आखिर जिस बात का था डर वही हुआ! अब इंसानों को हायर करेगा AI? यहां जानिए सबकुछ
Al खुद फिजिकल वर्क्स के लिए इंसानों की हायरिंग शुरू कर रहा है. हो सकता है कि हमारी बात पर आपको यकीं न हो लेकिन RentAHuman.ai नाम का एक नया प्लेटफॉर्म आया है जहां Al एजेंट काम करवाने के लिए इंसानों को किराए पर लेने की सुविधा दे रहा है.
मुस्लिम बहुल देश में दिखी पीएम मोदी की 'कार डिप्लोमैसी', बोले-मलेशियाई PM ने अपनी सीट तक दे दी
पीएम मोदी साल के पहले विदेशी दौरे पर मलेशिया पहुंचे हैं. वहां पर भारतीय जनसमुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने यहां आने का वादा पूरा किया है. जिस तरह का भव्य स्वागत यहां पर मेरा हुआ है, उसका भव्य स्वागत भारत हमेशा याद रखेगा.
ट्रेड डील पर सहमति बनने के बाद यूएसटीआर ने एक सूचना-ग्राफिक जारी किया। इस ग्राफिक में भारत का राजनीतिक नक्शा दिखाया गया था, जिसके जरिए यह बताया गया कि अमेरिकी उत्पादों की पहुंच अब भारत के नए और बड़े बाजार तक बनेगी।
14 साल पहले हमला, अब हुई पहली गिरफ्तारी, अमेरिका लाया गया बेनगाजी हमले का संदिग्ध
Benghazi Attack: लीबिया के बेनगाजी में 14 साल पहले US मिशन पर हमला कर दिया गया था. जिसमें अब जाकर पहली गिरफ्तारी की गई है. संदिग्ध को पकड़कर अमेरिका लाया गया है.
India thailand air force joint exercise: भारत और थाईलैंड की वायु सेनाएं 9 फरवरी को अंडमान के पास नॉर्थ मलक्का स्ट्रेट में संयुक्त हवाई अभ्यास करेंगी, जिसमें सुखोई-30 और ग्रिपेन फाइटर जेट शामिल होंगे. इस अभ्यास का मकसद दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच तालमेल, ऑपरेशनल क्षमता और समुद्री क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है.
बांग्लादेश चुनाव से पहले यूनुस के घर के बाहर उग्र प्रदर्शन, हिंसक टकराव में 50 लोग घायल
Violent protests erupt outside Yunus home ahead of Bangladesh elections 50 people injured in clashes
इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान आत्मघाती हमला, 31 की मौत, 169 लोग घायल
धमाका उस समय हुआ जब मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग जुमे की नमाज अदा कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मस्जिद परिसर में अफरातफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से खुला बड़ा बाजार, अमेरिकी उत्पादों को मिलेगा फायदा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति के तहत भारत का बड़ा बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खुल रहा है
जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज, पीओके बना ‘राजनीतिक ब्लैक होल’
अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिली विशेष स्थिति समाप्त किए जाने के बाद क्षेत्र के विकास का रास्ता खुला, जहां भारत ने विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया और समावेशी शासन को बढ़ावा दिया
भारत-अमेरिका रिश्तों में नई शुरुआत- ट्रंप ने हटाया 25% टैरिफ
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क हटा दिया है
US warning countries for trading with Iran: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर 25 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खोलते हुए नया आदेश जारी किया है.
क्रेमलिन का बयान: रूस और अमेरिका ने परमाणु संधि पर बातचीत शुरू करने की जरूरत पर दिया जोर
रूस और अमेरिका ने नई सामरिक हथियार कटौती संधि (न्यू स्टार्ट) पर जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। यह जानकारी शुक्रवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दी
‘भारत ने यकीन दिलाया...’ रूसी तेल विवाद के बीच ट्रंप ने 25% टैरिफ हटाने के आदेश पर किए दस्तखत
US Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीद के कारण भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ को हटाने की घोषणा की है. आदेश में कहा गया है कि भारत ने रूसी तेल आयात बंद करने, अमेरिका से ऊर्जा खरीदने और रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है. यह फैसला 7 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा.
पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना का छोटा सा गांव संदेशखाली। फरवरी 2024 में ये गांव सुर्खियों में आया, जब तीन महिलाओं ने ममता बनर्जी की पार्टी TMC के नेता रहे शाहजहां शेख पर गैंगरेप के आरोप लगाए। महिलाओं की कहानी दिल दहलाने वाली थी। आरोपों के मुताबिक, शाहजहां और उसके लोगों को जो औरत अच्छी लगती, उसे पार्टी की मीटिंग के बहाने ऑफिस में बुला लेते। दो दिन, तीन दिन, चार दिन, जब तक मन होता, ऑफिस में ही रखते। अगर कोई महिला बुलाने पर नहीं आती उसे घर से उठा लेते। ये सब 13 साल से चल रहा था। शाहजहां शेख और उसके करीबी शिबू हाजरा, उत्तम सरदार को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। शाहजहां के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट, गैंगरेप के साथ जमीन कब्जा करने के भी आरोप लगे। CBI को करीब 50 शिकायतें मिलीं, लेकिन कुछ ही महीनों में दो महिलाओं ने केस वापस ले लिया। हालांकि, तीनों आरोपी अब भी कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में हैं। दो साल बीत चुके हैं। मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। संदेशखाली में क्या बदला, विक्टिम और उनके परिवार किस हाल में है, तीनों आरोपियों का खौफ कितना कम हुआ और केस कहां तक पहुंचा? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम कोलकाता से लगभग 90 किलोमीटर दूर संदेशखाली पहुंचीं। विक्टिम नंबर-1संदेशखाली में गीता पाठ और हनुमान चालीसा संदेशखाली गांव एक टापू पर बसा है। धमाखाली से यहां हम नाव से नदी पार करके पहुंचे। फेरीघाट से जाने वाला रास्ता BJP और TMC के झंडों से पटा हुआ है। टापू में अलग-अलग पाड़ा यानी मोहल्ले हैं। केस की अकेली विक्टिम अब रेखा पात्रा ही हैं। वे माझेर पाड़ा में रहती हैं। यहीं से दो साल पहले महिलाओं ने शाहजहां शेख के खिलाफ मोर्चा खोला था। रेखा अब कोलकाता शिफ्ट हो चुकी हैं। SIR की प्रक्रिया के लिए संदेशखाली आई हुई थीं। यहां लाइब्रेरी मैदान में 30 जनवरी को हिंदू जागरण मंच ने गीता और हनुमान चालीसा का पाठ कराया था। रेखा अलग-अलग पाड़ों में जाकर उसी का पर्चा बांट रही थीं। वे घर-घर जाकर कह रही थीं, ’ये किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यक्रम नहीं है। इसके लिए आप कुछ योगदान करें और परिवार के साथ इसका हिस्सा बने। लाल पाड़े वाली सफेद साड़ी पहनकर आना है। उस दिन खाना बनाने की जरुरत नहीं है, यहीं खाना है। संदेशखाली की महिलाओं के लिए यही सही रास्ता है, ये हमारी ताकत है।’ हमने रेखा पात्रा से पूछा- क्या पहले भी इस तरह का आयोजन हुआ था? जवाब में वे कहती हैं, ‘नहीं, ऐसा पहली बार हो रहा है।‘ रेखा पात्रा ने 2024 में BJP के टिकट पर बशीरहाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गईं। ‘शाहजहां शेख को फांसी होगी, तभी इंसाफ मिलेगा’संदेशखाली के मौजूदा माहौल के बारे में पूछने पर रेखा कहती हैं, ‘संदेशखाली में पुलिस आज भी लोगों को झूठे केस में अंदर कर देती है। BJP का समर्थन करने वालों पर केस कर दिया जाता है। अभी कुछ दिनों पहले ही दो लड़कों पर केस किया गया। राज्य की पुलिस हमारे खिलाफ है। कैसे कह दें कि डर का माहौल नहीं है। मैं इन वजहों से ही कोलकाता शिफ्ट हो गई हूं।‘ पिछले दो साल के बारे में पूछने पर वे कहती हैं, ‘मेरी जिंदगी में बदलाव तब आएगा, जब शाहजहां शेख और उसके गुर्गों को फांसी की सजा दी जाएगी। शाहजहां शेख ने कहा था मैं भले ही जेल चला जाऊं, लेकिन मैंने हजारों शेख खड़े किए हैं, जो मेरे लिए काम करेंगे। अभी कुछ दिन पहले ही केस के एक मुख्य गवाह का एक्सीडेंट करके उसे मार दिया गया। इसलिए डर लगता है कि कहीं कुछ हो न जाए।’ सियासी जिम्मेदारियों के बारे में पूछने पर रेखा कहती हैं, ’इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा हैं। पार्टी जो पद देगी, मैं उसके मुताबिक काम करती जाऊंगी।’ विधानसभा चुनाव में फिर किस्मत आजमाएंगी क्या? वे कहती हैं, ’पार्टी जो फैसला लेगी, वो मुझे मंजूर है।’ संदेशखाली केस में आपके साथ शिकायत करने वाली दो महिलाओं ने पिछले दिनों केस वापस ले लिया। आरोप है कि BJP ने उनसे प्लेन पेपर पर साइन करा लिया था। इसके जवाब में रेखा कहती हैं, ‘वो दोनों पहले से ही TMC से जुड़ी हुई थीं। हालांकि एक दिन उन्हें अहसास होगा कि उन्होंने क्या कर दिया। दोनों हिंदू हैं, एक न एक दिन उन्हें हमारी शरण में आना ही पड़ेगा।‘ विक्टिम नंबर-2शाहजहां के गुंडों से पीछा छूटा, अब हालात बेहतरइसके बाद हम माझेपाड़ा में दूसरी विक्टिम कविता (बदला हुआ नाम) से मिलने पहुंचे। हम लोकसभा चुनाव के दौरान यहां आए थे, तब मिट्टी का घर था। इसके बाहर कविता की सुरक्षा में पुलिस बैठी थी। अब डेढ़ साल बाद तस्वीर अलग है। मिट्टी की झोपड़ी की जगह पक्का मकान है। कविता हमें घर के पास ही गली में खड़ी मिलीं। केस के बारे में पूछने की कोशिश की, लेकिन बात करने को राजी नहीं हुईं। वे बांग्ला में कहते हुए निकल गईं, ‘ऐखोन कौनो प्रॉब्लम नेई, ऐखोन सोब ठीक आछे।’ मतलब फिलहाल कोई परेशानी नहीं है, सब ठीक है। इसके बाद हम संदेशखाली के बाजार पहुंचे, जहां आंदोलन का हिस्सा रहीं डॉली अधिकारी की कपड़े की दुकान है। डॉली खुश हैं कि शाहजहां शेख के गुर्गे शिबू हाजरा और उत्तम सोदार जेल में हैं। वे कहती हैं, ‘लोग इनके आतंक से परेशान थे। रोजी-रोटी कमानी मुश्किल थी। शिबू और उत्तम ने मेरे पति को बुलाकर धमकी दी थी कि अगर बात नहीं मानी, तो दुकान नहीं चलने देंगे।‘ वे आगे कहती हैं, ‘इन्होंने सब पर जुल्म किया। लड़कियों और महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव किया गया और पुरुषों को मारा-पीटा। अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो उनके आतंक का शिकार होना पड़ता। पहले गांव के लोग आपस में बंटे हुए थे। यहां आपस में बात भी BJP और TMC देखकर की जाती थी। इन लोगों के जेल चले जाने के बाद अब ये दूरियां कम हुई हैं और लोग प्यार से रह रहे हैं।‘ विक्टिम नंबर-3लीज पर कहकर जमीन कब्जा ली, न पैसे दिए न जमीन मिलीइसके बाद हम सुनीता सोदार (बदला हुआ नाम) से मिले। इन्होंने शाहजहां शेख और उसके साथियों पर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया था। सुनीता बताती हैं, ‘2010 में आए चक्रवती तूफान आयला ने हमें बर्बाद कर दिया। खेती की जमीन में नमक वाला पानी भर गया। यहां खेती के बजाय मछली पालन होने लगा। शाहजहां शेख के गुर्गों ने हमसे जमीनें लीज पर ले लीं और पैसा भी नहीं दिया। उनका डर इतना था कि लोग न पैसे मांग सके और न जमीन वापस ले सकते थे।‘ वे आगे बताती हैं, ‘तूफान में मेरा पूरा मकान टूटकर तबाह हो गया था। शाहजहां के गुर्गे उत्तम और उसके साथी कई बार घर की फोटो खींचकर ले गए। बनवाने का वादा किया, लेकिन कुछ नहीं कराया। वे हर बार सरकारी तिरपाल देकर फोटो खींच लेते, लेकिन मिलता कुछ नहीं। इतने साल बाद अब जाकर घर का कुछ हिस्सा तैयार किया है।‘ शाहजहां के खिलाफ दो साल पहले हुए आंदोलन के बारे में सुनीता बताती हैं, ‘पहले अंधेरा हो जाने के बाद बाहर नहीं निकल सकते थे। अब ऐसा नहीं है। पहले से आतंक थोड़ा कम हुआ है।’ विक्टिम नंबर-4शाहजहां जेल न जाता, तो जमीन वापस नहीं मिलती2024 में राशन घोटाले में शेख शाहजहां के घर ईडी की रेड पड़ी थी। इसी के बाद संदेशखाली की महिलाओं ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने की शिकायत की थी। इस मामले में करीब 50 महिलाओं ने याचिका दायर की थी, जिसके बाद शाहजहां शेख को TMC ने पार्टी से निकाल दिया था। हालांकि अब कई विक्टिम फैमिली अपनी जमीन वापस ले रही हैं। इनमें कुछ ऐसे हैं, जिन्हें लीज के पैसे मिले हैं और कुछ को नहीं। पार्वती उनमें से एक हैं। पति का निधन हो गया। वे संदेशखाली में बेटों के साथ रहती हैं, जो खेती करते हैं। पार्वती बताती हैं, ‘हमारे पास 3 एकड़ जमीन थी। शिबू हाजरा और उत्तम ने उस पर कब्जा कर लिया था। तीन साल जमीन उन्हीं के पास थी, जिसमें मछली पालन हो रहा था। हमें एक पैसा नहीं दिया। उनके जेल जाने के बाद जमीन वापस मिली। अगर वे अंदर नहीं जाते, तो शायद आज भी नहीं मिलती।’ पार्वती के छोटे बेटे बताते हैं, ‘कुछ महीने पहले ही जमीन वापस मिली है, लेकिन खेती करने लायक नहीं थी। हमने 30 हजार रुपए लगाकर मिट्टी ठीक कराई है। कई दिन तक मैं खुद भी काम करता रहा। अब जमीन धान की खेती के लायक हुई है।‘ हाफीज्जुल रहमान गाजी भी खुद को शाहजहां शेख का विक्टिम बताते हैं। वे कहते हैं, ‘इनके (शेख शेरजहां) गुंडे जब से अंदर गए हैं, यहां लोग आराम से जिंदगी गुजार रहे हैं। नहीं तो ये लोगों की जमीन ही नहीं छोड़ते थे।‘ उन्हीं के बगल में बैठे श्यामल बारो कहते हैं, ‘संदेशखाली के लोग अब आजाद हुए हैं। इनके आंतक के कारण लोगों ने जीना छोड़ दिया था। ये लोग इतने घटिया थे कि एक प्रेग्नेंट महिला इनके पैर पकड़ती रही, लेकिन फिर भी उसके पति को नहीं छोड़ा। हर शख्स को डराकर काबू में रखना चाहते थे। अब सब शांत हो गए हैं।‘ शाहजहां की मां बोलीं…मैं टीचर रही, क्या बेटे को रेप सिखाऊंगीइसके बाद हम शेख शाहजहां के घर पहुंचे। ये संदेशखाली से करीब 7 किलोमीटर पहले ही है। सड़क से सटकर चार मकान बने हैं। यहां शाहजहां शेख के परिवार के साथ उसके दो भाई और मां रहती हैं। घर पर कुछ बच्चे खेलते मिले। हमारी पहली मुलाकात शाहजहां के भाई की पत्नी से हुई। उन्होंने शाहजहां की मां रजिया शेख से मिलवाया। शाहजहां से मुलाकात हुई या नहीं, ये पूछते ही 70 साल की रजिया कहती हैं, ‘अब तक तीन बार मिली हूं। हर बार वो एक ही बात कहता है- मां मेरे लिए दुआ करो, अल्लाह सब ठीक कर देंगे। मुझे भी कानून पर भरोसा है। इतने दिन से वो जेल में हैं, हम सबको न्याय की उम्मीद है।‘ राजिया आगे कहती हैं, ‘हमारे परिवार के बारे में क्या कुछ नहीं कहा गया, जबकि मैं खुद टीचर थी। आसपास के कई बच्चे मेरे पास पढ़ने आते थे। अब आंखें काम नहीं करतीं, इसलिए पढ़ाना छोड़ दिया। आपको लगता है कि मैं अपने बच्चों को रेप की शिक्षा दूंगी। मैं दो बार हज करके आई हूं। जिस साल ये घटना हुई, मेरे बेटे और बहुएं भी हज के लिए जाने वाले थे, लेकिन खुदा की कुछ और ही मर्जी थी।‘ शाहजहां को जेल में इसलिए डाला क्योंकि वो मुसलमानमां रजिया शेख के पास खड़ी शाहजहां की भाभी कैमरे पर आने को तो राजी नहीं हुईं, लेकिन मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, ‘जिस वक्त शाहजहां शेख के खिलाफ आंदोलन हुआ, सभी चैनलों में दिखाया गया। उसके पक्ष में लोगों ने आंदोलन किया, तो किसी ने नहीं दिखाया।‘ शाहजहां ने किसी को आंख उठाकर भी नहीं देखा। न ही उसने मदद करते वक्त किसी की जाति या धर्म देखा, लेकिन उसे धर्म देखकर जेल में डाला गया है। ‘संदेशखाली हमारे घर से इतनी दूर है, वो वहां क्या करने जाएगा? हमारा सारा कारोबार नदी के इस पार है। वहां से हमारा कोई लेना-देना नहीं हैं। उसे इसलिए जेल में डाला गया क्योंकि वो मुसलमान है। यहां अब सिर्फ हिंदू मुसलमान ही होता है।‘ वे आगे कहती हैं, ‘हमारे परिवार में सब पढ़े-लिखे हैं। पति डॉक्टर हैं। आसपास के लोगों में ही हमारा अच्छा उठना-बैठना है। हम तो मदद भी धर्म देखकर नहीं करते। फिर भी हमारे साथ ऐसा हो रहा है।‘ पिछले दो साल में आए बदलाव के बारे में पूछते ही वे गुस्से में कहती हैं, ‘हमारी जिंदगी ही मुश्किल हो गई है। सारा काम घर की महिलाओं को देखना पड़ता है। बच्चों को स्कूल पहुंचाने से लेकर कोर्ट कचहरी तक सब हम ही लोग देख रहे हैं। कभी नहीं सोचा था कि ऐसी जिंदगी हो जाएगी।‘ पुलिस बोली- शाहजहां मर्डर और हिंसा के केस में जेल मेंकेस की जांच कहां तक पहुंची, जब इसकी जानकारी हमने संदेशखाली पुलिस स्टेशन के SHO से मांगी, तो उन्होंने कहा कि चार्जशीट कोर्ट में जा चुकी है। इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकते। लिहाजा हमने बशीरहाट SP ऑफिस का रुख किया। यहां एक पुलिस अधिकारी ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि वो दो मामलों में जेल में हैं। एक 2019 का मामला है, जब शाहजहां शेख को इलेक्शन के बाद प्रदीप मंडल, देवदास मंडल और सुकांता मंडल की हत्या के मामले में CBI ने मुख्य आरोपी पाया था। इसके अलावा दूसरा केस 2024 में ED की रेड के दौरान हुई हिंसा का है। रेप केस के बारे में पूछने पर बोले कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है।…………….. ये खबर भी पढ़ें… ‘हमें बचा लो, बांग्लादेश में मर जाएंगे‘ 'पुलिस ने हमें मारपीट कर जबरदस्ती बांग्लादेश भेज दिया। हमारे पास न खाने-पीने के लिए कुछ है और न रहने की जगह। हम बहुत तकलीफ में हैं, हमें यहां से निकाल लो वरना मर जाएंगे। हमें भारत लौटना है। बच्चे भी पास नहीं हैं।' 65 साल की अलकन बीबी बांग्लादेश से फोन कर रिश्तेदारों से मदद मांग रही हैं। पढ़िए पूरी खबर…
DNA: खलीफा का संवाद यानी युद्ध का आगाज!...ईरान के लिए ट्रंप का 'अंडरकवर प्लान'; जानिए पूरी डिटेल
अमेरिका और ईरान के बीच वर्ता होने की खबर सामने आने के बाद एक उम्मीद की किरण दिखी है. माना जा रहा है कि इस वार्ता से ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव कम हो सकता है.
US Presidents: अमेरिका के लगभग सभी राष्ट्रपति दो खास तुरुप के इक्कों की वजह से खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर नेता मानते हैं. खासकर 23 देशों वाले उत्तरी अमेरिका महाद्वीप और 12 देशों वाले दक्षिण अमेरिका पर तो उनकी खास नजर रहती है. ग्लोबल ग्लोब पर एशिया, अफ्रीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्टिका तक अमेरिकी राष्ट्रपति कैसे अपनी नजर रखते हैं, जानिए.
बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा भड़क गई है. इस बार सरकारी कर्मचारियों ने मोहम्मद यूनुस के आवास जमुना के बार प्रदर्शन किया है. हिंसक झड़प में कई लोगों के घायल होने की खबर है.
UAE Releases More Than 100 Afghan Prisoners:यूएई ने अपने नेशनल डे के मौके पर 100 से ज्यादा अफगान नागरिकों को जेल से रिहा कर दिया है. यह कदम ऐसे दौर में हुआ है, जब पाकिस्तान और तालिबान के बीच रिश्तों में जमकर तनाव फैला हुआ है. समझते हैं पूरी बात.
Vladimir Alexeyev Attack:मास्को में रूसी लेफ्टिनेंट जनरल व्लादिमीर एलेक्सेयेव पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें कई गोलियां लगीं और अस्पताल में भर्ती कराया गया है. रूसी जांच समिति ने हत्या के प्रयास और अवैध हथियारों के मामलों में केस दर्ज किया है. हमलावर फरार है और जांच एजेंसियां सीसीटीवी व गवाहों के आधार पर जांच कर रही हैं.
जेफ्री एपस्टीन से रिश्तों पर बिल गेट्स ने जताया खेद, कहा-उसके साथ बिताए हर मिनट पर पछतावा
ऑस्ट्रेलिया के ‘9न्यूज’ को दिए एक साक्षात्कार में गेट्स ने कहा कि उन्हें एपस्टीन के साथ बिताए समय पर गहरा पछतावा है और वे इसके लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा, “उसके साथ बिताए हर मिनट पर मुझे अफसोस है। वह एक बड़ी गलती थी।”
बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री ए. के. अब्दुल मोमेन ने 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव को “पाखंड” करार दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर विपक्षी दलों को चुनाव से बाहर कर दिया गया है. मोमेन ने अमेरिका से अपील की है कि वह इस चुनाव को मान्यता न दे.
अमेरिका में सस्ती दवाओं के लिए वेबसाइट लॉन्च, ट्रंप बोले- ये है 'वेरी बिग डील'; लोगों का बचेगा पैसा
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सस्ती दवाओं के लिए TrumpRx.gov नाम की नई फेडरल वेबसाइट लॉन्च की है. ट्रंप का दावा है कि इससे प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों में ऐतिहासिक कमी आएगी और लोग पैसा बचाकर स्वस्थ रहेंगे. योजना के तहत कूपन के जरिए दवाएं वैश्विक न्यूनतम कीमत पर उपलब्ध होंगी.
बीएलए के प्रवक्ता ने दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने अब तक पाकिस्तानी सेना के 310 सैनिकों को मार गिराया है। वहीं पाकिस्तानी सेना ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में 216 विद्रोहियों को ढेर किया है और अभियान को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया गया है।
ओमान में आज से शुरू अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता
शुक्रवार को परमाणु वार्ता के लिए यूएस और ईरान ओमान में मिलेंगे। व्हाइट हाउस ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम कूटनीति पर काम कर रही है जिसका मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक लगाना है
ये खबर सुनकर आपको भी हंसी और हैरानी दोनों होगी. पोलैंड में संसद के निचले सदन (सीज्म) के स्पीकर व्लोडजिमिएर्ज चार्जास्टी(Wodzimierz Czarzasty) ने अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को खुलकर लताड़ लगाई है. ऐसी बात कही है, जिसके बाद पूरी दुनिया में अपना दबदबा बना रहे ट्रंप की सरकार भड़क गई है. जानें पूरी बात.
अमेरिका में बड़ा रेल हादसा, पटरी से उतरी मालगाड़ी, पानी में गिरे प्रोपेन से भरे डिब्बे
US Train Accident: अमेरिका में एक बड़ा हादसा हो गया है. यहां के कनेक्टिकट राज्य के मैन्सफील्ड शहर में एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. इस ट्रेन में दो इंजन और 41 डिब्बे थे.
ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने का हाई अलर्ट जारी किया है. इसी दौरान मस्कट में अमेरिका–ईरान परमाणु बातचीत होने वाली है. आधिकारिक तौर पर हमले की घोषणा नहीं हुई, लेकिन जानकार मानते हैं कि बातचीत विफल रही तो सैन्य विकल्पों पर विचार तेज हो सकता है.
अमेरिका में सस्ती दवाओं की नई राह: ट्रंप ने लॉन्च की वेबसाइट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रंपआरएक्सडॉटजीओवी नाम की एक नई फेडरल वेबसाइट लॉन्च की, जो आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दर्जनों प्रिस्क्रिप्शन दवाओं पर भारी छूट देने का विश्वास दिलाती है
Zohran Mamdani: न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी हिजाब का समर्थन करके फंस गए हैं. उन्होंने हिजाब को मुस्लिम विरासत की भक्ति और जश्न का एक शक्तिशाली प्रतीक बताया, जिसके बाद लोगों ने उनकी जमकर आलोचना की.
Russia-Ukraine Talks Second Round: अमेरिका की मध्यस्थता में रूस-यूक्रेन वार्ता का दूसरा दौर समाप्त हो गया है, हालांकि युद्धविराम, क्षेत्रीय विवाद और सुरक्षा गारंटी जैसे अहम मुद्दों पर अब भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि अगली शांति वार्ता जल्द होगी.
यूएई में रूस-यूक्रेन वार्ता खत्म, कैदियों की अदला-बदली पर सहमति
अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत का दूसरा दौर पूरा हो गया है। इस बातचीत में दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर कैदियों की अदला-बदली पर सहमति जताई
अमेरिका की मशहूर टीवी एंकर सवाना गुथरी की 84 वर्षीय मां नैन्सी गुथरी पिछले पांच दिनों से लापता हैं. घर से खून के निशान मिले हैं और मीडिया को फिरौती नोट भेजे गए हैं. क्या जिंदा हैं नैन्सी गुथरी? मशहूर एंकर की मां की तलाश में ट्रंप ने पूरी फौज उतार दी है. नैन्सी गुथरी का केस बन जाएगा ऐतिहासिक किडनैपिंग मामला? जानें कुछ अमेरिकीहाई-प्रोफाइल किडनैपिंग मामला.
नेपाल में बारात ले जा रही बस हादसे का शिकार, 8 लोगों की मौत
नेपाल के बैतडी जिले में गुरुवार शाम एक शादी की बारात ले जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई
5 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस को लेकर कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा- पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी ने देश के लोगों को समस्या माना। पीएम ने बिना नाम लिए राहुल और उनके परिवार पर आरोप लगाया कि महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया। पीएम मोदी के ऐसे ही 4 बड़े बयान और उनके पीछे की सच्चाई जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… बयान-1: नेहरू-इंदिरा ने देश के लोगों को समस्या माना पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘हमारी और कांग्रेस की अप्रोच में जमीन-आसमान का अंतर है। देश के नौजवानों पर हमें भरोसा है। कांग्रेस देशवासियों को ही समस्या मानती है। एक बार इंदिरा जी ईरान में भाषण दे रहीं थी। उन्होंने नेहरू जी के साथ बातचीत का उल्लेख किया, 'जब किसी ने मेरे पिता जी से पूछा कि उनके सामने कितनी समस्याएं हैं तो उन्होंने कहा 35 करोड़।' उस समय हमारे देश की जनसंख्या 35 करोड़ थी।’ ‘इंदिरा जी ने आगे कहा- आज देश की जनसंख्या 57 करोड़ है। मेरी समस्याओं की संख्या भी इतनी ही बड़ी है।’ कोई ऐसा हो सकता है कि अपने देश के लोगों को समस्या मानें? ये लोग भारत के लोगों को समस्या मानते हैं।’ सच्चाई क्या है? बयान-2: 'महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया' पीएम मोदी ने क्या कहा- नेहरू- गांधी परिवार का नाम लिए बिना पीएम बोले, ‘चोरी इनका खानदानी पेशा है। इन्होंने महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया।’ सच्चाई क्या है? बयान-3: ‘मोहब्बत की दुकान वाले मोदी तेरी कब्र खुदेगी के नारे लगा रहे’ पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘मोहब्बत की दुकान खोलने वाले ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के नारे लगा रहे हैं। ये कौन सी दुकान है जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करते हैं? ये कौन से संविधान से सीखा है, जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करते हैं?’ सच्चाई क्या है? बयान-4: सरदार सरोवर प्रोजेक्ट नेहरु ने शुरु किया, दशकों बाद मैंने पूरा किया पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘सरदार पटेल ने इसका सपना देखा था, नेहरू ने इसकी आधारशिला रखी थी, और कई दशकों बाद मैंने इसका उद्घाटन किया। यही कांग्रेस की हालत है। वे सिर्फ कल्पना करते हैं, लेकिन उसे लागू नहीं कर पाते। जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब इस प्रोजेक्ट के लिए मुझे 3 दिन अनशन पर बैठना पड़ा था। ’ सच्चाई क्या है? --------- ये खबर भी पढ़िए… क्या लोकसभा में पीएम मोदी को खतरा था:स्पीकर बिरला ने क्यों टाली उनकी स्पीच; किस 'अप्रत्याशित घटना' का संकेत दिया 22 साल बाद प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ। 4 फरवरी को बजट सत्र के 7वें दिन विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में पीएम मोदी नहीं पहुंचे। पूरी खबर पढ़िए…
3 फरवरी को ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स ने दिल्ली में हड़ताल की। इसमें शामिल अर्बन कंपनी की वर्कर नेहा (बदला हुआ नाम) 7-8 सालों से गुरुग्राम में काम कर रही हैं। वे कहती हैं, ‘12-13 घंटे काम करने के बाद 20-25 हजार रुपए बचते हैं। कंपनी 250 करोड़ का टर्नओवर कर रही है, लेकिन हम लोगों को नोचा जा रहा है।‘ वहीं अर्बन कंपनी के लिए काम करने वाली भावना कहती हैं कि हमें ऑर्डर कैंसिल करने की भी परमिशन नहीं। हम इंसान हैं, रोबोट नहीं। सिर्फ नेहा और भावना ही नहीं तकरीबन सभी गिग वर्कर्स की यही शिकायतें हैं। उनका कहना है कि हमारे लिए न कंपनी सोच रही न सरकार। किसी को हमारी तकलीफ न दिखाई देती है न सुनाई। वर्कर्स अपनी मांगें लेकर PM मोदी और अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मेमोरेंडम भी दे चुके हैं। इसमें गिग और प्लेटफॉर्म से जुड़े काम के रेगुलेशन के लिए कानून बनाने की मांग की गई है। सरकार ने 1 फरवरी को पेश बजट से पहले आए इकोनॉमिक सर्वे में माना कि ज्यादातर गिग वर्कर्स 15 हजार रुपए से भी कम कमा रहे हैं। इनके लिए पॉलिसी बननी चाहिए लेकिन बजट में कोई घोषणा नहीं हुई। हमने दिल्ली और दूसरे शहरों में कुछ गिग वर्कर्स से बात कर उनकी मुश्किलें समझने की कोशिश की। संडे भी काम का प्रेशर, एक्सीडेंट होने पर भी छुट्टी नहींदिल्ली में प्रदर्शन में शामिल गिग वर्कर नेहा कहती हैं, ‘कंपनी अपने हिसाब से काम का दबाव बनाती है। हम पर शनिवार-रविवार को भी लगातार काम करने का दबाव बनाया जाता है। ऑटो असाइंड (जिसमें वर्कर की सहमति नहीं हो) बुकिंग मिलती है।‘ ‘हम जिस परिवार के लिए काम करते हैं, उन्हीं के लिए समय नहीं मिल पाता। अगर हमारा एक्सीडेंट हो गया तो हमें AI से चैट करनी पड़ेगी। इसके बावजूद जरूरी नहीं है कि समाधान हो जाए।’ नेहा आगे कहती हैं, ’कंपनी सिर्फ अपना मुनाफा कमा रही है। हमें एक लाख रुपए का इंश्योरेंस देने के लिए भी शर्तें रखती हैं कि शनिवार-रविवार को काम के 70-80 घंटे पूरे करने होंगे। कोई ऑर्डर कैंसिल नहीं होना चाहिए। कंपनी कहती है कि 4 बजे से 8 बजे तक काम करना कम्पलसरी होगा। अगर 8 बजे बुकिंग आएगी और एक-दो घंटे का काम होगा तो हम 11 बजे घर जाएंगे?’ प्रदर्शन में आईं गिग वर्कर भावना (बदला हुआ नाम) 6 सालों से अर्बन कंपनी के लिए काम कर रही हैं। वे कहती हैं, ‘वर्कर्स को ऑर्डर कैंसिल करने की परमिशन होनी चाहिए क्योंकि वे इंसान हैं रोबोट नहीं। उन्हें भी दिक्कत हो सकती है। कंपनी हर बात पर आईडी ब्लॉक करने की धमकी देती है।’ ’अगर आपने एक बुकिंग कैंसिल की तो पेनाल्टी दो ऑर्डर में लगेगी। अगर चार बार ऑर्डर कैंसिल किया तो हमारी आईडी परमानेंट ब्लॉक कर दी जाती है। बात करने का भी मौका नहीं मिलता। पहले कंपनी बुकिंग पर सिर्फ 10% तक कमीशन लेती थी लेकिन अब 30% तक काटने लगी है। हमें इंश्योरेंस तक नहीं मिलता।’ ’शनिवार-रविवार को काम करना कम्पलसरी कर दिया है, उसमें छुट्टी का कोई ऑप्शन नहीं है। एक बार सर्विस के दौरान ही एक्सीडेंट हो गया। पैर से खून निकल रहा था। कंपनी को बताया तो उधर से कहा गया कि क्लाइंट को कनेक्ट करके पूछता हूं। क्लाइंट ने कहा कि आपको थोड़ी सी चोट लगी है, आ जाओ। काम पूरा कर लो, फिर पट्टी करवा लेना। ऐसे मामलों में भी अगर हम ऑर्डर कैंसिल करते हैं तो पेनाल्टी लगती है।’ 12 घंटे काम, इंसेंटिव भी कम, टीशर्ट-बैग भी खुद खरीद रहेजोमैटो के लिए डिलिवरी का काम करने वाले मोहम्मद शादाब (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि लॉकडाउन में नौकरी छूटने की वजह से मजबूरी में ये काम करना पड़ रहा है। वे इस वर्किंग मॉडल की दिक्कतें गिनाते हुए कहते हैं, ‘कंपनी कौन सा मैप इस्तेमाल करके बताती है, हमें नहीं पता। वो बताती है कि आप पिकअप लोकेशन से 2 मिनट दूर हैं, जबकि गूगल मैप पर 7-8 मिनट दिखाता है। जब ऐसा होता है तो ये हमारे ऊपर आता है। कंपनी सिर्फ परेशान करती है।‘ ‘इंसेंटिव पहले से काफी कम हो गया है। जैकेट से लेकर टीशर्ट-बैग तक खुद खरीदना पड़ता है। अगर हम देरी से डिलीवरी करते हैं, तो कंपनी रेटिंग गिरा देती है। जबकि ये जाम के कारण होता है, कई बार हमें गलियों में घूम कर जाना पड़ता है।‘ सुबह 9 बजे से रात के 10-11 बजे तक काम करता हूं। तब जाकर 700-800 रुपए का काम होता है। उसमें भी 250-300 का पेट्रोल खर्च हो जाता है। शादाब कहते हैं कि वर्कर्स को सही रेट मिलना चाहिए, एक फिक्स रेट हो। बेरोजगारी के कारण ही लोग ऐसी कंपनियों में काम कर रहे हैं, नहीं तो ये काम कोई नहीं करना चाहता। कोई व्यक्ति जोमैटो, स्विगी में काम करके खुश नहीं है। कोलकाता में अर्बन कंपनी के जरिए सफाई का काम करने वाले महेश (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि पिछले कुछ समय से कंपनी जबरदस्ती आईडी ब्लॉक कर रही है। वे बताते हैं, ‘हम अगर कुछ बोलने जाते हैं, तो धमकी मिलती है कि हमारी आईडी स्थायी रूप से ब्लॉक कर दी जाएगी। हमने 27 जनवरी और 3 फरवरी को कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया। हम चाहते हैं कि सरकार सख्त कानून लाए, जिससे कंपनियों की मनमानी रुके।‘ सरकार ने सर्वे में माना कि पॉलिसी बनना जरूरी केंद्र सरकार ने हाल में जारी इकनॉमिक सर्वे में बताया कि 2025 में देश में गिग वर्कर्स की संख्या बढ़कर 1.20 करोड़ हो गई है। ये देश की कुल वर्क फोर्स का 2% से ज्यादा है। सर्वे में सरकार ने माना है कि गिग इकोनॉमी को मजबूत बनाने के लिए पॉलिसी जरूरी है। ताकि ये प्लेटफॉर्म्स पारदर्शी हो और एल्गोरिदम के आधार पर भेदभाव ना हो। सर्वे में कहा गया है कि 40% गिग वर्कर्स महीने में 15,000 रुपए से कम कमाते हैं। ऐसे में परेशानी सुलझाने के लिए वेटिंग टाइम का मुआवजा, प्रति घंटे के हिसाब से न्यूनतम मजदूरी जैसे सुझाव दिए गए हैं। पिछले महीने सेंट्रल लेबर मिनिस्ट्री ने इन प्लेटफॉर्म कंपनियों से '10 मिनट डिलिवरी' का प्रचार या ब्रांडिंग बंद करने का आदेश दिया था। ये फैसला गिग वर्कर्स की हड़ताल के बाद लिया गया था। इसके बाद कंपनियों ने ये एड या टैगलाइन हटा दी। हालांकि सरकार ने इसे लेकर कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया था। गिग वर्कर्स की मांगों और प्रदर्शन को लेकर हमने केंद्रीय श्रम मंत्रालय और ऑनलाइन कंपनियों से जवाब मांगा। हालांकि स्टोरी लिखे जाने तक उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। आगे मिलने पर उनका पक्ष रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। वर्कर्स के संगठन बोले..कंपनियां मुनाफा कमा रहीं, गिग वर्कर्स खाली हाथगिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) के राष्ट्रीय संयोजक निर्मल गोराना अग्नि आरोप लगाते हैं कि सरकार ने इन कंपनियों को खुली छूट दे रखी है। इसी छूट की वजह से कंपनियां मनमानी कर रही हैं। निर्मल कहते हैं, ‘अगर सरकार चाहे तो दो मिनट के अंदर कंपनियों से सवाल कर सकती है। जब तक सरकार बोलेगी नहीं तब तक कुछ नहीं हो सकता। कब तक अलग-अलग राज्य इस पर नियम बनाते रहेंगे। एक केंद्रीय कानून बनना चाहिए ताकि सबको सुरक्षा मिल जाए।‘ वर्कर्स की मांगों को लेकर निर्मल कहते हैं, ‘10 मिनट में डिलीवरी खत्म करने को लेकर कोई ऑफिशियल लेटर जारी नहीं हुआ। कानून के साथ इन सभी को वर्कर्स का दर्जा मिले। पार्टनर के नाम पर इन्हें धोखा दिया जा रहा है। कंपनियों को मुनाफे का बड़ा हिस्सा मिल रहा है, जो लोग काम कर रहे हैं उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। इस वर्किंग मॉडल में बदलाव की तत्काल जरूरत है।’ ‘गिग वर्कर्स से जबरदस्ती काम कराया जा रहा है। एक ऑर्डर कैंसिल करने पर उनके पूरे काम का कोई मतलब नहीं रह जाता, रेटिंग खराब हो जाती है। इन्हें सही सैलरी और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।‘ गिग वर्कर्स के साथ स्कैम हो रहा, सरकार देखेGIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह पहले अर्बन कंपनी की वर्कर थीं। वो कहती हैं कि कंपनी में रहते हुए उन्होंने खुद शोषण का सामना किया। जब इसके खिलाफ आवाज उठाई तो कंपनी ने पुलिस कार्रवाई की धमकी दी। उनकी आईडी ब्लॉक कर दी गई थी। उसके बाद ही उन्होंने इन गिग वर्कर्स के लिए काम करना शुरू किया। सीमा कहती हैं, ‘हम अब भी वही मांग कर रहे हैं कि सरकार एक कानून लेकर आए। उनकी जो असल मजदूरी है, उन्हें वो मिले। एकतरफा तरीके से आईडी ब्लॉक करने पर रोक होनी चाहिए। 13-14 घंटे काम करने पर भी उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। गिग वर्कर्स के साथ ये बहुत बड़ा स्कैम हो रहा है. सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए।‘ महिला वर्कर्स की चुनौतियों पर सीमा कहती हैं, ‘कई बार ऐसा होता है कि लड़कियों के साथ मारपीट होती है। उनके साथ रेप और छेड़छाड़ की घटनाएं आई हैं लेकिन कंपनियां इन मामलों को दबा देती हैं। कोई ऐसा प्लेटफॉर्म नहीं हैं जहां वो अपनी आवाज उठा सकती हैं। ज्यादातर लड़कियां 15 हजार रुपए कमा रही हैं लेकिन कंपनी इन्हीं की मेहनत के दम पर अरबों-खरबों का कारोबार कर रही है।‘ एक्सपर्ट: जब कंपनी वर्कर मानेगी हालात तब सुधरेंगे सोशल एक्टिविस्ट और मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक निखिल डे कहते हैं, ‘इन वर्कर्स को अधिकार तभी मिलेंगे, जब उन्हें 'वर्कर' माना जाएगा। भारत में पूरा असंगठित क्षेत्र ही इसी तरीके से बना हुआ है। वे माइक्रो कॉन्ट्रैक्ट, अस्थायी कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों में गिग वर्कर्स के लिए वहां के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि संस्थान और कर्मचारी का संबंध बनाना चाहिए। यहां कंपनियां अपना डेटा नहीं शेयर करना चाहती है, जबकि सारा डेटा वर्कर्स का ही है।‘ डिलीवरी वर्कर्स को कर्मचारी ना माने जाने पर निखिल कहते हैं, ‘मौजूदा मॉडल को फिलहाल तीन चीजों से सुधारा जा सकता है। पहला, उनकी न्यूनतम मजदूरी तय की जानी चाहिए। दूसरा, उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। तीसरा, काम के दौरान मिलने वाली सुरक्षा।‘ ‘महाराष्ट्र में 60 साल पहले बोरी ढोने वाले मजदूरों (उन्हें हमाल कहा जाता है) के लिए वहां के हमाल यूनियन ने फॉर्मूला निकाला कि हर बोरी पर ये तीन चीजें सुरक्षित हों। इसके तहत एक बोर्ड गठित करके सारे दुकानदारों/व्यापारियों को रजिस्टर कराया गया और मजदूरों की हर बोरी पर लेवी देने का फॉर्मूला लाया गया। जो मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए इस्तेमाल होता था। इसी तरीके का काम अभी गिग इकोनॉमी में हो सकता है।‘ निखिल आगे कहते हैं कि डेटा से ही पारदर्शिता आ सकती है। अगर कर्मचारी नहीं भी बनाएं लेकिन अगर हर ट्रांजैक्शन पर संस्थान-कर्मचारी का संबंध बना लें और जिम्मेदारी बांध दें तो इस समस्या का हल हो सकता है। केंद्र सरकार को ये करना चाहिए कि पूरे देश में एक मिनिमम स्टैंडर्ड बनाए ताकि शोषण रूक सके।…………………. ये खबर भी पढ़ें… 10 मिनट में डिलीवरी का प्रेशर, कमाई सिर्फ 700 रुपए ‘ये मेरा आज का 28वां ऑर्डर है। लिफ्ट से कस्टमर को ऑर्डर देने जा रहा हूं। देखो भाई, यहां के 15 रुपए मिले। मेरे 15 घंटे होने वाले है और अब तक 762 रुपए की कमाई हुई है। ब्लिंकिट बहुत कम पैसे दे रहा है। मैं घर जा रहा हूं, अब काम नहीं करना है।’ ब्लिंकिट के डिलीवरी पार्टनर हिमांशु थपलियाल ने 29 सितंबर को ये वीडियो बनाया और इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। पढ़िए पूरी खबर…
शेख हसीना के तख्तापलट और भागकर भारत आने के बाद से ही बांग्लादेश और इंडिया के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। एक तरफ बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं तो दूसरी तरफ जमात और BNP जैसी पार्टियां हसीना को वापस भेजने की मांग पर अड़ी हुई हैं। 12 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव हैं। इन चुनावों में भी सबसे बड़ा मुद्दा भारत के साथ दोस्ती या दुश्मनी ही नजर आ रहा है। फिलहाल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार डॉ यूनुस चला रहे हैं। ये सरकार हिंदुओं पर हो रहे हमलों को कम्युनल न मानकर निजी दुश्मनी के मामले बता रही है। दैनिक भास्कर ने डॉ यूनुस के चीफ एडवाइजर और प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम से भारत से रिश्तों, शरिया कानून और हिंदुओं के कत्ल जैसे मुद्दों पर बात की। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सबसे बुरे दौर में हैं। आप भारत से क्या चाहते हैं?जवाब: भारत को समझना होगा कि बांग्लादेश बड़ा देश है। वो हमें भूटान न समझे। हम 18 करोड़ आबादी वाला देश हैं। हसीना के दौर में खुलेआम चुनाव में धांधली हुई। इसके बावजूद किसने हसीना का समर्थन किया, लोग ये सब समझते हैं। रिश्तों को बेहतर करने के लिए दोनों देशों को समझना होगा कि रिश्ता ईमानदारी, सम्मान और बराबरी के साथ हो सकता है। हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। भारत हमारा बड़ा पड़ोसी है। भारतीय इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है। हमारे बीच 4 हजार किमी का बॉर्डर है। हम भौगोलिक रूप से जुड़े हुए हैं। एक-दूसरे की रिश्तेदारियां हैं। हमारी भाषा, संस्कृति काफी मिलती-जुलती है। सवाल: डॉ. यूनुस क्या चाहते हैं, वे इन विवादों को कैसे देख रहे हैं?जवाब: मुझे लगता है कि सभी शेख हसीना की वापसी चाहते हैं। उनके दिल्ली में होने से किसी का फायदा नहीं हो रहा। वे वहां रहकर बांग्लादेश में लोगों को भड़का रही हैं, विद्रोह की कोशिश कर रही हैं। सवाल: बांग्लादेश की टीम ने भारत आकर टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप खेलने से मना कर दिया, ऐसा क्यों?जवाब: टीम की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी चिंता थी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने जो फैसला लिया, हमने उसका समर्थन किया। मैं इस पर ज्यादा नहीं कहना चाहता। सवाल: चुनाव के ठीक पहले 118 अफसरों का प्रमोशन हुआ लेकिन उसमें एक भी हिंदू या अल्पसंख्यक नहीं है? जवाब: उसमें बौद्ध कम्युनिटी से आने वाले एक अफसर हैं। वैसे मुझे लगता है कि हम धर्म देखकर ऐसे फैसले नहीं करते। हसीना सरकार में अच्छे अफसरों को काफी नजरअंदाज किया गया था। सवाल: मतलब आप कह रहे हैं कि सभी हिंदू अफसर अवामी लीग के समर्थक हैं?जवाब: हमने सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि उन मुस्लिम अफसरों को भी प्रमोट नहीं किया, जो भ्रष्ट या नाकाबिल थे। हमने जो नई सरकारी नौकरियां दी हैं, उनमें कई कर्मचारी हिंदू कम्युनिटी के भी हैं। सवाल: स्टूडेंट लीडर उस्मान हादी की हत्या हुई, सरकार ये क्यों नहीं रोक सकी?जवाब: 2014 में हसीना के वक्त चुनाव में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। BNP ने चुनाव का बहिष्कार किया था। तब चुनाव में 115 लोगों की हत्या हुई थी। अब ऐसा नहीं है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि इस बार चुनाव अनाउंस होने के बाद से अब तक सिर्फ 4 मौतें हुईं। इसमें स्टूडेंट लीडर उस्मान हादी भी शामिल हैं। उस्मान को अवामी लीग के समर्थकों ने मारा है। हमारी रिपोर्ट्स बताती हैं कि अवामी लीग के सीनियर लीडर ने हादी को मरवाने के लिए फंडिंग की है। पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक हादी की हत्या करने के बाद हत्यारे बांग्लादेश की सीमा पार करके भारत में दाखिल हो गए। सवाल: बांग्लादेश की भारत से दूरी बढ़ रही हैं लेकिन दूसरे देशों से नजदीकियां बढ़ी हैं?जवाब: हमें पूरी दुनिया से समर्थन मिला है। अमेरिका, चीन, सार्क देश और वेस्टर्न यूरोप के देशों से समर्थन मिला है। डॉ यूनुस ने शांति और स्थिरता लाने के लिए काम किया है। इकोनॉमी में भी ग्रोथ देखने को मिली है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि हम 6% ग्रोथ के साथ आगे बढ़ेंगे। हमारा फोकस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के साथ संबंध बेहतर करने पर था और डॉ यूनुस ने इसे बखूबी किया है। सवाल: चुनाव से पहले बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले और हत्याएं हुईं, आपके सरकार में रहते ऐसा कैसे हो रहा है?जवाब: पिछले साल हमने हिंसा पर सालाना रिपोर्ट जारी की थी। दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा के वक्त हालात बेहतर थे। कम्युनल और हेट क्राइम के मामले में पिछले एक साल में सिर्फ एक ही हत्या हुई है, जिसमें दीपू चंद्र दास का मामला है। दूसरी घटनाओं में जमीन और कानून व्यवस्था के मामले या किसी दूसरी वजहों से हत्या हुई हैं। अवामी लीग हर हिंदू की हत्या को धार्मिक हिंसा में हुई मौत बता रही है। आप खुद जाकर इन्वेस्टिगेशन करें। हम आपका स्वागत करते हैं कि आप जाकर उन परिवारों से मिलें और बात करें। सवाल: हिंदू अल्पसंख्यक कम्युनिटी ने डेटा देकर कहा कि पिछली सरकार के मुकाबले अपराध बढ़े हैं, क्या वे झूठ बोल रहे हैं?जवाब: मुझे लगता है कि ऐसे संगठनों के नेता अवामी लीग से मिले हुए हैं। वे जो डेटा जारी करते हैं वो गलत हैं। कई मीडिया संगठनों ने उनके डेटा पर रिसर्च की है। वे बताते हैं कि डेटा में से कोई भी घटना कम्युनल किलिंग की नहीं है। ज्यादातर मामले लूटपाट, आपसी रंजिश के हैं। बांग्लादेश हिंदू, बुद्ध, क्रिश्चियन परिषद नाम के संगठन और लोग हसीना के पालतू कुत्तों की तरह के हैं। सवाल: डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार निष्पक्ष चुनाव कराना कैसे सुनिश्चित करेगी?जवाब: ये अंतरिम और निष्पक्ष सरकार है। बांग्लादेश में किसी पार्टी ने अंतरिम सरकार पर पक्षपाती होने का आरोप नहीं लगाया है। डॉ यूनुस की सरकार में ईमानदारी से काम हो रहा है। हमने चुनाव में 10 लाख सिक्योरिटी फोर्स, पुलिस, पैरामिलिट्री और एलीट फोर्स लगाने का फैसला किया है। मुश्किल जगहों पर सीसीटीवी कैमरा और सुरक्षाबलों को वियरेबल कैमरे देंगे। हमने क्रिटिकल इलाकों में ड्रोन सर्विलांस की भी तैयारी की है। ताकि हम चुनाव मॉनीटर कर सकें। अगर चुनाव के दौरान कोई गड़बड़ी होती है, तो पुलिस और सुरक्षाबल तुरंत मौके पर पहुंच पाएं। हमने इसकी डिटेल प्लानिंग की है। लोकल प्रशासन में हमने निष्पक्षता और बैकग्राउंड चेक करके ही अधिकारियों को चुना है। सवाल: वोटिंग के दिन एक वोट सरकार बनाने के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए देना होगा, क्या इससे कनफ्यूजन नहीं होगा ?जवाब: मुझे लगता है कि जिसे भी बहुमत मिलेगा, वो सरकार बनाएगा। बाकी रेफरेंडम देश में रिफॉर्म को लेकर है। अगर लोग ‘हां’ के पक्ष में वोट देते हैं तो हम बेहतर राजनीतिक व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उसमें कोई भी नेता हसीना की तरह तानाशाही नहीं कर पाएगा। सवाल: अगर किसी को बहुमत नहीं मिला तब क्या होगा?जवाब: किसी भी दूसरे देश या भारत की तरह गठबंधन की सरकार बन सकती है। सवाल: अगर रेफरेंडम के पक्ष में वोटिंग हुई तो क्या बांग्लादेश से सेक्युलरिज्म निकाल दिया जाएगा?जवाब: मुझे लगता है कि वैसा ही रहेगा। सेक्युलरिज्म को हम प्लूरलिज्म से बदलेंगे। हालांकि मुझे नहीं लगता कि इस मामले में कोई बड़ा बदलाव होगा। सवाल: क्या बांग्लादेश में सेक्युलरिज्म की जगह इस्लामिक शरिया कानून होगा?जवाब: ऐसा नहीं होगा, इसे लागू करने का सवाल ही नहीं उठता। सवाल: 40% वोट शेयर वाली अवामी लीग को चुनाव नहीं लड़ने दे रहे, आपको नहीं लगता ये अलोकतांत्रिक है?जवाब: अवामी लीग अपना वोट शेयर 40% होने का दावा करती है, लेकिन सभी चुनावों में धांधली हुई थी। उनका वोटिंग शेयर 10% ही था। वे जानते थे कि BNP उनके लिए चुनौती है, इसलिए चुनाव में धांधली करके जीतते थे। अवामी लीग ने जुलाई और अगस्त 2024 में सारा समर्थन खो दिया लेकिन मुझे लगता है कि पुलिस और सिक्योरिटी की वजह से हुई मौतों से जनाधार कम नहीं हुआ। बल्कि अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और स्टूडेंट लीडर्स की हिंसा से उनका समर्थन खत्म हो गया है। हसीना के ऑर्डर पर हजारों लोग गायब कर दिए गए, हजारों की हत्या कर दी गई। हसीना सरकार धरती पर सबसे भ्रष्ट सरकार थी लेकिन उनकी पार्टी ने अब तक सॉरी नहीं कहा। हसीना भारतीय मीडिया को इंटरव्यू दे रहीं और अच्छी-अच्छी बातें कर रही हैं। सवाल: अगर शेख हसीना अवामी लीग पार्टी से अलग हो गईं तो क्या बैन हटाएंगे?जवाब: ये तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल अभी इलेक्शन होने हैं। ……………… ये इंटरव्यू भी पढ़ें… ‘जिस देश ने हसीना को पनाह दी, वो दोस्त कैसे’ बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। पार्टी की कमान पूर्व PM खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…
ओमान की बैठक हुई फेल तो जल उठेगा मिडिल ईस्ट! आर-पार की तैयारी में अमेरिका और ईरान
वार्ता से पहले ही दोनों देशों के रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्य चुनौती बातचीत की विषय-वस्तु को लेकर ही होगी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि यदि बातचीत सार्थक होनी है तो उसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों जैसे मुद्दों को शामिल करना होगा।
वॉशिंगटन पोस्ट ने की बड़े पैमाने पर छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी बाहर
ईशान थरूर पिछले 12 वर्षों से वाशिंगटन पोस्ट से जुड़े थे और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नियमित स्तंभ लिखते थे। छंटनी की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे आज वाशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया है। मेरे साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी और कई अन्य शानदार सहकर्मी भी निकाले गए हैं। ”
Iran-America Conflict: ईरान और अमेरिका इन दिनों जंग की कगार पर खड़े हैं. भले ही दोनों देश वार्ता के लिए मान चुके हैं, लेकिन जंग को लेकर अभी भी संभावना जताई जा रही है.
यूरोप के खूबसूरत देशों में शुमार ग्रीस धार्मिक उन्माद, हिंसा और कट्टरपंथ से परेशान हैं. ग्रीस आने वाले समय में कई बड़े एक्शन की तैयारी में है. ग्रीस सरकार एथेंस में अवैध मस्जिदों की पहचान करने के लिए अभियान चला रही है.
अमेरिका की डिफेंस इनोवेशन यूनिट और डीआरडीओ एक साथ कर सकते हैं काम
नई दिल्ली में भारत-अमेरिका संयुक्त तकनीकी समूह की 24वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मकसद रक्षा विज्ञान और नई तकनीकों के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाना था।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को कैसे क्रूड ऑयल ने किया प्रभावित? जानिए क्या है एक्सपर्ट्स की राय
भारत अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते की घोषण की जा चुकी है. जल्द ही दोनों देशों के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किया जाना है. ट्रंप ने भारत पर थोपा गया 50 प्रतिशत का टैरिफ घटा कर 18 प्रतिशत कर दिया है.
घाना को क्यों कहा जाता है'सोने का देश', भारत के साथ कैसा ही इस देश का रिश्ता?
भारत अपनी कुल सोने की जरूरत का 70 प्रतिशत से अधिक आयात घाना से करता है, जिससे यह द्विपक्षीय व्यापार का मुख्य आधार बन गया है. वित्त वर्ष 2024-25 में घाना ने भारत को करीब 12,157.74 मिलियन डॉलर मूल्य का सोना निर्यात किया.
22 साल बाद प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ। 4 फरवरी को बजट सत्र के 7वें दिन विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में पीएम मोदी नहीं पहुंचे। आज स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि लोकसभा में पीएम मोदी के साथ अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। इसलिए कल उनकी स्पीच टालनी पड़ी। आखिर लोकसभा में ऐसा क्या हुआ कि स्पीकर ने पीएम को भाषण न देने की सलाह दी और उन्हें क्या होने की आशंका थी; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: लोकसभा में क्या हुआ और स्पीकर ने क्या कहा? जवाब: 4 फरवरी को पीएम मोदी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। शाम 5 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्ताधारी नेताओं की कुर्सियां घेर लीं। इनमें पीएम मोदी की कुर्सी भी थी। हंगामा बढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही स्थगित कर दी गई। आज 5 फरवरी को कार्रवाई फिर शुरू हुई। इस दौरान स्पीकर ओम बिरला ने एक दिन पहले सदन स्थगित करने और पीएम का भाषण टालने का कारण बताया। उन्होंने कहा, ‘जब सदन के नेता पीएम मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था तो विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते थे।’ बिरला ने आगे कहा, ‘अगर ये घटना हो जाती, तो लोकतंत्र की परंपरा तार-तार हो जाती। इसे टालने के लिए मैंने पीएम से सदन में न आने का आग्रह किया। पीएम ने मेरे सुझाव को माना।’ बिरला ने महिला सांसदों का पीएम की कुर्सी तक जाना मर्यादा के खिलाफ बताया। उन्होंने विपक्षी सांसदों से कहा, ‘आप पोस्टर लेकर आएंगे तो सदन नहीं चलेगा। जिस तरह से महिला सदस्य पीएम की सीट तक पहुंचीं, उसे देश ने देखा। ये उचित नहीं था। ये सदन की गरिमा के अनुकूल भी नहीं था।’ सवाल-2: विपक्ष ने ऐसा क्या किया कि स्पीकर ने पीएम को भाषण न देने की सलाह दी? जवाब: स्पीकर ओम बिरला ने 4 फरवरी को लोकसभा में हुई घटना का जिक्र करते हुए पीएम को भाषण न देने की सलाह दी। सवाल-3: स्पीकर बिरला को संसद में क्या होने की आशंका थी? जवाब: स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि संसद में कुछ अप्रत्याशित हो सकता था, जिससे लोकतंत्र की परंपरा तार-तार हो जाती। स्पीकर बिरला के मुताबिक, 4 फरवरी को विपक्ष के कई संसदों ने उनके चैंबर का भी घेराव किया था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद में दो तरह की ‘अप्रत्याशित घटना’ हो सकती थी- राजनीतिक विवाद या सुरक्षा पर खतरा। सदन में इससे पहले हुई अप्रत्याशित घटनाओं से समझते हैं कि लोकसभा में राजनीतिक या सुरक्षा की नजर से क्या अप्रत्याशित हो सकता था… सदन में हुई अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाएं 1988: तमिलनाडु विधानसभा में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा 1989: जे. जयललिता की साड़ी खींची 1997: उत्तर प्रदेश में विधायकों ने कुर्सियां और माइक फेंके 2014: कांग्रेस सांसद ने चलाया मिर्ची स्प्रे 2016: विधायक ने मंत्री पर जूता फेंका सदन की सिक्योरिटी अप्रत्याशित घटनाएं 1994: विजिटर गैलरी से एक आदमी कूद गया 2001: संसद भवन पर आतंकी हमला 2002: ओडिशा विधानसभा में बजरंग दल, विहिप का हंगामा 2023: संसद में घुसे 2 युवक, पीले धुएं वाले कैनिस्टर छोड़े सवाल-4: अगर हंगामा बढ़ता या कुछ अप्रत्याशित होता, तो फिर क्या होता? जवाब: संसद में अगर कोई अप्रत्याशित घटना या बहुत ज्यादा हंगामा होता है, तो सिक्योरिटी प्रोसिजर और प्रोटोकॉल तुरंत एक्टिव हो जाता है… 1. सदन की कार्यवाही रोकना 2. सांसदों और मंत्रियों की सुरक्षा 3. सुरक्षा चूक पर लॉकडाउन 4. कानूनी सख्त कार्रवाई -----------
अमेरिकी टीवी की मशहूर एंकर सवाना गुथरी (Savannah Guthrie) की अमेरिका समेत पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. इनसे जुड़ा मामला इतना भावुक है कि पूरी कहानी पढ़कर आप रो देंगे. तो समझे पूरी कहानी.
ख्वाजा आसिफ ने संसद में कहा कि बलूचिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। उन्होंने तर्क दिया कि इतने विशाल और कम आबादी वाले, पहाड़ी व रेगिस्तानी क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना किसी घनी आबादी वाले शहर की तुलना में कहीं अधिक कठिन है।
Vladimir Putin: रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वीडियो कॉल पर बात की. बातचीत के दौरान उन्होंने कई मसलों पर चर्चा की. ये बातचीत वेस्टर्न लीडर्स के मीटिंग्स के बीच हुई है.
अफगानिस्तान में बिना फटे बमों की घटनाओं में मारे गए लोगों में 67.5 फीसदी बच्चे शामिल
अफगानिस्तान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिकारी (एएनडीएमए) ने बुधवार को बताया कि पिछले साल अफगानिस्तान में बिना फटे बम से जुड़ी 193 घटनाओं में कम से कम 87 लोग मारे गए और 333 अन्य घायल हुए
इटली के रोम की बासीलीका सैन लोरेंजो इन लुसीना में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जिसकी चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है. चर्चा हो भी क्यों न, मामला तो इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी से जुड़ा है, इसके पहले आप सब दिमाग लगाए, हम आपको बताते हैं पूरी कहानी.
न्यू स्टार्ट समझौता खत्म, रूस‑अमेरिका अब आज़ाद रास्तों पर
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अब रूस और अमेरिका के बीच हुए न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी यानी न्यू स्टार्ट समझौते से जुड़ी कोई बाध्यता दोनों देशों पर नहीं रह गई है
ट्रंप के हमलावर को उम्रकैद की सजा, 2024 में की थी गोल्फ कोर्स पर जानलेवा हमले की कोशिश
America News: साल 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप पर हमला किया गया था. जिसके आरोपी को अब उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. इसके अलावा कई और गुनाहों की भी उसे सजा दी गई है.
ये तो कमाल हो गया! जो जमात-ए-इस्लामी सालों से भारत विरोधी बयानबाजी के लिए जानी जाती थी, शेख हसीना के खिलाफ जहर उगलती थी और 1971 के युद्ध में भी विवादास्पद भूमिका के कारण बदनाम रही, वही पार्टी अब चुनाव जीतने के लिए भारत से दोस्ती का बड़ा-बड़ा ढोल पीट रही है. जानें पूरी कहानी.
जिस दीये को तूफां में... शशि थरूर के लिए बैड डे! सीढ़ियों पर गिरे, उधर बेटे ईशान की नौकरी चली गई
Ishaan Tharoor Layoff: शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी चली गई है. मीडिया समूह वाशिंगटन पोस्ट ने बड़े पैमाने पर छंटनी की और उसमें ईशान को भी निकाल दिया. यह खबर थरूर फैमिली के लिए 'बैड डे' के दिन आई जब दिल्ली में थरूर भी सीढ़ियों पर गिर गए थे, कुछ देर बाद अमेरिका में बेटे की नौकरी चली गई.
बांग्लादेश में Bogra एयरबेस के पास चीन की मदद से एक बड़ी ड्रोन फैक्ट्री लगने वाली है. ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, पूरा प्लान यूनुस सरकार ने अप्रूव किया है, और पीछे शी जिनपिंग का हाथ साफ दिख रहा है. भारत के लिए ये बड़ा खतरा क्यों? समझें पूरी खबर.
140 करोड़ की आबादी वाले हिंदुस्तान में सोशल मैसेजिंग एप ‘व्हाट्सएप’ के 85 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं। अब इसी व्हाट्सएप को सुप्रीम कोर्ट ने भारत छोड़ने की चेतावनी दे दी है। वजह है- एड, यूजर डेटा और प्राइवेसी। आखिर ऐसा क्या हुआ कि सुप्रीम कोर्ट इतना गुस्सा है, व्हाट्सएप पर यूजर्स का डेटा बेच रहा और वो भारत छोड़ देगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: व्हाट्सएप से जुड़ा ये मामला शुरू कहां से हुआ? जवाब: ये मामला व्हाट्सएप की जनवरी 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी के अपडेट से शुरु हुआ। इस प्राइवेसी पॉलिसी के मुताबिक… इस प्राइवेसी पॉलिसी का नोटिफिकेशन जब यूजर्स को भेजा गया, तो उन्हें 2 ऑप्शन दिए गए। या तो वे इसे एक्सेप्ट करें और व्हाट्सएप का यूज करते रहें या फिर अपना अकाउंट डिलीट कर दें। यानी व्हाट्सएप का यूजर बने रहते हुए डेटा शेयरिंग से बचने का कोई ऑप्शन नहीं था। बाद में व्हाट्सएप कहता रहा कि दोस्तों या परिवार से की जाने वाली प्राइवेट चैट पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड है। उन्हें न तो व्हाट्सएप पढ़ सकता है और न ही कोई और। हालांकि अगर यूजर व्हाट्सएप पर किसी बिजनेस या कंपनी से बात करता है, तो वह डेटा विज्ञापन दिखाने के लिए यूज किया जा सकता है। मार्च 2021 में कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया यानी CCI ने व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी की जांच शुरू की। फिर नवंबर 2024 में मेटा पर 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। इसके खिलाफ मेटा-व्हाट्सएप ने दिसंबर 2024 में नेशनल कंपनी लॉ एप्पेलेट ट्रिब्यूनल यानी NCLAT में अपील की। नवंबर 2025 में NCLAT ने मेटा को कुछ राहत दी, लेकिन जुर्माना बरकरार रखा। फिर जनवरी 2026 में मेटा-व्हाट्सएप ने NCLAT के जुर्माने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी मामले में 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सवाल-2: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा और व्हाट्सएप ने क्या दलीलें दीं? जवाब: 3 फरवरी को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने मेटा-व्हाट्सएप को फटकार लगाते हुए कहा, ‘हम आपको एक भी जानकारी शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे।’ वहीं मेटा की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि व्हाट्सएप की सर्विस मुफ्त है और यूजर्स से कोई फी नहीं ली जाती। प्राइवेसी से जुड़ा एक मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सामने लंबित है। रोहतगी ने आगे कहा कि हम कोर्ट में एक पेज का एफिडेविट देकर यह बता सकते हैं कि हम क्या कर रहे हैं? व्हाट्सएप की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अरुण ने कहा कि सभी यूजर्स का डेटा शेयर नहीं किया जाता है और शेयरिंग का दायरा सीमित है। व्हाट्सएप का कहना है कि हमारी पहुंच यूजर्स के पर्सनल मैसेज तक नहीं रहती। इससे पहले व्हाट्सएप ने कहा था कि अगर डेटा शेयरिंग पर सख्त रोक लगी, तो उसे भारत में कुछ फीचर्स को वापस लेना या रोकना पड़ सकता है। इससे व्हाट्सएप के कारोबार को नुकसान होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में IT मिनिस्ट्री को भी एक पक्ष बनाने को कहा है। साथ ही व्हाट्सएप और मेटा को हलफनामा देने को कहा है, जिसमें यह आश्वासन दिया जाए कि वे यूजर्स डेटा शेयर नहीं करेंगे। 9 फरवरी को कोर्ट अंतरिम आदेश देगा। सवाल-3: क्या यूजर्स को वॉट्सएप पर एड भी आ रहे हैं? जवाब: कम्युनिटी प्लेटफॉर्म LocalCircles ने व्हाट्सएप को लेकर हाल ही में सर्वे किया था। इसके मुताबिक, सवाल-4: डिजिटल डेटा शेयरिंग और प्राइवेसी को लेकर कानून क्या है? जवाब: भारत में 2023 का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट यानी DPDP एक्ट, आम लोगों के डिजिटल डेटा और प्राइवेसी को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। इसके मुताबिक… डेटा प्रिंसिपल यानी वे यूजर, जिनका डेटा लिया जा रहा है, वह अपने डेटा के मालिक हैं। वहीं डेटा फिडुशियरी यानी व्हाट्सएप और गूगल जैसी कंपनियां, जो डेटा इकट्ठा करती हैं, उनकी जिम्मेदारी यूजर्स का डेटा सुरक्षित रखने की है। कोई भी कंपनी बिना परमिशन के यूजर का डेटा नहीं ले सकती। कंपनी को साफ-साफ बताना होगा कि वह कौन सा डेटा ले रही है और क्यों। अगर यूजर ने किसी ऐप को अपनी 'लोकेशन' सिर्फ डिलीवरी के लिए दी है, तो कंपनी उसे किसी से शेयर नहीं कर सकती। काम पूरा होने के बाद, कंपनी को ये डेटा अपने सर्वर से हटाना होगा। अगर कोई कंपनी डेटा सिक्योरिटी में लापरवाही करती है या डेटा लीक होता है, तो उस पर 250 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। सवाल-5: इस मामले में आगे क्या हो सकता है? जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने मेटा-वाॉट्सएप से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। हलफनामा देने पर कोर्ट उनकी दलीलों पर विचार कर सकता है और उसे प्राइवेसी पॉलिसी सुधारने का आदेश दे सकता है। इसके अलावा कोर्ट व्हाट्सएप की याचिका खारिज करके CCI को जांच करने को भी कह सकता है। या फिर सरकार को नए नियम बनाने को कह सकता है, जिससे व्हाट्सएप बिजनेस और विज्ञापन पर सख्त निगरानी रखी जा सके। हालांकि केंद्र सरकार तमाम एप्स और OTT प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते फ्रॉड को लेकर नया कानून बनाने की तैयारी में है। सवाल-6: तो क्या वाकई में व्हाट्सएप भारत छोड़ सकता है? जवाब: भले ही कोर्ट में व्हाट्सएप को देश छोड़ने की चेतावनी दी गई है, लेकिन भारत से व्हाट्सएप का एक झटके में बाहर हो जाना मुश्किल है। भारत के 97% इंटरनेट यूजर व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं। पूरे देश में व्हाट्सएप के ऐसे यूजर करीब 85 करोड़ हैं। भारत के 1.5 करोड़ से ज्यादा छोटे-बड़े बिजनेस भी कस्टमर से कम्युनिकेट करने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं। एप्स के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट ’Priori Data’ के मुताबिक, 2026 में सिर्फ भारत से व्हाट्सएप 27 हजार करोड़ रुपए की कमाई कर सकता है। 2025 में ये रकम लगभग 23 हजार करोड़ रुपए थी। कुल मिलाकर भारत व्हाट्सएप का सबसे बड़ा मार्केट है और यहां से जाना उसे काफी नुकसान दे सकता है। ऐसे में व्हाट्सएप के पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने का ही ऑप्शन है। सुप्रीम कोर्ट चेतावनी देकर व्हाट्सएप से भारत के नियम-कानून मानने के लिए दबाव बना रहा है। कोर्ट का कहना है कि भारत में बिजनेस करने के साथ आने वाली जिम्मेदारियों से समझौता नहीं किया जा सकता। अगर व्हाट्सएप को अपना काम जारी रखना है, तो उसे भारतीय संवैधानिक मूल्यों, खासकर आम लोगों के निजता के अधिकार का सम्मान करना होगा। अगर भारत से व्हाट्सएप चला जाता है, तो पहले से मौजूद मैसेजिंग एप जैसे- टेलीग्राम, सिग्नल, एट्टराई वगैरह अल्टरनेटिव बन सकते हैं। लेकिन इनका यूजर बेस बहुत कम है और लोग भी अचानक व्हाट्सएप से इन पर शिफ्ट होने में असहज होंगे। ***** व्हाट्सएप से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… सरकार ने वॉट्सएप चैट से कैसे पकड़े 250 करोड़, क्या आपके मैसेज पढ़ रही सरकार; नए कानून का क्या होगा असर वॉट्सएप चैट और इंस्टाग्राम अकाउंट्स डिकोड करके 250 करोड़ रुपए की बेहिसाब संपत्ति पकड़ी गई। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 25 मार्च 2025 को संसद में ये बात कही। उन्होंने कहा कि गैरकानूनी लेनदेन के सबूत मिलने के बावजूद इसकी जांच के लिए कोई कानून नहीं है। इसलिए हमने सोचा कि इनकम टैक्स कानून में डिजिटल शब्द जोड़ना होगा। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली से आए मीडिया के लोग दिनभर अंकिता भंडारी के माता-पिता से बात करने के लिए उनके घर के बाहर बैठे रहे, लेकिन वे घर पर ताला लगाकर चले गए थे। तब तक नहीं लौटे, जब तक मीडिया के लोग वापस नहीं चले गए। अगले दिन मैं बिना बताए उनके घर पहुंची। वह हड़बड़ा गईं, लेकिन बात करने से पहले एक शर्त रख दी- ‘मनीषा जी, आप पत्रकार बनकर नहीं, मेरी बेटी बनकर सुनेंगी, तभी बात करूंगी,’ मैंने हामी भर दी। इसके बाद वह मेरे सामने जार-जार रोने लगीं। रोते-रोते उन्हें हिचकिया आने लगीं। मेरी ओर देखकर बोलीं- ‘मनीषा जी, क्या हम मर जाएं? सुबह से कुछ खाया तक नहीं है। कल दुखी होकर हम पति-पत्नी घर पर ताला लगाकर चले गए थे। मीडिया को मेरे बयान से मतलब है, मेरी जान से नहीं। देर रात हम जब लौटे तो पड़ोसियों ने रास्ते की लाइटें बंद कर दी थीं। मेरे पति बीमार हैं। अगर इन्हें कुछ हो गया तो मैं अकेली औरत क्या करूंगी? हम पर दया कीजिए,’ यह कहते हुए वह शॉल से मुंह ढककर फिर सिसकने लगती हैं। यह वही अंकिता भंडारी की मां हैं, जो उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थी। 18 सितंबर 2022 को उसकी हत्या कर दी गई। सबूत मिटाने के लिए उसका कमरा तक ढहा दिया गया। यह मामला सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन में बदल गया। 30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हाल ही में एक ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद मामला फिर उबाल पर है। लोग सड़कों पर नारे लगा रहे हैं, लेकिन इन नारों से दूर अंकिता के माता-पिता इंसाफ की लड़ाई में टूट चुके हैं। घर में कैद हो चुके हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में अंकिता भंडरी की हत्या के बाद इंसाफ की लड़ाई में उलझे उनके मां-बाप की कहानी। आस पड़ोस के लोगों और रिश्तेदारों ने उनसे दूरी बना ली है। उन्होंने खुद को अपने घर में कैद कर लिया है। गढ़वाल जिले का छोटा सा कस्बा है श्रीनगर। यहीं से मैं करीब 45 किलोमीटर दूर बरसूड़ी गांव पहुंची। श्रीनगर समेत उत्तराखंड बंद है। दुकानें, होटल, गुमटियां- सबके दरवाजे बंद। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। वजह साफ है- अंकिता भंडारी केस एक बार फिर चर्चा में है। यह अब सिर्फ एक परिवार का मामला नहीं रहा, बल्कि पूरे उत्तराखंड का सवाल बन चुका है। हर दिन सड़कों पर जुलूस निकल रहे हैं, न्याय की मांग गूंज रही है। बरसूड़ी पहुंचकर दूर नीचे दोभश्रीकोट गांव दिखाई देता है। वहीं है अंकिता का घर। रास्ता बेहद संकरा है- कहीं पगडंडी, तो कहीं रास्ता ही नहीं है। करीब सात किलोमीटर पैदल नीचे उतरकर हम दोभश्रीकोट गांव पहुंचे। गांव में सिर्फ दो-तीन परिवार रहते हैं। अंकिता के माता-पिता अपने घर पर नहीं थे। वे इतने टूट चुके हैं कि देशभर का मीडिया उनके दरवाजे पर बैठा रहा, लेकिन वे घर पर ताला लगाकर चले गए। उनका घर उत्तराखंड के पुराने तरीके- पत्थरों से बना है। इसमें तीन कमरे हैं, और हर कमरे तक पहुंचने के लिए अलग सीढ़ियां। तीनों कमरों पर बाहर से ताले लटके हैं। बीच में एक खुला आंगन है, जहां चूल्हे पर काला पड़ चुका एल्युमिनियम का पतीला रखा है। सामने एक बछिया बंधी है। घर के ठीक सामने घना जंगल है। बताया गया कि रात में भालू और बाघ यहां तक आ जाते हैं। मैं वहां करीब 3 घंटे तक इंतजार करती रही, उम्मीद थी कि शायद वे लौट आएंगे। आखिर में एक लड़की आई। उसने बताया कि अंकिता की मां ने संदेश भेजा है- वे आज घर नहीं आएंगी। तब तक शाम के 4 बज चुके थे। लगा, अब इंतजार का कोई मतलब नहीं। उस लड़की ने चेताया- ‘अभी उजाला है, आप ऊपर सड़क तक निकल जाइए। अंधेरा होते ही रास्ते में बाघ जैसे जानवर मिल सकते हैं।’ मैंने पहाड़ की चढ़ाई शुरू की। करीब 7 किलोमीटर की तीखी चढ़ाई पार कर बरसूड़ी गांव की सड़क तक पहुंचना था। मौसम बिगड़ रहा था, रास्ता सुनसान था और रोशनी सिर्फ तारों की थी। लगभग 6 बज रहे थे। आखिरकार मैं वहां पहुंची, जहां मेरी कार खड़ी थी। सोचती रही- अंकिता के माता-पिता यह चढ़ाई रोज कैसे करते होंगे। यहां जंगल से लकड़ी और घास भी लानी पड़ती है। आसपास न तो अस्पताल है, न दवा की कोई दुकान- चारों तरफ बस जंगल। खैर, अगले दिन मिलने की उम्मीद में मैं रातभर श्रीनगर रुकी। सुबह फिर दोभश्रीकोट जाने का मन बनाया। फोन करती रही, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ था। परिवार के नजदीकी लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिले थे। इसके बाद से उनके घर न लौटने ने शक और गहरा कर दिया। अब तक सोच-विचार करते-करते दोपहर हो चुकी थी। मैंने अंकिता के घर जाने के लिए फिर एक टैक्सी बुक की। बरसूड़ी गांव पहुंची। दोभश्रीकोट की ओर नीचे देखा, तो समझ आ गया कि एक बार फिर लंबा रास्ता तय कर नीचे जाना है। 7 किलोमीटर की तीखी ढलान उतरने के बाद मैं दोबारा अंकिता के घर पहुंच गई। इस बार एक कमरे का दरवाजा खुला हुआ था। अंदर झांककर देखा तो लाल और नीले रंग की रजाइयों में दो लोग बेसुध पड़े थे। मैंने महिला को हाथ हिलाकर जगाया। वह हड़बड़ा कर उठीं। बगल बेड पर लेटे एक शख्स भी जग गए। दोनों अंकिता के माता-पिता थे- सोनी देवी और वीरेंद्र सिंह भंडारी। मैंने परिचय दिया- मैं पत्रकार मनीषा हूं, जिसे आपने कल बुलाया था। कल आपके घर पर ताला लगा था। अंकिता की मां कुछ नहीं बोलीं। कुछ देर हम सभी चुप बैठे रहे। फिर उन्होंने कहा- ‘आप कुछ भी रिकॉर्ड नहीं करेंगी, न ही मेरा इंटरव्यू लेंगी,’ मैंने सहमति जताई। थोड़ी देर बाद उन्होंने दोबारा कहा- 'हमें कोई इंटरव्यू नहीं देना है। माफ कर दो।’ फिर उन्होंने सामने रखी टेबल की ओर इशारा किया- ‘वहां देखिए, हम पति-पत्नी की दवाएं रखी हैं।’ टेबल पर आंखों, पेट दर्द, बीपी और नींद की दवाएं बिखरी पड़ी थीं। उन्होंने बताया- कल हम अस्पताल गए थे। अंकिता के लिए रो-रोकर मेरे पति की आंखें खराब हो गई हैं। डॉक्टर ने कहा है कि ज्यादा रोएंगे तो रोशनी जा सकती है। उन्होंने कहा- हमें दवाएं खानी हैं, लेकिन कल से हमने खाना नहीं खाया है। कोई पड़ोसी इतना भी नहीं सोचता कि खिचड़ी ही बनाकर भिजवा दें। मीडिया के लोग बयान के लिए आते हैं, लेकिन इस हालत में हम दवा तक नहीं खा पा रहे। कल एक मीडियाकर्मी बयान के लिए दबाव बना रहे थे, जबकि मेरे पेट में तेज दर्द था। यह कहते-कहते वह फूट-फूटकर रोने लगती हैं। बोलीं- सालों से मीडिया को एक ही बात बता-बताकर थक गई हूं। मुझे पित्त की पथरी है। हम दोनों को नींद नहीं आती, खाना मिलना मुश्किल है। हम दिनभर न्याय के लिए भटकते हैं और रात को घर आकर बिस्तर पर पड़ जाते हैं। गांव, पड़ोस और रिश्तेदार- सब धीरे-धीरे हमसे कट गए हैं। बिना काम किए दवा और खाने की जरूरत कैसे पूरी करें, समझ नहीं आता। अब हमसे और नहीं हो पा रहा। उन्होंने कहा- रात में गांव तक बाघ और भालू आ जाते हैं। लोगों ने रास्ते की लाइट काट दी हैं, क्योंकि हम देर रात पुलिस और नेताओं से मिलकर घर लौटते थे, जिससे लोगों को दिक्कत थी। उनकी आवाज भर्रा गई। बोलीं- इस तरह लोगों ने हमें हर तरफ से अकेला कर दिया है। यह कहते हुए वह फिर रोने लगती हैं। बगल में रखी अंकिता की तस्वीर पर हाथ फेरते हुए बोलती हैं- अब यही मेरी देवी है। यही मेरा मंदिर। रोज तस्वीर पर ताजे गेंदे के फूल चढ़ाती हूं, तिल के लड्डू और सेब रखती हूं। दिन-रात बस उसी को याद करती हूं। उसकी बातें मेरे कानों में गूंजती रहती हैं। घर के हर कोने में उसकी यादें बसी हैं। इतना कहकर वह फिर शॉल से मुंह ढंक लेती हैं और सिसकने लगती हैं। आंसू पोंछते हुए कहती हैं- अब मैं मीडिया के लोगों से बात नहीं करना चाहती। तुम मेरी बेटी जैसी हो। मेरी बात पत्रकार नहीं, बेटी बनकर सुनो। फिर धीमी आवाज में जोड़ती हैं- अब मैं भगवान को नहीं मानती, अब सिर्फ अंकिता की पूजा करती हूं। मैं उनसे पूछती हूं- अंकिता की कौन-सी बातें सबसे ज्यादा याद आती हैं? वह बताती हैं- जब मैं घर में जानवरों का गोबर उठाती थी तो वह कहती थी- मां, दस्ताने पहन लिया करो। तुम्हारे गंदे हाथ-पैर अच्छे नहीं लगते। वह मेरे गंदे कपड़े देखती तो डांटती थी। वह चाहती थी कि उसके मां-बाप सुंदर दिखें। वह सामने टेबल की ओर इशारा करती हैं। यह कवर उसी ने क्रोशे से बनाया था। उसे गुड़िया-गुड़ियों का बहुत शौक था। यह बेड उसी के सामान से भरा है। उसकी गुड़ियां, उसके कपड़े से। वह पापा को भी सुंदर देखना चाहती थी। उनके चेहरे की मालिश करती थी। उनकी दाढ़ी बनाती थी। वह बताती हैं कि अंकिता को पढ़ाई का बहुत शौक था। उसने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी। पता नहीं कितनी मुश्किलों से हमने उसे पढ़ाया। पढ़ाई पूरी होने के बाद अंकिता के एक दोस्त ने उसे वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी के बारे में बताया। वह नौकरी करने की जिद करने लगी। कहती थी- काम करूंगी तो पापा का हाथ बंटा पाऊंगी। उसे फिक्र रहती थी कि पापा अकेले घर चलाते हैं। यह कहते-कहते उनकी आवाज टूट जाती है- ‘काश, उस दिन मैं उसे जाने न देती। काश, मैंने उसे पढ़ाया ही न होता।’ वह बताती हैं कि अंकिता बहुत अच्छा खाना बनाती थी। मैं कहीं से भी लौटती, तो वह मेरे जूते साफ करती थी। हाथ-पैर धोने के लिए गरम पानी देती थी। हमारे गाल सहला देती थी। अब, जब बाहर से घर लौटती हैं, तो हर बार निराशा हाथ लगती है। शायद सभी बेटियां ऐसी ही होती होंगी। वह मेरे गाल छूकर कहती थी- तू मेरी मम्मा है, मेरी। मैं बस उसे देखती रह जाती थी। वह बहुत सुंदर थी। कहती थी, मां मैं किसकी तरह हूं, इतनी सुंदर? वह जोड़ती हैं- जैसे बेटी को मां की जरूरत होती है, वैसे ही मां को बेटी की भी। मेरी बेटी अब वापस नहीं आ सकती। न्याय के लिए हमने आधी रात में भी कोटद्वार और नैनीताल के चक्कर लगाए। कई बसें बदले। कई बार जंगल के रास्तों से रात-रात भर पैदल चले। ‘2022 में उसकी हत्या हो गई। इतने साल बीत गए, अब हमसे यह लड़ाई नहीं लड़ी जा रही,’ वह थकी आवाज में कहती हैं। पहाड़ों की चढ़ाई में मुझे चक्कर आ जाते हैं। कई बार उल्टी हो जाती है, फिर भी मीलों का सफर तय करती हूं- सिर्फ बेटी के लिए। अब वह साफ कहती हैं- अगर आप चाहते हैं कि हम जिंदा रहें, तो बस हमसे बात मत कीजिए। मुझमें अब मीडिया से बात करने की ताकत नहीं बची, यह बात करते-करते वह सिर पकड़ लेती हैं। फिर धीमे से जोड़ती हैं- मुझे पता है यह लंबी लड़ाई है। इस मामले में बड़े-बड़े नेता शामिल हैं। अगर ऐसा न होता, तो यह मामला कब का दब गया होता। लेकिन ऊपर से देख रही अंकिता शायद नहीं चाहती कि उसकी फाइल बंद हो। वह बताती हैं- मैं एक स्कूल शिक्षिका थी। लेकिन क्या वैसी लगती हूं? हम गरीब थे, लेकिन ईमानदार और स्वाभिमानी। एक कमरे में गुजारा किया- जहां न बाथरूम था, न रसोई। दिन-रात काम करते थे, कई बार खाना तक नहीं मिलता था। गोबर जलाकर बासी रोटियां सेंककर खाई हैं हमने। जब अंकिता की नौकरी लगी, तो वह बताती थी- मम्मी, यहां स्टाफ में मैं सबसे छोटी हूं। मैं उसे समझाती थी- ढंग से रहना, किसी के मुंह मत लगना। लेकिन वह कहती थी- ‘यहां सब अच्छे लोग हैं।’ वह रुककर कहती हैं- सब खत्म हो गया। अंकिता की दादी उसे याद करते-करते मर गईं। बेटी की मौत के बाद उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था। अब हम भी डिप्रेशन में हैं और बीमारी से जूझ रहे हैं। कोई मदद नहीं कर रहा। वह कहती हैं- लेकिन हम इस लड़ाई को जिंदा रखना चाहते हैं। इलाके की सीनियर पत्रकार गंगा बताती हैं कि उर्मिला सनावर नाम की महिला का एक ऑडियो वायरल होने के बाद सरकार पर दबाव तेज हो गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग उठ रही है। उनके मुताबिक, मामला दोबारा उभरने के बाद अंकिता के माता-पिता सामाजिक रूप से और अलग-थलग पड़ गए हैं। गंगा का कहना है कि कुछ नेता उनके रिश्तेदारों को प्रभावित करने में जुटे हैं। उन्हें अंकिता के माता-पिता से दूर किया जा रहा है। उन पर नजर रखी जा रही है- कौन उनके घर जा रहा है और कौन आ रहा है। इस बीच लोग मांग कर रहे हैं कि मामले में शामिल वीवीआईपी शख्स पर कानूनी शिकंजा कसा जाए। दूसरी ओर, अंकिता के माता-पिता मानसिक रूप से टूट चुके हैं। उनका स्वास्थ्य एक बड़ा मुद्दा बन गया है। लंबा आंदोलन लड़ने के बाद वे अब थक चुके हैं। इसको लेकर जब मैंने उर्मिला सनावर से बात की, तो उन्होंने भी इसकी पुष्टि की। बताया कि मामला बेहद नाज़ुक है और सुरक्षा कारणों से पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर लिया है, ताकि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे। अंकिता को न्याय दिलाने के आंदोलन से जुड़ी सरस्वती कहती हैं कि कागजो में जिस वीवीआईपी का जिक्र था, अब उसका नाम सबके सामने आ चुका है। आंदोलन से जुड़े लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। राज्य सरकार को भी कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए कि आखिर उसकी नाक के नीचे अंकिता से ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ की मांग कैसे की गई। सरस्वती का कहना है कि हम लोग सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हत्याकांड की जांच चाहते हैं। अंकिता के माता-पिता को गुमराह किया जा रहा है और पहले भी उन्हें डराया व प्रताड़ित किया गया। इसी आंदोलन से जुड़े मुकेश सेमवाल कहते हैं कि अंकिता हत्याकांड का मुद्दा अब जनआंदोलन बन चुका है, जिसने उत्तराखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को झकझोर दिया है। 2022 में घटना के आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। दरअसल अंकिता पर वीवीआईपी को ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देने का दबाव था, जिसके लिए उसने मना कर दिया था। हाल ही में उर्मिला सनावर नाम की एक महिला का ऑडियो वायरल होने के बाद मामला फिर से गरमा गया है। यह महिला भाजपा के एक पूर्व विधायक की दूसरी पत्नी होने का दावा कर रही हैं। ऑडियो में उस विधायक ने वीवीआईपी का नाम लिया है। अब जबकि वीवीआईपी का नाम सामने आ चुका है तो सरकार कानून शिकंजा कसे। ------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-किडनैप कर 10 दिन तक मेरा रेप किया:होश आया तो हाथ-पैर बंधे थे, चादर खून से सनी थी, रिश्तेदार ने एक लाख में बेचा था ‘2021 की बात है। दोपहर के 2 बज रहे थे। मैं अपनी सहेली के घर कुछ काम से जा रही थी। अचानक दो लड़के दौड़ते हुए मेरी तरफ आए। उन्होंने मुझे जबरदस्ती एक बोलेरो गाड़ी में बैठा लिया। मैं चीख-चीखकर पूछ रही थी- मुझे कहां ले जा रहे हो। तभी एक लड़के ने थप्पड़ मारा और रूमाल से मेरा मुंह दबाते हुए बोला- चुपचाप बैठी रहो। सागर जिले में सब तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पापा को फांसी दिलाकर आत्महत्या कर लूंगी:कहते थे ब्राह्मण होकर नीच से शादी कैसे की, गोली मारकर बोले- अब मैं बहुत खुश हूं हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
ढाका की मशहूर ‘शहीद मीनार’ के पास आइसक्रीम बेचने वाले अहीदुज्जमान जिस जगह ठेला लगाते हैं, वह बांग्लादेश की पहचान है। 1952 में इसी जगह ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भाषायी आंदोलन शुरू किया था। बांग्लादेश फिर बदलाव के दौर में है। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहली बार 12 फरवरी को चुनाव होने हैं। हालांकि, चुनाव का जिक्र होते ही अहीदुज्जमान बहुत उत्साह में नहीं दिखते। अहीदुज्जमान कहते हैं, ‘मुझे चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ता। अवामी लीग ने देश को आजादी दिलवाई, उसी को चुनाव नहीं लड़ने दिया जा रहा। दूसरी तरफ जो 1971 के मुक्ति संग्राम के खिलाफ थे, जिन्होंने बांग्लादेश बनने का विरोध किया, वे चुनाव में जमकर प्रचार कर रहे हैं। अब बताइए इलेक्शन में हम किसे और क्यों वोट करेंगे।’ अहीदुज्जमान का इशारा जमात-ए-इस्लामी की ओर था। उनके जैसी ही उलझन हर आम बांग्लादेशी के सामने है। चुनाव में सिर्फ दो विकल्प हैं, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन। चुनाव की कवरेज के लिए दैनिक भास्कर ढाका पहुंचा है। आम लोगों और एक्सपर्ट्स से बात करके समझ आया कि भारत सबसे बड़ा मुद्दा है। वोटर दो हिस्सों में बंटे हैं, एक भारत समर्थक है और दूसरा भारत विरोधी। लोगों को डर है कि चुनाव के दौरान हिंसा हो सकती है। इसमें अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान लूटे गए हथियारों को इस्तेमाल होने का खतरा है। तख्तापलट की बुरी यादों से निकला बांग्लादेश, अब सड़कों पर चुनावी नारेअगस्त, 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद दैनिक भास्कर बांग्लादेश पहुंचा था। तब राजधानी ढाका के अलावा कई शहर हिंसा और आगजनी से दहले हुए थे। जगह-जगह तबाही की निशानियां थीं। सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा था और सुरक्षाबल भाग चुके थे। अब ढाका में चहल-पहल है। चुनावी रैलियां हो रही हैं, पोस्टर लगे हैं। बांग्लादेश में फिलहाल डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार है। इसमें छात्र आंदोलन से निकले नेता भी एडवाइजर के तौर पर शामिल हैं। इस बार चुनाव में सिर्फ दो धड़े हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, जिसके नेता खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान हैं। दूसरा जमात-ए-इस्लामी, जिसने 11 पार्टियों का गठबंधन बनाया है। जमात के नेता शफीकुर रहमान हैं। पूर्व PM शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों की पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी ने भी जमात के साथ हाथ मिला लिया है। मुस्लिम बोले- भारत से दोस्ती जरूरी, जमात पाकिस्तान के एजेंडे परशहीद मीनार के पास मिले अहीदुज्जमान चुनाव के बारे में कहते हैं, ‘देश में चुनाव के लिए जैसा माहौल होना चाहिए, वैसा है नहीं। ये चुनाव मजाक की तरह हो रहा है। स्टूडेंट्स ने आंदोलन करके शेख हसीना को हटा दिया। अब उनकी पार्टी NCP ने जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन कर लिया। वे अपनी पार्टी के अंदर ही महिलाओं से भेदभाव करते हैं।’ NCP ने 5 अगस्त को जो वादा किया था, उस पर कुछ नहीं कर पाए। जमात-ए-इस्लामी ने पहले छात्रों के आंदोलन का इस्तेमाल किया, अब उनकी पार्टी का कर रही है। जमात ही NCP को चला रही है। वह अपनी हुकूमत कायम करके पाकिस्तानी एजेंडे को लागू करना चाहती है। ‘पाकिस्तान ने हम पर जुल्म किया, सताया और कभी हमें बराबर का नहीं समझा। भारत ने हमें जुल्म और गुलामी से आजादी दिलाई। आज भारत बड़ी ताकत बन चुका है।’ ढाका में रिक्शा चलाने मोहम्मद नजरूल इस्लाम कहते हैं, ‘चुनाव में हर कोई अपनी फिक्र में लगा हुआ है। यहां पार्टियां लोगों के लिए राजनीति नहीं करतीं। पिछले दिनों इतने लोगों की मौत हो गई, उसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। महंगाई पर कोई बात नहीं कर रहा। पार्टियां अपने फायदे के लिए सब करने में लगी हैं।’ ‘मुझे नहीं पता कि मैं जमात को वोट करूं या BNP को। कोई मेरे बारे में तो बात ही नहीं कर रहा। मुझे लगता है कि भारत जैसे पड़ोसी से अच्छे रिश्ते रखने चाहिए। अभी रिश्ते अच्छे नहीं हैं।’ हिंदू वोटर्स की राय- पहले ज्यादा सेफ थे, समझ नहीं आ रहा किसे वोट देंढाका की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली सुष्मिता मोंडल म्यूजिक डिपार्टमेंट में सेकेंड ईयर की स्टूडेंट हैं। वे अपने दोस्तों के साथ शहीद मीनार आई थीं। चुनाव और अल्पसंख्यकों के हालात पर सुष्मिता कहती हैं, ‘बीच-बीच में दिक्कतें आती रहती हैं। सड़क पर लोग गलत इशारे करते हैं। टोकने पर बदतमीजी करने लगते हैं।’ ‘ऐसा हमेशा से नहीं होता था। पहले हालात बेहतर थे। हम ज्यादा सुरक्षित महसूस करते थे। अब लगता है कि हमारे साथ कुछ हो भी जाए, तो कोई साथ नहीं देगा। ये डर हमारे दिल में घर कर गया है।’ बांग्लादेशियों के पास दो विकल्पबांग्लादेश के अलग-अलग तबकों के लोगों से बात करने पर समझ आया कि चुनाव को लेकर उनमें बहुत उत्साह नहीं है। आंदोलन चलाकर शेख हसीना की सरकार गिराने वाले छात्रों की पार्टी से भी बांग्लादेशियों का मोहभंग हो गया है। अब उनके पास दो ही विकल्प हैं- 1. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टीBNP के नेता वोट मांगते वक्त अपना पुराना शासन याद दिला रहे हैं। तारिक रहमान इस पार्टी के सबसे बड़े चेहरे हैं। वे देश को फिर से पटरी पर लाने का वादा कर रहे हैं। लोगों के बीच जाकर भविष्य की नीतियों का खाका पेश कर रहे हैं। 2. जमात-ए-इस्लामीजमात भविष्य के सपने बेच रही है। इस्लामिक पॉलिटिक्स को केंद्र में रखकर पार्टी खुलकर धर्म के आधार पर वोट मांग रही है। धर्म की राह पर चलकर करप्शन कम करने की बात कर रही है। जमात ने चुनाव की तैयारियां बहुत बारीकी से की हैं और सबसे बड़ा गठबंधन बनाने में कामयाब रही है। एक्सपर्ट बोले- लोगों को सुरक्षा से मतलब, सरकार से नहींढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सैफुल आलम चौधरी कहते हैं, ‘जिन हालात में बांग्लादेश में चुनाव हो रहे हैं, उसमें सबसे बड़ा सवाल है कि चुनाव होंगे या नहीं। अगर आप लोगों से बात करेंगे तो ज्यादातर कहेंगे कि चुनाव तो होगा, लेकिन नतीजे आएंगे या नहीं, इस पर शक है। अभी बांग्लादेश का अजीब माहौल है। अवामी लीग पर बैन लगा है। वह चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है। सरकार चुनाव की बजाय रेफरेंडम पर जोर दे रही है।’ चौधरी आगे कहते हैं, ‘चुनाव शांति से और निष्पक्ष होंगे, इसे लेकर शंका है। अगस्त, 2024 में हुई हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी फोर्स के हथियार लूटे गए थे। इनमें से सिर्फ 30% रिकवर हो पाए हैं। 70% हथियार अब भी लोगों के पास है। इसलिए लग रहा है कि चुनाव में हिंसा हो सकती है। चुनी हुई सरकार लोगों के लिए जवाबदेह होती है, अभी अंतरिम सरकार के साथ ऐसा नहीं है।’ चौधरी कहते हैं, ‘1971 के बाद से बांग्लादेश में दो तरह का वोट बैंक रहा है। एक भारत का समर्थक है, दूसरा विरोधी। कोई भी सिर्फ प्रो-इंडिया वोट बैंक से नहीं जीत सकता, इसलिए हर नेता और पार्टी खुद को भारत का विरोधी दिखाते हैं। मौजूदा सरकार भी अंदरूनी तौर पर भारत से पहले की तरह संबंध रखे हुए है। क्रिकेट जैसे मामलों पर ऐसा दिखाने की कोशिश हो रही है कि रिश्ते खराब हो रहे हैं।’ ‘सरकार के साथ मिलकर चुनाव में धांधली कर सकती है जमात’बांग्लादेश के सीनियर जर्नलिस्ट मंजरुल आलम पन्ना कहते हैं, ‘लोग दुविधा में हैं कि चुनाव होंगे या नहीं। डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार के काम में भेदभाव दिखता है। बांग्लादेश में कई सुपरपावर जैसे अमेरिका, चीन और तुर्किए का बड़ा दखल है। लोगों को लगता है कि डॉ. यूनुस पश्चिमी देशों का एजेंडा पूरा कर रहे हैं। कानून व्यवस्था बहुत खराब है। ऐसे में चुनाव कैसे होंगे, ये कहना मुश्किल है।’ मंजरुल आलम कहते हैं कि अवामी पार्टी की एक्टिविटी पर बैन है। ऐसे में BNP और जमात के बीच सीधी लड़ाई है। जमात के मुकाबले BNP ज्यादा पसंद की जाने वाली पार्टी है। उसके पास 35% रिजर्व वोट हैं। जमात के पास सिर्फ 5-7% वोट है।' 'जमात और अंतरिम सरकार मिलकर बारीकी से चुनाव की प्लानिंग कर रहे हैं। मुझे लगता है कि चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे और ये मिलकर धांधली करेंगे। अगस्त, 2024 में लोग इंडिया से नाराज थे। अब लोगों को समझ आ रहा है। भारत का विरोध करने वाले फिर से समर्थन में आ गए हैं। हिंदू अल्पसंख्यक किसे वोट करेंगेबांग्लादेश में करीब 8% हिंदू आबादी है। चुनाव में 60 से 70 सीटों पर इनका असर है। तख्तापलट से पहले तक हिंदू समुदाय अवामी लीग के वोटर माने जाते थे। अब उनके सामने सवाल है कि वे किसे वोट करें। मंजरुल आलम कहते हैं, ‘सबसे बड़ा सवाल है कि अवामी लीग के वोटर और अल्पसंख्यक किसे वोट देंगे। BNP अवामी लीग के वोटर्स को अपने पाले में ला सकती है। ऐसा होता है तो BNP को जीतने से कोई नहीं रोक सकता। अंतरिम सरकार ने अल्पसंख्यकों पर हमलों के बाद जिस तरह का बर्ताव किया है, उससे साफ है कि हिंदू समुदाय स्टूडेंट्स की पार्टी NCP और जमात को वोट नहीं देगा। ऐसे BNP ही बड़ा विकल्प बचता है।’ चुनाव में धांधली हुई, तो सेना के लिए मौकाबांग्लादेश में चुनाव वाले दिन हिंसा और धांधली होती है, तो नतीजों में देरी होगी। अगर पूरे नतीजे नहीं आ पाए, दोबारा चुनाव कराया जाएगा। हालात हाथ से बिल्कुल बाहर हो गए, तो बांग्लादेश की आर्मी एक्टिव हो सकती है। सूत्र बताते हैं कि ऐसी स्थिति में नतीजे आने तक आर्मी कुछ वक्त के लिए सरकार भी बना सकती है। प्रोफेसर चौधरी कहते हैं, ‘बांग्लादेश में आर्मी का रुख प्रोफेशनल रहा है, लेकिन हाल में कई मौकों पर आर्मी का रवैया भेदभाव वाला दिखा है। 5 अगस्त के बाद उसने कई बार सरकार के निर्देशों का पालन किया, लेकिन बीच-बीच में सरकार को चेतावनी देती भी दिखी है। आर्मी की ही जिम्मेदारी है कि चुनाव शांति से हों।’ ……………………….बांग्लादेश से ये रिपोर्ट भी पढ़ें BNP लीडर बोले- इंडिया स्पेशल नहीं, शेख हसीना को पनाह देने से रिश्ते कैसे सुधरेंगे शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। वे कहते हैं कि हम भारत से अच्छी दोस्ती चाहते हैं, लेकिन भारत में कुछ स्पेशल नहीं है। समझ नहीं आता उसने शेख हसीना को पनाह क्यों दी है। इससे रिश्ते अच्छे नहीं हो पाएंगे। पढ़ें पूरा इंटरव्यू...
मुलाकात से जुड़े भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, डोभाल ने रूबियो से कहा था कि भारत राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने तक इंतजार करने को तैयार है। लेकिन भारत चाहता है कि ट्रंप और उनके सहयोगी भारत की सार्वजनिक रूप से निंदा न करें ताकि रिश्तों को पटरी पर लाया जा सके।
हाल में ही भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात बनी है. हालांकि, इस ओर ट्रंप के दावे पर एक्सपर्ट्स अपनी राय रख रहे हैं. कुछ जानकार मानते हैं कि अगर भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद किया, तो मॉस्को को भारी आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है.
दशकों बाद खुलेआम ईरान की सड़कों पर बाइक चला सकेंगी महिलाएं, सरकार ने पलटा सालों पुराना कानून
Iranian Women Get Freedom To Ride Motorcycles: ईरान में लंबे समय बाद महिलाओं को खुलेआम मोटरबाइक चलाने की इजाजत मिल गई है. अब वे दोपहिया वाहन के लिए लाइसेंस ले सकती हैं.
Army kill two jaish terrorists: उधमपुर में सुरक्षा बलों ने जैश के दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया है, जो गुफा में छिपे हुए थे. सर्च ऑपरेशन किया और किश्तवाड़ का ऑपरेशन त्राशी-1 लगातार जारी है, इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
लीबिया के पूर्व तानाशाह शासक मुअम्मर गद्दाफी के बेटे की गोली मारकर हत्या, मौत को लेकर अलग-अलग दावे
सैफ अल-इस्लाम के वकील खालिद अल-ज़ायदी के अनुसार, चार लोगों की एक टीम ने ज़िंतान शहर में स्थित उनके घर पर हमला किया और उन्हें गोली मार दी। वकील ने कहा कि यह हमला सुनियोजित था और हमलावर सीधे उनके निवास पर पहुंचे।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में भारत ने अभी तक अमेरिकी मानकों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, जबकि अमेरिका का मानना है कि उसके उत्पाद सुरक्षित और वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं। इस दिशा में एक मान्यता प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके तहत भारत को अपनी घरेलू राजनीतिक और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
लीबिया के पूर्व तानाशाह मुम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की हत्या कर दी गई है. कभी सुधारक के तौर पर देखे जाने वाले सैफ ने देश की नीतियां बनाईं, लेकिन 2011 के विद्रोह में पिता का साथ दिया. कैद से रिहा होने के बाद चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन विवादों में घिरे. आइए जानते हैं आखिर40 साल तक लीबिया को चलाने वाले गद्दाफी के वारिस को क्यों मार दिया गया?
ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि अमेरिका से मुठभेड़ से पहले उसके ड्रोन ने पूरा निगरानी डेटा कंट्रोल सेंटर तक भेज दिया था. हालांकि बाद में ड्रोन से संपर्क टूट गया. वहीं अमेरिका ने ईरानी ड्रोन को मार गिराने की पुष्टि की है. अरब सागर और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव तेज हो गया है.
शुक्रवार दोपहर ऑॅस्टिन अपनी मां जोआन एपलबि, 12 वर्षीय भाई ब्यू और आठ साल की बहन ग्रेस के साथ समुद्र में पैडल बोर्डिंग और कायकिंग कर रहा था। मौसम साफ था और समुद्र अपेक्षाकृत शांत दिख रहा था। परिवार छुट्टियों का आनंद ले रहा था। लेकिन कुछ ही देर में हालात बदल गए। तेज समुद्री हवाएं चलने लगीं और उनके इन्फ्लेटेबल (हवा भरे जाने वाले) बोर्ड्स खुले समंदर की ओर बहने लगे।
तनातनी के बीच अमेरिका-ईरान इस दिन करेंगे परमाणु वार्ता, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
इस्तांबुल में होने वाली बैठक में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकाफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल होंगे। इस वार्ता का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद को सुलझाना और पश्चिम एशिया में संभावित क्षेत्रीय संघर्ष के खतरे को टालना है।
Who Is Indian-origin restaurant owner Vikas Nath:लंदन के एक्सक्लूसिव क्लब एनाबेल्स में भारतीय मूल के रेस्टोरेंट मालिक विकास नाथ महिला के ड्रिंक में डेट-रेप ड्रग मिलाते पकड़े गए है. CCTV फुटेज, दोस्तों को भेजे आपत्तिजनक मैसेज और कोर्ट में कबूलनामे ने मामले को सनसनीखेज बना दिया. क्लब स्टाफ की फुर्ती से महिला सुरक्षित बच गई है. जानें पूरी रिपोर्ट.
China threaten Panama for port deal: पनामा ने हांगकांग की सीके हचिसन कंपनी के पोर्ट संचालन करार को रद्द कर दिया, जिससे चीन नाराज है और अमेरिका इसे अपनी जीत मान रहा है. इस फैसले से हचिसन की 23 अरब डॉलर की वैश्विक पोर्ट बिक्री योजना खतरे में पड़ गई है और इसी कारण चीन-पनामा तनाव बढ़ गया है.
दोस्ती पर लगी मुहर, ट्रंप के किस कमिटमेंट को मान गए पीएम मोदी? व्हाइट हाउस सेक्रेटरी ने बताई सच्चाई
India US Trade Deal: भारत और अमेरिका की ट्रेड डील के बाद अब व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने का कमिटमेंट किया है और इसके बजाय वह अमेरिका से कच्चा तेल लेगा.
S Jaishankar Meets Marco Rubio: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात कर आपसी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की है. ये बैठक ऐसे समय हुई है, जब भारत-अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स सम्मेलन और नए व्यापार समझौते को लेकर रिश्तों में नई तेजी देखी जा रही है.
लीबिया के पूर्व तानाशाह गद्दाफी के बेटे का कत्ल, सैफ अल-इस्लाम की गोली मारकर की गई हत्या
Libyan News: लीबिया के पूर्व तानाशाह मुआम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की गोली मारकर जिंतान शहर में हत्या कर दी गई है. इस हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है.
बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। पार्टी की कमान पूर्व PM खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। वे पार्टी की इंटरनेशनल सेल के प्रमुख हैं। अगर BNP सत्ता में आती है, तो अब्दुल मोइन खान विदेश मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में भारत-बांग्लादेश रिश्तों की दिशा तय करने में उनकी अहम भूमिका होगी। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: भारत-बांग्लादेश के रिश्ते अब तक के सबसे खराब दौर में हैं। अगर BNP की सरकार बनी, तो भारत के लिए क्या रुख होगा?जवाब: बांग्लादेश की विदेश नीति एकदम साफ है। दोस्ती सभी से, दुश्मनी किसी से नहीं। हमने भारत के लिए पहले भी यही पॉलिसी अपनाई है और आगे भी ऐसा ही करेंगे। भारत या किसी और देश में कुछ भी स्पेशल नहीं है। भारत-बांग्लादेश के संबंध सबसे खराब दौर में हैं या नहीं, ये यूनुस सरकार बताएगी। आम लोग अंतरिम सरकार की विदेश नीति, खासतौर पर भारत के साथ रिश्तों की वजह से खुश नहीं है। वे भारत जैसे बड़े पड़ोसी से बिगड़ रहे रिश्तों से भी नाखुश हैं। सवाल: बांग्लादेश और भारत के रिश्ते खराब होने की वजह क्या है?जवाब: दो देशों के बीच रिश्ते सरकारों के रिश्ते नहीं होते। भारत ने बांग्लादेश के मामले में बहुत गलत किया। वे अवामी लीग और शेख हसीना से अच्छे रिश्ते चाहते थे। असल में उन्हें बांग्लादेश के लोगों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने चाहिए थे। भारत के नेता, विदेश मंत्रालय के अधिकारी और सुरक्षाबल बांग्लादेश के लोगों की भावना समझने में नाकाम रहे हैं। अगर उन्होंने बांग्लादेश के लोगों को समझा होता, तो ये हालात नहीं होते। सवाल: क्या आपकी पार्टी भारत से अच्छे रिश्तों के लिए पहल करेगीजवाब: हम भारत से दोस्ती चाहते हैं। दुनिया के सभी मुल्कों से अच्छे और बराबरी वाले रिश्ते चाहते हैं। साउथ एशिया को एक ताकत के तौर पर उभरते देखना चाहते हैं। साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन यानी सार्क भी हमने मिलकर बांग्लादेश में ही बनाया था। दुनिया के हर मुद्दे या मुसीबत में साउथ एशिया अपना अलग पक्ष मजबूती के साथ रख सकता है। दुख की बात है कि सार्क काम नहीं कर रहा है। सवाल: क्या आपकी पार्टी चाहती है कि अवामी लीग से बैन हटे और शेख हसीना की वापसी हो?जवाब: शेख हसीना ने बांग्लादेश में जो भी किया, उसके बाद लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। शेख हसीना को देश छोड़कर जाना पड़ा। शेख हसीना को बांग्लादेश कोर्ट ने सजा सुना दी है। भारत ने उन्हें शरण दी है और बांग्लादेश की सरकार प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। हमें नहीं पता कि भारत ने हसीना को किस आधार पर पनाह दी है। उनके समर्थन में प्रोग्राम किए जा रहे हैं। अगर ये होता रहेगा, तो भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कैसे अच्छे होंगे। सवाल: अगर आप सत्ता में आए, तो क्या शेख हसीना की वापसी के लिए भारत से बात करेंगे?जवाब: इसके लिए आपको इंतजार करना होगा। BNP लोगों की आवाज से चलने वाली पार्टी है, जो लोग चाहेंगे, हम वही करेंगे। सवाल: डॉ. यूनुस का डेढ़ साल का कार्यकाल आपको कैसा लगा, क्या अंतरिम सरकार निष्पक्ष तरीके से चुनाव करवा रही है?जवाब: सरकार ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए माहौल बनाने की कोशिश तो की है। हालांकि, अधिकारियों की नियुक्तियों पर सवाल उठ रहे हैं। कई अधिकारी शेख हसीना सरकार में काम कर चुके हैं। वही अब चुनाव कराएंगे। इलेक्शन कमीशन चुनाव कराने के लिए इन्हीं अधिकारियों के भरोसे है। सवाल: बांग्लादेश में चुनाव के साथ रेफरेंडम भी कराया जा रहा है। लोगों को वोट करना होगा कि संविधान में बदलाव होने चाहिए या नहीं। आपको नहीं लगता इससे कन्फ्यूजन होगा?जवाब: मेरा मानना है कि सरकार को इन दोनों चीजों को मिलाना नहीं था। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि रेफरेंडम की क्या जरूरत है। लोगों को बांग्लादेश की मौजूदा लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत लग रही है। किसी एक के पास बहुत ज्यादा ताकत नहीं होनी चाहिए, शक्ति का संतुलन होना चाहिए। ऐसे में बदलाव के लिए बांग्लादेश में आम सहमति बन गई है। सवाल: BNP के सामने जमात-ए-इस्लामी बड़ी चुनौती है। आप जमात और उसकी विचारधारा के बारे में क्या सोचते हैं?जवाब: 35 साल की राजनीति में मुझे समझ आया है कि राजनीति और चुनाव दोनों अलग-अलग चीजें हैं। मुझे लगता है कि जमात राजनीति में अच्छी हो सकती है, लेकिन चुनाव में वो कोई बड़ी ताकत नहीं बन पाएंगे। सवाल: जमात-ए-इस्लामी मानता है कि बांग्लादेश में शरिया कानून से शासन चलना चाहिए, आपका क्या मानना है?जवाब: जमात अलग-अलग बात करती है। 6 महीने पहले वे कह रहे थे कि देश को शरिया कानून के तहत चलाना चाहते हैं। कुछ दिन पहले जमात नेता ने कहा कि बांग्लादेश में शरिया कानून नहीं थोपेंगे। लोगों को लगता है कि वे राजनीतिक सुविधा के मुताबिक रुख बदलते रहते हैं। मुझे लगता है कि जमात ने खुद को पहले की तुलना में बदला है। सवाल: अगर लोग रेफरेंडम में वोट देते हैं, तो क्या बांग्लादेश का सेक्युलरिज्म कायम रहेगा या खत्म कर दिया जाएगा?जवाब: बांग्लादेश आधिकारिक तौर पर कभी सेक्युलर राज्य नहीं रहा है। भारत सेक्युलर राज्य है। हां, बांग्लादेश ने हमेशा सेक्युलर देश के तौर पर ही व्यवहार किया है। यहां घूमने से आपको पता चल जाएगा कि देश में धार्मिक कट्टरता नहीं है। सवाल: बीएनपी की चेयरपर्सन खालिदा जिया के निधन के बाद उनके बेटे तारिक रहमान ने कमान संभाली है। वे ज्यादातर देश से बाहर रहे हैं, लोग कहते हैं कि उन्हें बांग्लादेश की जमीनी हकीकत नहीं पता है। इससे कैसे निपटेंगे?जवाब: तारिक रहमान लोगों से जुड़े व्यक्ति हैं। उनके काम करने का अपना स्टाइल है। रूरल एरिया में लोगों और पार्टी के कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पकड़ है। ये कहना गलत होगा कि जमीन पर उनकी पकड़ कमजोर है। सवाल: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हत्याओं की खबरें देखी-सुनीं। दीपू चंद्र दास को सरेआम मारा और पेड़ पर लटकाकर जला दिया। ऐसा क्यों हो रहा है?जवाब: ऐसी एक-दो घटनाएं हुई हैं। हर घटना में ये नहीं कहा जा सकता कि किसी को इसलिए मारा गया क्योंकि वो हिंदू था। बांग्लादेश जैसे देश की दिक्कत ये है कि यहां गरीबों को सताया जाता है। लोगों को धर्म के आधार पर कम और समाज में स्तर के आधार पर ज्यादा प्रताड़ित किया जा रहा है। सवाल: वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी जमात-ए-इस्लामी के नेताओं से मिल रहे हैं। क्या अमेरिका बांग्लादेश के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है?जवाब: मैंने पूरी रिपोर्ट पढ़ी है। इसे गलत तरह से समझा गया है। रिपोर्ट की भाषा से गलतफहमी फैली है। इसमें साफ तौर पर अधिकारी के हवाले से लिखा है कि अमेरिका ने जमात को उसके कट्टर रुख को लेकर चेतावनी दी है। अमेरिका ने जमात को समर्थन दिया है, ये बात सही नहीं है। सवाल: BNP चुनाव में किन मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जा रही है?जवाब: बांग्लादेश का जन्म लोकतंत्र के लिए हुआ था। हम चाहते हैं कि बांग्लादेश में लोकतंत्र होना चाहिए। 2009 के बाद से हमने लगातार 17 साल तक लोकतंत्र खत्म होते देखा है। इस दौरान अवामी लीग ने दमन, उत्पीड़न और यहां तक हत्याएं भी कीं। छात्रों ने सरकार से यही मांग की थी कि वे मेरिट के आधार पर नौकरियां चाहते हैं, न कि आरक्षण के आधार पर। शेख हसीना सरकार ने छात्रों को मारना शुरू कर दिया। यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के मुताबिक, 1600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, लेकिन शेख हसीना सरकार का खात्मा हुआ और अंतरिम सरकार बनी। अब आखिरकार चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव के साथ जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह बांग्लादेश में वोटिंग वाले दिन जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह होगा। जुलाई चार्टर संवैधानिक और राजनीतिक सुधार का डॉक्युमेंट है। इसमें प्रधानमंत्री की सत्ता सीमित करने की बात है, ताकि कोई हमेशा के लिए सत्ता में न रह सके। प्रधानमंत्री का कार्यकाल 8 या 10 साल करने की भी बात है। जुलाई 2025 में, पॉलिटिकल पार्टियों और नागरिक संगठनों के बीच जुलाई चार्टर नाम से संविधान सुधार प्रस्ताव बना था। इसमें 26 पॉइंट हैं। चार्टर के जरिए 4 अहम चीजें तय करने की कोशिश हुई है। जनमत संग्रह में लोगों से जुलाई चार्टर को लागू करने के आदेश पर राय मांगी जाएगी। इसमें प्रावधान है कि राजनीतिक दलों की अलग-अलग मांगों के बीच संतुलन बनाने के लिए 100 सदस्यों वाले अपर हाउस प्रतिनिधित्व के आधार पर बनाया जाएगा, यानी जिस पार्टी को जितने वोट मिलेंगे, उसी अनुपात में उसे सीटें दी जाएंगी। ……………………….. बांग्लादेश से ये इंटरव्यू भी पढ़ें...हिंदूवादी नेता का नामांकन रद्द, बोले-बांग्लादेश की पार्टियां नहीं चाहतीं हम संसद पहुंचें बांग्लादेश की राजधानी ढाका की गोपालगंज सीट से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना चुनाव लड़ा करती थीं। इस सीट से इस बार हिंदूवादी नेता और वकील गोबिंद चंद्र प्रमाणिक निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले थे। उनका नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया। गोबिंद बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत के महासचिव हैं। आरोप है कि उनका नामांकन हिंदू होने की वजह से रद्द किया गया है। पढ़ें पूरा इंटरव्यू...
31 जनवरी को फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर 5 राउंड फायरिंग हुई। घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग के गुर्गे शुभम लोनकर ने ली। वही शुभम, जो सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग केस में भी वांटेड है। रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग से 5 दिन पहले फिल्म फाइनेंसर सनी नाना वाघचौरे से 5 करोड़ रुपए रंगदारी मांगी गई थी। ये धमकी भी शुभम लोनकर ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर दी थी। तीन किलो सोने की चेन पहने सनी की तस्वीरें सोशल मीडिया में काफी वायरल हैं। अब सवाल उठता है कि क्या ये महज इत्तफाक था या सोची समझी साजिश। कहीं रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग के बहाने लॉरेंस गैंग के निशाने पर बॉलीवुड के बड़े स्टार्स तो नहीं हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच और दूसरी एजेंसियां अब इस एंगल से मामले की पड़ताल कर रही हैं। मुंबई पुलिस ने पहले रोहित शेट्टी के मामले में शुभम लोनकर का नाम कोर्ट डॉक्यूमेंट में नहीं रखा था, लेकिन बाद में जोड़ दिया। हालांकि जिस लॉरेंस के नाम पर फायरिंग हुई और धमकाया गया, पुलिस ने उसका नाम इसमें शामिल नहीं किया है। पुलिस शुभम लोनकर के सोशल मीडिया पोस्ट की जांच कर रही है। दैनिक भास्कर को सोर्सेज से पता चला है कि बॉलीवुड में बड़े फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़े प्रोड्यूसर, एक्टर और फाइनेंसर, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर हैं। ये 1990 में दाऊद गैंग के पैटर्न को फॉलो कर रहे हैं। अबू सलेम की तर्ज पर लॉरेंस का गुर्गा मांग रहा रंगदारीरोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग के बाद शुभम लोनकर आरजू बिश्नोई नाम से बने फेसबुक पेज से एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई। इसमें कई फिल्म स्टार्स को टारगेट करने का जिक्र है। ऐसे में सवाल था कि क्या वाकई फिल्म स्टार लॉरेंस गैंग के निशाने पर हैं। इसे समझने के लिए हमने गैंगस्टर नेटवर्क पर काम कर रहे सोर्स से कॉन्टैक्ट किया। नाम न छापने की शर्त पर मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि लॉरेंस गैंग से अलग होने के बाद रोहित गोदारा-गोल्डी बराड़ गैंग भी फिल्मी सितारों को टारगेट कर रहा है। सितंबर 2025 में यूपी के बरेली में एक्ट्रेस दिशा पाटनी के घर फायरिंग की गई। पहली बार फायरिंग की खबर मीडिया में नहीं आई, तो अगले दिन कई राउंड फायरिंग की गई। इससे पहले अप्रैल 2025 में लॉरेंस गैंग ने सलमान खान के घर फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी। फिर अक्टूबर 2025 में कनाडा के सरे में कपिल शर्मा के कैफे पर तीसरी बार फायरिंग हुई। इन घटनाओं से साफ है कि लॉरेंस गैंग फिल्मी सितारों को धमकी देकर करोड़ों वसूलने की तैयारी में हैं। हालांकि, लॉरेंस गैंग का मेंबर शुभम लोनकर जो पैटर्न अपना रहा है, वही 1990 के दशक में दाऊद इब्राहिम के खास अबू सलेम का था। पहले दाऊद के नाम पर, फिर अपने नाम पर अबू सलेम फिल्मी सितारों को फोन पर धमकाता था। फायरिंग की आवाज सुनाकर एक्सटॉर्शन मनी मांगता था। वो कहता था- ‘अब अगली गोली तुम्हारे लिए चलेगी।‘ ‘5 दिन में 5 करोड़ नहीं मिले तो बाबा सिद्दीकी जैसा हाल होगा’FIR के मुताबिक, शुभम ने बिजनेसमैन और फाइनेंसर सनी नाना वाघचौरे को धमकाने के लिए 25 जनवरी की शाम इंटरनेशनल नंबर से दो बार वॉट्सएप कॉल किया, लेकिन फोन नहीं उठा। इसके कुछ देर बाद उसने मैसेज किया, जिसमें लिखा था- Shubham Lonkar, Cl me (शुभम लोनकर, मुझे कॉल करो)। सनी ने कॉलबैक किया तो जवाब मिला- ‘शुभम लोनकर बोल रहा हूं, अगर नाम नहीं पता, तो गूगल पर सर्च कर लो, पता चल जाएगा। जब कॉल करूं, उठा लेना।’ इसके बाद फोन कट गया। अगले दिन 26 जनवरी की शाम दूसरे इंटरनेशनल नंबर से कॉल आया। ये कॉल भी सनी नाना ने नहीं उठाया। कुछ देर बाद मैसेज आया, जिसमें लिखा था- '5 करोड़ रुपए देने के लिए तैयार हो जाओ। 5 दिन में पैसा मिल जाए वरना बाबा सिद्दीकी जैसा हाल होगा।' सनी ने अपने एडवोकेट आतिश लांडगे को इसकी जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने पिंपरी चिंचवड़ पुलिस में मामले की शिकायत की। पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला कि कॉल और मैसेज VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क के जरिए किए गए थे। पुलिस ये भी पता लगा रही है कि आखिर कॉल करने वाला शुभम लोनकर ही था या कोई और। रोहित शेट्टी के घर 5 राउंड फायरिंग, पहले लगा पटाखे फूटे रोहित शेट्टी 31 दिसंबर की रात करीब 10 बजे जुहू में अपने घर शेट्टी टावर पहुंचे। करीब 12:45 बजे परिवार के साथ 7वीं मंजिल पर थे। तभी पहली बार फायरिंग हुई। घर के बाहर दो प्राइवेट बॉडीगार्ड और दो पुलिसकर्मी तैनात थे। पहले लगा कि पटाखों की आवाज है, लेकिन दोबारा आवाज आने पर सीसीटीवी चेक किया गया, तो फायरिंग का पता चला। ब्लैक जैकेट और सफेद पैंट पहने एक युवक गेट के बाहर खड़ा दिखा। उसके हाथ में पिस्टल थी। फायरिंग के दौरान जिम के कांच पर भी एक गोली लगी। घटना के बाद युवक अपने साथी के साथ स्कूटर से फरार हो गया। शेट्टी फैमिली से मिली सूचना के बाद जुहू पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में पुलिस को मौके से कारतूस के 5 खाली खोखे मिले हैं। वहीं आरोपी स्कूटर से ट्यूलिप स्टार होटल जंक्शन पहुंचे। वहां पुलिस की नाकाबंदी थी, इसलिए आरोपी यू-टर्न लेकर जुहू चर्च की तरफ चले गए। दोनों ने वहीं स्कूटर छोड़ दिया और ऑटो से भाग निकले। पुलिस ने जुहू चर्च से लावारिस स्कूटर बरामद कर ली है। स्कूटर की जांच हुई तो मालिक का पता चला। उन्होंने पूछताछ में बताया कि कुछ दिन पहले ही स्कूटर (MH12FN2205) आदित्य गायकवाड़ को 30 हजार रुपए में बेच दी थी। पुलिस ने अब तक कुल 4 आरोपियों को अरेस्ट कर लिया है। हालांकि, शेट्टी टावर पर फायरिंग करने वाला शूटर अब भी फरार है। सभी आरोपी पुणे के रहने वाले, कोई स्टूडेंट तो कोई डिलिवरी बॉयमुंबई पुलिस ने सबसे पहले आरोपी आदित्य ज्ञानेश्वर गायकवाड़ को पकड़ा। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि चारों आरोपियों के बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड से कई सबूत मिले हैं, जिससे चारों के आपस में जुड़े होने का पता चला। इन्होंने ही स्कूटर और हथियार का इंतजाम किया था। पुलिस के मुताबिक, चारों आरोपी पुणे के रहने वाले हैं। इनमें से आदित्य ने 30 हजार रुपए में स्कूटर खरीदकर शूटर को दिया था। आदित्य ऑनलाइन सामानों की डिलीवरी करता है। इससे पूछताछ के जरिए पुलिस स्वप्निल, समर्थ शिवशरण पोमानी और सिद्धार्थ दीपक येनपुरे तक पहुंची। मुंबई पुलिस में हमारे सोर्स ने बताया कि इन सभी चार आरोपियों में स्वप्निल बंदू बेरोजगार है। इस घटना को अंजाम देने के लिए वही सीधा शुभम लोनकर के कॉन्टैक्ट में था। वहीं बाकी दो आरोपी समर्थ शिवशरण पोमानी और सिद्धार्थ येनपुरे ने गैंग से जुड़ने के लिए स्कूटर और हथियार खरीदने में मदद की थी। पांचवां आरोपी अब भी फरार है। यही शूटर है। बताया जा रहा है कि ये कुछ हजार रुपए लेकर फायरिंग के लिए तैयार हो गया था। कोर्ट डॉक्यूमेंट में शुभम का नाम जोड़ा, लॉरेंस बिश्नोई का नाम नहींरोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग के बाद शुभम लोनकर ने सोशल मीडिया पर हमले की जिम्मेदारी ली है। उसने लिखा- ‘सभी भाइयों, आज जो मुंबई में (शेट्टी टावर) फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर फायरिंग हुई है, उसकी जिम्मेदारी शुभम लोनकर, आरजू बिश्नोई, हरि बॉक्सर, हरमन संधू लेते हैं।' 'हमने इसे बहुत बार मैसेज किया कि हमारे काम में दखल न दे, लेकिन इसे समझ में नहीं आया। ये छोटा सा ट्रेलर दिया है। अगर इसने आगे हमारी बात नहीं मानी, तो अब घर के बाहर नहीं, अंदर इसके बेडरूम में गोली चलेगी, इसकी छाती पर।‘ इसी पोस्ट में आगे लिखा- ‘बॉलीवुड को चेतावनी है कि टाइम रहते सुधर जाओ, नहीं तो बुरा हाल होगा। तुम्हारा बाबा सिद्दीकी से भी बुरा हाल करेंगे। हमने जिन-जिन लोगों को फोन कर रखा है या तो टाइम रहते लाइन पर आ जाओ, वरना छिपने के लिए जगह कम पड़ जाएगी। जितने भी हमारे दुश्मन हैं, तैयार रहो, तुमसे जल्दी ही मुलाकात होगी। एक ही था, एक ही है और एक ही रहेगा, लॉरेंस बिश्नोई गैंग।‘ इस घटना को लेकर 1 फरवरी को पुलिस ने कोर्ट में रिमांड आवेदन किया था। उसमें बताया गया कि 31 जनवरी की देर रात जब फायरिंग हुई, तब पुलिस विभाग की तरफ से तैनात किए गए दो पुलिसकर्मी की ड्यूटी वहीं पर थी। एक पुलिसकर्मी का नाम आशीष राणे और दूसरे का सचिन राणे है। घटना के वक्त आशीष राणे शेट्टी टावर की सातवीं फ्लोर पर खाना खा रहे थे। दूसरा पुलिसकर्मी उस वक्त कहां था, इसका जिक्र कोर्ट डॉक्यूमेंट में नहीं है। वहीं प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड उस समय गार्ड लॉबी में सीसीटीवी कैमरे देख रहे थे। फौजी बनना चाहता था शुभम, अब मुंबई में दबदबा बनाने की चाहत 32 साल शुभम लोनकर महाराष्ट्र के अकोला जिले के अकोट का रहने वाला है। पहले भाई के साथ पुणे में डेयरी चलाता था। वो अपनी कद-काठी के चलते आर्मी में भर्ती होना चाहता था। 2018-19 में राजस्थान के जैसलमेर में उसने आर्मी भर्ती का एग्जाम भी दिया था, लेकिन फेल हो गया। इसके बाद शुभम, लॉरेंस गैंग के नेटवर्क से सोशल मीडिया के जरिए जुड़ गया। फिर सीधे उसकी अनमोल बिश्नोई से बात होने लगी। शुभम का नाम पहली बार बाबा सिद्दीकी मर्डर केस में आया। इसी ने फेसबुक पोस्ट से हत्या की जिम्मेदारी ली थी। वो हत्याकांड में वांटेड भी है। आशंका है कि शुभम नेपाल के रास्ते विदेश भाग चुका है। अब अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी और गोल्डी बराड़ के गैंग से अलग होने के बाद शुभम ही लॉरेंस गैंग की अहम कड़ी बन गया है। पिछली दो घटनाओं में शुभम लोनकर के साथ आरजू बिश्नोई का नाम भी आ रहा है। कुछ महीने पहले ही सिंगर बी प्राक को धमकी देने के मामले में पहली बार आरजू बिश्नोई का नाम सामने आया। अब रोहित शेट्टी के घर हुई फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पोस्ट पर शुभम लोनकर के साथ आरजू बिश्नोई का नाम आया है। हमारे सोर्स बताते हैं कि इस बात की संभावना ज्यादा है कि शुभम ने ही अपना नाम आरजू बिश्नोई भी रखा है। लॉरेंस के बाद कुख्यात नाम अनमोल बिश्नोई का था, लेकिन अब वो पुलिस की निगरानी में है।………………..ये खबर भी पढ़ें लॉरेंस और पाकिस्तानी डॉन शहजाद क्यों बने दुश्मन पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी अपने गैंगस्टर टेरर मॉड्यूल के जरिए भारत के खिलाफ खतरनाक साजिश रच रहा है। ये वही शहजाद है, जो कभी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का सबसे करीबी दोस्त था। पहलगाम हमले के बाद लॉरेंस ने हाफिज सईद को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद से शहजाद भट्टी लॉरेंस बिश्नोई और उसकी गैंग का दुश्मन बन गया। पढ़िए पूरी खबर…

