जयपुर सहित कई स्टेशनों से यात्रियों के लिए 9 मई से भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन शुरू होने जा रही है। यह विशेष ट्रेन 11 दिनों में देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराएगी, जिससे श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में कई तीर्थों के दर्शन करने का अवसर मिलेगा। दरअसल, इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) 9 मई से भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन शुरू कर रहा है। यह ट्रेन श्रीगंगानगर से रवाना होकर अलग-अलग स्टेशनों से यात्रियों को लेकर 11 दिन में देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक जाएगी। 19 मई को यात्रा पूरी होगी। ट्रेन का रूट श्री गंगानगर से शुरू होकर हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, रिंगस, जयपुर, भरतपुर, मथुरा, आगरा कैंट, ग्वालियर, झांसी और कानपुर रहेगा। श्रद्धालुओं की मांग को देखते इस ट्रेन को किया प्लान IRCTC जयपुर के अपर महाप्रबंधक योगेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि श्रद्धालुओं की मांग को देखते हुए इस ट्रेन को प्लान किया गया है, ताकि एक ही पैकेज में कई बड़े धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जा सकें। उन्होंने बताया कि ट्रेन में थर्ड एसी कोच, किचन कार और बायो टॉयलेट जैसी सुविधाएं होंगी। यात्रियों के लिए स्टैंडर्ड और कंफर्ट दो कैटेगरी रखी गई हैं, ताकि बजट के अनुसार विकल्प मिल सके। एक ही यात्रा में कई बड़े धार्मिक स्थल इस यात्रा में पुरी का जगन्नाथ धाम, कोणार्क का सूर्य मंदिर, गंगासागर तीर्थ, कोलकाता का काली घाट मंदिर, जसीडीह स्थित बाबा बाबा बैद्यनाथ धाम, गया के महाबोधि मंदिर और विष्णुपद मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा आरती, साथ ही अयोध्या में रामलला मंदिर और हनुमानगढ़ी के दर्शन शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों के इन प्रमुख तीर्थों को एक ही रूट में कवर किया गया है। कितना रहेगा किराया, क्या मिलेंगी सुविधाएं IRCTC के क्षेत्रीय प्रबंधक मुकेश सैनी ने बताया कि स्टैंडर्ड कैटेगरी का किराया 27,890 रुपए रखा गया है, जिसमें एसी ट्रेन यात्रा, ठहरने के लिए नॉन-एसी होटल और लोकल ट्रांसपोर्ट के लिए नॉन-एसी बसें शामिल हैं। कंफर्ट कैटेगरी का किराया 32,065 रुपए है, जिसमें एसी होटल और एसी बस सुविधा दी जाएगी। पैकेज में कन्फर्म बर्थ, होटल में ठहरना, ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर, पेयजल और लोकल ट्रांसपोर्ट शामिल रहेगा। यात्रियों को इंश्योरेंस कवर भी मिलेगा। जानिए, भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन का पूरा शेड्यूल ट्रेन 9 मई को श्री गंगानगर से रवाना होकर 11 मई को गया पहुंचेगी, जहां महाबोधी मंदिर और विष्णुपद मंदिर के दर्शन होंगे। इसके बाद 12 मई को पुरी, 13 मई को कोणार्क और 14 मई को कोलकाता पहुंचकर गंगासागर ले जाया जाएगा। 15 मई को काली घाट मंदिर के दर्शन के बाद 16 मई को जसीडीह में बैद्यनाथ धाम, 17 मई को वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा आरती, जबकि 18 मई को अयोध्या में रामलला मंदिर और हनुमानगढ़ी के दर्शन होंगे। इसके बाद ट्रेन वापस श्री गंगानगर के लिए रवाना होगी और 19 मई को यात्रा पूरी होगी। ऐसे कर सकते हैं बुकिंग यात्री इस पैकेज की बुकिंग IRCTC की वेबसाइट irctctourism.com पर कर सकते हैं। इसके अलावा जयपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय (जीवन प्रकाश बिल्डिंग, अंबेडकर सर्किल, भवानी सिंह रोड) में जाकर भी बुकिंग करवाई जा सकती है। जानकारी के लिए 9001094705 और 8595930998 पर संपर्क किया जा सकता है।
Baisakhi 2026: खुशियों की सौगात बैसाखी, जानें वैशाखी के त्योहार की 6 खासियतें
Baisakhi celebration 2026: बैसाखी का त्योहार केवल एक कैलेंडर तिथि नहीं है, बल्कि यह उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब की आत्मा, वीरता और उदारता का प्रतिबिंब है। 2026 में जब हम 14 अप्रैल, दिन मंगलवार को यह पर्व मना रहे हैं, तो इसकी खासियतें हमारे जीवन में एक नई ऊर्जा भर देती हैं। यहां पाठकों के लिये बैसाखी के उत्सव की कुछ सबसे अनूठी खासियतें दी गई हैं: ALSO READ: Baisakhi 2026: बैसाखी 2026: परंपरा, उत्सव और पंजाबी संस्कृति का जश्न 1. फसलों का 'स्वर्ण' उत्सव 2. खालसा पंथ का 'जन्मदिन' 3. बैसाखी की अनूठी परंपराएं 4. सांस्कृतिक ऊर्जा: भांगड़ा और गिद्दा 5. एकता और भाईचारे का संदेश 6. बैसाखी का महत्वपूर्ण संदेश 1. फसलों का 'स्वर्ण' उत्सव बैसाखी मुख्य रूप से एक कृषि पर्व है। सर्दियों में बोई गई गेहूं की फसल इस समय तक पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। किसान की खुशी: लहलहाते सुनहरे खेतों को देखकर किसान अपनी मेहनत के सफल होने का जश्न मनाते हैं। जट्टा आई बैसाखी: पंजाब के खेतों में 'जट्टा आई बैसाखी' के नारे गूंजते हैं, जो नई शुरुआत और समृद्धि का संकेत हैं। 2. खालसा पंथ का 'जन्मदिन' सिख इतिहास में बैसाखी सबसे गौरवशाली दिन है। इसी दिन 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में 'खालसा पंथ' की नींव रखी थी। आत्मसम्मान का प्रतीक: गुरु साहिब ने अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए एक ऐसी कौम तैयार की, जो जाति-पाति से ऊपर थी। अमृत छकना: इस दिन गुरुद्वारों में विशेष 'अमृत संचार' या दीक्षा समारोह आयोजित किए जाते हैं। 3. बैसाखी की अनूठी परंपराएं इस त्योहार को मनाने के तरीके इसे अन्य पर्वों से अलग बनाते हैं: नगर कीर्तन- गुरु ग्रंथ साहिब की अगुवाई में पंज प्यारों के साथ भव्य जुलूस, जिसमें गतका (युद्ध कला) का प्रदर्शन होता है। कार सेवा- गुरुद्वारों की सफाई और रंग-रोगन करना, जिसे सेवा भाव का सर्वोच्च रूप माना जाता है। निशान साहिब की सेवा- गुरुद्वारे के पवित्र ध्वज (निशान साहिब) के चोले को धोकर बदला जाता है। दान और लंगर- इस दिन भारी संख्या में लोग 'लंगर' में सेवा करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। स्वाद और पकवानों की मिठास- मीठे चावल, कड़ा प्रसाद, लस्सी और मीठी फिरनी उत्सव का आनंद दोगुना कर देती हैं। ALSO READ: बैसाखी कब है, क्या है इसका महत्व, जानिए खास 5 बातें 4. सांस्कृतिक ऊर्जा: भांगड़ा और गिद्दा बैसाखी की रंगीनी इसके लोक नृत्यों के बिना अधूरी है। ढोल की थाप पर किया जाने वाला नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन के प्रति उत्साह का प्रदर्शन है। भांगड़ा: पुरुष पारंपरिक पोशाक लुंगी और पगड़ी पहनकर ढोल की आवाज पर ऊर्जा से भरपूर नृत्य करते हैं। गिद्दा: महिलाएं रंग-बिरंगे सूट और गहने पहनकर बोलियां डालती हैं और अपनी खुशियां साझा करती हैं। 5. एकता और भाईचारे का संदेश बैसाखी हमें सिखाती है कि चाहे हम किसी भी पृष्ठभूमि से हों, मेहनत का फल और अन्याय के खिलाफ एकता ही समाज की असली ताकत है। यह पर्व 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'सरबत दा भला' यह वाक्यांश 'सरबत' (सब) और 'भला' (कल्याण) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ ' सबका भला' की भावना को जीवंत करता है। 6. बैसाखी का महत्वपूर्ण संदेश यह त्योहार हमें सिखाता है कि 'किरत करो (मेहनत करो), नाम जपो (ईश्वर को याद करो) और वंड छको (बांटकर खाओ) '। बैसाखी की लख-लख बधाइयां! यह साल आपके लिए गेहूं की बालियों जैसी सुनहरी सफलता और ढोल की थाप जैसी ऊर्जा लेकर आए। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: Baisakhi 2026: बैसाखी 2026: परंपरा, उत्सव और पंजाबी संस्कृति का जश्न
बक्सर जिले के प्रसिद्ध चौसा पशु मेले में इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पशु व्यापारियों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुफस्सिल थानाध्यक्ष शंभू भगत ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम में मेला मालिकों और व्यापारियों ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों तथा गणमान्य लोगों को फूल-माला और पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण बिरहा गायन रहा। मशहूर बिरहा गायिका रजनीगंधा और गायक अखिलेश यादव ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उनके गीतों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। इस आयोजन को सफल बनाने में मोहन सिंह, लक्ष्मण सिंह, ब्रजेश चौबे, सुनील यादव और विवेक चौबे की अहम भूमिका रही। मेला मालिकों के सहयोग से कार्यक्रम सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। पशु मेला को बताया सामाजिक-सांस्कृतिक मेलजोल का मंच इस अवसर पर मेला मालिक उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि चौसा का पशु मेला केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल का भी मंच है। मेला मालिक कामेश्वर चौबे ने आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। चौसा का यह पशु मेला विशेष रूप से दुधारू गायों की खरीद-बिक्री के लिए जाना जाता है। यहां दूर-दूर से पशु व्यापारी आते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मेला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और हजारों युवाओं को रोजगार प्रदान कर पलायन रोकने में सहायक है। कार्यक्रम में चेयरमैन प्रतिनिधि डॉ. मनोज यादव, विनोद यादव, सुनील सिंह, राकेश चौबे, भुनेश्वर चौबे, कासेश्वर चौबे, गोलू चौबे सहित कई मेला मालिक और पशु व्यापारी उपस्थित थे।
निंबाहेड़ा: अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने मनाई डॉ. अंबेडकर जयंती
विशाल अकादमी विद्यालय में आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने बाबा साहब के संवैधानिक योगदान और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर चर्चा की।
मोतिहारी के बापू सभागार में शिक्षा और करियर मार्गदर्शन पर केंद्रित 'उड़ान एजुकेशनल एक्सपो सह सम्मान समारोह' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को उनके भविष्य के प्रति जागरूक करना और सही दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. आशुतोष शरण सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिले के सैकड़ों शिक्षक, हजारों छात्र-छात्राएं और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। छात्रों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित कियाआयोजन के दौरान कैरियर एंबीशन एजुकेशन की ओर से मेधावी छात्रों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। शिक्षकों को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें नृत्य, संगीत और नाटक शामिल थे। छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कई मोटिवेशनल स्पीकर्स ने विशेष सत्र आयोजित किए। इन सत्रों में छात्रों को करियर के विभिन्न विकल्पों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और लक्ष्य निर्धारण के बारे में जानकारी दी गई। आयोजन का उद्देश्य छात्रों को सही मार्गदर्शन देनाकैरियर एंबीशन एजुकेशन के डायरेक्टर चंदन कुमार ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य छात्रों को सही मार्गदर्शन देना और उनकी प्रतिभा को मंच उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें। आयोजकों ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों का आभार व्यक्त किया।
बलिया के बापू भवन टाउन हॉल में रविवार को 'हुनर उत्सव' हस्तकला मेले का आयोजन किया गया। फाउंड वन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस मेले का उद्देश्य हस्तनिर्मित उत्पादों को बढ़ावा देना था। रविवार का सही उपयोग, हुनर को दें सहयोग के नारे के साथ शुरू हुए इस मेले में हस्तकला से निर्मित विभिन्न सामानों के स्टॉल लगाए गए थे। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने अपनी पसंद के सामानों की खरीदारी की। समाजसेविका नंदिनी तिवारी ने बताया कि इस पहल से बच्चों और महिलाओं को जोड़ा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मेले में प्रदर्शित सभी उत्पाद हस्तनिर्मित हैं और उनकी गुणवत्ता उच्च स्तर की है। नंदिनी ने स्केचिंग तस्वीरों का जिक्र करते हुए बताया कि ये सभी चित्र विद्या सहित अन्य बच्चियों द्वारा बनाए गए हैं। उन्होंने आराध्या द्वारा घर के अनुपयोगी सामानों (कबाड़) से बनाए गए विभिन्न उत्पादों की भी सराहना की। मेले में आलोक गुप्ता द्वारा तैयार किए गए जैविक खाद, महिलाओं द्वारा गोबर से बनाए गए दीये और विभिन्न प्रकार के पौधों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। विभिन्न स्टॉलों पर मिट्टी के बर्तन, साड़ियां, रसोई और घर में उपयोग किए जाने वाले सामान, बैग सहित कई अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं उपलब्ध थीं। इन सामानों की खरीदारी के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे और अपनी मनपसंद चीजें खरीदीं।
करनाल में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से बैसाखी पर्व के अवसर पर 12 अप्रैल को अन्नदाता बैसाखी मिलन समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने इसकी रूपरेखा साझा की और इसे भाईचारे व एकता का संदेश देने वाला आयोजन बताया। शहरी जिलाध्यक्ष पराग गाबा ने बताया कि समारोह मेहता फार्म में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, पूर्व सांसद राज बब्बर, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य सरदार गुरदीप सिंह सप्पल, पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सरदार अमरिंदर राजा वारिंग, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रफुल्ल गुड्डे और जितेंद्र बघेल विशेष रूप से शामिल होंगे। कई विधायक भी रहेंगे मौजूद कार्यक्रम में विधायक अशोक अरोड़ा, विधायक भारत भूषण बत्रा, विधायक आफताब अहमद, विधायक मनदीप चट्ठा और विधायक इंदु राज नरवाल सहित कई प्रमुख नेता भी भाग लेंगे। आयोजकों के अनुसार यह समारोह राजनीतिक के साथ सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी होगी प्रस्तुति समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इनमें पंजाब और हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। आयोजकों का कहना है कि इस मंच के माध्यम से एकता और भाईचारे का संदेश दिया जाएगा। किसानों के मुद्दों को उठाया जाएगा कांग्रेस नेता दिव्यांशु बुद्धिराजा ने कहा कि, पार्टी हमेशा सभी वर्गों और 36 बिरादरी को साथ लेकर चलती है। उन्होंने बताया कि समारोह में किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा और उनके समाधान के लिए आवाज बुलंद की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किसान कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और कांग्रेस उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अंबेडकर जयंती भी मनाई जाएगी उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती भी पूरे सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस मौके पर सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के मूल्यों को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
“बुरा मानो होली है”– त्योहार की आड़ में छिपी हिंसा (त्यौहार, सहमती, गरिमा, आधिकार)
होली का दिन रंगों से खेलने के लिए मशहूर है, लेकिन कई लोग आज के दिन महिलाओं और लड़कियों, लड़कों के साथ रंग लगाने के बहाने छेड़छाड़ करते हैं। कई जगहों पर होली के नाम पर गोबर, कीचड़ आदि से भी होली खेली जाती है। “बुरा न मानो होली है” कहकर बहुत शर्मनाक व्यवहार करते ... Read more
होली को छपरियों का त्योहार बताकर फंसीं फराह खान, दर्ज हुआ केस
फिल्ममेकर-कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों कुकिंग रियलिटी शो 'सेलिब्रिटी मास्टशेफ' को जज करती नजर आ रही हैं। हाल ही में शो के एक एपिसोड में फराह खान ने होली को 'छपरी लोगों का फेवरेट फेस्टिवल' बताया था। इसके बाद फराह मुश्किलों में घिर गई हैं। फराह खान ...

