मोगा के धर्मकोट थाना क्षेत्र के गांव रेड़वां निवासी परमजीत सिंह के भाई और साले को वर्क परमिट पर अमेरिका भेजने का झांसा देकर 23 लाख रुपए की ठगी करने का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर धर्मकोट पुलिस ने फिरोजपुर के गांव स्नेर निवासी ट्रैवल एजेंट गुरपरम सिंह और उसकी पत्नी वरिंदरजीत कौर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मामले की जांच थानेदार इंद्रजीत सिंह कर रहे हैं। परमजीत सिंह ने जिला पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि अक्टूबर 2023 में उनकी मुलाकात आरोपी दंपति से हुई थी। वह अपने भाई जसवीर सिंह और साले बलविंदर सिंह को विदेश भेजना चाहते थे। आरोपियों ने दोनों को वर्क परमिट पर अमेरिका भेजने का भरोसा दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी शिकायतकर्ता के अनुसार, भरोसे में आकर उन्होंने आरोपियों को दोनों के जरूरी दस्तावेज और 23 लाख रुपए दे दिए। इसके बावजूद आरोपियों ने न तो जसवीर सिंह और न ही बलविंदर सिंह को अमेरिका भेजा। जब परमजीत सिंह ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी कथित तौर पर टालमटोल करते रहे और रकम वापस नहीं की। मामले की शिकायत मिलने के बाद एसपी ने डीएसपी स्पेशल क्राइम मोगा को जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए और शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। उनकी तलाश में पुलिस टीमों की ओर से छापेमारी की जा रही है।
महिला ने खुदको ट्रेनी आईएएस और मध्य प्रदेश पर्यटन की एडिशनल डायरेक्टर बताकर ठग लिए 39.17 लाख रुपये
बागसेवनिया थाना क्षेत्र में खुद को ट्रेनी आईएएस अधिकारी और मप्र पर्यटन (एमपीटी) की एडिशनल डायरेक्टर बताकर 39.17 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है।
रक्षाबंधन पर्व पर योगी सरकार की ओर से महिलाओं और बहनों को दी गई निशुल्क बस यात्रा की सुविधा का पहले दिन बड़ी संख्या में यात्रियों ने लाभ उठाया। 27 अगस्त से शुरू हुई निशुल्क बस यात्रा में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में 6.03 लाख से अधिक महिलाओं ने सफर किया। वहीं, महिलाओं के साथ सफर करने वाले 3.22 लाख से अधिक सहयात्रियों को भी निशुल्क यात्रा का लाभ मिला। इस तरह पहले दिन कुल 9.26 लाख से अधिक यात्रियों ने बिना किराया दिए सफर किया। परिवहन निगम के मुताबिक इस निशुल्क यात्रा की कुल कीमत 9.06 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यूपीएसआरटीसी प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन पर महिलाओं को किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें सुगम व सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराई जा सके, इसके लिए परिवहन निगम के अधिकारी और कर्मचारी भी युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं। सरकार और विभाग प्रमुख की तरफ से मिले निर्देशों के क्रम में यात्रियों की बढ़ी संख्या को देखते हुए जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बसों को भी सड़कों पर उतारा गया है। बसों के संचालन, यात्रियों की सुविधा और व्यवस्था पर निगम की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है। इन पांच क्षेत्रों में अब तक सबसे ज्यादा निशुल्क सेवा का लाभ लिया पहले दिन महिलाओं और उनके साथ सफर करने वाले सहयात्रियों की कुल संख्या के लिहाज से मुरादाबाद क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहां 62,586 महिलाओं और 32,203 सहयात्रियों समेत कुल 94,789 यात्रियों ने निशुल्क यात्रा की। इसके बाद हरदोई में 82,920, गोरखपुर में 68,152, लखनऊ में 64,590 और बरेली में 58,309 यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। इन पांच क्षेत्रों में ही कुल करीब 3.69 लाख यात्रियों ने निशुल्क सफर किया। यात्रियों ने की सरकार के कदम की सराहना रक्षाबंधन पर निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलने से महिलाओं के साथ उनके सहयात्रियों में भी खुशी का माहौल रहा। यात्रियों का कहना है कि त्योहार पर बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर जाने की जरूरत होती है। ऐसे में निशुल्क बस यात्रा से परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है। महिलाओं के साथ सहयात्री भी योगी सरकार की इस पहल की सराहना कर रहे हैं। साथ ही अतिरिक्त बसों के संचालन से भीड़ के बीच घर पहुंचने में सुविधा मिलने की बात यात्रियों ने कही। परिवहन निगम कर रहा निरीक्षण निशुल्क यात्रा का लाभ पात्र यात्रियों तक पहुंचे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए परिवहन निगम की टीमें विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण भी करेंगी। इससे बसों में निशुल्क यात्रा की व्यवस्था की निगरानी के साथ यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी जायजा लिया जाएगा।
Travel Tips: शिमला-मनाली के बजाय Jibhi के Offbeat Locations बन रहे पर्यटकों की पहली पसंद
हिमाचल प्रदेश का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में सबसे पहले शिमला और मनाली का नाम आता है। इसके अलावा लोग और दूसरी जगहों के बारे में बहुत कम जानते हैं। ऐसे में अगर आप भी हिमाचल प्रदेश घूमने का मन बना रही हैं, तो आप हिमाचल की ऑफबीट लोकेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हिमाचल प्रदेश की छिपे खजाने जिभी के बारे में बताने जा रह हैं। ऑफबीट लोकेशन जिभी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बंजार घाटी स्थिति जिभी आपको सुकून का एहसास दिलाएगा। क्योंकि 5000 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद यह जगह अन्य टूरिस्ट स्पॉट की तरह भीड़भाड़ वाली नहीं है। वहीं दूरी की बात की जाए, तो यह जगह मनाली से करीब 100 किमी दूर और मंदिर से करीब 50 किमी दूर है। इसे भी पढ़ें: Travel Plan Breakdown: दिल्ली से ₹5000 के बजट में घूमें ये 3 शहर, जानें ट्रांसपोर्ट और होटल का पूरा खर्च जिभी कैबाइन्स नामक ट्री हाउस, लकड़ी और घने देवदार के जंगलों के लिए जानी जाती है। आप आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करते हैं, तो जिभी के सुंदर झरने और प्राकृतिक नजारे आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। जिभी में इन जगहों को करें एक्सप्लोर दुनिया की भीड़भाड़ से दूर हिमाचल प्रदेश की यह ऑफबीट लोकेशन कई मायनों में बेहद खास है। तो आइए जानते हैं कि आप जिभी में क्या-क्या एक्सप्लोर कर सकते हैं। रघुपुर किला रघुपुर किला वैसे तो अब खंडहरों में गिना जाता है। लेकिन 11,155 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस किले से कुल्लू और मंडी के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाया जा सकता है। जालोरी पास जिभी से करीब 12-14 किमी दूर और करीब 10 हजार फीट स्थित जालोरी पास एक माउंटेन है। यहां पर बर्फ से ढकी पहाड़ियां हसीन वादियों से कम नहीं लगती हैं। श्रृंग ऋषि मंदिर जिभी से थोड़ी ही दूर पर बग्गी गांव में स्थित श्रृंग ऋषि मंदिर है। जो यहां के स्थानीय देवता श्रृंग ऋषि को समर्पित है। श्रृंग ऋषि को कुल्लू के 18 देवताओं में से एक माना जाता है। जिनका संबंध रामायण काल से है। यही कारण है कि इस मंदिर में दर्शन के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग भीड़ उमड़ती है। सेरोलसर झील जालोरी से करीब 5 किमी दूर सेरोलसर झील है। जिसके बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि इस झील के पानी में औषधीय गुण हैं। झील के किनारे बैठकर बहुत सुकून मिलता है। ऐसे में प्रकृति प्रेमियों को यहां आकर निराशा नहीं होगी।
अब समर वेकेशन नहीं, मानसून वेकेशन है हिट! जानिए इस बदलाव की बड़ी वजहें
बारिश शुरू होते ही घूमने का प्लान लोग पहले अक्सर टाल देते थे, लेकिन अब मानसून का मौसम भी लोगों को ट्रैवल के लिए अट्रैक्ट करने लगा है। पहाड़ों की हरियाली, झरनों की रौनक, ठंडा मौसम और बारिश से बदला हुआ प्राकृतिक नजारा ट्रैवलर को खूब पसंद आ रहा है। भारतीय लोग अब मानसून में भी घूमने के लिए छोटी-छोटी ट्रिप्स प्लान कर रहे हैं।अब घूमने का मतलब सिर्फ साल में एक लंबी छुट्टी लेना नहीं रह गया है। लोग अपने बिजी शेड्यूल के बीच वीकेंड ट्रिप और छोटे गेटअवे को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कम भीड़, कई जगहों पर बेहतर कीमत और प्रकृति के करीब समय बिताने का मौका मानसून ट्रैवल को खास बना रहा है। ट्रैवलर की पसंद भी अब बदल रही है और वे ऐसी जगहों पर जाना चाहते हैं, जहां उन्हें सुकून के साथ कुछ नया एक्सपीरियंस करने का मौका मिले। काम के साथ सफर का नया फॉर्मूलाहाइब्रिड वर्क और काम में मिलने वाली ज्यादा लचीलापन ने भी लोगों के घूमने का तरीका बदल दिया है। अब हर कोई साल की एक बड़ी छुट्टी का इंतजार नहीं करता, बल्कि समय मिलने पर छोटी ट्रिप प्लान कर लेता है। मानसून के वीकेंड में रोड ट्रिप, पहाड़ी जगहों पर स्टे, प्लांटेशन में रहना और नेचर के पास समय बिताना आसान हो जाता है। इससे पूरे साल अलग-अलग समय पर घूमने का मौका मिल रहा है। बारिश में ट्रैवल को और बढ़ावा देने के लिए सही मौसम की जानकारी और आसान बुकिंग जरूरी है। यदि ट्रैवलर को समय पर मौसम की अपडेट मिले और होटल या ट्रैवल बुकिंग में बदलाव या कैंसिलेशन की सुविधा हो, तो वे मानसून में घूमने के लिए ज्यादा आसानी से तैयार हो सकते हैं। ट्रैवल कंपनियां भी इस मौसम के लिए खास पैकेज तैयार कर सकती हैं। हरियाली के बीच सुकूनबारिश में कई जगहों की खूबसूरती और बढ़ जाती है। कूर्ग, चिकमगलूर और ऊटी जैसे इलाकों में धुंध से ढके पहाड़, हरे-भरे कॉफी बागान, झरने और ठंडा मौसम लोगों को खास एक्सपीरियंस देते हैं। इसके अलावा प्लांटेशन स्टे, बैकवाटर, वेलनेस रिट्रीट और नेचर ट्रिप भी मानसून में पसंद किए जा रहे हैं। जो लोग भीड़भाड़ से दूर सुकून चाहते हैं, उनके लिए इस तरह की ट्रैवल काफी अच्छी हो सकती हैं। सुहाने मौसम में घूमने का मूडमानसून में घूमने का ट्रेंड अब तेजी से बढ़ रहा है। बारिश के कारण पहाड़ हरे-भरे हो जाते हैं, झरनों में पानी बढ़ जाता है और कई जगहों का मौसम भी ठंडा और सुहावना हो जाता है। कम भीड़, छोटी वीकेंड ट्रिप और कई जगहों पर कम खर्च में घूमने का मौका भी लोगों को इस मौसम में ट्रैवल के लिए अट्रैक्ट कर रहा है। मानसून में कई पॉपुलर डेस्टिनेशन पर गर्मी या त्योहारों के मुकाबले कम भीड़ देखने को मिल सकती है। ऐसे में लोग बिना ज्यादा भागदौड़ के घूमने का आनंद ले सकते हैं। अब लोग साल में एक लंबी छुट्टी लेने के बजाय वीकेंड पर छोटी-छोटी ट्रिप करना पसंद कर रहे हैं। पास के हिल स्टेशन, रोड ट्रिप और नेचर गेटवे इसके लिए अच्छे ऑप्शन बन रहे हैं। मानसून अब सिर्फ घर में रहने या बारिश खत्म होने का इंतजार करने का मौसम नहीं रह गया है। भारतीय ट्रैवलर बारिश के दौरान मिलने वाली हरियाली, कम भीड़ और नेचर के खूबसूरत नजारों को पसंद कर रहे हैं। छोटी यात्राओं और नए एक्सपीरियंस का बढ़ता ट्रेंड मानसून को धीरे-धीरे एक अलग ट्रैवल सीजन बना रहा है।
Mau News: मऊ महादेव घाट पर पर्यटन बढ़ा लेकिन सुरक्षा घट गई, जहां श्रद्धा होनी थी, वहां रीलों का रेला
Tourism increased at Mau Mahadev Ghat but security decreased, where there was supposed to be devotion, there was a procession of reels.
नेपाल में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा और कठिन परिस्थितियों के बीच राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक बड़ा और अहम निर्णय लिया है...
घुमक्कड़ लोग हमेशा घूमने के लिए तैयार रहते हैं। यह लोग हमेशा कही न कहीं का प्लान बनाते रहते हैं। सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से खास माना जाता है। इस दौरान कई जगहों पर बारिश होती है, इसलिए मौसम सुहाना होता है। बरसात के बाद से हर जगह खूबसूरती चरम पर पहुंच जाती है और आसपास का नजारा काफी फ्रेश नजर आता है। परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ कुछ दिनों की छुट्टी पर जाना अच्छा हो सकता है। आइए आपको बताते हैं करीब 5000 रुपये में बजट में आप कहां घूम सकते हैं। पुष्कर, राजस्थान यदि आप पहाड़ों की जगह पर किसी झील और मंदिर वाली जगहों को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आप राजस्थान के पुष्कर जा सकते हैं। यहां की झीलें घूमना, ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करना और बाजारों में घूमना आपको मजेदार लगेगा। इस मौसम में यहां गर्मी कम होती है। - दिल्ली से दूरी-करीब 430 किमी है। - समय- लगभग 7-9 घंटे का समय लग जाता है। - घूमने के लिए पुष्कर झील, ब्रह्मा मंदिर, घाट और लोकल बाजार घूमने जा सकते हैं। बजट फ्रेंडली होटल लें, लोकल स्ट्रीट से खाना खाएं। होटल को बुकिंग ऑनलाइन ही करें। ऋषिकेश, उत्तराखंड योग नगरी ऋषिकेश धार्मिक दृष्टि से तो खास है, लेकिन यह जगह एडवेंचर के लिए भी काफी लोकप्रिय है। सुबह की आरती से लेकर मंदिरों के दर्शन तक, यहां पर आप सब कुछ देख सकते है। रिवर राफ्टिंग कर सकते हैं और भी कई एक्टिविटीज कर सकते हैं। - दिल्ली से दूरी करीब 240 किमी। - समय- लगभग 5 से 6 घंटे का समय लग जाता है। - होटल के लिए कम से कम 1200 से 1500 रुपये में रुम मिल जाएगा। - 5000 हजार में ट्रिप को करने के लिए पैदल या शेयरिगं ऑटो से घूमें और महंगे कैफे से बचें। अमृतसर, पंजाब बजट फ्रेंडली ट्रिप के लिए आप पंजाब घूमने जा सकते हैं। अमृतसर में धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों तरह की जगहें देखने को मिल जाएगी। सबसे फेमस यहां पर स्वर्ण मंदिर है, जिसकी खूबसूरती काफी देखने के लायक है और माहौल भी शांत देखने को मिलेगा। वहीं, आप अटारी-वाघा बॉर्डर भी घूमने जा सकते हैं। -दिल्ली से दूरी- लगभग 450 किमी -समय- लगभग 7 से 8 घंटे लग सकते हैं। इस ट्रिप के दौरान आप खाने पर खर्च बचा सकते हैं, गुरुद्वारे में खाना खा सकते हैं। वहीं, आप लोकल स्ट्रीट पर फूड खा सकते हैं। महंगे होटल पर खाना खाने से बचें।
नेपाल में बाढ़ के बाद बने हालात के बाद राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना में काठमांडू यात्रा को 5 दिन के लिए रोका है। योजना में पशुपतिनाथ मंदिर जाने वाली यात्रा को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर काठमांडू की हवाई यात्रा 27 से 31 अगस्त तक नहीं होगी। देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा- नेपाल में हालात ठीक होने के बाद पशुपतिनाथ यात्रा फिर शुरू की जाएगी। इसके लिए नई डेट तय की जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ही आगे का फैसला होगा। मंत्री बोले- नेपाल के हालात पर नजर देवस्थान विभाग नेपाल के मौसम, सुरक्षा और वहां की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। हालात को देखते हुए अभी यात्रा रोकने का फैसला लिया गया है।मंत्री कुमावत ने कहा- तीर्थयात्रियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। बुजुर्ग तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। नेपाल में हालात ठीक नहीं होने के कारण किसी तरह की परेशानी और खतरे से बचने के लिए यात्रा रोकने का फैसला किया गया है।
Travel Tips: रक्षाबंधन पर बना ले आप भी घूमने जाने का प्लॉन, इन जगहों पर घूमने का आ जाएगा मजा
इंटरनेट डेस्क। र क्षाबंधन 28 अगस्त का है और एक लंबा वीकेंड भी शुरू हो रहा है ऐसे में आप भी अगर घूमने जाने की प्लॉनिंग कर रहे हैं तो फिर आज आपको बता देते कुछ आस पास की ऐसी जगहों के बारे में जहां आप घूम सकते हैं और एंजोय कर सकते है। तो हो जाए तैयार। वृंदावन आप इस वीकेंड में वृंदावन जा सकते हैं। वैसे इतनी बड़ी जगह है की आपको यहां घूमने के लिए दो से तीन दिन का समय लग जाएगा। यह उत्तर प्रदेश के सबसे पवित्र शहरों में गिना जाता प्रेमं मदिर आप यहां पर घूमने जा रहे है और मंदिरों के दर्शन कर रहे है तो फिर आपको प्रेम मंदिर जाना चाहिए। ये ऐसा मंदिर है जो दिन में जितना सुंदर दिखता है उससे ज्यादा रात में दिखता है। इस मंदिर को देखने के लिए यहां देशी ही नहीं विदेशी पर्यटक भी पहुंचते है। pc- danik bhaskar
भारत की ये 5 बेहद खूबसूरत झीलें चुरा लेंगी आपका दिल, अपनी ट्रैवल बकेट लिस्ट में आज ही करें शामिल
विशालता, विविधता और प्राकृतिक धरोहरों से भरपूर हमारा देश भारत दुनिया भर के सैलानियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। बर्फीले पहाड़ों की चोटियों से लेकर हरे-भरे जंगलों और मरुस्थलों के बीच स्थित यहाँ के पर्यटन स्थल हर किसी का मन मोह लेते हैं। जब बात भारत की प्राकृतिक खूबसूरती की हो, तो यहाँ की झीलों (Lakes in India) का जिक्र किए बिना बात अधूरी मानी जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में फैली ये झीलें न केवल अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि इनका अपना एक ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी है। शांत और नीले पानी के बीच तैरते बादलों का अक्स देखना किसी भी इंसान की सारी थकान पल भर में मिटा देता है। यदि आप भी फोटोग्राफी के शौकीन हैं या फिर अपनी रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो भारत की इन 5 सबसे खूबसूरत और जादुई झीलों को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार जरूर एक्सप्लोर करना चाहिए।पहली झील: डल झील, श्रीनगर (कश्मीर) – धरती के स्वर्ग का बेजोड़ नज़ाराभारत के मुकुट यानी जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में स्थित डल झील (Dal Lake) को देश की सबसे खूबसूरत और प्रतिष्ठित झीलों में शुमार किया जाता है। चारों तरफ से बर्फ से ढके ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों और हरियाली से घिरी इस झील की खूबसूरती ऐसी है जो किसी भी पर्यटक के दिल में हमेशा के लिए बस जाती है। डल झील की सबसे बड़ी खासियत यहाँ चलने वाले पारंपरिक शिकारे (Shikara) और तैरते हुए हाउसबोट (Houseboats) हैं, जिनमें बैठकर घूमना एक जादुई अनुभव प्रदान करता है। इसके अलावा, यहाँ पानी के ऊपर लगने वाला अनोखा तैरता हुआ बाजार (Floating Vegetable Market) दुनिया भर के सैलानियों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। शाम के वक्त जब डूबते सूरज की किरणें डल झील के साफ पानी पर पड़ती हैं, तो पूरा नजारा किसी सुनहरी पेंटिंग की तरह अद्भुत और सम्मोहक नजर आता है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।दूसरी झील: पैंगोंग त्सो, लद्दाख – रंग बदलने वाले नीले पानी का समंदरसमुद्र तल से लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित पैंगोंग त्सो झील (Pangong Tso Lake) भारत के सबसे रोमांचक और खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है। लद्दाख की ठंडी हवाओं और बंजर भूरे पहाड़ों के बीच नीले कांच की तरह चमकती यह झील अपनी एक अनोखी विशेषता के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है, और वह है इसके पानी का रंग बदलना। दिन के अलग-अलग पहर में यह झील अपना रंग बदलती है कभी यह चमकीला नीला दिखती है, तो कभी हरी या फिर फिरोजी रंग में बदल जाती है। बॉलीवुड की कई प्रसिद्ध फिल्मों की शूटिंग यहाँ होने के बाद से युवाओं के बीच इस जगह को लेकर क्रेज और अधिक बढ़ गया है। रात के समय पैंगोंग झील के किनारे बैठकर आसमान में अनगिनत तारों और मिल्की वे (Milky Way) को देखना एक ऐसा अलौकिक अनुभव है जो जिंदगी में कभी नहीं भुलाया जा सकता।तीसरी झील: पिछोला झील, उदयपुर (राजस्थान) – महलों और इतिहास की नगरी का दर्पणझीलों के शहर के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध राजस्थान के उदयपुर में स्थित पिछोला झील (Lake Pichola) अपनी शाही और सांस्कृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। इस कृत्रिम झील का निर्माण सदियों पहले किया गया था, जिसके चारों ओर भव्य ऐतिहासिक महल, घाट और हवेलियाँ बनी हुई हैं। झील के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित लेक पैलेस (Lake Palace) और जग मंदिर इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। शाम के वक्त जब आप पिछोला झील में नाव (Boat Ride) की सवारी करते हैं, तो पानी की लहरों के बीच से शहर के महलों की जगमगाती रोशनी देखना एक बेहद रोमांटिक और शानदार अहसास कराता है। राजस्थान की गर्म हवाओं के बीच यह झील पर्यटकों को एक शांत, शीतल और शाही अनुभव देती है, जो शाही विरासत और प्रकृति का बेजोड़ संगम है।चौथी झील: वेम्बनाड झील, केरल – बैकवाटर की सैर का असली आनंददक्षिण भारत के खूबसूरत राज्य केरल में स्थित वेम्बनाड झील (Vembanad Lake) देश की सबसे लंबी और केरल की सबसे बड़ी झील है। यह झील अपने शांत बैकवाटर्स (Backwaters), हरे-भरे नारियल के पेड़ों और पारंपरिक केटूवल्लम यानी हाउसबोट्स के लिए पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखती है। यहाँ के शांत पानी में हाउसबोट पर बैठकर छुट्टियां बिताना प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा होता है। इसके अलावा, हर साल ओणम के त्योहार के दौरान इस झील पर होने वाली प्रसिद्ध 'वल्लम कली' यानी बोट रेस (Snake Boat Race) को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों लोग यहाँ इकट्ठा होते हैं। केरल की पारंपरिक संस्कृति, आयुर्वेद और इस विशाल झील का शांत परिवेश सैलानियों के मन को पूरी तरह से तरोताजा कर देता है और उन्हें प्रकृति के बेहद करीब ले जाता है।पांचवीं झील: उमियम झील, शिलांग (मेघालय) – उत्तर-पूर्व भारत का छिपा हुआ नगीनाभारत के उत्तर-पूर्व हिस्से यानी मेघालय की राजधानी शिलांग के पास स्थित उमियम झील (Umiam Lake), जिसे स्थानीय लोग 'बड़ा पानी' के नाम से भी जानते हैं, प्रकृति का एक बेहद खूबसूरत और शांत उपहार है। पाइनेन और हर-भरे पहाड़ों की पहाड़ियों के बीच फैली यह विशाल झील अपनी नीले पानी की चादर और चारों तरफ फैली देवदार के पेड़ों की हरियाली के लिए जानी जाती है। यहाँ आने वाले पर्यटक वॉटर स्पोर्ट्स, बोटिंग, कयाकिंग और फोटोग्राफी का भरपूर आनंद उठाते हैं। शिलांग आने वाले हर सैलानी के लिए यह जगह एक प्रमुख पड़ाव होती है, जहाँ बैठकर घंटों शांति से प्राकृतिक नजारों को निहारा जा सकता है। भारत की ये पांचों झीलें अपनी अलग-अलग विशेषताओं, भौगोलिक विविधता और अद्वितीय सुंदरता के कारण देश की अमूल्य धरोहर हैं, जो हर यात्री को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
New Delhi, 27 अगस्त . भारतीय कंपनियां पनामा को एक निर्यात गंतव्य के रूप में नहीं, बल्कि कई दक्षिणी अमेरिकी बाजारों के लिए एक रीजनल बिजनेस हब के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं. यह बयान India में पनामा के राजदूत अलोंसो कोरिया मिगुएल की ओर से दिया गया. एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर Mumbai में ... Read more
देश की खबरें: '2029 में पीएम की कु्र्सी पर बैठेंगे राहुल गांधी ', तमिलनाडु के पर्यटन मंत्री का दावा
News Updates: '2029 में पीएम की कु्र्सी पर बैठेंगे राहुल गांधी ', तमिलनाडु के पर्यटन मंत्री का दावा news-updates-north-east-west-south-india-elections-2026-politics-crime-national-news-in-hindi
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक रशियन महिला ट्रैवलर ने भारत की 3AC ट्रेन में सफर के बारे में बताया है।
Sant Kabir Nagar News: बखिरा झील में होगा पर्यटन का ‘नया सवेरा’, ईको पार्क भी बनेगा
A new dawn for tourism at Bakhira Lake eco-park to be developed too
Basti News: देरी से चल रहीं ट्रेनें, समय से गंतव्य नहीं पहुंच पा रहे यात्री
Trains running late; passengers unable to reach destinations on time.
Sant Kabir Nagar News: लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना का हुआ शुभारंभ
Lokmata Ahilyabai Matrushakti Yatra Scheme launched
Mathura News: जुलहेंदी में अमृत सरोवर की सौगात, पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
मथुरासमाचार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना' का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत, राज्य की 60 साल और उससे अधिक आयु की महिलाओं को आजीवन निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, रक्षाबंधन के अवसर पर सभी माताओं, बहनों और बेटियों को सहयात्री सहित मुफ्त बस यात्रा का लाभ मिलेगा। रक्षाबंधन के लिए यह विशेष सुविधा 27 अगस्त को सुबह 6 बजे से शुरू होकर 29 अगस्त, 2026 की मध्यरात्रि 12 बजे तक उपलब्ध रहेगी। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए महिलाएं अपना आधार कार्ड या निर्वाचन कार्ड दिखाकर निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से इस योजना का शुभारंभ करते हुए विशेष बसों को हरी झंडी दिखाई। जौनपुर कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह में इस कार्यक्रम का सजीव प्रसारण किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह सुविधा माताओं और बहनों को आसानी से अपने भाइयों के पास जाकर राखी बांधने में मदद करेगी। जिलाधिकारी ने बताया कि रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए बस सेवाएं निःशुल्क रहेंगी और 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को यह सुविधा आजीवन मिलेगी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण शासन की शीर्ष प्राथमिकता है और यह योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम का संचालन प्रीती श्रीवास्तव ने किया।
हरदोई में गांधी भवन सभागार में बुधवार को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम और जिला प्रशासन की ओर से ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने पात्र बुजुर्ग महिलाओं को योजना के स्मार्ट कार्ड वितरित किए। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक चला। योजना का शुभारंभ राज्य मंत्री रजनी तिवारी, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान लखनऊ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज्य स्तरीय शुभारंभ संबोधन का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को आजीवन मुफ्त यात्रा ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को परिवहन निगम की बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। पात्र महिलाओं को स्मार्ट कार्ड के माध्यम से इस सुविधा का लाभ मिलेगा। रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। राज्य मंत्री ने लाभार्थी बुजुर्ग महिलाओं को स्मार्ट कार्ड के साथ उपहार स्वरूप बैग प्रदान किए। बैग में साड़ी और मिठाई रखी गई थी। 27 से 29 अगस्त तक महिलाओं का मुफ्त सफर रक्षाबंधन पर्व के मद्देनजर 27, 28 और 29 अगस्त तक सभी महिलाओं, बेटियों और माताओं को रोडवेज और सिटी बसों में एक सहयात्री के साथ तीन दिनों तक निःशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई है। राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान, सुरक्षा और सुविधा सरकार की प्राथमिकता है। रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और उपहार की सुविधा सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है। इस दौरान कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अलका गुप्ता, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दीप्ति भार्गव, नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, यूपीएसआरटीसी हरदोई क्षेत्र के आरएम गौरव वर्मा, एसएम, एआरएम समेत अन्य अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
KTM 349cc एडवेंचर को मिला नया आर्कटिक फ्लेयर रंग, जानें कीमत और खासियत
KTM 390 Adventure: KTM ने अपनी 349cc 390 एडवेंचर बाइक के लिए नया आर्कटिक फ्लेयर कलर लॉन्च कर दिया है जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 2.88 लाख रुपए है।
BMW F 650 GS टेस्टिंग में दिखी, जानें नई एडवेंचर बाइक की खासियतें
BMW F 650 GS: BMW की नई GS बाइक टेस्टिंग के दौरान देखी गई है, जिसे F 650 GS नाम दिया जा सकता है। यह बाइक 650cc सेगमेंट में Yamaha Tenere 700 और Aprilia Tuareg 660 जैसी बाइक्स को टक्कर देगी।
ऋषभदेव में नागरिक सुविधाओं और पर्यटन विकास को लेकर नगर विकास समिति ने उठाई आवाज
ऋषभदेव में नागरिक सुविधाओं और पर्यटन विकास को लेकर नगर विकास समिति ने उपखण्ड अधिकारी बजरंग गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। पार्किंग, सफाई, डंपिंग यार्ड, अतिक्रमण और मंदिर परिसरों की व्यवस्थाओं पर मांगें रखीं।
जमेरिया गांव को वन्यजीव पर्यटन का नया केंद्र बनाने की तैयारी है। सीबीटी योजना के तहत 50 से अधिक परिवारों को होम स्टे, बर्ड वॉचिंग और वन्यजीव ज्ञान का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उदयपुर के ओबरॉय उदय विलास में टूरिस्ट 5.74 लाख का बिल छोड़कर फरार, वीडियो में जाने ट्रैवल एजेंसी के नाम पर किया भुगतान से इनकार
सांसद मनोज तिवारी ने बताया कि बिहार को पर्यटन में अग्रणी बनाने के लिए केंद्र 25 हजार करोड़ रुपये लगा रहा है। संसदीय समिति के साथ बोधगया दौरे पर उन्होंने पर्यटन स्थलों के व्यापक विकास की योजना साझा की।
चंदौली लोकसभा सीट से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखकर चंदौली, मिर्जापुर और आसपास के धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक व ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर व्यापक पर्यटन सर्किट बनाने का सुझाव दिया है। सांसद ने वाराणसी को केंद्र में रखते हुए इन क्षेत्रों को एक पर्यटन एवं आध्यात्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की मांग की है। सांसद का कहना है कि चंदौली में गंगा के किनारे का बड़ा क्षेत्र धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध है। यह इलाका बाबा कीनाराम, मौनी बाबा, त्रिदंडी स्वामी, स्वामी प्रेमानंद जी और संत खड़िया बाबा जैसी विभूतियों की तपोस्थली रहा है। इसके अलावा बरठी का बाबा कालेश्वर नाथ मंदिर, नौगढ़ का किला और बांध भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पत्र में कहा कि नौगढ़ के प्राकृतिक क्षेत्र में राजदारी-देवदारी जलप्रपात, मिर्जापुर का लखनिया दरी और चुनार का ऐतिहासिक किला भी इस सर्किट से जोड़े जा सकते हैं। इन स्थलों को एक पैकेज के रूप में विकसित करने से वाराणसी आने वाले पर्यटकों का ठहराव बढ़ाया जा सकता है। एक दिन के बजाय दो या अधिक दिन रुकेंगे पर्यटक सांसद वीरेंद्र सिंह के अनुसार, अभी बड़ी संख्या में पर्यटक वाराणसी आते हैं, लेकिन सीमित समय के कारण आसपास के जिलों के पर्यटन स्थलों तक नहीं पहुंच पाते। यदि चंदौली और मिर्जापुर के प्रमुख स्थलों को वाराणसी से जोड़कर सुविधाएं विकसित की जाएं तो पर्यटकों का प्रवास एक दिन से बढ़कर दो या उससे अधिक दिनों का हो सकता है। इससे स्थानीय होटल, होम स्टे, परिवहन और पर्यटन गाइड के काम को बढ़ावा मिलेगा। हस्तशिल्प, खान-पान और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। धार्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने का सुझाव सांसद ने पत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक पर्यटन को भी विकसित करने पर जोर दिया है। नौगढ़, राजदारी-देवदारी और लखनिया दरी जैसे स्थान प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं चुनार का किला और नौगढ़ का किला ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। उनका कहना है कि इन सभी स्थलों को जोड़कर एक समेकित पर्यटन मार्ग विकसित किया जाए, ताकि पर्यटकों को एक ही यात्रा में धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन का अनुभव मिल सके। स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पर्यटन सर्किट बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के कई नए अवसर पैदा होंगे। होटल और होम स्टे से लेकर टैक्सी, गाइड, हस्तशिल्प, स्थानीय खान-पान और अन्य छोटे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। इससे युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सकेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वाराणसी को पूर्वांचल के पर्यटन का प्रवेशद्वार बनाने की मांग सांसद ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास योजनाओं को केवल वाराणसी की सीमाओं तक सीमित रखने के बजाय क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। वाराणसी से चंदौली, मिर्जापुर और आसपास के प्रमुख स्थलों को जोड़ने से इसका लाभ बड़े क्षेत्र की जनता को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास से जुड़े मामलों में विपक्षी सांसदों के रचनात्मक सुझावों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लोकतंत्र में राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन जनता और क्षेत्र के विकास से जुड़े अच्छे सुझाव किसी दल की सीमा में नहीं बंधने चाहिए। सांसद ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि काशी को केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के पर्यटन, आध्यात्मिकता, संस्कृति और आर्थिक विकास के प्रवेशद्वार के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल की जाए।
राजस्थान पर्यटन में घरेलू पर्यटकों का दबदबा, वीडियो में जाने पहली छमाही में 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी
मंत्री जावेद राणा ने संगरवानी को जनजातीय पर्यटन मॉडल गांव बनाने की घोषणा की और वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
हरियाणा के रोहतक की रहने वाली इंटरनेशनल शूटर काजल सैनी के डॉग जोनी को टूर पैकेज में मेंशन होने के बावजूद दार्जिलिंग के होटल में रूम देने से मना कर दिया गया। इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ, लेकिन होटल मैनेजमेंट नहीं माना। किसी तरह एजेंसी के कहने पर डॉग को रखा गया। ऐसी ही स्थिति सिक्किम में भी सामने आई। नाथू ला दर्रा घूमकर लौटे तो उनका होटल बदल कर 30 किलोमीटर दूर कर दिया गया। वहां भी जोनी को लेकर परेशानी हुई। पूरी फैमिली आठ घंटे तक इधर-उधर भटकती रही। टूर के दौरान सामने आईं इन परेशानियों को लेकर शूटर के पिता ने उपभोक्ता फोरम में ट्रैवल्स के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में केस दर्ज कराया। डेढ़ साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने ट्रैवल एजेंसी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 1 लाख 8 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। इसमें 9% ब्याज, 10 हजार रुपए मानसिक परेशानी का मुआवजा और 5 हजार रुपए केस खर्च भी शामिल है। दैनिक भास्कर एप की टीम ने शूटर काजल सैनी के पिता विजय सैनी से इस पूरे मामले में बातचीत की। विजय सैनी बिजनेसमैन हैं। शूटिंग एकेडमी भी चलाते हैं और शिक्षण संस्थान रोहतक के तीन बार लगातार प्रधान चुके हैं। उन्होंने मई 2024 को टूर पैकेज से लेकर अब कोर्ट के फैसले तक की पूरी कहानी बताई। पहले जानिए सिक्किम-दार्जलिंग के टूर पर क्या हुआ… अब जानिए उपभोक्ता फोरम तक कैसे पहुंचा यह मामला… डॉग जानी के बारे में परिवार की क्या सोच… ----------------------- ये खबर भी पढ़ें…. 4 देश ट्रैवल कर चुके डॉग संग सेल्फी की होड़:गुरुग्राम में लड़कियों ने गले लगाया, पंजे के प्रिंट्स लिए; इंस्टाग्राम पर 4.8 लाख फॉलोअर्स कभी कोलकाता की गलियों में छुट्टा घूमने वाला डॉग अब दुनिया भर में छाया है। अब इसे पीस का ब्रांड एंबेसडर कहा जा रहा है। नाम मिला है 'आलोका'। USA समेत 4 देशों में कई हजार किलोमीटर पैदल चल चुका स्ट्रे डॉग अब गुरुग्राम पहुंचा। (पूरी खबर पढ़ें)
बोधगया में संसदीय स्थायी समिति की बैठक में गया-बोधगया कॉरिडोर को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने पर चर्चा हुई। 1200 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ फल्गु नदी में सालभर पानी रखने की योजना से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
भारत में कई अद्भुत चमत्कार और रहस्यमय मंदिरों का खजाना है। यहां पर आपको कई प्राचीन मंदिर देखने को मिलेंगे। हर मंदिर की एक अलग विशेषता है। राजस्थान के सीकर जिले में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शता है। इस मंदिर का नाम है जीणा माता। यह मंदिर मां जीण भवानी को समर्पित है। रक्षाबंधन पर अपने भाई के साथ यहां दर्शन के लिए आप जरुर जा सकते हैं। यह मंदिर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है और यहां मां जीण माता के साथ उनके भाई हर्ष की भी पूजा की जाती है। आइए आपको इस मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बताते हैं। राजस्थान में कहां स्थित है भाई-बहन को समर्पित जीण माता का मंदिर? राजस्थान के सीकर जिले में जीणमाता गांव में यह मंदिर स्थित है। यहां पर मुख्य रुप से मां जीण की पूजा होती है। राखी के समय यहां लोग दर्शन के लिए जरुर जाते हैं। इस दौरान यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर खाटू श्याम से 25-30 किमी की दूरी पर स्थित है। कैसे पहुंचे? - अगर आप सीकर शहर से यहां जाएंगे, तो आपको 29 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। यदि आप जयपुर से जा रहे हैं, तो आपको 110 किमी का सफर तय करना होगा। जयपुर से पहुंचने के लिए करीब 3 घंटे का समय लगेगा। - जो भाई-बहन दूसरे शहरों से आने का प्लान कर रहे हैं, वह ट्रेन से जा सकते हैं। इसके लिए आपको रींगस जंक्शन तक ट्रेन टिकट बुक करानी पड़ेगी। - सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर एयरपोर्ट है, यहां से आप मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए बस की क्या सुविधा है? - राजस्थान से आपको सीकर जिले से मंदिर के लिए बस मिल जाएगी। आसपास के शहरों से भी सीकर जिले के लिए बस जाती है। - जयपुर से आप सीकर के लिए पहले बस लें। इसके बाद सीकर पहुंचकर जीण माता मंदिर के लिए शेयरिंग टैक्सी या ऑटो बुक कर सकते हैं। जीण माता मंदिर यह मंदिर भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है, इसलिए रक्षाबंधन के समय भीड़ थोड़ी देखने को मिल सकती है। किसी भी साधन से जा रहे हैं, तो समय का जरुर ध्यान रखें। जीण माता मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, इसलिए जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 200 से 300 मीटर पैदल चलना पड़ता है। रास्ते में करीब 200 सीढ़िया मिलेगी। इन्हें चढ़ने में आधे घंटे का समय लग जाएगा। View this post on Instagram A post shared by Aryan Parashar (@aryanpujari_jeenmata)
नालंदा पहुंची 19 सांसदों की टीम, शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने पर हुआ मंथन
25 अगस्त, मंगलवार: नालंदा में 19 सांसदों वाली संयुक्त संसदीय स्थायी समिति की टीम ने नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया। समिति ने शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति, पर्यावरण और भविष्य की योजनाओं पर जानकारी ली। गया, राजगीर और नालंदा को जोड़कर पर्यटन गलियारा विकसित करने पर भी चर्चा हुई।
जन्माष्टमी पर दिल्ली से द्वारका कैसे जाएं और कितना होगा खर्चा? जानिए पूरा बजट और ट्रैवल प्लान
जन्माष्टमी के दिन द्वारकाधीश के दर्शन करने का प्लान कर रहे हैं, तो दिल्ली से द्वारका तक जाने का पूरा ट्रैवल प्लान जान लीजिए। हम आपको आने-जाने और ठहरने का खर्चा बताने जा रहे हैं।
वेडिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने की पर्यटन मंत्री से मुलाकात, आगरा में होगा वेडिंग एक्सपो
प्रेग्नेंट दीपिका और बेटी दुआ को लेकर वेकेशन पर निकले रणवीर सिंह! बेबी बंप फोटोज देख चहक उठे फैंस
Ranveer Singh Deepika Padukone Photos Fact Check:
रायसेन जिले की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख पहचान दिलाने की मांग को लेकर सामाजिक संगठन ‘टीम समाधान’ ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सोमवार देर शाम के ज्ञापन सौंपा। इसमें जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़कर ‘राष्ट्रीय पर्यटन सर्किट’ के रूप में विकसित करने तथा रायसेन को देश का प्रमुख पर्यटन जिला घोषित करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि रायसेन जिला मानव सभ्यता के प्रारंभिक इतिहास से लेकर प्राचीन, गुप्तकालीन और मध्यकालीन स्थापत्य तक की समृद्ध विरासत समेटे हुए है। जिले में भीमबेटका, भोजपुर, रायसेन किला, सांची, सतधारा और सुनारी जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। दो दिवसीय पर्यटन सर्किट का प्रस्ताव‘टीम समाधान’ ने पर्यटकों के लिए 2 दिवसीय विशेष पर्यटन परिपथ का प्रस्ताव दिया है। पहले दिन भीमबेटका, भोजपुर और रायसेन किला को शामिल किया गया है। भीमबेटका में हजारों वर्ष पुरानी शैल कला और मानव जीवन के प्राचीन साक्ष्य मौजूद हैं। भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर अपनी विशाल शिवलिंग प्रतिमा और अद्भुत स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है। वहीं रायसेन किला अपनी ऐतिहासिक संरचनाओं, जल प्रबंधन व्यवस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण प्रमुख आकर्षण है। दूसरे दिन सांची, सुनारी, सतधारा और उदयगिरि गुफाओं को जोड़ा गया है। सांची के विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्मारकों के साथ सुनारी और सतधारा के प्राचीन बौद्ध अवशेषों को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता देने की मांग की गई। उदयगिरि की गुप्तकालीन गुफाओं में भगवान विष्णु के विशाल वराह स्वरूप सहित कई ऐतिहासिक शिल्प मौजूद हैं। 2000 से अधिक शैल चित्रों के संरक्षण की मांगज्ञापन में रायसेन जिले में मौजूद 2000 से अधिक आदिमानव कालीन शैल चित्रों और रॉक पेंटिंग्स का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने इन धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की मांग करते हुए रायसेन को ‘शैल चित्रों की राजधानी’ के रूप में पहचान दिलाने की बात कही। संगठन ने पर्यटन मंत्रालय और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की वेबसाइटों पर इस सर्किट को प्रमुखता से प्रदर्शित करने तथा सुनारी-सतधारा के मार्ग और पर्यटक सुविधाओं में सुधार की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि व्यवस्थित विकास से रायसेन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है।
गयाजी में संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय झा और जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा ने 1996 के भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौते की समीक्षा करने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि यह समझौता 30 वर्षों के लिए हुआ था, जिसकी अवधि 12 दिसंबर को समाप्त हो रही है। इस समझौते का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। अगर कोई नया राजनयिक समझौता होता है, तो उसमें बिहार के हितों की अनदेखी बिल्कुल नहीं की जानी चाहिए। संजय झा ने कहा कि 1996 में जब यह समझौता हुआ था, तब बिहार की आबादी लगभग सवा सात करोड़ थी, जो अब बढ़कर 13 करोड़ से अधिक हो चुकी है। समझौता 5 वर्षों के लिए होता है। बावजूद इसके बिहार के हित की अनदेखी कर लंबी अवधि के लिए किया गया जो गलत हुआ। बिहार की आबादी बढ़ने से पानी की जरूरत दोगुनी हो चुकी है। सिंचाई, उद्योग और पेयजल के लिए पानी की सख्त आवश्यकता है। हमारे सामने से गंगा नदी बहती है, लेकिन हम इसका पानी उपयोग नहीं कर पाते। तत्कालीन केंद्र और राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण बिहार के हितों से समझौता किया गया था। अब उत्तर और दक्षिण बिहार दोनों क्षेत्रों में पानी का संकट तेजी से बढ़ रहा है। लेयर भाग रहे हैं। देवघाट और रबर डैम का निरीक्षण संसदीय समिति का नेतृत्व करते हुए संजय झा 18 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बोधगया और गयाजी के दौरे पर हैं। समिति पर्यटन विकास और बजट घोषणाओं की समीक्षा कर रही है। मंगलवार सुबह संजय झा ने विष्णुपद मंदिर में लगभग 15 मिनट तक पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने फल्गु नदी के देवघाट और रबर डैम का निरीक्षण किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार द्वारा बनाए गए रबर डैम के कारण फल्गु नदी में पानी उपलब्ध रहता है। गयाजी में पिंड दान और बोधगया में बौद्ध श्रद्धालुओं का साल भर आना-जाना लगा रहता है। इसलिए फल्गु नदी में स्थायी और स्वच्छ जल बनाए रखना बेहद जरूरी है। फल्गु नदी को सोन नदी से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम चल रहा है। 'कॉरिडोर की रूपरेखा तय हो चुकी है' संजय झा ने आगे कहा कि केंद्र के बजट में गयाजी और बोधगया के लिए कॉरिडोर की घोषणा की गई है। लगभग 1200 करोड़ रुपए की इस महात्वाकांक्षी योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा हो चुकी है। दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कॉरिडोर की रूपरेखा तय की जा चुकी है। विष्णुपद या फिर बोधगया कॉरिडोर हो इन दोनों का अस्तित्व फल्गु नदी से है। कॉरिडोर की महत्ता व आकर्षण के लिए फल्गु में सालोभर जल प्रवाह जरूरी है। इसमें सोन का पानी लाने का न केवल प्रयास होगा बल्कि इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। इस पर काम तेजी से चल रहा है। गयाजी पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा संजय झा ने दावा किया कि कॉरिडोर और पर्यटन योजनाओं के पूरा होने के बाद गयाजी-बोधगया का पूरा क्षेत्र पूरी तरह बदल जाएगा। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद देश का सबसे बड़ा और प्रमुख पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा। 15 वर्ष पहले कोई नहीं जानता था कि बोधगया पर्यटन क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा गेम चेंजर होगा। आज यह सभी बातें पूरे विश्व को नजर आ रही है।
शेरगढ़ में पर्यटन विकास पर मंथन किया
भास्कर न्यूज| सकतपुर नदीपार क्षेत्र के शेरगढ़ के इतिहास, पुरातत्व, पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विशेष सेमिनार आयोजित किया गया। इंटेक बारां चैप्टर ने बारां से शेरगढ़ तक विरासत यात्रा, सेमिनार का आयोजन किया। इतिहास व राकेश शर्मा ने पावर पॉइंट प्रजेंटेशन से शेरगढ़ के इतिहास, पुरासंपदा, कई धर्मों के स्मारकों पर प्रस्तुति दी। सेमिनार में इंटेक एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन विष्णु कुमार साबू मुख्य अतिथि थे। मुख्य वक्ता राकेश शर्मा ने शेरगढ़ के इतिहास, स्थापत्य, पुरातात्विक महत्व, ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रजेंटेशन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंटेक सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत पाटनी ने की। इंटेक एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, लायंस क्लब श्रीजी के संरक्षक कुंजबिहारी नागर भी मौजूद थे। वक्ताओं ने हाड़ौती में पर्यटन विकास, पुरासंपदा संरक्षण पर विचार रखे। सेमिनार के बाद करीब 50 प्रतिभागियों ने शेरगढ़ के दोनों किलों का भ्रमण किया। राकेश शर्मा ने हर स्मारक का इतिहास, कला, निर्माण की जानकारी दी। सेमिनार में शेरगढ़ के ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व के साथ यहां पर्यटन व विकास की संभावनाओं पर चर्चा हुई। विष्णु साबू और कन्वीनर जितेंद्र शर्मा ने कहा कि इंटेक बारां चैप्टर शेरगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखते हुए इसे जिले के प्रमुख हेरिटेज व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर राज्य सरकार और संबंधित विभागों से समन्वय कर काम कराएगा। इंटेक बारां चैप्टर की वार्षिक बैठक भी हुई। जिसमें आगामी गतिविधियों, विरासत संरक्षण के काम, जिले के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण की भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। जिले के इतिहास प्रेमियों, पुरातत्व व विरासत में रुचि रखने वाले नागरिकों, इंटेक सदस्यों से सहभागिता का आह्वान किया गया।
कानपुर सांसद रमेश अवस्थी और एमएलसी सलील विश्नोई ने सोमवार को नानाराव घाट (मेस्कर घाट) के सौंदर्यीकरण कार्य का लोकार्पण किया। इसके बाद उन्होंने घाट का निरीक्षण किया। इस दौरान महिला चेंजिंग रूम में गंदगी मिली। टाइल्स की गुणवत्ता खराब मिली। यह देखकर उन्होंने ठेकेदार को जमकर फटकार लगाई। कहा कि यहां घटिया टाइल्स लगाई हैं। पूछा कि किस कंपनी ने काम किया है? किसके माध्यम से ठेका दिया गया? तभी पर्यटन विभाग के अधिकारी भी पहुंच गए। पर्यटन विभाग के प्रोजेक्ट मैनेजर को देखकर सांसद बोले- इतने बेअंदाज हो गए हो। तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। आज यहां उद्धघाटन था। पर्यटन विभाग का कोई अधिकारी नहीं आया। यहां की व्यवस्था भी दुरूस्त नहीं की गई। चारों तरफ गंदगी है। जो निर्माण कार्य हुआ है। उसमें भी अनियमितता है। कोई देखने वाला नहीं है। भ्रष्टाचार फैला रखा है। जांच कराकर कार्रवाई कराई जाएगी। कैंट क्षेत्र में नानाराव घाट का सौंदर्यीकरण पर्यटन विभाग करा रहा है। इसमें करीब 1 करोड़ रुपए की लागत आएगी। सोमवार को इसी काम का लोकार्पण करने सांसद रमेश अवस्थी पहुंचे थे। लोकार्पण के बाद जब उन्होंने घाट का निरीक्षण किया तो उन्हें वहां गंदगी और अव्यवस्था मिली। सांसद ने मौके पर मौजूद कैंटोनमेंट बोर्ड के जेई से काम की गुणवत्ता को लेकर सवाल किए। उन्होंने पूछा कि किस ठेकेदार से ऐसा काम कराया गया? जेई ने जवाब दिया कि वह अभी नए आए हैं। सांसद ने कहा कि संबंधित कंपनी और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। सांसद ने कहा कि घाट का इतिहास 1857 की क्रांति से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का काम किया जा रहा है। निर्माण कार्य में अनियमितता और गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सांसद ने कहा कि पूरे मामले जांच कराए जाने के लिए लिखा जाएगा। जांच और कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। जहां भी अनियमितता पाई जाएगी, संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि ऐतिहासिक स्थल के विकास के नाम पर घटिया निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पूर्णिया के बड़हरा कोठी स्थित बाबा वरुणेश्वर धाम में सावन के अंतिम सोमवार को भव्य श्रावणी मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बिहार सरकार के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल और मंत्री लेशी सिंह ने धाम को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने और श्रावणी मेले को राजकीय महोत्सव घोषित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में भेजने की घोषणा की। दोनों मंत्रियों ने बाबा वरुणेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया। उन्होंने राज्य की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद, मंत्रियों ने रुपौली विधायक कलाधर प्रसाद मंडल की उपस्थिति में संयुक्त रूप से श्रावणी मेला महोत्सव का उद्घाटन किया। जलाभिषेक और मेले के उद्घाटन के अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। शिवगंगा के जीर्णोद्धार के लिए 25 लाख रुपए स्वीकृत होंगे मंत्री डॉ. दिलीप जयसवाल ने कहा कि बाबा वरुणेश्वर धाम इस क्षेत्र का दूसरा बाबा धाम है, जहां लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था जुड़ी है। धाम परिसर स्थित ऐतिहासिक शिवगंगा के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए सरकार 25 लाख रुपए की राशि स्वीकृत करेगी। इस राशि से शिवगंगा परिसर में आकर्षक फव्वारे, श्रद्धालुओं के बैठने की उत्तम व्यवस्था और पर्याप्त लाइटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। आगामी 1 से 2 साल में मंदिर परिसर में एक सुव्यवस्थित विवाह मंडप का निर्माण कराया जाएगा। ऐतिहासिक धरोहर है वरुणेश्वर धाम- लेसी सिंहबिहार सरकार की मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि बाबा वरुणेश्वर महादेव एक अपरूपी शिवलिंग हैं और इस स्थान का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि वैदिक काल में वरुण ऋषि ने इसी पावन स्थल पर कठिन तपस्या और पूजा-अर्चना की थी, जिसके कारण इस तीर्थ स्थल का नाम वरुणेश्वर धाम पड़ा। मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि इस बार सरकारी स्तर पर श्रावणी मेले का भव्य आयोजन किया गया है।
क्या आप कभी भारत के ऐसे इलाके में घूमने गए हैं, जहां की सड़कें एकदम जिगजैग हों। ऐसा सफर देखकर या सोचकर ही रोमांचक लगता है। कुछ ऐसा ही है सिक्किम का ऑफ बीट लोकेशन है। जिसका नाम जुलूक है। अगर आप भी हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड जाकर ऊब चुके हैं, तो इस बार आपको सिक्कम जाने का प्लान करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सिक्किम के छोटे से गांव जुलूक के बारे में बताने जा रहे हैं। सिक्किम का जन्नत भारत के सिक्किम राज्य के पूर्वी जिले में स्थित एक बेहद छोटा और खूबसूरत गांव जुलूक है। जुलूक आपको जन्नत की सैर इसी धरती पर करा सकता है। बादलों के ऊपर बसा यह गांव समुद्र तल से करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसको आप हनीमून डेस्टिनेशन या फैमिली ट्रिप बना सकती हैं। आपको यहां आकर निराशा नहीं होगी। इसे भी पढ़ें: IRCTC Northeast Package: अब किस्तों में चुकाएं पैसे, मुंबई से Gangtok-Darjeeling ट्रिप में Flight और Guide भी शामिल सिल्क रूट का हिस्सा शायद आपको पता न हो जुलूक कभी सिल्क रूट का हिस्सा था। इसके व्यापार मार्ग की बात करें, तो यह मार्ग जेलेपा मुख्य पहाड़ी दर्रे को तिब्बत के ल्हासा तक जोड़ता था। जुलूक में क्या करें एक्सप्लोर अगर आप भी जुलूक घूमने का मन बना रहे हैं, तो आपको इन खास जगहों को जरूर एक्सप्लोर करना चाहिए। थंबी व्यू पॉइंट थंबी व्यू पॉइंट से आपको कंचनजंघा की चोटियां साफ देखने को मिल सकती हैं। क्योंकि थंबी व्यू पॉइंट से कंचनजंघा सिर्फ 10 से 12 किमी की दूरी पर है। नाथंग वैली नाथंग वैली पर जाकर आप एक गाना तो जरूर गुनगुनाएंगे, 'बादल पर पांव हैं', क्योंकि वाकई में आपके पैर बादलों के बीच होंगे। एलीफेंट लेक ओल्ड सिल्क रूट पर आपको सिर्फ बादल ही नहीं बल्कि एलिफेंट लेक भी देखने को मिलेगी। इसको कुपूप झील या बिटांग छो भी कहते हैं। इस झील का आकार कुछ-कुछ हाथी जैसा दिखता है। जिग-जैग रास्ते यहां जाकर अगर आप रोड ट्रिप पर नहीं गए हैं तो मतलब आपने जुलूक को सही से नहीं एक्सप्लोर किया। यहां के जिग-जैग मोड़ ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। जानें कब और कैसे जाएं यहां पर जाने के लिए मार्च से लेकर मई और सितंबर से नवंबर तक का समय बेस्ट है। अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं, तो न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन और हवाई मार्ग के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद गंगटोक और रोंगली होते हुए सड़क यात्रा करनी होगी।
‘इनोवेशन इन गवर्नेंस’ श्रेणी में जगह पाने वाली इस सफारी में ग्लास स्काईवॉक, सस्पेंशन ब्रिज, जिप लाइन, नेचर कैंप और प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीव सफारी जैसी सुविधाएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
Udhampur News: देखरेख के अभाव में खंडहर बन रही पर्यटन विभाग की इमारत
देखरेख के अभाव में खंडहर बन रही पर्यटन विभाग की इमारत
Jalaun News: प्राचीन धर्मस्थलों के पर्यटन विकास को मंजूरी
प्राचीन धर्मस्थलों के पर्यटन विकास को मंजूरी
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नए पर्यटन स्थलों को किया जाएगा विकसित : बगौली
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लद्दाख में पर्यटन को लगेंगे नए पंख, थोइस एयरबेस से दिसंबर तक शुरू हो सकती है नागरिक उड़ान सेवा
नुब्रा घाटी के थोइस एयरबेस से अब नागरिक हवाई सेवा शुरू होगी, जिसका लक्ष्य दिसंबर तक है।
धमतरी के रुद्री बांध में शुरू हुई कयाकिंग अकादमी पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन गई है। हरियाली, बांध की विशाल जलराशि और कयाकिंग का रोमांच सैलानियों को खूब लुभा रहा है।
उद्घाटन सत्र के दौरान 125 से अधिक कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकनृत्यों में गोटीपुआ, संबलपुरी, पशु मुखौटा और पाइका नृत्य की प्रस्तुति ने खूब वाहवाही बटोरी।
Mohali News: क्लासमेट ट्रैवल एजेंट ने 14 लाख लेकर विदेश नहीं भेजा, दंपती ने सल्फास खाकर दी जान
Couple commits suicide by consuming Celphos after travel agent takes 14 lakh but fails to send them abroad
यूपी और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच समझौता, रोजगार और पर्यटन बढ़ेगा
यूपी और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच शुक्रवार को ग्रीन हाइड्रोजन पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दस्तखत हुए। इसके तहत यूपी में हर साल एक मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
Travel Tips: तुर्कमेनिस्तान का वह नरक द्वार जहाँ 1971 से नहीं बुझी आग, जानिए Karakum Desert का सच
दुनिया में आपको कई ऐसी अनोखी जगहें मिलेंगी, जिनके बार में जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा। ऐसी ही एक जगह मध्य एशियाई के देश तुर्कमेनिस्तान में है। यहां पर काराकुम रेगिस्तान को नरक का दरवाजा भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कोई पैर नहीं रख सकता है। काराकुम रेगिस्तान में डेवरेज गांव के पास में यह रेगिस्तान में है। जिसको 'शाइनिंग काराकुम' के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि रेगिस्तान का एक हिस्सा हमेशा आग की तरह चमकता रहता है। ऐसे में अगर आप भी यह सोच रहे है कि इसको नरक का दरवाजा क्यों कहा जाता है, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको इस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2026: भारतीय रेलवे का बड़ा तोहफा, इन Routes पर चलेंगी Raksha Bandhan Special Trains क्यों कहते हैं नरक का दरवाजा साल 1971 में मध्य एशिया के काराकुम रेगिस्तान में एक ऐसी घटना हुई। जिस कारण रेगिस्तान में आग लगाना पड़ा। साल 1971 में तेल भंडार की खोज में सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक का एक ग्रुप काराकुम रेगिस्तान आया था। यहां पर उनको एक ऐसी जगह मिल भी गई। जहां पर वैज्ञानिकों को लगा कि तेल भंडार होगा। उन्होंने प्राकृतिक गैस के एक बड़े भंडार के ऊपर खुदाई करना शुरू किया। लेकिन उनको इसके नतीजे के बारे में नहीं पता था। जब खुदाई के लिए उन्होंने उस हिस्से पर भारी मशीनें लगाईं। तो जमीन मशीनों का जोर न सह पाए और जमीन अंदर की ओर धंसने लगी। जिस कारण कई जगहों पर गड्ढा बनता चला गया। एक गड्ढे से निकलने लगी गैस बता दें कि रेगिस्तान में जगह-जगह गड्ढे बन रहे थे। लेकिन एक गड्ढा सबसे बड़ा था। यह गड्ढा करीब 230 फीट चौड़ा और 65 फीट गहरा था। जिसके बाद वैज्ञानिकों को चिंता सताने लगी। क्योंकि इस गड्ढे से लगातार प्राकृतिक गैस बाहर निकल रही थी। हालांकि यह गैस जहरीली नहीं थी, लेकिन फिर भी यह ऑक्सीजन को बदल देती थी। जिस कारण सांस ले पाना मुश्किल हो जाता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी रेगिस्तान में रहने वाले जानवरों को होती थी। क्योंकि गड्ढे में गिरने से जानवर की फौरन मौत हो जाती। ऐसे में वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर यहां ब्लास्ट करना हो तो सिर्फ 5% मीथेन की मात्रा काफी होगी। इसलिए उन्होंने सोचा कि इसमें आग लगा दी जाए। अभी तक जल रही आग आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आग अभी तक जल रही है। तुर्कमेनिस्तान के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जब गड्ढे में मौजूद प्राकृतिक गैस खत्म हो जाएगी, तो यह आग अपने आप बुझ जाएगी। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है और यह आग जल रही है। साल 2010 में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति कुरबानगुली बर्डीमुखामेदोव भी इस गड्ढे का दौरा करने के लिए यहां पहुंचे थे। रेगस्तान में भभकने वाली इस आग को देखकर उन्होंने भी चिंता जताई थी। इससे आसपास के गैस क्षेत्रों को भी खतरा हो सकता है।
वियतनाम भारतीय पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जगहों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां पर्यटकों को मिलने वाली हर तरह की सुविधा है। जिन यात्रियों को समुद्र के किनारे समय बिताना अच्छा लगता है, उनके लिए यहां पर कई खूबसूरत बीच हैं। एडवेंचर और ऐतिहासिक जगहों पर घूमने के लिए कई जगहें हैं। वियतनाम की संस्कृति भी पर्यटकों का काफी आकर्षित करती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वियतनाम की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं। जिस कारण हर साल लाखों की संख्या में भारतीय पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते हैं। इसे भी पढ़ें: Delhi to Agra Travel Guide: मानसून की फुहारों के बीच ताजमहल और Baby Taj का दीदार, एक दिन की छुट्टी के लिए परफेक्ट One-Day Trip आसान वीजा प्रोसेस वियतनाम जाने के लिए भारतीयों को वीजा प्रोसेस के लिए ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती है। ई-वीजा के जरिए आवेदन करने पर 90 दिनों के अंदर आप वियतनाम यात्रा पर जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के कारण भारतीयों को वीजा के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के दौरान भारतीयों को पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, एक्सपायरी डेट, पासपोर्ट साइज फोटो, पासपोर्ट के बायोडाटा की फोटो और पर्सनल जानकारी जैसी जानकारी देनी होती है। वहीं यात्रा से 2 सप्ताह पहले आवेदन करना सही होता है। घूमना है आसान वियतनाम की मुद्रा को डोंग कहते हैं, जोकि भारत के रुपए के मुकाबले सस्ती है। भारतीय रुपए की तुलना में वियतनाम के डोंग की वैल्यू काफी कम है। भारतीय 1 रुपया करीब 275 वियतनामी डोंग के बराबर है। अगर आप 100 रुपए खर्चा करती हैं, तो यह 27,500 वियतनामी डोंग के बराबर होगा। इसलिए यहां पर भारतीयों को घूमना सस्ता पड़ता है। वहीं यहां पर रहना, खाना, घूमना आदि भारतीय पर्यटकों को सस्ता लगता है। कई बेहद खूबसूरत जगहें वियतनाम जाने का एक कारण यह भी है कि यहां पर खूबसूरत जगहों की भरमार है। यहां समुद्र तट, नदियां, पहाड़, गुफाएं और ऐतिहासिक स्थल आदि सभी चीजें आपको एक ही जगह पर मिल जाती है। इस तरह से आपका विदेश ट्रिप पूरा लगता है। यहां का हा लॉन्ग बे जगह नीले पानी और चूना पत्थर की के लिए काफी फेमस माना जाता है। वहीं दा नांग एक बेहद खूबसूरत बीच है। आप हो ची मिन्ह सिटी में शॉपिंग कर सकती हैं। तो हनोई में वियतनाम की संस्कृति को बेहद करीब से देखने और समझने का मौका मिलता है।
Gaurav Khanna माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर निकले, बारिश में फंसे तो ऐसे किया एन्जॉय
एक्टर गौरव खन्ना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। एक्टर लगातार अपने फैंस के साथ अपनी जिंदगी से जुड़े अपडेट शेयर कर रहे हैं। हाल ही में गौरव ने एक नया वीडियो शेयर कर बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर गए हैं। गौरव ने वीडियो में उस कार की झलक भी दिखाई, जिसमें वह अपनी मां और पिता के साथ सफर कर रहे हैं। पहाड़ों की ओर जाते हुए गौरव काफी खुश नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा, बादलों के बीच में जाते हुए। इस वीडियो के साथ उन्होंने मसूरी का नाम भी लिखा। बारिश में फंसे गौरव खन्ना मसूरी पहुंचने के बाद गौरव ने एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बारिश का मजा लेते नजर आए। उन्होंने बताया कि वहां बारिश काफी तेज हो रही थी। गौरव ने कहा कि उन्होंने छतरी भी ली थी, लेकिन तेज बारिश की वजह से उनके हाल खराब हो गए। इसके बाद गौरव एक रेस्टोरेंट में चाय पीते नजर आए। उन्होंने कहा कि ट्रिप पर इतनी बारिश में आएंगे तो ऐसा होना ही है, लेकिन यही तो ट्रिप का मजा है। वीडियो के आखिर में गौरव ने मजाकिया अंदाज में कहा, मजा भी है। इसे भी पढ़ें: Tumbbad 2 की रेकी के दौरान हुआ बड़ा खुलासा: उसी खौफनाक हवेली में टीम को मिला 8 साल पुराना रहस्यमयी खजाना! फैंस ने गौरव के वेकेशन को बताया जरूरी गौरव खन्ना के ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फैंस को उनका अपने माता-पिता के साथ समय बिताना काफी पसंद आ रहा है। कई फैंस का मानना है कि गौरव को इस तरह के ब्रेक और वेकेशन की जरूरत थी। कुछ फैंस ने गौरव और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के रिश्ते को लेकर भी कमेंट किए। फैंस का कहना है कि आकांक्षा से अलग रहने के बाद गौरव के लिए परिवार के साथ समय बिताना और घूमना अच्छा है। इसे भी पढ़ें: Pune में घर खरीदने के बाद अब शादी की जिम्मेदारियों पर क्या बोले Parth Samthaan गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का अभी तक नहीं हुआ तलाक गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला की शादी और तलाक को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। लॉकअप 2 में गौरव, आकांक्षा को सपोर्ट करने पहुंचे थे। उस दौरान एक्टर ने बताया था कि दोनों अभी भी कानूनी तौर पर शादीशुदा हैं और उनका तलाक नहीं हुआ है। वहीं, लॉकअप 2 के बाद आकांक्षा चमोला ने भी बताया था कि अभी तक तलाक के पेपर साइन नहीं हुए हैं। फिलहाल दोनों अपने-अपने प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं। इस बीच गौरव अपने माता-पिता के साथ मसूरी ट्रिप का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।
चंदेरी को भगवान श्रीकृष्ण की बुआ श्रुति के बेटे शिशुपाल की राजधानी माना जाता है। उस दौरान इसका उल्लेख चेदी राज्य के रूप में मिलता है। चंदेरी की रणनीतिक स्थिति में इसके समृद्धि की बड़ी वजह रही। कभी चंद्रगिरि कहा जाने वाला चंदेरी, बुंदेलखंड और मालवा की सीमा पर बसा है। जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। यहां पर मालवा के सुल्तानों और बुंदेल के राजपूतों द्वारा बनवाई गई तमाम इमारतें देखी जा सकती हैं। नदी किनारे गुफाओं में बने शैलचित्र सांस्कृतिक वैभव और कलात्मक सौंदर्य का परिचय देते हैं। यहां के शैलचित्रों को देखकर कहा जा सकता है कि चंदेरी प्रागैतिहासिक काल से एक जीवंत शहर है। चंदेरी साड़ियों से तो सभी वाकिफ हैं, चंदेरी साड़ियां अपने शिल्प और नफासत के लिए फेमस हैं। इसे भी पढ़ें: Monsoon Tourism 2026: भीड़भाड़ से दूर शांति देंगे ये 4 Budget Friendly Destinations, आज ही करें अपने ट्रिप का Plan जानें चंदेरी में कहां घूमें कोशक महल वहीं खिलजी वंश के शासनकाल में यह महल इस्लामी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चतुर्भुज आकार में निर्मित इस त्रि-स्तरीय महल के विशाल द्वार, झरोखे, खुले गलियारे इसकी स्थायपत्य कला को अनुपम बनाते हैं। इस महल के छत से दिखने वाले प्राकृतिक दृश्य इसकी शोभा को दोगुना कर देती है। कोशल इमारत के हर कक्ष के छत की डिजाइन बेहद अनोखा है। शुरूआत में 7 मंजिला इमारत के रूप में यह ढांचा सिर्फ 3 मंजिलों तक पूरा हो सका। चंदेरी किला चंदेरी किला शहर से 71 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला अभी भी शान से खड़ा है। यह किला कभी अभेद्य दुर्ग की तरह रहा होगा। यह किला 5 किमी लंबी दीवार से घिरा है। किले तक पहुंचने के तीन रास्ते हैं: पहला पक्का रास्ता है, जिससे आप गाड़ी से किले तक जा सकते हैं। दूसरा रास्ता खूनी दरवाजा है, जहां से पैदल पहुंचा जा सकता है। खूनी दरवाजा लकड़ी का बड़ा द्वार है। इस पर मालवा के सुल्तान कैदियों के शवों को लटका देते थे। बताया जाता है कि जब बाबर ने किले की घेराबंदी की थी। तो यह सच में खून से नहा गया था। इसको आखिरी किला कहा जाता था, यानी जब शासक को पता होता था कि उसकी हार होना निश्चित है। वह यहीं से युद्ध करते थे, जिससे तहखाने से निकलकर सुरक्षित जा सकें। बत्तीसी बावड़ी चौकोर, गोल और समकोण बावड़ियों से भरा यह अफगान वास्तुकला की निशानी है। इसकी सुंदर सीढ़ियों के ऊपर बने बीच में स्वागत द्वारों ने इसको अधिक भव्य बनाया है। 60-60 फीट लंबी-चौड़ी बावड़ी आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां पर आपको एक फारसी में लिखा शिलालेख भी मिलेगा। जिसका अर्थ है, जो स्वर्ग की झलक देखना चाहता है, वह यहां पर थोड़ा विश्राम करें, क्योंकि स्वर्ग इसी की तरह है। कटी घाटी इसको विशाल चट्टान को तराश कर बनाया गया है। चंदेरी के दक्षिणी किनारे पर स्थित यह मार्ग बुंदेलखंड और मालवा के बीच एक कड़ी का काम करता था। मालवा के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी के स्वागत के लिए इसको रातों-रात बनाया गया था। लेकिन इस दरवाजे में कुंडे या टिकाव के लिए राजमिस्त्री ने जगह नहीं छोड़ी थी। इस कमी को देखते हुए जिमन खान ने मिस्त्री को मेहनताना देने से इंकार दिया। इससे दुखी होकर मिस्त्री ने आत्महत्या कर ली। तब से यह कटी घाटी गेट बिना दरवाजे के खड़ा है। शहजादी का रोजा चंदेरी के गवर्नर की बेटी मेहरुनिस्सा और एक सेनापति के अमर प्रेम का प्रतीक यह मकबरा है। इसको 15वीं शताब्दी में गवर्नर ने बनवाया था। गवर्नर ने दोनों को अलग करने के लिए सेनापति को युद्ध में भेजा और सैनिकों को निर्देश दिए कि वह जीवित वापस न आ पाए। यह जानकारी मिलने पर शहजादी ने रोजे रखे थे। घायल होने के बाद भी सेनापति बच गया और वापस चंदेरी आ गया। जब मेहरुन्निसा उससे मिली, तो वह सेनापति अंतिम सांसे ले रहा था। उसी दौरान शहजादी ने भी प्राण त्याग दिए। रोजा रखने के कारण इस मकबरे का नाम 'शहजादी का रोजा' पड़ा। बाद में दोनों प्रेमियों को गवर्नर ने इस मकबरे में साथ दफनाया। यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ललितुर है। वहीं भोपाल एयरपोर्ट से कैब लेकर भी यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। बुंदेली खानों का स्वाद लें, जैसे मक्के की रोटी, दाल बाफला, रसखीर और सूजी के लड्डू। चंदेरी घूमने का सबसे सही समय अक्तूबर से लेकर मार्च के बीच का है। दो लोगों के एक दिन रहने और खाने का अनुमानित खर्च 2.5 से 3 हजार रुपए तक है। यहां का मौसम अधिकतम 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
क्या आप भी अगस्त में घूमने का बना रहे हैं प्लान और आपका बजट भी लिमिटेड है, तो यह लेख आपके लिए है। वैसे इस महीने के घूमने का एक अलग ही अनुभव होता है, हर तरफ हरियाली और सुकून वाला मौसम होता है। इस बार आप कम बजट में भी कम भीड़ वाली जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि किसी शांत और खूबसूरत जगहों पर जाने का प्लान। अगस्त में घूमने के लिए 4 बजट-फ्रेंडली डेस्टिनेशंस वैसे तो भारत में घूमने के लिए कई छिपी हुई जगहें, जहां पर काफी शांति देखने को मिलती है। आइए आपको इन जगहों के बारे में बताते हैं- जंजैहली घाटी (हिमाचल प्रदेश) शिमला और मनाली के शोर-शराबे से दूर आप हिमाचल प्रदेश के की इस खूबसूरत जगह पर जा सकते हैं। मंडी जिले में स्थित जंजैहली घाटी, जहां मानसून के समय सेब के बागान और हरे-भरे मखमली मैदान देखने के लायक होते है। यह जगह ट्रेकिंग और नेचर वॉक के लिए शौकीनों के लिए बेस्ट है। कैसे पहुंचे? - दिल्ली से जंजैहली घाटी पहुंचने के लिए सबसे पहले ISBT कश्मीरी गेट से मंडी/ओट के लिए सीधी HRTC या प्राइवेट वोल्वो बस पकड़ लें। - मंडी से जंजैहली की दूरी करीब 85 किमी है, आपको यहां से स्थानीय बस या प्राइवेट टैक्सी मिल जाएगी। - आप चाहे, तो दिल्ली से चंडीगढ़ या ऊना हिमाचल तक ट्रेन लें। इसके बाद बस या टैक्सी से करीब 5-6 घंटे में यहां पहुंच जाए। ओरछा और गढ़कुंडार (मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश या आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, यहां पर जरुर जाएं। यहां आपको बेतवा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक कस्बा ओरछा और पास ही स्थित गढ़कुंडार का किला देखने का गजब का अनुभव प्राप्त होगा। मानसून के समय जंगलों के बीच बने प्राचीन महल, छतरियां और नदियां आपके ट्रिप को यादगार बना देगी। जिन लोगों को फोटोग्राफी और इतिहास जानने का शौक है, वो लोग इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। ऐसे पहुंचें - - ओरछा और गढ़कुंडार जाने के लिए आप झांसी वीरांगना लक्ष्मीबाई, झांसी रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा। - स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाएंगे। आप लोकल बस से भी यहां तक पहुंच सकते हैं। - यहां पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट ग्वालियर है। वहीं, एयरपोर्ट से ओरछा की दूरी करीब 130 किमी है। भंडारदरा और घाटघर (महाराष्ट्र) यदि आपको झरने देखने का काफी शौक है, तो आप अगस्त के महीने में आप इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। मुंबई और पुणे के पास बसा भंडारदरा का घाटघर क्षेत्र घूमने के लिए सबसे बेस्ट है। मानसून के दौरान पूरी तरह धुंध और सैकड़ों मौसमी झरने देखने को मिलते हैं। यहां पर रंधा फॉल्स और आर्थर लेक अगस्त की बारिश में अपने पूरे शबाब पर होते हैं। कैसे पहुंचे? - इस जगह पर पहुंचने के लिए आपको नजदीकी बड़े शहर मुंबई, पुणे या नाशिक हैं। - आपको यहां आने के लिए मुंबई (BOM) पुणे (PNQ) या नाशिक (ISK) की डायरेक्ट फ्लाइट ले सकते हैं। - मुंबई से भंडारदरा करीब 165 किमी और नाशिक से लगभग 70 किमी दूर है। कसार देवी (उत्तराखंड) अगस्त के महीने में घूमने के लिए अल्मोड़ा के पास बसा कसार देवी भी एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यहां मानसून के समय बादल पहाड़ियों को छूकर गुजरते हैं, जिससे नजारा काफी अद्भुत लगता है। कसार देवी अपनी चुंबकीय ऊर्जा और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां पर आप दोस्तों और फैमिली के साथ घूमने जा सकते हैं। ऐसे पहुंचे - कसार देवी जाने के लिए आप काठगोदाम या हल्द्वानी स्टेशन तक जा सकते हैं। - स्टेशन पहुंचते ही आपको बहार अल्मोड़ा या कसार देवी के लिए शेयरिंग टैक्सी और बसें मिल जाएगी। - यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर (PGH) है, जो कि कसार देवी से करीब 125 किमी दूर है।
Travel Tips: बारिश के मौसम में जन्नत लगती हैं ये वादियां, Monsoon में एक्सप्लोर करें Hill Stations
बारिश के मौसम में घूमने का मजा ही अलग होता है। क्योंकि इस मौसम में चारों ओर हरियाली, बादलों से ढके पहाड़, ठंडी-ठंडी हवाएं और रिमझिम फुहारें लोगों को खूब भाती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस मॉनसून कहीं घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आप साउथ इंडिया के कुछ फेमस हिल स्टेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। यहां बारिश में नेचर की खूबसूरती इस कदर बढ़ जाती है, जिसको देखकर लगता है मानो स्वर्ग में आ गए हों। साउथ इंडिया के हिल स्टेशन अपने चाय के बागानों, झरनों, हिल स्टेशनों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां की वादियां खूबसूरत और हरी-भरी हो जाती हैं। वहीं कई जगहों पर बादल इतने नीचे आ जाते हैं कि ऐसा लगता है कि हम बादलों के बीच खड़े हैं। तो आइए जानते हैं साउथ इंडिया की इन खूबसूरत जगहों के बारे में। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Switzerland on a Budget? ये 4 Indian Destinations देंगे आपको यूरोप जैसी हसीन वादियों का अनुभव मुन्नार मॉनसून में केरल के मुन्नार की खूबसूरती भी गई गुना बढ़ जाती है। यहां चाय के खूबसूरत बागान, ठंडी-ठंडी हवाएं और धुंध से ढके पहाड़ लोगों की ट्रिप को यादगार बना देते हैं। बारिश के बाद यहां की हरियाली निखर जाती है। ऐसे में अगर आप भी नेचर लवर हैं, या फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। कूर्ग कर्नाटक का कूर्ग भी मॉनसून में देखने लायक होता है। इसकी खूबसूरती के कारण कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। मॉनसून में यहां पहाड़, कॉफी के बागानों और झरनों की खूबसूरती बढ़ जाती है। कूर्ग खूबसूरत होने के साथ शांत भी है। चिकमगलूर कर्नाटक का चिकमगलूर पिछले कुछ सालों से लोगों की पसंदीदा जगह बन चुकी है। मॉनसून में यहां हरी-भरी घाटियां और बादलों से ढके पहाड़ देखने को मिलेंगे। यहां आप शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के कुछ पल बिता सकते हैं। यह एक शानदार डेस्टिनेशन है। कोडाइकनाल तमिलनाडु का कोडाइकनाल हिल स्टेशन मानसून में बेहद खूबसूरत लगने लगता है। यहां की घाटियां, झीलें और व्यू पॉइंट बारिश के मौसम में बहुत ज्यादार सुंदर नजर आते हैं। अगर आपको भी प्रकृति से प्यार है और नेचर के बीच समय बिताना अच्छा लगता है, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। वायनाड केरल की खूबसूरती के बारे में तो आप सभी ने सुना होगा। इसको God's Own Country भी कहा जाता है। वहीं केरल का वायनाड भी मॉनसून में बेहद खूबसूरत लगता है। यहां लेक, गुफाएं, घने जंगल और कई बेहद शानदार झरने देखने लायक होते हैं। अगर आपको ट्रेकिंग और नेचर वॉक पसंद है, तो यह जगह आपके लिए बेस्ट है। ऊटी तमिलनाडु का ऊटी हिल स्टेशन भी बेहद खूबसूरत है। मॉनसून में यहां के चाय के बागान, पहाड़ और बगीचे खिल उठते हैं। अगर आप भी ऊटी आती हैं, तो पायकारा फॉल्स जाना न भूलें। इन बातों का ध्यान बारिश में मौसम की जानकारी लेने के बाद ही ट्रिप प्लान करें। छाता, रेनकोट और अच्छी ग्रिप वाले शूज साथ रखें। लोकल गाइडलाइंस को जरूर फॉलो करें।
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे पहले खास होता है। इस दौरान शिवभक्तों की मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। अगर आप भी इस महीने कहीं घूमने के साथ-साथ भोलेनाथ के दर्शन करना चाहती हैं। तो हिमाचल प्रदेश एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो ऊंचाई पर बने हुए हैं। इस शिव मंदिरों तक पहुंचने का सफर उतना ही खूबसूरत होता है, जितने सुंदर यहां के नजारे होते हैं। बिजली महादेव मंदिर कुल्लू में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित बिजली महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश का सबसे फेमस शिव मंदिर है। यह मंदिर करीब 2,460 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां से कुल्लू और पार्वती वैली का खूबसूरत नजारा बेहद साफ दिखता है। मंदिर की मान्यता है कि समय-समय पर शिवलिंग पर बिजली गिरती है। फिर पारंपरिक तरीके से पुजारी शिवलिंग को जोड़ते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम बिजली महादेव रखा गया है। इसे भी पढ़ें: Amarnath Yatra Rituals: कैसे करें बाबा बर्फानी की पूजा और क्या है प्रसाद वितरण का सही तरीका बैजनाथ शिव मंदिर हिमाचल के कांगड़ा जिले में बैजनाथ मंदिर भी है। जो भोलेनाथ को समर्पित है। यह धौलाधार पर्वत की तलहटी में बना हुआ है। भगवान शिव का यह मंदिर अपनी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी और अपने पुराने इतिहास के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि रावण भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहीं पर तपस्या की थी। सावन के महीने में यहां पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। मणिमहेश चंबा जिले में स्थित मणिमहेश भगवान भोलनाथ का सबसे पवित्र स्थल है। यहां मणिमहेश लेक और इसके पीछे दिखने वाली मणिमहेश पीक बेहद खूबसूरत लगती है। सावन और जन्माष्टमी के आसपास यहां पर मणिमहेश यात्रा भी निकलती है। समुद्र तल से मणिमहेश कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 5,653 मीटर बताई जाती है। अर्द्धनारीश्वर मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से एक अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। जोकि भगवान शिव और मां पार्वती की शक्ति का प्रतीक है। पहाड़ों के बीच बसे इस शहर का धार्मिक माहौल सावन के महीने में अधिक खास हो जाता है। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी सावन के महीने में हिमाचल के ऊंचाई वाले शिव मंदिरों में जाने का प्लान बना रहे हैं। तो मौसम की जानकारी पहले ले लें। क्योंकि बारिश की वजह से कई जगह सड़कें फिसलने वाली हो सकती है। इसलिए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें। साथ में छाता या रेनकोट रख लें। ट्रैकिंग वाले मंदिरों में तब जाएं, जब आप फिजिकली फिट हों।
हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
घुमक्कड़ लोगों को घूमने का सिर्फ मौका ही चाहिए। अगर आप भी अगस्त में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको बता दें कि, इस महीने में लंबी छुट्टी मिलने वाली है। दरअसल, 15 अगस्त को शनिवार है और इसके अगले दिन रविवार है। वहीं, आप 14 अगस्त यानी के शुक्रवार की एक छुट्टी ले लें तो आपके पास करीब तीन दिनों का समय हो जाएगा। इन तीन दिनों में आप किसी भी अच्छी जगह पर घूमने जा सकते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अगस्त के महीने में किन जगहों पर घूमने जा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं Independenc Day Weekend पर 3 दिन की छोटी-सी ट्रिप का प्लान बना सकती हैं। मसूरी उत्तराखंड यदि आप शहर की भीड़ और शोर से दूर, कहीं सुकून भरी जगह पर घूमने जा रहे हैं, तो आप मसूरी जा रही है। अगस्त में यहां पर बारिश होती है। जिससे पहाड़िया हरी-भरी नजर आती हैं। बादलों से घिरे पहाड़ और ठंडा मौसम आपको शांति का एहसास कराएगा। तीन दिन में आप माल रोड पर बिंदास होकर घूम सकते हैं, आसपास के नजारे देख सकते हैं। ध्यान रखें कि मौसम को देखकर ही ट्रिप का प्लान बनाएं। क्योंकि इस दौरान यहां बारिश भी हो सकती है। मुन्नार, केरल बरसात के मौसम में केरल के मुन्नार का नजारा भी काफी खूबसूरत देखने को मिलता है। मुन्नार अपने चाय के बागानों और पहाड़ी नजारों के लिए काफी लोकप्रिय है। ऐसे में आप आपको हरियाली पसंद है, तो आप 3 दिन के लिए यहां जा सकती हैं। बारिश में मुन्नार जाते समय छाता और रेनकोट साथ जरुर रख लें। कूर्ग, कर्नाटक मानसून के समय कूर्ग का घूमने का एक अलग ही मजा होता है। कर्नाटक टूरिज्म के अनुसार, बरसात के समय यहां का मौसम कॉफी के बागान हरे-भरे हो जाते हैं और धुंध से पहाड़ियों का नजारा और भी सुंदर दिखता है। सुंदर से हरे-भरे कॉफी के बगान, पहाड़ और झरने देख सकती हैं। Abbey Falls कूर्ग की सबसे खूबसूरत जगह है। आप यहां जरुर जाएं। जब आप यहां जाने का प्लान बनाएं, तो एक बार मौसम की जानकारी जरुर लें। उदयपुर, राजस्थान मानसून के समय आप झील, महल और सुंदर शहर देखना चाहते हैं, तो आप इस बार स्वतंत्रता दिवस की लॉन्ग छुट्टियों पर राजस्थान के उदयपुर जा सकती हैं। अगस्त में यहां की खूबसूरती देखने के लायक होती है। तीन की ट्रिप के अंदर आप सिटी पैलेस, पिछोला लेक और पुराने शहर के आसपास घूम सकते हैं। ट्रिप पर जाने से पहले इन चीजों पर ध्यान दें - अगस्त के समय पहाड़ों पर भारी बारिश होती है, इसलिए जाने से पहले मौसम का हाल और रास्ते जरुर चेक करें। - ट्रेन और फ्लाइट की टिकट पहले ही बुक कर लें। इसके साथ ही होटल रुम पहले से बुक कर लें। - बरसात से बचने के लिए आप वॉटरप्रूफ बैग, छाता, रेनकॉट और क्विक-ड्राय कपड़े अपने साथ ले जाएं। - बरसात के समय रास्तों में फिसलन अधिक देखने को मिलती है, इसलिए अच्छी ग्रिप वाले स्पोर्ट्स या ट्रैकिंग शूज ही पहनें।
दिल्ली से उज्जैन पहुंचने का सबसे सस्ता तरीका कौन सा? जानिए किराया और पूरा ट्रैवल प्लान
Ujjain Travel Plan: सावन के दिनों में महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन जाने का प्लान कर रहे हैं, तो हम आपको बताएंगे दिल्ली से जाने पर कितना खर्चा आएगा। चलिए आपको पूरा ट्रैवल प्लान समझाते हैं।
Travel Tips: पहले ज्योतिर्लिंग की भव्यता का अनुभव, जानें Diu Airport और Veraval से पहुंचने का रास्ता
सावन में भगवान शिव के दर्शन के लिए इस बार अगर आप भी गुजरात के सोमनाथ मंदिर जाने का सोच रही हैं। तो आपको मंदिर से जुड़ी जानकारी पता होनी चाहिए। भगवान शिव को समर्पित सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर अपने शांत वातावरण, भव्य वास्तुकला और समुद्र किनारे स्थित होने की वजह से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सोमनाथ मंदिर में दर्शन से जुड़े नियमों के बारे में और यहां तक कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी देने जा रहे हैं। ऐसे जाएं गुजरात के सोमनाथ मंदिर सोमनाथ मंदिर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल या सोमनाथ है। इस दौरान आप दीव एयरपोर्ट से भी दर्शन के लिए आ सकती हैं। सोमनाथ मंदिर तक जाने के लिए भारत के करीब सभी बड़े शहरों से सीधी ट्रेन और फ्लाइट मिल जाती है। लेकिन अगर बजट में यहां आना चाहती हैं, तो ट्रेन से आना चाहिए। गुजरात राज्य के सोमनाथ जिले में वेरावल स्टेशन है। यहां से मंदिर की दूरी करीब 6 से 7 किमी है। दीव एयरपोर्ट से मंदिर की दूरी करीब 82 किमी है। यहां तक पहुंचने में आपको 1 घंटे का समय लग जाएगा। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: अगस्त में लद्दाख की हसीन वादियों का उठाएं लुत्फ, जानें Booking Details और Full Cost मंदिर के दर्शन से जुड़े जरूरी नियम सोमनाथ मंदिर में कैमरा, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर जाने की अनुमति नहीं है। एंट्री गेट के पास ही आपको क्लॉक रूम मिलेगा, यहां पर सामान जमा करवाना होगा। मंदिर में प्रवेश से पहले सिक्योरिटी जांच कराना जरूरी है। मंदिर दर्शन के लिए मर्यादित कपड़े पहनकर जाने पर ही एंट्री मिलेगी। दर्शन के लिए आपको लंबी लाइन में लगना पड़ सकता है। मंदिर परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की इजाजत नहीं है। वहीं नियम फॉलो न करने पर आप पर फाइन लग सकता है। आरती के दौरान भक्तों की संख्या ज्यादा होती है। इसलिए समय से पहले पहुंचें। सोमनाथ मंदिर में दर्शन का समय सोमनाथ मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट https://somnath.org/ के मुताबिक मंदिर रोजाना सुबह 06:00 बजे से लेकर रात को 10:00 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में रोजाना 3 बार आरती होती है। ऐसे में आप अपने हिसाब से दर्शन का समय प्लान कर सकती हैं। जिससे कि आपको आरती में शामिल होने का मौका मिल जाए। मंगला आरती का समय - सुबह 7:00 बजे राजभोग आरती का समय - दोपहर 12:00 बजे संध्या आरती का समय - शाम 7:00 बजे मंदिर में शाम को लाइट एंड शो भी होता है। रात को 08:00 बजे से 09:00 बजे तक इस शो का आयोजन होता है। हालांकि मौसम के हिसाब से इसका समय बदल सकता है। सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए गुजरात गए लोग अगले दिन भालका तीर्थ, गीता मंदिर, त्रिवेणी संगम, बाण स्तंभ और प्रभास पाटन संग्रहालय भी घूम सकते हैं।
Travel Tips: अगस्त में लद्दाख की हसीन वादियों का उठाएं लुत्फ, जानें Booking Details और Full Cost
क्या आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ से थक गए हैं और किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं। जहां पर आसमान सीधे जमीन से मिलता है। ऐसा सुकून मिले, जो आपकी सारी थकान को मिटा दे। नीली झीलें, सुकून भरी ठंडी हवाएं और ऊंचे-ऊंचे पहाड़। दरअसल, हम लद्दाख की बात कर रहे हैं, जो हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट का अल्टीमेट सपना है। अगर आप भी इस दुनिया को अपनी आंखों से देखने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है। बता दें कि IRCTC ने आपकी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए बेहद खास टूर पैकेज पेश किया है, जिसका नाम 'लेह विद तुरतक' है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस ट्रिप की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: किन्नौर कैलाश यात्रा का हुआ आगाज: Registration से लेकर Trekking तक, Delhi से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरी Travel Guide टूर पैकेज की डिटेल्स यह टूर पैकेज 6 रात और 7 दिन का है जोकि 'कम्फर्ट' क्लास का फिक्स्ड डिपार्चर फ्लाइट पैकेज है। इसकी शुरूआत हैदराबाद से होगी। यह ट्रिप 13 अगस्त 2026 को शुरू होगा। इस सफर में पर्यटक लद्दाख की सबसे खूबसूरत और फेमस जगहों को एक्सप्लोर कर सकेंगे। कहां-कहां घूमेंगे यात्री पहले दिन लेह पहुंचकर यात्री आराम करेंगे। जिससे कि वहां के मौसम में ढल सकें। शाम को लोकल मार्केट को एक्सप्लोर करेंगे और अगले दिन लेह पैलेस, शांति स्तूप और भारतीय सेना को समर्पित 'हॉल ऑफ फेम' दिखाया जाएगा। शाम वैली यहां पर यात्रियों को गुरुद्वारा पत्थर साहिब के दर्शन होंगे और आप 'मैग्नेटिक हिल' के उस रहस्यमयी खिंचाव को स्वयं महसूस कर सकेंगे। नुब्रा वैली यात्रा के तीसरे दिन आपको दीक्षित और हुंडर गांव ले जाया जाएगा। यहां आप अपने खर्च पर ऊंट की सवारी का लुत्फ ले सकते हैं। तुरतुक वहीं यात्रा के चौथे दिन भारत के सबसे उत्तरी कोने में बसे तुरतुक गांव को एक्सप्लोर करेंगे। यहां की लाइफस्टाइल और संस्कृति बेहद अनोखी है। पैंगोंग झील वहीं यात्रा के 5वें दिन 120 किमी लंबी, खारे पानी की उस अद्भुत पैंगोंग झील को देखेंगे। यह झील फिल्म '3 इडियट्स' के बाद से टूरिस्ट्स की पहली पसंद बन गई है। यह झील भारत और चीन दोनों देशों में फैली है। वापसी का सफर पैंगोंग से लेग वापस आते समय रास्ते में थिकसे मॉनेस्ट्री, चांगला पास और शे पैलेस के नजारे भी देखने को मिलेंगे। पैकेज में क्या-क्या मिलेगा हैदराबाद से लेह तक आने-जाने की फ्लाइट की टिकट है। स्टे का पूरा इंतजाम है, लेह में 3 रातें, 2 रातें नुब्रा और 1 रात पैंगोंग में स्टे होगा। इस पूरे ट्रिप में 6 बार सुबह का नाश्ता, 6 बार दोपहर का खाना और 6 बार रात का डिनर होगा। घूमने-फिरने के लिए शेयरिंग वाली नॉन-एसी गाड़ी की सुविधा मिलेगी। जरूरी इनर लाइन परमिट, ट्रैवल इंश्योरेंस और स्मारकों की टिकट उपलब्ध होंगे। दूसरे दिन से लेकर छठे दिन तक टूर गाइड और एक खास कल्चरल शो देखने को मिलेगा। हर व्यक्ति को हर दिन एक लीटर पानी की बोतल मिलेगी। इमरजेंसी के लिए गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर और सफर में सहायता के लिए IRCTC टूर मैनेजर होंगे। कितना आएगा खर्च अगर आप अकेले सफर पर जाने हैं, तो आपको 55,640 रुपए देने होंगे। वहीं दोनों लोगों के यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति किराया 54,380 रुपए देने होंगे। वहीं तीन लोगों संग यात्रा करने पर 48,730 रुपए देने होंगे। अगर आपके साथ 5 से 11 साल का बच्चा है, तो बेड के साथ 36,970 रुपए देने होंगे। लेकिन बच्चों के साथ बिना बेड के 35,780 रुपए देने होंगे। वहीं ट्रिप पर 2 से 4 साल के बच्चे का किराया 35,720 रुपए है। इन बातों का रखें ध्यान ज्यादा ऊंचाई और कम ऑक्सीजन के कारण 'एक्यूट माउंटेन सिकनेस' की समस्या हो सकती है। इसलिए लेह पहुंचने का पहला दिन पूरी तरह से आराम के लिए रखा जाता है। यात्रा से निकलने से पहले आप डॉक्टर से पूछकर कुछ दवाओं को अपने साथ रखें। शरीर को हाइड्रेटेड रखें, इसके लिए समय-समय पर इलेक्ट्रोलाइट्स, ग्लूकोज और पानी आदि पीते रहें। वहीं इस दौरान ज्यादा खाना, शराब और एंटी डिप्रेसेंट दवाओं को लेने से बचना चाहिए। नुब्रा और पैंगोंग के टेंट/कैंप्स लाइट सिर्फ कुछ घंटों के लिए आती है। सुबह नहाने के लिए सोलर या बाल्टी में गर्म पानी मिलता है। पैंगोंग में वाई-फाई, एटीएम, मोबाइल नेटवर्क, बैंक या पेट्रोल पंप की सुविधा नहीं है। इसलिए अपने साथ जरूरी दवाएं और कैश लेकर आएं। अगर आप ट्रिपल शेयरिंग का रूम लेते हैं, तो तीसरे व्यक्ति के लिए सिर्फ एक एक्स्ट्रा गद्दा दिया जाएगा।
सावन का महीना शुरु हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अलग-अलग तीर्थस्थल पर जाने का प्लान करते हैं। इन्हीं में से एक है किन्नौर कैलाश यात्रा। यहां पर जाने का हर किसी का सपना होता है। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध किन्नौर कैलाश यात्रा है, जहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वैसे यहां पर पहुंचने के लिए कठिन ट्रेक से गुजरना पड़ता है। यदि आप इस बार किन्नौर कैलाश जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले इस बारे में सभी जानकारी जान लें। बता दें कि, इस साल 30 जुलाई से किन्नौर कैलाश यात्रा शुरु हो चुकी है, जो कि 10 अगस्त तक चलने वाली है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनमुति नहीं दी जाएगी। यद आप दिल्ली से यहा पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार यह ट्रैवल गाइड को जरुर देंख लें। किन्नौर कैलाश यात्रा क्यों है खास? आपको बताते चलें कि, हिमाचल प्रदेस के किन्नौर जिले में स्थित किन्नौर कैलाश भगवान शिव का पवित्र धाम है। यहां पर मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग जैसी विशाल चट्टान श्रद्धालुओं के लिए आस्था केंद्र हैं। हर साल सावन में हजारों यहां पर हजारों भक्तजन आते हैं। आपको बता दें कि, यह ट्रेक आसान नहीं है, इसलिए बेहद जरुरी है फिजिकली फिट होना। दिल्ली से कैसे जाएं? पहला स्टेज- दिल्ली से शिमला बता दें कि, दिल्ली से शिमला की दूरी करीब 340-360 किलोमीटर है। इधर से आप बस से भी जा सकते हैं। दूसरा स्टेज- शिमला से रिकांग पियो जब आप शिमला पहुंच जाएंगे, तो रिकांग पियो जाना होगा। जिसकी दूरी करबी 220 किलोमीटर है। यहां से आपको हिमाचल रोडवेज और प्राइवेट बसें दोनों ही मिल जाएंगी। चाहे आप टैक्सी से भी जा सकते हैं। तीसरा स्टेज- रिकांग पियो से टांगलिंग गांव टांगलिंग गांव ही यात्रा का बेस कैंप माना जाता है। बता दें कि, यहीं से किन्नौर कैलाश ट्रेक शुरु होता है। कितना कठिन ट्रैक है? दरअसल, किन्नौर कैलाश ट्रेक की गिनती सबसे कठिन ट्रेक में से एक है। ट्रेकिंग की शुरुआत टांगलिंग गांव से होती है। रास्ते में मिलिंग खाटा और पार्वती कुंड जैसे कहई पड़ाव आते हैं। फिर यहां पर भक्तजन पहुंचते हैं। बता दें कि, यहां की ऊंचाई बहुत ज्यादा है, जिस कारण से सांस फूलना और थकान महसूस होना आम बात है। इसलिए जल्दबाजी करने की बजाय धीरे-धीरे चढ़ाई करें। सबसे जरुरी रजिस्ट्रेशन कराना - आप बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा नहीं कर सकते हैं। - मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मैंडेटरी है। - प्रत्येक दिन 375 श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति मिलेगी। - आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। यात्रा में क्या-क्या साथ रखें? - अपने साथ रेनकोट या पोंचो रखें - मौसम बदलता रहता है इसलिए वुलेन जैकेट रखें। - अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें। - टॉर्च अपने साथ रखें। - पानी की बॉटल, जरुरी दवाइयां। - ट्रेकिंग स्टिक - इसके साथ ही खाने के लिए स्नैक्स अपने साथ रखें। यात्रा के समय किन बातों का ध्यान रखें - भूलकर भी शॉर्टकट रास्ते पर न जाए। - अकेले ट्रेक करने से बचें। - प्लास्टिक और कचरा को रास्ते में न फेंके। - यदि मौसम खराब है, तो आगे बढ़ने की कोशिश न करें। - प्रशासन और लोकल गाइड के निर्देशों का पालन करें। - अगर आपको ट्रेकिंग के दौरान कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत आराम करें। कितने दिन का प्लान बनाएं? -पहला दिन: दिल्ली से शिमला - दूसरा दिन: शिमला से रिकांग पियो - तीसरा दिन- टांगलिंग पहुंचकर ट्रेक की शुरुआत होगी - चौथा दिन- किन्नौर कैलाश दर्शन और वापसी - पांचवां दिन: रिकांग पियो से दिल्ली की वापसी
आजकल युवाओं में घूमने-फिरने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर किसी शांत प्लेस को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। मानसून के समय हर कोई हरियाली से भरपूर, बादल, झरने और सुकून हो वाली जगहों पर घूमने का प्लान बनाते हैं। इस बार आप बरसात के समय भारत के कुछ खूबसूरत गांव को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इस मौसम में यहां पर पहाड़ हरे रंग को हे जाते हैं, बादल घरों के बीच से गुजरने नजर आते हैं और हर तरफ आपको ताजगी का माहौल देखने को मिलता है। इस बार आप भी इन जगहों का आनंद जरुर लें। चलिए आपको इस लेख में बताते हैं मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग, नागालैंड का खोनोमा और अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली आपके लिए सबसे बेहतरीन रहने वाली है। आइए आपको बताते हैं इन तीन गांवों में ऐसा क्या खास है,जो आपको मानसून के समय जरुर विजिट करना चाहिए। मावल्यान्नॉन्ग (मेघालय) आपको बताते चलें कि मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग गांव अपनी साफ-सफाई के लिए दुनियाभर में काफी फेमस है। इसकी गिनती एशिया के सबसे साफ गांव में मानी जाती है। यहां पर रहने वाले सभी लोग इस गांव को हमेशा साफ रखते हैं। बरसात के मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधे, फूल और बारिश से धुले रास्ते गांव की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यहां आप इन जगहों पर विजिट कर सकते हैं- - लिविंग रुट ब्रिज - बांस से बना स्काई व्यू पॉइंट - छोटे-छोटे झरने - खासी गांव की लाइफस्टाइल खोनोमा (नागालैंड) अगर आप नेचर लवर हैं, नागालैंड के खोनोमा गांव में जरुर विजिट करें। यहां की नेचुरल ब्यूटी और पर्यावरण संरक्षण बेहद लोकप्रिय है। बता दें कि, इसे भारत के पहले ग्रीन विलेज में गिना जाता है। बरसात के समय यहां पर सीढ़ीदार वाली खेती, पहाड़ और जंगल के काफी खूबसूरत नजर आते हैं। बादलों से घिरे पहाड़ भी इस गांव की खूबसूरती को बढ़ा देते हैं। यहां पर इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। - गांव में पैदल वॉक करना - सीढ़ीदार खेत देखना - लोकर नागा कल्चर को करीब से देख सकते हैं - नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग जीरो (अरुणाचल प्रदेश) मानसून के समय अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली में घूमने का प्लान जरुर बनाएं। यह जगह अपनी नेचुरल ब्यूटी और अपतानी जनजाति की अनोखी कल्चर के लिए जानी जाती है। इधर मानसून के समय काफी खूबसरत लगता है। बरसात के समय धान के खेत, पहाड़ और हल्का कोहरा मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जिसे देखकर मन एकदम खुश ही हो जाती है। यहां आप क्या-क्या कर सकती हैं- - हरे-भरे धान के खेतों को देख सकती हैं - अपतानी जनजाति के पारंपरिक गांव को एक्सप्लोर कर सकती है - खूबसूरती पहाड़ी रास्ते - यहां लोकल बाजार और खाने का जायका लेना मानसून के समय इन गांव में यात्रा करने से पहले जानें जरुरी बातें - बरसात से बचने के लिए रेनकोट और बढ़िया क्वालिटी की छतरी साथ रखें। - इस दौरान फिसलन ज्यादा हो सकती है, इसलिए मजबूत ग्रिप वाले शूज ही पहनें। - मौसम का अपडेट देखकर ही ट्रिप प्लान करें। - वहां के नियमों का पालन जरुर करें। - दरअसल, पहाड़ी इलाकों में शाम जल्दी हो जाती है, इसलिए समय का भी ध्यान जरुर रखें। - प्लास्टिक या कचरा कहीं भी ने फेंकें, ताकि इन गांवों के सुंदरता बनीं रहे।
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Kedarnath Yatra Travel Plan: सावन के महीने में लोग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र धाम केदारनाथ के दर्शन के लिए जाते हैं। अगर आप भी भगवान शिव के दर्शन करने का मन बना रहे हैं, तो यहां पूरा बजट प्लान और रूट जान लीजिए।
क्या आप भी अगस्त में घूमने का प्लान बना रहे हैं। बरसात के मौसम में घूमने का एक अलग ही मजा होता। चारों तरफ हरियाली और सुकून भरा मौसम होता है। इस बीच, भारतीय रेलवे ने अगस्त 2026 के कई टूर पैकेज को लाइव किया है। इन पैकेज की सबसे बड़ी खासियत यह ही कि इनमें भारत के फेमस हिल स्टेशन, प्राकृतिक पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक विरासत से संबंधित कई जगहों पर घूमने का अवसर प्राप्त होगा। मानसून के दौरान शिमला, मनाली, दार्जिलिंग, ऊटी, मुन्नार और नैनीताल जैसी जगहों पर भी इन पैकेज के जरिए मस्त घूमा जा सकता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं मानसून के समय घूमने का शानदार पैकेज। IRCTC के अगस्त टूर पैकेज से सिक्किम जाएं घूमने बारिश के मौसम में सिक्किम का नजारा देखने लायक होता है। अगस्त के महीने में यदि आप भी सुंदर पहाड़ी और बदलों के बीच खोना चाहते हैं, तो आप सिक्किम टूर पैकेज जरुर बुक करें। यहां के खूबसूरत झरने, हरे-भरे पहाड़ और करीब से उड़ते हुए बादल आपको देखने को मिल जाएंगे। वैसे यह जगह प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है, इसके साथ ही यहां पर शांति काफी देखने को मिलती है। पैकेज की डिटेल्स - पैकेज का नाम SIKKIM SILVER - पैकेज कोड: EHH121 - समय: 5 रातें/6 दिन - पैकेज की शुरुआत: बागडोगरा / न्यू जलपाईगुड़ी - डेस्टिनेशन (घूमने की जगहें): दार्जिलिंग / गंगटोक / कलिम्पोंग - पैकेज की शुरुआत: 03 अगस्त 2026 - यात्रा कैसे होगी? बस सिक्किम टूर पैकेज फीस क्या है? गौरतलब है कि सिक्किम में गाड़ियों का किराया काफी ज्यादा होता है, ऐसे में आप पैकेज से जाएंगी ,तो आपको काफी फायदा मिलेगा। इस पैकेज में आपको 5 रातें/6 दिन के लिए होटल, घूमना-खाना और इंश्योरेंस जैसी तमाम सुविधाएं इसमें शामिल है। वैसे आप अलग बुक करेंगी तो आपको काफी महंगा पड़ सकता है। पैकेज फीस - 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति फीस ₹29,350 है। - 3 लोगों के साथ यात्रा करने पर पैकेज फीस प्रति व्यक्ति ₹22,700 है। - 4 लोगों का ग्रुप: ₹22,500 प्रति व्यक्ति - 6 लोगों का ग्रुप: ₹18,610 प्रति व्यक्ति Deluxe कैटेगरी - 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर ₹37,350 प्रति व्यक्ति फीस होगी। - 3 लोगों के साथ यात्रा करने पर ₹28,700 प्रति व्यक्ति फीस देनी होगी। - 4 लोगों का ग्रुप: ₹30,500 प्रति व्यक्ति -6 लोगों का ग्रुप: ₹26,610 प्रति व्यक्ति सिक्किम पैकेज में क्या सुविधाएं मिल रही हैं? दरअसल, पिक-सीजन के मुकाबले प्रति व्यक्ति 8000 से 10,000 रुपये की सीधी बचत देखने को मिलेगी। इसके अतिरिक्त कई जगहों के लिए परमिट बनवाना पड़ता है। इस पैकेज को बुक करने से ट्रांसपोर्ट और होटल का मैनेजमेंट टूर कंपनी करती है। इसलिए आपका समय और मेहनत दोनों ही बच जाएंगे। - होटल प्रति व्यक्ति के अनुसार है। - जहां भी आप इस पैकेज में घूमने जाएंगे, वहां आप शेयरिंग वाहन से जाएंगे। - नाश्ता और रात का भोजन शामिल है। - इस पैकेज में आपको यात्रा बीमा भी मिलेगा।
देश के ज्यादातर राज्यों में मानसून ने दस्तक दे दी है। कई जगहों पर बारिश से मौसम बेहद सुहावना हो गया है। तो कहीं बादल आफत बनकर बरसते हैं, तो कई पहाड़ी इलाकों पर लैंडस्लाइड, सड़कें बंद होने की समस्याएं देखने को मिल रही है। ऐसे में अगर आप भी इन जगहों पर घूमने की प्लानिंग कर रहे थे, तो इस यात्रा को टालना बेहतर होगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि आपको अपनी छुट्टियां पूरी तरह से कैंसिल करने की जरूरत नहीं है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 4 ऐसे हिल स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं कि मानसून के दौरान आप इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। वहीं यह जगहें सेफ भी हैं और आपकी ट्रिप भी यादगार बनेगी। शिमला मॉनसून में घूमने के लिए शिमला अच्छी जगह है। पहाड़ों की रानी कहलाने वाला शिमला मॉनसून के दौरान बेहद खूबसूरत नजर आता है। यहां पर आप जाखू मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। चाय के साथ पहाड़ों पर तैरते बादलों और मनमोहक नजारों का आनंद ले सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: मानसून सीजन में बना लें तमिलनाडु के इन 5 हिल स्टेशंस का प्लान, हमेशा कि लिए यादगार बन जाएगी ट्रिप कूनूर मॉनसून में आप तमिलनाडु में स्थित कुनूर भी घूमने के लिए जा सकते हैं। यह एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। यहां पर हरे-भरे चाय के बागान और भी अधिक खूबसूरत दिखते हैं। यहां पर सिम्स पार्क एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके अलावा आप लैम्ब्स रॉक और डॉल्फिन्स नोज जैसे शानदार नजारों का आनंद ले सकते हैं। वहीं आप फेमस नीलगिरि रेलवे की सवारी का मजा ले सकती हैं। अगर आप भी फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। माउंट आबू बारिश के मौसम में आप माउंट आबू भी घूमने जा सकते हैं। यह राजस्थान का ऐसा हिल स्टेशन है, जो बारिश के मौसम में हरियाली से खिल उठता है और इसकी खूबसूरती भी देखने लायक होती है। ऐसे में अगर आप भी किसी ऐसी जगह घूमने जाना चाहते हैं, जहां पर लैंडस्लाइड न हो। तो यह एक परफेक्ट जगह है। सापुतारा मॉनसून में शांति का अनुभव करने के लिए आप गुजरात के सापुतारा हिल स्टेशन को एक्सप्लोर कर सकते हैं। बारिश के मौसम में इस हिल स्टेशन की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है। वहीं यहां की हरियाली और झरनों की खूबसूरती आपका दिल जीत लेगी। सातपुरी झील में आप बोटिंग भी कर सकते हैं। वहीं रोपवे की सवारी कर शानदार दृश्य देख सकते हैं।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
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टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
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सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
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