Murder in Meerut: नितिन के दोस्त प्रिंस का उसके पड़ोसी मिट्ठू से रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में समझौता हो गया था। इसके बाद भी हत्यारों ने घेरकर फायरिंग कर दी।
Weather in UP: यूपी में आने वाले दो दिनों तक मौसम शुष्क बना रह सकता है। इस दौरान कहीं भारी बारिश की संभावना नहीं है।
Meerut News: हस्तिनापुर में सतीश नागर के इकलौते बेटे नितिन की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। चार महीने पहले ही कस्बे की प्रिया से उसकी शादी हुई थी। तीन अक्तूबर को दिल्ली पुलिस का फिजिकल था, जिसकी तैयारी नितिन कर रहा था।
UP News Today Live: उत्तर प्रदेश ब्रेकिंग न्यूज़, पढ़ें 12 सितम्बर के मुख्य और ताजा समाचार
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हिमाचल: कार में आए नकाबपोश ने नाबालिग का किया अपहरण, मामी के साथ जा रही थी पंजाब
मानपुरा के खेड़ावाली रोड पर एक नाबालिग लड़की को कार में आए नकाबपोश ने अगवा कर लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
लखनऊ में स्वाइन फ्लू मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार को 11 नए मरीज मिले। इनमें एक मरीज की हालत को देखते हुए अस्पताल में भर्ती कराया गया। 10 मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। नए मरीज मिलने के बाद जिले में सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है। 10 मरीजों का होम आइसोलेशन में इलाज सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि लखनऊ में अब तक स्वाइन फ्लू के 29 मरीज अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 27 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो गए। उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं, शुक्रवार को मिले नए मरीजों में एक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी मरीजों की निगरानी घर पर की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों के संपर्क में आने वालों और होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण होने पर लापरवाही नहीं बरतने की अपील की है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने और संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखने की सलाह दी गई है।
10 दिन बाद भरी एलडीए सचिव की खाली कुर्सी:पीसीएस सुशील प्रताप सिंह ने संभाला कार्यभार
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में करीब 10 दिन से खाली चल रही सचिव की कुर्सी को शासन ने भर दिया है। शासन ने पीसीएस अधिकारी सुशील प्रताप सिंह को एलडीए सचिव नियुक्त किया है। नियुक्ति का आदेश बृहस्पतिवार रात जारी हुआ। इसके बाद शुक्रवार को सुशील प्रताप सिंह ने एलडीए पहुंचकर सचिव पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया। सुशील प्रताप सिंह एलडीए के लिए नए नहीं हैं। वह करीब एक महीने पहले तक एलडीए में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात थे। उस समय उनके पास भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलसचिव और संस्कृति निदेशालय के अपर निदेशक की जिम्मेदारी भी थी। करीब दो सप्ताह पहले शासन ने उनका एलडीए से तबादला कर दिया था। इसके बाद वह भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय और संस्कृति निदेशालय में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। प्रमोशन के बाद खाली हुआ था पद एलडीए सचिव पद पर पहले विवेक श्रीवास्तव तैनात थे। करीब डेढ़ महीने पहले उनका आईएएस संवर्ग में प्रमोशन हुआ। इसके बाद शासन ने उन्हें विशेष सचिव, पशुधन विभाग के पद पर स्थानांतरित कर दिया। एक सितंबर को उन्हें एलडीए से कार्यमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद सचिव का पद करीब 10 दिन तक खाली रहा। अब शासन ने सुशील प्रताप सिंह को दोबारा एलडीए में भेजते हुए सचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, करीब चार महीने पहले गाजियाबाद से स्थानांतरित होकर आए पीसीएस अधिकारी अतुल कुमार को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का कुलसचिव और संस्कृति निदेशालय में अपर निदेशक बनाया गया है।
शाहपुर नगर परिषद चुनाव: हाईकोर्ट ने खारिज की आरक्षण में हेरफेर के आरोपों की याचिका
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शाहपुर नगर परिषद चुनाव में वार्डों के आरक्षण और 2011 की जनगणना के आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है।
बारिश के बीच शुक्रवार सुबह आलमबाग बस टर्मिनल से प्रयागराज जाने वाली एसी अनुबंधित बस यात्री कम होने के कारण रद्द कर दी गई। हैरानी की बात यह रही कि बस के निरस्त होने की जानकारी यात्रियों को मोबाइल पर नहीं दी गई। ऐसे में बारिश के दौरान यात्री बस पकड़ने के लिए आलमबाग बस अड्डे पहुंचे और वहां पहुंचकर उन्हें बस रद्द होने की जानकारी मिली। यात्री देवेश वर्मा ने बताया कि वह अपने चाचा को प्रयागराज जाने वाली बस में बैठाने के लिए आलमबाग बस अड्डे पहुंचे थे। पूछताछ काउंटर पर बस के बारे में जानकारी लेने पर पता चला कि बस निरस्त कर दी गई है। उनका कहना था कि अगर बस रद्द होने की सूचना मोबाइल पर मिल जाती तो उन्हें बारिश में बेवजह बस अड्डे तक नहीं आना पड़ता। कई रूटों पर साधारण बसें भी हुईं रद्द आलमबाग बस टर्मिनल के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह एक एसी बस को यात्रियों की कमी के कारण कैंसिल किया गया था। इसके अलावा कई रूटों पर यात्री नहीं मिलने के कारण साधारण बसों का संचालन भी रद्द किया गया। हालांकि, एसी बस के रद्द होने की सूचना यात्रियों तक मोबाइल के जरिए नहीं पहुंच सकी।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड रिफाइनरी द्वारा सीएसआर पहल के अंतर्गत मथुरा के विभिन्न स्थानों पर 270 सोलर स्ट्रीट लाइटों की स्थापना की है। इन सोलर स्ट्रीट लाइटों का उद्घाटन सांसद हेमा मालिनी द्वारा किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम के अवसर पर मुकुल अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एवं मथुरा रिफाइनरी प्रमुख, अनिल कुमार, मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन,अभिनव गोस्वामी, महाप्रबंधक कर्मचारी सेवाएं, विवेक शर्मा, वरिष्ठ प्रबंधक सीसी एवं सीएसआर तथा दीपक कुमार साह, सीएसआर उपस्थित रहे। आम लोगों को मिलेगी सुविधा और सुरक्षा इस अवसर पर हेमा मालिनी ने इंडियनऑयल मथुरा रिफाइनरी द्वारा क्षेत्र के विकास एवं जनकल्याण के लिए किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सोलर स्ट्रीट लाइटों की स्थापना से संबंधित क्षेत्रों में बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित होगी तथा आमजन को आवागमन में सुविधा एवं सुरक्षा प्राप्त होगी। साथ ही, सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के लक्ष्यों को भी बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा आधारित इन स्ट्रीट लाइटों से पारंपरिक विद्युत ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी और स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। इस अवसर पर रिफाइनरी प्रमुख मुकुल अग्रवाल ने कहा कि इंडियन ऑयल मथुरा रिफाइनरी अपने व्यावसायिक दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए भी निरंतर प्रतिबद्ध है। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से मथुरा एवं आसपास के क्षेत्रों में समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास, महिला एवं बाल विकास तथा सामुदायिक आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में विभिन्न जनकल्याणकारी पहल की जा रही हैं। मुकुल अग्रवाल ने कहा कि मथुरा के विभिन्न स्थानों पर सोलर स्ट्रीट लाइटों की स्थापना इसी सामाजिक प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदाय को बेहतर एवं सुरक्षित प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइटें न केवल ऊर्जा संरक्षण में सहायक होंगी, बल्कि इनके माध्यम से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक योगदान मिलेगा।
महानगर और जुगौली रेलवे क्रॉसिंग पर रोज लगने वाले जाम से लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। दोनों क्रॉसिंग पर करीब 333 करोड़ रुपये की लागत से दो लेन के रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) बनाए जाएंगे। इनके निर्माण को राज्य सरकार और पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन की ओर से मंजूरी मिल चुकी है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। जुगौली क्रॉसिंग पर 168 करोड़ रुपये होंगे खर्च लखनऊ पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के विधायक ओपी श्रीवास्तव ने बताया कि जुगौली रेलवे क्रॉसिंग पर 168 करोड़ रुपये की लागत से 763 मीटर लंबा आरओबी बनाया जाएगा। इससे विश्वास खंड, गोमतीनगर, लोहिया चौराहा, रवींद्रपल्ली, ब्रह्मपुरी और इंदिरानगर की ओर आने-जाने वाले लोगों को काफी राहत मिलेगी। महानगर क्रॉसिंग पर 165 करोड़ की लागत वहीं, महानगर रेलवे क्रॉसिंग पर 165 करोड़ रुपये की लागत से 813 मीटर लंबा आरओबी बनाया जाएगा। इसके बनने से महानगर, छन्नीलाल चौराहा, विवेकानंद अस्पताल, आईटी चौराहा, कपूरथला और अलीगंज समेत आसपास के इलाकों में आवागमन आसान होगा। विधायक ने कहा कि दोनों क्रॉसिंग पर आरओबी बनने से जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी। इससे लोगों का समय बचेगा और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। उन्होंने इसे क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि जनता की समस्याओं का स्थायी समाधान उनकी प्राथमिकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के लोनी थाने से जुड़े एस सी एस टी एक्ट केस में आरोपी राजू कुरैशी उर्फ उमरदराज के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस रद कर दिया है।न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने कहा कि जब तक किसी विवाद में पीड़ित की जाति के कारण उसे जानबूझकर अपमानित करने का इरादा न हो और घटना सार्वजनिक रूप से न हुई हो, तब तक एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं हो सकता। जानिये क्या है मामला यह मामला गाजियाबाद जिले के लोनी थाना क्षेत्र के ग्राम बंथला से जुड़ा है, जहां जमीन सौदे के तहत 2,41,000 रुपये अग्रिम लेने और बैनामा न कर धोखाधड़ी करने,व एस सी एस टी एक्ट अपराध के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गाजियाबाद की विशेष एससी/एसटी अदालत ने आरोपी के खिलाफ सम्मन जारी किया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड और केस डायरी में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो दर्शाता हो कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया या सार्वजनिक स्थल पर अपमानित किया। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि विशुद्ध रूप से सिविल या संपत्ति विवाद को आपराधिक या जातिगत मोड़ देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। हाईकोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत समन आदेश को निरस्त कर आरोपी को इस कानून से बरी कर दिया, हालांकि धोखाधड़ी और अमानत में खयानत से जुड़ी आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमे की सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष उपस्थित होकर जमानत याचिका दाखिल करने का अवसर प्रदान किया है।
यात्रियों की सुविधा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने बढ़नी से बांद्रा के बीच ऐशबाग होकर स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। ट्रेन नंबर 05037 बढ़नी-बांद्रा स्पेशल 8 अक्टूबर से 26 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार को बढ़नी से रवाना होगी। ट्रेन बढ़नी से शाम 7:45 बजे चलेगी और शनिवार सुबह 6:30 बजे बांद्रा पहुंचेगी। रास्ते में ट्रेन बादशाहनगर रात 1:18 बजे और ऐशबाग रात 2:15 बजे पहुंचेगी। इन स्टेशनों पर होगा ठहराव स्पेशल ट्रेन का ठहराव तुलसीपुर, बलरामपुर, गोंडा, कानपुर सेंट्रल, इटावा, टूंडला, ईदगाह आगरा, बयाना, कोटा, रतलाम, वडोदरा, सूरत, वलसाड, वापी और बोरीवली स्टेशनों पर होगा। ट्रेन में स्लीपर और जनरल श्रेणी की कुल 16 बोगियां लगाई जाएंगी। शनिवार को बांद्रा से लौटेगी ट्रेन वापसी में ट्रेन नंबर 05038 बांद्रा-बढ़नी स्पेशल 10 अक्टूबर से 28 नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को सुबह 9:30 बजे बांद्रा से रवाना होगी। यह ट्रेन अगले दिन शाम 5:20 बजे ऐशबाग, शाम 5:57 बजे बादशाहनगर होते हुए रात 11:30 बजे बढ़नी पहुंचेगी।
सीकर नगर परिषद निकाय चुनाव के तहत 64 वार्डों में हुए मतदान के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर ली है। भाजपा अपने प्रत्याशियों को जयपुर लेकर गई है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने पहले तो अपने प्रत्याशियों को सीकर के एक मैरिज गार्डन में रुकवाया और इसके बाद बस में बैठाकर सीकर से बाहर ले गए हैं। दोनों ही पार्टियों ने 7 बजे से अपने प्रत्याशियों को कॉल करना शुरू किया। भाजपा प्रत्याशियों को पूर्व विधायक रतनलाल जलधारी के आवास पर बुलाया गया। इसके बाद एक बस में बैठाकर उन्हें जयपुर ले जाया गया है। इधर कांग्रेस पार्टी ने पहले तो अपने सभी प्रत्याशियों को सीकर में रानी सती रोड पर प्रधानजी का जाव मैरिज गार्डन में बुलाया। इसके बाद उन्हें बस में बैठाकर सीकर से बाहर ले जाया गया है। सीकर में भाजपा के प्रत्याशियों के साथ पूर्व विधायक रतनलाल जलधारी भी गए हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी में कोई बड़ा नेता प्रत्याशियों के साथ नजर नहीं आया। निर्दलीय प्रत्याशियों पर सस्पेंस अभी भी जारी सीकर में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों ने भले ही अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर ली हो। लेकिन अभी भी निर्दलीय प्रत्याशियों पर सस्पेंस जारी है। 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद ही यह सस्पेंस दूर होगा।
वाराणसी में खराब मौसम के चलते दिल्ली से वाराणसी जा रही इंडिगो की फ्लाइट IX1827 को लखनऊ डायवर्ट कर दिया गया। मौसम की स्थिति को देखते हुए विमान को वाराणसी के बजाय लखनऊ एयरपोर्ट पर उतारने का निर्णय लिया गया। रात 9:49 बजे लखनऊ में सुरक्षित लैंडिंग फ्लाइट IX1827 ने रात 9:49 बजे (IST) लखनऊ एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। खराब मौसम के कारण वाराणसी में विमान की लैंडिंग संभव नहीं होने पर उसे लखनऊ भेजा गया। फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान को लखनऊ में उतारा गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लेखपाल पद की भर्ती में लोकोमोटर दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को आरक्षण से बाहर किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने 30 जुलाई 2021 के शासनादेश में लोकोमोटर दिव्यांगता की श्रेणी को आरक्षण से बाहर करने का कोई उचित कारण या तर्क नहीं दिया। बाद में 30 सितंबर 2024 के शासनादेश से इस श्रेणी को फिर आरक्षण में शामिल कर लिया गया। कोर्ट ने इसे सरकार की गलती माना और कहा कि इस गलती का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना पड़ेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने नीतू कुमार समेत 22 अन्य की ओर से दाखिल रिट याचिका पर दिया। क्या थी याचिका जानिये याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सभी याची दिव्यांग हैं और उन्हें लेखपाल भर्ती में आरक्षण का लाभ मिलना था, लेकिन 30 जुलाई 2021 के शासनादेश में लोकोमोटर दिव्यांगता को आरक्षण के दायरे से बाहर कर दिया गया। बाद में सरकार ने 30 सितंबर 2024 को संशोधित शासनादेश जारी कर इस श्रेणी को फिर शामिल कर लिया। याचियों ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34(1) का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी प्रतिष्ठानों में बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए कम से कम चार प्रतिशत पद आरक्षित हैं। इसमें लोकोमोटर दिव्यांगता को एक प्रतिशत आरक्षण की श्रेणी में रखा गया है। सरकार बोली समय पर आपत्ति नहीं की राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचियों ने संबंधित शासनादेश के बाद भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था और उस समय कोई आपत्ति नहीं की थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि राज्य की ओर से ऐसा कोई ठोस आधार या सामग्री पेश नहीं की गई, जिससे यह पता चले कि 2021 से 2024 के बीच लेखपाल के काम की प्रकृति में कोई ऐसा बदलाव हुआ था, जिसके कारण लोकोमोटर दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को आरक्षण से बाहर करना जरूरी हो गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 34(1) के दूसरे प्रावधान के तहत आरक्षण से किसी श्रेणी को बाहर करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिसूचना जारी की जानी चाहिए थी, लेकिन राज्य सरकार ने ऐसी कोई अधिसूचना पेश नहीं की। इसलिए 30 जुलाई 2021 का शासनादेश अधिकार क्षेत्र से बाहर जारी किया गया था। कोर्ट ने माना कि लोकोमोटर दिव्यांगता की श्रेणी को हटाने और बाद में बहाल करने के पीछे कोई तर्कसंगत आधार नहीं था और यह सरकार की गलती थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 8085 लेखपाल पदों के एक प्रतिशत के बराबर आरक्षित पदों को पूरा करने के लिए यदि रिक्त पद उपलब्ध हैं तो पात्र पाए गए याचियों को उचित समायोजन के तहत नियुक्ति दी जाए। यदि पर्याप्त रिक्त पद उपलब्ध नहीं हैं तो उनके समायोजन के लिए अतिरिक्त यानी सुपरन्यूमरेरी पद सृजित किए जाएं। कोर्ट ने नियुक्ति प्राधिकारी को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के छह सप्ताह के भीतर आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया।
इंदौर में 8 महीने बाद MIC में जीतू की वापसी:बिजली-यांत्रिकी विभाग की जिम्मेदारी मिली
इंदौर के पार्षद कमलेश कालरा से विवाद के बाद पार्टी से निष्कासन और MIC से हटाए गए जीतू यादव की अब पूरी तरह वापसी हो गई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार देर रात को आदेश जारी कर जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू यादव को मेयर-इन-काउंसिल (MIC) का सदस्य नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभार भी सौंपा गया है। इससे पहले पुलिस से क्लीन चिट मिलने के बाद 18 अगस्त को जीतू यादव की बीजेपी में वापसी हुई थी, लेकिन उन्हें MIC में शामिल नहीं किया गया था। अब पार्टी स्तर पर हुई चर्चा के बाद उन्हें फिर से MIC में लेने पर सहमति बनी और महापौर ने इसकी औपचारिक घोषणा कर दी। भोपाल में बैठक के बाद रास्ता साफजीतू यादव की MIC में वापसी को लेकर भोपाल में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ उनके करीबी नेताओं की मुलाकात हुई थी। इस बैठक में विधायक रमेश मेंदोला, विधायक गोलू शुक्ला समेत अन्य नेताओं के शामिल होने की बात सामने आई है। बैठक में जीतू यादव का पक्ष रखा गया और उन्हें दोबारा MIC में शामिल करने की मांग की गई। चर्चा के बाद पार्टी ने उनकी वापसी को हरी झंडी दे दी। इसके बाद इंदौर महापौर की ओर से MIC सदस्य बनाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया। कालरा विवाद के बाद हुई थी कार्रवाईजनवरी 2025 में बीजेपी के वार्ड 65 के पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हमला किया था। इस मामले में जीतू यादव के समर्थकों के नाम सामने आने के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया था। कार्रवाई के चलते उनका MIC पद भी चला गया था। यह पूरा विवाद एक ऑडियो सामने आने के बाद शुरू हुआ था। ऑडियो में कमलेश कालरा द्वारा नगर निगम के एक कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अपशब्द कहे जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद विवाद बढ़ता गया और मामला कालरा के घर पर हुए हमले तक पहुंच गया। अब जीतू के पास बिजली और यांत्रिकी विभागमहापौर पुष्यमित्र भार्गव के आदेश के मुताबिक मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 37 के तहत जितेन्द्र कुमार (जीतू यादव) को मेयर-इन-काउंसिल का सदस्य नियुक्त किया गया है। MIC सदस्य निरंजनसिंह (गुड्डू) चौहान को सौंपे गए विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग के प्रभार से मुक्त किया जाता है। विजयवर्गीय-मेंदोला खेमे के करीबी माने जाते हैंजीतू यादव को भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा विधायक रमेश मेंदोला के करीबी नेताओं में माना जाता है। भाजपा से बाहर रहने के दौरान भी जीतू यादव स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे। वे कई मौकों पर भाजपा नेताओं के साथ नजर आए और नगर निगम परिषद की बैठकों में निर्दलीय पार्षद के रूप में शामिल होते रहे। इस दौरान वे कांग्रेस पार्षदों के खिलाफ भी मुखर नजर आए। कालरा विवाद के बाद हुई थी पार्टी की किरकिरीजीतू यादव और भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के विवाद ने जनवरी 2025 में इंदौर की राजनीति को गरमा दिया था। कालरा के घर में तोड़फोड़ और उनके नाबालिग बेटे से कथित अभद्रता के आरोपों के बाद मामला गंभीर हो गया था। घटनाक्रम की गूंज प्रदेश भाजपा से लेकर दिल्ली तक पहुंची थी। इसके बाद पार्टी ने जीतू यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। लेकिन डेढ़ साल बाद यह कार्रवाई तय अवधि से पहले ही समाप्त कर दी गई है।
बच्चों को आधुनिक तकनीक के साथ संस्कार, शिष्टाचार और मानवीय मूल्यों की शिक्षा देना जरूरी है। आज कई घरों में अतिथि आने पर बच्चे उनसे अभिवादन या बातचीत करने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। यह स्थिति बताती है कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने की जरूरत है। यह बात माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गुलाब देवी ने शुक्रवार को कही। वे सुल्तानपुर रोड स्थित गुलजार उपवन ट्रेनिंग सेंटर में ब्रह्माकुमारीज एजुकेशन विंग की ओर से तीन दिवसीय मीटिंग एंड ट्रेनिंग प्रोग्राम के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति पर बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों को अपनी प्राचीन संस्कृति, संस्कारों और गौरव से परिचित कराना जरूरी है। शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी ध्यान देना होगा गुलाब देवी ने कहा कि बच्चों को श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के प्रति जागरूक और प्रेरित करने के लिए शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी ध्यान देना होगा। आधुनिक तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन इसके साथ शिष्टाचार, आत्मचिंतन और मानवीय मूल्यों की समझ भी बच्चों को दी जानी चाहिए। शिक्षा के मूल्यों पर चर्चा दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। ममता दीदी, सुमन दीदी और राजयोगिनी राधा दीदी ने संबोधित किया। ब्रह्माकुमारीज शिक्षा प्रभाग की नेशनल कोऑर्डिनेटर सुमन दीदी और वरिष्ठ राजयोगिनी शिक्षिकाएं ममता दीदी व राधा दीदी ने शिक्षा में मूल्यों, संस्कारों, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के महत्व पर विचार रखे। कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रो. पी.के गुप्ता विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए राजयोगिनी स्वर्णलता दीदी ने कहा कि तीन दिवसीय कार्यक्रम में शिक्षा के साथ मूल्य आधारित जीवन, आत्मचिंतन, नैतिक सशक्तिकरण और आध्यात्मिक विकास पर चर्चा होगी।
लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज के फेयर फील्ड सभागार में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार की स्वामी विवेकानंद युवा तकनीकी सशक्तिकरण योजना के तहत टैबलेट वितरण किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लखनऊ उत्तर विधायक डॉ. नीरज बोरा रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. नौमिता गवन की ईश्वरीय वंदना और डॉ. विवेक जोज़फ़ के बाइबिल पाठ से हुई। नोडल अधिकारी डॉ. मनीषा प्रसाद और प्राचार्या डॉ. ईशा वी. लाल ने योजना के उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना का मकसद विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक से जोड़ना और उनकी शैक्षणिक व तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना है। मुख्य अतिथि डॉ. नीरज बोरा ने कहा कि डिजिटल युग में तकनीकी ज्ञान विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यार्थियों को टैबलेट का उपयोग ज्ञान बढ़ाने, पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों के लिए करना चाहिए। टैबलेट मिलने पर विद्यार्थियों में उत्साह देखने को मिला। कॉलेज के प्रबंधक/अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह ने योजना की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे।
लखनऊ की सड़कों पर बढ़ती ई-रिक्शों की संख्या और उससे बिगड़ती यातायात व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र की अधिसूचना के कारण ई-रिक्शों के लिए पंजीकरण और परमिट की जरूरत नहीं है, जिससे इनकी संख्या पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। राज्य सरकार के अधिकारियों को अगली सुनाई में बुलाया है। रेलवे, बस स्टेशन और चौराहों पर ई-रिक्शा की भरमार सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमावली के नियम 178 के तहत किसी सड़क के खास हिस्से पर वाहनों के चलने पर रोक लगाई जा सकती है। परिवहन आयुक्त ने इस बारे में पुलिस आयुक्त को पत्र भी भेजा है। इस मामले पर पुलिस आयुक्त के स्तर पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा बनाई गई एसआईटी भी परिवहन आयुक्त के पत्र को ध्यान में रखते हुए पुलिस आयुक्त को अपनी सिफारिश देगी। अधिसूचना जारी होने के बाद जिन रास्तों पर रोक लगेगी, वहां ई-रिक्शों का संचालन रोका जाएगा। कोर्ट ने ई-रिक्शों की अव्यवस्थित पार्किंग पर भी चिंता जताई। सुनवाई में सामने आया कि रेलवे और बस स्टेशनों के साथ-साथ बड़े चौराहों के आसपास बड़ी संख्या में ई-रिक्शे खड़े रहते हैं, जिससे यातायात पर असर पड़ता है। नगर निगम, यातायात और पुलिस विभाग मिलकर ई-रिक्शों की पार्किंग और यात्रियों को बैठाने-उतारने के लिए जगह तय करेंगे। व्यवस्था संभालने के लिए कॉन्स्टेबल भर्ती कर रहे राज्य सरकार ने बताया कि यातायात कॉन्स्टेबलों के लिए अलग कैडर बनाने का प्रस्ताव फिलहाल सही नहीं पाया गया है। इसके बजाय यातायात व्यवस्था के लिए 1028 कॉन्स्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा, पूरे प्रदेश के लिए 11 ट्रैफिक इंस्पेक्टर और 1277 ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है। कोर्ट को बताया गया कि फिलहाल लखनऊ के अलग-अलग चौराहों पर करीब 1200 कर्मचारी यातायात संभालने में लगे हैं। सरकार के अनुसार, इस संख्या को बढ़ाकर करीब 1500 करने की जरूरत है। 153 कमियां चिह्नित की थीं, रिपोर्ट SIT को सौंपी न्यायालय को यह भी बताया गया कि पॉलिटेक्निक से कामता चौराहे तक जाने वाली सड़क पर 153 कमियां चिह्नित की गई थीं। संबंधित विभाग को इनके सुधार के लिए सूचित किया गया है। नगर निगम ने दावा किया कि आवश्यक कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट एसआईटी को सौंप दी गई है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को तय की है। उस दिन उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और नगर निगम आयुक्त द्वारा नामित अपर नगर आयुक्त को न्यायालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
गोरखपुर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर निगरानी कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने पादरी बाजार चौराहे का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर यातायात व्यवस्था का जायजा लिया और वाहनों के आवागमन की स्थिति देखी। देखिए 2 तस्वीरें यातायात व्यवस्था को लेकर दिए जरूरी निर्देश निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से यातायात की स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का संचालन सुगम, सुरक्षित और निर्बाध तरीके से कराया जाए। वाहन चालकों को किसी तरह की परेशानी न हो और अनावश्यक जाम की स्थिति न बने, इसके लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया। एसएसपी ने यातायात व्यवस्था के साथ ही कानून व्यवस्था को भी बेहतर बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्कता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए। ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील पुलिस की ओर से आम लोगों से भी यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई है। पुलिस ने कहा कि सड़क पर वाहन चलाते समय नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। वाहन चालक निर्धारित लेन में चलें, यातायात संकेतों का पालन करें और चौराहों पर जल्दबाजी न करें। पुलिस का कहना है कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में सिर्फ पुलिस की भूमिका नहीं है, बल्कि आम लोगों का सहयोग भी जरूरी है। लोगों के सहयोग से ही शहर में यातायात को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। निरीक्षण के दौरान संबंधित पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में संचालित कैंटीन में स्वच्छता, हाइजीन, खाद्य पदार्थों के सुरक्षित निर्माण एवं भंडारण को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई। यहां सड़ी हुई प्याज रखी थी। वहीं, जिस ब्रेड की एक्सपायरी डेट 10 दिन पहले खत्म हो गई थी, उसका उपयोग किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए संचालित नवीन कैंटीन का निरीक्षण किया। इस दौरान कैंटीन में खाद्य पदार्थों के निर्माण एवं भंडारण से संबंधित व्यवस्थाओं में कई अनियमितताएं पाई गईं। कैंटीन में सेलिब्रेशन इवेंट एंड इंटरटेंमेंट केटरिंग के जरिए भोजन तैयार किया जाना सामने आया। निरीक्षण में कैंटीन में साफ-सफाई एवं हाइजीन की उचित व्यवस्था नहीं होना, खाद्य सामग्री का उचित एवं सुरक्षित तरीके से भंडारण नहीं किया जाना और खाद्य पदार्थों के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता एवं भंडारण व्यवस्था संतोषजनक नहीं होना पाया गया। वहीं, सैंडविच ब्रेड की बेस्ट बिफोर अवधि समाप्त होने के लगभग 10 दिन बाद भी उसे कैंटीन में सैंडविच तैयार करने के लिए उपयोग किया जाना पाया गया। इसके अतिरिक्त पेयजल के लिए उपयोग की जा रही आरओ/वॉटर फिल्ट्रेशन प्रणाली एवं पानी की गुणवत्ता के संबंध में भी आवश्यक जांच की गई। एक अन्य कैंटीन का निरीक्षण भी किया। इस कैंटीन में भी स्वच्छता संबंधी कमियां, खाद्य पदार्थों के उचित भंडारण की व्यवस्था में कमी और खाद्य निर्माण में संलग्न कर्मचारियों द्वारा निर्धारित स्वच्छ एवं उचित वेशभूषा का पालन नहीं किया जाना पाया गया। निरीक्षण के दौरान पाई गई उक्त अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कैंटीन संचालकों को सुधार सूचना पत्र जारी कर खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता संबंधी कमियों को नियमानुसार दूर करने के निर्देश दिए गए। खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गएखाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए दोनों कैंटीन में खाद्य निर्माण में प्रयुक्त खाद्य सामग्री के मटर का आटा एवं रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत नियमानुसार लिए गए हैं। नमूनों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला में जांच हेतु भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 एवं संबंधित नियम-विनियमों के अंतर्गत अग्रिम वैधानिक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
कानपुर गंगा पुल पर शुक्रवार रात को 10 किमी. लंबा जाम लग गया। लोगों को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से कानपुर रामादेवी चौराहा तक पहुंचने में डेढ़ से दो घंटा तक लगा। जाजमऊ पुल की मरम्मत के चलते 13 सितंबर से दो दिनों के लिए पुल पर ट्रैफिक बंद करके डायवर्जन का ट्रायल किया जाएगा। माना जा रहा है कि अगर अफसर सजग नहीं हुए तो मुसीबत और बढ़ने वाली है। देर रात तक हाईवे पर भीषण जाम लगा रहा और वाहन रेंग-रेंग कर चलते रहे। देर रात तक जाम से जूझते रहे वाहन, गंगापुल पर डायर्जन से बढ़ेगी मुसीबत कानपुर-उन्नाव गंगापुल पर जाम के चलते हजारों वाहन देर रात फंसे रहे। उन्नाव की तरफ गंगा पुल के पास ट्रैफिक रुक गया। पुल पर कई जगह गड्ढे होने के कारण गाड़ियां बहुत धीरे चल रही थीं। देखते ही देखते गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई। जाम इतना बढ़ गया कि पुल के आसपास ट्रैफिक संभालने के लिए पुलिसकर्मी कम दिखे। इससे गाड़ी चलाने वाले लोग नाराज हो गए। लोगों ने उन्नाव पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर अभी यह हाल है, तो तीन महीने के डायवर्जन में हालात कितने मुश्किल होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। 13 से पुल पर लागू होगा डायवर्जन, बढ़ेगी मुसीबत पुराने गंगा पुल की मरम्मत उन्नाव की तरफ से शुरू होगी। इस दौरान लखनऊ से कानपुर आने वाले भारी वाहनों को पुराने पुल से जाने नहीं दिया जाएगा। कानपुर से लखनऊ जाने वाले वाहनों के लिए नया गंगा पुल खुला रहेगा। एनएचएआई ने डायवर्जन की जानकारी देने के लिए खास जगहों, टोल प्लाजा और आसपास के रास्तों पर 50 से ज्यादा साइन बोर्ड लगाने की तैयारी की है। हाईवे पर वालंटियर्स भी लगाए जाएंगे। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज यादव के अनुसार, दो दिन के ट्रायल में वैकल्पिक रास्तों पर ट्रैफिक का दबाव, भारी वाहनों की आवाजाही और जाम लगने वाली संभावित जगहों का आकलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर डायवर्जन व्यवस्था में बदलाव भी किया जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि किसी मामले में एक बार संज्ञान लेने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट दोबारा संज्ञान नहीं ले सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि बाद में दाखिल प्रोटेस्ट अर्जी के आधार पर पहले के संज्ञान आदेश की समीक्षा या उसमें बदलाव भी नहीं किया जा सकता। संज्ञान लेते समय मजिस्ट्रेट आरोपों की धाराएं जोड़ या घटा भी नहीं सकता है। जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने यह आदेश गोंडा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के 22 मई 2026 के आदेश को रद्द करते हुए दिया। यह मामला नवाबगंज थाने में साल 2025 में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा था। पुलिस ने अखिलेश सिंह और शेखर सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। वहीं, अल्पना सिंह के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट लगाई थी। सीजेएम ने 17 नवंबर 2025 को आरोपपत्र पर संज्ञान लिया था। उन्होंने दोनों आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में पेश होने को कहा था। बाद में अल्पना सिंह के खिलाफ लगी अंतिम रिपोर्ट के विरोध में प्रोटेस्ट अर्जी दाखिल हुई। इस पर 22 मई 2026 को सीजेएम ने अल्पना सिंह के साथ शेखर सिंह को भी कुछ और धाराओं में पेश होने के लिए बुलाया। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रोटेस्ट अर्जी पहले से लिए गए संज्ञान आदेश की समीक्षा या दोबारा विचार करने का जरिया नहीं हो सकती। कोर्ट ने तीन बातें साफ कीं: मजिस्ट्रेट अपने संज्ञान आदेश की समीक्षा नहीं कर सकता, संज्ञान लेते समय धाराएं जोड़ या घटा नहीं सकता और एक बार संज्ञान लेने के बाद उसी मामले में दोबारा संज्ञान नहीं लिया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 22 मई के आदेश को रद्द कर दिया। निचली अदालत को कानून के हिसाब से आगे की कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है।
दवा व्यापारियों के संगठन केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन, गोरखपुर के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह ने कहा कि अब हर साल केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स फेडरेशन उत्तर प्रदेश (CDFUP), आल इंडिया आर्गनाइजेशन आफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) की बैठक में शामिल हो सकती हैं। जिससे दवा व्यापारियों की समस्या का त्वरित निराकरण हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के दवा व्यापारियों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उचित मंच मिलने का मार्ग स्पष्ट हुआ है। संगठन के गोरखपुर इकाई के अध्यक्ष दिलीप ने कहा कि यह फैसला CDFUP और उत्तर प्रदेश के दवा व्यापारियों के संगठनात्मक अधिकारों की बड़ी जीत है। यह निर्णय संगठनात्मक पारदर्शिता, वैधानिक प्रक्रिया और प्रतिनिधित्व के अधिकार को मजबूती प्रदान करता है। महासचिव नीरज पाठक ने बताया कि न्यायालय का यह निर्णय संगठनात्मक पारदर्शिता, वैधानिक प्रक्रिया और प्रतिनिधित्व के अधिकार को मजबूती प्रदान करता है। एसोसिएशन ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद में न्यायालय द्वारा विभिन्न पक्षों एवं वाद-बिंदुओं पर विचार करने के बाद दिया गया निर्णय महत्वपूर्ण है। *12 जनवरी 2020 के विवादित आदेश तथा 28 अक्टूबर 2020 के संबंधित आदेश को अवैध एवं प्रभावहीन घोषित कर निरस्त किया जाना* इस मामले में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। एसोसिएशन ने कहा कि संगठन की वास्तविक शक्ति उसके संविधान, उपनियम, पारदर्शी कार्यप्रणाली और सदस्यों के विश्वास में निहित होती है। न्यायालय का यह निर्णय इसी भावना को मजबूत करता है। उन्होंने दवा व्यापारियों से अपील की कि वे संगठनात्मक एकता बनाए रखें और दवा व्यापार से जुड़े नीतिगत एवं व्यावसायिक मुद्दों पर एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रायबरेली के मीरजहांपुर गांव में भूमि अधिग्रहण के एक मामले में राजस्व रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि जब जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है, तो राजस्व अधिकारियों ने अधिग्रहण की गई जमीन को छह अलग-अलग खातों से कैसे जोड़ दिया। खास बात यह है कि इन छह खातों में याचिकाकर्ताओं के नाम भी दर्ज नहीं हैं। जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की बेंच ने रायबरेली के जिलाधिकारी (DM) और अपर जिलाधिकारी (ADM) को 18 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। अधिकारियों को यह भी बताना होगा कि याचिकाकर्ताओं के हिस्से की जमीन वास्तव में खाली है और उस पर उनका कब्जा है या नहीं। याचिकाकर्ताओं के नाम उन खातों में नहीं हैं यह मामला सलोन तहसील के मीरजहांपुर गांव में गाटा संख्या 584(6) से जुड़ा है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि गाटा की कुछ जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, यह जमीन छह खातों में दर्ज है, जबकि याचिकाकर्ताओं के नाम उन खातों में नहीं हैं। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मिनजुमला गाटा का भौतिक बंटवारा नहीं हुआ है, तो उसके किसी खास हिस्से को छह खातों में अलग-अलग कैसे तय किया जा सकता है। कोर्ट ने DM से शपथपत्र देकर यह साफ करने को कहा है कि अधिग्रहण की गई जमीन से जुड़े छह खाताधारकों को मुआवजा मिला है या नहीं। साथ ही, बाकी दो खातों में याचिकाकर्ताओं या उनमें से किसी का नाम दर्ज है या नहीं, यह भी साफ करना होगा। मौके की स्थिति साफ करने के लिए, अगर संभव हो तो, तस्वीरें और वीडियो भी कोर्ट में पेश करने को कहा गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक युवती की उम्र तय करने में ट्रायल कोर्ट की ओर से मेडिकल विशेषज्ञों की राय को अनदेखा करने पर आपत्ति जताई है। न्यायालय ने कहा कि जब डॉक्टरों और रेडियोलॉजिस्ट ने युवती की उम्र करीब 18 वर्ष बताई थी, तो ट्रायल कोर्ट दांत और शारीरिक बनावट के आधार पर उसकी उम्र 14 से 17 वर्ष तय नहीं कर सकता था। विशेषज्ञों की राय को दरकिनार करना सही नहीं था। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने भैया लाल रैदास की अपील मंजूर करते हुए उन्नाव की अपर सत्र अदालत के 8 फरवरी 2013 के फैसले को रद्द कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 366 के तहत 7 साल की कठोर जेल और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। दस्तावेज सही तरीके से रिकॉर्ड पर साबित नहीं हुए न्यायालय ने बताया कि रेडियोलॉजिकल जांच से उम्र तय करने में दो साल तक की गलती हो सकती है। इसलिए, मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर घटना के समय युवती की उम्र 20 साल तक होने की संभावना से मना नहीं किया जा सकता। ऐसे में अभियोग पक्ष को यह साबित करना जरूरी था कि घटना के समय युवती निश्चित रूप से नाबालिग थी, लेकिन वह ऐसा करने में कामयाब नहीं रहा। न्यायालय ने पाया कि युवती के पिता ने एफआईआर में उसकी उम्र नहीं बताई थी। उन्होंने गवाही में भी कहा कि उन्हें बेटी की जन्मतिथि या उम्र की जानकारी नहीं थी। बाद में कक्षा आठ की मार्कशीट में जन्मतिथि 25 सितंबर 1993 दर्ज होने की बात कही गई, लेकिन यह दस्तावेज सही तरीके से रिकॉर्ड पर साबित नहीं हुए। प्रिंसिपल या जिम्मेदार अधिकारी को नहीं बुलाया गया न तो मार्कशीट की मूल कॉपी रिकॉर्ड में थी और न ही उसकी कॉपी को सबूत के तौर पर पेश किया गया। संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल या किसी जिम्मेदार अधिकारी को भी इसे सही साबित करने के लिए गवाही में नहीं बुलाया गया। इसलिए ट्रायल कोर्ट इस मार्कशीट को उम्र का मुख्य आधार नहीं बना सकता था। न्यायालय ने युवती के बयानों में आए अंतर को भी महत्वपूर्ण माना। युवती आरोपी के साथ रहना चाहती थी मजिस्ट्रेट के सामने उसने कहा था कि वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी। दोनों शादी करना चाहते थे और वह आरोपी के साथ रहना चाहती थी। उसने माता-पिता के पास लौटने से भी इनकार किया था।बाद में अदालत में उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे कुछ सुंघाकर बेहोश किया और लुधियाना ले गया। न्यायालय ने कहा कि पीड़िता की अकेली गवाही पर दोषसिद्धि हो सकती है, लेकिन उसके लिए गवाही का पूरी तरह विश्वसनीय होना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि युवती आरोपी के साथ लुधियाना में करीब सात महीने तक रही और इस दौरान उसने बल प्रयोग किए जाने की कोई शिकायत नहीं की। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन आरोपी के खिलाफ धारा 366 का अपराध संदेह से परे साबित नहीं कर सका। लिहाजा दोषसिद्धि और सात वर्ष की सजा रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कस्टडी में लोगों को बार-बार पीटने और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपी पुलिसकर्मियों की डिस्चार्ज (आरोप से बरी करने) की अर्जी खारिज करने का फैसला सही ठहराया। कोर्ट ने इस पर अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी हिंसा को पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना जा सकता, इसे केवल अपराध ही कहा जाएगा। जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने पाया कि कस्टडी में लोगों के हाथ-पैर रस्सी से बांधकर और उन्हें उल्टा लिटाकर बार-बार पीटा गया था। कोर्ट पुलिसकर्मियों शिवानी जोशी व दो अन्य (जिनमें एक महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थी) की दो जुड़ी हुई अर्जियों पर सुनवाई कर रही थी। ये अर्जियां बांदा जिले के बबेरू पुलिस स्टेशन से जुड़े एक मामले में ट्रायल कोर्ट के 27 सितंबर, 2024 के उस आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गईं, जिसमें उनकी डिस्चार्ज की अर्जियां खारिज कर दी गईं। क्या है मामला जानिये आवेदकों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत सुरक्षा का दावा करते हुए तर्क दिया कि कथित हरकतें आधिकारिक ड्यूटी के दौरान की गईं। हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने उनकी डिस्चार्ज की अर्जियां खारिज करने में कोई गलती नहीं की और दोनों अर्जियों को बिना किसी ठोस आधार के मानते हुए खारिज किया। मामले के अनुसार पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 323, 504 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान, सब-इंस्पेक्टर दिलीप कुमार मिश्रा ने आरोपियों का सहयोग पाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41A के तहत नोटिस जारी किए। नोटिस तामील कराने के लिए चार कांस्टेबलों को पडरी गांव भेजा गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर पुलिस कांस्टेबलों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की, नोटिस फाड़ दिए या छीन लिए, ईंट-पत्थर फेंके और कथित तौर पर कांस्टेबल सुखबीर सिंह का मोबाइल फोन छीन लिया। घटना के बाद पुलिस बल को गांव भेजा गया। महिलाओं को अरेस्ट किया गया 13 मई, 2022 की रात को 4 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया, जबकि अगले दिन एक मुखबिर सहित 4 पुरुषों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिसकर्मियों पर गैर-कानूनी मारपीट, छेड़छाड़, कस्टडी में हिंसा, लूटपाट और झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाया। उनकी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत दायर अर्जी पर आदेश के बाद मौजूदा आवेदकों सहित नौ नामजद और कई अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जब उनकी डिस्चार्ज की अर्जी खारिज कर दी गई तो वे हाईकोर्ट आए। कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट की जांच की हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता और उनके परिवार के सदस्यों की मेडिकल रिपोर्ट देखीं, जिनमें कई चोटों का ज़िक्र था। इनमें उनके कूल्हों, जांघों, पैरों, छाती और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान और सूजन शामिल है। कोर्ट ने कहा: शिकायतकर्ता समेत ऊपर बताए गए घायल लोगों को लगी चोटों को देखने से पता चलता है कि पुलिस स्टेशन में पुलिस कस्टडी के दौरान उन्हें बार-बार पीटा गया। इसमें अर्जी देने वाले पुलिसकर्मी भी शामिल थे। उनके हाथ-पैर रस्सी से बांधकर उन्हें पेट के बल लिटाया गया था और खास तौर पर कूल्हों, जांघों और पिंडलियों पर वार किए गए। कोर्ट ने कहा हिंसा को डयूटी का हिस्सा नहीं मानेंगे इसके बाद बेंच ने साफ़ तौर पर कहा कि इस तरह की हिंसा को पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना जा सकता। रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायत करने वाले को गिरफ़्तारी के दौरान ज़मीन पर गिरने से कथित तौर पर खून बहने वाली चोट लगी थी, जबकि तीन अन्य लोगों को कुंद चीज़ से चोटें आई थीं। हाईकोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को बिल्कुल बेतुका बताया कि गिरफ़्तारी के समय, अगर चारों गिरते हैं और घायल होते हैं तो उन्हें खून बहने लगेगा। कोर्ट ने गौर किया कि ट्रायल कोर्ट ने सभी आठ घायल व्यक्तियों की मेडिकल बोर्ड से जांच का आदेश दिया, जिससे चोटों का पता चला। यह देखा गया कि अगर ऐसा नहीं होता तो केवल पुलिस द्वारा तैयार की गई झूठी रिपोर्ट ही रिकॉर्ड में रहती, जिससे घायल व्यक्तियों के खिलाफ हुए कथित अपराध का पता चलने की संभावना खत्म हो जाती। पुलिसकर्मियों ने तर्क दिया कि कथित घटनाएं उनके आधिकारिक कर्तव्यों के पालन के दौरान हुईं, इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत पूर्व मंज़ूूरी अनिवार्य थी। हाईकोर्ट ने कथित कृत्यों और चोटों की प्रकृति को देखते हुए इस दलील को खारिज किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि आई पी सी की धाराओं 147, 148, 323, 504, 452, 354 और 395 के तहत चार्ज-शीट दायर की गई, और ट्रायल कोर्ट ने इसका संज्ञान लिया। कोर्ट ने धाराओं को साफ कर बताया उल्लेखनीय है कि आई पी सी की धारा 354 भी आरोपों में शामिल है। सीआरपीसी की धारा 197(1) के स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जब किसी लोक सेवक पर आई पी सी की धारा 354 के तहत अपराध का आरोप हो, तो किसी मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं होती। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि आवेदकों ने पहले हाईकोर्ट के समक्ष संज्ञान और समन आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन सक्षम अदालत के समक्ष पेश होने और उचित ज़मानत अर्ज़ी दायर करने की अनुमति लेने के बाद 8 फरवरी, 2024 को वह अर्ज़ वापस ले ली थी। इसके बावजूद, उन्होंने न तो ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण किया और न ही अपनी डिस्चार्ज अर्ज़ी (आरोप से मुक्ति की अर्ज़ी) दायर करने से पहले ज़मानत प्राप्त की।हाईकोर्ट ने माना कि इन परिस्थितियों में धारा 197 के तहत सुरक्षा की मांग करने वाली डिस्चार्ज अर्ज़ी विचारणीय नहीं थी। अंततः, हाईकोर्ट ने डिस्चार्ज अर्ज़ियों को खारिज करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश की पुष्टि की और दोनों आपराधिक अर्ज़ियों को खारिज किया।
वाराणसी में शुक्रवार की देर शाम हेरिटेज अस्पताल के पास पेट्रोल पंप के बगल में युवती को कुछ लोगों द्वारा स्कॉर्पियो में जबरन बैठाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में कई लोग युवती को स्कॉर्पियो में जबरन बैठाते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के विरोध करने और हमले की कोशिश का भी दावा किया गया। वीडियो वायरल होने के बाद रोहनिया पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के बाद मामला पारिवारिक निकलाइंस्पेक्टर रोहनिया ने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रही स्कॉर्पियो के नंबर के आधार पर उसमें सवार लोगों की पड़ताल की गई। जांच के बाद मामला पारिवारिक निकला। उन्होंने बताया कि युवती घर से नाराज होकर प्रयागराज घूमने के लिए बिना बताए निकली थी। परिवार के लोग उसकी तलाश कर रहे थे। इसी दौरान युवती को किसी ने वाराणसी में देखा तो परिजनों को सूचना दी, कार से आए परिजनों को युवती हेरिटेज अस्पताल के पास मिली। पुलिस के अनुसार, युवती के पिता भी मौके पर पहुंचे। पिता को देखते ही वैष्णवी शर्मा के साथ मौजूद युवक चार पहिया वाहन से वहां से फरार हो गया। इसके बाद पिता अपनी बेटी को घर ले जाने लगे। युवती जाने को राजी नहीं थी, इसी दौरान का वीडियो किसी ने बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। किसी लड़के के साथ घूमने गई थीलड़की के पिता संतोष, निवासी बबुरी, चंदौली ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी वैष्णवी शर्मा घर पर पढ़ने जाने की बात कहकर किसी लड़के के साथ घूमने गई थी। बेटी के घर वापस नहीं आने पर परिवार वालों ने उसकी खोजबीन शुरू की। तलाश के दौरान उसे हेरिटेज अस्पताल के पास पाया गया। पिता के अनुसार, लड़की घर जाने के लिए तैयार नहीं थी, जिसके बाद उसे पकड़कर घर ले जाया गया। पुलिस ने वीडियो में दिख रहे घटनाक्रम की जांच की तो सोशल मीडिया पर किए जा रहे लड़की के अपहरण के दावे की पुष्टि नहीं हुई। वहीं परिजनों द्वारा बताया गया युवक मौके पर नहीं मिलाl
कानपुर के घाटमपुर नगर पालिका परिषद में वर्ष 2011 से कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत दीपक कुमार गुप्ता को नौकरी से हटाए जाने के मामले में नया विवाद सामने आया है। उनकी मां सुधा गुप्ता ने नगर पालिका चेयरमैन के पति हाफिज अब्दुल आहद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि दीपक को सेवा में बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। रकम नहीं देने पर नौकरी से हटाने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। सुधा गुप्ता की तहरीर पर घाटमपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं चेयरमैन पति ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा है कि दीपक को हटाने या रखने का उनके पास कोई अधिकार नहीं है। मां बोली- नौकरी में बनाए रखने के लिए मांगे 50 हजार घाटमपुर निवासी सुधा गुप्ता ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनका बेटा दीपक कुमार वर्ष 2011 से नगर पालिका परिषद में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर काम कर रहा था। आरोप है कि चेयरमैन पति हाफिज अब्दुल आहद नगर पालिका के कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं। सुधा के मुताबिक, दीपक को सेवा में स्थायी रूप से बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपए मांगे गए थे। रकम 5 अगस्त 2025 तक देने को कहा गया था। रकम नहीं देने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। सुधा का आरोप है कि रकम नहीं देने के बाद दीपक पर झूठा आरोप लगाकर FIR दर्ज कराई गई और उसे नौकरी से हटा दिया गया। तीन कर्मचारियों को दोबारा रखा, बेटे को नहीं लिया सुधा ने तहरीर में बताया कि दीपक के साथ नौकरी से हटाए गए तीन अन्य कर्मचारियों को बाद में दोबारा काम पर रख लिया गया, लेकिन उनके बेटे को वापस नहीं लिया गया। आरोप है कि बेटे को दोबारा नौकरी पर रखने की बात करने के लिए वह कार्यालय पहुंचीं। वहां डर-धमकाकर उनसे 10 हजार रुपए ले लिए गए। बाकी 40 हजार रुपए बाद में देने की बात कही गई। इसके बाद गाली-गलौज और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। सुधा ने बेटे को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। चेयरमैन पति बोले- खुन्नस में कराया मुकदमा चेयरमैन पति अब्दुल अहद ने आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सुधा गुप्ता से कोई मुलाकात नहीं हुई है। जो भी बातचीत हुई है, वह रामकिशन गुप्ता से हुई है। उन्होंने उल्टा धमकी देने का आरोप लगाया। अब्दुल अहद ने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को रखने या हटाने का उनके पास कोई अधिकार नहीं है। दीपक गुप्ता को हटाए जाने की खुन्नस में उनकी मां ने उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस बोली- तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज घाटमपुर इंस्पेक्टर मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यूपी प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2026 के लिए 35 लाख 41 हजार 296 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। यह उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के इतिहास में PET के लिए सबसे ज्यादा आवेदन हैं। पिछले साल करीब 25 लाख 32 हजार अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। PET-2026 की परीक्षा 23, 24 और 25 अक्टूबर को होगी। परीक्षा दो पालियों में होगी। पहली पाली सुबह 10 से दोपहर 12 बजे और दूसरी पाली दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक होगी। 22 हजार से ज्यादा पदों पर आएंगी नई भर्तियां PET में बड़ी संख्या में आवेदन आने की एक बड़ी वजह आने वाली भर्तियां भी हैं। आयोग जल्द ही 22 हजार से ज्यादा पदों पर नई भर्तियों के विज्ञापन जारी कर सकता है। इन भर्तियों में वही अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे, जो PET-2026 पास करेंगे। 2026 में 30 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती आयोग ने 2026 में अब तक 13 भर्ती परीक्षाएं कराई हैं। इनके जरिए 30 हजार 669 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं 2021 से 2026 तक आयोग ने 52 भर्ती परीक्षाएं कराई हैं और करीब 79 हजार पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए हैं।
रेप का आरोपी पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार:9 साल की बच्ची से किया था गलत काम, पैर में लगी गोली
इटावा के बलरई थाना क्षेत्र में नौ साल की बच्ची से रेप करने वाले साधु को पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी साधु अजब सिंह (45) बच्ची को खाने-पीने का लालच देकर अपने साथ ले गया था। शुक्रवार को पुलिस की घेराबंदी के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके बाएं पैर में गोली लग गई। घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। खाने-पीने का लालच देकर की थी दरिंदगीपुलिस के अनुसार, 9 सितंबर को पीड़ित पिता की सूचना पर मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि जब नौ साल की बच्ची खेत की ओर जा रही थी, तब आरोपी अजब सिंह उसे फुसलाकर ले गया और उसके साथ गलत काम किया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बीएनएस की धारा 65(2), 351(3) और 5एम/6 पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा (अपराध संख्या 38/2026) दर्ज किया था। घेराबंदी के दौरान पुलिस पर की फायरिंगएसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर आरोपी की धरपकड़ के लिए कई टीमें गठित की गईं। शुक्रवार को चेकिंग के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी ब्रम्हाणी मंदिर से पीहरपुर खारजा नहर पुल की ओर जा रहा है। पुलिस टीम ने जब उसे घेरने का प्रयास किया, तो उसने पुलिस पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। अवैध तमंचा बरामद, नए मुकदमे दर्जआत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से आरोपी घायल हो गया, जिसके बाद उसे दबोच लिया गया। मौके से 315 बोर का एक अवैध तमंचा, दो खोखा और एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया। मुठभेड़ और अवैध हथियार बरामदगी के संबंध में बलरई थाने में बीएनएस की धारा 109(1) और आर्म्स एक्ट के तहत एक और मामला (अपराध संख्या 39/2026) दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई एसपी सिटी अभयनाथ त्रिपाठी और सीओ जसवंतनगर आयुषी सिंह के नेतृत्व में थानाध्यक्ष आलोक कुमार की टीम द्वारा अंजाम दी गई।
दुर्ग जिले में HDFC बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर राजकुमार तिवारी (37) को गिरफ्तार किया गया है। उन पर बड़े खाताधारकों को गोल्ड ईटीएफ में निवेश पर हर महीने 10 प्रतिशत प्रॉफिट का झांसा देने का आरोप है। सुपेला पुलिस ने यह कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी राजकुमार तिवारी बैंक में अपने पद का फायदा उठाता था। वह संभावित निवेशकों से संपर्क करता था। निवेशकों से चेक लेकर मुख्य आरोपी योगेश साहू के खाते में पैसे जमा करवाता था। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए वह अपने खाते से लाभांश भी देता था। सेक्टर-7 भिलाई निवासी राजू नामदेव ने सुपेला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि योगेश साहू और अन्य आरोपियों ने उन्हें हर महीने 10 प्रतिशत प्रॉफिट का भरोसा दिलाया था। निवेश योजना को भरोसेमंद दिखाने के लिए उन्हें दूसरे ग्राहकों के बैंक खातों के स्टेटमेंट भी दिखाए गए थे। राजू नामदेव ने आरोपियों की बातों पर विश्वास करके 21 मार्च 2025 को 15 लाख रुपए बताए गए खाते में ट्रांसफर किए। शुरुआत में उन्हें प्रॉफिट मिलता रहा, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया। उन्हें पैसे वापस करने का आश्वासन दिया जाता रहा, पर रकम नहीं मिली। बाद में पता चला कि इसी तरीके से कई अन्य निवेशकों से भी बड़ी रकम ली गई थी। शिकायत के आधार पर सुपेला थाने में अपराध क्रमांक 961/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने राजू नामदेव समेत अन्य निवेशकों के बयान लिए। निवेशकों मोहम्मद रफी, साधना मिश्रा और शिबा शेख सहित अन्य के बयानों और दस्तावेजों की जांच में राजकुमार तिवारी की भूमिका सामने आई। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। बैंक पद का उठाया फायदा एएसपी मणि शंकर चंद्रा के हवाले से पुलिस ने बताया कि राजकुमार तिवारी HDFC बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर था। इसी पद का फायदा उठाकर वह बड़े रकम वाले खाताधारकों की जानकारी प्राप्त करता था। इसके बाद उन्हें गोल्ड ईटीएफ में निवेश और ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी निवेशकों से चेक प्राप्त कर मुख्य आरोपी योगेश साहू के खाते में रकम जमा करता था। निवेशकों को शुरुआती प्रॉफिट अपने खाते से देकर उनका भरोसा कायम रखा जाता था। पुलिस को इस प्रक्रिया से जुड़े बैंक दस्तावेज और लेन-देन संबंधी साक्ष्य मिले हैं। सबूत मिलने पर गिरफ्तारी पुलिस ने राजकुमार को हिरासत में लेकर गवाहों के सामने उसका बयान दर्ज किया। जांच में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस निवेश से जुड़े लेन-देन और आरोपियों से जुड़े स्थानों की जांच कर रही है। मामले में सबूत जुटाने का काम भी जारी है। इन धाराओं में केस सुपेला थाने में अपराध क्रमांक 961/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(2), 318(4), 61(2) और 111(4) में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने निवेशकों के बैंक खातों, लेन-देन और लाभांश भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है। पुलिस अब मुख्य आरोपी योगेश साहू और उसके अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही निवेशकों से जुटाई गई रकम, उसके लेन-देन और पूरे नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
प्रेमी से शादी की जिद पर टावर पर चढ़ी युवती; ड्रोन से पहचान कराई, 2 घंटे चला हाईवोल्टेज ड्रामा
देवरिया के लार क्षेत्र में शुक्रवार को एक किशोरी प्रेमी से शादी की जिद में मोबाइल टावर पर चढ़ गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया। किशोरी ने चेहरा ढक रखा था। पुलिस ने समझाकर उसे नीचे उतारा और आरोपी युवक की तलाश शुरू की।
उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की FIR से चर्चा में आईं कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को आखिरकार जेल से बाहर आने का रास्ता मिल गया है। 14 जुलाई को जेल भेजी गई कल्पना को ADJ-8 अशोक कुमार यादव की कोर्ट ने 50 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी। मंत्री ने कल्पना पर अपने नाम-पद और पति गिरधारी लाल साहू के नाम-पते के इस्तेमाल, चोरी, जालसाजी और पद का रौब दिखाकर धन उगाही के गंभीर आरोप लगाए थे। जमानत पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि कल्पना खुद गिरधारी लाल साहू के व्यापार में 25 हजार रुपए महीने की मैनेजर थीं। इसके लिए 6 जुलाई 2022 का पंजीकृत अनुबंध भी कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद संबंधित दस्तावेजों को फर्जी साबित करने वाला कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं पाया। मंत्री के नाम-पते के इस्तेमाल का आरोप रेखा आर्या की ओर से दर्ज FIR में आरोप लगाया गया था कि कल्पना मिश्रा ने अपने आधार कार्ड, पासपोर्ट समेत दूसरे दस्तावेजों में उनके पति गिरधारी लाल साहू का नाम और बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया। आरोप था कि वह मंत्री के नाम और पद का प्रभाव दिखाकर लोगों पर रौब जमाती थीं और धन उगाही करती थीं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि कल्पना जिस हुंडई क्रेटा कार से चलती थीं, उस पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड, हूटर और नीली-लाल बत्ती लगी थी। मंत्री ने कल्पना और डॉ. आरसी पांडेय की गतिविधियों की जांच की मांग भी की थी। घर से 7 लाख रुपए और रुद्राक्ष की माला चोरी का आरोप मंत्री ने बरेली स्थित आवास से 7 लाख रुपए और सोने से जड़ी रुद्राक्ष की माला चोरी होने का भी आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर 9 सितंबर 2024 को बारादरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने पहले मामले की विवेचना कर अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। बाद में आपत्ति के बाद दोबारा विवेचना कराई गई। इसी मुकदमे में कल्पना मिश्रा को 14 जुलाई 2026 को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। अब कोर्ट के जमानत आदेश के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। बचाव पक्ष बोला- 25 हजार रुपए वेतन पर मैनेजर थीं जमानत पर सुनवाई के दौरान कल्पना के वरिष्ठ अधिवक्ता लवलेश पाठक ने आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कोर्ट में 6 जुलाई 2022 का पंजीकृत अनुबंध पेश किया। इसके मुताबिक गिरधारी लाल साहू ने कल्पना को अपने व्यापार में 25 हजार रुपए महीने के वेतन पर मैनेजर नियुक्त किया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि नौकरी के दौरान कल्पना का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण किया गया। उनकी निजी रकम भी हड़प ली गई। विरोध करने और शिकायत करने की बात कहने पर प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें मुकदमे में फंसा दिया गया। तीन बैनामों में मंत्री के घर का पता होने का दावा मंत्री पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए तीन बैनामों का हवाला दिया। आरोप लगाया गया कि अलग-अलग तारीखों में तैयार इन दस्तावेजों में रेखा आर्या के बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया गया। अभियोजन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। कोर्ट ने कहा- दस्तावेज फर्जी होने का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं कोर्ट ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन किया। जमानत आदेश में दर्ज है कि कल्पना के पास गिरधारी लाल साहू की मैनेजर होने से संबंधित पंजीकृत अनुबंध मौजूद है। कोर्ट ने यह भी देखा कि आधार कार्ड में पता बदला जा सकता है, जबकि पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों के लिए पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया होती है। कोर्ट के सामने पेश रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेजों को फर्जी साबित करने वाला कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि मामले के आरोप प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट से विचारणीय हैं और आरोपी की पूर्व दोषसिद्धि की कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को जमानत दे दी। उन्हें 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की एक जमानत दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने सुनवाई में सहयोग करने और साक्ष्यों व गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्त भी लगाई है।
कटिया लगाकर चला रहे थे एसी-कूलर, बिजली विभाग की बड़ी छापेमारी, डेढ़ दर्जन लोगों पर FIR
राजधानी के विभिन्न इलाकों में बिजली चोरी पर अंकुश लगाने और बड़े बकायेदारों के खिलाफ अभियान चलाया। छापेमारी में कटिया लगाकर लोग एसी-कूलर चलाते हुए पकड़े गए। विभाग ने 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) नायब तहसीलदार बनने के लिए सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा-2026 आयोजित करेगा। राजस्व विभाग में कार्यरत पात्र पटवारी, राजस्व निरीक्षक (RI) और लिपिक वर्गीय सेवा संवर्ग के कर्मचारी इसमें शामिल हो सकेंगे। ऑनलाइन आवेदन 17 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक किए जा सकेंगे। आवेदन में संशोधन की सुविधा 6 अक्टूबर तक रहेगी। परीक्षा 14 नवंबर से संभावित है। इस परीक्षा के जरिए नायब तहसीलदार के कुल 73 पद भरे जाएंगे। इनमें लिपिक वर्गीय सेवा संवर्ग के 46 और पटवारी-राजस्व निरीक्षक संवर्ग के 27 पद शामिल हैं। परीक्षा भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैन में होगी। 5 साल का अनुभव और स्नातक डिग्री जरूरीपरीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी का राजस्व विभाग में किसी लिपिक वर्गीय पद, पटवारी या राजस्व निरीक्षक के रूप में कम से कम 5 साल से स्थायी या स्थानापन्न रूप से काम करने का अनुभव होना जरूरी है। साथ ही मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कला, विज्ञान, वाणिज्य या कृषि में स्नातक उपाधि होना अनिवार्य है। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आवेदन की तारीख तक पूरी होना जरूरी है। इसके बाद योग्यता पूरी करने पर नियुक्ति की पात्रता नहीं रहेगी। 1 जनवरी 2026 को अभ्यर्थी की अधिकतम आयु 55 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। किसी भी अभ्यर्थी को इस योजना के तहत परीक्षा में तीन बार से अधिक शामिल होने का मौका नहीं दिया जाएगा। लिपिक संवर्ग के 46 पद सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए लिपिक वर्गीय सेवा संवर्ग से नायब तहसीलदार के 46 पद भरे जाएंगे। इनमें 32 पद सामान्य प्रशासन विभाग के आरक्षण रोस्टर के अनुसार और 14 पद बैकलॉग के हैं। 32 पदों में अनारक्षित वर्ग के 9, EWS के 3, अनुसूचित जाति के 5, अनुसूचित जनजाति के 6 और OBC के 9 पद शामिल हैं। OBC वर्ग के लिए 14% और 13% आरक्षण के आधार पर अलग-अलग पद संख्या निर्धारित की गई है। पटवारी-राजस्व निरीक्षक संवर्ग के 27 पद पटवारी और राजस्व निरीक्षक संवर्ग में सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए नायब तहसीलदार के 27 पद भरे जाएंगे। इनमें 12 पद सीधी भर्ती और 15 पद बैकलॉग के हैं। 12 पदों में अनारक्षित वर्ग के 4, EWS का 1, अनुसूचित जाति के 2, अनुसूचित जनजाति के 2 और OBC के 3 पद शामिल हैं। इस संवर्ग में भी OBC के लिए 14% और 13% आरक्षण के आधार पर पद निर्धारित किए गए हैं। वेतनमान ₹36,200 से ₹1,14,800 नायब तहसीलदार पद के लिए मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के वेतन मैट्रिक्स के लेवल-9 के तहत वेतनमान ₹36,200 से ₹1,14,800 निर्धारित है। इसके अलावा नियमानुसार महंगाई भत्ता देय होगा। परीक्षा में 55 अंक जरूरी, ST के लिए 40 अभ्यर्थी को परीक्षा में कम से कम 55 अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 40 अंक निर्धारित हैं। महिलाओं के लिए 35% पद और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए कुल 6% आरक्षण का प्रावधान है। कर्मचारी चयन मंडल अभ्यर्थियों की योग्यता के क्रम में सूची तैयार कर प्रमुख राजस्व आयुक्त को भेजेगा। इसके बाद नियुक्ति संबंधी आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभागीय जांच या आपराधिक मामला लंबित तो पात्रता नहीं यदि किसी आवेदक के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है या आरोप पत्र जारी किया गया है, पिछले 5 साल के दौरान वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन में कोई प्रतिकूल टिप्पणी की गई है अथवा न्यायालय या किसी प्राधिकारी के समक्ष कोई आपराधिक कार्यवाही लंबित है, तो वह नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। मूल निवासी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं यह राजस्व विभाग में वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों के लिए सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा है। इसलिए आवेदकों को मूल निवासी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होगी। आवेदन पत्र में उम्मीदवार को अपना एम्प्लॉयी कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। पहचान पत्र और बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी परीक्षा के दौरान मूल फोटो पहचान पत्र लाना अनिवार्य होगा। इसके लिए मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड या पासपोर्ट में से किसी एक दस्तावेज का उपयोग किया जा सकेगा। परीक्षा के समय आधार आधारित बहुस्तरीय बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा। 100 प्रश्न, 2 घंटे का समय परीक्षा लिखित एवं वस्तुनिष्ठ प्रकार की होगी। प्रश्नपत्र में 100 प्रश्न, 100 अंक और 2 घंटे का समय निर्धारित है। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। विभागीय उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क ₹2,000 तय किया गया है। परीक्षा केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर, स्मार्ट वॉच, ईयरफोन, रिकॉर्डिंग डिवाइस सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। अभ्यर्थियों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा।
सीकर नगर परिषद में वोटिंग खत्म होने के साथ ही 64 वार्डों के 262 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद हो गया है। सीकर में इस बार 2019 के मुकाबले 1.13 प्रतिशत ज्यादा मतदान हुआ है। मतदान प्रतिशत बढ़ने के बाद कांग्रेस को बढ़त मिलने के आसार जताए जा रहे हैं, जबकि भाजपा को अपनी पिछली स्थिति के मुकाबले सीटें बढ़ने की उम्मीद है। दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला नजदीकी रहने की संभावना के बीच निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। ऐसे में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। बता दें कि वोटों की काउंटिंग 14 सितंबर को होगी, इसके बाद 21 सितंबर को चेयरमैन और 22 सितंबर को वाइस चेयरमैन के चुनाव होंगे। शहर की सरकार चुनने के लिए इस बार भी वोटर्स में गजब का उत्साह देखने को मिला। सीकर नगर परिषद क्षेत्र की 72.21 प्रतिशत वोटिंग ने राजनीतिक पंडितों के समीकरण को भी उलझा दिया है। 2019 के चुनाव के मुकाबले वोटिंग में 1.13 प्रतिशत बढ़ोतरी सीकर में 2014 के नगर परिषद चुनाव के बाद सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। SIR के विरोध को देखते हुए सीकर में इस बार वोटिंग घटने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन इसके उलट सीकर में 2019 के चुनाव के मुकाबले वोटिंग में 1.13 प्रतिशत बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि, सीकर में 2014 के नगर परिषद चुनाव में रिकॉर्ड 74 प्रतिशत पोलिंग हुई थी। वोटिंग के बाद भाजपा-कांग्रेस का बोर्ड बनाने का गणित सीकर में वोटिंग के बाद बोर्ड बनाने की गणित शुरू हो गई है। सभापति का पद इस बार अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है। ऐसे में महिलाओं के साथ उनके प्रतिनिधियों की बाड़ाबंदी भी की जाएगी। कांग्रेस की ओर से सीकर विधायक राजेंद्र पारीक और जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला ने मोर्चा संभाला है तो वहीं, भाजपा के कुनबे को पूर्व विधायक रतनलाल जलधारी और जिलाध्यक्ष मनोज बाटड़ लीड कर रहे हैं। कांग्रेस ने सभी प्रत्याशियों को फोन करने शुरू कर दिए हैं। वहीं, भाजपा ने सिंबल के सभी प्रत्याशियों को सुरक्षित जगह भेजने की तैयारी कर ली है। इसके लिए भाजपा के प्रत्याशियों को पूर्व विधायक के आवास पर बुलाया गया है। सीकर में कांग्रेस सभी प्रत्याशियों को साध रही है, वहीं, भाजपा ने निर्दलीयों से भी संपर्क साधा है। दोनों प्रमुख दलों की सीटों में ज्यादा अंतर नहीं रहेगा अभी तक के चुनावी आंकलन से सीकर में रिवायत की तरह कांग्रेस बढ़त बनाती दिख रही है। वहीं, भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर अंदरखाने की गुटबाजी से जूझ रही भाजपा की सीटें जरूर बढ़ रही हैं। सट्टा बाजार की मानें तो दोनों प्रमुख दलों की सीटों में ज्यादा अंतर नहीं रहेगा। सीकर में कांग्रेस की परंपरा, सिर्फ डायरेक्ट इलेक्शन में जीती भाजपा सीकर नगर परिषद के बोर्ड में आज तक कांग्रेस का कब्जा रहा है। एक बार डायरेक्टर हुए उपचुनाव में भाजपा की राजेश्वरी सैनी सभापति बनीं थीं। पिछले 2 कार्यकाल में यहां कांग्रेस के जीवण खां सभापति बने। ऐसे में सीकर में कांग्रेस का बोर्ड एक परंपरा की तरह हो गया है। हालांकि, इस बार भाजपा ने बोर्ड बनाने की कोशिशों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सभापति के लिए लॉबिंग शुरू, कांग्रेस की गणित सरल, भाजपा में उलझन सीकर में मतदान खत्म होने के बाद सभापति पद के लिए लॉबिंग शुरू हो गई है। कांग्रेस में दावेदार कम नजर आ रहे हैं। वहीं, भाजपा में कोई सीधी दावेदारी नहीं कर रहा है, क्योंकि भाजपा का बोर्ड बनने की स्थिति में जयपुर से सभापति का नाम तय होने के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं, निर्दलीयों के झुकाव को भी तवज्जो मिलने की संभावना नजर आ रही है। कब किसका बोर्ड रहा सभापति के लिए भाजपा और कांग्रेस में कास्ट मैनेजमेंट की गणित का भी ध्यान सभापति के लिए भाजपा और कांग्रेस में कास्ट मैनेजमेंट की गणित को भी ध्यान में रखा जाएगा। पूरी संभावना है कि कांग्रेस का बोर्ड बनने पर मुस्लिम समाज से सभापति बनेगी और भाजपा का बोर्ड बनने पर माली समाज की सभापति पद ताजपोशी हो सकती है। आपको बता दें कि सीकर नगर परिषद के परिसीमन में कुछ ग्रामीण इलाके भी जुड़े हैं, ऐसे में जाट समाज से सभापति होने की संभावना से मना नहीं किया जा सकता। वहीं दोनों ही दल 16 सितंबर को चौंकाने वाले नाम भी ला सकते हैं। सभापति पद के लिए कांग्रेस में निवर्तमान सभापति जीवण खां की पत्नी वार्ड नं-15 से प्रत्याशी खतीजा बानो, वार्ड नं- 19 से सूबे दौलत और वार्ड नं-40 से किरण चौधरी को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। सूबे दौलत के पति अब्दुल रज्जाक पंवार काफी समय से पार्षद रहे हैं और स्थानीय राजनीति में पूरा दखल रखते हैं। इधर, किरण चौधरी पूर्व उपसभापति अशोक चौधरी की पुत्रवधू हैं। सभापति पद के लिए भाजपा में वार्ड नं-28 से कंचन खड़ाेलिया, वार्ड नं-46 से मोनिका सैनी, वार्ड नं-48 से सरोज सैनी का प्रमुखता से चर्चा में है। हालांकि, भाजपा की वार्ड नं-50 से प्रत्याशी सोनल चौधरी का नाम भी आ सकता है।
भरतपुर, डीग, अलवर, धौलपुर और दौसा सहित पूर्वी राजस्थान के जिलों में गोवंश में लम्पी स्किन डिजीज (लम्पी चर्म रोग) के मामले सामने आए हैं। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए राजस्थान गो सेवा आयोग ने प्रदेशभर के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। आयोग ने सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों और गोशाला संचालकों को इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। लम्पी रोग के लक्षण गो सेवा आयोग की सचिव डॉ. अनिता अग्रवाल के अनुसार, यह एक विषाणुजनित संक्रामक बीमारी है जो गर्म और नमी वाले मौसम में मच्छर, मक्खी, चीचड़, दूषित पानी व चारे के जरिए तेजी से फैलती है। ऐसे करें बचाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि लम्पी एक वायरस जनित बीमारी है, जिसका कोई सटीक इलाज नहीं है। ऐसे में पशुपालकों द्वारा बरती गई थोड़ी सी सावधानी और बचाव के उपाय ही गोवंश की सुरक्षा के लिए सबसे प्रभावी हैं।
उदयपुर में बॉयफ्रेंड ने अपनी गर्लफ्रेंड सहित उसकी मां और भाई पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। इसके बाद खुद का गला काट लिया। गंभीर हालत में चारों को एमबी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां बॉयफ्रेंड की हालत सीरियस बताई जा रही है। अंबामाता थाना क्षेत्र की खारोल कॉलोनी में यह घटना रात करीब 9:30 बजे खारोल कॉलोनी में हुई है। थानाधिकारी हुकम सिंह ने बताया- युवक का युवती से अफेयर था। दोनों की अक्सर फोन पर बातें होती थीं। किसी बात को लेकर युवती नाराज हो गई। युवती ने युवक से बात करना बंद कर दिया और युवक का नंबर ब्लॉक कर दिया। इस बात पर गुस्साया युवक अचानक युवती के घर पहुंचा। सबसे पहले उसने युवती की मां पर धारदार हथियार से हमला किया। बीच-बचाव में आए भाई के सिर पर हथियार से हमला कर दिया। फिर युवती के कान और हाथ पर वार किए। इसके बाद खुद का गला काट लिया। युवती की अंगुलियां काटी, भाई का सिर फाड़ा पुलिस ने बताया- युवक ने युवती की अंगुलियां काट दी और चेहरे पर हमला किया। वहीं भाई का सिर फोड़ दिया। इससे वह खून से लहुलूहान हो गया। घर में खून ही खून फैल गया। घटना का पता लगते ही परिजन और समाज के लोग बड़ी संख्या में हॉस्पिटल पहुंचे। डीएसपी राजेश और थानाधिकारी हुकम सिंह भी मौके पर पहुंचे और घटना का जायजा लिया। पुलिस ने बताया कि युवती शादीशुदा है। वह कुछ साल से अपने पति से अलग अपने मां और भाई के साथ रह रही है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची में कथित विसंगतियों को लेकर जन सुराज पार्टी ने निर्वाचन आयोग से सुधार की मांग उठाई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में उच्चस्तरीय शिष्टमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), बिहार से मुलाकात की और मतदाता सूची में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने विशेष रूप से तिरहुत क्षेत्र की मतदाता सूची में एक ही नाम के दो-दो बार दर्ज होने का मामला उठाया। जन सुराज का दावा है कि तिरहुत क्षेत्र में 1668 नाम डुप्लीकेट पाए गए हैं। दो दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया था मामला मनोज भारती ने कहा कि जन सुराज ने दो दिन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एमएलसी चुनाव की जारी मतदाता सूची में मौजूद विसंगतियों को सामने रखा था। उस दौरान पार्टी ने तिरहुत क्षेत्र की सूची में डुप्लीकेट नामों की सूची भी सार्वजनिक की थी। अब इसी मामले को लेकर निर्वाचन आयोग को ज्ञापन दिया गया है। उन्होंने कहा कि आयोग ने पार्टी का ज्ञापन स्वीकार किया है और मतदाता सूची में सामने आई गलतियों का संज्ञान भी लिया है। आयोग की ओर से बताया गया है कि चुनाव की घोषणा होने तक मतदाता सूची में जरूरी संशोधन की प्रक्रिया जारी रहेगी। इसके बाद जो अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, उसी के आधार पर एमएलसी चुनाव कराया जाएगा। एमएलसी मतदाता सूची में अपनाने की मांग जन सुराज ने निर्वाचन आयोग के सामने एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी रखी। मनोज भारती ने कहा कि जिस तरह विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार और संशोधित की जाती है, उसी तरह की प्रक्रिया विधान परिषद चुनाव के लिए भी अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि चुनाव से पहले होने वाले पुनरीक्षण के दौरान स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के लिए अलग-अलग कॉलम बनाए जाएं। इसके बाद निर्वाचन आयोग सूची को अलग-अलग छांटकर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदाता सूची तैयार करे। इससे डुप्लीकेट नामों और अन्य विसंगतियों की पहचान करने में आसानी होगी। आयोग ने कहा- प्रक्रिया में बदलाव अधिकार क्षेत्र से बाहर मनोज भारती के अनुसार, मुलाकात के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से इस मांग को लेकर कुछ तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। आयोग की ओर से बताया गया कि मतदाता सूची तैयार करने की विधि और प्रक्रिया में बदलाव विधि-विधान से जुड़ा विषय है और यह सीधे आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इस पर जन सुराज ने आयोग से आग्रह किया कि पार्टी की मांगों को केंद्र के निर्वाचन आयोग के समक्ष भेजा जाए और वहां इस विषय को रखा जाए। पार्टी का कहना है कि एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए प्रक्रिया में जरूरी सुधार किया जाना चाहिए। फाइनल सूची में गड़बड़ी नहीं रहने का आश्वासन: कुमार सौरभ जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने कहा कि जो मतदाता सूची जारी हुई थी, उसमें सुधार किया जाना चाहिए था। पार्टी ने सूची में गड़बड़ी होने के प्रमाण भी निर्वाचन आयोग के सामने रखे हैं। हालांकि, आयोग की ओर से बताया गया कि मतदाता सूची में सुधार एक सतत प्रक्रिया है। कुमार सौरभ ने कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। आयोग की ओर से आश्वासन दिया गया है कि फाइनल सूची तैयार करते समय इन त्रुटियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा और अंतिम सूची में इस तरह की अशुद्धियां नहीं रहने दी जाएंगी। शिष्टमंडल में ये नेता रहे मौजूद CEO बिहार से मुलाकात करने वाले जन सुराज के शिष्टमंडल में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ और पूर्व आईपीएस जितेन्द्र मिश्रा समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। पार्टी ने कहा कि एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची में पारदर्शिता और शुद्धता जरूरी है, क्योंकि इसी सूची के आधार पर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होना है।
रायपुर के सदर बाजार में शुक्रवार शाम एक जर्जर पुरानी बिल्डिंग अचानक गिर गई। यह बिल्डिंग सहेली ज्वेलर्स के सामने स्थित थी। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। घटना की जानकारी मिलते ही नगर निगम के अधिकारी और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और आगे की कार्रवाई शुरू की। नगर निगम जोन-4 के कमिश्नर ने बताया कि मकान काफी जर्जर था और नगर निगम की ओर से इसे लेकर पहले भी नोटिस दिया जा चुका था। आज शाम अचानक बिल्डिंग का हिस्सा गिर गया। हादसे के बाद नगर निगम की टीम क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने का काम कर रही है। मौके पर पुलिस भी तैनात है। वहीं, पुलिस की ओर से आसपास के लोगों से भवन के पास तेज आवाज में डीजे या साउंड नहीं बजाने की अपील की गई है, ताकि किसी तरह की परेशानी या खतरा न हो। नगर निगम जोन अध्यक्ष और निगम की टीम मौके पर मौजूद हैं। फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करने का काम जारी है।
पाली जिले में प्रशासन की पूरी कोशिशों के बाद भी निकाय चुनाव में इस बार वोटिंग कम हुई। सबसे ज्यादा गिरावट सादड़ी नगर पालिका में दिखी, जहां इस बार 66.42% वोट पड़े। जबकि 2021 में यहां 71.25% वोटिंग हुई थी। वहीं रानी खुर्द में सबसे कम 0.23% वोट घटे और 76.15% मतदान हुआ। पाली नगर निगम समेत बाली, फालना, सुमेरपुर, तख्तगढ़ और सोजत में भी वोटिंग में करीब 2.63% की कमी आई। इससे साफ है कि लोग वोट डालने के लिए कम बाहर निकले। भाजपा और कांग्रेस के लिए साख का सवालजानकारों के अनुसार, कम वोटिंग का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। फिलहाल जिले के किसी भी निकाय में कांग्रेस का बोर्ड नहीं है, इसलिए उसके पास खोने को कुछ नहीं है। वहीं भाजपा के लिए अपनी सीटें बचाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में यह चुनाव दोनों ही पार्टियों के लिए साख का सवाल बन गया है। 14 सितंबर को आएगा फैसलावोटिंग खत्म होने के बाद सभी EVM मशीनों को पाली के बांगड़ कॉलेज लाया गया है। यहां तीन स्तर (थ्री-लेयर) की सख्त सुरक्षा और हथियारबंद जवानों के पहरे में मशीनों को बंद रखा गया है। दोनों ही पार्टियां अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं। ऐसे में 14 सितंबर को नतीजों के बाद बोर्ड गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब पढ़िए- चुनाव आयोग से जारी आंकड़ें
BJP MLA बोले पेटीकोट पहनाओ, फसल सर्वे में वसूली पर भड़के किसानों ने निकाल दिया सर्वेयरों का जुलूस
महोबा में बारिश से तबाह फसलों के मुआवजे के लिए सर्वे के नाम पर वसूली की शिकायत मिली तो किसानों का गुस्सा भड़क गया। सर्वेयरों को पेटीकोट-ब्लाउज और जूते-चप्पलों की माला पहनाकर जुलूस निकालने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने पकड़े गए सर्वेयरों से BJP विधायक बृजभूषण राजपूत से फोन पर बात कराई।
सीआईए रेवाड़ी की टीम ने गांव गुजरीवास स्थित एक खेत के अंदर बने प्लॉट में रेड की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अवैध रूप से भंडारण किए गए पेट्रोल-डीजल से भरे सात ड्रम बरामद किए, जिनमें एक हजार लीटर से अधिक ईंधन होने की बात सामने आई है। कार्रवाई के दौरान सीआईए टीम ने मौके पर कसोला थाना पुलिस और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को बुलाया। पुलिस ने ड्रमों के साथ एक पिकअप गाड़ी को भी जब्त किया है। रेवाड़ी एसपी हेमेंद्र मीणा ने कहा कि जिले में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सड़क बनवाओ, नहीं तो कूदकर मर जाऊंगा; टावर पर चढ़ गया युवक, दौड़े-दौड़े पहुंचे बीडीओ
मुजफ्फरपुर जिले के एक गांव में जर्जर सड़क से परेशान होकर एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। वह टावर से कहने लगा कि सड़क बनवाओ, नहीं तो कूदकर मर जाएगा। लोगों और पुलिस के समझाने पर भी वह नहीं माना। इसके बाद बीडीओ दौड़े-दौड़े मौके पर पहुंचे।
हांसी बार एसोसिएशन के चुनाव में एडवोकेट सुदेश यादव प्रधान चुने गए हैं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी एडवोकेट चंद्रभान यादव को 85 वोटों से हराया। बार एसोसिएशन के कुल 642 सदस्यों में से 594 वकीलों ने वोट डाले। वोटिंग बार लाइब्रेरी में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक हुई। प्रधान पद के लिए सुदेश यादव को 286 वोट मिले, जबकि चंद्रभान यादव को 201 वोट मिले। कुछ वोट रद्द भी किए गए। सुदेश यादव की जीत के बाद उनके समर्थकों ने बार परिसर में ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई और फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। अजय सचदेवा बने उप प्रधान उप प्रधान पद पर एडवोकेट अजय सचदेवा ने जीत हासिल की। उन्होंने एडवोकेट कमल कुमार गर्ग को 53 वोटों से हराया। कमल कुमार गर्ग को 269 वोट मिले। सचिव पद पर एडवोकेट जितेंद्र सिहाग ने एडवोकेट आशुतोष अरोड़ा को 131 वोटों से हराया। सह-सचिव पद पर जैस्मिन ने सबसे ज्यादा 236 वोट हासिल कर जीत हासिल की। अनिता जांगड़ा को 185 और किरण जांगड़ा को 150 वोट मिले। महिला आरक्षित उप प्रधान पद पर एडवोकेट नीलम का अकेला नामांकन आने से उन्हें निर्विरोध चुना गया। खजांची पद पर अश्वनी कुमार दूहन और लाइब्रेरी इंचार्ज पद पर जयदेव भी निर्विरोध चुने गए। शांतिपूर्ण तरीके से हुए चुनाव निर्वाचन अधिकारी एडवोकेट रोहित कलसन ने बताया कि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से पूरे हुए। सुदेश यादव को प्रधान, अजय सचदेवा को उप प्रधान, जितेंद्र सिहाग को सचिव और जैस्मिन को सह-सचिव चुना गया। नीलम को महिला आरक्षित उपप्रधान, जयदेव को लाइब्रेरी इंचार्ज और अश्वनी कुमार दूहन को खजांची पद पर निर्विरोध चुना गया। इन प्रत्याशियों ने भरे थे नामांकन प्रधान पद के लिए सुदेश यादव, चंद्रभान यादव, ललित शर्मा और कमल सीमार ने नामांकन भरे थे। उपप्रधान पद के लिए अजय सचदेवा और कमल कुमार गर्ग ने नामांकन भरा था। सचिव पद के लिए जितेंद्र सिहाग, आशुतोष अरोड़ा और मोहित ढिल्लो ने नामांकन भरा। सह-सचिव पद के लिए जैस्मिन, अनिता जांगड़ा और किरण जांगड़ा ने नामांकन भरा। खजांची पद के लिए अश्वनी कुमार दूहन और लाइब्रेरी इंचार्ज पद के लिए जयदेव ने नामांकन भरा था।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाने की राह हुई आसान, योगी सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन पोर्टल
लखनऊ, 11 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित सुशासन के विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश में राजस्व सेवाओं को और सरल एवं नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। राजस्व परिषद ने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के लिए ईडब्ल्यूएस पोर्टल व भूमि अभिलेखों को अधिक स्पष्ट और सटीक बनाने के लिए सरलीकृत खतौनी का शुभारंभ किया है। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने शुक्रवार को राजस्व परिषद के आंबेडकर सभागार में दोनों सुविधाओं की शुरुआत की। इनके साथ उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने वाला पोर्टल भी शुरू किया गया।ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे अनावश्यक चक्करईडब्ल्यूएस पोर्टल के शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नागरिकों के लिए प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और पारदर्शी होगी। अब नागरिक ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन आगे लेखपाल और तहसीलदार स्तर पर ऑनलाइन भेजा और निस्तारित किया जा सकेगा। आवेदन किस स्तर पर पहुंचा है और उसकी क्या स्थिति है, इसकी जानकारी भी डिजिटल माध्यम से दर्ज और देखी जा सकेगी।इस व्यवस्था से कागजी कार्यवाही कम होगी और नागरिकों को बार-बार तहसील या संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम पड़ेगी। साथ ही आवेदन के निस्तारण में जवाबदेही और समयबद्धता बढ़ेगी। पूरी प्रक्रिया की निगरानी डिजिटल माध्यम से होने के कारण पारदर्शिता भी मजबूत होगी। योगी सरकार की तकनीक आधारित व्यवस्था का यह कदम खास तौर पर उन नागरिकों के लिए राहत देने वाला है, जिन्हें प्रमाण-पत्र बनवाने में अनावश्यक भागदौड़ करनी पड़ती थी।सरलीकृत खतौनी से भूमि का रिकॉर्ड समझना होगा आसानसरलीकृत खतौनी के जरिए भूमि अभिलेखों को आम नागरिक के लिए अधिक स्पष्ट, सहज और उपयोगी बनाया गया है। अब खतौनी में भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे भूमि के क्षेत्रफल की जानकारी पहले से अधिक सटीक रूप में सामने आएगी।खतौनी में अभिलेखागार से संबंधित पुराने आदेशों और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी को भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे नागरिकों और राजस्व अधिकारियों को भूमि के स्वामित्व से जुड़े पुराने अभिलेखों और आदेशों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। इससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड को समझने में सुविधा होगी और पुराने दस्तावेजों की जानकारी जुटाने में होने वाली कठिनाई भी कम होगी।धारा 116 पोर्टल से भूमि विभाजन की प्रक्रिया होगी ऑनलाइनउत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत सह-खातेदार द्वारा भूमि के विभाजन का वाद किया जा सकता है। अब इस प्रक्रिया को भी तकनीक से जोड़ते हुए नया पोर्टल शुरू किया गया है। नागरिक भूमि विभाजन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया को भी डिजिटल माध्यम से संचालित और निगरानी में रखा जा सकेगा।संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध होगी। भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को देखने के लिए मानचित्र की सुविधा भी दी गई है। इससे न्यायालय और मौके पर होने वाली कार्यवाही के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। परिणामस्वरूप भूमि विभाजन के मामलों का निस्तारण अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से करने में मदद मिलेगी।तकनीक के साथ संवेदनशीलता पर जोरराजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा संबंध आम नागरिक और उसके भूमि संबंधी अधिकारों से है। इसलिए तकनीक और नए प्रयोगों का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का सरल, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना के साथ काम करने व तकनीक का अधिकतम उपयोग करने के लिए।पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों से संवादकार्यक्रम के दौरान पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद भी आयोजित किया गया। उन्हें राजस्व परिषद की कार्यप्रणाली और क्षेत्र स्तर पर राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराया गया। साथ ही रोवर तकनीक के माध्यम से आधुनिक एवं सटीक भूमि मापन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने राजस्व प्रशासन, तकनीक के उपयोग और क्षेत्र स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर अधिकारियों के साथ संवाद किया।
दमोह-जबलपुर मार्ग पर शुक्रवार रात एक हादसे में मां और बेटे की मौत हो गई। देहात थाना की जबलपुर नाका चौकी अंतर्गत चिरई चोंच के पास एक वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। दोनों मृतकों की पहचान कल्याणपुरा देहात थाना निवासी 35 वर्षीय रामकृष्ण सिंह (पिता बंधू सिंह) और उनकी मां 65 वर्षीय मंजली बहू के रूप में हुई है। ये दोनों तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया। परिजन ने क्या बताया? मृतक रामकृष्ण के बड़े भाई खिलान सिंह ने बताया कि शुक्रवार को उनकी बुआ के यहां बंदरकोला गांव में तेरहवीं का कार्यक्रम था। उनकी मां और छोटा भाई बाइक से शुक्रवार शाम कार्यक्रम में शामिल होने निकले थे। उन्हें फोन पर घटना की जानकारी मिली। जब वे जिला अस्पताल पहुंचे, तो भाई और मां के शव देखे। उन्हें घटना कैसे हुई, इसकी जानकारी नहीं है। पुलिस ने क्या कहा? खबर मिलते ही जबलपुर नाका चौकी प्रभारी प्रियंका पटेल भी जिला अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने बताया कि मृतक नरसिंहगढ़ चौकी क्षेत्र के रहने वाले हैं और जबेरा के पास एक तेरहवीं कार्यक्रम में जा रहे थे। शवों को जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में रखा गया है। शनिवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिए जाएंगे। पुलिस ने वाहन चालक की तलाश शुरू कर दी है।
रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में उनके पिता का अनशन दसवें दिन भी जारी है। लगातार भूखे रहने से उनकी हालत बिगड़ गई है। अब वे बैठ भी नहीं पा रहे हैं और धरना स्थल पर लेटकर अनशन कर रहे हैं। प्रशासन की टीम उन्हें समझाने पहुंची, लेकिन उन्होंने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। पिता ने कहा अब मरने की ठान ली है, एफआईआर दर्ज होने तक नहीं उठूंगा। वे बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर की मांग कर रहे हैं। इधर, प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है। प्रशासन समझाने पहुंचा, पिता नहीं मानेपिता कई दिनों से सिरमौर चौराहे पर धरना दे रहे हैं। शुक्रवार को प्रशासन की टीम उनकी स्थिति देखने और अनशन खत्म कराने के लिए पहुंची। अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। उन्होंने अपनी मांग दोहराई। कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, वे अनशन खत्म नहीं करेंगे। 26 अगस्त को हुई थी कल्पना और नवजात की मौतकल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की 26 अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में मौत हुई थी। इसके बाद उनके पिता ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग शुरू की। पिता का कहना है कि बेटी को न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिएमामले में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी एसडीएम सिरमौर दृष्टि जायसवाल को सौंपी गई है। कलेक्टर के अनुसार जांच के लिए 7 बिंदु तय किए गए हैं। जांच एक महीने में पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। 12 से 24 सितंबर तक होगी सुनवाईप्रशासन के अनुसार मामले की सुनवाई 12 सितंबर से 24 सितंबर के बीच होगी। सुनवाई प्रत्येक गुरुवार और शनिवार को होगी। सुनवाई कलेक्टर कार्यालय में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगी। मामले से जुड़े पीड़ित पक्ष, प्रत्यक्षदर्शी और आम नागरिक घटना से संबंधित साक्ष्य, लिखित बयान या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्रमाण के साथ प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त साक्ष्यों पर विचार नहीं किया जाएगा। जांच शुरू, लेकिन FIR की मांग पर अड़े पिताप्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बावजूद कल्पना के पिता एफआईआर की मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि मजिस्ट्रियल जांच अपनी जगह चलती रहे, लेकिन बेटी की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होने तक वे अनशन खत्म नहीं करेंगे।
भोजपुर में बाढ़ के पानी में एक युवक डूब गया था। उसकी लाश दूसरे दिन बरामद हुई है। मृतक नवादा थाना क्षेत्र के जवाहर टोला वार्ड नंबर-40 निवासी धर्मेंद्र कुमार का 23 वर्षीय बेटा मोहित कुमार है। वह रस्सी बेचने का काम करता था। इधर, मृतक के ममेरे भाई विकास कुमार ने बताया कि मैं मोहित कुमार और चार अन्य लड़कों के साथ जयपाल पिपरा गांव में बड़की पुल के पास बाढ़ के पानी में नहाने गया था। जहां दो लोग बैठे थे। जबकि मैं और मोहित कुमार सहित दो अन्य लड़के नहा रहे थे। तभी उनमें से एक लड़के ने अपने चप्पल को पानी में कुछ दूर पर फेंक दिया और बोला की चप्पल ले आओ। बहुत मजा आएगा। तभी मैं चप्पल लाने के लिए चला गया और पीछे मोहित कुमार भी आया। लौटने के क्रम में मोहित कुमार पानी में डूब गया। घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के जयपाल पिपरा गांव की है। मुझे लगा मोहित डुबकी लगा रहा है ममेरे भाई विकास ने कहा कि मैंने सोचा कि मोहित पानी के अंदर डुबकी लगा रहा है। कुछ देर जब पानी से बाहर नहीं निकला तो, हमलोगों ने ने शोर मचाना शुरू किया। जिसके बाद गुरुवार की देर शाम तक एसडीआरएफ की टीम ने उसकी काफी खोजबीन की। पर कहीं उसका पता नहीं चला। शव को एसडीआरएफ की टीम के सहयोग से पानी से बाहर निकल गया। बताया जाता है कि मृतक अपने 2 भाई व 2 बहन में बड़ा था। उसके परिवार में मां अनीता देवी और दो बहन दुर्गा कुमारी, रागिनी कुमारी, एक भाई शिवम कुमार है। घटना के बाद मृतक के घर में मातम है। उसकी मां अनीता देवी एवं परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सक्ती जिले के ग्राम जेठा के कॉलेज ग्राउंड में हुए राज्यस्तरीय कार्यक्रम में पिछली भूपेश बघेल सरकार पर प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से आवास के लिए पैसा आने के बावजूद तब की राज्य सरकार ने मैचिंग ग्रांट नहीं दी। इस वजह से गरीबों के आवास अटक गए और तत्कालीन मंत्री टीएस सिंहदेव को इस्तीफा तक देना पड़ा। शिवराज ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनते ही गरीबों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास देने का फैसला लिया गया था। अब प्रदेश को 3 लाख 65 हजार 159 अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवासों की सौगात मिली है। सक्ती में हुए इस कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के करीब 2 लाख नए बने प्रधानमंत्री आवासों में गृह प्रवेश कराया। उन्होंने लाभार्थियों को प्रतीकात्मक तौर पर नए घरों की चाबियां भी सौंपीं। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की घोषणा की। इसके साथ ही, बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 करने का भी एलान किया गया। ढाई साल में 11.50 लाख से ज्यादा पीएम आवास पूर्ण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय लिया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में प्रतिदिन 1,600 से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की। 4 हजार करोड़ से ज्यादा लागत के 3.65 लाख नए आवास शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि छत्तीसगढ़ को मिले 3,65,159 अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवासों की लागत 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 17 लाख से अधिक मकान दिए गए हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना ने लाखों गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार किया है। उन्होंने कहा कि पक्के आवास के साथ हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, निःशुल्क राशन, शौचालय और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र से किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ को केवल धान के कटोरे के रूप में नहीं, बल्कि फल, सब्जी, फूल, बागवानी, नर्सरी और पशुपालन सहित विविध कृषि गतिविधियों के लिए भी पहचान दिलाने की जरूरत है। उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि मछली पालन, मधुमक्खी पालन और बकरी पालन जैसी गतिविधियों से किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत खेती और फसल विविधीकरण की जानकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी। 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिलाओं को कारोबार से जोड़ने के लिए डीलर दीदी जैसी पहल भी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की करीब 70 लाख माताओं-बहनों को लाभ मिल रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है। किसान सम्मान निधि और फसल बीमा का भी जिक्र शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से छत्तीसगढ़ को करीब 29 हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं। किसान सम्मान निधि के तहत 11,500 करोड़ रुपए से अधिक और फसल बीमा योजना के तहत किसानों को 7,500 करोड़ रुपए के क्लेम मिलने की जानकारी उन्होंने दी। बस्तर में आवास सर्वे की तारीख बढ़ी केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संकल्प से बस्तर के गांवों तक विकास पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बस्तर के नक्सलमुक्त हुए क्षेत्रों में पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास का लाभ देने के लिए सर्वे की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे लोगों के आवास की भी सरकार चिंता कर रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित नहीं रहेगा। सक्ती को 121.70 करोड़ के 38 विकास कार्यों की सौगात कार्यक्रम में सक्ती जिले को 121 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक के 38 विकास कार्यों की सौगात मिली। इनमें 79.25 करोड़ रुपए के 23 कार्यों का भूमिपूजन और 42.46 करोड़ रुपए के 15 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। भूमिपूजन वाले कार्यों में सड़क निर्माण एवं चौड़ीकरण, उप स्वास्थ्य केंद्र, महतारी सदन, शासकीय कन्या महाविद्यालय भवन, नवीन लाइवलीहुड संस्थान, पुलिस लाइन में आर्मरी भवन, कृषि कार्यालय सहित अन्य निर्माण कार्य शामिल हैं। लोकार्पित कार्यों में जल जीवन मिशन के सोलर ड्यूल पंप, नवीन तहसील कार्यालय भवन, पुलिस थाना एवं पुलिस चौकी भवन, सड़क-पुल-पुलिया निर्माण, हाईस्कूल भवन और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। ग्रामीण विकास के नए अभियानों की शुरुआत कार्यक्रम में 2 लाख आवासों के गृह प्रवेश के साथ मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन, ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बाड़ी’ अभियान की शुरुआत की गई। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 270 नए इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टरों का विमोचन हुआ। ‘अथ उद्यमिता की ओर’ कार्यक्रम के तहत चैलेंज फंड इवेंट का भी शुभारंभ किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों, डीलर दीदियों और पंचायतों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। 17 सितंबर से एक महीने तक सेवा कार्य, ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को जन्मदिन के अवसर पर जन्मदिन से एक महीने तक सेवा कार्य आयोजित करने की बात कही गई। लोगों से प्रधानमंत्री के लिए 'आशीर्वाद का दीया' जलाने की अपील भी की गई। मंत्री के भाई के कांग्रेस में जाने के सवाल पर बोले साय- ‘देखेंगे’ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से एक मंत्री के भाई के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी अभी मिली है, इसे देखेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद कमलेश जांगड़े, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, हितग्राही और बड़ी संख्या में नागरिक कार्यक्रम में मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने आभार व्यक्त किया।
मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के दानपात्र की दो दिन चली गिनती में 34 लाख 37 हजार 800 रुपए मिले हैं। गुरुवार को 16 लाख 45 हजार 500 रुपए मिले थे। शुक्रवार को 17 लाख 92 हजार 300 रुपए की गिनती हुई। नकद राशि के साथ दानपात्र से करीब 100 ग्राम चांदी और 6 ग्राम सोने के आइटम भी मिले हैं। विदेशी मुद्रा भी मिली है। सितंबर की गिनती के बाद 2026 में मंदिर को अब तक 1 करोड़ 37 लाख 44 हजार 340 रुपए का दान मिल चुका है। विदेशी मुद्रा और पुराना 2000 का नोट भी मिलादानपात्र से नाइजीरिया का 1000 का एक नोट मिला है। नेपाल के 20 रुपए के दो नोट भी मिले हैं। इसके अलावा 5 रुपए के तीन और 2 रुपए का एक नोट मिला। गिनती के दौरान 2000 रुपए का एक पुराना नोट भी मिला है। दो दिन में ऐसे हुई दान की गिनतीगुरुवार को दानपात्र से 16 लाख 45 हजार 500 रुपए निकले थे। शुक्रवार को देर शाम तक गिनती चली। इसमें 17 लाख 92 हजार 300 रुपए मिले। दोनों दिनों की राशि मिलाकर कुल 34 लाख 37 हजार 800 रुपए हुए। चांदी और सोने के आइटम भी मिलेनकदी के अलावा दानपात्र में श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के आइटम भी चढ़ाए थे। इनमें करीब 100 ग्राम चांदी के छोटे आइटम मिले हैं। करीब 6 ग्राम सोने के आइटम भी मिले। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इनका रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। जिला सहकारी बैंक में जमा होगी राशिमंदिर प्रबंधन के मुताबिक दानपात्र से मिली पूरी नकद राशि जिला सहकारी बैंक में जमा कराई जाएगी। दान की गिनती निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई। साल में लगातार बढ़ी दान राशि मंदिर को 2026 में अलग-अलग महीनों में लगातार बड़ी राशि दान में मिली है। सितंबर की राशि जुड़ने के बाद 2026 में अब तक मंदिर को 1 करोड़ 37 लाख 44 हजार 340 रुपए दान में मिल चुके हैं। देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालुमंदसौर का भगवान पशुपतिनाथ मंदिर अपनी अष्टमुखी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ दान राशि में भी बढ़ोतरी हो रही है। समिति इसे भगवान पशुपतिनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था से जोड़कर देख रही है।
कुरुक्षेत्र जिला बार एसोसिएशन चुनाव में मुकाबला आखिरी दौर तक दिलचस्प बना रहा। करीब डेढ़ साल बाद शुक्रवार को हुए चुनाव में पिछली बार दूसरे नंबर पर रहे सहदेव राढ़ान जठलाना ने प्रधान पद पर जीत दर्ज कर ली। उन्होंने 1139 वोट हासिल कर पहली बार प्रधान बनने का सपना पूरा किया। उनके सामने चुनाव लड़ रहे विक्रम शर्मा को 880 वोट मिले। राढ़ान ने 259 वोट के अंतर से जीत हासिल की। हालांकि, प्रधान की कुर्सी राढ़ान के पास गई, लेकिन पूरे पैनल के लिहाज से विक्रम शर्मा गुट ने बाजी मार ली। एसोसिएशन के 7 प्रमुख पदों के लिए हुए चुनाव में विक्रम शर्मा गुट के प्रत्याशियों ने 5 पदों पर जीत दर्ज की, जबकि राढ़ान गुट को प्रधान और कोषाध्यक्ष पद से संतोष करना पड़ा। अन्नू सैनी को मिले सबसे ज्यादा वोट सहदेव राढ़ान दूसरी बार प्रधान पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे। पिछली बार उन्हें करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था और वे दूसरे नंबर पर रहे थे। इस चुनाव में सबसे ज्यादा वोट लेडी एग्जिक्यूटिव पद पर अन्नू सैनी को 1194 मिले। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी रजनी को 405 वोट के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में कुल 2026 वोट हुए पोल यहां वकीलों के कुल 2239 वोट हैं। प्रधान पद पर कुल 2026 वोट पड़े। इनमें राढ़ान को 1139 और विक्रम शर्मा को 880 वोट मिले। सिर्फ 7 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। वहीं विक्रम शर्मा पहली बार प्रधान पद के लिए चुनाव मैदान में थे। इससे पहले वे अपने पैनल से महासचिव रह चुके हैं। पहली बार ईवीएम से हुआ मतदान चुनाव अधिकारी विनय मोहन आश्री ने बताया कि इस बार एसोसिएशन में 2239 मतदाता थे। इनमें से 2026 ने मतदान किया। मतदाताओं की संख्या को देखते हुए तीन बूथ बनाए गए थे। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चला। इस बार पहली बार ईवीएम के जरिए मतदान कराया गया। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक पूरी चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। जीत के बाद समर्थकों ने मनाया जश्न परिणाम घोषित होते ही विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। समर्थकों ने विजेताओं को फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया और जीत की खुशी मनाई। सहदेव राढ़ान के लिए यह जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि पिछली बार हारने के बाद उन्होंने दोबारा चुनाव मैदान में उतरकर प्रधान पद हासिल किया।
70वीं राज्य स्तरीय शालेय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 7 से 10 सितंबर तक आयोजित की गई। सीहोर में आयोजित प्रतियोगिता में प्रदेश के 200 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसमें भोपाल के एक निजी स्कूल की 14 वर्षीय छात्रा वेटलिफ्टर तनीषा आसनानी ने अंडर-17 के 69 किलोग्राम भार वर्ग में 150 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। मध्य प्रदेश शासन की इस प्रतियोगिता की मध्य प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ वेटलिफ्टर भी चुना गया। लगातार चौथी बार जीता स्वर्णतनीषा लगातार चार वर्षों से इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत रही हैं। 14 वर्ष की उम्र में उनके नाम प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां दर्ज हैं। वे प्रतिदिन अपने पिता और प्रशिक्षक जितेंद्र आसनानी के मार्गदर्शन में अभ्यास करती हैं। नवंबर में राष्ट्रीय प्रतियोगिताराज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रदर्शन के आधार पर तनीषा का चयन नवंबर में मणिपुर के इम्फाल में होने वाली राष्ट्रीय शालेय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता के लिए हुआ है। जिला अधिकारियों ने दी शुभकामनाएंप्रतियोगिता के समापन पर सीहोर जिला मजिस्ट्रेट बालागुरु के. और जिला शिक्षा अधिकारी शीलू शर्मा ने तनीषा को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने तनीषा को युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
मंदसौर जिले के पिपलियामंडी में शुक्रवार को जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक हुई। इसमें 19 सितंबर को राहुल गांधी के इंदौर आगमन पर होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की तैयारियों पर चर्चा हुई। बैठक में छात्र-युवा पंजीयन अभियान की रणनीति बनाई गई और प्रत्येक ब्लॉक में 10 हजार छात्र-युवाओं के पंजीयन का लक्ष्य तय किया गया। यह बैठक जिला कांग्रेस प्रभारी सदाशिव यादव के मार्गदर्शन और जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में हुई। विधायक विपिन जैन भी इसमें मौजूद थे। जिला कांग्रेस प्रभारी सदाशिव यादव ने कहा कि छात्र और युवा देश का भविष्य तय करने वाली शक्ति हैं। 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से युवाओं की आवाज को मंच मिलेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव, बूथ और वार्ड स्तर पर संपर्क कर ज्यादा से ज्यादा छात्र-युवाओं का पंजीयन कराने को कहा। उन्होंने यह भी बताया कि संगठन की ताकत कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता से सीधे जुड़ाव में है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि युवाओं को जोड़ना और उनकी आवाज को लोकतांत्रिक मंच देना संगठन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से पंजीयन अभियान में पूरी ताकत से जुटने की अपील की। बैठक में विधानसभा, ब्लॉक, मंडलम और वार्ड स्तर पर पंजीयन के लक्ष्य तय किए गए। साथ ही क्षेत्रवार जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। छात्र-युवा संपर्क अभियान को तेज करने के निर्देश भी दिए गए। विधायक विपिन जैन ने कहा कि कॉलेज स्तर पर अभियान चलाकर छात्र-युवाओं का पंजीयन कराया जाए। कार्यक्रम में उनकी ज्यादा से ज्यादा उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास भी किए जाएं। इस बैठक में विधानसभा प्रभारी हेमराज पलकोनी, रामचंद्र दांगी, राकेश पाटीदार, परशुराम सिसोदिया, सोमिल नाहटा, चंचलेश व्यास, मंजीत सिंह टुटेजा, जिला संगठन महासचिव अजय लोढ़ा, जितेंद्र सिंह ठाकुर, दुर्गेश पटेल और इष्टा भाचावत सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
दुर्ग जिले के पाटन इलाके में आपसी विवाद के बाद एक युवक की सब्बल से हमला कर हत्या कर दी गई। यह घटना रानीतराई थाना क्षेत्र के आसोगा गांव में 11 सितंबर की दोपहर हुई। विवाद के दौरान 26 साल के भूपेन्द्र टंडन ने 35 साल के कामता कोसरे पर सब्बल से कई वार किए। कामता बुरी तरह घायल हो गया। गंभीर रूप से घायल कामता को पाटन अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही रानीतराई पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी भूपेन्द्र टंडन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से वारदात में इस्तेमाल सब्बल भी जब्त कर लिया है। पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, 11 सितंबर की दोपहर आसोगा गांव में कामता कोसरे और भूपेन्द्र टंडन के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। पहले दोनों के बीच बहस हुई। झगड़ा बढ़ने के बाद मारपीट होने लगी। इसी दौरान भूपेन्द्र ने सब्बल उठाकर कामता पर हमला कर दिया। सब्बल के कई वार से कामता गंभीर रूप से घायल हो गया था। हमले में घायल कामता को तुरंत पाटन अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने घटना की जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। रानीतराई पुलिस ने आरोपी भूपेन्द्र टंडन को गिरफ्तार करने के साथ ही उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल सब्बल बरामद किया है। पुलिस ने हथियार को जब्त कर लिया है। आरोपी से पूछताछ कर विवाद की वास्तविक वजह और हत्या से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। एएसपी बोले- मर्ग कायम, पूछताछ जारी एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि रानीतराई थाना क्षेत्र के असोगा गांव में दो पक्षों के बीच विवाद की सूचना मिली थी। विवाद के दौरान सब्बल से हमला किए जाने से एक युवक की मौत हुई है। मामले में फिलहाल मर्ग कायम किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी भूपेन्द्र टंडन को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस घटना की परिस्थितियों और विवाद के कारणों की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
किशनगंज जिले के वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। जिला परिवहन कार्यालय और यातायात पुलिस मिलकर कल 12 सितंबर को किशनगंज व्यवहार न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत लगा रहे हैं। यह लोक अदालत 'एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना-2026' के तहत लगाई जा रही है। इसमें 90 दिन या उससे अधिक पुराने लंबित यातायात चालानों का निपटारा किया जाएगा। प्रशासन ने चालान राशि पर 50 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रावधान किया है। विभाग ने बताया कि इस योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं वाहन मालिकों को मिलेगा, जिनका चालान किशनगंज जिले में कटा है और वह 90 दिन से ज्यादा समय से लंबित है। छूट का फायदा लेने के लिए 7 सितंबर से 11 सितंबर तक परिवहन कार्यालय के पहले फ्लोर पर रजिस्ट्रेशन किया गया था। आज रजिस्ट्रेशन का आखिरी दिन था। जिन लोगों ने तय समय में रजिस्ट्रेशन करा लिया है, वही कल लोक अदालत में छूट का फायदा लेकर अपने चालान का निपटारा करा पाएंगे। वही जिला प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन करा चुके वाहन मालिकों से अपील की है कि वे कल समय पर व्यवहार न्यायालय पहुंचकर इस योजना का फायदा उठाएं। वही वाहन चालकों के द्वारा जिला प्रशासन के इस कार्य की सराहना की जा रही है।
रणथम्भौर दुर्ग स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री त्रिनेत्र गणेश जी का तीन दिवसीय लक्खी मेला-2026 शनिवार, 12 सितम्बर से 14 सितम्बर तक आयोजित होगा। 14 सितम्बर को मुख्य मेला रहेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, चिकित्सा एवं कानून-व्यवस्था सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। जिला कलेक्टर काना राम ने कहा कि त्रिनेत्र गणेश मेला जिले की धार्मिक आस्था एवं परंपरा का महत्वपूर्ण आयोजन है। श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुगम वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्गों एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का पालन करते हुए अनुशासन और सावधानी के साथ दर्शन करने की अपील की। सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम मेले में मेला मजिस्ट्रेट, सहायक मेला मजिस्ट्रेट एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेटों के साथ पर्याप्त पुलिस जाप्ता तैनात रहेगा। प्रमुख स्थानों पर सतत निगरानी की जाएगी। वन एवं निर्जन क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने और जलभराव एवं तेज बहाव वाले स्थानों से आवाजाही नहीं करने की अपील की गई है। श्रद्धालुओं को निर्धारित सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करने के लिए कहा गया है। गणेश मार्ग सुचारू, आवागमन में मिलेगी राहतबरसात के दौरान तेज जलप्रवाह से गौमुखी के समीप क्षतिग्रस्त हुए गणेश मार्ग पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य पूर्ण कर मार्ग को आवागमन के लिए सुचारू कर दिया गया है। मेले से पूर्व अन्य क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत एवं पेचवर्क भी प्राथमिकता से कराया गया है। ‘स्वच्छ भंडारा–स्वस्थ मेला’ का संदेशमेले को स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए ‘श्री गणेश स्वच्छ सेवा सम्मान-2026’ पहल की गई है। इसके तहत भंडारों का मूल्यांकन स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा, कचरा प्रबंधन, पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था, श्रद्धालु सुविधाओं एवं सेवा भावना सहित निर्धारित मानकों पर किया जाएगा। श्रेष्ठ भंडारों को प्रथम पुरस्कार 21,000 रुपए, द्वितीय 11,000 रूपए एवं तृतीय 5,100 रुपए और पांच उत्कृष्ट प्रयास करने वाले भंडारों को 1,100 रूपए प्रत्येक के सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। जिला कलेक्टर ने भंडारा संचालकों से स्वच्छता, खाद्य गुणवत्ता एवं कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने तथा श्रद्धालुओं से कचरा केवल निर्धारित डस्टबिन में डालने की अपील की है। कंट्रोल रूम से मिलेगी आपात सहायतामेला मजिस्ट्रेट एवं उपखंड अधिकारी मलारना डूंगर गौरव मित्तल ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गणेशधाम मेला कंट्रोल रूम 07462-294100 तथा एसडीएम कार्यालय मेला कंट्रोल रूम 07462-220344 पर सहायता एवं शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जिला प्रशासन ने देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को श्री गणेश चतुर्थी एवं मेले की शुभकामनाएं देते हुए सुरक्षित यात्रा, स्वच्छता एवं अनुशासन के साथ श्री त्रिनेत्र गणेश जी के दर्शन करने का आह्वान किया है।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में राजनांदगांव की 8वीं बटालियन में तैनात एडिशनल एसपी केबी सिंह पर 17 साल की नाबालिग को अपने पास रखने और उसके परिजनों को गुमराह करने के आरोप लगे हैं। बच्ची के परिजनों का आरोप है कि अधिकारी के घर काम के दौरान उसके साथ शराब के नशे में गलत व्यवहार किया जाता था। जांच के दौरान पुलिस नाबालिग की तलाश में अधिकारी के तालपुरी स्थित घर पहुंची और उनसे पूछताछ की। इसके बाद पुलिस नाबालिग के संपर्क में बताई जा रही अधिकारी की साली के घर भी पहुंची, जहां पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मी से धक्का-मुक्की और उसकी उंगली काटने का आरोप लगा। इस मामले में महिला के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। हालांकि 10 दिन से लापता नाबालिग को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है। पुलिस का कहना है कि अब नाबालिग के बयान और काउंसलिंग के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई होगी। यह मामला अंडा थाना क्षेत्र का है। अब जानिए पूरा मामला परिजनों का आरोप है कि नाबालिग कुछ महीनों तक भिलाई के तालपुरी स्थित अधिकारी के घर पर बच्चों की देखभाल का काम करती थी। इस दौरान उसके साथ शराब के नशे में गलत व्यवहार किया जाता था। इससे परेशान होकर उसने काम छोड़ दिया और घर लौट आई थी। इसके बाद अधिकारी और उनकी पत्नी उस पर दोबारा काम पर आने का दबाव बना रहे थे। लगातार फोन आने से परेशान होकर नाबालिग ने दोनों के नंबर ब्लॉक कर दिए थे। 30 अगस्त से थी लापता परिजनों के मुताबिक, 30 अगस्त को नाबालिग घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद 4 सितंबर को अंडा थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने शुरुआती जांच में बीएनएस की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नाबालिग पुलिस अधिकारी के संपर्क में थी। परिजनों को दूसरे नंबर से फोन आने का आरोप परिजनों का आरोप है कि उन्हें फोन कर बताया गया कि नाबालिग किसी दूसरे नंबर से बात कर रही है और वह घर वापस नहीं आना चाहती। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर कोर्ट के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। मामले में शक बढ़ने पर पाटन एसडीओपी प्रांशु तिवारी की मौजूदगी में पुलिस टीम अधिकारी के तालपुरी स्थित घर पहुंची। वहां नाबालिग नहीं मिली। पुलिस ने घर की तलाशी लेने के साथ अधिकारी से पूछताछ की। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान अधिकारी ने अपने पद का हवाला देकर पुलिस टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की और उनके साथ गलत व्यवहार किया। एसपी तक पहुंची शिकायत मामले को लेकर परिजन दुर्ग एसपी के पास पहुंचे। इसके बाद दुर्ग ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा को जांच में लगाया गया। पुलिस ने अधिकारी से पूछताछ की और बच्ची के संबंध में जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार बाद में अधिकारी ने बच्ची को बरामद कराने की बात कही। साली पर पुलिसकर्मी से मारपीट का केस जांच के दौरान पुलिस को बच्ची के भिलाई के पल्स अस्पताल में अधिकारी की साली के साथ देखे जाने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम सेक्टर-8 स्थित उसके घर पहुंची और बच्ची के संबंध में पूछताछ की। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक पूछताछ के दौरान महिला घर के भीतर चली गई। प्रशिक्षु उप निरीक्षक ने देखा कि उसके हाथ में मिट्टी के तेल से भरी बोतल और माचिस थी। पुलिसकर्मी ने बोतल छीनकर उसे बाहर लाने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद महिला ने शासकीय कार्य में बाधा डाली, धक्का-मुक्की की और पुलिसकर्मी की उंगली पर दांत से काटकर चोट पहुंचाई। घटना के बाद भिलाई नगर थाने में बीएनएस की धारा 121(1) और 221 के तहत अपराध दर्ज किया गया और महिला को गिरफ्तार किया गया। कंट्रोल रूम पहुंचा अधिकारी महिला की गिरफ्तारी के बाद मामले में नया मोड़ आया। पुलिस के अनुसार अधिकारी बच्ची को लेकर ड्राइवर और अन्य लोगों के साथ दुर्ग पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचा। वहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ काफी देर तक बातचीत और विवाद की स्थिति बनी रही। इसके बाद पुलिस ने बच्ची को अपने संरक्षण में ले लिया। अब बच्ची के बयान पर टिकी कार्रवाई दुर्ग ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि अंडा थाने में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि बच्ची अधिकारी के यहां काम करती थी। पुलिस टीम ने उनके घर की तलाशी ली, लेकिन बच्ची वहां नहीं मिली। बाद में पूछताछ के दौरान अधिकारी ने बच्ची को बरामद कराया। उन्होंने बताया कि बच्ची के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उसकी काउंसलिंग भी कराई जा रही है। उसके बयान में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि बच्ची के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। परिजनों की शिकायत से शुरू हुआ मामला परिजनों ने अपनी शिकायत में बताया था कि बच्ची के अचानक गायब होने के बाद उन्हें किसी अनहोनी की आशंका थी। उनका कहना था कि यदि वह अपनी इच्छा से कहीं गई होती तो संपर्क कर सकती थी। इसी आशंका के आधार पर उन्होंने पुलिस से तलाश और कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने शिकायत को आधार बनाकर गुमशुदगी की जांच आगे बढ़ाई और संभावित संपर्कों की पड़ताल की। अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की कानूनी स्थिति भी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सीतामढ़ी के मेहसौल रेलवे गुमटी के पास शुक्रवार को सीतामढ़ी-दरभंगा रेलखंड पर एक अज्ञात महिला का शव दो टुकड़ों में मिला। रेलवे ट्रैक पर शव मिलने की सूचना से इलाके में सनसनी फैल गई। महिला की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। प्रथमदृष्टया ट्रेन की चपेट में आने से मौत की आशंका जताई जा रही है, हालांकि मौत की वास्तविक वजह पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। रेलवे ट्रैक पर शव मिलने से मची अफरा-तफरी घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। रेलवे ट्रैक पर शव पड़ा होने से कुछ समय के लिए इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना जीआरपी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची जीआरपी, शुरू की जांच सूचना मिलते ही जीआरपी की पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने मौके का मुआयना करने के बाद शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पहचान के लिए आसपास के इलाकों से जुटाई जा रही जानकारी मृतका की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। जीआरपी स्थानीय लोगों से पूछताछ करने के साथ आसपास के इलाकों से महिला के संबंध में जानकारी जुटा रही है। पहचान के लिए आसपास के थानों से भी संपर्क किया जा रहा है। कुछ देर प्रभावित रही ट्रेनों की आवाजाही रेलवे ट्रैक पर शव मिलने के बाद कुछ समय के लिए ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। पुलिस और रेलवे अधिकारियों की कार्रवाई के बाद परिचालन सामान्य करने की कोशिश की गई। हादसा या कोई और वजह, जांच के बाद होगा खुलासा फिलहाल पुलिस ट्रेन की चपेट में आने की आशंका के आधार पर मामले की जांच कर रही है। महिला की मौत हादसे में हुई या इसके पीछे कोई दूसरी परिस्थिति थी, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
कूदकर स्कूल जाने वाली दिव्यांग बेटी रागिनी से मिले CM योगी, इलाज से पढ़ाई तक मदद का भरोसा
बलिया की 7 वर्षीय दिव्यांग रागिनी ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। सीएम ने उसके स्वास्थ्य, पढ़ाई और परिवार की जरूरतों की जानकारी लेकर मदद का भरोसा दिया। रागिनी का एक पैर से स्कूल जाने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उसे दो ट्राइसाइकिल भी उपलब्ध कराई गईं।
सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी शासकीय अस्पतालों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के उपचार के लिए जरूरी जीवनरक्षक दवाइयों, उपकरणों तथा पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम की उपलब्धता रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ग्रामीण पंचायतों एवं शहरी वार्डों में प्रशिक्षित स्नेक-कैचर्स यानी सर्प-मित्रों का डेटाबेस तैयार करने तथा उनकी सेवाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। मध्यप्रदेश में सर्पदंश से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए सर्पदंश को ‘स्थानीय आपदा’ घोषित किया गया है। इसके प्रभावी प्रबंधन एवं नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए गृह विभाग के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जिलों को व्यापक एवं समन्वित कार्ययोजना के अंतर्गत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पंचायत एवं वार्ड स्तर पर जारी होंगे हेल्पलाइन नंबर नागरिकों को सर्प रेस्क्यू एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पंचायत एवं वार्ड स्तर पर स्थानीय हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे। इन नंबरों के माध्यम से नागरिक सर्प रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित सर्प-मित्रों से संपर्क करने के साथ ही निकटतम एंटी-वेनम उपलब्ध शासकीय अस्पताल की जानकारी भी पा सकेंगे। सर्प-मित्रों को सुरक्षित रेस्क्यू के लिए आवश्यक स्नेक रेस्क्यू किट एवं फर्स्ट-एड सामग्री उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। हर जिले को 23.17 लाख रुपये दिए बताया गया कि सर्पदंश से बचाव और सुरक्षा के प्रति नागरिकों को जागरुक करने के लिए ‘प्रशिक्षण एवं क्षमता वृद्धि’ योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में हर जिले को 23.17 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए है। इसके माध्यम से ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों एवं कृषि चौपालों में जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। रेडियो जिंगल्स, सोशल मीडिया और प्रचार पुस्तिकाओं के माध्यम से भी नागरिकों को सर्पदंश से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही आपदा मित्रों, सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सांपों की पहचान, सर्पदंश की स्थिति में आवश्यक सावधानियों एवं प्राथमिक उपचार संबंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचें राज्य शासन ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश की घटना होने पर झाड़-फूंक, अंधविश्वास या अन्य गैर-चिकित्सकीय उपायों में समय न गंवाते हुए पीड़ित को तत्काल निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचाया जाए। सर्पदंश के उपचार में समय पर चिकित्सकीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है। अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के बाद आवश्यकता के अनुसार एंटी-वेनम सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है। राज्य शासन ने नागरिकों से कहा है कि खेतों एवं झाड़ियों में काम करते समय लंबे जूते या गमबूट और मोटे दस्ताने पहनें। बारिश के सीजन में रात में टॉर्च या पर्याप्त रोशनी का उपयोग करने तथा अंधेरे में चलने से बचें। जमीन पर सोने से बचने और चारपाई या पलंग पर मच्छरदानी का उपयोग करने को कहा गया है। जूते, कपड़े एवं स्लीपिंग बैग का उपयोग करने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांचने और झाड़ने, घरों, दुकानों एवं पशु-बाड़ों के आसपास कचरा, कबाड़ एवं ऊंची घास न जमा होने देने तथा दीवारों की दरारों एवं बिलों को बंद रखने की सलाह दी गई है। सर्पदंश के लक्षणों की तत्काल पहचानें सर्पदंश के बाद दंश वाले स्थान पर दर्द, सूजन, लालिमा, दांतों के निशान या त्वचा का नीला या काला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा उल्टी, जी मिचलाना, कंपकंपी, कमजोरी, अत्यधिक प्यास, रक्तचाप कम होना तथा असामान्य रक्तस्राव जैसी स्थिति भी हो सकती है। विषैले सांप के काटने पर पलकें उठाने, बोलने और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना विलंब किए पीड़ित को अस्पताल पहुंचाना आवश्यक है। सर्पदंश होने पर क्या न करें
यूपी चुनाव की तैयारी तेज, आयोग का दलों की मौजूदगी में EVM की जांच का आदेश
यूपी में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को वाराणसी के सर्किट हाउस सभागार में ईवीएम और वीवीपैट की प्रथम स्तर जांच की कार्यशाला हुई। इसमें छह मंडलों के डीएम, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और ईवीएम सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण दिया गया।
कपूरथला मॉडर्न जेल के हाई सिक्योरिटी जोन-ए में कैदियों ने ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से धक्का-मुक्की और बहस की। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी में भी रुकावट डाली। जेल प्रशासन की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने छह कैदियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। थाना कोतवाली के एसएचओ लखबीर सिंह ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस के मुताबिक, जेल के सहायक सुपरिंटेंडेंट धीरज कुमार ने कोतवाली थाने में शिकायत दी। उन्होंने बताया कि हाई सिक्योरिटी जोन-ए में कुछ कैदियों ने सीआरपीएफ कर्मचारियों से धक्का-मुक्की और बहस की। उन्होंने सरकारी ड्यूटी में भी बाधा डाली। 6 लोगों पर केस दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने छह कैदियों पर केस दर्ज किया है। इनमें मोगा निवासी संदीप सिंह, एसबीएस नगर निवासी मनदीप कुमार, अमृतसर निवासी तेजवीर सिंह, लुधियाना निवासी परमजीत सिंह, लुधियाना निवासी अंकित भूरी और संगरूर निवासी गुरधियान सिंह शामिल हैं। एसएचओ लखबीर सिंह ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। सभी आरोपी कैदियों को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की जाएगी। जांच में घटना से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
मंदसौर जिले की अफजलपुर थाना पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से 260 ग्राम एमडी ड्रग्स और 5 किलो 150 ग्राम डोडाचूरा पकड़ा है। पकड़ी गई एमडी की कीमत करीब 26 लाख रुपए और डोडाचूरा की कीमत करीब 10 हजार रुपए बताई गई है। यह कार्रवाई शुक्रवार को पलवई फंटे के पास की गई। पुलिस को जानकारी मिली थी कि हल्के नीले रंग की टी-शर्ट और नीली लोअर पहने एक गंजा व्यक्ति विमल का झोला लेकर पलवई फंटे से कहीं जाने वाला है। इस सूचना पर थाना प्रभारी विकास गहलोत ने टीम बनाकर फंटे पर नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान बताए गए हुलिए का एक शख्स पैदल आता दिखा। पुलिस को देखकर उसने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम और पंचों की मदद से उसे घेरकर पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मुख्तयार अहमद खान बताया, जो मुस्लिम अहमद खान का बेटा है। वह मूल रूप से बांसवाड़ा का रहने वाला है और अभी जावरा, रतलाम में रहता है। तलाशी लेने पर उसकी लोअर की जेब से प्लास्टिक की थैली में 260 ग्राम एमडी ड्रग्स मिली। उसके हाथ में विमल का झोला था, जिसमें 5 किलो 150 ग्राम डोडाचूरा मिला। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 और 22 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। सीएसपी और प्रभारी एसडीओपी जितेंद्र भास्कर ने बताया कि थाना प्रभारी विकास गहलोत के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई कर आरोपी को पकड़ा है। उसके पास से 260 ग्राम एमडी और करीब 5 किलो डोडाचूरा मिला है। थाना प्रभारी विकास गहलोत ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीन दिन की पुलिस रिमांड मिली है। पूछताछ में यह पता लगाया जाएगा कि आरोपी मादक पदार्थ कहां से लेकर आया था और इसकी डिलीवरी किसे करने वाला था। इसके साथ ही पूरी सप्लाई चैन की जानकारी जुटाकर इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। युवाओं में बढ़ रहा एमडी ड्रग्स का खतरापुलिस के अनुसार जब्त एमडी एक सिंथेटिक ड्रग है। इसका नशा युवाओं के बीच गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसके सेवन से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी के जरिए इस ड्रग की सप्लाई किन लोगों तक पहुंचाई जा रही थी।
नवादा के हिसुआ थाना क्षेत्र के चंद्रवंशी नगर में गोलीबारी की घटना के बाद शुक्रवार को पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी। गोलीकांड में एक युवक की मौत और दो लोगों के घायल होने के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए शहर में पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला। इसका नेतृत्व खुद पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने किया। देखें, मौके से आई खबरें… विश्व शांति चौक से निकला फ्लैग मार्च फ्लैग मार्च विश्व शांति चौक से शुरू हुआ और नरहट रोड, गया रोड, राजगीर रोड, टीएस कॉलेज रोड और पीएनबी बैंक रोड समेत शहर के प्रमुख और संवेदनशील इलाकों से गुजरा। एसपी के साथ हिसुआ थानाध्यक्ष, पुलिस अधिकारी, जवान और विशेष बल के कर्मी मौजूद रहे। पुलिस की मौजूदगी के जरिए लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। 300 से ज्यादा जवानों की तैनाती पुलिस प्रशासन के अनुसार हिसुआ नगर और आसपास के इलाकों में 300 से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है। सुरक्षा के लिए चार प्रमुख स्थानों पर विशेष फोर्स लगाई गई है। आरएएफ, बीएमपी, सीआरपीएफ और बिहार पुलिस के जवानों को अलग-अलग जगहों पर तैनात किया गया है। चारों एंट्री गेट पर चेकिंग शहर में प्रवेश करने वाले चार मुख्य गेटों पर पुलिस चेकिंग अभियान चला रही है। हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा रही है। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य होने तक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था जारी रहेगी। दोनों पक्षों की FIR, कुर्की का इश्तिहार गोलीबारी मामले में दोनों पक्षों की ओर से FIR दर्ज कराई गई है। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपियों के घरों पर कुर्की के इश्तिहार भी चिपकाए गए हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद फरार आरोपियों पर दबाव बढ़ा है। पुलिस दबिश के बाद चार आरोपियों ने किया सरेंडर लगातार छापेमारी के बीच भदसेनी के राहुल उर्फ निवास, राजा उर्फ गौरव, बलियारी गांव के अंकित कुमार और खनवां गांव के गुलशन कुमार ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। अफवाह और सोशल मीडिया पर पुलिस की नजर एसपी अभिनव धीमान ने लोगों से शांति और आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर गलत या भ्रामक जानकारी प्रसारित करने से बचें। माहौल बिगाड़ने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि माहौल खराब करने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से पुलिस का सहयोग करने और शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल पुलिस के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है और इलाके की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
न गर्भवती महिलाओं की ड्यू लिस्ट, न फॉलोअप:कलेक्टर ने उप स्वास्थ्य केंद्र बीएमओ-सीएचओ को दिया नोटिस
छतरपुर में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर मृणाल मीना ने रगौली उप स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। यहां स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी में लापरवाही मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने बीएमओ और सीएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही सीएमएचओ से भी जवाब मांगा गया है, जिसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सीएचओ से गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और अनमोल पोर्टल पर दर्ज जानकारी के बारे में पूछा। वैक्सीनेशन की ड्यू लिस्ट नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। इसके अलावा, स्क्रीनिंग के बाद गर्भवती महिलाओं का फॉलोअप नहीं किया जा रहा था और स्वास्थ्य सेवाओं में भी अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी, जिस पर अधिकारियों को फटकार लगाई गई। कलेक्टर ने उप स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की उपलब्धता, गैर-संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रम, टीकाकरण और एएनसी पंजीयन की जानकारी भी ली। उन्होंने हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और उनके प्रबंधन पर भी सवाल किए। कलेक्टर ने सीएचओ, बीएमओ और एएनएम को तय लक्ष्य के हिसाब से काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने जोर देकर कहा कि शासन की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक समय पर पहुंचना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे ग्रामीणों को उप स्वास्थ्य केंद्र के जरिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए गंभीरता से काम करें। इसके बाद कलेक्टर ने सोसायटी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने हितग्राहियों से राशन, खाद और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। यहां की व्यवस्थाओं पर उन्होंने संतोष जताया। साथ ही सोसायटी में नए सदस्यों को जोड़ने के अभियान में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। इस निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया, एसडीएम बिजावर ऋषिकेश ठाकरे और सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
राजस्थान में दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग पूरी होते ही शुक्रवार को सभी 309 शहरी निकायों में मतदान खत्म हो गया। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और पाली निगमों सहित 147 नगर निकायों में शुक्रवार को शाम 6 बजे तक औसतन 70.01% से ज्यादा वोटिंग हुई। कई जगह रिकॉर्ड भी टूटे। बालोतरा जिले की धोरीमन्ना नगर पालिका में सबसे ज्यादा 91.59% वोटिंग हुई। नगर निगमों की बात करें तो दूसरे चरण में जयपुर नगर निगम में सबसे कम 63.55% और सबसे ज्यादा जोधपुर में 71.95% वोटिंग हुई। पिछली बार से तुलना करें तो उदयपुर में करीब 12, जोधपुर में 11 और जयपुर में करीब 5 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई। इससे पहले 9 सितंबर को पहले चरण में 162 शहरी निकायों में औसतन 76.41% वोटिंग हुई है। आंकड़ों को अंतिम रूप देने को लेकर निर्वाचन विभाग में काम जारी है। जल्द फाइनल आंकड़े जारी होंगे। यदि नगर निगमों को लेकर दोनों चरणों की तुलना करें तो सबसे ज्यादा भरतपुर नगर निगम में 73.68% वोटिंग रही। दूसरे चरण में जोधपुर और उदयपुर में पिछले निकाय चुनाव के मुकाबले बढ़े वोटिंग परसेंटेज ने सभी को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट में पढ़िए.. जयपुर, जोधपुर सहित 6 बड़े निगमों के वोटिंग पर्सेंटेज क्या संकेत दे रहे हैं। जयपुर : राजधानी में वोटर्स ने दिखाया जोर, क्या एक निगम होने का फायदा राजधानी में वोटिंग प्रतिशत बढ़ गया है। पिछली बार 2 निगम थे और दोनों निगमों की औसत वोटिंग 57.5 प्रतिशत तक पहुंची थी। इस बार वोटिंग बढ़ने से बीजेपी खेमा अपने बोर्ड के रास्ते को खुलने जैसा मान रहा है। वहीं कांग्रेस भी कुछ समीकरणों के आधार पर गुणा-भाग में जुटी हुई है। सीएम भजनलाल शर्मा का सांगानेर, डिप्टी सीएम दीया कुमारी का विद्याधर नगर, मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ का झोटवाड़ा, सीनियर विधायक कालीचरण सराफ का मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र जयपुर शहर में ही आते हैं। इन सभी का तेज प्रचार चर्चा में भी रहा। दो समीकरण से बीजेपी को फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। एक, जयपुर में पिछली बार दो निगमों में कुल 250 वार्ड में चुनाव हुआ था, वहीं इस बार 150 पर वोटिंग हुई है। वोटिंग पिछली बार के 2 निगमों के औसत से बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है, जो बीजेपी के खेमे में खुशी जगा रहा है। दूसरा, प्रदेश की सत्ता बीजेपी के हाथ में है, जो बीजेपी के लिए फायदे वाला माना जा रहा है। जेन-जी की असंतुष्टि का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने ज्यादातर नए चेहरों को मौका दिया। विधायक रफीक खान व अमीन कागजी, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास जैसे विपक्ष के नेताओं ने गली-गली जाकर कांग्रेस को जिताने की अपील की। इन नेताओं का मानना है कि सरकार और विधायकों के कामों से लोग असंतुष्ट हैं और एंटी इन्कम्बेंसी से वोटिंग पर्सेंटेज बढ़ा है, जो विपक्ष को फायदा देगी। वहीं, मुसलमानों को भी कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। जयपुर की वालसिटी में 8 मुस्लिम चेहरों से कांग्रेस को काफी आशा है। पिछली बार : भष्टाचार में फंसी मेयर के कारण कांग्रेस ने गंवाया बोर्डसाल 2020 में जयपुर नगर नगम को हेरिटेज और ग्रेटर, दो भागों में बांटकर वोटिंग करवाई गई थी। हेरिटेज में 58.31% और ग्रेटर में 57.82% वोटिंग हुई थी। हेरिटेज में 100 में से 47 वार्ड कांग्रेस ने, 42 बीजेपी ने और 11 वार्ड निर्दलीयों ने जीते। कुछ निर्दलीयों को मिलाकर कांग्रेस ने हेरिटेज में बोर्ड बनाया। इधर, ग्रेटर में 150 में से बीजेपी ने 88 वार्ड जीतकर बोर्ड बना लिया। कांग्रेस और निर्दलीयों ने 49 वार्ड जीते थे। इसके बाद 2024 में हेरिटेज निगम की मेयर मुनेश गुर्जर को भ्रष्टाचार के मामले को लेकर पद से हटा दिया गया। बीजेपी ने 8 कांग्रेसी पार्षदों के समर्थन से बीजेपी का बोर्ड बनाया। इस तरह बीजेपी के दोनों निगमों में बोर्ड बन गए। जोधपुर : 11% से ज्यादा वाेटिंग, बदल सकते हैं समीकरण जोधपुर में पिछली बार दो निगम थे और वोटिंग का औसत 60.7 फीसदी रहा था। इस बार एक निगम के लिए चुनाव हो रहे हैं। वोटिंग 11 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की रणनीति के कारण मुकाबला एक तरफा नहीं माना जा रहा है। वोटिंग के बाद जनता के बीच चर्चा है कि ज्यादा वोटिंग बीजेपी को फायदा दे सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछली बार दो निगम में से एक पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था। इस बार एक निगम होने के कारण समीकरण बदले हुए दिखाई दे सकते हैं। यहां पार्टियों से ज्यादा गजेंद्र सिंह और गहलोत के चेहरों पर नजरें टिकी हुई हैं। पिछली बार : बीजेपी और कांग्रेस ने बनाया एक-एक बोर्ड साल 2020 में जोधपुर नगर निगम को उत्तर और दक्षिण, दो भागों में बांटकर वोटिंग करवाई गई थी। उत्तर में 62.64% और दक्षिण में 58.76% वोटिंग हुई थी। उत्तर में 80 में से 53 वार्ड कांग्रेस ने जीते और बोर्ड बनाया। दक्षिण में 80 में से 43 वार्ड बीजेपी ने जीते और बोर्ड बनाया। कांग्रेस ने 23 और 14 वार्ड निर्दलीय जीते थे। कोटा : वोटिंग पैटर्न फिर बता रहा है...टक्कर अच्छी है कोटा में पिछले निकाय चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस में बोर्ड बनाने को लेकर जैसी खींचतान चली। इस बार का वोटिंग पैटर्न बता रहा है कि इस बार भी वैसी ही टक्कर देखे को मिल सकती है। कोटा में इस बार वोटिंग 67.66% प्रतिशत हुई है, जो पिछली बार के मुकाबले 1.89% ज्यादा है। पिछली बार कोटा में दो निगम थे और दोनों में बोर्ड कांग्रेस ने बना लिए थे। ये आंकड़ा बीजेपी पर इस बार बोर्ड बनाने का दवाब बढ़ा रहा है। वोटिंग नहीं बढ़ने से कांग्रेस खेमे में ज्यादा खलबली नहीं है, लेकिन बीजेपी अब ज्यादा बेचैन होकर रिजल्ट की ओर नजरें जमाए हैं। हालांकि बीजेपी का मानना है कि एक निगम के कारण वोटिंग में ज्यादा उतार-चढ़ाव देने को नहीं मिला है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि प्रदेश की सत्ता में बीजेपी होने और नेता-कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव लड़ने जैसे दोनों समीकरणों से पार्टी को फायदा होगा। कांग्रेस का मानना है कि स्थानीय समस्याओं के कारण वोटर्स में निराशा थी, जो कांग्रेस को फायदा देगी। पिछली बार : निर्दलीयों के सहारे कांग्रेस ने बना लिए दो बोर्डसाल 2020 में कोटा नगर निगम को उत्तर और दक्षिण, दो भागों में बांट कर वोटिंग करवाई गई थी। उत्तर में 65.12% और दक्षिण में 66.43% वोटिंग हुई थी। उत्तर में कुल 70 में से 47 वार्ड कांग्रेस ने जीते और बोर्ड बनाया। बीजेपी केवल 14 ही जीत पाई थी। वहीं दक्षिण में 80 में से बीजेपी ने 36 वार्ड जीते, कांग्रेस ने 30 और 14 वार्ड निर्दलीयों ने जीते। कांग्रेस ने निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बना लिया। उदयपुर : पिछली बार सबसे फिसड्डी, इस बार दिखा दी ताकत साल 2019 में हुए पिछले निकाय चुनावों में राजस्थान में सबसे कम उदयपुर नगर निगम में 57.81 फीसदी वोटिंग हुई थी। लेकिन इस चुनाव में उदयपुर में ज्यादा लोग घरों से निकलकर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। पिछली बार के मुकाबले इस बार करीब 12 फीसदी ज्यादा 69.77% वोटिंग हुई। माना जाता है कि कम वोटिंग से कांग्रेस को फायदा होता है, लेकिन पिछले चुनाव में कम वोटिंग के बावजूद बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की थी। बीजेपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले उदयपुर में इस बार वोटिंग का बढ़ना बीजेपी अच्छा संकेत मान रही है। बीजेपी का मानना है कि पिछली बार से ज्यादा वार्ड जीतकर और ज्यादा पार्षदों की संख्या के साथ मजबूती से बोर्ड बनाएंगे। इधर, कांग्रेस का कहना है कि लोगों को शहरी सरकारों से समस्याओं के समाधान नहीं मिल रहे हैं, इस कारण जनता ने इस बार बदलाव के लिए अच्छी वोटिंग की है। पिछली बार : एकतरफा जीत से बीजेपी ने बनाया बोर्डउदयपुर निगम में पिछली बार 57.81% वोटिंग हुई थी। निगम के 70 वार्डों में से 44 वार्ड जीतकर बीजेपी ने बोर्ड बनाया। कांग्रेस 20 वार्ड ही जीत सकी थी। अजमेर : पिछली बार के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया अजमेर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के शहर में वोटिंग प्रतिशत पिछली बार के मुकाबले कम रहा। हालांकि अजमेर भी बीजेपी का गढ़ माना जाता है। वोटिंग गिरने से बीजेपी खेमे में बोर्ड बनाने को लेकर ज्यादा चिंता नजर नहीं आ रही। हालांकि यहां दो बार बीजेपी से मेयर रहे धर्मेंद्र गहलोत की बगावत और देवनानी के खिलाफ तीखे बयानों ने इस चुनाव को चर्चा में बना दिया। धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी निर्दलीय खड़ी हुई हैं, ऐसे में कांग्रेस भी गहलोत पर नजर रखे हुए है। यदि निर्दलीय ज्यादा जीते तो बीजेपी के खेल में खलल पड़ सकता है। पिछली बार : बीजेपी की बंपर जीत, टक्कर तक नहीं दे पाई कांग्रेसअजमेर निगम में पिछले चुनाव में 66.17% वोटिंग हुई थी। यहां 80 वार्ड में से 48 बीजेपी ने जीतकर बोर्ड बनाया। कांग्रेस 18 वार्ड जीत सकी थी। पाली : बढ़ सकती है निर्दलीयों की भूमिका पाली में वोटिंग परसंटेज लगभग पिछली बार के जैसा रहा। पिछली बार 71.35 फीसदी वोटिंग हुई थी। 70 फीसदी से ऊपर वोटिंग होने के बावजूद बीजेपी को बोर्ड बनाने में मशक्कत करनी पड़ी थी। बीजेपी निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बना पाई थी। इस बार भी वोटिंग से कुछ ऐसा ही संकेत मिल रहा है। निर्दलीयों की भूमिका बढ़ सकती है। कांग्रेस इस तरह के वोटिंग परसेंट को मौके के रूप में देख रही है। अब बस रिजल्ट की ओर नजरें टिकी है, जिससे खुद के साथ निर्दलीयों के आंकड़े भी कुछ साफ हो जाए। पिछली बार : बीजेपी ने निर्दलीयों के समर्थन से बनाया था बोर्डपाली नगर परिषद के पिछले चुनाव में भी 65 वार्ड थे। पिछले चुनाव में बीजेपी ने 29 वार्ड जीते और कांग्रेस ने 22 जीते। बीजेपी को 14 निर्दलीयों में से 8 ने समर्थन दिया और पार्टी बोर्ड बनाने में सफल हो गई। कांग्रेस सभी निर्दलीयों को साधने में कामयाब नहीं हो सकी। टोंक नगर परिषद : कांग्रेस ने निर्दलीयों के सहयोग से बनाया था बोर्ड कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट के कारण प्रदेश की नजरें टोंक नगर परिषद पर भी टिकी हुई हैं। यहां कांग्रेस का बोर्ड बना था और पायलट की रणनीति के चलते निर्दलीय कांग्रेस की ओर झुक गए थे। इस बार भी बीजेपी और कांग्रेस में अच्छी टक्कर है। इस बार 77.17 फीसदी वोटिंग हुई है, जो पिछली बार के मुकाबले 3.1 फीसदी बढ़ा है। हालांकि कांग्रेस के नेता इसे चुनौती नहीं मान रहे। उनका मानना है कि यहां कांग्रेस काफी मजबूत है और पिछली बार की तरह इस बार भी बीजेपी को हराने की ताकत रखती है। वहीं बीजेपी नेताओं का मानना है कि वोटिंग परसंटेज बढ़ने का फायदा बीजेपी को होगा और कांग्रेस से बोर्ड इस बार छिन सकता है। टोंक नगर परिषद में 2019 के चुनाव में 74.07 प्रतिशत मतदान हुआ था। कुल 60 वार्ड में से कांग्रेस ने 27 वार्ड, बीजेपी ने 23 और निर्दलीयों ने 10 वार्ड जीते थे। कांग्रेस ने निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाया था। ये खबरें भी पढ़ें जयपुर-जोधपुर नगर निगम में रिकॉर्ड वोटिंग:कोटा में थाने में धरने पर बैठीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष; भरतपुर जिले में वोट देने के बाद नाचने लगीं बुजुर्ग उदयपुर में भाजपा के सभी प्रत्याशी सूटकेस लेकर होटल पहुंचे:झुंझुनूं में वोटिंग-खत्म होने से पहले कांग्रेस ने की बाड़ेबंदी, उम्मीदवारों को बस-कार से भेजा
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की खाद्य एवं औषधि प्रशासन (पीडीए) परीक्षा का पेपर लीक होने से जुड़ा विवाद काफी बढ़ गया है।
सरगुजा में नशीले इंजेक्शन के साथ पकड़े गए युवक को कोर्ट ने 12 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। युवक को करीब एक साल पहले नशीले इंजेक्शन बेचने के आरोप में पकड़ा गया था। आबकारी विभाग ने मामला दर्ज कर इसे विशेष न्यायालय में पेश किया था। जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर के दर्रीपारा के सूरज यादव को 29 सितंबर 2025 की रात मेडिकल कॉलेज के पास पकड़ा गया था। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता की टीम ने बाइक सवार सूरज की तलाशी ली। उसके पिट्ठू बैग से 99 रेक्सोजेसिक इंजेक्शन और 79 एविल इंजेक्शन बरामद हुए। आबकारी विभाग के मुताबिक, सूरज इन इंजेक्शनों को बेचने के लिए ले जा रहा था। उसके खिलाफ नारकोटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से जेल में था आरोपी गिरफ्तारी के बाद सूरज को जमानत नहीं मिली थी। वह न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश नार्कोटिक्स एक्ट अतुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत में हुई। कोर्ट ने नशीले इंजेक्शन बेचने को गंभीर अपराध मानते हुए सूरज यादव को 12 साल के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर उसे 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में मतदान के बाद भाजपा ने बाड़ेबंदी कर दी। यहां पर पहले सभी को शहर के 100 फीट रोड स्थित एक होटल पर बुलाया था और उसके बाद रात करीब सवा ग्यारह बजे दो बसों में सभी को अज्ञात स्थान के लिए रवाना किया गया। पार्टी ने सभी 80 वार्डों के प्रत्याशियों को प्रशिक्षण बैठक के नाम पर एकत्र किया और सभी से वार्ड वार उनके मतदान प्रतिशत से लेकर जीत को लेकर फीडबैक लिया। इससे पहले सभी अपने साथ 2 - 2 बैग लेकर पहुंचे। रात को उदयपुर से दूर लेकर रवाना हुए जहां पर होटल में बाड़ेबंदी करके रखा जाएगा। इस बैठक में भाजपा शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण फूलसिंह मीणा, भाजपा पदाधिकारी और प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद रहे। देखिए, 3 PHOTO'S सभी पार्षद प्रत्याशियों के साथ पहले एक बैठक हुई जहां मतदान के बाद सभी ने वार्ड वाइज फीडबैक दिया। इसके साथ ही भाजपा ने ग्रुप लीडर तय किए जो पार्षद उम्मीदवारों को लेकर गए। इस दौरान शहर जिला अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि 80 में से 60 से ज्यादा वार्ड बीजेपी जीतेगी और ऐतिहासिक बहुमत से बोर्ड बनाएंगे। निकाय चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… मिनी पाकिस्तान वाले बयान पर भाजपा विधायक को रोका:कांग्रेस समर्थक बूथ सीमा में पहुंचे तो बीजेपी ने जताया विरोध; उदयपुर में 69.78% वोट पड़े उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में पार्षद चुनने के लिए मतदान पूरा हुआ और यहां 69.78 प्रतिशत मतदान हुआ। इस दौरान वार्ड नंबर 23 में हंगामा हो गया। यहां कांग्रेस समर्थकों के बूथ की निर्धारित सीमा के अंदर जाने पर भाजपा ने विरोध किया। (पूरी खबर पढ़ें…)
धार में वराह मार्च की अनुमति रद्द:पुलिस ने बैनर-पोस्टर हटाए, लोगों से रैली में शामिल न होने की अपील
धार शहर में 15 सितंबर को होने वाला वराह मार्च जिला प्रशासन ने रद्द कर दिया है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया है। शुक्रवार शाम पुलिस और प्रशासन की टीम शहर में निकली और मार्च से जुड़े बैनर-पोस्टर हटाए। लोगों से मार्च में शामिल नहीं होने और शांति बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई। सनातन प्रहरी की ओर से भगवान वराह जयंती के मौके पर पीजी कॉलेज से विजय मंदिर तक वाहन मार्च निकालने की तैयारी थी। संगठन ने शहर में इसका प्रचार भी किया था। 4 सितंबर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंशुल शर्मा ने बताया था कि संगठन ने मार्च के लिए अनुमति का आवेदन नहीं किया था, बल्कि प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी। अंशुल शर्मा के अनुसार, यह मार्च हर साल निकाला जाता है। भगवान वराह के दर्शन और लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इसकी तैयारी की जा रही थी। उन्होंने बताया था कि पिछले दो महीने से शहर में बैठकें कर मार्च की तैयारी चल रही थी और बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी। संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने पर विरोध की बात भी कही गई थी। धारा 163 लागू, बिना अनुमति कार्यक्रम पर होगी कार्रवाई एसडीएम राजकुमार हलदर ने बताया कि पुलिस प्रशासन से बातचीत के बाद मार्च की अनुमति रद्द की गई है। धार में धारा 163 लागू है। इसके चलते किसी भी जुलूस या कार्यक्रम के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति कार्यक्रम करने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के अनुसार 15 सितंबर को मुस्लिम समाज की ओर से भी वाहन मार्च की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उसे भी मंजूरी नहीं मिली। इस तरह दोनों समुदायों की ओर से प्रस्तावित वाहन मार्च की अनुमति रद्द हो चुकी है। इसके बाद शुक्रवार को पुलिस और प्रशासन ने शहर में लगे मार्च से जुड़े बैनर-पोस्टर हटाए। साथ ही लोगों से प्रशासन का सहयोग करने और शहर में शांति बनाए रखने की अपील की।
सीहोर पुलिस ने तेजी दिखाते हुए अपहरण के दो अलग-अलग मामलों को कुछ ही घंटों में सुलझा लिया है। पुलिस ने दोनों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित ढूंढ निकाला है। वहीं, शादी का झांसा देकर नाबालिग को भगा ले जाने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, 8 सितंबर को भैरुंदा थाने में दो अलग-अलग फरियादियों ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी नाबालिग बेटियों को कोई अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसलाकर ले गया है। फरियादियों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीहोर पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे और एसडीओपी रोशन कुमार जैन के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी घनश्याम दांगी के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने मुखबिरों की मदद से कड़ी मेहनत की, जिसके बाद पहली नाबालिग लड़की को सुरक्षित ढूंढ लिया गया। तलाश जारी रखते हुए पुलिस टीम ने इंदौर में छापा मारा और दूसरी नाबालिग लड़की को आरोपी प्रवीण भुसारिया (21 साल, निवासी ग्राम खांडाबड़ा, थाना बुधनी, जिला सीहोर) के चंगुल से छुड़ाया। पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि आरोपी उसे शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया था। नाबालिग के बयानों के आधार पर मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 जोड़ी गई और आरोपी प्रवीण भुसारिया को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
बुरहानपुर में शनिवार 12 सितंबर को 11 केवी हरीरपुरा फीडर की बिजली सप्लाई तीन घंटे बंद रहेगी। बिजली कंपनी के अनुसार सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक सप्लाई बंद रखी जाएगी। शनवारा चौराहा से गणपति नाका तक फोरलेन सड़क का काम चल रहा है। इसके चलते बिजली के खंभों और लाइनों में बदलाव किया जा रहा है। इसी काम के लिए फीडर पर मेंटेनेंस किया जाएगा। इन इलाकों में नहीं आएगी बिजली बिजली बंद रहने के दौरान सलूजा टिंबर मार्ट, आरको कॉम्प्लेक्स, ठाकुर साहब का पेट्रोल पंप, कृषि उपज मंडी, मला लाइन, हरीरपुरा, सुभाष स्कूल, राधेश्याम अस्पताल, शाह एन शाह मॉल, बीएसएनएल ऑफिस, गुरूसिख मॉल, मंगलम प्रोसेस और हजरत गोटिया पीर दरगाह क्षेत्र में बिजली सप्लाई प्रभावित रहेगी। बिजली कंपनी के सहायक यंत्री (एचटी मेंटेनेंस) रोहित भारती ने बताया कि काम की जरूरत के अनुसार बिजली बंद रहने का समय कम या ज्यादा हो सकता है।
मोहाली बार एसोसिएशन के चुनाव के नतीजे देर रात घोषित किए गए। अध्यक्ष पद पर रणजोध सिंह सराओ ने 246 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके मुकाबले गुरविंदर सिंह औलख को 200 और सुनील कुमार प्रशार को 191 वोट मिले। मतगणना देर रात तक चली। नतीजे घोषित होते ही विजयी उम्मीदवारों के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बार के वकीलों में भी पूरे दिन चुनाव परिणाम को लेकर उत्सुकता बनी रही। इन पदों पर ये उम्मीदवार जीते कैशियर: प्रभप्रीत सिंह ने 396 वोट लेकर जीत दर्ज की।लाइब्रेरी इंचार्ज: वीरदविंदर 312 वोट लेकर विजयी रहे।सचिव: हरप्रीत सिंह ने 298 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।संयुक्त सचिव: मनप्रीत कौर ने अपने प्रतिद्वंद्वी को महज एक वोट से हराया।महिला उपाध्यक्ष: कुलविंदर कौर ने 250 वोट लेकर जीत दर्ज की।उपाध्यक्ष: दलजीत सिंह पुणिया ने 312 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। नई टीम में ये चेहरे मोहाली बार एसोसिएशन की नई टीम में रणजोध सिंह सराओ अध्यक्ष, प्रभप्रीत सिंह कैशियर, वीरदविंदर लाइब्रेरी इंचार्ज, हरप्रीत सिंह सचिव, मनप्रीत कौर संयुक्त सचिव, कुलविंदर कौर महिला उपाध्यक्ष और दलजीत सिंह पुणिया उपाध्यक्ष चुने गए।
छतरपुर में महिला की हत्या का आरोपी गिरफ्तार:लाठी भी बरामद, जमीनी विवाद में वारदात का दावा
छतरपुर के गौरिहार थाना क्षेत्र के बलरामपुर गांव में महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। सुमित्रा नाम की महिला पर 9 सितंबर को हमला हुआ था। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में हत्या और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है। महिला पर हमले की सूचना मिलते ही गौरिहार थाना पुलिस, फिंगरप्रिंट और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। डॉक्टरों ने सुमित्रा की मौत की पुष्टि की। पुलिस ने घटनास्थल की जांच कर सबूत जुटाए। पूछताछ में जमीनी विवाद की बात कही घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी रजत सकलेचा ने आरोपी को जल्द पकड़ने के निर्देश दिए। पुलिस ने जांच और पूछताछ के आधार पर बलरामपुर गांव के विक्रम सिंह (पिता अमरीश सिंह) को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में विक्रम सिंह ने बताया कि उसने जमीनी विवाद के चलते महिला की हत्या की थी। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई लाठी भी बरामद की है। आरोपी को कोर्ट में पेश किया जा रहा है। कार्रवाई एडिशनल एसपी आदित्य पटले की देखरेख और एसडीओपी लवकुशनगर नवीन दुबे की अगुवाई में की गई। टीम में गौरिहार थाना इंचार्ज आरएन पटेरिया, पहरा चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह यादव, एएसआई जीवनलाल प्रजापति सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। फिंगरप्रिंट और एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल से सबूत जुटाए। पुलिस ने मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया है।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जेल में बंद तीन आरोपियों की जमानत पर शुक्रवार को होने वाली सुनवाई टल गई। आरोपी अविनाश शुक्ल, रमाशंकर मिश्र और मनीष यादव की जमानत अर्जी पर पुलिस की रिपोर्ट न्यायालय में पेश नहीं हो सकी। अभियोजन ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए पांच दिन का समय मांगा। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा ने अभियोजन की मांग स्वीकार करते हुए अब 16 सितंबर को सुनवाई की तारीख तय की है। मामले में आठ आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए जमानत की मांग की है। इनमें अविनाश शुक्ल, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, करुणेश पांडेय, रामशंकर यादव और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। 1708 घंटे जेल में रहने के बाद दाखिल की थी अर्जी आठों आरोपियों ने 5 सितंबर को 1708 घंटे जेल में बिताने के बाद जमानत अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने अर्जियां दर्ज करते हुए पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी और सभी की सुनवाई के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित की थीं। सुभाष को पेंशन खाते पर लगी रोक से राहत मामले में करीब 78 दिन से जेल में बंद पूर्व बैंककर्मी सुभाषचंद्र श्रीवास्तव को 8 सितंबर को राहत मिली थी। कोर्ट ने उनके पेंशन खाते पर लगी रोक हटा दी थी। यह अर्जी उनके अधिवक्ता डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल कुलशेखर सिंह ने 18 जुलाई को दाखिल की थी। हालांकि, गलत धाराओं में रिमांड, गिरफ्तारी और बरामदगी को चुनौती देने वाली सुभाष की अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी थी। इनकी जमानत पर भी होगी सुनवाई सोमवार: अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र और करुणेश पांडेय।मंगलवार: रामशंकर यादव टिन्नू और सुभाषचंद्र श्रीवास्तव।16 सितंबर: अविनाश शुक्ल, रमाशंकर मिश्र और मनीष यादव।
संभल में 8 साल पुराने दहेज हत्या के मामले में कोर्ट ने मां-बेटे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर कुल 24,500 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने शुक्रवार शाम 7 बजे यह जानकारी दी। मामला बहजोई थाना क्षेत्र के रफीपुर गांव का है। ईशमवती की शादी लेखराज से हुई थी। शादी के बाद से ही दहेज को लेकर उसे परेशान करने का आरोप था। इसी मामले में बदायूं की कोर्ट में मुकदमा चल रहा था। 3 अगस्त 2017 को लेखराज सुलह के बाद ईशमवती को अपने साथ घर ले गया था। दो दिन बाद हुई थी ईशमवती की हत्या पुलिस को दी शिकायत में बदायूं के फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र के कुआरेरा गांव निवासी अतर सिंह ने बताया था कि ईशमवती को पति लेखराज, सास माला देवी के अलावा रूम सिंह और रघुवीर भी परेशान करते थे। 5 अगस्त 2017 को ईशमवती की हत्या कर दी गई थी।मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने लेखराज पुत्र अमर सिंह और उसकी मां माला देवी को दोषी ठहराया। कोर्ट ने दोनों को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है। तीन धाराओं में सुनाई गई सजा धारा 498ए के तहत दोनों को 2 साल के सश्रम कारावास और 3 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई। धारा 302 सपठित धारा 34 के तहत आजीवन सश्रम कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया। वहीं धारा 3/4 डीपी एक्ट के तहत 1 साल के सश्रम कारावास और 1,500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। पुलिसकर्मियों ने भी की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि मामले में कोर्ट मोहर्रिर महिला कांस्टेबल अनीता और हेड कांस्टेबल रामकुमार सिंह ने भी पैरवी की थी।
बालाघाट शहर के अग्रसेन भवन परिसर में शुक्रवार शाम मारवाड़ी समाज ने राणी सती दादी (मां नारायणी देवी) के मंगलपाठ का आयोजन किया। इस धार्मिक कार्यक्रम में समाज की महिलाओं और पुरुषों ने बड़ी संख्या में शामिल होकर मां का मंगलपाठ किया। अग्रवाल समाज के प्रतिनिधि हरीओम अग्रवाल ने बताया कि मारवाड़ी समाज हर वर्ष यह आयोजन श्रद्धापूर्वक करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में अभिमन्यु की वीरगति के बाद उनकी पत्नी उत्तरा सती होना चाहती थीं, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलयुग में नारायणी देवी के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया था। कलयुग में पति की मृत्यु के बाद सती हुई मां नारायणी के सतीत्व और शक्ति की पूजा की जाती है। महाप्रसाद वितरण के साथ समापन श्रद्धालुओं का मानना है कि राणी सती दादी का मंगलपाठ सुनने और पढ़ने मात्र से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। देर शाम तक चले इस मंगलपाठ के समापन के बाद सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को महाप्रसाद का वितरण किया गया।
मोगा में डीसी सागर सेतिया ने चाइना डोर (सिंथेटिक/प्लास्टिक से बनी डोर) की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जारी किया गया है। ये आदेश 31 अक्टूबर, 2026 तक लागू रहेंगे। जिला मजिस्ट्रेट सागर सेतिया ने बताया कि मोगा जिले में अक्सर बड़ी संख्या में पतंगें उड़ाई जाती हैं। इन पतंगों के लिए चाइना डोर का काफी इस्तेमाल होता है। यह डोर सिंथेटिक/प्लास्टिक से बनी होती है और बहुत मजबूत होती है। 'दुर्घटना होने का खतरा रहता है' इस डोर से पतंग उड़ाने वालों के हाथ और उंगलियां कटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। साथ ही, साइकिल, स्कूटर और बाइक चलाने वालों के गले और कान भी कट जाते हैं। इससे दुर्घटना होने का खतरा भी बना रहता है। इसके अलावा, चाइना डोर में फंसकर कई पक्षियों की मौत हो जाती है। उनके पेड़ों पर लटके रहने से बदबू फैलती है और वातावरण भी प्रदूषित होता है। पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाली यह चाइना डोर मानव जीवन के लिए जानलेवा साबित होती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए चाइना डोर के उपयोग, बिक्री और भंडारण पर रोक लगाना जरूरी था।
फर्जी दस्तावेजों से अग्निवीर बने यूपी के 3 युवकों पर मुकदमा, मेघालय में ट्रेनिंग ले रहे थे
ललितपुर में अग्निवीर भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि तीन युवकों ने दूसरे लोगों के नाम और दस्तावेजों पर अपनी फोटो लगाकर चयन हासिल किया। पुलिस ने कन्हैयालाल, आकाश और वीरेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
छतरपुर में जिला अस्पताल के बाहर एक निजी सोनोग्राफी सेंटर पर जांच के लिए पहुंची एक महिला ने प्रसव पीड़ा के दौरान मेडिकल दुकान के सामने मृत शिशु को जन्म दे दिया। यह महिला शुक्रवार को राजनगर क्षेत्र के खजवा गांव से छतरपुर अल्ट्रासाउंड कराने आई थी। परिजनों ने बताया कि सोनोग्राफी सेंटर पर 1000 रुपए जमा कर नंबर लगाया गया था। करीब आधे घंटे के इंतजार के दौरान महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। वह सेंटर के बगल में स्थित राजेंद्र मेडिकल दुकान के सामने जाकर बैठ गई, जहां कुछ ही देर में उसका प्रसव हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल के प्रसूता वार्ड के स्टाफ ने तत्काल व्हीलचेयर और प्रशिक्षित नर्स को मौके पर भेजा। , मेडिकल दुकान के बाहर ही जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद महिला को व्हीलचेयर से जिला अस्पताल लाकर प्रसूता वार्ड में भर्ती कराया गया। यहां उसका इलाज चल रहा है। प्रसव कराने वाले अस्पताल स्टाफ के अनुसार, नवजात मृत पैदा हुआ था। स्टाफ ने बताया कि बच्चे के शरीर का रंग काला और नीला पड़ा हुआ था। इससे आशंका है कि उसकी गर्भ में ही कई दिन पहले मौत हो चुकी थी। हालांकि, बच्चे की मौत कब और किस कारण हुई, यह डॉक्टरी जांच के बाद ही साफ होगा। महिला के पति दिव्यांगखजवा निवासी आरती पटेल (40) के परिजनों ने बताया कि करीब दो महीने पहले डॉक्टर ने सोनोग्राफी कराने की सलाह दी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उस समय जांच नहीं हो सकी थी। आरती के पति दिव्यांग हैं। शुक्रवार को परिवार के कहने पर आरती का दामाद वीरेंद्र पटेल उसे छतरपुर लेकर आया था। उसके साथ करीब 12-13 साल की साली अंजलि भी थी। परिजनों के मुताबिक, राजनगर में डॉक्टरों ने गर्भ में बच्चे की हलचल न होने की बात सामने आने पर सोनोग्राफी कराने को कहा था। इसके बाद वे सीधे छतरपुर के सृष्टि सोनोग्राफी सेंटर पहुंचे और जांच के लिए 1000 रुपए जमा कर नंबर लगवाया। प्रसव के बाद सोनोग्राफी सेंटर ने लौटाए ₹1000प्रसव होने के बाद निजी सोनोग्राफी सेंटर की ओर से परिजनों को जमा किए गए ₹1000 वापस कर दिए गए। परिजनों ने इलाज और जांच में हुई देरी को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि महिला को समय पर जांच और उपचार मिल जाता तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। हालांकि बच्चे की मौत वास्तव में कब हुई और इसका कारण क्या था, यह चिकित्सकीय जांच का विषय है। परिजन बोले हम जिला अस्पताल गये ही नहींवहीं महिला के दामाद वीरेंद्र पटेल का कहना है कि मैं राजनगर से सीधा सोनोग्राफ़ी सेंटर लेकर आया जिला अस्पताल गया ही नहीं और न ही मुझे जाना था मुझसे मेरे ससुर ने सोनोग्राफ़ी करने भिजवाया था इसके बाद मैं वापिस चला जाता। पर सेंटकर के बाहर प्रसव पीड़ा हुई और प्रसव हो गया। प्रसव होने के बाद मैं परेशान हो गया और सामने जिला अस्पताल पहुंचा और मेडिकल दुकान के बाहर प्रसव की जानकारी दी जहां अस्पताल स्टाफ तत्काल बाहर मौके पर पहुंचा और प्रसव के बाद की जरूरी प्रक्रिया पूरी कर महिला को जिला अस्पताल लेकर आए जहां उसका इलाज चल रहा है। सिविल सर्जन बोले- प्रसूता अस्पताल आई ही नहीं थीजिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि आरती पटेल प्रसव पीड़ा के दौरान जिला अस्पताल आई ही नहीं थी। उनके अनुसार, महिला का दामाद वीरेंद्र पटेल उसे सीधे अपीने गांव से जिला अस्पताल के बाहर स्थित सोनोग्राफी सेंटर लेकर पहुंचा था। उन्होंने कहा कि यदि प्रसूता को सीधे जिला अस्पताल लाया जाता तो उसका परीक्षण और उपचार अस्पताल में ही किया जाता।उन्होंने बताया कि सेंटर के बाहर प्रसव होने की जानकारी प्रसूता वार्ड की इंचार्ज वर्षा चतुर्वेदी को लगी जहां उनके द्वारा अस्पताल के प्रशिक्षित स्टाफ को तत्काल मौके पर भेजा गया और प्रसव के बाद की आवश्यक प्रक्रिया कर महिला को सुरक्षित किया गया। यहां नवजात मृत पैदा हुआ था और प्रथम दृष्टया उसकी गर्भ में कई दिन पहले ही मौत होने की बात सामने आई है। फिलहाल महिला जिला अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। मृत गर्भ से गर्भावती को था खतराडॉक्टर का कहना है कि गनीमत रही की महिला छतरपुर आई थी और उसका पास में ही प्रसव हो गया। उसका बच्चा पहले ही मृत हो चुका था जिससे गर्भवती को भी खतरा हो सकता था। मामले की जानकारी लगते ही तत्काल अस्पताल लाकर उसका प्रॉपर इलाज कराया अगर समय रहते वह उसे चिकित्सीय लाभ नहीं मिलता तो उसे भी खतरा जो सकता था।
पंजाब सरकार ने 3 सीनियर IAS अधिकारियों के तबादले किए हैं। ऋषि पाल सिंह को PAU लुधियाना के रजिस्ट्रार पद से स्थानांतरित कर सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत पंजाब राज्य महिला आयोग का मेंबर सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है। अभिजित कपलिश PEDA के चीफ एग्जीक्यूटिव के साथ अब डायरेक्टर, खेल एवं युवा सेवाएं का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वहीं, साक्षी साहनी को इस अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। सुखजीत पाल सिंह को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव पद से स्थानांतरित कर PAU लुधियाना का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तहत की गई है।
: जिले में नशों की अवैध सप्लाई और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से जालंधर ग्रामीण पुलिस ने विशेष अभियान चलाया है। एसएसपी हरविंदर सिंह विरक के सख्त निर्देशों पर पुलिस टीमों ने जिले के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में व्यापक स्तर पर 'कासो' (Cordon and Search Operation - CASO) अभियान चलाकर संदिग्ध ठिकानों की गहन जांच की। सब-डिवीजनों के डीएसपी की सीधी देखरेख में चलाए गए इस अभियान के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने खुद मौके पर पहुंचकर चेकिंग का जायजा लिया। इस विशेष चेकिंग के दौरान पुलिस ने नशा हॉटस्पॉट्स, खाली मकानों, सुनसान जगहों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर बारीकी से तलाशी ली। 4 एफआईआर और 4 गिरफ्तारियां: अभियान के दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 4 अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर 4 आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया गया। पुलिस नशा पीड़ितों की पहचान कर उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए प्रेरित कर रही है। नशा तस्करी और सप्लाई चेन में शामिल तत्वों के खिलाफ पुलिस ने सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई का संदेश दिया है। एसएसपी हरविंदर सिंह विरक ने स्पष्ट किया कि जालंधर ग्रामीण पुलिस की नशों के खिलाफ यह मुहिम आगे भी लगातार और अचानक (सरप्राइज चेकिंग) जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि नशा तस्करी में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पारा थाना क्षेत्र के हंसखेड़ा में एक व्यक्ति ने पड़ोस की महिला और उसके पति समेत चार लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई है कि आरोपियों ने उनके घर में घुसकर मारपीट की, गाली-गलौज की और उनकी पत्नी के गले से सोने की चेन व 5 हजार रुपए लूट लिए। पीड़ित का यह भी आरोप है कि महिला इंस्टाग्राम पर उनकी और उनकी पत्नी की तस्वीरें लगाकर अभद्र टिप्पणियां कर रही है। साथ ही उन्हें जान से मारने और हंसखेड़ा इलाका छोड़कर चले जाने की धमकी भी दी जा रही है। पारा पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लूटे रुपए और चेन वापस करने को कहा, लेकिन किया नहीं हंसखेड़ा निवासी श्रीराम यादव ने पुलिस को बताया कि 28 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे वह अपनी पत्नी सोनी के साथ घर पर थे। शिकायत के अनुसार, इसी दौरान हिमांशी यादव उर्फ झांसी की रानी, उसका पति विनोद यादव और दो अज्ञात लोग उनके घर में घुस आए। आरोपियों ने बिना किसी कारण के गाली-गलौज शुरू कर दी और दंपती के साथ मारपीट की। इसी दौरान उनकी पत्नी के गले से सोने की चेन और पांच हजार रुपए छीन लिए गए। पीड़ित ने बताया कि घटना के बाद आरोपियों ने पड़ोसियों से कहा था कि वे चेन और रुपए कुछ दिन बाद वापस कर देंगे। हालांकि, काफी समय बीतने के बाद भी यह सामान वापस नहीं किया गया। जब श्रीराम ने इसका विरोध किया, तो उन्हें धमकी दी गई कि जो करना है कर लो, रुपए और चेन वापस नहीं मिलेंगे। इंस्टाग्राम पर अभद्र टिप्पणियों से बदनामी हो रही श्रीराम ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि महिला इंस्टाग्राम पर उनकी और उनकी पत्नी की तस्वीरें लगाकर लगातार अभद्र टिप्पणियां कर रही है, जिससे उनकी बदनामी हो रही है। उन्हें सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। हंसखेड़ा छोड़कर चले जाने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और अपनी व पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
शेखपुरा के चेवाड़ा प्रखंड के छठियारा गांव में महादलित परिवारों की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। शुक्रवार को पीड़ित ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी (DM) से जांच कर न्याय दिलाने की मांग की। फर्जी दस्तावेज बना जमीन पर कब्जा करने की कोशिश पीड़ितों में सुधीर रविदास, पुनीत पासवान और पंकज सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उनके पूर्वजों को कई साल पहले सरकार से खेती के लिए जमीन का पर्चा मिला था। इस जमीन पर उनका लंबे समय से कब्जा है और वे इस पर खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पूर्व मुखिया के बेटे रंजीत यादव और एक अन्य व्यक्ति फर्जी दस्तावेज बनाकर उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। कानूनी कार्रवाई की मांग की पीड़ितों ने कहा कि जमीन पर उनका वर्षों पुराना कब्जा और खेती-बाड़ी है, इसके बावजूद उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अवैध कब्जे का प्रयास करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गुस्सा है। उन्होंने आशंका जताई है कि जमीन पर अवैध कब्जा जमाने के लिए दबंग लोग कोई भी अप्रिय घटना कर सकते हैं।
शाहजहांपुर में कानून-व्यवस्था और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसपी सौरभ दीक्षित ने शुक्रवार शाम पुलिस विभाग में फेरबदल किया। नौ पुलिस अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है। इनमें 8 इंस्पेक्टर और एक दरोगा शामिल हैं। सभी अधिकारियों को तत्काल नई जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं। खुटार थाने की जिम्मेदारी लोकेन्द्र कुमार को निरीक्षक लोकेन्द्र कुमार को पुलिस लाइन से खुटार थाने का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। खुटार के प्रभारी निरीक्षक अरविन्द कुमार का गैर जनपद तबादला हो चुका है। इसके बाद उन्हें पुलिस लाइन भेजा गया है। देखें ट्रांसफर लिस्ट… रामचंद्र मिशन और कांट थाने में भी बदलाव निरीक्षक हरीश कुमार को पुलिस लाइन से रामचंद्र मिशन थाने का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। यहां तैनात धर्मेंद्र कुमार का गैर जनपद तबादला हुआ है। उन्हें भी पुलिस लाइन भेजा गया है। निरीक्षक अनुज कुमार तोमर को पुलिस लाइन से कांट थाने का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। कांट के प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार को अल्हागंज थाने की जिम्मेदारी दी गई है। गढ़िया रंगीन में उपनिरीक्षक ओमप्रकाश की तैनाती गढ़िया रंगीन के प्रभारी निरीक्षक हरकेश सिंह का गैर जनपद तबादला होने के बाद उन्हें पुलिस लाइन भेजा गया है। निरीक्षक मेघपाल सिंह को पुलिस लाइन से एएचटी का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। उपनिरीक्षक ओमप्रकाश को अल्हागंज थानाध्यक्ष के पद से हटाकर गढ़िया रंगीन थाने का थानाध्यक्ष बनाया गया है। एसपी ने अधिकारियों को नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

