नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK/PoK) में हाल ही में आयोजित कराए गए तथाकथित स्थानीय चुनावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे एक ‘खोखला ढोंग और नाटक’ (Farce) करार दिया है. विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते […]
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
Anthropic India Plan: भारत में ही रहेगा एआई डाटा; एंथ्रोपिक की साझेदारी की योजना में क्या, किसे मिलेगा लाभ?
PAK में कुछ बड़ा होने वाला है? विदेश मीडिया बैन, बाहर जाने के लिए NOC
PoK में विरोध प्रदर्शनों के दमन पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बाद पाकिस्तान सरकार ने कड़ा कदम उठाया है. नई गाइडलाइन्स 2026 के तहत अब विदेशी पत्रकारों को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची से बाहर रिपोर्टिंग के लिए जाने से पहले एनओसी (NOC) लेना अनिवार्य कर दिया है.
No इंश्योरेंस-No फ्यूल: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश Jagran जिन गाड़ियों का बीमा नहीं है उन्हें पेट्रोल नहीं मिलेगा; सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, National Hindi News Hindustan कार के अंदर मौत होने भर से नहीं मिलेगा मोटर एक्सीडेंट मुआवजा ! लेकिन क्यों? जानिए लीगल एंगल Navbharat Times थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को लेकर सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश, नई कार-बाइक दोनों पर होगा लागू News18 Hindi 'बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल' सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI को क्या-क्या दिए आदेश ndtv.in
लाल सागर में हूती हमला, भारतीय जहाज डूबा
यमन के पश्चिमी तट के पास लाल सागर में विस्फोटकों से भरी एक नाव के हमले के बाद भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज डूब गया
अंग्रेजी नहीं आती थी... ट्रंप ने भारतीयों को दिया एक और झटका, एक झटके में रद्द किए 28000 CDL
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सड़कों की सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए गैर-नागरिकों और अवैध विदेशियों के पास मौजूद 28000 से अधिक कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। राज्यों के सहयोग से लगभग 24000 ऐसे ड्राइवरों के लाइसेंस पूरी तरह रद्द किए गए हैं जो अंग्रेजी बोल या पढ़ नहीं सकते थे।
अब बंगाल की खाड़ी में सेना उतारने की तैयारी में ट्रंप, भारत-चीन के करीब ऐसी हिमाकत क्यों? क्या प्लान
माना जाता है कि अमेरिका ने बांग्लादेश को एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान और एएच-64ई अपाचे आक्रमण हेलीकॉप्टर, साथ ही लॉकहीड निर्मित टीपीवाई-4 भूमि-आधारित वायु रक्षा रडार और NASAMS वायु रक्षा मिसाइल देने का प्रस्ताव दिया है।
'टिक टॉक... काउंटडाउन शुरू हो गया है', बिलावल भुट्टो ने शहबाज को दी चेतावनी
PoK में चल रहे चुनाव को लेकर पाकिस्तान की सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी PPP और PML-N आमने-सामने हैं. बिलावल भुट्टो जरदारी ने PML-N पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा, 'टिक टॉक, आपका काउंटडाउन शुरू हो गया है.'
समंदर ने उगले रहस्यमयी नीले जीव! ब्रिटेन के समुद्र किनारे सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ये अनोखे प्राणी
H-1B, L-1 वीजा वालों को झटका! रिन्यूअल पर भी पैसा वसूलेगा US
अमेरिका H-1B और L-1 वीजा रिन्यूअल पर भी अतिरिक्त शुल्क लागू करने की तैयारी में है. प्रस्ताव लागू हुआ तो बड़ी कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है. इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ने की आशंका है.
पाकिस्तान से अलग 11 अगस्त को 'स्वतंत्रता दिवस' क्यों मनाते हैं बलूचिस्तान के लोग?
इसका जवाब दशकों पुराने ऐतिहासिक विवाद में छिपा है, जो 1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन और कलात की रियासत के भाग्य से जुड़ा है, जो कभी वर्तमान बलूचिस्तान के एक बड़े हिस्से पर राज करती थी।
बौद्ध धर्म की प्रथाओं पर प्रतिबंध का विरोध पड़ा भारी, चीन ने तिब्बती अफसर को दी सख्त सजा
चीन ने पूर्वी तिब्बत के वरिष्ठ अधिकारी द्रुक बुम ग्याल को तिब्बती बौद्ध परंपराओं पर नए प्रतिबंध तुरंत लागू करने से कथित इनकार के बाद पद से हटा दिया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सामाजिक असंतोष की आशंका जताई थी। स्थानीय लोगों ने उनके रुख की सराहना की है।
Vinay Mohan Kwatra ने Georgia के गवर्नर Brian Kemp से की मुलाकात
(सागर कुलकर्णी)वाशिंगटन, चार अगस्त अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने जॉर्जिया के गवर्नर ब्रायन केम्प से मुलाकात की और दक्षिण-पूर्वी राज्य के साथ व्यापार और निवेश साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की। क्वात्रा ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “हमने भारत-जॉर्जिया व्यापार और निवेश साझेदारी बढ़ाने, बेहतर कनेक्टिविटी और व्यापार, नवाचार एवं शिक्षा में सहयोग को गहरा करने के मौकों पर चर्चा की। भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में जॉर्जिया के लगातार योगदान के प्रति हम आशान्वित हैं।’’उन्होंने गवर्नर केम्प को उनके सफल कार्यकाल के लिए बधाई दी। अटलांटा की अपनी यात्रा के दौरान, क्वात्रा ने लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कंपनी यूनाइटेड पार्सल सर्विस (यूपीएस) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरल टोम से भी मुलाकात की और भारत में निवेश के अवसरों पर चर्चा की। भारतीय राजदूत ने कहा कि टोम के साथ चर्चा भारत-अमेरिका की बढ़ती आर्थिक साझेदारी, मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और भारत में यूपीएस के बढ़ते निवेश, जुड़ाव तथा मौजूदगी पर केंद्रित थी। अटलांटा में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित भारत-अमेरिका शिक्षा गोलमेज वार्ता में, क्वात्रा ने अनुसंधान साझेदारियों, अकादमिक आदान-प्रदान, नवाचार, प्रौद्योगिकी सहयोग तथा भारत में सैटेलाइट परिसर खोलने पर लाभकारी चर्चा की। उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे भारत और अमेरिका भविष्य में निवेश कर रहे हैं, शिक्षा हमारी रणनीतिक साझेदारी के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बनी हुई है।”भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ अपनी बैठक में क्वात्रा ने कहा कि उनकी उपलब्धियां बढ़ती भारत-अमेरिका साझेदारी का मजबूत स्तंभ हैं। भारतीय राजदूत ने कहा, “अटलांटा में भारतवंशी समुदाय के सदस्यों से मिलकर बहुत अच्छा लगा। पूरे दक्षिण पूर्व में, हमारा समुदाय हर क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रहा है और भारत तथा अमेरिका के बीच रिश्तों को गहरा कर रहा है। उनकी उपलब्धियां गौरवान्वित करती हैं और हमारी बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का मजबूत स्तंभ हैं।
ईरान से जंग अमेरिका पर पड़ रही भारी! मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घटा, अब क्या करेंगे ट्रंप
ईरान से जंग अमेरिका पर पड़ रही भारी! मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घटा, अब क्या करेंगे ट्रंप
मुनीर-नकवी ने मिलकर कर दिया खेल, पाकिस्तान में तख्तापलट होने वाला है?
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पिछले 21 सालों के सबसे बड़े घोटाले का खुलासा करते हुए कहा है कि देश का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से विफल हो गया है। इससे पाकिस्तान को दुनिया भर में शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। नकवी ने जजों, राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। नतीजतन, पाकिस्तान में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और सत्ता परिवर्तन की संभावना को लेकर फिर से अटकलें लगाई जा रही हैं। इंटरनेशनल एनालिस्ट्स के अनुसार, मोहसिन नकवी तेज़ी से एक मीडिया प्रमुख से एक ताकतवर राजनीतिक नेता बन गए हैं। लंबे समय से उनकी प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रही है। माना जाता है कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस भूमिका में नकवी का सीधे तौर पर समर्थन करते हैं, क्योंकि नकवी को जनरल का बेहद करीबी माना जाता है। इसे भी पढ़ें: 11 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान! भारत भी हैरान बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में बढ़ते जन-आक्रोश और नागरिक अशांति के बीच, जनरल आसिम मुनीर अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, मुनीर देश में नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयाँ बनाने का रास्ता साफ़ करने के लिए मोहसिन नक़वी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका असल मकसद मुनीर के लिए पूरी सत्ता हासिल करने का रास्ता बनाना है—जिसमें वे राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों के प्रमुख, दोनों की भूमिका निभाएँगे—ठीक वैसे ही जैसे परवेज़ मुशर्रफ़ ने किया था। नकवी ने देश में जवाबदेही और न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए प्रशासनिक प्रांत बनाने की मांग की है। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता ने भी सुरक्षा और सुशासन के नज़रिए से इस प्रशासनिक पुनर्गठन का समर्थन किया है। हालाँकि, दोनों सत्ताधारी पार्टियों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी है, क्योंकि उनकी राजनीतिक ताकत पंजाब और सिंध प्रांतों से आती है; प्रांतों की सीमाओं में किसी भी बदलाव से उनका राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ ने मोहसिन नकवी के लगातार बयानों से नाराज़ होकर उन पर तीखा हमला किया है। आसिफ़ ने कहा कि नकवी पिछले तीन सालों से बहुत ताकतवर पद पर हैं और प्रधानमंत्री के प्रति भी जवाबदेह नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर इतनी ज़्यादा ताकत वाला व्यक्ति शिकायत कर रहा है, तो बाकी मंत्रियों को घर चले जाना चाहिए। आसिफ़ ने कैबिनेट की बैठकों और संसदीय सत्रों में नकवी की कम भागीदारी की भी आलोचना की। आसिफ़ ने नक़वी को यह सलाह भी दी कि वे अपने मंत्रालय और PCB से ही सिस्टम में बदलाव करना शुरू करें। इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय ने Pakistan में पीओके चुनाव को बताया दिखावा पाकिस्तान की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले बताते हैं कि मोहसिन नकवी लंबे वक्त से प्रधानमंत्री बनने की महत्वकांक्षा रखते हैं। मोहसिन नकवी के इन बयानों के पीछे सीधे सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का हाथ है। नकवी को जनरल मुनीर का बेहद करीबी और रिश्तेदार माना जाता है। मुनीर ने संघर्ष के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए भी मुनीर ने शहबाज सरकार को दरकिनार कर नकवी को ही अपना विशेष प्रतिनिधि बनाया था।
Pak सेना की सीक्रेट Info भारत की खुफिया एजेंसी को मिली, चीन के साथ बड़े खेल का खुलासा
पाकिस्तान की सेना में बड़े बदलाव हो रहे हैं। भारत की खुफिया एजेंसियों को कई अहम जानकारी इससे जुड़ी हुई हासिल हुई है। भारत की सुरक्षा एजेंसी को मिली खुफिया जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने अपने अधिकारियों, सैन्य कर्मियों को मेटा के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफार्म WhatsApp का इस्तेमाल बंद करके चीन के वीचैट प्लेटफार्म पर ट्रांसफर होने के निर्देश दिए हैं। ये कदम बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच लगातार गहराते रणनीतिक, सैन्य और तकनीकी सहयोग का एक बेहद महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की ओर से जारी एक आंतरिक निर्देश में सभी अधिकारियों, जवानों और प्रशासनिक अधिकारियों को आधिकारिक और ऑपरेशनल संचार के लिए धीरे-धीरे WhatsApp का इस्तेमाल बंद कर वीट अपनाने को कह दिया गया है। सूत्र कहते हैं कि इस फैसले के पीछे पश्चिमी मैसेजिंग प्लेटफार्म पर निगरानी, डाटा लीक और इंटरसेप्शन की आशंकाएं बहुत अहम वजह बताई जा रही हैं। इसे भी पढ़ें: 11 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान! भारत भी हैरान पाकिस्तानी सेना का मानना है कि संवेदनशील सैन्य संचार के लिए चीन के डिजिटल इको सिस्टम का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित और रणनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि इस पूरे मामले पर जो विशेषज्ञ हैं वह कहते हैं कि वीchaat को अपनाने से पाकिस्तान और चीन के सैन्य संचार तंत्र में अधिक तालमेल स्थापित हो सकता है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभियानों खुफ़िया जानकारी के आदान-प्रदान और साइबर समन्वय को और अधिक मजबूत करने में मदद हासिल हो सकता है। यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग लगातार नए आयाम हासिल कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Pakistan-Iran Diplomacy: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Islamabad बना मध्यस्थ, Ishaq Dar ने अरागची को भेजा न्योता बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध केवल लड़ाकू विमान, नौसैनिक युद्धपोत, एयर डिफेंस सिस्टम और दूसरे उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं रहे हैं। बल्कि साइबर क्षमताओं, सुरक्षित संचार नेटवर्क, साझा कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल और खुफिया सहयोग तक भी विस्तार हो चुका है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना के यह कदम केवल एक मैसेजिंग ऐप बदलने का फैसला नहीं बल्कि यह चीन के साथ उसके बढ़ते डिजिटल और डिजिटल और मिलिट्री इंटीग्रेशन का स्पष्ट संकेत है। इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य योजना, साइबर सुरक्षा, संवेदनशील सैन्य संचार में अधिक समन्वय देखने को मिल सकता है। और सबसे बड़ी बात ये कि जिस तरह से पाकिस्तान और चीन की हाल के दिनों में जुगलबंदी बनी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब पाकिस्तान और चीन की मिसाइलें बुरी तरह से भारत के आगे पिट गई, तो उसके बाद दोनों ही देश मिलकर अब नए तौर तरीके अपनाने पर लगे हैं। इसी कड़ी में माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना चीन के साथ मिलकर अब इस नए तरह के कम्युनिकेशन गेम में आना चाहती है जिसके जरिए वो अपनी सेनाओं की जानकारी को बचा सके और हैकिंग प्रूफ बना सके।
'वापस आएं और कानून का सामना करें', हसीना को लेकर बांग्लादेश की मांग
शेख हसीना की वापसी को लेकर बांग्लादेश ने भारत से फिर मांग दोहराई है. दिल्ली में उनके प्रस्तावित कार्यक्रम पर भी बांग्लादेश ने चिंता जताई है. वहीं, तसलीमा नसरीन की वापसी को लेकर भी बांग्लादेश सरकार ने अपना रुख बताया है.
ट्रंप की कसम, ईरान को मिटा देंगे, अब अमेरिका करेगा भयंकर बमबारी
ईरान ने वो कर दिया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी के आत्मघाती ड्रोंस ने कुवैत में बने अमेरिकी मिलिट्री बेस पर सीधा हमला बोल दिया है। यही नहीं ओमान के समंदर में एक और मालवाहक जहाज को मिसाइल से उड़ाने की कोशिश हुई है। इस घटना के बाद वाइट हाउस से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वो बयान आया है जिसने ईरान के माथे पर पसीना ला दिया। ट्रंप ने दो टूक कह दिया है ईरान के पास समझौते का यह आखिरी मौका है। वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे। ट्रंप ने साफ कर दिया कि अगर ईरान नहीं सुधरा तो अमेरिका टोटल मिलिट्री डिस्ट्रक्शन यानी ईरान का नामोनिशान मिटाने वाली कारवाई करेगा। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि डील की बातचीत चल रही है। वहीं दूसरी तरफ ईरान ने सीना तान कर कह दिया हम अमेरिका से कोई बात नहीं कर रहे। इसे भी पढ़ें: मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसा यह बातचीत फेल हो गई तो क्या अमेरिका ईरान पर बम बरसाएगा और इस लड़ाई से आपकी और हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? ईरान के खतरनाक शाहिद 136 सुसाइड ड्रोंस ने कुवैत में अमेरिकी बेस को निशाना बनाकर उड़ान बढ़ी। गनीमत यह रही कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते इन ड्रोंस को हवा में ही मार गिराया। लेकिन इसका मलबा जब नीचे गिरा तो अमेरिकी कैंपों में हड़कंप मच गया। अभी दुनिया इस हमले की कड़ियां जोड़ ही रही थी कि ओमान के तट से 20 समुद्री मील दूर होमज स्टेट में एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात मिसाइल से हमला हो गया। शक की सुई सीधे ईरान पर है क्योंकि यह पूरा इलाका ईरान के दबदबे वाला है। इस हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप गुस्से से लाल है। ट्रंप ने दावा किया कि वह शुक्रवार को ही ईरान पर एक बड़ा हमला करने वाले थे। लेकिन ईरान की तरफ से आए शांति के संकेतों के बाद उन्होंने प्लान टाल दिया था। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान तुरंत न्यूक्लियर डील पर साइन करे और समंदर का रास्ता जहाजों के लिए हमेशा खुला रखे। इसे भी पढ़ें: US-Iran युद्ध के बीच भारत का बड़ा एक्शन, अचानक तेहरान में नियुक्त किया अपना नया राजदूत लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कह दिया है हम अमेरिका से कोई डायरेक्ट बात नहीं कर रहे। जो भी बात हो रही है वो ओमान के जरिए सिर्फ समंदर के रास्ते को मैनेज करने के लिए हो रही। इतना ही नहीं ईरान के सांसदों ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने उनके देश पर एक भी बम गिराया तो पूरे मिडिल ईस्ट में फैले अमेरिकी ठिकानों को श्मशान बना देंगे और सऊदी अरब व यूएई के तेल कुओं को आग लगा देंगे।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला मंगलवार को संसद में जोरदार तरीके से गूंजा। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया तो संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर पलटवार किया। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस के दौरान सत्ता और विपक्ष के सदस्य आमने-सामने आ गए। हंगामा इतना बढ़ा कि सभापति सीपी राधाकृष्णन को अपने आसन से उठकर सदस्यों को शांत कराने की कोशिश करनी पड़ी। इसके बावजूद शोर नहीं थमा और कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इससे पहले, खड़गे ने कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था। ट्रस्ट को 70 एकड़ से ज्यादा जमीन सौंपी गई। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में ईडी, सीबीआई और दूसरी केंद्रीय जांच एजेंसियां कहां हैं, सरकार को सदन में इसका जवाब देना चाहिए। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर बनने पर काली पट्टी बांधकर विरोध किया था। जो लोग भगवान राम के अस्तित्व को नहीं मानते थे, वे आज घड़ियाली आंसू बहाकर देश को गुमराह नहीं कर सकते। पहले भगवान राम का अपमान करने के लिए देश से माफी मांगिए, उसके बाद सरकार से जवाब मांगिए। इसके बाद सदन में हंगामा और तेज हो गया। सभापति सीपी राधाकृष्णन अपने आसन से उठकर सदस्यों को शांत कराने पहुंचे, लेकिन व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी। इसके चलते राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर में कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी अपनी बात रखी। प्रश्नकाल हंगामे के बीच चला और सदन को फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। इसके बाद उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की अध्यक्षता में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 चर्चा के लिए पेश किया। विपक्ष के विरोध के बीच चर्चा हुई और विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही 5 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। उधर, लोकसभा में भी दिनभर हंगामा जारी रहा। सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा नहीं थमा। दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो पीठासीन दिलीप सैकिया के सामने विपक्षी सदस्य दोबारा वेल में पहुंच गए। इसी दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इसके कुछ देर बाद उन्होंने विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026 भी सदन में रखा। लगातार हंगामे के बीच दोनों विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से पारित हो गए। पीठासीन दिलीप सैकिया ने विपक्ष से कई बार सहयोग की अपील की, लेकिन जब हंगामा नहीं रुका तो लोकसभा की कार्यवाही भी 5 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति और राजपत्र में अधिसूचना के बाद यह कानून बन जाएगा। इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के देर से होने वाले पंजीकरण पर सख्ती बढ़ाना है। नए प्रावधान के तहत, यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के 2 साल से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) की अनुमति अनिवार्य होगी। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
पाकिस्तान की सियासत में बड़ा तूफान! नकवी ने खोले शरीफ सरकार के राज, सत्ता बदलने की अटकलें तेज
पाकिस्तान की सियासत में बड़ा तूफान! नकवी ने खोले शरीफ सरकार के राज, सत्ता बदलने की अटकलें तेज
'भारत और उज्बेकिस्तान में अटूट मित्रता'
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा हैकि भारत और उज्बेकिस्तान सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों से बंधे हुए हैं और ये संबंध उनकी अटूट मित्रता का मजबूत आधार हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि बढ़ते राजनीतिक विश्वास, बढ़ते व्यापार और निवेश तथा जन-जन केबीच आदान-प्रदान में वृद्धि से आने...
ड्रैगन की 'चिकन नेक' पर घेराबंदी की चाल! बांग्लादेश को चीन देगा J-10CE फाइटर जेट
भारतीय रक्षा विशेषज्ञों की नजर में यह सौदा सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के हवाई ताकत के संतुलन को बिगाड़ने वाली एक बड़ी रणनीतिक चाल है।
11 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान! भारत भी हैरान
दक्षिण एशिया की भू राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक नींद उड़ा दी है पूरी दुनिया की। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने एक ऐतिहासिक घोषणा की है कि 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस घोषित कर दिया गया है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं है बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व को दी गई सबसे बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान के कब्जे से अपनी आजादी का दावा करने के कुछ ही हफ्तों बाद अब बलूच नेतृत्व ने पूरी दुनिया के देशों से अपील की है कि वे बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दे। आखिर 11 अगस्त का राज क्या है? दरअसल बलूचिस्तान का दावा है कि वे कभी भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं थे बल्कि वे एक अलग रियासत थे। 11 अगस्त 1947 को यानी पाकिस्तान बनने से 3 दिन पहले बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का ऐलान किया। हैरानी की बात यह है कि उस समय द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी इस खबर को छापा था और ऑल इंडिया रेडियो ने दुनिया को बताया था कि बलूचिस्तान आजाद हो चुका है। लेकिन फिर क्या हुआ? इसे भी पढ़ें: Balochistan में Pakistani Army पर भीषण हमला, UBA और BRG के धमाकों में 8 जवानों की मौत मार्च 1948 में पाकिस्तान की सेना ने जबरन बलूचिस्तान में घुसकर उस पर कब्जा कर लिया। आज के बलूच नेता मीरियार बलूच ये कहते हैं कि पाकिस्तान के साथ उनका रिश्ता सिर्फ और सिर्फ अवैध कब्जे का है। इसलिए 11 अगस्त को फिर से मनाना उस खोई हुई आजादी को वापस पाने की एक सबसे बड़ी मुहिम है। दरअसल रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के ताजा बयान में पाकिस्तान पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान का जन्म ही इस पूरे क्षेत्र में अशांति और आतंकवाद का कारण बना है। इसमें साफ तौर पर जिक्र किया गया है कि कैसे पाकिस्तान की नीतियों ने कश्मीर में घुसपैठ की। कैसे 1971 में पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश है वहां नरसंहार किया गया पाकिस्तानी सैनिकों के द्वारा और कैसे जॉर्डन में फिलिस्तीनियों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाए गए। इतना ही नहीं, बलूच नेतृत्व ने 1998 के चगाई परमाणु परीक्षणों को भी याद दिलाया जो बलूचिस्तान की जमीन पर किए गए थे, और जिससे वहां की पर्यावरण और जनता को भारी नुकसान पहुंचा था। उनका तर्क सीधा है कि जब तक पाकिस्तान अपने मौजूदा नक्शे में रहेगा तब तक ना तो भारत सुरक्षित है और ना ही अफगानिस्तान और ना ही पूरी दुनिया। इसे भी पढ़ें: Pakistan में इस साल 3,000 से अधिक आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं: सेना अब बलूचिस्तान की यह लड़ाई सिर्फ जंगलों और पहाड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह डिप्लोमेसी की मेज पर पहुंच चुकी है और बलूच नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय विशेषकर भारत, अमेरिका और यूरोपीय देशों से अपील कर दी है और उनका कहना है कि 60 मिलियन बलूच जनता अपनी संप्रभुता के लिए तैयार खड़े हैं। बलूच दुनिया से पूछ रहे हैं कि अगर सूडान अलग हो सकता है अगर तिमोर लेसे को पहचान मिल सकती है तो बलूचिस्तान को क्यों नहीं? वे चाहते हैं कि दुनिया पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को पीछे छोड़कर बलूचिस्तान की जमीनी हकीकत देखे जहां हर दिन युवा लापता हो रहे हैं और संसाधनों की लूट मची हुई है।
'यह आखिरी मौका है...' ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान का पलटवार, कहा- जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं
'यह आखिरी मौका है...' ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान का पलटवार, कहा- जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं
ईरान का बड़ा बयान, Pezeshkian बोले 'हम युद्ध नहीं चाहते' पर Trump ने दी Last Chance की चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने सोमवार को कहा कि तेहरान इलाके में कोई झगड़ा या तनाव नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं करेगा। प्रेस टीवी के मुताबिक, पेज़ेश्कियान ने कहा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान इलाके में तनाव या अस्थिरता नहीं बढ़ाना चाहता।हालांकि, देश की सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए वह अपनी पूरी ताकत से काम करेगा। उनके ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आए हैं जिसमें उन्होंने सोमवार (स्थानीय समय) को कहा था कि ईरान को समझौता करने का आखिरी मौका दिया गया है। ट्रंप ने दावा किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ईरान के अनुरोध पर कूटनीति का रास्ता अपनाने के लिए वॉशिंगटन ने एक तय सैन्य हमले को रोक दिया था। इसे भी पढ़ें: Delhi Gold Price: दिल्ली में सोना ₹1,47,500 के पार, US-Iran Tension के बीच बाजार में बेचैनी ओवल ऑफिस में 'प्रेसिडेंशियल मिलिट्री स्पाउस कमीशन' बनाने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि कूटनीतिक कोशिशों की वजह से हमले को रोकने से पहले अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार था। तेहरान के साथ चल रही बातचीत पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा यह आखिरी मौका है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह उनके लिए एक अच्छा समझौता करने का आखिरी मौका है। ईरान के अनुरोध पर बातचीत होने का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा हम अभी बातचीत कर रहे हैं, हम बातचीत कर रहे हैं और यह बातचीत ईरान के अनुरोध पर हो रही है, जिसे सऊदी अरब, UAE और खासकर कतर का समर्थन हासिल है, और दूसरे देशों का भी। कई देशों ने फोन किया... वे सभी इसे एक आखिरी मौका देना चाहते थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ कई बैठकें करने के बावजूद ईरान ने पहले बातचीत करने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से फिर से खोलने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत के नए दौर का पहला चरण इस अहम शिपिंग रूट को खोलने पर केंद्रित होगा। इसे भी पढ़ें: Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमान हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल नहीं है। उन्होंने तेहरान और वाशिंगटन के बीच सक्रिय द्विपक्षीय बातचीत के दावों को सख्ती से खारिज कर दिया। फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बघाई ने जोर देकर कहा कि ईरान का मौजूदा राजनयिक जुड़ाव केवल पड़ोसी देश ओमान के साथ द्विपक्षीय है, जो रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर एक अस्थायी सुरक्षित रास्ता बनाने पर केंद्रित है। बघाई ने स्पष्ट किया कि ओमान में चल रही बातचीत पूरी तरह से समुद्री यातायात प्रबंधन तक ही सीमित है। हालांकि मस्कट के साथ एक नए अस्थायी शिपिंग लेन को लेकर बनी सहमति सुरक्षित नेविगेशन के लिए एक तकनीकी पूर्व-शर्त है, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि ऐसा समझौता एक जरूरी शर्त तो है, लेकिन इस अहम 'चोकपॉइंट' (संकरे समुद्री रास्ते) को पूरी तरह से फिर से खोलने के लिए अकेले यह काफी नहीं है।
तमिलनाडु में नेता विपक्ष उदयनिधि स्टालिन को मंगलवार सुबह पुलिस घर से उठा ले गई। उन पर महिला के अपमान से लेकर दंगा भड़काने तक ९ धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। मामला एक दिन पहले एक रैली का है, जिसमें उदय के भाषण के बीच कुछ लोग सीएम विजय थलापति की करीबी एक्ट्रेस ‘तृषा’ का नाम चिल्लाने लगे। उदयनिधि ने भी मुस्कराते हुए ‘डबल-मीनिंग’ बात कह दी। सीएम विजय और एक्ट्रेस तृषा की कहानी क्या है, कभी दोस्त रहे विजय और उदयनिधि राइवल कैसे बने और मौजूदा विवाद में आगे क्या होगा; आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: उदयनिधि ने रैली में ऐसा क्या किया, जो पुलिस घर से उठा ले गई? जवाब: 3 अगस्त को तमिलनाडु के तंजावुर में कावेरी जल विवाद पर प्रोटेस्ट चल रहा था। पूर्व सीएम MK स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने मंच से कहा, ‘45 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी आना चाहिए था, लेकिन एक बूंद भी नहीं आई। हमारे सीएम तो इसपर कुछ बोल ही नहीं रहे हैं। उनकी चिंता DMK (उदयनिधि की पार्टी) नेताओं पर झूठे मामले दर्ज करने की है।' इसी बीच रैली में मौजूद कुछ लोग 'तृषा-तृषा' का नारा लगाने लगे। उदयनिधि ने भाषण रोका और भीड़ की तरफ मुस्कराते हुए एक डबल-मीनिंग सेंटेंस बोला। उनके पीछे मंच पर बैठे लोग भी इस पर मुस्कराए। फिर उदयनिधि ने कहा, 'मैं कावेरी की बात कर रहा था।' विजय की पार्टी TVK सहित बीजेपी नेताओं ने भी इस पर कड़ा विरोध जताया। उदयनिधि के बयान को तृषा पर सेक्शुअल कमेंट की तरह देखा जा रहा है। TVK प्रवक्ता फेलिक्स जेराल्ड ने कहा, 'क्या विपक्ष के नेता उदयनिधि अपनी बेटी या बेटे को लेकर भी ऐसा कहेंगे?' तमिलनाडु बीजेपी प्रवक्ता नारायण तिरुपति ने कहा, 'उदयनिधि का बयान अश्लील, अमर्यादित और आम जनभावना को ठेस पहुंचाने वाला है। इसके लिए उनको जेल भेजना चाहिए।' सवाल-2: आखिर कौन हैं तृषा, जिनका सीएम विजय के साथ अक्सर जिक्र आता है? जवाब: पहले ये 3 तस्वीरें देखिए… 4 मई, 2026, जगह थलापति विजय का नीलांकरई वाला घर 10 मई, 2026, विजय का शपथ ग्रहण समारोह, चेन्नई 22 जून, 2026, विजय का जन्मदिन इसके पहले 15 मई को तृषा की नई फिल्म ‘करुप्पु’ की स्क्रीनिंग थी। विजय ने ‘करुप्पु’ के लिए सुबह 9 बजे के मॉर्निंग शो (स्पेशल स्क्रीनिंग) की परमिशन दी। जबकि मॉर्निंग शो तमिलनाडु में 3 सालों से बैन था। स्क्रीनिंग के बाद थिएटर से निकली तृषा से फैन ने कहा, 'थलापति से कहना- मैंने उनका हालचाल पूछा है।' इस पर तृषा ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘कंदीपा (जरूर)’। तृषा और विजय के इस साथ की कहानी पुरानी है.. हालांकि, विजय और तृषा ने अबतक अपने रिश्ते को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। सवाल-3: उदयनिधि और सीएम विजय की पुरानी राइवलरी, क्या पर्सनल खुन्नस निकाल रहे? जवाब: एक समय उदयनिधि और विजय दोस्त हुआ करते थे। दोनों चेन्नई के लोयोला कॉलेज से पढ़े हैं। विजय, उदयनिधि से 3 साल सीनियर थे। विजय के ही कहने पर उदयनिधि ने अपना प्रोडक्शन हाउस- ‘रेड जायंट मूवीज’ शुरू किया और 2008 में विजय और तृषा को लेकर मूवी ‘कुरुवी’ बनाई। ये फिल्म सफल नहीं रही। फिर विजय और उदयनिधि ने कभी साथ काम नहीं किया। ‘कुरुवी’ के बाद दोनों में नाराजगी हो गई थी। 2023 में उदयनिधि ने कहा, ‘विजय आसानी से दोस्त नहीं बनते। जब बनते हैं, तो बहुत करीब हो जाते हैं। कुरुवी के बाद कुछ लोगों ने हमें अलग करने की कोशिश की, हमने दो साल बात नहीं की, लेकिन हम दोबारा दोस्त बने। हालांकि फिर हमने उचित दूरी बनाए रखी।’ 2012 में उदयनिधि ने भी फिल्म 'ओरु कल ओरु कन्नाडी' से एक्टिंग की शुरुआत की थी। तब तक कई ब्लॉकबस्टर हिट्स दे चुके विजय का कद बड़ा हो चुका था। उदय से पूछा गया कि क्या विजय को टक्कर देने फिल्म इंडस्ट्री में आए हैं। उदय ने कहा, 'मैं पागल नहीं हूं, जो उनसे कॉम्पिटीशन रखूंगा।' उदय ने करीब 20 फिल्में की हैं। जबकि विजय आखिरी मूवी ‘जननायगन’ तक करीब 70 फिल्में कर चुके हैं। 2021 में जब उदयनिधि ने पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, तो विजय से आशीर्वाद लिया। यहां तक सब ठीक था, लेकिन असली प्रतिद्वंद्विता तब शुरू हुई, जब विजय ने विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की और उदयनिधि के पिता सीएम MK स्टालिन के खिलाफ बयान देने शुरू किए। दरअसल, तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन से निकली दो पार्टियां- DMK और AIADMK हैं। दोनों तमिल प्राइड, सेकुलरिज्म और एंटी-हिंदी स्टैंड के लिए जानी जाती हैं, लेकिन DMK इन मुद्दों पर ज्यादा कट्टर है। जबकि विजय ने एक नए तरीके की द्रविड़ पॉलिटिक्स की चर्चा की। उन्होंने DMK सरकार में भ्रष्टाचार को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। स्टालिन परिवार के खिलाफ तीखे बयान दिए। विधानसभा में अपनी पहली स्पीच में उन्होंने एक कहानी सुनाई- ‘एक बुजुर्ग व्यक्ति धूप में कुछ खोज रहा था। एक लड़के ने उससे पूछा कि क्या ढूंढ रहे हैं। उसने जवाब दिया- 'मैं तुम्हारे पिता को ढूंढ रहा हूं।' दरअसल, स्टालिन चुनाव में अपनी कोलाथुर सीट हार गए थे। जवाब में उदयनिधि ने विजय के तलाक के मामले की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘चेंगलपट्टू कोर्ट में अपने पति को ढूंढ रही पत्नी की कहानी तमिलनाडु के लोग पहले से ही जानते हैं।' मई में विजय के सीएम बनने के बाद ये भी खबर आई कि ‘रेड जायंट मूवीज’ ने तृषा को रजनीकांत और कमल हासन स्टारर एक बड़ी फिल्म के लिए 12 करोड़ रुपए ऑफर किए हैं। हालांकि तृषा या उदयनिधि की तरफ से इसे लेकर कोई बयान नहीं आया। सवाल-4: उदयनिधि पर 9 धाराओं में केस, इनमें होगा क्या?जवाबः 3 अगस्त की घटना के लिए उदयनिधि पर इन 9 धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है… महिला का अपमान करना और सार्वजनिक स्थान पर कटाक्ष करने जैसी धाराओं को उदयनिधि के बयान के वीडियो से साबित किया जा सकता है। हालांकि उदयनिधि ने कहा कि वे कावेरी नदी के बारे में बात कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, ‘उदयनिधि ने खुद किसी का नाम भी नहीं लिया। ऐसे में ‘बेनेफिट ऑफ डाउट’ मिल सकता है। हालांकि अभियोजन पक्ष ‘तृषा-तृषा’ के नारों के बाद उदयनिधि की मुस्कराहट को उनकी गलत मंशा का आधार बना सकता है।’ वहीं दंगे फैलाना, आपराधिक साजिश, समूहों को भड़काने जैसी धाराएं कोर्ट में कमजोर पड़ सकती हैं, क्योंकि इसके सबूत नहीं है। अक्सर, राजनीतिक टकराव वाले मामलों में केस दर्ज करते समय हर संभव धारा लगा दी जाती है। लेकिन कोर्ट गैर-जरूरी धारा हटा देता है। अग्रिम जमानत की याचिका पर मद्रास हाई कोर्ट ने उदय को रिहा करने का आदेश दे दिया है। ------------- ये खबर भी पढ़िए… क्या थलापति विजय से जलते हैं रजनीकांत; कहां से उठी सीएम बनने में अड़ंगा लगाने की बात, पूरी कहानी जानिए थलाइवा रजनीकांत ने चेन्नई के पोएस गार्डेन स्थित अपने घर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। सफाई देते हुए कहा- मैं विजय को तब से देख रहा हूं, जब वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी। पूरी खबर पढ़िए…
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सोमवार को यूक्रेन के राजदूतों को दिए एक अहम भाषण में विदेश नीति और रक्षा से जुड़ी बड़ी पहलों के बारे में बताया। उन्होंने कीव की क्षेत्रीय सुरक्षा योजना के केंद्र में 'FREYJA' (फ्रेया) के विकास को रखा, जो यूरोप का एक संयुक्त एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। एक्स पर यूक्रेनी राजदूतों के साथ हुई बातचीत में अपनी कही बातों का ज़िक्र करते हुए, ज़ेलेंस्की ने 'एंटी-बैलिस्टिक गठबंधन' के विस्तार पर ज़ोर दिया ताकि 'FREYJA' को पूरा किया जा सके। यह यूक्रेन के नेतृत्व वाला एक प्रोजेक्ट है जिसका मकसद यूरोप के लिए एक संयुक्त मिसाइल डिफेंस शील्ड बनाना है। एयर डिफेंस को यूक्रेन की अहम ऑपरेशनल प्राथमिकता बताते हुए, ज़ेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन के पास 'FREYJA' फ्रेमवर्क के लिए मिसाइलें और मोबाइल लॉन्चर तो हैं, लेकिन इस शील्ड को चालू करने के लिए कुछ खास यूरोपीय पुर्ज़ों और संयुक्त फंडिंग की ज़रूरत है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री, भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान यूरोप के अरबों डॉलर के मिलिट्री टेक्नोलॉजी मार्केट की रणनीतिक स्थिति पर बात करते हुए, ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोगियों से मुकाबला करने के बजाय मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि मॉस्को महाद्वीप की रक्षा एकजुटता को तोड़ने की कोशिश करेगा। उन्होंने लिखा एंटी-बैलिस्टिक गठबंधन के तहत पहला कदम 'FREYJA' है। यह हमारा एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम होना चाहिए, जो उन यूरोपीय सहयोगियों के लिए खुला हो जिन्होंने इस युद्ध और हमारे सामने आई सभी चुनौतियों के दौरान हमारी मदद की है। हमारे पास मिसाइलें और लॉन्चर हैं, लेकिन कुछ पुर्ज़ों की कमी है। हमने उन सहयोगी देशों को एक साथ किया है जिनके पास वे खास चीज़ें हैं जिनकी हमें ज़रूरत है। हम सहयोगियों का स्वागत करते हैं। हमें इस सिस्टम के लिए ज़रूरी पुर्ज़ों और फंडिंग, दोनों की ज़रूरत होगी। जिन देशों के पास संबंधित प्रोडक्शन क्षमता नहीं है, लेकिन जिनके पास अभी पैट्रियट मिसाइलें हैं - और जो उन्हें देते हैं, यानी हमारे आसमान की सुरक्षा की हमारी क्षमता में उन मिसाइलों का योगदान करते हैं - उनका इस एंटी-बैलिस्टिक गठबंधन में शामिल होने के लिए बहुत स्वागत है। इसे भी पढ़ें: Moscow drone attack में पांच की मौत, रूस और यूक्रेन में तेज हमले उन्होंने आगे कहा हम समझते हैं कि हम न केवल यूरोप के लिए सुरक्षा बना रहे हैं, बल्कि एक प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर रहे हैं। स्वीडन में साब (Saab), जर्मन कंपनियाँ, अमेरिका में लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन, और इटली की बहुत मज़बूत कंपनी लियोनार्डो मौजूद हैं। हमें प्रतिस्पर्धियों की ज़रूरत नहीं है; हमें ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो हमें मज़बूत बनाएँ और हमें एक-दूसरे के करीब लाएँ। जब हम 'सिस्टमैटिक कदमों' की बात करते हैं, तो यहाँ राजनीति बहुत अहम हो जाती है।
Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमान
क्षेत्रीय संघर्ष और पश्चिम एशिया को लेकर अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच, ईरान में नई राजनीतिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इज़राइली मीडिया की खबरों के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कथित तौर पर राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन को आखिरी अल्टीमेटम दिया है और बातचीत व संघर्ष से जुड़े अहम फैसलों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी का समर्थन किया है। इज़राइली ब्रॉडकास्टर चैनल 14 ने तेहरान के घटनाक्रम से वाकिफ सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि खामेनेई ने राष्ट्रपति पेज़ेशकियन को एक और इस्तीफे की कोशिश से न रोककर, असल में उनसे उनकी मुख्य राजनीतिक ताकत छीन ली है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेज़ेशकियन ने ईरान के नेतृत्व के साथ नीतिगत मतभेदों के दौरान बार-बार इस्तीफे की धमकी दी थी और मई में औपचारिक रूप से इस्तीफा देने की कोशिश भी की थी। उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसलों में उनके प्रशासन को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया था। इसे भी पढ़ें: Pakistan-Iran Diplomacy: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Islamabad बना मध्यस्थ, Ishaq Dar ने अरागची को भेजा न्योता चैनल 14 ने दावा किया कि खामेनेई का नया रुख ईरान के मिलिट्री एस्टेब्लिशमेंट के साथ पूरी तरह तालमेल का संकेत देता है, जिससे राष्ट्रपति के पास रणनीतिक पॉलिसी बनाने में असर डालने की गुंजाइश कम हो गई है। चैनल 14 ने बिना नाम बताए सूत्रों के हवाले से यह भी बताया कि तेहरान ने अमेरिका के प्रति सख्त रुख अपनाया है, और IRGC कमांडर अहमद वाहिदी का तरीका अब असल में सरकार की आधिकारिक पॉलिसी बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की राजनीतिक लीडरशिप और IRGC के बीच मतभेद काफी कम हो गए हैं, और सुप्रीम लीडर ने कथित तौर पर अमेरिका से जुड़े बड़े फैसलों पर वाहिदी को आखिरी फैसला लेने का अधिकार दे दिया है। इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के बीच Iran क्या बना पाएगा परमाणु हथियार रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरानी नेताओं का मानना है कि नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के किसी बड़े पॉलिसी बदलाव की संभावना कम है, इसलिए तेहरान ज़्यादा से ज़्यादा दबाव बनाए रखने के साथ-साथ अपनी रणनीतिक और आर्थिक ताकत को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्हीं सूत्रों का हवाला देते हुए, चैनल 14 ने बताया कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और अमेरिकी विशेष दूतों - खासकर स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत और कतर व पाकिस्तान की मध्यस्थता तक ही सीमित है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अभी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है। इसे भी पढ़ें: UKMTO ने ओमान तट पर मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले की शुरू की जांच यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ट्रंप ने ईरान को समझौते तक पहुँचने का आखिरी मौका दिया है। वाशिंगटन ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के अनुरोध पर इस्लामिक रिपब्लिक पर नियोजित सैन्य हमले को रोक दिया था, ताकि कूटनीति का रास्ता अपनाया जा सके। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि कूटनीतिक कोशिशों की वजह से हमले को रोकने से पहले अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने के लिए तैयार था।
Heat Pack रसायन विज्ञान के किस सिद्धांत पर काम करते हैं?
(एलन ब्लैकमैन, ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी)ऑकलैंड, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) सर्दियों के दिनों में कुछ लोग बर्फीले पहाड़ों पर स्कीइंग का आनंद ले रहे होते हैं, तो कुछ को मजबूरी में खुले आसमान के नीचे काम करना पड़ता है। दोनों ही स्थितियों में शरीर को गर्म रखना जरूरी होता है। लेकिन कई बार केवल गर्म कपड़े पहनना पर्याप्त नहीं होता।ऐसे में तुरंत गर्माहट देने वाले ‘हीट पैक’ बेहद काम आते हैं। प्लास्टिक के पैकेट से ‘हैंड वॉर्मर’ निकालकर जेब में रखते ही वह धीरे-धीरे गर्म महसूस होने लगता है और कई घंटों तक हल्की, आरामदायक गर्माहट देता रहता है। यह किसी जादू से कम नहीं लगता।लेकिन ये ‘हीट पैक’ आखिर काम कैसे करते हैं? ये इतनी देर तक गर्म कैसे रहते हैं? और कुछ ‘हीट पैक’ दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जबकि कुछ केवल एक बार ही क्यों काम आते हैं? इसका जवाब रसायन विज्ञान के कुछ बुनियादी सिद्धांतों में छिपा है। उष्माक्षेपी अभिक्रिया क्या है?रासायनिक अभिक्रियाओं और भौतिक प्रक्रियाओं को इस आधार पर भी समझा जाता है कि वे ऊष्मा का क्या करती हैं—क्या वे ऊष्मा को अवशोषित करती हैं या उत्सर्जित करती हैं।जो प्रक्रिया अपने आसपास के वातावरण से ऊष्मा ग्रहण करती है, उसे उष्माशोषी (एंडोथर्मिक) प्रक्रिया कहा जाता है। सामान्य तापमान पर बर्फ का पिघलना इसका आम उदाहरण है। बर्फ वातावरण से ऊष्मा लेकर पानी में बदल जाती है।इसके विपरीत, जो प्रक्रिया अपने आसपास ऊष्मा छोड़ती है, उसे उष्माक्षेपी (एक्सोथर्मिक) प्रक्रिया कहते हैं। पेट्रोल का जलना इसका परिचित उदाहरण है, जिसमें बड़ी मात्रा में ऊष्मा निकलती है।‘हीट पैक’ भी इसी प्रकार की उष्माक्षेपी प्रक्रियाओं पर आधारित होते हैं। हालांकि, पेट्रोल के दहन की तरह इनमें प्रतिक्रिया बहुत तेज नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे होती है, इसलिए गर्माहट लंबे समय तक बनी रहती है।‘हीट पैक’ में इस प्रक्रिया को शुरू करने के दो प्रमुख तरीके हैं—हवा के संपर्क से सक्रिय होना और यांत्रिक रूप से सक्रिय होना। यही तय करता है कि कोई ‘हीट पैक’ एक बार इस्तेमाल होगा या उसे दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। हवा के संपर्क से सक्रिय होने वाले हीट पैक कैसे काम करते हैं?जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ऐसे हीट पैक हवा के संपर्क में आते ही सक्रिय हो जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें वास्तव में लोहे की ऑक्सीजन के साथ होने वाली प्रतिक्रिया यानी जंग लगने की प्रक्रिया होती है।जब कोई शुद्ध धातु हवा के संपर्क में आती है, तो वह ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया करती है और इस दौरान ऊष्मा निकलती है। कई बार यह प्रक्रिया बहुत तेज भी हो सकती है। उदाहरण के लिए, जब एंगल ग्राइंडर स्टील टुकड़े से टकराता है तो चिंगारियां निकलती हैं और वे लोहे और ऑक्सीजन के बीच अत्यंत तीव्र उष्माक्षेपी प्रतिक्रिया का परिणाम होती हैं।इसी तरह, 2016 में कैलिफोर्निया में लगी एक भीषण दावानल (जंगल में आग) की शुरुआत तब हुई थी, जब एक गोल्फ खिलाड़ी ने धातु के क्लब से एक पत्थर पर वार किया था।यदि ऐसा है, तो फिर धातु की वस्तुएं हर समय चिंगारियां क्यों नहीं छोड़तीं?दरअसल, लगभग सभी धातुओं की सतह पर ऑक्साइड की एक बेहद पतली परत बन जाती है, जो ऑक्सीजन के साथ उनकी प्रतिक्रिया की गति को काफी धीमा कर देती है। यही कारण है कि लोहे के ठोस टुकड़े पर जंग बहुत धीरे-धीरे लगती है।लेकिन हीट पैक के लिए यह गति पर्याप्त नहीं होती।इसीलिए इनमें लोहे के ठोस टुकड़े की जगह लोहे का बारीक पाउडर भरा जाता है। इससे लोहे का सतही क्षेत्रफल बहुत बढ़ जाता है और ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करने के लिए अधिक सतह उपलब्ध हो जाती है।लोहे के पाउडर के साथ पैक में नमक और पानी भी होता है, जो इस रासायनिक प्रक्रिया को आसान बनाते हैं। पैक के भीतर सामग्री बंद रहती है, लेकिन उसकी परत इतनी सूक्ष्म होती है कि हवा अंदर पहुंच सकती है। जैसे ही पैक हवा के संपर्क में आता है, प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है।यह प्रतिक्रिया इतनी नियंत्रित गति से होती है कि कई घंटों तक लगातार हल्की गर्माहट मिलती रहती है।प्रतिक्रिया पूरी होने पर सारा लोहा स्थायी रूप से जंग में बदल जाता है। यही वजह है कि हवा से सक्रिय होने वाले ‘हीट पैक’ केवल एक बार इस्तेमाल किए जा सकते हैं। पुन: इस्तेमाल होने वाले ‘हीट पैक’ कैसे काम करते हैं?पुन: उपयोग किए जा सकने वाले ‘हीट पैक’ भी उष्माक्षेपी प्रक्रिया पर आधारित होते हैं, लेकिन इनमें प्रतिक्रिया यांत्रिक तरीके से शुरू होती है।आपने बर्फ जमते समय यह प्रक्रिया देखी होगी। पानी जमकर बर्फ बनते समय अपने आसपास ऊष्मा छोड़ता है। यानी पानी का जमना भी एक उष्माक्षेपी प्रक्रिया है।ऐसे ‘हीट पैक’ में सोडियम एसीटेट नामक रंगहीन ठोस पदार्थ होता है, जो पानी में बहुत आसानी से घुल जाता है।यदि गर्म पानी में इसकी अधिकतम मात्रा घोलकर उसे बहुत सावधानी से ठंडा किया जाए, तो अतिसंतृप्त विलयन तैयार हो जाता है। इसमें सामान्य स्थिति से अधिक मात्रा में ‘सोडियम एसीटेट’ घुला रहता है।यह विलयन तब तक स्थिर रह सकता है, जब तक उसे कोई हल्का यांत्रिक झटका न मिले।‘हीट पैक’ के भीतर लगी छोटी धातु की पट्टी को मोड़ने या दबाने पर इतना झटका मिल जाता है कि सोडियम एसीटेट का क्रिस्टलीकरण शुरू हो जाता है। यह एक उष्माक्षेपी प्रक्रिया है, जिससे ऊष्मा निकलती है और पैक के भीतर मौजूद पानी गर्म हो जाता है।पानी अपेक्षाकृत धीरे-धीरे गर्म होता है और उतनी ही धीमी गति से ठंडा भी होता है। इसलिए सोडियम एसीटेट के क्रिस्टलीकरण से उत्पन्न ऊष्मा लंबे समय तक पैक में बनी रहती है।इन ‘हीट पैक’ को फिर से इस्तेमाल करने के लिए केवल इतना करना होता है कि उन्हें गर्म पानी में रखकर गर्म किया जाए। इससे सारा सोडियम एसीटेट दोबारा घुल जाता है और पैक अगली बार उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।
Pakistan Atrocities in PoJK: 90 नागरिकों की मौत, MEA बोला- खोखली चुनावी प्रक्रिया से नहीं छिपेगा सच
भारत ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए तथाकथित चुनावों को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की और दुनिया भर से अपील की कि वे आम नागरिकों पर पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा किए जा रहे अत्याचारों पर ध्यान दें। राष्ट्रीय राजधानी में हर दो हफ़्ते में होने वाली प्रेस ब्रीफ़िंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK में यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा है। असल में वहां जनता विरोध-प्रदर्शन कर रही है और पाकिस्तानी सेना आम लोगों की बेरहमी से हत्या कर रही है। ऐसी खोखली कवायदें सच्चाई को छिपा नहीं सकतीं। इसे भी पढ़ें: मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसा उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि जून के बाद से पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को बिजली कटौती, डराने-धमकाने और दमन का शिकार बनाने के कारण कम से कम 90 नागरिकों की जान जा चुकी है; यह सब एक खोखली चुनावी प्रक्रिया को वैधता दिलाने की कोशिश में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल जून से, लगातार हो रही कार्रवाई में कम से कम 90 आम नागरिकों की जान गई है। पाकिस्तानी प्रशासन ने जनता की नाराज़गी का जवाब गोलियों, ब्लैकआउट, डराने-धमकाने और दमन से दिया है, और अब एक खोखली चुनावी प्रक्रिया के ज़रिए अपनी वैधता साबित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस्लामाबाद को जवाबदेह ठहराने की अपील की। उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, और दुनिया को मानवाधिकारों पर पाकिस्तान के पाखंडपूर्ण उपदेशों के खोखलेपन को समझना चाहिए। इसे भी पढ़ें: Pakistan-Iran Diplomacy: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Islamabad बना मध्यस्थ, Ishaq Dar ने अरागची को भेजा न्योता उनकी यह टिप्पणी PoJK में स्थानीय चुनाव के दौरान आम नागरिकों पर हुई बेरहम कार्रवाई के बीच आई है। रविवार को हुए चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, लॉजिस्टिक्स की विफलता और लगातार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग गया और इसकी विश्वसनीयता पर नए सिरे से सवाल उठने लगे।
Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं
सरकार ने आज कहा कि बुधवार को राजधानी में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़े प्रस्तावित मीडिया इवेंट में उसकी कोई भूमिका नहीं है। सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि इसे एक प्राइवेट मीडिया संस्था आयोजित कर रही है और नई दिल्ली वहां व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन नहीं करती है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हर दो हफ़्ते में होने वाली मीडिया ब्रीफ़िंग में कहा कि सरकार की इस इवेंट में कोई भूमिका नहीं है। यह बयान बांग्लादेश की उन चिंताओं के बीच आया है जिनमें उसने नई दिल्ली में 'फ़ॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब [FCC] ऑफ़ साउथ एशिया' द्वारा आयोजित इवेंट में 5 अगस्त को शेख हसीना के प्रस्तावित संबोधन पर चिंता जताई थी। इसे भी पढ़ें: MEA का बयान: दोहरे इस्तेमाल वाली चीजों का भारत का निर्यात अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप जायसवाल ने कहा कि आप जिस बातचीत का ज़िक्र कर रहे हैं, उसे एक प्राइवेट मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। साथ ही, सरकार उस फ़ोरम पर व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन भी नहीं करती है। बांग्लादेश ने भारत के सामने अपनी चिंता ज़ाहिर की है कि शेख हसीना - जो पिछले साल ढाका छोड़ने के बाद से भारत में हैं एक वर्चुअल भाषण देने वाली हैं। बांग्लादेश का कहना है कि इस कार्यक्रम से दोनों देशों के रिश्तों में हाल ही में आए सुधार पर बुरा असर पड़ सकता है। यह मुद्दा सोमवार को बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर और ढाका में भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी के बीच हुई बैठक में उठा। एक और सवाल का जवाब देते हुए जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को फरवरी 2026 में पद संभालने पर भारत की द्विपक्षीय यात्रा के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था। उन्होंने कहा कि जहां तक ब्रिक्स समिट की बात है, भारत ने BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने के लिए अलग से निमंत्रण भेजा है। इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय का Pakistan पर तीखा प्रहार, PoK Elections को बताया ढकोसला, Sheikh Hasina और China से संबंधों को लेकर भी कह दी बड़ी बात उन्होंने कहा कि BRICS में आउटरीच सेशन के लिए अपनाई जाने वाली आम प्रक्रिया के तहत यह निमंत्रण भेजा गया है। इसी तरह क्षेत्रीय समूहों के अन्य प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि रहमान को BRICS समिट में शामिल होने का निमंत्रण मिला है और इस मामले को विचार के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा गया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने ANI को बताया हमें निमंत्रण मिला है और हमने इसे विचार के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दिया है; इस पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री ही लेंगे। अधिकारी ने आगे कहा BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर, बांग्लादेश को प्रधानमंत्री तारिक रहमान के लिए BRICS समिट के आउटरीच सेशन में भाग लेने का निमंत्रण मिला है। यह निमंत्रण 2027 से पहले आया है, जब BIMSTEC अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाएगा और बांग्लादेश ढाका में BIMSTEC समिट की मेजबानी करेगा।
जंग की मार से टूटा ईरान: लोग पेट पालने के लिए बेच रहे बाल, किराए पर दे रहे लैपटॉप
अमेरिका-ईरान युद्ध अब महज एक सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है। यह ईरान की आम जनता के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे बड़ा संकट बन चुका है। नतीजा यह है कि देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और नकदी की भारी कमी ने लाखों परिवारों को बेहद मजबूर हालात में धकेल दिया है।
पाकिस्तान में तख्तापलट की आहट? मुनीर-नकवी के पावर प्ले से उड़ी शहबाज की नींद
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश के प्रशासनिक तंत्र को विफल बताते हुए 21 साल के सबसे बड़े घोटाले का खुलासा किया है. नकवी ने जजों, राजनेताओं और नौकरशाहों पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
ईरान में सत्ता संघर्ष की अटकलें तेज! राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित होने का दावा, वीडियो में जाने सेना की बढ़ी भूमिका
लश्कर आतंकी का बड़ा दावा: '3-4 साल में 30 से ज्यादा सदस्य मारे गए', वीडियो में जाने पाकिस्तान में संगठन को भारी नुकसान
Moscow drone attack में पांच की मौत, रूस और यूक्रेन में तेज हमले
मॉस्को, चार अगस्त (एपी) मॉस्को के आसपास के इलाके में यूक्रेनी ड्रोन हमलों में पांच लोगों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। जबकि यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि वहां रूसी हवाई हमलों में भी कम से कम पांच नागरिकों की जान चली गई है। दोनों ही देश पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में लगभग 1,250 किलोमीटर (800 मील) में फैले संघर्ष क्षेत्र में मारे गए या घायल हुए सैनिकों की संख्या उजागर नहीं करते हैं। क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि रूस के काला सागर तट पर स्थित रिसॉर्ट शहर अरखिपो-ओसिपोवका में सोमवार को हुए एक ड्रोन हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। मंगलवार सुबह, क्रास्नोडार क्षेत्रीय अधिकारियों ने घायलों की संख्या अद्यतन करते हुए 58 बताई, जिनमें से 21 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इंटरनेट पर सामने आए वीडियो में एक ड्रोन को भीड़भाड़ वाले समुद्र तट से टकराते देखा गया, वीडियो में तेज गोलीबारी जैसी आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। यूक्रेन ने इस हमले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मॉस्को क्षेत्र (जो रूसी राजधानी को घेरता है लेकिन खुद राजधानी का हिस्सा नहीं है) के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि मंगलवार सुबह एक यूक्रेनी ड्रोन हमले में पांच लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। वोरोब्योव ने कहा कि इस हमले से सबसे ज्यादा नुकसान चेखव नगर पालिका क्षेत्र में हुआ, जहां नोवोसेल्की औद्योगिक क्षेत्र में कई जगह आग लग गई। रूस के सबसे बड़े ऑनलाइन विक्रेता वाइल्डबेरीज पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी में, कंपनी ने मंगलवार को बताया कि सेंट पीटर्सबर्ग से सटे लेनिनग्राद क्षेत्र में स्थित उसके गोदाम में आग लग गई है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार सुबह रिपोर्ट दी कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रात भर में 320 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया।
इस्लामाबाद हुआ सील, सड़कों पर कंटेनरों का पहरा! क्या पाकिस्तान में होने वाला है तख्तापलट ?
इस्लामाबाद हुआ सील, सड़कों पर कंटेनरों का पहरा! क्या पाकिस्तान में होने वाला है तख्तापलट ?
होर्मुज के नए रूट पर ईरान की ओमान से बातचीत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से बातचीत की पुष्टि की है लेकिन इससे पहले ईरान ने होर्मुज़ के नए रुट को लेकर ओमान से बातचीत कर रहा है...और ये भी साफ कर दिया है कि होर्मुज़ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा...होर्मुज़ बंद होने के लिए ईरान ने अमेरिका को ही ज़िम्मेदार बताया. देखें दुनिया आजतक.
जानकारों का मानना है कि आसिम मुनीर, बलूचिस्तान से लेकर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (POK) तक बढ़ती चुनौतियों के बीच, नकवी जैसे अपने करीबी को बड़ी राजनीतिक भूमिका के लिए समर्थन देकर अपना असर और बढ़ा सकते हैं।
खामेनेई के बेटे ने बदला ईरान का पावर बैलेंस? राष्ट्रपति की ताकत घटी, सुप्रीम लीडर की सेना बनी सबसे ताकतवर
दुबई में भारतीय कारोबारी सतीश सनपाल पर बड़ा एक्शन, खाते फ्रीज
यूएई की वित्तीय खुफिया एजेंसी ने भारतीय कारोबारी सतीश सनपाल और उनकी पत्नी ताबिंदा की संपत्तियां अटैच करने और बैंक खाते फ्रीज करने का आदेश दिया है. यह कार्रवाई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच के तहत की गई है.
पाकिस्तान ने ईरान के साथ अपने राजनयिक संपर्क बढ़ा दिए हैं। विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची को बातचीत के लिए जल्द से जल्द इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संपर्क को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील के बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ तय सैन्य हमले रद्द कर दिए थे। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से ईरान और अमेरिका के बीच एक अहम राजनयिक कड़ी बने रहने की इस्लामाबाद की कोशिश झलकती है, भले ही पाकिस्तान ने – जैसा कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया – काफी हद तक कम प्रोफ़ाइल बनाए रखी है। इस न्योते पर ईरान की प्रतिक्रिया के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं मिल पाई। इसे भी पढ़ें: Pakistan की स्थिति West Indies के खिलाफ टेस्ट में मजबूत सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री सीनेटर मोहम्मद इशाक डार (@MIshaqDar50) ने आज ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से बात की। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में बिगड़ते हालात भी शामिल हैं। इसमें आगे कहा गया उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री (डार) ने विदेश मंत्री अरागची को अपनी सुविधानुसार जल्द से जल्द पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया। इसके अलावा, खबर है कि नेशनल असsembly के स्पीकर अयाज सादिक ने अपने ईरानी समकक्ष मोहम्मद बागेर घालीबाफ को इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया है। अरागची और घालीबाफ, दोनों ने हाल ही में हुई अमेरिका-ईरान बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी। इसे भी पढ़ें: आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेना पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया हालिया कोशिशों के ज़रिए पाकिस्तान एक भरोसेमंद मध्यस्थ के तौर पर अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब कूटनीतिक कोशिशें कमज़ोर हैं और खाड़ी क्षेत्र में एक और सैन्य टकराव का खतरा बना हुआ है। अधिकारी ने कहा कि तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान अभी काफी हद तक खामोश है। उन्होंने आगे कहा मैं आपको बता दूं... पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत जारी है।
लश्कर के कमांडर का बड़ा कबूलनामा, 3-4 सालों में अज्ञात गनमैन ने मार दिए 30 से ज्यादा आतंकवादी
लश्कर के शीर्ष कमांडर रिजवान हनीफ ने यह स्वीकार किया है कि पाकिस्तान में अज्ञात गनमैन द्वारा इस आतंकवादी संगठन के 30 से अधिक सदस्यों को मार गिराया गया है।
'बादलदार'एशिया का सबसे दुर्लभ चीता
नई दिल्ली। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय बादलदार चीता दिवस पर नवगठित बादलदार चीता संरक्षण कार्ययोजना के जरिए एशिया के सबसे दुर्लभ चीतों में से एक बादलदार के संरक्षण केप्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। भारत सरकार-जीईएफ-यूएनडीपी की पहल केतहत तैयार की गई यह कार्ययोजना जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में कोयंबटूर में राष्ट्रीय...
OpenAI और Anthropic के AI मॉडल ने परीक्षण के दौरान कंप्यूटर प्रणालियों में लगाई सेंध
( वि5 आवश्यक सुधार के साथ रिपीट)(फ्रांसिस्को बेइलो, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी)सिडनी, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अग्रणी दो कंपनियों ने पिछले 10 दिनों के भीतर खुलासा किया है कि परीक्षण के दौरान उनके कुछ शक्तिशाली और अर्ध-स्वायत्त एआई मॉडल चार अलग-अलग घटनाओं में वास्तविक कंप्यूटर प्रणालियों में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर गए।ये घटनाएं केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं थीं। कई मामलों में एआई मॉडलों ने यह भी पहचान लिया कि वे वास्तविक प्रणालियों तक पहुंच चुके हैं, लेकिन केवल एक मॉडल ने यह समझने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी।विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अत्याधुनिक एआई मॉडलों का परीक्षण अब पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया नहीं रह गया है और इन्हें विकसित करने वाली कंपनियों को इनकी संभावित खतरनाक क्षमताओं को सुरक्षित रखने के लिए अधिक सख्त उपाय करने होंगे। ----- जब परीक्षण वास्तविक दुनिया तक पहुंच गया -----पहला मामला चैटजीपीटी विकसित करने वाली कंपनी ओपनएआई से सामने आया। कंपनी ने बताया कि अधिकतम साइबर क्षमताओं के परीक्षण के दौरान उसके कुछ नए एआई मॉडलों ने एक अज्ञात सुरक्षा खामी का पता लगाकर उस पृथक परीक्षण वातावरण से बाहर इंटरनेट तक पहुंच बना ली, जहां उन्हें सीमित रखा गया था।इसके बाद इन मॉडलों ने चोरी किए गए लॉग-इन विवरण और अन्य तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर मुक्त स्रोत एआई मंच ‘हगिंग फेस’ के सर्वरों तक पहुंच बनाई, ताकि उन्हें दिए गए परीक्षण कार्यों के समाधान खोजे जा सकें। ओपनएआई को इस सेंधमारी की जानकारी तब मिली, जब हगिंग फेस ने कई दिन पहले ही इसका पता लगाकर इसे रोक दिया था।कुछ ही दिनों बाद दूसरी प्रमुख एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी अपने साइबर सुरक्षा परीक्षणों की समीक्षा की। कंपनी ने पाया कि उसके तीन अलग-अलग ‘क्लॉड’ मॉडल, जिन्हें पूरी तरह पृथक वातावरण में रखा जाना था, गलती से इंटरनेट से जुड़ गए थे।इन मॉडलों को यह बताया गया था कि उनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और वे केवल एक काल्पनिक परीक्षण में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद एक मॉडल ने एक वास्तविक कंपनी के डेटाबेस से लॉग-इन जानकारी और अन्य आंकड़े प्राप्त कर लिए। दूसरे मॉडल ने एक हानिकारक सॉफ्टवेयर तैयार कर उसे सार्वजनिक कर दिया, जिसे एक वास्तविक साइबर सुरक्षा कंपनी ने डाउनलोड कर चलाया।रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि एआई मॉडलों की आंतरिक तर्क प्रक्रिया से पता चला कि एक मॉडल यह जान चुका था कि वह वास्तविक प्रणाली तक पहुंच गया है, लेकिन बाद में उसने स्वयं को यह विश्वास दिलाया कि वह अब भी एक काल्पनिक परीक्षण का हिस्सा है।एक अन्य मॉडल ने भी यह समझा कि लक्ष्य वास्तविक है, लेकिन उसने अपनी गतिविधि जारी रखी। कुछ परीक्षणों में उसने यह मान लिया कि संबंधित कंपनी भी परीक्षण प्रक्रिया का ही हिस्सा होगी। केवल तीसरे और सबसे उन्नत मॉडल ने वास्तविक प्रणाली तक पहुंचने का निष्कर्ष निकलने के बाद अपनी कार्रवाई रोक दी।एंथ्रोपिक के अनुसार, एआई मॉडलों के लिए यह समझना आवश्यक है कि वे किस परिस्थिति में काम कर रहे हैं, ताकि वे यह तय कर सकें कि कौन-से कदम उठाना उचित है। इन घटनाओं में उनकी परिस्थिति की समझ ही गलत साबित हुई। ----- सुरक्षा परीक्षण भी जोखिमपूर्ण -----दोनों कंपनियों की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि एआई मॉडलों की सुरक्षा जांच के लिए किए जा रहे परीक्षण भी अब पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित नहीं रह गए हैं। ये स्वयं ऐसे जोखिमपूर्ण अभियान बन चुके हैं, जिनसे वास्तविक दुनिया में नुकसान हो सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि इन मॉडलों की क्षमताएं अत्यंत तेज गति से बढ़ रही हैं। ऐसे में यह कहना कठिन है कि वे संभावित रूप से खतरनाक नहीं हैं, खासकर तब जब कंपनियों, सरकारों और अन्य संस्थानों के संवेदनशील आंकड़ों पर साइबर हमले पहले से ही गंभीर चुनौती बने हुए हैं।वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम के हालिया अनुमान के अनुसार, इस वर्ष एआई की मदद से किए जाने वाले साइबर हमलों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है, जबकि एक औसत डेटा सेंधमारी की लागत लगभग 50 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।एआई कंपनियों का मानना है कि उनकी तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित और इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए दो प्रमुख शर्तें आवश्यक हैं। पहली, एआई की वास्तविक नुकसान को पहचानने और समय रहते रुकने की क्षमता उतनी ही तेजी से विकसित हो, जितनी तेजी से उसकी नुकसान पहुंचाने की क्षमता बढ़ रही है। दूसरी, मॉडलों में लगाए गए सुरक्षा निर्देशों की वे हर स्थिति में सही और एक समान तरीके से व्याख्या करें, ताकि उन्हें ऐसे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल न किया जा सके जिनकी उनके निर्माताओं ने कल्पना भी न की हो।हालांकि हालिया घटनाओं ने इन दोनों धारणाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनियों के अपने परीक्षणों में यह सामने आया कि कुछ मॉडल स्पष्ट संकेत मिलने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका लक्ष्य वास्तविक है। इसके अलावा मुक्त स्रोत एआई मॉडलों से सुरक्षा प्रतिबंध हटाने के लिए तकनीकी उपायों पर काम करने वाला एक सक्रिय समुदाय भी मौजूद है। ----- भविष्य की नई चुनौतियां -----विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बहु-एजेंट एआई प्रणालियां और बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इनमें कई एआई मॉडल आपस में मिलकर काम करते हैं और उनके बीच होने वाली पारस्परिक गतिविधियों को नियंत्रित करना कहीं अधिक कठिन होता है।ऐसी प्रणालियों पर हुए शोध बताते हैं कि इनमें मॉडलों के बीच समन्वय की कमी, आपसी मिलीभगत और एक गलती के दूसरे मॉडल तक फैलने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन जोखिमों का अनुमान केवल प्रत्येक मॉडल का अलग-अलग परीक्षण करके नहीं लगाया जा सकता।लेख में विज्ञान कथा लेखक आइजैक एसीमोव के वर्ष 1957 के उपन्यास ‘द नेकेड सन’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें रोबोटों को मनुष्यों को नुकसान न पहुंचाने के लिए प्रोग्राम किया गया था, लेकिन उनकी परिस्थिति की समझ में बदलाव कर उन्हें अनजाने में हत्या में सहयोग करने के लिए इस्तेमाल कर लिया गया। ----- आगे क्या? -----विशेषज्ञों का मानना है कि एआई कंपनियों को अपने मॉडलों के परीक्षण के दौरान कहीं अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। साथ ही उन्हें यह भरोसा भी दिलाना होगा कि उनकी प्राथमिकता केवल बाजार या भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करना नहीं, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करना है।लेख के अनुसार, एआई तकनीक के विकास में व्यक्तियों, समाज और पर्यावरण की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। फिलहाल एआई के नियमन और शासन को लेकर ऐसी व्यापक और सहभागी व्यवस्था का अभाव है, जिसमें विभिन्न पक्ष मिलकर यह तय कर सकें कि तकनीकी प्रगति के लिए कितना जोखिम स्वीकार्य है। विशेषज्ञ इसे गंभीर चिंता का विषय मानते हैं।
रूस के पास कार्गो शिप पर ड्रोन अटैक, 3 क्रू मेंबर घायल, जहाज में लगी आग
रूस के नोवोरोस्सिय्स्क के पास Nadezhda कार्गो जहाज पर ड्रोन हमला हुआ. हमले में तीन क्रू मेंबर गंभीर रूप से घायल हो गए. जहाज पर मौजूद सभी 22 क्रू मेंबर्स को निकालकर रूस ले जाया गया.
जगद्गुरु कृपालु विवि कटक में शैक्षिक सत्र शुरू
कटक। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन और प्रथम शिक्षण सत्र का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में कहाकि शिक्षा केवल ज्ञान एवं रोज़गार अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र के समृद्ध भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने...
पाकिस्तान ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका! ईरान-अमेरिका वार्ता की मध्यस्थता से हुआ बाहर, अब कौन कराएगा डील?
पीओके में प्रेस पर शिकंजा: पत्रकार हिरासत में और इंटरनेट भी बंद, मीडिया संगठन ने उठाई आवाज
पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) लगातार हुक्मरानों और सुरक्षा बलों की बर्बरता का शिकार हो रहा है। इन दिनों तनाव चरम पर है। इस बीच मीडिया की आवाज उठाने वाले स्वतंत्र पत्रकार संगठन ने कब्जे वाले इस क्षेत्र में मीडिया कर्मियों की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। संगठन ने इंटरनेट ब्लैकआउट, दूरसंचार सेवाओं पर रोक, रिपोर्टिंग पर पाबंदी और पत्रकारों को हिरासत में लेने या उन्हें अगवा करने जैसी घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया है।
बस एक 'गलती' मानने से टल गई नई जंग? यूक्रेन को लेकर ईरान का चौंकाने वाला दावा
ईरान के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि कैस्पियन सागर में एक ईरानी जहाज पर हुए हमले के बाद तेहरान यूक्रेन के अंदर तीन लक्ष्यों पर जवाबी हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार था, लेकिन...
ईरान को हराने के लिए नई रणनीति बनाने में जुटा अमेरिका, दुनियाभर के विशेषज्ञों से मांगे जा रहे सुझाव
ईरान को हराने के लिए नई रणनीति बनाने में जुटा अमेरिका, दुनियाभर के विशेषज्ञों से मांगे जा रहे सुझाव
ईरानी हुकूमत में आ गई दरार! मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति पेजेशकियन को दी अंतिम चेतावनी
इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बीच अनबन की खबरों सामने आई थीं। अब खबर है कि ईरानी सुप्रीम लीडर ने ईरानी राष्ट्रपति को आखिरी चेतावनी दे दी है।
81 साल की महिला को 24 साल के युवक से हुआ प्यार, एयरपोर्ट पर पहली मुलाकात का वीडियो वायरल
Ajab Gajb News: फ्रांस की 81 वर्षीय महिला और सेनेगल के 24 वर्षीय युवक की ऑनलाइन शुरू हुई प्रेम कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
पड़ोसी देश बांग्लादेश में मचे राजनीतिक घमासान के बीच एक बार फिर भारत और ढाका के रिश्तों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। प्रख्यात हिंदू संत चिन्मय दास की जमानत और रिहाई के ठीक बाद बांग्लादेश की ओर से भारत के सामने एक नया दावा पेश किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के तार सीधे तौर पर देश छोड़कर वहां शरण लिए हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।चिन्मय दास की जमानत और बांग्लादेश में गरमाई सियासतबांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय दास की गिरफ्तारी और उसके बाद कानूनी लड़ाई ने दुनिया भर का ध्यान खींचा था। अब जैसे ही उन्हें अदालत से जमानत मिली है, देश की राजनीति और कट्टरपंथी संगठनों की प्रतिक्रियाएं तेजी से बदल रही हैं। इस बीच अंतरिम सरकार और प्रशासनिक हलकों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि वे इस मामले का इस्तेमाल कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं, जिससे भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा होती दिख रही है।शेख हसीना से कैसे जुड़ा है इस नई मांग का सीधा कनेक्शन?संत चिन्मय दास की रिहाई के तुरंत बाद बांग्लादेशी प्रशासन और वहां के राजनीतिक हलकों से जिस तरह की मांगें उठ रही हैं, उसका मुख्य केंद्रबिंदु पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भारत से सौंपने का दबाव बनाना है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार लगातार यह जताना चाहती है कि वह भारत के साथ अपने कूटनीतिक समीकरणों को अपनी शर्तों पर चलाना चाहती है। हालांकि, भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि शरण और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मामलों में नियमों का पालन किया जाएगा, लेकिन इस नई मांग ने दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट बढ़ा दी है।
पाकिस्तान से आज़ादी का बड़ा ऐलान: बलूचिस्तान ने खुद को घोषित किया स्वतंत्र देश
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक मानचित्र से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान के दमनकारी शासन और सालों के अत्याचार से तंग आकर बलूचिस्तान ने खुद को आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान से आज़ाद घोषित कर दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं, बलूचिस्तान के नेताओं ने अपनी स्वतंत्रता का दिन भी तय कर लिया है और एक नया संविधान भी जारी कर दिया है, जिसकी सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी जड़ें और भावनाएं भारत, यानी हिंदी और हिंदुओं की संस्कृति व सभ्यता से गहराई से जुड़ी हुई हैं।पाकिस्तान के अत्याचारों से तंग आकर बलूचिस्तान ने उठाया ऐतिहासिक कदमबलूचिस्तान के लोगों ने दशकों से पाकिस्तानी सेना और सरकार द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के हनन, संसाधनों की लूट और सैन्य जुल्म के खिलाफ खुली बगावत कर दी है। बलूच अवाम का कहना है कि उन्हें जबरन पाकिस्तान का हिस्सा बनाया गया था और तब से लेकर आज तक उन्हें केवल शोषण ही मिला है। इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद से इस्लामाबाद के हुक्मरानों की नींद उड़ गई है, क्योंकि यह घटना पाकिस्तान के टूटने और उसकी आंतरिक कमज़ोरी को दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब कर रही है।नए संविधान में क्या है खास और क्यों चर्चा में है हिंदी-हिंदुओं से जुड़ाव?बलूचिस्तान द्वारा जारी किए गए इस नए संविधान की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और क्षेत्रीय सद्भाव को सर्वोपरि रखा गया है। जानकारों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संविधान की रूपरेखा और वैचारिक ताने-बाने में प्राचीन भारतीय संस्कृति, सभ्यता और ऐतिहासिक साझी विरासत से जुड़ाव साफ झलकता है, जिससे बलूच नेतृत्व इस क्षेत्र में एक शांतिप्रिय, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील राष्ट्र की स्थापना करना चाहता है। पाकिस्तान के लिए यह भू-राजनीतिक मोर्चे पर अब तक का सबसे बड़ा और करारा झटका साबित हो रहा है।
ट्रंप का पाकिस्तान को बड़ा झटका: 'शांतिदूत' का तमगा छीना, मुनीर और शहबाज की बढ़ी मुश्किलें
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से पाकिस्तान के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और बुरी खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को तगड़ा गच्चा देते हुए उसे मिलने वाले 'शांतिदूत' यानी पीसमेकर के बैज या तमगे से वंचित कर दिया है। ट्रंप के इस अप्रत्याशित फैसले के बाद इस्लामाबाद में हड़कंप मच गया है। अमेरिका के इस कड़े रुख के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बुरे दिन आधिकारिक रूप से शुरू होते नजर आ रहे हैं, जिससे उनकी वैश्विक साख को तगड़ा झटका लगा है।ट्रंप के इस फैसले से पाकिस्तान की कूटनीति को क्यों लगा बड़ा आघात?अमेरिका द्वारा उठाया गया यह कदम पाकिस्तान की कूटनीति के लिए एक बड़े आघात के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान की सरकार और सेना अक्सर दुनिया के सामने अपनी छवि एक शांतिप्रिय देश के रूप में पेश करने की कोशिश करती रही है, लेकिन वाशिंगटन के इस कड़े फैसले ने उनकी पोल खोल दी है। ट्रंप प्रशासन के इस रुख से साफ हो गया है कि अमेरिका अब दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की दोहरी नीतियों और आतंकवाद को लेकर किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में बिल्कुल नहीं है।शहबाज और मुनीर के लिए आगे क्यों बढ़ेंगी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुश्किलें?पाकिस्तान के हुक्मरान शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर पहले से ही देश के भीतर गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं। ऐसे में अमेरिका की तरफ से मिला यह करारा झटका उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फेर गया है। जब दुनिया के बड़े देश इस तरह से दूरी बनाने लगते हैं, तो विदेशी मदद और कूटनीतिक समर्थन मिलना लगभग बंद हो जाता है, जिससे आने वाले समय में पाकिस्तान की मुश्किलें कई गुना बढ़ना तय माना जा रहा है।
सीमाओं पर लगातार तनाव बढ़ाने वाला चीन अब भारत के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र 'चिकन नेक' यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास अपनी चालें चलने लगा है। ड्रैगन ने पड़ोसी देश बांग्लादेश को अपने आधुनिक और खतरनाक J-10CE फाइटर जेट्स देने का बड़ा लालच दिया है। खास बात यह है कि ये वही चीनी जेट्स हैं जिन्हें लेकर यह दावा किया जाता है कि वे भारत के पास मौजूद राफेल विमानों को भी कड़ी टक्कर दे सकते हैं। चीन की इस हरकत से भारतीय रक्षा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और सामरिक विशेषज्ञों ने इस पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है।क्या है चीन की 'चिकन नेक' को घेरने की खतरनाक रणनीति?पश्चिम बंगाल में मौजूद सिलीगुड़ी कॉरिडोर या 'चिकन नेक' भारत का वह भूभाग है जो पूर्वोत्तर के सात राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। भू-राजनीतिक रूप से यह भारत का सबसे संवेदनशील रक्षा गलियारा माना जाता है। चीन लंबे समय से इस क्षेत्र के आसपास अपनी पकड़ मजबूत करने की फिराक में रहता है। बांग्लादेश को J-10CE फाइटर जेट्स देने का यह प्रस्ताव सीधे तौर पर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी रणनीतिक घेराबंदी माना जा रहा है, जिससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ना लाजिमी है।भारतीय वायुसेना के राफेल के सामने कितने ताकतवर हैं J-10CE जेट्स?चीन द्वारा बांग्लादेश को ऑफर किए जा रहे J-10CE एक 4.5 जनरेशन के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट हैं, जिन्हें पाकिस्तान की वायुसेना पहले से ही इस्तेमाल कर रही है। चीन और उसके समर्थक इन विमानों को आधुनिक रडार और मिसाइल क्षमताओं से लैस बताते हैं। हालांकि, भारतीय वायुसेना के पास मौजूद राफेल फाइटर जेट्स तकनीक, मारक क्षमता और युद्ध कौशल के मामले में इनसे कहीं ज्यादा आगे और भरोसेमंद हैं। इसके बावजूद, भारत के पड़ोसी मुल्क में इन लड़ाकू विमानों की मौजूदगी से क्षेत्रीय संतुलन पर असर पड़ सकता है, जिसका जवाब देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क है।
मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले अमेरिका के एक रिटायर्ड जनरल और डिफेंस एनालिस्ट ने पाकिस्तान और कतर पर आरोप लगाया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर उनकी भूमिका प्रभावित रही है। उनका आरोप है कि दोनों देश अमेरिका के बजाय ईरान का पक्ष लेते हैं। रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान और कतर को चुनने से ईरान के साथ अमेरिका की कूटनीति पर असर पड़ा है और इससे तेहरान के इरादों को समझने में गलतफहमी पैदा हुई है। कीन की ये टिप्पणियां तब आई हैं जब ट्रंप ने तेहरान के साथ कूटनीतिक कोशिशों को फिर से शुरू करने के लिए ईरान पर बड़े सैन्य हमले की योजना को रोकने का फैसला किया है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री, भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान कीन 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर' के चेयरमैन हैं, 'सेक्रेटरी ऑफ़ डिफेंस पॉलिसी बोर्ड' के सदस्य हैं, चार अमेरिकी रक्षा मंत्रियों को सलाह दे चुके हैं और 'नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी' पर 2018 और 2022 के कांग्रेसनल कमीशन में भी काम कर चुके हैं। कीन ने कहा मिडिल ईस्ट में हमारी इंटेलिजेंस एजेंसियों और सभी संबंधित पक्षों को यह अच्छी तरह पता है कि पाकिस्तान और कतर की स्थिति संदिग्ध है, क्योंकि वे अमेरिका के बजाय ईरान का पक्ष लेते हैं। यह बात पुरानी है, कोई नई नहीं। फिर भी, वे ही मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि ईरान के असली इरादों के बारे में अमेरिका को गुमराह करने में उनके प्रभाव की भी भूमिका रही है। रिटायर्ड जनरल ने सऊदी अरब के रवैये की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि रियाद ने बार-बार वॉशिंगटन को ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई न करने की सलाह दी थी। कीन के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरबेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि ऐसा ऑपरेशन सफल नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: Donald Trump के हाथ से निकल गई ये जंग? ईरान ने फिर ठोका अमेरिका का MQ-9 उन्होंने आगे दावा किया कि सऊदी अरब ने लगातार अमेरिका को ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया। कीन ने कहा सऊदी अरब मध्य पूर्व क्षेत्र को ईरान की आक्रामकता से मुक्त कराने के लिए कोई कुर्बानी देने को तैयार नहीं है। यही वह सच्चाई है जो हम यहां होते हुए देख रहे हैं। कीन ने यह भी आरोप लगाया कि सऊदी अरब ईरान का सामना करने का बोझ अमेरिका और इज़राइल पर डालना चाहता था, जबकि वह खुद अपने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान या जान-माल के नुकसान का जोखिम नहीं उठाना चाहता था।
होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के बीच Iran क्या बना पाएगा परमाणु हथियार
(एंड्र्यू थॉमस, दाइकिन विश्वविद्यालय)सिडनी, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध लंबा खिंचने के साथ एक अहम सवाल पीछे छूटता नजर आ रहा है—क्या ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है और यदि हां, तो क्या वह अब भी ऐसा करने में सक्षम है?दोनों देशों के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे बड़ा विवाद का विषय बन गया है। ऐसे में यह हैरानी की बात है कि परमाणु कार्यक्रम पर पहले जैसी चर्चा नहीं हो रही। वर्ष 2025 और 2026 में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के प्रमुख कारणों में से एक यह आशंका भी थी कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है।ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इससे युद्ध समाप्त होने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाने का उसे एक नया साधन मिल गया है। हालांकि, परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर उसकी वास्तविक मंशा पहले की तुलना में और अधिक अस्पष्ट हो गई है। ----- क्या ईरान अब भी परमाणु हथियार बना सकता है?-----माना जाता है कि ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जो सैद्धांतिक रूप से लगभग 10 परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है।सामान्य परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए केवल तीन से पांच प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता होती है, जबकि अनुसंधान कार्यों में अधिकतम 20 प्रतिशत तक संवर्धन पर्याप्त माना जाता है।ऐसे में 60 प्रतिशत तक संवर्धन चिंता का विषय माना जाता है क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार, परमाणु हथियार विकसित करने की संभावना के अलावा इसका कोई और व्यावहारिक उद्देश्य नहीं दिखता। इससे संकेत मिलता है कि ईरान भविष्य के लिए अपने विकल्प खुले रखना चाहता है।हालांकि, परमाणु हथियार बनाने के लिए केवल संवर्धित यूरेनियम ही पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए विशेष उपकरण, सामग्री और तकनीकी ढांचे की भी आवश्यकता होती है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों से उसकी तकनीकी क्षमता को कुछ नुकसान पहुंचा हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक ज्ञान और विशेषज्ञता को बमबारी से समाप्त नहीं किया जा सकता।अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई अपने पिता की तुलना में परमाणु हथियार हासिल करने के प्रति अधिक इच्छुक हैं।इस कारण, जब तक अमेरिका और इज़राइल जमीनी सैन्य कार्रवाई, सत्ता परिवर्तन या लंबे समय तक कब्जे जैसी कार्रवाई नहीं करते, तब तक ईरान के पास भविष्य में परमाणु हथियार विकसित करने का विकल्प बना रहेगा। ----- क्या ईरान वास्तव में ऐसा करना चाहेगा? -----परमाणु प्रतिरोध सिद्धांत के अनुसार देश मुख्य रूप से अपने विरोधियों को सैन्य या परमाणु हमले से रोकने के लिए परमाणु हथियार विकसित करते हैं। इन हथियारों का उद्देश्य उनका उपयोग करना नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व भर से संभावित हमलावर को हमले से रोकना होता है।उदाहरण के तौर पर, उत्तर कोरिया के पास परमाणु क्षमता होने के कारण अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से बचता है, क्योंकि उत्तर कोरिया जापान, दक्षिण कोरिया या अमेरिका के गुआम क्षेत्र पर हमला करने की क्षमता रखता है।इसी प्रकार यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो क्षेत्रीय देशों के लिए उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करना कहीं अधिक कठिन हो जाएगा। साथ ही, उसे इज़राइल के संभावित परमाणु हमले का जवाब देने की क्षमता भी मिल सकती है।हालांकि विशेषज्ञ इस बात पर एकमत नहीं हैं कि हालिया युद्ध ने ईरान के लिए परमाणु हथियारों को अनिवार्य बना दिया है या नहीं।एक पक्ष का तर्क है कि यदि ईरान के पास पहले से परमाणु हथियार होते तो अमेरिका और इज़राइल शायद उस पर हमला नहीं करते। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि बिना परमाणु हथियारों के भी ईरान कई महीनों तक हमलों का सामना करने में सफल रहा है और उसने अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली देशों पर रणनीतिक बढ़त हासिल की है।ईरान ने यह भी प्रदर्शित किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकता है। इसलिए संभव है कि भविष्य में यही उसकी सबसे प्रभावी प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे और उसे सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम की आवश्यकता न पड़े।यह भी संभव है कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम का भंडार केवल कूटनीतिक दबाव बनाने और सुरक्षा गारंटी तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में पुनः शामिल होने के उद्देश्य से सुरक्षित रखा हो।युद्ध शुरू होने से पहले ईरान संकेत दे चुका था कि यदि अमेरिका प्रतिबंध हटाने पर सहमत हो तो वह अपने संवर्धित यूरेनियम का स्तर कम करने को तैयार है। जून में युद्ध समाप्त करने के लिए हुए समझौता ज्ञापन के तहत भी उसने संवर्धित यूरेनियम को कम स्तर पर लाने पर सहमति जताई थी।इन परिस्थितियों में भविष्य में ईरान के परमाणु हथियार संपन्न बनने की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन की खुफिया एजेंसियों ने भी पिछले वर्ष सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि ईरान कई दशकों से सक्रिय रूप से परमाणु हथियार विकसित करने के कार्यक्रम पर काम नहीं कर रहा है। ----- क्या कूटनीति समाधान बन सकती है? -----विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2015 में हुआ संयुक्त व्यापक कार्ययोजना (जेसीपीओए) समझौता इस समस्या का व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत कर चुका था।इस समझौते पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों—अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन—के साथ जर्मनी तथा ईरान के बीच कई वर्षों की बातचीत के बाद सहमति बनी थी। वर्ष 2018 में ट्रंप प्रशासन द्वारा समझौते से अलग होने से पहले अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने पुष्टि की थी कि ईरान अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन कर रहा था।अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने और प्रतिबंध दोबारा लागू करने के बाद ही ईरान ने 20 प्रतिशत से अधिक स्तर पर यूरेनियम संवर्धन फिर शुरू किया।विश्लेषकों के अनुसार जेसीपीओए जैसा कोई नया समझौता आज भी संभव है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले की तुलना में अधिक रियायतें देनी होंगी। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का मुद्दा दोनों पक्षों के बीच विवाद का प्रमुख कारण बना रहेगा।सबसे बड़ी चुनौती दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी है। जेसीपीओए को लागू करने में वर्षों का विश्वास निर्माण लगा था, जबकि अब ईरान के कट्टरपंथी नेताओं का अमेरिकी प्रशासन पर भरोसा लगभग समाप्त हो चुका है। ऐसे में वे किसी नए समझौते के बजाय परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के प्रति पहले से अधिक सकारात्मक रुख अपना सकते हैं।
OpenAI और Anthropic के AI मॉडल परीक्षण के दौरान वास्तविक प्रणालियों में घुसे
(फ्रांसिस्को बेइलो, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी)सिडनी, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अग्रणी दो कंपनियों ने पिछले 10 दिनों के भीतर खुलासा किया है कि परीक्षण के दौरान उनके कुछ शक्तिशाली और अर्ध-स्वायत्त एआई मॉडल चार अलग-अलग घटनाओं में वास्तविक कंप्यूटर प्रणालियों में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने में सफल रहे।ये घटनाएं केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं थीं। कई मामलों में एआई मॉडल यह पहचानने में भी सफल रहे कि वे वास्तविक प्रणालियों तक पहुंच चुके हैं, लेकिन केवल एक मॉडल ने यह समझने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी।विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अत्याधुनिक एआई मॉडलों का परीक्षण अब पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया नहीं रह गया है और इन्हें विकसित करने वाली कंपनियों को इनकी संभावित खतरनाक क्षमताओं को सुरक्षित रखने के लिए अधिक सख्त उपाय करने होंगे। ----- जब परीक्षण वास्तविक दुनिया तक पहुंच गया -----पहला मामला चैटजीपीटी विकसित करने वाली कंपनी ओपनएआई से सामने आया। कंपनी ने बताया कि अधिकतम साइबर क्षमताओं के परीक्षण के दौरान उसके कुछ नए एआई मॉडलों ने एक अज्ञात सुरक्षा खामी का पता लगाकर उस पृथक परीक्षण वातावरण से बाहर इंटरनेट तक पहुंच बना ली, जहां उन्हें सीमित रखा गया था।इसके बाद इन मॉडलों ने चोरी किए गए लॉग-इन विवरण और अन्य तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर मुक्त स्रोत एआई मंच ‘हगिंग फेस’ के सर्वरों तक पहुंच बनाई, ताकि उन्हें दिए गए परीक्षण कार्यों के समाधान खोजे जा सकें। ओपनएआई को इस सेंधमारी की जानकारी तब मिली, जब हगिंग फेस ने कई दिन पहले ही इसका पता लगाकर इसे रोक दिया था।कुछ ही दिनों बाद दूसरी प्रमुख एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी अपने साइबर सुरक्षा परीक्षणों की समीक्षा की। कंपनी ने पाया कि उसके तीन अलग-अलग ‘क्लॉड’ मॉडल, जिन्हें पूरी तरह पृथक वातावरण में रखा जाना था, गलती से इंटरनेट से जुड़ गए थे।इन मॉडलों को यह बताया गया था कि उनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और वे केवल एक काल्पनिक परीक्षण में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद एक मॉडल ने एक वास्तविक कंपनी के डेटाबेस से लॉग-इन जानकारी और अन्य आंकड़े प्राप्त कर लिए। दूसरे मॉडल ने एक हानिकारक सॉफ्टवेयर तैयार कर उसे सार्वजनिक कर दिया, जिसे एक वास्तविक साइबर सुरक्षा कंपनी ने डाउनलोड कर चलाया।रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि एआई मॉडलों की आंतरिक तर्क प्रक्रिया से पता चला कि एक मॉडल ने सही ढंग से पहचान लिया था कि वह वास्तविक प्रणाली तक पहुंच चुका है, लेकिन बाद में उसने स्वयं को यह विश्वास दिलाया कि वह अब भी एक काल्पनिक परीक्षण का हिस्सा है।एक अन्य मॉडल ने भी यह समझा कि लक्ष्य वास्तविक है, लेकिन उसने अपनी गतिविधि जारी रखी। कुछ परीक्षणों में उसने यह मान लिया कि संबंधित कंपनी भी परीक्षण प्रक्रिया का ही हिस्सा होगी। केवल तीसरे और सबसे उन्नत मॉडल ने वास्तविक प्रणाली तक पहुंचने का निष्कर्ष निकलने के बाद अपनी कार्रवाई रोक दी।एंथ्रोपिक के अनुसार, एआई मॉडलों के लिए यह समझना आवश्यक है कि वे किस परिस्थिति में काम कर रहे हैं, ताकि वे यह तय कर सकें कि कौन-से कदम उठाना उचित है। इन घटनाओं में उनकी परिस्थिति की समझ ही गलत साबित हुई। ----- सुरक्षा परीक्षण भी जोखिमपूर्ण -----दोनों कंपनियों की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि एआई मॉडलों की सुरक्षा जांच के लिए किए जा रहे परीक्षण भी अब पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित नहीं रह गए हैं। ये स्वयं ऐसे जोखिमपूर्ण अभियान बन चुके हैं, जिनसे वास्तविक दुनिया में नुकसान हो सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि इन मॉडलों की क्षमताएं अत्यंत तेज गति से बढ़ रही हैं। ऐसे में यह कहना कठिन है कि वे संभावित रूप से खतरनाक नहीं हैं, खासकर तब जब कंपनियों, सरकारों और अन्य संस्थानों के संवेदनशील आंकड़ों पर साइबर हमले पहले से ही गंभीर चुनौती बने हुए हैं।वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम के हालिया अनुमान के अनुसार, इस वर्ष एआई की मदद से किए जाने वाले साइबर हमलों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है, जबकि एक औसत डेटा सेंधमारी की लागत लगभग 50 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।एआई कंपनियों का मानना है कि उनकी तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित और इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए दो प्रमुख शर्तें आवश्यक हैं। पहली, एआई की वास्तविक नुकसान को पहचानने और समय रहते रुकने की क्षमता उतनी ही तेजी से विकसित हो, जितनी तेजी से उसकी नुकसान पहुंचाने की क्षमता बढ़ रही है। दूसरी, मॉडलों में लगाए गए सुरक्षा निर्देशों की वे हर स्थिति में सही और एक समान तरीके से व्याख्या करें, ताकि उन्हें ऐसे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल न किया जा सके जिनकी उनके निर्माताओं ने कल्पना भी न की हो।हालांकि हालिया घटनाओं ने इन दोनों धारणाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनियों के अपने परीक्षणों में यह सामने आया कि कुछ मॉडल स्पष्ट संकेत मिलने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका लक्ष्य वास्तविक है। इसके अलावा मुक्त स्रोत एआई मॉडलों से सुरक्षा प्रतिबंध हटाने के लिए तकनीकी उपायों पर काम करने वाला एक सक्रिय समुदाय भी मौजूद है। ----- भविष्य की नई चुनौतियां -----विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बहु-एजेंट एआई प्रणालियां और बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इनमें कई एआई मॉडल आपस में मिलकर काम करते हैं और उनके बीच होने वाली पारस्परिक गतिविधियों को नियंत्रित करना कहीं अधिक कठिन होता है।ऐसी प्रणालियों पर हुए शोध बताते हैं कि इनमें मॉडलों के बीच समन्वय की कमी, आपसी मिलीभगत और एक गलती के दूसरे मॉडल तक फैलने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन जोखिमों का अनुमान केवल प्रत्येक मॉडल का अलग-अलग परीक्षण करके नहीं लगाया जा सकता।लेख में विज्ञान कथा लेखक आइजैक एसीमोव के वर्ष 1957 के उपन्यास ‘द नेकेड सन’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें रोबोटों को मनुष्यों को नुकसान न पहुंचाने के लिए प्रोग्राम किया गया था, लेकिन उनकी परिस्थिति की समझ में बदलाव कर उन्हें अनजाने में हत्या में सहयोग करने के लिए इस्तेमाल कर लिया गया। ----- आगे क्या? -----विशेषज्ञों का मानना है कि एआई कंपनियों को अपने मॉडलों के परीक्षण के दौरान कहीं अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। साथ ही उन्हें यह भरोसा भी दिलाना होगा कि उनकी प्राथमिकता केवल बाजार या भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करना नहीं, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करना है।लेख के अनुसार, एआई तकनीक के विकास में व्यक्तियों, समाज और पर्यावरण की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। फिलहाल एआई के नियमन और शासन को लेकर ऐसी व्यापक और सहभागी व्यवस्था का अभाव है, जिसमें विभिन्न पक्ष मिलकर यह तय कर सकें कि तकनीकी प्रगति के लिए कितना जोखिम स्वीकार्य है। विशेषज्ञ इसे गंभीर चिंता का विषय मानते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग में पाकिस्तान मध्यस्थ बनने के लिए उछल रहा था। इसके लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर ट्रंप की जी हुजूरी भी कर रहे थे। लेकिन कुछ हाथ न लगा।
सेंट्रल एशिया के खजाने तक पहुंचा भारत, Rare Earth Minerals पर मोदी के जय ने क्या बड़ा गेम कर दिया?
भारत मध्य एशिया के भू-राजनीतिक में अब बड़ा कदम उठा रहा है और आने वाले वक्त में यह पूरी दुनिया की तकनीक और ऊर्जा की तस्वीर बदल देगी। उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव भारत विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात करते नजर आए। इस मुलाकात ने एक नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रख दी है। चाहे वो डिफेंस हो, ट्रेड हो या फिर भविष्य की तकनीक के लिए जरूरी दुर्लभ खनिज भारत और उज़्बेकिस्तान अब एक नई ऊंचाई पर पहुंचने के लिए साथ में तैयार हैं। दरअसल उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव भारत के दौरे पर हैं। जहां पर उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अहम बैठक को अंजाम दिया है। इस मुलाकात की सबसे बड़ी और खास बात जो रही है वो है माइनिंग यानी कि खनन क्षेत्र में दोनों देशों का बढ़ता हुआ सहयोग। बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कह दिया कि अब वक्त आ गया है कि हमारे रिश्तों को कंस्ट्रक्शन, हेल्थ और डिजिटल सेक्टर से आगे बढ़ाकर जमीन के अंदर छिपे हुए खजाने तक ले जाया जाए। इसे भी पढ़ें: 5 अगस्त को दिल्ली से क्या बड़ा ऐलान करेंगी शेख हसीना? भड़क गए तारिक रहमान उज्बेकिस्तान दुर्लभ खनिजों के मामले में बहुत समृद्ध देश है जो स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों और डिफेंस इक्विपमेंट बनाने में काम आता है। भारत अब उज़्बेकिस्तान के साथ मिलकर खनिजों के खनन पर फोकस कर रहा है। इतना ही नहीं उज़्बेकी विदेश मंत्री ने भारतीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के साथ भी मुलाकात की है। और उस मुलाकात के दौरान भी इस बात पर जोर दिया गया कि एग्रीकल्चर और फार्मा के साथ-साथ आईटी और माइनिंग में भी असीम संभावनाएं हैं जिसे दोनों देश एक साथ मिलकर आगे बढ़ाएं। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कुछ कहा है पहले आप वो देखिए। फिलहाल भारत और उज्बेकिस्तान के बीच करीब $1 अरब डॉलर के आसपास का व्यापार होता है। लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नंबर काफी नहीं है और इसे कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका, रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवाल कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर भी गैन चर्चा हुई। इसके अलावा भारत ने अफगानिस्तान की 2027 से 29 की नॉन अलाइनमेंट मूवमेंट की अध्यक्षता का भी समर्थन किया है। वहीं ताशकंद से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत का साथ देने की बात को भी उन्होंने दोहराया है। सबसे अहम बात रही दोनों देशों ने एक साथ मिलकर एक आवाज में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को फिर से पुख्ता किया और पूरी दुनिया को संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। यानी कि रेयर अर्थ से लेकर आतंकवाद तक भारत और उज़्बेकिस्तान अब अपनी साझेदारी को बढ़ाने के लिए तैयार है। उज़्बेकिस्तान के साथ भरोसेमंद दोस्ती को आगे बढ़ाना भारत के लिए बड़ी बात है। मई में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श का 17वां दौर आयोजित किया गया था। इसमें व्यापार और निवेश, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा हुई थी। दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया था।
Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका, रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवाल
नेपाल में इस वक्त चीनी चीनी नहीं बल्कि सोना बन चुकी है। जिस चीनी से चाय और मिठाइयां होती है मीठी उसकी कड़वाहट ने पूरे नेपाल में हड़कंप मचा दिया। आलम यह है कि दुकानों से चीनी गायब हो रही है और जो मिल रही हैं उसके दाम आसमान छू रहे हैं। दरअसल कहानी शुरू होती है भारत के एक बड़े फैसले से। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश यानी हमारे भारत ने घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए चीनी के निर्यात यानी एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया। यह बैन मई के महीने में लगाया गया था। जो फिलहाल सितंबर 2026 तक या फिर अगले आदेश तक जारी रहेगा। भारत ने यह फैसला क्यों लिया यह जान लीजिए। दरअसल अलनीनो के चलते सूखे की आशंका और गन्ने की कम पैदावार को देखते हुए मोदी सरकार अपनी जनता के लिए स्टॉक सुरक्षित रखना चाहती थी। लेकिन भारत का यह सुरक्षा कवच नेपाल के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया। इसे भी पढ़ें: Nepal Violence : सड़कों पर उतरे हिंदू, नेपाल छोड़कर भागने लगे मुसलमान! नेपाल में चीनी की कीमतों का बड़ा धमाका दरअसल जैसे ही भारत से सप्लाई रुकी नेपाल के बाजारों में चीनी की कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर चली गई। जो चीनी कुछ समय पहले तक ₹95 प्रति किलो मिल रही थी उसकी कीमत अब ₹110 के पार जा चुकी है और यह सब बस शुरुआत है। नेशनल कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष प्रेमलाल कहते हैं कि सरकार इस पूरे संकट पर ऐसे खामोश है जैसे कुछ हुआ ही नहीं। अब जब सितंबर-अक्टूबर के बड़े त्यौहार, दशहरा, त्यौहार और छठ करीब आ रहे हैं तो सप्लाई मैनेजमेंट ना होने से कालाबाजारी और कीमतें और बढ़ने का डर सता रहा है। लेकिन दोस्तों, जहां कमी होती है, वहीं गैरकानूनी रास्ते भी खुल जाते हैं। नेपाल की दक्षिणी सीमा पर अब चीनी की तस्करी जोरों शोरों पर है। नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल यानी एपीएफ के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। मध्य जून से मध्य जुलाई के बीच चीनी की जप्त्ती दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई है। पुलिस ने महज एक महीने में सीमा से करीब 10 टन तस्करी की चीनी जप्त की है। जिसकी कीमत लाखों में है। छापा जैसे जिलों में तो हर दिन छापेमारी हो रही है। तस्कर चोरी छिपे भारतीय चीनी को नेपाल पहुंचा रहे हैं क्योंकि वहां इसकी भारी डिमांड है। लेकिन यह तस्करी सिर्फ राजस्व का नुकसान नहीं कर रही है। बल्कि बिना किसी जांच के आ रही यह चीनी स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे भी पढ़ें: नेपाल curfew में ढील: मधेश और कोशी प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात सुधरे क्या कहता है आंकड़ों का गणित नेपाल की डिमांड और सप्लाई की गणित। दरअसल दोस्तों नेपाल में हर महीने 20,000 से 25,000 टन चीनी की जरूरत होती है। त्योहारों के दौरान यह बढ़कर 3000 टन तक पहुंच जाती है। सालाना मांग 3 लाख टन है। जबकि नेपाल का अपना उत्पादन केवल 1.8 लाख से 2.15 लाख टन के बीच रहता है। यानी करीब 1 लाख टन चीनी के लिए नेपाल पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के पास फिलहाल स्टॉक बहुत कम है। सरकार भारत से जी टू जी यानी सरकार से सरकार समझौते के तहत चीनी मांगने की कोशिश कर रही है। लेकिन पिछला अनुभव अच्छा नहीं रहा। पिछले साल नेपाल ने 60 टन चीनी मांगी थी। लेकिन भारत ने केवल 25,000 टन की अनुमति दी थी। ऊपर से हाई कस्टम ड्यूटी के कारण आयातित चीनी बाजार भाव से भी महंगी हो जाती है। खैर कुल मिलाकर यह पहली बार नहीं है। सितंबर 2023 में भी जब भारत ने बैन बढ़ाया था, प्रतिबंध बढ़ाया था तब नेपाल में चीनी की कीमतें ₹88 से सीधे ₹160 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।
5 अगस्त को दिल्ली से क्या बड़ा ऐलान करेंगी शेख हसीना? भड़क गए तारिक रहमान
वो शेख हसीना जो कभी बांग्लादेश की सबसे ताकतवर नेता थी। करीब 15 साल तक देश की सत्ता पर उनका दबदबा रहा। लेकिन फिर 5 अगस्त 2024 आया और कुछ ही घंटों में पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया। सत्ता गई, देश छूटा और शेख हसीना भारत आ गई। तब से वह भारत में हैं और बांग्लादेश की राजनीति से लगभग पूरी तरीके से दूरी बनाए हुए हैं। लेकिन अब करीब 2 साल बाद शेख हसीना एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर अपनी आवाज बुलंद करने जा रही हैं और वो तारीख है 5 अगस्त 2026। दिलचस्प बात यह है कि जिस तारीख ने शेख हसीना की सत्ता का अंत किया था उसी तारीख को अब उनकी राजनीतिक वापसी का संकेत दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम फॉरेन कॉरेस्पोंडेंस क्लब ऑफ साउथ एशिया से जुड़ा बताया जा रहा है। कार्यक्रम में बांग्लादेश की राजनीति और शेख हसीना के भविष्य को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है और इस कार्यक्रम की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। इसे भी पढ़ें: Taslima Nasreen ने Bangladesh में अवामी लीग पर प्रतिबंध को बताया लोकतंत्र के खिलाफ 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन ने ऐसा रूप ले लिया था कि शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर बांग्लादेश से भागना पड़ा था, निकलना पड़ा था। इसके बाद उनकी सरकार गिर गई और देश की राजनीति पूरी तरह बदल गई। लेकिन अब सवाल यह है कि 2 साल बाद शेख हसीना अचानक सामने क्यों आ रहे हैं? क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक या फिर सार्वजनिक संबोधन है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति है? शेख हसीना के लिए यह जो मामला है सिर्फ राजनीति का नहीं है। बांग्लादेश में उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कारवाई हो चुकी है और नवंबर 2025 में एक ट्रिब्यूनल ने उन्हें मौत की सजा सुना दी। बांग्लादेश लगातार भारत से उनके प्रत्यार्पण की मांग भी कर रहा है। यानी अगर शेख हसीना वापस बांग्लादेश जाती हैं तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। और खुद शेख हसीना ने हाल ही में कहा है कि वह इस साल के अंत तक बांग्लादेश लौटने और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की योजना रखती हैं। हालांकि उनकी वापसी की कोई निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित कार्यक्रम पर Bangladesh ने India से मांगा रुख स्पष्ट करने को शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश में अंतरिम व्यवस्था आई। बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदली और अब बांग्लादेश की सत्ता में नई राजनीतिक ताकतें हैं। वहीं शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर भी बड़ा राजनीतिक दबाव है। ऐसे में 5 अगस्त का उनका संबोधन सिर्फ एक भाषण नहीं माना जा रहा। क्योंकि अगर शेख हसीना अपनी पार्टी के भविष्य बांग्लादेश लौटने की योजना या फिर वहां के राजनीतिक हालात पर खुलकर बोलती हैं तो इसका असर ढाका से लेकर नई दिल्ली तक दिखाई दे सकता है और भारत के लिए यह मामला आसान नहीं है। बांग्लादेश पहले ही भारत से शेख हसीना के प्रत्यार्पण की मांग कर चुका है। भारत कह रहा है कि प्रत्यार्पण से जुड़ा मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाएगा। अब बांग्लादेश ने शेख हसीना के 5 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर भारत से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को भी कह दिया है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री, भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान ढाका का कहना है कि भारत की जमीन से उनकी राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकती है। यानी कि साफ-साफ धमकी कह सकते हैं। एक तरफ शेख हसीना है जो करीब 2 साल से भारत में है। दूसरी तरफ बांग्लादेश की नई राजनीतिक व्यवस्था है जो उन्हें वापस लाना चाहती है। तीसरी तरफ भारत है जिसके सामने कानून, कूटनीति और पड़ोसी देश के साथ रिश्तों तीनों को संतुलित करने की चुनौती है। तो 5 अगस्त का दिन सिर्फ शेख हसीना के लिए नहीं बल्कि भारत बांग्लादेश संबंधों के लिए भी बेहद अहम होने वाला है। क्या शेख हसीना इस मंच से अपनी राजनीतिक वापसी का रोड मैप देंगी? क्या वह बांग्लादेश लौटने की तारीख का संकेत देंगी? क्या आवामी लीग को फिर से खड़ा करने की रणनीति सामने आएगी? या फिर यह सिर्फ अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने की एक कोशिश होगी। इन सवालों के जवाब 5 अगस्त को मिलने के लिए। एक बात जरूर साफ है।
भारत के पड़ोस में एक ऐसी घटना हुई है जिसके बारे में जितनी चर्चा होनी चाहिए थी उतनी नहीं हुई। यह खबर इतनी बड़ी है कि भारत की किस्मत बदल सकती है। रूस ने पहली बार भारत के पड़ोस में ऐसा दांव खेला है जिसके बारे में जानकर सभी चौंक जाएंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भारत पर दबाव डालने के लिए आजकल बांग्लादेश के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इसी बीच रूस ने धमाकेदार एंट्री ली है। रूस ने अमेरिका और बांग्लादेश दोनों को एक साथ लपेट दिया है। दरअसल रूस ने बांग्लादेश से कहा है कि हमने तुम्हें जो लोन दिया था उसका भुगतान अब भारत की करेंसी यानी रुपए में करो। रुपए में पेमेंट लेने के लिए रूस ने बांग्लादेश को यहां तक कह दिया है कि वह ढाका में अपने बैंक की ब्रांच तक खोलने के लिए तैयार है। आपको बता दें कि रूस ने बांग्लादेश के रूपपुर में बिजली उत्पादन के लिए बांग्लादेश का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाया था। इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस ने बांग्लादेश को $1.38 अरब डॉलर का लोन दिया था। इसे भी पढ़ें: आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेना बांग्लादेश को 20 सालों के अंदर यह सारा पैसा रूस की कंपनी को लौटाना है। अब इसी पैसे को लेकर रूस ने बहुत बड़ा खेल कर दिया है। रूस ने बांग्लादेश से कहा है कि आप पेमेंट के लिए रुपए का इस्तेमाल कर सकते हैं। बांग्लादेश ने सोचा नहीं था कि रूस रुपए में पेमेंट मांगेगा। हालांकि रूस ने भारत से इस बारे में बात जरूर की होगी। आपको याद होगा कि जब रूस पर अमेरिकी सेंशंस चरम पर थे तब भारत ने रूस से जमकर तेल खरीदा था। उसी तेल की पेमेंट भारत ने रुपए में की थी। यानी भारत ने रूस को पेमेंट के लिए रुपए का एक नेटवर्क तैयार कर लिया था। अब रूस चाहता है कि बांग्लादेश भी इसी नेटवर्क का इस्तेमाल करें और पेमेंट रुपए में करें। आप जानते ही हैं कि कोई भी देश रूस को डॉलर में पेमेंट नहीं कर सकता क्योंकि अमेरिका ने रूस के लिए इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे बंद कर रखा है। बांग्लादेश चाहकर भी रूस को डॉलर में पेमेंट नहीं कर सकता। आपके मन में सवाल होगा कि रूस चीनी करेंसी युवान में भी तो बांग्लादेश से पेमेंट मांग सकता था। इसे भी पढ़ें: 12-13 सितंबर को दिल्ली में ऐसा दिखेगा नजारा, व्हाइट हाउस से लेकर NATO मुख्यालय तक मच जाएगी खलबली! लेकिन यहां पर एक बहुत बड़ा खेल है। बांग्लादेश और चीन के बीच ज्यादातर बटरल व्यापार डॉलर में होता है। उसके बाद लोकल करेंसी आती है। लेकिन बांग्लादेश और भारत के बीच जो बटरल व्यापार होता है वो पहले लोकल करेंसी में होता है। उसके बाद डॉलर आता है। यानी बांग्लादेश और भारत के बीच रुपए वाला सिस्टम पहले से ही चल रहा था और अब रूस और भारत के बीच रुपए वाला सिस्टम शुरू हो गया है। यानी बांग्लादेश आराम से रुपए के जरिए रूस का लोन चुका सकता है। आप समझ रहे हैं कि यह कितनी बड़ी खबर है। यह सीधे-सीधे डॉलर को झटका है। अमेरिका में बवाल है कि रूस अभी तक भारत के साथ बटरल व्यापार में ही रुपए का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन अब रूस दूसरे देशों पर भी रुपए को इस्तेमाल करने का दबाव डाल रहा है। अमेरिका को डर है कि अगर ब्रिक्स देशों ने अपना व्यापार लोकल करेंसी में शुरू कर दिया तो यह डॉलर को सबसे बड़ी चोट होगी। दुनिया की 42% जीडीपी ब्रिक्स देश ही बनाते हैं। बहरहाल आप सोचिए कि बांग्लादेश अगर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए मिला 11.38 अरब डॉलर का लोन अगर रुपए में चुकाता है तो यह कितनी बड़ी घटना होगी।
Nepal Violence : सड़कों पर उतरे हिंदू, नेपाल छोड़कर भागने लगे मुसलमान!
नेपाल में कावड़ यात्रा के दौरान हुए बवाल के बाद किस तरह से कई इलाकों में हिंसा भड़की की तस्वीरें आपने देखी होंगी। इस हिंसा की शुरुआत तब हुई जब कावड़ियों पर पत्थरबाजी हुई। 24 साल के एक हिंदू युवक की गोली लगने से मौत हो गई। जिसके बाद हिंदू संगठन सड़कों पर उतर गए और फिर जो हुआ वो सब ने देखा। हालात इतने बिगड़ गए कि कई हिस्सों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। भले ही अब यहां हिंसा की आग शांत होती हुई दिखाई दे रही हो लेकिन हिंदू संगठन अब भी भड़के हुए हैं। इसके पीछे की वजह वो रोहिंग्या बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठिए हैं जो यहां आकर माहौल खराब कर रहे हैं और नेपाल की डेमोग्राफी के लिए बहुत बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। क्योंकि जिस सुनसुरी जिले के कप्तानगंज इलाके में हिंसा भड़की वहां मुस्लिम आबादी लगभग 13% है। सोचिए पूरे नेपाल की कुल मुस्लिम आबादी लगभग 5% है। लेकिन अकेले सुनसरी इलाके में 13% मुस्लिम रहते हैं। इसे भी पढ़ें: नेपाल curfew में ढील: मधेश और कोशी प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात सुधरे बताया जा रहा है कि इनमें सबसे बड़ी संख्या घुसपैठियों की है। इसलिए अब इन्हें खदेड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। दरअसल अब हिंदूवादी संगठनों नेपाल सरकार को 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा है। जिसमें सबसे बड़ी मांग रोहिंग्या बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से खदेड़ने की की गई है। साथ ही सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के साथ ही साल 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी उठाई गई है और इस मांग के बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने घुसपैठियों के बीच भगदड़ मचा दी है। तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि भारी संख्या में मुस्लिम भीड़ अपने कंधों पर बैग टांग कर हाथों में सामान लेकर निकलते हुए दिखाई दे रही है। इस तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये बांग्लादेश और पाकिस्तानी घुसपैठियां हैं जो अब एक्शन के डर से नेपाल छोड़कर भाग रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे हाल ही में बंगाल से भागते हुए दिखाई दिए। दरअसल नेपाल के आईजी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि भारत से भगाए गए बांग्लादेशी और रोहिंग्या अब नेपाल में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा सिलीगुड़ी रूट से भी बांग्लादेश से रोहिंग्या नेपाल में आ रहे हैं। आईजी ने बताया था कि रोहिंग्या नेपाल के अलग-अलग इलाकों में बसने की कोशिश कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: घरों से इस्लामिक झंडे खींच रहा नेपाल, क्या बोले मुसलमान? जिससे डेमोग्राफी चेंज हो रही है। जहां पर मुसलमानों की संख्या ज्यादा हो रही है, वहां पर हिंदुओं के साथ उनका टकराव हो रहा है। दरअसल नेपाल में अब तक मुसलमानों की आबादी सिर्फ तराई इलाकों में बढ़ रही थी। लेकिन अब पहाड़ों में भी मुसलमानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नेपाल में राजा के शासन के दौरान पहाड़ों पर मुसलमान ना के बराबर थे। लेकिन अब पहाड़ों पर मुसलमानों की तादाद इतनी बढ़ गई है कि वहां इस्तमा का आयोजन किया जा रहा है। इस्तमा मुख्य रूप से तबबलीगी जमात की ओर से किए जाने वाले बड़े धार्मिक सम्मेलन को कहा जाता है। इसी के बहाने बांग्लादेश, पाकिस्तान और सोमालिया से भी मुसलमान नेपाल पहुंचते हैं और एक बार मुसलमान नेपाल में घुस जाते हैं तो वापस नहीं लौटते। यही वजह है कि नेपाल में इस्तिमा बंद करवाने की भी मांग उठ रही है। क्योंकि नेपाल में इसका आयोजन सिर्फ घुसपैठ के लिए होता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेपाल में बसने के बाद यह मुसलमान लव जिहाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इसे भी पढ़ें: घरों से इस्लामिक झंडे खींच रहा नेपाल, क्या बोले मुसलमान? मस्जिद और मदरसों ऐसी गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं जिससे नेपाल के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। मुसलमानों की तादाद बढ़ने के साथ-साथ नेपाल में मदरसों और मस्जिदों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। 2020 में नेपाल के अंदर 911 रजिस्टर्ड मदरसे थे। 2025 तक उनकी संख्या बढ़कर 1200 से ज्यादा हो गई। जबकि इस दौरान अनरजिस्टर्ड मदरसों की संख्या बढ़कर 2400 तक पहुंच गई।
Donald Trump के हाथ से निकल गई ये जंग? ईरान ने फिर ठोका अमेरिका का MQ-9
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से चरम पर है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने हॉर्मोज जलडमरूमध्य के ऊपर ओढ़ रहे एक अमेरिकी एमकेाइन रिपड ड्रोन को मार गिराया है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी संकेत दिए हैं कि होमोस जलडम मध्य को लेकर उसकी रणनीति में बदलाव हो सकता है। लेकिन फिलहाल वह इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने के पक्ष में नहीं है। इन घटनाओं ने पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका आईआरजीसी के आधिकारिक मीडिया प्लेटफार्म सिपाह न्यूज़ के अनुसार अमेरिकी एम99 रिपेर ड्रोन को हॉर्मोज जलडमरूमध्य के ऊपर तैनात ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ड्रोन को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन ने किस स्थान से उड़ान भरी थी। एम9 रिपर ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिकी वायुसेना निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों के लिए करती है। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद से तेहरान लगातार अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को चुनौती देता रहा है। ईरानी मीडिया का दावा है कि अब तक 30 से ज्यादा एम क्यूाइन रिपोन गिराए गए हैं। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागची ने होमस जलडमरू मध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ओमान के साथ जलडम मध्य के प्रबंधन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच नए शिपिंग रूट को लेकर सहमति बनने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। इसे भी पढ़ें: UKMTO ने ओमान तट पर मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले की शुरू की जांच ईरानी विदेश मंत्रालय ने भी संकेत दिए हैं कि संबंध में जल्द ही कोई औपचारिक समझौता हो सकता है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी नए समुद्री मार्ग पर सहमति बनने का अर्थ यह नहीं होगा कि हुरम जलडम्र मध्य को पूरी तरह खोल दिया जाए। तेहरान का कहना है कि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और मौजूदा हालात को देखते हुए जलडू मंदिर में जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण बनाए रखा जाएगा। यानी नए शिपिंग रूट की व्यवस्था के बावजूद ईरान अपने रणनीतिक विकल्प अपने हाथ में रखना चाहता है। फिलहाल ईरान ने एक और एम9 रिपब ड्रोन को मार गिराया है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यमन के ईरान हिमायती अंसारुल्लाह या हूती ने जिस तरह सऊदी के सेंशंस के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए लाल सागर पर सऊदी के लिए कंप्लीट ब्लॉकेट लगा दिया है।
आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेना
ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि पाकिस्तान लगातार अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक उसने चीन से मिले 250 अत्याधुनिक एसएच 15 सेल्फ प्रोपेल होवेसर भारत से लगी पूरी पश्चिमी सीमा पर तैनात करने शुरू कर दिए हैं। यानी जम्मू कश्मीर से लेकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात सेक्टर तक पाकिस्तान अपनी लंबी दूरी की आर्टिलरी को नए सिरे से व्यवस्थित कर रहा है। यह हाल के सालों में उसकी सबसे बड़ी आर्टिलरी तैनाती मानी जा रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने हाल ही में चीन से 250 एसएच 15 ट्रक माउंटेड सेल्फ प्रोपेल होत्सर हासिल किए। अब इन्हें चरणबंद तरीके से भारत से लगी पश्चिमी सीमा पर तैनात किया जा रहा है। यह तैनाती किसी एक जगह नहीं हो रही बल्कि पूरी सीमा पर अलग-अलग रणनीतिक इलाकों में की जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान अपनी आर्टिलरी फायर पावर को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाने की कोशिश में है। इसे भी पढ़ें: Pakistan में M2 Motorway के पास बस दुर्घटना, 13 लोग घायल और बुनियादी ढांचे पर सवाल अचानक पाकिस्तान यह तैनाती क्यों कर रहा है? इसका बहुत साफ और सीधा जवाब है ऑपरेशन सिंदूर। मई 2025 में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ढांचों पर सटीक हमले किए। उस अभियान ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत जरूरत पड़ने पर सीमा पार भी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है और अब माना जा रहा है कि उसी के बाद पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारियों में तेजी लाने में जुटा है और यही वजह है कि चीन से इतने बड़े स्तर पर उसने ये तोपें हासिल की और अब इनकी तैनाती शुरू की जा रही है। इसे भी पढ़ें: जानिए, भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रहे सरकारी दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही तय करने का आह्वान क्यों किया? अब अगर बात चीन के इस हथियार के बारे में करें यानी कि एसएच होवसर तोपो की तो आपको बता दें एसए 15 चीन की सरकारी रक्षा कंपनी नोरिंको ने बनाया है। यह चीन की सेना के पीसीएल 1881 का एक्सपोर्ट वर्जन है। यह कोई साधारण तोप नहीं इसे 6 * 6 यानी ट्रक पर लगाया गया है। यानी इसे किसी ट्रेलर से खींचने की जरूरत नहीं पड़ती। जहां जरूरत पड़ी वहां पहुंची। कुछ ही मिनटों में फायरिंग की और फिर तुरंत दूसरी जगह निकल गई। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। आधुनिक युद्ध में इसे शूटन स्कूट क्षमता कहा जाता है। यानी गोली चलाओ और जवाबी हमला आने से पहले अपनी जगह बदल दो। यही वजह है कि ऐसी तोपों को नष्ट करना पारंपरिक आर्टिलरी की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है। और अगर इसकी मारक क्षमता की अगर हम बात करें तो यह 155 एमएम और 52 कैलिबर की होवेस्टर है। सामान्य गोले से करीब 30 से 40 कि.मी. तक हमला कर सकती है। लेकिन अगर रॉकेट असिस्टेड बी लैप गोले इस्तेमाल किए गए तो इसकी रेंज 53 से 72 किमी तक बताई जाती है। इसमें ऑटोमेटेड फायर कंट्रोल सिस्टम है और यह 1 मिनट में छह राउंड तक फायर कर सकती है। यानी कम समय में भारी गोलाबारी और फिर तुरंत दूसरी जगह। इसे भी पढ़ें: Satyanjal Pandey इस्लामाबाद में बने भारत के नए प्रभारी राजदूत यहां पर खबर ये नहीं है कि पाकिस्तान ने चीन से तोपे ली क्योंकि पाकिस्तान ने 250 की संख्या में ये तोपे ली हैं तो इसी वजह से ये अपने आप में एक बड़ी खबर बन जाती है क्योंकि 250 अमित सर किसी एक ब्रिगेड के लिए नहीं होते। इतनी संख्या कई आर्टिलरी रेजीमेंट को पूरी तरह लेस कर सकती है। यानी पाकिस्तान सिर्फ नई तोपे नहीं खरीद रहा बल्कि अपनी पूरी लंबी दूरी की गोलाबारी क्षमता को अपग्रेड कर रहा है। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा किरदार चीन। पाकिस्तान भले ही यह हथियार सीमा पर तैनाती कर रहा हो लेकिन अगर बड़ी तस्वीर देखा जाए तो चीन की भूमिका यहां पर ज्यादा बड़ी है। आज पाकिस्तान की सेना का आधुनिकीकरण तेजी से चीन के भरोसे पर हो रहा है। लड़ाकू विमान चाहिए। चीन दे रहा है। ड्रोन चाहिए उसके लिए चीन है। यहां तक कि एयर डिफेंस चाहिए वो भी पाकिस्तान चीन से ले रहा है। अब आधुनिक सेल्फ प्रोपेल्ड ऑफिसर भी चीन ने दे दिए। यानी पाकिस्तान की सैन्य ताकत में जो भी नया जोड़ रहा है उसमें चीन की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।
टूटे सारे रिकॉर्ड, रूस से रोजाना 28 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा भारत!
दुनिया भर में इस वक्त तनाव चरम पर है। कहीं युद्ध का खतरा है तो कहीं ऊर्जा संकट की चिंता बनी हुई है और ऐसे ही माहौल में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को और बढ़ा दिया है। जुलाई महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल खरीदा जो देश के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से भी ज्यादा हिस्सा रहा। जुलाई महीने में भारत ने रूस से अब तक का सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदा। आंकड़ों के मुताबिक रूस से भारत को करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल मिला। यानी भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी पहली बार 55% से ज्यादा हुई। सीधे शब्दों में कहें तो जुलाई में भारत ने जितना भी कच्चा तेल विदेशों से खरीदा उसमें से आधे से ज्यादा हिस्सा रूस का था। इसे भी पढ़ें: Middle East में टला बड़ा युद्ध: क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील पर Trump ने Iran से बातचीत को दी मंजूरी दरअसल साल 2022 में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ था तब अमेरिका और यूरोप समेत कई पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद रूस ने अपना तेल कम कीमत पर बेचना शुरू किया और भारत ने भी अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से तेल खरीद बढ़ा दी। अब हालात यह हैं कि रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन चुका है। हालांकि ऐसा नहीं है कि भारत सिर्फ रूस पर निर्भर है। जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने पश्चिम एशिया के देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई। सऊदी अरब से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। वहीं इराक से भी तेल खरीद में तेजी आई और जुलाई में यह करीब 1.3 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। कुवैत ने भी दोबारा भारत को तेल सप्लाई शुरू की। वहीं संयुक्त अरब अमीरात से आयात थोड़ा कम हुआ लेकिन वह अभी भी भारत के बड़े तेल सप्लायर देशों में शामिल हैं। इसके पीछे वजह यह है कि कुछ समय पहले पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। लेकिन अब हालात सामान्य होने के बाद भारत ने वहां से भी खरीद बढ़ानी शुरू कर दी है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका आपको बता दें भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है। देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम लोगों की जरूरतों के लिए लगातार ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में भारत की नीति साफ है कि जहां से बेहतर कीमत और भरोसेमंद सप्लाई मिले वहां से तेल खरीदा जाए। भारत, रूस के अलावा अमेरिका, खाड़ी देशों और दूसरे देशों से भी तेल आयात करता है। हालांकि अब एक नई चुनौती सामने जरूर आ रही है। अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बिल को मंजूरी दी। इस बिल में उन देशों पर 100% तक अतिरिक्त टेरिफ लगाने का प्रावधान है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल या गैस खरीदते हैं। इस बिल के निशाने पर सीधे तौर पर रूस के बड़े तेल खरीददार देशों में भारत और चीन भी आ सकते हैं। हालांकि अभी तक यह बिल कानून नहीं बना। इसे आगे अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी मिलनी बाकी है। इसे भी पढ़ें: Iraq और तुर्किये ने पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात बढ़ाने के समझौते पर किए हस्ताक्षर भारत ने इस पूरे मामले पर कहा है कि वह घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी दबाव में नहीं बल्कि देश के हित और 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। यानी एक तरफ भारत रूस से सस्ता और भरोसेमंद तेल लेकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका जैसे देशों के साथ अपने रिश्तों का संतुलन भी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर भारत की इस रणनीति पर है क्योंकि तेल सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा हथियार बन चुका है। लेकिन जिस तरह से पिछले महीने भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदा यह जरूर दिखाता है कि भारत किसी भी दबाव में नहीं आने वाला है।
Ethiopia Landslide में 14 की मौत, अम्हारा क्षेत्र की घटना
अदीस अबाबा, चार अगस्त (एपी) इथियोपिया के अम्हारा क्षेत्र में सोमवार को मूसलाधार बारिश के बीच हुए भूस्खलन में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए साथ ही कई लोग लापता हैं। यह हादसा त्सादकाने देब्रे मितमाक सेंट मैरी मठ में हुआ जहां पुरानी बीमारियों के आध्यात्मिक तरीके से उपचार के लिए लोकप्रिय, पवित्र जल से शुद्धिकरण अनुष्ठान में शामिल होने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु एकत्र हुए थे। मठ के महाप्रबंधक मेगाबे हादिस नेका तिबेब अबाबू ने कहा, ‘‘यह दुर्घटना सुबह लगभग सात बजे हुई। मृतकों में अधिकतर वे श्रद्धालु शामिल हैं, जो पवित्र जल से शुद्धिकरण के धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए पहुंचे थे।’’उन्होंने कहा कि मलबे के नीचे अब भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, हालांकि उनकी संख्या का अभी पता नहीं चल सका है। अबाबू के अनुसार, मृतकों में से 11 का अंतिम संस्कार मठ परिसर में ही कर दिया गया, जबकि अन्य के शव उनके पैतृक स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, कुछ मृतकों की पहचान अब भी नहीं हो सकी है। गंभीर रूप से घायल लोगों को मठ से लगभग 70 किलोमीटर दूर उत्तर शेवा प्रशासनिक क्षेत्र की राजधानी देबरे बिरहान के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
ट्रंप के बैंक अकाउंट पर क्यों लगा प्रतिबंध? जांच, शक और बड़े एक्शन की पूरी कहानी आई सामने
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ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! कुवैत में अमेरिकी ठिकाने को बनाया निशाना, ट्रंप बोले - 'समझौते का आखिरी मौका'
Narinder Singh समेत 25 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, चार अगस्त अमेरिका में पहचान संबंधी जानकारी में कथित फर्जीवाड़े से लेकर हत्या के प्रयास और बाल यौन शोषण जैसे आरोपों वाले मामलों में भारतीय मूल के एक व्यक्ति सहित 25 लोगों की नागरिकता रद्द की जा रही है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने 65 वर्षीय नरिंदर सिंह के खिलाफ डेलावेयर जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। उन पर अमेरिका में प्रवेश पाने के लिए फर्जी पहचान का सहारा लेने का आरोप है। न्याय मंत्रालय के मुताबिक सिंह ने 1996 में अमेरिका में प्रवेश के लिए गलत पहचान का इस्तेमाल किया और एक मई, 2008 को अमेरिका के नागरिक बन गए। शिकायत में उनके कई गलत बयानों और गैर-कानूनी कामों का जिक्र करते हुए सात आरोप लगाए गए हैं। जिन 25 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कार्यवाही शुरू की गई है उनमें पाकिस्तानी मूल के दो लोग – जिया मुराद भट्टी और मोहम्मद वासिफ भी शामिल हैं। उन पर पहचान से जुड़ी गलत जानकारी देने के आरोप हैं। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘‘अमेरिका की नागरिकता हमारे देश के सर्वोच्च विशेषाधिकारों में से एक है और इसे वैध तरीके एवं ईमानदारी से ही हासिल किया जाना चाहिए।’’ब्लांश ने कहा, ‘‘आज दर्ज की गई शिकायतों में आरोप है कि इन लोगों ने धोखाधड़ी से, तथ्यों को छिपाकर या गैर-कानूनी तरीके से नागरिकता हासिल की। इसमें हिंसक अपराध, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, फर्जी पहचान और नागरिकता के लिए अयोग्य ठहराने वाली अन्य बातें छिपाना शामिल है।’’ये शिकायतें 20 जुलाई से तीन अगस्त के बीच दर्ज की गई हैं। नागरिकता पाने वाले इन लोगों में 17 देशों जैसे कि पाकिस्तान, मोल्दोवा, भारत, मेक्सिको, कोलंबिया, नाइजीरिया, लाइबेरिया, घाना, जमैका, ताइवान, होंडुरास, कैमरून, जॉर्डन, क्यूबा, अल साल्वाडोर, हैती और स्वीडन के लोग शामिल हैं। ब्लांश ने कहा, ‘‘आज की ये कार्रवाई मंत्रालय के इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी समन्वित कोशिश है, लेकिन यह तो बस शुरुआत है। न्याय मंत्रालय नागरिकता प्रक्रिया की शुचिता और अमेरिकी लोगों की रक्षा के लिए हर उपलब्ध तरीके का इस्तेमाल करना जारी रखेगा।
पाकिस्तान में Unknown men अथवा Unknown gunmen आतंकवादियों पर कहर बन कर टूट रहे हैं। अक्सर खबर आती है कि बड़े बड़े आतंकी संगठनों के खूंखार आतंकी को अचानक से अज्ञात व्यक्ति या अज्ञात बंदूकधारी ठोक कर चला गया। इसी बीच, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर रिजवान हनीफ ने ऐसा बयान दिया है, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के भीतर का खौफ दर्शा रहा है। हम आपको बता दें कि रिजवान हनीफ ने स्वीकार किया कि वर्ष 2020 से अब तक लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 30 से अधिक आतंकवादी पाकिस्तान के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों में लक्षित हमलों में मारे जा चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए हनीफ ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों के दौरान संगठन के कई सक्रिय सदस्य पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में निशाना बनाए गए। उसने कहा कि इन आतंकियों की मौत पेशावर, कराची, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और रावलाकोट जैसे शहरों में हुई। उसने कहा कि इन घटनाओं के पीछे भारतीय खुफिया एजेंसियों का हाथ था। हालांकि, उसने अपने दावों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। इसे भी पढ़ें: China के J-20 Stealth Fighter Jets और Pakistan की SH-15 Howitzer Guns भारत की ओर तैनात, अब क्या करेंगे PM Modi? अपने संबोधन में हनीफ ने कहा, “पिछले चार वर्षों में हमारे 30 लोग भारतीय खुफिया एजेंटों द्वारा मार दिए गए। कोई पेशावर में मारा गया, कोई कराची में, कोई रावलपिंडी में, कोई मुजफ्फराबाद में और कोई रावलाकोट में।” देखा जाये तो रिजवान हनीफ का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आतंकी संगठन आमतौर पर अपने नेटवर्क को हुए नुकसान या अपने सदस्यों की मौत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बचते हैं। ऐसे में संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा खुले मंच से इतनी बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने की बात स्वीकार करना लश्कर-ए-तैयबा के भीतर हुए नुकसान की ओर संकेत माना जा रहा है। हालांकि, इस दौरान हनीफ का पूरा भाषण कट्टरपंथी और भड़काऊ टिप्पणियों से भी भरा रहा। उसने विभिन्न धर्मों के प्रति आपत्तिजनक और घृणा फैलाने वाली टिप्पणियां कीं तथा धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया। अपने भाषण में उसने अन्य आस्थाओं और उनके अनुयायियों के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए और संगठन के समर्थकों को धार्मिक आधार पर उकसाने की कोशिश भी की। उधर, हनीफ के भाषण पर कई विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के संबोधन यह दर्शाते हैं कि आतंकवादी संगठन किस प्रकार धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कर कट्टरता, वैमनस्य और हिंसा को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं। ऐसे संगठन अक्सर समाज में विभाजन पैदा करने और युवाओं के कट्टरपंथीकरण के लिए धर्म आधारित प्रचार का सहारा लेते हैं। बहरहाल, लश्कर को हुए नुकसान की बात तो उसके कमांडर ने कबूल कर ली लेकिन पाकिस्तान में कई और आतंकी संगठन भी हैं जिन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। हम आपको बता दें कि हालिया वर्षों में पाकिस्तान में अज्ञात हमलावर या अज्ञात बंदूकधारी शब्द का इस्तेमाल उन रहस्यमय लक्षित हत्याओं के लिए व्यापक रूप से किया जाता रहा है, जिनमें भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों से जुड़े कई वांछित और हाई-प्रोफाइल आतंकवादी मारे गए हैं। कराची, लाहौर, सियालकोट और रावलाकोट सहित कई शहरों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अल-बद्र जैसे प्रतिबंधित संगठनों के कई वरिष्ठ कमांडरों की गोली मारकर हत्या की जा चुकी है। इनमें वर्ष 2016 के पठानकोट आतंकी हमले के साजिशकर्ता शाहिद लतीफ, मसूद अजहर के भाई मोहम्मद ताहिर अनवर और वर्ष 2019 के पुलवामा हमले से जुड़े हमजा बुरहान जैसे नाम भी शामिल हैं। इन घटनाओं को लेकर पाकिस्तान समय-समय पर विदेशी खुफिया एजेंसियों, विशेषकर भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर आरोप लगाता रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने ऐसे सभी आरोपों को लगातार खारिज किया है।
PoJK में क्या छिपा रहा पाकिस्तान? पहले चलीं गोलियां, अब Al Jazeera पर कथित बैन के दावे
पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर (PoJK) एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछले कुछ समय से यहां विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और इंटरनेट एवं मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा […]
ईरान का कुवैत में अमेरिकी बेस पर हमला, ओमान तट पर जहाज निशाने पर
मंगलवार सुबह कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को कम से कम तीन ड्रोन से निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह हमला ईरान की आईआरजीसी से जुड़ा था।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और अधिक तेज करते हुए तेहरान को 'डील या टोटल सरेंडर' का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। सोमवार को एक तीखे बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पर्दे के पीछे निजी तौर पर बातचीत के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इसका खंडन कर रहे हैं। ट्रंप के इस ताजा और आक्रामक बयान से मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।ईरानी नेतृत्व का दोहरा चरित्र और गुप्त बातचीत का दावाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि ईरानी नेता बेहद दोहरा चरित्र अपना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक तरफ जहां गुप्त माध्यमों से बातचीत की गुहार लगाई जाती है और बैठकें तय होती हैं, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक रूप से यह ढिंढोरा पीटा जाता है कि वे अमेरिका के साथ किसी भी तरह की कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं और केवल ओमान के जरिए ही संवाद हो रहा है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि ईरान को दुनिया के किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मामले पर वाशिंगटन का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और अडिग है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना का पूर्ण दबदबाईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण किए जाने के दावों को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह महज खोखली बयानबाजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नौसेना और सख्त नाकेबंदी का पूरी तरह से नियंत्रण है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी अनुमति के बिना ईरान के अंदर कोई भी माल न तो आ सकेगा और न ही बाहर जा सकेगा। उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक ईरान पूरी तरह से समर्पण नहीं करता या कोई मजबूत कूटनीतिक डील नहीं होती, तब तक अमेरिका का आर्थिक और सैन्य शिकंजा यूं ही कसा रहेगा।कूटनीति के बीच तीखे बयानों से गरमाया मध्य पूर्व का राजनीतिक माहौलविशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह अल्टीमेटम ऐसे समय में आया है जब विभिन्न बिचौलियों के माध्यम से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनलों को खुला रखने की कोशिशें चल रही थीं। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर लगातार आ रहे तीखे और आक्रामक बयानों ने शांति वार्ताओं की उम्मीदों को झटका दिया है। ट्रंप के इस रुख ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर अपनी अधिकतम दबाव की नीति को और अधिक कड़ाई से लागू करने के मूड में है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आतंकवाद को पनाह देने और दूसरे देशों के मामलों में दखल देने वाला पाकिस्तान अब खुद अपने ही आंतरिक विद्रोहों और टूट की कगार पर खड़ा है। गुलाम कश्मीर (PoK) में चल रहे तीव्र विरोध प्रदर्शनों के बीच अब बलूचिस्तान ने पाकिस्तान से पूरी तरह रिश्ता खत्म करने का बिगुल फूंक दिया है। 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वे हर साल 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। इस बड़े ऐलान के साथ ही बलोच नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया भर के देशों से अपने समर्थन की जोरदार अपील की है, ताकि इस क्षेत्र में पाकिस्तानी दमन से मुक्ति मिल सके।पाकिस्तान के बाहर भी विदेशों में फहराया जाएगा स्वतंत्र बलूचिस्तान का झंडाबलोच लिबरेशन नेता मीर यार बलूच ने दुनिया भर में रह रहे तमाम बलोच नागरिकों से अपील की है कि वे आगामी 11 अगस्त को एकजुट होकर अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएं। उन्होंने निर्देश दिया है कि लोग अपने घरों, बाजारों, दुकानों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' का झंडा फहराएं। बलोच नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान की दमनकारी और विस्तारवादी नीतियों ने न केवल इस भू-भाग को तबाह किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अशांति फैलाई है। चाहे कश्मीर के मुद्दे पर जहर उगलना हो, बलूचिस्तान में बर्बर सैन्य कार्रवाई करना हो या परमाणु परीक्षण, पाकिस्तान की नीतियों से केवल खून-खराबा ही हुआ है।11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का ऐतिहासिक और कानूनी कारणइतिहास के पन्नों का हवाला देते हुए बलूचिस्तान के नेताओं ने बताया कि आधिकारिक रूप से पहली बार 11 अगस्त 1947 को ही बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में घोषित किया गया था। उस समय भारत और पाकिस्तान का औपचारिक विभाजन भी नहीं हुआ था। दावा किया जाता है कि उस दौरान 'ऑल इंडिया रेडियो' और प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'न्यूजीलैंड/न्यूयॉर्क टाइम्स' ने भी इस स्वतंत्रता की घोषणा को प्रमुखता से कवर किया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर बलूचिस्तान के लोग 11 अगस्त को अपना असली स्वाधीनता दिवस मानते आए हैं, जबकि पाकिस्तान बाद में 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने लगा था।अंतरराष्ट्रीय समर्थन की गुहार: पाकिस्तान के साथ रहकर तरक्की नामुमकिन'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' की ओर से जारी बयान में दो टूक कहा गया है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे और उसके साथ रहकर बलूचिस्तान कभी भी समृद्ध या सुरक्षित नहीं हो सकता। पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से तंग आ चुके बलोच नेतृत्व ने वैश्विक शक्तियों और मानवाधिकार संगठनों से गुहार लगाई है कि वे बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करें, ताकि दक्षिण एशिया क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित हो सके। इस बड़े ऐलान के बाद वैश्विक कूटनीति के गलियारों में पाकिस्तान की मुश्किलें और अधिक बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत दुनिया के कई देशों पर नए टैरिफ थोपा जाना अब खुद उनके लिए गले की फांस बनता जा रहा है। अमेरिका के 25 राज्यों के एक मजबूत गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के इस विवादास्पद फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में आधिकारिक रूप से मुकदमा दर्ज करा दिया है। राज्यों का आरोप है कि व्हाइट हाउस कानून का गलत इस्तेमाल करके अमेरिकी नागरिकों, परिवारों और व्यवसायों पर गैर-कानूनी तरीके से कर का बोझ डाल रहा है। इस कानूनी शिकंजे के बाद ट्रंप प्रशासन देश के भीतर ही चौतरफा घिरता नजर आ रहा है।60 से अधिक व्यापारिक साझेदारों पर लगाया गया है अतिरिक्त करबता दें कि इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत अपने करीब 60 ट्रेड पार्टनर्स पर 10 से 12.5 फीसदी तक का अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का बड़ा ऐलान किया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है जो बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के निर्यात को रोकने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव के तहत शुरुआती चर्चा में भारत पर 12.5% टैक्स लगाने की बात थी, जिसे बाद में घटाकर 10% कर दिया गया था। साथ ही, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खाद जैसी आवश्यक वस्तुओं को इस दायरे से बाहर रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद घरेलू स्तर पर भारी विरोध शुरू हो गया है।'1974 के ट्रेड एक्ट के नाम पर कानूनी नियमों की हो रही अनदेखी'मुकदमा दायर करने वाले अमेरिकी राज्यों ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत लागू किए गए इन नए शुल्कों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स और ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि धारा 301 का इस्तेमाल किसी विशिष्ट देश या कंपनी की व्यापारिक नीतियों की जांच के लिए किया जाता है, न कि सभी अमेरिकी आयातों पर एकमुश्त भारी टैरिफ थोपने के लिए। राज्यों का यह भी कहना है कि सामान्य तौर पर एक साल में पूरी होने वाली जटिल जांच प्रक्रिया को महज़ ढाई महीने में ही जल्दबाजी में पूरा दिखा दिया गया, जो पूरी तरह से संदिग्ध और बहानेबाजी है।सुप्रीम कोर्ट से पहले भी कई कानूनी लड़ाइयां हार चुके हैं ट्रंपयह पहला मौका नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी टैक्स नीतियों को लेकर अदालती लड़ाई का सामना करना पड़ रहा हो। इससे पहले इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए ट्रंप के शुल्कों को असंवैधानिक करार दिया था। सर्वोच्च अदालत से करारा झटका मिलने के बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत वैश्विक टैरिफ लगाने की कोशिश की, जिसे भी अदालतों ने गैर-कानूनी ठहरा दिया। अब धारा 301 का सहारा लेने के बाद 25 राज्यों के इस बड़े कानूनी दांव ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें और अधिक बढ़ा दी हैं।
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
Sheikh Hasina के वर्चुअल संबोधन को लेकर Bangladesh ने मांगी Bharat से सफाई
बांग्लादेश भारत से यह स्पष्टीकरण मांग रहा है कि क्या वह प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त को होने वाले वर्चुअल संबोधन का समर्थन करेगा। ढाका चाहता है कि भारत इस बात का आश्वासन दे कि उसकी धरती का उपयोग राजनीतिक बयानबाजी के लिए नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश की चिंताएं बांग्लादेश सरकार को इस बात की चिंता है कि ऐसे राजनीतिक बयान देश की स्थिरता को खतरे में डाल सकते हैं और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे पहले, भारत ने संकेत दिया था कि वह भगोड़ों से राजनीतिक बयानबाजी की उम्मीद नहीं करता है। तारीक रहमान और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस बीच, प्रधानमंत्री तारीक रहमान के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह मामला बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति और भारत के साथ उसके संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
UKMTO ने ओमान तट पर मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले की शुरू की जांच
अल-खसाब [ओमान], 4 अगस्त (एएनआई): यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने मंगलवार को कहा कि ओमान के अल-खसाब से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में एक मालवाहक जहाज अज्ञातProjectile से टकरा गया। यूकेएमटीओ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उसे मालवाहक जहाज द्वारा वीएचएफ चैनल 16 पर संदेश प्रसारित करने के बाद घटना के संबंध में एक संकट कॉल प्राप्त हुई। “यूकेएमटीओ को ओमान के अल-खसाब से 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में एक घटना की रिपोर्ट मिली है। एक मालवाहक जहाज ने वीएचएफ 16 पर प्रसारित किया है कि वे एक अज्ञातProjectile से टकरा गए हैं। अधिकारी जांच कर रहे हैं,” यूकेएमटीओ ने कहा। यह घटना ईरान के साथ चल रही बातचीत के संबंध में सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आई है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर और ईरान के राजनयिक हस्तक्षेप के बाद ईरान के खिलाफ नियोजित सैन्य हमले को टाल दिया था। “यह आखिरी मौका है। यह कुछ ऐसा नहीं है जिसे यदि यह नहीं होता है, तो यह उनके लिए एक अच्छा दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है,” ट्रम्प ने वार्ताओं का जिक्र करते हुए कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के अनुरोध पर बातचीत हो रही थी और दोहराया कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना वाशिंगटन का प्राथमिक उद्देश्य बना हुआ है। सोमवार को पहले, ट्रम्प ने यह भी कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में चर्चा चल रही है और जोर देकर कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनकी टिप्पणियों के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार्ताओं की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और कहा था कि तेहरान वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में शामिल नहीं है। बघेई ने यह भी कहा था कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से एक नए समुद्री यातायात मार्ग पर समझ केवल सुरक्षित जहाज आवाजाही के लिए एक तकनीकी व्यवस्था थी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने का संकेत नहीं देती थी। मालवाहक जहाज पर कथित हमला ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा और नौपरिवहन पर राजनयिक प्रयास जारी हैं। (एएनआई)
UGC की मंजूरी से भारत में खुलेंगे 15 विदेशी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा का होगा विस्तार
भारत में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इन संस्थानों में ऑस्ट्रेलिया, इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के विश्वविद्यालय शामिल हैं। कहां खुलेंगे नए कैंपस? ये विदेशी विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख शहरों में अपने परिसर स्थापित करेंगे। स्वीकृत शहरों में बेंगलुरु, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई और चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण शैक्षिक और व्यावसायिक केंद्र शामिल हैं। यह कदम भारत को एक वैश्विक शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। UGC की मंजूरी और प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इन विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपनी शाखाएं खोलने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों का पालन करने वाले विश्वविद्यालयों को ही मंजूरी दी गई है। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत में खुलने वाले विदेशी कैंपस उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करें और स्थानीय नियामक निकायों के मानकों का पालन करें। शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर इन विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खुलने से भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल विदेशी शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या कम होगी, बल्कि यह भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा। साथ ही, यह विभिन्न देशों के साथ शैक्षिक सहयोग को भी बढ़ावा देगा। क्या होंगे फायदे? यह पहल भारत को उच्च शिक्षा के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में मदद करेगी। छात्रों को विभिन्न देशों के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और शोध के अवसरों तक पहुंच मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा और भारत में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका के भीतर ही बड़ा कानूनी और राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले अमेरिका के 25 राज्यों के एक समूह ने सोमवार को अदालत का रुख किया है। इन राज्यों ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) समेत 60 व्यापारिक साझेदार देशों (Trading Partner Countries) से होने वाले आयात पर लगाए गए नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद एक बार फिर अपनी कानूनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहा है। न्यूयॉर्क में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर इस मुकदमे में 10% से 12.5% तक के उन टैरिफ को निशाना बनाया गया है, जो पिछले महीने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये ड्यूटी उन देशों के खिलाफ हैं जो जबरन मजदूरी से बने सामान के एक्सपोर्ट को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहे हैं। यह मामला ट्रंप की टैरिफ स्ट्रैटेजी की नई परीक्षा है, जो US कोर्ट में बार-बार झटके लगने के बावजूद कायम रही है। US राज्यों का कहना है कि ट्रंप कोर्ट के फैसलों को नहीं मान रहे हैं यह मुकदमा ओरेगन और न्यूयॉर्क समेत 25 राज्यों ने दायर किया है, जिनके गवर्नर या अटॉर्नी जनरल डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप एक अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल करके उन बड़े इम्पोर्ट टैक्स को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें कोर्ट पहले ही गैर-कानूनी करार दे चुका है। शिकायत के अनुसार, धारा 301 का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोपी खास देशों या उद्योगों को निशाना बनाने के लिए किया गया है - न कि लगभग सभी US इम्पोर्ट पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए। शिकायत में यह भी तर्क दिया गया है कि प्रशासन जबरन मजदूरी का बहाना बनाकर उन टैरिफ को फिर से लागू कर रहा है जिन्हें कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने एक बयान में कहा, हर कदम पर हारने के बावजूद, ट्रंप एक बार फिर कामकाजी परिवारों और ओरेगन के स्थानीय व्यवसायों के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नए टैरिफ 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों पर लागू विवादित टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को की गई थी और ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों से होने वाले इम्पोर्ट पर लागू होते हैं। कुछ देशों को कड़े नियम लागू करने के बाद कम टैरिफ दरें मिलीं। उदाहरण के लिए, प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भारत के लिए टैरिफ दर 12.5% से घटाकर 10% कर दी गई। कुछ खास प्रोडक्ट्स, जैसे तेल, नैचुरल गैस, फर्टिलाइज़र और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट के तहत ड्यूटी-फ्री सुविधा पाने वाले सामानों को नए टैरिफ से छूट दी गई। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने इस कदम का बचाव किया। अमेरिका में लगभग एक सदी से ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है; अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा ही करने का समय आ गया है। ट्रंप ने एक नई कानूनी रणनीति अपनाई ये टैरिफ ट्रंप के आर्थिक एजेंडा के मुख्य स्तंभों में से एक को बचाने की उनकी नई कोशिश है, क्योंकि इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में, US सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है, जिससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई। इसके जवाब में, ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत दुनिया भर में अस्थायी टैरिफ लगाए। बाद में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड ने उन लेवी को भी गैर-कानूनी करार दिया, हालांकि प्रशासन की अपील के दौरान वे लागू रहे। इसे भी पढ़ें: Ramayana की रिलीज से पहले स्पेशल स्क्रीन की मांग, श्री रामलीला महासंघ ने निर्माताओं को लिखा पत्र, विरोध प्रदर्शन की दी चेतावनी कानूनी चुनौतियों के कारण उन विकल्पों के बाद, प्रशासन ने अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का रुख किया है, एक ऐसा कानून जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से विदेशी सरकारों की अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए किया जाता है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर टैरिफ लगाने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया था, और वे उपाय कानूनी चुनौतियों में टिके रहे क्योंकि वे किसी खास देश को टारगेट करके लगाए गए थे। कोर्ट से बार-बार झटके मिलने के बावजूद ट्रंप US मैन्युफैक्चरिंग को फिर से शुरू करने और ग्लोबल ट्रेड को नया रूप देने के लिए टैरिफ को एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। पिछले साल, उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका का लंबे समय से चला आ रहा ट्रेड डेफिसिट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लगभग हर देश से होने वाले इंपोर्ट पर टैरिफ लगाए, हालांकि बाद में कोर्ट ने उन उपायों पर रोक लगा दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास किसी समझौते पर पहुँचने का यह आखिरी मौका है। ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दावों को खारिज किया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान को सबक सिखाने और उस पर दबाव बनाने के लिए गैर-पारंपरिक और अपरंपरागत रणनीतियों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के अनुरोध पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन के साथ बातचीत के दावों को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप ने जोर देकर कहा कि चर्चा चल रही है। ट्रंप ने कहा, हम अभी बात कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, यह उनके लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है। मैं उन्हें कड़ी कार्रवाई से पहले हर संभव आखिरी मौका देना चाहता हूँ। CENTCOM ने ईरान पर कार्रवाई के लिए 'नए और अनोखे' विचारों की मांग की इस बीच, खबर है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर दबाव बनाने के नए तरीकों के लिए सैन्य विश्लेषकों से नए विचारों की मांग की है। इसे भी पढ़ें: FSSAI का Dabur India पर बड़ा एक्शन! '100% शुद्ध' और 'ऑर्गेनिक' के गुमराह करने वाले दावों पर लगी रोक, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, CENTCOM की खुफिया शाखा के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते एक ईमेल भेजा था जिसमें कर्मचारियों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे दंडित करने के नए, अनोखे और अपरंपरागत तरीकों का प्रस्ताव देने को कहा गया था। क्राउडसोर्सिंग-शैली के इस अनुरोध को अमेरिकी सेना के लिए एक असामान्य कदम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अपने विकल्पों पर फिर से विचार कर रहा है क्योंकि वह ईरान को वाशिंगटन की शर्तों पर समझौते के लिए मजबूर करना चाहता है। मामले से परिचित एक दूसरे सूत्र ने CNN को बताया कि CENTCOM सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा कर रहा है और उसने अपनी मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स ने CNN को दिए एक बयान में कहा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का नए और अनोखे तरीकों से सोचने और काम करने का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने आगे कहा, खासकर एडमिरल कूपर, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के उच्चतम स्तर को हासिल करने के लिए रैंक की परवाह किए बिना हमारी बेहतरीन टीम के सदस्यों से संपर्क करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर फोकस ट्रंप के अनुसार, चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से निपटने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक जलमार्ग सचमुच कल तक फिर से खुल सकता है, जबकि ईरान के परमाणु-मुक्त होने की प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। अमेरिका और ईरान 28 फरवरी से ही संघर्ष में उलझे हुए हैं, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अचानक हमले किए थे। हालांकि बीच-बीच में हुई कूटनीतिक कोशिशों से कुछ समय के लिए शांति रही है, लेकिन टकराव जारी है। ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार है और वह इस इलाके में अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की क्षमता रखता है। होर्मुज में कार्गो जहाज पर हमला एक नई घटना में, ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी, UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने मंगलवार सुबह बताया कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय एक अज्ञात कार्गो जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल (किसी अज्ञात चीज़) से हमला हुआ। एजेंसी ने कहा कि अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जहाज की पहचान या संभावित नुकसान या हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
असम: नाबालिग के साथ रेप और हत्या के मामले में तीन किशोर गिरफ्तार, पीड़ित परिवार ने की फांसी देने की मांग Jagran असम में 'निर्भया' जैसा कांड! 15 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या; चेहरा कुचला, प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली! Hindustan असम में 15 वर्षीय किशोरी से दरिंदगी के बाद हत्या, 5 संदिग्ध हिरासत में ETV Bharat असम में नाबालिग के साथ रेप के बाद बेरहमी से हत्या, तीन किशोर गिरफ्तार, मां ने की आरोपियों को फांसी देने की मांग ndtv.in असम में 15 साल की लड़की की बेरहमी से हत्या, पांच लोग गिरफ्तार bhaskarhindi.com
'पैसा हमारा, फेवर ईरान का ले रहे थे...', जंग में 'चौधरी' बन फिर मजधार में फंसा पाकिस्तान
रिटायर्ड अमेरिकी जनरल जैक कीन ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ये दोनों देश वॉशिंगटन के बजाय तेहरान के पक्ष में झुके हुए हैं. उन्होंने सऊदी अरब पर भी अमेरिका को सख्त सैन्य कार्रवाई से रोकने का आरोप लगाया.
ईरान और अमेरिका में बढ़ा तनाव, मुश्किल में फंसे ट्रंप, तेहरान ओमान की हुई दोस्ती, युद्ध लेगा U-turn?
अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी फिर बढ़ गई है। ईरान ने अमेरिका से बात करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, ट्रंप अपने ही देश में मुश्किलों में फंस गए हैं। ईरान और ओमान की दोस्ती बढ़ी, क्या युद्ध लेगा यू-टर्न?

