पहले 'जस्टिस मिशन 2025', फिर नए साल पर जिनपिंग के तेवर पर ताइवान ने दिया मुंहतोड़ जवाब
चीन ने हाल ही में ताइवान के इर्द-गिर्द 'जस्टिस मिशन 2025' अभियान चलाया। नए साल के मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने भाषण में तल्ख तेवर दिखाते हुए हर हाल में चीन में विलय होने की बात कही है। इन सबके बीच ताइवान अलर्ट मोड पर है
नववर्ष पर रूस ने यूक्रेन पर किए 200 से ज्यादा ड्रोन हमले? जेलेंस्की ने लगाए नए आरोप
रूस और यूक्रेन के बीच नए साल में भी तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। बीते दिनों रूस ने दावा किया था कि यूक्रेन ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास पर हमला किया
बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको का दावा, पुतिन को पहले ही दी थी हत्या की कोशिश की चेतावनी
रूस ने दावा किया कि यूक्रेन ने अपने हालिया हमले में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास को निशाना बनाया था
हमास को काबू करेगा या दे देगा खुली छूट? गाजा मिशन में PAK की 'एंट्री' से चिंता में क्यों इजरायल!
Pakistan entry into Gaza in Hindi: गाजा में हमास से हथियार डलवाने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में इंटरनेशनल फोर्स का प्लान बन रहा है. जिसमें पाकिस्तान के भी शामिल होने की संभावना है. इस संभावना से इजरायल में टेंशन बढ़ी हुई है.
Ghana News in Hindi: घाना में 25 दिसंबर को क्रिसमस डे वाले दिन दुनिया पर प्रलय आने और लोगों के डूबकर मर जाने की बात कहने वाले फर्जी ईसाई पादरी को अरेस्ट कर लिया गया है. आरोप है कि उसने डर का साम्राज्य फैलाकर लोगों से लाखों डॉलर बटोर लिए.
भारी बारिश और बर्फबारी से अफगानिस्तान में जल प्रलय, करोड़ों लोगों पर मंडराया खतरा
Afghanistan flood: अफगानिस्तान के कई इलाकों में पिछले तीन से हो रही भारी बारिश और बर्फबारी के चलते अचानक बाढ़ के हालात बन गए. जिसके चलते कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 11 अन्य घायल हो गए हैं. अफगानिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता की तरफ से ये जानकारी गुरुवार को दी गई.
ईरान में तख्तापलट की दस्तक, बगावत में उतरी जनता; प्रदर्शन को रोकने पहुंचे सुरक्षाबल की कर दी हत्या
Iran Security Force Killed In Protest: ईरान में इन दिनों सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में एक सिक्योरिटी फोर्स की मौत हो गई. प्रदर्शन के दौरान उसकी हत्या कर दी गई.
Switzerland New Year Blast: स्विट्जरलैंड में नए साल के मौके पर एक बार में बड़ा धमाका हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई. घटना को लेकर पुलिस जांच में जुटी है.
चीन और ताइवान के बीच फिर बढ़ा तनाव
चीन ने बुधवार देर रात को ताइवान के आसपास बड़े पैमाने आयोजित सैन्य अभ्यास के पूरा होने की घोषणा की. इसके थोड़ी देर बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के अपने संबोधन में ताइवान को लेकर बयान दिया
ईरान में पिछले चार दिनों से क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन? जानिए क्या है इनकी मांग
ईरान इस समय गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है और इसका सीधा असर सड़कों पर दिख रहा है. ईरान के कई शहरों में पिछले चार दिन से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की भारी गिरावट ने आम लोगों का गुस्सा भड़का दिया है. हालात ऐसे बन गए हैं कि जो प्रदर्शन पहले सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित थे, अब वे सीधे शासन बदलने की मांग में बदलते जा रहे हैं
पुतिन के घर पर कथित हमले का मामला, रूस और यूरोपीय देश आमने-सामने
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के आवास पर कथित ड्रोन हमले का मामला बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है. यूक्रेन के पक्ष में सीधे तौर पर यूरोपीय देश उतर आए हैं
Kim Jong Un Message For Soldiers: नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर रूस के लिए जंग लड़ रहे अपने सैनिकों को संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने सैनिकों की प्रशंसा की है.
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने देशवासियों को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि वो बदलाव को तत्पर हैं। ऐसा करते वक्त वो हिचकिचाएंगी नहीं और आवश्यक सुधारों के लिए पूरी ताकत झोंक देंगी
यूक्रेन ने पुतिन के घर को नहीं बनाया टारगेट? सीआईए को हमले के नहीं मिले कोई निशान
रूस की तरफ से दावा किया गया था कि यूक्रेन ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, इस मामले में अमेरिकी मीडिया ने जानकारी दी है कि सीआईए को इस हमले के कोई निशान नहीं मिले हैं
हसीना शेख का नववर्ष पर जनता को संदेश : बीते दिनों के दुख और तकलीफों को मिटा दे ये साल
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने गुरुवार को मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर भ्रष्टाचार, झूठ और अपने निहित स्वार्थ के लिए देश को 'अंधेरे' की ओर धकेलने का आरोप लगाया
खामनेई की सत्ता पर संकट! ईरान में आखिर क्यों सड़कों पर उतरे लोग? सरकार का रुख भी जान लीजिए
Protests in Iran: ईरान में पिछले 4 दिनों से लोग सड़कों पर हैं. वहां सीधे तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई का विरोध हो रहा है. 86 साल के खामेनेई दशकों से वहां राज कर रहे हैं. आइए जानते हैं आखिर इसकी वजह क्या है.
रूस : खेरसॉन में एक कैफे और होटल पर 3 यूक्रेनी ड्रोन हमले, 24 लोगों की मौत, 50 से अधिक घायल
रूस के खेरसॉन क्षेत्र में एक कैफे और होटल पर तीन यूक्रेनी ड्रोन हमले में 24 लोगों की मौत हो गयी और 50 से अधिक लोग घायल हैं
अमेरिका के डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट जोहरान ममदानी ने गुरुवार सुबह न्यूयॉर्क शहर के 112वें मेयर के तौर पर शपथ ले ली है। ममदानी ने नवंबर 2025 में न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर के तौर पर जीत हासिल की। अब नए साल के मौके पर उन्होंने अपने पद की शपथ ली है
फ्लोरिडा : ट्रंप ने अपने रिसॉर्ट में मनाई न्यू ईयर की पार्टी, बताया नववर्ष का लक्ष्य
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में न्यू ईयर की पार्टी सेलिब्रेट की और नए साल का दिल खोलकर स्वागत किया। इस पार्टी में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अलावा भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर, कारोबारी फिल रफिन, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, रूडी गिउलिआनी और गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम, एरिक और लारा ट्रंप, अमीराती अरबपति हुसैन सजवानी और व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ डैन स्कैविनो शामिल हुए
जिस देश की प्रधानमंत्री महिला, वहां की संसद में महिला टॉयलेट का टोटा, मचा बवाल
Japan Women Parliament Toilet Issue: जापान की ससंद में महिला सांसदों के लिए पर्याप्त टॉयलेट नहीं हैं. इसी समस्या की मांग को लेकर प्रधानमंत्री साने ताकाइची समेत 60 महिला सांसदों ने एक याचिका दी है. आइए जानते हैं पूरा मामला...
स्विट्जरलैंड के बार में धमाका, कई लोगों की मौत, मातम में बदला नए जाल का जश्न
Crans montana bar explosion several:आज से नए साल यानी 2026 का आगाज हुआ है.न्यू ईयर सेलिब्रेशन के बीच स्विट्जरलैंड से बड़ी खबर है. क्रैन्स-मोंटाना के एक बार में बड़ा धमाका हुआ है. कई लोगों की मौत की खबर है. धमाके की वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है. पुलिस ने धमाके की पुष्टि की है.
ट्रंप की धमकी भी नहीं आई काम! न्यूयॉर्क को मिला पहली बार मुस्लिम मेयर, जोहरान ममदानी ने ली शपथ
Zohran Mamdani News: न्यूयॉर्क शहर को अपना नया मेयर मिल गया है. जोहरान ममदानी ने नए साल की शुरुआत में मेयर पद की शपथ ली. वह न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बने हैं. खास बात यह रही कि शपथ समारोह एक पुराने और ऐतिहासिक सबवे स्टेशन में हुआ. ममदानी अब अमेरिका के सबसे बड़े शहर की कमान संभालेंगे.
जेलेंस्की का नए साल पर संदेश: हमें युद्ध का अंत चाहिए, यूक्रेन का नहीं
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नए साल की पूर्व संध्या पर अपने देश को संबोधित करते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करना चाहता है
नए साल पर पुतिन का संदेश: सैनिक हैं हीरो, जीत हमारी होगी
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मोर्चे पर लड़ रहे अपने सैनिकों से कहा कि रूस को पूरा भरोसा है कि वह यूक्रेन युद्ध में जीत हासिल करेगा
Grape Theory New Year: नए साल की रात 12 अंगूर खाने की एक पुरानी परंपरा इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है. यह परंपरा स्पेन से शुरू हुई थी. माना जाता है कि इससे नए साल में किस्मत अच्छी रहती है. लोग इसे मजे के साथ-साथ उम्मीदों और अच्छी सोच के साथ निभाते हैं.
बांग्लादेश में यूनुस से क्यों नहीं मिले एस जयशंकर? तारिक रहमान से मुलाकात के सियासी मायने जानिए
India Bangladesh Tension: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की बांग्लादेश यात्रा औपचारिक तौर पर शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए थी, लेकिन इसमें एक अहम कूटनीतिक संकेद देखने को मिला है. जयशंकर ने बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस से कोई मुलाकात नहीं की, जबकि खालिदा जिया के परिवार से मिले और उनके बेटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवेदना पत्र भी दिया. अब इसे लेकर तरह के सियासी कयास लगाए जा रहे हैं.
यूक्रेन के साथ जंग में होगी हमारी जीत, सैनिकों को कहा-हीरोज; पुतिन का नए साल का पैगाम
Putin Address Nation: नए साल के मौके पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश को संबोधित किया. यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा बयान दे दिया है. पुतिन ने कहा कि रूस को अपने सैनिकों पर भरोसा है. देश को जीत जरूर मिलेगी. पुतिन के इस बयान को रूस के पूर्वी इलाके कामचटका में सबसे पहले दिखाया गया, क्योंकि कामचटका में नया साल सबसे पहले आता है.
‘जब मैंने पापा को बताया कि शोएब से शादी करना चाहती हूं, तो वो गुस्से में आग बबूला हो गए। कहने लगे कि वो मुस्लिम है, लव जिहाद करना चाहता है। तुम्हारा धर्म बदलवाकर मुस्लिम बना देगा। तुम्हें बुर्का पहनाएगा। नौकरी नहीं करने देगा। पंडित परिवार की लड़की हो, हम लोग तो लहसुन प्याज भी नहीं खाते। मुस्लिम के यहां तो नॉनवेज भी बनता होगा। पापा जानबूझकर अखबारों में छपी लव जिहाद की खबरें रोज सुबह जोर-जोर से पढ़कर सुनाते थे। हर बात पर किसी न किसी बहाने से बताते थे कि मुसलमान क्या क्या कर सकते हैं। नौकरी नहीं करने देंगे। हालांकि मैंने उनकी एक नहीं सुनी और शोएब से कोर्ट मैरिज कर ली।’ आज ब्लैकबोर्ड में स्याह कहानी उनकी जिन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर दूसरे धर्मों में शादी की। जिसके बाद दोनों के परिवार ने ये कहकर साथ छोड़ दिया कि अब ये हमारे समाज का हिस्सा नहीं… बरेली की रहने वाली आकांक्षा शर्मा ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर साल 2015 में मथुरा के शोएब से शादी की थी। आकांक्षा और शोएब दोनों गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते हैं। मैं उनसे मिलने के लिए ग्रेटर नोएडा उनके घर पहुंची। एक पॉश सोसाइटी में अपने ड्रॉइंग रूम में बैठी आकांक्षा बताती हैं कि ‘साल 2011 में पहली बार मैं शोएब से मिली थी। उस वक्त हम दोनों एक ही ऑफिस में नौकरी कर रहे थे। पहली मुलाकात ऑफिस में हुई, फिर धीरे-धीरे हम ऑफिस के बाहर भी मिलने लगे। हमारी दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला।’ गहरी सांस लेते हुए आकांक्षा कहती हैं कि ‘एक दिन शोएब ने मुझसे कहा कि अब हमें शादी के बारे में सोचना चाहिए। आखिरकार हम दोनों इस फैसले पर पहुंचे कि अगर धर्म बदलना पड़ा तो हम शादी नहीं करेंगे। कई दिनों तक सबसे बातचीत करने के बाद हमने घरवालों से बात करने का फैसला किया। उसी दिन शाम को मैंने अपने घर फोन किया और मम्मी को शोएब के बारे में बताया। वो भड़क गईं और कहने लगीं कि तुम्हें मुस्लिम लड़का ही मिला था। बचपन से तुम्हें यही सिखाया कि एससी-एसटी और मुस्लिम लड़कों से शादी का ख्याल भी दिमाग में मत लाना। आखिर तुमने वही कर दिखाया। कुछ ही दिन में मम्मी-पापा दोनों दिल्ली आए और मुझे अपने साथ ले गए।’ आकांक्षा बीते दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि ‘घर पर हर वक्त तनाव का माहौल रहता। मुझे दिन रात यही बताया जाता कि मुस्लिम लड़के से शादी करने के बाद कैसे मेरी जिंदगी बदल जाएगी। मुझे लव जिहाद से जुड़ी सारी खबरें बताई जातीं। उधर, शोएब ने जब अपने घरवालों को आकांक्षा के बारे में बताया तो उनका भी एक ही जवाब था, हिंदू लड़की के साथ शादी के बारे में कभी सोचना भी मत। ये कभी नहीं हो सकता। हम दोनों ये समझ चुके थे कि घरवाले इस फैसले में कभी हमारा साथ नहीं देंगे। एक दिन शोएब ने कहा कि तुम किसी तरह दिल्ली लौट आओ, फिर देखते हैं क्या करना है। अब तक मुझे घर पर रहते हुए एक महीना बीत गया था। मैंने शोएब के बारे में कोई बात नहीं की। मैं बस उन्हें ये समझाने में लगी थी कि नौकरी के लिए वापस जाना है। आखिरकार उन्होंने नौकरी के लिए दिल्ली जाने की इजाजत फिर से दे दी।’ आकांक्षा के बगल में ही उनके पति शोएब बैठे हैं। वो कहते हैं कि ‘आकांक्षा के दिल्ली आते ही हमने कोर्ट मैरिज करने का फैसला कर लिया। हालांकि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने के लिए हमें परिवार और समाज के अलावा कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हम लोग बहुत पढ़े-लिखे हैं, ताकतवर कंपनियों में काम करते हैं। हमें इस तरह की शादियों में कानूनी मदद करने वाली संस्था धनक का सहयोग था, तब भी प्रशासन ने हमारे लिए दिक्कतें पैदा कीं। जब हम लोग शादी करने के लिए एसडीएम ऑफिस पहुंचे तो डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया बहुत लंबी थी। फिर बोला गया कि जहां शादी करनी है, आधार कार्ड में पता भी उसी शहर का होना चाहिए। गवाहों के आधार कार्ड पर भी उसी शहर का पता होना चाहिए। जबकि कानून में ऐसा नहीं है। आकांक्षा जब शादी के लिए सिग्नेचर करने के गईं तो रूम में अकेली थीं। क्लर्क ने पूछा मुस्लिम से शादी क्यों कर रही हो? एकबार फिर सोच लो। आकांक्षा ने जवाब दिया कि कानून ने हक दिया है मुझे शादी करने का। फिर 30 दिन का नोटिस नासूर बन गया। स्पेशल मैरिज एक्ट में 30 दिन तक एसडीएम ऑफिस में नोटिस लगाया जाता है और परिवार वालों को भी नोटिस भेजा जाता है।’ शोएब कहते हैं कि 30 दिन के नोटिस में हमें यह डर था कि हिंदू संगठनों को हमारी शादी के बारे में न पता चल जाए क्योंकि एसडीएम ऑफिस से ऐसी जानकारी लीक हो जाती है। फिर संगठन पीछे पड़ जाते हैं। हालांकि हमारी किस्मत अच्छी थी कि ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमने घरवालों को बिना बताए चुपचाप शादी कर ली। हालांकि शादी को लेकर जो अरमान थे वो तो पूरे नहीं हुए।’ शोएब इतना कहते ही चुप हो गए, मैंने कुछ देर बाद उनसे पूछा, फिर घरवालों को शादी के बारे में कब बताया? ‘शादी करके जब घर लौटे तो मैंने अब्बू को फोन पर बताया कि आकांक्षा से शादी कर ली है। उन्होंने कहा कि फौरन बैग उठाओ और घर वापस आ जाओ। आकांक्षा के परिवार वाले या हिंदू संगठन वाले लव जिहाद के चलते तुम्हारी हत्या करवा देंगे। हालांकि मैंने घर जाने से साफ इनकार कर दिया। तब घरवालों ने कहा कि अब तुमसे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।’ और आकांक्षा के घरवालों ने क्या कहा? ‘आकांक्षा ने भी उसी दिन अपनी मम्मी को फोन पर बताया कि मुझसे शादी कर ली है। उनकी मम्मी ने ये सुनते ही कह दिया कि आज के बाद इस नंबर पर फोन करने की कोई जरूरत नहीं है। अब तुम्हारा यहां कोई नहीं रहता और फोन काट दिया।’ शोएब कुछ सोचते हुए आगे कहते हैं कि ‘शादी को कुछ दिन ही बीते थे कि एक रोज अम्मी-अब्बू मेरे दफ्तर आ गए। हालांकि वो मुझसे नहीं मिले, एचआर और मेरे मुस्लिम बॉस से मिलकर घर चले गए। उन लोगों की आपस में क्या बात हुई, मुझे नहीं पता। इसके ठीक तीन महीने बाद एचआर ने मुझ पर सीओओ को मेल करने का आरोप लगा दिया। तब मेरे बॉस ने कहा कि तुम्हें उसी दिन नौकरी से बाहर कर देना चाहिए था जिस दिन तुम्हारे अम्मी-अब्बू मुझसे मिलकर गए थे।’ शोएब कहते हैं कि ये सुनते ही मैं समझ गया था कि घरवालों को लगता है कि मेरी नौकरी चली जाएगी तो मैं आकांक्षा को छोड़कर घर चला जाऊंगा। इसलिए मैंने उसी दिन इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ दी। कई महीनों तक आंकाक्षा ने अकेले घर की जिम्मेदारी संभाली। आखिरकार मुझे दूसरी नौकरी मिल गई। शादी के पांच साल बाद तक घरवालों ने हमसे बात नहीं की। कुछ सालों बाद एक दिन अचानक आकांक्षा के भाई का फोन आया। उसने हालचाल लिया। आकांक्षा खुश थी, अपना धर्म, तीज त्योहार सब मना रही थी और अच्छी नौकरी भी कर रही थी। जाहिर है कि भाई के जरिए आकांक्षा के माता पिता तक बातें पहुंचीं। शादी के तीन साल के बाद एक दिन दिवाली वाला दिन था। आकांक्षा रंगोली बना रही थी, तभी फोन घनघनाया। देखा तो आकांक्षा की मां का फोन था। मां ने पूछा- कैसी हो? आकांक्षा ने जवाब दिया- ठीक हूं.. क्या कर रही हो? रंगोली बना रही हूं… इतना कहते ही आकांक्षा फफक कर रो पड़ीं। शोएब कहते हैं कि इसके बाद अक्सर फोन पर बात होने लगी। हालांकि संबंध वैसे तो नहीं हैं जैसे होने चाहिए, लेकिन बातचीत जरूर होती है। जब हमारी बेटी हुई तब पहली बार आकांक्षा का परिवार हमारे घर आया था। मेरे अम्मी-अब्बू भी दस साल में केवल एक बार मेरे घर आए। हां, हम आज तक अपने घर नहीं जा पाए। इस बात का बेहद अफसोस है। आकांक्षा और शोएब से मिलने के बाद मैं ऐसे ही एक और कपल शिवा तिवारी और महविश रिजवी के घर पहुंची। शिवा और महविश दोनों बरेली के रहने वाले हैं। इन्होंने पांच साल पहले परिवार के खिलाफ जाकर शादी की थी। महविश से मैं उनकी शादी के बारे में कुछ पूछती, उससे पहले ही वो बोल पड़ीं- ‘शादी की वजह से मां की ममता और अब्बू की मोहब्बत सब पीछे छूट गई। परिवारों के लिए मजहबी पहचान ज्यादा जरूरी हो गई। पांच साल गुजर गए हैं, लेकिन आज भी ऐसा कोई दिन नहीं होता जब मुझे अब्बू की याद नहीं आती।’ शिवा तिवारी और महविश रिजवी बरेली के बिशप कोनराड स्कूल में 11वीं में पढ़ते थे। शिवा एक अनुशासित छात्र और क्लास मॉनिटर थे। महविश उनके उलट क्लास की सबसे शरारती लड़की थीं। महविश के अब्बू आर्मी में थे। घर में भी सख्त कानून लागू थे जैसे- जोर से हंसना नहीं है। जोर से बोलना नहीं है। लड़कियां घर के काम करती हैं। समझदार होती हैं। इस वजह से महविश को लगता था कि स्कूल एक ऐसी जगह है जहां वह अपनी सारी मनमानी कर सकती हैं। शिवा महविश के पिता से ठीक उलट थे, इसलिए ही महविश को शिवा से प्यार हो गया। महविश कहती हैं कि ‘हम तीन बहन एक भाई हैं। मैं घर में सबसे बड़ी थी। किसी हिंदू से शादी करना तो दूर, कभी दोस्ती करने के बारे में भी नहीं सोच सकती थी। अब्बू इतने सख्त मिजाज के थे कि किसी भी बात पर बेटियों की पिटाई कर देते थे। गुस्सा ज्यादा आ जाए तो बूट तक से मारते थे। अक्सर कहते थे कि इनकी शादी कर दो, शौहर दिन रात मारेगा न तो अक्ल ठिकाने आ जाएगी। भाई को हमेशा तवज्जो देते थे।’ महविश कहती हैं कि अब्बू के इस मिजाज को देखते हुए मैंने शिवा से शादी करने का फैसला कर लिया था। दस जनवरी साल 2010 को मैंने शिवा से कह दिया था कि उसे पसंद करती हूं। हालांकि शिवा इस पर राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि वह पंडित परिवार से हैं और उनका परिवार इस शादी के लिए कभी राजी नहीं होगा। एक साल तक बात करते-करते शिवा भी शादी के लिए राजी हो गए।’ जब शिवा के परिवार को भनक लगी कि हम दोनों रिलेशन में हैं तो उनकी बहन ने मुझे फोन करके खूब बुरा-भला कहा। कहने लगी कि मैंने उनके भाई को फंसा लिया है। हालांकि मैं ये समझती थी कि सब हमें अलग करना चाहते हैं, लेकिन हमने किसी की नहीं सुनी। जब शिवा ने अपनी मां को पहली बार बताया कि मुझसे शादी करना चाहते हैं तो उनका पहला शब्द यही कहा कि पागल हो गए हो क्या। महविश मुसलमान है। तुम्हारे पापा दिल के मरीज हैं। अभी-अभी ठीक हुए हैं। ये सब सुन लिया तो घर में आफत आ जाएगी। जब मैंने अपनी अम्मी से शिवा के बारे में बात कि तो उन्होंने कहा कि शिवा हिंदू लड़का है। हम तुम्हारी शादी किसी भी मुसलमान लड़के से करवा देंगे, लेकिन शिवा से नहीं। अम्मी ने ये बात अब्बू को नहीं बताई। उन्हें लगता था कि मैं शिवा को भूल जाऊंगी, लेकिन मैं जिद पर अड़ी रही। अम्मी ने कहा कि शिवा से शादी हो गई तो तुम अपने रोजे कैसे रखोगी? जब मरोगी तो कैसे होगा? कौन तुम्हें दफनाएगा? मैं उन्हें बार-बार एक ही बात कहती कि जैसे बाकी मुस्लिम के साथ होता है वैसे ही मेरा भी सब होगा।’ महविश पुराने दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि आखिर एक दिन घर के माहौल से तंग आकर साल 2014 में दिल्ली आ गई और यहां आकर पॉलिसी बाजार में नौकरी ढूंढ ली। कुछ दिन बाद शिवा ने कहा कि अब शादी कर लेनी चाहिए। तब मैंने अब्बू को शिवा के बारे में एक लंबा वॉट्सऐप मैसेज किया कि शिवा से शादी करना चाहती हूं, लेकिन उनकी रजामंदी के साथ। अब्बू ने मैसेज देख भी लिया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। अम्मी ने फौरन फोन किया और कहने लगीं कि शिवा तुम्हारा धर्म बदलवा देगा। तुम काफिर हो गई हो। अब्बू कह रहे हैं कि तुमने हमारी नाक कटवा दी है। अगर तुमने शिवा से शादी कर ली तो उसी दिन से तुम हमारे लिए मर जाओगी।’ ये कहते हुए महविश की आंखें भर आईं। खुद को संभालते हुए बोलीं- आखिरकार दोनों परिवारों की सहमति के बिना ही हम लोगों ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर ली। शादी के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने मुझसे कॉन्टैक्ट किया और कहने लगे कि आपकी घर वापसी हुई है। हम आपको दहेज देना चाहते हैं। घर का सारा सामान और कुछ नकदी। हालांकि मैं और शिवा इसके लिए राजी नहीं थे। शिवा के घरवालों ने भी मुझे बहू मानने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कह दिया था कि महविश के साथ कभी घर नहीं आना। अब तुम्हारा इस घर में कोई हक नहीं। शिवा के परिवार ने महविश के सरनेम को लेकर भी आपत्ति जताई कि शादी हो गई है तो रिजवी क्यों लिखती है। लगभग दो साल पहले एक बार बहन का फोन आया था। पता नहीं कैसे ये बात अब्बू को पता लग गई। तब अब्बू ने साफ शब्दों में कह दिया कि जो भी मुझसे मतलब रखेगा, उसे घर छोड़कर जाना होगा। इसके बाद अम्मी का आखिरी फोन आया। उन्होंने कहा कि तुम हमारे लिए मर चुकी हो। इसके अलावा बददुआएं भी दीं। यहां तक कह दिया कि जब तुम्हारी बेटी घर से भागेगी तब पता लगेगा। उस दिन के बाद से मैंने अपने घरवालों का नंबर ब्लॉक कर दिया। शिवा कहते हैं कि मेरे बड़े भाई ने घर में कह रखा है कि अगर कोई महविश से बात करेगा तो वह घर छोड़कर चला जाएगा। परिवार के अलावा हमें तो दोस्तों से भी काफी कुछ सुनना पड़ा। लोग मजाकिया अंदाज में कह देते हैं शादी तो कर ली, अब निकाह भी कर लो। हिंदू दोस्त कहते हैं कि फेरे ले लो। उन्हें तो महविश के सिंदूर न लगाने से भी आपत्ति है। शिवा आगे कहते हैं कि किसी की तबीयत खराब होने पर कभी कभार घर जाता हूं तो बातें सुनने को मिलती हैं। पापा मेरे साथ घर के बाहर नहीं जाते। मुझे प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया गया। एक दफा मुझे मेरी बहन और जीजा ने अपने घर खाने पर बुलाया। जीजा मुझे समझाने लगे कि महविश को छोड़ दो, पुलिस का मामला मैं देख लूंगा। मैंने मना कर दिया तो प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया गया। हमारी शादी को पांच साल हो गया है, लेकिन आज भी हम कहीं जाते हैं तो मैरिज सर्टिफिकेट साथ रखते हैं। एक दफा हम हरिद्वार गए थे। फोर स्टार होटल में ऑनलाइन रूम बुक किया था। होटल पहुंचे तो उसने हिंदू-मुस्लिम जानकर कमरा देने से मना कर दिया। उसने कहा कि आप लोग पति-पत्नी नहीं हैं। अगर किसी को पता लगेगा कि हिंदू लड़का और मुस्लिम लड़की एक साथ यहां रुके हैं तो बवाल हो जाएगा। होटल वाले ने शिवा से बहुत बहस की। तब होटल वाले ने कहा रात बहुत ज्यादा हो गई है इसलिए सिर्फ एक रात के लिए कमरा मिलेगा, अगले दिन होटल छोड़ना होगा। इस हादसे के बाद से शिवा और महविश दोनों शादी का सर्टिफिकेट साथ लेकर चलते हैं। सर्टिफिकेट देखकर भी कई होटल वाले कमरा नहीं देते।
SpaceX Starlink Satellite: नए साल के लिए खराब खबर है. स्पेसएक्स का स्टारलिंक सैटेलाइट अपना कंट्रोल खो बैठा है. उसके बाद से यह सैटेलाइट बेकाबू होकर तेजी से घूम रहा है. जिससे केसरल सिंड्रोम का खतरा बढ़ गया है.
1 January 1863 History News: पूरी दुनिया में नया साल 2026 आ चुका है. अमेरिका के लिए नए साल के लिए ज्यादा ही महत्व है. इसकी वजह ये है कि 1 जनवरी को उसके इतिहास में एक ऐसी घटना हुई थी, जिसने पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया था.
नए साल की शुरुआत के साथ ही बुल्गारिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. बुल्गारिया 1 जनवरी से आधिकारिक तौर पर यूरो करेंसी यूनियन में शामिल होकर 21वां यूरोजोन सदस्य बन जाएगा. आइए जानते हैं आखिर इससे आम आदमी की जिंदगी में क्या बदलाव आएगा.
इस देश में सबसे पहले आता है नया साल, 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है जश्न
Happy New Year 2026: कुछ ही घंटों बाद घड़ी की सुई 12 नंबर को टच करेगी और हम 2026 में पहुंच जाएगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया का कैलेंडर एक साथ नहीं बदलता है. हर देश का अपना टाइम जोन होता है. चलिए जानते हैं सबसे पहले नया साल किस देश में आएगा.
भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद के सीजफायर को लेकर विश्व स्तर पर राजनीति चल रही है। पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह कह रहे थे कि उनकी वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुका। वहीं अब क्रेडिट की इस लड़ाई में चीन ने एंट्री ले ली है। हालांकि, भारत ने शुरुआत से ही किसी भी तीसरे पक्ष की ओर से ऐसी किसी भी मध्यस्थता से इनकार किया है
मध्य पूर्व में खुला जंग का एक और मोर्चा, यमन पर सऊदी अरब का हमला
सऊदी अरब ने मंगलवार (30 दिसंबर) को यमन के बंदरगाह शहर मुकल्ला पर बमबारी की है. सऊदी अरब का कहना है कि यहां अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए हथियारों की खेप लाई जा रही थी. सऊदी दावा करता है कि ये हथियार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आए थे
बांग्लादेश में एक और हिन्दू युवक की हत्या, हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार बढ़ रही हिंसा
बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या का मामला सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, मयमनसिंह जिले में नोमान मियां नाम के व्यक्ति ने 40 साल के बिजेंद्र बिश्वास की हत्या कर दी. पुलिस ने 22 साल के नोमान को गिरफ्तार कर लिया है. यह घटना 29 दिसंबर की शाम को हुई
Bangladesh mob violence: बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के बाद भीड़ हिंसा, हिरासत में मौत, राजनीतिक संघर्ष और अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेज इजाफा हुआ है, जिससे देश में डर और असुरक्षा बढ़ी गई है. मानवाधिकार संगठनों ने हालात को गंभीर बताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई और कानून व्यवस्था बहाल करने की मांग की है.
1990 में एकजुट हुआ यमन 5 धड़ों में कैसे बंटा? सऊदी अरब-UAE से लेकर ईरान तक के लिए बना जंग का मैदान
सऊदी अरब के हमले के बाद यमन दुनियाभर में चर्चा विषय बना हुआ है. इस मौके पर हम आपको यमन के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं, कैसे एक 'खुशकिस्मत' देश जंग के मैदान में बदला?
सऊदी अरब की रेत क्यों फिसल रही? विदेश से खरीदने को मजबूर हुआ मुस्लिम देश
सऊदी अरब आप गए हैं, या आप जानते हैं तो 95 प्रतिशत इलाका रेत से पटा है. फिर भी इसdesert country की अपनी मजबूरियां है. यहां की रेत ऐसे फिसल रही है कि इसका इस्तेमाल निर्माण में नहीं हो सकता है.
ईरान में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन, कई विश्वविद्यालयों तक फैला आंदोलन, तेहरान की सड़कों पर उतरी आवाम
पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव में ईरानी मुद्रा रियाल 2025 में डॉलर के मुकाबले लगभग आधी रह गई है, जबकि दिसंबर में महंगाई दर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस आर्थिक संकट ने एक बार फिर देश में असंतोष की आग भड़का दी है।
Faisal Karim Masud Video:बांग्लादेश में छात्र राजनीति के बड़े चेहरे और एंटी-इंडिया नेता रहे शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर बड़ा मोड़ आ गया है. इस हाई-प्रोफाइल केस के मुख्य आरोपी बताए जा रहे फैसल करीम मसूद ने दुबई से एक वीडियो जारी कर हत्या में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार करते हुए जमात पर बड़ा आरोप लगा दिया है. देखें वीडियो.
अमेरिका का कड़ा रुख, ईरान-वेनेजुएला हथियार व्यापार को लेकर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की
अमेरिका ने ईरान और वेनेजुएला के बीच कथित तौर पर हो रहे हथियारों के व्यापार को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों देशों की 10 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिका का आरोप है कि तेहरान, वेनेजुएला को पारंपरिक हथियारों की आपूर्ति कर रहा है, जिससे अमेरिकी सुरक्षा हितों को खतरा पैदा हो गया है
यमन संकट पर अमेरिका सक्रिय, रुबियो ने सऊदी-यूएई से की बातचीत
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यमन में बिगड़ती स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के शीर्ष नेताओं से अलग-अलग फोन पर बात की
1907 की सर्द रात में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में पहली बार बॉल ड्रॉप हुआ, जो आज दुनिया का सबसे बड़ा न्यू ईयर जश्न बन गया. आइए साल के आखिरी दिन और नए साल के पहले दिन जानते हैं नए साल मनाए जाने की पूरी कहानी.
निवेश के जादूगर वॉरेन बफेट आज 95 की उम्र में रिटायर हो रहे हैं। 60 साल पहले जब उन्होंने बर्कशायर हैथवे की कमान संभाली, तो कंपनी के एक शेयर की कीमत 18 डॉलर थी। आज एक शेयर की कीमत 8 लाख डॉलर से भी ज्यादा है। यानी 60 साल में 45,000 गुना की बढ़ोतरी। इस दौरान अमेरिका ने 11 राष्ट्रपति देखे, दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां डूबी-उभरीं, बाजारों ने कई बार सांस रोकी, लेकिन बफेट नहीं बदले। न उनका तरीका, न उनकी फिलॉसफी। उनकी बर्कशायर हैथवे 34 लाख करोड़ कैश के साथ आज दुनिया की सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट कंपनी है और बफेट दुनिया के 10वें सबसे अमीर शख्स। वॉरेन बफेट को सिर्फ आंकड़ों में नहीं मापा जा सकता। हमने 5 चैप्टर्स में उनकी जिंदगी के अहम पहलुओं को पिरोया है... साल 1929 और अमेरिका का ओमाहा शहर। स्टॉक ब्रोकर हॉवर्ड बफेट अपनी पत्नी लैला और बेटी डोरिस के साथ अच्छी जिंदगी जी रहे थे। तभी अमेरिका में महामंदी का दौर शुरू हुआ और स्टॉक मार्केट क्रैश हो गया। हॉवर्ड का काफी नुकसान हुआ और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। इसी बीच 30 अगस्त 1930 को उनके घर वॉरेन बफेट का जन्म हुआ। पिता के कारण कम उम्र से ही बफेट बिजनेस और इन्वेस्टमेंट में दिलचस्पी लेने लगे। लाइब्रेरी में उन्हें अमेरिकी बिजनेस राइटर फ्रांसेस मिनकर की किताब 'वन थाउसैंड वेस टू मेक 1000 डॉलर' मिली, जिससे उन्होंने पैसे कमाने के तरीके सीखे और अपनाए। 6 साल की उम्र में च्विंगम बेची, 13 साल में टैक्स भरा महज 6 साल की उम्र में वॉरेन ने दादा की किराने की दुकान से खरीदे च्विंगम पड़ोसियों को बेचकर मुनाफा कमाया। फिर वे कोका-कोला की बोतलें बेचने लगे। 6 बोतल के एक सेट से वे 5 सेंट कमाते। बाद में उन्होंने अखबार, गोल्फ बॉल, पॉपकॉर्न और मूंगफली बेची। जब 11 साल के हुए तो वॉरेन न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज घूमने गए। 1942 में पिता हॉवर्ड अमेरिकी कांग्रेस के मेंबर चुने गए। हालांकि वॉरेन ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ अखबार बेचते रहे, जिससे उन्हें हर महीने 175 डॉलर की कमाई होती। इसी साल उन्होंने बड़ी बहन डोरिस के साथ 120 डॉलर के 3 शेयर खरीदे। ये शेयर अमेरिकी पेट्रोलियम कंपनी सिटीज सर्विस के थे। 3 महीने बाद शेयर का भाव गिरने लगा तो बहन इन्हें बेचने को कहने लगी, लेकिन वॉरेन ने इंतजार करने का फैसला किया। 4 महीने बाद इन शेयरों से 5 डॉलर का मुनाफा हुआ। 13 साल की उम्र में उन्होंने पहला इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया। हाई स्कूल के दौरान 14 साल के वॉरेन ने करीब 40 एकड़ खेती की जमीन खरीदी, जिसे किराए पर चढ़ा दिया। 17 साल के वॉरेन से अपनी सेविंग्स से कुछ पिनबॉल मशीनें खरीदीं और नाई की दुकानों पर लगवा दी। छोटी बहन की रूममेट से पहली नजर में प्यार, फिर शादी किस्सा 1950 की गर्मियों का है। वॉरेन छोटी बहन बर्टी से मिलने कोलंबिया गए थे। वहीं बर्टी ने अपनी रूममेट सुसैन थॉम्पसन से उनकी मुलाकात कराई। उन्हें पहली नजर में प्यार हो गया, लेकिन सुसैन को कोई दिलचस्पी नहीं थी। फिर भी वॉरेन सुसैन से दोस्ती बढ़ाने की कोशिश करते रहे। जल्द ही वॉरेन सुसैन के पिता और साइकोलॉजी के प्रोफेसर विलियम डॉक थॉम्पसन के करीबी बन गए। धीरे-धीरे सुसैन को भी वॉरेन का साथ पसंद आने लगा। 2 साल की मशक्कत के बाद सुसैन ने वॉरेन से शादी के लिए हामी भरी। 19 अप्रैल 1952 को वॉरेन बफेट और सुसैन ने शादी कर ली। 1956 में वॉरेन ने एक इन्वेस्टमेंट पार्टनरशिप शुरू की। नाम रखा- बफेट एसोसिएट्स लिमिटेड। इसमें उन्होंने दोस्तों और परिवारवालों को जोड़ा। वॉरेन को कम उम्र से ही भरोसा था कि वैल्यू-इन्वेस्टमेंट का तरीका बहुत ज्यादा रिटर्न देगा। वॉरेन बताते हैं, ‘प्रो. ग्राहम ने मुझे ‘निवेश के दो नियम’ सिखाए, जिन्हें मैं हमेशा से अपना रहा हूं। पहला नियम- कभी पैसा मत गंवाओ और दूसरा नियम- पहले नियम को कभी मत भूलो।’ प्रो. ग्राहम वैल्यू इन्वेस्टिंग के जनक हैं। उनकी इसी थ्योरी और सीख से वॉरेन आज दुनिया के सबसे बड़े निवेशक हैं। भरोसा टूटने पर खरीदी डूबती टेक्सटाइल कंपनी बात दिसंबर 1962 की है। अमेरिकी टेक्सटाइल कंपनी बर्कशायर हैथवे घाटे में चल रही थी। दिन-ब-दिन क्लॉथ मिलें बंद हो रही थीं। तभी नौजवान इन्वेस्टर वॉरेन बफेट ने डूब रही कंपनी के शेयर प्राइस में एक पैटर्न देखा और उन्हें खरीदने लगे। धीरे-धीरे उनके पास बर्कशायर हैथवे के 7% शेयर हो गए, लेकिन कंपनी को घाटे में जाता देख वॉरेन को लगा कि पैसा डूब जाएगा। 1964 में बर्कशायर हैथवे के CEO स्टैंटन ने वॉरेन से 11.5 डॉलर पर कंपनी के शेयर खरीदने की पेशकश की। ये फायदे का सौदा था। वॉरेन राजी हो गए, लेकिन कुछ दिन बाद जब दस्तावेज मिले, तो उन पर शेयर का दाम 11.375 डॉलर लिखा था। पैसों का फर्क छोटा था, लेकिन वॉरेन को भरोसा टूटने पर गुस्सा आया। उन्होंने शेयर बेचने की बजाय और खरीदना शुरू किया और कंपनी के नए मालिक बन गए। वहीं स्टैंटन और उनके बेटे ने कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया। डूबती कंपनी को बचाने के लिए वॉरेन ने कई कोशिशें की, लेकिन नाकामी हाथ लगी। फिर उन्होंने बर्कशायर हैथवे को टेक्सटाइल कंपनी के बजाय होल्डिंग कंपनी बना दिया। इसके बाद कंपनी इंश्योरेंस, एनर्जी, रेल, डेयरी जैसे तमाम सेक्टर में काम करने लगी। आज कंपनी के 189 बिजनेस हैं। वॉरेन के सीईओ रहते बर्कशायर हैथवे ने एपल, कोका-कोला और बैंक ऑफ अमेरिका समेत 41 कंपनियों में 25 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश किए। अगस्त 2024 में बर्कशायर हैथवे एक ट्रिलियन डॉलर यानी 90 लाख करोड़ रुपए की मार्केट कैप वाली अमेरिका की पहली नॉन-टेक कंपनी बनी। बर्कशायर हैथवे के पास करीब 34 लाख करोड़ रुपए नकद हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। बर्कशायर हैथवे के पास 381 बिलियन डॉलर यानी करीब 34 लाख करोड़ रुपए कैश है। उन्होंने यह रकम न कहीं निवेश की है, न उससे सोना खरीदा है, न फिक्स्ड डिपॉजिट किया है और न ही बैंक में जमा किया है। इस रकम का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी ट्रेजरी बिल के रूप में हैं। अमेरिकी ट्रेजरी बिल, करेंसी नोट की तरह कैश ही माना जाता है। महंगाई के चलते हर साल इस मोटी रकम की वैल्यू 2% से 4% कम हो जाती है, फिर भी वॉरेन ऐसा करते क्यों हैं? दरअसल, वॉरेन दशक में एक बार मिलने वाले मौके का इंतजार करते हैं। जैसे- 2020 की कोरोना महामारी, 2008 का लेमन ब्रदर्स क्राइसिस और 2000 का Dot.com Bubble क्राइसिस। ऐसे मौकों पर जब ज्यादातर कंपनियां कंगाल होने लगती हैं तब वॉरेन 40% से 50% डिस्काउंट पर स्टॉक खरीदते हैं। इसके लिए वे कैश का इस्तेमाल करते हैं। 2020 में शेयरहोल्डर्स की एक मीटिंग में उन्होंने कहा था, ‘अगले 20-30 सालों में ऐसा दो या तीन बार होगा, जब सोने की बारिश हो रही होगी। तब हमें सिर्फ उसे समेटने के लिए बाहर जाना होगा, लेकिन यह कोई नहीं जानता कि ऐसा कब होगा।’ वॉरेन शेयर बाजार को Overvalued मानते हैं। यानी शेयर बाजारों में होने वाली उछाल असली नहीं। वे मानते हैं कि कभी न कभी शेयर बाजार क्रैश हो सकते हैं। इसलिए भी बफेट की कंपनी ने इतनी बड़ी रकम शेयर बाजार में निवेश करने के बजाय कैश रखी है। ये ट्रेंड अमेरिका की अन्य कई बड़ी कंपनियों में भी दिखता है, जिन्होंने दूसरी कंपनियों के शेयर के बजाय सरकारी बॉन्ड्स में इन्वेस्ट कर रखा है। 50 साल की उम्र के बाद कंपाउंडिंग से कमाई 99% संपत्ति 11 साल की उम्र से इन्वेस्टमेंट करने वाले वॉरेन बफेट ने अपनी 99% संपत्ति 50 साल की उम्र के बाद कमाई है, खासकर 60-70 की उम्र के बाद। दरअसल, वॉरेन ने पैसा कमाने के लिए दो तरकीब अपनाई… 1. वैल्यू इन्वेस्टिंग: वॉरेन ने अपने गुरु प्रो. बेंजामिन ग्राहम की वैल्यू इन्वेस्टिंग की थ्योरी अपनाई। इसके मुताबिक, केवल वही स्टॉक या कंपनी खरीदनी चाहिए, जो अपनी एक्चुअल वैल्यू यानी असली कीमत से सस्ती हो। वॉरेन का फोकस हमेशा कंपनी की इंटरनल वैल्यू, कैश फ्लो और लॉन्ग टर्म बिजनेस क्वालिटी पर रहा, न कि शॉर्ट टर्म मार्केट प्राइस पर। 2. कंपाउंडिंग: वॉरेन ने न सिर्फ पैसे से पैसा कमाया, बल्कि कमाए हुए पैसे से भी पैसा बनाया। इसे ही कंपाउंडिंग कहते हैं। मान लीजिए कि वॉरेन ने किसी कंपनी में 10 साल के लिए 10 हजार रुपए लगाए। हर साल उन्हें 10% रिटर्न मिला, जो उसी कंपनी में इन्वेस्ट होता रहा तो 10 साल बाद उन्हें कुल 25,937 रुपए मिले। यानी हर साल मिलने वाले 10% रिटर्न ने भी पैसा कमाया। भले ही इन थ्योरीज से ज्यादा पैसा कमाने में ज्यादा वक्त लगता है, लेकिन ये जरूर है कि कम पैसे से भी ज्यादा मुनाफा बनाया जा सकता है। शुरुआती 20-30 साल में कमाई धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन इसके बाद के 10-20 साल में कमाई का ग्राफ तेजी से ऊपर गया। वॉरेन के साथ यही इफेक्ट 50 की उम्र के बाद हुआ। वॉरेन बफेट पैसा बनाने के लिए ये 4 वेल्थ मंत्र बताते हैं… 1. जब लोग सतर्क हों, तब लालची बन जाओ 2. बुरी खबर ही निवेशक की अच्छी दोस्त 3. वही चीज खरीदें, जिसकी समझ हो 4. लंबे समय के लिए निवेश करो और छोड़ दो बर्कशायर हैथवे कंपनी की सालाना बैठक में 3 मई 2025 को वॉरेन बफेट ने कहा, '2025 के अंत में मैं CEO के पद से रिटायरमेंट ले लूंगा और मेरे बाद कंपनी की जिम्मेदारी ग्रेग एबेल संभालेंगे।' वॉरेन चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें शांति और सुकून भरा जीवन बिताने का समय मिले। वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम दिखेंगे। वे ओमाहा के उसी घर में रहेंगे, जहां वे 67 साल से रह रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी नई जगह रहने या जाने की बात नहीं की है। दरअसल, 1958 में वॉरेन ने ओमाहा शहर में एक घर खरीदा। तब इसकी कीमत 31,500 डॉलर थी, आज के हिसाब से 3.2 करोड़ रुपए। 6280 वर्ग फीट में बने इस घर में 5 बेडरूम और 2 बाथरूम हैं। वॉरेन बर्कशायर हैथवे के शेयर होल्डर्स के लिए सालाना खत लिखते थे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद वे ऐसे खत नहीं लिखेंगे। हालांकि थैंक्सगिविंग मैसेज देना जारी रखेंगे। क्रिसमस पर दोस्तों, करीबियों और परिवारवालों को गिफ्ट और लेटर देते रहेंगे। 99% संपत्ति और बर्कशायर हैथवे के सभी शेयर करेंगे दान वॉरेन बफेट के पास करीब 15 हजार करोड़ डॉलर यानी करीब 13 लाख करोड़ रुपए की कुल संपत्ति है। 2006 में उन्होंने एक ‘गिविंग प्लेज’ यानी परोपकारी शपथ ली थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे अपनी 99% संपत्ति दान कर देंगे। उन्होंने कहा, 'बर्कशायर हैथवे के अपने सभी शेयर धीरे-धीरे परोपकारी संस्थाओं को दान कर दूंगा। मेरी संपत्ति का 99% से ज्यादा हिस्सा मेरे रहते या न रहते दान कर दिया जाएगा। पैसों के हिसाब से ये नंबर तो बहुत बड़ा दिख रहा होगा, लेकिन लोग हर रोज इससे कहीं ज्यादा दान कर देते हैं। वॉरेन ने ये भी बताया कि इससे उनके 3 बच्चों की जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्हें पहले ही पर्सनल यूज के लिए अच्छी-खासी रकम मिल चुकी है और भविष्य में भी मिलती रहेगी। वॉरेन ने मृत्यु के 10 साल बाद पूरी संपत्ति दान करने के लिए बनाया ट्रस्ट पिछले दो दशकों में वॉरेन 60 अरब डॉलर दान कर चुके हैं। वॉरेन चाहते थे कि उनका किया ज्यादातर दान बिल गेट्स के ‘गेट्स फाउंडेशन’ में जाए। इसमें उन्होंने 40 अरब डॉलर दिए भी हैं, लेकिन हाल ही में उन्हें लगा कि कुछ नया किया जाना चाहिए। वे बिल गेट्स के खर्चीले रवैए से भी काफी असहज थे। ऐसे में वॉरेन ने अपनी संपत्ति दान करने के लिए एक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया है, जिसका मैनेजमेंट उनके 3 बच्चे सुसैन, हॉवर्ड और पीटर करेंगे। यह ट्रस्ट वॉरेन की मृत्यु के बाद अगले 10 साल में उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा अलग-अलग संस्थाओं को दान कर देगा। इसमें एक शर्त है कि तीनों भाई-बहनों को रजामंदी से तय करना होगा कि पैसा किसे दिया जाए। वे हर साल करीब 50 करोड़ डॉलर दान करेंगे। इसका ज्यादातर हिस्सा बच्चों से जुड़ी संस्थाओं को जाएगा। वॉरेन तीनों बच्चे लोगों की मदद करते हैं। सुसैन सोशल जस्टिस, एजुकेशन और हेल्थ पर, हॉवर्ड फूड, क्राइम और इंटरनेशनल हेल्प को लेकर और पीटर आदिवासियों की बेहतरी और भुखमरी रोकने के लिए काम करते हैं। वॉरेन ने कहा, 'मुझे भरोसा है कि मेरे बच्चे मेरे जाने के बाद ढंग से काम करेंगे। तीनों मिलकर काम करेंगे और सही फैसला लेंगे।' ग्राफिक्स- दृगचंद्र भुर्जी **** References- 1. द स्नोबॉल: वॉरेन बफेटट एंड द बिजनेस ऑफ लाइफ - एलिस श्रोएडर 2. बफेटट: द मेकिंग ऑफ एन अमेरिकन कैपटलिस्ट - रोजर लोवेनस्टीन 3. बफेटटोलॉजी - मैरी बफेटट एंड डेविड क्लार्क 4. फोर्ब्स, न्यूयॉर्क टाइम्स, ब्लूमबर्ग, बिजनेस इंसाइडर जैसे न्यूजआउटलेट्स की रिपोर्ट
Thieves drill into German bank vault:नए साल से ठीक पहले जर्मनी में ऐसी बैंक डकैती सामने आई है, जिसे देखकर लोग कह रहे हैं इसके आगे तो हॉलीवुड फिल्म भी फेल है. पश्चिमी जर्मनी के गेलसेनकिर्शेन शहर में चोरों ने बैंक की सुरक्षा को धता बताते हुए सुरंग जैसे रास्ते से दीवार काट डाली और करीब 300 करोड़ रुपये (30 मिलियन यूरो) की संपत्ति लेकर फरार हो गए. जानें पूरी रिपोर्ट.
बांग्लादेश में बीएनपी चीफ खालिदा जिया का आज अंतिम संस्कार होगा. भारत से विदेश मंत्री जयशंकर जनाजे में शामिल होंगे. इससे पहले पीएम मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया. फरवरी में बेगम खालिदा के बेटे पीएम बन सकते हैं. क्या आप जानते हैं बेगम जिया हमेशा भारत विरोधी क्यों रहीं?
Tatiana Schlossberg death: टाटियाना श्लॉसबर्ग के 35 वर्ष की उम्र में कैंसर से निधन ने जॉन एफ. कैनेडी परिवार के लंबे समय से चले आ रहे दुर्भाग्य और दुखद घटनाओं की कड़ी को और गहरा कर दिया है. उनका जाना परिवार के लिए एक नई त्रासदी और विश्वभर के लोगों के लिए सदमा साबित हुआ है.
‘ये मेरा आज का 28वां ऑर्डर है। लिफ्ट से कस्टमर को ऑर्डर देने जा रहा हूं। देखो भाई, यहां के 15 रुपए मिले। मेरे 15 घंटे होने वाले है और अब तक 762 रुपए की कमाई हुई है। ब्लिंकिट बहुत कम पैसे दे रहा है। मैं घर जा रहा हूं, अब काम नहीं करना है।’ ब्लिंकिट के डिलीवरी पार्टनर हिमांशु थपलियाल ने 29 सितंबर को ये वीडियो बनाया और इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। वीडियो वायरल हो गया और आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने हिमांशु का जिक्र संसद में किया। हिमांशु ने ब्लिंकिट का काम छोड़ दिया, लेकिन उनके जैसे गिग वर्कर्स की परेशानियां अब भी बची हुई हैं। कम कमाई और 10 मिनट में डिलीवरी के प्रेशर से परेशान गिग वर्कर्स आज यानी 31 दिसंबर को हड़ताल पर हैं। यानी अगर आप न्यू ईयर की पार्टी के लिए कुछ ऑर्डर करें, तो हो सकता है कि वो आपको 10 मिनट में न मिले। इससे पहले गिग वर्कर्स 25 दिसंबर को क्रिसमस पर हड़ताल पर चले गए थे। दैनिक भास्कर ने गिग वर्कर्स की परेशानियों और हड़ताल पर कुछ डिलीवरी पार्टनर से बात की। सबसे पहले हिमांशु की बातहिमांशु उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हैं, लेकिन बचपन से परिवार के साथ दिल्ली में रह रहे हैं। किदवई नगर के एक कमरे के मकान में हिमांशु मम्मी-पापा के साथ रहते हैं। इंस्टाग्राम पर उनके वीडियो को 75 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। 19 साल के हिमांशु बताते हैं, ‘मैंने ब्लिंकिट में 5-6 महीने काम किया। मेरा वीडियो बनाने के पीछे मकसद था कि लोगों को सच्चाई पता चले कि कंपनी कैसे लोगों को पागल बनाती है।’ ‘5 किमी तक के ऑर्डर के लिए ब्लिंकिट से पहले 80 रुपए तक मिलते थे, फिर इसे घटाकर 50 रुपए कर दिया। मैं डिलीवरी के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल किराए पर लेता था। इसके लिए 200 से 250 रुपए रोज देना होता है। इसी से आप कमाई का अंदाजा लगा लीजिए।’ हिमांशु आगे कहते हैं, ‘मुझे नहीं पता था कि मेरा वीडियो वायरल हो जाएगा। मैं बस चाह रहा था कि लोगों तक ये वीडियो पहुंचे। कंपनी कहती है कि एक हफ्ते में आपकी इतनी या उतनी कमाई हो जाएगी, लेकिन ये नहीं बताती है कि आपको कितने घंटे काम करना होगा। कितने समय तक लॉग-इन रहना पड़ेगा। अगर आप लॉग-इन नहीं रहेंगे, तो इंसेंटिव नहीं मिलेगा।’ हिमांशु के पिता अरविंद थपलियाल भी पहले गिग वर्कर थे। तीन साल पहले तक वे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के लिए काम करते थे। अरविंद कहते हैं, ‘कभी-कभी ऐसा भी होता था कि पूरे दिन काम करने के बाद 200-250 रुपए की कमाई होती थी। इस काम से कोई फायदा नहीं होता।’ ‘2 किमी की डिलीवरी पर 20 रुपए, कंपनी से कोई सुविधा नहीं’हमने फूड डिलीवरी और क्विक सर्विस का काम कर रहे कुछ और वर्कर्स से मुलाकात की। वे पहचान जाहिर नहीं करना चाहते, इसलिए उनके नाम बदल दिए हैं। 56 साल के सुरेंद्र ढाई साल से जोमैटो के लिए काम कर रहे हैं। हम उनसे दिल्ली के लक्ष्मीनगर में मिले। सुरेंद्र कहते हैं, ‘चाहे ट्रैफिक जाम हो या लोकेशन की दिक्कत हो, लेकिन डिलीवरी लेट होने पर आपकी रेटिंग कम कर दी जाती है। कभी-कभी तो आईडी भी बंद कर देते हैं। 2 किलोमीटर तक की डिलीवरी के लिए मिनिमम 20 रुपए मिलते हैं। इसके अलावा दूरी और समय के हिसाब से हर किलोमीटर के पैसे मिलते हैं। इसके अलावा कोई सुविधा नहीं मिलती।’ सुरेंद्र बताते हैं कि हम लोगों को सिर्फ एक लाख तक दुर्घटना बीमा मिलता है। पिछले साल मेरा एक्सीडेंट हो गया था। कंपनी ने एक लाख रुपए का खर्च उठाया। बाकी के 75 हजार रुपए मुझे खुद देने पड़े। इसके लिए कर्ज लिया था। आज तक ब्याज चुका रहा हूं।’ क्या होना चाहिए: सुरेंद्र कहते हैं कि डिलीवरी के लिए रेट फिक्स होना चाहिए। इंश्योरेंस दिया जाए। अगर रिटायर हो रहे हों, तो पेंशन देना चाहिए। ‘महिलाओं के लिए अलग दिक्कतें, वॉशरूम तक नहीं मिलता’शाहदरा की रहने वाली नेहा (बदला हुआ नाम) डेढ़ साल से स्विगी में काम कर रही हैं। नेहा बताती हैं, ‘एक ऑर्डर पर सिर्फ 15 रुपए मिल रहे हैं। 15-16 घंटे काम करने के बाद 700-800 रुपए तक कमाई होती है। एक्सीडेंट हो गया तो कोई पूछने वाला नहीं होता। एक बार डिलीवरी के दौरान एक्सीडेंट हो गया, तो कंपनी की तरफ से कहा गया था कि आप ही गाड़ी तेज चला रहे होगे।’ इस पेशे में महिलाओं को ज्यादा दिक्कतें होती हैं। वॉशरूम नहीं होते, पीरियड्स में ज्यादा देर बाहर रहने पर दिक्कत होती है, इसलिए छुट्टी लेनी पड़ती है। कस्टमर से होने वाली समस्याओं पर नेहा कहती हैं, ‘कस्टमर अगर बिल्डिंग में ऊपर के फ्लोर पर रह रहे हैं, तो सामान लेने नीचे नहीं आते। आटे का पैकेट हो या कुछ और सामान, हमें ही ऊपर बुलाते हैं। हम नहीं जाते हैं तो कंपनी से शिकायत कर देते हैं। फिर दो-दो दिन तक हमारी आईडी बंद रहती है। कस्टमर कुछ भी लिखकर डाल देते हैं और हमारी रेटिंग डाउन कर दी जाती है।’ क्या होना चाहिए: नेहा कहती हैं, ‘हम जैसे वर्कर्स को सैलरी के आधार पर रखना चाहिए। कंपनियां मेहनत बहुत करवा रही हैं, लेकिन उस हिसाब से पैसे नहीं दे रहीं। छुट्टी लेने का मतलब है उस दिन की कमाई बंद। सरकार को इसके लिए कोई नियम लाना चाहिए।’ ‘10 मिनट में डिलीवरी का सिस्टम खत्म होना चाहिए’डिलीवरी पार्टनर अमित (बदला हुआ नाम) कहते हैं, ‘मैं सुबह 10 बजे आईडी ऑन करता हूं। रात के 11 बजे तक काम करते हैं। अगर आपको 1 हजार रुपए कमाना है, तो कम से कम 14-15 घंटे काम करना पड़ेगा। शुरुआत में कंपनियां ठीक पैसे देती थीं, आज घर चला पाना भी बहुत बड़ी बात है।' अमित आगे कहते हैं, ‘10 मिनट में डिलीवरी का सिस्टम खत्म करना चाहिए। अगर टाइम से डिलीवरी नहीं हुई, तो रेटिंग कम कर दी जाती है। फिर हमें ऑर्डर कम दिए जाते हैं। सड़क पर गिर गए या गाड़ी खराब हो गई, तब भी कंपनी को कोई मतलब नहीं है। मैं रोज 12-13 घंटे काम करता हूं, तब 1 हजार रुपए का काम होता है। इसमें भी 200 रुपए पेट्रोल पर खर्च हो जाते हैं।’ डिलीवरी बॉय वर्कर नहीं, पार्टनर, इसलिए सैलरी की जगह इंसेंटिवगिग इकोनॉमी में कंपनियां संस्थान-कर्मचारी वाले मॉडल को छोड़कर टास्क के आधार पर काम देती हैं। कंपनियां उन्हें वर्कर न मानकर पार्टनर बनाती हैं। अगर कोई पार्टनर उनके तय किए गए नियमों से काम करता है, तो उसे इंसेंटिव दिया जाता है। अगर शिकायत आती है तो उनकी आईडी ब्लॉक कर दी जाती है। नीति आयोग ने 2022 में एक रिपोर्ट में बताया था कि भारत में करीब 77 लाख गिग वर्कर्स हैं। इनमें एप बेस्ड कैब ड्राइवर से लेकर डिलीवरी एजेंट तक शामिल हैं। आयोग का अनुमान है कि 2030 तक इन वर्कर्स की संख्या 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में दावा: 25% ड्राइवर 14-16 घंटे काम कर रहेयूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया ने 2024 में पीपुल्स एसोसिएशन इन ग्रासरूट्स एक्शन एंड मूवमेंट और इंडियन फेडरेशन ऑफ एप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के साथ मिलकर भारत में गिग वर्कर्स पर रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट का नाम था- 'Prisoners on Wheels' यानी पहियों पर कैदी। इसमें 8 शहरों में 10 हजार से ज्यादा वर्कर्स (5302 कैब ड्राइवर और 5082 डिलीवरी एजेंट) से बात कर उनके हालात समझने की कोशिश की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 31% एप बेस्ड कैब ड्राइवर 14 घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं। 60% ड्राइवर दिन में 12 घंटे और 83% ड्राइवर 10 घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं। 25% ड्राइवर 14-16 घंटे तक काम करते हैं। सर्वे में शामिल 40.7% ड्राइवर ने बताया कि वे हफ्ते में एक भी छुट्टी नहीं लेते। 43% ने बताया कि रोज के खर्चों (पेट्रोल-डीजल, खाना) के बाद 500 रुपए तक ही कमा पाते हैं। 27% ड्राइवर 500 से 1000 रुपए के बीच कमाते हैं। सर्वे से एक और दिलचस्प जानकारी निकली कि करीब 62% दलित और 60% आदिवासी ड्राइवर दिन में 14 घंटे से ज्यादा काम करते हैं। इनके मुकाबले जनरल कैटेगरी के 16% और OBC कैटेगरी के 26% ड्राइवर ही इतनी देर काम करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे जाहिर होता है कि दलित और आदिवासी कम्युनिटी से आने वाले लोगों पर जिम्मेदारियां या कर्ज ज्यादा है। इसलिए उन्हें ओवरवर्क करना पड़ रहा है। सर्वे में करीब 37% ड्राइवर ने बताया कि वे रोज 150 से 200 किलोमीटर ड्राइव करते हैं। 72% ड्राइवर ने बताया कि महीने की कमाई से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता है। करीब 67% ड्राइवर ने कहा कि वे परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। 86.5% ड्राइवर पीठ, घुटने, पैर या सिर दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं। एक्सपर्ट बोले- कर्मचारी का दर्जा देने पर ही फायदा होगागिग वर्कर्स एसोसिएशन से जुड़े नीतेश दास कहते हैं कि सरकार और इस तरह की कंपनियों को वर्कर्स के लिए बेहतर माहौल बनाना चाहिए। डिलीवरी पार्टनर को कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। नवंबर में लागू वेज कोड में गिग वर्कर्स का जिक्र जरूर है, लेकिन ये लोग किसी संस्थान के कर्मचारी नहीं हैं। आप इन्हें वर्कर्स नहीं मानेंगे, तब तक कोई फायदा नहीं है क्योंकि सारे कानून संगठित मजदूरों के लिए लागू होते हैं।’ गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन के राष्ट्रीय संयोजक निर्मल गोराना अग्नि कहते हैं कि इंसेंटिव के नाम पर ये कंपनियां वर्कर्स से जबरिया मजदूरी करवा रही हैं। कंपनियों को रेटिंग का धंधा बंद करना चाहिए क्योंकि ये पारदर्शी नहीं है। राजस्थान और कर्नाटक में गिग वर्कर्स को लेकर कानून बने हैं। हालांकि ये कानून सिर्फ उनकी सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं। इन कानूनों में भी उनकी मांगों का समाधान नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार ने भी उनके मिनिमम वेज, काम के घंटे और दूसरी मांगों पर अब तक पहल नहीं की है। हमने गिग वर्कर्स के मुद्दों पर केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया से संपर्क करने की कोशिश की। जवाब नहीं मिलने पर श्रम मंत्रालय को गिग वर्कर्स के मुद्दों और सरकार की तरफ से हो रही कोशिशों पर कुछ सवाल भेजे हैं। ब्लिंकिट और जोमैटो को भी मेल भेजा है। उनकी तरफ से रिप्लाई नहीं आया है। जवाब आने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी। ...................................ये रिपोर्ट भी पढ़ें दिल्ली दंगे के 5 आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा- पुलिस के पास सबूत नहीं दिल्ली के चांद बाग में रहने वाले मोहम्मद खालिद को पुलिस ने फरवरी 2020 में अरेस्ट किया था। उन्हें दिल्ली दंगों के दौरान भजनपुरा में पेट्रोल पंप जलाने के मामले में आरोपी बनाया गया। फिर एक के बाद एक 19 केस में उनका नाम शामिल हो गया। 11 दिसंबर को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने खालिद समेत 5 आरोपियों को इस केस में बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं दे पाई। पढ़िए पूरी खबर...
बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या: न बहस हुई न हाथापाई, बस बैठे-बैठे चला दी गोली
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के जीवन की कोई खास कीमत नहीं है; ये एक बार फिर जाहिर हो गया। एक और हिंदू शख्स को गोली मार दी गई, जिसकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई
नया साल दुनिया के लिए महायुद्ध का 'काल'? कहां-कहां सुलग रही है नई जंग की चिंगारी
War news: दावा किया जा रहा है कि आने वाला नया साल दुनिया के लिए महायुद्ध का साल है? नए साल पर भारत और पाकिस्तान के बीच भी टकराव की आशंका क्यों जताई जा रही है. धरती के कई ऐसे हिस्से हैं जहां नई जंग की चिंगारी सुलग नहीं बल्कि धधक रही है.
DNA: खालिदा जिया की मौत से कैसे दफन हो गए मुनीर के मंसूबे? बांग्लादेश की राजनीति में उथल-पुथल
DNA: नए साल पर बांग्लादेश में एक तरफ यूनुस की सत्ता जाना तय है. तो दूसरी ओर खालिदा जिया की मौत ने यूनुस के साथ-साथ आसिम मुनीर और जमात-ए-इस्लामी यानी तीनों के ढाका वाले मंसूबे को मिट्टी में मिला दिया है. ख़ालिदा ज़िया का निधन पाकिस्तान के लिए किस तरह झटका है, ये जानने से पहले आपको बांग्लादेश की राजनीति पर ख़ालिदा के निधन से पड़ने वाले असर के बारे में जानना चाहिए.
Boy Forgets Mother Tongue Sfter Knee Surgery: नीदरलैंड्स में एक शख्स घुटने की सर्जरी के बाद अपनी मातृभाषा ही भूल गया. मेडिकल साइंस में यह बड़ा ही दुर्लभ मामला है.
रूस के पूर्व बैंकिंग टाइकून ओलेग टिंकोव ने कहा है कि यूक्रेन में युद्ध की आलोचना करने वाली एक इंस्टाग्राम पोस्ट की वजह से उन्हें अपनी पर्सनल दौलत का करीब $9 बिलियन (करीब 80,000 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है.
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बर्बरता जारी, एक और हिंदू को गोली मारकर उतारा मौत के घाट
Bangladeshi Hindu: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है. ताजा मामले में एक हिंदू युवक की उसके साथी ने ही गोली मारकर हत्या कर दी. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी अंसार सदस्य नोमान मिया को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस की तरफ से जारी बयान में इस घटना को गलती से गोली चलने के कारण हुआ बताया जा रहा है.
Sheikh Hasina condolences Khaleda Zia:खालिदा जिया और शेख हसीना की दुश्मनी को “बेगमों की जंग” कहा जाता था. तीन दशकों तक दोनों ने बारी-बारी से सत्ता संभाली और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं. हसीना के शासन में जिया को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल हुई, जबकि हसीना की सत्ता गिरने के बाद जिया रिहा हुईं. ऐसे में हसीना का इस तरह संदेश लिखना बहुत मायने माने जा रहे हैं.
ढाका में हुआ था ये बड़ा बवाल! जान के खतरे के चलते प्रणब मुखर्जी और खालिदा जिया की मुलाकात हुई कैंसल
Khaleda Zia security threat: साल 2013 में सुरक्षा कारणों से खालिदा जिया ने भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने वाली बैठक रद्द कर दी थी. 80 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, वे लंबे समय से बीमार थीं और ढाका के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं.
जापान में बर्ड फ्लू का कहर, सामने कई मामले; 2.40 लाख मुर्गियां की जाएंगी नष्ट
Bird Flu: जापान के ग्रेटर टोक्यो इलाके के साइतामा प्रांत में एवियन इन्फ्लूएंजा का 12वां मामला सामने आया है. कृषि मंत्रालय ने पुष्टि की कि एक पोल्ट्री फार्म में संक्रमण फैला है, जिसमें 2 लाख 40 हजार मुर्गियां थीं. सभी मुर्गियों को नष्ट कर सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जाएगा.
ISI तो जमात पर दांव लगा रही थी, खालिया जिया की मौत से बदलेगा आलम? भारत की लगी टकटकी
Khaleda Zia death:बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मौत के बाद अब बांग्लादेश के चुनाव के समीकरण बदलते हुए दिख रहे हैं. फरवरी 2026 चुनाव से ठीक पहले खालिदा की मौत से बीएनपी को सहानुभूति की बड़ी लहर मिल सकती है. बेटे तारिक रहमान की वापसी से पार्टी ने हुंकार जिस तरह भरी है उससे ISI की जमात-केंद्रित रणनीति को झटका लग सकता है.
ढाका में कल होगा खालिदा जिया का अंतिम संस्कार
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का अंतिम संस्कार बुधवार को राजधानी के मानिक मियां एवेन्यू में होने का अनुमान है
आज तकनीक बहुत आगे बढ़ गई है लेकिन हाल ही में आई खबर ने सदियों पुरानी यात्रा अनुभवों की याद दिला दी है. चीन 5 क्रेन की डिलीवरी के लिए 90 दिनों 37000 किलोमीटर का सफर तय किया है.
खालिदा जिया की मौत के बीच बांग्लादेश सरकार ने अचानक भारत से अपने हाई कमिश्नर को क्यों किया तलब?
M Riyaz Hamidullah: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपने उच्चायुक्त एम रियाज हामिदुल्लाह को ढाका वापस बुला लिया है. बता दें, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है.
साथ-साथ गुजरा बचपन, फिर पढ़ाई के लिए गईं US; सड़के हादसे में दो दोस्तों ने छोड़ दी दुनिया
Telangana News: कैलिफोर्निया में दो बचपन की दोस्तों की एक साथ साथ मौत हो गई, ये दोनों एक साथ पढ़ाई करने के लिए US गईं हुई थीं. दोनों तेलंगाना की रहने वाली थीं.
Vladimir Putin: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें बताया कि यूक्रेनी ड्रोन ने उनके आवास पर हमले की कोशिश की थी. हालांकि, यूक्रेनी अधिकारियों ने इस दावे का खंडन करते हुए इसे झूठ बताया.
Military-backed party to win in Myanmar:म्यांमार में 28 दिसंबर को पहले चरण के चुनाव हुए, सेना समर्थक USDP ने 102 में से 82 सीटें जीतने का दावा किया. गृहयुद्ध जारी है. कई इलाकों में वोटिंग नहीं हुई है. नोबेल विजेता आंग सान सू अभी भी लापता हैं. जानें पूरी खबर.
ताइवान पर हमले की तैयारी कर रहा चीन? द्वीप के आसपास सेना तैनात, बड़े सैन्य अभ्यास से इलाके में तनाव
ताइवान को लेकर चीन और जापान समेत इस क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की टिप्पणी के बाद से चीन ने अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है
वो चमत्कारी बाबा जिसने महारानी के 'दिल' पर किया कब्जा, खुद की मौत की भी कर चुका था भविष्यवाणी
इतिहास के पन्नों में कई ऐसी कहानियां दफन हैं, जिन्हें हम अब पढ़ते हैं तो हैरानी बहुत हैरानी होती है. आज हम आपको रूस के शाही परिवार से जुड़ी एक ऐसी ही कहानी का बारे में बताने जा रहे हैं.
सन 81 की वो हत्या जिसने खालिदा जिया के मुस्तकबिल को बदला, सियासत ने दिया 'बैटल ऑफ बेगम्स' का नाम
Khalida vs Hasina Rivalry: शेख मुजीबुर रहमान की बेटी और अवामी लीग की नेता शेख हसीना वाजेद और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख रहीं बेगम खालिदा जिया के बीच काफी लंबी राजनीतिक लड़ाई चली, यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब 1975 में हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान को मार दिया गया. आइए जानते है इस संघर्ष की पूरी कहानी...
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की उम्र में निधन
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का मंगलवार सुबह लंबी बीमारी के बाद 80 साल की उम्र में निधन हो गया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नेतन्याहू को लेकर कहा कि उनकी माफी रास्ते मे है. हालांकि इस बयान पर इजरायली राष्ट्रपति का खंडन ट्रंप को पसंद नहीं आएगा, क्योंकि उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को चुभ सकती है.
2026 का पूरी दुनिया को इंतजार है. कुछ जगहों पर 24 घंटे बाद नया साल शुरू हो जाएगा. ऐसे में बीतते साल 2025 पर एक नजर दौड़ाने की जरूरत है. दुनिया में सियासी नजरिए से देखें तो कुछ बयान काफी चर्चा में रहे. इसमें पीएम नरेंद्र मोदी, डोनाल्ड ट्रंप, पुतिन, इटली की पीएम मेलोनी के बयान प्रमुख थे.
बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का इंतकाल, 1 दिन पहले भरा था चुनावी पर्चा
Khalida Zia: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में इंतकाल हो गया है. मौत से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने अस्पताल से ही चुनावी पर्चा भरा था.
ट्रंप को मिलेगा एक और 'पीस प्राइज', फीफा के बाद अब नेतन्याहू देंगे इजरायल का सर्वोच्च सम्मान
IsraelPeacePrize:इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की घोषणा की है. यह पुरस्कार 80 वर्षों में पहली बार किसी गैर-इजरायली नागरिक को और शांति श्रेणी में पहली बार प्रदान किया जा रहा है.
हमने ड्रग्स की नर्सरी को तबाह कर दिया... अमेरिका ने एक और बोट पर किया हमला; अब तक 107 की मौत
US Strike on Drugs Boat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने एक ड्रग्स की एक और बोट पर हमला कर दिया है. इस हमले में 2 लोगों की मौत हुई है.
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को बड़ी धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम जारी रखा तो US उस पर हमला कर सकता है.
Trump Netanyahu Meeting: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, गाजा शांति योजना का दूसरा चरण जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा. फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की. इस दौरान ट्रंप ने साफ किया कि गाजा में शांति के लिए हमास का हथियार डालना जरूरी है. साथ ही उन्होंने गाजा के पुनर्निर्माण की बात भी कह दी.
‘जब नीतीश कुमार ने नकाब खींचा, तो समझ नहीं आया कौन, कहां से मुझे खींच लेगा। वहां सब हंसने लगे थे। इतना कुछ पहले हो गया था, न जाने और क्या करते। मैं जल्दी-जल्दी वहां से निकली, ताकि मुझे कोई देख न ले। थोड़ी देर बाद दोबारा वहां गई अपॉइंटमेंट लेटर फाड़कर फेंकने, लेकिन तब तक सब जा चुके थे।’ नुसरत परवीन ने ये आपबीती भाई बबलू को सुनाई थी। वही नुसरत, जिनका हिजाब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त खींच दिया था। तारीख 15 दिसंबर थी। इसके बाद से नुसरत सामने नहीं आई हैं। अब तक कुछ कहा भी नहीं है। बिहार सरकार की ओर से जॉइनिंग की तारीख बढ़ाने के बाद भी उन्होंने नौकरी जॉइन नहीं की है। नुसरत और उनका परिवार पटना से कोलकाता चला गया। भाई का दावा है कि पति ने नुसरत को मीडिया से बात करने और बाहर निकलने से मना किया है। परिवार भी इसका विरोध नहीं कर रहा, क्योंकि हम नहीं चाहते कि पति-पत्नी का रिश्ता बिगड़े। पहले पटना में तलाशतारीख: 23 और 24 दिसंबरदो पते, पहला घर खाली और दूसरा बंद, परिवार गायब नुसरत और उनका परिवार पटना में रह रहा था। हमें घर का पता चला। न्यू पाटलिपुत्र के कमर प्लाजा में मकान नंबर-102 में किराए पर पूरा परिवार रहता है। परिवार में नुसरत के पति डॉ. आसिफ अली खान, 14 साल का बड़ा और 9 साल का छोटा बेटा है। हम उस पते पर पहुंचे, लेकिन वे इस घर को छोड़कर कुछ दूर किसी और मकान में रहने लगे हैं। बदला पता है- मोहिदिन इन्क्लेव, न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी। यहां पहुंचे, तो गेट पर ताला मिला। सिक्योरिटी गार्ड शंभू ने बताया कि परिवार 17 दिसंबर को कहीं चला गया है। नुसरत तिब्बी कॉलेज में पीजी कर रही हैं। पति डॉ. आसिफ साइकियाट्रिस्ट हैं। वे हाजीपुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं और पटना के चांद मेमोरियल अस्पताल में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। नुसरत के घर के पास रहने वाले रफीक बताते हैं कि नुसरत का परिवार यहीं रहता था, लेकिन उनसे बहुत मेलजोल नहीं था। रफीक आगे कहते हैं, ‘मेरी पत्नी भी कुवैत में सरकारी नौकरी करती हैं। वहां भी जॉब करने वालों को फेस खुला रखना पड़ता है, लेकिन चेहरे से नकाब महिला पुलिस ही हटाती है।’ नुसरत के इस घर के सामने मस्जिद है। पता चला कि नुसरत के पति डॉ. आसिफ वहां नमाज पढ़ने जाते थे। वहां के इमाम मोहम्मद फारूक ने बताया कि डॉ. आसिफ से बहुत ताल्लुक नहीं है। बस कभी सलाम-कलाम करते थे। चार महीने पहले ही उमरा करके आए थे। उस दौरान दिन में 2-3 दफा नमाज पढ़ने आ जाया करते थे। इससे ज्यादा पता नहीं।’ इसी कड़ी में इमाम साहब की पत्नी हुस्ना खातून बताती हैं, नुसरत बालकनी में कपड़े डालने आती थीं, तब नकाब नहीं पहनती थी। वहीं से दुआ-सलाम हो जाती थी। वो किसी के घर नहीं आती-जाती थीं। नुसरत के पति ने अस्पताल आना बंद किया, पटना भी छोड़ामोहल्ले से निकलकर हम चांद मेमोरियल अस्पताल पहुंचे। नुसरत के पति डॉ. आसिफ यहां रोज शाम 6 बजे मरीजों को देखते थे। उस दिन डॉ. आसिफ अस्पताल नहीं पहुंचे। उन्हें कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अस्पताल के मैनेजर ने फोन मिलाया, तो उन्होंने आने से मना कर दिया। हम अगली सुबह, यानी 24 दिसंबर को फिर अस्पताल पहुंचे। मैनेजर ने बताया कि डॉ. आसिफ शहर में ही नहीं हैं। नकाब वाले मामले के बाद मीडिया से बच रहे हैं। शायद कोलकाता गए हैं।’ अब पटना से कोलकाता तक तलाश तारीख: 25-26 दिसंबरनुसरत का पता लगाने हम पटना से कोलकाता रवाना हुए। पता चला कि नुसरत और उनका परिवार कोलकाता के तोपसिया के कोहिनूर बाजार में रहता है। हम वहां घंटों तक उनके घर का पता खोजते रहे। आखिरकार नुसरत के बडे़ भाई सरफराज का पता मिला। वहां पहुंचे, तो घर में कोई नहीं था। पता चला कि नुसरत के छोटे भाई बबलू का प्रॉपर्टी का काम है। हम उनके ऑफिस SK ट्रेडर्स 77/2 तोपसिया पहुंचे। पहचान छिपाते हुए उनके घर का पता पूछा। बताया गया कि अभी सब नुसरत की बहन के घर गए हैं। साथ ही सरफराज का फोन नंबर दे दिया। बहन का घर भी उसी बाजार में है। करीब घंटेभर की मशक्कत के बाद उनका पता मिल गया। हम उनके अपार्टमेंट जेनटेक्स प्लाजा पहुंचे। सिक्योरिटी गार्ड ने हमें रोक लिया। कुछ ही देर में बबलू भी स्कूटी से वहां आ गया। हमें देखकर हमारी सही पहचान पूछने लगा। इस बार हमने बता दिया कि दैनिक भास्कर से हैं। बहुत समझाने और भरोसा दिलाने पर वो हमें अपने घर ले जाने को राजी हो गया। नुसरत की बहन देखते ही भड़कीं, बोलीं- यहां से चले जाइएहम बबलू के साथ बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर पहुंचे। सामने गेट पर एक महिला खड़ी थीं। ये नुसरत की छोटी बहन हैं। उन्होंने गुस्से से पूछा- आप लोग कौन हैं? मीडिया से होने की वजह से उन्होंने हम पर चिल्लाना शुरू कर दिया। कुछ देर में घर से और लोग बाहर आने लगे। ये वही घर है, जिसमें नुसरत और उनके पति डॉ. आसिफ मौजूद थे। परिवार के लोगों ने धमकी दी कि गार्ड से कहकर, धक्के मारकर बाहर करवा देंगे। हमने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की। इसके बाद हम बाहर आ गए। भाई बोले- हम नहीं चाहते कि पति-पत्नी अलग हो जाएंबाहर जाने पर बबलू ने हमें अपने भतीजे वकार से मिलवाया। वकार सरफराज के बेटे हैं। वे वकालत करते हैं। उन्होंने ऑफिस चलने के लिए कहा। ऑफिस पहुंचकर बताया कि नुसरत के पति ने उसे मीडिया से दूर रखा है। सोशल मीडिया पर भी कुछ लिखने से मना किया है। इसी वजह से नुसरत घर में बंद है। हम कुछ नहीं कर सकते, हम नहीं चाहते कि मियां-बीवी अलग हो जाएं। इसलिए हम चुप हैं।’ ‘भाई परमिशन दें तो नीतीश समेत सभी मंत्रियों पर FIR करा दूं’बबलू आगे कहते हैं, ‘मौजूदा हुकूमत से कौन उलझेगा। हम लोगों को बहुत तकलीफ है। अगर आज मेरा बड़ा भाई परमिशन दे दे, तो अभी तोपसिया थाना जाकर नीतीश कुमार समेत वहां मौजूद सभी मंत्रियों के नाम FIR करवा दूं।’ हमने पूछा कि नुसरत क्या चाहती हैं? भाई जवाब देते हैं, ‘पति के बोलने पर ही वो कुछ करेंगी।’ नुसरत, पढ़ी-लिखी, समझदार हैं, फिर ऐसा कैसे? इस पर वकार ने कहा, ‘मुस्लिम परिवार है। यही सबसे बड़ी वजह है।’ आखिरकार नुसरत के घरवालों ने हमें उनसे नहीं मिलने दिया। भाई सरफराज ने कहा, ‘नुसरत इस माहौल में मीडिया से बात नहीं करना चाहतीं। एक महीने बाद वे मीडिया से बात करेंगी। उसने कॉलेज जाना बंद कर दिया है। मुख्यमंत्री ने जॉइनिंग लेटर दिया है, लेकिन जॉइन नहीं किया।’ हालांकि बिहार के आयुष विभाग की तरफ से जॉइनिंग की तारीख 20 दिसंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है। अब देखना यही है कि नुसरत के पति, नुसरत के लिए क्या फैसला करते हैं। हिजाब विवाद की शुरुआत15 दिसंबर को बिहार के CM नीतीश कुमार पटना में आयुष डॉक्टरों को जॉइनिंग लेटर दे रहे थे। डॉ. नुसरत लेटर लेने मंच पर आईं। नीतीश कुमार उन्हें लेटर देने लगे। नीतीश कुमार ने नुसरत के हिजाब की ओर इशारा करते हुए पूछा कि ये क्या है जी। नुसरत ने जवाब दिया, हिजाब है सर। CM ने कहा कि हटाइए इसे। इसके बाद नीतीश कुमार ने नुसरत का हिजाब खींच दिया। इस दौरान डिप्टी CM सम्राट चौधरी नीतीश कुमार को रोकने की कोशिश करते दिखे। हिजाब हटाने से नुसरत थोड़ी देर के लिए असहज हो गईं। आसपास मौजूद लोग हंसने लगे। अधिकारियों ने नुसरत को जॉइनिंग लेटर देकर जाने का इशारा किया। इसके बाद नुसरत वहां से चली गईं। 32 हजार सैलरी, आयुष डॉक्टर की नौकरी, लेकिन नुसरत नहीं पहुंचींडॉ. नुसरत पटना के राजकीय तिब्बी कॉलेज अस्पताल से पढ़ाई कर रही हैं। यहां बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी की पढ़ाई होती है। नुसरत की नियुक्ति 32 हजार रुपए सैलरी पर आयुष डॉक्टर के पद पर हुई है। उन्हें 20 दिसंबर 2025 को पटना सिटी के पीएचसी सदर में जॉइन करना था। हिजाब विवाद के बाद नुसरत ने नौकरी जॉइन नहीं की। इस दौरान इस जॉइनिंग की तारीख 31 दिसंबर कर दी गई। अगर वे इस तारीख तक जॉइन नहीं करती हैं, तो उनका अपॉइंटमेंट रद्द हो सकता है। यूपी, झारखंड और कश्मीर में नीतीश के खिलाफ शिकायतइस विवाद के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ लखनऊ, रांची और श्रीनगर में शिकायत दर्ज कराई गई। सपा की प्रदेश प्रवक्ता सुमैया राणा ने लखनऊ के कैसरबाग थाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ तहरीर दी। सुमैया मशहूर शायर मुनव्वर राणा की बेटी हैं। झारखंड की राजधानी रांची के इटकी थाने में सोशल वर्कर मो. मुर्तजा आलम ने शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि धार्मिक पोशाक के साथ सार्वजनिक मंच पर किया गया ऐसा व्यवहार आपत्तिजनक है। जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दल पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर पुलिस में नीतीश कुमार के खिलाफ शिकायत दी है।
हिंदुओं की आबादी 'मिटाने वाला' पाकिस्तान, क्रिसमस में तोड़फोड़ और मुस्लिमों पर भारत को दे रहा ज्ञान
भारत में क्रिसमस का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे तो यह ईसाईयों का त्योहार है, लेकिन इसे लेकर हर भारतीयों के दिल में उत्साह और सम्मान की भावना होती है
पुतिन के घर 91 ड्रोन से हमला, रूस ने लगाया यूक्रेन पर आरोप, कीव बोला- हमने नहीं किया अटैक
Drone Attack on Russia: नोवगोरोड क्षेत्र में कथित हमले के बाद सर्गेई लावरोव ने कहा कि यूक्रेन पर मॉस्को के हमले को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता में 'रूस की बातचीत की स्थिति में बदलाव किया जाएगा.' लावरोव ने कहा कि इस घटना में कोई नुकसान या जानमाल का नुकसान नहीं हुआ.
Putin Christmas gifts:क्रिसमस बीत गया लेकिन एक दूसरे को तोहफे देने का दौर जारी है. 25 दिसंबर की रात से शुरू हुआ जश्न एक जनवरी के बाद तक चलेगा. दुनियाभर के हाट-बाजार क्रिसमस की सजावट और गिफ्ट्स की रौनक से पटे पड़े हैं. इस बीच सैंटा बनकर तोहफे बांट रहे रूसी राष्ट्रपति पुतिन का वीडियो वायरल हो रहा है. क्या है खास आइए जानते हैं.
बौखलाया पाकिस्तान ! भारत ने चिनाब नदी पर दुलहस्ती-2 परियोजना को दी मंजूरी
भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया। भारत का ये फैसला पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका था। हालांकि, पाकिस्तान अभी तक इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि भारत ने उसे एक और झटका दे दिया
उस्मान हादी के हत्यारों को लेकर भारत-बांग्लादेश में कड़वाहट
बांग्लादेशी युवा नेता उस्मान हादी के हत्यारों के भारत में छिपने के दावे ने दोनों देशों के बीच संबंधों में कड़वाहट को और बढ़ाया. हादी के संगठन इंकलाब मंच ने वहां काम करने वाले भारतीयों के वर्क परमिट रद्द करने की मांग की
Antarctica news:ग्लेशियर की अनंत गहराइयों में तैरते हुए पहुंचना और उसकी खोज-खबर निकालना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पावर से लैस रोबोट के लिए भी आसान नहीं था. शुरुआत में सिग्नल और तस्वीरें नहीं मिलीं तो रोबोट को लापता मान लिया गया था, जबकि हकीकत में वो किसी दूसरी जगह फंसा था.
बांग्लादेश में निर्दलीय उम्मीदवार शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में अब तक इंसाफ नहीं मिला है। हादी के समर्थक और इंकलाब मंच के कार्यकर्ता यूनुस के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर कर रहे हैं। इंकलाब मंच और उससे जुड़े समूहों ने बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन किया
1,79,87,650 रुपये की घूस! बुरी फंसी इस देश के पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी, भ्रष्टाचार से हिला मुल्क
अभियोजन पक्ष ने किम केओन-ही के खिलाफ गंभीर आरोपों के चलते कड़ी सजा की मांग की है. अभियोजन ने अदालत से अनुरोध किया है कि किम केओन-ही को 15 साल की जेल की सजा दी जाए. उन पर बिचौलिया बनकर विभिन्न सौदे कराने, घूस लेने और सरकारी नियुक्तियों में अवैध रूप से हस्तक्षेप करने जैसे आरोप लगाए गए हैं.
बलूचिस्तान के सरकारी कर्मचारियों ने सोमवार को पेन-डाउन स्ट्राइक का ऐलान किया। ये लंबे समय से अपनी मांगों को अनसुना करने की आदत को लेकर सरकार से खफा हैं
Bangladeshi Hindu under attack: उपद्रवियों ने घटना को उस समय अंजाम दिया जब हिंदू परिवार घर में सुबह के वक्त सो रहा था. इससे पहले चट्टोग्राम रावजान में भी जिहादियों ने सुबह के वक्त इसी तरह हिंदुओं के घर में आग लगा दी थी.
भारत के सबसे बड़े भगोड़े... वीडियो के बाद ललित मोदी की माफी, नेटिजन्स बोले– सामने आकर कहो
Lalit Modi: भगोड़े ललित मोदी ने सोमवार को X पर पोस्ट करते हुए माफी मांगी है और कहा कि मेरा इरादा किसी को ठेस पहंचाने का नहीं था. ललित मोदी ने यह माफी हाल ही में विजय माल्या के साथ शेयर किए फोटो विवाद के बाद आई है.
BNP files Tarique Rahman's Dhaka-17 nomination:बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने 17 साल के निर्वासन के बाद ढाका-17 सीट से नामांकन दाखिल कर सनसनी मचा दी है. BNP में खुशी की लहर है, क्योंकि यह कदम पूर्व PM शेख हसीना के पतन के बाद की राजनीति को पलट सकता है. चुनाव फरवरी 2026 में होंगे.जानें पूरी खबर.
What Is robo-grandma dolls: हम सब आजकल इतने व्यस्त हैं कि माता-पिता या दादा-दादी का ध्यान नहीं रख पाते. अधिकतर लोगों के साथ यह समस्या है. साउथ कोरिया में तो हालात इतने बदतर हो गए कि लोग सुसाइड कर रहे हैं. इन सबको रोकने के लिए एक कंपनी ने छोटे-छोटे AI रोबोट बनाए हैं जो बच्चे जैसे दिखते हैं. ये बुजुर्गों से बात करते हैं, गले लगाते हैं, दवा याद दिलाते हैं। इससे उनका अकेलापन कम होता है और मन खुश रहता है. हजारों बुजुर्गों की जिंदगी बेहतर हुई है. जानें पूरी कहानी.
Turkiye News: आतंकवाद को पालने वाले देश पाकिस्तान का समर्थक देश तुर्की अब खुद आतंकवाद को लेकर डरा-सहमा है, इसी बीच उत्तर-पश्चिमी तुर्की के यालोवा प्रांत में इस्लामिक स्टेट (IS) के संदिग्ध मिलिटेंट्स के साथ झड़प हुई, जिसमें तुर्की पुलिस के 7 ऑफिसर घायल हो गए है.

