकसित करने की दिशा में सरकार काम करेगी। ओरछा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी इसी दिशा में विकसित किया जा रहा है।
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भारत के लिए रूस बड़े पेट्रोल निर्यात गंतव्य के रूप में उभरा, शिपमेंट करीब एक मिलियन बैरल पहुंची
नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के लिए रूस एक बड़े पेट्रोल निर्यात गंतव्य के रूप में उभरा है और बीते दो महीने में देश ने करीब एक मिलियन बैरल की शिपमेंट की है। इसकी वजह रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन की ओर से लगातार हमले करना है, जिससे रूस को घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पेट्रोल को आयात करना पड़ रहा है। यह जानकारी शिप-ट्रैकिंग फर्म वोर्टेक्सा की रिपोर्ट में दी गई।
हिमाचल फिर गुलजार: शिमला-कसौली में बढ़ी सैलानियों की रौनक, तीसरे वीकेंड पर पर्यटन कारोबार को राहत
Himachal Tourism: हिमाचल के शिमला, कसौली और चायल में तीसरे वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। सुहावने मौसम के चलते पर्यटन कारोबारियों को अच्छे कारोबार की उम्मीद है।
Bareilly News: ट्रैवल हिस्ट्री या कॉन्टैक्ट... संक्रमण की कड़ी जोड़ेगी टीम
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Jhansi News: पर्यटन मानचित्र से दूर ललितपुर का खूबसूरत खजाना
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UP Tourism Spiritual Triangle: उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विभाग ने 'विजिट माय स्टेट' अभियान के तहत श्रद्धालुओं के लिए 4 रात और 5 दिन का विशेष 'स्पिरिचुअल ट्रायंगल' (Spiritual Triangle) टूर पैकेज लॉन्च किया है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ...
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Goa Tourism में भारी इजाफा, सात महीनों में पहुंचे 61.38 लाख पर्यटक
गोवा में इस साल के पहले सात महीनों में 61.38 लाख पर्यटक पहुंचे। राज्य के पर्यटन विभाग ने शनिवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय निजी उड़ानों की बुकिंग बढ़ने से सर्दियों में पर्यटकों की संख्या में अच्छी वृद्धि की उम्मीद है। विभाग ने कहा कि आमतौर पर मानसून में पर्यटन गतिविधियां कम रहने के बावजूद पर्यटकों की संख्या में यह मजबूत बढ़ोतरी यात्रा संबंधी बदलती पसंद को दर्शाती है। अब पर्यटक केवल समुद्र तटों तक सीमित पर्यटन के बजाय संस्कृति, स्वास्थ्य और खान-पान से जुड़े अनुभवों को भी पसंद कर रहे हैं। पर्यटन विभाग की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, गोवा में पर्यटकों के आगमन में कुल मिलाकर वृद्धि दर्ज की गई है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच राज्य में 61.38 लाख पर्यटक पहुंचे। राज्य के पर्यटन मंत्री रोहन खौंटे ने कहा, ‘‘पहले सात महीनों में पर्यटकों के आगमन में हुई कुल वृद्धि से पता चलता है कि वैश्विक पर्यटन बाजार में अनिश्चितता के बावजूद गोवा की मांग बनी हुई है।’’उन्होंने कहा कि पर्यटक पारंपरिक रूप से समुद्र तट पर छुट्टियां मनाने से आगे बढ़कर अब गोवा की संस्कृति, खान-पान, विरासत, स्वास्थ्य, प्रकृति और स्थानीय समुदायों से जुड़े अनुभवों को पसंद करने लगे हैं। खौंटे ने कहा, ‘‘हम स्थापित और उभरते बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। साथ ही, ऐसे पर्यटन उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो पर्यटकों को पूरे साल गोवा आने के लिए आकर्षित करे। हालिया आंकड़ों में दिखी मजबूती से हमें भरोसा है कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर गोवा की स्थिति मजबूत बनी हुई है।’’पर्यटन विभाग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया आगामी सर्दियों के मौसम के लिए हुई अग्रिम बुकिंग और टीयूआई की ओर से घोषित योजनाओं में भी दिखाई दे रही है। ली पैसेज टू इंडिया (टीयूआई समूह) के सहायक उपाध्यक्ष नहुष बर्गी ने कहा, ‘‘टीयूआई की निजी उड़ानों से पर्यटकों का आगमन नवंबर से शुरू होगा। ब्रिटेन से हर सप्ताह चार उड़ानें संचालित होंगी, जिनमें दो मैनचेस्टर और दो गैटविक से होंगी।’’उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। अभी तक 15,300 यात्रियों ने बुकिंग कराई है, जो पिछले साल इसी समय की तुलना में सात प्रतिशत अधिक है।
बाढ़ के बीच 114 भारतीयों को बचाया गया, नेपाल पर्यटन बोर्ड ने दी जानकारी
नेपाल में लगातार भारी बारिश और बाढ़ के कारण बिगड़े हालात के बीच अब तक 114 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है। नेपाल सरकार ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि आपदा ग्रस्त इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है।
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Lakshadweep Travel Guide: लक्षद्वीप के इन 3 द्वीपों पर घूम आएं, भूल जाएंगे विदेशी डेस्टिनेशंस
फिरोजाबाद में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ब्रज की कृष्ण भक्ति से जुड़े पांच धार्मिक स्थलों को पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित इन राधा-कृष्ण एवं ठाकुर जी मंदिरों के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण पर लगभग 7.26 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। पर्यटन विभाग द्वारा नगला पीरिया, बड़ा गांव, असवाई, गौंछ और रामनगर स्थित धार्मिक स्थलों का विकास कराया जा रहा है। इन परियोजनाओं के तहत मंदिर परिसरों का सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ग्राम नगला पीरिया स्थित रामकृष्ण धाम मंदिर (गंगा सागर गरियारी) के विकास के लिए 1.10 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है। नारखी ब्लॉक के बड़ा गांव स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर के लिए 1.49 करोड़ रुपये, असवाई के ऐतिहासिक श्री राधाकृष्ण मंदिर के पर्यटन विकास पर 1.35 करोड़ रुपये और गौंछ स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर के सौंदर्यीकरण पर 1.36 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, रामनगर स्थित ठाकुर जी महाराज मंदिर के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास के लिए 1.96 करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य जारी है। इस प्रकार, पांचों धार्मिक स्थलों पर कुल 7.26 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन से जोड़ रही है। उन्होंने कहा कि ब्रज की पहचान भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से है और फिरोजाबाद में कृष्ण भक्ति से जुड़े स्थलों का विकास इसी विरासत को व्यापक पहचान देगा। इन धार्मिक स्थलों के विकसित होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा लाभ स्थानीय दुकानदारों, खान-पान, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवा क्षेत्रों को मिलेगा। पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे।
लखनऊ में स्वाइन फ्लू के 2 नए मामले सामने आए हैं। बलरामपुर अस्पताल में शुक्रवार को दो और मरीजों में H1N1 वायरस की पुष्टि हुई। दोनों मरीजों की RT-PCR रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। आइसोलेशन वार्ड में उनका इलाज वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आनंद की निगरानी में चल रहा है। फिलहाल दोनों की हालत स्थिर है। सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में अलर्ट जारी करते हुए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. बीकेएस चौहान ने बताया कि अस्पताल की आइसोलेशन बिल्डिंग को स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए रिजर्व कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग भी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। इससे पहले, गुरुवार को एक संक्रमित महिला की मौत हो गई थी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सभी संक्रमित मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री चेक करने के निर्देश दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर प्रयागराज में युवक की सिर कूचकर हत्या: घर से 50 मीटर दूर चबूतरे पर मिला खून से लथपथ शव प्रयागराज में एक सब्जी व्यापारी की ईंट से कुचलकर हत्या कर दी गई। आरोपियों ने उसके चेहरे पर ईंट से कई वार किए। फिर फरार हो गए। शनिवार सुबह जब ग्रामीण टहलने निकले, तो उन्होंने खून से लथपथ शव देखा। पास जाकर देखने पर मृतक की पहचान गांव के ही राहुल भारतीय (25) के रूप में हुई। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस को घटनास्थल से खून से सनी एक ईंट बरामद हुई। परिजनों ने बताया कि वह शुक्रवार दोपहर बाद घर से किसी काम के सिलसिले में निकला था। देर रात तक जब वह घर नहीं लौटा, तो उसकी काफी खोजबीन की गई, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। घटना घूरपुर थाना क्षेत्र की है। पढ़ें पूरी खबर पीलीभीत में बाघ ने किसान को मार डाला; शव रखकर ग्रामीणों ने जाम लगाया पीलीभीत में शुक्रवार रात बाघ ने केले के खेत की रखवाली कर रहे एक बुजुर्ग किसान पर हमला कर दिया। किसान की मौके पर ही मौत हो गई। शांतिनगर गांव निवासी मुंशी प्रसाद (60) रोज की तरह शुक्रवार रात 8 बजे खेत की रखवाली करने गए थे। खेत में बाघ ने उन पर अचानक हमला कर दिया। देर रात तक जब वह घर नहीं लौटे, तो परिजन ग्रामीणों के साथ उनकी तलाश में निकले। खेत पहुंचने पर मुंशी प्रसाद का खून से लथपथ शव बरामद हुआ। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने रामनगर तिराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर उचित मुआवजे की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर बमुश्किल रास्ता खुलवाया। मामला पूरनपुर इलाके का है। पूरी खबर पढ़िए कानपुर RTO में छापेमारी के बाद 2 बाबू सस्पेंड कानपुर RTO में छापेमारी के बाद शासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए सीनियर क्लर्क मधुर मिश्रा और बाबू विपिन कुमार को सस्पेंड कर दिया है। अपर परिवहन आयुक्त चित्रलेखा सिंह के आदेश पर दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। छापेमारी के बाद आरटीओ कार्यालय की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। गुरुवार को एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके के पास पहुंची दो शिकायतों में आरटीओ परिसर में एजेंटों के जरिए लोगों से ठगी किए जाने का मामला सामने आया। एक मामले में OLX पर स्कूटी बेचने का विज्ञापन देकर युवक को आरटीओ कार्यालय बुलाया गया। यहां एजेंटों से मिलवाने के बाद कागजी कार्रवाई कराने के नाम पर 25 हजार रुपए और चालान के 15 हजार रुपए लिए गए। इसके बाद युवक को कार्यालय के अंदर ले जाकर आरोपी फरार हो गया और बाहर खड़ी स्कूटी भी गायब मिली। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उसने हनुमंत विहार के एक युवक से भी 15 हजार रुपए ठगने की बात कबूल की है। पढ़ें पूरी खबर
नई KTM 390 Adventure ने मचाई एंट्री, दमदार इंजन के साथ मिले एडवेंचर राइडिंग के कई शानदार फीचर्स
नई KTM 390 Adventure ने मचाई एंट्री, दमदार इंजन के साथ मिले एडवेंचर राइडिंग के कई शानदार फीचर्स
लखनऊ में स्वाइन फ्लू का असर बढ़ता दिख रहा है। बलरामपुर अस्पताल में गुरुवार को संक्रमित महिला की मौत के एक दिन बाद शुक्रवार को 2 और मरीजों में H1N1 की पुष्टि हुई। दोनों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। इसके बाद सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. बीकेएस चौहान ने बताया कि दोनों मरीजों की RT-PCR जांच में H1N1 वायरस की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। दोनों का इलाज वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आनंद की निगरानी में चल रहा है। फिलहाल दोनों की हालत स्थिर है। बलरामपुर अस्पताल की आइसोलेशन वार्ड बिल्डिंग को स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए रिजर्व कर दिया गया है। लगातार नए मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अस्पतालों में अलर्ट की 3 तस्वीरें देखिए… 75 जिलों के डीएम को अलर्ट रहने के निर्देश प्रदेश में स्वाइन फ्लू की स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग और सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से स्वाइन फ्लू के मामलों की नियमित समीक्षा करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने को कहा है। मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में मरीजों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश दिए हैं। आइसोलेशन वार्ड, जरूरी दवाएं, जांच किट और अन्य चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। संक्रमितों की ट्रैवल हिस्ट्री होगी चेक डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। खासकर दिल्ली-NCR से जुड़े जिलों में मरीज तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने सभी संक्रमित मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री चेक करने के निर्देश दिए हैं। संक्रमित मरीजों को जरूरत के अनुसार होम आइसोलेशन की सलाह दी जाएगी। डिप्टी सीएम ने स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। लक्षण दिखें तो समय पर कराएं जांच मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज न करें। लक्षण दिखाई देने पर समय रहते डॉक्टर की सलाह लें और जरूरी जांच कराएं। उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन समय पर जांच और इलाज जरूरी है। …………… ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में स्वाइन फ्लू के 2 नए मरीज मिले:रक्षाबंधन पर अस्पतालों की OPD में पसरा रहा सन्नाटा, KGMU की बंद रही लखनऊ के अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में शुक्रवार को रक्षाबंधन के कारण मरीजों की संख्या बेहद कम रही। SGPGI और लोहिया संस्थान की OPD में कुछ ही मरीज इलाज के लिए पहुंचे। जबकि, KGMU की OPD अवकाश के चलते बंद रही। सरकारी अस्पतालों में हाफ-डे यानी दोपहर 12 बजे तक ही OPD चालू रही। यहां भी बेहद सीमित मरीज इलाज के लिए पहुंचे। वहीं, बलरामपुर अस्पताल में एक दिन पहले स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीज की मौत के बाद उसके इलाज में रहे मेडिकल स्टाफ को आइसोलेशन में रखा गया है। अगले दिन शुक्रवार को स्वाइन फ्लू के 2 नए मरीज भर्ती हुए। पढ़िए पूरी खबर…
सिद्धार्थनगर। रक्षाबंधन पर भाई के घर पहुंचने की जल्दी और महिलाओं के लिए मुफ्त रोडवेज यात्रा योजना ने शुक्रवार को जिले की परिवहन व्यवस्था का पूरा स्वरूप बदल दिया।
कानपुर में जाजमऊ थाना क्षेत्र के गंगापुल पर शुक्रवार शाम 7 बजे चाइनीज मांझे की चपेट में आने से ट्रैवल एजेंसी संचालक गंभीर रूप से घायल हो गया। मांझा हेलमेट का शीशा खुला होने के कारण सीधे उसके गले और गाल में जा फंसा। हादसे में उसके आठ टांके लगे, जबकि बाइक पर बैठी उसकी मां भी मामूली रूप से घायल हो गईं। श्याम नगर के ए-ब्लॉक निवासी वरुण सिंह ट्रैवल एजेंसी संचालक हैं। रक्षाबंधन पर वह अपनी मां सरोज सिंह को लेकर उन्नाव के सोहरामऊ स्थित मामा कृष्णपाल सिंह के घर राखी बंधवाने गए थे। शाम को दोनों बाइक से कानपुर लौट रहे थे। जाजमऊ गंगापुल पर पहुंचते ही अचानक चाइनीज मांझा वरुण के गले और गाल में फंस गया। मांझे से कट लगते ही बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई। हादसे में वरुण के गले और गाल से खून निकलने लगा। मौके पर मौजूद राहगीरों ने उन्हें पास के निजी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उपचार के दौरान घायल के आठ टांके लगाए। प्राथमिक उपचार के बाद परिजन उन्हें घर ले गए। हादसे में वरुण की मां सरोज सिंह को भी मामूली चोटें आईं। हाल में हुई घटनाएं जाजमऊ थाना प्रभारी संजय पांडे ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस को नहीं है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी
मोगा के धर्मकोट थाना क्षेत्र के गांव रेड़वां निवासी परमजीत सिंह के भाई और साले को वर्क परमिट पर अमेरिका भेजने का झांसा देकर 23 लाख रुपए की ठगी करने का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर धर्मकोट पुलिस ने फिरोजपुर के गांव स्नेर निवासी ट्रैवल एजेंट गुरपरम सिंह और उसकी पत्नी वरिंदरजीत कौर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मामले की जांच थानेदार इंद्रजीत सिंह कर रहे हैं। परमजीत सिंह ने जिला पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि अक्टूबर 2023 में उनकी मुलाकात आरोपी दंपति से हुई थी। वह अपने भाई जसवीर सिंह और साले बलविंदर सिंह को विदेश भेजना चाहते थे। आरोपियों ने दोनों को वर्क परमिट पर अमेरिका भेजने का भरोसा दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी शिकायतकर्ता के अनुसार, भरोसे में आकर उन्होंने आरोपियों को दोनों के जरूरी दस्तावेज और 23 लाख रुपए दे दिए। इसके बावजूद आरोपियों ने न तो जसवीर सिंह और न ही बलविंदर सिंह को अमेरिका भेजा। जब परमजीत सिंह ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी कथित तौर पर टालमटोल करते रहे और रकम वापस नहीं की। मामले की शिकायत मिलने के बाद एसपी ने डीएसपी स्पेशल क्राइम मोगा को जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए और शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। उनकी तलाश में पुलिस टीमों की ओर से छापेमारी की जा रही है।
Travel Tips: शिमला-मनाली के बजाय Jibhi के Offbeat Locations बन रहे पर्यटकों की पहली पसंद
हिमाचल प्रदेश का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में सबसे पहले शिमला और मनाली का नाम आता है। इसके अलावा लोग और दूसरी जगहों के बारे में बहुत कम जानते हैं। ऐसे में अगर आप भी हिमाचल प्रदेश घूमने का मन बना रही हैं, तो आप हिमाचल की ऑफबीट लोकेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हिमाचल प्रदेश की छिपे खजाने जिभी के बारे में बताने जा रह हैं। ऑफबीट लोकेशन जिभी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बंजार घाटी स्थिति जिभी आपको सुकून का एहसास दिलाएगा। क्योंकि 5000 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद यह जगह अन्य टूरिस्ट स्पॉट की तरह भीड़भाड़ वाली नहीं है। वहीं दूरी की बात की जाए, तो यह जगह मनाली से करीब 100 किमी दूर और मंदिर से करीब 50 किमी दूर है। इसे भी पढ़ें: Travel Plan Breakdown: दिल्ली से ₹5000 के बजट में घूमें ये 3 शहर, जानें ट्रांसपोर्ट और होटल का पूरा खर्च जिभी कैबाइन्स नामक ट्री हाउस, लकड़ी और घने देवदार के जंगलों के लिए जानी जाती है। आप आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करते हैं, तो जिभी के सुंदर झरने और प्राकृतिक नजारे आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। जिभी में इन जगहों को करें एक्सप्लोर दुनिया की भीड़भाड़ से दूर हिमाचल प्रदेश की यह ऑफबीट लोकेशन कई मायनों में बेहद खास है। तो आइए जानते हैं कि आप जिभी में क्या-क्या एक्सप्लोर कर सकते हैं। रघुपुर किला रघुपुर किला वैसे तो अब खंडहरों में गिना जाता है। लेकिन 11,155 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस किले से कुल्लू और मंडी के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाया जा सकता है। जालोरी पास जिभी से करीब 12-14 किमी दूर और करीब 10 हजार फीट स्थित जालोरी पास एक माउंटेन है। यहां पर बर्फ से ढकी पहाड़ियां हसीन वादियों से कम नहीं लगती हैं। श्रृंग ऋषि मंदिर जिभी से थोड़ी ही दूर पर बग्गी गांव में स्थित श्रृंग ऋषि मंदिर है। जो यहां के स्थानीय देवता श्रृंग ऋषि को समर्पित है। श्रृंग ऋषि को कुल्लू के 18 देवताओं में से एक माना जाता है। जिनका संबंध रामायण काल से है। यही कारण है कि इस मंदिर में दर्शन के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग भीड़ उमड़ती है। सेरोलसर झील जालोरी से करीब 5 किमी दूर सेरोलसर झील है। जिसके बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि इस झील के पानी में औषधीय गुण हैं। झील के किनारे बैठकर बहुत सुकून मिलता है। ऐसे में प्रकृति प्रेमियों को यहां आकर निराशा नहीं होगी।
Mau News: मऊ महादेव घाट पर पर्यटन बढ़ा लेकिन सुरक्षा घट गई, जहां श्रद्धा होनी थी, वहां रीलों का रेला
Tourism increased at Mau Mahadev Ghat but security decreased, where there was supposed to be devotion, there was a procession of reels.
Bhadohi News: पांच बांधों के फाटक खोले गए, पर्यटन स्थलों पर भी बढ़ा खतरा
Sluice gates of five dams opened; risk increases at tourist spots as well.
घुमक्कड़ लोग हमेशा घूमने के लिए तैयार रहते हैं। यह लोग हमेशा कही न कहीं का प्लान बनाते रहते हैं। सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से खास माना जाता है। इस दौरान कई जगहों पर बारिश होती है, इसलिए मौसम सुहाना होता है। बरसात के बाद से हर जगह खूबसूरती चरम पर पहुंच जाती है और आसपास का नजारा काफी फ्रेश नजर आता है। परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ कुछ दिनों की छुट्टी पर जाना अच्छा हो सकता है। आइए आपको बताते हैं करीब 5000 रुपये में बजट में आप कहां घूम सकते हैं। पुष्कर, राजस्थान यदि आप पहाड़ों की जगह पर किसी झील और मंदिर वाली जगहों को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आप राजस्थान के पुष्कर जा सकते हैं। यहां की झीलें घूमना, ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करना और बाजारों में घूमना आपको मजेदार लगेगा। इस मौसम में यहां गर्मी कम होती है। - दिल्ली से दूरी-करीब 430 किमी है। - समय- लगभग 7-9 घंटे का समय लग जाता है। - घूमने के लिए पुष्कर झील, ब्रह्मा मंदिर, घाट और लोकल बाजार घूमने जा सकते हैं। बजट फ्रेंडली होटल लें, लोकल स्ट्रीट से खाना खाएं। होटल को बुकिंग ऑनलाइन ही करें। ऋषिकेश, उत्तराखंड योग नगरी ऋषिकेश धार्मिक दृष्टि से तो खास है, लेकिन यह जगह एडवेंचर के लिए भी काफी लोकप्रिय है। सुबह की आरती से लेकर मंदिरों के दर्शन तक, यहां पर आप सब कुछ देख सकते है। रिवर राफ्टिंग कर सकते हैं और भी कई एक्टिविटीज कर सकते हैं। - दिल्ली से दूरी करीब 240 किमी। - समय- लगभग 5 से 6 घंटे का समय लग जाता है। - होटल के लिए कम से कम 1200 से 1500 रुपये में रुम मिल जाएगा। - 5000 हजार में ट्रिप को करने के लिए पैदल या शेयरिगं ऑटो से घूमें और महंगे कैफे से बचें। अमृतसर, पंजाब बजट फ्रेंडली ट्रिप के लिए आप पंजाब घूमने जा सकते हैं। अमृतसर में धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों तरह की जगहें देखने को मिल जाएगी। सबसे फेमस यहां पर स्वर्ण मंदिर है, जिसकी खूबसूरती काफी देखने के लायक है और माहौल भी शांत देखने को मिलेगा। वहीं, आप अटारी-वाघा बॉर्डर भी घूमने जा सकते हैं। -दिल्ली से दूरी- लगभग 450 किमी -समय- लगभग 7 से 8 घंटे लग सकते हैं। इस ट्रिप के दौरान आप खाने पर खर्च बचा सकते हैं, गुरुद्वारे में खाना खा सकते हैं। वहीं, आप लोकल स्ट्रीट पर फूड खा सकते हैं। महंगे होटल पर खाना खाने से बचें।
लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना बहनों के लिए तोहफा : राज्यमंत्री
लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना का लखनऊ से मुख्यमंत्री ने बुधवार को शुभारंभ किया।
Sant Kabir Nagar News: बखिरा झील में होगा पर्यटन का ‘नया सवेरा’, ईको पार्क भी बनेगा
A new dawn for tourism at Bakhira Lake eco-park to be developed too
Basti News: देरी से चल रहीं ट्रेनें, समय से गंतव्य नहीं पहुंच पा रहे यात्री
Trains running late; passengers unable to reach destinations on time.
Sant Kabir Nagar News: लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना का हुआ शुभारंभ
Lokmata Ahilyabai Matrushakti Yatra Scheme launched
Mathura News: जुलहेंदी में अमृत सरोवर की सौगात, पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
मथुरासमाचार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना' का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत, राज्य की 60 साल और उससे अधिक आयु की महिलाओं को आजीवन निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, रक्षाबंधन के अवसर पर सभी माताओं, बहनों और बेटियों को सहयात्री सहित मुफ्त बस यात्रा का लाभ मिलेगा। रक्षाबंधन के लिए यह विशेष सुविधा 27 अगस्त को सुबह 6 बजे से शुरू होकर 29 अगस्त, 2026 की मध्यरात्रि 12 बजे तक उपलब्ध रहेगी। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए महिलाएं अपना आधार कार्ड या निर्वाचन कार्ड दिखाकर निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से इस योजना का शुभारंभ करते हुए विशेष बसों को हरी झंडी दिखाई। जौनपुर कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह में इस कार्यक्रम का सजीव प्रसारण किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह सुविधा माताओं और बहनों को आसानी से अपने भाइयों के पास जाकर राखी बांधने में मदद करेगी। जिलाधिकारी ने बताया कि रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए बस सेवाएं निःशुल्क रहेंगी और 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को यह सुविधा आजीवन मिलेगी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण शासन की शीर्ष प्राथमिकता है और यह योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम का संचालन प्रीती श्रीवास्तव ने किया।
हरदोई में गांधी भवन सभागार में बुधवार को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम और जिला प्रशासन की ओर से ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने पात्र बुजुर्ग महिलाओं को योजना के स्मार्ट कार्ड वितरित किए। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक चला। योजना का शुभारंभ राज्य मंत्री रजनी तिवारी, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान लखनऊ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज्य स्तरीय शुभारंभ संबोधन का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को आजीवन मुफ्त यात्रा ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को परिवहन निगम की बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। पात्र महिलाओं को स्मार्ट कार्ड के माध्यम से इस सुविधा का लाभ मिलेगा। रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। राज्य मंत्री ने लाभार्थी बुजुर्ग महिलाओं को स्मार्ट कार्ड के साथ उपहार स्वरूप बैग प्रदान किए। बैग में साड़ी और मिठाई रखी गई थी। 27 से 29 अगस्त तक महिलाओं का मुफ्त सफर रक्षाबंधन पर्व के मद्देनजर 27, 28 और 29 अगस्त तक सभी महिलाओं, बेटियों और माताओं को रोडवेज और सिटी बसों में एक सहयात्री के साथ तीन दिनों तक निःशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई है। राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान, सुरक्षा और सुविधा सरकार की प्राथमिकता है। रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और उपहार की सुविधा सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है। इस दौरान कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अलका गुप्ता, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दीप्ति भार्गव, नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, यूपीएसआरटीसी हरदोई क्षेत्र के आरएम गौरव वर्मा, एसएम, एआरएम समेत अन्य अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ नागरिक महिलाओं को एक बड़ा लाभ दिया है। बुधवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उन्होंने 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना' का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत, प्रदेश में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाएं अब रोडवेज बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। योजना के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर से आईं बुजुर्ग महिलाओं से संवाद किया। उन्होंने घोषणा की कि रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में 27, 28 और 29 अगस्त को सभी बेटियां और माताएं अपने एक साथी के साथ रोडवेज बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी। इसके उपरांत, वरिष्ठ महिलाओं के लिए यह मुफ्त सफर आजीवन जारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार अक्टूबर-नवंबर माह में 50 हजार मेधावी बेटियों को मुफ्त स्कूटी वितरित करेगी। देखें, 4 तस्वीरें… लखनऊ में आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पीलीभीत के गांधी प्रेक्षागृह में भी किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार, भाजपा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य और जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह सहित कई प्रशासनिक अधिकारी तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने कहा कि यह योजना सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बताया कि इससे 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद महिलाओं को यात्रा के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस अवसर पर, रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में उपस्थित महिलाओं को उपहार स्वरूप साड़ियां और मिठाइयां भी वितरित की गईं।
सांसद मनोज तिवारी ने बताया कि बिहार को पर्यटन में अग्रणी बनाने के लिए केंद्र 25 हजार करोड़ रुपये लगा रहा है। संसदीय समिति के साथ बोधगया दौरे पर उन्होंने पर्यटन स्थलों के व्यापक विकास की योजना साझा की।
चंदौली लोकसभा सीट से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखकर चंदौली, मिर्जापुर और आसपास के धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक व ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर व्यापक पर्यटन सर्किट बनाने का सुझाव दिया है। सांसद ने वाराणसी को केंद्र में रखते हुए इन क्षेत्रों को एक पर्यटन एवं आध्यात्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की मांग की है। सांसद का कहना है कि चंदौली में गंगा के किनारे का बड़ा क्षेत्र धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध है। यह इलाका बाबा कीनाराम, मौनी बाबा, त्रिदंडी स्वामी, स्वामी प्रेमानंद जी और संत खड़िया बाबा जैसी विभूतियों की तपोस्थली रहा है। इसके अलावा बरठी का बाबा कालेश्वर नाथ मंदिर, नौगढ़ का किला और बांध भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पत्र में कहा कि नौगढ़ के प्राकृतिक क्षेत्र में राजदारी-देवदारी जलप्रपात, मिर्जापुर का लखनिया दरी और चुनार का ऐतिहासिक किला भी इस सर्किट से जोड़े जा सकते हैं। इन स्थलों को एक पैकेज के रूप में विकसित करने से वाराणसी आने वाले पर्यटकों का ठहराव बढ़ाया जा सकता है। एक दिन के बजाय दो या अधिक दिन रुकेंगे पर्यटक सांसद वीरेंद्र सिंह के अनुसार, अभी बड़ी संख्या में पर्यटक वाराणसी आते हैं, लेकिन सीमित समय के कारण आसपास के जिलों के पर्यटन स्थलों तक नहीं पहुंच पाते। यदि चंदौली और मिर्जापुर के प्रमुख स्थलों को वाराणसी से जोड़कर सुविधाएं विकसित की जाएं तो पर्यटकों का प्रवास एक दिन से बढ़कर दो या उससे अधिक दिनों का हो सकता है। इससे स्थानीय होटल, होम स्टे, परिवहन और पर्यटन गाइड के काम को बढ़ावा मिलेगा। हस्तशिल्प, खान-पान और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। धार्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने का सुझाव सांसद ने पत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक पर्यटन को भी विकसित करने पर जोर दिया है। नौगढ़, राजदारी-देवदारी और लखनिया दरी जैसे स्थान प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं चुनार का किला और नौगढ़ का किला ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। उनका कहना है कि इन सभी स्थलों को जोड़कर एक समेकित पर्यटन मार्ग विकसित किया जाए, ताकि पर्यटकों को एक ही यात्रा में धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन का अनुभव मिल सके। स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पर्यटन सर्किट बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के कई नए अवसर पैदा होंगे। होटल और होम स्टे से लेकर टैक्सी, गाइड, हस्तशिल्प, स्थानीय खान-पान और अन्य छोटे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। इससे युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सकेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वाराणसी को पूर्वांचल के पर्यटन का प्रवेशद्वार बनाने की मांग सांसद ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास योजनाओं को केवल वाराणसी की सीमाओं तक सीमित रखने के बजाय क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। वाराणसी से चंदौली, मिर्जापुर और आसपास के प्रमुख स्थलों को जोड़ने से इसका लाभ बड़े क्षेत्र की जनता को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास से जुड़े मामलों में विपक्षी सांसदों के रचनात्मक सुझावों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लोकतंत्र में राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन जनता और क्षेत्र के विकास से जुड़े अच्छे सुझाव किसी दल की सीमा में नहीं बंधने चाहिए। सांसद ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि काशी को केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के पर्यटन, आध्यात्मिकता, संस्कृति और आर्थिक विकास के प्रवेशद्वार के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल की जाए।
भारत में कई अद्भुत चमत्कार और रहस्यमय मंदिरों का खजाना है। यहां पर आपको कई प्राचीन मंदिर देखने को मिलेंगे। हर मंदिर की एक अलग विशेषता है। राजस्थान के सीकर जिले में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शता है। इस मंदिर का नाम है जीणा माता। यह मंदिर मां जीण भवानी को समर्पित है। रक्षाबंधन पर अपने भाई के साथ यहां दर्शन के लिए आप जरुर जा सकते हैं। यह मंदिर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है और यहां मां जीण माता के साथ उनके भाई हर्ष की भी पूजा की जाती है। आइए आपको इस मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बताते हैं। राजस्थान में कहां स्थित है भाई-बहन को समर्पित जीण माता का मंदिर? राजस्थान के सीकर जिले में जीणमाता गांव में यह मंदिर स्थित है। यहां पर मुख्य रुप से मां जीण की पूजा होती है। राखी के समय यहां लोग दर्शन के लिए जरुर जाते हैं। इस दौरान यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर खाटू श्याम से 25-30 किमी की दूरी पर स्थित है। कैसे पहुंचे? - अगर आप सीकर शहर से यहां जाएंगे, तो आपको 29 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। यदि आप जयपुर से जा रहे हैं, तो आपको 110 किमी का सफर तय करना होगा। जयपुर से पहुंचने के लिए करीब 3 घंटे का समय लगेगा। - जो भाई-बहन दूसरे शहरों से आने का प्लान कर रहे हैं, वह ट्रेन से जा सकते हैं। इसके लिए आपको रींगस जंक्शन तक ट्रेन टिकट बुक करानी पड़ेगी। - सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर एयरपोर्ट है, यहां से आप मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए बस की क्या सुविधा है? - राजस्थान से आपको सीकर जिले से मंदिर के लिए बस मिल जाएगी। आसपास के शहरों से भी सीकर जिले के लिए बस जाती है। - जयपुर से आप सीकर के लिए पहले बस लें। इसके बाद सीकर पहुंचकर जीण माता मंदिर के लिए शेयरिंग टैक्सी या ऑटो बुक कर सकते हैं। जीण माता मंदिर यह मंदिर भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है, इसलिए रक्षाबंधन के समय भीड़ थोड़ी देखने को मिल सकती है। किसी भी साधन से जा रहे हैं, तो समय का जरुर ध्यान रखें। जीण माता मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, इसलिए जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 200 से 300 मीटर पैदल चलना पड़ता है। रास्ते में करीब 200 सीढ़िया मिलेगी। इन्हें चढ़ने में आधे घंटे का समय लग जाएगा। View this post on Instagram A post shared by Aryan Parashar (@aryanpujari_jeenmata)
जन्माष्टमी पर दिल्ली से द्वारका कैसे जाएं और कितना होगा खर्चा? जानिए पूरा बजट और ट्रैवल प्लान
जन्माष्टमी के दिन द्वारकाधीश के दर्शन करने का प्लान कर रहे हैं, तो दिल्ली से द्वारका तक जाने का पूरा ट्रैवल प्लान जान लीजिए। हम आपको आने-जाने और ठहरने का खर्चा बताने जा रहे हैं।
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Ranveer Singh Deepika Padukone Photos Fact Check:
क्या आप कभी भारत के ऐसे इलाके में घूमने गए हैं, जहां की सड़कें एकदम जिगजैग हों। ऐसा सफर देखकर या सोचकर ही रोमांचक लगता है। कुछ ऐसा ही है सिक्किम का ऑफ बीट लोकेशन है। जिसका नाम जुलूक है। अगर आप भी हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड जाकर ऊब चुके हैं, तो इस बार आपको सिक्कम जाने का प्लान करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सिक्किम के छोटे से गांव जुलूक के बारे में बताने जा रहे हैं। सिक्किम का जन्नत भारत के सिक्किम राज्य के पूर्वी जिले में स्थित एक बेहद छोटा और खूबसूरत गांव जुलूक है। जुलूक आपको जन्नत की सैर इसी धरती पर करा सकता है। बादलों के ऊपर बसा यह गांव समुद्र तल से करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसको आप हनीमून डेस्टिनेशन या फैमिली ट्रिप बना सकती हैं। आपको यहां आकर निराशा नहीं होगी। इसे भी पढ़ें: IRCTC Northeast Package: अब किस्तों में चुकाएं पैसे, मुंबई से Gangtok-Darjeeling ट्रिप में Flight और Guide भी शामिल सिल्क रूट का हिस्सा शायद आपको पता न हो जुलूक कभी सिल्क रूट का हिस्सा था। इसके व्यापार मार्ग की बात करें, तो यह मार्ग जेलेपा मुख्य पहाड़ी दर्रे को तिब्बत के ल्हासा तक जोड़ता था। जुलूक में क्या करें एक्सप्लोर अगर आप भी जुलूक घूमने का मन बना रहे हैं, तो आपको इन खास जगहों को जरूर एक्सप्लोर करना चाहिए। थंबी व्यू पॉइंट थंबी व्यू पॉइंट से आपको कंचनजंघा की चोटियां साफ देखने को मिल सकती हैं। क्योंकि थंबी व्यू पॉइंट से कंचनजंघा सिर्फ 10 से 12 किमी की दूरी पर है। नाथंग वैली नाथंग वैली पर जाकर आप एक गाना तो जरूर गुनगुनाएंगे, 'बादल पर पांव हैं', क्योंकि वाकई में आपके पैर बादलों के बीच होंगे। एलीफेंट लेक ओल्ड सिल्क रूट पर आपको सिर्फ बादल ही नहीं बल्कि एलिफेंट लेक भी देखने को मिलेगी। इसको कुपूप झील या बिटांग छो भी कहते हैं। इस झील का आकार कुछ-कुछ हाथी जैसा दिखता है। जिग-जैग रास्ते यहां जाकर अगर आप रोड ट्रिप पर नहीं गए हैं तो मतलब आपने जुलूक को सही से नहीं एक्सप्लोर किया। यहां के जिग-जैग मोड़ ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। जानें कब और कैसे जाएं यहां पर जाने के लिए मार्च से लेकर मई और सितंबर से नवंबर तक का समय बेस्ट है। अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं, तो न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन और हवाई मार्ग के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद गंगटोक और रोंगली होते हुए सड़क यात्रा करनी होगी।
Travel Tips: तुर्कमेनिस्तान का वह नरक द्वार जहाँ 1971 से नहीं बुझी आग, जानिए Karakum Desert का सच
दुनिया में आपको कई ऐसी अनोखी जगहें मिलेंगी, जिनके बार में जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा। ऐसी ही एक जगह मध्य एशियाई के देश तुर्कमेनिस्तान में है। यहां पर काराकुम रेगिस्तान को नरक का दरवाजा भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कोई पैर नहीं रख सकता है। काराकुम रेगिस्तान में डेवरेज गांव के पास में यह रेगिस्तान में है। जिसको 'शाइनिंग काराकुम' के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि रेगिस्तान का एक हिस्सा हमेशा आग की तरह चमकता रहता है। ऐसे में अगर आप भी यह सोच रहे है कि इसको नरक का दरवाजा क्यों कहा जाता है, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको इस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2026: भारतीय रेलवे का बड़ा तोहफा, इन Routes पर चलेंगी Raksha Bandhan Special Trains क्यों कहते हैं नरक का दरवाजा साल 1971 में मध्य एशिया के काराकुम रेगिस्तान में एक ऐसी घटना हुई। जिस कारण रेगिस्तान में आग लगाना पड़ा। साल 1971 में तेल भंडार की खोज में सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक का एक ग्रुप काराकुम रेगिस्तान आया था। यहां पर उनको एक ऐसी जगह मिल भी गई। जहां पर वैज्ञानिकों को लगा कि तेल भंडार होगा। उन्होंने प्राकृतिक गैस के एक बड़े भंडार के ऊपर खुदाई करना शुरू किया। लेकिन उनको इसके नतीजे के बारे में नहीं पता था। जब खुदाई के लिए उन्होंने उस हिस्से पर भारी मशीनें लगाईं। तो जमीन मशीनों का जोर न सह पाए और जमीन अंदर की ओर धंसने लगी। जिस कारण कई जगहों पर गड्ढा बनता चला गया। एक गड्ढे से निकलने लगी गैस बता दें कि रेगिस्तान में जगह-जगह गड्ढे बन रहे थे। लेकिन एक गड्ढा सबसे बड़ा था। यह गड्ढा करीब 230 फीट चौड़ा और 65 फीट गहरा था। जिसके बाद वैज्ञानिकों को चिंता सताने लगी। क्योंकि इस गड्ढे से लगातार प्राकृतिक गैस बाहर निकल रही थी। हालांकि यह गैस जहरीली नहीं थी, लेकिन फिर भी यह ऑक्सीजन को बदल देती थी। जिस कारण सांस ले पाना मुश्किल हो जाता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी रेगिस्तान में रहने वाले जानवरों को होती थी। क्योंकि गड्ढे में गिरने से जानवर की फौरन मौत हो जाती। ऐसे में वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर यहां ब्लास्ट करना हो तो सिर्फ 5% मीथेन की मात्रा काफी होगी। इसलिए उन्होंने सोचा कि इसमें आग लगा दी जाए। अभी तक जल रही आग आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आग अभी तक जल रही है। तुर्कमेनिस्तान के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जब गड्ढे में मौजूद प्राकृतिक गैस खत्म हो जाएगी, तो यह आग अपने आप बुझ जाएगी। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है और यह आग जल रही है। साल 2010 में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति कुरबानगुली बर्डीमुखामेदोव भी इस गड्ढे का दौरा करने के लिए यहां पहुंचे थे। रेगस्तान में भभकने वाली इस आग को देखकर उन्होंने भी चिंता जताई थी। इससे आसपास के गैस क्षेत्रों को भी खतरा हो सकता है।
वियतनाम भारतीय पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जगहों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां पर्यटकों को मिलने वाली हर तरह की सुविधा है। जिन यात्रियों को समुद्र के किनारे समय बिताना अच्छा लगता है, उनके लिए यहां पर कई खूबसूरत बीच हैं। एडवेंचर और ऐतिहासिक जगहों पर घूमने के लिए कई जगहें हैं। वियतनाम की संस्कृति भी पर्यटकों का काफी आकर्षित करती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वियतनाम की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं। जिस कारण हर साल लाखों की संख्या में भारतीय पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते हैं। इसे भी पढ़ें: Delhi to Agra Travel Guide: मानसून की फुहारों के बीच ताजमहल और Baby Taj का दीदार, एक दिन की छुट्टी के लिए परफेक्ट One-Day Trip आसान वीजा प्रोसेस वियतनाम जाने के लिए भारतीयों को वीजा प्रोसेस के लिए ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती है। ई-वीजा के जरिए आवेदन करने पर 90 दिनों के अंदर आप वियतनाम यात्रा पर जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के कारण भारतीयों को वीजा के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के दौरान भारतीयों को पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, एक्सपायरी डेट, पासपोर्ट साइज फोटो, पासपोर्ट के बायोडाटा की फोटो और पर्सनल जानकारी जैसी जानकारी देनी होती है। वहीं यात्रा से 2 सप्ताह पहले आवेदन करना सही होता है। घूमना है आसान वियतनाम की मुद्रा को डोंग कहते हैं, जोकि भारत के रुपए के मुकाबले सस्ती है। भारतीय रुपए की तुलना में वियतनाम के डोंग की वैल्यू काफी कम है। भारतीय 1 रुपया करीब 275 वियतनामी डोंग के बराबर है। अगर आप 100 रुपए खर्चा करती हैं, तो यह 27,500 वियतनामी डोंग के बराबर होगा। इसलिए यहां पर भारतीयों को घूमना सस्ता पड़ता है। वहीं यहां पर रहना, खाना, घूमना आदि भारतीय पर्यटकों को सस्ता लगता है। कई बेहद खूबसूरत जगहें वियतनाम जाने का एक कारण यह भी है कि यहां पर खूबसूरत जगहों की भरमार है। यहां समुद्र तट, नदियां, पहाड़, गुफाएं और ऐतिहासिक स्थल आदि सभी चीजें आपको एक ही जगह पर मिल जाती है। इस तरह से आपका विदेश ट्रिप पूरा लगता है। यहां का हा लॉन्ग बे जगह नीले पानी और चूना पत्थर की के लिए काफी फेमस माना जाता है। वहीं दा नांग एक बेहद खूबसूरत बीच है। आप हो ची मिन्ह सिटी में शॉपिंग कर सकती हैं। तो हनोई में वियतनाम की संस्कृति को बेहद करीब से देखने और समझने का मौका मिलता है।
क्या आप भी दिल्ली की भागदौड़ में परेशान हो गए हैं। बस आपको एक दिन ब्रेक लेना है, तो यह लेख आपके लिए है। वीकेंड पर घूमने के लिए आप दिल्ली से बेहद नजदीक इस जगह पर जरुर जा सकते हैं। यहां पर आपको इतिहास, खूबसूरती और अच्छा खाना तीनों एक साथ मिल जाएंगे। इस ट्रिप के लिए आपको ज्यादा दिन की छुट्टी लेनी की भी जरुरत नहीं है। आगरा में कई मशहूर जगहें जहां आप जरुर जाएं। मानसून के समय आगरा का मौसम बेहद प्यारा और खूबसूरत रहता है, तो चलिए बिना देर किए आपको बताते हैं एक दिन की छोटी ट्रिप के बारे में- आगरा में देखें ताजमहल आगरा जाएं और आप ताजमहल न देखें, ऐसा कुछ हो नहीं सकता। सफेद संगमरमर से बना हुआ यह मकबरा मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। आपको बताते चलें कि यह यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल है। मानसून के दौरान जब काले बादल छाए रहते हैं, तो ताजमहल का नजारा और भी खूबसूरत दिखता है। फोटो क्लिक करने के लिए शानदार व्यू बन जाता है। आगरा फोर्ट घूमें दिल्ली से आगरा की दूरी करीब 230 से 240 किलोमीटर है। ताजमहल घूमने के बाद आप आगरा फोर्ट देखने जरुर जाएं। लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ यह किला यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल हैं। एक समय में यह मुगल बादशाहों के लिए सत्ता और रहने की जगह थी। वैसे यह ताजमहल से ज्यादा दूर नहीं है। किले के अंदर बड़े आंगन, महल और मुगर दौर की चीजें देखने को मिलती है। मेहताब बाग में मिलेगा ताज का अलग नजारा भीड़ से हटकर घूमना चाहती हैं, तो मेहताब बाग जा सकती हैं। यहां से दूर बैठकर ताजमहल के दीदर किए जा सकते हैं। खासतौर पर यह यमुना नदी के दूसरी तरफ बना मुगल गार्डन है और यहां से ताजमहल सबसे सुंदर नजर आता है। बेबी ताज भी देख सकती हैं आप यदि आप ट्रिप का समय का मैनेज कर लें, तो आप इत्माद-उद-दौला का मकबरा देखने भी जा सकते हैं। इसको बेबी ताज कहा जाता है। सफेद मार्बल, डिजाइन और काम इसको और भी सुंदर बना दिया है। जिन लोगों को भीड़ दूर रहना पसंद उनके लिए यह जगह बेहद खास है। मानसून में ट्रिप प्लान करते समय रखें ये बातें सबसे बढ़िया समय है मानसून के दौरान ट्रिप प्लान करने का। इस बात का ध्यान रखें कि पूरे दिन का शेड्यूल न रखें। आप भी एक दिन के लिए ऐसे ट्रिप का प्लान कर सकती हैं। - सुबह दिल्ली से आगरा के लिए निकलें। - सबसे पहले आप ताजमहल देखने जाएं। - दोपहर के समय खाना और थोड़ा आराम करें। - शाम के समय आप मेहताब बाग घूम सकते हैं। - अगर समय बचे तो बेबी ताज देख सकते हैं। - रात के समय दिल्ली के लिए वापस निकलें।
चंदेरी को भगवान श्रीकृष्ण की बुआ श्रुति के बेटे शिशुपाल की राजधानी माना जाता है। उस दौरान इसका उल्लेख चेदी राज्य के रूप में मिलता है। चंदेरी की रणनीतिक स्थिति में इसके समृद्धि की बड़ी वजह रही। कभी चंद्रगिरि कहा जाने वाला चंदेरी, बुंदेलखंड और मालवा की सीमा पर बसा है। जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। यहां पर मालवा के सुल्तानों और बुंदेल के राजपूतों द्वारा बनवाई गई तमाम इमारतें देखी जा सकती हैं। नदी किनारे गुफाओं में बने शैलचित्र सांस्कृतिक वैभव और कलात्मक सौंदर्य का परिचय देते हैं। यहां के शैलचित्रों को देखकर कहा जा सकता है कि चंदेरी प्रागैतिहासिक काल से एक जीवंत शहर है। चंदेरी साड़ियों से तो सभी वाकिफ हैं, चंदेरी साड़ियां अपने शिल्प और नफासत के लिए फेमस हैं। इसे भी पढ़ें: Monsoon Tourism 2026: भीड़भाड़ से दूर शांति देंगे ये 4 Budget Friendly Destinations, आज ही करें अपने ट्रिप का Plan जानें चंदेरी में कहां घूमें कोशक महल वहीं खिलजी वंश के शासनकाल में यह महल इस्लामी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चतुर्भुज आकार में निर्मित इस त्रि-स्तरीय महल के विशाल द्वार, झरोखे, खुले गलियारे इसकी स्थायपत्य कला को अनुपम बनाते हैं। इस महल के छत से दिखने वाले प्राकृतिक दृश्य इसकी शोभा को दोगुना कर देती है। कोशल इमारत के हर कक्ष के छत की डिजाइन बेहद अनोखा है। शुरूआत में 7 मंजिला इमारत के रूप में यह ढांचा सिर्फ 3 मंजिलों तक पूरा हो सका। चंदेरी किला चंदेरी किला शहर से 71 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला अभी भी शान से खड़ा है। यह किला कभी अभेद्य दुर्ग की तरह रहा होगा। यह किला 5 किमी लंबी दीवार से घिरा है। किले तक पहुंचने के तीन रास्ते हैं: पहला पक्का रास्ता है, जिससे आप गाड़ी से किले तक जा सकते हैं। दूसरा रास्ता खूनी दरवाजा है, जहां से पैदल पहुंचा जा सकता है। खूनी दरवाजा लकड़ी का बड़ा द्वार है। इस पर मालवा के सुल्तान कैदियों के शवों को लटका देते थे। बताया जाता है कि जब बाबर ने किले की घेराबंदी की थी। तो यह सच में खून से नहा गया था। इसको आखिरी किला कहा जाता था, यानी जब शासक को पता होता था कि उसकी हार होना निश्चित है। वह यहीं से युद्ध करते थे, जिससे तहखाने से निकलकर सुरक्षित जा सकें। बत्तीसी बावड़ी चौकोर, गोल और समकोण बावड़ियों से भरा यह अफगान वास्तुकला की निशानी है। इसकी सुंदर सीढ़ियों के ऊपर बने बीच में स्वागत द्वारों ने इसको अधिक भव्य बनाया है। 60-60 फीट लंबी-चौड़ी बावड़ी आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां पर आपको एक फारसी में लिखा शिलालेख भी मिलेगा। जिसका अर्थ है, जो स्वर्ग की झलक देखना चाहता है, वह यहां पर थोड़ा विश्राम करें, क्योंकि स्वर्ग इसी की तरह है। कटी घाटी इसको विशाल चट्टान को तराश कर बनाया गया है। चंदेरी के दक्षिणी किनारे पर स्थित यह मार्ग बुंदेलखंड और मालवा के बीच एक कड़ी का काम करता था। मालवा के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी के स्वागत के लिए इसको रातों-रात बनाया गया था। लेकिन इस दरवाजे में कुंडे या टिकाव के लिए राजमिस्त्री ने जगह नहीं छोड़ी थी। इस कमी को देखते हुए जिमन खान ने मिस्त्री को मेहनताना देने से इंकार दिया। इससे दुखी होकर मिस्त्री ने आत्महत्या कर ली। तब से यह कटी घाटी गेट बिना दरवाजे के खड़ा है। शहजादी का रोजा चंदेरी के गवर्नर की बेटी मेहरुनिस्सा और एक सेनापति के अमर प्रेम का प्रतीक यह मकबरा है। इसको 15वीं शताब्दी में गवर्नर ने बनवाया था। गवर्नर ने दोनों को अलग करने के लिए सेनापति को युद्ध में भेजा और सैनिकों को निर्देश दिए कि वह जीवित वापस न आ पाए। यह जानकारी मिलने पर शहजादी ने रोजे रखे थे। घायल होने के बाद भी सेनापति बच गया और वापस चंदेरी आ गया। जब मेहरुन्निसा उससे मिली, तो वह सेनापति अंतिम सांसे ले रहा था। उसी दौरान शहजादी ने भी प्राण त्याग दिए। रोजा रखने के कारण इस मकबरे का नाम 'शहजादी का रोजा' पड़ा। बाद में दोनों प्रेमियों को गवर्नर ने इस मकबरे में साथ दफनाया। यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ललितुर है। वहीं भोपाल एयरपोर्ट से कैब लेकर भी यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। बुंदेली खानों का स्वाद लें, जैसे मक्के की रोटी, दाल बाफला, रसखीर और सूजी के लड्डू। चंदेरी घूमने का सबसे सही समय अक्तूबर से लेकर मार्च के बीच का है। दो लोगों के एक दिन रहने और खाने का अनुमानित खर्च 2.5 से 3 हजार रुपए तक है। यहां का मौसम अधिकतम 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
क्या आप भी अगस्त में घूमने का बना रहे हैं प्लान और आपका बजट भी लिमिटेड है, तो यह लेख आपके लिए है। वैसे इस महीने के घूमने का एक अलग ही अनुभव होता है, हर तरफ हरियाली और सुकून वाला मौसम होता है। इस बार आप कम बजट में भी कम भीड़ वाली जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि किसी शांत और खूबसूरत जगहों पर जाने का प्लान। अगस्त में घूमने के लिए 4 बजट-फ्रेंडली डेस्टिनेशंस वैसे तो भारत में घूमने के लिए कई छिपी हुई जगहें, जहां पर काफी शांति देखने को मिलती है। आइए आपको इन जगहों के बारे में बताते हैं- जंजैहली घाटी (हिमाचल प्रदेश) शिमला और मनाली के शोर-शराबे से दूर आप हिमाचल प्रदेश के की इस खूबसूरत जगह पर जा सकते हैं। मंडी जिले में स्थित जंजैहली घाटी, जहां मानसून के समय सेब के बागान और हरे-भरे मखमली मैदान देखने के लायक होते है। यह जगह ट्रेकिंग और नेचर वॉक के लिए शौकीनों के लिए बेस्ट है। कैसे पहुंचे? - दिल्ली से जंजैहली घाटी पहुंचने के लिए सबसे पहले ISBT कश्मीरी गेट से मंडी/ओट के लिए सीधी HRTC या प्राइवेट वोल्वो बस पकड़ लें। - मंडी से जंजैहली की दूरी करीब 85 किमी है, आपको यहां से स्थानीय बस या प्राइवेट टैक्सी मिल जाएगी। - आप चाहे, तो दिल्ली से चंडीगढ़ या ऊना हिमाचल तक ट्रेन लें। इसके बाद बस या टैक्सी से करीब 5-6 घंटे में यहां पहुंच जाए। ओरछा और गढ़कुंडार (मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश या आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, यहां पर जरुर जाएं। यहां आपको बेतवा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक कस्बा ओरछा और पास ही स्थित गढ़कुंडार का किला देखने का गजब का अनुभव प्राप्त होगा। मानसून के समय जंगलों के बीच बने प्राचीन महल, छतरियां और नदियां आपके ट्रिप को यादगार बना देगी। जिन लोगों को फोटोग्राफी और इतिहास जानने का शौक है, वो लोग इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। ऐसे पहुंचें - - ओरछा और गढ़कुंडार जाने के लिए आप झांसी वीरांगना लक्ष्मीबाई, झांसी रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा। - स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाएंगे। आप लोकल बस से भी यहां तक पहुंच सकते हैं। - यहां पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट ग्वालियर है। वहीं, एयरपोर्ट से ओरछा की दूरी करीब 130 किमी है। भंडारदरा और घाटघर (महाराष्ट्र) यदि आपको झरने देखने का काफी शौक है, तो आप अगस्त के महीने में आप इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। मुंबई और पुणे के पास बसा भंडारदरा का घाटघर क्षेत्र घूमने के लिए सबसे बेस्ट है। मानसून के दौरान पूरी तरह धुंध और सैकड़ों मौसमी झरने देखने को मिलते हैं। यहां पर रंधा फॉल्स और आर्थर लेक अगस्त की बारिश में अपने पूरे शबाब पर होते हैं। कैसे पहुंचे? - इस जगह पर पहुंचने के लिए आपको नजदीकी बड़े शहर मुंबई, पुणे या नाशिक हैं। - आपको यहां आने के लिए मुंबई (BOM) पुणे (PNQ) या नाशिक (ISK) की डायरेक्ट फ्लाइट ले सकते हैं। - मुंबई से भंडारदरा करीब 165 किमी और नाशिक से लगभग 70 किमी दूर है। कसार देवी (उत्तराखंड) अगस्त के महीने में घूमने के लिए अल्मोड़ा के पास बसा कसार देवी भी एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यहां मानसून के समय बादल पहाड़ियों को छूकर गुजरते हैं, जिससे नजारा काफी अद्भुत लगता है। कसार देवी अपनी चुंबकीय ऊर्जा और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां पर आप दोस्तों और फैमिली के साथ घूमने जा सकते हैं। ऐसे पहुंचे - कसार देवी जाने के लिए आप काठगोदाम या हल्द्वानी स्टेशन तक जा सकते हैं। - स्टेशन पहुंचते ही आपको बहार अल्मोड़ा या कसार देवी के लिए शेयरिंग टैक्सी और बसें मिल जाएगी। - यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर (PGH) है, जो कि कसार देवी से करीब 125 किमी दूर है।
Travel Tips: बारिश के मौसम में जन्नत लगती हैं ये वादियां, Monsoon में एक्सप्लोर करें Hill Stations
बारिश के मौसम में घूमने का मजा ही अलग होता है। क्योंकि इस मौसम में चारों ओर हरियाली, बादलों से ढके पहाड़, ठंडी-ठंडी हवाएं और रिमझिम फुहारें लोगों को खूब भाती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस मॉनसून कहीं घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आप साउथ इंडिया के कुछ फेमस हिल स्टेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। यहां बारिश में नेचर की खूबसूरती इस कदर बढ़ जाती है, जिसको देखकर लगता है मानो स्वर्ग में आ गए हों। साउथ इंडिया के हिल स्टेशन अपने चाय के बागानों, झरनों, हिल स्टेशनों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां की वादियां खूबसूरत और हरी-भरी हो जाती हैं। वहीं कई जगहों पर बादल इतने नीचे आ जाते हैं कि ऐसा लगता है कि हम बादलों के बीच खड़े हैं। तो आइए जानते हैं साउथ इंडिया की इन खूबसूरत जगहों के बारे में। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Switzerland on a Budget? ये 4 Indian Destinations देंगे आपको यूरोप जैसी हसीन वादियों का अनुभव मुन्नार मॉनसून में केरल के मुन्नार की खूबसूरती भी गई गुना बढ़ जाती है। यहां चाय के खूबसूरत बागान, ठंडी-ठंडी हवाएं और धुंध से ढके पहाड़ लोगों की ट्रिप को यादगार बना देते हैं। बारिश के बाद यहां की हरियाली निखर जाती है। ऐसे में अगर आप भी नेचर लवर हैं, या फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। कूर्ग कर्नाटक का कूर्ग भी मॉनसून में देखने लायक होता है। इसकी खूबसूरती के कारण कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। मॉनसून में यहां पहाड़, कॉफी के बागानों और झरनों की खूबसूरती बढ़ जाती है। कूर्ग खूबसूरत होने के साथ शांत भी है। चिकमगलूर कर्नाटक का चिकमगलूर पिछले कुछ सालों से लोगों की पसंदीदा जगह बन चुकी है। मॉनसून में यहां हरी-भरी घाटियां और बादलों से ढके पहाड़ देखने को मिलेंगे। यहां आप शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के कुछ पल बिता सकते हैं। यह एक शानदार डेस्टिनेशन है। कोडाइकनाल तमिलनाडु का कोडाइकनाल हिल स्टेशन मानसून में बेहद खूबसूरत लगने लगता है। यहां की घाटियां, झीलें और व्यू पॉइंट बारिश के मौसम में बहुत ज्यादार सुंदर नजर आते हैं। अगर आपको भी प्रकृति से प्यार है और नेचर के बीच समय बिताना अच्छा लगता है, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। वायनाड केरल की खूबसूरती के बारे में तो आप सभी ने सुना होगा। इसको God's Own Country भी कहा जाता है। वहीं केरल का वायनाड भी मॉनसून में बेहद खूबसूरत लगता है। यहां लेक, गुफाएं, घने जंगल और कई बेहद शानदार झरने देखने लायक होते हैं। अगर आपको ट्रेकिंग और नेचर वॉक पसंद है, तो यह जगह आपके लिए बेस्ट है। ऊटी तमिलनाडु का ऊटी हिल स्टेशन भी बेहद खूबसूरत है। मॉनसून में यहां के चाय के बागान, पहाड़ और बगीचे खिल उठते हैं। अगर आप भी ऊटी आती हैं, तो पायकारा फॉल्स जाना न भूलें। इन बातों का ध्यान बारिश में मौसम की जानकारी लेने के बाद ही ट्रिप प्लान करें। छाता, रेनकोट और अच्छी ग्रिप वाले शूज साथ रखें। लोकल गाइडलाइंस को जरूर फॉलो करें।
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे पहले खास होता है। इस दौरान शिवभक्तों की मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। अगर आप भी इस महीने कहीं घूमने के साथ-साथ भोलेनाथ के दर्शन करना चाहती हैं। तो हिमाचल प्रदेश एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो ऊंचाई पर बने हुए हैं। इस शिव मंदिरों तक पहुंचने का सफर उतना ही खूबसूरत होता है, जितने सुंदर यहां के नजारे होते हैं। बिजली महादेव मंदिर कुल्लू में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित बिजली महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश का सबसे फेमस शिव मंदिर है। यह मंदिर करीब 2,460 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां से कुल्लू और पार्वती वैली का खूबसूरत नजारा बेहद साफ दिखता है। मंदिर की मान्यता है कि समय-समय पर शिवलिंग पर बिजली गिरती है। फिर पारंपरिक तरीके से पुजारी शिवलिंग को जोड़ते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम बिजली महादेव रखा गया है। इसे भी पढ़ें: Amarnath Yatra Rituals: कैसे करें बाबा बर्फानी की पूजा और क्या है प्रसाद वितरण का सही तरीका बैजनाथ शिव मंदिर हिमाचल के कांगड़ा जिले में बैजनाथ मंदिर भी है। जो भोलेनाथ को समर्पित है। यह धौलाधार पर्वत की तलहटी में बना हुआ है। भगवान शिव का यह मंदिर अपनी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी और अपने पुराने इतिहास के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि रावण भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहीं पर तपस्या की थी। सावन के महीने में यहां पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। मणिमहेश चंबा जिले में स्थित मणिमहेश भगवान भोलनाथ का सबसे पवित्र स्थल है। यहां मणिमहेश लेक और इसके पीछे दिखने वाली मणिमहेश पीक बेहद खूबसूरत लगती है। सावन और जन्माष्टमी के आसपास यहां पर मणिमहेश यात्रा भी निकलती है। समुद्र तल से मणिमहेश कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 5,653 मीटर बताई जाती है। अर्द्धनारीश्वर मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से एक अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। जोकि भगवान शिव और मां पार्वती की शक्ति का प्रतीक है। पहाड़ों के बीच बसे इस शहर का धार्मिक माहौल सावन के महीने में अधिक खास हो जाता है। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी सावन के महीने में हिमाचल के ऊंचाई वाले शिव मंदिरों में जाने का प्लान बना रहे हैं। तो मौसम की जानकारी पहले ले लें। क्योंकि बारिश की वजह से कई जगह सड़कें फिसलने वाली हो सकती है। इसलिए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें। साथ में छाता या रेनकोट रख लें। ट्रैकिंग वाले मंदिरों में तब जाएं, जब आप फिजिकली फिट हों।
हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
घुमक्कड़ लोगों को घूमने का सिर्फ मौका ही चाहिए। अगर आप भी अगस्त में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको बता दें कि, इस महीने में लंबी छुट्टी मिलने वाली है। दरअसल, 15 अगस्त को शनिवार है और इसके अगले दिन रविवार है। वहीं, आप 14 अगस्त यानी के शुक्रवार की एक छुट्टी ले लें तो आपके पास करीब तीन दिनों का समय हो जाएगा। इन तीन दिनों में आप किसी भी अच्छी जगह पर घूमने जा सकते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अगस्त के महीने में किन जगहों पर घूमने जा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं Independenc Day Weekend पर 3 दिन की छोटी-सी ट्रिप का प्लान बना सकती हैं। मसूरी उत्तराखंड यदि आप शहर की भीड़ और शोर से दूर, कहीं सुकून भरी जगह पर घूमने जा रहे हैं, तो आप मसूरी जा रही है। अगस्त में यहां पर बारिश होती है। जिससे पहाड़िया हरी-भरी नजर आती हैं। बादलों से घिरे पहाड़ और ठंडा मौसम आपको शांति का एहसास कराएगा। तीन दिन में आप माल रोड पर बिंदास होकर घूम सकते हैं, आसपास के नजारे देख सकते हैं। ध्यान रखें कि मौसम को देखकर ही ट्रिप का प्लान बनाएं। क्योंकि इस दौरान यहां बारिश भी हो सकती है। मुन्नार, केरल बरसात के मौसम में केरल के मुन्नार का नजारा भी काफी खूबसूरत देखने को मिलता है। मुन्नार अपने चाय के बागानों और पहाड़ी नजारों के लिए काफी लोकप्रिय है। ऐसे में आप आपको हरियाली पसंद है, तो आप 3 दिन के लिए यहां जा सकती हैं। बारिश में मुन्नार जाते समय छाता और रेनकोट साथ जरुर रख लें। कूर्ग, कर्नाटक मानसून के समय कूर्ग का घूमने का एक अलग ही मजा होता है। कर्नाटक टूरिज्म के अनुसार, बरसात के समय यहां का मौसम कॉफी के बागान हरे-भरे हो जाते हैं और धुंध से पहाड़ियों का नजारा और भी सुंदर दिखता है। सुंदर से हरे-भरे कॉफी के बगान, पहाड़ और झरने देख सकती हैं। Abbey Falls कूर्ग की सबसे खूबसूरत जगह है। आप यहां जरुर जाएं। जब आप यहां जाने का प्लान बनाएं, तो एक बार मौसम की जानकारी जरुर लें। उदयपुर, राजस्थान मानसून के समय आप झील, महल और सुंदर शहर देखना चाहते हैं, तो आप इस बार स्वतंत्रता दिवस की लॉन्ग छुट्टियों पर राजस्थान के उदयपुर जा सकती हैं। अगस्त में यहां की खूबसूरती देखने के लायक होती है। तीन की ट्रिप के अंदर आप सिटी पैलेस, पिछोला लेक और पुराने शहर के आसपास घूम सकते हैं। ट्रिप पर जाने से पहले इन चीजों पर ध्यान दें - अगस्त के समय पहाड़ों पर भारी बारिश होती है, इसलिए जाने से पहले मौसम का हाल और रास्ते जरुर चेक करें। - ट्रेन और फ्लाइट की टिकट पहले ही बुक कर लें। इसके साथ ही होटल रुम पहले से बुक कर लें। - बरसात से बचने के लिए आप वॉटरप्रूफ बैग, छाता, रेनकॉट और क्विक-ड्राय कपड़े अपने साथ ले जाएं। - बरसात के समय रास्तों में फिसलन अधिक देखने को मिलती है, इसलिए अच्छी ग्रिप वाले स्पोर्ट्स या ट्रैकिंग शूज ही पहनें।
सावन का विशेष महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस दौरान भक्तजन भगवान शिव के मंदिरों के दर्शन करने जाते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर उज्जैन के दर्शन के लिए मध्य प्रदेश जरुर आते हैं। दरअसल, उज्जैन की यात्रा न केवल महाकाल मंदिर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस शहर के कोने-कोने में अध्यात्म, पौराणिक कथाएं और अद्भुत वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। अगर आप भी उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो महाकाल दर्शन के अलावा बाद आप इन 5 प्रमुख स्थलों का भी भ्रमण करती है। महांकाल मंदिर के आसपास घूमने की 5 जगह मंगलनाथ मंदिर यदि आप उज्जैन महाकाल मंदिर जा रहे हैं, तो शिप्रा नदी के किनारे पहाड़ी पर स्थित मंगलनाथ मंदिर भी जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान को मंगल ग्रह (मंगल देव) का जन्मस्थान माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष या मांगलिक दोष होता है, वे यहां जरुर आएं और विशेष भात पूजा व शांति अनुष्ठान पूजा करवाएं। यदि आप महाकाल मंदिर से ऑटो या कैब बुक कर इस मंदिर तक जा सकते हैं। प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित चिंतामन गणेश मंदिर सबसे लोकप्रिय और प्राचीन है। माना जाता है कि यहां श्रद्धापूर्वक दर्शन करने से भक्तों की सभी चिंताएं दूर हो जाती है और मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। अगर आप नए काम की शुरुआत या गाड़ी खरीदने पर लोग सबसे पहले यहां आशीर्वाद लेने जरुर आएं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले महाकाल मंदिर से लोकल ई-रिक्शा मिल जाएगा। ऐतिहासिक गोमती कुंड अगर आप उज्जैन जा रहे हैं, तो महर्षि सांदीपनि आश्रम परिसर स्थित गोमती कुंड एक प्राचीन जलकुंड है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, अपने गुरु की सेवा और उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने सभी पवित्र नदियों के जल को यहां एकत्रित किया था। वैसे आज भी इस कुंड का पानी पवित्र माना जाता है। यहां पर जाने के लिए आप रिक्शा लेकर जा सकते हैं। इस्कॉन मंदिर उज्जैन का इस्कॉन मंदिर घूमने के लिए एकदम परफेक्ट है। ऐसे में आप महाकाल दर्शन के बाद यहां जरुर जा सकती हैं। संगमरमर के पत्थरों से बने इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी विराजमान हैं। यहां का शांत वातावरण, हरी-भरी वाटिका और शाम की आरती में होने वाला कीर्तन भक्ति में डूबो देता है। आप महाकाल मंदिर से सीधा कैब करके यहां पहुंच सकते हैं। भव्य चार धाम मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर मार्ग के नजदीक स्थित चार धाम मंदिर एक अनोखा और सुंदर धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की स्थापना इसलिए की गई थी कि जो लोग देश के चार मुख्य धामों की यात्रा नहीं कर पाए, वे एक ही स्थान पर चारों धाम के दर्शन कर सकें। आपको इस मंदिर में बद्रीनाख, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। यहां पर वैष्णो देवी के जैसी गुफा भी स्थित है। कैसे पहुंचे उज्जैन? उज्जैन जाने के लिए आप किसी भी रेलवे स्टेशन से उज्जैन जंक्शन तक की टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा, आप हवाई जहाज से भी जा सकते हैं, तो उज्जैन के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर अंतर्राष्टीय हवाई अड्डा है। जब आप इंदौर-उज्जैन पहुंच जाएंगे, तो वहां से बस या कैब को बुक कर सकते हैं।
Travel Tips: पहले ज्योतिर्लिंग की भव्यता का अनुभव, जानें Diu Airport और Veraval से पहुंचने का रास्ता
सावन में भगवान शिव के दर्शन के लिए इस बार अगर आप भी गुजरात के सोमनाथ मंदिर जाने का सोच रही हैं। तो आपको मंदिर से जुड़ी जानकारी पता होनी चाहिए। भगवान शिव को समर्पित सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर अपने शांत वातावरण, भव्य वास्तुकला और समुद्र किनारे स्थित होने की वजह से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सोमनाथ मंदिर में दर्शन से जुड़े नियमों के बारे में और यहां तक कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी देने जा रहे हैं। ऐसे जाएं गुजरात के सोमनाथ मंदिर सोमनाथ मंदिर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल या सोमनाथ है। इस दौरान आप दीव एयरपोर्ट से भी दर्शन के लिए आ सकती हैं। सोमनाथ मंदिर तक जाने के लिए भारत के करीब सभी बड़े शहरों से सीधी ट्रेन और फ्लाइट मिल जाती है। लेकिन अगर बजट में यहां आना चाहती हैं, तो ट्रेन से आना चाहिए। गुजरात राज्य के सोमनाथ जिले में वेरावल स्टेशन है। यहां से मंदिर की दूरी करीब 6 से 7 किमी है। दीव एयरपोर्ट से मंदिर की दूरी करीब 82 किमी है। यहां तक पहुंचने में आपको 1 घंटे का समय लग जाएगा। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: अगस्त में लद्दाख की हसीन वादियों का उठाएं लुत्फ, जानें Booking Details और Full Cost मंदिर के दर्शन से जुड़े जरूरी नियम सोमनाथ मंदिर में कैमरा, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर जाने की अनुमति नहीं है। एंट्री गेट के पास ही आपको क्लॉक रूम मिलेगा, यहां पर सामान जमा करवाना होगा। मंदिर में प्रवेश से पहले सिक्योरिटी जांच कराना जरूरी है। मंदिर दर्शन के लिए मर्यादित कपड़े पहनकर जाने पर ही एंट्री मिलेगी। दर्शन के लिए आपको लंबी लाइन में लगना पड़ सकता है। मंदिर परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की इजाजत नहीं है। वहीं नियम फॉलो न करने पर आप पर फाइन लग सकता है। आरती के दौरान भक्तों की संख्या ज्यादा होती है। इसलिए समय से पहले पहुंचें। सोमनाथ मंदिर में दर्शन का समय सोमनाथ मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट https://somnath.org/ के मुताबिक मंदिर रोजाना सुबह 06:00 बजे से लेकर रात को 10:00 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में रोजाना 3 बार आरती होती है। ऐसे में आप अपने हिसाब से दर्शन का समय प्लान कर सकती हैं। जिससे कि आपको आरती में शामिल होने का मौका मिल जाए। मंगला आरती का समय - सुबह 7:00 बजे राजभोग आरती का समय - दोपहर 12:00 बजे संध्या आरती का समय - शाम 7:00 बजे मंदिर में शाम को लाइट एंड शो भी होता है। रात को 08:00 बजे से 09:00 बजे तक इस शो का आयोजन होता है। हालांकि मौसम के हिसाब से इसका समय बदल सकता है। सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए गुजरात गए लोग अगले दिन भालका तीर्थ, गीता मंदिर, त्रिवेणी संगम, बाण स्तंभ और प्रभास पाटन संग्रहालय भी घूम सकते हैं।
Travel Tips: अगस्त में लद्दाख की हसीन वादियों का उठाएं लुत्फ, जानें Booking Details और Full Cost
क्या आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ से थक गए हैं और किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं। जहां पर आसमान सीधे जमीन से मिलता है। ऐसा सुकून मिले, जो आपकी सारी थकान को मिटा दे। नीली झीलें, सुकून भरी ठंडी हवाएं और ऊंचे-ऊंचे पहाड़। दरअसल, हम लद्दाख की बात कर रहे हैं, जो हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट का अल्टीमेट सपना है। अगर आप भी इस दुनिया को अपनी आंखों से देखने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है। बता दें कि IRCTC ने आपकी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए बेहद खास टूर पैकेज पेश किया है, जिसका नाम 'लेह विद तुरतक' है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस ट्रिप की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: किन्नौर कैलाश यात्रा का हुआ आगाज: Registration से लेकर Trekking तक, Delhi से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरी Travel Guide टूर पैकेज की डिटेल्स यह टूर पैकेज 6 रात और 7 दिन का है जोकि 'कम्फर्ट' क्लास का फिक्स्ड डिपार्चर फ्लाइट पैकेज है। इसकी शुरूआत हैदराबाद से होगी। यह ट्रिप 13 अगस्त 2026 को शुरू होगा। इस सफर में पर्यटक लद्दाख की सबसे खूबसूरत और फेमस जगहों को एक्सप्लोर कर सकेंगे। कहां-कहां घूमेंगे यात्री पहले दिन लेह पहुंचकर यात्री आराम करेंगे। जिससे कि वहां के मौसम में ढल सकें। शाम को लोकल मार्केट को एक्सप्लोर करेंगे और अगले दिन लेह पैलेस, शांति स्तूप और भारतीय सेना को समर्पित 'हॉल ऑफ फेम' दिखाया जाएगा। शाम वैली यहां पर यात्रियों को गुरुद्वारा पत्थर साहिब के दर्शन होंगे और आप 'मैग्नेटिक हिल' के उस रहस्यमयी खिंचाव को स्वयं महसूस कर सकेंगे। नुब्रा वैली यात्रा के तीसरे दिन आपको दीक्षित और हुंडर गांव ले जाया जाएगा। यहां आप अपने खर्च पर ऊंट की सवारी का लुत्फ ले सकते हैं। तुरतुक वहीं यात्रा के चौथे दिन भारत के सबसे उत्तरी कोने में बसे तुरतुक गांव को एक्सप्लोर करेंगे। यहां की लाइफस्टाइल और संस्कृति बेहद अनोखी है। पैंगोंग झील वहीं यात्रा के 5वें दिन 120 किमी लंबी, खारे पानी की उस अद्भुत पैंगोंग झील को देखेंगे। यह झील फिल्म '3 इडियट्स' के बाद से टूरिस्ट्स की पहली पसंद बन गई है। यह झील भारत और चीन दोनों देशों में फैली है। वापसी का सफर पैंगोंग से लेग वापस आते समय रास्ते में थिकसे मॉनेस्ट्री, चांगला पास और शे पैलेस के नजारे भी देखने को मिलेंगे। पैकेज में क्या-क्या मिलेगा हैदराबाद से लेह तक आने-जाने की फ्लाइट की टिकट है। स्टे का पूरा इंतजाम है, लेह में 3 रातें, 2 रातें नुब्रा और 1 रात पैंगोंग में स्टे होगा। इस पूरे ट्रिप में 6 बार सुबह का नाश्ता, 6 बार दोपहर का खाना और 6 बार रात का डिनर होगा। घूमने-फिरने के लिए शेयरिंग वाली नॉन-एसी गाड़ी की सुविधा मिलेगी। जरूरी इनर लाइन परमिट, ट्रैवल इंश्योरेंस और स्मारकों की टिकट उपलब्ध होंगे। दूसरे दिन से लेकर छठे दिन तक टूर गाइड और एक खास कल्चरल शो देखने को मिलेगा। हर व्यक्ति को हर दिन एक लीटर पानी की बोतल मिलेगी। इमरजेंसी के लिए गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर और सफर में सहायता के लिए IRCTC टूर मैनेजर होंगे। कितना आएगा खर्च अगर आप अकेले सफर पर जाने हैं, तो आपको 55,640 रुपए देने होंगे। वहीं दोनों लोगों के यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति किराया 54,380 रुपए देने होंगे। वहीं तीन लोगों संग यात्रा करने पर 48,730 रुपए देने होंगे। अगर आपके साथ 5 से 11 साल का बच्चा है, तो बेड के साथ 36,970 रुपए देने होंगे। लेकिन बच्चों के साथ बिना बेड के 35,780 रुपए देने होंगे। वहीं ट्रिप पर 2 से 4 साल के बच्चे का किराया 35,720 रुपए है। इन बातों का रखें ध्यान ज्यादा ऊंचाई और कम ऑक्सीजन के कारण 'एक्यूट माउंटेन सिकनेस' की समस्या हो सकती है। इसलिए लेह पहुंचने का पहला दिन पूरी तरह से आराम के लिए रखा जाता है। यात्रा से निकलने से पहले आप डॉक्टर से पूछकर कुछ दवाओं को अपने साथ रखें। शरीर को हाइड्रेटेड रखें, इसके लिए समय-समय पर इलेक्ट्रोलाइट्स, ग्लूकोज और पानी आदि पीते रहें। वहीं इस दौरान ज्यादा खाना, शराब और एंटी डिप्रेसेंट दवाओं को लेने से बचना चाहिए। नुब्रा और पैंगोंग के टेंट/कैंप्स लाइट सिर्फ कुछ घंटों के लिए आती है। सुबह नहाने के लिए सोलर या बाल्टी में गर्म पानी मिलता है। पैंगोंग में वाई-फाई, एटीएम, मोबाइल नेटवर्क, बैंक या पेट्रोल पंप की सुविधा नहीं है। इसलिए अपने साथ जरूरी दवाएं और कैश लेकर आएं। अगर आप ट्रिपल शेयरिंग का रूम लेते हैं, तो तीसरे व्यक्ति के लिए सिर्फ एक एक्स्ट्रा गद्दा दिया जाएगा।
सावन का महीना शुरु हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अलग-अलग तीर्थस्थल पर जाने का प्लान करते हैं। इन्हीं में से एक है किन्नौर कैलाश यात्रा। यहां पर जाने का हर किसी का सपना होता है। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध किन्नौर कैलाश यात्रा है, जहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वैसे यहां पर पहुंचने के लिए कठिन ट्रेक से गुजरना पड़ता है। यदि आप इस बार किन्नौर कैलाश जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले इस बारे में सभी जानकारी जान लें। बता दें कि, इस साल 30 जुलाई से किन्नौर कैलाश यात्रा शुरु हो चुकी है, जो कि 10 अगस्त तक चलने वाली है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनमुति नहीं दी जाएगी। यद आप दिल्ली से यहा पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार यह ट्रैवल गाइड को जरुर देंख लें। किन्नौर कैलाश यात्रा क्यों है खास? आपको बताते चलें कि, हिमाचल प्रदेस के किन्नौर जिले में स्थित किन्नौर कैलाश भगवान शिव का पवित्र धाम है। यहां पर मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग जैसी विशाल चट्टान श्रद्धालुओं के लिए आस्था केंद्र हैं। हर साल सावन में हजारों यहां पर हजारों भक्तजन आते हैं। आपको बता दें कि, यह ट्रेक आसान नहीं है, इसलिए बेहद जरुरी है फिजिकली फिट होना। दिल्ली से कैसे जाएं? पहला स्टेज- दिल्ली से शिमला बता दें कि, दिल्ली से शिमला की दूरी करीब 340-360 किलोमीटर है। इधर से आप बस से भी जा सकते हैं। दूसरा स्टेज- शिमला से रिकांग पियो जब आप शिमला पहुंच जाएंगे, तो रिकांग पियो जाना होगा। जिसकी दूरी करबी 220 किलोमीटर है। यहां से आपको हिमाचल रोडवेज और प्राइवेट बसें दोनों ही मिल जाएंगी। चाहे आप टैक्सी से भी जा सकते हैं। तीसरा स्टेज- रिकांग पियो से टांगलिंग गांव टांगलिंग गांव ही यात्रा का बेस कैंप माना जाता है। बता दें कि, यहीं से किन्नौर कैलाश ट्रेक शुरु होता है। कितना कठिन ट्रैक है? दरअसल, किन्नौर कैलाश ट्रेक की गिनती सबसे कठिन ट्रेक में से एक है। ट्रेकिंग की शुरुआत टांगलिंग गांव से होती है। रास्ते में मिलिंग खाटा और पार्वती कुंड जैसे कहई पड़ाव आते हैं। फिर यहां पर भक्तजन पहुंचते हैं। बता दें कि, यहां की ऊंचाई बहुत ज्यादा है, जिस कारण से सांस फूलना और थकान महसूस होना आम बात है। इसलिए जल्दबाजी करने की बजाय धीरे-धीरे चढ़ाई करें। सबसे जरुरी रजिस्ट्रेशन कराना - आप बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा नहीं कर सकते हैं। - मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मैंडेटरी है। - प्रत्येक दिन 375 श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति मिलेगी। - आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। यात्रा में क्या-क्या साथ रखें? - अपने साथ रेनकोट या पोंचो रखें - मौसम बदलता रहता है इसलिए वुलेन जैकेट रखें। - अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें। - टॉर्च अपने साथ रखें। - पानी की बॉटल, जरुरी दवाइयां। - ट्रेकिंग स्टिक - इसके साथ ही खाने के लिए स्नैक्स अपने साथ रखें। यात्रा के समय किन बातों का ध्यान रखें - भूलकर भी शॉर्टकट रास्ते पर न जाए। - अकेले ट्रेक करने से बचें। - प्लास्टिक और कचरा को रास्ते में न फेंके। - यदि मौसम खराब है, तो आगे बढ़ने की कोशिश न करें। - प्रशासन और लोकल गाइड के निर्देशों का पालन करें। - अगर आपको ट्रेकिंग के दौरान कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत आराम करें। कितने दिन का प्लान बनाएं? -पहला दिन: दिल्ली से शिमला - दूसरा दिन: शिमला से रिकांग पियो - तीसरा दिन- टांगलिंग पहुंचकर ट्रेक की शुरुआत होगी - चौथा दिन- किन्नौर कैलाश दर्शन और वापसी - पांचवां दिन: रिकांग पियो से दिल्ली की वापसी
आजकल युवाओं में घूमने-फिरने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर किसी शांत प्लेस को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। मानसून के समय हर कोई हरियाली से भरपूर, बादल, झरने और सुकून हो वाली जगहों पर घूमने का प्लान बनाते हैं। इस बार आप बरसात के समय भारत के कुछ खूबसूरत गांव को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इस मौसम में यहां पर पहाड़ हरे रंग को हे जाते हैं, बादल घरों के बीच से गुजरने नजर आते हैं और हर तरफ आपको ताजगी का माहौल देखने को मिलता है। इस बार आप भी इन जगहों का आनंद जरुर लें। चलिए आपको इस लेख में बताते हैं मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग, नागालैंड का खोनोमा और अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली आपके लिए सबसे बेहतरीन रहने वाली है। आइए आपको बताते हैं इन तीन गांवों में ऐसा क्या खास है,जो आपको मानसून के समय जरुर विजिट करना चाहिए। मावल्यान्नॉन्ग (मेघालय) आपको बताते चलें कि मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग गांव अपनी साफ-सफाई के लिए दुनियाभर में काफी फेमस है। इसकी गिनती एशिया के सबसे साफ गांव में मानी जाती है। यहां पर रहने वाले सभी लोग इस गांव को हमेशा साफ रखते हैं। बरसात के मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधे, फूल और बारिश से धुले रास्ते गांव की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यहां आप इन जगहों पर विजिट कर सकते हैं- - लिविंग रुट ब्रिज - बांस से बना स्काई व्यू पॉइंट - छोटे-छोटे झरने - खासी गांव की लाइफस्टाइल खोनोमा (नागालैंड) अगर आप नेचर लवर हैं, नागालैंड के खोनोमा गांव में जरुर विजिट करें। यहां की नेचुरल ब्यूटी और पर्यावरण संरक्षण बेहद लोकप्रिय है। बता दें कि, इसे भारत के पहले ग्रीन विलेज में गिना जाता है। बरसात के समय यहां पर सीढ़ीदार वाली खेती, पहाड़ और जंगल के काफी खूबसूरत नजर आते हैं। बादलों से घिरे पहाड़ भी इस गांव की खूबसूरती को बढ़ा देते हैं। यहां पर इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। - गांव में पैदल वॉक करना - सीढ़ीदार खेत देखना - लोकर नागा कल्चर को करीब से देख सकते हैं - नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग जीरो (अरुणाचल प्रदेश) मानसून के समय अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली में घूमने का प्लान जरुर बनाएं। यह जगह अपनी नेचुरल ब्यूटी और अपतानी जनजाति की अनोखी कल्चर के लिए जानी जाती है। इधर मानसून के समय काफी खूबसरत लगता है। बरसात के समय धान के खेत, पहाड़ और हल्का कोहरा मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जिसे देखकर मन एकदम खुश ही हो जाती है। यहां आप क्या-क्या कर सकती हैं- - हरे-भरे धान के खेतों को देख सकती हैं - अपतानी जनजाति के पारंपरिक गांव को एक्सप्लोर कर सकती है - खूबसूरती पहाड़ी रास्ते - यहां लोकल बाजार और खाने का जायका लेना मानसून के समय इन गांव में यात्रा करने से पहले जानें जरुरी बातें - बरसात से बचने के लिए रेनकोट और बढ़िया क्वालिटी की छतरी साथ रखें। - इस दौरान फिसलन ज्यादा हो सकती है, इसलिए मजबूत ग्रिप वाले शूज ही पहनें। - मौसम का अपडेट देखकर ही ट्रिप प्लान करें। - वहां के नियमों का पालन जरुर करें। - दरअसल, पहाड़ी इलाकों में शाम जल्दी हो जाती है, इसलिए समय का भी ध्यान जरुर रखें। - प्लास्टिक या कचरा कहीं भी ने फेंकें, ताकि इन गांवों के सुंदरता बनीं रहे।
दिल्ली से केदारनाथ कैसे जाएं और कितना होगा खर्चा? जानिए पूरा बजट और ट्रैवल प्लान
Kedarnath Yatra Travel Plan: सावन के महीने में लोग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र धाम केदारनाथ के दर्शन के लिए जाते हैं। अगर आप भी भगवान शिव के दर्शन करने का मन बना रहे हैं, तो यहां पूरा बजट प्लान और रूट जान लीजिए।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
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टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
Tejasswi Praksh-Karan Kundrra नहीं हुए अलग,रोमांटिक वेकेशन एन्जॉय कर रहा है कपल करीबी दोस्त ने खोला राज
सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
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