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27 जुलाई से शनि की उल्टी चाल शुरू, 5 राशियों पर मंडराएगा संकट! बचाव के लिए जरूर करें ये 5 उपाय

जब शनि महाराज अपनी चाल बदलते हैं या वक्री होते हैं, तो उनका प्रभाव सभी राशियों पर गहरा पड़ता है। यदि आपकी कुंडली में शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती या महादशा चल रही है, तो इन उपायों को 27 जुलाई से अवश्य शुरू करें। शनि महाराज 11 दिसंबर तक यानी 138 दिनों तक ...

वेब दुनिया 25 Jul 2026 4:08 pm

सावन 2026 में कब-कब रखा जाएगा मंगला गौरी व्रत? जानिए पहला व्रत, तिथियां और पूजा विधि

सनातन धर्म में सावन का महीना भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की कृपा पाने के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। सावन महीने में जहां सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा को समर्पित होता है, वहीं हर मंगलवार का दिन माता पार्वती के 'मंगला गौरी' स्वरूप की आराधना के लिए विशेष माना गया है।सावन के मंगलवार को रखे जाने वाले इस व्रत को 'मंगला गौरी व्रत' (Mangla Gauri Vrat) कहते हैं। सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, विवाह योग्य कन्याएं मनोवांछित वर और शीघ्र विवाह की कामना से इस व्रत को धारण करती हैं। साल 2026 के सावन महीने में कुल चार मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे। आइए एक सांस्कृतिक और धर्म-आस्था रिपोर्टर के नजरिए से जानते हैं मंगला गौरी व्रत की सभी तिथियां, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।सावन 2026: पहला मंगला गौरी व्रत कब है?साल 2026 में सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से हो रही है। सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा, जबकि इसके ठीक अगले दिन यानी 4 अगस्त 2026 (मंगलवार) को पहला मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा।सावन 2026 में मंगला गौरी व्रत की पूरी तिथि सूची (Dates List)सावन 2026 के दौरान पड़ने वाले चारों मंगला गौरी व्रतों की तिथियां इस प्रकार हैं:मंगला गौरी व्रततारीख और दिनपहला मंगला गौरी व्रत4 अगस्त 2026, मंगलवारदूसरा मंगला गौरी व्रत11 अगस्त 2026, मंगलवारतीसरा मंगला गौरी व्रत18 अगस्त 2026, मंगलवारचौथा मंगला गौरी व्रत25 अगस्त 2026, मंगलवारमंगला गौरी व्रत की सही पूजा विधि (Puja Vidhi)स्नान और संकल्प: व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ (संभव हो तो लाल या हरे) वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल पर माता पार्वती और भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।प्रतिमा स्थापना: पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता पार्वती (मंगला गौरी) और भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।पूजा सामग्री अर्पित करें: माता पार्वती को लाल रंग की चुनरी, लाल पुष्प, रोली, कुमकुम, अक्षत और फल-मिठाई अर्पित करें।सोलह श्रृंगार का अर्पण: सुहागिन महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की 16 सामग्रियां (जैसे सिंदूर, हरी/लाल चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, काजल, महावर आदि) अर्पित करें।शिव-पार्वती संयुक्त पूजन: माता पार्वती की पूजा के साथ-साथ भगवान शिव पर जल, चंदन और बेलपत्र जरूर चढ़ाएं, क्योंकि दोनों की साथ में पूजा करने से ही व्रत पूर्ण माना जाता है।कथा व आरती: मंगला गौरी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें और अंत में कपूर से माता पार्वती की आरती कर सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना करें।मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्वपौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। सावन के मंगलवार को उनके मंगला गौरी रूप का पूजन करने से मां पार्वती अत्यंत प्रसन्न होती हैं। सुहागिन महिलाओं के जीवन में हमेशा खुशहाली बनी रहती है, दांपत्य जीवन के कलह दूर होते हैं और पति को लंबी आयु प्राप्त होती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 1:44 pm

घर की बंद किस्मत खोल सकती है पेंडुलम वाली घड़ी: जानिए किस दिशा में लगाना होता है सबसे शुभ

घर की सजावट हो या दिनचर्या में समय देखने की जरूरत, दीवार घड़ी हर घर का एक अनिवार्य हिस्सा होती है। लेकिन वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार, घड़ी सिर्फ समय बताने वाला एक उपकरण मात्र नहीं है, बल्कि यह आपके घर की ऊर्जा, तरक्की, आर्थिक स्थिति और भाग्य की गति को भी तय करती है।वास्तु में पेंडुलम वाली घड़ी (Pendulum Clock) को एक विशेष और शक्तिशाली साधन माना गया है। इसकी लगातार हिलती पेंडुलम गतिशीलता और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने का प्रतीक होती है। यदि इसे सही दिशा में लगाया जाए, तो यह घर से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को दूर कर सोई हुई किस्मत को चमका सकती है। आइए एक सांस्कृतिक और वास्तु रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं पेंडुलम घड़ी लगाने के मुख्य नियम।पेंडुलम वाली घड़ी किस दिशा में लगाएं?1. उत्तर दिशा (North Direction): धन और समृद्धि का द्वारवास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को सबसे शुभ माना गया है, क्योंकि इस दिशा के स्वामी धन के देवता कुबेर हैं।फायदे: उत्तर दिशा की दीवार पर पेंडुलम वाली घड़ी लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।आर्थिक लाभ: मान्यता है कि इस दिशा में लगी घड़ी धन-धान्य, आय के नए स्रोतों और आर्थिक समृद्धि के मार्ग खोलती है।2. पूर्व दिशा (East Direction): तरक्की और नए अवसरयदि आपके घर में उत्तर दिशा की दीवार पर जगह नहीं है, तो आप पूर्व दिशा का चयन कर सकते हैं।फायदे: पूर्व दिशा उगते हुए सूर्य और भगवान इंद्र से जुड़ी है।सकारात्मक माहौल: इस दिशा में पेंडुलम घड़ी लगाने से घर के सदस्यों के सम्मान में वृद्धि होती है, करियर में तरक्की के नए अवसर मिलते हैं और घर का वातावरण खुशनुमा बना रहता है।किस दिशा में भूलकर भी न लगाएं घड़ी?वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण दिशा (South Direction) में घड़ी लगाना वर्जित और अशुभ माना जाता है।कारण: दक्षिण दिशा को यम (मृत्यु के देवता) और ठहराव की दिशा माना जाता है।नुकसान: इस दिशा में घड़ी लगाने से घर की प्रगति रुक सकती है, मुखिया के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और परिवार में नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है।पेंडुलम वाली घड़ी क्यों मानी जाती है खास?पेंडुलम वाली घड़ी में पेंडुलम एक निश्चित और निरंतर गति में आगे-पीछे घूमता रहता है।समय और ऊर्जा का संतुलन: वास्तु में पेंडुलम का यह दोलन (Oscillation) समय के साथ चलने और जीवन में रुकावटों को दूर करने का प्रतीक है।सकारात्मक बदलाव: जब सही दिशा (उत्तर या पूर्व) में पेंडुलम घड़ी लगाई जाती है और वह सही समय पर चल रही होती है, तो यह घर के वास्तु दोषों को कम कर सकारात्मक ऊर्जा के चक्र को तेज करती है।ध्यान रखने योग्य जरूरी वास्तु टिप्स:बंद घड़ी न रखें: घर में बंद या टूटी हुई पेंडुलम घड़ी कभी न रखें। यह तरक्की में रुकावट लाती है।सही समय रखें: घड़ी का समय हमेशा सही या 1-2 मिनट आगे होना चाहिए, पीछे बिल्कुल न रखें।साफ-सफाई: घड़ी पर धूल-मिट्टी न जमने दें, उसे नियमित रूप से साफ रखें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 1:41 pm

हरियाली तीज 2026 सही तारीख: 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम

सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए सावन के महीने में आने वाली हरियाली तीज (Hariyali Teej) का व्रत अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और पारिवारिक खुशहाली की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के वस्त्र, हरी चूड़ियां पहनकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज के दिन ही माता पार्वती की सैकड़ों वर्षों की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। आइए एक सांस्कृतिक और धर्म-आस्था रिपोर्टर के नजरिए से जानते हैं साल 2026 में हरियाली तीज की सही तिथि, पूजा मुहूर्त और इस दिन से जुड़े जरूरी नियम।हरियाली तीज 2026 की सही तारीख और शुभ मुहूर्तद्रिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ और समापन इस प्रकार रहेगा:तृतीया तिथि का प्रारंभ: 14 अगस्त 2026 को शाम 6:46 बजे।तृतीया तिथि का समापन: 15 अगस्त 2026 को शाम 5:28 बजे।व्रत व पूजा की उदया तिथि: उदया तिथि के मान के अनुसार हरियाली तीज का व्रत और पूजन 15 अगस्त 2026, शनिवार को किया जाएगा।हरियाली तीज पर क्या करें? (पूजा विधि और परंपराएं)भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाएं। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।हरे रंग के वस्त्र और हरी चूड़ियां: हरियाली तीज में हरा रंग प्रकृति, हरियाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग की साड़ी या सूट पहनती हैं और हरी चूड़ियां धारण करती हैं।सुहाग की सामग्री का दान: पूजा के बाद किसी जरूरतमंद महिला या ब्राह्मणी को सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और हरे वस्त्र दान करना बहुत शुभ माना जाता है।तीज की कथा और आरती: व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की हरियाली तीज कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।हरियाली तीज पर क्या न करें? (जरूरी सावधानियां)क्रोध और अपशब्दों से बचें: व्रत के दिन मन को शांत रखें। किसी से झगड़ा, बहस या घर में क्लेश का माहौल न बनने दें।महिलाओं व बुजुर्गों का अपमान न करें: यह पर्व माता पार्वती की आराधना का उत्सव है, इसलिए किसी भी महिला, सास-ससुर या घर के बड़ों का अनादर करने से बचें।पूजा में जल्दबाजी न करें: भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा पूरे मन, भक्ति और विश्वास के साथ करें, इसे केवल एक औपचारिकता न समझें।हरियाली तीज का धार्मिक महत्वसावन का पवित्र महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान आने वाली हरियाली तीज माता पार्वती और महादेव के अटूट प्रेम और मिलन का प्रतीक है। मान्यता है कि जो सुहागिन महिलाएं इस दिन निष्ठापूर्वक व्रत रखकर शिव-पार्वती की आराधना करती हैं, उनके दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है, पति को दीर्घायु प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास रहता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 1:39 pm

Aaj Ka Panchang 25 July 2026: आज देवशयनी एकादशी पर लग रहा है भद्रा काल, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का पंचांग

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से आज यानी 25 जुलाई 2026, शनिवार का दिन बेहद खास और पवित्र है। आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी (हरिशयनी एकादशी) है। मान्यता के अनुसार, इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।इसके साथ ही आज से गौरी व्रत का भी शुभारंभ हो रहा है, जो आषाढ़ पूर्णिमा तक चलता है। यह व्रत अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर पाने और सुहागिनें अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, आज सुबह ही भद्रा काल लग रहा है जो सुबह 11:34 बजे तक रहेगा। आइए जानते हैं आज का पूरा पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त और ग्रह-गोचर:आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang 25 July 2026)तिथि: आषाढ़ शुक्ल एकादशी (सुबह 11:34 बजे तक), इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ।वार: शनिवारनक्षत्र: ज्येष्ठा नक्षत्र (सुबह 04:36 बजे से पूरे दिन रहेगा)व्रत एवं त्योहार: देवशयनी एकादशी, गौरी व्रत प्रारंभ।योग: ब्रह्म योग (रात 09:08 बजे तक), इसके बाद इन्द्र योग।करण: विष्टि/भद्रा (सुबह 11:34 बजे तक), इसके बाद बव करण।चंद्र राशि: चंद्रमा पूरे दिन वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे।सूर्य और चंद्रमा का समयसूर्योदय: सुबह 05:58 बजेसूर्यास्त: शाम 07:08 बजेचंद्रोदय: दोपहर 04:05 बजे (25 जुलाई)चन्द्रास्त: देर रात 02:42 बजे (26 जुलाई)आज के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:22 बजे से 05:10 बजे तकअभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:07 बजे से 12:59 बजे तक (पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम समय)अमृत काल: रात 09:40 बजे से 11:28 बजे तकआज के अशुभ समय (Ashubh Muhurat & Rahukaal)भद्रा काल: सुबह 05:58 बजे से 11:34 बजे तकराहुकाल: सुबह 09:15 बजे से 10:54 बजे तक (इस दौरान कोई नया काम शुरू न करें)यमगंड: दोपहर 02:12 बजे से 03:50 बजे तककुलिक: सुबह 05:58 बजे से 07:37 बजे तकदुर्मुहूर्त: सुबह 07:43 बजे से 08:36 बजे तकवर्ज्यम: सुबह 10:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 8:18 am

Saptahik Rashifal 27 July - 2 Aug 2026: सूर्य-गुरु की शुभ युति चमकाएगी 3 राशियों की किस्मत, जानें किसे होगा बड़ा धन लाभ

27 जुलाई से 2 अगस्त 2026 का यह सप्ताह ग्रह-नक्षत्रों की चाल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस सप्ताह चंद्रमा मकर, कुंभ और मीन राशि से होकर गुजरेंगे। चंद्रमा की यह गोचर स्थिति मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए सतर्क रहने की ओर इशारा कर रही है, क्योंकि इन राशियों के लिए षड्यंत्र, छल या आर्थिक हानि के योग बन सकते हैं।वहीं दूसरी ओर, कर्क राशि में सूर्य और गुरु की शुभ युति का प्रभाव वृषभ, तुला और कुंभ राशि के जातकों को करियर और बिजनेस में बड़ी सफलता व आर्थिक लाभ दिला सकता है। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का विस्तृत साप्ताहिक राशिफल:1. मेष राशि (Aries)करियर: चंद्रमा नवम, दशम और एकादश भाव में रहने से यह सप्ताह आपके काम-धंधे के लिए बेहद अहम रहेगा। काम का दबाव जरूर रहेगा, लेकिन कई रुके हुए बड़े काम पूरे होंगे। इस समय का पूरा लाभ उठाएं।आर्थिक स्थिति: राशि स्वामी मंगल का गोचर द्वितीय भाव में रहने से आर्थिक मामलों में बेहतरीन सफलता मिलेगी।2. वृषभ राशि (Taurus)करियर: 27-28 जुलाई को चंद्रमा अष्टम में रहने से मान-हानि व काम में नुकसान की आशंका है। 29-30 जुलाई को भाग्य का साथ मिलेगा। 31 जुलाई से 2 अगस्त के बीच कार्यभार बढ़ेगा, लेकिन सफलता हासिल होगी।आर्थिक स्थिति: 27-28 जुलाई को पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें। 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच धन लाभ के योग हैं। मिथुन राशि के बुध दूसरे भाव में होने से विशेष आर्थिक फायदा होगा।3. मिथुन राशि (Gemini)करियर: 28 जुलाई को सप्तम भाव के चंद्रमा शुभ परिणाम देंगे। 29 और 30 जुलाई को अष्टम भाव में चंद्रमा के रहने से कार्यस्थल पर सावधानी रखें। 31 जुलाई से 2 अगस्त के बीच भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।आर्थिक स्थिति: सूर्य और गुरु की युति इस हफ्ते आपको आर्थिक मजबूती देगी। हालांकि, 29 और 30 जुलाई को किसी भी प्रकार का आर्थिक जोखिम लेने से बचें।4. कर्क राशि (Cancer)करियर: 27 और 28 जुलाई को कार्यक्षेत्र में बहस या अनबन से बचें। 29 व 30 जुलाई को सप्तम भाव का चंद्रमा और सूर्य-गुरु की दृष्टि मान-सम्मान में वृद्धि कराएगी। 31 जुलाई से 2 अगस्त का समय थोड़ा संभलकर चलने का है।आर्थिक स्थिति: 29 व 30 जुलाई को विशेष धन लाभ होने के योग हैं, जबकि सप्ताह के अन्य दिनों में अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें।5. सिंह राशि (Leo)करियर: 27 और 28 जुलाई को पंचम भाव का चंद्रमा और एकादश भाव के स्वराशि बुध आपको अति-शुभ परिणाम देंगे। 29-30 जुलाई को षष्ठम चंद्रमा के कारण कुछ परेशानियां आ सकती हैं। 31 जुलाई से स्थिति सुधरेगी।आर्थिक स्थिति: सप्ताह की शुरुआत (27-28 जुलाई) आर्थिक लाभ लेकर आएगी। मध्य में सतर्कता बरतें।6. कन्या राशि (Virgo)करियर: शुरुआत में काम में थोड़ी मंदी रह सकती है। 29 और 30 जुलाई को पंचम चंद्र और एकादश सूर्य-गुरु की दृष्टि से आपके महत्वपूर्ण और बड़े काम आसानी से बन जाएंगे। 31 जुलाई के बाद सतर्क रहें।आर्थिक स्थिति: 29 और 30 जुलाई धन प्राप्ति के लिए सबसे उत्तम दिन हैं। 31 जुलाई से 2 अगस्त के बीच अनावश्यक खर्च या घाटे से बचें।7. तुला राशि (Libra)करियर: 27 और 28 जुलाई पराक्रम और यात्राओं के दिन हैं, जिनमें सफलता मिलेगी। 29-30 को थोड़ी सुस्ती महसूस हो सकती है, लेकिन चतुर्थ भाव का चंद्रमा कोई बड़ा काम पूरा कराएगा। 31 जुलाई से 2 अगस्त का समय काफी लाभदायक रहेगा।आर्थिक स्थिति: आर्थिक दृष्टिकोण से पूरा सप्ताह शुभ है। सप्ताह के अंत में विशेष धन लाभ होगा।8. वृश्चिक राशि (Scorpio)करियर: 27-28 जुलाई को मंगल की दृष्टि और द्वितीय चंद्रमा 'लक्ष्मी योग' बनाएंगे, जिससे कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमेगी। 29 और 30 को भाग्य का विशेष साथ मिलेगा। 31 जुलाई से 2 अगस्त के बीच काम में मंदी आ सकती है।आर्थिक स्थिति: 27 और 28 जुलाई को धन प्राप्ति के मजबूत योग हैं। शेष दिन सामान्य रहेंगे।9. धनु राशि (Sagittarius)करियर: 27 व 28 जुलाई को नेटवर्किंग और सही लोगों से मुलाकात होगी। 29-30 जुलाई सामान्य रहेगी। 31 जुलाई से 2 अगस्त के बीच पराक्रम के बल पर काम बनेंगे, हालांकि केतु की दृष्टि से मानसिक तनाव हो सकता है।आर्थिक स्थिति: 29 और 30 जुलाई को विशेष धन लाभ के योग हैं। 31 जुलाई के बाद राहु-चंद्र की युति के कारण किसी भी वित्तीय भ्रम से बचें।10. मकर राशि (Capricorn)करियर: 27 व 28 जुलाई को द्वादश चंद्रमा के कारण किसी षड्यंत्र या हानि से बचें। 29 और 30 जुलाई इस हफ्ते के सबसे महत्वपूर्ण और सफल दिन साबित होंगे। आपकी राशि में चंद्रमा और सप्तम सूर्य-गुरु का प्रभाव बड़ी कामयाबी दिलाएगा।आर्थिक स्थिति: 27-28 को खर्च अधिक रहेगा। 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी।11. कुंभ राशि (Aquarius)करियर: 27 और 28 जुलाई को एकादश-द्वितीयांश का चंद्रमा सफलता देगा। 29-30 जुलाई को द्वादश चंद्र की वजह से सतर्क रहें, हानि या छल हो सकता है। 31 जुलाई से 2 अगस्त के बीच महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात होगी और काम पूरे होंगे।आर्थिक स्थिति: 27-28 जुलाई को धन लाभ होगा। 29 और 30 तारीख को आर्थिक नुकसान से बचें।12. मीन राशि (Pisces)करियर: 27 और 28 जुलाई को दशम भाव का चंद्रमा और चतुर्थ भाव के बुध का प्रभाव आपको बड़ी कामयाबी दिलाएगा। 29 व 30 जुलाई को सूर्य-गुरु की दृष्टि विशेष सफलता दिलाएगी। 31 जुलाई से 2 अगस्त के बीच किसी भी काम में लापरवाही न बरतें।आर्थिक स्थिति: 27 से 30 जुलाई के बीच धन लाभ के उत्तम अवसर मिलेंगे। सप्ताह के अंत (31 जुलाई - 2 अगस्त) में नुकसान या छल से सावधान रहें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 8:16 am

Shani Vakri 2026: 27 जुलाई से उल्टी चाल चलेंगे शनिदेव, अगले 140 दिन इन 3 राशियों के लिए भारी

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को सबसे प्रभावशाली और न्यायप्रिय ग्रह माना जाता है। शनि एक राशि में लगभग ढाई साल तक विराजमान रहते हैं और अपनी साढ़े साती या ढैय्या के जरिए जातक को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यही वजह है कि जब भी शनि की चाल बदलती है, तो इसका असर हर किसी के जीवन पर देखने को मिलता है। इस समय शनिदेव मीन राशि में विराजमान हैं और 27 जुलाई को इसी राशि में वक्री होने जा रहे हैं।अगले 140 दिनों तक शनि की उल्टी चाल27 जुलाई से शनिदेव अगले 140 दिनों तक वक्री यानी उल्टी चाल से चलेंगे। वैसे तो इस बदलाव का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार 3 विशेष राशियों के लिए यह समय काफी सतर्क रहने वाला है। उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के मुताबिक, इस दौरान करियर में अड़चनें, आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और मेहनत का पूरा फल न मिलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इन 3 राशियों को झेलनी पड़ सकती है मुसीबतमेष राशि: मेष राशि के जातकों के लिए शनि का वक्री होना कई चुनौतियां ला सकता है। लंबे समय से चल रही संपत्ति, नया मकान या गाड़ी खरीदने की योजनाएं अटक सकती हैं। अनावश्यक खर्चों के कारण आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिससे बड़े फैसले लेना मुश्किल हो जाएगा।कर्क राशि: कर्क राशि वाले जातकों के लिए भी यह समय थोड़ा कठिन रहेगा। आपके अटके हुए कामों में और ज्यादा देरी हो सकती है। नौकरी और व्यापार में नई-नई अड़चनें आने से मानसिक तनाव और आत्मविश्वास में कमी आ सकती है।मीन राशि: चूंकि शनि मीन राशि में ही वक्री हो रहे हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है। पुरानी मानसिक उलझनें दोबारा परेशान कर सकती हैं। कार्यक्षेत्र में मन मुताबिक सफलता न मिलने से निराशा बढ़ सकती है।शनि देव के बुरे प्रभाव से बचने के अचूक उपायअगर आप शनि की प्रतिकूल दृष्टि और वक्री चाल के प्रभाव को कम करना चाहते हैं, तो ज्योतिष शास्त्र में बताए गए इन आसान उपायों को जरूर अपनाएं:मंत्र जाप: हर शनिवार को पूरे मन और श्रद्धा से ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें।पाठ और स्तुति: रोजाना या विशेष रूप से शनिवार के दिन हनुमान चालीसा, शनि स्तोत्र और शनि कवच का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।दान-पुण्य करें: शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द की दाल, सरसों का तेल, काला छाता या काले जूते दान करें।तेल अर्पित करें: शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर सरसों का तेल अर्पित करें और गरीब व भूखे लोगों को भोजन कराएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 8:08 am

Aaj Ka Panchang 24 July 2026: आज सुबह 09:13 बजे तक रहेगी दशमी, जानें देवशयनी एकादशी की सही तारीख और आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार आज 24 जुलाई 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि सुबह 09:13 बजे तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा जो पूरी रात रहेगी। एकादशी तिथि दो दिन पड़ने के कारण बहुत से लोगों के मन में देवशयनी एकादशी की सही तारीख को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। पंडित ऋभुकांत गोस्वामी के अनुसार, आज शुक्रवार के दिन ब्रह्म और शुक्ल योग का एक बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है, जो ज्योतिष शास्त्र में पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए बहुत उत्तम माना गया है। आइए जानते हैं आज का पूरा विस्तृत पंचांग, सूर्य-चंद्रमा का समय और देवशयनी एकादशी व्रत की सही तिथि।24 जुलाई 2026 का विस्तृत पंचांग और ग्रह स्थितिआज शुक्रवार के पंचांग के मुताबिक शक संवत 02 श्रावण (सौर) 1948 और विक्रमी संवत 2083 चल रहा है। आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि सुबह 09:13 बजे तक है और इसके उपरांत एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी। नक्षत्र की बात करें तो आज अनुराधा नक्षत्र रात्रि 04:37 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। आज के दिन चंद्रमा पूरे दिन और रात वृश्चिक राशि में संचार करेंगे, जबकि सूर्य देव दक्षिणायन स्थिति में रहेंगे। इसके अलावा आज रात 10:24 बजे से भद्रा का साया भी रहेगा और रात्रि 04:37 बजे से गंडमूल शुरू होंगे।सूर्य-चंद्रमा का समय और आज के शुभ मुहूर्तआज के दिन सूर्योदय सुबह 06:14 बजे और सूर्यास्त शाम 07:17 बजे होगा। वहीं, चंद्रमा शाम 06:29 बजे उदय होगा और अगले दिन यानी 25 जुलाई की सुबह 01:44 बजे अस्त होगा। आज बनने वाले शुभ मुहूर्तों की बात करें तो दिन की शुरुआत में ही सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह 06:14 बजे से शुरू होकर अगले दिन 25 जुलाई की सुबह 01:06 बजे तक रहेंगे। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:05 बजे से 05:39 बजे तक, अमृत काल दोपहर 01:27 बजे से 03:14 बजे तक, और दोपहर का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 01:26 बजे से 02:28 बजे तक रहेगा, जो किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए उत्तम है।राहुकाल और आज के अशुभ मुहूर्तधार्मिक कार्यों या यात्रा आदि से पहले अशुभ मुहूर्तों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। आज राहुकाल सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा, जिस दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 08:09 बजे से सुबह 10:05 बजे तक, यमगण्ड शाम 05:48 बजे से शाम 07:44 बजे तक, और दुर्मुहूर्त सुबह 09:19 बजे से सुबह 10:21 बजे तक रहेगा। रात के समय भद्रा भी रात्रि 10:24 बजे से शुरू हो जाएगी।कब है देवशयनी एकादशी? जानें व्रत की सही तारीखसनातन धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार के लिए उदया तिथि को सबसे ज्यादा मान्यता दी जाती है। इसी नियम के आधार पर इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को रखा जाएगा। इस दिन चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाती है और भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। जो श्रद्धालु इस व्रत को रखेंगे, वे 26 जुलाई 2026, रविवार को सुबह शुभ मुहूर्त में अपने व्रत का पारण कर सकेंगे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 8:06 am

प्यार में आंख मूंदकर भरोसा करने लायक होती हैं ये 4 राशियां, क्या लिस्ट में शामिल है आपका पार्टनर?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर राशि का अपना स्वभाव होता है लेकिन कुछ राशियों के लोग प्यार और रिश्तों के मामले में बेहद ईमानदार और वफादार माने जाते हैं। वृषभ, कर्क, कन्या और मकर राशि के जातक अपने रिश्ते को लेकर बेहद गंभीर होते हैं और हर परिस्थिति में अपने साथी का साथ निभाते हैं।वृषभ और कन्या राशि की वफादारीवृषभ राशि के लोग रिश्तों में स्थिरता और लंबे समय तक साथ निभाने में विश्वास रखते हैं, वहीं कन्या राशि के जातक अपनी समझदारी और परिपक्वता से रिश्ते को मजबूत बनाते हैं। ये दोनों ही राशियां अपने पार्टनर के प्रति पूरी तरह समर्पित रहती हैं और कभी भी भरोसे को टूटने नहीं देती हैं।कर्क और मकर राशि का अटूट रिश्ताकर्क राशि के जातक अपने भावुक और देखभाल करने वाले स्वभाव के लिए जाने जाते हैं जो पार्टनर की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखते हैं। दूसरी ओर मकर राशि के लोग अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ अपने रिश्ते को आगे बढ़ाते हैं और मुश्किल समय में चट्टान की तरह साथ खड़े रहते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 8:02 am

Ashadha Purnima 2026: आषाढ़ी पूर्णिमा कब है, जानिए इस दिन का खास महत्व

Ashadha Purnima Date 2026: भारतीय संस्कृति, साधना और अध्यात्म की दृष्टि से आषाढ़ी पूर्णिमा अत्यंत पवित्र, कल्याणकारी और फलदायी तिथियों में से एक है। यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ने और आत्म-मंथन का ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 4:10 pm

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश, 5 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन; धन-करियर में मिल सकता है बड़ा लाभ

वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। मंगल के इस नक्षत्र परिवर्तन के चलते 5 भाग्यशाली राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे और उनके लिए लाभ के योग बनेंगे।

वेब दुनिया 23 Jul 2026 12:25 pm

गुरु पूर्णिमा कब है? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और कुंडली से 'गुरु दोष' दूर करने के 5 अचूक व महाउपाय

सनातन परंपरा में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान और सत्य के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) या 'व्यास पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर चारों वेदों के रचयिता और महान ऋषि महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। यह दिन अपने आध्यात्मिक गुरुओं, शिक्षकों और माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर होता है।गुरु पूर्णिमा तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्तज्योतिषीय पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई की शाम 06:18 बजे से होगी और इसका समापन 29 जुलाई की रात 08:05 बजे होगा। उदयातिथि के नियम का पालन करते हुए गुरु पूर्णिमा का मुख्य पर्व 29 जुलाई (बुधवार) को ही मनाया जाएगा।शुभ पूजा मुहूर्त (29 जुलाई): सुबह 05:41 बजे से सुबह 09:05 बजे तक (स्नान, दान और गुरु पूजन के लिए उत्तम)अमृत मुहूर्त: सुबह 07:22 बजे से सुबह 09:04 बजे तकअभिजीत/विजय मुहूर्त: दोपहर 02:43 बजे से दोपहर 03:37 बजे तककुंडली से 'गुरु दोष' दूर करने के 5 अचूक उपाययदि आपकी कुंडली में देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) कमजोर स्थिति में हैं या 'गुरु दोष' बना हुआ है, तो इसके कारण शिक्षा, विवाह, धन और करियर में लगातार बाधाएं आती हैं। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए सबसे फलदायी माना जाता है। इस दिन ये 5 उपाय अवश्य करें:पीली वस्तुओं का दान करें:गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद किसी गरीब, जरूरतमंद या मंदिर में चने की दाल, हल्दी, बेसन, केसर, केले और पीले वस्त्रों का दान करें। इससे देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।गुरु मंत्र का जाप करें:इस दिन 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' या 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' मंत्र का 108 बार तुलसी या हल्दी की माला से जाप करें। इससे मन शांत होता है और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है।केसर या हल्दी का तिलक लगाएं:गुरु पूर्णिमा से शुरुआत करके प्रतिदिन नाभि, माथे और दोनों कानों के पीछे केसर या शुद्ध हल्दी का तिलक लगाएं। ऐसा करने से भाग्य का साथ मिलने लगता है और मान-सम्मान बढ़ता है।केले के वृक्ष की पूजा:इस दिन जल में थोड़ी सी हल्दी और चने की दाल मिलाकर केले के पेड़ की जड़ में अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर 7 बार परिक्रमा करें। यह उपाय विशेष रूप से शीघ्र विवाह और दांपत्य सुख के लिए रामबाण माना जाता है।बजुर्गों और गुरुजनों का आशीर्वाद लें:गुरु पूर्णिमा के दिन अपने असली गुरु, शिक्षकों और घर के बड़े-बुजुर्गों (माता-पिता, दादा-दादी) के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें पीले वस्त्र या मिठाई भेंट करें। शास्त्रों के अनुसार, जीवित गुरुओं का आदर करने से बड़ा कोई ज्योतिषीय उपाय नहीं है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 9:53 pm

भड़ली नवमी 2026: इस शुभ दिन क्या करें, क्या न करें? जानिए खास जानकारी

What to do on Bhadli Navami: भड़ली नवमी श्रद्धा, संयम और सद्कर्म का संदेश देने वाली तिथि है। इस दिन पूजा-पाठ, दान और सकारात्मक आचरण को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि, भड़ली नवमी से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं, इसलिए ...

वेब दुनिया 22 Jul 2026 12:28 pm

शनि वक्री होकर रेवती नक्षत्र में, क्या भारत में आने वाला है कोई बड़ा संकट? ज्योतिषीय संकेतों से जानें

Mundane Astrology: शनि 29 मार्च 2025 से मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। 17 मई 2026 को शनि ने रेवती नक्षत्र में प्रवेश किया है जहां वे 9 अक्टूबर तक रहेंगे। दूसरी ओर अब शनिदेव मीन राशि में ही 27 जुलाई से 11 दिसंबर तक वक्री चाल चलेंगे। इस बड़े परिवर्तन ...

वेब दुनिया 22 Jul 2026 12:15 pm

भड़ली नवमी आज: बिना मुहूर्त देखे किए जा सकेंगे सभी शुभ कार्य, जानिए महत्व और खरीदारी का सही समय

हिंदू पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी भड़ली नवमी बेहद धूमधाम से मनाई जा रही है। साल 2026 में 22 जुलाई यानी बुधवार के दिन पड़ रही भड़ली नवमी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इसे 'भड़रिया नवमी' के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन साल के सबसे बड़े अबूझ मुहूर्तों में से एक माना जाता है, जिसका अर्थ है कि बिना किसी पंचांगीय बाधा या मुहूर्त की चिंता किए बिना आज के दिन सभी तरह के मांगलिक कार्य और खरीदारी बिना किसी रुकावट के संपन्न की जा सकती है।नवमी तिथि और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारीवैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि की शुरुआत 22 जुलाई को देर रात 01 बजकर 46 मिनट पर हो चुकी है और इसका समापन 23 जुलाई को सुबह 03 बजकर 33 मिनट पर होगा। उदया तिथि के प्रभाव के कारण भड़ली नवमी का यह पावन पर्व आज यानी 22 जुलाई को ही मनाया जा रहा है। भड़ली नवमी के ठीक बाद देवशयनी एकादशी आती है जिसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है और अगले चार महीनों के लिए मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। यही वजह है कि चातुर्मास से ठीक पहले आने वाली भड़ली नवमी को शादी-विवाह और अन्य आयोजनों के लिए अंतिम और सबसे उत्तम दिन माना जाता है।भड़ली नवमी का महत्व और पूजा-विधिसनातन परंपरा में भड़ली नवमी को एक अत्यंत ही पवित्र और शुभ तिथि माना गया है। जिन लोगों के विवाह के लिए सालभर में कोई अन्य अनुकूल मुहूर्त नहीं निकल पाता, वे अक्सर इसी अबूझ मुहूर्त के दिन विवाह के बंधन में बंधते हैं। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी के साथ-साथ देवों के देव महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस विशेष दिन पर व्रत और पूजन करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और अपार आर्थिक संपन्नता की प्राप्ति होती है।खरीदारी और पूजा के लिए आज के शुभ मुहूर्तआज के दिन यदि आप किसी नई वस्तु, वाहन, प्रॉपर्टी या सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदारी करना चाहते हैं, तो इसके लिए कई बेहतरीन और शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। पंचांग के अनुसार, आज खरीदारी के लिए अमृत काल सुबह 09:56 बजे से लेकर सुबह 11:41 बजे तक रहेगा। इसके अलावा दोपहर बाद विजय मुहूर्त शाम 04:32 बजे से शाम 05:34 बजे तक रहेगा और शाम 07:33 बजे से पूरी रात के लिए अत्यंत शुभ 'रवि योग' भी प्रभावी रहेगा, जो आपके हर नए कार्य को सफल बनाएगा।इस दिन क्या करें और क्या नहींचूंकि आज गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन भी है, इसलिए भड़ली नवमी के अवसर पर कन्या पूजन करना और जरूरतमंदों या गरीबों को दान देना बेहद पुण्य का काम माना जाता है। आज के दिन आप बिना किसी संकोच के नया वाहन, नया घर या भूमि की खरीदारी, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सभी संस्कार पूरे कर सकते हैं। यह दिन आपके जीवन में सकारात्मकता और नई शुरुआत का बड़ा अवसर लेकर आया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 8:24 am

क्या हिंसक जन आंदोलन से होगा भारत में सत्ता परिवर्तन, क्या कहता है मेदिनी ज्योतिष?

cjp protest: ज्योतिषीय दृष्टिकोण और मेदिनी ज्योतिष (Mundane Astrology) के सिद्धांतों के अनुसार, भारत में बड़े आंदोलनों और राजनीतिक उथल-पुथल का मूल्यांकन करते समय विद्वान ज्योतिषाचार्यों का मत कुछ इस प्रकार है। शनि, मंगल और राहु ये तीनों ग्रह हिंसक ...

वेब दुनिया 21 Jul 2026 4:03 pm

Aaj Ka Panchang 21 July 2026: आज मासिक दुर्गाष्टमी का पावन व्रत! जानें 21 जुलाई का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया का समय

आज मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। हिंदू धर्म में सावन माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इस दिन माँ दुर्गा को समर्पित मासिक दुर्गाष्टमी (Durga Ashtami) का व्रत और पूजन किया जाता है। आज मंगला गौरी व्रत का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे देवी भगवती की कृपा प्राप्त करने का यह उत्तम दिन है। यदि आप आज कोई नया कार्य, पूजा-अनुष्ठान या शुभ काम शुरू करने जा रहे हैं, तो दैनिक पंचांग (Daily Panchang) के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय जरूर नोट कर लें। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो आज बन रहे शुभ योगों में की गई पूजा-अर्चना मनोवांछित फल देने वाली मानी गई है।21 जुलाई 2026 का मुख्य पंचांग विवरणतिथि: सावन शुक्ल पक्ष अष्टमी (रात 09:12 बजे तक), तत्पश्चात नवमी तिथि।दिन: मंगलवारमास: सावन (श्रावण)पक्ष: शुक्ल पक्षनक्षत्र: स्वाति नक्षत्र (शाम 06:45 बजे तक), तत्पश्चात विशाखा नक्षत्र।योग: सिद्ध योग (दोपहर 01:20 बजे तक), उसके बाद साध्य योग।करण: विष्टि (भद्रा) दोपहर 10:15 बजे तक, तत्पश्चात बव करण।सूर्य और चंद्रोदय का समय:सूर्योदय: सुबह 05:36 बजेसूर्यास्त: शाम 07:18 बजेचंद्रोदय: दोपहर 12:45 बजेचंद्रास्त: मध्यरात्रि 11:58 बजेशुभ मुहूर्त और योग (Shubh Muhurat)आज के दिन धार्मिक कार्य, नए व्यवसाय की शुरुआत या मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक (किसी भी नए कार्य के लिए सबसे उत्तम समय)।अमृत काल: सुबह 08:15 बजे से सुबह 09:50 बजे तक।विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 बजे से दोपहर 03:40 बजे तक।गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:05 बजे से शाम 07:27 बजे तक।अशुभ समय और राहुकाल (Ashubh Muhurat & Rahukaal)ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल के दौरान किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए:राहुकाल: दोपहर 03:52 बजे से शाम 05:35 बजे तक (इस समय कोई भी शुभ काम न करें)।यमगंड: सुबह 09:01 बजे से सुबह 10:44 बजे तक।गुलिक काल: दोपहर 12:27 बजे से दोपहर 02:10 बजे तक।दिशाशूल: उत्तर दिशा (आज उत्तर दिशा की यात्रा करने से बचें, यदि आवश्यक हो तो गुड़ या सौंफ खाकर घर से निकलें)।आज का विशेष धार्मिक महत्व: मासिक दुर्गाष्टमीआज मासिक दुर्गाष्टमी के अवसर पर प्रातःकाल स्नान के बाद माँ दुर्गा को लाल चुनरी, फल, फूल और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जाप करने से जीवन के कष्ट और शत्रुओं का भय दूर होता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 9:49 am

सूर्य का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश: शनि के नक्षत्र में गोचर से इन 4 राशियों पर मंडरा सकता है संकट

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन के साथ-साथ उनका नक्षत्र परिवर्तन भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 20 जुलाई 2026 को ग्रहों के राजा सूर्य देव ने पुनर्वसु नक्षत्र से निकलकर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है। पुष्य नक्षत्र को सभी 27 ...

वेब दुनिया 20 Jul 2026 12:35 pm

Parvati Jayanti 2026: पार्वती जयंती, जानिए क्या है इस दिन का महत्व और कथा

Goddess Parvati Worship: पार्वती जयंती सनातन धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह दिन भगवान भोलेनाथ की अर्धांगिनी माता पार्वती शक्ति के जन्मोत्सव के रूप में पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 21 ...

वेब दुनिया 20 Jul 2026 12:03 pm

Pushya Nakshatra Sun Transit 2026: शनि के पुष्य नक्षत्र में आ रहे हैं सूर्य देव, इन 3 राशि वालों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानें किसे रहना होगा बेहद सावधान

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य का राशि और नक्षत्र परिवर्तन एक बेहद महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी जाती है, जिसका सीधा असर मानव जीवन और सभी 12 राशियों पर पड़ता है। जुलाई 2026 में सूर्य देव अपने धुर विरोधी और कर्मफल दाता शनि देव के प्रिय नक्षत्र 'पुष्य' में प्रवेश करने जा रहे हैं। चूंकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य और शनि के बीच घोर शत्रुता का संबंध है, इसलिए शनि के घर (नक्षत्र) में सूर्य का यह गोचर कुछ राशियों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाला है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो इस गोचर के प्रभाव स्वरूप 3 विशेष राशियों के जातकों को अपने करियर, स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।सूर्य-शनि की शत्रुता इन 3 राशियों पर पड़ेगी भारीपुष्य नक्षत्र में सूर्य के गोचर काल के दौरान इन तीन राशि वाले जातकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी जाती है:मेष राशि (Aries): इस गोचर के प्रभाव से मेष राशि के जातकों के कार्यक्षेत्र में अचानक दबाव बढ़ सकता है। उच्च अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेद होने की आशंका है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ेगा। वाणी पर नियंत्रण रखना इस समय बेहद जरूरी है।मिथुन राशि (Gemini): आर्थिक मोर्चे पर मिथुन राशि वालों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह जरूर लें, अन्यथा धन हानि के योग बन रहे हैं। परिवार में किसी बात को लेकर कलह की स्थिति बन सकती है।तुला राशि (Libra): तुला राशि के जातकों को इस अवधि में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से आंखों या पेट से जुड़ी परेशानियां घेर सकती हैं। व्यापार में भी पार्टनरशिप के कामों में पारदर्शिता बनाए रखें, नहीं तो धोखा मिल सकता है।गोचर के दौरान क्या सावधानियां बरतें?ज्योतिषविदों के अनुसार, जब सूर्य और शनि की ऊर्जा आपस में टकराती है, तो इंसान के भीतर अहंकार और आलस की प्रवृत्ति बढ़ती है। इससे बचने के लिए जातकों को रोजाना सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके साथ ही शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाने से इस गोचर के नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यस्थल पर किसी भी तरह की राजनीति या गॉसिप से दूर रहना ही आपके लिए समझदारी का सौदा होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 20 Jul 2026 9:43 am

आज का पंचांग: ताप्ती जयंती पर बन रहा है बेहद दुर्लभ संयोग, नोट कर लें आज 20 जुलाई का शुभ मुहूर्त, राहुकाल का समय और दिशाशूल की पूरी जानकारी

सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या नए काम की शुरुआत करने से पहले शुभ मुहूर्त और राहुकाल का विचार करना बेहद अनिवार्य माना जाता है। आज सोमवार, 20 जुलाई 2026 को श्रावण (सावन) मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है क्योंकि आज 'ताप्ती जयंती' का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो आज का पंचांग आपके पूरे दिन की कार्ययोजना को सफल बनाने में मददगार साबित हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं आज के सूर्योदय, चंद्रोदय, ग्रह नक्षत्रों की चाल और सबसे महत्वपूर्ण— राहुकाल के समय के बारे में ताकि आपकी राह में कोई बाधा न आए।ताप्ती जयंती आज: जानें तिथि और नक्षत्रों का दुर्लभ संयोगआज सावन महीने के सोमवार का अद्भुत संयोग है, जो देवों के देव महादेव की पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। पंचांग गणना के अनुसार:तिथि: आज शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है।नक्षत्र: आज उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो कार्यों में स्थिरता और सफलता देने वाला माना जाता है।योग: आज शिव योग और सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है, जो किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान या मंत्र दीक्षा के लिए बेहद फलदायी हैं।चंद्र राशि: चंद्रमा आज पूरे दिन और रात कन्या राशि में संचार करेंगे, जिससे कन्या राशि वाले जातकों के लिए मानसिक एकाग्रता बढ़ेगी।नोट कर लें आज के सबसे शुभ मुहूर्त का समययदि आप आज कोई नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं, सोने-चांदी की खरीदारी करना चाहते हैं या कोई बड़ा निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इन शुभ समयों का सदुपयोग कर सकते हैं:अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक। यह दिन का सबसे शक्तिशाली मुहूर्त माना जाता है, जिसमें किए गए कार्य निर्विघ्न पूरे होते हैं।अमृत काल: शाम को 06:14 बजे से रात 08:02 बजे तक रहेगा। इस दौरान की गई पूजा-अर्चना विशेष फल देती है।विजय मुहूर्त: दोपहर 02:42 बजे से दोपहर 03:36 बजे तक, जो कानूनी मामलों या प्रतिद्वंदियों पर विजय पाने के लिए उत्तम है।इस समय भूलकर भी न करें शुभ कार्य: आज का राहुकालज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अत्यंत अशुभ समय माना गया है। इस अवधि में शुरू किया गया कोई भी नया काम या यात्रा अक्सर असफल होती है या उसमें बड़े व्यवधान आते हैं।राहुकाल का समय: आज सुबह 07:30 बजे से सुबह 09:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। ध्यान रखें कि इस डेढ़ घंटे की अवधि में किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत न करें और न ही कोई बड़ा वित्तीय फैसला लें।आज का दिशाशूल: पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचेंसोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल होता है। इसका मतलब यह है कि आज के दिन पूर्व दिशा की ओर लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे यात्रा में कष्ट या धन हानि की आशंका रहती है। यदि पूर्व दिशा में यात्रा करना बेहद जरूरी हो, तो घर से निकलने से पहले थोड़ा सा शीशा (दर्पण) देखकर या दूध-घी खाकर निकलें, जिससे दिशाशूल का नकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है। आज सूर्योदय सुबह 05:36 बजे और सूर्यास्त शाम को 07:18 बजे होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 20 Jul 2026 9:42 am

घर में सुख-शांति और सौभाग्य लाती हैं वास्तु की ये 5 तस्वीरें, सही दिशा में लगाने से चमक जाएगी आपकी सोई हुई किस्मत

सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व माना गया है। कई बार लाख कोशिशों के बाद भी घर में बरकत नहीं होती, परिवार के सदस्यों के बीच अनबन रहती है और आर्थिक तंगी पीछा नहीं छोड़ती। वास्तु विज्ञान के अनुसार, इसका मुख्य कारण घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) हो सकती है। अपने आशियाने में सकारात्मकता का संचार करने और रूठे हुए भाग्य को जगाने का सबसे आसान तरीका है सही तस्वीरों का चयन। घर की दीवारों पर सही दिशा में लगाई गई कुछ खास तस्वीरें न सिर्फ घर की खूबसूरती बढ़ाती हैं, बल्कि आपके जीवन में सुख-समृद्धि और अपार सौभाग्य का द्वार भी खोल देती हैं।1. सात दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर: सफलता और तरक्की का प्रतीकवास्तु शास्त्र में सात सफेद दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर को बेहद चमत्कारी और प्रभावशाली माना गया है। यह तस्वीर जीवन में गतिशीलता, ऊर्जा, साहस और व्यापार में अभूतपूर्व प्रगति का प्रतीक है। यदि आप करियर में ग्रोथ चाहते हैं या आपका कोई बड़ा काम लंबे समय से अटका हुआ है, तो इस तस्वीर को अपने लिविंग रूम (Living Room) या ऑफिस की पूर्वी दीवार पर लगाएं। ध्यान रखें कि घोड़ों का मुंह घर के अंदर की तरफ होना चाहिए और घोड़े प्रसन्न मुद्रा में दौड़ते हुए दिखने चाहिए।2. हंसते हुए मुस्कुराते बच्चों की तस्वीर: घर में लाती है सकारात्मक ऊर्जाअक्सर काम के तनाव या पारिवारिक कलह के कारण घर का माहौल बोझिल हो जाता है। ऐसे में घर की उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर हंसते हुए और खेलते हुए छोटे बच्चों की सुंदर तस्वीर लगाना बेहद शुभ माना जाता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की मासूम मुस्कान से निकलने वाली पॉजिटिव वाइब्स घर के वातावरण से तनाव और अवसाद को तुरंत दूर कर देती हैं। इस तस्वीर को देखने मात्र से ही मन शांत होता है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और तालमेल बढ़ता है।3. कुबेर देव और उत्तर दिशा में हरियाली: कभी नहीं होगी धन की कमीयदि आप लगातार आर्थिक तंगी या भारी कर्ज के जाल से परेशान हैं, तो आपको अपने घर की उत्तर दिशा (North Direction) पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वास्तु में उत्तर दिशा को धन के देवता भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी का स्थान माना गया है। इस दिशा की दीवार पर लहराती हुई फसलों, घने हरे-भरे जंगलों या कुबेर देव की मनमोहक तस्वीर लगाने से धन आगमन के नए स्रोत खुलते हैं। यह जियो-ऑप्टिमाइजेशन और वास्तु नियमों के अनुसार घर के वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत करने का सबसे सटीक उपाय है।4. उगते हुए सूर्य की तस्वीर: समाज में मान-सम्मान और यश की प्राप्तियदि आप समाज में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और राजनीति या प्रशासनिक सेवाओं में सफलता पाना चाहते हैं, तो उगते हुए सूर्य (Rising Sun) की तस्वीर को अपने घर का हिस्सा जरूर बनाएं। इसे हमेशा घर की पूर्वी दिशा में लगाना चाहिए। उगता हुआ सूरज अंधकार को मिटाकर नई उम्मीदों का संचार करता है। इस तस्वीर को लगाने से घर के मुखिया का आत्मविश्वास बढ़ता है और बच्चों का मन पढ़ाई लिखाई में एकाग्रता के साथ लगने लगता है।5. राधा-कृष्ण की तस्वीर: वैवाहिक जीवन में घोलेगी प्रेम की मिठासअगर आपके बेडरूम (Bedroom) में अक्सर तनाव रहता है या पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव होता है, तो वास्तु शास्त्र आपको राधा-कृष्ण की प्रेममयी तस्वीर लगाने की सलाह देता है। इस दिव्य जोड़ी की तस्वीर को बेडरूम की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पश्चिमी दीवार पर इस तरह लगाएं कि सुबह उठते ही सबसे पहले इस पर नजर पड़े। यह उपाय दांपत्य जीवन में मधुरता लाता है और घर से हर प्रकार के घरेलू क्लेश को हमेशा के लिए समाप्त कर देता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 19 Jul 2026 12:46 pm

August 2026 Festivals: अगस्त 2026 माह के व्रत एवं त्योहारों और जयंतियों की लिस्ट

August 2026 Hindu Festivals List. अगस्त 2026 में सावन सोमवार व्रत, कामिका एकादशी, हरियाली तीज, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति, श्रावण पुत्रदा एकादशी, वरलक्ष्मी व्रत, रक्षाबंधन, श्रावणी पूर्णिमा, गायत्री जयंती, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और कजरी तीज जैसे अनेक ...

वेब दुनिया 18 Jul 2026 12:30 pm

Budh Mangal Dashank Yoga: बुध और मंगल के मिलन से बना चमत्कारी 'दशांक योग', 19 जुलाई तक इन 4 राशियों पर होगी पैसों की झमाझम बारिश

नई दिल्ली/लखनऊ। वैदिक और आधुनिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर के साथ-साथ उनके बीच बनने वाले विशेष कोणीय संबंध बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अंतरिक्ष में एक ऐसी ही दुर्लभ खगोलीय घटना घटी है, जिसने कई राशियों के भाग्य के द्वार खोल दिए हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, बुद्धि और संचार के कारक ग्रह बुध तथा साहस व पराक्रम के देवता मंगल के बीच ठीक 36 डिग्री का एक विशेष कोण बना है, जिससे एक बेहद शक्तिशाली और चमत्कारी 'दशांक योग' (Dashank Yoga 2026) का निर्माण हुआ है। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, यह अनूठा योग मुख्य रूप से 16 जुलाई की रात 8:27 बजे से शुरू होकर 19 जुलाई 2026 तक पूरी तरह प्रभावी रहेगा। इस दौरान बुध अपनी स्वराशि मिथुन में वक्री रहेंगे और मंगल वृषभ राशि में गोचर कर रहे होंगे।क्या होता है दशांक योग और इसका महत्व?आधुनिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब कोई दो ग्रह एक-दूसरे से लगभग 36 डिग्री की कोणीय दूरी पर स्थित होते हैं, तो 'दशांक योग' बनता है। इस योग को असाधारण प्रतिभा, नवाचार (Innovation), रचनात्मक सोच, त्वरित निर्णय क्षमता और जीवन में अचानक मिलने वाले सुनहरे अवसरों का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से जब यह बुद्धि के स्वामी बुध और अदम्य ऊर्जा के स्रोत मंगल के बीच बनता है, तो यह पेशेवर (Professional) लाइफ में जातकों की कार्य करने की गति और बौद्धिक क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। यह योग आईटी, मीडिया, बैंकिंग, शेयर बाजार, स्टार्टअप और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए सबसे ज्यादा फलदायी साबित होता है।इन 4 भाग्यशाली राशियों के करियर और धन में आएगा तगड़ा उछाल1. वृषभ राशि (Taurus): चूंकि मंगल देव आपकी ही राशि में मौजूद हैं, इसलिए इस योग का सर्वाधिक लाभ आपको मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा और आपके द्वारा लिए गए कड़े फैसले बिल्कुल सही साबित होंगे। व्यापारिक यात्राएं सफल होंगी, नए बड़े क्लाइंट्स जुड़ेंगे और पुराना निवेश आपको मोटा मुनाफा देना शुरू करेगा। नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति या कोई बड़ी अथॉरिटी मिल सकती है।उपाय: नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को गुड़ का भोग लगाएं।2. मिथुन राशि (Gemini): बुध आपकी ही राशि में वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं। इस दौरान समाज के प्रभावशाली लोगों से आपके संपर्क मजबूत होंगे, जो भविष्य में आपके करियर के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। बिजनेस में नए और बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने की पूरी संभावना है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा।उपाय: रोजाना सुबह भगवान सूर्य नारायण को जल अर्पित करें और तांबे की वस्तु का दान करें।3. सिंह राशि (Leo): सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। यदि आपका कोई धन लंबे समय से कहीं फंसा या रुका हुआ था, तो वह इस अवधि में आपको वापस मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों से आपकी योजनाओं को खूब सराहना मिलेगी और समाज में आपके मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में भारी वृद्धि होगी।4. कन्या राशि (Virgo): कन्या राशि के जातकों के लिए करियर में उन्नति के बेहतरीन रास्ते खुल रहे हैं। नौकरी में आपकी परफॉर्मेंस को देखते हुए आपको कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है। व्यापार में किया गया कोई भी नया प्रयोग या निवेश इस समय अत्यधिक सफल रहेगा।उपाय: बुधवार के दिन गाय को हरी मूंग खिलाएं या इसका दान करें और भगवान गणेश की आराधना करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 18 Jul 2026 8:44 am

Ravi Pradosh Vrat: 26 या 27 जुलाई कब है आषाढ़ शुक्ल प्रदोष? नोट कर लें महादेव की पूजा का सटीक समय और दुर्लभ संयोग

लखनऊ। हिंदू धर्म में महादेव की कृपा बरसाने वाला प्रदोष व्रत बेहद फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रयोदशी तिथि को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और इस समय मां पार्वती के साथ पूरे शिव परिवार की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। इस समय आषाढ़ मास का शुक्ल पक्ष चल रहा है और इस महीने का अंतिम प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ने के कारण 'रवि प्रदोष व्रत' के रूप में मनाया जाएगा। इस बार पूजा के समय सर्वार्थ सिद्धि योग, इंद्र योग और ज्येष्ठा नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ गया है।रवि प्रदोष व्रत 2026 की सही तारीख और पंचांग गणनावैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जुलाई 2026 को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 27 जुलाई को शाम 04 बजकर 14 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष व्रत में उदयातिथि की जगह शाम के समय यानी प्रदोष काल के मुहूर्त को प्रधानता दी जाती है, इसलिए आषाढ़ का यह अंतिम प्रदोष व्रत 26 जुलाई दिन रविवार को ही रखा जाएगा।महादेव की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का समयशिव साधना के लिए 26 जुलाई की शाम को 07 बजकर 16 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 21 मिनट तक का समय सबसे उत्तम है, जो कि प्रदोष काल की पूजा का मुख्य मुहूर्त है। इसके अतिरिक्त इस दिन सुबह 04 बजकर 16 मिनट से 04 बजकर 58 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। दोपहर में शुभ कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त 12:00 बजे से दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जबकि तंत्र व विशेष उपासना के लिए निशिता मुहूर्त देर रात 12:07 ए एम से 12:49 ए एम तक रहेगा।सर्वार्थ सिद्धि और इंद्र योग का महासंयोगइस रवि प्रदोष व्रत की सबसे खास बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो 26 जुलाई की सुबह 07 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 27 जुलाई की सुबह 05 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इस योग में की गई शिव पूजा हर मनोकामना को सिद्ध करने वाली मानी जाती है। इसके साथ ही इंद्र योग सूर्योदय से लेकर रात 10 बजकर 05 मिनट तक रहेगा। नक्षत्रों की बात करें तो ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 07 बजकर 34 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मूल नक्षत्र की शुरुआत होगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 9:45 pm

Gupt Navratri Upay: 23 जुलाई से पहले कर लें नारियल और हल्दी के ये 3 अचूक उपाय, हर बाधा होगी दूर!

लखनऊ। हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि का पावन पर्व आता है, जिसमें चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि गृहस्थों के बीच प्रसिद्ध है, वहीं आषाढ़ और माघ मास में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। तंत्र साधना और सिद्धियों के लिए बेहद खास मानी जाने वाली आषाढ़ गुप्त नवरात्रि इस समय चल रही है, जिसकी शुरुआत 15 जुलाई 2026 से हो चुकी है और इसका समापन 23 जुलाई 2026 को होगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ 10 महाविद्याओं की विशेष पूजा की जाती है। यदि आप भी अपने जीवन से मानसिक तनाव, नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करना चाहते हैं, तो इस गुप्त नवरात्रि में तीन सरल उपाय करके मां शक्ति का आशीर्वाद पा सकते हैं।प्रतिभा और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मातंगी माता का उपायधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के दौरान घर की पूर्व दिशा में मां मातंगी की तस्वीर लगाना बेहद शुभ होता है। मां मातंगी के हाथों में तोता सुशोभित रहता है। इस उपाय को करने से व्यक्ति के भीतर छिपी हुई प्रतिभा बाहर आती है, आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है और आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।नकारात्मक ऊर्जा और विरोधियों से रक्षा के लिए मां बगलामुखी की पूजामां बगलामुखी को संकटों से रक्षा करने वाली देवी माना गया है। उन्हें हल्दी अत्यंत प्रिय है, इसलिए गुप्त नवरात्रि में मां बगलामुखी को हल्दी अर्पित करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। यह उपाय आपको बुरी नजर और शत्रुओं के षड्यंत्रों से सुरक्षित रखने में मददगार माना जाता है।मानसिक शांति और बाधा मुक्ति के लिए मां काली को चढ़ाएं नारियलजीवन में नई शुरुआत और बड़े बदलावों की देवी मां काली की आराधना से मानसिक उलझनें समाप्त होती हैं। इस गुप्त नवरात्रि में मां काली को नारियल अर्पित करने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मानसिक बल मिलता है। यह उपाय जीवन में आ रही तमाम रुकावटों को दूर करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 9:44 pm

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

Gundicha Temple: भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय पड़ाव गुंडिचा मंदिर ही है। प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पुरी में श्री जगन्नाथ प्रभु की रथयात्रा निकाली जाती है। यह रथ मुख्य मंदिर से ...

वेब दुनिया 17 Jul 2026 4:20 pm

क्या उपनिषदों की अवधारणाएं क्वांटम विज्ञान से मेल खाती हैं? जानिए पूरी पड़ताल

उपनिषद कोई बंधी-बंधाई परिभाषा या अंतिम ज्ञान नहीं है, बल्कि यह 'न जानने' (अज्ञान) से 'जानने' (बोध) की ओर ले जाने वाली एक अनवरत यात्रा है। यह हमें उस परम सत्य की ओर अग्रसर करता है जहां विचार शांत हो जाते हैं और केवल अनुभव बचता है। आइए इस आलेख के ...

वेब दुनिया 17 Jul 2026 12:28 pm

Mangal Shani Labh Drishti Yog 2026: 19 जुलाई से मंगल-शनि मिलकर बनाएंगे 'लाभ दृष्टि योग', इन 4 राशियों की पलटेगी किस्मत, खुलेगा तरक्की का रास्ता

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के राशि और नक्षत्र परिवर्तन के साथ-साथ उनका दूसरे ग्रहों के साथ बनने वाला संयोग (Aspects) बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब दो बड़े और प्रभावशाली ग्रह एक-दूसरे के साथ विशेष कोणीय स्थिति में आते हैं, तो उसका सीधा असर सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन पर पड़ता है। ऐसा ही एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग 19 जुलाई 2026 को अंतरिक्ष में बनने जा रहा है।इस दिन ऊर्जा के कारक मंगल (Mars) और कर्मफल दाता शनि (Saturn) ग्रह रात के ठीक 11:30 बजे एक-दूसरे से 60 डिग्री के कोण (Sextile Position) पर स्थित होंगे। इन दोनों ग्रहों की इस विशेष खगोलीय स्थिति के कारण 'लाभ दृष्टि योग' (Labh Drishti Yog) का निर्माण होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद सकारात्मक, उन्नति देने वाला और सफलता का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना गया है। आइए जानते हैं कि इस शुभ योग का सबसे ज्यादा बंपर लाभ किन 4 भाग्यशाली राशियों को मिलने वाला है:मंगल और शनि की युति का प्रभाव (Astrological Significance)ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मंगल ग्रह को साहस, अदम्य ऊर्जा, पराक्रम और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, शनि देव अनुशासन, धैर्य, न्याय और कर्मों के अनुसार फल देने वाले देव हैं। जब इन दोनों विपरीत स्वभाव वाले लेकिन शक्तिशाली ग्रहों के बीच 'लाभ दृष्टि योग' बनता है, तो जातकों को सही दिशा में कड़ी मेहनत (शनि का प्रभाव) और उसे पूरा करने के लिए जरूरी ऊर्जा व साहस (मंगल का प्रभाव) दोनों एक साथ मिलते हैं। यही कारण है कि यह समय कई जातकों के जीवन में सुनहरे बदलाव लेकर आता है।इन 4 राशियों का शुरू होगा 'गोल्डन टाइम' (Lucky Zodiac Signs)पंचांग और ग्रह गणना के अनुसार, 19 जुलाई से बनने वाले इस राजयोग का सबसे शानदार और शुभ प्रभाव मुख्य रूप से इन 4 राशियों पर दिखाई देगा:1. मेष राशि (Aries): अटके कामों को मिलेगी रफ्तारमेष राशि के जातकों के लिए मंगल-शनि का यह संयोग जीवन में नई उम्मीदें और बेहतरीन संभावनाएं लेकर आ रहा है।करियर: यदि आपके कोई व्यावसायिक या व्यक्तिगत कार्य लंबे समय से अटके हुए थे, तो अब उनमें तेजी से गति आएगी।नौकरी: नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यस्थल (Workspace) पर वरिष्ठ अधिकारियों और बॉस का पूरा सहयोग मिलेगा। आपको कोई बड़ी और नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिससे आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा।2. वृश्चिक राशि (Scorpio): आर्थिक पक्ष होगा मजबूतवृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह लाभ दृष्टि योग मुख्य रूप से धन-धान्य और आर्थिक समृद्धि बढ़ाने वाला साबित होगा।धन लाभ: आपकी आय (Income) के नए स्रोत विकसित होने की प्रबल संभावना है। यदि आपका पैसा कहीं फंसा या रुका हुआ था, तो वह इस दौरान वापस मिल सकता है।तरक्की: कॉर्पोरेट सेक्टर या सरकारी नौकरी से जुड़े लोगों को पदोन्नति (Promotion) या वेतन वृद्धि (Appraisal) से जुड़ी कोई बहुत अच्छी खुशखबरी मिल सकती है। समाज और परिवार में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा।3. मकर राशि (Capricorn): व्यापार में बड़ी डील के संकेतमकर राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और बिजनेस दोनों ही मोर्चों पर बेहद अनुकूल और मुनाफा देने वाला रहने वाला है।बिजनेस: जो लोग खुद का व्यापार चला रहे हैं, उनके लंबित पड़े हुए व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे। आपको नए बड़े ग्राहकों (Clients) से जुड़ने का मौका मिलेगा और कोई बड़ी व्यावसायिक डील फाइनल हो सकती है।नौकरी: कामकाजी लोगों को कार्यक्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिलेगा, जिससे भविष्य में उन्नति के नए रास्ते खुलेंगे।4. कुंभ राशि (Aquarius): मानसिक तनाव से मिलेगी मुक्तिकुंभ राशि के जातकों के लिए मंगल और शनि की यह जुगलबंदी उनके कार्यक्षेत्र और व्यक्तिगत जीवन दोनों में सकारात्मक संतुलन लेकर आएगी।सहयोग: ऑफिस में सहकर्मियों (Colleagues) और सीनियर्स के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे। टीम वर्क की बदौलत आप अपने महत्वपूर्ण और कठिन प्रोजेक्ट्स को समय से पहले पूरा कर पाने में सफल रहेंगे।मानसिक शांति: पिछले कुछ समय से जीवन में चल रहा मानसिक तनाव और उथल-पुथल धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, जिससे आप राहत महसूस करेंगे।डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी पूरी तरह से पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं और पंचांग की गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी शत-प्रतिशत सटीकता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। किसी भी प्रकार के ज्योतिषीय उपाय या निर्णय से पहले संबंधित विषय के प्रमाणित विशेषज्ञ या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 9:50 am

Aniruddha Chaturthi 2026: अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत कब है, जानें महत्व, पूजन के मुहूर्त, विधि और मंत्र

Aniruddha Chaturthi Vrat: अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध को समर्पित एक महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना के साथ किया जाता है। भगवान श्रीगणेश, अनिरुद्ध, श्रीकृष्ण और भगवान ...

वेब दुनिया 16 Jul 2026 4:30 pm

विज्ञान भी है हैरान! जगन्नाथ पुरी मंदिर के वो 7 महा-रहस्य, जो रथयात्रा 2026 के बीच फिर बने कौतूहल

ओडिशा के तटीय शहर पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 2026 की शुरुआत हो चुकी है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस पावन पल के गवाह बनने पहुंचे हैं। सनातन आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक, पुरी का यह मुख्य मंदिर सिर्फ अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि उन अविश्वसनीय रहस्यों के लिए भी जाना जाता है जिसका जवाब आज तक आधुनिक विज्ञान और बड़े-बड़े शोधकर्ता भी नहीं ढूंढ पाए हैं। आइए जानते हैं जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े वो हैरान कर देने वाले चमत्कार, जो इंसानी सोच और प्रकृति के स्थापित नियमों को सीधी चुनौती देते हैं।हवा के विपरीत लहराता महाध्वज और 800 साल पुरानी कठिन परंपरासामान्य भौतिक विज्ञान का नियम कहता है कि कोई भी कपड़ा या झंडा उसी दिशा में लहराएगा जिस तरफ हवा बह रही हो। लेकिन जगन्नाथ मंदिर के 65 मीटर ऊंचे शिखर पर लगा पवित्र 'पतितपावन बाना' (महाध्वज) हमेशा हवा की दिशा के बिल्कुल विपरीत दिशा में लहराता है。 इस रहस्य को आज तक कोई मौसम वैज्ञानिक नहीं समझ पाया है। इसके अलावा, एक और कड़ा नियम यह है कि इस झंडे को हर रोज सूर्यास्त के समय बदला जाता है। मंदिर के पुजारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण, रस्सी या बेल्ट के नंगे पैर इतनी ऊंचाई पर चढ़कर इस परंपरा को निभाते हैं। मान्यता है कि यदि एक दिन भी यह झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर अगले 18 वर्षों के लिए बंद करना पड़ जाएगा।दोपहर में भी गायब हो जाती है मुख्य गुंबद की परछाईदुनिया की हर छोटी-बड़ी वस्तु, इमारत या जीव की रोशनी पड़ने पर एक परछाई (Shadow) जरूर बनती है। लेकिन कलिंग वास्तुकला के इस बेजोड़ और विशालकाय पत्थर के मंदिर का मुख्य गुंबद इस नियम से पूरी तरह परे है। साल का कोई भी महीना हो, दिन का कोई भी समय हो, सुबह हो या दोपहर, मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई जमीन पर कभी दिखाई नहीं देती。 वैज्ञानिक और आर्किटेक्ट इसके पीछे की ज्यामिति को समझने में आज भी नाकाम हैं कि आखिर रोशनी का यह परावर्तन किस प्रकार काम करता है।मुख्य सिंहद्वार के अंदर कदम रखते ही मौन हो जाता है समंदरपुरी एक तटीय क्षेत्र है और बंगाल की खाड़ी की विशाल लहरों का शोर मंदिर के काफी करीब तक गूंजता रहता है। जब आप मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार, जिसे 'सिंहद्वार' कहा जाता है, के बाहर खड़े होते हैं, तो आपको लहरों की तेज आवाज साफ सुनाई देती है。 लेकिन जैसे ही आप सिंहद्वार के अंदर अपना पहला कदम रखते हैं, समुद्र की वह भारी आवाज पूरी तरह से गायब (म्यूट) हो जाती है। मंदिर परिसर के भीतर आपको समुद्र की ध्वनि का लेशमात्र भी अहसास नहीं होगा, और जैसे ही आप एक कदम वापस बाहर की तरफ बढ़ाएंगे, वह आवाज तुरंत लौट आती है।मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ता कोई पक्षी या विमानआमतौर पर भारत के किसी भी बड़े मंदिर या ऊंची मीनारों के ऊपर पक्षियों का बैठना या उड़ना बेहद आम बात है। लेकिन जगन्नाथ पुरी मंदिर के आकाश को एक प्राकृतिक 'नो-फ्लाई ज़ोन' माना जाता है। इस मंदिर के ठीक ऊपर से कभी कोई पक्षी उड़ता हुआ नहीं दिखाई देता और न ही कोई विमान या हेलीकॉप्टर इसके ठीक ऊपर के हवाई क्षेत्र से गुजरता है। इस रहस्यमयी आभा मंडल को लेकर वैज्ञानिक भी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं।रसोई का वो अनोखा चमत्कार: सबसे ऊपर रखा मिट्टी का बर्तन पकता है पहलेभगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले 'महाप्रसाद' को बनाने की प्रक्रिया भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। मंदिर की विशाल रसोई में लकड़ी के चूल्हे पर एक के ऊपर एक कुल सात मिट्टी के बर्तन (clay pots) रखे जाते हैं। सामान्य विज्ञान के अनुसार, जो बर्तन आग के सबसे करीब (यानी सबसे नीचे) होगा, उसका खाना पहले पकना चाहिए। परंतु यहां उल्टा होता है; सबसे ऊपर रखे सातवें नंबर के बर्तन का भोजन सबसे पहले पकता है, और फिर क्रमशः नीचे वाले बर्तनों का खाना तैयार होता है। इसके साथ ही, यहां आने वाले लाखों भक्तों के लिए बनने वाला प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही कभी एक दाना बर्बाद होता है।सुदर्शन चक्र की जादुई बनावट और हवा का उल्टा रुखमंदिर के शीर्ष पर अष्टधातु से बना एक विशाल 'नील चक्र' (सुदर्शन चक्र) स्थापित है। इस चक्र की इंजीनियरिंग इतनी अद्भुत है कि आप पुरी शहर के किसी भी कोने से या मंदिर के किसी भी कोण से इसे देखें, यह हमेशा ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह सीधे आपकी तरफ ही देख रहा है। वहीं, तटीय क्षेत्रों में आमतौर पर हवा दिन में समुद्र से जमीन की ओर और रात में जमीन से समुद्र की ओर चलती है, लेकिन पुरी के इस भौगोलिक क्षेत्र में यह प्राकृतिक नियम भी उल्टा काम करता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jul 2026 1:13 pm

कब से शुरू हो रहा है आस्था का महापर्व सावन? नोट कर लें पहले दिन की तारीख और जलाभिषेक का सबसे शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और देवों के देव महादेव की आराधना के विशेष महीने 'सावन' (Shravan Month) को लेकर शिव भक्तों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। वर्ष 2026 में सावन के महीने की शुरुआत बेहद अद्भुत और शुभ संयोगों के साथ हो रही है। इस साल सावन का पहला दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जा रहा है। अगर आप भी इस पावन महीने में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने और कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए पहले दिन की सही तारीख और पूजा का सटीक समय जानना बेहद जरूरी है।किस तारीख से शुरू हो रहा है सावन 2026 का पावन महीना?वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन (श्रावण) का महीना 31 जुलाई 2026, दिन शुक्रवार से शुरू हो रहा है। पूर्णिमांत कैलेंडर का पालन करने वाले उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में शिव भक्त इसी दिन से सावन के पवित्र नियमों और व्रतों की शुरुआत करेंगे। सावन के पहले ही दिन से शिवालयों में 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजने लगेंगे। इस बार सावन का महीना बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इसमें कई दुर्लभ योग बन रहे हैं जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करेंगे।नोट कर लें पहले दिन जलाभिषेक का सबसे शुभ समय और मुहूर्तसावन के पहले दिन यानी 31 जुलाई को भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन सुबह 05:42 बजे से लेकर सुबह 08:24 बजे तक पूजा और जल अर्पण करने का सबसे पहला और श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद दोपहर में चर और लाभ के चौघड़िया मुहूर्त में भी शिव आराधना की जा सकती है। यदि आप शाम के समय पूजा करना चाहते हैं, तो प्रदोष काल में शाम 06:52 बजे से रात 08:58 बजे के बीच महादेव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।कैसे करें सावन के पहले दिन भोलेनाथ की पूजा?सावन के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े धारण करें। इसके बाद अपने नजदीकी शिव मंदिर में जाएं या घर के मंदिर में ही शिवलिंग के सामने व्रत का संकल्प लें। शिवजी को जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद और घी से पंचामृत स्नान कराएं। इसके बाद महादेव के सबसे प्रिय बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, श्वेत फूल और चंदन का तिलक लगाएं। पूजा के अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती उतारें। ध्यान रहे कि शिवलिंग पर कभी भी तुलसी की पत्ती, केतकी का फूल और सिंदूर न चढ़ाएं।लोकल ऑप्टिमाइजेशन: देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और प्रसिद्ध मंदिरों में तैयारियां तेजसावन की शुरुआत को देखते हुए वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, उज्जैन के महाकालेश्वर, झारखंड के बैद्यनाथ धाम और देवघर सहित देश भर के सभी प्रमुख शिवालयों में प्रशासन ने सुरक्षा और वीआईपी दर्शन के कड़े इंतजाम पूरे कर लिए हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों ने कांवड़ियों के मार्ग और पेयजल की व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया है ताकि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के रूटों पर श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन (GEO) के मुताबिक, इस बार सावन के दौरान डिजिटल दर्शन और लाइव आरती की खोज में भारी उछाल आने की उम्मीद है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jul 2026 1:10 pm

नवरात्रि और अंक ज्योतिष : क्या संख्या ‘9’ केवल एक अंक है या आत्मपरिवर्तन का सांस्कृतिक सूत्र? (भाग–2)

cultural significance of the number 9: नवरात्रि हमें यह सिखाती है कि शक्ति बाहर खोजने की वस्तु नहीं, भीतर जागृत करने की प्रक्रिया है। अंक ज्योतिष हमें यह संकेत देता है कि प्रत्येक व्यक्ति की अपनी विशिष्ट प्रवृत्तियां और संभावनाएं होती हैं। जब इन ...

वेब दुनिया 16 Jul 2026 12:05 pm

Shukra Rashi Parivartan 2026: सिंह राशि में शुक्र और केतु की अनोखी युति, आज से चमकेगा इन 3 राशियों का भाग्य; जानें केतु को शांत करने के अचूक उपाय

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य की राशि 'सिंह' में आज (16 जुलाई 2026) एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावकारी खगोलीय घटना होने जा रही है। धन, वैभव, ऐश्वर्य, सौंदर्य और प्रेम के कारक ग्रह शुक्र (Venus) आज सिंह राशि में गोचर करने जा रहे हैं। सिंह राशि में पहले से ही छाया ग्रह केतु (Ketu) विराजमान हैं, जो जातक को अध्यात्म और अकेलापन देते हैं।सूर्य की राशि में शुक्र और केतु का यह मिलन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद खास है। जब भी सुख-सुविधाओं के स्वामी शुक्र का संयोग रहस्यमयी केतु से होता है, तो देश-दुनिया समेत सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव आते हैं। हालांकि, आज होने वाले इस महागोचर से 3 विशेष राशियों की बंद किस्मत के ताले खुलने वाले हैं और उन्हें बम्पर धन लाभ होने जा रहा है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में:शुक्र-केतु की युति से इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत1. वृषभ राशि (Taurus) – आय के बनेंगे नए स्रोतवृषभ राशि के जातकों के लिए शुक्र और केतु का एक साथ आना जीवन में सकारात्मक बदलावों की झड़ी लगा देगा।आर्थिक लाभ: आपकी आमदनी (Income) के नए-नए साधन विकसित होंगे और धन आगमन के रास्ते में आ रही रुकावटें स्वतः दूर होती चली जाएंगी। व्यापार या नौकरी में किसी भी प्रकार की बड़ी परेशानी सामने नहीं आएगी।पारिवारिक जीवन: यह समय आपके लिए हर लिहाज से उत्तम है। आपकी पर्सनल लाइफ शानदार रहेगी और मुश्किल घड़ी में जीवनसाथी (Partner) का पूरा भावनात्मक व आर्थिक सहयोग प्राप्त होगा।2. तुला राशि (Libra) – अचानक होगा बड़ा धन लाभतुला राशि के जातकों के लिए सिंह राशि में बन रही यह युति बेहद कल्याणकारी और फलदायी साबित होने वाली है।आर्थिक लाभ: आपके लिए कार्यक्षेत्र में लाभ के कई शानदार मौके हाथ आएंगे। आपको किसी पुराने निवेश या पैतृक संपत्ति से अचानक धन लाभ (Sudden Wealth) हो सकता है। भविष्य के लिए की गई आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग पूरी तरह सफल रहेगी।मानसिक स्थिति: पिछले कुछ समय से चल रहा मानसिक तनाव खत्म होगा और आप खुद को काफी हल्का व सकारात्मक महसूस करेंगे। शादीशुदा जिंदगी में भी मधुरता और सुखद पल लौटेंगे।3. वृश्चिक राशि (Scorpio) – लव लाइफ और निवेश में सफलतावृश्चिक राशि के जातकों के लिए शुक्र और केतु का यह दुर्लभ संयोग आर्थिक और व्यक्तिगत दोनों मोर्चों पर बड़ी खुशखबरी लेकर आया है।आर्थिक लाभ: आपकी आर्थिक स्थिति (Financial Condition) में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा। आपकी मंथली इनकम में बढ़ोतरी होगी और यदि आप शेयर बाजार या कहीं और निवेश (Investment) करने की सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए बेहतरीन रिटर्न दिलाने वाला साबित होगा।लव लाइफ: आपकी प्रेम जिंदगी में चार चांद लगेंगे, पार्टनर के साथ आपसी समझ और भरोसा और ज्यादा मजबूत होगा। इस गोचर का आपकी राशि पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं दिख रहा है।कुंडली में केतु को मजबूत और खुश करने के 3 अचूक उपायकेतु को एक क्रूर और छाया ग्रह माना जाता है, जो कुंडली में कमजोर होने पर भ्रम, अकेलापन और चर्म रोग जैसी समस्याएं दे सकता है। यदि आपकी कुंडली में केतु अशुभ फल दे रहा है, तो आज इस गोचर के अवसर पर नीचे दिए गए उपाय करके आप उसे शांत और मजबूत कर सकते हैं:तिल का दान: केतु के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए गुरुवार या शनिवार के दिन काले और सफेद तिल का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।श्वान (कुत्ते) की सेवा: रोजाना या विशेषकर शनिवार को किसी काले या दोरंगे कुत्ते को सरसों का तेल लगी हुई रोटी खिलाएं। पशुओं की सेवा से केतु तुरंत शांत होते हैं।कंबल का दान: समाज के अत्यंत गरीब और जरूरतमंद लोगों को काले-सफेद रंग के कंबल या गर्म कपड़ों का दान करें। इससे केतु जनित दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में स्थिरता आती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jul 2026 8:13 am

सूर्य का कर्क राशि में गोचर: कर्क संक्रांति से देश, दुनिया और आपके जीवन पर क्या होगा असर?

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव का एक राशि से दूसरी राशि में जाना 'संक्रांति' कहलाता है। इस बार बृहस्पतिवार, 16 जुलाई 2026 को सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे 'कर्क संक्रांति' का महापर्व बेहद शुभ और दुर्लभ 'सिद्ध योग' में मनाया जाएगा। ...

वेब दुनिया 15 Jul 2026 4:13 pm

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की द्वितीय देवी माता तारा, जानिए पूजा विधि

Gupt Navratri Second Day Puja: गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन माता तारा देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां तारा अपने भक्तों को जीवन की कठिन परिस्थितियों से पार लगाने वाली शक्ति प्रदान करती हैं। माता तारा को ज्ञान, करुणा, ...

वेब दुनिया 15 Jul 2026 12:35 pm

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही रहस्यों और संघर्षों से भरा है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता और अटूट आस्था की जीती-जागती कहानी है। हजारों वर्षों से यह रथयात्रा जारी है। आइए इसके ...

वेब दुनिया 15 Jul 2026 12:23 pm

Bhadli Navami 2026: भड़ली नवमी व्रत 2026 कब है?

भड़ली नवमी व्रत 2026 कबBhadariya Navami 2026: भड़ली नवमी का व्रत वर्ष 2026 में 22 जुलाई, बुधवार को रखा जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत-पूजन करने से परिवार में सुख, शांति और ...

वेब दुनिया 15 Jul 2026 12:04 pm

देवशयनी एकादशी से 4 महीने के लिए योग निद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु! तो क्या बंद हो जाएंगे सारे व्रत, पूजा और उपवास

सनातन धर्म और हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वर्ष का सबसे पवित्र और नियमों से बंधा समय यानी 'चातुर्मास' (Chaturmas 2026) बेहद करीब आ गया है। देवशयनी एकादशी के पावन दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाएंगे। देवी-देवताओं के शयन काल में जाने की इस खबर के साथ ही आम जनमानस और श्रद्धालुओं के मन में एक बहुत बड़ा असमंजस और सवाल खड़ा हो गया है। लोग अक्सर सोचते हैं कि जब भगवान ही सो रहे हैं, तो क्या इस दौरान किए जाने वाले व्रत, दैनिक पूजा-पाठ और उपवास भी रोक दिए जाते हैं? यदि आप भी इसी कशमकश में हैं, तो शास्त्रों के सटीक नियम और विद्वानों की राय जानना आपके लिए बेहद जरूरी है ताकि अनजाने में आपसे कोई बड़ी भूल न हो जाए।मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, लेकिन साधना और भक्ति का खुलेगा महा-द्वारसबसे पहले इस भ्रम को दूर करना जरूरी है कि देवताओं के सोने का मतलब पूजा-पाठ का बंद होना बिल्कुल नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास के इन 4 महीनों (सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक) के दौरान केवल और केवल 'मांगलिक कार्यों' जैसे कि विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश और नई संपत्तियों की खरीदारी पर पूरी तरह से रोक (बैन) रहती है। इसके विपरीत, यह समय आध्यात्मिक उन्नति, आंतरिक शुद्धि, जप, तप और ध्यान के लिए पूरे साल में सबसे ज्यादा फलदायी माना गया है। इस दौरान किए गए शुभ कर्मों का फल आम दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।क्या चातुर्मास में व्रत और उपवास रख सकते हैं? जानिए शास्त्रों की आज्ञाव्रत और उपवास को लेकर शास्त्रों के नियम बेहद स्पष्ट और कड़े हैं। चातुर्मास के दौरान व्रत और उपवास रखने की न सिर्फ अनुमति है, बल्कि इसे सेहत और धर्म दोनों के लिहाज से अनिवार्य बताया गया है। इसी कालखंड के भीतर हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहार और व्रत जैसे कि सावन सोमवार, रक्षाबंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और शारदीय नवरात्रि आते हैं। इन सभी त्योहारों पर पूरे विधि-विधान से देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और उपवास रखे जाते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इन चार महीनों में वर्षा ऋतु के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इसलिए उपवास रखना शरीर को निरोगी बनाए रखने का एक बेहतरीन जरिया है।देश के प्रसिद्ध मंदिरों से लेकर हर घर में भक्ति का माहौलजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ और प्रयागराज के त्रिवेणी संगम सहित देश भर के तमाम छोटे-बड़े मठ-मंदिरों में चातुर्मास को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। स्थानीय पंडितों और कथावाचकों का कहना है कि इन चार महीनों में साधु-संत एक ही स्थान पर रुककर साधना करते हैं, जिसे 'चातुर्मास व्रत' कहा जाता है। आम गृहस्थों के लिए भी इन दिनों में सात्विक भोजन करना, भूमि पर शयन करना और तामसिक प्रवृत्तियों से दूर रहना आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। स्थानीय मंडली और समितियों द्वारा इस दौरान अखंड रामायण और भागवत कथा के पाठ आयोजित किए जाते हैं।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर छाया चातुर्मास का ये आध्यात्मिक विमर्शआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स के विश्लेषण के मुताबिक, 'Chaturmas Do's and Don'ts 2026' इस समय इंटरनेट और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर सबसे तेजी से सर्च किया जाने वाला धार्मिक विषय बन चुका है। गूगल और बिंग पर लोग लगातार 'चातुर्मास में क्या खाएं और क्या न खाएं' और 'देवशयनी एकादशी की सही तिथि' जैसे कीवर्ड्स खोज रहे हैं। एआई सर्च इंजन इस खबर को एक संपूर्ण लाइफस्टाइल और स्पिरिचुअल गाइड के रूप में प्रमोट कर रहे हैं। शास्त्रों का यह अमूल्य ज्ञान आज की भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे युवाओं को मानसिक तनाव से मुक्ति पाने और खुद को रीसेट करने का एक बेहतरीन मौका देता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:58 pm

3 साल तक बिना रुके चलती रही बप्पा की कलम! जानें महर्षि वेदव्यासजी की वो 'चतुर शर्त' जिसके आगे खुद गणेशजी भी रह गए थे हैरान

सनातन धर्म और भारतीय पौराणिक इतिहास के पन्नों में कई ऐसे अद्भुत और विस्मयकारी रहस्य छिपे हैं, जिन्हें जानकर आधुनिक विज्ञान और बुद्धिजीवी भी दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। एक ऐसा ही चमत्कारी और अलौकिक वाकया दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्य 'महाभारत' के लेखन से जुड़ा हुआ है। जब महर्षि वेदव्यासजी ने इस विशाल ग्रंथ की रचना की, तो इसे लिपिबद्ध करने यानी लिखने का महा-कठिन कार्य ज्ञान और बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश (बप्पा) को सौंपा गया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस लेखन कार्य को पूरा करने के लिए बप्पा की कलम पूरे 3 साल तक बिना एक सेकंड के लिए रुके लगातार चलती रही थी? इस अटूट लेखन के पीछे महर्षि वेदव्यासजी की एक ऐसी 'चतुर शर्त' थी, जिसने खुद बुद्धि के सागर भगवान गणेश को भी सोच में डाल दिया था।जब लेखन के लिए व्यासजी के सामने गणेशजी ने रखी एक कठिन चुनौतीपौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्माजी के कहने पर महर्षि वेदव्यास महाभारत की रचना करने बैठे, तो उन्हें एक ऐसे लेखक की तलाश थी जो उनके विचारों और श्लोकों की तीव्र गति को बिना किसी त्रुटि के कागजों पर उतार सके। इसके लिए उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की। गणेशजी लेखन के लिए तैयार तो हो गए, लेकिन उन्होंने व्यासजी के सामने अपनी एक कड़क चुनौती रख दी। गणेशजी ने कहा, 'मैं लिखना तभी शुरू करूंगा जब मेरी कलम एक पल के लिए भी न रुके। अगर आप श्लोक बोलते हुए कहीं भी रुके, तो मैं लिखना वहीं छोड़ दूंगा।' व्यासजी जानते थे कि इतने विशाल ग्रंथ को बिना रुके लगातार बोलना लगभग असंभव है, लेकिन उन्होंने मुस्कुराते हुए बप्पा की यह शर्त स्वीकार कर ली।महर्षि वेदव्यासजी का पलटवार: वो चतुर शर्त जिसने बप्पा की रफ्तार पर लगाया 'ब्रेक'भगवान गणेश की इस कठिन चुनौती का सामना करने के लिए महर्षि वेदव्यासजी ने अपनी बुद्धि का परिचय देते हुए एक 'चतुर प्रति-शर्त' रख दी। व्यासजी ने कहा, 'प्रभु! मुझे आपकी शर्त मंजूर है, लेकिन मेरी भी एक शर्त है। आप जो भी श्लोक लिखेंगे, उसे बिना समझे और उसका पूरा अर्थ जाने बिना अपनी पुस्तक में दर्ज नहीं करेंगे।' भगवान गणेश ने भी इस शर्त को सहर्ष स्वीकार कर लिया। बस यहीं से महर्षि वेदव्यासजी का मास्टरस्ट्रोक शुरू हुआ। जब भी व्यासजी को थोड़ा आराम करना होता या नए श्लोकों की रचना करनी होती, वे एक ऐसा अत्यंत कठिन और गूढ़ अर्थ वाला कूट श्लोक बोल देते थे, जिसे समझने और उसका सही अर्थ निकालने में खुद बुद्धिमान गणेशजी को कुछ पलों के लिए सोचना पड़ता था। बप्पा जब तक उस श्लोक का अर्थ समझते, तब तक व्यासजी अगले कई श्लोक तैयार कर लेते थे।3 साल का अखंड तप और बप्पा के एकदंत होने का अमर इतिहासजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो उत्तराखंड के बद्रीनाथ के पास स्थित 'व्यासा गुफा' और 'गणेश गुफा' आज भी इस ऐतिहासिक और पवित्र घटना की गवाह हैं। स्थानीय मान्यताओं और तीर्थयात्रियों के अनुसार, इसी अत्यंत ठंडे और दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में यह अखंड लेखन कार्य पूरे तीन वर्षों तक चलता रहा। इस दौरान एक समय ऐसा भी आया जब लिखते-लिखते गणेशजी की कलम अचानक टूट गई। लेकिन अपनी शर्त के पक्के बप्पा ने लिखना बंद नहीं किया; उन्होंने तुरंत अपना एक दांत (तस्क) तोड़ लिया और उसे स्याही में डुबोकर लिखना जारी रखा, जिसके बाद से वे पूरी दुनिया में 'एकदंत' के नाम से पूजनीय हुए। 3 साल की इस निरंतर तपस्या के बाद महाभारत जैसा महान ग्रंथ मानव जाति को मिल सका।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर क्यों छाया बप्पा का ये डिजिटल विमर्शआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया एनालिटिक्स के मुताबिक, 'Mahabharata Writing Hidden Secrets' और 'गणेशजी और वेदव्यास की कथा' जैसे विषय इंटरनेट और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले सांस्कृतिक टॉपिक्स में शामिल हैं। गूगल और बिंग जैसे आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर दुनिया भर के लोग लगातार 'महाभारत लिखने में कितना समय लगा' और 'गणेशजी का दांत क्यों टूटा था' सर्च कर रहे हैं। एआई मॉडल्स के अनुसार, यह पौराणिक कहानी आज की जनरेशन के लिए एक महान लाइफ लेसन है, जो सिखाती है कि कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न हो, एकाग्रता, बुद्धि कौशल और प्रतिबद्धता के बल पर हर असंभव कार्य को संभव बनाया जा सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:57 pm

लड़कियां भूलकर भी ऐसे 5 लड़कों को न दें अपना दिल! चाणक्य नीति में छिपा है वो कड़वा सच

आधुनिक दौर के रिश्तों में प्यार, विश्वास और धोखा अक्सर एक साथ देखने को मिलते हैं। आज के समय में यह पहचान पाना बेहद मुश्किल हो गया है कि सामने वाला व्यक्ति आपसे सच्चा प्यार करता है या सिर्फ अपनी जरूरतों के लिए आपका इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे भ्रम के समय में भारत के महान कूटनीतिज्ञ और मार्गदर्शक आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही सटीक बैठती हैं जितनी सदियों पहले थीं। चाणक्य नीति में पुरुषों के कुछ ऐसे स्वभाव और लक्षणों का जिक्र किया गया है, जिन्हें जानकर महिलाएं किसी बड़े धोखे से बच सकती हैं। आचार्य चाणक्य ने साफ तौर पर सचेत किया है कि लड़कियों को भूलकर भी 5 खास तरह के लड़कों के साथ प्रेम संबंध या शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग सिर्फ सामने वाले का यूज करना जानते हैं।मीठी छुरी चलाने वाले और अत्यधिक तारीफ करने वाले पुरुषआचार्य चाणक्य के अनुसार, जो पुरुष बात-बात पर बहुत ज्यादा मीठा बोलते हैं और बिना वजह अत्यधिक तारीफों के पुल बांधते हैं, उनसे हमेशा सावधान रहना चाहिए। ऐसे पुरुष अक्सर अपने मन में कपट छिपाए रखते हैं और सामने वाले का भरोसा जीतने के लिए मीठी बातों का जाल बुनते हैं। चाणक्य नीति कहती है कि सच्चा व्यक्ति हमेशा कड़वा सच बोलने से नहीं हिचकता, जबकि केवल स्वार्थ सिद्ध करने वाले लोग हर समय आपकी चापलूसी करेंगे। लड़कियां अक्सर ऐसी तारीफों के जाल में फंसकर अपना दिल दे बैठती हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि उनका सिर्फ इस्तेमाल किया गया है।स्वार्थी और हर बात में अपना फायदा खोजने वाले लड़केरिश्ते की बुनियाद आपसी समझ और त्याग पर टिकी होती है, लेकिन कुछ लड़के स्वभाव से अत्यधिक स्वार्थी होते हैं। चाणक्य नीति के मुताबिक, जो व्यक्ति हर छोटे-बड़े फैसले में सिर्फ अपना फायदा या आराम देखता है, वह कभी एक अच्छा जीवनसाथी नहीं बन सकता। ऐसे लड़के प्यार का नाटक सिर्फ तब तक करते हैं जब तक उन्हें आपसे कोई आर्थिक, मानसिक या शारीरिक लाभ मिल रहा हो। जैसे ही आपकी तरफ से उन्हें फायदा मिलना बंद होता है या आप किसी मुश्किल में होती हैं, ये अपना पल्ला झाड़कर दूर हो जाते हैं।चरित्रहीन और दूसरों की महिलाओं पर नजर रखने वालेआचार्य चाणक्य ने पुरुषों के चरित्र को परखने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। उनका मानना है कि जो पुरुष अपनी पार्टनर के प्रति वफादार नहीं है और जिसकी नजरें हर समय दूसरी महिलाओं को तलाशती रहती हैं, वह कभी किसी एक का होकर नहीं रह सकता। ऐसे लड़कों के लिए भावनाएं और कसमें सिर्फ एक खेल होती हैं। वे अपनी चंचलता और हवस को छुपाने के लिए प्यार का मुखौटा पहनते हैं। ऐसी मानसिकता वाले पुरुषों के साथ रहने से महिलाओं को जीवन भर मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ता है।आलसी और जिम्मेदारी से भागने वाले पुरुष हैं सबसे खतरनाकजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो आज के समाज में एक आत्मनिर्भर और जिम्मेदार साथी की तलाश हर महिला को होती है। दिल्ली, लखनऊ, पटना जैसे शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और आलस के बीच चाणक्य की यह नीति बेहद प्रासंगिक है। चाणक्य कहते हैं कि जो पुरुष कर्महीन है, जिसमें आगे बढ़ने की कोई इच्छा नहीं है और जो अपनी जिम्मेदारियों का बोझ दूसरों पर डालता है, उसके साथ कभी सुरक्षित भविष्य नहीं बनाया जा सकता। ऐसे लड़के शादी या प्यार के बाद आर्थिक रूप से महिला पर निर्भर हो जाते हैं और अपनी नाकामियों का ठीकरा भी साथी पर ही फोड़ते हैं।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर क्यों ट्रेंड हो रही है चाणक्य नीतिआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया के बदलते पैटर्न के मुताबिक, 'Relationship Warning Signs Chanakya Niti' इस समय इंटरनेट और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर युवाओं द्वारा सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला विषय बन गया है। गूगल और बिंग पर लोग लगातार 'सच्चे पार्टनर की पहचान कैसे करें' और 'चाणक्य नीति फॉर विमेन' सर्च कर रहे हैं। एआई मॉडल्स इस खबर को एक बेहतरीन लाइफ लेसन और सेफ्टी गाइड के रूप में पेश कर रहे हैं। आचार्य चाणक्य का यह ज्ञान आज की जनरेशन के लिए एक आई-ओपनर की तरह काम कर रहा है, जो भावनाओं में बहकर गलत फैसले लेने से रोकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:55 pm

सूर्य का कर्क राशि में गोचर, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का राशिफल

16 जुलाई 2026 को ग्रहों के राजा सूर्यदेव कर्क राशि में गोचर करने जा रहे हैं। कर्क जल तत्व की राशि है और इसके स्वामी चंद्रमा हैं, जो सूर्य के परम मित्र माने जाते हैं। वैसे तो इस राशि में सूर्यदेव थोड़े शांत पड़ जाते हैं, लेकिन खास बात यह है कि इस समय ...

वेब दुनिया 13 Jul 2026 12:10 pm

Chaturmas 2026: वर्ष 2026 में चातुर्मास कब से कब तक रहेगा?

Chaturmas 2026 in Hindi: इस बार 25 जुलाई 2026, शनिवार से चातुर्मास का प्रारंभ होगा। मान्यता के अनुसार, इसी दिन से भगवान विष्णु अगले 4 महीनों के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। यहीं से 'चातुर्मास' की शुरुआत होती है, जिसके दौरान सभी तरह ...

वेब दुनिया 13 Jul 2026 12:08 pm

Chanakya Niti: भाग्यशाली पुरुषों को मिलती हैं इन खास गुणों वाली पत्नियां, घर में ही मिल जाता है स्वर्ग का सुख

भारतीय इतिहास के महान अर्थशास्त्री, नीतिशास्त्र और रणनीतिकार आचार्य चाणक्य ने अपनी प्रसिद्ध रचना 'चाणक्य नीति' में मानव जीवन, समाज, और वैवाहिक रिश्तों को लेकर कई गूढ़ बातें बताई हैं। चाणक्य नीति के अनुसार, एक सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन के पीछे जीवनसंगिनी के गुणों का बहुत बड़ा हाथ होता है। आचार्य चाणक्य का मानना है कि दुनिया में कुछ पुरुष बेहद भाग्यशाली होते हैं, जिन्हें ऐसी पत्नियां मिलती हैं जो अपने सद्गुणों से पूरे परिवार का भाग्य बदल देती हैं। ऐसी स्त्रियों के साथ रहने वाले पुरुषों को इसी धरती पर स्वर्ग जैसा सुख और मानसिक शांति का अनुभव होता है।शांत स्वभाव और मीठी वाणी है सबसे बड़ा आभूषणआचार्य चाणक्य के मुताबिक, जिस स्त्री की वाणी मधुर होती है और जो शांत स्वभाव की होती है, वह अपने पूरे परिवार को एक सूत्र में बांधकर रखती है। मीठी भाषा बोलने वाली पत्नी विकट से विकट परिस्थितियों में भी घर के माहौल को तनावमुक्त बनाए रखती है। चाणक्य नीति कहती है कि ऐसी स्त्री का पति हमेशा मानसिक चिंताओं से दूर रहता है और कार्यक्षेत्र में दोगुनी तेजी से तरक्की करता है। जिस घर में कलह नहीं होती, वहां सुख-समृद्धि का वास स्वतः ही होने लगता है।संतोषी प्रवृत्ति और विपरीत हालातों में ढलने की क्षमताएक आदर्श जीवनसंगिनी का दूसरा सबसे बड़ा गुण उसका संतोषी होना है। चाणक्य जी का मानना है कि जो महिला कम संसाधनों या कम आय में भी पूरे धैर्य के साथ खुश रहती है और अपने पति पर अनुचित दबाव नहीं बनाती, वह परिवार के लिए किसी ढाल से कम नहीं होती। धन के उतार-चढ़ाव वाले समय में जो पत्नी कदम से कदम मिलाकर पति का संबल बनती है, वह पुरुष को कभी हारने नहीं देती। ऐसी समझदार पत्नी के कारण ही पुरुष समाज में मान-सम्मान और बड़ी सफलताएं हासिल कर पाता है।धार्मिक आचरण और संस्कारों को सहेजने वाली स्त्रीचाणक्य नीति के अनुसार, जो स्त्री धार्मिक विचारों वाली होती है और अपने बड़ों का सम्मान व छोटों से स्नेह करती है, वह घर को संस्कारवान बनाती है। ऐसी पत्नी न केवल अपनी संतानों को अच्छे संस्कार देती है, बल्कि घर की मर्यादा और प्रतिष्ठा को भी कभी आंच नहीं आने देती। पवित्र आचरण और मर्यादित जीवन जीने वाली जीवनसंगिनी जिस पुरुष के जीवन में आती है, उसका भाग्य अपने आप ही चमक उठता है। यही कारण है कि चाणक्य ने ऐसे गुणों से युक्त पत्नी वाले घर को साक्षात स्वर्ग की उपमा दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Jul 2026 1:52 pm

शनि की वक्री चाल से बदलेगी किस्मत, 4 राशियों को मिलेगा धन, सफलता और शनिदेव का आशीर्वाद

Rashifal: 27 जुलाई 2026 की रात से लेकर 11 दिसंबर 2026 की सुबह तक, शनिदेव पूरे 138 दिनों के लिए वक्री यानी उल्टी चाल चलने जा रहे हैं। चार भाग्यशाली राशियां ऐसी हैं, जिनके लिए शनिदेव का यह गोचर किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है।

वेब दुनिया 11 Jul 2026 12:21 pm

Puja Rule: कहीं आप भी तो नहीं फेंकते मंदिर के दीपक की बची हुई बाती कचरे में? जान लें शास्त्रों के ये 3 जरूरी नियम, वरना लग सकता है दोष

Deepak ki Bati ke Niyam: सनातन धर्म में पूजा के समय दीपक जलाने का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपक बुझने के बाद बची हुई बाती का क्या करना चाहिए? शास्त्रों के अनुसार, इसे साधारण कूड़ा समझकर डस्टबिन में फेंकना देव दोष और पितृ दोष का कारण बन सकता है. जानिए बची हुई पवित्र बाती के विसर्जन के 3 सही और धार्मिक नियम.सनातन धर्म में सुबह और शाम के समय घर के मंदिर में दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है. दीपक को प्रकाश, सकारात्मकता और साक्षात ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है. लेकिन अक्सर लोग दीपक के पूरा जलने के बाद बची हुई बाती को लेकर असमंजस में रहते हैं. कई लोग इसे साधारण कूड़ा समझकर डस्टबिन में फेंक देते हैं.अगर आप भी अनजाने में ऐसा कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए. शास्त्रों में पूजा से जुड़ी हर छोटी-से-छोटी वस्तु के विसर्जन के खास नियम बताए गए हैं. पवित्र बाती को सीधे कचरे में फेंकना न सिर्फ धार्मिक रूप से अनुचित है, बल्कि इससे घर में नकारात्मकता भी आ सकती है. आइए जानते हैं धर्म शास्त्रों के अनुसार बची हुई बाती का क्या करना चाहिए.बची हुई बाती को सीधे कचरे में क्यों न फेंकें? (Why Not to Throw in Trash)जब हम किसी बाती को घी या तेल में भिगोकर मंत्रों और शुद्ध भाव के साथ भगवान के सामने प्रज्वलित करते हैं, तो उसमें दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. वह बाती सीधे भगवान को समर्पित हो चुकी होती है. ऐसी पवित्र वस्तु को डस्टबिन जैसी गंदगी वाली जगह पर फेंकने या पैरों में आने देने से देव दोष और पितृ दोष लग सकता है. इससे घर की बरकत रुक सकती है और परिवार में मानसिक तनाव बढ़ सकता है.शास्त्रों के अनुसार बची बाती के 3 जरूरी नियम (3 Rules for Leftover Wicks)यदि आपके घर में भी रोजाना पूजा के बाद बाती बच जाती है, तो उसे इधर-उधर फेंकने के बजाय इन तीन पवित्र तरीकों से विसर्जित करें:गमले की मिट्टी में दबाएं: बची हुई बातियों को एक जगह एकत्र कर लें और घर के किसी पवित्र पौधे, जैसे कि तुलसी या अन्य फूलों के गमले की मिट्टी में गहराई में दबा दें. समय के साथ यह प्राकृतिक रूप से मिट्टी में ही विलीन हो जाएगी. ध्यान रहे कि उस स्थान पर किसी का पैर न पड़े.पवित्र जलाशय में प्रवाहित करें: यदि आपके घर के आस-पास कोई पवित्र नदी, तालाब या जलाशय है, तो हफ्ते या महीने भर की एकत्रित की गई बातियों को सम्मानपूर्वक वहां जल में प्रवाहित कर दें.अग्नि देव को समर्पित करें: यदि आप घर में नियमित रूप से कपूर जलाते हैं या छोटा हवन करते हैं, तो इन बची हुई बातियों को उस पावन अग्नि में डाल दें. चूंकि यह पहले से ही पूजा का हिस्सा रही हैं, इसलिए अग्नि में इनका भस्म होना सबसे शुद्ध और उत्तम माना जाता है.अखंड ज्योति की बाती का विशेष नियम (Akhand Jyoti Wick Rules)रोजाना की पूजा के अलावा, यदि आपने नवरात्रि, दिवाली या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान में अखंड दीपक जलाया था, तो उसकी बची हुई बाती के नियम और भी कड़े होते हैं. इस महा-बाती को कभी भी घर में लापरवाही से नहीं छोड़ना चाहिए. अनुष्ठान पूरी तरह समाप्त होने के बाद, इस पवित्र बाती को किसी बहती हुई साफ नदी या पवित्र जलाशय में विसर्जित करना ही सबसे श्रेष्ठ माना गया है.डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं. किसी भी विशेष उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें.

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 9:18 am

Aaj Ka Panchang 11 July 2026: शनिवार को 3 शुभ योगों का महासंयोग, जानें राहुकाल का समय और एकादशी पारण का शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने, यात्रा पर निकलने या धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले दैनिक पंचांग (Daily Panchang) देखना बेहद महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है। पंचांग के माध्यम से हमें दिन के सभी शुभ-अशुभ समय और ग्रहों की स्थिति की सटीक जानकारी मिलती है।दैनिक पंचांग के अनुसार, आज 11 जुलाई 2026, दिन शनिवार है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक आज आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत खास है, क्योंकि आज 'योगिनी एकादशी' (Yogini Ekadashi) व्रत का पारण (Vrat Parana) किया जा रहा है। साथ ही आज 'कृष्ण रामलक्ष्मण द्वादशी' भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज का दिन बेहद मंगलकारी रहने वाला है क्योंकि आज एक या दो नहीं, बल्कि एक साथ तीन सबसे शुभ योगों का महासंयोग बन रहा है। आज त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिसमें किए गए कार्य निश्चित ही सफलता प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं आज 11 जुलाई 2026 के सूर्योदय-सूर्यास्त के समय सहित दिनभर के सभी शुभ और अशुभ मुहूर्त की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।आज का पंचांग विवरण (Panchang Details: 11 July 2026)तिथि (Tithi): द्वादशी – 12 जुलाई को सुबह 02:04 AM तक (इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ)पक्ष (Paksha): कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha)वार (War): शनिवार (Saturday)नक्षत्र (Nakshatra): कृत्तिका नक्षत्र – सुबह 11:03 AM तक (इसके बाद रोहिणी नक्षत्र)योग (Yoga): गण्ड योग – 12 जुलाई को सुबह 12:05 AM तककरण (Karana): कौलव – दोपहर 03:45 PM तक, इसके बाद तैतिल करण – 12 जुलाई को सुबह 02:04 AM तकसूर्य और चंद्र गणना (Sun & Moon Timings)सूर्योदय का समय (Sunrise): 05:31 AMसूर्यास्त का समय (Sunset): 07:22 PMचंद्रोदय का समय (Moonrise): 12 जुलाई को सुबह 02:49 AMचंद्रास्त का समय (Moonset): दोपहर 04:21 PMहिंदू लूनर दिनांक व सम्वत (Hindu Calendar Samvat)शक सम्वत (Shaka Samvat): 1948 विश्वावसुविक्रम सम्वत (Vikram Samvat): 2083 कालयुक्तगुजराती सम्वत (Gujarati Samvat): 2082 पिङ्गलचन्द्रमास (Amanta/Purnimanta): आषाढ़ (पूर्णिमान्त) / ज्येष्ठ (अमान्त)आज का शुभ मुहूर्त (Aaj Ka Shubh Muhurat)आज के दिन त्रिपुष्कर, सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त भी उपलब्ध हैं, जो इस प्रकार हैं:अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurat): दोपहर 11:59 AM से दोपहर 12:54 PM तक (किसी भी नए कार्य को शुरू करने के लिए सर्वश्रेष्ठ समय)अमृत काल (Amrit Kaal): सुबह 08:52 AM से सुबह 10:19 AM तकविजय मुहूर्त (Vijay Muhurat): दोपहर 02:45 PM से दोपहर 03:40 PM तकगोधूलि मुहूर्त (Godhuli Muhurat): शाम 07:21 PM से शाम 07:41 PM तकब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat): सुबह 04:10 AM से सुबह 04:51 AM तकनिशिता मुहूर्त (Nishita Muhurat): 12 जुलाई की मध्यरात्रि 12:06 AM से 12:47 AM तकआज का अशुभ मुहूर्त और राहुकाल (Aaj Ka Ashubh Muhurat)शास्त्रों के अनुसार अशुभ समय या राहुकाल के दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य, मुंडन, गृह प्रवेश या नए व्यापार की शुरुआत करने से बचना चाहिए:राहुकाल (Rahukaal): सुबह 10:42 AM से दोपहर 12:26 PM तक (इस समय शुभ कार्यों को पूरी तरह टालें)यमगण्ड (Yamaganda): सुबह 08:59 AM से सुबह 10:43 AM तकगुलिक काल (Gulik Kaal): सुबह 05:31 AM से सुबह 07:15 AM तकदुर्मुहूर्त (Durmuhurirat): सुबह 06:26 AM से सुबह 07:22 AM तक, और दोबारा सुबह 08:17 AM से सुबह 09:12 AM तकशनिवार विशेष उपाय: आज शनिवार का दिन है और साथ ही तीन अत्यंत शुभ योग बने हुए हैं। ऐसे में राहुकाल को छोड़कर शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने और शनि चालीसा का पाठ करने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और कुंडली के साढ़ेसाती व ढैय्या के दोष दूर होते हैं।डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई पंचांग और पौराणिक जानकारियां पारंपरिक सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी भी विशेष पूजा, मुहूर्त या ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के योग्य ज्योतिषी या पंचांग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 8:59 am

शनि की उल्टी चाल: 138 दिनों तक मीन राशि में वक्री रहेंगे शनिदेव, जानें अपनी राशि का हाल

shani ki vakri chaal: न्याय के देवता शनि ग्रह वर्तमान में बृहस्पति की राशि मीन में विराजमान हैं, जहाँ वे 3 जून 2027 तक रहेंगे। इस बीच 27 जुलाई 2026 की रात से 11 दिसंबर 2026 की सुबह तक शनिदेव पूरे 138 दिनों के लिए वक्री (उल्टी चाल) होने जा रहे हैं। ...

वेब दुनिया 10 Jul 2026 4:14 pm

मंगल का चंद्रमा के नक्षत्र में प्रवेश, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, मंगलदेव बरसाएंगे कृपा

5 जुलाई 2026 को साहस, ऊर्जा और पराक्रम के कारक वृषभ राशि में गोचर कर रहे मंगल ग्रह ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया है, और वह 24 जुलाई 2026 तक इसी स्थिति में रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं। चंद्रमा के साथ मंगल का संयोग शुभ माना गया ...

वेब दुनिया 10 Jul 2026 12:05 pm

योगिनी एकादशी 2026: आज घर की इन 5 विशेष जगहों पर जरूर जलाएं दीपक; चमकेगा सौभाग्य, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) आज पूरे देश में बेहद श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। सनातन शास्त्रों में योगिनी एकादशी के व्रत को समस्त पापों का नाश करने वाला और अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन तिथि पर जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और अटूट बरकत आती है। शास्त्रों में तो यहाँ तक कहा गया है कि इस एक एकादशी का व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।इस पावन अवसर पर ज्योतिष और वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में 'दीपदान' का एक विशेष और चमत्कारी महत्व बताया गया है। यदि आप भी अपने घर में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और धन-धान्य का भंडार बनाए रखना चाहते हैं, तो आज की शाम (प्रदोष काल) में घर की पांच विशेष जगहों पर दीपक जलाना बिल्कुल न भूलें।घर के इन 5 पवित्र स्थानों पर आज जरूर करें दीपदान1. तुलसी का पौधा (सौभाग्य और सुख-शांति के लिए)हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को साक्षात माता लक्ष्मी का ही रूप माना गया है। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यधिक प्रिय हैं। योगिनी एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के पास गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जरूर जलाएं। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, गृह क्लेश दूर होते हैं और घर का सौभाग्य बढ़ता है।2. घर का मुख्य द्वार (नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने के लिए)घर का मुख्य प्रवेश द्वार (Main Gate) वह स्थान है जहाँ से सकारात्मक ऊर्जा और देवी-देवताओं का आगमन होता है। आज की शाम मुख्य द्वार के दाईं ओर घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इससे घर के भीतर किसी भी प्रकार की नकारात्मक या बुरी ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार के सदस्यों की उन्नति होती है।3. घर का पूजा मंदिर (अखंड आशीर्वाद के लिए)आज एकादशी के दिन अपने घर के मंदिर या पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति के सम्मुख एक अखंड ज्योति या शुद्ध घी का दीपक जलाएं। दीपक की लौ की दिशा उत्तर या पूर्व की तरफ होनी चाहिए। इससे देवी-देवता अत्यंत प्रसन्न होते हैं और घर का आध्यात्मिक माहौल शांत व ऊर्जावान बना रहता है।4. पीपल का पेड़ (शनि और पितृ दोष से मुक्ति के लिए)शास्त्रों के अनुसार, पीपल के वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है, विशेषकर एकादशी के दिन भगवान विष्णु पीपल में निवास करते हैं। आज शाम को किसी नजदीकी पीपल के पेड़ के पास जाकर सरसों के तेल या घी का दीपक जलाने से कुंडली के शनि दोष, साढ़ेसाती और पितृ दोष जैसी भारी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, जिससे आपके लंबे समय से रुके हुए कार्य अपने आप बनने लगते हैं।5. रसोई घर या किचन (धन-धान्य की प्रचुरता के लिए)वास्तु में रसोई घर को पूरे घर का सबसे पावन और ऊर्जा से भरपूर स्थान माना गया है, क्योंकि यहाँ माता अन्नपूर्णा का वास होता है। योगिनी एकादशी के दिन रसोई घर में (विशेषकर पीने के पानी के स्थान के पास) एक दीपक जरूर जलाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा और लक्ष्मी जी की कृपा से घर में कभी भी अन्न, धन और धान्य की कमी नहीं होती।दीपदान करते समय इन 2 बातों का रखें विशेष ध्यानशुद्धता का महत्व: दीपक जलाने के लिए हमेशा शुद्ध गाय के घी या साफ सरसों के तेल का ही उपयोग करें। खंडित (टूटे हुए) दीपक का इस्तेमाल भूलकर भी न करें।शांत और एकाग्र मन: दीपक प्रज्वलित करते समय अपने मन को पूरी तरह शांत और शुद्ध रखें। पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करते हुए श्री हरि का ध्यान करें।महा मुहूर्त और समय (Quick Info)आज 10 जुलाई को पूजा और दीपदान के लिए चौघड़िया मुहूर्त सुबह से ही बेहद अनुकूल बना हुआ है। शाम के समय सूर्यास्त के बाद का समय (प्रदोष काल) दीपदान के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Jul 2026 8:04 am

सूर्य का पुष्य नक्षत्र में गोचर: शनि के नक्षत्र में प्रवेश करते ही इन 5 राशियों की चमक सकती है किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा 'सूर्य' और न्याय के देवता 'शनि' के बीच शत्रुता का भाव माना जाता है। लेकिन जब भी सूर्य देव अपने पुत्र और शत्रु शनि के नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो ब्रह्मांड में एक विशेष ऊर्जा का संचार होता है। साल 2026 के जुलाई ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 4:24 pm

शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन: इन 5 राशियों को मिल सकता है अचानक धन लाभ और करियर में तरक्की

16 जुलाई को शुक्र देव मघा नक्षत्र से निकलकर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र में वे 29 जुलाई तक विराजमान रहेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को शुक्र उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में गोचर कर जाएंगे, जहां वे 11 अगस्त तक स्थिति रहेंगे। 16 जुलाई ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 12:10 pm

आज का अंक राशिफल: जन्मांक 8 के प्रभाव से चमकेगा इन लोगों का भाग्य, जानें अपनी जन्म तारीख से आज का सटीक भविष्यफल

आज 9 जुलाई 2026 का दिन करुणा, पेंडिंग कामों को पूरा करने और जीवन में नई सीख लेने का है। अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार, आज के दिन की तारीख, महीने और वर्ष का कुल अंक योग (भाग्यांक) 8 ($9+7+2+0+2+6 = 26 ightarrow 2+6 = 8$) है। अंक 8 शनि का प्रतीक है, जो हमें मेहनत, अनुशासन और न्याय के साथ आगे बढ़ने की राह दिखाता है। आज का दिन बिना किसी स्वार्थ के सेवा करने और मन से पुरानी कड़वाहट को छोड़ देने का है। आइए जानते हैं कि आज का दिन आपके जन्मांक (मूलांक) के हिसाब से कैसा रहने वाला है।जन्मांक 1: अधिकारियों से मिलेगी तारीफ(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19, 28 तारीख को हुआ है)आज आप अपने जरूरी कामों को पूरे भरोसे के साथ निपटा लेंगे। आपके काम करने के तरीके को देखकर कार्यस्थल पर बड़े अधिकारी भी आपकी तारीफ करेंगे। अपने बड़े लक्ष्यों पर नजर रखें और हर काम को जिम्मेदारी से पूरा करें। सेहत को अच्छा रखने के लिए काम के बीच-बीच में थोड़ा आराम जरूर करें और पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं। अपने परिवार के साथ प्यार से पेश आएं, आपकी छोटी सी भावनात्मक समझ उन्हें बहुत खुशी देगी। किसी भी काम में अपना अहंकार बिल्कुल न आने दें।आज का टिप: करुणा के साथ किया गया हर काम हमेशा सफल होता है।जन्मांक 2: सूझबूझ से सुलझेंगे बड़े मामले(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20, 29 तारीख को हुआ है)आज आपकी सूझबूझ से काम के दौरान आने वाली हर छोटी-बड़ी उलझन बहुत आसानी से सुलझ जाएगी। टीम के साथ मिलकर चलना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। अपनी मन की आवाज जरूर सुनें, लेकिन काम को पूरी तरह समझदारी से करें। मन को शांत रखने के लिए थोड़ा समय शांति या प्रकृति के बीच बिताएं, इससे तनाव कम होगा। परिवार के साथ दिल खोलकर बातें करें, आपकी एक प्यार भरी बात पुरानी दूरियों को पल भर में मिटा सकती है।आज का टिप: आपकी दया ही रिश्तों में मिठास पैदा करती है।जन्मांक 3: रचनात्मक कार्यों में मिलेगी बड़ी सफलता(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21, 30 तारीख को हुआ है)आज आपके रचनात्मक कामों की हर जगह बहुत सराहना होगी। अगर आप लिखने-पढ़ने, शिक्षा या मीडिया से जुड़े हैं, तो आज का दिन आपके लिए बहुत शुभ है। अपनी बातों को स्पष्ट रखें और योजना बनाकर आगे बढ़ें, सफलता जरूर मिलेगी। अपनी पाचन शक्ति का पूरा ध्यान रखें और समय पर भोजन करें। परिवार और दोस्तों के साथ बिताया गया समय आपके मन को बहुत खुश करेगा। अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं।आज का टिप: अपनी समझ को विनम्रता के साथ सबके साथ साझा करें।जन्मांक 4: अनुशासन से पूरे होंगे पेंडिंग काम(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22, 31 तारीख को हुआ है)आज आपका अनुशासन आपको अपने जरूरी कामों को समय पर पूरा करने में बहुत मदद करेगा। लंबी अवधि की योजनाएं बनाने और पैसे का सही हिसाब रखने के लिए आज का दिन बहुत बढ़िया है। आज की गई छोटी-छोटी मेहनत भविष्य में बड़ा फल देगी। शरीर का पोस्चर ठीक रखें और काम के दौरान थोड़ा स्ट्रेचिंग जरूर करें। घर में अपनों की बात को ध्यान से सुनें, इससे उन्हें सुरक्षा और प्यार का एहसास होगा।आज का टिप: निरंतर की गई मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है।जन्मांक 5: जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 5, 14, 23 तारीख को हुआ है)आज आपको जीवन में आगे बढ़ने के कई अच्छे मौके मिल सकते हैं, लेकिन कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले उसे एक बार ठीक से परख लें। लोगों से मिलने-जुलने के लिए आज का दिन बहुत अनुकूल है। खान-पान में लापरवाही न करें और अपने समय का पूरा ध्यान रखें, इससे आपकी कार्यक्षमता बढ़ेगी। किसी पुराने दोस्त से बात करके या मिलकर आपको बहुत खुशी मिलेगी। आज कोई भी काम जल्दबाजी या आवेश में आकर बिल्कुल न करें।आज का टिप: थोड़ा सब्र रखने से बेहतर मौके सामने आते हैं।जन्मांक 6: सहकर्मियों का मिलेगा भरपूर सहयोग(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 6, 15, 24 तारीख को हुआ है)आज आपके सहयोग करने वाले स्वभाव के कारण सहकर्मी और बड़े लोग आपकी बहुत तारीफ करेंगे। समाज सेवा, परामर्श, शिक्षा या कला से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन बहुत शुभ है। अपने मन की शांति के लिए संगीत सुनें या अपनों के साथ अच्छा समय बिताएं। परिवार के साथ ईमानदारी से बात करना आपके रिश्तों को और गहरा बनाएगा। दूसरों की देखभाल करते हुए खुद की जरूरतों को बिल्कुल न भूलें।आज का टिप: प्यार और समझ से ही रिश्ते फले-फूले हैं।जन्मांक 7: रिसर्च और प्लानिंग के लिए बेहतरीन दिन(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 7, 16, 25 तारीख को हुआ है)आज रिसर्च, योजना बनाने या विश्लेषण से जुड़े कामों में आपको बहुत सफलता मिलेगी। आपकी अंतर्दृष्टि आपको सही फैसले लेने में मदद करेगी। कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले खूब जानकारी इकट्ठी कर लें। मन की शांति के लिए आज थोड़ा समय अकेले बिताएं या ध्यान करें, इससे आपको नई ऊर्जा मिलेगी। घर के लोगों से दिल की बात खुलकर करें, इससे आपसी भरोसा बढ़ेगा। खुद को दुनिया से अलग बिल्कुल न करें।आज का टिप: मन की शांति ही बाहरी सफलता का आधार है।जन्मांक 8: आर्थिक और करियर के मामलों में रहेगा शानदार(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 8, 17, 26 तारीख को हुआ है)आज पैसे के हिसाब से और अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए आज का दिन बहुत शानदार है। आपका अनुशासन और काम के प्रति समर्पण देखकर सब बहुत खुश होंगे। बस ध्यान रखें कि सिर्फ पैसे और काम के पीछे न भागें, अपनी सेहत और परिवार को भी समय दें। नियमित व्यायाम और भरपूर नींद लेना न भूलें, इससे आप हमेशा ऊर्जावान महसूस करेंगे। काम की व्यस्तता में अपनों से दूर होने से बचें।आज का टिप: असली धन वही है जिसमें मन की शांति भी हो।जन्मांक 9: पुरानी नाराजगी दूर करने का है समय(यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 9, 18, 27 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके जन्मांक के बिल्कुल अनुकूल है, इसलिए अधूरे पड़े कामों को पूरा करने के लिए आज का समय बहुत अच्छा है। आपकी मेहनत देखकर दूसरे लोग भी आपसे बहुत प्रेरित होंगे। अपनी सेहत का ध्यान रखें और मन को हल्का रखने के लिए ध्यान या एक्सरसाइज करें। पुरानी नाराजगी को छोड़कर आगे बढ़ें और अपनों के साथ प्यार से पेश आएं। क्षमा करने का भाव आपके लिए खुशियां लेकर आएगा।आज का टिप: माफ कर देने से ही जीवन में सच्ची खुशी का रास्ता खुलता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:16 am

Yogini Ekadashi: योगिनी एकादशी कथा का आध्यात्मिक संदेश जानें

Yogini Ekadashi Vrat Katha Sandesh: योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक संदेश यही है कि इंसान से चाहे कितनी भी बड़ी भूल क्यों न हो गई हो, अगर वह सत्य का मार्ग अपना ले, अपनी गलतियों का अहसास कर ले और संयम व भक्ति/ व्रत का संकल्प ले, तो वह अपने जीवन के सबसे ...

वेब दुनिया 8 Jul 2026 4:05 pm

सावधान! कहीं आपके पूजा घर में तो नहीं रखी हैं ये चीजें? आज ही कर दें बाहर, वरना हो सकती है भारी भूल

घर का पूजा घर सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, जहाँ से हमें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। लेकिन अक्सर अनजाने में हम पूजा स्थल पर ऐसी चीजें रख देते हैं, जो वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार नकारात्मकता का कारण बनती हैं। क्या आपके मंदिर में माचिस की जली हुई तीलियां, नुकीली वस्तुएं या एक से अधिक शंख रखे हैं? अगर हाँ, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा घर में इन चीजों का होना देवी-देवताओं की कृपा को बाधित कर सकता है और सुख-समृद्धि में बाधा डाल सकता है।क्यों अशुभ मानी जाती हैं ये चीजें?वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में माचिस की जली हुई तीलियां रखना सबसे बड़ा दोष माना जाता है। जली हुई तीली नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है और यह पूजा की शुचिता को भंग करती है। इसी तरह, मंदिर में चाकू, कैंची या कोई भी नुकीली वस्तु रखना घर में कलह और मानसिक अशांति का कारक बनता है। वहीं, शंख को 'समुद्र मंथन' से प्राप्त रत्न माना गया है और इसे भगवान विष्णु का स्वरूप कहा जाता है। शास्त्र कहते हैं कि पूजा घर में केवल एक ही शंख रखना चाहिए; एक से अधिक शंख रखने से ऊर्जा का टकराव होता है और शुभ फलों की प्राप्ति में कमी आती है।कैसे रखें पूजा घर को ऊर्जावान?अपने पूजा घर को केवल ईश्वर की आराधना के लिए समर्पित रखें, न कि उसे स्टोर रूम की तरह उपयोग करें। मंदिर में केवल वही वस्तुएं होनी चाहिए जो पूजा के लिए अनिवार्य हैं, जैसे धूप-दीप, पवित्र जल, ताजे फूल और शुद्ध घी। जली हुई माचिस की तीलियों को तुरंत कचरे के डिब्बे में डाल देना चाहिए। यदि आपके मंदिर में अनावश्यक सामग्री जमा हो गई है, तो आज ही उसकी सफाई करें और गंगाजल छिड़क कर मंदिर को शुद्ध करें। एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित मंदिर ही घर में सकारात्मकता और शांति का संचार करता है।मंदिर से जुड़ी ये छोटी-छोटी बातें बदल देंगी किस्मतपूजा घर को हमेशा घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में ही होना चाहिए। इसके अलावा, खंडित मूर्तियां, पुराने फूल या सूखे हार भी मंदिर में नहीं छोड़ने चाहिए। यदि आपने मंदिर में एक से अधिक शंख रखे हैं, तो किसी मंदिर में दान कर दें या उसे घर के किसी अन्य पवित्र स्थान पर रखें, लेकिन पूजा के मुख्य स्थल पर नहीं। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से न केवल आपके घर का वास्तु दोष दूर होगा, बल्कि पूजा का पूर्ण फल भी प्राप्त होगा। सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए आज ही अपने पूजा घर की जांच करें और इन चीजों को हटाकर सकारात्मकता का स्वागत करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:43 pm

महाभारत का वो रहस्यमय पल: जब श्रीकृष्ण को तोड़नी पड़ी अपनी प्रतिज्ञा, युद्ध में शस्त्र उठाने को हो गए मजबूर

महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:41 pm

सावन 2026: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है सिर्फ 3 पत्तियों वाला बेलपत्र? शिव पुराण में छिपा है इसका गहरा रहस्य

पवित्र सावन का महीना शुरू हो चुका है और चारों ओर 'बम-बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिवलिंग पर हमेशा 'तीन पत्तियों वाला' बेलपत्र ही क्यों अर्पित किया जाता है? शिव पुराण के अनुसार, यह कोई साधारण पत्ती नहीं बल्कि साक्षात शिव स्वरूप है। सावन के इस पावन अवसर पर आइए जानते हैं कि इस तीन पत्तियों के मेल का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है।तीन पत्तियों के पीछे का दिव्य अर्थशिव पुराण में वर्णित है कि बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के त्रिशूल का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके अलावा, ये तीन पत्तियां त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करती हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से, ये तीन पत्तियां सत्व, रज और तम—तीनों गुणों को दर्शाती हैं, जो समस्त ब्रह्मांड का आधार हैं। शिवलिंग पर इसे चढ़ाते समय चिकना हिस्सा नीचे की ओर होना चाहिए, ताकि बेलपत्र की ऊर्जा सीधे भगवान शिव के चरणों में प्रवाहित हो सके। एक ही डंठल से जुड़ी ये तीन पत्तियां इस बात का प्रतीक हैं कि शिव ही संसार की एकता और शक्ति का केंद्र हैं।क्या कहता है शिव पुराण का नियम?शिव पुराण के अनुसार, बेलपत्र को भगवान शिव को अर्पित करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बेलपत्र में छेद नहीं होना चाहिए और न ही यह कटा-फटा होना चाहिए। मान्यता है कि अखंडित बेलपत्र ही शिव को प्रिय है। इसे चढ़ाते समय अनामिका, मध्यमा और अंगूठे का उपयोग करना चाहिए। यदि आपको नया बेलपत्र न मिल पाए, तो पुराने बेलपत्र को गंगाजल या स्वच्छ जल से धोकर दोबारा भी चढ़ाया जा सकता है, क्योंकि बेलपत्र कभी बासी नहीं होता। शिवलिंग पर इसे समर्पित करना मानसिक शांति और सुख-समृद्धि का द्वार खोलता है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सावन का महत्वसावन के महीने में मौसम में बदलाव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिक रूप से बेलपत्र की पत्तियों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। पुराने समय से ही शिव मंदिरों में बेलपत्र का चढ़ाना और उसका प्रसाद के रूप में ग्रहण करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है। सावन 2026 के इस दौरान, शिव भक्तों के लिए बेलपत्र का महत्व केवल आस्था ही नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ने का एक माध्यम भी है। तो इस बार शिव पूजा करते समय इन नियमों का पालन करें और महादेव की असीम कृपा प्राप्त करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:40 pm

Kalashtami 2026: कालाष्टमी का क्या है महत्व?

Kalashtami Significance: कालाष्टमी हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र तिथि है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, भगवान कालभैरव को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, जिसमें मार्गशीर्ष (अघहन) महीने की ...

वेब दुनिया 6 Jul 2026 12:10 pm

जब बुध चलेंगे उल्टी चाल: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, बरसेगा धन

Budh ki vakri chaal 2026: ब्रह्मांड के 'मैनेजर' और बुद्धि-संवाद के कारक बुध देव 7 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक अपनी ही राशि मिथुन में रहने वाले हैं। ट्विस्ट ये है कि 24 जुलाई तक बुध वक्री (उल्टी चाल) रहेंगे और 25 जुलाई तक अस्त भी। जब ग्रहों के राजकुमार ...

वेब दुनिया 6 Jul 2026 12:04 pm

गरुड़ पुराण: मृत्यु के बाद इन 3 तरह के लोगों के पास फटकने की भी नहीं होती यमदूतों की हिम्मत, खुद आते हैं भगवान के दिव्य पार्षद

सनातन धर्म में गरुड़ पुराण को एक बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया है, जिसमें जीवन, मृत्यु और उसके बाद की स्थितियों का बहुत गहराई से वर्णन मिलता है. आमतौर पर माना जाता है कि जब किसी इंसान का आखिरी समय आता है, तो यमराज के दूत यानी यमदूत उसकी आत्मा को लेने आते हैं. पापी लोगों के लिए यमदूतों का रूप बहुत भयानक और डरावना होता है, लेकिन इसी पुराण में कुछ बेहद गुप्त नियमों का भी जिक्र है. शास्त्रों के अनुसार, 3 तरह के भाग्यशाली लोग ऐसे होते हैं जिनके पास आने की हिम्मत खुद यमदूत भी नहीं कर पाते. आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार कौन से हैं वे खास लोग.1. प्रभु भक्ति में लीन रहने वाले सच्चे भक्तइस सूची में सबसे पहला स्थान उन लोगों का है जो अपना पूरा जीवन ईश्वर की आराधना और सिमरन में समर्पित कर देते हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति हर समय भगवान के नाम का जाप करता है, उसका अंत समय बेहद शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण होता है. ऐसे सात्विक लोगों के मन में मौत का कोई खौफ नहीं होता. जब उनकी अंतिम सांसें चल रही होती हैं, तो यमदूत उनके आसपास भी नहीं फटकते. प्रभु का नाम जपने वाले इन पुण्यात्माओं को लेने के लिए सीधे वैकुंठ धाम से भगवान विष्णु के अत्यंत सुंदर और शांत रूप वाले दिव्य पार्षद आते हैं और उन्हें आदरपूर्वक अपने विमान में ले जाते हैं.2. निस्वार्थ भाव से परोपकार और सेवा करने वालेदूसरा नियम उन लोगों पर लागू होता है जो हमेशा बेसहारा लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। शास्त्रों में भूखों को अन्न देना, बीमारों की सेवा करना और दूसरों के आंसू पोंछना सबसे बड़ा धर्म बताया गया है. जो इंसान बिना किसी स्वार्थ या लालच के समाज की भलाई में लगा रहता है, उसके खाते में अपार पुण्य जमा हो जाते हैं. यमराज के दूतों को केवल उन लोगों को बलपूर्वक ले जाने का अधिकार है जिन्होंने जीवन भर दूसरों को सताया हो. दूसरों का भला करने वाले परोपकारी लोगों का स्वागत करने के लिए खुद स्वर्ग के देवता आते हैं.3. सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले इंसानतीसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जो जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आ जाएं, कभी भी झूठ, फरेब और बेईमानी का रास्ता नहीं चुनते. गरुड़ पुराण कहता है कि सत्य बोलना और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाना भी एक कठिन तपस्या है. जो लोग अपने माता-पिता की सेवा करते हैं, किसी का दिल नहीं दुखाते और मर्यादा में रहते हैं, उन्हें यमराज का भय कभी नहीं सताता. यमदूत ऐसे साफ दिल वाले इंसानों को दूर से ही प्रणाम करते हैं. प्राण त्यागते समय इन्हें रत्ती भर भी कष्ट नहीं होता और इनकी आत्मा को सीधे मोक्ष या उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है.अच्छे कर्मों का मिलता है यह दिव्य फलगरुड़ पुराण की ये बातें हमें यह सिखाती हैं कि मृत्यु से डरने के बजाय हमें अपने वर्तमान के कर्मों को सुधारना चाहिए. जो इंसान लालच, नफरत और धोखेबाजी से दूर रहता है, उसका अंत समय अपने आप सुधर जाता है।. अगर हमारा मन साफ है और हम धर्म के मार्ग पर हैं, तो यमदूतों की यातनाएं नहीं बल्कि ईश्वर की परम शरण मिलती है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 5 Jul 2026 9:48 pm

वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर: 12 राशियों में किसे होगा फायदा, किसे रहना होगा सतर्क?

Budh ki vakri chaal 2026: 7 जुलाई से 5 अगस्त 2026 के बीच बुद्धि और संवाद के कारक बुध देव अपनी स्वराशि मिथुन में गोचर करने जा रहे हैं। इस दौरान वे 24 जुलाई तक वक्री (उल्टी चाल) और 25 जुलाई तक अस्त रहेंगे। ग्रहों की यह अनोखी स्थिति कुछ राशियों के लिए ...

वेब दुनिया 4 Jul 2026 4:31 pm

सूर्य का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें 5 आसान उपाय

6 जुलाई 2026 को सूर्य देव आर्द्रा नक्षत्र की अपनी यात्रा पूरी करके बृहस्पति ग्रह के पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। सूर्य का गुरु के नक्षत्र में आने का अर्थ है कि पद और सम्मान के साथ ही पुनः धनवान या समृद्ध होने का मार्ग खुलेगा। इस ...

वेब दुनिया 4 Jul 2026 12:17 pm

वास्तु टिप्स: बाथरूम में शीशे की सही दिशा बदल सकती है आपकी किस्मत

वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु की दिशा का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अक्सर लोग घर के मुख्य कमरों की सजावट और वास्तु का ध्यान तो रखते हैं, लेकिन बाथरूम जैसी महत्वपूर्ण जगह को अनदेखा कर देते हैं। वास्तु जानकारों का मानना है कि बाथरूम में शीशा लगाने की गलत दिशा न केवल आपके घर की सुख-समृद्धि में बाधा डालती है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण भी बनती है। बाथरूम में शीशा लगाते समय यदि कुछ छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नियमों का पालन किया जाए, तो नकारात्मक ऊर्जा को काफी हद तक कम किया जा सकता है।बाथरूम में शीशा लगाने की सही दिशाबाथरूम में नकारात्मक ऊर्जा का वास सबसे अधिक होता है, इसलिए यहां शीशा लगाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाथरूम का शीशा हमेशा उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की दीवार पर लगाना शुभ होता है। ये दोनों दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत मानी जाती हैं, जो सुबह उठकर शीशा देखने पर आपके भीतर ऊर्जा का संचार करती हैं। गलत दिशा में लगा शीशा घर की शांति और परिवार की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।इन चीजों का शीशे में दिखना है अशुभबाथरूम में शीशा लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें कमोड (Toilet Seat) की परछाईं बिल्कुल न दिखे। वास्तु के मुताबिक, कमोड में नकारात्मक ऊर्जा होती है। यदि शीशे में कमोड दिखाई देता है, तो वह उस नकारात्मक ऊर्जा को परावर्तित (Reflect) करके पूरे घर में फैलाता है। यदि संभव हो, तो कमोड को हमेशा उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थापित करना चाहिए। कमोड का शीशे में दिखना ऊर्जा के संतुलन को बिगाड़ देता है और घर में क्लेश व धन हानि का कारण बन सकता है।शीशे का आकार भी है महत्वपूर्णआजकल बाजार में गोल, अंडाकार (Oval) और अनोखे डिजाइन वाले शीशों का फैशन है, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम के लिए आयताकार (Rectangular) या चौकोर (Square) शीशा ही सबसे उपयुक्त होता है। गोल या अंडाकार शीशों में कोण (Corners) नहीं होते, जिससे सकारात्मक ऊर्जा स्थिर नहीं रह पाती। वहीं, आयताकार या चौकोर शीशे वास्तु के अनुकूल होते हैं और बाथरूम की ऊर्जा को एक दायरे में रखते हैं। इसलिए, शीशा खरीदते समय डिजाइन से ज्यादा उसके आकार और कोणों पर ध्यान देना चाहिए। इन सरल नियमों को अपनाकर आप अपने बाथरूम की नकारात्मकता को घर से बाहर रख सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 5:41 pm

कब है शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का पर्व?

Hindu Festival July 2026: धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतला माता की पूजा से घर में सुख-शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि का वास होता है। इस दिन स्वच्छता, सात्विकता और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर माता से परिवार की ...

वेब दुनिया 2 Jul 2026 12:10 pm

Horoscope Today 2 July 2026: शनि की चाल और 2 अशुभ योगों का महासंयोग, जानें अपनी राशि का हाल

ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से आज यानी 2 जुलाई 2026 का दिन बेहद हलचल भरा और महत्वपूर्ण रहने वाला है. द्रिक पंचांग के अनुसार, सौरमंडल में सबसे धीमी गति से चलने वाले न्याय के देवता शनि देव आज सुबह 08:22 बजे रेवती नक्षत्र के पहले चरण से निकलकर दूसरे चरण में प्रवेश कर चुके हैं. इसके साथ ही ग्रहों के राजा चंद्रमा भी दोपहर 01:31 बजे वृश्चिक राशि का सफर पूरा कर मकर राशि में गोचर करेंगे.ग्रहों के इस बड़े फेरबदल के बीच आज आकाश मंडल में 'वैधृति योग' और 'विषकुम्‍भ योग' नाम के दो बेहद अशुभ योग बन रहे हैं. ज्योतिषियों के मुताबिक, इन अशुभ योगों के प्रभाव के कारण आज के दिन किसी भी तरह के नए या मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए. आइए जानते हैं कि शनि की बदली चाल और इन अशुभ योगों के बीच मेष से लेकर मीन राशि तक के लोगों का भाग्य आज कैसा रहेगा.मेष राशि (Aries)आज आप अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर किसी बड़े और जरूरी काम को समय पर पूरा कर लेंगे. हालांकि, अपने गुप्त शत्रुओं और विरोधियों की हरकतों को हल्के में न लें; उन पर नज़र रखना ज़रूरी है। मीडिया और कंप्यूटर क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को आज बंपर मुनाफा हो सकता है. शाम का समय परिवार के साथ बीतेगा, जिससे रिश्तों में मिठास आएगी. सेहत के लिहाज से आज एलर्जी और खांसी-जुकाम आपको परेशान कर सकते हैं।अचूक उपाय: आज किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जरूरी दवाइयों का दान करें.वृष राशि (Taurus)वृष राशि के युवाओं के भीतर आज कुछ नया और बेहतर सीखने का जज्बा रहेगा, जो भविष्य में काम आएगा. आज आपको नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूरी बनाकर रखनी होगी, नहीं तो वे आपके काम बिगाड़ सकते हैं. प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े लोग सरकारी कागजी काम में पूरी सावधानी बरतें. घर-परिवार में आपसी प्यार और तालमेल शानदार रहेगा. महिलाओं को आज अपनी सेहत को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।.अचूक उपाय: मां भगवती की पूजा-अर्चना करें और मंदिर के बाहर गरीबों में खीर का प्रसाद बांटें.मिथुन राशि (Gemini)अगर आपका पैसा कहीं लंबे समय से फंसा या रुका हुआ है, तो आज उसकी वसूली के लिए प्रयास तेज कर दें, सफलता मिल सकती है. पुरानी बीती बातों को दिल से लगाकर बैठने के बजाय आगे बढ़ने में ही समझदारी है. मार्केटिंग से जुड़े लोगों के हाथ आज कोई बड़ा ऑर्डर या शुभ अवसर मिल सकता है. लव पार्टनर के साथ मुलाकात के खूबसूरत मौके मिलेंगे. डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित जांच करवाते रहें.अचूक उपाय: जरूरतमंद लोगों को फल, दूध या खाने-पीने की चीजें दान करें।कर्क राशि (Cancer)आज आपको समाज या कार्यक्षेत्र में किसी अनुभवी और जिम्मेदार व्यक्ति का बेहतरीन मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे आपकी राह आसान होगी. हालांकि, जोश में आकर फिजूलखर्ची न करें; अपनी आर्थिक स्थिति का बजट देखकर ही कदम बढ़ाएं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या तरक्की से जुड़ी कोई खुशखबरी मिल सकती है. परिवार के साथ हंसी-मजाक और मनोरंजन में बेहतरीन समय बिताया जाएगा। प्रदूषण और बदलते मौसम की वजह से एलर्जी की शिकायत हो सकती है.अचूक उपाय: सुबह-सुबह मंदिर जाकर देव दर्शन करें और किसी बुजुर्ग ब्राह्मण का आशीर्वाद लें.सिंह राशि (Leo)पिछले कई दिनों से चली आ रही किसी बड़ी समस्या का समाधान मिल जाने से आज मन को बड़ी शांति और संतोष मिलेगा. ध्यान रखें कि जोश में आकर किसी भी सरकारी नियम या कानून का उल्लंघन न करें, अन्यथा फंस सकते हैं. व्यापार विस्तार की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए आज का दिन काफी अनुकूल है. घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा. सेहत के मामले में आज एलर्जी या यूरिन इन्फेक्शन जैसी दिक्कतें घेर सकती हैं.अचूक उपाय: अनाथ या गरीब बच्चों को उनकी जरूरत की स्टेशनरी या खाने की चीजें गिफ्ट करें.कन्या राशि (Virgo)आज आपके सामने जो भी चुनौतियां आएं, उन्हें खुले दिल से स्वीकार करें, क्योंकि यही चुनौतियां आपके लिए तरक्की के नए रास्ते खोलेंगी. शेयर मार्केट, सट्टा या तेजी-मंदी के जोखिम भरे कामों में आज बड़ा पैसा लगाने से बचें. हार्डवेयर के कारोबारियों को आज बाजार में थोड़ी मंदी का सामना करना पड़ सकता है. प्रेम संबंधों में आज भावनात्मक नजदीकियाँ और भरोसा और भी मजबूत होंगे। कफ और खांसी-जुकाम से अपना बचाव रखें.अचूक उपाय: किसी सिद्ध मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार वहां सेवा या आराधना करें.तुला राशि (Libra)आर्थिक मोर्चे पर आज का दिन अच्छा है। कहीं सुरक्षित जगह पर निवेश करना भविष्य में बड़ा फायदा दे सकता है। हालांकि, पड़ोसियों के साथ किसी भी फालतू बात पर बहस या वाद-विवाद में न पड़ें. किसी रसूखदार या राजनीतिक व्यक्ति की मदद से आपका रुका हुआ बिजनेस का काम आज दोबारा शुरू हो जाएगा. पारिवारिक जीवन में सुकून रहेगा. सेहत का ध्यान रखें, कफ और नजला की परेशानी आज बढ़ सकती है.अचूक उपाय: शाम के समय पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाकर प्रणाम करें.वृश्चिक राशि (Scorpio)फाइनेंस और पैसों से जुड़े कामों में आपके द्वारा किए गए पुराने प्रयासों का आज बेहद सकारात्मक और उचित परिणाम मिलेगा. कोर्ट-कचहरी या जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों को आज के लिए टाल देना ही बेहतर रहेगा. इंश्योरेंस और कमिशन-बेसिस पर काम करने वाले जातकों को आज बड़ी सफलता मिल सकती है। शादीशुदा जिंदगी और लव लाइफ दोनों ही काफी रोमांटिक और मधुर रहेंगी. सड़क पर चलते समय आवारा जानवरों से दूरी बनाकर रखें.अचूक उपाय: अपनी बहन, बेटी या बुआ का सम्मान करें और उन्हें कोई सुंदर उपहार जरूर दें.धनु राशि (Sagittarius)मन में पिछले कुछ दिनों से चल रही किसी बड़ी दुविधा, उलझन और बेचैनी से आज आपको बड़ी राहत मिलने वाली है. नया वाहन या गाड़ी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आज उसे कुछ समय के लिए टाल दें. कार्यक्षेत्र में कर्मचारियों या कलीग्स के साथ चल रहा पुराना विवाद आज आपसी बातचीत से सुलझ जाएगा. घर के भीतर किसी बात को लेकर कहासुनी हो सकती है। शांत रहें।. मुँह में छाले या दांत दर्द की समस्या परेशान कर सकती है.अचूक उपाय: किसी गौशाला में या बाहर गाय को गुड़-रोटी खिलाएं और उनका आशीर्वाद लें.मकर राशि (Capricorn)आर्थिक और वित्तीय मामलों को लेकर आज आपके द्वारा लिया गया कोई बड़ा फैसला बेहद फायदेमंद साबित होने वाला है. विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे नंबर लाने के लिए अपनी पढ़ाई पर और अधिक फोकस करने की जरूरत है। कामकाजी महिलाएं आज अपने बिजनेस को लेकर कोई बड़ा और कड़ा फैसला ले सकती हैं. किसी पुराने जिगरी दोस्त से अचानक मुलाकात होने से पुरानी यादें ताजा होंगी. जोखिम वाले कामों से दूर रहें.अचूक उपाय: पानी की बर्बादी बिल्कुल न करें और अपने आसपास स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.कुंभ राशि (Aquarius)कुंभ राशि के युवा आज अपने करियर और भविष्य को लेकर काफी गंभीर और सजग नज़र आएंगे. जमीन-जायदाद या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में आज अचानक कोई रुकावट आ सकती है. रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी के काम से जुड़े लोगों के हाथ आज कोई बड़ी और मुनाफे वाली डील लग सकती है. प्रेमी-प्रेमिका को आज साथ में वक्त बिताने का अच्छा मौका मिलेगा. मानसिक तनाव को खुद पर हावी न होने दें.अचूक उपाय: किसी भी धार्मिक स्थल या एकांत जगह पर बैठकर कुछ देर आत्म-चिंतन करें, मानसिक शांति मिलेगी.मीन राशि (Pisces)आज का कुछ समय किसी आध्यात्मिक या धार्मिक स्थल पर बिताना आपको अद्भुत मानसिक सुकून और नई ऊर्जा देगा. ध्यान रखें कि बिना मांगे दूसरों के फालतू मामलों और पंचायतें न छेड़ें, बदनामी हो सकती है। बिजनेस में मुनाफा बढ़ाने के लिए अपनी पुरानी कार्यप्रणाली में थोड़ा आधुनिक बदलाव लाने की जरूरत है. परिवार के लोगों के बीच आपसी तालमेल और सामंजस्य बेहतरीन रहेगा। मौसम के मिजाज को देखते हुए खान-पान पर नियंत्रण रखें.अचूक उपाय: अपने इष्ट देव का ध्यान करें और किसी मंदिर में अपनी इच्छा अनुसार कुछ अन्न या धन का दान करें.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 8:49 am

शुक्र का सिंह राशि में गोचर, 4 जुलाई से इन 6 राशियों पर होगी धन और सुख की बरसात

4 जुलाई 2026 को शुक्र ग्रह सिंह राशि में गोचर करेंगे। जानें इस गोचर से किन 6 राशियों की किस्मत चमकेगी, किसे मिलेगा धन लाभ, करियर में सफलता और प्रेम जीवन में शुभ परिणाम।

वेब दुनिया 1 Jul 2026 4:25 pm

राहु-मंगल का अंगारक योग: धनिष्ठा नक्षत्र में 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, 3 रहें सावधान, जानें 5 उपाय

धनिष्ठा नक्षत्र में राहु और मंगल के संयोग से बने अंगारक योग का सभी 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? जानें किन 4 राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ, किन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क और कौन से 5 उपाय करेंगे अशुभ प्रभाव को कम।

वेब दुनिया 1 Jul 2026 12:11 pm

Devshayani Ekadashi 2026: वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी कब है?

Devshayani Ekadashi Date 2026: वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को मनाई जाएगी। इसी दिन से आषाढ़ शुक्ल एकादशी के अवसर पर भगवान भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ भी होता है। धार्मिक ...

वेब दुनिया 30 Jun 2026 4:15 pm

Ashadha Month 2026: आषाढ़ माह प्रारंभ 2026: जानिए इस माह का महत्व और क्या करें, क्या नहीं करें?

Ashadha Maas 2026: आषाढ़ महीने का धार्मिक और प्राकृतिक दोनों ही दृष्टिकोण से बहुत अधिक महत्व है। आषाढ़ माह 2026 की शुरुआत कब से हो रही है? जानें आषाढ़ मास का धार्मिक महत्व, क्या करें, क्या नहीं करें, पूजा के नियम, दान, व्रत और इस पवित्र महीने से ...

वेब दुनिया 29 Jun 2026 4:17 pm

अमरनाथ यात्रा 2026: निकलने से पहले जरूर कर लें ये 5 जरूरी तैयारियां, तभी रहेगा सफर सुरक्षित

Amarnath Yatra 2026: जय बाबा बर्फानी! अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत 3 जुलाई से होने जा रही है, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल 2026 से ही शुरू हो गए थे। यह यात्रा 28 अगस्त 2026 (रक्षाबंधन) तक चलेगी। समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित बाबा ...

वेब दुनिया 29 Jun 2026 4:14 pm

NCERT Book Controversy: एनसीईआरटी किताबों में मनुस्मृति के श्लोक पर क्यों छिड़ा है विवाद? जानें पूरा मामला

महान विचारक स्वामी विवेकानंद का मानना था कि किसी भी पुस्तक का मूल्यांकन उसके किसी एक पृष्ठ के आधार पर नहीं, बल्कि उसके समग्र अध्ययन से होना चाहिए। लेकिन भारतीय इतिहास और प्राचीन ग्रंथों के संदर्भ में अक्सर इसके विपरीत देखने को मिला है। पूर्वाग्रह से ग्रस्त कुछ वैचारिक दृष्टिकोणों ने हमेशा मनुस्मृति के केवल एक पक्ष को उभारकर उसका विश्लेषण किया। प्राचीन काल के कुछ श्लोकों और उनके चुनिंदा अर्थों को आधार बनाकर लंबे समय से इस ग्रंथ का विरोध होता रहा है, इसे जातिगत भेदभाव का मुख्य कारण भी बताया गया। लेकिन इस बार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी नई पाठ्यपुस्तकों में इसके एक दूसरे और सकारात्मक पक्ष को भी स्थान दिया है। पहली बार स्कूली पाठ्यक्रम में मनुस्मृति के एक श्लोक का उल्लेख किया जा रहा है, जिस पर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है।कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में हुआ शामिल, इतिहास के नए अध्याय में मिली जगहएनसीईआरटी ने अपने नए संशोधित और आधुनिक पाठ्यक्रम के तहत कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की इतिहास की पुस्तक में मनुस्मृति से जुड़े संदर्भ को शामिल किया है। इसे इतिहास के एक नए अध्याय, जिसका शीर्षक 'State and Society up to 1000 CE' (1000 ईस्वी तक राज्य और समाज) है, के अंतर्गत जोड़ा गया है। इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्राचीन भारतीय समाज की संरचना, शासन व्यवस्था और उस दौर के सामाजिक ताने-बाने से परिचित कराना है। हालांकि, सरकार और शिक्षा बोर्ड के इस फैसले पर भी कुछ संगठन और आलोचक लगातार प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।महिला सम्मान से जुड़ा है श्लोक, 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते' का पढ़ेंगे पाठ9वीं कक्षा के छात्र अब इतिहास की इस नई किताब में महिलाओं के सम्मान को दर्शाने वाले मनुस्मृति के अध्याय 3 के 56वें श्लोक का अध्ययन करेंगे। इस प्रसिद्ध श्लोक का मूल भाव है-यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः अर्थात् जहाँ महिलाओं का आदर और सत्कार होता है, वहाँ देवताओं का निवास होता है। पुस्तक में इस श्लोक के माध्यम से छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि प्राचीन भारतीय और वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति कितनी उच्च, गरिमापूर्ण और सम्मानित थी। उस दौर में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सार्वजनिक सभाओं, राजकाज और बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में समान रूप से भाग लेती थीं। उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार था और कई ऐतिहासिक संदर्भों में वे अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने (स्वयंवर) के लिए भी स्वतंत्र थीं।किताब में निष्पक्षता का दावा: सिर्फ तारीफ नहीं, स्थिति में गिरावट का भी है जिक्रइस नए बदलाव पर सवाल उठाने वालों के विपरीत एनसीईआरटी का कहना है कि पाठ्यक्रम को पूरी तरह निष्पक्ष और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुरूप तैयार किया गया है। किताब में केवल एकतरफा तारीफ नहीं है, बल्कि उसके आगे का दूसरा पहलू भी ईमानदारी से दर्ज है। अध्याय में साफ लिखा है कि समय बीतने और राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के साथ, बाद के मध्यकाल में महिलाओं की स्थिति में काफी उतार-चढ़ाव आया और उनकी सामाजिक स्थिति में गिरावट भी दर्ज की गई। इसके अलावा, इस चैप्टर में केवल महिलाओं की दशा ही नहीं, बल्कि प्राचीन 'वर्ण' और 'जाति' व्यवस्था के क्रमिक विकास पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि शुरुआती वैदिक समाज में किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान केवल उसके जन्म से तय नहीं होती थी, बल्कि उसके कर्म और योग्यता पर निर्भर करती थी।इतिहास के पन्नों में मनुस्मृति दहन और आज के विरोध की असल वजहएनसीईआरटी की किताब में मनुस्मृति के महज एक श्लोक का जिक्र होने के बावजूद कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठन इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। वे साल 1927 के उस ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला दे रहे हैं जब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सामाजिक असमानता के विरोध में मनुस्मृति का दहन किया था। आलोचकों का तर्क है कि इस ग्रंथ को स्कूली शिक्षा का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, दूसरी ओर इतिहासकारों का एक वर्ग यह भी मानता है कि मनुस्मृति कभी भी भारत का कोई आधिकारिक कानून लागू करने वाली किताब नहीं रही, बल्कि यह एक सामाजिक आचार संहिता थी। यह सच है कि इसमें कुछ बातें ऐसी हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों और आज के हिसाब से पूरी तरह अप्रासंगिक और आपत्तिजनक हैं, लेकिन शिक्षा बोर्ड ने इसमें से केवल नैतिक मूल्य और सकारात्मक श्लोक को ही चुना है।'विष से भी अमृत निकाल लेना चाहिए'— चाणक्य की नीति पर चला शिक्षा बोर्डमहान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कहा था कि 'यदि विष में से भी अमृत प्राप्त हो, तो उसे निकाल लेना चाहिए और यदि गंदगी में भी सोना गिरा हो, तो उसे उठा लेना चाहिए।' एनसीईआरटी ने भी प्राचीन ज्ञान और ग्रंथों में से केवल उसी हिस्से को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किया है जो समाज में नैतिक मूल्यों, महिलाओं के प्रति सम्मान और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। लेकिन दुर्भाग्यवश, वैचारिक मतभेदों और नकारात्मक दृष्टिकोण के चलते इस शैक्षणिक बदलाव को सहजता से स्वीकार करने में बाधाएं आ रही हैं। बहरहाल, यह नया पाठ्यक्रम छात्रों को भारत के प्राचीन समाज को एक नए और व्यापक नजरिए से देखने का अवसर जरूर प्रदान करेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 9:03 am

Numerology July 2026: जुलाई में चमकेगी इन मूलांक वालों की किस्मत, नौकरी में प्रमोशन और बिजनेस में तगड़े मुनाफे के योग

अंग्रेजी कैलेंडर का सातवां महीना यानी जुलाई 2026 कई लोगों के जीवन में खुशियों की नई सौगात लेकर आने वाला है। अंक ज्योतिष के अनुसार, यह महीना कई जातकों के लिए बेहद भाग्यशाली रहने वाला है। सिंगल लोगों के जीवन में किसी खास की एंट्री हो सकती है, तो वहीं लंबे समय से नौकरी में प्रमोशन का इंतजार कर रहे कामकाजी लोगों का इंतजार खत्म हो सकता है। व्यापार में भारी मुनाफे और आमदनी के नए स्रोत बढ़ने के भी मजबूत योग बन रहे हैं।जुलाई महीने का अपना सटीक भविष्यफल जानने के लिए आपको अपनी जन्मतिथि (Birthdate) को जोड़कर अपना मूलांक निकालना होगा। उदाहरण के लिए, यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो अंकों को जोड़ने पर आपका मूलांक 1 (जैसे: 2+8=10, 1+0=1) होगा। आइए जानते हैं मूलांक 1 से लेकर 9 तक के लिए जुलाई 2026 का पूरा अंक ज्योतिषफल।मूलांक 1 (यदि जन्म 1, 10, 19, 28 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: जुलाई का महीना आपके लिए करियर के नए और सुनहरे अवसर लेकर आ सकता है। अगर आप नौकरी बदलने या प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं, तो महीने के उत्तरार्ध में कोई सकारात्मक खबर मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपके नेतृत्व और सटीक निर्णय लेने की क्षमता की तारीफ होगी, लेकिन किसी भी बड़े फैसले को जल्दबाजी में लेने से बचें।व्यापार: कारोबारियों के लिए नए क्लाइंट्स और बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने की प्रबल संभावना है। पुराने व्यापारिक संपर्कों से भी बड़ा मुनाफा हो सकता है। जो लोग पार्टनरशिप में बिजनेस कर रहे हैं, उन्हें कागजी कार्रवाई और लिखित समझौतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।आर्थिक स्थिति: इस महीने आय के स्रोत काफी मजबूत रहेंगे, लेकिन इसके साथ ही खर्चों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यदि आप किसी नई जगह निवेश करने की सोच रहे हैं, तो बाजार की पूरी जानकारी जरूर जुटा लें। फालतू खर्चों पर लगाम लगाने से आपकी बचत सुरक्षित रहेगी।प्रेम और वैवाहिक जीवन: लव लाइफ में आपसी विश्वास और तालमेल बढ़ेंगे। यदि पार्टनर के साथ किसी बात को लेकर अनबन चल रही थी, तो बातचीत के जरिए उसका समाधान निकल जाएगा। शादीशुदा जातकों को अपने जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।पारिवारिक जीवन: परिवार में किसी मांगलिक या शुभ कार्य का आयोजन हो सकता है। माता-पिता का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे घर का माहौल शांतिपूर्ण और सुखद बना रहेगा।स्वास्थ्य: अधिक भागदौड़ के कारण थकान, सिरदर्द या अनिद्रा (नींद की कमी) जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं। शरीर को पर्याप्त आराम दें और अपनी दिनचर्या अनुशासित रखें।शुभ रंग व दिन: सुनहरा और नारंगी रंग आपके लिए भाग्यशाली रहेगा। शुभ दिनों में रविवार और सोमवार शामिल हैं।मूलांक 2 (यदि जन्म 2, 11, 20, 29 तारीख को हुआ हो)करियर और नौकरी: यह महीना आपको कार्यस्थल पर धैर्य और समझदारी के साथ आगे बढ़ने की सलाह देता है। ऑफिस में सहकर्मियों के साथ टीमवर्क में काम करने से आपको बेहतरीन नतीजे मिलेंगे। सीनियर्स और बॉस के साथ अपने संबंध मधुर बनाए रखें, इससे आपको भविष्य में लाभ होगा।व्यापार: यदि आप किसी नए बिजनेस को शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो जमीन स्तर पर बाजार का अच्छी तरह अध्ययन कर लें। पुराने और भरोसेमंद ग्राहकों के सहयोग से आपका मौजूदा कारोबार सुचारू रूप से चलता रहेगा।आर्थिक स्थिति: जुलाई के महीने में आपकी आमदनी सामान्य बनी रहेगी, लेकिन घरेलू सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है। किसी करीबी मित्र या रिश्तेदार को बड़ा कर्ज या पैसा उधार देने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें।प्रेम और वैवाहिक जीवन: भावनात्मक दृष्टिकोण से यह समय काफी अच्छा रहने वाला है। रिश्तों में मजबूती आएगी और आपसी भरोसा बढ़ेगा। अविवाहित जातकों के जीवन में किसी नए रिश्ते की शुरुआत हो सकती है।पारिवारिक जीवन: घर-परिवार के किसी बड़े सदस्य या काम की जिम्मेदारी अचानक आपके कंधों पर आ सकती है। शांति और ठंडे दिमाग से काम लेने पर आप सभी पारिवारिक जिम्मेदारियों को आसानी से निभा सकेंगे।स्वास्थ्य: मानसिक तनाव और बेवजह की चिंता से बचने की कोशिश करें। मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान (Meditation) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।शुभ रंग व दिन: सफेद और क्रीम रंग आपके लिए उत्तम हैं। शुभ दिनों में सोमवार और शुक्रवार का सहयोग मिलेगा।मूलांक 3 (यदि जन्म 3, 12, 21, 30 तारीख को हुआ हो)करियर और नौकरी: शिक्षा, मीडिया, मार्केटिंग, राइटिंग, कला और क्रिएटिव फील्ड से जुड़े लोगों के लिए यह महीना बेहद शानदार रहने वाला है। आपको अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए नए मंच मिलेंगे। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों या इंटरव्यू दे रहे जातकों को सफलता मिलने की पूरी उम्मीद है।व्यापार: बिजनेस के विस्तार (Expansion) की आपकी योजनाएं अब रफ्तार पकड़ेंगी। कारोबार को बढ़ाने के लिए बनाई गई नई मार्केटिंग स्ट्रेटेजी इस महीने आपको बड़ा मुनाफा कमा कर दे सकती है।आर्थिक स्थिति: आपको इस महीने एक्स्ट्रा इनकम (अतिरिक्त आय) के बेहतरीन मौके हाथ लग सकते हैं। हालांकि, शेयर बाजार या किसी भी तरह के जोखिम भरे निवेश से आपको पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए।प्रेम और वैवाहिक जीवन: प्रेम संबंधों में मधुरता घुलेगी और जीवनसाथी हर मोड़ पर सहयोग करेगा। यदि जीवनसाथी के साथ कोई पुराना मनमुटाव चल रहा था, तो वह इस महीने पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।पारिवारिक जीवन: परिवार के सदस्यों के साथ किसी धार्मिक यात्रा या पिकनिक पर जाने का प्लान बन सकता है, जिससे आपसी तालमेल और मजबूत होगा।स्वास्थ्य: पेट और पाचन से जुड़ी दिक्कतों से बचने के लिए बाहर के खाने-पीने से परहेज करें। संतुलित और सात्विक आहार लें।शुभ रंग व दिन: पीला और हल्का नारंगी रंग शुभ फल देगा। दिनों में गुरुवार और रविवार आपके लिए अनुकूल रहेंगे।मूलांक 4 (यदि जन्म 4, 13, 22, 31 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: आपकी पुरानी कड़ी मेहनत का मीठा फल अब आपको मिलने वाला है। लंबे समय से अटके हुए ऑफिशियल काम इस महीने पूरे हो जाएंगे। ऑफिस में आपका अनुशासन और समय की पाबंदी सीनियर्स को प्रभावित करेंगी।व्यापार: बिजनेस में स्थिरता (Stability) बनी रहेगी, जिससे आपका मानसिक तनाव कम होगा। पुराने ग्राहकों का आपके प्रति भरोसा और बढ़ेगा। हालांकि, किसी भी नए बड़े निवेश में हाथ डालने से पहले सावधानी बरतें।आर्थिक स्थिति: पैसों के मामले में आपकी स्थिति पहले के मुकाबले काफी मजबूत होगी। इसके बावजूद किसी भी तरह के बड़े और गैर-जरूरी खर्चों को फिलहाल के लिए टाल देना ही समझदारी होगी।प्रेम और वैवाहिक जीवन: रिश्तों में अपनी जिद और गुस्से को आड़े न आने दें। पार्टनर के साथ किसी भी विवाद को शांत मन से बैठकर बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें।पारिवारिक जीवन: घर के किसी बेहद महत्वपूर्ण निर्णय या पारिवारिक मसले में आपकी राय को विशेष महत्व दिया जाएगा, जिससे परिवार में आपका सम्मान बढ़ेगा।स्वास्थ्य: पीठ दर्द, कमर दर्द या जोड़ों में खिंचाव की समस्या आपको थोड़ा परेशान कर सकती है। डॉक्टर की सलाह लें और हल्के व्यायाम को अपने रूटीन में शामिल करें।शुभ रंग व दिन: नीला और ग्रे (स्लेटी) रंग आपके लिए सकारात्मक रहेगा। शुभ दिनों में शनिवार और रविवार का साथ मिलेगा।मूलांक 5 (यदि जन्म 5, 14, 23 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: जुलाई का यह महीना आपकी प्रोफेशनल लाइफ में बड़े और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। आप किसी दूसरी जगह ट्रांसफर हो सकते हैं या ऑफिस में कोई बड़ी नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आपके बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल्स (संचार कौशल) की वजह से आपको वर्कप्लेस पर नई पहचान मिलेगी।व्यापार: व्यापारियों के लिए यह समय नए एग्रीमेंट्स और बड़े ऑर्डर्स मिलने का है। जो लोग ऑनलाइन बिजनेस, डिजिटल मार्केटिंग या ई-कॉमर्स से जुड़े हैं, उन्हें इस महीने बंपर मुनाफा होने के आसार हैं।आर्थिक स्थिति: आर्थिक मोर्चे पर यह महीना आपके लिए भाग्यशाली रहेगा। लंबे समय से फंसा हुआ या रुका हुआ धन अचानक वापस मिल सकता है। कम समय में ज्यादा मुनाफे के चक्कर में आकर किसी भी सट्टेबाजी या जोखिम भरे काम में पैसा न लगाएं।प्रेम और वैवाहिक जीवन: लव लाइफ में रोमांस और नया उत्साह देखने को मिलेंगे। जो लोग सिंगल हैं, उनकी मुलाकात सोशल मीडिया या किसी इवेंट के दौरान किसी बेहद खास व्यक्ति से हो सकती है।पारिवारिक जीवन: घर में हंसी-खुशी का माहौल बना रहेगा। भाई-बहनों का पूरा सहयोग मिलेगा और परिवार के साथ किसी छोटी दूरी की यात्रा पर जाने के योग बन रहे हैं।स्वास्थ्य: काम की अधिकता के कारण भागदौड़ ज्यादा रहेगी, इसलिए शरीर को पर्याप्त आराम दें और समय पर पौष्टिक भोजन करना न भूलें।शुभ रंग व दिन: हरा रंग आपके लिए सबसे ज्यादा लकी साबित होगा। दिनों में बुधवार और शुक्रवार आपके लिए शुभ हैं।मूलांक 6 (यदि जन्म 6, 15, 24 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: जुलाई का महीना आपके करियर में संतुलन और निरंतर प्रगति लेकर आ रहा है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत और मिलनसार व्यवहार की हर कोई तारीफ करेगा। यदि आप सैलरी हाइक (वेतन वृद्धि) या प्रमोशन की उम्मीद कर रहे हैं, तो महीने के आखिरी हफ्ते में कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।व्यापार: बाजार में आपकी साख बढ़ेगी जिससे पुराने ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा। जो जातक फैशन, कॉस्मेटिक्स, होटल, इंटीरियर डिजाइनिंग, कला या लक्जरी आइटम्स के बिजनेस में हैं, उन्हें बड़े ऑर्डर्स मिलने की पूरी उम्मीद है। पार्टनरशिप में पारदर्शिता रखें।आर्थिक स्थिति: इस महीने आपकी आमदनी बढ़ने के साथ-साथ खर्चों का ग्राफ भी ऊपर जा सकता है। आप नया वाहन, घर या परिवार की सुख-सुविधाओं पर पैसा खर्च कर सकते हैं। एक सटीक बजट बनाकर चलेंगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी।प्रेम और वैवाहिक जीवन: प्रेम संबंधों में गहराई आएगी और पार्टनर के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा। शादीशुदा लोगों के लिए जीवनसाथी के हर कदम पर साथ देना उनके हौसले को बढ़ाएगा। पुराने मनमुटाव दूर होंगे।पारिवारिक जीवन: घर में किसी मांगलिक प्रसंग या उत्सव की रूपरेखा बन सकती है। सप्ताहांत (Weekend) पर परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने से आपको मानसिक शांति मिलेगी।स्वास्थ्य: खान-पान में लापरवाही भारी पड़ सकती है। ज्यादा मीठा, तली-भुनी चीजें और जंक फूड से पूरी तरह से परहेज करें। जो लोग शुगर या बढ़ते वजन से परेशान हैं, वे विशेष सावधानी बरतें।शुभ रंग व दिन: गुलाबी और हल्का नीला रंग आपके लिए अनुकूल हैं। शुभ दिनों में शुक्रवार और सोमवार शामिल हैं।मूलांक 7 (यदि जन्म 7, 16, 25 तारीख को हुआ हो)करियर और नौकरी: यह महीना आपके लिए अपनी स्किल्स को अपग्रेड करने, कुछ नया सीखने और भविष्य के लिए बड़ी प्लानिंग करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। जो लोग आईटी (IT), एजुकेशन, रिसर्च, डेटा एनालिसिस और कंसल्टिंग के क्षेत्र में कार्यरत हैं, उनके लिए तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। जोश में आकर नौकरी बदलने का फैसला न लें।व्यापार: कारोबारी इस महीने अपने बिजनेस के बेतहाशा विस्तार की बजाय अपने प्रोडक्ट्स या सर्विसेज की क्वालिटी (गुणवत्ता) को सुधारने पर ज्यादा फोकस करें। इस महीने बनाई गई नई बिजनेस स्ट्रेटेजी आपको भविष्य में बड़ा आर्थिक लाभ देगी।आर्थिक स्थिति: आर्थिक मामलों में महीना सामान्य रहेगा। जहां एक तरफ आकस्मिक धन लाभ के योग बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ अनचाहे और अचानक आने वाले खर्च आपका बजट बिगाड़ सकते हैं। निवेश करने से पहले किसी वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) की मदद लें।प्रेम और वैवाहिक जीवन: इस महीने आप स्वभाव से थोड़े अंतर्मुखी रह सकते हैं, जिससे आप अपनी भावनाएं पार्टनर के सामने खुलकर नहीं रख पाएंगे। इस वजह से साथी के मन में गलतफहमी पैदा हो सकती है। संवादहीनता से बचें और खुलकर बात करें।पारिवारिक जीवन: परिवार का पूरा सपोर्ट आपके साथ रहेगा, लेकिन काम के बढ़ते दबाव के बीच आप मानसिक शांति के लिए खुद के साथ अकेले में कुछ वक्त बिताने की जरूरत महसूस करेंगे।स्वास्थ्य: पर्याप्त नींद न लेना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। मानसिक तनाव और सिरदर्द से बचने के लिए योग, प्राणायाम और वॉक को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं।शुभ रंग व दिन: बैंगनी और सफेद रंग आपके ओरा को मजबूत करेगा। दिनों में सोमवार और गुरुवार का साथ मिलेगा।मूलांक 8 (यदि जन्म 8, 17, 26 तारीख को हुआ हो)करियर और नौकरी: जुलाई का यह महीना कार्यस्थल पर आपके धैर्य और कठिन परिश्रम की परीक्षा ले सकता है, लेकिन घबराएं नहीं, यही मेहनत आपको महीने के अंत तक बड़ी सफलता दिलाएगी। ऑफिस में वर्कलोड और जिम्मेदारियाँ बढ़ सकती हैं। सरकारी, प्रशासनिक, बैंकिंग, लॉ या मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को मान-सम्मान मिलेगा।व्यापार: किसी पुरानी प्रॉपर्टी, पूर्व में किए गए निवेश या लंबे समय से रुकी हुई बिजनेस डील्स से अचानक तगड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है। हालांकि, किसी भी नए डील या सरकारी दस्तावेज पर बिना पढ़े और बिना सोचे-समझे हस्ताक्षर करने की भूल न करें।आर्थिक स्थिति: लंबे समय से अटका हुआ या डूबा हुआ पैसा वापस मिलने के योग हैं। हालांकि, भावनाओं में बहकर किसी अनजान स्कीम में भारी निवेश करने से बचें, अन्यथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।प्रेम और वैवाहिक जीवन: काम की व्यस्तता के चलते आप अपने लाइफ पार्टनर को पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, जिससे थोड़े शिकवे-शिकायतें बढ़ सकती हैं। प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाकर रखें, पुराने विवाद धीरे-धीरे सुलझ जाएंगे।पारिवारिक जीवन: घर के किसी वरिष्ठ या बुजुर्ग सदस्य की सलाह आपके किसी बड़े संकट को टालने में मददगार साबित होगी। पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई अहम फैसला इस महीने लिया जा सकता है।स्वास्थ्य: हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप), जोड़ों के दर्द या अत्यधिक शारीरिक थकान को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने की गलती न करें। समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराते रहें।शुभ रंग व दिन: गहरा नीला और काला रंग आपके लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा। शुभ दिनों में शनिवार और शुक्रवार अनुकूल रहेंगे।मूलांक 9 (यदि जन्म 9, 18, 27 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: जुलाई 2026 आपके लिए बड़ी उपलब्धियों और सफलताओं का महीना साबित होने वाला है। जो काम महीनों से अटके हुए थे, वे अब तेजी से पूरे होने लगेंगे। सेना, पुलिस, प्रशासन, मेडिकल, सोशल सर्विस और राजनीति से जुड़े जातकों को इस महीने कोई बड़ा पद या विशेष सफलता मिल सकती है।व्यापार: बिजनेस में विस्तार की जो योजनाएं ठंडे बस्ते में थीं, वे अब अमलीजामा पहनेंगी। बाजार में नए संपर्क और बड़े क्लाइंट्स आपके साथ जुड़ेंगे। कोर्ट-कचहरी या प्रतिद्वंदियों के साथ चल रहे पुराने विवाद सुलझने से आपके काम में तेजी आएगी।आर्थिक स्थिति: धन आगमन के बेहद खूबसूरत और मजबूत योग बन रहे हैं। बिजनेस में रुका हुआ पुराना पेमेंट क्लियर हो जाएगा, जिससे आपकी फाइनेंशियल कंडीशन काफी मजबूत होगी। फिर भी, बड़ा निवेश करने से पहले जोखिमों का आकलन जरूर कर लें।प्रेम और वैवाहिक जीवन: लव लाइफ और वैवाहिक जीवन में गजब का आपसी तालमेल और भावनात्मक मजबूती देखने को मिलेगी। हर मुश्किल परिस्थिति में पार्टनर ढाल बनकर आपके साथ खड़ा रहेगा। अविवाहितों के लिए विवाह के बेहतरीन प्रस्ताव आ सकते हैं।पारिवारिक जीवन: परिवार में किसी सदस्य की नौकरी या विवाह से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है। घर में किसी मांगलिक या धार्मिक कार्य की योजना बनेगी, जिससे पूरे घर का माहौल सकारात्मक और ऊर्जावान रहेगा।स्वास्थ्य: इस महीने आपकी शारीरिक ऊर्जा और इम्युनिटी बहुत अच्छी रहेंगी। हालांकि, आपको अपने अत्यधिक गुस्से और मानसिक उत्तेजना पर कंट्रोल रखना होगा, वरना ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। नियमित वर्कआउट करें।शुभ रंग व दिन: लाल और मैरून रंग आपके भाग्य में वृद्धि करेगा। शुभ दिनों में मंगलवार और रविवार आपके लिए सर्वश्रेष्ठ रहेंगे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 8:54 am

ड्राइंग रूम में सोफा और टीवी की सही दिशा चमकाएगी किस्मत, वास्तु के इन नियमों से घर में बरसेगा पैसा

घर का लिविंग रूम यानी ड्राइंग रूम वह मुख्य स्थान होता है जहां परिवार के सभी सदस्य एक साथ समय बिताते हैं और घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ड्राइंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होना बेहद जरूरी है क्योंकि इसका सीधा असर घर के मुखिया की तरक्की, परिवार की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। अक्सर लोग इंटीरियर डिजाइनिंग के चक्कर में ड्राइंग रूम में सोफा सेट और टेलीविजन (TV) जैसी मुख्य चीजों को किसी भी दिशा में रख देते हैं, जिससे घर में भारी वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। आइए जानते हैं कि वास्तु संतुलन बनाए रखने के लिए सोफा और टीवी रखने की सबसे सटीक और सही दिशा कौन सी है।सुख-समृद्धि के लिए ड्राइंग रूम में किस दिशा में रखें भारी सोफा सेटवास्तु विज्ञान के नियमों के मुताबिक, ड्राइंग रूम में सोफा सेट या किसी भी तरह के भारी फर्नीचर को रखने के लिए दक्षिण (South) और पश्चिम (West) दिशा को सबसे उत्तम माना गया है। यदि आप अपने लिविंग रूम की दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण की दीवारों से सटाकर सोफा रखते हैं, तो इससे घर में स्थायित्व आता है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल मजबूत होता है। बैठते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घर के मुखिया का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। ऐसा होने से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार तेजी से होने लगता है।किस कोने में भूलकर भी न लगाएं टीवी, हो सकता है बड़ा मानसिक तनावआधुनिक घरों में टीवी केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह अग्नि तत्व और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ा उपकरण है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ड्राइंग रूम में टीवी लगाने के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East) यानी आग्नेय कोण को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिशा में टीवी होने से घर में रहने वाले लोगों को सकारात्मक जानकारियां मिलती हैं और उनका मानसिक विकास सही दिशा में होता है। ध्यान रखें कि भूलकर भी टीवी को उत्तर-पूर्व (North-East) यानी ईशान कोण में न लगाएं। इस पवित्र कोने में टीवी या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट रखने से घर का वास्तु बिगड़ता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई में रुकावट और परिवार में बेवजह का तनाव पैदा होने लगता है।इन छोटी मगर बेहद जरूरी वास्तु टिप्स का रखें विशेष ख्यालड्राइंग रूम को वास्तु सम्मत बनाने के लिए केवल सोफा और टीवी की दिशा ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य नियमों का पालन करना भी आवश्यक है। लिविंग रूम के केंद्र यानी बीच के हिस्से को हमेशा खाली और साफ-सुथरा रखें, क्योंकि इसे ब्रह्मस्थान माना जाता है। सोफे के ठीक सामने या टीवी स्क्रीन पर मुख्य दरवाजे का सीधा प्रतिबिंब यानी परछाई नहीं पड़नी चाहिए। साथ ही, ड्राइंग रूम की दीवारों पर हमेशा हल्के और सकारात्मक रंगों जैसे क्रीम, हल्का पीला या ऑफ-व्हाइट का ही इस्तेमाल करें। इन आसान से बदलावों को अपनाकर आप अपने घर की नकारात्मक ऊर्जा को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं और सुख-समृद्धि के द्वार खोल सकते हैं।

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