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पाकिस्तान: कराची के सरकारी अस्पताल फैला रहे एचआईवी, 6 मासूमों की मौत और 120 नए मामले आए सामने

पाकिस्तान के कराची स्थित दो सरकारी अस्पतालों ने कई मासूमों को जानलेवा एचआईवी-पॉजिटिव के जाल में फंसा दिया। स्वास्थ्य महकमे के ढुलमुल रवैये ने एक-एक करके 120 को संक्रमित कर दिया। अब तक 6 बच्चे जान गंवा चुके हैं और इसकी पुष्टि प्रांतीय सरकार ने की है।

देशबन्धु 15 Jul 2026 2:15 pm

सऊदी अरब के साथ गहरी हुई पाकिस्तान की दोस्ती! निशाने पर भारत नहीं, बल्कि इस तीसरे देश को घेरने की है पूरी तैयारी

दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने द्विपक्षीय और आर्थिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है, और विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह तीर बिल्कुल निशाने पर जाकर लगा है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के विपरीत, पाकिस्तान की इस नई और मजबूत होती 'सऊदी यारी' के निशाने पर उसका पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारत नहीं है। तो फिर आखिर वह कौन सा मुल्क है जिसे घेरने या कूटनीतिक रूप से पीछे धकेलने के लिए पाकिस्तान और सऊदी अरब इतने करीब आ रहे हैं?सऊदी संग क्यों मजबूत हो रही है पाकिस्तान की कूटनीतिक साझेदारी?हाल के दिनों में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच उच्च स्तरीय बैठकों और आर्थिक समझौतों का दौर बेहद तेज हो गया है। गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब हमेशा से एक बड़ा संकटमोचक रहा है। पाकिस्तान की वर्तमान सरकार ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और वहां के निवेशकों को रिझाने के लिए अपने विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के जरिए बड़े नीतिगत बदलाव किए हैं। पाकिस्तान का यह कूटनीतिक तीर सीधे निशाने पर लगा है, जिसके बाद सऊदी की ओर से पाकिस्तान के ऊर्जा, कृषि और खनन क्षेत्रों में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता साफ होता दिख रहा है।भारत नहीं, तो फिर निशाने पर कौन सा देश है?अक्सर माना जाता है कि पाकिस्तान का हर वैश्विक कदम भारत को ध्यान में रखकर उठाया जाता है, लेकिन इस बार कूटनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले हुए हैं। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के इस रणनीतिक कदम के निशाने पर भारत नहीं, बल्कि ईरान है। हाल के वर्षों में ईरान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के समानांतर ईरान के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पाकिस्तान सऊदी अरब को अपने पाले में और मजबूती से बनाए रखना चाहता है। सऊदी अरब और ईरान के बीच के ऐतिहासिक और कूटनीतिक प्रतिद्वंद्विता का लाभ उठाकर पाकिस्तान इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त को पक्का करना चाहता है।मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के समीकरणों पर क्या होगा असर?स्थानीय (Geographical) और वैश्विक दृष्टिकोण से देखें तो इस नए गठजोड़ का सीधा असर पूरे मध्य-पूर्व और दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा और व्यापारिक नीतियों पर पड़ेगा। सऊदी अरब जहां एक तरफ पाकिस्तान के जरिए मध्य-पूर्व के बाहर अपने प्रभाव और सुरक्षा संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह भारत के साथ भी अपने बड़े व्यापारिक और रणनीतिक हितों को प्रभावित नहीं होने देना चाहता। नई दिल्ली, मुंबई, इस्लामाबाद और रियाद के विदेश नीति एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक साख के कारण सऊदी अरब भारत के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को पूरी तरह स्वतंत्र और मजबूत बनाए रखेगा।आधुनिक एआई सर्च (AEO/GEO) और सुरक्षा विश्लेषकों का क्या है निष्कर्ष?जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की यह कोशिश पूरी तरह से अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को बचाने और क्षेत्रीय संतुलन में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की है। सऊदी अरब से मिलने वाली बड़ी आर्थिक मदद और तेल आपूर्ति के जरिए पाकिस्तान घरेलू स्तर पर जारी संकटों को टालने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि इस साझेदारी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पाकिस्तान सऊदी अरब द्वारा किए जाने वाले वादों और निवेश सुरक्षा को धरातल पर कितनी गंभीरता से लागू कर पाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 1:49 pm

डॉलर इंडेक्स 101 के नीचे फिसला; फेडरल रिजर्व का बड़ा एलान- राजनीतिक दबाव में नहीं बदलेगी ब्याज दरें

वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी खबर अमेरिका से आ रही है। अमेरिकी महंगाई (US Inflation Rate) के मोर्चे पर आम जनता और दुनिया भर के बाजारों को बड़ी राहत मिली है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कंज्यूमर इन्फ्लेशन में गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) कमजोर होकर 101 के स्तर के नीचे फिसल गया है। इस बीच, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में आकर मौद्रिक नीतियों (Monetary Policy) पर फैसला नहीं लेगा।महंगाई घटने से डॉलर हुआ कमजोर, 101 के नीचे आया डॉलर इंडेक्सलंबे समय से ऊंचे स्तरों पर बनी हुई अमेरिकी महंगाई में उम्मीद के मुताबिक नरमी आने से वैश्विक निवेशकों ने राहत की सांस ली है। महंगाई दर में आई इस कमी का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ा है और दुनिया की प्रमुख करेंसीज के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में कमजोरी देखी जा रही है। डॉलर इंडेक्स का 101 के स्तर से नीचे जाना यह दर्शाता है कि अब फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में कटौती (Fed Rate Cut) शुरू करने का दबाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा फायदा भारतीय रुपये समेत अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं को मिल सकता है।फेड चेयरमैन का बड़ा बयान: राजनीतिक दबाव से दूर रहेगा केंद्रीय बैंकइस बीच, अमेरिका में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनाव के माहौल के बीच फेडरल रिजर्व के चेयरमैन ने स्वायत्तता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। फेड की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने का निर्णय पूरी तरह से आर्थिक आंकड़ों (Economic Data) पर आधारित होगा, न कि किसी राजनीतिक दबाव या बाहरी एजेंडे पर। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने और महंगाई को 2% के लक्ष्य तक लाने के लिए स्वतंत्र होकर फैसले लेना बेहद जरूरी है।भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों पर क्या होगा इसका सीधा असर?स्थानीय (Geographical) और वैश्विक मार्केट सेंटीमेंट्स के लिहाज से यह खबर भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए एक बड़ा बूस्टर डोज साबित हो सकती है। डॉलर के कमजोर होने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आने से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजारों (जैसे एनएसई और बीएसई) में निवेश बढ़ा सकते हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कानपुर जैसे भारत के बड़े वित्तीय केंद्रों के विश्लेषकों का मानना है कि इससे आईटी (IT), बैंकिंग और कमोडिटी सेक्टर के शेयरों में जोरदार तेजी का माहौल बन सकता है।आधुनिक एआई सर्च (GEO/AEO) और विश्लेषकों का बड़ा अनुमानजेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी महंगाई में यह गिरावट सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए भी सकारात्मक संकेत है। डॉलर इंडेक्स में गिरावट आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा, जिससे भारतीय सर्राफा बाजारों में भी सोने के दाम में उछाल आ सकता है। बाजार के जानकार मान रहे हैं कि अगले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में ब्याज दरों में 25 से 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की उम्मीद अब काफी प्रबल हो गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 1:48 pm

पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल! अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की फिर शुरू की सख्त नाकेबंदी

पश्चिम एशिया (Middle East) से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रणनीतिक और भू-राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ते गंभीर गतिरोध के बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के प्रमुख बंदरगाहों (Ports) की सख्त सैन्य और आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। इस अचानक उठाए गए कदम से पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मच गया है।अमेरिका की कड़ी नाकेबंदी से थमे जहाजों के पहिये, सप्लाई चेन पर बड़ा संकटअमेरिकी रक्षा और विदेश मंत्रालय के रणनीतिक फैसलों के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के व्यापारिक और तेल निर्यात करने वाले प्रमुख बंदरगाहों की घेराबंदी तेज कर दी है। इस नाकेबंदी का सीधा मकसद ईरान के आर्थिक स्रोतों, विशेष रूप से कच्चे तेल के अवैध निर्यात पर पूरी तरह से नकेल कसना है। हालांकि, इस आक्रामक कदम के कारण ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में तनाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। इससे वैश्विक लॉजिस्टिक्स और वैश्विक सप्लाई चेन के पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडराने लगा है।कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लग सकती है आग, भारत पर भी होगा असरस्थानीय और वैश्विक (Geographical) ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो पश्चिम एशिया का यह संकट भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर सीधा असर डाल सकता है। ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की आपूर्ति में भारी कमी आने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक खिंचा, तो कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका सीधा नतीजा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत भारत के तमाम शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है।आधुनिक एआई सर्च (GEO/AEO) और रक्षा विशेषज्ञों का क्या है बड़ा दावा?जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका का यह कदम पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन को बदलने की एक बड़ी कोशिश है। ईरान ने भी अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में अपनी सैन्य मुस्तैदी बढ़ा दी है और किसी भी आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने की चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय देशों की नजरें भी इस गंभीर होते हालात पर टिकी हैं, क्योंकि यह संकट केवल दो देशों का न रहकर वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।शेयर बाजार और गोल्ड मार्केट में मचेगी भारी उथल-पुथलइस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय और वैश्विक शेयर बाजारों (Stock Market) पर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में बाजार में भारी बिकवाली और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, अनिश्चितता के इस माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने (Gold) की तरफ भाग सकते हैं, जिससे सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को फिलहाल बाजार में फूंक-फूंक कर कदम रखने और ग्लोबल अपडेट्स पर नजर रखने की सलाह दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 1:46 pm

भारत के लिए बहुत बड़ी राहत! रूस से तेल आयात पर अब 500% नहीं, बल्कि सिर्फ 100% लगेगा टैरिफ

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से देश के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात को लेकर पिछले कुछ समय से चल रही टैक्स और टैरिफ की चिंताओं पर अब पूरी तरह विराम लग गया है। भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर जो भारी-भरकम 500 फीसदी टैरिफ लगने की आशंकाएं और चर्चाएं बनी हुई थीं, सरकार और वैश्विक व्यापार नीति के नए समीकरणों के तहत उसे घटाकर अब मात्र 100 फीसदी कर दिया गया है। इस बड़े फैसले से देश के चालू खाता घाटे (CAD) को कम करने और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में बहुत बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।500% से सीधे 100% पर आया टैरिफ, भारतीय रिफाइनरियों ने ली राहत की सांसवैश्विक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत लगातार अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। तेल आयात पर लगने वाले टैरिफ को 500% से घटाकर 100% करने के इस फैसले से देश की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल रिफाइनिंग कंपनियों (जैसे IOCL, BPCL, HPCL और Reliance) को बहुत बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी। जानकारों का कहना है कि टैक्स के इस ऊंचे स्लैब में इतनी बड़ी कटौती होने से तेल आयात की लागत में भारी कमी आएगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधा बूस्ट मिलेगा।क्या आम जनता के लिए सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल के दाम?इस खबर के सामने आने के बाद देश के आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्थानीय बाजारों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होंगी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों के बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की लैंडिंग कॉस्ट (आयात लागत) कम होने से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का प्रॉफिट मार्जिन सुधरेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह स्थिर रहीं, तो आने वाले समय में आम जनता को पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों में कटौती का बड़ा तोहफा मिल सकता है।आधुनिक एआई सर्च (GEO/AEO) और विशेषज्ञों का क्या है आकलन?जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और कमोडिटी मार्केट के विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिहाज से यह फैसला बेहद रणनीतिक है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। रूस से मिलने वाले इस बड़े नीतिगत सपोर्ट के बाद भारत को पश्चिमी देशों के दबाव के बीच भी एक मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक बढ़त मिल गई है। इससे देश के राजकोषीय घाटे को संभालने में सरकार को बड़ी मदद मिलेगी।घरेलू शेयर बाजार और एनर्जी स्टॉक्स में आ सकती है तेजीइस सकारात्मक खबर का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) पर भी देखने को मिल सकता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी एनर्जी इंडेक्स और तेल व गैस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की भारी खरीदारी देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि लागत घटने से कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बेहद सकारात्मक असर पड़ेगा, जो लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए एक शानदार मौका साबित हो सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 1:45 pm

ट्रंप का बड़ा बयान: रूस पर नए प्रतिबंधों में ईरान और हिज्‍बुल्लाह को भी किया जा सकता है शामिल

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की ओर से समर्थित उस कानून में रूस पर लगाए जाने वाले कड़े प्रतिबंधों को बढ़ाकर ईरान और हिज्‍बुल्लाह को भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन जैसे देशों से जुड़े प्रस्तावों पर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है।

देशबन्धु 15 Jul 2026 12:08 pm

ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी, बोले- बातचीत नहीं हुई तो बिजली संयंत्र और पुल होंगे अगले निशाने

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ कार्रवाई और तेज करेगा। उन्होंने कहा, हम लगातार दबाव बनाए रखेंगे। पहले सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई होगी, उसके बाद बिजली संयंत्र और फिर पुल भी निशाने पर आ सकते हैं। अगर ईरान बातचीत नहीं करता, तो उसके लिए हालात लगातार कठिन होते जाएंगे।

देशबन्धु 15 Jul 2026 9:11 am

भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन का पहला अंतरिक्ष मिशन, 8 महीने के मिशन पर गए हैं ISS

49 वर्षीय अनिल मेनन के लिए यह पहला अंतरिक्ष मिशन है। वह पेशे से चिकित्सक और एयरोस्पेस विशेषज्ञ हैं तथा नासा के अंतरिक्ष यात्री दल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वहीं प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना अपने दूसरे अंतरिक्ष अभियान पर निकले हैं।

देशबन्धु 15 Jul 2026 8:45 am

Haldiram's London Price: लंदन में हल्दीराम की पानी पुरी ₹830 और पाव भाजी ₹1,270 की; भारत से 7 गुना महंगे दाम देख चौंके लोग

भारत में हर आम और खास परिवार का पसंदीदा और सबसे भरोसेमंद स्नैक्स व फूड ब्रांड 'हल्दीराम' (Haldiram’s) अब सात समंदर पार ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी अपनी धमक जमा चुका है। लंदन के मशहूर 'लेस्टर स्क्वायर' (Leicester Square) में हल्दीराम का नया आउटलेट खुलते ही वहां भारतीय प्रवासियों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सोशल मीडिया पर इस नए स्टोर के बाहर लगी लंबी-लंबी लाइनों के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय आउटलेट की जिस बात ने इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह है इसके मेन्यू कार्ड में लिखी व्यंजनों की चौंकाने वाली कीमतें...।लंदन के इस आउटलेट में मिलने वाले पकवानों के दाम देश की राजधानी दिल्ली या भारत के अन्य शहरों के मुकाबले आसानी से लगभग सात गुना अधिक हैं।लंदन बनाम भारत: खाने की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतरभारत में जो स्ट्रीट फूड बेहद किफायती दामों पर मिल जाते हैं, उनके लिए लंदन में ग्राहकों की जेब पर तगड़ा असर पड़ रहा है। आइए देखते हैं दोनों देशों के दामों का सीधा अंतर:पानी पूरी (गोलगप्पा): भारत में जहां अमूमन एक प्लेट स्वादिष्ट पानी पूरी ₹75 में मिल जाती है, वहीं लंदन के हल्दीराम में इसके लिए ग्राहकों को 6.50 यानी करीब ₹830 चुकाने पड़ रहे हैं।पाव भाजी: भारत की सबसे लोकप्रिय बजट-फ्रेंडली डिश 'पाव भाजी' के लिए लंदन स्टोर में 9.90 यानी लगभग ₹1,270 ढीले करने पड़ रहे हैं।गार्लिक नान: तंदूर से निकलने वाली एक गार्लिक नान की कीमत वहां 5 यानी करीब ₹640 रखी गई है।विदेशी ग्राहकों के लिए छोटा मेन्यू और खास डिस्क्रिप्शनलंदन आउटलेट का मेन्यू कार्ड भारत की तरह बहुत विशाल और फैला हुआ नहीं है। विदेशी मेहमानों और स्थानीय स्वाद को ध्यान में रखते हुए यहां का मेन्यू काफी छोटा और चुनिंदा व्यंजनों वाला बनाया गया है। खास बात यह है कि मेन्यू में हर एक डिश के साथ उसका पूरा विवरण (Details/Description) दिया गया है, ताकि ब्रिटिश और अन्य विदेशी ग्राहकों को भारतीय व्यंजनों के स्वाद, तीखेपन और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों को बेहतर ढंग से समझने में आसानी हो।आखिर लंदन में इतनी महंगी क्यों हैं कीमतें?हल्दीराम के इस प्रीमियम रेट कार्ड के पीछे बिजनेस एक्सपर्ट्स और मार्केट रिसर्चर्स ने दो मुख्य कारण बताए हैं:प्रीमियम ब्रांडिंग रणनीति: भारत में हल्दीराम खुद को एक किफायती और मिडिल-क्लास फैमिली रेस्तरां के रूप में पेश करता है। इसके विपरीत, लंदन में कंपनी ने खुद को एक 'प्रीमियम इंडियन कैजुअल डाइनिंग ब्रांड' (Premium Indian Casual Dining Spot) के रूप में स्थापित करने की रणनीति अपनाई है।हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट: लंदन जैसे दुनिया के सबसे महंगे शहरों में से एक में रेस्तरां चलाने का परिचालन खर्च (जैसे प्राइम लोकेशन का भारी-भरकम किराया, स्टाफ की मोटी सैलरी) भारत से कहीं ज्यादा है। इसके अलावा, प्रामाणिक भारतीय स्वाद देने के लिए मसालों और विशेष सामग्रियों के आयात पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) और वहां के कड़े टैक्स नियम भी इस 7 गुना ज्यादा कीमत के लिए जिम्मेदार हैं।24 साल की रिया अग्रवाल की सोच से खुला लंदन आउटलेटलंदन स्थित इस भव्य रेस्तरां में एक साथ 110 लोगों के बैठने की क्षमता है। हल्दीराम के इस बड़े अंतरराष्ट्रीय विस्तार के पीछे अग्रवाल परिवार की 24 वर्षीय युवा एंटरप्रेन्योर रिया अग्रवाल का दिमाग और उनकी अहम भूमिका बताई जा रही है।रिया ने खुद करीब 11 सालों तक लंदन में रहकर अपनी उच्च शिक्षा पूरी की है। लंदन में रहने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि ब्रिटेन के लोगों में भारतीय भोजन (Indian Cuisine) के प्रति दीवानगी लगातार बढ़ रही है। रिया का मानना है कि सही स्ट्रेटेजी के साथ हल्दीराम को यूके (UK) के बाजार में भी एक घरेलू और जाना-माना नाम बनाया जा सकता है। इसी विजन के साथ कंपनी ने ब्रिटिश फूड मार्केट में यह कदम रखा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 8:17 am

Trump's major U-turn: रूसी तेल खरीद पर भारत पर 500% की जगह अब लगेगा सिर्फ 100% टैरिफ, अमेरिकी सीनेट ने दी बड़ी राहत

वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीति के गलियारों से इस समय की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सीनेटरों ने मंगलवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विवादित विधेयक का एक नया संशोधित संस्करण (Revised Version) पेश किया है। दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा समर्थित इस ऐतिहासिक विधेयक में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव करते हुए भारत, चीन और रूसी ऊर्जा पर निर्भर अन्य देशों पर लगाए जाने वाले 500 प्रतिशत के विनाशकारी आर्थिक टैरिफ (आयात शुल्क) के खतरे को बेहद कम कर दिया गया है। अमेरिकी प्रशासन और व्हाइट हाउस के इस अप्रत्याशित यू-टर्न से भारतीय व्यापारिक क्षेत्रों और निर्यातकों ने बड़ी राहत की सांस ली है।दबाव बनाने की रणनीति बरकरार: 500% से घटकर 100% हुआ दंडात्मक शुल्करिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के संयुक्त समर्थन वाले इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य अभी भी मास्को के वित्तीय स्रोतों को सुखाना ही है। इसके तहत क्रेमलिन के शीर्ष अधिकारियों पर कड़े व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर आर्थिक दबाव बनाना जारी रखा गया है ताकि वे रूस से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे समाप्त करें। हालांकि, कूटनीतिक तल्खी और वैश्विक व्यापार चेन के पूरी तरह ध्वस्त होने के डर से अमेरिकी नीति-निर्माताओं ने एकमुश्त 500 प्रतिशत शुल्क लगाने के मूल प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे ईंधन के शीर्ष पांच खरीदारों के लिए अधिकतम 100 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है।इन देशों को मिलेगी बड़ी राहत: शीर्ष खरीदारों की सूची में भारत-चीन शामिलसीनेट की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों और सहयोगियों के विश्लेषण के अनुसार, रूसी कच्चे तेल के शीर्ष पांच खरीदारों के रूप में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान की पहचान की गई है। वहीं, रूसी प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के शीर्ष खरीदारों में चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम का नाम शामिल है। नए विधेयक में किए गए इस ऐतिहासिक संशोधन के बाद भारत जैसे बड़े विकासशील बाजारों पर से अमेरिकी मंदी थोपने का सीधा खतरा टल गया है। यह 100 प्रतिशत का अधिकतम स्लैब उन देशों के लिए एक रणनीतिक बफर की तरह काम करेगा, जो अचानक रूसी तेल को छोड़ पाने में अपनी व्यावहारिक और घरेलू असमर्थता जाहिर कर चुके हैं।यूरोपीय देशों और जापान के लिए विशेष छूट का नया प्रावधानइस संशोधित कानून की एक और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें उन देशों के लिए एक विशेष कानूनी छूट (Sanction Waiver) का रास्ता साफ किया गया है जो अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से होने वाले कुल गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से भी कम हिस्सा खरीदते हैं। इसके साथ ही शर्त यह भी होगी कि वे देश वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को तलाशने के लिए ठोस कदम उठा रहे हों। इस नई रियायत के तहत जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम जैसे अमेरिका के प्रमुख रणनीतिक सहयोगियों को प्रतिबंधों के कड़े दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जा सकता है, जिससे इन देशों को अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और घरेलू उद्योगों को चलाने में बड़ी मदद मिलेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 8:07 am

US-Iran War Update: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एलान-'ईरान को कभी नहीं बनने देंगे परमाणु ताकत', होर्मुज हमले में 1 भारतीय नाविक की मौत से भारत सख्त!

पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा बारूदी टकराव अब एक बेहद संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय संकट में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और ईरान को लेकर कई बड़े और आक्रामक एलान किए हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि रणनीतिक रूप से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) ईरान को छोड़कर बाकी सभी देशों के व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा, जबकि ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। इन सबके बीच, होर्मुज स्ट्रेट में हुए एक ताजा हमले में एक भारतीय नागरिक (नाविक) की दर्दनाक मौत हो गई है, जिससे भारत सरकार का रुख भी बेहद कड़ा हो गया है।'ईरान का हिंसक दौर अब खत्म होगा'-परमाणु हथियार पर ट्रंप का संकल्पराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक समुदाय को भरोसा दिलाते हुए एक बड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा उठाए गए इन सख्त आर्थिक और सैन्य कदमों के बाद अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में ईरान का हिंसक, आक्रामक और अस्थिरता फैलाने वाला दौर हमेशा-केशा के लिए खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना की मुस्तैदी की वजह से ही वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) इस युद्ध के बावजूद रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है।20% सुरक्षा टैक्स पर पलटे ट्रंप, खाड़ी देशों के साथ करेंगे सीक्रेट डीलइस महातनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने उस विवादास्पद बयान पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कमर्शियल जहाजों पर 20 प्रतिशत का भारी सुरक्षा शुल्क थोपने का एलान किया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के शीर्ष नेताओं के साथ हुई अत्यंत सकारात्मक बातचीत के बाद मैंने 20% अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क (Reimbursement Fee) लगाने की योजना को रद्द कर दिया है। अब इसकी जगह विभिन्न खाड़ी देश अमेरिका के भीतर बहुत बड़े पैमाने पर नए व्यापार और निवेश समझौते (Investment Agreements) करेंगे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह निवेश उनके पुराने दौरों के समझौतों से अलग है या उसी का हिस्सा।होर्मुज में तेल टैंकरों पर हमला: 1 भारतीय की मौत, 10 घायलइस युद्ध की आंच अब भारतीय नागरिकों तक भी पहुंच गई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो बड़े कमर्शियल तेल टैंकरों—'एमटी अल बहिया' (MT Al Bahiyah) और 'एमटी मोम्बासा' (MT Mombasa) पर होर्मुज स्ट्रेट में भीषण हमला हुआ।भारतीयों की मौजूदगी: इन दोनों जहाजों पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे।हताहतों की संख्या: इस हमले की चपेट में आने से 1 भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।बढ़ता आंकड़ा: गौरतलब है कि इस साल 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से खाड़ी क्षेत्र में जारी इस जंग में अब तक कुल 14 भारतीय नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं।भारत सरकार का बड़ा एक्शन: ईरानी राजनयिक तलब, जताई कड़ी चिंताअपने नागरिकों पर हुए इस जानलेवा हमले को लेकर नई दिल्ली में भारत सरकार बेहद सख्त नजर आ रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार सुबह तुरंत एक्शन लेते हुए भारत में मौजूद ईरानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी (राजनयिक) को साउथ ब्लॉक तलब किया और इस हिंसक हमले के खिलाफ भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया।भारत ने वैश्विक मंच पर इन हमलों की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है। विदेश मंत्रालय ने मारे गए नाविक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता पहुंचाने की बात कही। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यूएई (UAE) में मौजूद भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर पल-पल की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। इसके साथ ही भारत ने दोनों देशों से हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत व कूटनीति (Diplomacy) के जरिए शांति बहाल करने की अपनी पुरानी अपील को फिर दोहराया।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:57 am

रूसी तेल खरीद विवाद में डोनाल्ड ट्रंप ने किया ऐतिहासिक प्रतिबंध विधेयक का समर्थन, हिल सकती है देश की अर्थव्यवस्था

भारत और अमेरिका के रणनीतिक व व्यापारिक संबंधों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मोड़ सामने आया है। वैश्विक तेल बाजार और कूटनीति में तहलका मचाते हुए व्हाइट हाउस ने एक ऐसे सख्त अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक का खुला समर्थन किया है, जिसके कानूनी रूप से लागू होने पर रूसी कच्चे तेल की लगातार खरीद को लेकर भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर 500 प्रतिशत तक का रिकॉर्ड-तोड़ टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस के आर्थिक राजस्व को पूरी तरह ठप करने के लिए इस कड़े दंडात्मक कानून के पक्ष में आ गए हैं।क्या है 'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट' और भारत क्यों है इसके मुख्य निशाने परअमेरिकी संसद में पेश किए गए इस विवादित और बेहद आक्रामक कानून को 'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट' (Sanctioning Russia Act) के नाम से जाना जा रहा है। इसे दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल द्वारा तैयार किया गया था। इस बिल का मूल उद्देश्य केवल रूस पर ही नहीं, बल्कि उन देशों पर भी तगड़ा आर्थिक दबाव बनाना है जो यूक्रेन युद्ध के बावजूद मास्को के ऊर्जा क्षेत्र के साथ बड़ा व्यापारिक लेनदेन कर रहे हैं। अमेरिकी सीनेट में दिए गए बयानों के मुताबिक, रूस के कुल तेल, गैस और पेट्रोलियम निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर भारत और चीन को जा रहा है, जिससे मास्को को भारी राजस्व मिल रहा है। अमेरिका का मानना है कि इस मांग पर पूरी तरह रोक लगाने से रूस आर्थिक रूप से लाचार हो जाएगा और यूक्रेन युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है।कानूनी ग्रे जोन में फंसा भारत: 17 जून को समाप्त हुई अमेरिकी छूटभारत के लिए यह भू-राजनीतिक संकट इसलिए और भी ज्यादा गहरा गया है, क्योंकि बीती 17 जून 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा दी गई वह अस्थायी विशेष छूट (Sanction Waiver) आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुकी है, जिसके तहत नई दिल्ली को बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध के डर के रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने की कानूनी इजाजत मिली हुई थी। इस छूट की मियाद खत्म होने के बाद से ही भारत अब एक जटिल अंतरराष्ट्रीय कानूनी ग्रे जोन में आ गया है। यदि यह नया कानून पास हो जाता है, तो यह अमेरिकी इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति को कांग्रेस द्वारा दिया गया अब तक का सबसे व्यापक और खतरनाक 'सेकेंडरी टैरिफ' (Secondary Tariff) लगाने का अधिकार सौंप देगा।भारतीय जीडीपी (GDP) और इन प्रमुख सेक्टर्स पर मंडराया मंदी का खतराअंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्रियों और वैश्विक व्यापार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने भारत पर 500 प्रतिशत का यह दंडात्मक टैरिफ लागू कर दिया, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा वित्तीय झटका लगेगा। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इससे भारत की कुल जीडीपी में 0.5 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। अमेरिका को निर्यात करने वाले भारत के सबसे मजबूत सेक्टर्स जैसे फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग), टेक्सटाइल (कपड़ा निर्यात) और आईटी (IT) सर्विसेज पर इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय लगातार अपने पुराने और स्वतंत्र रुख पर कायम हैं कि देश का ऊर्जा आयात पूरी तरह से उसकी राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा और घरेलू जरूरतों से प्रेरित है, जिसका किसी भी अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।रिपब्लिकन पार्टी में ही अंतर्विरोध: वैश्विक व्यापार ठप होने की चेतावनीरिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अचानक निधन के बाद इस विधेयक को अमेरिकी संसद में एक नई भावनात्मक और राजनीतिक गति मिली है, जहां कई सीनेटर इसे उनके काम के सम्मान के रूप में पारित कराने पर अड़े हैं। हालांकि, इस विधेयक को लेकर खुद अमेरिकी राजनेताओं में गहरे मतभेद उभर आए हैं। सीनेट माइनॉरिटी व्हिप डिक डर्बिन सहित कई डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल अधिकारियों के बयान के बजाय खुद सार्वजनिक रूप से इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। वहीं दूसरी ओर, खुद ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर रैंड पॉल ने इस कठोर कानून का पुरजोर विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि भारत और चीन जैसे दुनिया के सबसे बड़े बाजारों पर ऐसे दंडात्मक आर्थिक प्रतिबंध लगाने से संपूर्ण वैश्विक व्यापार चेन ध्वस्त हो जाएगी और दुनिया में एक व्यापक आर्थिक मंदी और अस्थिरता फैल सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:54 am

अमेरिका ने होर्मुज में फिर की सख्त नौसैनिक नाकाबंदी, ईरान के अहवाज और केश्म द्वीप पर भीषण बमबारी

तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) का भू-राजनीतिक परिदृश्य एक बार फिर बारूद के ढेर पर आकर खड़ा हो गया है। अमेरिकी सेना ने आधिकारिक घोषणा करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में ईरान के प्रमुख बंदरगाहों की सख्त नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़े इस अप्रत्याशित सैन्य तनाव के कारण दोनों देशों के बीच हुआ नाजुक अंतरिम युद्धविराम समझौता पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में एक पूर्ण विनाशकारी युद्ध छिड़ने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।अहवाज, बुशहर और केश्म द्वीप पर विनाशकारी हवाई हमलेईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के अनुसार, अमेरिका की नई नाकाबंदी की घोषणा के तुरंत बाद ईरान के रणनीतिक रूप से संवेदनशील दक्षिणी शहर अहवाज, तटीय शहर बुशहर और केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी सैन्य सेंट्रल कमांड (US CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी तटीय प्रणालियों, मिसाइल ठिकानों और ड्रोन लॉन्च पैड्स को नष्ट करने के लिए हवाई हमलों की एक और विनाशकारी लहर शुरू की गई है। जवाब में ईरान ने भी बहरीन, कुवैत और जॉर्डन के पास तीन वाणिज्यिक टैंकरों को निशाना बनाया, जिसमें यूएई (UAE) से जुड़े दो टैंकरों पर हुए हमले में दो नाविकों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए हैं।ट्रंप ने बदला फैसला: जहाजों पर 20% टोल लगाने की योजना वापस लीइस बड़े सैन्य घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक यू-टर्न लिया है। इससे पहले ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क (टोल) लगाने की घोषणा की थी। हालांकि, ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि खाड़ी के मित्र देशों, राजाओं और अमीरों के विशेष अनुरोध के बाद उन्होंने इस योजना को वापस ले लिया है। खाड़ी देशों ने टोल के बदले अमेरिका में अरबों डॉलर के प्रत्यक्ष निवेश का वैकल्पिक प्रस्ताव दिया है। ट्रंप के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक उछला ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम $87 प्रति बैरल से गिरकर तत्काल $78 पर आ गया है।होर्मुज पर संप्रभुता की जंग और संकट में वैश्विक शांति वार्ताइस पूरे युद्ध का मुख्य केंद्र बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करना है, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरिबाबादी ने आरोप लगाया है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर तेहरान को उसकी वैध संप्रभुता का प्रयोग करने से रोक रहा है। वहीं, कतर के विदेश मंत्रालय ने जॉर्डन और बहरीन पर हुए ईरानी हमलों को संप्रभुता का घोर उल्लंघन बताते हुए कूटनीति की अपील की है। वर्तमान में पाकिस्तान के नेतृत्व वाली एक मध्यस्थता टीम युद्धविराम को बचाने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है, क्योंकि यदि अमेरिका-ईरान युद्ध भड़कता है, तो रोम में चल रही इजरायल-लेबनान शांति वार्ता और हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण की पूरी रूपरेखा भी हमेशा के लिए मलबे में तब्दील हो जाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:52 am

ट्रंप का धमाकेदार बयान: रूस संग ईरान-हिज़्बुल्लाह पर भी नए प्रतिबंध

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की ओर से समर्थित उस कानून में रूस पर लगाए जाने वाले कड़े प्रतिबंधों को बढ़ाकर ईरान और हिज्‍बुल्लाह को भी शामिल किया जा सकता है

देशबन्धु 15 Jul 2026 7:50 am

Italy Parliament Voting: इटली की पीएम जार्जिया मेलोनी को संसद में लगा बड़ा झटका, 1 वोट से गिरा चुनावी कानून संशोधन का प्रस्ताव

यूरोपीय राजनीति और इटली के सत्ता गलियारों से इस वक्त की एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) को चुनावी कानून में संशोधन करने के अपने एक बेहद महत्वपूर्ण एजेंडे पर संसद में बहुत बड़ा और करारा झटका लगा है। इटली की संसद के निचले सदन (Chamber of Deputies) ने पीएम मेलोनी की पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' (Brothers of Italy) द्वारा लाए गए वोटिंग नियमों में बदलाव से जुड़े एक अहम प्रस्ताव को महज 1 वोट के अंतर से खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 187 और विरोध में 188 वोट पड़े, जिससे मेलोनी सरकार को संसद के भीतर भारी फजीहत का सामना करना पड़ा है।क्या था प्रस्ताव और कैसे फेल हुई मेलोनी की रणनीति?यह पूरा विवादित प्रस्ताव देश की चुनावी प्रणाली में उम्मीदवारों के लिए 'प्राथमिकता-आधारित मतदान व्यवस्था' (Preference-Based Voting System) को फिर से लागू करने से संबंधित था। मेलोनी सरकार को पूरा भरोसा था कि वे इस संशोधन को आसानी से पास करा लेंगी, क्योंकि उनके गठबंधन सहयोगी दलों—'लीग' (League) और 'फोर्ज़ा इटालिया' (Forza Italia)—ने उन्हें संसद में पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया था।लेकिन, वोटिंग के दौरान सारा खेल तब पलट गया जब संसद में गुप्त मतदान (Secret Ballot) कराया गया। गुप्त मतदान होने की वजह से गठबंधन के कुछ सांसदों ने अपनी ही पार्टी लाइन के खिलाफ (क्रॉस वोटिंग) जाकर प्रस्ताव के विरोध में वोट डाल दिया, जिसके चलते यह प्रस्ताव सिर्फ एक वोट से धराशायी हो गया।इटली में क्यों बदले जा रहे हैं चुनावी नियम?इटली की संसद में फिलहाल एक बड़े चुनावी सुधार विधेयक (Election Reform Bill) पर विस्तार से चर्चा चल रही है। इस नए विधेयक में देश के भीतर पूर्ण आनुपातिक मतदान प्रणाली (Proportional Representation) लागू करने और चुनाव जीतने वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बोनस के रूप में कुछ 'अतिरिक्त सीटें' देने का प्रावधान शामिल है। मेलोनी सरकार इस कानून के जरिए देश में एक स्थायी सरकार की रूपरेखा तैयार करना चाहती थी, लेकिन इस शुरुआती झटके ने सरकार की राह मुश्किल कर दी है।विपक्ष का तीखा हमला: 'पीएम का बहुमत पर नियंत्रण खत्म'इस नतीजे के तुरंत बाद इटली के विपक्षी दलों ने मेलोनी सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है। विपक्ष ने इसे प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक राजनीतिक झटका करार दिया है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि मेलोनी सरकार अगले साल होने वाले आम चुनाव (General Elections) से ठीक पहले राजनीतिक रूप से डर गई है, और अपने निजी फायदे के लिए चुनावी नियमों को जबरन बदलना चाहती है। विपक्ष ने दावा किया कि इस एक वोट की हार ने पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री मेलोनी का अपने खुद के संसदीय बहुमत और सांसदों पर से नियंत्रण अब पूरी तरह खो चुका है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:39 am

Indian Railways Security: क्या Jio-Airtel का नेटवर्क ठप होने से थम जाएंगी भारतीय ट्रेनें? ऑस्ट्रेलिया के बड़े रेल संकट से भारत के लिए जरूरी सबक

अगर कोई आपसे कहे कि मोबाइल नेटवर्क बंद होने की वजह से ट्रेनें चलना बंद हो गईं, तो शायद आपको पहली बार में इस पर यकीन न हो। लेकिन हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में ऐसा असल में हुआ है, जहां एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क ठप पड़ने के बाद कई ट्रेन सेवाओं को इमरजेंसी के तौर पर रोकना पड़ा। यह घटना अब दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस संकट के बाद भारत में भी यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि अगर किसी दिन देश में जियो (Jio), एयरटेल (Airtel) या वोडाफोन-आइडिया (Vi) का नेटवर्क पूरी तरह बंद हो जाए, तो क्या भारतीय रेलवे की रफ्तार भी थम जाएगी?ऑस्ट्रेलिया में आखिर क्या हुआ था, जिससे थम गईं ट्रेनें?हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की सबसे प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में से एक 'टेलस्ट्रा' (Telstra) को अपने कम्यूनिकेशन नेटवर्क में एक बहुत बड़ी तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा। इसका असर सिर्फ आम लोगों के मोबाइल कॉल या इंटरनेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यू साउथ वेल्स (New South Wales) के कई बड़े इलाकों में इसके कारण ट्रेन सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं।दरअसल, इन क्षेत्रों में ट्रेनें मुख्य कंट्रोल सेंटर से संपर्क बनाए रखने के लिए टेलस्ट्रा के कमर्शियल 4G नेटवर्क पर निर्भर थीं। जैसे ही नेटवर्क बंद हुआ, ड्राइवरों और कंट्रोल सेंटर के बीच का जरूरी संवाद पूरी तरह टूट गया। इसे सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा जोखिम मानते हुए रेलवे प्रशासन ने तुरंत ट्रेन परिचालन रोक दिया।आधुनिक 4G सिस्टम होने के बावजूद क्यों आई परेशानी?यह कोई पुरानी या आउटडेटेड व्यवस्था नहीं थी। ऑस्ट्रेलियन रेल ट्रैक कॉरपोरेशन (ARTC) ने साल 2024 में देश में 3G नेटवर्क बंद होने के बाद अपने ट्रेन कम्यूनिकेशन सिस्टम को एडवांस 4G नेटवर्क पर अपग्रेड किया था।टेलस्ट्रा के नेटवर्क में आई खराबी का सीधा असर रेलवे के करीब 9,600 किलोमीटर लंबे विशाल रेल नेटवर्क पर पड़ा, जिससे हंटर लाइन और साउदर्न हाइलैंड लाइन जैसी कई प्रमुख यात्री सेवाएं ठप हो गईं। ट्रेनों को रोकने के बाद यात्रियों के लिए अस्थायी रूप से बसों का संचालन करना पड़ा। हालांकि, सिडनी शहर की लोकल ट्रेनें बच गईं क्योंकि वे इस नेटवर्क पर निर्भर नहीं थीं।क्यों ठप हुआ नेटवर्क? सेंट्रलाइजेशन बना बड़ी मुसीबतटेलस्ट्रा के अधिकारियों के अनुसार, समस्या कंपनी के मुख्य डेटा सेंटरों में मौजूद उन नेटवर्क नोड्स (Network Nodes) में आई खराबी के कारण हुई, जो पूरे नेटवर्क में टाइम सिंक्रोनाइजेशन (समय का तालमेल) बनाए रखते हैं। टेलीकॉम नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों का एक-दूसरे के साथ बिल्कुल सही समय पर तालमेल होना जरूरी होता है। जब यह टाइमिंग बिगड़ी, तो खराबी पूरे सिस्टम में फैल गई। इसके अलावा, नेटवर्क का अत्यधिक केंद्रीकृत (Highly Centralized) होना भी एक बड़ी वजह रहा, जिसके कारण एक जगह की खराबी ने पूरे बड़े हिस्से को पंगु बना दिया।क्या भारत में भी मोबाइल नेटवर्क ठप होने से रुक सकती हैं ट्रेनें?इसका सीधा और साफ जवाब है—नहीं। भारत में किसी निजी या सार्वजनिक टेलीकॉम ऑपरेटर (जैसे Jio, Airtel या Vi) का नेटवर्क पूरी तरह ठप होने से भी भारतीय रेलवे के परिचालन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:स्वतंत्र कम्यूनिकेशन नेटवर्क: भारतीय रेलवे अपनी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन और सिग्नलिंग के लिए आम जनता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यावसायिक 4G/5G मोबाइल नेटवर्क पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं है।विशाल ऑप्टिकल फाइबर जाल: रेलवे के पास पटरियों के साथ-साथ बिछाया गया अपना खुद का एक बेहद मजबूत और सुरक्षित डेडिकेटेड ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) नेटवर्क है।सुरक्षित रेडियो सिस्टम: कंट्रोल रूम, स्टेशन मास्टर और ट्रेन ड्राइवरों के बीच बातचीत के लिए रेलवे अपने विशेष रेडियो कम्यूनिकेशन सिस्टम और वायरलेस सेट का उपयोग करता है, जो बाहरी मोबाइल टावरों से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं।इसलिए, यदि किसी दिन देश का पूरा मोबाइल नेटवर्क भी बैठ जाए, तब भी भारतीय रेलवे का मुख्य सिग्नलिंग और परिचालन तंत्र बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।भारत के लिए इस घटना में क्या है बड़ा सबक?भले ही भारतीय रेलवे का अपना स्वतंत्र सुरक्षा ढांचा है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की यह घटना दुनिया भर के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक गंभीर चेतावनी और सीख है। यह साबित करती है कि किसी भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक या आपातकालीन सेवा (Emergency Services) को कभी भी पूरी तरह से किसी एक बाहरी सेंट्रलाइज्ड नेटवर्क पर निर्भर नहीं छोड़ना चाहिए। अगर बैकअप सिस्टम मजबूत न हो, तो एक छोटी सी तकनीकी चूक भी पूरे देश की रफ्तार को ब्रेक लगा सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:22 am

पाकिस्तान ने तेज की नागरिकों की वापसी, 525 परिवार भेजे अफगानिस्तान, बन्नू के तीन कैंप खाली

तोरखम बॉर्डर के रास्‍ते पाकिस्तान से 525 अफगान परिवारों को वापस अफगानिस्तान भेज दिया गया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में बने तीन शरणार्थी शिविर अब पूरी तरह खाली हो चुके हैं

देशबन्धु 15 Jul 2026 6:50 am

बलूचिस्तान में हथियारबंद हमलावरों ने उड़ाए बिजली के टावर, कई क्षेत्रों में बिजली संकट

डेरा मुराद जमाली के पास अज्ञात हथियारबंद लोगों ने उच पावर प्लांट से जुड़ी 220 केवी की दो हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन टावरों को विस्फोट कर उड़ा दिया। हमले में द अन्य टावरों को भी नुकसान पहुंचा।

देशबन्धु 15 Jul 2026 6:46 am

पीओके में प्रदर्शन: रावलाकोट में सड़कों पर उतरे छात्र, पाकिस्तानी कार्रवाई के खिलाफ उठी आवाज

पाकिस्तान कब्‍जे वाले कश्मीर (पीओके) में बढ़ते तनाव के बीच रावलाकोट के ईदगाह मैदान में सैकड़ों स्कूली बच्चे अपने स्कूल यूनिफॉर्म में, शिक्षकों और माता-पिता के साथ जमा हुए। बच्चों ने हाथों में सफेद झंडे लिए और इलाके में पाकिस्तानी सेना की कथित सख्त कार्रवाई का विरोध कि

देशबन्धु 15 Jul 2026 6:37 am

होर्मुज स्‍ट्रेट पर अमेरिका के टोल प्रस्ताव का इटली ने किया विरोध

इटली की सरकार ने समुद्री मार्गों से गुजरने पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने का व‍िरोध करते हुए कहा क‍ि समुद्री स्‍ट्रेट्स कोई इंसानों की बनाई संरचना नहीं है

देशबन्धु 14 Jul 2026 11:10 pm

US Iran Conflict: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान; होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की 'पूर्ण नाकेबंदी' का आदेश, 20% टैक्स की जगह रखी यह बड़ी शर्त

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर एक बेहद आक्रामक घोषणा की है, जिसने ईरान की चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के व्यापारिक जहाजों के लिए यह समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला रहेगा। उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को झूठा, हिंसक और बुरी नीयत वाला बताते हुए कहा कि उनकी नीतियां देश को बर्बादी की ओर ले जा रही हैं। इसी के चलते अमेरिका अब होर्मुज स्ट्रेट में उन सभी जहाजों की पूर्ण नाकेबंदी (Blockade) करेगा, जो ईरानी बंदरगाहों से आ-जा रहे हैं या ईरानी कार्गो का सामान ले जा रहे हैं।अमेरिकी सेना की तारीफ और मध्य पूर्व के नेताओं से बातचीतडोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने लिखा, अमेरिकी सेना की अदम्य ताकत के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का फ्लो पहले से कहीं ज्यादा बेहतर ढंग से हो रहा है। इसके लिए उन्होंने वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन और यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की लीडरशिप की जमकर सराहना की। ट्रंप ने बताया कि मध्य पूर्व (Middle East) के नेताओं के साथ उनकी बेहद फायदेमंद बातचीत हुई है, जिसके बाद सुरक्षा नीतियों में यह बदलाव किया गया है।20% सुरक्षा टैक्स का फैसला बदला, अब अमेरिका में करना होगा भारी निवेशइससे पहले ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घोषणा की थी कि अमेरिका अब से ‘होर्मुज स्ट्रेट का संरक्षक’ होगा और सुरक्षा खर्च निकालने के लिए वहां से गुजरने वाले सभी कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा। हालांकि, नए फैसले के तहत उन्होंने इस 20% अमेरिकी रीइंबर्समेंट फीस (टैक्स) की योजना को वापस ले लिया है। इसकी जगह अब खाड़ी देशों (Gulf States) को अमेरिका के साथ बड़े पैमाने पर ट्रेड और इन्वेस्टमेंट डील करनी होंगी। ट्रंप के मुताबिक, यह निवेश इतिहास में सबसे बड़ा होगा, जिससे अमेरिका में बड़े स्तर पर फैक्ट्रियां, प्लांट और उपकरण आएंगे और लाखों उच्च वेतन वाली नौकरियां पैदा होंगी।'ईरान के पास कभी नहीं होगा परमाणु हथियार'अपने सख्त लहजे को बरकरार रखते हुए ट्रंप ने ईरान सरकार को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, अमेरिका एक बार फिर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर रहा है। ईरान द्वारा अपने ही लाखों लोगों, जिनमें 52,000 प्रदर्शनकारी भी शामिल थे, की हत्या करने के काले दिन अब हमेशा के लिए खत्म हो गए हैं। ट्रंप ने पूरी दुनिया को आश्वस्त करते हुए सबसे बड़ी बात यह कही कि उनके रहते ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 10:50 pm

ट्रंप का टोल से यू-टर्न: अब खाड़ी देशों संग नया बिजनेस प्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज स्‍ट्रेट में जहाजों से टोल वसूलने के अपने ही फैसले से पलट गए हैं। ट्रंप ने अब 20 प्रतिशत टोल शुल्क की जगह मध्य पूर्व के देशों के साथ नए व्यापार और निवेश समझौतों का ऐलान किया है।

देशबन्धु 14 Jul 2026 10:16 pm

क्या मुज्तबा खामेनेई बीजिंग पहुंच गए? रूसी स्पेशल विमान की उड़ान से तेज हुई अटकलें

रिपोर्टों के अनुसार, रूस का विशेष कमांड एयरक्राफ्ट Tu-214PU सोमवार को मॉस्को से तेहरान पहुंचा और कुछ घंटों बाद वहां से चीन की राजधानी बीजिंग के लिए रवाना हो गया।

देशबन्धु 14 Jul 2026 4:16 pm

Balochistan: बलूचों ने किया ISIS की बैठक पर हमला, लश्कर आतंकियों समेत 34 को मारा

BLA के प्रवक्ता जीयांद बलोच द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह हमला संगठन के नए अभियान 'ऑपरेशन मुर्ग-ए-गदरान' की शुरुआत है। बयान में दावा किया गया कि खुजदार में स्थित एक परिसर को निशाना बनाया गया, जिसे कथित तौर पर ISIS-K कमांडर शफीक मेंगल का ठिकाना बताया गया।

देशबन्धु 14 Jul 2026 3:58 pm

मिडल ईस्ट में महाविस्फोट! यमन में उतरने वाला था हूतियों से भरा ईरानी विमान, MBS और ट्रंप के प्लान से दहल उठी धरती

मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) के सुलगते मैदान से इस वक्त एक बेहद खतरनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। यमन के आसमान में हूती विद्रोहियों से भरे एक ईरानी विमान की लैंडिंग होने ही वाली थी कि उससे ठीक पहले रणनीतिक ठिकानों पर धुआंधार और भीषण हवाई हमले शुरू हो गए। इस अचानक हुई बमबारी ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यह कोई आम हमला नहीं है, बल्कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बेहद गोपनीय और बड़ी रणनीतिक प्लानिंग का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि यह नया चक्रव्यूह मिडल ईस्ट में एक नई और महाविनाशकारी जंग की शुरुआत कर सकता है।लैंडिंग से ठीक पहले आसमान से बरसी तबाहीसुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, हूती लड़ाकों और भारी हथियारों से लैस एक ईरानी विमान यमन के एयरपोर्ट पर उतरने की तैयारी में था। ईरान इस विमान के जरिए हूतियों को बड़ी सैन्य मदद पहुंचाने की फिराक में था। लेकिन जैसे ही यह विमान यमन के एयरस्पेस के करीब पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे लड़ाकू विमानों ने हूती ठिकानों और एयरपोर्ट के रनवे के आसपास धुआंधार बमबारी शुरू कर दी। आसमान से बरसी इस तबाही के बाद ईरानी विमान को मजबूरन अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस हैरतअंगेज ऑपरेशन ने ईरान और हूती गठबंधन को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है।MBS और ट्रंप का सीक्रेट प्लान आया सामनेइस पूरे घटनाक्रम के पीछे सऊदी अरब के ताकतवर नेता मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जुगलबंदी को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने रेड सी (लाल सागर) और अदन की खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद आक्रामक नीति तैयार की है। ट्रंप और MBS का यह जॉइंट प्लान ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने और यमन में हूतियों की कमर तोड़ने के लिए बनाया गया है। इस सीक्रेट ऑपरेशन की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि अब अमेरिका और सऊदी अरब इस क्षेत्र में किसी भी ईरानी दखल को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।भारत की सुरक्षा और लोकल मार्केट पर पड़ेगा सीधा असरजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर भारत की बात करें, तो यमन और रेड सी में बढ़ने वाला कोई भी तनाव नई दिल्ली के लिए बेहद चिंता का विषय है। भारत का एक बहुत बड़ा व्यापारिक हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर यूरोप और अमेरिका जाता है। अगर यहां जंग की स्थिति बनती है, तो मुंबई, गुजरात और अन्य भारतीय बंदरगाहों से जाने वाले जहाजों का किराया और इंश्योरेंस कॉस्ट काफी बढ़ जाएगी। इसके चलते भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आने का खतरा पैदा हो जाएगा। यही वजह है कि भारत के नीति निर्माता भी इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर रख रहे हैं।क्या मिडल ईस्ट में छिड़ने वाली है एक और बड़ी जंग?आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और ग्लोबल थिंक टैंक के विश्लेषण के अनुसार, इस ताजा हमले के बाद ईरान और हूती गुट की ओर से बड़े पलटवार की आशंका काफी बढ़ गई है। ईरान इस कड़े एक्शन को अपनी संप्रभुता और प्रभाव पर सीधे हमले के रूप में देख रहा है। यदि आने वाले दिनों में हूतियों ने लाल सागर में अमेरिकी या सऊदी अरब के ठिकानों पर मिसाइल दागकर जवाबी कार्रवाई की, तो यह पूरा क्षेत्र एक ऐसे युद्ध की आग में झुलस सकता है जिसे संभालना वैश्विक शक्तियों के लिए भी नामुमकिन हो जाएगा। पूरी दुनिया इस समय सांसें थामकर मिडल ईस्ट के अगले कदम का इंतजार कर रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:06 pm

दोस्त के लिए ढाल बना भारत: अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई दिल्ली ने लिया ऐसा कड़ा स्टैंड, देखकर पाकिस्तान के उड़े होश

वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों से एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। समय-समय पर दुनिया ने भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत का लोहा माना है, लेकिन इस बार भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी दोस्ती का जो फर्ज निभाया है, उसने वैश्विक महाशक्तियों को भी हैरान कर दिया है। अपने एक बेहद भरोसेमंद और पक्के दोस्त देश पर आए संकट के समय भारत ने किसी भी दबाव की परवाह न करते हुए उसके पक्ष में चट्टान की तरह डटकर खड़े होने का फैसला किया। नई दिल्ली के इस बेहद आक्रामक और साहसिक कूटनीतिक कदम को देखकर पड़ोसी देश पाकिस्तान के हुक्मरानों के पैरों तले जमीन खिसक गई है और उसके पूरे खेमे में भारी छटपटाती बेचैनी देखी जा रही है।जब पक्के दोस्त पर आया संकट तो भारत ने दिखाई आंखेंअंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र (UN) के भीतर कुछ समय से भारत के एक बेहद करीबी सहयोगी देश को घेरने की साजिशें रची जा रही थीं। कुछ कूटनीतिक गुटों द्वारा उस देश पर प्रतिबंध लगाने या उसे अलग-थलग करने की कोशिशें की जा रही थीं। ऐसे नाजुक मोड़ पर भारत ने बिना किसी हिचकिचाहट के वैश्विक मंच पर अपनी बुलंद आवाज उठाई। भारतीय राजनयिकों ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी एकतरफा कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भारत अपने रणनीतिक साझेदार के साथ हर परिस्थिति में मजबूती से खड़ा है। भारत का यह स्टैंड सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उन ताकतों को सीधी चेतावनी थी जो इस क्षेत्र का संतुलन बिगाड़ना चाहती हैं।पाकिस्तान के कलेजे पर क्यों लोट रहे हैं सांप?भारत के इस मास्टरस्ट्रोक ने सबसे ज्यादा नुकसान इस्लामाबाद को पहुंचाया है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि इस संकट के बहाने वह अपने आकाओं के साथ मिलकर भारत के मित्र देश को कमजोर कर सकेगा और इस क्षेत्र में अपना भू-राजनीतिक (Geopolitical) उल्लू सीधा कर लेगा। लेकिन जैसे ही भारत ने अपनी पूरी कूटनीतिक ताकत झोंक दी, पाकिस्तान का पूरा प्लान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। दिल्ली, मुंबई से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में इस बात की चर्चा है कि भारत ने जिस तरह से फ्रंट फुट पर आकर बैटिंग की है, उसने पाकिस्तान के कूटनीतिक मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है, जिससे उसके खेमे में केवल हताशा बची है।दिल्ली से लेकर कश्मीर और सीमांत इलाकों तक मजबूत संदेशइस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम का असर जियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर भी साफ देखा जा रहा है। भारत के इस कड़े रुख से जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान जैसे सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा और रणनीतिक मोर्चे पर देश की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है। आम भारतीय नागरिक और रक्षा विशेषज्ञ भी सरकार के इस कदम की सराहना कर रहे हैं। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि आधुनिक भारत अपनी सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ वैश्विक पटल पर अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा करने में भी पूरी तरह सक्षम है।आधुनिक एआई सर्च और दुनिया भर में भारत का बजआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और वैश्विक विश्लेषकों के मुताबिक, इस घटना के बाद एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) क्षेत्र में भारत का कद कई गुना बढ़ गया है। दुनिया भर के एआई सर्च इंजन और कूटनीतिक मंच अब भारत को एक ऐसी महाशक्ति के रूप में देख रहे हैं जो अपने दम पर वैश्विक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है। भारत की इस 'फ्रेंड-फर्स्ट' पॉलिसी ने यह साबित कर दिया है कि नई दिल्ली न तो किसी के दबाव में झुकती है और न ही संकट के समय अपने दोस्तों का हाथ छोड़ती है। आने वाले दिनों में भारत के इस कदम के दूरगामी परिणाम वैश्विक राजनीति में देखने को मिलेंगे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:05 pm

50 साल पुराना वो जख्म: जब UNSC में पाकिस्तान से मात खा गया था भारत, मगर आज कूटनीति के मंच पर पलट गया पूरा खेल

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और इतिहास के पन्नों को पलटें तो कुछ ऐसी घटनाएं मिलती हैं जो वक्त के साथ एक बड़ा सबक बन जाती हैं। आज से करीब 50 साल पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच पर भारत को एक ऐसा कूटनीतिक दर्द मिला था, जिसे देश आसानी से नहीं भूल सकता। उस दौर में वैश्विक समीकरणों और महाशक्तियों के वीटो पावर के खेल में पाकिस्तान कूटनीतिक मोर्चे पर भारत पर भारी पड़ गया था। लेकिन बीते पांच दशकों में वैश्विक राजनीति और भारत की ताकत में जो बदलाव आया है, उसने समय के पहिए को पूरी तरह 360 डिग्री पर घुमा दिया है। आज हालात यह हैं कि जिस मंच पर कभी पाकिस्तान भारत को घेरता था, आज वहीं वह खुद को बचाने के लिए छटपटा रहा है।आधा दशक पुराना वो कूटनीतिक झटका1970 के दशक के उस दौर को याद करें तो भारत और पाकिस्तान के बीच शीत युद्ध की छाया साफ दिखाई देती थी। कश्मीर मुद्दे से लेकर द्विपक्षीय तनावों तक, जब भी मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाता था, तो वैश्विक महाशक्तियों का झुकाव भारत के पक्ष में वैसा नहीं रहता था जैसा आज है। उस समय पश्चिमी देशों और कुछ अन्य वैश्विक ताकतों के छिपे और खुले समर्थन के दम पर पाकिस्तान कई बार कूटनीतिक मोर्चे पर बढ़त बना लेता था। कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, वह दौर भारतीय विदेश नीति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था, जहां हमें अपने सही रुख को साबित करने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़ा संघर्ष करना पड़ता था।कैसे बदला समय और घूम गया महाशक्तियों का रुखबीते कुछ दशकों में भारत ने अपनी आर्थिक और सैन्य क्षमता के साथ-साथ अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है। आज नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु से लेकर वाशिंगटन, लंदन और मॉस्को तक भारत की आवाज को बेहद गंभीरता से सुना जाता है। भारत अब सिर्फ एक विकासशील देश नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की एक बुलंद आवाज और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक महाशक्ति बन चुका है। दूसरी तरफ, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक कंगाली और आतंकवाद के मुद्दे पर घिरे पाकिस्तान की साख वैश्विक मंच पर पूरी तरह खत्म हो चुकी है। अब संयुक्त राष्ट्र में उसकी बातों को कोई तवज्जो नहीं देता।आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान हुआ अलग-थलगस्थानीय और वैश्विक स्तर पर अगर आज के समीकरणों को देखें, तो भारत ने कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान को उसके ही बुने जाल में फंसा दिया है। आतंकवाद को पालने-पोसने की अपनी नीतियों के कारण पाकिस्तान आज वैश्विक बिरादरी में पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से लेकर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची तक, पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग करके यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, और इस रुख को अमेरिका, फ्रांस और यूके सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों का खुला समर्थन मिला है।स्थायी सदस्यता की दहलीज पर खड़ा आज का भारतआज का भारत महाशक्तियों के पीछे चलने वाला देश नहीं, बल्कि खुद वैश्विक एजेंडा तय करने वाला देश है। यूएनएससी में स्थायी सदस्यता (Permanent Seat) के लिए आज भारत का दावा दुनिया में सबसे मजबूत माना जा रहा है। दुनिया के अधिकांश बड़े देश खुले तौर पर सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी जगह की वकालत कर रहे हैं। 50 साल पहले जो पाकिस्तान भारत को कूटनीतिक नुकसान पहुंचाने की हैसियत रखता था, आज वह खुद वैश्विक मंच पर अपनी प्रासंगिकता बचाने की भीख मांग रहा है। इतिहास का यह बदलाव साबित करता है कि कूटनीति में समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता और आज भारत वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में मजबूती से स्थापित है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:03 pm

Hormuz Attack: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में UAE के तेल टैंकरों पर ईरान का बड़ा मिसाइल हमला, 1 भारतीय की मौत और 6 घायल

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त एक बेहद परेशान करने वाली और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा भीषण मिसाइल हमला किया गया है। इस अचानक हुए हमले ने न सिर्फ खाड़ी देशों में युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है, बल्कि भारत के लिए भी यह बेहद दुखद खबर लेकर आया है। इन व्यापारिक जहाजों पर तैनात भारतीय क्रू मेंबर्स इस हमले की चपेट में आ गए हैं, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि हो चुकी है और छह अन्य भारतीय नाविक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।रात के अंधेरे में हुआ भीषण मिसाइल हमलाअंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम सुरक्षा एजेंसियों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, यूएई के ये दोनों कमर्शियल ऑयल टैंकर अपनी तय समुद्री सीमा से गुजर रहे थे, तभी ईरान की ओर से दागी गईं कई मिसाइलें सीधे इन जहाजों से जा टकराईं। मिसाइल लगते ही जहाजों पर भीषण आग लग गई और वहां चीख-पुकार मच गई। सुरक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह हमला बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक चोकपॉइंट पर किया गया है, जहां से दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस हमले के बाद पूरे समुद्री क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।भारतीय दूतावास हुआ अलर्ट, घायलों की मदद में जुटाइस दर्दनाक हादसे में भारतीय नागरिकों के हताहत होने की खबर मिलते ही नई दिल्ली से लेकर खाड़ी देशों में स्थित भारतीय दूतावास तक हड़कंप मच गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय इस पूरी स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए है। स्थानीय अधिकारियों के समन्वय से घायल 6 भारतीय नाविकों को तुरंत रेस्क्यू कर नजदीकी सैन्य और नागरिक अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मारे गए भारतीय नागरिक के शव को ससम्मान भारत वापस लाने और उनके परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है।लोकल और ग्लोबल मार्केट पर मंडराया संकटस्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुई इस हिंसक घटना का सीधा असर जियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर भारत सहित दुनिया भर के बाजारों पर देखने को मिल सकता है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति के लिए काफी हद तक इसी रूट पर निर्भर है, इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही, खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर भी मुंबई, दिल्ली और केरल जैसे राज्यों में रहने वाले उनके परिवारों की चिंताएं अचानक बढ़ गई हैं।खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात, दुनिया भर की नजरेंविशेषज्ञों और आधुनिक एआई सर्च इंजनों (GEO) के विश्लेषण के मुताबिक, इस हमले के बाद अमेरिका, यूएई और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। वैश्विक समुदाय इस हमले की कड़ी निंदा कर रहा है क्योंकि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है। आने वाले घंटों में संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक महाशक्तियां इस पर क्या कड़ा रुख अपनाती हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को एक बार फिर बारूद के ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:01 pm

'हम हैं हॉर्मुज के रखवाले': डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, स्ट्रेट रहेगा खुला पर हर कार्गो को देना होगा 20% टैक्स

मिडिल ईस्ट और खाड़ी देशों में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को चौंकाने वाला एक बड़ा और आक्रामक ऐलान किया है। फॉक्स न्यूज के लोकप्रिय कार्यक्रम में फोन पर दिए गए साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले हॉर्मुज स्ट्रेट पर रणनीतिक नियंत्रण स्थापित करेगा। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उठाने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने के एवज में वहां से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत की दर से शुल्क यानी टैक्स वसूला जाएगा।सोशल मीडिया पर ट्रंप की दो टूक चेतावनीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि हॉर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला हुआ है और ईरान की सहमति हो या न हो, यह खुला ही रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में ईरानी नाकाबंदी को तोड़कर अपनी खुद की सुरक्षा नाकेबंदी लागू कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में आवाजाही सुरक्षित रखने के खर्च की भरपाई के लिए गुजरने वाले कार्गो से 20 प्रतिशत रीइंबर्समेंट लिया जाएगा, क्योंकि अन्य अमीर देशों को भी अमेरिकी सैन्य सेवाओं का पूरा मूल्य चुकाना चाहिए।अमेरिका और ईरान के बीच चरम पर पहुंचा टकरावयह तीखा बयान ऐसे वक्त में आया है जब पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर चल रहा है। ईरान ने दावा किया था कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है और बिना अनुमति कोई जहाज नहीं गुजर सकता, जिसके जवाब में ट्रंप ने ईरान पर पूर्व समझौतों को तोड़ने और कड़े सैन्य हमलों की चेतावनी दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी चेतावनी दी है कि इस समुद्री मार्ग पर अमेरिकी हस्तक्षेप जारी रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में और बड़े भू-राजनीतिक संकट पैदा हो सकते हैं।वैश्विक तेल बाजार और महंगाई पर मंडराता खतराहॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया भर में होने वाले कुल तेल परिवहन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाता है। अमेरिका और ईरान के बीच इस जलमार्ग पर सीधा टकराव होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं बहुत ज्यादा गहरी हो गई हैं, जिससे दुनिया भर के बाजारों में नई चिंताएं शुरू हो गई हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 11:49 am

'मोजतबा 90 फीसदी खत्म': अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, होर्मुज पर फिर नाकेबंदी के संकेत

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर भू-राजनीतिक हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज बयान देते हुए दावा किया है कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े मोजतबा खामेनेई अब 90 फीसदी तक खत्म हो चुके हैं। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि ईरान पहले ही अपनी नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस सिस्टम और शीर्ष सैन्य कमांडर्स को खो चुका है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता बुरी तरह पंगु हो गई है। हाल ही में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में मोजतबा की गैर-मौजूदगी को लेकर दुनिया भर में कयास लगाए जा रहे थे, और अब अमेरिकी हमलों व उनकी गंभीर चोटों की खबरों के बीच ट्रंप का यह बयान सामने आया है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर आमने-सामने अमेरिका और ईरानदोनों देशों के बीच जारी 60 दिवसीय अंतरिम समझौते का दौर लगभग आधा बीत चुका है, लेकिन स्थायी समाधान की बातचीत के बजाय खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला तेज हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोमवार को कई ठिकानों को निशाना बनाने की पुष्टि की, जिसमें रडार केंद्र और एयर डिफेंस उपकरण शामिल हैं। दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका के इन तमाम दावों को खारिज करते हुए चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह उनके नियंत्रण में है और वे किसी भी बाहरी सैन्य दखल को बर्दाश्त नहीं करेंगे।ट्रंप का एलान: होर्मुज में ईरान पर लागू होगी सख्त नाकेबंदीइस तनावपूर्ण माहौल के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए एलान किया है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के खिलाफ नाकेबंदी फिर से लागू करने जा रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरानी जहाजों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और सुरक्षित नौवहन व व्यापार के लिए वहां से गुजरने वाले अन्य वाणिज्यिक जहाजों पर 20 फीसदी तक का शुल्क या टैक्स लगाया जाएगा। इस नए घटनाक्रम से वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियों के बीच युद्ध फिर से भड़कने की आशंकाएं काफी गहरी हो गई हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 11:47 am

अफगानिस्तान के पुनर्वास में भारत की बड़ी पहल, लौट रहे परिवारों के लिए राहत सामग्री और टेंट सौंपे

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के लिए लगातार मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है। मंत्रालय के अनुसार, टेंट की यह खेप ऐसे परिवारों के लिए भेजी गई है जो अपने देश लौटने के बाद रहने की बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।

देशबन्धु 14 Jul 2026 8:55 am

US-Iran War Update: होर्मुज जलडमरूमध्य में भयंकर कोहराम! UAE के तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइल का बड़ा हमला, 1 भारतीय नाविक की मौत, 6 घायल

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Iran War 2026) ने अब एक बेहद खौफनाक और हिंसक मोड़ ले लिया है. पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो बड़े तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा दागी गईं क्रूज मिसाइलों से विनाशकारी हमला किया गया है.इस हाई-प्रोफाइल मिसाइल हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य (नाविक) की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि छह अन्य भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. इस भीषण सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पूरी तरह चरमरा गई है.ओमान के समुद्री क्षेत्र में UAE के टैंकरों को बनाया निशानायूएई के रक्षा मंत्रालय (UAE Ministry of Defence) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह कायरतापूर्ण हमला ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी नौवहन मार्ग से गुजर रहे दो राष्ट्रीय तेल टैंकरों— मोंबासा (Mombasa) और अल बहिया (Al Bahiyah) पर किया गया.ईरान की तरफ से दागी गईं दो हाइपर-सटीक क्रूज मिसाइलें सीधे इन जहाजों से टकराईं, जिसके बाद दोनों टैंकरों पर भीषण आग लग गई और भारी भौतिक नुकसान हुआ. मृत भारतीय नागरिक 'मोंबासा' टैंकर पर तैनात था. जहाज पर मौजूद अन्य क्रू मेंबर्स की मुस्तैदी के कारण आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बहुत बड़ा वैश्विक पर्यावरण और आर्थिक हादसा होने से टल गया.यूएई ने दी कड़ी चेतावनी; भारत से जताई गहरी संवेदनाइस बर्बर हमले की यूएई के विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने कड़े शब्दों में निंदा की है. यूएई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और 'आर्थिक ब्लैकमेलिंग' व समुद्री डकैती करार दिया है. यूएई प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि वह अपनी संप्रभुता, नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए ईरान को इस सैन्य उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है. इसके साथ ही यूएई ने भारत सरकार और पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है.क्यों भड़की होर्मुज में युद्ध की आग? (US Blockade Counter-Attack)यह विनाशकारी हमला उस समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर दोबारा से सख्त समुद्री नाकेबंदी (Naval Blockade) लागू करने का एलान किया था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरान के तटीय निगरानी तंत्र और मिसाइल ठिकानों पर की गई बमबारी के जवाब में ईरान की नौसेना ने इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी थी और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया.ईरान का कहना है कि वे किसी भी बाहरी ताकत को इस जलमार्ग पर नियंत्रण नहीं करने देंगे. इस युद्ध के कारण दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% हिस्सा प्रभावित होने की कगार पर पहुंच चुका है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 7:57 am

ब्रिटेन का बड़ा फैसला: आईआरजीसी समेत तीन संगठनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की तैयारी

ब्रिटेन की सरकार ने कहा कि वह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और दो अन्य संगठनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है

देशबन्धु 14 Jul 2026 7:10 am

होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइल हमला, भारतीय नागरिक की मौत

संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में यूएई के झंडे वाले दो टैंकरों पर मिसाइल हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है

देशबन्धु 14 Jul 2026 7:04 am

गर्मियों में खपत से चीनी अर्थव्यवस्था की जीवन शक्ति देखें

जुलाई आने के बाद चीन में गर्मियों में खपत तेजी से बढ़ रही है। 1 जुलाई को पूरे देश में 62 दिवसीय रेलवे ग्रीष्मकालीन परिवहन औपचारिक तौर पर शुरू हुआ।

देशबन्धु 14 Jul 2026 6:24 am

वंदे मातरम् मुश्किल, पहाड़े की तरह रट रहे मुस्लिम बच्चे:बंगाल के मदरसों में गाने का आदेश, मोबाइल पर सुनाकर सिखा रहे टीचर

सुबह 6:30 बजे। बेलडांगा के देवकुंडा हाई मदरसा में स्पीकर पर वंदे मातरम् बजता है। पहली लाइन खत्म होते-होते बच्चों की आवाज धीमी पड़ जाती है। ज्यादातर बच्चे सिर्फ होंठ हिला रहे होते हैं। पश्चिम बंगाल में 614 सरकारी मदरसे हैं। ज्यादातर में बीते एक महीने से यही हो रहा है। इन मदरसों में 5 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। दरअसल, 19 मई को पश्चिम बंगाल के सरकारी मदरसों में आदेश आया कि बच्चों के प्रार्थना के दौरान सबसे पहले वंदे मातरम् गाना होगा। इसके बाद से टीचर स्कूलों में हर दिन बच्चों को गाने की तैयारी करवा रहे हैं। दूरदराज के एरिया में ज्यादातर मुस्लिम बच्चे सिर्फ बांग्ला जानते हैं। वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंद संस्कृत में हैं, इसलिए टीचर बच्चों को स्पीकर या मोबाइल पर गीत सुना रहे हैं। पश्चिम बंगाल में पहली बार BJP की सरकार आई है। पहले लेफ्ट और बाद में तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने कभी मदरसों की प्रार्थना में वंदे मातरम को अनिवार्य नहीं किया। अभी जिस वक्त वंदे मातरम् गाने का आदेश आया, तब गर्मी की छुटि्टयां चल रही थीं। अब स्कूल खुलने के बाद क्या स्थिति है, ये जानने दैनिक भास्कर की टीम अलग-अलग जिलों के 5 मदरसों और स्कूलों में पहुंची। देखिए और पढ़िए यहां क्या मिला… जगह: देवकुंडा हाई मदरसा, बेलडांगा देवकुंडा हाई मदरसे में 200 से ज्यादा बच्चे प्रार्थना के कतार में खड़े हैं। प्रिंसिपल मोहम्मद खसरु अहमद हाथ में माइक लेकर बांग्ला में कहते हैं, ‘शोबाई मोन दिये शोनो। आज आबार बोन्दे मातोरोम शिक्बो’ यानी ‘ध्यान से सुनो, आज फिर वंदे मातरम् सीखेंगे।’ अगले ही पल स्पीकर पर वंदे मातरम् बजने लगता है। गीत के दो अंतरे आए जाते हैं। देवकुंडा हाई मदरसा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में है। मदरसों में वंदे मातरम् गाने के आदेश पर मोहम्मद खसरू कहते हैं, ‘हम पहले से ये गीत गाते आए हैं। सरकार के फैसले से परेशानी नहीं है।’ सरकारी आदेश है कि वंदे मातरम् गीत के सभी 6 अंतरे गाना है। प्रार्थना के दौरान सिर्फ दो अंतरे गाए, ऐसा क्यों? मोहम्मद खसरु जवाब देते हैं, ‘अभी बच्चे गीत सीख रहे हैं। पूरा गाना मुमकिन नहीं है, इसलिए नहीं गा रहे हैं।’ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे मुस्लिम संगठन वंदे मातरम् गाने का विरोध करते हैं, लेकिन 12वीं में पढ़ने वाली सोनू यासीम को इससे गुरेज नहीं है। वे कहती हैं ‘मैंने कई बार ये गीत सुना है, लेकिन मदरसे में इसे गाते नहीं थे। इसमें परेशानी जैसा कुछ नहीं है। पहले जन-गण-मन गा रहे थे, अब वंदे मातरम् भी गाएंगे। बस इसे सीखने में टाइम लगेगा।’ जगह: रहमानिया हायर सेकेंडरी स्कूल, आसनसोल पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड के उर्दू मीडियम स्कूल भी है। ज्यादातर मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में हैं। इनमें से एक रहमानिया हाई स्कूल आसनसोल के रेलपार एरिया में है। यहां नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। हम स्कूल पहुंचे, तब सुबह की प्रार्थना हो रही थी। पहले अल्लामा इकबाल का उर्दू में लिखा ‘लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी’ गीत गाया गया और फिर जन-गण-मन। आखिर में स्कूल के एक टीचर ने बच्चों से कहा कि अब राष्ट्रगीत वंदे मातरम् बजाया जाएगा, आप सभी को सावधान की मुद्रा में इसे सुनना है। टीचर जेब से मोबाइल निकालते हैं। यू-ट्यूब पर वंदे मातरम् सर्च करते हैं। गीत बजते ही फोन स्पीकर के सामने रख देते हैं। बच्चे उसे ध्यान से सुनने लगे। हमने स्कूल के सीनियर असिस्टेंट बख्तियार आलम से पूछा, आदेश तो वंदे मातरम् गाने का है, फिर फोन से क्यों सुना रहे हैं? वे कहते हैं, ‘बच्चों के लिए नया तराना फौरन गा पाना थोड़ा मुश्किल है। हमारे यहां उर्दू में पढ़ाई होती है। बच्चे हिंदी और बांग्ला बिल्कुल नहीं जानते। वंदे मातरम् संस्कृत में हैं। इसलिए छोटे बच्चों को परेशानी हो रही है। इसके शब्द भी मुश्किल हैं। हाई स्कूल के स्टूडेंट्स ने उर्दू में तराना लिखकर दिया है, लेकिन बच्चों को बोलने में दिक्कत आ रही है।’ आपने इस परेशानी से लिए कहीं शिकायत की? बख्तियार जवाब देते हैं, ‘सरकार का आदेश है, तो मानना पड़ेगा। हम बच्चों को पहाड़े की तरह एक-दो लाइन याद करवा रहे हैं। फिलहाल स्पीकर पर गाना सुनाया जा रहा है। उम्मीद है एक-दो महीने में बच्चे गाना सीख जाएंगे।’ जगह: सैयद नजरुल इस्लाम जूनियर हाई मदरसा, आसनसोल सैयद नजरुल इस्लाम जूनियर हाई मदरसा की हालत बहुत अच्छी नहीं है। बच्चों के लिहाज से क्लास रूम कम है। एक हॉल को दो हिस्सों में बांटकर क्लास लगाई जाती है। सुबह की प्रार्थना के लिए भी जगह नहीं है। बच्चे क्लास से ही प्रार्थना में शामिल होते हैं। यहां माइक और स्पीकर खराब हैं, इसलिए मोबाइल पर ही वंदे मातरम् सुनाया जाता है। मोबाइल की आवाज जहां तक जाती है, वहीं तक के बच्चे इसे सुन पाते हैं। टीचर सैयद कबीरुद्दीन अहमद स्कूल में सुविधाओं की कमी से नाराज हैं। वे कहते हैं, ‘2011 में यहां 200 स्टूडेंट, 6 टीचर, एक हेडमास्टर और एक प्यून थे। अब करीब एक हजार स्टूडेंट हो गए, लेकिन टीचर्स उतने ही हैं।’ क्लास की हालत देखकर लगा कबीरुद्दीन की शिकायत सही है। स्कूल में लाइट नहीं थी। तेज गर्मी में लड़कियां कॉपी से हवा कर रही थीं। स्कूल में स्टॉफ रूम के नाम पर एक झोपड़ीनुमा कमरा है। इसमें एक पुराना पंखा, अलमारी और कुर्सी टेबल है। छत भी टूटी हुई है। इसे प्लास्टिक से बंद किया गया है। टीचर्स यहां सिर्फ रजिस्टर में हाजिरी लगाने आते हैं, इसके बाद क्लास में ही रहते हैं। जगह: सोदपुर कोलयिरी हाईस्कूल, आसनसोल आखिर में हम हिंदी-बांग्ला मीडियम स्कूलों में गए। दो जगह चुनीं। पश्चिम बर्धवान जिले का आसनसोल और दुर्गापुर। आसनसोल के सोदपुर कोलयिरी हाईस्कूल में हिंदी और बांग्ला दोनों में पढ़ाई होती है। यह स्कूल 5वीं से 12वीं तक है। यहां भी स्पीकर पर वंदे मातरम् बजाया गया, लेकिन बच्चे भी इस गीत को गा रहे थे। कुछ बच्चे जरूर राष्ट्रगीत गाने में असहज थे। स्कूल की टीचर इन चार्ज श्रावणी गोस्वामी कहती हैं, ‘ज्यादातर बच्चों को राष्ट्रीय गीत के दो पैराग्राफ याद हैं। गीत के शब्द बहुत कठिन है। हमने इसे क्लास के वॉट्सऐप ग्रुप में भेजा है ताकि शब्द पढ़कर आसानी से याद कर सकें। ये गीत पश्चिम बंगाल में लिखा गया। यहां के लोग इस गीत को भूले नहीं थे। सरकारी आदेश के बाद से ये प्रैक्टिस में आ गया है।’ हमने कहा कि किसी बच्चे से वंदे मातरम् गवाकर सुना सकते हैं। स्टाफ ने जवाब दिया- बच्चे असेंबली में गाते हैं, अलग से गवाकर क्या दिखाना। जगह: प्राइमरी-जूनियर हाई स्कूल, झांझरा, दुर्गापुर आखिर में हम झांझरा के प्राइमरी-जूनियर हाई स्कूल पहुंचे। यहां हिंदी और बांग्ला मीडियम में पढ़ाई होती है। स्कूल में एक तरफ फ्री प्राइमरी और दूसरी तरफ एक कमरे में जूनियर हाई सेक्शन है। इसमें एक ही क्लास में छठवी से आठवीं की क्लास चलती है। हम यहां पहुंचे तब, एक कमरे में तीनों क्लास के बच्चे थे। हमने इस बारे में जूनियर हाई स्कूल के हेड मास्टर मनोज कुमार मंडल से बात की। वे कहते हैं, ‘स्कूल 2019 में शुरू हुआ था। अभी एक कमरे में दो टीचर बच्चों को एडजस्ट करके पढ़ा रहे हैं। कई बार कम टीचर होने की शिकायत की है, लेकिन फायदा नहीं हुआ। एक टीचर को बच्चों को वंदे मातरम् सिखाने की जिम्मेदारी दी है। वे कहती हैं, अभी तो टीचर्स को ही इसे गाने में दिक्कत होती है। इसलिए हमने बच्चों को गीत लिखकर दिया है और कठिन शब्द याद करवा रहे हैं।’ धर्मगुरु बोले- वंदे मातरम् ही क्यों, ‘सारे जहां से अच्छा’ भी तो गा सकते हैंऑल इंडिया इमाम मुअज्जिन एंड सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद शाकिफ कासमी सरकार के फैसले से खुश नहीं हैं। वे कहते हैं, ‘वंदे मातरम् गाने से मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं का मसला होता है। इसकी जगह पर कोई और गाना भी हो सकता है। जन-गण-मन और सारे जहां से अच्छा, में से कोई भी एक गाना रख सकते हैं।’ उर्दू स्कूलों और मदरसों में स्पीकर पर वंदे मातरम सुनाए जाने और याद कराने के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘स्पीकर पर बजाने से धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होती है। जिन्हें अच्छा लग रहा है, वे कर रहे हैं, इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है।’ वंदे मातरम् पर क्यों है विवाद मुस्लिम धर्मगुरुओं को वंदे मातरम् के तीसरे, चौथे, पांचवें और छठवें छंद पर आपत्ति है, क्योंकि इसमें मातृभूमि को देवी, दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती कहा गया है। आजादी की लड़ाई के वक्त मुस्लिम लीग ने भी इसे गैर-इस्लामिक बताया था। संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। 2006 में वंदे मातरम् के 100 साल पूरे होने पर केंद्र सरकार ने इसे स्कूलों में गाने का आदेश दिया। तब इस्लामिक संगठन जमात उलमा ए हिंद ने कहा कि कोई सच्चा मुसलमान वंदे मातरम् नहीं गा सकता। यूपी के देवबंद में वंदे मातरम् गाने के खिलाफ फतवा भी जारी किया गया था।

दैनिक भास्कर 14 Jul 2026 4:54 am

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मिस्र और सऊदी ने जताई चिंता, तनाव कम करने की अपील

मिस्र और सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही की सुरक्षा बनाए रखने और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को शांत करने की अपील की।

देशबन्धु 14 Jul 2026 2:40 am

जर्मनी: चुनाव से पहले एएफडी ने जारी किया 100 दिन का एक्शन प्लान, शरणार्थियों के लिए कड़े नियम

जर्मनी के सैक्सनी-अनहाल्ट राज्य में होने वाले चुनावों से पहले धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) ने अपना 100 दिन का एक्शन प्लान जारी किया है

देशबन्धु 14 Jul 2026 12:28 am

जर्मनी में गर्मी की वजह से इस साल 5,100 लोगों की मौत

जून के महीने में जर्मनी में पड़ी भारी गर्मी की वजह से करीब 5,100 लोगों की मौत हो गई. आखिर गर्मी का मौसम यूरोपीय देशों को इतना परेशान क्यों कर जाता है

देशबन्धु 14 Jul 2026 12:14 am

चीन के मिसाइल परीक्षण से अमेरिका के सहयोगी देशों की क्यों बढ़ी चिंता

प्रशांत महासागर क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के सहयोगी देशों ने चीन के उस मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा की है, जिसे बीजिंग ने एक ‘सामान्य’ अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण बताया है

देशबन्धु 13 Jul 2026 11:59 pm

वियतनाम बोट हादसे में मारे गए 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर मुंबई भेजे गए

वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास बोट हादसे में मारे गए 15 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह सिटी से मुंबई के लिए वियतनाम एयरलाइंस की फ्लाइट से रवाना क‍िए गए

देशबन्धु 13 Jul 2026 11:03 pm

ट्रंप का बड़ा ऐलान- अमेर‍िका 'होर्मुज स्‍ट्रेट का संरक्षक', 20 प्रत‍िशत शुल्‍क के साथ तय होगी जहाजों की आवाजाही

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने अमेर‍िका को 'होर्मुज स्‍ट्रेट का संरक्षक' बताया। साथ ही यहां से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रत‍िशत शुल्‍क वसूलने की बात कही।

देशबन्धु 13 Jul 2026 10:11 pm

ट्रंप का धमाका: अमेरिका बना 'होर्मुज स्ट्रेट का संरक्षक'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने अमेर‍िका को 'होर्मुज स्‍ट्रेट का संरक्षक' बताया। साथ ही यहां से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रत‍िशत शुल्‍क वसूलने की बात कही

देशबन्धु 13 Jul 2026 9:57 pm

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बढ़ाई खाड़ी देशों में हलचल, जॉर्डन ने कई ड्रोन किए नष्ट, बहरीन में बजा सायरन

ईरान-अमेरिका के बीच ताजा हमलों ने खाड़ी देशों की चिंता फिर से बढ़ा दी है। कुवैत ने सोमवार को कहा कि उसकी सेना एयरस्पेस में ईरानी हवाई हमलों का सामना कर रही है। वहीं, बहरीन की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, देश में सायरन बजा दिया गया है और लोगों से सबसे पास की सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की गई है। जॉर्डन ने भी कई ड्रोन को हवा में नष्ट करने का दावा किया।

देशबन्धु 13 Jul 2026 6:41 pm

आज का एक्सप्लेनर:ट्रम्प के करीबी लिंडसे ग्राहम की यूक्रेन से लौटते ही मौत, क्या रूस ने जहर दिया; भारत पर 500% टैरिफ के लिए उकसाते थे

राष्ट्रपति ट्रम्प के बेहद करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम 11 जुलाई को यूक्रेन दौरे से अमेरिका लौटे, ट्रम्प से फोन पर बात की और सोने चले गए। कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। लिंडसे ईरान और रूस के धुर विरोधी माने जाते थे। भारत को भी निशाने पर रखा और मौत से एक दिन पहले तक 500% टैरिफ लगाने की जिद करते रहे। ग्राहम की मौत पर एक तरफ ईरानी मीडिया जश्न मना रही है, दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं कि कहीं जहर देकर तो नहीं मारा गया। मौत बीमारी से हुई या कोई बड़ी साजिश; इस कंट्रोवर्सी को डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: लिंडसे ग्राहम की मौत की आधिकारिक वजह क्या बताई गई? जवाबः ग्राहम के ऑफिस ने आधिकारिक बयान में सिर्फ इतना बताया कि उनकी मौत ‘बीमारी की वजह’ से हुई। 12 जुलाई को वॉशिंगटन डीसी के मेडिकल एग्जामिनर ऑफिस ने प्रारंभिक ऑटोप्सी के आधार पर बताया- ‘Aortic Dissection due to Arteriosclerotic Cardiovascular Disease’ यानी धमनियों के सख्त होने की बीमारी की वजह से एओर्टा की अंदरूनी परत फट गई। दरअसल, एओर्टा इंसानी शरीर की सबसी बड़ी धमनी है। यह दिल से साफ खून लेकर पूरे शरीर में पहुंचाती है। एओर्टा की सबसे अंदरूनी परत में दरार की वजह से ग्राहम की मौत हुई। हालांकि ग्राहम का डेथ सर्टिफिकेट अभी जारी नहीं हुआ है। जहर से जुड़ी टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही कन्फर्म होगा कि मौत नेचुरल थी या किसी साजिश के तहत जहर दिया गया। 71 साल के ग्राहम यूक्रेन जाने से पहले स्वस्थ दिख रहे थे। उन्हें अगले हफ्ते एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करनी थी। ट्रम्प ने एनबीसी न्यूज से कहा, ‘मौत से कुछ घंटे पहले उनकी ग्राहम से बात हुई थी। ग्राहम की आवाज ठीक लग रही थी। हालांकि वह थोड़े थके हुए लग रहे थे।’ सवाल-2: ग्राहम की मौत से ईरान में जश्न क्यों मनाया जा रहा? जवाबः लिंडसे ग्राहम की मौत को ईरानी मीडिया ने सबसे बड़े दुश्मन की मौत बताया। मेहर न्यूज एजेंसी ने लिखा- ‘ग्राहम ईरान को तबाह करने का अपना सपना कब्र तक ले गए।' सरकारी न्यूज़ चैनल IRINN ने तो ग्राहम की मौत पर ईरानी जनता को बधाई तक दे दी। ग्राहम का रवैया हमेशा इजराइल समर्थक और धुर ईरान विरोधी रहा है… अमेरिकी लेखक रब्बी शमूएल ने लिखा है, ‘5 दिन पहले ईरान ने अमेरिका के महान सीनेटर को मारने की धमकी दी थी। अब उनकी मृत्यु हो गई, वो भी यूक्रेन से लौटने के अगले ही दिन।’ अमेरिकी दक्षिणपंथी पत्रकार लौरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, ‘IRGC ने उन्हें मारने की धमकी दी थी। खामेनेई के अंतिम संस्कार में धमकी भरे पोस्टर लहराए जा रहे थे। रूस भी इस अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था। वो ईरान को परमाणु हथियार देने की बात कर रहा था। अब यूक्रेन से लौटने के बाद ग्राहम की मौत हो गई। यह सब महज एक संयोग तो नहीं लगता।' सवाल 3: तो क्या ग्राहम की मौत के पीछे रूस की साजिश है? जवाबः अभी तक किसी बड़ी एजेंसी या अधिकारी ने रूसी साजिश की बात नहीं की। सबकुछ कयासों में चल रहा है… रूसी सोशियोलॉजिस्ट इगोर ईदमन के मुताबिक, ग्राहम की मौत में रूस खुफिया एजेंसियों का हाथ हो सकता है। रूस के पास उन्हें मारने का कारण भी था। ईदमन ने बेलारूस के मीडिया आउटलेट NEXTA को बताया, ‘ग्राहम यूक्रेन के सबसे बड़े समर्थक थे। उन्होंने 10 जुलाई को कीव में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए मना लिया है। यूक्रेन से लौटकर ग्राहम की मौत होना सबसे बड़ा संकेत देती है कि इसमें रूस का हाथ हो सकता है।’ ग्राहम अमेरिका से प्लेन के जरिए पोलैंड पहुंचे। वहां से 10-12 घंटे की ट्रेन यात्रा करके यूक्रेन की राजधानी कीव गए। इसी रास्ते से वापस भी लौटे। ईदमन के मुताबिक, इसी दौरान किसी खुफिया रूसी एजेंट को जहर देने का मौका मिल गया होगा। पूर्व CIA अधिकार माइकल सेलर्स के मुताबिक, ‘ग्राहम की हत्या के अभी कोई सबूत नहीं दिख रहे हैं। लेकिन जिन स्थितियों में उनकी मौत हुई है, उस हिसाब से इस एंगल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस दिशा में भी जांच होनी चाहिए।’ रूस का खुलकर विरोध करते थे ग्राहम, निशाने पर थे… सवाल-4: लिंडसे ग्राहम के निशाने पर भारत कैसे आ गया था? जवाबः लिंडसे ग्राहम ने अपने करियर में कई मौकों पर भारत को निशाना बनाया है। रूस-यूक्रेन जंग के बाद यह और बढ़ गया… ग्राहम ने भारत को रूस या अमेरिका में से किसी एक को चुनने का विकल्प भी दिया था। साथ ही कहा था, ‘मुझे विश्वास है कि वो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चुनेंगे।' इसके बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी तेल खरीदने के चलते भारत पर 25% पेनल्टी टैरिफ लगा दिया था। इससे भारत पर लगने वाला कुल टैरिफ बढ़कर 50% तक हो गया था। अगस्त 2025 में ग्रहाम ने फिर दावा किया कि भारत ने टैरिफ के दबाव के चलते रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। भारत पर दबाव की वजह से पुतिन जंग में समझौते के लिए तैयार हो गए हैं। सवाल-5: ग्राहम की मौत ट्रम्प के लिए कितना बड़ा झटका है, असर क्या होगा? जवाबः ग्राहम ट्रम्प के बेहद करीबी सलाहकारों में से एक थे, खासकर विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर। मिडिल ईस्ट में उनकी खासी दिलचस्पी थी। ग्राहम को श्रद्धांजलि देते हुए ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, 'वो हमेशा काम करते रहते थे। वो सच्चे अमेरिकी राष्ट्रभक्त थे। उन्हें बहुत याद किया जाएगा। उनकी अचानक मौत मौजूदा हालातों में कई चुनौतियां पैदा करती हैं।’ ग्राहम का अचानक निधन ट्रम्प के लिए 3 वजहों से बड़ा झटका है… 1. चुनाव के लिए महीने भर में नया उम्मीदवार चुनना होगा: नवंबर 2025 में अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन होने हैं। इसमें ग्राहमी 5वीं बार साउथ कैरोलिना सीट से चुनाव लड़ने वाले थे। उनकी मौत के बाद अब 11 अगस्त तक रिपब्लिकन पार्टी को नए उम्मीदवार का चुनाव करना होगा। कई नेता अपनी दावेदारी पेश भी करने लगे हैं। यह सीट रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्राहम के अलावा जो भी इस सीट से चुनाव लड़ेगा, उसे हराना मुश्किल होगा। हालांकि लंबे समय बाद कोई नया कैंडिडेट डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मौका भी हो सकता है। 2. लोगों को ट्रम्प के पक्ष में करने वाला हुनरमंद साथी खोया: ट्रम्प ने खुद एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया कि ग्राहम कोई भी चीज अप्रूव करवा सकते थे। उन्हें लोगों से अपनी बात मनवानी आती थी। अगर मुझे डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों से भी कोई समस्या होती थी, तो वो उनसे बात कर सुलझा लेते थे। 3. सीनेट में रिपब्लिकन की बढ़त कम हुई: 100 सीटों वाली अमेरिकी सीनेट में अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 और डेमोक्रेटिक के पास 47 सीटें थीं। ग्राहम की मौत से एक सीट कम हो गई। वहीं एक अन्य सीनेटर मिच मैककोनेल अस्पताल में भर्ती हैं और सदन में उपलब्ध नहीं रहेंगे। ऐसे में पहली बार ट्रम्प के पास सदन में 4 वोटों से कम की मार्जिन होगी। क्रॉस वोटिंग होने से ट्रम्प को जरूरी बिल पास कराने में मुश्किल होगी। --------- ये खबर भी पढ़िए… टीम इंडिया वर्ल्ड चैम्पियन से ‘लूजर’ कैसे बनी; 76 रन पर ऑलआउट, आयरलैंड से सीरीज हारी, आखिर जीत का फॉर्मूला क्यों बदला इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में टीम इंडिया 125 रन से हार गई। टी-20 में ये भारत की सबसे बड़ी हार है। पिछले महीने आयरलैंड भी भारत को 2-0 से सीरीज हरा चुकी है। मार्च में टी-20 वर्ल्ड चैम्पियन बनने के बाद टीम इंडिया ने 5 मैच खेले, कोई नहीं जीता। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 6:06 pm

होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर भड़का युद्ध! अमेरिका-ईरान के बीच सीधी भिड़ंत से खाड़ी देशों में खलबली

दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर एक बार फिर तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर फिर से हवाई हमले किए हैं, जिससे मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब खाड़ी देशों की सीमाओं तक पहुंच गया है। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और भू-राजनीतिक सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, अब सीधे तौर पर युद्ध क्षेत्र में बदलता नजर आ रहा है।क्यों बढ़ रहा है होर्मुज पर तनाव?ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहा शीतयुद्ध अब खुले संघर्ष में बदल चुका है। ताजा हमलों के पीछे अमेरिकी सेना का तर्क है कि ईरान समर्थित गुटों ने अमेरिकी संपत्ति और नौसैनिक बेड़ों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। वहीं, तेहरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार देते हुए कड़े जवाब की चेतावनी दी है। यह पूरा क्षेत्र न केवल तेल के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्लोबल सप्लाई चेन की 'धमनी' माना जाता है। किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।खाड़ी देशों के लिए कितना बड़ा खतरा?यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देश इस बढ़ते तनाव को लेकर सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। यदि युद्ध और अधिक फैलता है, तो इन देशों के समुद्री व्यापारिक मार्ग पूरी तरह से ठप हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर रूस-यूक्रेन युद्ध से भी कहीं ज्यादा घातक होगा। खाड़ी देशों ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा को हाई-अलर्ट पर रखा है और वे लगातार अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के संपर्क में हैं ताकि संघर्ष को फैलने से रोका जा सके।क्या वैश्विक बाजारों में आएगी तेजी?बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच इस सीधी भिड़ंत का असर सीधे तौर पर क्रूड ऑयल के दामों पर दिखेगा। अगले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। निवेशकों और आम नागरिकों के लिए आने वाला समय अनिश्चितताओं से भरा हो सकता है, क्योंकि युद्ध की यह आंच अब सीधे खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच चुकी है, जिसका असर हम सभी की जेब पर पड़ेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jul 2026 12:19 pm

Israel Elections 2026: ईरान और हमास से महा-युद्ध के बीच इजरायल में आम चुनाव का एलान, 38 साल बाद समय पर वोटिंग; दांव पर नेतन्याहू की सत्ता

मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान, लेबनान और गाजा के साथ साल भर से भीषण युद्ध में उलझे इजरायल से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है. इजरायल में आगामी आम संसदीय चुनावों (General Elections) की तारीखों का आधिकारिक एलान कर दिया गया है. चुनावी तारीख की घोषणा होते ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के करीब 4 दशक लंबे राजनीतिक करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा की घड़ी आ गई है. युद्ध के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच चुनावी बिगुल बजते ही पूरे इजरायल में सियासी सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं.रविवार देर शाम आई इजरायली मीडिया (Israeli Media Reports) की आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वर्तमान सरकार का चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर आगामी 27 अक्टूबर 2026 को देश में आम चुनाव कराए जाएंगे.38 साल बाद इतिहास दोहराएगा इजरायल'टाइम्स ऑफ इजरायल' की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के वरिष्ठ नेता ओफिर काट्ज ने स्पष्ट किया कि इजरायली कानून के अनुसार निर्धारित तारीख पर ही अगले चुनाव संपन्न होंगे. इजरायल की मौजूदा संसद यानी 'नेसेट' (Knesset) 17 जुलाई 2026 को अपना चार साल का कार्यकाल पूरा कर रही है. कार्यकाल पूरा होते ही संसद चुनावी ब्रेक पर चली जाएगी और 7 सितंबर तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची फाइनल कर ली जाएगी.यह चुनाव बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि बीते 38 सालों के इजरायली इतिहास में यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय चुनाव किसी समय पूर्व विघटन के बजाय अपने निर्धारित समय पर (On Schedule) हो रहे हैं. आखिरी बार साल 1988 में तय समय पर चुनाव हुए थे. इसके साथ ही, नेतन्याहू के नेतृत्व वाली यह दक्षिणपंथी सरकार पिछले 50 वर्षों में पूरे चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाली इजरायल की पहली सरकार बन जाएगी.सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम की सबसे कठिन परीक्षाबेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं. वे अब तक रिकॉर्ड 6 बार देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं, जिसमें उनका पहला कार्यकाल 1996 में शुरू हुआ था और छठा कार्यकाल दिसंबर 2022 से अब तक जारी है. हालांकि, इस बार राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके जीवन का सबसे कठिन चुनाव मान रहे हैं.इजरायली जनता इस बार वोट डालते समय 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए औचक हमले, इंटेलिजेंस व सुरक्षा विफलता (Security Failure), गाजा-लेबनान युद्ध के तौर-तरीकों, ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव और अमेरिका के साथ बिगड़े कूटनीतिक संबंधों के आधार पर नेतन्याहू सरकार का मूल्यांकन करेगी. हालांकि, नेतन्याहू अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के खात्मे और ईरानी सैन्य तंत्र को कमजोर करने को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक जीत बताकर राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव प्रचार को धार दे रहे हैं.क्या कह रहे हैं इजरायल के चुनावी सर्वे? (Opinion Polls)इजरायल के प्रमुख मीडिया हाउस 'चैनल 12' के ताजा पोल (Pre-Poll Survey) के मुताबिक, इस बार के महा-मुकाबले में भी किसी भी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. वर्तमान में नेतन्याहू की 'लिकुड पार्टी' (Likud Party) और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट की विपक्षी 'याशर पार्टी' (Yashar Party) दोनों 23-23 सीटों के साथ सबसे बड़े राजनीतिक दलों के रूप में उभर रहे हैं.वहीं 'चैनल 13' के एक अन्य ओपिनियन पोल में आइजनकोट की पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनते दिखाया गया है. कुल मिलाकर, इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (Knesset) में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का जादुई आंकड़ा किसी भी गठबंधन को आसानी से मिलता नहीं दिख रहा है, जिससे इजरायल में एक बार फिर 'हंग पार्लियामेंट' (त्रिशंकु संसद) बनने के आसार मजबूत हो गए हैं.

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jul 2026 7:45 am

होर्मुज जलडमरूमध्य में गोलीबारी, ईरान-अमेरिका आमने-सामने

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी की है

देशबन्धु 13 Jul 2026 7:40 am

वेस्ट बैंक में आईडीएफ सैनिकों ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को रोका, अमेरिकी सांसद ने नेतन्‍याहू से जांच की मांग की

भारतीय-अमेरिकी कांग्रेसमैन रो खन्ना ने आरोप लगाया है कि वेस्ट बैंक में हथियारबंद इजरायली लोगो और इजरायली सैनिकों ने उन्हें और उनके साथ गए दूसरे अमेरिकी नागरिकों को कुछ समय के लिए रोककर रखा। उन्होंने इस घटना की जांच की मांग की है।

देशबन्धु 13 Jul 2026 7:10 am

जिनेवा में 1971 बांग्लादेश हिंसा का उठा मुद्दा, धार्मिक उत्पीड़न को मान्यता देने की मांग

हाल ही में जिनेवा में यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल के 62वें सत्र के दौरान, ह्यूमन राइट्स विदाउट फ्रंटियर्स ने 1971 में बांग्लादेश में हुई बड़ी संख्या में हत्याओं और अत्याचारों को 'नरसंहार' के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

देशबन्धु 13 Jul 2026 7:00 am

रहस्यमयी चुप्पी तोड़ दुनिया के सामने आएंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई, पिता के लिए निभाएंगे अंतिम फर्ज

मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण सैन्य टकराव और रणनीतिक बदलावों के बीच ईरान के राजनीतिक गलियारों से वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। तेहरान प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर उस तारीख का ऐलान कर दिया है जब देश के नए और बेहद रहस्यमयी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पहली बार सार्वजनिक तौर पर सबके सामने आने वाले हैं। मोजतबा अपने दिवंगत पिता और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की याद में एक भव्य स्मारक सह शोक सभा का आयोजन कर रहे हैं, जहां वे अपने पिता के प्रति अंतिम फर्ज निभाएंगे।23 जुलाई को तेहरान में महा-आयोजन: निमंत्रण पत्र में दिवंगत नेता को बताया 'शहीद मुजाहिद इमाम'ईरान सरकार द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस और निमंत्रण पत्र के अनुसार, दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की याद में इस भव्य राष्ट्रीय शोक सभा का आयोजन 23 जुलाई को शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक तेहरान में किया जाएगा। इस निमंत्रण पत्र में पूर्व सुप्रीम लीडर को सर्वोच्च सम्मान देते हुए शहीद मुजाहिद इमाम के रूप में संबोधित किया गया है। वैश्विक मीडिया और खुफिया तंत्र की नजरें इस तारीख पर टिकी हैं, क्योंकि जब से मोजतबा ने ईरान के इस सर्वोच्च पद की कमान संभाली है, तब से सुरक्षा कारणों से उन्हें एक बार भी सार्वजनिक रूप से कैमरे के सामने नहीं देखा गया है।पिता के ऐतिहासिक जनाजे से क्यों नदारद थे मोजतबा? अंतिम संस्कार के उस दिन का पूरा सचयह घोषणा इसलिए भी अंतरराष्ट्रीय जगत में सस्पेंस बढ़ा रही है क्योंकि पिछले हफ्ते जब तेहरान के विशाल 'इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला' में देश के इतिहास की सबसे बड़ी शोक सभाओं में से एक का आयोजन हुआ था, तब भी मोजतबा खामेनेई वहां भौतिक रूप से दिखाई नहीं दिए थे। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज के अनुसार, अली खामेनेई के तीन अन्य बेटों—मुस्तफा, मीसम और मसूद खामेनेई ने ही जनाजे की नमाज का नेतृत्व किया था। उस भावुक कर देने वाले दिन अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ-साथ उनकी बेटी, दामाद, बहू और उनकी मात्र 14 महीने की मासूम पोती के ताबूत भी एक साथ रखे गए थे, जिनकी मौत फरवरी के अंत में हुए अमेरिकी व इजरायली हवाई हमलों में हुई थी।अमेरिकी चेतावनी के बाद मोजतबा का कड़ा रुख: 'हम जिंदा रहें या न रहें, बदला होकर रहेगा'भले ही मोजतबा अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने न आए हों, लेकिन रणनीतिक पटल पर उनके तेवर बेहद आक्रामक हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया सख्त चेतावनियों के ठीक कुछ घंटों बाद अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी एएफपी (AFP) के माध्यम से मोजतबा का एक लिखित सार्वजनिक बयान सामने आया था। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा था, पिता की मौत का प्रतिशोध लेना हमारे पूरे ईरानी राष्ट्र का सामूहिक संकल्प है और इसे निश्चित रूप से अंजाम दिया जाएगा। यह मिशन न तो मेरे व्यक्तिगत अस्तित्व पर निर्भर करता है और न ही किसी अन्य अधिकारी पर। हम इस दुनिया में रहें या न रहें, यह बदला हर हाल में पूरा होकर रहेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jul 2026 6:44 am

जिस 'जेन-जी' ने बनाया स्टार, अब वही मांग रही इस्तीफा! नेपाल के पीएम बालेन शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरे सैकड़ों युवा

नेपाल के हालिया राजनीतिक इतिहास में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। 'जेन-जी' (Gen-Z) यानी युवा पीढ़ी के ऐतिहासिक आक्रोश और अभूतपूर्व जन-आंदोलन की लहर पर सवार होकर सत्ता के शिखर तक पहुंचे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह को अब उसी युवा शक्ति के भीषण विरोध का सामना करना पड़ रहा है। काठमांडू घाटी में बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास योजना के भूमिहीन झुग्गीवासियों को उनके आशियाने से जबरन बेदखल करने के सरकारी फैसले के खिलाफ सैकड़ों युवाओं और नागरिकों ने रविवार को राजधानी की सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।मैतीघर मंडला में गूंजे सरकार विरोधी नारे: सिंहदरबार सचिवालय के सामने प्रदर्शनसंयुक्त राष्ट्रीय भूमिहीन मोर्चा के रणनीतिक आह्वान पर आयोजित यह विशाल विरोध प्रदर्शन काठमांडू में सिंहदरबार सचिवालय के ठीक सामने स्थित ऐतिहासिक मैतीघर मंडला में हुआ। प्रदर्शनकारी युवाओं के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर 'गरीबों पर अत्याचार बंद करो', 'मानवाधिकारों का सम्मान करो', 'अवैध गिरफ्तारियां बंद करो' और 'भूमिहीन झुग्गीवासियों को तुरंत आश्रय दो' जैसे तीखे नारे लिखे हुए थे। यह जन-आक्रोश तब और भड़क गया जब काठमांडू के कीर्तिपुर स्थित एक अस्थायी सरकारी आवास केंद्र में शुक्रवार रात आई भीषण बाढ़ का पानी घुस गया, जिससे वहां शरण लिए हुए करीब 150 भूमिहीन नागरिकों का जीवन संकट में पड़ गया।युवा कार्यकर्ताओं पर बर्बर लाठीचार्ज: नेपाली कांग्रेस ने पुलिसिया कार्रवाई की निंदा कीबाढ़ प्रभावित क्षेत्र की जमीनी हकीकत और पीड़ितों का हाल जानने के लिए जब शनिवार को 'जेन-जी' आंदोलन से जुड़े युवा सामाजिक कार्यकर्ता कीर्तिपुर पहुंचे, तो पुलिस प्रशासन ने उनके साथ बेहद सख्त रवैया अपनाया। पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे युवाओं पर अचानक लाठीचार्ज कर दिया और कई कार्यकर्ताओं को जबरन गिरफ्तार कर लिया। इस झड़प में एक युवा कार्यकर्ता के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जिसे तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने इस पुलिसिया दमन की कड़े शब्दों में आलोचना की है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताते हुए गिरफ्तार किए गए सभी युवाओं को तुरंत बिना शर्त रिहा करने की पुरजोर मांग की है।15,000 से अधिक लोग बेघर: कोशी प्रांत में भी भड़की आंदोलन की चिंगारीनेपाल में भूमिहीनों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का यह सिलसिला नया नहीं है। इससे पहले सरकार ने काठमांडू घाटी सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बुलडोजर चलाकर करीब 2,600 परिवारों के 15,000 से अधिक लोगों को बेदखल कर दिया था। इनमें से कई परिवार अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे थे, जिन्हें खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया था। इस कार्रवाई के विरोध की चिंगारी अब काठमांडू से निकलकर कोशी प्रांत तक फैल गई है। मोरांग जिला पुलिस कार्यालय के मुख्य द्वार पर युवा कार्यकर्ताओं के साथ हुए दुर्व्यवहार के खिलाफ धरना दे रहे 26 अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने रविवार को हिरासत में ले लिया, जिससे बालेन सरकार के खिलाफ गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।क्या था नेपाल का ऐतिहासिक जेन-जी प्रोटेस्ट? जिसने बदली थी सत्ता की तकदीरनेपाल में जारी यह वर्तमान संकट उस दौर की याद दिलाता है जब देश में सबसे बड़ा युवा आंदोलन शुरू हुआ था। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तत्कालीन सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा था। उस जन-आंदोलन के भारी दबाव के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उस पूरे आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी छवि और सोशल मीडिया पर अपनी धाक जमाने वाले पूर्व मेयर बालेंद्र शाह (बालेन शाह) युवाओं के सबसे बड़े आइकन बनकर उभरे। मार्च 2026 के आम चुनाव में उनकी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और 27 मार्च 2026 को बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। लेकिन सत्ता संभालने के कुछ ही महीनों के भीतर, वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना झुग्गियों को हटाने के उनके मानवीय दृष्टिकोण से परे फैसले ने उन्हीं समर्थकों को उनका धुर विरोधी बना दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jul 2026 6:42 am

ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिका का बड़ा मिसाइल हमला, वैश्विक तेल मार्ग पर छिड़ा परस्पर विरोधी दावों का महासंग्राम

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भीषण सैन्य संघर्ष एक बार फिर विनाशकारी स्तर पर पहुंच गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका की वायुसेना और नौसेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण केशम द्वीप (Qeshm Island) को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हमला बोल दिया है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस जलमार्ग से जहाजों के आवागमन को 'असंभव' घोषित कर दिया है, जबकि अमेरिकी सैन्य कमान ने इस दावे को खारिज करते हुए वैश्विक नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की हुंकार भरी है।केशम द्वीप पर एक दर्जन मिसाइलें दागीं: अमेरिकी सेंट्रल कमान ने 140 ईरानी ठिकानों को बनाया निशानाईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' (IRNA) ने द्वीप के स्थानीय गवर्नर के हवाले से पुष्टि की है कि रविवार दोपहर से अब तक अमेरिकी लड़ाकू विमानों द्वारा लगभग एक दर्जन मिसाइलें दागी गई हैं। फारस की खाड़ी के इस सबसे बड़े द्वीप, जहां लगभग 1,50,000 की आबादी निवास करती है, वहां हुए हमलों में एक नागरिक की मौत और दो अन्य के घायल होने की प्रारंभिक सूचना है। अमेरिकी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान द्वारा एक वाणिज्यिक पोत (Commercial Vessel) पर किए गए हमले के जवाब में की गई है, जिसके तहत आईआरजीसी (IRGC) की मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस सिस्टम और छोटी स्पीड बोट्स सहित लगभग 140 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया है।ईरान का ऐलान—'यातायात फिलहाल असंभव': पीजीएसए ने अमेरिकी गतिविधियों को ठहराया जिम्मेदारहोर्मुज जलडमरूमध्य के नए ट्रैफिक नियमों की निगरानी करने वाले ईरानी प्राधिकरण 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) ने वैश्विक जहाजों की आवाजाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। पीजीएसए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की हालिया गैर-कानूनी और आक्रामक गतिविधियों के कारण होर्मुज में जहाजों का सुरक्षित आवागमन फिलहाल संभव नहीं है। ईरानी अथॉरिटी ने साफ किया है कि जब तक इस समुद्री क्षेत्र में पूर्ण स्थिरता और शांति बहाल नहीं हो जाती, तब तक जहाजों के प्रवेश पर पाबंदी लागू रहेगी।अमेरिका का पलटवार—'अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह खुला है': सेंटकॉम ने तैनात की नेवीईरानी प्रतिबंधों के विपरीत, अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने एक बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया गया है। सेंटकॉम ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से कानूनी रूप से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है। ईरानी आक्रामकता, उत्पीड़न और मनमाने बयानों के बावजूद नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत मुस्तैदी से तैनात हैं। अमेरिकी नेवी की देख-रेख वाले 'जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर' (JMIC) ने भी ओमान वाले दक्षिणी रास्ते के खुले होने की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने इस रूट पर अत्यधिक जोखिम होने की चेतावनी जारी की है।मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता: वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग बाजारों में हड़कंपदोनों महाशक्तियों के परस्पर विरोधी दावों के बीच, वास्तविक समय में समुद्री जहाजों की ट्रैकिंग करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी 'मरीन ट्रैफिक' (Marine Traffic) के लाइव सैटेलाइट डेटा ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। ईरान के आधिकारिक ऐलान के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले विशालकाय तेल टैंकरों और कार्गो जहाजों की संख्या में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है। चूंकि दुनिया के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की वैश्विक आपूर्ति का एक-तिहाई हिस्सा इसी सकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए इस ताजा सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jul 2026 6:41 am

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-अमेरिका आमने-सामने

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर ईरान-अमेरिका ने परस्पर विरोधी दावे किये हैं, जिससे इसके खुलने को लेकर असमंजस की स्थिति बन गयी है

देशबन्धु 13 Jul 2026 6:23 am

बांग्लादेश में खसरे का कहर, 758 मौतों के बीच डेंगू का बढ़ा खतरा

बांग्लादेश में पिछले 24 घंटों के दौरान रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक खसरे जैसे लक्षणों से पांच और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही देश में खसरे से जुड़ी पक्की और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 758 हो गई है।

देशबन्धु 13 Jul 2026 5:33 am

1 साल में 1300% रिटर्न, ऑफिस की जगह फोटोकॉपी शॉप:पेनी स्टॉक्स वाली 6 कंपनियों की पड़ताल; काम बंद, प्लांट की जमीन पर जंगल

सिर्फ एक साल में 130 से 1300% तक रिटर्न। 8 से 10 रुपए का शेयर कुछ ही महीनों में 100 रुपए के पार पहुंच गया। दैनिक भास्कर की टीम ने शेयर बाजार में लिस्टेड और भरपूर मुनाफा देने वाली गुजरात की ऐसी 6 कंपनियों की पहचान की और उनके रजिस्टर्ड पते पर पहुंची। वहां जो मिला, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। जिन कंपनियों के शेयर रॉकेट की तरह भाग रहे थे, कहीं उनके बंद ऑफिस मिले, कहीं वीरान प्लॉट और कहीं फोटोकॉपी की दुकान। इन सभी कंपनियों के रजिस्टर्ड ऑफिस और कुछ के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट गुजरात में ही हैं। बाजार की भाषा में जिन शेयरों को पेनी स्टॉक कहा जाता है, उनमें संदिग्ध तरीके से भारी उतार-चढ़ाव दिखा। इन कंपनियों में प्रमोटर होल्डिंग में भी चौंकाने वाले बदलाव दिखे हैं। स्टॉक मार्केट के डेटा का एनालिसिस करने वाली वेबसाइट Screeners से मिले आंकड़ों को देखने के बाद कई सवाल खड़े हुए। इस इन्वेस्टिगेशन में जो पता चला, वह शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले छोटे-बड़े निवेशकों के लिए जानना और समझना जरूरी है। हो सकता है कि इन कंपनियों के शेयर आपके पोर्टफोलियो में भी हों। ऐसा होने पर आपकी कमाई जोखिम में पड़ सकती है। 1. सप्तक केमिकल: ऑफिस की जगह फोटोकॉपी की दुकान एक साल में निवेशकों का पैसा 1300 गुना करने वाली कंपनी सप्तक केमिकल का रजिस्टर्ड ऑफिस आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, तीर्थस्थान डाकोर के मोहन चेंबर कॉम्प्लेक्स में है। कागजों पर यह केमिकल कंपनी है, लेकिन मोहन चेंबर की दुकान नंबर-3 पर पहुंचते ही हैरानी हुई। वहां न कोई कॉर्पोरेट ऑफिस था और न ही फैक्ट्री। वहां 'चामुंडा जेरॉक्स' नाम की एक दुकान थी, जो बंद मिली। बोर्ड पर लिखे नंबर के आधार पर दुकान के मालिक जिग्नेश भावसार से संपर्क किया गया। वे मौके पर पहुंचे और सप्तक केमिकल्स के बारे में जो जानकारी दी, उसने एक अलग तस्वीर सामने रख दी। जिग्नेशभाई ने बताया, ‘वे लोग कभी यहां आते नहीं थे। करीब 5 साल बाद बार-बार सरकारी जांच होने लगी, तो मैंने जगह देने से मना कर दिया। इसके बाद किराया भी बंद हो गया। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में आज भी यही पता दर्ज है। करीब छह महीने पहले दिल्ली से भी अधिकारी जांच के लिए आए थे।’ सवाल यह है कि जिस कंपनी के ऑफिस की जगह 88 फीट की फोटोकॉपी की दुकान हो, जहां कोई कर्मचारी नहीं हो, कोई कारोबार नहीं हो, वह कंपनी एक साल में 1300% का रिटर्न कैसे दे सकती है? आखिर एक केमिकल कंपनी का ऐसा कौन-सा बिजनेस मॉडल है। इतना ही नहीं, पिछले एक साल में कंपनी के प्रमोटरों ने भी अपने हिस्से के शेयर बेचना शुरू कर दिया है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर करीब 12.5% रह गई है। बाकी हिस्सेदारी आम शेयरधारकों के पास है। यह तो सिर्फ शुरुआत थी। हमारी टीम जैसे-जैसे गुजरात के अलग-अलग जिलों में दूसरी कंपनियों के ऑफिस और प्लांट के पते पर पहुंची, नए खुलासे होते गए। हमारी लिस्ट में अगली कंपनी थी उमिया ट्यूब्स। 2. उमिया ट्यूब्स: ट्यूब बनाने वाली कंपनी के पते पर जंगल कंपनी के रजिस्टर्ड प्लांट का पता साबरकांठा जिले के तलोद के पास तोरणिया गांव का था। उम्मीद थी कि यहां ट्यूब बनाने का बड़ा प्लांट होगा, जहां भारी मशीनरी भी देखने को मिलेगी। मौके पर पहुंचने के बाद लगा जैसे रास्ता ही गलत आ गए हों। वहां कोई फैक्ट्री नहीं थी। आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि जिस वीरान जमीन पर कांटेदार झाड़ियां और बबूल उगे हुए थे, इसी जमीन पर कागजों में उमिया ट्यूब्स का प्लांट दर्ज है। यहां से हमारी टीम कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पहुंची। गांधीनगर के सेक्टर-11 में बने ऑफिस के बाहर कंपनी का छोटा सा बोर्ड लगा था, लेकिन शटर पर ताला मिला। ऑफिस का बड़ा हिस्सा पार्टीशन करके किसी और को ऑफिस के लिए किराए पर दिया गया था। प्रमोटरों ने तीन साल में 46% शेयर बेचे पास के ऑफिस में मौजूद एक शख्स से इस बारे में सवाल किया। उसने कहा कि ऑफिस और प्लांट कहीं और शिफ्ट हो गए हैं, लेकिन डॉक्युमेंट अब भी यहीं आते हैं। अब इस कंपनी के शेयर में आए संदिग्ध बदलाव को नीचे दिए गए ग्राफिक्स के जरिए समझिए। फिलहाल उमिया ट्यूब्स में प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर करीब 4% रह गई है, जबकि लगभग 96% शेयर आम निवेशकों के पास हैं। सितंबर 2023 में प्रमोटरों की हिस्सेदारी करीब 50% थी। ऐसे में ढाई साल के भीतर इतना बड़ा बदलाव आखिर क्यों आया? जब प्लांट और रजिस्टर्ड ऑफिस के नाम पर कुछ भी नहीं मिला, तो यह कंपनी शेयर बाजार में करीब 175% का रिटर्न कैसे दे रही है, यह एक गंभीर सवाल है। 3. संगीनीता केमिकल्स: सिक्योरिटी गार्ड ने बताया, प्लांट तीन महीने से बंद संगीनीता केमिकल्स का प्लांट गांधीनगर जिले के छत्राल GIDC फेज-4 में है। वहां पहुंचने पर पिछली दो कंपनियों की तरह ही मेन गेट पर ताला लटका मिला। पास ही एक दुकान थी। कंपनी के बारे में पूछने पर दुकानदार ने बताया कि कंपनी कुछ समय पहले ही बंद हो चुकी है। कैंपस के अंदर सिर्फ एक सिक्योरिटी गार्ड था। उसने भी कहा कि कंपनी का प्लांट पिछले तीन महीनों से बंद है। यहां कोई कामकाज नहीं हो रहा। ऑफिस में 4-5 कर्मचारी, अधिकारी बोले- 10 दिन बाद आना इसके बाद टीम गांधीनगर के सेक्टर-11 में कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पहुंची। वहां चार-पांच कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन मुख्य चेंबर खाली था। कर्मचारियों ने कंपनी के कामकाज से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। स्टाफ ने हमारी बात अपने एक सीनियर अधिकारी से फोन पर कराई। हमने कंपनी की मौजूदा स्थिति के बारे में सवाल किए। फोन पर बात करने वाले अधिकारी ने कहा, ‘फिलहाल इस पर बात नहीं कर सकता। आप 10 दिन बाद आइए।’ इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने उस अधिकारी का नंबर भी नहीं दिया। ध्यान देने वाली बात यह है कि छत्राल में संगीनीता केमिकल्स का प्लांट बंद है। कंपनी की तिमाही बिक्री में 29.36% की गिरावट दर्ज हुई है, इसके बावजूद शेयर बाजार में इसका शेयर लगातार ऊपर जा रहा है। वहीं प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी घटकर सिर्फ 25% रह गई है। पहले यह करीब 60% थी। 4. AVI पॉलिमर्स: दरवाजे पर ताला और मकड़ी के जाले कागजों में AVI पॉलिमर्स का ऑफिस अहमदाबाद के पॉश इलाके वस्त्रापुर के नालंदा कॉम्प्लेक्स में दर्ज है। हमारी टीम वहां पहुंची तो ऑफिस के गेट पर मकड़ी के जाले लगे थे। पहली नजर में ही ऐसा लगा कि यह ऑफिस कई साल से नहीं खुला है। दरवाजे पर एक पर्ची लगी थी, जिस पर लिखा था कि यहां आने वाले सभी दस्तावेज ऑफिस नंबर-96 में जमा कराएं। इसके बाद हमारी टीम ऑफिस नंबर-96 पहुंची। वहां मौजूद स्टाफ ने हमें ग्राहक समझते हुए पूछा, ‘क्या आप ऑफिस किराये पर लेने आए हैं।’ हमने कंपनी के बारे में पूछा तो उन्होंने मालिक का मोबाइल नंबर दिया। मालिक से बात हुई तो उन्होंने कंपनी के बारे में चौंकाने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘यह कंपनी तो काफी समय पहले बंद हो चुकी है।’ कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी सिर्फ 1% के आसपास रह गई है, यानी मालिक लगभग पूरी तरह कंपनी से बाहर निकल चुके हैं। इसके बावजूद रिकॉर्ड में कंपनी का तिमाही लाभ (प्रॉफिट वैरिएशन) 1283.78% दर्शाया गया है और शेयर ने 143.45% का रिटर्न दिया है। 5. केस्टोरा एग्री: एक ही पते पर दो-दो कंपनियां अहमदाबाद के नवरंगपुरा स्थित निर्माण कॉम्प्लेक्स में केस्टोरा एग्री कमोडिटीज का ऑफिस होने का जिक्र आधिकारिक दस्तावेजों में है। हमारी टीम वहां पहुंची तो ऑफिस के बाहर लगे बोर्ड पर केस्टोरा एग्री के साथ बड़े अक्षरों में हरिगोपाल स्टील एंड मेटल प्राइवेट लिमिटेड का भी नाम लिखा मिला। ऑफिस पर ताला भी लगा हुआ था। आसपास के लोगों ने बताया कि यह ऑफिस रेगुलर कभी खुलता ही नहीं। एग्री कमोडिटीज के नाम से चल रही इस कंपनी की तिमाही बिक्री (क्वार्टर सेल्स वैरिएशन) शून्य है, यानी कोई नया कारोबार नहीं हो रहा। इसके बावजूद शेयर बाजार में इसका शेयर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। केस्टोरा एग्री के शेयरों से प्रमोटरों ने भी बनाई दूर सितंबर 2023 में केस्टोरा एग्री कमोडिटीज लिमिटेड में पब्लिक शेयरहोल्डिंग करीब 73% और प्रमोटर होल्डिंग लगभग 26% थी। मार्च 2026 तक स्थिति पूरी तरह बदल गई। प्रमोटरों ने ज्यादातर हिस्सेदारी बेच दी और उनके पास सिर्फ 5% शेयर बचे। वहीं 94% से ज्यादा हिस्सेदारी आम शेयरधारकों के पास पहुंच गई। 6. गुरुकृपा जेम्स: लिस्ट में सिर्फ एक कंपनी, जहां कामकाज सामान्य मिला इस लिस्ट में सिर्फ गुरुकृपा जेम्स ऐसी कंपनी थी, जिसका अहमदाबाद के आश्रम रोड स्थित चार मंजिला ऑफिस चलता हुआ मिला। वहां कर्मचारी काम करते हुए दिखाई दिए। ग्राउंड रियलिटी में सब कुछ सामान्य लगा। हालांकि वहां से जानकारी मिली कि कंपनी का नाम बदलकर अब भक्ति ज्वेल्स कर दिया गया है। इसके बावजूद शेयर बाजार में कंपनी का नाम गुरुकृपा जेम्स ही है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि सितंबर 2023 में कंपनी में प्रमोटर होल्डिंग करीब 40% थी, जो अब घटकर 9.76% रह गई है। वहीं तिमाही मुनाफे में 84.66% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद कंपनी के शेयर ने एक वर्ष में 209.32% का रिटर्न दिया है। अब निवेशकों को क्या समझना चाहिए… शेयर बाजार की सामान्य धारणा है कि जिस कंपनी के भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद होती है, उसके प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर रखते हैं। यहां जिन छह कंपनियों की जांच की गई, उनमें लगातार प्रमोटर होल्डिंग घटती दिखाई दे रही है। AVI पॉलिमर्स में तो यह घटकर केवल 1.11% रह गई है। इसका सीधा अर्थ यही है कि प्रमोटरों ने अपने ज्यादातर शेयर या तो आम निवेशकों को बेच दिए हैं या फिर ऑपरेटरों के पास पहुंच गए हैं। मुनाफा और शेयर की चाल, दोनों में मेल नहीं सप्तक केमिकल का मुनाफा आधा रह गया। केस्टोरा एग्री का मुनाफा 84.72% घट गया। इसके बावजूद इन कंपनियों के शेयरों के भाव लगातार ऊंचाई पर बने हुए हैं। यह सामान्य बाजार सिद्धांत के बिल्कुल उलट स्थिति है। इतना ही नहीं, ये सभी माइक्रो-कैप कंपनियां हैं। ऐसी छोटी कंपनियों में ऑपरेटरों के लिए शेयर की कीमतों को मनचाहे तरीके से ऊपर या नीचे ले जाना आसान माना जाता है। इस इन्वेस्टिगेशन से यह स्पष्ट होता है कि ग्राउंड लेवल पर इन कंपनियों की ओर से किसी बड़े प्रोडक्शन या सक्रिय कारोबारी गतिविधि के पर्याप्त संकेत नहीं मिले। सामान्य निवेशक 100% से ज्यादा रिटर्न देखकर लालच में आकर इन शेयरों की खरीदारी करते हैं, तब कुछ ‘समझदार लोग’ ऊंचे भाव पर अपने शेयर बेचकर मुनाफा वसूल लेते हैं। बाजार की भाषा में इसे डंपिंग कहा जाता है। इसके बाद यदि शेयर में लगातार लोअर सर्किट लगने लगें तो आम निवेशकों की पूंजी फंस सकती है। ऐसी स्थिति में शेयर बेचने के लिए खरीदार तक नहीं मिलते और निवेशकों का पैसा लंबे समय तक अटकने या डूबने का जोखिम बना रहता है। दैनिक भास्कर ने 29 जून 2026 को इन सभी छह कंपनियों को ई-मेल भेजकर उनके शेयरों में दिखाई दे रहे असामान्य रुझान पर आधिकारिक जवाब मांगा था। 10 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद किसी भी कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। हमने शेयर बाजार की गतिविधियों पर निगरानी रखने वाली संस्था SEBI को भी आधिकारिक ई-मेल आईडी पर इन कंपनियों के शेयरों में दर्ज असामान्य तेजी के बारे में जानकारी भेजी गई और पूछा गया कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जा सकती है। SEBI की ओर से ऑटो-जनरेटेड जवाब मिला, जिसमें कहा गया कि इस तरह की शिकायत संबंधित कंपनी के शेयरधारक ही दर्ज करा सकते हैं।

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 5:17 am

क्या यूक्रेन से हारने वाला है रूस:क्रीमिया फिसल रहा, तेल के लिए लंबी कतारें, पुतिन बोले- मुश्किल दौर; यूक्रेन ने कैसे बाजी पलटी

24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला किया। दुनियाभर के मिलिट्री एक्सपर्ट्स बोले- रूस 24 घंटे के भीतर यूक्रेन को घुटनों पर ला देगा। लेकिन 4 साल, 4 महीने और 18 दिन की जंग के बाद रूस खुद बेहाल दिख रहा है। राष्ट्रपति पुतिन ने जंग के दौरान पहली बार माना कि देश मुश्किल में है। क्या छोटा-सा यूक्रेन वाकई सुपरपावर रूस को हरा देगा; मंडे मेगा स्टोरी में 4 चैप्टर्स में पूरी कहानी… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और विपुल शर्मा ------- ये खबर भी पढ़िए… मेलोनी की सिगरेट, पुतिन का अमर होने वाला प्लान:वर्ल्ड लीडर्स आपस में क्या बातें करते हैं; पीएम मोदी कैसे करते हैं तैयारी 16 जून 2026। G7 की सालाना बैठक से पहले अनौपचारिक बातचीत चल रही थी। इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी बोलीं- आज सुबह 3 कॉफी पीकर आई हूं। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने फौरन पूछा- और एक सिगरेट? ये गपशप वायरल हो गई। लोगों ने देखा कि दुनिया के सबसे ताकतवर लोग भी आपस में हम-आप जैसे ही बातें करते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 5:03 am

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बच्चियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर यूरोपीय संसद ने जताई चिंता

एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें पाकिस्तान के अधिकारियों से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के अपहरण और जबरन इस्लाम धर्म अपनाने की घटनाओं को रोकने की मांग की गई है।

देशबन्धु 12 Jul 2026 7:02 pm

ट्रंप की हत्या पर दबाया जाएगा 'ऑटोमैटिक' बटन? ईरान पर लॉक हुईं 1000 मिसाइलें, जानें क्या है अमेरिकी रक्षा प्रणाली का सच

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य एवं कूटनीतिक गतिरोध एक अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बेहद सनसनीखेज दावा करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने अमेरिकी सशस्त्र बलों को 'स्टैंडिंग ऑर्डर्स' (स्थायी आदेश) दे रखे हैं कि यदि ईरान उनकी हत्या करने या उन्हें किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो तेहरान पर अब तक का सबसे विनाशकारी सैन्य पलटवार किया जाए। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि 1,000 मिसाइलें इस वक्त पूरी तरह से तैयार हैं और उनका निशाना सीधे ईरान की ओर लॉक है।क्या वाकई काम करेगा 'डेड मैन्स स्विच'? अमेरिकी संविधान और विशेषज्ञों ने खोला राजडोनाल्ड ट्रंप के इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई अमेरिकी राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कोई स्वचालित मिसाइल हमला शुरू हो सकता है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और अमेरिकी संवैधानिक ढांचे के अनुसार, इस प्रकार का कोई भी डेड मैन्स स्विच (स्वचालित प्रतिशोध प्रणाली) व्यावहारिक या कानूनी तौर पर अस्तित्व में नहीं है। अमेरिकी कानून सेना को राष्ट्रपति की मृत्यु होते ही कंप्यूटर आधारित या स्वचालित रूप से युद्ध शुरू करने का अधिकार बिल्कुल नहीं देता है।राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में जेडी वेंस संभालेंगे कमान: ग्रैफ ने समझाया निरंतरता का नियमप्रसिद्ध इतिहासकार और सुरक्षा मामलों के लेखक गैरेट एम. ग्रैफ के अनुसार, अमेरिका के पास आपातकालीन स्थितियों और परमाणु खतरों से निपटने के लिए 'कंटिन्यूटी-ऑफ-गवर्नमेंट' (सरकार चलाने की निरंतरता) की बेहद विस्तृत नियमावली जरूर है, लेकिन वे योजनाएं भी किसी तकनीकी कंप्यूटर को मिसाइल दागने की स्वायत्तता नहीं देतीं। अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन और 'प्रेसिडेंशियल सक्सेशन एक्ट 1947' के तहत, यदि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कोई अनहोनी होती है, तो कमांडर-इन-चीफ की शक्तियां तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पास स्थानांतरित हो जाएंगी। इसके बाद यह पूरी तरह से जेडी वेंस के विवेक पर निर्भर करेगा कि वे ट्रंप के पूर्व-घोषित रणनीतिक फैसलों को लागू करते हैं या उन्हें पूरी तरह से खारिज कर देते हैं।मोजतबा खामेनेई का पलटवार: तेहरान में गूंजे प्रतिशोध के नारेट्रंप के इस आक्रामक बयान के कुछ ही घंटों के भीतर तेहरान से भी बेहद सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे और ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सरकारी टेलीविजन पर आकर अपने पिता की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराया। मोजतबा ने कहा कि देश के सभी शहीदों के पवित्र खून का बदला लेना पूरे ईरानी राष्ट्र की सामूहिक इच्छा है और इसे निश्चित रूप से पूरा किया जाएगा। तेहरान में हुए हालिया आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ नारे लिखे बैनर भी देखे गए, जिससे साफ है कि दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट चरम पर है।एयरफोर्स वन में अचानक बदलाव: तुर्की नाटो शिखर सम्मेलन के बाद सुरक्षा अलर्टइस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी वाशिंगटन में कई बड़े फेरबदल देखे जा रहे हैं। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने अमेरिकी सुरक्षा बलों को ट्रंप के खिलाफ ईरान की एक नई और बेहद गंभीर साजिश के बारे में इनपुट दिए हैं। इसी खतरे के मद्देनजर, तुर्की में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से लौटते समय राष्ट्रपति ट्रंप कतर द्वारा उपहार में मिले अत्याधुनिक 400 मिलियन डॉलर के नए विमान के बजाय एक पुराने 'एयर फोर्स वन' (Air Force One) विमान से यात्रा करते हुए देखे गए। विशेषज्ञों के अनुसार, नए विमान में वह उन्नत मिसाइल डिटेक्शन और काउंटर-मेजर (मिसाइल रोधी प्रणाली) मौजूद नहीं थी जो सुरक्षा के लिहाज से पुराने सैन्य विमानों में होती है। यह सुरक्षात्मक समझौता ऐसे समय में किया गया है जब दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुआ युद्धविराम पूरी तरह से टूटने की कगार पर है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Jul 2026 6:41 pm

ईरानी अखबार ने जारी की 13 बड़े नेताओं की 'रिवेंज लिस्ट', ट्रंप, नेतन्याहू और स्टार्मर के नाम शामिल

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण सैन्य गतिरोध के बीच ईरान के एक प्रमुख कट्टरपंथी अखबार द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए एक सनसनीखेज इन्फोग्राफिक ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है। इस इन्फोग्राफिक में दुनिया के 13 सबसे प्रभावशाली राजनीतिक और सैन्य नेताओं की तस्वीरें और नाम प्रकाशित करते हुए दावा किया गया है कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का प्रतिशोध लेने के लिए इन्हें निशाना बनाया जाना चाहिए। हालांकि, तेहरान प्रशासन या ईरानी सरकार द्वारा इस सूची को किसी भी प्रकार की आधिकारिक मान्यता दिए जाने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है।मोजतबा खामेनेई की सख्त चेतावनी: 'हमले के जिम्मेदार लोग शांतिपूर्ण मौत को तरसेंगे'यह विवाद तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई ने अपना पहला सार्वजनिक संदेश जारी किया। मोजतबा, जो खुद भी उस घातक हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और लंबे समय बाद जनता के सामने आए हैं, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिता की मौत का बदला लेना पूरे ईरानी राष्ट्र का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने एक बेहद आक्रामक बयान में कहा कि इस सूची में शामिल लोग अपनी स्वाभाविक और शांतिपूर्ण मौत का सपना केवल अपने दिल में लेकर ही कब्र में जाएंगे। इस बयान के ठीक बाद तेहरान प्रशासन से जुड़े 'हमशहरी' अखबार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर यह सूची साझा कर दी, हालांकि रविवार को प्रकाशित हुए प्रिंट संस्करण से इस विवादित ग्राफिक को हटा दिया गया था।रिवेंज लिस्ट में शामिल हुए वैश्विक चेहरे: अमेरिका से लेकर यूरोप तक हड़कंपमोजतबा खामेनेई ने भले ही अपने भाषण में किसी भी वैश्विक राजनेता का नाम स्पष्ट तौर पर न लिया हो, लेकिन 'हमशहरी' अखबार द्वारा तैयार किए गए डिजिटल इन्फोग्राफिक ने सीधे तौर पर कई देशों के प्रमुखों को इस प्रतिशोध का केंद्र बना दिया है। इस हिट लिस्ट में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को मुख्य रूप से दर्शाया गया है। इनके अलावा अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज जैसे पश्चिमी दुनिया के सबसे शक्तिशाली चेहरों को इस सूची में जगह दी गई है।पश्चिमी देशों के प्रति बढ़ता आक्रोश: हवाई क्षेत्र देने और मौन रहने पर नाराजगीईरान द्वारा इन विशिष्ट यूरोपीय और अमेरिकी नेताओं को लक्षित करने के पीछे एक गहरी रणनीतिक और कूटनीतिक नाराजगी है। युद्ध की शुरुआत से ही ईरान लगातार यूरोपीय संघ और नाटो (NATO) के सदस्य देशों पर यह आरोप लगाता रहा है कि उन्होंने न केवल ईरान की संप्रभुता पर हुए हमलों की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निंदा करने से इनकार किया, बल्कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों और रीफ्यूलिंग टैंकर्स को अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की खुली अनुमति भी दी। ईरान का मानना है कि यह मौन सहमति और सैन्य सहयोग सीधे तौर पर उसके खिलाफ युद्ध अपराधों में शामिल होने जैसा है। वर्तमान में दोनों परमाणु और सैन्य शक्तियों के बीच चल रही यह बयानबाजी किसी भी प्रकार के शांति समझौते की उम्मीदों को पूरी तरह समाप्त कर रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Jul 2026 6:39 pm

आज का एक्सप्लेनर:3 देशों से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदीः ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम, इंडोनेशिया से बंदरगाह की डील; ये चीन-अमेरिका को कितना खलेगा

पीएम मोदी 6 जुलाई की सुबह नई दिल्ली से इंडोनेशिया के लिए निकले थे। फिर ऑस्ट्रेलिया होते हुए न्यूजीलैंड पहुंचे। वे 6 दिनों में 3 देशों का दौरा करके 12 जुलाई की सुबह दिल्ली लौट आए। करीब 144 घंटे के इस मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी और भारत के लिए उसके मायने क्या हैं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… पहला पड़ाव था- इंडोनेशिया का जकार्ता। ये पीएम मोदी की चौथी इंडोनेशियाई यात्रा थी। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात की। दो दिन के टूर में उन्होंने इंडोनेशियाई संसद में भाषण दिया। दोनों देशों के बीच 14 समझौतों पर साइन हुए। इनमें 2 डील सबसे अहम हैं- 1. सबांग पोर्ट डीलभारत और इंडोनेशिया मिलकर सुमात्रा के उत्तर में सबांग पोर्ट डेवलप करेंगे। इंडोनेशिया ने मई 2018 में ही भारत को इसका न्योता दिया था। तब पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इसके लिए ज्वॉइंट टास्क फोर्स बनाने का फैसला हुआ था। 2023 तक प्रोजेक्ट को लेकर एक स्टडी भी हुई। अब समझौते पर साइन होने से काम आगे बढ़ पाएगा। सबांग समुद्र में गहरे पानी वाला पोर्ट है। ये 50 हजार टन के जहाजों, पनडुब्बियों और युद्धपोतों को भी संभाल सकता है। पोर्ट में भारत कितना इन्वेस्टमेंट करेगा और ये कब तक पूरा होगा, अभी ये जानकारी सामने नहीं आई है। दोनों देशों ने अंडमान-निकोबार और इंडोनेशिया के आचे व सुमात्रा द्वीपों के बाकी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने पर भी सहमति जताई है। भारत के लिए डील के मायने 2. ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की सप्लाईDRDO के तहत आने वाले ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के बीच ये एग्रीमेंट हुआ है। इसके तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम देगा। इंडोनेशिया ने पहले 10 करोड़ डॉलर में ब्रह्मोस की 12 मिसाइल्स की एक बैटरी लेने का प्रपोजल दिया था। अब इसे दोगुना कर दिया गया है। अनुमान हैं कि पूरी डील करीब 63 करोड़ डॉलर की हो सकती है। इसमें मिसाइल सिस्टम के अलावा ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है। इस पैकेज में सरफेस-टू-सरफेस और एयर-लॉन्च्ड, यानी मिसाइल के दोनों सुपरसोनिक वैरिएंट शामिल हैं, जिनकी रेंज 300 किलोमीटर है। ब्रह्मोस भारत के सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमानों पर तैनात है। इंडोनेशिया भी अपने सुखोई-30 बेड़े में इसे इंटीग्रेट करेगा। इस डील के साथ फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन जाएगा। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, BDL और इंडोनेशियाई कंपनी 'रिपब्लिकॉर्प' के बीच भारत की एस्ट्रा Mk-1 एयर-टू-एयर मिसाइल को लेकर भी समझौता हुआ है। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील पीएम मोदी का दूसरा पड़ाव था- ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न। वे यहां 8 और 9 जुलाई को रहे। पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज के बीच तीसरी सालाना भारत-ऑस्ट्रेलिया समिट हुई। दोनों देशों के बीच 18 समझौते और घोषणाएं हुईं। इनमें दो डील सबसे अहम हैं- 1. यूरेनियम सप्लाई डीलभारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2014 में ‘सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट’ हुआ था। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की सप्लाई होनी थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने सप्लाई बेहद सीमित रखी। उसको चिंता थी कि यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है। अब दोनों देशों ने उसी एग्रीमेंट को अमल में लाने के लिए 'एडमिनिस्ट्रेटिव अरेंजमेंट' पर साइन किए हैं। यानी अब ऑस्ट्रेलिया भारत को जरूरत भर का यूरेनियम एक्सपोर्ट करेगा। संयुक्त बयान में कहा गया है कि ये सप्लाई सिर्फ यूरेनियम के शांतिपूर्ण इस्तेमाल, यानी बिजली वगैरह बनाने के लिए होगी। सप्लाई की निगरानी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी, यानी IAEA करेगी। ऑस्ट्रेलिया किस कीमत पर और कितना यूरेनियम देगा, सप्लाई कब होगी, अभी ये डिटेल्स सामने नहीं आए हैं। भारत के लिए डील के मायने 2. क्रिटिकल मिनरल्स प्रोडक्शन भारत और ऑस्ट्रेलिया ने लीथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए समझौता किया है। इसे ‘क्रिटिकल मिनरल्स पार्टनरशिप’ कहा जा रहा है। इसके तहत सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट कंपनियों के बीच लॉन्ग-टर्म ऑफटेक, रिफाइनिंग और वैल्यू-एडिशन के लिए निवेश की व्यवस्था तय हुई है। यानी दोनों देशों की कंपनियां मिलकर मिनरल्स की सप्लाई में लंबे समय के लिए इन्वेस्टमेंट करेंगी। कच्चे माल की खरीद के अलावा प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग भी मिलकर होगी। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील पीएम मोदी का आखिरी पड़ाव था- न्यूजीलैंड का ऑकलैंड। वे 10 और 11 जुलाई को यहां रहे। ये पिछले 40 सालों में किसी भारतीय पीएम की पहली न्यूजीलैंड यात्रा थी। इससे पहले 1986 में तब के पीएम राजीव गांधी न्यूजीलैंड गए थे। पीएम मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन के बीच बातचीत हुई। इसके बाद 10 समझौते और 8 इनिशिएटिव की घोषणा हुई। इनमें 2 चीजें सबसे अहम थीं- 1. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और रोडमैप टू 2030मार्च 2025 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत शुरू हुई और दिसंबर 2025 में पूरी हुई। 27 अप्रैल 2026 को इस पर औपचारिक साइन हुए। यानी ये डील मोदी की मौजूदा यात्रा से पहले ही हो चुकी थी। अब इस यात्रा में इसे 'स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' के लेवल पर अपग्रेड किया गया। यानी तय हुआ कि FTA जल्द ही लागू करने ट्रेड बढ़ाया जाएगा। साथ ही 'इंडिया-न्यूजीलैंड रोडमैप टू 2030' नाम का एक दस्तावेज जारी किया गया। इसके तहत दोनों देश ट्रेड, डिफेंस, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, खेती, एजुकेशन और टेक्नोलॉजी के सेक्टर में पार्टनरशिप बढ़ाएंगे। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करके करीब 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर, यानी 35 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। FTA के तहत भारत न्‍यूजीलैंड को केमिकल्‍स, प्रोसेसिंग फूड, एग्रीकल्चर प्रोडक्‍ट्स वगैरह की सप्‍लाई करेगा। इस सामान पर जीरो टैरिफ लगेगा। वही न्‍यूजीलैंड से कीवी सहित दूसरे फल, लकड़ी और क्रिटिकल्‍स मिनरल्स वगैरह आएंगे। एग्रीमेंट के तहत पहले दिन से ही न्यूजीलैंड के 57 % सामान पर जीरो टैरिफ लागू हो जाएगा। इस पर भी सहमति बनी है कि न्‍यूजीलैंड भारत में अगले 15 सालों में 20 अरब डॉलर, यानी करीब 1.72 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगा। भारत के लिए डील के मायने 2. डिफेंस और मैरिटाइम पार्टनरशिपदोनों देशों ने डिफेंस में आपसी साझेदारी, लॉजिस्टिक सपोर्ट और जॉइंट नेवी एक्सरसाइज बढ़ाने पर सहमति जताई है।इसका मतलब है कि दोनों देशों की नेवी एक-दूसरे के पोर्ट और मैरीटाइम फैसिलिटीज का इस्तेमाल कर सकेंगे। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:5 देशों से क्या लेकर लौटे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स क्रिटिकल मिनरल देगा, मेलोनी से भी डील PM मोदी 15 मई 2026 की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आए। करीब 140 घंटे के इस मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी और भारत के लिए उसके मायने क्या हैं, पूरी खबर में पढ़िए…

दैनिक भास्कर 12 Jul 2026 6:19 pm

अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, 5 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले; बढ़ा तनाव

ईरान की IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में एयरबेस के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और MQ-9 ड्रोन रखने वाले हैंगर को नुकसान पहुंचा।

देशबन्धु 12 Jul 2026 4:14 pm

ओमान तट पर GFS Galaxy जहाज पर हमला, 10 भारतीय बचाए गए, एक लापता; विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता

भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार को ओमान के तट के पास वाणिज्यिक पोत जीएफएस गैलेक्सी पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया। बताया कि 10 भारतीयों को बचा लिया गया है जबकि एक की तलाश जारी है। भारतीय दूतावास भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, जहाज को आईआरजीसी के हमले की वजह से नुकसान पहुंचा।

देशबन्धु 12 Jul 2026 2:35 pm

ईरान ने बंद किया होर्मुज जलमार्ग, भड़के ट्रंप ने सीजफायर खत्म कर ईरानी शहरों पर बरसाए बम

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। ईरान द्वारा वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद किए जाने के बाद अमेरिका ने अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच चल रहे सीजफायर (युद्धविराम) को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का एलान करते हुए ईरान के कई रणनीतिक शहरों पर भीषण बमबारी के आदेश दे दिए हैं। अमेरिकी वायुसेना और मिसाइलों ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना बना इस भीषण टकराव की मुख्य वजहइस पूरे विवाद की जड़ होर्मुज जलमार्ग है, जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया का करीब एक-तिहाई समुद्री तेल परिवहन इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने वैश्विक प्रतिबंधों और अमेरिकी दबाव के विरोध में अचानक इस जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी। ईरान के इस कदम को वैश्विक व्यापार पर सीधे हमले के रूप में देखते हुए वाशिंगटन में हड़कंप मच गया, जिसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने बिना कोई वक्त गंवाए सीधे सैन्य एक्शन लेने का फैसला किया।राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा फैसला और सीजफायर का अचानक अंतअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनाव पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वैश्विक व्यापार और अमेरिकी हितों को चुनौती देने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने पूर्व में हुए सीजफायर समझौतों को पूरी तरह से रद्द घोषित कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी कमांड ने ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों, परमाणु केंद्रों के नजदीकी इलाकों और तटीय शहरों पर हवाई हमले और मिसाइलें बरसानी शुरू कर दीं। इस अप्रत्याशित हमले से पूरे ईरान में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।वैश्विक बाजार और भारत सहित दुनिया भर के देशों पर पड़ेगा इसका असरअमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस सीधे युद्ध का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलने लगा है। होर्मुज जलमार्ग बंद होने और अमेरिकी बमबारी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से आने वाले इसी तेल मार्ग पर निर्भर है। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के अन्य बड़े देश इस वक्त दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात पूरी तरह बेकाबू नजर आ रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Jul 2026 1:51 pm

कतर की किस्मत बदलने वाले पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा का निधन, तख्तापलट कर ली थी सत्ता की कमान

वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। कतर को एक छोटे से गुमनाम देश से दुनिया का सबसे अमीर और आधुनिक देश बनाने वाले पूर्व अमीर (शासक) शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे खाड़ी देशों (Gulf Countries) सहित वैश्विक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। शेख हमद को आधुनिक कतर का निर्माता माना जाता है, जिन्होंने अपने विजन और फैसलों से न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि कतर को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बड़ा केंद्र भी बना दिया।साल 1995 का वो ऐतिहासिक तख्तापलट जिसने बदल दिया कतर का इतिहासशेख हमद बिन खलीफा अल थानी के सत्ता में आने की कहानी बेहद नाटकीय और ऐतिहासिक रही है। साल 1995 में जब उनके पिता देश से बाहर स्विट्जरलैंड की यात्रा पर थे, तब शेख हमद ने एक रक्तहीन तख्तापलट (Bloodless Coup) के जरिए कतर की सत्ता अपने हाथों में ले ली थी। उस समय कतर की आर्थिक स्थिति आज जैसी मजबूत नहीं थी। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने देश के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर एक नई और आक्रामक नीति अपनाई, जिसने आने वाले दशकों में देश की पूरी तस्वीर को बदलकर रख दिया।लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के दम पर कतर को बनाया दुनिया का सबसे अमीर देशशेख हमद की सबसे बड़ी कामयाबी कतर के विशाल प्राकृतिक गैस भंडार (Natural Gas Reserves) को पहचानना और उसका सही इस्तेमाल करना था। उनके नेतृत्व में कतर ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के उत्पादन और निर्यात में भारी निवेश किया। देखते ही देखते कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक देश बन गया। इस गैस क्रांति ने कतर के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय को दुनिया में सबसे ऊंचा बना दिया और एक छोटे से मरुस्थलीय देश को दुनिया के सबसे अमीर और शक्तिशाली देशों की कतार में ला खड़ा किया।ग्लोबल मीडिया नेटवर्क अल जजीरा की शुरुआत और कूटनीति में दबदबाशेख हमद सिर्फ आर्थिक सुधारों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कतर को वैश्विक मंच पर एक बड़ी पहचान दिलाई। साल 1996 में उन्होंने प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल 'अल जजीरा' (Al Jazeera) की स्थापना की, जिसने मिडिल ईस्ट और दुनिया भर की पत्रकारिता का रुख बदल दिया। इसके साथ ही उन्होंने कतर की एयरलाइंस 'कतर एयरवेज' को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एयरलाइंस में शुमार कराया और खेल जगत में निवेश कर फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों की नींव भी रखी। साल 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे और वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी थी। उनके निधन के साथ ही मध्य पूर्व के इतिहास का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Jul 2026 1:49 pm

नेपाल में युवाओं का गुस्सा बढ़ा, बालेन शाह सरकार पर उठे सवाल; रोजगार और नीतियों को लेकर विरोध तेज

युवा संगठन जेन-जी नेपाल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बजट और नीतियों में युवाओं के रोजगार, आय बढ़ाने और भविष्य सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं। संगठन का आरोप है कि सरकार ने युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी, जिसके कारण असंतोष बढ़ रहा है।

देशबन्धु 12 Jul 2026 1:36 pm

कनाडा के स्ट्रीट फेस्टिवल में मास शूटिंग की घटना आई सामने, दो लोगों की मौत और तीन घायल

कनाडा के टोरंटो में एक स्ट्रीट फेस्टिवल के पास हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। अधिकारियों की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, घटना के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी।

देशबन्धु 12 Jul 2026 11:57 am

वेस्ट बैंक दौरे पर भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना का दावा, हथियारबंद इजरायली सेटलरों ने घेरा

रो खन्ना के अनुसार, उनका दल वेस्ट बैंक के एक फलस्तीनी गांव का दौरा कर रहा था। इस यात्रा का उद्देश्य स्थानीय निवासियों से मिलना और क्षेत्र में उनकी सुरक्षा तथा जीवन-स्थितियों के बारे में जानकारी लेना था।

देशबन्धु 12 Jul 2026 11:39 am

ट्रंप की धमकी: ईरान पर 1000 मिसाइलें तैयार

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया टकराव के बाद हालात और बिगड़ते दिख रहे हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने एक‑दूसरे को कड़े संदेश दिए हैं

देशबन्धु 12 Jul 2026 7:16 am