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इजरायल का 'किलिंग मिशन' फेल: ईरान के बड़े नेताओं पर मंडराया था खतरा, अमेरिका ने कैसे पलटी बाजी

मध्य-पूर्व में तनाव का पारा एक बार फिर तब आसमान छू गया जब ईरान के दो बड़े चेहरों, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ की जान पर बन आई। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने इन दोनों हस्तियों को निशाना बनाने के लिए अपने फाइटर जेट्स को पूरी तरह तैयार कर लिया था और ऑपरेशन के लिए 'ग्रीन सिग्नल' का इंतजार किया जा रहा था। हालांकि, ठीक वक्त पर अमेरिका की सक्रियता ने इस संभावित कत्लेआम को रोक लिया और एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की चिंगारी को बुझा दिया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच पर्दे के पीछे का खेल कितना जटिल और खतरनाक है।इजरायल का प्लान और अमेरिका का 'सेफगार्ड'सूत्रों के मुताबिक, इजरायल का खुफिया तंत्र इन दोनों ईरानी नेताओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए था। जैसे ही वे एक संवेदनशील मिशन पर निकले, इजरायली वायुसेना के फाइटर जेट्स ने उड़ान भर ली थी। बताया जा रहा है कि इजरायल ने इस हमले को अंजाम देने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन अमेरिका को इसकी भनक लग गई। बाइडन प्रशासन, जो पहले से ही क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए दबाव में है, ने इस संभावित हमले को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। अमेरिका ने न केवल अपने खुफिया चैनलों का इस्तेमाल किया, बल्कि इजरायल पर सीधा कूटनीतिक दबाव भी बनाया ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए।पर्दे के पीछे की कूटनीति और भविष्य का खतराअमेरिका का ईरान के इन नेताओं को बचाना महज एक मानवीय फैसला नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरा भू-राजनीतिक स्वार्थ भी छिपा है। वाशिंगटन को डर था कि अगर इजरायल इन हाई-प्रोफाइल नेताओं को मार गिराता है, तो ईरान का जवाब इतना भीषण होगा कि पूरा खाड़ी क्षेत्र युद्ध की आग में जल उठेगा, जिससे दुनिया भर में तेल की आपूर्ति और वैश्विक शांति खतरे में पड़ सकती थी। हालांकि यह संकट अभी टल गया है, लेकिन इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती यह दुश्मनी किसी भी वक्त एक बड़े धमाके का रूप ले सकती है। तेहरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने मध्य-पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 3 Jul 2026 1:56 pm

पाकिस्तान में बड़ा सड़क हादसा: खाई में गिरी अनियंत्रित बस, 40 यात्रियों की दर्दनाक मौत से मचा कोहराम

पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक भीषण सड़क हादसे ने दर्जनों परिवारों को मातम में डूबो दिया है। जानकारी के अनुसार, यात्रियों से खचाखच भरी एक ओवरलोडेड बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा इतना भयानक था कि बस के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही 40 लोगों ने दम तोड़ दिया। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग फौरन बचाव कार्य के लिए दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घटना स्थल की तस्वीरें विचलित कर देने वाली हैं, जहां बचाव दल कड़ी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकालने में जुटा है।खस्ताहाल सड़कें और ओवरलोडिंग बनी कालशुरुआती जांच में इस हादसे के पीछे बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। बस न केवल क्षमता से अधिक ओवरलोडेड थी, बल्कि जिस रास्ते से यह गुजर रही थी, वहां की सड़कें भी बेहद संकरी और खतरनाक हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चालक ने एक मोड़ पर बस से नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद वाहन सीधे खाई में जा गिरा। स्थानीय प्रशासन और राहत कर्मियों के अनुसार, मृतकों का आंकड़ा अभी और भी बढ़ सकता है, क्योंकि कई यात्री अभी भी मलबे में दबे हो सकते हैं और घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने आपातकाल घोषित कर दिया है।सरकार ने दिए जांच के आदेशइस हृदयविदारक घटना पर आला अधिकारियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस रूट पर अक्सर बसें ओवरलोडिंग करती हैं और प्रशासन की ढिलाई के कारण आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं। फिलहाल, पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा है। बचाव अभियान अभी भी जारी है, और सुरक्षा बलों ने घटनास्थल को पूरी तरह से सील कर दिया है ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 3 Jul 2026 1:55 pm

जमीन के नीचे दबा था मौत का खजाना! खुदाई के दौरान मिली ऐसी चीज कि रातों-रात खाली कराना पड़ा शहर

किसी भी निर्माण कार्य के लिए की जा रही खुदाई जब अचानक खौफ में बदल जाए, तो क्या होगा? कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जब मजदूर अपने नियमित काम में लगे थे कि तभी फावड़े की टक्कर किसी ऐसी चीज से हुई जिसने पूरे प्रशासन के होश उड़ा दिए। यह कोई मामूली खजाना या पुरानी ईंटें नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी 'तबाही' थी जो बरसों से जमीन के सीने में दफन थी। जैसे ही मजदूरों ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी, मौके पर पहुंचे आला अफसरों ने जो देखा, उसके बाद बिना एक पल गंवाए पूरे शहर को खाली करने के आदेश जारी कर दिए गए। अफरा-तफरी का ऐसा माहौल बना कि लोग अपना सब कुछ छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने पर मजबूर हो गए।खतरा इतना बड़ा कि थम गई सांसेंखुदाई के दौरान मिले उस खतरनाक अवशेष ने न केवल इलाके की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया, बल्कि भविष्य में होने वाली एक बड़ी अनहोनी की आहट भी दे दी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इसे समय रहते नहीं पहचाना जाता तो एक बड़ी त्रासदी पूरे शहर को नक्शे से मिटा सकती थी। खुदाई स्थल से निकली वो रहस्यमयी चीज कितनी घातक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बम निरोधक दस्ते और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को अपने घेरे में ले लिया है। फिलहाल, क्षेत्र के सभी रास्तों को सील कर दिया गया है और स्थानीय लोगों को प्रशासन की ओर से सख्त हिदायत दी गई है कि वे उस इलाके के आसपास भी न भटकें।प्रशासन की सख्ती और दहशत में शहरशहर खाली कराने के पीछे प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनहानि को रोकना है। हालांकि, अचानक मिले इस 'खतरे' के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा और डर का मिला-जुला असर है। लोगों का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई पूर्व सूचना नहीं थी और अचानक शहर को उजड़ते देखना बेहद दर्दनाक है। दूसरी ओर, सरकार और पुरातत्व विभाग के अधिकारी इस मामले की गहन जांच में जुट गए हैं कि आखिर वह क्या चीज थी जो जमीन के इतने नीचे दबी हुई थी। क्या यह कोई पुराना बारूद है या फिर कोई प्राकृतिक आपदा का संकेत? फिलहाल, पूरे शहर की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं और लोग इस उम्मीद में हैं कि कब वे अपने घरों में सुरक्षित वापस लौट सकेंगे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 3 Jul 2026 1:54 pm

ईरान-अमेरिका के बीच थमी जंग की आग, पर यूक्रेन में जारी तबाही: जेलेंस्की ने जेल से दी युद्ध जारी रखने की चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव फिलहाल भले ही शांत होता दिख रहा हो, लेकिन पूर्वी यूरोप में रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी संघर्ष ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यूक्रेन पर रूसी सेना का हमला एक बार फिर तेज हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। रूसी मिसाइलों और तोपों की बौछार से यूक्रेन के कई शहर मलबे में तब्दील हो गए हैं। इस भीषण हमले में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को भी चोटें आई हैं, लेकिन उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से ही रूस को करारा जवाब देने की कसम खाई है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का हर एक नागरिक इस अत्याचार के खिलाफ अपनी आखिरी सांस तक लड़ेगा और रूस के इस आक्रामक रवैये का बदला जरूर लिया जाएगा।जेलेंस्की का संकल्प और यूक्रेन की चुनौतीयूक्रेनी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि रूसी हमलों की तीव्रता में भारी इजाफा हुआ है। अस्पतालों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्तब्ध है। हालांकि हमले में घायल होने के बावजूद राष्ट्रपति जेलेंस्की का मनोबल नहीं टूटा है। उन्होंने अपने कमांडरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बचाव के साथ-साथ जवाबी हमले की रणनीति को और अधिक आक्रामक बनाया जाए। उन्होंने वैश्विक नेताओं से तत्काल और अधिक घातक हथियारों की मांग करते हुए कहा है कि यह युद्ध अब केवल यूक्रेन का अस्तित्व बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की जंग बन चुका है।वैश्विक भू-राजनीति पर युद्ध का गहरा असरविश्लेषकों का मानना है कि जहां मध्य-पूर्व में ईरान-अमेरिका के बीच एक अस्थाई शांति बनी है, वहीं यूक्रेन संकट का लंबा खिंचना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। रूस द्वारा लगातार किए जा रहे ये हमले न केवल ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी बुरी तरह बाधित कर रहे हैं। आने वाले दिनों में पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर और अधिक कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की जा सकती है। फिलहाल, यूक्रेन के आसमान में मंडराते रूसी ड्रोन और मिसाइलों के बीच आम जनता का जीवन दांव पर लगा है, और दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि जेलेंस्की का 'बदले का संकल्प' युद्ध की दिशा को क्या नया मोड़ देगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 3 Jul 2026 1:52 pm

पाकिस्तान में दो विदेशी महिलाओं के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, चार गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार, पीड़ित महिलाओं में एक नीदरलैंड (डच) और दूसरी वेनेजुएला की नागरिक हैं। शिकायत में कहा गया है कि दोनों की मुलाकात अक्टूबर 2025 में सिंगापुर में मोहम्मद रजा दार नामक व्यक्ति से हुई थी।

देशबन्धु 3 Jul 2026 12:22 pm

वार्ता के दौरान ईरानी नेताओं पर हमले की आशंका से अमेरिका सतर्क, सहयोगी देशों के जरिए तेहरान को भेजा था संदेश

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को डर था कि यदि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख नेताओं पर हमला हुआ, तो दोनों देशों के बीच जारी वार्ता और संभावित शांति प्रयास गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

देशबन्धु 3 Jul 2026 12:15 pm

‘चीन को कभी पनामा नहर पर कब्जा नहीं करने देंगे’, ट्रंप ने 1999 के समझौते को बताया ऐतिहासिक भूल

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि पनामा को नियंत्रण मिलने के बाद जहाजों से वसूले जाने वाले ट्रांजिट शुल्क में पहले चार गुना वृद्धि की गई और बाद में इसे और बढ़ा दिया गया।

देशबन्धु 3 Jul 2026 10:46 am

वेनेजुएला में भूकंप से हुई तबाही के बाद हालात हो रहे सामान्य, प्रभावित इलाके में मेट्रो और रेल सेवाएं हुई बहाल

वेनेजुएला में पिछले हफ्ते आए भूकंप के बाद धीरे-धीरे हालात स्थिर हो रहे हैं। परिवहन मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, लॉस टेक्स शहर में मास-ट्रांजिट रेल सेवा फिर से शुरू हो गई है

देशबन्धु 3 Jul 2026 9:46 am

ईरान की अमेरिका को चेतावनी, होर्मुज स्ट्रेट में दखल दिया तो मिलेगा करारा जवाब

ईरान की मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने गुरुवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका होर्मुज स्‍ट्रेट में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करता है, तो ईरानी सशस्त्र बल 'तेज और निर्णायक' जवाबी कार्रवाई करेंगे।

देशबन्धु 3 Jul 2026 9:08 am

सीरिया की राजधानी दमिश्क में एक कैफे में भीषण धमाका, 9 लोगों की मौत

सीरिया की राजधानी दमिश्क में एक कैफे में भीषण धमाके में 9 लोगों की जान चली गई है, जबकि 20 लोग घायल हो गए हैं। सीरिया के गृह मंत्रालय की ओर से बीती रात ये जानकारी दी गई कि मध्य दमिश्क के एक कैफे में धमाका हुआ और 9 लोगों की मौत हो गई।

देशबन्धु 3 Jul 2026 8:59 am

अमेरिका में कॉलेज एथलीट्स को टैक्स में राहत देने पर विचार

अमेरिकी सांसदों ने कॉलेज खिलाड़ियों को भारी-भरकम टैक्स के बोझ से बचाने के लिए सुधारों की मांग की है। उनका कहना है कि नेम, इमेज एंड लाइकेनेस (एनआईएल) समझौतों के तेजी से बढ़ते चलन के कारण कई युवा खिलाड़ी पर्याप्त मार्गदर्शन के अभाव में जटिल कर व्यवस्था को समझने और उसका पालन करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

देशबन्धु 3 Jul 2026 8:51 am

अमेरिका: ओहियो के मोटल में लगी भीषण आग, गुजरात के एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत

ओहियो (अमेरिका) के वूस्टर शहर में एक मोटल में लगी आग में गुजरात के एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। यह आग बुधवार देर रात लगी

देशबन्धु 3 Jul 2026 7:20 am

खाला की बेटी से शादी, नतीजा- बेटे को जेनेटिक बीमारी:सभी हड्डियां टेढ़ी हुईं, इलाज में हर साल 4 करोड़ का खर्च

8 साल का जावेद स्कूल के मैदान में क्रिकेट खेलते-खेलते अचानक गिर पड़ा। दोस्तों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं उठा। जमीन पर पड़ा कराहने लगा। टीचर भागते हुए आए, उन्होंने भी उठाने की कोशिश की। वो बार-बार कहता रहा- मेरे घुटने और कोहनियों में बहुत दर्द है। पैर मुड़ ही नहीं रहे। मैं उठ नहीं पाऊंगा। अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाऊंगा। प्लीज, अम्मी-अब्बू को फोन करके बुला दीजिए। घर पर फोन पहुंचते ही उसके अम्मी-अब्बू फौरन स्कूल पहुंचे। जावेद को गोद में उठाया और लेकर अस्पताल भागे। डॉक्टरों ने कुछ दवाइयां देकर घर भेज दिया। बोले- मांसपेशियां खिंच गई होंगी, कुछ दिन में ठीक हो जाएगा। जावेद की हालत हर दिन और खराब होती चली गई। फिर किसी ने मौलवी के पास जाने की सलाह दी। वहां भी लेकर गए। मौलवी ने 10 हजार की तेल की बॉटल थमा दी। कई हफ्तों तक उस तेल से मालिश की, लेकिन जावेद बिस्तर से नहीं उठा। आज इस बात को 18 साल बीत गए हैं, लेकिन जावेद आज तक बेड से उठ नहीं पाया। कूल्हे, कोहनी, घुटने, कलाई जहां-जहां भी जोड़ (ज्चाइंट) थे, वहां-वहां सूजन बढ़ती चली गई। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज- ‘ऐ जिंदगी’ में आज कहानी जावेद की। जिसके लिए मैं नीरज झा पहुंचा हूं गुजरात के अहमदाबाद शहर… जिस जावेद का ऊपर जिक्र किया है, अब उसकी उम्र 26 साल हो चुकी है। जावेद के अब्बू को एक डॉक्टर ने उसका जेनेटिक टेस्ट करवाने की सलाह दी थी। रिपोर्ट में पता चला कि उसे दुर्लभ बीमारी है, जिसका कोई इलाज नहीं है। दरअसल, जावेद के अब्बू की शादी खाला की बेटी से हुई है। करीबी रिश्तों में जब शादियां होती हैं, तो उनके बच्चों में ऐसी बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। इस बीमारी को एंजाइम थेरेपी से थोड़ा ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसका खर्च हर साल 4 करोड़ रुपए है। जब मैं जावेद के घर पहुंचा तो सुबह के 11 बज रहे थे। लाल-दरवाजे के पास एक घर है। यहां दस्तक देते ही एक बुजुर्ग दरवाजा खोलते हैं। वे अपना नाम- मोहम्मद आजी बताते हैं। घर के अंदर जाते ही किसी के कराहने और चीखने की आवाजें आती हैं। मोहम्मद आजी बताते हैं- ये मेरे बेटे जावेद के कराहने की आवाज है। वे मुझे उसके कमरे में ले गए। जावेद बेड पर लेटा है। दर्द से तड़प रहा है, हांफ रहा है। उसे देखकर लग रहा है मानो, शरीर से हडि्डयां बाहर झांक रही हों। उसके हाथ-पैर टेढ़े हो चुके हैं। वो कुछ देर बाद, उठने की कोशिश करता है, लेकिन दर्द के कारण लुढ़क जाता है। 15 मिनट तक वह कोशिश करता है, लेकिन उठ नहीं पाता। मो. आजी बताते हैं- शादी के दो साल बाद 3 मार्च 2000 को मेरा बेटा जावेद पैदा हुआ। शुरुआत में तो वैसा ही था, जैसे सबके बच्चे होते हैं। जब दो महीने का हुआ, तो धीरे-धीरे शरीर सूखने लगा। सिर भी शरीर के मुकाबले काफी बड़ा लग रहा था। इसकी दादी मजाक में कहती भी थी कि सरदार का बच्चा कहां से पैदा हो गया। डॉक्टर को दिखाया, तो उन्होंने कुछ दवाइयां दे दीं। तीन महीने बाद भी जब कुछ असर नहीं दिखा तो फिर डॉक्टर के पास पहुंचे। उन्होंने बोला कि जब बड़ा होगा तो ठीक हो जाएगा। तबसे हमने ध्यान देना बंद कर दिया। कई बार जावेद चलते-चलते गिर जाता था। हमें लगता था कि पैर कमजोर हैं। मालिश करेंगे तो ठीक हो जाएगा। लेकिन धीरे-धीरे इसका शरीर और सूखने लगा। एकबार कुछ रिश्तेदार घर आए और इसे देखते ही बोले- जावेद बड़ा कमजोर है। बीमार है क्या? इसको डॉक्टर को दिखाइए। तबसे हमारी चिंता और बढ़ गई। 2010 की बात है। सूरत में पत्नी की नौकरी लगे दो साल ही हुए थे। जावेद तब तीसरी कक्षा में था। मैं ही इसकी देखभाल कहता था। इसका ट्यूशन घर से 2 किलोमीटर दूर था। एक दिन यह ट्यूशन गया, लेकिन वापस नहीं लौटा। मैं घर पर उसका इंतजार कर रहा था। शाम हुई, तो मेरे जानने वाले शख्स दौड़ते हुए घर आए। बताया- तुम्हारा बेटा रास्ते में गिर गया है, उठ ही नहीं पा रहा है। जोर-जोर से चीख रहा है। मैं पहुंचा तो देखा जावेद बेहोश पड़ा था। उसके घुटने और कोहनियों में बहुत ज्यादा सूजन आ गई थी। उसे घर लाया। पत्नी को फोन करके सूरत से अहमदाबाद बुलाया। पूरी रात हम तेल से मालिश करते रहे, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। दोबारा डॉक्टर के पास ले गए तो उन्होंने कहा- इसे कोई भी भारी सामान नहीं उठाने देना, यहां तक की स्कूल बैग भी नहीं। आधा किलो से ज्यादा वजन इसका शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। मोहम्मद आजी बात ही कर रहे थे, तभी जावेद बिस्तर से उठने की कोशिश करने लगा, लेकिन दर्द के कारण वह बार-बार बिस्तर पर ही लुढ़क जा रहा था। 15 मिनट तक उसने कोशिश की, लेकिन उठ नहीं पाया। आखिरकार पिता के सहारे उसने आहिस्ता-आहिस्ता अपने पैर बेड से नीचे लटकाए और चप्पल पहनने लगा। इसके बाद, मोहम्मद उसे वॉशरूम की ओर ले गए। वह किसी बच्चे की तरह पैर घसीटते हुए धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ा रहा है। उसका घुटना जरा सा भी नहीं मुड़ रहा है। झुंझलाते हुए जावेद कहता है- ‘मुझे तो हर दिन आधे घंटे बिस्तर से उठने और आधे घंटे लेटने में लग जाते हैं। इतने दर्द में कहने को तो जिंदा हूं, लेकिन हालत किसी 90 साल के बूढ़े जैसी है। मेरे मां-बाप हैं जो मुझे ढो रहे हैं। उन्ही की वजह से जिंदा हूं। मेरे सारे काम यही लोग करते हैं। ऐसी बेकार जिंदगी है मेरी, 26 साल का हूं फिर भी पापा नहलाते हैं। मुझे शर्म आती है।’ ‘करीब एक साल पहले की बात है। मैं वॉशरूम गया था। अचानक घुटनों और कोहनियों में तेज दर्द उठा। पूरा शरीर सुन्न पड़ गया। मैं कमोड से उठ नहीं पा रहा था। करीब 15 मिनट तक जूझता रहा, लेकिन उठ नहीं पाया और न ही पैंट पहन पाया। आखिर मैंने चीखते हुए अब्बू को आवाज दी। पहले तो उन्हें मेरी आवाज भी सुनाई नहीं दी। काफी देर बाद जब मैं बाहर नहीं निकला तो वो खुद आए। आवाज देकर पूछा- जावेद तुम ठीक हो? मैंने रोते हुए जवाब दिया- अब्बू मेरा शरीर सुन्न पड़ गया है। घुटने जाम हो गए हैं। मैं उठ नहीं पा रहा हूं। मुझे यहां से बाहर निकालो। अब्बू भागते हुए गए और पड़ोसी को बुलाकर लाए। दोनों ने मिलकर वॉशरूम का दरवाजा तोड़ा। अंदर आए, मुझे पैंट पहनाई और बाहर निकाला। उस दिन के बाद से आज तक, मैंने कभी वॉशरूम का दरवाजा बंद नहीं किया। डर लगता है कि अगर दोबारा वैसा ही दर्द उठा, तो क्या करूंगा।’ मोहम्मद आजी कहते हैं कि- ये एक कदम भी बिना सहारे के नहीं चल पाता। तीन साल पहले की बात है। मैंने घर के पास ही एक दुकान से बिस्किट लाने भेजा। बमुश्किल 500 मीटर दूर। काफी देर तक लौटा नहीं। तब मैंने इसके नंबर पर फोन लगाया। किसी और ने जावेद का फोन उठाकर बोला- आपका बेटा बीच रोड में पड़ा है। इसे यहां से ले जाइए। मैं फौरन जावेद को लेने पहुंचा। उसने बस एक ही रट लगा रखी था- पापा, मर जाऊंगा। जल्दी ले चलो। मैं ऑटो वाले को बुलाकर लाया। जल्दी-जल्दी इसके जोड़ों में तेल और बाम लगाया। दवाई दी, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। जाने कितने दिनों तक ये तड़पता रहा। तीन महीने तक बिस्तर से नहीं उठा। कूल्हे, कोहनी, घुटने, कलाई जहां-जहां भी जोड़ जॉइंट्स थे, वहां-वहां सूजन बढ़ रही थी। जब आराम नहीं मिला तो हड्डी के डॉक्टरों को दिखाया। उन्होंने जेनेटिक टेस्ट कराने के लिए कहा। दो महीने बाद रिपोर्ट आई, तब डॉक्टरों ने बताया कि जावेद को मार्कियो डिजीज (म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस टाइप IV ) है। ये एक जेनेटिक बीमारी है। दुनिया में इसका कोई इलाज नहीं है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ेगी, हडि्डयां जाम होती जाएंगी। हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता जाएगा। आंखों की रोशनी कम होती जाएगी। इसके बाद दूसरे अस्पतालों में दिखाया। वहां डॉक्टर ने एंजाइम थेरेपी के बारे में बताया, लेकिन उसका खर्च 3 से 4 करोड़ रुपए सालाना है, जो हमारी हैसियत से कहीं ज्यादा था। अब तक जावेद की बीमारी में 6 से 8 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इसमें से 50 हजार रुपए तो जेनेटिक टेस्ट में लगे हैं। इसके बाद बेटी हिब्बा और दूसरे बेटे का भी टेस्ट कराया। ये दोनों जुड़वा हैं और जावेद से 4 साल छोटे हैं। जब दोनों की रिपोर्ट आई तो बेटी को भी यही बीमारी निकली, लेकिन छोटा बेटा बच गया। तभी किचन से एक महिला चाय लेकर आती हैं। मोहम्मद कहते हैं- यह मेरी पत्नी अजीजा बानो हैं। अजीजा कहती हैं- ‘मैं सरकारी टीचर हूं। अभी सूरत में पोस्टिंग है। हर हफ्ते बेटे को देखने के लिए आती हूं। कई बार ट्रांसफर की अर्जी लगाई, लेकिन सरकार में कोई सुनने वाला नहीं है। ऐसी हालत में कौन मां अपने बेटे से दूर रहेगी, लेकिन मुझे रहना पड़ता है। क्या करूं, इसी नौकरी के भरोसे तो पूरा घर चल रहा है। सोचती हूं, जब हम दोनों नहीं रहेंगे, उस दिन इसका क्या होगा।’ बोलते-बोलते अजीजा के आंसू निकल आते हैं। कुछ देर बाद फिर कहती हैं- बेटा कभी-कभी कहता है मेरी शादी करा दो, लेकिन किससे कराएं। कौन लड़की इससे ब्याह करेगी। मेरी बेटी हिब्बा बानो को भी यही बीमारी है। उसके घुटनों में भी हल्का-हल्का दर्द रहता है। हाथ-पैर की उंगलियां हल्की टेढ़ी हैं, लेकिन उसकी हालत इससे थोड़ी बेहतर है। वह 22 साल की हो चुकी है। अपना काम खुद कर लेती है। उसके लिए दो-तीन रिश्ते आ चुके हैं, लेकिन उसकी बीमारी के बारे में सुनते ही सब लौट जाते हैं। दोबारा मुड़कर नहीं देखते। अब डर लगता है कि बेटी की भी शादी होगी या नहीं। मो. आजी कहते हैं- ‘बचपन में जब जावेद को देखता था, तो सोचता था बड़ा बेटा है। बुढ़ापे का सहारा बनेगा, लेकिन ढलती उम्र में मुझे ही इसे सहारा देना पड़ रहा है। इसके सामने मैं खुद अपने घुटनों का दर्द भूल गया हूं। 9वीं तक इसे पढ़ाया। दोस्त हमेशा जावेद से पूछते थे- तुम ऐसे मरे हुए क्यों दिखते हो, कितनी छोटी हाइट है तुम्हारी। तुम इतने कमजोर क्यों हो। जावेद को बहुत बुरा लगता था। इसलिए एक दिन कह दिया कि आगे की पढ़ाई नहीं करूंगा। 2014 में इसने स्कूल छोड़ दिया। उसके बाद धीरे-धीरे इसका शरीर और सूखने लना। कुछ साल पहले तक ये जमीन पर बैठता भी था, अब तो वो भी नहीं। मेरे दोस्त भी कहते हैं- बेटे का इलाज तो करवाओ। अब उन्हें क्या बताऊं कि मेरा बेटा ऐसी बीमारी से जूझ रहा है, जिससे वो कभी जीत नहीं पाएगा। मैंने तो पूरी-पूरी रात जागकर बेटे को दर्द में तड़पते देखा है। जब भी कराहता है तो एक ही दुआ करता हूं, अल्लाह, इसे उठा ले। सच कहूं, तो यह कुछ नहीं कर सकता है। इसके कमर का हिस्सा इतना छोटा है कि बैठ भी नहीं सकता। जावेद को 18 साल से यह दर्द है। इतने सालों में कभी भी रात में मेरी नींद पूरी नहीं हुई। जावेद और हिब्बा की हालत देखने के बाद बतौर रिपोर्टर मैं इस बीमारी से जुड़े सवालों का जवाब पाने के लिए अहमदाबाद के ‘न्यूबर्ग सेंटर फॉर जिनोमिक मेडिसिन’ के जिनोमिक्स डेवलपमेंट एंड इम्प्लीमेनटेशन डिपार्टमेंट पहुंचा। मेरी मुलाकात यहां की डायरेक्टर डॉ. शीतल शारदा से हुई। डॉ. शारदा बताती हैं- मार्कियो सिंड्रोम की शुरुआत बहुत चुपके से होती है। जब करीबी रिश्तों में शादियां होती हैं, तो होने वाले बच्चों में जेनेटिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वजह-ऐसे दंपतियों के जींस काफी हद तक एक जैसे होते हैं। दक्षिण भारत में इस तरह के मामले ज्यादा सामने आते हैं। डॉ. शारदा बताती हैं- शुरुआत के एक-दो साल तक माता-पिता को अंदाजा नहीं होता कि उनके बच्चे के शरीर के भीतर कोई बीमारी पनप रही है, लेकिन जैसे ही बच्चा तीसरे साल में कदम रखता है, उसका शारीरिक विकास रुकने लगता है। हाइट रुक जाती है, हाथ-पैर हल्के-हल्के टेढ़े होने लगते हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की उम्र बमुश्किल 30 से 40 साल होती है। यह बीमारी क्यों होती है? डॉ. शारदा बताती हैं- जब हम कुछ खाते हैं, तो हमारे शरीर को शुगर मिलती है। एक स्वस्थ शरीर में 'GALNS' और 'GLB1' नाम के दो जीन इस शुगर को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में मदद करते हैं। मगर मार्कियो के मरीजों में यही दोनों जीन खराब हो जाते हैं। नतीजा- शुगर के ये बारीक कण यानी GAGs जोड़ों, कॉर्निया, फेफड़ों और हार्ट के वॉल्व के आसपास जमने लगते हैं। इससे आंखें कमजोर होने लगती हैं। हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है। वह बताती हैं- हमारी हड्डियों के जोड़ों के बीच एक गद्देदार परत होती है, जिसे कार्टिलेज कहते हैं। यह हड्डियों को आपस में टकराने से रोकती है, लेकिन जब शुगर जोड़ों में जमा होती है, तो कार्टिलेज में सूजन आ जाती है। धीरे-धीरे शरीर के सारे जॉइंट्स (कूल्हा, कोहनी, घुटने) पत्थर की तरह सख्त होने लगते हैं। रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाती है और हाथ-पैर सीधे नहीं हो पाते। जब भी दो हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं या उन पर दबाव पड़ता है, तो मरीज को तेज दर्द होता है। कई मामलों में तो इंसान पूरी तरह से बिस्तर पर आ जाता है और उसका चलना-फिरना बंद हो जाता है। इसका दुनिया में कोई स्थाई इलाज नहीं है। डॉ. शारदा बताती हैं- ऐसे मरीजों के लिए एंजाइम थेरेपी एक विकल्प है, लेकिन इससे भी बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती। इस थेरेपी के जरिए हर हफ्ते इंजेक्शन से एंजाइम शरीर में डाला जाता है। इससे जोड़ों में शुगर कम जमती है। मरीज का दर्द थोड़ा कम होता है और फेफड़े बेहतर काम करते हैं। लेकिन, जो हड्डियां एक बार टेढ़ी या जाम हो चुकी हैं, उन्हें यह दोबारा सीधा नहीं कर पाता। यह एंजाइम थेरेपी जिंदगी भर लेनी पड़ती है और इसका सालाना खर्च 3-4 करोड़ रुपए है। ------------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पड़ें… 1- उम्र-29, हाइट 3 फीट, खांसने से टूटती हैं हड्डियां: भगवान से हर रोज कहती हूं- मुझसे पहले मेरी बेटी को उठा लेना तखत पर एक लड़की करवट लिए लेटी है। बाल छोटे-छोटे। लंबाई बमुश्किल 3 फीट, लेकिन उम्र 29 बरस। इस लड़की ने आज तक आइसक्रीम नहीं खाई। जानते हैं क्यों? पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- 14 की उम्र में शरीर बना 'पेड़ की छाल’: उठो या बैठो फटने लगती है चमड़ी, मन करता है छीलकर फेंक दूं; देश का अकेला केस दोपहर के 1 बजे हैं। जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर कार हिचकोले खा रही है। तेज गर्मी से गला लगातार सूख रहा है। करीब 2 घंटे बाद जंगलों में कुछ झोपड़ियां नजर आती हैं। इन्हीं झोपड़ियों में से एक के सामने हमारी कार रुकी। झोपड़ी के बाहर एक लड़की बेजान सी खड़ी नजर आई। उसकी मटमैली शर्ट और हाफ पैंट के बाहर जितना भी शरीर दिख रहा है, वह बेहद डरावना है। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 3 Jul 2026 5:45 am

आज का एक्सप्लेनर:गुलाबी पेट्रोल, टैंक में चींटी के वीडियो वायरल; सरकार पेट्रोल में जबरन एथेनॉल मिलाने पर क्यों तुली है, पीछे की पूरी कहानी

कहीं गुलाबी रंग का पेट्रोल, कहीं टैंक से चिपकी चीटियां, कहीं पेट्रोल के साथ दिखता पानी। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली है। आखिर पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने पर क्यों तुली है सरकार, क्या हैं इसके फायदे-नुकसान और आगे का रास्ता; आज के एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… सवाल-1: सरकार एथेनॉल को लेकर क्या एक्सपेरिमेंट कर रही है?जवाबः एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो गन्ना, मक्का और चावल वगैरह से बनता है। ये ज्वलनशील होता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन की तरह इस्तेमाल करने पर कई स्टडी हुईं और सरकार के मुताबिक इसके अच्छे नतीजे आए। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है। जबकि एथेनॉल बनाने के लिए जरूरी गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलें देश में ही पैदा होती हैं। इसलिए 2001 में भारत सरकार ने एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ पेट्रोल पंपों पर 5% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सप्लाई की। ये सफल रहा। इसके बाद 2003 में शुरू हुआ एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम… इसके अलावा देश के 48 पेट्रोल पंपों पर E85 पेट्रोल भी रोलआउट हो चुका है। यानी 85% एथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल। दिसंबर 2026 तक इसे 500 पंपों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। 10 जून को नितिन गडकरी ने कहा कि उनकी सरकार ने 100% एथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को भी मंजूरी दे दी है। सवाल-2: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के फायदे क्या हैं?जवाबः सरकार 3 बड़े फायदे गिना रही है…1. 1.84 लाख करोड़ विदेशी मुद्रा की बचत: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से भारत को 302 लाख मीट्रिक टन कम तेल आयात करना पड़ा। इससे पिछले 12 सालों में 1.84 लाख करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। 2. किसानों की आय में 1.58 लाख करोड़ की बढ़ोतरी: एथेनॉल बनाने में तीन फसलों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है- मक्का, गन्ना और चावल। 2025-26 में 91.89 लाख हेक्टेयर जमीन पर मक्के की खेती हुई है, जो पिछले साल से 10.5% ज्यादा है। इसी तरह गन्ना और चावल की बुआई भी बढ़ी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक पिछले १२ साल में एथेनॉल प्रोजेक्ट से किसानों को 1.58 लाख करोड़ रूपए की कमाई हुई है। 3. प्रदूषण में 65% तक की कमीः NITI आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल की तुलना में गन्ने और मक्के से बनने वाले एथेनॉल के इस्तेमाल करने से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 60% से 65% तक कम होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक १२ साल में एथेनॉल प्रोजेक्ट से 909 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कटौती हुई है। सवाल-3: सरकार इतने फायदे गिना रही, तो फिर इसमें दिक्कत क्या है?जवाबः भारत के एथेनॉल प्रोजेक्ट में मोटेतौर पर 5 दिक्कतें हैं... 1. कम माइलेज और इंजन में खराबी की शिकायत 2. एथेनॉल सस्ता, लेकिन जनता को पेट्रोल के रेट पर मिल रहा 3. एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर तक पानी खर्च 4. मक्का-गन्ने की खपत बढ़ी, तो दाल-तिलहन पर संकट 5. नितिन गडकरी पर सवाल सवाल-5: सरकार क्या कदम उठाए, तो चीजें ठीक हो सकती हैं? जवाबः एक्सपर्ट्स 5 रास्ते बताते हैं…1. फ्लेक्स इंजन गाड़ियों की बिक्री बढ़ाएं और ब्लेंडिंग की रफ्तार धीमी करें 2. एथेनॉल अनिवार्य न किया जाए, लोगों को विकल्प मिले 3. पारदर्शिता लाई जानी चाहिए 4. ईंधन की कीमत घटाई जाए 5. गन्ने-मक्के का विकल्प ढूंढना अब आखिर में एथेनॉल से जुड़ा एक नॉलेज कैप्सूल… ---------- ये खबर भी पढ़िए… पासपोर्ट-आधार भी नागरिकता का सबूत नहीं, फिर कैसे तय होगा कि आप भारत के नागरिक; क्या NRC की तैयारी है ‘पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का प्रमाणपत्र।’ विदेश मंत्रालय के अधिकारी का ये बयान सुर्खियों में है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर पासपोर्ट नहीं, तो भारत के नागरिक होने का सबूत क्या है? क्या सरकार नागरिकता के लिए कुछ नया करने जा रही है, पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 2 Jul 2026 6:23 pm

हर हफ्ते 1.27 करोड़ छापने वाला मानव तस्करी का 'किंग' ब्रिटेन में गिरफ्तार: फर्जी पहचान लेकर मांग रहा शरण

ब्रिटेन की शरणार्थी प्रणाली और सुरक्षा जांच पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फ्रांस की अदालतों से मानव तस्करी के मामले में पांच साल की सजा काट चुका कुख्यात इराकी सरगना ट्वाना जमाल अब ब्रिटेन की धरती पर सुरक्षित पनाहगाह तलाशता पाया गया है। लीसेस्टरशायर के छोटे से ब्लैबी गांव में छिपकर रह रहा यह अपराधी फर्जी पहचान और दस्तावेजों के दम पर शरण के फैसले का इंतजार कर रहा था, जबकि उसका अतीत बेहद खौफनाक रहा है।'पाशा' बनकर चलाता था तस्करी का साम्राज्यबीबीसी की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, ट्वाना जमाल उत्तरी फ्रांस के प्रवासी शिविरों से अपना तस्करी का नेटवर्क संचालित करता था। उसे स्थानीय स्तर पर 'पाशा' (बॉस) के नाम से जाना जाता था। जमाल का नेटवर्क इतना संगठित था कि वह ब्रिटेन जाने वाले हर प्रवासी से औसतन 4500 पाउंड वसूलता था। वह प्रवासियों को प्याज और पनीर से लदे ट्रकों में छिपाकर सीमा पार कराता था। ट्रकों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड डिटेक्टरों को चकमा देने में मदद करती थी, जिससे उसका धंधा बिना किसी रुकावट के चलता रहा। इस अवैध कारोबार से वह हर हफ्ते करीब 1 लाख पाउंड यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 1.27 करोड़ रुपये की कमाई कर रहा था।ब्रिटेन के नियमों को दी खुली चुनौतीहैरानी की बात यह है कि फ्रांस में पांच साल की जेल काट चुका जमाल ब्रिटेन में घुसने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया का फायदा उठा रहा है। ब्रिटेन के मौजूदा आव्रजन नियमों के अनुसार, विदेश में एक साल से अधिक की सजा काट चुके व्यक्ति का शरण आवेदन स्वतः खारिज हो जाना चाहिए, लेकिन जमाल का आवेदन अभी भी पेंडिंग है। ब्लैबी गांव में रहने के दौरान वह न केवल फर्जी नाम का इस्तेमाल कर रहा था, बल्कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी भी चला रहा था। एक सीक्रेट रिकॉर्डिंग में उसने शेखी बघारते हुए कहा था, यह शहर हमारा है, यहां हमें कोई हाथ नहीं लगा सकता।क्या है दूसरा तस्कर 'करदो जाफ' का कनेक्शन?इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक और बड़ा खुलासा हुआ। करदो जाफ नामक एक अन्य तस्कर भी ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आया है। खुद को 'करदो रान्या' बताने वाला यह शख्स अफगानिस्तान से ब्रिटेन तक फैले अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का सरगना माना जाता है। सीक्रेट बातचीत में जाफ ने दावा किया कि उसके पास ब्रिटेन भेजने के लिए ट्रक, विमान और नाव तक उपलब्ध हैं। उसका यह नेटवर्क इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र से संचालित होता है, जो वर्तमान में मानव तस्करी के सक्रिय अड्डों में से एक बन चुका है।सरकार की सफाई और बढ़ती चिंताइन खुलासों के बाद ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (Home Office) ने सफाई दी है कि सभी शरण चाहने वालों की कड़ाई से सुरक्षा और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की जाती है। हालांकि, जमाल और जाफ जैसे अपराधियों की मौजूदगी ने ब्रिटिश सरकार की सुरक्षा नीतियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या अवैध घुसपैठियों के लिए ब्रिटेन एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है? फिलहाल, इन तस्करों के खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी जांच तेज कर दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 5:17 pm

पुतिन-जिनपिंग की महा-जुगलबंदी: क्या सच में होने वाली है परमाणु जंग

आज की सबसे बड़ी वैश्विक हलचल महाशक्तियों के गलियारों से आ रही है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बढ़ती नजदीकियों ने एक बार फिर पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और नाटो (NATO) सहयोगियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हाल ही में सामने आई एक लीक खुफिया रिपोर्ट ने दावा किया है कि दोनों देश बेहद गोपनीय तरीके से बड़े स्तर पर सैन्य अभ्यास कर रहे हैं, जो आम नहीं बल्कि परमाणु और केमिकल वॉर (परमाणु और रासायनिक युद्ध) से जुड़ा है।चीन के सुदूर इलाकों में चल रही है सीक्रेट ट्रेनिंगलीक हुई खुफिया जानकारियों के मुताबिक, चीन के बेहद सुरक्षित और संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर यह सीक्रेट ट्रेनिंग चल रही है। इस अभ्यास में रूस के परमाणु विशेषज्ञ और चीनी पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) के शीर्ष कमांडर हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य परमाणु हमले की स्थिति में दोनों देशों के बीच तुरंत तालमेल बिठाना और जवाबी कार्रवाई को अंजाम देना है। इसके अलावा, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल और उनसे बचाव की तकनीकों का भी कड़ा अभ्यास किया जा रहा है।लीक रिपोर्ट से आखिर क्यों कांप उठे पश्चिमी देशइस सीक्रेट मिशन की खबर बाहर आते ही वाशिंगटन से लेकर लंदन तक हड़कंप मच गया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक रूस और चीन केवल आर्थिक या सामान्य सैन्य स्तर पर एक-दूसरे का साथ दे रहे थे, लेकिन परमाणु स्तर पर इस तरह का खुफिया गठबंधन पूरी दुनिया के पावर बैलेंस (शक्ति संतुलन) को बदल सकता है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियां अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि इस ट्रेनिंग का दायरा कितना बड़ा है और क्या इसमें नए जमाने के हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम को भी शामिल किया गया है।एशिया-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा असरयह हलचल ऐसे समय में हो रही है जब ताइवान संकट और यूक्रेन युद्ध को लेकर पहले से ही वैश्विक स्तर पर तनाव चरम पर है। स्थानीय और भौगोलिक दृष्टि से देखें तो इस सीक्रेट ट्रेनिंग का सबसे पहला और सीधा असर एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) क्षेत्र पर पड़ेगा। भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे पड़ोसी देश भी इस नई सैन्य धुरी पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। भू-राजनीतिक (Geopolitical) जानकारों का मानना है कि यदि रूस और चीन का यह परमाणु समीकरण मजबूत होता है, तो आने वाले दिनों में वैश्विक सुरक्षा के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 3:13 pm

कीव में तबाही की रात: रूस ने यूक्रेन पर किया भीषण हमला, घंटों गूंजते रहे सायरन और जोरदार धमाके

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव सहित कई प्रमुख शहरों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा और चौतरफा हवाई हमला बोल दिया है। इस अचानक हुए हमले से पूरी यूक्रेन की राजधानी दहल उठी। चश्मदीदों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, राजधानी कीव में कई घंटों तक लगातार हवाई हमले के सायरन (Air Raid Sirens) बजते रहे और एक के बाद एक कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। इस ताजा हमले ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स से कीव को बनाया निशानासैन्य विश्लेषकों के अनुसार, रूस ने इस हमले में अपनी आधुनिक क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और अत्यधिक खतरनाक सुसाइड ड्रोन्स (कमिकेज़ ड्रोन) के झुंड का इस्तेमाल किया है। यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम (वायु सेना) ने कई मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद कई रिहायशी इलाकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों (पावर ग्रिड और एनर्जी सप्लाई) को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। हमले के बाद कीव के कई हिस्सों में बिजली और पानी की सप्लाई ठप हो गई है।बंकरों में दुबकने को मजबूर हुए लोग और बढ़ा मानवीय संकटधमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि स्थानीय प्रशासन को तुरंत नागरिकों को नजदीकी बंकरों और अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों में शरण लेने के लिए एडवायजरी जारी करनी पड़ी। डरे-सहमे लोग पूरी रात बंकरों में गुजारने को मजबूर रहे। इस बड़े हमले से प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू और एम्बुलेंस की टीमें मलबे को हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटी हैं। युद्ध के इस नए चरण ने स्थानीय आबादी के सामने एक बार फिर गहरा मानवीय संकट खड़ा कर दिया है।वैश्विक स्तर और क्षेत्रीय सुरक्षा पर हमले का बड़ा असरयूक्रेन पर हुए इस हालिया बड़े हमले ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी देशों और नाटो (NATO) ने रूस के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है और यूक्रेन को और अधिक एडवांस डिफेंस सिस्टम देने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स चेन पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है, जिससे दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता का माहौल और गहरा हो गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 3:11 pm

अरब सागर में अमेरिकी मिलिट्री हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग, पानी में उतरा विमान, एक क्रू मेंबर लापता

इंटरनेशनल मैरीटाइम बाउंड्री के करीब अरब सागर (Arabian Sea) के पानी में अमेरिकी सेना के एक हेलीकॉप्टर को बेहद आपातकालीन स्थितियों में उतारना पड़ा है। मिली जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान अचानक आई गंभीर तकनीकी खराबी के बाद पायलटों ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर की समुद्र के पानी में ही क्रैश लैंडिंग (इमरजेंसी लैंडिंग) कराई। इस बड़े हादसे के बाद अमेरिकी नौसेना और स्थानीय रेस्क्यू टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। हेलीकॉप्टर में सवार क्रू मेंबर्स को बचाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन शुरुआती रेस्क्यू के बाद भी एक क्रू मेंबर के लापता होने की खबर से हड़कंप मच गया है।आसमान में आई अचानक खराबी और पायलट का बड़ा फैसलायह हादसा उस समय हुआ जब अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर अरब सागर के ऊपर से अपनी नियमित या रणनीतिक उड़ान भर रहा था। अचानक बीच आसमान में इसके रोटर या इंजन में खराबी आ गई, जिसके बाद पायलटों के पास इसे नजदीकी जमीन तक ले जाने का समय नहीं बचा था। क्रैश से बचने के लिए विमान को सीधे समुद्र की लहरों पर उतारने का फैसला लिया गया। पानी पर लैंडिंग इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि हेलीकॉप्टर को काफी नुकसान पहुंचा है। घटना की जानकारी मिलते ही पास के बेड़े में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों और खोजी विमानों को तुरंत घटना स्थल की ओर रवाना कर दिया गया।लापता क्रू मेंबर की तलाश में समंदर में महाअभियान जारीहादसे के तुरंत बाद चलाए गए आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशन में हेलीकॉप्टर के अधिकांश क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और उन्हें प्राथमिक इलाज के लिए मिलिट्री मेडिकल फैसिलिटी में भेजा गया है। हालांकि, दल का एक सदस्य अभी भी लापता बताया जा रहा है। समंदर की तेज लहरों और गहरे पानी के बीच लापता सैनिक को ढूंढने के लिए हाई-टेक सोनार उपकरणों, गोताखोरों और नाइट-विज़न हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। अमेरिकी सैन्य कमांड ने अभी तक लापता सदस्य की पहचान उजागर नहीं की है।अरब सागर के रणनीतिक रूट पर इस घटना का स्थानीय असरजियोपॉलिटिकल और सुरक्षा के लिहाज से अरब सागर बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है, जहां से दुनिया का एक बड़ा व्यापारिक जहाजों का बेड़ा गुजरता है। इस क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी देशों की नौसेनाएं लगातार गश्त करती रहती हैं। इस मिलिट्री हेलीकॉप्टर हादसे के बाद से इस पूरे समुद्री रूट पर सुरक्षा अलर्ट को बढ़ा दिया गया है। स्थानीय तटीय सुरक्षा एजेंसियों और पड़ोसी देशों की नौसेनाओं को भी इस रेस्क्यू ऑपरेशन के मद्देनजर सूचित कर दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर स्थानीय मदद ली जा सके। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 3:10 pm

भारत के खिलाफ बांग्लादेश की नई चाल? चिकन नेक पर चीन को बढ़ावा देने के बाद अब तीस्ता नदी पर छिड़ा बड़ा विवाद

दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स में इस समय एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। भारत के सबसे करीबी पड़ोसी देशों में शुमार बांग्लादेश के हालिया कदमों से दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। जानकारों के मुताबिक, बांग्लादेश एक बार फिर भारत के रणनीतिक हितों को नजरअंदाज करने की राह पर चल पड़ा है। पहले भारत के सबसे संवेदनशील हिस्से यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब चीन को बड़ी भूमिका देने की कोशिशें हुईं और अब तीस्ता नदी के पानी को लेकर ढाका की ओर से तीखे तेवर दिखाए जा रहे हैं, जिसने भारतीय सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है।सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास चीन की एंट्री से बढ़ी भारत की चिंताभारत के पूर्वोत्तर राज्यों को पूरे देश से जोड़ने वाली संकरी पट्टी जिसे 'चिकन नेक' या सिलीगुड़ी कॉरिडोर कहा जाता है, सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है। हाल ही में बांग्लादेश द्वारा इस इलाके के बेहद करीब चीनी निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने की खबरें सामने आई हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस इलाके में ड्रैगन (चीन) की किसी भी तरह की मौजूदगी सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है। भारत हमेशा से ही इस क्षेत्र में बाहरी ताकतों के दखल का विरोध करता रहा है।तीस्ता नदी के पानी पर बांग्लादेशी नेताओं के बिगड़े बोलचिकन नेक विवाद के बीच अब तीस्ता नदी जल बंटवारे का मुद्दा भी गरमा गया है। बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से तीस्ता नदी को लेकर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। दशकों पुराने इस जल विवाद पर जहां दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का दावा करते रहे हैं, वहीं अब बांग्लादेश की ओर से अचानक आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है। वहां के कुछ गुटों द्वारा तीस्ता परियोजना पर भारत को दरकिनार कर चीन से वित्तीय मदद लेने की वकालत की जा रही है, जिसे सीधे तौर पर नई दिल्ली को आंख दिखाने के रूप में देखा जा रहा है।स्थानीय स्तर और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भारत-बांग्लादेश सीमा पर पड़ेगा असरइस कूटनीतिक तनातनी का सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्यों विशेषकर पश्चिम बंगाल और असम के स्थानीय क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है। तीस्ता नदी का पानी पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों के किसानों और कृषि के लिए लाइफलाइन माना जाता है। यदि बांग्लादेश इस मुद्दे पर चीन के साथ मिलकर कोई एकतरफा कदम उठाता है, तो इससे सीमा पर न केवल तनाव बढ़ेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा पर भी गहरा संकट आ सकता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार और रणनीतिक एक्सपर्ट्स इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 3:09 pm

क्रिप्टो कारोबार से ट्रंप परिवार ने कमाए 1.4 अरब डॉलर, 2025 में कुल आय 2.2 अरब डॉलर पहुंची

ट्रंप परिवार ने डिजिटल एसेट्स और संबंधित निवेशों के जरिए भारी कमाई की है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2025 में केवल क्रिप्टो कारोबार से ही ट्रंप परिवार को लगभग 1.4 अरब डॉलर (13 हजार करोड़ रुपये से अधिक) की आय हुई।

देशबन्धु 2 Jul 2026 3:00 pm

ट्रंप का बड़ा बयान: कम्युनिज्म अमेरिका का सबसे बड़ा खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ डकोटा में आयोजित थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट को याद करते हुए साम्यवाद (कम्युनिज्म) पर निशाना साधा। ट्रंप ने संबोधन में कहा कि आज के समय में कम्युनिज्म अमेरिका के सामने सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है और इससे समय रहते निपटना बेहद जरूरी है।

देशबन्धु 2 Jul 2026 9:49 am

350 किमी/घंटा की रफ्तार और 90% रास्ता सुरंगों में: चीन ने किनलिंग पहाड़ों को चीरकर दौड़ाई नई बुलेट ट्रेन

दुनिया के सबसे बड़े और एडवांस रेलवे नेटवर्क वाले देश चीन ने इंजीनियरिंग की दुनिया में एक और हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया है. चीन ने अपने देश के सेंट्रल (मध्य) और वेस्टर्न (पश्चिमी) हिस्सों को आपस में जोड़ने के लिए 350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली एक बेहद आधुनिक हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन सर्विस की शुरुआत कर दी है. मंगलवार सुबह जैसे ही चमचमाती नई G3966 बुलेट ट्रेन शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई, वैसे ही शिआन-शियान हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक पर आधिकारिक तौर पर परिचालन शुरू हो गया. इस नए रूट के शुरू होने से चीन के दो बड़े औद्योगिक और सांस्कृतिक हब के बीच की दूरी अब चंद घंटों में सिमट गई है.6 घंटे का सफर अब सिर्फ मिनटों में, वुहान तक का रास्ता हुआ बेहद आसान257 किलोमीटर लंबी इस नई हाई-स्पीड रेल लाइन ने शिआन (Shaanxi प्रांत) और शियान (Hubei प्रांत) के बीच यात्रा करने के समय में 6 घंटे से अधिक की भारी कटौती कर दी है. यानी जो सफर पहले पूरा दिन खा जाता था, वह अब मिनटों में पूरा हो रहा है. सबसे खास बात यह है कि यह नई रेल लाइन पहले से चल रही वुहान-शियान हाई-स्पीड रेलवे से भी जाकर कनेक्ट होती है. इस बेहतरीन कनेक्टिविटी का नतीजा यह हुआ है कि अब शिआन से लेकर वुहान तक का एक बहुत लंबा सफर यात्री केवल 2 घंटे 41 मिनट में बेहद आराम से पूरा कर सकेंगे.'प्राकृतिक भूवैज्ञानिक संग्रहालय' को चीरकर बनी रेल लाइन, 90% रास्ता पुल और सुरंगों मेंयह प्रोजेक्ट चीन के रेल इतिहास के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है. यह रेलवे लाइन सीधे 'किनलिंग पर्वतों' (Qinling Mountains) के सीने को चीरकर गुजरती है, जिन्हें उत्तरी और दक्षिणी चीन के बीच की एक बेहद दुर्गम प्राकृतिक सीमा माना जाता है. इसके साथ ही यह ट्रेन हानजियांग नदी को भी पार करती है, जो चीन की मशहूर यांग्त्ज़ी नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी है.इस ऐतिहासिक परियोजना के मुख्य डिजाइनर माओ लेई के मुताबिक, यह रेलवे जिस इलाके से गुजरती है, उसे अपनी बेहद जटिल बनावट के कारण 'प्राकृतिक भूवैज्ञानिक संग्रहालय' (Natural Geological Museum) कहा जाता है. इस खतरनाक और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र के कारण पूरी रेल लाइन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में तैरते पुलों और पहाड़ों के पेट को काटकर बनाई गई बेहद लंबी सुरंगों (Tunnels) के अंदर बनाया गया है.47 अरब युआन का भारी-भरकम खर्च और 2021 से चल रही थी मेहनतइस पूरे इलाके की कठिन भौगोलिक और पथरीली परिस्थितियों के कारण यहां लंबे समय से हैवी ट्रांसपोर्टेशन और बड़ी आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप या बेहद सीमित थीं. इसी बड़ी चुनौती को मात देने के लिए चीन सरकार ने साल 2021 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया था. इस बेहद आधुनिक और सुरक्षित ट्रैक को तैयार करने में चीन ने कुल 47.68 अरब युआन (यानी करीब 7 अरब अमेरिकी डॉलर) का भारी-भरकम बजट पानी की तरह बहाया है, जिसका असर अब साफ दिखने लगा है.5G और BeiDou सैटेलाइट से लैस है नया शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशनइस नई बुलेट ट्रेन सेवा के स्वागत के लिए चीन ने शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशन को एक नए जमाने के डिजिटल हब के रूप में तैयार किया है. उत्तर-पश्चिम चीन का यह सबसे बड़ा परिवहन केंद्र (Transport Hub) 1 लाख वर्ग मीटर से भी अधिक के विशालकाय क्षेत्र में फैला हुआ है. इस स्टेशन के निर्माण में अत्याधुनिक 5G कनेक्टिविटी, चीन के अपने 'BeiDou नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम' पर आधारित हाई-प्रिसिजन पोजिशनिंग और इंटेलिजेंट रोबोटिक कंस्ट्रक्शन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है.ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए स्टेशन की विशाल छत पर 30,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनल लगाए गए हैं. इन सोलर पैनल्स से हर साल लगभग 70 लाख kWh स्वच्छ और हरित बिजली (Green Electricity) पैदा होगी, जिससे पूरे स्टेशन की बिजली की जरूरतें खुद-ब-खुद पूरी हो जाएंगी.15वीं पंचवर्षीय योजना: चीन का महा-विस्तार प्लानचीन ने अपनी नई 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के तहत देशभर के परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर को और ज्यादा हाईटेक करने तथा आधुनिक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को देश के आखिरी कोने तक ले जाने का एक बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है. रक्षा और आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह नई शिआन-शियान हाई-स्पीड रेलवे चीन की इसी दूरगामी रणनीतिक और आर्थिक मजबूती का एक बेहद अहम हिस्सा है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 9:09 am

अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के खतरनाक लड़ाकू हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग, 1 क्रू मेंबर लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

मिडिल ईस्ट में जारी भारी सैन्य तनाव के बीच अरब सागर (Arabian Sea) से एक बहुत बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है. अमेरिकी नौसेना (US Navy) के एक बेहद आधुनिक और आक्रामक लड़ाकू हेलीकॉप्टर MH-60S सी हॉक (Sea Hawk) को बुधवार सुबह अचानक आई गंभीर तकनीकी खराबी के चलते गहरे समंदर में आपातकालीन लैंडिंग (Emergency Water Landing) करनी पड़ी है. इस हाई-प्रोफाइल हादसे के तुरंत बाद युद्धस्तर पर चलाए गए बचाव अभियान में हेलीकॉप्टर में सवार चार क्रू मेंबर्स में से तीन को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन एक क्रू मेंबर अब भी लापता बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में अमेरिकी नौसेना ने समंदर में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.किसी हमले का संकेत नहीं, कमान ने जारी किया आधिकारिक बयानयूएस नेवल फोर्सेज सेंट्रल कमांड (US Naval Forces Central Command) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए इस गंभीर घटना की पुष्टि की है. नेवल कमान के मुताबिक, यह हादसा ईस्टर्न टाइम के अनुसार सुबह करीब 3:30 बजे के आसपास हुआ. शुरुआती जांच और उपलब्ध डेटा के आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस इमरजेंसी लैंडिंग के पीछे किसी दुश्मन देश की कार्रवाई या मिसाइल हमले का कोई संकेत नहीं मिला है, बल्कि यह पूरी तरह से एक तकनीकी विफलता का मामला लग रहा है.एयरक्राफ्ट कैरियर 'जॉर्ज बुश' पर चल रहा है इलाज, समंदर में महा-सर्च ऑपरेशननौसेना ने बताया कि जिन तीन क्रू मेंबर्स को समंदर की लहरों से सुरक्षित निकाला गया है, उन्हें तुरंत अमेरिकी नौसेना के विशालकाय और परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर 'यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (USS George H.W. Bush) पर ले जाया गया है. वहां मौजूद मिलिट्री डॉक्टर्स की टीम उनका सघन इलाज कर रही है और फिलहाल तीनों की हालत पूरी तरह स्थिर बताई जा रही है.दूसरी ओर, लापता चौथे जांबाज एयरक्रूमैन को ढूंढने के लिए अरब सागर के उस खास रणनीतिक इलाके में अमेरिकी नौसेना के कई अत्याधुनिक युद्धपोत, टोही विमान (Reconnaissance Aircraft) और हंटर हेलीकॉप्टर लगातार रात-दिन सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इसके साथ ही क्रैश के सटीक कारणों को डिकोड करने के लिए एक हाई-लेवल इन्वेस्टिगेशन कमेटी भी बना दी गई है.होर्मुज स्ट्रेट के पास क्यों तैनात है अमेरिकी नौसेना का यह घातक दस्ता?हादसे का शिकार हुआ ट्विन-इंजन MH-60S सी हॉक हेलीकॉप्टर अमेरिकी नौसेना का मुख्य हथियार माना जाता है, जिसका इस्तेमाल एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, सर्च एंड रेस्क्यू, स्पेशल ऑपरेशन्स और युद्ध के मैदान में रसद पहुंचाने जैसे बेहद खतरनाक मिशनों के लिए किया जाता है. यह हेलीकॉप्टर 'यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश' पर ही तैनात था, जो अप्रैल के आखिर से मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के समंदर में लगातार गश्त कर रहा है.दरअसल, इस अशांत इलाके में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए तैनात दो परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर्स में से यह एक है. हालांकि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल तेल टैंकरों और जहाजों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी को हाल ही में अस्थाई रूप से हटा लिया है, लेकिन ईरान के साथ चल रही तनातनी और क्षेत्रीय संकट को देखते हुए वहां अभी भी अमेरिकी सेना का भारी जमावड़ा लगा हुआ है.'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में अमेरिका को लग रहे हैं तगड़े झटकेयह ताजा हादसा ऐसे नाजुक समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ऑपरेशन्स काफी जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं. मई के मध्य में अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई एक सीक्रेट मिलिट्री रिपोर्ट के मुताबिक, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के शुरू होने से लेकर अब तक यूनाइटेड स्टेट्स इस क्षेत्र में अपने 42 फिक्स्ड-विंग विमान और रोटरी एयरक्राफ्ट (हेलीकॉप्टर) गंवा चुका है.वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस भारी नुकसान की सूची में जून की शुरुआत में हुई वह सनसनीखेज घटना शामिल नहीं है, जहां एक ईरानी आत्मघाती ड्रोन ने अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया था. हालांकि, उस अपाचे हादसे में दोनों अमेरिकी पायलट चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गए थे, जिसके बाद भड़के अमेरिका को ईरान समर्थित ठिकानों के खिलाफ 'सेल्फ-डीफेंस एयरस्ट्राइक' करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. इस ताजा हादसे ने एक बार फिर अरब सागर में अमेरिकी उड़ानों की सुरक्षा और उनकी मेंटेनेंस पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 8:59 am

मलबे का ढेर क्यों नहीं बनता जापान? हर साल 1500 भूकंप झेलने वाले देश की जादुई तकनीक

सोचिए अगर किसी देश में हर साल 1500 से ज्यादा बार धरती हिले, तो वहां का नजारा कैसा होगा? दुनिया के किसी भी दूसरे कोने में अगर इतना बड़ा प्राकृतिक संकट आ जाए, तो आलीशान शहर के शहर पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील हो जाएंगे. लेकिन जापान एक ऐसा अनोखा देश है जो इस भयानक चुनौती को रोज हंसते-हंसते झेलता है और फिर भी पूरी दुनिया के सामने सीना ताने शान से खड़ा रहता है. चार सबसे खतरनाक टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु (जंक्शन) पर बसे होने के बाद भी यहां की गगनचुंबी इमारतें ताश के पत्तों की तरह नहीं बिखरतीं. इसके पीछे कोई कुदरती चमत्कार नहीं है, बल्कि जापानी वैज्ञानिकों की दशकों की कड़ी रिसर्च, बेहतरीन एंटी-अर्थक्वेक इंजीनियरिंग और आपदा से लड़ने की उनकी कमाल की तैयारी है.चार टेक्टोनिक प्लेटों का वो जानलेवा जाल, जिसने जापान को घेराजापान की भौगोलिक स्थिति (Geographical Location) ही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन है. यह देश पैसिफिक, फिलीपीन सी, यूरेशियन और नॉर्थ अमेरिकन नामक चार बड़ी और बेहद सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के ठीक ऊपर स्थित है. ये प्लेटें जमीन के अंदर लगातार आपस में टकराती हैं और एक-दूसरे के नीचे खिसकती रहती हैं. इसी भूगर्भीय उथल-पुथल के कारण दुनिया भर में आने वाले कुल खतरनाक भूकंपों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले जापान और उसके आसपास के समुद्री इलाकों में दर्ज किया जाता है. प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) पर स्थित होना इसे दुनिया का सबसे संवेदनशील डेंजर जोन बनाता है.भूकंप से लड़ती नहीं, बल्कि पानी की तरह हिलती हैं यहां की इमारतेंजापान ने प्रकृति से लड़ने के बजाय उसके साथ तालमेल बिठाना सीखा है. यहां के आधुनिक गगनचुंबी भवनों में 'बेस आइसोलेशन' (Base Isolation Technology) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस तकनीक में इमारत की मुख्य नींव और ऊपरी ढांचे के बीच रबर, लीड और स्टील के बेहद मोटे और लचीले बेयरिंग लगाए जाते हैं. जब भी कोई तगड़ा भूकंप आता है, तो ये बेयरिंग जमीन के खतरनाक झटके को सोख (Absorb) लेते हैं, जिससे नींव तो हिलती है लेकिन ऊपरी इमारत पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित रहती है. इसके अलावा, जिस तरह कारों में शॉक एब्जॉर्बर होते हैं, ठीक वैसे ही इमारतों में भी भारी-भरकम डैम्पर्स (Tuned Mass Dampers) लगाए जाते हैं, जो भूकंप के कंपन की ऊर्जा को हवा में ही खत्म कर देते हैं.सख्त कानून की जिद: दुनिया के सबसे बड़े सिम्युलेटर 'E-Defense' पर टेस्टजापान ने अपने इतिहास में कई ऐसे जख्म झेले हैं जिन्होंने पूरे देश को तबाह कर दिया था, जैसे 1923 का 'ग्रेट कांतो भूकंप' और 1995 का 'कोबे भूकंप'. इन महा-हादसों से सीख लेकर जापान ने अपने 'बिल्डिंग कोड' (Building Safety Laws) को दुनिया में सबसे सख्त और कड़ा बना दिया है. यहां कानूनन ऐसी इमारतें बनाना अनिवार्य है जो रिक्टर स्केल पर 8 या 9 की तीव्रता वाले भीषण झटके भी बिना गिरे आसानी से झेल सकें. जापानी वैज्ञानिक 'E-Defense' नामक दुनिया के सबसे बड़े शेकिंग टेबल (भूकंप सिम्युलेटर) पर असली बहुमंजिला इमारतों का लाइव टेस्ट करते हैं ताकि निर्माण की छोटी से छोटी कमी को भी समय रहते सुधारा जा सके.पलक झपकते ही अलर्ट: बुलेट ट्रेन में लग जाते हैं ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकजापान के पास दुनिया का सबसे तेज और सटीक 'अर्थक्वेक अर्ली वार्निंग सिस्टम' (EEW) है. जैसे ही जमीन के सैकड़ों किलोमीटर अंदर प्राथमिक तरंगें (P-waves) उठती हैं, देश भर में फैले सेंसर्स उन्हें मिलीसेकंड में पकड़ लेते हैं. विनाशकारी तरंगों (S-waves) के धरातल पर पहुंचने से कुछ सेकंड पहले ही पूरे देश के नागरिकों के मोबाइल पर एक खास इमरजेंसी अलार्म और अलर्ट चला जाता है. इतने कम समय में देश की बड़ी फैक्ट्रियों की मशीनें अपने आप रुक जाती हैं, बिल्डिंग्स की लिफ्ट नजदीकी सुरक्षित फ्लोर पर ठहर कर खुल जाती हैं और लोगों को संभलने का कीमती मौका मिल जाता है.इतना ही नहीं, जापान की मशहूर 'शिंकानसेन' (Shinkansen Bullet Train) सीधे इस राष्ट्रीय भूकंप डिटेक्शन नेटवर्क से जुड़ी हुई है. जैसे ही सेंसर्स को हल्के से झटके का भी आभास होता है, 300 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ रही बुलेट ट्रेनों में ऑटोमैटिक तरीके से इमरजेंसी ब्रेक एक्टिव हो जाते हैं. विनाशकारी लहरों के आने से पहले ही ट्रेनें सुरक्षित रूप से ट्रैक पर रुक जाती हैं, यही वजह है कि दशकों से इतने भूकंप आने के बावजूद जापान में आज तक कोई बड़ा बुलेट ट्रेन हादसा नहीं हुआ है.सदियों पुरानी लकड़ी की मीनारों (Pagodas) से चुराई आधुनिक तकनीकदिलचस्प बात यह है कि भूकंप से बचने की यह जापानी समझ सिर्फ आधुनिक विज्ञान की देन नहीं है. सदियों पुरानी लकड़ी से बनी जापानी मीनारें (Pagodas) बड़े से बड़े भूकंप में भी हमेशा सुरक्षित खड़ी रही हैं. प्राचीन इंजीनियरों ने उनके बीच में एक मुख्य और भारी लकड़ी का खंभा लगाया था, जिसे 'शिनबाशिरा' (Shinbashira) कहा जाता है. भूकंप के समय यह खंभा पूरी मीनार को एक सांप की तरह लचीलापन देता है, जिससे इमारत के अलग-अलग हिस्से विपरीत दिशाओं में हिलकर ऊर्जा को संतुलित कर लेते हैं. आज के आधुनिक जापानी इंजीनियर इसी प्राचीन कला और आर्किटेक्चर का गहराई से अध्ययन करके दुनिया की सबसे सुरक्षित गगनचुंबी इमारतें तैयार कर रहे हैं.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 8:55 am

अमेरिका-ईरान में बनी सीक्रेट डील? दोहा की बंद कमरों वाली बातचीत से आए चौंकाने वाले संकेत

मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी भारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है. कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद गोपनीय और अप्रत्यक्ष (Indirect) बातचीत हुई है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. इस ताजा बैठक से कुछ ऐसे सकारात्मक संकेत मिले हैं जो आने वाले दिनों में खाड़ी देशों की सूरत बदल सकते हैं. दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने पहले से तय समझौता ज्ञापन (MoU) को अमलीजामा पहनाने के रास्तों पर घंटों माथापच्ची की. इस हाई-प्रोफाइल चर्चा में ईरान की अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को अनलॉक करने, समझौते के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए एक एकदम नया और कड़ा सिस्टम बनाने और दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों को टेबल पर रखा गया. हालांकि कई मोर्चों पर दोनों महाशक्तियों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं, लेकिन इस बातचीत को पटरी पर लाने में जुटे मध्यस्थ देशों ने जो फीडबैक दिया है, वह वाकई उत्साहजनक है.आमने-सामने नहीं बैठे प्रतिनिधि, कतर और पाकिस्तान ने संभाली कमानईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से एक बड़ा अपडेट देते हुए उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने पुष्टि की है कि MoU को लागू करने को लेकर चल रहा यह महत्वपूर्ण चरण अब पूरा हो चुका है. दिलचस्प बात यह है कि दोहा के आलीशान होटलों में दोनों धुर विरोधी देशों के राजनयिक एक बार भी आमने-सामने नहीं बैठे. पूरी बातचीत को कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने अलग-अलग कमरों में बैठकर अंजाम दिया. इस दौरान दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने के लिए एक ऐतिहासिक सहमति बनी है. दोनों पक्ष अब इस बात पर राजी हो गए हैं कि समझौते के किसी भी संभावित उल्लंघन को रोकने, उसकी तुरंत जानकारी साझा करने और एक-एक चीज का पुख्ता रिकॉर्ड रखने के लिए बहुत जल्द एक 'विशेष संचार चैनल' (Special Communication Channel) यानी हॉटलाइन स्थापित की जाएगी. गरीबाबादी का मानना है कि यह नया ढांचा भविष्य में किसी भी अचानक पैदा होने वाले बड़े विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने में लाइफलाइन साबित होगा.3 अरब डॉलर के फंड पर फंसा पेंच, अमेरिका ने रखी कड़क शर्तइस सीक्रेट मीटिंग के बाद अरब मीडिया की गलियों से एक और सनसनीखेज दावा सामने आया. रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोहा वार्ता में ईरान की फ्रीज पड़ी संपत्ति में से लगभग 3 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि जारी करने पर एक शुरुआती सहमति बन गई है, जिसे किश्तों में ईरान को सौंपने का प्लान है. लेकिन जैसे ही यह खबर फैली, अमेरिकी खेमे ने इस पर तुरंत ब्रेक लगा दिया. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ लहजे में स्पष्ट किया कि फिलहाल वॉशिंगटन ने ईरान का एक भी डॉलर रिलीज नहीं किया है. अमेरिका ने अपनी शर्त साफ कर दी है कि तेहरान को फंड तभी मिलेगा जब वह MoU की हर एक शर्त को पूरी तरह मानेगा. इतना ही नहीं, अगर भविष्य में यह रकम जारी भी होती है, तो ईरान अपनी मर्जी से इसे खर्च नहीं कर पाएगा. अमेरिका की अंतिम मंजूरी के बाद इस धन का उपयोग सिर्फ मानवीय जरूरतों, खासकर अमेरिकी किसानों से कृषि उत्पाद खरीदकर ईरान की आम जनता तक खाना और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए ही किया जा सकेगा.स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान विवाद पर आर-पार की बहसत्रिपक्षीय बैठक में सिर्फ पैसों की बात नहीं हुई, बल्कि मिडिल ईस्ट के सबसे सुलगते क्षेत्र लेबनान और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रणनीतिक रूट पर भी तीखी बहस हुई. ईरान ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि लेबनान के भीतर इजरायल की सैन्य मौजूदगी इस शांति समझौते को जमीन पर उतारने में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है. इसके साथ ही तेहरान ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर हुंकार भरते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान और ओमान की संप्रभुता का हर हाल में सम्मान होना चाहिए. ईरान ने साफ किया है कि किसी भी बड़ी और व्यापक डील से पहले उसकी 5 प्रमुख शर्तों को मानना होगा. दूसरी ओर, ओमान की तरफ से भी टेबल पर एक नया शांति प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर दोनों देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने मुख्यालयों में शीर्ष नेतृत्व से सलाह-मशविरा करने के बाद ही अगला कदम उठाएंगे.ट्रंप के करीबियों ने तैयार की थी स्क्रिप्ट, 60 दिनों का मिला है अल्टीमेटमकतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस पूरी बातचीत को 'सकारात्मक प्रगति' करार दिया है. उन्होंने बताया कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन से जुड़े कई पेचीदा मुद्दों पर दोनों पक्ष आगे बढ़ने को तैयार हैं. हालांकि, अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों के संपन्न होने के बाद ही बुलाई जाएगी. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस पूरी वार्ता की पटकथा बेहद सधे हुए अंदाज में लिखी गई थी. मंगलवार रात से शुरू होकर बुधवार तक चली इस मैराथन बैठक से ठीक पहले अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी सलाहकार व दामाद जारेड कुशनर ने कतर के प्रधानमंत्री के साथ एक क्लोज-डोर मीटिंग की थी, जहां इस बातचीत का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया.अमेरिका का सीधा गणित है कि यदि ईरान एक व्यापक परमाणु समझौते को मान लेता है, तो उसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली कमाई की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ा वैश्विक आर्थिक फायदा मिल सकता है. दोनों देशों ने पहले समझौता ज्ञापन पर साइन करते समय 60 दिनों के भीतर इस महा-परमाणु समझौते को पूरा करने का टारगेट रखा था, और दोहा की यह बैठक उसी दिशा में सबसे बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 8:42 am

ब्लैकबोर्ड- बेटी की लाश मां-बेटे ने फंदे से उतारी:देखते ही पागल हो गया, बोली थी- NEET एग्जाम से लौटते समय मोमोज लेकर आऊंगी

एक बेटी मां से कहकर गई थी कि NEET परीक्षा से लौटते वक्त- 'मोमोज लेकर आऊंगी।' दूसरी बेटी परीक्षा केंद्र से एग्जाम देकर निकलते ही पिता से बोली थी- ‘अब तो आपकी बेटी डॉक्टर बन गई समझो।’ दोनों घरों में डॉक्टर बनने के सपने सज रहे थे। लेकिन नीट का पेपर लीक हो गया। उसके कुछ ही दिनों बाद एक घर में पंखे से लटका शव मिला और दूसरे घर में नीट की दोबारा परीक्षा के दिन नर्मदा किनारे बेटी की लाश। अब दोनों परिवारों के पास बची हैं सिर्फ बेटियों की तस्वीरें, अधूरे सपने और अनगिनत सवाल। इस बार ब्लैकबोर्ड में मैं नीरज झा कहानी लाया हूं मध्य प्रदेश के दो परिवारों की। दोनों ने अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना देखा, लेकिन NEET पेपर लीक के बाद दोनों बच्चों ने आत्महत्या कर ली। रीवा शहर से 60 किलोमीटर दूर महूगंज जिले का मांगलिया गांव। यहां एक भी पक्का मकान नहीं हैं। ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए थोड़ा आगे बढ़ने पर एक घर दिखाई दिया। यह कृष्ण कुमार चतुर्वेदी का पुश्तैनी मकान है। मिट्टी, छप्पर और खपरैल का बना। 49 साल के कृष्ण कुमार चतुर्वेदी बताते हैं- ‘अगर मुझे पता होता कि डॉक्टर बनाने का सपना बेटी की जान ले लेगा, तो मैं उसे कभी डॉक्टर बनाने की न सोचता। यह कहते हुए चुप हो जाते हैं। आंखें भर आती हैं। कुछ पल बाद मोबाइल निकालते हैं और बेटी आकांक्षा की तस्वीर दिखाने लगते हैं। रुंधे गले से कहते हैं- अब तो कुछ बचा ही नहीं है। सब बेटी आकांक्षा के साथ चला गया। हंसता, मुस्कुराता चेहरा… अभी चाय पी रहा था, तो आखों के सामने उसका चेहरा नाचने लगा। कहती थी- पापा अब तो डॉक्टर बन ही जाऊंगी। बस कुछ साल की तकलीफें हैं। पता होता कि उसकी जान एक परीक्षा की वजह से चली जाएगी, तो कभी डॉक्टर बनाने का सपना न देखता। उसे मना कर देता। कम-से-कम जिंदा तो रहती। पेपर लीक के बाद वह उदास रहने लगी थी। पर वो फांसी लगा लेगी…ऐसा भला मैं कैसे सोचता। फांसी लगाने से पहले एक बार तो कुछ बोलती। हमारा चेहरा ही देख लेती कि इस बाप का क्या होगा।' कृष्ण कुमार बताते हैं- 'हम परिवार के साथ नागपुर में रहते हैं। 20 मई की बात है। सुबह का वक्त था। मेरी बेटी ने तरबूज और कुछ फल काटकर मुझे खाने को दिए। मार्केट से कुछ काम निपटाकर वापस घर आया, तो वह सो रही थी। मैंने कहा- बेटा खाना खा लो, फिर सोना। बोली- नहीं पापा, नींद बहुत आ रही है। आप खा लो। खाना खाने के बाद मैं, पत्नी और बेटा बरामदे में सो गए। जबकि बेटी सोने के लिए अपने कमरे में चली गई। करीब 2 घंटे बाद, दोपहर के 3 बजे थे। उसकी मां ने पुकारा, लेकिन कमरे से कोई आवाज नहीं आई। कुछ देर बाद गेट ठकठकाया, तब भी कोई आवाज नहीं आई। खिड़की से झांककर देखा, तो वह पंखे से दुपट्टा लगाकर लटकी हुई थी। हाय मेरी आकांक्षा…! यह कहते कृष्ण कुमार फफककर रोने लगते हैं। इस दौरान बारिश शुरू हो जाती है। वह कुछ देर चुप रहकर बताते हैं- ‘कोई अगर कहे कि आपकी बेटी आसमान में मिलेगी, तो मैं उसे आसमान से लाने चला जाऊंगा।' अगले दिन हम लाश को नागपुर से घर लाए। यहां अर्थी सजी। सभी लाश को प्रयागराज लेकर गए। मुझे साथ नहीं ले गए। अच्छा हुआ वर्ना बेटी की चिता में कूदकर उसी के साथ चला जाता। अब तो लगता है जिंदगी में कुछ बचा ही नहीं। किसके लिए जीना। एक बेटा है, 15 साल का। उसके लिए सोचता हूं कि अगर मुझे कुछ हो गया, तो वह और पत्नी किसके सहारे रहेंगे। आकांक्षा 19 साल की थी। 2025 में ही उसने 12वीं किया था। 3 मई 2026 को उसका NEET एग्जाम का पहला अटेम्प्ट था। उस दिन एग्जाम दिलाने मैं ही साथ गया था। जब सेंटर से बाहर आई, तो कहने लगी- 'पापा 720 नंबर में से 650 तो कोई रोकने वाला नहीं है। पेपर अच्छा गया है। समझो अब आपकी बेटी डॉक्टर बन गई। उसके बाद हम दोनों ने एक दुकान पर साथ में लस्सी पी थी। मैंने मन ही मन सोचा- तब तो मैं डॉक्टर का बाप कहलाऊंगा। मैं उसे प्यार से लल्ला कहता था। एक दिन मैंने यूं ही कहा- लल्ला ये बता, जब तुम डॉक्टर बनोगी, तो डिग्री लेते वक्त जब मैं मंच पर जाऊंगा तो क्या बोलूंगा? यह कि रोटी बनाने वाले की बेटी डॉक्टर बन गई है? दरअसल, मैं नागपुर शादी-ब्याह में कैटरिंग यानी खाना बनाने और परोसने का काम करता हूं। ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं। उस दिन वह हंसकर बोली- पापा मैं आपकी परी बेटी हूं। देखिए कैसे, मेरे गाल पर डिंपल आते हैं। कितनी सुंदर लगती हूं। आपको सब सिखा दूंगी। अंग्रेजी भी। भाई की तो आप चिंता ही मत कीजिए। उसे मैं पढ़ाऊंगी। बस डॉक्टर बन जाने दीजिए, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया।’ इस दौरान कृष्ण कुमार अपनी मोबाइल में आकांक्षा की तस्वीर बार-बार देख रहे हैं। पास में एक पेपर भी लिए हैं, जिस पर कुछ लिखा है। वह रुंधे गले से उस नोट को दिखाते हुए कहते हैं- ‘सुसाइड करने से पहले उसने यही लिखा था- ‘मम्मी-पापा, आपका मुझ पर बहुत भरोसा था कि बेटी डॉक्टर बनेगी, लेकिन दोबारा नीट पेपर देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर। पहले नीट के पेपर में अच्छे मार्क्स आते, लेकिन दोबारा पेपर अच्छा जाएगा, इसकी क्या गारंटी? सॉरी मम्मी-पापा। मैंने सब बर्बाद कर दिया आप दोनों का…। - स्नेहा’। स्नेहा उसका घर का नाम था। दिनभर में इस नोट को कई दफा पढ़ लेता हूं। उसे याद करके रात-रातभर जगा रह जाता हूं। मेरे हाथ में बहुत दर्द होता है। नींद नहीं आती। पागल सा हो गया हूं।’ यह कहते हुए वह बार-बार अपना दाहिना हाथ सहलाते हैं। पूछने पर कहते हैं- ‘इसमें लकवा मारा गया था, तब से काफी दर्द होता है। दो बार तो हार्ट की सर्जरी हो चुकी है। उसी में 6-7 लाख रुपए लग गए। ये 2020 की बात है। उसी के बाद बेटी ने डॉक्टर बनने की ठानी। कहती थी- पापा आपका इलाज मैं करूंगी। आपके हाथ ठीक कर दूंगी। डॉक्टर बनकर देश की सेवा करूंगी। जिनके पास पैसे नहीं होंगे, उनका फ्री इलाज करूंगी।' मोबाइल में उसकी तस्वीर दिखाते हुए वह कहते हैं- सोचिए, बाप को छोड़कर ऐसे ही हंसते हुए चली गई। 10-12 लाख रुपए कर्ज है। बेटी की कोचिंग और अपने इलाज के लिए लिया था। अब उसी के बारे में सोचकर मरे जा रहा हूं। अभी तो कोई नहीं मांग रहा, लेकिन कुछ महीने, साल में सब मांगेंगे? बहन से 6 लाख कर्ज लिया था। फिर बैंक से लोन लिया। जब बैंक वाले परेशान करने लगे, तब बड़े भाई से ढाई लाख रुपए लेकर बैंक को चुकाया। अब बाकी लोगों के पैसे कैसे दूंगा? नागपुर कब गए? ‘1993 में। पढ़ा-लिखा कम हूं। कमाने के लिए नागपुर गया। वहां कुछ महीने होटल में काम किया, फिर कैटरिंग का काम करने लगा। शादी-ब्याह में खाना बनाने का। जब बच्चे हुए, तो दिन-रात जाग-जागकर काम किया, ताकि उन्हें पढ़ा सकूं। 2020 के बाद जब हाथ में लकवा मार गया, तब तो सब खत्म हो गया। थोड़ा-बहुत हेल्पर के तौर पर काम कर पाता हूं। इसी से जो कमाई होती, घर चलता था। वहां किराए के मकान में रहता हूं। वहीं आकांक्षा भी नीट की तैयारी कर रही थी। जब हाथ का ऑपरेशन हुआ तो डॉक्टर ने पराठा, ज्यादा तला-भुना खाना खाने से रोक दिया, लेकिन बेटी से चुपके से पराठे मांग लेता था। उस पर वह कहती- गलत बात है पापा। जब आप ठीक हो जाएंगे, तब खूब अच्छा बनाकर खिलाऊंगी। अभी तो सादी रोटी से काम चलाओ। वह मुझे गोल-गोल रोटियां बनाकर खिलाती थी। निक्की यादव की लाश नर्मदा नदी के किनारे मिली इसके बाद अगले दिन मैं इंदौर के मांगलिया इलाके में रहने वाली 18 साल की निक्की यादव के परिवार से मिलने पहुंचा। निक्की ने 21 जून को दूसरी बार हुए नीट परीक्षा के दिन सुसाइड कर लिया। यहां एक दोमंजिला मकान में निक्की की मां इंदु यादव और पिता रामानंद यादव मिले। इंदु मुझे देखकर सिसक-सिसकर रोने लगीं। वह बताती हैं- '21 जून... यह तारीख अब भी मेरी आंखों के सामने घूमती है। उससे दो दिन पहले, शुक्रवार को मैं और पति शिरडी साईं बाबा के दर्शन के लिए निकले थे। पिछले साल जब उसका NEET क्लीयर नहीं हुआ, तो हमने मन्नत मांगी थी। हम साईं बाबा के दर्शन करके रविवार को करीब 12 बजे घर लौटे। पूरे रास्ते बस यही मना रही थी कि इस बार बेटी का पेपर अच्छा हो जाए। घर पहुंचते ही बड़ी बेटी ने बताया- मम्मी, निक्की परीक्षा देने निकल गई है। उसका सेंटर करीब 50 किलोमीटर दूर महूगंज में था। परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होनी थी, लेकिन सेंटर पर 12 बजे तक पहुंचना था। इसलिए वह पहले चली गई। केवल एक कप चाय पी कर परीक्षा देने गई थी। सोचा था लौटकर आएगी तो उसकी पसंद का खाना बनाऊंगी।' यह कहते हुए इंदु रोने लगती हैं। थोड़ी चुप रहकर फिर बताती हैं- जब भी टीवी या अखबार में किसी छात्र के आत्महत्या की खबर आती तो निक्की कहती- मम्मी, ये लोग सुसाइड क्यों कर लेते हैं? जिंदगी में कोई-न-कोई रास्ता निकल ही आता है। मैं उसकी बातें सुनकर कहती थी- हां बेटा, कभी हार नहीं माननी चाहिए, लेकिन क्या पता था कि वैसा ही कदम मेरी बेटी भी उठा लेगी। 21 जून की सुबह जब निक्की घर से निकल रही थी, तब उसके चेहरे पर एग्जाम का तनाव नहीं, बल्कि हमेशा वाली मुस्कान थी। वह परीक्षा के जा रही थी तो बड़ी बहन से बोली- ‘दीदी या भाई शिवम मुझे एग्जाम सेंटर छोड़ देंगे। वापस बस से आ जाऊंगी। बोली थी- वापस आते वक्त मोमोज लेकर आएगी।’ इंदु की नजर सामने रखी निक्की की तस्वीर पर टिक जाती है। कहती हैं- वह मोमोज लेकर नहीं आई। अब न वह दरवाजा खोलते ही मुझे अब आवाज लगाएगी, न पीछे से आकर मेरे गले से झूलेगी। सोचकर बहुत तकलीफ होती है कि उसे घर से निकलते हुए आखिरी बार देख नहीं पाई। वह बताती हैं- भगवान जानें, उस दिन क्या हुआ। 21 की शाम आखिरी बार उससे बात हुई। 7-8 बजे उसने किसी दूसरे के मोबाइल से कॉल किया, बोली- मम्मी मैं इंदौर आ गई हूं। यहां से अपना घर 15 किलोमीटर दूर है। पापा को बोलना, एक घंटे बाद पंचवटी आ जाएं। मैं बस से आ रही हूं। मेरा फोन बंद हो गया है। इतना कहते हुए इंदु के फिर से आंसू बहने लगते हैं। बगल में बैठी उनकी दूसरी बेटी रूबी यादव कंधे पर हाथ रखकर सहारा देते हुए कहती हैं- 'निक्की के कमरे में उसकी एक बड़ी-सी तस्वीर फ्रेम कराके अखबार से लपेटी हुई रखी है, लेकिन हमारी हिम्मत नहीं कि उसे दीवार पर टांग दें। ऐसा लगता है, वह किसी कमरे से खिलखिला रही है। वह थोड़ी मोटी थी। हम प्यार से उसे छोटा हाथी कहकर बुलाते थे।’ एग्जाम से एक दिन पहले शाम को निक्की को लेकर हम एक कैफे में डिनर के लिए गए थे। उसे एग्जाम की कोई चिंता नहीं थी। हमने खूब मस्ती की। करीब 2-3 घंटे बाद वापस घर लौटे थे। 21 जून की सुबह उसने थोड़ा-बहुत घर का काम किया। झाड़ू लगाकर बोली- दीदी, अब तैयार होने जा रही हूं। वापस आने के लिए बस का किराया दे दो। मैंने उसे 500 रुपए दिए। बोली- अरे! ये तो ज्यादा हो गया। फिर बोली- चलो मोमोज लेकर आऊंगी। रूबी बताती हैं- हम चार बहनों में वह सबसे छोटी थी। भाई शिवम से बड़ी। उस दिन शिवम सेंटरछोड़ने गया। वापस आते वक्त उसे पानी की बोतल खरीदकर दी थी। शाम 5 बजे उसका एग्जाम खत्म हुआ। 5 घंटे बाद भी जब वह घर नहीं लौटी, तब हमें लगा कि कुछ गड़बड़ है। रात 9 बजे से लगातार उसे 50 से ज्यादा कॉल किए, लेकिन किसी का जवाब नहीं आया। मैंने मैसेज भी किया- ‘निक्की, प्लीज अटैंड दि कॉल’, लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आया। इस दौरान मां इंदु सुबकते हुए बोलीं- ‘भइया अब कैमरा बंद कर दीजिए। हम लोगों को मत कुरेदिए। बेटी चली गई… अब क्या ही बात करूं।’ कुछ देर चुप रहकर फिर कहती हैं। उस रात हमने थाने में शिकायत की, तो पुलिस ने उसकी उम्र पूछी। हमने 20 साल बताया, तो कहने लगी- अरे! किसी के साथ भाग गई होगी। आ जाएगी कल तक। उस दिन समय रहते पुलिस छानबीन करती, तो शायद बेटी जिंदा मिल जाती। वो कहती थी- मेरी दो बहनें सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। मैं तो डॉक्टर बनूंगी।’ यह कहते हुए इंदु फिर रोने लगती हैं। अब मैं कैमरा बंद कर देता हूं। घर के भीतर से निक्की के पिता रामानंद यादव आए। वह बताते हैं- ‘ब्रश कर रहा था। हफ्तेभर हो गए हैं ठीक से कुछ खाया-पीया नहीं है। सोचता हूं अगर मैं टूट गया, तो बच्चे, पत्नी… सब बिखर जाएंगे। रात 9 बजे तक वह जब घर नहीं आई, तो मैं अपने बेटे के साथ बस स्टैंड गया। हर बस को रोककर उसमें झांक-झांककर देखने लगा। उधर, बेटी उसे लगातार कॉल कर रही थी। जब आधे घंटे बाद भी कुछ पता नहीं चला, तब आसपास के हॉस्पिटल पहुंचे- यह सोचकर कि कहीं एक्सीडेंट तो नहीं हो गया। आखिरकार, हारकर लसूड़िया पुलिस स्टेशन गया। पुलिस ने कहा- लोकेशन ट्रेस करने में 24 घंटे लगेंगे। हम वापस घर आ गए। रातभर जागे रहे कि कहीं से कोई अच्छी खबर मिल जाए। सुबह हुई तो फिर से साइबर पुलिस के पास गए। पता चला कि बेटी की अंतिम लोकेशन बड़वाह में मिली है, जो खरगोन जिले में आती है। सोचने लगा कि जब उसने आखिरी बार कॉल किया था, तो बताया था कि वह इंदौर के भंवरकुआं पहुंच गई है। वहां से 85 किलोमीटर दूर आखिर बड़वाह कैसे पहुंच गई? उसके बाद मेरी बेटियों ने बड़वाह के अलग-अलग हॉस्पिटल, थानों में फोन करना शुरू किया। शाम होते-होते पता चला कि खरगोन के महेश्वर में नर्मदा नदी के एक टापू पर 20 साल की लड़की की लाश मिली है। पुलिस ने लाश को रेस्क्यू कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। हम अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टर ने बताया कि मौत 21 जून की रात में ही हो चुकी थी। उसके साथ कुछ गलत नहीं हुआ है। पिंक कलर की सूट-सलवार पहनी लाश…।’, रामानंद यह बताते हुए फफककर रोने लगते हैं। थोड़ी देर बाद कहते हैं- अब उसके कमरे में जाने का दिल नहीं करता। उसकी बनाई हुई पेंटिंग, स्टडी टेबल, कुर्सी, किताब से भरी अलमारी… सब यूं ही पड़ा है। 2024 में उसने NEET का पहला अटेंम्प्ट दिया था। उसका डेंटल के लिए सिलेक्शन भी हो गया था, लेकिन उसने कहा था- पापा MBBS करना है और तैयारी करूंगी। मैंने उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा था- तुम्हें जितना पढ़ना है, पढ़ो। वह इतना पढ़ती थी कि कई-कई दिन घर से बाहर नहीं निकलती थी। पेपर लीक नहीं हुआ होता, तो मेरी बच्ची आज हमारे बीच होती। नीट का पहला एग्जाम देकर आई थी, तो बोली थी- पापा इस बार क्रैक हो जाएगा, लेकिन 21 जून का पेपर पता नहीं कैसा हुआ। उसकी आखिरी आवाज सुनने को दिल तरस गया। अब तो उसकी आत्मा को शांति तभी मिलेगी, जब हमें पता चल जाएगा कि उस रात मेरी बेटी खरगोन कैसे पहुंची? पुलिस बता रही है कि रैपिडो करके ओंकारेश्वर गई थी। भला इतना दूर कोई रैपिडो करेगा? निष्पक्ष जांच चाहता हूं। ------------------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड- तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI में जा रही एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- भाई का अपहरण किया, जिससे जिंदा साबित हो जाऊं: सिंदूर लगाने वाली पत्नी विधवा पेंशन मांगने पहुंची, लेकिन मुझे जिंदा नहीं माना साल 1975। लाल बिहारी 20 साल के थे। शादी के 10 साल बाद अभी-अभी गौना हुआ था और पत्नी घर आई थी। मां ने कहा- गांव की जमीन गिरवी रखकर बैंक से कुछ लोन ले लो। अपना काम-धंधा शुरू करो, वर्ना आगे बाल-बच्चों को कैसे पालोगे? पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 2 Jul 2026 8:14 am

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर तीन बलूच नागरिकों को जबरन गायब करने का आरोप, मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया क‍ि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन और आम नागरिकों को कथित रूप से जबरन लापता कर दिया गया।

देशबन्धु 2 Jul 2026 6:30 am

'लोकायन-26' के तहत न्यूयॉर्क रवाना हुआ आईएनएस सुदर्शिनी, भारत की विरासत का देगा संदेश

भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गया। यह वहां सेल-फोर्थ टू-हंड्रेड-फिफ्टी न्यूयॉर्क और सेल बोस्‍टन कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा

देशबन्धु 2 Jul 2026 3:30 am

चीन में सेवानिवृत्त सैनिकों के रोजगार और उद्यमिता बढ़ाने पर नियम लागू होगा

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने हाल में राज्य परिषद का आदेश दिया। सेवानिवृत्त सैनिकों के रोजगार और उद्यमिता बढ़ाने पर नियम इस साल 1 अगस्त को लागू होगा।

देशबन्धु 1 Jul 2026 11:24 pm

अमेरिका में तीन क्यूबाई नागरिक हिरासत में, रुबियो ने रद्द किया कानूनी दर्जा

स्टेट डिपार्टमेंट ने बताया कि क्यूबा के तीन नागरिकों को फेडरल कस्टडी में ले लिया गया है। इनमें क्यूबा सरकार से जुड़ी एक ऐसी संस्था का पूर्व कर्मचारी भी शामिल है, जिस पर इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो की ओर से उनका कानूनी दर्जा खत्म किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।

देशबन्धु 1 Jul 2026 11:20 pm

1500 साल पुराना रिश्ता रचने जा रहा है नया इतिहास, जानें महाशक्तियों का क्या है महाप्लान

भारत और जापान के बीच के संबंध सिर्फ कूटनीतिक या व्यापारिक नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें 1500 साल पुराने गहरे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक सांस्कृतिक बंधनों से जुड़ी हुई हैं। छठी शताब्दी में जब बौद्ध धर्म भारत से चीन और कोरिया होते हुए जापान पहुंचा, तभी से दोनों देशों के बीच एक अटूट सांस्कृतिक सेतु का निर्माण हो गया था। अब यही प्राचीन और मजबूत ऐतिहासिक रिश्ता एक नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के भविष्य की एक नई इबारत लिखेगा।सांस्कृतिक विरासत से लेकर आधुनिक साझेदारी तक का सफरसदियों पुराने इस जुड़ाव को आधुनिक युग में एक नई दिशा मिली है। आज भारत और जापान सिर्फ दो मित्र देश नहीं हैं, बल्कि एशिया-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में स्थिरता, शांति और समृद्धि के सबसे बड़े स्तंभ बनकर उभरे हैं। बौद्ध धर्म की साझी विरासत से शुरू हुआ यह सफर अब बुलेट ट्रेन, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस डील और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन तक पहुंच चुका है। दोनों देशों का यह बढ़ता तालमेल न केवल द्विपक्षीय हितों को साध रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक नया शक्ति संतुलन भी पैदा कर रहा है।रणनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भविष्य की नई इबारतमौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भारत और जापान की यह रणनीतिक साझेदारी बेहद अहम हो चुकी है। रक्षा, सुरक्षित तकनीक, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। जापान का निवेश और भारत का विशाल बाजार तथा कुशल कार्यबल मिलकर आने वाले कल की तस्वीर बदल रहे हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि यह दोस्ती आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी, जो न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य को तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 2:21 pm

एच-1बी वीजा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप को झटका, अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता बरकरार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट फैसले से इमिग्रेशन से जुड़ी मुश्किलों में फंसे एच-1बी वर्क वीजा पर रह रहे करीब तीन लाख भारतीयों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के फैसले में अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी बच्चों की नागरिकता के अधिकार को बरकरार रखा गया है।

देशबन्धु 1 Jul 2026 1:14 pm

नेतन्याहू का बड़ा बयान: अब अमेरिका की आर्थिक मदद की जरूरत नहीं, ईरान पर तीसरी कार्रवाई की भी दी चेतावनी

नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अब आर्थिक रूप से इतना सक्षम हो चुका है कि उसे अमेरिकी आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो इजराइल ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

देशबन्धु 1 Jul 2026 12:49 pm

शेख हसीना के करीबी पूर्व मंत्री हसनुल हक इनु को 10 साल की सजा: छात्रों के दमन और हिंसा के लिए ठहराए गए दोषी

बांग्लादेश की सियासत में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, पूर्व सूचना मंत्री और 1971 मुक्ति संग्राम के अनुभवी सेनानी हसनुल हक इनु को 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने इनु को अगस्त 2024 के सरकार विरोधी छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस को घातक बल प्रयोग के लिए उकसाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमनकारी नीति अपनाने का दोषी पाया है। यह फैसला शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान हुई हिंसा को लेकर गठित विशेष न्यायाधिकरणों की एक और कड़ी कार्रवाई है।211 पन्नों का ऐतिहासिक फैसला और आरोपट्रिब्यूनल ने 211 पन्नों के अपने विस्तृत फैसले में इनु को जुलाई 2024 के विद्रोह के दौरान कुश्तिया जिले में छह प्रदर्शनकारियों की हत्या से संबंधित अपराधों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माना है। अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य पेश किए कि 19 जुलाई 2024 को प्रधानमंत्री आवास पर हुई 14-दलीय गठबंधन की उच्च-स्तरीय बैठक में इनु मौजूद थे, जहां सेना की तैनाती और प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का विवादित निर्णय लिया गया था। इसके अलावा, उन पर पुलिस को प्रदर्शनकारियों की सूची बनाकर उन पर कार्रवाई करने और टीवी इंटरव्यू के जरिए आंदोलनकारियों को 'आतंकवादी' कहकर बदनाम करने का आरोप भी साबित हुआ है।'अग्निपरीक्षा' करार देकर नकारा फैसलासजा सुनाए जाने के बाद इनु ने इस पूरी कानूनी कार्यवाही को महज एक 'नाटक' करार दिया है। अदालत कक्ष से बाहर निकलते हुए उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यह एक फर्जी मुकदमा है और वे इस 'अग्निपरीक्षा' से गुजर रहे हैं। उनकी पत्नी अफरोजा हक रीना ने भी इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है और संकेत दिया है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और अधिवक्ताओं से सलाह लेने के बाद परिवार ऊपरी अदालत में अपील दायर करने पर विचार करेगा।शेख हसीना के शासन में इनु का रसूखहसनुल हक इनु ने 2012 से 2018 तक सूचना मंत्री के रूप में बांग्लादेश की कैबिनेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, 2024 की अशांति के दौरान उनका राजनीतिक प्रभाव पहले के मुकाबले कम हो गया था, लेकिन अभियोजन पक्ष ने अदालत को यह समझाने में सफलता हासिल की कि हसीना सरकार के गिरने के अंतिम क्षणों तक इनु फैसले लेने वाली कोर टीम का हिस्सा थे। यह सजा इस बात का संकेत है कि अंतरिम सरकार के बाद गठित न्यायाधिकरण, पिछली सरकार के उन मंत्रियों और सलाहकारों के खिलाफ शिकंजा कसने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनकी भूमिका छात्र आंदोलन को कुचलने में रही थी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 11:22 am

सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद डोनाल्ड ट्रंप का तंज: शी जिनपिंग और चीन को दी 'बर्थराइट सिटिजनशिप' की जीत पर बधाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर 'बर्थराइट सिटिजनशिप' (जन्मजात नागरिकता) के मुद्दे पर मुखर हो गए हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता देने के अधिकार को बरकरार रखने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तंज कसते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को इस फैसले के लिए 'बधाई' दी है। ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि यह देश के लिए बेहद महंगा और अनुचित कदम है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे हार मानने वाले नहीं हैं और इस व्यवस्था को बदलने के लिए कांग्रेस के जरिए नए कानून लाने की पुरजोर कोशिश करेंगे।कांग्रेस से लगाई कानून बनाने की गुहारट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस से अपील की है कि वे बिना किसी देरी के 'बर्थराइट सिटिजनशिप' को खत्म करने के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करें। ट्रंप के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि संविधान में बड़े बदलाव के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए, तो इसे बदला जा सकता है। उन्होंने कांग्रेस को अपना पूर्ण समर्थन देने का भरोसा दिलाया है। राष्ट्रपति का मानना है कि एक ठोस कानून के माध्यम से इस दशकों पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर अमेरिका की सीमाओं की सुरक्षा और प्रवासियों के नियमों को सख्त किया जा सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 14वें संशोधन पर लगाई मुहरअमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने बहुमत के फैसले में संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या करते हुए ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया, जो अवैध या अस्थायी प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता देने से रोकता था। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा, नागरिकता, तब भी और अब भी अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में शामिल होने का अधिकार है। 14वें संशोधन को बनाने वालों ने इस देश में पैदा हुए हर व्यक्ति से यह वादा किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जन्मजात नागरिकता का सिद्धांत अमेरिकी लोकतंत्र की नींव का एक हिस्सा है और इसे कानूनी व्याख्याओं के माध्यम से पलटा नहीं जा सकता।क्या था ट्रंप प्रशासन का तर्क?ट्रंप प्रशासन लंबे समय से यह दलील देता रहा है कि 14वें संशोधन का मूल उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद पूर्व दासों और उनके वंशजों को अधिकार देना था, न कि अवैध प्रवासियों या अल्पकालिक पर्यटकों और विदेशी छात्रों के बच्चों को नागरिकता प्रदान करना। प्रशासन का कहना था कि यह व्यवस्था गलत इस्तेमाल की जा रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए संवैधानिक वादे को निभाने पर जोर दिया। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप की अपील पर अमेरिकी कांग्रेस कोई नया विधेयक पेश करती है या यह मामला एक बार फिर लंबी कानूनी और राजनीतिक खींचतान का केंद्र बनता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 11:20 am

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का 'रोता' हुआ नया नाटक: भारत के खौफ से नाम लेने की भी नहीं हुई हिम्मत

पाकिस्तान सिंधु जल समझौते के निलंबन के बाद से पूरी तरह बेदम हो चुका है। वैश्विक मंचों पर बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब उसकी एक न चली, तो अब पाकिस्तान ने इसे लेकर एक 'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस' का ड्रामा शुरू किया है। इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी नेताओं का रोना-धोना तो जारी रहा, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पाकिस्तान का खौफ इतना गहरा है कि उसके नेता मंच से 'भारत' का नाम तक लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। भारत की सैन्य ताकत और कड़े फैसलों के डर से पाकिस्तानी नेताओं ने सीधे तौर पर नाम लेने के बजाय 'ताकतवर देश' कहकर अपनी बौखलाहट जाहिर की।भारत के डर से 'ताकतवर देश' का जपा नामपाकिस्तानी सांसद मुसादिक मलिक ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोई ताकतवर देश अपनी मर्जी से किसी समझौते को रद्द नहीं कर सकता। गौरतलब है कि भारत ने बीते साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले के बाद यह समझौता स्थगित कर दिया था, जिसमें आतंकियों ने पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया था। उस बर्बर हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों की कमर तोड़ दी थी। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।'उपप्रधानमंत्री इशाक डार और बिलावल भुट्टो का बेतुका रागकॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने बेतुकी बातें करते हुए कहा कि वे भारत के फैसले को खारिज करते हैं और समझौता अभी भी वैध है। वहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी ने सिंधु नदी की तुलना 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' और 'स्वेज नहर' जैसे वैश्विक जलमार्गों से कर दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके। बिलावल ने इसे 'हथियार के रूप में इस्तेमाल' होने से बचाने का राग अलापा, लेकिन वे यह भूल गए कि यह कदम पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का ही सीधा परिणाम है।क्यों दाने-दाने को मोहताज हो रहा पाकिस्तान?पाकिस्तान की बौखलाहट के पीछे की असली वजह उसकी अर्थव्यवस्था और कृषि का पूरी तरह सिंधु नदी पर निर्भर होना है। भारत द्वारा हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा न करने के कारण पाकिस्तान अब पूरी तरह अंधेरे में है। उसे यह नहीं पता चल पाता कि भारतीय नदियों से कितना पानी आ रहा है, जिससे वह बाढ़ या सूखे की स्थिति में समय रहते बचाव नहीं कर पा रहा है। अपनी खुद की गलतियों और आतंक को पालने के कारण आज पाकिस्तान न केवल आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, बल्कि भारत के इस कड़े कदम से वह दाने-दाने के लिए भी मोहताज होने की कगार पर आ खड़ा हुआ है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 11:19 am

तालिबान का 'सर्जिकल स्ट्राइक': पाकिस्तान के घर में घुसकर तालिबानी वायुसेना ने किए ISIS-K के ठिकाने तबाह

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहा सीमा विवाद अब युद्ध जैसी स्थिति में बदल गया है। जून के अंत में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान की सीमा में घुसकर किए गए हवाई हमलों का तालिबान ने बेहद आक्रामक जवाब दिया है। अफगान वायुसेना ने पाकिस्तानी सीमा के अंदर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में ड्रोन और हवाई हमलों को अंजाम दिया है। तालिबान का दावा है कि ये हमले उन आतंकी ठिकानों पर किए गए हैं, जहाँ से इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS-K) के आतंकी अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाने की साजिश रच रहे थे।तालिबान का बड़ा दावा: आतंकी ठिकाने ध्वस्त, आम नागरिक सुरक्षितअफगान समाचार एजेंसी 'टोलो न्यूज' के अनुसार, इस्लामिक अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने इन एयरस्ट्राइक्स की आधिकारिक पुष्टि की है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहाँ से अफगानिस्तान के भीतर बेगुनाह नागरिकों की हत्या और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की योजनाएँ बनाई जा रही थीं। तालिबान ने यह स्पष्ट किया है कि यह ऑपरेशन पूरी सटीकता (Precision) के साथ किया गया है, जिसमें आतंकियों को भारी नुकसान पहुँचा है, जबकि इस जवाबी कार्रवाई में किसी भी आम नागरिक के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।क्यों भड़का है अफगानिस्तानयह जवाबी हमला पाकिस्तान द्वारा हाल ही में अफगानिस्तान के भीतर किए गए उन हवाई हमलों का नतीजा है, जिनमें तालिबान सरकार के अनुसार, कम से कम 38 अफगान नागरिक मारे गए थे और 163 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने भी इन हमलों की भयावहता की पुष्टि की थी। इसके विपरीत, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने दावा किया था कि उन्होंने उन हमलों में 29 आतंकियों को मार गिराया है, लेकिन अफगानिस्तान ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया है।भारत की सख्त चेतावनी: संप्रभुता पर हमला बर्दाश्त नहींइस पूरे घटनाक्रम पर भारत ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक्स को अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति के लिए सीधा खतरा करार दिया है। भारत का स्पष्ट मानना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और आर्थिक तंगी से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के लापरवाह कदम उठा रहा है। तालिबान ने भी विश्व को चेतावनी दी है कि वे भविष्य में अफगानिस्तान की सुरक्षा को अस्थिर करने वाले किसी भी ठिकाने या आतंकी को बख्शने वाले नहीं हैं, चाहे वह सीमा के उस पार ही क्यों न स्थित हो।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 11:07 am

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता को बरकरार रखा, ट्रंप का कार्यकारी आदेश असंवैधानिक

अदालत ने 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर व्यक्ति संविधान के तहत जन्म से ही अमेरिकी नागरिक है।

देशबन्धु 1 Jul 2026 10:56 am

भारत ने एफएटीएफ का किया समर्थन, टेरर फंडिंग रोकने वाली संस्था पर पाक के हमलों को किया खारिज

भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंक-वित्तपोषण निगरानी संस्था पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि ये आलोचनाएं “जांच के डर” से प्रेरित हैं।

देशबन्धु 30 Jun 2026 2:45 pm

अफगानिस्तान पर अटैक कर बुरी तरह घिरा पाकिस्तान! वैश्विक मंच पर हो रही भारी थू-थू, संकट के बीच पक्के दोस्त के साथ ढाल बनकर खड़ा हुआ भारत

पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान की सीमा के भीतर किए गए औचक हमले के बाद दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव चरम पर पहुंच गया है। बिना किसी ठोस उकसावे के किए गए इस सैन्य एक्शन के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के निशाने पर आ गया है और हर तरफ उसकी इस आक्रामक नीति की थू-थू हो रही है। इस नाजुक मोड़ पर भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत कूटनीति का परिचय देते हुए अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त अफगानिस्तान के प्रति अटूट समर्थन जताया है। नई दिल्ली की ओर से आए इस रणनीतिक रुख ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल तेज कर दी है।हवाई और जमीनी हमले के बाद पाकिस्तान की चौतरफा घेराबंदी शुरूस्थानीय और अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना द्वारा सीमा पार किए गए हवाई और जमीनी हमलों में बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें हैं। पाकिस्तान ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ कदम बताया है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित दुनिया के कई बड़े देशों ने इसे संप्रभुता का खुला उल्लंघन माना है। इस सैन्य दुस्साहस के बाद अफगानिस्तान ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है, जिससे डूरंड लाइन (Durand Line) पर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान खुद अपने ही बुने जाल में फंस गया है और वह वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है।ऐतिहासिक दोस्ती का फर्ज: संकट की इस घड़ी में क्यों अफगानिस्तान के साथ आया भारतभारत और अफगानिस्तान के संबंध सदियों पुराने और बेहद मजबूत सांस्कृतिक व रणनीतिक बुनियाद पर टिके हैं। भारत ने हमेशा संकट के समय अफगान नागरिकों की मदद की है, चाहे वह बुनियादी ढांचे का विकास हो या मानवीय सहायता। इस सैन्य तनाव के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ संकेत दिए हैं कि वह क्षेत्र में किसी भी तरह की एकतरफा सैन्य आक्रामकता के खिलाफ है और शांतिपूर्ण संवाद का पक्षधर है। नई दिल्ली का अफगानिस्तान के साथ खड़े होना यह साफ संदेश देता है कि भारत अपने रणनीतिक साझेदारों को किसी भी विपरीत परिस्थिति में अकेला नहीं छोड़ता, जिसने काबुल में भारत के प्रति सम्मान को और बढ़ा दिया है।एआई सर्च और आधुनिक कूटनीति में इस तनाव के दूरगामी परिणामआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और वैश्विक विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान की इस हरकत का असर उसके पहले से ही बदहाल आर्थिक और राजनीतिक हालातों पर बेहद बुरा पड़ने वाला है। अमेरिका, मध्य पूर्व और मध्य एशियाई देशों की नजरें इस पूरे विवाद पर टिकी हुई हैं। भारत की सक्रिय कूटनीति और अफगानिस्तान के प्रति उसके खुले समर्थन ने इस्लामाबाद के रणनीतिक थिंक-टैंक को बैकफुट पर ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुककर पाकिस्तान अपने कदम पीछे खींचता है या फिर यह सीमाई विवाद किसी बड़े क्षेत्रीय टकराव का रूप ले लेता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:43 pm

दिसंबर में अमेरिका जाएंगे पीएम मोदी! डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी सर्जियो गोर का बड़ा दावा, जानें बार-बार क्यों आ रहा है वॉशिंगटन से बुलावा

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्ते एक नए और बेहद मजबूत दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इसी बीच वैश्विक राजनीतिक गलियारों से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे खास और भरोसेमंद सिपहसालार सर्जियो गोर ने दावा किया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी दिसंबर महीने में अमेरिका की हाई-प्रोफाइल यात्रा पर जा सकते हैं। इस दावे के बाद से ही नई दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर अमेरिकी प्रशासन की तरफ से पीएम मोदी को बार-बार यह खास न्यौता क्यों भेजा जा रहा है।आखिर क्यों पीएम मोदी को बार-बार न्यौता भेज रहे हैं डोनाल्ड ट्रंपअंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन की तरफ से भारत को मिल रही यह असाधारण प्राथमिकता दोनों देशों के बीच के गहरे आपसी भरोसे को दर्शाती है। डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की निजी केमिस्ट्री जगजाहिर है, लेकिन इस बार का बुलावा सिर्फ दोस्ती तक सीमित नहीं है। अमेरिका इस समय वैश्विक मंच पर कई बड़े भू-राजनीतिक (Geopolitical) बदलावों से गुजर रहा है, जहां उसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर भारत के मजबूत साथ की बेहद जरूरत है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन साल के अंत तक पीएम मोदी के साथ एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक करना चाहता है।रक्षा सौदों से लेकर व्यापार तक इन बड़े मुद्दों पर टिकी हैं दुनिया की नजरेंअगर पीएम मोदी की यह दिसंबर यात्रा फाइनल होती है, तो यह कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होने वाली है। इस संभावित दौरे के दौरान दोनों महाशक्तियों के बीच कई अरब डॉलर के अत्याधुनिक रक्षा सौदों, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (iCET) की साझेदारी और इंडो-पैसिफिक रीजन में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने जैसे गंभीर मुद्दों पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसके साथ ही, अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच और दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए भी इस बैठक को बेहद मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ेगा।नई दिल्ली और वॉशिंगटन की जुगलबंदी से बढ़ी ड्रैगन की बेचैनीसर्जियो गोर के इस बड़े खुलासे और भारत-अमेरिका की इस बढ़ती नजदीकी ने पड़ोसी देश चीन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) के दौर में कूटनीतिक जानकार मान रहे हैं कि दिसंबर का यह संभावित दौरा वैश्विक राजनीति का नया रुख तय करेगा। भारत जिस तरह से वैश्विक सप्लाई चेन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है, उसे देखते हुए अमेरिका भारत को अपने सबसे मजबूत और स्थायी साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पीएमओ (PMO) की तरफ से इस यात्रा को लेकर आधिकारिक तौर पर क्या तारीखें सामने आती हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:41 pm

पाकिस्तान में खत्म हुआ कृष्ण-राम गली का ड्रामा! प्रशासन ने रातों-रात ढहाया 125 साल पुराना ऐतिहासिक गुरुद्वारा, भारी आक्रोश

पाकिस्तान से अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की एक बेहद हैरान करने वाली और दर्दनाक खबर सामने आई है। पिछले कुछ समय से 'कृष्ण गली' और 'राम गली' जैसे ऐतिहासिक इलाकों के नाम बदलने को लेकर चल रहे ड्रामे के बीच, अब पाकिस्तानी प्रशासन ने अपना असली रंग दिखा दिया है। सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए, वहां करीब 125 साल पुराने एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे को जमींदोज कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद न केवल पाकिस्तान में रहने वाले सिख और हिंदू परिवारों में दहशत का माहौल है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गहरी नाराजगी जताई है।रातों-रात मलबे में तब्दील कर दी गई सदियों पुरानी सिख विरासतस्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी नोटिस के बेहद गुपचुप तरीके से ढहाया गया। स्थानीय प्रशासन ने भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया, ताकि कोई भी इसका विरोध न कर सके। विभाजन से पहले के बने इस गुरुद्वारे से न केवल सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं जुड़ी थीं, बल्कि यह उस इलाके की ऐतिहासिक पहचान का एक बेहद अहम हिस्सा था। इस प्राचीन ढांचे को मलबे में तब्दील किए जाने की तस्वीरों और वीडियो ने दुनिया भर के सिख और अल्पसंख्यक समुदायों को झकझोर कर रख दिया है।नाम बदलने के विवाद की आड़ में रची गई बड़ी साजिशविशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों से कृष्ण गली और राम गली के नाम बदलने को लेकर जो विवाद खड़ा किया गया था, वह असल में इस ऐतिहासिक ढांचे को हटाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। पाकिस्तान में अक्सर अल्पसंख्यकों के प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को भू-माफियाओं और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से निशाना बनाया जाता रहा है। इस बार भी विकास और अतिक्रमण हटाने के नाम पर इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है, जिसने पाकिस्तान के धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के दावों की पूरी तरह से पोल खोलकर रख दी है।अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को घेरने की तैयारी तेजइस क्रूर और दमनकारी कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की चौतरफा थू-थू हो रही है। भारत सहित दुनिया भर के विभिन्न मानवाधिकार और सिख संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक कूटनीतिक मंचों से पाकिस्तान के इस कदम पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राचीन और धार्मिक विरासतों को इस तरह नष्ट करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के धार्मिक और नागरिक अधिकार कितने असुरक्षित और गंभीर खतरे में हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:40 pm

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा: क्या ईरान घुटनों पर आ गया, जानिए दोहा वार्ता को लेकर क्यों आमने-सामने हैं दोनों देश

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा शह और मात का खेल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज दावा किया कि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक का अनुरोध किया है। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है, लेकिन दूसरी ओर से मिला जवाब इसे एक बड़ी कूटनीतिक गुत्थी बना रहा है। ईरानी अधिकारियों ने ऐसी किसी भी बैठक की योजना से साफ इनकार कर दिया है, जिससे साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी अपने चरम पर है।दोहा वार्ता पर ट्रंप बनाम ईरान: सच क्या है?ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ बातचीत मंगलवार को कतर के दोहा में आयोजित होगी। वहीं, ईरान के वरिष्ठ वार्ताकार काजिम गरीबाबादी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी स्तर पर बातचीत की कोई पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि कतर के साथ अन्य मामलों पर संवाद जारी है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह दावा घरेलू राजनीति से भी प्रेरित हो सकता है, जहां वे यह दिखाना चाहते हैं कि उनका 'मैक्सिमम प्रेशर' काम कर रहा है और ईरान बातचीत के लिए मजबूर है।6 अरब डॉलर की संपत्ति और पेजेश्कियान का दांवईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हाल ही में जब्त की गई 6 अरब डॉलर की ईरानी संपत्ति के कतर के माध्यम से जारी होने का जिक्र किया है। यह कदम ईरानी जनता को अंतरिम समझौते के लिए राजी करने की एक कोशिश मानी जा रही है। दिलचस्प यह है कि अमेरिकी अधिकारी लगातार यह दोहरा रहे हैं कि ईरान की किसी भी संपत्ति से रोक अभी नहीं हटाई गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच यह वित्तीय मुद्दा दोनों देशों के बीच समझौते की मुख्य कड़ी बना हुआ है।होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया के लिए क्यों खतरनाक है यह तनाव?होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहां से वैश्विक व्यापार का करीब 20% तेल और गैस गुजरती है। हाल के दिनों में वहां जहाजों पर हुए हमलों और अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया ने क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है और तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ट्रंप के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अमेरिकी नागरिकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका में महंगाई घट रही है, लेकिन होर्मुज का तनाव उनके इस दावे को सीधे चुनौती दे रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:17 pm

यूरोप में प्रलयकारी गर्मी: सड़कें और ट्रैफिक लाइटें पिघलीं, हाईवे टूटे, 1300 से ज्यादा लोगों की मौत

यूरोप इस समय एक अभूतपूर्व और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में है, जिसने पूरे महाद्वीप को दहका दिया है। तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने के कारण स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि वहां का बुनियादी ढांचा (Infrastructure) जवाब देने लगा है। बर्लिन से लेकर इटली तक, सड़कों के डामर पिघल रहे हैं और ट्रैफिक लाइटें प्लास्टिक की तरह पिघलकर झुक रही हैं। लू के कारण अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसने यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ा दी है।जर्मनी में हाईवे टूटे, थम गए परिवहन के पहिएजर्मनी में गर्मी का असर सबसे ज्यादा परिवहन नेटवर्क पर पड़ा है। बर्लिन को पश्चिमी जर्मनी से जोड़ने वाला A2 मोटरवे भीषण गर्मी के कारण टूटकर बिखर गया, जिससे कई इंटरचेंज बंद करने पड़े। ब्रैंडनबर्ग के जीसार में हाईवे की हालत इतनी खराब हो गई है कि वहां गाड़ियों का चलना असुरक्षित हो गया है। इसके अलावा, लीपजिग शहर में तापमान इतना अधिक हो गया कि सड़क की डामर सतह पिघलने लगी, जिसके चलते ट्राम सेवाओं को बीच में ही रोकना पड़ा। बर्लिन की सड़कों पर तापमान कम करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ रहा है।फ्रांस-इटली में पिघल रही ट्रैफिक लाइटेंफ्रांस और इटली में भी स्थिति विकट है। सोशल मीडिया पर इटली और जर्मनी के कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटें तेज धूप और उमस की वजह से पिघलती हुई दिखाई दे रही हैं। ट्रेनें देरी से चल रही हैं और बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है। गर्मी से राहत पाने के लिए जलाशयों की ओर रुख कर रहे लोगों के साथ हादसे भी बढ़ गए हैं। फ्रांस में 18 जून से अब तक डूबने के 74 मामले सामने आए हैं, जबकि पोलैंड में एक ही दिन में 17 लोगों की जान चली गई।युद्धग्रस्त यूक्रेन और डेनमार्क पर दोहरी मारविचित्र बात यह है कि बिजली ग्रिडों के लिए प्रसिद्ध डेनमार्क में भी मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा हो गई है, जिससे वहां के ऊर्जा मंत्रालय को ग्रिड विस्तार पर सोचना पड़ रहा है। उधर, रूस के साथ युद्ध झेल रहे यूक्रेन के लिए यह भीषण गर्मी दोहरी मुसीबत बनकर आई है। इवानो-फ्रैंकिवस्क से लेकर फ्रंटलाइन पर स्थित जापोरीझझिया तक बिजली की खपत पर पाबंदियां लगा दी गई हैं। बिजली कंपनी 'यास्नो' के सीईओ सर्गी कोवलेंको के अनुसार, युद्ध से जर्जर हो चुके बिजली ग्रिडों के लिए यह गर्मी एक बड़ी परीक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय देशों का बुनियादी ढांचा इतनी भीषण गर्मी सहने के लिए नहीं बनाया गया था, और अब यह जलवायु परिवर्तन के खतरों को बयां कर रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:13 pm

ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: फेडरल गवर्नर लिसा कुक को नहीं हटा पाएंगे राष्ट्रपति, जानें क्या है पूरा विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा कानूनी अवरोध पैदा हो गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप के फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक को बर्खास्त करने के प्रयास पर रोक लगा दी है। 5-4 के बहुमत से आए इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन की कार्यकारी शक्तियों को एक बड़ा झटका दिया है। यह पहली बार है जब 1913 में फेडरल रिजर्व की स्थापना के बाद किसी राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय बैंक के किसी उच्च अधिकारी को हटाने की कोशिश को सर्वोच्च अदालत ने सिरे से खारिज किया है।सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ट्रंप प्रशासन की अपीलसुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ ने ट्रंप प्रशासन की उस याचिका को ठुकरा दिया, जिसमें कुक को बर्खास्त करने से रोकने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। जिला न्यायाधीश जिया कॉब ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि बिना उचित नोटिस और सुनवाई के लिसा कुक को हटाना 'उचित प्रक्रिया' (Due Process) का सीधा उल्लंघन है। इसके बाद कोलंबिया सर्किट अपील अदालत ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगाकर अंतिम रूप दे दिया है।क्या है विवाद की जड़?अगस्त 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए कुक को बर्खास्त करने का पत्र जारी किया था। उन्होंने लिसा कुक पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जिसे कुक और उनके समर्थकों ने पूरी तरह खारिज किया है। लिसा कुक, जो फेडरल रिजर्व की पहली अश्वेत महिला गवर्नर हैं, का कहना है कि यह कार्रवाई वास्तव में मौद्रिक नीति को लेकर चल रहे वैचारिक मतभेदों के कारण की जा रही है। उनका कार्यकाल 2038 तक निर्धारित है और उन्हें 2022 में नियुक्त किया गया था। इस फैसले के बाद ट्रंप ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत की कार्यवाही को 'पूरी तरह प्रक्रियात्मक' करार दिया है।फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और ट्रंप का रुखदुनिया के सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद से ही फेडरल रिजर्व उनके निशाने पर रहा है। इससे पहले वे फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के कार्यकाल के दौरान भी अपनी नाराजगी जता चुके हैं। केविन वॉर्श के नए चेयरमैन बनने के बाद भी ट्रंप प्रशासन और फेडरल रिजर्व के बीच खींचतान जारी है। लिसा कुक के मामले में आए इस फैसले ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से केंद्रीय बैंक के अधिकारियों को पद से नहीं हटा सकते, जो अमेरिकी संस्थागत लोकतंत्र के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:11 pm

शी चिनफिंग ने लुकाशेंको से भेंट की

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सोमवार सुबह राजधानी पेइचिंग में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से मुलाकात की।

देशबन्धु 29 Jun 2026 11:45 pm

प्रधानमंत्री को 'झूठा' कहने पर महिला सांसद तुरंत सस्पेंड! ब्रिटिश संसद के इस कड़े नियम पर भारत में क्यों छिड़ गई नई बहस?

वैश्विक राजनीति के मंच पर भारत का मान लगातार बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक दुनिया के 34 देश अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज चुके हैं. लेकिन देश के भीतर अक्सर घरेलू राजनीति में प्रधानमंत्री पद की गरिमा और मर्यादा को तार-तार करने वाले बयान सामने आते रहते हैं. इस बीच, भारत के संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं के इस आचरण को लेकर ब्रिटेन (UK) के वेस्टमिंस्टर संसदीय मॉडल का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने देश के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक नई कानूनी बहस छेड़ दी है. किरेन रिजिजू ने ब्रिटिश संसद का एक वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया है कि क्या भारत को भी पीएम पद की संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने के लिए अंग्रेजों के कड़े नियमों को अपनाना चाहिए?ब्रिटिश संसद में क्या हुआ था? जानिए पाकिस्तानी मूल की सांसद के सस्पेंशन की इनसाइड स्टोरीयह पूरा मामला इसी साल अप्रैल महीने का है, जब ब्रिटेन की संसद (House of Commons) में अमेरिका के राजदूत के रूप में पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर गरमागरम बहस चल रही थी. इसी दौरान लेबर पार्टी की सांसद और पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश नागरिक जारा सुल्ताना (Zarah Sultana) ने तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर तीखा व्यक्तिगत हमला बोल दिया. उन्होंने पीएम कीर स्टार्मर को 'बेयर-फेस्ड लायर' यानी सीधे तौर पर 'निर्लज्ज झूठा' कह दिया. जारा सुल्ताना ने सदन में कहा था कि प्रधानमंत्री पीटर मैंडेलसन का बचाव इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे उनके निजी हितों के लिए काम करते हैं और ऐसा करके प्रधानमंत्री पूरे देश को धोखा दे रहे हैं.जैसे ही जारा सुल्ताना के मुंह से 'झूठा' शब्द निकला, ब्रिटिश संसद के स्पीकर सर लिंडसे हॉयल ने तुरंत दखल दिया. उन्होंने जारा सुल्ताना को आदेश दिया कि वे अपने इस असंसदीय शब्द को तुरंत वापस लें और मर्यादा में रहें. लेकिन जब जारा सुल्ताना ने अपना बयान वापस लेने से साफ इनकार कर दिया, तो स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—'बैठ जाओ और तुरंत सदन से बाहर जाओ.' नियमों की अवहेलना करने पर जारा सुल्ताना को तत्काल प्रभाव से 5 दिनों के लिए संसद से निलंबित (Suspend) कर दिया गया. इसी दिन रिफॉर्म यूके के एक अन्य सांसद ली एंडरसन को भी प्रधानमंत्री को 'झूठा' कहने के कारण सदन से बाहर का रास्ता दिखाया गया था.आखिर क्यों ब्रिटेन में पीएम के अपमान पर तुरंत होती है जेल और सस्पेंशन जैसी कार्रवाई?ब्रिटेन का वेस्टमिंस्टर मॉडल अपनी संसदीय परंपराओं और भाषा की शुचिता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. वहां की रूलबुक के अनुसार, संसद के भीतर कुछ खास शब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से कानूनी पाबंदी है. ब्रिटिश संसदीय नियमों के तहत:प्रतिबंधित शब्द: सदन के अंदर किसी भी सदस्य को 'लायर' (झूठा) या 'डिसऑनेस्ट' (बेईमान) कहना पूरी तरह वर्जित है.नीतियों बनाम व्यक्तिगत टिप्पणी: कोई भी सांसद सरकार की नीतियों, फैसलों और बजट की कितनी भी कड़ी आलोचना कर सकता है, लेकिन वह देश के प्रधानमंत्री पर किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या अमर्यादित टिप्पणी नहीं कर सकता.स्पीकर के असीमित अधिकार: यदि कोई सांसद इन नियमों को तोड़ता है, तो स्पीकर के पास उसे बिना किसी देरी के तुरंत सदन से निष्कासित करने का पूर्ण अधिकार होता है.भारत के नियम क्या कहते हैं और यहाँ कार्रवाई क्यों नहीं होती?ब्रिटेन के इस कड़े एक्शन की तुलना अगर भारतीय संसद से की जाए, तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है. भारत में भी लोकसभा और राज्यसभा की रूलबुक के नियम 380 और 381 के तहत सदन में असंसदीय भाषा (Unparliamentary Language) के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध है. इसके अलावा नियम 222 के तहत विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) की कार्रवाई का भी प्रावधान है. भारत में राहुल गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खरगे और अधीर रंजन चौधरी जैसे कई बड़े नेता समय-समय पर प्रधानमंत्री के खिलाफ 'चोर' या 'कायर' जैसे शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं.लेकिन भारत में राजनीतिक और दलीय दबाव के कारण अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल होने पर सदन में सिर्फ भारी हंगामा और नारेबाजी होती है, मगर सांसदों के खिलाफ वैसी त्वरित और कड़ी निलंबन की कार्रवाई देखने को नहीं मिलती जैसी ब्रिटेन में हुई. भारतीय संसद में ज्यादा से ज्यादा यह होता है कि स्पीकर के आदेश पर उन विवादित शब्दों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही के रिकॉर्ड (Expunged from Records) से हटा दिया जाता है, लेकिन अपराधी सांसद पर कोई बड़ा एक्शन नहीं हो पाता. यही वजह है कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू अब भारत में एक ऐसा मजबूत स्वदेशी संसदीय ढांचा बनाने की वकालत कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा करे और नेताओं को जनता के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाए.

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 5:21 pm

'जिंदा हैं तो लौटा दो, मर गए तो डेथ सर्टिफिकेट दे दो': पाकिस्तानी सेना के जुल्मों के खिलाफ बलोच एक्टिविस्ट सम्मी दीन का खुला पत्र, बयां किया 17 साल का दर्द!

बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के खिलाफ बलोच नागरिकों का गुस्सा एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. बलोच विद्रोह और आजादी की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्दयता के साथ किए जा रहे अपहरण, जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearances) और 'किल एंड डंप' नीति के खिलाफ प्रमुख बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच (Sammi Deen Baloch) ने एक दिल दहला देने वाला खुला पत्र लिखा है.अपने इस पत्र के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार और सेना से अपने लापता पिता को लेकर कड़े सवाल पूछे हैं. सम्मी दीन बलोच ने अपनी भावुक और रोंगटे खड़े कर देने वाली अपील में लिखा है, अगर मेरे अब्बा जिंदा हैं तो उन्हें वापस लौटा दो और अगर आपने उन्हें मार दिया है, तो हमें और तड़पाने के बजाय उनका डेथ सर्टिफिकेट दे दो. इस खुले पत्र ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकारों के हनन और बलोच नरसंहार को बेनकाब कर दिया है.17 साल का अंतहीन इंतजार: डॉ. दीन मोहम्मद बलोच की गुमशुदगी की दर्दनाक कहानीबलोच एक्टिविस्ट सम्मी दीन बलोच ने अपने पिता डॉ. दीन मोहम्मद बलोच के जबरन अपहरण और लापता होने की 17वीं बरसी पर रविवार (28 जून 2026) को यह खुला पत्र जारी किया. अपनी मार्मिक अपील में सम्मी दीन ने लिखा कि पिछले दो दशकों से चल रही इस अनिश्चितता के बाद अब उनके परिवार को यह जानने का पूरा कानूनी और मानवीय हक है कि उनके पिता किस हाल में हैं.पेशा से सरकारी चिकित्सक डॉ. दीन मोहम्मद बलोच को 28 जून 2009 की रात बलोचिस्तान के खुजदार जिले से पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों और सेना के अधिकारियों ने जबरन हिरासत में लिया था. उस काली रात के बाद से आज तक, यानी पिछले 17 सालों में डॉ. दीन मोहम्मद का कोई अता-पता नहीं है. उनका परिवार आज भी उनकी सुरक्षित वापसी की आस में जी रहा है.'याचिकाएं, लाठियां और आंसू गैस ही मेरी विरासत बन गईं'अपने पिता के लापता होने के गहरे दुख और दर्द को बयां करते हुए सम्मी दीन बताती हैं कि वह अपने पिता के जीवित या मृत होने के सच से अनजान रहते हुए ही बड़ी हुईं. उन्होंने अपने पत्र में लिखा, बचपन में मुझे सिर्फ गुमशुदगी दी गई. जब भी मैंने स्कूल या समाज में अपने पिता के बारे में पूछा, तो मुझे सिर्फ इनकार, दुत्कार और अपमान मिला. मेरे पिता को यह जालिम राज्य उठा ले गया और उनका अंतहीन इंतजार करने की सजा मुझे आजीवन कारावास की तरह दे दी गई.उन्होंने आगे लिखा, दुनिया के बाकी बच्चे अपने पिता की उंगली थामकर और उनकी खूबसूरत यादों के साथ बड़े होते हैं. लेकिन मुझे बचपन से ही अदालतों की याचिकाएं, पुलिस की लाठियां, आंसू गैस के गोले और हाथों में पिता के पोस्टर्स लेकर सड़कों पर घूमने की विरासत मिली है. मेरे अब्बा कोई सरकारी फाइल या कोई कोरी अफवाह नहीं थे. वे डॉ. दीन मोहम्मद थे—एक डॉक्टर, एक जिम्मेदार पति और एक बेहद प्यारे पिता, जिन्हें हमसे हमेशा के लिए छीन लिया गया.अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजी आवाज: जर्मनी के संगठन ने पाकिस्तान को घेरासम्मी दीन बलोच आज बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ लड़ने वाली प्रमुख संस्था 'वॉयस फॉर बलोच मिसिंग पर्सन्स' (VBMP) की महासचिव हैं. वह बलोचिस्तान में जबरन गायब किए गए हजारों युवाओं और नागरिकों के इंसाफ की लड़ाई का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय चेहरा बन चुकी हैं. उनके इस शांतिपूर्ण आंदोलन और अदालतों में दायर की जा रही याचिकाओं से बौखलाई पाकिस्तानी सेना और पुलिस कई बार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है और उन पर हिंसक हमले भी करवा चुकी है.सम्मी दीन के इस खुले पत्र के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जर्मनी के डबलिन में स्थित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन 'फ्रंट लाइन डिफेंडर्स' (Front Line Defenders) ने सम्मी दीन बलोच के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया है. संगठन ने पाकिस्तानी हुक्मरानों से मांग की है कि वे डॉ. दीन मोहम्मद बलोच के ठिकाने का तुरंत और आधिकारिक तौर पर खुलासा करें और बलोचिस्तान में चल रहे जबरन गुमशुदगी के सभी मामलों की स्वतंत्र निष्पक्ष जांच कराएं.पाकिस्तानी सेना का ढिठाई भरा रुख: आरोपों को सिरे से किया खारिजहमेशा की तरह, इस बार भी पाकिस्तानी सरकार और उसकी सेना ने राजनीतिक उत्पीड़न और बलोच नागरिकों को गायब करने के इन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि बलोच कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पूरी तरह से देश के कानून के दायरे में है.सेना ने ढिठाई से बयान जारी करते हुए कहा कि आम नागरिकों को गायब करने की उनकी कोई आधिकारिक नीति नहीं है. पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि जो लोग लापता बताए जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश लोग या तो प्रतिबंधित उग्रवादी और आतंकवादी संगठनों में शामिल हो गए हैं, या वे कानून से बचने के लिए भूमिगत (Underground) हो गए हैं या फिर अपनी मर्जी से देश छोड़कर विदेश चले गए हैं. लेकिन बलोच मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सेना का यह बयान सिर्फ उनके खूनी गुनाहों को छिपाने का एक भद्दा बहाना है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 5:20 pm

अंतरिक्ष से लैंडिंग: उदयपुर रनवे पर इंडिगो के बड़े जेट ने रचा इतिहास, जानें भारत स्वदेशी 'गगन' नेविगेशन सिस्टम कैसे करता है कमाल!

27 जून 2026 की दोपहर को राजस्थान के उदयपुर रनवे पर इंडिगो (IndiGo) के एयरबस A320 विमान ने जब अपने कदम रखे, तो खिड़की से बाहर खूबसूरत अरावली की पहाड़ियों को देख रहे यात्रियों को सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगा. लेकिन बैकस्टेज भारतीय उड्डयन और विज्ञान के इतिहास में एक बहुत बड़ा कीर्तिमान रचा जा चुका था. इस विशाल पैसेंजर जेट को रनवे पर मौजूद पारंपरिक ग्राउंड रेडियो सिग्नल की मदद से नहीं, बल्कि भारत के ऊपर हजारों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में चौबीसों घंटे तैनात स्वदेशी सैटेलाइट्स की मदद से सुरक्षित उतारा गया था.डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविऐशन (DGCA) की कड़ी निगरानी और गाइडलाइंस के तहत, भारत के अपने स्वदेशी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम 'गगन' (GAGAN) का इस्तेमाल करके कॉमर्शियल लैंडिंग करने वाला यह देश का पहला बड़ा पैसेंजर जेट बन गया है. आइए एक एक्सपर्ट रिपोर्टर की नजर से इस पूरी तकनीक को आसान भाषा में समझते हैं कि यह कैसे काम करती है और भारत के लिए यह ऐतिहासिक मील का पत्थर क्यों बेहद खास है.क्या है 'गगन' (GAGAN) सिस्टम और अंतरिक्ष से कैसे मिलती है पायलट को मदद?गगन (GAGAN) का पूरा नाम 'जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' (GPS Aided GEO Augmented Navigation) है. इस बेहद आधुनिक और जटिल सिस्टम को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने सालों की रिसर्च के बाद संयुक्त रूप से मिलकर तैयार किया है. गगन का शक्तिशाली सिग्नल अंतरिक्ष में मौजूद इसरो के GSAT-8 और GSAT-10 कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स के जरिए सीधे विमानों के कॉकपिट तक पहुंचता है.इसे आप बेहद आसान शब्दों में एक ऐसे 'सुपर क्लास टीचर' या 'गाइड' की तरह समझ सकते हैं जो आसमान में बैठकर अमेरिकी जीपीएस (GPS) के काम को हर सेकंड चेक करता है. जीपीएस के सिग्नलों में आने वाली मामूली से मामूली खराबी या दूरी की गलतियों को तुरंत सुधारकर यह पायलट के रिसीवर तक बिल्कुल सटीक और एरर-फ्री जानकारी पहुंचाता है. जब कोई विमान घने कोहरे या खराब मौसम में लैंड कर रहा होता है, तो गगन उसे रनवे का बिल्कुल सुई की नोंक जैसा सटीक रास्ता दिखाता है.पारंपरिक रेडियो नेटवर्क बनाम गगन: छोटे शहरों के हवाई अड्डों के लिए वरदानआमतौर पर दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विमानों को सुरक्षित उतारने के लिए जमीन पर आधारित 'इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम' (ILS) यानी ग्राउंड रेडियो बीम नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है. यह सिस्टम जमीन से अदृश्य तरंगें (रेडियो सिग्नल) भेजकर पायलट को सीधा आने और रनवे पर टचडाउन करने का रास्ता बताता है. लेकिन यह पारंपरिक ग्राउंड सिस्टम बेहद महंगा होता है और हर छोटे या पहाड़ी इलाकों के रीजनल एयरपोर्ट (जैसे शिमला, कुल्लू या पूर्वोत्तर के राज्य) पर इसे लगाना और मेंटेन करना मुमकिन नहीं है.इसके विपरीत, गगन सिस्टम के लिए जमीन पर किसी करोड़ो रुपये के महंगे तामझाम या टावरों की बिल्कुल जरूरत नहीं होती. यह सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स की मदद से पायलट को बाएं-दाएं (Horizontal) और ऊपर-नीचे (Vertical) दोनों तरह की सटीक गाइडेंस दे देता है, जिससे छोटे शहरों के एयरपोर्ट्स पर भी बड़े विमानों की नाइट लैंडिंग और खराब मौसम में लैंडिंग बेहद आसान हो जाएगी.GAGAN और NavIC में क्या अंतर है? अक्सर लोग हो जाते हैं कंफ्यूजअक्सर लोग गगन (GAGAN) और नाविक (NavIC) को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन विज्ञान के नजरिए से ये दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग और अलग उद्देश्यों के लिए काम करते हैं. नाविक (Navigation with Indian Constellation) भारत का एक पूरी तरह स्वतंत्र और स्वदेशी पोजीशनिंग नेटवर्क है, जो खुद रास्ता ढूंढता है—ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका का GPS या रूस का ग्लोनास काम करता है.वहीं दूसरी तरफ, गगन खुद कोई नया नेविगेशन नेटवर्क नहीं है और न ही नया रास्ता बनाता है. गगन का मुख्य काम केवल और केवल जीपीएस (GPS) से मिलने वाले सिग्नलों की बारीकी से जांच करना, उनकी तकनीकी कमियों को दूर करना और नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) की सुरक्षा के लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा विश्वसनीय और अचूक बनाना है.70 टन के हवाई जहाज के लिए जीपीएस की कमियों को कैसे दूर करता है गगन?हमारे स्मार्टफोन में मौजूद सामान्य जीपीएस कुछ मीटर (5 से 10 मीटर) तक की चूक या एरर कर सकता है, जो सड़क पर गाड़ी चलाने या कोई रेस्टोरेंट ढूंढने के लिए तो ठीक है; लेकिन 70 टन के भारी-भरकम हवाई जहाज को जीरो विजिबिलिटी और घने बादलों के बीच से रनवे पर उतारने के लिए यह बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है. भारत के ऊपर मौजूद पृथ्वी की ऊपरी वायुमंडलीय परत (Ionosphere) के कारण जीपीएस के सिग्नल अक्सर सुस्त पड़ जाते हैं या मुड़ जाते हैं, जिससे गलत लोकेशन दिखने का खतरा रहता है.इसे पूरी तरह फिक्स करने के लिए इसरो ने भारतभर में 15 अत्यधिक संवेदनशील ग्राउंड रेफरेंस स्टेशन (INRES) बनाए हैं, जिनकी भौगोलिक लोकेशन सेंटीमीटर तक फिक्स है. ये स्टेशन जीपीएस की त्रुटि को रियल-टाइम में पकड़ते हैं, इंडियन मास्टर कंट्रोल सेंटर (INMCC) उसे ठीक करने का गणितीय फॉर्मूला बनाता है और सैटेलाइट्स के जरिए तुरंत प्लेन के रिसीवर को भेज देता है. सबसे खास बात यह है कि अगर किसी तकनीकी खराबी के कारण सिग्नल पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो यह सिस्टम पायलट को महज 6 सेकंड के भीतर वॉर्निंग अलर्ट (Time-to-Alert) भी दे देता है.अमेरिका-यूरोप के क्लब में शामिल हुआ भारत: क्यों दुनिया का सबसे एडवांस सिस्टम है 'गगन'?उदयपुर की इस ऐतिहासिक सफल लैंडिंग के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा और गिने-चुने देशों के एलीट क्लब में शामिल हो गया है, जिसके पास अपना खुद का सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) मौजूद है. वर्तमान में अमेरिका इसके लिए WAAS (Wide Area Augmentation System) का इस्तेमाल करता है, यूरोप के पास अपना EGNOS है और जापान MSAS तकनीक का उपयोग करता है.लेकिन इन सबके बीच भारत का गगन सिस्टम इसलिए दुनिया में सबसे अनोखा और एडवांस माना जा रहा है क्योंकि यह भूमध्यरेखीय (Equatorial Zone) क्षेत्र के बेहद कठिन, अशांत और तेजी से बदलते आसमान में भी सौ फीसदी सटीक काम करने वाला दुनिया का इकलौता प्रमाणित सिस्टम बन गया है. गगन के आने से भारतीय नागरिक उड्डयन सेक्टर में सुरक्षा के मायने पूरी तरह बदल गए हैं.

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 5:06 pm

Russia Fuel Crisis 2026 : जिस रूस के पास है 80 अरब बैरल तेल, वहां पेट्रोल के लिए हाहाकार; अब भारत से भीख मांग रहे पुतिन!

Russia Fuel Crisis 2026 : पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक (Geopolitical) परिदृश्य में एक ऐसा अप्रत्याशित और चौंकाने वाला फेरबदल हुआ है, जिसने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है. वैश्विक ऊर्जा बाजार का 'सिकंदर' और महाशक्ति कहलाने वाला रूस, जिसके पास 80 अरब बैरल से अधिक कच्चे तेल (Crude Oil) का असीमित भंडार है, आज खुद अपने ही देश में एक अभूतपूर्व और गंभीर तेल संकट (Fuel Crisis) से जूझ रहा है. रूस के बड़े-बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों के बाहर गाड़ियों की किलोमीटर लंबी लाइनें और ईंधन की राशनिंग (सप्लाई पर सीमा) देखी जा रही है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उनका देश इस समय इतिहास के सबसे बुरे गैसोलीन (पेट्रोल) संकट का सामना कर रहा है और उन्होंने इस विकट परिस्थिति से उबरने के लिए भारत और कजाकिस्तान जैसे मित्र देशों से आपातकालीन मदद की गुहार लगाई है.यूक्रेन के 'ड्रोन हंटर्स' ने तोड़ी रूस की कमर: रिफाइनिंग क्षमता 25% तक ठपयह संकट कच्चे तेल की कमी के कारण नहीं, बल्कि उसे इस्तेमाल के योग्य (रिफाइन) बनाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के तबाह होने से पैदा हुआ है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक इंटरव्यू में माना कि यूक्रेन के साथ पिछले चार साल से चल रहे भीषण युद्ध के दौरान रूसी तेल और गैस रिफाइनरियों पर लगातार किए गए एडवांस ड्रोन हमलों ने देश को गहरी चोट दी है.अकेले मई और जून 2026 में यूक्रेन ने रूस की 20 से अधिक मुख्य रिफाइनरियों को निशाना बनाकर उन्हें मलबे में तब्दील कर दिया है, जिसमें विशाल मॉस्को रिफाइनरी भी शामिल है. इन सटीक और घातक हमलों के चलते रूस की तेल प्रसंस्करण (Crude Processing) क्षमता पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर गिर गई है और देश का कुल पेट्रोल उत्पादन 25 प्रतिशत तक घट गया है. मॉस्को का गैसोलीन रिजर्व घटकर बेहद खतरनाक स्तर (सिर्फ 1.7 मिलियन मीट्रिक टन) पर आ चुका है, जिसे देखते हुए रूस ने पहले ही घरेलू बाजार को संभालने के लिए पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है.कजाकिस्तान के सामने बड़ी धर्मसंकट: 'हां' कहें तो यूक्रेन का डर, 'ना' कहें तो पुतिन का दबावइस गहरे ऊर्जा संकट से निपटने के लिए क्रेमलिन (रूस) ने अपने पड़ोसी देश कजाकिस्तान से तत्काल 50,000 टन AI-92 ग्रेड पेट्रोल की मांग की है. हालांकि, रूस की इस मांग ने कजाकिस्तान की सरकार को एक बेहद जटिल कूटनीतिक और आर्थिक धर्मसंकट (Matrix of Pressure) में डाल दिया है.कजाकिस्तान को सबसे बड़ा डर यह है कि अगर वह खुलेआम रूस को ईंधन की सप्लाई करता है, तो यूक्रेन के खतरनाक लॉन्ग-रेंज ड्रोन उसकी अपनी रिफाइनरियों को भी निशाना बनाना शुरू कर देंगे. दूसरी ओर, कजाकिस्तान के कच्चे तेल के निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा रूसी पाइपलाइनों और बंदरगाहों के माध्यम से ही वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है. ऐसे में कजाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय के लिए रूस की इस मांग पर 'हां' या 'ना' कहना सांप-छछूंदर की गति जैसा हो गया है. वहीं, कजाकिस्तान खुद भी जुलाई में एविएशन फ्यूल (हवाई ईंधन) की कमी का सामना कर रहा है, इसलिए वह रूस के सामने ईंधन के बदले ईंधन (Barter) की शर्त रखने पर विचार कर रहा है.भारत बना ग्लोबल रिफाइनिंग का 'पावरहाउस': पुतिन ने पेट्रोल के लिए खोला खजानाइस पूरे संकट में वैश्विक राजनीति का पासा पूरी तरह पलट चुका है. जो रूस अब तक भारत को भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल बेच रहा था, वही रूस अब भारत से रिफाइंड पेट्रोल (गैसोलीन) खरीदने के लिए मजबूर हो गया है. भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंध साल 2026 में एक नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गए हैं. जून 2026 में भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़कर रिकॉर्ड 2.66 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया है. भारत इस कच्चे तेल को अपनी अत्याधुनिक रिफाइनरियों (जैसे रिलायंस, नायरा एनर्जी, IOCL) में प्रोसेस करता है और इसे पेट्रोल-डीजल में बदलता है.अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स (रॉयटर्स और RBC) के अनुसार, रूसी रिफाइनरियों के तबाह होने के बाद वहां रोजाना करीब 25,000 टन पेट्रोल की भारी किल्लत हो रही है. रूस की घरेलू मांग रोजाना 1,11,000 टन है, जबकि उसकी बची हुई रिफाइनरियां सिर्फ 85,000 टन ही बना पा रही हैं. इस भारी गैप को भरने के लिए रूस ने भारत से बड़े पैमाने पर समुद्री रास्तों (Seaborne Imports) के जरिए पेट्रोल आयात करने के लिए अपने टैक्स कोड (Tax Code) में संशोधन किया है. इसके तहत विदेशी पेट्रोल खरीदने वाली रूसी तेल कंपनियों को सरकार भारी बजट सब्सिडी देगी.इथेनॉल ब्लेंडिंग का पेंच: क्या भारतीय पेट्रोल अपनाएगा रूस?भारत से बड़े पैमाने पर पेट्रोल आयात करने के सामने एक तकनीकी पेंच भी फंसा हुआ है. दरअसल, भारत ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए अपने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल (Ethanol Blend) मिलाता है, जो कि रूस के सामान्य राष्ट्रीय मानक (Standard) से दोगुना है. रूस में अधिकतम 10 फीसदी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की ही अनुमति है. हालांकि, मौजूदा संकट और पेट्रोल पंपों पर मची हाहाकार को देखते हुए रूसी स्टेट ड्यूमा (संसद) ने नियमों में ढील देने और भारतीय ईंधन को तुरंत स्वीकार करने की हरी झंडी दे दी है. यह पूरी स्थिति साबित करती है कि भारत आज दुनिया के लिए रिफाइनिंग का सबसे बड़ा और अनिवार्य पावरहाउस बन चुका है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 4:51 pm

शेख हसीना ने किया बांग्लादेश लौटने का ऐलान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौत की सजा के बावजूद इस साल देश लौटने का ऐलान किया है. वह करीब दो साल से भारत में रह रही हैं.

देशबन्धु 29 Jun 2026 10:58 am

आधी रात को थर्राया चीन! भारत के पड़ोसी देश में आया भयंकर भूकंप, रिक्टर स्केल पर मची तबाही; जानें ताजा हालात

एशियाई महाद्वीप के इस हिस्से में कुदरत का भयंकर कहर देखने को मिला है। भारत के पड़ोसी देश चीन में आधी रात को उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब लोग अपने घरों में गहरी नींद सो रहे थे। अचानक आए बेहद शक्तिशाली भूकंप के झटकों से धरती बुरी तरह कांप उठी और बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह हिलने लगीं। भूकंप का यह झटका इतना जोरदार था कि लोग डर के मारे अपने मासूम बच्चों के साथ घरों से बाहर निकलकर सड़कों और खुले मैदानों की तरफ भागने लगे। स्थानीय समयानुसार देर रात आए इस जलजले ने चीन के कई रिहायशी इलाकों को हिलाकर रख दिया है, जिसके बाद प्रभावित प्रांतों में आपातकाल (Emergency Services) लागू कर दिया गया है।रिक्टर स्केल पर कितनी थी भूकंप की तीव्रता और कहां था इसका केंद्र?सीस्मोलॉजी विभाग (भूकंप विज्ञान केंद्र) से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, चीन के सुदूर और पहाड़ी क्षेत्र में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर बेहद खतरनाक श्रेणी में मापी गई है। जमीन के अंदर कम गहराई पर इसका केंद्र (Epicenter) होने के कारण झटके बहुत ज्यादा महसूस किए गए और इसकी गूंज आसपास के कई किलोमीटर के दायरे तक फैल गई। भूकंपीय लहरों के चलते केंद्र के नजदीक स्थित कई पुराने मकानों और सरकारी इमारतों में दरारें आने की खबरें हैं। चीनी सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग (China Earthquake Networks Center) ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी अलर्ट? भौगोलिक दृष्टि से क्यों बढ़ा खतराचूंकि यह भूकंप भारत के पड़ोसी देश चीन के सीमाई और पहाड़ी हिस्से में आया है, इसलिए भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख व जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी भूवैज्ञानिक हलचल पर पैनी नजर रखी जा रही है। हिमालयन फॉल्ट लाइन (Himalayan Fault Line) पर लगातार बढ़ रहे इस दबाव के कारण टेक्टोनिक प्लेट्स में मची उथल-पुथल से भारतीय मौसम विभाग और भूकंप विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, भारतीय सीमा के भीतर अभी तक किसी भी तरह के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा गया है।तबाही और नुकसान का आकलन जारी: रात के अंधेरे में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरूआधी रात को आए इस भयंकर भूकंप के बाद प्रभावित शहरों की बिजली और संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चीनी सेना और स्थानीय आपदा राहत बलों (NDRF जैसी टीमों) को तैनात किया गया है। आने वाले कुछ घंटों में हल्के झटके (Aftershocks) आने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से पक्के और जर्जर मकानों के अंदर न जाने की अपील की है। पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त चीन से आने वाली पल-पल की तस्वीरों और आधिकारिक बयानों पर टिकी हुई हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 8:53 am

समंदर में टला महायुद्ध का खतरा! अमेरिका-ईरान के बीच कतर में सीजफायर डील पर सहमति, अब बेखौफ दौड़ेंगे पानी के जहाज

पूरी दुनिया को बड़ी राहत देते हुए मिडल ईस्ट के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते— स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जारी भीषण सैन्य तनाव पर फिलहाल पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। पिछले कई दिनों से युद्ध की कगार पर खड़े अमेरिका और ईरान आखिरकार बातचीत की मेज पर आने के लिए राजी हो गए हैं। दोनों महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक गतिरोध को सुलझाने के लिए अब कतर (Qatar Peace Talks) की मध्यस्थता में एक हाई-लेवल बैठक होने जा रही है। इस बड़ी और सकारात्मक खबर के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारों और ग्लोबल मार्केट ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अब इस रूट से दुनिया भर के मालवाहक और तेल टैंकर जहाज बिना किसी डर के सुरक्षित गुजर सकेंगे।कतर बना संकटमोचक: जानिए कैसे बनी अमेरिका और ईरान के बीच बात?रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खाड़ी देश कतर ने एक बार फिर वैश्विक शांति के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है। सूत्रों के मुताबिक, कतर के अमीर और शीर्ष राजनयिकों ने पर्दे के पीछे से दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा था। पिछले दिनों शांति समझौते के मसौदे में शामिल 'आर्टिकल-5' की एक लाइन के लीक होने के बाद जो बात पूरी तरह बिगड़ गई थी, उसे कतर ने एक नए न्यूट्रल ड्राफ्ट के जरिए फिर से पटरी पर ला दिया है। अमेरिका और ईरान दोनों ने ही इस बात पर सहमति जताई है कि वे कतर की राजधानी दोहा में बैठकर विवादित मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकालेंगे और तब तक कोई भी देश होर्मुज में कोई आक्रामक सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।वैश्विक बाजार में आई रौनक: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट की उम्मीदइस ऐतिहासिक शांति वार्ता की खबर जैसे ही दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) और वैश्विक वायदा बाजारों (Wall Street) तक पहुंची, वैसे ही चौतरफा राहत देखने को मिली। पिछले कई दिनों से कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन बाधित होने के डर से जो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने की आशंका बनी हुई थी, वह अब काफी हद तक टल गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस सीजफायर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की जाएगी। इसका सीधा और सबसे बड़ा फायदा भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को मिलेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर सबसे ज्यादा निर्भर है।जहाजों के लिए खुला सुरक्षित रास्ता: भारतीय शिपिंग कंपनियों ने ली राहत की सांसहोर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन गुजरने वाले दर्जनों भारतीय कमर्शियल जहाजों और वैश्विक कार्गो शिपिंग कंपनियों के लिए यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है। पिछले कुछ दिनों से इस रूट पर ईरानी नौसेना और अमेरिकी युद्धपोतों के आमने-सामने होने की वजह से जहाजों का इंश्योरेंस प्रीमियम काफी बढ़ गया था और कई रूट डायवर्ट करने पड़ रहे थे। अब कतर में बातचीत शुरू होने की आधिकारिक घोषणा के बाद इस समुद्री क्षेत्र में अलर्ट लेवल को घटा दिया गया है। स्थानीय बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसियों ने भी पुष्टि की है कि जहाजों का आवागमन अब पूरी तरह सामान्य और बेखौफ तरीके से शुरू हो गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 8:50 am

आधी रात को लाशों से पटा अफगानिस्तान! पाकिस्तान के खूनी एयरस्ट्राइक में 35 नागरिकों की मौत, 1 महीने में चौथा बड़ा हमला

मिडल ईस्ट और दक्षिण एशिया के इस हिस्से में तनाव अब अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमाई इलाकों में लंबे समय से जारी तनातनी ने बीती रात एक बेहद खौफनाक रूप अख्तियार कर लिया। पाकिस्तानी वायुसेना और सुरक्षाबलों ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में आधी रात को अचानक चौतरफा हवाई हमले (Air Strikes) शुरू कर दिए। इस भीषण बमबारी में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 35 बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बढ़ा यह सैन्य गतिरोध पिछले एक महीने के भीतर चौथा बड़ा हमला है, जिसने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है।रात के अंधेरे में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों का कहर: आखिर क्यों हुआ यह हमला?प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के खोस्त और कुनार प्रांतों के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागनी शुरू कर दीं। पाकिस्तान सरकार और सैन्य कमांडरों का दावा है कि यह हमला सीमा पार से सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठनों (TTP - तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के सुरक्षित ठिकानों को तबाह करने के लिए किया गया था। हालांकि, अफगान अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि मारे गए सभी लोग आम नागरिक थे, जिनका किसी भी उग्रवादी गुट से कोई लेना-देना नहीं था।काबुल और इस्लामाबाद में भारी तनाव: अफगान सीमा पर अलर्ट जारीइस भीषण खूनखराबे के बाद अफगानिस्तान की कार्यवाहक तालिबान सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। काबुल से जारी एक आधिकारिक बयान में पाकिस्तान को इस कायरतापूर्ण हरकत के गंभीर परिणाम भुगतने की सीधी चेतावनी दी गई है। सीमावर्ती इलाकों जैसे डूरंड लाइन (Durand Line) के आसपास अफगान सेना की टुकड़ियों को भारी हथियारों के साथ हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परमाणु और सैन्य ताकत संपन्न पड़ोसियों के बीच लगातार होते ये हमले किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की चिंगारी बन सकते हैं, जिससे दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।भारत और वैश्विक समुदाय की नजर: क्या संयुक्त राष्ट्र करेगा हस्तक्षेप?एक महीने के भीतर चौथे बड़े हमले ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है। भारत समेत दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां और विदेश मंत्रालय इस नाजुक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में तुरंत दखल देने और दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की मांग की जा रही है। अगर यह सीमाई विवाद जल्द नहीं थमा, तो शरणार्थियों का एक नया संकट खड़ा हो सकता है, जिसका सीधा असर भारत और आसपास के पड़ोसी देशों की आंतरिक सुरक्षा और भौगोलिक स्थिरता पर पड़ना लाजिमी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 8:48 am

ईरान पर भरोसा नहीं: अमेरिकी सीनेटर टिलिस का बड़ा बयान

अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने रविवार को कहा कि उन्हें इस बात पर संदेह है कि ईरान अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते का पालन करेगा

देशबन्धु 29 Jun 2026 8:40 am

हैती और सीरिया के नागरिकों का टीपीएस खत्म करने के ट्रंप के फैसले से रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हैती और सीरिया के हजारों प्रवासियों का टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने के फैसले को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद उभरकर सामने आए हैं

देशबन्धु 29 Jun 2026 7:10 am

किम जोंग उन की मां का राज: क्यों नॉर्थ कोरिया में नहीं लिया जाता उनका नाम,जानें कैसे बनी तानाशाह की सत्ता की राह

'पवित्र रक्त' और मां के अतीत का विरोधाभास उत्तर कोरिया की सत्ता 'माउंट पेक्टू रक्तसमूह' (Mount Paektu Bloodline) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे देश पर शासन करने के लिए सबसे शुद्ध और वीर माना जाता है। लेकिन किम जोंग उन की मां, को योंग-ही का इतिहास इस सरकारी दावे के बिल्कुल उलट है। रिपोर्ट्स के अनुसार, को योंग-ही का जन्म 1952 में जापान के ओसाका में हुआ था। उनका परिवार एक पुनर्वास कार्यक्रम के तहत उत्तर कोरिया आया था, लेकिन उस समय वहां के समाज में जापान से आए लोगों को हेय दृष्टि से देखा जाता था। यही कारण है कि किम जोंग उन की मां की सामाजिक पृष्ठभूमि को उनके 'पवित्र' परिवारिक इतिहास के लिए एक बड़ी बाधा माना जाता है, जिसे प्योंगयांग का प्रोपेगेंडा हमेशा छिपाने की कोशिश करता है।डांस, खूबसूरती और प्रेम कहानी का सफर को योंग-ही एक प्रतिभाशाली डांसर थीं और सरकारी आर्ट ट्रूप से जुड़ी हुई थीं। उनकी खूबसूरती और नृत्य ने तत्कालीन तानाशाह किम जोंग इल को अपनी ओर आकर्षित किया। उस समय किम जोंग इल पहले से ही विवाहित थे, लेकिन को योंग-ही के साथ उनके संबंधों ने एक नया मोड़ लिया। चूंकि उनकी शादी आधिकारिक नहीं थी, इसलिए को योंग-ही और उनके बच्चे राजधानी प्योंगयांग से दूर वोनसान शहर में रहने लगे। 2004 में स्तन कैंसर से उनकी मौत के बाद भी उत्तर कोरियाई मीडिया ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी, क्योंकि उनका जापानी जन्म किम परिवार की 'शुद्धता' की छवि को कमजोर कर सकता था।सत्ता का खेल: कैसे बनीं किंगमेकर? किम जोंग उन के सत्ता तक पहुँचने के पीछे उनकी मां को योंग-ही का सबसे बड़ा हाथ माना जाता है। तानाशाह बनने की दौड़ में कई नाम थे—किम जोंग इल के बड़े बेटे किम जोंग नम, जो सुधारों की वकालत के कारण पिता का भरोसा खो चुके थे और बाद में जिनकी मलेशिया में हत्या कर दी गई; और दूसरे भाई किम जोंग चुल, जो कथित रूप से निजी जीवन में व्यस्त थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि को योंग-ही ने ही पर्दे के पीछे से यह सुनिश्चित किया कि उनका बेटा किम जोंग उन ही अगला उत्तराधिकारी बने। अन्य दावेदारों के बाहर होने के बाद, मां की इस राजनीतिक बिसात ने किम जोंग उन को दुनिया के सबसे रहस्यमय और क्रूर तानाशाह की कुर्सी तक पहुँचा दिया। आज भी को योंग-ही का नाम उत्तर कोरिया की आधिकारिक गाथाओं में एक बड़ा 'ब्लैकआउट' है, क्योंकि उनका सच शासन की नींव पर उठने वाले सवालों को जन्म देता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 6:55 am

'रूस कठिन दौर से गुजर रहा है, लेकिन...': यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन का बड़ा कबूलनामा, क्या है भविष्य का प्लान

पुतिन का बड़ा कबूलनामा: रूस के सामने खड़ी हैं बड़ी चुनौतियां यूक्रेन के साथ जारी युद्ध और पश्चिमी देशों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि रूस फिलहाल एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। सत्तारूढ़ 'यूनाइटेड रूस पार्टी' के सम्मेलन को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि इन कठिनाइयों ने देश को कमजोर नहीं, बल्कि पहले से कहीं अधिक मजबूत और अनुभवी बनाया है। उनका यह बयान तब आया है जब रूसी क्षेत्रों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों में तेजी देखी जा रही है, जिससे बुनियादी ढांचों को काफी नुकसान पहुँचा है।हमलों का जवाब देने की दो-टूक तैयारी पुतिन ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार वर्तमान में उत्पन्न हर समस्या से पूरी तरह वाकिफ है और उन्हें सुलझाने के लिए ठोस रणनीतियां अपनाई जा रही हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि रूस अपनी सीमाओं की अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। बुनियादी ढांचा सुविधाओं पर हो रहे हमलों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि रूस की सुरक्षा एजेंसियां और सशस्त्र बल हर तरह के खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। उन्होंने देश की संप्रभुता को अटूट बताते हुए कहा कि रूस किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।विकास और सुरक्षा का 'पुतिन फॉर्मूला' सितंबर में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले पुतिन का यह संदेश पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी लामबंदी का हिस्सा माना जा रहा है। अपने भाषण में उन्होंने न केवल सैन्य और रक्षा क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी। पुतिन ने जोर देकर कहा कि वैश्विक स्तर पर डाले जा रहे दबावों के बावजूद रूस अपनी स्वतंत्र नीतियों पर अडिग है और विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। यह सम्मेलन स्पष्ट करता है कि आगामी चुनावों में पुतिन की पार्टी जनता के बीच 'विकास, सुरक्षा और स्थिरता' के तीन स्तंभों के साथ अपने वोट बैंक को और मजबूत करना चाहती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 6:53 am

गैस के लिए ईरान की ओर ताक रहा पाकिस्तान: क्या अमेरिका से मिली छूट के बाद खत्म होगा ऊर्जा संकट

ऊर्जा संकट की मार: बेहाल है पाकिस्तान का पंजाब पाकिस्तान इन दिनों एक गंभीर ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रहा है। अर्थशास्त्री महमूद रसूल के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों, विशेषकर पंजाब प्रांत में गैस की भीषण कमी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि उपभोक्ताओं को दिन भर में केवल कुछ घंटों के लिए ही गैस मिल पा रही है, जिससे घरेलू और औद्योगिक कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है। आम जनता इस महंगाई और आपूर्ति की कमी से त्रस्त है, जिसके चलते सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।ईरान-अमेरिका शांति समझौता: पाकिस्तान के लिए नई उम्मीद पाकिस्तान की नजरें अब ईरान के साथ होने वाले संभावित ऊर्जा सौदों पर टिकी हैं। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी (60 दिन की) ढील ने पाकिस्तान को एक उम्मीद की किरण दिखाई है। चूँकि अमेरिका ने ईरान को विशिष्ट शर्तों के साथ तेल और गैस निर्यात की छूट दी है, इसलिए पाकिस्तान अब इस कूटनीतिक अवसर का फायदा उठाने की फिराक में है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में शांति बहाल होने से वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम कीमतों में आई गिरावट का लाभ सीधे जनता तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।कीमतों में राहत की उम्मीद और सरकार की चुनौती पिछले दिनों जब अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष चरम पर था, तब पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड 414 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं। वर्तमान में यह 300 रुपये प्रति लीटर पर है, लेकिन जनता अभी भी और राहत की उम्मीद लगाए बैठी है। पेट्रोलियम मंत्री ने दावा किया है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों और नियमों के दायरे में रहकर ईरान से सस्ते तेल और गैस आयात के विकल्पों को तलाश रही है। हालांकि, यह छूट अस्थायी है और अमेरिका-ईरान वार्ताओं के भविष्य पर निर्भर करेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि शाहबाज शरीफ सरकार इस अल्पकालिक अवसर का लाभ उठाकर आम जनता को महंगाई से कितनी राहत दिला पाती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 6:51 am