भरतपुर जेल में प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने के मामले में हेड कांस्टेबल निलम्बित
भरतपुर। राजस्थान में सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार भरतपुर की सेवर सेंट्रल जेल में कैदियों तक प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने के मामले में जेल प्रशासन ने एक हेड कांस्टेबल को तुरंत प्रभाव से निलंबित करके दो बाहरी संदिग्ध लोगों को पुलिस के हवाले किया है। जेल के प्रशासनिक सूत्रों ने गुरुवार को की गई इस कार्रवाई […] The post भरतपुर जेल में प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने के मामले में हेड कांस्टेबल निलम्बित appeared first on Sabguru News .
अलवर में हवाला कारोबार पर पुलिस की कार्रवाई, 33.62 लाख रुपए बरामद
अलवर। राजस्थान में अलवर के कोतवाली थाना क्षेत्र में हवाला कारोबार के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार करके उनसे 33 लाख 62 हजार 623 रुपये की नकदी बरामद की है। पुलिस को आशंका है कि यह रकम हवाला नेटवर्क के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाई जा रही […] The post अलवर में हवाला कारोबार पर पुलिस की कार्रवाई, 33.62 लाख रुपए बरामद appeared first on Sabguru News .
हिज्बुल्ला ने लेबनान-इजराइल युद्धविराम को नकारा, कहा, यह आत्मसमर्पण
बेरूत। लेबनान के चरमपंथी संगठन हिज्बुल्ला के प्रमुख नईम कासिम ने इजरायल-लेबनान के बीच हुए युद्धविराम को सिरे से खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि यह बस एक अलग तरीके का ‘आत्मसमर्पण’ है। उन्होंने इज़राइल और लेबनान द्वारा एक नए युद्धविराम समझौते की घोषणा किए जाने के एक दिन से भी कम समय बाद […] The post हिज्बुल्ला ने लेबनान-इजराइल युद्धविराम को नकारा, कहा, यह आत्मसमर्पण appeared first on Sabguru News .
भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए घोषित किए 11 उम्मीदवारों के नाम
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने विभिन्न राज्यों से राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार को 11 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग मध्य प्रदेश से प्रत्याशी बनाए गए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने आज बताया कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने अरुणाचल, गुजरात मध्य प्रदेश, […] The post भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए घोषित किए 11 उम्मीदवारों के नाम appeared first on Sabguru News .
इजराइल-लेबनान युद्धविराम समझौते के बाद तेल कीमतों में गिरावट
लंदन। इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम समझौता होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि अमरीका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए व्यापक समझौते की दिशा में प्रगति हो सकती है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से […] The post इजराइल-लेबनान युद्धविराम समझौते के बाद तेल कीमतों में गिरावट appeared first on Sabguru News .
सिन्धपुति महाराजा दाहरसेन के 1314वें बलिदान दिवस पर होंगे कई कार्यक्रम
अजमेर। राष्ट्र रक्षा में बलिदान हुए सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन के 1314वें बलिदान दिवस के उपलक्ष में तीन दिवसीय आयोजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह निर्णय कवंल प्रकाश किशनानी की अध्यक्षता में स्वामी काम्पलेक्स में हुई समिति की बैठक लिया गया। समिति के महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने बताया कि सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन के बलिदान दिवस पर […] The post सिन्धपुति महाराजा दाहरसेन के 1314वें बलिदान दिवस पर होंगे कई कार्यक्रम appeared first on Sabguru News .
6 मई की शाम। बंगाल चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने घर पर TMC विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें अभिषेक बनर्जी की चुनावी भूमिका की तारीफ करते हुए खड़े होकर तालियां बजाने को कहा। कुछ विधायक खड़े हुए। कुछ चुपचाप बैठे रहे। बैठे रहने वालों में एक थे ऋतब्रत बनर्जी। ठीक 29 दिन बाद वही ऋतब्रत बंगाल विधानसभा के नेता विपक्ष बन चुके हैं। उन्होंने 58 बागी विधायकों को साथ लेकर असली TMC का दावा किया है। आखिर ये सब हुआ कैसे, कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी और क्या TMC को बीजेपी खत्म कर देगी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: TMC में 58 बागी विधायकों का अलग धड़ा कैसे बन गया? जवाबः 4 मई को पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजे आए। 41% वोट शेयर के बावजूद TMC सिर्फ 80 सीटें जीत पाई। बीजेपी को 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला। 6 मई की मीटिंग का किस्सा हमने ऊपर सुनाया। पश्चिम बंगाल की सीनियर पत्रकार शिखा मुखर्जी बताती हैं कि ममता उस बैठक में भतीजे अभिषेक की तारीफ कर रही थीं, जबकि ऋतब्रत बनर्जी, संदीपन साहा और कुणाल घोष जैसे नेता अभिषेक बनर्जी और I-PAC को हार का जिम्मेदार ठहरा रहे थे। IPAC ने ही टीएमसी के चुनावी प्रचार का जिम्मा संभाला था। टीएमसी में बगावत का असली खेल शुरू हुआ 22 मई से। पश्चिम बंगाल के सीनियर पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं, ‘22 मई को ऋतब्रत राज्यसभा की कुछ औपचारिकताओं के सिलसिले में दिल्ली गए थे। इसी दिन CM शुभेंदु अधिकारी भी दिल्ली स्थित बंग भवन में मौजूद थे। लंच पर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई।’ बंगाल लौटने के बाद ऋतब्रत ने अभिषेक बनर्जी से असंतुष्ट नेताओं को एकजुट करना शुरू किया। ऋतब्रत की कोशिश तब सफल हुई, जब ममता की 31 मई की बैठक में 80 में से 20 विधायक ही पहुंचे। 1 जून की रात कोलकाता के एक हॉस्टल में ऋतब्रत की TMC विधायकों के साथ बैठक की खबरें सामने आईं, तो बगावत की अटकलों पर मुहर लग गई। 1 जून को ममता ने ऋतब्रत और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की वजह से TMC से बाहर कर दिया। 4 जून की सुबह ममता ने TMC का पूरा संगठन भंग करने का ऐलान किया। शाम तक खबर आ गई ऋतब्रत ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु को 58 बागी विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपा है। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया और विधानसभा में विपक्ष के नेता के कमरे की चाबी ऋतब्रत को सौंप दी। शिखा मुखर्जी बताती हैं कि ऋतब्रत मुस्लिम विधायकों के समर्थन के बिना पार्टी नहीं तोड़ सकते थे, क्योंकि 80 में से 34 विधायक मुस्लिम थे। इसीलिए नेता विपक्ष बनने के बाद ऋतब्रत ने 4 डिप्टी लीडर चुने हैं, जिनमें से दो मुस्लिम हैं- सबीना यास्मीन और जावेद अहमद खान। वहीं अख्रुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है।’ ममता ने विधानसभा स्पीकर रथींद्र दास की भूमिका पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, 'जिस नेता को 2 दिन पहले पार्टी से निकाला गया, उसे स्पीकर विपक्ष का नेता कैसे चुन सकते हैं? ऋतब्रत के पास पार्टी का लेटरहेड भी नहीं था, उन्होंने कोरे कागज पर रिजॉल्यूशन लिखकर स्पीकर को भेजा, फिर भी स्पीकर ने उसे स्वीकार कैसे कर लिया?' सवाल-2: ममता की जमीन खिसकाने वाले ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं? जवाबः 47 साल के ऋतब्रत बनर्जी कोलकाता के रहने वाले हैं। 1990 के दशक में उन्होंने वामपंथी स्टूडेंट पॉलिटिक्स से शुरूआत की। वो CPI (M) की स्टूडेंट विंग स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI के जनरल सेक्रेटरी बने। ऋतब्रत करीब 8 साल तक SFI से जुड़े रहे। बेबाक भाषणों की बदौलत उनकी छवि युवा वामपंथी नेता के तौर पर मजबूत हुई। कहा जाता है कि वो CPI(M) के महासचिव रहे दिवंगत सीताराम येचुरी के भी करीबी थे। 2011 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए ममता बनर्जी ने कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट खाली कर दी। उपचुनाव में CPI (M) ने ऋतब्रत को उम्मीदवार बनाया, लेकिन वो चुनाव हार गए। 2014 में CPI (M) ने सिर्फ 35 साल के ऋतब्रत को राज्यसभा सांसद बना दिया। उन्हें एपल की स्मार्टवॉच और मोंटब्लैंक पेन जैसी महंगी चीजों का इस्तेमाल करते देखा गया। कहा जाता है कि ‘लग्जरी लाइफस्टाइल’ के चलते CPI (M) के टॉप लीडर्स से उनके मतभेद हो गए थे। 2017 में एक इंटरव्यू में ऋतब्रत ने कहा कि उनकी लड़ाई प्रकाश करात, वृंदा करात जैसे लीडर्स से है। इस बयान के कुछ ही दिन बाद CPI(M) ने उन्हें पहले सस्पेंड किया और फिर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसी साल ऋतब्रत के साथ एक और विवाद हुआ। एक महिला ने उन पर शादी का झूठा वादा करके बलात्कार का आरोप लगाया। ऋतब्रत ने महिला पर उन्हें ब्लैकमेल करके पैसा उगाही की कोशिश करने का आरोप लगाया। 2018 में ऋतब्रत TMC में शामिल हो गए। उन्हें TMC की ‘ट्राइबल वेलफेयर कमेटी’ का संयोजक बनाया गया। जल्द ही वे TMC की मजदूर शाखा कही जाने वाली ‘इंडियन नेशनल तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ यानी INTTUC के स्टेट प्रेसिडेंट बन गए। 2024 में TMC से राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ममता सरकार का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद TMC ने ऋतब्रत को उनकी जगह राज्यसभा भेज दिया। तब अभिषेक बनर्जी ने तारीफ करते हुए कहा था, 'ऋतब्रत ने संगठन को मजबूत करने और पूरे राज्य में ट्रेड यूनियन वर्कर्स के हक के लिए काम किया है। भले थोड़ा समय मिले, लेकिन आखिर समर्पण और कड़ी मेहनत का फल जरूर मिलता है।’ 2 अप्रैल 2026 को ऋतब्रत का राज्यसभा क्रायकाल खत्म हुआ। इसके बाद TMC ने उन्हें उलुबेरिया पूर्व विधानसभा सीट से टिकट दिया। प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं कि ऋतब्रत में बड़े नेताओं के करीब बने रहने की खूबी है। वे CPI(M) की सरकार में पूर्व सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्या के करीब रहे, जिसकी बदौलत उन्हें 2011 में विधानसभा का टिकट मिला और चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने 2014 में उन्हें राज्यसभा भेज दिया। इसके बाद TMC में रहते हुए वे शुभेंदु के करीब आए, जिसका फायदा उन्हें अब जाकर मिलता हुआ दिख रहा है। सवाल-3: क्या ऋतब्रत 60 विधायकों के साथ TMC हथिया लेंगे? जवाबः बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनने के बाद ऋतब्रत ने कहा, ‘हम विधानसभा में TMC का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। TMC की टिकट पर जीते 60 विधायक एकजुट हैं। 2 लोग फिलहाल राज्य से बाहर हैं। ममता बनर्जी से अनुरोध करते हैं कि वे हमारी सलाहकार बनें और हमारा मार्गदर्शन करें। हम एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। सदन में मजबूती से बीजेपी का सामना करेंगे।’ ऋतब्रत ने रथींद्र दास को बागी नेताओं की सहमति वाला जो पत्र भेजा, वो TMC के लेटरपैड के बजाय सफेद कागज पर लिखा गया था। इसमें ममता बनर्जी को ही TMC का नेता बताया गया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता। यानी ऋतब्रत खुले तौर पर दो संकेत दे रहे हैं। पहला- ममता बनर्जी कॉम्प्रोमाइज करके TMC की प्रतीकात्मक नेता बनी रह सकती हैं, दूसरा- वो बागी विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल नहीं होंगे। TMC के एक सीनियर सांसद ने दावा किया, 'जल्द ही TMC के सांसदों में भी फूट पड़ सकती है। यह TMC के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। एकनाथ शिंदे और अजीत पवार की तरह, बागी TMC सांसदों को भी चुनाव निशान और पार्टी के नाम का अधिकार मिल जाएगा।' दरअसल, अगर किसी पार्टी के कुल विधायकों में से दो-तिहाई या उससे ज्यादा विधायक अलग गुट बना लें और पार्टी के नेता के बजाय किसी और को लीडर मान लें, तो ऐसी स्थिति में दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। उल्टा पार्टी के चुनाव निशान पर भी इसी गुट का दावा मजबूत माना जाता है। कई जानकारों का मानना है कि फिलहाल बीजेपी नहीं चाहती कि TMC पूरी तरह टूट जाए या उसके बागी धड़े का उनमें विलय हो जाए। सवाल-4: क्या वाकई बीजेपी नहीं चाहती बंगाल में TMC बिखर जाए? जवाबः भाजपा सांसद सौमित्र खान ने दावा किया था कि TMC के लगभग 50 विधायक और 20 सांसद हमारे संपर्क में हैं। अगर आलाकमान चाहे, तो आज ही TMC का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बागी विधायकों ने बीजेपी से संपर्क भी किया था, लेकिन बीजेपी ने उनके लिए दरवाजा नहीं खोला, क्योंकि उसे सरकार बनाने के लिए संख्याबल की जरूरत नहीं है। पॉलिटिकल एनालिस्ट और पत्रकार सायंतन घोष X पर लिखते हैं… प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं, ‘ऋतब्रत के इस सकारात्मक विरोध वाले बयान और शुभेंदु से उनकी पुरानी नजदीकियों से राजनीतिक हलकों में यही चर्चा है कि ऋतब्रत का गुट BJP की बी-टीम बनकर रह जाएगा।’ पश्चिम बंगाल के सीनियर पत्रकार स्निग्धेंदु भट्टाचार्य बताते हैं, '2024 में भाजपा ने ओडिशा में चुनाव जीतने के बावजूद विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल का अस्तित्व बनाए रखने में मदद की थी, ताकि राज्य में कांग्रेस फिर से एक्टिव न हो सके। पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है।' सवाल-5: क्या TMC के बिखरने से वाकई लेफ्ट-कांग्रेस का फायदा होगा? जवाबः 2026 के बंगाल चुनाव में कांगेस 2 और CPI(M) सिर्फ 1 सीट जीती है। हालांकि दोनों का वोट शेयर मिलाकर करीब 7.5% है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि TMC के कमजोर होने से बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट की भूमिका बढ़ सकती है… हालांकि प्रसून आचार्य जोर देते हैं कि ममता के लिए पार्टी की अंदरूनी कलह बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अचानक उनका प्रभाव खत्म हो जाएगा और वोटबैंक लेफ्ट या कांग्रेस में शिफ्ट हो जाएगा। *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- बंगाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… क्या TMC बिखरने वाली है, 4 संकेत; बंगाल में एकबार सत्ता जाने के बाद पार्टियां कभी वापसी क्यों नहीं कर पातीं बंगाल में आजादी के बाद से ही एक ट्रेंड है। जो पार्टी सत्ता से एकबार बेदखल हुई, वो कभी लौट नहीं सकी। सिर्फ कांग्रेस एक अपवाद है। 2026 का बंगाल चुनाव हारने के बाद TMC भी सबसे मुश्किल दौर में है। पढ़ें पूरी खबर…
सीड बॉल कार्यशाला में बच्चों ने सीखा पर्यावरण संरक्षण का अनोखा मंत्र
मिट्टी और बीज से तैयार किए सीड बॉल, पक्षियों के लिए परिंडे भी वितरित अजमेर। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भारत विकास परिषद अजमेर मुख्य शाखा, सेंट्रल एकेडमी स्कूल एवं ऑप्टिमिस्टिक आउटरीच ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में सेंट्रल एकेडमी स्कूल के समर कैम्प में […] The post सीड बॉल कार्यशाला में बच्चों ने सीखा पर्यावरण संरक्षण का अनोखा मंत्र appeared first on Sabguru News .
झारखंड के पलामू जिले के राजहरा स्टेशन के समीप मालगाड़ी के 15 डब्बे पटरी से उतरे
मेदिनीनगर। झारखंड के पलामू जिले के धनबाद रेलमंडल अंतर्गत बरवाडीह-गढवारोड रेलखंड के बीच रजहरा रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर पहले गुरूवार दोपहर कोयला से लदा मालगाड़ी के 15 डब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यह मालगाड़ी टोरी से मुगलसराय जा रही थी। फिलहाल यह हादसा […] The post झारखंड के पलामू जिले के राजहरा स्टेशन के समीप मालगाड़ी के 15 डब्बे पटरी से उतरे appeared first on Sabguru News .
मुंबई में मेट्रो ट्रेन की लिफ्ट में छेड़छाड़ मामला : गीतांजलि एक्सप्रेस ट्रेन से आरोपी अरेस्ट
मुंबई। महाराष्ट्र में मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित धनुकरवाड़ी स्टेशन पर मुंबई मेट्रो ट्रेन की लिफ्ट के अंदर 17 साल की किशोरी से कथित तौर पर छेड़छाड़ करने के आरोप में 44 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि कांदिवली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया […] The post मुंबई में मेट्रो ट्रेन की लिफ्ट में छेड़छाड़ मामला : गीतांजलि एक्सप्रेस ट्रेन से आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
मानसून ने केरल में दस्तक दी, तमिलनाडु के सीमावर्ती जिलों में भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद
चेन्नई। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार को केरल में दस्तक दी, जिससे पश्चिमी घाट और तमिलनाडु के सीमावर्ती जिलों में भारी बारिश होने तथा भीषण गर्मी के प्रकोप से राहत मिलने के आसार हैं। मौसम विभाग ने इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के शेष हिस्सों, मध्य-पश्चिम और […] The post मानसून ने केरल में दस्तक दी, तमिलनाडु के सीमावर्ती जिलों में भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद appeared first on Sabguru News .
सूर्यास्त की ओर T20I कप्तान का करियर, बाहर होने की अटकलों के बीच क्या लेंगे संन्यास
T-20I विश्वकप के विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जब घरेलू मैदान पर टी-20 विश्वकप जीता था तो कहा था यह अंत नहीं है वह एशियन गेम्स तथा ओलंपिक में भी भारत को बतौर कप्तान गोल्ड दिलाना चाहते हैं। लेकिन अब ऐसा मुमकिन होता नहीं दिख रहा क्योंकि मीडिया सूत्रों की मानें तो 6 जुलाई को एशियन गेम्स और आयरलैंड दौरे के लिए जब भारतीय टीम की घोषणा होगी तो ना केवल उनकी कप्तानी जाएगी बल्कि टीम में भी उनकी जगह नहीं होगी।ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वह ड्रॉप होने से पहले संन्यास लेना मंजूर करेंगे। लगातार दो बड़े ICC खिताब जीतने के बावजूद कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) की कुर्सी अब खतरे में नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक BCCI और चयनकर्ता अब अगले टी20 साइकिल को ध्यान में रखते हुए नई लीडरशिप पर दांव लगाने की तैयारी कर रहे हैं, और इस रेस में सबसे आगे नाम है श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) का। सूर्या की कप्तानी शानदार, लेकिन बल्लेबाजी बनी चिंता सूर्यकुमार यादव ने जुलाई 2024 में भारत की टी20 कप्तानी संभाली थी। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने Asia Cup 2025 और T20 World Cup 2026 जैसे बड़े टूर्नामेंट अपने नाम किए। बतौर कप्तान उनका जीत प्रतिशत 76.92% (Win Percentage as Captain) रहा, जो किसी भी भारतीय टी20 कप्तान के लिए बेहद प्रभावशाली आंकड़ा माना जा रहा है। हालांकि, कप्तानी में सफलता के बावजूद उनकी बल्लेबाजी लगातार सवालों के घेरे में रही। कप्तान बनने के बाद से सूर्या ने 45 टी20 मुकाबलों में सिर्फ 932 रन बनाए हैं। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी उन्होंने 9 पारियों में 242 रन बनाए, लेकिन इनमें से 84 रन केवल अमेरिका के खिलाफ आए थे। बड़े मुकाबलों में उनका बल्ला दमदार असर नहीं छोड़ सका। आईपीएल 2026 में भी फीका रहा प्रदर्शन मुंबई इंडियंस के लिए खेल रहे सूर्यकुमार यादव का आईपीएल 2026 सीजन भी अब तक काफी निराशाजनक रहा है। सूर्यकुमार ने 12 पारियों में सिर्फ़ 18 की औसत से 2 अर्धशतक के साथ 270 रन बनाए हैं। टीम Points Table में नौवें स्थान पर रही । पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस का यह खराब प्रदर्शन भी कहीं न कहीं सूर्या पर दबाव बढ़ा गया। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि सूर्या लंबे समय से कलाई (Wrist Issue) की समस्या से जूझ रहे हैं। टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भी वह भारी टेपिंग के साथ बल्लेबाजी करते नजर आए थे। आईपीएल 2025 में भी उनकी कलाई पर मोटी स्ट्रैपिंग देखी गई थी। टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं, लेकिन यह चोट अब उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती दिख रही है।
तमिलनाडु के कीरैकडाई में किशोरी के यौन शोषण के आरोप में कैब चालक अरेस्ट
चेन्नई। तमिलनाडु के त्रिची जिले के कीरैकडाई इलाके में 14 साल की किशोरी के यौन शोषण के आरोप में गुरुवार को एक कैब चालक को गिरफ्तार किया गया है। कैब चालक पर किशोरी को नशीला पदार्थ खिलाकर यौन शोषण करने का आरोप है। बाद में लोगों ने उस चालक को पकड़ लिया, उसकी जमकर पिटाई […] The post तमिलनाडु के कीरैकडाई में किशोरी के यौन शोषण के आरोप में कैब चालक अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
'मां बहन' बनी माधुरी दीक्षित के अभिनय का नया अध्याय, हर फ्रेम में छाईं एक्ट्रेस
कई सालों से अपने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतती आ रही माधुरी दीक्षित, नेटफ्लिक्स की नई फिल्म 'मां बहन' में एक बिल्कुल अलग अंदाज़ में नजर आ रही हैं। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसा किरदार निभाया है जो रंगों से भरपूर होने के साथ-साथ भावनात्मक गहराई भी रखता है। माधुरी ने इस भूमिका को पूरी ईमानदारी और सहजता के साथ निभाया है। ALSO READ: बेबी पिंक कॉरसेट ड्रेस में पूजा हेगड़े ने बिखेरा हुस्न का जलवा, किलर पोज से मचाई सनसनी इस बार उनका किरदार उनकी पारंपरिक हीरोइन वाली छवि और 'धक-धक गर्ल' वाली पहचान से काफी अलग है। अपने करियर के इस पड़ाव पर ऐसा किरदार चुनना एक साहसिक फैसला है। माधुरी यह दिखाती हैं कि वह समय के साथ खुद को बदल सकती हैं, लेकिन उनकी स्क्रीन पर मौजूदगी और अभिनय की ताकत आज भी वैसी ही है। फिल्म में वह एक साधारण मध्यमवर्गीय महिला की भूमिका निभा रही हैं, जिसे दर्शक उनके साथ कम ही देख पाए हैं। उनके चेहरे के भाव, उनकी कॉमिक टाइमिंग और उत्तर भारतीय लहजे में बोले गए संवाद इस किरदार को और भी खास बना देते हैं। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें 'माँ बहन' में माधुरी दीक्षित पूरी तरह छाई हुई हैं। उन्होंने व्यंग्य, हास्य और आत्मविश्वास का बेहतरीन संतुलन दिखाया है। इस फिल्म के जरिए वह एक बार फिर साबित करती हैं कि शानदार अभिनय उम्र का मोहताज नहीं होता और आज भी वह नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों को कड़ी टक्कर दे सकती हैं।
भठकंडी गांव में हुई डॉ. प्रभात की वापसी, इस दिन प्राइम वीडियो पर होगा 'ग्राम चिकित्सालय' का प्रीमियर
प्राइम वीडियो ने दर्शकों का इंतज़ार खत्म करते अपनी प्राइम ऑरिजिनल सीरीज़, 'ग्राम चिकित्सालय' के दूसरे सीज़न के ग्लोबल प्रीमियर की घोषणा की। यह सीरीज 23 जून को स्ट्रीम होगी। ललितम तिवारी के निर्देशन में बनी सीरीज़, ग्राम चिकित्सालय को द वायरल फीवर ने प्रोड्यूस किया है, जिसकी कहानी वैभव सुमन और श्रेया श्रीवास्तव ने लिखी है। भठकंडी नाम के एक काल्पनिक गाँव पर आधारित यह दिल को छू लेने वाली कॉमेडी-ड्रामा सीरीज़, इस बार भी हंसी-मजाक और जज्बातों से भरे अपने सफ़र के जरिए देश के गांवों में स्वास्थ्य सेवा की कड़वी सच्चाइयों को सामने लाती है। इस सीरीज़ में गांव के लोगों के जुझारूपन, उनका प्यार और उनके अनोखे अंदाज़ को भी बखूबी दिखाया गया है। fffffffffffff ग्राम चिकित्सालय में अमोल पाराशर, आकाश मखीजा, आनंदेश्वर द्विवेदी, विनय पाठक, आकांक्षा रंजन कपूर, और गरिमा विक्रांत सिंह फिर से अपने-अपने किरदारों में नजर आने वाले हैं, जबकि इस सीज़न में दिनेश लाल यादव ने भी एक अहम किरदार निभाया है। यह नया सीज़न भारत के साथ-साथ दुनिया भर के 240 देशों एवं क्षेत्रों में 23 जून को सिर्फ़ प्राइम वीडियो पर हिंदी में प्रीमियर के लिए तैयार है। पहला सीज़न जहां खत्म हुआ था, वहीं से इसके आगे की कहानी शुरू होती है। इस नए सीज़न में भी डॉ. प्रभात (अमोल पाराशर) का सफर जारी है जो भठकंडी के एक बदहाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को फिर से पहले जैसा बनने के अपने मिशन में जुटे हैं। गांव वालों के मन में थोड़ा शक होने के बाद भी वे धीरे-धीरे उनका भरोसा तो जीत लेते हैं, पर मुश्किलें हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेतीं। ALSO READ: बेबी पिंक कॉरसेट ड्रेस में पूजा हेगड़े ने बिखेरा हुस्न का जलवा, किलर पोज से मचाई सनसनी कहानी में इस बार सिद्धांतों और कड़वी हकीकत के बीच के जबरदस्त टकराव को और भी गहराई से दिखाया गया है, जब डॉ. प्रभात को समझ आता है कि गाँव के अस्पताल को चलाने के लिए सिर्फ़ डॉक्टरी की पढ़ाई ही काफी नहीं होती है। इस मौके पर प्राइम वीडियो, इंडिया के डायरेक्टर और कंटेंट लाइसेंसिंग हेड मनीष मेघानी ने कहा, दर्शकों की पसंद धीरे-धीरे बदलती जा रही है, और हमने देखा है कि अब उन्हें सिर्फ शहरों की ही नहीं, बल्कि गाँव की मिट्टी से जुड़ी कहानियां भी खूब पसंद आ रही हैं। ग्राम चिकित्सालय ने रोज़मर्रा के आम जीवन को दर्शाने वाली कहानी और दिल को छू लेने वाले जज्बातों के ज़रिए इसी ट्रेंड को दर्शकों के सामने पेश किया है। सीरीज के निर्देशक ललितम तिवारी ने कहा, हमें खुशी है कि हम ग्राम चिकित्सालय के दूसरे सीज़न के साथ उस कहानी को आगे बढ़ा रहे हैं, जो हमारे लिए सिर्फ़ एक गांव पर आधारित एक कॉमेडी-ड्रामा से कहीं बढ़कर रही है। पहले सीज़न से ही हमने गाँव की असल जिंदगी को उसकी हकीकत के साथ पूरी ईमानदारी से दिखाने की कोशिश की है।
कोटा में जेईई कोचिंग छात्र ने की आत्महत्या
कोटा। देशभर में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रमुख केंद्र कोटा में एक और कोचिंग छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। गत दो वर्षों से संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) की तैयारी कर रहे 17 वर्षीय छात्र ने बुधवार देर रात अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। […] The post कोटा में जेईई कोचिंग छात्र ने की आत्महत्या appeared first on Sabguru News .
शाहजहांपुर में सौतेले पिता ने मासूम बच्ची की हत्या कर खेत में दफनाया
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर जिले के रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र में चार वर्षीय मासूम बच्ची की पीट-पीटकर हत्या कर शव को खेत में दफनाने के मामले में पुलिस ने सौतेले पिता समेत 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी सौतेले पिता और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया है। […] The post शाहजहांपुर में सौतेले पिता ने मासूम बच्ची की हत्या कर खेत में दफनाया appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ जिले में पटवारी 15000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट
हनुमानगढ़। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील के चाहूवाली पटवार मण्ड़ल के राजस्व पटवारी श्रीराम को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि एसीबी चौकी हनुमानगढ़ को शिकायत मिली कि पटवारी द्वारा परिवादी के पिता […] The post हनुमानगढ़ जिले में पटवारी 15000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
खरगोन : सार्वजनिक शौचालय में महिला ने बच्चे को जन्म दिया
खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव बस स्टैंड स्थित एक सार्वजनिक शौचालय में एक गर्भवती महिला ने बच्चे को जन्म दिया। प्राथमिक उपचार के बाद महिला और नवजात को जिला अस्पताल खरगोन में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। भीकनगांव के ब्लॉक मेडिकल अधिकारी डॉ. विजय वर्मा […] The post खरगोन : सार्वजनिक शौचालय में महिला ने बच्चे को जन्म दिया appeared first on Sabguru News .
पिता के मौत पर नहीं पहुंचे चारों बेटे, बेटी ने दिया कंधा और किया अंतिम संस्कार
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पिता की मौत की खबर सुनने के बाद भी चारों बेटों ने मुंह मोड़ लिया, तो बेटी ने बेटे का फर्ज निभाते हुए पिता को कंधा दिया और मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। झारखंड की रहने वाली पूजा अपने बुजुर्ग पिता के बीमार होने की खबर सुनकर उनकी सेवा […] The post पिता के मौत पर नहीं पहुंचे चारों बेटे, बेटी ने दिया कंधा और किया अंतिम संस्कार appeared first on Sabguru News .
विपुल अमृतलाल शाह के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'गवर्नर', जिसमें मनोज बाजपेयी लीड रोल में हैं, इस साल की सबसे मच-अवेटीड फिल्मों में से एक बनकर उभरी है। हाल ही में रिलीज हुए इसके ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर भारी बज बना दिया है। यह ट्रेलर दर्शकों को 1990 के भारत के उस दौर में ले जाता है, जब देश एक बहुत बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा था और उस मुश्किकी दिशा तय करने वाले कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए गए थे। फिल्म में मनोज बाजपेयी आरबीआई के गवर्नर के रूप में एक बिल्कुल नए और अलग ल समय में देश अवतार में नजर आ रहे हैं, और इस रोल के लिए उन्हें काफी तैयारी और ट्रांसफॉर्मेशन से गुजरना पड़ा। ALSO READ: बेबी पिंक कॉरसेट ड्रेस में पूजा हेगड़े ने बिखेरा हुस्न का जलवा, किलर पोज से मचाई सनसनी हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान मनोज बाजपेयी ने गवर्नर के इस किरदार को निभाने के लिए की गई अपनी तैयारियों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अपनी परफॉर्मेंस को पर्दे पर एकदम असली और विश्वसनीय बनाने के लिए उन्होंने इकोनॉमिक्स के बुनियादी शब्दों को सीखा। मनोज ने शेयर किया, मैंने फिल्म में आरबीआई गवर्नर का रोल निभाया है, इसलिए मुझे इसके बेसिक टर्म्स की पढ़ाई करनी पड़ी और जरूरी जानकारी जुटानी पड़ी। चूंकि मैं इकोनॉमिक्स में बहुत कमजोर था, इसलिए मुझे हर एक सीन और डायलॉग के लिए उन शब्दों को ऑनलाइन सर्च करना पड़ता था। एक एक्टर के तौर पर मैं पर्दे पर जो कुछ भी बोलूँ, वो सच लगना चाहिए। अगर मुझे खुद ही यह समझ नहीं आएगा कि '1.5 बिलियन का डेफिसिट बैलेंस (घाटा)' होने का क्या मतलब है, तो मैं उसे दर्शकों को कैसे समझा पाता। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें सच्ची घटनाओं से प्रेरित 'गवर्नर' दर्शकों को भारत के आर्थिक सफर के सबसे चुनौतीपूर्ण अध्यायों में से एक में वापस ले जाती है। 1990 के दशक के वित्तीय संकट की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म महत्वपूर्ण फैसलों, सियासी शह और मात के खेल, और देश के बड़े संस्थानों के बीच के टकरावों की एक बेहद दिलचस्प कहानी पेश करती है। तनाव और ड्रामे से भरपूर यह ट्रेलर उस दुनिया की एक झलक दिखाता है जहाँ मेकर्स का हर एक कदम देश के भविष्य पर बहुत बड़ा असर डाल सकता है। इस पूरी कहानी को नेशनल अवॉर्ड विनर एक्टर मनोज बाजपेयी अपने दमदार अभिनय से आगे बढ़ाते हैं, जो एक ऐसे गवर्नर के रूप में नजर आ रहे हैं जो पूरे देश का भविष्य बदलने वाले एक बेहद नाजुक मोड़ को संभाल रहा है। दमदार और असरदार डायलॉग्स से सजी यह बेहतरीन कहानी 'सनशाइन पिक्चर्स' के बैनर तले आ रही है। इस फिल्म का निर्देशन चिन्मय मांडलेकर ने किया है और इसके प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह हैं। यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए बिल्कुल तैयार है।
कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्ना हजारे के शामिल होने की तस्वीर फेक है
बूम ने पाया कि वायरल हो रही तस्वीर एडिटेड है. कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच पर अन्ना हजारे मौजूद नहीं थे.
हनुमानगढ़ : एडवोकेट ने टाइपिंग मशीन छीनी तो दिव्यांग टाइपिस्ट ने जहर खाकर की सुसाइड
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के रावतसर में एक एडवोकेट द्वारा टाइपिंग मशीन छीन लेने से व्यथित होकर दिव्यांग टाइपिस्ट ने सल्फास की गोलियों का सेवन करके आत्महत्या कर ली। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि एडवोकेट टिंकूराम सुडा उर्फ अर्जुनराम सुडा के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में मामला दर्ज […] The post हनुमानगढ़ : एडवोकेट ने टाइपिंग मशीन छीनी तो दिव्यांग टाइपिस्ट ने जहर खाकर की सुसाइड appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा में दो गुटों के खूनी संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के बागोर थाना क्षेत्र में बुधवार रात कंजर जाति के दो गुटों में हुए खूनी संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत हाे गई। थाना प्रभारी भंवरलाल ने गुरुवार को बताया कि कल देर रात लक्ष्मणगढ़ कॉलोनी में विनोद कंजर (40) और कमलेश कंजर के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी […] The post भीलवाड़ा में दो गुटों के खूनी संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत appeared first on Sabguru News .
तृणमूल विधायक दल में टूट, 58 सदस्यों के साथ ऋतब्रत बंदोपाध्याय बने विपक्ष के नेता
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को बुधवार को उस समय एक और झटका लगा जब विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ बोस ने पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बंदोपाध्याय के नेतृत्व वाले 58 विधायकों वाले समूह को मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दे दी। विधानसभा ने बंदोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष के नेता […] The post तृणमूल विधायक दल में टूट, 58 सदस्यों के साथ ऋतब्रत बंदोपाध्याय बने विपक्ष के नेता appeared first on Sabguru News .
दिल्ली के मालवीय नगर में लगी आग में एक ही परिवार के आठ सदस्यों की मौत
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में लगी भीषण आग में एक ही परिवार के आठ सदस्यों की जान चली गई। अपने एक बीमार रिश्तेदार की देखरेख के लिए गुरुग्राम से दिल्ली आए अग्रवाल परिवार के ये सदस्य होटल फ्लोरिश स्टे गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। यह होटल मैक्स […] The post दिल्ली के मालवीय नगर में लगी आग में एक ही परिवार के आठ सदस्यों की मौत appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ में प्रेमी युगल पर हमला, युवती की मौत
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जंक्शन थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात छह से अधिक लोगों ने एक प्रेमी युगल पर हमला कर दिया जिससे एक युवती की मौत हो गई जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि मनजीतकौर (32) विवाहित है। जंडवाला गांव के निवासी रमजान (40) के साथ […] The post हनुमानगढ़ में प्रेमी युगल पर हमला, युवती की मौत appeared first on Sabguru News .
शादी का झांसा देकर मुरैना डिप्टी कलेक्टर ने युवती से किया रेप, अरेस्ट
मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर के खिलाफ एक महिला की शिकायत पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और शारीरिक शोषण का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार 32 वर्षीय महिला ने अपने परिजनों के साथ पुलिस अधीक्षक […] The post शादी का झांसा देकर मुरैना डिप्टी कलेक्टर ने युवती से किया रेप, अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
प्रयागराज : टीचर ने की कोचिंग छात्रा से अश्लील हरकत,जमकर हुई धुनाई
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के नैनी के दांडी इलाके में कोचिंग छात्रा के साथ शिक्षक ने अश्लील हरकत की जिसके बाद परिजनों ने उसकी जम कर पिटाई कर दी और पुलिस के हवाले कर दिया। कक्षा तीन में पढ़ने वाली 10 साल की मासूम बच्ची ने अपने घर वालों को टीचर द्वारा किए गए […] The post प्रयागराज : टीचर ने की कोचिंग छात्रा से अश्लील हरकत,जमकर हुई धुनाई appeared first on Sabguru News .
मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, आईसीयू में 4 मरीजों की मौत, 20 झुलसे
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर शहर स्थित एक निजी अस्पताल में गुरुवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड में आईसीयू में भर्ती चार मरीजों की मौत हो गई, तथा 20 से अधिक लोग झुलस गए। पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में लगी। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग […] The post मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, आईसीयू में 4 मरीजों की मौत, 20 झुलसे appeared first on Sabguru News .
टीवी एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने 'भाबीजी घर पर हैं' के प्रोड्यूसर पर झूठा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने का खुलासा करके सनसनी मचा दी है। अपने इस कबुलनामें के बाद से ही शिल्पा शिंदे ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई है। कई लोग शिल्पा को गिरफ्तार करने की मांग भी कर रहे हैं। भारती सिंह और हर्ष के पॉडकास्ट में शिल्पा ने 'भाभीजी घर पर हैं' के प्रोड्यूसर के खिलाफ अतीत में लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को झूठा और कानूनी दबाव से बचने का एक रास्ता बताया था। इस कबूलनामे के बाद शुरू हुए विवाद और भारी ट्रोलिंग पर चुप्पी तोड़ते हुए अब शिल्पा शिंदे ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर विरोधियों को कड़ा जवाब दिया है। A post shared by Shilpa Shinde (@shilpa_shinde_official) पूरा इंटरव्यू देखे बिना जज न करें शिल्पा शिंदे ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो बयान साझा किया है। इसमें उन्होंने उन लोगों और मीडिया चैनल्स पर निशाना साधा है जो उनके इंटरव्यू की सिर्फ एक लाइन या छोटी क्लिप देखकर राय बना रहे हैं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने साफ शब्दों में लिखा, 'पूरा पॉडकास्ट देखे बिना सिर्फ एक लाइन पर फैसला सुना देना, पेड पीआर का बहुत ही घटिया तरीका है।' ALSO READ: प्रोड्यूसर पर झूठा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने पर ट्रोल हुईं शिल्पा शिंदे, सेलेब्स ने भी जताई नाराजगी शिल्पा ने वीडियो में कहा, इस पीआर अभियान के बाद जो कमेंट्स आ रहे हैं, मैं उनसे बस यही कहना चाहती हूं कि आप जो बोगे, वही काटोगे। उन्होंने उन लोगों पर भी सवाल उठाए जो उनके सिंगल होने और निजी जिंदगी को लेकर टिप्पणियां कर रहे हैं। शिल्पा ने कहा, 'लोग इस बात से परेशान हैं कि मेरी शादी नहीं हुई। आप लोग मेरे जैसी लड़की की चिंता छोड़ें और खुद के गिरेबान में झांक कर देखें। मुझे किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। शिल्पा ने अपनी बात रखते हुए उस दौर के मानसिक तनाव को भी साझा किया जब वह 'भाबीजी घर पर हैं' शो से अलग हुई थीं। उन्होंने बताया कि उन पर चारों तरफ से दबाव बनाया जा रहा था ताकि वह इंडस्ट्री में काम न कर सकें और इसी वजह से उन्होंने खुद को बचाने के लिए वह कदम उठाया था। शिल्पा ने कहा, जो मेरे साथ हुआ, वह आप लोगों को नहीं पता। भगवान न करे कि आपके या आपके परिवार के साथ ऐसा समय आए। वह दौर कैसा था, यह सिर्फ मैं जानती हूं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने यह सब पैसों के लिए नहीं किया था। शिल्पा ने बिग बॉस के बाद का एक किस्सा भी साझा किया, जहां एक व्यक्ति ने उनसे मिलकर बताया था कि कैसे शिल्पा के संघर्ष को देखकर उसने खुदकुशी करने का विचार छोड़ दिया था। अभिनेत्री ने कहा कि जब वह खुद इतने कठिन दौर से गुजर रही थीं, तब भी उनकी यात्रा ने दूसरों को जिंदगी जीने की प्रेरणा दी। जब शिल्पा से पूछा गया कि उन्होंने 10 साल बाद इस सच को स्वीकार क्यों किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला उनकी अंतरात्मा से जुड़ा था। उन्होंने कहा, मैं खुद की नजरों में गिर रही थी। वह एक झूठ था और मैं उस झूठ के साथ और ज्यादा नहीं जी सकती थी। मुझे आज या कल इस सच को सामने लाना ही था। कभी-कभी आपको अपनी बात कहने के लिए सही मौके की तलाश होती है।
दिल्ली के गेस्टहाउस में आग लगने पर लोग क्यों नहीं भाग सके
गेस्ट हाउस में बुधवार सुबह भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। हालांकि शुरुआती पड़ताल में अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और निर्माण से जुड़ी गडबड़ियों के संकेत मिले हैं। मरने वालों में 9 भारतीय और 12 ...
Adhik Panchami 2026: अधिक पंचमी क्या है, जानें महत्व, पूजा विधि और उपाय
Purushottam Maas Panchami 2026: हिंदू पंचांग में 'अधिक पंचमी' का संबंध अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) से है। जब अधिक मास के कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आती है, तो उसे 'अधिक पंचमी' कहा जाता है। चूंकि अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस पूरे महीने की हर तिथि का महत्व सामान्य दिनों से कहीं अधिक बढ़ जाता है। ALSO READ: 3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक पंचमी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, जप, दान और पुण्य कर्म करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है। यह दिन आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और गरीबों को दान देकर पुण्य अर्जित करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अधिक पंचमी पर किए गए धार्मिक उपाय ग्रह दोषों को शांत करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप और पूजा कई गुना फल प्रदान करता है। इसलिए अधिक पंचमी को पुण्य संचय और ईश्वर भक्ति का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। अधिक पंचमी का महत्व अधिक पंचमी पर क्या करें? जानें पूजा विधि और उपाय आइए यहां जानते हैं अधिक पंचमी का क्या महत्व है और इस दिन क्या करना फलदायी होता है। पढ़ें अधिक पंचमी का महत्व, पूजन की विधि और उपाय... अधिक पंचमी का महत्व हिंदू धर्म में अधिक मास को बहुत पवित्र माना गया है। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना होकर मिलता है। दोषों से मुक्ति: इस दिन भगवान विष्णु (श्रीहरि) और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्टों, पापों और कुंडली के दोषों से मुक्ति मिलती है। अक्षय फल की प्राप्ति: मान्यता है कि अधिक पंचमी के दिन किए जाने वाले दान-पुण्य और व्रत का फल कभी नष्ट नहीं होता, वह अक्षय बना रहता है। मानसिक शांति: इस तिथि पर पूजा-पाठ और ध्यान करने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। अधिक पंचमी पर क्या करें? जानें पूजा विधि और उपाय यदि आप अधिक पंचमी के दिन विशेष लाभ पाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं: ALSO READ: पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास? 1. श्रीहरि विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले फल, चंदन और तुलसी दल यानी तुलसी के पत्ते अर्पित करें। माता लक्ष्मी को मखाने की खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं। 2. महामंत्रों का जाप इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना या नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है: - 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' - 'ॐ श्री विष्णवे नमः' 3. दीपदान का विशेष महत्व अधिक मास में दीपदान (दीपक जलाना) सबसे उत्तम माना गया है। पंचमी की शाम को घर के मंदिर में, तुलसी के पौधे के पास और संभव हो तो किसी पवित्र नदी या पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जरूर जलाएं। 4. दान-पुण्य पंचमी तिथि पर भूखे लोगों को भोजन कराना, पीले अनाज- जैसे चने की दाल, पीले कपड़े या केले का दान करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है और भाग्य का साथ मिलता है। ध्यान दें: अधिक मास (मलमल मास) में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक व शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसलिए अधिक पंचमी के दिन केवल ईश्वर की भक्ति, साधना, व्रत और दान-पुण्य पर ही ध्यान देना चाहिए। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: पेड़-पौधों का ज्योतिष कनेक्शन: 100 यज्ञों के बराबर पुण्य देता है सिर्फ एक पौधा! जानें किस्मत चमकाने वाली 11 जादुई बातें
प्रोड्यूसर पर झूठा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने पर ट्रोल हुईं शिल्पा शिंदे, सेलेब्स ने भी जताई नाराजगी
टीवी शो 'भाबीजी घर पर हैं' में अंगूरी भाभी का किरदार निभाकर घर-घर फेमस हुई एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे इन दिनों सुर्खियों में हैं। हाल ही में शिल्पा ने भारती सिंह और हर्ष के पॉडकास्ट में कबुला की उन्होंने 'भाबीजी घर पर हैं' के प्रोड्यूसर संजय कोहली पर यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाया था। शिल्पा शिंदे के इस खुलासे के बाद उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है। टीवी और बॉलीवुड इंडस्ट्री के कई सेलेब्स भी शिल्पा के इस कदम की कड़ी निंदा कर रहे हैं। शिल्पा शिंदे के इस चौंकाने वाले बयान के बाद अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता पूजा बेदी ने इस पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। ALSO READ: आमिर खान 5 जुलाई को तीसरी बार करेंगे शादी, गौरी स्प्रैट बनेंगी दुल्हन! पूजा बेदी ने कहा, कोई भी महिला जो बदला लेने, व्यक्तिगत लाभ, पब्लिसिटी या दुर्भावना के लिए पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बने कानूनों को हथियार बनाती है, वह वास्तव में उस पूरे आंदोलन और मकसद को धोखा दे रही है जिसके लिए ये कानून बनाए गए थे। उन्होंने कहा, ऐसे झूठे आरोप न केवल एक मासूम इंसान की जिंदगी और उसका मान-सम्मान बर्बाद करते हैं, बल्कि समाज में वास्तविक पीड़ितों और सरवाइवर्स पर भरोसा करना भी मुश्किल बना देते हैं। कानून का ऐसा दुरुपयोग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और इसके गंभीर परिणाम होने चाहिए। एक्ट्रेस हिना खान ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने लिखा, आमतौर पर मैं ना किसी के बारे में बात करती हूं, ना किसी और के मुद्दों पर कमेंट या रिएक्ट करती हूं। मैं सिर्फ और सिर्फ तभी बोलती हूं जब संवेदनशील बात हो, या फिर ऐसी कोई बात हो जिसका असर समाज को प्रभावित करें, खासकर महिलाओं को। हिना ने लिखा, पब्लिक फिगर होने के नाते अपनी बात रखना मेरी जिम्मेदारी है। किसी विवाद में जीतने के लिए अपने सेक्स का इस्तेमाल कर किसी की छवि खराब करना सचमुच शर्मनाक है। जो लोग इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं, वे बिल्कुल सही हैं। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें उन्होंने लिखा, मैं पूरी तरह से शॉक्ड हूं। मेरे पास कहने को शब्द नहीं हैं। लेकिन मैं यहां रियल विक्टिम के बारे में बात करना चाहूंगी। एक सम्मानित व्यक्ति, जिसकी पत्नी, बेटी और परिवार में कई महिलाएं हैं। एक मेहनती प्रोड्यूसर, जिसने कई आइकॉनिक शो ऑडियंस को दिए हैं। उसे इस तरह की परेशानी से गुजरना पड़ा। जैसा कि फीमेल एक्ट्रेस ने कुबूला कि उसके आरोप बेबिनुयाद थे। वो आरोप उसने सिर्फ फायदा उठाने, जीतने, अपनी बात मनवाने और समझौता करवाने के लिए लगाए थे। करण ओबेरॉय ने बताया 'कानूनी आतंकवाद' अभिनेता व सिंगर करण ओबेरॉय ने भी इस मुद्दे पर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, एक झूठा मामला पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के खिलाफ होता है, क्योंकि इसकी वजह से वास्तविक पीड़ित महिलाओं को भुगतना पड़ता है। एक झूठा केस समाज में चल रहे सौ सच्चे मामलों पर भी संदेह की उंगली उठा देता है। यह एक तरह का 'कानूनी आतंकवाद' है, जिससे हजारों निर्दोष लोगों की जिंदगियां तबाह हो रही हैं। शिल्पा शिंदे ने पॉडकास्ट में अपनी पुरानी कानूनी लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा था, मैं आज इस प्लेटफॉर्म के जरिए पहली बार सच कबूल कर रही हूं कि वह आरोप झूठा था। उस वक्त मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। मेरे सारे रास्ते बंद कर दिए गए थे और मैं बस उस स्थिति से बाहर निकलना चाहती थी। उन्होंने कहा, जब आप पुलिस के पास एफआईआर दर्ज कराने जाते हैं, तो वे कहते हैं कि मामला गंभीर बनाने के लिए आपको कुछ बड़ा और कड़ा लिखना पड़ेगा। चूंकि मेरा बैकग्राउंड कानून का रहा है, इसलिए मैं इस प्रक्रिया को समझती थी। इस मामले के बाद दोनों पक्षों के बीच सेटलमेंट हो गया था और उनका बकाया भुगतान भी मिल गया था।
FCI साइलो परियोजना में अडानी-लीप इंडिया की बढ़ती हिस्सेदारी पर CPI(M) ने चिंता जताई है। पार्टी ने खाद्य सुरक्षा ढांचे के निगमीकरण और एकाधिकार पर सवाल उठाए हैं।
युद्ध समाप्त होने के बाद भी अवैध हथियार हिंसा को बढ़ाते रहते हैं। घोस्ट गन, 3डी-प्रिंटेड हथियार और तस्करी नेटवर्क वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन रहे हैं
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (04 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today Horoscope Rashifal 04 June 2026: करियर: आज वर्कप्लेस पर नए टारगेट मिलेंगे जिन्हें आप समय से पूरा कर लेंगे। लव: पार्टनर के साथ रिश्तों में भावनात्मक मजबूती आएगी। धन: निवेश करने से पहले बाजार की स्थिति जरूर जांच लें। स्वास्थ्य: आज पर्याप्त पानी पिएं। उपाय: शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें। ALSO READ: Miracle Plants: ये 9 चमत्कारी पौधे जो बदल देंगे आपकी जिंदगी: सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का प्राकृतिक खजाना 2. वृषभ (Taurus) करियर: अगर आप बिजनेस में हैं, तो आज कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है। लव: लव लाइफ में छोटी-मोटी गलतफहमियां हो सकती हैं। धन: आज खर्चों पर नियंत्रण रखना भी जरूरी है। स्वास्थ्य: बाहर के खाने से बचें। उपाय: 'ॐ सोम सोमाय नमः' मंत्र का जाप करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: आज ऑफिस में आपके काम की तारीफ होगी। लव: जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बना रहेगा। धन: आज बचत करने में सफल रहेंगे। स्वास्थ्य: योग को दिनचर्या में शामिल करें। उपाय: भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं। 4. कर्क (Cancer) करियर: आज वर्कप्लेस में एकाग्रता बनाए रखें। लव: रिश्तों में संवेदनशीलता बढ़ेगी। धन: आर्थिक लेनदेन में सावधानी बरतें। स्वास्थ्य: सर्दी-जुकाम की शिकायत हो सकती है। उपाय: शिव चालीसा का पाठ करें। 5. सिंह (Leo) करियर: आज मानसिक चंचलता काम पर असर डाल सकती है। लव: प्रेम संबंधों में अतिउत्साह देखने को मिलेगा। धन: कारोबार से आय के नए स्रोत बनेंगे। स्वास्थ्य: आंखों में तकलीफ हो तो मोबाइल का उपयोग कम करें। उपाय: सूर्य देव को जल चढ़ाएं और शिवजी की आरती करें। 6. कन्या (Virgo) करियर: बैंकिंग से जुड़े लोगों के लिए काम का बोझ बढ़ सकता है। लव: जीवनसाथी के साथ बैठकर बात सुलझाएं। धन: भविष्य के लिए बचत की गई प्लानिंग सफल होगी। स्वास्थ्य: जोड़ों के दर्द या कमर दर्द की समस्या हो सकती है। उपाय: सोमवार का व्रत रखें। ALSO READ: Weekly Horoscope 1 to 7 June: साप्ताहिक राशिफल (1 से 7 जून 2026): अपने भाग्य को जानें और तैयार रहें 7. तुला (Libra) करियर: पार्टनरशिप में नई योजनाओं पर काम शुरू होगा। लव: प्रेमी के साथ रिश्तों में मधुरता आएगी। धन: सुख-सुविधाओं की चीजों पर खर्च होगा। स्वास्थ्य: आप मानसिक रूप से प्रसन्न रहेंगे। उपाय: सफेद वस्त्र का दान करें। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: नौकरीपेशा का ऑफिस में किसी से विवाद होने की संभावना है। लव: पुराने लव अफेयर के कारण परेशानी हो सकती है। धन: खर्चों में अचानक वृद्धि हो सकती है। स्वास्थ्य: रात में वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। उपाय: हनुमान जी के दर्शन करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: नौकरी से जुड़े लोगों को मान-सम्मान मिलेगा। लव: लव लाइफ में रोमांच बना रहेगा। धन: रुका हुआ धन मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। स्वास्थ्य: सेहत के मामले में दिन अच्छा है। उपाय: चने की दाल का दान करें। 10. मकर (Capricorn) करियर: आज का दिन शुभ है। करियर में स्थिरता आएगी। लव: परिवार के सदस्यों के साथ किसी बात पर बहस हो सकती है। धन: पैसों के मामले में किसी पर अंधविश्वास न करें। स्वास्थ्य: पुरानी किसी बीमारी से राहत मिल सकती है। उपाय: भगवान शिव का अभिषेक शहद से करें। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: वर्कप्लेस पर नए प्रयोग करना सफल रहेगा। लव: पार्टनर के साथ चल रहे विवाद हल होंगे। धन: शेयर मार्केट में निवेश फायदेमंद हो सकता है। स्वास्थ्य: दिन भर स्फूर्ति बनी रहेगी। उपाय: गरीबों को भोजन कराएं। 12. मीन (Pisces) करियर: कार्यस्थल पर अपना आत्मविश्वास बनाए रखें। लव: लव पार्टनर आपकी भावनाओं का सम्मान करेगा। धन: धन को लेकर पारिवारिक खर्च भी बढ़ेंगे। स्वास्थ्य: गुनगुने पानी का प्रयोग करें। उपाय: शनि मंदिर में काले तिल अर्पित करें। ALSO READ: कुंभ राशि पर चल रहा है शनि की उतरती हुई साढ़ेसाती, पढ़ें क्या होगा इसका प्रभाव
दिल्ली के दरियागंज–चांदनी चौक में सूटकेस और नकदी से चलने वाला हवाला अब डिजिटल हो चुका है। यहां बैठे ऑपरेटर क्रिप्टो करेंसी के जरिए हवाला चला रहे हैं। इस नेटवर्क से जुड़े ऑपरेटर्स ने कैमरे पर दावा किया कि दुबई, थाईलैंड, कंबोडिया, हांगकांग समेत कई देशों में मिनटों में पेमेंट पहुंचाई जा सकती है। पर्दाफाश करने के लिए रिपोर्टर ने ब्रोकर बनकर दो माफियाओं से मुलाकात की। ‘10 हजार USDT से शुरू करो, फिर करोड़ों तक ले जाओ’ लोकेशन: दरियागंज, पुरानी दिल्लीकिससे मुलाकात: सलमान और शाहिद (डिजिटल हवाला एजेंट) क्रिप्टोकरेंसी के जरिए हवाला करने वाले माफियाओं तक पहुंचने के दौरान हमारी पहली मुलाकात साद से हुई। वो दरियागंज की एक पुरानी इमारत के सामने मिला। हमें पांचवी मंजिल पर बने ऑफिस में ले गया। हमने खुद को ब्रोकर बताते हुए कहा कि दुबई में हमारे क्लाइंट की बेटिंग कंपनी चलती है। भारत में सट्टे से आने वाला पैसा क्रिप्टो के जरिए विदेश भेजना और जरूरत पड़ने पर वापस लाना है। हमने कहा कि हमें नकद के बदले USDT (यह एक क्रिप्टोकरेंसी है) चाहिए और बाद में उसी USDT के जरिए दूसरे देशों में नकद भी चाहिए। इसके बाद हवाला ऑपरेटर सलमान ने पूरा सिस्टम समझाया। सवाल: बेटिंग ऐप का काम है। USDT के जरिए काम करना चाहते हैं? जवाब : हो जाएगा। सवाल: सिस्टम क्या रहेगा? जवाब : पैसा एडवांस देना होगा। जितना USDT चाहिए मिल जाएगा। हाथों-हाथ ट्रांसफर होगा। पहले 10 हजार USDT से शुरू करो, फिर करोड़ों तक ले जाओ। सवाल: काम कहां से शुरू होगा? जवाब : दिल्ली से शुरुआत करो। बाद में दुबई या दूसरी कंट्री में भी पेमेंट कलेक्ट करवा देंगे। ऑफिस दुबई में भी है। सवाल: USDT को नकद कैसे करेंगे? जवाब : अंदर करना हो या बाहर निकालना हो, सब हमारे जरिए होगा। क्रिप्टो को नकद, नकद को क्रिप्टो, हवाला सब हो जाएगा। दुबई, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी जहां बोलोगे वहां पेमेंट मिल जाएगी। सवाल: हमें नकद और USDT दोनों चाहिए। जवाब : हो जाएगा। सवाल: ऑफिस में कोई रिस्क तो नहीं ? जवाब : यहां कुछ रखा नहीं जाता। इनकम टैक्स भी आ जाए तो कुछ नहीं मिलेगा। सवाल: बायनेंस (क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म) से काम करते हो? KYC की जरूरत पड़ती है? जवाब : बायनेंस से करते हैं। ट्रेडिंग में बैंक अकाउंट की जरूरत नहीं पड़ती। आप सीधे USDT इस्तेमाल कर सकते हो। सवाल: पैसा अलग-अलग शहरों में भी मिल जाएगा? जवाब : जहां बोलोगे वहां मिल जाएगा। सवाल: आपका कमीशन कितना है? जवाब : मार्केट रेट पर 50 पैसे प्रति डॉलर। आज USDT का रेट 97 रुपए है, हम 97.50 में देंगे। 10 हजार डॉलर पर करीब 50 हजार कमीशन होगा। सवाल: अगर हमें वॉलेट चलाना नहीं आता तो? जवाब : अपना वॉलेट बनाने की जरूरत नहीं है। हमारा वॉलेट इस्तेमाल कर लो। USDT हमारे वॉलेट में रहेगा, जब जहां नकद चाहिए होगा वहां भिजवा देंगे। सवाल: कौन सा वॉलेट सिक्योर है? जवाब : बायनेंस ठीक है। सवाल: नया अकाउंट भी बनवा देंगे? जवाब : हां, दोनों सिस्टम करा देंगे। सवाल: काम का समय क्या रहता है? जवाब : दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक। ज्यादातर हवाला दुबई से होता है, इसलिए बाजार उसी हिसाब से चलता है। दूसरी मुलाकात लोकेशन: पूर्वी दिल्ली, गाजीपुर पेपर मार्केटकिससे मुलाकात: हर्ष सिंघल, डिजिटल हवाला नेटवर्क ऑपरेटर अगली मुलाकात अमन से हुई। अमन के संपर्क में डिजिटल हवाला नेटवर्क से जुड़े कई एजेंट थे। अमन ने बताया कि वह हर्ष सिंघल नाम के एक शख्स को जानता है, जो दुबई में बैठे बड़े सट्टेबाजों के पैसों को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर डिजिटल हवाला नेटवर्क के जरिए पहुंचाता है। उसके मुताबिक हर्ष दिल्ली का बड़ा डिजिटल हवाला एजेंट है। शुरुआत में हर्ष सीधे मिलने को तैयार नहीं था। कई दिनों तक अमन हम पर नजर रखता रहा कि कहीं हम किसी एजेंसी से जुड़े तो नहीं हैं। भरोसा होने के बाद वह हमें गाजीपुर पेपर मार्केट इलाके में हर्ष सिंघल से मिलवाने ले गया। एक गोदाम के बाहर इंतजार के दौरान नई मर्सिडीज कार आकर रुकी। अमन हमें कार के अंदर ले गया और सिंघल से मिलवाया। रिपोर्टर और सिंघल के बीच हुई बातचीत ‘एक दिन में 10 लाख, 20 लाख, 50 लाख तक भेज सकते हैं…’ सवाल: आप क्या काम करते हैं? जवाब : मैं USDT का काम करता हूं। दुबई में अपने लोग हैं, पूरा सेटअप है। सवाल: अकाउंट का भी इंतजाम हो जाएगा? जवाब : अकाउंट के चक्कर में मत पड़ना। सबसे ज्यादा रिस्क वहीं है। अकाउंट में कई बार स्कैम का पैसा आ जाता है और खाते फ्रीज हो जाते हैं। हम नकद में काम करते हैं। सवाल: सिस्टम कैसे चलेगा? जवाब : नकद लाओ, हाथों-हाथ USDT ट्रांसफर। शुरुआत 10 हजार से करो या लाखों से, कोई दिक्कत नहीं। एक दिन में 10 लाख, 20 लाख, 50 लाख तक करवा सकते हैं। सवाल: आज का रेट क्या है? जवाब: आज 99.50 का रेट है। सवाल: अगर दिल्ली में USDT दी और दुबई में नकद चाहिए तो? जवाब: वहां दिरहम मिल जाएगा। टोकन देंगे और पेमेंट हो जाएगी। सवाल: भारत में भी कहीं पैसा मिल जाएगा? जवाब : जहां नेटवर्क होगा वहां दिलवा देंगे। सवाल: किन देशों तक नेटवर्क है? जवाब: अमेरिका, ब्रिटेन, हांगकांग, दुबई, थाईलैंड जहां बोलोगे, जिस करेंसी में बोलोगे, वहां पैसा पहुंच जाएगा। पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में हर्ष का गोदाम है, जबकि गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में उसका ऑफिस है। दावा है कि यहीं से क्रिकेट सट्टेबाजी से लेकर डिजिटल हवाला तक का नेटवर्क ऑपरेट होता है। हर्ष ने बताया कि पहले बैंक अकाउंट के जरिए लेन-देन होता था, लेकिन साइबर फ्रॉड से जुड़े पैसे आने के चलते कई खाते फ्रीज हो गए। इसी वजह से उसने बैंकिंग सिस्टम से दूरी बना ली और अब सिर्फ नकद में काम करता है। बातचीत के दौरान हर्ष लगातार हमारी कहानी की तस्दीक करता रहा। उसने दुबई में अपने संपर्कों को फोन कर हमारे बताए बेटिंग नेटवर्क की जानकारी मिलाई, ताकि यह तय कर सके कि हम सच बोल रहे हैं या नहीं। इसके बाद हमने उससे पूछा कि वह किस वॉलेट के जरिए क्रिप्टो का इस्तेमाल करता है। सवाल: बायनेंस से काम करते हो? जवाब : नहीं, हम सीधे काम करते हैं। बायनेंस की जरूरत नहीं पड़ती। सवाल: फिर वॉलेट कौन सा इस्तेमाल करते हो? जवाब : ट्रोनलिंक। सवाल: अगर शुरुआत 50 लाख से करें तो? जवाब : कोई दिक्कत नहीं। म्यूल अकाउंट, शेल कंपनी और USDT : हवाला का नया रास्ता सलमान, शाहिद और हर्ष सिंघल जैसे एजेंट डिजिटली चल रहे हवाला कारोबार की सिर्फ बानगी हैं। ED की कार्रवाई से पता चलता है कि, म्यूल अकाउंट, शेल कंपनियां और USDT हवाला का नया रास्ता बन चुके हैं। ED ने फरवरी 2026 में कहा कि उसने साइबर अपराध से जुड़े 234 प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग यानी PMLA मामलों में 34 हजार 855 करोड़ की अपराध से जोड़ी गई रकम की पहचान की है। इसमें अवैध सट्टेबाजी, क्रिप्टो घोटाले, फर्जी ट्रेडिंग ऐप, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, इंस्टेंट लोन ऐप स्कैम शामिल हैं। ED के मुताबिक इन पैसों की मनी लॉन्ड्रिंग मोटेतौर पर म्यूल अकाउंट्स, शेल कंपनियों, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला ऑपरेटरों के जरिए की गई। एजेंसी ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी नेटवर्क पहले शेल कंपनियों और पेमेंट गेटवे के जरिए पैसा इकट्ठा करते हैं, फिर उसे क्रिप्टो खासकर USDT जैसे स्टेबलकॉइन में बदलकर हवाला चैनलों और फर्जी विदेशी रेमिटेंस के जरिए बाहर भेजते हैं। अब तक ऐसे मामलों में 12 हजार 229 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की जा चुकी है और 1,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स की पहचान हुई है। भास्कर की दरियागंज से लेकर गाजीपुर तक हुई इस पड़ताल से पता चला कि, पहले जहां कोड वर्ड, पर्चियों और नकदी के जरिए पैसा एक देश से दूसरे देश पहुंचता था, वहीं अब उसी खेल में USDT का इस्तेमाल हो रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले हवाला का पैसा बैग और नकदी के जरिए घूमता था, अब वही रकम डिजिटल वॉलेट के जरिए सरहद पार पहुंचाई जा रही है। ‘क्रिप्टो को दुनिया में कहीं भी आसानी से भेजा जा सकता है…’ दिल्ली पुलिस के DCP विनीत कुमार कहते हैं कि, ‘साइबर फ्रॉड या गैरकानूनी तरीके से जुटाए गए पैसों के मामलों में रकम पहले हवाला ऑपरेटर्स के पास जाती है। इसके बाद हवाला ऑपरेटर्स नकद को क्रिप्टो में बदलते हैं।’ ‘इंटरनेट पर कई ऐसे प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जहां नकद देकर क्रिप्टो खरीदी जा सकती है। एक बार क्रिप्टो आपके पास आ जाए तो उसे दुनिया में कहीं भी आसानी से भेजा जा सकता है। कई जगहों पर क्रिप्टो से प्रॉपर्टी तक खरीदी जा रही है।’ ‘कई ऐसे वॉलेट हैं, जिनमें बैंक KYC की जरूरत नहीं होती। ट्रस्ट वॉलेट जैसे प्लेटफॉर्म माफियाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। हालांकि ऐसे कई और वॉलेट भी हैं, जिनमें बिना KYC के ट्रांसफर संभव है।’ ‘सरकार चाहती है कि, लोग ऐसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करें जहां यूजर की पहचान दर्ज हो KYC यानी ‘नो योअर कस्टमर’ हो। बिना KYC वाले वॉलेट्स को बंद किए बिना इस नेटवर्क पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल है।’ अब हवाला करना आसान हो गया, ट्रैक करना मुश्किल वहीं, सायबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल कहते हैं कि,’ भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर स्पष्ट कानून नहीं बनाया है। फिलहाल सरकार ने सिर्फ इतना तय किया है कि क्रिप्टो खरीदने या बेचने पर 30 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसके बावजूद क्रिप्टो को कानूनी मुद्रा या कानूनी संपत्ति का पूरा दर्जा नहीं मिला है।’ ‘क्रिप्टो के बाद हवाला पहले से कई गुना आसान हो गया है और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल। साइबर अपराधियों और हवाला एजेंट्स के लिए क्रिप्टो एक तरह का ‘सेफ हेवन’ बन चुका है।’ ‘जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और सर्विस प्रोवाइडर्स भारत के बाहर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय एजेंसियों को जानकारी हासिल करने में मुश्किल आती है और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की पूरी चेन जोड़ना चैलेंजिंग हो जाता है।’ क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े हवाला के तीन मामले केस स्टडी 1 : 5.24 करोड़ का साइबर फ्रॉड, हवाला और क्रिप्टो नेटवर्क का खुलासा 26 नवंबर 2025 को दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट को सूचना मिली कि द्वारका के एक होटल में कुछ लोग साइबर फ्रॉड से जुड़े पैसों को ट्रांसफर कर रहे हैं। पुलिस ने होटल पर छापा मारा। यहां से सुल्तान सलीम शेख, सैयद अहमद चौधरी, तुषार मालिया और सतीश कुमार नाम के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पुलिस को एक ऐसे बैंक अकाउंट का पता चला, जिसमें सिर्फ 6 दिनों के भीतर 10,423 ट्रांजैक्शन हुए थे और करीब 5.24 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया कि हवाला चैनलों के जरिए इस रकम की मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी। कैश के बदले क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन किए जाते थे। हवाला ऑपरेटर्स को नकद रकम दी जाती थी और बदले में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम को आगे ट्रांसफर किया जाता था। केस स्टडी 2 : महादेव ऐप और क्रिप्टो हवाला नेटवर्क 21 अक्टूबर 2023 को ईडी ने महादेव बेटिंग ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत 14 लोगों को आरोपी बनाया था। ईडी के मुताबिक बेटिंग से आने वाला पैसा सीधे मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंचाया जाता था। पहले रकम को कई फर्जी, किराये और म्यूल बैंक अकाउंट्स में घुमाया जाता था। इसके बाद हवाला ऑपरेटर्स रकम को नकदी में बदलते थे। जांच एजेंसियों के अनुसार बाद में पैसे का एक हिस्सा USDT और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। फिर अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए रकम को विदेशों तक पहुंचाया जाता था। ईडी ने बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, चैट्स, केवाईसी डिटेल्स, आईपी लॉग्स और ब्लॉकचेन ट्रांजैक्शन ट्रेल के जरिए पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया। एजेंसी का दावा है कि यह नेटवर्क हजारों करोड़ रुपए के अवैध लेनदेन से जुड़ा था और इसके तार दुबई समेत कई विदेशी लोकेशनों तक फैले हुए थे। केस स्टडी 3 : जम्मू-कश्मीर में ‘क्रिप्टो हवाला’ का अलर्ट इसी साल जनवरी में सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और आतंकी नेटवर्क को दोबारा एक्टिव करने की कोशिशों को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक अब पारंपरिक हवाला और कैश कुरियर सिस्टम की जगह ‘क्रिप्टो हवाला’ का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। विदेशी हैंडलर्स अब क्रिप्टोकरेंसी, प्राइवेट वॉलेट्स और पीयर-टू-पीयर ट्रांजैक्शन के जरिए बिना बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किए पैसे जम्मू-कश्मीर तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों को यह भी पता चला कि कई स्थानीय संपर्कों को बिना KYC वाले क्रिप्टो वॉलेट बनाने और VPN के जरिए डिजिटल पहचान छुपाने के लिए कहा गया था, ताकि विदेशों से ट्रांसफर हुए क्रिप्टो को कई डिजिटल लेयर्स में घुमाकर भारत में नकद में बदला जा सके। …………………………………………….. आप ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं NEET पेपर लीक करने वाले सवाल रट लाए थे:न किताबें बाहर आईं, न अंदर डिवाइस जाने दी; फिर भी हुए लीक ‘नीट पेपर लीक ने हमारा भरोसा तोड़ा है। सालों से जो लोग हमारे साथ काम कर रहे थे, उन्होंने ही पेपर लीक कर दिए। लीक किस-किस ने किया, कैसे किया ये जांच के बाद पता चल जाएगा। लेकिन ऐसा लग रहा है कि, सवाल रटकर लीक किए गए हैं।’ पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…।
साल 1975। लाल बिहारी 20 साल के थे। शादी के 10 साल बाद अभी-अभी गंवना हुआ था और पत्नी घर आई थी। मां ने कहा- गांव की जमीन गिरवी रखकर बैंक से कुछ लोन ले लो। अपना काम-धंधा शुरू करो, वर्ना आगे बाल-बच्चों को कैसे पालोगे? लाल बिहारी बैंक पहुंचे, लेकिन मैनेजर ने जमीन के कागज मांग लिए। कागज लेने के लिए वह अपने चाचा के पास गए। चाचा भड़क उठे। बोले- जाओ, श्मशान में अपने बाप की राख से निकाल लो। परेशान लाल बिहारी गांव के एक आदमी की सलाह पर तहसील पहुंचे। तहसीलदार ने खतौनी निकाली, उस पर नजर दौड़ाई और फिर उनकी तरफ देखकर कहा- तुम तो मर चुके हो! लाल बिहारी रोते हुए उसके पैरों में गिर पड़े। बोले- साहब, मैं तो आपके सामने खड़ा हूं। तहसीलदार का जवाब था- सामने खड़े हो, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में तुम मर चुके हो और तुम्हारे हिस्से की जमीन तुम्हारे चाचा के बेटे के नाम दर्ज है। लाल बिहारी यह कहानी सुनाते हुए रो पड़े। ब्लैकबोर्ड सीरीज में मैं नीरज झा ऐसे लोगों की कहानी लाया हूं, जिन्हें सरकारी कागजों में मार दिया गया, लेकिन खुद को जिंदा साबित करने के लिए वे लड़ाई लड़ रहे हैं। इससे पहले, यूपी के आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर चौराहे पर एक दुकानदार से मैंने पूछा- ‘मुझे लाल बिहारी से मिलना है, उनके घर का पता बता सकते हैं?’ दुकानदार मुझे कुछ देर देखता रहा, फिर बोला, ‘अरे! आप ‘मृतक बिहारी’ का घर पूछ रहे हैं? मैंने कहां- हां, वही जिन्हें कागजों में मरा घोषित कर दिया गया है। दुकानदार ने कहा- 'ऐसा कीजिए, यहां से पूरब की ओर सड़क पर आगे बढ़िए, फिर बाएं मुड़ जाइएगा। कुछ दूर जाकर किसी से भी पूछ लीजिएगा। और हां, उन्हें ‘मृतक बिहारी’ कहकर पूछेंगे तभी कोई बता पाएगा। लोग ‘लाल बिहारी’ नाम से नहीं जानते।' अब मृतक बिहारी से मिलने चल पड़ा। रास्ते में सोच रहा था कि आखिर जिस व्यक्ति से मिलने जा रहा हूं, वह तो 70 साल का जिंदा आदमी है, लोग उसे ‘मृतक’ क्यों कह रहे हैं? पैदल चलते हुए करीब 20 मिनट बाद लाल बिहारी के घर पहुंचा। वो अपने बरामदे में बैठे मिले। पूछने पर सारी कहानी सुनाने लगे- 'उस जमाने में जल्दी शादी हो जाती थी। 10 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई थी, लेकिन पत्नी 18 साल की हुई, तब मेरा गंवना हुआ और वह घर आई। खर्च बढ़ गया तो अपना काम-धंधा शुरू करने के लिए बैंक से लोन लेने गया, जिसके बाद तहसीलदार ने खतौनी निकालकर बताया था कि- मैं मर चुका हूं। उस दिन घर पहुंचकर मां को बताया कि मुझे जमीन के कागजों में मरा बता दिया गया है। इससे दुखी मां ने एक हफ्ते तक चूल्हा नहीं जलाया। जब लोगों को ये बता पता चली तो वे मुझे मृतक बिहारी कहकर बुलाने लगे। सुनकर बुरा लगता है, लेकिन क्या कर सकता हूं? आप खुद तय कर लीजिए आप जिंदा आदमी से बात कर रहे हैं, या किसी मुर्दे से? लोग मुझे भूत-प्रेत, कंकाल तक कहते हैं। रास्ता चलते लोग मेरा मजाक उड़ाते हैं- देखो-देखो, मरा आदमी जा रहा है। सच में जब मरूंगा, तब पता नहीं क्या कहेंगे?', लाल बिहारी काफी गुस्से और टीस में ये बातें जल्दी-जल्दी बताते हैं। मेरी नजर उनके बरामदे में रखी दर्जनों फाइलों पर पड़ी। ऐसा लग रहा है जैसे किसी वकील के घर बैठा हूं। वह बताते हैं, ‘ये सभी फाइलें मेरे केस से जुड़ी हैं। मैं अंगूठाछाप हूं। पढ़ने का मौका नहीं मिला, लेकिन अपने दोस्तों की मदद से थोड़ा लिखना-पढ़ना सीख गया हूं।' वह मुस्कुराकर कहते हैं- 'गांव में एक आदमी की मौत हो गई है। उसके अंतिम संस्कार में जाना है। जरा सोचिए, एक मुर्दा आदमी मुर्दे को मिट्टी देने जाएगा?' वह बताते हैं- यह मेरी नानी का घर है। मेरा असली घर यहां से 80 किलोमीटर दूर खलीलाबाद में है। 1955 की बात है। करीब 8-9 महीने का था। अचानक पिता की मौत हो गई। विधवा मां की कोई देख-भाल करने वाला नहीं था। बहुत गरीब परिवार था। मां मुझे लेकर यहां आ गईं। थोड़ा बड़ा हुआ, तो मां ने बताया- पिता की मौत के बाद सभी मेरी उन्हें ‘कुलच्छनी’ ‘मनहूस’ कहकर ताने मारते थे। कहते थे- देखो, इसके कैसे करम हैं। आते ही पति को खा गई। मुझे भी कहते थे- कैसा अभागा बेटा पैदा हुआ। जन्म लेते ही बाप को मार दिया। वह बताती थीं कि हमारी हालत इतनी खराब थी कि एक रोटी में दिनभर गुजारा होता था। घर में दूध नहीं था, तो मां मुझे अरारोट घोलकर पिला देती थीं। यहां पास में कुछ बुनकर कपड़े बनाते थे। जब 7-8 साल का हुआ, तो मां ने मुझे उनके पास काम सीखने भेज दिया। वह जमीदारों के खेतों में काम करती थीं। धीरे-धीरे मैंने बुनाई का काम सीख लिया। 10 साल का हुआ तो शादी हो गई और 8 साल बाद, यानी 18 साल का हुआ तो मेरा गंवना हुआ। पत्नी घर आई। अब काम की जरूरत पड़ने लगी। बैंक से लोन लेने गया तो जमीन का कागज मांगा गया। वहां से तहसील पहुंचा था, जहां पता चला कि मुझे कागजों में मरा घोषित कर दिया गया है। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं? सोचा, अदालत का रुख करूं, लेकिन मेरे एक जानने वाले ने बताया- तुम कोर्ट में चक्कर लगाते मर जाओगे, कुछ साबित नहीं होगा। ऐसा करो, अपने नाम के आगे मृतक लिखकर प्रशासन को चिट्ठियां भेजना शुरू करो। लाल बिहारी बताते हैं- उसके बाद मैंने अधिकारियों को कई चिट्ठियां लिखीं। अपने नाम के आगे मृतक लिखता, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस बातचीत के दौरान ही उनकी पत्नी करमी देवी भी पास में आकर बैठ जाती हैं। वह बताते हैं- 'बहुत परेशान था। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। एक दिन घर पर बैठा था। मन में ख्याल आया कि क्यों न किसी का कत्ल कर दूं या कोई बड़ा अपराध कर दूं, ताकि पुलिस मुझे गिरफ्तार करके जेल में डाल दे। जेल से जब मेरी कोर्ट में पेशी हो तो वहां कह दूं- हुजूर, मैं तो मर चुका हूं। जिंदा होता, तब न कोई अपराध करता?' अब तक कई बार थाने जाकर पुलिस से शिकायत कर चुका था कि- मैं जिंदा हूं, लेकिन मुझे कागज में मरा घोषित किय गया है। पुलिस कोई मदद नहीं कर रही थी। एक दिन मैंने योजना बनाई कि क्यों न चाचा के बेटे यानी अपने भाई का अपहरण कर लूं। उस वक्त वह 8 साल का था। शाम का वक्त था। वह घर के पास खेल रहा था। मैंने उसे उठा लिया और अपने घर में लाकर बंद कर दिया। एक कमरे में उसे हफ्तेभर बंद रखा। चाचा ने थाने में अपहरण केस दर्ज कराया, लेकिन पुलिस ने जान-बूझकर कोई खोजबीन नहीं की। पुलिस चाचा से कह रही थी की तुम्हारे भतीजे ने ही यह काम किया होगा। परेशान मत हो, बेटा वापस लौट आएगा। पुलिस जानती थी कि कागज में जिंदा होने के लिए मैंने ही ये सब किया है। आखिरकार, पुलिस ने भाई को नहीं खोजा। एक हफ्ते बाद मैंने उसे चाचा को सौंप दिया। सोचा अब क्या करूं। गांव में प्रधानी का चुनाव था। मैंने तय किया कि चुनाव लड़ूंगा, क्या पता मुझे सरकारी कागज में जिंदा कर दिया जाए। चुनाव में पर्चा छपवाया। जगह-जगह लगवाए, लेकिन फिर भी मुझे कागज में जिंदा नहीं किया गया। इस तरह छोटे-मोटे 5-6 चुनाव लड़ा। 1986 की बात है। मैंने एक विधायक की मदद ली। उनके साथ लखनऊ में विधानसभा के अंदर गया। वहां अपने नाम के पर्चे फेंके। बड़ी उम्मीद थी की शायद मेरे ऊपर अब एक्शन लिया जाएगा और कागज में जिंदा हो जाऊंगा, लेकिन उस पर भी कोई एक्शन नहीं हुआ। फिर नाउम्मीदी हाथ लगी। उसके बाद 1988 में देश के प्रधानमंत्री रहे वीपी सिंह लोकसभा चुनाव के लिए इलाहाबाद से चुनावी मैदान में उतरे। मैंने सोचा क्यों न उनके खिलाफ उतर जाऊं। मैं भी उनके खिलाफ इलाहाबाद से मैदान में उतर गया। इस बार उम्मीद थी कि मेरी चर्चा होगी और अधिकारी मुझे कागज में जिंदा कर देंगे। उस चुनाव में खर्च के लिए जो कुछ मेरे पास था सब बिक गया, लेकिन मुझे कागजों में जिंदा नहीं किया गया। आखिरकार, वह दिन आया जब पहली बार प्रशासन पर दबाव बना। 1994 की बात है। मेरी पत्नी ने विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया। अधिकारी जांच-पड़ताल के लिए मेरे घर आए। उन्होंने पत्नी से कहा- तुम विधवा कहां हो? सिंदूर लगाती हो। चूड़ी पहनती हो। तुम्हारा पति जिंदा हैं, फिर किस बात की विधवा पेंशन? उस पर पत्नी ने कहा- जब मेरे पति सरकारी कागज में मर चुके हैं, तो मैं तो विधवा ही हुई न? लाला बिहारी बताते हैं कि- अब चूंकि पैसा देने की बात थी, तो अधिकारियों ने पहली बार मेरी एक-एक चीज खंगाली। जांच करते-करते एक साल बीत गया। 1995 में आजमगढ़ प्रशासन ने पहली बार मुझे कागजों में जिंदा कर दिया। मेरे गांव की जमीन, जो मेरे चाचा के बेटों के नाम पर थी, वह भी मेरे नाम कराकर दी। इस तरह खुद को जिंदा साबित करने में 18 साल लग गए। बात यहीं खत्म करके लाल बिहारी एक मय्यत यानी शोक में शामिल होने निकल जाते हैं। जाते-जाते कहते हैं- उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मेरे जैसे दर्जनों केस हैं। एक मामला तो जहानागंज के भुजहीं गांव में संजाफी देवी का है। अब वह चले जाते हैं। बातचीत से पहले ही उन्होंने अपनी संस्था ‘मृतक संघ’ के बारे में बताया था। इसके जरिए वह जान-बूझकर मृत घोषित किए गए लोगों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके मुताबिक यूपी में 40 हजार से ज्यादा ऐसे मामले हैं, जिनमें जमीन हड़पने के लिए जिंदा लोगों को ‘मुर्दा’ बता दिया गया है। चाचा ने कागजों में मारा, 6 साल बाद रजिस्टर में हुईं जिंदा अब मैं यहां से 35 किलोमीटर दूर जहानागंज के भुजहीं गांव निकल पड़ा। गांव पहुंचते ही कुछ कच्चे-पक्के मकान नजर आए। चौराहे पर डॉक्टर अंबेडकर की मूर्ति लगी हुई है। बसावट इतनी घनी है कि संजाफी देवी के घर जाने के लिए पैदल ही कच्चे रास्ते से दो घरों के बीच होकर जाना पड़ा। एक घर के बाहर 65 साल की संजाफी देवी खाट पर एक झोले में ढेर सारे कागज लिए मेरा इंतजार कर रही थीं। मुझे देखते ही फफक-फफककर रोने लगीं। वह यहां अपने मायके में रहती हैं। रोते हुए अपना घर-दुआर सब दिखाने लगीं। बोलीं- ‘ये सब आपको कोई मुर्दा औरत दिखा रही है क्या? सरकार कागज मुझे मरा बता दिया गया है। ये सारा खिलवाड़ मेरे चाचा ने किया है। जमीन के लिए मुझे जिंदा होते हुए भी कागजों में मार दिया।' वह आगे बताती हैं- हम चार भाई-बहन थे, लेकिन मैं ही इकलौती जिंदा बची। बाकी सभी बचपन में ही बीमारी से मर गए। 1986 की बात है। मेरी शादी हुई थी। कुछ महीने बाद पिता जी गुजर गए। फिर 2002 में मां भी चल बसीं। मुझे आज भी याद है- एक तरफ दरवाजे पर मां की लाश पड़ी थी। मेरे एक चाचा और उनके बेटे अर्थी तैयार कर रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ मेरे बाकी चार चाचा पंचायत बुलाकर जमीन का हिस्सा बांटने में जुटे थे। मैंने कहा- पहले मां का अंतिम संस्कार हो जाने दीजिए, फिर जमीन बांट लेंगे। उस वक्त मेरी मां के नाम ढाई एकड़ जमीन थी। मां के अंतिम संस्कार के कुछ दिन बाद जब मैं अपने खेत में गई, तो मेरे चाचा और उनके बच्चे कहने लगे- ‘अरे बुढ़िया, तुम्हारा अब यहां कुछ नहीं बचा। यहां से चली जा।’ उसके बाद रोते हुए मैं तहसील पहुंची। कागज निकलवाए, तो पता चला कि चाचा ने मुझे रजिस्टर में मृत बताकर सारी जमीन हड़प ली है। उस दिन मेरा कलेजा फट गया। जब मेरा बेटा बड़ा हुआ, तो 2005 में कोर्ट में मुकदमा दायर किया। करीब 6 साल तक कोर्ट में लड़ाई लड़ने के बाद मुझे 2011 में रजिस्टर में जिंदा किया गया। 'लेकिन आज भी जमीन चाचा के नाम ही है। लाखों रुपए कचहरी में फूंक दिए, कुछ नहीं मिला। केवल रजिस्टर में जिंदा की गई।’, यह कहते हुए संजाफी देवी फिर से रोने लगीं। जिंदा साबित करते हुए मर गईं, अब बेटी केस लड़ रही संजाफी से बात करते हुए अब रात हो चुकी है। अगली सुबह मऊ जिले के चांदमारी गांव जाना है, जहां जमीन हड़पने के लिए परिवार के लोगों ने कागज में एक विधवा की फर्जी शादी करा दी, फिर उसे मृत घोषित कर दिया। अब वह मर चुकी हैं। उनकी बेटी मुकदमा लड़ रही है। अगले दिन सुबह मऊ के चांदमारी गांव पहुंचा। वहां 55 साल के ओम प्रकाश मिले। वह बताते हैं- ‘मेरी सास धीराजी देवी खुद को जिंदा साबित करते-करते 2019 में मर गईं। अब उनकी जगह उनकी बेटी, यानी मेरी पत्नी मुकदमा लड़ रही हैं। 20 साल हो गए मुकदमा लड़ते-लड़ते, लेकिन कुछ नहीं मिला। जो कुछ अपने पास था, वह भी बिक गया। 1974 की बात है। मेरे ससुर शंकर ठाकुर पश्चिम बंगाल के वर्धमान में एक कोल कंपनी में नौकरी करते थे। वहां बिजली गिरने से उनकी मौत हो गई। उनकी जगह पर मेरी सास को नौकरी मिली। 1995 में सास रिटायर होकर गांव आईं। उन्होंने पट्टीदारों से जब जमीन-जायदाद के बारे में पूछा, तो वे कहने लगे- कैसी जमीन? तुम्हारा यहां कुछ नहीं है। उस दिन उनके साथ मार-पीट की गई और भगा दिया गया। उसके बाद वह अपने मायके जाकर रहने लगीं। करीब 10 साल बाद वह दोबारा अपने ससुराल गईं। फिर से अपनी जमीन मांगी। इस बार पट्टीदारों ने उनका हाथ तोड़ दिया। उस दिन वह तहसील पहुंचीं। खतौनी निकलवाई, तो पता चला कि उन्हें कागज में मरा घोषित कर दिया गया है। कागज में लिखा था- पति शंकर की मौत के बाद धीराजी देवी ने दूसरी शादी कर ली, जहां उनकी भी मौत हो चुकी है। उनका कोई वारिस नहीं है। उसके बाद मेरी सास की सास रामदेई देवी ने पूरी संपत्ति दूसरे बेटे रामू ठाकुर के नाम कर दी थी। 2005 में हमने इसके खिलाफ मुकदमा दायर किया। 5 साल से ज्यादा लड़ाई के बाद 2011 में कोर्ट ने माना कि धीराजी देवी जिंदा हैं। रजिस्टर में उन्हें गलती से मरा घोषित कर दिया गया है। लेकिन कोर्ट ने जमीन नहीं दिलवाई। इन 20 सालों में जो जमीन थी वह भी मुकदमा लड़ने में बिक गई, यह बताते हुए ओम प्रकाश रोने लगे। वह रोते हुए घर में गए और मेरे सामने कागजों से भरा एक थैला लाकर पलट दिया। बोले- ‘ये कागज देखिए। मन करता है जहर खा लूं, लेकिन बेटे-पत्नी का मुंह देखकर शांत हो जाता हूं। पानी-पूरी का ठेला लगाकर जो कमाता हूं, उसे मुकदमा लड़ने में खर्च कर रहा हूं। उनके बगल में बैठीं ओम प्रकाश की पत्नी मंशा देवी गुस्से में कहती हैं, ‘जिसके पास पैसा है, उसके पास सब है। कोर्ट, कचहरी, वकील। हम तो बर्बाद हो गए। आखिर कोर्ट को समझना चाहिए कि उसके सामने क्या कोई मुर्दा मुकदमा लड़ने आ रहा? कागज में मेरी मां को 2005 में मृत बताया गया, जबकि उनकी मौत 2019 में हुई। क्या बंगाल में कोल की नौकरी कोई मुर्दा कर रहा था?’ इस तरह बेबस और परेशान चेहरों के बारे में सोचते हुए मैं वापस दिल्ली लौट आया। ------------------------------------ 1- ब्लैकबोर्ड-'तुम ईसाई बन गए, बाप की लाश नाले में बहाओ':22 दिन तक सड़ती रही लाश, सरपंच बोला- अंतिम संस्कार किया तो बीवी-बच्चों के बारे में सोच लेना 7 जनवरी 2025। सुबह के 10 बजे थे। पापा की किडनी फेल होने की वजह से मौत हो गई थी। देखते ही मां रो-रोकर बेहाल हो गई। शव बरामदे में रखते ही चीख-पुकार मच गई। सभी रिश्तेदार घर पहुंचने लगे। सभी कहने लगे- अंतिम संस्कार की तैयारी करो। जब तक लाश दरवाजे पर रहेगी, सब रोते रहेंगे। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
सुबह करीब 8 से 9 बजे के बीच। दिल्ली के हौजरानी में रहने वाले मोहम्मद शाहरुख काम पर जा रहे थे। मालवीय नगर पहुंचे, तो फ्लरिश स्टे होटल से धुआं निकलता दिखा। भागकर होटल के पास पहुंचे, देखा चाचा और भाई अंदर फंसे लोगों को बचाने के इंतजाम कर रहे हैं। दोनों होटल के पास नीचे गद्दे लगा रहे थे। शाहरूख बताते हैं कि गद्दे लगाते ही होटल की खिड़की से सबसे पहले स्टाफ कूदकर बाहर आया। उन्हीं से पता चला कि अंदर 40 से ज्यादा लोग फंसे हैं। इनमें से ज्यादातर विदेशी हैं। कुछ गेस्ट सो रहे हैं, उन्हें आग लगने की खबर भी नहीं है। आस-पास के लोगों ने फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस बुलाई। आस-पास जाम था, इसलिए फायर ब्रिगेड की टीम को पहुंचने में थोड़ा वक्त लग गया। एक के ऊपर एक 5-6 गद्दे लगाए, 8 ने कूदकर जान बचाई होटल के सामने अरमान खान की गद्दे की दुकान है। वे बताते हैं, ‘होटल के ग्राउंड फ्लोर पर भीषण आग लगी थी। न कोई अंदर जा सकता था और न बाहर निकल सकता था। होटल के तीनों फ्लोर पर फंसे लोग खिड़कियों से कूदने की कोशिश कर रहे थे। हमने दुकान से गद्दे निकाले और होटल के पास 5 से 6 गद्दे एक के ऊपर एक करके लगा दिए। करीब 8 लोगों ने खिड़कियों से कूदकर जान बचाई।‘ ‘तब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग बुझानी शुरू कर दी थी। आग बुझी, तो हम 10-12 लोग होटल के अंदर गए। धुएं में दम घुटने की वजह से अंदर कई लोग बेहोश पड़े थे। उन्हें चादरों में लपेटकर बाहर लाया गया। हमने करीब 40-45 लोगों को निकाला। अंदर जो जैसे बैठा या लेटा था, वैसे ही जलकर खाक हो गया था।‘ ‘पहले फ्लोर से एक महिला हेल्प-हेल्प की आवाज दे रही थी। हम सब कई लोग रेस्क्यू में लगे थे, इसलिए पता नहीं कि महिला बची या नहीं।‘ होटल में गेस्ट के साथ स्टाफ भी था क्या। इस पर अरमान बताते हैं, ‘हमें शुरू में ही स्टाफ के लोग दिखे। फिर वो कहां गए, पता नहीं।‘ रिसेप्शन पर बैठी लड़की, उसी हाल में जली मिली रेस्क्यू में शामिल आमिर खान बताते हैं, ‘ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर भयानक आग लगी थी। बुझने के बाद भी मंजर इतना भयानक था कि कमजोर दिल वाला इंसान अंदर का हाल नहीं देख सकता। अंदर इतना धुआं भरा था कि सांस लेना मुश्किल था। फर्स्ट फ्लोर के रिसेप्शन पर बैठी लड़की, हमें उसी हालत में जली मिली।' ‘बेसमेंट तक आग नहीं पहुंची थी, इसलिए हम शटर काटकर वहां फंसे लोगों को देखने पहुंचे, लेकिन अंदर बहुत अंधेरा था। हमने बाथरूम और कमरों से लोगों को ढूंढकर निकाला। ज्यादातर बेहोश थे। करीब 20 से 25 लोगों को चादरों के जरिए बाहर लाए। इनमें ज्यादातर विदेशी गेस्ट थे, सिर्फ 3 ही भारतीय थे। इनमें से कई लोगों को सीपीआर देकर हॉस्पिटल भेजा। दो लेन की सड़क पर गाड़ियां खड़ीं, फायर ब्रिगेड कैसे आएहोटल के पास मेडिकल शॉप चलाने वाले शैलेंद्र तिलक बताते हैं, ‘मैक्स अस्पताल की वजह से इलाके में हमेशा भीड़ रहती है। यहां दूसरे देशों से लोग इलाज कराने के लिए आते हैं। मरीज के साथ जो परिवार वाले आते हैं, वो इन्हीं होटलों में रूकते हैं। पिछले 6-7 साल से यहां के 10-12 होटल इन्हीं लोगों से चल रहे हैं।‘ ट्रैफिक जाम के चलते टाइम पर फायर ब्रिगेड न पहुंचने पर वे कहते हैं, ‘यहां 6 लेन की सड़क पास हुए 40 साल बीत गए, लेकिन उस पर अब तक अमल नहीं हो सका। दो लेन की सड़क पर गाड़ियां खड़ी रहती हैं, इसलिए गाड़ियों के आने-जाने के लिए भी रास्ता नहीं होता।‘ रिहायशी इलाका बना होटल हब, सेफ्टी इंतजाम भी नहीं इस घटना के बाद हौजरानी में रहने वाले लोग रिहायशी इलाके में होटल चलाने पर सवाल उठा रहे हैं। शाहीन खान कहती हैं कि यहां BNB (बेड एंड ब्रेकफास्ट) सर्टिफाइड होम स्टे के नाम पर होटल चल रहे हैं। इनमें ज्यादातर विदेशी गेस्ट ठहरते हैं, जिनमें साउथ अफ्रीका और अफगानिस्तान से आने लोग ज्यादा है। गेट नंबर-1 पर होटल रजिस्टर देखेंगे, तो करीब 20 होटलों का रिकॉर्ड मिल जाएगा। BNB के तहत 5 से 6 कमरों के होम स्टे चलाने की परमिशन होती है, लेकिन उसके सर्टिफिकेट पर यहां 25 कमरे का 3 से 4 मंजिला होटल चल रहा है। इनमें न फायर सेफ्टी के इंतजाम हैं और न इमरजेंसी एग्जिट। पिछले कुछ सालों में पुराने घर होटल की नई बिल्डिंग में बदल गए हैं। सिर्फ 500 मीटर के दायरे में 8 से 10 होटल मालवीय नगर के जिस फ्लरिश स्टे होटल में आग लगी, उसके 400 से 500 मीटर के दायरे में 8 से 10 होटल हैं। वहीं 100 मीटर के दायरे में फ्लरिश स्टे समेत तीन होटल हैं। तीनों के मालिक लोकेश बजाज ही हैं। इनके नाम- 1- फ्लरिश स्टे 2- फ्लरिश इन गेस्ट हाउस3- ग्रीन रेजीडेंसी होटल इनमें फायर सेफ्टी समेत सुरक्षा इंतजाम देखने के लिए हम फ्लरिश इन गेस्ट हाउस पहुंचे। फ्लरिश स्टे की तरह यहां भी बेसमेंट में 5 कमरे और किचन मिला। बेसमेंट में न कोई फायर एक्सटिंग्विशर लगा मिला, न ही वेंटिलेशन का इंतजाम था। बेसमेंट में एंट्री और एग्जिट के लिए एक सकरा सा गेट है, जिसमें एक बार में एक व्यक्ति ही निकल सकता है। इसके अलावा कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं है। एक व्यक्ति के आने-जाने लायक कॉरिडोर है और इसी से कमरों में जाने का रास्ता है। बेसमेंट के ऊपर 3 फ्लोर हैं। हर फ्लोर पर 6-6 कमरे हैं और बाहर दो-दो फायर एक्सटिंग्विशर लगे हैं, लेकिन वेंटिलेशन ऊपर के फ्लोर पर भी नहीं है। विंडो में फिक्स ग्लास लगे हैं, जिसे इमरजेंसी की स्थिति में तोड़कर निकलने के सिवा बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं है। जब हम अंदर पहुंचे, तो होटल खाली मिला। अंदर कोई स्टाफ नहीं था। एक कमरे में बुजुर्ग रूके हुए थे, लेकिन वो बातचीत करने के लिए तैयार नहीं हुए। …………….ये खबर भी पढ़ें… बेसमेंट में कमरे और किचन, ना वेंटिलेशन, ना इमरजेंसी एग्जिट दिल्ली के जिस फ्लरिश स्टे होटल में बुधवार को आग लगने से 21 लोगों की मौत हुई, उसका मालिक पास में ऐसे ही दो और होटल चला रहा है। लवकेश बजाज के इन दोनों होटलों में बेसमेंट के अंदर ही किचन और कमरे हैं। इनमें इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं है। पूरी खबर पढ़िए…
अगर आप WhatsApp पर आने वाले फर्जी मैसेज, ऑनलाइन ठगी और स्कैम कॉल्स से परेशान हैं, तो जल्द ही आपके लिए एक उपयोगी फीचर आने वाला है। लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp अपने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एक नए ‘Scam Alert’ फीचर की टेस्टिंग कर रहा है, जो संदिग्ध संदेशों की पहचान करने में मदद करेगा। ALSO READ: ममता बनर्जी की TMC में बड़ी टूट, ऋतब्रत बनर्जी के साथ 60 विधायक, चुने गए विपक्ष के नेता, स्पीकर ने बागी गुट को दी मंजूरी क्या है WhatsApp का नया Scam Alert फीचर? रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर WhatsApp के एंड्रॉयड बीटा वर्जन 2.26.22.2 में देखा गया है। इसकी मदद से यदि किसी अनजान व्यक्ति की ओर से कोई संदिग्ध संदेश आता है, तो WhatsApp उसे स्कैन कर संभावित स्कैम की पहचान करेगा। यदि मैसेज संदिग्ध पाया जाता है, तो चैट विंडो में एक चेतावनी (Warning Banner) दिखाई देगी, जिसमें बताया जाएगा कि यह संदेश धोखाधड़ी या स्कैम से जुड़ा हो सकता है। ALSO READ: Lava Bold N2 5G : यह भारत का सबसे सस्ता स्मार्टफोन, 6000mAh बैटरी, Android 16 और 120Hz डिस्प्ले यूजर्स को मिलेंगे दो विकल्प WhatsApp किसी भी संदिग्ध अकाउंट को अपने आप ब्लॉक नहीं करेगा। इसके बजाय यूजर्स को दो विकल्प दिए जाएंगे— Sender को Block और Report करें यदि संदेश भरोसेमंद लगे तो बातचीत जारी रखें इससे यूजर्स को अधिक नियंत्रण मिलेगा और वे अपनी समझ के अनुसार निर्णय ले सकेंगे। प्राइवेसी से नहीं होगा समझौता WhatsApp का कहना है कि स्कैम की जांच सीधे यूजर के मोबाइल डिवाइस पर होगी। इसके लिए किसी भी मैसेज को WhatsApp के सर्वर पर नहीं भेजा जाएगा। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म की End-to-End Encryption पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और WhatsApp आपके निजी संदेशों की सामग्री नहीं देख सकेगा। ALSO READ: BTA से पहले US का बड़ा झटका, 60 देशों की बदनाम लिस्ट में क्यों है भारत का नाम, क्या पड़ेगा असर फीचर रहेगा वैकल्पिक WhatsApp का यह Scam Alert फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा। जो यूजर्स इसे इस्तेमाल करना चाहेंगे, वे सेटिंग्स में जाकर इसे मैन्युअली ऑन कर सकेंगे। फिलहाल कंपनी ने इस फीचर की आधिकारिक लॉन्च डेट की घोषणा नहीं की है, लेकिन बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए WhatsApp लगातार नए सुरक्षा फीचर्स पर काम कर रहा है। ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट भी मिल सकती है रिपोर्ट्स के अनुसार, WhatsApp एक नया Transparency Section भी जोड़ सकता है, जहां यूजर्स उन सभी संदिग्ध गतिविधियों की सूची देख सकेंगे जिन्हें ऐप ने स्कैम के रूप में चिन्हित किया है। यह पूरी जानकारी केवल यूजर के डिवाइस में ही स्टोर होगी और किसी बाहरी सर्वर पर साझा नहीं की जाएगी। Edited by: Sudhir Sharma
FIFA World Cup के लिए दक्षिण अफ्रीका की 26 सदस्यीय टीम हुई घोषित
दक्षिण अफ्रीका ने फीफा विश्वकप 2026 के लिए 26 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम के मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूज ने बुधवार को देश की राधानी प्रिटोरिया में एक सेंड-ऑफ डिनर के दौरान आधिकारिक रूप से फीफा विश्वकप 2026 के लिए 26 सदस्यीय टीम का ऐलान किया। टीम में घरेलू प्रतिभा पर भरोसा जताया गया है। विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका को ग्रुप ए में मेक्सिको, दक्षिण कोरिया और चेक रिपब्लिक के साथ रखा गया है। 11 जून को, दक्षिण अफ्रीका अपने पहले ग्रुप मैच में मेक्सिको सिटी के मशहूर एज़्टेका स्टेडियम में मेजबान मेक्सिको का सामना करेगा, ठीक 16 साल बाद जब दोनों टीमें दक्षिण अफ्रीका में 2010 वर्ल्ड कप के पहले मैच में मिली थीं। यह वर्ल्ड कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका की चौथी मौजूदगी होगी। फीफा विश्वकप 2026 के लिए दक्षिण अफ्रीका की 26 सदस्यीय की टीम इस प्रकार है: गोलकीपर: रॉनवेन विलियम्स (मैमेलोडी सनडाउन्स), रिकार्डो गॉस (सिवेलेले), सिफो चेन (ऑरलैंडो पाइरेट्स); डिफेंडर : खुलिसो मुडाऊ (मामेलोडी सनडाउन्स), नकोसिनाथी सिबिसी (ऑरलैंडो पाइरेट्स), इमे ओकोन (हनोवर 96), खुलुमानी नडामने (मामेलोडी सनडाउन्स), ऑब्रे मोदिबा (मामेलोडी सनडाउन्स), मबेकेज़ेली म्बोकाज़ी (शिकागो फायर), सैमुकेले काबिनी (मोल्डे FK), थबांग माटुलुडी (पोलोकवाने सिटी), ओल्वेथु माखन्या (फिलाडेल्फिया यूनियन), ब्रैडली क्रॉस (काइज़र चीफ्स); मिडफील्डर: तेबोहो मोकोएना (मामेलोडी सनडाउन्स), टैलेंटे मबाथा (ऑरलैंडो पाइरेट्स), स्फेफेलो सिथोले (सीडी टोंडेला), जेडन एडम्स (मामेलोडी सनडाउन्स); फॉरवर्ड: कामोगेलो सेबेलेबेले (ऑरलैंडो पाइरेट्स), ओसविन एपोलिस (ऑरलैंडो पाइरेट्स), इकराम रेनर्स (मैमेलोडी सनडाउन्स), त्सेपांग मोरेमी (ऑरलैंडो पाइरेट्स), एविडेंस माकगोपा (ऑरलैंडो पाइरेट्स), लाइल फोस्टर (बर्नले), रेलेबोहिले मोफोकेंग (ऑरलैंडो पाइरेट्स), थेम्बा ज़्वाने (मैमेलोडी सनडाउन्स), थापेलो मासेको (एईएल लिमासोल)।
गुजरात के प्राथमिक स्कूलों में 1808 मुख्य शिक्षकों की तत्काल होगी भर्ती
Gujarat Primary Teacher Recruitment: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल की सरकार ने प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग ने एचटीएटी (HTAT) मुख्य शिक्षकों के लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए आधिकारिक परिपत्र (circular) जारी कर दिया है। इस परिपत्र के माध्यम से विभाग के सभी संबंधित अधिकारियों को खाली पदों को भरने के लिए तत्काल और उचित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। खाली पड़े पदों को तत्काल और तेजी से भरने के निर्देश नए आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, राज्य भर के प्राथमिक स्कूलों में खाली पड़े 1808 मुख्य शिक्षकों के पदों को बहुत जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग ने सभी अधिकारियों को आगामी बजट की तैयारियां शुरू होने से पहले स्कूलों में नए पदों की आवश्यकता से संबंधित जरूरी प्रस्ताव तैयार कर भेजने के भी विशेष निर्देश दिए हैं। 1:1:2 रेशियो के आधार पर नियमानुसार होगी भर्ती प्रक्रिया शिक्षा विभाग ने इस बार मुख्य शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 1:1:2 के तय रेशियो (अनुपात) के अनुसार आयोजित करने का बड़ा फैसला किया है। इस निर्धारित रेशियो के तहत मुख्य शिक्षकों के खाली पदों को सीधी भर्ती, विभागीय पदोन्नति (प्रमोशन) और विशेष प्रतिस्पर्धी (सेमी-डायरेक्ट) परीक्षा के माध्यम से पारदर्शी तरीके से भरा जाएगा। प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को मिलेगी नई गति विभाग के इस महत्वपूर्ण निर्णय से स्कूलों के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में काफी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षा जगत में इस कदम का स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से मुख्य शिक्षकों की कमी के कारण राज्य के कई प्राथमिक स्कूलों में दैनिक संचालन और प्रशासन से जुड़ी बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हो रही थीं। प्राथमिक स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद सभी प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेजी कार्यवाही समय पर पूरी करके पूरी भर्ती प्रक्रिया को गति देने के लिए कहा गया है। शिक्षा विभाग के इस सराहनीय कदम के कारण आने वाले समय में राज्य के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता के स्तर में सुधार होगा और साथ ही स्कूलों की प्रबंधन व्यवस्था अधिक सुदृढ़ और मजबूत बनेगी। Edited by: Vrijendra Singh Jhala
इंग्लैंड टीम में गे और बेकर डेब्यू को तैयार, इस गेंदबाज की भी 2 साल बाद वापसी
इंग्लैंड ने लॉर्ड्स में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पहले रोथेसे टेस्ट के लिए 12-खिलाड़ियों वाली टीम का ऐलान किया है।एमिलियो गे अपना टेस्ट डेब्यू करने के लिए तैयार हैं, और उनके साथ टीम में सोनी बेकर के रूप में एक और नया खिलाड़ी शामिल हो सकता है, जबकि ओली रॉबिन्सन दो साल से ज़्यादा समय में अपना पहला टेस्ट खेलने के लिए तैयार हैं। छोटी टीम का मतलब है कि पिछले महीने घोषित 15 खिलाड़ियों में से 3 खिलाड़ी को हटा दिया गया है: समरसेट के जेम्स रेव, जो अपना डेब्यू भी कर रहे होते, साथ ही लेगस्पिनर रेहान अहमद और फास्ट बॉलर मैट फिशर। आखिरी विकल्प गुरुवार सुबह कन्फर्म होने की संभावना है, हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम ने इशारा किया है कि आने वाले हफ्ते में खराब मौसम को देखते हुए, दो अलग-अलग तेज गेंदबाज, शायद गस एटकिंसन और बेकर के बीच होगी। “हम बस यह तय करेंगे कि क्या हमें एक्स्ट्रा एयर स्पीड चाहिए, अगर अचानक मौसम 35 डिग्री हो जाए और फ्लैट हो जाए। या हम लॉर्ड्स में जो ट्राई और टेस्ट किया गया है, उसी पर टिके रहेंगे और ऐसे बॉलर्स के साथ रहेंगे जो कुछ ओवरहेड कंडीशंस में कुछ मूवमेंट निकाल सकें। मैकुलम ने आगे कहा, “हम अपने ग्रुप के साथ बहुत कम्फर्टेबल हैं। हम जो चुनने जा रहे हैं, उस पर हमें भरोसा है। इससे हमें कुछ भी गारंटी नहीं मिलती, लेकिन इससे हमें लगता है कि लॉर्ड्स में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ हमें सबसे अच्छा मौका मिलेगा। हम इस विरोधी टीम के खिलाफ़ इन हालात में जो ज़रूरी होगा, हम उसी पर टिके रहना चाहते हैं।” शोएब बशीर, जो 18 महीने तक इंग्लैंड के पहले पसंद के स्पिनर थे, जब तक कि उन्हें इस सर्दी की एशेज़ के लिए नज़रअंदाज़ नहीं कर दिया गया, उनके XI में वापस आने की उम्मीद है।मैकुलम ने कहा, “बैश, उनमें शायद लॉर्ड्स में पहले कुछ दिनों में ज़्यादा होल्डिंग रोल निभाने की काबिलियत है।फिर जैसे-जैसे खेल गहरा होता है, और अगर स्पिन ज़्यादा होने लगती है, तो वह ज़्यादा अटैकिंग रोल में जा सकते हैं।” इंग्लैंड टेस्ट XII: बेन स्टोक्स (कप्तान), गस एटकिंसन, सोनी बेकर, शोएब बशीर, जैकब बेथेल, हैरी ब्रूक, बेन डकेट, एमिलियो गे, ओली रॉबिन्सन, जो रूट, जेमी स्मिथ (विकेट कीपर), जोश टंग
जून 2026 में शुक्र प्रदोष व्रत कब है? कैसे करें पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और कथा
June 2026 Shukra Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। हर महीने के दोनों पक्षों (कृष्ण और शुक्ल) की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। शुक्रवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि मिलती है। ALSO READ: कर्क राशि में गुरु और शुक्र की युति से बना ये खास राजयोग, 4 राशियों के लिए धनवर्षा इस साल जून 2026 में ज्येष्ठ मास (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष में शुक्र प्रदोष व्रत 12 जून 2026 को पड़ रहा है। आइए जानते हैं इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा: जून 2026 शुक्र प्रदोष व्रत: तिथि व शुभ मुहूर्त इस बार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत और प्रदोष काल (शाम का समय) का संयोग शुक्रवार को बन रहा है, इसलिए व्रत 12 जून को ही रखा जाएगा। साथ ही इस दिन सुबह के समय सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग भी बन रहा है, जो पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देता है। शुक्र प्रदोष व्रत की तारीख: 12 जून 2026, शुक्रवार त्रयोदशी तिथि आरंभ- 12 जून 2026 को शाम 07:36 बजे से त्रयोदशी तिथि समाप्त- 13 जून 2026 को शाम 04:07 बजे तक दिन का प्रदोष समय - 07:19 पी एम से 09:20 पी एम शिव प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 07:36 बजे से रात 09:20 बजे तक कुल अवधि: 1 घंटा 44 मिनट शुक्र प्रदोष व्रत की सरल पूजन विधि प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा शाम को सूर्यास्त के समय (प्रदोष काल) की जाती है। सुबह का संकल्प और स्नान प्रातःकाल/ सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र, यदि संभव हो तो सफेद या पीले पहनें। हाथ में जल लेकर भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें। सुबह सामान्य पूजा करें। शाम की तैयारी (प्रदोष काल) सूर्यास्त से थोड़ा पहले यानी शाम को सूर्यास्त से करीब 1 घंटा पहले दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं। पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें। शिवलिंग का अभिषेक मुख्य पूजा के रूप में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल चढ़ाएं। भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाएं। सामग्री अर्पित करना और मंत्र जप महादेव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और अक्षत (साबुत चावल) चढ़ाएं। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें। कथा और आरती शुक्र प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। धूप-दीप से शिव जी की आरती करें और भोग लगाएं। अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद पारण करें या व्रत खोलें। शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अलग-अलग दिनों को पड़ने वाले प्रदोष व्रत का फल भी अलग होता है। शुक्र प्रदोष व्रत रखने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं: सौभाग्य और समृद्धि: यह व्रत जीवन से दरिद्रता को मिटाकर सुख, समृद्धि और वैभव लाता है। दांपत्य जीवन में मधुरता: यदि पति-पत्नी के बीच अनबन रहती है, तो यह व्रत रखने से आपसी प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। संतान सुख: संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए भी यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है। ग्रह दोष शांत: इस व्रत से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है और मानसिक शांति मिलती है। शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में तीन मित्र रहते थे- राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- 'नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।' धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरंत ही उसने अपनी पत्नी को लाने का निश्चय कर लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो जिद पर अड़ा रहा और कन्या के माता-पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकुओं से पड़ा। जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया, जहां उसकी हालत ठीक होती गई और शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए। इस दिन व्रत रखकर कथा सुनें अथवा सुनाएं। कथा समाप्ति के बाद हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार 'ॐ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा' मंत्र से आहुति दें। उसके बाद शिवजी की आरती तथा प्रसाद वितरित करें, उसके बाद भोजन करें। कहा जाता है कि शुक्रवार को प्रदोष व्रत सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि भर देता है। यही कारण है कि शुक्र प्रदोष व्रत बहुत खास माना जाता है। ALSO READ: कुंभ राशि पर चल रहा है शनि की उतरती हुई साढ़ेसाती, पढ़ें क्या होगा इसका प्रभाव
भारत भाग्य विधाता: जॉन अब्राहम की दरियादिली से कंगना रनौट को मिला टाइटल
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौट इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में मुंबई में एक ग्रैंड इवेंट में इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया। ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान कंगना ने एक्टर जॉन अब्राहम का शुक्रिया भी अदा किया। जॉन अब्राहम ने अपनी दरियादिली दिखाते हुए एक रजिस्टर्ड फिल्म का टाइटल कंगना को बिना कोई पैसा लिए सौंप दिया है। यह टाइटल और कोई नहीं बल्कि कंगना की आने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' है। कंगना ने बताया कि शुरुआत में इस फिल्म का नाम काफी सीधा और वास्तविक था। ALSO READ: आमिर खान 5 जुलाई को तीसरी बार करेंगे शादी, गौरी स्प्रैट बनेंगी दुल्हन! कंगना ने बताया, मेकर्स ने इसका वर्किंग टाइटल 'नर्सेस ऑफ कामा' रखा था, जो सीधे तौर पर फिल्म की कहानी की पृष्ठभूमि को दर्शाता था। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम आगे बढ़ा और इसकी शूटिंग पूरी हुई, मेकर्स को महसूस हुआ कि यह फिल्म सिर्फ एक अस्पताल या चंद नर्सों की कहानी नहीं है। यह कहानी देश की उस सामूहिक चेतना और राष्ट्रवाद की भावना को दर्शाती है, जहां आम लोग भी वक्त आने पर असाधारण वीरता दिखाते हैं। टीम को लगा कि फिल्म का नाम ऐसा होना चाहिए जो इसके गहरे और भावनात्मक संदेश को बखूबी बयां कर सके। ऐसे में उनके दिमाग में 'भारत भाग्य विधाता' नाम आया। शीर्षक तय होने के बाद जब मेकर्स ने इसकी खोजबीन की, तो पता चला कि 'भारत भाग्य विधाता' टाइटल पहले से ही जॉन अब्राहम के पास रजिस्टर्ड है। बॉलीवुड के नियमों के मुताबिक, किसी भी रजिस्टर्ड टाइटल को हासिल करना एक लंबी और कभी-कभी महंगी प्रक्रिया होती है। कई बार लोग इसके बदले मोटी रकम की मांग करते हैं। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें कंगना रनौत ने इस वाकये को याद करते हुए कहा, जब हमें पता चला कि यह टाइटल जॉन सर के पास है, तो मैंने उन्हें फोन किया और अपनी फिल्म की कहानी बताई। मुझे लोगों ने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री में कोई भी आसानी से अपना टाइटल नहीं छोड़ता है। लेकिन जॉन सर ने हमारी बात सुनी और महज एक दिन के भीतर बिना एक भी रुपया चार्ज किए यह टाइटल हमारे नाम ट्रांसफर कर दिया। आज के समय में ऐसा बड़प्पन दिखाना वाकई बहुत बड़ी बात है। मनोज तपाड़िया द्वारा लिखित और निर्देशित 'भारत भाग्य विधाता' साल 2008 में हुए 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के एक ऐसे अध्याय को पर्दे पर लाती है, जो इतिहास के पन्नों में कहीं ओझल हो गया था। यह कहानी मुंबई के कामा एंड अल्ब्लेस हॉस्पिटल की है। हमले की उस खौफनाक रात दो खूंखार आतंकवादी इस सरकारी अस्पताल की दीवार फांदकर अंदर घुस गए थे। पूरे अस्पताल में अंधेरा छा गया था और मौत सामने खड़ी थी। ऐसे नाजुक वक्त में अस्पताल की नर्सों, वार्ड बॉय, सफाईकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाला। उन्होंने सूझबूझ से वार्डों के दरवाजे बंद किए, रोते हुए बच्चों को चुप कराया और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित जगहों पर छिपाया। इन गुमनाम हीरोज ने उस खौफनाक रात लगभग 400 मासूम जिंदगियों को आतंकियों की गोलियों का शिकार होने से बचा लिया था। फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' में कंगना रनौट के साथ-साथ गिरिजा ओक गोडबोले, स्मिता तांबे और ईशा डे जैसे मंझे हुए कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। फिल्म का निर्माण 'पेन स्टूडियोज', 'मणिकर्णिका फिल्म्स' और 'परमहंस क्रिएशन्स' के बैनर तले किया गया है। यह फिल्म 12 जून 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बात अक्टूबर 1999 की है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 224 में 132 सीटें जीतीं। एसएम कृष्णा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले थे। कृष्णा के करीबी थे 37 साल के डीके शिवकुमार। इतने करीबी कि नए मंत्रिमंडल की लिस्ट भी दोनों ने साथ मिलकर तैयार की। लेकिन एक रात पहले कांग्रेस हाईकमान से मिली फाइनल लिस्ट में डीके का ही नाम नहीं था। डीके निराश और बेचैन हो गए। उन्होंने रात में ही अपने ज्योतिषी राजगुरु बेल्लूर शंकरनारायण द्वारकानाथ से सलाह मांगी। ज्योतिषी ने कहा- 'जब तक तुम खुद दरवाजा नहीं खोलोगे और मंत्री पद की मांग नहीं करोगे, यह नहीं मिलेगा।' डीके को बात लग गई। लेकिन संभावित मंत्रियों की लिस्ट राज्यपाल को भेजी जा चुकी थी। डीके आधी रात ही एसएम कृष्णा के घर जा पहुंचे। पता चला कि कृष्णा सो रहे हैं, लेकिन डीके ने उन्हें जगाकर कहा- 'आप मेरे बिना मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ले सकते।' अगले दिन, यानी 11 अक्टूबर 1999 को जब एसएम कृष्णा ने शपथ ली, तब डीके भी मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। बाद में डीके ने खुद ये किस्सा सुनाते हुए कहा- 'ज्योतिषी द्वारकानाथ ने मुझसे कहा था कि सत्ता छीननी पड़ती है और मैंने उनकी सलाह मानी।' 27 साल बाद आज 'डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार' उर्फ डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया को हटाकर कर्नाटक के 18वें मुख्यमंत्री की शपथ ली है। आज के एक्सप्लेनर में डीके शिवकुमार की पूरी कहानी… साउथ बेंगलुरु जिले में अर्कावती नदी के किनारे बसा है कनकपुरा शहर। यहीं के वोक्कालिगा किसान परिवार में 15 मई 1962 को डीके पैदा हुए। कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन राजनीति में शुरुआत से ही दिलचस्पी थी। 18 साल की उम्र में डीके कांग्रेस की स्टू़डेंट विंग NSUI से जुड़ गए। जल्द ही NSUI के बेंगलुरु जिला अध्यक्ष बन गए। बेंगलुरु के राम नारायण चेल्लाराम कॉलेज में पढ़ने पहुंचे, तो इंडियन यूथ कांग्रेस जॉइन कर ली। साल 1979 डीके की जिंदगी में टर्निंग पॉइंट बना। कर्नाटक के पहले मुख्यमंत्री देवराज उर्स की इंदिरा गांधी से अनबन हो गई थी। देवराज ने पार्टी तोड़ी। NSUI और यूथ कांग्रेस में भी फूट पड़ी। कांग्रेस लीडरशिप ने कैडर बचाने का जिम्मा डीके को सौंपा। उन्हें यूथ कांग्रेस का स्टेट जनरल सेक्रेटरी बना दिया गया। डीके ने इतनी जिम्मेदारी से काम किया कि कांग्रेस में उनकी पैठ बनती गई। फिर साल आया 1985। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। कांग्रेस राज्य में अपनी खोई जमीन वापस चाहती थी। वहीं, जेपी आंदोलन और इमरजेंसी से निकली जनता पार्टी दूसरी बार सत्ता में आना चाहती थी। जनता पार्टी में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले एचडी देवगौड़ा ने दो सीटों से पर्चा भरा- हासन जिले की होलेनरसीपुर और बेंगलुरु की साथनूर। देवगौड़ा राज्य के रसूखदार वोक्कालिगा समुदाय से आते थे। उन्हें 'मण्णिन मगा' यानी धरती पुत्र कहा जाता था। कांग्रेस ने देवगौड़ा के खिलाफ साथनूर सीट से वोक्कालिगा समुदाय के ही 23 साल के डीके शिवकुमार को टिकट दिया। डीके ने चुनाव लड़ने के लिए बेंगलुरु के पास की पुश्तैनी जमीन बेच दी। कड़ा मुकाबला हुआ। 4 बार के विधायक और दो बार नेता प्रतिपक्ष रहे देवगौड़ा सिर्फ 15 हजार वोटों से जीत पाए। डीके हारकर भी टॉप लीडरशिप के करीबी बन गए। देवगौड़ा से हार के बावजूद डीके 4 साल तक साथनूर सीट पर डटे रहे। जिसका फायदा 1989 में मिला। डीके ने जनता पार्टी के यूके स्वामी को 13 हजार वोटों से हराया। इस साल कांग्रेस ने 224 में से 178 सीटें जीतकर सरकार बनाई। फिर अक्टूबर 1990 में कांग्रेस के एस बंगारप्पा सीएम बने और 29 साल के डीके मंत्री। वे तब सबसे कम उम्र के मंत्री थे। डीके को झटका तब लगा, जब 1994 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस से टिकट ही नहीं मिला। वजह थी- पार्टी में गुटबाजी और जातीय समीकरण। हालांकि डीके निर्दलीय चुनाव जीते। कांग्रेस के बी रमेश तीसरे नंबर पर रहे। कांग्रेस आलाकमान समझ गया कि डीके को साथ रखने में ही पार्टी का फायदा है। 1995 के आखिर में डीके की कांग्रेस में वापसी हो गई। 1999 में उन्हें फिर मंत्री बनाया गया। डीके ने साथनूर से लगातार 4 विधानसभा चुनाव जीते। 2008 के परिसीमन में साथनूर सीट कनकपुरा में शामिल हो गई। इसके बाद डीके ने कनकपुरा से चुनाव लड़ा और लगातार 4 बार जीते। सभी 8 चुनावों में डीके को हमेशा 45% से ज्यादा वोट मिले हैं। 1985 के चुनाव से ही डीके और देवगौड़ा परिवार की राजनीतिक अदावत रही है। 1999 के चुनाव में साथनूर सीट पर डीके के सामने देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी खड़े हुए। डीके ने 14 हजार वोटों से हराया। हालांकि 2002 में कनकपुरा लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में वो देवगौड़ा से हार गए। 2004 के लोकसभा चुनाव हुए। कनकपुरा से देवगौड़ा ने पर्चा भरा। डीके ने सियासी गणित लगाया और 37 साल की पत्रकार तेजस्विनी गौड़ा को टिकट दिलवा दिया। तेजस्विनी का नाम नॉमिनेशन की आखिरी तारीख को ही तय हुआ था। तेजस्विनी ने देवगौड़ा को 1.16 लाख वोटों से हरा दिया। ये चौंकाने वाली बात इसलिए थी, क्योंकि तेजस्विनी का यह पहला चुनाव था। जबकि देवगौड़ा 6 दशकों से राजनीति कर रहे थे और प्रधानमंत्री रह चुके थे। इस जीत से डीके की साख इतनी मजबूत हुई कि समर्थक उन्हें 'कनकपुरदा बंदे' यानी कनकपुरा की चट्टान बुलाने लगे। राजनीति में शिवकुमार का कद और बिजनेस तेजी से बढ़ा। किताब 'डीके शिवकुमार: कांग्रेस क्राइसिस मैनेजर, कर्नाटक किंगमेकर' लिखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवई बताते हैं, 'जब भी कांग्रेस आलाकमान को फंड या क्राइसिस मैनेजमेंट की जरूरत पड़ी, उन्हें डीके की याद आई। डीके कई बार कांग्रेस के संकटमोचक साबित हुए।’ किस्सा-1: महाराष्ट्र सरकार बचाने के लिए 40 विधायक बेंगलुरू ले गए जून 2002 की बात है। महाराष्ट्र में कांग्रेस की अगुवाई वाले डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार थी। कांग्रेस के विलासराव देशमुख 30 महीने से मुख्यमंत्री थे। अचानक 9 विधायकों ने कह दिया कि वे देशमुख सरकार को समर्थन नहीं देंगे। बीजेपी की अगुआई वाला विपक्ष देशमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गया। कांग्रेस को और विधायक टूटने का डर था। कांग्रेस आलाकमान ने संकट में डीके को जिम्मेदारी सौंपी। डीके ने रातोंरात महाराष्ट्र कांग्रेस के 40 विधायकों बेंगलुरू शिफ्ट किया। एक हफ्ते तक उन्हें कड़ी सुरक्षा में अपने ईगलटन रिसोर्ट में रखा। टूट नहीं हो सकी और फ्लोर टेस्ट में देशमुख की कुर्सी बच गई। किस्सा-2: गुजरात के राज्यसभा चुनाव के लिए 44 विधायक एयरलिफ्ट किए 2017 में डीके ने गुजरात में भी ऐसा ही किया। राज्यसभा चुनाव हो रहे थे। सोनिया गांधी के करीबी और राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे थे। कांग्रेस को डर था कि उनके विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इससे अहमद पटेल हार जाते। आलाकमान ने फिर डीके को याद किया। रातोंरात डीके ने गुजरात कांग्रेस के 44 विधायकों को अहमदाबाद से एयरलिफ्ट किया। उन्हें बेंगलुरू के ईगलटन रिसॉर्ट में ठहराया। कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए डीके खुद रिसॉर्ट में ठहरे। 2 अगस्त की सुबह इनकम टैक्स अधिकारियों ने डीके शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश के दिल्ली और बेंगलुरू में मौजूद करीब 60 ठिकानों पर छापे मारे। एक टीम ईगलटन रिसॉर्ट भी पहुंची। जब अधिकारी डीके के कमरे में घुसे तो वे उस वक्त सोकर उठे ही थे। डीके ने कहा, ‘आप अपनी जांच कीजिए। लेकिन मैं अपने मेहमानों को छोड़कर कहीं नहीं जाउंगा।’ उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि कोई भी अधिकारी गुजरात के विधायकों के कमरे में न जाए। 8 अगस्त 2017 को वोटिंग हुई। डीके खुद सभी विधायकों को लेकर कड़ी सुरक्षा में अहमदाबाद पहुंचे। नतीजा आया तो अहमद पटेल चुनाव जीत गए। उन्होंने जीत का क्रेडिट डीके को दिया। कहा जाने लगा कि डीके ने ऐसा करके बीजेपी के ‘चाणक्य’ अमित शाह को सीधी चुनौती दी। रशीद किदवई बताते हैं, ‘2017 में डीके पर बीजेपी जॉइन करने का एक अनकहा दबाव था। फिर भी उन्होंने कांग्रेस की वफादारी चुनी।’ किस्सा-3: कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस-JDS गठजोड़ किया 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 104 विधायकों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से 11 कम। राज्यपाल ने बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को सीएम पद की शपथ दिला दी। कांग्रेस के पास 79 और देवगौड़ा की JDS के पास 37 सीटें थीं। बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए दोनों ने गठबंधन कर लिया और बहुमत जुटाया। लेकिन विधायक टूटने का डर था। डीके फिर संकटमोचक बने। उन्होंने कांग्रेस के 43 विधायकों को बेंगलुरू के एक रिसॉर्ट में जमा किया। सभी के मोबाइल फोन ले लिए और उन पर नजर रखी। असंतुष्ट विधायकों को संभाला और सुनिश्चित किया कि गठबधंन में किसी भी तरह की फूट न पड़े। नतीजतन येदियुरप्पा बहुमत साबित नहीं कर पाए। एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस-JDS गठजोड़ की सरकार बनी। डीके शिवकुमार का माइनिंग, रियल एस्टेट, एजुकेशन और ट्रांसपोर्ट का कारोबार है। 2018 के चुनावी हलफनामे में 860 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित है। तब वे देश के सबसे रईस विधायकों में शुमार थे। डीके पर टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के कई आरोप हैं। ऐसे ही एक मामले में ED ने उनसे लगातार 4 दिन तक पूछताछ की और 3 सितंबर 2019 को गणेश चतुर्थी के दिन गिरफ्तार कर लिया। डीके भावुक हो गए। लोगों ने उस कद्दावर नेता की आंख में आंसू देखे, जो कभी सीधे अमित शाह से भिड़ गया था। शिवकुमार के एक नजदीकी ने कहा था, 'यह कोई राजनीतिक नाटक नहीं था। वोक्कालिगा समुदाय के लोग गणेश चतुर्थी से बहुत गहराई से जुड़े हैं। डीके के साथ जैसा बर्ताव किया गया, इस क्षेत्र के समुदाय पर इसका प्रभाव पड़ना तय है।’ करीब 50 दिन तक डीके को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया। इस दौरान सोनिया गांधी उनसे मिलने जेल पहुंची। 13 मई 2023 को जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो डीके ने कहा, ‘मैं भूल नहीं सकता कि श्रीमती सोनिया गांधी मुझसे जेल में मिलने आई थीं। बीजेपी के लोगों ने मुझे जेल में डाल दिया था। तब मैंने पद पर रहने के बदले जेल में रहना चुना। सोनिया, राहुल से वादा किया था कि कर्नाटक जीतकर दिलाऊंगा। आज वादा पूरा हुआ।’ कांग्रेस को लंबे वक्त से कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल ने हाल में सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट लिखा- ‘डीके आर्थिक अपराध के आरोप में जेल गए थे। उन्हें आर्थिक अपराध वाले बाकी कैदियों के साथ रखा गया। उनमें से कई लोगों की डीके से दोस्ती हो गई। ज्यादातर गरीब लोग थे और बहुत छोटे आरोपों में जेल में बंद थे। जैसे- पत्नी को गुजारा भत्ता न दे पाना और जमीन के झगड़े। बाद में डीके को जमानत मिल गई। बाहर आकर उन्होंने जेल की दोस्ती निभाई। भारी भरकम वकीलों की एक फौज खड़ी करके जेल के दोस्तों की जमानत करवाई। उनमें से एक उनके दिल्ली वाले घर पर काम करता था, जो आजकल अपने जमीन के मसले को सुलझाने गांव गया हुआ है। दूसरे को बेंगलुरू के अपने मॉल में नौकरी पर रखा। ऐसे ही कई और लोगों को सलाखों के पीछे से निकालकर काम दिलवाया।’ जुलाई 2020 में कांग्रेस आलाकमान ने डीके को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया। उनकी मेहनत और इलेक्शन मैनेजमेंट की बदौलत कांग्रेस 135 सीटें जीतीं। डीके ने सीएम की कुर्सी पर दावा ठोका। उन्हें सिद्धारमैया से चुनौती मिली। बंद कमरे में 5 दिन मैराथन बैठकें हुईं। आखिरकार 19 मई 2023 को तय हुआ कि सिद्धा सीएम और डीके डिप्टी सीएम बनेंगे। सिद्धारमैया का अनुभव और सामाजिक समीकरण भारी पड़ा। वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल बताते हैं, ‘कांग्रेस आलाकमान की उस मीटिंग में तय किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। तब डीके चाहते थे कि इस फैसले का ऐलान किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।' 20 नवंबर 2025 को जब सिद्धा के कार्यकाल के ढाई साल पूरे हुए, तब भी लामबंदियां और बयानबाजियां शुरू हुईं। डीके और उनके समर्थक ‘सीक्रेट डील’ को पूरा करने का दबाव बना रहे थे, जबकि सिद्धा इससे इनकार कर रहे थे। आलाकमान ने दोनों नेताओं को समझाया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। डीके के सीएम बनने की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषी द्वारकानाथ ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, ‘सत्ता की खींचतान में डीके डिप्रेशन में थे। इतना ज्यादा कि वे रोने लगते थे।’ 20 मई 2026 को सिद्धा के 3 साल पूरे हुए। बदलाव की चर्चा फिर से शुरू हुई। कांग्रेस आलाकमान ने सीएम सिद्धा और डिप्टी सीएम डीके दिल्ली तलब किया। दोनों से कहा गया- आप 26 मई की सुबह 11 बजे तक दिल्ली के इंदिरा भवन (कांग्रेस मुख्यालय) पहुंचे। करीब 6 घंटे तक बातचीत चली। राहुल ने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से भी बातचीत की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनिया और प्रियंका चाहती थीं कि कर्नाटक में सीएम परिवर्तन हो। अलाकमान ने तय किया कि डीके सीएम बनेंगे और सिद्धारमैया की केंद्र में भूमिका बढ़ेगी। 28 मई को सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया। 30 मई को डीके विधायक दल के नेता चुने गए और 3 जून को कर्नाटक के 18वें सीएम के रूप में शपथ ली। 1413.7 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ डीके आज देश के सबसे रईस मुख्यमंत्री हैं। उनके ज्योतिषी की वो लाइन एक बार फिर सही साबित हुई कि सत्ता छीननी पड़ती है। --------------- कर्नाटक से जुड़ी भी खबर पढ़िए… कर्नाटक में सीएम बदलने के पीछे की कहानी; कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक या बीजेपी के भाग्य खुले, दांव पर हैं 62% अहिंदा वोटर्स कर्नाटक में कांग्रेस ने कार्यकाल के बीच सीएम बदल दिया। 77 साल के सिद्धारमैया की जगह 64 साल के डीके शिवकुमार ले रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये फैसला एक सीक्रेट डील के तहत हुआ। लेकिन बीजेपी को दो तैयार मुद्दे मिल गए- ओबीसी नेता की अनदेखी और दागदार छवि वाले नेता को कुर्सी। पूरी खबर पढ़िए…
PSG की जीत के बाद पेरिस में भड़की हिंसा से जोड़कर पुराना वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो साल 2022 का है, तब पेरिस की सड़कों पर कुर्दिश कल्चरल सेंटर के पास हुई गोलीबारी के विरोध में प्रदर्शन हुआ था.
सम्राट विक्रमादित्य का विजय अभियान: क्या समुद्रगुप्त से भी बड़ा था उज्जैन के राजा का साम्राज्य?
इतिहास के पन्नों को जब हम पलटते हैं, तो अक्सर कुछ गौरवशाली गाथाएं कहीं पीछे छूट जाती हैं। अगर इतिहास की किताबों में हरिषेण की 'प्रयाग प्रशस्ति' के आधार पर सम्राट समुद्रगुप्त के विजय अभियानों को पढ़ाया जाता है, तो समय आ गया है कि सोमदेव के 'कथासरित्सागर' और आचार्य क्षेमेंद्र की 'बृहत्कथामंजरी' के उन पन्नों को भी सामने लाया जाए, जो उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के अखंड भारत साम्राज्य की गवाही देते हैं। आइए, इतिहास के इस नए और भव्य अंदाज़ में सम्राट विक्रमादित्य के उस चक्रवर्ती अभियान को समझते हैं, जिसने भारत की सीमाओं को ईरान तक फैला दिया था। इस महा-विजय यात्रा को चार मुख्य क्षेत्रों में श्रेणीबद्ध करके विस्तार से समझते हैं। 1. शकों का समूल नाश और भारत का पश्चिमी अभियान सम्राट विक्रमादित्य की पहली और सबसे बड़ी चुनौती विदेशी आक्रांता 'शक' थे। उन्होंने शकों को देश से खदेड़ने के लिए एक सिलसिलेवार अभियान चलाया:- चरण 1 (मालवा की मुक्ति): विक्रमादित्य ने सबसे पहले अपने गृह क्षेत्र मालवा पर कुंडली मारकर बैठे शकों पर भीषण आक्रमण किया और उन्हें वहां से भागने पर मजबूर कर दिया। चरण 2 (गुजरात पर विजय): मालवा से हारकर शक जब गुजरात की ओर भागे, तो सम्राट ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उन्होंने गुजरात पर हमला कर वहां भी अपना परचम लहराया। चरण 3 (सिंधु और शकों का अंत): गुजरात से खदेड़े जाने के बाद शक सिंध जा छुपे। विक्रमादित्य ने एक निर्णायक सैन्य अभियान चलाकर उन्हें सिंध और भारत की सीमाओं से हमेशा-हमेशा के लिए बाहर खदेड़ दिया। 2. आर्यावर्त (उत्तर और मध्य भारत) का एकीकरण शकों के सफाए के बाद, सम्राट ने उत्तर और मध्य भारत के जनपदों को एक सूत्र में पिरोने का काम शुरू किया:- चरण 4 (मत्स्य देश): सम्राट ने मध्य भारत के मत्स्य देश (वर्तमान राजस्थान का क्षेत्र) पर आक्रमण कर उसे अपने साम्राज्य में मिलाया। चरण 5 (कुरु जनपद): यहाँ से आगे बढ़ते हुए उन्होंने कुरु जनपद (आज का दिल्ली और हरियाणा क्षेत्र) पर विजय प्राप्त की। चरण 6 और 7 (पांचाल, मथुरा और प्रयाग): इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के पांचाल जनपद और कृष्ण की नगरी मथुरा को जीता। अपनी सेना के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने प्रयाग (इलाहाबाद) तक अपने शासन का विस्तार किया। चरण 8 (पूर्वदिक्ग): प्रयाग की विजय के बाद सम्राट ने संपूर्ण उत्तर प्रदेश (पूर्वदिक्ग) को अपने अधीन कर लिया। 3. पूर्वी भारत और सुदूर दक्षिण (समुद्र पार तक) की विजय उत्तर भारत को सुदृढ़ करने के बाद विक्रमादित्य की सेनाएं पूर्व और फिर दक्षिण की ओर बढ़ीं, जहाँ उन्होंने समुद्र पार के द्वीपों तक को जीत लिया: चरण 9, 10 और 11 (बिहार, बंगाल और बांग्लादेश): पूर्व की ओर बढ़ते हुए सम्राट ने अंग (बिहार), गौड़ (पश्चिम बंगाल) और फिर बंग (वर्तमान बांग्लादेश) पर अपनी संप्रभुता स्थापित की। चरण 12 (कलिंग): इसके बाद उन्होंने ओडिशा के ऐतिहासिक कलिंग क्षेत्र को जीता। चरण 13 और 14 (अपरांत और विदर्भ): दक्षिण का रुख करते हुए उन्होंने अपरांत (कोंकण क्षेत्र) और विदर्भ (महाराष्ट्र का नागपुर क्षेत्र) पर विजय पताका फहराई। चरण 15 और 16 (आंध्र और कुंतल): विजय रथ आगे बढ़ा और आज के आंध्र प्रदेश-तेलंगाना (आंध्र) तथा कर्नाटक (कुंतल) को साम्राज्य का हिस्सा बनाया गया। चरण 17 (केरल, तमिल और सिंहल द्वीप): मुख्य भूमि के सुदूर दक्षिण यानी केरल और तमिल क्षेत्रों को जीतने के बाद सम्राट की सेना ने समुद्र पार किया और सिंहल द्वीप (आज का श्रीलंका) को भी जीत लिया। चरण 18 (हिंद महासागर के द्वीप): श्रीलंका विजय के बाद, उन्होंने हिंद महासागर में स्थित कई छोटे-बड़े रणनीतिक द्वीपों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। 4. पश्चिमोत्तर सीमांत और अंतरराष्ट्रीय विजय (ईरान तक साम्राज्य) भारत के भीतर और दक्षिण में अपनी धाक जमाने के बाद, सम्राट विक्रमादित्य ने उस दौर की वैश्विक शक्तियों और विदेशी मलेच्छों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया: चरण 19 (कश्मीर और पश्चिमोत्तर): उन्होंने भारत के पश्चिमोत्तर क्षेत्र पर एक बड़ा हमला बोला, जिसमें कश्मीर, कावेरी और काष्ठा के क्षेत्रों को जीतकर वहां पैर पसारे बैठे विदेशियों को बाहर निकाला। चरण 20 (पेशावर के मलेच्छ): कश्मीर से आगे बढ़ते हुए सम्राट ने पेशावर (वर्तमान पाकिस्तान) के क्षेत्र में 'मलेच्छों' को बुरी तरह पराजित कर खदेड़ा। चरण 21 (यवनों की पराजय): पेशावर के भी पार जाकर उन्होंने यवनों (यूनानियों/ग्रीक्स) की सेनाओं को धूल चटाई। चरण 22 (तुषारों/कुषाणों का अंत): विक्रमादित्य ने आगे बढ़कर तुषार साम्राज्य यानी कुषाणों को परास्त किया। इस विजय के साथ ही वे आधुनिक ईरान की सीमाओं तक जा पहुंचे। चरण 23 (पार्थियन विजय - ईरान पर कब्जा): अपने अंतिम और सबसे भव्य चरण में, राजा विक्रमादित्य ने पार्थियन यानी 'पहलवों' को उनके ही घर में युद्ध हराकर संपूर्ण ईरान पर सनातन साम्राज्य का भगवा ध्वज लहरा दिया। निष्कर्ष: सोमदेव और क्षेमेंद्र के ग्रंथ केवल कहानियों के पुलिंदे नहीं हैं, बल्कि वे भारत के उस स्वर्णिम काल के दस्तावेज हैं जब उज्जैन की धरती से उठकर एक महानायक ने भारत को 'अखंड भारत' बनाया था और उसकी सीमाएं एशिया के दिल (ईरान) तक फैला दी थीं। यह इतिहास की वह भव्य गाथा है, जो हर भारतीय को गौरवान्वित करती है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अलावा, उन्हें वेताल पंचविंशति (विक्रम और बेताल) और सिंहासन बत्तीसी जैसी लोककथाओं में एक ऐसे पराक्रमी चक्रवर्ती सम्राट के रूप में दिखाया गया है, जिन्होंने कभी कोई युद्ध नहीं हारा। - संकलन: अनिरुद्ध जोशी
तमिल फिल्म 'किलर' के सेट पर दर्दनाक हादसा, शूटिंग के दौरान फटा सिलेंडर, एक की मौत
तमिल फिल्म इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। एक्टर और निर्देशक एस.जे. सूर्या की आगामी फिल्म 'किलर' के सेट पर एक भीषण हादसा हो गया। चेन्नई के पेरम्बूर स्थित ऐतिहासिक बिन्नी मिल्स परिसर में चल रही शूटिंग के दौरान एक गैस सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हो गया। इस दर्दनाक हादसे में स्पेशल इफेक्ट विभाग के एक युवा तकनीशियन की जान चली गई, जबकि तीन अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह घटना बुधवार सुबह करीब 5 बजे की बताई जा रही है। ALSO READ: बंदर मूवी प्रिव्यू: सच्ची घटना से प्रेरित बॉबी देओल और अनुराग कश्यप की क्राइम थ्रिलर फिल्म के सेट पर एक महत्वपूर्ण बम ब्लास्ट सीक्वेंस फिल्माया जा रहा था। इस दृश्य को सजीव और प्रभावी बनाने के लिए स्पेशल इफेक्ट्स टीम गुब्बारों में भरी जाने वाली गैस और सिलेंडरों का उपयोग कर रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान अचानक एक सिलेंडर में तकनीकी खराबी या अत्यधिक दबाव के कारण जोरदार धमाका हो गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास मौजूद तकनीशियनों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। हादसे की चपेट में आने से स्पेशल इफेक्ट्स टीम के चार सदस्य गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के तुरंत बाद सेट पर अफरा-तफरी मच गई और आनन-फानन में सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने 26 वर्षीय मधन को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अन्य तीन घायल तकनीशियनों—शक्तिवेल, सूर्या और दिनकरन का इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केस दर्ज कर लिया है और फॉरेंसिक टीम की मदद से ब्लास्ट के सही कारणों का पता लगाया जा रहा है। फिल्म 'किलर' की शूटिंग को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। फिल्म के मुख्य अभिनेता एस.जे. सूर्या और सह-कलाकार प्रीति असरानी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
द इंडिया स्टोरी: खेती के ज़हर पर बनी फिल्म, काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े पहली बार दिखेंगे साथ
गंभीर मुद्दों पर फिल्में कम बनती हैं, लेकिन जब बनती हैं तो चर्चा दूर तक जाती है। अब ऐसी ही एक फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी’ रिलीज़ से पहले सुर्खियों में आ गई है। Kajal Aggarwal और Shreyas Talpade स्टारर यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक ऐसे खामोश खतरे को सामने लाने की कोशिश कर रही है जो लाखों लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। खेती में इस्तेमाल होने वाले जहरीले रसायनों पर आधारित है कहानी The India Story का सबटाइटल ‘स्लो पॉइज़न इन प्रोग्रेस’ है, जो इसके विषय की गंभीरता को साफ दिखाता है। फिल्म खेती में इस्तेमाल होने वाले हानिकारक रसायनों और उनके लोगों की सेहत पर पड़ने वाले खतरनाक असर को केंद्र में रखती है। कहानी यह दिखाने की कोशिश करती है कि कैसे औद्योगिक लापरवाही और जागरूकता की कमी धीरे-धीरे समाज को नुकसान पहुंचा रही है। पहली बार साथ दिखेंगे काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि पहली बार Kajal Aggarwal और Shreyas Talpade एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। दोनों कलाकारों से दमदार और भावनात्मक अभिनय की उम्मीद की जा रही है। फिल्म का टोन गंभीर है, इसलिए दर्शकों को इसमें इमोशन और सामाजिक संदेश का मजबूत मिश्रण देखने को मिल सकता है। 24 जुलाई को सिनेमाघरों में होगी रिलीज़ फिल्म का निर्देशन Chetan DK ने किया है, जबकि कहानी, लेखन और निर्माण की जिम्मेदारी Sagar B Shinde ने संभाली है। यह फिल्म Zee Studios और MIG Production and Studios के सहयोग से बनाई गई है। ‘द इंडिया स्टोरी’ 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में दर्शकों के सामने आएगी। मेकर्स को उम्मीद है कि यह फिल्म सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक चर्चा में भी अपनी खास जगह बनाएगी।
भारत भाग्य विधाता: जब डर के सामने खड़ी हुई इंसानियत, कंगना रनौत की यह मूवी सच्ची कहानी पर आधारित
हर सुपरहीरो के पास केप नहीं होती और इसी सच्चाई को पर्दे पर लाने जा रही हैं कंगना रनौत अपनी नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए। 12 जून 2026 को रिलीज होने वाली यह फिल्म किसी काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि उस सच्चाई को दिखाती है जहां आम लोगों ने असाधारण हालात में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाई। यही वजह है कि फिल्म का पहला पोस्टर सामने आते ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। कहानी: आतंक के बीच इंसानियत की जीत यह फिल्म एक भयावह रात की सच्ची घटनाओं पर आधारित है, जब शहर में आतंक का माहौल था। बाहर गोलियों और हमलों की गूंज थी, लेकिन अस्पताल के अंदर इंसानियत जिंदा थी। खास तौर पर कामा अस्पताल के भीतर करीब 400 लोगों की जान बचाई गई और यही इस कहानी का सबसे मजबूत पहलू है। फिल्म अस्पताल के गलियारों, वार्ड्स और इमरजेंसी के उन पलों को दिखाती है, जहां हर सेकंड भारी था, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। ‘भारत भाग्य विधाता’ सिर्फ एक थ्रिलर नहीं, बल्कि उन गुमनाम नायकों की कहानी है, नर्स, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी, लिफ्ट ऑपरेटर, सुरक्षा कर्मी और प्रशासनिक स्टाफ, जिन्होंने बिना हथियार के, सिर्फ अपने कर्तव्य और साहस के दम पर लोगों की जान बचाई। जब पूरा शहर डर के साए में था, तब इन लोगों ने दिखाया कि असली बहादुरी क्या होती है। कंगना रनौत का नजरिया फिल्म को लेकर कंगना रनौत का कहना है कि हम अक्सर दिखावटी वीरता का जश्न मनाते हैं, लेकिन असली साहस शांत होता है जो बिना शोर के अपनी जिम्मेदारी निभाता है। उनके मुताबिक, यह फिल्म देशभक्ति का सबसे सच्चा रूप दिखाती है, जहां आम लोग ही असली हीरो बन जाते हैं। मैं इस कहानी का हिस्सा बनकर गर्व महसूस करती हूं और 12 जून को इसे बड़े पर्दे पर दर्शकों के सामने लाने के लिए उत्साहित हूं।” फिल्म को मनोज तापड़िया ने लिखा और निर्देशित किया है, जबकि डॉ. जयंतीलाल गडा के पेन स्टूडियोज ने इसे प्रस्तुत किया है। मेकर्स का मानना है कि भारत की असली ताकत उसके आम लोग हैं, जो मुश्किल वक्त में बिना किसी पहचान के बड़ा काम कर जाते हैं। मनोज तापड़िया ने कहा, “12 जून को दर्शक एक ऐसा थ्रिलर देखेंगे जो तनाव से भरा, भावनात्मक और गहराई से इंसानी होगा। लेकिन इसकी असली कहानी सिर्फ आतंक के बारे में नहीं है, यह कहानी है उस साहस की जो डर पर जीत हासिल करता है, उस करुणा की जो अफरा-तफरी के बीच भी ज़िंदा रहती है, और उस बलिदान की जो खतरे के सामने दिया जाता है। फिल्म में कंगना रनौत के साथ गिरीजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे, आशा शेलार, सुहिता ठट्टे, रसीका आगाशे, आदित्य मिश्रा और जाहिद खान जैसे कलाकार नजर आएंगे। ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और दर्शकों को एक ऐसी कहानी से रूबरू कराएगी, जो दिल को छूने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर कर देगी। निर्देशक: मनोज तापड़िया कलाकार: कंगना रनौत, गिरीजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे, आशा शेलार, सुहिता ठट्टे, रसीका आगाशे, आदित्य मिश्रा रिलीज डेट : 12 जून 2026
कर्क राशि में गुरु और शुक्र की युति से बना ये खास राजयोग, 4 राशियों के लिए धनवर्षा
सितारों की चाल बदलने वाली है और इस बार ब्रह्मांड में कुछ बहुत बड़ा होने जा रहा है! ज्योतिष की दुनिया में जब वैभव और धन के देवता शुक्र और ज्ञान के महागुरु बृहस्पति (गुरु) एक साथ हाथ मिलाते हैं, तो जन्म होता है एक बेहद शक्तिशाली और चमत्कारी योग का- 'गजलक्ष्मी राजयोग'। आने वाली 8 जून 2026 से यह धमाकेदार युति कर्क राशि में बनने जा रही है, जो कुछ चुनिंदा राशियों की किस्मत का ताला खोलने के लिए बिल्कुल तैयार है। अगर आपकी राशि नीचे दी गई 4 राशियों में से एक है, तो समझ लीजिए कि आपके जीवन में अचानक धन की बरसात और करियर में एक लंबी छलांग लगने वाली है। आइए जानते हैं कि यह राजयोग किन राशियों की जिंदगी में खुशियों का तड़का लगाने आ रहा है। ALSO READ: साल का सबसे बड़ा महागोचर: 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में प्रवेश, जानें सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल मेष राशि: अटके काम होंगे पूरे, चमकेगा करियर मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। अगर आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था या पैतृक संपत्ति को लेकर कोई विवाद चल रहा था, तो अब वह सुलझ जाएगा और अचानक धन का आगमन होगा। नौकरी करने वालों के बॉस उनकी तारीफ करते नहीं थकेंगे- प्रमोशन और सैलरी हाइक की पूरी उम्मीद है। वहीं, बिजनेसमैन इस दौरान कोई ऐसी बड़ी डील क्रैक कर सकते हैं जो उनके बिजनेस का रुख बदल देगी। मिथुन राशि: पैसों की तंगी होगी दूर, बढ़ेगा बैंक बैलेंस मिथुन राशि के जातकों के लिए यह राजयोग सीधे उनकी जेब पर असर डालेगा, यानी आर्थिक स्थिति में जबरदस्त उछाल आने वाला है। कमाई के नए रास्ते खुलेंगे और अगर आपने पहले कभी कहीं इन्वेस्ट किया था, तो अब उससे मोटा मुनाफा वसूलने का समय आ गया है। घर में सुख-सुविधाओं की चीजें बढ़ेंगी और परिवार में किसी शुभ या मांगलिक कार्य की शहनाई गूंज सकती है। ALSO READ: शनि, बृहस्पति, राहु और केतु के कारण 5 राशियों के लिए रहेगा राजयोग कर्क राशि: आप ही हैं इस राजयोग के 'असली किंग' चूंकि यह जादुई संयोग कर्क राशि में ही आकार ले रहा है, इसलिए सबसे ज्यादा लाइमलाइट और फायदा आपको ही मिलने वाला है। समाज में आपका दबदबा बढ़ेगा, लोग आपकी बात सुनेंगे और मान-सम्मान में चार चांद लग जाएंगे। बिजनेस करने वालों के हाथ कोई 'जैकपॉट' लग सकता है, जिससे अप्रत्याशित मुनाफा होगा। अगर कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इससे बेहतर मुहूर्त दूसरा नहीं हो सकता। कन्या राशि: सुख-साधनों की बौछार और मनचाही सफलता कन्या राशि वालों के लिए यह समय ऐश-ओ-आराम और भौतिक सुखों को बढ़ाने वाला रहेगा। शेयर मार्केट, लॉटरी या किसी पुराने निवेश से अचानक आपकी तिजोरी भर सकती है, जिससे आपका बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ेगा। स्टूडेंट्स के लिए यह दौर बेहतरीन है; उन्हें कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में सफलता मिलेगी। वहीं, जो युवा लंबे समय से जॉब की तलाश में भटक रहे थे, उन्हें मनचाही नौकरी का ऑफर लेटर मिल सकता है। भाग्य चमकाने का एक सीक्रेट मंत्र: ग्रहों के इस अद्भुत संयोग का सौ फीसदी फायदा उठाने के लिए, इस दौरान मां लक्ष्मी की दिल से आराधना करें। साथ ही, शुक्रवार के दिन सफेद चीजें (जैसे दूध, चीनी या सफेद कपड़े) दान करना न भूलें। ऐसा करने से इस राजयोग का शुभ असर कई गुना बढ़ जाएगा!
राहुल से BJP क्यों डरती है? सुप्रिया श्रीनेत ने गिनाईं 20 बड़ी वजहें
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने राहुल गांधी के समर्थन में भाजपा और आलोचकों पर तीखा हमला बोला। जानिए राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस के बड़े दावे
'गवर्नर' को असली 1990 का लुक देने के लिए मेकर्स को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत, पढ़ें हर एक डिटेल
मनोज बाजपेयी और अदा शर्मा स्टारर फिल्म 'गवर्नर' इस साल की सबसे मच-अवेटेड फिल्मों में से एक है, जो अपने ट्रेलर लॉन्च के बाद से ही लगातार जबरदस्त सुर्खियां बटोर रही है। भारत के 1990 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म देश के इतिहास के एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय को टटोलती है। इतिहास के इस पन्ने को पर्दे पर इतने बेहतरीन तरीके से उतारने के लिए दर्शकों से ट्रेलर को बेहद शानदार रिस्पॉन्स मिला है। अपनी दमदार कहानी के अलावा, 'गवर्नर' इस समय उस दौर (1990 के दशक) को पूरी तरह प्रामाणिक और असली दिखाने के लिए की गई कड़ी मेहनत को लेकर भी चर्चा में है। प्रोडक्शन से जुड़े एक करीबी सूत्र ने खुलासा किया कि मेकर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस दौर को पर्दे पर हूबहू जिंदा करने की थी। चूंकि फिल्म का एक बड़ा हिस्सा असली आउटडोर लोकेशंस पर शूट किया गया था, इसलिए टीम को आज के आधुनिक दौर के माहौल को बदलकर उसे 1990 के दशक के रंग में ढालना पड़ा। सूत्र ने बताया, गवर्नर की मेकिंग के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ऐसा दौर तैयार करना था जो स्क्रीन पर पूरी तरह से असली लगे। चूंकि इसकी शूटिंग बड़े पैमाने पर असली लोकेशंस पर की गई थी, इसलिए आज की आधुनिक दुनिया से जुड़ी हर चीज को फ्रेम से हटाने में बहुत मेहनत लगी। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें चाहे वो आधुनिक कारें हों, साइनबोर्ड हों, बिलबोर्ड, मोबाइल टावर, एलईडी डिस्प्ले हों या फिर भीड़ में खड़े लोगों के हेयरस्टाइल और कपड़े ही क्यों न हों। हर एक फ्रेम ऐसा होना चाहिए था जो दर्शकों को सीधे समय में पीछे ले जाए, और इसे हासिल करने के लिए पूरी टीम की तरफ से बारीक प्लानिंग और बारीकियों पर खास ध्यान देने की जरूरत थी। सच्ची घटनाओं से प्रेरित 'गवर्नर' दर्शकों को भारत के आर्थिक इतिहास के सबसे उथल-पुथल भरे दौर में ले जाती है। 1990 के वित्तीय संकट के बीच सेट यह फिल्म बड़े फैसलों, राजनीतिक दांव-पेचों और संस्थागत टकरावों की एक बेहद रोमांचक कहानी बयां करती है। ट्रेलर में अनिश्चितता और महत्वाकांक्षा से भरी एक गंभीर कहानी की झलक मिलती है, वहीं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज बाजपेयी देश को एक नई दिशा देने वाले इस पल के केंद्र में 'गवर्नर' के रूप में एक बेहद दमदार किरदार में नजर आ रहे हैं। दमदार डायलॉग्स से सजी यह शानदार कहानी 'सनशाइन पिक्चर्स' द्वारा पेश की जा रही है। चिन्मय मांडलेकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म को विपुल अमृतलाल शाह ने प्रोड्यूस किया है, जबकि आशिन ए. शाह इसके को-प्रोड्यूसर हैं। फिल्म की स्क्रिप्ट सुवेंदु भट्टाचार्य, सौरभ भरत, रवि असरानी और विपुल अमृतलाल शाह ने लिखी है। यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बॉबी देओल ने मनीषा कोइराला संग इंटीमेट सीन करने से कर दिया था इनकार, सालों बाद बताई वजह
बॉलीवुड के 'लॉर्ड बॉबी' यानी बॉबी देओल इन दिनों अपने करियर के पीक पर है। वेब सीरीज 'आश्रम' की सफलता के बाद से ही बॉबी के पास बैक-टू-बैक फिल्मों की लाइन लगी हुई है। वह जल्द ही अनुराग कश्यप की फिल्म 'बंदर' में नजर आने वाले हैं। हाल ही में बॉबी देओल रजत शर्मा के शो 'आप की अदालत' में पहुंचे। शो में बॉबी देओल ने अपने पुराने दिनों को याद किया। इस दौरान उन्होंने 90 के दशक में अपनी फीमेल को-स्टार्स के साथ अनबन और सेट पर उन्हें परेशान करने की अफवाहों पर से सालों पुराना पर्दा उठा दिया है। ALSO READ: 'धुरंधर' के लिए रणवीर सिंह ने ली मामूली फीस, फिर भी की मोटी कमाई, 'रिस्क मॉडल' ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास ट्विंकल खन्ना से लड़ाई की अफवाह बॉबी देओल ने साल 1995 में फिल्म 'बरसात' से ट्विंकल खन्ना के साथ अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। उस दौर में दोनों के बीच अनबन की कई खबरें आती थीं। इस पर बॉबी ने कहा, हम दोनों उस समय बहुत छोटे और नासमझ थे। दरअसल, मुझे बचपन से ही पेट की समस्या रही है। मैं अक्सर सेट पर अपनी इस समस्या के बारे में बात करता रहता था कि आज मेरा पेट कैसा है या मैं वॉशरुम गया या नहीं। ट्विंकल मेरी इन बातों से बहुत ज्यादा चिढ़ जाती थीं। बॉबी ने आगे बताया कि ट्विंकल खन्ना ने अपने करियर के पहले ही इंटरव्यू में बॉबी की इस आदत का खुलासा मीडिया के सामने कर दिया था, जिसके बाद मीडिया ने इसे दोनों के बीच की बड़ी लड़ाई का रूप दे दिया। मनीषा कोइराला और प्याज का 'मजेदार' बदला साल 1997 की कल्ट थ्रिलर फिल्म 'गुप्त: द हिडन ट्रुथ' में बॉबी देओल, काजोल और मनीषा कोइराला मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म के एक गाने के दौरान बॉबी ने मनीषा कोइराला के साथ एक क्लोज सीन करने से मना कर दिया था। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें इस घटना को याद करते हुए बॉबी ने शो में बताया, ठंड का मौसम था और सेट के पास कोई 'चना जोर गरम' बेच रहा था। मनीषा बड़े चाव से उसमें खूब सारा कच्चा प्याज डलवाकर खा रही थीं। जब शॉट का समय आया, तो उनके मुंह से प्याज की इतनी तेज बदबू आ रही थी कि मैं चाहकर भी रोमांटिक एक्सप्रेशन नहीं दे पा रहा था। बॉबी ने इस बात का बदला लेने के लिए एक मजेदार प्रैंक भी प्लान किया। कॉलेज के एक सीन में मनीषा के भाई का किरदार निभा रहे एक नए एक्टर को बॉबी ने खूब सारी प्याज खिला दी और कहा कि इससे एक्टिंग बेहतर होती है। बॉबी का प्लान मनीषा को परेशान करने का था, लेकिन मनीषा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और बॉबी का यह प्रैंक फेल हो गया। 90 के दशक के इन हल्के-फुल्के प्रैंक्स से निकलकर बॉबी देओल अब पूरी तरह से बदल चुके हैं। फिल्म 'एनिमल' में अबरार के मूक और खूंखार विलेन के किरदार के बाद अब वे बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद एक्टर्स में शुमार हैं। वह जल्द ही अनुराग कश्यप के निर्देशन और सुदीप शर्मा की लिखी फिल्म 'बंदर' में नजर आने वाले हैं।
शुक्र तारे का नक्षत्र परिवर्तन, इन 5 राशियों पर होगा सकारात्मक असर
Venus Transit: शुक्र तारा का नक्षत्र परिवर्तन ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शुक्र ग्रह प्रेम, वैवाहिक सुख, धन, ऐश्वर्य, कला, सौंदर्य, विलासिता और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक ग्रह है। जब शुक्र एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। इस बार शुक्र तारे के नक्षत्र परिवर्तन से विशेष रूप से मेष, वृषभ, सिंह, तुला और मीन राशि के जातकों को सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बन रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह परिवर्तन करियर, व्यापार, प्रेम संबंध, वैवाहिक जीवन, आर्थिक स्थिति तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में शुभ अवसर प्रदान कर सकता है। शुक्र ग्रह का यह नक्षत्र परिवर्तन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आकर्षण शक्ति, धन लाभ, प्रेम संबंधों में मधुरता तथा भौतिक सुखों में वृद्धि का संकेत देता है। इसलिए मेष, वृषभ, सिंह, तुला और मीन राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी और शुभ माना जा रहा है। आइए जानते हैं उन 5 भाग्यशाली राशियों के बारे में जिन्हें इस गोचर से जबरदस्त लाभ होने वाला है: 1. मेष राशि (Aries) मेष राशि वाले जातकों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन बेहद शुभ रहने वाला है। आर्थिक लाभ: लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। आय के नए स्रोत खुलेंगे। करियर: नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर सराहना मिलेगी और पदोन्नति के योग बनेंगे। पारिवारिक जीवन: जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और घर में सुख-शांति का माहौल रहेगा। 2. वृषभ राशि (Taurus) चूंकि शुक्र आपकी ही राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस परिवर्तन का सबसे अधिक और सकारात्मक प्रभाव आप पर देखने को मिलेगा। व्यक्तित्व में निखार : आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा और आकर्षण में वृद्धि होगी। लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे। बिजनेस: व्यापारियों के लिए यह समय कोई नई डील साइन करने के लिए उत्तम है। बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य: सेहत में सुधार होगा और आप खुद को मानसिक रूप से काफी ऊर्जावान महसूस करेंगे। 3. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचर भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है। भाग्य का साथ: आप जिस भी काम में हाथ डालेंगे, उसमें सफलता मिलने की संभावना अधिक रहेगी। यात्राएं: बिजनेस या नौकरी के सिलसिले में की गई यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी। सुख-साधन: भौतिक सुख-सुविधाओं- जैसे गाड़ी, मकान या इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च कर सकते हैं, जिससे घर में खुशियां आएंगी। 4. तुला राशि (Libra) तुला राशि के स्वामी भी शुक्र देव ही हैं, इसलिए यह नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए भी वरदान से कम नहीं है। प्रेम और वैवाहिक जीवन: यदि आप सिंगल हैं, तो आपके जीवन में किसी खास व्यक्ति की एंट्री हो सकती है। विवाहित जातकों के बीच प्रेम और बढ़ेगा। करियर में बदलाव: कला, मीडिया, फैशन या डिजाइनिंग से जुड़े लोगों को इस अवधि में कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। निवेश: शेयर मार्केट या प्रॉपर्टी में किया गया पुराना निवेश अब अच्छा रिटर्न दे सकता है। 5. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह परिवर्तन आर्थिक और मानसिक सुकून लेकर आ रहा है। धन की आवक: अचानक से धन लाभ होने के योग बन रहे हैं। बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी। कर्ज से मुक्ति: यदि आप पिछले कुछ समय से कर्ज से परेशान थे, तो उससे राहत मिलने के रास्ते नजर आएंगे। मानसिक शांति: पिछले कुछ समय से चल रहा तनाव समाप्त होगा और आप मानसिक रूप से शांत महसूस करेंगे। विशेष टिप: शुक्र देव की कृपा को और अधिक बढ़ाने के लिए शुक्रवार के दिन सफेद रंग के कपड़े पहनें, छोटी कन्याओं को खीर खिलाएं या मिश्री का दान करें। इससे शुक्र जनित शुभ फलों में और वृद्धि होगी। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
डॉन 3 विवाद: FWICE के बैन के खिलाफ कोर्ट पहुंचे रणवीर सिंह, भेजा लीगल नोटिस
बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के बीच जारी टकराव ने अब एक बेहद गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। फरहान अख्तर की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'डॉन 3' से रणवीर सिंह के अचानक बाहर होने के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब कोर्ट में सुलझाया जाएगा। रणवीर सिंह ने फिल्म वर्कर्स की शीर्ष संस्था FWICE को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेजा है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में हलचल पैदा कर दी है। रणवीर सिंह की लीगल टीम ने अंदरूनी तौर पर बड़ा दांव खेला है। अभिनेता द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में FWICE के अधिकार क्षेत्र पर ही सीधे सवाल उठाए गए हैं। ALSO READ: हैसियत बढ़ती है तो दुश्मन भी बनते हैं, रणवीर सिंह के सपोर्ट में आगे आईं कंगना रनौट रणवीर के वकीलों का तर्क है कि एक अभिनेता और प्रोडक्शन हाउस के बीच का विवाद पूरी तरह से एक 'निजी संविदात्मक मामला' है, और इसमें किसी भी ट्रेड यूनियन या फेडरेशन को टांग अड़ाने या किसी कलाकार की आजीविका पर अघोषित प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद में अब बॉलीवुड के अन्य बड़े चेहरे भी कूद पड़े हैं। जहां एक तरफ दिग्गज प्रोड्यूसर टी.पी. अग्रवाल ने बॉम्बे सिविल कोर्ट में एक याचिका दायर कर फेडरेशन के इस अलोकतांत्रिक रवैये को चुनौती दी है, वहीं सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) भी अभिनेता के समर्थन में खड़ी दिखाई दे रही है। फिलहाल, गेंद अब पूरी तरह से अदालत के पाले में है। रणवीर सिंह के इस कानूनी नोटिस के बाद FWICE को कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल करना होगा। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या फिल्म फेडरेशन अपने रुख पर अड़ा रहता है या फिर कानून के आगे उसे अपनी इस 'नॉन-कोऑपरेशन' गाइडलाइन को वापस लेना पड़ता है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें क्या है पूरा विवाद? इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनने जा रही फिल्म 'डॉन 3' से रणवीर सिंह ने शूटिंग शुरू होने से ऐन पहले अपने पैर पीछे खींच लिए। फिल्म के निर्देशक और निर्माता फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने इस संबंध में फिल्म फेडरेशन से शिकायत दर्ज कराई। मेकर्स का आरोप है कि फिल्म के प्री-प्रोडक्शन, लोकेशन स्काउटिंग और लॉजिस्टिक्स पर पहले ही लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। ऐसे में एडवांस स्टेज पर आकर अभिनेता का प्रोजेक्ट को छोड़ना मेकर्स को भारी वित्तीय नुकसान के संकट में डाल गया। फरहान अख्तर की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए FWICE ने अपने सभी संबद्ध यूनियनों और सदस्यों को रणवीर सिंह के साथ काम न करने का एक 'असहयोग निर्देश' जारी कर दिया। संगठन के अध्यक्ष अशोक पंडित ने मीडिया को बताया कि रणवीर सिंह को अपनी बात रखने के लिए कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण फेडरेशन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ता देख संगठन ने स्पष्ट किया कि यह कोई 'आधिकारिक बैन' नहीं बल्कि एक असहयोग आंदोलन है।
हैसियत बढ़ती है तो दुश्मन भी बनते हैं, रणवीर सिंह के सपोर्ट में आगे आईं कंगना रनौट
बॉलीवुड गलियारों में इन दिनों सुपरस्टार रणवीर सिंह और निर्देशक-निर्माता फरहान अख्तर के बीच का 'डॉन 3' विवाद गर्माया हुआ है। 'डॉन 3' से रणवीर सिंह के अचानक पीछे हटने के बाद फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने अभिनेता के खिलाफ एक 'नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव' यानी असहयोग का नोटिस जारी किया है। यह विवाद अब सिर्फ गॉसिप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कानूनी मोड़ और फिल्म इंडस्ट्री के दोफाड़ होने की स्थिति आ गई है। इस विवाद के बीच कई सेलेब्स रणवीर सिंह के सपोर्ट में आगे आए हैं। अब बॉलीवुड की 'क्वीन' कंगना रनौट ने भी रणवीर सिंह का समर्थन किया है। कंगना रनौट हमेशा अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। अपनी आगामी फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान जब उनसे रणवीर सिंह के इस बैन पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'आप मुझसे पूछ रहे हैं? मुझे तो सबने बैन कर रखा है।' बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें रणवीर का हौसला बढ़ाते हुए कंगना ने आगे कहा, जब आपकी हैसियत बढ़ती है, तो दुश्मन भी बनते हैं। ऐसा हो ही नहीं सकता कि आपका कद बढ़े और आपके दुश्मन न बनें। रणवीर सिंह को तो यह सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है जो उनके इतने दुश्मन हैं। उन्होंने कहा, जीवन में जब आप आगे बढ़ते हैं, तो कई तरह की बाधाएं आती हैं। रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। मेरे साथ भी इतना सब कुछ हुआ है और देखिए, आज मैं अच्छा कर रही हूँ। मेरी गाड़ी चल रही है, कोई फर्क नहीं पड़ता। सब कुछ अंत में ठीक हो जाएगा। इस विवाद में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (IMPPA) के पूर्व अध्यक्ष और दिग्गज निर्माता टी.पी. अग्रवाल ने इस बैन के खिलाफ मुंबई की डिंडोशी सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने FWICE और IMPPA दोनों को कानूनी नोटिस भिजवाया है। अग्रवाल का तर्क है कि किसी भी ट्रेड यूनियन या फेडरेशन के पास किसी भी कलाकार या नागरिक की आजीविका और रचनात्मक स्वतंत्रता को रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। सिविल या कॉन्ट्रैक्टर विवादों का निपटारा अदालतों में होना चाहिए, न कि इस तरह के एकतरफा प्रतिबंधों के जरिए। क्या है विवाद की जड़ यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने एक्सेल एंटरटेनमेंट की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'डॉन 3' से अपने हाथ पीछे खींच लिए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन और FWICE से शिकायत की कि रणवीर के आखिरी वक्त पर फिल्म छोड़ने की वजह से उनके प्री-प्रोडक्शन के लगभग 45 करोड़ रुपए बर्बाद हो गए। FWICE का दावा है कि उन्होंने रणवीर सिंह को बातचीत के लिए तीन बार नोटिस भेजे, लेकिन अभिनेता की तरफ से ईमेल पर जवाब आया कि यह मामला पूरी तरह कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है और FWICE इस पर फैसला सुनाने का सही मंच या अधिकार क्षेत्र नहीं है। रणवीर के इस रुख से नाराज होकर फेडरेशन ने अपने 4 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को रणवीर के साथ काम न करने का निर्देश जारी कर दिया।
किडनी प्रत्यारोपण के लिए भारत में क्यों है लंबा इंतजार?
भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। अंगदान (Organ Donation) की भारी कमी और डायलिसिस के भारी-भरकम खर्च के कारण देश में अवैध किडनी रैकेट की जड़ें फैल रही हैं। जानिए इसके लक्षण, इलाज का खर्च और जमीनी हकीकत।
अजमेर में पश्चिम बंगाल की युवती से दरगाह में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी
अजमेर। दरगाह थाना क्षेत्र में पश्चिम बंगाल की एक 39 वर्षीय महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पश्चिम बंगाल से प्राप्त जीरो नंबर एफआईआर के आधार पर दरगाह थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों […] The post अजमेर में पश्चिम बंगाल की युवती से दरगाह में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी appeared first on Sabguru News .
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (03 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today 03 June 2026 horoscope in Hindi : करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। लव: जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बना रहेगा। धन: आकस्मिक धन लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। ALSO READ: Vibhuvan Chaturthi 2026: विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत कब है, जानें महत्व, पूजा विधि और मंत्र 2. वृषभ (Taurus) करियर: व्यापार में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। लव: प्रेम संबंधों में मधुरता रहेगी। धन: बजट बनाकर चलना बेहतर होगा। स्वास्थ्य: पेट संबंधी समस्या हो सकती है। उपाय: सफेद वस्त्र का दान करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: ऑफिस के प्रोजेक्ट में कलीग्स का सहयोग मिलेगा। लव: लव पार्टनर से वाद-विवाद हो सकता है। धन: रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव कम होगा। उपाय: गाय को हरा चारा खिलाएं। 4. कर्क (Cancer) करियर: कारोबार में शुभ समाचार मिल सकता है। लव: अविवाहितों के लिए विवाह का प्रस्ताव आ सकता है। धन: भूमि-भवन से जुड़े मामलों में लाभ की स्थिति है। स्वास्थ्य: बदलते मौसम के कारण सर्दी-जुकाम की संभावना है। उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें। 5. सिंह (Leo) करियर: नौकरी में लिये गये निर्णय आपको बड़ी सफलता दिलाएंगे। लव: पार्टनर आपकी भावनाओं का सम्मान करेगा। धन: आय के नए स्रोत बनेंगे, आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। स्वास्थ्य: दिनभर ऊर्जावान महसूस करेंगे। उपाय: उगते सूर्य को अर्घ्य दें। 6. कन्या (Virgo) करियर: कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर बांटें। लव: पुरानी बातों को भूलकर नई शुरुआत करने का समय है। धन: आज सोच-समझकर निवेश करें। स्वास्थ्य: कमर दर्द या जोड़ों के दर्द की समस्या हो सकती है। उपाय: गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं। ALSO READ: Weekly Horoscope 1–7 June 2026: 01 से 07 जून तक कैसा रहेगा आपका सप्ताह? शॉर्ट में पढ़ें साप्ताहिक राशिफल 7. तुला (Libra) करियर: साझेदारी में किया गया काम फलदायी होगा। लव: रोमांटिक डिनर पर जा सकते हैं। धन: सुख-सुविधाओं पर धन खर्च हो सकता है। स्वास्थ्य: आज ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। उपाय: छोटी कन्याओं को कुछ मीठा खिलाएं। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: आपकी मेहनत का श्रेय कोई और ले सकता है। लव: प्रेम जीवन में पारदर्शिता रखें। धन: उधार देने से बचें, पैसा फंस सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक शांति के लिए संगीत का सहारा लें। उपाय: सुंदरकांड का पाठ करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: आज नौकरी में उच्च अधिकारियों से प्रशंसा मिलेगी। लव: रिश्तों में नयापन आएगा। धन: पुराने निवेशों से अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य: खान-पान में लापरवाही न बरतें। उपाय: माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं। 10. मकर (Capricorn) करियर: करियर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लव: घर के बड़ों की सहमति से प्रेम संबंध विवाह में बदल सकते हैं। धन: आज अनावश्यक खर्च पर रोक लगाएं। स्वास्थ्य: नींद की कमी महसूस हो सकती है। उपाय: शनिवार के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: नई योजनाओं पर टीम वर्क में सफलता मिलेगी। लव: पार्टनर के साथ यात्रा का योग है। धन: शेयर बाजार में लाभ होने के संकेत हैं। स्वास्थ्य: शारीरिक थकान हो सकती है। उपाय: गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं। 12. मीन (Pisces) करियर: काम में मन नहीं लगेगा, मन भटक सकता है। लव: पार्टनर की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। धन: अचानक खर्च बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य: पुरानी किसी बीमारी से राहत मिल सकती है। उपाय: पक्षियों को दाना डालें। ALSO READ: गुरु का कर्क राशि में गोचर: किन राशियों के लिए रहेगा शुभ और अशुभ
बदलती सर्दियां, सिकुड़ते दाने: भारत के गेहूं पर बढ़ता जलवायु संकट और खाद्य सुरक्षा की चुनौती
Climate Trends की रिपोर्ट में खुलासा—बढ़ती गर्मी, गर्म होती रातें और बदलती बारिश भारत के गेहूं उत्पादन व खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं
देवी भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का भव्य समापन, महाआरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पुष्कर। निकटवर्ती रेवत डूंगरिया खुर्द स्थित जोगणियाधाम में आयोजित देवी भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में भव्य समापन हुआ। आठ दिनों तक चली कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। कथा के समापन अवसर पर कथा वाचक पंडित दिलीप शास्त्री […] The post देवी भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का भव्य समापन, महाआरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ appeared first on Sabguru News .
बंगाल में आजादी के बाद से ही एक ट्रेंड है। जो पार्टी सत्ता से एकबार बेदखल हुई, वो कभी लौट नहीं सकी। सिर्फ कांग्रेस एक अपवाद है। 2026 का बंगाल चुनाव हारने के बाद TMC भी सबसे मुश्किल दौर में है। क्या ममता बनर्जी TMC को संकट से निकालकर वापसी कर पाएंगी या उनके हाथ से पार्टी फिसल जाएगी; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ममता की TMC पर कितना बड़ा संकट है? जवाबः TMC पर आए संकट को 4 संकेतों से समझिए… 1. TMC के सांसद, नेता और सभासदों तक के इस्तीफे 2. दावा- भाजपा के संपर्क में TMC के 75% सांसद-विधायक 3. 80 में सिर्फ 20 विधायक ही ममता की मीटिंग में पहुंचे 4. TMC के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले सवाल-2: पार्टी को बचाने के लिए ममता बनर्जी क्या कर रहीं? जवाबः ममता बनर्जी दो तरह की स्ट्रैटेजी पर काम कर रही हैं, पहली- मजबूत और जुझारू दिखो, दूसरी- पॉलिटिकली रिलेवेंट बने रहो। चुनाव में हार के बाद पहली बार किसी सीएम ने इस्तीफा देने से मना कर दिया। जानकार बताते हैं कि ममता ने ‘मैं नहीं झुकूंगी’ वाला संदेश देने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए ऐसा किया। चुनाव बाद TMC कार्यकर्ताओं के साथ हो रही हिंसा और 30 मई को अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को भी ममता ने आक्रामक तरीके से उठाया। TMC इन घटनाओं के विरोध में पूरे राज्य में पॉलिटिकल कैंपेन खड़ा करने की कोशिश कर रही है। ममता ने 2 जून को कोलकाता के धर्मतला बस स्टैंड के पास प्रोटेस्ट किया। ममता ने एक मेगाफोन से भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमें मंच बनाने या माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी गई। लेकिन मैं लड़ूंगी या मर जाऊंगी।’ ममता ने कहा, ‘बंगाल में पुलिस वाले TMC नेताओं को धमका रहे हैं। इस मुश्किल समय में मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ूंगी।’ ममता कई मुद्दों पर INDIA ब्लॉक से अलग लीक पर चलती दिखती थीं। हालांकि चुनाव हारने के बाद उनका नया रुख दिखा। वह नेशनल लेवल पर विपक्ष की राजनीति में TMC की हिस्सेदारी और प्रभाव को कमजोर नहीं होने देना चाहतीं। चुनाव हारते ही 5 मई को ममता ने कहा, ‘मेरा टारगेट बहुत क्लियर है। मैं INDIA टीम को मजबूत करूंगी... सोनिया जी, राहुल, अरविंद केजरीवाल, हेमंत सोरेन…सभी ने मुझे फोन किया। सभी INDIA गठबंधन के सहयोगी मेरे साथ हैं। आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मजबूत होगी।’ सवाल-3: ममता की कोशिशों के बावजूद क्या वाकई TMC बिखर सकती है? जवाबः पश्चिम बंगाल को करीब से समझने वाले एक्सपर्ट्स के बीच राय बंटी हुई है। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक प्रभाकर मणि तिवारी का मानना है कि TMC बिखर जाएगी। वो कहते हैं, ‘ममता 2011 में सत्ता में आईं, तो धीरे-धीरे उन्होंने भी CPM को खत्म कर दिया था। बीजेपी भी बंगाल में विपक्ष को खत्म करना चाहती है। बीजेपी की कोशिश रहेगी कि TMC के आधे से ज्यादा विधायक अलग हो जाएं, जिससे उपचुनाव भी न कराना पड़े। हालांकि अगले 2-3 महीने तक TMC में किसी बड़ी टूट की आशंका नहीं है।’ वहीं, वरिष्ठ पत्रकार शिखा मुखर्जी मानती हैं कि TMC में कोई बड़ा विभाजन होता नहीं दिख रहा। वो कहती हैं, ‘इसका कोई साफ संकेत नहीं है कि बीजेपी TMC नेताओं को बीजेपी में शामिल होने के लिए उकसा रही है।’ बंगाल बीजेपी के बड़े नेताओं के बयानों से भी लगता है कि बीजेपी बागियों को खुला न्योता नहीं देना चाहती… हालांकि जीत के बाद 5 मई को सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता का राजनीतिक निर्वासन शुरू हो गया है। बंगाल में TMC के कई सांसद और कार्यकर्ता उनके साथ जुड़ेंगे। शिखा मुखर्जी कहती हैं कि बीजेपी फिर भी TMC को कमजोर करने के लिए कुछ विधायकों को अपने पाले में जरूर ले सकती है। सवाल-4: क्या बंगाल की सत्ता में टीएमसी वापसी कर पाएगी? जवाबः 1977 तक बंगाल में कांग्रेस 25 साल शासन में रही। हालांकि, बीच में 1967 से 1972 तक यूनाइटेड फ्रंट भी सत्ता में आई। फिर 34 साल लेफ्ट फ्रंट की सरकार चली। 2011 में सीएम बनीं ममता 2026 तक काबिज रहीं। यानी बंगाल में जो आता है, सालों तक छा जाता है। अब बीजेपी सत्ता में है। 4 वजहों से TMC की भी सत्ता में वापसी मुश्किल लगती है… 1. कैडर बेस नई पार्टी में शिफ्ट हो जाता है 2. दिल्ली बनाम बंगाल का नैरेटिव खत्म 3. ममता की जगह सुवेंदु का ‘पर्सनैलिटी कल्ट’ 4. वोटबैंक की सटीक चुनावी इंजीनियरिंग ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------पश्चिम बंगाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…बंगाल में गाय की कुर्बानी पर रोक, हिंदू क्यों नाराज:बोले- दीदी से परेशान होकर सरकार बदली, BJP ने 2500 करोड़ का धंधा बिगाड़ा पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में रहने वाले सुखदेव मंडल खेती-किसानी करते हैं। इसी से परिवार का खर्च चलता है। इस साल बेटी की शादी करनी है, इसलिए सालभर पहले बैंक से लोन लेकर मवेशी खरीदे। उम्मीद थी कि बकरीद पर बिक जाएंगे और शादी-ब्याह का खर्च निकल जाएगा, लेकिन बंगाल सरकार के एक फैसले ने उनकी उम्मीद तोड़ दी। पढ़ें पूरी खबर…
मिथुन संक्रांति 2026: कब है, क्या है इसका धार्मिक महत्व और पुण्य फल?
वर्ष में 12 संक्रांतियां होती है। जिसमें मेष, मकर, कर्क, धनु, मिथुन और मीन संक्रांति संक्रांति का ज्यादा महत्व है। 15 जून 2026 सोमवार को अधिकमास के समाप्ति के दिन मिथुन संक्रांति रहेगी। इस दिन सूर्यदेव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह गोचर दोपहर करीब 12:58 बजे होगा। इस संक्रांति का महत्व ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में अधिक है। मिथुन संक्रांति का महत्व 1. मौसम में बदलाव का प्रतीक यह संक्रांति सीधे तौर पर प्रकृति से जुड़ी है। मिथुन संक्रांति के साथ ही उत्तर भारत और मध्य भारत में भीषण गर्मी का दौर खत्म होने लगता है और आधिकारिक रूप से वर्षा ऋतु (Monsoon) की शुरुआत मानी जाती है। किसानों के लिए यह दिन बेहद खास होता है क्योंकि यहां से खेती-किसानी के काम में तेजी आती है। 2. ओडिशा का प्रसिद्ध 'राजा पर्ब' (Raja Parba) ओडिशा राज्य में मिथुन संक्रांति को 'राजा पर्ब' के रूप में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार तीन से चार दिनों तक चलता है। मान्यता: ऐसी लोक मान्यता है कि जैसे महिलाओं को मासिक धर्म (Periods) होता है, वैसे ही इन तीन दिनों में धरती माता (भूदेवी) रजस्वला होती हैं, यानी वे भविष्य की फसलों के लिए खुद को तैयार करती हैं। परंपरा: इन दिनों में धरती पर हल चलाना, खुदाई करना या कोई भी चोट पहुंचाना पूरी तरह मना होता है। महिलाएं और लड़कियां नए कपड़े पहनती हैं, झूला झूलती हैं और इस त्योहार का आनंद लेती हैं। चौथे दिन धरती माता को स्नान कराकर उनकी विशेष पूजा की जाती है। 3. पूर्वोत्तर भारत में 'अम्बुबाची मेला' (Ambubachi Mela) भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर प्रांतों में मिथुन संक्रांति को माता पृथ्वी के वार्षिक मासिक धर्म चरण के रूप में मनाया जाता है, जिसे राजा पारबा या अंबुबाची मेला के नाम से जानते हैं। असम के गुवाहाटी में स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में इस संक्रांति के दौरान 'अम्बुबाची मेला' लगता है। मान्यता है कि इस दौरान देवी कामाख्या रजस्वला होती हैं। इसलिए संक्रांति से लेकर अगले तीन दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और चौथे दिन विशेष पूजा के बाद भक्तों के लिए खोले जाते हैं। 4. दान-पुण्य और पितृ तर्पण अन्य संक्रांतियों की तरह मिथुन संक्रांति पर भी पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस दिन गरीब लोगों को अन्न, वस्त्र, पानी का घड़ा, छाता और पंखा दान करने से पुण्य मिलता है। साथ ही, इस दिन पूर्वजों (पितरों) के नाम तर्पण करने से घर में सुख-शांति आती है। ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, पिता, मान-सम्मान और करियर का कारक माना गया है। 15 जून को मिथुन राशि में सूर्य के आते ही इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। विशेष रूप से मेष, मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और आर्थिक दृष्टिकोण से काफी लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
बॉलीवुड की सबसे चर्चित सस्पेंस-थ्रिलर फ्रेंचाइजी में शामिल ‘दृश्यम’ के प्रशंसकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ की शूटिंग आधिकारिक तौर पर पूरी हो चुकी है। लंबे समय से इस फिल्म का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए यह अपडेट किसी खुशखबरी से कम नहीं है। अब फिल्म पोस्ट-प्रोडक्शन के चरण में प्रवेश कर चुकी है और इसकी रिलीज की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है। निर्देशक अभिषेक पाठक ने दी बड़ी जानकारी फिल्म के निर्देशक अभिषेक पाठक ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए शूटिंग पूरी होने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से पूरी टीम इसी फिल्म की दुनिया में जी रही थी। दिन-रात मेहनत, चुनौतियों का सामना और लगातार कहानी को बेहतर बनाने की कोशिशों के बाद आखिरकार फिल्म का शूट पूरा हो गया है। अभिषेक पाठक ने अपनी पोस्ट में कलाकारों और तकनीकी टीम का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति ने पूरे समर्पण और धैर्य के साथ काम किया और यही मेहनत अब बड़े पर्दे पर दिखाई देगी। ALSO READ: काला हिरण फिल्म पर सलमान खान का बड़ा एक्शन, रिलीज से पहले भेजा कानूनी नोटिस; 24 घंटे का अल्टीमेटम हर फ्रेम में टीम की मेहनत निर्देशक ने कहा कि इस फिल्म का हर दृश्य उन लोगों की मेहनत, जुनून और समर्पण की कहानी कहता है जिन्होंने इसे बनाने में योगदान दिया। उनके मुताबिक शूटिंग के दौरान अच्छे और मुश्किल दोनों तरह के दिन आए, लेकिन पूरी टीम ने कभी हार नहीं मानी। उनकी पोस्ट से साफ झलकता है कि ‘दृश्यम 3’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि पूरी टीम के लिए एक भावनात्मक सफर भी रही है। ALSO READ: गोल्ड डिगर नहीं, डायमंड थीं सुष्मिता सेन: 4 साल बाद ललित मोदी का बड़ा खुलासा, रिश्ते पर पहली बार खुलकर बोले फिर लौटेगा सस्पेंस का बादशाह विजय सालगांवकर ‘दृश्यम’ सीरीज ने भारतीय सिनेमा में सस्पेंस और मनोवैज्ञानिक थ्रिलर की एक अलग पहचान बनाई है। अजय देवगन द्वारा निभाया गया विजय सालगांवकर का किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है। पहली और दूसरी फिल्म में जिस तरह कहानी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा, उसी वजह से तीसरे भाग को लेकर उत्सुकता अपने चरम पर है। फिल्म में अजय देवगन के साथ तब्बू और श्रिया सरन भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। इन कलाकारों की मौजूदगी ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। ALSO READ: थाई-हाई स्लिट आउटफिट में शिल्पा शेट्टी का कातिलाना अंदाज, बोल्ड अदाओं से इंटरनेट पर मचाया तहलका गांधी जयंती पर होगा बड़ा मुकाबला ‘दृश्यम 3’ का निर्माण पैनोरमा स्टूडियोज और वायकॉम18 द्वारा किया जा रहा है। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी। त्योहारी माहौल और लंबे वीकेंड का फायदा फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिल सकता है। ऐसे में इंडस्ट्री की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘दृश्यम 3’ अपने पिछले दोनों भागों की सफलता को पीछे छोड़ पाएगी। फिलहाल इतना तय है कि विजय सालगांवकर की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। शूटिंग पूरी होने की खबर ने फैंस के उत्साह को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है और अब सभी को ट्रेलर और फिल्म की पहली झलक का इंतजार है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर लें धरती को हरा-भरा बनाने का सच्चा संकल्प
World Environment Day 2026: हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला 'विश्व पर्यावरण दिवस' हमें याद दिलाता है कि यह धरती हमारा इकलौता घर है और इसकी हरियाली को बचाना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है। साल 2026 में, जब कंक्रीट के जंगल लगातार बढ़ते जा रहे हैं और मौसम का मिजाज बदल रहा है, तब सिर्फ एक दिन का उत्सव मनाना काफी नहीं है। यदि पर्यावरण संतुलित रहेगा तो पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रहेगा। इस बार हमें अपनी सोच और आदतों को बदलने का एक सच्चा 'संकल्प' लेना होगा। ALSO READ: विश्व पर्यावरण दिवस 2026: 'कमिटमेंट नहीं, अब एक्शन का समय', यही है धरती बचाने का सबसे बड़ा संदेश आइए जानते हैं कि इस पर्यावरण दिवस पर हम अपनी धरती को फिर से सुंदर और हरा-भरा बनाने के लिए क्या संकल्प ले सकते हैं: 1. 'एक पौधा, एक संकल्प' (हर खास मौके पर वृक्षारोपण) हम अक्सर पर्यावरण दिवस पर पौधे तो लगाते हैं, लेकिन बाद में उनकी देखभाल करना भूल जाते हैं। इस साल यह संकल्प लें: अपने या परिवार के सदस्यों के जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या किसी भी शुभ अवसर पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं। पौधे को सिर्फ लगाएं नहीं, बल्कि अगले 3 वर्षों तक उसकी एक बच्चे की तरह देखभाल करने की जिम्मेदारी भी लें, ताकि वह एक मजबूत पेड़ बन सके। 2. 'शहरी हरियाली' (बालकनी और छतों को बनाएं हरा-भरा) अगर आप शहरों में रहते हैं और आपके पास जमीन की कमी है, तो भी आप धरती को हरा-भरा बनाने में योगदान दे सकते हैं: अपनी बालकनी, खिड़की या छत पर छोटे-छोटे गमले रखें। हवा को शुद्ध करने वाले (Air-Purifying) पौधे जैसे—तुलसी, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट, एलोवेरा और स्पाइडर प्लांट लगाएं। यह आपके घर के अंदर की हवा को साफ रखेंगे। 3. 'जीरो वेस्ट' और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संकल्प हरियाली तभी बढ़ेगी जब हम धरती को कचरे और प्लास्टिक के बोझ से मुक्त करेंगे: कच्चा कचरा, सूखी खाद: अपने रसोईघर के गीले कचरे (सब्जियों और फलों के छिलकों) को फेंकने के बजाय उससे घर पर ही जैविक खाद तैयार करें। इसी खाद को अपने पौधों में डालें। प्लास्टिक को ना: बाजार जाते समय कपड़े का थैला साथ ले जाने का संकल्प लें। प्लास्टिक की थैलियों और सिंगल-यूज प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार करें। ALSO READ: World Environment Day Essay: विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष निबंध 4. पानी की बचत का संकल्प (जल है तो जीवन है) बिना पानी के किसी भी हरियाली की कल्पना नहीं की जा सकती। गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए यह संकल्प लें: घर में वॉटर प्यूरीफायर (RO) से निकलने वाले बेकार पानी को बाल्टी में इकट्ठा करेंगे और उसका उपयोग पौधों में डालने या पोछा लगाने में करेंगे। बारिश के पानी को बचाने (Rainwater Harvesting) के छोटे-छोटे प्रयास अपने घरों में शुरू करेंगे। 5. अपनी 'कार्बन फुटप्रिंट' को कम करने का संकल्प प्रदूषण को कम करके ही हम पौधों को एक स्वस्थ वातावरण दे सकते हैं: कम दूरी के लिए पैदल चलने या साइकिल का उपयोग करने का संकल्प लें। सार्वजनिक वाहनों (बस या मेट्रो) या कारपूलिंग का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। संकल्प पत्र: आज ही से शुरुआत करें 'आज इस विश्व पर्यावरण दिवस पर, मैं यह संकल्प लेता/लेती हूं कि मैं प्रकृति के संसाधनों का सम्मान करूंगा/करूंगी। मैं अपनी ज़रूरतों को सीमित रखूंगा/रखूंगी और अपनी धरती मां को फिर से हरा-भरा और स्वस्थ बनाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा/करूंगी।' याद रखें, बदलाव की शुरुआत हमेशा एक छोटे से कदम से होती है। आपका लगाया हुआ एक पौधा और आपकी एक सुधरी हुई आदत आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर और सांस लेने योग्य भविष्य दे सकती है। इस 5 जून को आइए केवल बातें नहीं, बल्कि काम करके दिखाएं! अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: पृथ्वी और पर्यावरण पर कविता: काश प्रकृति भी बोल पाती
भाग्य बदलने वाली रात: परमा एकादशी व्रत की अमर कथा
parama ekadashi vrat katha: यह बात द्वापर युग की है। महाभारत के युद्ध की कगार पर खड़े अर्जुन के मन में कई दुविधाएं थीं। तब उनके सारथी और मार्गदर्शक, भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें एक ऐसी कहानी सुनाई, जो यह सिखाती है कि जब इंसान के पास सब कुछ खत्म हो जाता है, तब भी धर्म और धैर्य उसका साथ नहीं छोड़ते। अभावों के बीच महकता प्रेम और संतोष सदियों पहले, काम्पिल्य नाम के एक खूबसूरत नगर में सुमेधा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम था पवित्रा—जो अपने नाम की तरह ही पवित्र, शांत और ऊंचे विचारों वाली महिला थीं। दोनों के जीवन में एक बहुत बड़ी परीक्षा थी—घोर दरिद्रता। खाने को ठीक से अनाज नहीं था, पहनने को फटे-पुराने कपड़े थे, लेकिन उनके घर का दरवाज़ा कभी किसी अतिथि के लिए बंद नहीं होता था। खुद भूखे सो जाते, पर मेहमान को भूखा नहीं लौटने देते। एक दिन गरीबी के इस अंतहीन सिलसिले से टूटकर सुमेधा ने अपनी पत्नी से कहा, पवित्रा, अब यह मुफ़लिसी मुझसे देखी नहीं जाती। मैं धन कमाने के लिए परदेस जा रहा हूँ। पवित्रा ने मुस्कुराते हुए अपने पति का हाथ थामा और बड़े शांत भाव से कहा, स्वामी, धन और संतान तो पूर्वजन्मों के कर्मों और दान से मिलते हैं। अगर हमारे भाग्य में इस समय संघर्ष लिखा है, तो जगह बदलने से भाग्य नहीं बदलेगा। आप यहीं रहिए, हम मिलकर इस संकट का सामना करेंगे। ALSO READ: परमा एकादशी 2026: कब है व्रत? जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम जब कुटिया में आए महर्षि कौडिन्य वक्त गुज़रा और एक दोपहर उनकी कुटिया में साक्षात महर्षि कौडिन्य पधारे। ब्राह्मण दंपत्ति के पास देने के लिए कोई धन-दौलत नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपने तन-मन की श्रद्धा से महर्षि की ऐसी सेवा की कि ऋषि का हृदय पिघल गया। दोनों की आंखों में छिपे दर्द को महर्षि ने भांप लिया। महर्षि कौडिन्य ने प्यार से कहा, हे सुमेधा! तुम्हारी इस कंगाली का अंत अब निकट है। मैं तुम्हें इस दरिद्रता के चक्रव्यूह से निकलने का सबसे सीधा और दिव्य रास्ता बताता हूँ। अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में एक चमत्कारी तिथि आती है, जिसे 'परमा एकादशी' कहते हैं। तुम दोनों मिलकर पूरी श्रद्धा से इस दिन व्रत रखो और रात में सोओ मत, बल्कि ईश्वर की भक्ति में लीन रहकर जागरण करो। याद रखो, इसी व्रत के पुण्य से कभी राजा हरिश्चंद्र को उनका खोया राजपाठ मिला था और कुबेर देवताओं के धनाधीश बने थे। श्रद्धा का फल और बदला हुआ भाग्य ऋषि की बात मानकर सुमेधा और पवित्रा ने पूरे नियम और अटूट विश्वास के साथ परमा एकादशी का व्रत किया। रात भर दोनों ने प्रभु के नाम के दीप जलाए और कीर्तन किया। कहते हैं कि सच्ची श्रद्धा कभी खाली हाथ नहीं लौटती। अगले ही दिन सुबह, उनकी कुटिया के बाहर घोड़े की टापों की आवाज़ गूंजी। उन्होंने देखा कि एक दिव्य राजकुमार वहां खड़ा था। राजकुमार ने सुमेधा के त्याग और धार्मिकता से प्रभावित होकर उन्हें उपहार स्वरूप एक भव्य, आलीशान घर और इतनी धन-सम्पदा दी कि उनकी सात पीढ़ियों की गरीबी एक पल में गायब हो गई। सीख: श्री कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, जो इंसान अपने धर्म पर टिका रहता है और ईश्वर पर भरोसा रखता है, समय आने पर उसका भाग्य ज़रूर बदलता है। परमा एकादशी का व्रत सिर्फ धन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और समृद्धि देता है।
परमा एकादशी 2026: कब है व्रत? जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम
अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाली एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस बार अधिकमास ज्येष्ठ महीने में लगा है, इसलिए इसके कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। इस बार परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। आइए जानते हैं साल 2026 की परमा एकादशी से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें। 1. परमा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि आरंभ: 11 जून, 2026 को सुबह 12:57 बजे से एकादशी तिथि समाप्त: 11 जून, 2026 को रात 10:36 बजे तक उदयातिथि (व्रत का दिन): बृहस्पतिवार, 11 जून 2026 व्रत तोड़ने का (पारण) समय: 12 जून 2026 को सुबह 05:23 बजे से 08:10 बजे के बीच द्वादशी तिथि समाप्त: 12 जून 2026 को शाम 07:36 बजे ALSO READ: भाग्य बदलने वाली रात: परमा एकादशी व्रत की अमर कथा 2. व्रत का विशेष महत्व और लाभ कल्पतरू के समान फल: नि:स्वार्थ भावना से रखा गया यह व्रत कल्पतरू वृक्ष के समान फलदायी है, जिससे हर मनोकामना पूरी होती है। पापों से मुक्ति व मोक्ष: इस व्रत को करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुख और ऐश्वर्य: यह एकादशी जीवन में धन, सुख, समृद्धि और पुत्र-पौत्रादि का सुख देने वाली है। दुर्लभ सिद्धियां: पुरुषोत्तम मास की इस एकादशी को करने से साधक को परम दुर्लभ सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ALSO READ: परमा एकादशी का व्रत रखने के 10 फायदे 3. सम्पूर्ण पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप) दशमी तिथि (व्रत से एक दिन पहले): दशमी की रात्रि को सात्विक भोजन ग्रहण करें। एकादशी तिथि (व्रत का दिन): संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। पूजन सामग्री: धूप, दीप, पुष्प, मौसमी फल और नैवेद्य (प्रसाद) एकत्रित करें। अभिषेक व मंत्र: भगवान श्री विष्णु जी को पंचामृत से स्नान कराएं। पूजन के समय इस मंत्र का मनपूर्वक उच्चारण करें: एकादश्यां निराहार: स्थित्वाहमपरेअहनि, भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत दिनचर्या: पूरा दिन उपवास रखें (केवल एक समय फलाहार ले सकते हैं) और ज्यादा से ज्यादा समय श्रीहरि की भक्ति में बिताएं। रात्रि जागरण: रात में सोएं नहीं; भजन-कीर्तन, दीपदान, विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करते हुए जागरण करें। द्वादशी तिथि (अगले दिन): दूध से अभिषेक: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का केवल दूध से अभिषेक करें और हाथ जोड़कर इस मंत्र का जाप करें: अज्ञानतिमि रान्धस्य व्रतेनानेन केशव, प्रसीद सुमुखो भूत्वा ज्ञानदृष्टिप्रदो भव तर्पण व अर्घ्य: सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और पितृ तर्पण करें। दान-दक्षिणा: ब्राह्मणों को आदरपूर्वक भोजन करवाएं। उन्हें कपड़े, अनाज और सामर्थ्य अनुसार रुपए-पैसे दान दें। पारण: इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें। ALSO READ: Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा? 4. परमा एकादशी व्रत के कड़े नियम (क्या करें, क्या न करें) अन्न का त्याग: एकादशी के दिन भूलकर भी अन्न (चावल, गेहूं आदि) का सेवन न करें। वाणी पर संयम: इस दिन किसी की निंदा या बुराई न करें। किसी का दिल दुखाने वाले कटु (कड़वे) वचन न बोलें। पुण्य कार्य: गाय को चारा-पानी दें, असहाय और गरीब लोगों को भोजन, वस्त्र और अनाज का दान करें। मंदिर में फलों का दान करना भी शुभ होता है। महादान का फल: इस दिन स्वर्ण, विद्या, अन्न, भूमि और गौदान करने से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है। 5. विशेष परंपरा: पंचरात्रि उपवास परमा एकादशी पर कुछ श्रद्धालु बेहद कठिन 'पंचरात्रि उपवास' रखते हैं: यह उपवास एकादशी तिथि से शुरू होकर अमावस्या तिथि तक (5 दिनों तक) चलता है। इसमें रात के समय जल का पूर्ण त्याग कर दिया जाता है। उपवास के दौरान केवल भगवान का चरणामृत ही ग्रहण किया जाता है। इस पंचरात्र व्रत का पुण्य लाभ असीमित माना गया है।
LIVE: भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन से मिले अन्नामलाई
Latest News Today Live Updates in Hindi : भाजपा से मोहभंग की खबरों के बीच तमिलनाडु भाजपा के दिग्गज नेता अन्नामलाई आज दिल्ली में है। यहां वे पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन समेत कई दिग्गजों से मुलाकात कर रहे हैं। पल पल की जानकारी...
बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए अपना ध्यान कैसे रखें? WHO ने जारी किए नए स्व-सहायता दिशानिर्देश
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए नई गाइड जारी की है। जानिए डिप्रेशन, चिंता और तनाव से निपटने के स्व-सहायता उपाय
सिरोही:वार्ड पंचों ने दिया तीन बच्चों के सबूत, प्रशासन पर बिना जांच प्रशासक बनाने के आरोप
सबगुरु न्यूज- सिरोही। आबूरोड पंचायत समिति की किवरली पंचायत में चुने हुए जनप्रतिनिधियों और लोगों में आक्रोश है। वो इस बात का कि उनकी पंचायत समिति के अनुसूचित जनजाति के प्रशासक को प्रशासन ने कथित मामूली अनियमितता के चलते निलंबित कर दिया है, उनकी जगह उस निवर्तमान जनप्रतिनिधि को प्रशासक नियुक्त कर दिया जिसके खिलाफ […] The post सिरोही:वार्ड पंचों ने दिया तीन बच्चों के सबूत, प्रशासन पर बिना जांच प्रशासक बनाने के आरोप appeared first on Sabguru News .
इतना गर्म कैसे हो गया यूपी का बांदा जिला?
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बुंदेलखंड के बांदा जिले में इस साल गर्मी में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच गया। पिछले कई दिनों तक यहां का तापमान 47-48 डिग्री ही बना रहा। तापमान के असर के चलते शहरी और ग्रामीण इलाकों में दोपहर में ...
सुबह का वक्त, हल्की धुंध, घने जंगल में अजीब सी आवाजें आ रही हैं। 5 घंटे तक पैदल चलने के बाद चट्टानों पर कुछ लोग नजर आते हैं। नजदीक पहुंचे तो देखा चट्टानों में छोटी-बड़ी काली गुफाएं हैं। हमें देखते ही उनमें से कुछ छिप-छिपकर गुफाओं में जाने लगे। थोड़ी देर बाद डरे-सहमे कुछ लोग हमारे करीब आए। मैंने कैमरा निकाला तो वो अजीब हाव-भाव दिखाने लगे। मेरे साथी बोले- ये आपको नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस बीच, उन्हीं में से एक बुजुर्ग आगे आया और कैमरे की ओर इशारा करते हुए अपनी भाषा में बोला- इसे दूर करो, ये हमारी शक्ति खींच लेगा। मैंने तुरंत कैमरा हटा लिया। ये बात मुझे मेरे साथी ने समझाई। अपने साथी के जरिए बुजुर्ग से पूछा– आप लोग गुफाओं में क्यों रहते हैं? बुजुर्ग हमें अपनी गुफा के पास ले गया। एक ओर इशारा करते हुए कहा- यहां हमारे बुजुर्ग सोए हैं। हम उन्हें छोड़कर नहीं जाते। ये हमारी गुफाओं के रक्षक हैं। हम अपने परिवार के लोगों को भी यहीं दफनाते हैं। ये किस्सा है चोलानाइकन जनजाति का, जो 21वीं सदी में भी घने जंगलों के बीच गुफाओं में रहती है। इनसे मिलने पहुंचे थे पर्यावरणविद केए शाहजी। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं इसी चोलानाइकन जनजाति की कहानी। चोलानाइकन जनजाति के करीब 250 लोग ही बचे हैं, जो केरलम के मलप्पुरम जिले के नीलांबूर के जंगलों में बसे हैं। जब मैं इनसे मिलने जंगल पहुंची तो रोक दिया गया। केरलम सरकार ने हाल ही में चोलानाइकन लोगों से जंगल में जाकर मिलने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। केए शाहजी वो आखिरी शख्स हैं, जो इनकी गुफाओं तक पहुंचे हैं। शाहजी ने चोलानाइकन की गुफाएं और उनके रहन-सहन को करीब से देखा है। मेरी शाहजी से मुलाकात नीलांबूर जंगलों के मुहाने पर हुई। वहीं उन्होंने ये पूरी कहानी सुनाई। यह जंगल वायनाड के करीब है। मैंने प्रशासन से चोलानाइकन की गुफाओं तक जाने की मंजूरी मांगी, लेकिन अफसर नहीं माने। लगातार प्रयास करने के बाद वन विभाग के अफसरों ने सिर्फ दो चोलानाइकन परिवारों से मिलने की मंजूरी दी। ये दो परिवार जंगल के मुहाने पर रहते हैं। इन्हें सरकार ने कच्चे घर भी बनाकर दिए हैं। बाकी 20-25 परिवार जंगल में ही गुफाओं में रहते हैं। इजाजत मिलते ही मैं अपने साथी राम कुमार और बालकृष्णन के साथ वायनाड से नीलांबूर के जंगलों की ओर निकल पड़ी। रास्ते में बालकृष्णन बताते हैं कि चोलानाइकन बाहरी लोगों से डरते हैं, जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं होते। ये पहाड़ों को देवता मानते हैं। गर्मियों के मौसम में नदियों के किनारे झोपड़ी बनाते हैं। मानसून और ठंड में वापस गुफाओं में लौट जाते हैं। ये जंगल से आमतौर पर बाहर नहीं आते। फिर ये दो परिवार यहां क्यों रहते हैं? कभी-कभी कुछ सामान वगैरह लेने के लिए चोलानाइकन जंगल से बाहर आते हैं। थोड़े दिन इन कच्चे घरों में रहते हैं। प्रशासन इनकी निगरानी करता है, ताकि कोई इन्हें परेशान न करे। बाद में जंगल के बीचोबीच अपनी गुफाओं में लौट जाते हैं। नीलांबूर के आगे करीब 20 किलोमीटर के बाद सड़क खत्म हो जाती है। आगे का सफर यहां से पैदल ही तय करना होगा। हम तीनों पथरीले रास्तों से होते हुए तो जंगल के मुहाने पर पहुंचे। यहां चारों ओर पक्षियों की आवाज आ रही है। अचानक दो कच्चे घर दिखाई देते हैं। तभी बालकृष्णन कहते हैं- चोलानाइकन के दो परिवार वहीं रह रहे हैं। हम उन घरों की ओर बढ़े, तो कुत्ते भौंककर स्वागत करते हैं। घरों के करीब पहुंचते ही एक आदमी दिखता है। बालकृष्णन बताते हैं– ये मुरगन है। इस बीच, मुरगन अपने काम में लगा रहा, हमें देखा तक नहीं। वह जमीन पर बैठे-बैठे कटहल को फोड़कर उसके बीजों को खा रहा है। बालकृष्णन ने उसी की भाषा में पूछा- यह कहां से लाए हो? वह बताता है- जंगल से एक आदमी लेकर आया था। अभी वो और फल लेने जंगल गया है। इस दौरान, जब मैं इस बातचीत का वीडियो बना रही थी, तो मुरगन कुछ कहते-कहते रुक गया। बालकृष्णन के थोड़ा समझाने के बाद मुरगन मान गया। वह बताता है- गर्मी से एक महीने पहले जंगल से कटहल लाते हैं। इसे उबालते हैं। इसके बाद, इसमें शहद और मिर्च डालकर छोटे–छोटे गोले बनाकर खाते हैं। बालकृष्णन बताते हैं- 'इनके पास हर बीमारी का इलाज जंगल में ही है। ये हर तरह की जड़ी–बूटी पहचानते हैं। बालकृष्णन, मुरगन से पूछता है कि तुम्हारे यहां शादी कैसे होती है?' वो बताता है- ‘जब लड़की को लड़का पसंद कर लेता है, तो हमारे मुखिया और गांव के बुजुर्ग एक जगह सभी को बुलाते हैं। वहां वे तुलसी की दो माला बनाकर दोनों को देते हैं। लड़का, लड़की एक दूसरे को माला पहनाते हैं। इसके बाद, दोनों साथ रहने लगते हैं। उन्हें अलग से एक गुफा भी दे दी जाती है। किसी तरह का कोई भोज या लेन-देन नहीं होता।’ इतने में एक महिला आती हैं। दुबली-पतली, घुंघराले बालों वाली। बालकृष्णन ने नाम पूछा, तो बोली- बिंदु। मुझे देखते ही वह गुफा के दूसरी ओर चली जाती है और वहां कुछ सुखाने लगती है। बालकृष्णन पास में जाकर पूछते हैं- यह क्या कर रही हो? वो बताती है- ये काली मिर्च है, इसे सुखा रही हूं। जंगली शहद और काली मिर्च बेचकर थोड़ा बहुत पैसा मिल जाता है। इस दौरान मैं उनके घर में झांकती हूं, तो मुरगन–बिंदु मुझे गौर से देखते हैं। घर की दीवारें गंदी थीं और चारों तरफ धूल ही धूल है। नीचे दाल–चावल बिखरे पड़े हैं। शायद एक–दो दिन पहले उन्हें किसी ने राशन किट दी थी। जंगल से लाई गई सब्जियां हैं और नींबू भी रखे हैं। रसोई में सिर्फ 2–3 एल्युमिनियम के बर्तन दिखाई दिए। न मसाला, न नमक, न तेल। मुरगन, बालकृष्ण को बताता है कि हम जंगलों से कुछ भी तोड़कर सीधे ही खा लेते हैं, पकाते नहीं हैं। आग में मछली भून लेते हैं या चावल उबालकर कांजी बनाते हैं। तभी, मेरे साथी राम कुमार ने मुझे आवाज दी। मैं बाहर निकली, तो उन्होंने मुझे घर के पास से ही एक हल्दी की गांठ निकालकर दी। कहा– 'इसकी खुशबू लेकर देखिए।' मैंने सूंघी तो, वाकई हल्दी की ऐसी खुशबू मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। राम कुमार ने बताया– दुनिया में आपको इससे ज्यादा शुद्ध हल्दी कहीं नहीं मिलेगी। चोलानाइकन इसे खाते हैं। घाव होने पर शरीर पर लगाते हैं। इसके बाद राम कुमार ने एक पेड़ से पत्ता तोड़कर दिया। कहा- ये तेजपत्ता है। उसकी खुशबू भी लाजवाब थी। मैंने पूछा- जंगल में हर समय फल-फूल नहीं होते, ऐसे में ये क्या खाते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– चोलानाइकन जंगल से शहद इकट्ठा करते हैं। बांस के लंबे खोखले डंडों में भरकर इसे हल्की आंच पर गर्म करते हैं। इसके बाद इसे मिट्टी में दबा देते हैं। जब जंगल में खाने के लिए कुछ नहीं मिलता, तब ये लोग इस शहद को बाहर निकालकर उसमें पानी मिलाते हैं और पके चावल से खाते हैं। क्या, इनके नाम भी खास होते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– ‘हर चोलानाइकन की गुफा का एक नाम होता है, इसलिए गुफा के नाम से ही परिवार पहचाने जाते हैं। ये लोग भले ही संख्या में कम हैं, लेकिन अपने मुखिया की हर बात मानते हैं।’ ‘कौन सा परिवार किस गुफा में रहेगा, कब जंगल में नई जगह जाना है या शहद का बंटवारा कैसे होगा, ये सब मुखिया ही तय करता है।’ चोलानाइकन छोटे–छोटे कबीलों में जंगलों में अलग-अलग जगह रहते हैं। हर कबीले का एक मुखिया होता है। कबीले आपस में बहुत मेल-जोल नहीं रखते। क्या चोलानाइकन कोई उत्सव भी मनाते हैं? दैवओट्टू, इनका एक पारंपरिक उत्सव है। यह आमतौर पर अप्रैल में होता है। इस उत्सव के लिए हर परिवार शहद एकत्रित करता है। फिर शहद का एक हिस्सा पर्वत और पुरखों को अर्पित करते हैं। क्या आपको पता है, चोलानाइकन तारों को देखकर मौसम का हाल बता देते हैं। मैंने पूछा- कैसे? वो बताते हैं- ये लोग तारों की स्थिति और उनकी चमक के आधार पर मानसून के आने का अनुमान लगा लेते हैं। साथ ही, अपनी गुफा बदल लेते हैं। भारी बारिश से बचने के लिए ये लोग पहाड़ों पर बनी गुफाओं में चले जाते हैं। मौत के बाद मिट्टी से दूरी… लाश को पत्तों–बेलों से ढंकते हैं बालकृष्णन बताते हैं कि चोलनाइकन समुदाय में अंतिम संस्कार अनूठे तरीके से होता है। मौैत के बाद वे एक गहरा गड्ढा खोदते हैं। लाश को बेलों और पत्तों में लपेटकर उसमें रखते हैं। ऊपर से मिट्टी नहीं डालते, बल्कि गड्ढे को सूखी लकड़ियों और पत्तों से ढंक देते हैं। वे इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि मिट्टी का एक भी कण शव को न छू पाए। ऐसा क्यों? चोलनाइकन के लिए मिट्टी 'संसार का भार' है। शव को मिट्टी से दूर रखने के पीछे उनकी गहरी आस्था है। उनका मानना है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा बिना किसी सांसारिक बंधन में उलझे, जंगल की हवाओं और पेड़ों की चेतना में विलीन हो जाती है। अब शाम होने वाली है। हम वापस वायनाड की ओर निकल पड़ते हैं। अगले दिन, वायनाड में पर्यावरणविद केए शाहजी के घर पहुंची। शाहजी बताते हैं- बारिश के दिन थे। जब मैं पहली बार चोलानाइकन लोगों की गुफा के पास पहुंचा, तो लगा जैसे किसी दूसरी सदी में आ गया हूं। मैंने चोलानाइकन के बीच रात गुजारी है। रात में हाथियों की चिंघाड़ पूरे जंगल में गूंज रही थी। गुफाओं के पास तक भी कुछ हाथी आ गए थे, लेकिन चोलानाइकन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। वो रात मैंने करवटें बदल–बदल कर गुजारी। चोलानाइकन की खासियत बताता हूं। वे पक्षियों की चहचहाहट, हवा का रुख और पेड़ों की पत्तियों के हिलने के तरीके से बता सकते हैं कि बारिश कब होगी या जंगल में खतरा कितना करीब है। ‘वे कौन सी भाषा बोलते हैं?’ चोलानाइकन अपनी भाषा को 'चोलानाइक्कन' कहते हैं। इस भाषा में मलयालम के अलावा तमिल और कन्नड़ के भी कुछ शब्द मिलते हैं। शाहजी से मिलकर मैं वायनाड के स्थानीय पत्रकार दीपक कुमार के घर पहुंची। दीपक भी चोलानाइकन और उनकी गुफाओं को करीब से देख चुके हैं। कुछ बताने से पहले वो मुझे चोलानाइकन की तस्वीरें दिखाते हैं। इसके बाद वे कहते हैं- ये लोग अपने पूर्वजों की तरह गुफाओं में ही रहना पसंद करते हैं। सरकार ने जंगल में इनके लिए घर बनाकर दिए हैं, लेकिन वह अधूरे हैं। वे बताते हैं– चोलानाइकन समुदाय की एक महिला को गर्भवती होने पर वायनाड के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन वह रात में ही वहां से चली गई। अफरा–तफरी मच गई। आखिर, वह जंगल में अपने लोगों के बीच मिली। ऐसे और भी किस्से हैं। लेकिन सबसे बड़ा संकट यह है कि यदि इस जनजाति को नहीं संभाला गया तो ये ‘केवमैन’ जंगलों में ही खत्म हो जाएंगे। --------------------------------------- 1- ‘-10C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (02 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today Rashifal 02 June 2026 : करियर: आज काम में नई चुनौतियां आ सकती हैं। लव: प्यार में भावनाओं को समझना जरूरी है। धन: कारोबारी अनावश्यक खर्चों से बचें। स्वास्थ्य: पेट और पाचन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं। उपाय: लाल कपड़े धारण करें। ALSO READ: Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा? 2. वृषभ (Taurus) करियर: कार्यस्थल पर सहयोगियों का समर्थन मिलेगा। लव: रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। स्वास्थ्य: सिरदर्द और तनाव की संभावना। उपाय: रविवार को सूर्य देव की पूजा करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: आज आपकी रचनात्मकता काम आएगी। लव: प्रेम संबंधों में रोमांस बढ़ेगा। धन: अचानक आय के योग हैं। स्वास्थ्य: गले से संबंधित समस्या हो सकती है। उपाय: बुधवार को बुध देव की पूजा करें। 4. कर्क (Cancer) करियर: नौकरीपेशा के काम में स्थिरता रहेगी। लव: प्रेमी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें। धन: आज अनावश्यक खरीदारी को टालें। स्वास्थ्य: नींद कम आने की समस्या संभव है। उपाय: सोमवार को चंद्रमा की पूजा करें। ALSO READ: Weekly Horoscope 1 to 7 June: साप्ताहिक राशिफल (1 से 7 जून 2026): अपने भाग्य को जानें और तैयार रहें 5. सिंह (Leo) करियर: प्रमोशन और सराहना मिलने के योग हैं। लव: प्यार में रोमांस और उत्साह बना रहेगा। धन: कारोबार से पैसों में वृद्धि की संभावना है। स्वास्थ्य: व्यायाम और संतुलित भोजन करें। उपाय: रविवार को सूर्य को जल अर्पित करें। 6. कन्या (Virgo) करियर: कार्यक्षेत्र में दस्तावेज और रिपोर्ट में गलती न करें। लव: साथी की भावनाओं का ध्यान रखें। धन: व्यय बढ़ सकता है। बचत पर ध्यान दें। स्वास्थ्य: पेट और पाचन से जुड़ी समस्या हो सकती है। उपाय: मंगलवार को हनुमान जी का ध्यान करें। 7. तुला (Libra) करियर: आज नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लव: प्रेम में मधुरता बनी रहेगी। धन: खर्च अधिक होने की संभावना। स्वास्थ्य: थकान और मानसिक तनाव हो सकता है। उपाय: सफेद रंग के वस्त्र आज पहनें। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: नौकरीपेशा को मेहनत का फल मिलेगा। लव: प्यार में उत्साह और समझ बढ़ेगी। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत। धन प्राप्ति के योग। स्वास्थ्य: ध्यान और योग लाभकारी रहेगा। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: नौकरीपेशा की नई योजनाएँ सफल होंगी। लव: साथी के साथ समझदारी बनाए रखें। धन: कारोबारियों को निवेश में लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य: जोड़ों और हड्डियों में हल्का दर्द हो सकता है। उपाय: गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा करें। 10. मकर (Capricorn) करियर: आज का दिन मेहनत का प्रतिफल देगा। लव: रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। धन: आर्थिक लाभ के योग हैं। स्वास्थ्य: हल्का व्यायाम और संतुलित भोजन करें। उपाय: काले रंग का उपयोग कम करें। 11. कुम्भ (Aquarius) करियर: आज आपकी बुद्धिमानी और सोच से फायदा होगा। लव: प्रेम संबंधों में विश्वास और सहयोग बढ़ेगा। धन: कारोबार की आय में वृद्धि के योग हैं। स्वास्थ्य: सेहत संबंधी तनाव कम करें। उपाय: नीले या सफेद वस्त्र पहनें। 12. मीन (Pisces) करियर: कार्यस्थल पर पुराने प्रोजेक्ट पूरे होंगे। लव: अकेले लोगों के लिए नए संबंध के योग हैं। धन: आय के नए स्रोत बन सकते हैं। स्वास्थ्य: शरीर और मानसिक स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। उपाय: सोमवार को चंद्रमा की पूजा करें। ALSO READ: Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल: नवाबों के शहर से कैसे शुरू हुई बजरंगबली की ये खास परंपरा, पढ़ें गौरव गाथा
28 मई 2026, 77 साल के सिद्धारमैया ने कर्नाटक के CM पद से इस्तीफा दिया, अब 64 साल के डीके शिवकुमार 3 जून को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। ये फैसला अचानक नहीं लिया गया। 4 मई को दिल्ली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ सिद्धारमैया की बैठक हुई। इसमें उन्हें नेतृत्व परिवर्तन के लिए कहा गया। सिद्धारमैया ने 48 घंटे का वक्त मांगा और वादा पूरा करते हुए इस्तीफा दे दिया। CM पद छोड़ने के लिए आखिर कैसे माने सिद्धारमैया? कर्नाटक के सीनियर जर्नलिस्ट गौतम शंकर कहते हैं, ‘कांग्रेस सत्ता परिवर्तन को भले सहजता से पेश कर रही, लेकिन सिद्धारमैया का करियर देखने के बाद मैं कह सकता हूं कि इतनी आसानी से पद छोड़ देना, उनके स्वभाव के विपरीत है। उन्होंने 1996 में जेएच पटेल और 2004 में धर्म सिंह को कर्नाटक का CM बनाए जाने को खुली चुनौती दी थी। इसी अड़ियल रुख के कारण 2005 में पूर्व PM देवगौड़ा ने उन्हें JDS से निकाल दिया था।’ इस बार क्या बदला? गौतम जवाब में कहते हैं, ‘अहिंदा गुट के कुछ नेताओं से जानकारी मिली है कि सिद्धारमैया ने 4 प्रमुख मांगें रखीं।’ 1. तीन डिप्टी CM का पद। 2. कैबिनेट में वफादारों के लिए अहम विभाग। 3. MLC बेटे यतींद्र को कैबिनेट में जगह और बड़ी जिम्मेदारी। 4. कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने में उनकी सलाह जरूरी। इसकी ज्यादा संभावना है कि सतीश जारकीहोली को नया अध्यक्ष बनाया जाए।वे एक शक्तिशाली ST नेता हैं और खुद को अगले अहिंदा नेता के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं। गौतम आगे कहते हैं, ‘सीट छोड़ने के बाद सिद्धारमैया सबसे पहले बेटे यतींद्र के साथ दिल्ली गए। 29 मई को उन्होंने बेटे की मुलाकात सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कराई। इससे लगभग तय है कि अबकी यतींद्र को कैबिनेट में शामिल किया जाए।’ कर्नाटक की पॉलिटिक्स पर करीब से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट केए शाजी कहते हैं, ‘पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों से पता चला है कि सिद्धारमैया बेटे यतींद्र के लिए डिप्टी CM का पद या फिर पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, उद्योग और जल संसाधन विभाग और मेडिकल एजुकेशन जैसे विभाग चाहते हैं।‘ सिद्धारमैया गुट खुश नहीं, लेकिन फैसला माना सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले विधायक अशोक एम.पट्टन बताते हैं, ‘ये पहले से तय था कि हाईकमान से जो भी निर्देश होगा, दोनों नेता (सिद्धारमैया और शिवकुमार) मानेंगे। अब जब डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे, तो सभी उनके साथ हैं।‘ ‘पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले विधायकों ने आलाकमान तक संदेश पहुंचाया है कि अगर हमारे (अहिंदा) इतने बड़े नेता को पद से हटाया जा रहा है, तो भविष्य में भी इस वर्ग के हितों और प्रतिनिधित्व का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए।‘ केरल चुनाव की वजह से टाली गई CM बदलने की कवायद कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनकर उभरे। इसे देखते हुए फॉर्मूला निकाला गया कि दोनों ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे हो गए, लेकिन वो तब भी CM बने रहने पर अड़े रहे। कर्नाटक कांग्रेस से जुड़े सोर्स के मुताबिक, तय फॉर्मूले के हिसाब से दिसंबर 2025 से शिवकुमार को CM पद संभालना था, लेकिन राहुल गांधी समेत पार्टी के सभी सीनियर लीडर केरल में चुनावों की तैयारियों में व्यस्त थे, इसलिए तब ये बदलाव नहीं हो सका। नए CM के लिए क्या चैलेंज…वोक्कालिगा को एक रखना डीके के सामने चुनौती कांग्रेस सोर्सेज के मुताबिक, नई सरकार में 4 डिप्टी CM और 6 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। शिवकुमार प्रभावशाली वोक्कालिगा कम्युनिटी से हैं। राज्य में इनकी हिस्सेदारी करीब 15% है। CM बनते शिवकुमार का सबसे बड़ा टारगेट पूरे वोक्कालिगा वोटबैंक को कांग्रेस के पक्ष में करना होगा। ऐसे में BJP की सहयोगी पार्टी JD(S) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के लिए वोक्कालिगा वोटरों का समर्थन हासिल कर पाना मुश्किल हो सकता है। BJP की भी टेंशन बढ़ीBJP के एक सोर्स बताते हैं कि शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद JD(S) के अंदर टूट-फूट की आशंका भी बढ़ जाएगी। सोर्स के मुताबिक, शिवकुमार ये तय करेंगे कि JD(S) के नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा कांग्रेस में आए। JD(S) के लिए अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा राज्य की सबसे बड़ी कम्युनिटी लिंगायत को साधना भी चुनौती है। ये BJP के सपोर्टर रहे हैं। पार्टी लीडर और कर्नाटक के पूर्व CM बीएस येदियुरप्पा की बढ़ती उम्र के चलते पार्टी का इन पर कंट्रोल कम हो रहा है। ऐसे में BJP के नेतृत्व वाली NDA अगले चुनाव में सिर्फ एंटी-इनकंबेंसी के भरोसे नहीं रह सकती। उसे कांग्रेस को चुनौती देने के लिए नई रणनीति और मुद्दे तलाशने होंगे। डीके का कर्नाटक के लिए रोडमैप शिवकुमार की पहचान मनी और पावर के दम पर काम करने वाले लीडर की रही है। अब CM बनकर उन्हें अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित करनी है। सीनियर जर्नलिस्ट गौतम शंकर के मुताबिक, CM बनने के बाद शिवकुमार को सबसे पहले ये तय करना होगा कि राज्य कर्ज में न डूबे और टैक्सपेयर्स पर ज्यादा बोझ न बढ़े। उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए थे, लेकिन सभी फंड की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें बेंगलुरु में 40 किलोमीटर की टनल परियोजना शामिल है, जिसे 40,000 करोड़ से ज्यादा की लागत से शहर को जाम मुक्त करने के लिए बनाया जाना है। इस प्रोजेक्ट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं, लिहाजा इसपर काम जल्द पूरा करना चाहिए। गौतम कहते हैं, ‘राज्य के सिंचाई मंत्री के रूप में डीके ने कावेरी नदी पर मेकेदातु संतुलन जलाशय और पेयजल परियोजना के लिए केंद्र से मंजूरी लेने में कड़ी मेहनत की है। इसकी लागत करीब 14,000 करोड़ है। वे CM बनते ही ये प्रोजेक्ट शुरू करेंगे। इसके अलावा परिवहन और लॉ एंड ऑर्डर कंट्रोल की दिशा में सरकार बड़े फैसले ले सकती है।’ ………………….. ये खबर भी पढ़ें… 5 दिन मीटिंग, प्रियंका एक्टिव, तब सतीशन बने केरलम CM 10 दिन की माथापच्ची के बाद आखिर कांग्रेस ने केरलम का CM तय कर लिया। राज्य में पार्टी के सबसे बड़े लीडर वीडी सतीशन नए CM होंगे। राहुल के भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल और सबसे अनुभवी रमेश चेन्नीथला भी दावेदार थे। पढ़िए पूरी खबर…
पीएम बालेन शाह ने रविवार को दावा किया- नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। मामले ने तूल पकड़ा, तो नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। क्या वाकई नेपाल ने भारत की जमीन कब्जा की है और बालेन का दावा उनका ही नुकसान कैसे कर सकता है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बालेन शाह ने क्या दावे किए, जिसपर हंगामा मच गया? जवाबः नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद मार्च 2026 में चुनाव हुए। पुरानी पार्टियां और नेता बुरी तरह हार गए। बालेन शाह की अगुवाई में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिला। 35 साल के बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। पीएम बनने के 65 दिन बाद 31 मई को बालेन संसद में पहला भाषण देने पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ सांसदों ने उनसे भारत-नेपाल सीमा विवाद पर सवाल पूछा। जवाब में बालेन ने 2 बड़ी बातें कहीं… इन बयानों के बाद नेपाल की संसद में हंगामा मचा। विपक्षी दलों ने उनसे सबूत मांगे। बयान को संसद की कार्रवाई से हटाने की मांग की गई। प्रधानमंत्री को माफी मांगने के लिए कहा जाने लगा। नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री कमल थापा ने X पर लिखा ‘उन्हें जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह कौन-सी जगह है और उसके क्या सबूत हैं। उन्हें तुरंत उस गलती को सुधारना चाहिए और सम्मानपूर्वक वह जमीन भारत को वापस कर देनी चाहिए।’ विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के नेता वासना थापा ने कहा, ‘हमें जल्द सूचित किया जाना चाहिए था कि किस भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। यह एक गंभीर और आपत्तिजनक मुद्दा है। इस बयान को संसद के रिकॉर्ड से भी हटाना चाहिए।’ हालांकि नेपाल में पत्रकारों और राजनयिकों के एक धड़े ने पीएम बालेन की साफगोई और सीमा विवाद को इतनी मजबूती से उठाने की तारीफ भी की है। सवाल-2: क्या वाकई नेपाल ने भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है? जवाबः नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पीएम के बयान पर खुद स्पष्टीकरण जारी किया। लिखा- ‘प्रधानमंत्री भारत के इलाकों पर कब्जे की नहीं, 'क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन' की बात कर रहे थे।’ क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन यानी एक देश की जमीन को दूसरे देश के नागरिक खेती-बाड़ी, रहने के लिए और दूसरे कामों में इस्तेमाल करते हैं। दरअसल, भारत और नेपाल के बीच करीब 1,751 किमी लंबी सीमा है। इसमें पहाड़ी इलाके, नदियां और समतल जमीन है। ज्यादातर ओपेन बॉर्डर है, यानी दोनों देशों के बीच में कोई फेंसिंग नहीं है। जिन इलाकों में जमीन समतल है, वहां दोनों तरफ कुछ जमीन ‘नो-मेंस लैंड’ रखी जाती है। बॉर्डर पिलर के दोनों तरफ 10-10 गज की पट्टी होती है, इसलिए इसे दसगजा भी कहते हैं। इस जमीन पर दोनों देशों के नागरिकों को स्थायी निर्माण, मकान, दुकान या खेती करने की अनुमति नहीं होती। बिहार के सीमावर्ती इलाकों से भास्कर रिपोर्टर बताते हैं कि सीमा के कई इलाकों में 500 मीटर तक कोई पिलर नहीं है। यहां लोग अपना कब्जा बढ़ा लेते हैं। दोनों तरफ के किसान अपनी जमीन के साथ नो-मेंस लैंड की जमीन पर भी खेत जोतकर बुआई कर लेते हैं। कई जगहों पर लोगों ने टीन शेड लगाकर भैंसें और बकरियां भी बांधी हुई हैं। भारत की सशस्त्र सीमा बल और नेपाल सशस्त्र पुलिस मिलकर इस क्षेत्र में कब्जे हटाने के अभियान चलाते रहते हैं। इसके अलावा भी पिछले सालों में क्रॉस बॉर्डर अतिक्रमण की कुछ रिपोर्ट मिलती हैं… सवाल-3: बालेन शाह का दावा उनका ही नुकसान कैसे करेगा? जवाबः उनके दावे से 3 मुश्किलें पैदा होंगी… 1. नेपाल की कूटनीतिक स्थिति कमजोर होगी 2. ब्रिटेन शामिल हुआ, तो मामला और उलझ जाएगा 3. बालेन शाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठे सवाल-4: भारत के लिए इस बयान के मायने क्या हैं? जवाबः बालेन शाह के ताजा बयान पर फिलहाल भारत ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि पिछले दिनों सीमा विवाद के सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल के ये क्षेत्रीय दावे न तो सही हैं और न ही किसी ऐतिहासिक तथ्य या सबूत पर आधारित हैं। पीएम बनने के बाद पिछले 65 दिनों में बालेन शाह ने कई ऐसे काम किए, जिससे भारत के डिप्लोमैटिक गलियारों में हलचल है… भारतीय राजदूत को विशेष दर्जा नहीं दिया: परंपरा के मुताबिक, नेपाल में नए पीएम भारतीय राजदूत से अलग से शिष्टाचार मुलाकात करते हैं। बालेन शाह ने भारतीय राजदूत से अलग से मिलने के बजाय सभी देशों के राजदूतों से सामूहिक मुलाकात की। इससे यह संदेश गया कि उनकी सरकार भारत को कोई विशेष तरजीह नहीं देना चाहती। मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई: 4 जुलाई से मानसरोवर यात्रा शुरू होनी है। इसके लिए श्रद्धालु भारत से लिपुलेख पास होते हुए चीन के तिब्बत जाते हैं। नेपाली विदेश मंत्रालय ने इस पर आपत्ति जताई है और कहा है कि लिपुलेख उनका इलाका है। उन्होंने भारत और चीन को भी चिट्ठी लिखकर अपना स्टैंड साफ किया है। भारतीय विदेश सचिव से नहीं मिले: मई 2026 में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री नेपाल जाकर बालेन शाह को भारत आने का आधिकारिक न्योता देने वाले थे। लेकिन, बालेन ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया और दौरा रद्द हो गया। पीएम बनने के बाद भारत नहीं आए: ये परंपरा रही है कि पद संभलाने के बाद नेपाली प्रधानमंत्री भारत का दौरा करते हैं। लेकिन बालेन ने कार्यभार संभालते ही यह घोषणा कर दी कि वे कार्यकाल के पहले साल किसी भी देश के आधिकारिक दौरे पर नहीं जाएंगे। राजन कुमार के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पीएम बालेन शाह के बयान पर सफाई दे दी है। इसलिए भारत अभी इस पर कड़ा रुख नहीं अपनाएगा। भारत-नेपाल का सीमा विवाद उतना जटिल भी नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। इस बीच बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने 5 दिन के भारत दौरे पर आए हैं। वे बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करेंगे। इस दौरान हुई बातचीत से नेपाल की नई सरकार का रुख और साफ हो सकता है। सवाल-5: भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद क्या है? जवाबः भारत के पांच राज्यों से नेपाल की सीमा लगती है- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम। इनमें उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा की लंबाई 173 किलोमीटर है। उत्तराखंड की सीमा चीन से भी लगती है। इसी सीमा से जुड़े तीन इलाके- लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी विवाद की वजह हैं। नेपाल इन्हें अपना हिस्सा बताता है, जबकि भारत इस दावे को खारिज करता आया है। ये पूरा इलाका लगभग 338 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यानी रायपुर शहर जितना बड़ा। भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद करीब 210 साल पुराना है… उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मौजूद कालापानी भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद जरूरी है। मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री इसी इलाके के लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरते हैं। यहां से चीनी सेना पर नजर रखना आसान है। इसीलिए चीन इसे लेकर नेपाल को उकसाता रहता है। 1962 के युद्ध के बाद लिपुलेख दर्रा बंद भी हुआ। हालांकि 2015 में हुए भारत-चीन समझौते के बाद इसे दोबारा खोला गया। मई 2020 में भारत ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को आसान बनाने के लिए पिथौरागढ़ से लेकर लिपुलेख दर्रे तक 80 किमी की सड़क बनाई, जिस पर नेपाल ने नाराजगी जताई थी। 15 मई 2020 को तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष एम.एम नरवणे ने कहा था कि नेपाल ऐसा किसी और के बहकावे में कर रहा है। नरवणे का इशारा चीन की ओर था। इसके बाद जून 2020 में नेपाल की संसद ने एक नया नक्शा मंजूर किया था, जिसमें इन इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नेपाल का दावा ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। ---------- पुरी खबर पढ़िए… 15 दिन में सैलरी, अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूल में: पीएम बालेन शाह के 30 दिनों की कहानी; नेपाल को बदलेंगे या तानाशाह बनेंगे 27 मार्च 2026 को 35 साल के बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पीएम बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा दिया गया। सरकारी दफ्तरों से नेताओं की तस्वीरें उतरवा दी गईं। छात्र राजनीति पर रोक लगा दी गई। अब अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना होगा, जबकि कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी मिलेगी। पूरी खबर पढ़िए…

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