डिजिटल समाचार स्रोत

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पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव फिर भड़का: युद्धविराम खत्म, सीमा पर बढ़ी हिंसा और मानवीय संकट गहराया

इस्लामाबाद लगातार अफगान तालिबान पर आरोप लगाता रहा है कि वह पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी संगठनों को अपने यहां पनाह देता है। पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पार से हो रहे हमलों के पीछे यही समूह जिम्मेदार हैं।

देशबन्धु 27 Mar 2026 1:03 pm

ईरान का अल्टीमेटम: अमेरिकी सैनिकों को ठहराने वाले होटल बने निशाने पर

इजरायल और अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के होटल मालिकों को एक 'अल्टीमेटम' जारी किया है

देशबन्धु 27 Mar 2026 8:23 am

अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने पर दिया जोर, रिश्ते को 'जटिल' बताया

अमेरिका के वरिष्ठ विधायकों और अधिकारियों ने पाकिस्तान के साथ अधिक गहरे और परिणाम-उन्मुख संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है और इस रिश्ते को “जटिल” बताया है

देशबन्धु 27 Mar 2026 8:21 am

मध्य पूर्व संकट से इंडो-पैसिफिक रणनीति पर असर

खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष अमेरिका की इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) रणनीति को कमजोर कर सकता है

देशबन्धु 27 Mar 2026 8:19 am

अमेरिकी सांसदों की चेतावनी: अंतरिक्ष बना नया युद्धक्षेत्र

अमेरिकी सांसदों और सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी कि चीन, रूस और अन्य विरोधियों से बढ़ते खतरे रणनीतिक परिदृश्य को तेजी से बदल रहे हैं

देशबन्धु 27 Mar 2026 8:15 am

ट्रेन की ‘तत्काल टिकट’ चुराने वाली गैंग में 5वीं फेल:CBI ने जिसे सरगना बताया वो बेल पर छूटा; IIT–IIM वाले अफसर नहीं तोड़ पाए नेक्सस

अवैध सॉफ्टवेयर्स से ट्रेनों के तत्काल टिकट बुक हो रहे हैं। एक आम यात्री जितनी देर में IRCTC ऐप पर डिटेल भर पाता है, उससे भी कम वक्त में ये सॉफ्टवेयर टिकट बुक कर देते हैं। 25 से 30 सेकंड्स में एक टिकट बुक हो जाती है। फिर इन टिकट्स को 300 से 500 रुपए तक का कमीशन लेकर बेचा जाता है। फेस्टिवल टाइम में कमीशन चार गुना तक हो जाता है। इस नेक्सस को चलाने वाले सरगना 5वीं फेल हैं, वहीं जिन अफसरों पर धांधली रोकने जिम्मा है, वे IIT–IIM जैसे संस्थानों से पढ़े हैं, लेकिन गड़बड़ी को बंद नहीं करवा पा रहे। हर 2–3 महीने में नई पहचान: ऐसे बदलते हैं वेबसाइट, सॉफ्टवेयर और बैंक अकाउंट कभी नेक्सस में शामिल रहे एजेंट ने बताया कि, गिरोह का सरगना हर दो से तीन महीने में वेबसाइट, सॉफ्टवेयर के नाम, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर तक बदल देता है, ताकि किसी भी तरह की ट्रैकिंग से बचा जा सके। इस्तेमाल किए जाने वाले नंबर पूरी तरह फर्जी होते हैं, जबकि पैसों के लेन-देन के लिए म्यूल अकाउंट्स यानी लालच देकर या फर्जी तरीके से बनाए गए खातों का इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल ‘टेस्ला’, ‘गदर’, ‘स्टारलिंक’, ‘स्पेसएक्स’, ‘सुपरमैन’, ‘बीएमडब्ल्यू’ और ‘थंडर’ जैसे नामों से सॉफ्टवेयर बेचे जा रहे हैं, जिन्हें सुपर मास्टर से लेकर यूजर तक अलग-अलग स्तर के एजेंट्स को दिया जाता है, जो टिकट बुकिंग का काम संभालते हैं। पूरा नेटवर्क वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए संचालित होता है, जहां सॉफ्टवेयर से जुड़ी हर जानकारी और अपडेट मैसेज के जरिए साझा किए जाते हैं। अवैध टिकट खेल के 5 किरदार: ऑपरेटर से लेकर CBI तक, ऐसे चलता है पूरा नेटवर्क ऑपरेटर : यही अवैध सॉफ्टवेयर चलाते हैं। डेवलपर और ट्रैवल एजेंट्स के बीच की कड़ी हैं। एजेंटों को अवैध सॉफ्टवेयर का लॉग-इन आईडी और पासवर्ड देते हैं। इससे एजेंट Tatkal टिकट खुलते ही तेजी से टिकट बुक कर पाते हैं। टिकट एजेंट : अवैध सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके टिकट बुक करते हैं। इसके जरिए IRCTC वेबसाइट को ऑटोमेटिक एक्सेस करना, Captcha bypass करना और Tatkal टिकट सेकंडों में बुक करते हैं। कमीशन वसूलते हैं। CRIS : अवैध सॉफ्टवेयर से बुकिंग रोकने में सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी CRIS की तकनीकी भूमिका है। रेलवे के आईटी सिस्टम को डेवलप करने, सर्वर लॉग और ट्रैफिक पैटर्न की निगरानी कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, ऐसे IP एड्रेस और यूजर अकाउंट को ब्लॉक करना, CAPTCHA, OTP जैसी सिक्योरिटी पुख्ता करने का जिम्मा। RPF : रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी (RPF) पर टिकट दलालों, एजेंट नेटवर्क और अवैध बुकिंग गतिविधियों की पहचान कर कार्रवाई करना, छापे मारना और जांच करने का जिम्मा है। CBI : इस धांधली से जुड़े तीन केस की जांच कर चुकी है, लेकिन अभी तक क्राइम को बंद नहीं करवा सकी। गिरोह के सरगनाओं को पकड़कर सलाखों के पीछे डालने की जिम्मेदारी है। CBI ने सलमान–शमशेर को नेक्सस का किंगपिन बताया CBI पिछले 14 साल से इसकी जांच कर रही है। 2012 में पहली FIR दर्ज की थी। तब चौथीं पढ़े सलमान, अहमदाबाद के आईटी प्रोफेशनल कुलवीर सिंह, सतीश तिवारी और सीताराम निषाद को अरेस्ट किया था। एजेंसी ने चार्जशीट में यूपी के सलमान अहमद खान और शमशेर आलम को अवैध सॉफ्टवेयर से टिकट बुकिंग का किंगपिन बताया है। सलमान को 2018 और शमशेर को 2023 में भी पकड़ा गया, इससे साबित होता है कि दोनों अब भी नेक्सस चला रहे हैं। अलग–अलग मामलों में CBI अब तक चार बार केस दर्ज कर चुकी है, लेकिन न नेक्सस बंद हुआ, न कोई केस अंजाम तक पहुंचा। पहला केस : 2012 में पहली बार नाम सामने आया, लेकिन नेटवर्क नहीं टूटा 20 फरवरी 2012 को CBI और रेलवे विजिलेंस ने संयुक्त छापे में पहली बार इस धांधली को पकड़ा था। तब मेहताब अहमद खान, पी नागाकुमार, महबूब मलिक, संतराम यादव, सलमान अहमद खान और कुलबीर सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया था। मौजूदा स्टेट्स : कोर्ट ने सभी को दोषी पाया था, लेकिन इन पर IPS की धारा 120B – आपराधिक साजिश और रेलवे एक्ट 143 लगाया गया। इसलिए कोर्ट ने महज 6 महीने कैद और जुर्माने की सजा दी। दूसरा केस : सॉफ्टवेयर माफिया के ‘सरगना’ बेनकाब, लेकिन मामला अभी ट्रायल में 2014–15 में केस रजिस्टर्ड किया। इस केस की चार्जशीट में सीबीआई ने लिखा कि, ‘सलमान सलीम खान मुख्य व्यक्ति है, जो शमशेर आलम के साथ मिलकर पूरे गिरोह को नियंत्रित करता है। दोनों को अवैध Tatkal रेलवे टिकट बुकिंग सॉफ्टवेयर बेचने के कारोबार के शीर्ष सरगना के रूप में पहचाना गया है।’ ‘सलमान सलीम खान अवैध सॉफ्टवेयर कारोबार में टेक्निकल काम भी संभालता था, जैसे कि इंटरनेट डोमेन पर एप्लिकेशन को होस्ट करना, बिक्री और सेवा से संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर्स और एजेंटों के साथ कोर्डिनेट करना’ सीबीआई ने शब्बीर खोजा, शेख सलीम, नवनीत प्रजापति, टी स्टालिन, मोहम्मद हामिद, नौमान सलीम खान, रईस अहमद अकबर, सलमान सलीम खान और शमशेर आलम को आरोपी बनाया है। मौजूदा स्टेट्स : यह केस अभी ट्रायल के बीच में है। सबूत पेश और रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। केस की पहली सुनवाई 28 फरवरी 2017 को हुई थी। अगली सुनवाई 28 मार्च को है। सभी आरोपी बेल पर बाहर हैं। तीसरा केस : CBI का ही प्रोग्रामर बना मास्टरमाइंड, बिटकॉइन-हवाला से चलता था करोड़ों का खेल 25 दिसंबर 2017 को CBI ने अपने ही प्रोग्रामर अजय गर्ग के खिलाफ FIR दर्ज की। आरोप है कि उसने WinZip, Neo, Reget जैसे अवैध सॉफ्टवेयर बनाए, जो IRCTC के तत्काल टिकट सिस्टम को बायपास कर सकता था। इस सॉफ्टवेयर की मदद से एजेंट तेजी से बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे, जिससे आम यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाते थे। जांच में सामने आया कि अजय गर्ग ने अनिल गुप्ता और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर यह सॉफ्टवेयर देशभर में एजेंटों को बेचा। इसके बदले पैसे Bitcoin, हवाला और नकद के जरिए लिए जाते थे। छापों में करीब 89 लाख रुपए कैश और 61 लाख रुपए के जेवर बरामद हुए। मौजूदा स्टेट्स : इस केस में CBI ने 2021 में चार्जशीट दाखिल की थी। लेकिन प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 हटाया था, कोर्ट ने इस पर असहमति जताई। सीबीआई को फिर जांच के आदेश दिए। अभी आरोपों पर बहस चल रही है। गर्ग बेल पर बाहर है। चौथा केस : 18 FIR, लेकिन जांच सिर्फ 2 मामलों में हुई 2020 में RPF में दर्ज 18 FIR को आगे बढ़ाने के लिए RPF के DG की तरफ से CBI जांच की मांग की गई। आरोपियों में सिराज अहमद खान, शमशेर आलम, किफायत आलम, जितेंद्र शर्मा उर्फ गोरा जीतू खोदारे, राजेश यादव, रामकुमार यादव और ऋषभ जैन के नाम शामिल थे। मौजूदा स्टेट्स : 18 में से सिर्फ 2 एफआईआर की जांच हुई। बाकी केस की पड़ताल नहीं हुई। जबकि, खुद सीबीआई डायरेक्टर ने फाइल जांच के लिए आगे बढ़ाई है। 5400 एजेंट्स, करोड़ों का खेल- 1 लाख रुपए के 80 ई-टिकट बरामद हुए मई 2018 में रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF और सेंट्रल रेलवे की विजिलेंस टीम ने मुंबई में सलमान खान को गिरफ्तार किया था। 2 मई 2018 को जोगेश्वरी इलाके में छापेमारी के दौरान उसे लैपटॉप के साथ पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि वह ‘Counter V2’ नाम के अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए देशभर में लगभग 5,400 एजेंटों का नेटवर्क चलाता था, जिससे एजेंट कुछ सेकंड में Tatkal टिकट बुक कर लेते थे। कार्रवाई के दौरान उसके सिस्टम से करीब 1 लाख रुपए के 80 ई-टिकट बरामद हुए और बाद में सर्वर की जांच में 6,600 से ज्यादा PNR करीब 1.47 करोड़ कीमत के टिकटों का डेटा मिला। इस मामले में RPF, बायकुला ने रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत केस दर्ज किया था। 15 अप्रैल 2023 को RPF ने शमशेर आलम को तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई से गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों के अनुसार शमशेर ने IRCTC की Tatkal टिकट बुकिंग को बायपास करने के लिए ‘Fusion’ सहित कई अवैध सॉफ्टवेयर तैयार किए थे और इन्हें देशभर के प्राइवेट टिकट एजेंटों को किराये पर देता था। बताया गया कि वह पिछले लगभग 10 वर्षों से मुंबई के टिटवाला इलाके से नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था और उसके सॉफ्टवेयर के जरिए एजेंट सेकंडों में टिकट बुक कर लेते थे। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए करीब 50 करोड़ रुपए तक का अवैध कारोबार हुआ। पूछताछ में सामने आया कि वह पहले ‘Sharp’, ‘Tez’, ‘Nexus++’ और ‘Fusion’ जैसे सॉफ्टवेयर मंथली रेंट पर देता था और बाद में साथियों के साथ मिलकर नेटवर्क को देशभर में फैलाया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। फिलहाल बेल पर बाहर है। पैसा कैसे कमाते हैं इन 5 अधिकारियों पर धांधली रोकने की जिम्मेदारी ‘सिक्योरिटी फीचर जुड़ते ही तोड़ भी निकल जाता है’ जांच करने वाले सीनियर अफसर ने बताया कि, ‘जांच में सामने आया था कि, ईस्टर्न यूपी में बैठकर आरोपी अवैध सॉफ्टवेयर से टिकट बुकिंग का रैकेट पूरे देश में चला रहे हैं। इनके सॉफ्टवेयर में डाटा पहले से फीड होता है। सेकंड्स में टिकट बुक हो जाते हैं।’ ‘पूरा रैकेट अभी भी एक्टिव है, क्योंकि सब बेल पर बाहर हैं। IRCTC की तरफ से जो भी सिक्योरिटी फीचर जोड़े जाते हैं, ये लोग तुरंत उसका तोड़ निकाल लेते हैं, इसलिए अब आरपीएफ को इन्हें गिरफ्तार करना चाहिए। जिन लोगों के नाम चार्जशीट में हैं, वही रैकेट चला रहे हैं।’ IRCTC, CBI को सवाल भेजे – भास्कर ने इस मामले में IRCTC और CBI का पक्ष जानने के लिए उन्हें सवाल भेजे हैं। अभी तक जवाब नहीं आया है। रिप्लाई आते ही खबर में अपडेट किया जाएगा। …………………………………….. आप ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं वंदेभारत-तेजस ट्रेनों में बदबूदार लंच-डिनर:शिकायत पर पिट रहे यात्री; एडवांस पेमेंट के बाद भी घटिया खाना क्यों, पर्दाफाश तारीख : 1 जनवरी क्या हुआ : भुवनेश्वर-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस के यात्री ने वीडियो शेयर कर कहा कि, परोसा गया खाना ‘इंसानों के खाने लायक नहीं’ है, इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा है। तारीख : 23 जनवरी क्या हुआ : कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को अधपके चावल, कड़क रोटियां और बेहद कम मात्रा में खाना परोसा गया। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

दैनिक भास्कर 27 Mar 2026 4:56 am

ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान का पांच-सूत्रीय जवाब, जानें क्‍या हैं शर्तें

दुनिया होर्मुज स्‍ट्रेट के आंशिक बंद होने से पैदा हुए ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने गुरुवार को चेतावनी दी कि तेहरान के पास किसी समझौते को लेकर 'गंभीर होने' का समय अब ​​खत्म होता जा रहा है

देशबन्धु 26 Mar 2026 11:23 pm

होर्मुज ब्लॉकेड के इंचार्ज ईरानी कमांडर तंगसीरी की इजरायली हमले में मौत, बंदर अब्बास पर भीषण स्ट्राइक

अलीरेजा तंगसीरी IRGC की नौसैनिक शाखा के प्रमुख थे और उन्हें ईरान की आक्रामक समुद्री रणनीति का मुख्य सूत्रधार माना जाता था। सूत्रों के अनुसार, वे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

देशबन्धु 26 Mar 2026 3:17 pm

ईरान जंग खत्म करने के लिए 3 दिन के अंदर पाकिस्तान जा सकते हैं अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के प्रतिनिधियों ने ट्रंप प्रशासन को संकेत दिया है कि वे अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर के साथ दोबारा बातचीत करने के इच्छुक नहीं हैं।

देशबन्धु 26 Mar 2026 11:35 am

ईरान का बड़ा ऐलान: भारत समेत 5 देशों को होर्मुज जलमार्ग से छूट

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईरान ने ऐलान किया है कि वह भारत समेत पांच मित्र देशों से संबंधित जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा

देशबन्धु 26 Mar 2026 9:50 am

ट्रंप का दावा: मिडटर्म चुनाव में ‘ऐतिहासिक जीत’ तय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगामी मिडटर्म चुनावों को लेकर बड़ा दावा करते हुए रिपब्लिकन पार्टी की ऐतिहासिक जीत का भरोसा जताया

देशबन्धु 26 Mar 2026 9:40 am

ईरान युद्ध अपने लक्ष्यों के करीब, बातचीत जारी : अमेरिका

व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान “निर्धारित समय से आगे” चल रहे हैं और अपने मुख्य उद्देश्यों के करीब पहुँच रहे हैं

देशबन्धु 26 Mar 2026 8:32 am

जब मेलानिया ट्रंप से रोबोट बोला, व्हाइट हाउस में मुझे आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद

व्हाइट हाउस में सबसे ज्यादा ध्यान किसी अतिथि नेता, हस्ती, खेल सितारे या वरिष्ठ अधिकारी ने नहीं, बल्कि एक रोबोट ने खींचा

देशबन्धु 26 Mar 2026 8:30 am

ईरानी द्वीप पर कब्ज़ा करने की तैयारी कर रहे हैं दुश्मन : स्पीकर

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर ग़ालिबाफ ने कहा है कि कुछ सूचनाएं यह संकेत देती हैं कि “दुश्मन” एक क्षेत्रीय देश के समर्थन से ईरान के एक द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए अभियान की तैयारी कर रहे हैं

देशबन्धु 26 Mar 2026 8:26 am

बांग्लादेश: फरवरी चुनाव में गड़बड़ी के आरोप, जमात ने कानूनी रास्ता अपनाया

बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने 12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनावों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है

देशबन्धु 26 Mar 2026 6:40 am

बंगाल में ‘चुनावी’ रामनवमी, हिंदुओं की हत्या मुद्दा:BJP-हिंदू संगठन 5 दिन जुलूस निकालेंगे, TMC भी तैयार, बोली- राम सबके

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रामनवमी की तैयारियां चल रही हैं। रामनवमी 27 मार्च को है, लेकिन यहां 5 दिन तक कार्यक्रम होंगे। BJP का प्लान है कि इस दौरान हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा उठाए। इसमें बांग्लादेश में दीपू दास, मुर्शिदाबाद में हरिगोबिंद दास और उनके बेटे चंदन की हत्या भी शामिल है। TMC भी कार्यक्रम करेगी। पार्टी हुगली में ‘अस्त्रहीन संकीर्तन रैली’ निकालेगी। उसका कहना है कि जयश्री राम कहने से राम सिर्फ BJP के नहीं हो जाते। रामनवमी की तैयारियां पूरे बंगाल में हो रही हैं, लेकिन आसनसोल का जिक्र इसलिए क्योंकि यहां 2018 में रामनवमी पर हिंसा भड़की थी। रानीगंज और आसनसोल के बाजारों में 100 से ज्यादा दुकानें और घर जला दिए गए थे। तीन मौतें हुईं और कर्फ्यू लगाना पड़ा। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी है। रामनवमी BJP और TMC दोनों के लिए बड़ी परीक्षा है। अनुमान है कि राज्य में करीब 20 हजार शोभा यात्राएं और जुलूस निकाले जाएंगे। पहले हिंदू संगठनों की तैयारी…पश्चिम बंगाल में हिंदू संगठन रामनवमी पर 12 साल से रैलियां निकाल रहे हैं। इनमें RSS, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के लोग शामिल होते हैं। अब इनमें पॉलिटिकल पार्टियां भी शामिल होने लगी हैं। हालांकि जुलूसों में पार्टी का झंडा नहीं होता। रामनवमी पर ज्यादातर कार्यक्रम हिंदी भाषी इलाकों में होते हैं। इसमें आसनसोल भी है। हमने आसनसोल साउथ की विधायक और BJP की वाइस प्रेसिडेंट अग्निमित्रा पाल से तैयारियों के बारे में पूछा। वे कहती हैं, ‘इस बार बर्नपुर, चित्रा मोड़, राधानगर, बल्लावपुर, मोशिला, काली पहाड़ी और एगरा में रैलियां निकालेंगे। इनमें 10 हजार से ज्यादा लोग शामिल होंगे।’ रैलियों पर चुनाव का असर भी होगा? अग्निमित्रा कहती हैं, ’चुनाव की तो नहीं, लेकिन लोगों पर हो रहे अत्याचार पर बात होगी। बांग्लादेश से लेकर बंगाल तक हिंदुओं को मार दिया जाता है, लेकिन सरकार कुछ नहीं करती।’ हथियारों के प्रदर्शन पर रोक, BJP नेता बोले- हथियार लेकर जाएंगे हम पुरुलिया पहुंचे। यहां करीब 82% आबादी हिंदू है। यहां की रघुनाथपुर सीट BJP के पास है। रामनवमी की तैयारियों पर BJP के संयोजक शांतनु चटर्जी बताते हैं, ‘2005 से यहां रामनवमी का जुलूस निकल रहा है। इसमें पार्टियों के लोग शामिल होते हैं, लेकिन लीड BJP करती है। हमने जुलूस के लिए पुलिस को बता दिया है। हमारा अखाड़ा रजिस्टर्ड है, इसलिए जुलूस तो निकालेंगे।‘ रैली के खर्च पर वे कहते हैं, ‘हमने घरों से चंदा लिया है। इस बार तैयारियों में काफी खर्च हुआ है।‘ शांतनु थोड़े गुस्से में कहते हैं, हमें हथियार की परमिशन नहीं मिल रही है। हमारे सभी देवी-देवता हथियार लिए हुए हैं, इसलिए हम लोग हथियार के साथ रैली निकालेंगे। 5 से 6 घंटे का कार्यक्रम होगा। करीब 10 हजार लोग शामिल होंगे। दरअसल, पिछले साल कलकत्ता हाईकोर्ट ने रामनवमी में जुलूस के दौरान हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तामलुक में निकले जुलूस में लोग हथियार लहराते देखे गए थे। इसमें BJP नेता दिलीप घोष भी मौजूद थे। इस बार भी हाईकोर्ट ने हावड़ा में राम नवमी जुलूस की अनुमति देते हुए हथियारों पर प्रतिबंध लगाया है। अंजनी पुत्र सेना नाम के संगठन ने कोर्ट में याचिका लगाई थी कि पुलिस जुलूस निकालने की परमिशन नहीं दे रही है। कोर्ट ने संगठन को 26 मार्च को सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच जुलूस निकालने की परमिशन दे दी। रामनवमी से पहले पुलिस ने सभी समितियों के साथ मीटिंग की हैं। पुलिस के एक अधिकारी बताते हैं कि हमने कहा है कि समितियां शांति से रैलियां निकालें। अगर कोई कानून तोड़ेगा, तो कार्रवाई की जाएगी। मालदा में 52 संगठन मिलकर रैली निकालेंगेहम नॉर्थ बंगाल के मालदा जिले पहुंचे। यहां 10 साल से रामनवमी पर प्रोग्राम हो रहे हैं। मालदा में BJP की वाइस प्रेसिडेंट तंद्रा राय चौधरी बताती हैं, ‘पिछले साल 12 जगह छोटी-बड़ी रैलियां निकाली गई थीं। सिर्फ इंग्लिश बाजार में करीब 6 हजार लोग जुटे थे। इस बार इससे भी ज्यादा आएंगे।‘ ‘रामनवमी के लिए हमने दो बार मीटिंग की है। इसमें 52 संगठन शामिल हुए। साफ है कि इस बार ज्यादा भीड़ जुटेगी। 5 किमी लंबी रैली होगी। पहले थाने में लेटर देना पड़ता था, अब सारा प्रोसेस ऑनलाइन हो चुका है। रैली का रूट, लोगों की संख्या और लाउडस्पीकर की जानकारी सब ऑनलाइन दी जाती है।‘ परमिशन के बारे में हिंदू जागरण मंच के स्टेट प्रेसिडेंट अमित सरकार कहते हैं, ‘हमें रामनवमी के लिए परमिशन नहीं लेनी पड़ती, सिर्फ जानकारी देनी होती है। 2024-2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सशर्त परमिशन दी है। इस बार बिना डीजे और हथियार के रैली निकाली जाएगी।‘ नॉर्थ बंगाल के 8 जिलों में 150 से ज्यादा जुलूस निकलेंगेसिलीगुड़ी में 92% आबादी हिंदू है। श्रीरामनवमी जिला समिति के सचिव लक्ष्मण बंसल कहते हैं, ‘नॉर्थ बंगाल के सभी आठ जिलों में 150 शोभा यात्राएं निकाली जा रही हैं। 27 मार्च को सिलीगुड़ी में यात्रा निकलेगी, जिसमें साध्वी प्राची भी होंगी। पिछले साल यहां जुलूस में 6 लाख से ज्यादा लोग आए थे। इस बार आंकड़ा 7 लाख के पार होगा।‘ ‘रैली में करीब 150 झाकियां होंगी। इसमें वंदे मातरम् का सफर, संघ के 100 साल, हिंदुओं पर अत्याचार को दिखाएंगे। नॉर्थ बंगाल के 8 जिलों में करीब 35 लाख लोग शोभा यात्रा का हिस्सा बनेंगे।‘ TMC और BJP के नेताओं की भागीदारी पर वे कहते हैं, ‘यहां राम भक्तों का जमावड़ा होगा। इस बार चुनाव हैं, इसलिए TMC के लोकल नेता जरूर शामिल होंगे।’ TMC की तैयारी‘जुलूस हमेशा निकलता है, बस पार्टी का झंडा नहीं होता’पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ साल से रामनवमी पर होने वाले कार्यक्रमों में TMC भी शामिल हो रही है। हमने आसनसोल में पार्टी के एक लीडर ने बात की। वे पहचान उजागर नहीं करना चाहते। वे कहते हैं, ‘पार्टी किसी भी कीमत पर वोट नहीं खोना चाहती। हिंदी भाषी इलाकों में रामनवमी आस्था और शौर्य का विषय है। अब ये सियासी हो चुका है। इसलिए TMC भी जुलूस निकालेगी। ये पहली बार नहीं है। पहले भी पार्टी नेताओं ने जुलूस निकाले हैं, बस उसमें पार्टी का झंडा नहीं होता है। ऐसा ज्यादातर हिंदी भाषी इलाकों में ही करते हैं।‘ ‘BJP नेता जितेंद्र तिवारी पहले TMC से विधायक थे। आसनसोल के मेयर रह चुके हैं। वे खुद TMC के जुलूस का प्रतिनिधित्व करते थे और भगवा पगड़ी के साथ अखाड़े में शामिल होते थे। इस बार पार्टी के नाम पर न सही, लेकिन पार्टी के लीडर जरूर रैली निकालेंगे।‘ ‘राम सबके, जय श्रीराम कहने से सिर्फ BJP के नहीं’आसनसोल में TMC पार्षद रंजीत सिंह इसे बेहतर तरीके से समझाते हैं। वे कहते हैं, ‘रामनवमी पर हमारे इलाके में कई जगहों से रैली निकलती है। मंदिरों से होते हुए सब एक जगह इकट्ठा होते हैं। इसमें BJP और TMC का कोई मामला नहीं है। सिर्फ जय श्रीराम कह देने से राम BJP के नहीं हो गए, वे तो सबके हैं।‘ ‘इन रैलियों में नेता सीधे शामिल नहीं होते, लेकिन ज्यादातर कामकाज पार्टी के कार्यकर्ता ही देखते हैं। हमारे वार्ड में भी कई जगह रैली निकलती है। इसे हिंदू उत्सव की तरह मनाया जाता है।‘ ऐसी रैलियां कब से निकल रही हैं, कौन फंड करता है? जवाब में रंजीत कहते हैं, ‘2014 से रैलियां निकाल रहे हैं। फंड के लिए लोगों से चंदा लेते है। लोकल नेता भी मदद करते हैं।‘ एक्सपर्ट बोले- चुनाव की वजह से रामनवमी पर ज्यादा फोकससीनियर जर्नलिस्ट विनोद जायसवाल कहते हैं, 'आसनसोल और दुर्गापुर में ज्यादातर विश्व हिंदू परिषद रैली निकालती है। कुछ अखाड़ों को TMC के लोग लीड करते हैं, ताकि ये मैसेज न जाए कि TMC हिंदू विरोधी है। इस बार चुनाव का माहौल है, इसलिए पार्टियां ज्यादा फोकस कर रही हैं।’ एक और सीनियर जर्नलिस्ट नाम न देने की शर्त पर कहते हैं, ‘पिछले कुछ साल में रामनवमी मनाने के तरीके में बहुत अंतर आ गया है। लेफ्ट की सरकार के वक्त भी RSS के लोग जुलूस निकालते थे। तब इसका राजनीतिकरण नहीं हुआ था।’ ‘लोग घरों पर हनुमान जी का झंडा चढ़ाते थे। कुछ लोग ही जुलूस का हिस्सा बनते थे। जैसे-जैसे हिंदुत्व का प्रचार हुआ, रामनवमी में झंडे का रंग बदलने लगा। उसमें बजरंग बली के फोटो भी बदल गई। पिछले 10 साल में पश्चिम बंगाल में रामनवमी का ज्यादा क्रेज बढ़ा है।’ 8 साल में कैसे बढ़ती गई BJP2018 में रामनवमी के जुलूस के दौरान पश्चिम बंगाल के रानीगंज, आसनसोल और पुरुलिया सहित कई इलाकों में हिंसक झड़पें और दंगे हुए। इसके बाद राज्य में पंचायत चुनाव हुए। BJP दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी। TMC ने 38,118 ग्राम पंचायत सीटों पर कब्जा किया। BJP ने 5,779 सीटें जीतीं। 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले रामनवमी पर फिर हिंसा भड़की। चुनाव में राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा। इन घटनाओं ने राज्य में ध्रुवीकरण तेज कर दिया। 2014 में 34 सीटें जीतने वाली TMC 22 सीटों पर सिमट गई। वहीं, 2 सीटें जीतने वाली BJP ने 18 सीटें जीतीं। रामनवमी से पहले मूर्ति तोड़ने का विरोधनंदीग्राम के रेयापाड़ा में 22 मार्च को रामनवमी से पहले भगवान की मूर्ति तोड़ दी गई। पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और BJP लीडर शुभेंदु अधिकारी ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि ये सब तृणमूल कांग्रेस के इशारों पर हो रहा है। शुभेंदु ने कहा, ’मूर्ति तोड़ने के पीछे जिहादियों का हाथ है। बंगाल में चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही हैं, ये घटनाएं तनाव बढ़ा रही हैं। अगर ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।’ ……………..ये खबर भी पढ़ें… क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 26 Mar 2026 4:53 am

ब्लैकबोर्ड-शादी से पहले लड़के-लड़की की कैंसर रिपोर्ट देखी जाती है:विधवाओं का गांव जहां लोग पानी पीने से भी डरते हैं, पता नहीं कब मौत आ जाए

पंजाब में बठिंडा का एक गांव- जज्जल। 55 बरस की बीरपाल कौर एक मातम से लौटी हैं। लेकिन, उनके हाथों में तस्वीर है पति दौलतराम की। मैंने आहिस्ता से पूछा- क्या हो गया? बीरपाल पंजाबी में बोलीं- ननद की बहू मर गई। उसके मातम से लौंटी हूं। इस बातचीत से पहले मैं बीरपाल के घर की एक दीवार पर टंगी दौलतराम की तस्वीर देख चुका था। सो थोड़ी सी हैरानी भरे लहजे में मैंने फिर पूछा, 'आपके हाथ में तो पति की फोटो है… ऐसा क्यों? जवाब मिला, ‘जहां से आ रहीं हूं वो भी कैंसर से मर गई और मेरा आदमी भी कैंसर से मरा था। ये जो गली है न, इसके हर घर में कोई न कोई कैंसर से मरा है। किसी को ब्लड कैंसर हुआ तो किसी मुंह का। किसी के फेफड़ों में कैंसर था तो किसी को आंतों का। यहां मौत माने कैंसर है। हालात ऐसे हैं कि यहां शादी से पहले लड़के और लड़की की कैंसर रिपोर्ट देखी जाती है।’ मैं नीरज झा, दैनिक भास्कर की सीरीज ब्लैकबोर्ड में लाया हूं बठिंडा के लोगो की स्याह कहानी, जहां तकरीबन हर घर में कैंसर के मरीज हैं। हजारों लोग मर चुके हैं और हजारों पल-पल मौत का इंतजार कर रहे हैं- पंजाब के बठिंडा से करीब 50 किलोमीटर दूर जज्जल गांव में घुसते ही मैं गाड़ी रोक देता हूं। यहीं बीरपाल का घर है, जहां कैंसर से अपने लोगों को खो चुके आधा दर्जन परिवार मिल जाते हैं और पहुंचते ही बीरपाल अपने रिश्तेदार के घर से मातम मना कर लौटीं मिल जाती हैं। मैं पूछता हूं- बहू की मौत कैसे हुई? नजर फेरते हुए वह पंजाबी में बोलती हैं, 'कैंसर से… और कैसे? उसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। पति की दो-तीन साल पहले ही मौत हो गई थी। बेचारे उन बच्चों का अब क्या होगा? पहले बाप की और अब मां की मौत हो गई। बच्चे अनाथ हो गए। ऐसे ही पिछले साल मेरे पति की भी कैंसर से मौत हो गई। यह कहते हुए… बीरपाल की आंखों से आंसू बहने लगते हैं। वह बार-बार अपने पति की फोटो निहारती हैं। कहती हैं, ‘दिन में जितनी बार दीवार पर नजर जाती है, आंखें भर आती हैं। कैंसर ने हमारा हंसता-खेलता परिवार खत्म कर दिया। हॉस्पिटल के चक्कर काटते-काटते लाखों रुपए बर्बाद हो गए। जमींदारों के यहां मेहनत-मजदूरी की, लेकिन न हमारे पति बचे और न पैसा। आजकल बुढ़ापे में बच्चे किसे देखते हैं? बीरपाल कहती हैं, ‘जिस गली में आप घुसे हैं, यह ‘विधवाओं की गली’ कही जाती है। यहां आधे दर्जन से ज्यादा घर हैं, लेकिन एक भी घर में मर्द नहीं बचे हैं। कुछ मर्दों की कैंसर से मौत हो गई, …तो कुछ का पता ही नहीं चला कि उन्हें कौन-सी बीमारी थी।' आपके पति को किस तरह का कैंसर था? ‘उन्हें ब्लड कैंसर यानी खून का कैंसर था। पहले पास के रामा मंडी गांव के एक हॉस्पिटल में दिखाया, फिर बठिंडा लेकर गई। वहां से डॉक्टर ने पीजीआई चंडीगढ़ में रेफर कर दिया। तब पता चला कि मेरे पति को कैंसर है। डॉक्टर ने ये बात मेरे पति को भी बता दी। उसके बाद वह दिन-रात उसी सोच में डूबे रहने लगे। 3 महीने में ही गुजर गए। घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा। मैं जमींदारों के यहां काम करने लगी। पति के इलाज में 2 लाख से ज्यादा रुपए खर्च हो गए। एक दिन के इलाज में 10-10 हजार रुपए लग जाते थे। गरीब औरत हूं, इतने पैसे कहां से लाती? फिर भी पैसे की फिक्र नहीं थी… अगर वह बच जाते, तो कलेजे को ठंडक मिलती। अब न पति बचे, न पैसा। बीरपाल कौर अपने आंगन में बैठी रजनी राणा की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, ‘इनके ससुर की भी कुछ साल पहले कैंसर से मौत हुई थी। अभी कुछ दिन पहले सास भी गुजर गईं। तेरहवीं बाकी है।’ इस पर रजनी कहती हैं, ‘7 साल पहले की बात है। मेरी नई-नई शादी हुई थी। कुछ महीने बाद ससुर को जीभ के नीचे छेद जैसा महसूस होने लगा। उन्हें शहर ले जाकर चेकअप कराया, तो पता चला कि चौथे स्टेज का मुंह का कैंसर था। डॉक्टर ने कहा- घर ले जाकर सेवा करो, अब इलाज का कोई फायदा नहीं। फिर भी सास बोलीं- चूल्हा-चौका करके भी पति का इलाज कराऊंगी। वह जमींदारों के यहां गोबर उठाने लगीं। वहां इतना काम करने लगीं कि सिर पर टोकरी उठाते-उठाते उनके बाल घिस गए, लेकिन ससुर जी नहीं बचे। दो साल ही जिंदा रहे, फिर उनकी मौत हो गई। धीरे-धीरे दुख के कारण सास भी कमजोर होने लगीं। अभी एक हफ्ते पहले उनकी भी मौत हो गई। 50-55 साल की उम्र क्या जाने होती है? अब किस्मत ही ऐसी है, तो क्या करें?’ बीरपाल के आंगन में एक पानी की टंकी रखी है। रजनी कहती हैं, ‘इसमें जो गंदा पानी दिख रहा है, वही हम लोग पीते हैं। जब ससुर को डॉक्टर के पास दिखाने ले गई थी, तो डॉक्टर ने कहा था- पानी की खराबी की वजह से मुंह का कैंसर हुआ था। क्या करें, मौत से डर लगता है, लेकिन फिर भी यही पानी पीते हैं।’ रजनी के पास ही 17 साल की निशु बैठी हमारी बातें सुन रही थी। धीरे से बोलती है, ‘जब मैं 7वीं में थी, तो मेरी मां की भी कैंसर से मौत हो गई थी। मां का चेहरा आज भी याद आता है, तो रोने लगती हूं।’ यह कहते हुए वह मुझे कुछ ही कदम दूर अपने घर ले जाती है। दीवार पर उसकी मां रानी कौर की तस्वीर टंगी है। वह कहती है, ‘पापा दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। हम दो बहनें और एक भाई हैं। दादी ने किसी तरह हमें पाल-पोसा। 10वीं के बाद मैंने पढ़ाई छोड़ दी। बिना मां के बच्चों की क्या ही जिंदगी होती है। मुझे थोड़ा-थोड़ा याद है। मां के पेट में अक्सर दर्द रहता था। एक दिन पापा उन्हें साइकिल से बठिंडा चेकअप कराने डॉक्टर के पास ले गए। टेस्ट हुआ, तो पता चला कि बच्चेदानी का कैंसर था। पापा ने पैसे के लिए दो कनाल जमीन बेच दी। हर हफ्ते पापा, मां के इलाज के लिए शहर जाने लगे, लेकिन सालभर के भीतर मां की मौत हो गई। बोलते-बोलते निशु ठहर जाती है। उधर पीछे से बीरपाल कौर कहती हैं, ‘मेरी बहन की ननद के यहां जाएंगे क्या?’ हां कहते हुए मैं एक लोकल आदमी की मदद से जज्जल गांव से निकल पड़ता हूं। बीरपाल की बहन की ननद 12 किलोमीटर दूर रामा मंडी गांव में रहती हैं। यह गांव गुरु गोविंद सिंह रिफाइनरी प्लांट से सटा हुआ है। बीरपाल की बहन की ननद आशा रानी अपनी जेठानी बेड़वंती के साथ घर के बरामदे में शोक में बैठी हैं। मेरे पहुंचते ही सहम जाती हैं। थोड़ी बातचीत के बाद कहती हैं, ‘गुद्दा में इंफेक्शन की वजह से बेटे की तीन साल पहले ही मौत हो गई थी। फिर बहू कमलेश के पेट के निचले हिस्से में पस बनने लगी। सिर के बाल भी धीरे-धीरे झड़ने लगे। हमें लगा कमजोरी की वजह से बाल झड़ रहे हैं। जब वह कहने लगी कि उसके मल के रास्ते बहुत खून आ रहा है, तब मैं उसे शहर लेकर गई। डॉक्टर ने बताया कि रेक्टम कैंसर था। अब इसका कुछ नहीं हो सकता। रोती-बिलखती उसे घर लेकर आ गई। धीरे-धीरे उसके पेट के निचले हिस्से में कई घाव हो गए। अभी तीन दिन पहले ही उसकी मौत हो गई। दो बच्चे हैं। कैसे पालूंगी, क्या करूंगी- कुछ समझ नहीं आता। तीन बेटों में से दो बेटों की पहले ही मौत हो चुकी है। अब एक बहू और बेटा ही बचे हैं। आगे की जिंदगी के बारे में सोच-सोचकर मरी जा रही हूं।' जेठानी बेड़वंती कहती हैं, ‘15 साल पहले मेरे पति की भी ब्लड कैंसर के कारण मौत हो गई थी। एक साल चंडीगढ़ और एक साल बीकानेर में उनका इलाज करवाती रही, लेकिन उन्हें नहीं बचा पाई। घर-द्वार, जमीन… सब बिक गया। अब बेटा है, वही काम-धंधा करके घर चला रहा है।’ इन लोगों की कहानी सुनकर मैं दंग होता जा रहा हूं। मन-ही-मन सोच रहा हूं कि ये कैसा कैंसर है- एक परिवार, एक गली, एक गांव… हर दूसरे घर में इससे मौत हुई है। कई परिवारों में तो तीन-चार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। मेरा एक स्थानीय साथी 30 किलोमीटर दूर चट्ठेवाला गांव के ऐसे ही हालात के बारे में बताता है। मैं वहां के लिए निकल पड़ता हूं। आधे घंटे बाद गांव में गाड़ी रुकते ही 10 घरों में से 6-7 में कैंसर से हुई मौतों के मामले मिल जाते हैं। यहीं एक घर में महिंदर सिंह पिछले एक साल से बिस्तर पर पड़े हैं। उन्हें मुंह का कैंसर है। पत्नी मंजीत कौर जमींदार के यहां चूल्हा-चौका करने गई हुई हैं। उनकी बेटी बीरपाल एक दिन पहले ही ससुराल से मायके आई हैं। पिता के बारे में पूछते ही फूट-फूटकर रोने लगती हैं। काफी देर बाद कहती है, ‘हर वक्त डर रहता है- इस बार पिता से मिलकर जा रही हूं… अगली बार पता नहीं, कब मौत की खबर आ जाए।’ वह थोड़ी देर रुकती हैं, फिर धीमी आवाज में कहती हैं, ‘अब कोई भी बीमारी होती है, तो लगता है- कहीं कैंसर तो नहीं। तुरंत चेकअप के लिए शहर भागती हूं। लोग कहते हैं कि अगर माता-पिता को कैंसर हो, तो बच्चों में भी होने का खतरा रहता है। डर बस यही रहता है- कहीं हमें या हमारे बच्चों को कैंसर न हो जाए।’ इतनी ही देर में महिंदर सिंह की पत्नी मंजीत कौर आ जाती हैं। हल्की मुस्कान में अपने आंसू छुपाने की कोशिश करती हैं। कहती हैं, ‘पिछले एक साल से हर हफ्ते 6 हजार रुपए कीमोथेरेपी में जा रहे हैं। बरसात में घर की छत टपकती है। इलाज के लिए पैसे नहीं बचते, तो घर की मरम्मत कहां से कराऊं। अब बस यही देख रही हूं- कितनी जिंदगी बची है।’ वह एक पल के लिए चुप होती हैं, फिर कहती हैं, ‘पति ठीक हो जाए, तो सब ठीक… नहीं तो, सब खत्म। और क्या ही बोलूं…। इस चट्ठेवाला गांव में जिधर देखिए, उधर कैंसर के दो-चार मामले मिल जाएंगे। मेरी सास को भी रेक्टम कैंसर था। 10 साल पहले उनकी मौत हो गई थी।’ मैं महिंदर सिंह की गली से आगे गांव की तरफ बढ़ता हूं। तभी जालौर सिंह मिलते हैं। उनके भाई बलौर सिंह की भी कुछ साल पहले कैंसर से मौत हो चुकी है। पूछते ही वह अपने भाई की तस्वीर दिखाने लगते हैं। कहते हैं, 'वह हू-ब-हू मेरी तरह दिखता था। अभी घर में मेरी 100 साल की मां जिंदा हैं, लेकिन भाई चला गया। जहां-जहां लोगों ने बताया, वहां-वहां उसका इलाज कराया। मैं बिजली विभाग में नौकरी करता था, ठीक-ठाक कमाई थी, फिर भी उसे नहीं बचा पाया। लोग कहते हैं कि गुटखा-तंबाकू खाने से मुंह का कैंसर होता है, लेकिन मेरा भाई तो कुछ भी नहीं खाता था। दो साल बिस्तर पर पड़ा रहा, फिर उसकी मौत हो गई। अब उसकी पत्नी और बच्चे गांव से दूर खेत में जाकर रहने लगे हैं। वहीं मजदूरी करके गुजारा कर रहे हैं। आप मेरे घर के सामने, दाएं-बाएं कहीं भी चले जाइए- हर घर में कैंसर से मौत हुई है। मेरी चचेरी चाची की भी कुछ साल पहले कैंसर से मौत हो गई थी। इलाज के लिए पैसे नहीं थे, तो मैंने उनका घर खरीद लिया। कैंसर के इलाज में लाखों रुपए खर्च होते हैं, फिर भी कोई नहीं बचता। अब तो डर लगा रहता है कि कहीं मुझे या मेरे बच्चों को कुछ न हो जाए। बच्चे कहते हैं कि शहर चलकर बस जाएं, लेकिन घर-द्वार और खेती-बाड़ी छोड़कर कहां जाएं? जहां जन्म लिया, वहीं मर जाएंगे। ये बातें बताते हुए जालौर सिंह आवाज देकर दो-तीन लोगों को बुला लेते हैं। उनमें से एक गरिंदरजीत कौर हैं। उनकी सास की 7 साल पहले मुंह के कैंसर से मौत हो गई थी। वह मुझे अपने घर ले जाती हैं। कहती हैं, 'सास की जीभ के निचले हिस्से में छाला पड़ा था, जो धीरे-धीरे बड़ा छेद बन गया। वह कुछ खा नहीं पाती थीं। चम्मच से बच्चे की तरह पानी और जूस पिलाना पड़ता था। उनकी हालत देखकर हमारा भी खाना छूट जाता था- हम कैसे खाते? सास जूस-पानी पर रहती थीं और हम पकवान खाएं… ये कैसे होता? करीब डेढ़ साल इलाज चला, फिर उनकी मौत हो गई। डॉक्टर ने कहा था कि यहां का पानी ही इसकी वजह है। उसके बाद हमने घर में RO लगवा लिया।' गरिंदरजीत के घर के ठीक सामने जसविंदर कौर का घर है। 8 साल पहले उनके जेठ जग्गा सिंह की ब्लड कैंसर से मौत हो गई थी। जसविंदर, जो हरियाणा की रहने वाली हैं, कहती हैं, 'हम पांच बहनें थीं। पापा ने तीन बार में दो-दो बहनों की एक साथ शादी की। इस घर में भी हम दो बहनें ब्याहकर आईं। पहले मेरी बहन की मौत हुई, फिर जेठ की ब्लड कैंसर से। उनके तीन बच्चे हैं- दो बेटियां और एक बेटा। जॉइंट फैमिली है, तो हम ही उन्हें पाल-पोस रहे हैं। कैंसर का ऐसा डर है कि हमारी बेटियों से कोई शादी नहीं करना चाहता। रिश्ता लेकर आने वाले पहले ही पूछते हैं- घर में किसी को कैंसर तो नहीं? यहां का पानी पीने से भी डरते हैं। हम लोग बस जी रहे हैं… कब कैंसर हो जाए, कब मौत आ जाए- कुछ पता नहीं।' जज्जल, रामा मंडी और चट्ठेवाला गांव के बाद मैं 20 किलोमीटर दूर गियाना गांव की ओर निकलता हूं। शाम हो चुकी है। मुझे वापस बठिंडा लौटना है। गांव में सब्जी बेचने वाले पवन कुमार मिलते हैं। कैंसर का जिक्र करते ही कहते हैं, 'क्या बताऊं… मेरे मां-बाप, दोनों की कैंसर से मौत हो गई। 2008 के आसपास की बात है। हमारी परचून की दुकान थी। अचानक पापा को तेज बुखार आने लगा। उस वक्त बठिंडा में इलाज की सुविधा नहीं थी, इसलिए उन्हें बीकानेर लेकर गया। वहां पता चला- ब्लड कैंसर है। 6 महीने बाद मां भी बीमार रहने लगीं। उनका चेकअप कराया, तो बोन कैंसर निकला। धीरे-धीरे उनका शरीर इतना कमजोर हो गया कि जहां से पकड़ता, वहीं से हड्डी टूटने लगती। महीने में तीन बार बीकानेर कीमोथेरेपी के लिए जाना पड़ता था। दुकान बंद करनी पड़ी। दुकान में सामान नहीं रहेगा, तो चलेगी कैसे? आखिर में सब्जी की रेहड़ी लगानी शुरू की। 6 साल के अंदर दोनों की एक-एक करके मौत हो गई। अब पानी ही खराब है… क्या करें? जीना तो है, लेकिन जिंदगी कब तक है- कुछ पता नहीं।' मैं इन सब कहानियों को समेटते हुए वापस बठिंडा लौट आता हूं। एम्स बठिंडा में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. सपना भट्टी से मुलाकात होती है। वह कहती हैं, 'इन गांवों की स्थिति गंभीर है, लेकिन अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। बठिंडा में ही चार कैंसर अस्पताल हैं और एम्स में हर दिन 120 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं। पहले यहां सुविधाएं नहीं थीं, तो लोग बीकानेर जाते थे। यहां से एक ट्रेन चलती थी, जिसे लोग ‘कैंसर एक्सप्रेस’ कहते थे। अब वही मरीज इलाज के लिए बठिंडा आ रहे हैं। यहां बढ़ते कैंसर का सबसे बड़ा कारण पानी है। पानी बेहद खराब है। जिस मिट्टी में उगा अनाज लोग खाते हैं, वह भी प्रभावित है। फसलों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, जिससे मिट्टी और पानी दोनों जहरीले हो गए हैं। पानी में आर्सेनिक, सेलेनियम और यूरेनियम जैसे तत्व खतरनाक स्तर पर पाए जा रहे हैं, जो कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, रिफाइनरी प्लांट से निकलने वाला जहरीला कचरा भी हालात को और बिगाड़ रहा है। यहां तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब का सेवन भी ज्यादा होता है, जो कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। अगर किसी एक व्यक्ति को कैंसर होता है, तो परिवार के बाकी लोगों में भी खतरा बढ़ जाता है। गांवों में लोग शर्म और डर की वजह से कैंसर से हुई मौतों के बारे में खुलकर बात नहीं करते। उन्हें बदनामी का डर रहता है। हालांकि, हम लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में जाकर लोगों को इसके प्रति सचेत कर रहे हैं।' ------------------------------------ 1- ब्लैकबोर्ड- सिर्फ पीरियड्स में नहा पाती हैं महिलाएं:कम खाती हैं, ताकि शौच न जाना पड़े; बोलीं- नमक के खेत में ही पैदा हुए, इसी में मर जाएंगे चिलचिलाती धूप में दूर तक फैला नमक का मैदान इतनी तेज चमक रहा है कि आंखों में चुभ रहा है। दूर तक कहीं छांव नहीं। अचानक एक महिला, रमिला, काम छोड़कर धीरे से कहती हैं- ‘दिन में हम शौच नहीं जाते… लोग देख लेंगे। इसलिए खाना भी कम खाते हैं… ताकि बार-बार जाना न पड़े…पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- भूख के बजाय, दवाओं के ट्रायल से मरना अच्छा:बच्चों को तो 25 लाख मिल जाएंगे; उन्हें रिसर्च के लिए खून चाहिए, हमें पैसा ‘किसे अच्छा लगता है कि वह पैसे के लिए अपनी जान की बाजी लगाए, लेकिन मुझे लगानी पड़ती है। अगर मर भी गई तो बच्चों को 20-25 लाख मिलेंगे। कम से कम उनकी जिंदगी तो बेहतर हो जाएगी। अभी तक खुद पर दवाओं के ट्रायल में 4 बार पास हुई हूं।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 26 Mar 2026 4:53 am

'ना अभी, ना कभी ', ट्रंप पर ईरान का तिलमिला देने वाला तंज, क्या अब उतरेगी अमेरिकी सेना

सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक बयान में ज़ुल्फिकारी ने कहा कि ईरान की नीति शुरुआत से स्पष्ट रही है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ईरान का रुख साफ है और वह ऐसे किसी प्रस्ताव या समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा, जो उसकी संप्रभुता या रणनीतिक हितों को प्रभावित करता हो।

देशबन्धु 25 Mar 2026 3:32 pm

ईरान-अमेरिका तनाव कम करने की कोशिशें तेज, पाकिस्तान ने वार्ता स्थल बनने की पेशकश की

टनीतिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान में वार्ता के प्रस्ताव को “सैद्धांतिक रूप से” स्वीकार कर लिया है। हालांकि, अब तक ईरान की ओर से इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति नहीं मिली है।

देशबन्धु 25 Mar 2026 11:50 am

अमेरिका ने मध्य पूर्व के लिए 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों को किया तैयार

पेंटागन अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात करने की तैयारी कर रहा है, जो ईरान संघर्ष में संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है

देशबन्धु 25 Mar 2026 9:30 am

अमेरिका का बड़ा दांव: ईरान को 15-सूत्रीय प्लान

अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए एक व्यापक 15-सूत्रीय प्लान भेजा है

देशबन्धु 25 Mar 2026 9:28 am

इंडो-पैसिफिक के भविष्य में भारत की अहम भूमिका: अमेरिकी उप रक्षा सचिव

अमेरिका के नीति मामलों के उप रक्षा सचिव एल्ब्रिज कोल्बी ने कहा कि अमेरिका भारत को बहुत सम्मान की नजर से देखता है। इस देश की एक गौरवशाली रणनीतिक परंपरा है

देशबन्धु 25 Mar 2026 6:10 am

चीन में प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाले टोकनों की संख्या 1,400 खरब से अधिक

चीनी राष्ट्रीय डेटा प्राधिकरण के महानिदेशक ल्यू ल्येहोंग ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी कि इस मार्च तक चीन में प्रतिदिन टोकनों के इस्तेमाल की संख्या 1,400 खरब से अधिक हो गई है

देशबन्धु 25 Mar 2026 5:10 am

दक्षिण कोरिया: पांच-दिन के व्हीकल रोटेशन सिस्टम को सख्ती से लागू करेगी सरकार

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच दक्षिण कोरिया ने व्हीकल रोटेशन सिस्टम (वाहन रोटेशन प्रणाली) को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है

देशबन्धु 24 Mar 2026 11:33 pm

धमकी से संवाद तक: ट्रंप का अचानक यू-टर्न

पश्चिम एशिया में युद्ध के कोलाहल के बीच शनिवार से सोमवार के दौरान दुनिया अचानक दहशत से राहत की ओर मुड़ गई

देशबन्धु 24 Mar 2026 11:12 pm

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा खुलासा, रक्षा मंत्री हेगसेथ को बताया ईरान युद्ध का असली 'मास्टरमाइंड'

डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने खुलासा किया है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई का फैसला किस तरह लिया गया। इस बयान ने न सिर्फ अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई बहस छेड़ दी है।

देशबन्धु 24 Mar 2026 3:36 pm

ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच सीजफायर की हलचल, बैकडोर डिप्लोमेसी में जुटे बड़े चेहरे

इस कूटनीतिक प्रयास में तीन नाम खास तौर पर चर्चा में हैं स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बगेर गलीबाफ। बताया जा रहा है कि विटकॉफ और कुशनर अमेरिकी हितों के साथ-साथ इजरायल के साथ तालमेल बिठाते हुए बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं, ईरान की ओर से गलीबाफ बातचीत की मेज पर अपनी शर्तें रख रहे हैं।

देशबन्धु 24 Mar 2026 12:43 pm

नेपाल ने बदले ट्रैक‍िंग के न‍ियम, यात्रा के ल‍िए अब साथी ढूंढने की जरूरत नहीं

नेपाल ने विदेशी ट्रैकर्स को कुछ खास प्रतिबंधित इलाकों में अकेले जाने की अनुमति देने का फैसला किया है। इस फैसले के साथ ही वह मौजूदा पर‍म‍िट स‍िस्‍टम खत्‍म हो गया

देशबन्धु 24 Mar 2026 10:25 am

ईरान से समझौता मध्य पूर्व में ला सकता है स्थिरता, असफलता पर जारी रहेगा हमला: ट्रंप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ चल रही बातचीत मध्य पूर्व में दीर्घकालिक स्थिरता ला सकती है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और लाखों प्रवासियों का घर भी है

देशबन्धु 24 Mar 2026 8:29 am

जेल में आजम, बिना पूछे रामपुर में लीडरशिप बदली:क्या 2027 के चुनाव से पहले सपा भूली, लोग बोले- ये बुरे वक्त में धोखा

7 नवंबर 2025, आजम खान के जेल से रिहा होने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव उनसे मिलने रामपुर पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद आजम थोड़ा तल्ख दिखे। अखिलेश से बढ़ती दूरी पर उनसे सवाल पूछा गया, तो बोले- ‘अब दिल ही कहां रह गया है, बगैर दिल के काम कर रहे हैं। इस रिश्ते (सपा से) को टूटने में सदियां लगेंगी। अगर रिश्ते पर जंग लग जाए, तो उसे खुद साफ कर लूंगा, किसी और की जरूरत नहीं है।‘ इस बयान ने साफ कर दिया कि आजम को रामपुर में अपने और पार्टी के बीच 'किसी और' का आना पसंद नहीं है। शायद उन्हें अंदाजा था कि सपा रामपुर में बड़ा फेरबदल कर सकती है। 2 मार्च को ऐसा ही हुआ। अखिलेश यादव ने BSP से आए पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सागर को प्रदेश सचिव बना दिया। सुरेंद्र रामपुर के कद्दावर नेता रहे हैं। उन्हें प्रदेश सचिव बनाने का फैसला आजम खान की गैरमौजूदगी में हुआ। फैसले को 20 दिन हो गए, लेकिन रामपुर में आजम के समर्थक अब भी नाराज हैं। उनका कहना है कि आजम 7 साल की सजा काट रहे हैं, नहीं पता कब चुनाव लड़ पाएंगे। इसलिए उन्हें पार्टी में तवज्जो नहीं मिल रही। अब तीन सवाल हैं1. सुरेंद्र सागर को लाना अखिलेश यादव की 2027 विधानसभा चुनाव की नई रणनीति का हिस्सा है? 2. क्या सपा रामपुर में आजम खान से अलग नई लीडरशिप तलाश रही है? 3. रामपुर में आजम समर्थकों और सुरेंद्र सागर का इस फेरबदल पर क्या कहना है? 4 पॉइंट्स में जानिए, रामपुर में सुरेंद्र सागर को कमान देने की वजह 1. दलित-पिछड़ा-अल्पसंख्यक, यानी PDA मॉडल को मजबूत करना2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा का फोकस PDA फॉर्मूले पर है। सुरेंद्र सागर को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर अखिलेश रामपुर और मुरादाबाद मंडल के दलित वोटर्स को पॉजिटिव मैसेज देना चाहते हैं। 2. आजम की गैरमौजूदगी में नया विकल्पआजम फर्जी पैन कार्ड मामले में सजा काट रहे हैं। वे 2027 में चुनाव नहीं लड़ सकते। उनकी गैरमौजूदगी में सपा रामपुर में एक खालीपन महसूस कर रही थी। इसकी भरपाई के लिए सुरेंद्र सागर को प्रदेश सचिव बनाकर रामपुर की जिम्मेदारी दी गई। 3. बसपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारीसुरेंद्र सागर की बसपा के कैडर वोटरों और यादव-जाटव बिरादरी में अच्छी पकड़ मानी जाती है। सपा ने उनके जरिए BSP के पारंपरिक वोट बैंक को अपनी ओर खींचने का दांव चला है। 4. लोकल गुटबाजी को बैलेंस करनारामपुर में सपा की लीडरशिप में पहले भी गुटबाजी रही है। सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी आजम खान के खिलाफ बयान देते रहते हैं। लिहाजा पार्टी ने ऐसे नेता को जिम्मेदारी दी, जो बाहर से (BSP से) आए हैं। इससे पुराने समीकरणों को बैलेंस करने की कोशिश की गई है। वो दौर, जब रामपुर में आजम के बिना पत्ता नहीं हिलता थारामपुर के सीनियर जर्नलिस्ट विवेक गुप्ता कहते हैं, ‘आजम के दबदबे की शुरुआत 2003 में मुलायम सरकार से हुई। वे यूपी सरकार में शहरी विकास मंत्री बनाए गए। 2012 से 2017 तक रामपुर में जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी सुबह उठकर सबसे पहले आजम के घर हाजिरी लगाने जाते थे। जिले का DM या SP कौन होगा, ये लखनऊ से नहीं बल्कि आजम की पसंद से तय होता था।‘ ‘2005 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव रामपुर में आजम की जौहर यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करने आए थे। तब आजम की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था। आज वे सलाखों के पीछे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में सपा ने सुरेंद्र सागर पर दांव चला है। ये बताता है कि अब सपा रामपुर को एक चेहरे के भरोसे नहीं छोड़ना चाहती।‘ 2017 में योगी सरकार आने के बाद से आजम खान तीन बार जेल जा चुके हैं। पहली बार फरवरी 2020 से मई 2022 तक और फिर अक्टूबर 2023 से सितंबर 2025 तक जेल में रहे। बीते 5 साल में उन्होंने 50 महीने जेल में काटे। 23 सितंबर 2025 को सीतापुर जेल से रिहा होकर रामपुर आए। 54 दिनों तक बाहर रहे, लेकिन 17 नवंबर 2025 को फर्जी पैन कार्ड मामले में उन्हें फिर 7 साल की सजा हो गई। सुरेंद्र सागर बोले- रामपुर में सपा का हर वोटर मेरे साथ रामपुर सीट पर आजम खान 9 बार विधायक और 2 बार सांसद रहे। 4 बार यूपी सरकार में मंत्री रहे। फिलहाल बेटे अब्दुल्ला के साथ रामपुर जेल में बंद हैं। रामपुर की सियासत में बीते 40 साल से आजम फैमिली का दबदबा रहा है। उनकी गैरमौजूदगी में सुरेंद्र सागर रामपुर की कमान कैसे संभालेंगे, ये जानने के लिए हम उनके दफ्तर पहुंचे। यहां मिले सुरेंद्र सागर के बेटे अंकुर सागर ने बताया कि वे पार्टी के काम से बाहर गए हैं। हमने सुरेंद्र से फोन पर बात की। सपा में मिली जिम्मेदारी पर उन्होंने कहा, ‘रामपुर के लोग हमारे साथ है। आजम खान साहब ने रामपुर को सपा का गढ़ बनाया है। उनके संघर्ष के दिनों में पार्टी को जमीन पर मजबूत रखना हमारी प्राथमिकता है।‘ क्या रामपुर में आजम खान के समर्थक आपको वोट देंगे? सुरेंद्र जवाब देते हैं, ‘सिर्फ रामपुर में ही नहीं बल्कि पूरे यूपी में सपा PDA मॉडल पर काम रही है। पार्टी का टारगेट है कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों को एकजुट किया जाए। यही लक्ष्य लेकर हम रामपुर में गांव-गांव का दौरा कर रहे हैं। हमें हर वर्ग के लोगों का सपोर्ट है।‘ BSP में रहते हुए सुरेंद्र सागर 5 बार रामपुर के जिला अध्यक्ष बने थे। वे BSP के टिकट पर 2 बार मिलक विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। मायावती ने उन्हें राज्यमंत्री भी बनाया। मायावती ने 24 दिसंबर, 2024 को उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। वे इस बात से नाराज थीं कि सुरेंद सागर ने अपने बेटे की शादी सपा नेता की बेटी से कर दी थी। इस शादी में अखिलेश यादव भी पहुंचे थे। सपा को ‘खामोश’ आजम खान की जरुरतरामपुर में नवाबों के दौर से लेकर मौजूदा सियासत पर रिसर्च कर चुके पॉलिटिकल एनालिस्ट तमकीन फयाज खान कहते हैं, ‘सपा में आजम खान का कद तो बरकरार है, लेकिन पार्टी को उनकी दखलंदाजी और बयान बर्दाश्त नहीं हो रहे। सपा को अब एक खामोश आजम खान चाहिए।‘ ‘आजम जेल में रहते हैं, तो पार्टी के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करते हैं। बाहर आकर अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हैं कि PDA का नारा देने वाले अल्पसंख्यकों को स्टेज पर क्यों नहीं जाने देते। इससे सपा असहज हो जाती है।‘ तमकीन आगे कहते हैं, ‘सपा का सुरेंद्र को प्रदेश सचिव बनाकर रामपुर में नई लीडरशिप तैयार करना चौंकाने वाला फैसला है। PDA मॉडल पर रामपुर में सुरेंद्र सागर का अपॉइंटमेंट हुआ, लेकिन बड़ी अजीब बात है कि उन्हीं की बिरादरी के अजय सागर को पार्टी ने दरकिनार कर दिया है। इन्हें कभी आजम खान की सिफारिश पर सपा का जिलाध्यक्ष बनाए गया था। इससे ये मैसेज गया कि बड़े फैसलों में सपा आजम खान की मर्जी नहीं देख रही।’ क्या सपा आजम फैमिली से जानबूझकर कट रही है?तमकीन इसका जवाब एक सियासी घटना से देते हैं। उन्होंने बताया, ‘पिछले साल आजम खान की जमानत से लगभग 5 महीने पहले उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जमानत हुई थी। अब्दुल्ला ने बाहर आने के बाद अपने वालिद को बेल दिलवाने के लिए बहुत कोशिशें की। इसके बाद सितंबर में आजम रिहा हो गए।’ ’अब्दुल्ला जमानत पर बाहर थे, तब उसी समय सपा ने रामपुर में अल्पसंख्यकों का बड़ा सम्मेलन करवाया। इसमें अब्दुल्ला को न्योता तक नहीं दिया गया। आजम फैमिली का कोई सदस्य इसमें शामिल नहीं हुआ। ये सब देखकर लगता है कि सपा में रहते हुए आजम खान को सियासत में बड़ा मौका मिलना मुश्किल होगा।’ भड़काऊ भाषण के मामले में 2022 में आजम को सजा हुई और उनकी विधायकी चली गई। वे 2028 तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते। यही हाल अब्दुल्ला का भी है। 2023 में अब्दुल्ला की विधायकी चली गई। वो स्वार सीट से विधायक थे। वे 2029 तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। लोग बोले- अखिलेश बुरे वक्त में आजम को धोखा दे रहेरामपुर के शाहबाद गेट पर बेकरी चलाने वाले जाहिद का मानना है कि रामपुर की लीडरशिप में फेरबदल करने से सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जाहिद सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नाराजगी जताते हुए कहते हैं, ‘मीडिया सुरेंद्र सागर को नेता बना रही है, जबकि वे खुद बहन जी (मायावती) की मेहरबानी से जिलाध्यक्ष बने थे। आजम खान के मुकाबले उनकी कोई हैसियत नहीं है।‘ ‘रामपुर में सुरेंद्र सागर क्या, अगर अखिलेश यादव भी आजम के मुकाबले चुनाव लड़ लें तो हार जाएंगे। आजम खान की वजह से सपा उत्तर प्रदेश में इतनी बड़ी पार्टी बन पाई। जाटव समाज को छोड़ दें, तो सुरेंद्र सागर को रामपुर में कोई नहीं जानता।‘ आदर्श कॉलोनी के रहने वाले गोविंद यादव सुरेंद्र सागर का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं, ‘ यादव और जाटव बिरादरी के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। हमने वो दौर देखा है, जब रामपुर में एक ही परिवार की चलती थी। सुरेंद्र के आने से राजनीति जौहर यूनिवर्सिटी की दीवारों से निकलकर खेतों और गांवों तक पहुंचेगी।‘ ‘आजम के आगे सागर कमजोर विकल्प’सीनियर जर्नलिस्ट सुहैल जैदी कहते हैं, ‘आजम खान का कद आज भी अपनी जगह है। वे अपनी सियासत के ऐसे मुकाम पर आ चुके हैं कि उसमें कुछ भी फेरबदल होना नामुमकिन है। बात रही सुरेंद्र सागर की, तो उन्होंने मंत्री रहते हुए रामपुर में ऐसा कोई काम नहीं करवाया, जिससे उनका प्रभाव दिखता हो।‘ ‘दूसरी तरफ आजम खान ने बतौर मंत्री यहां के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल, स्कूल और बस स्टॉप जैसी सुविधाएं दीं। भले ही वे जेल में हैं, लेकिन उनके लिए इज्जत बरकरार है। आजम खान और सुरेंद्र सागर के बीच कोई बराबरी नहीं है। सबको पता है आजम खान की मर्जी के बिना रामपुर का विधायक नहीं तय हो सकता।‘ ……………….ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर-2 में अतीक अहमद की कहानी सच या प्रोपेगैंडा इलाहाबाद का चकिया। सफेद कुर्ता, सिर पर साफा पहने, चेहरे पर मुस्कान लिए एक माफिया। फिल्म धुरंधर-2 शुरुआती सीन से ही आपको सीधे यूपी के माफिया और सांसद रहे अतीक अहमद के दौर में ले जाएगी। फिल्म में भले ही डिस्क्लेमर है, लेकिन आतिफ का किरदार हूबहू अतीक अहमद से मिल रहा है। ये कहानी सच है या प्रोपेगैंडा, पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 24 Mar 2026 5:12 am