26 मई को गृहमंत्री अमित शाह ने एक पोस्ट लिखी- 'अवैध घुसपैठ से हो रहा अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।' बस इतने से शब्दों ने पूरे देश में बहस छेड़ दी कि कुछ बड़ा होने वाला है। लेकिन ये पोस्ट अकेली नहीं थी। इसी महीने 3 फैसले आए, जिनका निशाना एक है- अवैध घुसपैठ। क्या हैं ये फैसले, क्या सरकार कुछ बड़ा करने वाली है और क्या इससे देश के मुसलमानों को चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अवैध घुसपैठ से जुड़े कौन से 3 बड़े फैसले हुए हैं? जवाबः ये 3 फैसले हैं… 1. बंगाल में 600 एकड़ सीमाई जमीन BSF को देना 2. भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट 3. अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी सवाल-2: डेमोग्राफिक चेंज के लिए बनी हाई लेवल कमेटी क्या करेगी? जवाबः गृह मंत्रालय के मुताबिक, कमेटी 6 काम करेगी... इनके अलावा कमेटी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अवैध घुसपैठ, डेमोग्राफिक चेंज के मामले में बेहतर को-ऑर्डिनेशन के लिए पॉलिसी बनाने का भी सुझाव देगी। सवाल-3: तो क्या वाकई भारत में डेमोग्राफी अप्राकृतिक रूप से बदल रही है? जवाबः कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि असामान्य वजहों से देश के कुछ इलाकों में डेमोग्राफिक बैलेंस बिगड़ रहा है… 1. बांग्लादेश से घुसपैठ के चलते मूल-निवासी घट रहे 2. बंगाल, बिहार के सीमाई इलाकों में मुस्लिम आबादी बढ़ी 3. सुप्रीम कोर्ट ने घुसपैठ को ‘अघोषित बाहरी आक्रमण’ कहा 4. हिंदू 7.8% तक घटे व मुस्लिम 4.25% तक बढ़ गए सवाल-4: कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार क्या कर सकती है? जवाबः अवैध घुसपैठ से डेमोग्राफिक चेंज पर लगाम लगाने की इस कोशिश को 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' की पॉलिसी कहा जाता है। कमेटी के सुझाव के आधार पर सरकार 3 बड़े कदम उठा सकती है- 1. अवैध घुसपैठियों की सटीक संख्या तय करना 2. होल्डिंग सेंटर्स में रख सकती है 3. वापस बांग्लादेश डिपोर्ट कर सकती है हर्षवर्धन त्रिपाठी ये भी कहते हैं कि कमेटी की सिफारिशों के आधार पर बॉर्डर और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े कानून सख्त हो सकते हैं। नागरिकता से जुड़े कानून भी कड़े किए जा सकते हैं। हालांकि, सरकार के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं- सवाल-5: क्या भारतीय मुसलमानों को इससे चिंता करनी चाहिए? जवाबः सरकार के कदमों से भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के पूर्व उप-कुलपति और संविधान के एक्सपर्ट फैजान मुस्तफा कहते हैं, ‘डेमोग्राफिक चेंज को समझने के लिए बनाई जा रही ये कमेटी महज एक स्टडी करेगी, जिससे भारतीय मुसलमानों को कोई चिंता नहीं होनी चाहिए।’ फैजान मुस्तफा जोर देते हैं कि घुसपैठ जैसी वजहों से डेमोग्राफी नहीं बदली है। वो इस मुद्दे को हेडलाइन मैनेजमेंट मानते हैं। फैजान के मुताबिक, ‘सरकार इकॉनमी के मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ये कदम उठा रही है। अगर NDA सरकार मानती है कि देश में अवैध घुसपैठियों की संख्या बढ़ी है, तो उसने अपने 12 साल के कार्यकाल में कितने बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया? चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल, असम, बिहार में SIR करवाया गया, फिर भी सरकार नहीं बता पाई कि इन राज्यों में घुसपैठियों की संख्या ज्यादा है।’ ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 4 बच्चे होने पर मिलेंगे 95 हजार, आंध्र प्रदेश CM ने क्यों कहा- बच्चे ही हमारी दौलत; इसका भारत पर क्या असर आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू ने 16 मई को कहा, 'राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपए और चौथे के जन्म पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे। एक समय मैंने जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए बहुत मेहनत की थी, लेकिन अब जन्म दर बढ़ाने की जरूरत है।' पढ़ें पूरी खबर…
इजरायली हमलों से दहला लेबनान, 31 लोगों की मौत, 40 अन्य घायल.. नेतन्याहू ने दिए बड़े आदेश
इजरायल द्वारा लेबनान पर हाल के घंटों में किए गए सिलसिलेवार हमलों में 31 लोग मारे गए और 40 अन्य घायल हो गए।लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। अराघची ने अमेरिका और इजरायल के एकमत होने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब्राहम समझौते को लेकर बुरी तरह फंस गया पाकिस्तान, जानें क्या है ट्रंप का मकसद
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान इस मुद्दे पर दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। यदि वह अब्राहम समझौते का खुलकर विरोध करता है तो अमेरिका के साथ उसके संबंधों पर असर पड़ सकता है। वहीं अगर वह इस पहल के समर्थन में जाता है, तो उसे घरेलू राजनीतिक विरोध और धार्मिक समूहों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है
वाशिंगटन की पेपर मिल में बड़ा हादसा, केमिकल टैंक फटने से कई लोगों की मौत
अमेरिका के वाशिंगटन राज्य के लॉन्गव्यू शहर में एक पल्प और पेपर मिल में केमिकल टैंक फटने से कई लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए
अगस्त 2023 में डॉन-3 का टीजर रिलीज हुआ। अमिताभ बच्चन, शाहरूख खान के बाद फ्रेंचाइजी में रणवीर सिंह की एंट्री सुर्खियों में आ गई। इसके बाद एक लंबी खामोशी का दौर। न शूटिंग की तारीख, न फाइनल कास्ट और न कोई रिलीज डेट। करीब 3 साल बाद 25 मई को अचानक खबर आई कि फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉइज यानी FWICE ने डॉन-3 छोड़ने और नोटिस का जवाब न देने पर रणवीर सिंह पर बैन लगा दिया है। क्या वाकई रणवीर अब फिल्मों में काम नहीं कर पाएंगे, डॉन-3 का पूरा झगड़ा क्या है और आगे क्या होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: डॉन-3 को लेकर रणवीर सिंह का झगड़ा क्या है? जवाब: 2006 की डॉन और 2011 की डॉन-2 के हीरो शाहरुख थे। डॉन फ्रेंचाइज की तीसरी फिल्म को लीड करने वाले थे रणवीर सिंह। इसके राइटर-डायरेक्टर थे फरहान अख्तर। उन्हीं का प्रोडक्शन हाउस ‘एक्सेल एंटरटेनमेंट’ इसे बना रहा था। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, रणवीर को फिल्म में साइन करने के लिए 10 करोड़ रुपए का साइनिंग अमाउंट भी मिला था। फिल्म में रणवीर सिंह के अपोजिट पहले कियारा आडवाणी को कास्ट किया गया, लेकिन प्रेग्नेंसी के चलते कियारा ने फिल्म छोड़ दी, जिसके बाद कृति सेनन को कास्ट करने की खबरें आईं। 2025 में डॉन-3 की शूटिंग शुरू होनी थी, लेकिन फिर अचानक रणवीर ने फिल्म छोड़ दी। इसके पीछे 3 वजहें बताई जा रही हैं… 1. फिल्म में लगातार देरीः एनाउंसमेंट के सालों बाद भी फिल्म की कोई फाइनल स्क्रिप्ट नहीं थी और कहानी के कई पहलू उलझे हुए थे। रणवीर प्रोडक्शन की तरफ से इस देरी पर नाराज हुए। फिर वो धुरंधर की शूटिंग में व्यस्त हो गए। जबकि फरहान का कहना था कि स्क्रिप्ट कई फेज में तैयार हुई और रणवीर से शेयर की गई, उन्होंने बिना किसी आपत्ति के हर ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी। 2. रणवीर का क्रिएटिव दखलः फिल्म मेकर्स का ये भी आरोप है कि रणवीर फिल्म की स्क्रिप्ट में दखल दे रहे थे। वो डॉन का एक सीरियस और एग्रेसिव वर्जन बनाना चाहते थे। उनकी मांग थी कि फिल्म में गाली-गलौज, धारदार एक्शन और ज्यादा हिंसक सीन होने चाहिए। जबकि फरहान चाहते थे कि पिछली दोनों फिल्मों में जिस तरह की रियलिस्टिक कहानी थी, ये भी उसके करीब ही रहे। वो रणवीर की मांग पर राजी नहीं हुए। 3. रणवीर को निकालने की चर्चाः ये भी खबरें आईं कि रणवीर सिंह मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म नहीं कर रही थीं। इसलिए फरहान उनके अलावा किसी और एक्टर को शामिल करने की सोच रहे थे। जब रणवीर को ये पता चला, तो विवाद और बढ़ गया और उन्होंने फिल्म छोड़ने का ऐलान कर दिया। दिसंबर 2025 में धुरंधर का पहला पार्ट रिलीज होने के बाद ‘मिडडे’ अखबार में दावा किया गया कि रणवीर ने फिल्म छोड़ दी है और वो जल्द ही फिल्म का साइनिंग अमाउंट लौटा देंगे। इधर, मेकर्स पहले ही फिल्म के प्री-प्रोडक्शन और बाकी चीजों पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च कर चुके थे। फरहान ने प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया में शिकायत की और रणवीर से 45 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की। एक्टर आमिर खान ने भी इस विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। प्रोड्यूसर गिल्ड ने दोनों को सुलह का समय भी दिया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। इसके बाद 11 अप्रैल 2026 को फरहान अख्तर ने इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन यानी IFTDA में शिकायत की। IFTDA से ये मामला FWICE के पास पहुंचा। सवाल-2: FWICE ने रणवीर सिंह पर बैन क्यों लगाया? जवाब: फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े वर्कर्स और कलाकारों के हितों के लिए काम करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। ये फिल्मों और टीवी शोज में वर्कर्स के पेमेंट और अधिकारों की लड़ाई लड़ता रहा है। FWICE द्वारा जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि फरहान अख्तर ने अपनी शिकायत में कहा कि रणवीर के अचानक फिल्म छोड़ देने से आर्थिक नुकसान होगा और फिल्म के प्रोडक्शन पर भी असर पड़ेगा। इस तरह फिल्म छोड़कर जाना स्वीकार्य नहीं है। साथ ही इंडस्ट्री की नीतियों और प्रोफेशनल नियमों के खिलाफ है। फेडरेशन के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने कहा, ‘ रणवीर को 22 अप्रैल, 30 अप्रैल और 13 मई 2026 को रिमाइंडर भेजे। रणवीर सिंह का जवाब आया कि शिकायत करने वाले लोगों की समस्याओं का हल निकालने के लिए FWICE सही मंच नहीं है।’ इसके बाद 25 मई 2026 को FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ बैन लगाने का फैसला लिया। ये बैन एक नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव है, यानी FWICE ने एक्टर्स, डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स, कैमरामैन, टेक्नीशियंस जैसे बॉलीवुड से जुड़े लोगों को निर्देश दिया है कि कोई रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करेगा। सवाल-3: तो क्या अब रणवीर बॉलीवुड फिल्मों में काम नहीं कर पाएंगे? जवाब: FWICE ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियन फेडरेशन है। कोई यूनियन कानूनी तौर पर किसी व्यक्ति के खिलाफ नॉन-कोऑपरेटिव निर्देश जारी कर सकता है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 2017 में एक केस की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘FWICE को क्रू और टेक्नीशियंस की मांग उठाने वाला संगठन कहा जा सकता है, न कि संसद द्वारा बनाया गया कोई नियामक निकाय यानी रेगुलेटरी बॉडी। हालांकि, FWICE फिल्म इंडस्ट्री के कामकाजी माहौल को नियंत्रित करने की बड़ी ताकत रखता है। FWICE के जनरल सेक्रेटरी अशोक दुबे के मुताबिक जब तक विवाद नहीं सुलझता, तब तक फेडरेशन का कोई भी मेंबर रणवीर के साथ काम नहीं करेगा। कैमरामैन, स्पॉट बॉय और लाइट टेक्नीशियन कोई भी नहीं। इंडस्ट्री के करीब 90% लोग, FWICE के किसी न किसी एसोसिएशन के मेंबर हैं। अगर ये मेंबर रणवीर के साथ काम करने से मना कर दें, तो उनकी अपकमिंग फिल्मों की शूटिंग रुक सकती है। रणवीर 3-4 बहुत बड़े बजट की फिल्में कर रहे हैं। इसमें शाहरुख खान के साथ ‘किंग’, डायरेक्टर जय मेहता के साथ प्रलय, कियारा अडवाणी के साथ एक फिल्म और धुरंधर के डायरेक्टर आदित्य धर के साथ भी एक बड़ा प्रोजेक्ट शामिल है। इन फिल्मों के मेकर्स को प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ाने के लिए फेडरेशन से मंजूरी लेनी पड़ सकती है। यानी रणवीर के लीड रोल वाली ये फिल्में लटक भी सकती हैं। सवाल-4: इससे पहले FWICE ने ऐसे बैन लगाए, तब क्या हुआ? जवाब: FWICE अपनी बातें मनवा लेता है। 4 मामले- 1. सलमान खान: दबाव में पाकिस्तानी सिंगर आतिफ का गाना हटाया 2. मीका सिंह: पाक में मुशर्रफ के रिलेटिव के यहां गाना गया, माफी के बाद बैन हटा 3. दिलजीत दोसांझ: 2 बार बैन हुए, भारत में फिल्म रिलीज नहीं हो पाई 4. फिरोज नाडियाडवाला: डायरेक्टर, क्रू मेंबर्स का 8 साल पुराना बकाया चुकाना पड़ा इसके अलावा 2017 में FWICE के बैनर टेल ढाई लाख वर्कर्स ने क्रू मेंबर्स की सैलरी बढ़ाने, शिफ्ट टाइमिंग और इंश्योरेंस जैसे मुद्दों पर हड़ताल की थी, जिससे अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की शूटिंग रोकनी पड़ गई थी। इससे ‘पद्मावत’, ‘परमाणु’ और ‘जीरो’ जैसी फिल्मों की शूटिंग लेट हुई थी। सवाल-5: रणवीर के पास आगे क्या रास्ता है? जवाब: रणवीर ने इसे कांट्रैक्ट से जुड़ा मामला बताया है और कोर्ट जाने की बात कही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर ने FWICE को सीधे अपना जवाब भेजकर कहा, ‘FWICE इस शिकायत के लिए सही फोरम नहीं है। जो मुद्दा उठाया गया है, वो कांट्रैक्ट से जुड़ा हुआ है और इसके लिए कोर्ट या उचित कानूनी फोरम की जरूरत पड़ सकती है।’ अगर रणवीर कोर्ट जाते हैं, तो ये उनके और फरहान के प्रोडक्शन हाउस के बीच का कानूनी मामला हो जाएगा। इसमें कांट्रैक्ट और एग्रीमेंट के कानून के मुताबिक, कोर्ट ही कोई फैसला ले सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि FWICE के पास रणवीर को फिल्मों में काम करने से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ये विवाद अब मीडिया के सामने है, इसीलिए इसे बातचीत से सुलझा लिया जाएगा। दैनिक भास्कर के बॉलीवुड रिपोर्टर अमित कर्ण के मुताबिक, ‘रणवीर बड़े एक्टर हैं, उनके पास कई बड़े फिल्म स्टूडियोज का सपोर्ट है। उनके लिए इस विवाद को सुलझाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। दोनों पक्ष किसी नतीजे पर पहुंचना चाहेंगे। रणवीर की फिल्म में वापसी भी हो सकती है।’ जाने-माने फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श बताते हैं, ‘मुझे लगता है कि फिल्म प्रोड्यूसर फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी और रणवीर सिंह को आमने-सामने बैठकर विवाद सुलझा लेना चाहिए। 80-90 के दशक में भी ऐसे कई विवाद होते थे, आज भी होते हैं, लेकिन बातचीत से उनका हल निकाल लिया जाता है।’ ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… क्या थलापति विजय से जलते हैं रजनीकांत; कहां से उठी सीएम बनने में अड़ंगा लगाने की बात, पूरी कहानी जानिए 17 मई की शाम। थलाइवा रजनीकांत ने चेन्नई के पोएस गार्डेन स्थित अपने घर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। सफाई देते हुए कहा- मैं विजय को तब से देख रहा हूं, जब वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी। पढ़ें पूरी खबर…
इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे बेंजामिन नेतन्याहू, सेहत को लेकर फिर तेज हुई बहस
पिछले कुछ वर्षों से नेतन्याहू की सेहत इस्राइल की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। विपक्षी दल और आलोचक लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय उनकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं करता।
सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी ठिकानों पर हमला
अमेरिकी सेना के अनुसार दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास संदिग्ध सैन्य गतिविधियां देखी गईं। इसके बाद अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई। अमेरिका ने माइन बिछाने की कोशिश कर रही कई बोट्स को निशाना बनाया।
चिली में 6.7 तीव्रता का भूकंप, जनजीवन सुरक्षित
चिली के उत्तरी हिस्से में मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम करीब 5:52 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 3:22 बजे) 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया
माकपा की समीक्षा: बंगाल में भाजपा की जीत पर गहरी चिंता
माकपा की केंद्रीय समिति (सीसी) ने हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक, संगठनात्मक और वैचारिक कारणों की प्रारंभिक समीक्षा की है
17 साल की लड़की और उसके दोस्तों ने मिलकर नए साल की पार्टी रखी। 31 दिसंबर 2025 की रात एक फॉर्मफाउस पर जश्न शुरू हुआ। नाबालिग के साथ एक लड़की और 5 लड़के थे। इनमें एक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार का 25 साल का बेटा साई भागीरथ भी था। आरोप है कि पार्टी के दौरान भागीरथ ने नाबालिग पर शराब पीने का दबाव बनाया। इसके बाद उससे छेड़छाड़ करने लगा। भागीरथ नशे में धुत था। उसने लड़की को पहले गलत तरह से छुआ, फिर फिजिकल होने के लिए उकसाने लगा। लड़की अकेली पड़ गई, मजबूरी में विरोध नहीं कर सकी। घटना के बाद लड़की ने मां को आपबीती बताई। परिवार ने शिकायत कराने की कोशिश की, लेकिन उन पर केस न करने का दबाव डाला गया। करीब 4 महीने बाद 8 मई को मां की शिकायत पर भागीरथ के खिलाफ पॉक्सो का मामला दर्ज हुआ। भागीरथ को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी के बाद केस में RSS को भी खींचने की कोशिश की गई। इस पर संघ ने बयान जारी कर कहा कि ये पूरी तरह से BJP का आंतरिक मामला है, इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। 24 घंटे पुलिस निगरानी में पीड़ित फैमिली, मीडिया पर पाबंदी पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन हैदराबाद सिटी से 15 किलोमीटर दूर पड़ता है। इसी थाने में पॉक्सो का मामला दर्ज कराया गया था। सुरक्षा को देखते हुए पीड़ित परिवार अभी पुलिस निगरानी में है। वे मीडिया से बात करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि खतरा हो सकता है। पीड़ित के रिश्तेदार ने हमें AIDSO यानी ऑल इंडिया स्टूडेंट डेमोक्रेटिक एसोसिएशन का नंबर दिया। ये संस्था विक्टिम की कानूनी लड़ाई लड़ रही और उसके लिए विरोध प्रदर्शन कर रही है। AIDSO में लीगल टीम की मेंबर वैशाली ने हमें केस से जुड़े लीगल डॉक्यूमेंट्स दिए। इसमें पीड़ित की मां के स्टेटमेंट और अहम जानकारियां शामिल हैं। शिकायत में पीड़ित की मां ने बताया, ‘जून 2025 के आसपास मेरी बेटी की भागीरथ से पहचान हुई। इसके बाद इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के जरिए दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी। भागीरथ ने मेरी बेटी को बालिग होने पर शादी करने का झूठा भरोसा दिलाया और अपने जाल में फंसाया। उसका भरोसा जीतने के बाद भागीरथ उसे इमोशनली ब्लैकमेल करने लगा। इतना ही नहीं वो पढ़ाई-लिखाई और करियर से जुड़े फैसलों पर रोक लगाने लगा।’ ’भागीरथ के संपर्क में रहने के दौरान मेरी बेटी को कई बार निजी अपार्टमेंट और फार्म हाउस में ले जाया गया, जहां उसे यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। खास तौर पर 31 दिसंबर, 2025 की रात, जब मोइनाबाद के फार्महाउस में उसे जबरदस्ती शराब पिलाई गई। फिर उसका यौन उत्पीड़न किया गया। इस घटना के बाद 7 जनवरी 2026 को अचानक आरोपी ने उससे रिश्ता तोड़ दिया। क्या BJP नेता विक्टिम को पहले से जानते थे? पीड़ित की मां ने आरोप लगाया कि बेटी की हालत देखकर हमने मार्च से अप्रैल के बीच कोर्ट और वकीलों से संपर्क किया, तो हमें शिकायत वापस लेने की धमकी मिलने लगी। 21 अप्रैल 2026 को इसी दौरान भागीरथ के एक साथी ने निर्मल पुलिस स्टेशन में हमारे खिलाफ केस दर्ज करवाया। उसमें आरोप लगाया गया कि मेरी बेटी आरोपी को ब्लैकमेल कर रही और उससे पैसों की उगाही की कोशिश कर रही है। पीड़ित पक्ष ने अपने स्टेटमेंट के पॉइंट नंबर-8 में कहा है कि 22 अप्रैल 2026 को उनसे संगप्पा नाम का शख्स मिला। उसने एक दिन बाद 23 अप्रैल को उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार से करवाई। इस मुलाकात के दौरान हम लोगों पर समझौता करने का दबाव डाला गया। हमें सुरक्षा का भरोसा दिलाने के बजाय डराया और धमकाया गया। पीड़ित पक्ष के सरकारी वकील नागेश्वर राव ने बताया कि 16 मई को साइबराबाद पुलिस ने उसे अरेस्ट किया, तब पीड़ित परिवार को राहत मिली है। परिवार ने पुलिस को अपना स्टेटमेंट सौंप दिया है। इसके आधार पर पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। वो 29 मई तक पुलिस रिमांड पर है। अब जानिए बंडी संजय और आरोपी पक्ष के वकील क्या कह रहे…‘वो लड़की पहले मेरे बेटे की दोस्त थी‘ 12 मई को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार करीमनगर में हनुमान जयंती रैली में शामिल हुए। इस दौरान भाषण में उन्होंने बेटे पर लगे आरोपों का खंडन किया। उन्होंने इसे झूठी साजिश बताते हुए कहा, ‘आपने मेरे समर्थकों को नाराज किया है और मेरी पार्टी को मुश्किल में डाल दिया। आप उसी आग में जलकर भस्म हो जाएंगे, जो आपने खुद लगाई है।‘ हमने इस मामले पर भागीरथ का पक्ष जानने के लिए उनके वकील करुणासागर से बात की। उनके मुताबिक, पीड़िता की मां के सभी आरोप मनगढ़ंत लगते हैं। उन्होंने कहानी की फ्रेमिंग ऐसे की है, जिससे लगता है कि किसी ने जानबूझकर या फिर राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा किया हो। करुणासागर आगे कहते हैं, ‘तेलंगाना पुलिस साई भगीरथ की गिरफ्तारी का झूठा दावा कर रही है। जबकि केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के निर्देश पर मैंने और सीनियर एडवोकेट एंथनी रेड्डी ने साइबराबाद पुलिस स्टेशन के टेक पार्क के पास भागीरथ को खुद पुलिस के हवाले किया था।‘ ‘पुलिस BNS और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मुताबिक जांच कर रही है। हमने पुलिस को भागीरथ से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां और फोन हैंडओवर कर दिया है।‘ POCSO केस के बाद तेलंगाना RSS ने BJP से किनारा किया साल 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के वक्त तेलंगाना में RSS और BJP ने मिलकर 'अक्षत वितरण' अभियान चलाया। वहीं, लोकसभा चुनाव से पहले संघ ने बूथ लेवल पर डोर-टू-डोर कैंपेनिंग की। इसका फायदा BJP को मिला, उसे राज्य में रिकॉर्ड 8 सीटों पर जीत मिली। 2019 में पार्टी 4 सीट ही जीत सकी थी। अब भागीरथ के खिलाफ POCSO केस होने के बाद RSS ने खुद को मामले से अलग कर लिया है। तेलंगाना के प्रांत प्रचारक कट्टा राजगोपाल कहते हैं, ‘इस मामले में संघ के कुछ पदाधिकारियों को भी घसीटा गया। इस पर हमारे प्रांत संघचालक बार्ला सुंदर रेड्डी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा है कि इस विवाद से RSS का कोई लेना-देना नहीं है। अगर कोई हमारे पदाधिकारियों को इससे जोड़कर संघ की छवि खराब करने की कोशिश करेगा, तो हम उस पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।‘ तेलंगाना पुलिस क्या कह रही... पुलिस बोली- भागीरथ ने सरेंडर नहीं किया, हमने उसे पकड़ा तेलंगाना पुलिस ने पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन पर भागीरथ के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद 12 मई को एक नोटिस जारी किया। इसमें पुलिस ने बताया कि विक्टिम के बयान दर्ज होने के बाद पहले दर्ज की गई धाराओं में बदलाव किया गया है। नोटिस में भागीरथ से 13 मई को दोपहर दो बजे पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया, लेकिन वो पेश नहीं हुआ। उसकी जगह भागीरथ ने पुलिस को लिखे लेटर में कहा कि मैं पर्याप्त सबूतों के साथ पेश होऊंगा और अपनी दलीलें रखूंगा। हालांकि, कुकटपल्ली की डिप्टी कमिश्नर IPS रितिराज का कहना है, ‘भागीरथ ने पुलिस के सामने सरेंडर नहीं किया, बल्कि 16 मई को एक पुलिस अधिकारी ने उसे गिरफ्तार किया है।‘ …………. ये खबर भी पढ़ें… 58 अश्लील वीडियो वाला खरात बोला-सब दैवीय शक्तियों ने कराया 58 अश्लील वीडियो, 150 पीड़ित महिलाएं, 1500 करोड़ की संपत्ति, 100 फर्जी खाते, स्वयंभू बाबा अशोक खरात पर आरोपों की लिस्ट, अंधविश्वास, मंत्रियों-विधायकों से कनेक्शन से होते हुए सबसे अहम गवाह जितेंद्र शेलके की मौत तक आ पहुंची। पढ़िए पूरी खबर…
सुबह के ठीक 9 बजे हैं। जंगल के पथरीले और उबड़-खाबड़ रास्तों पर हमारे कदम बढ़ते जा रहे हैं। करीब 40 मिनट बाद कुछ घर नजर आने लगे। पास पहुंचे तो एक घर के आंगन में भीड़ लगी दिखी। आंगन के एक ओर महिलाएं चुपचाप बैठी हैं, तो दूसरी ओर मर्द। इनमें से तीन लोग डमरू जैसा एक वाद्य यंत्र और घुंघरू बजा रहे हैं। इनकी धीमी थाप जंगल के इस सन्नाटे को और गहरा कर रही है। तभी हमारी नजर आंगन के बीचोबीच पड़ी। झुलसाने वाली इस उमस और गर्मी के बीच जमीन पर एक शख्स बैठा है। उसे सिर से पैर तक कंबल में इस कदर बांधा गया है कि उसके शरीर का एक भी हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा। अचानक, कंबल में लिपटा वह जिस्म जोर-जोर से हिलने लगा। भीतर से अजीबोगरीब आवाजें आने लगी। आस-पास बैठे लोग टकटकी लगाए उसे देख रहे हैं। वे बातें कर रहे हैं कि अब इस जिस्म में पुरखों की आत्मा आने वाली है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं, केरल के वायनाड के जंगलों में रहने वाली अडिया जनजाति की कहानी, इनकी आबादी करीब 12 हजार है। मेरे साथ हैं अजयन। अजयन, यहीं जंगलों टूरिज्म काम काम करते हैं। वह अडिया जनजाति के रीति-रिवाज और इनकी भाषा समझते हैं। अजयन बताते हैं- ‘यह चेकाड़ी गांव है। यहां अडिया समुदाय की एक रस्म चल रही है, जिसे पैलेय रस्म कहते हैं। इस दौरान पुरखों की आत्मा को बुलाने का दावा किया जाता है।’ कंबल में लिपटा शख्स जोर से हिल रहा है। वाद्य यंत्र की थाप जिस तर तेज-धीमी होती है, उस शख्स के शरीर की हलचल भी उसी रफ्तार से बदल रही है। कई बार तो ऐसा लगा कि वह गिर जाएगा। थोड़ी देर बाद वह भारी आवाज में कुछ बोलता है। उसके पास एक बुजुर्ग बैठे हैं। वह कंबल में बंधे शख्स से अपनी भाषा में कुछ पूछ रहे हैं, जिसका वह जवाब देता है। आस-पास बैठे बाकी लोग भी सवाल पूछते हैं। कंबल में बंधा शख्स, बारी-बारी से सबको जवाब देता है। अजयन बताते हैं- ‘यह रस्म बीती रात से चल रही है। जो वाद्य यंत्र बज रहा है, उसे मुरथम कहते हैं।’ मैंने पूछा- इस रस्म की कोई खास वजह है? अजयन ने बताया- ‘10 दिन पहले इसी घर में 40 साल की एक महिला ने खुदकुशी कर ली थी। उसका नाम चिक्की था। उसने ऐसा क्यों किया? लोग यही सवाल कंबल में हिलते शख्स से पूछ रहे हैं। उनका मानना है कि शख्स में पुरखों की आत्मा आई हुई है और उसे इन बातों की जानकारी है।’ मैंने सवाल किया- क्या मरने के 10 दिन बाद ही आत्मा को बुलाते हैं? अजयन बताते हैं- ‘अडिया लोग मानते हैं कि मौत के बाद 42 दिनों तक घर के आसपास आत्मा रहती है। इस दौरान कभी भी पैलेय रस्म की जा सकती है।’ 'इस रस्म के समय पुरखों की आत्मा से प्रार्थना करते हैं कि वे मृतक की आत्मा को अपने साथ ले जाएं, ताकि वह भटकती न रहे।’ तभी एक लड़का कुछ सामान लाकर कंबल में बंधे शख्स के सामने रखता है। इसमें पानी, पान के पत्ते, सुपारी, दीये की बाती और अगरबत्ती है। इसके बाद, बुजुर्ग बाती और अगरबत्ती जलाते हैं। उसके तुरंत बाद कंबल की गांठ खोल देते हैं। कंबल में पसीने से तर-बतर एक बुजुर्ग निकलता है। वह धोती में है। उसके हाथ में सूप (सूपड़ा) है, जिस पर घुंघरू लगे हैं। इसी शख्स की शरीर में पुरखों की आत्मा आई थी। अब सामने बैठे और वाद्य यंत्र बजा रहे दूसरे बुजुर्ग अगरबत्ती से इस शख्स की आरती उतारते हैं। उसके बाद दोनों आपस में बातें करने लगते हैं। कुछ देर बाद, बगल में बैठा दूसरा बुजुर्ग केले के पत्ते पर जल रही अगरबत्ती को खेत में रखने जाता है। मैंने अजयन से पूछा- कंबल में लिपटे शख्स से बुजुर्ग ने क्या सवाल पूछे? मेरे पूछते ही अजयन सामने बैठे बुजुर्ग की तरफ मुड़ते हैं। दोनों के बीच कुछ देर बातें होती हैं। इसके बाद, अजयन बताते हैं- बुजुर्ग ने आत्माओं से पहला सवाल पूछा कि चिक्की ने खुदकुशी क्यों की? कंबल में बंधे शख्स में आई पुरखों की आत्मा ने क्या जवाब दिया? वह बताते हैं कि आत्माओं ने बताया कि चिक्की पिछले कुछ समय से तनाव में थी। घर वाले बात-बात पर उसे तंग करते थे, इसी कारण उसने खुदकुशी कर ली। अजयन बताते हैं- ‘चिक्की की मौत को 10 दिन हो चुके हैं, लोगों का मानना है कि उसकी आस-पास ही कहीं भटक रही है। अब कुछ दिन बाद फिर यह रस्म होगी।’ बाकी आस-पास बैठे लोगों ने क्या पूछा? बुजुर्ग बताते हैं- किसी ने अपने घर की कलह के बारे में पूछा तो किसी ने अपने बच्चों की बीमारी के बारे में। क्या आत्माओं ने सबके जवाब दिए?, मैंने सवाल किया बुजुर्ग बताते हैं- हां, आत्माओं ने सबको कुछ न कुछ उपाय बताए, लेकिन इस बारे में आपको नहीं बता सकता। नहीं तो उसका असर नहीं होगा। इसके बाद, बुजुर्ग वहां से चले गए। अजयन बताते हैं- ‘अडिया लोगों का मानना है कि पूर्वजों की आत्माएं केवल मृतक की आत्मा को रास्ता दिखाने नहीं आतीं, बल्कि वे अपने लोगों की परेशानियों और भविष्य के संकेतों के बारे में भी बताती हैं।’ ‘अगर किसी परिवार पर कोई संकट हो, घर में परेशानी चल रही हो या गांव पर कोई मुसीबत आने वाली हो, तो लोग पूर्वजों की आत्माओं से उसके बारे में सवाल पूछते हैं। उनसे समस्या का समाधान भी पूछते हैं।’ ‘खेती, बारिश, फसल और गांव के फैसलों तक के बारे में पुरखों की आत्माओं से सलाह ली जाती है। अडिया समुदाय का मानना है कि पुरखे हमेशा अपने लोगों की रक्षा करते हैं।’ क्या किसी भी शख्स के अंदर पुरखों की आत्मा आ जाती है?, मैंने सवाल किया अजयन कहते हैं- ‘ऐसा नहीं है। गांव में कुछ ही बुजुर्ग ऐसे होते हैं, जिनके शरीर में आत्मा आती है। जहां तक बात आत्मा को बुलाने की है, तो इसके लिए मुरथम की थाप जरूरी है। बिना मुरथम के थाप के आत्माएं नहीं आतीं’ 'मुरथम की थाप के बिना आत्माएं क्यों नहीं आती?' अजयन बताते हैं- ‘मुरथम, अडिया लोगों का प्रमुख वाद्य यंत्र है। इसकी खासियत यह है कि हर अवसर के लिए इससे निकलने वाली आवाज अलग-अलग होती है। पुरखों की आत्मा को बुलाने के लिए अलग आवाज, विवाह या मृत्यु के शोक पर अलग आवाज, मुरथम हर बार अलग तरह से बजता है। साथ में घुंघरू भी बजाना जरूरी होता है, क्योंकि इनके बिना कोई भी आयोजन पूरा नहीं माना जाता।’ इसी बीच, अडिया लोग आंगन में खड़े हो जाते हैं। बड़ी तादात में पान के पत्तों पर सुपारी सजाई जा रही है। अब एक लड़का इन पानों को बांटना शुरू करता है। उसके बाद एक दूसरा लड़का ग्लास में सभी को खीर जैसी कोई चीज परोसना शुरू करता है। पूछने पर वे बताते हैं- ‘यह पायसम है। इसे गन्ने के रस में नारियल, ड्रायफ्रूट और चावल मिलाकर बनाया जाता है। यह गाढ़ा और पौष्टिक होता है।’ इसके बाद महिलाओं को भी पान दिया जाता है। अब अजयन मुझे इस परिवार घर के अंदर ले जाते हैं। घर के अंदर चूल्हे पर खाना बन रहा है। दीवारों पर पेंटिंग की गई है। घर के अंदर एक पत्थर रखा है। मैंने पूछा यह पत्थर क्या है? अजयन बताते हैं- यह पत्थर ही इनका मंदिर है। यहां बैठकर अडिया परिवार के लोग अपने पुरखों का याद करते हैं। ये मूर्ति नहीं रखते, न पूजा में कोई सामान इस्तेमाल करते हैं। बस एक पत्थर, जिसे ये अपना रक्षक मानते हैं। यहां महिलाओं के पहनावे में काफी फर्क है। कुछ ने साड़ी के ऊपर ब्लाउज नहीं पहना है, तो कुछ ने पल्लू को ब्लाउज के तौर पर बांधा है। थोड़ी ही देर बाद, एक लड़का हमें खाना खाने के लिए बुलाता है। सभी मर्द कतार में बैठते हैं। महिलाएं पत्तलों में खाना परोसती हैं। खाने में चावल, सब्जी, दाल, रसम, पापड़, छाछ और अचार है। अजयन के साथ मैं भी खाने का स्वाद लेती हूं। कुट्टम त्योहार, पुरखों की आत्मा करती है न्याय खाना खाते-खाते मैंने पूछा- अडिया लोग कोई त्योहार भी मनाते हैं? अजयन बताते हैं- ‘कुट्टम, यहां का प्रमुख त्योहार है। फसलों की कटाई के बाद इस त्योहार को मनाते हैं। इस दौरान सभी लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं। नए धान से भोजन बनाकर पुरखों की आत्माओं को भोग लगाते हैं।’ ‘अडिया लोग मानते हैं कि इस दौरान जब मुरथम और ढोल की थाप गूंजती है, तो अडिया समुदाय के पुजारी के शरीर में पुरखों की आत्माएं उतरती हैं। गांव के आपसी विवाद या पारिवारिक झगड़े उन्हीं के सामने रखे जाते हैं। पुजारी जो भी फैसला सुनाता है, सबको मंजूर होता है।’ बीमारी और बुरी आत्माओं के लिए गाधिका अनुष्ठान अजयन बताते हैं- ‘अडिया समुदाय के लोग गाधिका अनुष्ठान भी करते हैं। इसे बीमारी और बुरी आत्माओं को दूर भगाने के लिए किया जाता है। अनुष्ठान में शामिल पुरुष और महिलाएं तरह सजते-संवरते हैं और गीतों की धुन पर नाचते हैं। अनुष्ठान के पूरा होने से पहले पुजारी बीमार व्यक्ति के पास जाकर मंत्रोच्चार करता है। साथ ही पुरखों से प्रार्थना करता है कि बुरी आत्माओं को गांव से दूर ले जाएं।’ अडिया लोग मंदिर में करते हैं शादी अब हम खाना खा चुके हैं। इसके बाद, अजयन मुझे अडिया लोगों के मंदिर ले जाते हैं। मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है, सिर्फ एक पत्थर है। वे बताते हैं- ‘अडिया लोग इसी मंदिर में शादी करते हैं। शादी से एक रात पहले मंदिर में दो तुलसी की माला रखते हैं। अगले दिन दूल्हा-दुल्हन बुजुर्गों के सामने एक-दूसरे को यह माला पहनाते हैं, और शादी की रस्म पूरी हो जाती है। इसे थापूकोडी कहते हैं। लड़की वाले दहेज में अनाज और नारियल देते हैं।’ शाम के 6 बज चुके हैं। हमें रात होने से पहले चेकाड़ी गांव से वायनाड के लिए निकलना है। जंगल को पैदल पार करने में करीब 40 मिनट लगेंगे। चलते-चलते मैंने अजयन को बताया कि जंगलों में हमें अडिया समुदाय के कुछ लोग दिखे थे। जैसे ही हम उनके पास पहुंचे तो किसी ने हमें दूर ही रुकने को कहा, तो कोई हमें देखते ही भाग गया, ऐसा क्यों? अजयन बताते हैं- ये लोग जल्दी किसी से घुलते-मिलते नहीं हैं। सरकार ने भी इनसे मिलने पर रोक लगाई है। बहुत मुश्किल से इनसे मिलने की परमिशन मिलती है। मैंने कहा- हां, मुझे भी काफी परेशानी हुई। दो-तीन दिन तक परमिशन नहीं मिली। बाद में वन विभाग के अधिकारियों ने हमारे साथ एक ड्राइवर को जंगल के मुहाने तक भेजा। आगे का रास्ता हमने खुद तय किया। वे बताते हैं- ‘यह जंगल हाथियों के उत्पात के लिए मशहूर है। इसलिए वन विभाग की सख्ती है। रात होते ही यहां से हाथियों के झुंड गुजरने लगते हैं।’ करीब 40 मिनट के बाद हम वहां पहुंच जाते हैं, जहां वन विभाग की गाड़ी खड़ी है। अजयन से विदा लेकर वायनाड की ओर चल देती हूं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए केरल के चोला नाइकन की कहानी…. --------------------------------------- 1- ‘-10C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पांच देशों से अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग कर दी है। इन पांच देशों में पाकिस्तान का नाम भी शामिल है
शी चिनफिंग ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भेंट की
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पेइचिंग में यात्रा पर आए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की।
ट्रंप का दबाव: पाकिस्तान समेत आठ देशों से अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर की मांग
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पांच देशों से अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग कर दी है
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। इस बीच पीएम मोदी को व्हाइट हाउस का निमंत्रण मिला है। ट्रम्प का भी बयान आया- ‘मुझे पीएम मोदी से प्यार है, पीएम मोदी महान हैं।’ पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के रिश्तों में खटास थी। फिर यह गर्मजोशी क्यों? ट्रम्प का यह प्यार असली है या सिर्फ डैमेज कंट्रोल; आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: भारत-अमेरिका के रिश्तों में खटास क्यों आने लगी थी? जवाबः जनवरी 2025 में ट्रम्प दोबारा राष्ट्रपति बने। अगले ही महीने पीएम मोदी उनसे मिलने वाशिंगटन पहुंचे। माहौल गर्मजोशी भरा था, लेकिन इसके बाद 2 बड़ी चीजें हुईं, जिसने रिश्तों में दरार डाल दी… 1. ट्रम्प ने भारत पर दुनिया में सबसे ज्यादा 50% टैरिफ लगाया 2. भारत के दुश्मन पाकिस्तान से ट्रम्प की अप्रत्याशित नजदीकी इसके अलावा भी कुछ घटनाएं हुई। जैसे- सवाल-2: क्या अब भारत से रिश्ते सुधारने में जुट गए हैं ट्रम्प? जवाबः जनवरी 2026 में ट्रम्प ने अपने खास सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का राजदूत बनाया। इसके बाद रिश्तों में थोड़ी नरमी आनी शुरू हुई। फरवरी में ट्रेड डील पर सहमति बनी, अमेरिका के न्योते पर भारत ने पैक्स सिलिका जॉइन किया। यह एक संगठन है, जिसका मकसद कम्प्यूटर चिप्स और AI की सप्लाई चेन सुरक्षित बनाए रखना है। पिछले कुछ दिनों से अमेरिका ने ऐसे प्रयास काफी तेज कर दिए हैं- मार्को रूबियो की पहली भारत यात्रा ट्रम्प ने कहा- अमेरिका पर 100% भरोसा कर सकता है इंडिया मोदी को व्हाइट हाउस का न्योता सवाल-3: क्या ये सिर्फ डैमेज कंट्रोल या अमेरिका को भारत की सख्त जरूरत? जवाबः अमेरिकी मीडिया का कहना है कि भारत आए मार्को रूबियो डैमेज कंट्रोल मिशन पर हैं। रूबियो ने पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ होने वाली आतंकी गतिविधियों की बात मानी और इस पर विरोध जताया। रूबियो ने कहा, 'पाकिस्तान के मध्यस्थ बनने पर भारत ने कोई आपत्ति नहीं जताई। इससे भारत की कूटनीतिक मैच्योरिटी का पता चलता है।' एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस वक्त 4 वजहों से अमेरिका को भारत की सख्त जरूरत है… 1. भारत के साथ ट्रेड डील को अंजाम तक पहुंचाना 2. भारत को तेल बेचकर पैसे कमाना 3. भारत के जरिए चीन का काउंटर तैयार करना 4. अमेरिकी हथियार बेचकर कमाई, रक्षा साझेदारी बढ़ाना सवाल-4: क्या अमेरिका पर भारत आंख मूंदकर भरोसा कर सकता है? जवाबः भारत के पास विकल्प कम हैं, लेकिन फिर भी वो अमेरिका पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकता। स्ट्रैटजिक एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्म चेल्लानी के मुताबिक, ‘सत्ता में लौटने के बाद दोस्त कहते हुए ट्रम्प ने कई बार भारत का अपमान किया, दबाव डाला और पेनल्टी लगाई। अब फिर वो मोदी को दोस्त और खुद को उनका फैन बताने लगे।’ बेल्जियम बेस्ड थिंक टैंक इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट प्रवीण दोन्थी के मुताबिक, ‘भारत शायद धैर्य दिखाते हुए ट्रम्प का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करेगा।’ भारत को लेकर अमेरिका की पोजिशन अब भी बहुत साफ नहीं है। अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने भारत के एक कार्यक्रम में कहा- ‘हम भारत के साथ वह गलतियां नहीं दोहराएंगे, जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं। हम आपको सभी बाजारों को विकसित करने की छूट नहीं देंगे, जिससे आप कई क्षेत्रों में हमें ही पछाड़ दें।’ भारत भी संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिका पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करने वाला। मार्को रूबियो के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अमेरिका से तेल खरीदने के बारे में पूछा गया। उन्होंने साफ कर दिया कि भारत ईंधन सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिका के अलावा दूसरे देशों से भी ईंधन खरीदेगा। जब मार्को रूबियो भारत आए, तो जयशंकर उनका स्वागत करने भी नहीं पहुंचे थे। रूबियो की यात्रा के तीनों पड़ावों- कोलकाता, दिल्ली और आगरा में सरकार के किसी मंत्री या विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी ने उनका स्वागत नहीं किया। सवाल-5: मार्को रूबियो की भारत यात्रा से क्या हासिल होगा? जवाबः भारत का भरोसा जीतने के अलावा इस दौरे में रूबियो का फोकस 3 चीजों पर है… i. भारत-अमेरिका ट्रेड डील। ii. QUAD को दोबारा पटरी पर लाना। iii. वीजा पर भारत की चिंता का रास्ता खोजना। अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑफ फॉरेन रिसर्च, CFR के एक्सपर्ट सदानंद धूमे के मुताबिक, ‘रूबियो की महज एक यात्रा से काम नहीं चलेगा। दोनों देशों को अपने रिश्तों को फिर से सुधारने के लिए लगातार कोशिशें करनी होंगी।’ सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज, CSIS के रिचर्ड रोसो ने भी कहा, 'मुझे नहीं लगता कि रूबियो के भारत दौरे से दोनों देशों के रिश्तों के मौजूदा हालात को बदल पाएंगे। इस मुलाकात से फरवरी में अंतरिम ट्रेड डील को फाइनल ट्रेड एग्रीमेंट में बदलने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है।’ रिचर्ड रोसो ने ये भी कहा, ‘QUAD की यह लगातार तीसरी बैठक है, जो किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी के बिना हो रही है। इसे QUAD की प्राथमिकता घटने के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है।’ ****रिसर्च सहयोग: प्रथमेश व्यास ------------------------ ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर: 5 देशों से क्या लेकर लौटे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स क्रिटिकल मिनरल देगा, मेलोनी से भी डील PM मोदी 15 मई की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले थे। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आए। करीब 140 घंटे मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी पूरी खबर पढ़िए…
कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट, X अकाउंट और इंस्टाग्राम अकाउंट सभी हैक और डाउन हो गए, तो फाउंडर अभिजीत दिपके ने लिखा- 'कॉकरोच कभी मरते नहीं।' बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। बिना नर के भी बच्चा पैदा कर सकते हैं। मंडे मेगा स्टोरी में इस वक्त के सबसे पॉपुलर प्राणी कॉकरोच की कहानी... **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा ------ ये स्टोरी भी पढ़िए... एक नाग में हाथी मारने की ताकत: नागिन के लिए कैसे कुश्ती लड़ते हैं; इंसान का सांपों से रिश्ता 70 हजार साल पुराना कभी विष्णु का बिस्तर बनते हैं, तो कभी शिव के गले की शोभा। बुद्ध को भी मुचलिंडा नाग के फन के नीचे बैठा हुआ दिखाया जाता है। बाइबिल में तो सांपों को शैतान बताया गया है। सांपों को लेकर इंसानों का कौतूहल 70 हजार साल पुराना है, जो आज भी जारी है।
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में 3 बड़े अपडेट हैं… आरोपी समर्थ ने ट्विशा के आखिरी दिन की क्या कहानी बताई, इस कहानी में क्या-क्या झोल हैं और दूसरे पोस्टमार्टम के बाद अब आगे क्या; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: पति समर्थ ने ट्विशा की मौत की क्या कहानी बताई? जवाब: ट्विशा शर्मा के पति और वकील समर्थ सिंह ने ट्विशा की मौत के 10 दिन बाद, यानी 22 मई को जबलपुर कोर्ट में सरेंडर किया। रात करीब 2 बजे भोपाल पुलिस समर्थ को भोपाल लेकर आई। 23 मई को भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने समर्थ को 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया। पुलिस को ट्विशा से अपने रिश्ते और ट्विशा की मौत के दिन की पूरी कहानी बताई… ‘प्रेग्नेंसी के बाद ट्विशा का व्यवहार बदल गया’- आरोपी पति समर्थ समर्थ के मुताबिक… ‘मौत से पहले साथ हमने साथ खाना खाया’- आरोपी पति समर्थ समर्थ के मुताबिक… हालांकि, ट्विशा की मौत को सुसाइड बताने वाली समर्थ की इस कहानी पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस का भी मानना है कि आरोपी खुद को बचाने के लिए झूठे बयान दे रहा है। सवाल-2: समर्थ की बताई इस कहानी पर क्या सवाल हैं? जवाब: 7 बड़े सवाल उठ रहे हैं… 1. शरीर पर मौत से पहले की कई चोटें 2. जिस बेल्ट से फंदा लगा, वो पोस्टमोर्टम के समय मौजूद नहीं थी 3. FIR और CCTV फुटेज के मुताबिक, मौत के समय में 3 घंटे का फर्क 4. अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस को खबर नहीं दी गई 5. FIR में ट्विशा की उम्र दो जगह अलग-अलग 6. सास गिरिबाला सिंह ने सैलून के CCTV फुटेज मांगे 7. ट्विशा ने मां को वॉट्सएप पर लिखा - ‘समर्थ को मेरी प्रेग्नेंसी पर शक’ सवाल-3: दोबारा पोस्टमार्टम से क्या पता चल सकता है? जवाब: 24 मई को करीब 3 घंटे में ट्विशा की बॉडी का दोबारा पोस्टमार्टम हुआ। फोरेंसिक साइंस की रिसर्च के मुताबिक, दोबारा पोस्टमार्टम में कई दिक्कतें आती हैं, जैसे- पहले पोस्टमार्टम से शरीर में कुछ बदलाव आ जाते हैं। शव पुराना होने से डिकम्पोज होने लगता है। FIR में दावा किया गया था कि ट्विशा का शव परिवार को सौंप दिया गया था। जबकि उनके परिवार का कहना था कि उन्होंने शव स्वीकार नहीं किया। करीब 8 दिन शव AIIMS के मुर्दाघर में -4 डिग्री सेल्सियस पर ही रखा रहा, क्योंकि परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने तक अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया था। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, AIIMS के ऑफिसर्स ने कहा था कि शव को सड़ने से बचाने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस टेम्पेरचर पर रखने की जरूरत होती है। जबकि भोपाल में कहीं ऐसी फैसिलिटी नहीं है। हालांकि शव का विसरा, खून, नाखूनों के सैम्पल आदि फोरेंसिक और DNA जांच के लिए प्रिजर्व कर लिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, ‘अगर दूसरे पोस्टमार्टम में चोटों या बाकी चीजों के आधार पर ये साबित हुआ कि मामला आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या का है तो फिर BNS की धारा 103 के तहत नए सिरे से मामला दर्ज होगा। सबूतों को मिटाने के लिए भी धारा 238 और 241 के तहत मामला दर्ज हो सकता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद आरोपियों को निचली कोर्ट से जमानत मिलने में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।' सवाल-4: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का खुद संज्ञान क्यों लिया है? जवाब: सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने 23 मई को CJI सूर्यकांत को एक नोट भेजकर मामले का स्वतः संज्ञान लेने का सुझाव दिया था। नोट में कहा गया कि ट्विशा की मौत के बाद मीडिया कवरेज से ये सोच बन रही है कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह के असर के चलते जांच प्रभावित हुई है। नोट में मानसिक प्रताड़ना, दहेज की मांग के आरोपों का भी जिक्र है। ट्विशा के परिवार ने भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच कराने की मांग की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने कहा है, ‘अगर किसी मामले में कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठते हैं, तो ये महज एक केस का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।' विराग गुप्ता कहते हैं, ‘ट्विशा की मौत का आरोपी समर्थ वकील है और उनकी मां रिटायर्ड जज। पीड़ित पक्ष के मुताबिक, इन वजहों से पुलिस सही जांच नहीं कर रही और लोकल कोर्ट से न्याय नहीं मिल रहा। कॉकरोच वाले बयान पर विवाद के बाद न्यायिक व्यवस्था, जज और वकील भी सवालों के घेरे में है। ऐसे में इस चर्चित मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बढ़ेगा।’ सवाल-5: इस मामले में आगे क्या हो सकता है? जवाब: ट्विशा के परिवार की 6 प्रमुख मांगे थीं- विराग गुप्ता बताते हैं, ‘इनमें से ज्यादातर बातों पर पीड़ित पक्ष को राहत मिल गई थी। 24 मई को दोबारा पोस्टमार्टम हुआ और 22 मई को ही मध्य प्रदेश सरकार ने केस की जांच CBI को सौंप दी। अब CBI जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करेगी। ‘चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच 25 मई को इस मामले पर सुनवाई कर सकती है। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट मुकदमे की सुनवाई भोपाल या मध्य प्रदेश से बाहर कराने का आदेश दे सकती है, ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके।’ सबूतों के आधार पर अगर हत्या का आरोप साबित हुआ, तो आरोपियों को आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है।***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्विशा के गले पर दो निशान ने उलझाई गुत्थी:गले की हड्डी भी नहीं टूटी, दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मिलेंगे 5 सवालों के जवाब फिल्म अभिनेत्री ट्विशा की मौत की जांच में नया मोड़ आया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गले पर मिले दो निशानों के बाद आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं। परिजन का दावा है कि दोनों निशान ओवरलैप कर रहे हैं। इसे सामान्य फांसी के मामलों से अलग माना जा रहा है। परिजन ने सवाल उठाया कि कथित फंदे को न तुरंत जब्त किया गया और न डॉक्टर्स को सौंपा गया। पढ़ें पूरी खबर…
ग्रीन कार्ड नीति पर बेरा का हमला – ट्रंप प्रशासन को बताया हानिकारक
भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने ट्रंप प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड (आव्रजन) नीति की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे परिवारों, श्रमिकों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए विघटनकारी और हानिकारक बताया है।
व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी – सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को किया ढेर
व्हाइट हाउस के पास शनिवार शाम गोलीबारी करने वाले एक हमलावर को सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने जवाबी फायरिंग में मार गिराया।
असीम मुनीर ने पेजेश्कियन और गालिबाफ से की मुलाकात, ईरान के राष्ट्रपति ने इस्लामिक एकता पर दिया जोर
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी सीजफायर से संबंधित बातचीत के सिलसिले में तेहरान पहुंचे
व्हाइट हाउस नॉर्थ लॉन खाली – गोलियों की आवाज से मचा हड़कंप
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार शाम व्हाइट हाउस परिसर के पास कथित तौर पर गोलियों की आवाज सुनाई देने के बाद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने व्हाइट हाउस के उत्तरी लॉन को खाली करा लिया।

