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ईरान युद्ध का असर संयुक्त राष्ट्र तक: वरिष्ठ राजनयिक मोहम्मद सफा का इस्तीफा, ‘न्यूक्लियर खतरे’ की चेतावनी

सफा ने अपने बयान में ‘न्यूक्लियर विंटर’ (परमाणु हमले के बाद वैश्विक जलवायु पर पड़ने वाला गंभीर प्रभाव) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा इस खतरे को दुनिया के सामने लाने की कोशिश है, ताकि समय रहते इसे टाला जा सके।

देशबन्धु 31 Mar 2026 1:26 pm

उषा वेंस ने अपने जीवन के बारे में खुलकर की बात, जेडी वेंस की महत्वाकांक्षाओं का किया समर्थन

उषा वेंस ने एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उपराष्ट्रपति आवास के अंदर के जीवन की एक दुर्लभ व्यक्तिगत झलक साझा की। उन्होंने परिवार, राजनीति और अपनी बदलती सार्वजनिक भूमिका पर बात की

देशबन्धु 31 Mar 2026 9:38 am

ट्रंप का दावा: जल्द पता चल जाएगा कि ईरान के संसद अध्यक्ष अमेरिका के साथ काम करना चाहते हैं या नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा है कि करीब एक हफ्ते में यह साफ हो जाएगा कि ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं या नहीं

देशबन्धु 31 Mar 2026 9:35 am

लेबनान में यूएन शांतिसैनिकों पर हमला: फ्रांस के विदेश मंत्री ने की इजरायल की कड़े शब्दों में निंदा

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने इजरायल की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लेबनान के नकौरा क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना (यूएनआईएफआईएल) के साथ “गंभीर घटनाएं” हुई हैं

देशबन्धु 31 Mar 2026 9:15 am

ईरान युद्ध का बिल अरब देशों से वसूलेंगे ट्रंप?

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अरब देशों से ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इजरायल युद्ध से जुड़े खर्चों को उठाने में मदद मांगने में काफी दिलचस्पी रखेंगे

देशबन्धु 31 Mar 2026 7:22 am

शरीर के ऊपरी हिस्से पर कपड़े नहीं पहनतीं बोंडा महिलाएं:शादी ठुकराने पर लड़कीवालों का तोड़ देते हैं घर, मृत्युभोज में खाते हैं गाय का मांस

सुबह करीब 10 बजे का वक्त। मिट्टी से लिपा-पुता एक कच्चा घर। बाहर सिर मुंडाए दो महिलाएं बैठी हैं। उम्र करीब 38-40 साल। ऊपरी बदन लगभग नंगा। बाकी शरीर पर नाम मात्र के कपड़े। छाती छिपाने के लिए मोतियों और कौड़ियों से बनी मालाएं। गले में एल्युमीनियम के ढेर सारे छल्ले भी। हाथों में अंगूठी और कानों में दो अलग-अलग तरह की बालियां। ये हैं बोंडा सुमदाय की महिलाएं। मैं मनीषा भल्ला दैनिक भास्कर की खास सीरीज ‘हम लोग’ में लाई हूं इसी बोंडा समुदाय की कहानी। मैं पहुंची हूं दिल्ली से 1700 किलोमीटर दूर ओडिशा के बोंडा हिल्स… अब सिर्फ 9,200 बोंडा लोग बचे हैं। इनसे मिलने पर पाबंदी है। सरकार को डर है कि घुलने-मिलने से बोंडा संस्कृति खत्म न हो जाए। बेहद जरूरी होने पर ही इनसे मिलने की परमिशन मिलती है। सो मैं बोंडा डेवलपमेंट एजेंसी के ऑफिस पहुंच गई। ये दफ्तर गांव की शुरुआत में ही है। बोंडा प्रोजेक्ट हिल्स के प्रोजेक्ट मैनेजर शशिकांत समांतारे से मिली। उन्होंने लक्ष्मी नाम के एक शख्स को मेरे साथ कर दिया। कह तो वो ये रहे थे कि लक्ष्मी मेरी मदद करेंगे, लेकिन वो मुझ पर नजर रख रहे थे। लक्ष्मी गांव की तरफ चलते हुए बताते हैं कि- ‘10 साल पहले तक बोंडा महिलाएं बिना कपड़ों के रहती थीं। सिर्फ प्राइवेट पार्ट एक छोटे से कपड़े से ढक लेती थीं, जिसे रिंगा कहते हैं। ऊपरी हिस्से पर केवल मोतियों की माला पहनती थीं।’ हम गांव में घुसे ही थे कि चिकनी मिट्‌टी से खिलौने बनाते बच्चे नजर आने लगे। हमें देखते ही हंसने लगे। शायद उन्हें मेरा पहनावा अजीब लग रहा था। मैं कार्गो पैंट और टीशर्ट जो पहने थी। सुबह का वक्त था, कई महिलाएं घर के बाहर झाड़ू लगा रही थीं। मेरे साथी लक्ष्मी ने एक कोने की तरफ इशारा किया और बोले- ‘कल रात यहीं गांव की लड़कियां डांस कर रही थीं। लड़के देख रहे थे। इस दौरान कुछ लड़कों ने लड़कियों को पसंद कर लिया। हमारे यहां शादियों की शुरुआत ऐसे ही होती है। डांस करती लड़कियों को लड़के पसंद करते हैं। अपनी पसंद परिवार को बताते हैं। फिर उनका परिवार शराब की बोतल, चूड़ी और अंगूठी लेकर लड़की के घर पहुंचता है। शादी का प्रस्ताव रखता है, लेकिन लड़की वाले इनकार कर देते हैं। लड़के वाले दोबारा आते हैं। लड़की वाले फिर मना कर देते हैं। ये सिलसिला डेढ़ साल तक चलता है। आखिरकार एक दिन लड़के वाले लड़की के घर आते हैं और उसका पूरा घर तहस-नहस कर देते हैं। तब जाकर लड़की वाले शादी के लिए हामी भरते हैं। सुनने में ये थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सब रिवाज है, कोई दुश्मनी नहीं। आखिर लड़के वाले, लड़की के परिवार को मुर्गी, सुअर और बकरी देकर रिश्ता पक्का कर देते हैं।’ ‘इसके बाद शादी कैसे होती है?’ मैंने पूछा ‘हमारे यहां बारात दूल्हे के घर की महिलाएं लेकर जाती हैं, मर्द नहीं। गीत गाती, नाचती ये महिलाएं पैदल लड़की के घर पहुंचती हैं। लड़की को शादी का जोड़ा पहनाती हैं। ये जोड़ा भी लड़के वालों की तरफ से ही आता है। फिर ये महिलाएं लड़की को अपने साथ घर ले आती हैं। जब लड़की ससुराल की चौखट पर पहुंचती है, तो पुरोहित उसी चौखट पर मुर्गी की बलि देता है। मुर्गी के खून से पुरोहित लड़की और लड़के का तिलक करता है। यहीं पर लड़की की एक छोटी सी परीक्षा होती है। उसे चावल पकाकर पूरे परिवार को खिलाना होता है। इसके बाद से दुल्हन शादीशुदा मानी जाती है और उसे बहू का दर्जा मिल जाता है।’ एक घर के बाहर एक महिला और पुरुष बैठे बात कर रहे हैं। हाव-भाव से लग रहा है कि पति-पत्नी हैं। पत्नी की उम्र ज्यादा और पति की कम लगा रही है। मैंने लक्ष्मी को उनसे मिलवाने का इशारा किया। महिला का नाम है सोगी। मैंने सोगी से पूछा, ‘ये आपके पति हैं?’ जवाब मिला ‘हां’ लेकिन इनकी उम्र तो आपसे काफी कम लग रही है? सोगी मुस्कुराईं और बोलीं- ‘मेरा पति मुझसे आठ साल छोटा है। हमारे यहां 10 साल के लड़के की शादी कर दी जाती है, लेकिन लड़की की उम्र कम से कम 18 साल होती है। हर रिश्ते में जरूरी है कि लड़की, लड़के से बड़ी हो। इसकी वजह तो किसी को नहीं मालूम, लेकिन यही नियम है। आज तक किसी ने इसे नहीं तोड़ा है।’ बोंडा लोग हिंदी या उड़िया नहीं जानते। इनकी भाषा रेमो है। इन्हें हिंदी में केवल एक वाक्य बोलना आता है कि पैसा दे, पैसा दे। इन्हें पता लग गया है कि बाहरी इनके गांव आकर तस्वीरें खींचते हैं। फिर उससे पैसा कमाते हैं। इसलिए फोटो खींचने या वीडियो बनाने पर आपको हर बोंडा को पैसे देने होते हैं। गांव में मिट्टी और घास-फूस से बने कुल 1900 घर हैं। सरकारी योजना के तहत इनमें से 1200 घरों को ढहाकर नए पक्के घर बनाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने दो-दो लाख रुपए दिए हैं। जगह-जगह मलबा और बल्लियां रखी हुई हैं। एक घर के बाहर महिला झाड़ू लगा रही है। मैं उनसे मिलने पहुंची तो उन्होंने घर के अंदर आने के लिए कहा। महिला का नाम है चुनकी धंधमाझी। वो मुझे अपनी रसोई में ले गईं। पूरी तरह से मिट्‌टी से लिपी हुई एकदम साफ-सुथरी रसोई। यहां मिट्टी के कई चूल्हे बने हैं। दो पर दाल, सब्जी और एक पर चावल पक रहा है। पास में सिर्फ तेल, नमक और मिर्च रखे हैं। दीवार पर कुछ पॉलिथीन टंगी हैं। बोंडा समुदाय के घरों में ऐसी एक बड़ी रसोई के अलावा सिर्फ एक कमरा होता है। इनके घरों में बिस्तर नहीं होते, कपड़े और बर्तन भी गिने चुने। चुनकी से मैंने बोंडा महिलाओं की पहनावे के बारे में पूछा। वो बताने लगीं कि ‘मोतियों और कौड़ियों की जो माला वे पहनती हैं उसे लुबैदक कहते हैं। एल्युमीनियम के छल्लेनुमा गहने को उसुन्गु कहते हैं। चुनकी बताती हैं कि ‘महिलाओं के इस तरह से सजने संवरने के पीछे कहते हैं कि एक बार माता सीता नहा रही थीं। बोंडा समुदाय के लोग उन्हें देखकर हंसने लगे। नाराज सीता ने उन्हें हमेशा वस्त्रहीन रहने का श्राप दे दिया। ये सुनते हो बोंडा लोग माफी मांगने लगे। तब माता सीता ने अपनी धोती फाड़कर एक छोटा सा टुकड़ा महिलाओं को दिया। ये कपड़ा महिलाओं के निचले हिस्से को ढकने के लिए था। जिसे ये लोग रिंगा कहते हैं।’ बात करते हुए चुनकी चूल्हे पर खाना बना रही हैं। चूल्हे के ठीक ऊपर लकड़ी का एक छोटा झूला टंगा है। इस पर यह लोग मांस भूनते हैं। फिलहाल इस पर बींस भुन रही है। रसोई से अंदर की तरफ एक बड़ा कमरा है। जिसमें पलंग पर धान, छोटे-छोटे टमाटर, प्याज, चावल रखे हैं। पास ही एल्युमीनियम के पतीले में भात यानी पका चावल रखा है। एक मटके में भी कुछ रखा है। पूछने पर चुनकी बोलीं- ‘इसमें मंडिया है।’ चखा तो एकदम खट्‌टे दही जैसा लगा। दरअसल, मंडिया इनका स्थानीय अनाज है जिसे पानी में नमक और हल्दी डालकर पकाया जाता है। इसे ये लोग चावल के साथ खाते हैं। चुनकी बताती हैं कि भात, गाय का मांस, सुअर का मांस और बींस की सब्जी हमारा पारंपरिक खाना है। यहां से मेरे साथी लक्ष्मी मुझे अपने घर ले गए। पहुंचते ही मेरे सामने शराब रख दी। बोले- ये हमारी अपनी बनाई शराब है। मेहमानों को यही पिलाते हैं। ये शराब एक खास तरह के बर्तन में दी। ये बर्तन डाल पर ही सूखी हुई लौकी से बना है। इसे चखा तो स्वाद चावल की मांड़ जैसा थोड़ा कड़वा और खट्‌टा लगा। ये सलभ नाम के पेड़ के पत्तों के रस से बनती है। एक ही कुल में शादी पाप मानी जाती है। अगर कोई अपने ही कुल में शादी कर ले तो उसे समाज से बेदखल कर देता है। जुर्माने के तौर पर एक गाय या बैल और कुछ पैसे भी देने पड़ते हैं। शादी के बाद अगर लड़की किसी लड़के को छोड़ दे, तो उसके परिवार पर जुर्माना लगाया जाता है। लड़का अगर लड़की को छोड़ दे तो उसे भी यही सजा दी जाती है। परिवार की मर्जी के बिना अपनी जाति से बाहर शादी करने पर लड़का-लड़की को समाज से बाहर कर दिया जाता है। कुछ समय बाद मामला दोबारा देख कर जुर्माना लगाया जाता है। उन्हें गांव में दावत देनी पड़ती है। तब जाकर समाज में शामिल किया जाता है। हालांकि, उनके हाथ से खाना-पानी नहीं लिया जाता, सिर्फ सूखा अनाज ही स्वीकार होता है। अब ये परंपराएं धीरे-धीरे बदल रही हैं।' बोंडा समुदाय की अपनी अदालत है। एक पेड़ के नीचे पत्थरों से बना प्लेटफॉर्म है, जहां यह स्थानीय झगड़े सुलझाते हैं। लक्ष्मी के घर में ही बोंडा समुदाय के रघुनाथ सीसा मिले। वो बताते हैं कि 'हमारे यहां मृत्यु के बाद जलाने का रिवाज है। मौत के बाद एक या दो महीने के बाद पूरे गांव को भोज दिया जाता है, जिसमें चावल और गौ-मांस खिलाया जाता है। इसे एकोस्याह कहते हैं। बोंडा समुदाय के त्योहार यहां की रौनक हैं। फसल कटने के बाद पूस का त्योहार जनवरी में आता है। उस दिन नए कपड़े खरीदे जाते हैं। बींस की सब्जी, पहाड़ और पेड़ों की पूजा की जाती है। पूजा में किसी प्रकार की कोई मूर्ति नहीं होती है। बल्कि अपने पुरखों को याद किया जाता है। उस दिन पारंपरिक डांस मेमे भी किया जाता है। इस त्योहार को अन्नूआल झातिमारा कहते हैं। इस त्योहार को पुरानी दुश्मनी खत्म करने के लिए मनाया जाता है। सबसे पहले गांव का पुरोहित देवता को मुर्गी समेत कुछ पक्षियों की बलि देता है। अनाज और शराब चढ़ाई जाती है। उसके बाद लोग एक-दूसरे से अपनी दुश्मनी खत्म करते हैं। सभी एक-दूसरे को सलभ पेड़ की शाखा से मारते हैं। इतना मारते हैं कि पिटने वाले का खून निकल आए और उनका सारा गुस्सा उतर जाए। गुस्सा निकलने के बाद एक-दूसरे को गले लगाते हैं। फिर महिलाएं उनके घावों पर हल्दी लगाती है। ये लोग हर साल एक पाठखंडा यात्रा निकलते हैं। यह बोंडा समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार है। जिसमें तलवार की पूजा की जाती है। ये तलवार सौ साल पुरानी होती है। इसे पुराने बरगद के पेड़ में छिपाकर टांगा जाता है। ताकि किसी को दिखे ना। हर साल पुजारी ही उसे नीचे उतारता है। फिर इससे बकरे की बलि दी जाती है और तलवार की पूजा की जाती है। यह तलवार इन लोगों के पूर्वजों की है। तलवार की पूजा में हमेशा ओडिशा के जेपोर राज घराने के लोग शामिल होते हैं। माना जाता है कि ये लोग जेपोर के राजा के सिपाही थे। बीते साल जेपोर के राजा इनकी यात्रा में शामिल होने के लिए आए थे। इस दिन बोंडा समुदाय के 12 गांव के लोग इकट्ठा होते हैं। मेमे डांस भी किया जाता है। इसी तरह से अक्टूबर-नवंबर में डंगर पूजा होती है, जिसमें मुर्गी की बलि दी जाती है। दो अंडे फोड़े जाते हैं। अगर घर में किसी के साथ कुछ बुरा हो जाए तो डुमा पूजा करते हैं। इसमें घर के अंदर मिट्‌टी की एक आकृति बनाई जाती है। जो उनके किसी पूर्वज की होती है। इस आकृति में आत्मा बुलाते हैं और उसकी पूजा करते हैं। आत्मा को बींस, सुअर और गाय के मांस का भोग लगाते हैं। बोंडा समुदाय के ये लोग ओडिशा के मलकानगिरी जिले से 85 किलोमीटर दूर बोंडा हिल्स पर रहते हैं। पहाड़ों पर बसे इस गांव में ये लोग कांगो, काजू, स्ट्रॉबेरी, आम, बांस, फूल झाड़ू, कटहल और आंवला की खेती करते हैं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए ऐसे ही अनोखे वांचू लोगों की कहानी…. ---------------------------------------------------- 1- 100 किलो का पत्थर उठाया, लड़की बोली- तुमसे करूंगी शादी:औरतें 5 पति भी रख सकती हैं, 1800 अनोखे ‘टोडा’ लोगों की कहानी सुबह की हल्की धुंध अभी पहाड़ियों से हटी नहीं है। घास पर जमी ओस चमक रही है। मैदान के किनारे जंगल में एक पुराने पेड़ के नीचे लोग जमा हुए हैं। इसी पेड़ के नीचे एक बड़ा इम्तिहान होने वाला है। पूरी कहानी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 31 Mar 2026 5:07 am

1000 से शुरुआत, हर महीने 4 लाख रुपए कमाई:केरलम में ऐसी 46 लाख कुडुंबश्री दीदियां, लेफ्ट के वोट में कैसे सेंध लगाएगी BJP

शुरुआत बिंदू की कहानी से। तिरुवनंतपुरम के पल्लीचल गांव में रहने वाली बिंदू की शादी 16 साल की उम्र में हो गई थी। ससुराल में खाने के भी लाले थे। बिंदू पढ़ी-लिखी थीं। बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं। पहली कमाई 10 रुपए थी। धीरे-धीरे कमाई बढ़ी, तो बिंदू संस्कृत से ग्रेजुएशन करने लगीं। वहीं उनके आचार्य ने आयुर्वेद बिजनेस का आइडिया दिया। बिंदू ने सास से एक हजार रुपए उधार लिए। केरलम सरकार की कुडुंबश्री योजना से मदद ली और काम शुरू कर दिया। ये 2006 की बात है। अब बिंदू अपनी कंपनी चलाती हैं। 3 से 4 लाख रुपए महीने का बिजनेस है। 40 से ज्यादा देशों के लोग उनसे बिजनेस मॉडल समझने आ चुके हैं। सब उन्हें दीदी बुलाते हैं। बिंदू मानती हैं कि उनकी लाइफ कुडुंबश्री ने बदली है। केरलम सरकार की इस योजना से 46 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, यानी राज्य के हर दूसरे घर में एक कुडुंबश्री मेंबर है। ये महिलाएं बिजनेस तो चलाती ही हैं, साथ में चुनाव लड़ती भी हैं और हार-जीत तय भी करती हैं। कुडुंबश्री में लेफ्ट का दबदबा, विजयन को दूसरी बार सत्ता दिलाई2021 में चुनाव जीतने वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF को 48% महिलाओं ने वोट दिए थे। ये मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की सत्ता में वापसी की बड़ी वजह मानी गई। नवंबर 2023 से नवंबर 2025 में देश के 15 राज्यों में चुनाव हुए हैं। इनमें से 10 में महिलाओं को पैसे देने वाली कैश स्कीम लागू की गईं या वादा किया गया। 10 में से 9 राज्यों में योजना कारगर रही। मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, ओडिशा में महिलाओं के लिए हर महीने पैसे वाली स्कीम लाने वाली पार्टियों को एकतरफा जीत मिली। केरलम की 140 सीटों के लिए 9 अप्रैल को वोटिंग होनी है। यहां कुडुंबश्री गेमचेंजर हो सकती है। अब तक इस बिजनेस मॉडल पर लेफ्ट का कब्जा था, लेकिन अब कांग्रेस और BJP भी सेंधमारी कर रही हैं। बिंदू की कहानी से समझिए कुडुंबश्री कितनी अहमबिंदू की आयुराज इंडस्ट्री के नाम से आयुर्वेद कंपनी है। वे 15 तरह के प्रोडक्ट बेचती हैं। 5 प्रोडक्ट ब्राह्मी के हैं, जिसमें हेयर ऑयल, फेसवॉश, शहद, जैम, मिक्स पैक शामिल हैं। बिंदु केरलम में आयुर्वेद आइकाॅन बन चुकी हैं। कुडुंबश्री से जुड़ी महिलाओं को ट्रेनिंग देने जाती हैं। 2012, 2014, 2016 में राज्य और केंद्र सरकार से बेस्ट आंत्रप्रेन्योर अवॉर्ड मिला है। आयुर्वेद पर किताब लिख रही हैं। बिंदू बताती हैं, ‘पहली बार ब्राह्मी ऑयल बनाकर फ्री में पड़ोसियों को दिया था। उन्हें बहुत पसंद नहीं आया। तभी पता चला कि तिरुवनंतपुरम में कुडुंबश्री फेयर लगा है। वहां स्टॉल लगाया। 24 बॉटल ऑयल तैयार किया था। 2 घंटे में सब बिक गया। इसी से हिम्मत बढ़ी। मैं कुडुंबश्री मिशन से जुड़ गई। वहां से लोन लेकर घर में मशीन लगवाई। काम चल निकला।’ 1998 में कुडुंबश्री की शुरुआत, विजयन सरकार की सबसे बड़ी ताकतकेरलम में बिंदु की तरह लाखों कहानियां हैं। इससे जुड़ी महिलाओं के बिजनेस हैं, वे कैंटीन, जूस का प्लांट चलाती हैं। 17 मई, 1998 को शुरू हुआ। तब LDF के ईके नयनार मुख्यमंत्री थे। योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने मल्लापुरम से की थी। योजना का मकसद गरीबी खत्म करना और महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाना था। अब ये मिशन दुनिया में महिलाओं का सबसे बड़ा ग्रुप बन चुका है। अब कुडुंबश्री के ऑफिस चलिए, देखिए वहां क्या होता हैकुडुंबश्री का ऑफिस राजधानी तिरुवनंतपुरम में है। सीढ़ियां चढ़ते ही सीएम पिनराई विजयन की फोटो और LDF का पोस्टर दिखता है। चुनावी माहौल में कुडुंबश्री की बातें हो रही हैं। दिसंबर, 2025 में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में ग्राम, ब्लॉक, जिला पंचायत, म्युनिसिपालिटी, कॉर्पोरेशन लेवल पर 17,082 कुडुंबश्री वॉलंटियर्स ने चुनाव लड़ा। इनमें 7,210 जीत गईं। ऑफिस में महिलाओं की क्लास चल रही है। पूरे केरलम से करीब 40 महिलाएं आई हुई थीं, जिन्होंने एक-दो साल पहले ही बिजनेस शुरू किया है। अधिकारी बोले- ग्राउंड पर राजनीति है, बात करूंगा तो झापड़ खाऊंगाहमने महिलाओं को ट्रेनिंग दे रहे अधिकारी से बात की। वे अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते। अधिकारी कहते हैं, ‘हम ट्रेनिंग, डोनेशन और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को मिशन से जोड़ने की बात करते हैं। अगर मैं यहां पॉलिटिकल बात करूंगा, तो झापड़ खाने को मिलेगा।’ ‘हकीकत यही है कि ये महिलाएं किसी न किसी पार्टी से जुड़ी हैं। 10 साल से LDF की सरकार है, जाहिर सी बात है कि उससे प्रभावित महिलाएं ज्यादा मिलेंगी। विजयन सरकार ने पिछले साल में अच्छा खासा बजट भी दिया है।’ 10 लाख लोन लेकर कैंटीन खोला, हर महीने 7 लाख रुपए कमाई50 साल की सुनिता तिरुवनंतपुरम में कैंटीन चलाती हैं। वे बताती हैं, ‘बेटे और पति बाहर काम करते हैं। घर पर मन नहीं लगता था, इसलिए मैंने 2024 में कैंटीन शुरू किया। कुडुंबश्री से जुड़ी, 10 लाख रुपए लोन लिया। आज कैंटीन में 21 महिलाएं काम कर रही हैं। उन्हें 700 से 1300 रुपए रोज मेहनताना देती हूं। महीने में 6 से 7 लाख रुपए की कमाई हो जाती है।’ चुनाव पर सुनिता कहती हैं, इस बार थोड़ा मुश्किल है। BJP अच्छी फाइट में है। तिरुवनंतपुरम में तीन सीटों पर मजबूत है। हालांकि, कुडुंबश्री की महिलाएं LDF को ही वोट देंगी। कुडुंबश्री के जरिए राजनीति में आईं महिलाएंसिंधू शशि LDF से जुड़ी हैं। वे मलयालम में बताती हैं, ‘20 साल से कुडुंबश्री से जुड़ी हूं। मेरी टीम सिलाई–बुनाई करती हैं। नगर निगम चुनाव में कुडुंबश्री से जुड़ी 10 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, इनमें से 5 जीत गईं। ज्यादातर LDF से जुड़ी हैं। महिलाओं की इतनी तरक्की मौजूदा सरकार की वजह से हुई है, तो हम उसे कैसे छोड़ सकते हैं।’ एक्सपर्ट बोले- कुडुंबश्री का वोट LDF को मिलेगातिरुवनंतपुरम के सीनियर जर्नलिस्ट अजय कुमार बताते हैं कि कुडुंबश्री की शुरुआत के बाद ज्यादातर LDF की सरकार रही है। उसने समय-समय पर फंड भी बढ़ाया है। ऐसे में कुडुंबश्री का बड़ा तबका LDF और विजयन सरकार को ही वोट करेगा। ये उनके लिए फायदे का मिशन है। LDF कुडुंबश्री को अपनी राजनीति में इस्तेमाल भी करता है। जन्मभूमि अखबार के एडिटर प्रदीप बताते हैं सरकार चला रही पार्टी CPI(M) ने कुडुंबश्री का कैरेक्टर बदल दिया है। कार्यकर्ताओं को इसकी यूनिट में नौकरी दी है। कुडुंबश्री को CPI(M) के नेता वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने इसमें अपनी राजनीति को मिक्स कर दिया है। उनका यूनियन भी ग्राउंड पर कुडुंबश्री के साथ मिलकर काम कर रहा है। कुडुंबश्री पर BJP-कांग्रेस के वादे BJP: राजनीति का दखल खत्म करेंगे, मार्केट मुहैया कराएंगेBJP ने महिलाओं के दम पर मध्यप्रदेश, हरियाणा और बिहार में एकतरफा जीत हासिल की। केरलम में महिलाओं को अपने पाले में करने की चुनौती है। पार्टी ने 11 मार्च को जारी संकल्प पत्र में कुडुंबश्री को भी शामिल किया है। वादा किया है कि इसकी यूनिट का दायरा बढ़ाकर इसे लघु उद्योग में बदलेेंगे। फंड मैनेजमेंट को पारदर्शी बनाएंगे, ताकि राजनीतिक दखल कम हो। कुडुंबश्री के बनाए प्रोडक्ट को इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा गरीबी रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को हर महीने पैसे देना, साल में 6 मुफ्त सिलेंडर, स्कॉलरशिप और सस्ते कर्ज जैसे वादे भी हैं। कांग्रेस: 5 लाख रुपए का ब्याज मुक्त कर्जराहुल गांधी ने 25 मार्च को कोच्चि में UDF का गारंटी कार्ड जारी किया। इसमें कुडुंबश्री के जरिए बच्चों के लिए नर्सरी और क्रेच चलाने की योजना है। इसके अलावा महिलाओं को 5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त कर्ज देने का वादा किया है। …………………………असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंगांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 31 Mar 2026 5:01 am

संकट गहराने के साथ ही क्यूबा अगला निशाना होगा : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि क्यूबा “अगला होगा” जो पतन का सामना करेगा

देशबन्धु 30 Mar 2026 10:17 am

ईरान का भारी जल संयंत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त, संचालन बंदः आईएईए

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने कहा है कि मध्य ईरान के खोंडाब में स्थित ईरान का भारी जल उत्पादन संयंत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और अब चल नहीं रहा है

देशबन्धु 30 Mar 2026 10:10 am

अमेरिकी कांग्रेस में ईरान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नाराजगी, सैनिकों और युद्ध शक्तियों में टकराव जारी

ईरान में ग्राउंड पर सेना तैनात करने की संभावना को लेकर अमेरिका के सीनेटरों में गहरी चिंता है। अमेरिका के वरिष्ठ नेताओं ने बढ़ते खतरों, साफ मकसद और कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत पर जोर दिया है

देशबन्धु 30 Mar 2026 9:45 am

ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी, जमीनी हमले की स्थिति में दी जवाबी कार्रवाई की धमकी

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा

देशबन्धु 30 Mar 2026 9:38 am

तनाव बढ़ने के बीच ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत दिए

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता जल्द हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका के हालिया हमलों से ईरान की सेना और नेतृत्व कमजोर हुआ है

देशबन्धु 30 Mar 2026 8:30 am

गाजा में हमास के दस हथियारबंद लड़ाकों को निशाना बनाया : इजरायल

इजरायल ड‍िफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने जानकारी देते हुए बताया क‍ि शन‍िवार रात सैन्‍य कार्रवाई में उसने गाजा पट्टी में लगभग दस हथियारबंद लड़ाकों को मार ग‍िराया

देशबन्धु 30 Mar 2026 5:50 am

बंगाल में 5% वोट बढ़े, तो बीजेपी नंबर-1 बनेगी:मुस्लिम एकजुट हुए, तो असम फिसल जाएगा; 5 राज्यों में बीजेपी का दांव पर क्या है

अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंत बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा। अगले 30 दिनों में भारत के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इलेक्शन एक्सप्लेनर में जानेंगे आखिर इन पांचों प्रदेशों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा है… ***** ये भी खबर पढ़िए… CEC ज्ञानेश कुमार ने चुनावी तारीखें बताईं, विपक्ष उन्हें पद से हटाने की तैयारी कर रहा; क्या ममता बनर्जी का राजनीतिक दांव चुनाव ऐलान से पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की अगुआई में विपक्ष नेु मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग का नोटिस दिया। सड़कों पर प्रदर्शन कर रही TMC का आरोप है कि ज्ञानेश SIR के जरिए वोट काटकर बीजेपी को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 30 Mar 2026 5:06 am

अंधाधुंध बमबारी, फिर समुद्र और हवा से पहुंचेंगे कमांडो:जानिए 3 टारगेट पर अमेरिकी ग्राउंड अटैक का पूरा प्लान; ईरान कैसे किलेबंदी कर रहा

अमेरिका ने ईरान जंग में डुअल ट्रैक स्ट्रैटजी अपनाई है। यानी एक तरफ जंग रोकने के लिए डिप्लोमैटिक चैनल से बातचीत की कोशिशें हो रही हैं। दूसरी तरफ ‘फाइनल ब्लो’ यानी अंतिम प्रहार की तैयारी है, जिसमें जमीनी सैनिक भी शामिल होंगे। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अभी तक जमीनी हमले की मंजूरी नहीं दी है। 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के 3500 अमेरिकी सैनिक मिडिल ईस्ट पहुंच चुके हैं। उनके साथ ट्रांसपोर्ट और लड़ाकू विमान भी भेजे गए हैं। हजारों अतिरिक्त सैनिक, टैंक, जंगी बेड़े, फाइटर जेट्स भेजने की योजना है। ईरान के अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिकों ने ईरान की जमीन पर कदम रखा, तो ताबूत में वापस लौटेंगे। अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर लिखा- नर्क में आपका स्वागत है। आखिर अमेरिका के ‘अंतिम प्रहार’ का प्लान क्या है, ईरान कैसे मुकाबला करेगा और इसका असर क्या होगा; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… ईरान की जियोग्राफी और जंग के खर्च को देखते हुए, अमेरिका फुल स्केल वॉर के बजाए 3 संभावित जमीनी टारगेट पर हमले कर सकता है... ***** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और अजीत सिंह -------- ये खबर भी पढ़िए…क्या पूरे मिडिल ईस्ट पर नेतन्याहू की नजर:'ग्रेटर इजराइल' क्या है, जिसके लिए ईरान जंग के बीच लेबनान पर कब्जा कर रहा इजराइल पूरी दुनिया की नजर ईरान जंग पर टिकी है। उधर इजराइल तेजी से लेबनान पर जमीनी कब्जा करने में जुटा है। 20% जमीन खाली करा ली है और अपने सैन्य ठिकाने जमा रहा है। इजराइल का कहना है कि वो हिजबुल्ला के सैन्य ढांचे और हथियारों को खत्म करना चाहता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू ‘ग्रेटर इजराइल’ को हकीकत बनाने में जुटे हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 30 Mar 2026 5:06 am

तंत्र विद्या, जादू-टोने वाला गांव, यहां हर घर में तांत्रिक:नरबलि के दावे, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता

तपती धूप में सड़क किनारे एक महिला कुर्सी पर बेसुध सी बैठी है। एक शख्स उसके सिर पर लकड़ी का सूप रखकर कुछ बुदबुदाता है। सूप में पानी डालता है। फिर वही पानी मिट्टी के बर्तन में महिला को दे देता है। गुवाहाटी की रहने वाली ये महिला कुछ दिनों से बीमार है। मंत्र पढ़ने वाला शख्स तांत्रिक है, जो काले जादू से उसका इलाज कर रहा है। महिला के साथ आया लड़का उसे सहारा देकर उठाता है और दोनों चले जाते हैं। ये जगह है असम का मायोंग गांव। करीब तीन हजार आबादी वाले मायोंग गांव को काले जादू की राजधानी कहा जाता है। माना जाता है कि इस गांव के लोग सदियों से जादू-टोना और तंत्र विद्या में माहिर हैं। दावा करते हैं कि उनके मंत्र इतने शक्तिशाली हैं कि इंसान को हवा में गायब कर दें या उसे जानवर बना दें। एक किस्सा ये भी है कि दिल्ली के सुल्तान तुगलक की सेना के एक लाख सैनिक यहां के जंगल में गायब कर दिए गए थे। असम में 9 अप्रैल को चुनाव, जादू-टोना कराने आने लगे नेतामायोंग गांव गुवाहाटी से करीब 50 किमी दूर ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा है। पास में पोबितोरा वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी है, जो एक सींग वाले गैंडों के लिए मशहूर है। हम 27 मार्च को मायोंग पहुंचे थे। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। हालांकि गांव में कहीं नेताओं के बैनर-पोस्टर नहीं हैं। बस कुछ घरों पर BJP के झंडे लगे हैं। यह गांव जागीरोड विधानसभा सीट में आता है। BJP के पीजूष हजारिका विधायक हैं। वे हिमंता सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके करीबी माने जाते हैं। पीजूष लगातार तीसरी बार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के बुबुल दास से है। तांत्रिक का दावा- विधायक जीत के लिए टोटका करवाकर गएगांववाले दावा करते हैं कि नेता यहां वोट मांगने नहीं, जादू-टोना करवाने आते हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। 10 दिन पहले भी परिवार के साथ आए थे। वे जीत के लिए तंत्र करवाकर गए हैं। हमने पूछा- पूजा के लिए कितने पैसे देते हैं? जवाब मिला- हम पैसा नहीं मांगते। पूजा कराने वाला इच्छा से जो दे दे। विधायक से पैसे नहीं लेते। हर घर में तांत्रिक, यहां आने वाले हर शख्स का रिकॉर्डगांव के अंदर लाइन से कुछ दुकानें बनी हैं। इनमे से एक में विपुल मेधी की हार्डवेयर की दुकान है। विपुल गांव के सबसे बड़े तांत्रिक परिवार से हैं। ये परिवार पीढ़ियों से तंत्र साधना करता आया है। 45 साल के विपुल को उनके पिता ने यह विद्या सिखाई थी। विपुल बताते हैं कि गांव के हर घर में एक तांत्रिक जरूर है। यहां लोग बीमारी, कोई मानसिक समस्या जैसी परेशानियां लेकर आते हैं। कुछ तो दुश्मन को मरवाने का काम भी लाते हैं, लेकिन हम गलत काम के लिए मना कर देते हैं। पूजा से पहले ही पूछ लेते हैं कि उनकी मंशा क्या है। मैंने एक डायरी बनाई है, जिसमें तंत्र साधना के लिए आने वाले लोगों के नाम लिखता हूं, ताकि अगर कोई गलत काम के लिए आए, तो हमें आगे भी पता रहे।’ आपके पास कोई नेता आता है? विपुल मेधी बताते हैं, नेता, बड़े लोग, सब आते हैं। सबकी अपनी-अपनी समस्या होती हैं। कोई किसी को हराने के लिए आता है, तो हम भगा देते हैं। ‘मोहम्मद शाह की सेना गायब, औरंगजेब का सेनापति भागा’विपुल के चैंबर के बाहर गांव के लोग बैठे थे। कैमरे पर नहीं बोले, लेकिन पुराने किस्से सुनाने लगे। एक बुजुर्ग बोले कि दिल्ली सल्तनत के मुहम्मद शाह ने 1337 में यहां चढ़ाई की थी। एक लाख घुड़सवार लेकर आए थे। मायोंग के जंगलों में पूरी सेना गायब हो गई।’ ‘मुगल बादशाह औरंगजेब की तरफ से जयपुर के राजा राम सिंह ने भी हमला किया। उसने मायोंग के बारे में सुन रखा था। तब मायोंग के जादू की खबर देशभर में फैली हुई थी। हारने की नौबत आई तो राम सिंह को भी संधि करके लौटना पड़ा। गांव में एक बार खुदाई की गई, तो पुरानी तलवारें और मंत्र लिखी तांबे की प्लेट मिली थीं। ये चीजें गांव के म्यूजियम में रखी हैं।’ इंसानों की बलि का इतिहास, श्मशान में साधना करते तांत्रिकगांव से करीब एक किमी दूर जंगल में मंदिर बना है। गांव के लोग बताते हैं कि यहां 18वीं सदी तक तंत्र साधना के लिए इंसानों की बलि दी जाती थी। अंग्रेजों ने इस पर रोक लगा दी। कच्चे रास्ते से होते हुए हम मंदिर तक पहुंचे। यहां एक बड़ी चट्‌टान है। ये जगह पहाड़ों से घिरी है। यहां एक कुंड है, जिससे गांव के लोग पीने का पानी ले जाते हैं। यहां से हम वापस गांव पहुंचे और जंतू मंडल से मिले। वे गांव के सबसे बुजुर्ग तांत्रिक हैं। उम्र 100 साल बताते हैं। 14 साल के थे, तभी से तंत्र साधना कर रहे हैं। इस काम से घर नहीं चल पाता, इसलिए परिवार के बाकी लोग खेती करते हैं। जंतू अमावस्या और पूर्णिमा को साधना के लिए श्मशान जाते हैं। वे बताते हैं, ‘मैं सिर्फ बीमार लोगों का इलाज करता हूं।’ क्या कोई गलत इरादे से पूजा कराने आता है? जंतू कहते हैं, ‘हां, लोग आते तो हैं, लेकिन मैं उनका काम नहीं करता। बोल देता हूं कि मुझे ये सब नहीं आता।’ नेता भी आते हैं? जंतू दावा करते हैं कि एक बार दिल्ली से एक नेता आया था। बोला कि उसे मंत्री बनना है। मैंने साफ कह दिया कि ऐसा उपाय हमारे पास नहीं है। असम के भी कुछ लोग आए हैं, लेकिन हम जीत-हार के लिए उपाय नहीं बताते। तंत्र सीखने वालों में काशी से कश्मीर तक के लाेग, 25 साल का फकन भीगांव के मंदिर में 25 साल के फकन बोरो मिले। मायोंग के रहने वाले हैं। स्कूल जाते थे, लेकिन पढ़ाई बीच में छोड़ दी। 3 महीने पहले साधना शुरू की है। वे कहते हैं कि नई पीढ़ी इस विद्या से दूर जा रही है। लोग नौकरी और दूसरे कामों में लग रहे हैं। मुझे ईश्वर की महिमा यहां खींच लाई। फकन आगे बताते हैं, ‘यहां कई तरह की तांत्रिक परंपराएं हैं। अमावस्या पर तांत्रिक शरीर में छेद करके या आग के साथ पूजा करते हैं। ये सब बिना मंत्र के नहीं होता, वरना जान जा सकती है।’ फकन दावा करते हैं कि गांव में काशी से कश्मीर तक के लोग आते हैं। कोई तंत्र विद्या सीखने, कोई वशीकरण, कोई मारण, यानी दूसरे को मारने की विद्या सीखने आता है। हालांकि, सरकार ने इस पर बैन लगा दिया है।’ मायोंग में कैसे शुरू हुआ जादू-टोना, महाभारत से कनेक्शनमायोंग पहले छोटा सा राज्य था। इसके आखिरी राजा बरूआ या देका परिवार से थे। फिलहाल कोई राजा नहीं है। सांस्कृतिक तौर पर एक व्यक्ति को राजा की उपाधि दी जाती है। अभी ये उपाधि मयूरभंज नारायण के पास है। वे म्यूजियम के बाहर बैठे मिले। साधारण वेशभूषा और रहन-सहन। हमने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन वे तैयार नहीं हुए और उठकर चले गए। मायोंग का म्यूजियम 2002 में बना था। इसमें तंत्र-मंत्र की किताबें, हथियार और पुरानी चीजें रखी हैं। गांव के डॉ. उप्पल नाथ म्यूजियम के फाउंडर हैं। वे बताते हैं, ‘लोककथाओं के मुताबिक, मायोंग का संबंध भीम और हिंडिंबा के बेटे घटोत्कच से है। घटोत्कच और उसके वंशज तंत्र शक्तियों में निपुण थे और यहीं रहते थे।’ ‘एक मान्यता यह भी है कि मायोंग शब्द माया से बना है, यानी यह भ्रम और जादू की भूमि है। मायोंग का संबंध कामाख्या मंदिर से भी है, जो तंत्र साधना का बड़ा केंद्र है। कामाख्या मुख्य केंद्र और मायोंग उसके सब-सेंटर की तरह था।’ मायोंग की महिलाएं बोलीं- वक्त बदल रहा, बच्चों के लिए काम चाहिए 56 साल की निरूपमा देवी कहती हैं कि मायोंग में चीजें बदल रही हैं। गांव के लड़के बाहर जाकर नौकरी कर रहे हैं। नई पीढ़ी पढ़ाई और तकनीक की तरफ जा रही है। यहां कंप्यूटर सिखाने के लिए स्कूल खुल गया है। बच्चे अब पुरानी चीजों से हटकर नए काम करना चाहते हैं। चुनाव के बारे में निरूपमा कहती हैं कि यहां नेता खुद नहीं आते, उनके कार्यकर्ता आते हैं। लोग भी मदद करने वाले को वोट देते हैं। 50 साल की नीलम मुनि देवी का बेटा ITI में पढ़ाई कर रहा है। वे चाहती हैं कि पढ़ाई के बाद बेटे की नौकरी लग जाए। चुनाव पर कहती हैं, ‘गांव में महिलाओं को कोई खास दिक्कत नहीं है। हम मर्जी से वोट डालते हैं। हम चाहते हैं कि बच्चे को यहीं नौकरी मिल जाए, ताकि बाहर जाने की जरूरत न पड़े।’ …………….ये खबर भी पढ़ें… CM हिमंता के बयान बदले, सियासत वही ‘हमारे मुख्यमंत्री हमें पहचानते तक नहीं, हमें गालियां देते हैं। बांग्लादेश जाने को कहते हैं। हम बांग्लादेश के नहीं, असम के हैं। हमारे पास सारे कागज हैं, लेकिन क्या कर सकते हैं। वे मुख्यमंत्री हैं, बड़े आदमी हैं। हम तो कुछ भी नहीं।’ ये बेबसी असम के कामरूप जिले के सोंताली गांव में रहने वाले मोफिज अली की है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 30 Mar 2026 5:04 am

अफगानिस्तान में भारी बारिश का कहर, बाढ़ और भूस्खलन से 17 की मौत, 26 घायल

अफगानिस्तान में पिछले 24 घंटों के दौरान बारिश से जुड़ी दुर्घटनाओं में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई

देशबन्धु 30 Mar 2026 3:55 am

होली सेपल्चर मामला: नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा 'प्रार्थना की अनुमति देने का बनाया जा रहा प्लान'

यरूशलम स्थित होली चर्च सेपल्चर में पैट्रिआर्क कार्डिनल और होली लैंड के कस्टोस फादर को पाम संडे मास की इजाजत न दिए जाने पर इजरायल को चौतरफा आलोचना झेलनी पड़ी

देशबन्धु 29 Mar 2026 11:43 pm

ईरान संघर्ष पर कूटनीतिक पहल: इस्लामाबाद में सऊदी, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक

इस बैठक की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है, जिसे क्षेत्रीय संतुलन और अपने तटस्थ रुख के चलते बातचीत के लिए उपयुक्त मंच माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक का उद्देश्य ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए साझा रणनीति तैयार करना है।

देशबन्धु 29 Mar 2026 4:26 pm

पश्चिम एशिया में जंग का दायरा बढ़ा: हूती विद्रोही भी कूदे मैदान में, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहराया संकट

हूती विद्रोही पहले भी गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों को बाधित कर चुके हैं। ऐसे में उनकी सक्रियता से वैश्विक शिपिंग रूट्स पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

देशबन्धु 29 Mar 2026 1:28 pm

No Kings Protests: ट्रंप के खिलाफ 50 राज्यों में रैलियों में लाखों लोग उतरे, वैश्विक स्तर पर भी समर्थन

देशभर में हुए इन प्रदर्शनों का केंद्र न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस, वॉशिंगटन डीसी और मिनेसोटा के ट्विन सिटीज रहे। हालांकि इस बार की खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में रैलियां छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी आयोजित की गईं।

देशबन्धु 29 Mar 2026 12:18 pm

चीन के शांक्सी में भीषण आग, तीन की मौत, 23 घायल

उत्तरी चीन के शांक्सी प्रांत में ताइयुआन में किनशियान नॉर्थ स्ट्रीट के पास एक इमारत में आग लगने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई

देशबन्धु 29 Mar 2026 10:40 am

इजरायली सेना का दावा: कुछ ही दिनों में पूरी तरह तबाह हो जाएंगे ईरान के सभी महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने

इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने एक लाइव प्रसारण में कहा कि आने वाले कुछ दिनों में इजरायली सेना ईरान की सैन्य इंडस्ट्री के सभी अहम ठिकानों पर हमले पूरे कर लेगी

देशबन्धु 29 Mar 2026 10:00 am

क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंध: विदेश मंत्री रोड्रिग्ज ने ईंधन नाकेबंदी और आर्थिक दबाव पर साधा निशाना

क्यूबा और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। क्यूबा ने अमेरिका पर ईंधन आपूर्ति को लेकर झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है

देशबन्धु 29 Mar 2026 9:54 am

मिस्र ने मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से बातचीत की

मिस्र के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलट्टी ने मध्य पूर्व में तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा करने के लिए सऊदी, जॉर्डन और जर्मन समकक्षों के साथ-साथ यूरोपीय आयोग के अधिकारियों के साथ अलग-अलग फोन पर बातचीत की

देशबन्धु 29 Mar 2026 9:49 am

ईरान का बड़ा दावा: अमेरिकी एफ-16 और ड्रोन मार गिराए

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के दक्षिणी हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी एफ-16 फाइटिंग फाल्कन और एक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को निशाना बनाया है

देशबन्धु 29 Mar 2026 8:25 am

ईरान संग तनाव चरम पर, अमेरिका ने भेजे 3,500 मरीन

ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है

देशबन्धु 29 Mar 2026 8:05 am

संडे जज्बात-उन्होंने हेलिकॉप्टर से लाश भेजी, हम ट्रेनें भर देंगे:दिल्ली वालों ने पीट-पीटकर मारा डाला मेरा बेटा, क्योंकि हमारी शक्ल अलग है

मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। वह चिल्ला रहा था- ‘मैं भारतीय हूं…’ लेकिन भीड़ ने उसकी एक भी नहीं सुनी। सोचा था- मेरा बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनेगा, लेकिन उसकी लाश हवाई जहाज से वापस आई। नीडो बाकी बच्चों जैसा नहीं था। अक्सर मुझसे 5-10 हजार मांगता। मैं पूछती- कहां जाते हैं इतने पैसे? वह हंसकर टाल देता। बाद में पता चला- वह जरूरतमंदों की मदद करता था। दोस्तों की फीस भरता था। मुझे बिना बताए घर के ड्राइवरों को पैसे दे देता था। उसके भीतर इंसानियत भरी थी। वह मेरे पास बैठकर कहता- मम्मी, बड़ा होकर एक ऐसी जगह बनाऊंगा, जहां मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च और मस्जिद- सभी होंगे… और हर कोई वहां आकर एक साथ प्रार्थना कर सकेगा। मैं उसे देखती रह जाती… और सोचती- यह बच्चा आखिर बड़ा होकर क्या बनेगा? नीडो पांच बच्चों में तीसरे नंबर पर था। ईटानगर के छोटे से स्कूल से पढ़कर जब उसे हरियाणा के डीपीएस पानीपत भेज रही थी, तो दिल में डर था… लेकिन एक भरोसा भी था कि- मेरा बेटा कुछ बड़ा करेगा। पानीपत में साइंस की पढ़ाई की। 12वीं के बाद बोला- मम्मी, मैं सोशोलॉजी पढ़ूंगा और विदेश जाऊंगा। मैंने पूछा- क्या बनना चाहते हो? वह बस मुस्कुरा देता। अब समझ आता है- वह कुछ बनना नहीं, कुछ बदलना चाहता था। 12वीं के बाद उसने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। फीस थी 68 हजार रुपए सालाना। लेकिन जब उसकी मार्कशीट देखी गई- तो यूनिवर्सिटी ने कहा- इतना इंटेलिजेंट बच्चा हमारे यहां पढ़ेगा, यही हमारे लिए काफी है। उसने फीस घटाकर 13 हजार कर दी। उस दिन मुझे लगा- मेरा बेटा सच में कुछ अलग है। लेकिन एक डर लगा रहता था। मैंने नस्लवाद झेला था, इसलिए उसे हमेशा समझाती- सावधान रहना, सब जगह लोग एक जैसे नहीं होते, लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की- न डीपीएस में, न यूनिवर्सिटी में। छुट्टियों में घर आता तो खाली हाथ नहीं आता। सबके लिए कुछ न कुछ लाता। हमारे घर के ड्राइवर मुस्लिम हैं- ईद पर उनके लिए टोपी लाता। उनके लिए क्रिसमस और न्यू ईयर पर पार्टी करता। वह सबको हंसाता था, घर का माहौल हल्का कर देता था। नीडो मुझे कभी उदास नहीं देख पाता था। जैसे ही चेहरे पर जरा-सी उदासी दिखती, वह तुरंत कोई न कोई मजाक कर देता। एक दिन हंसते-हंसते बोला- मम्मी, मैं दो शादियां करूंगा। मैं चौंकी- क्या? वह हंसकर बोला- ताकि आपको हमेशा खुश रख सकूं… फिर घर में किसी नौकर की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह उसकी बचकानी बातें थीं, लेकिन इरादा सच्चा था- मुझे खुश देखना। कभी-कभी वह किचन में चला जाता, कुछ बनाकर खुद ही चखता और कहता- मम्मी, एक दिन मैं सब संभाल लूंगा। सच कहूं, मुझे उस पर भरोसा था। फिर एक दिन आया, जब सब कुछ बदल गया। उस दिन वह दिल्ली में अपनी बहन के घर था। बैग पैक था, कार नीचे खड़ी थी। वह झुककर जूते के फीते बांध रहा था… तभी फोन बजा। दूसरी तरफ से एक लड़की की घबराई हुई आवाज थी- भैया, मेरे भाई की तबीयत बहुत खराब है। हम लाजपत नगर में, चौथी मंजिल पर हैं… प्लीज आ जाओ। मैं अकेली हूं। नीडो ने एक सेकंड भी नहीं सोचा। ड्राइवर से कहा- रुको, कॉलेज बाद में जाएंगे। उसने तुरंत एंबुलेंस बुलाई और लाजपत नगर के लिए निकल पड़ा। तंग गलियों में वह भटकता रहा- घर मिल नहीं रहा था। फोन कान से लगा था- उधर से जल्दबाजी भरी आवाज आती- जल्दी आओ, हालत और खराब हो रही है… पास में एक मिठाई की दुकान है, वहीं से पता पूछ लो। वह सीधे उसी दुकान पर पहुंचा- अंकल, एक पता पूछना है। दुकानदार ने बिना देखे ही कह दिया- नहीं पता। वह फिर गलियों में भटकने लगा। फोन दोबारा बजा- इस बार आवाज और घबराई हुई थी- भैया, जल्दी आ जाओ। थककर वह उसी मिठाई की दुकान पर वापस लौटकर गया। बोला- अंकल, प्लीज, मेरे दोस्त की जान जा सकती है। दुकानदार भड़क गया- क्या समझता है खुद को? सलमान खान, अक्षय कुमार? बार-बार क्यों आ रहा है? इतना कहकर उसने धक्का दे दिया। बस यहीं से सब बदल गया। नीडो ने पलटकर कुछ नहीं कहा, बस गुस्से में दुकान के काउंटर पर हाथ मार दिया- शीशे में हल्की दरार पड़ गई। अगले ही पल आसपास के दुकानदार जमा हो गए। किसी ने कॉलर पकड़ा, किसी ने मुक्का मारा। वह कुछ कह भी नहीं कह पाया। फिर पुलिस को बुला लिया गया। उधर, लाजपत नगर जाते वक्त उसने मुझे फोन पर बताया था और 10 हजार रुपए मांगे थे। मैंने पैसे भेज दिए थे। वही पैसे उसने पुलिस को दे दिए। पुलिस ने उसमें से 6 हजार दुकानदार को दिए और 4 हजार अपने पास रख लिए। पुलिस उसे अपने साथ ले गई। थाने में बिठाए रखा- चोट लगी थी, फिर भी अस्पताल नहीं ले गई। थोड़ी देर बाद पुलिस फिर उसी दुकान पर लेकर गई- कहा, समझौता करना है। लेकिन वहां फिर भीड़ जुट गई। किसी ने कहा- यही है, शीशा तोड़ने वाला लड़का! और भीड़ ने दोबारा हमला कर दिया। उसे फिर से बेरहमी से पीटा गया। मैं लगातार फोन कर रही थी, लेकिन वह उठा नहीं पा रहा था। जब भीड़ ने छोड़ा, तो उसने कॉल उठाया। आवाज बहुत धीमी थी- सब ठीक है मम्मी… बस हल्की चोट है… दवा ले ली… बाय बाय…, फोन कट गया। शायद उसे खुद भी नहीं पता था- यही उसकी जिंदगी की आखिरी बात होगी। अगले दिन फोन आया। स्क्रीन पर बड़ी बेटी का नाम था। आवाज टूटी हुई थी- मम्मी… नीडो एम्स में है… अब वो… नहीं रहा। बस इतना सुनते ही मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। बेहोश हो गई। होश आया, तो खुद को अस्पताल में पाया। उधर, बेटे का शव हेलिकॉप्टर से गुवाहाटी लाया गया। हम हेलीकॉप्टर से पहुंचे। ताबूत में उसे देखा, तो लगा- यह वही बच्चा नहीं है, जो हंसते हुए घर से गया था। मेरा शरीर कांप रहा था। हम किसी तरह उसे ईटानगर लेकर आए और अंतिम संस्कार किया। करीब 15 दिन बाद हम 300 लोग इकट्ठा होकर दिल्ली पहुंचे। सड़कें, दफ्तर, कोर्ट- हर जगह एक ही आवाज गूंज रही थी- नीडो के लिए न्याय चाहिए। मैंने जंतर-मंतर पर भाषण दिया। ‘मरीना नीडो स्पीच’ नाम से वह वीडियो यूट्यूब पर है। उस पर दुनिया भर के छात्रों का समर्थन मिला- जापान, अफ्रीका, कश्मीर… हर जगह से हमारे पक्ष में आवाज उठी। लोग लिख रहे थे- आंटी, हम भी यह झेल चुके हैं… पीछे मत हटना, हम आपके साथ हैं। ये पढ़कर मुझे नीडो की वह बात याद आई- मम्मी, मैं बड़ा होकर कुछ ऐसा करूंगा कि दुनिया याद रखेगी। उसने सच में कुछ बड़ा कर दिया था। पूरी दुनिया उसे जान गई थी। बस फर्क इतना था कि वह खुद इसे देखने के लिए जिंदा नहीं था। कुछ दिन बाद लंदन से बीबीसी की टीम आई। कैमरा मेरे सामने था, लेकिन मुझे सिर्फ अपने बेटे का चेहरा दिख रहा था। इस तरह नीडो के जाने के बाद मुझे रोने का वक्त नहीं मिला। मैं उसकी न्याय की लड़ाई में जुट गई। आंसू आते, पर हर बार उन्हें पोंछकर एक नई फाइल उठा लेती। दिल्ली की सड़कें, दफ्तरों के बाहर, कोर्ट के गलियारे- बस कागजों के साथ भटकती रही। सरकार ने वकील दिया, भरोसा भी दिलाया कि दोषियों को सजा मिलेगी। लेकिन हकीकत अलग थी- कार्यवाही धीमी, फाइलें खिसकती रहीं, तारीखें बढ़ती रहीं। हुआ कुछ नहीं। मैंने कई वकील बदले। इस तरह एक वकील जाता, दूसरा आता। करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। आखिरकार मैंने निजी वकील किया। तब केस कुछ आगे खिसका। इस दौरान मामला सीबीआई तक पहुंचा। उम्मीद जगी, लेकिन वहां भी सवाल मेरे बेटे पर ही उठे- कहा गया कि उसके कागज नहीं है, उसका एससी का सर्टिफिकेट नहीं है। तभी सोच लिया- अगर बेटे को इंसाफ नहीं मिल रहा, तो कम से कम उसकी कहानी देश तक पहुंचे। मैंने सरकार को एक मांगपत्र दिया। उसमें मांग थी- दिल्ली के किसी व्यस्त रोड के किनारे नीडो की ऊंची मूर्ति बनाई जाए, जिस पर लिखा हो- उसे सिर्फ अलग दिखने की वजह से मार दिया गया। सिनेमा हॉल में फिल्मों से पहले चेतावनी दिखाई जाए- नॉर्थ-ईस्ट के लोग भी इसी देश के हैं। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी यह संदेश लिखा हो। स्कूल और विश्वविद्यालयों में हमारे कल्चर के बारे में पढ़ाया जाए। कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम चलें। लेकिन आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। खैर उधर, कोर्ट में पहली सुनवाई का दिन आया। कोर्टरूम खचाखच भरा था। विरोधी वकील खड़ा हुआ और बोला कि नीडो ड्रग्स लेता था। बहुत गुस्सैल था। यह सुनते ही मेरा खून खौल गया। खुद को रोक नहीं पाई। कटघरे से निकलकर वकील के पास पहुंची और गिरेबान पकड़ लिया। बोली- मेरे बेटे के बारे में ऐसा मत कहो। कोर्ट में हड़कंप मच गया। वकील मुस्कुराया और बोला- देखिए इन्हें… ऐसा ही इनका बेटा भी गुस्सैल था। तभी जज ने वकील को रोका और कहा- वो मां हैं, उनका गुस्सा स्वाभाविक है। फिर मेरी तरफ देखकर अगली सुनवाई में आने से मुझे रोक दिया। इसके बाद मामला खिंचता रहा- लंबा, थकाने वाला रहा। फिर एक दिन फैसला आया। कोर्टरूम में सन्नाटा था। जज ने दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई। लोग कह रहे थे- न्याय मिला है। लेकिन मैं वहीं खड़ी सोच रही थी- क्या 10 साल एक जिंदगी के बराबर हो सकते हैं? 12 साल बाद मिला यह फैसला… मेरे लिए अब भी अधूरा है। मैं आज भी अपने बेटे के लिए लड़ रही हूं। मेरी मेज पर एक फाइल हमेशा रहती है- जिस पर लिखा है, बेजवाड़ा कमेटी। 2014 में सरकार ने इस मामले की जांच के लिए यह कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अपनी पड़ताल के बाद सिफारिश की थी- नस्लवाद के खिलाफ सख्त कानून बने। नॉर्थ-ईस्ट के लिए पुलिस में अलग सेल हो। नॉर्थ-ईस्ट वालों के लिए हेल्पलाइन शुरू की जाए और लोगों को बताया जाए कि नॉर्थ-ईस्ट भी भारत का हिस्सा है। लेकिन ये सिफारिशें कागजों तक रह गईं। आज 12 साल हो गए, लेकिन नीडो कहीं गया नहीं है। वह किसी न किसी रात, मेरे सपनों में लौट आता है। मैं देखती हूं- वह खड़ा है, बिल्कुल वैसे ही, मासूम सा। सपने में कहता है- मम्मी, टिकट दिलवा दो, मुझे जाना है। मैं नींद में ही उसे रोकना चाहती हूं, कुछ पूछना चाहती हूं, लेकिन वह चला जाता है। जैसे वह पूछ रहा हो- मम्मी आप मेरे लिए कुछ कर क्यों नहीं रही हैं? नींद टूटती है और रात फिर से लंबी हो जाती है। आज भी उसके सारे सर्टिफिकेट मेरे पास हैं- आईडी कार्ड, एटीएम कार्ड, मार्कशीट्स सभी। कभी-कभी मैं उन्हें निकालकर देखती हूं और लगता है, जैसे वह अभी दरवाजे से अंदर आ जाएगा। अभी देहरादून से खबर आई- त्रिपुरा के एंजेल चकमा की हत्या कर दी गई। खबर पढ़ते ही नीडो की याद ताजा हो गई। लगा, जैसे वही सीन फिर सामने है- नीडो भीड़ के बीच चिल्ला रहा है- 'मैं भारतीय हूं…’ और भीड़… बस उसकी शक्ल देख रही है, कुछ सुन नहीं रही। एंजेल की मां के बारे में सोचती हूं- वह भी शायद कहीं बैठी रो रही होगी, बिल्कुल मेरी तरह। कई बार मन हुआ कि त्रिपुरा जाकर उससे मिलूं, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाती। अब तो एंजेल भी सपनों में आने लगा है, जबकि मैंने उसे कभी देखा तक नहीं। नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से बस इतना कहूंगी- मैं यहां तक लड़कर आ गई हूं, अब कोई और आगे बढ़े… वर्ना हमारे साथ यह सब यूं ही होता रहेगा। एंजेल की खबर के बाद मैंने सोशल मीडिया देखना छोड़ दिया है। हर तस्वीर में मुझे अपना नीडो दिखने लगता है। आज नीडो होता, तो 31 साल का होता। शायद उसकी शादी हो चुकी होती, घर में बच्चे खेल रहे होते। वह मेरे पास बैठकर कहता- मम्मी, चिंता मत करो, मैं हूं। लेकिन आंखों के सामने आज भी वही तस्वीर घूमती है- एयरपोर्ट, एक सफेद ताबूत… और उसमें मेरा बेटा। मैंने उसे अपने हाथों से रिसीव किया था, फिर अग्नि दी थी। ईटानगर में हमारे घरों और दफ्तरों में उत्तर भारत के लोग काम करते हैं। हम उन्हें मेहमान मानते हैं, सम्मान देते हैं। लेकिन दिल में एक सवाल अटका जाता है- हमारे साथ ऐसा क्यों नहीं किया जाता? अगर हम भी आपके लोगों के साथ नीडो जैसा सलूक करें तो फिर क्या होगा? हम चाहें तो एक फोन कॉल पर नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं- नागालैंड, गुवाहाटी, सिक्कम… हर जगह से। फिर आपके साथ वही सुलूक होगा, जो हमारे साथ होता है। उन्होंने मेरे बेटे को मारकर हेलिकॉप्टर से भेजा, हम भी चाहें तो ट्रेनों की बोगियों को लाशों से भरकर भेज सकते हैं। तब मेनलैंड इंडिया वालों को समझ नहीं आएगा कि अचानक क्या हो गया। इसलिए नस्लवाद के खिलाफ सख्त कानून बने। इसे नहीं रोका गया, तो मेरी तरह जख्म खाया कोई और भी एक दिन खड़ा हो जाएगा। मैं ये बातें बोलना नहीं चाहती। लेकिन नीडो को याद में गुस्सा आ जाता है। हमारे बच्चे दिल्ली में फ्री में नहीं पढ़ने जाते। वे किराया देते हैं, फीस भरते हैं। हमारे यहां यूपीएससी की कोचिंग नहीं, इसलिए हम उन्हें बाहर भेजते हैं- पढ़ने के लिए, जीने के लिए… मरने के लिए नहीं। हमारी आंखें और चेहरा अलग हैं- इसे हमने नहीं, भगवान ने बनाया है। भगवान से पूछिए, उसने हमें अलग क्यों बनाया है। अगर आप चाहते हैं सब एक जैसे दिखें, तो सरकार से कहिए- सभी कपड़ा फैक्ट्रियां सिर्फ साड़ियां बनाएं, पूरे देश में सिर्फ गेहूं उगाया जाए। फिर सब एक जैसा पहनें, एक जैसा खाएं। तब शायद हम भी आपके जैसे दिखने लगें। लेकिन क्या सच में ऐसा संभव है, तब भी हमारा चेहरा नहीं बदलेगा? (मरीना नीडो ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) -------------------------------------------------- 1- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-तीरंदाज बेटी मरी तो MBBS बेटे को खिलाड़ी बनाया:जब डॉक्टर बेटा भी नहीं रहा तो 55 की उम्र में बेटी पैदाकर बनाया तीरंदाज मेरी कहानी एक साधारण स्पोर्ट्स कोच की नहीं, उस पिता की है, जिसने अपने दोनों अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बच्चों को खो दिया… लेकिन खेल और सपने को मरने नहीं दिया। 2004 में नेशनल चैंपियन तीरंदाज बेटी वोल्गा एक सड़क हादसे में चली गई। अकादमी बंद हो गई। परिवार बिखरने लगा। उसके बाद बेटे लेनिन ने MBBS छोड़ धनुष उठा लिया- अपने लिए नहीं, मेरे और अपनी बहन के अधूरे सपने के लिए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 29 Mar 2026 5:41 am

1 अप्रैल से रूस किसी भी देश को नहीं बेचेगा पेट्रोल, इस वजह से लिया ये बड़ा फैसला!

रूस सरकार ने 1 अप्रैल से पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह प्रतिबंध अस्थायी होगा, लेकिन शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह 31 जुलाई तक यानी करीब चार महीने तक लागू रह सकता है।

देशबन्धु 28 Mar 2026 1:08 pm

नेपाल में बड़ा राजनीतिक भूचाल: पीएम बनने के घंटे भर में ओली गिरफ्तार

बालेंद्र शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही बड़ी कार्रवाई की है

देशबन्धु 28 Mar 2026 9:30 am

व्हाइट हाउस ने ईरान संकट पर पीएम मोदी और ट्रंप की बातचीत की सराहना की

व्हाइट हाउस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ईरान संकट को लेकर हुई बातचीत की तारीफ की। हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की गई कि इस बातचीत में एलन मस्क भी शामिल थे या नहीं

देशबन्धु 28 Mar 2026 8:26 am

चीन को टक्कर देने के ल‍िए अमेरिका का दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका पर फोकस

चीन के बढ़ते आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव का सामना करते हुए, अमेरिकी अध‍िकार‍ियों ने सीनेटरों से कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले चरण को आकार देने में वॉशिंगटन की रणनीति के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका केंद्र बिंदु होंगे

देशबन्धु 28 Mar 2026 8:24 am

ट्रंप का दावा: ईरान पूरी तरह तबाह, अब बातचीत की बारी!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान बहुत कमजोर हो चुका है और अब बातचीत चल रही है

देशबन्धु 28 Mar 2026 8:21 am

क्या मुख्तार अंसारी की मौत के पीछे 5 करोड़:2 साल बाद भी बैरक नंबर-16 सील; वकील बोले- हमारे पास जहर देने के सबूत

'मुझे बांदा जेल में जान का खतरा है। नसों में दर्द है, हाथ-पैर ठंडे पड़ गए हैं। स्टाफ मुझे खाने में स्लो पॉइजन दे रहा है। लग रहा है कि किसी भी पल मौत आ जाएगी।' माफिया और विधायक रहे मुख्तार अंसारी की यूपी की बाराबंकी सिविल कोर्ट में दाखिल ये आखिरी अर्जी थी। 21 मार्च, 2024 को अर्जी अदालत पहुंची और 28 मार्च को मुख्तार की मौत हो गई। उस वक्त वे बांदा जेल में बंद थे। मुख्तार को गुजरे 2 साल हो गए। परिवार अब भी केस लड़ रहा है। उनके वकील रणधीर सिंह सुमन दावा करते हैं कि जेल स्टाफ ने साजिश करके मुख्तार की जान ली। वे मौत से पहले की फोटो, कोर्ट में दिए बयान और दस्तावेज का हवाला देते हैं। मजिस्ट्रियल जांच को फर्जी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। 172 दिन चली जांच में मुख्तार की मौत की वजह हार्ट अटैक को बताया गया। कानूनी प्रक्रिया की वजह से जेल में मुख्तार के कपड़ों से लेकर बैरक तक, सब सील है। उनके बड़े भाई और गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी भी मौत को सरकार और जेल प्रशासन की मिलीभगत मानते हैं। पॉइंट 1: मुख्तार की मौत नेचुरल डेथ या प्लांड मर्डरमुख्तार की मौत के अगले दिन 29 मार्च, 2024 को यूपी सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। जांच टीम में बांदा की DM दुर्गा शक्ति नागपाल और एसपी अंकुर अग्रवाल शामिल थे। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गरिमा सिंह इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बनाई गईं। टीम ने 5 महीने जांच की। 16 सितंबर, 2024 को आई रिपोर्ट में बताया गया कि मुख्तार की मौत हार्ट अटैक यानी Myocardial Infarction से हुई। जांच रिपोर्ट से 3 बातें साफ हुईं…1. जेल के खाने में जहर नहीं था। बैरक नंबर-16 में मिले गुड़, चने और नमक के सैंपल में जहर के सबूत नहीं मिले। 2. जेल मैनुअल के मुताबिक कैदियों को खाना देने से पहले स्टाफ और रसोइए उसे चखते हैं।3. मौत वाले दिन और उससे 2-3 दिन पहले तक जेल में जिन लोगों ने खाना खाया, उनमें से किसी की भी तबीयत खराब नहीं हुई थी। मुख्तार पक्ष का काउंटर: वकील रणधीर सुमन इन दावों को काउंटर करने के लिए 2 तर्क देते हैं। पहला: मौत के 2 हफ्ते पहले से मुख्तार की तबीयत खराब थी। 20 मार्च को पेशी थी। तब उसने पहली बार कहा कि 19 मार्च की रात उसे खाने में जहर दिया गया।दूसरा: मुख्तार ने मौत से 7 दिन पहले 21 मार्च को बाराबंकी सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसे 40 दिन पहले खाने में स्लो पॉइजन दिया गया। ये खाना बांदा जेल स्टाफ बनाता था। स्टाफ ने भी खाना खाया था, जिसके बाद कई कर्मचारियों और मुख्तार की तबीयत बिगड़ गई थी। पॉइंट 2: मौत से पहले जेल में मुख्तार की सुरक्षामजिस्ट्रियल जांच के मुताबिक, जेल का हर CCTV फुटेज खंगाला गया। रिपोर्ट में मिनट-दर-मिनट का ब्यौरा है कि 28 मार्च, 2024 की शाम मुख्तार बैरक में बेहोश हुआ। जेल प्रशासन ने गोल्डन आवर, यानी जेल से अस्पताल ले जाने तक के वक्त में कोई देरी नहीं की। मुख्तार पक्ष का काउंटर16 अगस्त, 2021 को मुख्तार ने बाराबंकी की MP/MLA कोर्ट में बताया था कि बांदा जेल में उसकी हत्या की साजिश रची जा रही है। अधिकारी और संदिग्ध लोग CCTV कैमरों का मुंह मोड़कर अंदर आते हैं। कुछ कैदियों को मेरी हत्या के बदले 5 करोड़ रुपए और सभी मुकदमों से रिहाई दिलाने की बात कही गई थी। पॉइंट 3: बैरक नंबर-16 में मुख्तार की मेडिकल कंडीशनजांच टीम के मुताबिक, मजिस्ट्रियल जांच सिर्फ डॉक्टरों के मेडिकल रिपोर्ट पर आधारित नहीं थी, बल्कि इसमें मुख्तार के साथ बंद कैदियों समेत 100 से ज्यादा लोगों के बयान और विसरा की लैब रिपोर्ट शामिल है। मुख्तार के हार्ट की मसल्स में येलो स्पॉट और ब्लॉकेज मिला। ये सबूत है कि मौत अचानक नहीं हुई, बल्कि पुरानी बीमारी बढ़ने से हुई। मुख्तार पक्ष का काउंटर मुख्तार के बेटे उमर अंसारी ने कोर्ट में कहा था कि पिता की डेडबॉडी पर चोट के निशान थे। नाक-कान से निकला खून साफ दिख रहा था। आंखें सूजी हुई और पेट गुब्बारे जैसा फूला था। इसलिए मौत हार्ट अटैक से हुई नहीं लगती। भाई अफजाल बोले- मौत का सच सामने लाएंगेगाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘मुख्तार की मौत से पहले उनसे फोन पर बात हुई थी। उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। वो सिर्फ इतना कह रहे थे कि जेल में जहर दिया गया है, जिससे शरीर टूटता जा रहा है।’ वकील बोले- मजिस्ट्रियल जांच खानापूर्ति, केस फिर खुलेगाएडवोकेट रणधीर कहते हैं, ‘मौत से करीब 10 दिन पहले मुख्तार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए थे। उसने जेल में स्लो पॉइजन देने का आरोप लगाया था। मैंने 19 मार्च को उनकी सुरक्षा के लिए कोर्ट में एप्लिकेशन दी, लेकिन आदेश के बावजूद जेल स्टाफ और प्रशासन की लापरवाही जारी रही।’ नेचुरल डेथ के दावे पर वे कहते हैं, 'उत्तर प्रदेश में कस्टोडियल डेथ पर जितनी भी मजिस्ट्रियल जांच होती हैं, वे खानापूर्ति हैं। मुख्तार जिंदा थे, तब उन्हें परेशान करने के लिए दिन में चार से पांच बार बैरक की चेकिंग होती थी। जांच के बहाने खाना और पर्सनल सामान बाहर फेंक दिया जाता था। रात में 1 बजे भी जांच होती थी। ये शारीरिक शोषण जैसा ही था।' एडवोकेट रणधीर मुख्तार की मौत का जिम्मेदार बांदा के तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट विरेश राज शर्मा और जेल स्टाफ को मानते हैं। वे कहते हैं कि विरेश राज ने कोर्ट में मौत को लेकर जिरह के वक्त हर सवाल का गोलमोल जवाब दिया। इससे साबित होता है कि वे सच छिपा रहे थे। हमने बांदा जेल सुपरिटेंडेंट रहे विरेश राज से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि केस अभी सुप्रीम कोर्ट की प्रोसेस में है, इसलिए कुछ बोलना सही नहीं। इसके बाद हमने मौजूदा सुपरिटेंडेंट आलोक कुमार से बात की। आलोक कहते हैं, ‘जांच के लिए बैरक नंबर-16, मुख्तार के कपड़े, किताबें और पर्सनल सामान सील रखा गया है। हमने उनका पर्सनल सामान परिवार को हैंडओवर करने के लिए कहा था, लेकिन कोई लेने नहीं आया है। दो साल बाद भी बैरक उसी कंडीशन में है। ये प्रोटोकल केस की इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा है।’ क्रिमिनल लॉयर बोले- जहर देने और सुपारी के दावे कमजोरमुख्तार के वकील रणधीर के दावों की पड़ताल के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के क्रिमिनल लॉयर शाश्वत आनंद से बात की। 1. क्या मुख्तार को खाने में जहर दिया गया होगा?जवाब: मुख्तार के वकील कोर्ट में उनकी एप्लिकेशन दिखा रहे हैं। ये देखना जरूरी है कि मुख्तार की अर्जी पर क्या एक्शन लिया गया। जहर देने की शिकायत से लेकर मौत के बीच 9 दिन का समय था। ये बड़ा अंतर है। इस दरमियान उनके वकील जेल प्रशासन से 'स्टमक फूड पंपिंग' की रिक्वेस्ट करते तो मुख्तार की बॉडी से खराब खाना निकालकर उसे चेक किया सकता था कि उन्होंने कौन सा जहर दिया गया है। मौत के बाद उनकी कोर्ट एप्लीकेशन दिखाने का कोई मतलब नहीं दिखता। 2. मुख्तार को मारने के लिए जेल में सुपारी दी गईजवाब: सिर्फ ये कह देना, बड़ा कमजोर पक्ष है कि जेल में हत्या की सुपारी दी जा रही या बैरक में कोई आ-जा रहा है। क्या उनके वकीलों के पास कोई सबूत हैं। मुख्तार हाई सिक्योरिटी बैरक में थे। इसकी निगरानी जेल के साथ-साथ पुलिस हेडक्वार्टर तक होती है। लिहाजा उन्हें सुपारी देकर जेल में मार देना कम मुमकिन लगता है। 3. मुख्तार के शरीर पर चोट के निशानजवाब: अगर डेडबॉडी पर चोट के निशान या कुछ दिख रहा था, तो हाईकोर्ट में दूसरे पोस्टमॉर्टम की अपील करनी चाहिए थी। हाईकोर्ट दूसरे राज्य के डॉक्टर और पुलिस से पोस्टमॉर्टम करवा सकता था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब भी अगर परिवार या वकील के पास डेडबॉडी पर चोट की फोटो है, तो इसे आधार बनाकर हाईकोर्ट में नई पिटीशन डाल सकते हैं। हालांकि सवाल अब भी उठेंगे कि अगर पहले से सबूत थे, तो अब तक कुछ क्यों नहीं किया। पूर्व IPS अधिकारी बोले- मुख्तार का चैप्टर खत्म, मौत बीमारी से हुईयूपी के पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार पांडे ने 2016 में मुख्तार पर पत्रकार को पीटने का केस दर्ज कराया था। वे मुख्तार गैंग के खिलाफ चले ऑपरेशन में शामिल रहे हैं। राजेश कहते हैं, ‘ये केस पूरी तरह खुल चुका है। जहर देने जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। मुख्तार के भाई अफजाल जहर देने की बात कई बार कह चुके हैं, लेकिन सच यही है कि मुख्तार की मौत बीमारी की वजह से हुई।’ हालांकि, 1972 बैच के रिटायर्ड IPS अधिकारी एसआर दारापुरी राजेश पांडे की बात पर सहमति नहीं जताते। वे कहते हैं, ‘अगर कोई कैदी मौत के कुछ दिन पहले हत्या होने की आशंका जताता है और हफ्ते भर बाद उसकी मौत हो जाती है, तो इससे साबित होता है कि कुछ गड़बड़ है। सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच करवाई, वो बेमतलब थी।‘ दारापुरी आगे कहते हैं कि अमूमन देखा गया है कि मजिस्ट्रेट राज्य सरकार के दबाव में काम करते हैं। सबको पता है कि योगी सरकार का रुख मुख्तार को लेकर कैसा था। जांच किसी इंडिपेंडेंट जांच एजेंसी को देनी चाहिए थी। ……………. ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर-2 में अतीक अहमद की कहानी सच या प्रोपेगैंडा इलाहाबाद का चकिया। सफेद कुर्ता, सिर पर साफा पहने, चेहरे पर मुस्कान लिए एक माफिया। फिल्म धुरंधर-2 शुरुआती सीन से ही आपको सीधे यूपी के माफिया और सांसद रहे अतीक अहमद के दौर में ले जाएगी। फिल्म में भले ही डिस्क्लेमर है, लेकिन आतिफ का किरदार हूबहू अतीक अहमद से मिल रहा है। ये कहानी सच है या प्रोपेगैंडा, पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 28 Mar 2026 5:05 am