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विदेश से पंजाब लौटे चेहरे राजनीति में छाए: एनआरआई नेटवर्क बना पार्टियों की नई ताकत, मान रहे नई चुनावी पूंजी

2027 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला केवल स्थानीय संगठन की ताकत से तय नहीं होगा।

अमर उजाला 8 Sep 2026 10:08 am

Indian Diaspora: विदेशों में कहां कितने भारतीय? अमेरिका से UAE और कनाडा तक, जानें कौन से काम करते हैं प्रवासी भारतीय

Indian Diaspora: विदेशों में कहां कितने भारतीय? अमेरिका से UAE और कनाडा तक, जानें कौन से काम करते हैं प्रवासी भारतीय

समाचार नामा 7 Sep 2026 12:05 pm

NRI बेटे का लापता पिता की जमीन का दावा खारिज:1973 की बिक्री को चुनौती, 23 लोगों को पार्टी बनाया; सबूत नहीं कर पाया पेश

कनाडा में रह रहे एक एनआरआई बेटे ने अपने 40 साल से लापता पिता की 120 कनाल 1 मरला पैतृक जमीन पर मालिकाना हक का दावा करते हुए मोहाली जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया। गुरप्रीत सिंह चौहान का कहना था कि उनके पिता गुरचरन सिंह चार दशक से अधिक समय से लापता हैं और उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर लोगों ने पैतृक जमीन पर कब्जा कर लिया। हालांकि, कोर्ट में दावे के समर्थन में कोई मौखिक या दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद अदालत ने मुकदमा खारिज कर दिया। उन्होंने 23 लोगों को मामले में पार्टी बनाया था। अब 5 पाइंट में सारे मामले को जानिए :- 1. एनआरआई बेटे ने कोर्ट में दायर किया केस कनाडा के ब्रैम्पटन में रहने वाले गुरप्रीत सिंह चौहान ने 25 जुलाई 2022 को मोहाली अदालत में अपने पिता गुरचरन सिंह की जमीन को लेकर मुकदमा दायर किया। गुरप्रीत ने यह केस अपने मुख्तार-ए-आम मोहिंदर पाल के जरिए दाखिल किया था। गुरप्रीत का कहना था कि उनके पिता गुरचरन सिंह 40 साल से अधिक समय से लापता हैं। परिवार भी गांव से दूर चला गया और इसी दौरान उनकी जमीन पर दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया। गुरप्रीत ने कोर्ट से जमीन में अपना और अपने भाई-बहनों का हिस्सा दिलाने की मांग की। 2. 50 साल पहले जमीन बेचने के बाद हुए गायब मामले की कहानी इससे करीब 50 साल पहले शुरू होती है। रायपुर कलां गांव में गुरचरन सिंह के पास 120 कनाल 1 मरला जमीन में आधा हिस्सा था। रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने 29 मई 1973 को 8 कनाल 18 मरला जमीन अपने भतीजे भूपिंदर सिंह को 5 हजार रुपये में रजिस्ट्री के जरिए बेच दी थी। इसके बाद गुरचरन सिंह लापता हो गए। परिवार का कहना था कि वह 40 साल से ज्यादा समय से नहीं मिले और उन्हें कानून की नजर में मृत माना जाना चाहिए। 3. 1985 में जमीन आगे बेच दी गई गुरचरन सिंह से जमीन खरीदने वाले उनके भतीजे भूपिंदर सिंह ने मई 1985 में इसमें से 8 कनाल जमीन रंजीत सिंह, बलवंत सिंह और हरगोविंद सिंह को 20 हजार रुपये में बेच दी। जमीन का कब्जा भी उन्हें दे दिया गया। यही तीनों बाद में कोर्ट में प्रतिवादी बने। उन्होंने कोर्ट में 1973 और 1985 की रजिस्ट्रियां पेश कीं और कहा कि उन्होंने जमीन ईमानदारी से खरीदी थी। इसलिए वे सद्भावी खरीदार हैं। 4. 2022 में पटवारी से मिली जानकारी गुरप्रीत सिंह के अनुसार, कनाडा में रहते हुए उन्हें हलका पटवारी के जरिए पता चला कि उनके लापता पिता के हिस्से की जमीन पर दूसरे लोगों का कब्जा है। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का रुख किया। गुरप्रीत ने यह भी दावा किया कि उनके पिता गायब होने से पहले मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थे और उन्होंने जमीन नहीं बेची थी। इसलिए उन्होंने 1973 की बिक्री को भी चुनौती दी। 5. चार साल तक चली कानूनी लड़ाई केस दाखिल होने के बाद दोनों पक्षों ने कोर्ट में अपनी-अपनी दलीलें दीं। प्रतिवादियों ने जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज पेश किए। 10 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने दोनों पक्षों के दावों के आधार पर मामले में मुख्य कानूनी मुद्दे तय किए। इसके बाद गुरप्रीत को अपने दावों के समर्थन में गवाह और दस्तावेज पेश करने के कई मौके मिले। कोर्ट ने उन पर लागत भी लगाई, लेकिन वह कोई गवाह या दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सके। अदालत के सामने गुरप्रीत अपने दावों को साबित करने के लिए जरूरी मौखिक या दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सके। इसी वजह से उनका मालिकाना हक का दावा स्वीकार नहीं किया गया और मुकदमा लागत के साथ खारिज कर दिया गया।

दैनिक भास्कर 7 Sep 2026 5:22 am

1.5 करोड़ में NRI कोटे से डॉक्टर बनाने का दावा:एजेंट बोले-रिश्तेदार विदेश में नहीं, फिर भी करवा देंगे काम, 1.60 लाख में बैकडेट डिग्री

छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में करियर काउंसलिंग एजेंसियां 1.5 करोड़ में नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) कोटे में MBBS की सीट दिलाने का दावा कर रही हैं। हालात ये है कि यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, एमपी, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश से छत्तीसगढ़ में करियर और एडमिशन काउंसलिंग के नाम पर फर्जी डिग्रियों का कारोबार चलाया जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों में सीट और डिग्री की सौदेबाजी का खुलासा हुआ है। दैनिक भास्कर ने पड़ताल के लिए जब इन एजेंसियों के नंबरों पर संपर्क किया तो कई हैरान करने वाली बातें सामने आईं। यहां तक कि लखनऊ की ओम कंसल्टेंसी ने हमें बैक डेट में बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी की डिग्री का सैंपल भी भेज दिया। जिसका रेट 1.60 लाख रुपए बताया। इतना ही नहीं, यदि छात्र का कोई सगा संबंधी विदेश में न हो तो भी सवा से डेढ़ करोड़ में NRI कोटे में छत्तीसगढ़ या अन्य राज्यों के निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने की बात कही जा रही है।इसके ऐवज में डेढ़ से 2 लाख रुपए तक का कमीशन लिया जा रहा है। दुबई से स्पांसरशिप दिलाने की बात तक कही जा रही है। मेडिकल एजुकेशन में चल रही गड़बड़ियों को लेकर भास्कर टीम पिछले 2 महीनों से लगातार पड़ताल कर रही है। इस दौरान सोशल मीडिया, वॉट्सएपग्रुप्स और कुछ अभिभावकों के जरिए हमने विभिन्न एजेंसियों के नंबरों पर संपर्क किया। ये एजेंसियां छत्तीसगढ़ में अपना एजेंट होने का दावा कर रही हैं। प्रदेश में इस तरह की कई एजेंसियां चल रही हैं। कांउसिल का रजिस्ट्रेशन, असली डॉक्यूमेंट बनाने का भी दावा पड़ताल में सामने आया कि NRI सीट के लिए सौदेबाजी कर फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने का दावा करते हैं। अगर आपका कोई रिश्तेदार विदेश में न हो तो भी एजेंट लोग स्पासंरशिप या नकली रिश्तेदारी के जरिए एडमिशन दिलवाने का भरोसा दिलाते हैं। यही नहीं, सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस सीट दिलाने के नाम पर विज्ञापन तक चलाए जा रहे हैं। जिसमें किसी भी कॉलेज में सीट दिलाने का दावा किया जा रहा है। इसकी एवज में एजेंट लाखों रुपए की फीस भी ले रहे हैं। हालांकि, कुछ एजेंसियों ने हमें सलाह भी दी कि एनआरआई कोटे की जगह हम राजस्थान, महाराष्ट्र या डीम्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन के ऑप्शन पर गौर करें। इसके लिए भी उन्होंने सवा से डेढ़ करोड़ तक की फीस का अनुमान बताया। कुछ एजेंसियो ने सलाह दी कि एनआरआई कोटे में एडमिशन के नियम बदल गए हैं। चैट में दावा- छत्तीसगढ़ काउंसिल का रजिस्ट्रेशन भी करवा देंगे एजेंट ने बताया कि, एडमिशन के लिए 15 हजार रुपए एडवांस देने होंगे। बातचीत के दौरान एजेंट ने हमें बैक डेट में बनवाई गई बीपीटी की मार्कशीट के सैंपल भी भेजे। कहा कि इस तरह हमें केवल 1 लाख 60 हजार देने के बाद 3 महीने में कर्नाटक की यूनिवर्सिटी की डिग्री मिल जाएगी। उनकी एजेंसी छत्तीसगढ़ काउंसलिंग का रजिस्ट्रेशन भी करवा देगी। ………………………… इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… 35 लाख में MBBS, बिना ट्रेनिंग डॉक्टर बनाने का दावा: एजेंट बोले- साल में एक बार परीक्षा देने जाना होगा; 100+ सेंटरों पर डिग्री शॉर्टकट रायपुर में विदेश से MBBS और दूसरे राज्यों से हेल्थकेयर कोर्स की डिग्री दिलाने के नाम पर एजेंसियों का नेटवर्क एक्टिव है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में एजेंटों ने बिना कॉलेज गए MBBS, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, फार्मेसी और पैरामेडिकल कोर्स की डिग्री दिलाने का दावा किया। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 1:44 pm

कपूरथला के गांव लखन के पड्डा में एनआरआई के बंद घर में चोरी

कपूरथला के गांव लखन के पड्डा में एनआरआई के बंद घर में चोरी

अमर उजाला 31 Aug 2026 11:52 am