जब भी हम किसी मंदिर में भगवान के दर्शन करने जाते हैं, तो एक खास बात अक्सर देखने को मिलती है। गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने के बाद श्रद्धालु तुरंत पीछे मुड़कर नहीं चलते, बल्कि उल्टे कदमों से पीछे हटते हुए बाहर आते हैं। यानी जब तक वे मंदिर परिसर या गर्भगृह से बाहर न निकल जाएं, तब तक वे भगवान की तरफ पीठ नहीं करते हैं।यह केवल सदियों पुरानी कोई अंध परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे बेहद गहरे धार्मिक, आध्यात्मिक, मानसिक और व्यावहारिक कारण छिपे हैं। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि दर्शन के बाद उल्टे पैर पीछे हटने के पीछे क्या वजहें हैं:1. ईश्वर के प्रति सर्वोच्च सम्मान और आदर की भावनाहमारी भारतीय संस्कृति में बड़ों, माता-पिता और गुरुओं का आदर करना सबसे पहला धर्म माना गया है। जैसे हम किसी पूजनीय या बड़े व्यक्ति से बात करने के बाद तुरंत उनके सामने पीठ मोड़कर नहीं भागते, ठीक वैसे ही भगवान तो पूरी सृष्टि के स्वामी हैं। उनके सामने से अचानक पीठ फेरकर चले जाना अनादर का प्रतीक माना जाता है। जब तक हम मंदिर परिसर से बाहर नहीं आते, हमारा ध्यान और चेहरा ईश्वर की ओर ही रहता है, जो हमारी सच्ची श्रद्धा को दर्शाता है।2. सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) को अपने अंदर समेटनाविज्ञान और अध्यात्म दोनों मानते हैं कि मंदिर का गर्भगृह और मूर्ति स्थल सकारात्मक ऊर्जा का बहुत बड़ा केंद्र होता है। जब हम हाथ जोड़कर ईश्वर के समक्ष खड़े होते हैं, तो वह पवित्र ऊर्जा हमारे शरीर और आभामंडल (Aura) में प्रवेश करती है। यदि हम दर्शन के तुरंत बाद सीधे मुड़ जाते हैं, तो उस ऊर्जा का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो जाता है। उल्टे कदमों से बाहर आने का सांकेतिक अर्थ यही है कि हम उस दिव्य शांति, शक्ति और आशीर्वाद को अपने भीतर सहेजकर घर ले जा रहे हैं।3. अहंकार और घमंड का नाशसीधे पीठ मोड़कर चले जाना कभी-कभी इंसान के अनजाने अहंकार को दर्शाता है—मानो काम खत्म हुआ और हम चलते बने। इसके विपरीत, धीरे-धीरे पीछे की तरफ कदम बढ़ाना हमारी नम्रता और समर्पण भाव को प्रकट करता है। यह परंपरा इंसान को यह याद दिलाती है कि ईश्वर के सामने हमारा अस्तित्व बहुत छोटा है और जो कुछ भी हमारे पास है, वह सब उन्हीं की कृपा है।4. ध्यान और मन की एकाग्रता बनाए रखनाजैसे ही इंसान मंदिर से बाहर जाने के लिए पीठ मोड़ता है, उसका ध्यान तुरंत सांसारिक बातों—जैसे बाहर खड़े जूते-चप्पल, गाड़ियां या रोजमर्रा की चिंताओं में उलझ जाता है। लेकिन जब हम भगवान के श्रीविग्रह को देखते हुए पीछे हटते हैं, तो हमारा ध्यान अंतिम समय तक मूर्ति पर ही टिका रहता है। इससे मंदिर में मिली असीम मानसिक शांति लंबे समय तक मन में बनी रहती है।
मध्य प्रदेश में बने उत्पाद नई दिल्ली में बिकेंगे। अगले महीने होने वाले भारतीय व्यापार महोत्सव-2026 में एमपी के हस्तशिल्प, एमएसएमई, जनजातीय उत्पादों को भी मंच मिलेगा। यह आयोजन कैट यानी, कान्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स करेगा। इसे लेकर गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, सुनील जैन, संदीप गोधा, जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा मौजूद थे। इस दौरान बैठक भी हुई। इसमें जिलाध्यक्ष शर्मा ने बताया कि भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, इंडियन ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) और कैट के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 15 अगस्त तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में भारतीय व्यापार महोत्सव 2026 होगा। यह भारत का पहला एवं सबसे बड़ा स्वदेशी व्यापार महोत्सव होगा। जिसमें देशभर के उद्योग, व्यापार, एमएसएमईएस, स्टार्टअप, जीआई उत्पाद, हस्तशिल्प एवं निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। एमपी को मिले बेहतर मंचअध्यक्ष शर्मा ने बताया कि इस महोत्सव में मध्य प्रदेश सरकार भी अपने चार से पांच स्टॉल लगाएगी। ताकि, प्रदेश के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा और सशक्त मंच प्राप्त हो सके। अपर मुख्य सचिव मंडलोई ने शासन की सहभागिता पर सकारात्मक आश्वासन दिया और राज्य के विभिन्न विभागों के माध्यम से महोत्सव में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की। आगामी चरण में महोत्सव की आयोजन समिति द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिए जाने पर भी सकारात्मक सहमति जताई गई।
बागोर की हवेली और लोक कला मंडल के टिकट अब ऑनलाइन, कतारों से मिली मुक्ति
झीलों की नगरी में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें शहर के प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाने के लिए टिकट की लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की बागोर की हवेली और भारतीय लोक कला मंडल ने ऑनलाइन टिकटिंग की सुविधा शुरू कर दी है। इससे पर्यटक अब अपनी उदयपुर यात्रा की प्लानिंग पहले से और बेहतर तरीके से कर सकेंगे। नई व्यवस्था से वीकेंड और पर्यटन सीजन के दौरान सीट न मिलने की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाएगी। पूर्व बुकिंग होने से पर्यटक निर्धारित समय पर सीधे प्रवेश कर सकेंगे।
किताबी पढ़ाई के साथ बच्चों को हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने की पहल के तहत महिला अधिकार मंच ने मंगलवार को शिर्डी साईं हाई स्कूल में स्किल डेवलपमेंट कार्यशाला आयोजित की। कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को कैंडल और सोप मेकिंग, राखी बनाना और दीया सजाने जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मक सोच विकसित करना और उन्हें छोटे-छोटे हुनर से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि कोई भी व्यावहारिक कौशल भविष्य में रोजगार और अतिरिक्त आय का माध्यम भी बन सकता है। यदि बचपन से ही बच्चे अपने हुनर को पहचानकर उसे निखारें, तो वे आगे चलकर अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। हुनर को रोजगार से जोड़ने पर जोर कार्यशाला में बच्चों को बताया गया कि आज के समय में स्किल डेवलपमेंट की अहमियत लगातार बढ़ रही है। छोटे-छोटे हुनर भी स्वरोजगार का माध्यम बन सकते हैं। विद्यार्थियों को अपने अंदर छिपी प्रतिभा पहचानने और उसे लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया। राखी, कैंडल, साबुन और दीया सजाना सीखा बच्चों को अलग-अलग समूहों में बांटकर कैंडल और सोप मेकिंग, आकर्षक राखियां बनाना तथा दीयों को सजाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने बच्चों को इन चीजों को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया समझाई। बच्चों ने भी उत्साह के साथ गतिविधियों में हिस्सा लिया और अपने हाथों से कई रचनात्मक वस्तुएं तैयार कीं। बच्चों ने लिया आत्मनिर्भर बनने का संकल्प कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि इस रक्षाबंधन पर वे बाजार से राखी खरीदने के बजाय अपने हाथों से बनाई राखियों का इस्तेमाल करेंगे। साथ ही दीपावली और अन्य त्योहारों पर भी अपने हाथों से सजाए गए दीयों का उपयोग करेंगे। उनका कहना था कि इससे न सिर्फ उनकी रचनात्मकता बढ़ेगी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की सोच भी मजबूत होगी। रचनात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने की पहल आयोजकों ने बताया कि इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य बच्चों को किताबों के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान देना है। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है, नई चीजें सीखने की रुचि विकसित होती है और भविष्य में स्वरोजगार के प्रति सकारात्मक सोच बनती है। विद्यालय ने दिया सहयोग कार्यशाला के सफल आयोजन में विद्यालय प्रबंधन का सहयोग रहा। अंत में आयोजकों ने स्कूल प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आगे भी बच्चों के कौशल विकास के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में महिला अधिकार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योति सिंह, जिला अध्यक्ष पूजा मंगतानी, सचिव निशिका लालवानी, उप सचिव कोमल जैन, कोषाध्यक्ष मेघना सिंह, समन्वयक रंजना कालरा, विंग्स अकैडमी की संस्थापक निकिता खुबचंदानी, शिर्डी साईं हाई स्कूल की प्राचार्य प्रियंका शांडिल्य, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा कक्षा 6 से 10 तक के बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
भांडेर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल का मामला:माता के दरबार में अश्लील डांस करते वीडियो वायरल
भांडेर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रामगढ़ वाली सिद्ध दरबार मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अश्लील गानों पर डांस होने का मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। भांडेर नगर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित सिद्ध दरबार मंदिर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, कार्यक्रम में देर रात अश्लील गानों पर डांस शुरू हो गया। इसकी जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची डायल-112 की टीम ने तुरंत कार्यक्रम को बंद करवा दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि, पुलिस की टीम के वापस लौटते ही कार्यक्रम दोबारा शुरू हो गया और देर रात करीब 1.30 बजे तक चलता रहा। पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों में नाराजगी है। भांडेर टीआई कोमल सिंह परिहार ने बताया कि, उन्हें इस तरह की अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। हालांकि उनके पास सूचना आई थी। बाद में मामले की जानकारी उन्होंने तहसीलदार भांडेर को दी है। इस मामले की जांच अब तहसीलदार के द्वारा कराई जा रही है।
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार की कैबिनेट बैठकें राजधानी के अलावा अन्य स्थानों पर भी हो रही हैं। इसी क्रम में आठवीं डेस्टिनेशन बैठक रविवार को राजधानी के करीब स्थित ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर में होने वाली है।
जैसलमेर में सीमावर्ती क्षेत्र मोहनगढ़ में प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' चलाया। इसके तहत प्रशासन और पुलिस ने शुक्रवार को अवैध निर्माण को लेकर बड़ी कार्रवाई की। भारी संख्या में पुलिस जाब्ता पहुंचा। टीम ने सड़क किनारे बनी करीब 12 अवैध दुकानों पर बुलडोजर चलाकर गिराया। इसके साथ ही पाखा माइनर के पास अवैध रूप से बने एक धार्मिक स्थल पर भी कार्रवाई की गई। 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत हुई कार्रवाई हालांकि, शुक्रवार को ही ऑपरेशन क्लीन मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लोगों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने आदेश दिया है कि अगले दो हफ्ते तक धार्मिक स्थलों के खिलाफ किसी भी तरह की सख्ती या कार्रवाई न की जाए। वकील ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका (818/2026) वापस लेने की अनुमति मांगी, ताकि वे इस मामले को राजस्थान हाईकोर्ट में ले जा सकें। अब यह राजस्थान हाईकोर्ट पर निर्भर करेगा कि वह इस मामले के तथ्यों के आधार पर क्या फैसला सुनाता है। अवैध रूप से पक्की दुकानें बना ली थी जानकारी के अनुसार, मोहनगढ़ के पीटीएम इलाके में आने वाले 7 टीडी और 60 पीडी क्षेत्र में लंबे समय से सड़क किनारे अवैध रूप से पक्की दुकानें बना ली गई थीं। यह इलाका पाकिस्तान बॉर्डर के काफी करीब है। इस वजह से बाहरी लोगों और अवैध कब्जों पर प्रशासन की सख्त नजर रहती है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शुक्रवार शाम को यह अभियान चलाया गया। अब ढाबों और दुकानों पर नजर इस कार्रवाई के बाद अब प्रशासन की नजर मोहनगढ़ तहसील के अन्य ग्रामीण इलाकों और बॉर्डर को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों पर है। राजस्व विभाग की टीम ने सड़क किनारे बने अवैध ढाबों, दुकानों और अन्य पक्के निर्माणों की पहचान कर ली है। जल्द ही इन सभी लोगों को नोटिस भेजकर खुद ही कब्जा हटाने के निर्देश दिए जाएंगे। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज होगा प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। चेतावनी दी गई है कि अगर किसी ने भी सरकारी जमीन, गोचर भूमि या सड़क की सीमा में दोबारा पक्का निर्माण करने की कोशिश की, तो न केवल उस निर्माण को बुलडोजर से तोड़ा जाएगा, बल्कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
होली को छपरियों का त्योहार बताकर फंसीं फराह खान, दर्ज हुआ केस
फिल्ममेकर-कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों कुकिंग रियलिटी शो 'सेलिब्रिटी मास्टशेफ' को जज करती नजर आ रही हैं। हाल ही में शो के एक एपिसोड में फराह खान ने होली को 'छपरी लोगों का फेवरेट फेस्टिवल' बताया था। इसके बाद फराह मुश्किलों में घिर गई हैं। फराह खान ...

