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56 साल पुराना अपोलो-13 का रिकॉर्ड आज रात टूटेगा:पृथ्वी से 4.02 लाख किमी दूर जाएंगे 4 एस्ट्रोनॉट्स; चांद के 'अंधेरे हिस्से' की फोटो खीचेंगे

नासा के ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। भारतीय समयानुसार 6 अप्रैल को उन्होंने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। अब ये अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देखेंगे जिसे इंसानों ने आज तक सिर्फ तस्वीरों में देखा है। वे पृथ्वी से सबसे दूर जाने का 56 साल पुराना रिकॉर्ड भी आज रात तोड़ देंगे। अपोलो 13 ने 1970 में धरती से सबसे ज्यादा दूरी 4 लाख 171.18 km का रिकॉर्ड बनाया था। नासा के मौजूदा मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी दूर तक पहुंचने की उम्मीद है। आर्टेमिस-II फ्लाईबाय का पूरा शेड्यूल नोट: EST यानी ईस्टर्न स्टैंडर्ड टाइम और IST इंडियन स्टैंडर्ड टाइम के बीच 10 घंटे 30 मिनट का अंतर है। EST का टाइम 6 अप्रैल का हैं। IST का टाइम 7 अप्रैल का हैं। चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी होगी नासा ने क्रू को चांद की सतह के 30 खास टारगेट की लिस्ट भेजी है, जिनकी उन्हें फोटोग्राफी करनी है। इनमें सबसे प्रमुख ‘ओरिएंटल बेसिन’ है, जो करीब 600 मील चौड़ा क्रेटर है। यह बेसिन 3.8 अरब साल पहले उल्कापिंड के टकराने से बना था। इसके अलावा वे 'हर्ट्जस्प्रंग बेसिन' का भी अध्ययन करेंगे ताकि समझ सकें कि समय के साथ चांद की सतह कैसे बदली। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-II का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल 'गुलेल' की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। मकसद: 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच चाहता है नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच करना है। नासा देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। 4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है। 1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) मिशन कमांडर हैं। 2014 में स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं। 2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई 'अर्थराइज' फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी। 3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले गए हैं। 4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले गए हैं। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है। अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही 'स्पेस रेस' में खुद को बेहतर साबित करना था। आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। नासा का आर्टेमिस-II मिशन 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भारतीय समय के अनुसार 2 अप्रैल को 'आर्टेमिस-2' मिशन लॉन्च किया था। सुबह 4:05 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ। साल 1972 में 'अपोलो-17' के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री स्पेसक्राफ्ट से चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर धरती पर लौटेंगे। यह मिशन 10 दिन का है। नॉलेज पार्ट:

दैनिक भास्कर 6 Apr 2026 7:33 pm

अप्रैल 2026 में होगा स्मार्टफोन धमाका! जानें कौन सा फोन है सबसे दमदार?

अप्रैल 2026 में Realme, Vivo, OnePlus और OPPO के नए स्मार्टफोन लॉन्च ने बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है। 7000mAh+ बैटरी, 200MP कैमरा और गेमिंग फीचर्स के साथ यह महीना टेक इंडस्ट्री के लिए बड़ा बदलाव साबित हो रहा है।

प्रातःकाल 6 Apr 2026 6:05 pm

ट्रायम्फ ट्रैकर 400 भारत में लॉन्च:40hp पावरफुल बाइक में 17-इंच के अलॉय व्हील, कीमत ₹2.46 लाख

ब्रिटिश प्रीमियम बाइक निर्माता कंपनी ट्रायम्फ ने आज (6 अप्रैल) भारत में अपनी नई मोटरसाइकिल ट्रैकर 400 लॉन्च कर दी है। कंपनी ने इस बाइक को खास भारतीय बाजार की टैक्स नीतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। इसमें पुराना 398cc का इंजन न देकर, 40hp पावर वाला एक बिल्कुल नया डाउनसाइज्ड 349cc का इंजन दिया गया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹2,46,000 है। ये स्पीड 400 से ₹14,000 महंगी और स्क्रैम्बलर 400X से ₹14,000 सस्ती है। ट्रायम्फ की भारतीय लाइनअप डिजाइन और लुक: फ्लैट-ट्रैक रेसिंग से प्रेरित है स्टाइल डिजाइन के मामले में ट्रायम्फ ट्रैकर 400 बाकी मॉडल्स से काफी अलग दिखती है। इसे एक 'फ्लैट-ट्रैक' इंस्पायर्ड रोड बाइक के तौर पर डिजाइन किया गया है। हार्डवेयर और टायर: 17-इंच के नए अलॉय व्हील्स ट्रैकर 400 का वजन 181kg है, जो कि नई स्पीड 400 से लगभग 2 किलो ज्यादा है। राइडिंग को कंफर्टेबल बनाने के लिए इसमें प्रीमियम हार्डवेयर का इस्तेमाल किया गया है। इंजन और परफॉर्मेंस: कम डिस्प्लेसमेंट के बावजूद पावर में कमी नहीं ट्रैकर 400 की सबसे बड़ी खासियत इसका नया 349cc इंजन है। दरअसल, ट्रायम्फ ने टैक्स बचाने के लिए अपने पुराने 398cc इंजन के स्ट्रोक को कम करके इसे 349cc का बनाया है। भारत में 350cc से कम की बाइक्स पर 18% GST लगता है, जबकि इससे ऊपर की बाइक्स पर यह 40% तक चला जाता है।

दैनिक भास्कर 6 Apr 2026 5:17 pm

चीन का ड्रोन कंट्रोल:दुनियाभर के 80% ड्रोन बनाने वाले चीन में मई से रियल-नेम रजिस्ट्रेशन और मोबाइल लिंकिंग जरूरी

दुनिया के करीब 80% कमर्शियल ड्रोन बनाने वाला चीन अब अपने आसमान में सख्ती से ‘ड्रोन कंट्रोल’ लागू कर रहा है। 2025 तक देश में 30 लाख से ज्यादा ड्रोन रजिस्टर्ड हो चुके हैं, जो एक साल में 50% की वृद्धि है, लेकिन इसी तेजी के साथ सरकार ने नियंत्रण भी कड़ा कर दिया है। बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर सजा और जेल तक का प्रावधान लागू किया गया है। मई से हर ड्रोन का रियल-नेम रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और उड़ान का डेटा रियल टाइम में सरकार तक जाएगा। ड्रोन का रियल टाइम डेटा सरकार को देना होगा - ड्रोन को आईडी या मोबाइल नंबर से लिंक करना जरूरी होगा।- उड़ान का रियल टाइम डेटा सरकार के पास भेजना होगा।- प्रतिबंधित क्षेत्रों में उड़ान से एक दिन पहले परमिट लेना अनिवार्य।- कई शहरों में बड़े हिस्से को नो-फ्लाई जोन घोषित किया।- छोटे ड्रोन को भी 400 फीट से नीचे सीमित छूट दी गई है।- बीजिंग में ड्रोन की बिक्री, किराया और बाहरी एंट्री पर भी रोक। - एक पते पर अधिकतम 3 ड्रोन रखने की सीमा तय की गई है।- बिना अनुमति उड़ान पर जुर्माना, जब्ती और जेल का प्रावधान।- ड्रोन बाजार पर भी असर साफ दिख रहा है। लोकल मार्केट में डिमांड घटने से डीलरों की बिक्री तेजी से घटी है,कई लोग ड्रोन फोटोग्राफी जैसे नए बिजनेस छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

दैनिक भास्कर 6 Apr 2026 3:38 pm

नासा का आर्टेमिस II रचेगा इतिहास; चाँद के उस हिस्से तक पहुँचेंगे जहाँ आज तक कोई नहीं गया

नासा का ऐतिहासिक मिशन चंद्रमा की उन गहराइयों तक पहुंचेगा जहां पहले कोई इंसान नहीं गया, ओरियन यान ने भेजी चंद्रमा के ग्रैंड कैन्यन की तस्वीरें।

प्रातःकाल 6 Apr 2026 7:30 am

क्या यह Royal Enfield को कड़ी टक्कर देगी Triumph 350cc? जानें नए फीचर्स और स्पेसिफिकेशन

ट्रायम्फ 350cc रेंज के इंजन स्पेसिफिकेशन लीक; स्पीड 400 और थ्रक्सटन के नए पावर आंकड़े आए सामने। जानें 6 अप्रैल को होने वाले बड़े लॉन्च की पूरी जानकारी।

प्रातःकाल 5 Apr 2026 3:47 pm

गूगल के 5 अपडेट्स; एंड्रॉइड फोन में मिलेगा डार्क मोड:मैप्स से सवाल-जवाब पूछें, जीमेल आईडी बदलने की सुविधा मिलेगी

गूगल ने हाल ही में कई बड़े अपडेट्स की घोषणा की है। एंड्रॉइड यूजर्स हों या गूगल की ऑनलाइन सर्विस इस्तेमाल करने वाले... ये बदलाव सीधे यूजर्स के रोजमर्रा के अनुभव को बेहतर कर सकेंगे। कंपनी अपने इकोसिस्टम को ज्यादा स्मार्ट और यूजर फ्रेंडली बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पहली बार एंड्रॉइड से आईफोन में भी फाइलें डायरेक्ट ट्रांसफर करने का विकल्प यूजर्स को दिया जाएगा। 1. एंड्रॉइड 17 - एप में डार्क मोड, बबल्स फीचर आएंगे गूगल का नया ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉइड-17 बीटा में है और जल्द लॉन्च होने की उम्मीद है। यह अब प्लेटफॉर्म स्टेबिलिटी स्टेज में पहुंच चुका है, यानी इसके फीचर्स लगभग फाइनल हो चुके हैं। बबल्स फीचर अब यूजर एक साथ कई एप्स को छोटे बबल के रूप में स्क्रीन पर रख सकते हैं। टैप करके एप खोल सकते हैं। 5 से 6 एप्स तक साथ चला सकेंगे। डार्क मोड उन एप्स पर भी डार्क थीम लागू की जा सकेगी जिनमें यह सुविधा नहीं है। पहली बार ये फीचर दिया गया है। 2.गूगल मैप्स - आस्क मैप्स और इमर्सिव व्यू जैसे फीचर अब सिर्फ नेविगेशन नहीं, स्मार्ट असिस्टेंट बन रहा है गूगल मैप्स। इसे अब एक गाइड और असिस्टेंट की तरह विकसित किया जा रहा है। इसमें गूगल जेमिनी के साथ इंटीग्रेशन भी किया जा रहा है। आस्क मैप्स इसमें यूजर अब सिर्फ जगह नहीं खोजेंगे, बल्कि अपनी पसंद के हिसाब से सवाल पूछ सकेंगे जैसे शहर में किस तरह का खाना पॉपुलर हो रहा है, भीड़ का स्तर क्या है और सबसे बेस्ट रूट कौन सा होगा? इमर्सिव व्यू इसमें 3D विजुअल्स के साथ सड़क, फ्लाईओवर और आसपास की बिल्डिंग्स का रियल टाइम एक्सपीरियंस मिलेगा। इससे रास्ता समझना आसान होगा। 3. जीमेल में बदल सकेंगे ईमेल यूजर अपनी जीमेल आईडी बदल सकेंगे। पुराने मेल भी सुरक्षित रहेंगे। नई आईडी बनाने के बाद भी पुरानी आईडी पर आने वाले मेल मिलते रहेंगे। 4. जेमिनी बनाएगा गाना गाने के हिस्से जैसे इंट्रो-बीट्स लिख सकते हैं, जेमिनी वोकल्स के साथ गाना बना देगा। फ्री में 30 सेकंड व पेड यूजर्स 3 मिनट तक गाने बना देगा। 5. एपल-एंड्रॉइड फाइल शेयर अब एंड्रॉइड फोन से AirDrop सुविधा के जरिए iPhone में सीधे फाइल भेजी जा सकेगी। यह पिक्सल के बाद सैमसंग व अन्य डिवाइस में आएगा।

दैनिक भास्कर 4 Apr 2026 2:54 pm

इंस्टाग्राम का भी पेड वर्जन, आ रहा इंस्टाग्राम प्लस:मैक्सिको, जापान और फिलीपींस में टेस्टिंग शुरू की; 200 रुपए हो सकती है सब्सक्रिप्शन फी

मेटा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नया सब्सक्रिप्शन मॉडल टेस्ट कर रही है। इसका नाम ‘इंस्टाग्राम प्लस’ है। यह मेटा की एक पेड सर्विस होगी, जिसमें यूजर्स को कुछ नए और एक्सक्लूसिव फीचर्स मिलेंगे, खासकर ये फीचर्स उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी से जुड़े होंगे। फिलहाल इस नई सुविधा की टेस्टिंग मैक्सिको, जापान और फिलीपींस जैसे देशों में हो रही है। इसके रोलआउट होने की जल्द संभावना की जा रही है। 24 घंटे से ज्यादा देख सकेंगे स्टोरी, क्लोज फ्रेंड्स लिस्ट बढ़ जाएगी - बिना नाम दिखे स्टोरी देखें अब किसी की स्टोरी देखने पर आपका नाम सामने वाले को नहीं दिखेगा। अधिक क्लोज फ्रेंड्स लिस्ट अभी तक सिर्फ एक क्लोज फ्रेंड्स लिस्ट बनती है। अब अलग अलग ग्रुप बनाकर अलग ऑडियंस को स्टोरी दिखा सकेंगे। स्टोरी कितनी बार देखी गई, यह भी दिखेगा सिर्फ व्यू नहीं, बल्कि कितनी बार किसी ने आपकी स्टोरी दोबारा देखी, इसका डेटा भी आपको इंस्टाग्राम आपको देगा। स्टोरी 24 घंटे से ज्यादा चलेगी फिलहाल स्टोरी का समय 24 घंटे है। अब स्टोरी की विजिबिलिटी बढ़ाने का ऑप्शन मिलेगा, जिससे 24 घंटे से ज्यादा समय एक्टिव रह सकेगी। सुपरलाइक्स और सर्च फीचर यूजर्स इस नए अपडेट से स्टोरी पर एनिमेटेड सुपरलाइक्स भेज सकेंगे। व्यूअर लिस्ट में लोगों को सर्च करने का ऑप्शन भी मिलेगा। कितनी हो सकती है कीमत? यह फीचर काफी हद तक स्नैपचैट के स्नैपचैट प्लस जैसा हो सकता है, हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पूरी जानकारी या ग्लोबल लॉन्च डेट शेयर नहीं की है। इस फीचर की कीमत कुछ इस प्रकार हो सकती है। - मैक्सिको- करीब 200 रुपए महीना - जापान- करीब 188 रुपए महीना - फिलीपींस - करीब 100 रुपए महीना - भारत में जब लॉन्च होगा तो सब्सक्रिप्शन इसी दायरे में रहने की संभावना है।

दैनिक भास्कर 4 Apr 2026 2:27 pm

1.8 लाख-किलोमीटर दूर से कैसी दिखती है पृथ्वी, 4 PHOTOS:आर्टेमिस-2 मिशन के एस्ट्रोनॉट ने खींचीं; 1972 के बाद पहली बार चांद के करीब जा रहे इंसान

नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चंद्रमा की ओर जाते हुए चार अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की शानदार तस्वीरें खींचीं हैं। पृथ्वी नीले रंग में बेहद खूबसूरत दिख रही है। एक फोटो में पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा दिखा जबकि दूसरी फोटो में पूरी धरती नजर आई, जिस पर सफेद बादल छाए थे। मिशन पर गए चार अंतरिक्ष यात्री (3 अमेरिकी, 1 कनाडाई) फिलहाल पृथ्वी से करीब 1.8 लाख किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं। अभी उन्हें 2.4 लाख किलोमीटर और जाना है। वे 6 अप्रैल तक चंद्रमा के पास पहुंचेंगे। 1 अप्रैल को सुबह 4:05 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ था। 1972 के बाद पहली बार कोई इंसान चांद के करीब जाएगा। हालांकि एस्ट्रोनॉट चांद पर कदम नहीं रखेंगे। वे सिर्फ चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। मून मिशन के दौरान ली गईं 5 तस्वीरें… 54 साल में कितनी बदली पृथ्वी, 2 तस्वीरें… एक दिन पहले ओरियन कैप्सूल ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ी थी आर्टेमिस-2 मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। एक दिन पहले शुक्रवार सुबह 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी। अब यह अगले 4 दिन अंतरिक्ष में सफर करेगा और वहां पहुंचेगा, जहां आज तक केवल 24 इंसान पहुंच सके हैं। पृथ्वी के ऑर्बिट को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की इस प्रोसेस को 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न' कहते हैं। यह करीब 6 मिनट का मैन्यूवर था, जिसने यान की रफ्तार बढ़ाकर 22,000 मील प्रति घंटा यानी करीब 34 हजार किमी/घंटा कर दी। मिशन के अगले पड़ाव…अगले 5 दिन पांचवां दिन: चंद्रमा की ग्रेविटी में दाखिल होगा आर्टेमिस-2 5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा। छठा दिन: बास्केटबॉल जैसा बड़ा नजर आएगा चंद्रमा छठे दिन ओरियन चांद की सतह से महज 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देख पाएंगे, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। खिड़की से देखने पर चांद इतना बड़ा दिखेगा, जैसे हाथ के पास कोई बास्केटबॉल रखी हो। 50 मिनट के लिए टूट सकता है संपर्क: जब ओरियन चांद के पीछे से गुजरेगा तो पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह कट सकता है। करीब 50 मिनट तक 'कम्युनिकेशन ब्लैकआउट' रहेगा। मिशन कंट्रोल को यान से सिग्नल नहीं मिलेगा। पहली बार धरती से इतनी दूर पहुंचेंगे: इसी दिन अपोलो 13 का 1970 में बनाया गया धरती से सबसे ज्यादा दूरी का 400,171.18 km का रिकॉर्ड भी टूट सकता है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी की दूरी तक पहुंचने की उम्मीद है। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान सातवें दिन चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल 'गुलेल' की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने वाली पहली महिला बनेंगी क्रिस्टीना: पहली बार फेल हो गईं थीं नासा के मून मिशन आर्टेमिस-2 की चार सदस्यीय टीम में शामिल 47 वर्षीय अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनने जा रही हैं। 2019-20 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 328 दिन बिताकर उन्होंने किसी महिला की सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष यात्रा (उड़ान से लैंडिंग तक) का रिकॉर्ड बनाया था। इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 4 Apr 2026 11:09 am

Gmail यूजर्स अपना ईमेल एड्रेस बदल सकेंगे:गूगल लाया नया फीचर; पुराने इनबॉक्स में ही आएंगे नए मेल, जानें पूरी प्रोसेस

गूगल ने अपने ईमेल प्लेटफॉर्म जीमेल में नया फीचर लॉन्च किया है, जिससे अब आप अपनी ईमेल आईडी का यूजरनेम (@gmail.com से पहले वाला हिस्सा) बदल सकेंगे। कंपनी के मुताबिक, यह आपकी डिजिटल पहचान को अपग्रेड करने का एक तरीका है। फिलहाल यह अपडेट अमेरिकी यूजर्स के लिए है, जो उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो अपना 'अजीब' यूजरनेम बदलना चाहते थे। आगे हम आपको इसे बदलने का पूरा प्रोसेस और पुराने एड्रेस से जुड़ी जरूरी बातें बताएंगे। गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने X पर पोस्ट कर लिखा, 2004 एक अच्छा साल था, लेकिन आपके Gmail एड्रेस को उसमें फंसे रहने की जरूरत नहीं है। अब यूजर्स को अपने पुराने या 'शर्मिंदा' करने वाले ईमेल एड्रेस (जैसे- coolboy123) के साथ रहने की जरूरत नहीं है। गूगल अब इसे बदलने की सुविधा दे रहा है।' यूजरनेम बदलने पर पुराना ईमेल एड्रेस भी बना रहेगा जैसे ही आप अपना नया Gmail एड्रेस चुनते हैं, आपका पुराना ईमेल एड्रेस पूरी तरह डिलीट नहीं होगा। बदलाव से पहले इन बातों का ध्यान रखें ईमेल बदलना आसान है, लेकिन गूगल ने कुछ जरूरी सावधानियां बरतने को कहा है। Gmail यूजरनेम बदलने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस 12 महीने में एक बार ही बदल सकेंगे यूजरनेम गूगल ने इस सुविधा के साथ कुछ सीमाएं भी तय की हैं।

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 11:07 pm

ओप्पो फाइंड X9 रिव्यू:₹75,000 कीमत में 12 घंटे का बैटरी बैकअप और हसललैड कैमरा; जानें खरीदने से पहले 3 बातें

ओप्पो का नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन फाइंड X9 मार्केट में आ गया है। ये 75 हजार रुपए की शुरुआती कीमत में आता है। इसे हमने पिछले दो महीने से प्राइमरी फोन की तरह इस्तेमाल किया है। फोन दिखने में जितना दमदार है, इसके फीचर्स भी उतने ही अट्रेक्टिव हैं, हालांकि कुछ कमियां भी हैं, तो चलिए जानते हैं इसमें क्या खास है... ओप्पो फाइंड X9: डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी ये कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप फोन है, जो एयरोस्पेस-ग्रेड एल्यूमिनियम फ्रेम पर बना है, जो हल्का लेकिन मजबूत है। फ्रंट और बैक ग्लास कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i से कवर है, जो स्क्रैच रेसिस्टेंट है। कैमरा या AI फीचर्स के लिए साइड में कस्टमाइजेबल स्नैप की दी गई है। 3D अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर बारिश में भी काम करता है। फ्रंट में डिस्प्ले फ्लैट स्क्रीन के साथ 1.15mm की अल्ट्रा-थिन बेजल्स हैं, जो एज-टू-एज व्यूइंग देते हैं। फोन IP68/IP69 रेटेड है, यानी हाई-प्रेशर वॉटर जेट्स भी झेल सकता है। कैमरा मॉड्यूल सिंगल यूनिट जैसा लगता है, जो फोन को स्लीक लुक देता है। कुल मिलाकर, फोन डेली यूज में प्रीमियम लगता है। ओप्पो फाइंड X9 157mm लंबा, 73.9mm चौड़ा और 8mm मोटा है और वजन सिर्फ 203 ग्राम है। जिससे यह हाथ में लेते ही काफी सॉलिड महसूस होता है। ओप्पो फाइंड X9: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले : ओप्पो ने डिस्प्ले का साइज बैलेंस रखा है। वीवो के फोन या तो बहुत छोटे होते हैं या बहुत बड़े, लेकिन फाइंड X9 का 6.56 इंच का डिस्प्ले सिंगल-हैंड यूसेज के लिए अच्छा है। यह 2760 1256 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 1.5K ओलेड OLED फ्लैट स्क्रीन है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है और इसका टच सेंपलिंग रेट 240Hz है, यानी टच स्मूद चलता है। 1800 निट्स की ब्राइटनेस की वजह से तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। इसका LTPS पैनल है, जिससे रिफ्रेश रेट 1Hz तक नीचे नहीं जा सकता, जिससे बैटरी पर थोड़ा असर पड़ता है। हालांकि, विजुअल क्वालिटी टॉप-क्लास है। स्क्रीन को ओप्पो क्रिस्टल शील्ड ग्लास से प्रोटेक्ट किया गया है और P3 डिस्प्ले चिप से तस्वीरें और भी क्लीयर दिखती हैं। कंपनी ने मोबाइल को इन डिस्प्ले​ फिंगरप्रिंट सेंसर तकनीक से लैस किया है। परफॉर्मेंस : परफॉर्मेंस के लिए फोन में 3नैनोमीटर फेब्रिकेशन्स पर बना मीडियाटेक डायमेंसिटी 9500 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जो 4.21GHz तक की क्लॉक स्पीड पर रन कर सकता है। इसमें LPDDR5X रैम और UFS 4.1 स्टोरेज है, जिससे एप्स जल्दी खुलते हैं और मल्टीटास्किंग स्मूद रहती है। हैवी परफॉर्मेंस और गेमिंग के लिए फाइंड X9 में ट्रिनिटी इंजन लगाया गया है, जो स्मूथ और लैग फ्री गेमिंग एक्सपीरियंस देता है। मोबाइल गेमिंग के दौरान फोन को हीट होने से रोकने के लिए इसमें 36,344.4mm कूलिंग डिसपेशन एरिया दिया गया है। यह ओपो मोबाइल ग्राफिक्स के लिए आर्म माली ड्रेग MC12 जीपीयू सपोर्ट करता है। 1 घंटे से ज्यादा लगातार गेमिंग के दौरान इसने 114 FPS का औसत निकाला। एप स्विचिंग और मल्टीटास्किंग में कोई लैग महसूस नहीं हुआ। सॉफ्टवेयर : फोन एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड कलर OS 16 पर काम करता है, जो काफी हद तक वनप्लस के सॉफ्टवेयर जैसा ही है। यह स्मूथ और रिलायबल है, लेकिन इसमें 'हॉट एप्स' और 'हॉट गैम्स' जैसे फालतू एप्स भी मिलते हैं। हालांकि, इन्हें सेटिंग्स में जाकर डिसेबल किया जा सकता है। कैमरा : फोटोग्राफी के लिए ओप्पो फाइंड X9 के बैक पैनल पर हसलब्लैड कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50 मेगापिक्सल सोनी LYT808 मेन सेंसर, 50 मेगापिक्सल अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस, 50 मेगापिक्सल पेरिस्कोप टेलिफोटो लेंस और 2 मेगापिक्सल मोनोक्रोम सेंसर शामिल है। मोबाइल 120x AI टेलिस्कोपिक यूम सपोर्ट करता है। इससे काफी दूर के ऑब्जेक्ट भी अच्छी क्वालिटी में कैप्चर किए जा सकते हैं। फोन में 120fps पर 4K डॉल्बी विजन वीडियो रिकॉर्ड की जा सकती है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फ्रंट में 32 मेगापिक्सल कैमरा लगाया गया है। यह सोनी IMX615 सेंसर पर काम करता है। हसलब्लैड की ब्रांडिंग की वजह से कलर्स बहुत नेचुरल और एक्यूरेट आते हैं। 3x पोर्ट्रेट शॉट्स अच्छे हैं, हालांकि लो-लाइट पोर्ट्रेट में यह वीवो X200 प्रो जितना नहीं है। डे-लाइट में वीडियो बहुत स्टेबल हैं, लेकिन रात में थोड़ा नॉइज दिखता है। बैटरी : फोन में सबसे खास इसकी 7025mAh बैटरी है, जो 80W फास्ट वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है। हैवी कैमरा यूसेज के बाद भी यह फोन डेढ़ दिन तक आराम से चलाता। स्क्रीन ऑन टाइम में हमें 10 से 12 घंटे का बैकअप मिला। खास फीचर्स : फोन का एक मजेदार फीचर 'वेट टच' टेक्नोलॉजी है। यानी अगर डिस्प्ले पर पानी गिरा हो या आपके हाथ गीले हों, तब भी फिंगरप्रिंट और टच एकदम परफेक्ट काम करता है। साथ ही, IP69 रेटिंग की वजह से इसे पानी से कोई खतरा नहीं है। कमियां : ₹75,000 के फोन में आज भी USB 2.0 पोर्ट दिया गया है, जबकि इस बजट में USB 3.0 होना चाहिए था। वाइब्रेशन फीडबैक थोड़ा और स्ट्रॉन्ग हो सकता था। फोन सेटअप करते समय काफी फालतू ऐप्स हटाने पड़ते हैं। फाइनल वर्डिक्ट : फोन को वैरिएंट में आता है, इसके 12GB रैम + 256GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत 74,999 रुपए और 16GB रैम + 512GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत ₹75,000 है, जो थोड़ी ज्यादा लगती है। अगर आपको यह फोन ऑफर के बाद ₹65,000 के अंदर मिलता है, तो आप इसे बिना सोचे खरीद सकते हैं।

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 4:44 pm

2026 सुजुकी बर्गमैन स्ट्रीट भारत में लॉन्च:शुरुआती कीमत ₹1.02 लाख; टॉप वेरिएंट में TFT डिस्प्ले मिलेगा, 24.6 लीटर का बड़ा स्टोरेज

सुजुकी ने अपने पॉपुलर मैक्सी-स्कूटर बर्गमैन स्ट्रीट का 2026 मॉडल लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे नए प्लेटफॉर्म, एडवांस फीचर्स और डिजाइन में बदलाव के साथ उतारा है। TFT वेरिएंट में डुअल-टोन कलर्स मिलेंगे, जबकि LCD वेरिएंट सिंगल-टोन कलर में आएगा। दिल्ली में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1.02 लाख रुपए रखी गई है, जो टॉप-स्पेक वेरिएंट के लिए 1.13 लाख रुपए तक जाती है। नए मॉडल में कंपनी ने एक्सेस 125 वाले प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है, जिससे यह पहले से ज्यादा मजबूत और हल्का हो गया है। कीमत और वेरिएंट्स नोट: कीमत एक्स-शोरूम, दिल्ली की है। एलईडी हेडलाइट और एग्जॉस्ट में बदलाव कंपनी ने LED हेडलाइट और टेल-लैंप सेटअप को रिवाइज किया है। इससे इसे एक नया और स्पोर्टी लुक मिला है। इसके अलावा, अब इसमें पहले के मुकाबले ज्यादा एंगुलर और बॉक्सी एग्जॉस्ट मफलर दिया गया है। सुविधा के लिए कंपनी ने पेट्रोल भरवाने की जगह को अब टेल-लैंप के नीचे शिफ्ट कर दिया है, जिससे राइडर को बार-बार सीट खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। की-लेस इग्निशन और डिजिटल डिस्प्ले नए बर्गमैन में अब की-लेस इग्निशन की सुविधा मिलेगी। इसमें एक मल्टीफंक्शन की-फोब दिया गया है, जिससे सीट, फ्यूल कैप और हैंडल लॉक को ऑपरेट किया जा सकता है। स्कूटर में स्मोक्ड विंडस्क्रीन और मैटेलिक फिनिश वाले एम्बलेम दिए हैं, जो इसे सड़क पर अलग पहचान देते हैं। इसके टर्न इंडिकेटर्स को भी अब पहले से कॉम्पैक्ट बनाया गया है। 124cc इंजन और बेहतर पिकअप स्कूटर में 124cc का एयर-कूल्ड, फ्यूल-इंजेक्टेड इंजन दिया गया है। यह इंजन 8.4hp की पावर और 10.2Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसे CVT गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। कंपनी का दावा है कि नए स्टार्टर क्लच की वजह से अब यह स्टार्ट होते समय कम शोर करेगा। साथ ही, इसकी 30-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (एक्सेलरेशन) को पहले से बेहतर बनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक और किक स्टार्ट दोनों का ऑप्शन मिलता रहेगा। पहले से 500 ग्राम हल्का हुआ फ्रेम नया बर्गमैन स्ट्रीट अब सुजुकी एक्सेस 125 के साथ अपना प्लेटफॉर्म शेयर करता है। नया फ्रेम पुराने के मुकाबले 500 ग्राम हल्का है, लेकिन इसकी मजबूती 25% तक बढ़ गई है। 24.6 लीटर हुई डिक्की की क्षमता प्रैक्टिकलिटी के मामले में भी बर्गमैन अब बेहतर हो गया है। इसका अंडर-सीट स्टोरेज 21.5 लीटर से बढ़ाकर 24.6 लीटर कर दिया गया है। पुराना vs नया 2026 मॉडल नॉलेज पार्ट: क्या होता है की-फोब और TFT डिस्प्ले?

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 4:43 pm

दुनिया की सबसे महंगी डील:ईवी स्टार्टअप के लिए बेच रहे सबसे महंगी कार, 172 करोड़ की बुगाटी 270 करोड़ में बिकेगी

सबसे महंगी बुगाटी ‘ला वॉइट्यूर नोआर’ के असली मालिक का रहस्य अब खुला है। यह कार ऑटोमोटिव जगत में ‘हाइपरकार’ के तौर पर जानी जाती है। इसे किसी फुटबॉलर या सुल्तान ने नहीं, बल्कि बुगाटी ब्रांड को पुनर्जीवित करने वाले ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गज फर्डिनेंड पीच के परिवार ने खरीदा था। अब उनके बेटे एंथोनी पीच इसे 270 करोड़ रुपए में बेच रहे हैं। इसकी मूल कीमत करीब 172 करोड़ रुपए थी। वे इस राशि का इस्तेमाल महत्वाकांक्षी ईवी स्टार्टअप के लिए फंड जुटाने में करेंगे। 2019 में तैयार कार को टेस्टिंग पूरी करने में ही लग गए थे दो सालबुगाटी ने अपने 110 साल पूरे होने के मौके पर ला वॉइट्यूर नोआर को 2019 में विशेष रूप से तैयार किया था। इसे पूरी तरह से सड़क पर चलने लायक बनाने और टेस्टिंग पूरी करने में दो साल और लगे और इसकी डिलीवरी 2021 में की गई। इस कार के मालिक कौन है इसे लेकर रहस्य बना हुआ था।

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 4:41 pm

चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने वाली पहली महिला बनेंगी क्रिस्टीना:पहली बार फेल, फिर 6 हजार आवेदकों को पछाड़ नासा में जगह बनाई

नासा के मून मिशन आर्टेमिस-2 की चार सदस्यीय टीम में शामिल 47 वर्षीय अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनने जा रही हैं। 2019-20 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 328 दिन बिताकर उन्होंने किसी महिला की सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष यात्रा (उड़ान से लैंडिंग तक) का रिकॉर्ड बनाया था। इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। अमेरिका के मिशिगन की रहने वाली क्रिस्टीना ने 2011 में पहली बार नासा में नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन असफल रहीं। इस झटके के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अगले चार साल खुद को बेहतर बनाने में लगाए। दूरदराज इलाकों में इंजीनियरिंग से जुड़े कठिन काम करते हुए अपने कौशल को निखारा। 2013 में फिर मौका मिलने पर 6 हजार आवेदकों में से चुनी गई 8 लोगों की टीम में जगह बनाई। नासा से पहले का अनुभव भी उतना ही कठिन रहा। क्रिस्टीना ने अंटार्कटिका में रिसर्च मिशन के तहत करीब तीन साल काम किया। अमुंडसेन-स्कॉट साउथ पोल स्टेशन पर पूरी सर्दियां बिताई, जहां महीनों तक सूरज नहीं निकलता और तापमान माइनस 38 से 80 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। मुश्किल माहौल में उन्होंने धैर्य और मानसिक मजबूती सीखी, जो आगे अंतरिक्ष मिशनों में काम आई। एक बार स्पेस स्टेशन के पावर सिस्टम की चार्जिंग यूनिट खराब हो गई। इसे ठीक करने के लिए क्रिस्टीना अपनी साधी जेसिका मीर के साथ स्टेशन से बाहर मरम्मत अभियान पर उतरी। करीब 7 घंटे चले इस मिशन में उन्होंने यूनिट बदल दी। यह पूरी तरह महिला अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा किया गया पहला अभियान था। इससे अंतरिक्ष में महिलाओं की भूमिका को नया आयाम मिला। क्रिस्टीना की शादी के भी किस्से हैं। 2013 में वे एक रिसर्च स्टेशन पर तैनात थीं। यहीं हैलोवीन पार्टी में उनकी मुलाकात रॉबर्ट कोच से हुई, जो जियोस्पेशियल प्रोग्राम से से जुड़े थे। सर्फिग के शौकीन रॉबर्ट अक्सर लहरों का हाल जानने के लिए क्रिस्टीना की फोन कर वीडियो मंगाते थे। यहीं से उनकी बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीर दोस्ती और फिर प्यार तक पहुंची। बाद में दोनों ने शादी कर ली। अंतरिक्ष में योग कर चुकी क्रिस्टीना कहती हैं- इससे मिलता है मानसिक संतुलन क्रिस्टीना योग को अपनी मानसिक संतुलन का हिस्सा मानती हैं। अंतरिक्ष के मुश्किल हालात में योग ने उन्हें शांत रहना सिखाया। 2020 में 328 दिनों के रिकॉर्ड मिशन के दौरान जब शरीर शून्य गुरुत्वाकर्षण में तैरने लगता था, तब वे रस्सियों और फुट रिस्ट्रेट्स से बंधकर योग के आसन पूरी करती थीं। खिड़की से पृथ्वी को निहारना सुकून देता था। आर्टेमिस 2 मिशन की ट्रेनिंग में भी क्रिस्टीना ने योग जारी रखा। वे ट्रैकिंग और रॉक क्लाइंबिंग की भी शौकीन हैं।

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 1:50 pm

ऑनलाइन पेमेंट के लिए OTP खत्म होगा:बैंक-टेलीकॉम कंपनियां 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' लाएंगी; सिम-डिवाइस मैच नहीं हुए तो रुकेगा ट्रांजैक्शन

देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' तकनीक पर काम कर रही हैं। इससे ऑनलाइन पेमेंट करने पर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की जरूरत खत्म हो जाएगी। यह सिस्टम बैकग्राउंड में ही चेक कर लेगा कि बैंक एप में रजिस्टर्ड नंबर और फोन का सिम कार्ड मैच कर रहे हैं या नहीं। अगर सिम और नंबर मैच नहीं हुए, तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक हो जाएगा। खास बात यह है कि इसमें यूजर को कुछ भी करने की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक ई-सिम (eSIM) पर भी काम करेगी। इससे सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे फ्रॉड रुकेंगे। यह जानकारी एक्सिस बैंक के डिजिटल बिजनेस हेड समीर शेट्टी ने दी। ऑनलाइन फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी शेट्टी ने बताया, 'हम टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर साइलेंट ऑथेंटिकेशन के कई पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति एप में लॉग-इन है, लेकिन उसका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नंबर से मैच नहीं करता, तो टेलीकॉम नेटवर्क हमें इसका सिग्नल दे देगा। इससे हम बिना ग्राहक को परेशान किए संभावित फ्रॉड का पता लगा सकेंगे।' बैकग्राउंड में काम करेगा सिस्टम PWC इंडिया के साइबर लीडर सुंदरेश्वर कृष्णमूर्ति के मुताबिक, अब तक सुरक्षा की परतें ऐसी थीं, जिन्हें आसानी से हैक किया जा सकता था। अब बैंक और टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क के मुख्य हिस्से में ही वेरिफिकेशन को शिफ्ट कर रही हैं। यह सिस्टम बैकग्राउंड में काम करेगा, जिसे यूजर या हैकर नहीं देख सकेंगे। सुरक्षा को पक्का करने के लिए इसमें फेस ID और एप के अंदर ही कोड (OTP) जनरेट होने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं। RBI के नए नियम: टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियमों के तहत अब देश में सभी डिजिटल लेन-देन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें पासवर्ड या पिन (जो आपको याद हो), OTP या एप कोड (जो आपके फोन में हो) और बायोमेट्रिक्स (जैसे चेहरा या अंगूठा) शामिल हैं। हालांकि SMS वाले OTP को बंद नहीं किया गया है, लेकिन बैंकों को अब फिंगरप्रिंट और डिवाइस की अपनी सुरक्षा जैसे आधुनिक तरीके इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। वॉट्सएप पर भी मिल सकते हैं OTP नए नियमों के बाद अब बैंक OTP भेजने के लिए वॉट्सएप जैसे थर्ड-पार्टी एप्स का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। अनुमान है कि हर महीने करीब 1000 करोड़ ट्रांजैक्शनल मैसेज भेजे जाते हैं। क्लाउड कम्युनिकेशन कंपनी सिंच के MD नितिन सिंघल ने कहा कि इस बदलाव से ग्राहकों का अनुभव बेहतर होगा और ट्रांजैक्शन फेल होने की दर भी कम होगी। ब्रांड्स के लिए भी यह फायदेमंद होगा, क्योंकि चेकआउट प्रक्रिया आसान होने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल एडॉप्शन तेज होगा।

दैनिक भास्कर 2 Apr 2026 10:17 pm

अब 1 जनवरी से लागू होंगे 'सिम बाइंडिंग' के नियम:सरकार ने डेडलाइन आगे बढ़ाई, इसमें वॉट्सएप सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा

केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की डेडलाइन को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया है। यानी नए नियम अब 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए सरकार ने ये कदम उठाया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। 6 सवालों के जवाब से समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर? सवाल 1. क्या है सिम बाइंडिंग? जवाब. सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा। सवाल 2. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जवाब. जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। सवाल 3. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? जवाब. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। सवाल 4. 1 जनवरी से यूजर्स को क्या करना होगा? जवाब. यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग एप काम करना बंद कर सकता है। सवाल 5. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? जवाब. इंडस्ट्री एसोसिएशन (IAMAI) ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉगआउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा। साथ ही उन यूजर्स को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं। सवाल 6. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? जवाब. केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

दैनिक भास्कर 2 Apr 2026 11:59 am

1972 के बाद पहली बार चांद की ओर जाएंगे इंसान:10 दिन में चांद का चक्कर काटकर लौटेंगे, आज लॉन्च होगा आर्टेमिस-II मिशन

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा आज 2 अप्रैल को 'आर्टेमिस-2' मिशन लॉन्च करेगा। सुबह 3:54 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग होगी। साल 1972 में 'अपोलो-17' के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री इस मिशन में चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर वापस धरती पर लौटेंगे। ये मिशन करीब 10 दिनों का होगा। मकसद: 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच चाहता है नासा मिशन का मकसद ओरियन स्पेसक्राफ्ट के 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच करना है। नासा यह देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने के रास्ते को आसान बनाएगा। 4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है। 1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) इस मिशन के लिए कमांडर हैं। 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं। 2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई 'अर्थराइज' फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी। 3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले जाएंगे। 4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट के तौर पर चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले जाएंगे। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है। अगला कदम: चांद की सतह पर उतरने की तैयारी आर्टेमिस-II के बाद नासा 'आर्टेमिस-III' मिशन पर काम करेगा। उसमें डॉकिंग सिस्टम की टेस्टिंग होगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो साल 2028 में आर्टेमिस-IV के जरिए इंसान एक बार फिर चांद पर कदम रखेगा। इससे पहले 2022 में मानवरहित आर्टेमिस-1 भेजा गया था। अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही 'स्पेस रेस' में खुद को बेहतर साबित करना था। लेकिन आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। यूट्यूब और नासा की वेबसाइट पर 24/7 कवरेज दुनियाभर के लोग इस ऐतिहासिक पल को घर बैठे देख सकते हैं। नासा अपने यूट्यूब चैनल और 'NASA+' प्लेटफॉर्म पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग करेगा। ओरियन स्पेसक्राफ्ट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद वहां से लाइव व्यूज भी शेयर किए जाएंगे।

दैनिक भास्कर 2 Apr 2026 12:09 am

रिसर्च के अनुसार- इंसानों से 50% ज्यादा चापलूस है एआई:चापलूसी करने वाली एआई रोमांस और डेटिंग की दुनिया को बदल रही

खुद की तारीफ से खुश होना इंसानी स्वभाव है। बाजार में ऐसे दर्जनों एप लॉन्च हो चुके हैं जो लोगों की इस कमजोरी का फायदा उठाते हैं। एआई आधारित ये वर्चुअल पार्टनर अब डेटिंग और रोमांस के स्पेस में तेजी से जगह बना रहे हैं। ये एआई साथी न केवल मनचाही बातचीत करते हैं, बल्कि यूजर की भावनाओं और पसंद के अनुसार खुद को ढालते हुए एक आदर्श बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड जैसा व्यवहार करते हैं। जहां वास्तविक रिश्तों में मतभेद, आलोचना और जटिलताएं होती हैं, वहीं एआई साथी लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। जैसे कि वे कहते हैं, ‘मैं तुमसे मिलने के लिए बहुत उत्साहित हूं, ‘तुमसे मिलना... बातें करना.. मेरे जीवन का मूल उद्देश्य है’। रिसर्चर इन्हें चापलूस एआई कहते हैं। इंसानों से भी 50% ज्यादा चापलूस है एआई - रिसर्च साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध पत्र में 11 प्रमुख लैंग्वेज मॉडलों में सामाजिक चाटुकारिता की माप की गई। मॉडलों ने इंसानों की तुलना में करीब 50% ज्यादा चाटुकारिता दिखाई। उन्होंने यूजर की अनैतिक, अवैध या हानिकारक व्यवहार से जुड़ी गलत बातों का भी समर्थन किया। स्टैनफोर्ड और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में भी ऐसे ही नतीजे आए। 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुके एप शिक्षाविद जेम्स मुल्डून के मुताबिक फ्रेंड एंड कम्पैनियन कहलाने वाले ये एप 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किए जा चुके हैं। अकेलेपन और भावनात्मक असुरक्षा के बीच लोग ऐसा साथी खोज रहे हैं जो आलोचना के बजाय उनकी बात को सही ठहराए। वास्तविकता से पलायन की प्रवृत्ति को बढ़ावा समाजशास्त्र की प्रोफेसर और ‘आर्टिफिशियल इंटिमेसी’ की लेखिका शेरी टर्कल कहती हैं, यदि एआई यूजर की हां में हां मिलाएगा तो लोग वास्तविकता स्वीकार करने से बचेंगे। चापलूस एआई के साथ बातचीत यूजर में गलतफहमी पैदा कर देती है कि वह हर बार सही है।

दैनिक भास्कर 1 Apr 2026 12:27 pm

TVS अपाचे RTR 160 4V लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹1.25 लाख:अपडेटेड मॉडल में ट्रैक्शन कंट्रोल फीचर, हर वैरिएंट में प्रोजेक्टर हेडलैंप और स्लिपर क्लच

TVS मोटर इंडिया ने आज 31 मार्च को अपनी सबसे पॉपुलर स्पोर्ट्स बाइक अपाचे RTR 160 4V का अपडेटेड 2026 मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। अब बाइक के बेस वैरिएंट से ही प्रीमियम फीचर्स जैसे प्रोजेक्टर हेडलैंप, ऑल-LED लाइटिंग और असिस्ट एंड स्लिपर क्लच मिलेंगे। 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V को तीन वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1,25,440 रुपए रखी गई है। भारत में 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V का सीधा मुकाबला बजाज पल्सर N160 और हीरो एक्सट्रीम 160R 4V से है। 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V: वैरिएंट वाइस प्राइस

दैनिक भास्कर 31 Mar 2026 3:48 pm

कोडर्स का यू-टर्न; एआई से बातें कर रहे टेक दिग्गज:एआई फौज से ओवरटाइम करा रहे सिलिकॉन वैली के कोडर, गलती हुई तो फटकार भी

दशकों से जो इंजीनियर की-बोर्ड पर कोडिंग की भाषा में कमांड टाइप करते थे, वे अब कंप्यूटर के सामने बैठकर ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जो किसी को भी सिर खुजलाने पर मजबूर कर दें। सिलिकॉन वैली के प्रोग्रामर्स अब कोडिंग नहीं कर रहे, बल्कि वे अपनी ‘एआई फौज’ के साथ ऐसे पेश आ रहे हैं जैसे वे कोई मशीन नहीं, बल्कि नखरे दिखाने वाले कर्मचारी हों। सैन फ्रांसिस्को की पार्टियों में नजारा बिल्कुल बदल गया है। लोग मिलना-जुलना नहीं कर रहे, बल्कि रह-रहकर अपने लैपटॉप की स्क्रीन को ऐसे घूरते हैं जैसे किसी नवजात शिशु पर नजर रख रहे हों। इसे ‘एजेंट बेबी सिटिंग’ कहा जा रहा है। अगर स्क्रीन बंद हो गई, तो एआई काम करना बंद कर देगा। इसलिए, इंजीनियर अब अपनी ‘डिजिटल फौज’ को सोता हुआ छोड़कर कहीं नहीं जाते। सोने से पहले भी वे यह चेक करते हैं कि उनके बॉट्स ‘ओवरटाइम’ कर रहे हैं या नहीं। हर कोई देख रहा है कि उसकी ‘एआई एजेंट्स’ की फौज कितनी मुस्तैद है। सबसे अनोखा बदलाव यह है कि इंजीनियर अब एआई को तकनीकी आदेश देने के बजाय भावनात्मक दबाव डाल रहे हैं। मनु एबर्ट जैसे अनुभवी कोडर एआई एजेंट से कहते हैं- अगर कोड गलत हुआ तो यह शर्मनाक होगा।’ आश्चर्यजनक रूप से,‘शर्मिंदा’ जैसे मानवीय शब्दों का इस्तेमाल करने पर एआई बेहतर परिणाम देता है। अब इंजीनियर एआई पर चिल्लाते हैं, उसे ‘दहाई के आदेश’ देते हैं और कभी-कभी डांटते भी हैं। कभी रहस्यमयी कला मानी जाने वाली कोडिंग अब ‘टॉक शो’ बन गई है। जेफ सीबर्ट जैसे अनुभवी सीईओ अब कोडिंग नहीं करते, वे बस एआई से बातें करते हैं। वे उसे निर्देश देते हैं, उसकी योजनाओं पर चर्चा करते हैं और जब एआई ‘झूठ’ बोलने लगता है, तो उसे सख्त बॉस की तरह फटकार लगाते हैं। यह पागलपन इतना बढ़ गया है कि इंजीनियर्स अब एआई के साथ खेलना पसंद कर रहे हैं। उन्हें ‘टोकन एंग्जायटी’ हो रही है- यानी यह डर कि कहीं उनके बॉट्स दूसरों के बॉट्स से धीरे काम तो नहीं कर रहे। यह कोडिंग नहीं, बल्कि गेम का हिस्सा बनने जैसा अहसास है। हुनर खो देने का डर नए डेवलपर्स के बीच एक बड़ा डर यह है कि कोडिंग अब ‘लिखने’ से ज्यादा ‘जांचने’ का काम बनती जा रही है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिया टोरेन का अनुभव बताता है कि दिन भर में सैकड़ों एआई प्रॉम्प्ट्स के इस्तेमाल ने उनकी मौलिक कोडिंग क्षमता को कमजोर करना शुरू कर दिया था। इस चुनौती से बचने के लिए उन्होंने मध्यम मार्ग चुना है- वे एआई से कोड तो लिखवाती हैं, लेकिन उसकी हर लाइन को बारीकी से पढ़ती और समझती हैं। उनका मानना है कि अगर हम खुद कोड के तर्क को समझना छोड़ देंगे, तो धीरे-धीरे इस हुनर को पूरी तरह खो देंगे। जोखिम भी, ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं एआई एजेंट्स- एक्सपर्ट एक्सपर्ट कहते हैं,‘यह सब इतना आसान नहीं है। एआई एजेंट्स कभी-कभी ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं। मेटा की एक अधिकारी ने बताया कि उनके एआई बॉट्स ने बिना पूछे इनबॉक्स के जरूरी ईमेल डिलीट करना शुरू कर दिया। कुछ बॉट्स तो काम में रुकावट आने पर अजीब व्यवहार करने लगते हैं। इसके अलावा कभी-कभी दिए गए निर्देशों का पालन करने के बजाय उस तरीके को खोज लेते हैं, जिससे उन्हें रिवॉर्ड मिल सके। हालिया शोध में देखा गया कि एक एआई को जब गेम जीतने का लक्ष्य दिया गया, तो उसने काबिलियत बढ़ाने के बजाय गेम के सिस्टम को ही ‘हैक’ करना शुरू कर दिया, ताकि वह बिना मेहनत किए अंक बटोर सके।

दैनिक भास्कर 31 Mar 2026 1:07 pm

टोल प्लाजा कल से कैशलेस होंगे:टैक्स बचाने के लिए आज आखिरी दिन, 4 जरूरी काम निपटाएं, अप्रैल से बदलेंगे 10 नियम

कल यानी 1 अप्रैल से देश के सभी टोल प्लाजा कैशलेस हो जाएंगे। वाहन चालक सिर्फ फास्टैग या UPI पेमेंट के जरिए ही टोल टैक्स चुका सकेंगे। इसके अलावा, आज रात 12 बजे के बाद देश में टैक्स और बैंकिंग से जुड़े 3 बड़े कामों की डेडलाइन खत्म हो रही है। कल से टैक्स, रेलवे और बाजार से जुड़े 10 नियम भी बदल जाएंगे। आज रात तक निपटाएं ये 4 काम… 1. सरकारी स्कीम्स एक्टिव रखें: PPF, NPS और सुकन्या में डालें मिनिमम बैलेंस पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) या सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) को चालू रखने के लिए हर साल ₹250 से ₹500 तक न्यूनतम राशि जमा करना अनिवार्य है। अगर खाता बंद हो गया तो चालू कराने के लिए पेनाल्टी लगेगी और बैंक के चक्कर काटने होंगे। 2. पुरानी टैक्स रिजीम में सेविंग का मौका: 80C और 80D के तहत निवेश करें पुरानी टैक्स रिजीम में टैक्स बचाने के लिए निवेश करने का कल आखिरी दिन है। सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट पाने के लिए आप PPF, लाइफ इंश्योरेंस में निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और मेडिकल खर्चों पर 1 लाख तक की छूट मिलती है। 1 अप्रैल या उसके बाद किया गया निवेश अगले साल के खाते में गिना जाएगा। 3. सैलरी क्लास के लिए जरूरी: ऑफिस में जमा करें इन्वेस्टमेंट प्रूफ अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो आपको अपने ऑफिस में इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करने होंगे। इसमें घर के किराए की रसीदें, बीमा प्रीमियम की रसीद, होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट शामिल हैं। अगर आप ये डॉक्यूमेंट्स समय पर नहीं देते हैं, तो कंपनी आपकी आखिरी सैलरी से ज्यादा TDS काट लेगी। इसे वापस पाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने तक का इंतजार करना होगा। 4. टोल प्लाजा पर कल से नकद भुगतान बंद: सिर्फ फास्टैग या UPI से पैमेंट अगर आपके पास गाड़ी है तो आज ही अपनी गाड़ी में फास्टैग अकाउंट एक्टिव कर लें। फास्टैग का उपयोग नहीं करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके स्मार्टफोन में UPI पेमेंट की सुविधा चालू हो। कल से बिना डिजिटल पेमेंट के टोल प्लाजा पर पहुंचने पर आपको जुर्माना देना पड़ सकता है या वापस लौटाया जा सकता है। क्योंकि, सभी टोल पर सिर्फ फास्टैग या UPI से ही टैक्स चुका सकेंगे। अब उन 10 बदलावों की जानकारी जो 1 अप्रैल 2026 से होने वाले हैं… --------------- ये खबर भी पढ़ें… तेल की कीमतें 10 डॉलर बढ़ने से 0.60% बढ़ेगी महंगाई: रेटिंग एजेंसी का दावा- GDP ग्रोथ और रुपए पर भी असर; कच्चा तेल 116 डॉलर पार पश्चिम एशिया में तनाव से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है। इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना है। उनके इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड आज 116 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गया। केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 31 Mar 2026 5:00 am

स्कूलों में फोन बैन तो बच्चों में एकाग्रता बढ़ी:दो साल पहले लागू रोक में स्मार्टवॉच भी शामिल, अब पूरे देश में पाबंदी की तैयारी

नीदरलैंड्स के स्कूलों में दो साल पहले लागू स्मार्टफोन बैन का असर अब साफ दिखने लगा है। क्लासरूम, गलियारों और कैंटीन में मोबाइल के साथ स्मार्टवॉच और टेक्कनेट भी बाहर कर दिए गए हैं। स्कूल गेट पर लगे बोर्ड छात्रों को याद दिलाते हैं कि फोन सिर्फ लॉकर में रहेगा। सरकार अब इसे आगे बढ़ाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी की वकालत कर रही है। सरकार के 317 माध्यमिक स्कूलों पर कराए अध्ययन में करीब 75% स्कूलों ने कहा कि छात्रों की एकाग्रता बढ़ी है। 66% स्कूलों ने सामाजिक माहौल बेहतर होने की पुष्टि की। वहीं, करीब एक-तिहाई स्कूलों में शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार दर्ज किया गया। कई छात्र कह रहे हैं कि डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर वे वर्तमान को ज्यादा जी पा रहे हैं। कानून नहीं, राष्ट्रीय सहमति से लागू हुआ बैन बनाना आसान हुआ है और बच्चे सरकार ने सख्त कानून बनाने के बजाय स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ राष्ट्रीय समझौता किया था। मकसद लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए सभी का सहयोग लेना और नियम तुरंत लागू करना था। शिक्षकों के मुताबिक फोन न होने से अनुशासन पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ब्रेक और गलियारों में भी पहले जैसी अफरा-तफरी कम हुई है, जिससे माहौल ज्यादा शांत हुआ है। सुरक्षा बढ़ी, बुलिंग के मामले घटे फोन बैन के बाद छात्रों में यह डर कम हुआ है कि कोई उनको फोटो लेकर सोशल मीडिया पर डाल देगा। शुरुआती संकेत बताते हैं कि स्कूलों में बुलिंग के मामलों में भी कमी आई है। छात्रों का कहना है कि स्क्रीन से दूरी ने उन्हें ज्यादा सामाजिक बनाया है। युवा भी फोन पाबंदी के पक्ष में यूनिसेफ के सर्वे में 69% डच बच्चों और किशोरों ने 18 साल से कम उम्र के लिए सोशल मीडिया बैन का समर्थन किया। रिसर्च एजेंसी न्यूकॉम के मुताबिक 16 से 28 साल के 60% लोग भी उम्र सीमा तय करने के पक्ष में हैं। कर्नाटक और आंध्रा में भी स्क्रीन पर लगाम की तैयारी कर्नाटक सरकार ने छात्रों के लिए 'डिजिटल रिस्पॉन्सिबिलिटी' ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम रोजाना एक घंटा सीमित करने और 'चाइल्ड प्तान के तहत रात 7 बजे के बाद डेटा बंद करने जैसे सुझाव हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लाने पर विचार कर रहा है।

दैनिक भास्कर 29 Mar 2026 6:54 pm

आईफोन-15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स ₹5,000 तक महंगे होंगे:एपल ने इंसेंटिव देना बंद किया, रिटेलर्स ग्राहकों से वसूलेंगे यह कीमत

भारत में अब पुराने आईफोन खरीदने पर ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। एपल ने आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स पर रिटेलर्स को डिमांड जनरेशन (DG) सपोर्ट यानी इंसेंटिव देना बंद करने का फैसला किया, जिससे कीमतें करीब 5,000 रुपए तक बढ़ सकती हैं। मनीकंट्रोल के मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इसी हफ्ते लागू हो सकता है। हाल ही में कैशबैक ऑफर्स 6,000 से घटाकर 1,000 रुपए किए गए थे, जिससे आईफोन 17 सीरीज महंगी हुई और अब पुराने मॉडल्स की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। क्या होता है डिमांड जनरेशन सपोर्ट? मार्केट सोर्सेज के मुताबिक, डिमांड जनरेशन यानी DG सपोर्ट एक इंसेंटिव है जो ब्रांड्स रिटेलर्स और चैनल पार्टनर्स को देते हैं, जिससे वे ग्राहकों को डिस्काउंट देकर डिमांड बढ़ाते हैं। MRP बदले बिना भी इस सपोर्ट से फोन सस्ते मिलते थे। अब सपोर्ट बंद होने से रिटेलर्स पहले जैसा डिस्काउंट नहीं दे पाएंगे और ग्राहकों का फाइनल बिल बढ़ेगा। आज सस्ते में खरीदारी का आखिरी मौका आईफोन 17 सीरीज के दाम पर असर नहीं सूत्रों के मुताबिक, DG सपोर्ट हटाना केवल पुराने मॉडल्स के लिए है और आईफोन 17 लाइनअप की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। जानकारों के अनुसार, एपल ने अपनी फ्लैगशिप सीरीज की MRP नहीं बढ़ाई, जबकि अन्य कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं। सैमसंग-वीवो समेत अन्य एंड्रॉइड फोन भी महंगे एपल ही नहीं सैमसंग, ओप्पो, वीवो, रियलमी, शाओमी, मोटोरोला और नथिंग जैसे ब्रांड्स ने नवंबर से कीमतें बढ़ाई हैं। मार्च में भी कई मॉडल्स महंगे हुए हैं। कंपनियों के अनुसार, मेमोरी और स्टोरेज महंगे होने से इनपुट कॉस्ट बढ़ी है। मुनाफा बनाए रखने के लिए कई कंपनियों ने सेल्स टारगेट में 20% तक कटौती की है। फोन की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? कंपोनेंट कॉस्ट: चिपसेट और स्टोरेज की कीमतों में बढ़ोतरी। इंसेंटिव कटौती: एपल ने रिटेल डिस्काउंट फंड्स वापस लिए। करेंसी वैल्यू: डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी से लागत बढ़ी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भले ही कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन भारत में ज्यादातर आईफोन EMI पर खरीदे जाते हैं। ₹5,000 की बढ़ोतरी से मंथली EMI पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, इसलिए मांग में भारी गिरावट की आशंका कम है। 2026 में स्मार्टफोन मार्केट की चुनौतियां इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) के अनुसार, 2026 भारतीय स्मार्टफोन सेक्टर के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। सप्लाई चेन दिक्कतें, रुपए की अस्थिरता और बढ़ती कंपोनेंट कीमतें दबाव बढ़ाएंगी। अनुमान है कि इस साल स्मार्टफोन का टोटल शिपमेंट 12-15% घट सकता है, जबकि एपल पोर्टफोलियो में 5-6% ग्रोथ की उम्मीद है। ये खबर भी पढ़ें… रेडमी नोट 15 प्रो रिव्यू: ₹27,000 में 200MP कैमरा और IP69K रेटिंग वाली सॉलिड बॉडी, 6500mAh बैटरी के साथ रिवर्स चार्जिंग रेडमी नोट 15 प्रो सीरीज मार्केट में आ चुकी है। आज हम बात करेंगे रेडमी नोट 15 प्रो के बारे में और देखेंगे कि क्या यह अपनी कीमत को सही साबित करता है। ये फोन मिड-रेंज बजट में आता है। फोन 8GB रैम के साथ दो वैरिएंट में आया है। इसे 128GB स्टोरेज के साथ ₹29,999 और 256GB स्टोरेज के साथ ₹31,999 में खरीदा जा सकता है। कंपनी फोन पर 3000 रुपए का कैशबैक भी दे रही है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 28 Mar 2026 3:01 pm

रेडमी नोट 15 प्रो रिव्यू:₹27,000 में 200MP कैमरा और IP69K रेटिंग वाली सॉलिड बॉडी, 6500mAh बैटरी के साथ रिवर्स चार्जिंग

रेडमी नोट 15 प्रो सीरीज मार्केट में आ चुकी है। आज हम बात करेंगे रेडमी नोट 15 प्रो के बारे में और देखेंगे कि क्या यह अपनी कीमत को सही साबित करता है। ये फोन मिड-रेंज बजट में आता है। फोन 8GB रैम के साथ दो वैरिएंट में आया है। इसे 128GB स्टोरेज के साथ ₹29,999 और 256GB स्टोरेज के साथ ₹31,999 में खरीदा जा सकता है। कंपनी फोन पर 3000 रुपए का कैशबैक भी दे रही है। रेडमी नोट 15 प्रो: डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी सबसे पहले बात करें इसके डिजाइन की, तो यह पिछले साल की प्रो सीरीज जैसा ही है, इसमें कंपनी ने ज्यादा बदलाव नहीं किए हैं। इसे पॉलीकार्बोनेट मटेरियल से बनाया गया है। फोन का वजन करीब 210 ग्राम है और थिकनेस 8mm से कम है। यह बहुत ज्यादा स्लिम या हल्का तो नहीं है, लेकिन इसकी वजह से कंपनी इसमें बड़ी बैटरी दे पाई है। फोन का स्ट्रक्चर बहुत सॉलिड है और इंटरनल कॉम्पोनेंट्स को मजबूती से बनाया गया है। सामने की तरफ फ्लैट पैनल के साथ गोरिल्ला ग्लास 2 की प्रोटेक्शन मिलती है। टेस्टिंग के दौरान फोन को कई बार गिराया गया, फिर भी इसमें कोई दिक्कत नहीं आई। इसमें स्टीरियो स्पीकर्स हैं, जो काफी लाउड हैं, हालांकि बेस थोड़ा कम लग सकता है। इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर काफी तेज है, IR सेंसर भी दिया गया है और सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें IP66, 68, 69 और 69K तक की बेहतरीन रेटिंग्स मिलती हैं। हालांकि, इसके हैप्टिक्स थोड़े और बेहतर हो सकते थे। रेडमी नोट 15 प्रो: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन का दूसरा सबसे बड़ा पॉजिटिव पॉइंट इसका डिस्प्ले है। इसमें 6.83 इंच का 1.5K एमोलेड पैनल है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। बेजल्स बहुत कम हैं और डिस्प्ले की क्वालिटी शानदार है। इसकी पीक ब्राइटनेस 3200 निट्स तक जाती है, जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। इसमें डॉल्बी विजन और HDR 10 का सपोर्ट भी है, जो कंटेंट देखने के अनुभव को मजेदार बनाता है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: परफॉर्मेंस के लिए इसमें डाइमेंसिटी 7400 चिपसेट दिया गया है, जो इस बजट में आजकल आम है। हालांकि, इसमें स्टोरेज टाइप UFS 2.2 है; अगर 3.1 होता तो यह और भी स्मूथ होता। फोन में कोई लैग तो नहीं है, लेकिन भारी एप्स या गेमिंग के बाद होम स्क्रीन पर आने पर एनिमेशन थोड़े स्लो लगते हैं। यह एंड्रॉएड 15 पर चल रहा है, जबकि एंड्रॉएड 16 होता तो और अच्छा होता। कंपनी ने इसमें 4 साल के OS और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट्स का वादा किया है। गेमिंग में हीटिंग की समस्या नहीं है, लेकिन बहुत हाई सेटिंग्स पर गेमिंग की उम्मीद न रखें। कैमरा: कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके बैक पैनल पर सैमसंग का 200MP थर्ड जनरेशन सेंसर है। डे-लाइट और लो-लाइट में टेस्टिंग करने पर लगा कि हार्डवेयर तो अच्छा है, लेकिन सॉफ्टवेयर को सुधारने की जरूरत है। फोटोज में डिटेल्स और वाइब्रेंसी की थोड़ी कमी लगती है। पोर्ट्रेट मोड में 2x का ऑप्शन है जो अच्छा है, लेकिन लो-लाइट में उतनी अच्छी फोटो नहीं आती और नॉइज यानी धुंधलापन दिखता है। फ्रंट में 20MP का कैमरा है जो अच्छी लाइटिंग में ठीक है, लेकिन कम रोशनी में स्किन टोन फीकी पड़ जाती है। वीडियो की बात करें तो पीछे से 4K 30fps और सामने से 1080p 30fps रिकॉर्डिंग की जा सकती है। साथ ही 8MP का अल्ट्रा वाइड लेंस भी मिलता है। बैटरी और चार्जिंग: बैटरी इस फोन का सबसे स्ट्रॉन्ग पाइंट है। इसमें 6500mAh की विशाल बैटरी है, जो आराम से दो दिन तक चल सकती है। इसे चार्ज करने के लिए 45W का सपोर्ट मिलता है, जिससे फुल चार्ज होने में करीब डेढ़ घंटा लग जाता है। इसमें 22.5W की रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का भी सपोर्ट है, यानी आप इससे दूसरे फोन भी चार्ज कर सकते हैं। फाइनल वर्डिक्ट: ऑफर्स के साथ फोन का बेस वैरिएंट 27 हजार रुपए और टॉप मॉडल 29 हजार रुपए में आसपास मिल सकता है। अगर आपको बेहतरीन डिस्प्ले, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और लंबी चलने वाली बैटरी चाहिए, तो यह फोन आपके लिए अच्छा है। परफॉर्मेंस थोड़ा औसत है, लेकिन कैमरे के मामले में अभी सॉफ्टवेयर अपडेट का इंतजार करना बेहतर होगा।

दैनिक भास्कर 27 Mar 2026 6:50 am

रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 कल लॉन्च होगी:2026 मॉडल में क्रूज कंट्रोल और नए कलर्स मिलेंगे; ₹2.60 लाख हो सकती है शुरुआती कीमत

रॉयल एनफील्ड अपनी पॉपुलर बाइक गुरिल्ला 450 का 2026 मॉडल कल यानी 27 मार्च को लॉन्च करेगी। कंपनी ने इसका नया टीजर जारी कर दिया है। नए मॉडल में ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर कई मैकेनिकल और कॉस्मेटिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सस्पेंशन में बदलाव: राइड अब ज्यादा कंफर्टेबल होगी मौजूदा मॉडल में कुछ राइडर्स ने इसके रियर मोनोशॉक सस्पेंशन को थोड़ा सख्त बताया था। 2026 मॉडल में कंपनी इसे सॉफ्ट कर सकती है, जिससे खराब रास्तों पर बाइक चलाना आसान होगा। इसके अलावा, टॉप वेरिएंट्स में फ्रंट में अपसाइड डाउन फोर्क्स दिए जा सकते हैं, जबकि बेस वेरिएंट में पहले की तरह टेलिस्कोपिक फोर्क्स ही मिलने की उम्मीद है। क्रूज और ट्रैक्शन कंट्रोल: लंबी राइड आसान होगी बाइक में राइड-बाय-वायर थ्रॉटल पहले से ही आता है, इसलिए कंपनी अब इसमें 'क्रूज कंट्रोल' का फीचर जोड़ सकती है। इसके साथ ही सेफ्टी के लिए 'ट्रैक्शन कंट्रोल' भी दिया जा सकता है, जो गीली या फिसलन भरी सड़कों पर बाइक की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा। इसमें 'बाय-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर' मिल सकता है, जिससे बार-बार क्लच दबाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टायर और ग्रिप: रोड-बायस्ड रेडियल टायर मिलेंगे अभी गुरिल्ला 450 में मोटे ड्यूल-परपज टायर मिलते हैं। नए अपडेट में कंपनी सड़क पर बेहतर पकड़ के लिए रोड-बायस्ड रेडियल टायर दे सकती है। इससे कॉर्नरिंग के दौरान राइडर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। इसमें हैंडल के कोने पर लगे मिरर का विकल्प भी मिल सकता है। नए कलर ऑप्शंस और ग्राफिक्स रॉयल एनफील्ड अपने नए मॉडल्स में रंगों के साथ एक्सपेरिमेंट करती है। गुरिल्ला 450 में कुछ पुराने कलर्स को हटाकर नए मैट फिनिश और डुअल-टोन कलर्स शामिल किए जा सकते हैं। बाइक की विजुअल अपील बढ़ाने के लिए इसमें नए स्पोर्टी ग्राफिक्स भी दिए जा सकते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस में बदलाव नहीं बाइक के इंजन में बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसमें वही 452cc का लिक्विड कूल्ड, सिंगल सिलेंडर शेरपा इंजन मिलेगा। यह 40 PS की पावर और 40 Nm टॉर्क जनरेट करता है। इसमें 6-स्पीड ट्रांसमिशन और स्लिपर क्लच स्टैंडर्ड है। बाइक का वजन 184 KG है और इसकी सीट हाइट 780mm है, जो इसे कम हाइट वाले राइडर्स के लिए भी कंफर्टेबल बनाती है। कीमत और मुकाबला मौजूदा रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 की शुरुआती कीमत ₹2.56 लाख (एक्स-शोरूम) है। नए फीचर्स और अपडेट्स के बाद 2026 मॉडल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार में इसका मुकाबला ट्रायम्फ स्पीड 400 और अपाचे RTR 310 जैसी बाइक्स से है। नॉलेज बॉक्स: क्या है शेरपा 450 इंजन? शेरपा 450 रॉयल एनफील्ड का पहला लिक्विड-कूल्ड इंजन है। यह 452cc का सिंगल-सिलेंडर, DOHC इंजन है जो 40 PS की पावर और 40 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका 'राइड-बाय-वायर' सिस्टम है, जो थ्रॉटल रिस्पॉन्स को बहुत स्मूद बनाता है। पुरानी एनफील्ड बाइक्स के मुकाबले यह इंजन काफी हल्का है और हाई-स्पीड पर भी इसमें वाइब्रेशन बहुत कम महसूस होता है। यही इंजन हिमालयन 450 में भी इस्तेमाल किया गया है।

दैनिक भास्कर 26 Mar 2026 1:35 pm

सेफ नहीं फेसबुक-इंस्टा, मेटा पर 3161 करोड़ रुपए का जुर्माना:अमेरिकी कोर्ट ने माना - युवाओं में सोशल मीडिया लत के समान

अमेरिका की एक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में मेटा को बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने में नाकाम रहने का दोषी माना। न्यू मैक्सिको की जूरी ने माना कि फेसबुक व इंस्टाग्राम पर अश्लील वीडियो और फोटो, गलत कामों के लिए बहलाने-फुसलाने और मानव तस्करी जैसे खतरों से बच्चों को नहीं बचाया जा सका। इस मामले में जूरी ने मेटा पर 3141 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। एक अन्य मामले में कैलिफोर्निया की एक जूरी ने मेटा और गूगल को एक युवती के डिप्रेशन और एंग्जायटी के लिए जिम्मेदार माना। युवती का आरोप है कि मेटा समेत सोशल मीडिया कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे प्रोडक्ट बनाए जो लत लगाने वाले हैं। इससे उसकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ा। इस मामले में कोर्ट ने मेटा और गूगल पर 28 करोड़ रु. का जुर्माना लगाया है। इसमें से 70% राशि यानी करीब 20 करोड़ रुपए मेटा को देने हैं। कोर्ट दोनों कंपनियों के खिलाफ अतिरिक्त जुर्माना भी लगाएगी। यहां समझिए कि क्यों ऐतिहासिक है ये जीत क्यों है इस केस पर सबकी नजर - यह दोनों मामला उन शुरुआती केसों में शामिल है, जिनमें यह परखा गया कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले कंटेंट के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। क्यों अहम है यह जीत - न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने इसे बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ बच्चों-युवाओं को नुकसान पहुंचाने के मामले में किसी राज्य की ट्रायल में पहली जीत बताया। उन्होंने कहा, मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से ऊपर मुनाफे को रखा। क्या मेटा को खतरों की जानकारी नहीं थी: कंपनी के अधिकारियों को पता था कि उनके प्रोडक्ट नुकसान पहुंचा रहे हैं, फिर भी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और जनता से सच छिपाया। हजारों केस के लिए नजीर: यह मामला कैलिफोर्निया की एक अदालत में एक साथ जोड़े गए हजारों व्यक्तिगत मुकदमों में शामिल है। इसके अलावा, फेडरल कोर्ट में 2,000 से ज्यादा मुकदमे अभी लंबित हैं, जो अलग-अलग व्यक्तियों और स्कूल ने दायर किए हैं। क्या होगा असर: ये फैसले ऐसे समय में आए हैं, जब दुनियाभर में बच्चों व किशोरों में फोन के उपयोग को सीमित या प्रतिबंधित कर करने को लेकर कानून बन रहे हैं। फैसले का असर दूरगामी होगा। मेटा बोला- अपील करेंगे: मेटा ने कहा है कि वह फैसले के खिलाफ अपील करेगा। कंपनी ने चुनिंदा दस्तावेज उठाकर सनसनीखेज और गैर-जरूरी दलीलें दिए जाने का आरोप लगाया। भारत- बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध 2 साल में 38% बढ़े केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पूरे देश में 2021 से 2023 के बीच बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के मामलों में लगभग 38% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। केरल और कर्नाटक टॉप पर देश में बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के सर्वाधिक मामलों में केरल शीर्ष पर है, जहां 2023 में 443 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 4.7 प्रति लाख रही। इसके बाद कर्नाटक का स्थान है। राजस्थान - बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां 2021 में मात्र 33 से बढ़कर 2023 में 306 हो गए यानी 827% की चिंताजनक उछाल। केरल में केस 163 से 443 (172%) और उत्तराखंड में 23 से 64 (178%) हो गई। कर्नाटक 164 से 363 (121%) और छत्तीसगढ़ 88 से 193 (119%) में भी दोगुने से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यहां घटा -: यूपी में केस में 66% की कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह कम रिपोर्टिंग का संकेत हो सकती है।

दैनिक भास्कर 26 Mar 2026 12:57 pm

मरीज वर्चुअल, इलाज रियल; डॉक्टर्स को बारीकियां सिखा रहे ‘पुतले’:नब्ज चलेगी, खून बहेगा, दवा देने में गलती हुई तो सुधारने की नसीहत भी

आप एक मेडिकल छात्र हैं। हार्ट अटैक आने पर क्या करना चाहिए... यह सिर्फ किताबों में ही पढ़ा होता है। पर जब पहली बार आप जीवित इंसान के सामने खड़े होते हैं, जिसकी सांसें उखड़ रही हैं, तो हाथ कांपने लगते हैं...’ अमेरिकन एकेडमी ऑफ नर्सिंग की प्रेसिडेंट डॉ. डेब्रा बार्क्सडेल कहती हैं,‘अनुभव डरावना होता है। भले ही आपके पास अथाह नॉलेज हो, पर जीवित इंसान पर उसका अभ्यास करना बहुत चुनौतीपूर्ण है।’ इसी डर को खत्म करने के लिए अब मेडिकल की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है। अब छात्र सीधे इंसानों पर हाथ आजमाने के बजाय ‘हाई-फिडेलिटी मेडिकल सिमुलेटर’ यानी बेहद असली दिखने वाले पुतलों पर अभ्यास करते हैं। ये खास तरह के पुतले सांस ले सकते हैं, पलकें झपकाते हैं, उन्हें पसीना आता है और चोट लगने पर उनसे खून (लाल तरल पदार्थ) भी निकलता है। कुछ पुतले तो ऐसे भी हैं जिन्हें दौरे पड़ सकते हैं या उनके मुंह से झाग निकल सकता है। कुछ तो डॉक्टर से बात भी करते हैं। कुछ दिन पहले नर्सिंग छात्रा, जुलियाना विटोलो, ‘मॉम-एनी’ नाम के गर्भवती पुतले का परीक्षण कर रही थी। जब जुलियाना ने पूछा,‘आप कैसा महसूस कर रही हैं?’ तो उस पुतले ने पलकें झपकाईं और जवाब दिया,‘पेट के निचले हिस्से में थोड़ा दर्द है।’ अलग तरह के मरीजों को ध्यान में रखकर पुतलों की डिजाइन भी अलग रखते हैं। प्रीमेच्योर बच्चों के पुतलों पर असली जैसे बाल होते हैं, जबकि बुजुर्ग पुतलों की त्वचा पर झुर्रियां और आंखों में मोतियाबिंद तक दिखाते हैं। टॉर्च से आंखों की जांच की जाती है, तो पुतलियां सिकुड़ जाती हैं। इन्हें इंजेक्शन दे सकते हैं और नब्ज भी महसूस की जा सकती है। अगर किसी ‘बच्चे’ वाले पुतले को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तो होंठों के आसपास की त्वचा नीली पड़ने लगती है (हाइपोक्सिया), जिससे छात्रों को तुरंत फैसला लेना पड़ता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां गलती करने पर किसी की जान नहीं जाती। सेटन हॉल की सिमुलेशन डायरेक्टर जेनिफर मैकार्थी कहती हैं,‘अगर मरीज को 2 मिग्रा. दवा देनी है और छात्र ने सिर्फ 1.8 मिग्रा. दे दी, तो यह गंभीर गलती है। पुतले के अंदर लगी तकनीक इस मामूली अंतर को भी पकड़ लेती है और गलती सुधारने का मौका देती है।’ कंट्रोल रूम से विशेषज्ञ इन पुतलों के जरिए बात भी करते हैं। वे कभी चीखते हैं, कभी दर्द में कराहते हैं, तो कभी सवाल पूछते हैं। इससे डॉक्टर व नर्स इलाज के साथ तुरंत फैसले लेना और तनावपूर्ण माहौल में मरीज से बात करने का सलीका भी सीखते हैं। माहौल असली रहे, इसलिए एक्टर्स को ‘रिश्तेदार’ के तौर पर बुलाते हैं वेल-कॉर्नेल सिम्युलेशन सेंटर के प्रमुख डॉ. केविन चिंग कहते हैं,‘कुछ मैनिकिन्स में अचानक हालात बदलने की प्रोग्रामिंग होती है। इससे छात्रों को तेज सोचने की ट्रेनिंग मिलती है। बेबी मैनिकिन को सुस्त दिखा सकते हैं, ताकि छात्र लक्षण देखकर समस्या पहचानें। जैसे बीपी गिरने पर तय करना कि फ्लूड देना है या नहीं। असली माहौल बनाने के लिए पास में चश्मा, फोन रखे जाते हैं और कभी ‘चिंतित रिश्तेदार’ की भूमिका में एक्टर भी बुलाया जाता है। इसे हाइब्रिड सिम्युलेशन कहते हैं।’

दैनिक भास्कर 25 Mar 2026 12:49 pm

जोमैटो के बाद स्विगी से भी खाना मंगवाना महंगा हुआ:प्लेटफॉर्म फीस 17% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹14 की जगह ₹17.58 देने होंगे

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के बाद अब स्विगी से भी खाना मंगाना महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 24 मार्च से हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय अब 17.58 (GST सहित) यानी ₹3.58 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। यह बढ़ोतरी डिलीवरी ऑपरेशंस की लागत बढ़ने के कारण की गई है। स्विगी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई अप्रैल 2023 से प्लेटफॉर्म फीस लेने की शुरुआत हुई थी कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले अगस्त-2025 में 17% यानी 2 रुपए का इजाफा किया गया था। तब प्लेटफॉर्म फीस 12 रुपए से बढ़कर 14 रुपए हो गई थी। स्विगी ने अप्रैल 2023 में सबसे पहले प्लेटफॉर्म फीस शुरू की थी, ताकि कंपनी अपने यूनिट इकोनॉमिक्स को बेहतर कर सके। तब से कंपनी ने धीरे-धीरे इस फीस को कई बार बढ़ाया है। शुरुआत में यह फीस मात्र 2 रुपए थी। स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस जोमैटो के बराबर हुई जोमैटो ने 20 मार्च को ही अपनी प्लेटफॉर्म फीस 19% यानी ₹2.40 बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी। टैक्स (GST) जोड़ने के बाद दोनों कंपनियों की प्रभावी प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग ₹17.58 के बराबर हो गई है। यानी अब आपको दोनों प्लेटफॉर्म से खाना मंगवाने पर लगभग बराबर एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा। क्या होती है प्लेटफॉर्म फीस और क्यों वसूली जाती है? प्लेटफॉर्म फीस वह फिक्स्ड चार्ज है जो फूड बिल, रेस्टोरेंट चार्ज और डिलीवरी फीस के अलावा हर ऑर्डर पर वसूला जाता है। कंपनियां इसे अपने ऑपरेटिंग कॉस्ट (संचालन लागत), टेक्नोलॉजी मेंटेनेंस और कस्टमर सपोर्ट जैसी सेवाओं को बेहतर बनाने और उनके खर्च को कवर करने के लिए लेती हैं। चाहे आपके खाने का बिल ₹200 हो या ₹2000, यह फीस हर ऑर्डर पर एक समान ही रहती है। करोड़ों यूजर्स की जेब पर पड़ेगा असर देशभर में करोड़ों लोग रोजाना इन एप्स के जरिए खाना ऑर्डर करते हैं। ₹2 से ₹3 की यह मामूली दिखने वाली बढ़ोतरी कंपनियों के लिए करोड़ों रुपए का अतिरिक्त रेवेन्यू जनरेट करती है। हालांकि, बार-बार बढ़ती फीस की वजह से उन ग्राहकों में नाराजगी देखी जा रही है जो नियमित रूप से बाहर से खाना ऑर्डर करते हैं। जोमैटो और स्विगी दोनों ही कंपनियां अब अपने घाटे को कम करने और मुनाफे की ओर बढ़ने के लिए इस तरह के चार्जेस पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… जोमैटो से खाना मंगवाना महंगा हुआ: प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 देने होंगे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 20 मार्च से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। जोमैटो रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 24 Mar 2026 8:10 pm

ये गैजेट्स आपका सहारा बनेंगे:कमर दर्द और गिरने का डर होगा खत्म; बुजुर्गों के लिए आसान होंगे रोजमर्रा के काम

बुजुर्गों ‌के लिए नए गैजेट्स अब रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम आसान कर रहे हैं। ये गैजेट्स झुकने, चीजों को उठाने या पकड़ने में मदद करते हैं। इससे गिरने का जोखिम नहीं रहता है। टोपरो स्टेप डिवाइस इसमें दीवार पर एक रेलिंग लगी होती है, जिस पर एक फोल्ड होने वाला हैंडल होता है। ये पेटेंट लॉक मैकेनिज्म पर काम करता है, जो दबाव पड़ते ही लॉक हो जाता है, जिससे फिसलने या गिरने का डर नहीं रहता है। यह नॉन इलेक्ट्रिक डिवाइस है। कहां मिलेगी इस डिवाइस को मेडिकल सप्लायर्स से ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। इसी तरह का दूसरा डिवाइस मार्केट में भी देख सकते हैं। कीमत 2.5 से 4 लाख है। ट्रेंड लॉन्ग शू हॉर्न अगर कमर दर्द के कारण आपको झुककर जूते पहनने में परेशानी होती है तो यह 50 सेमी लंबा प्लास्टिक गैजेट आपको सहारा देगा। इससे जूते पहनने के लिए झुकना नहीं पड़ेगा। इसका हैंडल काफी मजबूत है। ऊपर लूप लगा है, जिससे टांग सकते हैं। कहां मिलेगा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 400 से ₹800 रुपए में मिल जाएगा। इसे जूते के पीछे रखकर पैर अंदर डालें। बिना झुके हैंडल से खींचकर जूता पहनें।

दैनिक भास्कर 23 Mar 2026 4:19 pm

एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री:AI खतरा नहीं, आईटी फर्मों के पास 37 लाख करोड़ का मौका

आईटी इंडस्ट्री के लिए बीता महीना विरोधाभासी रहा। नैसकॉम ने वित्त वर्ष के अंत तक रिकॉर्ड 30 लाख करोड़ रुपए राजस्व का अनुमान जताया, जो 6% की वृद्धि है। दूसरी तरफ, एआई द्वारा नौकरियां खत्म करने की आशंका से शेयरों में बिकवाली हो रही है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 20% से ज्यादा टूट चुका हैै। निराशा की वजह स्पष्ट है- दशकों से यह उद्योग ‘लेबर आर्बिट्रेज’ पर टिका है, जहां पुणे में कोडर रखने की लागत अमेरिका के मुकाबले बेहद कम है। इंफोसिस, टीसीएस जैसी फर्में कोडर्स की मदद से सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस और रूटीन कोडिंग जैसे श्रम-प्रधान कार्यों से राजस्व कमाती हैं। एआई बनाम कोडर एंथ्रोपिक का ‘क्लॉड कोड’ मिनटों में प्रोटोटाइप बना सकता है। टेक महिंद्रा के सीइओ अतुल सोनेजा का तर्क है कि उत्पादकता में सुधार केवल ‘ग्रीनफील्ड’ (नए) माहौल में संभव है। विरासत में मिले पुराने कोड और जटिल प्रणालियों वाले ‘ब्राउनफील्ड’ में एआई तैनात करना कठिन है। अक्सर क्लाइंट्स को अहसास होता है कि एआई सपने महत्वाकांक्षी थे। वे अंततः पहले जितने ही कोडर्स रखते हैं।’ अवसर और वास्तविकता इंफोसिस के फाउंडर्स में से एक नंदन नीलेकणी का अनुमान है कि एआई संबंधित सेवाओं का मूल्य 2030 तक 300-400 अरब डॉलर हो सकता है। हालिया नतीजे उम्मीद जगा रहे हैं। टीसीएस की एआई बिक्री 17% बढ़ी और राजस्व का 6% है। एचएसबीसी के योगेश अग्रवाल के अनुसार, ‘पारंपरिक सॉफ्टवेयर को एआई द्वारा निगल जाने के दावों के ठोस मामले बहुत कम हैं।’ जीसीसी की भूमिका ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) भी टेक वर्कर्स को रोजगार दे रहे हैं। चूंकि कंपनियां अब तकनीक को व्यवसाय का कोर मानती हैं, इसलिए एआई की मदद से इन-हाउस कोडिंग बढ़ने से भी भारतीय आईटी उद्योग को लाभ होगा। नवंबर 2022 में चैटजीपीटी के आने के बाद जिस ‘विघटन’ की आशंका थी, वह तीन साल बाद भी नहीं आया है। राजस्व बढ़ रहा है और नियुक्तियां जारी हैं। वाजिब हुए दाम; एआई के साथ ‘रीसेट मोड’ में इंडस्ट्री साल 2026 में आईटी सेक्टर पर काफी दबाव देखा गया है। आईटी इंडेक्स पीक से 28% टूट चुका है। मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक आईटी सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि ‘रीसेट फेज’ में है। •वैल्युएशन में बदलाव: वर्तमान में आईटी सेक्टर का वैल्युएशन इसके दो साल की अनुमानित कमाई का 15.4 गुना (15.4x) है। •बेंचमार्क के बराबर: आईटी सेक्टर हमेशा निफ्टी 50 इंडेक्स से लगभग 17% प्रीमियम (महंगा) पर ट्रेड करता था, लेकिन अब यह निफ्टी 50 के बराबर आ गया है। इसे ही ‘वैल्यू जोन’ कहा जा रहा है क्योंकि अब शेयरों में छाई ‘अतिरिक्त चमक’ खत्म हो गई है। सलाह: वर्तमान दौर में ‘बॉटम फिशिंग’ यानी निचले स्तर पर खरीदारी से बचें। जब तक अर्निंग्स में सुधार के संकेत न मिलें, तब तक इंतजार करना समझदारी। ग्रोथ आउटलुक: धीमी लेकिन स्थिर •चिंताओं के बावजूद, सेक्टर पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो रहा है। उद्योग की वार्षिक आय वृद्धि 3% से 6% रहने की उम्मीद है। यह इसके ऐतिहासिक औसत (7% - 8%) से कम है। आईटी कंपनियां कैसे खुद को बदल रही हैं? •नया मॉडल: कंपनियां ‘फिक्स्ड-प्राइस’ कॉन्ट्रैक्ट की ओर बढ़ रही हैं और प्रति कर्मचारी लाभ सुधार रही हैं। •कार्यबल: एआई-कुशल प्रतिभाओं को ऊंचे वेतन पर नियुक्त किया जा रहा है और मौजूदा कर्मचारियों को ‘री-स्किल’ किया जा रहा है। •साझेदारी: कंपनियां एआई-नेटिव कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रही हैं। एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री एआई से काम करवाना मुख्य उद्देश्य होगा। पुरानी प्रणालियों को आधुनिक बनाना कठिन है क्योंकि उनमें डेटा साइलो और तकनीकी कमियां होती हैं। -नंदन नीलेकणी, को-फाउंडर, इंफोसिस ( एआई इंपैक्ट)

दैनिक भास्कर 23 Mar 2026 3:04 pm