पाकिस्तान पर भरोसा नहीं! ईरान ने चली डिकॉय चाल, इस्लामाबाद पहुंचीं तीन फ्लाइट्स पर असली टीम किसमें?
चीन और ईरान की सीक्रेट हथियार डील का खुलासा ,अमेरिकी एजेंसी की रिपोर्ट ने उड़ाई दुनिया की नींद
इस्लामाबाद वार्ता पर संकट: ईरान की शर्तें, पाकिस्तान के बयान और इजराइल की तैयारी से बढ़ा तनाव
इस वार्ता के भविष्य पर सबसे बड़ा सवाल ईरान की सख्त शर्तों के कारण खड़ा हुआ है। तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक इजराइल लेबनान में अपने सैन्य अभियान नहीं रोकता, तब तक वह किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं होगा।
आर्टेमिस II की ऐतिहासिक वापसी: चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित
नासा का आर्टेमिस ।। मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस मिशन में शामिल सभी अंतरिक्ष यात्री 10 दिन की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद ओरियन अंतरिक्ष यान के जरिए सुरक्षित रूप से समुद्र में उतर गए
ट्रंप का अल्टीमेटम: ईरान चाहे या न चाहे, होरमुज़ खुलेगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि शनिवार को पाकिस्तान में ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर बातचीत करेंगे
ऐतिहासिक मिशन आर्टेमिस II संपन्न, अंतरिक्ष यात्रियों की धरती पर सुरक्षित लैंडिंग
नासा का आर्टेमिस II मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह अंतरिक्ष की गहराई से खोज में मानवता की वापसी की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है
अमेरिका-ईरान वार्ता का संयुक्त राष्ट्र ने किया स्वागत, शांति और स्थायी समझौते की अपील
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस्लामाबाद में शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने यह जानकारी दी
1947 में देश के बंटवारे के साथ बंगाल का भी विभाजन हो गया। भारत को पश्चिम बंगाल मिला और पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में चला गया, जो बाद में बांग्लादेश बना। तब बंगाल का 67% हिस्सा पाकिस्तान को और 37% हिस्सा भारत को मिला। 1952 में पहली बार पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए। 238 में से 150 सीटें कांग्रेस ने जीत ली। सीपीआई वाले लेफ्ट फ्रंट को 41 और जनसंघ वाले राइट ब्लॉक को 13 सीट मिलीं। पीएम जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी के पर्सनल डॉक्टर रहे बिधान चंद्र रॉय मुख्यमंत्री बने। पश्चिम बंगाल में लगातार 20 साल और कुल 25 साल कांग्रेस सरकार में रही, लेकिन 1977 के बाद वो अपना सीएम नहीं बना पाई। अब उसका कोई विधायक भी नहीं है। कभी 39% से ज्यादा वोट शेयर भी सिमटकर 3% से कम हो गया। आखिर पश्चिम बंगाल में सत्ता से दूर कैसे हुई कांग्रेस और आज भी सरकार बनाने की दौड़ से बहुत पीछे क्यों है; इलेक्शन एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… तारीख- 18 अप्रैल 1975, जय प्रकाश नारायण यानी जेपी का काफिला कलकत्ता विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम से गुजर रहा था। जेपी एंबेसेडर कार में थे। अचानक 20 साल की एक लड़की भीड़ से निकली और उनकी कार के बोनट पर चढ़कर नाचने लगी। वो लड़की थीं- ममता बनर्जी। जेपी का काफिला रोककर ममता, रातों-रात इंदिरा की आंखों का तारा बन गईं। 1984 के लोकसभा चुनाव में महज 29 साल की ममता ने दिग्गज वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी को हरा दिया। उसी साल उन्हें प्रदेश युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया। 8 साल बाद यानी 1992 में ममता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में भी उतर गईं। सामने थे कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी के चहेते सोमेन मित्रा। ममता चुनाव हार गईं, लेकिन उनका बढ़ता कद प्रणब मुखर्जी, सोमेन मित्रा, प्रियरंजन दासमुंशी जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताओं को चुभने लगा। आखिरकार ममता को युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। फिर आई तारीख 9 अगस्त 1997, कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था। ममता को इसमें नहीं बुलाया गया। नाराज ममता ने स्टेडियम के बाहर रैली बुला ली। सीनियर जर्नलिस्ट कल्याणी शंकर अपनी किताब ‘Pandora's Daughters’ में लिखती हैं- ‘सीताराम केसरी ने ममता की रैली रोकने की पूरी कोशिश की। कई नेताओं को मनाने के लिए भेजा, पर ममता अड़ी रहीं। ममता की रैली में हजारों लोग पहुंचे। भीड़ देखकर ममता गदगद दिखीं और उन्होंने एलान किया- हमारी रैली में आने वाले ही असली ग्रासरूट कांग्रेस (तृणमूल कांग्रेस) वर्कर हैं।’ ममता की रैली से घबराए कांग्रेस नेताओं ने आनन-फानन में उनकी सोनिया गांधी से मीटिंग कराई। दिल्ली में आधी रात को ममता, सोनिया से मिलीं। बैठक के बाद ममता ने ऐलान किया- ‘मैं पार्टी से अलग नहीं हो रही हूं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस को तभी भंग करूंगी, जब सोनिया गांधी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगी।’ हालांकि, तब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनीं। आखिरकार ममता बनर्जी का सब्र टूट गया। एक रोज उन्होंने एलान किया- ‘अब मैं सोनिया गांधी या कांग्रेस से बात करने से बहुत नफरत करती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझसे समझौता करने के लिए 9 दिन इंतजार कराया। मुझसे बात करने का वादा किया, लेकिन बात नहीं की। बदले में मुझे क्या मिला? पार्टी से निष्कासन।’ 1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाई और अगले ही चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी बन गईं। कांग्रेस का करीब 30% वोट झपट लिया। उसके बाद कांग्रेस पश्चिम बंगाल में कभी नहीं लौट सकी। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पतन की 3 बुनियादी वजहें हैं... 1. सामाजिक वजह: भद्रलोक बनाम सर्वहारा के संघर्ष ने लेफ्ट का जनाधार बढ़ा दिया 2. राजनीतिक वजह: इंदिरा की केंद्रीकरण नीति और कांग्रेस में दरार 3. आर्थिक वजह: केंद्र की भेदभावपूर्ण नीतियां क्या कांग्रेस के पास पश्चिम बंगाल में वापसी का कोई रोडमैप है? 2021 विधानसभा में कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ गठबंधन किया था। वह 92 सीटों पर लड़ी, लेकिन कोई सीट नहीं जीत पाई। इस बार सभी सीटों पर कांग्रेस अकेले लड़ रही है। सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य बताते हैं… -------------------------- चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- 'शूद्र' महिलाओं से संबंध बनाते थे नंबूदरी ब्राह्मण: नस्ल सुधारने के नाम पर जन्मे बच्चों से दूर रहते, केरलम की राजनीति में कितना असर केरलम का त्रावणकोर इलाका। एक ब्राह्मण पुरुष तैयार होकर नायर बस्ती में जाता है। वहां एक घर के बाहर नहाता है। कपड़े बदलता है। एक अन्य ब्राह्मण उसे खाना परोसता है। फिर वह खाना खाता है। कुछ देर बाद वह घर के बाहर चप्पल उतार कर अंदर चला जाता है, जहां एक महिला उसका इंतजार कर रही होती है। जब महिला का पति लौटता है और उसे घर के बाहर एक आदमी की चप्पल दिखती है, तो बिना कुछ कहे लौट जाता है। क्योंकि वो समझ जाता है कि उसकी पत्नी एक नंबुदरी ब्राह्मण पुरुष के साथ संबंधम में है। ये किस्सा केरलम की दशकों पुरानी परंपरा ‘संबंधम’ का है, जिसमें नंबूदरी ब्राह्मण नायर महिलाओं से शारीरिक संबंध बना सकते थे। जानिए कहानी इसी ‘संबंधम’ परंपरा की…
पूजा-पाठ के नाम पर रेप के आरोपों में घिरे कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के बड़े नेताओं से कनेक्शन सामने आए हैं। सोशल एक्टिविस्ट अंजलि दमानिया का दावा है कि खरात की महाराष्ट्र के पूर्व CM एकनाथ शिंदे से 17 बार बात हुई थी। खरात और महाराष्ट्र महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रुपाली चाकणकर के बीच 177 बार फोन कॉल हुई। ये बात खरात के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) से पता चली है। अंजलि के मुताबिक, कॉल डेटा रिकॉर्ड से 8 नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। इनमें NCP (अजित गुट) के सुनील तटकरे, BJP के चंद्रकांत पाटिल और आशीष शेलार, शिवसेना (शिंदे गुट) के संजय शिरसाट, दीपक लोंढे और शिवसेना (उद्धव गुट) के मिलिंद नार्वेकर शामिल हैं। दावा- अजित पवार के प्लेन क्रैश से एक दिन पहले और बाद में खरात के अकाउंट में 73 बार ट्रांजैक्शनअंजलि का दावा है, ‘अजित पवार के प्लेन क्रैश के एक दिन पहले, यानी 27 जनवरी, हादसे वाले दिन और एक दिन बाद अशोक खरात ने समता पटसनस्थे बैंक खाते में कई बड़े लेनदेन किए थे। हादसे वाले दिन ट्रांजैक्शन के 28 मैसेज, एक दिन पहले 17 और एक दिन बाद यानी 29 जनवरी को 13 मैसेज आए।’ अंजलि कहती हैं, ‘21 से 29 जनवरी तक कुल 92 बार अकाउंट में क्रेडिट के मैसेज आए। ये मैसेज तभी आते हैं, जब बैंक खाते में पैसे भेजे गए हों। अगर इन मैसेज का सोर्स पता चले तो बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो सकता है। मैंने SIT से इस लेनदेन की जांच करने की मांग की है।’ अनजान शख्स ने भेजी कॉल डिटेल रिपोर्ट, किसने भेजी सरकार जांच कराएगीअंजलि कहती हैं, ‘मुझे वॉट्सएप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया। इसमें अशोक खरात के कॉल डेटा रिकॉर्ड्स थे। मैंने AI की मदद से पता लगाया कि खरात के मोबाइल फोन से कब, किसे और कितनी बार कॉल किया गया। इसी से पूर्व CM एकनाथ शिंदे से फोन पर 17 बार बातचीत होने का पता चला।’ ‘कॉल डेटा से ये भी पता चला कि राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रुपाली चाकणकर और खरात के बीच 33,727 सेकेंड तक बात हुई। उनकी बहन प्रतिभा चाकणकर ने खरात को 236 बार कॉल किया।‘ अंजलि ने CDR के बारे में SIT से बात की है। DGP सदानंद दाते को इसकी जानकारी देने के लिए समय मांगा है। क्या इस लिस्ट में BJP-NDA से जुड़े बड़े लीडर भी हैं? अंजलि कहती हैं, ‘मैंने CDR में देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन, प्रवीण दरेकर और प्रसाद लाड जैसे बड़े नेताओं के नाम तलाशे, लेकिन उनसे जुड़ी कोई कॉल डिटेल नहीं मिली।‘ CDR से जुडे़ खुलासों पर CM देवेंद्र फडणवीस प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि CDR लीक होना संवेदनशील मुद्दा है। सरकार पता लगाएगी कि अंजलि को ये जानकारी किसने और कैसे पहुंचाई। दरअसल, अंजलि का बैकग्राउंड पॉलिटिकल रहा है। वे आम आदमी पार्टी में थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में नागपुर सीट से AAP के टिकट पर नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं थीं। कैप्टन बाबा के मंदिर गए शिंदे, शिवसेना नेता बोले- धार्मिक कार्यक्रम में गए थेउद्धव सरकार गिरने के बाद नवंबर 2022 में तब CM रहे एकनाथ शिंदे मीरगांव पहुंचे थे। अशोक खरात के साथ पूजा करते उनकी फोटो भी वायरल हुई हैं। इस पर शिवसेना (शिंदे गुट) के नासिक जिलाध्यक्ष अजय बोरास्ते कहते हैं, 'शिंदे साहब को विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। इसीलिए वे गए थे। अगर कोई मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम में जा रहा है, तो इसमें गलत क्या है।' अंजलि की CDR को फेक करार देते हुए अजय आगे कहते हैं, 'वे पहले ये बताएं कि उन्हें CDR किसने दी। अगर वे इसका सबूत दे सकती हैं, तो हमारी पार्टी इसका जवाब देगी।' ट्रस्ट मेंबर्स के डॉक्यूमेंट में राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली का नाम18 मार्च को खरात की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की फोटो वायरल हुईं। इनमें वे खरात के पैर धोते और छाता पकड़े दिख रही थीं। रुपाली अभी मीडिया के सामने नहीं आ रही हैं। अपने बचाव में उन्होंने बयान जारी कर कहा था, ‘शिवनिका संस्थान महादेव मंदिर से जुड़ा ट्रस्ट है। मैं जनप्रतिनिधि होने के नाते इससे जुड़ी हूं। मुझे अशोक खरात पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी नहीं है।’ NCP नेता का दावा- खरात ने CM बदलने के लिए अनुष्ठान किया 25 मार्च को महाराष्ट्र विधानसभा में NCP (शरद पवार) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि 35 विधायकों और नेताओं ने CM बदलने के लिए अशोक खरात से तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था। इस पूजा में शामिल लोगों ने अपनी उंगली पर कट लगाया गया था। आव्हाड के दावों की सच्चाई जानने के लिए हमने खरात बाबा के पास गए नेताओं और अंजलि दमानिया की CDR में बताए गए नामों से जुड़ी लगभग 200 फोटो देखीं। इनमें NCP (अजित गुट) के नेता सुनील तटकरे और रूपाली की उंगलियों पर सफेद बैंडेज लगा दिखा। हमने दोनों के हाथ पर इन कट मार्क की वजह जानने की कोशिश की। रुपाली और सुनील दोनों से संपर्क नहीं हो पाया। इसी दौरान NCP (अजित गुट) के प्रवक्ता सूरज चौहान से बात हुई। सुनील तटकरे को लगी चोट पर वे बताते हैं कि उनकी उंगली दरवाजे में फंस गई थी। मैं खुद उन्हें हॉस्पिटल लेकर गया था। खरात के भक्तों में DCP-ACP रैंक के अधिकारी भी18 मार्च को खरात की गिरफ्तारी के बाद से अब तक उस पर 13 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें 8 सेक्शुअल हैरेसमेंट, 4 आर्थिक धोखाधड़ी और एक मनी लॉन्ड्रिंग का है, जो ED ने दर्ज कराया है। नासिक SIT ने कैप्टन बाबा का नेटवर्क खंगालने के लिए अब तक 30 गवाहों से पूछताछ की है। जांच में 160 GB डिजिटल डेटा रिकवर किया गया है। शिरडी पुलिस ने खरात की अवैध संपत्ति की छानबीन करते हुए 56 लोगों के नाम पर खुले 100 बैंक एकाउंट्स का खुलासा किया है। इसमें परिवहन विभाग के 2 अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। ये भी पता चला है कि नासिक में तैनात DCP और ACP रैंक की 2 महिला पुलिस अफसरों ने मनचाही पोस्टिंग के लिए खरात से संपर्क किया था। इन पर जांच जारी है, इसलिए हम नामों का खुलासा नहीं कर रहे। ……………………… अशोक खरात पर ये स्टोरी भी पढ़ें… 1. ‘बेटी हो, कन्यादान करूंगा बोलकर 3 साल रेप किया‘, कैप्टन बाबा के ऑफिस का सच ‘पहली बार मिली, तो बोला कि तू मेरी बेटी है। तेरा कन्यादान मैं खुद करूंगा। शादी से पहले मुझे ऑफिस में बुलाया और रेप किया।’ ये आपबीती कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के खिलाफ पहली FIR कराने वाली महिला की है। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित और उनका परिवार बदनामी की वजह से सामने नहीं आना चाहता। ज्यादातर घर छोड़कर जा चुकी हैं। पढ़ें पूरी खबर… 2. कैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर…
नेतन्याहू का कड़ा संदेश: इजरायल विरोधियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक सख्त बयान में कहा कि इजरायल अपने खिलाफ किसी भी हमले या विरोध के सामने चुप नहीं रहेगा
सीजफायर वार्ता से ईरान का किनारा: लेबनान में शांति से पहले नहीं होगी बातचीत
गौरतलब है कि 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी। इसी समझौते के तहत दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को स्थान चुना गया था।
इजरायल का ऑपरेशन रोरिंग लायन 18,000 बम और 4,000 टारगेट, लेबनान से ईरान तक दहला मिडिल ईस्ट
अंटार्कटिका से आई डराने वाली खबर विलुप्त होने की कगार पर एम्परर पेंगुइन, IUCN की रेड लिस्ट में शामिल
कुवैत बेस हमले पर अमेरिका के घायल सैनिकों ने उगल दी सच्चाई, कहा-ईरान ने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया
CBS को दिए इंटरव्यू में एक सैनिक ने बताया कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि ईरान ने पूरी रणनीति के साथ इसे अंजाम दिया था। सैनिक के मुताबिक, “हम जानते थे कि यह बेस निशाने पर हो सकता है। खुफिया रिपोर्ट में पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।”
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह को उनके पद से हटा दिया गया है। यह निर्णय सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की सिफारिश पर लिया गया।
72 घंटे में 8 देशों के संघर्ष पर विराम: दुनिया को मिली अस्थायी राहत, शांति की कोशिशें तेज
Iran America Israel Conflict, Ceasefire in 8 Nation, Russia Ukraine War, Israel Lebanon War, Pakistan Afghanistan War, US Israel Iran War, Donald Trump, Vladimir Putin
ग्लोबल पीसमेकर बना पाकिस्तान कर्ज में डूबा देश आखिर कैसे बना अमेरिका-ईरान का संकटमोचक?
विदेशों में चीन को टक्कर देने के लिए निजी क्षेत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा अमेरिका
संयुक्त राज्य अमेरिका को वैश्विक बाजारों में अपने निजी क्षेत्र को अधिक आक्रामक तरीके से उतारना चाहिए ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके
ईरान की चेतावनी: नेतन्याहू को रोकें ट्रंप
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया को खत्म करने की इजाजत न दे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की शिपमेंट को सीमित करके संघर्ष-विराम (सीजफायर) की सहमति का उल्लंघन करने का आरोप लगाया
कतर में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, एलएनजी सप्लाई पर करेंगे अहम बातचीत
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी अपनी दो दिवसीय यात्रा पर दोहा पहुंचे। हवाई अड्डे पर भारत के कतर स्थित राजदूत विपुल और कतर एनर्जी के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया
लेबनान में बैंडेज, एंटीबायोटिक्स की किल्लत, जल्द हो जाएंगे ये जरूरी सामान खत्म: डब्ल्यूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि लेबनान के कुछ अस्पतालों में जीवन बचाने वाली ट्रॉमा मेडिकल किट कुछ ही दिनों में खत्म हो सकते हैं
इजरायल ने भारत के रुख की सराहना की, होर्मुज में फ्री समुद्री आवाजाही पर दिया जोर
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि भारत मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच भी अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है
चीन ने इंटरनेट सेवा के लिए उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया
चीन ने थाइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से लॉन्ग मार्च-6ए रॉकेट का उपयोग करके अपनी इंटरनेट सेवा के लिए गुरुवार की सुबह 3.38 बजे 21वें ग्रुप के निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया
शी चिनफिंग ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के उद्घाटन समारोह में भाषण दिया
चीन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 8 अप्रैल की सुबह राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में शुरू हुआ
चीन में लघु व मझौले उद्यमों के लिए विकास वातावरण में लगातार सुधार जारी
चीन के लघु एवं मझौले आकार के उद्यमों के विकास को बढ़ावा देने वाले केंद्र ने लघु एवं मझौले आकार के उद्यमों के विकास वातावरण पर 2025 मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की
रूस का मेगा ऑफर एशियाई देशों को 40% सस्ती गैस का न्योता, भारत के लिए फायदे के साथ बड़ी दुविधा
इजरायल ने हिजबुल्लाह प्रमुख के भतीजे को किया ढेर, बेरूत पर किए हवाई हमले में बनाया निशाना
इजरायली सेना ने बुधवार को हिजबुल्लाह के गढ़ दाहियेह के बाहर बेरूत के तल्लेत खयात इलाके में हर्शी को निशाना बनाकर हमला किया। इसका फुटेज भी सामने आया है, जिसमें एक बहुमंजिला इमारत आंशिक रूप से ढह गई।
युद्धविराम पर संकट के बादल, लेबनान में इजरायली हमले में 254 लोगों की मौत, ईरान की कड़ी चेतावनी
लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि यदि इजरायल ने अपने हमले जारी रखे, तो तेहरान युद्धविराम से पीछे हट सकता है।
होर्मुज पर टोल की तैयारी: ईरान का बड़ा आर्थिक दांव, अरबों डॉलर की कमाई का अनुमान
ईरान हर बैरल तेल पर करीब 1 डॉलर का ट्रांजिट शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। यदि यह लागू होता है, तो अनुमान है कि ईरान को सालाना 70 से 80 बिलियन डॉलर (लगभग 6.4 से 7.4 लाख करोड़ रुपये) की कमाई हो सकती है! यह आय उसके पारंपरिक तेल निर्यात से होने वाली कमाई से भी ज्यादा हो सकती है।
लेबनान सीजफायर पर अमेरिका-ईरान के बीच महायुद्ध पाकिस्तान की एक गलती ने दुनिया भर में मचाया बवाल
शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अड़ा बांग्लादेश, भारत दौरे से पहले ढाका ने रख दी बड़ी मांग बढ़ सकती है टेंशन
नाटो से निकलने पर विचार कर रहे हैं ट्रंप, चर्चा को गठबंधन के महासचिव मार्क रूटे से की मुलाकात
ईरान के साथ संघर्ष के बीच नाटो और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सरकार की कार्रवाई से नाटो देश बेहद नाराज नजर आ रहे हैं
मंदी के बाद बांग्लादेश की ग्रोथ में तेजी आने की उम्मीद
वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में मंदी के दौर के बाद धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है, जिसे घरेलू मांग में सुधार और स्थिर होती स्थितियों से मदद मिलेगी
भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं के निर्यात में लचीलापन और लगातार सुधारों के दम पर तेजी से आगे बढ़ रही है
57 साल के आजाद खान अपने भाई की किराने की दुकान पर बेसुध बैठे हुए हैं। तीन महीने पहले ही 25 साल बाद जेल से बाइज्जत बरी होकर आए हैं। अकेले में कुछ बुदबुदा रहे हैं। पूछने पर कहते हैं- पूरी जिंदगी काल-कोठरी में गुजार दी। अब किसी से क्या ही बात करूं, क्या ही बचा है! मैंने पूछा- पूरी जिंदगी जेल में गुजार दी, किसी का मर्डर किए थे क्या? ‘नहीं-नहीं, डकैती का झूठा मुकदमा था। कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सोचिए जरा- डकैती के मामले में आजीवन कारावास!’ तभी पीछे से आजाद की भाभी आशा बेन बोल पड़ती हैं, ‘बेकसूर थे। झूठे मुकदमे में गांव के एक परिवार ने फंसा दिया था। सब बर्बाद हो गया।’ स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज झूठे मुकदमों में फंसाए गए लोगों की कहानी, जिनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई और आखिर में बाद कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। मैं उत्तर प्रदेश के मैनपुरी शहर से 22 किलोमीटर दूर ब्योंती कटरा गांव पहुंचा हूं। 25 साल बाद जेल से बाइज्जत बरी होकर आए आजाद खान से मिलने। यहां संकरी गली और खुले में बहते एक गंदे नाले के बीच आजाद खान का छप्पर का घर है। इसकी हालत इतनी खराब है कि हल्की आंधी आए तो उड़ जाए। इससे सटा इनके भाई मस्तान खान का घर है। एक छोटा-सा बिना प्लास्टर वाला ईंट का बना। सामने दो-तीन मवेशी बंधे हुए हैं। यहीं पर मस्तान खान की दुकान है। उसके बाहर बैठ जाता हूं और अपने भाई आजाद खान को बुलाने के लिए कहता हूं, लेकिन आजाद मुझसे बात करने के लिए सामने नहीं आ रहे। पहले इनके भाई ने बुलाया और फिर भतीजा कई बार बुलाने गया तब आने को तैयार हुए। दुकान से बाहर आकर यहां रखे तख्त पर बैठ जाते हैं। अब भी काफी सहमे हुए नजर आ रहे हैं। बार-बार इधर-उधर देख रहे हैं। उसी तख्त के बगल बैठी इनकी भाभी आशा बेन कहती हैं- जेल जाने से मानसिक हालत खराब हो गई है। तीन महीने पहले 21 जनवरी 2026 को जब सुबह-सुबह मेरे बेटे और पति इन्हें जेल से रिहा कराकर घर लाए, तो गांव की बदली गली और घर देखकर चौंक गए। इन्हें सब बदला-बदला लग रहा था। धीमी आवाज में बोले- भाभी सब बदल गया न! मैं इनकी पीठ पर हाथ सहलाते हुए बोली- हां, सब बदल गया। अब जेल से छूटकर आ गए हो। डरो मत। मैं तुम्हारी मां जैसी हूं। जब ये जेल गए थे, तो 30 बरस के थे। 25 साल सलाखों के पीछे रहने के बाद 55 साल के हो गए हैं। इनकी पूरी जिंदगी जेल में चौपट कर दी गई। यह बताते हुए आशा बेन की आंखें भर आती हैं और दुपट्टे से आंसू पोछने लगती हैं। थोड़ी देर रुककर फिर कहती हैं- मुझे ब्याहकर आए 10 साल हुए थे। आजाद अपने 5 भाइयों में सबसे छोटे हैं। शुरू से थोड़ा अड़ियल मिजाज के रहे हैं। किसी से डरते नहीं थे। इसी वजह से गांव वालों की नजर में चढ़े हुए थे। 22 अक्टूबर 2000 को दिवाली का दिन था। हम लोग गहरी नींद में सो रहे थे। आजाद उस वक्त दिल्ली में सिलाई का काम करते थे। सुबह के 3 बजे, अचानक गांव में हल्ला मचा कि- डाका पड़ गया है। चोरी हो गई है। शोर-शराबा सुनकर हम भी उठकर दौड़े। हमारे गांव के एक ब्राह्मण परिवार के यहां चोरी हो गई थी। उनके यहां शादी की तैयारी चल रही थी, लिहाजा उनके घर में काफी गहने रखे थे, जो चोरी हो चुके थे। मामले की पुलिस से शिकायत की गई। फौरन हमारे एऊल थाना की पुलिस छानबीन में जुट गई। तीन-चार दिनों बाद अचानक पुलिस हमारे घर आई। गाली देते हुए बोली- उस रात डकैती में तुम्हारा देवर आजाद खान भी शामिल था। यह सुनकर हम हैरान हो गए। मैंने कहा- साहेब, वह तो दिल्ली में सिलाई का काम करते हैं। वो यहां कैसे आ गए? पुलिस कहने लगी- झूठ मत बोले। तुम लोगों ने उसे यहां से भगा दिया। उसके खिलाफ गवाही मिली है। तुरंत उसे बुलाकर थाने में पेश करो, वर्ना सभी को जेल में डाल दूंगा। हम लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं। मेहनत-मजदूरी करके घर चलाते हैं। उस दौरान गांव वाले हमारी हंसी उड़ाने लगे। कहने लगे- और चलो ठसक में! अब भुगतो अपनी करनी का फल। आखिर गांव वाले भी हमें ही गलत मान रहे थे। उसके बाद हमने आजाद को चिट्ठी लिखी और बताया- पुलिस आपको खोज रही है। घर आ जाइए। आपके ऊपर गांव के घर में डाका डालने का केस दर्ज है। इस बातचीत के दौरान तख्त पर ही मुरझाया चेहरा लिए, मटमैली पीली बनयान और पैजामा में आशा बेन के पति मस्तान खान भी बैठे हैं। कहने लगे- आजाद ने अपनी जवाबी चिट्ठी में लिखा- मैं तो दिल्ली में हूं। मैंने कौन-सा अपराध किया है, जो पुलिस के सामने सरेंडर करूं? आजाद अभी तक घर नहीं आए थे। इसी बीच, पुलिस घर की कुर्की-जब्ती का नोटिस लेकर आ गई। दीवार पर नोटिस चिपकाते ही घर में चीख-पुकार मच गई। हम पांच भाई, मेरे तीन बच्चे। कहां जाते। घर न बचता, तो सड़क पर आ जाते। उसके बाद हमने कर्ज लिया और वकील को 20 हजार रुपए दिए, तब कुछ दिनों के लिए कुर्की-जब्ती से मोहलत मिली। उसके बाद फौरन अपने भाई आजाद खान से मिलने दिल्ली निकल गया। उसे पूरी बात बताई, तब वह कोर्ट में सरेंडर करने को राजी हुआ। वह आया और कोर्ट में सरेंडर कर दिया। करीब महीनेभर बाद नवंबर 2001 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। फिर सुनवाई चली और सेशन कोर्ट ने 25 साल जेल की सजा सुनाई। अब जाकर तीन महीने पहले यह बाइज्जत बरी होक बाहर आया है। आजाद की न शादी हुई, न घर बसा। पूरी जवानी जेल में खप दिया। अब किसी काम का नहीं बचा है। सोच-सोचकर मानसिक रूप से बीमार हो गया। यह कहते हुए मस्तान खान फूट-फूटकर रोने लगते हैं। आंख मलते हुए बोलते हैं, ‘जेल में इससे मिलने के लिए हजार-पांच सौ रुपए पुलिस वालों को देने होते थे। मेर पास जब भी कुछ रुपए जमा होते, तब इससे मिलने चला जाता था। आखिर मेरा छोटा भाई है। जेल के दौरान मैंने कई बार कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई, लेकिन खारिज होती रही। वकील ने कहा- 50 हजार रुपए दो, तब जमानत करवाऊंगा, लेकिन उस वक्त मेरे पास उतने पैसे नहीं थे। किसी तरह से जमींदारों के खेत में दिहाड़ी-मजदूरी करके पैसे जुटाता, फिर साल-दो साल में वकील के पास जा पाता। वकील पैसे तो ले लेता, लेकिन जमानत नहीं करवाता था। एक बार तो रमजान का महीना था। 5 हजार रुपए लेकर मैनपुरी शहर से खाने-पीने का कुछ सामान खरीदने गया था। साथ में भाई की जमानत के लिए वकील से मिलकर बात करनी थी। उस दिन वकील ने मेरे सारे पैसे ले लिए। त्योहार का कोई सामान नहीं खरीद पाया। यहां तक कि इतना भी पैसा नहीं बचा कि बस का किराया दे सकूं। उस दिन पैदल ही मैनपुरी से अपने गांव आया था। इस बातचीत के दौरान बीच-बीच में आजाद खान कुछ-कुछ बुदबुदा रहे हैं। उनसे बात शुरू किया तो कहने लगे- जेल में मैं खूंखार कैदियों के बीच रह रहा था। एक बार तो वे सारे मिलकर मुझे मारने की योजना बना लिए थे। उन्होंने एक थैले में कई सारी खुरपियां जुटाई। एक कैदी ने तो मेरे हाथ पर खुरपी से हमला भी कर दिया था। मौके पर जेल अधिकारी पहुंच गए थे और किसी तरह बचाया था। उस दिन बच गया था, लेकिन इतना डर गया कि मानसिक रूप से बीमार रहने लगा। मन में एक खौफ बस गया। हर वक्त लगने लगा कि- कोई मुझे मारने आ रहा है। ऐसा लगने लगा कि जेल से बाहर जाऊंगा तो गांव वाले मार देंगे। मेरी खराब हालत खराब होने लगी। उसके बाद जेल प्रशासन मुझे बरेली सेंट्रल जेल से बनारस के मेंटल हॉस्पिटल लेकर गया। वहां मेरा दो साल इलाज चला। हाथ में कोर्ट-कचहरी के कागज पलटते हुए आजाद खान ये बातें बताते हैं। इस दौरान वह इधर-उधर देखते हुए अक्सर मुठभेड़-मुठभेड़ कहते हैं। पूछने पर कुछ नहीं बताते। फिर थोड़ा जोर देता हूं तो कहते हैं- हमारे गांव में दो समुदायों के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़े होते थे। 1999 की बात है। गांव में झगड़ा हुआ और पुलिस पहुंच गई। हमारी पुलिस से हाथापाई हो गई। मेरे कुछ साथियों ने पुलिस पर गोली चला दी। अटैंप्ट टू मर्डर का केस चला, मुझे भी 10 साल की सजा हुई थी। कुछ महीने जेल में रहा था, फिर जमानत पर छूटकर आया था। उसके बाद दिल्ली कमाने चला गया था और फिर यह डकैती का झूठा केस मुझ पर लाद दिया गया। यह कहते हुए आजाद खान अजीबोगरीब बातें करने लगते हैं। कुछ का कुछ बताने लगते हैं। पास में ही बैठी इनकी भाभी कहती हैं- अब आप इनसे मत बात कीजिए। इनकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। कई बार गाली-गलौज भी करने लगते हैं। 25 साल जेल के दौरान इन्हें अकेले काल-कोठरी में रखा गया था। वहां इन्हें टॉर्चर किया गया था, उसके बाद से बड़बड़ाने लगे हैं। हम लोग कुछ कर नहीं पा रहे थे। एक NGO ने हमारी मदद की। मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां मामले को झूठा पाया गया। सोचिए एक झूठे केस में इंसान की पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी गई। पागल बना दिया गया। जब तक हम लोग जिंदा हैं, इनकी देखभाल करेंगे, हमारे मरने के बाद इनका क्या होगा, पता नहीं। आजाद खान की इस स्याह कहानी को जानने के बाद मैं मैनपुरी से दिल्ली पहुंचा। यहां किराड़ी इलाके के प्रेम नगर में रामदास का परिवार रहता है। रामदास यहां चप्पल की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। 9 हजार रुपए महीना कमाते हैं। पड़ोसियों ने एक बच्ची के रेप के झूठा केस में फंसा दिया। पॉक्सो एक्ट तहत जेल गए। 7 साल जेल काटी और 2021 में बाइज्जत बरी बाहर आए हैं। रामदास बताते हैं- मुझ पर रेप का मुकदमा दर्ज था। अभी 60 साल का हूं। जब जेल गया था, तब 50 साल का था। मेरा दो बेटे-दो बेटियों समेत पूरा परिवार है। पड़ोसी ने मेरी जाति से नफरत करते थे, इसलिए मुझे फर्जी केस में फंसा दिया। एक ऐसी बच्ची का रेप करने और उसे गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया, जिसे मैं अपनी पोती मानता था। मई 2015 की बात है। मेरी सिलाई मशीन की फैक्ट्री थी। उसमें काम करने के बाद बैंक में गार्ड की नौकरी भी करता था। एक दिन शाम को घर आया, तो पड़ोसी मेरे परिवार से लड़ाई कर रहे थे। पता चला था कि गेट पर किसी कुत्ते ने पॉटी कर दी थी, जिसको लेकर मेरे परिवार से गाली-गलौज कर रहे थे। मैंने रोका तो मुझ पर टूट पड़े। घसीटते हुए कहने लगे- बहुत शान में चलता है न तू। ऐसा लगता है, जैसे कोई बड़ा रईस हो। कितनी बड़ी नौकरी करता है रे। आज हम तुझ पर केस करेंगे। अगले दिन सुबह-सुबह पुलिस मेरे घर आई और मुझे उठाकर ले गई। थाने में बताया कि मुझ पर रेप का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मुझे पीटते हुए बोली- तुम पर केस करने के लिए तुम्हारे पड़ोसी 50 हजार रुपए दिए हैं। अगर इस केस को खत्म करना है, तुम्हें एक लाख रुपए देने होंगे। मेरे पास उतने रुपए नहीं थे। नहीं दे पाया और पुलिस ने केस को बड़ा बनाकर मुझे जेल भेज दिया। इसके बाद तारीख पर तारीख शुरू हुई। मैंने कभी पॉक्सो एक्ट… के बारे में सुना तक नहीं था। उधर, मेरे जेल जाते ही मेरे बेटे-बहू, पत्नी सब दर-दर ठोकर खाने लगे। उस वक्त बहू गर्भवती थी। केस लड़ने के लिए मेरे बेटे ने एक-एक करके बहू की सारी ज्वैलरी बेच दी। हर तारीख पर 3 से 5 हजार रुपए खर्च हो रहे थे। जब गहने के पैसे खत्म हो गए तो मैंने जज से कहा था कि- साहब जो भी फैसला देना है दे दीजिए, नहीं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा। पास में बैठे रामदास के बेटे जोगिंदर दास भी ये बाते सुन रहे थे। वह कहते हैं- एक तरफ मेरी पत्नी गर्भवती थी, दूसरी तरफ पापा जेल में थे। जब भी वकील के पास जमानत के लिए जाता, वह कहता- 50 हजार रुपए दो, तभी जमानत की अर्जी लगवाऊंगा। जब पत्नी के सारे गहने बिक गए, तब फैक्ट्री की 5 सिलाई मशीनें भी बेच दी। उसके बाद पैसे कम पड़ने लगे। तो गांव जाकर घर की जमीन बेची। मामले में 10 लाख से ज्यादा खर्च हो गए थे। जब जेल में पापा से मिलने जाता, तो हम एक-दूसरे को देखकर रोते। उस वक्त यही सोचता जैसे भी पापा को जेल बाहर निकालूंगा। आखिर में किसी तरह पैसे दे-लेकर फाइनल सुनवाई हुई। तीस हजारी कोर्ट ने 2021 में पापा को 7 साल की जेल के बाद बरी कर दिया। दिल्ली सरकार को एक लाख रुपए मुआवजा देने को भी कहा। लेकिन जब हम ये पैसे लेने हम दिल्ली सचिवालय गए, तो वहां अधिकारी एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस का चक्कर कटवाने लगे। अब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। इस एक लाख को पाने के चक्कर मेंल हमारे ढाई लाख खर्च हो चुके हैं। केवल अपील पर अपील चल रही है। जोगिंदर की ये बातें सुनकर रामदास लंबी सांस लेते हुए बोलते हैं- जेल में गीता पढ़कर और पेंटिंग करके जिंदगी काट रहा था। वहां बाकी कैदी मुझे देखकर पूछते- चाचा, आप कौन-से जुर्म में जेल आए हो? मैं जैसे ही कहता- रेप केस में। वे पुलिस को गाली देते हुए कहते- आपकी उम्र भी तो देख लेते पुलिस वाले। उन्होंने ऐसी ही फर्जी केस में फंसाकर हमें अपराधी बनने को मजबूर किया है। रामदास कहते हैं- इस तरह 7 साल जेल में बेनुनाह होते हुए भी गुजारे। अब जेल से चले आने के बाद भी क्या बचा है। जमीन, गहने बिक गए। पूरी कमाई कोर्ट-कचहरी में लुटा दी। --------------------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-हट्टा-कट्टा भर्ती हुआ, फौज ने विकलांग बनाकर भेज दिया:8 महीने कोमा में रहा, होश आया तो पता चला- मुझे आर्मी से निकाल दिया ‘डेढ़ महीने से मुझे ‘महाराजा’ पनिशमेंट दी जा रही थी, जिसमें सिर के बल डेढ़-डेढ़ घंटे रहना होता था। एक दिन मैं बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रहा था। तभी एक जोरदार पंच मेरे सिर पर लगा और मैं गिर पड़ा। अफसर चिल्लाए- चेतन, उठो और लड़ो। मैंने कहा- अब नहीं लड़ पाऊंगा, सर। लेकिन उन्होंने कहा- नहीं चेतन, तुम्हें भिड़ना होगा। पूरी कहानी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- सिर्फ पीरियड्स में नहा पाती हैं महिलाएं:कम खाती हैं, ताकि शौच न जाना पड़े; बोलीं- नमक के खेत में ही पैदा हुए, इसी में मर जाएंगे चिलचिलाती धूप में दूर तक फैला नमक का मैदान इतनी तेज चमक रहा है कि आंखों में चुभ रहा है। दूर तक कहीं छांव नहीं। अचानक एक महिला, रमिला, काम छोड़कर धीरे से कहती हैं- ‘दिन में हम शौच नहीं जाते… लोग देख लेंगे। इसलिए खाना भी कम खाते हैं… ताकि बार-बार जाना न पड़े…पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
बात 18 अक्टूबर 1954 की है। सुबह का वक्त था और जगह पुडुचेरी का कीझूर इलाका। एक सरकारी इमारत के कमरे में काफी हलचल थी। एक कोने में पप्पा गौबार्ट नाम से मशहूर इंडो-फ्रेंच नेता एडौर्ड गौबार्ट खड़े थे। सफेद खादी के कुर्ते में लिपटे गौबार्ट कभी फ्रांसीसी प्रशासन का दाहिना हाथ माने जाते थे। उनके सामने फ्रांसीसी कमिश्नर का प्रतिनिधि पसीने पोंछते हुए फाइलों में उलझा था। बाहर हजारों की भीड़ देशभक्ति के नारे लगा रही थी। 178 लोग लाइन में लगे थे। सबके हाथ में मतपत्र था। वे एक-एक करके पेटी में वोट डाल रहे थे। जैसे ही आखिरी वोट डला, गौबर्ट बाहर निकले, उन्होंने अपना हाथ हवा में लहराया और देखते ही देखते कीझूर की धूल भरी सड़क 'जय हिंद' के नारों से गूंज उठी। 178 में से 170 लोगों ने पुडुचेरी के भारत में विलय के लिए वोट किया। इसके बाद पुडुचेरी भारत का हिस्सा बन गया, लेकिन फ्रेंच सरकार को इसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में 8 साल लग गए। 1962 में पुडुचेरी कानूनी तौर पर भारत में शामिल हो गया। आज, यानी 9 अप्रैल को पुडुचेरी में वोटिंग है। ऐसे में आज कहानी, मिनी फ्रांस कहे जाने वाले पुडुचेरी, यानी पांडिचेरी की जो साल में दो बार आजादी मनाता है… 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा ने भारत का रास्ता खोजा। इसके बाद यूरोप में होड़ मच गई। वजह थी- भारत के मसाले, रेशम, सोना और दौलत। डच, अंग्रेज और फ्रेंच भी दौड़ में जुट गए। 1665 में फ्रेंच अफसर फ्रांसिस कैरो भारत आए। 1668 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूरत में पहला ट्रेड सेंटर खोला। इसके बाद फ्रांसीसी पांडिचेरी की ओर बढ़े। तब पांडिचेरी मछली पकड़ने वाला छोटा गांव था। यह बीजापुर रियासत में आता था। 1673 में फ्रेंच अफसर फ्रांस्वा मार्टिन ने बीजापुर के सुल्तान के सूबेदार शेर खान लोधी से पांडिचेरी को लीज पर ले लिया। उन्होंने यहां ट्रेड सेंटर खोला। धीरे-धीरे यह शहर बन गया। 18वीं सदी के आखिर में फांसीसियों ने पांडिचेरी के साथ-साथ यनम, माहे और कराईकल पर भी कब्जा कर लिया। ये इलाके दूर थे, लेकिन समुद्र किनारे थे। पांडिचेरी पर कई बार अंग्रेजों ने भी राज किया, लेकिन हर बार फ्रांसीसी इसे वापस ले लेते थे। आखिरकार 1816 में फ्रांसिसियों ने पांडिचेरी में खूंटा गाड़ दिया और फिर कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आया। फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी को एक नहर के सहारे दो हिस्सों में बांट दिया। पहला- 'विले ब्लांश' यानी वाइट टाउन, जहां फ्रेंच अधिकारी, व्यापारी और भारतीय ईसाई रहते थे। दूसरा- 'विले नोयर' यानी ब्लैक टाउन, जहां आम भारतीय रहते। फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी में नेवल बेस बनाया। टेक्सटाइल इंडस्ट्री खोली, जिससे फ्रांस को भारी मुनाफा हुआ। सालाना 1.95 लाख डॉलर की कमाई होती। यानी आज के हिसाब से करीब 40 करोड़ रुपए। 17 साल के लड़के ने शुरू किया आंदोलन फ्रेंच अफसर पांडिचेरी की कपड़ा मिल के मजदूरों से पूरे हफ्ते जी-तोड़ मेहनत करवाते और महीने में मुश्किल से 1 रुपए तनख्वाह देते। मजदूर गुस्से में थे। उनमें क्रांति की आग सुलग रही थी। 1908 में मशहूर लेखक और क्रांतिकारी सुब्रमण्यम भारती अंग्रेजों से बचते हुए मद्रास से भागकर पांडिचेरी आ गए। फ्रेंच कॉलोनी होने के कारण यह ब्रितानी हुकूमत के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इसका फायदा भारतीय क्रांतिकारी उठाते। सुब्रमण्यम ने पांडिचेरी से 'इंडिया' नाम की विकली मैगजीन निकाली। इसने ब्रिटिश भारत के साथ पांडिचेरी में भी क्रांति जगा दी। 1910 में पांडिचेरी के सवाना कपड़ा मिल के मजदूरों ने वेतन बढ़वाने के लिए हड़ताल की, लेकिन फ्रेंच पुलिस ने इसे बेरहमी से कुचल दिया। 17-18 साल तक ऐसा ही चला, लेकिन मजदूरों की हालत नहीं सुधरी। फिर आया साल 1928, 10वीं में पढ़ने वाले 17 साल के एक लड़के ने पांडिचेरी के कालवे कॉलेज में स्टूडेंट मूवमेंट खड़ा कर दिया। उसका नाम था- वरदराजुलु सुब्बैया उर्फ वी सुब्बैया। वे जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और रूसी क्रांति की सोच से प्रेरित थे। आंदोलन 3 महीने चला। खत्म होने पर सुब्बैया को 6 महीने के लिए सस्पेंड किया गया। जैसे-तैसे उन्हें 10वीं की परीक्षा देने को मिली। फिर वे नौकरी के लिए मद्रास चले गए। जब 12 मौतों के बाद मजदूरों को हक मिला 1933 में वी सुब्बैया पांडिचेरी लौटे। उन्होंने महात्मा गांधी के 'हरिजन सेवक संघ' की एक शाखा पांडिचेरी में खोली। दलितों और मजदूरों को जोड़ा। साथ ही 'सुदंतीरम' नाम की मंथली मैगजीन निकाली। 14 फरवरी 1935 को सुब्बैया ने सवाना मिल में हड़ताल शुरू की। मांग रखी कि काम के 10 घंटे तय हों, बाल मजदूरी रुके, वेतन 6 आने हो और गर्भवती महिलाओं को वेतन के साथ छुट्टी मिले। 84 दिनों की हड़ताल के बाद मजदूरों की मांगें मानी गईं। सुब्बैया दलितों और मजदूरों में मशहूर हो गए। जुलाई 1936 में सुब्बैया ने पांडिचेरी की रोडिए, सवाना और एली मिल के मजदूरों के साथ आंदोलन शुरू किया। उनकी मांग थी कि मजदूरों को ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार मिले। 29 जुलाई को सुब्बैया के भाषण के दौरान फ्रेंच पुलिस ने गोलीबारी कर दी। 12 मजदूर मारे गए। गुस्साए मजदूरों ने सवाना मिल को आग लगा दी। दुनियाभर में इसकी चर्चा हुई। विरोध प्रदर्शन हुए। फ्रेंच पीएम लियों ब्लम से दखल की मांग गुई। फ्रेंच संसद में भी ये मुद्दा उठा। सरकार ने सुब्बैया को मिलने बुलाया। जवाहरलाल नेहरू की सलाह पर सुब्बैया पेरिस गए। फ्रेंच सरकार ने मांगें मानीं। मजदूरों को ट्रेड यूनियन का अधिकार मिला। पांडिचेरी एशिया की पहली जगह बनी, जहां काम के 8 घंटे तय हुए। ‘पप्पा गौबार्ड’ की बगावत से कमजोर हुए फ्रांसीसी वी सुब्बैया आजादी के लिए स्ट्रैटजी बना रहे थे, लेकिन 1938 में गिरफ्तार कर लिए गए। 1942 में रिहा होने के बाद उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ पांडिचेरी बनाई, लेकिन एक साल के लिए उन्हें पांडिचेरी से निकाल दिया गया। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। अब पांडिचेरी में भी आजादी का आंदोलन तेज हो गया। मांग थी कि पांडिचेरी का भारत में विलय हो, लेकिन फ्रांसीसी इसे छोड़ना नहीं चाहते थे। जनवरी 1950 में फ्रेंच पुलिस पांडिचेरी की सड़कों पर उतर गई। सुब्बैया के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हो गया। कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जाने लगा। सुब्बैया का घर जला दिया गया, जहां कम्युनिस्ट पार्टी का दफ्तर भी था। सुब्बैया अंडरग्राउंड होकर कई बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की टॉप लीडरशिप से मिले। उन्हें मिली कि आंदोलन को गांव-गांव तक फैलाएं। 1952 में उन्होंने वापस आकर हथियारबंद दस्ते बनाए। आंदोलन को गांव-गांव फैलाया। इसी बीच एक और बड़ी घटना हुई। फ्रेंच नेशनल असेंबली में पांडिचेरी के प्रतिनिधि एडौर्ड गौबार्ट की फ्रांसीसी अधिकारियों से अनबन हो गई। नाराज पप्पा गौबार्ट ने बगावत कर दी। मार्च 1954 में गौबार्ट फ्रांस से पांडिचेरी आ गए। उन्होंने ‘समानांतर सरकार’ बना ली। वैचारिक मतभेद होने के बावजूद सुब्बैया ने इस सरकार को समर्थन दिया। यहां से पांडिचेरी पर फ्रांस की पकड़ ढीली पड़ने लगी। 7 अप्रैल 1954 को कम्युनिस्ट पार्टी ने 'डायरेक्ट एक्शन' का ऐलान कर दिया। कम्युनिस्टों ने तिरूबुवानी इलाके को आजाद करा लिया। पुलिस से हथियार छीने और थाने पर राष्ट्रीय झंडा फहरा दिया। धीरे-धीरे कई इलाके आजाद करा लिए। भारत की आजादी के 15 साल बाद स्वतंत्र हुआ पांडिचेरी भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि कूटनीति से मसला सुलझे, ताकि फ्रांस से रिश्ते खराब न हों। सो भारत, फ्रांस और पांडिचेरी के बीच कई बैठकें हुईं। आखिरकार 13 अक्टूबर 1954 को फ्रेंच पीएम पियरे मेंडेस फ्रांसे पांडिचेरी छोड़ने को तैयार हो गए। 18 अक्टूबर 1954 को पांडिचेरी के कीझूर में भारत के साथ विलय के लिए वोटिंग हुई। 178 स्थानीय प्रतिनिधियों में से 170 ने विलय के पक्ष में वोट दिया। 1 नवंबर 1954 को फ्रांस ने पांडिचेरी, यनम, माहे और कराईकल इलाकों का प्रशासनिक नियंत्रण भारत को दे दिया। पांडिचेरी को ‘डि फैक्टो’ आजादी मिल गई। यानी वास्तव या व्यवहार में आजाद हो गया, लेकिन फ्रांस ने अब भी कानूनी संप्रभुता नहीं छोड़ी थी। इस बीच फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता आ गई। जल्दी-जल्दी सरकारें बदलने लगीं। वहीं अल्जीरिया में आजादी की मांग होने लगी। युद्ध जैसे हालात बन गए। लेकिन अब भी कानूनी बात नहीं बनी। फिर फ्रांस की सत्ता पर काबिज हुए जनरल चार्ल्स डी गॉल। उन्हें लगा कि फ्रेंच कॉलोनियों को लंबे वक्त तक कंट्रोल में नहीं रखा जा सकता। इसके चलते मई 1956 में भारत-फ्रांस के बीच एक ट्रीटी हुई, जिसमें फ्रांस ने भारत को अपने कब्जे वाले इलाके सौंपने को लेकर हामी भरी। लेकिन इसे फ्रांसीसी संसद से मंजूरी मिलने में 6 साल लग गए। मई 1962 में फ्रांसीसी संसद ने इस पर मुहर लगाई। 16 अगस्त 1962 को फ्रांस ने ये दस्तावेज भारत को सौंपे। इसी दिन पांडिचेरी को ‘डि ज्यूर’ आजादी मिल गई। यानी कानूनन पांडिचेरी आजाद हो गया और भारत का हिस्सा बन गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने पांडिचेरी की जनता से वादा किया था कि कोई बाहरी उन पर शासन नहीं करेगा। इसीलिए पांडिचेरी को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया और विधानसभा गठित की गई। गौबार्ट पांडिचेरी के पहले सीएम बने, जबकि सुब्बैया विपक्ष में बैठे। पीले फ्रेंच क्वार्टर, फ्रेंच लैंग्वेज, फ्रेंच फूड आज भी मौजूद जैसे हर साल 15 अगस्त को पूरे भारत में आजादी का जश्न मनाया जाता है, वैसे पांडिचेरी में भी होता है। हालांकि 16 अगस्त को डि ज्यूर ट्रांसफर डे और 1 नवंबर को लिबरेशन डे भी मनाया जाता है। अक्टूबर 2006 में पांडिचेरी का नाम ‘पुडुचेरी’ कर दिया गया। ये दो तमिल शब्दों से मिलकर बना है- 'पुदु' यानी नया और 'चेरी' यानी गांव। प्राचीन तमिल साहित्य में इस इलाके का नाम 'पुडुचेरी' ही था, लेकिन फ्रेंच अफसरों को बोलने में कठिनाई होती थी, तो उन्होंने इसे बिगाड़कर पांडिचेरी कर दिया। आज भी यहां फ्रेंच कॉलोनी की निशानियां मौजूद हैं। ‘वाइट टाउन’ में आज भी पीले दीवारों, ऊंची खिड़कियों और बोगनवेलिया के फूलों से लदी बालकनियों के साथ फ्रेंच क्वार्टर मौजूद हैं। गलियों के नाम आज भी 'रुई' से शुरू होते हैं, जैसे 'रुई ड्यूमास' या 'रुई रोमां रोलां'। फ्रेंच भाषा में सड़कों को रूई कहते हैं। पुडुचेरी के कैफे, रेस्टोरेंट, होटल में दक्षिण भारतीय इडली-डोसा के साथ फ्रेंच डिश क्रॉसों, बैगेट, क्रेप्स और रैटटौई वगैरह भी मिलते हैं। फ्रेंच वाइन आज भी यहां के लोगों की पसंद है। फ्रेंच कॉलोनी के दौर में यहां की पुलिस 'कैपी' नाम की मशहूर लाल टोपी पहनती थी। आज भी ये बरकरार है। तमिल भले ही यहां की प्राइमरी ऑफिशियल लैंग्वेज है, लेकिन अग्रेंजी और फ्रेंच को भी ये दर्जा मिला है। यहां रहने वाले लोग फ्रेंच, तमिल, हिंदी और अंग्रेजी बोल सकते हैं। पुडुचेरी में रचे-बसे फ्रेंच कल्चर के कारण लोग बोल-चाल में इसे ‘मिनी फ्रांस’ तक कहते हैं। केंद्र शासित प्रदेश और तीन राज्यों में फैले होने के कारण पुडुचेरी की राजनीति केंद्र सरकार के प्रभाव में और स्थानीय गठबंधनों के हिसाब से चलती है। यहां 30 विधानसभा सीट हैं, जिनके लिए वोटिंग होती है। जबकि 3 अन्य सीटों पर केंद्र सरकार के नॉमिनेटेड विधायक होते हैं। अभी यहां एन. रंगासामी की सरकार है। उनकी पार्टी AINRC का बीजेपी के साथ अलायंस है, यानी NDA में है। 10 सीट पर AINRC और 6 पर बीजेपी काबिज है। बीजेपी के पास 3 नॉमिनेटेड विधायक भी हैं, यानी बीजेपी के पास कुल 9 विधायक हैं। वहीं एमके स्टालिन की DMK के पास 6 और कांग्रेस के 2 सीटें हैं। 6 पर निर्दलीय विधायक हैं। कल, यानी 9 अप्रैल को पुडुचेरी में वोटिंग होनी है। NDA के खिलाफ कांग्रेस और एमके स्टालिन की DMK का गठजोड़ चुनावी मैदान में है। फिर भी वैसे तो संभावना है कि ‘AINRC-बीजेपी बनाम कांग्रेस-DMK’ के बीच ही मुकाबला होगा, लेकिन माना जा रहा है कि तमिल एक्टर विजय की पार्टी TVK की एंट्री से समीकरण बदल सकते हैं। ******* चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 'शूद्र' महिलाओं से संबंध बनाते थे नंबूदरी ब्राह्मण: नस्ल सुधारने के नाम पर जन्मे बच्चों से दूर रहते, केरलम की राजनीति में कितना असर केरलम का त्रावणकोर इलाका। एक ब्राह्मण पुरुष तैयार होकर नायर बस्ती में जाता है। वहां एक घर के बाहर नहाता है। कपड़े बदलता है। खाना खाता है। फिर घर के बाहर चप्पल उतार कर अंदर जाता है, जहां एक महिला उसका इंतजार कर रही होती है। जब उसका पति लौटता है और उसे एक आदमी की चप्पल दिखती है, तो बिना कुछ कहे लौट जाता है। क्योंकि वो समझ जाता है कि उसकी पत्नी एक नंबुदरी ब्राह्मण पुरुष के साथ संबंधम में है। पूरी खबर पढ़िए…
‘पहली बार मिली, तो बोला कि तू मेरी बेटी है। तेरा कन्यादान मैं खुद करूंगा। शादी से पहले मुझे ऑफिस में बुलाया और रेप किया।’ ये आपबीती कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के खिलाफ पहली FIR कराने वाली महिला की है। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़िता और उनका परिवार बदनामी की वजह से सामने नहीं आना चाहता। ज्यादातर घर छोड़कर जा चुकी हैं। खरात पर अब तक 12 FIR दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 8 सेक्शुअल हैरेसमेंट की हैं। पुलिस को 58 अश्लील वीडियो मिले हैं। जांच में सामने आया है कि 150 से ज्यादा महिलाएं रेप और सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकार हो सकती हैंI दैनिक भास्कर ने नासिक SIT से बाबा के खिलाफ शिकायत करने वाली पहली पीड़िता की आपबीती जानी और वकीलों से बात की। पहली पीड़िता से कॉन्टैक्ट करते पुलिस का फोन आया, कहा- उनसे बात न करेंनासिक पुलिस ने अशोक खरात को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ पहली FIR प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली 30 साल की महिला ने करवाई थी। महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े एक सोर्स के जरिए हमें विक्टिम की लोकेशन और फोन नंबर मिला। जब संपर्क किया, तो घरवालों ने रॉन्ग नंबर बताकर फोन काट दिया। फोन कटने के कुछ देर बाद SIT में शामिल एक इंस्पेक्टर का फोन आया। उन्होंने हमारी पहचान पूछी और पीड़िता को फोन करने की वजह जानी। वे कहती हैं, ‘नासिक पुलिस हर महिला की गोपनीयता का ध्यान रख रही है। उनसे संपर्क न करें। पीड़ितों के साथ हुआ अपराध बेहद गंभीर है। इसलिए परिवारों की लगातार काउंसलिंग हो रही है।’ पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर किसी के पास इस मामले से जुड़े वीडियोज हैं, तो तुरंत हटा दें और फॉरवर्ड न करें। ऐसा करने पर लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और मुकदमे का प्रावधान है। बेटी बोलकर भरोसे में लिया, 78 हजार रुपए में दो पत्थर दिए, फिर रेपपहली FIR कराने वाली महिला तक पहुंचना मुश्किल था, इसलिए हमने उनके वकील और पुलिस को दिए बयान खंगाले। इसके जरिए कैप्टन बाबा का महिलाओं के फंसाने का तरीका समझने की कोशिश की। हमें उसकी 17 मार्च की FIR मिली। पुलिस को दिए बयान में महिला ने 4 अहम बातें कही हैं: 1. पीड़िता 2019 में रिश्तेदार के जरिए बाबा से मिली। वो शादी को लेकर परेशान थी।2. खरात ने दैवीय शक्ति होने का झूठा दावा किया और बेटी बोलकर भरोसे में लिया।3. 50 हजार और 28 हजार रुपए के खास पत्थर दिए। दोनों ताबीज की तरह पहनने के लिए कहा।4. नशीला पदार्थ पिलाकर नवंबर 2022 से दिसंबर 2025 तक रेप किया। पीड़िता ने आगे बताया, ‘मैं 2019 में पहली बार खरात से मिली। बाबा ने कहा कि तू चिंता मत कर, तुझे पुखराज पत्थर देता हूं। उसे खंडोबा मंदिर ले जाना। वहां भगवान को 11 नारियल चढ़ाकर पत्थर गले में लॉकेट बनाकर पहन लेना। तेरी शादी अच्छी जगह हो जाएगी।’ 'नवंबर 2022 में मेरी सगाई हुई। मंगेतर के साथ बाबा से आशीर्वाद लेने गई। बाबा ने कहा कि शादी से पहले ईशान्येश्वर महादेव मंदिर में सिद्धपूजा करनी होगी। मंदिर में होने वाले पूजा विधान के बारे में बताने के लिए ऑफिस बुलाया। यहीं पहली बार रेप किया। इसके बाद तीन साल तक कई बार रेप किया।’ पीड़िता के मुताबिक, शादी के बाद भी पति की मौत और बदनामी का डर दिखाकर खरात धार्मिक पूजा के लिए ऑफिस बुलाता था। तंग आकर 17 मार्च 2026 को मैंने सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करा दी। हिरासत में खरात लेकिन डर कायम, पीड़िता सामने नहीं आ रहींनासिक कोर्ट में वकीलों के जरिए हमें पीड़ित महिला के वकील एमवाई काले का नंबर मिला। उनका कहना है कि इस केस ने पीड़ित महिलाओं की जिंदगी पर गहरा असर डाला है। डर से कई गवाह और पीड़िताएं चुप हैं, इसलिए जांच में रुकावट आ रही है। काले दावा करते हैं कि खरात के खिलाफ जितने मामले सामने आए हैं, वो उसके अपराध की तुलना में बहुत कम हैं। अभी उस पर दर्ज पहली FIR पर ही जांच शुरू हुई है। हमने खरात पर लगे आरोपों पर उसके वकील सचिन भाटे से भी बात की। उन्होंने मामला कोर्ट में होने का हवाला देकर कुछ कहने से इनकार कर दिया। खरात का ऑफिस, जहां 58 महिलाओं के अश्लील वीडियो बनाए गए…10x12 का ऑफिस, दीवार पर लिखा- ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’हम नासिक टाउन में खरात के ऑफिस पहुंचे, जहां वो महिलाओं को बुलाता था। उससे जुड़े 58 अश्लील वीडियो इसी ऑफिस के हैंI ये ऑफिस नासिक के कनाडा कॉर्नर इलाके में हैं। यहां बड़े अक्षरों में लिखा है- 'ओकस प्रॉपर्टी डीलर्स एंड डेवलपर्स'। 1998 में खरात रियल एस्टेट एजेंट का काम करता था। जमीन के सौदों के दौरान रसूखदार लोगों के संपर्क में आया। उसे अंकशास्त्र में दिलचस्पी थी। धीरे-धीरे उसने भविष्य बताना शुरू कर दिया। 2014 में खरात ने कनाडा कॉर्नर इलाके में 10 बाई 12 का ये ऑफिस खोला। 6 साल में नासिक का जाना-माना भविष्यवक्ता बन गया। कोरोना के दौरान 2021 में उसके पास आने वालों की संख्या बढ़ने लगी। 2024 में हालत ये हो गई कि अपॉइंटमेंट के लिए 10 से 25 हजार रुपए लेने लगा। तब भी 3 महीने बाद मिलने का नंबर आता था। खरात के ऑफिस के सामने एसएस कंस्ट्रक्शन नाम की रियल एस्टेट फर्म है। यहां मिले सागर डाउकर कहते हैं, ‘खरात के ऑफिस में हर शनिवार सुबह 8 बजे से ही लोगों की लाइन लगने लगती थी। पूरा ऑफिस 2 हिस्से में बंटा है। पहले वेटिंग एरिया है। खरात का केबिन इससे सटा हुआ है। केबिन के चारों तरफ काले रंग के शीशे की दीवारें हैं। इससे अंदर क्या हो रहा है, ये बाहर बैठे लोगों को दिखाई नहीं देता था।’ आस-पास के लोगों ने बताया कि खरात के दफ्तर में एंट्री पॉइंट पर तिरंगा लगा था। दीवार पर ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती’ जैसी मोटिवेशनल लाइन लिखी थी। 28 मार्च को SIT ने ऑफिस सील कर दिया। ऑफिस स्टाफ ने बाबा के ऑफिस में लगाया खुफिया कैमराहमने अशोक खरात के पुराने ऑफिस स्टाफ से संपर्क करने की कोशिश की। वो पिछले साल तक अशोक खरात के ऑफिस में असिस्टेंट था। खरात उसे 8 हजार रुपए सैलरी देता था। SIT को दिए बयान में स्टाफ ने बताया, ‘2023 में प्रेग्नेंट पत्नी को लेकर मैं खरात के पास गया था ताकि बच्चा स्वस्थ पैदा हो। उसने धार्मिक पूजा के बहाने पत्नी से छेड़छाड़ की। इस घटना के बाद से ही मैंने खरात की करतूतों पर नजर रखनी शुरू कर दी। उसका पर्दाफाश करने के लिए दोस्त की मदद से ऑफिस में एक हिडन कैमरा लगाया। फिर बाबा का सच सामने आ गया।’ ‘कैप्टन बाबा 100 रुपए प्रति किलो के भाव से इमली के बीज खरीदता था। फिर उन्हें पॉलिश करके भक्तों को 10 हजार से लेकर एक लाख रुपए प्रति मुट्ठी के भाव से बेचता था। उसने धर्म के नाम पर कई महिलाओं के साथ गलत किया।’ महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े एक सोर्स के मुताबिक, 29 दिसंबर 2025 को खरात ने 2 लोगों के खिलाफ पांच करोड़ की वसूली का केस दर्ज करवाया था। खरात ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग उसका अश्लील AI मॉर्फ वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर रहे हैं। तब बाबा के असिस्टेंट पर भी शक जताया गया था। खरात की FIR के डेढ़ महीने बाद 18 फरवरी को 24 साल की युवती ने उसी असिस्टेंट के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। उसने असिस्टेंट पर उसकी अश्लील फोटो शेयर करने का आरोप लगाया था। तब से खरात का असिस्टेंट महाराष्ट्र पुलिस की निगरानी में है। 18 दिन में 12 FIR, महिलाओं के फंसाने का खास पैटर्ननासिक SIT से जुड़े एक सीनियर अफसर कहते हैं, ‘अशोक खरात के खिलाफ दर्ज रेप की सभी शिकायतों में एक कॉमन पैटर्न है। मुकदमा दर्ज करवाने वाली ज्यादातर महिलाओं का कहना है कि बाबा तंत्र पूजा करने के बाद उन्हें धमकाता था। उनके दिमाग में ये बात डालने की कोशिश करता कि अगर वो ये बात किसी से कहेंगी, तो उनके बच्चों के साथ बुरा होगा या परिवार में कोई अनहोनी हो सकती है।’ अशोक खरात मामले की जांच के लिए बनाई गई नासिक पुलिस की SIT टीम में 24 लोग शामिल हैं। इनमें 2 DSP, 3 SI, 3 ASI, 10 इंस्पेक्टर और 6 अतिरिक्त पुलिसकर्मी शामिल हैं। ये टीम तकनीकी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर खरात के नेटवर्क और क्राइम को खंगाल रहा है।…………….अशोक खरात पर ये स्टोरी भी पढ़ें…कैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर...
आईएमएफ के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने में पाकिस्तान सरकार नाकाम, टैक्स कलेक्शन में बड़ा अंतर
पाकिस्तान सरकार के राजस्व संग्रह में कमी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कार्यक्रम के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। राजस्व लक्ष्य इस कार्यक्रम की आधारशिला हैं
7 अप्रैल की रात। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ऐलान किया- आज रात ईरान की पूरी सभ्यता तबाह हो जाएगी, जो फिर कभी वापस नहीं आ सकेगी। दुनिया सांस रोककर बैठी थी। इस दौरान इस्लामाबाद के डिप्लोमैटिक गलियारों में हलचल थी और दो शख्स लगातार फोन पर लगे थे- पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर। कुछ घंटे बाद 8 अप्रैल की सुबह 4 बजे ट्रम्प ने लिखा- सीजफायर। ईरान भी राजी हो गया। सीजफायर के लिए कैसे राजी हुए ट्रम्प-खामेनेई, क्या 14 दिन बाद फिर जंग शुरू होगी और इस सबका भारत पर क्या असर पड़ेगा; भास्कर एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कब हुआ, इसकी शर्तें क्या हैं? जवाब: 40 दिन से जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग में 14 दिन की रोक लग गई है… सीजफायर के बाद ट्रम्प ने बयान दिया, ‘ईरान ने अमेरिका को 10 पाइंट का प्रस्ताव भेजा। यह काफी नहीं है, लेकिन उन्होंने बहुत अहम कदम उठाया है। देखते हैं, आगे क्या होता है।’ वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का दावा है कि अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। काउंसिल इसे जीत बता रही है। अमेरिका को भेजे गए ईरान के प्रस्ताव में 10 शर्तें हैं… सवाल-2: क्या इजराइल भी सीजफायर के लिए राजी है? जवाब: न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने सीजफायर की घोषणा से ठीक पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की थी।घोषणा के बाद इजराइल ने भी इस सीजफायर का समर्थन किया है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने बयान में कहा कि यह सीजफायर तभी संभव होगा जब... हालांकि, बयान में यह भी साफ किया गया कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। जबकि इस सीजफायर की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी पोस्ट में साफ कहा था कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल है। सवाल-3: आखिर कैसे हुआ सीजफायर, इसमें पाकिस्तान ने क्या किया? जवाब: सीजफायर की बैक स्टोरी पॉइंट-टू-पॉइंट समझिए… पाकिस्तान ने क्यों दखल दिया? सवाल-4: अगर 14 दिन बाद बात नहीं बनी, तो क्या फिर हमले होंगे? जवाब: सीजफायर और डिप्लोमैटिक बातचीत को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है। 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में एक हाई लेवल मीटिंग की तैयारी हो रही है, जिसमें अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारी शामिल हो सकते हैं। यहीं से कोशिश की जाएगी कि सीजफायर के बाद समझौता हो सके और क्षेत्र में शांति बने। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि अगर वे (ईरान) समझौता नहीं करते हैं, तो उनके पास न तो पुल होंगे और न ही पावर प्लांट। जबकि ईरान ने भी साफ किया है कि युद्ध खत्म नहीं हुआ, ये सिर्फ विराम है। इजराइल की बात करें तो सीजफायर में वो ज्यादा दिलचस्प नहीं दिख रहा। क्योंकि पाक पीएम शरीफ की सीजफायर पोस्ट में लेबनान में भी हमले रोकने की बात लिखी थी, लेकिन इजराइली पीएम नेतन्याहू की पोस्ट में बताया गया है कि लेबनान इससे बाहर है। ऐसे में अगर अमेरिका और ईरान के बीच सबकुछ ठीक नहीं हुआ तो इजराइल पहले से और ज्यादा आक्रामक हो सकता है। वहीं अगर बातचीत में ठीक-ठाक प्रोग्रेस हुई तो सीजफायर आगे के लिए भी बढ़ाया जा सकता है। सवाल-5: भारत को इस सीजफायर से क्या नफा-नुकसान? जवाब: भारत ने खुद को इस युद्ध में तटस्थ रखा। पीएम मोदी ने खाड़ी देशों के नेताओं से बात की और शांति की अपील की, लेकिन ईरान या अमेरिका-इजराइल का नाम लेकर कोई सीधी आलोचना नहीं की। इस सीजफायर से भारत पर मिले-जुले असर पड़ेंगे। पहले पॉजिटिव असर की बात... अब भारत के लिए चिंता की बात... हालांकि ट्रम्प जैसे लेनदेन वाले नेता के दरबार में 'पसंदीदा मध्यस्थ' और 'बेकार मोहरे' के बीच का फासला बेहद कम होता है। अगर यह मध्यस्थता नाकाम हुई, तो मुनीर और शरीफ ही खलनायक कहलाएंगे। ---------------- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ: पापा के कहने पर 'किलर' बने, दोस्त को छत से फेंकने पर अड़े; अब ईरान को बास्टर्ड कहा अक्सर डोनाल्ड ट्रम्प अपनी हरकतों और बयानों से दुनिया को चौंका देते हैं। वे खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पूरी खबर पढ़िए…
ट्रंप समर्थकों में भारी नाराजगी ईरान के साथ सीजफायर डील पर भड़कीं लौरा लूमर, अपनी ही सरकार को घेरा
क्यों अफगानिस्तान में मौसम इतना जानलेवा होता जा रहा है?
अफगानिस्तान में एक बार फिर भारी बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड का जानलेवा मेल तबाही मचा रहा है
ओरबान को जिताने में जुटे ट्रंप, हंगरी चुनाव में अमेरिका की इतनी दिलचस्पी क्यों?
हंगरी के पीएम ओरबान सबसे मुश्किल चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी हार के आसार हैं. ट्रंप ओरबान को जिताने की कोशिश कर रहे हैं
ईरान-अमेरिका सीजफायर : शहबाज शरीफ ने 'इस्लामाबाद वार्ता' का दिया न्योता
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है
खुद की तय समय-सीमा से महज 90 मिनट पहले पलटे ट्रंप, आखिरी क्षणों में ईरान पर हमले का फैसला टाला
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव को फिलहाल टाल दिया है। उन्होंने घोषणा की कि प्रस्तावित हमलों को दो हफ्ते के लिए रोका जाएगा
ट्रंप-ईरान वार्ता: 14 दिन का युद्धविराम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक मोड़ सामने आया है
ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: युद्ध खत्म करने की शर्तें तय
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि अमेरिका के साथ दो हफ्ते का सीजफायर युद्ध के खत्म होने का संकेत नहीं है
ईरान-अमेरिका तनाव: पाक प्रधानमंत्री ने ट्रंप से सैन्य कार्रवाई टालने का किया अनुरोध
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सार्वजनिक रूप से अपील की है कि वे एक अहम समय-सीमा को दो हफ्ते के लिए बढ़ा दें, ताकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बातचीत का रास्ता खुला रह सके
अफगानिस्तान में बारिश का कहर, दीवार और छत गिरने से कई लोगों की मौत
अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के बाद एक दीवार गिरने से तीन महिलाओं की मौत हो गई और दो बच्चे घायल हो गए
ईरानी शासन पर इजरायल का प्रहार: पुलों और ठिकानों को बनाया निशाना
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर जारी कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि ईरानी शासन को कुचलने के अभियान को तेज और बढ़ती ताकत के साथ किया जा रहा है
'जमीर को गवारा नहीं' कह कर शीर्ष पद से इस्तीफा देने वाले जो केंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को गैर जरूरी और हलका करार दिया है
असम में विधानसभा की 126 सीटों पर कल 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। दैनिक भास्कर असम के एक छोर बांग्लादेश बॉर्डर से दूसरे छोर अरुणाचल बॉर्डर तक पहुंचा। दो सवालों के जवाब तलाशे… जवाब के लिए आम लोगों, सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट से बात की। इससे ये 3 बातें समझ आईं… 1. असम में फिर हिमंता सरकार बन सकती है। BJP और सहयोगी पार्टियां 90 सीटों पर आगे नजर आ रही हैं। इसकी एक वजह ओरुनोडोई योजना है, जिसके तहत 60 लाख महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए। 2. कांग्रेस को 15 से 20 सीटें मिलने के आसार हैं। इसकी वजह पार्टी की कमजोर लीडरशिप है, गौरव गोगोई इकलौते पॉपुलर लीडर हैं। 3. बदरुद्दीन अजमल की AIUDF, TMC और बाकी पार्टियों को 1 से 2 सीटें तक मिल सकती हैं। इसकी वजह BJP का मजबूत होना है। परिसीमन की वजह से भी मुस्लिम वोट बैंक बंट सकता है। तीन हिस्सों में बंटा राज्य, निचले असम में सबसे ज्यादा 50 सीटेंअसम में 2016 से BJP की सरकार है। 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने तब CM रहे सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। BJP को 60 और सहयोगी पार्टियों को 15 सीटें मिली थीं। कांग्रेस गठबंधन 50 सीटों पर सिमट गया था। चुनाव के बाद BJP ने हिमंता को CM बनाया। पार्टी उनके नेतृत्व में पहली बार चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने पूर्व CM तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को कमान सौंपी है। मई 2025 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। असम तीन हिस्सों ऊपरी असम, निचला असम और बराक घाटी में बंटा है। ऊपरी असम में 46 सीटें हैं। यहां चाय बागान और असमिया पहचान सबसे बड़ा मुद्दा हैं। निचले असम में 50 सीटें हैं। बांग्लादेश बॉर्डर वाले इस इलाके में मियां मुसलमानों की आबादी ज्यादा है। बराक घाटी और आसपास के इलाके में 30 सीटें हैं। ये इलाका भाषाई और जनजातीय पहचान के लिए जाना जाता है। हमारी टीम तीनों हिस्सों में पहुंची और यहां के मुद्दे समझे। 1. हश्वती शर्मा, Gen Z उम्र: 20 साल, गुवाहाटी‘अभी सिर्फ कम्युनल पॉलिटिक्स का सीजन है। हमें नौकरी चाहिए, लेकिन सारा फोकस हिंदू-मुस्लिम पर है।’ 2. तौफीक हुसैन मियां, मुस्लिम वोटरउम्र: 29 साल, धुबरी‘मुसलमानों को निशाना बनाकर CM सिर्फ अपनी कुर्सी बचा रहे हैं। हम स्कूल-अस्पताल के नाम पर वोट देंगे।’ 3. कृष्णा लाल गौढ़, बुजुर्गउम्र: 75 साल, अपर असम‘हिमंता का काम अच्छा है। इस बार BJP को जीतना चाहिए। वे अच्छा काम कर रहे हैं। बस इलाके में फैक्ट्री लग जाएं, तो लोगों को काम मिले।’ एक्सपर्ट बोले- महिला वोटर BJP की सबसे बड़ी ताकत असम में 37 साल से पत्रकारिता कर रहे इकबाल अहमद कहते हैं, ‘ओरुनोडोई योजना के जरिए हिमंता सरकार ने महिलाओं के खाते में हर महीने 1250 रुपए भेजे हैं। इसका असर दिखेगा।’इकबाल के मुताबिक, ये मुद्दे भी असर करेंगे… ‘एंटी इनकम्बेंसी नहीं, ग्राउंड पर BJP मजबूत’ एक एक्सपर्ट की राय अलगपॉलिटिकल एक्सपर्ट उत्पल बोरा अलग दावा करते हैं। वे कहते हैं कि लोग मौजूदा सरकार से संतुष्ट नहीं हैं। पार्टी के पुराने नेता हिमंता से खफा हैं। वे कह रहे हैं कि जिन कांग्रेसियों पर घोटालों के आरोप थे, वही अब BJP चला रहे हैं। पार्टियां क्या कह रहीं…BJP के राज्य महासचिव और असम पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष रितुपर्णा बरुआ कहते हैं कि पार्टी जीत के लिए 100% आश्वस्त है। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल शर्मा कहते हैं कि इस बार कांग्रेस सहयोगी पार्टियों के साथ सरकार बनाएगी। …………………………असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. घर-मदरसे टूटे, हिमंता से नाराज मुस्लिम बोले- ज्यादतियां याद रखेंगे धुबरी के संतोषपुर में रहने वाले अफसर अली कपड़े की दुकान चलाते हैं। 8 जुलाई, 2025 को अफसर के अलावा 1400 और घर तोड़ दिए गए। करीब 12 हजार लोग बेघर हो गए। अफसर हिमंता पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाते हैं। कहते हैं कि मेरा घर मुस्लिम होने की वजह से तोड़ा गया। और ऐसा कहने वाले वे अकेले नहीं हैं। पढ़िए पूरी खबर… 2. गांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
केरलम में 9 अप्रैल को 140 सीटों पर वोटिंग है। यहां LDF और UDF के बीच नेक टू नेक फाइट है। UDF को 70 से 80 और LDF को 60 से 70 सीटें मिल सकती हैं। BJP को 3 से 5 सीटें मिलने के आसार हैं। केरलम में वोटिंग से पहले दैनिक भास्कर ने लोगों, एक्सपर्ट और पॉलिटिकल पार्टियों से बात कर हवा का रूख जाना। ये 4 बातें समझ आईं…1. पिनराई विजयन 10 साल से CM हैं। उनके खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी है। 2. CPM में CM विजयन के बाद सेकेंड लाइन लीडरशिप की कमी है। कई लीडर BJP-कांग्रेस में शामिल हो गए। कैडर नाराज है। पार्टी लीडर्स का मानना है कि अगर मंत्री रहीं केके शैलजा को कमान मिलती, तो सत्ता में वापसी मुमकिन थी।3. कांग्रेस CM फेस पर खींचतान में फंसी रही। पार्टी राहुल गांधी के नाम पर चुनाव लड़ रही है और क्रिश्चियन-मुस्लिम के सहारे है। सबरीमाला मुद्दे पर भी सरकार को घेरकर हिंदू वोट बैंक में सेंध लगा रही है। 4. BJP लोकल बॉडी इलेक्शन में जीत के बाद भी 20 से 25 सीटों पर ही फाइट दे रही है। वोट शेयर बढ़ने और सिंगल डिजिट में सीट आने से ज्यादा की उम्मीद नहीं है। तिरुवनंतपुरम, पलक्कड़, कासरगोड और त्रिशूर में पार्टी जीत सकती है। लोग बोले- CM से खुश नहीं, उन्होंने सिर्फ केंद्र सरकार की स्कीम के नाम बदलेकोच्चि में एक चर्च के बाहर मिले जैकब कहते हैं, ‘लोग विजयन सरकार से खुश नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस इसका ज्यादा फायदा नहीं उठा पाई। वे आपस में लड़ते रहे।’ एर्नाकुलम के श्रीजेत कहते हैं ‘विजयन ने सिर्फ मोदी की स्कीम्स के नाम बदले हैं और कुछ नहीं किया। यहां हाईवे भी केंद्र सरकार ने बनवाए हैं।‘ 46 लाख कुडुंबश्री LDF की सबसे बड़ी ताकत50 साल की सुनिता तिरुवनंतपुरम में कैंटीन चलाती हैं। वे सरकार की योजना कुडुंबश्री से जुड़ी हैं। इस योजना में राज्य की 46 लाख महिलाएं शामिल हैं और विजयन सरकार की सबसे बड़ी ताकत हैं। सुनिता कहती हैं, ‘इस बार BJP अच्छी फाइट में है। तिरुवनंतपुरम में तीन सीटों पर मजबूत है। हालांकि, कुडुंबश्री की महिलाएं LDF को ही वोट देंगी।‘ तिरुवनंतपुरम के सीनियर जर्नलिस्ट अजय कुमार बताते हैं कि कुडुंबश्री की शुरुआत के बाद ज्यादातर LDF की सरकार रही है। उसने समय-समय पर फंड भी बढ़ाया है। ऐसे में कुडुंबश्री का बड़ा तबका LDF और विजयन सरकार को ही वोट करेगा। ये उनके लिए फायदे का मिशन है। एक्सपर्ट बोले- BJP का वोट शेयर बढ़ा, इससे CPM को नुकसान सीनियर जर्नलिस्ट बृजेश कुमार कहते हैं, ‘केरलम में किसे-कितनी सीटें मिलेगी, अभी कहना मुश्किल है। यहां वोटर्स आखिरी वक्त में तय करते हैं। UDF और LDF के बीच टफ फाइट है। LDF तीसरी बार सत्ता में लौट सकती है। वायनाड की सीनियर जर्नलिस्ट नीनू मोहन का कहना है, ‘केरल में पॉलिटिक्स बहुत अलग है। आखिरी 24 घंटे में पिक्चर बदल जाती है। 2021 में यही हुआ था। तब भी UDF की सरकार बन रही थी, इस बार भी हालात कुछ वैसे ही हैं।’ तिरुवंतपुरुम में केरल यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. जय प्रसाद कहते हैं, ‘BJP के लिए ये चुनाव टेस्ट केस होगा। हर सीट पर 25 से 35% मुस्लिम वोट उसके लिए चैलेंज हैं। इस बार BJP को 22 से 25% वोट शेयर मिलने की उम्मीद है। CPM के 90 से 95% कार्यकर्ता हिंदू हैं। उसे लगता है कि RSS और BJP उसके वोट छीन रही है। क्रिश्चियन कम्युनिटी करीब 18 से 20% है। इनमें BJP का सपोर्ट बढ़ा है।‘ सीनियर जर्नलिस्ट कैलाश बताते हैं, ‘BJP का वोट शेयर नेचुरली बढ़ रहा है। अभी 20% है। पार्टी को सरकार बनाने में कम से कम 10 साल और लगेंगे, लेकिन ये क्रिश्चियन वोट के बिना संभव नहीं है।‘ UDF को एंटी-इनकम्बेंसी का फायदा लेकिन बहुमत नहीं सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. धनुराज बताते हैं, ‘कई सर्वे बता रहे हैं कि इस बार माइनॉरिटी एकजुट होकर UDF को वोट करने वाली है। पिछले इलेक्शन में ये वोट LDF को मिला था। UDF पहली बार लगातार 10 साल से अपोजिशन में है। लोकल बॉडी इलेक्शन में कांग्रेस के नेतृत्व में उसे जीत मिली। जिन 5 से 7 जिलों में बड़ी जीत हुई, वहां माइनॉरिटी वोट ज्यादा है। 7 जिले हिंदू डॉमिनेंट हैं, वहां LDF और BJP जीती। कम्युनल पॉलिटिक्स की वजह से UDF का बहुमत ला पाना आसान नहीं है।‘ BJP बोली- LDF-UDF लोगों को बेवकूफ बना रहेBJP के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर कहते हैं, ‘राज्य में LDF और UDF दोनों साथ हैं। 27 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में दोनों साथ राजनीति करते हैं। यहां लोगों को भड़काने और बेवकूफ बनाने का नाटक करते हैं, इसलिए यहां BJP ही विकल्प है।‘ CPM बोली- विजयन फिर मुख्यमंत्री बनेंगेCPM के पूर्व सांसद और सीनियर लीडर सेबिस्टियन पॉल कहते हैं, ‘पिनराई विजयन तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। परफॉर्मेंस ही एक वजह है। सेकेंड लीडरशिप में पूर्व हेल्थ मिनिस्टर केके शैलजा बड़ा चेहरा हैं। UDF का दावा- 100 से ज्यादा सीटें जीतेंगे केरलम में विपक्ष के नेता वीडी. सतीशन के मुताबिक, विजयन सरकार के 12 से ज्यादा मंत्री हारने वाले हैं। वे दावा करते हैं कि UDF को 100 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। ………………केरलम चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए 1. 46 लाख कुडुंबश्री दीदियां लेफ्ट की वोटर, कैसे सेंध लगाएगी BJP केरलम सरकार की कुडुंबश्री योजना से 46 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, यानी राज्य के हर दूसरे घर में एक कुडुंबश्री मेंबर है। ये महिलाएं बिजनेस तो चलाती ही हैं, साथ में चुनाव लड़ती भी हैं और हार-जीत तय भी करती हैं। 2021 में चुनाव जीतने वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF को 48% महिलाओं ने वोट दिए थे। BJP इनमें सेंधमारी की कोशिश कर रही है। पढ़िए पूरी खबर... 2. केरलम CM की बेटी की मुस्लिम से शादी चुनावी मुद्दा, 5000 लड़कियों के कन्वर्जन का दावा केरलम चुनाव में फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ मुद्दा है, लेकिन लोग और नेता इस पर बंटे हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे BJP की प्रोपेगैंडा फिल्म बताते हुए बैन कर दिया। BJP विजयन की बेटी की मुस्लिम से शादी का मुद्दा उठाती रहती है। धर्म परिवर्तन के दावे करने वाले संगठनों का कहना है कि किरदार और किस्से अलग हो सकते हैं, लेकिन ऐसी कहानियां यहां भरी पड़ी हैं। यहां 5 हजार से ज्यादा लड़कियों को धर्म परिवर्तन किया गया है। पढ़िए पूरी खबर…
हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान को अब अपनी मंशाओं से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी
ईरान में भारतीयों को दूतावास की सलाह, 48 घंटे तक सुरक्षित जगह पर रहें
पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी और इजरायल के हमलों के बीच ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। लोगों को अगले 48 घंटे तक बाहर जाने से बचने की सलाह दी गई है
रूस-चीन की बढ़ती नजदीकी और पेट्रो-डॉलर पर खतरा, भारत के लिए नई आर्थिक और कूटनीतिक चुनौती
सोमवार को अंतरिक्षयात्री उस बिंदु तक पहुंच गए, जो मानव इतिहास में अब तक की सबसे अधिक दूरी मानी जा रही है। आने वाले घंटों में यह दूरी बढ़कर लगभग 252,760 मील तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए फरिश्ता बना UAE अचानक थमाया 3 अरब डॉलर का चेक
ईरान के भावी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की हालत बेहद नाजुक, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट से मचा हड़कंप
ऊर्जा संकट से जूझ रहा पाकिस्तान: रात 8 बजे तक मॉल और बाजार बंद, सरकार ने सख्त पाबंदियां लागू कीं
नई गाइडलाइंस के तहत केवल बाजार ही नहीं, बल्कि होटल और खानपान से जुड़े व्यवसाय भी प्रभावित होंगे। रेस्टोरेंट, बेकरी, तंदूर और फूड आउटलेट को रात 10 बजे तक बंद करना होगा। मैरिज हॉल और शादी समारोहों को भी इसी समय सीमा के भीतर समाप्त करना अनिवार्य किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह ऑपरेशन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के निर्देश पर अंजाम दिया गया। कई B-2 बॉम्बर विमानों ने अमेरिका के व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से उड़ान भरी और करीब 36 घंटे की लंबी यात्रा के बाद तेहरान में अपने लक्ष्य पर हमला किया।

