वर्धा-नागपुर मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, ट्रैवलर ने टिप्पर को मारी टक्कर, 17 यात्री घायल
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महाराष्ट्र के वर्धा में टेम्पो ट्रैवलर ने पीछे से टिपर को टक्कर मारी, 17 लोग घायल
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शेरगढ़ की विरासत और पर्यटन विकास पर होगा विशेष सेमिनार, आज निकलेगी विरासत यात्रा
बाराँ से शेरगढ़ विरासत यात्रा, इतिहास-पुरातत्व सेमिनार और सावन की गोठ में धरोहर संरक्षण व पर्यटन विकास की संभावनाओं पर होगा मंथन।
अब India में Digital होगा International Travel, 1 सितंबर से बोर्डिंग पास पर स्टैंपिंग खत्म
भारतीय हवाई अड्डों से यात्रा करने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। भारतीय हवाई अड्डों से उड़ान भरने वाले यात्रियों को अब फिजिकल बोर्डिंग पास साथ रखने की ज़रूरत नहीं होगी, क्योंकि इमिग्रेशन अधिकारियों ने 1 सितंबर से इस दस्तावेज़ पर स्टैम्प लगाने की प्रक्रिया को खत्म करने का फैसला किया है। इसके बजाय, विदेश यात्रा करने वाले लोगों को इमिग्रेशन क्लीयरेंस के लिए अपने स्मार्टफ़ोन पर ई-बोर्डिंग पास दिखाना होगा। इसे भी पढ़ें: Akhilesh Yadav बोले सपा कभी नहीं तोड़ेगी गठबंधन, BJP से जारी रहेगी लड़ाई यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब गृह मंत्रालय (MHA) के तहत आने वाले ब्यूरो ऑफ़ इमिग्रेशन (BOI) ने हाल ही में एयरपोर्ट अधिकारियों को एक आधिकारिक निर्देश भेजा है। एजेंसी ने पाया कि इमिग्रेशन के मकसद से बोर्डिंग पास पर फिजिकल स्टैम्पिंग करने से यात्रियों को परेशानी हो रही थी। अधिकारियों ने बताया कि गलत या ठीक से न की गई स्टैम्पिंग की वजह से बोर्डिंग पास पढ़ने में गलतियों की खबरें भी आ रही थीं, इसलिए इस प्रक्रिया को खत्म करने का फैसला किया गया। अधिकारियों ने आगे कहा कि BOI ने इस मामले की जांच की है और अब यह तय किया गया है कि देश के सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फिजिकल बोर्डिंग पास और इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास की स्टैम्पिंग की अनिवार्य ज़रूरत को खत्म कर दिया जाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि फ़िज़िकल बोर्डिंग पास स्वीकार किए जाते रहेंगे, लेकिन 1 सितंबर से इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा उन पर स्टैम्प नहीं लगाया जाएगा। सुरक्षा अधिकारियों ने आगे कहा कि इंटरनेशनल यात्रियों की व्यक्तिगत तलाशी के दौरान सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फ़ोर्स (CISF) द्वारा भी बोर्डिंग पास पर स्टैम्प नहीं लगाया जा रहा था और उन्हें केवल इमिग्रेशन अधिकारियों से मंज़ूरी के लिए दिखाना होता था। इसे भी पढ़ें: Vande Mataram Controversy | BJP का कांग्रेस पर बड़ा हमला! 'वंदे मातरम्' को लेकर तुष्टिकरण का आरोप, कहा- संसद और संविधान से ऊपर नहीं CWC उन्होंने कहा कि घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के यात्रियों के लिए CISF द्वारा बोर्डिंग पास पर स्टैम्प लगाने का काम कई साल पहले ही बंद कर दिया गया था। इसके अलावा, अधिकारियों ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए इमिग्रेशन एंट्री और एग्ज़िट स्टैम्पिंग को खत्म करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट की योजना है, जिसे इस संदर्भ में पायलट एक्सरसाइज़ पूरी होने के बाद लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही भारत के सभी एयरपोर्ट्स पर यह व्यवस्था लागू होने की उम्मीद है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
आज की इस भागदौड़ भरी कॉर्पोरेट लाइफ और व्यस्त दिनचर्या में हर इंसान मानसिक शांति और थोड़ा सुकून पाने के लिए ट्रैवल करना चाहता है। लेकिन समय की कमी के कारण लंबी छुट्टियां निकाल पाना हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में वीकेंड ट्रैवल यानी केवल दो दिन की छुट्टी में किसी खूबसूरत जगह की सैर करना एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। लोग अपने शहर के पास मौजूद ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जहाँ कम समय में पहुंचकर प्रकृति के करीब वक्त बिताया जा सके और बिना किसी लंबी प्लानिंग के तरोताजा होकर वापस लौटा जा सके। भारत में ऐसे अनगिनत पर्यटन स्थल मौजूद हैं जो दो दिन के छोटे से सफर के लिए एकदम परफेक्ट माने जाते हैं।पहली शानदार जगह: प्रकृति प्रेमियों के लिए बेस्ट है उत्तराखंड का लैंसडाउनअगर आप दिल्ली या उत्तर भारत के किसी भी शहर के आसपास रहते हैं और केवल दो दिनों की छुट्टी में किसी शांत, साफ-सुथरे और भीड़भाड़ से दूर हिल स्टेशन की तलाश में हैं, तो लैंसडाउन आपके लिए सबसे बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित यह खूबसूरत हिल स्टेशन अपनी प्राकृतिक सुंदरता, चीड़ और ओक के ऊंचे पेड़ों के जंगलों और औपनिवेशिक कालीन वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यहाँ की हवा में एक अजीब सा सुकून है जो शहरी थकान को पल भर में दूर कर देता है। लैंसडाउन में आप टिफिन टॉप से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का मनमोहक नजारा देख सकते हैं, भुल्ला ताल झील में बोटिंग का आनंद ले सकते हैं और शांत वातावरण में अपने परिवार या दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं। यह जगह वीकेंड पर ड्राइविंग करके जाने के लिए बेहद सुगम और सुरक्षित मानी जाती है।दूसरी बेहतरीन जगह: अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा ऐतिहासिक शहर अलवरराजस्थान का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला अलवर केवल दो दिन की ट्रिप के लिए इतिहास, संस्कृति और वन्यजीव प्रेमियों का एक परफेक्ट संगम है। अगर आप दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं तो सड़क मार्ग से महज तीन से चार घंटे की ड्राइव करके अलवर पहुँचा जा सकता है। यहाँ का मुख्य आकर्षण सरिस्का टाइगर रिजर्व है, जहाँ आप जंगल सफारी का रोमांचक अनुभव ले सकते हैं और प्रकृति के बीच बाघों और अन्य वन्यजीवों को देख सकते हैं। इसके अलावा, पहाड़ी पर बना ऐतिहासिक बाला किला, सिलीसेढ़ झील का शांत पानी और भूतिया किले के रूप में प्रसिद्ध भानगढ़ का रहस्यमयी खंडहर इस ट्रिप को बेहद रोमांचक बना देते हैं। राजस्थानी खानपान और यहां की समृद्ध संस्कृति का अनुभव करने के लिए यह वीकेंड डेस्टिनेशन एक आदर्श विकल्प है।तीसरी खूबसूरत जगह: घाटों और संस्कृति का संगम राजस्थान का पुष्कर शहरअगर आप धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक शांत और बोहेमियन वाइब का अनुभव करना चाहते हैं, तो अजमेर के पास स्थित पवित्र पुष्कर शहर आपके वीकेंड को यादगार बना सकता है। पुष्कर झील के चारों ओर बने घाटों पर शाम की आरती का नजारा देखने लायक होता है, जो मन को असीम शांति प्रदान करता है। यहाँ का ब्रह्मा मंदिर दुनिया भर में अपने आप में इकलौता है, जिस वजह से इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। दो दिन की इस ट्रिप में आप पुष्कर के रंग-बिरंगे बाजारों में घूमकर ट्रेडिशनल शॉपिंग कर सकते हैं, स्वादिष्ट राजस्थानी कचौरी और मालपुए का लुत्फ उठा सकते हैं, और शाम के समय अरावली की पहाड़ियों के पीछे ढलते सूरज का सुंदर नजारा देख सकते हैं। यहाँ का शांत और आध्यात्मिक माहौल हर पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करता है।चौथी शानदार जगह: ट्रेकिंग और वाटरफॉल के शौकीनों के लिए कर्नाटक का कूर्गयदि आप दक्षिण भारत में रहते हैं और प्रकृति के बीच दो दिन बिताना चाहते हैं, तो कॉफी के बागानों के लिए मशहूर कर्नाटक का कूर्ग यानी कोडागु जिला आपके लिए स्वर्ग के समान है। कूर्ग को 'भारत का स्कॉटलैंड' भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ की हरी-भरी वादियाँ, धुंध से ढके पहाड़ और मनमोहक झरने हर किसी का दिल जीत लेते हैं। दो दिन की इस छोटी सी यात्रा में आप एब्बी फॉल्स और मडिकेरी किले की खूबसूरती निहार सकते हैं, राजा सीट से सूर्यास्त का अद्भुत नजारा देख सकते हैं और विशाल कॉफी के बागानों में टहलने का आनंद ले सकते हैं। यहाँ का मौसम साल भर सुहाना रहता है, जिससे यह वीकेंड गेटअवे के लिए दक्षिण भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है।पांचवीं बेहतरीन जगह: बीच और नाइटलाइफ का मजा लेने के लिए गोवाजब भी दो दिन की छुट्टियों या वीकेंड ट्रिप की बात आती है, तो गोवा का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। आधुनिक समय में बेहतर एयर कनेक्टिविटी और नाइट उड़ानों की वजह से देश के किसी भी कोने से वीकेंड पर गोवा पहुँचना बहुत आसान हो गया है। दो दिन के कम समय में आप उत्तरी गोवा के पॉपुलर बीच जैसे बागा और कलंगूट पर समुद्री लहरों का आनंद ले सकते हैं, स्थानीय सी-फूड का स्वाद चख सकते हैं और शाम को गोवा की वाइब्रेंट नाइटलाइफ का हिस्सा बन सकते हैं। अगर आप थोड़ी शांति चाहते हैं, तो दक्षिण गोवा के एकांत बीचों पर बैठकर सुकून के कुछ पल बिता सकते हैं। यह छोटी ट्रिप आपको पूरी तरह से तरोताजा कर देगी और आपके बोरिंग वीकेंड को एक बेहतरीन और यादगार छुट्टी में बदल देगी।
Travel Tips: बच्चे की बर्थ डे पार्टी के लिए आप भी जा सकते हैं इस बार Trishla Farmhouse
इंटरनेट डेस्क। बारिश का मौसम चल रहा हैं और आप भी अगर पूल पार्टी करना चाह रहे हैं और इस बीच आपके बच्चे का बर्थ डे भी आ रहा हैं तो फिर आपको बता रहे हैं ऐसी जगह जहां आप दोनों पार्टी एक साथ एंजोय कर सकते है। जी हां आप त्रिशला फार्महाउस को चुन सकते है। यहां आपको कई तरह की सुविधाएं मिलेगी साथ ही आपके खाने पीने से लेकर रहने तक हर चीज का ख्याल रखा जाएगा। इसके साथ ही स्वीमिंग पूल का भी आनंद ले सकते है। जा सकते हैं आप बता दें की जयपुर के गोनेर रिंग रोड के पास खिजूरिया ब्राहम्णान में बना ये फार्महाउस ऐसे इवेंट के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। इसके साथ ही शहर की भीड़ से दूर है और यहां आपको एक बढ़िया सुविधा भी मिलती है। तो ऐसे में आप लोग त्रिशला फार्महाउस जा सकते है और यहां आराम से एंजोय कर कर सकते है। कम बजट में मिल जाएगा आपको त्रिशला फार्महाउस कम ही बजट में उपलब्ध हो जाएगा। यहां आपको कई एक्टिविटीज भी करने का मौका मिलेगा। आप स्वीमिंग पूल का आनंद भी ले सकेंगे,स्पोटर्स का आनंद ले सकते है। ऐसे में आप टैरिफ से जुडी पूरी जानकारी के लिए व्हाट्सएप नंबर 9784461221 पर मैसेज कर के पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कैसे पहुंचे आप राजस्थान के बाहर किसी शहर से हैं और एयरपोर्ट से यहाँ आ रहे हैं तो जानकारी के लिए बता दें कि जयपुर एयरपोर्ट से त्रिशला फार्म हाउस 22 किलोमीटर है। आप टैक्सी से आसानी से यहाँ पहुंच सकते हैं। ट्रेन से जयपुर आ रहे हैं तो रेलवे स्टेशन से त्रिशला फार्म हाउस की दूरी लगभग 28 किलोमीटर है। टेक्सी से आप यहां पहुंच सकते है और इसके साथ ही यह जगह अक्षयपात्र जगतपुरा से 15 किलोमीटर है।
International Travel: एयरपोर्ट पर यात्रियों की टेंशन होगी खत्म! 1 सितंबर से नहीं रखना होगा फिजिकल बोर्डिंग पास
Bajaj इस साल लॉन्च कर सकता है नई Adventure बाइक, जानिए कितनी होगी कीमत इंजन और पावर
Bajaj Adventure Bike: बजट सेगमेंट में अपनी पहली एडवेंचर बाइक उतारने की तैयारी कर रहा है। आइए जानते हैं कि इसमें क्या-क्या संभावित फीचर्स और इंजन मिल सकते हैं।
ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों ने पर्यटन, एआई और सुविधाजनक यात्रा पर केंद्रित जयपुर घोषणापत्र को स्वीकृति दी brics,bricstourism,AI,jaipurब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों ने पर्यटन, एआई और सुविधाजनक यात्रा पर केंद्रित जयपुर घोषणापत्र को स्वीकृति दी भारत की अध्यक्षता में जयपुर में हुई ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक कल जयपुर घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी देने के साथ संपन्न […]
यूपी और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच समझौता, रोजगार और पर्यटन बढ़ेगा
यूपी और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच शुक्रवार को ग्रीन हाइड्रोजन पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दस्तखत हुए। इसके तहत यूपी में हर साल एक मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
Japan Delegation 22 अगस्त को पहुंचेगा Varanasi, यूपी में निवेश और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
जापान का एक प्रतिनिधिमंडल 22 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी आएगा। एक बयान में यह जानकारी दी गई। बयान के मुताबिक जापान के यामानाशी प्रांत के गवर्नर के नेतृत्व में आ रहे इस प्रतिनिधिमंडल में जापान की प्रमुख कंपनियों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। प्रतिनिधिमंडल के वाराणसी दौरे से उत्तर प्रदेश में निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने के साथ ही पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी नयी गति मिलने की संभावना है। बयान में कहा गया कि प्रतिनिधिमंडल सारनाथ का भ्रमण करेगा, विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती और काशी की कला-संस्कृति से रूबरू होगा। इस दौरान मेहमानों को काशी की सदियों पुरानी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और हस्तशिल्प परंपरा की झलक भी देखने को मिलेगी। इसे भी पढ़ें: UP में Semiconductor निवेश को बढ़ावा देगी जापानी टीम, CM Yogi से मिले राजदूत Ono बयान के अनुसार वाराणसी पहुंचने के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल सारनाथ भी का भ्रमण करेगा। प्रतिनिधिमंडल के दौरे का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में निवेश एवं औद्योगिक सहयोग को प्रोत्साहित करना तथा हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, अवसंरचना, पर्यटन और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को तलाशना है। प्रतिनिधिमंडल को काशी की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा से परिचित कराने के लिए एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) और जीआई उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे।
नैनीताल में बूंदाबांदी के बाद भी 15 सड़कें बंद, पर्यटन पर असर; येलो अलर्ट जारी
नैनीताल में हल्की बूंदाबांदी के बाद मौसम सुहावना रहा, लेकिन लगातार बारिश से पर्यटकों की संख्या कम रही और होटल खाली पड़े हैं। जिले में 15 सड़कें अभी भी बंद हैं, जबकि मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए हल्की से मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
काशीपुर का तुमड़िया डैम जल्द ही साहसिक पर्यटन (एडवेंचर टूरिज्म) के शौकीनों के लिए एक नया और प्रमुख आकर्षण बनने जा रहा है। यहां पर्यटकों को डैम के शांत और प्राकृतिक परिवेश के बीच मोटर बोट राइडिंग का रोमांच मिलेगा।
Udhampur News: देसा की अनछुई खूबसूरती को पर्यटन मानचित्र पर लाने की जरूरत
देसा की अनछुई खूबसूरती को पर्यटन मानचित्र पर लाने की जरूरत
Yogi Adityanath बोले, बौद्ध पर्यटन बनेगा UP और Japan के मजबूत संबंधों का आधार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि राज्य की बौद्ध व आध्यात्मिक विरासत और भारत-जापान की साझा सांस्कृतिक परंपराएं यामानाशी प्रांत के साथ गहरे व दीर्घकालिक संबंधों का आधार हैं। यामानाशी जापान के 47 प्रांतों में से एक है। भारत में प्रांत का दर्जा राज्य के बराबर होता है। लखनऊ में यामानाशी के गवर्नर कोतारो नागासाकी के नेतृत्व वाले जापानी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश-जापान निवेश शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन की “बहुत अधिक संभावनाएं” हैं और जापानी पर्यटक पहले से ही बड़ी संख्या में भारत आते हैं। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास बौद्ध सर्किट के जरिए जापान से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करना है।”उन्होंने बताया कि इसके लिए शिखर सम्मेलन में एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को बौद्ध और आध्यात्मिक विरासत में बड़ी संभावनाओं वाला प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और मेहमाननवाजी को दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश जापान में आयोजित होने वाले पर्यटन उत्सवों में हिस्सा लेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और जापान ने अपनी विरासत और परंपराओं को अपने दैनिक जीवन व कामकाज की संस्कृति का हिस्सा बनाकर सुरक्षित रखा है। उन्होंने कहा, “जापान की संस्कृति हजारों वर्षों की समृद्ध परंपरा से विकसित हुई है और उस पर बौद्ध परंपराओं का गहरा प्रभाव रहा है। प्रकृति का सम्मान, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक संतुलन जापानी सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।”आदित्यनाथ ने अपना संबोधन जापानी शब्द “कोन्निचिवा मिनासान” (नमस्कार) के साथ शुरू किया और “अरिगातो गोजाइमासु” (बहुत-बहुत धन्यवाद) कहकर समाप्त किया। उन्होंने जापान से आए हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के 13 छात्र-छात्राओं और भारतीय (लखनऊ) छात्रों के कार्यक्रम को भी संबोधित किया। आदित्यनाथ ने कहा कि भारत और जापान की ताकतें साथ आएंगी तो दोनों देशों के बच्चों के बेहतर भविष्य के साथ नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। उन्होंने दोनों देशों की विशेषता बताते हुए कहा कि जापान की अपनी ताकत, स्व अनुशासन और त्वरित निर्णय की क्षमता है, गुणवत्ता, टीम वर्क और नवाचार है, वहीं भारत की अपनी ताकत युवा शक्ति है, हमारी प्रतिभा, हमारी विविधता, हमारी सृजनात्मकता और साथ लेकर चलने की भावना है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताते हुए कहा, मेरा विश्वास है कि जब भारत और जापान की ताकतें साथ आएंगी तो केवल दोनों देशों के बच्चों का ही भविष्य बेहतर नहीं होगा, बल्कि वैश्चिक स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। उन्होंने कहा भारतीय बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है कि वह जापान के बच्चों से जानें कि कार्यसंस्कृति क्या होती है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत एक दूसरे से सीखना है। जापान के यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के आपसी संबंधों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। जापानी में बोलते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच अपार संभावनाएं जताईं। कोटारो नागासाकी ने कहा कि “दोनों देशों को और बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि हमारे बीच क्या समानताएं हैं और क्या भिन्नताएं।”उन्होंने भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और यामानाशी की उस सोच का उल्लेख किया, जिसमें एक-दूसरे के लोगों को समृद्ध बनाने के साथ अपनी समृद्धि को भी सुनिश्चित करने की भावना है। नागासाकी ने कहा कि यह मुलाकात केवल एक दिन का कार्यक्रम बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जापानी और भारतीय मित्रों के साथ इस दोस्ती को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश साथ मिलकर समृद्ध हों और युवा पीढ़ी इस रिश्ते को और मजबूत बनाए, यही इस संवाद की सबसे बड़ी अपेक्षा है। जापान के एक छात्र ने नमस्ते से अपने संबोधन की शुरुआत की और फिर जापानी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया। एक जापानी छात्रा ने भी संबोधन दिया। छात्रों ने एक जापानी गीत भी सुनाया। जापानी विद्यार्थियों ने मिलकर जापानी में गीत प्रस्तुत किया। उनकी सामूहिक प्रस्तुति के दौरान मुख्यमंत्री आवास का वातावरण तालियों से गूंज उठा। इसके जवाब में भारत की ओर से लखनऊ के छात्र ईशान ने भगवान श्रीराम को समर्पित कौशल्या दशरथ के नंदन गीत प्रस्तुत किया। छात्रा अक्षरा पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जापानी गवर्नर और उनके प्रतिनिधिमंडल का अभिवादन करते हुए उनका स्वागत किया। जापानी छात्र कजामा ने कहा, “भारत आना मेरे लिए बहुत खास अनुभव है, क्योंकि मैं पहली बार अपने देश से बाहर निकला हूं। जापानी छात्रा मियागी मोतो ने कहा, “इतने लोगों के सामने अपने विचार साझा करने का अवसर मेरे लिए बहुत विशेष है।
BRICS सम्मेलन: Jaipur Declaration को मिली मंजूरी, पर्यटन सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
भारत की अध्यक्षता में शुक्रवार को यहां ब्रिक्स देशों के पर्यटन मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए ‘जयपुर घोषणापत्र’ को मंजूर दी गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने की। आधिकारिक बयान के अनुसार बैठक में ब्रिक्स के नौ सदस्य देशों के पर्यटन मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने भाग लिया। ‘जयपुर घोषणापत्र’ में भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स पर्यटन कार्यबल द्वारा किए गए कामों का उल्लेख है, जिसमें कृत्रिम मेधा (एआई), पर्यटन, कौशल विकास और क्षमता विकास समेत चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। इस अवसर पर शेखावत ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की यात्रा में पर्यटन अहम भूमिका निभाएगा और कस्बों, गांवों तथा दूर-दराज के इलाकों में आर्थिक विकास व रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। बैठक के दौरान भारत ने ब्राजील, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधिमंडलों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। प्रतिनिधियों का शनिवार को हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर किले के दौरे का कार्यक्रम है।
उत्तर प्रदेश सरकार अब अपने तेजी से विकसित हो रहे बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस कड़ी में जापान को प्रदेश का एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार माना जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को ...
जापान में यूपी पर्यटन का नया प्रवेश द्वार बनेगा 'यामानाशी', सीएम योगी की मौजूदगी में MoU पर हुए साइन
उत्तर प्रदेश सरकार ने जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के साथ बौद्ध, आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य यामानाशी को जापान में यूपी पर्यटन का प्रवेश द्वार बनाना और जापानी पर्यटकों को राज्य के बौद्ध स्थलों से जोड़ना है।
Bengaluru, 21 अगस्त . कर्नाटक Government तटीय और मलनाड इलाकों के लिए व्यापक पर्यटन नीति तैयार कर रही है. ऊर्जा और पर्यटन मंत्री केजे जॉर्ज ने Friday को कहा कि इसका ड्राफ्ट 7 सितंबर तक तैयार होने की उम्मीद है. यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों को सांप्रदायिक ... Read more
जयपुर में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- BRICS देशों के बीच पर्यटन सहयोग को मजबूत करने के लिए जयपुर डिक्लेरेशन तैयार किए गया है। इसमें सदस्य देशों के सहयोग का फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। ब्रिक्स पर्यटन कार्य समूह की 19 और 20 अगस्त को आयोजित बैठक में सदस्य देशों के बीच पर्यटन क्षेत्र में सहयोग को को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस पर बैठक की चर्चाओं पर मीडिया से शुक्रवार को बात करते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह कहा। उन्होंने कहा- भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत पर्यटन ट्रैक की थीम बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी रखी गई। बैठक में पर्यटन क्षेत्र की चार प्रमुख प्राथमिकताओं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यटन, सतत और जिम्मेदार पर्यटन, पर्यटन क्षेत्र में कौशल और क्षमता निर्माण और यात्रा सुविधा पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा- चीन के मंत्री ने जानकारी दी है कि उन्होंने 55 देशों में वीजा फ्री एंट्री शुरू की है। विदेशी प्रतिनिधियों ने बगरू प्रिंटिंग, मीणा बुनाई, लाख की चूड़ी निर्माण और मिट्टी और कागज से बने हस्तशिल्प देखा। पर्यटन में होगा एआई का इस्तेमाल शेखावत ने कहा- पर्यटन क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में BRICS देशों के बीच एआई के जिम्मेदार और मानव-केंद्रित उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। तकनीक का इस्तेमाल पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, पर्यटन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने और क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा- बदलती तकनीक के साथ पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले मानव संसाधन को भी तैयार करना जरूरी है। इसके लिए BRICS देशों के बीच प्रशिक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा। एक दशक में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा घरेलू पर्यटन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- भारत में घरेलू पर्यटन में एक दशक के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। देशी पर्यटकों की यात्राओं में तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। भारत की भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता उसे वैश्विक पर्यटन के क्षेत्र में विशेष अवसर देती है। उन्होंने कहा- देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद प्राकृतिक, सांस्कृतिक और विरासत स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के सामने प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। इसके लिए पर्यटन उत्पादों के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी, निवेश और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यावरण-संसाधनों से पर्यटन में चुनौतियां शेखावत ने कहा- दुनिया के कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर अत्यधिक पर्यटन के कारण पर्यावरण, संसाधनों और स्थानीय समुदायों के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं। इसलिए पर्यटन का विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी और हित भी सुनिश्चित हों। उन्होंने बताया- भारत में डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन की व्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सीमलेस ट्रैवल पर भी हुई चर्चा BRICS देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सीमलेस ट्रैवल पर भी चर्चा हुई। शेखावत ने कहा- प्रत्येक देश की वीजा व्यवस्था उसके अपने नियमों और नीतियों के अनुसार तय होती है, लेकिन यात्रियों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने और असुविधा कम करने की दिशा में सभी देश मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत की ई-वीजा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा- कई देशों के पर्यटक घर या कार्यालय से ऑनलाइन आवेदन कर भारत आने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आसान यात्रा व्यवस्था से BRICS देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने में मदद मिलेगी। विदेशी प्रतिनिधियों ने देखा राजस्थान का हेरिटेज और कल्चर जयपुर बैठक में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की समृद्ध विरासत, संस्कृति और पारंपरिक कला से भी परिचित कराया गया। प्रतिनिधियों ने हवामहल, सिटी पैलेस और आमेर किले जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें राजस्थान की पारंपरिक कला एवं शिल्प की झलक भी दिखाई गई। इन गतिविधियों के माध्यम से राजस्थान की सदियों पुरानी कला परंपराओं और स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया गया। ‘टूरिज्म केवल स्मारकों का भ्रमण नहीं’ शेखावत ने कहा- भारत के लिए पर्यटन केवल स्मारकों के भ्रमण तक सीमित नहीं है। पर्यटन देश की संस्कृति, परंपराओं, जीवनशैली और विविधता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम है। पर्यटन के माध्यम से विभिन्न देशों के लोगों और सभ्यताओं को एक-दूसरे के करीब लाया जा सकता है। उन्होंने कहा- पर्यटन को अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ रोजगार के अवसर पैदा करने, स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद बढ़ाने का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
Uttarakhand Monsoon Travel: अगस्त के बाद घूमने के लिए पहाड़ के ये कम भीड़ वाले डेस्टिनेशन
उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, खासकर मानसून में यहां के पर्वतीय इलाके मनमोहक लगते हैं।
आईआरसीटीसी में पर्यटन मॉनिटर के पदों पर भर्ती का सुनहरा अवसर, 8-9 सितंबर को वॉक-इन इंटरव्यू
New Delhi, 21 अगस्त . इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) ने संविदा के आधार पर दो वर्ष की अवधि के लिए पर्यटन मॉनिटर (टूरिज्म मॉनिटर) के खाली कुल 9 पदों पर पात्र उम्मीदवारों की भर्ती के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके रिक्तियों की घोषणा की है. पर्यटन मॉनिटर के 9 पदों में ... Read more
क्रूज ऑपरेटर वॉटरवेज लीशर टूरिज्म का स्टॉक स्प्लिट होने वाला है। इस कॉरपोरेट एक्शन के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाला एक शेयर 1 रुपये फेस वैल्यू वाले 10 शेयरों में टूटने वाला है। रिकॉर्ड डेट 25 अगस्त 2026 है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, उनके स्टॉक स्प्लिट हो जाएंगे।वॉटरवेज लीशर टूरिज्म जुलाई 2026 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। कंपनी का IPO 585 करोड़ रुपये का था। यह कंपनी कॉर्डेलिया क्रूज ब्रांड के तहत कारोबार करती है। यह देश की पहली क्रूज कंपनी है, जो लिस्ट हुई है। कॉर्डेलिया क्रूज भारत की प्रीमियम क्रूज लाइन है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 89.35 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।IPO में 72 लाख नए शेयर जारी हुए।शेयर एक सप्ताह में 16 प्रतिशत चढ़ाकंपनी का शेयर 21 अगस्त को BSE पर करीब 6.5 प्रतिशत बढ़त के साथ 969 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 7000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर एक सप्ताह में 16 प्रतिशत मजबूत हुआ है। इसका BSE पर अब तक का रिकॉर्ड हाई 987 रुपये और रिकॉर्ड लो 623.30 रुपये है। शेयर के लिए अपर प्राइस बैंड 1,000.90 रुपये और लोअर प्राइस बैंड 819 रुपये है। सर्किट लिमिट 10 प्रतिशत है।Amagi Media Labs Share Price: ब्लॉक डील में बिके ₹600 करोड़ के शेयर, कीमत 9% तक चढ़ीकंपनी की वित्तीय सेहतअप्रैल-जून 2026 तिमाही में वॉटरवेज लीशर टूरिज्म का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 190.11 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 27.35 करोड़ रुपये और अर्निंग्स प्रति शेयर 4.19 करोड़ रुपये रही। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 52.14 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। इससे पहले के वित्त वर्ष में कंपनी को 168.19 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। वित्त वर्ष 2026 में इनकम 586.99 करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2025 में 597.68 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर 101.90 करोड़ रुपये की उधारी थी।Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Travel Tips: वीकेंड में जा सकते हैं आप भी इस बार घूमने के लिए रत्नागिरी
इंटरनेट डेस्क। बारिश का मौसम चल रहा हैं और आप अभी महाराष्ट्र राज्य के दौरे पर हैं तो आपको बता दें यहां भी घूमने के लिए एक से बढ़कर एक जगह है। ऐसे में आप अभी वीकेंड में वहीं घूमने का प्लॉन बना सकते है। ऐसे में इस बार आप घूमने के लिए रत्नागिरी जा सकते है। रत्नागिरी की इन जगहों का करें दीदार रत्नागिरी महाराष्ट्र का एक खूबसूरत जिला है, जहां के समुद्र तट, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थल आपको पसंद आएंगे। ऐसे में आप यहां घूमने का प्लॉन तैयार कर सकते है। रत्नागिरी की तीर्थ गंगा अगर आप रत्नागिरी का प्लान बना रहे हैं, तो रत्नागिरी से कुछ ही दूरी पर मौजूद तीर्थ गंगा एक पवित्र नदी है, जहां आपजा सकते है। यहा नदी के किनारे बैठकर नेचुरल खूबसूरत नजारे का लुत्फ उठा सकते है। pc- jkvtravel.com
Travel Tips: तुर्कमेनिस्तान का वह नरक द्वार जहाँ 1971 से नहीं बुझी आग, जानिए Karakum Desert का सच
दुनिया में आपको कई ऐसी अनोखी जगहें मिलेंगी, जिनके बार में जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा। ऐसी ही एक जगह मध्य एशियाई के देश तुर्कमेनिस्तान में है। यहां पर काराकुम रेगिस्तान को नरक का दरवाजा भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कोई पैर नहीं रख सकता है। काराकुम रेगिस्तान में डेवरेज गांव के पास में यह रेगिस्तान में है। जिसको 'शाइनिंग काराकुम' के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि रेगिस्तान का एक हिस्सा हमेशा आग की तरह चमकता रहता है। ऐसे में अगर आप भी यह सोच रहे है कि इसको नरक का दरवाजा क्यों कहा जाता है, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको इस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2026: भारतीय रेलवे का बड़ा तोहफा, इन Routes पर चलेंगी Raksha Bandhan Special Trains क्यों कहते हैं नरक का दरवाजा साल 1971 में मध्य एशिया के काराकुम रेगिस्तान में एक ऐसी घटना हुई। जिस कारण रेगिस्तान में आग लगाना पड़ा। साल 1971 में तेल भंडार की खोज में सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक का एक ग्रुप काराकुम रेगिस्तान आया था। यहां पर उनको एक ऐसी जगह मिल भी गई। जहां पर वैज्ञानिकों को लगा कि तेल भंडार होगा। उन्होंने प्राकृतिक गैस के एक बड़े भंडार के ऊपर खुदाई करना शुरू किया। लेकिन उनको इसके नतीजे के बारे में नहीं पता था। जब खुदाई के लिए उन्होंने उस हिस्से पर भारी मशीनें लगाईं। तो जमीन मशीनों का जोर न सह पाए और जमीन अंदर की ओर धंसने लगी। जिस कारण कई जगहों पर गड्ढा बनता चला गया। एक गड्ढे से निकलने लगी गैस बता दें कि रेगिस्तान में जगह-जगह गड्ढे बन रहे थे। लेकिन एक गड्ढा सबसे बड़ा था। यह गड्ढा करीब 230 फीट चौड़ा और 65 फीट गहरा था। जिसके बाद वैज्ञानिकों को चिंता सताने लगी। क्योंकि इस गड्ढे से लगातार प्राकृतिक गैस बाहर निकल रही थी। हालांकि यह गैस जहरीली नहीं थी, लेकिन फिर भी यह ऑक्सीजन को बदल देती थी। जिस कारण सांस ले पाना मुश्किल हो जाता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी रेगिस्तान में रहने वाले जानवरों को होती थी। क्योंकि गड्ढे में गिरने से जानवर की फौरन मौत हो जाती। ऐसे में वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर यहां ब्लास्ट करना हो तो सिर्फ 5% मीथेन की मात्रा काफी होगी। इसलिए उन्होंने सोचा कि इसमें आग लगा दी जाए। अभी तक जल रही आग आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आग अभी तक जल रही है। तुर्कमेनिस्तान के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जब गड्ढे में मौजूद प्राकृतिक गैस खत्म हो जाएगी, तो यह आग अपने आप बुझ जाएगी। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है और यह आग जल रही है। साल 2010 में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति कुरबानगुली बर्डीमुखामेदोव भी इस गड्ढे का दौरा करने के लिए यहां पहुंचे थे। रेगस्तान में भभकने वाली इस आग को देखकर उन्होंने भी चिंता जताई थी। इससे आसपास के गैस क्षेत्रों को भी खतरा हो सकता है।
Raksha Bandhan 2026: लॉन्ग वीकेंड ने बढ़ाई ट्रैवल की कीमत, होटल और फ्लाइट टिकट के दाम आसमान पर
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दियोटसिद्ध: उतराई पर पलटा टेंपो ट्रैवलर, बाल-बाल टला बड़ा हादसा
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जमुई जिले के खैरा प्रखंड की अरुणमाबांक पंचायत स्थित परासी में पर्यटन स्थल विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। गुरुवार को जिलाधिकारी नवीन ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण कर पर्यटन विकास की संभावनाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि परासी पर्यटन के लिए उपयुक्त क्षेत्र है, जहां एडवेंचर और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों के विकास की पर्याप्त संभावनाएं हैं। सिर्फ मंदिर नहीं, पर्यटकों को मिलेगा पूरा पैकेज निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पर्यटन को व्यापक रूप से विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन का मतलब केवल किसी एक धार्मिक स्थल का दर्शन कराना नहीं है, बल्कि पर्यटकों के लिए एक संपूर्ण पैकेज तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल गिद्धेश्वर मंदिर दिखाकर पर्यटन को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। धार्मिक स्थलों के साथ पर्यटकों को एडवेंचर, मनोरंजन और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव भी मिलना चाहिए। बड़े जलाशय में बोटिंग की संभावना डीएम ने कहा कि आज की जीवनशैली में लोग तनावग्रस्त रहते हैं। ऐसे में प्राकृतिक वातावरण और शांत स्थान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। परासी और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन के लिए कई संसाधन पहले से मौजूद हैं। यहां एक बड़ा जलाशय है, जहां बोटिंग जैसी गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं। गिद्धेश्वर और लछुआड़ मंदिर को भी जोड़ा जाएगा परासी के आसपास गिद्धेश्वर मंदिर और लछुआड़ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भी स्थित हैं। जिलाधिकारी ने इन सभी स्थानों को एकीकृत कर बेहतर पर्यटन मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। इससे जमुई में बाहरी पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी पैदा होंगे। कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को पर्यटन विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। प्रशासन की इस पहल से क्षेत्र के लोगों में पर्यटन विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है।
उदयपुर के भविष्य का स्वरूप कैसा होगा, शहर में विकास की रफ्तार किस दिशा में जाएगी और तकनीक से लेकर पर्यटन तक किन क्षेत्रों में नए अवसर बनेंगे-इन सवालों की झलक होटल योइस में शुरू हुई तीन दिवसीय मेगा प्रदर्शनी ‘उज्ज्वल राजस्थान 3.0’ में देखने को मिल रही है। गुरुवार को प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। इस बार प्रदर्शनी की खास थीम ‘फ्यूचर ऑफ उदयपुर’ रखी गई है। 22 अगस्त तक चलने वाली यह प्रदर्शनी रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी में उदयपुर के इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, औद्योगिक विकास, शिक्षा, तकनीक, स्थिरता और सामाजिक-आर्थिक प्रगति की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया है। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता एवं वनांचल शिक्षा समिति की महामंत्री डॉ. रजनी पी. रावत ने अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में ‘विकसित राजस्थान’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में उदयपुर की भूमिका को भी सामने रखा गया है। अलग-अलग स्टॉल और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के जरिए केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यों की जानकारी दी जा रही है। लाइव डेमोंस्ट्रेशन और विशेषज्ञों से संवाद के जरिए लोगों को नई तकनीकों और सरकारी पहलों को समझने का अवसर मिल रहा है। छात्रों, युवाओं, किसानों और उद्यमियों पर विशेष फोकस प्रदर्शनी को आम नागरिकों के साथ छात्रों, युवाओं, किसानों और उद्यमियों के लिए भी उपयोगी बनाया गया है। यहां करियर के अवसर, कौशल विकास, उभरती तकनीक, उद्यमिता और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। उदयपुर में 21 अगस्त से होम एंड लाइफस्टाइल अपग्रेड फेस्टिवल घर को आधुनिक और आकर्षक बनाने के साथ नई तकनीक व डिजाइन से जुड़ी सुविधाओं को एक ही जगह देखने का मौका उदयपुर के 100 फीट रोड स्थित शुभ केसर गार्डन में 21 से 23 अगस्त तक होम एंड लाइफस्टाइल अपग्रेड फेस्टिवल में मिलेगा। फेस्टिवल में लगाए जाएंगे 15 से ज्यादा स्टॉल और 5 से ज्यादा लाइव मॉकअप रिद्धि सिद्धी ग्रुप के निदेशक पंकज जैन और अनिल जैन ने बताया कि फेस्टिवल में इंटीरियर, फर्नीचर, मॉड्यूलर किचन, लाइटिंग, इलेक्ट्रिकल, सैनिटरीवेयर, बाथ फिटिंग, पाइप्स, टैंक, बैटरी-सोलर, फर्निशिंग और रियल एस्टेट सहित घर और आधुनिक लाइफस्टाइल से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। आयोजक हर्षल जैन के अनुसार, फेस्टिवल में 15 से अधिक स्टॉल और 5 से ज्यादा लाइव मॉकअप लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से लोग उत्पादों के उपयोग और डिजाइन को वास्तविक रूप में समझ सकेंगे। एक्सपो के प्रबंधक आयुष वक्तावत व हंसमुख डागरिया ने बताया कि आर्किटेक्ट्स, बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स और आम उपभोक्ताओं को विशेषज्ञों से सलाह लेने और विभिन्न उत्पादों की तुलना करने का अवसर मिलेगा। समारोह में विशिष्ट अतिथि निधि त्रिवेणी, इकोसिस्टम एंगेजमेंट मैनेजर-वेस्ट, भाषिणी, इसरो के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग के वैज्ञानिक-जी एवं ग्रुप हेड डॉ. हरि शंकर श्रीवास्तव, एलआईसी के डिविजनल मैनेजर रवि कुमार नेगी और गुजरात इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड अल्पेश मधाद मौजूद रहे।
राजस्थान पर्यटन विभाग की सक्रिय सहभागिता से टीटीएफ मुंबई 2026 का शुभारंभ
राजस्थान पर्यटन विभाग की सक्रिय सहभागिता के साथ ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ) मुंबई 2026 का तीन दिवसीय आयोजन गुरुवार से जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर, मुंबई में प्रारंभ हो गया...
मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन से उत्तर बिहार में सुगम होगा आवागमन, पर्यटन स्थलों को भी जोड़ेगा NH 22
NH 22 Highway Bihar: केंद्रीय कैबिनेट ने मुजफ्फरपुर से नेपाल सीमा पर सोनबरसा तक 83 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क परियोजना को मंजूरी दी है। करीब 3590 करोड़ की लागत से बनने वाली यह सड़क उत्तर बिहार में आवागमन को सुगम बनाएगी।
चित्रकूट के रामसैया में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए डीएम पुलकित गर्ग और एसपी अरुण कुमार सिंह ने गुरुवार को औचक निरीक्षण किया। इस स्थल का विकास लगभग दो करोड़ रुपए की परियोजना से किया जाएगा। अधिकारियों ने प्रस्तावित कार्यों का जायजा लिया और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। पर्यटन विभाग द्वारा यहां एक प्रवेश द्वार का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालुओं के लिए यात्री शेड और रैन बसेरा विकसित किया जाएगा। रैन बसेरे में गर्मी से बचाव के लिए कूलर और पंखों की व्यवस्था भी की जाएगी। पास के एक अन्य यात्री शेड में पुलिस चौकी बनाने का भी प्रस्ताव है, जिससे बढ़ती भीड़ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। अधिकारियों ने बताया कि रामसैया धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहां साल भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। परियोजना पूरी होने पर यात्रियों को बैठने, ठहरने और सुरक्षा सहित कई सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी। डीएम और एसपी ने निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से और समय पर पूरा करने पर जोर दिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास काल में भगवान श्रीराम ने माता जानकी के साथ रामसैया में समय व्यतीत किया था। यहां एक शिला पर आज भी उनके बैठने के चिन्ह मौजूद बताए जाते हैं। इसी धार्मिक महत्व के कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। रामसैया के विकास से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सुविधाओं से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। निरीक्षण के दौरान भाजपा नेता अश्वनी अवस्थी, अनूप पांडे, अशोक मिश्रा और बंसी बिहारी चौबे सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
Monsoon Travel 2026: बारिश के मौसम में स्वर्ग से कम नहीं ये 5 जगहें, घूमने के लिए आज ही करें प्लानिंग
डिंडौरी निवासी बस संचालक संजय केशवानी और साधना केशवानी के खिलाफ कुछ दिन पहले EOW ने जांच की थी। अब संजय केशवानी से जुड़े आकाश ट्रैवल्स के खिलाफ चेक बाउंस मामले में जबलपुर जिला न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने वारंट की तामील के लिए डिंडौरी पुलिस को निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी। जबलपुर निवासी डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मूल रूप से डिंडौरी निवासी बिलैया के पड़ोस में आकाश ट्रैवल्स के संचालक संजय केशवानी और उनकी पत्नी साधना केशवानी रहते थे। दोनों ने अक्टूबर 2023 में व्यापार के लिए उनसे साढ़े 12 लाख रुपए उधार लिए थे। उन्होंने रकम लौटाने के लिए दो महीने का समय मांगा था। भरोसा कर बिलैया ने उन्हें रुपए दे दिए। दो महीने बाद रकम वापस मांगने पर दंपती ने टालमटोल की और जल्द रुपए लौटाने का आश्वासन दिया। सितंबर 2024 में संजय केशवानी ने बिलैया को साढ़े 12 लाख रुपए के चेक दिए, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए। शिकायत के मुताबिक, संजय ने IDBI बैंक का 6.50 लाख रुपए का एक चेक, स्टेट बैंक डिंडौरी के दो चेक और HDFC बैंक के पांच चेक दिए थे। सभी चेक अनादरित हो गए। इसके बाद 26 सितंबर 2024 को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन संजय केशवानी ने उसका भी जवाब नहीं दिया। डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया और डॉ. शोभना बिलैया ने बाउंस हुए चेक कोर्ट में पेश किए और मामले दर्ज कराए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिव्यकृष्ण के अनुसार, संजय केशवानी ने जिस खाते के चेक दिए थे, वह काफी समय पहले ही बंद हो चुका था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद जानबूझकर उन्हीं खातों के चेक जारी किए गए। सुनवाई के दौरान आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जबलपुर जिला न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वारंट की तामील और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डिंडौरी पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालयीन रिकॉर्ड में एक मामले में डॉ. शोभना बिलैया बनाम साधना केशवानी और दूसरे में डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया बनाम मेसर्स आकाश ऑटोमोबाइल्स/आकाश रोडवेज डिंडौरी प्राइवेट लिमिटेड एवं संजय केशवानी का उल्लेख है। दोनों मामलों में अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को निर्धारित है। गौरतलब है कि संजय केशवानी और साधना केशवानी के खिलाफ पहले भी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से जुड़ा मामला सामने आ चुका है। डिंडौरी में बस संचालन और टैक्स से संबंधित शिकायत पर EOW जबलपुर ने कार्रवाई की थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2006 से 2025 के बीच संचालित बसों के टैक्स भुगतान में कथित अनियमितताओं की शिकायत पर जांच की गई थी और संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था।
सरगुजा में खस्ताहाल नेशनल हाईवे 43 में बीती शाम भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की इनोवा कार फंस गई। गाड़ी को निकालने में करीब दो घंटे लग गए। अंबिकापुर पहुंचकर पवन साय ने खस्ताहाल सड़क को लेकर प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी और अधिकारियों के साथ संगठन के बड़े नेताओं को जमकर फटकारा। सुबह पवन साय से मिलने पहुंचे पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया को सड़क की खस्ताहालत को लेकर पवन साय ने फटकार लगाई। प्रदेश संगठन महामंत्री की फटकार के बाद नेशनल हाईवे में गड्ढों को भरने का काम तत्काल शुरू कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, सूरजपुर और कोरिया में आयोजित भाजपा की बैठक में शामिल होने के लिए भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय बुधवार शाम जशपुर से अंबिकापुर आ रहे थे। नेशनल हाईवे 43 में सीतापुर शहर के बीच उनकी इनोवा वाहन गड्ढे में घुस गई और अटक गई। गाड़ी फंसने के बाद उन्हें सीतापुर के रेस्ट हाउस ले जाया गया। मंत्रियों, अधिकारियों को जमकर फटकारा पवन साय की गाड़ी को निकालने के लिए मैकेनिक को बुलाना पड़ा। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद गाड़ी बाहर निकल सकी। वे रात करीब 9.30 बजे अंबिकापुर पहुंचे। अंबिकापुर पहुंचने के पहले दरिमा मोड़ से लेकर भारत माता चौक तक खस्ताहाल सड़क से उन्हें गुजरना पड़ा। अंबिकापुर पहुंचने के बाद पवन साय ने प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी को फोन कर जमकर सुनाया। मौके पर मौजूद भाजपा नेताओं के अनुसार पवन साय ने यहां तक कह दिया कि वे कभी क्षेत्र में भ्रमण पर आते भी हैं या नहीं। पवन साय ने नेशनल हाईवे के अधिकारियों को भी जमकर फटकारा। सुबह प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय से मिलने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया सहित अन्य नेता पहुंचे। पवन साय ने मंत्री सहित नेताओं को भी सड़क की खस्ताहालत को लेकर फटकारा। उन्होंने कहा कि सब नेता ठेकेदार हैं तो श्रमदान क्यों नहीं करते। फटकार के बाद मरम्मत हुई शुरू भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री की फटकार के बाद नेशनल हाईवे की खस्ताहाल सड़क पर बोल्डर, गिट्टी गिरा दी गई है। भारत माता चौक से दरिमा रोड मोड़ तक गड्ढों को भरा जा रहा है और पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुकी सड़क का सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। सीतापुर में भी सड़क के गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया गया है। कई किलोमीटर सड़क खस्ताहाल नेशनल हाईवे 43 में अंबिकापुर के खरसिया नाका से दरिमा रोड तक सड़क पूरी तरह से उखड़ गई है। वहीं सीतापुर में भी सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। वहीं पीजी कॉलेज से सिलफिली तक सड़क में गढ्ढे हो गए हैं और सड़क कई स्थानों पर पूरी तरह से टूट गई है। नेशनल हाईवे द्वारा भारत माता चौक से लुचकी तक एवं गांधी चौक से रेलवे स्टेशन मोड़ कर फोरलेन सड़क निर्माण के लिए टेंडर करा दिया गया है। पूर्व में सांसद ने भी सड़क सुधारने का निर्देश दिया था, लेकिन सड़क मरम्मत शुरू नहीं कराई गई। फटकार के बाद नेशनल हाईवे ने गड्ढों को भरने का काम शुरू करा दिया है।
इटावा में ट्रैवल्स एजेंसी संचालक के 28 वर्षीय बेटे ने की आत्महत्या, एक साल से था बीमार
इटावा में ट्रैवल्स एजेंसी संचालक के 28 वर्षीय बेटे ने की आत्महत्या, एक साल से था बीमार
Travel Tips: परिवार के साथ बनाले इस जगह का प्लॉन, आने का नहीं करेगा वापस मन
इंटरनेट डेस्क। परिवार के साथ में घूमने जाने की सोच रहे है और इस बार का प्लान कही दूर का है तो फिर आपको बताएंगे ऐसी जगह के बारे में जहां जाकर आप खुश हो जाएंगे। जी हां घूमने जाने के लिए हर कोई बेताब रहता है। तो ऐेसे में आप भी कर ले बैग तैयार और निकल जाए सिक्किम के लिए। लाचेन, सिक्किम आपने अगर कभी भी सिक्कम का दौरा नहीं किया है यानी घूमने नहीं गए है तो आपको जाना चाहिए। यहा एक से बढ़कर एक जगह है और उनमें से ही एक है लाचेन, जहां आप घूमने के लिए जा सकते है। वैसे ये जगह एडवेंचर लवर्स के लिए बहुत ही ज्यादा पसंद की जाने वाली है। क्या है खास बर्फ से घिरे पहाड़ आप यहां देख खुश हो जाएंगे। सिक्किम आएं तो आप यहां थांगु घाटी, चोपता घाटी, लाचेन मठ, गुरुडोंगमार झील, शिंगबा रोडोडेंड्रन अभयारण्य देखने जा सकते है। pc- tripoto.com
प्रवासी राजस्थानियों को निवेश और पर्यटन से जोड़ने की पहल, जयपुर में हुई महत्वपूर्ण बैठक
जयपुर के उद्योग भवन में प्रवासी राजस्थानियों को निवेश और पर्यटन से जोड़ने पर महत्वपूर्ण बैठक हुई। सतीश पंचाल सहित अधिकारियों और निवेशकों ने परियोजनाओं, निवेश, पर्यटन और कुवैत में कार्यक्रमों पर चर्चा की।
जयपुर में ब्रिक्स 2026 पर्यटन कार्य समूह की दूसरी बैठक, स्थिरता और निर्बाध यात्रा पर जोर
जयपुर में ब्रिक्स 2026 पर्यटन कार्य समूह की दूसरी बैठक में स्थिरता, कौशल विकास, स्मार्ट पर्यटन और निर्बाध यात्रा पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। 21 अगस्त की मंत्रिस्तरीय बैठक के लिए तैयार होगा आधार।
मंत्री कपिल देव के नाम पर साइबर ठगी की कोशिश, ट्रैवल कारोबारी को WhatsApp कॉल; PA बनकर कहा- ‘मंत्री बात करेंगे’
कोयलानगरी बिश्रामपुर का नाम गौरवान्वित: 2016 बैच की आइएएस अफसर जयश्री जैन बनीं सक्ती जिले की नई कलेक्टर; शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन पर रहेगा मुख्य जोर
मेचका गांव के पास मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित पौराणिक मुचुकुंद ऋषि की यह पावन तपोस्थली श्रद्धालुओं की आस्था के साथ ही पर्यटकों को बेहद आकर्षित कर रही है।
Yogi Adityanath ने Lucknow में Taj Palace होटल का उद्घाटन कर उत्तर प्रदेश को बताया पर्यटन केंद्र
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को यहां ताज पैलेस होटल का उद्घाटन करते हुए कहा कि राज्य ने अपनी पुरानी छवि छोड़ दी है और वह विशेष रूप से पर्यटन, आतिथ्य, बुनियादी ढांचे और निवेश में असीमित क्षमता वाले गंतव्य के रूप में उभरा है। उद्घाटन के बाद सभा को संबोधित करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश कोई साधारण भूमि का टुकड़ा नहीं है, बल्कि भारत का हृदय स्थल है, देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत राज्य में गहराई से निहित है। उन्होंने कहा, जब हम राज्य के बारे में बात करते हैं, तो उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और लखनऊ इसकी राजधानी है। उत्तर प्रदेश के बारे में आम धारणा यह है कि अगर भारत की आत्मा कहीं बसती है, तो वह उत्तर प्रदेश में रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से राज्य अपनी पहचान को पहचानने और पेश करने में विफल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप “पहचान संकट” पैदा हुआ है। उन्होंने कहा, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन उत्तर प्रदेश में है, काशी उत्तर प्रदेश में है और प्रयागराज उत्तर प्रदेश में है, राज्य की बौद्ध और जैन विरासत यहां है। यह राज्य भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण से जुड़ा है और बड़ी संख्या में जैन तीर्थ स्थलों का भी घर है। पर्यटन का जिक्र करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि जब 2017 में उनकी सरकार सत्ता में आई, तो उत्तर प्रदेश पर्यटन के मामले में देश में तीसरे स्थान पर था, लेकिन तब से पर्यटकों की संख्या में नाटकीय वृद्धि देखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बदलाव ने उत्तर प्रदेश के बारे में धारणा भी बदल दी है। आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक बुनियादी ढांचे और विकास के साथ जोड़कर पर्यटन के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ को यूनेस्को द्वारा दी गई मान्यता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए न केवल बुनियादी ढांचे की जरूरत है बल्कि एक सुरक्षित वातावरण और लोगों के बीच भागीदारी की भावना की भी जरूरत है।
जयपुर में दूसरी ब्रिक्स 2026 पर्यटन कार्य समूह बैठक, AI और सतत पर्यटन पर सहयोग बढ़ाने पर जोर
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत दूसरी ब्रिक्स 2026 पर्यटन कार्य समूह (टीडब्ल्यूजी) बैठक बुधवार को जयपुर में आयोजित हुई...
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए चार आईएएस अधिकारियों की नई पदस्थापना की है। पर्यटन, उच्च शिक्षा, गृह और नवकरणीय ऊर्जा विभागों में नई जिम्मेदारियां मिली हैं।
जम्मू-कश्मीर भारत का ‘महत्वपूर्ण हिस्सा’, ट्रैवल एडवाइजरी पर फिर विचार करेगा अमेरिका: अमेरिकी राजदूत
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे के दौरान कहा कि अमेरिका केंद्र शासित प्रदेश के लिए जारी यात्रा संबंधी एडवाइजरी पर फिर से विचार करेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वियतनाम भारतीय पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जगहों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां पर्यटकों को मिलने वाली हर तरह की सुविधा है। जिन यात्रियों को समुद्र के किनारे समय बिताना अच्छा लगता है, उनके लिए यहां पर कई खूबसूरत बीच हैं। एडवेंचर और ऐतिहासिक जगहों पर घूमने के लिए कई जगहें हैं। वियतनाम की संस्कृति भी पर्यटकों का काफी आकर्षित करती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वियतनाम की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं। जिस कारण हर साल लाखों की संख्या में भारतीय पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते हैं। इसे भी पढ़ें: Delhi to Agra Travel Guide: मानसून की फुहारों के बीच ताजमहल और Baby Taj का दीदार, एक दिन की छुट्टी के लिए परफेक्ट One-Day Trip आसान वीजा प्रोसेस वियतनाम जाने के लिए भारतीयों को वीजा प्रोसेस के लिए ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती है। ई-वीजा के जरिए आवेदन करने पर 90 दिनों के अंदर आप वियतनाम यात्रा पर जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के कारण भारतीयों को वीजा के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के दौरान भारतीयों को पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, एक्सपायरी डेट, पासपोर्ट साइज फोटो, पासपोर्ट के बायोडाटा की फोटो और पर्सनल जानकारी जैसी जानकारी देनी होती है। वहीं यात्रा से 2 सप्ताह पहले आवेदन करना सही होता है। घूमना है आसान वियतनाम की मुद्रा को डोंग कहते हैं, जोकि भारत के रुपए के मुकाबले सस्ती है। भारतीय रुपए की तुलना में वियतनाम के डोंग की वैल्यू काफी कम है। भारतीय 1 रुपया करीब 275 वियतनामी डोंग के बराबर है। अगर आप 100 रुपए खर्चा करती हैं, तो यह 27,500 वियतनामी डोंग के बराबर होगा। इसलिए यहां पर भारतीयों को घूमना सस्ता पड़ता है। वहीं यहां पर रहना, खाना, घूमना आदि भारतीय पर्यटकों को सस्ता लगता है। कई बेहद खूबसूरत जगहें वियतनाम जाने का एक कारण यह भी है कि यहां पर खूबसूरत जगहों की भरमार है। यहां समुद्र तट, नदियां, पहाड़, गुफाएं और ऐतिहासिक स्थल आदि सभी चीजें आपको एक ही जगह पर मिल जाती है। इस तरह से आपका विदेश ट्रिप पूरा लगता है। यहां का हा लॉन्ग बे जगह नीले पानी और चूना पत्थर की के लिए काफी फेमस माना जाता है। वहीं दा नांग एक बेहद खूबसूरत बीच है। आप हो ची मिन्ह सिटी में शॉपिंग कर सकती हैं। तो हनोई में वियतनाम की संस्कृति को बेहद करीब से देखने और समझने का मौका मिलता है।
Gaurav Khanna माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर निकले, बारिश में फंसे तो ऐसे किया एन्जॉय
एक्टर गौरव खन्ना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। एक्टर लगातार अपने फैंस के साथ अपनी जिंदगी से जुड़े अपडेट शेयर कर रहे हैं। हाल ही में गौरव ने एक नया वीडियो शेयर कर बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर गए हैं। गौरव ने वीडियो में उस कार की झलक भी दिखाई, जिसमें वह अपनी मां और पिता के साथ सफर कर रहे हैं। पहाड़ों की ओर जाते हुए गौरव काफी खुश नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा, बादलों के बीच में जाते हुए। इस वीडियो के साथ उन्होंने मसूरी का नाम भी लिखा। बारिश में फंसे गौरव खन्ना मसूरी पहुंचने के बाद गौरव ने एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बारिश का मजा लेते नजर आए। उन्होंने बताया कि वहां बारिश काफी तेज हो रही थी। गौरव ने कहा कि उन्होंने छतरी भी ली थी, लेकिन तेज बारिश की वजह से उनके हाल खराब हो गए। इसके बाद गौरव एक रेस्टोरेंट में चाय पीते नजर आए। उन्होंने कहा कि ट्रिप पर इतनी बारिश में आएंगे तो ऐसा होना ही है, लेकिन यही तो ट्रिप का मजा है। वीडियो के आखिर में गौरव ने मजाकिया अंदाज में कहा, मजा भी है। इसे भी पढ़ें: Tumbbad 2 की रेकी के दौरान हुआ बड़ा खुलासा: उसी खौफनाक हवेली में टीम को मिला 8 साल पुराना रहस्यमयी खजाना! फैंस ने गौरव के वेकेशन को बताया जरूरी गौरव खन्ना के ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फैंस को उनका अपने माता-पिता के साथ समय बिताना काफी पसंद आ रहा है। कई फैंस का मानना है कि गौरव को इस तरह के ब्रेक और वेकेशन की जरूरत थी। कुछ फैंस ने गौरव और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के रिश्ते को लेकर भी कमेंट किए। फैंस का कहना है कि आकांक्षा से अलग रहने के बाद गौरव के लिए परिवार के साथ समय बिताना और घूमना अच्छा है। इसे भी पढ़ें: Pune में घर खरीदने के बाद अब शादी की जिम्मेदारियों पर क्या बोले Parth Samthaan गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का अभी तक नहीं हुआ तलाक गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला की शादी और तलाक को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। लॉकअप 2 में गौरव, आकांक्षा को सपोर्ट करने पहुंचे थे। उस दौरान एक्टर ने बताया था कि दोनों अभी भी कानूनी तौर पर शादीशुदा हैं और उनका तलाक नहीं हुआ है। वहीं, लॉकअप 2 के बाद आकांक्षा चमोला ने भी बताया था कि अभी तक तलाक के पेपर साइन नहीं हुए हैं। फिलहाल दोनों अपने-अपने प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं। इस बीच गौरव अपने माता-पिता के साथ मसूरी ट्रिप का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।
Travel Tips: इस हिल स्टेशन पर आकर आपके बच्चे भी हो जाएंगे खुश, नजारे हैं एक से बढ़कर एक
इंटरनेट डेस्क। मानसून सीजन चल रहा हैं और बारिश हो रही है। रक्षाबंधन भी पास में हैं और एक लंबा वीकेंड आने को है। ऐसे में आप अगर घूमने जाने की तैयारी कर रहे हैं तो उत्तराखंड के राजधानी देहरादून के पास बसे मसूरी जा सकते है। ये जगह इतनी खूबसूरत है की आप खुश हो जाएंगे। कैसे पहुंचे आपको बता दें की सबसे पहले तो यहां मंसूर के पौधे सबसे ज्यादा उगते हैं, इसी कारण इसे मंसूरी कहा गया। बाद में मसूरी हो गया है। यहां वैसे आपको देखने को बहुत कुछ मिल जाएगा। यहा पहुंचने के लिए आपको ट्रेन, बस, कार और फ्लाइट मिल जाएगी। अंग्रेजों ने ढूंढ़ा था इस जगह को आपको बता दें की इस जगह पर 1823 में ब्रिटिश अफसर पर्वतारोहण करते-करते पहुंच था। उसे यह जगह पसंद आई और बाद में यहां बसावट हो गईं। आज यह बड़ी ही खूबसूरत जगह है। यह एक बड़ा शहर बन गया है। यहां हजारों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते है। pc- www.worldatlas.com
World Photography Day: महिला फोटोग्राफर्स की रुचि अब केवल स्टूडियो या समारोहों की फोटोग्राफी तक सीमित नहीं है। कई युवतियां नेचर और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में भी सक्रिय हैं। जंगलों में पक्षियों और वन्यजीवों को कैमरे में कैद करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। आदेश के अनुसार 22 IAS अधिकारियों और एक IFS अधिकारी की नई पदस्थापना की गई है। इस फेरबदल में 6 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव नगरीय प्रशासन विभाग में हुआ है। 1999 बैच के IAS अधिकारी सोनमणि बोरा को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। उनके पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। विवेक आचार्य (IFS), जो वर्तमान में प्रबंध संचालक, पर्यटन मंडल के पद पर थे, उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से उनके मूल विभाग वन विभाग को वापस कर दी गई हैं। इस तरह विवेक आचार्य 3 महीने में संस्कृति और पर्यटन दोनों विभागों की जिम्मेदारी से बाहर हो गए हैं। आर. शंगीता को नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव पद से हटाकर सचिव, मंत्रालय बनाया गया है। वहीं, गरियाबंद के कलेक्टर भगवान सिंह उइके को सामान्य प्रशासन विभाग का संयुक्त सचिव बनाया गया है। कबीरधाम के कलेक्टर गोपाल वर्मा को संयुक्त सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। 3 महीने पहले दी जिम्मेदारी, अब फिर बदला प्रभार सोनमणि बोरा: आदिम जाति विकास से नगरीय प्रशासन की कमान सोनमणि बोरा (1999 बैच) आदिम जाति विकास विभाग की प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब 18 अगस्त के नए आदेश में उन्हें प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग बनाया गया है। नगरीय प्रशासन सरकार के प्रमुख विभागों में से एक है। शहरों के विकास, नगरीय निकायों और शहरी योजनाओं से जुड़े बड़े फैसले इसी विभाग के दायरे में आते हैं। ऐसे में बोरा की नई पोस्टिंग को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी माना जा रहा है। आर. संगीता: नगरीय प्रशासन से मंत्रालय भेजा आर. संगीता (2005 बैच) सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब उन्हें इस विभाग से हटाकर सचिव, मंत्रालय पदस्थ किया गया है। रणबीर शर्मा: NHM से समाज कल्याण, अब गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा (2012 बैच) संचालक, समाज कल्याण के पद से हटाकर कलेक्टर, गरियाबंद बनाया गया है। यानी एक बार फिर उनकी पोस्टिंग फील्ड प्रशासन में हुई है। 3 महीने में संस्कृति और पर्यटन दोनों से बाहर हुए विवेक आचार्य 2006 बैच के IFS विवेक आचार्य की जिम्मेदारियों में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। करीब तीन महीने पहले जारी प्रशासनिक आदेश में उन्हें संस्कृति विभाग के संचालक पद से हटाकर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी दी गई थी। अब 18 अगस्त के नए आदेश में सरकार ने उनकी टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक पद से भी सेवाएं वापस लेते हुए उन्हें उनके मूल विभाग वन विभाग में भेज दिया है। विवेक आचार्य वर्ष 2020 से संस्कृति विभाग के संचालक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यानी करीब 6 साल तक वे संस्कृति और पर्यटन विभाग में रहे। इस तरह 3 महीने के भीतर विवेक आचार्य की पोस्टिंग 2 बार बदली और अब वे संस्कृति और पर्यटन दोनों विभागों की जिम्मेदारी से बाहर हो गए हैं। कांकेर कलेक्टर को नगरीय प्रशासन की जिम्मेदारी कांकेर कलेक्टर नीलेशकुमार महादेव क्षीरसागर को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का संचालक बनाया गया है। वहीं, इस पद पर रहे रिमिजियुस एक्का को विशेष सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बनाया गया है। उन्हें मिशन संचालक, जल जीवन मिशन का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
Sambhal News: श्री हरिबाबा बांध धाम बनेगा पर्यटन स्थल, भाजपा विधायक ने किया भूमि पूजन
श्री हरिबाबा बांध धाम बनेगा पर्यटन स्थल, भाजपा विधायक ने किया भूमि पूजन
उत्तर प्रदेश वन निगम अब जंगलों के प्रबंधन और ईको-टूरिज्म से आय बढ़ाने के नए रास्ते तलाशेगा। इसके लिए वन प्रमाणीकरण, रिवर ट्रेनिंग और ईको पर्यटन स्थलों की दरों के पुनर्निर्धारण पर जोर दिया गया है।
छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। आदेश के अनुसार 22 IAS अधिकारियों और एक IFS अधिकारी की नई पदस्थापना की गई है। इस फेरबदल में 6 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव नगरीय प्रशासन विभाग में हुआ है। 1999 बैच के IAS अधिकारी सोनमणि बोरा को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। उनके पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। विवेक आचार्य (IFS), जो वर्तमान में प्रबंध संचालक, पर्यटन मंडल के पद पर थे, उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से उनके मूल विभाग वन विभाग को वापस कर दी गई हैं। इस तरह विवेक आचार्य 3 महीने में संस्कृति और पर्यटन दोनों विभागों की जिम्मेदारी से बाहर हो गए हैं। आर. शंगीता को नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव पद से हटाकर सचिव, मंत्रालय बनाया गया है। वहीं, गरियाबंद के कलेक्टर भगवान सिंह उइके को सामान्य प्रशासन विभाग का संयुक्त सचिव बनाया गया है। कबीरधाम के कलेक्टर गोपाल वर्मा को संयुक्त सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। 3 महीने पहले दी जिम्मेदारी, अब फिर बदला प्रभार सोनमणि बोरा: आदिम जाति विकास से नगरीय प्रशासन की कमान सोनमणि बोरा (1999 बैच) आदिम जाति विकास विभाग की प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब 18 अगस्त के नए आदेश में उन्हें प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग बनाया गया है। नगरीय प्रशासन सरकार के प्रमुख विभागों में से एक है। शहरों के विकास, नगरीय निकायों और शहरी योजनाओं से जुड़े बड़े फैसले इसी विभाग के दायरे में आते हैं। ऐसे में बोरा की नई पोस्टिंग को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी माना जा रहा है। आर. संगीता: नगरीय प्रशासन से मंत्रालय भेजा आर. संगीता (2005 बैच) सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब उन्हें इस विभाग से हटाकर सचिव, मंत्रालय पदस्थ किया गया है। रणबीर शर्मा: NHM से समाज कल्याण, अब गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा (2012 बैच) संचालक, समाज कल्याण के पद से हटाकर कलेक्टर, गरियाबंद बनाया गया है। यानी एक बार फिर उनकी पोस्टिंग फील्ड प्रशासन में हुई है। 3 महीने में संस्कृति और पर्यटन दोनों से बाहर हुए विवेक आचार्य 2006 बैच के IFS विवेक आचार्य की जिम्मेदारियों में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। करीब तीन महीने पहले जारी प्रशासनिक आदेश में उन्हें संस्कृति विभाग के संचालक पद से हटाकर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी दी गई थी। अब 18 अगस्त के नए आदेश में सरकार ने उनकी टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक पद से भी सेवाएं वापस लेते हुए उन्हें उनके मूल विभाग वन विभाग में भेज दिया है। विवेक आचार्य वर्ष 2020 से संस्कृति विभाग के संचालक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यानी करीब 6 साल तक वे संस्कृति और पर्यटन विभाग में रहे। इस तरह 3 महीने के भीतर विवेक आचार्य की पोस्टिंग 2 बार बदली और अब वे संस्कृति और पर्यटन दोनों विभागों की जिम्मेदारी से बाहर हो गए हैं। कांकेर कलेक्टर को नगरीय प्रशासन की जिम्मेदारी कांकेर कलेक्टर नीलेशकुमार महादेव क्षीरसागर को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का संचालक बनाया गया है। वहीं, इस पद पर रहे रिमिजियुस एक्का को विशेष सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बनाया गया है। उन्हें मिशन संचालक, जल जीवन मिशन का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर में 7 से 10 सितंबर तक होने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFJK) की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस आयोजन में फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ कश्मीर के पर्यटन, संस्कृति और हस्तशिल्प को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा।
चंबल बीहड़, जो कभी डकैतों का गढ़ था, अब पर्यटकों के लिए रोमांचक स्थल बन गया है, जहां वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य आकर्षित करते हैं। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में घड़ियाल, डॉल्फिन और दुर्लभ कछुओं की संख्या बढ़ी है, जिससे यह परिवार और युवाओं के लिए पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बन गया है।
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए 84 करोड़ वित्तीय सहायता मंजूर की है। इसमें चिंतपूर्णी मंदिर के लिए 56 करोड़ और सीमावर्ती क्षेत्र रकछम व काजा के विकास के लिए भी प्रावधान है।
चंदेरी को भगवान श्रीकृष्ण की बुआ श्रुति के बेटे शिशुपाल की राजधानी माना जाता है। उस दौरान इसका उल्लेख चेदी राज्य के रूप में मिलता है। चंदेरी की रणनीतिक स्थिति में इसके समृद्धि की बड़ी वजह रही। कभी चंद्रगिरि कहा जाने वाला चंदेरी, बुंदेलखंड और मालवा की सीमा पर बसा है। जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। यहां पर मालवा के सुल्तानों और बुंदेल के राजपूतों द्वारा बनवाई गई तमाम इमारतें देखी जा सकती हैं। नदी किनारे गुफाओं में बने शैलचित्र सांस्कृतिक वैभव और कलात्मक सौंदर्य का परिचय देते हैं। यहां के शैलचित्रों को देखकर कहा जा सकता है कि चंदेरी प्रागैतिहासिक काल से एक जीवंत शहर है। चंदेरी साड़ियों से तो सभी वाकिफ हैं, चंदेरी साड़ियां अपने शिल्प और नफासत के लिए फेमस हैं। इसे भी पढ़ें: Monsoon Tourism 2026: भीड़भाड़ से दूर शांति देंगे ये 4 Budget Friendly Destinations, आज ही करें अपने ट्रिप का Plan जानें चंदेरी में कहां घूमें कोशक महल वहीं खिलजी वंश के शासनकाल में यह महल इस्लामी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चतुर्भुज आकार में निर्मित इस त्रि-स्तरीय महल के विशाल द्वार, झरोखे, खुले गलियारे इसकी स्थायपत्य कला को अनुपम बनाते हैं। इस महल के छत से दिखने वाले प्राकृतिक दृश्य इसकी शोभा को दोगुना कर देती है। कोशल इमारत के हर कक्ष के छत की डिजाइन बेहद अनोखा है। शुरूआत में 7 मंजिला इमारत के रूप में यह ढांचा सिर्फ 3 मंजिलों तक पूरा हो सका। चंदेरी किला चंदेरी किला शहर से 71 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला अभी भी शान से खड़ा है। यह किला कभी अभेद्य दुर्ग की तरह रहा होगा। यह किला 5 किमी लंबी दीवार से घिरा है। किले तक पहुंचने के तीन रास्ते हैं: पहला पक्का रास्ता है, जिससे आप गाड़ी से किले तक जा सकते हैं। दूसरा रास्ता खूनी दरवाजा है, जहां से पैदल पहुंचा जा सकता है। खूनी दरवाजा लकड़ी का बड़ा द्वार है। इस पर मालवा के सुल्तान कैदियों के शवों को लटका देते थे। बताया जाता है कि जब बाबर ने किले की घेराबंदी की थी। तो यह सच में खून से नहा गया था। इसको आखिरी किला कहा जाता था, यानी जब शासक को पता होता था कि उसकी हार होना निश्चित है। वह यहीं से युद्ध करते थे, जिससे तहखाने से निकलकर सुरक्षित जा सकें। बत्तीसी बावड़ी चौकोर, गोल और समकोण बावड़ियों से भरा यह अफगान वास्तुकला की निशानी है। इसकी सुंदर सीढ़ियों के ऊपर बने बीच में स्वागत द्वारों ने इसको अधिक भव्य बनाया है। 60-60 फीट लंबी-चौड़ी बावड़ी आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां पर आपको एक फारसी में लिखा शिलालेख भी मिलेगा। जिसका अर्थ है, जो स्वर्ग की झलक देखना चाहता है, वह यहां पर थोड़ा विश्राम करें, क्योंकि स्वर्ग इसी की तरह है। कटी घाटी इसको विशाल चट्टान को तराश कर बनाया गया है। चंदेरी के दक्षिणी किनारे पर स्थित यह मार्ग बुंदेलखंड और मालवा के बीच एक कड़ी का काम करता था। मालवा के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी के स्वागत के लिए इसको रातों-रात बनाया गया था। लेकिन इस दरवाजे में कुंडे या टिकाव के लिए राजमिस्त्री ने जगह नहीं छोड़ी थी। इस कमी को देखते हुए जिमन खान ने मिस्त्री को मेहनताना देने से इंकार दिया। इससे दुखी होकर मिस्त्री ने आत्महत्या कर ली। तब से यह कटी घाटी गेट बिना दरवाजे के खड़ा है। शहजादी का रोजा चंदेरी के गवर्नर की बेटी मेहरुनिस्सा और एक सेनापति के अमर प्रेम का प्रतीक यह मकबरा है। इसको 15वीं शताब्दी में गवर्नर ने बनवाया था। गवर्नर ने दोनों को अलग करने के लिए सेनापति को युद्ध में भेजा और सैनिकों को निर्देश दिए कि वह जीवित वापस न आ पाए। यह जानकारी मिलने पर शहजादी ने रोजे रखे थे। घायल होने के बाद भी सेनापति बच गया और वापस चंदेरी आ गया। जब मेहरुन्निसा उससे मिली, तो वह सेनापति अंतिम सांसे ले रहा था। उसी दौरान शहजादी ने भी प्राण त्याग दिए। रोजा रखने के कारण इस मकबरे का नाम 'शहजादी का रोजा' पड़ा। बाद में दोनों प्रेमियों को गवर्नर ने इस मकबरे में साथ दफनाया। यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ललितुर है। वहीं भोपाल एयरपोर्ट से कैब लेकर भी यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। बुंदेली खानों का स्वाद लें, जैसे मक्के की रोटी, दाल बाफला, रसखीर और सूजी के लड्डू। चंदेरी घूमने का सबसे सही समय अक्तूबर से लेकर मार्च के बीच का है। दो लोगों के एक दिन रहने और खाने का अनुमानित खर्च 2.5 से 3 हजार रुपए तक है। यहां का मौसम अधिकतम 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत अमृतसर से नए रूटों के लिए बसों का काफिला रवाना
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत अमृतसर से नए रूटों के लिए बसों का काफिला रवाना
पूर्व रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई तक 44.8 करोड़ यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाया और रिकॉर्ड 4,987 करोड़ रुपये का यात्री राजस्व अर्जित किया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में ईको टूरिज्म के समग्र विकास की समीक्षा की, जिसमें ट्रैकिंग, माउंटेनियरिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसी साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
जमुई जिले में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कभी अति नक्सल प्रभावित रहे गुरमाहा और चोरमारा गांवों की बेटियों ने अपनी लोक कला के जरिए जिले की बदलती तस्वीर पेश की। इन इलाकों की बच्चियों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से शांति, विकास और पर्यटन का संदेश दिया। लोक नृत्य से गूंज उठा रावणेश्वर हॉल रावणेश्वर हॉल में आयोजित कार्यक्रम में गुरमाहा और चोरमारा गांव की बच्चियों ने सबसे पहले पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। इसके बाद बच्चियों ने जमुई के गांवों, प्राकृतिक सुंदरता और इको-टूरिज्म से जुड़े लोकगीत प्रस्तुत किए। लोक संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। सरकारी स्कूलों के बच्चों ने दिखाई प्रतिभा जिला प्रशासन की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में सरकारी विद्यालयों के बच्चों ने गायन, वादन, नृत्य और अभिनय की शानदार प्रस्तुतियां दीं। जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में रावणेश्वर हॉल दर्शकों से खचाखच भरा रहा। रिकॉर्डेड म्यूजिक की जगह लाइव प्रस्तुति कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बच्चों ने रिकॉर्डेड संगीत के बजाय लाइव गायन और वादन के साथ प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों के साथ संगीत शिक्षकों ने भी मंच पर सहयोग किया। इससे सरकारी विद्यालयों में संगीत शिक्षा के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए। भगत सिंह और आजाद के बलिदान पर नाटक अन्य विद्यालयों के बच्चों ने भी देशभक्ति और सामाजिक मुद्दों पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के बलिदान पर आधारित नाटक के जरिए राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया। वहीं, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर एक छात्रा की प्रस्तुति ने लोगों को भावुक कर दिया। कजरी, संथाली नृत्य और अन्य लोक प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। सही अवसर मिले तो गांव के बच्चे भी छा सकते हैं यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि सरकारी विद्यालयों के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर गांवों के बच्चे भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। गुरमाहा और चोरमारा की बेटियों की प्रस्तुति ने जमुई में शांति, विकास और सामाजिक बदलाव की एक नई तस्वीर पेश की। कार्यक्रम से जुड़ी अन्य तस्वीरें…
क्या आप भी अगस्त में घूमने का बना रहे हैं प्लान और आपका बजट भी लिमिटेड है, तो यह लेख आपके लिए है। वैसे इस महीने के घूमने का एक अलग ही अनुभव होता है, हर तरफ हरियाली और सुकून वाला मौसम होता है। इस बार आप कम बजट में भी कम भीड़ वाली जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि किसी शांत और खूबसूरत जगहों पर जाने का प्लान। अगस्त में घूमने के लिए 4 बजट-फ्रेंडली डेस्टिनेशंस वैसे तो भारत में घूमने के लिए कई छिपी हुई जगहें, जहां पर काफी शांति देखने को मिलती है। आइए आपको इन जगहों के बारे में बताते हैं- जंजैहली घाटी (हिमाचल प्रदेश) शिमला और मनाली के शोर-शराबे से दूर आप हिमाचल प्रदेश के की इस खूबसूरत जगह पर जा सकते हैं। मंडी जिले में स्थित जंजैहली घाटी, जहां मानसून के समय सेब के बागान और हरे-भरे मखमली मैदान देखने के लायक होते है। यह जगह ट्रेकिंग और नेचर वॉक के लिए शौकीनों के लिए बेस्ट है। कैसे पहुंचे? - दिल्ली से जंजैहली घाटी पहुंचने के लिए सबसे पहले ISBT कश्मीरी गेट से मंडी/ओट के लिए सीधी HRTC या प्राइवेट वोल्वो बस पकड़ लें। - मंडी से जंजैहली की दूरी करीब 85 किमी है, आपको यहां से स्थानीय बस या प्राइवेट टैक्सी मिल जाएगी। - आप चाहे, तो दिल्ली से चंडीगढ़ या ऊना हिमाचल तक ट्रेन लें। इसके बाद बस या टैक्सी से करीब 5-6 घंटे में यहां पहुंच जाए। ओरछा और गढ़कुंडार (मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश या आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, यहां पर जरुर जाएं। यहां आपको बेतवा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक कस्बा ओरछा और पास ही स्थित गढ़कुंडार का किला देखने का गजब का अनुभव प्राप्त होगा। मानसून के समय जंगलों के बीच बने प्राचीन महल, छतरियां और नदियां आपके ट्रिप को यादगार बना देगी। जिन लोगों को फोटोग्राफी और इतिहास जानने का शौक है, वो लोग इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। ऐसे पहुंचें - - ओरछा और गढ़कुंडार जाने के लिए आप झांसी वीरांगना लक्ष्मीबाई, झांसी रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा। - स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाएंगे। आप लोकल बस से भी यहां तक पहुंच सकते हैं। - यहां पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट ग्वालियर है। वहीं, एयरपोर्ट से ओरछा की दूरी करीब 130 किमी है। भंडारदरा और घाटघर (महाराष्ट्र) यदि आपको झरने देखने का काफी शौक है, तो आप अगस्त के महीने में आप इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। मुंबई और पुणे के पास बसा भंडारदरा का घाटघर क्षेत्र घूमने के लिए सबसे बेस्ट है। मानसून के दौरान पूरी तरह धुंध और सैकड़ों मौसमी झरने देखने को मिलते हैं। यहां पर रंधा फॉल्स और आर्थर लेक अगस्त की बारिश में अपने पूरे शबाब पर होते हैं। कैसे पहुंचे? - इस जगह पर पहुंचने के लिए आपको नजदीकी बड़े शहर मुंबई, पुणे या नाशिक हैं। - आपको यहां आने के लिए मुंबई (BOM) पुणे (PNQ) या नाशिक (ISK) की डायरेक्ट फ्लाइट ले सकते हैं। - मुंबई से भंडारदरा करीब 165 किमी और नाशिक से लगभग 70 किमी दूर है। कसार देवी (उत्तराखंड) अगस्त के महीने में घूमने के लिए अल्मोड़ा के पास बसा कसार देवी भी एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यहां मानसून के समय बादल पहाड़ियों को छूकर गुजरते हैं, जिससे नजारा काफी अद्भुत लगता है। कसार देवी अपनी चुंबकीय ऊर्जा और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां पर आप दोस्तों और फैमिली के साथ घूमने जा सकते हैं। ऐसे पहुंचे - कसार देवी जाने के लिए आप काठगोदाम या हल्द्वानी स्टेशन तक जा सकते हैं। - स्टेशन पहुंचते ही आपको बहार अल्मोड़ा या कसार देवी के लिए शेयरिंग टैक्सी और बसें मिल जाएगी। - यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर (PGH) है, जो कि कसार देवी से करीब 125 किमी दूर है।
Travel Tips: बारिश के मौसम में जन्नत लगती हैं ये वादियां, Monsoon में एक्सप्लोर करें Hill Stations
बारिश के मौसम में घूमने का मजा ही अलग होता है। क्योंकि इस मौसम में चारों ओर हरियाली, बादलों से ढके पहाड़, ठंडी-ठंडी हवाएं और रिमझिम फुहारें लोगों को खूब भाती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस मॉनसून कहीं घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आप साउथ इंडिया के कुछ फेमस हिल स्टेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। यहां बारिश में नेचर की खूबसूरती इस कदर बढ़ जाती है, जिसको देखकर लगता है मानो स्वर्ग में आ गए हों। साउथ इंडिया के हिल स्टेशन अपने चाय के बागानों, झरनों, हिल स्टेशनों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां की वादियां खूबसूरत और हरी-भरी हो जाती हैं। वहीं कई जगहों पर बादल इतने नीचे आ जाते हैं कि ऐसा लगता है कि हम बादलों के बीच खड़े हैं। तो आइए जानते हैं साउथ इंडिया की इन खूबसूरत जगहों के बारे में। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Switzerland on a Budget? ये 4 Indian Destinations देंगे आपको यूरोप जैसी हसीन वादियों का अनुभव मुन्नार मॉनसून में केरल के मुन्नार की खूबसूरती भी गई गुना बढ़ जाती है। यहां चाय के खूबसूरत बागान, ठंडी-ठंडी हवाएं और धुंध से ढके पहाड़ लोगों की ट्रिप को यादगार बना देते हैं। बारिश के बाद यहां की हरियाली निखर जाती है। ऐसे में अगर आप भी नेचर लवर हैं, या फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। कूर्ग कर्नाटक का कूर्ग भी मॉनसून में देखने लायक होता है। इसकी खूबसूरती के कारण कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। मॉनसून में यहां पहाड़, कॉफी के बागानों और झरनों की खूबसूरती बढ़ जाती है। कूर्ग खूबसूरत होने के साथ शांत भी है। चिकमगलूर कर्नाटक का चिकमगलूर पिछले कुछ सालों से लोगों की पसंदीदा जगह बन चुकी है। मॉनसून में यहां हरी-भरी घाटियां और बादलों से ढके पहाड़ देखने को मिलेंगे। यहां आप शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के कुछ पल बिता सकते हैं। यह एक शानदार डेस्टिनेशन है। कोडाइकनाल तमिलनाडु का कोडाइकनाल हिल स्टेशन मानसून में बेहद खूबसूरत लगने लगता है। यहां की घाटियां, झीलें और व्यू पॉइंट बारिश के मौसम में बहुत ज्यादार सुंदर नजर आते हैं। अगर आपको भी प्रकृति से प्यार है और नेचर के बीच समय बिताना अच्छा लगता है, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। वायनाड केरल की खूबसूरती के बारे में तो आप सभी ने सुना होगा। इसको God's Own Country भी कहा जाता है। वहीं केरल का वायनाड भी मॉनसून में बेहद खूबसूरत लगता है। यहां लेक, गुफाएं, घने जंगल और कई बेहद शानदार झरने देखने लायक होते हैं। अगर आपको ट्रेकिंग और नेचर वॉक पसंद है, तो यह जगह आपके लिए बेस्ट है। ऊटी तमिलनाडु का ऊटी हिल स्टेशन भी बेहद खूबसूरत है। मॉनसून में यहां के चाय के बागान, पहाड़ और बगीचे खिल उठते हैं। अगर आप भी ऊटी आती हैं, तो पायकारा फॉल्स जाना न भूलें। इन बातों का ध्यान बारिश में मौसम की जानकारी लेने के बाद ही ट्रिप प्लान करें। छाता, रेनकोट और अच्छी ग्रिप वाले शूज साथ रखें। लोकल गाइडलाइंस को जरूर फॉलो करें।
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे पहले खास होता है। इस दौरान शिवभक्तों की मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। अगर आप भी इस महीने कहीं घूमने के साथ-साथ भोलेनाथ के दर्शन करना चाहती हैं। तो हिमाचल प्रदेश एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो ऊंचाई पर बने हुए हैं। इस शिव मंदिरों तक पहुंचने का सफर उतना ही खूबसूरत होता है, जितने सुंदर यहां के नजारे होते हैं। बिजली महादेव मंदिर कुल्लू में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित बिजली महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश का सबसे फेमस शिव मंदिर है। यह मंदिर करीब 2,460 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां से कुल्लू और पार्वती वैली का खूबसूरत नजारा बेहद साफ दिखता है। मंदिर की मान्यता है कि समय-समय पर शिवलिंग पर बिजली गिरती है। फिर पारंपरिक तरीके से पुजारी शिवलिंग को जोड़ते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम बिजली महादेव रखा गया है। इसे भी पढ़ें: Amarnath Yatra Rituals: कैसे करें बाबा बर्फानी की पूजा और क्या है प्रसाद वितरण का सही तरीका बैजनाथ शिव मंदिर हिमाचल के कांगड़ा जिले में बैजनाथ मंदिर भी है। जो भोलेनाथ को समर्पित है। यह धौलाधार पर्वत की तलहटी में बना हुआ है। भगवान शिव का यह मंदिर अपनी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी और अपने पुराने इतिहास के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि रावण भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहीं पर तपस्या की थी। सावन के महीने में यहां पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। मणिमहेश चंबा जिले में स्थित मणिमहेश भगवान भोलनाथ का सबसे पवित्र स्थल है। यहां मणिमहेश लेक और इसके पीछे दिखने वाली मणिमहेश पीक बेहद खूबसूरत लगती है। सावन और जन्माष्टमी के आसपास यहां पर मणिमहेश यात्रा भी निकलती है। समुद्र तल से मणिमहेश कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 5,653 मीटर बताई जाती है। अर्द्धनारीश्वर मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से एक अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। जोकि भगवान शिव और मां पार्वती की शक्ति का प्रतीक है। पहाड़ों के बीच बसे इस शहर का धार्मिक माहौल सावन के महीने में अधिक खास हो जाता है। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी सावन के महीने में हिमाचल के ऊंचाई वाले शिव मंदिरों में जाने का प्लान बना रहे हैं। तो मौसम की जानकारी पहले ले लें। क्योंकि बारिश की वजह से कई जगह सड़कें फिसलने वाली हो सकती है। इसलिए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें। साथ में छाता या रेनकोट रख लें। ट्रैकिंग वाले मंदिरों में तब जाएं, जब आप फिजिकली फिट हों।
हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
घुमक्कड़ लोगों को घूमने का सिर्फ मौका ही चाहिए। अगर आप भी अगस्त में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको बता दें कि, इस महीने में लंबी छुट्टी मिलने वाली है। दरअसल, 15 अगस्त को शनिवार है और इसके अगले दिन रविवार है। वहीं, आप 14 अगस्त यानी के शुक्रवार की एक छुट्टी ले लें तो आपके पास करीब तीन दिनों का समय हो जाएगा। इन तीन दिनों में आप किसी भी अच्छी जगह पर घूमने जा सकते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अगस्त के महीने में किन जगहों पर घूमने जा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं Independenc Day Weekend पर 3 दिन की छोटी-सी ट्रिप का प्लान बना सकती हैं। मसूरी उत्तराखंड यदि आप शहर की भीड़ और शोर से दूर, कहीं सुकून भरी जगह पर घूमने जा रहे हैं, तो आप मसूरी जा रही है। अगस्त में यहां पर बारिश होती है। जिससे पहाड़िया हरी-भरी नजर आती हैं। बादलों से घिरे पहाड़ और ठंडा मौसम आपको शांति का एहसास कराएगा। तीन दिन में आप माल रोड पर बिंदास होकर घूम सकते हैं, आसपास के नजारे देख सकते हैं। ध्यान रखें कि मौसम को देखकर ही ट्रिप का प्लान बनाएं। क्योंकि इस दौरान यहां बारिश भी हो सकती है। मुन्नार, केरल बरसात के मौसम में केरल के मुन्नार का नजारा भी काफी खूबसूरत देखने को मिलता है। मुन्नार अपने चाय के बागानों और पहाड़ी नजारों के लिए काफी लोकप्रिय है। ऐसे में आप आपको हरियाली पसंद है, तो आप 3 दिन के लिए यहां जा सकती हैं। बारिश में मुन्नार जाते समय छाता और रेनकोट साथ जरुर रख लें। कूर्ग, कर्नाटक मानसून के समय कूर्ग का घूमने का एक अलग ही मजा होता है। कर्नाटक टूरिज्म के अनुसार, बरसात के समय यहां का मौसम कॉफी के बागान हरे-भरे हो जाते हैं और धुंध से पहाड़ियों का नजारा और भी सुंदर दिखता है। सुंदर से हरे-भरे कॉफी के बगान, पहाड़ और झरने देख सकती हैं। Abbey Falls कूर्ग की सबसे खूबसूरत जगह है। आप यहां जरुर जाएं। जब आप यहां जाने का प्लान बनाएं, तो एक बार मौसम की जानकारी जरुर लें। उदयपुर, राजस्थान मानसून के समय आप झील, महल और सुंदर शहर देखना चाहते हैं, तो आप इस बार स्वतंत्रता दिवस की लॉन्ग छुट्टियों पर राजस्थान के उदयपुर जा सकती हैं। अगस्त में यहां की खूबसूरती देखने के लायक होती है। तीन की ट्रिप के अंदर आप सिटी पैलेस, पिछोला लेक और पुराने शहर के आसपास घूम सकते हैं। ट्रिप पर जाने से पहले इन चीजों पर ध्यान दें - अगस्त के समय पहाड़ों पर भारी बारिश होती है, इसलिए जाने से पहले मौसम का हाल और रास्ते जरुर चेक करें। - ट्रेन और फ्लाइट की टिकट पहले ही बुक कर लें। इसके साथ ही होटल रुम पहले से बुक कर लें। - बरसात से बचने के लिए आप वॉटरप्रूफ बैग, छाता, रेनकॉट और क्विक-ड्राय कपड़े अपने साथ ले जाएं। - बरसात के समय रास्तों में फिसलन अधिक देखने को मिलती है, इसलिए अच्छी ग्रिप वाले स्पोर्ट्स या ट्रैकिंग शूज ही पहनें।
दिल्ली से उज्जैन पहुंचने का सबसे सस्ता तरीका कौन सा? जानिए किराया और पूरा ट्रैवल प्लान
Ujjain Travel Plan: सावन के दिनों में महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन जाने का प्लान कर रहे हैं, तो हम आपको बताएंगे दिल्ली से जाने पर कितना खर्चा आएगा। चलिए आपको पूरा ट्रैवल प्लान समझाते हैं।
सावन का विशेष महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस दौरान भक्तजन भगवान शिव के मंदिरों के दर्शन करने जाते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर उज्जैन के दर्शन के लिए मध्य प्रदेश जरुर आते हैं। दरअसल, उज्जैन की यात्रा न केवल महाकाल मंदिर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस शहर के कोने-कोने में अध्यात्म, पौराणिक कथाएं और अद्भुत वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। अगर आप भी उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो महाकाल दर्शन के अलावा बाद आप इन 5 प्रमुख स्थलों का भी भ्रमण करती है। महांकाल मंदिर के आसपास घूमने की 5 जगह मंगलनाथ मंदिर यदि आप उज्जैन महाकाल मंदिर जा रहे हैं, तो शिप्रा नदी के किनारे पहाड़ी पर स्थित मंगलनाथ मंदिर भी जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान को मंगल ग्रह (मंगल देव) का जन्मस्थान माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष या मांगलिक दोष होता है, वे यहां जरुर आएं और विशेष भात पूजा व शांति अनुष्ठान पूजा करवाएं। यदि आप महाकाल मंदिर से ऑटो या कैब बुक कर इस मंदिर तक जा सकते हैं। प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित चिंतामन गणेश मंदिर सबसे लोकप्रिय और प्राचीन है। माना जाता है कि यहां श्रद्धापूर्वक दर्शन करने से भक्तों की सभी चिंताएं दूर हो जाती है और मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। अगर आप नए काम की शुरुआत या गाड़ी खरीदने पर लोग सबसे पहले यहां आशीर्वाद लेने जरुर आएं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले महाकाल मंदिर से लोकल ई-रिक्शा मिल जाएगा। ऐतिहासिक गोमती कुंड अगर आप उज्जैन जा रहे हैं, तो महर्षि सांदीपनि आश्रम परिसर स्थित गोमती कुंड एक प्राचीन जलकुंड है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, अपने गुरु की सेवा और उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने सभी पवित्र नदियों के जल को यहां एकत्रित किया था। वैसे आज भी इस कुंड का पानी पवित्र माना जाता है। यहां पर जाने के लिए आप रिक्शा लेकर जा सकते हैं। इस्कॉन मंदिर उज्जैन का इस्कॉन मंदिर घूमने के लिए एकदम परफेक्ट है। ऐसे में आप महाकाल दर्शन के बाद यहां जरुर जा सकती हैं। संगमरमर के पत्थरों से बने इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी विराजमान हैं। यहां का शांत वातावरण, हरी-भरी वाटिका और शाम की आरती में होने वाला कीर्तन भक्ति में डूबो देता है। आप महाकाल मंदिर से सीधा कैब करके यहां पहुंच सकते हैं। भव्य चार धाम मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर मार्ग के नजदीक स्थित चार धाम मंदिर एक अनोखा और सुंदर धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की स्थापना इसलिए की गई थी कि जो लोग देश के चार मुख्य धामों की यात्रा नहीं कर पाए, वे एक ही स्थान पर चारों धाम के दर्शन कर सकें। आपको इस मंदिर में बद्रीनाख, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। यहां पर वैष्णो देवी के जैसी गुफा भी स्थित है। कैसे पहुंचे उज्जैन? उज्जैन जाने के लिए आप किसी भी रेलवे स्टेशन से उज्जैन जंक्शन तक की टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा, आप हवाई जहाज से भी जा सकते हैं, तो उज्जैन के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर अंतर्राष्टीय हवाई अड्डा है। जब आप इंदौर-उज्जैन पहुंच जाएंगे, तो वहां से बस या कैब को बुक कर सकते हैं।
Travel Tips: अगस्त में लद्दाख की हसीन वादियों का उठाएं लुत्फ, जानें Booking Details और Full Cost
क्या आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ से थक गए हैं और किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं। जहां पर आसमान सीधे जमीन से मिलता है। ऐसा सुकून मिले, जो आपकी सारी थकान को मिटा दे। नीली झीलें, सुकून भरी ठंडी हवाएं और ऊंचे-ऊंचे पहाड़। दरअसल, हम लद्दाख की बात कर रहे हैं, जो हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट का अल्टीमेट सपना है। अगर आप भी इस दुनिया को अपनी आंखों से देखने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है। बता दें कि IRCTC ने आपकी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए बेहद खास टूर पैकेज पेश किया है, जिसका नाम 'लेह विद तुरतक' है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस ट्रिप की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: किन्नौर कैलाश यात्रा का हुआ आगाज: Registration से लेकर Trekking तक, Delhi से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरी Travel Guide टूर पैकेज की डिटेल्स यह टूर पैकेज 6 रात और 7 दिन का है जोकि 'कम्फर्ट' क्लास का फिक्स्ड डिपार्चर फ्लाइट पैकेज है। इसकी शुरूआत हैदराबाद से होगी। यह ट्रिप 13 अगस्त 2026 को शुरू होगा। इस सफर में पर्यटक लद्दाख की सबसे खूबसूरत और फेमस जगहों को एक्सप्लोर कर सकेंगे। कहां-कहां घूमेंगे यात्री पहले दिन लेह पहुंचकर यात्री आराम करेंगे। जिससे कि वहां के मौसम में ढल सकें। शाम को लोकल मार्केट को एक्सप्लोर करेंगे और अगले दिन लेह पैलेस, शांति स्तूप और भारतीय सेना को समर्पित 'हॉल ऑफ फेम' दिखाया जाएगा। शाम वैली यहां पर यात्रियों को गुरुद्वारा पत्थर साहिब के दर्शन होंगे और आप 'मैग्नेटिक हिल' के उस रहस्यमयी खिंचाव को स्वयं महसूस कर सकेंगे। नुब्रा वैली यात्रा के तीसरे दिन आपको दीक्षित और हुंडर गांव ले जाया जाएगा। यहां आप अपने खर्च पर ऊंट की सवारी का लुत्फ ले सकते हैं। तुरतुक वहीं यात्रा के चौथे दिन भारत के सबसे उत्तरी कोने में बसे तुरतुक गांव को एक्सप्लोर करेंगे। यहां की लाइफस्टाइल और संस्कृति बेहद अनोखी है। पैंगोंग झील वहीं यात्रा के 5वें दिन 120 किमी लंबी, खारे पानी की उस अद्भुत पैंगोंग झील को देखेंगे। यह झील फिल्म '3 इडियट्स' के बाद से टूरिस्ट्स की पहली पसंद बन गई है। यह झील भारत और चीन दोनों देशों में फैली है। वापसी का सफर पैंगोंग से लेग वापस आते समय रास्ते में थिकसे मॉनेस्ट्री, चांगला पास और शे पैलेस के नजारे भी देखने को मिलेंगे। पैकेज में क्या-क्या मिलेगा हैदराबाद से लेह तक आने-जाने की फ्लाइट की टिकट है। स्टे का पूरा इंतजाम है, लेह में 3 रातें, 2 रातें नुब्रा और 1 रात पैंगोंग में स्टे होगा। इस पूरे ट्रिप में 6 बार सुबह का नाश्ता, 6 बार दोपहर का खाना और 6 बार रात का डिनर होगा। घूमने-फिरने के लिए शेयरिंग वाली नॉन-एसी गाड़ी की सुविधा मिलेगी। जरूरी इनर लाइन परमिट, ट्रैवल इंश्योरेंस और स्मारकों की टिकट उपलब्ध होंगे। दूसरे दिन से लेकर छठे दिन तक टूर गाइड और एक खास कल्चरल शो देखने को मिलेगा। हर व्यक्ति को हर दिन एक लीटर पानी की बोतल मिलेगी। इमरजेंसी के लिए गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर और सफर में सहायता के लिए IRCTC टूर मैनेजर होंगे। कितना आएगा खर्च अगर आप अकेले सफर पर जाने हैं, तो आपको 55,640 रुपए देने होंगे। वहीं दोनों लोगों के यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति किराया 54,380 रुपए देने होंगे। वहीं तीन लोगों संग यात्रा करने पर 48,730 रुपए देने होंगे। अगर आपके साथ 5 से 11 साल का बच्चा है, तो बेड के साथ 36,970 रुपए देने होंगे। लेकिन बच्चों के साथ बिना बेड के 35,780 रुपए देने होंगे। वहीं ट्रिप पर 2 से 4 साल के बच्चे का किराया 35,720 रुपए है। इन बातों का रखें ध्यान ज्यादा ऊंचाई और कम ऑक्सीजन के कारण 'एक्यूट माउंटेन सिकनेस' की समस्या हो सकती है। इसलिए लेह पहुंचने का पहला दिन पूरी तरह से आराम के लिए रखा जाता है। यात्रा से निकलने से पहले आप डॉक्टर से पूछकर कुछ दवाओं को अपने साथ रखें। शरीर को हाइड्रेटेड रखें, इसके लिए समय-समय पर इलेक्ट्रोलाइट्स, ग्लूकोज और पानी आदि पीते रहें। वहीं इस दौरान ज्यादा खाना, शराब और एंटी डिप्रेसेंट दवाओं को लेने से बचना चाहिए। नुब्रा और पैंगोंग के टेंट/कैंप्स लाइट सिर्फ कुछ घंटों के लिए आती है। सुबह नहाने के लिए सोलर या बाल्टी में गर्म पानी मिलता है। पैंगोंग में वाई-फाई, एटीएम, मोबाइल नेटवर्क, बैंक या पेट्रोल पंप की सुविधा नहीं है। इसलिए अपने साथ जरूरी दवाएं और कैश लेकर आएं। अगर आप ट्रिपल शेयरिंग का रूम लेते हैं, तो तीसरे व्यक्ति के लिए सिर्फ एक एक्स्ट्रा गद्दा दिया जाएगा।
सावन का महीना शुरु हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अलग-अलग तीर्थस्थल पर जाने का प्लान करते हैं। इन्हीं में से एक है किन्नौर कैलाश यात्रा। यहां पर जाने का हर किसी का सपना होता है। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध किन्नौर कैलाश यात्रा है, जहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वैसे यहां पर पहुंचने के लिए कठिन ट्रेक से गुजरना पड़ता है। यदि आप इस बार किन्नौर कैलाश जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले इस बारे में सभी जानकारी जान लें। बता दें कि, इस साल 30 जुलाई से किन्नौर कैलाश यात्रा शुरु हो चुकी है, जो कि 10 अगस्त तक चलने वाली है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनमुति नहीं दी जाएगी। यद आप दिल्ली से यहा पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार यह ट्रैवल गाइड को जरुर देंख लें। किन्नौर कैलाश यात्रा क्यों है खास? आपको बताते चलें कि, हिमाचल प्रदेस के किन्नौर जिले में स्थित किन्नौर कैलाश भगवान शिव का पवित्र धाम है। यहां पर मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग जैसी विशाल चट्टान श्रद्धालुओं के लिए आस्था केंद्र हैं। हर साल सावन में हजारों यहां पर हजारों भक्तजन आते हैं। आपको बता दें कि, यह ट्रेक आसान नहीं है, इसलिए बेहद जरुरी है फिजिकली फिट होना। दिल्ली से कैसे जाएं? पहला स्टेज- दिल्ली से शिमला बता दें कि, दिल्ली से शिमला की दूरी करीब 340-360 किलोमीटर है। इधर से आप बस से भी जा सकते हैं। दूसरा स्टेज- शिमला से रिकांग पियो जब आप शिमला पहुंच जाएंगे, तो रिकांग पियो जाना होगा। जिसकी दूरी करबी 220 किलोमीटर है। यहां से आपको हिमाचल रोडवेज और प्राइवेट बसें दोनों ही मिल जाएंगी। चाहे आप टैक्सी से भी जा सकते हैं। तीसरा स्टेज- रिकांग पियो से टांगलिंग गांव टांगलिंग गांव ही यात्रा का बेस कैंप माना जाता है। बता दें कि, यहीं से किन्नौर कैलाश ट्रेक शुरु होता है। कितना कठिन ट्रैक है? दरअसल, किन्नौर कैलाश ट्रेक की गिनती सबसे कठिन ट्रेक में से एक है। ट्रेकिंग की शुरुआत टांगलिंग गांव से होती है। रास्ते में मिलिंग खाटा और पार्वती कुंड जैसे कहई पड़ाव आते हैं। फिर यहां पर भक्तजन पहुंचते हैं। बता दें कि, यहां की ऊंचाई बहुत ज्यादा है, जिस कारण से सांस फूलना और थकान महसूस होना आम बात है। इसलिए जल्दबाजी करने की बजाय धीरे-धीरे चढ़ाई करें। सबसे जरुरी रजिस्ट्रेशन कराना - आप बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा नहीं कर सकते हैं। - मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मैंडेटरी है। - प्रत्येक दिन 375 श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति मिलेगी। - आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। यात्रा में क्या-क्या साथ रखें? - अपने साथ रेनकोट या पोंचो रखें - मौसम बदलता रहता है इसलिए वुलेन जैकेट रखें। - अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें। - टॉर्च अपने साथ रखें। - पानी की बॉटल, जरुरी दवाइयां। - ट्रेकिंग स्टिक - इसके साथ ही खाने के लिए स्नैक्स अपने साथ रखें। यात्रा के समय किन बातों का ध्यान रखें - भूलकर भी शॉर्टकट रास्ते पर न जाए। - अकेले ट्रेक करने से बचें। - प्लास्टिक और कचरा को रास्ते में न फेंके। - यदि मौसम खराब है, तो आगे बढ़ने की कोशिश न करें। - प्रशासन और लोकल गाइड के निर्देशों का पालन करें। - अगर आपको ट्रेकिंग के दौरान कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत आराम करें। कितने दिन का प्लान बनाएं? -पहला दिन: दिल्ली से शिमला - दूसरा दिन: शिमला से रिकांग पियो - तीसरा दिन- टांगलिंग पहुंचकर ट्रेक की शुरुआत होगी - चौथा दिन- किन्नौर कैलाश दर्शन और वापसी - पांचवां दिन: रिकांग पियो से दिल्ली की वापसी
आजकल युवाओं में घूमने-फिरने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर किसी शांत प्लेस को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। मानसून के समय हर कोई हरियाली से भरपूर, बादल, झरने और सुकून हो वाली जगहों पर घूमने का प्लान बनाते हैं। इस बार आप बरसात के समय भारत के कुछ खूबसूरत गांव को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इस मौसम में यहां पर पहाड़ हरे रंग को हे जाते हैं, बादल घरों के बीच से गुजरने नजर आते हैं और हर तरफ आपको ताजगी का माहौल देखने को मिलता है। इस बार आप भी इन जगहों का आनंद जरुर लें। चलिए आपको इस लेख में बताते हैं मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग, नागालैंड का खोनोमा और अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली आपके लिए सबसे बेहतरीन रहने वाली है। आइए आपको बताते हैं इन तीन गांवों में ऐसा क्या खास है,जो आपको मानसून के समय जरुर विजिट करना चाहिए। मावल्यान्नॉन्ग (मेघालय) आपको बताते चलें कि मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग गांव अपनी साफ-सफाई के लिए दुनियाभर में काफी फेमस है। इसकी गिनती एशिया के सबसे साफ गांव में मानी जाती है। यहां पर रहने वाले सभी लोग इस गांव को हमेशा साफ रखते हैं। बरसात के मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधे, फूल और बारिश से धुले रास्ते गांव की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यहां आप इन जगहों पर विजिट कर सकते हैं- - लिविंग रुट ब्रिज - बांस से बना स्काई व्यू पॉइंट - छोटे-छोटे झरने - खासी गांव की लाइफस्टाइल खोनोमा (नागालैंड) अगर आप नेचर लवर हैं, नागालैंड के खोनोमा गांव में जरुर विजिट करें। यहां की नेचुरल ब्यूटी और पर्यावरण संरक्षण बेहद लोकप्रिय है। बता दें कि, इसे भारत के पहले ग्रीन विलेज में गिना जाता है। बरसात के समय यहां पर सीढ़ीदार वाली खेती, पहाड़ और जंगल के काफी खूबसूरत नजर आते हैं। बादलों से घिरे पहाड़ भी इस गांव की खूबसूरती को बढ़ा देते हैं। यहां पर इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। - गांव में पैदल वॉक करना - सीढ़ीदार खेत देखना - लोकर नागा कल्चर को करीब से देख सकते हैं - नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग जीरो (अरुणाचल प्रदेश) मानसून के समय अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली में घूमने का प्लान जरुर बनाएं। यह जगह अपनी नेचुरल ब्यूटी और अपतानी जनजाति की अनोखी कल्चर के लिए जानी जाती है। इधर मानसून के समय काफी खूबसरत लगता है। बरसात के समय धान के खेत, पहाड़ और हल्का कोहरा मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जिसे देखकर मन एकदम खुश ही हो जाती है। यहां आप क्या-क्या कर सकती हैं- - हरे-भरे धान के खेतों को देख सकती हैं - अपतानी जनजाति के पारंपरिक गांव को एक्सप्लोर कर सकती है - खूबसूरती पहाड़ी रास्ते - यहां लोकल बाजार और खाने का जायका लेना मानसून के समय इन गांव में यात्रा करने से पहले जानें जरुरी बातें - बरसात से बचने के लिए रेनकोट और बढ़िया क्वालिटी की छतरी साथ रखें। - इस दौरान फिसलन ज्यादा हो सकती है, इसलिए मजबूत ग्रिप वाले शूज ही पहनें। - मौसम का अपडेट देखकर ही ट्रिप प्लान करें। - वहां के नियमों का पालन जरुर करें। - दरअसल, पहाड़ी इलाकों में शाम जल्दी हो जाती है, इसलिए समय का भी ध्यान जरुर रखें। - प्लास्टिक या कचरा कहीं भी ने फेंकें, ताकि इन गांवों के सुंदरता बनीं रहे।
दिल्ली से केदारनाथ कैसे जाएं और कितना होगा खर्चा? जानिए पूरा बजट और ट्रैवल प्लान
Kedarnath Yatra Travel Plan: सावन के महीने में लोग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र धाम केदारनाथ के दर्शन के लिए जाते हैं। अगर आप भी भगवान शिव के दर्शन करने का मन बना रहे हैं, तो यहां पूरा बजट प्लान और रूट जान लीजिए।
क्या आप भी अगस्त में घूमने का प्लान बना रहे हैं। बरसात के मौसम में घूमने का एक अलग ही मजा होता। चारों तरफ हरियाली और सुकून भरा मौसम होता है। इस बीच, भारतीय रेलवे ने अगस्त 2026 के कई टूर पैकेज को लाइव किया है। इन पैकेज की सबसे बड़ी खासियत यह ही कि इनमें भारत के फेमस हिल स्टेशन, प्राकृतिक पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक विरासत से संबंधित कई जगहों पर घूमने का अवसर प्राप्त होगा। मानसून के दौरान शिमला, मनाली, दार्जिलिंग, ऊटी, मुन्नार और नैनीताल जैसी जगहों पर भी इन पैकेज के जरिए मस्त घूमा जा सकता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं मानसून के समय घूमने का शानदार पैकेज। IRCTC के अगस्त टूर पैकेज से सिक्किम जाएं घूमने बारिश के मौसम में सिक्किम का नजारा देखने लायक होता है। अगस्त के महीने में यदि आप भी सुंदर पहाड़ी और बदलों के बीच खोना चाहते हैं, तो आप सिक्किम टूर पैकेज जरुर बुक करें। यहां के खूबसूरत झरने, हरे-भरे पहाड़ और करीब से उड़ते हुए बादल आपको देखने को मिल जाएंगे। वैसे यह जगह प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है, इसके साथ ही यहां पर शांति काफी देखने को मिलती है। पैकेज की डिटेल्स - पैकेज का नाम SIKKIM SILVER - पैकेज कोड: EHH121 - समय: 5 रातें/6 दिन - पैकेज की शुरुआत: बागडोगरा / न्यू जलपाईगुड़ी - डेस्टिनेशन (घूमने की जगहें): दार्जिलिंग / गंगटोक / कलिम्पोंग - पैकेज की शुरुआत: 03 अगस्त 2026 - यात्रा कैसे होगी? बस सिक्किम टूर पैकेज फीस क्या है? गौरतलब है कि सिक्किम में गाड़ियों का किराया काफी ज्यादा होता है, ऐसे में आप पैकेज से जाएंगी ,तो आपको काफी फायदा मिलेगा। इस पैकेज में आपको 5 रातें/6 दिन के लिए होटल, घूमना-खाना और इंश्योरेंस जैसी तमाम सुविधाएं इसमें शामिल है। वैसे आप अलग बुक करेंगी तो आपको काफी महंगा पड़ सकता है। पैकेज फीस - 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति फीस ₹29,350 है। - 3 लोगों के साथ यात्रा करने पर पैकेज फीस प्रति व्यक्ति ₹22,700 है। - 4 लोगों का ग्रुप: ₹22,500 प्रति व्यक्ति - 6 लोगों का ग्रुप: ₹18,610 प्रति व्यक्ति Deluxe कैटेगरी - 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर ₹37,350 प्रति व्यक्ति फीस होगी। - 3 लोगों के साथ यात्रा करने पर ₹28,700 प्रति व्यक्ति फीस देनी होगी। - 4 लोगों का ग्रुप: ₹30,500 प्रति व्यक्ति -6 लोगों का ग्रुप: ₹26,610 प्रति व्यक्ति सिक्किम पैकेज में क्या सुविधाएं मिल रही हैं? दरअसल, पिक-सीजन के मुकाबले प्रति व्यक्ति 8000 से 10,000 रुपये की सीधी बचत देखने को मिलेगी। इसके अतिरिक्त कई जगहों के लिए परमिट बनवाना पड़ता है। इस पैकेज को बुक करने से ट्रांसपोर्ट और होटल का मैनेजमेंट टूर कंपनी करती है। इसलिए आपका समय और मेहनत दोनों ही बच जाएंगे। - होटल प्रति व्यक्ति के अनुसार है। - जहां भी आप इस पैकेज में घूमने जाएंगे, वहां आप शेयरिंग वाहन से जाएंगे। - नाश्ता और रात का भोजन शामिल है। - इस पैकेज में आपको यात्रा बीमा भी मिलेगा।
देश के ज्यादातर राज्यों में मानसून ने दस्तक दे दी है। कई जगहों पर बारिश से मौसम बेहद सुहावना हो गया है। तो कहीं बादल आफत बनकर बरसते हैं, तो कई पहाड़ी इलाकों पर लैंडस्लाइड, सड़कें बंद होने की समस्याएं देखने को मिल रही है। ऐसे में अगर आप भी इन जगहों पर घूमने की प्लानिंग कर रहे थे, तो इस यात्रा को टालना बेहतर होगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि आपको अपनी छुट्टियां पूरी तरह से कैंसिल करने की जरूरत नहीं है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 4 ऐसे हिल स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं कि मानसून के दौरान आप इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। वहीं यह जगहें सेफ भी हैं और आपकी ट्रिप भी यादगार बनेगी। शिमला मॉनसून में घूमने के लिए शिमला अच्छी जगह है। पहाड़ों की रानी कहलाने वाला शिमला मॉनसून के दौरान बेहद खूबसूरत नजर आता है। यहां पर आप जाखू मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। चाय के साथ पहाड़ों पर तैरते बादलों और मनमोहक नजारों का आनंद ले सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: मानसून सीजन में बना लें तमिलनाडु के इन 5 हिल स्टेशंस का प्लान, हमेशा कि लिए यादगार बन जाएगी ट्रिप कूनूर मॉनसून में आप तमिलनाडु में स्थित कुनूर भी घूमने के लिए जा सकते हैं। यह एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। यहां पर हरे-भरे चाय के बागान और भी अधिक खूबसूरत दिखते हैं। यहां पर सिम्स पार्क एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके अलावा आप लैम्ब्स रॉक और डॉल्फिन्स नोज जैसे शानदार नजारों का आनंद ले सकते हैं। वहीं आप फेमस नीलगिरि रेलवे की सवारी का मजा ले सकती हैं। अगर आप भी फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। माउंट आबू बारिश के मौसम में आप माउंट आबू भी घूमने जा सकते हैं। यह राजस्थान का ऐसा हिल स्टेशन है, जो बारिश के मौसम में हरियाली से खिल उठता है और इसकी खूबसूरती भी देखने लायक होती है। ऐसे में अगर आप भी किसी ऐसी जगह घूमने जाना चाहते हैं, जहां पर लैंडस्लाइड न हो। तो यह एक परफेक्ट जगह है। सापुतारा मॉनसून में शांति का अनुभव करने के लिए आप गुजरात के सापुतारा हिल स्टेशन को एक्सप्लोर कर सकते हैं। बारिश के मौसम में इस हिल स्टेशन की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है। वहीं यहां की हरियाली और झरनों की खूबसूरती आपका दिल जीत लेगी। सातपुरी झील में आप बोटिंग भी कर सकते हैं। वहीं रोपवे की सवारी कर शानदार दृश्य देख सकते हैं।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
कड़कड़ाती सर्दी में बिकिनी पहन पूल में उतरीं रुबीना दिलैक, जापान वेकेशन की दिखाई झलक
टीवी की संस्कारी बहू रुबीना दिलैक रियल लाइफ में काफी ग्लैमरस हैं। वह अक्सर फैंस के साथ अपनी हॉट एंड सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। रुबीना वह छोटे पर्दे की हाई पेड एक्ट्रेसेस में शुमार है। हाल ही में रुबीना ने अपनी जापान ट्रिप की तस्वीरें फैंस ...
गोवा में वेकेशन एंजॉय कर रहीं कृष्णा श्रॉफ, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
कृष्णा श्रॉफ निश्चित रूप से जानती हैं कि लोगों का ध्यान कैसे आकर्षित करना है- चाहे वह उनकी MMA चॉप्स हों या उनकी वेकेशन की तस्वीरें। कृष्णा इस दिनों गोवा की धूप और बीच पर छुट्टियां मना रही हैं। इसी बीच कृष्णा श्रॉफ ने सोशल मीडिया पर अपनी ट्रॉपिकल ...
कैंसर के ट्रीटमेंट जंग के बीच वेकेशन मनाने मालदीव पहुंचीं हिना खान, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
Tejasswi Praksh-Karan Kundrra नहीं हुए अलग,रोमांटिक वेकेशन एन्जॉय कर रहा है कपल करीबी दोस्त ने खोला राज
सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
शादी के तीन महीने बाद हनीमून पर निकलेRakul Preet Singh औरJackky Bhagnani, वेकेशन से वायरल हुई एक्ट्रेस की तस्वीरें
एक बार फिर सिनेमा घरो में दस्तक देने जा रही है क्रिस्टोफ़र नोलन की स्पेस एडवेंचर फिल्मInterstellar,10वीं सालगिरह पर होगी री-रिलीज़

