अगर आप रोज एक करोड़ रुपए खर्च करें- बिना रुके, बिना छुट्टी लिए। तो इलॉन मस्क की मौजूदा संपत्ति खर्च करने में आपको करीब 26 हजार साल से ज्यादा लगेंगे। 11 जून 2026 को स्पेसएक्स के IPO ने मस्क को वो मुकाम दे दिया, जहां इंसानी इतिहास में कोई नहीं पहुंचा है, यानी पहला ट्रिलियनेयर। आखिर मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर कैसे बने, ये कितनी बड़ी रकम है और स्पेसएक्स आगे क्या करने वाली है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: इलॉन मस्क की नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर के पार कैसे पहुंची? जवाब: इलॉन मस्क की स्पेस इंजीनियरिंग कंपनी है स्पेसएक्स। ये रॉकेट, स्पेसक्राफ्ट वगैरह बनाती है। साथ ही ‘स्टारलिंक’ नाम से सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज भी देती है। फरवरी 2026 में मस्क ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ‘xAI’ को भी इसी में शामिल कर लिया था। AI प्लेटफॉर्म Grok इसी xAI का बनाया हुआ है। स्पेसएक्स अब तक प्राइवेट कंपनी थी, यानी इसके शेयर आम लोग शेयर मार्केट से नहीं खरीद सकते थे। 11 जून 2026 को इसने अमेरिकी शेयर बाजार ‘NASDAQ’ पर अपना IPO लॉन्च किया है। जब कोई कंपनी पहली बार शेयर बाजार में लिस्टेड होने के लिए शेयर जारी करती है, तो उसे IPO यानी ‘इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग’ कहते हैं। रॉयटर्स ने कंपनी के दस्तावेजों और फोर्ब्स के अनुमानों के आधार पर हिसाब लगाया है कि जैसे ही स्पेसएक्स शेयर बाजार में ट्रेडिंग शुरू करेगी, मस्क की कुल संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर पार कर जाएगी। ऐसा कैसे होगा, इसे आसान भाषा में समझते हैं… चूंकि IPO लॉन्च होने के बाद लोगों के शेयर खरीदने के चलते उसका प्राइस भी बढ़ता है। फोर्ब्स के मुताबिक, स्पेसएक्स का शेयर शुरुआती प्राइस, यानी 135 डॉलर से 3.5 डॉलर बढ़कर 138.5 डॉलर पहुंच जाए या फिर टेस्ला का शेयर 399 डॉलर से बढ़कर 424 डॉलर का हो जाए, तो मस्क की नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। रुपए में करीब 95.35 लाख करोड़। सवाल-2: एक ट्रिलियन डॉलर से क्या-क्या खरीद सकते हैं मस्क? जवाब: किसी की कमाई कितनी ज्यादा है, इसे समझने का एक तरीका ये है कि उस रकम से क्या-क्या खरीदा जा सकता है। मस्क 1 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ से सैद्धांतिक रूप से कई देश खरीदने से लेकर मंगल ग्रह पर कॉलोनी तक बसा सकते हैं… दुनिया के कई देश खरीद सकते हैं मस्क (थ्योरिटिकली) मंगल ग्रह पर 10 लाख लोगों का शहर बसा सकते हैं एक खुद की न्यूक्लियर पावर्ड नेवी बना सकते हैं सभी रईस स्पोर्ट्स लीग और सैकड़ों टीमें खरीद सकते हैं हॉलीवुड के सबसे अमीर 5 फिल्म स्टूडियो खरीद सकते हैं दुनिया की सबसे अमीर 10 एयरलाइंस खरीद सकते हैं मुंबई शहर का हर घर खरीद सकते हैं सवाल-3: स्पेसएक्स इतनी रकम जुटाकर आगे क्या-क्या करने वाली है? जवाब: स्पेसएक्स इस रकम को 3 बड़े कामों में लगाएगी… 1. स्टारलिंक के लिए नए V3 सैटेलाइट खरीदेगी 2. अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर्स बनाएगी 3. रॉकेट सिस्टम पर इन्वेस्टमेंट बढ़ाएगी सवाल-4: मस्क के बाद सबसे ज्यादा नेटवर्थ वाले लोग कौन हैं? जवाब: इलॉन मस्क की नेटवर्थ न सिर्फ सबसे ज्यादा है, बल्कि लिस्ट में दूसरे स्थान पर मौजूद गूगल के CEO लैरी पेज की नेटवर्थ से 3.36 गुना ज्यादा है। सवाल-5: आम आदमी के नजरिए से 1 ट्रिलियन डॉलर कितनी बड़ी रकम है? जवाब: अगर आपकी एक महीने की सैलरी 1 लाख रुपए हो, तो इस हिसाब से आपकी सालाना सैलरी 12 लाख रुपए होगी। अगर आपके परिवार के 4 अन्य सदस्यों की सैलरी भी इतनी ही हो, तो परिवार की कुल सालाना कमाई हुई 60 लाख रुपए। अगर साल-दर साल इस 60 लाख रुपए से कोई खर्च न किया जाए, तो भी आपके पूरे परिवार को इलॉन मस्क की नेटवर्थ के बराबर पैसा जमा करने में 158 लाख साल लगेंगे। मस्क ने अपनी आधी संपत्ति दान करने का फैसला किया है। अभी दुनिया की आबादी करीब 8.29 अरब है। अगर मस्क दुनिया के हर व्यक्ति को अपनी नेटवर्थ से बराबर रकम बांट दें, तो सबको 121 डॉलर यानी करीब 11,500 रुपए मिलेंगे। वहीं वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, दुनियाभर में 70 करोड़ लोग भयंकर गरीबी में जी रहे हैं। मस्क चाहें तो इनमें से हर व्यक्ति को 1,430 डॉलर दे सकते हैं। ---------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…चुटकी में हैक कर लेता है बैंक, दुनियाभर की सरकारों को Mythos AI का डर; क्या खातों में जमा आपका पैसा भी खतरे में है एंथ्रोपिक का नया AI मॉडल 'क्लॉड मिथोस' इतना खतरनाक है कि इसे आम लोगों के लिए रिलीज ही नहीं किया गया। हालांकि ये किसी तरह लीक हो गया है। एंथ्रोपिक के मुखिया डेरियो अमोदेई ने खुद इसके खतरे की चेतावनी दी है। पढ़ें पूरी खबर…
बांग्लादेश में भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण पर प्रशासन ने लगाई रोक, इलाके में तनाव बढ़ा
बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह आदेश वहां के अधिकारियों ने दिया है। मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने गुरुवार शाम मंदिर के सभागार में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की।
अफगानिस्तान में महिलाओं पर लगाए गए सख्त ड्रेस कोड को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर बल प्रयोग को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने चिंता जताई। इन प्रदर्शनों में एक लड़के समेत दो लोगों की मौत हो गई और बीस से ज़्यादा लोग घायल हो गए।
ईरान के विदेश मंत्री अराघची बोले- अमेरिकी कार्रवाई से अप्रैल का सीजफायर निष्प्रभावी हो गया
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका के नए हमलों ने दोनों पक्षों के बीच अप्रैल में हुए सीजफायर को बेअसर कर दिया है।
श्रीलंका की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भारत दौरे से मिली सीख साझा की
श्रीलंका की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने कोलंबो में भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की और पिछले महीने भारत दौरे से मिली सीख और अनुभव साझा किए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका पिछले कई हफ्तों से गुप्त रूप से होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास सैन्य अभियान चला रहा था। यही वजह है कि वैश्विक तेल बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 400 किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा का जबेली गांव। कभी नक्सली रहे प्रदीप कुंजम का घर यहां है। उन्होंने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला। गोद में 8 महीने की बेटी करिश्मा थी। प्रदीप 2008 में नक्सली बन गए थे। संगठन का नियम था, शादी करनी है तो नसबंदी करानी होगी। 2016 में प्रदीप ने शादी से पहले नसबंदी करा ली। 2022 में उन्होंने सरेंडर कर दिया। 2023 में नसबंदी खुलवाने के लिए सर्जरी कराई और अब एक बेटी के पिता हैं। प्रदीप अकेले नहीं है। बीते 10 साल में 56 पूर्व नक्सली ऐसी सर्जरी करा चुके हैं। 26 लोग पिता भी बन गए। बस्तर रेंज के IG सुंदर राज पी. के मुताबिक, 120 पूर्व नक्सलियों की सर्जरी अभी होनी है। ये सरेंडर पॉलिसी का हिस्सा है और फ्री में की जाती है। पहली कहानी प्रदीप कुंजम की जख्मी पत्नी को इलाज नहीं मिला, तो संगठन छोड़ा; दूसरी सर्जरी के बाद पिता बने 2008 में प्रदीप के गांव में नक्सली आए थे। उनकी बातों के असर में आकर प्रदीप संगठन से जुड़ गए। वे बताते हैं, ‘संगठन में काम करते हुए मैं गंगू से मिला। हम अक्सर साथ रहते थे। जंगल में राशन ढोना, पानी लाना, खाना बनाना, पहरा देना, सब काम मिलकर करते थे। इसी दौरान एक-दूसरे के करीब आ गए।’ ‘कैडर के लोगों ने हमें बात करते देख लिया। खबर बड़े लीडर तक पहुंच गई। उन्होंने मुझसे पूछा, क्या तुम इससे शादी करना चाहते हो? मैंने हां कह दिया। उन्होंने रिश्ता मंजूर कर लिया। शादी की बात आगे बढ़ी, तो कामरेडों ने कहा कि पहले नसबंदी करानी होगी। कैडर की महिलाओं ने गंगू को समझाया कि जंगल की जिंदगी में बच्चे के साथ रहना मुश्किल होगा। अगर किसी मुठभेड़ में फंस गए, तो बच्चे को लेकर भाग नहीं पाओगी। पूरे परिवार की जान खतरे में पड़ जाएगी।’ ‘धीरे-धीरे गंगू भी यही बात कहने लगी। आखिरकार मैंने नसबंदी के लिए हामी भर दी। संगठन में कोई डॉक्टर नहीं था। कुछ लोग थे, जो बुखार की दवा देते थे, चोट लगने पर मरहम-पट्टी कर देते थे। उन्होंने ही नसबंदी करना सीख लिया और जंगल में मेरा ऑपरेशन किया।’ ‘मई 2016 में मैंने गंगू से शादी कर ली। करीब एक महीने बाद मुठभेड़ में गंगू जख्मी हो गई। तीन साथी मारे गए। घायल होने के बाद भी गंगू सामान उठाकर पहाड़ चढ़ती थी। उसकी हालत बिगड़ने लगी। मैंने कई बार अपने नेताओं से कहा कि किसी डॉक्टर को बुला लें, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।’ प्रदीप ये किस्सा सुना ही रहे थे कि बगल में बैठीं गंगू स्थानीय भाषा में कुछ कहने लगीं। हमने प्रदीप से पूछा कि वे क्या कह रही हैं? प्रदीप ने उनकी बात का मतलब बताया, ‘ये कह रही है कि घायल होने के बाद भी तैरकर नदियां पार करनी पड़ती थीं। भीगे कपड़े शरीर पर ही सूख जाते, जिससे घाव और गहरा हो जाता था। रात में दवाइयां दी जाती थीं, लेकिन उनका असर नहीं होता था।’ हमने गंगू से बात करने की कोशिश की, लेकिन वे उठकर चली गईं। प्रदीप ने पहले ही कहा था कि पत्नी के वीडियो न बनाएं। इसलिए हमने जोर नहीं दिया। प्रदीप आगे कहते हैं, ‘उसी वक्त मैंने सोचा कि जिस संगठन के लिए हमने सब छोड़ दिया, वह अपने लोगों का इलाज तक नहीं करा सकता। तय कर लिया कि अब यहां नहीं रहना है।’ पहली सर्जरी रायपुर में, दूसरी तेलंगाना में प्रदीप बताते हैं, ‘मैंने 2022 में दंतेवाड़ा में सरेंडर कर दिया। तब एसपी अभिषेक पल्लव थे। मैंने उन्हें नसबंदी के बारे में बताया। उन्होंने मुझे रायपुर के रामकृष्ण अस्पताल भेजा। वहां ऑपरेशन हुआ, लेकिन कामयाब नहीं हुआ। मुझे पता चला कि तेलंगाना के वारंगल में भी नसबंदी रिवर्स करने के लिए ऑपरेशन होता है। मैं वारंगल गया और दूसरी बार ऑपरेशन कराया। इस बार सर्जरी कामयाब रही। मैं 2025 में पिता बन गया।’ दूसरी कहानी दिनेश कड़ती की सोचा था जंगल में ही मरेंगे, गांव में बच्चों को देखकर पिता बनने की इच्छा हुई दिनेश दंतेवाड़ा के मुंगेर गांव में रहते थे। 2005 में उन्होंने नक्सल संगठन जॉइन कर लिया। 2012 में सरेंडर किया, तब डिप्टी कमांडर बन चुके थे। 3 लाख रुपए के इनामी थे। दिनेश बताते हैं, ‘मैं संगठन में नया था। तभी एक लड़की भी आई। उसका नाम मीना था। वो मुझे पसंद थी। मैंने उसे प्यार के इजहार वाला लेटर भेजा। मीना की तरह से जवाब नहीं आया। फिर दूसरा लेटर लिखा और पूछा क्या आप नाराज हो? इस बार उसने जवाब दिया और मेरा प्रपोजल मान लिया।’ 2007 में हमने शादी के बारे में सोचा। हमें नहीं पता था कि शादी से पहले नसबंदी कराना पड़ता है। मैंने यह बात मीना को बताई, तो उसने कहा कि हम यहीं मिले हैं, यहीं रहेंगे और शायद यहीं मरेंगे, इसलिए नसबंदी करा लो। मैंने 2008 में नसबंदी करा ली। दिनेश आगे बताते हैं, ‘समय के साथ मेरे भीतर पिता बनने की इच्छा जागने लगी। मैं किसी गांव में जाता और छोटे बच्चों को खेलते देखता, तो सोचता था कि मैं कभी बाप नहीं बन पाऊंगा। मीना भी मां बनना चाहती थी, लेकिन संगठन छोड़ने से डरती थी। मैं उससे पूछता था कि अगर परिवार ही नहीं होगा, तो यह लड़ाई किसके लिए लड़ रहे हैं।’ ‘हमने 2012 में दंतेवाड़ा में सरेंडर कर दिया। मैंने अफसरों को नसबंदी के बारे में बताया। कहा कि मैं परिवार बढ़ाना चाहता हूं। उन्होंने मेरी मदद की। अभी मेरा पांच साल का बेटा है।’ तीसरी कहानी योगेश माड़वी की एक थप्पड़ ने नक्सली बनाया, बेटे को देखकर लगता है जिंदगी ने दूसरा मौका दे दिया सुकमा के चिंतलनार गांव के योगेश माड़वी के नक्सली बनने की कहानी एक थप्पड़ से शुरू हुई थी। 1996 में उनके मामा जंगल में जमीन जोत रहे थे। तभी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी आए और उन्हें रोकने लगे। एक अधिकारी ने मामा को थप्पड़ मार दिया। यह बात नक्सलियों तक पहुंची, तो उन्होंने अधिकारी को धमकाया। योगेश कहते हैं कि इसके बाद वह अधिकारी दोबारा हमारे इलाके में नहीं आया। तभी मुझे लगा कि नक्सली ही आदिवासियों के साथ हैं। 1998 में मैं उनसे जुड़ गया। शुरुआत स्टूडेंट विंग से हुई। धीरे-धीरे रीजनल कमेटी का मेंबर बन गया। हिडमा जैसे बड़े नक्सली नेताओं के साथ काम करने लगा। योगेश आगे बताते हैं, ‘संगठन में शामिल होने के कुछ समय बाद मुझे कैडर में शामिल अनीता पसंद आ गई। मैंने उसे चिट्ठी लिखी कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। उसने हां कह दिया, लेकिन पूछा कि क्या नसबंदी कराओगे? पहले मैं इसके लिए तैयार नहीं था, लेकिन कामरेड दबाव बनाने लगे। आखिरकार मैं मान गया। 2007 में पश्चिम बंगाल से आए एक डॉक्टर ने मेरी नसबंदी कर दी।’ ‘समय के साथ संगठन से मेरा भरोसा उठने लगा। गुटबाजी बढ़ रही थी। कई लोगों को सिर्फ शक के आधार पर पुलिस का मुखबिर बताकर मार दिया गया। तब पहली बार लगा कि हम जिस लड़ाई का हिस्सा हैं, उसमें कहीं न कहीं बड़ी गलती हो रही है।’ ‘2011 में मैंने तय किया कि अब संगठन के साथ नहीं रहूंगा। मुझे डर था कि अगर पुलिस के पास गया तो वे नक्सली समझकर मार देंगे। संगठन को पता चल गया तो वे भी नहीं छोड़ेंगे। मैंने पत्नी के इलाज का बहाना बनाया। मेरी सुरक्षा में पांच गनमैन थे। उनके साथ तेलंगाना बॉर्डर तक गया। फिर उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि इलाज कराकर लौट आऊंगा।’ ‘तेलंगाना में एक सरपंच मुझे पहचानता था। उसकी मदद से मैं करीमनगर पहुंचा और सरेंडर कर दिया। नसबंदी खुलवाने के लिए सर्जरी करवाई। मेरा एक बेटा है। उसे देखकर लगता है कि जिंदगी ने मुझे दूसरा मौका दिया है।’ नसबंदी की रिवर्स सर्जरी कामयाब होने के चांस 30 से 70% पूर्व नक्सली सर्जरी के लिए जगदलपुर के महारानी अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल के मुख्य अधीक्षक डॉ. संजय कुमार प्रसाद बताते हैं, ‘कई पूर्व नक्सलियों की नसबंदी प्रशिक्षित डॉक्टरों ने नहीं की थी। कुछ मामलों में ऑपरेशन के दौरान ऐसी नसें भी कट गईं, जिन्हें दोबारा जोड़ना मुमकिन नहीं है।’ सरेंडर पॉलिसी में नसबंदी की रिवर्स सर्जरी कराने का वादा बस्तर डिवीजन के IG सुंदरराज पी. कहते हैं, ‘हाल के कुछ साल में 1 हजार से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है। उसमें से ज्यादातर ने यही कहा कि संगठन में उनकी नसबंदी हो गई है, लेकिन वे परिवार बढ़ाना चाहते हैं। हमने फैसला लिया कि सभी का टेस्ट कर नसबंदी खुलवाई जाएगी।’ भारत में नक्सलवाद की स्थिति इस ग्राफिक से समझिए… ……………………. ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंआर्मी के साथ आतंकियों से लड़े, सरकार ने घर उजाड़ा, मंत्री बोले- पता नहीं किसने आदेश दिया 80 साल के अब्दुल रज्जाक अपने टूटे घर के मलबे के पास उदास बैठे रहते हैं। 2001 में वे कश्मीर से भागकर जम्मू आए थे। सिधरा एरिया में घर बनाया। 25 साल हो गए रहते हुए। 19 मई को वन विभाग वाले बुलडोजर लेकर आए और अब्दुल समेत करीब 25 घर तोड़ दिए। ये दूसरी बार है, जब अब्दुल बेघर हुए हैं। इससे पहले आतंकियों के डर से घर छोड़ा था। हालांकि मंत्री जावेद राणा ने हैरानी जताई है कि ये कार्रवाई सरकार की जानकारी के बिना की गई। पढ़ें पूरी खबर...
चीनी प्रतिनिधि ने मध्य पूर्व में शांति को आगे बढ़ाने के लिए चार प्रस्ताव रखे
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने सुरक्षा परिषद की 'मध्य पूर्व में शांति को बढ़ावा देना: स्थायी शांति के लिए मध्यस्थता और संवाद' विषय पर खुली बहस को संबोधित करते हुए मध्य पूर्व में शांति को आगे बढ़ाने के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव किए।
मेघालय से एनपीपी के जेम्स संगमा निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित
नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के जेम्स संगमा मेघालय से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए। राज्य की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया।
अदन मिलिट्री कैंप में धमाका: 12 सैनिकों की मौत, कई घायल
यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में गुरुवार सुबह सरकार समर्थित सेना के मिलिट्री कैंप में जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके में 12 सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए
ओमान की खाड़ी से गुजर रहे जहाज पर अमेरिकी हमले की ये तस्वीरें देखिए… सेटेबेलो नाम के इस जहाज पर सवार 24 क्रू मेंबर्स भारतीय थे। इनमें से 3 की मौत हो चुकी है। 8 जून और 11 जून को भी अमेरिका ने भारतीय क्रू मेंबर्स वाले जहाजों पर हमले किए हैं। आखिर भारतीय क्रू वाले जहाजों पर मिसाइल क्यों मार रहा है अमेरिका; इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों को समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: भारतीय चालक दल वाले जहाजों पर अमेरिका ने कैसे हमला किया?जवाबः पहला हमला 8 जून की दोपहर करीब 2:15 बजे हुआ… दूसरा हमला 10 जून की सुबह करीब 9 बजे हुआ… तीसरा हमला 11 जून की दोपहर हुआ… जिस ऑपरेशन में भारतीय नाविकों को निशाना बनाया गया, उसे उपलब्धि बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा- ‘मेरी वजह से 10 करोड़ बैरल तेल होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर दुनिया के बाजार में पहुंचा। क्योंकि उसे हम कंट्रोल कर रहे हैं, ईरान नहीं।’ सवाल-2: भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हमले की वजह क्या है? जवाबः 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था। उसने समुद्र में माइन्स बिछाईं। जहाजों पर हमले किए। इससे दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई ठप पड़ गई। होर्मुज खुलवाने की सारी कोशिश नाकाम होने के बाद अमेरिका ने 13 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट के बाहर ओमान की खाड़ी में दोहरी नाकेबंदी लगा दी। अमेरिकी सेना ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोकने लगी। जो जहाज अमेरिकी नाकेबंदी का पालन नहीं करता, उन पर हमले भी किए जाते हैं। अमेरिका का दावा है कि 13 अप्रैल से अब तक उसने 9 जहाजों पर कार्रवाई की है, 135 जहाजों का रास्ता बदला है। 8 से 11 जून के बीच भारतीय क्रू वाले जहाजों के साथ भी यही हुआ। अमेरिकी सेना के मुताबिक… एक आशंका ये भी है कि ये तीनों जहाज शैडो फ्लीट का हिस्सा थे। शैडो फ्लीट, यानी ऐसे जहाज जिनकी रजिस्ट्री किसी और देश में हो, लेकिन कंट्रोल कोई और देश करे। इन दोनों जहाजों के ऑपरेशंस पर भी पलाऊ का कंट्रोल न के बराबर है। सवाल-3: तो क्या भारत ईरान से गुपचुप तरीके से तेल खरीद रहा है?जवाबः पहले ये समझिए कि गुपचुप तरीके से शैडो फ्लीट के जरिए समुद्र में तेल का ट्रांसपोर्ट होता कैसे है… कनाडाई थिंक टैंक मैकडोनाल्ड लॉरियर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, शैडो फ्लीट अपने सफर का ओरिजिन और डेस्टिनेशन दोनों छिपाते हैं। अक्सर उन देशों के झंडे इस्तेमाल करते हैं, जो इंटरनेशनल मैरीटाइम कानूनों की ज्यादा परवाह नहीं करते। मरीन ट्रैफिक डेटा के मुताबिक, 8 जून को जिस मैरिवेक्स जहाज पर हमला हुआ, वो अप्रैल में ईरान के बंदर अब्बास से कार्गो लेकर भारत आया था। जिस वक्त मैविरेक्स पर हमला हुआ, वो खाली था और ओमान की खाड़ी से होते हुए ईरान के बंदरगाह तक पहुंचना चाह रहा था। ओमान की खाड़ी तक पहुंचते ही उसने अपने सिग्नल बंद कर लिए थे। ये जहाज किसी भारतीय मालिक का नहीं था। वहीं सेटेबेलो टैंकर अप्रैल में चीन गया था। उसने चीन के लियांयुंगांग पोर्ट पर सामान उतारा और फिर 12 मई को सिंगापुर से रवाना हुआ था। ये भी ईरान से तेल लेने जा रहा था। हालांकि इन जहाजों पर भारतीय क्रू होने का मतलब ये नहीं है कि ये ईरान से तेल लेकर भारत आने वाले थे। इंडियन सीफेयरर के मुताबिक, भारतीय नाविक ग्लोबल मर्चेंट नेवी का हिस्सा है, जो दुनिया के किसी भी मालिक के जहाज पर काम करते हैं। जहाज में क्या सामान है और कहां जाएगा, इसका क्रू के भारतीय होने से कोई लेना-देना नहीं होता। फिलहाल भारत के ईरान से तेल खरीदने के कोई सबूत नहीं हैं- न आधिकारिक तौर पर और न ही गुपचुप तरीके से। सवाल-4: भारत ईरान से आधिकारिक तौर पर तेल क्यों नहीं खरीद रहा है?जवाब: भारत पिछले 7 सालों से ईरानी तेल नहीं खरीद रहा है। इसकी वजह अमेरिकी बैन है… 19 अप्रैल, यानी छूट की मियाद खत्म होने के बाद भारत के ईरानी तेल खरीदने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। सवाल-5: भारतीय क्रू सदस्यों वाले जहाज पर अमेरिकी हमले, सरकार क्या कर रही? जवाबः भारत ने 10 जून को सेटेबेलो पर हुए हमले के विरोध में अमेरिका के चार्ज डी'अफेयर्स, यानी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब किया। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नागराज नायडू ने मीक्स को इस हमले को लेकर भारत की चिंताओं के बारे में बताया। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने अमेरिका का नाम लिए बिना एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया, ‘हम ओमान के तट पर कमर्शियल जहाज सेटेबेलो पर हुए हमले की निंदा करते हैं। इस इलाके में शिपिंग पर लगातार हमले की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। कमर्शियल जहाजों और सिविलियन इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना अब बंद होना चाहिए और जल्द से जल्द अंतर्राष्ट्रीय समुद्री रास्तों से बिना रुकावट के दोबारा व्यापार शुरू होना चाहिए।’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को बताया कि बताया कि भारत ने अमेरिका को साफ मैसेज दिया है कि समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और जहाजों पर हो रहे हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ---- रिसर्च सहयोग- श्रेया नाकाड़े ---- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का भारतीय क्रू वाले तीसरे जहाज पर अटैक:अब तक 3 मौतें; भारत ने अमेरिकी राजदूत को फटकारा, कहा- तुरंत हमले बंद करें ओमान के पास भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर अमेरिकी हमलों को लेकर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय क्रू वाले तीसरे जहाज MT जलवीर पर भी हमला किया है। इस पर सवार सभी 20 भारतीय सुरक्षित हैं और उन्हें निकालने का काम जारी है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू हुए युद्ध के शोर ने एक बार फिर से क्षेत्र में अशांति का माहौल बना दिया है। कतर विदेश मंत्रालय ने ईरान की ओर से जॉर्डन, बहरीन और कुवैत पर किए गए मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है।
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों के एक वरिष्ठ नेता की ओर से चीन पर अमेरिका की खुली राजनीतिक व्यवस्था का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।
लेबनान पर इजरायल का बड़ा हमला: दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों से मची तबाही, 18 लोगों की मौत, कई घायल
इजरायल और लेबनान के बीच जारी सीमा पर संघर्ष में दक्षिणी लेबनान में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं। यह जानकारी नागरिक सुरक्षा और स्वास्थ्य अधिकारियों ने दी है।
ईरान से तनाव के बीच इजरायल के प्रमुख एयरबेस को मामूली नुकसान, मिसाइल के टुकड़े गिरे
ईरान के साथ हालिया तनाव के बीच उत्तरी इजरायल में स्थित रामत डेविड एयर बेस पर मिसाइल के कुछ टुकड़े गिरे। इसकी पुष्टि इजरायली सेना ने की है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ का इतवारा बाजार इलाका। सुबह के करीब 9 बजे हैं। एक घर के बाहर कुछ लोग अर्थी तैयार कर रहे हैं। पास में एक लाश रखी है। ये 18 साल के सक्षम की है। लाश के पास मां छाती पीट-पीटकर रो रही है। तभी घर से एक बदहवास लड़की निकल कर आई और लाश से लिपटकर रोने लगी। नाम है आंचल। रोते-रोते बोली, ‘सक्षम और मैंने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं। अब मेरा क्या होगा? इस अर्थी में बांधकर मेरा भी अंतिम संस्कार कर दो।’ लोग समझा रहे थे, लेकिन वो नहीं मान रही थी। कुछ देर बाद उसने कहा- ‘सिंदूर और अगरबत्ती लाओ! मैं सक्षम की लाश से शादी करूंगी और इसे इंसाफ दिलाऊंगी।’ सिंदूर लाया गया। उसने कांपते हाथों से सक्षम का बेजान चेहरा छुआ और अपनी मांग में सिंदूर भर लिया। मंगलसूत्र की जगह गले में लाल धागा बांधा। रोते हुए बोली- ‘अब से सक्षम की विधवा हूं। उसकी जगह घर में रहूंगी। उसके मां-बाप अब मेरे मां-बाप हैं।’ लाश से शादी की चर्चा दुनियाभर में हुई। अमर प्रेम की मिसाल दी गई। लेकिन वो लड़की सक्षम का घर छोड़कर जा चुकी है। इस बार ब्लैकबोर्ड में नांदेड़ की संगीता ताटे की स्याह कहानी, जिनके बेटे को प्रेमिका के घरवालों ने मार डाला। फिर प्रेमिका ने बेटे की लाश से शादी की और अब घर छोड़कर चली गई… मैं नीरज झा महाराष्ट्र के नांदेड़ के इतवारा बाजार में घनी आबादी, संकरी गलियों से होते हुए संगीता ताटे से मिलने पहुंचा। एक पतली-सी सीढ़ी के सहारे दूसरे माले पर बने उनके घर में दाखिल हुआ। 40 साल की संगीता से बातचीत शुरू हुई। बेटे को गोली मारने की बात बताते हुए रो पड़ती हैं। सिसकते हुए कहती हैं- ‘मुझे नहीं पता था कि लड़की का परिवार इतनी बेरहमी से मेरे बेटे को मार देगा, नहीं तो कभी उसे वहां जाने नहीं देती। मेरा अब क्या ही बचा। न बेटा बचा, न पति। वो लड़की भी अब जा चुकी है।’ वह बताती हैं- 27 नवंबर 2025 की बात है। दोपहर करीब 1 बजे थे। मेरा बेटा सक्षम घर पर था। तभी उसके कुछ दोस्त उसे बुलाने आए। उन्होंने कहा- ‘चलो, तुम्हारी गर्लफ्रेंड के घरवाले बुला रहे हैं।' सक्षम ने हैरानी से पूछा- 'वे मुझे क्यों बुलाएंगे?' उसका एक दोस्त बोला- 'वे शादी की बात करना चाहते हैं।' सक्षम दोस्तों के साथ चला गया। दोस्त उसे लड़की के घर छोड़कर चले गए। घर में उसका दामाद की तरह स्वागत हुआ। उसे चाय-पानी दिया गया। माहौल ऐसा था मानो किसी रिश्ते की बात होने वाली हो। कुछ देर बाद अचानक सब बदल गया। लड़की के बाप ने पिस्टल निकाली और सक्षम की कनपटी पर तान दी। कहने लगे- ‘तू मेरी बेटी से शादी करेगा? सा%$’ सक्षम जान बचाने के लिए भागा, लेकिन लड़की के बाप ने उस पर गोली चला दी। पहली गोली उसके सीने में लगी। वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद दो गोलियां और उसके सीने में दाग दीं। वह जमीन पर पड़ा तड़प रहा था। तभी एक बड़ा पत्थर उठाकर लाए और सिर पर दे मारा। मेरे बेटे का सिर बुरी तरह से कुचल दिया। सक्षम की मौत का सदमा मेरे पति बर्दाश्त नहीं कर सके। 3 महीने बाद उनकी भी मौत हो गई। ये बताते हुए संगीता फिर रोने लगीं। ‘घर में कोई और है या आप अकेली रहती हैं?, मैंने पूछा संगीता ताटे धीरे से बोलीं- ‘छोटा बेटा नासिक में रहकर पढ़ाई कर रहा है। अब घर में अकेली बची हूं। बेटे की प्रेमिका मेरे ही घर रह रही थी, लेकिन कुछ महीने में वापस मायके चली गई। उसने कहा था- ‘मम्मी, सक्षम की जगह अब मैं आपका बेटा हूं। आपके साथ ही रहूंगी। आपकी देखभाल करूंगी।’ वह साढ़े 3 महीने साथ रही। एक दिन अचानक बोली- ‘दादी की तबीयत बहुत खराब हो गई है। मुझे उनसे मिलने जाना है’। यहां से कुछ ही दूर उसका घर है। मैं उसे पहुंचाकर आ गई। उसके बाद से वह कभी लौटकर नहीं आई। अब मेरी क्या ही जिंदगी बची है? रोज बेटे को याद करती हूं। सोचती हूं, उस दिन मुझे भी मार दिया गया होता तो इस तरह बेटे की याद में घुट-घुटकर न जीती। लेकिन फिर सोचती हूं- मैं नहीं रहूंगी तो बेटे को इंसाफ कौन दिलाएगा? घर में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा। सरकार ने वादा किया था कि वह 3 महीने में घर के किसी सदस्य को नौकरी देगी, लेकिन 6 महीने बीत चुके हैं, कुछ नहीं हुआ।’ लड़की को आप पहले से जानती थीं? उसकी कोई तस्वीर? संगीता मोबाइल का स्क्रीन ऑन करती हैं। एक तस्वीर दिखाती हैं, जिसमें लड़का-लड़की एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखे हुए खड़े हैं। वह बताती हैं- ‘लड़की का नाम आंचल है। साथ में मेरा बेटा सक्षम। लड़की इसी बस्ती में रहती थी। दोनों की इंस्टाग्राम पर बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे वे मिलने-जुलने लगे। प्यार हो गया। हम SC यानी शेड्यूल कास्ट से हैं और लड़की पिछड़ी जाति यानी OBC से है। मेरा बेटा 12वीं में पढ़ता था और लड़की 11वीं में। कुछ समय बाद सक्षम आंचल के घर जाने लगा। नवरात्रि में दोनों गरबा करने जाते थे। लड़की के घर वालों को शक हुआ। उन्हें दोनों के रिश्ते की बात पता चल गई। वह रिश्ते के खिलाफ हो गए, लेकिन आंचल मेरे बेटे के साथ ही शादी करना चाहती थी। एक दिन उसके घर वाले मारते-पीटते हुए आंचल को थाने लेकर गए। वहां कहा कि सक्षम और उसके परिवार के खिलाफ केस दर्ज कराओ, नहीं तो तुम्हें जान से मार देंगे। लड़की बोली- वह मुकदमा नहीं दर्ज कराएगी। वह सक्षम से ही शादी करेगी। संगीता ताटे आगे बताती हैं- पता नहीं, अचानक उन लोगों के मन में क्या आया। वे सक्षम को अपनाने की बात कहने लगे। मेरे बेटे को घर बुलाने लगे। ये सारी बातें मुझे बेटे की मौत से दो महीने पहले पता चली थीं। मैंने उससे कहा था कि वो परिवार ठीक नहीं है। गांजा-चरस का धंधा करते हैं। वे अपराधी लोग हैं। गोली-बंदूक भी रखते हैं। उनसे दूर रहो। लेकिन मेरे बेटे ने कहा- मम्मी वे अच्छे लोग हैं। मेरी आंचल के पापा से बात हुई है। उसका भाई तो अब मेरा दोस्त बन चुका है। वह हमारी शादी करवाने की बात कहते हैं। पहले चाचा की शादी हो जाए तब आंचल से शादी करूंगा।’ इस दौरान बार-बार संगीता की नजर बेटे सक्षम की तस्वीर पर जाकर टिक रही है। ऐसा लग रहा जैसे वो बेटे की तस्वीर को गले लगाना चाह रही हों। फिर से फूट-फूटकर रोने लगीं। फफकते हुए बोलीं- ‘सक्षम इतना समझदार था कि पापा के साथ धंधे में हाथ बंटाता था। इसी इतवारा बाजार में एक सब्जी मंडी है। वहां हमारी फल की दुकान थी। वह स्कूल और कोचिंग से जब आता तो दुकान पर पापा का हाथ बंटाता था। 27 नवंबर को बस्ती के कुछ लोगों ने बताया कि 10 मिनट पहले सक्षम को आंचल के घरवालों ने मार डाला। लाश उनके घर के बाहर सड़क पर पड़ी है। जब तक हम पहुंचते, पुलिस वहां से लाश को थाने ले जा चुकी थी। लड़की के घर वाले हत्या के बाद आसपास ही छिपे थे। पुलिस ने सभी को दबोच लिया था। मैं तो बेहोश पड़ी थी। होश आने पर जब थाने पहुंची, तो बेटे की लाश थाने के बरामदे में पड़ी थी। पुलिस ने हत्यारों को हवालात में बंद कर रखा था।’ इस बीच संगीता की चचेरी सास रेखा बाई आती हैं। वह कहती हैं- ‘उन हत्यारों की फांसी होनी चाहिए। हमारे सक्षम को मार दिया।' घटना के थोड़ी देर बाद ही हम थाने पहुंचे। आंचल सक्षम की लाश से लिपटकर रो रही थी। कह रही थी- मेरे सामने ही मेरे होने वाले पति को पापा, भाई ने मिलकर मार दिया। सक्षम को मारने से पहले उन्होंने आंचल को एक कमरे में बंद कर दिया था। उस दिन थाने से हम जब सक्षम की लाश घर लेकर आए, तो साथ में आंचल भी आई। तब तक रात हो चुकी थी। अगले दिन सुबह जब अर्थी बनाई जा रही थी, तभी आंचल ने बेटे की लाश के साथ शादी कर ली। फिर हमारे घर में ही रहने लगी। कुछ महीने बाद अपने मायके चली गई। यह कहते हुए वह रोने लगती हैं। ‘पति की कब और कैसे मौत हुई?’, मैंने संगीता ताटे से पूछा वह बताती हैं- ‘आंचल जब मेरे घर रहने लगी तो हम उसका बेटी की तरह ख्याल रखते थे। किसी भी चीज की कमी नहीं होने देते थे। जो कहती थी, लाकर देते थे। उधर, पुलिस ने उसके मां, भाई और पिता तीनों को जेल भेज दिया था। हमें लगा कि अब सक्षम की जगह आंचल ही हमारा बेटा है और ताउम्र हमारे साथ रहेगी। मार्च महीने की बात है। शायद इंस्टाग्राम पर उसके चाचा से उसकी बात होनी शुरू हुई। हम लोग कोई पूछताछ नहीं करते थे कि वह किससे बात कर रही है। चाचा ने क्या कहा, नहीं पता। फिर दादी की तबीयत का बताकर वो घर से चली गई। उसके जाने पर मेरे पति की तबीयत और बिगड़ गई। सक्षम के जाने के सदमे में वह काम-धंधा छोड़कर पहले ही घर बैठ गए थे। उनका रह-रहकर बीपी कम हो रहा था। हमने आंचल को फोन किया और ये बातें बताई, लेकिन वह वापस लौटकर नहीं आई। 21 मार्च को अचानक पति की भी मौत हो गई। मेरी जिंदगी एकदम से उजड़ गई।’, यह कहते हुए संगीता फिर से रोने लगीं। संगीता रोते हुए उठीं और सक्षम की तस्वीर को सीने से लगा लिया। उसे चूमने लगीं। इस दौरान टेबल पर जल रहा दीया बुझ जाता है। वह उसे फिर से जलाती हैं। संगीता आगे बताती हैं- ‘अब तो केवल बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए जिंदा हूं। लड़की का परिवार तो जेल में है, लेकिन पता नहीं कब वे जमानत पर छूटकर बाहर आ जाएं। डर लगता है कि मुझे भी न मार दें। डरती हूं कि बेटे का केस अकेले कैसे लड़ूं? प्राइवेट वकील करना पड़ेगा। उसके लिए पैसे कहां से लाऊंगी?’ सक्षम की मां से बात करने के बाद मैंने लाश से शादी करने वाली आंचल से कई बार बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। -------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड- भाई का अपहरण किया, जिससे जिंदा साबित हो जाऊं:सिंदूर लगाने वाली पत्नी विधवा पेंशन मांगने पहुंची, लेकिन मुझे जिंदा नहीं माना साल 1975। लाल बिहारी 20 साल के थे। शादी के 10 साल बाद अभी-अभी गौना हुआ था और पत्नी घर आई थी। मां ने कहा- गांव की जमीन गिरवी रखकर बैंक से कुछ लोन ले लो। अपना काम-धंधा शुरू करो, वर्ना आगे बाल-बच्चों को कैसे पालोगे? पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
17 जून 2015 की बात है। के. अन्नामलाई कर्नाटक के उडुपी के SP थे। तैनाती के 6 महीने बाद 17 साल की एक लड़की की रेप के बाद हत्या का मामला सामने आया। अन्नामलाई परिवार से मिलने पहुंचे। लड़की की मां ने उनसे पूछा- ‘क्या मेरी बच्ची को वापस ला सकते हो? अन्नामलाई ने जवाब दिया- ‘नहीं, लेकिन मैं यह कर सकता हूं कि वो सबके दिलों में रहे, सबको याद रहे।’ अन्नामलाई ने लड़की के नाम से 10 हजार रुपए की स्कॉलरशिप शुरू कर दी। पुलिस अफसर रहते हुए अन्नामलाई के ऐसे कई किस्से कर्नाटक में मशहूर होते गए। अचानक उन्होंने 2019 में नौकरी छोड़ दी और अपने राज्य तमिलनाडु लौट गए। अगस्त 2020 में BJP जॉइन की। 11 महीने बाद ही प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए। तमिलनाडु में जगह तलाश रही BJP को बड़े चेहरे की जरूरत थी और अन्नामलाई को बड़े प्लेटफॉर्म की। 6 साल बाद 2 जून, 2026 को ये साथ छूट गया। इस दौरान अन्नामलाई को अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा। उन्हें BJP और AIADMK का गठबंधन टूटने की वजह माना गया। पार्टी में साइडलाइन कर दिए गए। चुनाव में टिकट तक नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने BJP से इस्तीफा दिया और 5 जून को नए अभियान की घोषणा कर दी। इसे लीडरशिप मूवमेंट बताया। नाम दिया- 'इधु नम्मा इयक्कम' यानी 'ये हमारा आंदोलन है'। अन्नामलाई इस मूवमेंट को पार्टी में बदलकर 2031 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। ठीक वैसे, जिस तरह आम आदमी पार्टी और थलापति विजय की TVK की शुरुआत एक आंदोलन से हुई और बाद में पॉलिटिकल पार्टी ये बन गईं। अब 4 सवाल… और इनके जवाब… 1. अन्नामलाई का मूवमेंट पॉलिटिकल पार्टी में कब बदलेगा? BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई ने https://wetheleader.org/ पोर्टल बनाया। 5 जून से इस पर रजिस्ट्रेशन शुरू हुए। उन्होंने कहा कि पहले मैं लोगों को आंदोलन से जोडूंगा, फिर ट्रेनिंग देकर पॉलिटिकल पार्टी बनाऊंगा। BJP के स्टेट वाइस प्रेसिडेंट रहे और अन्नामलाई के सपोर्ट में BJP छोड़ने वाले करु नागराजन कहते हैं, ‘वी द लीडर्स तमिलनाडु के लोगों का आंदोलन है। हमारे प्रेसिडेंट अन्नामलाई ने आम लोगों, खासकर युवाओं से जुड़ने की गुजारिश की थी। बड़ी संख्या में लोग मेंबर बन चुके हैं। हमारा प्लान है कि 3 से 4 महीने के अंदर इन लोगों को कोयंबटूर में ट्रेनिंग देकर फ्यूचर लीडर बनाया जाए। इन्हीं लोगों में से हम पार्टी के लिए लीडरशिप तैयार करेंगे।’ क्या पार्टी बनाने की कोई डेडलाइन है? नागराजन जवाब देते हैं, ‘जून के आखिर तक मेंबरशिप कैंपेन चलेगा। हमारे पास सदस्यों का बड़ा आंकड़ा आ जाएगा, तब ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु करेंगे। अक्टूबर से नवंबर के बीच पार्टी बनाने की तरफ बढ़ जाएंगे।’ 2. क्या अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद तमिलनाडु में BJP बिखर जाएगी? अन्नामलाई ने इस्तीफे से पहले दावा किया कि पार्टी आलाकमान को बीते 18 महीनों से मतभेद के बारे में बता रहे थे। 5 दिसंबर 2025 को पार्टी छोड़ने की सूचना दे दी थी, लेकिन दिल्ली से मैसेज मिला कि आप मई में होने वाले विधानसभा चुनाव खत्म होने तक रुक जाइए। तमिलनाडु की राजनीति और सोशल इश्यूज पर 20 से ज्यादा किताब लिख चुके पॉलिटिकल एक्सपर्ट मालन नारायणन इस पर कहते हैं, ‘BJP में रहते हुए अन्नामलाई ने DMK के मंत्रियों और सांसदों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने राज्यपाल को DMK फाइल्स सौंपी थी। केंद्र सरकार ने इस पर आंखें मूंद लीं। BJP ने DMK के खिलाफ उस आक्रामकता से काम नहीं लिया, जैसा उसने AAP और TMC के लिए किया।’ ‘6 मई 2022 को प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए अन्नामलाई ने बड़े फेरबदल किए। द्रविड़ विचारधारा वाली पार्टियों से आए नेताओं को जगह दी। पूर्व AIADMK सांसद शशिकला पुष्पा, एजी संपत, पूर्व DMK विधायक वीपी दुरैसामी इसके उदाहरण हैं।’ अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद पार्टी में नंबर दो नेता रहे करु नागराजन के अलावा प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश और 14 दूसरे पदाधिकारी BJP छोड़ चुके हैं। करु नागराजन कहते हैं, ‘BJP में रहते हुए भी अन्नामलाई की छवि पब्लिक लीडर जैसी थी। मौजूदा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन और केंद्र में मंत्री लोगनाथन मुरुगन जैसे बड़े नेता पार्टी में ब्रांच मैनेजर की तरह काम कर रहे हैं।’ ‘तमिलनाडु के लोग अन्नामलाई का वर्क कल्चर जानते हैं। उन्होंने BJP को तमिलनाडु में नीचे से ऊपर तक पहुंचाया। उन्होंने पार्टी छोड़ी, तो उनकी विचारधारा से प्रभावित दूसरे नेताओं ने समर्थन किया।’ 3. क्या अन्नामलाई के आंदोलन के पीछे पूरा खेल BJP का ही है? तमिलनाडु कांग्रेस का तो यही मानना है। पार्टी के सांसद मणिकम टैगोर कहते हैं, ‘अन्नामलाई का मूवमेंट BJP और RSS का प्लान-B है। अन्नामलाई ने भले खुद को BJP से अलग कर लिया है, लेकिन पर्दे के पीछे से उन्हें लीडरशिप का सपोर्ट मिलता रहेगा।’ सीनियर जर्नलिस्ट राजसंगीथन इस पर कहते हैं, ‘अन्नामलाई का इस्तीफा और नई पार्टी बनाना BJP के बड़े प्लान का हिस्सा लगता है।’ 4. क्या अन्नामलाई की पार्टी थलापति विजय की TVK जैसा कमाल कर पाएगी? पॉलिटिकल एक्सपर्ट मालन नारायणन के मुताबिक, इस वक्त तमिलनाडु की दोनों बड़ी द्रविड़ पार्टियां DMK-AIADMK कमजोर पड़ चुकी हैं। लोग नए विकल्प तलाश रहे हैं। लिहाजा, अन्नामलाई की नई शुरुआत के लिए ये वक्त बिल्कुल मुफीद है। वहीं, सीनियर जर्नलिस्ट उमा सुधीर के मुताबिक, अन्नामलाई के आंदोलन से तीन तरह के लोग जुड़ रहे हैं। 1. अन्नामलाई की आक्रामकता और लोकप्रियता देखकर उन्हें हीरो मानने वाले। 2. जो ये मानते हैं कि BJP को तमिलनाडु में मजबूत करने वाले अकेले अन्नामलाई ही थे। 3. पढ़े-लिखे युवा, जो जानना चाहते हैं कि अन्नामलाई आगे क्या करने वाले हैं। उमा आगे कहती हैं, ‘अन्नामलाई के मूवमेंट के पीछे थलापति की पार्टी TVK की कामयाबी भी है। वे कह चुके हैं कि ग्रासरूट लीडरशिप तैयार करेंगे। तमिलनाडु की पॉलिटिक्स में नई जनरेशन का ही बोलबाला होने वाला है। DMK में स्टालिन उम्रदराज हो गए हैं। वे उदयनिधि को आगे कर रहे हैं। AIADMK में पलानीस्वामी के बाद युवा चेहरे की तलाश है। अन्नामलाई अभी 42 साल के हैं। 2031 का चुनाव विजय, उदयनिधि और अन्नामलाई के बीच हो सकता है।’ BJP बोली- अन्नामलाई के जाने से फर्क नहीं पड़ेगा अन्नामलाई के साथ छोड़ने पर तमिलनाडु BJP के स्टेट स्पोक्सपर्सन नारायणन तिरुपति कहते हैं, ‘हमारा संगठन इतना मजबूत है कि किसी के आने या जाने से फर्क नहीं पड़ता। अन्नामलाई को पार्टी ने अध्यक्ष बनाया और उन्होंने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। उन्हें लगा कि पार्टी छोड़नी है, तो लीडरशिप ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए इस्तीफा मंजूर कर लिया। उनके जाने से संगठन में कोई मतभेद नहीं है।’ ………………………………….ये खबर भी पढ़ें… क्या 4 साल बाद एक होगी उद्धव-शिंदे की शिवसेना 2 जून को उद्धव ठाकरे खेमे के बड़े नेता अंबादास दानवे और एकनाथ शिंदे गुट के विधायक अब्दुल सत्तार का काफिला आमने-सामने आ गया। दोनों नेता गाड़ी से उतरे और एक-दूसरे को गले लगाया। अंबादास दानवे ने मीडिया में कहा- वक्त आ गया है कि दोनों शिवसेना एक हो जाएं। अब्दुल सत्तार ने जवाब में कहा- शिंदे साहब रजामंदी दें, तो दोनों पार्टियों को एक होने में जरा भी वक्त नहीं लगेगा। क्या ये करीबी शिवसेना के दोनों गुटों के एक होने का संकेत है? पढ़ें पूरी खबर...
चीन के विदेशी व्यापार का अच्छा प्रदर्शन
वर्ष 2026 फीफा विश्व कप के आने के चलते छोटी वस्तुओं के विश्व शहर के नाम से मशहूर चीन के यीवू में ज्यादा व्यस्तता आ गई है
पीओके में विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की सख्ती, बल प्रयोग का आरोप
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करने के आरोप लगे हैं।
ओमान तट के पास ऑयल टैंकर पर हमला, 3 भारतीय लापता
ओमान के तट के पास एक वाणिज्यिक ऑयल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ है
ओमान तट के पास जहाज पर हमले की भारत ने की निंदा, 21 भारतीय सुरक्षित निकाले गए, तीन अब भी लापता
ओमान तट के पास एक कमर्शियल जहाज पर हुए हमले की भारत सरकार ने कड़ी निंदा की है
ईरान पर और बड़े हमलों की चेतावनी, ट्रंप बोले-'बातचीत में देरी की कीमत चुकानी होगी'
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना रुख और सख्त करते हुए हमले और तेज करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर तेहरान जल्द किसी समझौते पर नहीं पहुंचता, तो अमेरिका उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव: यमन तट के पास जहाज पर गोलीबारी, ओमान के पास टैंकर में लगी आग
मध्य पूर्व एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है। खाड़ी क्षेत्र और आसपास के समुद्री मार्गों में संघर्ष एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।
TMC के 58 विधायकों की टूट और अब 20 सांसदों के बागी होने का दावा। ममता बनर्जी के पास अब सिर्फ 22 विधायकों और 8 सांसदों का समर्थन बाकी है। खेमे के सांसदों से लेकर पार्टी नेताओं तक पर हमले हो रहे। इस बीच ममता लगातार दो दिन सोनिया गांधी से मिलीं। INDIA ब्लॉक की अगुवाई करने की भी इच्छा जताई। ये तक कहा जा रहा कि ममता ‘अपनी वाली TMC’ का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं। क्या ममता के पास यही अकेला चारा बाकी, TMC के बागी सांसदों से बीजेपी को क्या फायदा और क्या ममता की राजनीतिक वापसी हो पाएगी, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या 58 विधायकों के बाद TMC के 20 सांसद भी टूट जाएंगे? जवाब: TMC में टूट की शुरुआत 6 मई की शाम ममता के घर पर हुई एक बैठक से हुई थी। करीब एक महीने में ममता अपने 58 विधायक गंवा चुकी हैं। अब खबरें हैं कि 20 सांसद भी बगावत कर रहे हैं। पूरी टाइमलाइन समझिए… कीर्ति आजाद ने दावा किया, ‘काकोली का 20 सांसदों वाला दावा झूठा है। उनके पास सिर्फ 12-13 सांसद हैं। उन्होंने बताया नहीं कि नंबर कितने हैं। दो तिहाई हुए या नहीं। वर्ना अब तक आपने नंबर जारी कर दिया होता। स्पीकर को चिट्ठी में क्या लिखा, ये भी बता दिया होता।’ सवाल-2: काकोली के साथ 20 सांसदों वाले दावे के क्या मायने हैं? जवाब: दरअसल, 1985 में केंद्र की राजीव गांधी सरकार ने संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़ी थी। इसे ही दल-बदल विरोधी कानून कहा जाता है। इसके मुताबिक, विधायक या सांसद पार्टी की सदस्यता छोड़ें, पार्टी व्हिप को न मानें, तो पार्टी की शिकायत पर लोकसभा या विधानसभा अध्यक्ष उसकी सदस्यता रद्द कर सकते हैं। हालांकि इसमें अपवाद ये है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई विधायक या सांसद दूसरी पार्टी में जाना चाहे, तो वो अयोग्य नहीं ठहराए जा सकते। यानी अगर कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग हों, तो इसे दल-बदल नहीं, बल्कि विलय माना जाता है। ऐसे में उनकी सदस्यता बरकरार रहती है। फिलहाल लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं। यानी दो तिहाई का आंकड़ा पूरा करने के लिए काकोली को कम से कम 19 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। काकोली के 20 बागी सांसदों के समर्थन वाले दावे में 2 पेच भी हैं… पहला: अब तक वो चिट्ठी सामने नहीं आई है, जिसमें काकोली ने 20 सांसदों के समर्थन की बात कही है। दूसरा: दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी सांसदों के लिए एकजुट होना या फिर दूसरी पार्टी में शामिल होना जरूरी माना जाता है। अब तक ये साफ नहीं है कि ये सभी सांसद बीजेपी जॉइन कर सकते हैं। कल्याण बनर्जी ने 9 जून को कहा, 'मुझे नहीं पता कौन क्या दावा कर रहा है, लेकिन जिस चिट्ठी का जिक्र काकोली घोष ने किया है, वह अब तक सार्वजनिक नहीं है। सोमवार को ओम बिड़ला के ऑफिस में सांसदों की कोई चिट्ठी नहीं दी गई है। ' कल्याण बनर्जी ने ये भी कहा कि बागी सांसद दल-बदल विरोधी कानून के तहत पार्टी नहीं छोड़ सकते। कीर्ति आजाद ने भी कहा, ‘अगर इस झूठ को मान भी लें कि उनके (काकोली के) साथ 20, 21 या 22 सांसद हैं, तो उन्हें बीजेपी में विलय करना होगा।' 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 6 के मुताबिक, स्पीकर या सदन के चेयरपर्सन ही दल-बदल पर आखिरी फैसला लेंगे। हालांकि 1991 में सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि स्पीकर के फैसले की कानूनी समीक्षा हो सकती है। सवाल-3: तो अब ममता बनर्जी के पास आगे के क्या रास्ते हैं? जवाब: अभी 3 सिनैरियो बन रहे हैं… 1. बचे हुए नेताओं के साथ दोबारा पार्टी खड़ी करें 2. सांसदों को पार्टी छोड़कर जाने से रोक लें सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी कहती हैं, ‘ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर पर एजेंसियां छापे मार रही हैं। सांसदों पर हमले हो रहे हैं। विधायकों से लेकर मेयर और पार्षदों तक पर दबाव बनाया जा रहा है।’ 3. कांग्रेस से नजदीकी, केंद्र की राजनीति पर फोकस शिखा मुखर्जी बताती हैं, ‘कांग्रेस और INDIA गठबंधन SIR के खिलाफ अभियान खड़ा करने की प्लानिंग कर रहा है, ममता देशभर में इसका प्रचार करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं, क्योंकि बंगाल SIR से BJP को फायदा मिलने का सबसे ताजा उदाहरण है।’ ये भी अटकलें लगाई गईं कि ममता अपनी वाली TMC का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं। सवाल-4: क्या ममता कांग्रेस में विलय भी कर सकती हैं? जवाब: फिलहाल इसकी संभावना कम है। कांग्रेस के सीनियर नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया है। अधीर ने कहा, ‘ममता ने मेघालय, त्रिपुरा और गोवा जैसे राज्यों में कांग्रेस को कमजोर करने के लिए उम्मीदवार उतारे थे। तो अब विलय या करीबी की बात कैसी? अभी भी लड़ते जाओ, किसने रोका है।’ ममता की INDIA ब्लॉक के नेतृत्व की इच्छा पर अधीर ने कहा, ‘अगर आप फ्री हैं, तो अपनी पार्टी को सारे हिंदुस्तान में फैलाइए। किसने मना किया है? हमने ममता को नहीं बुलाया, वो मजबूरी में कांग्रेस के पास आई हैं।’ शिखा मुखर्जी कहती हैं, ‘ममता के कांग्रेस में विलय की संभावना कम हैं, क्योंकि उन्होंने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बड़े जतन से अपनी पार्टी TMC खड़ी की थी। फिर वे 3 बार सीएम बनीं। अब एक झटके के चलते अगर ममता TMC को खत्म करके फिर से कांग्रेस में चली जाएंगी, तो इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचेगा। वो ये बात जानती हैं।’ सवाल-5: ममता की TMC के कमजोर होने से BJP को क्या फायदा होगा? जवाब: इससे केंद्र में BJP को 2 बड़े फायदे हैं… 1. INDIA गठबंधन के सांसद घटेंगे 2. NDA के सहयोगी दलों पर BJP की निर्भरता घटेगी अधीर रंजन चौधरी कहते हैं, ‘TMC के बागी सांसद बीजेपी और नरेंद्र मोदी के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे। बीजेपी अब अपने बचे हुए एजेंडे परिसीमन बिल और वन नेशन-वन इलेक्शन बिल को संसद में पारित करा लेगी।’ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें… TMC के बागी विधायक बीजेपी में क्यों नहीं गए; कौन हैं बंगाल के नए नेता विपक्ष ऋतब्रत बनर्जी, क्या वही TMC चलाएंगे 6 मई की शाम। बंगाल चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने घर पर TMC विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें अभिषेक बनर्जी की चुनावी भूमिका की तारीफ करते हुए खड़े होकर तालियां बजाने को कहा। कुछ विधायक खड़े हुए। कुछ चुपचाप बैठे रहे। बैठे रहने वालों में एक थे ऋतब्रत बनर्जी। पढ़ें पूरी खबर…
पाकिस्तान: खाई में गिरी टूरिस्ट वैन, एक ही परिवार के 10 लोगों की मौत
पाकिस्तान के इस्लामाबाद-मरी एक्सप्रेसवे पर बुधवार को एक भीषण सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 13 अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि सभी एक ही परिवार के सदस्य थे।
सेंटकॉम का दावा: ईरान के वायु रक्षा ठिकाने, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और निगरानी रडार साइट तबाह
संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर सैन्य हमले किए हैं। यह कार्रवाई उस घटना के बाद की गई जिसमें कथित तौर पर अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को होर्मुज स्ट्रेट के पास मार गिराया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि यह हमला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई के तौर पर किया गया।
24 साल पुराने नेपाल के शाही परिवार हत्याकांड की फिर होगी जांच, मामले की फाइलें दोबारा खुलेंगी
नेपाल के गृह मंत्री सूदन गुरुंग ने पदभार संभालने के बाद इस मामले को फिर से खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पहले की गई जांच से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिपोर्टों का पुनः अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि क्या मामले की गहराई से दोबारा जांच की आवश्यकता है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। ईरानी दावे के अनुसार, कम से कम चार बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन अमेरिकी ठिकानों की ओर दागे गए।
अफगानिस्तान में हवाई हमले, पाकिस्तानी सीमा पर फिर बढ़ा तनाव
तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने रिहायशी इलाकों पर बमबारी की। उनके मुताबिक, हमलों में 11 बच्चों, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान चली गई।
ईरानी हमले का जवाब देंगे : ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अत्याधुनिक अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराया है और इस हमले का जवाब देना उसके लिए जरूरी हो गया है
नरेंद्र मोदी बतौर इलेक्टेड प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को क्रॉस कर चुके हैं। नेहरू चुनाव जीतकर 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे। मोदी का बतौर पीएम आज उससे एक ज्यादा, यानी 4399वां दिन है। हालांकि नेहरू 1947 से 1952 तक, यानी 1733 दिन बिना चुनाव के प्रधानमंत्री भी थे। उसे भी जोड़ दें, तो नेहरू कुल 6131 दिन तक लगातार पीएम रहे। देश में सबसे ज्यादा लगातार 9000 से ज्यादा दिनों तक सत्ता प्रमुख रहने का रिकॉर्ड भी नरेंद्र मोदी के नाम है। पहले गुजरात के सीएम और फिर देश के पीएम के तौर पर। बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 सालों की 12 बड़ी छाप का पूरा एनालिसिस… ****** ग्राफिक्स- दृगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा ------------- पीएम मोदी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… पीएम मोदी की रैलियां आधी हुईं, भाषण लंबे; सूट पहनकर विदेश जाते थे, अब कुर्ता- जैकेट; कितने अलग हैं मोदी 3.0 8 जून 2025 को पीएम नरेंद्र मोदी ने 11 साल पूरे किए। इन 11 सालों में प्रधानमंत्री के लुक, स्टाइल, पहनावे और बोलने के तौर-तरीके काफी बदल गए हैं। उनकी रैलियां घट गई हैं और भाषण लंबे हो गए। अब वो तेजी से बोलने की बजाय ठहरकर बोलने लगे। पूरी खबर पढ़ें…
शी चिनफिंग ने कनाडा की नई गवर्नर जनरल को बधाई संदेश भेजा
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 8 जून को कनाडा की नई गवर्नर जनरल लुईस आर्बर को बधाई संदेश भेजा।
रूस पर दबाव बढ़ाने की तैयारी, ईयू ने 21वें प्रतिबंध पैकेज का किया ऐलान
यूरोपीय आयोग ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का 21वें पैकेज प्रस्तावित किया है। इसका लक्ष्य ऊर्जा, वित्तीय सेवाएं और क्रिप्टो, व्यापार और पहली बार मत्स्य पालन जैसे अहम सेक्टर हैं
बालेंद्र शाह ने मंत्रिमंडल का किया विस्तार, सुधन गुरुंग फिर बने गृह मंत्री
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। उन्होंने सुधन गुरुंग को फिर से गृह मंत्री नियुक्त किया और महावीर पुन को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री बनाया।
भारत ने पिछले 3 साल में 26 परमाणु हथियार बढ़ाए। अब परमाणु जखीरा 190 तक पहुंच गया है। भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर बम मिसाइल्स पर लोड करके तैनात कर दिए हैं। ये खुलासा स्वीडिश थिंकटैंक SIPRI की लेटेस्ट रिपोर्ट में हुआ है। आखिर इस तैनाती के मायने क्या हैं और भारत लगाातर अपना न्यूक्लियर जखीरा क्यों बढ़ा रहा; आज के एक्सप्लेनर में 6 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: पिछले दिनों भारत के परमाणु जखीरे में क्या-क्या बदला?जवाबः स्वीडन का थिंकटैंक है- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI। ये दुनियाभर के परमाणु हथियारों पर नजर रखता है और हर साल एक रिपोर्ट जारी करता है। 8 जून को जारी ‘SIPRI ईयरबुक 2026’ के मुताबिक… सवाल-2: भारत के परमाणु हथियार ‘तैनात’ करने का मतलब क्या है? जवाबः परमाणु बम में मौजूद यूरेनियम और प्लूटोनियम जैसे एनरिच्ड रेडियोऐक्टिव मटेरियल आपस में रिएक्ट करके भारी मात्रा में एनर्जी रिलीज करते हैं, जिससे भयंकर विस्फोट होता है। परमाणु बम अकेले काम नहीं करता। इसे दुश्मन के ठिकाने तक पहुंचाने के लिए एक डिलीवरी सिस्टम की भी जरूरत होती है। ये डिलीवरी सिस्टम 3 तरह के हो सकते हैं… अब सवाल आता है कि परमाणु बम को मिसाइल से जोड़कर रखें या अलग-अलग। इसके 2 तरीके होते हैं- 1. डी-मेटेड: इसमें वॉरहेड यानी परमाणु बम और मिसाइल अलग-अलग रखे जाते हैं। अगर दुश्मन अटैक करता है या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा खतरा हो, तो दोनों को जोड़कर फायर कर दिया जाता है। 2. मेटेड: वॉरहेड पहले से मिसाइल पर फिट होते हैं, ताकि खतरे की स्थिति में फौरन सीधे फायर किया जा सके। भारत अब तक पहला तरीका अपनाता था। लेकिन SIPRI की रिपोर्ट कहती है कि पहली बार भारत ने शांतिकाल में 12 परमाणु हथियार मिसाइलों पर तैनात कर दिए हैं। शांतिकाल, यानी वो स्थिति, जब एक देश किसी दूसरे देश के साथ सीधे तौर पर जंग में शामिल नहीं होता। यह बड़ा बदलाव इसलिए है, क्योंकि अब तक यह काम सिर्फ अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ही करते थे। भारत इस क्लब में शामिल होने वाला छठा देश बन गया है। मौजूदा समय में दुनियाभर की ऑपरेशनल सेनाओं के पास मौजूद 4,012 परमाणु हथियारों में से करीब 2,200 परमाणु हथियार मिसाइलों और विमानों पर तैनात हैं। ये डिप्लॉयड हथियार हाई अलर्ट पर रखे गए हैं। सवाल-3: भारत ने अचानक 12 परमाणु बम क्यों तैनात कर दिए? जवाबः एक्सपर्ट्स इसके पीछे 3 बड़ी वजहें बताते हैं… 1. न्यूक्लियर ट्रायड के लिए पनडुब्बियों पर न्यूक्लियर बम की तैनाती ऑबर्जवर रिसर्च फाउंडेशन यानी ORF में फेलो और डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी के मुताबिक, ‘12 परमाणु बमों की तैनाती पूरी तरह से स्ट्रैटेजिक फैसला है। भारत अब तक सुरक्षा कारणों से न्यूक्लियर वॉरहेड्स को मिसाइल से अलग कहीं दूर लोकेशंस पर रखता आया है, लेकिन अब हमारे पास न्यूक्लियर हमले करने में सक्षम सबमरीन्स मौजूद हैं। ये पेट्रोलिंग या गश्त के लिए जाती हैं, तो वहां परमाणु बमों को मिसाइलों से अलग रखना संभव नहीं है।’ 2. पाकिस्तान के टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों का जवाब भारत ने 2003 में अपना न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन जारी किया था। इसके मुताबिक, भारत न्यूक्लियर अटैक के लिए 'नो फर्स्ट यूज' पॉलिसी अपनाता है। यानी भारत पहला वार नहीं करेगा, लेकिन न्यूक्लियर अटैक का जवाब न्यूक्लियर अटैक से देगा। जबकि पाकिस्तान ‘नो फर्स्ट यूज’ की पॉलिसी नहीं मानता। इसके उलट वो भारत पर परमाणु हमला करने की धमकी देता आया है। पाकिस्तान ने हमेशा अपने जखीरे में भारत से ज्यादा परमाणु बम बनाए रखने की कोशिश की है। 2024 तक पाकिस्तान के पास भारत से 2 परमाणु बम ज्यादा थे। साथ ही पाकिस्तान के पास NASR (HAtf-9) जैसी लैंड बेस्ड न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकने वाली बैलिस्टिक मिसाइल हैं, जिसकी रेंज 60-70 किलोमीटर है। इसे पाकिस्तान का ‘टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन’ भी कहा जाता है। भारत के पास 5 हजार किमी से ज्यादा दूरी यानी चीन तक अटैक करने की क्षमता वाली मिसाइल है, लेकिन 100 से कम रेंज में वार करने वाली मिसाइलें नहीं हैं। एक संभावना है कि भारत ने पाकिस्तान के टैक्टिकल हथियारों के काउंटर के लिए 12 परमाणु बम तैनात किए। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ा है। ऐसे में भारत किसी संभावित टकराव का जवाब देने के लिए अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है। 3. भारत की उत्तरी सीमाओं पर चीन के बढ़ते दबदबे का काउंटर सवाल-4: भारत ने 2023 तक पाकिस्तान से कम परमाणु बम क्यों रखे थे? जवाबः भारत के कम हथियार रखने की 3 बड़ी वजहें हो सकती हैं… 1. भारत ने ‘नो फर्स्ट यूज’ स्ट्रैटजी अपनाई 2. पाकिस्तान से सीधी दुश्मनी, लेकिन उसका इलाका छोटा 3. भारत के पास संसाधन कम, लेकिन तकनीक बेहतर की सवाल-5: भारत ने 3 साल में 26 परमाणु बम क्यों बढ़ाए? जवाबः चीन को ध्यान में रखते हुए भारत अपने परमाणु बम बढ़ा रहा है। चीन के सैन्य ठिकाने बिखरे हुए हैं और उसका एरिया भारत से करीब 3 गुना है। इसीलिए उसे ज्यादा परमाणु बमों और लॉन्ग रेंज मिसाइल्स की जरूरत है। अब भारत 6 से 8 हजार किमी रेंज वाली अग्नि-6 जैसी लॉन्ग रेंज मिसाइलों पर काम कर रहा है। ये चीन के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती हैं। ऑबर्जवर रिसर्च फाउंडेशन यानी ORF में फेलो और डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी कहते हैं, ‘चीन ने बहुत तेजी से परमाणु हथियार बढ़ाए हैं, क्योंकि अमेरिका के मुकाबले उसकी परमाणु क्षमता कम है। चीन के बढ़ते हथियारों के चलते भारत भी सतर्क है, क्योंकि चीन उस पर भी इनका इस्तेमाल कर सकता है। इसीलिए भारत भी अपने परमाणु हथियार बढ़ा रहा है।' ORF में सीनियर फेलो सुशांत सरीन कहते हैं, ‘बीते कुछ सालों में पाकिस्तान और चीन नजदीक आए हैं। इसीलिए कूटनीतिक तौर पर भारत, दोनों देशों को ये संदेश ही देना चाहता है कि अगर वे एकसाथ दो मोर्चों से भारत पर हमला करें, तो भी भारत दोनों पर मजबूत पलटवार करने में सक्षम होगा। सवाल-6: तो क्या अब पाकिस्तान और चीन से एकसाथ निपट सकता है भारत? जवाबः चीन परमाणु हथियारों के मामले में हमसे कहीं आगे हैं… उसके पास भारत से करीब 3 गुना यानी 620 परमाणु हथियार हैं। SIPRI के मुताबिक, 2023 से चीन हर साल 100 न्यूक्लियर हथियार बढ़ा रहा है। जबकि भारत ने 2023 से 2025 तक सिर्फ 16 न्यूक्लियर हथियार बढ़ाए हैं। पाकिस्तान और चीन दोनों के परमाणु हथियार जोड़कर भारत से चार गुना ज्यादा होते हैं। SIPRI के मुताबिक, चीन रेगिस्तानों और पहाड़ों पर करीब 350 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल भी तैनात कर रहा है। चीन ने भी पहली बार अपने 24 परमाणु हथियारों को मिसाइलों और ऑपरेशन बेसों पर तैनात किया है। हालांकि मनोज जोशी कहते हैं, ‘परमाणु युद्ध परमाणु हथियारों की संख्या पर बहुत निर्भर नहीं करती। 5-10 परमाणु बम भी एक पूरा देश तबाह कर सकते हैं। अगर पाकिस्तान के इस्लामाबाद, लाहौर और कराची पर कुल 5 बम ही गिरा दिए जाएं, तो फिर पाकिस्तान में बाकी क्या रहेगा। भारत में मुंबई, दिल्ली और कोई दो बड़े शहरों पर परमाणु हथियार गिरा दिए जाएं, तो बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा।’ मनोज कहते हैं कि इसी तरह अगर चीन हमारे 150 परमाणु हथियार भी खत्म कर दे, तो भी जवाबी हमले के लिए हमारे पास 30 हथियार होंगे। इनसे भारत, चीन के 15 बड़े शहर खत्म कर सकता है। सुशांत भी कहते हैं कि हथियारों का जखीरा सिर्फ न्यूक्लियर डिटरेंस दिखाने के लिए होता है। अगर कभी परमाणु हमले की नौबत आई, तो पाकिस्तान के महत्वपूर्ण तीन-चार इलाकों पर बम गिराना ही भारत के लिए काफी होगा।‘ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…क्या नेपाल ने भी भारतीय जमीन पर कब्जा किया; पीएम बालेन शाह का बड़बोलापन, उनका ही नुकसान क्यों करेगा पीएम बालेन शाह ने रविवार को दावा किया- नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। मामले ने तूल पकड़ा, तो नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। पढ़ें पूरी खबर…
दक्षिणी लेबनान के शहर टायर में इजरायली एयरस्ट्राइक, 8 की मौत
इजरायली एयरस्ट्राइक में दक्षिणी लेबनान के प्रमुख तटीय शहर टायर में 8 लोगों की मौत हो गई। आईडीएफ (इजरायल डिफेंस फोर्सेस) ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए शहर के निवासियों को क्षेत्र खाली करने का आदेश जारी किया था।
PoK में पाकिस्तान सेना ने प्रदर्शनकारियों पर चलाई गोलियां, 30 से ज्यादा मरे, 200 घायल
पीओके में जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की ओर से 9 जून को एक बड़े लॉन्ग मार्च का आह्वान किया गया था। जेएएसी क्षेत्र का एक प्रमुख नागरिक अधिकार संगठन माना जाता है, जो लंबे समय से शासन व्यवस्था, सब्सिडी, बिजली, खाद्यान्न और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाता रहा है।
अमेरिकी अदालत से 1 लाख डॉलर का एच-1बी वीजा शुल्क रद्द होने के बाद व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बचाव किया है। अमेरिकी संघीय अदालत ने वीजा शुल्क को यह करते हुए रद्द कर दिया कि प्रशासन ने अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर काम किया और एक गैर-कानूनी टैक्स लगाया।
ओमान तट के पास व्यापारी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला, 24 भारतीयों को किया गया रेस्क्यू
भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) मुंबई ने ओमान के अधिकारियों के साथ मिलकर एक त्वरित और सफल बचाव अभियान को अंजाम दिया है
मस्कट में भारतीय दूतावास ने होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में आग लगने की घटना के बाद एमटी मैरीवेक्स पर सवार 24 भारतीय क्रू को बचाए जाने की पुष्टि की है
ट्रंप का दावा- ईरान परमाणु समझौते के लिए तैयार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश छोड़ने और अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार है

