Commonwealth Games 2026 में भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा, आस्ट्रेलिया शीर्ष पर
ग्लास्गो, दो अगस्त ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में ऐसे कई खेल नहीं थे जिनमें भारत सबसे प्रबल दावेदार था लेकिन इसके बावजूद भारतीय दल ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 से शानदार प्रदर्शन के साथ विदा ली और 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहे। भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक जीते। आस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण समेत 171 पदक जीतकर शीर्ष रहा जबकि इंग्लैंड ने 110 और कनाडा ने 62 पदक जीते। मेजबान स्कॉटलैंड 39 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने 11 दिन तक चले खेलों में मुक्केबाजी, एथलेटिक्स , जूडो, पैरा खेलों और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन करके साबित कर दिया कि भारत राष्ट्रमंडल खेल महाशक्तियों में से एक है। मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण और तीन रजत समेत दस पदक जीते। जूडो खिलाड़ियों ने भी जबर्दस्त प्रदर्शन करके पदक जीते। निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेल नहीं होने से भारत के पदकों की संख्या कम हुई है लेकिन बाकी खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया। कुछ घटनाओं ने निराश भी किया जैसे खेलों से पहले ही जूडो खिलाड़ी तूलिका मान डोपिंग रोधी नियमों के तहत ठिकाने का पता बनाने में तीन बार नाकाम रहने के कारण अस्थायी तौर पर निलंबित हो गई और खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई। ग्लास्गो से विदा लेने के बाद अब नजरें अहमदाबाद पर होंगी जहां 2030 में खेल होने हैं।
एकतरफा मैच में झारखंड को 12-3 से हराया
भास्कर न्यूज | जालंधर 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर पुरुष राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप में पंजाब ने झारखंड को 12-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। तमिलनाडु के कोयंबटूर में हॉकी इंडिया की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में पंजाब ने पूल सी में शीर्ष स्थान हासिल कर अंतिम आठ में प्रवेश किया। हॉकी पंजाब के अध्यक्ष नितिन कोहली और महासचिव अमरीक सिंह पुआर के अनुसार, शाम को खेले गए इस मुकाबले में पंजाब ने शुरू से ही बढ़त बनाते हुए एकतरफा जीत दर्ज की। पंजाब के लिए मनदीप सिंह ने चार गोल दागे और हैट्रिक पूरी की, उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया। चरणजीत सिंह और हर्षदीप सिंह ने दो-दो गोल किए। जोबनप्रीत सिंह, ओम रजनीश सैनी, प्रिंस सिंह और अमनदीप ने एक-एक गोल जोड़ा। झारखंड की ओर से हैमरम टिंटस ने दो और सबीन किरो ने एक गोल किया। इससे पहले पंजाब ने दिल्ली को 6-2 से हराकर छह अंक के साथ पूल सी में पहला स्थान पक्का किया था। क्वार्टर फाइनल मुकाबले 5 अगस्त को खेले जाएंगे।
Gorakhpur News: हॉकी के साथ मिली नई सीख और दोस्ती, खिलाड़ियों को भायी गोरक्षनगरी
Players say: The journey of the CBSE Zonal Hockey tournament was memorable.
इंडिया हॉकी 360 फेस्टिवल ने चंडीगढ़ में वैश्विक हॉकी विशेषज्ञता को जोड़ा
तुलसीया स्पोर्ट्स मार्केटिंग (TSM) और एनएचएल (NHL) ब्रॉडकास्टर रणदीप जांडा द्वारा सह-आयोजित इस फेस्टिवल ने खिलाड़ी विकास, कोचिंग शिक्षा और खेल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भारत के हॉकी समुदाय को अंतरराष्ट्रीय संगठनों और पेशेवर कोचों से जोड़ा।
PR Sreejesh ने हॉकी जर्सी विवाद को नकारा, टीम से 50 साल बाद पदक जीतने पर फोकस को कहा
(मोना पार्थसारथी)नयी दिल्ली, दो अगस्त महान गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग केसरिया किये जाने को लेकर विवाद को खारिज करते हुए टीम से बाहर की आवाजों पर ध्यान नहीं देते हुए पूरी ऊर्जा 50 साल बाद विश्व कप में पदक जीतने पर फोकस करने के लिये कहा है। तोक्यो ओलंपिक 2020 में 41 साल बाद भारतीय हॉकी टीम के ओलंपिक कांस्य जीतने और 2024 में पेरिस में उस प्रदर्शन को दोहराने में अहम भूमिका निभाने वाले इस दिग्गज ने जर्सी विवाद के बारे में पूछे जाने पर से कहा ,‘‘ सच कहूं तो मुझे पहले समझ ही नहीं आया कि क्या मसला है क्योंकि 2014 और 2018 विश्व कप में भी जर्सी का रंग बदला था। हमारी एक ट्रेनिंग किट का भी रंग आरेंज है। इस बार विश्व कप से पहले इतनी चर्चा क्यों हो रही है। केसरिया रंग की वजह से या जर्सी का रंग बदलने की वजह से।’’नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग बदलकर नीले से केसरिया कर दिया गया है। इस पर पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा , धनराज पिल्लै, अजित पाल सिंह, वासुदेवन भास्करन और परगट सिंह समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाये थे। पेरिस ओलंपिक के बाद हॉकी से विदा लेकर कोच बने श्रीजेश ने कहा ,‘‘अगर विवाद रंग बदलने की वजह से है तो 2014 और 2018 में भी होना चाहिये था जब हमने पीली और हल्के नीले रंग की जर्सी पहनी थी।’’उन्होंने कहा कि जर्सी का रंग बदलने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यह कहना कि नीली टर्फ पर खेलने में दिक्कत होती है, समझ से परे है क्योंकि इतने साल से नीली जर्सी में ही तो खेलते आये हैं। भारत के लिये 339 मैच खेल चुके और पिछले साल चेन्नई में जूनियर हॉकी विश्व कप में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के कोच रहे 38 वर्ष के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा ,‘‘मुझे जर्सी के रंग बदलने से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उसका जो कारण बताया जा रहा है , वह समझ से परे है। अगर खेलने में दिक्कत की वजह से रंग बदला जा रहा है तो फिर दोबारा नीली जर्सी कभी नहीं पहननी चाहिये।’’उन्होंने कहा ,‘‘ यह सही है कि एक सा रंग होने से देखने में थोड़ा मुश्किल तो होता है लेकिन 2012 लंदन ओलंपिक में नीली टर्फ आने के बाद से अब तक 14 साल में दो ही बार जर्सी का रंग बदला है। बाकी टूर्नामेंट में हम नीली जर्सी में ही खेले हैं जिसमें पेरिस ओलंपिक, तोक्यो ओलंपिक शामिल है।’’उन्होंने यह भी कहा कि अगर खिलाड़ियों की मर्जी से यह फैसला किया गया है तो विवाद होना ही नहीं चाहिये था। उन्होंने कहा ,‘‘ मीडिया में मैने जो कुछ भी देखा है, उसमें यही बोला गया है कि खिलाड़ियों की सहमति से रंग बदला गया है। हॉकी इंडिया ने एफआईएच से केसरिया रंग की जर्सी के लिये अनुमति ली होगी। अब चूंकि आरेंज हालैंड की जर्सी का भी रंग है तो जब उससे मैच होगा तो हम अपनी दूसरी सफेद जर्सी पहनकर खेल सकते हैं।’’उन्होंने कहा ,‘‘अगर इस फैसले में खिलाड़ियों की मंजूरी है तो बात वही खत्म हो जाती है क्योंकि आखिर में तो मैदान पर खिलाड़ियों को ही खेलना होता है।’’मसले के राजनीतिक रंग लेने के बारे में उन्होंने कहा ,‘‘ मेरा मानना है कि राजनीति को खेलों से दूर रखना चाहिये। खिलाड़ी सबसे अहम है और अगर उन्हें दिक्कत नहीं है तो बाहर बैठे लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिये। ’’श्रीजेश ने हालांकि यह जरूर कहा कि अगर रंग बदला जाना था तो यह पहले हो जाना चाहिये था कि खिलाड़ियों को नयी जर्सी की आदत हो सके। उन्होंने कहा ,‘‘ मुझे लगता है कि खिलाड़ियों को इस जर्सी को पहनकर थोड़ा खेलने का भी मौका देना चाहिये था। अभी तक हमें नीली जर्सी में खेलने की आदत है। मान लीजिये कि मैं मैदान में खेल रहा हूं और सामने हरमनप्रीत है तो मैं उसे नीली जर्सी में ही तलाशूंगा।अगर जर्सी का रंग बदलना था तो थोड़ा जल्दी करना चाहिये था।’’श्रीजेश ने यह भी कहा कि उन्हें यकीन है कि विश्व कप से पहले मैदान से बाहर की आवाजों का टीम पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने कहा,‘‘ हम टीम के भीतर हमेशा बोलते थे कि बाहर की आवाजों से दूर रहना है। मैदान से बाहर की बातों का पता तो रहता है लेकिन शुक्र है कि अभी उनके पास समय है। अब टीम यूरोप में है और इन बातों को भुलाकर अब पूरा फोकस टूर्नामेंट पर करना होगा।’’श्रीजेश ने कहा कि भारत के पास विश्व कप में 50 साल का पदक का इंतजार खत्म करने का यह सबसे सुनहरा मौका है और खिलाड़ियों को इसे चूकना नहीं चाहिये। यह पूछने पर कि टीम को क्या संदेश देना चाहेंगे, उन्होंने कहा ,‘‘ मैं इतना ही कहूंगा कि हम बहुत साल से इंतजार कर रहे हैं। इस बार सुनहरा मौका है। पूल में इंग्लैंड ही थोड़ी कठिन टीम है। अगर हम शीर्ष रह सकें तो पूल ए से अर्जेंटीना से खेलना पड़ सकता है, जिसे हम पहले हरा चुके है। सेमीफाइनल की राह आसान है।’’उन्होंने कहा ,‘‘जाओ और अपनी सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलो, खेल का पूरा मजा लो और 50 साल का ये इंतजार खत्म करो। ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा। अपेक्षाओं का दबाव भूल जाओ, मैदान के बाहर की बातों को भूल जाओ और पोडियम पर जगह बनाओ।
Gorakhpur News: सीबीएसई जोनल हॉकी में सनबीम स्कूल बलिया बना अंडर-19 चैंपियन
अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 वर्गों में खिलाड़ियों ने दिखाया शानदार प्रदर्शन
कोयंबटूर, 1 अगस्त (आईएएनएस)। शनिवार को कोयंबटूर के कोयंबटूर हॉकी ग्राउंड में 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर मेन नेशनल चैंपियनशिप 2026 के पांचवें दिन उत्तराखंड और चंडीगढ़ ने डिवीजन 'बी' में जीत हासिल की, जबकि उत्तर प्रदेश हॉकी, हॉकी पंजाब और हॉकी एसोसिएशन ऑफ ओडिशा ने डिवीजन 'ए' मुकाबलों में जीत हासिल की।
कांग्रेस ने भारतीय हॉकी टीम की नीली जर्सी को केसरिया करने पर सवाल उठाया है, इसे खिलाड़ियों और जनता की भावनाओं के खिलाफ संकीर्ण राजनीति बताया है।
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीला से नारंगी किए जाने पर विवाद गहरा गया है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने इस पर आपत्ति जताते हुए फेडरेशन के अधिकारियों से लिखित जवाब मांगा है। उनका आरोप है कि यह फैसला एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी और उन्हें बिना बताए लिया गया। टिर्की ने बोर्ड सदस्यों को ईमेल भेजकर सवाल पूछे हैं। उन्होंने लिखा, 'मुझे नारंगी रंग से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन नेशनल टीम की पहचान से जुड़े इस बड़े फैसले पर चुनी हुई लीडरशिप से चर्चा जरूर होनी चाहिए थी। इस बीच, ओडिशा सरकार ने भी टिर्की से स्पष्टीकरण मांग लिया है। वहीं, गुरुवार को टिर्की ने बदलाव का बचाव किया था। उन्होंने लोगों से इसे राजनीतिक रंग न देने की अपील करते हुए कहा था कि यह पूरी तरह 'टेक्निकल' फैसला है। खिलाड़ियों से सलाह के दावे पर सवाल शुक्रवार को इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भारतीय टीम के एक खिलाड़ी के हवाले से कहा गया कि जर्सी में बदलाव को लेकर न तो उनसे राय ली गई और न ही सलाह मांगी गई। हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति के एक सदस्य ने भी दावा किया कि उन्हें जर्सी में बदलाव की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे ऐसी किसी आधिकारिक बैठक का हिस्सा नहीं रहे, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा हुई हो। जर्सी देखकर कोई प्रेरणा नहीं मिल रही- भास्करन इससे पहले, जर्सी के रंग को लेकर कई पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाए थे। 1980 ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान वासुदेवन भास्करन ने भी नाराजगी जताई थी। रासकिन्हा ने लिखा- टीम को भगवा रंग क्यों पहनाया भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रासकिन्हा ने इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि टीम को भगवा रंग पहनाया जाना शर्मनाक है। प्रियंका गांधी ने भी नई जर्सी आलोचना की कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से नारंगी किए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश की पहचान अहिंसा, सत्य और भाईचारे जैसे मूल्यों से जुड़ी है और इन्हें बदला नहीं जा सकता। जर्सी का रंग कैसे तय होता है, सवाल-जवाब के जरिए समझिए … सवाल: जर्सी का रंग किस आधार पर तय होता है? जवाब: जर्सी के रंग को लेकर कोई भी लिखित नियम नहीं है। कोई भी देश किसी भी रंग को चुन सकता है। लेकिन आमतौर किसी देश की टीम की जर्सी का रंग उसके राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीकों या राष्ट्रीय पहचान के आधार पर चुना जाता है। सवाल: भारतीय टीम की जर्सी नीली क्यों रखी गई थी? जवाब: हॉकी इतिहासकार के. अरुमुगम ने बताया कि भारतीय हॉकी टीम 1928 से ज्यादातर नीली और सफेद जर्सी में खेलती आई है। समय-समय पर जर्सी का डिजाइन बदला, लेकिन रंग नीला ही रहा। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट टीम ने 1992 में रंगीन जर्सी शुरू होने पर तिरंगे के अशोक चक्र का नीला रंग अपनाया। इसी वजह से भारतीय टीमों की पहचान 'मेन इन ब्लू' के तौर पर बन गई। सवाल: जर्सी का रंग ऑरेंज क्यों किया गया? जवाब: हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी अब नीले सिंथेटिक टर्फ पर खेली जाती है। ऐसे में मैदान और जर्सी दोनों नीले होने से खिलाड़ियों को तेज खेल के दौरान साथी खिलाड़ियों और गेंद को पहचानने में दिक्कत होती थी। भारत ने 1975 में वर्ल्ड कप जीता था FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 टूर्नामेंट का 16वां एडिशन होगा। इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) की ओर से आयोजित यह टूर्नामेंट 14 से 30 अगस्त 2026 तक बेल्जियम के वावरे और नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन में खेला जाएगा। भारत ने अपना आखिरी और इकलौता हॉकी वर्ल्ड कप खिताब 1975 में जीता था। टीम करीब 50 साल बाद फिर से वर्ल्ड चैंपिंयन बनने का सपना लेकर मैदान में उतरेगी।
Hockey Jersey Controversy: जर्सी पर सवाल उठाने वालों पर बरसे कप्तान हरमनप्रीत सिंह, कहा- कंट्रोवर्सी का क्यों नाम दिया जा रहा Navbharat Times भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग केसरिया होने पर विवाद, पूर्व कप्तान ने कहा 'शर्मनाक', नवीन पटनायक ने जताया विरोध BBC 'भगवा' जर्सी विवाद पर हॉकी इंडिया में दो फाड़, अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने अपनी ही संस्था उठाए सवाल, कहा- मुझे अंधेरे में रखा गया AajTak हॉकी इंडिया की नई नारंगी जर्सी पर विवाद: खिलाड़ियों से सलाह लेने के दावे को टीम मेंबर ने नकारा, दिग्गजों ने ... Dainik Bhaskar Agra News: नई हॉकी जर्सी पर बहस में आगरा से उठी विरासत बचाने की आवाज Amar Ujala
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Agra News: नई हॉकी जर्सी पर बहस में आगरा से उठी विरासत बचाने की आवाज
भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी के रंग में बदलाव पर देशभर में बहस छिड़ी हुई है।
Bhadohi News: आशीष का यूपी हॉकी टीम में चयन, कोयंबटूर में दिखाएंगे दम
Ashish selected for UP hockey team; set to showcase his skills in Coimbatore
जर्सी का रंग नहीं, खेल की गरिमा बचाने की जरूरत
भारतीय हॉकी टीम की नई यूनिफॉर्म में केसरिया रंग के प्रयोग The post जर्सी का रंग नहीं, खेल की गरिमा बचाने की जरूरत appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
'भगवा' जर्सी विवाद पर हॉकी इंडिया में दो फाड़, तिर्की ने पूछे कड़े सवाल
हॉकी इंडिया ने क्या राष्ट्रीय टीम की पहचान से जुड़े इतने अहम फैसले में अपने संविधान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया था, ये अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. अगर दिलीप तिर्की का दावा सही साबित होता है, तो आने वाले दिनों में हॉकी इंडिया को सिर्फ जर्सी के रंग पर नहीं, बल्कि फैसले लेने के तरीके और पारदर्शिता पर भी जवाब देना पड़ सकता है.
भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। एक रिपोर्ट में एक खिलाड़ी और हॉकी इंडिया के एक अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि जर्सी के रंगमें बदलाव को लेकर खिलाड़ियों से सलाह नहीं ली गई थी। अगले महीने होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप के लिए हॉकी इंडिया ने 27 जुलाई को नीली जर्सी की जगह नारंगी जर्सी लॉन्च की है। इस बदलाव के बाद कई पूर्व हॉकी खिलाड़ियों और दिग्गजों ने नाराजगी जाहिर की है। खिलाड़ियों से सलाह के दावे पर सवाल हॉकी इंडिया ने विरोध के जवाब में गुरुवार को कहा कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से सलाह-मशविरा के बाद लिया गया है। हालांकि, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भारतीय टीम के एक खिलाड़ी के हवाले से कहा गया है कि उनसे इस संबंध में न तो राय ली गई और न ही सलाह मांगी गई। वहीं, हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति के एक सदस्य ने भी दावा किया कि उन्हें जर्सी में बदलाव की जानकारी नहीं थी। वे ऐसी किसी आधिकारिक बैठक का हिस्सा नहीं रहे, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा हुई हो। जर्सी देखकर कोई प्रेरणा नहीं मिल रही- भास्करन 1980 ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान वासुदेवन भास्करन ने भी सवाल उठाया है। भास्करन ने कहा कि उन्हें यह जर्सी देखकर कोई प्रेरणा नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि 1928 से भारतीय खिलाड़ी नीली जर्सी पहनते आए हैं, तो अचानक यह बदलाव क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि अगर यह फैसला हॉकी इंडिया का है, तो उन्हें पहले पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों से सलाह लेनी चाहिए थी। रासकिन्हा ने लिखा- टीम को भगवा रंग क्यों पहनाया भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रासकिन्हा ने इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि टीम को भगवा रंग पहनाया जाना शर्मनाक है। प्रियंका गांधी ने भी नई जर्सी आलोचना की कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से नारंगी किए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश की पहचान अहिंसा, सत्य और भाईचारे जैसे मूल्यों से जुड़ी है और इन्हें बदला नहीं जा सकता। जर्सी का रंग कैसे तय होता है, सवाल-जवाब के जरिए समझिए … सवाल: जर्सी का रंग किस आधार पर तय होता है? जवाब: जर्सी के रंग को लेकर कोई भी लिखित नियम नहीं है। कोई भी देश किसी भी रंग को चुन सकता है। लेकिन आमतौर किसी देश की टीम की जर्सी का रंग उसके राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीकों या राष्ट्रीय पहचान के आधार पर चुना जाता है। सवाल: भारतीय टीम की जर्सी नीली क्यों रखी गई थी? जवाब: हॉकी इतिहासकार के. अरुमुगम ने बताया कि भारतीय हॉकी टीम 1928 से ज्यादातर नीली और सफेद जर्सी में खेलती आई है। समय-समय पर जर्सी का डिजाइन बदला, लेकिन रंग नीला ही रहा। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट टीम ने 1992 में रंगीन जर्सी शुरू होने पर तिरंगे के अशोक चक्र का नीला रंग अपनाया। इसी वजह से भारतीय टीमों की पहचान 'मेन इन ब्लू' के तौर पर बन गई। सवाल: जर्सी का रंग ऑरेंज क्यों किया गया? जवाब: हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी अब नीले सिंथेटिक टर्फ पर खेली जाती है। ऐसे में मैदान और जर्सी दोनों नीले होने से खिलाड़ियों को तेज खेल के दौरान साथी खिलाड़ियों और गेंद को पहचानने में दिक्कत होती थी। भारत ने 1975 में वर्ल्ड कप जीता था FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 टूर्नामेंट का 16वां एडिशन होगा। इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) की ओर से आयोजित यह टूर्नामेंट 14 से 30 अगस्त 2026 तक बेल्जियम के वावरे और नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन में खेला जाएगा। भारत ने अपना आखिरी और इकलौता हॉकी वर्ल्ड कप खिताब 1975 में जीता था। टीम करीब 50 साल बाद फिर से वर्ल्ड चैंपिंयन बनने का सपना लेकर मैदान में उतरेगी।
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग केसरिया होने पर विवाद, पूर्व कप्तान ने कहा 'शर्मनाक', नवीन पटनायक ने जताया विरोध BBC 'भगवा' जर्सी विवाद पर हॉकी इंडिया में दो फाड़, अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने अपनी ही संस्था उठाए सवाल, कहा- मुझे अंधेरे में रखा गया AajTak हॉकी इंडिया की नई नारंगी जर्सी पर विवाद: खिलाड़ियों से सलाह लेने के दावे को टीम मेंबर ने नकारा, दिग्गजों ने ... Dainik Bhaskar हर चीज की ‘भगवा’ ब्रांडिंग क्यो, कहा परगट ने, धनराज ने कहा यह आईपीएल या फ्रेंचाइजी हॉकी नहीं है Press Trust of India भगवा जर्सी पर हॉकी इंडिया ने तोड़ी चुप्पी, बताया क्यों चुना ये रंग ABP News
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से भारतीय हॉकी टीम की भगवा जर्सी और आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को लेकर की गई टिप्पणियों पर देशभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं
भारतीय हॉकी टीम का 'नीला रंग' देश की खेल विरासत से जुड़ी एक भावना है : नवीन पटनायक
वर्ल्ड कप से पहले भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग 'नीले' से बदलकर 'केसरिया' करने पर ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ऐतराज जताया है। उनका मानना है कि भारतीय हॉकी टीम का नीला रंग सिर्फ एक रंग नहीं है, बल्कि देश की खेल विरासत से जुड़ी एक भावना है।
हॉकी जर्सी विवाद: भाजपा बोली रंग बदलना सरकार का अधिकार, विपक्ष ने राजनीति करने का लगाया आरोप
भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा रंग की जर्सी लाए जाने की खबर के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रस्किन्हा ने इस बदलाव पर चिंता जताई है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे सामान्य बदलाव बताते हुए इसका समर्थन किया है। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस फैसले को प्रतीकों और पहचान से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने कहा कि सरकार को रंग बदलने का फैसला लेने का अधिकार है। क्या हुआ अगर रंग बदल दिया गया? सत्ता में आने के बाद वे जो चाहें, कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद थे और जिस विषय पर जवाब देना था, उसका उत्तर पहले से तय व्यवस्था के तहत केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दिया। केसरिया को लेकर उठ रहे विवाद पर उन्होंने कहा, यह सब छोटी मानसिकता का परिचायक है। अगर भगवा रंग की जर्सी हो गई, तो इसमें क्या दिक्कत है? उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी केसरिया रंग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत क्रांतिकारियों की धरती है और केसरिया रंग देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके मुताबिक इस रंग पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने इस प्रस्तावित बदलाव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से भारतीय खेल टीमों, खासकर क्रिकेट और हॉकी में नीला रंग देश की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय टीम किसी बड़े टूर्नामेंट में उतरती है तो ब्लीड ब्लू का नारा लगाया जाता है। उनके अनुसार नीला रंग एक तटस्थ और प्रेरणादायक रंग रहा है तथा इस तरह का बदलाव अनावश्यक विवाद पैदा कर सकता है। सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और रंगों तथा प्रतीकों को राजनीतिक नजरिए से देखने से बचना चाहिए। समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने भी कहा कि जिस जर्सी को पहनकर भारतीय टीम वर्षों तक खेलती रही है, उससे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का भावनात्मक जुड़ाव होना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस बदलाव के पीछे की वास्तविक वजह हॉकी इंडिया फेडरेशन ही स्पष्ट कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय टीम किसी बड़े टूर्नामेंट में उतरती है तो ब्लीड ब्लू का नारा लगाया जाता है। उनके अनुसार नीला रंग एक तटस्थ और प्रेरणादायक रंग रहा है तथा इस तरह का बदलाव अनावश्यक विवाद पैदा कर सकता है। सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और रंगों तथा प्रतीकों को राजनीतिक नजरिए से देखने से बचना चाहिए। Also Read: LIVE Cricket Score इस पूरे विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने कहा कि जर्सी का रंग चाहे नारंगी हो, हरा हो या कोई अन्य, असली महत्व खिलाड़ियों के प्रदर्शन का होता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में खिलाड़ी लंबे समय तक सफेद कपड़ों में खेलते रहे हैं और सफलता कभी कपड़ों के रंग से नहीं, बल्कि मैदान पर किए गए प्रदर्शन से तय होती है। Article Source: IANS
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने पर भड़के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा, बोले- यह शर्मनाक है
नई दिल्ली, भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वीरेन टीम की जर्सी का रंग नीले से ऑरेंज किए जाने से काफी नाखुश हैं। उन्होंने हॉकी इंडिया के इस कदम को शर्मनाक बताया है।
FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से पहले भारतीय हॉकी टीम की जर्सी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दशकों से नीली जर्सी में खेलने वाली भारतीय टीम अब वर्ल्ड कप में नारंगी रंग की किट में नजर आएगी। भारतीय हॉकी के दिग्गज और पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने जर्सी का रंग बदलने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। वहीं, हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप कुमार टिर्की ने इस फैसले का बचाव किया है। हॉकी इंडिया ने 27 जुलाई को पुरुष और महिला टीमों की नई जर्सी लॉन्च की थी। पूर्व कप्तान ने फैसले को बताया शर्मनाक भारतीय हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व कप्तान विरेन रासकिन्हा ने इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि भारतीय टीम की पहचान हमेशा नीली जर्सी रही है और इसे बदलने का कोई तर्क समझ नहीं आता।रासकिन्हा ने एक्स (X) पर लिखा- विरेन ने एथेंस ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया विरेन रासकिन्हा जूनियर वर्ल्ड कप 2001 जीतने वाली टीम के सदस्य थे और सीनियर टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। उन्होंने एथेंस ओलिंपिक 2004, मेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2006 और चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें अपने दौर के बेस्ट मिडफील्डर्स में गिना जाता है। टिर्की बोले- खिलाड़ियों की पसंद थी, वर्ल्ड कप के बाद बदल सकते हैं हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप कुमार टिर्की ने कहा कि यह फैसला खिलाड़ियों, कप्तानों, कोच और सपोर्ट स्टाफ के सुझाव पर लिया गया। उन्होंने कहा कि अगर वर्ल्ड कप के बाद खिलाड़ियों को यह जर्सी पसंद नहीं आती है तो भविष्य में इसे बदला भी जा सकता है। भारत ने 1975 में वर्ल्ड कप जीता था FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 टूर्नामेंट का 16वां संस्करण होगा। इंटरनेशनल हॉकी महासंघ (FIH) की ओर से आयोजित यह टूर्नामेंट 14 से 30 अगस्त 2026 तक बेल्जियम के वावरे और नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन में खेला जाएगा। भारत ने अपना आखिरी और इकलौता हॉकी वर्ल्ड कप खिताब 1975 में जीता था। टीम करीब 50 साल बाद फिर से वर्ल्ड चैंपिंयन बनने का सपना लेकर मैदान में उतरेगी। प्रियंका गांधी ने भी आलोचना की कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से नारंगी किए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश की पहचान अहिंसा, सत्य और भाईचारे जैसे मूल्यों से जुड़ी है और इन्हें बदला नहीं जा सकता। --------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स में 8 साल बाद खेलेंगे भारत के जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स में 8 साल बाद आज उतरेंगे। गेम्स के आठवें दिन वे जैवलिन थ्रो के क्वालिफाइंग राउंड में खेलेंगे। नीरज की सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान के ओलिंपिक चैंपियन अरशद नदीम होंगे। पूरी खबर…
आगामी 30 जुलाई से पवित्र श्रावण मास की कांवड़ यात्रा की शुरुआत होने जा रही है, जो 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक के साथ संपन्न होगी। इस दौरान देश भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पैदल या वाहनों के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री धाम पहुंचकर पवित्र गंगाजल लाते हैं और अपने स्थानीय शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के सीमावर्ती जिलों की पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। तीर्थ मार्गों पर भारी-भरकम डीजे सेटअप, किसी भी तरह के हथियारों और मांसाहारी दुकानों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।यात्रा के दौरान क्या करें और क्या न करें?प्रशासन ने कांवड़ियों और शिविर आयोजकों की सुविधा व सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं को अपना वैध पहचान पत्र (ID Proof) हमेशा साथ रखना अनिवार्य है। श्रद्धालुओं से केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित एवं सुरक्षित कांवड़ मार्ग का ही उपयोग करने की अपील की गई है। वहीं, यात्रा के दौरान हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, लाठी-डंडे, तलवार या किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना पूरी तरह वर्जित है। दोपहिया वाहनों पर मॉडिफाइड साइलेंसर और तेज प्रेशर हॉर्न का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा। मार्ग में लगे शिविर आयोजकों के लिए सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन उपकरण और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, ढाबों और होटलों में भोजन या पानी लेने से पहले तय रेट लिस्ट जरूर जांचने की सलाह दी गई है।डीजे और कांवड़ की ऊंचाई को लेकर शहरों में तय नियमविभिन्न जिलों में कांवड़ और डीजे साउंड की सीमा तय कर दी गई है। बागपत पुलिस ने कांवड़ और डीजे सेटअप की अधिकतम ऊंचाई 10 फीट तथा चौड़ाई 12 फीट तय की है। इसके साथ ही डीजे और साउंड सिस्टम का आवाज स्तर 75 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। आगरा में पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई समन्वय बैठक में कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई 12 फीट तय की गई है और डीजे की आवाज तय मानकों के भीतर रखने के निर्देश दिए गए हैं। कांवड़ मार्गों और प्रमुख शिव मंदिरों के आसपास की सभी मीट-मांस की दुकानें यात्रा अवधि के दौरान पूरी तरह बंद रहेंगी।मेरठ के NH-58 डायवर्जन से हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर भारी जामकांवड़ यात्रा के मद्देनजर 28 जुलाई से 10 अगस्त के बीच मेरठ के NH-58 पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। इसके विकल्प के रूप में ट्रकों और भारी कॉमर्शियल वाहनों को हस्तिनापुर खादर क्षेत्र के संकरे रास्ते से निकाला जा रहा है। इस नए डायवर्जन की वजह से हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। सड़क की खस्ताहाल स्थिति और भारी ट्रैफिक के कारण स्थानीय निवासियों, व्यापारियों, किसानों और स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात करने की मांग की है।विभिन्न शहरों और हाईवे पर रूट डायवर्जन का पूरा प्लानमुजफ्फरनगर (NH-58): 29 जुलाई की मध्यरात्रि से 12 अगस्त तक भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। 4 अगस्त तक हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि 4 अगस्त के बाद दोनों लेन केवल कांवड़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी।हरिद्वार: सहारनपुर, दिल्ली, मेरठ और यमुनानगर की ओर से आने वाले वाहनों को मंडावर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम चौक होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग में भेजा जाएगा।देहरादून-ऋषिकेश मार्ग: वाहनों को नेपाली तिराहा और दूधाधारी फ्लाईओवर के रास्ते चमगादड़ टापू व लालजीवाला पार्किंग की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी।दिल्ली-एनसीआर सीमावर्ती जिले: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर पुलिस आपस में समन्वय बनाकर काम कर रही है। रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट देने के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं और अतिरिक्त इमरजेंसी पार्किंग की व्यवस्था की गई है।खान-पान की दुकानों और ढाबों के लिए सख्त गाइडलाइंसखाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) ने यात्रा मार्गों पर स्थित होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट्स की सघन जांच शुरू कर दी है। अकेले हापुड़ जिले में लगभग 130 खान-पान प्रतिष्ठानों की जांच की जा रही है। मुजफ्फरनगर में खाद्य सुरक्षा सहायक आयुक्त अर्चना धीरन के अनुसार, कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों में नॉन-वेज खाना, प्याज और लहसुन का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग की छह टीमें बासी और मिलावटी खाने की जांच कर रही हैं। श्रद्धालुओं से ओवरचार्जिंग रोकने के लिए 21 आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम सरकारी स्तर पर तय किए गए हैं। सभी दुकानों पर प्रोपराइटर की जानकारी, लाइसेंस नंबर और फूड-सेफ्टी QR कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य है। साथ ही खाना बनाने और परोसने वाले कर्मचारियों के लिए हैंड ग्लव्स पहनना अनिवार्य किया गया है।
हमारी बेटी मां से फोन पर बात कर करते हुए जा रही थी...फिर अचानक चीख सुनाई दी और हमेशा के लिए आजाव खामोश हो गया…. यह बात चंड़ीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में 28 जुलाई को जान गंवाने वाली हरियाणा की ज्योति(26) के चाचा जतिंदर ने कही। जतिंदर ने कहा कि सुबह करीब 10 बजे पीयू प्रशासन की तरफ से त्योति कि पिता रविंद्र के फोन पर कॉल आई थी। फोन करने वाले ने कहा कि उनकी बेटी को करंट लग गया है और उसकी मौत हो चुकी है आप जल्दी आ जाइए। लेकिन हम कैसे मान लें कि यह करंट से हुई मौत है। हमने पीयू प्रशासन से कहा कि पीयू कैंपस इतना बड़ा है, वहां कहीं कैमरे लगे होंगे। कोई ऐसा सबूत दिखा दो, जिससे हमें भी लगे उसकी मौत करंट लगने से हुई है, क्योकिं उसके शरीर पर कोई निशान ही नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक हमारे सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक हम शव नहीं लेंगे। जहां हादसा हुआ है, वहां से करीब 50 मीटर दूरी पर सिक्योरिटी गार्ड बैठते हैं, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। वहीं, आज मृतका का पोस्टमॉर्टम होगा। साथ ही पीयू में देर रात मीटिंग का दौर चल रहा था। सूत्रों के अुनसार, प्रशासन मृतका के भाई को नौकरी देने की बात पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान समाने नहीं आया। आखिर कैसे हुई ज्योति की मौत, मदद के लिए सबसे पहले कौन पहुंचा, घटनास्थल की जांच में क्या-क्या सामने आया…जानने के लिए पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट… पहले जानिए हादसा कहां हुआ, करंट कैसे आया हरियाणा के महेंद्रगढ़ की ज्योति PU के साउथ कैंपस के हॉस्टल नंबर- 10 में रहती थी। वह सुबह के वक्त होस्टल नंबर-8 के पास होते हुए कहीं जा रही थी। इस हॉस्टल के दो गेट हैं- एक आगे और दूसर पीछे। जहां हादसा हुआ है वह जगह आगे वाले गेट से करीब 50 मीटर दूर है, यहां पर सिक्योरिटी गार्ड भी बैठते हैं। जबकि पीछे वाला गेट हादसे वाली जगह से सिर्फ 15 मीटर दूर है, हालांकि यहां पर सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं रहते हैं। सुबह के वक्त तेज बारिश हो रही थी, जिससे सड़क पर करीब आधा फीट पानी भरा हुआ था। जिससे ज्योति सड़क की बजाय फुटपाथ से होकर जा रही थी। जब वह हॉस्टल नंबर-8 के पीछे वाले गेट से 15 मीटर पास पहुंची, तो यहां पर फुटपाथ पर एक मोटी केबल डली हुई थी। हादसे वाली जगह की जांच टीम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यहां पर जंक्शन बॉक्स लगे हुए हैं और केबल भी फैली हुई हैं। इन्हीं में से एक केबल में कट था और बारिश की नमी के कारण केबल में स्पार्किंग हुई, जिससे फुटपाथ पर करंट फैल गया। जब वहां से ज्योति निकली तो करंट लग गया। हालांकि ज्योति के परिजन जब पीयू पहुंचने वाले थे, तो उससे ठीक पहले पीयू का स्टाफ वहां पहुंच गया। सभी जंक्शन बॉक्स बंद किए गए और वहां बैरिकेड भी लगा दिए गए। इससे पहले वहां से लोग भी गुजर जरते रहे। पिता बस ड्राइवर, बेटी ने स्कालरशिप से पढ़ाई की चाचा जतिंदर ने बताया कि ज्योति शुरू से ही पढ़ने में काफी होशियार थी। उसके पिता रविंद्र एक स्कूल में बस ड्राइवर हैं। उन्हें हर महीने साढ़े 12 हजार रुपए मिलते हैं। इससे तो घर का खर्च भी बड़ी मुश्किल से चलता है। वह माइक्रोबायोलॉजी में पीएचडी कर रही थी। उसे स्कॉलरशिप मिल रही थी, जिसके दम पर वह पढ़ रही थी। वहीं, परिवार को उम्मीद थी कि जल्दी ही उसे अच्छी नौकरी मिल जाएगी, जिससे परिवार के दिन बदल जाएंगे। लेकिन अब किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि ऐसा भी हो सकता है। परिवार में उसका एक छोटा भाई भी है। पहले बैग फिर हॉकी की मदद से निकाला करंट लगने के तुरंत बाद ज्योति की मदद करने वाले वंशराज ने बताया कि घटना सुबह 9 से 10 बजे के बीच की है। वह साइकिल पर जा रहे थे। उस समय बारिश हो रही थी। लड़की वहां (फुटपाथ की तरफ इशारा करते हुए) से आई थी। वह पानी में गिरी हुई थी। इसके बाद मैंने साइकिल रोकी और उसकी मदद के लिए आगे आया। पहले उसका बैग पकड़कर निकालने की कोशिश की, लेकिन बैग की तनी टूट गई। फिर वहां हॉकी स्टिक लेकर जा रहे एक लड़के से हॉकी ली और उसकी मदद से लड़की को पानी से निकालने की कोशिश की। हालांकि तब तक वह बेसुध हो चुकी थी। इसके बाद उसे साइड में ले गया और उसके पैरों की मालिश की। लोग जुट गए। इतने में एंबुलेंस आ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। ज्योति बहुत चिल्लाई, लेकिन मदद नहीं मिली हॉस्टल के बाद धरने पर बैठी छात्राओं ने कहा कि करंट लगने के बाद ज्योति करीब एक से दो मिनट तक चिल्लाती रही, लेकिन उसकी मदद के लिए PU का कोई भी स्टाफ सामने नहीं आया। घटना स्थल से 100 मीटर से भी कम दूरी पर स्कूल है, लेकिन वहां से भी कोई नहीं आया। योगा-डे का मैसेज आता है, मौत की खबर नहीं छात्राओं ने कहा कि योगा-डे, पर्यावरण दिवस या पौधारोपण हो, हर कार्यक्रम का मैसेज वॉट्सएप ग्रुप में आता है। कहा जाता है कि अगर आप इसमें शामिल नहीं होंगे तो आपको यहां से निकाल दिया जाएगा। लेकिन आज लड़की की मौत हो गई, फिर भी किसी भी वार्डन का मैसेज नहीं आया कि ऐसी घटना हुई है, आप वहां न जाएं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि सिक्योरिटी स्टाफ क्या कर रहा था। एक छात्रा दीपिका ने बताया कि हॉस्टलों के वाटर कूलरों का भी बुरा हाल है। उनमें भी करंट आ जाता है। पता नहीं किस समय बड़ा हादसा हो जाए। छात्र नेता बोले- परिवार को मुआवजा दिया पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र नेता सारा ने कहा- हमने वीसी को मांग पत्र दिया है। हमने साफ कहा है कि इस घटना के लिए एक्सईएन ऑफिस के जिम्मेदार लोग तुरंत इस्तीफा दें। उन पर लापरवाही का केस दर्ज किया जाए। परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। पूरी यूनिवर्सिटी में बिजली के जंक्शन बॉक्स की जांच हो और पेड़ों की छंटाई तुरंत कराई जाए। इसके साथ ही हमने मांग रखी है कि साउथ कैंपस में एक स्थायी हेल्थ सेंटर बनाया जाए और 24 घंटे एंबुलेंस तैनात की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने। डीएसडब्ल्यू बोलीं- विशेषज्ञों से राय ले रहे पंजाब यूनिवर्सिटी की डीएसडब्ल्यू (वीमेन) - प्रो. नमिता गुप्ता ने कहा कि हम इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों से राय ले रहे हैं। वे साइट विजिट कर रहे हैं। भविष्य में इस तरह की घटना न हो, इस पर काम किया जा रहा है। बच्चे की भरपाई तो कर पाना मुश्किल है, लेकिन यूनिवर्सिटी अपनी तरफ से प्रयास कर रही है। छात्रों की कमेटी बनाई गई है। उनकी सभी मांगों पर विचार किया जाएगा। बाकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत की वजह साफ हो जाएगी। ************** ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़ PU में हरियाणा की छात्रा की करंट से मौत: गुस्साए स्टूडेंट्स गेट तोड़ VC ऑफिस में घुसे; परिजनों का शव लेने से इनकार, अगले महीने शादी थी चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) में मंगलवार सुबह PhD स्कॉलर युवती की करंट लगने से मौत हो गई। वह गर्ल्स हॉस्टल से अपने विभाग में पढ़ाई के लिए जा रही थी। इसी दौरान वह अचानक कच्चे रास्ते पर नीचे गिर पड़ी। यह देखकर स्टूडेंट्स उसे उठाने के लिए दौड़े। (पढ़ें पूरी खबर)
जहीर खान और उनकी पत्नी सागरिका घाटगे ने ‘Akutee’ ब्रांड की शुरुआत की
बेंगलुरु। पल्लू, दुपट्टे और जैकेट पर खूबसूरत रंगों में की गई कढ़ाई और पेंटिंग घाटगे शाही परिवार का एक रहस्य रहा होगा, जिसका इस्तेमाल प्रियजनों के कपड़ों को प्यार से सजाने के लिए किया जाता था। हालांकि क्रिकेटर जहीर खान की व्यावसायिक समझ से अब यह एक ब्रांड अकुती में तब्दील हो गया है। अभिनेत्री, मॉडल एवं राष्ट्रीय स्तर की पूर्व हॉकी चैंपियन सागरिका घाटगे अकुती ब्रांड को अपनी मां उर्मिला घाटगे के साथ चलाती हैं। सागरिका घाटगे ने कहा, “हाथ से पेंटिंग मेरे बचपन का हिस्सा रहे हैं। मेरी मां लंबे समय से यह करती रही हैं। हालांकि शुरू में मैं इसे उतनी गंभीरता से नहीं लेती थी, लेकिन मेरे पति (जहीर खान) ने मुझे इसे एक विशेष कलेक्शन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मां-बेटी की जोड़ी ने बेंगलुरु में ‘फोर सीजन्स’ में अपने कलेक्शन की शुरुआत की। सोलह मई को होटल में एक दिन के लिए साड़ियों, दुपट्टों और ब्लेजर का संग्रह प्रदर्शित किया गया। घाटगे ने कहा कि जब उन्होंने लगभग एक साल पहले इसकी शुरुआत करने का फैसला किया, तो एक ब्रांड नाम के लिए ‘अकुती’ एक स्वाभाविक पसंद बन गई, जिसका मराठी में अर्थ राजकुमारी होता है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival में दिखाई गई श्याम बेनेगल की फिल्म मंथन, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह मौजूद खान ने कहा, ‘‘हां, वह एक राजकुमारी है। घाटगे ने कहा कि यह नाम सिर्फ उनके खानदान का संकेत नहीं है, बल्कि उनके परिवार की सभी महिलाओं के लिए एक सम्मान भी है। घाटगे ने कहा, अकुती समय में पीछे ले जाता है। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन की प्रेरणा सीधे कोल्हापुर के शाही घाटगे परिवार के बगीचों से आती है। घाटगे ने कहा, मेरी मां वास्तव में बागवानी में रुचि रखती हैं और हमारे बगीचे में खिलने वाले फूल हमारे कपड़ों पर हाथ से पेंट की गई डिजाइन में तब्दील हो जाते हैं।

