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आज से 15 जून तक थमेंगे मांगलिक कार्य, त्योहार भी खिसकेंगे आगे

पुशांत मोदगिल | लुधियाना सनातन पंचांग और खगोलीय गणना के लिहाज से 17 मई यानी आज से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सूर्य और चंद्रमा के बीच दिनों के अंतर को पाटने के लिए आज से ज्येष्ठ अधिमास की शुरुआत हो रही है जो अगले एक महीने यानी 15 जून तक चलेगा। प्रथम ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर यह महीना द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की समाप्ति तक रहेगा। आम बोलचाल में इसे मलमास और धार्मिक भाषा में पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। प्राचीन दुर्गा मंदिर शास्त्री नगर ए-ब्लॉक के भागवत कथा व्यास पंडित देवानंद शास्त्री हीने की अवधि में शादी-ब्याह, गृह प्रवेश जैसे तमाम सांसारिक मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से विराम लग जाएगा। इस अतिरिक्त महीने के कारण इस साल के तमाम बड़े त्योहार भी अपने सामान्य समय से करीब 20 से 25 दिन आगे खिसक जाएंगे। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, चंद्र वर्ष 354 दिनों का और सौर वर्ष 365 दिनों का होता है। हर साल दोनों पंचांग में आने वाले 11 दिनों के अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिमास कहते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब इस महीने को सूर्य संक्रांति न होने के कारण अपवित्र मानकर सभी देवताओं ने त्याग दिया था तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम दिया। {16 जून से फिर बजेंगी शहनाइयां: अधिमास की यह खगोलीय स्थिति 15 जून की रात को समाप्त हो जाएगी। पंडित ने बताया कि इसके ठीक अगले दिन यानी मंगलवार 16 जून से पंचांग पूरी तरह शुद्ध हो जाएगा और समाज में मांगलिक कार्यों की रौनक फिर से लौट आएगी। अतिरिक्त महीने के प्रभाव से त्योहारों पर असर: इस साल ज्येष्ठ महीना दो भागों में बंटने के कारण हिंदू पंचांग के आगे के सभी त्योहारों की तारीखें बदल गई हैं। पंडित देवानंद शास्त्री के अनुसार, अधिमास की वजह से इसके बाद आने वाले सावन, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे सभी बड़े पर्व अपने सामान्य समय से लगभग तीन से चार सप्ताह की देरी से आएंगे। मांगलिक कार्य भले ही बंद हों लेकिन यह समय परोपकार और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस महीने निम्नलिखित कार्य करने से महा पुण्य मिलता है। • व्रत और पूजन के नियम: हेमाद्रि के अनुसार, इस महीने सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर एक भुक्त यानी दिन में एक बार भोजन या नक्तव्रत यानी रात में भोजन रखना चाहिए। भगवान विष्णु के स्वरूप सहस्रांशु का मंत्रों द्वारा लाल पुष्प से पूजन करना चाहिए। • 33 पूओं का दान: इस महीने में या इसके अंतिम दिन घी, गेहूं और गुड़ से बनाए गए तेन्दिस यानी 33 पूओं को कांसे के पात्र में रखकर, फलों, वस्त्र और दक्षिणा सहित ब्राह्मण को दान देने का विधान है। • ग्रंथों का नियमित पाठ: इस पूरे महीने रोज श्रद्धापूर्वक श्री पुरुषोत्तम महात्म्य का पाठ करना चाहिए। इसके अतिरिक्त श्रीविष्णु स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम, श्रीसूक्त और पुरुषसूक्त का पाठ करने से घर की नकारात्मकता समाप्त होती है और समृद्धि आती है। • अंतिम दिन का विशेष विधान : महीने की समाप्ति पर पवित्र स्नान और जप के बाद गुड़, गेहूं, घी, वस्त्र, किशमिश, केले, कद्दू, ककड़ी और मूली का दान करना चाहिए। इसके बाद भगवान को 3 बार अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करना चाहिए। इन कार्यों पर रहेगा पूरी तरह प्रतिबंध • विवाह और मांगलिक उत्सव: शादी, सगाई, द्विरागमन जैसे संस्कारों के लिए इस दौरान कोई मुहूर्त नहीं मिलेगा। • भवन निर्माण और गृह प्रवेश: नए मकान की नींव रखना, भूमि पूजन और नए बने घर में प्रवेश करने जैसे शुभ काम ठप रहेंगे। • उपनयन और मुंडन संस्कार: बच्चों का जनेऊ संस्कार और पहली बार बाल कटवाने का अनुष्ठान इस अवधि में वर्जित है। • बड़ी व्यावसायिक शुरुआत: नई दुकान का उद्घाटन, नए व्यापारिक अनुबंध या बड़ी संपत्ति की रजिस्ट्री को इस एक महीने के लिए टालना ही बेहतर माना जाता है।

दैनिक भास्कर 17 May 2026 5:30 am

भारतीय लोक कला मंडल में ग्रीष्म कालीन प्रशिक्षण शिविर शुरू

उदयपुर } भारतीय लोक कला मंडल में शुक्रवार से एक माह का ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर शुरू हुआ। पहले दिन ही बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखा गया। संस्था का उद्देश्य लोक कलाओं का संरक्षण, प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को पारंपरिक कला से जोड़ना है। निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने बताया कि संस्था वर्षभर कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है तथा हर वर्ष ग्रीष्मकालीन शिविर लगाया जाता है। इसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागी हिस्सा लेते हैं। शिविर में लोक नृत्य, लोक गीत, लोक वादन तथा दस्ताना पुतली निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 9 से 11 बजे तक आयोजित होता है। एक माह के समापन पर प्रतिभागियों द्वारा रंगमंचीय प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इच्छुक प्रतिभागी पंजीयन करें

दैनिक भास्कर 16 May 2026 5:30 am

“बुरा मानो होली है”– त्योहार की आड़ में छिपी हिंसा (त्यौहार, सहमती, गरिमा, आधिकार)

होली का दिन रंगों से खेलने के लिए मशहूर है, लेकिन कई लोग आज के दिन महिलाओं और लड़कियों, लड़कों के साथ रंग लगाने के बहाने छेड़छाड़ करते हैं। कई जगहों पर होली के नाम पर गोबर, कीचड़ आदि से भी होली खेली जाती है। “बुरा न मानो होली है” कहकर बहुत शर्मनाक व्यवहार करते ... Read more

अजमेरनामा 1 Mar 2026 9:03 pm

होली को छपरियों का त्योहार बताकर फंसीं फराह खान, दर्ज हुआ केस

फिल्ममेकर-कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों कुकिंग रियलिटी शो 'सेलिब्रिटी मास्टशेफ' को जज करती नजर आ रही हैं। हाल ही में शो के एक एपिसोड में फराह खान ने होली को 'छपरी लोगों का फेवरेट फेस्टिवल' बताया था। इसके बाद फराह मुश्किलों में घिर गई हैं। फराह खान ...

वेब दुनिया 22 Feb 2025 11:30 am