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गाजा में अमेरिका की 15 सूत्रीय योजना: ट्रंप का दावा- हथियार डालेगा हमास, क्या इस्राइल अब छोड़ देगा गाजा पट्टी?

गाजा में अमेरिका की 15 सूत्रीय योजना: ट्रंप का दावा- हथियार डालेगा हमास, क्या इस्राइल अब छोड़ देगा गाजा पट्टी?---Trump 15-Point Gaza Peace Plan: Hamas Agrees to Disarm, Will Israel Withdraw from Gaza Strip?

अमर उजाला 1 Aug 2026 1:20 am

Neeraj Chopra CWG 2026: भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में नीरज चोपड़ा समेत तीन भारतीय, कितनी दूर फेंका जैवलिन?

Neeraj Chopra CWG 2026: भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में नीरज चोपड़ा समेत तीन भारतीय, कितनी दूर फेंका जैवलिन?

अमर उजाला 1 Aug 2026 1:11 am

नेपाल में हिंसा के बाद जबरदस्त तनाव, जानिए कैसे फैला पूरा विवाद

नेपाल के सुनसरी में भड़की सांप्रदायिक हिंसा अबकई शहरों तक फैल चुकी है. कई इलाकों में तोड़फोड़, पथराव और पुलिस से झड़प की घटनाएं देखने को मिली हैं.आधे दर्जन शहरों में कर्फ्यू का आदेश जारी किया गया. वहीं, अब तक तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है.

आज तक 31 Jul 2026 11:48 pm

'ईरान की मिसाइल-ड्रोन ताकत अब खत्म', ट्रंप बोले- तेज करेंगे हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है और जरूरत पड़ने पर अमेरिका और कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा.

आज तक 31 Jul 2026 11:34 pm

PoJK में पाकिस्तान के अत्याचारों की जांच कराए विश्व समुदाय, भारत ने की अपील

नई दिल्ली। भारत ने विश्व समुदाय से पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तान की गतिविधियों की जांच करने और वहां किए जा रहे अत्याचारों के लिए उसे जवाबदेह ठहराए जाने की अपील की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकार वार्ता में कहा कि मीडिया जगत को भी पता है कि कैसे पाकिस्तानी […]

पांचजन्य 31 Jul 2026 11:23 pm

2026 में अमेरिका से अब तक 2,273 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया: विदेश मंत्रालय

भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग स्‍पष्‍ट करते हुए कहा क‍ि साल 2026 में अब तक अमेरिका से 2,273 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा गया है।

देशबन्धु 31 Jul 2026 11:16 pm

US Immigration Fraud: भारतीय वकील Suraj Raj Singh पर 4 करोड़ का जुर्माना, फर्जी Asylum आवेदन का आरोप

अमेरिका में इमिग्रेसन मामलों से जुड़े एक भारतीय मूल के वकील पर गंभीर आरोप लगने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने अपने कई मुवक्किलों की ओर से कथित रूप से गलत और भ्रामक शरण आवेदन दाखिल किए। इस मामले में अब उनके खिलाफ करोड़ों रुपये के बराबर का नागरिक जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि मामले की कानूनी सुनवाई अभी जारी है और अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों द्वारा लिया जाना बाकी है। मौजूद जानकारी के अनुसार, भारतीय मूल के आव्रजन वकील सूरज राज सिंह अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में इमिग्रेसन से जुड़े मामलों की पैरवी करते हैं। बताया गया है कि उन्होंने मुख्य रूप से भारतीय मूल के लोगों के लिए शरण से संबंधित आवेदन तैयार किए और उन्हें अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया। अब अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग और आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी ने उनके खिलाफ नागरिक दंड की कार्रवाई शुरू की है। अधिकारियों का आरोप है कि सूरज राज सिंह ने 54 अलग-अलग इमिग्रेसन मामलों में कुल 118 कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर दाखिल किए। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कई आवेदनों में इस्तेमाल की गई भाषा, घटनाओं का विवरण और तथ्यों का उल्लेख लगभग एक जैसा था। यहां तक कि अलग-अलग आवेदकों द्वारा कथित उत्पीड़न की कहानी भी काफी हद तक समान पाई गई, जिससे अधिकारियों को दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह हुआ है। बता दें कि इन्हीं आरोपों के आधार पर इमिग्रेसन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी ने सूरज राज सिंह पर अधिकतम 4 लाख 70 हजार 584 अमेरिकी डॉलर का नागरिक जुर्माना लगाने की मांग की है। भारतीय मुद्रा में इसकी अनुमानित राशि लगभग 4 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। हालांकि यह प्रस्तावित दंड है और अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। गृह सुरक्षा विभाग के महाधिवक्ता जेम्स पर्सिवल ने कहा कि कथित रूप से फर्जी शरण आवेदन केवल आव्रजन व्यवस्था को कमजोर नहीं करते, बल्कि इससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों के मामलों में भी देरी होती है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों के कारण गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान आव्रजन नियमों के दुरुपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है और इस तरह के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि गृह सुरक्षा विभाग ने बताया है कि यह कार्रवाई मई 2026 में जारी उस निर्देश के तहत की जा रही है, जिसमें कथित फर्जी शरण दावों पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। विभाग का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य आव्रजन प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और नियमों के दुरुपयोग को रोकना है। यह भी उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में यह दूसरा बड़ा मामला है, जिसमें किसी आव्रजन वकील के खिलाफ दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी को लेकर नागरिक दंड की कार्रवाई की गई है। इससे पहले जून 2026 में भारतीय मूल के एक अन्य आव्रजन वकील विनोद दोड्डमणि को भी कथित रूप से फर्जी शरण आवेदन दाखिल करने के आरोप में 2 लाख 55 हजार अमेरिकी डॉलर से अधिक के प्रस्तावित जुर्माने का नोटिस जारी किया गया था। मौजूद जानकारी के अनुसार, सूरज राज सिंह के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। फिलहाल संबंधित एजेंसियां मामले की जांच और सुनवाई कर रही है।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 11:09 pm

अगस्त से और मजबूत होगा अल नीनो, बढ़ेगी गर्मी और बदलेगा बारिश का पैटर्न

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने 2026 के अगस्त से अक्टूबर के बीच प्रबल अल नीनो की संभावना जताई है, जिससे वैश्विक तापमान में वृद्धि और वर्षा के असामान्य पैटर्न देखने को मिल सकते हैं.

आज तक 31 Jul 2026 11:03 pm

'भारतीय नाविकों पर न हो हमला', जयशंकर की ईरान को दो टूक

इरानी विदेश मंत्री अराघची के साथ बातचीत से पहले एस. जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के सामने ब्लैक सी में कमर्शियल शिपिंग और भारतीय नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई थी.

आज तक 31 Jul 2026 10:54 pm

बीते समय की जलवायु के हिसाब से सड़कें क्यों बना रहा है जर्मनी?

गर्मी से जर्मनी के ऑटोबान हाईवे भले ही टूटने लगे हों, लेकिन वहां की सरकार अब भी पुराने मौसम के हिसाब से ही सड़कें बना रही है. इंजीनियरों को अच्छी तरह पता है कि इस समस्या को हल कैसे किया जा सकता है, तो फिर देरी क्यों

देशबन्धु 31 Jul 2026 10:36 pm

London में चीन के विवादित Super Embassy निर्माण को मिली अदालत से मंजूरी

(अदिति खन्ना)लंदन, 31 जुलाई ब्रिटेन के ‘टावर ऑफ लंदन’ के पास चीन के विवादित नये ‘सुपर दूतावास’ के निर्माण का रास्ता शुक्रवार को इंग्लैंड उच्च न्यायालय में कानूनी बाधा दूर होने के बाद साफ हो गया। ब्रिटेन की राजधानी में चीन के स्वामित्व वाली रॉयल मिंट कोर्ट साइट पर रहने वाले लोगों के एक संगठन ने इस विवादित परियोजना के लिए ब्रिटेन सरकार द्वारा दी गई निर्माण अनुमति को कानूनी चुनौती देने के लिए हजारों पौंड की राशि जुटाई थी। रॉयल मिंट कोर्ट रेजिडेंट्स एसोसिएशन (आरएमसीआरए) ने इस साल की शुरुआत में आवास, समुदाय और स्थानीय सरकार मंत्रालय तथा ‘लंदन बरो ऑफ टावर हैमलेट्स’ द्वारा लिये गए फैसले की न्यायिक समीक्षा का अनुरोध किया था। रॉयल मिंट कोर्ट रेजिडेंट्स एसोसिएशन इस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों और व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करता है। अदालत की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस नथाली लीवेन और लॉर्ड जस्टिस जेम्स डिंगेमन्स ने कहा कि इसमें ‘कोई संदेह नहीं’ है कि सरकार ने इस बात को ध्यान में रखा था कि निर्माण अनुमति चीन सरकार द्वारा मांगी गई थी। उन्होंने फैसला दिया कि इस प्रक्रिया के दौरान निवासियों के संगठन के साथ ‘कोई अन्याय नहीं’ हुआ। एसोसिएशन ने कहा कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेगा और इस सप्ताह उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए जुटाए गए 2,20,000 पौंड से अधिक की राशि में और बढ़ोतरी के लिए लोगों से समर्थन मांगना जारी रखेगा। एक प्रवक्ता ने कहा, “एसोसिएशन हमेशा से इस मामले को उच्चतम न्यायालय तक ले जाने के लिए तैयार रहा है।”उन्होंने कहा, “मकसद अब भी वही है। हम इस विशाल दूतावास से हमारे निवासियों के सामने उत्पन्न होने वाले गंभीर और अनसुलझे सुरक्षा जोखिमों को स्वीकार नहीं कर सकते। साथ ही, हम अपने ऐतिहासिक इलाके को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के यूरोपीय शक्ति केंद्र में बदलने की अनुमति नहीं देंगे।’’प्रवक्ता ने कहा, “हमने साबित कर दिया है कि जब हम एकजुट होकर खड़े होते हैं, तो हम दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों को भी चुनौती दे सकते हैं। अब हमें इस लड़ाई के अगले चरण में ले जाने की जरूरत है।”चीन ने 2018 में इस ऐतिहासिक स्थल को 22.5 करोड़ पौंड में खरीदा था और इसके बाद स्थानीय ‘टावर हैमलेट्स काउंसिल’ के पास इस जगह को लंदन में अपने मौजूदा दूतावास से कहीं बड़ा दूतावास बनाने की योजना पेश की थी। वर्तमान दूतावास बेकर स्ट्रीट के पास पोर्टलैंड प्लेस में है।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 10:13 pm

Pakistan में इस साल 3,000 से अधिक आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं: सेना

पाकिस्तान में इस साल आतंकवाद से जुड़ी 3,000 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें सुरक्षा बलों सहित 800 लोगों की मौत हो गई। सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ‘इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया कि पाकिस्तान में इस साल विभिन्न अभियानों के दौरान कुल 2,084 आतंकवादी मारे गए। इस्लामाबाद में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चौधरी ने कहा, “साल 2026 में पाकिस्तान में 3,145 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 1,971 घटनाएं खैबर पख्तूनख्वा, 1,148 बलूचिस्तान और 26 देश के अन्य हिस्सों घटीं।”उन्होंने कहा कि उक्त अवधि में रोजाना औसतन 10 आतंकवादी मारे गए, जो अब तक का सर्वाधिक औसत है। चौधरी के मुताबिक, पाकिस्तान में 2026 में हुए आतंकवादी हमलों में 819 लोग मारे गए, जिनमें सेना के 303 जवान और पुलिस तथा नागरिक सशस्त्र बल के 194 कर्मी भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि देश में इस साल खुफिया जानकारी पर आधारित कुल 40,348 अभियान चलाए गए, जिनमें से 31,000 बलूचिस्तान में संचालित हुए। चौधरी के अनुसार, पाकिस्तान में इस साल आत्मघाती हमले की 28 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकतर में अफगान नागरिक और उनके सुरक्षा बलों से जुड़े लोग शामिल थे।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 10:01 pm

Sri Lanka 2019 ईस्टर संडे हमले में पूर्व पुलिस प्रमुख और नौकरशाह को मौत की सजा

श्रीलंका पुलिस के पूर्व प्रमुख पुजित जयसुंदरा और रक्षा मंत्रालय के तत्कालीन शीर्ष नौकरशाह हेमासिरी फर्नांडो को 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमले के मामले में शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई गई। इस हमले में 270 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उच्च न्यायालय ने दोनों पूर्व अधिकारियों को पहले से मिली खुफिया चेतावनियों पर कार्रवाई नहीं करने का दोषी माना। अदालत ने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई की जाती, तो इन हमलों को रोका जा सकता था। पुलिस के मुताबिक, 21 अप्रैल 2019 को गिरजाघरों और महंगे होटलों पर हुए सिलसिलेवार आत्मघाती बम धमाकों में 279 लोगों की मौत हुई थी तथा मरने वालों में 45 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। जयसुंदरा और फर्नांडो को 2019 में गिरफ्तार किया गया था। चार महीने तक हिरासत में रहने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। नवंबर 2021 में दोनों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे और उन पर स्थानीय जिहादी हमले की साजिश रचने की भारतीय एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी की अनदेखी करने का आरोप था। उच्च न्यायालय ने फरवरी 2022 में दोनों को बरी कर दिया था और उनके खिलाफ लगाए गए सभी 855 आरोप खारिज कर दिए थे। नवंबर 2024 में अटॉर्नी जनरल द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले की फिर से सुनवाई शुरू हुई। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि पिछली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया था। न्यायमूर्ति प्रियंथा लियानागे और न्यायमूर्ति तिलकरत्ने बंडारा ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए कहा कि खुफिया जानकारी की अनदेखी के कारण 268 लोगों की मौत हुई और 586 लोग घायल हुए। पीठ ने कहा कि जयसुंदरा नागरिकों की जान की रक्षा करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे। तीन सदस्यीय पीठ के न्यायमूर्ति विराज वीरसूरिया ने इससे अलग फैसला दिया और दोनों को बरी कर दिया था। जयसुंदरा 150 से अधिक वर्षों के इतिहास में श्रीलंका पुलिस के सबसे वरिष्ठ अधिकारी बन गए, जिन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ा और दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई गई।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 9:52 pm

ट्रंप ने बताया हमास डालेगा हथियार, लेकिन इसराइल ने रखी ये शर्त - BBC

ट्रंप ने बताया हमास डालेगा हथियार, लेकिन इसराइल ने रखी ये शर्त BBC 'अगर गाजा से इजरायली सेना वापस नहीं बुलाई तो ट्रंप...', US की नेतन्याहू को सीधी वॉर्निंग AajTak ट्रम्प का दावा- हमास-इजराइल में शांति समझौता: हमास हथियार छोड़ेगा, इजराइली सेना पीछे हटेगी; नई फिलिस्तीनी स... Dainik Bhaskar हमास ने हथियार छोड़ने के समझौते पर जताई सहमति DW.com गाजा में लौटेगी शांति? डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, हथियार छोड़ने को तैयार हमास, International Hindi News Hindustan

गूगल न्यूज़ 31 Jul 2026 9:38 pm

Nepal के Saptari में सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन ने लगाया अनिश्चितकालीन Curfew

(शिरिष बी प्रधान)काठमांडू, 31 जुलाई नेपाल के अधिकारियों ने सुनसरी जिले में हाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में प्रदर्शन शुरू होने के बाद शुक्रवार को भारत की सीमा से लगे सप्तरी जिले के कुछ हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तनावपूर्ण स्थिति पर गहरी चिंता जताई तथा लोगों से शांति, एकता एवं संयम बनाए रखने की अपील की। नेपाल पुलिस ने एक बयान में बताया कि मधेश प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने में कथित रूप से शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, इन आठ लोगों में से पांच को सिरहा और तीन को धनुषा से गिरफ्तार किया गया। सप्ताहांत में कोशी प्रांत के सुनसरी में सांप्रदायिक झड़पें शुरू होने के बाद से नेपाल के कई जिलों में तनाव बना हुआ है। तनाव के कारण अधिकारियों ने कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू की है तथा सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री शाह ने मधेश प्रांत का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं के साथ शुक्रवार को बैठक की। बैठक में महंत ठाकुर, राजेंद्र महतो, सीके राउत, प्रभु शाह और समीम अंसारी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शाह ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से जुड़े मधेश क्षेत्र के सांसदों से भी मुलाकात की। बैठक में मधेशी लोगों की आजीविका और वहां जारी विकास एवं निर्माण कार्यों पर चर्चा की गई। सप्तरी जिला प्रशासन कार्यालय ने एहतियाती कदम के तौर पर राजबिराज नगरपालिका के कुछ हिस्सों में सुबह आठ बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया। यह फैसला सांप्रदायिक झड़पों के विरोध में कुछ समूहों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के बाद लिया गया। इस नये आदेश के बाद अब चार जिलों में कर्फ्यू लागू हो गया है। नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में भारत की सीमा से लगे सुनसरी, धनुषा और सिरहा जिलों के कुछ हिस्सों में पहले से ही कर्फ्यू लागू है। अधिकारियों को तनाव को नियंत्रित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। बीते रविवार को दो धार्मिक समुदायों के कार्यक्रमों के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षा कर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। हिंसा उस समय शुरू हुई, जब अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे दोनों समुदायों के लोगों के बीच लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे लगाने को लेकर विवाद हो गया। बातचीत के दौरान हुई बहस ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। बृहस्पतिवार को हिंसा मधेश प्रांत तक फैल गई, जहां सिरहा जिले में हुई झड़पों में एक नाबालिग की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सुनसरी में हुई हिंसा में घायल एक व्यक्ति की कोशी प्रांत में मौत हो गई। सहायक मुख्य जिला अधिकारी होम प्रसाद घिमिरे ने बताया कि इस बीच, सीमा से लगे सरलाही जिले की जिला सुरक्षा समिति ने फैसला लिया कि सीमा पार से नेपाल में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 9:21 pm

Algeria में भीषण Bus Accident: गहरी खाई में बस गिरने से 25 की मौत, 44 घायल

अल्जीरिया में शुक्रवार को एक बस दुर्घटना में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि 44 घायल हो गए। अल्जीरिया के नागरिक सुरक्षा विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। बस यात्रियों को सेतीफ से अल्जीरिया की राजधानी अल्जीयर्स ले जा रही थी। बस अल्जीयर्स से लगभग 50 किलोमीटर दूर एल कर्मा क्षेत्र में सड़क से फिसलकर एक गहरी खाई में जा गिरी। इस घटना में 25 लोगों की मौत हो गई और 44 घायल हो गए। घटनास्थल पर बचाव दल मौजूद थे और एंबुलेंस के माध्यम से लगातार घायलों को नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा था। सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अल्जीरिया के राष्ट्रपति अब्देलमजीद तेब्बौने ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। पंद्रह अगस्त 2025 को अल्जीयर्स में एक सार्वजनिक परिवहन बस पुल के सुरक्षा अवरोधक को तोड़ते हुए नीचे नदी में जा गिरी थी। इस नदी में शहर का सीवेज (मलजल) प्रवाहित होता है। उस दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हुई थी और 21 लोग घायल हुए थे।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 9:19 pm

कुलगाम में आतंकी हमला, गैर-कश्मीरियों को मारी गोली, 1 की मौत - ABP News

कुलगाम में आतंकी हमला, गैर-कश्मीरियों को मारी गोली, 1 की मौत ABP News J-K: कुलगाम में आतंकियों ने दो गैर-कश्मीरी मजदूरों को मारी गोली, एक की मौत AajTak कश्मीर में टारगेट किलिंग में एक की हत्या: आतंकवादियों ने कुलगाम में मजदूरों पर फायरिंग की, एक घायल, सर्च ऑप... bhaskar.com जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने बरसाईं गोलियां, एक की मौत, National Hindi News Hindustan जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में 'टारगेट किलिंग': आतंकियों की फायरिंग में एक गैर-स्थानीय मजदूर की मौत, दूसरा गंभीर Amar Ujala

गूगल न्यूज़ 31 Jul 2026 9:15 pm

भारत बॉर्डर केस: बम भोले बोलते ही नेपाल में हो गया बवाल

Nepal Violence: नेपाल के सुनसरी जिले से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा अब कई शहरों तक फैल चुकी है. कई इलाकों में कर्फ्यू लागू है, नेपाली सेना तैनात है और हेलिकॉप्टर से निगरानी की जा रही है. हिंसा में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है.इस बीच भारत-नेपाल सीमा से लगे बिहार के सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आने-जाने वाले लोगों की सघन जांच की जा रही है.

आज तक 31 Jul 2026 9:06 pm

PoJK में चुनाव पर भारत सख्त! पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, बर्बरता और अधिकारों के मुद्दे पर उठाए सवाल

PoJK में चुनाव पर भारत सख्त! पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, बर्बरता और अधिकारों के मुद्दे पर उठाए सवाल

समाचार नामा 31 Jul 2026 8:35 pm

पप्पू यादव ने पुजारी बनकर किया चंदा चोरी का ‘नाटक’:राहुल ने दानपेटी में डाला चंदा, बिड़ला ने चेताया- यह सदन की मर्यादा के खिलाफ

आज लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण हंगामे की भेंट चढ़ गई। लोकसभा में राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाने के लिए विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पुजारी वेश में पहुंचे और कथित चंदा चोरी को लेकर प्रतीकात्मक नाटकीय विरोध जताया। इस दौरान राहुल गांधी भी प्रदर्शन में शामिल हुए और दान पेटी में पैसे डालने की कोशिश की। विपक्ष के इस प्रदर्शन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदन में अलग-अलग वेश-भूषा में आने वाले सांसदों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। राम मंदिर चंदे पर संसद परिसर में ‘नाटक’ शुक्रवार को संसद परिसर में विपक्ष ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और कथित चंदा चोरी को लेकर प्रदर्शन किया। पप्पू यादव ने भगवा कपड़े पहनकर मंदिर के पुजारी का रूप धारण किया और एक प्रतीकात्मक ‘चंदा चोरी’ का प्रदर्शन किया। राहुल गांधी इस प्रदर्शन में पहुंचे और दान पेटी में पैसे डालने की कोशिश करते नजर आए। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मुद्दा उठाने की कोशिश की। बिड़ला ने सांसदों को चेताया लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। विपक्षी सांसद प्रश्नकाल के दौरान भी विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करने को कहा। बिड़ला ने कहा कि प्रश्नकाल में नियोजित तरीके से व्यवधान पैदा करना उचित नहीं है। सदन में तख्तियां और बैनर लेकर आने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई और इसे संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं बताया। पप्पू यादव के भगवा वेश में संसद पहुंचने और प्रदर्शन के संदर्भ में भी अध्यक्ष ने अलग-अलग वेशभूषा में आने वाले सदस्यों को चेतावनी दी। चंदा चोरी की तख्तियों के बीच बिल पास हंगामे और लगातार समझाइश के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। विपक्ष का विरोध हालांकि जारी रहा। इसी दौरान दोपहर करीब 12 बजकर 6 मिनट पर पंजीकरण जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर बिल पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कांग्रेस और विपक्षी सांसदों से विधेयक पर चर्चा में शामिल होने की बार-बार अपील की गई, क्योंकि यह महत्वपूर्ण विधेयक है। रिजिजू के बोलने के दौरान विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चंदे से जुड़ी तख्तियां लहराईं और नारेबाजी की। लगातार हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही 3 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी नारेबाजी राज्यसभा की कार्यवाही भी शुक्रवार सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने शून्यकाल की घोषणा की, लेकिन विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी करने लगे। विपक्ष की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई समेत कई मुद्दे उठाए गए। हंगामे के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जाहिर की और सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी जारी रहने के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी ज्यादा देर नहीं चल सकी और करीब 11 बजकर 21 मिनट पर सदन को 3 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 31 Jul 2026 8:35 pm

सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहा नेपाल, देखें अब कैसे हैं हालात

नेपाल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में अब कई जिले आ गए हैं. हिंसा की शुरुआत हुई सुनसरी जिले से, जिसने अब कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है और इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. नेपाल में भड़की हिंसा में अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है. स्थिति को काबू में करने के लिए सेना की भी तैनाती की गई है. लेकिन हालात काबू में नहीं आ रहे हैं.

आज तक 31 Jul 2026 8:33 pm

भारत के 'कॉकरोचों' से क्यों डरी पाकिस्तान सरकार? मंत्री बोले-ये एकजुट हुए तो सब उलट पुलट कर देंगे

भारत में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए अब पाकिस्तान में भी सरकार युवाओं से डरी हुई है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा, अगर ये जेन-जी एकजुट हो जाएंगे तो सब उलट पुलट कर देंगे।

खबर इंडिया टीवी 31 Jul 2026 8:13 pm

Russia-India Oil Deal: भारत-रूस की यारी के सामने अमेरिकी बैन फेल! 3 मिलियन बैरल का नया रिकॉर्ड

जब दुनिया में संकट गहराया, तब एक पुरानी दोस्ती भारत की सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरी। पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बीच कयास लगाए जा रहे थे कि भारत का एनर्जी सेक्टर संकट में आ जाएगा। लेकिन आज जो खबर वाशिंगटन से लेकर यूरोप तक हलचल मचा रही है, उसने सारे समीकरण बदल दिए हैं। भारत और रूस मिलकर तेल आयात का एक ऐसा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। आख़िर क्या है वो रिपोर्ट जिसने ग्लोबल ऑयल मार्केट में खलबली मचा दी है? ग्लोबल कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म केप्लर का कहना है कि भारत का रूस से कच्चे तेल यानी कि क्रूड ऑयल का आयात लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। लेकिन ये खबर सिर्फ तेल की नहीं है। यह खबर तब आ रही है जब अमेरिका में नए टेरिफ बिल को लेकर चर्चाएं तेज है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अमेरिका के संभावित दबाव के आगे झुकेगा? या फिर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए रूस के साथ इस रिकॉर्ड तेल आयात को अंजाम देगा। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदे दरअसल इस पूरी खबर के पीछे एक बड़ा कारण है लाल सागर यानी रेड सी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में बढ़ता हुआ तनाव। कैप्टनर की रिपोर्ट बताती है कि अगर रेड सी में सप्लाई बाधित होती है तो भारतीय रिफाइनरियों के पास रूस ही सबसे भरोसेमंद विकल्प बचेगा। भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी तेल खरीद को काफी ज्यादा डायवर्सिफाई कर लिया है। चाहे वो वेनेजुएला हो, अफ्रीका हो या अटलांटिक बेसिन। लेकिन जब बात बफर की आती है तो रूस का कोई भी मुकाबला नहीं है। सऊदी अरब का ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन भारत को कुछ राहत तो देता है लेकिन वो रूस की विशाल सप्लाई की बराबरी नहीं कर सकता। रूस भारत के लिए एक हैच की तरह काम करता है। यानी दुनिया में कहीं भी सप्लाई रुके। रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए खड़ा है। केप्लर की लीड एनालिस्ट सुमित रितोलिया का मानना है कि अनुकूल परिस्थितियों में रूस से शिपमेंट 30 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ऊपर जा सकता है। हालांकि इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं। रूस के ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष के कारण हमले हो रहे हैं। जुलाई में रूस का निर्यात पहले की तुलना में कम भी हुआ है। इसके बावजूद भारत की रिफाइनरियों ने अपनी रणनीति को इतना लचीला बनाया है कि वह रूस से अधिक तेल खरीद कर भी शॉर्ट टर्म गैप को भर सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध? वैसे यहां एक टेक्निकल बात समझना बेहद जरूरी हो जाता है। रूस के इन ओरस्कियस एक्सपोर्ट टर्मिनल की भी भूमिका बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ रूस का ओरसल तेल ही नहीं बल्कि कजाकिस्तान का तेल भी दुनिया तक पहुंचाता है। अगर ब्लैक सी में कोई बड़ी बाधा उत्पन्न होती है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत इसी रिस्क को मैनेज करने के लिए रूस के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है। तो क्या भारत अमेरिका के टेरिफ बिल से पहले यह बड़ा कदम उठाएगा? जानकारों का मानना है कि भारत ने हमेशा ही इंडिया फर्स्ट की नीति अपनाई है। रूस से सस्ता तेल ना केवल हमारी अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाता है बल्कि हमारी रिफाइनरी को भी दुनिया के कंपटीशन में बनाए रखता है। खैर 30 लाख बैरल ऑयल प्रतिदिन का यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है बल्कि यह भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमाण है। रूस के साथ यह दोस्ती भविष्य में भारत को एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 7:59 pm

'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?

स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.

आज तक 31 Jul 2026 7:58 pm

मर्जी से काम, घंटे के हिसाब से कमाई और बॉस की चिकचिक से दूर... युवा क्यों बन रहे गिग वर्कर्स? - Jagran

मर्जी से काम, घंटे के हिसाब से कमाई और बॉस की चिकचिक से दूर... युवा क्यों बन रहे गिग वर्कर्स? Jagran गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत मिली कानूनी मान्यता: श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया News On AIR Jobs For 10th-12th: कम पढ़े ल‍िखे लोगों के ल‍िए आ रहीं 1.6 करोड़ नौकर‍ियां, होगी बंपर कमाई News18 Hindi Gig Workers: देश में गिग जॉब्स का बड़ा उछाल? 2030 तक 2 करोड़ कामगार, महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी सिर्फ 1% Amar Ujala गिग वर्कर्स के हितों की रक्षा के लिए नयी श्रम संहिताओं में पर्याप्त प्रावधान: सरकार univarta.com

गूगल न्यूज़ 31 Jul 2026 7:55 pm

'गाजा से इजरायली सेना वापस नहीं बुलाई तो ट्रंप...', US की नेतन्याहू को सीधी वॉर्निंग

गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 20-सूत्रीय प्लान को अगर इजरायल आगे बढ़ने से रोकता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज हो सकते हैं. यह जानकारी एक अमेरिकी अधिकारी ने दी है.

आज तक 31 Jul 2026 7:54 pm

पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी? इस्लामाबाद से क्या बड़ा ऐलान होने वाला है!

क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी पाकिस्तान में ऐसा क्या हो रहा है कि जिसमें पीएम मोदी को बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है क्या पाकिस्तान अपने कुकर्मों की पीएम मोदी से मांगेगा माफ। पाकिस्तान ने ऐसा क्या ऐलान किया है जिसने भारत को भी चौंका दिया है। इआप चौंक रहे होंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि पीएम मोदी मोदी पाकिस्तान जाएं। वो भी तब जब लगातार पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव बढ़ाने वाली हरकतें कर रहा है। अपने पालतू आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने के लिए आए दिन बॉर्डर पर गोलीबारी करता रहता है। पहलगाम हमले के बाद से ही पाकिस्तान और भारत के बीच किस तरह से तनाव की स्थिति बनी हुई है। क्या ऐसे हालातों के बीच पीएम मोदी पाकिस्तान जा सकते हैं? इसे भी पढ़ें: Jammu के खौर सेक्टर में सेना की बड़ी कार्रवाई, Pakistan का Chinese Drone मार गिराया दरअसल कुछ ही महीने बाद पाकिस्तान में एसइओ समिट होने वाला है क्योंकि इस बार एसइओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी पाकिस्तान ही कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से यह संकेत दे दिए हैं कि वो इस्लामाबाद में होने वाले एसइओ शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा। दरअसल पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में भारत और एसइओ समिट को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। लेकिन जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्या अगले साल इस्लामाबाद में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा। तो इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्रावी ने कहा कि एससीओ के सभी मेंबर देशों को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्र अध्यक्ष और शासन अध्यक्ष भी शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: POJK में प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता की जांच के लिए India ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की मतलब साफ है कि भारत भी आमंत्रित देशों में शामिल है। पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि एससीओ की प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करना उनकी दायित्व है। हालांकि एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी शिरकत करेंगे या नहीं? इसको लेकर सस्पेंस है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या पाकिस्तान यह हिम्मत जुटा पाएगा कि वह पीएम मोदी को एसइओ समिट में आने का न्योता दे सके। क्योंकि भारत के खिलाफ वो जिस तरह की कायराना हरकतों को अंजाम देता रहता है उससे तो नहीं लगता कि वो न्योता भेजने लायक बचा हो। पाकिस्तान वो आतंकी मुल्क है जो किसी भी तरह से भारत के आगे मुंह दिखाने लायक नहीं है। उसके चेहरे पर ना जाने कितने बेगुनाहों के खून बहाने के दाग हैं जिससे भारत कभी भी माफ नहीं कर सकता। दरअसल एसइओ बहुपक्षीय बैठकों के तहत सदस्य देशों के बीच निमंत्रण भेजे जाते हैं। एसओ शिखर सम्मेलन एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसमें 10 सदस्य देश हैं।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 7:54 pm

IDF का बड़ा स्ट्राइक: Beaufort Ridge के नीचे Hezbollah का मुख्य Underground Network तबाह, ईरान की बड़ी साजिश नाकाम

इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने शुक्रवार को कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में ब्यूफोर्ट रिज के नीचे कई अहम अंडरग्राउंड सुरंगों को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई सुरक्षा क्षेत्र में एक सीमित गतिविधि के दौरान की गई, जबकि अगस्त में रोम में अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल-लेबनान बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। आईडीएफ ने कहा कि सुरंग नेटवर्क हिज़्बुल्लाह के लिए एक मुख्य कमांड सेंटर का काम करता था, जहाँ से उसके कमांडर लड़ाई की गतिविधियों को संभालते थे और इज़राइली सैनिकों और नागरिकों पर हमले का निर्देश देते थे। इसे भी पढ़ें: US के साथ समझौते से Iran का साफ इनकार, Strait of Hormuz को बताया अपनी ताकत का 'विराट शिखर' आईडीएफ के अनुसार, इस अंडरग्राउंड नेटवर्क में कई स्तर थे और इसे दो दशकों में बनाया गया था। IDF ने यह भी कहा कि यह दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह की 'बदर यूनिट' के लिए एक मुख्य कमांड सेंटर के तौर पर काम करता था और इसे ईरान के आतंकवादी शासन ने प्लान और फंड किया था। आईडीएफ ने कहा कि यह नेटवर्क उत्तरी इज़राइल के लिए खतरा था क्योंकि यह मेटुला और गैलिली पैनहैंडल से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित था। आईडीएफ ने कहा, युद्ध के दौरान, इस इंफ्रास्ट्रक्चर से इज़राइली नागरिकों और IDF सैनिकों पर दर्जनों UAV, विस्फोटक उपकरण और एंटी-टैंक मिसाइलें दागी गईं। आईडीएफ ने कहा, आज रात, IDF ने ज़मीन के नीचे बने सुरंगों के नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया। इसे भी पढ़ें: सलमान रुश्दी पर हमला करने वाले अमेरिकी नागरिक हादी मतर को आतंकवाद संबंधी आरोपों में दोषी ठहराया गया इज़राइली सेना ने बताया कि उसकी टुकड़ियों ने पिछले कुछ हफ़्तों में ब्यूफोर्ट रिज इलाके में अपनी तैनाती पूरी कर ली है। साथ ही, उन्होंने ज़मीन के नीचे बने सुरंगों के नेटवर्क पर अपना ऑपरेशनल कंट्रोल बनाए रखा और उन्हें नष्ट करने की तैयारी भी की। आईडीएफ ने कहा, IDF के सैनिक अली ताहिर रिज इलाके में ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं, वे पूरी तरह सतर्क हैं और बचाव व हमले, दोनों तरह की स्थितियों के लिए तैयार हैं। आईडीएफ सैनिकों पर होने वाले हमलों का उचित जवाब दिया जाएगा। सेना ने यह भी कहा कि वह लेबनान के साथ हुए सीज़फ़ायर समझौते का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही अपनी सेना के लिए खतरों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन भी जारी रखे हुए है।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 7:51 pm

Iran vs US: कुवैत में अमेरिकी Airbase पर बड़ा Drone Attack, ईरान ने लिया Qeshm Island का बदला

ईरानी सेना ने कहा है कि उसने 'ऑपरेशन लाइटनिंग' के 27वें चरण के दौरान कुवैत में अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर मौजूद अमेरिका के अहम ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने सेना के जनसंपर्क विभाग के बयान का हवाला देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया था; इसमें खास तौर पर केशम द्वीप पर एक रिहायशी घर पर हुए हमले का ज़िक्र किया गया। सरकारी ब्रॉडकास्टर ने बताया कि इन हमलों में कुवैती बेस पर मौजूद फाइटर जेट के ठिकानों, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और उपकरणों के गोदामों को निशाना बनाया गया। इस बेस को अमेरिकी एयर सपोर्ट, निगरानी और ऑपरेशन्स के लिए एक अहम केंद्र माना जाता है। इसे भी पढ़ें: Pakistan ने ट्रंप से कर दी गद्दारी, ईरान कैसे पहुंचा हथियारों का जखीरा? IRIB ने आगे बताया कि ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लगातार बड़े हमलों की वजह से दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के लिए ड्रोन और मिसाइलों को रोकना मुश्किल और महंगा हो गया है। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया है कि हताहतों और हुए नुकसान की खबरों को दबाने के लिए कड़ी सेंसरशिप लागू की जा रही है। इससे पहले, ईरान के सरकारी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत में अमेरिका द्वारा संचालित अली अल सलेम एयरबेस पर दो ड्रोन हैंगर और मिलिट्री एयरक्राफ्ट व हेलीकॉप्टर के लिए बनाए गए फ्यूल स्टोरेज सेंटर को नष्ट कर दिया है। इसे भी पढ़ें: Mahan Air की एजेंट भारत की Skies Travels समेत कई कंपनियों पर US Sanctions शुक्रवार को कुवैत के नागरिकों को संबोधित करते हुए, IRGC के बयान में कहा गया कि तेहरान की सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक कि इस इलाके से अमेरिका की कब्जा करने वाली और लूटने वाली सेनाओं को पूरी तरह से हटा नहीं दिया जाता। कुवैत में तनाव बढ़ने की यह घटना तेहरान द्वारा गुरुवार को जॉर्डन के अल-अज़राक एयरबेस पर एक अलग जवाबी मिसाइल हमले के दावों के बाद हुई है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने ईरान के इन दावों को खारिज कर दिया है कि हमले में अमेरिकी F-35 फाइटर जेट नष्ट हो गए थे। सेना का कहना है कि किसी भी अमेरिकी विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उसकी सेनाएं पूरे इलाके में ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के दावे का जवाब देते हुए, US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने X पर पोस्ट किया, ईरान के हालिया हमलों की कोशिशों में कोई भी अमेरिकी विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं हुआ।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 7:42 pm

Russian Army में फंसे 139 भारतीयों की घर वापसी, MEA ने Job Fraud को लेकर नागरिकों को किया सावधान

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को भारतीय नागरिकों को विदेशों में नौकरी दिलाने वाली धोखाधड़ी करने वाली एजेंसियों के बारे में कड़ी चेतावनी जारी की। मंत्रालय ने बताया कि राजनयिक कोशिशों से रूसी सेना में शामिल 139 भारतीयों को छुड़ा लिया गया है और लगभग दो दर्जन अन्य लोगों को भी छुड़ाने की कोशिशें जारी हैं। राष्ट्रीय राजधानी में हर दो हफ़्ते में होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नौकरी चाहने वालों से कहा कि वे विदेश में नौकरी के ऑफ़र पर विचार करते समय बहुत सावधानी बरतें। जायसवाल ने कहा हम रूसी सेना में बचे हुए भारतीय नागरिकों को छुड़ाने के लिए रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। अब तक हमारी कोशिशों से 139 भारतीय नागरिकों को छुड़ाया जा चुका है। हम बाकी बचे लगभग दो दर्जन भारतीय नागरिकों को भी छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके बारे में खबर है कि वे रूसी सेना में हैं। खतरनाक मानव तस्करों से जुड़े खतरों का ज़िक्र करते हुए जायसवाल ने कहा हम एक बार फिर अपने लोगों को उन नौकरी के ऑफ़र के बारे में सावधान करना चाहते हैं जिनमें जोखिम हो और जो बेईमान लोगों या एजेंसियों की तरफ़ से दिए गए हों। MEA का यह अपडेट उसी दिन आया जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित परिवारों को राहत पहुँचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई ज़रूरी निर्देश जारी किए। रूस-यूक्रेन संघर्ष में फँसाए गए भारतीय नागरिकों के रिश्तेदारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने MEA को एक खास नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया, जिसकी संपर्क जानकारी सीधे पीड़ित परिवारों के साथ साझा की जाएगी। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: 280 अटैक ड्रोन और मिसाइल बारिश से दहला यूक्रेन, Zelensky ने बताया 'रूसी आतंक' का खौफनाक मंजर कोर्ट ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि वह शवों की पहचान के लिए DNA जाँच की सुविधा दे, मुफ़्त कानूनी मदद मुहैया कराए और मुआवज़े के दावों व स्वदेश वापसी से जुड़े दस्तावेज़ों का अनुवाद करवाए। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को यह भी निर्देश दिया कि वह प्रभावित परिवारों के लिए एक कंबाइंड डॉकेट (जानकारी का सेट) तैयार करे। इसे स्थानीय भाषाओं में अनुवादित किया जाना चाहिए और इसमें रूसी अधिकारियों के सामने मुआवज़े का दावा करने की प्रक्रिया समझाई जानी चाहिए। कोर्ट ने साफ़ किया कि मुआवज़े के दावे विदेश मंत्रालय के ज़रिए भेजे जाएंगे, लेकिन इनके पेंडिंग रहने की वजह से शवों की वापसी या अंतिम संस्कार में देरी नहीं होनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: MEA Press Conference : Pakistan पर India का अब तक का सबसे बड़ा हमला, विदेश मंत्रालय ने दुनिया के सामने खोली आतंकिस्तान की पूरी पोल कोर्ट ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों के सदस्य सचिवों को यह भी निर्देश दिया कि वे प्रभावित परिवारों को मुआवज़े का दावा करने और DNA टेस्टिंग में मदद के लिए मुफ़्त कानूनी सहायता दें। विदेश मंत्रालय से यह भी कहा गया कि वह रूसी अधिकारियों से मिले उन दस्तावेज़ों का अनुवादित वर्शन उपलब्ध कराए जो शवों की वापसी और मुआवज़े के दावों से संबंधित हैं। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि 2024 और 2025 में, कई भारतीय युवा अलग-अलग वीज़ा पर रूस गए थे, क्योंकि उन्हें कंस्ट्रक्शन, हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर में नौकरी का वादा किया गया था। हालाँकि, वहाँ पहुँचने पर उनके पासपोर्ट और पहचान के दस्तावेज़ ज़ब्त कर लिए गए और उन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया, जिसके बाद उन्हें लड़ाई के मोर्चे पर भेज दिया गया।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 7:03 pm

Balochistan में Pakistani Army पर भीषण हमला, UBA और BRG के धमाकों में 8 जवानों की मौत

बलूचिस्तान के कच्छी ज़िले में हुए अलग-अलग हमलों की ज़िम्मेदारी दो बलूच हथियारबंद गुटों - यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) - ने ली है। इस दौरान इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और हथियारबंद लड़ाकों के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी होती रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, कच्छी के सन्नी इलाके में एक धमाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की एक गाड़ी को निशाना बनाया गया, जबकि आस-पास के इलाकों से भी गोलीबारी की खबरें मिलीं। UBA के प्रवक्ता मज़ार बलूच ने एक बयान में कहा कि उनके गुट ने धादर और सन्नी के बीच चिघार्डी इलाके में पाकिस्तानी बलों के सात गाड़ियों वाले काफिले में शामिल एक गाड़ी पर रिमोट-कंट्रोल विस्फोटक डिवाइस से हमला किया। प्रवक्ता ने बताया कि हमला तब हुआ जब काफिला एक मिलिट्री चेकपॉइंट की ओर जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में आठ जवान मौके पर ही मारे गए और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इसे भी पढ़ें: Pakistan के Balochistan में कोयला खदान विस्फोट, 34 खनिकों की मौत और बचाव अभियान जारी उन्होंने आगे आरोप लगाया कि UBA के लड़ाकों ने इलाके से पीछे हटने से पहले काफिले की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों के साथ थोड़ी देर गोलीबारी की। TBP की रिपोर्ट के अनुसार, मज़ार बलूच ने कहा हमारा संगठन, UBA, इस हमले की ज़िम्मेदारी लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज़ाद बलूचिस्तान बनने तक ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे। इस बीच, बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने बताया कि उसके लड़ाके बुधवार सुबह 7:00 बजे से पाकिस्तानी सेना के दो अलग-अलग काफिलों पर हमले कर रहे थे। संगठन ने दावा किया कि बयान जारी होने के समय भी झड़पें जारी थीं। इसे भी पढ़ें: Balochistan Civil War Like Situation: बलूचिस्तान में बेकाबू हुए हालात, Army और Rebels के बीच खूनी संघर्ष तेज़ समूह ने कहा कि वह बाद में इन झड़पों के बारे में विस्तार से बयान जारी करेगा। एक अलग बयान में, BRG के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच ने कहा कि समूह ने कच्छी के धादर इलाके में सरकारी सिंचाई विभाग के दफ़्तर को निशाना बनाया और वहां विस्फोटक उपकरण लगाए।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 6:58 pm

Saudi Arabia ने समुद्री सुरक्षा के लिए बनाया 14 देशों का गठबंधन, लेकिन ओमान और UAE क्यों रहे अलग? जानें वजह

Saudi Arabia ने समुद्री सुरक्षा के लिए बनाया 14 देशों का गठबंधन, लेकिन ओमान और UAE क्यों रहे अलग? जानें वजह

समाचार नामा 31 Jul 2026 6:55 pm

Russia-Ukraine War में China की 'चुपचाप' मदद, US Weapon Stock खत्म होने से बढ़ी Xi Jinping की ताकत

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐसी लड़ाई में अमेरिका को उलझा दिया है जिसे शायद जीता नहीं जा सकता, और इससे चीन की स्थिति मज़बूत हुई है। इसके अलावा, बीजिंग दुनिया भर में अपना असर बढ़ा रहा है और यूक्रेन और पश्चिमी देशों के साथ रूस की लड़ाई में चुपचाप उसका साथ भी दे रहा है। अमेरिका के मिसाइल और हथियारों का स्टॉक कम होने की बात लंबे समय से पता है - और ईरान युद्ध ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है - जिसका सीधा फ़ायदा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मिल रहा है। बहुत मुमकिन है कि चीन और रूस अपनी अगली चालों (क्रमशः ताइवान और यूक्रेन के ख़िलाफ़) की योजना बनाते समय इस बात को ध्यान में रख रहे हों। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदेश जैसा कि ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर एनालिस्ट डॉ. मैल्कम डेविस ने कहा यह बात उतनी ही पक्की है जितनी कि दिन के बाद रात का आना यह स्थिति अब अमेरिकी सैन्य क्षमता के लिए एक बहुत ही खतरनाक संकट पैदा कर रही है और यह संकट एक दशक या एक-दो साल बाद नहीं, बल्कि अभी आ रहा है। बेशक, रूस को समर्थन देने के मामले में चीन का रवैया उत्तर कोरिया जितना खुला नहीं रहा है। बीजिंग ने न तो तोप का चारा बनने वाले सैनिक भेजे हैं और न ही मिसाइलें बेची हैं, लेकिन फिर भी वह यूक्रेन में व्लादिमीर पुतिन की लंबी खिंचती लड़ाई का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने चीन को रूस की लड़ाई को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने वाला बताया है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बीजिंग की तथाकथित तटस्थता असल में वैसी नहीं है। यह शुरू से ही एक दिखावा रहा है; चीन ने तुरंत मॉस्को की बातों को दोहराया और यहाँ तक कि अनिवार्य कोर्स भी चलाए, जिनमें शिक्षकों और लेक्चररों को यह बताया गया कि पुतिन की लड़ाई के बारे में आधिकारिक नैरेटिव को कैसे पेश किया जाए। तब से चीन अपनी इस बात पर अडिग रहा है। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध? चीन अपनी आलोचना को लेकर बहुत सोच-समझकर कदम उठाता है। जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तुरंत कहा, चाहे कोई भी वजह हो, बिना सोचे-समझे ताकत का इस्तेमाल मंज़ूर नहीं है, और बेगुनाह नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले की निंदा की जानी चाहिए। फिर भी, यूक्रेन के खिलाफ पुतिन की चार साल से ज़्यादा चली लड़ाई में, चीन ने मॉस्को को सिर्फ़ एक ही चेतावनी दी है कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करे। यह बात ही चीन के दोहरे रवैये को दिखाती है। इसके बावजूद, रूस में जन्मे पूर्व शतरंज ग्रैंडमास्टर गैरी कास्पारोव ने कहा, चीन बिना किसी बुरे नतीजे के रूस की सीधे और परोक्ष रूप से मदद करता है। रूस की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने के बावजूद, उसे कोई खास सज़ा नहीं मिली है। हाँ, कुछ चीनी कंपनियों पर अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन उन्हें कोई खास राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा है। तो फिर, रूस के लिए चीन का समर्थन किस तरह का है? काम के बँटवारे के तहत, मॉस्को 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी' (PLA) को लड़ाई के गुर सिखाता है, जबकि बदले में चीन रूस को इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और मशीनरी भेजता है ताकि उसके सैन्य-औद्योगिक ढांचे को मदद मिल सके। चीन रूस से लड़ाई के सबक सीखने के लिए उत्सुक है, क्योंकि ये सीधे तौर पर ताइवान को लेकर उसकी सैन्य योजनाओं से जुड़े हैं।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 6:53 pm

Xinjiang Victims Database का बड़ा खुलासा, China के Detention Campaign से 1.4 लाख Uyghur Kids हुए अलग

'उइघुर टाइम्स' के हवाले से 'शिनजियांग विक्टिम्स डेटाबेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस डेटाबेस द्वारा प्रकाशित एक नए विश्लेषण में अनुमान लगाया गया है कि 2018 के अंत तक, चीन के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने के अभियान के कारण उइघुर मातृभूमि के दक्षिणी इलाकों के चार प्रान्तों में कम से कम 143,228 बच्चे (जिनमें ज़्यादातर उइघुर थे) अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों से अलग हो गए थे। 27 जुलाई को प्रकाशित यह विश्लेषण काशगर प्रान्त के कोनाशेहर (शुफू) काउंटी के विस्तृत दस्तावेज़ों पर आधारित है। यहाँ शोधकर्ताओं ने हिरासत से जुड़े डेटा के साथ-साथ चीन सरकार के लीक हुए रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके पारिवारिक रिश्तों की जानकारी जुटाई। रिपोर्ट के अनुसार, यह अध्ययन उइघुर परिवारों और बच्चों पर चीन के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने के अभियान के असर का अब तक का सबसे व्यापक अनुमान पेश करता है। इसे भी पढ़ें: China ने नई Sports Development Plan से 2030 तक विश्व-अग्रणी खेल शक्ति बनने का लक्ष्य रखा 'शिनजियांग विक्टिम्स डेटाबेस' के अनुसार, शोधकर्ताओं ने कोनाशेहर काउंटी में ऐसे 21,809 लोगों की पहचान की, जिन्हें 2017 से लंबे समय तक हिरासत में रखा गया था। घर के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और पारिवारिक रिश्तों के डेटा का विश्लेषण करके, उन्होंने ऐसे 3,772 बच्चों की जानकारी दर्ज की जो अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों के हिरासत में लिए जाने के बाद पीछे छूट गए थे। रिपोर्ट में इस संख्या को एक न्यूनतम अनुमान बताया गया है और कहा गया है कि जैसे-जैसे और सरकारी दस्तावेज़ उपलब्ध होंगे, और मामले सामने आ सकते हैं। विश्लेषण में पाया गया कि प्रभावित परिवारों में अक्सर कई बच्चे थे। जिन परिवारों में माता-पिता को हिरासत में लिया गया था, उनमें औसतन 2.4 बच्चे प्रभावित हुए, जबकि 700 से ज़्यादा परिवारों में तीन या उससे ज़्यादा बच्चे अपने माता-पिता से अलग हो गए थे। हालांकि उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि कई बच्चों को बोर्डिंग स्कूलों में रखा गया या रिश्तेदारों ने उनकी देखभाल की, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा दस्तावेजों से हर प्रभावित बच्चे के भविष्य के बारे में पता नहीं लगाया जा सकता। इसे भी पढ़ें: OpenAI और Anthropic AI आउटपुट का चीनी सेना ने रक्षा प्रणालियों के लिए किया उपयोग इस अध्ययन में माता-पिता को हिरासत में लेने के एक बार-बार दिखने वाले पैटर्न की भी पहचान की गई। नतीजों के अनुसार, दर्ज किए गए ज़्यादातर मामलों में पहले पिताओं को हिरासत में लिया गया, जिन्हें अक्सर 2017 के दौरान लंबी जेल की सज़ा हुई, जबकि माताओं को बाद में 2018 में नज़रबंदी कैंपों में भेजा गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन परिवारों में हिरासत की समय-सीमा का साफ़ तौर पर पता लगाया जा सका, उनमें से लगभग 56 प्रतिशत मामलों में यही क्रम देखा गया।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 6:53 pm

PAK: उजैर बलोच के भाई जुबैर को गोलियों से भूना, ल्यारी में फिर गैंगवार से दहशत

पाकिस्तान की पुलिस के मुताबिक ल्यारी के मिर्जा आदम खान रोड पर हुई फायरिंग में तीन लोग घायल हुए. घायलों में एक की पहचान जुबैर बलोच के रूप में की जा रही है. ल्यारी के गैंगवार की कहानी भारत के लोगों को आदित्य धर की मूवी धुरंधर से पता चली.

आज तक 31 Jul 2026 6:48 pm

Pakistani Kashmir शब्दावली पर भड़का MEA, NYT की विवादित Headline पर Indian Embassy ने जताई कड़ी आपत्ति

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की उस हेडलाइन पर आपत्ति जताई जिसमें पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) को पाकिस्तानी कश्मीर बताया गया था। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय पक्षों और मीडिया संगठनों से सही कानूनी और राजनीतिक शब्दावली का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का यह रुख फिर से दोहराया कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। जयसवाल ने कहा कि हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ है कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के केंद्र-शासित प्रदेशों का पूरा इलाका भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। ये इलाके और ये क्षेत्र भारत का हिस्सा थे, हैं और आगे भी रहेंगे। इसे भी पढ़ें: MEA Press Conference : Pakistan पर India का अब तक का सबसे बड़ा हमला, विदेश मंत्रालय ने दुनिया के सामने खोली आतंकिस्तान की पूरी पोल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा हम अपने सभी सहयोगियों और संबंधित पक्षों से आग्रह करेंगे कि वे इस इलाके के लिए सही नाम का इस्तेमाल करें, जैसा कि हम इसे समझते हैं। विदेश मंत्रालय का यह बयान अमेरिका में भारतीय दूतावास द्वारा 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक हेडलाइन पर आपत्ति जताने के कुछ दिनों बाद आया है। उस हेडलाइन में पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) को पाकिस्तानी कश्मीर बताया गया था, जबकि भारत ने फिर से दोहराया है कि यह इलाका देश का अभिन्न हिस्सा है। न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र के शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए भारतीय दूतावास ने इसे भ्रामक और गलत बताया। न्यूयॉर्क टाइम्स का शीर्षक भ्रामक और गलत है। पाकिस्तानी कश्मीर जैसा कुछ नहीं है, केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर है। इसे भी पढ़ें: POJK में प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता की जांच के लिए India ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की नई दिल्ली के रुख को दोहराते हुए दूतावास ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। दूतावास ने इस्लामाबाद पर इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान कब्जे वाले लोगों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल जारी रखे हुए है।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 6:48 pm

Lyari में Gangster Uzair Baloch के भाई को मारी गोली, क्या फिर शुरू होगा खूनी Gang War?

कराची के लियारी इलाके में अपने घर के बाहर गोली लगने से पाकिस्तानी गैंगस्टर उज़ैर बलोच का भाई ज़ुबैर बलोच गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना में दो राहगीर भी घायल हुए, जिन्हें मेडिकल मदद दी गई। मीडिया की कई रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम को हुई। 40 साल के ज़ुबैर की छाती और पेट में गोली लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए; इसके बाद उन्हें इलाज के लिए कराची के सिविल अस्पताल ले जाया गया। पाकिस्तान के प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक 'डॉन' ने खबर दी है कि हमलावर मोटरसाइकिल पर आए थे और उनके चेहरे ढके हुए थे। ज़ुबैर, जिनकी सर्जरी हो चुकी है, सिंगु लेन में अपने घर के बाहर बैठे थे, तभी बाइक पर सवार दो हमलावरों ने उन पर गोली चलाई। पास ही मौजूद एक दुकानदार के जवाबी फायरिंग करने पर वे मौके से भाग गए। इसे भी पढ़ें: Pakistan Economic Crisis: महंगाई की मार से कराह रहा ट्रांसजेंडर समुदाय, Karachi में सड़कों पर उतरा प्रदर्शनकारी सभी पहलुओं की जांच की जा रही है साउथ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) सैयद असद रज़ा ने 'डॉन' को बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पाकिस्तानी अखबार ने एक सामाजिक कार्यकर्ता का हवाला देते हुए यह भी बताया कि ज़ुबैर हाल ही में एक 'राजनीतिक पार्टी' में शामिल हुए थे। इस घटना से लियारी में एक और गैंग वॉर (गिरोहों के बीच संघर्ष) का डर पैदा हो गया है। 'डॉन' के अनुसार, ईरान और दुबई भाग गए कई गैंगस्टर, अमेरिका (US) और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद लियारी लौट आए हैं। इसे भी पढ़ें: वर्दी उतारकर लड़ो चुनाव...Pakistan में सेना-सियासत में घमासान, Maulana Fazlur Rehman की Asim Munir को सीधी चुनौती उज़ैर बलोच पाकिस्तानी जेल में बंद है ज़ुबैर बलोच, उज़ैर बलोच का 40 साल का भाई है। उज़ैर बलोच प्रतिबंधित 'पीपल्स अमन कमेटी' (PAC) का पूर्व प्रमुख था। उसे पाकिस्तान के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में से एक माना जाता है। 2009 में पुलिस मुठभेड़ में रहमान डकैत के मारे जाने के बाद, उज़ैर ने लियारी के अंडरवर्ल्ड में अपना नाम बनाया और उस पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। पाकिस्तान के जियो न्यूज़ के अनुसार, उज़ैर के खिलाफ 100 से अधिक मामलों में जांच चल रही है। इन मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, पुलिस और रेंजर्स पर हमले और विदेशी खुफिया एजेंसियों के लिए जासूसी करना शामिल है। उसे 30 जनवरी 2016 को पाकिस्तानी रेंजर्स ने कराची में चुपके से घुसने की कोशिश करते समय गिरफ्तार किया था। अप्रैल 2020 में, जासूसी के आरोपों के चलते एक पाकिस्तानी अदालत ने उसे 12 साल की जेल की सज़ा सुनाई थी।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 6:47 pm

Ceuta में मोरक्को से दाखिल हुए 60000 प्रवासी, Spain के प्रधानमंत्री ने की निंदा

पिछले 24 घंटों में मोरक्को से लगभग 60,000 प्रवासी स्पेन के सेउटा में दाखिल हुए हैं। सेउटा के प्रशासनिक प्रमुख ने यह जानकारी दी। यह संख्या सेउटा शहर की नियमित जनसंख्या के 70 फीसद के बराबर है। सेउटा के प्रशासनिक प्रमुख जुआन जीसस विवास के अनुसार प्रवासन की इस प्रक्रिया में कम से कम 34 लोगों की मौत हो गयी। उन्होंने शुक्रवार को कहा, ‘‘ सेउटा जिस स्थिति से गुज़र रहा है, वह बिल्कुल भी टिकाऊ नहीं है।’’बृहस्पतिवार को सीमा पर भड़का संकट शुक्रवार को भी जारी रहा जहां सीमा के मोरक्को वाले क्षेत्र में सुरक्षाबलों एवं प्रवासियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने शुक्रवार को सेउटा में अपने संबोधन में सीमा उल्लंघन की निंदा की और इन घटनाओं को ‘स्पेन की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन’ बताया। स्पेन के नेता ने मानव तस्करों को दोषी ठहराते हुए कहा कि वे ‘बहुत से युवाओं को बहकाते हैं और अंततः उनमें से कई को मौत के मुंह में धकेल देते हैं - चाहे वह समुद्र में हो या, जैसा कि इस मामले में हुआ, स्पेन की सीमा पर स्वायत्त शहर सेउटा में।’’सीमा के सीधे प्रसारण में नजर आ रहा है कि सेउटा के ऊपर एक पहाड़ी पर सैकड़ों प्रवासी जमा थे, जिन्हें मोरक्को की सेना ने आंसू गैस के गोले दागकर तितर-बितर कर दिया, जबकि अन्य लोग तैरकर स्पेनिश क्षेत्र की ओर बढ़ते रहे।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 6:41 pm

ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10

ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.

आज तक 31 Jul 2026 6:09 pm

रूस ने कीव समेत कई शहरों पर की भीषण बमबारी, देखें दुनिया की बड़ी खबरें

रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की सभी उम्मीदों पर फिलहाल विराम लगा हुआ है...दोनों देशों के बीच जंग और भीषण हो गई है...रूस ने यूक्रेनी राजधानी कीव समेत कई शहरों पर भीषण बमबारी कर जान-माल का भारी नुकसान पहुंचाया है...उधर रूस में एक बार वाइल्डबेरीज़ के गोदाम को निशाना बनाया गया. देखें...

आज तक 31 Jul 2026 6:05 pm

पाकिस्तान पर बड़ा हादसा: प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा समेत 10 लोगों का दल हिमस्खलन के बाद लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

दुनियाभर में अपनी अदम्य साहस और पर्वतारोहण के रिकॉर्ड्स के लिए पहचाने जाने वाले नेपाल के नामचीन पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (Nimsdai Purja) और उनका 10 सदस्यीय दल पाकिस्तान की खतरनाक ब्रॉड पीक पर लापता हो गया है। जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित 8,047 मीटर ऊंची इस बर्फीली चोटी पर चढ़ाई के दौरान अचानक आए एक भीषण हिमस्खलन की चपेट में पूरा दल आ गया है। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद से पर्वतारोहियों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत में हड़कंप मच गया है।ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन और लापता दल की पूरी डिटेलपाकिस्तान के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे काराकोरम पर्वतमाला में स्थित ब्रॉड पीक पर हुआ। दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची और चढ़ाई के लिहाज से बेहद जोखिम भरी इस चोटी पर अचानक आए हिमस्खलन ने पर्वतारोहियों को अपनी चपेट में ले लिया। लापता हुए 10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय दल में एक अमेरिकी, एक चीनी, एक ओमानी और पांच नेपाली नागरिक शामिल हैं, जिनका नेतृत्व खुद प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा कर रहे थे। खराब मौसम और दुर्गम इलाके के कारण तुरंत संपर्क साधना संभव नहीं हो पाया था।शुक्रवार सुबह से शुरू हुआ हेलिकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशनबीबीसी और अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान की रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने हालात का जायजा लेते हुए शुक्रवार सुबह मौसम के साफ होने पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए विशेष हेलिकॉप्टर्स की मदद ली जा रही है। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान ने इस कठिन घड़ी में अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय के एकजुट होने की बात कही है, जबकि रेस्क्यू टीमें लगातार बर्फीले इलाकों में जीवन बचाने की उम्मीद के साथ खोजबीन में जुटी हुई हैं।कौन हैं रिकॉर्ड होल्डर पर्वतारोही निर्मल पुर्जालापता पर्वतारोही निर्मल पुर्जा नेपाल के एक प्रतिष्ठित पर्वतारोही हैं, जो ब्रिटिश सेना की प्रतिष्ठित रॉयल मरीन यूनिट में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। साल 2012 में माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचने के बाद उनके भीतर पर्वतारोहण का ऐसा जुनून जागा कि उन्होंने इतिहास रच दिया। साल 2019 में निर्मल पुर्जा ने महज 6 महीने और 6 दिन के रिकॉर्ड समय में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंची सभी 14 चोटियों को फतह करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने एवरेस्ट, मकालू और ल्होत्से जैसी कठिन चोटियों को महज 48 घंटे के भीतर फतह करने का अनूठा कारनामा भी किया है। उनकी इस असाधारण जीवनयात्रा पर '14 पीक्स: नथिंग इज इंपॉसिबल' नाम से एक चर्चित डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है। फिलहाल, मौसम की दुश्वारियों के बीच रेस्क्यू टीमों के सामने लापता दल को सुरक्षित ढूंढ निकालना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 6:02 pm

Mossad और CIA की नींद उड़ाई: पिछले 5 महीने से कहां गायब हैं ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई? हवा में हुए विलीन या बंकर में छिपे

मध्य एशिया की भू-राजनीति में इस वक्त एक ऐसा रहस्य गहराया हुआ है जिसने अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA और इजरायल की कुख्यात एजेंसी मोसाद (Mossad) दोनों की नींद उड़ा रखी है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) म पिछले पांच महीनों से पूरी तरह से नजरों से ओझल हैं और दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियां भी उनका सुराग लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं। अपने पिता अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता की बागडोर संभालने वाले मोजतबा ने अब तक एक बार भी कोई सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय गलियारों में उनके ठिकाने और स्वास्थ्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।CIA और मोसाद का हाई-प्रियोरिटी ऑपरेशन, फिर भी कोई सुराग नहींमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों ने ईरानी सुप्रीम लीडर की सही लोकेशन का पता लगाने के लिए एक विशेष हाई-प्रियोरिटी ऑपरेशन शुरू कर रखा है। फरवरी महीने में हुए हमलों के दौरान अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत के बाद मोजतबा के भी गंभीर रूप से घायल होने और यहां तक कि उनकी मौत के दावे किए गए थे। हालांकि, 8 मार्च को उन्हें आधिकारिक तौर पर ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया गया, लेकिन पिछले पांच महीनों में उन्होंने न तो कभी टीवी पर कोई संबोधन दिया और न ही वे अपने पिता के जनाजे में शामिल हुए। एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी पहेली यह है कि उनका कोई भी डिजिटल फुटप्रिंट या सुराग हाथ नहीं लग रहा है।'कोई फोन नहीं, कोई लैपटॉप नहीं': बेहद गोपनीय है कार्यशैलीईरानी सुप्रीम लीडर की सुरक्षा और गोपनीयता इतनी चाक-चौबंद है कि खुफिया विशेषज्ञों के होश उड़े हुए हैं। एक वरिष्ठ खुफिया सूत्र के हवाले से सामने आया है कि पिछले पांच महीनों में मोजतबा की तरफ से कोई फोन कॉल, कोई लैपटॉप इस्तेमाल या किसी भी तरह का डिजिटल संपर्क नहीं किया गया है। अपने पिता अली खामेनेई के विपरीत—जो अक्सर सोशल मीडिया और टेलीविजन के माध्यम से संदेश जारी करते थे—मोजतबा पूरी तरह से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर हो चुके हैं। वे केवल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बेहद भरोसेमंद और चुनिंदा सहयोगियों के जरिए अपने हाथ से लिखे गए लिखित बयान ही बाहर भेज रहे हैं, जिससे उनकी लोकेशन को किसी भी तकनीकी सर्विलांस से ट्रैक कर पाना नामुमकिन हो गया है।अंडरग्राउंड बंकर या गुप्त सुरंगों का नेटवर्क? कहां छिपे हैं मोजतबा?इंटेलिजेंस विश्लेषकों का यह मानना है कि मोजतबा खामेनेई इस समय राजधानी तेहरान के किसी बेहद सुरक्षित और गुप्त अंडरग्राउंड बंकर में छिपे हो सकते हैं। इसके अलावा यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि वे ईरान के धार्मिक और पवित्र शहर कॉम के आसपास बने जटिल सुरंगों के नेटवर्क से देश की सत्ता चला रहे हैं। हालांकि, हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दावा किया था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम लीडर से मुलाकात की है, लेकिन इस दावे के समर्थन में कोई भी ठोस सबूत या तस्वीर सामने नहीं आई है, जिससे रहस्य और अधिक गहराता जा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 5:55 pm

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भयंकर सांप्रदायिक हिंसा का गदर, 3 की मौत के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संभाला मोर्चा

भारत के पड़ोसी मुल्क नेपाल में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच भड़की हिंसक झड़पों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब तक हुई खूनी हिंसा और आगजनी में 3 लोगों की जान जा चुकी है, जिसके बाद से भारत की सीमा से लगे कई प्रमुख जिलों में तनाव चरम पर है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू बढ़ा दिया है। इस बीच, देश के प्रधानमंत्री बालेन शाह खुद मोर्चे पर आ गए हैं और उन्होंने एक उच्चस्तरीय सर्वदलीय बैठक बुलाने के साथ-साथ नागरिकों से शांति और संयम बरतने की पुरजोर अपील की है।चार जिलों में बढ़ा अनिश्चितकालीन कर्फ्यू, तेराई क्षेत्र में तनावनेपाल के दक्षिण तेराई क्षेत्र में स्थिति बेहद विस्फोटक बनी हुई है। ताजा आधिकारिक आदेशों के अनुसार, भारत की सीमा से लगे सप्तारी जिले में भी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है, जिससे पाबंदी वाले जिलों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है। इससे पहले सुनसरी, धानुषा और सिराहा जिलों में भी सख्त कर्फ्यू लागू किया गया था। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, गोलबाजार क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शनकारियों ने भारी उपद्रव मचाते हुए एक शॉपिंग मॉल को आग के हवाले कर दिया था, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़े।कैसे भड़की थी हिंसा? उत्सव के विवाद से लेकर पुलिस फायरिंग तकइस पूरे तनाव की शुरुआत सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके में हुई थी, जहां एक उत्सव के दौरान दो धार्मिक समुदायों के बीच मामूली बात पर खूनी संघर्ष छिड़ गया था। उग्र भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद यह हिंसा मधेश क्षेत्र तक फैल गई, जहां सिराहा जिले में एक किशोर की मौत हो गई और इलाज के दौरान एक अन्य घायल ने भी दम तोड़ दिया। इस दौरान झड़प में पुलिस कांस्टेबल नारद पेरियार को भी गोली लगने की खबर सामने आई है।प्रधानमंत्री बालेन शाह की राष्ट्र के नाम अपील, बुलाई सर्वदलीय बैठकबिगड़ते हालातों के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह ने टेलीविजन के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित किया और देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की। पीएम शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार इस पूरी हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाएगी तथा इसके लिए जिम्मेदार उपद्रवियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। स्थिति को तुरंत नियंत्रित करने के लिए काठमांडू में एक आपातकालीन सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से यह भी विशेष आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली अफवाहों, भ्रामक जानकारियों और नफरत फैलाने वाले संदेशों से दूर रहें तथा देश में आपसी भाईचारा बनाए रखें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 5:53 pm

पाकिस्तान के ल्यारी में फिर गरजीं बंदूकें: गैंगस्टर उजैर बलोच का भाई जुबैर बलोच गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल

कराची का कुख्यात ल्यारी इलाका एक बार फिर से खूनी संघर्ष और गैंगवॉर की आग सुलगने के कारण सुर्खियों में आ गया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ल्यारी के चाकीवारा थाना क्षेत्र में एक अज्ञात हमलावरों द्वारा की गई ताबड़तोड़ गोलीबारी में कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच का भाई जुबैर बलोच गंभीर रूप से घायल हो गया है। इस सनसनीखेज हमले के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। स्थानीय अस्पताल में जुबैर बलोच की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जबकि पुलिस इस हाई-प्रोफाइल हमले के पीछे की असली साजिश को बेनकाब करने में जुट गई है।मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने बरसाईं अंधाधुंध गोलियांपाकिस्तानी पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना तब घटी जब जुबैर बलोच अपने घर के बाहर शांति से बैठा हुआ था। अचानक मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए दो अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस अचानक हुए जानलेवा हमले में जुबैर को कई गोलियां लगीं, जिससे वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा। इस गोलीबारी की चपेट में आने से आसपास से गुजर रहे दो अन्य आम नागरिक भी घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद तीनों घायलों को इलाज के लिए कराची के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।आपराधिक इतिहास और राजनीतिक रंजिश की आशंकापाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच की गैर-मौजूदगी में उसका भाई जुबैर बलोच भी आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है। पुलिस अधिकारी सैयद असद रजा ने पुष्टि की है कि जुबैर के खिलाफ विभिन्न थानों में करीब सात आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह पहले भी कई बार जेल की हवा खा चुका है। शुरुआती जांच में पुलिस यह भी अंदेशा जता रही है कि हाल ही में जुबैर द्वारा किसी राजनीतिक पार्टी का दामन थामने और इलाके में झंडे-पोस्टर लगाने को लेकर उपजे विवाद के चलते विरोधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया हो। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों की तलाश में जुบैर के ठिकानों पर दबिश दे रही है।गैंगवॉर की वापसी और खाड़ी देशों से लौट रहे अपराधियों का खौफइस घटना के बाद ल्यारी में एक बार फिर पुराने दिनों की तरह गैंगवॉर भड़कने की आशंका तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि कराची ऑपरेशन के बाद जो गैंगस्टर और अपराधी भागकर ईरान और खाड़ी के देशों में छिप गए थे, वे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव और क्षेत्रीय युद्धों के कारण वापस पाकिस्तान लौटने लगे हैं। यही वजह है कि ल्यारी में वर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर सिर उठा रही है। गौरतलब है कि ल्यारी का यह पूरा आपराधिक और राजनीतिक सिंडिकेट पहले भी बॉलीवुड फिल्मों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रह चुका है, जहां उजैर बलोच जैसे अपराधियों का आतंक जगजाहिर है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 5:51 pm

अभिजीत दीपके के आंदोलन से थर-थर कांप रहा पाकिस्तान! गृह मंत्री मोहसिन नकवी बोले- 'ये कॉकरोच सब कुछ पलट देंगे'

भारत की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में समाप्त हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की गूंज अब पड़ोसी देश पाकिस्तान तक सुनाई देने लगी है। भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चले उग्र युवा आंदोलन के बाद अब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी को भी 'कॉकरोचों' का खौफ सताने लगा है। नकवी ने सार्वजनिक रूप से आशंका जताई है कि यदि पाकिस्तानी युवाओं का असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो ये 'कॉकरोच' मिलकर पूरे सिस्टम को पलट कर रख देंगे।पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का बड़ा बयानएक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और गहराते आर्थिक संकट खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समय भारी-भरकम कर्ज के जाल में फंस चुका है और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे महंगाई चरम पर है। नकवी ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार युवाओं की उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आप उन्हें युवा कहें या कॉकरोच, लेकिन जब ये एक साथ सड़कों पर उतरेंगे, तो मौजूदा सत्ता और सिस्टम को पूरी तरह पलट देंगे।'पिछले 70 सालों से पूरी तरह ढह चुका है पाकिस्तान का सिस्टम'पाकिस्तान की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए गृह मंत्री नकवी ने माना कि देश का प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 70 वर्षों से इस नाकाबिल सिस्टम को जबरन घसीटा जा रहा है, लेकिन अब सुधार की गुंजाइश कम और कर्ज लेने की आदत ज्यादा हो गई है। बजट का अधिकांश हिस्सा केवल नए कर्ज चुकाने और पुराने ऋणों को संभालने में ही निकल जाता है, जिससे आम जनता और खास तौर पर युवाओं में सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा सुलग रहा है।भारत में अभिजीत दीपके के आंदोलन और CJP का असरविशेषज्ञों का मानना है कि मोहसिन नकवी के मुंह से 'कॉकरोच' शब्द का यह इस्तेमाल भारत में हाल ही में हुए उस युवा आंदोलन से प्रेरित है, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले अभिजीत दीपके के नेतृत्व में महीनों तक ऐतिहासिक प्रदर्शन चला था। इस दबाव के चलते तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। भारत के इस सफल युवा विद्रोह से सहमे पाकिस्तानी हुक्मरानों को अब अपने ही देश में युवाओं के बड़े विद्रोह का डर सताने लगा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 5:49 pm

FIFA अध्यक्ष के सलाहकार Carlos Cordero का इस्तीफा, विश्व कप योजना पर उठाए सवाल

फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो के सबसे करीबी सलाहकारों में से एक, कार्लोस कॉर्डेरो ने संगठन की विवादास्पद विश्व कप निवेश प्रस्ताव के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कॉर्डेरो ने इस प्रस्ताव को फुटबॉल के लिए एक बुरा सौदा बताते हुए इसकी शासन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। प्रस्ताव पर बढ़ता विरोध कॉर्डेरो का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब फीफा को UEFA, Concacaf और AFC जैसे प्रमुख फुटबॉल संगठनों से बढ़ते विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह विरोध फीफा के विश्व कप के लिए प्रस्तावित निवेश योजना को लेकर है, जिसे कई लोग फुटबॉल के भविष्य के लिए हानिकारक मान रहे हैं। शासन व्यवस्था पर सवाल कॉर्डेरो ने विशेष रूप से फीफा की निर्णय लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव फुटबॉल के हितों के बजाय किसी और एजेंडे को पूरा करता दिख रहा है। उनके इस्तीफे से फीफा के भीतर और बाहर दोनों तरफ से बढ़ते प्रतिरोध का संकेत मिलता है। सदस्यों के मतदान से पहले दबाव फीफा के सदस्य आगामी एक महत्वपूर्ण मतदान में इस प्रस्ताव पर निर्णय लेने वाले हैं। कॉर्डेरो जैसे करीबी सलाहकार का इस्तीफा इन्फैंटिनो के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है और यह प्रस्ताव के पारित होने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। यह घटनाक्रम फीफा के नेतृत्व और उसकी भविष्य की योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 5:43 pm

इजरायल ने तोड़ दी हिज्बुल्लाह की कमर! साउथ लेबनान में तबाह कर दिया उसका अंडरग्राउंड टनल नेटवर्क

इजरायल डिफेंस फोर्सेज ने साउथ लेबनान में कई अहम अंडरग्राउंड सुरंगों को नष्ट कर दिया है। यहीं, हिज्बुल्लाह का सेंट्रल कमांड सेंटर था, जिससे हमलों के निर्देश दिए जाते थे।

खबर इंडिया टीवी 31 Jul 2026 5:34 pm

पाकिस्तान का ईरान से 'डबल गेम', उसके दुश्मनों को बेचे हथियार

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान डबल गेम खेल रहा है. एक तरफ, तो वह खुद को मध्यस्थ की तरह पेश करने की कोशिश कर रहा है. वहीं, सूत्रों के मुताबिक, खाड़ी देशों को हथियार बेचने की कोशिश कर रहा है.

आज तक 31 Jul 2026 5:26 pm

स्पेन में बड़ा प्रवासी संकट! समुद्र के रास्ते पहुंचे 49 हजार लोग, बॉर्डर पर भगदड़ में गई 18 लोगों की जान

स्पेन में बड़ा प्रवासी संकट! समुद्र के रास्ते पहुंचे 49 हजार लोग, बॉर्डर पर भगदड़ में गई 18 लोगों की जान

समाचार नामा 31 Jul 2026 5:25 pm

क्या नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र? पीएम बालेन शाह ने साफ किया रुख

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन् शाह ने कहा है कि उनकी सरकार हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना और राजशाही की वापसी के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे संघीय व्यवस्था कमजोर हो सकती है. उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है.

आज तक 31 Jul 2026 5:23 pm

भारत-चीन रिश्तों में नई पहल, गलवान के बाद पहली बार दिल्ली पहुंचेंगे शी जिनपिंग; क्यों अहम है ये दौरा?

भारत-चीन रिश्तों में नई पहल, गलवान के बाद पहली बार दिल्ली पहुंचेंगे शी जिनपिंग; क्यों अहम है ये दौरा?

समाचार नामा 31 Jul 2026 5:07 pm

पाकिस्तान में नई ‘कॉकरोच पार्टी’ से हलचल, गृहमंत्री को सता रहा बगावत का डर, जाने पूरा मामला

पाकिस्तान में नई ‘कॉकरोच पार्टी’ से हलचल, गृहमंत्री को सता रहा बगावत का डर, जाने पूरा मामला

समाचार नामा 31 Jul 2026 5:05 pm

PM-किसान पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा, Business Hindi News - Hindustan

PM-किसान पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा, Business Hindi News Hindustan मोदी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा! 2031 तक जारी रहेगी पीएम किसान योजना, कैबिनेट ने लगाई मुहर India TV Hindi सोलर से खेलो तक... संसद में हंगामे के बीच मोदी कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले Jagran PM Kisan:क्या दूसरे के खेत में काम करने वाले किसान ले सकते हैं पीएम किसान योजना का लाभ? यहां दूर करें कंफ्यूजन Amar Ujala मोदी सरकार ने पीएम किसान योजना को 5 साल और बढ़ाया, 3.15 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च Jansatta

गूगल न्यूज़ 31 Jul 2026 4:59 pm

नेपाल में कांवड़ यात्रा के दौरान हिंसा भड़की, फुटेज में देंखे 2 की मौत; सुनसरी और सिराहा के कई इलाकों में कर्फ्यू, पुलिस ने की फायरिंग

नेपाल में कांवड़ यात्रा के दौरान हिंसा भड़की, फुटेज में देंखे 2 की मौत; सुनसरी और सिराहा के कई इलाकों में कर्फ्यू, पुलिस ने की फायरिंग

समाचार नामा 31 Jul 2026 4:59 pm

ट्रम्प का बड़ा दावा: हमास हथियार छोड़ने को तैयार, गाजा से पीछे हटेगी इजराइली सेना; वीडियो में जाने शांति समझौते का किया ऐलान

ट्रम्प का बड़ा दावा: हमास हथियार छोड़ने को तैयार, गाजा से पीछे हटेगी इजराइली सेना; वीडियो में जाने शांति समझौते का किया ऐलान

समाचार नामा 31 Jul 2026 4:52 pm

भारत मालदीव में डिजिटल लेनदेन सेवा शुरू

माले/ नई दिल्ली। मालदीव मोनेटरी अथॉरिटी (एमएमए) ने मालदीव की तत्काल भुगतान प्रणाली 'फवारा' और भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) केबीच एकीकरण के सफल शुभारंभ की घोषणा कर दी है। यह मालदीव और भारत केबीच सीमापार डिजिटल वित्तीय संपर्क और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में एक रूपांतरकारी उपलब्धि है। रियल टाइम ट्रांसफर सेवा...

स्वतंत्र आवाज़ 31 Jul 2026 4:41 pm

अभिजीत दीपके के आंदोलन के बाद थर-थर कांप रहा पाकिस्तान, गृह मंत्री बोले- कॉकरोच सबकुछ पलट देंगे

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी को कॉकरोचों का डर सताने लगा है। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि कॉकरोच सबकुछ पलट देंगे। भारत में अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हुए सीजेपी के आंदोलन के चलते धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा है।

लाइव हिन्दुस्तान 31 Jul 2026 3:55 pm

नेपाल में भड़की हिंसा का कहर: 4 नए जिलों में बढ़ा तनाव, कई शहरों में लगा कर्फ्यू, सेना हाई अलर्ट पर

नेपाल में भड़की हिंसा की आग अब और भी भयावह रूप लेती जा रही है. देश के चार और जिलों में अचानक तनाव बढ़ने के बाद स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है. हालात की गंभीरता को देखते हुए कई प्रमुख शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है, वहीं शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए नेपाली सेना को हाई अलर्ट पर तैनात कर दिया गया है.कई शहरों में लगा कर्फ्यू और थमे वाहनों के पहिएहिंसा के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन कड़े कदम उठाए हैं. जिन इलाकों में उपद्रव और झड़पों की आशंका थी, वहां पूरी तरह से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही बंद है और सुरक्षाबल चप्पे-चप्पे पर गश्त लगा रहे हैं. अचानक लगे कर्फ्यू की वजह से आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है.शांति व्यवस्था कायम करने के लिए सेना हाई अलर्ट परउपद्रवियों पर नकेल कसने और हालात को बेकाबू होने से रोकने के लिए नेपाली सेना को अलर्ट मोड पर रखा गया है. संवेदनशील इलाकों और मुख्य चौराहों पर सेना की फ्लैग मार्च शुरू कर दी गई है. प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि माहौल बिगाड़ने या कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही पड़ोसी जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 3:25 pm

PoK में बेगुनाहों के खून से रंगे पाकिस्तान के हाथ: 125 से ज्यादा मौतों और महिलाओं पर जुल्म के बाद दुनिया के सामने खुली नापाक हरकतों की पोल

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय निवासियों पर वहां की सेना और सुरक्षाबलों का भयानक अत्याचार चरम पर पहुंच गया है. अपनी बुनियादी जरूरतों, आटे-बिजली की किल्लत, भारी-भरकम बिलों और आर्थिक बदहाली के खिलाफ आवाज उठा रही निहत्थी अवाम पर गोलियां बरसाकर पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरी हमदर्दी का उसका दावा केवल एक ढोंग है.125 से अधिक निर्दोषों की मौत और महिलाओं पर बर्बरताशुरुआती रिपोर्टों में नुकसान कम आंका जा रहा था, लेकिन स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार सेना की गोलीबारी में अब तक 125 से ज्यादा बेगुनाह लोग जान गंवा चुके हैं. रावलकोट, मीरपुर और कोटली जैसे शहरों में अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया. पुलिस व सेना के लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल से 50 से अधिक महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुई हैं. इस दरिंदगी को छिपाने के लिए PoK में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, फिर भी सच उजागर होने पर वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला.संयुक्त राष्ट्र ने लगाई कड़ी फटकारसंयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने इस स्थिति पर गहरा दुख जताते हुए पाकिस्तान को सख्त कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाना, नागरिकों को अपराधी ठहराना और अत्यधिक बल प्रयोग करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का सीधा उल्लंघन है. संयुक्त राष्ट्र की इस टिप्पणी ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की बची-कुची साख भी खत्म कर दी है.'मुजफ्फराबाद मार्च' के साथ आंदोलन फिर शुरू'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा यह जनआंदोलन पाकिस्तान की गोलियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है. समिति के नेताओं ने साफ किया कि अपने शहीदों का अंतिम संस्कार करने और घायलों के इलाज के लिए आंदोलन को कुछ समय रोका गया था, लेकिन अब 'मुजफ्फराबाद मार्च' को और अधिक मजबूती के साथ दोबारा शुरू कर दिया गया है. जनता का संकल्प है कि जब तक सैन्य तानाशाही का अंत नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा.क्यों भड़की आक्रोश की आग और क्या है 12 सीटों का विवाद?PoK के लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा और महंगे बिजली बिलों से त्रस्त हैं. इस आर्थिक शोषण के साथ-साथ राजनीतिक अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है. PoK विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के नाम पर 12 सीटें आरक्षित रखी गई हैं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन 12 सीटों का गलत इस्तेमाल करके अपनी मनपसंद कठपुतली सरकार बनाता है. प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि इन आरक्षित सीटों को तुरंत खत्म किया जाए ताकि PoK के मूल निवासियों को उनका वास्तविक राजनीतिक हक मिल सके.

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 3:23 pm

आधी रात को डोली धरती! भारत के पड़ोस में 2 घंटे के भीतर 4 बार आए तेज भूकंप, झटकों से कांप उठे दो देश

भारत के पड़ोसी देशों से आधी रात को एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है, जहां प्रकृति के एक भीषण झटके ने हजारों लोगों की नींद उड़ा दी। देर रात जब लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी अचानक जमीन तेजी से हिलने लगी। महज 2 घंटे के भीतर एक के बाद एक लगातार 4 बार आए तेज भूकंप (Earthquake) के झटकों से दो देश पूरी तरह कांप उठे। झटके इतने जोरदार थे कि लोग दहशत के मारे अपने बच्चों और परिवारों को लेकर आधी रात को ही कड़ाके की ठंड और अंधेरे में सड़कों की तरफ भागने लगे। सोशल मीडिया पर इस प्राकृतिक आपदा के बाद की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।महज 120 मिनट में चार बार महसूस किए गए तगड़े झटकेमौसम और भूगर्भीय हलचलों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक, पहला झटका बेहद तीव्र था, जिसके तुरंत बाद लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला कि एक के बाद एक तीन आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) ने धरती को दोबारा हिलाकर रख दिया। दो घंटे के भीतर आए इन चार लगातार झटकों के कारण बहुमंजिला इमारतों और घरों में रखे सामान तेजी से हिलने लगे। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। गनीमत यह रही कि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन कई पुरानी इमारतों में दरारें आने की खबरें जरूर सामने आ रही हैं।भारत के सीमावर्ती राज्यों और स्थानीय इलाकों में भी दिखा असरभौगोलिक रूप से भारत के बेहद करीब होने के कारण इस भूकंप का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों और स्थानीय जियोग्राफिकल लोकेशंस पर भी आंशिक रूप से देखने को मिला है। नेपाल, भूटान और म्यांमार से सटे भारतीय सीमाई इलाकों में भी लोगों ने हल्के झटके महसूस किए जाने का दावा किया है। आपदा प्रबंधन टीमों (NDRF) और स्थानीय प्रशासन को पूरी सीमा पट्टी पर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर काफी गहराई में होने के कारण तबाही का मंजर तो नहीं दिखा, लेकिन बार-बार आए इन झटकों ने फॉल्ट लाइन पर स्थित इन पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के निवासियों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है।एआई और आधुनिक सर्च इंजन अलर्ट्स पर एक्सपर्ट्स की बड़ी चेतावनीआधुनिक जेनेरेटिव एआई (Generative Engine Optimization) और गूगल-बिंग सर्च ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले सीस्मोलॉजिस्ट्स (भूकंप वैज्ञानिकों) का कहना है कि टेक्टोनिक प्लेटों में आ रहे इस अचानक बदलाव पर करीब से नजर रखने की जरूरत है। भारत और उसके आसपास का यह पूरा उपमहाद्वीप भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील जोन (Zone 4 और Zone 5) में आता है। एक्सपर्ट्स ने स्थानीय लोगों को सलाह दी है कि वे आने वाले कुछ घंटों तक सतर्क रहें और किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पूरी तरह से पालन करें, क्योंकि मुख्य झटके के बाद छोटे-छोटे आफ्टरशॉक्स आने का सिलसिला अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 12:56 pm

स्पेन और मोरक्को के बीच हुआ बड़ा बवाल, तो फिर इटली की पीएम जॉर्जियो मेलोनी क्यों हो गईं लाल

यूरोपीय महाद्वीप और उत्तरी अफ्रीका के बीच रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले स्पेन और मोरक्को के रिश्तों में अचानक बड़ा तनाव पैदा हो गया है। इस सीमावर्ती और कूटनीतिक बवाल ने न सिर्फ इन दोनों देशों को आमने-सामने ला खड़ा किया है, बल्कि इसकी तपिश अब भूमध्य सागर को पार करते हुए इटली तक पहुंच गई है। स्पेन और मोरक्को के इस आपसी विवाद पर इटली की फायरब्रांड प्रधानमंत्री जॉर्जियो मेलोनी (Giorgia Meloni) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी तीखी नाराजगी जाहिर की है। मेलोनी के इस औचक गुस्से ने यूरोपीय संघ (EU) के गलियारों में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है कि आखिर दो अन्य देशों के झगड़े में इटली की पीएम क्यों भड़क उठी हैं?स्पेन और मोरक्को सीमा पर सुलगता विवाद और अवैध घुसपैठ का मुद्दास्पेन और मोरक्को के बीच विवाद की जड़ें काफी पुरानी हैं, लेकिन हालिया दिनों में दोनों देशों की सीमाओं, खासकर सेउटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla) जैसे स्पेनिश क्षेत्रों में सुरक्षा और अवैध प्रवासियों (Illegal Migrants) के प्रवाह को लेकर गतिरोध चरम पर पहुंच गया है। मोरक्को की तरफ से होने वाली घुसपैठ और स्पेनिश अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बयानबाजी चल रही है। चूंकि यह क्षेत्र अफ्रीका से यूरोप में एंट्री करने का एक मुख्य प्रवेश द्वार है, इसलिए यहां होने वाली कोई भी प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी लापरवाही सीधे तौर पर पूरे यूरोपीय संघ की सुरक्षा को प्रभावित करती है।जॉर्जियो मेलोनी के गुस्से के पीछे का असली 'माइग्रेशन' कनेक्शनअब सवाल उठता है कि इस पूरे मामले में जॉर्जियो मेलोनी क्यों दखल दे रही हैं और वह इतनी गुस्से में क्यों हैं? इसका सीधा जवाब है—अवैध प्रवासियों पर मेलोनी की सख्त नीति और इटली की जियोग्राफिकल लोकेशन। मेलोनी शुरू से ही यूरोप में बिना दस्तावेजों के आने वाले प्रवासियों के सख्त खिलाफ रही हैं। इटली खुद भूमध्यसागरीय मार्ग से आने वाले प्रवासियों की समस्या से बुरी तरह जूझ रहा है। मेलोनी का मानना है कि अगर स्पेन और मोरक्को अपनी सीमाओं पर कड़े कदम उठाने में नाकाम रहते हैं या एक-दूसरे से उलझकर सुरक्षा को ढीला छोड़ते हैं, तो मानव तस्कर (Human Traffickers) इस स्थिति का फायदा उठाएंगे। इसके चलते प्रवासियों का पूरा रुख इटली के समुद्री तटों (जैसे लैम्पेडुसा द्वीप) की तरफ मुड़ जाएगा, जिससे इटली पर सुरक्षा और आर्थिक बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।यूरोपीय संघ की नीति पर मेलोनी ने उठाए गंभीर सवालआधुनिक जेनेरेटिव एआई सर्च और ग्लोबल सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेलोनी का यह गुस्सा केवल एक बयान नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के नेतृत्व को एक खुली चेतावनी है। मेलोनी ने साफ कर दिया है कि सीमा सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी देश की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इटली की प्रधानमंत्री ने मांग की है कि यूरोपीय संघ को स्पेन और मोरक्को के इस विवाद में दखल देकर उत्तरी अफ्रीकी देशों के साथ सीमा नियंत्रण को लेकर और अधिक कड़े समझौते करने चाहिए, ताकि पूरे यूरोप को एक नए प्रवासी संकट (Migration Crisis) से बचाया जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 12:55 pm

पाकिस्तान का सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है! आर्मी चीफ के साले मोहसिन नकवी ने सरेआम कबूला खौफनाक सच

पड़ोसी देश पाकिस्तान में जारी गहरे आर्थिक और राजनीतिक संकट के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मचा दिया है। पाकिस्तान के ताकतवर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साले और देश के मौजूदा गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सार्वजनिक रूप से एक ऐसा सच कबूल किया है, जिसे अब तक वहां की सरकारें छिपाने की कोशिश करती रही हैं। नकवी ने एक बड़े मंच से साफ-साफ लफ्जों में कह दिया है कि मानो या न मानो, लेकिन हकीकत यही है कि पाकिस्तान का पूरा प्रशासनिक और गवर्नेंस सिस्टम पूरी तरह से तबाह और ध्वस्त हो चुका है। उनके इस विस्फोटक बयान के बाद शहबाज शरीफ सरकार बैकफुट पर आ गई है।गृह मंत्री के इस बड़े कबूलनामे से पूरी दुनिया में पाकिस्तान की फजीहतमोहसिन नकवी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लेकर दुनिया के तमाम अमीर मुल्कों के सामने कर्ज के लिए हाथ फैला रहा है। देश के आंतरिक मामलों के मंत्री और सुरक्षा व्यवस्था के मुखिया होने के नाते नकवी का यह मानना कि सरकारी मशीनरी काम नहीं कर रही है, यह दर्शाता है कि हालात अब काबू से बाहर हो चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब सरकार का सबसे अहम हिस्सा ही सिस्टम के फेल होने का रोना रोने लगे, तो आम जनता का बचा-कुचा भरोसा भी खत्म हो जाता है। इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।आर्मी चीफ आसिम मुनीर से कनेक्शन ने मामले को बनाया बेहद संवेदनशीलइस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प और गंभीर मोड़ यह है कि मोहसिन नकवी केवल एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि उन्हें पाकिस्तानी सेना के सबसे शक्तिशाली शख्सियत, आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर का बेहद करीबी और रिश्तेदार (साला) माना जाता है। पाकिस्तान की राजनीति में यह जगजाहिर है कि वहां की असली कमान चुनी हुई सरकार के बजाय रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय (GHQ) से चलती है। ऐसे में नकवी के मुंह से निकले इन तीखे शब्दों को सीधे तौर पर सैन्य प्रतिष्ठान की हताशा या फिर मौजूदा हाइब्रिड मॉडल सरकार को दी गई एक परोक्ष चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।बदहाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान और आगे का रास्ताआधुनिक जेनेरेटिव एआई और ग्लोबल सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह आंतरिक संकट केवल उस तक सीमित नहीं रहने वाला है। दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा और भौगोलिक स्थिरता के लिहाज से पाकिस्तान का यह प्रशासनिक पतन बेहद चिंताजनक है। चरमराती अर्थव्यवस्था, लगातार बढ़ते आतंकी हमले और अब शीर्ष नेतृत्व द्वारा सिस्टम के फेलियर को स्वीकार कर लेना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में कोई बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल या सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है, जिसकी स्क्रिप्ट पर्दे के पीछे लिखी जानी शुरू हो चुकी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 12:54 pm

पाकिस्तान में दर्दनाक हादसा: बलूचिस्तान की कोयला खदान में मीथेन गैस का धमाका; कम से कम 34 खनिकों की मौत, रेस्क्यू जारी

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कोयला खदान के अंदर मीथेन गैस से हुए धमाके में 34 मजदूरों की मौत हो गई। रेस्क्यू टीम मलबे में फंसे अन्य खनिकों को निकालने में जुटी है।

देशबन्धु 31 Jul 2026 11:37 am

चीन, तिब्बत और नेपाल में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके, कुछ ही घंटों में कई बार हिली धरती

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, शुक्रवार सुबह कुछ ही घंटों में चीन, तिब्बत और नेपाल के कई हिस्सों में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। इनमें सबसे तेज भूकंप चीन में आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई।

देशबन्धु 31 Jul 2026 11:30 am

टोक्यो पर मंडराता खतरा या आपदा से बचाव? जानिए जापान की 'दूसरी राजधानी' की रेस में कौन-कौन से शहर हैं आगे और क्या हैं उनकी खूबियां

आधुनिक तकनीक और विकास के मामले में दुनिया भर में मिसाल कायम करने वाला जापान इन दिनों एक बेहद अहम और रणनीतिक योजना पर काम कर रहा है। जापान सरकार टोक्यो के अलावा एक 'दूसरी राजधानी' (Second Capital / Backup Capital) स्थापित करने की योजना को आगे बढ़ा रही है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में टोक्यो में कोई भीषण भूकंप या प्राकृतिक आपदा आती है, तो देश की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकार और आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से सुरक्षित रहें और बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलती रहें। आइए जानते हैं कि इस रेस में कौन-कौन से प्रमुख शहर शामिल हैं और उनकी क्या खासियतें हैं।1. ओसाका (Osaka): सबसे मजबूत और अग्रणी दावेदारजापान की दूसरी राजधानी बनने की इस रेस में ओसाका को सबसे आगे और सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।ओसाका टोक्यो के बाद जापान का दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण महानगर (Metropolitan Area) है।इसके पास विशाल आर्थिक महत्व, मजबूत कमर्शियल नेटवर्क और एक विकसित शहरी बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पहले से मौजूद है।यहां बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और व्यावसायिक संचालन करने की पूरी क्षमता है, जो इसे इस दर्जे के लिए सबसे मुफीद बनाती है।2. नागोया और आइची (Aichi / Nagoya): देश का प्रमुख इंडस्ट्रियल हबआइची प्रिफेक्चर और उसके मुख्य शहर नागोया ने भी आधिकारिक तौर पर इसके लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।यहां के प्रशासकों का दावा है कि नागोया और आइची क्षेत्र के पास देश की दूसरी राजधानी के रूप में कार्य करने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक, राजनीतिक और औद्योगिक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।यह क्षेत्र जापान के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल हब के रूप में जाना जाता है, जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।3. फुकुओका (Fukuoka): पश्चिमी जापान का तेजी से उभरता केंद्रफुकुओका प्रिफेक्चर ने स्थानीय नगर पालिकाओं और बिजनेस कम्युनिटी के साथ मिलकर इस रेस में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।यह पश्चिमी जापान का एक प्रमुख और तेजी से उभरता हुआ आर्थिक व व्यापारिक केंद्र है।इसकी भौगोलिक स्थिति और आधुनिक कनेक्टिविटी इसे आपदा प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों के लिहाज से एक बेहद सुरक्षित और सक्षम विकल्प बनाती है।(इन प्रमुख शहरों के अलावा होक्काइडो (Hokkaido) और मियागी (Miyagi) जैसे प्रिफेक्चर भी इस योजना के तहत अपनी हिस्सेदारी और संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।)

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 9:49 am

अमेरिका में नौकरी के लिए विदेशी छात्रों को देंगे 1 लाख डॉलर शुल्क, भारतीय छात्रों पर पड़ेगा बड़ा असर

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसके तहत वहां की यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने वाले विदेशी छात्रों को नौकरी करने के लिए 1 लाख डॉलर (करीब 96 लाख रुपये) तक का शुल्क देना पड़ सकता है।

देशबन्धु 31 Jul 2026 9:37 am

पाकिस्तान में खौफनाक हादसा: कोयला खदान में मीथेन गैस से विस्फोट, 18 मजदूरों की दर्दनाक मौत और 24 मलबे में दबे

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। प्रांतीय राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाके में स्थित एक कोयला खदान में मीथेन गैस के रिसाव के कारण जोरदार धमाका हो गया। इस खौफनाक हादसे में कम से कम 18 खनिकों की मौके पर ही मौत हो गई है। वहीं, लगभग 24 मजदूर अभी भी खदान के मलबे में बुरी तरह फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी है।1200 मीटर गहरी खदान में जिंदगी की जद्दोजहदराहत और बचाव टीमें 1,200 मीटर की गहराई में फंसे 24 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कड़ी मशक्कत कर रही हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मीथेन गैस के धमाके के बाद ऑक्सीजन का स्तर शून्य हो जाता है, जिससे फंसे हुए मजदूरों के जिंदा बचने की उम्मीद बहुत कम रह गई है। फिर भी, जब तक हर एक मजदूर का पता नहीं चल जाता, तलाश जारी रहेगी।परिजनों का बुरा हाल और मुआवजे का ऐलानइस दर्दनाक घटना के बाद से ही खदान के बाहर मजदूरों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। बलूचिस्तान के खदान मंत्री शोएब नोशेरवानी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। लेबर यूनियन ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसके बाद सरकार ने हादसे के कारणों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 8:58 am

गाजा से हटेगी इजराइली सेना, हथियार छोड़ेगा हमास… ट्रंप ने किया ऐतिहासिक डील का ऐलान, क्या नेतन्याहू होंगे राजी?

मिडिल ईस्ट में सालों से चल रहे खूनी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में शांति स्थापित करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया है। इस डील के तहत यह तय किया गया है कि हमास अपने सभी हथियार डाल देगा और इसके बदले इजराइली सेना गाजा से पूरी तरह वापस लौट जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने इसे 'शांति परिषद' (Board of Peace) की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। लेकिन इस घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और खुद हमास इस समझौते को पूरी तरह से मानेंगे? आइए इस बहुचर्चित डील की जमीनी हकीकत को समझते हैं।कैसे लागू होगा ट्रंप का यह शांति फार्मूला?ट्रंप द्वारा पेश किए गए इस शांति रोडमैप के मुताबिक, हमास का निरस्त्रीकरण एक झटके में नहीं, बल्कि कई चरणों में होगा। योजना यह है कि गाजा में मौजूद सभी छोटे-बड़े हथियार और सैन्य ठिकाने एक नई फिलिस्तीनी तकनीकी सरकार (NCAG) और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) के नियंत्रण में सौंप दिए जाएंगे। जैसे-जैसे हमास अपने हथियार सौंपने की प्रक्रिया पूरी करेगा, वैसे-वैसे इजरायली सेना गाजा पट्टी से अपने कदम पीछे खींचना शुरू कर देगी। अमेरिका का मानना है कि इससे इजरायल को अपनी सुरक्षा की गारंटी मिलेगी और गाजा के आम नागरिकों को फिर से एक सुरक्षित जीवन मिल सकेगा।क्या नेतन्याहू और हमास इस डील को मानेंगे?भले ही अमेरिका ने इस समझौते को एक बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया हो, लेकिन राह अभी इतनी आसान नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने अभी तक इस प्रस्ताव पर आधिकारिक तौर पर अपनी मुहर नहीं लगाई है। नेतन्याहू सरकार का साफ कहना है कि इजरायली सेना के पीछे हटने से पहले गाजा का पूरी तरह से सैन्यीकरण खत्म होना चाहिए। इजरायल किसी भी शर्त पर हमास के पास एक भी हथियार छोड़ने के पक्ष में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, हमास की ओर से भी अभी तक कोई सीधा बयान नहीं आया है, हालांकि मिस्र की राजधानी काहिरा में मध्यस्थों (कतर, मिस्र और तुर्की) के साथ उसकी बातचीत काफी एडवांस स्टेज में चल रही है।आगे का रास्ता क्या है?अगर यह डील अपने तय स्वरूप में लागू हो जाती है, तो यह मध्य पूर्व के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी। लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह से दूर नहीं किया जाता और हमास जमीनी स्तर पर अपने हथियार नहीं सौंपता, तब तक यह समझौता सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले कुछ दिनों में काहिरा में होने वाली अहम बैठकों में क्या ठोस नतीजा निकलकर सामने आता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Jul 2026 8:53 am

ईरान युद्ध पर ट्रंप का नियंत्रण: नेतन्याहू ने किया बड़ा खुलासा

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान युद्ध से जुड़े सभी निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही ले रहे हैं

देशबन्धु 31 Jul 2026 7:50 am

ईरान का दावा: अल अजराक एयर बेस पर अमेरिकी सैन्‍य कर्म‍ियों को बनाया न‍िशाना, तीन एफ-35 विमान क‍िए नष्ट

ईरान और अमेरिका में जारी तनातनी के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन के अल अजराक एयर बेस पर अमेर‍िका के जवाबी हमले का दावा किया

देशबन्धु 31 Jul 2026 7:20 am

पाकिस्तान में बलूच छात्रों को जबरन गायब करने का सिलसिला जारी, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की मांग

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर एक बार फ‍िर बलूचिस्तान और पंजाब प्रांतों में दो और बलूच छात्रों को जबरन गायब किए जाने का आरोप लगा है।

देशबन्धु 31 Jul 2026 6:30 am

पीओके में मानवाधिकारों का उल्लंघन, पुलिस पर कोटली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर फायरिंग का आरोप

बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे लोगों पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है और महिलाओं को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है

देशबन्धु 31 Jul 2026 6:20 am

हाथ हैं, लेकिन पैरों से चलती है वंदना की जिंदगी:जिस्म कंपकंपाता है, जुबान साथ नहीं देती; आखिरी ख्वाहिश- अमिताभ बच्चन से मिलना चाहती हूं

दुर्लभ बीमारियों की सीरीज- ‘ऐ जिंदगी’ में आज कहानी वंदना कटारिया की, जिसके लिए मैं नीरज झा पहुंचा हूं गुजरात के जैतपुर शहर- वक्त- शाम के करीब 4 बजे। मूसलाधार बारिश हो रही है। जैतपुर की तंग गलियों से गुजरते हुए एक शख्स से पूछा- वंदना कटारिया का घर कहां है? उसने एक पुरानी तीन मंजिला बिल्डिंग की ओर इशारा करते हुए कहा- वो कोने वाली दुकान वंदना दीदी की है। वहीं मिलेंगी। छोटी-सी दुकान में कुर्सी पर एक औरत बैठी हैं। दुकान पर एक शख्स आया। बोला- वंदना दीदी, चिप्स का पैकेट देना। पास ही एक छोटी टेबल रखी थी। ग्राहक ने उसी पर 10 रुपए रख दिए। वंदना ने इस सिक्के की तरफ हाथ की बजाय पैर बढ़ाया। लेकिन उनके पैर कंपकंपाते हुए पहले दाईं फिर बाईं ओर मुड़ गए। उन्होंने दोबारा कोशिश की। इस बार दोनों पैरों के पंजे से सिक्के को छू तो लिया, लेकिन पकड़ नहीं पाईं। इसके बाद तीसरी, फिर चौथी कोशिश… आखिरकार बड़ी मशक्कत के बाद दाएं पैर की उंगलियां ने किसी तरह सिक्के को दबोच लिया। फिर उन्होंने धीरे-धीरे पैर खींचते हुए सिक्के को टेबल के एक कोने तक सरका लिया। …लेकिन अभी एक और परीक्षा बाकी है। ग्राहक को चिप्स देना। वंदना कुर्सी पर बैठी-बैठी दूसरी ओर मुड़ी। पहले गर्दन, फिर कंधे और फिर कमर, लेकिन शरीर का एक हिस्सा, दूसरे हिस्से का साथ नहीं देता। एक पल के लिए उनका संतुलन बिगड़ा। ऐसा लगा कि कुर्सी से गिर पड़ेंगी। उन्होंने खुद को संभाला और दीवार पर टंगे चिप्स के पैकेट की ओर पैर बढ़ाया। पैरों की उंगलियों से धीरे-धीरे चिप्स का पैकेट खींचकर टेबल पर रख दिया। ग्राहक ने पैकेट उठाया और चला गया। वंदना जस की तस कुर्सी पर बैठ गईं। जो काम अमूमन कुछ सेकंड में हो जाते हैं, उन्हें पूरा करने में वंदना को कई मिनट लग जाते हैं। वजह - शरीर उनके कंट्रोल में नहीं है। हाथ कंपकंपाते हैं। गर्दन सीधी नहीं रहती, बार-बार झटक जाती है। होंठ हिलते हैं, लेकिन शब्द मुंह से बाहर निकलते-निकलते खो जाते हैं। बैठना, चलना, बोलना, खाना, पीना जैसे काम वंदना के लिए हर दिन की जद्दोजहद बन चुके हैं। तभी, एक बुजुर्ग आए। बाल काले-सफेद, चेहरे पर झुर्रियां। उन्होंने अपना नाम अशोक मेहता बताया। वे कहते हैं- 22 साल से मैं इसकी देखभाल कर रहा हूं। न इसकी मां है, न बाप। एक भाई है, वो भी सिर्फ नाम का। बिल्डिंग के गेट के पास मेरी फल की दुकान है। इसलिए वंदना की दुकान भी यहीं खुलवा दी, ताकि नजर रहे। अशोक यह कहते-कहते रुक गए। फिर बोले- दिनभर घर में अकेली बैठी रहे, उससे अच्छा है यहां लोगों के बीच बैठे। पहले इसी दुकान में एसटीडी-पीसीओ चलता था। वक्त बदला, तो उसे बंद करना पड़ा। अब चिप्स, नमकीन और बिस्किट रख दिए हैं। कोई ग्राहक आ जाए, तो 50–100 रुपए मिल जाते हैं। इससे ज्यादा खुशी उसे इस बात पर होती है कि वह अपने दम पर कुछ कर रही है। यह बिल्डिंग, यह मार्केट, सब इसके पिता का है। तभी बच्ची का हाथ थामे सीढ़ियों से एक शख्स उतरा। कुछ पूछने से पहले ही बोला- मैं भावेश हूं, वंदना का छोटा भाई। वंदना के बारे में बात करने से मना करते हुए वो कहते हैं- माफ कीजिए, मैं कुछ नहीं बता पाऊंगा। जो भी बात करनी है, अशोक भाई या उनके छोटे भाई हितेश से कर लीजिए। मेरी बेटी 6 साल की है, लेकिन दिखती 6 महीने की बच्ची जैसी। डॉक्टरों ने कहा है कि उसे वंदना जैसी बीमारी है। अब बताइए, पहले अपनी बेटी को संभालूं या 45 साल की बहन को? इतना कहकर वो चले गए। अशोक कुछ पल तक भावेश को जाते हुए देखते रहे। फिर बोले- बातें बनाना आसान है। अपने खून का साथ आखिर कौन छोड़ता है। मां-बाप थे, तब तक घर भी एक था और परिवार भी। उनके जाने के बाद सब बदल गया। इस बिल्डिंग की दुकानों के एक हिस्से से वंदना को महीने का 12 हजार रुपए किराया मिलता है। इसी से उसका गुजारा चलता है। मैं फल की रेहड़ी लगाता हूं। जितना बनता है, कर देता हूं, लेकिन हर जरूरत पूरी करने की हैसियत कहां है। मेरी आंखें अगर अभी मुंद जाएं, तो इसे पूछने वाला कोई नहीं। मैं तो खुद को धनवान समझता हूं कि भगवान ने इसके लिए मुझे भेजा है। अंतिम सांस तक इसकी सेवा करूंगा। चलिए, अब इसे घर ले चलते हैं। आगे की बात वहीं करेंगे। अशोक वंदना को कुर्सी से उठाते हैं। कुर्सी के पास ही उसकी जूतियां रखी हैं। वंदना दोनों पैरों को धीरे-धीरे जूतियों की तरफ बढ़ाती हैं, लेकिन पैर सीधे जूतियों तक पहुंचते ही नहीं। कभी दायां पैर दूसरी तरफ मुड़ जाता, तो कभी बायां पैर। वह गहरी सांस लेकर फिर कोशिश करती हैं, लेकिन शरीर धोखा दे जाता है। ये सिलसिला करीब 1 मिनट तक चला। तब कहीं जाकर वंदना के दोनों पैर जूतियों के भीतर पहुंचे। अशोक के सहारे वंदना ने धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ाए, लेकिन पैर बार-बार अपनी दिशा बदलते हैं। अशोक तुरंत उन्हें संभालते हैं। दो-तीन कदम चलने के बाद वंदना के शरीर का संतुलन डगमगाया। हाथ कांपने लगे। चेहरा भी सिकुड़ गया। ऐसा लगा, जैसे शरीर का हर अंग रुक जाने की जिद कर रहा हो। दोनों धीरे-धीरे कमरे की तरफ बढ़े। चलते-चलते अशोक बताते हैं- छह साल पहले इसकी मां चल बसीं। जब तक वह थीं, वंदना उन्हीं के साथ ऊपर वाले कमरे में रहती थी। इसके भैया-भाभी भी साथ रहते थे। मां का स्वभाव सख्त था, इसलिए सब वंदना का ध्यान रखते थे। उनके जाने के बाद, कोई इसकी देखभाल नहीं करता था। अकेली पड़ी रहती थी। तब मैंने इसे नीचे वाले कमरे में शिफ्ट किया। अब यहीं रहती है। जिस दुकान में आपने इसे बैठे देखा, वहीं मैं खाना भी बनाता हूं। पहले इसे अपने हाथों से खिलाता हूं, फिर खुद खाता हूं। अशोक कमरे के एक कोने की ओर इशारा करते हैं। कहते हैं- वहां फर्श पर गद्दा बिछा है। वंदना वहीं सोती है। बार-बार पलंग पर चढ़ाना-उतारना मुश्किल होता है, इसलिए जमीन पर सुला देता हूं सुबह एक हेल्पर आती है। वही इसे नहलाती है, कपड़े बदलवाती है, झाड़ू-पोंछा करती है। बाकी दिनभर जो बन पड़ता है, मैं कर देता हूं। आप इनके क्या लगते हैं? कुछ पल तक चुप रहने के बाद अशोक बताते हैं- मैं कोई नहीं हूं। न रिश्तेदार, न पड़ोसी। 1998 की बात है। मैं यहीं बिल्डिंग के बाहर फल की रेहड़ी लगाता था। तभी वंदना के पिता मनीलाल कटारिया से पहचान हुई। मनीलाल भाई, वंदना को जान से ज्यादा चाहते थे। हमेशा कहते थे- ये मेरी पहली संतान है। जब तक जिंदा हूं, इसे किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। उन्हें शराब की लत थी। एक दिन तबीयत इतनी बिगड़ी कि अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मैं ही लेकर गया था। जांच में पता चला कि पेट में पानी भर गया है। तब वंदना 17 साल की थी। तीसरे दिन डॉक्टरों ने कह दिया कि अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। आखिरी वक्त में मनीलाल भाई ने मुझे बुलाया। मेरा हाथ पकड़ा और कहा- अशोक भाई, एक जिम्मेदारी देकर जा रहा हूं। मेरे बाद मेरी वंदना का ख्याल रखना। मैं जानता हूं, मेरे जाने के बाद इसे कोई नहीं देखेगा। मैंने उनसे वादा किया- जब तक मेरी सांस चलेगी, तब तक वंदना कभी अकेली नहीं होगी। उस एक वचन ने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी। घर में कई बार मेरी शादी की बात चली। हर बार मैंने मना कर दिया। कहा- मैं हनुमान भक्त हूं। ब्रह्मचर्य का पालन करूंगा। न शादी करूंगा, न अपना परिवार बसाऊंगा। डर था, अगर मेरा अपना परिवार हो गया, तो कहीं मनीलाल भाई को दिया हुआ वचन अधूरा न रह जाए। बोलते-बोलते अशोक उठ जाते हैं। कहते हैं- ये सब मत पूछिए। दिल दुखता है। कुछ देर बाद उन्होंने एक स्ट्रॉ लगी बोतल वंदना की तरफ बढ़ा दी। वो पैर से बोतल को पकड़कर मुंह तक ले जाती हैं। एक घूंट पानी खींचती हैं। लेकिन पानी निगलना भी उनके लिए आसान नहीं है। जैसे ही पानी गले से नीचे उतरा, वंदना की गर्दन झटके से पीछे की ओर खिंच गई। चेहरे की मांसपेशियां तन गईं। मानो शरीर में किसी ने करंट दौड़ा दिया हो। अशोक कहते हैं- इसके शरीर का कोई भी अंग इसके कंट्रोल में नहीं है। जो हरकतें आप देख रहे हैं, इन्हीं के साथ इसने पूरी जिंदगी काटी है। 1981 में इसका जन्म हुआ था। तारीख याद नहीं। इसकी मां होतीं, तो आपको बता देतीं। वंदना के जन्म वाले दिन तो किसी को कुछ समझ नहीं आया। लेकिन दूसरे दिन उसके हाथ-पैर अपने आप कांप रहे थे। मां-बाप को लगा कि शायद नवजात बच्चे में ऐसा होता होगा। लेकिन महीने बीतते गए, चिंता बढ़ती गई। वंदना दिनभर बिस्तर पर पड़ी रहती थी। वंदना के पिता उसे पहले जैतपुर के डॉक्टरों के पास ले गए। फिर राजकोट। लेकिन हर जगह डॉक्टरों ने यही कहा- दिमाग या नसों से जुड़ी कोई बड़ी बीमारी है। यहां जांच नहीं होगी। किसी बड़े अस्पताल ले जाइए। इसके बाद, वंदना को अहमदाबाद, मुंबई, डॉक्टरों ने जहां भेजा, मनीलाल वहां पहुंच गए। कई जांचों के बाद डॉक्टरों ने बीमारी का नाम बताया- सेरेब्रल पाल्सी (सीपी)। और कहा- बीमारी के साथ ही इसे जीना होगा। वंदना के चार साल बाद छोटा भाई भावेश हुआ। वो एकदम ठीक था। लेकिन 1998 में मनीलाल भाई की मौत के बाद पूरा घर बिखर गया। मेरा छोटा भाई हितेश ही उनका अस्थि कलश लेकर हरिद्वार गया था। मनीलाल भाई मुझसे कहते थे- अशोक, बेटी के इलाज में 5 लाख रुपए लगा दिए। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़़ा। पिता के जाने के बाद वंदना की पूरी दुनिया उसकी मां बन गईं। वो प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थीं। मां ही उसे नहलाती थीं, कपड़े पहनाती थीं, खाना खिलाती थीं। पिता के जाने के बाद भी वंदना की मां ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। 2004 में मुंबई के मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अशोक जौहरी का पता चला। बताया गया कि वह साल में कुछ दिन मुंबई में मरीज देखते हैं, बाकी समय विदेश में रहते हैं। बड़ी मुश्किल से अपॉइंटमेंट मिला। लेकिन किस्मत ने यहां भी साथ नहीं दिया। जिस दिन वंदना को दिखाना था, उससे ठीक दो दिन पहले भावेश का एक्सीडेंट हो गया। वह 15 दिनों तक भर्ती रहा। हालात ऐसे बने कि वंदना को मुंबई नहीं ले जा पाए। धीरे-धीरे परिवार ने भी मान लिया कि जब कोई इलाज ही नहीं है, तो अस्पतालों के चक्कर काटने से क्या फायदा। वक्त गुजरता गया। मां के जाते ही भाई इसी बिल्डिंग में अलग रहने लगा। उसका अपना परिवार है। पत्नी है, बच्चे हैं, उसकी भी अपनी जिम्मेदारियां हैं। इसी बीच मेरी नजर वंदना के कमरे की दीवारों पर पड़ी। जगह-जगह अमिताभ और अभिषेक बच्चन की तस्वीरें लगी हैं। क्या आप अमिताभ बच्चन की फैन हैं? वंदना गर्दन को संभालने की कोशिश करती हैं। शब्दों को बाहर आने में वक्त लगता है। फिर रुकते-रुकते कहती हैं- बचपन से पसंद करती हूं। एक बार उनसे मिलने के लिए फाइल भी तैयार की थी। एक शूटिंग के लिए वो यहां आए थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। आखिरी इच्छा है एक बार अमिताभ बच्चन से मिल लूं। इतना कहते ही वो जमीन पर घिसटते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करती हैं। गर्दन को मोड़कर धीमी आवाज में कहती हैं- कई बार दिल करता था कि अपनी जिंदगी खत्म कर दूं। मन में बार-बार सवाल उठता था कि भगवान ने मुझे ऐसी जिंदगी क्यों दी, जहां हर जरूरत के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। फिर मां की बात याद आ जाती है। वो कहती थीं- कोई कमजोर नहीं होता। भगवान हर इंसान को किसी खास वजह से भेजते हैं। बस इन्हीं शब्दों ने मुझे संभाल रखा है। मां की वजह से ही मैं बीकॉम कर पाई। उन्होंने डिस्टेंस लर्निंग से मुझे पढ़ाया। मैं लिख नहीं पाती थी, इसलिए परीक्षा देने मेरे साथ राइटर बैठता था। इतने में अशोक के भाई हितेश आए। वे जैतपुर बस स्टैंड के पास अपनी दुकान चलाते हैं। वे बताते हैं- मेरी अपनी जिम्मेदारियां हैं, लेकिन वंदना को देखकर यही लगता है कि अगर मेरी बच्ची के साथ ऐसा होता, तो क्या मैं उसे अकेला छोड़ देता। इसकी जितनी सेवा बन पड़ती है, हम लोग करते हैं। सरकार की तरफ से आज तक कोई बड़ी मदद नहीं मिली। हर महीने सिर्फ एक हजार रुपए मिलते हैं। कई लोग आए। मदद का भरोसा दिया,. लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। वंदना से मिलने के बाद बतौर रिपोर्टर मैं अहमदाबाद के रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस पहुंचा। यहां पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. संजीव मेहता से मिला। डॉ. मेहता, वंदना के बारे बताते हैं- हमारे शरीर का हर हिस्सा दिमाग के इशारों पर काम करता है। उठना, बैठना, चलना, बोलना, खाना निगलना और हाथ-पैर हिलाना, हर काम का आदेश दिमाग देता है। अगर दिमाग का वह हिस्सा, जो इन गतिविधियों को नियंत्रित करता है, ठीक से विकसित नहीं होता, तो बच्चे को सेरेब्रल पाल्सी हो सकती है। इसकी शुरुआत अक्सर मां के गर्भ में ही हो जाती है। जब बच्चे का दिमाग बन रहा होता है, तब उसकी कुछ कोशिकाएं और तंत्रिका मार्ग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। कई मामलों में LIS1, DCX, TUBA1A और ARX जैसे जीन में गड़बड़ी भी इसकी वजह बनती है। हालांकि हर मामला जेनेटिक नहीं होता। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली दिक्कतें भी इसका कारण बन सकती हैं। डॉ. मेहता बताते हैं कि लेबर पेन शुरू होने के बाद अगर प्रसव लंबा खिंच जाए या समय रहते सामान्य प्रसव और सर्जरी के बीच फैसला न लिया जा सके, तो बच्चे के दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे दिमाग की कोशिकाओं को स्थायी नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे का रोना बहुत जरूरी माना जाता है। इससे उसके फेफड़े ठीक से काम करने लगते हैं और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। वंदना के लक्षण एटेक्सिक सेरेब्रल पाल्सी से मिलते हैं। यह बीमारी का सबसे दुर्लभ प्रकार माना जाता है। इसमें शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और हाथ-पैर लगातार कांपते रहते हैं। डॉ. मेहता कहते हैं कि फिलहाल सेरेब्रल पाल्सी का कोई स्थायी इलाज नहीं है। दिमाग के क्षतिग्रस्त हिस्से की सर्जरी भी संभव नहीं है। अगर मरीज खुद बैठ सकता है और कुछ काम कर सकता है, तो उसकी उम्र 50-55 साल तक हो सकती है। गर्भावस्था के 24 से 28 सप्ताह के बाद भ्रूण का एमआरआई करके पता लगाया जा सकता है कि बच्चे का दिमाग विकसित हो रहा है या नहीं। —------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पढ़ें… 1- शादी के दिन आंतें फटीं, 5 महीने खुला रहा पेट:सूप पिया तो छाती से बह निकला, हनीमून पर भी नहीं जा पाया 6 मार्च 2022 की शाम। कोलकाता के एक बैंक्वेट हॉल में हमारी शादी की पार्टी चल रही थी। मेहमानों की भीड़ थी। सभी बधाइयां दे रहे थे, फोटो खिंचवा रहे थे। कोई लिफाफा दे रहा था, तो कोई गिफ्ट। सामने पूरा परिवार, रिश्तेदार और दोस्त गानों की धुन पर झूम रहे थे। इसी बीच, मेरे पेट में तेज दर्द उठा। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें… 2- सिर से जुड़ीं दो बहनें अब अलग नहीं होना चाहतीं: सलमान खान ने बहन बनाया, इलाज का वादा किया, अब फोन तक नहीं उठाते ये हैं सबा और फरहा। उम्र 24 साल। दोनों का जन्म एक दिन, एक समय और एक ही मां की कोख से हुआ, सो ये जुड़वां कहलाती हैं। लेकिन… इनके जिस्म अलग-अलग नहीं, सिर से आपस में जुड़े हैं। वो भी इस तरह कि दोनों एक दूसरे को देख नहीं सकतीं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 31 Jul 2026 4:50 am

यूक्रेन के कार्यवाहक विदेश मंत्री ने जयशंकर से की बात, रूस की आक्रामकता और युद्ध के वैश्विक प्रभावों पर चर्चा

यूक्रेन के कार्यवाहक विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से फोन पर बात की। इस चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की और यूक्रेन में जारी युद्ध के वैश्विक प्रभावों पर विचार साझा किए।

देशबन्धु 31 Jul 2026 3:40 am

फिलीपींस में सेना से मुठभेड़ में एनपीए के दो सदस्‍यों की मौत, आईईडी में इस्‍तेमाल होने वाला सामान जब्‍त

मध्य फिलीपींस के ओरिएंटल मिंडोरो प्रांत में फिलीपीन सेना के जवानों के साथ मुठभेड़ में दो कथित न्यू पीपुल्स आर्मी (एनपीए) सदस्यों की मौत हो गई। वहीं एक सदस्‍य को गिरफ्तार कर लिया गया।

देशबन्धु 31 Jul 2026 2:50 am

चीन ने थ्येनल्येन-3 01 उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया

चीन ने 29 जुलाई को थ्येनल्येन-3 01 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। शाम 7 बजकर 50 मिनट पर चीन ने वनछांग अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से लांग मार्च-7ए वाहक रॉकेट के जरिए इस उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा

देशबन्धु 31 Jul 2026 2:40 am

जापान भूकंप: कुमामोटो में 34 लोगों ने गंवाई जान, नौ मामलों में मौत की असली वजह की जांच जारी

जापान के कुमामोटो प्रीफेक्चर भूकंप हादसे के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। हालांक‍ि, मामले की जांच चल रही है क‍ि इन मौतों का सीधा संबंध रिक्टर स्केल पर 7.1 तीव्रता वाले भूकंप से था या नहीं। प्रीफेक्चरल डिजास्टर रिस्पॉन्स हेडक्वार्टर के अनुसार, इनमें नौ मामलों की जांच चल रही है।

देशबन्धु 31 Jul 2026 1:50 am

क्या ईरान को घेरने की ट्रंप की जिद में भारत को भी चुकानी पड़ेगी बड़ी कीमत?

वैश्विक कूटनीति के मंच पर एक बार फिर बड़ा भूचाल आता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए इस बार सैन्य मिसाइलों के बजाय 'टैरिफ' को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने का संकेत दिया है। सीधे तौर पर सेना भेजने या हवाई हमलों के बजाय ट्रंप प्रशासन का ध्यान अब ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने पर केंद्रित है। लेकिन इस कड़े फैसले की गूंज सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर भारत और चीन जैसे बड़े एशियाई देशों पर पड़ता दिख रहा है।मिसाइल की जगह 'टैरिफ वार' का पैंतरासैन्य संघर्ष में होने वाले भारी नुकसान से बचने के लिए अमेरिका अब 'सेकेंडरी प्रतिबंधों' और भारी आयात शुल्क (टैरिफ) की रणनीति पर काम कर रहा है। रणनीति बेहद साफ है: जो भी देश या विदेशी कंपनियां ईरान के साथ व्यापार करेंगी या वहां से कच्चा तेल खरीदेंगी, अमेरिका उन पर भारी पेनल्टी और टैरिफ लगाएगा। इसका मकसद ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजर से पूरी तरह से अलग-थलग करना है, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को मिलने वाला रेवेन्यू रुक जाए।निशाने पर भारत और चीन क्यों?ट्रंप की इस सख्त नीति के केंद्र में सीधे तौर पर चीन और भारत आते हैं। चीन वर्तमान में ईरान के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापारिक लेनदेन होता है। अगर अमेरिका ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो अमेरिकी बाजार में चीनी सामान और महंगा हो जाएगा, जिससे बीजिंग की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा।दूसरी तरफ भारत के लिए भी यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। भारत भले ही अमेरिकी दबाव के बाद ईरान से तेल का आयात कम कर चुका हो, लेकिन चाबहार पोर्ट जैसी सामरिक परियोजनाओं और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए ईरान के साथ भारत के रिश्ते बेहद अहम हैं। यदि अमेरिका ईरान के साथ हर तरह के आर्थिक संबंधों पर सख्ती बरतता है, तो भारत को अपने कूटनीतिक संतुलन और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?अगर यह आर्थिक युद्ध इसी दिशा में आगे बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि ट्रंप के इस कड़े फैसले के सामने भारत और चीन अपनी-अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को बचाते हुए किस तरह का कूटनीतिक रुख अपनाते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 11:06 pm

नेपाल में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ा बवाल: उपद्रव में युवक की मौत, भारत सीमा से सटे 3 जिलों में लगा कर्फ्यू

पड़ोसी देश नेपाल में सावन के पवित्र महीने में निकाली जा रही कांवड़ यात्रा के दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी। दो समुदायों/गुटों के बीच शुरू हुई कहासुनी ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया, जिसके बाद इलाके में पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। इस दुखद उपद्रव में एक स्थानीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है।भारत सीमा से सटे 3 जिलों में लागू हुआ कर्फ्यूयुवक की मौत की खबर फैलते ही आक्रोशित भीड़ सड़कों पर उतर आई और स्थिति बेकाबू होने लगी। बिगड़े हालात और कानून-व्यवस्था को काबू में करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारत-नेपाल सीमा से सटे 3 संवेदनशील जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है। कर्फ्यू लागू होने के बाद सुरक्षा बलों ने सड़कों पर फ्लैग मार्च निकाला है और लोगों से घरों के भीतर रहने की अपील की जा रही है।भारत-नेपाल बॉर्डर पर बढ़ाई गई चौकसीसीमावर्ती जिलों में कर्फ्यू लागू होने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सीमा सुरक्षा बल (SSB) को भी अलर्ट मोड पर रख दिया गया है।सघन चेकिंग: सीमा पार से आवाजाही करने वाले लोगों की कड़ी तलाशी और पहचान पत्र की जांच की जा रही है।अतिरिक्त बल की तैनाती: किसी भी अप्रिय घटना या असामाजिक तत्वों की घुसपैठ को रोकने के लिए सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।प्रशासनिक सतर्कता: दोनों देशों के सीमावर्ती अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है ताकि शांति व्यवस्था बनाए रखी जा सके।नेपाली पुलिस के अनुसार, उपद्रव में शामिल उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी आंशिक रूप से पाबंदी लगाई गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 10:13 pm

'धमकी देते हो…' खड़गे के बयान पर सदन में हंगामा:एंटी पेपर लीक बिल पर बहस, 'मनुस्मृति' को लेकर बयान पर सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों में हंगामा और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। खड़गे ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी जा रही है। बाद में उनके 'मनुस्मृति' संबंधी बयान पर हंगामा हुआ और सभापति ने टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए। वहीं, लोकसभा में राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। सुबह 11 बजे राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई। दोपहर 2 बजे कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया। विधेयक पर चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में भर्ती परीक्षाओं के लिए यूपीएससी, एसएससी, आईबीपीएस और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए एनटीए जैसी प्रमुख एजेंसियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा एजेंसी बनाने का सुझाव 1992 में आया था। एनडीए सरकार, यूपीए का अधूरा काम पूरा कर रही है। नेता प्रतिपक्ष खड़गे चर्चा में शामिल हुए। आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी जा रही है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि एक दिन संबंधित सदस्य को कमरे से बाहर खींचकर लाएंगे। इस टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। खड़गे बोले- शिक्षण संस्थानों में आरएसएस का दखल इसके बाद खड़गे ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों में आरएसएस का दखल बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 'मनुस्मृति' मानने वालों की संख्या बढ़ने से शूद्रों का पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। नड्‌डा ने कहा- खड़गे का बयान तथ्यों से परे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे का बयान तथ्यों से परे है और इससे अशांति फैल सकती है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 'मनुस्मृति' संबंधी टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए। खड़गे ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कानून तो बना दिया, लेकिन उसे रोकने की व्यवस्था क्या की गई, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था, तब धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया। सरकार जो कहती है, उसका उल्टा करती है। अगर शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आगे भी पेपर लीक की घटनाएं होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन अब तक किसी को सजा नहीं मिली। 2024 के पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों को क्लीनचिट मिल गई। लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण कुछ ही देर में दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसदों की मांग थी कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह माफी मांगें। दोपहर 2 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन संध्या राय ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। इस दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही फिर 3 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। साढ़े 3 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। सरकार ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया, जिस पर चर्चा हुई। सांसद संबित पात्रा ने कहा- गांधी परिवार की सरकारों ने गांधी परिवार को तो ऊपर रखा, लेकिन वंदे मातरम् को ऊपर नहीं रखा।वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 30 Jul 2026 9:31 pm

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चुनाव: तनाव कम करने की कोशिश या नई चुनौती?

आरक्षित सीटों के मुद्दे पर कई हफ्तों तक चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चुनाव हो रहा है. एक स्थानीय संगठन ने इन चुनावों के बहिष्कार की मांग की है

देशबन्धु 30 Jul 2026 9:00 pm

प्राइड परेड के साथ बर्लिन के जीवन मूल्यों पर हमला हुआ है

लोगों का कहना है बर्लिन के प्राइड फेस्टिवल पर हमला इस शहर और उन सारे मूल्यों पर हमला है जिनके लिए बर्लिन मुस्तैदी से डटा है. इसकी विविधता, इसकी उदारता और आजादी में भरोसा, इन सब पर हमला हुआ है

देशबन्धु 30 Jul 2026 8:59 pm

आज का एक्सप्लेनर:संसद पहुंचा वास्तेगुना-हुइंया और कुचु-पुचु; 56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा अचानक जेन-जी की भाषा क्यों बोलने लगी

56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा में इन दिनों 14 से 29 साल वाली जेन-जी के स्लैंग गूंज रहे हैं। कोई सांसद ‘वास्तेगुना-हुइंया’ और ‘कुच्चु-पुच्चु’ बोल रहा, तो किसी के भाषण में ‘डेलुलू’ और ‘क्लॉक्ड इट’ का इस्तेमाल हुआ। आखिर इन शब्दों के मतलब क्या हैं और जेन-जी के स्लैंग संसद क्यों पहुंच गए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: जेन-जी के कौन से स्लैंग संसद में गूंजे?जवाबः मानसून सत्र में एंटी-पेपर लीक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में ये 6 स्लैंग चर्चा में आए… 1. MIA 2. FOMO 3. DELULU 4. VASTEGUNA HUIYA 5. KUCHU-PUCHU 6. CLOCKED IT सवाल-2: जेन-जी के कुछ और मशहूर स्लैंग कौन से हैं?जवाबः सवाल-3: इंस्टाग्राम और स्नैपचैट से निकलकर संसद क्यों पहुंचे ये स्लैंग?जवाबः 3 वजहें हैं…1. कॉकरोच जनता पार्टी का सुपरहिट मूवमेंट 2. मौजूदा राजनीति में जेन-जी का असर 3. 2029 में जेन-जी सबसे बड़ा वोटर ग्रुप सवाल-4: क्या पहले भी संसद ऐसे मशहूर शब्दों या मुहावरों को अपनाती रही है?जवाबः हां, इसके कुछ उदाहरण देखिए… 1. 'हाउ इज द जोश?’ 2. ‘जय हो’ फिल्म स्लमडॉग मिलिनेयर में ए. आर. रहमान के इस गाने को 2009 में ऑस्कर मिला। कांग्रेस ने तब लोकसभा चुनाव के दौरान इसका खूब इस्तेमाल किया था। अक्सर राजनीतिक रैलियों में इसकी धुन बजती है। 3. ‘खेला होबे’ सवाल-5: संसद में ऐसे स्लैंग के इस्तेमाल पर जेन-जी क्या सोचते हैं?जवाबः जेन-जी मोटे तौर पर दो बातें कह रहे हैं… 1. हमारे स्लैंग गलत संदर्भ में इस्तेमाल हो रहे ‘Delulu का इस्तेमाल हम ज्यादातर पॉजिटिव तरीके से करते हैं, जैसे किसी फैंटेसी में होना। हम ‘Delulu is Solulu’ भी बोलते हैं, जिसका मतलब है- खुद को जानबूझकर पॉजिटिव डेल्यूजन में रखना, ताकि वो सपने पूरे हो जाएं। नेता Delulu जैसे कई स्लैंग गलत संदर्भ में इस्तेमाल कर रहे, इसलिए हम उनसे कनेक्ट नहीं हो सकते।’ 2. हमको कॉपी करने के बजाय अपने काम पर ध्यान दें ‘इस कॉपीकैट से जेन-जी पर कोई अच्छा असर नहीं पड़ने वाला। इसके बजाय नेता अपने काम पर ध्यान दें। हमारे लिए बेहतर मौके बनाएंगे, तो हमें ज्यादा खुशी होगी।’ ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो 6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 30 Jul 2026 6:09 pm

वाह रे पाकिस्तान! एक तरफ शांति दूत बनने का ढोंग, तो दूसरी तरफ चोरी-छिपे ईरान को पहुंचा रहा चीनी हथियार

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सुलग रही जंग के बीच पाकिस्तान का एक बार फिर बेहद दोगला और खतरनाक चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अमेरिका को खुश करने के लिए दोनों देशों के बीच शांति मध्यस्थ बनने का नाटक कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से वह ईरान को चीनी हथियार पहुंचाने के गुप्त खेल में जुटा हुआ है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान और चीन की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।अमेरिका-ईरान जंग के बीच पाकिस्तान का खतरनाक डबल गेमवर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले चुका है। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर बड़ा पलटवार किया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान खुद को एक तटस्थ और जिम्मेदार देश के रूप में पेश करते हुए शांति समझौते की मध्यस्थता कराने का दावा कर रहा था। लेकिन रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान के इस नकाब को पूरी तरह से उतार कर रख दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल करके चीन के अत्याधुनिक हथियार चोरी-छिपे ईरान तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे अमेरिका का नाराज होना लाजिमी है।क्या है चीन और ईरान के बीच हथियारों की इस सीक्रेट डील का सच?सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अपनी सैन्य ताकत और एयर डिफेंस सिस्टम को अचूक बनाने के लिए चीन से भारी मात्रा में हथियार खरीद रहा है। इस गुप्त डील के तहत ईरान लगभग 300 से 400 'मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम' (MANPADS) हासिल कर रहा है, जिसकी कुल कीमत करीब 60 से 70 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में 500 से 580 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पूरी रक्षा डील में चीन की अत्याधुनिक QW-12 और FN-16 शोल्डर-फायर्ड मिसाइलें शामिल हैं, जो ईरानी सेना को अमेरिकी हमलों और मिसाइलों का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम बना सकती हैं।कैसे अंजाम दिया जा रहा है हथियारों की इस तस्करी का खेल?खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन और ईरान के बीच हो रही इस हथियारों की सप्लाई का ट्रांजिट रूट पाकिस्तान से होकर गुजर रहा है। योजना के तहत चीन के पश्चिमी हिस्से यानी उरुमकी से हथियारों की यह खेप सबसे पहले पाकिस्तान पहुंचती है। इसके बाद पाकिस्तानी सैन्य और साजो-सामान के नेटवर्क की आड़ में इन घातक हथियारों को सड़क या हवाई मार्ग के जरिए सुरक्षित रूप से ईरान की सीमा तक पहुंचा दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और सैन्य तंत्र की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी और नाराजगीओवल ऑफिस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर गहरी हैरानी और नाराजगी जाहिर की है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे वादा किया था कि चीन ईरान को किसी भी प्रकार की हथियार सप्लाई नहीं करेगा। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि यह खबर सच साबित होती है, तो इससे उन्हें और अमेरिका को बेहद निराशा होगी, और आने वाले कूटनीतिक बैठकों में इस पर कड़ा रुख अपनाया जा सकता है। उधर, इस बड़े खुलासे के बाद से पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR और चीनी विदेश मंत्रालय ने इन तमाम रिपोर्टों को सिरे से खारिज करते हुए लीपापोती शुरू कर दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 5:04 pm

जापान में महाप्रलय का खतरा! टोक्यो से अलग देश की दूसरी राजधानी बनाने की तैयारी, संसद में पास हुआ नया कानून

दशकों से भीषण भूकंपों और प्राकृतिक आपदाओं के साये में जी रहे जापान ने भविष्य के किसी बड़े खतरे से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। जापान सरकार ने देश की मौजूदा राजधानी टोक्यो के अलावा एक 'बैकअप कैपिटल' यानी दूसरी वैकल्पिक राजधानी स्थापित करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जापानी संसद ने जुलाई में एक नया कानून भी पारित कर दिया है, ताकि आपातकाल के दौरान देश की सत्ता और व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, इस फैसले को लेकर देश की राजनीति में तीखा विरोध और घमासान भी शुरू हो गया है।क्यों पड़ी जापान को दूसरी राजधानी बनाने की जरूरत?ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए कानून को लाने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में किसी भीषण भूकंप की वजह से टोक्यो पूरी तरह तबाह हो जाता है, तब भी देश की शासन व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज में कोई रुकावट न आए। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 30 वर्षों के भीतर टोक्यो महानगर क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक तीव्रता का एक महाप्रलयकारी भूकंप आ सकता है। यदि ऐसा होता है, तो जापान का प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद भवन, तमाम केंद्रीय मंत्रालय और देश के मुख्य आर्थिक संस्थान एक ही झटके में पूरी तरह ठप हो सकते हैं।टोक्यो पर है देश की अर्थव्यवस्था और आबादी का सबसे बड़ा बोझवर्तमान समय में पूरे जापान देश का आर्थिक और प्रशासनिक भार अकेले टोक्यो पर टिका हुआ है। देश की 30 प्रतिशत से अधिक आबादी इसी क्षेत्र में निवास करती है, जबकि जापान की कुल जीडीपी का लगभग पांचवां हिस्सा अकेले टोक्यो से ही आता है। इसके अलावा, देश की 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां भी यहीं से संचालित होती हैं। सरकार का मानना है कि दूसरी राजधानी बन जाने से न केवल देश को प्राकृतिक आपदाओं के वक्त सुरक्षा कवच मिलेगा, बल्कि टोक्यो के बाहर के अन्य क्षेत्रीय शहरों में भी रोजगार, निवेश और समग्र विकास तेजी से पहुंचेगा।कौन-से शहर हैं बैकअप कैपिटल की रेस में शामिल?जापानी संसद द्वारा पारित किए गए नए कानून में अभी किसी एक निश्चित शहर का नाम फाइनल नहीं किया गया है। इसके बजाय देश के विभिन्न राज्यों को इसके लिए आवेदन करने की पूरी छूट दी गई है, हालांकि इस पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री द्वारा लगाई जाएगी। इस रेस में आईची, ओसाका, फुकुओका, होक्काइडो और मियागी जैसे प्रमुख राज्यों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। सरकार की तरफ से यह शर्त रखी गई है कि चुने जाने वाले वैकल्पिक शहर में टोक्यो के साथ एक ही समय में भूकंप आने का जोखिम न्यूनतम होना चाहिए और वहां प्रशासनिक व आर्थिक बुनियादी ढांचा पहले से ही मजबूत स्थिति में होना चाहिए।क्यों छिड़ गया है जापान की राजनीति में सियासी संग्राम?भले ही राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से यह योजना बेहद जरूरी लग रही हो, लेकिन जापान के राजनीतिक गलियारों में इस पर भारी घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दलों का कड़ा आरोप है कि यह बिल प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की गठबंधन सरकार की सहयोगी पार्टी 'जापान इनोवेशन पार्टी' को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है, क्योंकि ओसाका इस पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इसके साथ ही, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अभी तक इस विशाल परियोजना की कुल लागत और भविष्य के आर्थिक फायदों का कोई स्पष्ट आंकड़ा जनता के सामने नहीं रखा है, जिससे देश के सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 5:01 pm

बलूचिस्तान में BLA का खूनी तांडव: अगवा किए गए 6 मजदूरों की निर्मम हत्या, चीनी प्रोजेक्ट्स पर मंडराया बड़ा खतरा

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में आतंकवाद का एक बेहद खौफनाक चेहरा सामने आया है। तुर्बत के पास केच जिले में कुछ दिन पहले अगवा किए गए छह निर्दोष मजदूरों के शव बरामद होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सुरक्षा बलों ने इस जघन्य हत्याकांड के लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) को जिम्मेदार ठहराया है। इस खूनी खेल के बाद से क्षेत्र में काम कर रहे अन्य श्रमिकों और विकास परियोजनाओं से जुड़े लोगों के बीच भारी दहशत का माहौल पैदा हो गया है।क्या है पूरा मामला और कैसे दिया गया वारदात को अंजामसुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह खूनी सिलसिला 27 जुलाई को केच जिले के क्लाटुक इलाके से शुरू हुआ था। भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह ने विकास कार्यों में लगे मजदूरों के काफिले को बलपूर्वक रोक लिया। इस दौरान आतंकवादियों ने खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी जिले के रहने वाले जावेद नामक मजदूर की मौके पर ही गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद आंतकवादी छह अन्य मजदूरों को जबरन अगवा करके किसी अज्ञात ठिकाने पर ले गए थे। कई दिनों की तलाश के बाद आखिरकार तुर्बत के एक सुनसान और दूरदराज इलाके से इन सभी छह बंधक मजदूरों के शव बरामद किए गए। शवों की गंभीर हालत को देखकर साफ पता चलता है कि आतंकवादियों ने उन्हें बेहद बेदर्दी से मौत के घाट उतारा था। सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मारे गए इन मजदूरों में पंजाब प्रांत के चार और खैबर पख्तूनख्वा के दो मजदूर शामिल थे, जो बलूचिस्तान में विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे।BLए की रणनीति में खतरनाक बदलाव, चीनी परियोजनाओं को निशानाखुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, इस हमले को बलूच लिबरेशन आर्मी की ऑपरेशनल रणनीति में एक बड़े और खतरनाक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अतीत में यह संगठन मुख्य रूप से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सैन्य चौकियों को अपना निशाना बनाता था, लेकिन अब इसने अपनी रणनीति बदलते हुए चीनी निवेश, माइनिंग ऑपरेशंस और खनिज विकास से जुड़ी परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और यहां तक कि स्थानीय नागरिकों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। संगठन का मुख्य उद्देश्य इन आर्थिक और ढांचागत परियोजनाओं को पूरी तरह से ठप करना और क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मन में गहरा खौफ पैदा करना है।स्थानीय और बाहरी मजदूरों के लिए सीधी चेतावनीआतंकी संगठन BLA ने अपनी धमकियों में साफ कर दिया है कि चीन के सहयोग से चल रही किसी भी परियोजना, खदान या खनिज स्थल के आसपास काम करने वाले लोग तुरंत उन जगहों को छोड़ दें। यह खुली चेतावनी केवल दूसरे प्रांतों से रोजी-रोटी कमाने आए मजदूरों के लिए ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी और चीनी विकास परियोजनाओं से जुड़े स्थानीय मजदूरों, इंजीनियरों, अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए भी जारी की गई है। जानकारों का मानना है कि इन सुनियोजित हमलों के जरिए आतंकवादी बलूचिस्तान में चल रही आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचना चाहते हैं।पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी खौफनाक घटनाएंतुर्बत की यह घटना कोई पहली या अकेली वारदात नहीं है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस घटना से ठीक पहले मश्केल इलाके में हुए एक अन्य हमले में कम से कम पांच और मजदूरों की जान चली गई थी। ये लगातार होती घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में आतंकवादियों द्वारा हिंसा का एक सुनियोजित पैटर्न चलाया जा रहा है। कुछ हफ्ते पहले ही मस्तुंग जिले में हुए एक बड़े हमले की जिम्मेदारी भी BLA ने ली थी, जिसमें दर्जनों पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया था। बहरहाल, इन ताजा हत्याओं के बाद से बलूचिस्तान में काम कर रहे कामगारों की सुरक्षा एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल बन गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 4:59 pm

अमेरिका ने विदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट पर लगाई रोक, चीन को बड़ा झटका; राष्ट्रीय सुरक्षा और AI वर्चस्व पर बढ़ी टकराव की आशंका

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि महत्वपूर्ण सेवाओं और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों द्वारा विकसित रोबोट का बढ़ता उपयोग भविष्य में सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। सरकार को आशंका है कि यदि किसी भू-राजनीतिक तनाव या आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधान की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इन रोबोटों की उपलब्धता और संचालन प्रभावित हो सकता है।

देशबन्धु 30 Jul 2026 1:39 pm

ट्रंप से मिलते ही भड़के पुतिन: कीव पर बरसाए घातक 'अग्निबाण', यूक्रेन का अमेरिकी F-16 फाइटर जेट भी हुआ तबाह

यूक्रेन और रूस के बीच जारी भीषण युद्ध में एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा मोड़ आ गया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक बेहद अहम रणनीतिक मुलाकात कर वापस लौटे ही थे कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर अब तक का सबसे भीषण मिसाइल हमला बोल दिया। इस हवाई हमले में रूस ने कीव को दहलाने के साथ-साथ यूक्रेन की वायुसेना को सबसे बड़ा घाव दिया है, जहां युद्ध में गेमचेंजर माने जा रहे अमेरिकी मूल के एडवांस F-16 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया गया है।ट्रंप-जेलेंस्की की मुलाकात के तुरंत बाद रूस का भीषण पलटवारवैश्विक कूटनीति के गलियारों में इस हमले के समय को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ जेलेंस्की की इस बैठक पर मॉस्को की पैनी नजर थी। जैसे ही जेलेंस्की अपनी इस यात्रा से वापस लौटे, रूसी सेना ने बिना कोई वक्त गंवाए यूक्रेन के प्रमुख सैन्य ठिकानों और हवाई पट्टियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कीव के आसमान में एक के बाद एक कई रूसी हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलें गरजती हुई दिखाई दीं, जिसे स्थानीय रक्षा विशेषज्ञों ने पुतिन की तरफ से अमेरिका और यूक्रेन के नए गठजोड़ को दिया गया सीधा और आक्रामक संदेश बताया है।यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को तगड़ा झटका, अमेरिकी F-16 फाइटर जेट जमींदोजइस पूरे हमले की सबसे बड़ी और नुकसानदेह खबर यूक्रेन के लिए उसके F-16 लड़ाकू विमान का क्रैश होना रही। पश्चिमी देशों और अमेरिका से काफी मिन्नतें करने के बाद यूक्रेन को मिले इन आधुनिक लड़ाकू विमानों से उसे हवाई क्षेत्र में काफी बढ़त मिलने की उम्मीद थी। रूसी रक्षा मंत्रालय के करीबी सूत्रों और सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, इस भीषण हवाई हमले और एयर डिफेंस के जाल में फंसकर यूक्रेन का एक F-16 पूरी तरह तबाह हो गया। यह नुकसान यूक्रेन की वायुसेना के मनोबल पर एक बड़ा आघात माना जा रहा है, क्योंकि इन विमानों की खेप बेहद सीमित है।युद्ध के मोर्चे पर अब आगे क्या होगा, दुनिया भर के देशों में बढ़ी चिंताइस बड़े सैन्य घटनाक्रम के बाद अब पूर्वी यूरोप में युद्ध की आग और ज्यादा भड़कने की आशंका गहरा गई है। अमेरिका में सत्ता के समीकरणों के बीच पुतिन का यह आक्रामक रुख साफ दिखाता है कि रूस किसी भी तरह के दबाव में पीछे हटने को तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर, जेलेंस्की ने इस भारी नुकसान के बाद अपने पश्चिमी सहयोगियों से और अधिक एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों की मांग तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि वाशिंगटन इस बड़े नुकसान और पुतिन की खुली चुनौती पर क्या रणनीतिक कदम उठाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 12:48 pm

कैटी पेरी को सनस्क्रीन लगाते दिखे कनाडा के Ex PM जस्टिन ट्रूडो? सोशल मीडिया पर रोमांटिक तस्वीरों ने मचाई भारी हलचल

हॉलीवुड की मशहूर पॉप स्टार कैटी पेरी और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कुछ बेहद चौंकाने वाली तस्वीरें इस वक्त इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन वायरल तस्वीरों में जस्टिन ट्रूडो समंदर किनारे कैटी पेरी की पीठ पर सनस्क्रीन लगाते हुए नजर आ रहे हैं। दोनों के बीच की यह खास और रोमांटिक बॉन्डिंग सोशल मीडिया पर आते ही टॉक ऑफ द टाउन बन गई है और लोग दोनों के रिश्तों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाने लगे हैं।वायरल तस्वीरों के पीछे की क्या है असली कहानीतस्वीरें सामने आते ही नेटिजन्स के बीच बहस का दौर शुरू हो गया है। समंदर के खूबसूरत बैकड्रॉप में क्लिक की गई इन फोटोज में दोनों ही बेहद रिलैक्स और एक-दूसरे के करीब दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन तस्वीरों के सोशल मीडिया पर छाने के बाद कई तकनीकी और मीडिया एक्सपर्ट्स ने इस पर अपनी राय दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है, जहां डीपफेक और एआई-जनरेटेड इमेज (AI Generated Pics) के जरिए किसी भी नामचीन हस्ती को किसी के भी साथ फ्रेम में दिखाया जा सकता है। ऐसे में कई लोग इसे एआई का कमाल भी बता रहे हैं, जिसने पहली नजर में सबको धोखा दे दिया।फैंस और नेटिजन्स का रिएक्शन और कमेंट्स की बाढ़जस्टिन ट्रूडो अपनी पर्सनल लाइफ और लुक्स को लेकर हमेशा से ही सुर्खियों में रहे हैं, वहीं कैटी पेरी की दुनिया भर में तगड़ी फैन फॉलोइंग है। जैसे ही ये तस्वीरें एक्स (पहले ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर वायरल हुईं, फैंस ने इस पर मजेदार मीम्स और कमेंट्स की बौछार कर दी। कुछ यूजर्स ने इसे साल का सबसे बड़ा सरप्राइज अफेयर बताया, तो वहीं ज्यादातर समझदार यूजर्स ने इसे फेक बताते हुए साझा न करने की सलाह दी। फिलहाल दोनों ही स्टार्स की तरफ से इन वायरल हो रही तस्वीरों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।सेलिब्रिटीज और राजनेताओं के फेक एआई कंटेंट्स का बढ़ता खतराइस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर इंटरनेट पर डीपफेक और एआई की मदद से बनने वाली भ्रामक तस्वीरों के खतरे को उजागर कर दिया है। पिछले कुछ समय में वैश्विक नेताओं से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड के बड़े कलाकारों की ऐसी कई फर्जी तस्वीरें और वीडियो सामने आ चुके हैं, जो हूबहू असली जैसे लगते हैं। यही वजह है कि गूगल डिस्कवर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब ऐसी एआई जनरेटेड तस्वीरों को लेकर बेहद सख्त नीतियां अपना रहे हैं ताकि यूजर्स तक सिर्फ सही और प्रामाणिक जानकारी ही पहुंच सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 12:46 pm

चीन-ईरान डिफेंस डील से हड़कंप: अमेरिका ने तुरंत लिया बड़ा एक्शन, पाकिस्तान भी रडार पर

मिडल ईस्ट में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर तेजी से बदलते दिख रहे हैं। चीन द्वारा ईरान को आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम सप्लाई करने की खबर सामने आते ही वैश्विक महाशक्तियों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस रणनीतिक कदम से भड़के अमेरिका ने बिना वक्त गंवाए बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीजिंग और तेहरान के बीच हो रही इस बड़ी सैन्य डील की आंच भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान तक भी पहुंच गई है, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने अपने रडार पर ले लिया है।चीन और ईरान के बीच इस बड़ी सैन्य डील के क्या हैं मायनेरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी मिडल ईस्ट में अमेरिकी और इजरायली प्रभाव को सीधे तौर पर चुनौती देने की एक बड़ी कोशिश है। चीन द्वारा ईरान को दिए जा रहे उन्नत एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम से ईरानी हवाई क्षेत्र की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी। इस खबर के सार्वजनिक होते ही वॉशिंगटन के नीति निर्माताओं में खलबली मच गई। अमेरिका ने इसे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए चीन और ईरान से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ तत्काल कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।इस डिफेंस डील की आंच में पाकिस्तान कैसे आया अमेरिकी रडार परइस पूरे मामले में पाकिस्तान का नाम जुड़ने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। खुफिया रिपोर्टों और वैश्विक विश्लेषकों का दावा है कि चीन द्वारा ईरान को भेजे जा रहे सैन्य उपकरणों, कलपुर्जों या तकनीकी ट्रांसफर के लिए पाकिस्तानी जमीन, बंदरगाहों या कुछ संदिग्ध लॉजिस्टिक कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने का अंदेशा है। अमेरिका ने हाल के दिनों में पाकिस्तान की कई कंपनियों पर मिसाइल और सैन्य प्रोग्राम में मदद करने के आरोप में प्रतिबंध लगाए हैं। इस ताजा घटनाक्रम के बाद अमेरिकी जांच एजेंसियां इस्लामाबाद की हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं।वैश्विक प्रतिबंधों का खतरा और एशिया-मिडल ईस्ट पर इसका बड़ा असरबीजिंग, तेहरान और इस्लामाबाद के इस कथित सैन्य त्रिकोण पर अमेरिका की पैनी नजर से आने वाले दिनों में कड़े प्रतिबंधों का एक नया दौर शुरू हो सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर पाकिस्तान की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उस पर अमेरिकी आर्थिक मदद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले फंड को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। वहीं, भारत के दृष्टिकोण से भी यह बेहद संवेदनशील मामला है, क्योंकि पश्चिमी सीमा पर चीनी दखल का बढ़ना और मिडल ईस्ट में अस्थिरता का सीधा असर दक्षिण एशियाई सुरक्षा और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर पड़ेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 12:44 pm