रात के लगभग आठ बज चुके हैं। सड़कों पर अंधेरा है। एक स्विफ्ट डिजायर कार तेजी से मेरे पास आकर रुकी। गेट खुला तो देखा स्टीयरिंग और गियर पर चूड़ी से सजे एक महिला के हाथ हैं। ड्राइविंग सीट पर बैठी ये महिला प्रेग्नेंट है। मुझे देखते ही महिला हल्की सी मुस्कान के साथ बोली- ‘हैलो मैम! आज मैं आपकी ड्राइवर हूं, टीना।’ मैं मुस्कुराकर आगे वाली सीट पर ही बैठ गई। हरे रंग की यूनिफॉर्म पहने टीना की उम्र करीब 30 साल होगी। मेरे बैठते ही टीना बोलीं- ‘नाइट ड्यूटी में फीमेल क्लाइंट मिल जाए तो खुशी होती है।’ मैंने पूछा- ‘मेल क्लाइंट मिलें तो?’ टीना फौरन बोल पड़ीं- कई क्लाइंट तो बहुत अच्छे होते हैं। मुझे ड्राइविंग सीट पर देखकर खुश होते हैं। लेकिन अक्सर खराब लोग भी मिलते हैं। एक बार रात 12 बजे की बात है। मेल क्लाइंट की राइड आई। एक बार के बाहर उन्हें लेने पहुंची। उसने काफी शराब पी रखी थी। पीछे बैठकर शीशे से मुझे घूर रहा था। मैंने शीशे को दूसरी तरफ घुमाया, तो वो खिसककर दूसरी तरफ जा बैठा। फिर एकटक देखने लगा। मुझे घबराहट होने लगी, फिर भी राइड बीच में नहीं रोकी। उसे एक होटल तक ड्रॉप करना था। रात का वक्त था तो ज्यादा ट्रैफिक भी नहीं था। कुछ देर में होटल पहुंच गए। मैंने कहा- आपका डेस्टिनेशन आ गया, लेकिन वो कार से उतरा ही नहीं। मैंने फिर रिक्वेस्ट की, लेकिन वो कहने लगा- मेरे साथ होटल में चलो। आज रात मेरे साथ रुक जाओ। मैं बार-बार उसे उतरने को कहने लगी, लेकिन वो माना नहीं। लड़खड़ाती जुबान से कहता रहा कि आज रात तो तुम्हें मेरे साथ रुकना ही पड़ेगा। फिर मैंने कार का गेट खोला और उसका हाथ पकड़कर बाहर खींच लिया। उसकी हालत देखकर होटल वाले भी आ गए और उसे अंदर ले गए। मैं किसी तरह अपनी जान छुड़ाकर वहां से भागी। ऐसे लोगों की वजह से ही कैब कंपनी कार में एक इमरजेंसी सेफ्टी बटन लगवाती हैं। जिसे दबाने पर कंपनी को पता लग जाता है कि कोई मुसीबत है। बातों ही बातों में मैंने टीना से पूछा प्रेग्नेंसी में भी इतने घंटे टैक्सी चला रही हो, कोई दिक्कत तो नहीं होती? टीना ने कहा- क्यों नहीं होती मैडम, लेकिन क्या करें। घर भी तो चलाना है। इसके पहले जब पेट से थी तो कैब में ही मेरा बच्चा गिर गया था। पांचवां महीना था। जुड़वा बच्चे थे। उस दिन भी नाइट ड्यूटी थी। घर लौटने में कुछ ही घंटे बचे थे। सुबह पांच बजे एक कस्टमर को एयरपोर्ट पर छोड़ा। उसके बाद अचानक दर्द शुरू हो गया। कुछ ही मिनटों में ये दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया। ब्लीडिंग शुरू हो गई। पति को फोन करके एयरपोर्ट बुलाती तो अस्पताल पहुंचने में देर हो जाती। जैसे-तैसे हिम्मत करके खुद ही गाड़ी लेकर चल दी। दर्द के मारे आंखों के सामने बार-बार अंधेरा छाने लगा। ब्लीडिंग बढ़ती जा रही थी। करीब एक घंटे बाद हॉस्पिटल पहुंची। गेट पर गाड़ी रोककर जैसे ही उतरी, चारों तरफ खून फैल गया। आंखों के सामने मेरे बच्चे खून का लोथड़ा बनकर गिर गए। मैं वहीं बेहोश हो गई थी। होश आया तो अस्पताल के बेड पर थी। पति भी ड्यूटी से छुट्टी लेकर आ चुके थे। इसके बाद कई महीने लगे मुझे अपनी जिंदगी को पटरी में लाने के लिए। न काम में मन लगता था और न घर पर। ये बताते हुए टीना पेट में हाथ रखकर कहती हैं- ‘ऊपर वाले की मेहरबानी है मैम, इसबार सबकुछ ठीक है।’ मैंने पूछा दिल्ली में अब तक का सबसे अच्छा क्लाइंट कौन था, वो तुरंत बोल पड़ी- मैडम, आमिर खान, वो फिल्मों वाले। वो शूटिंग के लिए दिल्ली आए थे। दिवाली करीब थी। मुझे कंपनी ने बताया कि जितने दिन आमिर खान दिल्ली में रहेंगे, मैं ही उनकी ड्राइवर रहूंगी। सच कहूं तो मुझे यकीन नहीं हुआ। उन्हें लेने एयरपोर्ट पहुंची। जैसे ही वो आकर कार में बैठे मुझे भरोसा ही नहीं हुआ कि फिल्मों वाले आमिर खान हैं। मैं बार-बार पीछे पलटकर उन्हें देख रही थी। वो मुझे देखते ही बोले- अरे वाह! ड्राइविंग सीट पर आपको देखकर खुशी हुई। फिर उन्होंने मेरा नाम पूछा और हाल-चाल लिया। कुछ देर बाद उन्हें होटल ड्रॉप कर दिया। फिर अगले दिन उन्हें शूटिंग साइट पर ले गई। उस दिन पूरे रास्ते उन्होंने मेरे घरवालों और मेरी पढ़ाई-लिखाई के बारे में बात की। दोपहर में लंच के वक्त उन्होंने एक शख्स को भेजकर मुझे अंदर बुलाया। फिर अपने साथ लंच करवाया। वो जब तक दिल्ली में थे, हर दिन मुझे अपने साथ ही लंच करवाते थे। एक दिन उनकी शूटिंग नहीं थी। शायद रविवार था। उन्होंने पूछा- ‘टीना जी, हमारे साथ फिल्म देखने चलेंगी क्या?’ मैंने तुरंत हां कह दिया। उनके साथ करीब 8-10 लोग और थे। हम लोग साकेत के मॉल में फिल्म देखने गए थे। पांच दिन की शूटिंग के बाद जब वो वापस मुंबई गए तो दीवाली मनाने के लिए मुझे पांच हजार रुपए देकर गए थे। वो पांच दिन मेरे जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन थे। टीना को बीच में टोंकते हुए मैंने पूछा- आपने ड्राइविंग कैसे सीखी? कुछ सोचते हुए वो बोलीं- मेरा परिवार दिल्ली की झुग्गियों में रहता था। हम पांच भाई-बहन थे। मैं चौथे नंबर की थी। पापा बस ड्राइवर थे। एक दिन वे बस लेकर दिल्ली से बाहर गए थे। रास्ते में कुछ गुंडों ने उनकी बस को रोककर लूट लिया। सवारियों को बचाने के लिए पापा ने उनसे हाथापाई की। उन लोगों ने पापा के सिर पर लोहे की रॉड मार दी। उनकी मानसिक हालत बिगड़ गई। वो कई दिनों तक दिल्ली के शहादरा मेंटल अस्पताल में भर्ती रहे। ऐसे में घर की जिम्मेदारी मां पर आ गई। वो लोगों के घरों में बर्तन और झाड़ू पोछा करने लगीं। जब कई महीने तक पापा की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उन्हें घर ले आए। लगभग दस साल लगे पापा को ठीक होने में। फिर उन्हें दोबारा ड्राइवर की नौकरी मिल गई। लेकिन मां ने उन्हें करने नहीं दी। इसी बीच मैं पैदा हुई। बचपन में जब औरतों को गाड़ी चलाते देखती तो बहुत अच्छा लगता था। बीच सड़क में खड़े होकर मैं उन्हें देखने लगती थी। घर की हालत तो ऐसी थी नहीं कि कभी कार चलाने का मौका मिले। पैसों की तंगी की वजह से दसवीं में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। फिर मैंने सिलाई सीखी। एकबार मां ने मुझे ब्यूटी पार्लर का कोर्स करने भेजा। वहां एक संस्था का कैंप लगा था, जहां महिलाओं को ड्राइविंग सिखाई जा रही थी। इसके लिए वो लोग 2 हजार रुपए ले रहे थे और नौकरी का वादा भी किया। मेरे पास सिर्फ 500 रुपए थे। मैंने उनसे कहा- अभी 500 जमा कर लो, बाकि जब नौकरी लगेगी तब सैलरी से काट लेना। वो लोग मान गए। इस तरह से मैंने ड्राइविंग सीख ली। मां या फिर मेरे भाइयों को भी ड्राइविंग सीखने से कोई आपत्ति नहीं थी। पापा को इस बारे में कुछ पता नहीं था। छह महीने की ट्रेनिंग के बाद एक हाई कमिश्नर की बेटी की कार चलाने की नौकरी मिली। तब मैं 19 साल की थी। पहली बार जब ड्यूटी पर पहुंची तो कार चलाने में पांव कांप रहे थे। लेकिन वह मैडम अच्छी थी। रास्ते में कार के बारे में हर छोटी-छोटी बात मुझे बताती थीं। तब सैलरी 5 हजार रुपए महीना थी। करीब तीन साल मैंने वहां काम किया, फिर कैब कंपनी में काम करने लगी। एक बार मां का किसी पड़ोसी से झगड़ा हो गया। वो कहने लगा कि तुम्हारी बेटी तो रातों को गाड़ी चलाती है। क्या पता गाड़ी चलाने जाती है या कुछ और करने जाती है। हमें पता है कि तुम्हारी बेटी धंधा करने जाती है। तुम्हारी बेटी धंधेबाज है। हालांकि, घरवालों को गर्व था कि मैं लड़की होकर कार चला लेती हूं। एकबार मां रिश्तेदारी में गई थी। वो लोग कहने लगे कि तुम्हें शर्म नहीं आती, बेटी की कमाई खाते हो। कोई बेटी को इस तरह कमाने भेजता है। बेटी से टैक्सी चलवाता है क्या। मां घर आकर रोने लगीं, लेकिन मुझसे कभी ये नहीं कहा कि काम छोड़ दो। यहां तक कि जब शादी के लिए ससुराल वाले मुझे देखने आए थे, मां ने उनसे साफ कह दिया था कि मेरी बेटी ड्राइविंग नहीं छोड़ेगी। जब उन लोगों ने इसपर कोई आपत्ति नहीं जताई, तब मां ने रिश्ते के लिए हामी भरी। पति राजस्थान में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। टीना बात करते हुए टैक्सी चला रही थी, तभी बगल से एक बाइक वाला कुछ बुदबुदाते हुए निकल गया। मैं कुछ कहती उससे पहले ही टीना कहने लगी- ये सब कोई नई बात नहीं है मैडम। लोग जब ड्राइविंग सीट पर महिला को देखते हैं तो ताने मारते हुए चले जाते हैं। कहते हैं- अरे मैडम तुम्हें भी गाड़ी चलानी है क्या, घर में चूल्हा-चौका करो। रोटी सब्जी बनाओ। कई बार तो क्लाइंट भी पूछने लगते हैं कि मैडम आप अच्छे से गाड़ी चला लेंगी ना। कहीं भिड़ा तो नहीं देंगी ना। कई क्लाइंट तो महिला ड्राइवर देखकर राइड कैंसिल भी कर देते हैं। कहते है- मैडम छोड़ दो ये काम। ये आदमियों का पेशा है, औरतों का नहीं। जब शुरुआत में टैक्सी चलाती थी, तब पार्किंग में गाड़ी लगाना थोड़ा मुश्किल होता था। तब अक्सर ताने सुनने पड़ते थे। दूसरे ड्राइवर मजाक उड़ाते थे। कुछ मर्द ड्राइवर तो आज भी कह देते हैं- कहां हमारी रोजी रोटी छीनने लगी हो मैडम। घर पर रहो। अपना काम करो। रोटी बनाओ। अब उन्हें कौन बताए कि मैं घर के काम भी करती हूं और कैब भी चलाती हूं। जब नाइट ड्यूटी के बाद घर जाती हूं तो पहले घर के सारे काम निपटाती हूं। खाना, कपड़ा, बर्तन सब करती हूं। इस वजह से नींद भी नहीं हो पाती है। फिर भी लोग घर का काम करने के ताने देते हैं। टीना कुछ सोचते हुए कहती हैं- ये ताने तो कुछ भी नहीं मैडम जी, कई क्लाइंट तो गाली भी देते हैं। जब मैंने पहली बार किसी से गाली सुनी थी तो रातभर सो नहीं पाई थी। एक क्लाइंट को रेलवे स्टेशन ड्रॉप करना था। मैप से उनका एड्रेस नहीं मिल रहा था। फोन करके पूछा तो नाराज हो गए। कहने लगे कि आप घर का पता तो ढूंढ नहीं पा रही, टाइम पर स्टेशन कैसे पहुंचाएंगी। जैसे-तैसे मैं उनके घर पहुंची। वो पूरे रास्ते मुझे चिल्लाते रहे कि आपकी वजह से मेरी ट्रेन छूट जाएगी। जब स्टेशन पहुंचे, तब भी उन्होंने गुस्से में गाड़ी का गेट पटक दिया। गाली देते हुए बोले- ‘जब कुछ आता नहीं तो ड्राइवर क्यों बन गई हो। घर के काम करो। ये सब औरतों के बस की बात नहीं है।’ अपनी एक खतरनाक राइड का जिक्र करते हुए टीना बताती हैं कि एक बार रात दो बजे करोल बाग से धौलाकुंआ होते हुए एयरपोर्ट जाना था। ये जंगल वाला सुनसान रास्ता है। तेज बारिश भी हो रही थी। इतना गहरा अंधेरा था कि गाड़ी की लाइट चालू होने के बाद भी मुश्किल से कुछ दिख रहा था। जाते वक्त तो क्लाइंट साथ में था। लौटते वक्त मेरी हालत खराब हो गई। मेरी दूर की बहन भी टैक्सी चलाती है। उस दिन वो भी क्लाइंट को लेकर इसी रास्ते से एयरपोर्ट जा रही थी। मैंने उसको कॉल किया और हम दोनों अलग-अलग टैक्सी में साथ में निकले। बीच रास्ते में वो टैक्सी रोककर कहने लगी कि उसकी कार में कोई चुड़ैल आ गई है। अब वो गाड़ी नहीं चला पाएगी। मैंने जैसे-तैसे उसको समझाया और किसी तरह बड़ी मुश्किल से हम उस दिन लौट पाए। नोट- टीना बदला हुआ नाम है। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-8 पुलिसवालों को मारने वाले विकास दुबे की बीवी हूं:आज वो जिंदा होते तो थप्पड़ मारती, बच्चे बाप का नाम तक नहीं सुनना चाहते साल 2020, 2-3 जुलाई की दरमियानी रात। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ वाले घर पर सो रही थी। बड़ा बेटा उन दिनों छुट्टी पर मॉस्को से इंडिया आया हुआ था और अपनी चाची के घर पर था। रात 2 बजे अचानक फोन बजा। पूरी कहानी यहां पढ़ें… 2- ब्लैकबोर्ड-पत्नी की साड़ी-पेटीकोट धोता हूं, झाडू-पोंछा करता हूं:दोस्त कहते हैं- ये मर्द नहीं, हाउस हसबैंड बनने से भाइयों की शादी नहीं हो रही कहानी ऐसे मर्द की जो पैसे कमाने बाहर नहीं जाता। घर पर रहकर झाड़ू-पोंछा करता है। बरतन धोता है। खाना बनाता है। वो हाउस हसबैंड है। ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां हाउस वाइफ होती हैं। पूरी कहानी यहां पढ़ें
India-B'desh Ties: शेख हसीना ने कैमरे पर चेहरा क्यों नहींदिखाया? बेटे सजीब बोले- मां को भारत में मिला सम्मान
ईरान-ओमान समझौता अंतिम चरण – होर्मुज जलडमरूमध्य नौवहन मार्ग पर सहमति
ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले एक प्रस्तावित वाणिज्यिक नौवहन मार्ग के लिए खास तरह के भौगोलिक चिन्हों पर सहमति व्यक्त की है
कार धमाके में रूस की प्रमुख ड्रोन निर्माता कंपनी के सीईओ घायल, आईसीयू में भर्ती
रूस की एक प्रमुख सैन्य ड्रोन निर्माता कंपनी 'यूरालड्रोनजावोड' के सीईओ व्लादिमीर त्काचुक मंगलवार देर रात एक कार विस्फोट घटना के बाद गंभीर रूप से घायल हो गए
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली में आयोजित एक वर्चुअल बातचीत में मीडिया से देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए 2024 के छात्र आंदोलन को सुनियोजित राजनीतिक साजिश बताया
एसएआईसी और जीएम ने संयुक्त उद्यम समझौते का किया नवीनीकरण
शांगहाई ऑटोमोटिव इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (एसएआईसी) और जनरल मोटर्स (जीएम) ने अपने संयुक्त उद्यम समझौते के नवीनीकरण पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दोनों कंपनियों के संयुक्त उद्यम की अवधि 20 साल के लिए बढ़ाकर वर्ष 2047 तक कर दी गई।
Pakistan: इमरान खान की रिहाई की मांग पर पाकिस्तान में बवाल, कई शहरों में प्रदर्शन; 100 से ज्यादा गिरफ्तार---Imran Khan Supporters Protest Across Pakistan, Over 100 Arrested on Completion of Three Years in Jail
Sheikh Hasina Bangladesh: शेख हसीना करेंगी घर वापसी, दिया बड़ा राजनीतिक संदेश!
Sheikh Hasina Bangladesh: शेख हसीना करेंगी घर वापसी, दिया बड़ा राजनीतिक संदेश!
ढाका (बांग्लादेश)। बांग्लादेश में आतंकवाद विरोधी कानून (Anti-Terrorism Act) के सख्त प्रावधानों के तहत 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले 14 वर्षीय छात्र को न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस कार्रवाई के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश है. मुख्य विपक्षी दल अवामी लीग ने वर्तमान सरकार […]
गिरफ्तारी या मौत का खतरा भी नहीं रोक सकता, दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी : शेख हसीना
नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो वर्षों के अंतराल के बाद बुधवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से वर्चुअल माध्यम से देश और दुनिया को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि वह हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी, चाहे उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए या उनकी जान को खतरा ही क्यों न […]
इमरान खान के समर्थकों का उग्र प्रदर्शन, 100 से ज्यादा गिरफ्तार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के तीन साल पूरे होने पर देशभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए. पंजाब और सिंध प्रांतों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे, जिसमें 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है.
निर्मल पुर्जा का शव बेस कैंप पहुंचा, 8000M पर चला रिकवरी मिशन
ब्रॉड पीक पर आए विनाशकारी हिमस्खलन के बाद दुनिया के मशहूर नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल 'निम्स दाई' पुर्जा समेत चार पर्वतारोहियों के शव आखिरकार बेस कैंप तक पहुंचा दिए गए हैं. 8,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर चला यह रिकवरी मिशन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा. अभी भी तीन पर्वतारोहियों के शव पहाड़ पर फंसे हैं, जिन्हें नीचे लाने की कोशिश जारी है.
जर्मन एयरपोर्ट पर यूक्रेनी विमान के पास मिला विस्फोटक वाला ड्रोन
जर्मनी में एक यूक्रेनी कार्गो विमान के पास विस्फोटकों से लैस ड्रोन मिला है जबकि एक विमान से कोई उड़ान भरती अज्ञात वस्तु टकराई है. हालांकि इस टक्कर के बाद भी विमान सुरक्षित उतरने में सफल रहा.
ट्रंप का बड़ा दावा- इस हफ्ते खुल सकता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान-ओमान के बीच फाइनल हुआ ड्राफ्ट!
ट्रंप ने दावा किया है कि Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए इस हफ्ते समझौता हो सकता है। ईरान और ओमान के बीच इस जलमार्ग को लेकर एक समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में है।
बांग्लादेश क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाकिब अल हसन के घर को जलाने की कोशिश की गई है। जानकारी के अनुसार, ये घटना शाकिब द्वारा शेख हसीना के कार्यक्रम में भाग लिए जाने के बाद देखने को मिली है।
बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पेट्रोल बम से हमला, हसीना के कार्यक्रम में हुए थे शामिल
नई दिल्ली में शेख हसीना के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर हमले का दावा किया गया है. घर में तोड़फोड़ और आग लगाने की कोशिश की बात सामने आई है, जबकि पेट्रोल बम के आरोप पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
Russia में Drone फैक्टरी के प्रमुख Vladimir Tkachuk कार धमाके में घायल, चालक की मौत
मॉस्को, पांच अगस्त (एपी) रूसी सेना को ड्रोन की आपूर्ति करने वाली एक फैक्टरी के निदेशक कार विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि उनके चालक की मौत हो गई। मीडिया की खबरों से बुधवार को यह जानकारी मिली। सरकारी समाचार एजेंसियों ‘तास’ और ‘आरआईए नोवोस्ती’ ने बताया कि मॉस्को से 1,400 किलोमीटर पूर्व में येकातेरिनबर्ग के पास बोल्शोय इस्तोक में मंगलवार देर रात हुए कार विस्फोट के बाद व्लादिमीर तकाचुक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों की ओर से इस पर तुरंत कोई बयान नहीं आया है। तकाचुक ‘उपीर’ नामक ड्रोन बनाने वाली यूराल्ड्रोनजावोड फैक्टरी के प्रमुख थे। एक छोटे स्तर के उद्यमी तकाचुक ने अभियंताओं की एक टीम बनाई, जिसने ‘उपीर’ को विकसित किया और रूस के चौथे सबसे बड़े शहर येकातेरिनबर्ग के पास इसके उत्पादन की व्यवस्था की। यह शहर यूराल पर्वत के पास स्थित एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। ‘उपीर’ एक सस्ता ड्रोन है और सैनिकों ने जैमिंग से सुरक्षा देने की क्षमता के लिए इसकी तारीफ की है। सितंबर 2024 में सेंट पीटर्सबर्ग में सैन्य ड्रोनों की एक प्रदर्शनी के दौरान तकाचुक को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने अपने डिजाइन पेश करते हुए देखा गया था। यूक्रेन में क्रेमलिन की सैन्य कार्रवाई के पक्के समर्थक तकाचुक ‘ऑब्सेस्ड विद वॉर’ नाम का एक चैनल भी चलाते हैं, जिसके टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर 6,50,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं। बुधवार को चैनल पर पोस्ट किए गए एक संदेश में कहा गया कि जानलेवा हमले की कोशिश के बाद वे आपात चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं और उनकी हालत स्थिर है। कोमर्सेंट ने बताया कि एक हफ़्ते पहले, रूसी सेना के लिए ड्रोन बनाने वाली एक और कंपनी के प्रमुख आंद्रे चेरेजोव को तुला शहर में गोली मारकर घायल कर दिया गया था। फरवरी 2022 में मॉस्को द्वारा यूक्रेन में सेना भेजने के बाद से, रूसी अधिकारियों ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और सार्वजनिक हस्तियों को निशाना बनाकर किए गए कई बम धमाकों और अन्य हमलों के लिए कीव को जिम्मेदार ठहराया है।
शाकिब अल हसन के घर पर फेंका पेट्रोल बम, शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए थे शामिल
अज्ञात उपद्रवियों के एक समूह ने मागुरा स्थित उनके आवास को निशाना बनाया। उपद्रवियों ने पथराव किया, खिड़कियों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तथा घर में आग लगाने की मंशा से पेट्रोल बम फेंका।
दूसरा पाकिस्तान बन गया बांग्लादेश, यहीं से अब निकलेंगे आतंकवादी; शेख हसीना के बेटे ने चेताया
शेख हसीना के बेटे वाजेद ने दुनियाभर के देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अभी नहीं रोका गया तो भविष्य में आतंकवादियों का अगला ग्रुप अब बांग्लादेश से ही आएगा।
'बांग्लादेश, भारत के लिए एक और पाकिस्तान बन गया है', शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने दी चेतावनी
'बांग्लादेश, भारत के लिए एक और पाकिस्तान बन गया है', शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने दी चेतावनी
Rukhsar Ahmed: UK में जमानत पर रिहा पूर्व पाकिस्तानी मंत्री ने फिर जीता PoK चुनाव
(अदिति खन्ना)लंदन, पांच अगस्त ब्रिटेन में कम उम्र की लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपों में गिरफ्तार हुए पाकिस्तान के एक पूर्व मंत्री ने जमानत पर रहने के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चुनाव लड़ा। ब्रिटेन के एक अखबार ने बुधवार को अपनी खबर में यह जानकारी दी। खबरों के मुताबिक, रुखसार अहमद को पिछले सप्ताह पीओके में हुए चुनाव में फिर से चुना गया। ‘द गार्डियन’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2024 में मैनचेस्टर हवाई अड्डे पर अहमद को गिरफ्तार किया गया था। उस पर यौन उत्पीड़न और बच्चों की तस्करी का संदेह था। खबर के मुताबिक, 62 वर्षीय व्यक्ति को पिछले महीने जमानत की शर्तों के तहत ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस के सामने पेश होना था, लेकिन बताया जा रहा है कि वह पेश नहीं हुआ। इसके मुताबिक, ब्रिटिश पुलिस अहमद की जमानत शर्तों के तहत उसके विदेश यात्रा करने पर रोक लगाना चाहती थी, लेकिन दो साल पहले एक अदालत ने इन सख्त उपायों को मंजूरी नहीं दी। अहमद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) से जुड़ा है। अहमद 2006 से लेकर 2021 में अपनी सीट हारने तक अलग-अलग राज्य सरकारों में मंत्री रहा। अखबार के मुताबिक, उम्मीद है कि अहमद अगले छह सप्ताह में मैनचेस्टर में जमानत के सिलसिले में पेश होगा; ऐसा न करने पर पुलिस गिरफ़्तारी का वारंट जारी कर सकती है या उसके प्रत्यर्पण की कार्रवाई कर सकती है।
परिवार के बलिदान को याद कर भावुक हुईं शेख हसीना, बेटा बोला- भारत ने राष्ट्राध्यक्ष की तरह रखा
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तख्तापलट को दो साल पूरे होने पर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि वह जल्दी ही बांग्लादेश वापस लौटेंगीं। बांग्लादेश के लिए अपने परिवार के बलिदान को याद कर वह प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही भावुक हो गईं।
'ईरान ने टोल वसूला तो हम लेंगे चार्ज', होर्मुज को लेकर ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए ईरान और ओमान के बीच समझौते की संभावना जताई है, जो कल या परसों तक हो सकता है. इस बीच, ट्रंप ने जहाजों से टोल वसूली की इजाजत नहीं देने की चेतावनी दी है.
लाइव संबोधन में रो पड़ीं शेख हसीना, बोलीं- 'लाखों शहादतों वाला बांग्लादेश आज बदल गया...'
लाइव संबोधन में रो पड़ीं शेख हसीना, बोलीं- 'लाखों शहादतों वाला बांग्लादेश आज बदल गया...'
चीन ने ट्रंप की तरफ से लगाए गए हाल के टैरिफ का जवाब दिया है और अमेरिका की 6 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही, ड्रोन एक्सपोर्ट के नियम भी कड़े कर दिए हैं।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप लगाकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की आवाज अब संसद तक पहुंच गई है। बुधवार को लोकसभा में पीठासीन जगदंबिका पाल ने प्रदर्शनकारी छात्रों का जिक्र कर विपक्ष पर निशाना साधा। वहीं, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के पीएम मोदी पर बयान को लेकर उपसभापति हरिवंश ने उन्हें बीच में टोक दिया। इस तरह दोनों सदनों में दिनभर हंगामा होता रहा। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी सांसद पोस्टर और तख्तियां लेकर वेल में पहुंच गए। हंगामा बढ़ा तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नाराजगी जताई। कार्यवाही शुरू होने के करीब एक मिनट बाद ही सदन दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। दोपहर 2 बजे सदन की बैठक फिर शुरू हुई, लेकिन हालात नहीं बदले। विपक्ष फिर वेल में पहुंच गया। हंगामे के बीच पीठासीन जगदंबिका पाल ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके बाद जगदंबिका पाल ने कहा कि झारखंड में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष उनकी आवाज उठाने के बजाय संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उन्होंने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष संसद नहीं चलने देना चाहता। कई विधेयक बिना चर्चा के पारित करना पड़ा। इसकी जिम्मेदारी विपक्ष पर है। रिजिजू ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों पर राम मंदिर का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद परिसर में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। लगातार हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही 6 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी हुई नारेबाजी राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। शून्यकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर सभापति ने उन्हें नियमों का पालन करने की चेतावनी दी। हंगामे के चलते सुबह 11:23 बजे सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। दोबारा बैठक शुरू होने पर प्रश्नकाल चला। शोर-शराबे के बीच सांसदों ने सरकार से सवाल भी पूछे। दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई। इस दौरान उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई। विपक्ष प्रधानमंत्री की मौजूदगी की मांग को लेकर नारेबाजी करता रहा। चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने विधेयक से हटकर टिप्पणी करनी शुरू की। इस पर उपसभापति हरिवंश ने उन्हें टोका और कहा कि वे केवल विधेयक से जुड़े मुद्दे पर ही बोलें। बुधवार को भी संसद में हंगामा हावी रहा। लोकसभा ने शोर-शराबे के बीच बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 पारित किया। वहीं, राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक पर चर्चा हुई। सरकार और विपक्ष के टकराव के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
अचानक भारत के वायुसेना प्रमुख पहुंचे Vietnam , Brahmos के दम से हिला चीन
जब भारत के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह वियतनाम की धरती पर कदम रखते हैं तो वह सिर्फ एक मेहमान नहीं होते हैं। बल्कि वो उस ब्रह्मोस की ताकत और सुखोई के भरोसे को साथ लेकर चलते हैं जिसने पूरे दक्षिण चीन सागर की लहरों में एक नई हलचल पैदा कर दी है? दरअसल डिप्लोमेसी में तकनीक का बहुत बड़ा महत्व होता है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हनोई में महान क्रांतिकारी नेता होची मिन को श्रद्धांजलि देकर यह साफ कर दिया कि भारत वियतनाम के संघर्ष और उसके गौरवशाली इतिहास का सम्मान बखूबी करता है। लेकिन असली गेम शुरू हुआ जब वो रेजीमेंट 927 पहुंचे। रेजीमेंट 927 वियतनाम की वायुसेना की रीड है। यहां एयर चीफ ने सीधे वियतनामी फाइटर पायलट से बातचीत की। वियतनाम भी सुई 30 एम के भी उड़ाता है और भारत के पास इसका सबसे बड़ा बेड़ा है। इसे भी पढ़ें: Pakistan में कुछ बड़ा होने वाला है? विदेशी मीडिया पर बैन, बाहर जाने के लिए पत्रकारों को लेना होगा NOC भारत अब वियतनाम को इन विमानों की ट्रेनिंग और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई में नंबर वन पार्टनर बनने जा रहा है। दोस्तों, इसका मतलब क्या है? इसका मतलब यह है कि वियतनाम के आसमान की सुरक्षा में अब भारत का दिमाग और तकनीक दोनों शामिल हैं। अब बात करते हैं उस सौदे की जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। $629 मिलियन की ब्रह्मोस मिसाइल डील। यह सिर्फ एक व्यापार नहीं है। यह वियतनाम को दांत देने जैसा है। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूड मिसाइल है। अगर इसे वियतनाम के तटों पर तैनात कर दिया जाता है तो दक्षिण चीन सागर में किसी भी अवैध घुसपैठ को रोकना वियतनाम के लिए बाएं हाथ का खेल होगा। इसे भी पढ़ें: Shaurya Path: इधर से China, उधर से Pakistan, Border की रक्षा कैसे करेगा Hindustan? सामने आया पूरा प्लान इसे भी पढ़ें: Shaurya Path: इधर से China, उधर से Pakistan, Border की रक्षा कैसे करेगा Hindustan? सामने आया पूरा प्लान भारत ने वियतनाम को क्रेडिट ऑफ लाइन यानी लोन भी दी है ताकि वह अपनी रक्षा जरूरतों को आसानी से पूरा कर सके और यही तो दोस्ती है और यही दोस्ती में दिखता है कि भारत अब सिर्फ अपनी सुरक्षा नहीं कर रहा है बल्कि अपने दोस्तों को भी अभेद्य बना रहा है और चीन को यह बता रहा है कि हरकत करना बंद कर दीजिए वरना अंजाम बुरा होगा। अब चीन वियतनाम के समुद्री क्षेत्र पर अक्सर दावे करता है और हमने आपको अक्सर वीडियो में दिखाया भी है सबूतों के साथ। यहां भारत की एंट्री चीन के स्ट्रिंग ऑफ पल्स का सबसे बड़ा जवाब है। अगर चीन हिंद महासागर में पैर पसारने की कोशिश करता है तो भारत वियतनाम के जरिए चीन के पिछले दरवाजे यानी कि दक्षिण चीन सागर जिसे हम साउथ चाइना सी कहते हैं उसमें अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। एयर चीफ मार्शल और जनरल गुएन तान कुओं के बीच हुई बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा शब्द का बार-बार इस्तेमाल हुआ। यह कूटनीतिक भाषा में बीजिंग को एक सीधा और स्पष्ट मैसेज था, संदेश था कि हम अब अकेले नहीं हैं। यानी वियतनाम भारत के साथ खड़ा है। भारत और वियतनाम का रिश्ता नया नहीं है। 1954 में जब वियतनाम फ्रांसीसी शासन से लड़ रहा था तब भारत ने उसका समर्थन कर दिया था।
आंखें बंद कर क्यों बैठे ट्रंप? भारत के खिलाफ अमेरिका में चल रही क्या प्लानिंग
कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ऑफिस में आंखें बंद करके बैठे थे और ईसाई धर्मुगुरु उन्हें आशीर्वाद दे रहे थे। खुद को सेक्युलर बोलने वाले अमेरिका ने पहली बार दुनिया को दिखा दिया कि देश ईसाई राष्ट्रवादी चला रहे हैं। लेकिन अब अमेरिका यही ईसाई राष्ट्रवाद भारत पर थोपना चाहता है। अमेरिका भारत पर बहुत अजीब हमले की तैयारी कर रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका भारत को ईसाई बहुल देश बनाना चाहता है? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि डॉनल्ड ट्रंप की पार्टी के एक नेता रायली मूर ने खुलकर भारत को धमकी दी है। रायली मूर ने भारत में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी एफसीआरए कानून में संशोधनों की आलोचना कर दी है। हैरानी की बात देखिए कि यह तो भारत का कानून है लेकिन इसका विरोध अमेरिका की संसद में शुरू हो गया है। इसे भी पढ़ें: Chai Par Sameeksha: PM ने गाली देने वालों को किया माफ, क्या Gen Z भी अब मोदी मोदी के नारे लगाएंगे? भारत तो एफसीआरए कानून में संशोधन इसलिए ला रहा है ताकि एनजीओ और ईसाई मिशनरी विदेशी पैसे का इस्तेमाल भारत में धर्मांतरण रैकेट चलाने के लिए ना कर पाएं। भारत की विकास परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रोकने के लिए ना कर पाएं। विदेशी पैसे का इस्तेमाल एनजीओ और ईसाई मिशनरी भारत में इमीग्रेशन, अबॉर्शन और होमोसेक्सुअलिटी जैसे मुद्दों को सही ठहराने के लिए करते हैं। भारतीय लोगों की आस्थाओं और संस्कृति पर प्रहार करने के लिए करते हैं। यह सभी वो मुद्दे हैं जो भारत के विकास और भारत की हिंदू पहचान को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाते हैं। लेकिन अब भारत ऐसा नहीं होने देगा। शायद इसीलिए अमेरिका डर गया है। शायद इसीलिए रैली मूर झूठी खबरें फैलाते हुए एफसीआरए संशोधनों को ईसाई समुदाय पर हमला बता रहे हैं। चेतावनी दे रहे हैं कि भारत अमेरिका के संबंधों पर इसका बुरा असर पड़ेगा। यह संशोधन तो धर्मांतरण को रोकने के लिए है। हिंदुओं को बचाने के लिए है। ईसाइयों का तो इससे कुछ लेना देना नहीं है। यह ठीक वैसा ही नैरेटिव है जो सीएए कानून के दौरान फैलाया गया था। इसे भी पढ़ें: FCRA Bill पर US MP Riley Moore ने जताई चिंता, द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की कही बात सीएए कानून को भी मुस्लिम विरोधी बता दिया गया था। जबकि मुसलमानों का उस कानून से कुछ लेना देना नहीं था। वो कानून भी हिंदुओं की रक्षा के लिए लाया गया था। क्या आप जानते हैं कि अमेरिका और यूरोप से आने वाले पैसे का इस्तेमाल एनजीओ और ईसाई मिशनरी किस तरह से करते हैं? उसका एक उदाहरण देख लीजिए। आदिवासी रीति-रिवाजों को मानने वाले नागालैंड, मिजोरम और मेघालय जैसे राज्य आज ईसाई बहुसंख्यक हो गए हैं। पिछले 2 सालों में पंजाब में 3.5 लाख से ज्यादा लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi से मिले Kiren Rijiju; संसद गतिरोध खत्म करने में मांगा सहयोग पंजाब के तरन-तारन में ईसाइयों की आबादी 102% की रफ्तार से बढ़ी है। झारखंड और छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदायों में जमकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। कुछ समय पहले एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें दावा किया गया कि भारत सरकार के बाद कैथोलिक चर्च भारत में जमीन का दूसरा सबसे बड़ा मालिक है जिसके पास पूरे देश में लगभग 70 मिलियन हेक्टेयर यानी 172 मिलियन एकड़ जमीन है। आपको क्या लगता है यह सब कुछ किस पैसे से किया गया है? यह पैसा अमेरिकी डीप स्टेट का है। भारत को तेजी से ईसाई बहुसंख्यक देश बनाने की तैयारी की जा रही है। हैरानी की बात देखिए कि अमेरिका में खुद फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट नाम का एक कानून है जो दूसरे देशों से आने वाले विदेशी प्रभाव, धर्म परिवर्तन और प्रोपोगेंडा के लिए मिलने वाले पैसे पर रोक लगाता है। यानी अमेरिका अपने देश में तो धर्मांतरण पर रोक लगा रहा है लेकिन भारत के हिंदुओं को ईसाई बना रहा है। शायद इसीलिए रायली मूर एफसीआरए कानून का विरोध कर रहे हैं। शायद इसीलिए पहली बार अमेरिका की डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियां इतिहास में पहली बार एक साथ आई हैं और एफसीआरए संशोधनों का विरोध कर रही हैं। रायली मूर ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि अमेरिका हमेशा एक ईसाई देश रहेगा।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 2024 में सत्ता से हटने और भारत में निर्वासित होने के बाद अपना पहला सार्वजनिक संबोधन दिया। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी बात खुलकर रखी। इस दौरान वह इमोशनल हो गई। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का कहना है कि मुहम्मद यूनुस की सरकार का पुलिसकर्मियों के हत्यारों को सुरक्षा (इंडेम्निटी) देने का एक फ़ैसला उनके असली मकसद को ज़ाहिर करता है। उनका कहना है कि उन्होंने इस मामले की जांच शुरू की थी, लेकिन मुहम्मद यूनुस की गैर-कानूनी अंतरिम सरकार ने उसे रोक दिया। वे सवाल करती हैं, अगर उन्हें डर नहीं था, तो उन्होंने सच सामने क्यों नहीं आने दिया? इसे भी पढ़ें: हम भारत संग अपने रिश्ते नहीं बिगाड़ना चाहते हैं...शेख हसीना के कार्यक्रम से नई दिल्ली ने बनाई दूरी, बांग्लादेश ने भी बदले अपने सुर शेख हसीना ने आरोप लगाया कि उनके सत्ता से हटने के बाद से ही अवामी लीग के हज़ारों नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ-साथ पुलिसकर्मियों, पत्रकारों, वकीलों, जजों और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को गिरफ़्तारी, टॉर्चर और हिंसा का सामना करना पड़ा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2024 का आंदोलन संविधान पर एक सुनियोजित हमले में बदल गया और मौजूदा सरकार पर असहमति को दबाने और आज़ादी की लड़ाई (लिबरेशन वॉर) से जुड़े लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इस दौरान शेख हसीना अपने परिवार के सदस्यों को याद कर रोने लगीं। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये वो बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए दी लाखों शहादत दी गई। बांग्लादेश में चरमपंथ में भारी बढ़ोतरी: पूर्व इंटेलिजेंस अधिकारी बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक और इंटेलिजेंस अधिकारी अमीनुल हक पोलाश का कहना है कि शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद हाल के वर्षों में चरमपंथ में भारी बढ़ोतरी हुई है। वकील शाह मोहम्मद बख्तियार ने मोहम्मद यूनुस की पिछली सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा शेख हसीना पर चलाए गए दिखावटी मुकदमे की भी आलोचना की है। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं शेख हसीना के सहयोगी और राजनीतिक विश्लेषक अबू ओबैदा अरिन ने पूर्व प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने बांग्लादेश को बिना तार वाले बिजली के खंभों वाले देश से दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक में बदल दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली बीएनपी सरकार के दौरान कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए 10% कमीशन देना पड़ता था।
Dubai के Jebel Ali Industrial Zone में 7 भीषण धमाके, धुएं के गुबार से सहमा UAE का ट्रेड हब
संयुक्त अरब अमीरात के तट पर कई धमाकों और उसके बाद भीषण आग लगने की खबर मिली। ईरानी ब्रॉडकास्टर 'प्रेस टीवी' ने अरबी भाषा के मीडिया और क्षेत्रीय सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि दुबई के जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया में 20 मिनट के भीतर कम से कम सात धमाके सुने गए। प्रेस टीवी ने आगे बताया कि वीडियो फुटेज में जेबेल अली पोर्ट के पास से घने धुएं के गुबार उठते हुए दिखाई दिए। हालांकि, प्रेस टीवी के अनुसार, किसी भी व्यक्ति या संगठन ने इस घटना की ज़िम्मेदारी नहीं ली है। इसे भी पढ़ें: मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसा इस बीच, प्रेस टीवी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए पुष्टि की कि घटनास्थल पर धुआं उठने के बाद 'UAE अधिकारियों ने आग की घटना की वीडियो बनाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है'। दक्षिण-पश्चिमी दुबई में स्थित जेबेल अली, इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेंटर है। इस इलाके में जेबेल अली पोर्ट और जेबेल अली फ्री ज़ोन (Jafza) शामिल हैं। Jafza एक इंटरनेशनल ट्रेड हब है जिसे 1985 में शुरू किया गया था और यहाँ अभी 150 से ज़्यादा देशों की 11,000 से ज़्यादा कंपनियाँ काम कर रही हैं। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कॉम्प्लेक्स बड़े हाईवे, जेबेल अली पोर्ट और अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ा हुआ है और ग्लोबल व्यापार के लिए एक अहम केंद्र बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: CBI और विदेश मंत्रालय के सहयोग से कौशल-बंबीहा गिरोह का गौरव गडोली UAE से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार यह बात तब सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (वहाँ के समय के अनुसार) को कहा कि ईरान और ओमान के साथ एक समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बहुत जल्द खोल दिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इलाके में तनाव कम करने के लिए अंतरिम व्यवस्था पर बातचीत के दौरान कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक को बहुत बड़ा झटका लगेगा। उन्होंने अपनी बात फिर दोहराई कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी और इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने को चल रही कूटनीतिक कोशिशों से जोड़ा।
5 महीने की लड़ाई ने बदला समीकरण! ईरान युद्ध में अमेरिका के मिसाइल स्टॉक खाली, लम्बा चला युद्ध तो क्या करेंगे ट्रंप
5 अगस्त 2024, भयंकर विरोध और हिंसा के बीच शेख हसीना बांग्लादेश से भारत आ गई थीं। ठीक दो साल बाद, आज दिल्ली में हसीना पहली बार एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगी। आखिर हसीना का आगे का प्लान क्या है और क्या भारत इसमें उनके साथ है, इसका भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर क्या असर होगा; आज के एक्सप्लेनर में पीछे की पूरी कहानी... सवाल-1: प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंटरव्यूज के पीछे शेख हसीना का इरादा क्या है?जवाब: 2 साल से भारत में अज्ञात जगह पर रह रहीं शेख हसीना बीते करीब दो महीने से दोबारा एक्टिव हैं और वापस बांग्लादेश जाने की बात कर रही हैं… अब शेख हसीना दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया, यानी FCC के एक कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होंगी। ये कार्यक्रम मार्क टली ऑडिटोरियम में 5 अगस्त की शाम 6 से 7:30 बजे तक होगा। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग होगी। इसमें हसीना बांग्लादेश वापसी और मौजूदा सरकार को घेरने वाले बयान दे सकती हैं। सवाल-2: हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत-बांग्लादेश का रुख क्या है?जवाब: अलग-अलग समझते हैं… बांग्लादेश इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के खिलाफ भारत ने कहा- ये प्राइवेट इवेंट, हमारा कंट्रोल नहीं सवाल-3: जान का खतरा, फिर बांग्लादेश क्यों जाना चाहती हैं हसीना?जवाब: हसीना के जोखिम उठाने की 2 वजहें हैं… 1. बांग्लादेश की राजनीति में वापसी की कोशिश ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर विवेक मिश्र के मुताबिक, ‘शायद शेख हसीना को लगने लगा है कि दोबारा बांग्लादेश में ताकत से खड़े होने का मौका है और सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा सकता है।’ इसके कुछ संकेत भी दिखने लगे हैं… इसके अलावा अमेरिका में रह रहे हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय फिलहाल भी बांग्लादेश के मुद्दों पर एक्टिव हैं। अगर हसीना उनके लिए राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहें, तो भी ये बिना बांग्लादेश लौटे मुमकिन नहीं है। 2. पार्टी के लोगों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश सवाल-4: क्या हसीना की वापसी के इरादे के पीछे भारत है?जवाब: बांग्लादेश हसीना के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा है। भारत का कहना है कि प्रत्यर्पण का मामला कानूनी मुद्दा है, इसे उसी तरीके से निपटा जाएगा। हालांकि अंदरखाने भारत का क्या रुख है, इसे लेकर एक्सपर्ट के दो तरह के तर्क हैं… भारत में हसीना का ज्यादा दिन रहना मुश्किल भारत हसीना को बलि का बकरा नहीं बना सकता सवाल-5: क्या शेख हसीना के मुद्दे पर भारत-बांग्लादेश संबंध और बिगड़ सकते हैं?जवाब: सीमा विवाद, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जैसे मुद्दों पर टकराव और एंटी-इंडिया स्टैंड के चलते खालिदा से भारत के रिश्ते अच्छे नहीं रहे। जबकि शेख हसीना भारत के नजदीक रही हैं। शेख हसीना के भारत आने के बाद बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी, उसके बाद फरवरी 2026 से तारिक रहमान की पार्टी BNP सत्ता में हैं। सत्ता बदलने के बाद भारत को लेकर बांग्लादेश का रुख पॉजिटिव नहीं रहा है… राजन कुमार कहते हैं, 'हसीना के मुद्दे को बांग्लादेश हमसे रिश्तों के केंद्र में रखकर देख रहा है। हमारा जैसा रुख होगा, उसी हिसाब से आगे रिश्ते चलेंगे। भारत भी जानता है कि तारिक सरकार स्थायी है, इसलिए कोई गलती नहीं करना चाहता। हालांकि बांग्लादेश में हसीना और जिया के बीच सत्ता अचानक उलटती-पलटती रही है। ऐसा भी हो सकता है कि हसीना दोबारा सत्ता में आने लायक स्थिति में आ जाएं। वह भारत के लिए भी बेहतर होगा।’ --------------- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: शेख हसीना की फांसी लगभग तय, फिर भी बांग्लादेश क्यों जाना चाहती हैं; क्या भारत का रुख बदल गया बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद वो भागकर भारत आ गई थीं। उन्हें बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेशी नेता कह रहे- वापस आने पर इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। पढ़िए पूरी खबर…
चीन ने बुधवार को अमेरिका के खिलाफ कई आर्थिक जवाबी कदम उठाए। उसने छह अमेरिकी कंपनियों को प्रतिबंधों वाली ब्लैकलिस्ट में डाल दिया और वॉशिंगटन भेजे जाने वाले ड्रोन के एक्सपोर्ट पर पाबंदियां और कड़ी कर दीं। यह कदम अमेरिका द्वारा जबरन मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नए व्यापार प्रतिबंध लगाने के बाद उठाया गया है। ये जवाबी कदम तब उठाए गए जब वॉशिंगटन ने बीजिंग और 50 से ज़्यादा अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाए। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार से जुड़ी व्यापक नीति का हिस्सा था; उनका तर्क था कि वॉशिंगटन के लिए अनुचित व्यापार घाटे को ठीक करने के लिए ऐसा करना ज़रूरी था। इन कदमों का जवाब देते हुए, चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के इन कदमों से चीन के जायज़ अधिकारों और हितों को गंभीर नुकसान पहुँचता है। इसे भी पढ़ें: Iran से संघर्ष के चलते अमेरिका की अत्याधुनिक Missiles लगभग खत्म, खाली मिसाइल भंडार देखकर Trump परेशान प्रवक्ता ने आगे कहा इसके जवाब में चीन केवल ज़रूरी जवाबी कदम ही उठा सकता है, जिसमें अमेरिका को ड्रोन और उनके मुख्य पुर्ज़ों व टेक्नोलॉजी के निर्यात पर नियंत्रण को और कड़ा करना शामिल है। अपनी कार्रवाई की रणनीति के तहत, वाणिज्य मंत्रालय ने घरेलू सर्टिफ़िकेशन संस्थाओं द्वारा की जाने वाली फ़ैक्ट्री फ़ॉलो-अप जाँच को रोक दिया, अमेरिकी कंप्लायंस टेस्टिंग फ़र्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया, और ऑफ़िस कॉपियर व प्रिंटर के आयात की राष्ट्रीय सुरक्षा जाँच शुरू कर दी। इसे भी पढ़ें: BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन बीजिंग ने छह अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगाए, जिनमें बायोटेक्नोलॉजी फ़र्म 'एप्लाइड डीएनए साइंसेज़' और जियोसाइंस रिसर्च कंपनी 'स्ट्रेटम रिज़र्वोयर' शामिल हैं। इन प्रतिबंधों के तहत चीनी लोगों और संगठनों को इन कंपनियों के साथ संबंधित लेन-देन, सहयोग या अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोक दिया गया है।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बुधवार को कोलंबो में श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने भारत की मदद से द्वीप देश में चल रहे विकास कार्यों सहित प्रमुख द्विपक्षीय परियोजनाओं की समीक्षा भी की। ये बैठकें उनके एक दिवसीय दौरे का हिस्सा थीं, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को और मजबूत करना था। मिसरी ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की, विदेश मंत्री विजिता हेराथ से मिले और अपनी श्रीलंकाई समकक्ष अरुनी रनराजा के साथ भी बातचीत की। उनकी प्रधानमंत्री हरिणी अमरसूर्या से भी मुलाकात होनी थी, क्योंकि यह दौरा भारत और श्रीलंका के बीच नियमित उच्च-स्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाने वाला था। इसे भी पढ़ें: Shashi Tharoor की अध्यक्षता में India-Sri Lanka Relations पर मंथन, MEA अधिकारियों संग बड़ी Meeting कोलंबो में भारतीय उच्चायोग के अनुसार, राष्ट्रपति दिसानायके के साथ मिसरी की बातचीत आपसी हित के मुद्दों और श्रीलंका में भारत की मदद से चल रही विकास परियोजनाओं सहित अहम द्विपक्षीय परियोजनाओं की समीक्षा पर केंद्रित थी। मिशन ने बताया कि बैठक के बाद, दोनों पक्षों ने 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की भारतीय रुपये (INR) में तय 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (ऋण सुविधा) के समझौतों का आदान-प्रदान किया। यह राशि चक्रवात 'दितवाह' के बाद भारत द्वारा दिए गए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का हिस्सा है। उच्चायोग ने कहा कि ये लाइन ऑफ क्रेडिट चक्रवात के बाद पैदा हुई पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास और खरीद संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगी। विदेश मंत्री हेराथ के साथ बैठक के दौरान, मिसरी ने अहम प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की। भारतीय मिशन ने बताया कि राणाराजा के साथ बातचीत में उन्होंने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, और करीबी द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। इसे भी पढ़ें: Shashi Tharoor की अध्यक्षता में India-Sri Lanka Relations पर मंथन, MEA अधिकारियों संग बड़ी Meeting मिशन ने यह भी कहा कि मिस्री ने भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी' और 'विज़न महासागर' को आगे बढ़ाने में श्रीलंका की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया। इससे पहले, हवाई अड्डे पर भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा और श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। भारतीय उच्चायोग ने कहा, भारत और श्रीलंका के बीच नियमित उच्च-स्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाते हुए, यह दौरा दोनों देशों के बीच करीबी द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करेगा और अहम पहलों को गति देगा। इस दौरे के दौरान भारत और श्रीलंका ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की, और चक्रवात 'डिटवाह' से जुड़े क्रेडिट समझौतों के आदान-प्रदान के ज़रिए विकास और पुनर्निर्माण में मदद की दिशा में आगे बढ़े।
मर्सिडीज में बारूद लगाकर उड़ाया, पुतिन के ड्रोन फैक्ट्री के CEO पर अटैक!
रूस की न्यूज एजेंसी तास ने बताया कि धमाके के बाद व्लादिमीर तकाचुक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया. ICU में उनका इलाज चल रहा है. तकाचुक 'यूरालड्रोनज़ावोद' फ़ैक्ट्री के प्रमुख थे, जो रूसी सेना के लिए 'उपिर' ड्रोन बनाती है.
पड़ोसी देश पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता पर एक बार फिर से बड़ा संकट गहरा गया है। पाकिस्तान सरकार ने विदेशी मीडिया कर्मियों और अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों के लिए काम करने वाले पत्रकारों पर बेहद सख्त नई पाबंदियां लागू कर दी हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब विदेशी पत्रकारों को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची जैसे प्रमुख महानगरों से बाहर रिपोर्टिंग या किसी अन्य काम से जाने से पहले अनिवार्य रूप से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' यानी एनओसी (NOC) लेना होगा। सरकार की इस तानाशाही और कड़े कदम से अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत और पत्रकारों के बीच भारी हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसे स्वतंत्र रिपोर्टिंग को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।जानिए क्या हैं पाकिस्तान सरकार के नए मीडिया नियम और एनओसी की प्रक्रियापाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी की गई इन नई गाइडलाइंस के तहत देश में कार्यरत सभी विदेशी मीडिया संगठनों और पत्रकारों के रजिस्ट्रेशन, मान्यता और आवाजाही के लिए एक विस्तृत और सख्त कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यद्यपि पत्रकारों को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के भीतर सामान्य आवाजाही के लिए एनओसी की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन यदि वे एबटाबाद या मरी की निजी यात्रा पर जाना चाहते हैं, तो उन्हें मंत्रालय के एक्सटर्नल पब्लिसिटी विंग (EP Wing) के माध्यम से आवेदन करना होगा, जिसकी मंजूरी सामान्यतः तीन कामकाजी दिनों के भीतर मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा, विदेशी मीडिया के लिए काम करने वाले स्थानीय पाकिस्तानी पत्रकारों को भी ईपी विंग के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपने आवेदन पाकिस्तान के नजदीकी मिशन, दूतावास या उच्चायोग के माध्यम से आगे बढ़ाने होंगे।प्रोडक्शन हाउस, फिक्सर और फ्रीलांसरों के लिए भी रजिस्ट्रेशन हुआ अनिवार्यइन कड़े नियमों का दायरा केवल पत्रकारों तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि पाकिस्तान में काम करने वाले सभी प्रोडक्शन हाउस, कंपनियों, फिक्सरों, फ्रीलांसरों और उन गैर-पत्रकारों को भी सूचना मंत्रालय के पास खुद को पंजीकृत कराना अनिवार्य कर दिया गया है जो किसी भी रूप में विदेशी मीडिया संगठनों को अपनी सेवाएं देते हैं। इन गाइडलाइंस की चपेट में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल आउटलेट्स के साथ-साथ वेब-बेस्ड प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया संगठन भी आ गए हैं। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय चुनावों के दौरान हुए व्यापक विरोध-प्रदर्शनों, गड़बड़ियों और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग की खबरों को दुनिया के सामने आने से रोकने के लिए ही मीडिया पर यह कड़ा शिकंजा कसा गया है।
THAAD से पैट्रियोट तक भारी तबाही: ईरान युद्ध के बीच क्या सचमुच खत्म हो गया अमेरिका का डिफेंस स्टॉक
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य संघर्ष ने मध्य पूर्व (Middle East) में एक ऐसा महायुद्ध छेड़ दिया है, जिसकी भीषणता ने खुद अमेरिकी रक्षा तंत्र को सकते में डाल दिया है। इस जंग को लंबा खिंचते देख अब अमेरिका की सैन्य ताकत और उसकी आधुनिक रक्षा प्रणालियों के स्टॉक पर बहुत बड़े संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला करने में अमेरिकी सेना के तरकश के कई अहम तीर खाली हो चुके हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या आधुनिक युद्धक हथियारों की यह कमी अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व पर भारी पड़ने वाली है।THAAD के 80 और पैट्रियोट के 50 प्रतिशत इंटरसेप्टर खत्म, हथियारों का भंडार हुआ खालीसीएनएन की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के हवाले से यह खुलासा हुआ है कि ईरान के साथ जारी इस लंबे युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने अपने बेहद मारक और आधुनिक 'थाड' (THAAD) एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लगभग 80 प्रतिशत इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल कर डाला है। इसके साथ ही, देश की सुरक्षा का मुख्य आधार माने जाने वाले 'पैट्रियोट' (Patriot) इंटरसेप्टर का भी करीब 50 प्रतिशत स्टॉक पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। इससे पहले शुरुआती दौर के हमलों में ही अमेरिकी सेना अपनी लगभग 30 प्रतिशत टोमाहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइलों को भी झोंक चुकी है। रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि हथियारों के इस भारी क्षरण ने पेंटागन की नींद उड़ा दी है।व्हाइट हाउस ने खारिज किए दावे, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस की सुरक्षा पर बढ़ी चिंताविशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे पूरी तरह से इन्हीं एयर डिफेंस सिस्टम्स की सुरक्षा पर निर्भर हैं, और ऐसे में स्टॉक का खतरनाक स्तर तक कम होना अमेरिकी सैनिकों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुमान के अनुसार, युद्ध से पहले अमेरिका के पास लगभग 2,200 पैट्रियोट और 452 थाड मिसाइलें मौजूद थीं, जो अब काफी हद तक घट चुकी हैं। हालांकि, इन गंभीर चेतावनियों के सामने आने के बावजूद व्हाइट हाउस ने गोला-बारूद की कमी की इन तमाम रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यकता से अधिक और पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद का सुरक्षित भंडार मौजूद है।
अनुच्छेद 370 और 35(ए) निरसन के 7 वर्ष पूरे
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश ने आज जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35(ए) के ऐतिहासिक निरसन के सात साल पूरे होने पर 5 अगस्त 2019 के दिन को भारत के समावेशी विकास की यात्रा में ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि बीते सात वर्ष में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी...
Kyiv पर Russia missile attack में 17 लोगों की मौत, Zelenskyy ने मांगी और एयर डिफेंस सिस्टम
कीव, पांच अगस्त (एपी) यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार रातभर किए गए रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों में 17 लोगों की मौत हो गई तथा 44 अन्य लोग घायल हो गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बुधवार को यह जानकारी दी। रूस यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर लगातार बैलिस्टिक मिसाइल हमले कर रहा है। इस साल गर्मियों से ऐसे हमले लगभग नियमित हो गए हैं। यूक्रेन के पास अमेरिका निर्मित ‘पैट्रियट’ प्रणालियों की मिसाइलों का सीमित भंडार है। उसके पास मौजूद हवाई रक्षा प्रणालियों में केवल ‘पैट्रियट’ ही बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। रूस के हमलों में यूक्रेन की इसी कमजोरी का फायदा उठाया जा रहा है। जेलेंस्की ने अन्य देशों से और अधिक अवरोधक मिसाइलें भेजने की अपील की है। ईरान युद्ध के कारण इन मिसाइलों की उपलब्धता और कम हो गई है। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘आज मारे गए लोगों की जान बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाली प्रणालियां ही बचा सकती थीं।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमारे साझेदारों के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि इनकी आपूर्ति में देरी या बैलिस्टिक मिसाइल रोधी प्रणालियां देने में अनिच्छा का सीधा नतीजा ऐसी भयावह जनहानि और तबाही के रूप में सामने आता है।’’अमेरिका की अगुवाई वाले शांति प्रयासों में कोई प्रगति होती नहीं दिखने के बीच यूक्रेन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर बातचीत के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से तेल रिफाइनरियों जैसे प्रमुख रूसी स्थलों पर हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिना शर्त युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था जिसे यूक्रेन ने स्वीकार कर लिया है लेकिन पुतिन ने इसे मानने से इनकार कर दिया है। रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन खुदरा कंपनी ‘वाइल्डबेरीज’ और तुला क्षेत्र के गवर्नर ने बताया कि यूक्रेन ने कंपनी के माल ढुलाई केंद्रों पर बुधवार को एक और हमला करते हुए मॉस्को के दक्षिण में तुला क्षेत्र स्थित उसके एक गोदाम को ड्रोन से निशाना बनाया। यूक्रेन के आंकड़ों के अनुसार, तीन सप्ताह से भी कम समय में ‘वाइल्डबेरीज’ का यह 14वां गोदाम है, जिसमें आग लगी है। यूक्रेन का कहना है कि यह कंपनी ऐसे सामान उपलब्ध कराती है, जिनका इस्तेमाल रूसी सेना कर सकती है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने रातभर में रूस के 16 क्षेत्रों के अलावा, क्रीमिया तथा आजोव सागर और काला सागर के ऊपर यूक्रेन के 475 ड्रोन मार गिराए। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि रूस ने 24 बैलिस्टिक मिसाइल, चार अन्य मिसाइल और 115 ड्रोन दागकर यूक्रेन को निशाना बनाया। उसने बताया कि चार अन्य मिसाइल की पहचान या तो हाइपरसोनिक ‘जिरकॉन’ या सुपरसोनिक ‘ओनिक्स’ मिसाइलों के रूप में की गई। कई ड्रोन जेट इंजन से संचालित थे। जेलेंस्की ने कहा कि हमलों में आम नागरिकों के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के गोदामों, बुनियादी ढांचे और एक रेलवे स्टेशन को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया। हालांकि, रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने सैन्य गतिविधियों में शामिल परिवहन, माल ढुलाई और वितरण केंद्रों को निशाना बनाया।
ओमान से वार्ता के बीच ईरान को ट्रंप की चेतावनी, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान के साथ डील पर अच्छी बातचीत वाले बयान के बाद स्टॉक मार्केट में तेज़ी देखी जा रही है..लेकिन इस बीच उन्होंने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर बातचीत नाकाम रही तो इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी...वहीं दूसरी तरफ ईरान, ओमान के साथ होर्मुज़ में नए प्रस्तावित रूट पर चर्चा की है. देखें दुनिया आजतक.
Hormuz Strait जल्द खुलने के आसार, Donald Trump बोले- Iran से समझौता नहीं हुआ तो होगा 'बड़ा प्रहार'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (स्थानीय समय) को कहा कि ईरान और ओमान के साथ एक समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बहुत जल्द खोल दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इलाके में तनाव कम करने के लिए अंतरिम व्यवस्था पर बातचीत के दौरान कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक (ईरान) को बहुत बड़ा झटका लगेगा। उन्होंने अपनी बात दोहराई कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा और इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने की बात को चल रही कूटनीतिक कोशिशों से जोड़ा। फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा उदाहरण के लिए, ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे। उनके पास अभी भी ये नहीं हैं, लेकिन वे... इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। जलडमरूमध्य बहुत जल्द खुल जाएगा, वरना उन्हें बहुत बड़ा झटका लगेगा, और फिर जलडमरूमध्य खुल जाएगा। इसे भी पढ़ें: Donald Trump प्रशासन ने US में Brazil की राजदूत मारिया लुइजा का वीजा रद्द किया उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब खबर है कि अमेरिका, ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। 'एक्सियोस' (Axios) ने दो क्षेत्रीय सूत्रों और एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि पिछले महीने वाशिंगटन और तेहरान के बीच 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के टूटने के बाद से यहां तनाव बढ़ गया था। Axios के अनुसार, इस प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फायर को फिर से बहाल करना और तेहरान के साथ बातचीत (जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चर्चा भी शामिल है) को दोबारा शुरू करना है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump Assassination Plot: ट्रंप को मारने की साजिश, गोल्फ कोर्स के पास हुई बड़ी गिरफ्तारी ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पहले ईरान के खिलाफ़ एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा था, लेकिन तेहरान से बातचीत का अनुरोध मिलने के बाद उसने कूटनीति का रास्ता अपनाने का फैसला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने फॉक्स न्यूज़ से कहा, हम एक ज़बरदस्त हमले की ओर बढ़ रहे थे, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला होता, लेकिन उन्होंने मुझे फ़ोन किया और बहुत विनम्रता से कहा, 'कृपया, क्या हम बात कर सकते हैं? क्या हम बात कर सकते हैं?' वे नहीं चाहते थे... और मैंने कहा, 'हाँ, हम बात कर सकते हैं। चलिए, इसे करते हैं।' आखिरकार, चलिए इसे करते हैं।
इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में तैनात सैनिकों ने हिज़्बुल्लाह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों के एक गोदाम और ज़मीन के नीचे बने इंफ्रास्ट्रक्चर का पता लगाया है। IDF ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सैनिकों को इस जगह पर हथियारों का एक बड़ा जखीरा मिला, जिसमें कलाश्निकोव राइफलें, एंटी-टैंक रॉकेट और कई तरह के मिलिट्री उपकरण शामिल थे। सेना ने बताया, इसके अलावा, IDF के सैनिकों ने सरोबिन इलाके में ज़मीन के नीचे बनी एक सुरंग को नष्ट कर दिया, जो कई मीटर लंबी थी। सेना ने कहा कि इस ज़मीनी रास्ते का इस्तेमाल हिज़्बुल्लाह आगे बढ़ने और IDF सैनिकों पर आतंकी हमले करने के लिए करता था। ये ऑपरेशन IDF की उन लगातार चल रही सैन्य कोशिशों का हिस्सा हैं, जिनका मकसद हिज़्बुल्लाह के सीमा-पार मिलिटेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करना और उत्तरी इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसे भी पढ़ें: IDF का बड़ा स्ट्राइक: Beaufort Ridge के नीचे Hezbollah का मुख्य Underground Network तबाह, ईरान की बड़ी साजिश नाकाम पिछले हफ़्ते, इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने बताया कि उसने दक्षिणी लेबनान में ब्यूफोर्ट रिज के नीचे बनी कई अहम ज़मीनी सुरंगों को नष्ट कर दिया है। यह कार्रवाई सिक्योरिटी ज़ोन वाले इलाके में एक सीमित गतिविधि के दौरान की गई, जबकि अगस्त में रोम में अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल-लेबनान के बीच बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। IDF ने कहा कि यह सुरंग नेटवर्क हिज़्बुल्लाह के लिए एक सेंट्रल कमांड सेंटर का काम करता था, जहाँ से उसके कमांडर लड़ाई की गतिविधियों को संभालते थे और इज़राइली सैनिकों और नागरिकों पर हमले का निर्देश देते थे। इसे भी पढ़ें: IDF का बड़ा स्ट्राइक: Beaufort Ridge के नीचे Hezbollah का मुख्य Underground Network तबाह, ईरान की बड़ी साजिश नाकाम IDF के मुताबिक, इस ज़मीनी नेटवर्क में कई स्तर थे और इसे दो दशकों में बनाया गया था। IDF ने यह भी कहा कि यह दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह की 'बदर यूनिट' के लिए एक सेंट्रल कमांड सेंटर के तौर पर काम करता था और इसे ईरान के आतंकवादी शासन ने प्लान और फंड किया था। IDF ने कहा कि यह नेटवर्क उत्तरी इज़राइल के लिए खतरा था क्योंकि यह मेटुला और गैलिली पैनहैंडल से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित था।
राष्ट्रपति को 'चोर', चीफ जस्टिस को 'कचरा' कहा, ठीक से भिड़े ब्राजील-अर्जेंटीना
ब्राजील ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति पर अभद्र और अनर्गल बातचीत का आरोप लगाते हुए अपने राजदूत को वापस बुला लिया है. दक्षिण अमेरिका के इन दो पड़ोसी मुल्कों के बीच फुटबॉल के मैदान से लेकर राजनीति के अखाड़े तक प्रतियोगिता चलती है.
PoK में बढ़ते विवाद के बीच विदेशी मीडिया पर पाबंदी, आखिर क्या छुपा रहा पाक ?
PoK में बढ़ते विवाद के बीच विदेशी मीडिया पर पाबंदी, आखिर क्या छुपा रहा पाक ?
कूटनीति के मोर्चे पर फिर हार गया पाकिस्तान, ट्रंप ने की बेइज्जती
इस बुलेटिन में सबसे पहले बात PoK में बगावत के बीच चल रहे विधानसभा चुनाव की. पीओके में दो चरणों को मतदान खत्म हो गया है. तीसरे चरण का मतदान 10 अगस्त को होगा. पहले चरण की गिनती में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) सबसे आगे चल रही है. शहबाज शरीफ और मुनीर की जुल्मी जोड़ी की इस बार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ही अंतर्राष्ट्रीय बेइज्जती कर दी.
बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ मना कर दिया है कि वह अभी गाजा से अपनी सेना पीछे नहीं हटाने जा रहे हैं। हमास जब तक पूरी तरह हथियार नहीं डालेगा तब तक वह भी फौज नहीं हटाएंगे। जानें नेतन्याहू ने ऐसा रुख क्यों अपनाया है।
India-Myanmar Border Dispute पर बोले MEA प्रवक्ता, मणिपुर सीमा पर ज़मीन की अदला-बदली पर चर्चा जारी
भारत और म्यांमार मणिपुर से लगी अपनी साझा सीमा के उस हिस्से को लेकर ज़मीन की अदला-बदली पर विचार कर रहे हैं, जिसकी सीमा रेखा दशकों से तय नहीं हो पाई है। मंगलवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पर कुछ ऐसे इलाके हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है। उन हिस्सों पर बातचीत चल रही है। जायसवाल उस सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि भारत मणिपुर सीमा पर म्यांमार के साथ ज़मीन की अदला-बदली पर विचार कर रहा है। उन्होंने इन खबरों की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन यह ज़रूर माना कि सीमा के अनसुलझे हिस्सों को ठीक करने के लिए बातचीत चल रही है। इसे भी पढ़ें: म्यांमा में आंग सान सू ची से ICRC के प्रतिनिधि ने की मुलाकात उनके ये बयान, अमेरिका की मैगज़ीन 'द डिप्लोमैट' की उस रिपोर्ट के कुछ हफ़्ते बाद आए हैं जिसमें कहा गया था कि नई दिल्ली ऐसे किसी प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। 17 जुलाई की एक रिपोर्ट में, जिसमें एक आधिकारिक दस्तावेज़ का ज़िक्र था, मैगज़ीन ने कहा कि भारत सरकार म्यांमार के साथ मणिपुर की सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए लगभग 1.4 वर्ग मील ज़मीन की अदला-बदली करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। पिलर 65 और 68 के बीच की दूरी लगभग 2.8 किलोमीटर है। इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय का Pakistan पर तीखा प्रहार, PoK Elections को बताया ढकोसला, Sheikh Hasina और China से संबंधों को लेकर भी कह दी बड़ी बात अदला-बदली के लिए प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल ज़िले में है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की कबाव घाटी से सटा हुआ है। 26 मई, 2026 की तारीख वाले आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, सीमांकन का काम तीन महीने के भीतर, यानी अगस्त के आसपास पूरा होने की उम्मीद थी। भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह सीमा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है और फिर म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र और चिन राज्य में प्रवेश करती है। इस सीमा का ज़्यादातर हिस्सा पहाड़ी, जंगलों से घिरा और खुला (पोरस) है, जो उन जातीय समुदायों के इलाकों से होकर गुजरता है जो ऐतिहासिक रूप से सीमा के दोनों ओर रहते आए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, सीमा के लगभग 1,472 किलोमीटर हिस्से को सीमा-स्तंभों (बाउंड्री पिलर्स) के ज़रिए चिह्नित किया गया है, जबकि लगभग 171 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी अनसुलझा है; यह मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की कबाव घाटी में है।
PM मोदी का वीडियो हटाने पर जुकरबर्ग को अल्टीमेटम: 3 दिन में माफी मांगें, वरना कार्रवाई होगी; जंतर-मंतर प्रद... bhaskar.com पीएम मोदी का वीडियो हटाने के मामले में मेटा के प्रतिनिधिमंडल ने आईटी मिनिस्ट्री के सचिव से मुलाक़ात की BBC 'PM मोदी से माफी मांगें मार्क जुकरबर्ग, वरना...', संसदीय पैनल ने Meta CEO को दिया अल्टीमेटम; वीडियो हटाए जा India TV Hindi एल्गोरिद्म का बहाना नहीं चेलगा, पीएम मोदी के वीडियो मामले पर मेटा को सबकुछ बताना होगा Aaj Tak News PM मोदी का वीडियो कैसे हटा, मेटा ने 45 मिनट तक सरकार को समझाया; मीटिंग खत्म, National Hindi News Hindustan
अंतरिक्ष में तैर रहे स्पेस-एक्स रॉकेट का एक टुकड़ा आज चंद्रमा से टकराया, 4 हजार किलो है वजन
अंतरिक्ष में आज एक ऐसी हलचल हुई है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। अंतरिक्ष में तैर रहे स्पेस-एक्स रॉकेट का एक टुकड़ा आज चंद्रमा से टकरा गया है।
होर्मुज बंद फिर भी अरामको को बंपर मुनाफा, सऊदी को ये टैक्टिक्स आया काम
होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई संकट और ईरान जंग के बीच सऊदी अरामको ने दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. कंपनी की एडजस्टेड नेट इनकम सालाना आधार पर 33% बढ़कर 33.4 अरब डॉलर पहुंच गई. ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ने होर्मुज की दिक्कत के बीच तेल निर्यात जारी रखने में अहम भूमिका निभाई.
पाकिस्तानी सेना में WhatsApp की जगह WeChat अपनाने की तैयारी, चीन से बढ़ते तालमेल के संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना का यह फैसला पश्चिमी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताओं से जुड़ा है। सेना को आशंका है कि संवेदनशील आधिकारिक बातचीत के दौरान डेटा सुरक्षा, निगरानी और संदेशों के इंटरसेप्शन जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
उत्तर कोरिया में भीषण गर्मी: सरकारी अखबार ने कुत्ते के मांस का सूप खाने की सलाह दी
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने गर्मियों की भीषण गर्मी से निपटने के लिए कुत्ते के मांस का सूप खाने की सलाह दी है। कोरियाई प्रायद्वीप में तापमान कई जगहों पर 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। रविवार को किम जोंग उन की वर्कर्स पार्टी के अखबार रोडोंग सिनमुन में यह सलाह छपी। […]
Hormuz पर America का कड़ा रुख, तेहरान को दी चेतावनी!
ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द नहीं खुला तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है. दूसरी ओर ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बातचीत जारी है. हालांकि अब तक किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं.
पाकिस्तान ने विदेशी पत्रकारों पर नई पाबंदियां लगाई हैं। अब उन्हें कुछ चुनिंदा बड़े शहरों से बाहर जाने के लिए खास मंज़ूरी लेनी होगी। 'द डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में घोषित 'विदेशी मीडिया सुविधा गाइडलाइंस, 2026' के तहत पाकिस्तान सरकार ने सभी विदेशी मीडिया कर्मियों के लिए इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर किसी भी जगह से रिपोर्टिंग करने से पहले सूचना और प्रसारण मंत्रालय से 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) लेना ज़रूरी कर दिया है। इस फ़ैसले को देश में चल रही राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के बीच निगरानी और सख़्ती बढ़ाने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नए नियमों के तहत पत्रकारों की आवाजाही पर सरकार का नियंत्रण काफी बढ़ गया है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े विदेशी पत्रकारों को अब तीन तय शहरों के बाहर सामान्य समाचार रिपोर्ट, डॉक्यूमेंट्री या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए भी पहले से मंज़ूरी लेनी होगी। इसे भी पढ़ें: ISI की Jantar Mantar पर हमले की बड़ी साजिश नाकाम, Amritsar से 9 आतंकी गिरफ्तार यहाँ तक कि घूमने-फिरने के लिए की जाने वाली यात्राओं पर भी कोई छूट नहीं है। एबटाबाद या मरी जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों पर जाने की योजना बना रहे पत्रकारों को मंज़ूरी के लिए आवेदन करना होगा, और मंज़ूरी मिलने में तीन कामकाजी दिनों तक का समय लग सकता है। यात्रा पर लगी पाबंदियों के अलावा, पाकिस्तान ने रजिस्ट्रेशन की एक व्यापक व्यवस्था भी लागू की है। सभी विदेशी मीडिया संगठनों, फ्रीलांसरों, फिक्सरों और यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय आउटलेट्स के साथ काम करने वाले स्थानीय योगदानकर्ताओं को मंत्रालय के 'एक्सटर्नल पब्लिसिटी विंग' द्वारा संचालित एक सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। विदेशों में रहने वाले और विदेशी प्रकाशनों में योगदान देने वाले पाकिस्तानी पत्रकारों को भी इस दायरे में लाया गया है, जिसके लिए राजनयिक मिशनों के माध्यम से अतिरिक्त वेरिफिकेशन की आवश्यकता होगी। इसे भी पढ़ें: मुनीर-नकवी ने मिलकर कर दिया खेल, पाकिस्तान में तख्तापलट होने वाला है? गाइडलाइंस में यह भी अनिवार्य किया गया है कि विदेशी मीडिया की सहायता करने वाले सभी सहयोगियों - जिनमें प्रोडक्शन हाउस और गैर-पत्रकार भी शामिल हैं। अधिकारियों के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। हालांकि सरकार ने कहा है कि रजिस्ट्रेशन से कोई आधिकारिक दर्जा नहीं मिलता है, लेकिन असल में इससे विदेशी रिपोर्टिंग से जुड़े लोगों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार हो जाता है। मान्यता (एक्रेडिटेशन) की प्रक्रिया को भी सख्त कर दिया गया है। अब पत्रकारों को सालाना या कम समय के लिए प्रेस कार्ड के लिए आवेदन करना होगा। ये कार्ड मांगे जाने पर दिखाने होंगे और कार्यकाल खत्म होने या संबद्धता (एफिलिएशन) बदलने पर इन्हें वापस करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद भी मान्यता को मंज़ूरी मिलने में कई हफ़्ते लग सकते हैं, जिससे रिपोर्टिंग के काम में देरी हो सकती है। जानकारों का कहना है कि ये कदम पाकिस्तान के सिस्टम में बढ़ती बेचैनी को दिखाते हैं, क्योंकि वह कई संकटों से जूझ रहा है - जैसे राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कड़ी नज़र। ज़मीनी स्तर पर पहुँच को सीमित करने और अफ़सरशाही की रुकावटें बढ़ाने वाले इस नए नियम-कानून से स्वतंत्र रिपोर्टिंग मुश्किल हो सकती है और संवेदनशील इलाकों से कवरेज सीमित हो सकता है। इस कदम की आलोचना ग्लोबल मीडिया संस्थाओं और प्रेस की आज़ादी की वकालत करने वालों द्वारा किए जाने की संभावना है, जिन्होंने पाकिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए कम होती जगह पर बार-बार चिंता जताई है।
2 साल बाद आज क्या कहेंगी शेख हसीना, भारत से क्यों उलझा बांग्लादेश?
बांग्लादेश इन दिनों घबराया हुआ है। इसकी बजाय देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर हुई नई घोषणा। आज बांग्लादेश में हुए तख्तापलट को दो साल हो गए हैं। इस तख्तापलट के बाद आज पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सबके सामने आने वाली हैं। शेख हसीना शाम 6 बजे आज मीडिया को संबोधित करने वाली हैं। 5 अगस्त 2024 को हुए इस तख्तापलट का मुख्य कारण बना था छात्रों का आंदोलन। छात्रों का आंदोलन इतना हिंसक हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपना ही देश छोड़ना पड़ गया था। 2 साल से शेख हसीना भारत में निर्वासन कर रही थी। लेकिन आज वे मीडिया के सामने आने वाली हैं। इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय का Pakistan पर तीखा प्रहार, PoK Elections को बताया ढकोसला, Sheikh Hasina और China से संबंधों को लेकर भी कह दी बड़ी बात दरअसल बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेने वाली शेख हसीना दो सालों में पहली बार मीडिया से लाइव जुड़ेंगी। वह मीडिया से सीधा मुखातिब होंगी और उनके सवालों के जवाब भी देंगी। इस कार्यक्रम के ऐलान के बाद से बांग्लादेश बेचैन हो गया है। ढाका ने भारत से इस कार्यक्रम को रोकने की गुहार लगाई है। हालांकि भारत ने बांग्लादेश को टका सा जवाब दे दिया। बता दें आपको बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थी और तब से यहां किसी गुप्त स्थान पर रह रही हैं। बुधवार को वे वर्चुअल तरीके से विदेशी पत्रकार क्लब में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगी। इससे पहले उन्होंने सिर्फ लिखित बयान ही जारी किए थे। अब भारत पहुंचने के बाद वह पहली बार वर्चुअल तरीके से ही सही पहली बार लोगों से रूबरू होंगी। बांग्लादेश सरकार ने इस आयोजन पर सवाल उठाए। बांग्लादेश के विदेशी राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम ने बयान दिया है कि एक भगोड़े नेता को भारत किस आधार पर ऐसी राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दे रहा है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ भविष्य की सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हम नहीं चाहते कि इस प्रक्रिया पर कोई असर पड़े इसलिए भारत को अपना रुख साफ करना चाहिए। व शेख हसीना के इस कदम को लेकर जानकारों का कहना है कि अपना पक्ष रखने से हसीना बांग्लादेश के लोगों की सहानुभूति बटोर सकती हैं। ढाका इस बात को लेकर ही चिंतित है। गौरतलब है कि इससे पहले बांग्लादेश की एक ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी मानते हुए हसीना को मौत की सजा सुनाई थी। उन पर जुलाई अगस्त 2024 में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर हिंसक कारवाई के आरोप लगे हैं। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina Virtual Address: यह भारत का Official Event नहीं, पूर्व राजनयिक ने बताया FCC का कार्यक्रम हालांकि हसीना ने इन आरोपों से पूरी तरह इंकार किया है। ऐसे में तारिक रहमान सरकार को डर है कि शेख हसीना अपना पक्ष मजबूत करने के लिए यह तरीका अपना रही है। इस बीच भारत ने बांग्लादेश को सदा हुआ जवाब दे दिया है। बांग्लादेश की चिंताओं पर सवाल पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम है। इससे सरकार का कोई लेना देना नहीं है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक साक्षात्कार की प्रक्रिया में सरकार की भूमिका नहीं है। मीडिया ईमेल के जरिए सीधे उनसे संपर्क कर रहा है। और साक्षात्कार देना या ना देना उनका फैसला है। सुद्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और साक्षात्कार देकर शेख हसीना बांग्लादेश की जनता समेत दुनिया के समक्ष अपना पक्ष रखेंगी। यह बात बांग्लादेश सरकार को नागवार गुजर रही है। बांग्लादेश की सरकार ने कई बार शेख हसीना को ढाका भेजने की मांग दोहराई। बांग्लादेश ने उनके प्रतारण के लिए औपचारिक अनुरोध भी किया। हालांकि भारत में भी अभी कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। जानकारों की मानें तो भारत का मानना है कि अगर हसीना खुद वापस जाने का फैसला करती हैं तो फिर इसकी जरूरत ही नहीं रहेगी। इससे पहले हसीना ने पिछले महीने एक इंटरव्यू में संकेत दिए थे कि वह दिसंबर में वतन वापसी कर सकती हैं।
बर्दाश्त नहीं...लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन!
लाल सागर में हर गुजरते दिन के साथ खतरा और बढ़ता जा रहा है। कभी मिसाइलें, कभी ड्रोन और कभी कारोबारी जहाजों पर हमले। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में शामिल ये इलाका अब जंग के साए में जी रहा है और अब इस आग की चपेट में भारत के झंडे वाला एक जहाज भी आ गया है। लेकिन राहत की बात सिर्फ इतनी है कि सभी भारतीय नाविकों की जान बच गई। लेकिन इस हमले ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दरअसल लाल सागर में यमन के तट के पास भारत के झंडे वाले कारोबारी जहाज एमएसवी फैज नूर ओलिया प्रोजेक्टाइल हमले का शिकार हो गया। हमला इतना तेज था कि जहाज पलट गया और देखते ही देखते समुद्र में समा गया। उस वक्त जहाज पर 14 लोग सवार थे। जिनमें 13 भारतीय नाविक और एक यमन का नागरिक शामिल था। हादसे के तुरंत बाद यमन की कोस्ट गार्ड और नौसेना ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं हमले की खबर मिलते ही भारत सरकार हरकत में आ गई। विदेश मंत्रालय ने इस पूरे हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारतीय झंडा लगे कारोबारी जहाज को निशाना बनाया जाना बेहद गंभीर मामला है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसे भी पढ़ें: ISI की Jantar Mantar पर हमले की बड़ी साजिश नाकाम, Amritsar से 9 आतंकी गिरफ्तार विदेश मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मौजूद भारतीय दूतावास पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमन के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। भारत ने इस मुश्किल वक्त में मदद के लिए यमन की सरकार और वहां के अधिकारियों का भी धन्यवाद दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि लाल सागर और आसपास के इलाकों में जिस तरह से लगातार व्यापारिक जहाजों पर हमले हो रहे हैं, वह बेहद चिंताजनक हैं। भारत का साफ कहना है कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक इस क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही और व्यापार जल्द से जल्द बहाल होना चाहिए ताकि दुनिया भर का समुद्री कारोबार सुरक्षित और सामान्य तरीके से चलता रहे। वहीं केंद्रीय पोत जहाज रानी और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनवाल ने इस हमले को बिना किसी उकसावे के किया गया हमला बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी वजह से समुद्री प्रशासन को सभी एजेंसियों के साथ मिलकर तुरंत जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इसे भी पढ़ें: Red Sea में MSV Faiz Noor Oliya जहाज पर हमला, सभी 13 भारतीय सुरक्षित भारत ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए और समुद्री व्यापार में किसी तरह की रुकावट स्वीकार नहीं की जा सकती। लेकिन यह मामला सिर्फ एक भारतीय जहाज पर हुए हमले का नहीं असली चिंता उस समुद्री गलियारे को लेकर है जहां पिछले कई दिनों से लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। लाल सागर, बाबल मंडेप और होरमोज अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बदल चुके हुती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस पूरे क्षेत्र को असुरक्षित बना दिया है। हाल ही में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए। आपको बता दें इस पूरे रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल, गैस, कंटेनर, कारगो और रोजमर्रा का सामान गुजरता है। वहीं होमोस को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। ऐसे में इस इलाके में होने वाला हर हमला सिर्फ एक जहाज या एक देश की समस्या नहीं रहता। बल्कि उसका असर पूरी दुनिया के व्यापार, तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ता है।
ट्रंप प्रशासन अमेरिका में H-1B और L-1 वर्क वीजा की अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया को अधिक खर्चीला बनाने की तैयारी में है। अगर यह होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर ही पड़ने वाला है।
ड्रैगन की गोद में बैठा बांग्लादेश, शेख हसीना के बहाने भारत को दे रहा सीधी धमकी
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को लेकर कूटनीतिक गलियारों से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने और देश छोड़ने के बाद से ढाका के तेवर पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां बांग्लादेश यह दावा कर रहा है कि वह भारत के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, वहीं दूसरी तरफ उसके नीति निर्माताओं और रणनीतिक कदमों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि वह चीन (ड्रैगन) के पाले में पूरी तरह बैठ चुका है। इतना ही नहीं, भारत के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से अहम 'चिकन नेक' (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के पास बांग्लादेश की बढ़ती गतिविधियां नई दिल्ली के लिए चिंता का बड़ा सबब बन गई हैं।भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी 'चिकन नेक' की भौगोलिक स्थिति देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद बांग्लादेश की तरफ से जिस प्रकार की बयानबाजी सामने आ रही है, उसे रणनीतिकार सीधे तौर पर भारत पर दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं। शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद से ढाका लगातार तीखे तेवर अपनाए हुए है और कूटनीतिक मंचों पर ऐसे संकेत दे रहा है जो नई दिल्ली की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने के लिए काफी हैं।कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश वर्तमान में चीन के आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव के पूरी तरह गहरे असर में आ चुका है। तीस्ता नदी परियोजना समेत कई बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में चीन की एंट्री करवाकर ढाका ने बीजिंग को अपनी जमीन पर मजबूत पैठ बनाने का मौका दे दिया है। भारत विरोधी ताकतों को मिल रही हवा और घरेलू राजनीति में भारत को लेकर अपनाए जा रहे कड़े रुख से यह साफ जाहिर होता है कि बांग्लादेश अब कूटनीतिक संतुलन खोकर ड्रैगन की गोद में बैठने का जोखिम उठा रहा है, जिसका सीधा असर भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा नीति पर पड़ सकता है।भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां बांग्लादेश के इन तमाम घटनाक्रमों और बयानों पर बेहद पैनी नजर बनाए हुए हैं। नई दिल्ली हमेशा से अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे और सहयोगात्मक रिश्तों की पक्षधर रही है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में भारत किसी भी प्रकार का समझौता नहीं कर सकता। रणनीतिक मोर्चे पर भारत अपनी सैन्य तैयारियों और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत कर रहा है ताकि चिकन नेक के आसपास मंडराने वाले किसी भी भू-राजनीतिक खतरे से पूरी मुस्तैदी से निपटा जा सके।
थाड और पैट्रियट मिसाइलें चट कर गया ईरान, ट्रंप का गोदाम खाली; अमेरिका में हथियारों की भारी कंगाली
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव और ईरान के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका की सैन्य साजो-सामान से जुड़ी पोल खुलती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ रक्षा करने और उसके हमलों को नाकाम करने में अमेरिकी सेना ने अपने आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम 'थाड' (THAAD) और 'पैट्रियट' (Patriot) मिसाइलों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया है, जिसके चलते अमेरिकी रक्षा भंडारों में इन खतरनाक मिसाइलों का भारी अकाल पड़ गया है और ट्रंप प्रशासन के सामने हथियारों की जबरदस्त कंगाली खड़ी हो गई है।जानकारों का कहना है कि ईरान और उसके समर्थित मिलिशिया गुटों द्वारा दागे गए ड्रोनों और बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को अपने सबसे महंगे और अत्याधुनिक डिफेंस इंटरसेप्टर्स का लगातार इस्तेमाल करना पड़ा है। एक के बाद एक लगातार होने वाले इन हमलों से निपटने की प्रक्रिया में अमेरिकी रक्षा गोदामों में रखी करोड़ों डॉलर की ये मिसाइलें तेजी से खत्म हो गई हैं। स्थिति यह हो गई है कि रक्षा उत्पादन की धीमी रफ्तार के मुकाबले खपत कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी है, जिससे पेंटागन की नींद उड़ी हुई है।इस हथियारों की किल्लत का सबसे बड़ा असर अमेरिकी वैश्विक सैन्य रणनीति पर पड़ता दिख रहा है। पेंटागन के रणनीतिकारों के सामने अब यह गंभीर संकट खड़ा हो गया है कि यदि आने वाले दिनों में दुनिया के किसी अन्य हिस्से में कोई नया भू-राजनीतिक विवाद या युद्ध छिड़ जाता है, तो अमेरिकी सेना अपनी रक्षा कैसे करेगी। अमेरिका के रक्षा कारखाने और हथियार निर्माता कंपनियां दिन-रात प्रोडक्शन बढ़ाने में जुटी हैं, लेकिन जिस तेजी से युद्ध के मैदान में मिसाइलें खर्च हो रही हैं, उस हिसाब से नए हथियारों की आपूर्ति करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।पश्चिम एशिया के इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सैनिकों और बंदूकों का खेल नहीं, बल्कि अत्यधिक खर्चीले और तकनीकी एयर डिफेंस सिस्टम्स की जंग बन चुका है। ईरान के रणनीतिक दबाव ने अमेरिका के अजेय माने जाने वाले रक्षा भंडारों को खाली करने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले समय में अमेरिकी प्रशासन के लिए अपने डिफेंस रिजर्व को दोबारा भरना और हथियारों की इस बड़ी कंगाली से निपटना सबसे बड़ी प्राथमिकता रहने वाली है, जिसका असर अमेरिकी रक्षा बजट और विदेश नीतियों पर भी साफ दिखाई देगा।
20 मिनट में हुए सात धमाके से दहला दुबई का जुबेल अली इलाका, आसमान में दिखाई दिया धुएं का गुबार
दुबई के जुबेल अली इंडस्ट्रियल इलाके में आज 20 मिनट में सात धमाके हुए जिससे आसमान में धुएं का गुबार दिखाई दिया। इसका वीडियो बना रहे दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अमेरिका की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित गोल्फ कोर्स के बेहद करीब एक संदिग्ध व्यक्ति को सुरक्षा एजेंसियों ने दबोच लिया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि संदिग्ध की कार से एक घातक गन और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस हाई-प्रोफाइल घटना ने एक बार फिर देश के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।घटना की जानकारी मिलते ही सीक्रेट सर्विस (Secret Service) और स्थानीय पुलिस के अमले ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया। आरोपी की गाड़ी की तलाशी के दौरान सुरक्षाकर्मियों को हथियार और कुछ अन्य संदिग्ध वस्तुएं मिलीं, जिसके आधार पर उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया। शुरुआती पूछताछ के दौरान फेडरल एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस शख्स की मंशा क्या थी और क्या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश या सुनियोजित हमले का प्लान तो नहीं था।गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर सुरक्षा खतरे लगातार बढ़ते रहे हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और रैलियों के दौरान पहले भी उन पर कई बार जानलेवा हमले की कोशिशें हो चुकी हैं, जिसके चलते उनकी सुरक्षा व्यवस्था को हमेशा 'रेड अलर्ट' पर रखा जाता है। ताजा घटना के बाद से व्हाइट हाउस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गहरी समीक्षा शुरू हो गई है ताकि राष्ट्रपति की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश न बचे।इस सनसनीखेज गिरफ्तारी के बाद से अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि संदिग्ध व्यक्ति उस संवेदनशील इलाके तक कैसे पहुंचा और क्या उसके तार किसी स्थानीय या अंतरराष्ट्रीय संगठन से जुड़े हुए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) और सीक्रेट सर्विस मिलकर संयुक्त रूप से आगे की जांच को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं ताकि इस संभावित बड़े खतरे के हर पहलू का पर्दाफाश किया जा सके।
होर्मुज संकट खत्म: भारत के लिए बड़ी खुशखबरी, ओमान बना संकटमोचक; धकाधक गुजरेंगे तेल और LPG के जहाज
पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया के इस सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग पर पिछले कुछ समय से मंडरा रहा तनाव अब कम होता नजर आ रहा है। भारत के सबसे भरोसेमंद कूटनीतिक साझेदार ओमान की मध्यस्थता और ईरान के साथ हुई अहम बातचीत के बाद इस मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रूप से खोलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इस बड़ी कूटनीतिक सफलता से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा संकट टलता दिख रहा है और अगले 48 घंटों के भीतर कच्चे तेल तथा एलपीजी (LPG) के जहाजों के धकाधक गुजरने की उम्मीद है।भारत अपनी कुल एलपीजी और ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण पिछले कुछ दिनों से इस रूट पर जहाजों की आवाजाही लगभग प्रभावित हो गई थी, जिससे भारतीय रिफाइनरियों और नीति निर्माताओं की चिंताएं काफी बढ़ गई थीं। ऐसे में भारत के सदाबहार मित्र ओमान ने आगे आकर मध्यस्थता की और पश्चिम एशिया के इस अहम चोकपॉइंट पर कमर्शियल शिपिंग को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत कूटनीतिक फ्रेमवर्क तैयार किया, जिसका सीधा फायदा भारत को मिलने जा रहा है।ईरान और ओमान के बीच बनी इस नई व्यवस्था के तहत समुद्री जहाजों के आवागमन को अत्यधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत जहाजों के लिए अलग सेफ कॉरिडोर और मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार के भू-राजनीतिक जोखिम से बचा जा सके। भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय संबंध हमेशा से बेहद मजबूत रहे हैं और समय-समय पर ओमान ने रणनीतिक रूप से भारत के ऊर्जा हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाई है। इस बार भी ओमान के इन प्रयासों ने भारत के लिए तेल और गैस आपूर्ति की अनिश्चितता को पूरी तरह खत्म कर दिया है।होर्मुज रूट के दोबारा पूरी तरह खुलने और जहाजों के अबाध रूप से गुजरने से भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। समय पर क्रूड ऑयल और एलपीजी की खेप मिलने से घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी और सप्लाई चेन में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी। जानकारों का मानना है कि अगले कुछ घंटों में इस मार्ग से जुड़ा फाइनल अपडेट सामने आते ही शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और एनर्जी सेक्टर से जुड़े निवेशकों को भी बड़ा सुकून मिलेगा।
Donald Trump Assassination Plot: ट्रंप को मारने की साजिश, गोल्फ कोर्स के पास हुई बड़ी गिरफ्तारी
कैलिफ़ोर्निया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गोल्फ़ कोर्स के पास एक 38 साल के आदमी को गिरफ़्तार किया गया। उसके पास भरी हुई पिस्तौल और गोलियां थीं। आरोप है कि उसने उस जगह पर रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के फ़ंडरेज़र प्रोग्राम से कुछ दिन पहले सुरक्षा इंतज़ामों की तस्वीरें ली थीं। अधिकारियों ने बताया कि उसके घर की तलाशी के दौरान उन्हें हथियार, बॉडी आर्मर और ऐसी नोटबुक मिलीं जिनमें चिंताजनक बातें लिखी हुई थीं। इसे भी पढ़ें: BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन अब तक घटित घटनाक्रम पर एक नजर 1. ट्रंप के दौरे से कुछ दिन पहले गिरफ़्तारी 38 साल के जीनिन जॉन टेले को रैंचो पालोस वर्डेस के ट्रंप नेशनल गोल्फ़ कोर्स में गिरफ़्तार किया गया। यह गिरफ़्तारी डोनाल्ड ट्रंप के वहां रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के फ़ंडरेज़िंग डिनर में शामिल होने से ठीक दो दिन पहले हुई। 2. संदिग्ध पर सुरक्षा व्यवस्था पर नज़र रखने का आरोप लॉस एंजिल्स काउंटी शेरिफ़ डिपार्टमेंट के मुताबिक, जीनिन जॉन टेले को डेप्युटीज़ द्वारा रोके जाने से पहले गोल्फ़ कोर्स के आस-पास सुरक्षा इंतज़ामों की तस्वीरें लेते और वीडियो बनाते हुए देखा गया था। 3. बंदूक और गोला-बारूद बरामद गिरफ़्तारी के दौरान, डेप्युटीज़ ने जीनिन जॉन टेले की गाड़ी से एक लोडेड पिस्तौल बरामद की और उसकी जेब से गोला-बारूद से भरी 16-राउंड वाली मैगज़ीन भी मिली। 4. घर की तलाशी में और हथियार मिले अगले दिन डाउनी में जीनिन जॉन टेले के घर की तलाशी के दौरान जांचकर्ताओं को कई हथियार, मैगज़ीन, गोला-बारूद, बॉडी आर्मर और ऐसी नोटबुक मिलीं जिनमें अधिकारियों के अनुसार चिंताजनक बातें लिखी थीं। 5. कई आपराधिक आरोपों का सामना जीनिन जॉन टेले पर कई गंभीर अपराधों के आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सेकंड-डिग्री रॉबरी (लूटपाट), बड़ी क्षमता वाली मैगज़ीन रखना और छोटी बैरल वाली राइफल या शॉटगन रखना शामिल है। उन पर गाड़ी के अंदर छिपाकर हथियार रखने का भी आरोप है। उन्होंने सभी आरोपों में खुद को बेगुनाह बताया है।
दोस्त रूस ने तो भारत की लॉटरी लगा दी! क्या है दुनिया का पहला परमाणु आइसब्रेकर?
आज से करीब 65 साल पहले रूस ने सफेद मौत के साम्राज्य को चुनौती दी थी। एक ऐसी चुनौती जिसने दुनिया का भूगोल और इतिहास बदल दिया था। दुनिया के पहले परमाणु ऊर्जा से चलने वाले सिविलियन जहाज लेनिन सिर्फ एक आइस ब्रेकर नहीं था। यह सोवियत संघ का यानी इस समय के रूस और उस समय के सोवियत संघ का वो न्यूक्लियर जिद था जिसने बर्फ की दीवार को हमेशा हमेशा के लिए तोड़ दिया। आज 2026 में इस पुराने जहाज की बात इसलिए हो रही है क्योंकि लेनिन ने जो रास्ता बनाया था आज उसी रास्ते पर भारत और रूस की दोस्ती की सबसे बड़ी इबारत लिखी जा रही है। 1950 के दशक की शीत युद्ध चरम पर था। परमाणु ऊर्जा का मतलब केवल एटम बम समझा जाता था। लेकिन 17 जुलाई 1956 को सेंट पीटर्सबर्ग यानी तब का लेनिन ग्रा एडमिलिट्री शिपयार्ड में कुछ ऐसा हुआ जिसने विज्ञान की दिशा बदल दी। वहां लेनिन की नींव रखी गई। रूस चाहता था कि एक ऐसा जहाज बने जो बिना रुके, बिना ईंधन खत्म हुए महीनों तक आर्कटिक की 2 से 3 मीटर मोटी बर्फ को कागज की तरह फाड़ सके और 3 सितंबर 1959 को यह चमत्कार हकीकत बन गया। जब लेनिन समुद्र में उतरा तो अमेरिका समेत पूरी दुनिया दंग रह गई। अब परमाणु ऊर्जा से चलने वाला दुनिया का यह पहला सतह का जहाज है। इसकी ताकत का अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि इसे बार-बार बंदरगाह पर तेल भरने के लिए नहीं रुकना पड़ता है। इतना ही नहीं यह रूस की उस आर्कटिक महत्वाकांक्षा की पहली बड़ी जीत थी जिसने उसे इस क्षेत्र का अघोषित राजा बना दिया। इतना ही नहीं एफएसयूई के विशेषज्ञ व्लादमीर के आंकड़े किसी के भी होश उड़ा सकते हैं। लेनिन ने 30 साल तक लगातार सेवा की। इसे भी पढ़ें: BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन 30 साल का महापराक्रम सबसे पहला पॉइंट है 26 आर्किटिक नेविगेशन। इसने नॉर्दन सी रूट को एक व्यापारिक मार्ग में बदल दिया। दूसरा है 3741 जहाज। लेनिन ने अकेले करीब 3/4000 जहाजों को बर्फ के बीच से सुरक्षित रास्ता भी दिया है। 6,54,000 समुद्री मील यह दूरी पृथ्वी के 30 चक्कर लगाने के बराबर है। अब आप खुद सोचिए दोस्तों कि अगर लेनिन ना होता तो आज रूस का वो उत्तरी तट व्यापार के लिए कभी खुल ही ना पाता। लेनिन ने यह साबित कर दिखाया कि परमाणु आइस ब्रेकर ही भविष्य है और आज रूस के पास 40 से ज्यादा आइस ब्रेकर है जिनमें आठ परमाणु शक्ति से भी लैस हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा बेड़ा है और इसकी नींव इसी लेनिन ने रखी थी। भारत और रूस इस बर्फीले रास्ते पर एक साथ क्यों आ रहे हैं? अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक बैठक होती है। भारत के जहाज रानी मंत्रालय और रूस की परमाणु दिग्गज रूसाटम के बीच एक वर्किंग ग्रुप बनता है। इसका मकसद है नॉर्दर्न सी रूट यानी एनएसआर को भारत के लिए मेन स्ट्रीम बनाना। भारत के लिए यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके तीन बड़े कारण हैं। पहला है समय की बचत। स्वेज नहर के मुकाबले यह रास्ता यूरोप तक पहुंचने में 40% कम लेता है। दूसरा है सुरक्षा। लाल सागर यानी रेड सी में जहाजों पर हमले हो रहे हैं। लेकिन आर्कटिक का रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और रूस के नियंत्रण में है। तीसरा मुख्य पॉइंट है ऊर्जा सुरक्षा। भारत रूस से कच्चा तेल और कोयला मंगाता है और यह रास्ता इस सप्लाई को तेज और सस्ता बना देता है। आज भारत न सिर्फ इस रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है बल्कि रूस के साथ मिलकर विशाल बुनियादी ढांचे का निर्माण भी कर रहा है और यह दोस्ती का वो स्तर है वो प्रमाण है जहां रूस अपनी सबसे एडवांस तकनीक भारत के साथ साझा कर रहा है और इस वक्त कर रहा है। आज लेनिन रिटायर हो चुका है और मूरमास बंदरगाह पर एक भव्य संग्रहालय के रूप में खड़ा है। यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र तो है ही, लेकिन यह रूस की उस तकनीक की विरासत का जीता जागता सबूत भी है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री, भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान आर्कटिक में रूस का साझेदार बना भारत लेनिन से शुरू हुआ यह सफर आज आर्कटिका और साइबेरिया जैसे नए महाशक्तिशाली जहाजों पर पहुंच चुका है। इतना ही नहीं रूस आज आर्कटिक में जो भी कर रहा है भारत उसमें इसका सबसे बड़ा साझेदार बनकर उभर चुका है। यह साझेदारी आने वाली सदी की ग्लोबल सप्लाई चेन को बदल कर रख देगी और इतिहास भी बदल दी जाएगी। लेकिन दोस्तों वो कहा जाता है ना कि संकट का साथी ही असली मित्र होता है और वैश्विक राजनीति के मंच पर अगर किसी दो देशों की दोस्ती इस मुहावरे पर सटीक बैठती है, फिट बैठती है तो वो है भारत और रूस की पक्की दोस्ती। पिछले सात दशकों में दुनिया का भूगोल बदल गया। महाशक्तियां बदल गई और युद्धों के कारण समीकरण बदल गए। लेकिन नई दिल्ली और मॉस्को के बीच का भरोसा कभी खत्म नहीं हुआ। भारत रूस यानी तब का सोवियत संघ की दोस्ती की शुरुआत भारत की आजादी के तुरंत बाद हो गई थी। नॉर्दर्न सीट यानी एनएसआर के जरिए भारत और रूस एक ऐसा समुद्री रास्ता तैयार कर रहे हैं जो स्वेज नहर के मुकाबले 40% छोटा और सस्ता है। भारत और रूस की यारी दोस्ती कोई मजबूरी नहीं है बल्कि एक ऐतिहासिक जरूरत भी है। रूस को अपनी अर्थव्यवस्था के लिए भारत जैसे विशाल बाजार और भरोसेमंद दोस्त की जरूरत है। तो दूसरी तरफ भारत को अपनी रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संतुलन के लिए रूस के साथ की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। अब लेनिन आइस ब्रेकर की तरह ही यह दोस्ती भी वक्त की जमी हुई बर्फ को काटकर भविष्य का रास्ता बनाने का दम रखती है।
यमन के पश्चिमी तट के पास लाल सागर में विस्फोटकों से भरी एक नाव के हमले के बाद भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज डूब गया। सिन्हुआ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यमनी बलों ने जहाज के 14 चालक दल के सदस्यों को बचा लिया। इनमें 13 भारतीय नाविक और एक यमन का नागरिक शामिल है। हालांकि, हमला कब हुआ इसकी जानकारी नहीं दी गई।
BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन
वाशिंगटन के गलियारों में इस समय जो सन्नाटा है, वह किसी बड़े तूफान के आने की आहट है। कल तक जो अमेरिका दुनिया को टैरिफ की धमकियां देता था, आज वह खुद अपने ही बुने हुए जाल में फंस गया है। चीन ने 90 अरब डॉलर का ऐसा आर्थिक बम फोड़ा है कि अमेरिका की कृषि से लेकर एनर्जी सेक्टर तक की नीव हिल गई है। लेकिन यह तो सिर्फ झांकी है। असली खबर उस 23 जुलाई 2026 के फैसले में छिपी है जिसने रातों-रात बीजिंग और वाशिंगटन के रिश्तों को उस नए मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां से वापसी नामुमकिन है। दरअसल पीटरसन इंस्टट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनमी की रिपोर्ट कोई सामान्य चेतावनी नहीं है। यह अमेरिका के लिए एक डेथ वारंट की तरह है। अगर 2017 में ट्रंप ने वो ट्रेड वॉर शुरू ना किया होता तो आज अमेरिकी कंपनियां हर साल $90 अरब डॉलर का एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रही होती। यह पैसा कहां से आता? यह पैसा आता अमेरिका के सोयाबीन किसानों की जेब से, टेक्सास के तेल कुओं से और मिड वेस्ट की फैक्ट्रियों से। लेकिन आज हालत क्या है? इसे भी पढ़ें: BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बांग्लादेश को निमंत्रण चीन जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आयात करने वाली अर्थव्यवस्था है उसने अमेरिका की तरफ पीट कर लिया है। निर्यात 2008 की वैश्विक मंदी के स्तर पर गिर चुका है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका की ग्रोथ अब रिवर्स गियर में है। दोस्तों, अब बात करते हैं उस सेक्टर की जिसने अमेरिका की कमर तोड़ दी है और उस सेक्टर का नाम है ऊर्जा यानी कि एनर्जी। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी एक्सपोर्टर बनने का सपना देखता रहता था। लेकिन चीन ने एक ही झटके में सपने को चगनाचूर कर दिया। 2026 की शुरुआत में चीन ने अमेरिकी गैस खरीदना लगभग शून्य कर दिया। क्यों? क्योंकि टेरिफ की वजह से अमेरिकी गैस इतनी महंगी हो गई कि चीन को क़तर और रूस से गैस मंगाना सस्ता पड़ने लगा। हैरानी की बात यह है कि चीन की चालाकी यहां खत्म नहीं हुई। चीन की कंपनियों ने अमेरिका से जो गैस पहले से बुक कर रखी थी, उसे अपने देश लाने के बजाय रास्ते में ही यूरोप को महंगे दाम पर बेच दिया। यानी अमेरिका की गैस, चीन का मुनाफा और अमेरिका का बाजार खत्म। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं एक्सपर्टों का मानना है कि अब चीन कभी भी अमेरिका के साथ नए लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट नहीं करेगा। आखिर 23 जुलाई 2026 को ऐसा क्या हुआ? दरअसल अमेरिका का पुराना टेरिफ सिस्टम कानूनी लड़ाई में हार गया था। अपनी ईगो बचाने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने सेक्शन 301 [संगीत] का इस्तेमाल किया और चीनी सामानों पर 12.5% का नया टैक्स थोप दिया। बहाना बनाया गया कि जबरन शंका। लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई कुछ और ही थी। अमेरिका को पता था कि अगर उसने यह टेरिफ नहीं लगाया तो चीन का सस्ता सामान अमेरिकी मार्केट को पूरी तरह निकल जाएगा। लेकिन चीन ने इसका ऐसा जवाब दिया जिसकी उम्मीद पेंटागन को भी नहीं थी। 27 जुलाई 2026 को ब्लूमबर्ग ने एक ऐसी रिपोर्ट छापी जिसने वाशिंगटन की साख को मिट्टी मिला दिया। इसे भी पढ़ें: सेंट्रल एशिया के खजाने तक पहुंचा भारत, Rare Earth Minerals पर मोदी के जय ने क्या बड़ा गेम कर दिया? चीन ने दावा किया कि अमेरिका ने बंद कमरों में उनसे भीख मांगी थी कि हम टेरिफ तो लगा रहे हैं लेकिन वादा करते हैं यह 20% से ऊपर नहीं जाएगा। चीन ने इस प्राइवेट बातचीत को पब्लिक कर दिया। यह अमेरिका के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी थी। इससे दुनिया को क्या मैसेज गया? यह गया कि महाशक्ति कहलाने वाला अमेरिका अब चीन के साथ डील करने के लिए मजबूर है। साल 2022 में जब रूस के डॉलर फ्रीज किए गए तब हमने कहा था कि अमेरिका अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारी है।
20 मिनट में 7 धमाकों से दहला दुबई, वीडियो बनाने वाले दो लोग भी गिरफ्तार - Jagran
20 मिनट में 7 धमाकों से दहला दुबई, वीडियो बनाने वाले दो लोग भी गिरफ्तार Jagran दुबई के जेबेल अली औद्योगिक क्षेत्र और बंदरगाह पर भीषण विस्फोट, 20 मिनट में 7 धमाके NewsBytes ईरान-अमेरिका तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात से भी चौंकाने वाली खबर सामने आई है.दुबई के जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया में मंगलवार को लगातार कई धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद इलाके म facebook.com
घुसपैठिए मुस्लिमों को खदेड़ते ही नेपाल में हिंदू राष्ट्र पर बड़ा ऐलान, शुरू हुआ इलाज!
नेपाल में मुस्लिमों की ओर से कावन यात्रा पर की गई पत्थरबाजी और गोलीबारी में हुई हिंदू युवक की मौत के बाद से ही नेपाल के हिंदू संगठन गुस्से में दिखाई दे रहे हैं। नेपाल से लगातार वो वीडियो सामने आ रहे हैं जिसमें हिंदू संगठन सड़कों पर उतर कर कई सालों से अवैध रूप से रह रहे मुस्लिम घुसपैठियों को बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं। जिस वक्त हिंदू राष्ट्र की मांग तेज हो रही है, ठीक उसी वक्त सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसमें भारी संख्या में मुस्लिम भीड़ बोरिया बिस्तर बांधकर जाती हुई दिखाई दे रही है। वैसे तो हिंदू संगठनों ने सरकार के आगे कई मांगे रखी हैं। लेकिन सबसे बड़ी जो मांग उन्होंने रखी है वो पाकिस्तानी बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर खदेड़कर नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की है। उनकी इस मांग पर सरकार ने पहला ऐसा काम किया है कि जिसके बाद लग रहा है कि नेपाल में आने वाले दिनों में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसे भी पढ़ें: Nepal Violence : सड़कों पर उतरे हिंदू, नेपाल छोड़कर भागने लगे मुसलमान! दरअसल नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग इतनी तेज हो गई है कि यह मुद्दा केवल हिंदू संगठनों और प्रदर्शनों तक ही सीमित नहीं रह गया बल्कि आम लोग अपने जनप्रतिनिधियों से भी सीधे जवाब मांग रहे हैं। सांसदों का घेराव कर उनसे हिंदू समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों के पक्ष में खुलकर बोलने की मांग की जा रही है। हिंदूवादी संगठनों ने सरकार को 13 से 19 सूत्रीय मांगों वाला लेटर सौंपते हुए नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने समेत कई बड़े फैसले लेने की मांग की है। मांग पत्र में सुनसरी जिले के कप्तानगंज में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच। घटना के दोषियों और साजिशकर्ताओं की तुरंत गिरफ्तारी और जांच समिति की रिपोर्ट साधनी करने की मांग की गई है। अब खबर है कि गृह मंत्री सुदन गुरंग को हिंदू संगठनों ने जिस 13 से 19 सूत्रीय मांगों वाले ज्ञापन को सौंपा है जिसमें 3 महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक के माध्यम से हिंदू राष्ट्र की मांग पर विचार विमर्श करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है। इसे भी पढ़ें: Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका, रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवाल अब कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल सरकार ने हिंदू संगठनों की मांगों वाले पत्र पर सकारात्मक सहमति जता दी है। जिसके बाद नेपाल के हिंदू खुश दिखाई दे रहे हैं और वह इसे अपनी पहली बड़ी जीत बता रहे हैं। हालांकि कुछ घंटे पहले ही नेपाल के पीएम बालन शाह ने कहा था कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के साथ राजशाही का मुद्दा भी जुड़ जाता है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में यह उचित नहीं होगा। लेकिन अब हिंदुओं की बढ़ती जा रही मांग और गुस्से को देखते हुए सरकार कहीं ना कहीं इस मुद्दे पर यू टर्न मारती हुई दिखाई दे रही है। खैर अब देखना यह होगा कि क्या घुसपैठियों के खिलाफ कोई बड़ा एक्शन होता है या नहीं और सरकार नेपाल को कब तक हिंदू राष्ट्र घोषित करती है क्योंकि जिस तरह से नेपाल की लगातार डेमोग्राफी जो है चेंज हो रही है। लगातार वहां बदलाव हो रहे हैं। मुस्लिमों की कई इलाकों में संख्या बढ़ती जा रही है और इसीलिए हिंदू आक्रोश में दिख रहे हैं।
पाकिस्तान में सियासी हलचल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ‘सबसे बड़े घोटाले’ का किया दावा
पत्रकारों से बातचीत में मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान के इतिहास में शायद ही कभी इतना व्यापक भ्रष्टाचार सामने आया हो, जिसमें विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थानों से जुड़े लोग शामिल रहे हों।
'रूस पागल हो गया है...': यूक्रेन में सब्जी वाले के पीछे पड़ा ड्रोन, लहसुन दिखाने पर भी नहीं छोड़ा
यूक्रेन के खेरसॉन में रूसी ड्रोन ने सब्जी बेचने वाले यूरी का पीछा कर हमला कर दिया। इस खौफनाक 'ड्रोन सफारी' पर राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा, 'रूस पागल हो गया है'। पढ़ें पूरी खबर।
FCRA Bill पर US MP Riley Moore ने जताई चिंता, द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की कही बात
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, पांच अगस्त अमेरिकी सांसद रिले मूर ने भारत में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), न्यासों, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे से संबंधित कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताई और कहा कि इनका असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद मूर ने मंगलवार को कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधन भारतीय सरकार को गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति देंगे तथा यह ‘‘ईसाइयों पर स्पष्ट हमला’’ होगा। मूर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने के कुछ ही दशक बाद सेंट थॉमस भारत के मालाबार तट पर पहुंचे थे और तभी से भारत में ईसाइयों की उपस्थिति है लेकिन इतने लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) नियमों में ऐसे बदलाव पर विचार कर रही है, जिससे सरकार गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगी।’’उन्होंने कहा, ‘‘यह ईसाइयों पर स्पष्ट हमला है। यदि यह विधेयक इसी स्वरूप में आगे बढ़ता है तो भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में यह गंभीर चिंता का विषय होगा।’’विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में सरकार को एक ‘नामित प्राधिकरण’ गठित करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। यह प्राधिकरण उन मामलों में विदेशी अंशदान और उससे निर्मित परिसंपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगा, जब किसी संगठन का एफसीआरए पंजीकरण रद्द हो जाए, वह स्वेच्छा से पंजीकरण छोड़ दे या नवीनीकरण नहीं होने के कारण समाप्त हो जाए। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि संबंधित परिसंपत्ति कोई पूजा स्थल है, तो नामित प्राधिकरण उसके धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना सुनिश्चित करेगा। इसमें नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम सजा भी पांच वर्ष के कारावास से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों को विदेशी अंशदान के रूप में 55,741 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। एफसीआरए पोर्टल के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक 14,449 संगठनों के एफसीआरए प्रमाणपत्र सक्रिय थे, जबकि 22,498 प्रमाणपत्र रद्द किए जा चुके थे और 15,212 प्रमाणपत्रों की अवधि समाप्त मानी गई थी।
West Asia: कब खत्म होगा ईरान-US टकराव, होर्मुज में शुल्क; शांति बहाली के समझौते पर कतर और अमेरिका क्या बोले?
ईरान जंग के बीच दहल उठा दुबई: 20 मिनट में लगातार 7 धमाके, धुआं-धुआं आसमां
इराकी न्यूज आउटलेट्स ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच यमन की तरफ से UAE पर मिसाइल दागे गए हैं। हालांकि, अमीराती मीडिया ने धमाके की वजह के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है
ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान ने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति की उस कमजोरी को उजागर कर दिया है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक मुश्किल मानी जाती थी। अमेरिकी सेना के लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले अत्याधुनिक मिसाइल भंडार तेजी से खाली हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, पेंटागन के कई वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के पास मौजूद कई अहम मिसाइल प्रणालियों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक घट चुका है। यह स्थिति केवल ईरान युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक में चीन जैसे महाशक्ति प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अमेरिका की भविष्य की सैन्य तैयारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने अपने आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) और नई पीढ़ी की प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) का लगभग पूरा परिचालन भंडार इस्तेमाल कर लिया है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इन लंबी दूरी की सटीक मारक मिसाइलों का वर्चुअली ऑल यानी लगभग पूरा स्टॉक खर्च हो चुका है। हालांकि पेंटागन ने शेष संख्या सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन यह स्वीकार किया गया है कि सेंट्रल कमांड को अपने अभियान जारी रखने के लिए दुनिया के अन्य अमेरिकी सैन्य भंडारों से मिसाइलें मंगानी पड़ीं। इसे भी पढ़ें: Donald Trump प्रशासन ने US में Brazil की राजदूत मारिया लुइजा का वीजा रद्द किया युद्ध के दौरान केवल आक्रामक हथियार ही नहीं, बल्कि रक्षात्मक मिसाइलों का भंडार भी तेजी से घटा है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका अपने THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) इंटरसेप्टरों का लगभग 80 प्रतिशत और पैट्रियट इंटरसेप्टरों का लगभग आधा इस्तेमाल कर चुका है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) के अनुमान के अनुसार युद्ध से पहले अमेरिका के पास लगभग 452 THAAD और 2,200 Patriot इंटरसेप्टर थे। इसी अवधि में अमेरिकी नौसेना और अन्य बलों ने अपने वैश्विक टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल भंडार का भी लगभग आधा हिस्सा खर्च कर दिया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये वही हथियार हैं जिन पर अमेरिका चीन जैसे तकनीकी रूप से सक्षम प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ युद्ध की स्थिति में सबसे अधिक निर्भर करता है। चीन की बहुस्तरीय और अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली के कारण पारंपरिक लड़ाकू विमानों के जरिए गहरे हमले करना बेहद जोखिम भरा माना जाता है। ऐसे में ATACMS और PrSM जैसी लंबी दूरी की सटीक मिसाइलें अमेरिकी युद्धनीति की रीढ़ हैं। यदि इनका भंडार सीमित हो जाता है, तो इंडो-पैसिफिक में अमेरिका की प्रतिरोधक क्षमता और त्वरित जवाबी कार्रवाई की शक्ति दोनों कमजोर पड़ सकती हैं। यही वजह है कि पेंटागन के भीतर इस बात पर गंभीर बहस छिड़ी हुई है कि ईरान के खिलाफ अभियान को कितने समय तक जारी रखा जाए। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगाह किया है कि यदि मौजूदा गति से मिसाइलों का इस्तेमाल जारी रहा, तो अमेरिका किसी दूसरे बड़े सैन्य संकट के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं रहेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरानी ठिकानों पर मानव चालित लड़ाकू विमानों को भेजने की बजाय लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले को प्राथमिकता दी, ताकि पायलटों को जोखिम से बचाया जा सके। लेकिन इसी रणनीति ने अत्याधुनिक मिसाइल भंडार पर भारी दबाव डाल दिया। इस बीच, अमेरिका का रक्षा उद्योग उत्पादन बढ़ाने की कोशिश में जुटा है। लॉकहीड मार्टिन ATACMS के स्थान पर नई PrSM मिसाइलों का उत्पादन बढ़ा रही है। हालांकि PrSM अपेक्षाकृत नई प्रणाली है, इसलिए उसका उत्पादन अभी सीमित है। अमेरिकी सेना ने भविष्य के लिए बड़े ऑर्डर जरूर दिए हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड उत्पादन भी लंबे और उच्च तीव्रता वाले युद्ध में खर्च हुए हथियारों की भरपाई इतनी तेजी से नहीं कर सकता। राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस लगातार इन चिंताओं को खारिज कर रहे हैं। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी देश से कहीं अधिक हथियार हैं और जरूरत से ज्यादा गोला बारूद मौजूद है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल और व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने भी कहा है कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के सभी रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता और गहरा हथियार भंडार मौजूद है। इसके बावजूद घटनाक्रम अलग तस्वीर पेश करता है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले सप्ताह ट्रंप ने ईरान पर बड़े पैमाने पर प्रस्तावित हमले को अंतिम क्षणों में रोक दिया। आधिकारिक तौर पर इसका कारण खाड़ी देशों की चिंता और ऊर्जा ढांचे पर संभावित ईरानी जवाबी हमला बताया गया, लेकिन अमेरिकी मीडिया के अनुसार हथियारों के घटते भंडार और लंबा युद्ध झेलने की क्षमता भी इस फैसले के पीछे एक अहम कारक थी। इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी हलचल तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बेहद अच्छी बातचीत चल रही है, जबकि ईरान सार्वजनिक रूप से इससे इंकार करता रहा है। दूसरी ओर, एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए अंतरिम समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। देखा जाये तो ईरान युद्ध ने एक बड़ा सबक दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल तकनीक या सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि सतत हथियार उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक क्षमता का भी संघर्ष है। यदि दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति को एक क्षेत्रीय युद्ध के दौरान अपने वैश्विक मिसाइल भंडार से हथियार खींचने पड़ रहे हैं, तो यह भविष्य के बहु-मोर्चीय संघर्षों के लिए गंभीर चेतावनी है। बहरहाल, ऐसा लग रहा है कि चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों के साथ संभावित समानांतर संकट की स्थिति में अमेरिका को अपने संसाधनों का विभाजन करना पड़ सकता है। इससे उसकी वैश्विक सैन्य विश्वसनीयता, सहयोगी देशों का भरोसा और प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, बीजिंग जैसे प्रतिद्वंद्वी इस घटनाक्रम का बारीकी से अध्ययन करेंगे और इसे अमेरिकी सैन्य क्षमता की सीमाओं के संकेत के रूप में देख सकते हैं। ऐसे में यह संकट केवल मिसाइलों की कमी का नहीं, बल्कि अमेरिकी वैश्विक सैन्य रणनीति, रक्षा उत्पादन मॉडल और दीर्घकालिक युद्ध क्षमता की वास्तविक परीक्षा बन चुका है।
'पीस कमेटी' में आतंकी! PoK आंदोलन को कुचलने पहुंचा जैश कमांडर
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जेएएसी आंदोलन को रोकने के लिए रावलाकोट भेजे गए कथित 'पीस कमेटी' प्रतिनिधिमंडल में जैश-ए-मोहम्मद के वरिष्ठ कमांडर इलियास कश्मीरी के शामिल होने का दावा सामने आया है. वीडियो में वह कैमरे से बचता दिख रहा है.
America-Iran में छिड़ी जंग, Hormuz पर सस्पेंस गहराया!
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं. ट्रंप ने वार्ता जारी होने की बात कही, जबकि ईरान ने इससे इनकार किया है. इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत जारी है. हालांकि अब तक किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है
ऑनलाइन आया पत्रकार, खुद को ही काटने लगा; अब पुराने वीडियो से हुआ वजह का खुलासा
सेलिब्रिटी ब्लॉगर पेरेज हिल्टन खौफनाक टिकटॉक लाइव के बाद अस्पताल में भर्ती। मियामी शिफ्ट होने के बाद से गहरे मानसिक तनाव में थे हिल्टन। पुलिस की मौके पर एंट्री, जानें पूरी खबर।
ट्रंप की ईरान को समझौते को लेकर आखिरी चेतावनी, देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि समझौता करने का ये आखिरी मौका है. ट्रंप का दावा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान को परिणाम भुगतने पड़ सकते है. हालांकि ईरान पहले अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से मना कर चुका है.
FCRA: भारत में एफसीआरए संशोधन पर अमेरिकी सांसद को क्यों लगा मिर्ची? बोले- संबंधों पर असर पड़ने की आशंका why-us-congressman-riley-moore-concern-over-fcra-amendment-bill-india
लाल सागर (Red Sea) में यमन तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक व्यावसायिक कार्गो जहाज़ पर हुए हमले के बाद वह समुद्र में पलटकर डूब गया। इस जहाज़ पर सवार 13 भारतीय नागरिकों समेत सभी 14 क्रू सदस्यों को यमनी कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचा लिया है और उन्हें मोखा बंदरगाह पहुँचाया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने व्यावसायिक जहाजों पर हो रहे इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Assembly में TVK सरकार का पहला Budget पेश करेंगी वित्त मंत्री Mary Wilson विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा की व्यावसायिक जहाज़ 'MSV फ़ैज़ नूर ओलिय' पर हुए हमले की निंदा करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि रियाद में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और क्रू की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा, हम भारत के झंडे वाले व्यावसायिक जहाज़ 'MSV फ़ैज़ नूर ओलिय' पर हुए हमले की निंदा करते हैं, जो 4 अगस्त, 2026 को यमन के तट के पास रेड सी में डूब गया था। सभी 13 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है। रियाद में हमारा दूतावास स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और क्रू की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है। हम सहयोग के लिए यमनी अधिकारियों का धन्यवाद करते हैं। इसे भी पढ़ें: Trisha Krishnan Controversy | 'मेरे साथ आतंकवादी जैसा बर्ताव किया गया', जेल से रिहाई के बाद Udhayanidhi Stalin ने TVK सरकार पर साधा निशाना विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाज़ों पर लगातार हो रहे हमले बहुत चिंताजनक हैं। मंत्रालय ने कहा, इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाज़ों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए, और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार, इस क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से जहाज़ों की आवाजाही और व्यापार बिना किसी रुकावट के जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। इस बीच, केंद्रीय बंदरगाह, जहाज़रानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि उन्होंने मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन के महानिदेशक (DGMA) को निर्देश दिया है कि वे सभी संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बचाए गए क्रू को हर ज़रूरी मदद देने के लिए तुरंत कदम उठाएँ। ब्लैक सी में व्यावसायिक जहाज़ पर हमला इससे पहले जुलाई में, ब्लैक सी में एक व्यावसायिक जहाज़ पर हमले के बाद एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी, क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से ज़्यादा समय से चल रहा संघर्ष जारी है। रूस के समुद्री इलाके में मौजूद इस जहाज़ की पहचान मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले 'MV OMORFI' के तौर पर की गई थी। यह जहाज़, जो पिछली बार रूस के सेंट पीटर्सबर्ग बंदरगाह पर रुका था, घटना के समय दस क्रू सदस्यों को ले जा रहा था, जिनमें तीन भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इसमें यह भी कहा गया कि जहाज़ पर मौजूद अन्य दो भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह भी कहा कि रूस में भारतीय मिशन ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया है और मृतक के परिवार की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस हमले की निंदा की है और सभी पक्षों से समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने का आह्वान किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा करता है जो वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाते हैं और निर्दोष नागरिक क्रू सदस्यों की जान को खतरे में डालते हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है कि नेविगेशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता को बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi Indian MSV Faize Noore Oliya has been hit by a projectile near Yemeni waters, causing the vessel to capsize and sink. India strongly condemns this unprovoked attack on the defenseless mechanised sailing vessel. The safety of our people is our supreme priority & I am relieved to… — Sarbananda Sonowal (@sarbanandsonwal) August 4, 2026
कतर से रुकी सप्लाई, फिर भी 15% कैसे बढ़ा भारत का LNG आयात? देखें कूटनीति
कूटनीति' में आज बात भारत की उस रणनीतिक चाल की, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाज़ारों को हैरान कर दिया है. जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग छिड़ी, तो दुनिया को लगा कि भारत में बड़ा गैस संकट आने वाला है. वजह साफ थी-भारत अपनी 60 फीसदी एलएनजी (LNG) गैस इसी समुद्री रास्ते से मंगाता था. लगा कि कतर से सप्लाई रुकते ही भारत की फैक्ट्रियां और रसोई गैस थम जाएगी. लेकिन भारत ने ऐसा कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक खेला कि इस पूरे संकट के बावजूद देश में एलएनजी का आयात घटने के बजाय 15 फीसदी और बढ़ गया.
होर्मुज में तय रूट को लेकर ईरान की US को धमकी, देखें दुनिया आजतक
ईरान ने अमेरिका को धमकी दी है. ईरान ने कहा है कि अगर होर्मुज में तय रूट को बदलने की अगर अमेरिका ने कोशिश की तो अमेरिकी युद्धपोत उड़ा दिए जाएंगे. सीनियर सैन्य सलाहकार ने साथ ही ये बी कहा कि होर्मुज में किसी भी तरह की कोई दखलअंदाजी नहीं बर्दाश्त की जाएगी. ईरान को अमेरिका की नाकेबंदी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है.
ईरान की ना, ट्रंप दे रहे धमकी पर धमकी... होर्मुज पर खत्म नहीं हो रहा सस्पेंस
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त चेतावनी दी और कहा कि होर्मुज स्ट्रेट बहुत जल्द खुल जाएगा, नहीं तो बहुत जोरदार हमला होगा, साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं रखेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज को दोबारा खोलने पर ईरान-ओमान में बातचीत चल रही है.
अमेरिका में भारतीय समुदाय का सम्मान: मैसाचुसेट्स ने 15 अगस्त को घोषित किया 'भारत दिवस', गवर्नर ने क्या कहा?
ढाका। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के समय जुलाई विद्रोह के दौरान लोकतांत्रिक जागृति का प्रतीक रहे शिक्षण संस्थान दो साल बाद लड़ाई के मैदान में बदल गए हैं। दो दिनों के भीतर जातीयतावादी छात्र दल (जेसीडी) और इस्लामी छात्र शिविर के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें रंगपुर के बेगम रोकेया यूनिवर्सिटी से […]
गोल्फ क्लब के पास कार में बंदूक के साथ शख्स गिरफ्तार, ट्रंप की ह्त्या का था प्लान
गोल्फ क्लब के पास कार में बंदूक के साथ शख्स गिरफ्तार, ट्रंप की ह्त्या का था प्लान
नई दिल्ली/मुज़फ़्फराबाद: भारत के अभिन्न अंग लेकिन पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र 'पाक अधिकृत कश्मीर' (PoK) में मानवीय संकट और नागरिकों पर राजकीय हिंसा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। पिछले दो महीनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, फ्रंटियर कांस्टेबुलरी (FC), पाक रेंजर्स और स्थानीय कठपुतली प्रशासन द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई, अंधाधुंध गोलीबारी और हिरासत में प्रताड़ना के कारण 90 से अधिक निर्दोष स्थानीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। पोके के प्रमुख शहरों—मुज़फ़्फराबाद, मीरपुर, रावलाकोट, पलंदरी और कोटली में सब्सिडी की समाप्ति, बिजली की आसमान छूती दरों और पाकिस्तानी सेना के दमनकारी रवैये के खिलाफ ऐतिहासिक जनआंदोलन छिड़ा हुआ है। इस भीषण खून-खराबे और मानवाधिकारों के सरेआम हनन पर भारत सरकार ने कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए इस्लामाबाद को सख्त कटघरे में खड़ा किया है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान द्वारा पोके में आयोजित किए जाने वाले तथाकथित चुनाव और राजनीतिक प्रक्रियाएं लोकतंत्र के नाम पर एक भद्दा मजाक और दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास हैं।पाक अधिकृत कश्मीर में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि स्थानीय नागरिक अपनी ही जमीन पर गुलामों जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। पाकिस्तानी सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की शह पर निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर जिस तरह से गोलियां बरसाई जा रही हैं, उसने वहां के माहौल को जलते हुए बारूद के ढेर में बदल दिया है।पाक अधिकृत कश्मीर में क्यों भड़का जनआक्रोश? 2 महीने में 90 मौतों की भयावह सच्चाईपोके में उपजे इस उग्र असंतोष की नींव महीनों पहले रखी गई थी, जब 'अवामी एक्शन कमेटी' (Awami Action Committee - AAC) के नेतृत्व में आम नागरिकों ने सरकार की दमनकारी आर्थिक नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। पोके के नागरिक वर्षों से सस्ती बिजली, आटे और गेहूं पर सब्सिडी तथा अपने ही प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इस्लामाबाद में बैठी पाकिस्तानी हुकूमत ने उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय सेना और अर्धसैनिक बलों की 15 से अधिक बटालियनों को सड़कों पर उतार दिया।पिछले 60 दिनों के भीतर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, छात्रों, व्यापारियों और बुजुर्गों पर पुलिस की बर्बरता का वो नंगा नाच देखा गया जिसने जलियांवाला बाग जैसी त्रासदी की याद दिला दी। भीड़ को तितर-बितर करने के नाम पर एक्सपायर हो चुके आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया और सीधे सिर व छाती को निशाना बनाकर गोलियां चलाई गईं। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों की सीधी गोलीबारी में 65 से अधिक लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक घायल नागरिकों ने अस्पतालों में समय पर इलाज न मिलने और पुलिस कस्टडी में प्रताड़ना के कारण दम तोड़ दिया। इस हिंसा में 800 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं और सैकड़ों युवाओं को जबरन उठाकर अज्ञात स्थानों पर प्रताड़ित किया जा रहा है।भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की क्रूरता की धज्जियां उड़ाईंपोके में निर्दोष नागरिकों की सिलसिलेवार हत्याओं पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए वैश्विक समुदाय का ध्यान इस मानवीय त्रासदी की ओर आकर्षित किया है। भारत के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों में की जा रही क्रूरता, सेना का नग्न प्रयोग और बुनियादी मानवाधिकारों का हनन अत्यंत निंदनीय है।विदेश मंत्रालय ने अपने स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा, सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बालटिस्तान भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान का इन भारतीय भू-भागों पर केवल अवैध और जबरन कब्जा है। इस्लामाबाद को तुरंत प्रभाव से अपने कब्जे वाले भारतीय इलाकों को खाली कर देना चाहिए और वहां के नागरिकों पर किए जा रहे अत्याचारों को बंद करना चाहिए। भारत ने कहा कि जो देश खुद को दुनिया के सामने मानवाधिकारों का मसीहा बताने का ढोंग करता है, वह अपनी ही अवैध हिरासत में रह रहे नागरिकों की आवाज को बंदूकों की नोक पर दबा रहा है।पाकिस्तान का 'चुनावी ढोंग': जनमत को दबाने के लिए सेना की फर्जी लोकतंत्र व्यवस्थाभारत ने पोके में समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले असेंबली और स्थानीय निकाय चुनावों की धज्जियां उड़ाते हुए उन्हें पूरी तरह से निष्प्रभावी और दिखावटी करार दिया। इस्लामाबाद द्वारा पोके में राजनीतिक वैधता हासिल करने के लिए कराए जा रहे चुनाव किसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि पाक सेना की अपनी पसंद के कठपुतली नेताओं (Puppet Leaders) को बिठाने की एक तयशुदा पटकथा मात्र हैं।भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि जिस क्षेत्र में मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध हो, स्थानीय स्वतंत्र पत्रकारों को जेल में डाला जा रहा हो, राजनीतिक विरोधियों का अपहरण किया जा रहा हो और आम जनता को अपने विचार व्यक्त करने पर गोलियों से भून दिया जाता हो, वहां चुनाव कराना लोकतंत्र की आत्मा का कत्ल करने जैसा है। पोके के चुनाव में केवल उन्हीं राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को हिस्सा लेने की इजाजत दी जाती है जो पाकिस्तान के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हैं। जो स्थानीय नेता या राष्ट्रवादी दल पोके की स्वतंत्रता या भारत के साथ जुड़ाव की बात करते हैं, उन्हें असंवैधानिक घोषित कर चुनाव लड़ने से बेदखल कर दिया जाता है। ऐसे में इन चुनावों की कोई कानूनी या नैतिक वैधता नहीं रह जाती।संसाधनों की लूट और आर्थिक गुलामी: भुखमरी की कगार पर पोके के निवासीपाक अधिकृत कश्मीर के सुलगने के पीछे केवल राजनीतिक दमन ही वजह नहीं है, बल्कि वहां का आर्थिक शोषण भी एक बड़ा कारण है। पोके में स्थित नीलम-झेलम और मंगला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स (Hydropower Projects) से हजारों मेगावाट सस्ती बिजली पैदा की जाती है। इस बिजली को पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांतों में बेहद कम दरों पर सप्लाई किया जाता है, जबकि पोके के निवासियों को, जिनकी नदियों पर ये बांध बने हैं, 45 से 50 रुपये प्रति यूनिट की अत्यधिक महंगी दरों पर बिजली बेची जाती है।इसी तरह, पाकिस्तान के भारी आर्थिक संकट और मुद्रास्फीति (Inflation) की मार सबसे ज्यादा पोके के निवासियों पर पड़ी है। वहां आटे का संकट इतना गहरा चुका है कि राशन की दुकानों पर कई-कई किलोमीटर लंबी लाइनें लग रही हैं। पोके के प्राकृतिक संसाधनों, जंगलों, खनिजों और नदियों का इस्तेमाल केवल इस्लामाबाद के खजाने को भरने के लिए किया जा रहा है, जबकि स्थानीय युवाओं के लिए न तो रोजगार के साधन हैं और न ही बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य का ढांचा। सीपेक (CPEC) परियोजनाओं के नाम पर भी स्थानीय आबादी की जमीनों को छीनकर चीनी कंपनियों को सौंपा जा रहा है, जिससे आम जनता में पाकिस्तान विरोधी गुस्सा भड़क उठा है।संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर उठे सवालपोके में 2 महीने के भीतर 90 बेगुनाहों की हत्या के बावजूद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) और पश्चिमी देशों की चुप्पी पर भी भारत के रक्षा विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर जब भी कश्मीर का राग अलापता है, तो वह पोके में अपने द्वारा ढाए जा रहे जुल्मों को छिपाने की नाकाम कोशिश करता है।हालांकि, अब सोशल मीडिया और डिजिटल क्रांति के इस युग में मुज़फ़्फराबाद और मीरपुर से आ रही तस्वीरें पाकिस्तान के इस झूठ के गुब्बारे की हवा निकाल रही हैं। वायरल हो रहे वीडियो में पाकिस्तानी सेना के जवान निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां चलाते और माताओं-बहनों को घसीटते हुए साफ नजर आ रहे हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के इस घिनौने चेहरे को बेनकाब करना जारी रखेगा। जब तक पाकिस्तान पोके से अपना अवैध कब्जा नहीं हटा लेता और वहां के निवासियों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक भारत की यह कूटनीतिक और नैतिक लड़ाई मजबूती से जारी रहेगी।
तेहरान: मध्य पूर्व में जारी भारी उथल-पुथल और अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे भीषण संघर्ष के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) मुज्तबा खामेनेई के भावी रुख को लेकर पूरी दुनिया में गहरा सस्पेंस बना हुआ है। अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बाद सत्ता की कमान संभालने वाले 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने आने के बजाय पर्दे के पीछे से देश और सेना का मार्गदर्शन कर रहे हैं। हमले में घायल होने की खबरों के बीच वे रणनीतिक संदेशों के जरिए तेहरान की नीतियों को आकार दे रहे हैं। ऐसे समय में जब देश में अंदरूनी राजनीतिक खींचतान और आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां चरम पर हैं, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या मुज्तबा अमेरिका के साथ युद्ध को आगे बढ़ाएंगे या फिर पर्दे के पीछे कोई सुलह का रास्ता तलाशेंगे।अली खामेनेई के बाद मुज्तबा की ताजपोशी और तेहरान में आंतरिक चुनौतियांईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के समर्थन से मुज्तबा खामेनेई को देश का तीसरा सुप्रीम लीडर चुना गया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के समय से ही तेहरान के सत्ता के गलियारों में कुछ हद तक अंतर्कलह और बहस की स्थिति रही है। पारंपरिक धर्मगुरुओं और सुधारवादी धड़ों के बीच सर्वोच्च पद के वंशानुगत जैसे लगने वाले हस्तांतरण को लेकर सवाल उठे थे। इसके अलावा, अमेरिकी व इजरायली हमलों में बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान के कारण आंतरिक प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना नए नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।सार्वजनिक रूप से नजर न आने के बावजूद मुज्तबा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे देश में राजनीतिक स्थिरता और जनसमर्थन बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। वे सरकारी संस्थानों और जनता के बीच एकता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं ताकि युद्ध के इस नाजुक दौर में आंतरिक मतभेद देश की सुरक्षा को नुकसान न पहुंचाएं।'सैन्य प्रतिरोध और हॉर्मुज की नाकाबंदी': मुज्तबा का आक्रामक रुखसुप्रीम लीडर बनने के बाद जारी अपने शुरुआती लिखित बयानों में मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ सख्त और बेबाक रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान अपनी सैन्य ताकत के दम पर प्रतिरोध जारी रखेगा और किसी भी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा।मुज्तबा के प्लान का एक प्रमुख हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल जलमार्गों में से एक हॉर्मुज को प्रभावित कर तेहरान वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बनाए रखना चाहता है। इसके अलावा, उन्होंने यमन के हूती, लेबनान के हिजबुल्लाह और इराक के सशस्त्र समूहों जैसे 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (प्रतिरोध के मोर्चे) के सहयोगियों को एकजुट रखकर नए युद्ध मोर्चे खोलने का भी संकेत दिया है।अमेरिका से सीधा टकराव या बैकचैनल डिप्लोमेसी? अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का दावाअमेरिकी खुफिया एजेंसियों (US Intelligence) के ताजा आकलनों के मुताबिक, घायल होने के बावजूद मुज्तबा खामेनेई तेहरान की युद्ध नीति और वाशिंगटन के साथ होने वाले गोपनीय कूटनीतिक संवादों को खुद नियंत्रित कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मुज्तबा अपने भरोसेमंद संदेशवाहकों और आमने-सामने की वार्ताओं के जरिए आईआरजीसी कमांडरों और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को दिशानिर्देश भेज रहे हैं।एक तरफ जहां सार्वजनिक मंचों पर उनका संदेश अमेरिका को सबक सिखाने का है, वहीं दूसरी तरफ वाशिंगटन में ट्रंप प्रशासन के साथ बैकचैनल कूटनीति के दरवाजे भी पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। अमरीकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नुकसान जरूर पहुंचा है, लेकिन वे पूरी तरह नष्ट नहीं हुई हैं। ऐसे में मुज्तबा का दोहरा प्लान दिख रहा है—एक तरफ सैन्य ताकत से हमले रोकना और दूसरी तरफ सौदेबाजी की मेज पर अपनी शर्तों को मजबूत बनाए रखना।आईआरजीसी का दबदबा और शासन की भावी दिशावर्तमान परिदृश्य में ईरान की दैनिक शासन व्यवस्था और रक्षा नीतियों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ की भूमिका बेहद अहम हो गई है। मुज्तबा खामेनेई के आईआरजीसी के साथ दशकों पुराने घनिष्ठ संबंध रहे हैं, जिसके चलते सेना का तेहरान की राजनीति पर नियंत्रण और मजबूत हुआ है।विश्लेषकों का मानना है कि मुज्तबा खामेनेई का अंतिम प्लान न तो पूरी तरह अमेरिका के सामने सरेंडर करने का है और न ही बिना किसी रणनीतिक सोच के अनियंत्रित युद्ध में कूदने का। वे ईरान के आंतरिक मतभेदों को दबाने, आईआरजीसी के जरिए नियंत्रण कायम रखने और हॉर्मुज व क्षेत्रीय सहयोगियों के माध्यम से अमेरिका पर कूटनीतिक व सैन्य दबाव बनाए रखने की बहुकोणीय रणनीति पर काम कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि मुज्तबा का यह गुप्त दांव मध्य पूर्व में शांति का रास्ता खोलेगा या संघर्ष को एक नए और भीषण मोड़ पर ले जाएगा।
अदन की खाड़ी और लाल सागर के जलक्षेत्र में एक बार फिर समुद्री सुरक्षा पर भारी संकट खड़ा हो गया है। यमन के तटवर्ती इलाके के करीब से गुजर रहे भारतीय नाविकों के दल वाले एक व्यावसायिक जहाज (मर्चेंट वेसल) पर यमन के हूती विद्रोहियों ने घातक ड्रोन से हमला कर दिया। इस अचानक हुए आत्मघाती ड्रोन हमले के बाद जहाज में आग लग गई और अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना (Indian Navy) के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत ने त्वरित और साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। भारतीय नौसेना के जांबाज मरीन कमांडो और नौसैनिकों की तत्परता की बदौलत जहाज पर सवार सभी 14 भारतीय नाविकों को सकुशल और बिना किसी गंभीर चोट के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यमन के हूती विद्रोही लाल सागर और अदन की खाड़ी से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस हमले के बाद पूरे लाल सागर गलियारे (Red Sea Corridor) और अरब सागर में भारतीय नौसेना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा बलों ने निगरानी और गश्त बढ़ा दी है।लाल सागर और यमन तट के पास कैसे हुआ हमला: घटना का पूरा ब्योरामिली जानकारी के अनुसार, यह वाणिज्यिक मर्चेंट वेसल अपनी निर्धारित यात्रा के तहत लाल सागर के महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर रहा था। जहाज पर कुल 14 क्रू मेंबर्स मौजूद थे, जो सभी भारतीय नागरिक हैं। जैसे ही जहाज यमन के तट से कुछ समुद्री मील की दूरी पर अदन की खाड़ी के पास पहुँचा, हूती नियंत्रित इलाके से छोड़े गए एक विस्फोटक से लैस मानवरहित ड्रोन (Kamikaze Drone) ने जहाज को निशाना बनाया।ड्रोन सीधे जहाज के ऊपरी हिस्से और सुपरस्ट्रक्चर से टकराया, जिसके तुरंत बाद एक जोरदार धमाका हुआ और जहाज के एक हिस्से में आग की लपटें उठने लगीं। हमले के वक्त जहाज में जरूरी कमोडिटी और वाणिज्यिक सामान लोड था। धमाके और आग लगने के बाद जहाज के कैप्टन ने तुरंत डिस्ट्रेस सिग्नल (आपातकालीन संदेश) प्रसारित किया और आसपास के जलक्षेत्र में गश्त कर रहे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों व भारतीय नौसेना से तत्काल मदद मांगी।भारतीय नौसेना की त्वरित कार्रवाई और 14 भारतीय नाविकों का रेस्क्यूभारतीय नौसेना का एक मिसाइल विध्वंसक (Guided-Missile Destroyer) युद्धपोत और समुद्री गश्ती विमान 'P-8I Poseidon' पहले से ही अरब सागर और अदन की खाड़ी के संवेदनशील क्षेत्र में आतंकवाद रोधी व पायरेसी रोधी (Anti-Piracy) अभियानों के लिए तैनात था। आपातकालीन डिस्ट्रेस कॉल मिलते ही भारतीय युद्धपोत ने बिना एक पल गंवाए घटना स्थल की ओर तेज गति से प्रस्थान किया।नाविकों की जान बचाने के लिए युद्धपोत से एक विशेष रेस्क्यू टीम, नौसैनिक फायर फाइटिंग दस्ता और स्पीड बोट्स को रवाना किया गया। भारतीय नौसैनिकों ने धुएं और आग से घिरे मर्चेंट शिप तक पहुँचकर बेहद योजनाबद्ध तरीके से रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। नौसैनिकों ने बहादुरी का परिचय देते हुए जहाज पर लगी आग को नियंत्रित किया और लाइफ रॉफ्ट्स व रेस्क्यू बोट्स के माध्यम से सभी 14 भारतीय नाविकों को सुरक्षित भारतीय युद्धपोत पर स्थानांतरित कर लिया।रेस्क्यू किए गए सभी नाविकों की प्रारंभिक मेडिकल जांच युद्धपोत के डॉक्टर द्वारा की गई, जिसमें सभी नाविक पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ पाए गए हैं। भारतीय नौसेना की इस बिजली जैसी त्वरित कार्रवाई की वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है।हूती विद्रोहियों का लाल सागर में बढ़ता आतंक और जहाजों पर मंडराता खतरायमन के उत्तर-पश्चिम हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पिछले कुछ महीनों से लाल सागर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने का सिलसिला तेज कर रखा है। हूती विद्रोही लगातार एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स का इस्तेमाल कर व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहे हैं।हूती गुटों का दावा है कि वे इजराइल, अमेरिका और ब्रिटेन से जुड़े या उनके सहयोगी देशों के जहाजों पर हमले कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन हमलों की चपेट में तट से गुजरने वाले तटस्थ देशों के सामान्य मालवाहक और तेल टैंकर भी आ रहे हैं। इससे पहले भी कई मर्चेंट जहाजों को हूती मिसाइलों और ड्रोन्स द्वारा निशाना बनाया जा चुका है, जिसमें कई जहाजों को भारी नुकसान पहुँचा है। इस नए हमले ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन समुदाय को चिंता में डाल दिया है।वैश्विक समुद्री व्यापार और लाल सागर जलमार्ग पर पड़ा गंभीर असरलाल सागर और स्वेज नहर का समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। दुनिया का लगभग 12% से 15% अंतरराष्ट्रीय व्यापार और 30% कंटेनर ट्रैफिक इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। एशिया, यूरोप और अमेरिका को जोड़ने वाला यह सबसे छोटा और सुलभ जलमार्ग है।हूती विद्रोहियों के लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण कई वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने लाल सागर के रास्ते अपने जहाजों को भेजना बंद या कम कर दिया है। इसके बजाय, अब वाणिज्यिक जहाजों को अफ्रीका महाद्वीप के चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) के लंबे और खर्चीले रास्ते से यूरोप जाना पड़ रहा है। इस वैकल्पिक लंबे मार्ग के कारण जहाजों की यात्रा में 10 से 14 दिनों की देरी हो रही है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ी है और मालभाड़ा (Freight Rate) और बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) और महंगाई पर पड़ रहा है।भारतीय नौसेना की मुस्तैदी और अरब सागर में सुरक्षा का अभेद्य चक्रभारत की रणनीतिक स्थिति और वैश्विक व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना अरब सागर, अदन की खाड़ी और उत्तरी हिंद महासागर में मुख्य सुरक्षा प्रदाता (First Responder and Net Security Provider) के रूप में कार्य कर रही है। भारत ने अपने मर्चेंट शिप्स और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'ऑपरेशन संकल्प' (Operation Sankalp) के तहत एक दर्जन से अधिक आधुनिक युद्धपोत, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और समुद्री टोही विमान इस इलाके में तैनात कर रखे हैं।भारतीय नौसेना का स्पष्ट रुख है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) और नाविकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालिया रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब भी समुद्र में भारतीय नागरिकों या वाणिज्यिक जहाजों पर कोई संकट आता है, तो भारतीय नौसेना तत्परता से जीवन रक्षक की भूमिका में खड़ी नजर आती है। फिलहाल, प्रभावित मर्चेंट शिप को सुरक्षित बंदरगाह तक पहुँचाने और सुरक्षा घेरा मजबूत करने के लिए अतिरिक्त नौसैनिक संपत्तियों को तैनात कर दिया गया है।
ब्राजील में केमिकल फैक्ट्री धधकी! कई धमाके, 30 फायर टेंडर मौजूद
मंगलवार को साओ पाउलो मेट्रोपॉलिटन इलाके के इटाक्वाक्वेसेटुबा में एक केमिकल फ़ैक्ट्री में भीषण आग लग गई, दमकल की 30 गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं.

