डिजिटल समाचार स्रोत

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ममता बनर्जी की हार से हैरान और सुवेंदु अधिकारी की जीत से खुश है बांग्लादेश, नई सरकार से जताई ये उम्मीदें

बीएनपी नेता ने भाजपा की जीत पर खुशी जताते हुए सुवेंदु अधिकारी को बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में नई सरकार प्रभावी ढंग से काम करेगी।हेलाल ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में और मजबूती आ सकती है।

देशबन्धु 6 May 2026 10:39 am

ईरान-अमेरिका तनाव: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ खत्म, लेकिन शांति दूर

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ समाप्त हो चुका है

देशबन्धु 6 May 2026 10:16 am

ट्रंप प्रशासन से रूस को दी गई तेल छूट वापस लेने का आग्रह

अमेरिका की राजनीति में रूस और ऊर्जा नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई डेमोक्रेटिक लॉमेकर्स ने ट्रंप प्रशासन से रूस के तेल पर दी गई छूट (वेवर) को तुरंत वापस लेने की मांग की

देशबन्धु 6 May 2026 9:50 am

अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार अभियान चलाता रहेगा : मार्को रुबियो

अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में एक बड़ा नौसैनिक अभियान शुरू किया है। इसका मकसद वहां फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक पर फिर से आवाजाही शुरू कराना है

देशबन्धु 6 May 2026 9:14 am

होर्मुज स्ट्रेट पर संकट: अमेरिका ने दी ईरान को कड़ी चेतावनी

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा गलियारों में से एक में लंबे समय तक रुकावट की आशंकाओं से वैश्विक तेल बाजारों पर दबाव बढ़ रहा है

देशबन्धु 6 May 2026 9:10 am

सूडान पर ड्रोन हमले के आरोपों को इथियोपिया ने बताया बेबुनियाद, दोनों देशों में तनाव बढ़ा

इथियोपिया की सरकार ने सूडान के उस आरोप को बेबुनियाद बताया, जिसमें कहा गया था कि इथियोपिया ने ड्रोन हमले किए हैं

देशबन्धु 6 May 2026 8:10 am

होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में भागीदारी जरूरी, हमसे ज्‍यादा दुन‍िया को जलमार्ग की जरूरत: पीट हेगसेथ

संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों से कहा कि वे होर्मुज स्‍ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी में और ज्यादा हिस्सा लें

देशबन्धु 6 May 2026 6:30 am

रोमानिया में राजनीतिक भूचाल: पीएम इली की सरकार गिर गई

रोमानिया की द्विसदनीय संसद ने प्रधानमंत्री इली बोलोजान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कर दिया

देशबन्धु 6 May 2026 5:51 am

होर्मुज स्‍ट्रेट पर अमेर‍िका का 'प्रोजेक्‍ट फ्रीडम' सैन्य मिशन, जहाजों की सुरक्षा के लिए उठाया कदम

संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक सैन्य मिशन शुरू किया है, जिसका मकसद ईरान की होर्मुज स्‍ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों पर कथित नाकेबंदी को तोड़ना बताया जा रहा है

देशबन्धु 6 May 2026 5:24 am

बाहरी का मुद्दा उठाने वाले हिमंता के पुरखे यूपी से:हॉस्टल के कमरे से मिली थी रिवॉल्वर और 25 कारतूस; लगातार दूसरी बार सीएम बनेंगे असम के ‘मामा’

30 अप्रैल 2026 की दोपहर, ढाका के बरिधारा डिप्लोमैटिक जोन में हलचल थी। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बधे को तलब किया। कूटनीति की भाषा में ‘तलब’ एक सीधा और सख्त संदेश होता है। वजह था एक बयान- ‘मैं हर सुबह भगवान से प्रार्थना करता हूं कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में और सुधार न हो, ताकि अवैध प्रवासियों को सुविधाजनक जगहों पर ले जाकर रात के अंधेरे में सीमा पार धकेलना जारी रहे।’ यह बयान असम के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का था। मौका असम के विधानसभा चुनाव, जहां हिंदू-मुसलमान और अवैध घुसपैठ बड़ा चुनावी मुद्दा है। मौजूदा बीजेपी में हिमंता का रुख कई बार कट्टर बीजेपी कार्यकर्ताओं से भी सख्त होता है। लेकिन वे हमेशा ऐसे नहीं थे। 2015 में भाजपा में आने से पहले वे असम की कांग्रेस सरकार में मंत्री थे और हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई की राजनीति करते थे। उस दौर में हिमंता नरेंद्र मोदी के कट्टर आलोचक माने जाते थे। 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार में उन्होंने मोदी पर हमला करते हुए कहा था कि ‘गुजरात में पानी के पाइपों से मुसलमानों का खून बहता है।’ हिमंता की राजनीति हालात और मौके दोनों से बदलती रही है, लेकिन चुनाव में कामयाबी इनकी मुख्य ताकत है। 2026 का चुनाव भी उन्होंने पहले से ज्यादा सीटों से जीता है। यह कहानी उन्हीं हिमंता की है, जो हर बार पाला बदलकर ताकतवर होते गए… 1 फरवरी 1969, असम का जोरहाट। एक शिक्षित ब्राह्मण परिवार में हिमंता का जन्म हुआ। उनके पिता कैलाश नाथ शर्मा जाने-माने लेखक और गीतकार थे। मां मृणालिनी देवी लेखिका थीं, जो आगे चलकर असम साहित्य सभा की उपाध्यक्ष बनीं। दिलचस्प विरोधाभास यह है कि ‘बाहरी बनाम असमिया’ की राजनीति करने वाले हिमंता के पूर्वज खुद उत्तर प्रदेश के कन्नौज से जाकर असम में बसे थे। एक अर्थ में, वे भी कभी 'बाहरी’ थे। शब्दों की विरासत घर से मिली। 10 साल की उम्र तक आते-आते भाषण देने की कला उनकी पहचान बन चुकी थी। कक्षा 5 में ही वे असमिया वक्ता के रूप में मशहूर हो गए थे। अक्सर अपने पिता के लिखे भाषण पढ़ते, लेकिन उसमें जान खुद भरते। कामरूप एकेडमी स्कूल की कक्षा 6 में वे AASU से जुड़ गए थे। इसी समय असम में भाषा और पहचान को लेकर आंदोलन तेज हो रहे थे। इसी दौरान वे AASU के उभरते नेताओं प्रफुल्ल कुमार महंत और भृगु कुमार फूकन के संपर्क में आए। 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद बड़ी संख्या में आए शरणार्थियों आए। इनसे असम की अस्मिता, संस्कृति और जनसंख्या संतुलन जैसे मुद्दे जोर पकड़ने लगे। अप्रैल 1979 में असम के शिवसागर जिले में कुछ छात्रों ने एक हथियारबंद संगठन बनाया- यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम यानी ULFA। असम एक उबलते हुए बर्तन की तरह था और हिमंता इसी उबाल के बीच पल-बढ़ रहे थे। 1985 असम के इतिहास का एक निर्णायक साल था। AASU और ऑल असम गण संग्राम परिषद के नेतृत्व में बाहरियों के खिलाफ आंदोलन अपने चरम पर था। आंदोलनकारियों ने हाईवे बंद कर दिए। तेल की सप्लाई रुक गई, स्कूल-कॉलेज बंद हो गए और सरकारी कामकाज ठप पड़ गया। इससे भी पहले 1983 में नेल्ली नरसंहार हो चुका था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उसमें 2,000 से ज्यादा लोग मारे गए। गैर-सरकारी अनुमान 5,000 तक जाते हैं। इस खून-खराबे की चर्चा दुनियाभर में थी। राजीव गांधी इस चैप्टर को बंद करना चाहते थे। समझौते के दो महीने बाद AASU के नेताओं ने असम गण परिषद (AGP) बनाई। दिसंबर 1985 के चुनाव में AGP को बहुमत मिला और महज 32-33 साल की उम्र में प्रफुल्ल कुमार महंत किसी राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। और 16 साल का हिमंता? वह भी उस इतिहास के बनने की प्रक्रिया में थे। उसी साल उन्होंने गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज में दाखिला लिया। ये पूर्वोत्तर की राजनीति का असली पावर सेंटर था। अब तक असम के 7 मुख्यमंत्री इसी कॉलेज से निकले हैं। सीएम प्रफुल्ल महंत के करीबी होने के चलते उन्हें मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय तक सीधी पहुंच मिली। कम उम्र में ही उन्होंने देख लिया कि फाइलें कैसे चलती हैं, पुलिस-प्रशासन को कैसे साधा जाता है। कॉटन कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में 1988 से 1992 तक लगातार तीन बार महासचिव चुने गए थे। ये एक रिकॉर्ड है। इस बीच 1990 में हालात बदलने लगे। ULFA ने असम में आतंक फैला दिया था। प्रफुल्ल सरकार बेबस दिखने लगी। केंद्र ने राष्ट्रपति शासन लगाया। उस साल AGP चुनाव हार गई और हिमंता की जिंदगी में आया एक बड़ा तूफान। 1990 में असम पुलिस ने उनके हॉस्टल पर छापा मारा। किचन के पीछे से एक रिवॉल्वर और 25 कारतूस बरामद हुए। आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज हुआ। 1991 में उन पर ULFA से जुड़े होने के आरोप लगे। कहा गया कि वे व्यापारियों से वसूली कर रहे थे। जनवरी और मार्च 1991 में दो अलग-अलग थानों में आतंक विरोधी कानून TADA के तहत मामले दर्ज हुए। इसी दौरान कांग्रेस नेता मानवेंद्र शर्मा की हत्या हुई और इस केस में भी हिमंता का नाम आया। मार्च 1991 में उन्हें गिरफ्तार किया गया, 15 दिन पुलिस हिरासत में रहे। 22 साल की उम्र में हिमंता समझ चुके थे कि केंद्र के समर्थन के बिना असम की राजनीति में लंबा सफर संभव नहीं है। इन संकटों में फंसे हिमंता ने एक चतुर कदम उठाया। उन्होंने AASU छोड़ा और तत्कालीन मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया की शरण में चले गए। सैकिया उनके जमीनी नेटवर्क से प्रभावित थे। 1993 में हिमंता आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल हो गए। 1996 तक उनसे जुड़े TADA मामलों की केस डायरी और रिकॉर्ड पुलिस स्टेशनों से रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। 1996 में हिमंता ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। सैकिया ने उन्हें जालुकबारी सीट से उतारा, जो AASU के बड़े नेता भृगु कुमार फुकन की सीट थी। रणनीति थी कि आंदोलन से निकला नया चेहरा, उसी आंदोलन के पुराने चेहरे को हरा दे। लेकिन हिमंता खुद हार गए। इस बीच सैकिया का भी निधन हो गया। एक झटके में वे उस नेता से वंचित हो गए, जिन्होंने उन्हें संरक्षण दिया था। निराशा इतनी गहरी थी कि हिमंता ने असम छोड़ने का मन बना लिया। दिल्ली जाकर सुप्रीम कोर्ट में वकालत करना चाहते थे। लेकिन तभी पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने उन्हें रोका। अजीत दत्त की किताब, हिमंता बिस्वा सरमा- फ्रॉम बॉय वंडर टू सीएम, के अनुसार राव ने कहा- ‘जब कोई विधायक अपने क्षेत्र में जाता है तो लोग ध्यान नहीं देते। लेकिन जब हारने वाला उम्मीदवार बार-बार लौटकर लोगों की मदद करता है, तो लोग उसे याद रखते हैं।’ हिमंता जालुकबारी वापस लौटे। सड़क, राशन, कागजी अड़चनों जैसी लोगों की छोटी-बड़ी समस्याएं सुलझाते रहे। जमीन से जुड़े रहे। इसी दौरान उन्होंने तरुण गोगोई के साथ गठबंधन को मजबूत किया, जो दिल्ली के 10 जनपथ के करीबी थे। गोगोई को ऐसे साथी की जरूरत थी, जो मैदान में उतरकर आक्रामक राजनीति कर सके। हिमंता बिल्कुल वैसे ही थे। उन्होंने अपने पुराने AASU नेटवर्क के जरिए यह पता लगाया कि प्रफुल्ल सरकार के दौर में हुई ‘गुप्त हत्याओं’ के पीछे ULFA के पुराने मेंबर्स के संगठन SULFA और राज्य पुलिस के कुछ अफसरों का हाथ था, जिन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय का मौन समर्थन था। गोगोई ने इसे अपना चुनावी हथियार बना लिया। हर सभा में एक ही जुमला गूंजता था- ‘असम की माताओं और बहनों, रात को आपके दरवाजे पर जो नकाबपोश दस्तक देते हैं, उन्हें सचिवालय से आशीर्वाद मिला हुआ है।’ इस एक लाइन ने माहौल बदल दिया। सीएम प्रफुल्ल की छवि खराब होती गई और 2001 में कांग्रेस सत्ता में लौटी। हिमंता ने जालुकबारी से भृगु कुमार फुकन को 10 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर 1996 की हार का बदला ले लिया। धीरे-धीरे हिमंता, तरुण गोगोई के परिवार जैसे हो गए। गोगोई की पत्नी डॉली गोगोई का भरोसा जीतना उनकी बड़ी सफलता थी। जब भी गोगोई गुवाहाटी आते, हिमंता सबसे पहले एयरपोर्ट पहुंचते। राज्य की हर छोटी-बड़ी राजनीतिक जानकारी उन्हीं के जरिए गोगोई तक पहुंचती। 2002 में गोगोई सरकार के विस्तार में हिमंता राज्य मंत्री बने। कृषि, योजना, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा- एक के बाद एक बड़े विभाग उनके पास आते गए। धीरे-धीरे सरकार के ज्यादातर फैसले और विधायकों को संभालने का काम भी हिमंता देखने लगे। उन्हें असम का ‘सुपर सीएम’ कहा जाने लगा। 2011 के चुनाव में कांग्रेस ने 126 में से 78 सीटें जीतीं। पार्टी के अंदर सबको पता था- इस जीत के असली आर्किटेक्ट हिमंता थे। लेकिन गोगोई ने अपने बेटे गौरव गोगोई को आगे बढ़ाना शुरू किया। हिमंता को लगने लगा- वे उत्तराधिकारी नहीं, प्रतिद्वंद्वी समझे जा रहे हैं। फिर एक पल आया जिसने रिश्ते को लगभग खत्म कर दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पत्रकारों ने हिमंता की भूमिका पर सवाल किया, तो गोगोई ने हल्की मुस्कान के साथ कहा- हिमंता बिस्वा सरमा कौन है? आखिरकार वो मेरे एक मंत्री ही तो हैं। हिमंता को साफ हो गया कि गोगोई के रहते मुख्यमंत्री बनना असंभव है। 2012 में तनाव और बढ़ा। असम कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में गोगोई के उम्मीदवार हारे, हिमंता समर्थित जीत गए। हिमंता ने गुवाहाटी के एक होटल में 50 से ज्यादा कांग्रेस विधायकों को इकट्ठा कर ताकत दिखाई। दिल्ली को संदेश था कि गोगोई का नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है। जब पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे आए, हिमंता ने गुप्त मतदान की मांग रखी। लेकिन अंत में सोनिया गांधी ने यथास्थिति बनाए रखी। 2014 में हिमंता अपनी शिकायत लेकर राहुल गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे। लेकिन यह मुलाकात एक और झटका बन गई। हिमंता के मुताबिक, बातचीत के दौरान राहुल गांधी का ध्यान अपने पालतू कुत्ते ‘पिडी’ को बिस्कुट खिलाने में था। लेखक अजीत दत्ता अपनी किताब हिमंता बिस्वा सरमा- फ्रॉम बॉय वंडर टू सीएम में हिमंता के हवाले से लिखते हैं कि यहीं से रिश्तों में दरार शुरू हुई। जब हिमंता ने बताया की इस आपसी लड़ाई से कांग्रेस कमजोर हो सकती है और विपक्ष जीत सकता है, तो जवाब मिला- तो क्या हुआ? यह आखिरी संकेत था। अप्रैल 2013 में पश्चिम बंगाल में शारदा समूह का चिटफंड घोटाला सामने आया। लाखों गरीब निवेशकों के पैसे डूब गए। शारदा के मालिक सुदीप्त सेन के साथ हिमंता के संबंधों के आरोप लगे। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद अगस्त 2014 में CBI ने उनके घर और न्यूज चैनल ‘न्यूज लाइव’ पर छापेमारी की। जुलाई 2015 में एक और मामला सामने आया। अमेरिकी कंपनी लुई बर्जर पर आरोप था कि उसने असम में जल आपूर्ति परियोजनाओं के ठेके लेने के लिए मंत्रियों को रिश्वत दी। हिमंता 2010-11 में गुवाहाटी विकास विभाग के मंत्री थे। गोगोई इन फाइलों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहे थे।हिमंता को अहसास हो गया कि कांग्रेस में रहे तो ये फाइलें कभी भी जेल तक ले जा सकती हैं। कैरावैन रिपोर्ट में दर्हैंज है कि जब हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस छोड़ना चाहते थे, तब वे बीजेपी के संगठन मंत्री राम माधव से मिले। राम माधव ने ही उन्हें बीजेपी में लाने का खाका खींचा। 21 जुलाई 2015 को जब दिल्ली में असम बीजेपी के नेता सर्बानंद सोनोवाल और किरेन रिजिजू प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमंता की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। उसी समय पर्दे के पीछे शाह से मुलाकात तय हो रही थी। 2016 में छपी कैरावैन की रिपोर्ट में छपा कि अमित शाह नें इस प्रेस वार्ता के बाद असम के बीजेपी अध्यक्ष सिद्धार्थ भट्टाचार्य से कहा- ‘ये तो गलती हुआ। फिर जो गलती हुआ तो उसको सुधारना है।‘ ‘हिमंता बिस्वा सरमा- फ्रॉम बॉय वंडर टू सीएम‘ किताब में अजीत दत्ता लिखते हैं कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और असम के प्रभारी दिग्विजय सिंह से जब हिमंता ने तकलीफ साझा की तो उन्होंने भाजपा जॉइन करने की सलाह दी। दिग्विजय का तर्क था कि इधर कांग्रेस में कुछ नहीं होने वाला है। बीजेपी का नेतृत्व गंभीर है। वही पार्टी तुम्हारे लिए बेहतर रहेगी। 23 अगस्त 2015 को दिल्ली में हिमंता ने अमित शाह से मुलाकात की। और आखिरकार हिमंता कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। हिमंता के आने के बाद भाजपा ने असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के साथ गठबंधन किया। वे इन दलों के नेताओं की नब्ज जानते थे। उन्होंने भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को ‘असमिया अस्मिता’ के साथ जोड़ा और चुनाव को नैरेटिव दिया- ‘35 बनाम 65’ यानी मुस्लिम-हिंदू और ‘स्थानीय बनाम घुसपैठिए’। अपने न्यूज चैनल की मदद से पूरे अभियान को एक इवेंट की तरह चलाया। इमका रैलियां और बयान 24 घंटे दिखती थीं। कई बार तो खुद मुख्यमंत्री उम्मीदवार सोनोवाल से भी ज्यादा। नतीजे आए और भाजपा गठबंधन को 86 सीटें मिलीं। विश्लेषकों का मानना था कि हिमंता के बिना यह आंकड़ा 40-45 पर ठहर जाता। सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। दिल्ली के गलियारों में एक लाइन बार-बार सुनाई देती- चेहरा सोनोवाल का है, दिमाग हिमंता का। कॉटन कॉलेज के दिनों का एक चर्चित किस्सा है। हिमंता की गर्लफ्रेंड रिनिकी भुइयां ने उनसे पूछा था- मैं अपनी मां को तुम्हारे बारे में क्या बताऊं?’ हिमंता ने बिना झिझक जवाब दिया था- मां से कह देना, तुम असम के होने वाले मुख्यमंत्री से शादी करने जा रही हो।’ उस वक्त यह दंभ लगता था। 2021 में यह भविष्यवाणी सच होने वाली थी। 2021 में बीजेपी की दोबारा जीत हुई। लेकिन 2 मई से 9 मई तक यानी ७ दिन असम का अगला मुख्यमंत्री तय नहीं हो पाया। भाजपा के इतिहास में यह दुर्लभ था कि जीतकर आए मौजूदा मुख्यमंत्री को बदलने की बात इतनी खुलकर हो। दिल्ली में तब के बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर बैठकें हुईं। अमित शाह ने दोनों नेताओं से अलग-अलग बात की। हिमंता ने कहा- मैंने 20 साल इस दिन के लिए काम किया है। शाह ने सोनोवाल को समझाया। केंद्र में भूमिका के आश्वासन के बाद वे पीछे हट गए। विधायक दल की बैठक में खुद सोनोवाल ने हिमंता के नाम का प्रस्ताव रखा। 10 मई 2021 को शपथ ग्रहण हुआ। शपथ के बाद पत्नी रिनिकी भावुक हो गईं और बोलीं कि कॉटन कॉलेज में किया गया वादा आज पूरा हुआ। मुख्यमंत्री बनते ही हिमंता ने आक्रामक प्रशासक की छवि बनाई। दशकों से चल रहे उग्रवाद को कमजोर किया। दिसंबर 2023 में ULFA के शांति गुट के साथ समझौता एक ऐतिहासिक मोड़ माना गया। असम-मेघालय और असम-अरुणाचल सीमा विवादों को सुलझाने की दिशा में समझौते हुए। सरकारी मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदला गया। कानून-व्यवस्था पर सख्ती के साथ ड्रग्स के खिलाफ बड़े अभियान चले। औद्योगिक मोर्चे पर 2024-25 में जागीरोड में टाटा समूह के 27 हजार करोड़ रुपए के सेमीकंडक्टर प्लांट की आधारशिला रखी गई। ‘ओरुनोदोई योजना’ के जरिए लाखों महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे पहुंचे। माइक्रो फाइनेंस कर्ज माफी ने ग्रामीण इलाकों में बड़ा असर डाला। हिमंता ने 2026 का चुनाव भी जीत लिया है और लगातार दूसरी बार सीएम बनने की तैयारी कर रहे हैं। ******References and Further Readings: ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में BJP की सरकार बनती क्यों दिख रही:मछली का भोज, शाह की नई स्ट्रैटजी और SIR; BJP के 5 बड़े दांव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद हुए ज्यादातर एग्जिट पोल में BJP की सरकार बनती दिख रही है। 7 में से 5 बड़ी एजेंसियों के सर्वे बीजेपी को बहुमत से ज्यादा सीटें दे रहे हैं। नतीजे 4 मई को आएंगे। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 6 May 2026 5:10 am

थलापति विजय का CM बनना तय, बस 11 सीढ़ी दूर:कांग्रेस के 5 विधायक तैयार, 6 के लिए तोड़ सकते हैं AIADMK

तमिलनाडु में थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, लेकिन बहुमत से दूर है। सरकार बनाने के लिए 118 विधायक चाहिए। विजय दो सीटों पर जीते हैं, इसलिए एक सीट छोड़नी होगी, यानी TVK के पास 107 सीटें ही रहेंगी। ऐसे में 11 विधायक और चाहिए। TVK के सोर्स बताते हैं कि गठबंधन के लिए दूसरी पार्टियों से बात चल रही है। 5 विधायकों वाली कांग्रेस से डील लगभग फाइनल है। बाकी 6 विधायकों के लिए VCK, CPI और CPM से बात हो रही है। तीनों पार्टियों के पास 2-2 विधायक हैं। संभावना 1: विजय के लिए कांग्रेस DMK का साथ छोड़े विजय ने 5 मई को दिन भर पार्टी की कोर कमेटी के साथ मीटिंग की। उन्होंने DMK अलायंस तोड़ने की जिम्मेदारी अपने सबसे करीबी सलाहकार एसए चंद्र को दी है। समर्थन देने वाली पार्टियों को कौन से मंत्रालय दिए जाएंगे, इस पर भी बात होने लगी है। TVK के सोर्स बताते हैं कि कांग्रेस को 2 और बाकी पार्टियों के 3-4 मंत्री पद दिए जा सकते हैं। विजय गठबंधन सरकार चलाने पर सहमत हैं, इसलिए कोई अड़चन नहीं आएगी। वहीं, तमिलनाडु कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक, ‘हमने समर्थन का वादा किया है। हाईकमान पहले से विजय के साथ गठबंधन चाहता था।‘ तो क्या DMK का साथ छोड़ देंगे? कांग्रेस नेता कहते हैं, ‘ये तो होना ही था। सरकार की कुछ तो कमी रही होगी, जो ऐसा जनादेश आया है।’ सीनियर जर्नलिस्ट डी. सुरेश कुमार कहते हैं कि विजय की पार्टी ने दो गठबंधनों को हराया है। 35% वोट हासिल किए हैं। दोनों में से कोई भी गठबंधन उन्हें सत्ता से बाहर रखने की कोशिश करेगा, तो TVK समर्थक उन्हें घेर लेंगे। इसलिए ऐसी गलती कोई पार्टी नहीं करना चाहेगी। संभावना 2: AIADMK के विधायक टूट जाएं TVK सोर्स बताते हैं कि कुछ पार्टियों से बाहर से समर्थन मांग रहे हैं। अभी कुछ तय नहीं हुआ है। अगर राज्यपाल समर्थन पत्र मांगते भी हैं, तो दिक्कत नहीं आएगी। TVK विधायक संगोटे श्रीनिवासन पहले AIADMK में थे। उनसे जुड़े एक सोर्स का दावा है कि वे AIADMK के नेताओं से बात कर रहे हैं। पहले पार्टी चीफ पलानीस्वामी को मना रहे हैं। वे राजी नहीं हुए तो विधायकों से बात करेंगे। AIADMK से विधायक तोड़ने की भी कोशिश की जा सकती है। पॉलिटिकल एनालिस्ट राम कुमार मानते हैं कि विजय के लिए AIADMK के साथ सरकार बनाना सबसे सुरक्षित और आसान विकल्प है। VCK, CPI, CPM के पास 2-2 और DMDK के पास एक सीट हैं। ये सभी DMK की सहयोगी हैं। इसलिए विजय के साथ जाने से बचेंगी। संभावना 3: DMK से गठबंधन मुश्किल, स्टालिन नहीं मानेंगे तमिलनाडु के CM रहे स्टालिन चुनाव हार गए हैं। उनके बेटे उदयनिधि जीते हैं। उदयनिधि तमिल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रहे हैं, इसलिए ऐसे कयास थे कि वे विजय को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि DMK के सोर्स इसकी संभावना न के बराबर बता रहे हैं। पार्टी के एक नेता कहते हैं, ’हमारे लीडर स्टालिन को विजय की पार्टी को समर्थन देना कभी मंजूर नहीं होगा। हमें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है, हम अपनी भूमिका निभाएंगे।’ पॉलिटिकल एनालिस्ट राम कुमार भी मानते हैं कि DMK के विजय को समर्थन देने की गुंजाइश बहुत कम है। विजय का पूरा प्रचार स्टालिन सरकार के भ्रष्टाचार पर फोकस था। अगर वे उन्हीं का समर्थन लेंगे, तो ये बात लोगों को हजम नहीं होगी। संभावना 4: वोटिंग हो तो, विधायक सदन से वॉकआउट कर जाएं सरकार बनाने के लिए विजय को सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा। एक संभावना ये भी है कि उस वक्त कुछ विधायक सदन में मौजूद न रहें। 30-32 विधायक हिस्सा न लें। इससे बहुमत के लिए जरूरी संख्या कम हो जाएगी। इसे ऐसे समझिए कि तमिलनाडु विधानसभा में 234 सीटें हैं। बहुमत के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए। अगर फ्लोर टेस्ट के वक्त विपक्ष के 30 विधायक सदन से बाहर चले जाते हैं, तो सदन की 'प्रभावी संख्या' 204 रह गई। अब सरकार बचाने के लिए 103 विधायकों की जरूरत होगी। ऐसा होने पर विजय मौजूदा नंबर्स में ही सरकार बना लेंगे। अगर पार्टियों ने सभी विधायकों को मौजूद रहने का व्हिप जारी किया, तब दिक्कत हो सकती है। विजय की पार्टी के चीफ स्पोक्सपर्सन फेलिक्स गेराल्ड दावा करते हैं, ‘हम सरकार बना रहे हैं। विजय 7 मई को शपथ लेंगे। सरकार बनाने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अभी किसी की पुष्टि नहीं कर सकते। गवर्नर के पास दो विकल्प सीनियर जर्नलिस्ट डी. सुरेश कुमार कहते हैं कि तमिलनाडु में गवर्नर के पास दो विकल्प हैं। पहला: विजय से 118 विधायकों का समर्थन पत्र मांगें। उन्हें सरकार बनाने के लिए बुलाएं। इसमें विजय को दिक्कत होगी। उन्हें पहले गठबंधन बनाना होगा। कम वक्त की वजह से समर्थन करने वाली पार्टियों की शर्तें माननी पड़ेंगी। दूसरी: गवर्नर बिना समर्थन पत्र मांगे विजय को सरकार बनाने के लिए बुला लें और शपथ ग्रहण करवा दें। ऐसे में विजय को विधायकों का समर्थन हासिल करने और सदन में बहुमत साबित करने का वक्त मिल जाएगा। ……………… तमिलनाडु इलेक्शन रिजल्ट पर ये खबर भी पढ़ें… थलापति तमिलनाडु के किंग, लेकिन किंगमेकर कौन तमिलनाडु में 1967 से सत्ता सिर्फ DMK और AIADMK के पास रही। विजय ने इस दीवार को गिरा दिया। लोगों को एक विकल्प की तलाश थी। सुपरस्टार रजनीकांत पार्टी बनाकर पीछे हट गए, कमल हासन बेअसर रहे, लेकिन विजय ने उस खाली जगह को भर दिया। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 6 May 2026 5:06 am

जर्मन शहर लाइपजिग में भीड़ पर चढ़ी कार, दो लोगों की मौत

पूर्वी जर्मन शहर लाइपजिग में एक व्यक्ति पैदल चलने वाली जगह पर कार लेकर घुस गया. उसकी चपेट में आने से अब तक दो लोगों की मौत हो गई है व कई लोग घायल हैं. पुलिस का कहना है कि ड्राइवर पकड़ लिया गया है और वह जर्मन नागरिक है

देशबन्धु 5 May 2026 10:54 am

ईरान पर जहाजों को निशाना बनाने का आरोप, ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ में दक्षिण कोरिया को शाम‍िल होने को कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर शिप मूवमेंट से जुड़े हालात में कुछ देशों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ का जिक्र किया है

देशबन्धु 5 May 2026 10:23 am

चीन के पटाखा प्लांट में भीषण धमाका: 21 लोगों की मौत, 61 घायल

सेंट्रल चीन के हुनान प्रांत में एक पटाखा प्लांट में बड़े धमाके की जानकारी सामने आई है। चीनी अधिकारियों की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, इस धमाके में 21 लोगों की मौत हो गई और 61 अन्य घायल हो गए

देशबन्धु 5 May 2026 10:07 am

ईरान के खिलाफ 'मिनी वॉर' में अपने लक्ष्य हासिल कर रही अमेरिकी सेना : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की कार्रवाई बहुत अच्छी तरह चल रही है। उनका कहना है कि ईरान की ताकत काफी हद तक खत्म हो चुकी है

देशबन्धु 5 May 2026 9:18 am

होर्मुज में अमेरिकी हमले में 7 ईरानी नावें डुबोईं, व्यापारिक जहाजों पर हमले का आरोप, इधर UAE में मिसाइल अटैक

ईरानी मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की ओर जा रही दो नागरिक मालवाहक नौकाओं को निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि ये नौकाएं आईआरजीसी की स्पीडबोट्स नहीं थीं, बल्कि आम नागरिक जहाज थे। इस हमले में पांच लोगों की मौत का दावा किया गया है।

देशबन्धु 5 May 2026 9:13 am

राष्ट्रपति ट्रंप ने छोटे व्यवसायों को अमेरिका की रीढ़ बताया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि छोटे व्यवसाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्होंने टैक्स में कटौती और नियमों में ढील के साथ टैरिफ को विकास के प्रमुख कारक बताया।

देशबन्धु 5 May 2026 9:09 am

व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी, कुछ देर के लिए लॉकडाउन

व्हाइट हाउस के पास एक हथियारबंद व्यक्ति को गोली मारने के बाद कुछ समय के लिए वहां लॉकडाउन लगा दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब उस व्यक्ति ने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चला दी।

देशबन्धु 5 May 2026 8:41 am

तमिलनाडु में नास्तिक के बाद ईसाई सीएम:थलापति विजय की कहानी, जिसने पहले ही चुनाव में स्टालिन की DMK, जयललिता की AIADMK को किनारे लगा दिया

थलापति विजय। द्रविण राजनीति का नया सितारा। बचपन में एक्टर बने। जवानी में सुपरस्टार और पिछले दो साल में ही एक पूरी पार्टी खड़ी कर दी। विजय ने राज्य के नास्तिक मुख्यमंत्री स्टालिन की 50 साल पुरानी पार्टी DMK बनाम AIADMK की सियासत को किनारे लगा दिया। उनका तमिलनाडु का पहला ईसाई मुख्यमंत्री बनना तकरीबन तय है। कैसे एक फिल्मी हीरो राजनीति का असल हीरो बन बैठा, जानिए पूरी कहानी... ****** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल

दैनिक भास्कर 5 May 2026 5:26 am

तमिलनाडु में सरकार बनाने का नंबर गेम:TVK सबसे बड़ी पार्टी; एक्टर विजय थलपति के पास सरकार बनाने के लिए दो ऑप्शन; क्या DMK को साथ लाएंगे

तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK 107 सीटों पर आगे चल रही है। सिर्फ दो साल पहले बनी पार्टी बहुमत यानी 118 सीटों से सिर्फ 11 कदम पीछे रह गई। वहीं BJP के समर्थन वाला AIADMK गठबंधन 53 सीट और DMK गठबंधन 74 सीटों पर है। 1967 से अब तक तमिलनाडु में 6 बार DMK और 8 बार AIADMK की सरकार रही है। अब पहली बार किसी तीसरी पार्टी की सरकार बन सकती है। हालांकि इसके लिए TVK को 118 सीटों का आंकड़ा जुटाना होगा… इसके लिए 3 सिनैरियो बन सकते हैं… 1. TVK को AIADMK का साथ मिल जाए ऐसा होने की संभावना कितनी? 2. TVK को DMK की सहयोगी कांग्रेस और बाकी दलों का साथ मिल जाए ऐसा होने की संभावना कितनी? एक रेयरेस्ट सिनैरियो ये भी है कि TVK को DMK का समर्थन मिल जाए.. अगर DMK समर्थन दे दे, तो आंकड़ा कुछ इस तरह होगा…107 + 60 = 167 यानी बहुमत से 49 सीटें ज्यादा। इससे TVK और DMK की गठबंधन वाली सरकार बन जाएगी। हालांकि दोनों का साथ आना बेहद मुश्किल और अव्यावहारिक है। TVK, DMK के शासन का विरोध करके ही सबसे ज्यादा सीटें लाई है। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने तमिलनाडु सीएम MK स्टालिन को घेरा। स्टालिन के बेटे उदयनिधि और विजय पॉलिटिकल राइवल माने जाते हैं। अगर TVK बहुमत न साबित कर पाई, तो चौथा सिनैरियो भी हो सकता है… AIADMK और DMK मिल जाएं तो, आंकड़ा 127 सीटों का हो जाएगा। इससे पहली बार तमिलनाडु में दो विरोधी पार्टियों की गठबंधन सरकार बन सकती है। ऐसा कर पाना वैचारिक और राजनीतिक तौर पर लगभग असंभव होता है। हालांकि इससे पहले 2 बार ऐसा हो चुका है… 2018 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2019 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव ---- ये खबर भी पढ़ें… गढ़ में 58% सीटें हार रहीं ममता, क्या मुसलमान छिटके:बीजेपी ने सिर्फ 7% वोट से 121 सीटें कैसे बढ़ाईं; बंगाल नतीजों के 5 फैक्टर्स पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार होगी। शाम 4 बजे तक के रुझानों में बीजेपी 198 सीटों के साथ बहुमत से कहीं आगे है, जबकि टीएमसी 89 सीटों पर सिमटती दिख रही है। 2021 के मुकाबले बीजेपी के महज 7% वोट बढ़े, लेकिन सीटें 121 बढ़ती दिख रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 5 May 2026 5:25 am

साउथ में एक्टर्स को ‘भगवान’ क्यों मानते हैं लोग:सुपरस्टार विजय पहले ही चुनाव में सीएम बनने जा रहे; ऐसी दीवानगी की 6 बड़ी वजहें

एक्टर विजय थलपति तमिलनाडु के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं। सिर्फ दो साल पुरानी उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेत्त्री कझगम’ यानी TVK अपने पहले ही चुनाव में बहुमत के करीब पहुंच गई। राज्य की दोनों पुरानी पार्टियां DMK और AIADMK कहीं पीछे छूट गईं। दक्षिण भारत में लोग सुपरस्टार्स को सिर्फ एक्टर नहीं, बल्कि अपना लीडर, गार्जियन और कई बार भगवान तक मानने लगते हैं। दो फिल्मी सितारे MGR और जयललिता सीएम बन चुके हैं और अब विजय भी वही करिश्मा करने जा रहे हैं। एक्टर्स के पीछे इस तरह की दीवानगी को 'कल्ट स्टेटस' नाम दिया जाता है। इसके पीछे 6 बड़े फैक्टर्स हैं… साउथ के लोगों की एक्टर्स के लिए इस दीवानगी के पीछे 4 मनोवैज्ञानिक वजहें भी हैं... 1. लोगों का एक्टर्स से एकतरफा पैरासोशल रिश्ता 2. आर्केटाइप रोल से जनता के 'मसीहा, भगवान' बनते हैं एक्टर्स 3. कम/अधूरी जानकारी से आइकॉन बन जाते हैं एक्टर्स ---- ये खबर भी पढ़ें… गढ़ में 58% सीटें हार रहीं ममता, क्या मुसलमान छिटके:बीजेपी ने सिर्फ 7% वोट से 121 सीटें कैसे बढ़ाईं; बंगाल नतीजों के 5 फैक्टर्स पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार होगी। शाम 4 बजे तक के रुझानों में बीजेपी 198 सीटों के साथ बहुमत से कहीं आगे है, जबकि टीएमसी 89 सीटों पर सिमटती दिख रही है। 2021 के मुकाबले बीजेपी के महज 7% वोट बढ़े, लेकिन सीटें 121 बढ़ती दिख रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 5 May 2026 5:25 am

थलापति तमिलनाडु के किंग, लेकिन किंगमेकर कौन:107 सीटें, 35% वोट शेयर; पर्दे के 'मास्टर' ने कैसे बदली 50 साल पुरानी स्क्रिप्ट

‘ये चुनाव विजय Vs स्टालिन की लड़ाई है।’ 23 फरवरी, 2026 को थलापति विजय ने पहली बार ये बात कही। तमिलनाडु के वेल्लोर में उनकी रैली थी। इतने लोग आए कि नेशनल हाईवे-48 थम गया। ट्रैफिक इतना कि 4 घंटे तक गाड़ियां हिल नहीं पाईं। यही दीवानगी वोट में बदली और विजय की सिर्फ दो साल पुरानी पार्टी तमिझागा वेत्री कड़गम तमिलनाडु की सत्ता के करीब पहुंच गई। पॉलिटिक्स में विजय की बिल्कुल फिल्मी एंट्री। तमिलनाडु में 1967 से सत्ता सिर्फ DMK और AIADMK के पास रही। विजय ने इस दीवार को गिरा दिया। लोगों को एक विकल्प की तलाश में थी। सुपरस्टार रजनीकांत पार्टी बनाकर पीछे हट गए, कमल हासन बेअसर रहे, लेकिन विजय ने उस खाली जगह को भर दिया। 4 मई की रात 10 बजे तक TVK 107, DMK 60 और AIADMK 47 सीटें या तो जीत चुके हैं या बढ़त बनाए हुए थे। बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए। TVK को सरकार बनाने के लिए 11 सीटों की जरूरत है। अब सरकार बनने के दो सिनेरियो हैं… 1. AIADMK BJP से अलग होकर कुछ मंत्री पदों के बदले सरकार में शामिल हो सकती है। 2. कांग्रेस और PMK या कांग्रेस, कम्युनिस्ट और VCK सरकार को समर्थन दे सकते हैं। विजय को इतनी बड़ी जीत की 5 वजहें 1. विजय का स्टारडम, विजय ही पार्टी, विजय ही मुद्दा 28 साल के भास्कर चेन्नई में रहते हैं। DMK और स्टालिन के समर्थक थे। सरकार का काम भी पसंद करते थे। 23 अप्रैल को वोटिंग वाले दिन थलापति विजय की पार्टी TVK को वोट दे दिया। बोले कि माहौल बदल गया है। अब विजय ही इकलौते विकल्प हैं। वही तमिलनाडु में बदलाव ला सकते हैं। ये सिर्फ भास्कर की कहानी नहीं है। सेंट्रल और नॉर्थ तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों में चुनाव से 2 दिन पहले वोटर का मूड बदल गया। चुनाव की कवरेज करते हुए हम थलापति विजय की लहर महसूस कर पा रहे थे। हमने विजय की कई रैलियां और रोड शो भी कवर किए। चेन्नई के टीनगर की रैली में विजय के लिए लोगों में दीवानगी देखी। विजय को देखते ही एक शख्स पहले जोर से चिल्लाया, फिर रोने लगा। विजय की एक झलक के लिए उसने 6 घंटे धूप में खड़े होकर इंतजार किया था। विजय का रोड शो शाम को 4 बजे था, लेकिन भीड़ सुबह 11 बजे से जुटने लगी। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई। हजारों लोग तेज धूप में बैरिकेड के पीछे खड़े रहे। मकसद सिर्फ एक, विजय की एक झलक मिल जाए। बस से 300 किमी सफर करके आया एक लड़का, बेटे को लेकर आई मां, 61 साल की बुजुर्ग महिला सभी को सिर्फ एक बार विजय को देखना था। इन लोगों को नहीं पता था कि विजय सरकार में आकर क्या करेंगे, उनके मेनिफेस्टो में क्या वादे हैं, वे स्टालिन सरकार से क्या अलग करेंगे। फिर भी वे विजय को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते थे। विजय की ये जीत उनके स्टारडम की ही जीत है। विचारधारा, पार्टी, चुनावी गुणा-गणित, लोकलुभावन वादे सब पीछे रह गए। विजय का थलापति कल्ट फिगर इन सब को पछाड़कर आगे निकल गया। पूरे तमिलनाडु में लोग विजय के अलावा न उनकी पार्टी के नेताओं को जानते हैं और न ही दूसरे नेताओं की पार्टी में कोई अहमियत है। विजय की पार्टी से चुनाव लड़े ज्यादातर नेता DMK और AIADMK के बागी या पूर्व नेता हैं। 2. MGR के रास्ते चले, पॉलिटिक्स के लिए फिल्में छोड़ी MGR के नाम से मशहूर एमजी रामचंद्रन भारत के पहले फिल्म स्टार थे, जो मुख्यमंत्री बने। 1977 से 1987 तक तमिलनाडु के CM रहे। उन्होंने ही AIADMK बनाई थी। विजय तमिल फिल्मों में मौजूदा दौर के सबसे बड़े स्टार हैं। करियर के पीक पर रहते हुए राजनीति में एंट्री की। उनसे पहले सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हासन राजनीति में तब आए थे, जब उनकी फिल्में चलना बंद हो गई थीं। 2024 में आई GOAT फिल्म में विजय डबल रोल में थे। इसने बॉक्स ऑफिस पर 450 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया और उनकी पॉलिटिकल एंट्री से पहले माहौल बना दिया। 2023 में आई लियो ने दुनियाभर में 600 करोड़ रुपए कमाए। 2023 में ही आई फिल्म वारिसु ने विजय को तमिलनाडु का बेटा और अन्ना यानी बड़ा भाई वाली इमेज दी। फिल्में सुपरहिट हो रही थीं, लेकिन अचानक विजय ने पॉलिटिक्स में एंट्री का ऐलान कर दिया। इसके बाद जन नायगम उनकी आखिरी फिल्म होती, लेकिन ये विवादों की वजह से रिलीज ही नहीं हो पाई। 3. फैन क्लब पॉलिटिक्स, लाखों फैन की कार्यकर्ता बन गए थलापति विजय ने भले दो साल पहले पार्टी बनाई हो, लेकिन वे अपने फैन क्लब के जरिए 20 साल से सोशल वर्क कर रहे थे। तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों में संगठन बनाना और फिर उनके जरिए सोशल वर्क करना। विजय 20 साल पहले से 2026 की तैयारी कर रहे थे। तमिलनाडु में फैन क्लब कल्चर बहुत बड़ा है। हर सुपरस्टार के इलाकों, शहरों के नाम से फैन क्लब होते हैं। ये क्लब पसंदीदा स्टार के नाम पर सोशल वर्क करते हैं, लेकिन इसके पीछे खुद स्टार ही होता है। विजय के तमिलनाडु में सैकड़ों फैन क्लब हैं। यही फैन क्लब पार्टी स्ट्रक्चर में बदल गए। फैन क्लब का ढांचा काफी हद तक किसी पॉलिटिकल पार्टी की तरह होता है। स्टेट लेवल पर लीडरशिप होती है। इसके बाद इलाकों के हिसाब से कोऑर्डिनेटर्स काम करते हैं। सबसे नीचे एरिया और बूथ वॉलंटियर्स होते हैं। विजय राजनीति में नहीं आए थे, तब तक ये फैन क्लब ब्लड डोनेशन कैंप, मेडिकल कैंप लगाने जैसे काम करते रहे। गरीबों को खाना-कपड़े देकर मदद करते रहे। सरकारी दफ्तरों, अस्पताल, पुलिस, कोर्ट के मामलों में मदद करते रहे। इससे लोगों का विजय पर भरोसा बढ़ता गया। TVK के चीफ स्पोक्सपर्सन फेलिक्स गेराल्ड बताते हैं, 'विजय ने पार्टी नहीं बनाई थी, तब से विजय का फैन क्लब थलापति विजय मक्कल इयक्कम नाम से चलता था। बाद में इसी को पार्टी में बदल दिया गया। 2021 में फैन क्लब से जुड़े 130 लोगों ने लोकल बॉडी चुनाव लड़ा था। इनमें से 115 जीत गए। विजय ने पार्टी लॉन्च करने के पहले ही जमीन का अंदाजा लगा लिया था। कहने को वे 2024 में राजनीति में आए, लेकिन ये उनके फैन क्लब की मेहनत का नतीजा है।’ चुनाव के करीब 2-3 साल पहले से विजय मौजूदा मुख्यमंत्री स्टालिन के खिलाफ प्रचार कर रहे थे। हालांकि BJP और AIADMK के लिए उनका रवैया थोड़ा नरम दिखा। हमने फेलिक्स से पूछा कि विजय BJP को लेकर नरम रवैया क्यों रखते हैं? फेलिक्स जवाब देते हैं, ‘हम भ्रष्टाचार के खिलाफ है। DMK सही मायने में सेक्युलर पार्टी भी नहीं है। हम BJP की भी आलोचना करते हैं। विजय ने साफ किया है BJP वैचारिक रूप से हमारी विरोधी है।’ 4. क्रिश्चियन-मुस्लिम वोट DMK से विजय की तरफ शिफ्ट विजय ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो TVK के मंच से पहली बार कहा- मेरा नाम है जोसेफ विजय। उन्होंने साफ कर दिया कि वे क्रिश्चियन है। तमिलनाडु में मुस्लिम और क्रिश्चियन मिलाकर करीब 12% वोटर हैं। अब तक ये वोट बैंक DMK का था। विजय की एंट्री ने क्रिश्चियन वोट तो काटे ही, मुस्लिमों के भी बड़े तबके को अपने पाले में किया। मुस्लिम और क्रिश्चियन वोट ज्यादातर शहरी इलाकों में हैं। यहीं TVK मजबूत बनकर उभरी है। सीनियर जर्नलिस्ट आर. रंगराज कहते हैं- विजय ने DMK के 13 से 14% और AIADMK के करीब 10% वोट काटकर अपना वोट बैंक बड़ा बना लिया। फर्स्ट टाइम वोटर्स भी विजय की तरफ चले गए। TVK ने 30-33% का बड़ा वोट बैंक अपने पाले में किया है। 5. युवाओं और महिलाओं का एकतरफा समर्थन युवाओं और महिलाओं में विजय के लिए अलग ही दीवानगी है। एक पूरी पीढ़ी उनकी फिल्में देखकर बड़ी हुई है। यही पीढ़ी फर्स्ट और सेकेंड टाइम वोटर है, जिन्होंने विजय को वोट दिया है। युवा और महिला आबादी करीब 2 करोड़ हैं। तमिलनाडु के करीब 20-25% वोटों पर विजय का सीधा असर है। विजय अपनी रैलियों और सभाओं में कास्ट पॉलिटिक्स करते नहीं दिखे। उनका फोकस महिला और युवा वोटबैंक पर रहा। उनकी पार्टी युवाओं और महिलाओं से सीधे जुड़ी। पहली बार वोट देने वाले 18-25 साल के युवाओं के लिए विजय स्टाइल आइकन के साथ-साथ उम्मीद भी थे। नीट का विरोध और शराब के खिलाफ सख्त रुख युवाओं-महिलाओं को विजय के करीब लाया। अल्पसंख्यक, यानी मुस्लिम-क्रिश्चियन और युवा-महिला वोट मिला लें, तो करीब 25% वोट विजय के पक्ष में एकतरफा एकजुट हुआ। बचे वोट DMK और AIADMK में बंट गए। यही विजय की जीत की सबसे बड़ी वजह है। …………………………..चुनाव नतीजों पर ये खबर भी पढ़ें बंगाल में पहली बार BJP सरकार, 206 सीटें जीतीं, TMC को 81 सीटें बंगाल की 293 सीटों के नतीजे आ गए। BJP राज्य में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। उसे 206 सीटें मिलीं। ममता की पार्टी TMC सिर्फ 81 पर सिमट गई। 2021 विधानसभा चुनाव की तुलना में TMC को 134 सीटों का नुकसान हुआ है। कांग्रेस के खाते में 2 सीट आईं, वहीं दो सीटें हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी ने जीतीं। दो अन्य के खाते में आईं। भवानीपुर से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,114 वोटों से हराया। पढ़ें पूरी खबर

दैनिक भास्कर 5 May 2026 5:22 am

बीजेपी की बंगाल जीत में SIR का कितना रोल:केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस कैसे लौटी; नतीजों के पीछे की पूरी कहानी

बंगाल में बीजेपी ने हिंदुत्व का वो रूप दिखाया जो उत्तर भारत से बिल्कुल अलग था- माछ भात खाते हुए, मां काली का नाम लेते हुए। असम में मुस्लिम वोट इस तरह बंटे कि विपक्ष का गणित ही बिगड़ गया। केरलम में राहुल गांधी ने भगवान अयप्पा के नाम पर वो नैरेटिव सेट किया, जिसे लेफ्ट काट नहीं पाया। और तमिलनाडु में विजय ने साबित किया कि स्टारडम अगर सही रणनीति से मिले, तो वो असली राजनीतिक ताकत बन जाता है। हर राज्य का अपना फॉर्मूला था। हर जीत के पीछे एक अलग कहानी। इलेक्शन एक्सप्लेनर में जानिए वो 5 फैक्टर, जो इन नतीजों की असली वजह बने… बंगाल में बीजेपी ने माछ-भात और मां काली के दम पर साधे हिंदू वोटर असम में मुस्लिम वोट बंटे, तो कामयाब हुई बीजेपी केरलम में UDF ने एकजुट किए मुस्लिम-ईसाई वोटर बंगाल में बीजेपी के पक्ष में रहा SIR असम में परिसीमन के बाद 36% मुस्लिम बहुल सीटें घटीं बंगाल में ममता की 15 साल की एंटी-इनकमबेंसी असम में हिमंता की बेतहाशा पॉपुलैरिटी सुपरस्टार से नेता बने विजय ने बदली तमिल राजनीति केरलम में विजयन विवादों में घिरे, 10 साल की एंटी-इनकमबेंसी बंगाल में बीजेपी ने महिलाओं को ₹3000 देने का वादा किया तमिलनाडु में विजय ने साधे महिला और युवा वोटर जहां टीएमसी ने 3 चुनाव जीते, वैसी 74 सीटें बीजेपी ने जीतीं तमिलनाडु में DMK के गढ़ में विजय ने वोट झटके ----------- चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… मोदी सरकार देशभर की महिलाओं को दे सकती है सीधा कैश, गंगोत्री से गंगासागर तक बीजेपी; चुनावी नतीजों से क्या क्या बदलेगा हिंदुत्व की राजनीति का बड़ा प्रतीक है गंगा। बंगाल में प्रचंड जीत के बाद अब गंगोत्री से गंगासागर तक, गंगा किनारे के चारों बड़े राज्यों में बीजेपी की सरकार होगी। अपवाद सिर्फ 45 किमी का वो इलाका है, जहां गंगा झारखंड में बहती है। अब देश के 22 राज्यों में एनडीए की सरकार और 17 में बीजेपी के मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले 2018 में 21 राज्यों में एनडीए की सरकार थी। अब बीजेपी ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 5 May 2026 5:19 am

हर जगह हार रही कांग्रेस, केरलम में कैसे जीती:तमिलनाडु में विजय और असम में हिमंता का जादू क्यों चला; 4-4 पॉइंट्स में वजहें

बंगाल में बीजेपी की जीत के अलावा इस समय लोगों के मन में तीन बड़े सवाल हैं। असम में तीसरी बार बीजेपी की सरकार बनती क्यों दिख रही है, तमिलनाडु में सुपरस्टार विजय ने पहले ही चुनाव में इतना बड़ा करिश्मा कैसे कर दिखाया और चारों राज्यों में हार रही कांग्रेस केरलम में कैसे जीती? इन तीनों सवालों के जवाब और नतीजों का असर; जानेंगे इलेक्शन एक्सप्लेनर में… असम में बीजेपी 95 सीटों पर जीतती दिख रही है। लेटेस्ट टैली ये रही- असम में BJP की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. परिसीमन के बाद 36% मुस्लिम बहुल सीटें घटीं 2. कांग्रेस और AIUDF के मुस्लिम वोट बंटे, बीजेपी को फायदा 3. हिमंता बिस्व सरमा की पॉपुलैरिटी और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण 4. कांग्रेस के सीनियर नेता बीजेपी में आए असम नतीजों का क्या असर होगा? पूरे नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की पकड़ मजबूत होगी: हिमंता पहले ही अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय में BJP के विस्तार का काम कर चुके हैं। मेघालय, नागालैंड और सिक्किम में बीजेपी सहयोगी पार्टी है, जबकि मिजोरम में अभी एक छोटी पार्टी है। तीसरी बार असम जीतने का मतलब होगा कि नॉर्थ ईस्ट में उनका 'हिंदुत्व मॉडल' स्थापित हो रहा है। हिमंता की राष्ट्रीय छवि चमकेगी: हिमंता बिस्वा सरमा का कद बढ़ेगा। अभी तक उन्हें नॉर्थ-ईस्ट की ही जिम्मेदारियां और अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार का काम दिया गया है। इस जीत के बाद केंद्र में भी उनकी भूमिका बढ़ सकती है। नॉर्थ ईस्ट में कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट: कांग्रेस के सीनियर नेता लगातार बीजेपी में जा रहे हैं। इससे ग्राउंड कैडर और कार्यकर्ताओं में मोटिवेशन कम हो रहा है। ऐसे में नॉर्थ-ईस्ट में फिर से पार्टी को रिवाइव करना मुश्किल होगा। तमिलनाडु में TVK 105 सीटों पर जीतती दिख रही है। मौजूदा टैली ये रही- तमिलनाडु में TVK की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. फिल्म करियर के पीक पर रहते हुए राजनीति में एंट्री 2. युवा और महिला वोटरों को साधने में सफल हुए विजय 3. DMK के गढ़ में सेंधमारी की, वोट काटे 4. पारंपरिक पार्टियों से ऊबे वोटर्स के लिए तीसरा विकल्प बनकर उभरे तमिलनाडु नतीजों का क्या असर होगा? केरलम में कांग्रेस की अगुआई वाली UDF 60 सीटों पर जीतती दिख रही है। मौजूदा टैली ये रही- केरलम में UDF की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. LDF की 10 साल की एंटी-इनकम्बेंसी 2. मुस्लिम और ईसाई वोटों का एकजुट होना 3. LDF विवादों में घिरी 4. BJP ने हिंदू और ईसाई वोट काटे केरलम नतीजों का क्या असर होगा? देश में एक भी लेफ्ट नेतृत्व की सरकार नहीं रहेगी: पूरे देश में केरलम इकलौता राज्य है जहां लेफ्ट सत्ता में है। LDF की हार से देश में वामपंथ के अस्तित्व पर खतरा होगा। बीजेपी के लिए स्कोप बनेगा: इस चुनाव में बीजेपी बड़ा नंबर नहीं ला पाई, लेकिन उसने वोट काटने का काम किया है। बीजेपी ने हिंदुओं और ईसाइयों को साधकर लेफ्ट और UDF दोनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। लेफ्ट के कमजोर होने से बीजेपी को यहां पैर जमाने का मौका मिलेगा। दक्षिण में कांग्रेस मजबूत होगी: दक्षिण भारत में अभी कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस सरकार है। अब केरलम में भी जीत के साथ दक्षिण में कांग्रेस और मजबूत होगी।------------------- ग्राउंट इनपुट्स ------------------ ये खबर भी पढ़ें… गढ़ में 55% सीटें हार रहीं ममता, क्या मुसलमान छिटके:बीजेपी ने सिर्फ 7% वोट से 117 सीटें कैसे बढ़ाईं; बंगाल नतीजों के 5 फैक्टर्स पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार होगी। दोपहर 1 बजे तक के रुझानों में बीजेपी 184 सीटों के साथ बहुमत से कहीं आगे है, जबकि टीएमसी 91 सीटों पर सिमटती दिख रही है। 2021 के मुकाबले बीजेपी के महज 7% वोट बढ़े, लेकिन सीटें 117 बढ़ती दिख रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 4 May 2026 7:30 pm

तमिलनाडु में थलापति का 'विजय' घोष:रोते-चिल्लाते फैंस के भरोसे स्टार से CM की कुर्सी तक पहुंचे, जीत की 5 वजहें

‘ये चुनाव विजय Vs स्टालिन की लड़ाई है।’ 23 फरवरी, 2026 को थलापति विजय ने पहली बार ये बात कही। तमिलनाडु के वेल्लोर में उनकी रैली थी। इतने लोग आए कि नेशनल हाईवे-48 थम गया। ट्रैफिक इतना कि 4 घंटे तक गाड़ियां हिल नहीं पाईं। यही दीवानगी वोट में बदली और विजय की सिर्फ दो साल पुरानी पार्टी तमिझागा वेत्री कड़गम तमिलनाडु की सत्ता के करीब पहुंच गई। पॉलिटिक्स में विजय की बिल्कुल फिल्मी एंट्री। 4 मई की शाम 6 बजे तक TVK 105, DMK 59 और AIADMK 48 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए। यही रिजल्ट रहा, तो TVK को सरकार बनाने के लिए सिर्फ 10 सीटों की जरूरत है। सिनेमा के पर्दे पर 'मास्टर' बनकर सिस्टम सुधारने वाले, 'मर्सल' बनकर करप्शन से लड़ने वाले और 'लिओ' बनकर दुश्मनों को खत्म करने वाले विजय अब तमिलनाडु की सरकार चलाएंगे। विजय को इतनी बड़ी जीत की 5 वजहें 1. विजय का स्टारडम, विजय ही पार्टी, विजय ही मुद्दा 28 साल के भास्कर चेन्नई में रहते हैं। DMK और स्टालिन के समर्थक थे। सरकार का काम भी पसंद करते थे। 23 अप्रैल को वोटिंग वाले दिन थलापति विजय की पार्टी TVK को वोट दे दिया। बोले कि माहौल बदल गया है। अब विजय ही इकलौते विकल्प हैं। वही तमिलनाडु में बदलाव ला सकते हैं। ये सिर्फ भास्कर की कहानी नहीं है। सेंट्रल और नॉर्थ तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों में चुनाव से 2 दिन पहले वोटर का मूड बदल गया। चुनाव की कवरेज करते हुए हम थलापति विजय की लहर महसूस कर पा रहे थे। हमने विजय की कई रैलियां और रोड शो भी कवर किए। चेन्नई के टीनगर की रैली में विजय के लिए लोगों में दीवानगी देखी। विजय को देखते ही एक शख्स पहले जोर से चिल्लाया, फिर रोने लगा। विजय की एक झलक के लिए उसने 6 घंटे धूप में खड़े होकर इंतजार किया था। विजय का रोड शो शाम को 4 बजे था, लेकिन भीड़ सुबह 11 बजे से जुटने लगी। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई। हजारों लोग तेज धूप में बैरिकेड के पीछे खड़े रहे। मकसद सिर्फ एक, विजय की एक झलक मिल जाए। बस से 300 किमी सफर करके आया एक लड़का, बेटे को लेकर आई मां, 61 साल की बुजुर्ग महिला सभी को सिर्फ एक बार विजय को देखना था। इन लोगों को नहीं पता था कि विजय सरकार में आकर क्या करेंगे, उनके मेनिफेस्टो में क्या वादे हैं, वे स्टालिन सरकार से क्या अलग करेंगे। फिर भी वे विजय को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते थे। विजय की ये जीत उनके स्टारडम की ही जीत है। विचारधारा, पार्टी, चुनावी गुणा-गणित, लोकलुभावन वादे सब पीछे रह गए। विजय का थलापति कल्ट फिगर इन सब को पछाड़कर आगे निकल गया। पूरे तमिलनाडु में लोग विजय के अलावा न उनकी पार्टी के नेताओं को जानते हैं और न ही दूसरे नेताओं की पार्टी में कोई अहमियत है। विजय की पार्टी से चुनाव लड़े ज्यादातर नेता DMK और AIADMK के बागी या पूर्व नेता हैं। 2. MGR के रास्ते चले, पॉलिटिक्स के लिए फिल्में छोड़ी MGR के नाम से मशहूर एमजी रामचंद्रन भारत के पहले फिल्म स्टार थे, जो मुख्यमंत्री बने। 1977 से 1987 तक तमिलनाडु के CM रहे। उन्होंने ही AIADMK बनाई थी। विजय तमिल फिल्मों में मौजूदा दौर के सबसे बड़े स्टार हैं। करियर के पीक पर रहते हुए राजनीति में एंट्री की। उनसे पहले सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हासन राजनीति में तब आए थे, जब उनकी फिल्में चलना बंद हो गई थीं। 2024 में आई GOAT फिल्म में विजय डबल रोल में थे। इसने बॉक्स ऑफिस पर 450 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया और उनकी पॉलिटिकल एंट्री से पहले माहौल बना दिया। 2023 में आई लियो ने दुनियाभर में 600 करोड़ रुपए कमाए। 2023 में ही आई फिल्म वारिसु ने विजय को तमिलनाडु का बेटा और अन्ना यानी बड़ा भाई वाली इमेज दी। फिल्में सुपरहिट हो रही थीं, लेकिन अचानक विजय ने पॉलिटिक्स में एंट्री का ऐलान कर दिया। इसके बाद जन नायगम उनकी आखिरी फिल्म होती, लेकिन ये विवादों की वजह से रिलीज ही नहीं हो पाई। 3. फैन क्लब पॉलिटिक्स, लाखों फैन की कार्यकर्ता बन गए थलापति विजय ने भले दो साल पहले पार्टी बनाई हो, लेकिन वे अपने फैन क्लब के जरिए 20 साल से सोशल वर्क कर रहे थे। तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों में संगठन बनाना और फिर उनके जरिए सोशल वर्क करना। विजय 20 साल पहले से 2026 की तैयारी कर रहे थे। तमिलनाडु में फैन क्लब कल्चर बहुत बड़ा है। हर सुपरस्टार के इलाकों, शहरों के नाम से फैन क्लब होते हैं। ये क्लब पसंदीदा स्टार के नाम पर सोशल वर्क करते हैं, लेकिन इसके पीछे खुद स्टार ही होता है। विजय के तमिलनाडु में सैकड़ों फैन क्लब हैं। यही फैन क्लब पार्टी स्ट्रक्चर में बदल गए। फैन क्लब का ढांचा काफी हद तक किसी पॉलिटिकल पार्टी की तरह होता है। स्टेट लेवल पर लीडरशिप होती है। इसके बाद इलाकों के हिसाब से कोऑर्डिनेटर्स काम करते हैं। सबसे नीचे एरिया और बूथ वॉलंटियर्स होते हैं। विजय राजनीति में नहीं आए थे, तब तक ये फैन क्लब ब्लड डोनेशन कैंप, मेडिकल कैंप लगाने जैसे काम करते रहे। गरीबों को खाना-कपड़े देकर मदद करते रहे। सरकारी दफ्तरों, अस्पताल, पुलिस, कोर्ट के मामलों में मदद करते रहे। इससे लोगों का विजय पर भरोसा बढ़ता गया। TVK के चीफ स्पोक्सपर्सन फेलिक्स गेराल्ड बताते हैं, 'विजय ने पार्टी नहीं बनाई थी, तब से विजय का फैन क्लब थलापति विजय मक्कल इयक्कम नाम से चलता था। बाद में इसी को पार्टी में बदल दिया गया। 2021 में फैन क्लब से जुड़े 130 लोगों ने लोकल बॉडी चुनाव लड़ा था। इनमें से 115 जीत गए। विजय ने पार्टी लॉन्च करने के पहले ही जमीन का अंदाजा लगा लिया था। कहने को वे 2024 में राजनीति में आए, लेकिन ये उनके फैन क्लब की मेहनत का नतीजा है।’ चुनाव के करीब 2-3 साल पहले से विजय मौजूदा मुख्यमंत्री स्टालिन के खिलाफ प्रचार कर रहे थे। हालांकि BJP और AIADMK के लिए उनका रवैया थोड़ा नरम दिखा। हमने फेलिक्स से पूछा कि विजय BJP को लेकर नरम रवैया क्यों रखते हैं? फेलिक्स जवाब देते हैं, ‘हम भ्रष्टाचार के खिलाफ है। DMK सही मायने में सेक्युलर पार्टी भी नहीं है। हम BJP की भी आलोचना करते हैं। विजय ने साफ किया है BJP वैचारिक रूप से हमारी विरोधी है।’ 4. क्रिश्चियन-मुस्लिम वोट DMK से विजय की तरफ शिफ्ट विजय ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो TVK के मंच से पहली बार कहा- मेरा नाम है जोसेफ विजय। उन्होंने साफ कर दिया कि वे क्रिश्चियन है। तमिलनाडु में मुस्लिम और क्रिश्चियन मिलाकर करीब 12% वोटर हैं। अब तक ये वोट बैंक DMK का था। विजय की एंट्री ने क्रिश्चियन वोट तो काटे ही, मुस्लिमों के भी बड़े तबके को अपने पाले में किया। मुस्लिम और क्रिश्चियन वोट ज्यादातर शहरी इलाकों में हैं। यहीं TVK मजबूत बनकर उभरी है। तमिलनाडु में 1967 से सत्ता सिर्फ DMK और AIADMK के पास रही। विजय ने इस दीवार को गिरा दिया। लोगों को एक विकल्प की तलाश में थी। सुपरस्टार रजनीकांत पार्टी बनाकर पीछे हट गए, कमल हासन बेअसर रहे, लेकिन विजय ने उस खाली जगह को भर दिया। सीनियर जर्नलिस्ट आर. रंगराज कहते हैं- विजय ने DMK के 13 से 14% और AIADMK के करीब 10% वोट काटकर अपना वोट बैंक बड़ा बना लिया। फर्स्ट टाइम वोटर्स भी विजय की तरफ चले गए। TVK ने 30-33% का बड़ा वोट बैंक अपने पाले में किया है। 5. युवाओं और महिलाओं का एकतरफा समर्थन युवाओं और महिलाओं में विजय के लिए अलग ही दीवानगी है। एक पूरी पीढ़ी उनकी फिल्में देखकर बड़ी हुई है। यही पीढ़ी फर्स्ट और सेकेंड टाइम वोटर है, जिन्होंने विजय को वोट दिया है। युवा और महिला आबादी करीब 2 करोड़ हैं। तमिलनाडु के करीब 20-25% वोटों पर विजय का सीधा असर है। विजय अपनी रैलियों और सभाओं में कास्ट पॉलिटिक्स करते नहीं दिखे। उनका फोकस महिला और युवा वोटबैंक पर रहा। उनकी पार्टी युवाओं और महिलाओं से सीधे जुड़ी। पहली बार वोट देने वाले 18-25 साल के युवाओं के लिए विजय स्टाइल आइकन के साथ-साथ उम्मीद भी थे। नीट का विरोध और शराब के खिलाफ सख्त रुख युवाओं-महिलाओं को विजय के करीब लाया। अल्पसंख्यक, यानी मुस्लिम-क्रिश्चियन और युवा-महिला वोट मिला लें, तो करीब 25% वोट विजय के पक्ष में एकतरफा एकजुट हुआ। बचे वोट DMK और AIADMK में बंट गए। यही विजय की जीत की सबसे बड़ी वजह है। …………………………..चुनाव नतीजों पर ये खबर भी पढ़ें बंगाल के रुझानों में BJP को बहुमत, भवानीपुर में ममता आगे बंगाल की 293 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। एक सीट फालता पर 21 मई को फिर वोटिंग होगी। शुरुआती रुझान में BJP को बहुमत मिला है। BJP 191 और TMC 96 सीटों पर आगे चल रही है। BJP को 45%, TMC को 42% वोट मिलते दिख रहे हैं। काउंटिंग के दौरान राज्य में चार जगह हिंसा-झड़प हुई। आसनसोल में TMC ऑफिस कैंप में तोड़फोड़, तो जमुरिया में आगजनी की गई। भवानीपुर से ममता बनर्जी आगे हैं। सुवेंदु अधिकारी पीछे चल रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर

दैनिक भास्कर 4 May 2026 4:02 pm

गढ़ में 55% सीटें हार रहीं ममता, क्या मुसलमान छिटके:बीजेपी ने सिर्फ 7% वोट से 117 सीटें कैसे बढ़ाईं; बंगाल नतीजों के 5 फैक्टर्स

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार होगी। दोपहर 1 बजे तक के रुझानों में बीजेपी 184 सीटों के साथ बहुमत से कहीं आगे है, जबकि टीएमसी 91 सीटों पर सिमटती दिख रही है। 2021 के मुकाबले बीजेपी के महज 7% वोट बढ़े, लेकिन सीटें 117 बढ़ती दिख रही हैं। ममता अपना गढ़ भी नहीं बचा पाईं। जिन 119 सीटों पर टीएमसी पिछले 15 साल से लगातार काबिज थी, उनमें से 65 सीटें यानी करीब 55% सीटें बीजेपी छीनती दिख रही है। लेकिन ये सब कैसे हुआ, जानेंगे इलेक्शन एक्सप्लेनर में… सबसे पहले वो आंकड़ा, जो बीजेपी की जीत की गहराई को बताता है… अब जानिए बीजेपी की जीत के 5 बड़े फैक्टर… 2011 में खाता न खोल पाने वाली बीजेपी ने 2021 में 77 सीटें जीतीं और अब बंगाल में सरकार बनाने वाली है। पिछली दो बार आंकड़े साफ बताते हैं कि बीजेपी को 50% से ज्यादा हिंदुओं का वोट मिला। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है- हिंदू वोटर्स का अपने पक्ष में ध्रुवीकरण। हिंदुओं को लामबंद करने के लिए इस चुनाव में बीजेपी ने कई दांव चले… हिंदू ध्रुवीकरण के आड़े आ रहे ‘माछ-भात’ को हथियार बनाया ‘काबा बनाम मां काली’ का नैरेटिव बनाया ममता ने बतौर नेता और सीएम अपना महिला वोट बैंक तैयार किया। टीएमसी में 9 महिला सांसद और 39 महिला विधायक भी हैं। बीजेपी ने ममता के इसी कोर वोटबैंक को साधा… महिलाओं को ₹3000 देने का वादा, सरकारी नौकरी में 33% आरक्षण महिला आरक्षण बिल के नाम पर टीएमसी को महिला-विरोधी बताया पीड़ित महिलाओं के परिजनों को टिकट दिए पीएम, 12 सीएम, 15 केंद्रीय मंत्रियों ने मांगे वोट 15 दिन तक बंगाल में रहे शाह 4 केंद्रीय + 4 बंगाली नेताओं का कोर ग्रुप बनाया बूथ से जिले तक का माइक्रो-मैनेजमेंट बीजेपी के बंगाल जीतने से नेशनल पॉलिटिक्स पर क्या असर पड़ेगा? ***** ग्राफिक्स- दृगचंद्र भुर्जी------------------- चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… दीदी बोली थीं- तृणमूल रही तो फिर मिलेंगे:मोदी ने कहा- प्याज खाता हूं, दिमाग नहीं, राहुल का तीर मिस; चुनाव के वायरल मोमेंट्स ‘रहा गुलशन तो फूल खिलेंगे, तृणमूल रहा तो फिर मिलेंगे।’ बंगाल नतीजो में टीएमसी हारती दिखी, तो ममता बनर्जी का ये डॉयलाग फिर वायरल हो गया। 5 राज्यों के चुनाव के दौरान ऐसे कई मोमेंट्स आए, जिन्हें हमने 3 मिनट के वीडियो में बुना है। क्लिक करके देखिए

दैनिक भास्कर 4 May 2026 2:37 pm

दीदी बोलीं- तृणमूल रही तो फिर मिलेंगे:मोदी ने कहा- प्याज खाता हूं, दिमाग नहीं, राहुल का तीर मिस; चुनाव के वायरल मोमेंट्स

‘रहा गुलशन तो फूल खिलेंगे, तृणमूल रहा तो फिर मिलेंगे।’ बंगाल नतीजो में टीएमसी हारती दिखी, तो ममता बनर्जी का ये डॉयलाग फिर वायरल हो गया। 5 राज्यों के चुनाव के दौरान ऐसे कई मोमेंट्स आए, जिन्हें हमने 3 मिनट के वीडियो में बुना है। ऊपर तस्वीर पर क्लिक करके आप भी देखिए-

दैनिक भास्कर 4 May 2026 12:51 pm

जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती में कटौती के बाद भी मर्ज ने दोनों देशों में सहयोग जारी रखने का किया वादा

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हाल ही में हुए जुबानी तनाव के बावजूद वह अमेरिका के साथ सहयोग नहीं छोड़ेंगे।

देशबन्धु 4 May 2026 8:30 am

सीनेटर वार्नॉक ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की, बताया मतदान अधिकारों पर बड़ा झटका

डेमोक्रेटिक सीनेटर राफेल वार्नॉक ने रविवार को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के मतदान अधिकारों से जुड़े फैसले की कड़ी आलोचना की

देशबन्धु 4 May 2026 6:59 am

ममता को बाल से खींचकर बाहर फेंका गया:18 साल बाद बदला लिया, सोनिया की कांग्रेस को जीरो किया; ‘दीदी’ की पूरी कहानी

30 अप्रैल 2026। रात करीब 8 बजे। कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल के बाहर भारी बारिश हो रही थी। तभी एक गाड़ी आकर रुकी। सफेद साड़ी, पैरों में रबड़ की चप्पल। अपने सिग्नेचर स्टाइल में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उतरीं, और सीधे स्ट्रॉन्ग रूम की तरफ बढ़ चलीं। केंद्रीय बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। ममता ने चुनाव नियमों का हवाला दिया और अंदर चली गईं। करीब चार घंटे तक वहीं डटी रहीं। रात 12 बजे बाहर निकलीं और कहा- अगर EVM चुराने या काउंटिंग में धांधली हुई, तो हम जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे। जवाब में BJP ने कहा– ये हार का डर है। लेकिन जो लोग ममता बनर्जी को जानते हैं, उनके लिए यह कोई नई बात नहीं थी। यह वही ममता हैं, जो 1975 में जेपी की कार के बोनट पर चढ़ गई थीं। जिन्हें 1993 में राइटर्स बिल्डिंग की सीढ़ियों पर बालों से पकड़कर घसीटा गया, तो 18 साल बाद बदला लिया। और जो 2021 में प्लास्टर चढ़े पैर के साथ व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव जीती थीं। मंडे मेगा स्टोरी में उन्हीं ‘स्ट्रीट फाइटर दीदी’ यानी ममता बनर्जी की रोचक कहानी… ****अब 2026 का चुनाव सिर्फ वोट की लड़ाई नहीं है। ममता ने इस बार ‘बंगाली अस्मिता’ को अपनी सबसे बड़ी ढाल बनाया। केंद्र सरकार को रैलियों में ‘दिल्ली के जमींदार’ कहा। खुद को ‘बंगाल की उस क्रांतिकारी मिट्टी की बेटी’ बताया जो अपने लोगों की गरिमा के लिए आखिरी सांस तक लड़ने को तैयार है। यह कहानी 30-B हरीश चटर्जी स्ट्रीट के उस दो कमरे के मकान से शुरू हुई थी। उस मोनाबाबा से, जिसने 15 साल की उम्र में अपना बचपन गंवाया और एक जिद ठान ली कि लड़ती रहूंगी। कार के बोनट से लेकर व्हीलचेयर तक, रॉइटर्स बिल्डिंग की सीढ़ियों से लेकर भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम तक- वह जिद आज भी जिंदा है। लेकिन ममता अर्श पर रहेंगी या फर्श पर, ये आज विधानसभा चुनाव के नतीजों से तय होगा।****** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और महेंद्र वर्मा --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में BJP की सरकार बनती क्यों दिख रही:मछली का भोज, शाह की नई स्ट्रैटजी और SIR; BJP के 5 बड़े दांव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद हुए ज्यादातर एग्जिट पोल में BJP की सरकार बनती दिख रही है। 7 में से 5 बड़ी एजेंसियों के सर्वे बीजेपी को बहुमत से ज्यादा सीटें दे रहे हैं। नतीजे 4 मई को आएंगे। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 4 May 2026 5:10 am

होर्मुज में सख्ती बढ़ाने के डोनाल्‍ड ट्रंप ने दिए संकेत, ईरान बोला- फिर भड़क सकता है युद्ध

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति में और अधिक व्यवधान आ सकता है।

देशबन्धु 3 May 2026 2:16 pm

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की हालत बेहद गंभीर, ICU में भर्ती; अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

नरगिस मोहम्मदी से जुड़े एक फाउंडेशन ने उनकी सेहत को लेकर चिंताजनक जानकारी साझा की है। फाउंडेशन के अनुसार, नरगिस को अस्पताल ले जाने से पहले दो बार बेहोशी की स्थिति का सामना करना पड़ा।

देशबन्धु 3 May 2026 2:03 pm

टैंकर ट्रैकर्स फर्म का दावा, 'ईरानी सुपरटैंकर ने यूएस नाकाबंदी को दिया चकमा'

ईरान का एक सुपरटैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंच गया है। मॉनिटरिंग फर्म 'टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम' के अनुसार, जहाज लगभग 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर वहां से निकल गया

देशबन्धु 3 May 2026 10:09 am

अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई को 'पाइरेसी' बताने पर विवाद, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की उठाई मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर विवाद और गहरा गया है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों की जब्ती कार्रवाई को पाइरेट्स जैसा (समुद्री लुटेरों) बताया

देशबन्धु 3 May 2026 9:22 am

ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह जल्द ही इसकी समीक्षा करेंगे, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगा

देशबन्धु 3 May 2026 9:08 am

भाजपा अगर 500-700 वोटों से आगे हो, तो दोबारा गिनती की मांग करें: सीएम ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के काउंटिंग एजेंटों को निर्देश दिया कि वे उन बूथों पर तत्काल दोबारा गिनती की मांग करें

देशबन्धु 3 May 2026 7:30 am

बांग्लादेश बार एसोसिएशन चुनाव: अवामी लीग से जुड़े वकीलों के नामांकन रद्द होने पर वैश्विक आलोचना

बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने 13-14 मई को होने वाले चुनाव के लिए 90 में से 42 वकीलों के नामांकन पत्र यह कहते हुए खारिज कर दिए कि उनका अवामी लीग से संबंध है

देशबन्धु 3 May 2026 7:10 am

पाकिस्तान: मानवाधिकार वकीलों की अपील सुनवाई में देरी पर अधिकार संगठन चिंतित

पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी-पाकिस्तान) ने शनिवार को सरकार और संबंधित न्यायिक अधिकारियों से मानवाधिकार वकील ईमान ज़ैनब मजारी-हाज़िर और हादी अली चट्ठा के कानूनी अधिकारों की तत्काल रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की

देशबन्धु 3 May 2026 6:50 am

आईडीएफ का सबसे बड़ा वार, हिजबुल्लाह के 120 ठिकाने ध्वस्त

इजराइल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने बताया कि उसने हिजबुल्लाह के लगभग 120 ठिकानों पर हमला किया है

देशबन्धु 3 May 2026 6:16 am

दक्षिण कोरिया-ईरान में बातचीत, होर्मुज स्ट्रेट पर सुरक्षित आवाजाही शुरू करने की अपील

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बात की और होर्मुज स्‍ट्रेट से फिर से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही शुरू करने की अपील की।

देशबन्धु 3 May 2026 6:00 am

संडे जज्बात-तीन बार कैंसर से लड़ी, फिर पति को हुआ:हमने कई बार मौत को करीब से देखकर नौकरी-कारोबार छोड़ा, चरखे में सुकून तलाश लिया

मैं ललिता हूं और हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हूं। कभी मेरी पहचान एक फैशन डिजाइनर के तौर पर थी। रसूखदार परिवारों से कपड़ों के ऑर्डर मिलते थे। रंग, कपड़े, डिजाइन और ग्लैमर की दुनिया में मेरी पहचान थी। मेरे पति अपना बिजनेस संभालते थे। जिंदगी आराम से गुजर रही थी और पैसों की भी कोई कमी नहीं थी। मुझे लगता था कि जिंदगी ने मुझे सब कुछ दे दिया है, लेकिन सिर्फ 15 साल की उम्र में मुझे दो बार टीबी हुई। बड़ी मुश्किल से उससे उबरी, लेकिन असली लड़ाई अभी बाकी थी। आगे चलकर कैंसर ने मुझे तीन बार अपनी चपेट में लिया और एक बार मेरे पति को भी। साल 1995। मेरी उम्र थी 19 साल। दिल्ली में पढ़ाई कर रही थी, तभी एक दिन ब्रेस्ट में तेज दर्द उठा। पहले लगा नॉर्मल समस्या होगी, लेकिन दर्द बढ़ता गया। घबराकर मैंने पापा को बताया और उन्होंने तुरंत मुझे रोहतक बुला लिया। जांच में डॉक्टरों ने बताया कि ब्रेस्ट में गांठ है। उस दौर में मैमोग्राफी जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। 19 साल की उम्र में पहली बार ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़ी मैं डर से कांप रही थी, लेकिन सर्जरी सफल रही और गांठ निकाल दी गई। मेरे ऑपरेशन के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि घर पर एक और तूफान आ गया। पिता को लिवर कैंसर होने का पता चला। वह रिटायर्ड अफसर थे, मजबूत इंसान थे, लेकिन कुछ ही महीनों में बीमारी ने उन्हें मुझसे छीन लिया। पिता मेरे लिए पैसा और प्रॉपर्टी छोड़ गए थे, इसलिए भविष्य की चिंता नहीं थी, लेकिन जिस इंसान के भरोसे मैं खड़ी थी, वही चला गया। मां से मुझे कभी वह अपनापन नहीं मिला। बचपन से घर में काम करने वाली अम्मा ने मुझे पाला, जिन्हें मैं आज भी ‘हंसो मां’ कहती हूं। पापा के जाने के बाद खुद को संभालना मेरी जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाइयों में से एक था। 1997 में मैंने सोचा था कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है। मैं पढ़ाई के लिए दोबारा दिल्ली आ गई थी, लेकिन तभी नाभी के पास तेज दर्द शुरू हुआ। जांच में पता चला कि मुझे बार्थोलिन ग्लैंड कैंसर है, जो वजाइना के हिस्से में होता है। दूसरी बार ‘कैंसर’ शब्द सुनते ही मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। पापा अब इस दुनिया में नहीं थे और मां ने साफ कह दिया- ‘मैं ऑपरेशन के लिए नहीं आऊंगी।’ यह सुनकर मुझे दुख कम, खालीपन ज्यादा महसूस हुआ। आखिर में मैंने दोस्तों को सब बताया। वही मेरे परिवार की तरह खड़े रहे। उन्होंने अस्पताल के चक्कर लगाए, हिम्मत दी और सर्जरी करवाई। लगा कि लड़ाई खत्म हो गई… लेकिन सिर्फ छह महीने बाद उसी जगह फिर दर्द शुरू हो गया, जहां कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। जैसे ही लगा कि जिंदगी फिर सामान्य हो रही है, डॉक्टरों ने बताया कि बार्थोलिन ग्लैंड में कैंसर दोबारा लौट आया है। मुझे फिर ऑपरेशन थिएटर में जाना पड़ा। सर्जरी हुई। धीरे-धीरे संभल रही थी कि छह महीने के भीतर मेरी तबीयत फिर बिगड़ गई। जांच रिपोर्ट ने एक और झटका दिया- इस बार कैंसर फैलोपियन ट्यूब के हिस्से तक पहुंच चुका था। इलाज लंबा, दर्दनाक और थका देने वाला था, लेकिन डॉक्टर किसी तरह मेरी फैलोपियन ट्यूब बचाने में कामयाब रहे। मैं बार-बार कैंसर को हराने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर अस्पताल के कमरे में मुझे पापा की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चुभती थी। कैंसर की लंबी लड़ाई लड़कर जब घर लौटी, तो घर में मां रोज शादी के लिए दबाव बनाने लगीं। मैं मानसिक रूप से इतनी थक चुकी थी कि बस उस माहौल से बाहर निकलना चाहती थी। तब मेरी उम्र 28 साल थी। एक जाट लड़के को पसंद करती थी। मैंने उससे शादी करने का फैसला कर लिया। उसे और उसके परिवार को साफ बता दिया था कि मैं कैंसर सर्वाइवर हूं। मुझे लगा था कैंसर सर्वाइवर होना उनके लिए सबसे बड़ा सवाल होगा, लेकिन उन्हें मेरे कैंसर से नहीं, मेरी उम्र से परेशानी थी- मैं उनके बेटे से पांच साल बड़ी थी। आखिरकार शादी हो गई। लेकिन ससुराल पहुंचते ही एक नई लड़ाई शुरू हो गई। मुझसे घूंघट करने को कहा जाता, हर बात पर रोक-टोक होती। हॉस्टल में पली मेरी आजाद जिंदगी अचानक परंपराओं के घेरे में कैद की जाने लगी। घूंघट न करने पर अक्सर झगड़े होते। आखिरकार रोज के तनाव से तंग आकर मैं पति के साथ अलग रहने लगी। किराए के छोटे से घर में नई शुरुआत की और फैशन डिजाइनिंग सीखी। मैंने बीएएमएस की पढ़ाई की थी। इसलिए शौक में आयुर्वेद की प्रैक्टिस करती थी और साथ ही कपड़े डिजाइन कर अच्छी कमाई भी हो रही थी। शादी को छह साल हो चुके थे और हमारा एक साल का बेटा था। जिंदगी आखिरकार सामान्य लगने लगी थी। फिर एक दिन सब बदल गया। मैं रोहतक से बाहर थी, तभी पति का फोन आया- ‘मेरा मुंह खुलना बंद हो गया है, डॉक्टर के पास जा रहा हूं।’ मैं घबरा गई। तुरंत वापस लौटी और उन्हें अस्पताल लेकर गई। जांच में पता चला कि उन्हें गले का कैंसर है। पति एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे। 45 बार कीमोथेरेपी हुई। पैसों की कमी नहीं थी, लेकिन अपनों का साथ नहीं था। मेरी सास अपने बेटे को देखने तक नहीं आईं। उनकी सर्जरी 12 घंटे चली- सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक। बाहर मैं एक साल के बच्चे को गोद में लेकर बैठी थी और अंदर पति जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे थे। तीन महीने बाद उनकी हालत सुधरने लगी। उन दिनों मैं अपनी आयुर्वेद की पढ़ाई के भरोसे जड़ी-बूटियों का काढ़ा बनाती थी, जिससे उनकी रिकवरी में सहारा मिला। पति के ठीक होने के बाद भी हमारे भीतर का डर खत्म नहीं हुआ। हम दोनों मौत को इतने करीब से देख चुके थे कि पैसा, बिजनेस और भाग-दौड़ अचानक बहुत छोटे लगने लगे। हमने तय किया- अब जिंदगी सिर्फ कमाने के लिए नहीं, सुकून से जीने के लिए होगी। मेरे पति ने अपना एग्रीकल्चर प्रोडक्ट बिजनेस छोड़ दिया। मैं फैशन डिजाइनिंग कर रही थी, लेकिन जिंदगी मुझे एक बिल्कुल नए रास्ते की ओर ले जा रही थी। एक दिन मुझे रेडियो के टॉक शो में बुलाया गया। वहां डायरेक्टर ने एक कपड़ा मेरी तरफ बढ़ाया और पूछा- बताओ, यह किस धागे से बना है? मैं जवाब नहीं दे पाई। उन्होंने कहा- तुम फैशन डिजाइनर हो और इसे नहीं पहचानतीं? यह रेजा कपास है। उनकी बात मेरे दिल पर लग गई। मैंने तुरंत कहा- मुझे 15 दिन दीजिए, मैं इसके बारे में सब जानकर लौटूंगी। मैंने इंटरनेट खंगाला, लोगों से पूछा, रिकॉर्ड ढूंढ़े- लेकिन कुछ नहीं मिला। आखिरकार पुरानी किताबों में इसका जिक्र मिला। कबीरदास और गरीबदास की रचनाओं में रेजा कपास पर बातें मिलीं, जिसे पढ़कर लगा कि मैं किसी भूली हुई विरासत के पीछे चल पड़ी हूं। रेजा सूत की कहानी ने मुझे भीतर तक बेचैन कर दिया। मैंने तय किया कि सिर्फ इसके बारे में पढ़ना नहीं, इसे अपने हाथों से समझना है। हरियाणा में एक पुराने मुस्लिम परिवार का पता चला, जो पीढ़ियों से चरखा चलाना सिखाता था। मैं उनके पास गई, चरखा सीखा और फिर एक चरखा अपने घर लेकर आई। मैंने अपने पति को भी यह सिखाया। हैरानी की बात यह थी कि जिस मन ने सालों तक अस्पताल, कैंसर और मौत का डर झेला था, उसे चरखे की आवाज में शांति मिलने लगी। धीरे-धीरे चरखा हमारे लिए सिर्फ हुनर नहीं, मानसिक इलाज जैसा बन गया। फिर मुझे लगा कि अगर इसने हमें सुकून दिया है, तो शायद उन लोगों को भी दे सकता है, जिनकी जिंदगी दुखों से भरी है। मैं जेलों में गई और कैदियों को चरखा सिखाना शुरू किया। उनके हाथों से निकला सूत कपड़ों में बदलता और उन्हें यह एहसास देता कि वे अब भी किसी काम के हैं। बाद में हमने हैंडलूम की मशीन पर धागों को कातना शुरू किया। अब तक मेरी सोच नहीं बदली थी। मेरा काम भी बदल गया था। मैंने हरियाणा में 1970 में खत्म हो चुकी रेजा कपास की खेती को फिर से जिंदा करने की ठानी। बड़ी मशक्कत से इसके बीज खोज पाई। आज मैं किसानों को रेजा कपास का बीज देती हूं और उनसे इसकी खेती करवाती हूं। उसी कपास से खादी के कपड़े बनाती हूं। उन कपड़ों पर डिजाइन खुद तैयार करती हूं। आज ये कपड़े देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रहे हैं। मेरी जानकारी में पूरे भारत में सिर्फ मैं ही रेजा कपास से डिजाइनर कपड़े बना रही हूं। लेकिन मेरी असली कमाई कपड़े नहीं। यह धागा है। जब यह घूमता है, तो मेरे भीतर का शोर धीमा पड़ जाता है। हर धागे के साथ लगता है कि मैं अपने टूटे हिस्सों को फिर से जोड़ रही हूं। हमने जिंदगी बहुत तेज भागकर जी थी- बीमारी, पैसा, बिजनेस, अस्पताल… सब देखा। अब हमने धीरे जीना सीखा है। आज भी मेरे पास घर, पैसा और सुविधाएं हैं, लेकिन सबसे बड़ी दौलत शांति है। पहले मैं सिर्फ कपड़े बुनती थी, अब अपनी जिंदगी को फिर से बुन रही हूं। (ललिता ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-हम अधेड़ कुंवारे कौवों जैसे अपशकुन माने जाते हैं:सरकार हमें देती है पेंशन, जाने कितने जानवरों से रेप करते पकड़े गए लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

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