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रूस पर दबाव बढ़ाने की तैयारी, ईयू ने 21वें प्रतिबंध पैकेज का किया ऐलान

यूरोपीय आयोग ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का 21वें पैकेज प्रस्तावित किया है। इसका लक्ष्य ऊर्जा, वित्तीय सेवाएं और क्रिप्टो, व्यापार और पहली बार मत्स्य पालन जैसे अहम सेक्टर हैं

देशबन्धु 9 Jun 2026 11:42 pm

बालेंद्र शाह ने मंत्रिमंडल का किया विस्तार, सुधन गुरुंग फिर बने गृह मंत्री

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। उन्होंने सुधन गुरुंग को फिर से गृह मंत्री नियुक्त किया और महावीर पुन को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री बनाया।

देशबन्धु 9 Jun 2026 11:20 pm

आज का एक्सप्लेनर:भारत ने अचानक 12 परमाणु बम क्यों तैनात किए; 3 साल से जखीरा बढ़ा रहा, चीन-पाक से एकसाथ निपटने को तैयार?

भारत ने पिछले 3 साल में 26 परमाणु हथियार बढ़ाए। अब परमाणु जखीरा 190 तक पहुंच गया है। भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर बम मिसाइल्स पर लोड करके तैनात कर दिए हैं। ये खुलासा स्वीडिश थिंकटैंक SIPRI की लेटेस्ट रिपोर्ट में हुआ है। आखिर इस तैनाती के मायने क्या हैं और भारत लगाातर अपना न्यूक्लियर जखीरा क्यों बढ़ा रहा; आज के एक्सप्लेनर में 6 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: पिछले दिनों भारत के परमाणु जखीरे में क्या-क्या बदला?जवाबः स्वीडन का थिंकटैंक है- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI। ये दुनियाभर के परमाणु हथियारों पर नजर रखता है और हर साल एक रिपोर्ट जारी करता है। 8 जून को जारी ‘SIPRI ईयरबुक 2026’ के मुताबिक… सवाल-2: भारत के परमाणु हथियार ‘तैनात’ करने का मतलब क्या है? जवाबः परमाणु बम में मौजूद यूरेनियम और प्लूटोनियम जैसे एनरिच्ड रेडियोऐक्टिव मटेरियल आपस में रिएक्ट करके भारी मात्रा में एनर्जी रिलीज करते हैं, जिससे भयंकर विस्फोट होता है। परमाणु बम अकेले काम नहीं करता। इसे दुश्मन के ठिकाने तक पहुंचाने के लिए एक डिलीवरी सिस्टम की भी जरूरत होती है। ये डिलीवरी सिस्टम 3 तरह के हो सकते हैं… अब सवाल आता है कि परमाणु बम को मिसाइल से जोड़कर रखें या अलग-अलग। इसके 2 तरीके होते हैं- 1. डी-मेटेड: इसमें वॉरहेड यानी परमाणु बम और मिसाइल अलग-अलग रखे जाते हैं। अगर दुश्मन अटैक करता है या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा खतरा हो, तो दोनों को जोड़कर फायर कर दिया जाता है। 2. मेटेड: वॉरहेड पहले से मिसाइल पर फिट होते हैं, ताकि खतरे की स्थिति में फौरन सीधे फायर किया जा सके। भारत अब तक पहला तरीका अपनाता था। लेकिन SIPRI की रिपोर्ट कहती है कि पहली बार भारत ने शांतिकाल में 12 परमाणु हथियार मिसाइलों पर तैनात कर दिए हैं। शांतिकाल, यानी वो स्थिति, जब एक देश किसी दूसरे देश के साथ सीधे तौर पर जंग में शामिल नहीं होता। यह बड़ा बदलाव इसलिए है, क्योंकि अब तक यह काम सिर्फ अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ही करते थे। भारत इस क्लब में शामिल होने वाला छठा देश बन गया है। मौजूदा समय में दुनियाभर की ऑपरेशनल सेनाओं के पास मौजूद 4,012 परमाणु हथियारों में से करीब 2,200 परमाणु हथियार मिसाइलों और विमानों पर तैनात हैं। ये डिप्लॉयड हथियार हाई अलर्ट पर रखे गए हैं। सवाल-3: भारत ने अचानक 12 परमाणु बम क्यों तैनात कर दिए? जवाबः एक्सपर्ट्स इसके पीछे 3 बड़ी वजहें बताते हैं… 1. न्यूक्लियर ट्रायड के लिए पनडुब्बियों पर न्यूक्लियर बम की तैनाती ऑबर्जवर रिसर्च फाउंडेशन यानी ORF में फेलो और डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी के मुताबिक, ‘12 परमाणु बमों की तैनाती पूरी तरह से स्ट्रैटेजिक फैसला है। भारत अब तक सुरक्षा कारणों से न्यूक्लियर वॉरहेड्स को मिसाइल से अलग कहीं दूर लोकेशंस पर रखता आया है, लेकिन अब हमारे पास न्यूक्लियर हमले करने में सक्षम सबमरीन्स मौजूद हैं। ये पेट्रोलिंग या गश्त के लिए जाती हैं, तो वहां परमाणु बमों को मिसाइलों से अलग रखना संभव नहीं है।’ 2. पाकिस्तान के टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों का जवाब भारत ने 2003 में अपना न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन जारी किया था। इसके मुताबिक, भारत न्यूक्लियर अटैक के लिए 'नो फर्स्ट यूज' पॉलिसी अपनाता है। यानी भारत पहला वार नहीं करेगा, लेकिन न्यूक्लियर अटैक का जवाब न्यूक्लियर अटैक से देगा। जबकि पाकिस्तान ‘नो फर्स्ट यूज’ की पॉलिसी नहीं मानता। इसके उलट वो भारत पर परमाणु हमला करने की धमकी देता आया है। पाकिस्तान ने हमेशा अपने जखीरे में भारत से ज्यादा परमाणु बम बनाए रखने की कोशिश की है। 2024 तक पाकिस्तान के पास भारत से 2 परमाणु बम ज्यादा थे। साथ ही पाकिस्तान के पास NASR (HAtf-9) जैसी लैंड बेस्ड न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकने वाली बैलिस्टिक मिसाइल हैं, जिसकी रेंज 60-70 किलोमीटर है। इसे पाकिस्तान का ‘टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन’ भी कहा जाता है। भारत के पास 5 हजार किमी से ज्यादा दूरी यानी चीन तक अटैक करने की क्षमता वाली मिसाइल है, लेकिन 100 से कम रेंज में वार करने वाली मिसाइलें नहीं हैं। एक संभावना है कि भारत ने पाकिस्तान के टैक्टिकल हथियारों के काउंटर के लिए 12 परमाणु बम तैनात किए। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ा है। ऐसे में भारत किसी संभावित टकराव का जवाब देने के लिए अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है। 3. भारत की उत्तरी सीमाओं पर चीन के बढ़ते दबदबे का काउंटर सवाल-4: भारत ने 2023 तक पाकिस्तान से कम परमाणु बम क्यों रखे थे? जवाबः भारत के कम हथियार रखने की 3 बड़ी वजहें हो सकती हैं… 1. भारत ने ‘नो फर्स्ट यूज’ स्ट्रैटजी अपनाई 2. पाकिस्तान से सीधी दुश्मनी, लेकिन उसका इलाका छोटा 3. भारत के पास संसाधन कम, लेकिन तकनीक बेहतर की सवाल-5: भारत ने 3 साल में 26 परमाणु बम क्यों बढ़ाए? जवाबः चीन को ध्यान में रखते हुए भारत अपने परमाणु बम बढ़ा रहा है। चीन के सैन्य ठिकाने बिखरे हुए हैं और उसका एरिया भारत से करीब 3 गुना है। इसीलिए उसे ज्यादा परमाणु बमों और लॉन्ग रेंज मिसाइल्स की जरूरत है। अब भारत 6 से 8 हजार किमी रेंज वाली अग्नि-6 जैसी लॉन्ग रेंज मिसाइलों पर काम कर रहा है। ये चीन के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती हैं। ऑबर्जवर रिसर्च फाउंडेशन यानी ORF में फेलो और डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी कहते हैं, ‘चीन ने बहुत तेजी से परमाणु हथियार बढ़ाए हैं, क्योंकि अमेरिका के मुकाबले उसकी परमाणु क्षमता कम है। चीन के बढ़ते हथियारों के चलते भारत भी सतर्क है, क्योंकि चीन उस पर भी इनका इस्तेमाल कर सकता है। इसीलिए भारत भी अपने परमाणु हथियार बढ़ा रहा है।' ORF में सीनियर फेलो सुशांत सरीन कहते हैं, ‘बीते कुछ सालों में पाकिस्तान और चीन नजदीक आए हैं। इसीलिए कूटनीतिक तौर पर भारत, दोनों देशों को ये संदेश ही देना चाहता है कि अगर वे एकसाथ दो मोर्चों से भारत पर हमला करें, तो भी भारत दोनों पर मजबूत पलटवार करने में सक्षम होगा। सवाल-6: तो क्या अब पाकिस्तान और चीन से एकसाथ निपट सकता है भारत? जवाबः चीन परमाणु हथियारों के मामले में हमसे कहीं आगे हैं… उसके पास भारत से करीब 3 गुना यानी 620 परमाणु हथियार हैं। SIPRI के मुताबिक, 2023 से चीन हर साल 100 न्यूक्लियर हथियार बढ़ा रहा है। जबकि भारत ने 2023 से 2025 तक सिर्फ 16 न्यूक्लियर हथियार बढ़ाए हैं। पाकिस्तान और चीन दोनों के परमाणु हथियार जोड़कर भारत से चार गुना ज्यादा होते हैं। SIPRI के मुताबिक, चीन रेगिस्तानों और पहाड़ों पर करीब 350 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल भी तैनात कर रहा है। चीन ने भी पहली बार अपने 24 परमाणु हथियारों को मिसाइलों और ऑपरेशन बेसों पर तैनात किया है। हालांकि मनोज जोशी कहते हैं, ‘परमाणु युद्ध परमाणु हथियारों की संख्या पर बहुत निर्भर नहीं करती। 5-10 परमाणु बम भी एक पूरा देश तबाह कर सकते हैं। अगर पाकिस्तान के इस्लामाबाद, लाहौर और कराची पर कुल 5 बम ही गिरा दिए जाएं, तो फिर पाकिस्तान में बाकी क्या रहेगा। भारत में मुंबई, दिल्ली और कोई दो बड़े शहरों पर परमाणु हथियार गिरा दिए जाएं, तो बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा।’ मनोज कहते हैं कि इसी तरह अगर चीन हमारे 150 परमाणु हथियार भी खत्म कर दे, तो भी जवाबी हमले के लिए हमारे पास 30 हथियार होंगे। इनसे भारत, चीन के 15 बड़े शहर खत्म कर सकता है। सुशांत भी कहते हैं कि हथियारों का जखीरा सिर्फ न्यूक्लियर डिटरेंस दिखाने के लिए होता है। अगर कभी परमाणु हमले की नौबत आई, तो पाकिस्तान के महत्वपूर्ण तीन-चार इलाकों पर बम गिराना ही भारत के लिए काफी होगा।‘ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…क्या नेपाल ने भी भारतीय जमीन पर कब्जा किया; पीएम बालेन शाह का बड़बोलापन, उनका ही नुकसान क्यों करेगा पीएम बालेन शाह ने रविवार को दावा किया- नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। मामले ने तूल पकड़ा, तो नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 9 Jun 2026 6:21 pm

दक्षिणी लेबनान के शहर टायर में इजरायली एयरस्ट्राइक, 8 की मौत

इजरायली एयरस्ट्राइक में दक्षिणी लेबनान के प्रमुख तटीय शहर टायर में 8 लोगों की मौत हो गई। आईडीएफ (इजरायल डिफेंस फोर्सेस) ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए शहर के निवासियों को क्षेत्र खाली करने का आदेश जारी किया था।

देशबन्धु 9 Jun 2026 5:50 pm

PoK में पाकिस्तान सेना ने प्रदर्शनकारियों पर चलाई गोलियां, 30 से ज्यादा मरे, 200 घायल

पीओके में जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की ओर से 9 जून को एक बड़े लॉन्ग मार्च का आह्वान किया गया था। जेएएसी क्षेत्र का एक प्रमुख नागरिक अधिकार संगठन माना जाता है, जो लंबे समय से शासन व्यवस्था, सब्सिडी, बिजली, खाद्यान्न और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाता रहा है।

देशबन्धु 9 Jun 2026 3:48 pm

एच-1बी वीजा शुल्क पर व्हाइट हाउस ने किया ट्रंप का बचाव, अमेरिकी अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी

अमेरिकी अदालत से 1 लाख डॉलर का एच-1बी वीजा शुल्क रद्द होने के बाद व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बचाव किया है। अमेरिकी संघीय अदालत ने वीजा शुल्क को यह करते हुए रद्द कर दिया कि प्रशासन ने अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर काम किया और एक गैर-कानूनी टैक्स लगाया।

देशबन्धु 9 Jun 2026 12:15 pm

ओमान तट के पास व्यापारी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला, 24 भारतीयों को किया गया रेस्क्यू

भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) मुंबई ने ओमान के अधिकारियों के साथ मिलकर एक त्वरित और सफल बचाव अभियान को अंजाम दिया है

देशबन्धु 9 Jun 2026 9:36 am

भारतीय दूतावास ने एमटी मैरीवेक्स पर सवार 24 भारतीय क्रू सदस्यों के रेस्क्यू के लिए ओमान का किया धन्यवाद

मस्कट में भारतीय दूतावास ने होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में आग लगने की घटना के बाद एमटी मैरीवेक्स पर सवार 24 भारतीय क्रू को बचाए जाने की पुष्टि की है

देशबन्धु 9 Jun 2026 8:55 am

ट्रंप का दावा- ईरान परमाणु समझौते के लिए तैयार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश छोड़ने और अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार है

देशबन्धु 9 Jun 2026 7:52 am

मिसाइल गिरी जहाज तबाह, होर्मुज में 30 दिन फंसे अशोक:एक हफ्ते का खाना पूरे महीने चलाया, 300 जहाज अब भी जंग के बीच

11 सेकेंड का एक वीडियो है। इसमें एक जहाज है, जिसके आगे वाले हिस्से से धुंआ उठ रहा है। वीडियो बना रहा शख्स कैमरा घुमाकर दूर एक और जहाज दिखाता है, जो शायद नेवी का है। भारतीय नाविकों के संगठन फॉरवर्ड सीमैन्स यूनियन ऑफ इंडिया का दावा है कि ये जहाज भारत का है और इस पर 8 जून को होर्मुज स्ट्रेट में ओमान तट के पास हमला हुआ है। जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिनका इंडियन नेवी ने रेस्क्यू कर लिया। अमेरिका और ईरान जंग के बीच बीते 101 दिनों से होर्मुज की यही हालत है। करीब 167 किमी लंबे होर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा 33 किमी चौड़ा है। जंग से पहले हर रोज दुनिया में तेल ट्रांसपोर्ट करने वाला 5वां शिप यहीं से गुजरता था। ओडिशा के मरीन ऑफिसर अशोक दीक्षित 27 फरवरी को कतर से LPG का जहाज लेकर निकले थे। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ गई। अशोक का जहाज होर्मुज में फंस गया। 30 दिन वहीं फंसा रहा। दैनिक भास्कर ने उनके जरिए जाना कि होर्मुज से निकलना कितना खतरनाक है और उनका क्या अनुभव रहा। अशोक का दावा है कि अब भी वहां 300 से ज्यादा जहाज फंसे हैं। इनमें 20 से 22 भारत के हैं। पूरी बातचीत… सवाल: अचानक जंग शुरू होने से होर्मुज पार करने में क्या परेशानी आई? जवाब: जंंग शुरू होते ही हम लोग फंस गए। बाहर निकलने का सवाल ही नहीं था। एक जगह एंकर डालकर खड़े हो गए। कोई मूवमेंट नहीं। 30 दिन ऐसे ही खड़े रहे। हॉर्मुज पार करने की परमिशन नहीं थी। बाकी तो ये इंटरनेशनल बॉर्डर है। आम दिनों में कोई दिक्कत नहीं होती। आराम से एंट्री-एग्जिट होता है। सवाल: होर्मुज पार करते वक्त सबसे बड़ा खतरा क्या था, ईरानी सेना, समंदर में बिछी सुरंग या आसमान से आते ड्रोन?जवाब: पूरा पर्शियन गल्फ जल रहा है। हम बीच में खड़े थे और कुछ भी हो सकता था। चाहे मिसाइल हो, ड्रोन हो या सिंगल फायरिंग, डर तो रहता ही है। मेरे 15-17 साल के करियर में मैंने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी। कभी नहीं सोचा था कि इस तरह फंसना पड़ेगा। अब तो काफी बेहतर स्थिति है। मार्च में तो इतनी फायरिंग हो रही थी कि एक दिन में 6 देशों पर अटैक हो रहा था। वहां फंसे लोग जैसा बता रहे हैं, उस हिसाब से अब खतरा कम है। बस आना-जाना बंद है। सवाल: वहां फंसे थे, तो आपकी मेंटल सिचुएशन कैसी थी, खाने-पीने का इंतजाम कैसे होता था? जवाब: सीनियर अफसरों की जिम्मेदारी होती है कि बहुत पैनिक न हो। हम पैनिक होंगे, तो जूनियर ज्यादा डरेंगे। उनसे बार-बार बोलते थे कि सब ठीक हो जाएगा। मर्जी से काम करो। सब अपने को बिजी रखो। कोई प्रेशर मत लो। सबसे ज्यादा प्रेशर फैमिली का होता है। वे न्यूज देख रहे हाेते हैं, तो डरकर सवाल करते हैं। मैं गल्फ इंडिया के लिए काम करता हूं। गल्फ में लोड करते हैं, इंडिया में डिस्चार्ज करते हैं। अगर आप इंडिया आएंगे तो 4 से 5 दिन गुजरात, मुंबई, मैंगलोर के लिए मिलेंगे। ईस्ट काेस्ट जाएंगे तो 8 से 10 दिन लेंगे। मतलब 4 से 10 दिन के बीच सफर होता है। हम इतने दिन के अलावा एक्स्ट्रा खाना-पानी भी रखते हैं। हमें गल्फ से लोड करके इंडिया में ईस्ट कोस्ट में डिस्चार्ज करना था। हमने 7-8 दिन का खाना ले लिया। फिर होर्मुज में फंस गए। दिन बीतने लगे तो हमने राशनिंग शुरू कर दी। खाने-पीने की चीजों पर कंट्रोल किया। खाना सभी को मिले, लेकिन बर्बाद न हो। रोज सामान चेक करते थे। वॉशिंग मशीन दो दिन में एक बार चलाते हैं, उसे हफ्ते में एक बार कर दिया। ऐसे ही पूरा टाइम निकाला। हमारा खाना खत्म होने वाला था। किस्मत अच्छी थी कि उससे पहले ही हम वहां से निकल गए। सवाल: होर्मुज में जिस जगह जहाज फंसे, वो एरिया कैसा है? इसे पार करने में कितना टाइम लगा? जवाब: एक तरफ ईरान कोस्ट और दूसरी तरफ ओमान कोस्ट है। ओमान की तरफ पहाड़ हैं। ईरान का तट सीधा है। ये करीब 32 से 36 किमी का एरिया है। यहां आप कहीं से भी नहीं जा सकते। इसके लिए एक ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम, यानी TSS है। ये एक तरह का ट्रैक है। इसे इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन रिकमंड करता है। अगर आप ट्रैक से बाहर जाते हैं और कुछ हो जाता है, तो इंश्योरेंस नहीं मिलेगा। TSS पार करने में करीब 3 घंटे लगते हैं। जंग चल रही थी, इसलिए डेंजर जोन पार करने में करीब 22 घंटे लग गए। 5 से 6 घंटे तो बहुत खतरनाक थे। कहीं जहाज जल रहे थे। मिसाइलें गिरी थीं। कहीं टूटे जहाज खड़े हैं। गल्फ ऑफ ओमान पहुंचने के बाद हम सेफ हो गए। सवाल: क्या सफर के दौरान ईरानी या अमेरिकी सेना की तरफ से रेडियो पर वॉर्निंग आई? जवाब: हां, सफर के दौरान रेडियो पर चेतावनी आती थीं। जिस इलाके से हमें होर्मुज पार करना था, उसके आसपास हालात बहुत खराब थे। एक जहाज पर हमला हुआ। इसके बाद रेडियो पर ऐलान किया गया कि ‘Hormuz is currently closed, no ships are allowed to transit. 28 फरवरी को भी ईरान की तरफ से रेडियो पर चेतावनी दी गई थी कि कोई भी जहाज इस रूट से आगे न बढ़े। उनका लहजा काफी सख्त होता था। सवाल: क्या कभी आपके आसपास अटैक हुआ था? जवाब: 19 फरवरी को कतर के LNG टर्मिनल पर अटैक हुआ था। मैं और मेरा एक जूनियर बातें कर रहे थे, तभी हमारे करीब ही मिसाइल गिरी। कतर ने 2-3 मिसाइल इंटरसेप्ट की थीं। उनके टुकड़े हमारे आसपास के कुछ शिप पर गिरे थे। कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन जहाजों को नुकसान हुआ। कतर नेवी ने सभी को फोन करके पूछा भी कि आपका नुकसान हुआ है क्या? सवाल: होर्मुज पार करते वक्त किन कानूनों का पालन करना पड़ता है? जवाब: बहुत से इंटरनेशनल नियम और नेविगेशन प्रोसेस का पालन करना पड़ता है। होर्मुज नेविगेशन के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। जहाजों को तय नेविगेशन चैनल का ही इस्तेमाल करना पड़ता है। आने और जाने वाले जहाजों के लिए अलग-अलग ट्रैक होते हैं। होर्मुज में एंट्री से पहले हर शिपिंग कंपनी के अपने सुरक्षा नियम भी होते हैं। ये कंपनी के मुताबिक, अलग-अलग हो सकते हैं। सफर के दौरान जहाज के सभी अधिकारियों और क्रू को अलर्ट रहना पड़ता है। इंजन को हमेशा रेडी पोजीशन में रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर जहाज को तुरंत कंट्रोल किया जा सके। सवाल: भारत सरकार या इंडियन नेवी की तरफ से कोई मदद मिली? जवाब: हां, इंडियन नेवी की वजह से ही हम बाहर निकल पाए। उन्होंने 28 मार्च को हमसे बात की। 29 मार्च की सुबह हम वहां से निकल पाए। 30 दिन फंसे रहने के बाद हमने इंडियन नेवी को देखा, तो सब बहुत खुश हुए। ईरान ने इजराइल पर हमले रोके, अमेरिका सीजफायर की कोशिश में जुटाअमेरिका और ईरान के बीच 39 दिन की जंग के बाद 7-8 अप्रैल को पहले अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी। दो महीने बाद ईरान ने 7 जून की रात इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह हमला लेबनान में इजराइली हमले के जवाब में किया गया। इजराइल के मुताबिक, अप्रैल में सीजफायर के बाद यह पहली बार है, जब ईरान ने उस पर मिसाइल हमला किया है। 8 जून को ईरान ने कहा कि उसने फिलहाल इजराइल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोक दी है। हालांकि चेतावनी भी दी कि इजराइल ने फिर से लेबनान पर हमला किया तो पहले से ज्यादा सख्त जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका युद्धविराम और शांति समझौते की कोशिशों में जुटा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि इजराइल और ईरान दोनों संघर्ष रोकना चाहते हैं और अंतिम समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। ……………………………..ईरान-अमेरिका जंग पर ये खबर भी पढ़ेंहोर्मुज में जलते जहाज से 24 भारतीयों का रेस्क्यू, भारत ने नागरिकों को ईरान छोड़ने को कहा होर्मुज स्ट्रेट के पास एक तेल टैंकर में आग लगने के बाद उस पर सवार 24 भारतीय नाविकों को इंडियन नेवी ने बचा लिया। शुरुआती रिपोर्टों में जहाज पर हमले की आशंका जताई गई, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। ईरान और इजराइल के बीच बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द वहां से निकलने की सलाह दी है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 9 Jun 2026 5:15 am

पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी को लेकर चिंता, हालात पर उठे सवाल

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं

देशबन्धु 9 Jun 2026 12:01 am

फिलीपींस में भूकंप के बाद 32 लोगों की मौत, कई इमारतें क्षतिग्रस्त, स्कूल बंद करने की घोषणा

दक्षिणी फिलीपींस के सारंगनी प्रांत में सोमवार सुबह 7.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। भूकंप में कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई, कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और स्कूलों और विमानों का संचालन रोक दिया गया। कई देशों ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी, जिसे बाद में हटा लिया गया।

देशबन्धु 8 Jun 2026 11:41 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या अमेरिका के बिना टिक पाएगा इजराइल, ट्रम्प के रोकने के बावजूद ईरान से भिड़ा; दोबारा जंग से भारत चिंता में क्यों

जंग शुरू होने के 100वें दिन, यानी 7 जून को ईरान और इजराइल फिर भिड़ गए। ईरान के तेहरान, तबरीज और इस्फहान में धमाके गूंजे। इजराइल पर भी ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प दोनों पक्षों से शांति की गुहार लगा रहे हैं। आखिर 2 महीने से जारी सीजफायर अचानक क्यों टूटा, क्या अमेरिका के बिना इजराइल लड़ पाएगा और दोबारा जंग से भारत पर कितना असर पड़ेगा; आज के एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: क्या वाकई ईरान और इजराइल में दोबारा जंग शुरू हो चुकी है? जवाब: 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था। 5 हफ्ते जंग चलती रही। ईरान हार मानने को तैयार नहीं था। पाकिस्तान की कोशिशों के बाद 8 अप्रैल को डोनाल्ड ट्रम्प ने सीजफायर की घोषणा कर दी। तब से दोनों पक्षों में कोई सीधा बड़ा हमला नहीं हुआ था, लेकिन करीब 2 महीने बाद ये शांति वापस भंग हो गई… ईरान की FARS न्यूज एजेंसी ने 8 जून को दावा किया कि अब ईरान हमले रोक रहा है। इजराइल की तरफ से ऐसा कोई संकेत फिलहाल नहीं मिला है। सवाल-2: क्या अमेरिका भी इजराइल के साथ इन हमलों में शामिल है? जवाब: इजराइल के ताजा हमलों में अमेरिका सीधे शामिल नहीं है। उल्टा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट Axios के मुताबिक, ईरान के हमलों के बावजूद ट्रम्प नेतन्याहू को फोन करना चाहते थे कि पलटवार न करें। लेकिन इजराइल ने हमला कर दिया। ट्रम्प इजराइल के बेरूत पर हमले से भी बिल्कुल खुश नहीं थे। उन्होंने अमेरिकी मीडिया से कहा भी कि इन हमलों से शांति समझौते के इरादे पर कोई असर नहीं पड़ा है। नेतन्याहू के पास भी इसे स्वीकार करने के अलावा 'कोई विकल्प' नहीं है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, ‘सारे फैसले मैं लेता हूं, नेतन्याहू नहीं।’ इससे पहले जब 2 जून को इजराइल ने लेबनान पर हमला किया था। तब भी ट्रम्प ने नेतन्याहू को फटकार लगाई थी। Axios ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ट्रम्प ने फोन पर नेतन्याहू को गालियां दीं और कहा कि वो शांति वार्ता को बर्बाद कर रहे हैं। सवाल-3: क्या अमेरिका के बगैर ईरान का मुकाबला कर पाएगा इजराइल? जवाबः इजराइल और ईरान जमीन से जुड़े हुए नहीं हैं, यानी किसी भी तरह से सीमा साझा नहीं करते हैं। इसलिए जंग हवा या पानी में ही हो सकती है। इसके लिए इजराइल को अमेरिका की मदद चाहिए। मिलिट्री पावर रैंकिंग में इजराइल दुनिया में १५वें नंबर पर है और ईरान १६वें। ऐसे में ईरान से निपटने के लिए इन 4 वजहों से इजराइल को अमेरिका की सख्त जरूरत है… 1. लंबी दूरी की उड़ान के लिए रीफ्यूलर्स की कमी 2. हवाई हमला रोकने वाले इंटरसेप्टर्स की कमी 3. इजराइल के पास जमीन और लोगों की कमी 4. इतनी महंगी जंग का खर्च कौन उठाएगा विवेक मिश्र के मुताबिक, ‘अमेरिकी मदद के बिना इजराइल 10-15 दिन ईरान का मुकाबला कर सकता है। इसके बाद उसे अमेरिका का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।’ दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में रिसर्च एसोसिएट और ईरानी मामलों के जानकार यासिर अली मिर्जा कहते हैं, ‘ट्रम्प भले ही इस जंग से ऊब चुके हैं, लेकिन वो चाहकर भी इजराइल को जंग में सपोर्ट करना बंद नहीं कर सकते, क्योंकि इजराइली लॉबी का अमेरिका की विदेश नीति में दखल है। ये लॉबी अमेरिकी सांसदों और पॉलिसी मेकर्स को फंड भी करती है।’ सवाल-4: आखिर ट्रम्प की बात क्यों नहीं मान रहे नेतन्याहू? जवाबः एक्सपर्ट्स इसके पीछे दो बड़ी वजहें मानते हैं… नेतन्याहू का करप्शन केस से बचने और सत्ता में बने रहने की कोशिश दुश्मन को खत्म करने का आखिरी बड़ा मौका सवाल-5: मिडिल ईस्ट में दोबारा जंग शुरू होने से भारत की चिंता क्यों बढ़ गई?जवाबः 100 दिन की ईरान जंग में दुनिया की जीडीपी को 339 लाख करोड़ रुपए के नुकसान होने का अनुमान है। भारत भी इससे असर से अछूता नहीं है… ------------------- ये खबर भी पढ़िए… होर्मुज में जलते जहाज से 24 भारतीयों का रेस्क्यू:ईरान बोला- अब इजराइल पर हमले नहीं; भारत ने नागरिकों को ईरान छोड़ने को कहा होर्मुज स्ट्रेट के पास एक तेल टैंकर में आग लगने के बाद उस पर सवार 24 भारतीय नाविकों को इंडियन नेवी ने बचा लिया है। शुरुआती रिपोर्टों में जहाज पर हमले की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 8 Jun 2026 6:37 pm

दक्षिणी फिलीपींस में शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही: कई इमारतें जमींदोज, 5 लोगों की मौत और दर्जनों घायल

एक स्थानीय आपदा अधिकारी के अनुसार, फिलीपींस के दक्षिणी हिस्से में आए 7.8 तीव्रता के ऑफशोर (समुद्र के पास) भूकंप में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है।

देशबन्धु 8 Jun 2026 12:48 pm

इजरायल-ईरान तनाव के बीच ट्रंप ने की शांति की अपील, बातचीत की मेज पर लौटने को कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से कहा है कि वह इजरायल पर मिसाइलें दागना बंद करे और फिर से बातचीत की मेज पर लौट आए। यह बयान तब आया जब ईरान ने इजरायल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलों की एक नई खेप दागी।

देशबन्धु 8 Jun 2026 8:43 am

पीएम नेतन्याहू ने लेबनान में जारी हमलों के बीच किया दावा, 'पीछे हट रहा है हिज्बुल्लाह'

इजरायल में हर हफ्ते होने वाली कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत करते हुए, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखे हुए है

देशबन्धु 8 Jun 2026 8:40 am

पाकिस्तानी सेना आंतरिक सुरक्षा को ठीक करने में रही नाकाम

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (पीआईसीएसएस) के अनुसार, मई में पाकिस्तान में हुई मिलिटेंट हिंसा में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

देशबन्धु 8 Jun 2026 8:20 am

बांग्लादेश में एआई रेगुलेशन की जरूरत पर जोर, तकनीक-आधारित अपराधों में हुई खतरनाक बढ़ोतरी

आज के दौर में एआई पर लोगों की निर्भरता बढ़ती जा रही है। हालांकि, एआई से जुड़े अपराधों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है

देशबन्धु 8 Jun 2026 5:50 am

जब एक आम ने 18 साल पुराना अमेरिकी बैन हटवाया:भारत में जन्मा, काजू-पिस्ता का करीबी रिश्तेदार; कहानी, जो फलों का राजा बनाती है

साल 2006। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश न्यूक्लियर डील के लिए भारत आए थे। राजकीय डिनर में उन्हें हापुस आम परोसा गया। बुश ने चखा और मनमोहन सिंह की तरफ मुड़कर बोले- ‘यह तो कमाल का फल है।’ अगले साल अमेरिका ने भारतीय आमों पर 18 साल से लगा प्रतिबंध हटा लिया। एक फल ने वह कर दिखाया, जो सालों की कूटनीति नहीं कर सकी थी। आम की हजारों किस्में हैं- कोई 3 लाख रुपए किलो, कोई तरबूज जितना बड़ा। एक पेड़ पर तो 300 अलग-अलग किस्म के आम फलते हैं। एक आम का पेड़, तो 300 सालों से खड़ा है। मंडे मेगा स्टोरी में फलों के इस राजा की दिलचस्प कहानी… **** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और अंकलेश विश्वकर्मा ------------- ये खबर भी पढ़िएबिना संबंध बनाए भी बच्चे पैदा कर लेती है कॉकरोच:सिर कटने पर भी कैसे जिंदा रहते हैं, डायनासोर से भी सीनियर; कॉकरोच के किस्से कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट, X अकाउंट और इंस्टाग्राम अकाउंट सभी हैक और डाउन हो गए, तो फाउंडर अभिजीत दीपके ने लिखा- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं।’ बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 8 Jun 2026 5:15 am

ईरान पर कार्रवाई कोई नया युद्ध नहीं: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि यह कोई नया युद्ध नहीं है, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया आवश्यक कदम था

देशबन्धु 8 Jun 2026 5:00 am

ईरान-अमेरिका शांति समझौते के करीब: ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान और अमेरिका शांति समझौते पर पहुंचने के बहुत करीब हैं

देशबन्धु 8 Jun 2026 3:22 am

जर्मनी फिर करेगा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीट के लिए दावेदारी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट का चुनाव हारने के बाद जर्मनी ने 2035-36 और 2043-44 कार्यकाल के लिए फिर से दावेदारी करने का ऐलान किया है. जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने शुक्रवार को घोषणा की कि देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2035-36 कार्यकाल के लिए फिर से चुनाव लड़ेगा. यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब दो दिन पहले ही जर्मनी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. मैर्त्स ने यह ऐलान मोंटेनेग्रो में यूरोपीय संघ और पश्चिमी बाल्कन देशों के शिखर सम्मेलन में किया. संयुक्त राष्ट्र महासभा में 3 जून को हुए मतदान में जर्मनी को ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल के मुकाबले हार मिली थी. सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए जर्मनी को 104 वोट मिले, जबकि जीत के लिए 127 वोटों के दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी. पुर्तगाल को 134 और ऑस्ट्रिया को 131 वोट मिले. संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 सदस्य देश हैं. यह पहली बार था जब जर्मनी सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता हासिल करने में असफल रहा. इससे पहले जर्मनी छह बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है और सबसे हाल में उसने 2019-20 कार्यकाल में सीट संभाली थी. हार के कारणों की जांच विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने इस हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के आदेश दिए हैं. चांसलर मैर्त्स ने वाडेफुल को अपना पूरा समर्थन देते हुए कहा कि इस बार जर्मनी शुरुआत से ही लंबी अवधि की तैयारी करेगा. उन्होंने 2035-36 और 2043-44 दोनों कार्यकालों के लिए जर्मनी की नई उम्मीदवारी की घोषणा की. जर्मननी बहुत समय से स्थायी सीट की मांग करता रहा है. मैर्त्स ने कहा कि स्वीडन की दावेदारी को देखते हुए वह यूरोपीय संघ के भीतर यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि यूरोप से केवल सीमित संख्या में उम्मीदवार मैदान में हो और खासकर यूरोपीय संघ के भीतर से अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी दावेदारी न आए. चांसलर ने वाडेफुल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में इस अभियान के लिए कड़ी मेहनत की. मैर्त्स ने यह भी कहा कि जर्मनी की मौजूदा दावेदारी कई साल पहले घोषित हुई थी, लेकिन बहुत देर से सक्रिय तैयारी शुरू हुई. वाडेफुल ने भी माना कि संयुक्त राष्ट्र में मिला परिणाम संतोषजनक नहीं था. न्यूयॉर्क से मेक्सिको पहुंचे वाडेफुल ने कहा कि अब अगली चुनौती की तैयारी शुरू हो चुकी है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल को शुरुआत से ही बढ़त हासिल थी और जर्मनी ने अपेक्षाकृत देर से अपनी सक्रिय दावेदारी शुरू की. उन्होंने कहा कि जर्मन सरकार ने इस हार से पहला निष्कर्ष निकालते हुए भविष्य के कार्यकालों के लिए अभी से उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है. वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी दुनियाभर में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा, खासकर यूरोप में. समर्थन कम नहीं करेगा जर्मनी इस बीच मेक्सिको सिटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वाडेफुल ने उन मांगों को खारिज कर दिया, जिनमें सुरक्षा परिषद चुनाव हारने के बाद संयुक्त राष्ट्र को दी जाने वाली जर्मनी की आर्थिक सहायता घटाने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने वाली सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक संस्था बनी हुई है और जर्मनी इसमें पूरी तरह सक्रिय रहेगा. वाडेफुल ने कहा कि संकट और संघर्षों के समाधान के मामले में संयुक्त राष्ट्र से अधिक वैधता रखने वाली कोई दूसरी संस्था नहीं है. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब जर्मनी के हेसे राज्य के अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री मानफ्रेड पेंट्स ने सुझाव दिया था कि सुरक्षा परिषद सीट नहीं मिलने के बाद जर्मनी संयुक्त राष्ट्र को अपनी वित्तीय सहायता कम करने पर विचार कर सकता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं. इनमें अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो शक्ति है. बाकी 10 अस्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं. जर्मनी की हालिया हार को उसकी कूटनीतिक रणनीति के लिए एक झटका माना जा रहा है, लेकिन बर्लिन ने साफ कर दिया है कि वह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेगा और भविष्य में फिर से सुरक्षा परिषद की सीट हासिल करने का प्रयास करेगा. विवेक कुमार (डीपीए, रॉयटर्स)

देशबन्धु 8 Jun 2026 12:50 am

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वार्श का किया समर्थन, रेट कम करने पर दिया जोर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए बने फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वार्श पर भरोसा जताया और कहा कि वह शानदार हैं और उन्हें मॉनेटरी पॉलिसी पर अपने फैसले खुद लेने चाहिए।

देशबन्धु 7 Jun 2026 11:36 pm

इजरायल में गोलीबारी से हड़कंप: एक की मौत और कई घायल, पीएम नेतन्याहू ने सुरक्षा स्थिति का लिया जायजा

इजरायल के केंद्रीय इलाके कोचाव याइर के पास हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे देश में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर है।

देशबन्धु 7 Jun 2026 9:03 pm

आज का एक्सप्लेनर:अन्नामलाई वो करना चाहते थे, जो विजय थलापति ने किया; बीजेपी छोड़ने की असली वजह क्या, अब कौन-सा आंदोलन खड़ा कर रहे

2 जून को तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दिया। 3 दिन मान-मनौव्वल के बाद जब इस्तीफा मंजूर हुआ, तो अन्नामलाई ने अपने नए ‘पॉलिटिकल मूवमेंट’ का ऐलान कर दिया। ये पार्टी 2031 में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। कहा जा रहा है कि अन्नामलाई बीजेपी में रहते वो हासिल कर सकते थे, जो सीएम विजय थलापति ने किया। जबकि कांग्रेस का कहना है कि अन्नामलाई बीजेपी की ही B टीम बना रहे हैं। आखिर अन्नामलाई के बीजेपी से किनारा करने की इनसाइड स्टोरी क्या है, क्या अन्नामलाई विजय थालापति की तरह बीजेपी को बड़ी जीत दिला सकते थे, आगे के प्लान की क्या सच्चाई, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अन्नामलाई के बीजेपी से इस्तीफा देने की इनसाइड स्टोरी क्या है? जवाब: अन्नामलाई ने अगस्त 2020 को BJP जॉइन की औरे 11 महीने बाद 16 जुलाई 2021 को उन्हें BJP प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। दरअसल, तमिलनाडु में पिछले 60 सालों से एक अलग तरह की राजनीति होती आई है, जिसे ‘द्रविड़ पॉलिटिक्स’ कहते हैं। इसी द्रविड़ पॉलिटिक्स के सहारे पार्टियां DMK और AIADMK 60 सालों तक लगातार सत्ता में रहीं। अन्नामलाई ने बीजेपी में रहते द्रविड़ पॉलिटिक्स का काट निकालने की कोशिश की, लेकिन उनका ये मिशन सफल नहीं हो पाया। सवाल-2: आखिर तमिलनाडु की द्रविड़ पॉलिटिक्स है क्या? जवाब: इसकी शुरुआत होती है- आर्य बनाम द्रविड़ की बहस से। जर्मन भाषाविद मैक्स मूलर जैसे कई विद्वानों ने दावा किया कि 1500 ईसापूर्व आर्य नाम की एक जाति ने भारतीय उपमहाद्वीप पर हमला किया। इनकी भाषा संस्कृत थी। वहीं दक्षिण भारत में बोली जाने वाली भाषाओं- तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम को द्रविड़ भाषा कहा गया। ब्रिटिश शासन के दौरान ये सोच बनी कि द्रविड़ भाषाएं आर्यों की भाषा से कमतर हैं। इसी भाषाई आधार पर देश के लोगों में एक बंटवारा हुआ- आर्य बनाम द्रविड़। फिर 20वीं सदी की शुरुआत में मद्रास में द्रविड़ सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन खड़ा हुआ। शुरुआती द्रविड़ नेता ब्राह्मणों के भी विरोधी थे। उसकी वजह थी कि मद्रास प्रेसिडेंसी में सिर्फ 3% ब्राह्मण सरकारी विभागों में करीब 70% प्रमुख पदों पर काबिज थे। गैर-ब्राह्मण नेताओं का मानना था कि ब्राह्मण दक्षिण के मूल निवासी नहीं हैं, बल्कि आर्य हैं और बाहरी हैं। द्रविड़ आंदोलन मूलतः 3 बातों पर टिका था- इन्हीं तीन बातों पर दो बड़ी द्रविड़ राजनीतिक पार्टियां बनीं… 1. DMK: अन्नादुरई पहले गैर कांग्रेसी CM बने 2. AIADMK, एक्टर MG रामचंद्रन सीएम बने 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद से AIADMK कमजोर पड़ती गई। EPS अभी इसके नेता हैं। इधर DMK की कमान एम.के. स्टालिन के हाथों में है। 2021 से 2026 तक उनकी सरकार रही। DMK और AIADMK आज भी द्रविड़ पॉलिटिक्स को सबसे ऊपर रखती हैं। तमिल प्राइड, सेकुलरिज्म और एंटी-हिंदी कल्चर के अपने स्टैंड के लिए जानी जाती हैं। हालांकि दोनों में मूल अंतर ये है कि DMK पेरियार की सोच, एंटी-ब्राह्मण रेशनलिज्म जैसे मुद्दों पर ज्यादा सख्त है। जबकि AIADMK उतना कट्टर नहीं है। इसीलिए AIADMK और BJP का गठबंधन भी हुआ। हालांकि अन्नामलाई द्रविड़ पॉलिटिक्स के बजाय नए तरीके से बीजेपी को सत्ता में लाना चाहते थे। अन्ना से विवाद के चलते बीजेपी इसमें सफल नहीं हुई, लेकिन सिर्फ 2 साल पहले TVK को लॉन्च करने वाले विजय थलापति इसमें सफल हो गए। सवाल-3: तमिलनाडु में ऐसा क्या करना चाहते थे अन्नामलाई, जिस पर बीजेपी से विवाद हुआ? जवाब: तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद अन्नामलाई ने बीजेपी की पॉलिटिक्स और द्रविड़ पॉलिटिक्स के अलावा एक तीसरी तरह की पॉलिटिक्स की… इस्तीफे के बाद अन्ना का तमिलनाडु में तीसरे तरह की पॉलिटिक्स का एक्सपेरिमेंट रुक गया। हालांकि अन्ना की पॉलिटिकल वैक्यूम वाली बात सही साबित हुई। उन्होंने द्रविड़ राजनीति को जितना कमजोर किया, उसका फायदा विजय को हुआ। अन्ना द्रविड़ राजनीति को राष्ट्रवाद से हराना चाहते थे, वहीं विजय ने यही काम अपने ‘नए द्रविड़वाद’ से किया। विजय ने 2 फरवरी 2024 को जब तमिलगा वेत्री कझगम, TVK बनाई तब कहा था, ‘हम द्रविड़ राष्ट्रवाद को तमिल राष्ट्रवाद से अलग नहीं करेंगे। ये दोनों इस धरती की दो आंखें हैं।’ यानी विजय ने भी द्रविड़ राजनीति को ऊपर रखा, लेकिन थोड़ा अलग तरह से। पॉलिटिकल एनालिस्ट आर. राजगोपालन कहते हैं कि ये विजय की नई द्रविड़ विचारधारा है। DMK के आइकॉन पेरियार और करुणानिधि हैं और AIADMK के आइकॉन MGR और जयललिता। जबकि विजय ने 5 बड़ी शख्सियत- कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज, पेरियार, महिला स्वतंत्रता सेनानी वेलु नाच्चियार और अंजलाई अम्माल और भीमराव आंबेडकर को अपना आदर्श बताया। TVK का आधिकारिक नारा है, 'पिरप्पोक्कुम एल्ला उयिर्क्कुम' यानी 'जन्म से सभी जीव समान हैं।' ये DMK और AIADMK की आर्यन बनाम द्रविड़ पॉलिटिक्स की लाइन से अलग है। TVK के नाम में द्रविड़ शब्द तक नहीं है। विजय ने चुनाव में ज्यादा कट्टर द्रविड़वादी मानी जाने वाली DMK का पुरजोर विरोध किया। जबकि AIADMK और उसके नेता EPS को लेकर अपना रुख रखा। सवाल-4: अन्नामलाई का आगे का प्लान क्या, क्या इसमें सफल होंगे? जवाब: अन्नामलाई ने कहा, 'पहले मैं लोगों को आंदोलन से जोडूंगा, फिर उन्हें ट्रेनिंग देकर इसे पॉलिटिकल पार्टी बनाऊंगा।' अन्नामलाई ने WetheLeaders.org नाम का एक पोर्टल बनाया है। 5 जून को पोर्टल शुरू होने के सिर्फ 10 घंटे के भीतर 10 लाख लोगों ने इस पर रजिस्ट्रेशन करा लिया। अन्नामलाई ने कोयंबटूर में ‘एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स’ बनाकर युवाओं को राजनीति की ट्रेनिंग देने का ऐलान भी किया है। उन्होंने कहा, ‘इस सेंटर में मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके उन लोगों को ट्रेन किया जाएगा, जो राजनीति में आना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता। मैं कुछ सबसे प्रतिभाशाली लोगों को राजनीति में लाकर प्रदेश की राजनीतिक भाषा बदलना चाहता हूं।’ अन्नामलाई का कहना है कि 2031 के विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय निकाय चुनावों में भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे। पार्टी BJP को भी उसी नजरिए से देखेगी जैसे DMK, AIADMK या दूसरी पार्टियों को।’ तमिलनाडु BJP प्रदेश उपाध्यक्ष करु नागराजन सहित कई बीजेपी नेता भी इस्तीफा देकर अन्नामलाई से जुड़ गए हैं। नागराजन ने कहा है, ‘मेरे साथ कई और BJP नेता भी हैं, जिन्होंने अन्नामलाई के प्रति समर्थन जताया है।' पॉलिटिकल एनालिस्ट आर. राजगोपालन कहते हैं, ‘10-15 सालों तक तमिलनाडु में TVK की प्रासंगिकता बनी रह सकती है। लेकिन अगर अन्नामलाई अलग पार्टी बनाते हैं, तो DMK नेता उदयनिधि के अलावा यह TVK के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर सकती है।’ हालांकि तमिलनाडु के सीनियर जर्नलिस्ट आर. रंगराज कहते हैं कि अन्नामलाई के आंदोलन का असर सीमित ही रहेगा, क्योंकि TVK पहले ही युवाओं को अपने साथ जोड़ चुकी है। अभी हम ये भी नहीं जानते कि ये पार्टी पूरी तरह से अन्नामलाई की है या इसमें BJP का समर्थन भी है।' तमिलनाडु के कांग्रेस नेता और सांसद मणिकम टैगोर ने भी X पर लिखा, 'तमिलनाडु के लिए प्लान-बी तैयार है और इसके पीछे RSS का भी हाथ है।' सवाल-5: तो क्या अन्नामलाई के इस प्लान के पीछे बीजेपी है? जवाब: पॉलिटिकल एनालिस्ट निहार नलिनी सारंगी कहती हैं, ‘अन्नामलाई BJP से इस्तीफा देते हैं, फिर गृहमंत्री के घर पर उनसे मिलते हैं और उसी दिन नई पार्टी का ऐलान कर देते हैं। वो भी उस राज्य में जहां BJP अभी-अभी बुरी तरह हारी है। अन्नमलाई की ये विदाई बड़ी कंट्रोल्ड दिखती है।’ सारंगी के मुताबिक, ‘कोई आदमी गृहमंत्री से पार्टी छोड़ने के बाद नहीं मिलता, बल्कि तब मिलता है, जब उसे नई चाबियां सौंपी जाती हैं। इसका संकेत ये है कि अन्नामलाई ने इस्तीफे में BJP के लिए कोई कड़वी बात नहीं लिखी। PM मोदी की तारीफ की और पार्टी को धन्यवाद भी दिया।’ सारंगी कहती हैं, ‘अन्नामलाई की नई पार्टी BJP के लिए कोई चैलेंज नहीं, बल्कि TVK की प्रतिद्वंद्वी है। इसका टारगेट TVK की तरह OBC समुदाय, शहरी मिडिल क्लास और उन युवा वोटर्स को जोड़ना होगा, जो द्रविड़ियन राजनीति से थक चुके हैं। इसी वोटबैंक ने TVK को 108 सीटें दिलाईं और BJP इस ट्रेंड से अनजान नहीं है।’ आर. रंगराज भी कहते हैं, ‘तमिलनाडु में BJP ने ही अन्नामलाई को नई पार्टी बनाने के लिए बढ़ावा दिया है, क्योंकि अभी बीजेपी AIADMK के साथ मिलकर जैसी राजनीति कर रही है, उसमें अन्नामलाई के लिए कोई स्पेस नहीं बचता।' आर. राजगोपालन के मुताबिक, 'अन्नामलाई उन युवा वोटर्स को खींच सकते हैं, जिन तक BJP अपनी मौजूदा पहचान के साथ नहीं पहुंच सकती। उन्हें RSS का साइलेंट सपोर्ट भी मिल सकता है। ऐसे में बीजेपी, AIADMK गठबंधन में रह सकते हैं, जबकि अन्नामलाई अपने पुराने रवैये से DMK और AIADMK दोनों के वोट काट सकते हैं।' हालांकि, तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा है कि बीजेपी नेतृत्व ने अन्नामलाई के आंदोलन को कोई समर्थन नहीं दिया है। BJP नेताओं से अपील है कि वे किसी भी बहकावे में आकर इस मूवमेंट में शामिल न हों।’ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------तमिलनाडु से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… शराब दुकानें बंद, 200 यूनिट बिजली फ्री, गोल्ड चेन भी देंगे; फिल्मी हीरो जैसे फैसले ले रहे CM विजय, कितना महंगा पड़ेगा CM बनते ही थलापति विजय किसी फिल्मी नायक की तरह फैसले ले रहे हैं। 48 घंटे में ही 700 से ज्यादा शराब की दुकानें बंद कराने का आदेश दिया। शपथ के मंच से ही 200 यूनिट फ्री बिजली का ऐलान कर दिया था। सोने की चेन, अंगूठी और कैश देने का भी वादा किया है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 7 Jun 2026 7:06 pm

पाकिस्तान में बढ़ा गृहयुद्ध जैसा संकट: सिंध में गहराया भारी जल संकट, पंजाब प्रांत पर लगाया तय हिस्से से अधिक पानी चोरी करने का आरोप

पाकिस्तान के दो प्रांत पानी बंटवारे को लेकर आपस में भिड़े हुए हैं। हालात बेकाबू होते जा रहे हैं, लेकिन हुक्मरान बेफिक्र हैं। स्थानीय मीडिया का दावा है कि सिंध प्रांत में खरीफ सीजन के दौरान गंभीर जल संकट पैदा हो गया है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पहले ही जलवायु परिवर्तन, घटते जल संसाधनों और कृषि चुनौतियों से जूझ रहा है।

देशबन्धु 7 Jun 2026 7:05 pm

कुवैत और बहरीन ने ईरान के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की, कहा- यह संप्रभुता का खुला उल्लंघन है

कुवैत और बहरीन दोनों ने शनिवार को अपने देशों पर ईरान के नए हमलों की कड़ी आलोचना की और इसे संप्रभुता का खुला उल्लंघन और इलाके की स्थिरता के लिए खतरनाक बताया।

देशबन्धु 7 Jun 2026 7:40 am

जंतर-मंतर पर ‘मैं भी अन्ना’ की जगह ‘मैं हूं कॉकरोच’:5 घंटे का प्रोटेस्ट, उम्मीद से कम भीड़; कॉकरोच जनता पार्टी को क्या मिला

कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर 7.30 बजे आ गए थे, लेकिन बाहर आने में डेढ़ घंटे से ज्यादा वक्त लगा। सुबह 9 बजे के बाद बाहर निकले। सीधे गाड़ी में बैठे और जंतर-मंतर पहुंच गए। यहां पार्टी का पहला प्रोटेस्ट होना था। 5 अप्रैल, 2011 इसी जंतर-मंतर पर एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने आमरण अनशन से करप्शन के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। तब नारे लगे थे- मैं भी अन्ना। इस बार आंदोलन का मकसद एजुकेशन सिस्टम में बदलाव है। नारा है- मैं हूं कॉकरोच। पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.2 करोड़ फॉलोअर हैं। जंतर-मंतर पर उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं आई, लेकिन पहली बार पार्टी जमीन पर दिखाई दी। सवाल है कि पार्टी को प्रोटेस्ट से क्या हासिल हुआ… 1. मीम पार्टी का टैग हटा, पेपर लीक का मुद्दा दोबारा ट्रेंड में लाए 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं।’ इसी से कॉकरोच जनता पार्टी ऑनलाइन मूवमेंट के तौर पर शुरू हुई। हर दिन लाखों लोग जुड़ने लगे। कहा गया कि पार्टी सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित है। 6 जून के प्रोटेस्ट से पार्टी ये साबित कर गई कि वो जमीन पर भी मौजूद है। इस प्रोटेस्ट में हर उम्र के लोग शामिल हुए। देश के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग आए। पार्टी जमीन पर भले बहुत भीड़ नहीं जुटा पाई, लेकिन सोशल मीडिया पर NEET और पेपर लीक के मुद्दे को फिर से ट्रेंड करा दिया। 2. अभिजीत ही पार्टी का चेहरा, सबसे ज्यादा एक्टिव रहे स्टेज पर सबसे ज्यादा अभिजीत दीपके ही एक्टिव दिखे। हालांकि चीफ स्पोक्सपर्सन सौरव दास और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी कुछ देर स्पीच दी। अभिजीत के टारगेट पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान रहे। उन्होंने मंच से शिक्षा मंत्री को रिजाइन करने का अल्टीमेटम दिया। ऐसा नहीं होने पर अगले शनिवार को दोबारा प्रोटेस्ट की बात कही। 3. अन्ना आंदोलन जैसी कोशिश, लेकिन उतने असरदार नहीं सीनियर रिपोर्टर निखिल वाथ कहते हैं कि लोग इस प्रदर्शन में अन्ना आंदोलन की झलक ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि हालात में कुछ समानताएं हैं। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, NEET और CBSE एग्जाम में गड़बड़ी जैसे आरोप लग रहे हैं। अगले चुनाव में 3 साल बचे हैं। अन्ना आंदोलन के वक्त भी चुनाव में तीन साल बाकी थे। लोगों में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा था। फिर भी ये प्रोटेस्ट अन्ना आंदोलन जितना असरदार नहीं है। आगे क्या होगा…निखिल कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट के दौरान कोई बड़ी घटना नहीं हुई। कुछ लोग प्रोटेस्ट का विरोध करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया ताकि टकराव न हो। प्रोटेस्ट में किसी भी तरह का ड्रामा नहीं हुआ, जिससे लोगों के बीच इसकी रिकॉल वैल्यू कम हो सकती है। अगर शनिवार को दोबारा प्रदर्शन होता है, तो और भीड़ जुटानी होगी, नहीं तो आंदोलन लोगों के जेहन से जल्दी ही उतर सकता है।’ पार्टी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां 1. फॉलोअर्स को वोटर्स में बदलना जंतर-मंतर की कम भीड़ ने साबित किया कि पार्टी को अभी सोशल मीडिया से निकलकर जमीनी स्तर पर ब्लॉक और जिला कमेटियां बनानी होंगी। पार्टी के पास पॉलिटिक्स का बिल्कुल अनुभव नहीं है। सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की ताकत तो है, लेकिन सवाल है कि अगर वे चुनाव में उतरते हैं तो क्या इसे वोट बैंक में बदल पाएंगे। 2. अन्ना आंदोलन जैसा मददगार कैडर नहीं 2011 के अन्ना आंदोलन की कामयाबी के पीछे अलग-अलग संगठनों का समर्थन था। कॉकरोच जनता पार्टी के पास कैडर नहीं है। उसका पूरा आधार क्लिक एक्टिविज्म पर टिका है। इंस्टाग्राम पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स होना डिजिटल उपलब्धि तो है, लेकिन इस वर्चुअल कैडर के पास न लीडर हैं और न ही बूथ मैनेजमेंट की कोई समझ। 3. सिंगल पॉइंट एजेंडा नहीं कामयाब राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन की पहली शर्त सिंगल पॉइंट एजेंडा है। अन्ना आंदोलन का एक साफ मकसद था- लोकपाल बिल। इससे लोग जुड़ गए। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में आए लोगों में कोई मणिपुर की बात कर रहा था, कोई टैक्स और पानी के संकट की, तो कोई करप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर की। पार्टी को स्पष्ट राष्ट्रीय नीति और एजेंडा सामने रखना होगा। प्रोटेस्ट में पहुंचे लोगों की बातहमने प्रोटेस्ट में आए लोगों से समझने की कोशिश की कि उन्हें इससे क्या उम्मीदें हैं। चेहरे पर कॉकरोच का मास्क लगाकर आए गोल्डी 30 साल के हैं। दिल्ली के राजौरी गार्डन में रहते हैं। आंदोलन में आने की वजह बताते हैं, ‘22 लाख बच्चे नीट का एग्जाम दे रहे थे, पेपर लीक हो गया, SSC में 50 लाख बच्चे एग्जाम दे रहे थे, CBSE की साइट कोलेप्स हो गई। सरकार कर क्या रही है।’ ‘अनपढ़ हूं, लेकिन जानता हूं बच्चों को कॉकरोच नहीं बोलना चाहिए’ दिल्ली के तीमारपुर से आए 68 साल के बुजुर्ग बोले, ‘हमारे बच्चों के साथ बार-बार खिलवाड़ हो रहा है। इसका हमें भी दर्द होता है। आप उन्हें कीड़े-मकोड़े बोल रहे हो। ये बोलने का अधिकार किसने दिया। इसलिए जरूरी है कि हम जवाब दें। मैं अनपढ़ हूं, लेकिन जानता हूं कि बच्चों को कॉकरोच नहीं बोलना चाहिए।’ असम से आईं जून अभी दिल्ली में रहती हैं। वे कहती हैं, ‘नॉर्थ ईस्ट में मणिपुर जल रहा है। सरकार कुछ नहीं कर रही है। वहां के युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है। यहां भी भविष्य दांव पर है। कॉकरोच जनता पार्टी का अभी जमीन पर तो असर नहीं दिख रहा है, लेकिन जिस तरह ये सोशल मीडिया पर हैं, उससे लग रहा है कि बदलाव होगा।’ …………………………. प्रोटेस्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा, अगले शनिवार फिर जंतर-मंतर पर जुटने का ऐलान NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा था कि मंत्री आज शाम 5 बजे तक इस्तीफा दें, नहीं तो पूरे देश में प्रदर्शन किया जाएगा। अगले शनिवार, यानी 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन करेंगे। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 7 Jun 2026 5:32 am

लेनिनग्राद में रूस ने गिराए 144 यूक्रेनी ड्रोन

रूसी एयर डिफेंस फोर्स ने लेनिनग्राद इलाके में हवाई हमले के दौरान 144 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। यह जानकारी इलाके के गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज्डेंको ने शनिवार को सोशल मीडिया पर दी।

देशबन्धु 7 Jun 2026 4:53 am

ट्रंप ने जेलेंस्की के ओपन लेटर के बाद कहा, 'रूस और यूक्रेन को विवाद आपस में सुलझाने दें'

व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लिखे गए ओपन लेटर और उनसे मुलाकात के प्रस्ताव का जिक्र किया

देशबन्धु 6 Jun 2026 10:49 pm

कॉकरोच कभी मरते क्यों नहीं:बिना संबंध बनाए बच्चे, सिर कटने पर भी जिंदा; डायनासोर से भी सीनियर कॉकरोच के रोचक किस्से

कॉकरोच जनता पार्टी इंटरनेट से सड़क पर उतर चुकी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों लोग जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे। कॉकरोच पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अकाउंट ब्लॉक होने पर कहा भी था- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं।’ बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। बिना नर के भी बच्चा पैदा कर सकते हैं। भास्कर एक्सप्लेनर में इस वक्त के सबसे पॉपुलर प्राणी कॉकरोच की कहानी... **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा **** Reference: https://www.researchgate.net/publication/395390819_The_Cockroach_An_Analysis_of_Resilience_through_Biomathematical_Calculus https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9753028/ https://academic.oup.com/mbe/article/35/4/1035/4951729?login=false https://pursuit.unimelb.edu.au/articles/would-cockroaches-really-survive-a-nuclear-apocalypse Cockroach Fossil: https://www.digitalatlasofancientlife.org/ve/living-fossils/insects-and-arachnids/ Book:Cockroaches: Ecology, Behavior and Natural History by William J. Bell, Louis M. Roth and Christine A. Nalepa------ ये खबर भी पढ़िए... जमीन पर उतर रही कॉकरोच पार्टी; कौन-कौन साथ, आगे का रोडमैप, सरकार कैसे निपटेगी; 9 सवालों में पूरी कहानी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत पहुंचने के बाद करीब एक घंटे एयरपोर्ट केअंदर रहे। प्रोटेस्ट की परमिशन मिलने के बाद अभिजीत और CJP के समर्थक जंतर-मंतर पहुंच चुके हैं। बड़ी संख्या में फोर्सेज भी तैनात हैं।

दैनिक भास्कर 6 Jun 2026 1:55 pm

अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति पर लगाई रोक, भारत समेत 39 देशों के प्रवासियों को राहत

ट्रंप प्रशासन ने वर्ष 2025 में आव्रजन नियमों में बदलाव करते हुए कई देशों के नागरिकों के लिए अमेरिका में रहने और विभिन्न प्रकार की आव्रजन सेवाएं प्राप्त करने की प्रक्रिया को कठिन बना दिया था।

देशबन्धु 6 Jun 2026 12:22 pm

भारत को SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने को तैयार रूस, संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव; पुतिन बोले- मोदी पर दबाव बेअसर

पुतिन ने कहा कि रूस ने पहले भी भारत को इस पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास में साझेदार बनने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा, हमने भारत में अपने मित्रों को इस कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। हमें लगता है कि यह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लड़ाकू विमानों में से एक है, लेकिन भारतीय पक्ष ने कहा था कि वह इस पर विचार करेगा।

देशबन्धु 6 Jun 2026 11:55 am

अमेरिकी जॉब मार्केट में बूम: ट्रंप ने थपथपाई अपनी पीठ, ब्याज दरें न घटाने पर फेड को लताड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई में उम्मीद से ज्यादा नौकरियों में बढ़ोतरी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रोजगार के ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि ईरान के साथ जारी तनाव के बावजूद अर्थव्यवस्था अनुमान से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

देशबन्धु 6 Jun 2026 11:54 am

हिज्बुल्लाह ने इजरायली विमानों पर दागीं मिसाइलें, आईडीएफ ने किया दावा

इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने हिज्बुल्लाह की ओर हमले किए जाने का दावा किया है। आईडीएफ ने कहा है कि हिज्बुल्लाह की ओर से इजराइली वायुसेना के विमानों को निशाना बनाकर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं

देशबन्धु 6 Jun 2026 9:40 am

ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को 'किसी न किसी तरह' खत्म कर दिया जाएगा : डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ टकराव खत्म होने के करीब है और उन्होंने ऐलान किया कि तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को 'किसी न किसी तरह' रोका जाएगा।

देशबन्धु 6 Jun 2026 9:38 am

लेबनानी राष्ट्रपति का ईरान पर तीखा हमला, कहा- अमेरिका से बातचीत के लिए हमारा इस्तेमाल बंद हो

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल 'मोल-भाव के मोहरे' के रूप में करने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की है

देशबन्धु 6 Jun 2026 8:40 am

अमेरिका ने ब्रिटेन, डेनमार्क और कुवैत को लगभग 3 अरब डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दी

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ब्रिटेन, डेनमार्क और कुवैत को लगभग 3 अरब डॉलर के संभावित विदेशी सैन्य सौदों को मंजूरी दे दी है। इनमें लंबी दूरी की मारक मिसाइलें, विमान सुरक्षा प्रणाली और ड्रोन-रोधी प्लेटफॉर्म शामिल हैं

देशबन्धु 6 Jun 2026 8:30 am