जर्मनी: चुनाव से पहले एएफडी ने जारी किया 100 दिन का एक्शन प्लान, शरणार्थियों के लिए कड़े नियम
जर्मनी के सैक्सनी-अनहाल्ट राज्य में होने वाले चुनावों से पहले धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) ने अपना 100 दिन का एक्शन प्लान जारी किया है
जर्मनी: पानी में मस्ती पड़ी भारी, 23 सालों में सबसे जानलेवा रहा जून का महीना
जर्मनी में इस साल जून के महीने में डूबने से 99 लोगों की मौत हुई है. 2003 के बाद किसी एक महीने में जान गंवाने वालों का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है. मरने वालों में युवाओं और पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा है
जर्मनी में गर्मी की वजह से इस साल 5,100 लोगों की मौत
जून के महीने में जर्मनी में पड़ी भारी गर्मी की वजह से करीब 5,100 लोगों की मौत हो गई. आखिर गर्मी का मौसम यूरोपीय देशों को इतना परेशान क्यों कर जाता है
चीन के मिसाइल परीक्षण से अमेरिका के सहयोगी देशों की क्यों बढ़ी चिंता
प्रशांत महासागर क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के सहयोगी देशों ने चीन के उस मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा की है, जिसे बीजिंग ने एक ‘सामान्य’ अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण बताया है
वियतनाम बोट हादसे में मारे गए 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर मुंबई भेजे गए
वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास बोट हादसे में मारे गए 15 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह सिटी से मुंबई के लिए वियतनाम एयरलाइंस की फ्लाइट से रवाना किए गए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने अमेरिका को 'होर्मुज स्ट्रेट का संरक्षक' बताया। साथ ही यहां से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क वसूलने की बात कही।
ईरान-अमेरिका के बीच ताजा हमलों ने खाड़ी देशों की चिंता फिर से बढ़ा दी है। कुवैत ने सोमवार को कहा कि उसकी सेना एयरस्पेस में ईरानी हवाई हमलों का सामना कर रही है। वहीं, बहरीन की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, देश में सायरन बजा दिया गया है और लोगों से सबसे पास की सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की गई है। जॉर्डन ने भी कई ड्रोन को हवा में नष्ट करने का दावा किया।
राष्ट्रपति ट्रम्प के बेहद करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम 11 जुलाई को यूक्रेन दौरे से अमेरिका लौटे, ट्रम्प से फोन पर बात की और सोने चले गए। कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। लिंडसे ईरान और रूस के धुर विरोधी माने जाते थे। भारत को भी निशाने पर रखा और मौत से एक दिन पहले तक 500% टैरिफ लगाने की जिद करते रहे। ग्राहम की मौत पर एक तरफ ईरानी मीडिया जश्न मना रही है, दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं कि कहीं जहर देकर तो नहीं मारा गया। मौत बीमारी से हुई या कोई बड़ी साजिश; इस कंट्रोवर्सी को डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: लिंडसे ग्राहम की मौत की आधिकारिक वजह क्या बताई गई? जवाबः ग्राहम के ऑफिस ने आधिकारिक बयान में सिर्फ इतना बताया कि उनकी मौत ‘बीमारी की वजह’ से हुई। 12 जुलाई को वॉशिंगटन डीसी के मेडिकल एग्जामिनर ऑफिस ने प्रारंभिक ऑटोप्सी के आधार पर बताया- ‘Aortic Dissection due to Arteriosclerotic Cardiovascular Disease’ यानी धमनियों के सख्त होने की बीमारी की वजह से एओर्टा की अंदरूनी परत फट गई। दरअसल, एओर्टा इंसानी शरीर की सबसी बड़ी धमनी है। यह दिल से साफ खून लेकर पूरे शरीर में पहुंचाती है। एओर्टा की सबसे अंदरूनी परत में दरार की वजह से ग्राहम की मौत हुई। हालांकि ग्राहम का डेथ सर्टिफिकेट अभी जारी नहीं हुआ है। जहर से जुड़ी टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही कन्फर्म होगा कि मौत नेचुरल थी या किसी साजिश के तहत जहर दिया गया। 71 साल के ग्राहम यूक्रेन जाने से पहले स्वस्थ दिख रहे थे। उन्हें अगले हफ्ते एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करनी थी। ट्रम्प ने एनबीसी न्यूज से कहा, ‘मौत से कुछ घंटे पहले उनकी ग्राहम से बात हुई थी। ग्राहम की आवाज ठीक लग रही थी। हालांकि वह थोड़े थके हुए लग रहे थे।’ सवाल-2: ग्राहम की मौत से ईरान में जश्न क्यों मनाया जा रहा? जवाबः लिंडसे ग्राहम की मौत को ईरानी मीडिया ने सबसे बड़े दुश्मन की मौत बताया। मेहर न्यूज एजेंसी ने लिखा- ‘ग्राहम ईरान को तबाह करने का अपना सपना कब्र तक ले गए।' सरकारी न्यूज़ चैनल IRINN ने तो ग्राहम की मौत पर ईरानी जनता को बधाई तक दे दी। ग्राहम का रवैया हमेशा इजराइल समर्थक और धुर ईरान विरोधी रहा है… अमेरिकी लेखक रब्बी शमूएल ने लिखा है, ‘5 दिन पहले ईरान ने अमेरिका के महान सीनेटर को मारने की धमकी दी थी। अब उनकी मृत्यु हो गई, वो भी यूक्रेन से लौटने के अगले ही दिन।’ अमेरिकी दक्षिणपंथी पत्रकार लौरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, ‘IRGC ने उन्हें मारने की धमकी दी थी। खामेनेई के अंतिम संस्कार में धमकी भरे पोस्टर लहराए जा रहे थे। रूस भी इस अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था। वो ईरान को परमाणु हथियार देने की बात कर रहा था। अब यूक्रेन से लौटने के बाद ग्राहम की मौत हो गई। यह सब महज एक संयोग तो नहीं लगता।' सवाल 3: तो क्या ग्राहम की मौत के पीछे रूस की साजिश है? जवाबः अभी तक किसी बड़ी एजेंसी या अधिकारी ने रूसी साजिश की बात नहीं की। सबकुछ कयासों में चल रहा है… रूसी सोशियोलॉजिस्ट इगोर ईदमन के मुताबिक, ग्राहम की मौत में रूस खुफिया एजेंसियों का हाथ हो सकता है। रूस के पास उन्हें मारने का कारण भी था। ईदमन ने बेलारूस के मीडिया आउटलेट NEXTA को बताया, ‘ग्राहम यूक्रेन के सबसे बड़े समर्थक थे। उन्होंने 10 जुलाई को कीव में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए मना लिया है। यूक्रेन से लौटकर ग्राहम की मौत होना सबसे बड़ा संकेत देती है कि इसमें रूस का हाथ हो सकता है।’ ग्राहम अमेरिका से प्लेन के जरिए पोलैंड पहुंचे। वहां से 10-12 घंटे की ट्रेन यात्रा करके यूक्रेन की राजधानी कीव गए। इसी रास्ते से वापस भी लौटे। ईदमन के मुताबिक, इसी दौरान किसी खुफिया रूसी एजेंट को जहर देने का मौका मिल गया होगा। पूर्व CIA अधिकार माइकल सेलर्स के मुताबिक, ‘ग्राहम की हत्या के अभी कोई सबूत नहीं दिख रहे हैं। लेकिन जिन स्थितियों में उनकी मौत हुई है, उस हिसाब से इस एंगल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस दिशा में भी जांच होनी चाहिए।’ रूस का खुलकर विरोध करते थे ग्राहम, निशाने पर थे… सवाल-4: लिंडसे ग्राहम के निशाने पर भारत कैसे आ गया था? जवाबः लिंडसे ग्राहम ने अपने करियर में कई मौकों पर भारत को निशाना बनाया है। रूस-यूक्रेन जंग के बाद यह और बढ़ गया… ग्राहम ने भारत को रूस या अमेरिका में से किसी एक को चुनने का विकल्प भी दिया था। साथ ही कहा था, ‘मुझे विश्वास है कि वो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चुनेंगे।' इसके बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी तेल खरीदने के चलते भारत पर 25% पेनल्टी टैरिफ लगा दिया था। इससे भारत पर लगने वाला कुल टैरिफ बढ़कर 50% तक हो गया था। अगस्त 2025 में ग्रहाम ने फिर दावा किया कि भारत ने टैरिफ के दबाव के चलते रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। भारत पर दबाव की वजह से पुतिन जंग में समझौते के लिए तैयार हो गए हैं। सवाल-5: ग्राहम की मौत ट्रम्प के लिए कितना बड़ा झटका है, असर क्या होगा? जवाबः ग्राहम ट्रम्प के बेहद करीबी सलाहकारों में से एक थे, खासकर विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर। मिडिल ईस्ट में उनकी खासी दिलचस्पी थी। ग्राहम को श्रद्धांजलि देते हुए ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, 'वो हमेशा काम करते रहते थे। वो सच्चे अमेरिकी राष्ट्रभक्त थे। उन्हें बहुत याद किया जाएगा। उनकी अचानक मौत मौजूदा हालातों में कई चुनौतियां पैदा करती हैं।’ ग्राहम का अचानक निधन ट्रम्प के लिए 3 वजहों से बड़ा झटका है… 1. चुनाव के लिए महीने भर में नया उम्मीदवार चुनना होगा: नवंबर 2025 में अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन होने हैं। इसमें ग्राहमी 5वीं बार साउथ कैरोलिना सीट से चुनाव लड़ने वाले थे। उनकी मौत के बाद अब 11 अगस्त तक रिपब्लिकन पार्टी को नए उम्मीदवार का चुनाव करना होगा। कई नेता अपनी दावेदारी पेश भी करने लगे हैं। यह सीट रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्राहम के अलावा जो भी इस सीट से चुनाव लड़ेगा, उसे हराना मुश्किल होगा। हालांकि लंबे समय बाद कोई नया कैंडिडेट डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मौका भी हो सकता है। 2. लोगों को ट्रम्प के पक्ष में करने वाला हुनरमंद साथी खोया: ट्रम्प ने खुद एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया कि ग्राहम कोई भी चीज अप्रूव करवा सकते थे। उन्हें लोगों से अपनी बात मनवानी आती थी। अगर मुझे डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों से भी कोई समस्या होती थी, तो वो उनसे बात कर सुलझा लेते थे। 3. सीनेट में रिपब्लिकन की बढ़त कम हुई: 100 सीटों वाली अमेरिकी सीनेट में अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 और डेमोक्रेटिक के पास 47 सीटें थीं। ग्राहम की मौत से एक सीट कम हो गई। वहीं एक अन्य सीनेटर मिच मैककोनेल अस्पताल में भर्ती हैं और सदन में उपलब्ध नहीं रहेंगे। ऐसे में पहली बार ट्रम्प के पास सदन में 4 वोटों से कम की मार्जिन होगी। क्रॉस वोटिंग होने से ट्रम्प को जरूरी बिल पास कराने में मुश्किल होगी। --------- ये खबर भी पढ़िए… टीम इंडिया वर्ल्ड चैम्पियन से ‘लूजर’ कैसे बनी; 76 रन पर ऑलआउट, आयरलैंड से सीरीज हारी, आखिर जीत का फॉर्मूला क्यों बदला इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में टीम इंडिया 125 रन से हार गई। टी-20 में ये भारत की सबसे बड़ी हार है। पिछले महीने आयरलैंड भी भारत को 2-0 से सीरीज हरा चुकी है। मार्च में टी-20 वर्ल्ड चैम्पियन बनने के बाद टीम इंडिया ने 5 मैच खेले, कोई नहीं जीता। पूरी खबर पढ़िए…
होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर भड़का युद्ध! अमेरिका-ईरान के बीच सीधी भिड़ंत से खाड़ी देशों में खलबली
दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर एक बार फिर तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर फिर से हवाई हमले किए हैं, जिससे मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब खाड़ी देशों की सीमाओं तक पहुंच गया है। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और भू-राजनीतिक सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, अब सीधे तौर पर युद्ध क्षेत्र में बदलता नजर आ रहा है।क्यों बढ़ रहा है होर्मुज पर तनाव?ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहा शीतयुद्ध अब खुले संघर्ष में बदल चुका है। ताजा हमलों के पीछे अमेरिकी सेना का तर्क है कि ईरान समर्थित गुटों ने अमेरिकी संपत्ति और नौसैनिक बेड़ों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। वहीं, तेहरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार देते हुए कड़े जवाब की चेतावनी दी है। यह पूरा क्षेत्र न केवल तेल के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्लोबल सप्लाई चेन की 'धमनी' माना जाता है। किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।खाड़ी देशों के लिए कितना बड़ा खतरा?यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देश इस बढ़ते तनाव को लेकर सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। यदि युद्ध और अधिक फैलता है, तो इन देशों के समुद्री व्यापारिक मार्ग पूरी तरह से ठप हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर रूस-यूक्रेन युद्ध से भी कहीं ज्यादा घातक होगा। खाड़ी देशों ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा को हाई-अलर्ट पर रखा है और वे लगातार अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के संपर्क में हैं ताकि संघर्ष को फैलने से रोका जा सके।क्या वैश्विक बाजारों में आएगी तेजी?बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच इस सीधी भिड़ंत का असर सीधे तौर पर क्रूड ऑयल के दामों पर दिखेगा। अगले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। निवेशकों और आम नागरिकों के लिए आने वाला समय अनिश्चितताओं से भरा हो सकता है, क्योंकि युद्ध की यह आंच अब सीधे खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच चुकी है, जिसका असर हम सभी की जेब पर पड़ेगा।
बैंकॉक के पब में लगी भीषण आग; अब तक 27 लोगों की मौत, कई घायल
थाईलैंड के बैंकॉक के चतुचक जिले में लाट फ्राओ रोड के पास एक पब में आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हो गए। थाईलैंड मीडिया ने बताया कि आग स्थानीय समयानुसार रविवार रात करीब 11:57 बजे लगी और बाद में बुझा दी गई।
मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान, लेबनान और गाजा के साथ साल भर से भीषण युद्ध में उलझे इजरायल से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है. इजरायल में आगामी आम संसदीय चुनावों (General Elections) की तारीखों का आधिकारिक एलान कर दिया गया है. चुनावी तारीख की घोषणा होते ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के करीब 4 दशक लंबे राजनीतिक करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा की घड़ी आ गई है. युद्ध के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच चुनावी बिगुल बजते ही पूरे इजरायल में सियासी सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं.रविवार देर शाम आई इजरायली मीडिया (Israeli Media Reports) की आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वर्तमान सरकार का चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर आगामी 27 अक्टूबर 2026 को देश में आम चुनाव कराए जाएंगे.38 साल बाद इतिहास दोहराएगा इजरायल'टाइम्स ऑफ इजरायल' की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के वरिष्ठ नेता ओफिर काट्ज ने स्पष्ट किया कि इजरायली कानून के अनुसार निर्धारित तारीख पर ही अगले चुनाव संपन्न होंगे. इजरायल की मौजूदा संसद यानी 'नेसेट' (Knesset) 17 जुलाई 2026 को अपना चार साल का कार्यकाल पूरा कर रही है. कार्यकाल पूरा होते ही संसद चुनावी ब्रेक पर चली जाएगी और 7 सितंबर तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची फाइनल कर ली जाएगी.यह चुनाव बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि बीते 38 सालों के इजरायली इतिहास में यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय चुनाव किसी समय पूर्व विघटन के बजाय अपने निर्धारित समय पर (On Schedule) हो रहे हैं. आखिरी बार साल 1988 में तय समय पर चुनाव हुए थे. इसके साथ ही, नेतन्याहू के नेतृत्व वाली यह दक्षिणपंथी सरकार पिछले 50 वर्षों में पूरे चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाली इजरायल की पहली सरकार बन जाएगी.सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम की सबसे कठिन परीक्षाबेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं. वे अब तक रिकॉर्ड 6 बार देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं, जिसमें उनका पहला कार्यकाल 1996 में शुरू हुआ था और छठा कार्यकाल दिसंबर 2022 से अब तक जारी है. हालांकि, इस बार राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके जीवन का सबसे कठिन चुनाव मान रहे हैं.इजरायली जनता इस बार वोट डालते समय 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए औचक हमले, इंटेलिजेंस व सुरक्षा विफलता (Security Failure), गाजा-लेबनान युद्ध के तौर-तरीकों, ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव और अमेरिका के साथ बिगड़े कूटनीतिक संबंधों के आधार पर नेतन्याहू सरकार का मूल्यांकन करेगी. हालांकि, नेतन्याहू अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के खात्मे और ईरानी सैन्य तंत्र को कमजोर करने को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक जीत बताकर राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव प्रचार को धार दे रहे हैं.क्या कह रहे हैं इजरायल के चुनावी सर्वे? (Opinion Polls)इजरायल के प्रमुख मीडिया हाउस 'चैनल 12' के ताजा पोल (Pre-Poll Survey) के मुताबिक, इस बार के महा-मुकाबले में भी किसी भी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. वर्तमान में नेतन्याहू की 'लिकुड पार्टी' (Likud Party) और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट की विपक्षी 'याशर पार्टी' (Yashar Party) दोनों 23-23 सीटों के साथ सबसे बड़े राजनीतिक दलों के रूप में उभर रहे हैं.वहीं 'चैनल 13' के एक अन्य ओपिनियन पोल में आइजनकोट की पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनते दिखाया गया है. कुल मिलाकर, इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (Knesset) में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का जादुई आंकड़ा किसी भी गठबंधन को आसानी से मिलता नहीं दिख रहा है, जिससे इजरायल में एक बार फिर 'हंग पार्लियामेंट' (त्रिशंकु संसद) बनने के आसार मजबूत हो गए हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य में गोलीबारी, ईरान-अमेरिका आमने-सामने
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी की है
भारतीय-अमेरिकी कांग्रेसमैन रो खन्ना ने आरोप लगाया है कि वेस्ट बैंक में हथियारबंद इजरायली लोगो और इजरायली सैनिकों ने उन्हें और उनके साथ गए दूसरे अमेरिकी नागरिकों को कुछ समय के लिए रोककर रखा। उन्होंने इस घटना की जांच की मांग की है।
जिनेवा में 1971 बांग्लादेश हिंसा का उठा मुद्दा, धार्मिक उत्पीड़न को मान्यता देने की मांग
हाल ही में जिनेवा में यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल के 62वें सत्र के दौरान, ह्यूमन राइट्स विदाउट फ्रंटियर्स ने 1971 में बांग्लादेश में हुई बड़ी संख्या में हत्याओं और अत्याचारों को 'नरसंहार' के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नेपाल के हालिया राजनीतिक इतिहास में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। 'जेन-जी' (Gen-Z) यानी युवा पीढ़ी के ऐतिहासिक आक्रोश और अभूतपूर्व जन-आंदोलन की लहर पर सवार होकर सत्ता के शिखर तक पहुंचे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह को अब उसी युवा शक्ति के भीषण विरोध का सामना करना पड़ रहा है। काठमांडू घाटी में बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास योजना के भूमिहीन झुग्गीवासियों को उनके आशियाने से जबरन बेदखल करने के सरकारी फैसले के खिलाफ सैकड़ों युवाओं और नागरिकों ने रविवार को राजधानी की सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।मैतीघर मंडला में गूंजे सरकार विरोधी नारे: सिंहदरबार सचिवालय के सामने प्रदर्शनसंयुक्त राष्ट्रीय भूमिहीन मोर्चा के रणनीतिक आह्वान पर आयोजित यह विशाल विरोध प्रदर्शन काठमांडू में सिंहदरबार सचिवालय के ठीक सामने स्थित ऐतिहासिक मैतीघर मंडला में हुआ। प्रदर्शनकारी युवाओं के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर 'गरीबों पर अत्याचार बंद करो', 'मानवाधिकारों का सम्मान करो', 'अवैध गिरफ्तारियां बंद करो' और 'भूमिहीन झुग्गीवासियों को तुरंत आश्रय दो' जैसे तीखे नारे लिखे हुए थे। यह जन-आक्रोश तब और भड़क गया जब काठमांडू के कीर्तिपुर स्थित एक अस्थायी सरकारी आवास केंद्र में शुक्रवार रात आई भीषण बाढ़ का पानी घुस गया, जिससे वहां शरण लिए हुए करीब 150 भूमिहीन नागरिकों का जीवन संकट में पड़ गया।युवा कार्यकर्ताओं पर बर्बर लाठीचार्ज: नेपाली कांग्रेस ने पुलिसिया कार्रवाई की निंदा कीबाढ़ प्रभावित क्षेत्र की जमीनी हकीकत और पीड़ितों का हाल जानने के लिए जब शनिवार को 'जेन-जी' आंदोलन से जुड़े युवा सामाजिक कार्यकर्ता कीर्तिपुर पहुंचे, तो पुलिस प्रशासन ने उनके साथ बेहद सख्त रवैया अपनाया। पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे युवाओं पर अचानक लाठीचार्ज कर दिया और कई कार्यकर्ताओं को जबरन गिरफ्तार कर लिया। इस झड़प में एक युवा कार्यकर्ता के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जिसे तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने इस पुलिसिया दमन की कड़े शब्दों में आलोचना की है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताते हुए गिरफ्तार किए गए सभी युवाओं को तुरंत बिना शर्त रिहा करने की पुरजोर मांग की है।15,000 से अधिक लोग बेघर: कोशी प्रांत में भी भड़की आंदोलन की चिंगारीनेपाल में भूमिहीनों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का यह सिलसिला नया नहीं है। इससे पहले सरकार ने काठमांडू घाटी सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बुलडोजर चलाकर करीब 2,600 परिवारों के 15,000 से अधिक लोगों को बेदखल कर दिया था। इनमें से कई परिवार अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे थे, जिन्हें खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया था। इस कार्रवाई के विरोध की चिंगारी अब काठमांडू से निकलकर कोशी प्रांत तक फैल गई है। मोरांग जिला पुलिस कार्यालय के मुख्य द्वार पर युवा कार्यकर्ताओं के साथ हुए दुर्व्यवहार के खिलाफ धरना दे रहे 26 अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने रविवार को हिरासत में ले लिया, जिससे बालेन सरकार के खिलाफ गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।क्या था नेपाल का ऐतिहासिक जेन-जी प्रोटेस्ट? जिसने बदली थी सत्ता की तकदीरनेपाल में जारी यह वर्तमान संकट उस दौर की याद दिलाता है जब देश में सबसे बड़ा युवा आंदोलन शुरू हुआ था। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तत्कालीन सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा था। उस जन-आंदोलन के भारी दबाव के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उस पूरे आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी छवि और सोशल मीडिया पर अपनी धाक जमाने वाले पूर्व मेयर बालेंद्र शाह (बालेन शाह) युवाओं के सबसे बड़े आइकन बनकर उभरे। मार्च 2026 के आम चुनाव में उनकी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और 27 मार्च 2026 को बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। लेकिन सत्ता संभालने के कुछ ही महीनों के भीतर, वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना झुग्गियों को हटाने के उनके मानवीय दृष्टिकोण से परे फैसले ने उन्हीं समर्थकों को उनका धुर विरोधी बना दिया है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भीषण सैन्य संघर्ष एक बार फिर विनाशकारी स्तर पर पहुंच गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका की वायुसेना और नौसेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण केशम द्वीप (Qeshm Island) को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हमला बोल दिया है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस जलमार्ग से जहाजों के आवागमन को 'असंभव' घोषित कर दिया है, जबकि अमेरिकी सैन्य कमान ने इस दावे को खारिज करते हुए वैश्विक नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की हुंकार भरी है।केशम द्वीप पर एक दर्जन मिसाइलें दागीं: अमेरिकी सेंट्रल कमान ने 140 ईरानी ठिकानों को बनाया निशानाईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' (IRNA) ने द्वीप के स्थानीय गवर्नर के हवाले से पुष्टि की है कि रविवार दोपहर से अब तक अमेरिकी लड़ाकू विमानों द्वारा लगभग एक दर्जन मिसाइलें दागी गई हैं। फारस की खाड़ी के इस सबसे बड़े द्वीप, जहां लगभग 1,50,000 की आबादी निवास करती है, वहां हुए हमलों में एक नागरिक की मौत और दो अन्य के घायल होने की प्रारंभिक सूचना है। अमेरिकी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान द्वारा एक वाणिज्यिक पोत (Commercial Vessel) पर किए गए हमले के जवाब में की गई है, जिसके तहत आईआरजीसी (IRGC) की मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस सिस्टम और छोटी स्पीड बोट्स सहित लगभग 140 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया है।ईरान का ऐलान—'यातायात फिलहाल असंभव': पीजीएसए ने अमेरिकी गतिविधियों को ठहराया जिम्मेदारहोर्मुज जलडमरूमध्य के नए ट्रैफिक नियमों की निगरानी करने वाले ईरानी प्राधिकरण 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) ने वैश्विक जहाजों की आवाजाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। पीजीएसए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की हालिया गैर-कानूनी और आक्रामक गतिविधियों के कारण होर्मुज में जहाजों का सुरक्षित आवागमन फिलहाल संभव नहीं है। ईरानी अथॉरिटी ने साफ किया है कि जब तक इस समुद्री क्षेत्र में पूर्ण स्थिरता और शांति बहाल नहीं हो जाती, तब तक जहाजों के प्रवेश पर पाबंदी लागू रहेगी।अमेरिका का पलटवार—'अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह खुला है': सेंटकॉम ने तैनात की नेवीईरानी प्रतिबंधों के विपरीत, अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने एक बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया गया है। सेंटकॉम ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से कानूनी रूप से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है। ईरानी आक्रामकता, उत्पीड़न और मनमाने बयानों के बावजूद नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत मुस्तैदी से तैनात हैं। अमेरिकी नेवी की देख-रेख वाले 'जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर' (JMIC) ने भी ओमान वाले दक्षिणी रास्ते के खुले होने की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने इस रूट पर अत्यधिक जोखिम होने की चेतावनी जारी की है।मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता: वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग बाजारों में हड़कंपदोनों महाशक्तियों के परस्पर विरोधी दावों के बीच, वास्तविक समय में समुद्री जहाजों की ट्रैकिंग करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी 'मरीन ट्रैफिक' (Marine Traffic) के लाइव सैटेलाइट डेटा ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। ईरान के आधिकारिक ऐलान के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले विशालकाय तेल टैंकरों और कार्गो जहाजों की संख्या में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है। चूंकि दुनिया के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की वैश्विक आपूर्ति का एक-तिहाई हिस्सा इसी सकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए इस ताजा सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-अमेरिका आमने-सामने
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर ईरान-अमेरिका ने परस्पर विरोधी दावे किये हैं, जिससे इसके खुलने को लेकर असमंजस की स्थिति बन गयी है
सीनेटर लिंडसे ग्राहम के निधन पर ट्रंप ने जताया दुख, बोले- परिवार के सदस्य जैसे थे
अमेरिका के सीनेटर लिंडसे ग्राहम, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। शनिवार की शाम को उनका निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। ट्रंप ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। ग्राहम के दफ्तर के मुताबिक, वह कुछ ही घंटे पहले यूक्रेन से लौटे थे।
बांग्लादेश में खसरे का कहर, 758 मौतों के बीच डेंगू का बढ़ा खतरा
बांग्लादेश में पिछले 24 घंटों के दौरान रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक खसरे जैसे लक्षणों से पांच और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही देश में खसरे से जुड़ी पक्की और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 758 हो गई है।
सिर्फ एक साल में 130 से 1300% तक रिटर्न। 8 से 10 रुपए का शेयर कुछ ही महीनों में 100 रुपए के पार पहुंच गया। दैनिक भास्कर की टीम ने शेयर बाजार में लिस्टेड और भरपूर मुनाफा देने वाली गुजरात की ऐसी 6 कंपनियों की पहचान की और उनके रजिस्टर्ड पते पर पहुंची। वहां जो मिला, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। जिन कंपनियों के शेयर रॉकेट की तरह भाग रहे थे, कहीं उनके बंद ऑफिस मिले, कहीं वीरान प्लॉट और कहीं फोटोकॉपी की दुकान। इन सभी कंपनियों के रजिस्टर्ड ऑफिस और कुछ के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट गुजरात में ही हैं। बाजार की भाषा में जिन शेयरों को पेनी स्टॉक कहा जाता है, उनमें संदिग्ध तरीके से भारी उतार-चढ़ाव दिखा। इन कंपनियों में प्रमोटर होल्डिंग में भी चौंकाने वाले बदलाव दिखे हैं। स्टॉक मार्केट के डेटा का एनालिसिस करने वाली वेबसाइट Screeners से मिले आंकड़ों को देखने के बाद कई सवाल खड़े हुए। इस इन्वेस्टिगेशन में जो पता चला, वह शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले छोटे-बड़े निवेशकों के लिए जानना और समझना जरूरी है। हो सकता है कि इन कंपनियों के शेयर आपके पोर्टफोलियो में भी हों। ऐसा होने पर आपकी कमाई जोखिम में पड़ सकती है। 1. सप्तक केमिकल: ऑफिस की जगह फोटोकॉपी की दुकान एक साल में निवेशकों का पैसा 1300 गुना करने वाली कंपनी सप्तक केमिकल का रजिस्टर्ड ऑफिस आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, तीर्थस्थान डाकोर के मोहन चेंबर कॉम्प्लेक्स में है। कागजों पर यह केमिकल कंपनी है, लेकिन मोहन चेंबर की दुकान नंबर-3 पर पहुंचते ही हैरानी हुई। वहां न कोई कॉर्पोरेट ऑफिस था और न ही फैक्ट्री। वहां 'चामुंडा जेरॉक्स' नाम की एक दुकान थी, जो बंद मिली। बोर्ड पर लिखे नंबर के आधार पर दुकान के मालिक जिग्नेश भावसार से संपर्क किया गया। वे मौके पर पहुंचे और सप्तक केमिकल्स के बारे में जो जानकारी दी, उसने एक अलग तस्वीर सामने रख दी। जिग्नेशभाई ने बताया, ‘वे लोग कभी यहां आते नहीं थे। करीब 5 साल बाद बार-बार सरकारी जांच होने लगी, तो मैंने जगह देने से मना कर दिया। इसके बाद किराया भी बंद हो गया। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में आज भी यही पता दर्ज है। करीब छह महीने पहले दिल्ली से भी अधिकारी जांच के लिए आए थे।’ सवाल यह है कि जिस कंपनी के ऑफिस की जगह 88 फीट की फोटोकॉपी की दुकान हो, जहां कोई कर्मचारी नहीं हो, कोई कारोबार नहीं हो, वह कंपनी एक साल में 1300% का रिटर्न कैसे दे सकती है? आखिर एक केमिकल कंपनी का ऐसा कौन-सा बिजनेस मॉडल है। इतना ही नहीं, पिछले एक साल में कंपनी के प्रमोटरों ने भी अपने हिस्से के शेयर बेचना शुरू कर दिया है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर करीब 12.5% रह गई है। बाकी हिस्सेदारी आम शेयरधारकों के पास है। यह तो सिर्फ शुरुआत थी। हमारी टीम जैसे-जैसे गुजरात के अलग-अलग जिलों में दूसरी कंपनियों के ऑफिस और प्लांट के पते पर पहुंची, नए खुलासे होते गए। हमारी लिस्ट में अगली कंपनी थी उमिया ट्यूब्स। 2. उमिया ट्यूब्स: ट्यूब बनाने वाली कंपनी के पते पर जंगल कंपनी के रजिस्टर्ड प्लांट का पता साबरकांठा जिले के तलोद के पास तोरणिया गांव का था। उम्मीद थी कि यहां ट्यूब बनाने का बड़ा प्लांट होगा, जहां भारी मशीनरी भी देखने को मिलेगी। मौके पर पहुंचने के बाद लगा जैसे रास्ता ही गलत आ गए हों। वहां कोई फैक्ट्री नहीं थी। आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि जिस वीरान जमीन पर कांटेदार झाड़ियां और बबूल उगे हुए थे, इसी जमीन पर कागजों में उमिया ट्यूब्स का प्लांट दर्ज है। यहां से हमारी टीम कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पहुंची। गांधीनगर के सेक्टर-11 में बने ऑफिस के बाहर कंपनी का छोटा सा बोर्ड लगा था, लेकिन शटर पर ताला मिला। ऑफिस का बड़ा हिस्सा पार्टीशन करके किसी और को ऑफिस के लिए किराए पर दिया गया था। प्रमोटरों ने तीन साल में 46% शेयर बेचे पास के ऑफिस में मौजूद एक शख्स से इस बारे में सवाल किया। उसने कहा कि ऑफिस और प्लांट कहीं और शिफ्ट हो गए हैं, लेकिन डॉक्युमेंट अब भी यहीं आते हैं। अब इस कंपनी के शेयर में आए संदिग्ध बदलाव को नीचे दिए गए ग्राफिक्स के जरिए समझिए। फिलहाल उमिया ट्यूब्स में प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर करीब 4% रह गई है, जबकि लगभग 96% शेयर आम निवेशकों के पास हैं। सितंबर 2023 में प्रमोटरों की हिस्सेदारी करीब 50% थी। ऐसे में ढाई साल के भीतर इतना बड़ा बदलाव आखिर क्यों आया? जब प्लांट और रजिस्टर्ड ऑफिस के नाम पर कुछ भी नहीं मिला, तो यह कंपनी शेयर बाजार में करीब 175% का रिटर्न कैसे दे रही है, यह एक गंभीर सवाल है। 3. संगीनीता केमिकल्स: सिक्योरिटी गार्ड ने बताया, प्लांट तीन महीने से बंद संगीनीता केमिकल्स का प्लांट गांधीनगर जिले के छत्राल GIDC फेज-4 में है। वहां पहुंचने पर पिछली दो कंपनियों की तरह ही मेन गेट पर ताला लटका मिला। पास ही एक दुकान थी। कंपनी के बारे में पूछने पर दुकानदार ने बताया कि कंपनी कुछ समय पहले ही बंद हो चुकी है। कैंपस के अंदर सिर्फ एक सिक्योरिटी गार्ड था। उसने भी कहा कि कंपनी का प्लांट पिछले तीन महीनों से बंद है। यहां कोई कामकाज नहीं हो रहा। ऑफिस में 4-5 कर्मचारी, अधिकारी बोले- 10 दिन बाद आना इसके बाद टीम गांधीनगर के सेक्टर-11 में कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पहुंची। वहां चार-पांच कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन मुख्य चेंबर खाली था। कर्मचारियों ने कंपनी के कामकाज से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। स्टाफ ने हमारी बात अपने एक सीनियर अधिकारी से फोन पर कराई। हमने कंपनी की मौजूदा स्थिति के बारे में सवाल किए। फोन पर बात करने वाले अधिकारी ने कहा, ‘फिलहाल इस पर बात नहीं कर सकता। आप 10 दिन बाद आइए।’ इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने उस अधिकारी का नंबर भी नहीं दिया। ध्यान देने वाली बात यह है कि छत्राल में संगीनीता केमिकल्स का प्लांट बंद है। कंपनी की तिमाही बिक्री में 29.36% की गिरावट दर्ज हुई है, इसके बावजूद शेयर बाजार में इसका शेयर लगातार ऊपर जा रहा है। वहीं प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी घटकर सिर्फ 25% रह गई है। पहले यह करीब 60% थी। 4. AVI पॉलिमर्स: दरवाजे पर ताला और मकड़ी के जाले कागजों में AVI पॉलिमर्स का ऑफिस अहमदाबाद के पॉश इलाके वस्त्रापुर के नालंदा कॉम्प्लेक्स में दर्ज है। हमारी टीम वहां पहुंची तो ऑफिस के गेट पर मकड़ी के जाले लगे थे। पहली नजर में ही ऐसा लगा कि यह ऑफिस कई साल से नहीं खुला है। दरवाजे पर एक पर्ची लगी थी, जिस पर लिखा था कि यहां आने वाले सभी दस्तावेज ऑफिस नंबर-96 में जमा कराएं। इसके बाद हमारी टीम ऑफिस नंबर-96 पहुंची। वहां मौजूद स्टाफ ने हमें ग्राहक समझते हुए पूछा, ‘क्या आप ऑफिस किराये पर लेने आए हैं।’ हमने कंपनी के बारे में पूछा तो उन्होंने मालिक का मोबाइल नंबर दिया। मालिक से बात हुई तो उन्होंने कंपनी के बारे में चौंकाने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘यह कंपनी तो काफी समय पहले बंद हो चुकी है।’ कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी सिर्फ 1% के आसपास रह गई है, यानी मालिक लगभग पूरी तरह कंपनी से बाहर निकल चुके हैं। इसके बावजूद रिकॉर्ड में कंपनी का तिमाही लाभ (प्रॉफिट वैरिएशन) 1283.78% दर्शाया गया है और शेयर ने 143.45% का रिटर्न दिया है। 5. केस्टोरा एग्री: एक ही पते पर दो-दो कंपनियां अहमदाबाद के नवरंगपुरा स्थित निर्माण कॉम्प्लेक्स में केस्टोरा एग्री कमोडिटीज का ऑफिस होने का जिक्र आधिकारिक दस्तावेजों में है। हमारी टीम वहां पहुंची तो ऑफिस के बाहर लगे बोर्ड पर केस्टोरा एग्री के साथ बड़े अक्षरों में हरिगोपाल स्टील एंड मेटल प्राइवेट लिमिटेड का भी नाम लिखा मिला। ऑफिस पर ताला भी लगा हुआ था। आसपास के लोगों ने बताया कि यह ऑफिस रेगुलर कभी खुलता ही नहीं। एग्री कमोडिटीज के नाम से चल रही इस कंपनी की तिमाही बिक्री (क्वार्टर सेल्स वैरिएशन) शून्य है, यानी कोई नया कारोबार नहीं हो रहा। इसके बावजूद शेयर बाजार में इसका शेयर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। केस्टोरा एग्री के शेयरों से प्रमोटरों ने भी बनाई दूर सितंबर 2023 में केस्टोरा एग्री कमोडिटीज लिमिटेड में पब्लिक शेयरहोल्डिंग करीब 73% और प्रमोटर होल्डिंग लगभग 26% थी। मार्च 2026 तक स्थिति पूरी तरह बदल गई। प्रमोटरों ने ज्यादातर हिस्सेदारी बेच दी और उनके पास सिर्फ 5% शेयर बचे। वहीं 94% से ज्यादा हिस्सेदारी आम शेयरधारकों के पास पहुंच गई। 6. गुरुकृपा जेम्स: लिस्ट में सिर्फ एक कंपनी, जहां कामकाज सामान्य मिला इस लिस्ट में सिर्फ गुरुकृपा जेम्स ऐसी कंपनी थी, जिसका अहमदाबाद के आश्रम रोड स्थित चार मंजिला ऑफिस चलता हुआ मिला। वहां कर्मचारी काम करते हुए दिखाई दिए। ग्राउंड रियलिटी में सब कुछ सामान्य लगा। हालांकि वहां से जानकारी मिली कि कंपनी का नाम बदलकर अब भक्ति ज्वेल्स कर दिया गया है। इसके बावजूद शेयर बाजार में कंपनी का नाम गुरुकृपा जेम्स ही है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि सितंबर 2023 में कंपनी में प्रमोटर होल्डिंग करीब 40% थी, जो अब घटकर 9.76% रह गई है। वहीं तिमाही मुनाफे में 84.66% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद कंपनी के शेयर ने एक वर्ष में 209.32% का रिटर्न दिया है। अब निवेशकों को क्या समझना चाहिए… शेयर बाजार की सामान्य धारणा है कि जिस कंपनी के भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद होती है, उसके प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर रखते हैं। यहां जिन छह कंपनियों की जांच की गई, उनमें लगातार प्रमोटर होल्डिंग घटती दिखाई दे रही है। AVI पॉलिमर्स में तो यह घटकर केवल 1.11% रह गई है। इसका सीधा अर्थ यही है कि प्रमोटरों ने अपने ज्यादातर शेयर या तो आम निवेशकों को बेच दिए हैं या फिर ऑपरेटरों के पास पहुंच गए हैं। मुनाफा और शेयर की चाल, दोनों में मेल नहीं सप्तक केमिकल का मुनाफा आधा रह गया। केस्टोरा एग्री का मुनाफा 84.72% घट गया। इसके बावजूद इन कंपनियों के शेयरों के भाव लगातार ऊंचाई पर बने हुए हैं। यह सामान्य बाजार सिद्धांत के बिल्कुल उलट स्थिति है। इतना ही नहीं, ये सभी माइक्रो-कैप कंपनियां हैं। ऐसी छोटी कंपनियों में ऑपरेटरों के लिए शेयर की कीमतों को मनचाहे तरीके से ऊपर या नीचे ले जाना आसान माना जाता है। इस इन्वेस्टिगेशन से यह स्पष्ट होता है कि ग्राउंड लेवल पर इन कंपनियों की ओर से किसी बड़े प्रोडक्शन या सक्रिय कारोबारी गतिविधि के पर्याप्त संकेत नहीं मिले। सामान्य निवेशक 100% से ज्यादा रिटर्न देखकर लालच में आकर इन शेयरों की खरीदारी करते हैं, तब कुछ ‘समझदार लोग’ ऊंचे भाव पर अपने शेयर बेचकर मुनाफा वसूल लेते हैं। बाजार की भाषा में इसे डंपिंग कहा जाता है। इसके बाद यदि शेयर में लगातार लोअर सर्किट लगने लगें तो आम निवेशकों की पूंजी फंस सकती है। ऐसी स्थिति में शेयर बेचने के लिए खरीदार तक नहीं मिलते और निवेशकों का पैसा लंबे समय तक अटकने या डूबने का जोखिम बना रहता है। दैनिक भास्कर ने 29 जून 2026 को इन सभी छह कंपनियों को ई-मेल भेजकर उनके शेयरों में दिखाई दे रहे असामान्य रुझान पर आधिकारिक जवाब मांगा था। 10 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद किसी भी कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। हमने शेयर बाजार की गतिविधियों पर निगरानी रखने वाली संस्था SEBI को भी आधिकारिक ई-मेल आईडी पर इन कंपनियों के शेयरों में दर्ज असामान्य तेजी के बारे में जानकारी भेजी गई और पूछा गया कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जा सकती है। SEBI की ओर से ऑटो-जनरेटेड जवाब मिला, जिसमें कहा गया कि इस तरह की शिकायत संबंधित कंपनी के शेयरधारक ही दर्ज करा सकते हैं।
24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला किया। दुनियाभर के मिलिट्री एक्सपर्ट्स बोले- रूस 24 घंटे के भीतर यूक्रेन को घुटनों पर ला देगा। लेकिन 4 साल, 4 महीने और 18 दिन की जंग के बाद रूस खुद बेहाल दिख रहा है। राष्ट्रपति पुतिन ने जंग के दौरान पहली बार माना कि देश मुश्किल में है। क्या छोटा-सा यूक्रेन वाकई सुपरपावर रूस को हरा देगा; मंडे मेगा स्टोरी में 4 चैप्टर्स में पूरी कहानी… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और विपुल शर्मा ------- ये खबर भी पढ़िए… मेलोनी की सिगरेट, पुतिन का अमर होने वाला प्लान:वर्ल्ड लीडर्स आपस में क्या बातें करते हैं; पीएम मोदी कैसे करते हैं तैयारी 16 जून 2026। G7 की सालाना बैठक से पहले अनौपचारिक बातचीत चल रही थी। इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी बोलीं- आज सुबह 3 कॉफी पीकर आई हूं। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने फौरन पूछा- और एक सिगरेट? ये गपशप वायरल हो गई। लोगों ने देखा कि दुनिया के सबसे ताकतवर लोग भी आपस में हम-आप जैसे ही बातें करते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बच्चियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर यूरोपीय संसद ने जताई चिंता
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें पाकिस्तान के अधिकारियों से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के अपहरण और जबरन इस्लाम धर्म अपनाने की घटनाओं को रोकने की मांग की गई है।
ईरानी अखबार ने जारी की 13 बड़े नेताओं की 'रिवेंज लिस्ट', ट्रंप, नेतन्याहू और स्टार्मर के नाम शामिल
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण सैन्य गतिरोध के बीच ईरान के एक प्रमुख कट्टरपंथी अखबार द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए एक सनसनीखेज इन्फोग्राफिक ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है। इस इन्फोग्राफिक में दुनिया के 13 सबसे प्रभावशाली राजनीतिक और सैन्य नेताओं की तस्वीरें और नाम प्रकाशित करते हुए दावा किया गया है कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का प्रतिशोध लेने के लिए इन्हें निशाना बनाया जाना चाहिए। हालांकि, तेहरान प्रशासन या ईरानी सरकार द्वारा इस सूची को किसी भी प्रकार की आधिकारिक मान्यता दिए जाने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है।मोजतबा खामेनेई की सख्त चेतावनी: 'हमले के जिम्मेदार लोग शांतिपूर्ण मौत को तरसेंगे'यह विवाद तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई ने अपना पहला सार्वजनिक संदेश जारी किया। मोजतबा, जो खुद भी उस घातक हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और लंबे समय बाद जनता के सामने आए हैं, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिता की मौत का बदला लेना पूरे ईरानी राष्ट्र का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने एक बेहद आक्रामक बयान में कहा कि इस सूची में शामिल लोग अपनी स्वाभाविक और शांतिपूर्ण मौत का सपना केवल अपने दिल में लेकर ही कब्र में जाएंगे। इस बयान के ठीक बाद तेहरान प्रशासन से जुड़े 'हमशहरी' अखबार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर यह सूची साझा कर दी, हालांकि रविवार को प्रकाशित हुए प्रिंट संस्करण से इस विवादित ग्राफिक को हटा दिया गया था।रिवेंज लिस्ट में शामिल हुए वैश्विक चेहरे: अमेरिका से लेकर यूरोप तक हड़कंपमोजतबा खामेनेई ने भले ही अपने भाषण में किसी भी वैश्विक राजनेता का नाम स्पष्ट तौर पर न लिया हो, लेकिन 'हमशहरी' अखबार द्वारा तैयार किए गए डिजिटल इन्फोग्राफिक ने सीधे तौर पर कई देशों के प्रमुखों को इस प्रतिशोध का केंद्र बना दिया है। इस हिट लिस्ट में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को मुख्य रूप से दर्शाया गया है। इनके अलावा अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज जैसे पश्चिमी दुनिया के सबसे शक्तिशाली चेहरों को इस सूची में जगह दी गई है।पश्चिमी देशों के प्रति बढ़ता आक्रोश: हवाई क्षेत्र देने और मौन रहने पर नाराजगीईरान द्वारा इन विशिष्ट यूरोपीय और अमेरिकी नेताओं को लक्षित करने के पीछे एक गहरी रणनीतिक और कूटनीतिक नाराजगी है। युद्ध की शुरुआत से ही ईरान लगातार यूरोपीय संघ और नाटो (NATO) के सदस्य देशों पर यह आरोप लगाता रहा है कि उन्होंने न केवल ईरान की संप्रभुता पर हुए हमलों की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निंदा करने से इनकार किया, बल्कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों और रीफ्यूलिंग टैंकर्स को अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की खुली अनुमति भी दी। ईरान का मानना है कि यह मौन सहमति और सैन्य सहयोग सीधे तौर पर उसके खिलाफ युद्ध अपराधों में शामिल होने जैसा है। वर्तमान में दोनों परमाणु और सैन्य शक्तियों के बीच चल रही यह बयानबाजी किसी भी प्रकार के शांति समझौते की उम्मीदों को पूरी तरह समाप्त कर रही है।
पीएम मोदी 6 जुलाई की सुबह नई दिल्ली से इंडोनेशिया के लिए निकले थे। फिर ऑस्ट्रेलिया होते हुए न्यूजीलैंड पहुंचे। वे 6 दिनों में 3 देशों का दौरा करके 12 जुलाई की सुबह दिल्ली लौट आए। करीब 144 घंटे के इस मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी और भारत के लिए उसके मायने क्या हैं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… पहला पड़ाव था- इंडोनेशिया का जकार्ता। ये पीएम मोदी की चौथी इंडोनेशियाई यात्रा थी। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात की। दो दिन के टूर में उन्होंने इंडोनेशियाई संसद में भाषण दिया। दोनों देशों के बीच 14 समझौतों पर साइन हुए। इनमें 2 डील सबसे अहम हैं- 1. सबांग पोर्ट डीलभारत और इंडोनेशिया मिलकर सुमात्रा के उत्तर में सबांग पोर्ट डेवलप करेंगे। इंडोनेशिया ने मई 2018 में ही भारत को इसका न्योता दिया था। तब पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इसके लिए ज्वॉइंट टास्क फोर्स बनाने का फैसला हुआ था। 2023 तक प्रोजेक्ट को लेकर एक स्टडी भी हुई। अब समझौते पर साइन होने से काम आगे बढ़ पाएगा। सबांग समुद्र में गहरे पानी वाला पोर्ट है। ये 50 हजार टन के जहाजों, पनडुब्बियों और युद्धपोतों को भी संभाल सकता है। पोर्ट में भारत कितना इन्वेस्टमेंट करेगा और ये कब तक पूरा होगा, अभी ये जानकारी सामने नहीं आई है। दोनों देशों ने अंडमान-निकोबार और इंडोनेशिया के आचे व सुमात्रा द्वीपों के बाकी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने पर भी सहमति जताई है। भारत के लिए डील के मायने 2. ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की सप्लाईDRDO के तहत आने वाले ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के बीच ये एग्रीमेंट हुआ है। इसके तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम देगा। इंडोनेशिया ने पहले 10 करोड़ डॉलर में ब्रह्मोस की 12 मिसाइल्स की एक बैटरी लेने का प्रपोजल दिया था। अब इसे दोगुना कर दिया गया है। अनुमान हैं कि पूरी डील करीब 63 करोड़ डॉलर की हो सकती है। इसमें मिसाइल सिस्टम के अलावा ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है। इस पैकेज में सरफेस-टू-सरफेस और एयर-लॉन्च्ड, यानी मिसाइल के दोनों सुपरसोनिक वैरिएंट शामिल हैं, जिनकी रेंज 300 किलोमीटर है। ब्रह्मोस भारत के सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमानों पर तैनात है। इंडोनेशिया भी अपने सुखोई-30 बेड़े में इसे इंटीग्रेट करेगा। इस डील के साथ फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन जाएगा। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, BDL और इंडोनेशियाई कंपनी 'रिपब्लिकॉर्प' के बीच भारत की एस्ट्रा Mk-1 एयर-टू-एयर मिसाइल को लेकर भी समझौता हुआ है। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील पीएम मोदी का दूसरा पड़ाव था- ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न। वे यहां 8 और 9 जुलाई को रहे। पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज के बीच तीसरी सालाना भारत-ऑस्ट्रेलिया समिट हुई। दोनों देशों के बीच 18 समझौते और घोषणाएं हुईं। इनमें दो डील सबसे अहम हैं- 1. यूरेनियम सप्लाई डीलभारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2014 में ‘सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट’ हुआ था। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की सप्लाई होनी थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने सप्लाई बेहद सीमित रखी। उसको चिंता थी कि यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है। अब दोनों देशों ने उसी एग्रीमेंट को अमल में लाने के लिए 'एडमिनिस्ट्रेटिव अरेंजमेंट' पर साइन किए हैं। यानी अब ऑस्ट्रेलिया भारत को जरूरत भर का यूरेनियम एक्सपोर्ट करेगा। संयुक्त बयान में कहा गया है कि ये सप्लाई सिर्फ यूरेनियम के शांतिपूर्ण इस्तेमाल, यानी बिजली वगैरह बनाने के लिए होगी। सप्लाई की निगरानी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी, यानी IAEA करेगी। ऑस्ट्रेलिया किस कीमत पर और कितना यूरेनियम देगा, सप्लाई कब होगी, अभी ये डिटेल्स सामने नहीं आए हैं। भारत के लिए डील के मायने 2. क्रिटिकल मिनरल्स प्रोडक्शन भारत और ऑस्ट्रेलिया ने लीथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए समझौता किया है। इसे ‘क्रिटिकल मिनरल्स पार्टनरशिप’ कहा जा रहा है। इसके तहत सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट कंपनियों के बीच लॉन्ग-टर्म ऑफटेक, रिफाइनिंग और वैल्यू-एडिशन के लिए निवेश की व्यवस्था तय हुई है। यानी दोनों देशों की कंपनियां मिलकर मिनरल्स की सप्लाई में लंबे समय के लिए इन्वेस्टमेंट करेंगी। कच्चे माल की खरीद के अलावा प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग भी मिलकर होगी। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील पीएम मोदी का आखिरी पड़ाव था- न्यूजीलैंड का ऑकलैंड। वे 10 और 11 जुलाई को यहां रहे। ये पिछले 40 सालों में किसी भारतीय पीएम की पहली न्यूजीलैंड यात्रा थी। इससे पहले 1986 में तब के पीएम राजीव गांधी न्यूजीलैंड गए थे। पीएम मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन के बीच बातचीत हुई। इसके बाद 10 समझौते और 8 इनिशिएटिव की घोषणा हुई। इनमें 2 चीजें सबसे अहम थीं- 1. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और रोडमैप टू 2030मार्च 2025 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत शुरू हुई और दिसंबर 2025 में पूरी हुई। 27 अप्रैल 2026 को इस पर औपचारिक साइन हुए। यानी ये डील मोदी की मौजूदा यात्रा से पहले ही हो चुकी थी। अब इस यात्रा में इसे 'स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' के लेवल पर अपग्रेड किया गया। यानी तय हुआ कि FTA जल्द ही लागू करने ट्रेड बढ़ाया जाएगा। साथ ही 'इंडिया-न्यूजीलैंड रोडमैप टू 2030' नाम का एक दस्तावेज जारी किया गया। इसके तहत दोनों देश ट्रेड, डिफेंस, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, खेती, एजुकेशन और टेक्नोलॉजी के सेक्टर में पार्टनरशिप बढ़ाएंगे। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करके करीब 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर, यानी 35 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। FTA के तहत भारत न्यूजीलैंड को केमिकल्स, प्रोसेसिंग फूड, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स वगैरह की सप्लाई करेगा। इस सामान पर जीरो टैरिफ लगेगा। वही न्यूजीलैंड से कीवी सहित दूसरे फल, लकड़ी और क्रिटिकल्स मिनरल्स वगैरह आएंगे। एग्रीमेंट के तहत पहले दिन से ही न्यूजीलैंड के 57 % सामान पर जीरो टैरिफ लागू हो जाएगा। इस पर भी सहमति बनी है कि न्यूजीलैंड भारत में अगले 15 सालों में 20 अरब डॉलर, यानी करीब 1.72 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगा। भारत के लिए डील के मायने 2. डिफेंस और मैरिटाइम पार्टनरशिपदोनों देशों ने डिफेंस में आपसी साझेदारी, लॉजिस्टिक सपोर्ट और जॉइंट नेवी एक्सरसाइज बढ़ाने पर सहमति जताई है।इसका मतलब है कि दोनों देशों की नेवी एक-दूसरे के पोर्ट और मैरीटाइम फैसिलिटीज का इस्तेमाल कर सकेंगे। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:5 देशों से क्या लेकर लौटे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स क्रिटिकल मिनरल देगा, मेलोनी से भी डील PM मोदी 15 मई 2026 की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आए। करीब 140 घंटे के इस मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी और भारत के लिए उसके मायने क्या हैं, पूरी खबर में पढ़िए…
अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, 5 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले; बढ़ा तनाव
ईरान की IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में एयरबेस के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और MQ-9 ड्रोन रखने वाले हैंगर को नुकसान पहुंचा।
ओमान के पास कंटेनर जहाज में टक्कर के बाद लगी भीषण आग, UKMTO ने जारी किया अलर्ट
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने कहा कि ओमान के तट पर एक घटना के बाद एक कंटेनर जहाज को नुकसान पहुंचा और उसमें आग लग गई।
ओमान तट पर GFS Galaxy जहाज पर हमला, 10 भारतीय बचाए गए, एक लापता; विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता
भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार को ओमान के तट के पास वाणिज्यिक पोत जीएफएस गैलेक्सी पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया। बताया कि 10 भारतीयों को बचा लिया गया है जबकि एक की तलाश जारी है। भारतीय दूतावास भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, जहाज को आईआरजीसी के हमले की वजह से नुकसान पहुंचा।
ईरान ने बंद किया होर्मुज जलमार्ग, भड़के ट्रंप ने सीजफायर खत्म कर ईरानी शहरों पर बरसाए बम
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। ईरान द्वारा वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद किए जाने के बाद अमेरिका ने अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच चल रहे सीजफायर (युद्धविराम) को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का एलान करते हुए ईरान के कई रणनीतिक शहरों पर भीषण बमबारी के आदेश दे दिए हैं। अमेरिकी वायुसेना और मिसाइलों ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना बना इस भीषण टकराव की मुख्य वजहइस पूरे विवाद की जड़ होर्मुज जलमार्ग है, जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया का करीब एक-तिहाई समुद्री तेल परिवहन इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने वैश्विक प्रतिबंधों और अमेरिकी दबाव के विरोध में अचानक इस जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी। ईरान के इस कदम को वैश्विक व्यापार पर सीधे हमले के रूप में देखते हुए वाशिंगटन में हड़कंप मच गया, जिसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने बिना कोई वक्त गंवाए सीधे सैन्य एक्शन लेने का फैसला किया।राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा फैसला और सीजफायर का अचानक अंतअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनाव पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वैश्विक व्यापार और अमेरिकी हितों को चुनौती देने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने पूर्व में हुए सीजफायर समझौतों को पूरी तरह से रद्द घोषित कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी कमांड ने ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों, परमाणु केंद्रों के नजदीकी इलाकों और तटीय शहरों पर हवाई हमले और मिसाइलें बरसानी शुरू कर दीं। इस अप्रत्याशित हमले से पूरे ईरान में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।वैश्विक बाजार और भारत सहित दुनिया भर के देशों पर पड़ेगा इसका असरअमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस सीधे युद्ध का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलने लगा है। होर्मुज जलमार्ग बंद होने और अमेरिकी बमबारी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से आने वाले इसी तेल मार्ग पर निर्भर है। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के अन्य बड़े देश इस वक्त दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात पूरी तरह बेकाबू नजर आ रहे हैं।
कतर की किस्मत बदलने वाले पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा का निधन, तख्तापलट कर ली थी सत्ता की कमान
वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। कतर को एक छोटे से गुमनाम देश से दुनिया का सबसे अमीर और आधुनिक देश बनाने वाले पूर्व अमीर (शासक) शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे खाड़ी देशों (Gulf Countries) सहित वैश्विक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। शेख हमद को आधुनिक कतर का निर्माता माना जाता है, जिन्होंने अपने विजन और फैसलों से न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि कतर को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बड़ा केंद्र भी बना दिया।साल 1995 का वो ऐतिहासिक तख्तापलट जिसने बदल दिया कतर का इतिहासशेख हमद बिन खलीफा अल थानी के सत्ता में आने की कहानी बेहद नाटकीय और ऐतिहासिक रही है। साल 1995 में जब उनके पिता देश से बाहर स्विट्जरलैंड की यात्रा पर थे, तब शेख हमद ने एक रक्तहीन तख्तापलट (Bloodless Coup) के जरिए कतर की सत्ता अपने हाथों में ले ली थी। उस समय कतर की आर्थिक स्थिति आज जैसी मजबूत नहीं थी। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने देश के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर एक नई और आक्रामक नीति अपनाई, जिसने आने वाले दशकों में देश की पूरी तस्वीर को बदलकर रख दिया।लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के दम पर कतर को बनाया दुनिया का सबसे अमीर देशशेख हमद की सबसे बड़ी कामयाबी कतर के विशाल प्राकृतिक गैस भंडार (Natural Gas Reserves) को पहचानना और उसका सही इस्तेमाल करना था। उनके नेतृत्व में कतर ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के उत्पादन और निर्यात में भारी निवेश किया। देखते ही देखते कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक देश बन गया। इस गैस क्रांति ने कतर के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय को दुनिया में सबसे ऊंचा बना दिया और एक छोटे से मरुस्थलीय देश को दुनिया के सबसे अमीर और शक्तिशाली देशों की कतार में ला खड़ा किया।ग्लोबल मीडिया नेटवर्क अल जजीरा की शुरुआत और कूटनीति में दबदबाशेख हमद सिर्फ आर्थिक सुधारों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कतर को वैश्विक मंच पर एक बड़ी पहचान दिलाई। साल 1996 में उन्होंने प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल 'अल जजीरा' (Al Jazeera) की स्थापना की, जिसने मिडिल ईस्ट और दुनिया भर की पत्रकारिता का रुख बदल दिया। इसके साथ ही उन्होंने कतर की एयरलाइंस 'कतर एयरवेज' को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एयरलाइंस में शुमार कराया और खेल जगत में निवेश कर फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों की नींव भी रखी। साल 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे और वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी थी। उनके निधन के साथ ही मध्य पूर्व के इतिहास का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है।
नेपाल में युवाओं का गुस्सा बढ़ा, बालेन शाह सरकार पर उठे सवाल; रोजगार और नीतियों को लेकर विरोध तेज
युवा संगठन जेन-जी नेपाल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बजट और नीतियों में युवाओं के रोजगार, आय बढ़ाने और भविष्य सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं। संगठन का आरोप है कि सरकार ने युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी, जिसके कारण असंतोष बढ़ रहा है।
वेस्ट बैंक दौरे पर भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना का दावा, हथियारबंद इजरायली सेटलरों ने घेरा
रो खन्ना के अनुसार, उनका दल वेस्ट बैंक के एक फलस्तीनी गांव का दौरा कर रहा था। इस यात्रा का उद्देश्य स्थानीय निवासियों से मिलना और क्षेत्र में उनकी सुरक्षा तथा जीवन-स्थितियों के बारे में जानकारी लेना था।
ट्रंप की धमकी: ईरान पर 1000 मिसाइलें तैयार
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया टकराव के बाद हालात और बिगड़ते दिख रहे हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने एक‑दूसरे को कड़े संदेश दिए हैं
भास्कर सीरीज ‘स्पाई फाइल्स’ में आप पढ़ रहे हैं- ‘ऑपरेशन गंगा।’ पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 30 जनवरी 1971 को दो कश्मीरी लड़कों ने पिस्तौल और हैंडग्रेनेड दिखाकर भारत के यात्री विमान ‘गंगा’ को हाईजैक कर लिया। वे विमान को लाहौर ले गए और भीड़ के सामने पेट्रोल डालकर आग लगा दी। हाईजैकर्स की मांग थी कि हिंदुस्तान अपने जेलों में बंद उनके 36 साथियों को रिहा करे, लेकिन भारत तैयार नहीं हुआ। दुनियाभर में हड़कंप मच गया। भारत के लोग गुस्से में थे, लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और RAW प्रमुख मुस्कुरा रहे थे… क्या थी पूरी कहानी जानते हैं ‘ऑपरेशन गंगा’ पार्ट-2 में… इस कहानी की शुरुआत होती है साल 1956 से। पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश के चटगांव की पहाड़ियों में बना एक सीक्रेट मिलिट्री कैंप। कंट्रोल रूम में कुछ फौजी नक्शों पर उंगलियां फेर रहे थे। ये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के अफसर थे। इन्हीं में से एक ने सिगार का धुआं उड़ाते हुए कहा- ‘फिजो साहब, असम और नगालैंड में ऐसी आग लगाओ कि दिल्ली की हुकूमत बुझा न पाए।’ फिजो ने मुस्कुराते हुए राइफल उठाई और कहा- ‘दिल्ली बहुत दूर है और हमारे जंगल बहुत घने। हमें तबाही मचाने से कोई रोक नहीं पाएगा।’ फिजो का पूरा नाम अंगामी जापु फिजो था। वह नगा उग्रवादी था और अलग नगालैंड बनाना चाहता था। ISI ने उसे ना सिर्फ पनाह दी थी, बल्कि हथियारों, गुरिल्ला वॉर की ट्रेनिंग और पैसों से पाट दिया था। 1960 तक पाकिस्तान यही खेल मिजोरम में भी शुरू कर चुका था। वह मिजो नेशनल फ्रंट को मोहरा बनाकर मिजोरम को भी भारत से तोड़ना चाहता था। इस खेल में चीन भी कूद चुका था, जो चटगांव के रास्ते चरमपंथियों को हथियार सप्लाई कर रहा था। भारत के सामने सबसे बड़ा खतरा था- 'सिलिगुड़ी कॉरिडोर' यानी 'चिकन नेक'।’ पश्चिम बंगाल में 22 किमी. चौड़ा ये हिस्सा पूरे पूर्वोतर को भारत से जोड़ने का अकेला जमीनी रास्ता है। अगर पाकिस्तान इस पर कब्जा कर लेता, तो पूर्वोत्तर के सातों राज्य भारत से कट जाते। RAW के पूर्व अफसर आरके यादव अपनी किताब ‘मिशन आर एंड ए डब्ल्यू’ में लिखते हैं- ‘प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने RAW प्रमुख आरएन काव से कहा- ‘अगर पाकिस्तान हमारे नॉर्थ-ईस्ट को तोड़ने के लिए पूर्वी पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर रहा है, तो क्यों न हम उस जमीन को ही अलग कर दें?’ काव साहब कुछ देर सोचते रहे, फिर बोले- ‘ठीक है मैडम। कुछ करते हैं।’ दिसंबर 1970 में पाकिस्तान में पहला आम चुनाव हुआ। कुल 300 सीटों में से बहुमत के लिए 151 सीट चाहिए थीं। पूर्वी पाकिस्तान के शेख मुजीब-उर-रहमान की 'आवामी लीग' ने 160 सीटें जीत लीं, जबकि पश्चिमी पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो को सिर्फ 81 सीट मिलीं। मुजीब का प्रधानमंत्री बनना तय था, लेकिन रावलपिंडी में बैठे तानाशाह राष्ट्रपति याह्या खान को एक बंगाली का हुकूमत चलाना बर्दाश्त नहीं था। दिन बीतते गए, पर उन्होंने मुजीब को सत्ता नहीं सौंपी। नतीजा यह हुआ कि पूर्वी पाकिस्तान की सड़कों पर 'जॉय बांग्ला' के नारे गूंजने लगे। इसी बीच लंदन में बैठे एक सोर्स ने RAW को खबर भेजी कि पाकिस्तान अपने पूर्वी हिस्से में बड़े मिलिट्री एक्शन की तैयारी में है। वह वहां गुपचुप तरीके से हथियार, रसद और सैनिक भेज रहा है। ऐसे में RAW चीफ काव ने PM इंदिरा को सुझाव दिया- ‘हम पाकिस्तान के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर देते हैं। फिर उसे श्रीलंका होकर पूर्वी पाकिस्तान जाना पड़ेगा, जो काफी लंबा रास्ता है। पूर्वी हिस्से में उसकी पकड़ ढीली पड़ जाएगी।’ PM ने जवाब दिया- ‘सुझाव तो ठीक है, लेकिन इसके लिए कोई ठोस वजह चाहिए होगी। अंतरराष्ट्रीय नियमों के चलते हम अचानक ऐसा कदम नहीं उठा सकते। काव मुस्कुराए और बोले- ‘हम कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे।’ यहीं से RAW ने अपने सीक्रेट मिशन की बिसात बिछानी शुरू कर दी… अब एक साल पीछे चलते हैं… साल 1969, पाकिस्तान के पेशावर में एक आलीशान बंगला। यह घर था कश्मीरी अलगाववादी नेता डॉ. फारूख हैदर का। उस शाम डायनिंग टेबल पर लजीज कश्मीरी पुलाव और कबाब परोसे गए थे। दस्तरखान के एक तरफ अलगाववादी नेता मकबूल भट्ट बैठा था और दूसरी तरफ 19 साल का हाशिम कुरैशी। मकबूल, कश्मीर की कथित आजादी के लिए नेशनल लिब्रेशन फ्रंट चला रहा था। उस पर हत्या के कई मुकदमे थे। भारत में उसे फांसी की सजा सुनाई जा चुकी थी। वहीं, कश्मीर का रहने वाला हाशिम एक रिश्तेदार की शादी में पाकिस्तान गया था। उसके भीतर कश्मीर को लेकर कुछ करने की छटपटाहट थी। मकबूल इस बात को ताड़ चुका था और कई दिनों से उसका ब्रेनवॉश करने में जुटा था। अचानक, रेडियो पर आवाज गूंजी- ‘आज कराची हवाई अड्डे पर इरिट्रिया के दो चरमपंथियों ने इथियोपिया के एक जहाज पर फायरिंग की है। जहाज को भारी नुकसान पहुंचा है।’ मकबूल कुर्सी से छलांग मारकर उठ खड़ा हुआ। उसने टेबल पर मुक्का मारते हुए कहा- ‘देखा तुम लोगों ने? दुनिया हमारी चीखें नहीं सुनती, लेकिन जब जहाज हवा में हिचकोले खाता है, तो पूरी दुनिया के कान खड़े हो जाते हैं। हमें ऐसा ही कुछ करना होगा।’ मकबूल ने हाशिम के कंधे पर हाथ रखा। ‘हाशिम... अगर हम तुम्हें एक हिंदुस्तानी जहाज को अगवा करने की ट्रेनिंग दें, तो क्या तुम कौम के लिए इसे अंजाम दे पाओगे?’ हाशिम जोश में था। उसने तुरंत जवाब दिया- ‘आप हुक्म कीजिए। मैं तैयार हूं।’ मकबूल ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा- ‘तो फिर जुबान समझें?’ हाशिम ने बिना सोचे कहा- ‘जी बिल्कुल।’ हाशिम की ट्रेनिंग शुरू हो गई। भाग-दौड़ से लेकर हथियार चलाने तक। कुछ महीने बाद मकबूल ने उसे फिर से मिलने बुलाया। मकबुल ने कहा- ‘सुनो हाशिम, अब तुम्हें कश्मीर वापस जाना है। श्रीनगर से उड़ने वाले एक जहाज को अगवा करके रावलपिंडी लाना है। बदले में हम हिंदुस्तान की जेलों में बंद अपने 36 साथियों को छुड़ाएंगे। दुनिया को भी पता चलना चाहिए कि कश्मीरी अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।’ हाशिम ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘ठीक है जनाब। तैयारी करता हूं।’ मकबूल ने उसे एक पर्ची थमाते हुए कहा- ‘वहां पहुंचकर इस पते पर चले जाना। हथियार और बाकी का जरूरी सामान वहीं मिल जाएगा।’ ‘जी…खुदा हाफिज’ कहकर हाशिम वहां से निकल पड़ा। साल 1970 की एक सर्द शाम। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास श्रीनगर सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल यानी BSF की एक टुकड़ी गश्त पर थी। तभी अंधेरे में एक साया रेंगता हुआ दिखा। 'कौन है वहां? हाथ ऊपर करो।' जवान ने राइफल तानते हुए आवाज लगाई। 19-20 साल के एक लड़के ने अपने हाथ ऊपर उठा लिए- 'गोली मत चलाना भाई, मैं सरेंडर कर रहा हूं।' BSF के जवानों ने उसे घेरकर दबोच लिया। तलाशी ली गई, तो उसके पास से पाकिस्तानी दस्तावेज, नक्शे और विदेशी करेंसी बरामद हुई। BSF के अफसर ने उसकी छाती पर राइफल तानते हुए पूछा- ‘कौन हो तुम? किसने भेजा है?’ लड़के ने चुप्पी साध ली, तो अफसर ने एक थप्पड़ जड़ दिया, 'बोलता क्यों नहीं?' लड़के ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, 'साहब, मैं तो कश्मीरी हूं। पास के गांव का रहने वाला। रास्ता भटक गया था।' अफसर ने जवानों से कहा- ‘ये ऐसे नहीं खुलेगा। हेडक्वार्टर ले चलो।’ BSF के जवान उसे लेकर हेडक्वार्टर की तरफ चल पड़े। अगली सुबह…. एक बंद कमरे में वो लड़का पसीने से तरबतर बैठा था। सामने BSF के दो अफसर बैठे थे। एक घंटे की सख्त पूछताछ और 'थर्ड डिग्री' टॉर्चर के बाद लड़का टूट गया। उसने हांफते हुए कहा, ‘साहब, मत मारो। सब सच-सच बताता हूं।’ लड़के ने राज खोल दिया- ‘मेरा नाम हाशिम है। मकबूल भट्ट ने भेजा है। मैं हिंदुस्तान का एक हवाई जहाज हाईजैक करने आया हूं।’ किताब ‘द वॉर दैट मेड आर एंड ए डब्ल्यू’ के मुताबिक- ‘अफसर ने मुस्कुराते हुए तंज कसा- ‘अच्छा… एक जहाज अगवा कर लेने से कश्मीर आजाद हो जाएगा?’ हाशिम ने झट से जवाब दिया- 'मेरा निशाना वो जहाज था, जिसे इंदिरा गांधी का बेटा राजीव उड़ाता है।' कमरे में सन्नाटा छा गया। दोनों अफसर एक-दूसरे को देखते रह गए। मामला देश की प्रधानमंत्री के बेटे और सुरक्षा से जुड़ा था। अफसरों ने फौरन यह खबर BSF के डीजी केएफ रुस्तमजी तक पहुंचाई। रुस्तमजी ने फौरन फोन घुमाया और पूरी कहानी RAW चीफ को बता दी। जल्द ही दिल्ली में एक गोपनीय बैठक बुलाई गई। बंद कमरे में सिर्फ तीन लोग थे- PM इंदिरा गांधी, RAW चीफ आरएन काव और BSF के डीजी केएफ रुस्तमजी। RAW प्रमुख ने सुझाव दिया- ‘हम हाशिम से सौदा करेंगे।’ ‘कैसा सौदा?’ इंदिरा ने पूछा। ‘डबल एजेंट बनने का सौदा। हम हाशिम के सामने दो विकल्प रखेंगे- या तो वो हमारे लिए काम करे या फिर पूरी जिंदगी जेल में सड़े।' काव ने जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने उनकी तरफ देखा- ‘आपको लगता है वह इस बात के लिए तैयार होगा?’ RAW प्रमुख बोले- ‘कोशिश करके देखते हैं।’ अगली सुबह, श्रीनगर के इंटरोगेशन रूम का दरवाजा खुला। इस बार अफसरों के हाथों में डंडा नहीं, चाय की प्याली थी। एक अफसर ने आगे बढ़कर हाशिम के कंधे पर हाथ रखा और कहा- 'देखो, तुम्हारी उम्र अभी बहुत कम है। जेल गए तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। हम तुम्हें एक मौका दे सकते हैं। तुम जहाज हाईजैक करो, हम नहीं रोकेंगे। बदले में तुम्हें वो करना होगा, जो हम कहेंगे।’ हाशिम असमंजस में पड़ गया- ‘लेकिन... इसमें मेरा क्या फायदा?’ ‘तुम पाकिस्तान की नजर में हीरो बन जाओगे। तुम्हारी जान भी बचेगी और दुनिया को लगेगा कि तुमने हिंदुस्तानी एजेंसियों को चकमा दे दिया।' अफसर ने उसे समझाया। हाशिम ने कहा- ‘मैं कुछ समझा नहीं।’ अफसर ने चाय की प्याली उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा- 'पहले चाय पियो।’ हाशिम ने चुपचाप कप ले लिया। अफसर ने बताया- ‘घबराओ मत, हम तुम्हें फंसा नहीं रहे हैं। तुम अपने प्लान के मुताबिक जहाज हाईजैक करके पाकिस्तान ले जाओ। इस काम में हम तुम्हारी मदद करेंगे। बस हमारी एक ही शर्त है।' ‘क्या शर्त है?’ हाशिम ने पूछा। अफसर बोला, ‘तुम यह बात किसी को नहीं बताओगे।’ हाशिम ने कुछ देर सोचा, फिर सिर हिलाकर कहा- ‘मैं तैयार हूं। क्या करना होगा मुझे?’ अफसर ने दोबारा उसके कंधे को थपथपाया- 'अभी आराम से यहीं रहो, खाओ-पियो। वक्त आने पर हम तुम्हें सब समझा देंगे।’ हाशिम को बेंगलुरु के एक सेफ हाउस में भेज दिया गया। पूरे मामले को इतना सीक्रेट रखा गया कि किसी दूसरी एजेंसी को तो दूर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री तक को भनक नहीं लगी। पाकिस्तान में बैठे हाशिम के आका भी इससे बेखबर थे। कुछ दिनों बाद हाशिम को BSF में भर्ती कर लिया गया। उसे जॉइनिंग लेटर भी दे दिया गया। उसकी ड्यूटी श्रीनगर हवाई अड्डे पर लगाई गई। हाशिम ने हफ्तों तक रेकी की। लोग किस गेट से आते हैं, कहां से जाते हैं और दस्तावेजों की जांच कहां-कहां होती है, उसकी नजर हर कोने पर थी। रेकी करते हुए हाशिम को अहसास हुआ कि अकेले दम पर किसी जहाज को अगवा करना मुमकिन नहीं होगा। उसने यह बात RAW अफसर को बताई। अफसर ने कहा- ‘तुम अपने हिसाब से कोई साथी ढूंढ लो, बस ध्यान रखना कि उसे प्लान की भनक नहीं लगनी चाहिए।’ हाशिम ने चचेरे भाई अशरफ कुरैशी को चुना। अशरफ सीधा-साधा और जज्बाती लड़का था। हाशिम ने धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश कर दिया। वह मिशन के लिए तैयार भी हो गया। अब बारी थी हथियारों के इंतजाम की। एक रोज हाशिम की नजर उर्दू अखबार के कोने में छपे विज्ञापन पर पड़ी, जिसमें लिखा था- 'असली जैसी दिखने वाली खिलौना बंदूकें घर बैठे मंगाएं।' हाशिम ने बंदूक का ऑर्डर दे दिया। उधर, अशरफ ने घर के पिछले हिस्से में बैठकर लकड़ी से एक हथगोला बनाया और बाजार से पेंट लाकर उसे पोत दिया। देखने में वह असली ग्रेनेड जैसा लगने लगा। अब हाईजैक के लिए जहाज की व्यवस्था करनी थी। RAW ने इंडियन एयरलाइंस के कबाड़ हो चुके विमान गंगा को चुना। इस फोकर फ्रेंडशिप विमान को भारतीय सेना पहले ही डिकमीशन कर चुकी थी। अब स्क्रिप्ट तैयार थी। तारीख तय की गई- 30 जनवरी 1971… श्रीनगर एयरपोर्ट पर धुंध छाई हुई थी। रनवे पर 'गंगा' उड़ान भरने के लिए तैयार था। कैप्टन एम.के. कचरू कॉकपिट में बैठकर कंट्रोल पैनल की जांच कर रहे थे। यात्रियों की कतार में हाशिम और अशरफ भी शामिल हो गए। हाशिम की जेब में वह खिलौना बंदूक थी और अशरफ के पास लकड़ी का ग्रेनेड। RAW के गुप्त निर्देशों के चलते एयरपोर्ट पर उनकी गंभीर चेकिंग नहीं हुई। विमान में 28 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स सवार हुए। ठीक 11:30 बजे 'गंगा' ने जम्मू के लिए उड़ान भरी। करीब 20 मिनट बाद, जब विमान पूरी ऊंचाई पर था, अचानक हाशिम अपनी सीट से उठा। उसने जेब से नकली पिस्तौल निकाली और हवा में लहराते हुए चिल्लाया- ‘कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा। जहाज हाईजैक हो चुका है।’ उधर, अशरफ ने लकड़ी का ग्रेनेड निकाला और उसकी पिन खींचने का नाटक करते कहा- ‘किसी ने चालाकी दिखाई, तो मैं जहाज को उड़ा दूंगा।’ विमान के भीतर चीख-पुकार मच गई। हाशिम कॉकपिट का दरवाजा धक्का देकर अंदर घुसा। कैप्टन ने मुड़कर देखा तो पिस्तौल उनकी कनपटी पर तनी थी। ‘जहाज का रुख बदलो। इसे सीधे रावलपिंडी ले चलो।' हाशिम ने चिल्लाते हुए कहा। कैप्टन ने बिना घबराए जवाब दिया- ‘इसमें फ्यूल बहुत कम है। हम रावलपिंडी नहीं जा पाएंगे। तुम कहो तो इसे लाहौर ले जा सकते हैं।’ कुछ देर आनाकानी करने के बाद हाशिम विमान को लाहौर ले जाने पर राजी हो गया। दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर 'गंगा' लाहौर के रनवे पर उतरा। पाकिस्तानी फौज और पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। हाशिम और अशरफ का जोरदार स्वागत किया गया। पाकिस्तान के कद्दावर नेता जुल्फिकार अली भुट्टो ने रनवे पर आकर उन्हें गले लगाया। पाकिस्तान दोनों को हीरो मान चुका था। 2 फरवरी की शाम हाशिम ने पाकिस्तानी अफसरों से पेट्रोल और माचिस की मांग की। अफसरों ने बिना सोचे-समझे यह सामान उन्हें मुहैया करा दिया। हाशिम ने विमान के भीतर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। ‘गंगा’ धू-धू कर जलने लगा। पाकिस्तानी टीवी चैनल इसे लाइव दिखा रहे थे। भीड़ तालियां बजा रही थी। अगली सुबह, 3 फरवरी 1971 को भारत ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के नियमों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। इस पाबंदी के बाद पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने का सीधा रास्ता कट गया। पाकिस्तान को कोई फ्लाइट, फौज या रसद ढाका भेजनी होती, तो उन्हें अरब सागर से होते हुए, श्रीलंका का चक्कर लगाकर जाना पड़ता था। यह बेहद लंबा सफर था। उधर, पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली विद्रोहियों ने बगावत कर दी थी। वे पाकिस्तानी फौज से खुली जंग लड़ रहे थे। RAW ने इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग दी थी। हथियार मुहैया कराए थे। आखिरकार बौखलाए पाकिस्तान ने 3 दिसंबर 1971 की शाम अमृतसर, पठानकोट, श्रीनगर सहित भारत के कई हवाई ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी। इन हमलों के तुरंत बाद भारत ने भी जंग का ऐलान कर दिया। पाकिस्तान फंस चुका था। भारत का एयरस्पेस तो उसके लिए बंद था ही, रही-सही कसर भारत ने श्रीलंका पर कूटनीतिक दबाव बनाकर पूरी कर दी। श्रीलंका ने भी पाकिस्तान को रीफ्यूलिंग की सहूलियत नहीं दी। नतीजा ये हुआ कि पाकिस्तानी फौज कमजोर पड़ गई। महज 13 दिनों के भीतर घुटने टेक दिए। 16 दिसंबर 1971 को ढाका के रेसकोर्स मैदान में पाकिस्तानी जनरल एएके नियाजी ने अपने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया। पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए। एक नए मुल्क का जन्म हुआ- बांग्लादेश। जब जंग खत्म हुई, तब पाकिस्तान को समझ आया कि उसके साथ खेल हो चुका है। हाशिम और अशरफ, जिन्हें वो हीरो मानकर पलकों पर बिठा रखा था, उन्हें फौरन गिरफ्तार कर लिया गया। हाशिम को कई साल पाकिस्तान की जेल में काटने पड़े। जेल से छूटने के बाद वह नीदरलैंड्स चला गया। साल 2000 में भारत लौटा, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट पर ही वो गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर देशद्रोह और विमान अपहरण के मामले दर्ज किए गए। 2001 में उसे जमानत मिल गई। तब से वह जेल से बाहर है और श्रीनगर में रहता है। यह सबकुछ RAW के इसी सीक्रेट मिशन की बदौलत हुआ। हालांकि, भारत सरकार और RAW ने कभी आधिकारिक रूप से इसे स्वीकार नहीं किया। RAW के काम करने का तरीका भी यही है। अब ऑपरेशन गंगा की पहली कड़ी भी पढ़िए : कश्मीरी आतंकी भारत का विमान हाईजैक करके पाकिस्तान ले गए:पेट्रोल डालकर जला दिया, देश गुस्से में था, लेकिन प्रधानमंत्री मुस्कुराने लगीं; ऑपरेशन गंगा पार्ट-1 रेफरेंस : 1. Mission RAW : By R.K. Yadav 2. The Kaoboys of RAW : By B. Raman 3. The War that Made RAW : By Anusha Nandakumar and Sandeep Saket 4. India, Pakistan and the Secret Jihad : By Praveen Swami
‘सिया गोयल ने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल को लोहगढ़ किले से धक्का देकर मार डाला। क्योंकि वो केतन से शादी नहीं करना चाहती थी।’ पुणे पुलिस की ये थ्योरी पूरे देश को याद हो चुकी है। लेकिन ये बात कहने में जितनी आसान है, कोर्ट में साबित करना उतना ही मुश्किल। तो क्या केतन अग्रवाल की हत्या मामले में सिया बच जाएगी, पुलिस कैसे साबित करेगी सिया ने ही धक्का दिया; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: पुलिस ने सिया को किस आधार पर केतन की हत्या का आरोपी बनाया है? जवाब: पुलिस के मुताबिक, 18 जून 2026 की सुबह करीब 10 बजे लोहगढ़ किले की चोटी पर मौजूद सिया चीखी। गार्ड्स पहुंचे, तो सिया ने बताया- मेरा मंगेतर केतन फिसलकर खाई में गिर गया है।' सिया ने ही घरवालों को भी फोन किया। अगले दिन इंस्टाग्राम पर लिखा- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’ केतन अग्रवाल के माता-पिता ने लोनावला ग्रामीण पुलिस स्टेशन के ऑफिसर्स से कहा कि उन्हें केतन की मौत में किसी गलत इरादे का शक नहीं है। पुलिस भी इसे एक्सीडेंट मान रही थी। लेकिन इसके बाद जांच में 5 ऐसी बातें सामने आईं, जिसके आधार पर सिया और चेतन को हत्या का आरोपी बनाया गया… 1. केतन के घर वालों को सिया पर शक हुआ 2. सिया ने पुलिस के सामने अपने बयान बदले 3. किले के CCTV फुटेज में गर्मी में हुडी पहने दिखा शख्स 4. हत्या वाले दिन चेतन का इंटरनेट पूरे दिन बंद 4. सिया की चेतन के नंबर पर 2000 से ज्यादा कॉल्स सवाल-2: क्या सिया को दोषी साबित करने के लिए ये 5 आधार काफी नहीं, और क्या जरूरी? जवाब: हत्या के मामले में आरोपी को 2 तरीके से दोषी साबित किया जा सकता है… 1. हत्या का कोई पुख्ता सबूत मौजूद हो भारतीय कानून में हत्या का आरोप साबित करने के लिए तीन चीजें बेहद जरूरी होती हैं- हत्या का मोटिव, यानी इरादा, हत्या में इस्तेमाल हथियार, आरोपी का मौके पर मौजूद होना और हत्या का चश्मदीद गवाह। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, ‘मान लीजिए किसी की हत्या हो और मौके पर ही आरोपी और हत्या में इस्तेमाल हुआ हथियार बरामद हो जाएं, जिसकी पोर्टमार्टम रिपोर्ट से भी पुष्टि हो जाए, तो हत्या का मामला चलेगा। अभियोजन पक्ष या पुलिस घटना के CCTV फुटेज, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वारदात के गवाह या किसी दूसरे सबूत के जरिए यह साबित करेंगे कि आरोपी ने ही हत्या की है। इसके बाद कोर्ट आरोपी को दोषी करार दे देगा।’ केतन के मामले में पुलिस का मानना है कि उसे चेतन या सिया ने खाई में धक्का दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। विराग गुप्ता के मुताबिक, कोर्ट सिया और केतन को तभी दोषी मानेगा, जब सबूतों से ये साबित हो जाए कि केतन न ही खुद फिसला, न उसका संतुलन बिगड़ा, बल्कि उसे जानबूझकर चेतन या सिया ने या दोनों ने मिलकर धक्का दिया था। हालांकि अभी तक पुलिस के पास इसका कोई सबूत नहीं है। एक पुलिस ऑफिसर ने कहा है, ‘केतन की हत्या के समय किले पर 208 लोग मौजूद थे। हमें उम्मीद है कि किसी न किसी ने कोई आपत्तिजनक फोटोग्राफिक सबूत कैद किया होगा।' पुलिस ने कोर्ट से चेतन और सिया के लाई-डिटेक्टर टेस्ट की परमिशन मांगते हुए कहा था कि उसके पास घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और न ही कोई ऐसा सबूत है, जिससे साबित हो सके कि केतन को धक्का देकर किसने मारा। पुलिस ने ये अर्जी वापस भी ले ली है। 2. हत्या की परिस्थिति से जुड़े सबूत मौजूद हों हत्या का वीडियो न हो, तो भी हत्या साबित की जा सकती है और आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है। अदालतें परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर भी हत्या के मामलों में सजा सुनाती हैं। परिस्थितिजन्य सबूतों का मतलब है कि किसी व्यक्ति की हत्या के पीछे की वजह या मोटिव, हत्या के समय आरोपियों की लोकेशन, हत्या के तरीके से जुड़े सबूत सभी आपस में अच्छे से जुड़े हों। किसी भी तरह कोई एक भी कड़ी ऐसी न हो, जिससे ये गुंजाइश बने कि आरोपी बेकसूर भी हो सकता है। विराग गुप्ता कहते हैं कि केतन की हत्या के समय का कोई मटेरियल एविडेंस नहीं मिल पाता, तो पुलिस ने केतन की हत्या के पीछे जो कहानी, सुराग और हत्या का जो मोटिव बताया है, अभियोजन पक्ष को उसे कोर्ट में सबूतों के साथ साबित करना होगा। पुलिस को इस पूरे मामले से जुड़े लोगों के फोन रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, केतन की मौत की लोकेशन से जुड़े सबूत जुटाने होंगे। इन सबके आधार पर यह साबित करना होगा कि सिया और चेतन के पास केतन को मारने की पर्याप्त वजह थी और उन दोनों ने ही केतन की हत्या की है। पुलिस का एक दावा ये भी है कि उसके पास चेतन और सिया के कबूलनामे हैं, जिनमें उन्होंने केतन की हत्या की बात स्वीकार की है। हालांकि पुलिस को दिए बयान में कोई आरोपी अपना जुर्म कबूल ले, तो भी CRPC या BNS कानून के तहत इसकी कोर्ट में कोई अहमियत नहीं होती। सवाल-3: तो क्या हत्या के आरोप से बच भी सकते हैं सिया-चेतन? जवाब: अक्सर परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर हत्या के मामले में आरोपी बरी भी हो जाते हैं। आपने कई फैसलों में कोर्ट की ये टिप्पणी सुनी होगी- सबूतों की कमी के चलते आरोप साबित नहीं किया जा सका। दरअसल, इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के बनाए हुए नियम हैं। 1952 में एक फैसले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को आगाह किया था कि किसी शक को सबूत न समझा जाए। फिर 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने एक और मामले में 5 सिद्धांत बताए… सिया के वकील तनवीर अहमद मीर कहते हैं कि अभियोजन पक्ष केवल ये दिखाकर केस नहीं जीत सकता कि कई चीजें संदिग्ध लग रही हैं। घटना की हर परिस्थिति खुद में साबित हो, और फिर वो अगली कड़ी से भी जुड़ती हो, ये भी साबित हो कि केतन की मौत की दूसरी कोई संभव वजह नहीं है। अगर एक भी कड़ी टूटती है, तो आरोपियों को संदेह का फायदा मिलेगा। केतन के मामले में पुलिस को हर दावा, सबूत में बदलना होगा। साबित करना होगा कि सिया शादी से नाखुश थी और यही हत्या का मोटिव था। चेतन के साथ उसका रिश्ता, कैफे में हुई दोनों की मुलाकात और दोनों के प्लान को रिहर्सल से साबित करना होगा। सिर्फ ये साबित करना काफी नहीं होगा कि दोनों का व्यवहार संदिग्ध है, बल्कि ये फोन, चैट रिकॉर्ड, CCTV फुटेज से ये साबित करना होगा कि वो हत्या की साजिश कर रहे थे। मीर कहते हैं कि इसके अलावा सबसे जरूरी ये साबित करना होगा कि केतन गिरा कैसे? उस पॉइंट की ढलान, कहां पर गिरा, केतन के जूते, गिरने की दिशा, उनकी चोटें, फिसलने की संभावना, ये सभी चीजें मायने रखेंगी। कई संभावनाएं हो सकती हैं- केतन खद फिसले, या कोई बहस हुई, उस दौरान गिर गए, किसी एक ने धक्का दिया, या दोनों ने उकसाया, या हाथापाई में ऐसा हुआ। पुलिस को बाकी सभी संभावनाओं को खारिज करके ये साबित करना होगा कि केतन को धक्का दिया गया। सवाल-4: क्या पहले भी कोर्ट ने ऐसे फैसले दिए हैं? जवाब: हां, आरुषि-हेमराज हत्याकांड इसकी लैंडमार्क मिसाल है। 13 साल की आरुषि तलवार और तलवार दंपति के नौकर हेमराज की 2008 में नोएडा में हत्या कर दी गई थी। आरुषि की लाश उसके बेडरूम में, जबकि हेमराज की लाश छत पर मिली थी। केतन के मामले की तरह ही ये दोहरा हत्याकांड नेशनल लेवल पर सनसनी बन चुका था। आरुषि के माता-पिता- राजेश और नूपुर तलवार के बारे में कहा जा रहा था कि दोनों ने ऑनर-किलिंग की है। 2013 में CBI कोर्ट ने दोनों को दोषी भी करार दे दिया, लेकिन 4 साल बाद इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। सिया के वकील मीर ने ही उनका भी केस लड़ा था। इस मामले में भी हाई कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को लेकर 5 सिद्धांतों के आधार पर निचली अदालत का फैसला पलट दिया था। अभियोजन पक्ष ये साबित करने में नाकाम रहा था कि घटना की रात तलवार के घर में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकता था। मीर ने कोर्ट में ये कल्पना दी कि राजेश तलवार का कंपाउंडर, कृष्णा थडाराई को भी पहले संदिग्ध माना गया था। हो सकता है कि उसने हत्याएं की हों। तलवार दंपति को बचाने के लिए मीर को ये साबित करने की जरूरत नहीं थी कि कृष्णा ने असल में हत्याएं की थीं। बस उन्हें अपनी कल्पना को इतना भरोसेमंद बनाना था कि तलवार के दोषी होने पर संदेह पैदा हो जाए। ------- ये खबर भी पढ़िए… शादी से बचने के लिए सीधे मंगेतर की हत्या, मना क्यों नहीं कर सकी; रोमांटिक पोस्ट डाले, चार सुराग से सुलझी गुत्थी पुणे शहर से 64 किमी दूर लोहगढ़ किला। 18 जून 2026 की सुबह करीब 10 बजे किले की चोटी से एक चीख गूंजी। गार्ड्स पहुंचे, तो वहां मौजूद 20 साल की सिया ने बताया- मेरा मंगेतर केतन फिसलकर खाई में गिर गया है। सिया ने ही घरवालों को भी फोन किया। अगले दिन इंस्टाग्राम पर लिखा- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’ पूरी खबर पढ़िए…
हर साल 11 जुलाई की तारीख को दुनिया भर में 'विश्व जनसंख्या दिवस' (World Population Day) के रूप में मनाया जाता है. इस खास दिन की शुरुआत साल 1987 में तब हुई थी, जब वैश्विक आबादी ने 5 अरब का आंकड़ा छुआ था. आज 2026 में दुनिया की कुल आबादी करीब 8.2 अरब तक पहुंचने का अनुमान है. लेकिन इस बार का जनसंख्या दिवस भारत के लिए बेहद खास और मंथन करने वाला है, क्योंकि आबादी के मामले में हम अपने पड़ोसी देश चीन को पछाड़कर अब दुनिया के पहले पायदान पर काबिज हो चुके हैं.140 करोड़ से अधिक की इस विशाल जनसंख्या के साथ दुनिया का नेतृत्व करना हमारे लिए गर्व का विषय है या आने वाले संकट की चेतावनी? आइए देश की इस सबसे बड़ी पूंजी और इससे जुड़ी चुनौतियों का पूरा विश्लेषण समझते हैं.क्यों गर्व का कारण बन सकती है भारत की भारी आबादी?1. दुनिया का सबसे बड़ा और आकर्षक घरेलू बाजार140 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं की मौजूदगी भारत को दुनिया का सबसे आकर्षक और विशाल घरेलू बाजार (Domestic Market) बनाती है. हमारे यहां मोबाइल, कपड़े, डिजिटल सेवाएं, गाड़ियां, घर और शिक्षा का उपभोग करने वाले करोड़ों लोग हैं. जब किसी देश में खरीदार अधिक होते हैं, तो वहां प्रोडक्शन बढ़ता है, नई कंपनियां आती हैं और विदेशी निवेश (FDI) खिंचा चला आता है. भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटल मार्केट और गांवों तक पहुंचा ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम इसका सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण है.2. 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) यानी युवाओं की शक्तिजहां एक तरफ जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और कई यूरोपीय देश बुजुर्ग होती आबादी और घटते कामगारों की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं भारत इस मामले में बेहद भाग्यशाली है.65% युवा आबादी: भारत में लगभग 65 फीसदी आबादी युवाओं की है, जो कामकाजी उम्र में हैं.जब किसी देश में आश्रितों (बुजुर्गों और बच्चों) के मुकाबले कमाने वाले और टैक्स देने वाले हाथ ज्यादा होते हैं, तो वह देश आर्थिक मोर्चे पर दोगुनी रफ्तार से दौड़ सकता है. भारत के पास लंबे समय तक काम करने वाली यह सबसे बड़ी पूंजी है.चुनौतियां जो बढ़ा रही हैं चिंता की लकीरेंलेकिन यह 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' यानी युवा शक्ति हमें अपने आप लाभ नहीं देगी. इसके लिए देश को कई मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा, क्योंकि बड़ी आबादी अपने साथ कुछ गंभीर चिंताएं भी लेकर आती है:1. रोजगार और स्किल गैप की बड़ी खाईहर साल भारत में करोड़ों युवा नौकरी की उम्र में कदम रखते हैं. लेकिन सिर्फ डिग्री थमा देने से रोजगार नहीं मिलता. आज के कॉर्पोरेट और तकनीकी बाजार को जिस एडवांस स्किल की जरूरत है, कॉलेज की पढ़ाई और उसके बीच एक बड़ा अंतर (Skill Gap) है. भारत को कंस्ट्रक्शन, एआई (AI), रोबोटिक्स, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर्स में नए अवसर पैदा करने होंगे. साथ ही, युवाओं को सिर्फ नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि 'स्टार्टअप' के जरिए नौकरी देने वाला (Job Creator) बनाना होगा.2. महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े डरावने आंकड़ेराष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की 57 फीसदी महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं, जो पिछले सर्वे (53%) के मुकाबले और बढ़ गया है. यदि देश की आधी आबादी यानी महिलाएं ही स्वस्थ नहीं रहेंगी, तो आने वाली पीढ़ी भी शारीरिक रूप से कमजोर होगी. स्वास्थ्य सेवाओं को चुनावी वादों से अलग हटकर बुनियादी स्तर पर मजबूत करना ही होगा.3. प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण पर भारी दबावबढ़ती आबादी का सीधा प्रहार हमारे सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर हो रहा है:जल संकट: देश के कई बड़े शहरों में भूजल (Groundwater) का स्तर लगातार नीचे जा रहा है और पीने के पानी की किल्लत बढ़ रही है.शहरीकरण की मार: शहरों में बढ़ती भीड़ के कारण ट्रैफिक, वायु प्रदूषण और कचरा प्रबंधन (Waste Management) बेकाबू होता जा रहा है. खेती योग्य जमीनें सिकुड़ रही हैं और जंगलों का सफाया हो रहा है.4. महिलाओं की शिक्षा और श्रम में भागीदारीजनसंख्या नियंत्रण और देश के विकास का सबसे सीधा रास्ता महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों से जुड़ा है. जब लड़कियां शिक्षित होकर कार्यबल (Workforce) का हिस्सा बनती हैं, तो परिवार नियोजन (Family Planning) किसी दबाव का नहीं बल्कि जागरूकता का विषय बन जाता है. आधी आबादी को घरों में कैद रखकर या पीछे छोड़कर कोई भी देश महाशक्ति बनने का सपना पूरा नहीं कर सकता.चीन की घटती आबादी से क्या है सीख?चीन ने लंबे समय तक सख्त जनसंख्या नीतियां अपनाईं, जिसके दुष्परिणाम आज उसके सामने हैं. वहां की आबादी अब धीरे-धीरे घटने लगी है और बुजुर्गों की संख्या काम करने वाले युवाओं से ज्यादा हो रही है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. भारत के लिए यह सबक है कि आज का जो युवा वर्कफोर्स है, वह हमेशा युवा नहीं रहेगा. हमें इसी दशक में उन्हें सही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार देकर भविष्य के लिए तैयार करना होगा.निष्कर्ष: बोझ नहीं, ताकत बनेगी यह आबादीभारत का दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश बनना केवल जश्न मनाने या डरने का विषय नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है. यह विशाल आबादी हमारी सबसे बड़ी ताकत तभी बन पाएगी जब हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और साफ पानी मिलेगा. तभी हम इस जनसांख्यिकीय अवसर का सही लाभ उठा पाएंगे और भारत वैश्विक पटल पर एक आत्मनिर्भर महाशक्ति बनकर उभरेगा.
ट्रंप बोले- ईरान के साथ युद्धविराम खत्म, लेकिन बातचीत जारी; तेहरान ने वार्ता की अटकलों से किया इनकार
ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि पिछले महीने जिस युद्धविराम व्यवस्था के तहत दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ था, वह अब प्रभावी नहीं रही। इसके बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और दोनों पक्ष प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवाद के विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
बहामास से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. देश के 53वें स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रव्यापी जश्न के बीच एक छोटा विमान समुद्र में क्रैश हो गया, जिससे 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. यह भीषण हादसा शुक्रवार को बहामास की राजधानी नासाउ के पश्चिम में स्थित नॉर्थ एंड्रोस के पास समंदर में हुआ. प्रधानमंत्री फिलिप ब्रेव डेविस ने इस भयानक दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे पूरे देश के लिए एक बड़ा और दुखद दिन बताया है. इस हादसे के तुरंत बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए फ्लेमिंगो एयर (Flamingo Air) की सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है.बचा था सिर्फ एक शख्स, अस्पताल में उसने भी तोड़ा दम'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस समय पूरा देश आजादी की खुशियां मना रहा था, उसी वक्त इस विमान हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. प्रधानमंत्री डेविस ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान शुरुआत में एक व्यक्ति के जिंदा बचने की उम्मीद जागी थी, जिसे तुरंत मेडिकल इमरजेंसी के लिए ले जाया गया, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया. इस तरह प्लेन में सवार सभी 10 लोगों की जान चली गई. प्रशासन ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल के कारण अभी तक मारे गए यात्रियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है.लिंडेन पिंडलिंग एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही समंदर में समाया सेसना विमानबहामास की 'एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन अथॉरिटी' ने हादसे की शुरुआती जानकारी साझा की है. रिपोर्ट के मुताबिक:रूट: यह विमान नासाउ के मुख्य लिंडेन पिंडलिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सैन एंड्रोस के लिए रवाना हुआ था.विमान का मॉडल: क्रैश होने वाला विमान सेसना 402 (Cessna 402) था, जो बहामास में ही रजिस्टर्ड था.जांच: उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद नॉर्थ एंड्रोस के पास प्लेन का नियंत्रण खो गया और वह सीधे पानी में जा गिरा. विमानन अधिकारी अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि क्रैश के पीछे कोई तकनीकी खराबी थी या मौसम की वजह से यह हादसा हुआ.एक ही दिन में दो बड़ी घटनाएं, बाल-बाल बचे थे मायागुआना जा रहे यात्रीहैरानी की बात यह है कि शुक्रवार को फ्लेमिंगो एयरलाइन के साथ एक नहीं बल्कि दो बड़ी सुरक्षा चूक की घटनाएं सामने आईं. बहामास की विमानन मंत्री जोबेथ कोलबी-डेविस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि इस भयानक क्रैश से ठीक पहले एयरलाइन का एक अन्य विमान मायागुआना के लिए उड़ान भर रहा था. तभी पायलट को विमान में किसी गंभीर तकनीकी खराबी का अहसास हुआ.पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को तुरंत वापस नासाउ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंड कराया. राहत की बात यह रही कि जैसे ही सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया, उस विमान में अचानक भीषण आग लग गई. एक ही दिन में हुई इन दोनों गंभीर घटनाओं के बाद विमानन मंत्रालय ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए फ्लेमिंगो एयर का 'एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट' तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.
मिडिल ईस्ट (Middle East) में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गए हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच अमेरिका द्वारा ईरान के अहम सैन्य ठिकानों पर किए गए ड्रोन व मिसाइल हमलों और जवाब में ईरान द्वारा कतर, बहरीन व यूएई (UAE) में अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किए जाने के बाद युद्ध की स्थिति बनी हुई है।पिछले दो दिनों से ईरान को भीषण हमले की धमकी दे रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सुर शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को अचानक बदलते नजर आए। ट्रंप अब सैन्य हमले की बात छोड़कर फिर से कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं, हालांकि उन्होंने इसका श्रेय ईरान के पाले में डाल दिया है।डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: सीजफायर खत्म, लेकिन बातचीत को तैयारअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने दोबारा बातचीत की टेबल पर लौटने की इच्छा जताई है। ईरान की इस पहल के बाद अमेरिका भी राजनयिक वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, ट्रंप ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच पूर्व में हुआ अंतरिम सीजफायर (युद्ध विराम) अब आधिकारिक रूप से खत्म हो चुका है, लेकिन भविष्य में बड़े युद्ध को टालने के लिए बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा।दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिका की उप राजदूत टैमी ब्रूस ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप क्षेत्र में स्थायी शांति चाहते हैं, लेकिन उन्होंने एक कड़ी शर्त भी रखी। ब्रूस ने कहा कि यदि ईरान समर्थित ताकतों द्वारा नागरिक ठिकानों या अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जहाजों (Commercial Ships) पर कोई भी हमला किया गया, तो अमेरिका उसका माकूल और आक्रामक जवाब देगा।इजरायल के पीएम नेतन्याहू की दो टूक: ईरान से जंग अभी खत्म नहीं हुईजहां एक तरफ अमेरिका बातचीत की वकालत कर रहा है, वहीं उसके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल का रुख बेहद आक्रामक बना हुआ है। इजरायल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने इजराइली एयर फोर्स के एक कार्यक्रम में दो टूक कहा कि ईरान के साथ जारी यह महाजंग अभी खत्म नहीं हुई है।नेतन्याहू ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर (परमाणु) हथियार हासिल नहीं करने देगा, चाहे कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता हो या नहीं। उन्होंने दावा किया कि यदि इजरायल ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक न की होती, तो ईरान अब तक परमाणु बम बना चुका होता और देश हर आगामी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।ईरान का पलटवार: हमला हुआ तो इजरायल का अस्तित्व मिट जाएगाबेंजामिन नेतन्याहू की सीधी सैन्य धमकी के बाद ईरान ने भी बेहद आक्रामक तेवर दिखाए हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना (IRNA) के मुताबिक, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलगदर ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के किसी भी परमाणु या रणनीतिक ठिकाने पर हमला हुआ, तो उसका ऐसा घातक जवाब दिया जाएगा जिसके बाद इजरायल को दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा पाएगी।अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव से जुड़े 5 बड़े अंतरराष्ट्रीय अपडेट्स:अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें: अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए कई मिसाइलें दागीं। हालांकि, इन मित्र देशों की एयर डिफेंस प्रणालियों ने अधिकांश मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है।रणनीतिक रेलवे ब्रिज पर हमला: ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी वायुसेना ने उत्तरी ईरान में चीन और रूस की साझेदारी से बने एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक रेलवे पुल को क्रूज मिसाइल से उड़ा दिया है। ईरान ने इसे सीधा 'युद्ध अपराध' बताया है, जबकि पेंटागन ने इसे ईरान द्वारा अंतरिम शर्तों के उल्लंघन का नतीजा करार दिया।होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही ठप: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ने के कारण दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही शुक्रवार को भी पूरी तरह ठप रही। वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में करीब 1% का उछाल दर्ज किया गया है।ईरान का 1 करोड़ बैरल तेल का इमरजेंसी एक्सपोर्ट: अमेरिका द्वारा दोबारा पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू किए जाने के डर से ईरान ने एक ही रात के भीतर आनन-फानन में कम से कम 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल निर्यात के लिए विभिन्न गुप्त जहाजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय रूट पर रवाना कर दिया है।लेबनान पर इजराइली ड्रोन स्ट्राइक: लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (NNA) के मुताबिक, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह प्रांत में दो बड़े ड्रोन हमले किए हैं। ये हमले कफर रेमान और नबातियेह अल-फौका कस्बों में हिजबुल्लाह के ठिकानों को देखकर किए गए, हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।वैश्विक मध्यस्थता की कोशिशें तेजबीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दो दिनों की सीधी सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों की ओर से गोलाबारी थमी हुई है। इस वैश्विक संकट को टालने और दोनों देशों को दोबारा 18 जून को हुए अंतरिम समझौते (MoU) के रास्ते पर लाने के लिए मध्यस्थ देश— कतर, मिस्र (Egypt) और पाकिस्तान पर्दे के पीछे से सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती से फोन पर वार्ता कर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के सेफ कॉरिडोर को तुरंत बहाल करने पर जोर दिया है।
गंभीर आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान में बुनियादी खाद्य पदार्थों की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। सिंध प्रांत की राजधानी और पाकिस्तान की आर्थिक धड़कन कहे जाने वाले कराची शहर में इन दिनों आटे की कीमतों को नियंत्रित करने को लेकर प्रांतीय सरकार और आटा मिल उद्योग के बीच एक बड़ा और हिंसक प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सख्त चेतावनियों और नए आधिकारिक नोटिफिकेशन के बावजूद, बाजार के बड़े व्यापारियों और मिल मालिकों ने सरकारी आदेशों को पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया है। इस टकराव के कारण आने वाले दिनों में पूरे कराची महानगर में आटे की सप्लाई चेन पूरी तरह से ठप होने और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा होने की गंभीर आशंका बढ़ गई है।कागजों पर सिमटीं सरकारी दरें: नोटिफिकेशन के बाद भी ऊंचे दामों पर बिक रहा है अनाज'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' द्वारा जारी एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, कराची के स्थानीय प्रशासन ने बेलगाम हो रही महंगाई पर लगाम लगाने के लिए आनन-फानन में एक नया प्राइस-कंट्रोल नोटिफिकेशन जारी किया था। इस नए सरकारी आदेश के तहत सामान्य श्रेणी के आटे की खुदरा कीमत 125 पाकिस्तानी रुपये (PKR) प्रति किलोग्राम, महीन (फाइन) आटे की कीमत 135 PKR प्रति किलोग्राम और शुद्ध चक्की के आटे की दर 145 PKR प्रति किलोग्राम तय की गई थी। इसके साथ ही थोक बाजार के लिए भी कीमतें क्रमशः 122 और 132 रुपये निर्धारित की गई थीं। परंतु, धरातल पर सरकार का यह आदेश पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ है। शहर के खुदरा बाजारों में आज भी सामान्य आटा 145 से 150 रुपये और बारीक तथा महीन आटा 160 से 170 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुलेआम बेचा जा रहा है।मिल मालिकों की खुली बगावत: गेहूं की बढ़ती इनपुट लागत का हवाला देकर फैसले को मानने से इनकारसरकारी नियंत्रण के खिलाफ पाकिस्तान के आटा मिल संघ (Flour Mills Association) और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। उद्योगपतियों का साफ तर्क है कि सरकार द्वारा एकतरफा तरीके से तय की गई ये कागजी दरें व्यावहारिक नहीं हैं और वे इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि ओपन मार्केट में गेहूं की इनपुट लागत (Wheat Procurement Cost) और बिजली-ईंधन के दामों में जो बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, सरकार ने इस नए नोटिफिकेशन में उसकी पूरी तरह अनदेखी की है। घाटे में धंधा करने से साफ मना करते हुए मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर उन पर जबरन सरकारी रेट थोपने की कोशिश की गई या प्रशासनिक कार्रवाई की गई, तो वे अपनी मिलों में ताला लगा देंगे, जिससे पूरे देश में गेहूं का अकाल पड़ सकता है।सप्लाई चेन टूटने की कगार पर: आम जनता के बीच जमाखोरी और भुखमरी का बढ़ा खौफइस बड़े प्रशासनिक और व्यापारिक गतिरोध का सीधा खामियाजा कराची की गरीब और मध्यमवर्गीय जनता को भुगतना पड़ रहा है। बाजार में भारी अनिश्चितता के चलते खुदरा दुकानदारों ने आटे की जमाखोरी शुरू कर दी है, जिससे कई इलाकों में राशन की किल्लत पैदा हो गई है। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और मिल मालिकों के बीच जल्द ही कोई व्यावहारिक समझौता नहीं हुआ, तो आने वाले 48 घंटों में कराची की आटा मंडियां पूरी तरह से बंद हो सकती हैं। यह संकट ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कठिन शर्तों और भारी विदेशी कर्ज के नीचे दबा हुआ है, जिससे शहबाज शरीफ सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बहामास में विमान त्रासदी, 10 लोगों की मौत से मातम
बहामास में शुक्रवार को एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद सरकार ने 'फ्लेमिंगो एयर' की उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया है
दुनिया भर में तेजी से पैर पसार रहे एक नए सुरक्षा संकट से निपटने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका अगले सप्ताह एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) के तत्वावधान में आयोजित होने जा रही इस विशेष बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक स्तर पर 'राजनीतिक आतंकवाद' (Political Terrorism) के खतरनाक ढंग से फिर से उभरने पर लगाम लगाना है। वाशिंगटन ने इस रणनीतिक विमर्श का हिस्सा बनने के लिए भारत सहित दुनिया भर के 60 प्रमुख देशों को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। इस बैठक को लेकर वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी ज्यादा तेज हो गई है क्योंकि इसे वैश्विक सुरक्षा ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करने वाले एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।16 जुलाई को वाशिंगटन में जुटेगी दुनिया: एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका के मंत्रियों का लगेगा जमावड़ाप्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'वाशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) द्वारा ब्रेक की गई एक विशेष खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैश्विक सम्मेलन आगामी 16 जुलाई 2026 को अमेरिकी विदेश विभाग के मुख्यालय में आयोजित किया जाएगा। इस हाई-वोल्टेज बैठक में यूरोप, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया महाद्वीप के दर्जनों शक्तिशाली देशों के विदेश मंत्रियों और गृह मंत्रियों (Foreign and Home Ministers) के सीधे तौर पर शामिल होने की पूरी उम्मीद है। अमेरिका इस समय दुनिया भर में बढ़ रहे वैचारिक और राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक आंदोलनों को अपनी आंतरिक और वैश्विक संप्रभुता के लिए एक अत्यंत उभरता हुआ और गंभीर खतरा मान रहा है, जिसे रोकने के लिए वह एक मजबूत बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग और खुफिया नेटवर्क तैयार करना चाहता है।हिंसक अति-वामपंथी नेटवर्क से खतरा: अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक्स पर किया बड़ा दावाइस महा-सम्मेलन की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक प्रवक्ता टामी पिगाट (Tommy Pigott) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। पिगाट ने स्पष्ट तौर पर कहा, 'वैश्विक पटल पर हिंसक अति-वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद (Violent Far-Left Political Terrorism) का यह खतरनाक पुनरुत्थान कोई नई या अचानक उत्पन्न हुई बात नहीं है। यह एक बेहद पुराना और शातिर खतरा है, जो अब डिजिटल युग में मजबूत अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, सीमा पार वित्तीय कड़ियों और नए खतरनाक गठजोड़ों के साथ एक बार फिर से दुनिया के सामने आ रहा है।' उनके इस बयान से साफ है कि वाशिंगटन इस बार वैचारिक रूप से प्रेरित उग्रवाद के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के मूड में है।भारत के शामिल होने पर सस्पेंस: नई दिल्ली के कूटनीतिक रुख पर टिकी पूरी दुनिया की नजरेंइस पूरी अंतरराष्ट्रीय कवायद के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बेहद दिलचस्प और सस्पेंस से भरा मोड़ सामने आया है। कुछ वरिष्ठ स्वतंत्र विश्लेषकों और यूरोपीय कूटनीतिक सूत्रों से मिली अंदरूनी जानकारी के अनुसार, ऐसी प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं कि भारत शायद इस विशिष्ट बैठक में अपना कोई आधिकारिक प्रतिनिधि या उच्च स्तरीय कूटनीतिक शिष्टमंडल न भेजे। हालांकि नई दिल्ली ने अभी तक इस आमंत्रण को लेकर अपनी किसी आधिकारिक नीति या फैसले की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आतंकवाद की परिभाषा और पश्चिमी देशों द्वारा वैचारिक उग्रवाद को देखने के चश्मे को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाता रहा है, जिसके चलते इस समिट में भारत की भागीदारी पर सस्पेंस गहरा गया है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब तक के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दो सप्ताह पूर्व हुआ सीजफायर पूरी तरह से खटाई में पड़ चुका है और ईरान की प्रमुख तटीय पोर्ट सिटीज—बंदर अब्बास, केश्म, मूसा और रणनीतिक चाबहार में पिछले चार दिनों से भीषण धमाकों की आवाजें गूंज रही हैं। तनाव की मुख्य वजह ईरान द्वारा होर्मुज के भीतर एक दूसरा 'समानांतर समुद्री रास्ता' तैयार करना है, जिस पर वह अपना पूर्ण संप्रभु नियंत्रण का दावा कर रहा है। ईरान के इस आक्रामक कदम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 24 घंटे का सख्त अल्टीमेटम जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जलडमरूमध्य के सभी रास्तों को सार्वजनिक रूप से नहीं खोला गया, तो ईरान को बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।होर्मुज में 'कॉरिडोर' की जंग: वैश्विक तेल सप्लाई चेन ठप होने से दुनिया पर ऊर्जा संकट का सायाइस समय खाड़ी क्षेत्र में चल रहा सैन्य टकराव किसी कूटनीतिक मतभेद का परिणाम नहीं, बल्कि सीधे तौर पर होर्मुज के भीतर समुद्री व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण स्थापित करने की जंग है। अमेरिका जहां अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए एक स्वतंत्र वैश्विक कॉरिडोर चलाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान अपने सुझाए समानांतर रास्ते से न गुजरने वाले अमेरिकी सहयोगी खाड़ी देशों के कमर्शियल शिप्स पर लगातार मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमले कर रहा है। आपको बता दें कि पूरी दुनिया के कुल तेल परिवहन का पांचवां हिस्सा (20%) इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इससे पहले 28 फरवरी को भड़के युद्ध के कारण इस संकीर्ण समुद्री रास्ते में हजारों कमर्शियल जहाज फंस गए थे, जिससे वैश्विक स्तर पर हाहाकार मच गया था।ट्रंप प्रशासन की सख्त शर्त: बिना किसी शुल्क के खुलेगा रूट, वरना अमेरिकी सेना करेगी बड़ी कार्रवाईएक्सियोस (Axios) की ताजा खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्रीय मध्यस्थों (ओमान और कतर) के जरिए तेहरान को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश भिजवाया है। वाशिंगटन चाहता है कि ईरान बिना किसी देरी के सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरा शिपिंग रूट हर देश के लिए खुला है और वह किसी भी कमर्शियल वेसल (व्यापारिक जहाज) को निशाना नहीं बनाएगा। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी प्रकार का अवैध टैक्स या टोल शुल्क वसूलना बंद करे। इस बड़े गतिरोध को सुलझाने के लिए शनिवार को मस्कट में ओमान, ईरान और अमेरिकी अधिकारियों के बीच एक आपातकालीन त्रिपक्षीय बैठक होने की संभावना है।अमेरिकी वायुसेना की भीषण बमबारी के बाद ईरान पंगु: तटीय बुनियादी ढांचे पर दागी गईं मिसाइलेंडोनाल्ड ट्रंप का यह बेहद आक्रामक अल्टीमेटम अमेरिकी वायुसेना (US Air Force) द्वारा हाल ही में ईरानी धरती पर की गई सबसे बड़ी और विनाशकारी बमबारी के ठीक बाद आया है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों ने पश्चिमी ईरान में स्थित महत्वपूर्ण बिजली उपकरण निर्माण संयंत्रों, बड़े पावर ग्रिडों और समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले (Desalination Plants) तटीय बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए दावा किया था कि इस भीषण अटैक का उद्देश्य ईरान की उस आर्थिक और तकनीकी रीढ़ को तोड़ना है, जिसका उपयोग वह खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य आक्रामकता और ड्रोन ऑपरेशन्स को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है। हालांकि, इस भारी तबाही के बावजूद ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों पर ड्रोन हमले जारी रखे हैं, जिससे युद्ध की आग भड़कने की पूरी आशंका बनी हुई है
'शी चिनफिंग के नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद पर विचार और दुनिया' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी चीन के निंगश्या हुई जाति स्वायत्त प्रदेश के यिनछुआन में आयोजन हुई
फिलीपींस में तबाही – भूस्खलन से 15 की मौत, ‘बावी’ का कहर
ताइवान और पूर्वी चीन की ओर बढ़ रहे विनाशकारी तूफान बावी के असर से फिलीपींस में भूस्खलन से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गयी है
चीनी राज्य परिषद ने '15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्बन पीकिंग कार्य योजना' जारी की
हाल ही में, चीनी राज्य परिषद ने '15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्बन पीकिंग कार्य योजना' जारी की, जिसमें 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान कार्बन उत्सर्जन को चरम पर पहुंचाने के लिए कार्य योजना की रूपरेखा दी गई है।
मस्कट में जयशंकर-अलबुसैदी की मुलाकात, व्यापार से लेकर रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर बनी सहमति
विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने शुक्रवार को मस्कट में अपने ओमानी समकक्ष सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ओमान के बीच रिश्तों और खाड़ी क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा की।
भारत में शरण ले चुकीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने भविष्य को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज ऐलान किया है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। रॉयटर्स को दिए एक विशेष इंटरव्यू में शेख हसीना ने खुलासा किया है कि वह और उनके सहयोगी इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटेंगे। उन्होंने बेहद भावुक लहजे में कहा, अगर मौत आती है, तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी मातृभूमि पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं। हसीना ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि वहां कदम रखते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी हत्या भी हो सकती है, लेकिन वे प्रत्यर्पण का इंतजार करने के बजाय खुद स्वेच्छा से जाकर सरेंडर करेंगी।एंट्री करते ही गिरफ्तारी: जेल या फांसी का फंदा?शेख हसीना जैसे ही हवाई, जमीनी या समुद्री मार्ग से बांग्लादेश की धरती पर कदम रखेंगी, इमिग्रेशन और सीमा अधिकारी उन्हें तुरंत हिरासत में ले लेंगे। साल 2024 के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़ने वाली हसीना को वहां की युद्ध अपराध अदालत पिछले साल नवंबर में ही मौत की सजा सुना चुकी है। चूंकि गैर-मौजूदगी में दी गई इस सजा के खिलाफ अपील करने की 30 दिनों की कानूनी समयसीमा खत्म हो चुकी है, इसलिए उनकी मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। अब कोर्ट का फैसला बरकरार रहने पर उन्हें लंबी जेल या सीधे फांसी की सजा हो सकती है।'अदालत के तमाशे को बेनकाब करना मेरा मकसद'अवामी लीग की नेता ने स्पष्ट किया कि वे देश से भागकर निर्वासन में जीने के बजाय बांग्लादेश में कानूनी मुकदमों का सामना करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, मैं न्याय में विश्वास करती हूं। मैं वहां जाकर कोर्ट की कार्यवाही के जरिए यह साबित करना चाहती हूं कि यह अदालत कितनी बकवास और एक तमाशा है। हालांकि, ढाका का वर्तमान प्रशासन लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग कर रहा है, जिस पर नई दिल्ली कानूनी विचार कर रही है। लेकिन हसीना के इस नए फैसले ने अब पूरी पटकथा को बदल कर रख दिया है।
‘ईरान ने ट्रम्प की हत्या के लिए एक नया प्लान तैयार किया है।’ ये खुफिया इनपुट इजराइल ने अमेरिका को दिया है। इसके बाद ईरान को लेकर ट्रम्प के तेवर वापस सख्त हो गए। वो ईरानी नेताओं को ‘गंदा’ और ‘शैतान’ बताने लगे। अमेरिका ने 7-8 जुलाई की रात ईरान के 80 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर दी। क्या ईरान वाकई ट्रम्प की हत्या का प्लान बना रहा या सिर्फ इजराइल की चाल है, क्या इसी उकसावे में अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला किया; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: इजराइल ने ट्रम्प की हत्या की साजिश से जुड़े क्या खुफिया इनपुट दिए? जवाबः 9 जुलाई को सबसे पहले अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में एक रिपोर्ट छपी। इसमें कहा गया कि इजराइल ने अमेरिका को इनपुट दिया है कि ईरान ने ट्रम्प की हत्या की साजिश रची है। इसके बाद अमेरिकी मीडिया चैनल CNN ने बताया कि ये इनपुट इसी हफ्ते दिया गया। रिपोर्ट में दो सोर्सेज के हवाले से कहा गया… सवाल-2: क्या इसी खुफिया इनपुट से भड़के ट्रम्प ने ईरान पर दोबारा धावा बोला? जवाबः सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता। लेकिन इसके 3 संकेत मिलते हैं… 1. ईरानी नेताओं को लेकर ट्रम्प के तेवर बदले 2. ट्रम्प ने खुद कहा- ‘उनकी ‘किल लिस्ट में सबसे ऊपर’, जहाज बदला 3. नेतन्याहू से नाराजगी के बीच फोन पर बात सवाल-3: क्या इजराइल जानबूझकर ट्रम्प को भड़काने की कोशिश कर रहा? जवाबः पिछले 2 साल में अमेरिका ने ईरान पर तीन हमले किए। हर हमले से पहले इजराइल ने अमेरिका को कोई-न-कोई खुफिया इनपुट दिया, जिसने ट्रम्प भड़क गए… जून 2025, ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिका की स्ट्राइक इजराइली खुफिया विभाग ने ट्रम्प को इनपुट दिया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की तैयारी में है। अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के मुताबिक ‘इजराइलियों ने ट्रम्प को यकीन दिलाया कि सैन्य विकल्प खोलने से ईरान के साथ न्यूक्लियर डील आसान हो जाएगी। ट्रम्प प्रशासन भी नेतन्याहू को रोकने में सक्षम नहीं था। ऐसे में ट्रम्प को उनका समर्थन करना पड़ा।' फरवरी 2026, ईरान के खिलाफ जंग छेड़ना 28 फरवरी 2026 के हमले से पहले 11 फरवरी को नेतन्याहू, ट्रम्प से मिलने व्हाइट हाउस गए थे। उन्होंने ट्रम्प को 1 घंटे का प्रेंजेंटेशन देकर बताया कि कैसे ईरान पर उनका हमला सफल होगा। लेकिन ट्रम्प हमले के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद नेतन्याहू ने ट्रम्प से कहा था कि खामेनेई को मारकर 2024 में उन पर हुए हमले का बदला लेने का सबसे अच्छा मौका है। दरअसल राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान एक हमलावर ने ट्रम्प पर गोली चलाई थी। अमेरिकी खुफिया विभाग के मुताबिक, इसमें ईरान का हाथ था। जुलाई 2026, समझौते के बावजूद ईरान पर हमला इसबार भी इजराइल ने ट्रम्प की हत्या की साजिश का खुफिया इनपुट दिया। दरअसल, अमेरिका ने ईरान के साथ समझौते की घोषणा की, तो इजराइल इससे खुश नहीं था। नेतन्याहू ने तो ये तक कहा था कि वे इस डील को मानने के लिए बाध्य नहीं है। CNN के मुताबिक, जिन सोर्सेज ने ये बताया कि इजराइल ने अमेरिका को ट्रम्प पर हमले का अलर्ट दिया है, उन्हीं में से एक सोर्स ने ये भी कहा कि ये रिपोर्ट ट्रम्प के फैसले को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। क्योंकि ट्रम्प इस समय सोच रहे हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज की जाए या नहीं। इस इजराइली रिपोर्ट के डिटेल्स भी स्पष्ट नहीं हैं। साथ ही अमेरिका ने न ही ऐसी किसी साजिश की खुद कोई जांच की है और न ही वह इस पर नजर रख रहा है। इसलिए ये इजराइल का उकसावा ज्यादा लग रहा है। इजराइली अखबार ‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ में ये भी दावा किया गया है कि इजराइल दोबारा ईरान पर हमले में अमेरिका के साथ शामिल होना चाहता है। नेतन्याहू सिर्फ अमेरिका और ट्रम्प से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सवाल-4: इजराइल की बातों में आकर अमेरिका को क्या कीमत चुकानी पड़ी? जवाबः इजराइल पर भरोसा कर ईरान पर हमले करने से अमेरिका को आर्थिक और सैन्य नुकसान हुआ है, ट्रम्प को घरेलू आलोचना झेलनी पड़ रही है… 10 लाख करोड़ रुपए तबाह हो गए: अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, जंग के पहले 6 दिनों में ही अमेरिका ने 11.3 बिलियन डॉलर, यानी करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। जंग के दौरान अमेरिका में पेट्रोल के दाम 40% तक बढ़ गए थे।ईरान के साथ जंग में अमेरिका अबतक 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर चुका है। 42 जेट गंवाए, करोड़ों के रडार सिस्टम को नुकसान: पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, जंग के दौरान अमेरिका ने 42 जेट गंवाए हैं। इनमें करीब 282 करोड़ रुपए के चार F-15E फाइटर जेट और करीब 534 करोड़ रुपए के तीस MQ-9 रीपर ड्रोन भी शामिल हैं। कतर के अमेरिकी बेस पर तैनात FP132 रडार सिस्टम नुकसान पहुंचा है। ईरानी सेना ने अमेरिका के एडवांस डिफेंस सिस्टम THAAD और पैट्रियट को भी डैमेज किया है। ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग 25% घटी: ईरान के साथ जंग छेड़ने से अमेरिकी जनता खुश नहीं है। जनवरी में जब ट्रम्प को दूसरी बार राष्ट्रपति बने 1 साल पूरे हुए थे, उनकी अप्रूवल रेटिंग 52% थी। अप्रूवल रेटिंग, यानी एक सर्वे के जरिए पता करना कि कितने प्रतिशत लोग किसी नेता, सरकार या नीति से खुश हैं। 10 जुलाई को ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग सिर्फ 39% रह गई है। अमेरिका के कई शहरों में उनके खिलाफ ‘नो किंग्स’ प्रोटेस्ट हो रहे हैं। इसके अलावा ईरान जंग को लेकर अमेरिका के टारगेट भी पूरे नहीं हुए। ट्रम्प ने जंग के 3 मुख्य टारगेट बताए थे- ईरान में सत्ता परिवर्तन, उसके न्यूक्लियर और बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर रोक, ईरानी नेवी का खात्मा। 4 महीने बाद भी इनमें से कोई टारगेट पूरा नहीं हो पाया है। सवाल-5: क्या वाकई अभी ईरान ट्रम्प को मारने की कोई साजिश कर रहा है? जवाबः कुछ अमेरिकी रिपोर्ट्स के अलावा अभी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि ईरान ने ट्रम्प को मारने के लिए कोई नया प्लान बनाया है। हालांकि 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी टॉप जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद कई बार ट्रम्प को मारने की धमकी दी गई, कुछ साजिशें हुईं और एक बार ट्रम्प पर हमला भी हुआ… --------- ये खबर भी पढ़िए… ‘हमारे पास भारत है’, नेतन्याहू ने जेडी वेंस को क्यों दिया ऐसा जवाब; भारत-इजराइल की ‘पक्की दोस्ती’ के पीछे की कहानी 5 जुलाई को इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- अमेरिका ही नहीं, बल्कि हमारे कुछ और दोस्त भी हैं। जैसे- 1.4 अरब आबादी वाला भारत। नेतन्याहू का ये बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जवाब था। वेंस ने पिछले महीने कहा था कि ट्रम्प दुनिया के इकलौते ताकतवर देश के नेता हैं, जो इजराइल से सहानुभूति रखते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की जताई इच्छा, अदालत में आत्मसमर्पण करने का किया दावा
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर विभिन्न मामले दर्ज किए गए हैं, जिसके कारण अनेक लोग सार्वजनिक जीवन से दूर रहने या छिपकर रहने को मजबूर हैं।
यही मैं भारत के साथ कर रहा हूं, इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच नेतन्याहू ने क्यों लिया भारत का नाम
हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बयान वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका के साथ चल रही अनबन और बढ़ते तनाव के बीच नेतन्याहू का 'भारत का नाम लेना' कई गंभीर संकेत दे रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि 'जो मैं भारत के साथ कर रहा हूं, वही इजरायल के लिए भी अपनाऊंगा।' इस बयान ने न केवल विशेषज्ञों को चौंकाया है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इजरायल अब अपने रणनीतिक संबंधों के लिए भारत को एक 'मॉडल' के रूप में देख रहा है? आइए समझते हैं इजरायल का यह नया कूटनीतिक गेम प्लान।क्या भारत को 'रोल मॉडल' मान रहे नेतन्याहू?नेतन्याहू के इस बयान के गहरे अर्थ निकाले जा रहे हैं। भारत और इजरायल के बीच पिछले एक दशक में रक्षा, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में जो मजबूत साझेदारी बनी है, वह दुनिया के लिए एक उदाहरण है। भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) के लिए जाना जाता है, यानी किसी एक महाशक्ति के दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के फैसले लेना। नेतन्याहू का यह इशारा संभवतः इसी ओर है कि इजरायल अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर भारत की तरह खुद को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर विदेश नीति के साथ ढालना चाहता है।इजरायल का नया प्लान: स्वायत्तता और आत्मनिर्भरताइजरायल का नया प्लान केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भी एक बड़ा कदम है। नेतन्याहू का मानना है कि जिस तरह भारत ने अपनी शर्तों पर वैश्विक शक्तियों के साथ संबंध बनाए हैं, उसी तरह इजरायल भी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए अब किसी एक देश के भरोसे नहीं रहना चाहता। इस कूटनीति का सीधा मतलब है कि इजरायल अब अपने पड़ोसियों और अन्य वैश्विक मंचों पर अपनी शर्तों को प्राथमिकता देगा। यह बदलाव निश्चित रूप से मिडिल ईस्ट के समीकरणों को बदल सकता है और आने वाले समय में भारत-इजरायल के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ कर सकता है।
सूत्रों के हवाले से कहा गया कि इजरायल ने अमेरिका को हाल ही में ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है जिसमें ट्रंप की सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरे का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही ऊंचे स्तर पर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के तीसरे और अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में इस ऐतिहासिक पहल की घोषणा की। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद रहे।
कंगाली और भारी कर्ज के बोझ से दबे पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) को सुधारने के लिए जब से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कड़े आर्थिक रिफॉर्म्स लागू कराए हैं, तब से आंकड़ों के लिहाज से वहां की स्थिति में मामूली सुधार देखा जा रहा है। इस बीच पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।पाकिस्तान को इस समय अपने किसी उद्योग या प्रोडक्शन से नहीं, बल्कि विदेशों में मजदूरी और नौकरियां कर रहे अपने नागरिकों (Overseas Pakistanis) से इतनी मोटी कमाई हो रही है कि वह देश की अर्थव्यवस्था की असली लाइफलाइन बन गई है। यह रकम इस समय पाकिस्तान द्वारा दुनिया भर में किए जाने वाले कुल नेट एक्सपोर्ट (Total Export) से भी कहीं ज्यादा हो चुकी है।वित्त वर्ष 2026 में रेमिटेंस का बना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्डपाकिस्तान के केंद्रीय बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 30 जून 2026 को समाप्त हुए पिछले पूरे वित्त वर्ष (FY26) में पाकिस्तान को विदेशों से रिकॉर्ड 41.6 अरब अमेरिकी डॉलर ($41.6 Billion$) की रेमिटेंस (प्रवासियों द्वारा भेजी गई रकम) प्राप्त हुई है।सालाना बढ़ोतरी: यह ऐतिहासिक रकम वित्त वर्ष 2025 में मिली 38.3 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि से 8.6 प्रतिशत ज्यादा है।पाकिस्तान के वित्त मंत्री के मुख्य सलाहकार खुर्रम शहजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए इसे देश के इतिहास की “अब तक की सबसे बड़ी सालाना रेमिटेंस आमद” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह आंकड़ा विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों के देश की नीतियों पर अटूट भरोसे को दर्शाता है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Buffer) मजबूत हुआ है।किन अमीर मुल्कों से आया सबसे ज्यादा पैसा?स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि पाकिस्तान की झोली में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा डालने वाले शीर्ष देश खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) के हैं। केवल जून के महीने के आंकड़ों को देखें तो:सऊदी अरब (Saudi Arabia): रेमिटेंस का सबसे बड़ा स्रोत रहा, जहां से 829.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर भेजे गए।संयुक्त अरब अमीरात (UAE): दूसरे नंबर पर रहा, जहां से पाकिस्तानियों ने 792.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर घर भेजे।यूनाइटेड किंगडम (UK): ब्रिटेन से पाकिस्तान को 514.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले।अमेरिका (USA): संयुक्त राज्य अमेरिका से 296.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आमद दर्ज की गई।इसके अलावा 100 मिलियन डॉलर से अधिक की सूची में यूरोपीय देश इटली (121.1 मिलियन डॉलर) और खाड़ी देश ओमान (110.8 मिलियन डॉलर) भी प्रमुख योगदानकर्ता रहे। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही इस साल रेमिटेंस में 8.6% की ग्रोथ हुई हो, लेकिन यह रफ्तार वित्त वर्ष 2025 की 26.6% और वित्त वर्ष 2024 की 10.7% की ग्रोथ दर के मुकाबले काफी धीमी पड़ी है।पाकिस्तान का ट्रेड डेफिसिट: कुल एक्सपोर्ट से 11.5 अरब डॉलर ज्यादा है रेमिटेंसपाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का सबसे स्याह और कड़वा पहलू यह है कि देश का अपना खुद का उत्पादन और निर्यात (Exports) पूरी तरह धराशायी हो चुका है।आर्थिक संकेतक (FY26)कुल रकम (अमेरिकी डॉलर में)वर्कर्स रेमिटेंस (विदेशों से आई रकम)41.6 अरब डॉलरनेट एक्सपोर्ट (कुल निर्यात कमाई)30.1 अरब डॉलरट्रेड डेफिसिट (कुल व्यापार घाटा)लगभग 40 अरब डॉलरआंकड़ों की तुलना करें तो पाकिस्तान ने दुनिया भर में अपना सामान बेचकर जितना कमाया (30.1 अरब डॉलर), उससे 11.5 अरब डॉलर ज्यादा रकम उसके प्रवासी मजदूरों ने खैरात और पसीने की कमाई के रूप में सीधे देश भेज दी। वर्तमान में पाकिस्तान का कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) लगभग 40 अरब डॉलर के ऊंचे स्तर पर है। ऐसे में यदि प्रवासी पाकिस्तानी यह पैसा भेजना बंद कर दें, तो पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार शून्य हो जाएगा और देश तुरंत डिफॉल्ट (दिवालिया) घोषित हो जाएगा। यही कारण है कि इस रेमिटेंस को पाक इकोनॉमी की वेंटिलेटर या लाइफलाइन कहा जा रहा है।
मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति और युद्धविराम की कोशिशों को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे भीषण और रणनीतिक हवाई हमले (Airstrikes) किए हैं। इन हमलों से ईरान का सरकारी मीडिया और कई शहर थर्रा उठे हैं।सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अमेरिका ने इस बार ईरान के एकमात्र बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट कॉम्प्लेक्स (Bushehr Nuclear Power Plant) के बेहद नजदीकी इलाके को निशाना बनाया है, जिससे परमाणु हादसे का खतरा भी पैदा हो गया था। इस भीषण सैन्य गोलाबारी ने कुछ ही समय पहले हुए उस नाजुक अंतरिम समझौते को पूरी तरह वेंटिलेटर पर ला दिया है, जिसका मकसद क्षेत्र में शांति स्थापित करना था।खामेनेई को दफनाने के तुरंत बाद बुशहर पर गिराए बमईरान के लिए गुरुवार का दिन बेहद भावुक और तनावपूर्ण था। कई दिनों के राष्ट्रीय शोक के बाद, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (जिनकी मौत 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआती गोलाबारी में हो गई थी) को उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। ठीक इसी अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए।बुशहर के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी एहसान जहानियन के हवाले से सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' ($IRNA$) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी विमानों ने दोपहर के समय सीधे न्यूक्लियर प्लांट के पास बमबारी की। हालांकि, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इसे ईरान की उस सैन्य क्षमता को नष्ट करने की कार्रवाई बताया है, जो होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थी।अमेरिका के 90 ठिकानों पर हमले, ईरान का पलटवार: 14 की मौतअमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इन हमलों के ब्लैक-एंड-व्हाइट फुटेज जारी किए हैं, जिनमें ईरानी एयरपोर्ट के रनवे, मिसाइल लॉन्चर और उत्तर-पूर्वी गोलिस्तान प्रांत में स्थित रेलवे के बड़े पुलों को नष्ट होते हुए देखा जा सकता है।नुकसान का आंकड़ा: ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो दिनों में हुए इन अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश सुरक्षा बलों के सदस्य थे, जबकि 78 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं।ईरान का जवाबी हमला: ईरान ने भी इस कार्रवाई का तुरंत बदला लेते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाया। जॉर्डन, कुवैत और कतर की तरफ ईरान की ओर से कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी गईं।सहयोगियों का हाल: बहरीन में, जहां अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय है, हमलों के डर से तीन बार सायरन गूंजे। कुवैती सेना ने दावा किया कि उसने 3 बैलिस्टिक मिसाइलों और 10 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया, हालांकि इसके मलबे से एक नागरिक घायल हो गया। जॉर्डन सरकार ने भी ईरान के हमलों को रोकने का दावा किया है।'ईरान को दादागिरी की कीमत चुकानी होगी' - डोनाल्ड ट्रंप की दोटूकतुर्की में नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से बाहर निकलने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान में हुए धमाकों के वीडियो पोस्ट करते हुए इस्लामिक गणराज्य को बेहद सख्त चेतावनी दी।ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा किए गए बम हमलों का यह सीधा बदला है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा:अगर ईरान ने दोबारा ऐसी हिमाकत की, तो हालात और भी बदतर हो जाएंगे। यह नाजुक अंतरिम युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म माना जा सकता है। मुझे लगता है कि शांति वार्ता करने वाले अधिकारी केवल अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि बिजली ग्रिड, वाटर डिसेलिनेशन प्लांट को उड़ाने और खार्ग द्वीप (जहां से ईरान का 90% तेल एक्सपोर्ट होता है) पर कब्जा करने की अपनी पुरानी धमकियों को फिर से दोहराया।'हमला करोगे तो भुगतोगे' - ईरान का कड़ा रुखअमेरिका के इस आक्रामक रुख पर ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। युद्धविराम वार्ता में मुख्य भूमिका निभाने वाले ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि वादे तोड़ने की क्या कीमत होती है। अगर आप हम पर हमला करेंगे, तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे और पलटवार करेंगे।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का डरइस ताजा सैन्य टकराव ने वैश्विक आर्थिक जगत की रातों की नींद उड़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है।मई के महीने में जहां इस रास्ते से केवल 233 जहाज गुजरे थे, वहीं जून में अंतरिम समझौते के बाद यह संख्या बढ़कर 576 हुई थी (हालांकि यह जून 2025 के 3,100 जहाजों के मुकाबले बेहद कम है)। अगर यह रास्ता पूरी तरह युद्ध की चपेट में आकर बंद हो जाता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे हर देश में भयंकर मंदी और महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सऊदी अरब, तुर्की, ओमान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से फोन पर बात कर तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं।
कुवैत में रक्षा, व्यापार और ऊर्जा पर अहम चर्चा बैठकें पूरी करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर गुरुवार को ओमान पहुंचे।
समझौता हो या न हो, ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे – नेतन्याहू का धमाकेदार ऐलान
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि देश विदेशी खरीद पर निर्भरता कम करने के लिए अपने यहां हथियारों का उत्पादन बढ़ाएगा।

