पाकिस्तान में किस बात का डर? सरकार ने विदेशी मीडिया पर कसा शिकंजा, 'बैन' से उठे सवाल
पाकिस्तान सरकार ने विदेशी मीडिया पर कड़ा शिकंजा कस दिया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अंतरराष्ट्रीय मीडिया के पत्रकार अब लाहौर, इस्लामाबाद और कराची के बाहर बिना एनओसी के रिपोर्टिंग नहीं कर सकेंगे। सूचना मंत्रालय द्वारा जारी इन नियमों के बाद सवाल उठने लगे हैं कि पाकिस्तन में कुछ बड़ा होने वाला है?
TCS केस: AIMIM पार्षद मतीन पटेल गिरफ्तार, निदा खान को दी थी पनाह
TCS केस में पुलिस एक्शन हुआ है. संभाजीनगर के AIMIM पार्षद मतीन पटेल को गिरफ्तार किया गया है. उनपर TCS केस की आरोपी निदा खान को पनाह देने का आरोप लगा था. कोर्ट में हाजिर न होने की वजह से उनके खिलाफ वारंट निकला था. अब नासिक पुलिस ने मतीन पटेल को अरेस्ट किया है.
अकेली देखकर घर में घुसा और... लखनऊ में BCA छात्रा की निर्मम हत्या
Lucknow Crime News: लखनऊ के पारा में 17 वर्षीय BCA छात्रा की गला रेतकर हत्या. आरोपी देवांश पाठक गिरफ्तार, परिजनों के आरोप पर POCSO व बीएनएस धारा जुड़ी.
'पिछले हफ्ते फ्रेंडशिप डे मनाया, अब...', PM मोदी ने जारी किया न्यू इंस्टा Video
पीएम मोदी ने आज फिर नया इंस्टा वीडियो जारी किया है. दरअसल, 7 अगस्त को नेशनल हैंडलूम डे को लेकर पीएम मोदी का इंस्टाग्राम वीडियो संदेश सामने आया है. बता दें कि 1905 के स्वदेशी आंदोलन को याद कर पीएम ने एक खास अपील की है. देखें वीडियो.
इजरायल पर भड़के UAE समेत 8 मुस्लिम देश, कहा- 'खतरे में है गाजा पर ट्रंप का प्लान'
UAE समेत 8 मुस्लिम देशों ने इजरायल के गाजा सैन्य अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि इससे ट्रंप की शांति योजना प्रभावित हो सकती है। देशों ने नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया। वहीं, इजरायल ने हमास के हथियार डालने तक सेना हटाने से इनकार किया है।
फ्रांस ने 114 राफेल की डील के लिए भेजा प्रपोजल, भारत में ही बनेंगे 94 विमान
फ्रांस ने भारतीय वायुसेना को 114 राफेल मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीद का टेक्निकल और कमर्शियल प्रपोजल सौंपा है. ये डील लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की है और इसमें भारत में बड़े पैमाने पर लोकल मैन्यूफैक्चरिंग का प्लान शामिल है. ये सौदा भारत की रक्षा क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा.
भारत ने श्रीलंका को 250 मीट्रिक टन वजन वाले बेली ब्रिज सौंपे, बुनियादी ढांचे के विकास को मिलेगी मदद
भारत के श्रीलंका में उप उच्चायुक्त मैत्रेय कुलकर्णी ने श्रीलंका के सहकारी विकास उप मंत्री उपाली समरसिंघे को अतिरिक्त बेली ब्रिज सौंपे। इन पुलों को भारतीय सेना के इंजीनियर श्रीलंका में स्थापित करेंगे। इससे लोगों की आवाजाही फिर से बेहतर होगी और देश के बुनियादी ढांचे के विकास को भी मदद मिलेगी।
CCTV में कैद आरोपी सूरत में गिरफ्तार, जानें पूरा मामला
मुंबई में बंद मकानों में चोरी के आरोप में एक संदिग्ध को सूरत पुलिस ने नियोल चेकपोस्ट से पकड़ा. पुलिस ने उसके पास से करीब 45.26 लाख रुपये के सोने के गहने, नकदी और अन्य सामान बरामद किया. मामले की जांच जारी है. प्रारंभिक जांच में उसके परिवार के कुछ सदस्यों के भी कथित रूप से ऐसे मामलों से जुड़े होने की जानकारी मिली है.
नेतन्याहू का पीएम मोदी को फोन, मिडिल ईस्ट संकट के बीच दोनों नेताओं ने की अहम बातचीत; जानिए क्या हुई चर्चा
भारतीय जहाजों पर मंडरा रहा खतरा, होर्मुज से लाल सागर तक फंसे 16 शिप्स
भारत के 16 जहाज अब भी फारस की खाड़ी, होर्मुज, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में फंसे हैं, जिनमें कच्चे तेल के टैंकर भी शामिल हैं. मिडिल-ईस्ट जंग के दौरान मार्च 2026 से अगस्त 2026 के बीच 19 जहाजों पर हमले हुए हैं, जिनमें 17 नाविकों की मौत हो चुकी है. ऐसे में जहाजों का खाड़ी में होना भारत के लिए चिंता की बात है.
नॉर्थ यॉर्कशायर के हैरोगेट स्थित आर्मी फाउंडेशन कॉलेज में प्रशिक्षण के दौरान चार जवान लड़कियों ने यौन उत्पीड़न और बलात्कार का गंभीर आरोप लगाया है। इनमें से एक ने दावा किया कि 17 साल की उम्र में कई साथी जूनियर सैनिकों ने उसके साथ बलात्कार किया।
संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को भी हंगामा जारी रहा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच कार्यवाही कई बार स्थगित हुई। इसी दौरान राज्यसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वहीं, लोकसभा में हंगामे के बीच कराधान और अन्य विधियां संशोधन बिल, 2026 पारित हुआ। राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा हुई और उसे पारित कर लोकसभा को लौटा दिया गया। लोकसभा में तीन मिनट में स्थगित हुई कार्यवाही लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। विपक्षी सांसद पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामा बढ़ने पर कार्यवाही शुरू होने के करीब तीन मिनट बाद ही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 2 बजे सदन दोबारा बैठा। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सदस्यों से जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। विपक्ष की नारेबाजी के बीच यह प्रक्रिया जारी रही। इसके बाद करीब 2 बजकर 11 मिनट पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान और अन्य विधियां संशोधन बिल, 2026 विचार और पारित करने के लिए रखा गया। विपक्षी सदस्यों के विरोध और नारेबाजी के बीच बिल पारित कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बिल पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही 7 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में रिजिजू-खड़गे आमने-सामने अब बारी राज्यसभा की थी। उच्च सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। शुरुआती कुछ मिनटों तक कार्यवाही सामान्य रही। लेकिन शून्यकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर इशारा करते हुए सदन के नियमों और कार्यवाही को लेकर सवाल उठाया। इसी दौरान खड़गे नाराज हो गए। उन्होंने रिजिजू को जवाब देते हुए कहा कि उन्हें संसद के नियम सिखाने की जरूरत नहीं है। हंगामा बढ़ने पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद सदन दोबारा बैठा तो नारेबाजी जारी रही। खड़गे और रिजिजू के बीच हुई इस तकरार की चर्चा सदन के बाहर भी होती रही। जजों की नियुक्ति पर मनोज झा का सवाल हंगामे के बीच प्रश्नकाल भी चला। आरजेडी सांसद प्रो मनोज झा ने जजों की नियुक्ति से जुड़े सवाल उठाए और सरकार से इस प्रक्रिया को लेकर जवाब मांगा। विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सरकार की ओर से जवाब दिया। लेकिन सदन में हंगामा थमा नहीं। इसके चलते कार्यवाही को दोपहर 2 बजकर 15 मिनट तक स्थगित करना पड़ा। 2 बजकर 15 मिनट पर सदन दोबारा बैठा, लेकिन कुछ ही देर बाद फिर 2 बजकर 45 मिनट तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026 को चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। इसके जरिए वित्त वर्ष 2022-23 में दी गई राशि से अधिक हुए 54,067 करोड़ रुपए के अतिरिक्त सरकारी खर्च को संसद की मंजूरी देने का प्रावधान था। राज्यसभा ने इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। मिड-डे-मील को लेकर संजय सिंह का निशाना विधेयक पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सीतापुर से सामने आए एक वीडियो का जिक्र किया। उन्होंने इस मामले के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा- सर, वह कल उत्तर प्रदेश के सीतापुर का वीडियो देखे। मिड-डे मील में बच्चों को जो सब्जी परोसी जा रही थी, उसमें सिर्फ पानी ही दिख रहा था, सब्जी नजर नहीं आ रही थी। उनके बयान पर उपसभापति हरिवंश ने आपत्ति जताई और कहा कि सदस्य जान-बूझकर सदन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसके बावजूद सदन में बहस और हंगामा जारी रहा। अंततः राज्यसभा ने विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026 पारित कर उसे लोकसभा को लौटा दिया। चूंकि यह धन विधेयक है, इसलिए राज्यसभा की भूमिका इसे लोकसभा को सिफारिशों के साथ लौटाने तक सीमित है। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी 7 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह गुरुवार का संसद दिवस हंगामे, बार-बार स्थगन और महत्वपूर्ण विधायी कामकाज के बीच खत्म हुआ। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान, मौत और जेल के खतरे के बावजूद क्यों लिया यह फैसला?
यूरोप में भीषण गर्मी का कहर... इटली में रेड अलर्ट, ऑस्ट्रिया में तापमान का टूटा रिकॉर्ड
यूरोप में भीषण गर्मी और लू ने कई देशों के तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इटली सरकार ने 27 प्रमुख शहरों को रेड अलर्ट पर रखा है. ऑस्ट्रिया में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. इस गर्मी और सूखे का असर बिजली उत्पादन, परिवहन और पर्यटन पर भी पड़ा है. पर्यावरणविद ग्लोबल वार्मिंग को इस स्थिति का मुख्य कारण मानते हैं.
Shehbaz Sharif तीन दिवसीय यात्रा पर Saudi Arabia जाएंगे, रक्षा संबंधों पर होगी वार्ता
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से बृहस्पतिवार से तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सऊदी अरब जाएंगे। पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह 18 जून को हस्ताक्षरित ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के तहत अमेरिका और ईरान को फिर से वार्ता की मेज पर लाने के लिए ‘‘हरसंभव प्रयास’’ कर रहा है। शरीफ छह से आठ अगस्त तक होने वाली इस यात्रा के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। विदेश कार्यालय (एफओ) ने ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल में फील्ड मार्शल मुनीर के अलावा उप प्रधानमंत्री इशाक डार और अन्य केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। डार उप प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ विदेश मंत्री भी हैं। वह यरुशलम पर आयोजित एक मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के बाद जॉर्डन की यात्रा पूरी करके पहले ही सऊदी अरब पहुंच चुके हैं। विदेश कार्यालय ने कहा कि वह वहीं प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे। बयान में कहा गया, ‘‘यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शरीफ सऊदी अरब के युवराज और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात करेंगे। वार्ता में पाकिस्तान-सऊदी अरब द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जुड़े साझा हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।’’ पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने कहा कि यह यात्रा पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच दशकों पुराने आपसी विश्वास, सहयोग और भाईचारे पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारी को दर्शाती है। उसने कहा, ‘‘हालांकि यह यात्रा खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच हो रही है, लेकिन इसका महत्व मौजूदा संकट और अल्पकालिक परिस्थितियों से कहीं अधिक है। इससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे, रणनीतिक सहयोग गहरा होगा, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समन्वय बढ़ेगा तथा बहुपक्षीय सहयोग को भी मजबूती मिलेगी।’’ यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया का संघर्ष कई मोर्चों तक फैल गया है, जिसके चलते खाड़ी देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय बढ़ाने की दिशा में कदम तेज किए हैं। इससे पहले 30 जुलाई को सऊदी अरब ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक समुद्री मार्गों और महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा के लिए बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन (एमएमडीसी) का प्रस्ताव रखा था। खबरों के अनुसार, पाकिस्तान सहित 14 देशों ने इस पहल का समर्थन किया, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों में से एक की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं का संकेत मिला। इस्लामाबाद ने साथ ही सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से वैध समुद्री व्यापार के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले वर्ष रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करके अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत किया था। यह समझौता इस वर्ष की शुरुआत में प्रभावी हुआ। इस समझौते का क्रियान्वयन ऐसे समय शुरू हुआ, जब पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा था। इसे इस्लामाबाद की सऊदी अरब के साथ अपनी करीबी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखने और साथ ही तेहरान के साथ संवाद के रास्ते खुले रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। रक्षा ढांचे के तहत पाकिस्तान ने संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा आवश्यकताओं के समर्थन के लिए सैन्य कर्मियों और विमान भी वहां तैनात किए हैं। पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए वित्तीय सहायता के मामले में भी सऊदी अरब पर निर्भर है।
विदेशी चंदे से जुड़े कानून में सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। विपक्षी नेताओं के साथ-साथ अमेरिका तक से ऐतराज आ रहा है। अमेरिकी सांसद रिले मूर ने तो कह दिया- ये ईसाइयों पर सीधा हमला है। रिपोर्ट्स हैं कि FCRA संशोधन बिल पर 12 अगस्त को चर्चा होगी, जिसका जवाब गृहमंत्री अमित शाह दे सकते हैं। आखिर विदेशी चंदे से जुड़े कानून में क्या और क्यों बदलना चाहती है सरकार, क्या ये चर्च-मस्जिद के गले का फंदा बनेगा और सरकार की दुविधा क्या है; 4 सवालों में पूरी कहानी… सवाल-1: FCRA कानून में सरकार क्या बदलाव करना चाहती है और क्यों? जवाब: 1976 में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, यानी FCRA बनाया। मकसद- विदेशी ताकतें NGOs, शिक्षण संस्थानों और ट्रस्टों को पैसा देकर भारत के अंदरूनी मामलों को प्रभावित न कर सकें। 2010 में मनमोहन सिंह सरकार और 2020 में मोदी सरकार ने इसे और सख्त किया। जैसे- NGOs अब सिर्फ 20% विदेशी पैसा प्रशासनिक खर्च में लगा सकते हैं, पहले 50% की लिमिट थी। यह पैसा सिर्फ दिल्ली की एक तय SBI ब्रांच के खाते में ही आ सकता है। सब-ग्रांट पर भी रोक लगा दी गई, यानी बड़ी एनजीओ छोटी एनजीओं को फंड नहीं दे सकतीं। अब 2026 में सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए… 1. संस्थाओं को अपना काम और इलाका साफ बताना होगा: विदेशी पैसा किस खास काम के लिए और किस राज्य या UT में इस्तेमाल होगा। ये रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर लिखा जाएगा। पहले सामाजिक, धार्मिक जैसी ब्रॉडर कैटेगरी लिख दी जाती थी। ये नियम जून 2026 में लागू हो चुका है। 2. विदेशी चंदे से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकेगाः धार्मिक गतिविधियों की लिस्ट में कई काम जैसे- पूजा स्थल बनवाना, धार्मिक शिक्षा, सत्संग वगैरह करवाने की अनुमति है, लेकिन अब विदेशी पैसे से दूसरों का धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ये नियम भी जून 2026 में लागू हो चुका है। 3. रजिस्ट्रेशन नहीं, तो प्रॉपर्टी अथॉरिटी मैनेज करेगीः अगर किसी संस्था के FCRA रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म हो जाए, रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो जाए या रद्द हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी प्रॉपर्टीज की सुरक्षा, मैनेजमेंट और रखरखाव सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी करेगी। यही वो मुख्य प्रावधान है, जिसे FCRA संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। 25 मार्च को लोकसभा में विधेयक पेश हुआ था और अभी संसद में पास होना बाकी है। सरकार ने संशोधन विधेयक पेश करते हुए तर्क दिया था कि ये बदलाव FCRA के ऑपरेशनल गैप भरने के लिए किए जा रहे हैं। अब तक कोई साफ कानून नहीं था कि जब किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द या खत्म हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी संपत्ति और बचा पैसा किसके पास जाएगा? डेजिग्नेटेड अथॉरिटी इसी खाली जगह को भरती है। सरकार ने बताया कि उसका मकसद पूरी तरह पारदर्शिता, जवाबदेही व राष्ट्रीय सुरक्षा है। सवाल-2: ईसाई मिशनरीज और NGO’s इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? जवाब: संशोधन विधेयक को लेकर 3 चिंताएं हैं… 1. सालों पुरानी जमीन खोने का डर 2. ईसाइयों को टारगेट करने की कोशिश 3. विदेशी फंडिंग कम होने से कामकाज पर असर सवाल-3: क्या सरकार इसे पारित करा पाएगी? जवाब: FCRA संशोधन बिल एक सामान्य विधेयक है। इसे पास कराने के लिए सदन में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों का सिर्फ साधारण बहुमत, यानी 50%+1 की जरूरत है। लोकसभा में 543 सदस्य हैं। 3 सीटें खाली हैं। अगर सभी सदस्य मौजूद रहते हैं, तो बहुमत के लिए चाहिए 271 वोट। NDA के पास अभी 318 सीटें हैं। राज्यसभा में 245 सदस्य हैं। बहुमत के लिए 123 वोट चाहिए। NDA के पास 152 है। यानी दोनों सदनों में बिल पारित कराने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल है। सवाल-4: फिर सरकार के सामने दुविधा क्या है? जवाब: असली दुविधा टाइमिंग की है। इस वक्त सरकार के सामने सबसे बड़ा एजेंडा FCRA विधेयक नहीं, बल्कि परिसीमन बिल पारित करवाना है। जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए। बजट सत्र के दौरान बिल पेश हुआ, लेकिन पारित नहीं हो सका। 54 वोट कम पड़ गए थे। अब सरकार NDA के बाहर की पार्टियों के समर्थन से बिल पास कराने की जद्दोजहद कर रही है… लेकिन यहां FCRA संशोधन विधेयक का पेच फंस जाता है। रिपोर्ट्स हैं कि DMK और NCP (शरद) इस विधेयक के खिलाफ हैं। बजट सत्र के दौरान सरकार का समर्थन करने वाली YSR कांग्रेस पार्टी भी बिल से खुश नहीं है। इन पार्टियों को डर है कि FCRA से उनके ईसाई और मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ेगा। अगर सरकार इन पार्टियों की सहमति के बिना FCRA बिल पास करवा लेती है, तो परिसीमन बिल पर बहुमत जुटाने में मुश्किल हो जाएगी। वहीं अगर ये पार्टियां FCRA बिल पर सरकार का विरोध करती हैं और फिर परिसीमन बिल पर समर्थन, तो छवि पर असर पड़ेगा। --------------------- ये खबर भी पढ़िए… गाली देना क्राइम कब बन जाता है, दोषी को कितनी सजा; आखिर जेन-जी के लिए गाली देना न्यू-नॉर्मल कैसे बन गया जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान गाली देती लड़की पर FIR, बचाव में अभिजीत दीपके का बयान और पीएम मोदी का माफ करने वाला वीडियो। पिछले 48 घंटे के इन तीन घटनाक्रम से सवाल उठा- क्या गाली देना क्राइम है? कुछ लोग ये भी कह रहे कि जेन-जी के लिए गाली ‘न्यू नॉर्मल’ है। पूरी खबर पढ़िए…
बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव की उलटी गिनती शुरू, जानें कब होगी वोटिंग और नामांकन की आखिरी तारीख
बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि देश में राष्ट्रपति पद का चुनाव 20 अगस्त को कराया जाएगा। नामांकन पत्र 13 अगस्त तक जमा किए जा सकेंगे। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के 24 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से अचानक इस्तीफा देने के बाद यह चुनाव हो रहा है।
PoK Human Rights Violation: पाकिस्तान के जुल्मों के खिलाफ ब्रिटेन की सड़कों पर उतरे लोग
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय नागरिकों पर पाकिस्तानी हुकूमत के अत्याचार और मानवाधिकारों का हनन का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजने लगा है। पाकिस्तान अपनी दमनकारी नीतियों और काली करतूतों को छिपाने की लाख कोशिश कर रहा है, लेकिन अब पीओके के लोगों की चीखें और आक्रोश ब्रिटेन तक पहुंच गया है। ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड शहर में कश्मीरी समुदाय के लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कार्रवाई की मांग की है।ब्रिटेन की सड़कों पर फूटा गुस्सा, PoK के दमन के खिलाफ प्रदर्शनब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड सिटी सेंटर में भारी संख्या में कश्मीरी समुदाय के लोग जमा हुए और पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) की सभी मांगों का जोरदार समर्थन किया। हाथों में तख्तियां और बैनर थामे लोगों ने PoK में नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों, नागरिक स्वतंत्रता और एक सम्मानजनक जीवन की बहाली की पुरजोर मांग की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की हिंसक सैन्य कार्रवाइयों में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई है, जिनमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है तथा उनके घरों पर अवैध छापे मारे जा रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय संगठनों से निष्पक्ष जांच की मांगप्रदर्शन के दौरान ब्रिटिश कश्मीरी समुदाय ने ब्रिटिश सरकार, संयुक्त राष्ट्र और तमाम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे PoK के हालात पर तुरंत संज्ञान लें। उन्होंने मांग की है कि पाकिस्तान द्वारा नागरिकों पर किए जा रहे बल प्रयोग और बर्बर कार्रवाई की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराई जाए, ताकि पाकिस्तानी हुकुमतरों के चेहरे से नकाब उतर सके। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान लगातार वहां के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल रहा है और अपने अवैध कब्जे को मजबूत करने के लिए फर्जी हथकंडे अपना रहा है।भारत ने पहले ही दुनिया के सामने खोली है पाकिस्तान की पोलइस बीच, भारत ने भी PoK में हो रही हिंसा और मानवाधिकारों के हनन की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा कराए जा रहे स्थानीय चुनावों और नाटकों को पूरी तरह से दिखावा करार दिया है। भारत का स्पष्ट मानना है कि PoK इस समय पाकिस्तानी सेना के अत्याचार, आर्थिक शोषण और ब्लैकआउट की आग में जल रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। पीओके में उठ रहे विरोध के ये स्वर दशकों से चले आ रहे शोषण और दमन का सीधा परिणाम हैं।
अमेरिकी राजनीति और सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आधिकारिक हेलिकॉप्टर 'मरीन वन' और एक कमर्शियल यात्री विमान के बीच हवा में टकराने की स्थिति बनते-बनते टल गई। दोनों विमान एक-दूसरे के इतने करीब आ गए थे कि उनके बीच की दूरी तय सुरक्षा मानकों से भी कम रह गई थी। इस खतरनाक वाकये के बाद अमेरिकी एविएशन एजेंसियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।हवा में कैसे टला बड़ा हादसा और क्या थी विमानों की दूरीयह घटना मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे की है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने 'मरीन वन' हेलिकॉप्टर से व्हाइट हाउस से एंड्रयूज एयर फोर्स बेस के लिए उड़ान भर रहे थे और उन्हें वहां से आगे कैलिफोर्निया जाना था। उसी समय रोनाल्ड रीगन वाशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से अमेरिकन एयरलाइंस की सब्सिडियरी एन्वाय एयर के एक 'एम्ब्रेयर ई-170' यात्री विमान ने भी उड़ान भरी थी। एविएशन की भाषा में इसे 'लॉस ऑफ सेपरेशन' कहा जाता है, क्योंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों विमानों के बीच की होरिजेंटल दूरी महज 0.8 मील यानी करीब 1.2 किलोमीटर और वर्टिकल दूरी सिर्फ 700 फीट ही रह गई थी, जबकि तय नियमों के अनुसार होरिजेंटल दूरी कम से कम 1.5 मील होनी अनिवार्य है।एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और कम्यूनिकेशन में कहां हुई चूकशुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के साथ संपर्क में आई तकनीकी या संवाद की गड़बड़ी के कारण हुई। 'मरीन वन' के क्रू ने उड़ान भरने से तीन मिनट पहले कंट्रोल टावर को अपनी स्थिति बताने के लिए तीन बार संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन संभवतः स्पष्ट आवाज न पहुंच पाने के कारण संदेश टावर तक ठीक से नहीं गया। इसी गलतफहमी के चलते एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने यात्री विमान को भी टेकऑफ की हरी झंडी दे दी, जिससे यह गंभीर स्थिति पैदा हो गई।व्हाइट हाउस और मरीन कॉर्प्स ने क्या दी प्रतिक्रियाइस घटना के सामने आने के बाद व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को किसी भी प्रकार का सीधा खतरा नहीं था। उन्होंने बयान दिया कि 'मरीन वन' दुनिया के सबसे कुशल और बेहतरीन पायलटों द्वारा उड़ाया जाता है और राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित थे। इसके अलावा अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के प्रवक्ता कैप्टन जैकब सग ने भी किसी बड़ी चूक से इनकार करते हुए इसे एक सामान्य प्रक्रिया बताया और कहा कि टावर की तरफ से हेलिकॉप्टर क्रू को न तो रुकने का निर्देश मिला था और न ही मार्ग बदलने को कहा गया था।जनवरी 2025 के भयानक विमान हादसे की ताजा हुईं यादेंइस ताजा घटना ने अमेरिका में पिछले साल जनवरी 2025 में हुए उस खौफनाक हादसे की यादें ताजा कर दी हैं, जब रोनाल्ड रीगन एयरपोर्ट के पास ही एक आर्मी 'ब्लैक हॉक' हेलिकॉप्टर और यात्री विमान आपस में टकरा गए थे। उस भीषण दुर्घटना में 67 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने इस क्षेत्र में हवाई यातायात के नियमों को बेहद कड़ा कर दिया था। पिछली दुर्घटना की जांच में यह चौंकाने वाला सच भी सामने आया था कि पेंटागन और रीगन कंट्रोल टावर को जोड़ने वाली हॉटलाइन तीन साल से अधिक समय से खराब पड़ी थी।
पाकिस्तान में राजनीतिक और आर्थिक कोहराम थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलूचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वा तक लोग पहले से ही शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं अब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कैद के तीन साल पूरे होने पर हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। पुलिस की कड़ी कार्रवाई और लाठीचार्ज के बावजूद बुधवार को देश के विभिन्न हिस्सों में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने पंजाब और सिंध प्रांतों में कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया है।पेशावर में रैली और शहबाज सरकार को चेतावनीखैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में पीटीआई द्वारा एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जहां पार्टी सत्ता में है। इस दौरान खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी ने सभी कानूनी और न्यायिक रास्ते अपना लिए हैं और अगर अब न्याय नहीं मिला, तो शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने दो प्रमुख मांगें रखीं—पहली, इमरान खान और उनकी पत्नी के मामलों की सुनवाई जल्द हो और उन पर मेरिट के आधार पर फैसला आए; दूसरी, उनकी कानूनी टीम, डॉक्टरों और परिवार के सदस्यों के साथ मुलाकात की सुविधा तुरंत बहाल की जाए।27 सितंबर को इस्लामाबाद तक मार्च का ऐलानमुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने दावा किया कि यदि पारदर्शी तरीके से न्याय मिले तो इमरान खान को मात्र 30 मिनट के भीतर रिहा किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो पूरे पाकिस्तान से पीटीआई समर्थक 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर कूच करेंगे और बड़ा मार्च निकालेंगे। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पार्टी भीख नहीं बल्कि न्याय मांग रही है। इमरान खान के अपहरण के तीन साल पूरे होने पर उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री को एकांतवास में रखा गया है और जेल में उनकी बहनों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने 26वें और 27वें संवैधानिक संशोधनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन बदलावों ने देश की न्यायपालिका को कमजोर कर दिया है, जिससे अदालतें स्वतंत्र रूप से न्याय करने में असमर्थ हो गई हैं।विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस की भारी कार्रवाई और गिरफ्तारियांजब पीटीआई कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में रैलियां निकालीं, तो पुलिस और सुरक्षा बलों ने कई शहरों में उन पर सख्ती बरती। पंजाब प्रांत के लाहौर, मियांवाली और रावलपिंडी में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठीचार्ज किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। लाहौर के व्यस्त मॉल रोड पर पुलिस ने इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे लोगों को बलपूर्वक खदेड़ा। इस दौरान कुछ पत्रकारों के साथ भी मारपीट के आरोप लगे हैं, जिसकी विभिन्न मीडिया संगठनों ने कड़ी निंदा की है। पीटीआई की पंजाब इकाई के महासचिव चौधरी बिलाल एजाज ने बताया कि अकेले लाहौर में 5 विधायकों समेत 25 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे पंजाब में कम से कम 50 कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया है।पीटीआई नेताओं का कड़ा रुख और आगे की रणनीतिपूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान ने स्पष्ट किया है कि उनकी रिहाई के लिए आंदोलन का आगाज हो चुका है और जल्द ही इसके अगले चरण का ऐलान किया जाएगा। पीटीआई के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि जेल में इमरान खान को पर्याप्त चिकित्सा उपचार और मुलाकात के अधिकारों से वंचित रखा गया है, जिससे उनकी सेहत पर भी असर पड़ रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार भले ही उनकी शारीरिक स्वतंत्रता छीन ले, लेकिन उनके हौसले और संकल्प को कभी कमजोर नहीं किया जा सकता और पूरा देश 'कप्तान' के साथ मजबूती से खड़ा है।
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने और तख्तापलट की घटना को दो साल पूरे हो चुके हैं। इस बीच, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के पूर्व कानूनी सलाहकार आसिफ नजरुल ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके मुताबिक, जब शेख हसीना के जाने के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने की चर्चा चल रही थी, तब देश के आर्मी चीफ जनरल वकार-उज-जमान ने उनके नाम पर कड़ी असहमति जताई थी। आइए जानते हैं कि आर्मी चीफ क्यों इस नियुक्ति के खिलाफ थे और फिर हालात कैसे बदले।आर्मी चीफ वकार-उज-जमान ने क्यों जताया था मुहम्मद यूनुस के नाम पर विरोधबांग्लादेश के एक प्रमुख अखबार 'प्रथोम अलो' को दिए गए इंटरव्यू में पूर्व कानून सलाहकार आसिफ नजरुल ने 5 अगस्त को तख्तापलट के दो साल पूरे होने पर इस पूरे घटनाक्रम की अंदरूनी कहानी साझा की। नजरुल ने बताया कि वह आर्मी हेडक्वार्टर गए थे, जहां जनरल वकार ने छात्रों द्वारा दिखाए गए साहस की सराहना की और सुधारों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। जब आर्मी चीफ ने पूछा कि अंतरिम सरकार का नेतृत्व किसे संभालना चाहिए, तब नजरुल ने उन्हें बताया कि छात्र आंदोलन के नेताओं ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नाम पर अपनी सहमति दे दी है। इस पर आर्मी चीफ ने तुरंत आपत्ति जताई और तर्क दिया कि यूनुस के ऊपर लेबर लॉ के उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।लेबर लॉ और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में घिरे थे यूनुसगौरतलब है कि मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश में गरीबों के आर्थिक उत्थान के लिए जाना जाता है, लेकिन उनकी संस्था पर करीब 2 मिलियन डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग और गबन के आरोप भी लगे थे। इसके अलावा, शेख हसीना के शासनकाल के दौरान जनवरी 2024 में उन्हें लेबर कानूनों के उल्लंघन के मामले में छह महीने की जेल की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि, बाद में जब वह अंतरिम सरकार के प्रमुख बने, तो उनकी यह सजा रद्द कर दी गई थी। आर्मी चीफ इस बात को लेकर बेहद सतर्क थे कि देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर किसी ऐसे व्यक्ति को न बैठाया जाए जिस पर गंभीर कानूनी मुकदमे चल रहे हों।कैसे मनाए गए आर्मी चीफ, फिर ऐसे बदली बांग्लादेश की राजनीतिक तस्वीरआसिफ नजरुल ने बताया कि उन्होंने आर्मी चीफ को समझाने की पूरी कोशिश की और कहा कि यूनुस के खिलाफ दर्ज किए गए लेबर लॉ और मनी लॉन्ड्रिंग के ये सभी मामले पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित थे। चूंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी सरकार यूनुस को पसंद नहीं करती थी, इसलिए उन पर ये झूठे इल्जाम मढ़े गए थे। इस स्पष्टीकरण के बाद आर्मी चीफ वकार-उज-जमान मान गए और मुहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार के पद पर नियुक्त किए जाने का रास्ता साफ हो गया।शेख हसीना का तख्तापलट और बांग्लादेश के मौजूदा राजनीतिक हालातआपको बता दें कि 5 अगस्त 2024 को कई महीनों के हिंसक छात्र आंदोलन के बाद गुस्साई भीड़ प्रधानमंत्री आवास में घुस गई थी, जिसके ठीक पहले सेना के निर्देश पर शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं और तब से यहीं रह रही हैं। यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के बाद देश में चुनाव हुए, जिसमें मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी को जीत मिली। हालांकि चुनाव से पहले खालिदा जिया का निधन हो जाने के कारण उनके बेटे तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बने। वर्तमान में शेख हसीना के भारत में शरण लेने और बीएनपी के रुख के कारण भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंध सामान्य नहीं चल रहे हैं।
Hiroshima परमाणु हमले की 81वीं बरसी पर मेयर Kazumi Matsui ने परमाणु हथियारों की होड़ की निंदा की
जापान के हिरोशिमा शहर में अमेरिका द्वारा किए गए परमाणु बम हमले की बृहस्पतिवार को 81वीं बरसी मनाई गई। इस अवसर पर शहर के महापौर काजुमी मात्सुई ने प्रमुख शक्तियों द्वारा युद्ध का सहारा लेने की आलोचना की और परमाणु हथियारों को प्रतिरोधक क्षमता के साधन के रूप में उचित ठहराने की प्रवृत्ति समाप्त करने का आह्वान किया। हिरोशिमा शांति स्मारक पार्क में आयोजित समारोह में अपने शांति संदेश में मात्सुई ने कहा कि परमाणु हथियारों की अमानवीयता को कम करके आंकना और अपनी समृद्धि के लिए बल प्रयोग को स्वीकार करना हिंसक प्रतिशोध के ऐसे चक्र को जन्म दे सकता है, जिसका अंत एक और हिरोशिमा या नागासाकी जैसी त्रासदी में हो सकता है। इसे भी पढ़ें: परमाणु हथियारों के प्रतिबंध की वकालत करती है हिरोशिमा त्रासदी उन्होंने कहा कि आज भी अनेक राजनीतिक नेता परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को व्यावहारिक नीति मानते हैं और हिंसा को वैध ठहराते हैं। उनके अनुसार, इससे परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व का लक्ष्य और दूर होता जा रहा है। उन्होंने लोगों से अतीत से सीख लेकर शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की। समारोह में अमेरिका और ईरान सहित लगभग 120 देशों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों समेत करीब 50,000 लोगों ने भाग लिया। सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर, जब वर्ष 1945 में अमेरिकी बी-29 बमवर्षक विमान ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था, उसी समय घंटी बजाई गई और दो मिनट का मौन रखा गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद सानाए ताकाइची ने पहली बार इस स्मृति समारोह में भाग लिया। इसे भी पढ़ें: BJD ने Odisha में Nuclear Power Plant प्रस्ताव का विरोध किया, सुरक्षा पर उठाए सवाल उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने संबंधी संयुक्त राष्ट्र की संधि के ढांचे के भीतर वह ऐसे विश्व के निर्माण के लिए ‘‘व्यावहारिक दृष्टिकोण’’ अपनाएंगी, जहां परमाणु हथियारों का कभी इस्तेमाल न हो। यह समारोह ऐसे समय आयोजित हुआ है, जब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का समर्थन करने वाली ताकाइची सरकार इस वर्ष के अंत में नई सुरक्षा एवं रक्षा नीति तैयार करते समय जापान के युद्धोत्तर तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों में ढील दे सकती है। परमाणु बम हमले के जीवित बचे लोगों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें जापान भी शामिल है, के बीच प्रतिरोधक क्षमता के नाम पर परमाणु हथियार रखने के बढ़ते समर्थन पर चिंता और निराशा व्यक्त की है।
अमेरिका को मिला पहला मुस्लिम सीनेटर, ख़ुशी जताते हुए ट्रंप बोले- 'यह तो हमारे लिए अच्छी खबर है'
अमेरिका को मिला पहलामुस्लिम सीनेटर, ख़ुशी जताते हुए ट्रंप बोले- 'यह तो हमारे लिए अच्छी खबर है'
अमेरिका में मुस्लिम उम्मीदवार की जीत पर खुश हुए ट्रंप, कहा- 'यह तो हमारे लिए अच्छी खबर है'
अमेरिका के मिशिगन में डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में अब्दुल एल-सैयद ने हेली स्टीवंस को हराकर बड़ी जीत दर्ज की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे रिपब्लिकन पार्टी के लिए अच्छी खबर बताया और एल-सैयद पर तीखा हमला बोला।
Sheikh Hasina के अलावा दुनिया में कई ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने निर्वासन के बाद वतन वापसी का फैसला किया, इस जोखिम के बावजूद कि लौटने पर उन्हें मारा जा सकता है, फांसी पर चढ़ाया जा सकता है, झूठे मामलों में फंसाकर जेल में डाला जा सकता है। पढ़िए ऐसे हिम्मती नेताओं के बारे में।
ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ओमान के साथ एक समझौते का मसौदा तैयार करने के अंतिम चरण में है। वहीं, गुरुवार को ईरान युद्ध और व्यापक मध्य पूर्व से जुड़ी हालिया घटनाओं के तहत लेबनान में दो इज़राइली सैनिक मारे गए। सूडान में चल रहे युद्ध से यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, प्राचीन मेरो पिरामिड (Meroe pyramids) को खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि वहां संरक्षण का काम पूरी तरह से रुक गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बुधवार को कहा कि ओमान के साथ 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) को लेकर एक समझौता तैयार करने का काम आखिरी चरण में है। उन्होंने कहा कि अगर कुछ पक्ष इस प्रक्रिया में रुकावट नहीं डालते हैं तो एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा; उनका इशारा साफ़ तौर पर अमेरिका की ओर था। यह समझौता इस बात पर निर्भर कर सकता है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है या नहीं। यह जलडमरूमध्य दुनिया भर में शिपिंग और ऊर्जा की सप्लाई के लिए बहुत अहम है। फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों से शुरू हुई जंग से पहले, दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित इसी जलमार्ग से होकर गुज़रता था। गुरुवार को आगे क्या होता है, इस पर सबकी नज़रें अमेरिका पर टिकी थीं। इसे भी पढ़ें: Iran के पास कभी नहीं होंगे Nuclear Weapons, बातचीत से गिरेंगे Oil Prices, जेडी वेंस का दावा सूडान में अप्रैल 2023 में शुरू हुआ संघर्ष खार्तूम से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर में स्थित मेरोए पिरामिडों के लिए खतरा बन गया है। इस जगह पर 200 से ज़्यादा पिरामिड हैं, जिन्हें 800 ईसा पूर्व और 350 ईस्वी के बीच कुश साम्राज्य के शाही मकबरों के तौर पर बनाया गया था; यह जगह अपनी खास कोणीय बनावट (आर्किटेक्चर) के लिए जानी जाती है। युद्ध ने सूडान की कई ऐतिहासिक जगहों और संग्रहालयों को नुकसान पहुँचाया है, और यूनेस्को ने अप्रैल में चेतावनी दी थी कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर खतरा बढ़ रहा है। पुरातत्वविद् महमूद सुलेमान ने कहा कि मेरोए में पिरामिडों के ढहने की आशंका है। इसे भी पढ़ें: US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले- जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेल गुरुवार को हुई ताज़ा घटनाओं में मुख्य रूप से ओमान के साथ ईरान के प्रस्तावित 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' समझौते, लेबनान में दो इज़राइली सैनिकों की मौत और सूडान के मेरो पिरामिडों पर बढ़ते ख़तरे को लेकर नई चिंता शामिल रही, क्योंकि युद्ध के कारण वहाँ की धरोहर वाली जगहों को ख़तरा बना हुआ है।
दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, उत्तर कोरिया ने गुरुवार को अपने पूर्वी तट के पास समुद्र की ओर एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी। यह इस साल प्योंगयांग द्वारा किए गए हथियारों के परीक्षणों की श्रृंखला में नवीनतम है। दक्षिण कोरिया ने बताया कि उसने शाम करीब 5 बजे पूर्वी तटीय शहर वॉनसन से मिसाइल लॉन्च का पता लगाया। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी कहा कि उत्तर कोरिया ने संभवतः एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी है, और साथ ही यह भी कहा कि जापान या उसके आसपास इसका कोई असर नहीं हुआ। एक बयान में, दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ़ स्टाफ़ ने कहा कि मिसाइल लॉन्च के बाद सेना ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है और वह अमेरिका और जापान के साथ मिलकर काम कर रही है। इसे भी पढ़ें: India Bhutan China Tri-Junction पर भारत की नई रणनीति ने किया हैरान, Doklam तक पहुँचेगी रेल, चीन के छूटे पसीने 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ नेता किम जोंग उन की अहम बातचीत नाकाम होने के बाद से ही उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल हथियारों के भंडार को बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। जानकारों का कहना है कि किम उत्तर कोरिया को परमाणु शक्ति संपन्न देश के तौर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाना चाहते हैं, ताकि वे देश पर लगे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों को हटवा सकें। पिछले महीने, किम ने 5,000 टन वज़न वाले एक नए डिस्ट्रॉयर पर परमाणु क्षमता वाली क्रूज़ मिसाइल और दूसरे हथियारों के परीक्षण की देखरेख की। कई सालों तक बैलिस्टिक मिसाइल बनाने को प्राथमिकता देने के बाद, अब उन्होंने अपना ध्यान नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित किया है, जिसमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी बनाना भी शामिल है। इसे भी पढ़ें: Assam में बाढ़ राहत कार्य के बाद अपने हेल्पर के गांव पहुंचे Randeep Hooda, नगालैंड बॉर्डर को देखकर बोले- 'यह तो धरती पर स्वर्ग है' फरवरी में वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस में किम ने पानी के नीचे से लॉन्च होने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों की भी मांग की। हाल के वर्षों में, उन्होंने रूस के साथ उत्तर कोरिया के संबंधों को भी मज़बूत किया है; उत्तर कोरिया ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की लड़ाई में मदद के लिए पारंपरिक हथियार और सैनिक भी उपलब्ध कराए हैं।
Deep Strike: Russia के अंदर 1300km दूर Ukraine का बड़ा हमला, Zelenskyy ने मांगी और Patriot Missiles
यूक्रेन ने कहा कि उसने रात भर चले हमलों में रूस के अंदर मौजूद तेल ठिकानों पर हमला किया। कीव मॉस्को की युद्ध-कालीन अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने और क्रेमलिन पर दबाव बनाने की कोशिशें जारी रखे हुए है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेनी सेना ने काला सागर में रूसी मिलिट्री पेट्रोल बोट्स और मॉस्को के तथाकथित 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) के जहाजों पर भी हमला किया; इन जहाजों का इस्तेमाल तेल निर्यात पर पश्चिमी देशों की पाबंदियों से बचने के लिए किया जाता था। अधिकारियों ने बताया कि इसी दौरान, रात भर यूक्रेन पर हुए रूसी हमलों में कम से कम तीन आम नागरिकों की मौत हो गई और 22 अन्य घायल हो गए। जैसे-जैसे मॉस्को ने ड्रोन, मिसाइल और ग्लाइड बम से हमले तेज़ किए, यूक्रेन ने अपनी एयर डिफेंस (हवाई सुरक्षा) को मज़बूत करने के लिए और ज़्यादा इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग फिर से तेज़ कर दी है; अधिकारियों का कहना है कि एयर डिफेंस सिस्टम पर बहुत ज़्यादा दबाव है। इसे भी पढ़ें: रूस के खिलाफ Zelenskyy का बड़ा दांव, यूरोप की सुरक्षा के लिए FREYJA Anti-Ballistic Shield का किया ऐलान ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर बताया कि यूक्रेनी सेना ने बशकोर्तोस्तान में एक रिफाइनरी पर हमला किया, जो पूर्वी यूक्रेन में फ्रंट लाइन से 1,300 किलोमीटर से ज़्यादा दूर है, और यारोस्लाव क्षेत्र में एक और रिफाइनरी पर हमला किया, जो यूक्रेनी सीमा से लगभग 700 किलोमीटर दूर है। उन्होंने ब्लैक सी में निशाना बने जहाजों या हुए नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। बार-बार हो रहे इन हमलों से रूस में ईंधन की कमी हो गई है और वहां के लोग परेशान हैं, जबकि यूक्रेन का हौसला बढ़ा है क्योंकि वह लगातार रूसी हमलों का सामना कर रहा है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस ने रात भर में कई रूसी इलाकों के साथ-साथ गैर-कानूनी रूप से कब्ज़े में लिए गए क्रीमिया और काला सागर व आज़ोव सागर के ऊपर 605 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। इसे भी पढ़ें: Kyiv पर Russia missile attack में 17 लोगों की मौत, Zelenskyy ने मांगी और एयर डिफेंस सिस्टम इस बीच, मॉस्को की सेनाओं ने पूरे यूक्रेन में नए हमले किए। यूक्रेन की वायु सेना ने बताया कि रूस ने बुधवार से गुरुवार के बीच चार मिसाइलें और 101 लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन दागे, और एयर डिफेंस सिस्टम ने 66 ड्रोन को मार गिराया या जाम कर दिया। शहर के मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख विटाली काराबानोव के अनुसार, उत्तर-पूर्वी खार्किव इलाके के बालाक्लिया में तीन लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पहला हमला एक घर पर हुआ, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और आग लग गई, जबकि दूसरे हमले में एक अन्य घर के पास एक पुरुष और एक महिला की मौत हो गई। नेशनल पुलिस ने बताया कि पड़ोसी सुमी इलाके में रूसी ग्लाइड बमों से 12 लोग घायल हो गए। रीजनल मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख ओलेह ग्रिगोरोव ने कहा कि हमले वाली जगहों के पास अपार्टमेंट बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा और सैकड़ों खिड़कियां टूट गईं। दक्षिणी खेरसॉन इलाके में, स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि खेत में काम करने वाले मजदूरों को ले जा रही एक बस पर रूसी ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें छह लोग घायल हो गए। दक्षिण-पूर्वी शहर ज़ापोरिज्जिया में, रीजनल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख इवान फेडोरोव ने बताया कि रूसी ड्रोन ने एक रिहायशी इलाके में हमला किया, जिससे चार लोग घायल हो गए।
'बिना वर्दी वाला मुनीर'... कौन है जो शरीफ की जमीन छीनने पर आमदा है
सिर्फ 47 साल का ये राजनेता आज के पाकिस्तान में अपनी जाहिर शक्ति से कई गुना ताकत रखता है. उनके पास गृहमंत्री का ओहदा है, क्रिकेट का कंट्रोल है और अपनी ही सरकार के प्रधानमंत्री शरीफ को कठघरे में खड़ा करने की सलाहियत. दरअसल इसके पीछे की ताकत वर्दी है.
शेख हसीना के तख्तापलट पर नया खुलासा, यूनुस के सपोर्ट में नहीं थे आर्मी चीफ वकार; फिर क्या बदला?
Sheikh Hasina ouster in Bangladesh: शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने की घटना को दो साल पूरे हो चुके हैं। इस मामले पर अब खुलासा हुआ है कि अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने के लिए मुहम्मद यूनुस के नाम पर आर्मी चीफ वकार सहमत नहीं थे। क्योंकि यूनुस के ऊपर दो गंभीर केस दर्ज थे।
पाकिस्तान में नहीं थम रहा कोहराम, सड़कों पर क्यों उतरे लोग? शहबाज शरीफ को थमाया नया अल्टीमेटम
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कैद के तीन साल पूरे होने पर उनके समर्थकों ने बुधवार को पुलिस की कार्रवाई के बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किया। इस दौरान 100 से अधिक समर्थकों को गिरफ्तार किया गया।
डेनमार्क की 19 वर्षीय प्रिंसेस इसाबेला ने 11 महीने की अनिवार्य सैन्य सेवा शुरू की। वह शाही परिवार की पहली महिला सक्रिय सैन्य भर्ती बनीं और वेतन लेने से इनकार किया।
शेख हसीना के करीबी ने ही कराई थी मोहम्मद यूनुस की ताजपोशी? नाम सुनते ही क्यों भड़क गए थे आर्मी चीफ
पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति में कब क्या नया भूचाल आ जाए, यह कह पाना किसी के लिए भी आसान नहीं है। सत्ता के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज अंदरूनी राज बाहर आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना के एक बेहद खास और करीबी व्यक्ति ने ही देश में तख्तापलट के बाद अंतरिम सरकार की कमान संभालने के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नाम का प्रस्ताव रखा था और उन्हें सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जब सबसे पहले सेना प्रमुख के सामने यह नाम रखा गया था, तो वह सुनकर पूरी तरह बिदक गए थे और उनका रिएक्शन बेहद तीखा था। आइए जानते हैं कि इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के पीछे की पूरी कहानी क्या है और कैसे अचानक रातों-रात बांग्लादेश का पूरा सियासी खेल पलट गया।तख्तापलट के बाद अचानक कैसे बदला बांग्लादेश का सत्ता समीकरणजब शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा था, तब पूरे बांग्लादेश में अराजकता और अनिश्चितता का माहौल छा गया था। देश को चलाने और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए एक ऐसी अंतरिम सरकार की जरूरत थी जिस पर जनता और सेना दोनों का भरोसा हो। इसी कशमकश के बीच पर्दे के पीछे गुप्त बैठकों का दौर शुरू हुआ। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह है कि शेख हसीना के खेमे के ही एक बेहद प्रभावशाली और करीबी शख्स ने चतुराई से देश की बागडोर संभालने के लिए डॉ. मोहम्मद यूनुस का नाम आगे बढ़ाया, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को संभाला जा सके और सत्ता का वैध हस्तांतरण हो सके।आर्मी चीफ का नाम सुनते ही क्यों भड़का था गुस्साजब यह प्रस्ताव सबसे पहले बांग्लादेश की सेना के शीर्ष नेतृत्व यानी आर्मी चीफ के सामने रखा गया, तो उनका शुरुआती रिएक्शन बेहद कड़ा और नाराजगी भरा था। सेना प्रमुख इस बात से हैरान और असहज थे कि देश के इस संकटपूर्ण और संवेदनशील दौर में किस प्रकार के राजनीतिक समीकरण बिठाए जा रहे हैं। सेना इस बात को लेकर चिंतित थी कि अचानक इस तरह के बदलाव से देश की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य अनुशासन पर क्या असर पड़ेगा। हालांकि, देश के बिगड़ते हालात और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे आखिरकार सभी पक्षों को झुकना पड़ा और तमाम आंतरिक विरोध के बावजूद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बना दिया गया।इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के क्या होंगे दूरगामी परिणामबांग्लादेश की राजनीति का यह नाटकीय घटनाक्रम इस बात का जीता-जागता सबूत है कि पर्दे के पीछे होने वाले खेल और फैसले जमीन पर दिखने वाले हालात से बिल्कुल अलग होते हैं। शेख हसीना के करीबी माने जाने वाले शख्स का इस तरह यूनुस की ताजपोशी के पीछे होना और सेना की नाराजगी इस बात को दर्शाती है कि देश का सत्ता संघर्ष अभी थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। आने वाले समय में बांग्लादेश के इन राजनीतिक और सैन्य समीकरणों का असर न केवल वहां के आम जनजीवन पर पड़ेगा, बल्कि भारत समेत पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक रिश्तों पर भी इसकी गहरी छाप देखने को मिलेगी।
प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित खूबसूरत देश फिलीपींस (Philippines) से एक बड़ी और दहशत भरी खबर सामने आ रही है। फिलीपींस के कई इलाकों में बुधवार को धरती अचानक जोरदार तरीके से कांप उठी, जब रिक्टर स्केल पर 6.3 तीव्रता वाले एक शक्तिशाली भूकंप (Earthquake) ने यहां दस्तक दी। झटके इतने तेज और भयानक थे कि इमारतों में रखा सामान हिल गया और खौफ के मारे लोग अपने-अपने घरों, अपार्टमेंट्स और दफ्तरों को छोड़कर सुरक्षित खुले आसमान के नीचे सड़कों पर भाग खड़े हुए। इस अचानक आई प्राकृतिक आपदा से स्थानीय नागरिकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर सुरक्षित ठिकानों की तलाश करने लगे।कितनी थी भूकंप की गहराई और कहां था इसका मुख्य केंद्रयूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) और स्थानीय भूकंप विज्ञान एजेंसियों से मिली शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, इस शक्तिशाली भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे काफी गहराई में स्थित था। झटकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसके प्रभाव से दूर-दराज के इलाकों में भी धरती के डोलने का अहसास साफ तौर पर किया गया। जैसे ही भूकंप के झटके महसूस हुए, सायरन बजने लगे और लोग तुरंत बिना किसी देरी के सुरक्षित स्थानों की ओर निकल पड़े। हालांकि प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने तुरंत हरकत में आते हुए स्थिति का जायजा लेना शुरू कर दिया ताकि किसी भी संभावित बड़े नुकसान या जनहानि से समय रहते निपटा जा सके।फिलीपींस में बार-बार क्यों आते हैं इतने खतरनाक भूकंपफिलीपींस की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) कहा जाता है। इस बेल्ट में टेक्टोनिक प्लेटों के लगातार खिसकने और आपस में टकराने के कारण यहाँ अक्सर छोटे से लेकर बड़े भूकंप आते रहते हैं। देश के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण हमेशा हाई अलर्ट पर रहते हैं क्योंकि यहाँ बुनियादी ढांचे और ऊंची इमारतों को इस तरह की आपदाओं से बचाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन और सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होता है।जानमाल के नुकसान पर प्रशासन की नजर और सुनामी का अलर्टभूकंप के तुरंत बाद फिलीपींस के आपदा प्रतिक्रिया विभागों ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे का काम तेज कर दिया है। राहत और बचाव टीमों को तुरंत फील्ड में उतार दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी ग्रामीण या शहरी इलाके में कोई गंभीर दुर्घटना या मलबे में फंसने जैसी स्थिति न हो। गनीमत यह रही कि इस बड़े झटके के बाद शुरुआती तौर पर किसी बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान या सुनामी (Tsunami) की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है, जिससे प्रशासन और आम जनता ने बड़ी राहत की सांस ली है।
दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक लाल सागर (Red Sea) में एक बार फिर से अशांति और दहशत का माहौल गहरा गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर अपनी कायराना हरकतों को अंजाम देते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में इन विद्रोही ताकतों ने पहले भारत की ओर आ रहे या भारतीय समुद्री सीमा से जुड़े जहाजों को निशाना बनाया था और अब एक बार फिर लाल सागर के मुहाने पर एक बड़े कमर्शियल ऑयल टैंकर के बेहद करीब खतरनाक मिसाइल से हमला कर दिया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद से वैश्विक शिपिंग कंपनियों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई है, क्योंकि इस रास्ते से होने वाला अंतरराष्ट्रीय व्यापार गंभीर खतरे में पड़ गया है।हूतियों के इस खौफनाक हमले की पूरी ड्रामेटिक घटनासमुद्री सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजर रहे एक ऑयल टैंकर को निशाना बनाकर आसमान में अचानक मिसाइल दाग दी। गनीमत यह रही कि मिसाइल सीधे तौर पर जहाज से टकराने के बजाय उसके ठीक पास पानी में जाकर गिरी, जिससे एक बड़ा और भयानक जल-प्रलय टल गया, वरना यह हादसा इतिहास के सबसे बड़े समुद्री灾难 में बदल सकता था। इस जोरदार धमाके के बाद टैंकर पर सवार चालक दल के सदस्यों में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल एक्टिवेट कर दिए गए। यह हमला एक बार फिर यह साबित करता है कि हूती विद्रोही इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले हर एक वैश्विक जहाज के लिए काल बनते जा रहे हैं।भारत से जुड़े जहाजों पर भी पहले मंडरा चुका है बड़ा खतराहूती विद्रोहियों की यह खूनी साजिशें नई नहीं हैं। इससे पहले भी इन आतंकवादियों ने भारत के समुद्री हितों और भारतीय जहाजों को अपने हमलों की जद में लिया था। लाल सागर और अदन की खाड़ी के इस पूरे इलाके में भारत आने-जाने वाले कमर्शियल कार्गो और तेल टैंकरों पर कई बार मिसाइलें और ड्रोन दागे जा चुके हैं। भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने अतीत में भी अदम्य साहस और पराक्रम दिखाते हुए कई संकट में फंसे जहाजों और भारतीय नाविकों की जान बचाई है। इसके बावजूद हूती विद्रोहियों का यह दुस्साहस कम होने का नाम नहीं ले रहा है, जो ग्लोबल इकोनॉमी और एनर्जी सप्लाई चेन के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहा है।वैश्विक व्यापार और क्रूड ऑयल की सप्लाई पर मंडराया संकट का बादललाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण चॉकपॉइंट्स में से एक है, जहां से एशिया और यूरोप के बीच का अधिकांश तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है। हूतियों द्वारा लगातार किए जा रहे इन मिसाइल हमलों के कारण अब दुनिया भर की बड़ी शिपिंग कंपनियों को मजबूरन लंबे और महंगे रास्तों यानी केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) का चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। इस कारण माल ढुलाई का खर्च (Freight Cost) आसमान छू रहा है और भारत समेत पूरी दुनिया में कच्चे तेल, गैस और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों के बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और महाशक्तियां अब इन हमलों से निपटने के लिए किसी ठोस और स्थायी सैन्य कार्रवाई की योजना बनाने पर मजबूर हो गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भू-राजनीतिक हलकों में इस समय रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक के बाद एक कड़े फैसलों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे और भीषण संघर्ष के बीच पुतिन ने अपनी सैन्य रणनीति और सामरिक पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए देश की सेना और रक्षा मंत्रालय के ढांचे में बहुत बड़े फेरबदल कर दिए हैं। राष्ट्रपति पुतिन के इस अचानक और आक्रामक प्रशासनिक बदलाव के बाद दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक यह पता लगाने में जुट गए हैं कि इस बड़े बदलाव के पीछे आखिर रूस की असली रणनीति और वजह क्या है। आइए जानते हैं कि पुतिन के इस ताजा कदम के क्या मायने हैं और इससे वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।रक्षा मंत्रालय और सैन्य नेतृत्व में क्यों किए गए बड़े बदलावरूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा सेना के भीतर किए गए इन बड़े बदलावों का मुख्य उद्देश्य देश की सैन्य मशीनरी को अधिक चुस्त-दुरुस्त, आधुनिक और युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुकूल बनाना है। जानकारों का मानना है कि लंबे खिंचते संघर्ष के कारण रूस को अपनी आर्थिक और सैन्य रणनीतियों में लगातार समायोजन करना पड़ रहा है। पुतिन ने सेना के शीर्ष पदों पर ऐसे अनुभवी और तकनीकी रूप से दक्ष चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी है जो युद्ध के मैदान में लॉजिस्टिक्स, हथियारों के उत्पादन और सप्लाई चेन को और अधिक तेज कर सकें। इस फेरबदल के जरिए क्रेमलिन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि रूसी सेना हर मोर्चे पर पूरी तरह से मुस्तैद और आत्मनिर्भर बनी रहे।पश्चिमी देशों और नाटो को रूस का कड़ा संदेशव्लादिमीर पुतिन के इनसैन्य फेरबदल को केवल प्रशासनिक बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे पश्चिमी देशों और नाटो (NATO) गठबंधन के लिए एक स्पष्ट और कड़े संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन को लगातार मिल रही भारी सैन्य और वित्तीय मदद के जवाब में रूस अब अपनी आंतरिक सुरक्षा और रक्षा उत्पादन को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ा रहा है। पुतिन का यह कदम यह साफ जाहिर करता है कि रूस इस संघर्ष में किसी भी तरह के दबाव में झुकने वाला नहीं है और वह लंबी रणनीतिक लड़ाई के लिए पूरी तरह से कमर कस चुका है।वैश्विक कूटनीति और युद्ध के भविष्य पर इसका क्या होगा असररूसी सेना में हुए इन बड़े फेरबदल का सीधा असर आने वाले दिनों में युद्ध के मैदान की स्थिति और वैश्विक कूटनीति पर पड़ना तय है। एक तरफ जहां रूस अपनी सामरिक स्थिति को अभेद्य बनाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात को लेकर चिंतित है कि यह संघर्ष और अधिक लंबा खिंच सकता है। पुतिन की यह सोची-समझी रणनीति यह दिखाती है कि रूस अपनी सैन्य प्राथमिकताओं को लेकर बेहद आक्रामक है और वह अपनी शर्तों पर ही इस पूरे भू-राजनीतिक समीकरण को अंजाम तक पहुंचाना चाहता है।
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
UK Police से ज़मानत लेकर फरार Grooming Gang का आरोपी, Rushkar Ahmed अब PoK Assembly में बैठेगा
लंदन के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों 'द गार्डियन' और 'द टाइम्स' की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुए विधानसभा चुनावों में एक बेहद विवादित चेहरे की जीत दर्ज की गई है। 1990 के दशक में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में सक्रिय रहे एक चर्चित 'ग्रूमिंग गैंग' के आरोपी और पूर्व मंत्री रुश्कर अहमद को पीओके असेंबली के लिए चुन लिया गया है। 62 वर्षीय रुश्कर अहमद पर यूके में बच्चों के यौन शोषण, बलात्कार और मानव तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप हैं, और वह वर्तमान में इस मामले में यूके पुलिस की जमानत पर बाहर है। इसे भी पढ़ें: वो हमें चुन चुन कर मार रहे हैं...पहली बार हनुमान का नाम लेकर आतंकी ने खोला भारत का राज! 54% मतों के साथ हासिल की जीत 27 जुलाई को हुए पीओके चुनावों के पहले चरण में अहमद ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) के टिकट पर मीरपुर-IV (LA-4) निर्वाचन क्षेत्र से किस्मत आजमाई थी। 'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, अहमद ने इस सीट पर कुल पड़े वोटों का 54% हिस्सा हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। वर्ष 2021 के चुनावों में इसी सीट पर मिली शिकस्त के बाद, यह पिछले पांच वर्षों में पहला मौका है जब वह किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। एक गंभीर आपराधिक मामले में घिरे व्यक्ति का जन-प्रतिनिधि के रूप में चुना जाना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का विषय बन गया है। इसे भी पढ़ें: Imran Khan की रिहाई पर अड़ी PTI: 27 सितंबर को Islamabad March का ऐलान, सुहैल अफरीदी की चेतावनी अहमद इससे पहले 2006 और 2021 के बीच POK की कई सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने राजस्व, व्यापार, उद्योग, पशुपालन और बिजली विकास संगठन जैसे कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (POK) में तथाकथित विधानसभा के चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हो रहे हैं। PML-N अभी आगे चल रही है और उसने 53 सदस्यों वाली विधानसभा में 24 सीटें हासिल की हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने तथाकथित स्थानीय चुनावों को पूरी तरह से दिखावा बताया है। मंत्रालय ने PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ इस्लामाबाद की कार्रवाई का हवाला दिया है, जिसमें खबरों के मुताबिक कम से कम 90 लोगों की जान गई है। इसे भी पढ़ें: Pakistan में कुछ बड़ा होने वाला है? विदेशी मीडिया पर बैन, बाहर जाने के लिए पत्रकारों को लेना होगा NOC रुश्कर अहमद को 2024 में UK में गिरफ़्तार किया गया, बाद में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस (GMP) ने 18 जुलाई, 2024 को मैनचेस्टर एयरपोर्ट पर अहमद को रेप और बच्चों की तस्करी के शक में गिरफ़्तार किया। ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस (GMP) के डिटेक्टिव्स ने अहमद से कम से कम दो महिलाओं के आरोपों के बारे में पूछताछ की। इन महिलाओं का दावा है कि 1990 के दशक में जब वे मैनचेस्टर के रुशोलम इलाके में केयर होम्स में रह रही थीं और कमज़ोर स्थिति में थीं, तब अहमद ने उनका रेप किया और उनकी तस्करी की। अहमद की गिरफ़्तारी और पूछताछ, बच्चों के साथ पुराने समय में हुए यौन शोषण के कई आरोपों की GMP की बड़ी जांच का हिस्सा थी। इन आरोपों का संबंध कथित 'ग्रूमिंग गैंग' से है, जिससे अहमद भी जुड़ा हुआ है। हालांकि, GMP पुलिस अहमद पर आरोप तय नहीं कर पाई और उसके ख़िलाफ़ आरोपों की जांच अभी भी चल रही है। पूछताछ के बाद उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। 'द टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, GMP की इस बड़ी जांच में अब तक 22 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। अहमद ज़मानत की शर्तों के तहत पेश नहीं हुआ, PoK में प्रचार करते देखा गया रुश्कर अहमद को पिछले महीने जुलाई में मैनचेस्टर के एक पुलिस स्टेशन में ज़मानत के सिलसिले में पेश होना था, लेकिन वह नहीं पहुँचा। उसने अधिकारियों को बताया कि वह इतना बीमार था कि UK के लिए उड़ान नहीं भर सकता था। इसी दौरान, सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए जिनमें अहमद को PoK के मीरपुर में तथाकथित चुनावों से पहले चुनावी रैलियों में सक्रिय रूप से प्रचार करते हुए देखा गया।
Iran के पास कभी नहीं होंगे Nuclear Weapons, बातचीत से गिरेंगे Oil Prices, जेडी वेंस का दावा
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार (स्थानीय समय) को ईरान के नेतृत्व को बिखरा हुआ और समझने में मुश्किल बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के साथ बातचीत एक जटिल प्रक्रिया होगी जो उलझी हुई हो सकती है और किसी नतीजे तक पहुँचने में कुछ समय लगेगा। साथ ही, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वॉशिंगटन अपने पक्ष में नतीजा पाने के लिए सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक तरीकों का इस्तेमाल करेगा। फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि ईरान के नेतृत्व में आपसी मतभेदों ने समाधान की कोशिशों को मुश्किल बना दिया है। 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के विफल होने के बाद तनाव में कुछ समय की कमी आई थी, जिसके बाद ईरान के साथ फिर से कूटनीतिक बातचीत शुरू हुई है। वेंस ने बताया कि ईरान में कुछ गुट संघर्ष खत्म करना चाहते हैं, जबकि दूसरे गुट दुश्मनी जारी रखने पर अड़े हुए हैं। इसे भी पढ़ें: US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले- जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेल वेंस ने फॉक्स न्यूज़ से कहा ईरानी लोग बहुत मुश्किल स्वभाव के होते हैं। दूसरी बात, उनका सिस्टम बंटा हुआ है। उनके सिस्टम में कुछ लोग ऐसे हैं जो चाहते हैं कि युद्ध खत्म हो जाए; वहीं कुछ ऐसे कट्टरपंथी भी हैं जो चाहते हैं कि युद्ध जारी रहे। उन्होंने आगे कहा हमारा काम इन हालात को संभालना और अमेरिकी लोगों के साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए भी सबसे अच्छा नतीजा हासिल करना है। इसे भी पढ़ें: Michigan Senate Primary: प्रोग्रेसिव नेता Abdul El-Sayed की जीत पर Donald Trump का बड़ा बयान, बताया GOP के लिए शुभ संकेत वेंस ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी समझौता जल्दी नहीं होगा, लेकिन उन्हें भरोसा है कि अमेरिका अपने मकसद पूरे कर लेगा। उन्होंने कहा और मुझे लगता है कि आखिर में हम जिस स्थिति में पहुंचेंगे—हालांकि वहां तक पहुंचने का रास्ता उलझा हुआ होगा और इसमें कुछ समय भी लगेगा—वहां तेल की कीमतें कम हो जाएंगी और कम ही रहेंगी। ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा, और अमेरिका ज़्यादा मज़बूत स्थिति में होगा। उप-राष्ट्रपति ने बातचीत जारी रहने के दौरान ही उसके नतीजों के बारे में कोई राय बनाने से बचने की सलाह दी।
प्रोग्रेसिव उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन में US सीनेट के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का नॉमिनेशन हासिल कर लिया है। उन्होंने पार्टी के स्थापित धड़े (एस्टेब्लिशमेंट) के समर्थन वाली प्रतिनिधि हेली स्टीवंस को एक कड़े मुकाबले वाले प्राइमरी चुनाव में हराया। यह जीत पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। अल-सईद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर प्रोग्रेसिव नेताओं के लिए एक बड़ा बढ़ावा माना जा रहा है, क्योंकि पब्लिक हेल्थ के पूर्व अधिकारी रहे अल-सईद एक ऐसे कड़े मुकाबले से जीतकर आए हैं, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा और जिसमें बाहरी समूहों ने भारी खर्च किया। इस नतीजे पर प्रतिक्रिया देते हुए US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका स्वागत किया और इसे रिपब्लिकन के लिए बहुत अच्छी खबर बताया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में अल-सयद की जीत को रिपब्लिकन के लिए फ़ायदेमंद बताया। उन्होंने डेमोक्रेटिक प्राइमरी को कम्युनिस्ट लूज़र कहा और कहा कि उनकी जीत से डेमोक्रेट्स की पागलपन भरी नीतियां और खराब हो जाएंगी। इसे भी पढ़ें: Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन! ट्रंप ने कहा रिपब्लिकन पार्टी के लिए बहुत अच्छी खबर है। अल-सयद, एक कम्युनिस्ट लूज़र जो यहूदियों और इज़राइल से नफ़रत करता है, सोशलिस्ट के साथ अपनी दौड़ में संभावित विजेता है। हमेशा की तरह, इस मामले में भी पोल (सर्वे) काफ़ी गलत साबित हुए। उससे इतने अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी, जितना उसने किया। अब, डेमोक्रेट्स की पागलपन भरी नीतियां और भी खराब हो जाएंगी! इसे भी पढ़ें: US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले- जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेल पोलिटिको के अनुसार, अल-सयद ने स्टीवंस को बहुत कम अंतर से हराया। स्टीवंस को डेमोक्रेटिक पार्टी के बड़े नेताओं का समर्थन हासिल था और उन्हें 'अमेरिकन इज़राइल पब्लिक अफ़ेयर्स कमेटी' (AIPAC) द्वारा रिकॉर्ड 32 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाने का फ़ायदा भी मिला था। नतीजा कुछ प्रगतिशील समूहों की उम्मीद से ज़्यादा करीबी था, क्योंकि पहले के पोल में अल-सयद को काफ़ी बढ़त बनाए हुए दिखाया गया था। हालाँकि, उनकी जीत मौजूदा चुनावी दौर में प्रगतिशील आंदोलन के लिए सबसे बड़ी जीतों में से एक है।
जेप्टो, बुक माय शो और इंडिगो समेत 9 एप्स पर लगा 20 लाख रुपये का जुर्माना; डार्क पैटर्न इस्तेमाल करने का आरोप Jagran ऑनलाइन ऑफर दिखाकर कर रहे थे खेल, सरकार ने Zepto, IndiGo, Physics Wallah समेत 9 बड़ी कंपनियों पर ठोका जुर्माना Hindustan Digital Platforms: सरकार ने Zepto, IndiGo और PhysicsWallah समेत 9 प्लेटफॉर्म्स पर लगाया जुर्माना ABP News क्या है 'डार्क पैटर्न', जिसकी वजह से इंडिगो-जेप्टो समेत 9 कंपनियों पर लगा जुर्माना? NewsBytes Zepto, BookMyShow और IndiGo समेत 9 बड़े प्लेटफॉर्म्स पर लगा जुर्माना, बिल में चुपके से जोड़ते थे एक्स्ट्रा चार्ज Nai Dunia
वेस्टइंडीज को दूसरे टेस्ट में आठ विकेट से हराकर पाकिस्तान ने न सिर्फ दो मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर की, बल्कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 की अंकतालिका में भी एक स्थान का फायदा हासिल किया।
युद्ध में दुश्मन की सबसे बड़ी ताकत मिसाइलें, रडार नहीं उसका इंजन और साथ ही साथ कड़वा सच तो यह भी है कि भारत ने परमाणु बम बनाए तो जरूर। चांद पर तिरंगा भी लहराया। लेकिन जब बात फाइटर जेट इंजन की आई तो हम दशकों तक दुनिया के सामने हाथ फैलाए खड़े थे। लेकिन रूस ने आंखें दिखाई। अमेरिका ने पाबंदियां लगाई और फ्रांस ने भी जेब खाली कर दी थी। लेकिन कैलेंडर पर 15 अगस्त 2026 की तारीख मार्क कर लीजिए क्योंकि इसी दिन भारत अपनी वायु सेना की आजादी का नया घोषणा पत्र लिखने जा रहा है। आपको बता दें कि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी कि सीसीएस की मेज़ पर आज वह गुप्त फाइल है जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा चार मुल्कों की लिस्ट में शामिल कर देगी जो अपना इंजन खुद बनाते हैं। सैफरन और साथ ही साथ जीटीआरई का 120 किल न्यूटन का यह महा इंजन जो है वो सिर्फ और सिर्फ एक मशीन नहीं बल्कि यह भारत की संप्रभुता की नई क्रांति है। आलोचकों ने यह कहा था कि इंजन बनाना रॉकेट साइंस से भी मुश्किल है। लेकिन पिछले एक साल में बता दें कि भारत ने पूरा गेम यहां पर पलट कर रख दिया है। अब हम सिर्फ सरकारी फाइल्स और HL के ऊपर भरोसा और निर्भर नहीं है। साथ ही साथ आपको बता दें कि Tata, LNT और BS जैसी जो प्राइवेट कंपनियां हैं अब इस रेस में वो भी कूद चुकी हैं। और ध्यान देने वाली बात यहां पर यह है कि इस डील का सबसे शॉकिंग सच क्या है? आज तक हमने जो भी विदेशी इंजन लिए उनकी चाबी कभी हमारे पास नहीं थी। इसे भी पढ़ें: Dubai के Jebel Ali Industrial Zone में 7 भीषण धमाके, धुएं के गुबार से सहमा UAE का ट्रेड हब आज सफरान डील में भारत 100% इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी यानी कि आईपी का मालिक होगा। यानी कि इंजन का ब्लूप्रिंट, सोर्स कोड सब कुछ भारत का भारत के हाथों में होने वाला है और साथ ही साथ इसमें कोई भी बदलाव करना हो या फिर किसी भी और देश का यहां पर इसको बेचना हो तो हमें फ्रांस से भी एनओसी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उसे मांगनी नहीं पड़ेगी। और सबसे खौफनाक टेक्नोलॉजी उसके बारे में बात कर लेते हैं। हॉट सेक्शन टेक्नोलॉजी फाइटर जेट इंजन के अंदर का तापमान 2100 केल्विन तक पहुंच जाता है। जहां पर लोहे का पानी बन जाता है। और आपको बता दें कि भारत अब वो सिंगल क्रिस्टल टरबाइन ब्लेड्स में बनाने जा रहा है जो इस भयंकर आग में भी चट्टान की तरह खड़े रहेंगे। यह वही आपको बता दें कि टेक है जिसे अमेरिका ने अपनी सबसे करीबी दोस्तों को देने से भी साफ-साफ मना कर दिया था। तो अब सवाल यह है कि यह राक्षसी ताकत जाएगी कहां? तो बता दें कि यह जो ताकत है वो जाएगी हमारे सपनों के विमान एमका में यानी कि एएमसीए में और भारत का पहला फिफ्थ जनरेशन स्टिल्थ फाइटर जेट। एक ऐसा विमान जो दुश्मन के रडार पर एक मच्छर से ज्यादा कुछ नहीं दिखेगा। इसे भी पढ़ें: Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन! आपको बता दें कि सैफरान का यह 120 किलो न्यूटन इंजन ना सिर्फ बेमिसाल ताकत रखता है बल्कि साथ ही साथ इसके लो इंफ्रारेड सिग्नेचर्स दुश्मन की गर्मी खोजने वाली मिसाइलों को भी अंधा बना देगा। योजना यहां पर बिल्कुल साफ है। मतलब प्लान बिल्कुल साफ है। पहले नौ प्रोडक्ट टाइप बनाए जाएंगे और उसके बाद फिर से अपग्रेड कर कर 140 किटन तक इसे लिया जाएगा जो आगे चलकर हमारे सिक्स्थ जनरेशन विमानों की रीड बनेगा। अब आप यहां पर कहेंगे कि हमें इतनी ज्यादा जल्दी क्यों हो रही है? तो जवाब है क्योंकि सीमा पार चीन बैठा है और चीन के पास जे 20 स्टील फाइटर हैं जिसमें से उसका जो 180 किलो वाला न्यूटन वाला WS15 इंजन लगा है। चीन ने रूस से टेक्नोलॉजी चुरा ली है। रिवर्स इंजीनियरिंग की है और साथ ही साथ आज लद्दाख बॉर्डर पर तैनात भी हैं। ईरान इजराइल युद्ध ने भी पूरी दुनिया को यहां पर साबित कर दिया है कि जंग में वही हथियार काम आते हैं जिनका सीधा-सीधा रिमोट कंट्रोल आपके खुद के हाथों में होता है। कावेरी प्रोजेक्ट की पुरानी नाकामियों से सीखकर अब भारत ने भी रिएक्टिव नहीं बल्कि साथ ही साथ प्रोएक्टिव तरीके से काम करना शुरू कर दिया है। 15 अगस्त 2026 की वो सुबह जब सीसीएस इस फाइल पर दस्तखत करेगी तो फिर वो सिर्फ और सिर्फ एक इंजन को मंजूरी नहीं दे रही होगी।
US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले- जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ टकराव के दौरान अमेरिकी सेना का गोला-बारूद का भंडार काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास गोला-बारूद का बहुत बड़ा भंडार है और चेतावनी दी कि जो लोग सेना के भंडार के बारे में जानकारी लीक करेंगे, उन पर मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें लंबी जेल की सजा हो सकती है। ट्रंप की यह टिप्पणी CNN की एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें कई सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि ईरान के साथ टकराव के बाद अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने कुछ खास तरह के गोला-बारूद, खासकर एयर डिफेंस इंटरसेप्टर के भंडार में भारी कमी को लेकर चिंता जताई थी। इसे भी पढ़ें: वॉशिंगटन के आसमान में Donald Trump पर मंडराया मौत का साया? राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर के सामने अचानक आ गया पैसेंजर प्लेन! ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा अमेरिका के पास गोला-बारूद का बहुत बड़ा भंडार है, खासकर कुछ खास तरह के गोला-बारूद का। इसके अलावा, ज़रूरत के हिसाब से बड़ी मात्रा में इनका उत्पादन किया जा रहा है और अमेरिका भेजा जा रहा है। रक्षा कंपनियां हमारे देश के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्लांट और फैक्ट्रियां बना रही हैं। देशद्रोह जैसी बातें लीक करने वालों का पता लगाया जा रहा है। उन्हें लंबी जेल की सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी!CNN ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने अहम मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए अपने इंटरसेप्टर का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। साथ ही, सीनियर कमांडरों ने चेतावनी दी है कि पेंटागन के कुछ स्टॉक चिंताजनक स्तर तक कम हो गए हैं। इसे भी पढ़ें: Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन! रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेंट्री के हालिया आकलन की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने बताया कि युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में अमेरिकी सेना ने अपने 'टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस' (THAAD) मिसाइल स्टॉक का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है और संघर्ष के दौरान अपने 'पैट्रियट' इंटरसेप्टर का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि THAAD स्टॉक में आई इस कमी के पैमाने का खुलासा पहले सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया था। 'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़' (CSIS) का अनुमान है कि ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास लगभग 452 THAAD मिसाइलें और दो सबसे आधुनिक वेरिएंट वाले लगभग 2,200 पैट्रियट इंटरसेप्टर मौजूद थे।
रूस की एक प्रमुख सैन्य ड्रोन निर्माता कंपनी 'यूरालड्रोनजावोड' के सीईओ व्लादिमीर त्काचुक मंगलवार देर रात एक कार विस्फोट घटना के बाद गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। रूसी समाचार एजेंसी 'टास' ने बुधवार को आपातकालीन सेवाओं के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी।
Red Sea Crisis | सऊदी टैंकर Daisy पर हूतियों का Missile Attack, अदन की खाड़ी में बढ़ा भारी तनाव
यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने अदन की खाड़ी में सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल से सफलतापूर्वक हमला किया है। ईरान का समर्थन करने वाला यह समूह इस इलाके में सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ अपना अभियान जारी रखे हुए है। टेलीग्राम पर जारी एक बयान में हूतियों ने दावा किया कि सऊदी तेल टैंकर 'डेज़ी' को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया और कहा कि जहाज पर हमला हुआ और उसे अपना रास्ता बदलने पर मजबूर होना पड़ा। बयान में कहा गया अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर डेज़ी को बैलिस्टिक मिसाइल से सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। ईश्वर की कृपा से इस ऑपरेशन का मकसद पूरा हुआ। जहाज पर हमला हुआ और उसे वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। इसे भी पढ़ें: Indian Cargo Ship Attack | Red Sea में भारतीय कार्गो जहाज़ पर हमला, डूबने के बाद 13 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया, विदेश मंत्रालय ने जताई सख्त आपत्ति हूतियों ने कहा कि यह हमला लाल सागर में खासकर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्ते सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी के तहत किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे सऊदी तेल जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेंगे। बयान में आगे कहा गया यह हमला सऊदी दुश्मन के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने के तहत किया गया है, जो 'नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी' के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें आगे कहा गया कि हम सऊदी तेल टैंकरों की हर गतिविधि पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। जब तक हमारे लोगों की जायज़ मांगें पूरी नहीं हो जातीं और नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती, तब तक हम किसी भी जहाज को - चाहे वह दक्षिणी लाल सागर से आ रहा हो या उत्तरी लाल सागर से गुजरने नहीं देंगे। यह दावा हुतियों द्वारा उत्तरी लाल सागर में सऊदी तेल टैंकर पर एक और हमले की घोषणा के एक दिन बाद किया गया है। इसे भी पढ़ें: बर्दाश्त नहीं...लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन! हुती प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि सऊदी बंदरगाह शहर यानबू के तट के पास बैलिस्टिक मिसाइलों से वफ़ा टैंकर को निशाना बनाया गया। सरी ने X पर शेयर किए गए एक बयान में कहा अल्लाह की कृपा से हमला सटीक रहा। हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि 'वफ़ा' पर हमले के साथ ही, 22 जुलाई को अपना समुद्री अभियान शुरू होने के बाद से इस समूह द्वारा निशाना बनाए गए सऊदी तेल जहाजों की संख्या आठ हो गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि लाल सागर और अरब सागर में 29 सऊदी तेल जहाजों को उनके रास्ते पर आगे बढ़ने से रोका गया या उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया। इस बीच, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने 5 अगस्त को इस क्षेत्र में समुद्र से जुड़ी दो अलग-अलग घटनाओं की जानकारी दी।
Trump Tariff Refund threatened world with tariffs finds himself cornered US will haveo refund $100 billion Trump Tariff Refund: दुनिया को टैरिफ का डर दिखाते-दिखाते खुद फंसे ट्रंप, अमेरिका को लौटाने होंगे 100 अरब डॉलर
Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन!
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच हुए सैन्य टकराव ने कुछ हफ्तों पहले पूरी दुनिया की सांसे रोक दी थी। ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले जवाब में ईरान की मिसाइल कारवाई और फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते स्टेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ग्लोबल तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई थी। लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई। कई कमर्शियल जहाजों ने अपना रोड बदल लिया और दुनिया भर में आशंका जताई जाने लगी थी कि अगर यह संकट लंबा चला तो उर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ेगा। लेकिन अब इसी हुरमूस को लेकर एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान और ओमान ने स्टेट ऑफ हुरमूस के लिए एक नए शिपिंग मॉडल पर एक सहमति बना ली है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच नए समुद्री कॉरिडोर के भौगोलिक कोऑर्डिनेट्स पर सहमति बन चुकी है और अब संयुक्त बयान को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Hormuz Strait जल्द खुलने के आसार, Donald Trump बोले- Iran से समझौता नहीं हुआ तो होगा 'बड़ा प्रहार' ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता स्माइल बगई ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। जबकि ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबादी ने कहा कि वार्ता बुनियादी समझौतेों तक पहुंच चुकी है और प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है। प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक फारस की खाली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल जहाजों का मुख्य मार्ग ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इससे तेरान को खाली में आने वाले जहाजों की निगरानी करने का अधिकार मिलेगा। वर्तमान व्यवस्था में जहाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिपिंग लेन का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें ना तो ईरान और ना ही ओमान से अलग से अनुमति लेने की जरूरत होती है। नए मॉडल के तहत मौजूदा अस्थाई शिपिंग लेनों को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। इनमें ईरान के लहराक द्वीप के पास का उत्तरी मार्ग और ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाला दक्षिणी मार्ग शामिल है। इनकी जगह एक नया कॉरिडोर बनाया जाएगा जिसका अधिकांश हिस्सा ईरानी समुद्री सीमा में और शेष हिस्सा ओमान के समुद्री क्षेत्र में होगा। इसे भी पढ़ें: बहुत मुश्किल...Mojtaba Khamenei को लेकर ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने क्या बड़ा खुलासा किया? फाइनल ड्रॉफ्ट तैयार दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ईरान और ओमान के बातचीत करने वालों ने जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को फिर से खोलने के लिए समझौते का ड्राफ़्ट तैयार कर लिया है और वे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की अंतिम मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहे हैं। माना जाता है कि युद्ध की शुरुआती कार्रवाई में खामेनेई घायल हो गए थे और तब से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। बातचीत की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने इस संभावित समझौते को जलडमरूमध्य को लेकर चल रहे विवाद का एक अस्थायी समाधान बताया। उन्होंने कहा कि यह जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौते से जुड़ा है, जिसका मकसद लड़ाई खत्म करना और जलमार्ग को फिर से खोलना था, लेकिन वह समझौता अंततः विफल हो गया था। निजी बातचीत के बारे में बताने के लिए नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले अधिकारियों ने कहा कि यह संभावित समझौता अमेरिका और ईरान के लिए तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने का रास्ता साफ़ करेगा। इससे पहले, उन्होंने कहा था कि संभावित समझौते के तहत जहाज़ ईरान के कंट्रोल वाले रास्ते से फ़ारस की खाड़ी में प्रवेश करेंगे और ओमान के कंट्रोल वाले रास्ते से बाहर निकलेंगे। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा देने और समुद्री पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सर्विस फ़ीस ली जाएगी।
ईरान में अंदरूनी कलह की आहट? राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सुप्रीम लीडर से बातचीत को लेकर दिया बड़ा बयान
ईरान में अंदरूनी कलह की आहट? राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सुप्रीम लीडर से बातचीत को लेकर दिया बड़ा बयान
अजिंक्य रहाणे के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद एक बार फिर बीसीसीआई की पेंशन योजना चर्चा में है। आखिर पूर्व भारतीय क्रिकेटरों को कितनी पेंशन मिलती है, कौन किस श्रेणी में आता है और किन परिस्थितियों में भुगतान रुक सकता है?
बहुत मुश्किल...Mojtaba Khamenei को लेकर ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने क्या बड़ा खुलासा किया?
ईरान के नेतृत्व में तनाव की खबरों के बीच, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से बातचीत करना इस समय बहुत मुश्किल हो गया है। 56 साल के खामेनेई अपने पिता, पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह लेने के बाद से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उनके पिता की मौत अमेरिका-इजरायल के हमले में हुई थी, जिसमें खबरों के मुताबिक मोजतबा खामेनेई भी घायल हो गए थे। सार्वजनिक रूप से दिखाई न देने के बावजूद, पेज़ेशकियन ने ज़ोर देकर कहा कि खामेनेई इस टकराव पर ईरान की प्रतिक्रिया तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के बीच Iran क्या बना पाएगा परमाणु हथियार खामेनेई पर पेज़ेशकियन AFP के अनुसार, पेज़ेशकियन ने कहा कि इस समय उनसे बातचीत करना बहुत मुश्किल है, लेकिन किसी भी स्थिति में, उनकी मौजूदगी हमारे लिए ताकत का बहुत बड़ा स्रोत है ताकि हम आगे बढ़ सकें। हालांकि खामेनेई ने पद संभालने के बाद से लिखित बयान जारी किए हैं, लेकिन अमेरिका के साथ चल रहे टकराव के दौरान सार्वजनिक रूप से उनके कम दिखने की वजह से वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेताओं के साथ उनके रिश्तों को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। वे पिछले महीने अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए थे। आपसी मतभेद की बातों को खारिज करते हुए, पेज़ेशकियन ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के साथ सार्थक बैठकें की हैं और बताया कि उन्होंने उनके साथ दयालुता और बहुत ठोस तर्क के साथ व्यवहार किया। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा दुर्भाग्य से, मौजूदा हालात कुछ बुरे इरादे वाले लोगों को उनके बारे में अलग तरह से बात करने और उनकी एक अलग छवि पेश करने का मौका देते हैं। इसे भी पढ़ें: Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमान लीडरशिप में मतभेदों की खबरें पेज़ेशकियान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मीडिया में ईरान की लीडरशिप के बीच बढ़ते मतभेदों की खबरें आ रही हैं। इज़राइली ब्रॉडकास्टर 'चैनल 14' ने तेहरान के घटनाक्रम से वाकिफ़ सूत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि खामेनेई ने राष्ट्रपति को आखिरी अल्टीमेटम दिया था और संघर्ष व बातचीत से जुड़े अहम फैसलों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी का समर्थन किया था। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि खामेनेई ने पेज़ेशकियान को इस्तीफ़ा देने से रोकने की कोशिश नहीं की, जिससे राष्ट्रपति का राजनीतिक प्रभाव कमज़ोर हो गया। चैनल 14 के मुताबिक, पेज़ेशकियान ने नीतिगत मतभेदों के दौरान कई बार इस्तीफ़ा देने की धमकी दी थी और मई में औपचारिक रूप से अपना इस्तीफ़ा भी पेश किया था। उनका तर्क था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसलों में उनके प्रशासन को काफी हद तक दरकिनार कर दिया गया था।
बाल-बाल बचे डोनाल्ड ट्रंप, हेलिकॉप्टर के बेहद करीब आ गया यात्री विमान; किससे हुई चूक?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के हेलिकॉप्टर 'मरीन वन' और एक यात्री विमान के बीच वाशिंगटन में टकराने की स्थिति बनते-बनते बची। दोनों विमान बेहद करीब आ गए थे, जिसके बाद इस घटना की जांच शुरू हो गई है।
पैटरनिटी लीव लेने पर बैंक ने नौकरी से निकाला, कोर्ट में मुकदमे के बाद देने पड़ गए 19 करोड़ रुपये!
मैनेजर ने आरोप लगाया कि लीव लेने के बाद बैंक ने उन्हें निशाना बनाया और नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने अपने बचाव में कई दलीलें दीं लेकिन कोर्ट ने कर्मचारी के हक में फैसला सुनाया।
क्या बांग्लादेश में लोकतांत्रिक असहमति के लिए जगह बची है? यह सवाल तब फिर चर्चा में आ गया, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल होने वाले पूर्व क्रिकेटर और अवामी लीग के नेता शाकिब अल हसन के घर पर हमला किया गया। क्या बांग्लादेश में मीडिया स्वतंत्र है? यह सवाल तब फिर चर्चा में आ गया जब बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार के फतवे का पालन करते हुए हर मीडिया संस्थान ने शेख हसीना के भाषण को अपने प्रकाशन या प्रसारण में कोई जगह नहीं दी। देखा जाये तो बांग्लादेश में साफ नजर आ रहा है कि शेख हसीना भले वापस लौटने की बात कह कर अपने समर्थकों में उत्साह भरने का प्रयास कर रही हों लेकिन तारिक रहमान सरकार हसीना की पार्टी को अलग थलग करने और उनके समर्थकों का उत्साह ठंडा करने तथा उनको कहीं से भी समर्थन नहीं मिलने देने की नीति पर अडिग है। दिल्ली में हुए कार्यक्रम के दौरान भले शेख हसीना की पार्टी के नेताओं ने बड़ी बड़ी हुंकारें भरी हों लेकिन उनको रोकने के लिए बांग्लादेश सरकार भी तूफानी गति से रणनीति बनाने में जुटी हुई है। 2024 की 'अगस्त क्रांति' के चलते बांग्लादेश से भागने पर मजबूर हुईं शेख हसीना 'दिसंबर क्रांति' की सफलता की कल्पना कर रही हैं मगर उसको विफल करने के लिए ढाका हर तरह से तैयारी कर रहा है। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina दिसंबर में Bangladesh लौटेंगी, कहा- गिरफ्तारी या मौत का डर नहीं जहां तक नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब में वर्चुअल माध्यम से शेख हसीना के संबोधन की बात है तो आपको बता दें कि उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और गिरफ्तारी की आशंका से भयभीत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश को सही रास्ते पर लाने के लिए होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें जेल भी जाना पड़े तो भी वह अपने देश लौटेंगी। अपने संबोधन में हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली का समर्थन करने की अपील की और अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाने, राजनीतिक बंदियों की रिहाई, अभिव्यक्ति और मीडिया की स्वतंत्रता बहाल करने तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने जैसी मांगें रखीं। हसीना ने 2024 के जुलाई विद्रोह को स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सत्ता परिवर्तन अभियान बताया। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन अंतरिम प्रशासन के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के पुराने बयानों से भी इस दिशा में संकेत मिलते हैं। इसी कार्यक्रम में हसीना के पुत्र और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता सजीब वाजेद जॉय ने भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश एक विफल राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है और यदि मौजूदा हालात जारी रहे तो भविष्य में यह क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकवाद का बड़ा केंद्र बन सकता है। जॉय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की आईएसआई को बांग्लादेश में खुली छूट मिल गई है, अवामी लीग सरकार के दौरान गिरफ्तार किए गए सैकड़ों दोषी आतंकियों को रिहा कर दिया गया है, प्रतिबंधित संगठन खुलेआम मार्च कर रहे हैं और अल-कायदा से जुड़े लोगों को सार्वजनिक मंच मिल रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए भी इसे सुरक्षा चुनौती बताया और भारतीय मीडिया से इस विषय को लगातार उठाने की अपील की। जॉय ने यह भी आरोप लगाया कि अवामी लीग को राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लंबे समय से बिना मुकदमे या जमानत के हिरासत में रखा गया है, जबकि पार्टी से सहानुभूति रखने वाले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर भी कार्रवाई हुई है। उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके कार्यक्रम से पहले भारतीय मीडिया संस्थानों तक दबाव बनाने की कोशिश की गई। उधर, शेख हसीना के संबोधन के कुछ ही घंटों बाद पूर्व बांग्लादेश क्रिकेट कप्तान और अवामी लीग के पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के मगुरा स्थित घर पर हमला हुआ। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोटरसाइकिलों पर पहुंचे कुछ लोगों ने घर के मुख्य गेट पर पेट्रोल बम जैसी वस्तु फेंकी, जिससे आग लगी, लेकिन पड़ोसियों ने समय रहते आग बुझा दी। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस्तेमाल की गई वस्तु वास्तव में पेट्रोल बम थी या कुछ और। घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था। यह हमला ऐसे समय हुआ जब शाकिब अल हसन शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम में दिखाई दिए थे। इसी कारण अवामी लीग समर्थक इस घटना को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ रहे हैं। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक हमले के पीछे किसी राजनीतिक उद्देश्य की पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने शेख हसीना को फरार दोषी बताते हुए उनके कार्यक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि भारत में इस कार्यक्रम के आयोजन से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली में आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह निजी था और भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी ढाका ने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदायक बताया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत को पहले ही इस कार्यक्रम के संभावित कूटनीतिक प्रभावों से अवगत करा दिया गया था, इसके बावजूद शेख हसीना को भारतीय धरती से मीडिया को संबोधित करने की अनुमति देना बांग्लादेश की जनता की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। मंत्रालय ने शेख हसीना के बयानों को जुलाई-अगस्त 2024 की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र के निष्कर्षों को नकारने का प्रयास बताते हुए इसे बांग्लादेश की संप्रभुता और 'जुलाई क्रांति' के शहीदों का अपमान करार दिया। साथ ही ढाका ने एक बार फिर 2013 की भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना के प्रत्यर्पण की अपनी मांग दोहराई, जबकि भारत ने दोहराया कि यह कार्यक्रम फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया द्वारा आयोजित निजी आयोजन था और सरकार ने न तो इसका आयोजन किया और न ही इसका समर्थन किया। बहरहाल, इन घटनाओं ने बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल, विपक्ष की भूमिका, मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति तथा भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर अवामी लीग मौजूदा व्यवस्था पर राजनीतिक दमन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में कमी और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार शेख हसीना और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए है और उससे जुड़े लोग खुलेआम चेतावनी दे रहे हैं कि शेख हसीना को बांग्लादेश लौटने पर फांसी पर चढ़ा दिया जायेगा। ऐसे में शेख हसीना की दिसंबर में प्रस्तावित वापसी और उसके बाद की राजनीतिक परिस्थितियों पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी रहेगी।
अदन की खाड़ी में यमन के दक्षिणी तट के पासएक टैंकर ने अपने नजदीक तेज धमाके की आवाज सुनने की सूचना दी है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों को निशाना बनाने के नए अभियान के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ गया है।
'30 मिनट में जेल से बाहर होंगे इमरान खान', PTI ने तय कर ली डेडलाइन
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में तीन साल की कैद पूरी होने के बीच उनकी पार्टी PTI ने सरकार को बड़ा अल्टीमेटम दिया है. खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी ने कहा कि अगर इमरान खान और उनकी पत्नी के मामलों में न्याय नहीं मिला और जेल में मुलाकातों पर लगी रोक नहीं हटी, तो 27 सितंबर को समर्थक इस्लामाबाद की ओर मार्च करेंगे.
टैरिफ के पैसे वापस करेगा अमेरिका! ट्रंप के फैसले से भारतीय कंपनियों को मिल सकता है बड़ा फायदा
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कितने जुल्म छिपाएगा पाकिस्तान? ब्रिटेन पहुंचा PoK में नागरिकों के दमन का मामला, सड़क पर उतरे लोग
प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटिश सरकार, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से PoK में पाकिस्तान द्वारा की गई बर्बर कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पाकिस्तान यहां लगातार लोगों के अधिकारों को कुचल रहा है।
अमेरिका जाने की है तैयारी?: जान लें USCIS का नया नियम, वरना अधूरा आवेदन पड़ सकता है भारी
अमेरिका जाने की है तैयारी?: जान लें USCIS का नया नियम, वरना अधूरा आवेदन पड़ सकता है भारी- Planning to go to US Know new USCIS rule otherwise an incomplete application could cost you dearly
क्या 194 साल तक जिंदा रहेंगे पुतिन, क्या सच में अमर हो सकता है इंसान ? जानिए लम्बी उम्र का रहस्य
क्या 194 साल तक जिंदा रहेंगे पुतिन, क्या सच में अमर हो सकता है इंसान ? जानिए लम्बी उम्र का रहस्य
एनसी सांसद मोहम्मद रमजान का भारत के खिलाफ बयान, PoJK को अलग देश बताया
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल पूरे होने पर एक बार फिर यह मुद्दा सुर्खियों में है। इस बार चर्चा की वजह नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के सांसद मोहम्मद रमजान का बयान है। उन्होंने पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर (PoJK) को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। […]
अमेरिका और इजरायल के हमले में घायल ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई गायब हैं, लेकिन उनके संदेश समय समय पर आते रहते हैं। अब राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने उनसे मुलाकात की है। जानें पेजेश्कियान ने क्या बताया?
ईरानी राष्ट्रपति Pezeshkian का America पर बड़ा हमला!
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि दोनों देशों ने कम समय में ईरान पर नियंत्रण की उम्मीद की थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वहीं ईरान ने अमेरिका के साथ किसी नई वार्ता से इनकार किया है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बाहरी दखल स्वीकार नहीं करने का अपना रुख दोहराया है.
US Court में भारतीय मकान मालिक Venkatachalam Mani पर यौन उत्पीड़न का केस दर्ज
वाशिंगटन, छह अगस्त अमेरिका की संघीय सरकार ने पेनसिल्वेनिया में एक महिला किरायेदार के यौन उत्पीड़न के आरोप में एक भारतीय मकान मालिक के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। पेनसिल्वेनिया के ‘मिडल डिस्ट्रिक्ट’ की ‘यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ में बुधवार को दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि स्टेट कॉलेज नगर क्षेत्र में मकान मालिक वेंकटचलम मणि ने महिला किरायेदार का यौन उत्पीड़न किया और जब महिला ने उसका विरोध किया तो मणि ने मकान की मरम्मत के लिए बार-बार उसके अनुरोधों को नजरअंदाज किया। अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने कहा, ‘‘ऐसा आचरण गैरकानूनी है। न्याय विभाग महिला किरायेदारों के उस अधिकार की रक्षा करेगा, जिसके तहत वे मकान मालिक द्वारा यौन उत्पीड़न के खतरे के बिना आवास में रह सकें।’’मुकदमे में महिला किरायेदार और उसके बच्चों के लिए आर्थिक मुआवजे तथा भविष्य में भेदभाव रोकने के लिए अदालत से आदेश जारी करने की मांग की गई है। पेनसिल्वेनिया के ‘मिडल डिस्ट्रिक्ट’ के अमेरिकी अटॉर्नी ब्रायन डी. मिलर ने कहा, ‘‘यौन संबंध का दबाव बनाने के लिए मकान मालिकों द्वारा किरायेदारों का शोषण करने, उनका यौन उत्पीड़न करने और उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करने के प्रयासों को पेनसिल्वेनिया के ‘मिडल डिस्ट्रिक्ट’ में कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’जांच के बाद विभाग ने पाया कि मणि ने निष्पक्ष आवास अधिनियम का उल्लंघन करते हुए आवेदक के साथ भेदभाव किया।
PoK Election: शुरुआती दो चरणों की 34 में से 24 सीटें जीतकर PML-N की वापसी तय
इस्लामाबाद, छह अगस्त (एपी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों के नतीजों में बुधवार को सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने स्पष्ट बढ़त बना ली। यह बढ़त ऐसे समय मिली है, जब पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं और एक प्रतिबंधित संगठन ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया हैं। क्षेत्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता राजा शकील ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल-एन समर्थित उम्मीदवारों ने पहले दो चरणों में 34 में से 24 सीट पर जीत हासिल की है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय राजधानी मुजफ्फराबाद में मतदान 56 प्रतिशत से अधिक रहा। शकील ने कहा कि शेष 11 सीट के लिए मतदान 10 अगस्त को होगा, लेकिन पार्टी अगली क्षेत्रीय सरकार बनाने की स्थिति में पहले ही पहुंच चुकी है। इसके साथ ही एक दशक बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सत्ता में वापसी तय मानी जा रही है। शकील ने बताया कि सुरक्षा चिंताओं और भारी मानसूनी बारिश के कारण चुनाव तीन चरण में कराए जा रहे हैं। बारिश के कारण चुनाव प्रचार प्रभावित हुआ और खुले मैदान में बड़ी जनसभाओं का आयोजन मुश्किल हो गया। क्षेत्रीय सरकार और चुनाव अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा चिंताओं तथा प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा चुनाव बहिष्कार की अपील के बावजूद मुजफ्फराबाद सहित कई क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। जेएएसी हिंसक प्रदर्शनों के लिए कुख्यात रहा है। नवाज शरीफ ने एक बयान जारी कर विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी। भारत और पाकिस्तान, दोनों कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों का प्रशासन चलाते हैं, लेकिन दोनों ही पूरे कश्मीर पर अपना दावा करते हैं। रविवार को मतदान से पहले जेएएसी समर्थकों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुईं। हालांकि स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा की आशंका के बावजूद उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को मजबूत किया है, क्योंकि लोगों ने कई सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शनों, हिंसा और बहिष्कार अभियान के बावजूद मतदान किया। विवाद का मुख्य कारण 12 आरक्षित सीट हैं, जो ब्रिटिश शासन समाप्त होने के बाद भारत के हिस्से वाले कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए निर्धारित की गई हैं। जेएएसी का तर्क है कि इन सीटों के कारण पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से बाहर रहने वाले लोगों को असंगत राजनीतिक प्रभाव मिलता है। संगठन इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब जून में क्षेत्र के उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया कि ये सीटें संविधान द्वारा संरक्षित हैं और संवैधानिक संशोधन के बिना इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता। अधिकारी अक्सर जेएएसी समर्थकों पर चुनाव बाधित करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हैं। उनका यह भी आरोप है कि पाकिस्तानी तालिबान के सदस्य इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो गए थे। हालांकि जेएएसी ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वर्ष 2023 में गठित जेएएसी कश्मीर के लोगों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहा है। सरकार का कहना है कि उसने संगठन की 38 में से 36 मांग स्वीकार कर ली हैं, जबकि आरक्षित सीटों का मुद्दा केवल विधानसभा के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है।
USCIS ने अधूरे आव्रजन आवेदन खारिज करने का अधिकार बहाल किया, नए नियम लागू हुए
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, छह अगस्त अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने आव्रजन अधिकारियों का विवेकानुसार यह निर्णय लेने का अधिकार फिर से बहाल कर दिया है कि यदि कोई आवेदक अधूरा आवेदन जमा करता है या पात्रता साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता, तो उसकी आव्रजन लाभ संबंधी याचिका सीधे खारिज की जा सकती है। पहले की नीति के तहत, यदि किसी आव्रजन अधिकारी ने आवेदन पर अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज मांगे थे, तो आवेदक को 12 सप्ताह का समय दिया जाता था। यह व्यवस्था वीजा, ग्रीन कार्ड, नागरिकता, आव्रजन स्थिति में बदलाव या उसके विस्तार से जुड़े आवेदनों पर लागू थी। इसके अलावा, यदि साक्ष्य के लिए अनुरोध (आरएफई) या आवेदन खारिज करने के आशय का नोटिस (एनओआईडी) अमेरिका के बाहर डाक से भेजा जाता था, तो जवाब देने की समय-सीमा में 14 दिन और जोड़ दिए जाते थे। यूएससीआईएस ने बुधवार को जारी बयान में कहा, ‘‘आवेदक की जिम्मेदारी है कि वह आवेदन दाखिल करते समय यह साबित करे कि वह मांगे गए आव्रजन लाभ के लिए पात्र है और निर्णय होने तक उसकी पात्रता बनी हुई है।’’एजेंसी ने कहा कि यदि कोई आवेदक अपनी पात्रता साबित करने में विफल रहता है या आवेदन के पास आवश्यक प्रारंभिक दस्तावेज जमा नहीं करता है, तो यूएससीआईएस बिना आरएफई या एनओआईडी जारी किए भी आवेदन खारिज कर सकता है। नयी नीति तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है और यह लंबित आवेदनों के साथ-साथ नए आवेदनों पर भी लागू होगी। नयी व्यवस्था के तहत आव्रजन अधिकारी आवश्यक प्रारंभिक दस्तावेजों के अभाव में आवेदन खारिज कर सकते हैं, आवेदन दाखिल करते समय पात्रता स्थापित न होने पर उसे अस्वीकार कर सकते हैं या यदि उन्हें उचित लगे तो अतिरिक्त साक्ष्य मांगने के लिए आरएफई जारी कर सकते हैं। यूएससीआईएस ने विशेष रूप से यह चिंता जताई कि कुछ आवेदक जानबूझकर अधूरे आवेदन दाखिल कर रहे थे ताकि मूल आवेदन पर अंतिम फैसला आने तक वे रोजगार परमिट जैसे अन्य आव्रजन लाभ हासिल कर सकें।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान और ओमान 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते के करीब पहुंच गए हैं। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि इस मार्ग को पूरी तरह खोलने का अंतिम निर्णय तीसरे पक्षों—विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका—के रुख पर निर्भर करेगा। जाहिर है, उनका इशारा अमेरिका (US) की तरफ है, जो मानता है कि यह रणनीतिक जलमार्ग सभी व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज़ पर ईरान का असल नियंत्रण है, लेकिन उसके विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ओमान के साथ डील का ड्राफ्ट साइन होने के लिए तैयार है, जबकि अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट को फिर से खोलने का समझौता 'जल्द ही' होने वाला है। इसे भी पढ़ें: Meta ने PM Modi का वीडियो हटाने पर मांगी माफी, ग्लोबल अफेयर्स चीफ Joel Kaplan ने स्वीकारी गलती AFP ने बघाई के हवाले से कहा, दोनों पक्षों ने रूट के भौगोलिक को-ऑर्डिनेट (स्थान की जानकारी) पर सहमति बना ली है और अगर कुछ तीसरे पक्ष इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डालते हैं, तो दोनों देशों का संयुक्त बयान - जिसमें मुख्य बातें और सहमति के बिंदु शामिल हैं - भी अंतिम समीक्षा और ड्राफ्टिंग के चरण में है। उन्होंने आगे कहा, होर्मुज़ स्ट्रेट को असुरक्षित बनाने वाले कारक अभी भी अमेरिका की तरफ से मौजूद हैं, खासकर नौसैनिक नाकेबंदी और ईरान व उसके हितों के खिलाफ अन्य आक्रामक और धमकी भरे कदम। होर्मुज़ का महत्व दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल होर्मुज़ से होकर गुजरता है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन का संतुलन बनाए रखने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन लगभग पांच महीने पहले संघर्ष शुरू होने के बाद से, दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ी हैं, जिससे अमेरिका पर अपने सैन्य अभियानों को खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है। इसे भी पढ़ें: अमेरिका का बड़ा झटका! भारतीय छात्रों के छात्र वीजा में 62% की भारी गिरावट, पढ़ाई और नौकरी के सपनों पर फिरा पानी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड बुधवार को 80 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जो संघर्ष शुरू होने के बाद बढ़ी कीमतों के स्तर से कम था। क्या होर्मुज़ डील संघर्ष को खत्म कर सकती है? AP द्वारा बताए गए क्षेत्रीय अधिकारियों का कहना है कि ओमान के साथ डील के ड्राफ्ट के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई की मंजूरी की जरूरत होगी, जिन्हें इस साल की शुरुआत में उनके पिता और पूर्ववर्ती अयातुल्ला अली खमेनेई की मौत के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। हालांकि, उन्होंने इस डील को होर्मुज़ को लेकर विवाद का एक अस्थायी समाधान बताया। उन्होंने यह भी कहा कि यह डील उस समझौते से जुड़ी है जिस पर अमेरिका और ईरान ने जून में साइन किए थे, लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच एक-दूसरे पर हमले फिर से शुरू होने के कारण वह समझौता टूट गया था। हालांकि, उनका कहना था कि इस संभावित डील से अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत फिर से शुरू करने का रास्ता भी साफ होगा। इससे पहले, उन्होंने कहा था कि संभावित समझौते के तहत जहाज ईरान के कंट्रोल वाले रास्ते से फारस की खाड़ी में आएंगे और ओमान के कंट्रोल वाले रास्ते से बाहर निकलेंगे। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा देने और समुद्री पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सर्विस फीस ली जाएगी। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि ईरान का फीस लेना समझौते के खिलाफ है और होर्मुज सभी जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
दुनिया का इकलौता शहर जहां लोगों को मरने की इजाजत नहीं, आखिर क्यों बनाया गया ऐसा अजीब नियम?
दुनिया का इकलौता शहर जहां लोगों को मरने की इजाजत नहीं, आखिर क्यों बनाया गया ऐसा अजीब नियम?
PoK में कत्लेआम का ब्रिटेन में विरोध, मुनीर आर्मी की हिंसा का पर्दाफाश
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले दो महीनों की कार्रवाई से आम लोग, खासकर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हुए हैं, इसलिए अब पारदर्शी जांच, जवाबदेही, बुनियादी आजादियों की हिफाजत और अंतरराष्ट्रीय निगरानी जरूरी है.
अमेरिका में पढ़ाई और उसके बाद नौकरी का सपना देखने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों—विशेषकर भारतीयों—के लिए आंकड़े चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में भारतीय छात्रों को जारी किए जाने वाले अमेरिकी छात्र वीजा (F-1 Visa) में 62 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में अस्थायी रोजगार देने वाले 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की सिफारिश की गई है। छात्र वीजा के आंकड़ों में बड़ा अंतर सीआईएस (CIS) के वरिष्ठ कानूनी फेलो जॉर्ज फिशमैन द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में मई से अगस्त की मुख्य अवधि को आधार बनाया गया है, क्योंकि नए शैक्षणिक सत्र के लिए अधिकांश F-1 वीजा इसी दौरान जारी किए जाते हैं। भारतीय छात्र: अमेरिका ने 2024 में भारतीयों को 58,694 छात्र वीजा जारी किए थे, जो 2025 में 62% घटकर महज 22,149 रह गए। चीनी छात्र: चीन के छात्रों को जारी किए गए वीजा में भी 34% की कमी आई है। 2024 में चीनी छात्रों को 61,075 वीजा मिले थे, जो 2025 में घटकर 40,034 हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी छात्रों को जारी किए गए वीजा में भी 34 प्रतिशत की कमी आई। वर्ष 2025 में चीन के छात्रों को 40,034 वीजा जारी किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 61,075 थी। इसी तरह, अमेरिका ने 2025 में भारतीय नागरिकों को 22,149 छात्र वीजा जारी किए, जबकि 2024 में यह संख्या 58,694 थी।अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संस्थान (आईआईई) की वार्षिक जनगणना के अनुसार, 2024-25 शैक्षणिक सत्र में अमेरिका के उच्च शिक्षा संस्थानों में 11,77,766 विदेशी छात्र अध्ययनरत थे। इसे भी पढ़ें: Meta ने PM Modi का वीडियो हटाने पर मांगी माफी, ग्लोबल अफेयर्स चीफ Joel Kaplan ने स्वीकारी गलती इनमें 3,63,019 छात्र भारत और 2,65,919 छात्र चीन से थे। दोनों देशों के छात्र मिलाकर कुल विदेशी छात्रों का 53 प्रतिशत थे। रिपोर्ट में आईआईई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में अमेरिका में पढ़ रहे 10 लाख से अधिक विदेशी छात्रों में से 2,94,253 छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ओपीटी कार्यक्रम के तहत अमेरिका में काम कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, ओपीटी कार्यक्रम के तहत काम कर रहे छात्रों में 49 प्रतिशत (1,43,740) भारतीय थे, जबकि 21 प्रतिशत (61,981) छात्र चीन से थे। फिशमैन ने कहा, ‘‘मैं ओपीटी कार्यक्रम को समाप्त करने की वकालत करता रहा हूं ताकि अमेरिकी छात्रों और कर्मचारियों के वेतन तथा रोजगार के अवसरों की रक्षा की जा सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि ऐसा नहीं भी होता है, तो भी भारत और चीन से आने वाले ओपीटी कार्यक्रम के छात्रों की संख्या कम करने से अमेरिकी छात्रों और कर्मचारियों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव कम होंगे क्योंकि ओपीटी प्रतिभागियों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इन्हीं दोनों देशों के छात्रों की है।’’ सीआईएस की रिपोर्ट में तुलना के लिए मई से अगस्त की अवधि को आधार बनाया गया है, क्योंकि आगामी शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए एफ-1 छात्र वीजा का अधिकांश हिस्सा इसी अवधि में जारी किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारतीय नागरिकों को जारी किए गए 77 प्रतिशत एफ-1 वीजा और चीनी नागरिकों को जारी किए गए 76 प्रतिशत एफ-1 वीजा मई से अगस्त के बीच ही जारी किए गए थे। OPT कार्यक्रम खत्म करने की वकालत क्यों? रिपोर्ट के लेखक जॉर्ज फिशमैन का मानना है कि OPT कार्यक्रम को बंद करने या इसमें कटौती करने से स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को फायदा होगा। जॉर्ज फिशमैन ने कहा, मैं ओपीटी (OPT) कार्यक्रम को समाप्त करने की वकालत करता रहा हूं ताकि अमेरिकी छात्रों और कर्मचारियों के वेतन तथा रोजगार के अवसरों की रक्षा की जा सके। इसे भी पढ़ें: Biocon का शुद्ध लाभ पहली तिमाही में 53.36% बढ़कर 136.8 करोड़ रुपये पहुंचा उन्होंने आगे कहा कि यदि इस योजना को पूरी तरह बंद नहीं भी किया जाता है, तब भी भारत और चीन से आने वाले OPT प्रतिभागियों की संख्या सीमित करने से अमेरिकी कार्यबल पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव कम होंगे, क्योंकि इस योजना में सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं दो देशों के स्नातकों का है।
मिस्र का रहने वाला परिवार, भारत से कनेक्शन... जानें कौन हैं अब्दुल सईद
अमेरिका के मिशिगन में डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी जीतकर अब्दुल अल-सईद ने हेली स्टीवंस को करीबी मुकाबले में पीछे छोड़ा और अब नवंबर में उनका सामना रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से होगा. बेंगलुरु और दुबई से जुड़े संपत्ति खुलासों के बीच उनकी जीत की काफी चर्चा हो रही है.
बाल-बाल बचे डोनाल्ड ट्रंप! पैसेंजर प्लेन के इतने करीब पहुंचा हेलीकॉप्टर कि सांसे अटक गईं; VIDEO
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ले जा रहा उनका मिलिट्री हेलीकॉप्टर और एक यात्री विमान वॉशिंगटन के आसमान में एक-दूसरे के बेहद करीब पहुंच गए। दोनों विमान के बीच की दूरी एक मील से भी कम रह गई थी।
US mass shooting: Several killed in mass shooting in US' North Carolina, News in Hindi - Mass Shooting In US: अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में अंधाधुंध गोलीबारी, कई लोगों की मौत; एक घायल का इलाज जारी
वॉशिंगटन के आसमान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ले जा रहा हेलिकॉप्टर 'मरीन वन' एक पैसेंजर प्लेन के खतरनाक रूप से बेहद करीब आ गया। दोनों उड़ानों के बीच की दूरी महज एक मील से भी कम रह गई थी, जिससे एक पल के लिए बड़ा हादसा होने का डर पैदा हो गया। हालांकि, पायलटों की सूझबूझ से सीधी टक्कर टल गई और एक बड़ा हादसा होने से बच गया। वाशिंगटन के एयर स्पेस में हुई इस गंभीर सुरक्षा चूक के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है, जबकि व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित थे। इस चूक में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ले जा रहा हेलिकॉप्टर इस हफ्ते की शुरुआत में वाशिंगटन के ऊपर एक पैसेंजर प्लेन के 'बहुत करीब' आ गया था। इसे भी पढ़ें: Meta ने PM Modi का वीडियो हटाने पर मांगी माफी, ग्लोबल अफेयर्स चीफ Joel Kaplan ने स्वीकारी गलती यह घटना संभवतः मंगलवार दोपहर को हुई, जब ट्रंप को ले जा रहा हेलिकॉप्टर 'मरीन वन' एक पैसेंजर प्लेन के एक मील से भी कम दूरी पर आ गया। पैसेंजर प्लेन देरी के कारण उसी समय हवा में था। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सीधी टक्कर का कोई तत्काल खतरा नहीं था। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा है कि ट्रंप की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ। उन्होंने AFP को बताया, मरीन वन की उड़ानें दुनिया के कुछ बेहतरीन पायलट उड़ाते हैं, और राष्ट्रपति को किसी भी समय कोई खतरा नहीं था। जांच शुरू अमेरिकी अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है, लेकिन 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) के अनुसार, रीगन वाशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। FAA ने एक बयान में कहा कि दूरी कम होने (loss of separation) के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोलर कमर्शियल विमान और मरीन वन हेलिकॉप्टर के पायलटों के सीधे संपर्क में था। बयान में कहा गया, राष्ट्रपति कभी खतरे में नहीं थे। हम घटना की समीक्षा जारी रखे हुए हैं और अपनी जांच के आधार पर कोई भी उचित सुधारात्मक कदम उठाएंगे। इसे भी पढ़ें: Delhi के LNJP Hospital समेत 3 अस्पतालों की संशोधित लागत मंजूर, जांच के आदेश नियम क्या कहता है? 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के अनुसार, ऐसी स्थिति में सुरक्षा उपायों के तहत क्षैतिज रूप से (horizontally) कम से कम 1.5 मील और लंबवत रूप से (vertically) 500 फीट की दूरी बनाए रखना जरूरी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मंगलवार की घटना, जो दोपहर करीब 2:30 बजे (1830 GMT) हुई, उसमें अमेरिकन एयरलाइंस का एम्ब्रेयर E-170 विमान शामिल था, जिसे उसकी सहायक कंपनी एनवॉय एयर (Envoy Air) ऑपरेट करती है। इसमें यह भी बताया गया कि मरीन वन एंड्रयूज एयर फोर्स बेस जा रहा था, जहां 80 वर्षीय ट्रंप कैलिफोर्निया जाने के लिए एयर फोर्स वन में सवार हुए। फिलहाल, न तो अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और न ही अमेरिकन एयरलाइंस ने इस घटना के बारे में कोई बयान जारी किया है। इस बीच, जनवरी 2025 में वाशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट के पास एक एयरलाइनर और आर्मी के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर की घातक टक्कर में 67 लोगों की मौत के बाद से FAA ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं।
मुक्केबाजों ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण समेत कुल 10 पदक जीते, जबकि साई की ओर से तीन स्वर्ण समेत कुल सात पदक का अनुमान लगाया गया था।
'Difficult to contact Mojtaba': Iranian President speaks amidst power struggle, what does Pezeshkian's mean? - 'मोजतबा से संपर्क करना मुश्किल': सत्ता संघर्ष के बीच बोले ईरानी राष्ट्रपति, पेजेश्कियन के इस बयान मायने क्या?
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चेतावनी लेबल का असर: लैटिन अमेरिकी देशों में घटी हानिकारक खाद्य पदार्थों की बिक्री, किन उत्पादों की मांग घटी?
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US प्रेसिडेंट की सुरक्षा में फिर बड़ी चूक!जेट से टकराने से बाल-बाल बचा ट्रंप का हेलीकॉप्टर, जाने पूरा मामला
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भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर की सीमा पर लंबे समय से अधूरा पड़ा सीमांकन का मुद्दा सुलझाने के लिए जमीन के आदान-प्रदान की संभावना पर चर्चा हो रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सीमा के कुछ इलाके अभी तय नहीं हुए […]
चांद से जा टकराया एलन मस्क का बेकाबू रॉकेट, स्कूल बस जितना बड़ा साइज; पृथ्वी के लिए खतरा?
एलन मस्क की कंपनी SpaceX का स्कूल बस के आकार का 4-टन वजनी रॉकेट 8,700 km/h की रफ्तार से चांद से टकरा गया है। जानें 18 महीने से भटक रहे इस मलबे के क्रैश की पूरी जानकारी।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने कहा कि हम दूसरे विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े हमले के लिए तैयार थे, लेकिन ईरान ने बातचीत करने का प्रस्ताव रखा।
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पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव: अदन की खाड़ी में हूतियों ने सऊदी अरब के टैंकर के पास किया धमाका; चालक दल सुरक्षित - Have Houthi rebels become active again Massive blast near tanker in Gulf of Aden crew safe
US China Trade War: ड्रोन को लेकर चीन का बड़ा दांव, छह अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध; व्यापारिक तनाव फिर बढ़ा---China Tightens Drone Export Controls and Blacklists Six US Companies in Response to Trade Curbs
शेख हसीना की मीडिया से बातचीत पर भड़का बांग्लादेश, भारत के साथ रिश्ते सुधारने पर भी बयान दिया
बांग्लादेश ने शेख हसीना को नरसंहार का दोषी करार दिया। वहीं, हसीना ने साफ किया कि वह जल्द ही बांग्लादेश लौटेंगी। उन्हें फांसी की सजा या जेल जाने का डर नहीं है।
बांग्लादेश के मशहूर पूर्व क्रिकेट कप्तान और पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के मागुरा जिले वाले घर पर हमला हुआ है। पुलिस के मुताबिक कुछ अज्ञात लोगों ने घर को नुकसान पहुंचाया और आग लगाने की कोशिश भी की। क्या हुआ था यह घटना मंगलवार रात करीब 9 बजे हुई। शाकिब का घर मागुरा शहर […]
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