तेल कंपनियों पर बिफरे ट्रंप: शवोन के CEO को अमेरिकी राष्ट्रपति की खरी-खरी, क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?--Trump Slams Chevron CEO, Demands Immediate Fuel Price Cuts Amid Rising Oil Costs
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। बीती रात यूक्रेन की ओर से रूस के कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए गए, जिनमें कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई। इन हमलों में नागरिक इलाकों के साथ-साथ व्यावसायिक ढांचे को भी निशाना बनाया गया। दूसरी ओर रूस ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में सैकड़ों यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। मौजूद जानकारी के अनुसार, रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में कुल 635 यूक्रेनी ड्रोन को नष्ट कर दिया। इसके बावजूद कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे, जिससे कई क्षेत्रों में जान-माल का नुकसान हुआ। बता दें कि रूस के सीमावर्ती बेलगोरोद क्षेत्र में एक ड्रोन हमला बच्चों के खेल मैदान के पास हुआ। कार्यवाहक गवर्नर अलेक्जेंडर शुवायेव के अनुसार, इस हमले में एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए। बाद में बेलगोरोद के अन्य हिस्सों में हुए अलग-अलग हमलों में तीन और लोगों की मौत तथा पांच लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं पड़ोसी सारातोव क्षेत्र के एंगेल्स शहर में एक रिहायशी इमारत पर ड्रोन गिरने से दो लोगों की जान चली गई। क्षेत्र के गवर्नर रोमन बुसारगिन ने बताया कि एंगेल्स और क्षेत्रीय राजधानी सारातोव दोनों जगह नागरिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। गौरतलब है कि एंगेल्स में रूस का एक महत्वपूर्ण सैन्य हवाई अड्डा मौजूद है, जबकि सारातोव अपने बड़े तेल शोधन संयंत्र के लिए जाना जाता है। इसी वजह से ये दोनों शहर पहले भी कई बार यूक्रेनी हमलों का निशाना बन चुके हैं। उदमुर्तिया क्षेत्र में भी ड्रोन हमले से तीन लोगों की मौत और दो अन्य के घायल होने की पुष्टि कार्यवाहक गवर्नर ओल्गा अब्रामोवा ने की है। वहीं बश्कोर्तोस्तान क्षेत्र के गवर्नर रादिय खाबीरोव ने बताया कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए गए बड़े ड्रोन हमले को वायु रक्षा प्रणाली ने विफल कर दिया। हालांकि क्षेत्रीय राजधानी उफा के औद्योगिक इलाके में एक ड्रोन गिरने के बाद आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए राहत दलों को तैनात किया गया। दूसरी ओर रूस ने भी यूक्रेन पर जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसकी सेना ने यूक्रेन के मिकोलाइव बंदरगाह पर सैन्य सामान ले जा रहे दो जहाजों और वहां मौजूद बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। इसके अलावा काला सागर में सैन्य सामग्री ले जा रहे एक अन्य जहाज पर भी हमला किया गया। उधर यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी शहर जापोरिज्जिया में रूसी निर्देशित बम हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य लोग घायल हुए। क्षेत्रीय गवर्नर इवान फेदोरोव ने इसकी पुष्टि की है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में यूक्रेन ने रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के तहत कई व्यावसायिक ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इसी अभियान के तहत रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन खुदरा कंपनी वाइल्डबेरीज़ के एक गोदाम पर भी हमला किया गया। बताया जा रहा है कि पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में इस कंपनी के एक दर्जन से अधिक गोदाम ड्रोन हमलों का शिकार बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमलों से युद्ध का दायरा और व्यापक होता जा रहा है। इसका असर अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम नागरिकों, व्यापारिक गतिविधियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
दक्षिण कोरिया इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और देश ने अपने मौसम इतिहास का नया रिकॉर्ड दर्ज किया है। दक्षिण-पूर्वी शहर यांगसान में रविवार दोपहर तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो वर्ष 1904 में आधुनिक मौसम रिकॉर्ड शुरू होने के बाद अब तक का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकार और मौसम विभाग ने लोगों के लिए कई चेतावनियां जारी की है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यांगसान में लगातार पांचवें दिन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। वहीं डेगू, बुसान और कई अन्य शहरों में भी पारा 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया। हालात को देखते हुए 20 से अधिक क्षेत्रों में आपातकालीन गर्मी चेतावनी लागू कर दी गई है। यह नई चेतावनी व्यवस्था इस वर्ष शुरू की गई है ताकि बढ़ते तापमान से लोगों की सुरक्षा बेहतर तरीके से की जा सके। बता दें कि दक्षिण कोरिया मौसम प्रशासन के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में महसूस किया जाने वाला तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या वास्तविक तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना होती है, तब आपात चेतावनी जारी की जाती है। लोगों से सभी बाहरी गतिविधियां तुरंत रोकने, ठंडी जगहों पर जाने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की अपील की गई है। प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने स्थानीय प्रशासन को बुजुर्गों, बच्चों और अन्य संवेदनशील लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिजली और पानी की आपूर्ति लगातार बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। गर्मी का असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राजधानी सियोल में बड़ी संख्या में लोग वातानुकूलित बाजारों, कैफे और सार्वजनिक शीतलन केंद्रों का सहारा ले रहे हैं। कई जगहों पर धुंध जैसी पानी की फुहार वाले केंद्र भी बनाए गए हैं, जहां लोग गर्मी से राहत पाने पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि ग्योंगजू शहर में भी तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले आठ वर्षों का सबसे अधिक स्तर है। वहीं उत्तर कोरिया में भी कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। राजधानी प्योंगयांग में लगातार एक सप्ताह तक रात का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया। भीषण गर्मी का असर खेलों पर भी पड़ा है। चांगवोन में पेशेवर बेसबॉल लीग का मुकाबला लगातार दूसरे दिन रद्द करना पड़ा, क्योंकि वहां तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव गतिविधियों से बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन और इस वर्ष फिर सक्रिय हुए अल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की ओर बढ़ रहे डॉल्फिन नामक तूफान की दिशा आने वाले दिनों में दक्षिण कोरिया के मौसम पर असर डाल सकती है। अगर तूफान की दिशा बदलती है तो बारिश और तेज हवाओं से कुछ राहत मिल सकती है, जबकि दूसरी स्थिति में गर्मी और उमस और अधिक बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
डील या टोटल सरेंडर… ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम; होर्मुज पर अमेरिकी कंट्रोल का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए डील या टोटल सरेंडर का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि वे निजी तौर पर बातचीत चाहते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से इनकार करते हैं।
आतंकियों का काल बना 'अननोन', मारे 30 से ज्यादा लश्कर, पाकिस्तान में कौन कर रहा ऑपरेशन?
लश्कर-ए-तैयबा के एक वरिष्ठ कमांडर ने पहली बार खुलेआम यह बात स्वीकार की है कि पिछले तीन से चार वर्षों में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई शहरों में संगठन के 30 से अधिक सदस्य मारे जा चुके हैं। उसने इन हत्याओं का ठीकरा भारत से जुड़े 'अननोन' पर फोड़ा है।
क्या नवाज़ शरीफ को मिलेगी नई ज़िम्मेदारी?
PoK चुनाव में PML-N की बढ़त के बाद नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा तेज है. हालांकि मौजूदा नियमों के तहत उनके लिए यह राह आसान नहीं मानी जा रही.
1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर की मस्जिदों से पाकिस्तान के 'आजादी' और बेहतर भविष्य के वादे सुनाई देते थे। आज वही मस्जिदें लाइन ऑफ कंट्रोल के उस पार मुजफ्फराबाद में गूंज रही हैं, लेकिन इस बार स्थानीय इमाम पाकिस्तानी सेना के अत्याचार के खिलाफ कश्मीरियों को एकजुट होने की अपील कर रहे हैं।
ईरान के साथ नई बातचीत पर ट्रंप का बड़ा बयान, देखें दुनिया आजतक
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए समझौते की उम्मीद कर रहे हैं. इसलिए अमेरिका ने ईरान पर नया हमला नहीं किया. ट्रंप के अनुसार, समझौते के लिए ईरान के साथ नई बातचीत सोमवार से शुरू होगी. देखें दुनिया आजतक.
PoK में जीती शहबाज शरीफ की पार्टी, क्या बड़े भाई को बनाएंगे PM
1947 से ही पाकिस्तान अपने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में एक अलग सरकार और प्रधानमंत्री का पद बना रखा है. यह पाकिस्तान का छलावा है. ताकि वहां वह सेल्फ गवर्नेंस का कथित ढांचा दुनिया को दिखा सके. नवाज ने इसी PoK का पीएम बनने की इच्छा जाहिर की है.
जब संसद का हर मिनट करीब ढाई लाख रुपए का पड़ता हो, तब हंगामे की कीमत सिर्फ राजनीतिक नहीं, आर्थिक भी होती है। मानसून सत्र के कुल 25 दिनों में से 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब दोनों सदनों की कार्यवाही बिना रोक-टोक के चल पाई हो। सोमवार को भी लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के चलते बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। हालांकि, शोर-शराबे के बीच दोनों सदनों में अहम विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गए। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते कार्यवाही महज 3 मिनट बाद स्थगित हो गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों के व्यवहार पर नाराजगी जताई और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने सदस्यों से जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा, लेकिन विपक्ष की नारेबाजी जारी रही। इसी दौरान भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 पेश किया गया। इसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 सदन में पेश किया। हालांकि, विपक्ष का हंगामा जारी रहा। शोर-शराबे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2026 चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। इस दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सांसद राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर नारेबाजी करते रहे। हंगामे के बीच विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) समेत कुल जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 हो गई। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी नहीं थमा हंगामा राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से शांत रहने और सदन चलने देने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा जारी रहने पर कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 विचार के लिए सदन में रखा। सभापति ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की अनुमति दी। हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वह विषय पर चर्चा ही नहीं करना चाहता। शोर-शराबे के बीच सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका? ट्रंप के फैसले के पीछे क्या थे रणनीतिक और राजनीतिक कारण
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PAK के खैबर पख्तूनख्वा में सुसाइड अटैक, बॉम्बर ने थाने में किया ब्लास्ट
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में एक शांति रैली के दौरान सुसाइड अटैक हुआ. जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई. पुलिस स्टेशन को आत्मघाती हमले में निशाना बनाया गया, जिसमें पांच सुरक्षाकर्मियों की भी जान चली गई. ये धमाका तब हुआ जब स्वात ज़िले के काबल शहर में पुलिस स्टेशन के ठीक सामने स्वात शांति रैली चल रही थी. देखें.
14 नवंबर 2025 को बिहार चुनाव के नतीजे आए। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। जीत मिलना तो दूर, 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई। कई विश्लेषकों ने लिखा कि पीके की राजनीति खत्म, अब बिहार छोड़ देंगे। 9 महीने बाद प्रशांत किशोर ने धमाकेदार वापसी की है। बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव 19 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत लिया। बांकीपुर बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट रही है। यहां बीजेपी को हमेशा 50% से ज्यादा वोट मिले और कभी नहीं हारी थी। प्रशांत किशोर के इस कमबैक के चर्चे हैं। आखिर पीके ने महज 9 महीने में ये बड़ी वापसी कैसे की और क्या अब उन्हें बिहार जीत का फॉर्मूला मिल गया है; आज के एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… सवाल-1: बिहार चुनाव हारने के बाद पीके ने क्या-क्या किया? जवाब: बिहार नतीजों के बाद सबसे बड़ा सवाल था- अब पीके क्या करेंगे? पीके ने सबसे पहले अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग ये सोच रहे हैं कि मैं बिहार छोड़ दूंगा। ये आपका भ्रम है। जब तक बिहार को बदलेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं।' इसके बाद पीके ने 3 बड़े काम किए… 1. आत्ममंथन और आगे की स्ट्रैटेजी बनाईः 20 नवंबर 2025 को पश्चिम चंपारन के भितिहरवा आश्रम गए। यहां एक दिन का मौन व्रत रखा। इसे आत्ममंथन का संकेत माना गया। यहां से निकलकर बताया- 15 जनवरी के बाद अगले 15 से 18 महीने हम हर गांव, हर वार्ड और हर घर तक जाएंगे। पीके ने 8 फरवरी 2026 से ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ शुरू की। 2. 90% संपत्ति जन सुराज के नाम की: पीके ने ऐलान किया कि अगले 5 साल तक अपनी कमाई का 90% हिस्सा जन सुराज को दान करेंगे। दिल्ली का घर छोड़कर पिछली 20 साल में कमाई गई हर संपत्ति भी पार्टी को देंगे। उन्होंने जन सुराज पार्टी से जुड़े हर व्यक्ति से कम-से-कम 1,000 रुपए का सहयोग मांगा और कहा, 'आज के बाद मैं ऐसे किसी व्यक्ति से नहीं मिलूंगा, जिसने यह योगदान न दिया हो।' 3. बंगला छोड़, आश्रम में रहने लगे: पीके ने मई 2026 में पटना का शेखपुरा हाउस छोड़ दिया। वो बिहार नवनिर्माण आश्रम में आकर रहने लगे। इसे जन सुराज पार्टी के कामकाजों के लिए ही बनाया गया है। अगले विधानसभा चुनाव तक पीके यहीं रहेंगे। करीब 5 एकड़ में बने इस आश्रम में जन सुराज पार्टी के 300 से ज्यादा लोग रहते हैं। सवाल-2: पीके ने 2025 चुनाव की हार से क्या सबक लिए, स्ट्रैटेजी कैसे बदली?जवाबः पीके ने 3 बड़े बदलाव किए… 1. प्रोफेशनल्स से ज्यादा समर्पित कार्यकर्ताओं पर भरोसा 2. हर बूथ पर तैनाती, जमीनी पहुंच बढ़ाई 3. ‘सही लोग, सही सोच’ का नारा सवाल-3: पीके ने बांकीपुर से ही चुनाव लड़ना क्यों चुना? जवाब: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी निराशा थी। लोग साथ छोड़ रहे थे। इस बीच नितिन नवीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिए गए और उनकी विधानसभा सीट बांकीपुर पर उपचुनाव की घोषणा हो गई। पीके ने दो बड़ी वजहों से यहां चुनाव लड़ना चुना… 1. मुफ्त की पब्लिसिटी, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा: पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल कहते हैं, ‘मुख्यधारा की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने और जन सुराज को बचाए रखने के लिए एक बड़ा धमाका जरूरी था। भाजपा के गढ़ में सीधे खुद उतरने से मीडिया और जनता की नजरें उन पर टिक गईं। कार्यकर्ताओं में जोश आ गया।’ 2. बीजेपी को सीधे चुनौती से मजबूत नैरेटिव सेट किया: पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘प्रशांत किशोर पर अब तक भाजपा का मददगार होने का ठप्पा विपक्षी पार्टियां लगाती रही हैं। उन्होंने सीधे गढ़ में चुनौती देकर यह जताने का प्रयास किया है कि हम मिले हुए नहीं हैं। हमारी तरह भाजपा को घर में घुसकर सीधी चुनौती देने की ताकत तेजस्वी यादव के पास भी नहीं।’ सवाल-4: बांकीपुर से हार तय मानी जा रही थी, फिर पीके ने बाजी कैसे पलटी?जवाबः बांकीपुर से पीके की जीत के 3 बड़े फैक्टर रहे… 1. खुद को तीसरे विकल्प की तरह पेश किया 2. जेन-जी प्रोटेस्ट, एथेनॉल के चलते नैरेटिव में पिछड़ी बीजेपी 3. लोकल मुद्दे उठाए, सवर्ण और पिछड़ों को साधा सवाल-4: तो क्या पीके को बांकीपुर से बिहार जीतने का फॉर्मूला मिल गया है? जवाब: जन सुराज को उम्मीद की किरण जरूर दिखी, लेकिन बिहार जीत के फॉर्मूले का दावा करना जल्दबाजी होगी। इसकी 3 बड़ी वजहें हैं… 1. शहरी बनाम ग्रामीण वोटर में फर्क: बांकीपुर पूरी तरह से शहरी और साक्षर इलाका है, जबकि बिहार की करीब 89% आबादी गांवों में रहती है। शहरी और ग्रामीण वोटर्स की सोच और वोटिंग पैटर्न में काफी फर्क होता है। ऐसे में बांकीपुर जीतने से सिर्फ ये माना जा सकता है कि पीके ने शहरी वोटर्स को समझ लिया है। 2. बिहार में जातिगत लामबंदी: बांकीपुर में कायस्थ, वैश्य और सवर्ण जातियों का दबदबा है, जबकि समूचे बिहार में करीब 85% आबादी पिछड़ा, दलित या महादलित है। इनमें से 14.3% यादव हैं, जो RJD का कोर वोटबैंक हैं। जबकि 10% कुर्मी, कोयरी और कुशवाहा JDU के साथ और 15% सवर्ण बीजेपी के साथ माने जाते हैं। पीके खुद सवर्ण हैं और ऐसे में उन्हें बिहार के पिछड़ा वोटर्स को साधना चुनौती भरा हो सकता है। 3. स्केलिंग और जमीनी जुड़ाव: पीके के पास अब भी बीजेपी, JDU, RJD जैसा मजबूत कैडर नहीं है, जो पूरे बिहार में जमीनी पकड़ बना सके। उनकी जन सुराज के ज्यादातर वॉलंटियर्स कार्यकर्ता की तरह नहीं, बल्कि कर्मचारी की तरह हैं। अभिरंजन कुमार कहते हैं, 'अगर पीके आने वाले 3-4 सालों में अच्छा काम कर लेते हैं और बिहार की जनता में तीसरे विकल्प को चुनने का कॉन्फिडेंस ला पाते हैं, तो गठबंधनों की शक्ल बदल जाएगी। महागठबंधन का दौर खत्म हो गया। पीके RJD का विकल्प बन पाएंगे। ऐसा हुआ तो कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के सहयोगी दल भी उनके साथ गठबंधन करना चाहेंगे।' ------------- ये खबर भी पढ़िए… प्रशांत किशोर पर छापे क्यों नहीं पड़ते: मोदी के एक फोन पर UN की नौकरी छोड़ी, 6 साल में 6 सीएम बनवाए; PK की पॉलिटिक्स क्या है 12वीं करने के बाद 3 साल पढ़ाई छोड़ दी। नरेंद्र मोदी की कॉल पर यूनाइटेड नेशंस की नौकरी छोड़ दी। मोदी के पीएम बनने के बाद नीतीश के साथ गए। 2015 में नीतीश की वापसी कराई, फिर ममता, जगन, स्टालिन को जिताया। 6 साल में 6 सीएम बनवाने वाला ये शख्स अब खुद बिहार जीतने निकला है। पूरी खबर पढ़िए
CCTV में कैद हुई दहशत, स्वात में पुलिस स्टेशन के बाहर आत्मघाती धमाके में 15 की जान गई - AajTak
CCTV में कैद हुई दहशत, स्वात में पुलिस स्टेशन के बाहर आत्मघाती धमाके में 15 की जान गई AajTak पाकिस्तान के स्वात में पुलिस थाने के बाहर आत्मघाती धमाके में 14 लोगों की मौत, 15 से ज़्यादा घायल BBC पाकिस्तान में आत्मघाती हमला, 8 पुलिसकर्मियों समेत 19 की मौत: खैबर पख्तूनख्वा में युवक ने थाने में जाकर ब्ला... Dainik Bhaskar पाकिस्तान में शांति रैली के दौरान बड़ा धमाका, चपेट में आने से 14 लोगों की मौत; कई घायल India TV Hindi पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आतंक-विरोधी रैली पर आत्मघाती हमला, बम फटने का वीडियो वायरल Jagran
पाकिस्तान में Al Jazeera पर बैन की चर्चा
PoK में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के बाद पाकिस्तान में Al Jazeera समेत कुछ डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म पर कथित रोक की खबरें हैं. सरकार ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ पाकिस्तान-ऑक्यूपाइड जम्मू एंड कश्मीर HRC-PoJK के हवाले से मौजूदा अशांति में 80 लोगों की मौत का दावा किया गया है. इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
ट्रम्प का दावा- अमेरिका और ईरान के बीच आज से शुरू होगी वार्ता, वीडियो में जाने बड़े हमले को टालने की कही बात
इंडोनेशिया में समुद्र के बीच फेरी में भीषण आग, जान बचाने के लिए यात्रियों ने लगाई समुद्र में छलांग; फुटेज में देंखे 5 की मौत, 41 लापता
World Richest Leaders List: कौन है दुनिया का सबसे अमीर नेता? पुतिन से लेकर ट्रंप तक जाने किसके पास कितनी दौलत
मीराबाई चानू का स्वागत और अभिनंदन!
नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली दिग्गज भारोत्तोलक मीराबाई चानू का स्वदेश वापसी पर जोरदार स्वागत और अभिनंदन किया जा रहा है। केंद्रीय संचार और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया ने आज नई दिल्ली में मीराबाई चानू से मुलाकातकर उनको बधाई दी और खूब प्रशंसा...
चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा की होगी कड़ी निगरानी! भारतीय रेलवे ने बनाया ₹45,000 करोड़ का मेगा प्लान
'भारत उज्बेकिस्तान संबंध घनिष्ठ व ऐतिहासिक'
नई दिल्ली। उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री सईदोव बख्तियार ओदिलोविच ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन में सईदोव बख्तियार ओदिलोविच और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि भारत और उज्बेकिस्तान केबीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत...
बांग्लादेश की राजनीति में हालिया उथल-पुथल के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक और बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है। खुफिया रिपोर्टों के सामने आने के बाद दक्षिण एशिया के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। ताजा इनपुट्स के अनुसार, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सुरक्षा को लेकर बेहद खतरनाक साजिश रची जा रही है। इस सनसनीखेज खुलासे में प्रेस के फर्जी स्टिकर लगी गाड़ियों, आईईडी (IED) और आत्मघाती हमलों का जिक्र किया गया है, जिसके बाद से सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से हाई अलर्ट पर आ गया है।खुफिया एजेंसियों के हाथ लगे खतरनाक इनपुट्स और साजिश की परतेंखुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश की पूर्व पीएम को निशाना बनाने के लिए असामाजिक तत्वों और कट्टरपंथी ताकतों द्वारा एक पुख्ता साजिश रची जा रही है। रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि हमलावर सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए मीडिया वाहनों का सहारा ले सकते हैं। गाड़ियों पर 'PRESS' का फर्जी स्टिकर लगाकर चेकिंग से बचने और आसानी से वीआईपी जोन या लक्षित ठिकाने के पास पहुंचने की योजना बनाई गई है। इस तरह के हथकंडों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है क्योंकि इस रणनीति से किसी भी सुरक्षा घेरे को भेदना आसान हो जाता है।IED और आत्मघाती हमलों का खौफनाक जालइस पूरी साजिश का सबसे डरावना पहलू यह है कि इसमें अत्याधुनिक विस्फोटकों और फिदायीन हमलों का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों या साज़िशकर्ताओं द्वारा आईईडी से लैस वाहनों का उपयोग किया जा सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों या आवाजाही के रास्तों पर आत्मघाती हमले को अंजाम देकर भारी तबाही मचाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल टारगेट पर हमला करने के लिए ट्रेंड ऑपरेटर्स को काम पर लगाया गया है, जो सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं।सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चौकसी और कड़े इंतजामइन गंभीर खुफिया इनपुट्स के सामने आने के बाद तमाम संबंधित सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने अपनी चौकसी कई गुना बढ़ा दी है। सीमाओं से लेकर संवेदनशील ठिकानों तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। फर्जी प्रेस स्टीकर लगाकर घूमने वाली हर संदिग्ध गाड़ी की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके। बांग्लादेश के घटनाक्रम के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर भी गहरा असर पड़ा है, और पूरी दुनिया की नजरें इस संवेदनशील मामले पर टिकी हुई हैं।
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK के हालात इन दिनों किसी युद्धग्रस्त देश जैसे बन चुके हैं। पाकिस्तानी हुक्मरानों और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की दमनकारी नीतियों के चलते यह पूरा क्षेत्र मानवाधिकारों के हनन का एक जीवंत उदाहरण बन गया है। स्थानीय लोगों का जीवन दूभर हो चुका है, लेकिन इन सबके बावजूद कश्मीरी अवाम का हौसला टूटने का नाम नहीं ले रहा है। पाकिस्तानी सेना की अंधाधुंध फायरिंग और क्रूरता के बाद भी वहां के निवासियों का प्रतिरोध अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।PoK में सेना का तांडव और सूडान जैसे भयावह हालातपाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कुछ समय से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। आम नागरिकों द्वारा अपनी बुनियादी सुविधाओं, बढ़े हुए बिजली बिलों और महरेंगे राशन के खिलाफ शुरू किया गया शांतिपूर्ण प्रदर्शन उस वक्त खूनी संघर्ष में बदल गया, जब पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। सूडान की तर्ज पर PoK की सड़कों पर टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां उतार दी गईं। जनरल असीम मुनीर के सीधे आदेश पर सेना ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिसमें कई बेकसूर लोग अपनी जान गंवा बैठे और सैकड़ों की संख्या में घायल हो गए। इस अमानवीय कृत्य ने पूरी दुनिया का ध्यान इस क्षेत्र में हो रहे अत्याचारों की ओर खींचा है।गोलियों की बौछार के बीच भी बुलंद है स्थानीय अवाम का हौसलाइतिहास गवाह है कि जब-जब जुल्म की इंतिहा होती है, तब-तब जनता का विद्रोह और अधिक मुखर हो जाता है। PoK में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। पाकिस्तानी सेना की गोलियों और आंसू गैस के गोलों के बीच भी कश्मीरी युवाओं और बुजुर्गों के कदम पीछे नहीं हटे। सेना के खौफनाक रवैये के बावजूद लोग सड़कों पर उतरकर 'आजादी' और पाकिस्तान विरोधी नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि वे अब और अधिक अत्याचार सहन नहीं करेंगे। सेना के जुल्म उनके दिलों से पाकिस्तान के प्रति उपजे गुस्से और प्रतिरोध की आग को बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघनएक तरफ जहां PoK के लोग बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी मीडिया और सरकार इस पूरी सच्चाई को दबाने में जुटी हुई है। इंटरनेट और संचार सेवाओं को बार-बार बाधित किया जा रहा है ताकि वहां होने वाले अत्याचारों की तस्वीरें दुनिया के सामने न आ सकें। मानवाधिकार संगठनों ने इस दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है, लेकिन पाकिस्तान की इस तानाशाही के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और ठोस कार्रवाई की अभी भी दरकार है। स्थानीय नागरिकों का यह संघर्ष अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे और उसकी दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ा मोड़ साबित हो रहा है।
Ajab-Gajab News: साल 1966 में लापता हुई महिला 42 साल बाद अपने फ्लैट में टीवी के सामने कुर्सी पर मृत अवस्था में मिलीं।
'No War' ऐलान के बाद ट्रंप का ईरानी मीडिया ने उड़ाया मजाक, कहा - ''क्या अब हवा निकल गई?
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Piyush Goyal ने कहा: भारत और उज्बेकिस्तान 3 साल में दोगुना करेंगे व्यापार
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान अगले तीन वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से खनन, फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की महत्वपूर्ण संभावनाओं पर प्रकाश डाला। गोयल ने भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच वर्तमान में लगभग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसे बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। व्यापार बढ़ाने पर जोर मंत्री ने दोनों देशों के व्यवसायों से एक-दूसरे की अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने भारत की आईटी, कुशल कार्यबल और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में ताकत का उल्लेख किया, जबकि उज्बेकिस्तान खनन और कपास उत्पादन में क्षमता प्रदान करता है। गोयल ने एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत करने के विचार को भी एक आशाजनक कदम बताया। उज्बेकिस्तान की ओर से निवेश का निमंत्रण उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग और व्यापार मंत्री, लाज़िज़ कुदरतोव ने भी व्यापार बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यापार मात्रा क्षमता से कम है और सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। कुदरतोव ने विशेष रूप से स्टील, फार्मा, स्वास्थ्य सेवा, खनन और ऑटो क्षेत्रों में भारतीय निवेश आमंत्रित किया। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में लगभग 400 भारतीय कंपनियां उज्बेकिस्तान में काम कर रही हैं।
NASA का DART या चीन का न्यूक्लियर प्लान? जानें धरती को एस्टेरॉयड से बचाने का कौन सा तरीका है बेहतर
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होर्मुज से आई भारत के लिए खुशखबरी, अब खूब आएंगे तेल-LPG के टैंकर, ओमान बना संकटमोचक
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर फारस की खाड़ी से एक बेहद राहत भरी और शानदार खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ओमान ने एक ऐसा कूटनीतिक और सामरिक कदम उठाया है जिससे भारत के लिए कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) के टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह से सुरक्षित और सुगम हो गई है। खाड़ी देशों में अक्सर तनाव और भू-राजनीतिक हलचल के कारण समुद्री मार्गों पर मंडराने वाले संकट के बीच ओमान भारत के लिए एक बड़े संकटमोचक के रूप में उभरा है।संकटमोचक बना ओमान और समुद्री मार्ग की सुरक्षाभारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, जिसके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे प्रमुख समुद्री रास्ता है। पिछले कुछ समय से इस इलाके में बढ़ते तनाव के चलते तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने का खतरा लगातार बना हुआ था। ऐसे वक्त में ओमान ने अपनी मजबूत समुद्री कूटनीति और रणनीतिक स्थिति का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि भारत आने वाले एनर्जी टैंकरों को किसी भी तरह की बाधा या सुरक्षा जोखिम का सामना न करना पड़े, जिससे भारतीय रिफाइनरियों और एलपीजी सप्लायर्स ने बड़ी राहत की सांस ली है।तेल और एलपीजी की बेरोकटोक आपूर्ति से देश को फायदाओमान के इस सकारात्मक सहयोग के बाद अब भारत के लिए कच्चे तेल, डीजल और एलपीजी गैस से भरे टैंकरों की निर्बाध आवाजाही का रास्ता साफ हो गया है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से भारत में ईंधन की कीमतों और सप्लाई चेन पर किसी भी तरह का दबाव नहीं बनेगा। त्योहारी सीजन या मांग बढ़ने के समय एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कमी का जो डर अक्सर सताता रहता था, वह अब ओमान की मदद से काफी हद तक दूर हो गया है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को भी बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।भारत और ओमान के प्रगाढ़ होते सामरिक संबंधइस पूरी घटना ने भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने और भरोसेमंद रिश्तों पर मुहर लगा दी है। रक्षा, व्यापार और समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देश लगातार एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। रणनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बीच ओमान का भारत के पक्ष में खड़ा होना यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कूटनीतिक पकड़ कितनी मजबूत हो चुकी है, जिसका सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता को मिल रहा है।
PoK में अपने गंदे काम छिपा रहा पाकिस्तान, पहले गोलियां चलाईं, अब अल-जजीरा पर भी लगाया बैन
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में इन दिनों पाकिस्तान सरकार की तानाशाही अपने चरम पर पहुंच चुकी है। स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना हर हद पार कर रही है। हालात यह हैं कि वहां हो रहे मानवाधिकार हनन और क्रूरता को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए अब मीडिया के गले पर भी कैंची चलाई जा रही है। स्थानीय जनता की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तान ने पहले तो शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवाईं और अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों पर भी पाबंदी लगानी शुरू कर दी है।अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनल अल-जजीरा पर लगाया बैनPoK के भीतर पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसियों के काले कारनामों को उजागर करने वाले प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थान 'अल-जजीरा' के प्रसारण और कवरेज पर पाकिस्तान ने रोक लगा दी है। जब अल-जजीरा की टीम ने वहां के स्थानीय लोगों पर हो रहे अत्याचार, सेना की बर्बरता और कश्मीरी अवाम के गुस्से को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की, तो बौखलाई पाकिस्तानी सरकार ने तुरंत सेंसरशिप लागू कर दी। इस बैन का मुख्य मकसद यह है कि PoK की जमीनी सच्चाई किसी भी तरह से वैश्विक मंचों तक न पहुंच सके और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर कोई दाग न लगे।गोलियों और दमन के दम पर जनता की आवाज दबाने की कोशिशकुछ समय पहले PoK के विभिन्न इलाकों में बढ़े हुए बिजली के बिल, महंगाई और पाकिस्तानी हुक्मरानों के शोषण के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन नागरिकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें कई बेकसूर लोग मारे गए और सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हो गए। इस खूनी संघर्ष के बाद से ही पूरा क्षेत्र सुलग रहा है, लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन मीडिया को प्रतिबंधित कर इस नरसंहार और दमन चक्र को पूरी तरह से छिपाने की नापाक कोशिश में जुटा हुआ है।वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर सवालपाकिस्तान के इन अलोकतांत्रिक और तानाशाही कदमों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां पाकिस्तान दुनिया भर में मानवाधिकारों की दुहाई देता फिरता है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही कब्जे वाले क्षेत्र में वह फासीवादी नीतियां अपना रहा है। जानकारों का कहना है कि सूचना के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटकर पाकिस्तान ज्यादा दिनों तक अपनी इन करतूतों को छिपा नहीं पाएगा, क्योंकि वहां की जनता का आक्रोश अब ज्वालामुखी का रूप ले चुका है।
भारत के एक फैसले ने किया नेपाल को मजबूर, अकड़ रहे बालेन शाह लगाने लगे गुहार
भारत और नेपाल के बीच हाल ही में कूटनीतिक और कड़े व्यापारिक नियमों को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पड़ोसी देशों के साथ रणनीतिक संबंधों और सीमावर्ती व्यापार को नियंत्रित करने के लिए जब भारत ने सख्त नियम लागू किए, तो नेपाल की राजनीति में हड़कंप मच गया। अपनी बड़बोलेपन और तीखे बयानों के लिए जाने जाने वाले काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जो अक्सर भारत विरोधी तेवर दिखाते नजर आते थे, अब अचानक से कूटनीतिक दबाव के आगे झुकते हुए नजर आ रहे हैं और नेपाल के आंतरिक विकास व आपूर्ति के लिए भारत से मदद की गुहार लगाने पर मजबूर हो गए हैं।क्यों पड़ी नेपाल को भारत के सामने गिड़गिड़ाने की जरूरतनेपाल भौगोलिक रूप से चारों तरफ से जमीन से घिरा देश है और अपनी रोजमर्रा की जरूरतें, ईंधन, खाद्य सामग्री और बुनियादी सामानों के आयात के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है। हाल ही में जब भारत ने सीमा पार व्यापार और ट्रांजिट रूट्स को लेकर नियमों को कड़ा किया, तो नेपाल की अर्थव्यवस्था और स्थानीय बाजारों में तुरंत संकट के बादल मंडराने लगे। बालेन शाह जैसे नेताओं को यह अहसास हो गया है कि केवल बयानबाजी और तीखे तेवरों से देश की जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता, जिसके चलते उनकी सारी अकड़ काफूर हो गई है।बालेन शाह के सुर बदले और शुरू हुई कूटनीतिक नरमीकाठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन शाह अपने कड़े फैसलों और भारत के खिलाफ की जाने वाली सोशल मीडिया बयानबाजी के लिए चर्चा में रहते हैं। लेकिन जब जमीनी स्तर पर जनता को जरूरी सामानों की किल्लत और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा, तो उनका रुख एकदम से बदल गया। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत की मजबूत विदेश नीति और स्पष्ट रुख ने नेपाल के उन नेताओं को आईना दिखा दिया है जो भारत की सदाशयता का फायदा उठाकर राजनीतिक रोटियां सेकते थे।दोनों देशों के रिश्तों पर क्या होगा इसका असरइस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत के बिना नेपाल के विकास और स्थिरता की कल्पना करना नामुमकिन है। भारत के सख्त और स्पष्ट फैसलों ने यह संदेश साफ कर दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों में सम्मान और सहयोग दोनों तरफ से होना चाहिए। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस दबाव के बाद अब नेपाल के हुक्मरान भविष्य में भारत विरोधी बयानों से बचेंगे और आपसी व्यापार तथा कूटनीतिक रिश्तों को सुधारने पर अधिक जोर देंगे।
PoK में कत्लेआम की रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की कोशिश? PAK में अल-जजीरा बैन!
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में जारी विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के बाद अल जज़ीरा इंग्लिश समेत कई डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म पाकिस्तान में कथित तौर पर प्रतिबंधित या सीमित कर दिए गए हैं. हालांकि, इस पर पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
बस तीन छोटी नावें थीं और एक दीवाना सपना!
इस कहानी को आज कहने का सबब वो इतिहास है. जो आज के दिन ही शुरू हुआ था. बात आधा हजार साल पहले की है. जब एक जुनूनी अपने ख्वाबों की ताबीर के लिए समंदर की लहरों पर निकल चुका था.
Iran ने Trump के Hormuz समझौते के दावे को बताया 'एक और झूठ', कहा- कोई सहमति नहीं
रविवार को ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया कि तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ संभावित समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति जताई थी; ईरान का कहना है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। ईरानी मीडिया ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि तेहरान ने अमेरिका से नियोजित सैन्य हमलों को रोकने के लिए कहा था। मीडिया ने इस दावे को एक और झूठ बताया और कहा कि जब तक अमेरिका की दुश्मनी भरी कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक यह रणनीतिक जलमार्ग बंद रहेगा। इसे भी पढ़ें: Middle East में टला बड़ा युद्ध: क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील पर Trump ने Iran से बातचीत को दी मंजूरी ईरान की सेमी-ऑफिशियल फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने देश की बातचीत करने वाली टीम के करीबी सूत्रों के हवाले से कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर कोई समझौता नहीं हुआ है। एजेंसी ने एक जानकार सूत्र के हवाले से कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बारे में कोई समझौता नहीं हुआ है। सूत्र ने आगे कहा कि जब तक अमेरिका अपनी दुश्मनी भरी हरकतें जारी रखेगा, तब तक यह जलमार्ग बंद रहेगा। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों ने ईरान के साथ पांच महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस संघर्ष में ईरान पर नए सैन्य हमले का आदेश नहीं देंगे। ट्रंप ने शनिवार शाम को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल और पूरी तरह खोलना तथा ईरान के परमाणु खतरे का अंत शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इस अनुरोध के आधार पर मैंने दुनिया के भविष्य के हित में और साथ ही एक सफल एवं समृद्ध ईरान के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए फिलहाल हमलों को रोकने पर सहमति दी है, बशर्ते कि शीघ्र ही कोई समझौता हो सके। इसे भी पढ़ें: Middle East Conflict | Donald Trump का दावा- शांति समझौते पर बनी रूपरेखा: होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दों पर वार्ता, खाड़ी देशों की मध्यस्थता रंग लाई अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमला किए जाने के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप कई बार ईरान पर हमले रोकने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन हर बार हालात फिर बिगड़ गए और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष दोबारा शुरू हो गया। ईरान के रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ट्रंप की हालिया घोषणा से ईरान न तो हैरान है और न ही ढिलाई बरत रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से मिलने वाली धमकियों के मद्देनजर ईरान पूरी तरह सतर्क और सजग बना हुआ है। क्षेत्रीय मामलों से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि सप्ताहांत में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित प्रस्ताव के तहत अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फिर से शुरू करने तथा उन अनेक लंबित मुद्दों पर बातचीत जारी रखने की बात कही गई है, जिनके कारण पहले किसी समझौते पर प्रगति नहीं हो सकी थी।
म्यांमा में आंग सान सू ची से ICRC के प्रतिनिधि ने की मुलाकात
बैंकॉक, तीन अगस्त (एपी) म्यांमा की पूर्व नेता आंग सान सू ची से अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) के प्रतिनिधि ने सोमवार को राजधानी में मुलाकात की। सैन्य समर्थित सरकार ने यह जानकारी दी। वर्ष 2021 में सेना द्वारा सत्ता अपने हाथ में लिये जाने के बाद से सू ची ‘‘नजरबंद’’ हैं, ऐसे में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता के लिए बाहरी दुनिया से संपर्क का यह एक दुर्लभ अवसर रहा। घोषणा के साथ जारी दो तस्वीरों में सू ची म्यांमा में आईसीआरसी के प्रतिनिधि अरनॉड डी बैक से हाथ मिलाती तथा लकड़ी की आंतरिक सज्जा वाले कक्ष में उनके साथ बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। तस्वीरें जारी करने वाले राष्ट्रपति प्रेस एवं सूचना ब्यूरो ने बताया कि यह बैठक सोमवार सुबह हुई। हालांकि, ब्यूरो ने बैठक के स्थान और बातचीत के विषय में कोई जानकारी नहीं दी। जारी की गई दो अन्य तस्वीरों में सू ची केक काटती नजर आ रही हैं। केक पर ‘‘हेपी बर्थ डे आंटी सू, 19.6.2026’’ लिखा है। इससे संकेत मिलता है कि ये तस्वीरें जून में उनके 81वें जन्मदिन के अवसर पर ली गई होंगी। तस्वीरों में सू ची सहज और मुस्कुराती दिखाई दे रही हैं। वे किसी प्रकार से अस्वस्थ भी नहीं लग रही हैं। हालांकि, केवल तस्वीरों के आधार पर उनकी वास्तविक शारीरिक स्थिति का स्वतंत्र रूप से आकलन नहीं किया जा सकता।
युवा नशे जैसी विनाशकारी आदत से दूर रहें-मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ करते हुए आह्वान किया हैकि देश के युवा शारीरिक और मानसिक रूपसे स्वस्थ रहें, आत्मविश्वास से परिपूर्ण हों और नशीले पदार्थों जैसी विनाशकारी आदतों से हमेशा दूर रहें। राष्ट्रव्यापी वीडियो कॉंफ्रेंस से जुड़े एक करोड़ से...
Middle East में टला बड़ा युद्ध: क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील पर Trump ने Iran से बातचीत को दी मंजूरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सोमवार दोपहर को शुरू होगी। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य हमले की योजना को टाल दिया है, जिससे हफ़्तों से बढ़ते तनाव के बावजूद कूटनीति की दिशा में नई पहल का संकेत मिलता है। रविवार को न्यू जर्सी से वॉशिंगटन लौटते समय 'एयर फ़ोर्स वन' में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार था, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील के बाद इसे रोकने का फ़ैसला किया गया, क्योंकि उन्हें लगा कि कूटनीतिक समाधान निकल सकता है। इसे भी पढ़ें: Middle East Conflict | Donald Trump का दावा- शांति समझौते पर बनी रूपरेखा: होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दों पर वार्ता, खाड़ी देशों की मध्यस्थता रंग लाई ट्रंप ने कहा कि यह एक बहुत बड़ा हमला होने वाला था। यह हमला दूसरे विश्व युद्ध के बाद का अब तक का सबसे बड़ा हमला होता। ट्रंप ने बताया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ईरान ने उनसे सैन्य कार्रवाई न करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि हम उनसे बातचीत (नेगोशिएशन) के ज़रिए बात कर रहे हैं। यह कल दोपहर शुरू होगी, और देखते हैं क्या होता है। कूटनीति को लेकर उम्मीद जताते हुए ट्रंप ने कहा, मैं ऐसा ज़रूर करना चाहूँगा। इससे बहुत सारी जानें बचेंगी। जब पूछा गया कि क्या ईरान के पास समझौता करने के लिए कोई समय-सीमा है, तो ट्रंप ने कहा कि वे और टकराव के बजाय बातचीत से समाधान निकालना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं समझौता करना ज़्यादा पसंद करूँगा। मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता क्योंकि लोग मरते हैं, बहुत से लोग मरते हैं, और हम ऐसा नहीं चाहते। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि दूसरा विकल्प यानी मिलिट्री ऑपरेशन उनके लिए विनाशकारी होता और कहा कि सऊदी अरब ने कूटनीति का समर्थन किया क्योंकि उसका मानना था कि समझौता जल्द ही होने वाला है। इसे भी पढ़ें: Gaza Air Strikes: ट्रम्प के Peace Plan पर फिरा पानी, इजरायली हवाई हमलों में 17 नागरिकों की मौत से बढ़ा तनाव ये बातें शनिवार को 'ट्रुथ सोशल' पर किए गए एक पोस्ट के बाद सामने आईं, जिसमें ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार थी, लेकिन ईरान और मध्य पूर्व के कई देशों के समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगने पर उन्होंने कार्रवाई टालने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत और पूरी तरह से फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
'गले लगाया और छुरा घोंप दिया'... PAK मंत्री का ट्रंप पर बड़ा हमला, अमेरिका को लेकर किया चौंकाने वाला दावा
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 के समापन समारोह में भारत ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति से पूरी दुनिया का दिल जीत लिया।
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मिस्र में भूकंप के तेज झटके: शर्म अल-शेख के पास आया 5.5 तीव्रता का भूकंप, जान-माल के नुकसान पर क्या अपडेट?
CWG 2026: पीएम मोदी ने भारतीय खिलाड़ियों की सराहना की, खेल मंत्री बोले- 39 पदक ऐतिहासिक उपलब्धि
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के 39 पदकों के अभियान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खिलाड़ियों की जमकर सराहना की।
इंसानियत की मिसाल: फ्रांस में जान जोखिम में डालकर 100 से ज्यादा कुत्ते, बिल्ली व घोड़ों को बचाया गया
इंसानियत की मिसाल: फ्रांस में जान जोखिम में डालकर 100 से ज्यादा कुत्ते, बिल्ली व घोड़ों को बचाया गया
हालांकि यह पदकों की संख्या हाल के वर्षों की तुलना में कम रही, लेकिन कई पारंपरिक खेलों के बाहर होने के बावजूद भारत चौथे स्थान पर रहा। यही वजह है कि इसे टीम इंडिया के सर्वश्रेष्ठ अभियानों में गिना जा रहा है।
Pakistan में M2 Motorway के पास बस दुर्घटना, 13 लोग घायल और बुनियादी ढांचे पर सवाल
इस्लामाबाद [पाकिस्तान], 3 अगस्त (एएनआई): पाकिस्तान भर में लगातार बुनियादी ढांचे की खामियों, नागरिक कुप्रबंधन और बढ़ते सार्वजनिक सुरक्षा जोखिमों को उजागर करते हुए, सरगोधा में सड़क दुर्घटनाओं, ढांचागत विफलताओं और शहरी बाढ़ की घटनाओं की एक श्रृंखला देखी गई है, जैसा कि डॉन ने रिपोर्ट किया है। बहेरा के पास एम2 मोटरवे पर भीषण बस दुर्घटना बहेरा इंटरचेंज के पास एम2 मोटरवे पर एक बड़ी सड़क दुर्घटना में, तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस ने नियंत्रण खो दिया और सड़क किनारे टायर बदलने के लिए खड़ी एक वाहन से टकरा गई, जिससे यात्री बस पलट गई। शनिवार को 13 लोगों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें राईस, मुख्तार, मुहम्मद सामी, फैजान इजाज, अली वारिस, कमर ज़ुल्फिकार, महमूद हसन, तसावुर इजाज, नदीम, जहीर अहमद, उस्मान अली, शोएब और मुहम्मद इक़बाल शामिल हैं, जैसा कि डॉन ने रिपोर्ट किया है। रेस्क्यू 1122 के कर्मियों ने पांच गंभीर रूप से घायल पीड़ितों को स्वास्थ्य सुविधा में ले जाने से पहले प्रारंभिक आपातकालीन देखभाल प्रदान की, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। सरगोधा में बुनियादी ढांचे की विफलताएं सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में गंभीर प्रशासनिक चूक और भ्रष्ट आचरण को उजागर करते हुए, सरगोधा के उपायुक्त ने शहर के बाजार सौंदर्यीकरण अभियान में घटिया सामग्री और त्रुटिपूर्ण निष्पादन के संबंध में गंभीर चिंता जताई, जहां मानसून की बारिश के बाद नव-बिछाई गई फुटपाथ ढह गई और तूफान के पानी से दुकानों के बेसमेंट में बाढ़ आ गई। डॉन के अनुसार, उपायुक्त कार्यालय के आधिकारिक प्रतिनिधियों ने दावा किया कि कदाचार के संबंध में कोई ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और गुणवत्ता मानकों को लागू करने के लिए शहरी नियोजन में संरचनात्मक दोषों को दूर करने का वचन दिया। बाढ़ और आवास सुरक्षा चिंताएं इस बीच, सरगोधा डिवीजन के आयुक्त हाफिज शौकत अली, नगरपालिका, राजमार्ग और जल स्वच्छता नेतृत्व सहित क्षेत्रीय प्रशासकों ने विभिन्न नगरपालिका स्थलों का निरीक्षण किया, जीर्ण-शीर्ण सड़क नेटवर्क, विफल जल निकासी बुनियादी ढांचे और उपेक्षित नागरिक उपयोगिताओं की समीक्षा की। आयुक्त ने सिल्लवाली डिस्पोजल स्टेशन, ईदगाह डिस्पोजल स्टेशन, सिटी रोड और शहीन चौक में चल रही विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया, फील्ड अधिकारियों को टिकाऊ सामग्री का उपयोग करके कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए, जबकि भारी वर्षा के दौरान शहरी पक्षाघात को रोकने के लिए जल प्रबंधन एजेंसियों को चालू डिस्पोजल पंप बनाए रखने का निर्देश दिया। आवास सुरक्षा कमजोरियों को उजागर करने वाली एक अन्य घटना में, मुरादाबाद कॉलोनी गली 12 में अपने आवास की छत गिरने से 18 वर्षीय समीन अशरफ और 20 वर्षीय फरवा अशरफ गंभीर रूप से घायल हो गए, जो भारी बारिश के बाद आधी रात को ढह गई। पारंपरिक टीआर गर्डर से निर्मित संरचना अचानक ढह गई, जिससे दोनों पीड़ित भारी मलबे के नीचे दब गए, इससे पहले कि उन्हें निकाला गया और एक निजी चिकित्सा केंद्र ले जाया गया। बढ़ती जलवायु भेद्यता और कमजोर आपदा निवारण उपायों को और इंगित करते हुए, चेनाब और झेलम नदियों के बढ़ते जल स्तर ने आसपास के किनारों पर बाढ़ ला दी, जिससे कृषि भूमि नष्ट हो गई और ग्रामीण आबादी को खतरा पैदा हो गया, जैसा कि डॉन ने रिपोर्ट किया है। आपातकालीन टीमों ने लगभग तीन दर्जन निवासियों को जलमग्न क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर सुरक्षित निकाला, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने दावा किया कि अंतर-एजेंसी तत्परता को बढ़ावा देने के लिए पहले मॉक बाढ़ अभ्यास आयोजित किए गए थे। (एएनआई)
Donald Trump के ईरान से बातचीत के संकेतों के बाद तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट
अंतर्राष्ट्रीय तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संभावित बातचीत की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 6% से अधिक की कमी आई है। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगाई है, हालांकि इन वार्ताओं की अनिश्चितता और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर सुरक्षा जोखिम अभी भी बने हुए हैं। ईरान वार्ता की उम्मीदें राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान के साथ चर्चा शुरू करने के संकेत के बाद तेल की कीमतों में यह बड़ी गिरावट देखी गई। पिछले महीने, मध्य पूर्व में बढ़े हुए संघर्ष और टैंकरों पर हुए हमलों के कारण तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी। बाजार की प्रतिक्रिया बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के साथ कूटनीतिक प्रयास शुरू होने की संभावना से भू-राजनीतिक जोखिम कम हो सकते हैं, जिससे तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर कम हो जाता है। यह उम्मीद तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में परिलक्षित हुई है। सतर्कता के संकेत इसके बावजूद, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम अभी भी मौजूद हैं। महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार की अस्थिरता तेल की कीमतों को फिर से प्रभावित कर सकती है। निष्कर्ष फिलहाल, तेल की कीमतों में गिरावट ईरान के साथ संभावित वार्ता के सकारात्मक संकेत को दर्शाती है, लेकिन क्षेत्र की अस्थिरता को देखते हुए बाजार सतर्क बना हुआ है।
IND vs SL: चोटिल जसप्रीत बुमराह श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर, आकिब नबी को मिली जगह - Jagran
IND vs SL: चोटिल जसप्रीत बुमराह श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर, आकिब नबी को मिली जगह Jagran टीम में कौन लेगा बुमराह की जगह? लाइन में ये चार गेंदबाज, BCCI जल्द करेगा नाम का ऐलान AajTak श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टीम में बड़ा बदलाव, BCCI ने किया जसप्रीत बुमराह के रिप्लेसमेंट का ऐलान India TV Hindi टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ में बदलाव की तैयारी: श्रीलंका टेस्ट सीरीज के बाद फिजियो और डॉक्टर की भूमिका पर ह... Dainik Bhaskar इन चार खिलाड़ियों ने बढ़ाई गिल की टेंशन, टीम में होकर भी खेलने को 'तैयार' नहीं News18 Hindi
AI Usage in Surveillance: एआई बच्चों की कर रहा निगरानी, स्टार्टअप्स ला रहे स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम
AI Usage in Surveillance: एआई बच्चों की कर रहा निगरानी, स्टार्टअप्स ला रहे स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम
पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव और युद्ध के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच सोमवार दोपहर से औपचारिक शांति वार्ता शुरू होने जा रही है। 'एयर फोर्स वन' में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह खुले हैं और अमेरिका सैन्य बल के प्रयोग के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह उनसे [ईरानियों से] बातचीत कर रहे हैं, यह सोमवार दोपहर को शुरू होगी, और देखते हैं कि यह कैसे आगे बढ़ती है। उन्होंने आगे कहा कि वह लोगों की जान नहीं लेना चाहते, क्योंकि इसमें बहुत से लोग मारे जाते हैं; वह ऐसा नहीं चाहते। इसे भी पढ़ें: US Airstrikes Called Off | द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई टली, Donald Trump मचाने वाले थे कोहराम, बस एक गलती.... ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरान पर नए हमले करने का आदेश देने से रोका पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों के सहयोगियों के अनुरोध पर अमेरिकी सेना को ईरान पर नए हमले करने का आदेश देने से रोकने का फैसला किया। उन्होंने आगे दावा किया कि अमेरिकी सेना द्वारा रविवार को एक और बड़ा हमला करने की योजना थी। हालाँकि, उन्होंने कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सहित खाड़ी देशों के प्रमुख नेताओं की बात सुनने और कुछ अज्ञात ईरानी अधिकारियों के अनुरोध के बाद उन्होंने इस योजना को टालने और कूटनीति को और समय देने का फैसला किया। इसे भी पढ़ें: Assembly Bypolls Results | बिहार की बांकीपुर, MP की दतिया और गुजरात की मंज़लपुर सीट पर वोटों की गिनती शुरू, बीजेपी-कांग्रेस में कड़ा मुकाबला अरब नेताओं ने ईरान के बारे में ट्रंप से क्या कहा? उन्होंने बताया कि उन्होंने क्राउन प्रिंस से कहा, 'आप क्या करना चाहेंगे?' क्या आप चाहेंगे कि हम ऐसा करें या नहीं? ध्यान देने वाली बात है कि शनिवार को ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच बातचीत हुई थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि मध्य-पूर्व के सहयोगी पांच महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक दिन पहले कहा था कि ईरान के साथ बातचीत से उनका भरोसा उठ रहा है और चेतावनी दी थी कि अमेरिकी सेना उन पर बहुत ज़ोरदार हमला करेगी। हालांकि, रविवार को उन्होंने कहा कि जो समझौता हो रहा है, उसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना शामिल होगा। यह एक अहम समुद्री रास्ता है, जहां से युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की लगभग पांचवीं-हिस्से (20%) ऊर्जा की आपूर्ति होती थी। साथ ही, इस समझौते से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताएं भी दूर हो जाएंगी। ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने की कोशिश करने वाले जहाजों पर बार-बार हमले करता है यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान, अमेरिका के साथ अपने टकराव के तहत, बिना इजाज़त होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने की कोशिश करने वाले जहाजों पर बार-बार हमले कर रहा है। इसके अलावा, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य किसी भी हाल में 28 फरवरी से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं आएगा - इसी दिन युद्ध शुरू हुआ था। ईरानी सरकारी टीवी के साथ फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान, होर्मुज़ के दूसरी तरफ़ स्थित ओमान के साथ इस जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर चर्चा कर रहा है, लेकिन इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने के बारे में अभी कोई बातचीत नहीं हो रही है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार ईरान पर हमले रोकने की घोषणा भी की है — जब से 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया था — लेकिन हर बार हालात बिगड़ गए और लड़ाई फिर से शुरू हो गई। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों के अनुरोध पर उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला करने की पूरी तैयारी कर चुकी थी, लेकिन प्रमुख खाड़ी नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद इस योजना को रद्द कर कूटनीतिक प्रयासों को समय देने का निर्णय लिया गया। इसे भी पढ़ें: Jammu and Kashmir | बारामूला और पुलवामा में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, हथियार और गोला-बारूद के साथ आतंकियों के 2 मददगार गिरफ्तार ट्रंप ने बताया कि रविवार को अमेरिकी सेना की ‘‘द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला’’ करने की योजना तैयार थी लेकिन सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान सहित प्रमुख खाड़ी नेताओं से बातचीत और कुछ अज्ञात ईरानी अधिकारियों के अनुरोध के बाद उन्होंने इस योजना को रद्द कर दिया और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए थोड़ा और समय देने का निर्णय लिया। ट्रंप ने न्यू जर्सी के बेडमिन्स्टर स्थित अपने गोल्फ क्लब से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने क्राउन प्रिंस से पूछा कि आप क्या चाहते हैं? क्या आप चाहेंगे कि हम हमला करें या नहीं? उन्होंने कहा कि हम हमले के बजाय समझौता करना ज्यादा पसंद करेंगे, क्योंकि आपको नहीं पता कि ऐसे हमले कहां जाकर रुकेंगे।’’ इसे भी पढ़ें: Ahmedabad 2030 | अलविदा ग्लास्गो, अहमदाबाद में फिर मिलेंगे... 'वसुधैव कुटुम्बकम' के संग भारत में सजेगा राष्ट्रमंडल खेलों का महाकुंभ! ट्रंप और सऊदी अरब के शहजादे के बीच शनिवार को बातचीत हुई थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों ने पांच महीने पुराने युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। यह ट्रंप के रुख में एक और बड़ा बदलाव था। एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि उन्हें ईरान के साथ बातचीत पर भरोसा कम होता जा रहा है और चेतावनी दी थी कि अमेरिकी सेना ‘‘ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगी।’’ ट्रंप ने रविवार को दोहराया कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल होगा। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब किसी भी कीमत पर 28 फरवरी, यानी युद्ध शुरू होने से पहले जैसी नहीं होगी। उन्होंने ईरान के सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि ईरान होर्मुज के दूसरी ओर स्थित ओमान के साथ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर चर्चा कर रहा है, लेकिन फिलहाल इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। ट्रंप इससे पहले भी कई बार ईरान पर हमले रोकने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन बाद में हालात बिगड़ने पर संघर्ष फिर शुरू हो गया। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
रूस के भीषण हमलों के बाद जेलेंस्की की अमेरिका-यूरोप से गुहार, बोले- पैट्रियट मिसाइलें गोदामों में नहीं, यूक्रेन भेजिए
उपचुनाव: बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर के नतीजे बीजेपी के लिए क्यों ख़ास - BBC
उपचुनाव: बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर के नतीजे बीजेपी के लिए क्यों ख़ास BBC 3 राज्यों की 3 सीटों पर उपचुनाव की काउंटिंग शुरू: बिहार के बांकीपुर में प्रशांत किशोर, BJP की प्रतिष्ठा भी ... bhaskar.com By Election Result Live Updates: दतिया में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी आगे, बांकीपुर और मांजलपुर में गिनती जारी Jagran बांकीपुर विधानसभा सीट पर 8 बजे शुरू होगी काउंटिंग, BJP-जन सुराज-RJD के बीच कड़ा मुकाबला; यहां देखें हर LIVE India TV Hindi Bankipur Election Result live - बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी जीतेगी या जनसुराज? थोड़ी देर में मतगणना Hindustan
अंतरराष्ट्रीय डेस्क, वॉशिंगटन/दुबई: मध्य पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी भीषण सैन्य तनाव और तीसरे विश्व युद्ध के खतरे के बीच वैश्विक शांति के दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित उस व्यापक सैन्य कार्रवाई को अंतिम समय में टालने का आधिकारिक ऐलान किया है, जिसे उन्होंने खुद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा और विनाशकारी हमला करार दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और स्वयं ईरानी अधिकारियों के विशेष अनुरोध व कूटनीतिक हस्तक्षेप के बाद उन्होंने इस हमले को रोकने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच औपचारिक कूटनीतिक वार्ताओं के नए दौर की शुरुआत होने जा रही है।राष्ट्रपति ट्रंप के इस अचानक आए मोड़ से न केवल मध्य पूर्व में जारी बारूदी जंग के थमने की उम्मीद जगी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों, शेयर बाजारों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं ने भी गहरी राहत की सांस ली है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि आगामी वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से खोलना, क्षेत्रीय हमलों पर विराम लगाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरों का स्थायी समाधान निकालना है।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला टला: ट्रंप ने क्यों लिया यू-टर्न?एयरफोर्स वन (Air Force One) में पत्रकारों से बातचीत करते हुए और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी बयानों में राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि अमेरिकी और इजरायली बल ईरान के रणनीतिक बुनियादी ढांचों, ऊर्जा ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर एक ऐसा अभूतपूर्व हमला करने की पूरी तैयारी कर चुके थे, जैसा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में कभी नहीं देखा गया। अमेरिकी सेना लॉक एंड लोडेड (पूर्ण सैन्य तैयारी) की स्थिति में थी। हालांकि, ऐन वक्त पर खाड़ी देशों के प्रमुख नेताओं और मध्यस्थों द्वारा दिए गए प्रस्तावों के बाद ट्रंप ने बल प्रयोग के बजाय कूटनीति का रास्ता चुनना बेहतर समझा।डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, मैं लोगों को मारना नहीं चाहता। यदि यह हमला होता, तो यह बेहद विनाशकारी होता और इससे होने वाली तबाही को दोबारा ठीक करने में कई-कई साल लग जाते। ईरान और उसके पड़ोसी देशों ने हमसे सीधे तौर पर अनुरोध किया कि हम इस हमले को रोकें क्योंकि एक व्यापक समझौते की रूपरेखा (Framework) तैयार हो चुकी है। यदि बिना युद्ध के बातचीत के जरिए दुनिया को सुरक्षित बनाया जा सकता है, तो हम शांति को ही पहला मौका देंगे।सऊदी क्राउन प्रिंस और खाड़ी देशों की मध्यस्थता: पर्दे के पीछे क्या हुआ?इस ऐतिहासिक हमले को टालने में मध्य पूर्व के प्रमुख खाड़ी देशों, विशेष रूप से सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कतर के कूटनीतिक दलों ने सबसे केंद्रीय भूमिका निभाई है। रिपोर्टों के अनुसार, हमले के तय समय से महज कुछ घंटे पहले सऊदी क्राउन प्रिंस ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ एक लंबी और अत्यंत महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत की। इस दौरान क्राउन प्रिंस ने अमेरिका को आगाह किया कि यदि ईरान पर इतना बड़ा हमला होता है, तो तेहरान की संभावित जवाबी कार्रवाई से समूचे खाड़ी क्षेत्र की तेल सुविधाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।कतर के मध्यस्थों ने शनिवार को ईरानी राजनयिकों के सामने एक संशोधित शांति प्रस्ताव रखा, जिस पर तेहरान की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। खाड़ी देशों का मानना था कि युद्ध के इस विकराल मोड़ पर सैन्य हमला किसी भी देश के हित में नहीं होगा, बल्कि इससे अनियंत्रित क्षेत्रीय युद्ध छिड़ सकता है। कतर, सऊदी अरब और यूएई की इस संयुक्त कूटनीतिक पहल के कारण ही वॉशिंगटन ने अपनी सैन्य रणनीति को रोककर बातचीत की मेज पर लौटने का फैसला किया।हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और परमाणु मुद्दा: क्या हैं प्रस्तावित समझौते की शर्तें?अमेरिका और ईरान के बीच शुरू होने जा रही इस नई बातचीत के केंद्र में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खोला जाना और क्षेत्रीय सुरक्षा समझौते शामिल हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल परिवहन मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर लगी पाबंदियों से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और महंगाई का खतरा मंडरा रहा था।क्षेत्रीय अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित शांति समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:हॉर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण बहाली: ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों के लिए हॉर्मुज की खाड़ी को तुरंत और पूरी तरह से सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होगा।क्षेत्रीय हमलों पर पूर्ण विराम: ईरान और उसके समर्थित क्षेत्रीय गुट (मिशिया) खाड़ी देशों, अमेरिकी ठिकानों व वाणिज्यिक जहाजों पर अपने सभी रॉकेट, ड्रोन व मिसाइल हमलों को तुरंत रोकेंगे।समुद्री नाकेबंदी की समाप्ति: बदले में अमेरिका ईरान पर लगाई गई कड़े नौसैनिक जहाजरानी प्रतिबंधों (Naval Blockade) को हटाएगा और तेहरान को कानूनी रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कच्चा तेल बेचने की अनुमति देगा।परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण: अमेरिकी प्रशासन की सबसे प्राथमिक शर्त यह है कि ईरान अपने परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) कार्यक्रमों को ऐसा रूप देगा जिससे वैश्विक परमाणु खतरे का हमेशा के लिए अंत हो सके।अंतरराष्ट्रीय बाजार और क्रूड ऑयल पर असर: दुनिया ने ली राहत की सांसट्रंप के इस ऐतिहासिक ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और कमोडिटी बाजारों में जबरदस्त सकारात्मक हलचल देखी गई है। पिछले कई हफ्तों से युद्ध के डर से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में घोषणा के तुरंत बाद 4 से 7 प्रतिशत तक की जोरदार गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड के दाम टूटकर $84 प्रति बैरल के पास आ गए हैं।तेल की कीमतों में आई इस नरमी से भारत, जापान, यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों को भारी आर्थिक राहत मिली है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि सोमवार से शुरू हो रही यह वार्ता किसी मुकाम पर पहुंचती है, तो वैश्विक मुद्रास्फीति (Global Inflation) पर तेजी से लगाम लगेगी और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों (Global Stock Markets) में नई तेजी का दौर देखने को मिलेगा।हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं, लेकिन कूटनीति के इस नए अवसर ने यह साबित कर दिया है कि संवाद के जरिए बड़े से बड़े वैश्विक संकट को टाला जा सकता है। अब पूरी दुनिया की निगाहें सोमवार दोपहर से शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान की ऐतिहासिक वार्ताओं पर टिकी हुई हैं।
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
ईरान ने खोली US की पोल, इस दावे को किया खारिज, देखें दुनिया आजतक
ईरान ने अमेरिका के हमले रोकने वाले प्लान को खारिज कर दिया है. ईरान ने कहा है कि ट्रंप का दावा सरासर झूठा है साथ ही ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर टकराव अनिवार्य हुआ तो मैदान तय करेगा कि किसके पास असली ताकत है.
'दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला?', ट्रंप ने ईरान पर अब किया ये ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़ा हमला फिलहाल रोक दिया है. दूसरी तरफ तेहरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए सैन्य सतर्कता बनाए रखने, सऊदी अरब और पाकिस्तान से तेज संपर्क बढ़ाने और यह साफ करने का संदेश दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, जवाबी तैयारी और राजनीतिक समाधान अब साथ साथ चलेंगे.
ट्रम्प का दावा- ईरान पर बड़ा सैन्य हमला टला, समझौते के प्रस्ताव के बाद अमेरिका ने बदला फैसला
ट्रम्प का दावा- ईरान पर बड़ा सैन्य हमला टला, समझौते के प्रस्ताव के बाद अमेरिका ने बदला फैसला
इंडोनेशिया में समुद्र के बीच फेरी में भीषण आग, जान बचाने के लिए समुद्र में कूदे यात्री; 5 की मौत, 41 लापता
नेपाल हिंसा: धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हालात, धनुषा से हटी निषेधाज्ञा
नेपाल के धनुषा जिले में सांप्रदायिक हिंसा के बाद लागू निषेधाज्ञा सोमवार सुबह हटा दी गई है. प्रशासन ने बताया कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था सामान्य होने और प्रदर्शनकारियों द्वारा विरोध वापस लेने के कारण यह निर्णय लिया गया.
वर्ल्ड वॉर 2 के बाद सबसे बड़ा हमला होता, बातचीत से पहले ट्रंप ने फिर लगाई आग, ईरान को उकसाया
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि खाड़ी देशों ने ईरान के साथ पांच महीने से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका ईरान पर हमले नहीं करेगा।
Trump ने हमला रोका तो ईरानी मीडिया ने उड़ाया उनका मजाक
डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर बड़ा सैन्य हमला टाल दिया। उन्होंने इसे शांति के लिए जरूरी बताया, जबकि ईरानी मीडिया ने इस फैसले को अमेरिका की कमजोरी बताते हुए ट्रंप का मजाक उड़ाया।
UNSC सीट के लिए भारत ने बढ़ाए कदम: यूएन प्रतिनिधिमंडल से सिबी जॉर्ज की अहम मुलाकात, बहुपक्षवाद पर रखा पक्षindia unsc 2028 bid shanti framework global south multilateralism
US Shutdown: चुनाव प्रचार के बीच टल सकता है शटडाउन का खतरा, सीनेट ने किस फंडिंग बिल पर बनाई सहमति?
US Shutdown: चुनाव प्रचार के बीच टल सकता है शटडाउन का खतरा, सीनेट ने किस फंडिंग बिल पर बनाई सहमति?
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू हुए अब पांच महीने से ज्यादा समय हो चुका है। इस बीच दोनों के बीच एक बार युद्ध विराम का समझौता लागू हो चुका है। हालांकि, यह एक महीने भी नहीं चल पाया और जुलाई के पहले हफ्ते से शुरू होने के बाद अब तक जारी है।
World News: अमेरिका में 80 वर्षीय अभिनेता विंसेंट पास्टर का शव बरामद; PAK में सड़क हादसा, 13 लोग घायल
'मूर्ख की ताकत खत्म हो गई': US-ईरान के बीच जुबानी जंग तेज, ट्रंप के किस दावे का ईरानी मीडिया ने उड़ाया मजाक? iran-media-mocks-donald-trump-over-delay-in-possible-us-military-strike
मिस्र में सुबह-सुबह भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 5.4 रही तीव्रता
मिस्र के भूमध्य सागर क्षेत्र में सोमवार तड़के 5.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके कई इलाकों में महसूस किए गए. जर्मनी के भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनुसार भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर 10 किलोमीटर की गहराई पर था.
“मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता”: ट्रंप का बड़ा बयान
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है
उत्तरी अफ्रीका के मोरक्को से स्पेन के स्वायत्तशासी क्षेत्र स्यूटा में अवैध तरीके से घुसपैठ करने की कोशिश एक भीषण मानवीय त्रासदी में बदल गई है। स्पेन के इस हिस्से में घुसने के प्रयास में अब तक कुल 72 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश मौतें समंदर में डूबने और भगदड़ के दौरान कुचले जाने की वजह से हुईं। एक झूठी सोशल मीडिया अफवाह के बाद शुरू हुए इस भारी जनसैलाब और अवैध घुसपैठ के प्रयास ने स्पेन और मोरक्को प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। हालांकि, स्पेनिश सुरक्षा बलों और सेना की सख्त कार्रवाई के बाद करीब 48 हजार लोगों को वापस खदेड़ दिया गया है, जबकि इलाके में हालात को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।एक अफवाह के चलते उमड़ी 60 हजार लोगों की भीड़, मची भगदड़यह पूरी वीभत्स घटना तब शुरू हुई जब एक खतरनाक अफवाह ने तूल पकड़ा। स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने जानकारी दी कि कुछ कुख्यात मानव तस्करों ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की पूरी तरह से गलत व्याख्या करके यह अफवाह फैला दी थी कि जो भी प्रवासी समुद्र के रास्ते तैरकर या अवैध रूप से स्यूटा में प्रवेश कर जाएगा, उसे बिना किसी कानूनी सुनवाई के वापस नहीं भेजा जाएगा। इसी झूठी उम्मीद में गुरुवार को लगभग 60 हजार मोरक्कोवासी समुद्र के रास्ते स्यूटा के तराजाल तट पर जबरन घुसने के लिए उमड़ पड़े। भारी अव्यवस्था और भगदड़ के कारण समंदर में डूबने और पैरों तले कुचले जाने से देखते ही देखते दर्जनों लोगों की सांसें थम गईं।सेना और पुलिस ने संभाला मोर्चा, जमीनी रास्ते से वापस भेजे गए लोगस्यूटा के प्रमुख जुआन जीसस ने मीडिया को बताया कि स्थानीय मोर्चुरी (शवगृह) में कुल 88 प्रवासियों के शव पहुंच चुके हैं, जिनमें से कुछ की मौत गुरुवार से पहले भी समुद्र पार करने के दौरान हुई थी। स्यूटा को यूरोप का प्रवेश द्वार माना जाता है, जहाँ अफ्रीका की गरीबी, बेरोजगारी और बदहाली से तंग आकर युवा अक्सर जोखिम भरे रास्तों से यूरोप में दाखिल होने की फिराक में रहते हैं। स्पेन सरकार के स्यूटा प्रतिनिधि मिगुएल एंजेल पेरेज ने बताया कि इस खौफनाक हादसे में 1,000 से अधिक घायल प्रवासियों का इलाज किया गया है। दिल दहलाने वाले दृश्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई महिलाएं अपने दो-दो महीने के मासूम बच्चों को लेकर जान हथेली पर रखकर समंदर पार करने उतरी थीं। स्थिति पर काबू पाने के लिए स्पेनिश सेना ने तुरंत मोर्चा संभाला और घुसपैठियों को जमीनी रास्ते से वापस खदेड़ना शुरू किया।सुरक्षा के कड़े इंतजाम: तराजाल तट पर बनाई गई 500 मीटर लंबी तैरती दीवारइस बड़े पैमाने पर हुई अवैध घुसपैठ और भगदड़ के बाद स्पेनिश प्रशासन ने भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम कर लिए हैं। स्यूटा के तराजाल तट पर प्रशासन ने करीब 500 मीटर (1,600 फीट) लंबी एक विशेष 'तैरती दीवार' (Floating Barrier) तैयार कर दी है, ताकि समंदर के रास्ते होने वाले अवैध प्रवेश को पूरी तरह से सील किया जा सके। इसके अलावा समुद्र तट पर भारी संख्या में पुलिस बल और सेना के जवानों को तैनात किया गया है जो लगातार गश्त कर रहे हैं। प्रशासन की इन सख्त और त्वरित कार्रवाइयों के बाद अब शहर का जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है और बाजार, रेस्त्रां तथा कैफे दोबारा गुलजार होने लगे हैं।
Iran-US Talks: ईरान पर US के हमले टले, अब बातचीत की कवायद; होर्मुज पर डील और शांति वार्ता पर क्या बोले ट्रंप?---Trump Announces US-Iran Talks from Monday After Shelving Strike, Hints at Hormuz Deal
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चाइनीज सेना को 99 साल पूरे हो गए हैं। टूटी-फूटी राइफलों से चलने वाली ये फौज आज आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस है और दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर सेना मानी जाती है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसे 2027 तक 'सबसे मॉडर्न आर्मी' बनाना चाहते हैं। डेडलाइन में अब सिर्फ 1 साल बाकी है। लेकिन चीनी सेना और उसके आधुनिक हथियारों पर एक टैग हमेशा चिपका रहा है- न कभी असली जंग लड़ी, न भरोसेमंद साबित हुए। मंडे मेगा स्टोरी में जानेंगे PLA की पूरी कहानी, चाइनीज आर्मी वाकई ताकतवर है या सिर्फ दिखावटी शेर… ***** ग्राफिक - दृगचंद्र भुर्जी, विपुल शर्मा और अंकुर बंसल ------------------ ये खबर भी पढ़िए… जिनपिंग के पिता को जेल, बहन ने खुदकुशी की: चीनी राष्ट्रपति की कहानी; उनका मकसद क्या और PM मोदी से चाहते क्या हैं पीएम मोदी 7 साल बाद चीन दौरे पर गए। दावा किया जा रहा है कि ये चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक गुप्त चिट्ठी के बाद संभव हुआ। ट्रम्प की टैरिफ वॉर के बाद जिनपिंग ने किसी खास मकसद से एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। आखिर कौन हैं जिनपिंग? पूरी खबर पढ़िए…
पाकिस्तान: स्वात में शांति रैली के दौरान पुलिस मुख्यालय को बनाया निशाना, 14 की मौत और 22 घायल
उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक बेहद दहला देने वाली और खौफनाक वारदात सामने आई है। स्वात जिले के कबाल कस्बे में आयोजित एक 'शांति रैली' के दौरान हुए भीषण आत्मघाती हमले में कम से कम 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों और शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्रूर हमले का मुख्य निशाना स्थानीय पुलिस मुख्यालय था, जिससे पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस खूनी खेल के बाद पाकिस्तान के इस संवेदनशील क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।शांति रैली के बीच हुआ जोरदार धमाका, मची अफरा-तफरीप्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि यह विस्फोट कबाल कस्बे में चल रही शांति रैली के ठीक बीचों-बीच हुआ। अचानक हुए इस जोरदार धमाके के बाद मौके पर चारों तरफ अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। शुरुआती जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने इसे एक आत्मघाती हमला करार दिया है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया अभी जारी है। स्थानीय जनजातीय परिषद 'स्वात अमन जिरगा' के आह्वान पर सैकड़ों लोग हाथों में प्लेकार्ड लेकर और शांति की गुहार लगाते हुए सड़कों पर उतरे थे, लेकिन आतंकियों ने इस शांतिपूर्ण आयोजन को अपने खूनी षड्यंत्र का शिकार बना लिया।पुलिस, रेंजर्स और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को किया सीलविस्फोट की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे, जिसके बाद घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। घटना के तुरंत बाद पाकिस्तानी पुलिस, रेंजर्स और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया और सील कर दिया। फॉरेंसिक टीमों को भी मौके पर बुलाया गया है जो घटनास्थल से अहम सबूत जुटाने में जुटी हुई हैं, ताकि इस भयावह साजिश के असली मास्टरमाइंडों का पता लगाया जा सके।पिछले कुछ महीनों से लगातार बिगड़ रही है स्वात घाटी की सुरक्षा स्थितिगौरतलब है कि पिछले कुछ समय से स्वात और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। इसी बढ़ती अशांति और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के लिए स्थानीय जनजातीय नेताओं ने 'स्वात अमन जिरगा' के बैनर तले इस शांति रैली का आयोजन किया था। आम नागरिक जब अपने क्षेत्र में अमन-चैन और शांति बहाली की मांग को लेकर सड़कों पर मार्च कर रहे थे, ठीक उसी वक्त इस कायराना हमले को अंजाम दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान के इन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और आम जनता तथा सुरक्षा बल दोनों ही आतंकियों के आसान निशाने पर हैं।
पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस स्टेशन में आत्मघाती हमला, सात लोगों की मौत, 18 घायल
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले के कबाल पुलिस स्टेशन में रविवार को एक आत्मघाती हमला हुआ। स्थानीय मीडिया की जानकारी के अनुसार, इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई और 18 अन्य घायल हो गए
दक्षिण कोरिया में 42.5 डिग्री: 1904 के बाद सबसे भीषण गर्मी, जलवायु परिवर्तन का खतरा
जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार गर्मी बढ़ती जा रही है। इसका असर दुनियाभर में पड़ रहा है। स्पेन से लेकर फ्रांस तक गर्मी से झुलस रहे हैं। इसी तरह के दक्षिण कोरिया में है। वहां, पिछले एक सदी से ज्यादा पुराने मौसम रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया है। मौसम […]
अध्ययन: चुनाव में पसंदीदा पार्टी की हार पर दोस्त भी बन जाते हैं दुश्मन; शोध में सामने आई चौंकाने वाली बात---Election Defeat May Turn Friends Into Rivals, Study Finds Political Polarisation Hurts Social Trust
ट्रंप का दावा, अमेरिका ईरान के बीच होगी बैठक, होर्मुज के साथ न्यूक्लियर डील के भी दिए संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ सोमवार दोपहर से बैठक शुरू होगी। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट के साथ-साथ न्यूक्लियर डील हो सकती है।
पाकिस्तानी घुसपैठियों को बाहर करो, नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग; सड़कों पर उतरे लोग
नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग लगातार तेज होती जा रही है। इसके लिए कई संगठन और आम जनता सड़कों पर उतर आई है। वहीं मांग की जा रही है कि बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाए।
बड़ी राहत: नक्सलियों की हजारों आईईडी बरसात में हुईं बेअसर, फिर भी सुरक्षाबलों के सामने खत्म नहीं हुआ खतरा--Rain Damages Thousands of Maoist IEDs, But Buried Explosives Still Pose Threat to Security Forces
'बेवकूफ की हवा निकल गई', ट्रंप ने रोके 'भीषण हमले' तो ईरान ने उड़ाया मजाक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमलों को रोकने का फैसला किया है. ट्रंप ने बताया कि हमला सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद सबसे बड़ा हो सकता था, लेकिन सहयोगी देशों की मांग पर इसे टाल दिया गया है. वहीं अब ईरानी मीडिया ने ट्रंप के फैसले का मजाक उड़ाया है और इसे अमेरिका की कमजोरी बताया है.
West Asia Tension LIVE: होर्मुज पर फिर बढ़ा तनाव, ट्रंप के दावे पर ईरान का पलटवार; ओमान से समझौता करीब?---West Asia Tension LIVE Updates Iran US War Trump Israel reports on US military action centcom IRGC Hormuz news
भारत ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में दमदार प्रदर्शन किया। अंतिम दिन भारत की झोली में एक भी पदक नहीं आया। इस तरह भारत ने इन खेलों में कुल 39 पदकों के साथ अपने अभियान का अंत किया।
इडाहो रेस्टोरेंट फायरिंग: हमलावर ने गोली मारकर की आत्महत्या, पुलिस का खुलासा
इडाहो के ट्विन फॉल्स में एक फास्ट-फूड रेस्टोरेंट में शनिवार को हुई गोलीबारी में हमलावर की भी मौत हो गई थी. पुलिस ने बताया है कि संदिग्ध हमलावर ने खुद को गोली मारकर अपनी जान ले ली. इस हमले में सात लोग घायल हु थे, जिनमें से 2 की हालत नाजुक बनी हुई है.
Glasgow Commonwealth Games Day 11 Live Updates :नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आज 11वां दिन है।
जंगल की आग बुझाने में जुटे दो फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर आपस में टकराए, चालक दल की तलाश जारी
ग्रीस के पश्चिमी अटिका इलाके में रविवार दोपहर एक बड़े जंगल की आग बुझाने के दौरान दो अग्निशमन हेलीकॉप्टर आपस में टकरा गए।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में क्वेटा के स्पिन करेज इलाके में हुई हालिया कोयला खदान त्रासदी ने एक बार फिर देश के खनन उद्योग के खतरों को उजागर कर दिया है। इस हादसे में 34 मजदूरों की मौत हो गई।
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
इराक के सुलेमानिया पर ईरानी ड्रोन ने बरपाया कहर, सामने आया Video
इराक के सुलेमानिया में ईरान-विरोधी समूहों के एक ठिकाने को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया है. माना जा रहा है कि ये हमला ईरान ने किया है जिसमें अलगाववादी समूहों के मुख्यालय पर दो प्रोजेक्टाइल सीधे जाकर लगे. ईरान ने ड्रोन से ये हमला किया. देखें वीडियो.
बांग्लादेश में आतंकी हमले का अलर्ट, पुलिस और सरकारी वाहनों की बढ़ाई गई सुरक्षा
बांग्लादेश में संभावित आतंकी या चरमपंथी हमलों की खुफिया जानकारी के बाद देशभर में अलर्ट जारी किया गया है. पुलिस की जीप, ट्रक और बस जैसे सरकारी वाहनों की सुरक्षा बढ़ाई गई है. यह अलर्ट शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी 5 अगस्त से पहले आया है.
हमास पर भरोसा करने से इजरायल ने साफ इनकार कर दिया है। इजरायल का कहना है कि जब तक हमास अपने हथियारों को पूरी तरह सरेंडर नहीं कर देता तब तक वह अपनी फौज गाजा से नहीं हटाएगा।
पाकिस्तान में हिंदू संगठन की हुंकार... UN से भी लगाई मदद की गुहार
पाकिस्तान में हिंदू संगठन ने अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकार लागू करने की मांग उठाई है. संगठन ने पूरे प्रांत में अभियान शुरू करने का ऐलान किया है और UN समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी समर्थन मांगा है.
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आत्मघाती हमला, सात की मौत
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले के कबाल पुलिस स्टेशन में रविवार को एक आत्मघाती हमला हुआ। स्थानीय मीडिया की जानकारी के अनुसार, इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई और 18 अन्य घायल हो गए।

