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आज का एक्सप्लेनर:कर्नाटक में सीएम बदलने के पीछे की कहानी; कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक या बीजेपी के भाग्य खुले, दांव पर हैं 62% अहिंदा वोटर्स

कर्नाटक में कांग्रेस ने कार्यकाल के बीच सीएम बदल दिया। 77 साल के सिद्धारमैया की जगह 64 साल के डीके शिवकुमार लेंगे। कहा जा रहा है कि ये फैसला एक सीक्रेट डील के तहत हुआ। लेकिन बीजेपी को दो तैयार मुद्दे मिल गए- ओबीसी नेता की अनदेखी और दागदार छवि वाले नेता को कुर्सी। आखिर कांग्रेस ने अचानक क्यों बदला सीएम और चुनाव से 23 महीने पहले हुआ यह फेरबदल कांग्रेस के लिए फायदेमंद होगा या नुकसानदेह? जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… बैक-स्टोरीः कर्नाटक में सीएम कुर्सी की खींचतान और एक सीक्रेट डील मई 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव हुए। सिद्धारमैया की सोशल इंजीनियरिंग और डीके शिवकुमार की मेहनत और इलेक्शन मैनेजमेंट की बदौलत कांग्रेस को बहुमत मिला। 224 में से 135 सीटें। सीएम की कुर्सी पर सिद्धारमैया और डीके दोनों ने दावा किया। बंद कमरे में 5 दिन मैराथन बैठकें हुईं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, महासचिव केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला शामिल हुए। आखिरकार 19 मई 2023 को कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को सीएम और डीके को डिप्टी सीएम बनाने की घोषणा हुई। घोषणा के बाद डीके से एक पत्रकार ने पूछा- क्या कर्नाटक में ये सरकार 5 साल चलेगी, सिद्धारमैया के साथ सीएम पद को लेकर विवाद तो नहीं होगा? डीके ने हल्की मुस्कान के साथ कहा- कर्नाटक में 5 साल तक कांग्रेस सरकार चलेगी। सिद्धारमैया के 5 साल सीएम रहने पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। डीके के जेस्चर से कयास लगने लगे कि कर्नाटक में ढाई-ढाई साल के सीएम पर बात बनी है। कांग्रेस कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल बताते हैं, ‘कांग्रेस आलाकमान की उस मीटिंग में तय किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। तब डीके चाहते थे कि इस फैसले का ऐलान किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।' 20 नवंबर 2025 को जब सिद्धारमैया के कार्यकाल के ढाई साल पूरे हुए, तब भी लामबंदियां और बयानबाजियां शुरू हुईं। डीके और उनके समर्थक ‘सीक्रेट डील’ को पूरा करने का दबाव बना रहे थे, जबकि सिद्धारमैया इससे इनकार कर रहे थे। ऐसे में आलाकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाकर समझाइश दी। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सीएम कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे सिद्धारमैया 20 मई 2026 को सिद्धारमैया के 3 साल पूरे हो गए। सीएम बदलने की चर्चा फिर शुरू हुई। कांग्रेस आलाकमान ने सीएम सिद्धारमैया को अचानक दिल्ली तलब किया। कहा गया- आप सुबह 11 बजे तक दिल्ली के इंदिरा भवन (कांग्रेस मुख्यालय) पहुंचे। 5 दशकों से राजनीति करने वाले सिद्धारमैया समझ गए माजरा क्या है। सो उन्होंने इंदिरा भवन जाने से पहले पावर शो किया। दिल्ली के कर्नाटक भवन में अपने वफादारों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग की। मेज पर सिद्धारमैया के चारों ओर जी परमेश्वर, सतीश जारकीहोली और एचसी महादेवप्पा जैसे उनके खास मंत्री बैठे थे। कुछ विधायक भी मौजूद थे। 11 बजते ही इंदिरा भवन में हलचल शुरू हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार एक-एक करके कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। बैठक शुरू हुई। पहली बैठक में खड़गे, राहुल, वेणुगोपाल और सुरजेवाला शामिल हुए। 2 घंटे तक ये बातचीत हुई। इसके बाद सिद्धारमैया और डीके को अंदर बुलाया गया। बातचीत हुई और लंच हुआ। हालांकि राहुल लंच के लिए अपने घर चले गए, जहां उन्होंने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से बातचीत की। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रियंका चाहती थीं कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन हो। इसके बाद राहुल फिर इंदिरा भवन पहुंचे। सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल के मुताबिक, मीटिंग में सिद्धारमैया को दो ऑफर दिए गए। पहला कि आप राज्यसभा आइए और सेंट्रल लीडरशिप में काम करिए। दूसरा कि आपके बेटे को यतींद्र सिद्धारमैया को कैबिनेट मंत्री बनाया जाए। इस पर सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें परिवार और करीबियों से सलाह-मशवरा करना है। इसके लिए उन्होंने वक्त मांगा। शाम पौने 6 बजे वेणुगोपाल, सुरजेवाला, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार इंदिरा भवन से बाहर निकले। तब मीडिया से बातचीत करते हुए वेणुगोपाल ने कहा- जो अटकलें लगाई जा रही हैं, वे सिर्फ अटकलें हैं। इनमें कोई सच्चाई नहीं है। बैठक में राज्यसभा और विधान परिषद (MLC) चुनावों पर चर्चा हुई। 28 मई को मंत्रियों के साथ नाश्ता, दोपहर में इस्तीफा 28 मई को सिद्धारमैया ने बेंगलुरू में अपने आवास पर ब्रेकफास्ट मीटिंग की, जिसमें डीके शिवकुमार समेत पूरा मंत्रिमंडल शामिल हुआ। यहां सिद्धारमैया ने ऐलान किया कि मैं कुर्सी छोड़ रहा हूं। संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने बताया कि मीटिंग में डीके शिवकुमार के नाम पर मुहर लगी। वह अगले सीएम होंगे। मीटिंग में डीके ने सिद्धारमैया के पैर छुए। फिर सिद्धारमैया ने उन्हें गले लगा लिया। सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय मांगा था। लेकिन राज्यपाल पारिवारिक स्वास्थ्य कारणों के चलते बेंगलुरू से बाहर हैं। अभी वे इंदौर में हैं। ऐसे में सिद्धारमैया ने लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल के विशेष सचिव प्रभु शंकर को अपना इस्तीफा सौंपा। नियमों के मुताबिक, राज्यपाल जब राज्य में न हों, तब सीएम लिखित इस्तीफा राजभवन के अधिकारियों को ई-मेल, फैक्स के जरिए या खुद जाकर दे सकते हैं। राज्यपाल बाद में उसे स्वीकार करते हैं। इस्तीफा मंजूर होने तक मौजूदा सीएम ही पद पर रहेंगे। वहीं, डीके शिवकुमार भी कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी जगह सतीश जोरकीहोली ले सकते हैं, जो सिद्धारमैया के खास सिपहसलार हैं और अभी कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। डीके के सीएम बनने में अभी एक और पेंच है। खबरें हैं कि डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह सिद्धारमैया के राज्यसभा नामांकन के बाद होगा। राज्यसभा नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है। चुनाव से 23 महीने पहले सिद्धारमैया से कुर्सी क्यों खाली करवाई गई? अप्रैल-मई 2028 में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। 23 महीने पहले सीएम बदलने के पीछे एक्सपर्ट्स 5 बड़ी वजहें बताते हैं… 1. आने वाले चुनावों पर फोकस: राहुल गांधी चाहते हैं कि कर्नाटक में ऐसा नेता हो जो अगले 10-15 साल तक राजनीति कर सके। 2028 में फिर से सरकार बनाए और 2029 में लोकसभा की ज्यादा सीटें जिता सके। 2028 तक सिद्धारमैया करीब 80 साल के हो जाएंगे। ये बात डीके के फेवर में जाती है। 2. वक्त रहते पार्टी की बगावत मैनेज करनाः कांग्रेस आलाकमान जानता है कि ज्यादातर विधायक सिद्धारमैया के साथ हैं। वे कांग्रेस के एकमात्र ओबीसी सीएम भी हैं। ऐसे में पार्टी ये बदलाव बेहद सावधानी से करना चाहती है, ताकि सिद्धारमैया का सम्मान बना रहे और बगावत की स्थिति न बने। अगर कोई बगावत जैसी स्थिति बने, तो उसे समय रहते मैनेज किया जा सके। 3. सिद्धारमैया का एंटी-इन्कम्बेंसी फैक्टरः सिद्धारमैया के दूसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगे हैं। मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी स्कैम में तो सीधे सिद्धारमैया के परिवार को घेरा जा रहा है। इसके चलते उनके परिवार को 14 प्लॉट छोड़ने पड़े। सिद्धारमैया के खिलाफ एंटी-इन्कमबेंसी फैक्टर एक्टिव हो सकता है। जिसे बीजेपी-JDS भुना सकती है। 4. वोक्कालिगा समुदाय का दबावः डीके कर्नाटक के रसूखदार वोक्कालिगा (15%) समुदाय के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं। उनके समर्थकों ने साफ कर दिया था कि अगर डीके को नजरअंदाज किया, तो यह पूरे समुदाय का अपमान माना जाएगा। इससे ओल्ड मैसूर में कांग्रेस का आधार पूरी तरह खिसक सकता था। ओल्ड मैसूर बेल्ट में 61 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 39 कांग्रेस के पास हैं, यानी 64% सीटें। हालांकि यहां की 12 लोकसभा सीटों में से सिर्फ 2 कांग्रेस के पास है। 5. डीके कांग्रेस के संकटमोचकः डीके की छवि कांग्रेस में ‘संकटमोचक’ और ‘फंड मैनेजर’ की है। 2023 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, डीके के पास 1413.7 करोड़ रुपए की संपत्ति है। उनका माइनिंग, रियल एस्टेट, एजुकेशन और ट्रांसपोर्ट का कारोबार है। वो दूसरे राज्यों में भी कांग्रेस के इलेक्शन मैनेजमेंट में माहिर हैं। नवंबर 2025 में उन्होंने कहा था- मेरी कोशिश है कि मैं राज्य में 100 कांग्रेस ऑफिस बनवाऊं। Vote Vibe के फाउंडर और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी मानते हैं कि लीडरशिप चेंज को लेकर कांग्रेस का इंटेंशन अच्छा है, लेकिन ये दांव उल्टा भी पड़ सकता है। तो क्या इस उठापटक का फायदा बीजेपी उठा सकती है? बीजेपी 66 सीटों के साथ अभी कर्नाटक में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में 36%, जबकि 2024 के लोकसभा में 46% वोट मिले। वहीं उसकी साथी JDS के पास 19 सीटें हैं। उसके पास भी करीब 15% वोट शेयर है। राज्य के लिंगायत (17%) समुदाय में बीजेपी मजबूत है। कद्दावर नेता बीएस येदुरप्पा भी लिंगायत हैं और उनकी इस पर मजबूत पैठ है। एचडी देवगौड़ा की JDS के साथ अलायंस कर बीजेपी ने वोक्कालिगा में भी सेंध लगाई है। दरअसल, देवगौड़ा वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। उन्हें समुदाय में ‘मण्णिना मगा’ यानी धरतीपुत्र कहा जाता है। सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार के सीएम बनाने से बीजेपी दो नैरेटिव बना सकती है… 1. कांग्रेस में अहिंदा वोटर्स की अनदेखी हो रही 2. डीके पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर घेराबंदी क्या इस फेरबदल से कांग्रेस को नुकसान होगा? पॉलिटिकल एनालिस्ट बीएस मूर्ति मानते हैं कि पार्टी को इतिहास से सबक लेना चाहिए। जब कांग्रेस ने लिंगायत नेता वीरेंद्र पाटिल को सीएम पद से हटाया था, तब लिंगायत वोटर्स कांग्रेस से अलग हो गए। उत्तर कर्नाटक में कई चुनावों में कांग्रेस को संघर्ष करना पड़ा। सिद्धारमैया के मामले में भी ऐसा हो सकता है। आदेश रावल के मुताबिक अभी जातीय समीकरणों का हिसाब लगाना जल्दबाजी होगा। डीके के सामने चुनौती होगी कि वे वोक्कालिगा वोटर्स को एकजुट कर कांग्रेस से जुड़े और अहिंदा वोटर्स को बरकरार रखें। अमिताभ तिवारी बताते हैं कि कर्नाटक में अभी तक माना जाता था कि बीजेपी लिंगायत, JDS वोक्कालिगा और कांग्रेस अहिंदा सीएम बना सकती है। लेकिन डीके के सीएम बनने से ये नैरेटिव बदल जाएगा। वोक्कालिगा वोटर्स को लगेगा कि कांग्रेस और JDS दोनों ही उनकी कम्युनिटी से सीएम बना सकते हैं। वहीं लिंगायत अभी भी बीजेपी की ओर देख रही है। ऐसे में अकेले पड़ चुके अहिंदा को बीजेपी साध सकती है। इसके लिए बीजेपी डॉमिनेंट क्लास पॉलिटिक्स करने का टैग हटाएगी, जैसा कि उसने बाकी राज्यों में किया। इसी जातीय समीकरण को साधने के लिए डीके शिवकुमार के साथ 2-3 डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। इसको लेकर दलित समुदाय के जी परमेश्वर और लिंगायत कम्युनिटी के एमबी पाटिल का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने राज्यसभा जाने और नेशनल पॉलिटिक्स में एक्टिव होने का ऑफर ठुकरा दिया। कहा कि 50 साल का मेरा पॉलिटिकल करियर है, जो एक खुली किताब है। सिद्धारमैया ने कहा है कि वे कर्नाटक राजनीति में सक्रिय रहेंगे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि सिद्धारमैया भीतरखाने कोई दांव न चल दे, जिससे कांग्रेस के लिए मुश्किल हो। फिलहाल सिद्धारमैया ने भी कोई ऐसा बयान या संकेत नहीं दिया है, जो कांग्रेस के लिए दिक्कतें पैदा करे। हालांकि उनका बगावत का इतिहास रहा है। उन्होंने JDS का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा। अब भी उनके पास बड़ा वोटबैंक है और दर्जनों विधायक उनके लॉयलिस्ट हैं। -------- कर्नाटक की राजनीति से जुड़ी खबर भी पढ़िए… कर्नाटक के CM सिद्दारमैया का इस्तीफा: बोले- आलाकमान ने जो कहा, मैंने किया; मंत्री बोले- डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, ‘मैंने पहले ही कहा था कि हाईकमान जब कहेगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा। कल हाईकमान ने कहा और आज मैंने इस्तीफा दे दिया।’ पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 28 May 2026 5:24 pm

ऑस्ट्रेलियाई पीएम बोले- भारत को समझना हो तो ट्रेन से यात्रा करो, भारत के विकास की तारीफ की

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बेहद सकारात्मक और महत्वपूर्ण बयान दिया है। कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित करते हुए अल्बनीज ने भारत की विकास दर की सराहना की और इसे पूरे क्षेत्र के लिए गेम चेंजर बताया।

देशबन्धु 28 May 2026 2:15 pm

कनाडा में एक और गुजराती छात्रा की हत्या, चार साल पहले गई थीं, कर रही थीं पढ़ाई और नौकरी

विधि वहां अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ अपने खर्चों के लिए एक पार्ट-टाइम नौकरी भी करती थीं। इसके साथ ही वह कनाडा में स्थायी निवास हासिल करने की तैयारी में भी जुटी हुई थीं। गुजरात में रह रहे उनके माता-पिता और परिजनों को उम्मीद थी कि विधि जल्द ही वहां सेटल हो जाएगी, लेकिन इस खौफनाक वारदात ने सब कुछ तबाह कर दिया।

देशबन्धु 28 May 2026 2:00 pm

अमेरिका का ईरान पर बड़ा एक्शन: पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी को किया ब्लैकलिस्ट

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए एक नई पाबंदी लगाई है। अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान के ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ को स्पेशली डिजिग्नेटेड नेशनल्स (एसडीएन) सूची में शामिल कर लिया है। यह प्राधिकरण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात की निगरानी के लिए बनाया गया है।

देशबन्धु 28 May 2026 1:41 pm

अमेरिका के वॉशिंगटन की पेपर मिल केम‍िकल टैंक हादसे में दो की मौत, नौ लापता

अमेरिका में टेक्सास राज्य के लॉन्गव्यू शहर स्थित पेपर मिल में केमिकल टैंक हादसे मरने वालों की संख्या बढ़कर दो हो गई है, और नौ लोग अभी लापता हैं।

देशबन्धु 28 May 2026 11:56 am

अमेरिका पर ईरान का जवाबी हमला, कुवैत में अमेरिकी एयरबेस को बनाया निशाना

कुवैत सरकार ने भी पुष्टि की कि गुरुवार को उसे भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। हमले की आहट मिलते ही कुवैत में एयर डिफेंस सिस्टम तुरंत एक्टिव हो गए और पूरे इलाके में सायरन बज उठे।

देशबन्धु 28 May 2026 11:46 am

दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमला: हिजबुल्लाह ठिकानों पर बमबारी, दो की मौत

दक्षिणी लेबनान के डेर आमेस में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हवाई हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी ने यह जानकारी दी।

देशबन्धु 28 May 2026 9:15 am

वांग यी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस महीने के घूर्णनशील अध्यक्ष के रूप में चीन की पहल पर 'संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को कायम रखना और संयुक्त राष्ट्र केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना' विषय पर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

देशबन्धु 28 May 2026 5:50 am

बंगाल में गाय की कुर्बानी पर रोक, हिंदू क्यों नाराज:बोले- दीदी से परेशान होकर सरकार बदली, BJP ने 2500 करोड़ का धंधा बिगाड़ा

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में रहने वाले सुखदेव मंडल खेती-किसानी करते हैं। इसी से परिवार का खर्च चलता है। इस साल बेटी की शादी करनी है, इसलिए साल भर पहले बैंक से लोन लेकर मवेशी खरीदे। उम्मीद थी कि बकरीद पर बिक जाएंगे और शादी-ब्याह का खर्च निकल जाएगा, लेकिन बंगाल सरकार के एक फैसले ने उनकी उम्मीद तोड़ दी। 13 मई यानी बकरीद से 15 दिन पहले बंगाल सरकार ने एक नोटिस जारी किया। इसमें गोहत्या से जुड़े 1950 के कानून और 2018 के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि बिना 'फिटनेस सर्टिफिकेट' किसी भी गाय-भैंस की कुर्बानी नहीं दी जाएगी। इस फैसले के बाद सुखदेव परेशान हैं कि वो मवेशी लेकर कहां जाएं। उनका खर्च कैसे उठाएं और बैंक का लोन कैसे अदा करें। वे कहते हैं, ‘किसी को फांसी देने से पहले भी वक्त मिलता है, हमें वो भी नहीं मिला।‘ 28 मई यानी आज बकरीद है। फैसले से मुस्लिम भी नाखुश हैं। उन्हें कुर्बानी के लिए जानवर नहीं मिल रहे हैं। हिंदू व्यापारी बोले…दीदी से परेशान होकर सरकार बदली, BJP ने धंधा चौपट किया बंगाल में पशु हाट बाजारों से करीब 3.7 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी सीधे जुड़ी है। बंगाल में बकरीद पर करीब तीन हफ्ते के लिए पशुओं का बाजार लगता है। इस दौरान करीब ₹2000 से 2,500 करोड़ का व्यापार होता है। सिर्फ कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रोज 1 से 2 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। इस काम से जुड़े सुखदेव गुस्से में कहते हैं, ‘सरकार के फैसले ने हमारा व्यापार ठप्प कर दिया है। इस उम्मीद में बैंकों से लोन लिया था कि कुर्बानी के बाद पैसा भर देंगे। साल भर गाय-भैंस को खिलाया। जब बेचने की बारी आई, तो नया नियम आ गया। अब सरकार ही बताए कि कर्ज कैसे चुकाएं। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार खर्च कहां से निकालें।‘ ‘दीदी के 15 साल की खराब नीतियों के चलते सरकार बदली। जय श्री राम बोलकर राज्य में नई सरकार लाए, लेकिन अब BJP सरकार की नीतियों ने हमारी परेशानी बढ़ा रखी है। अब लगता है कि सुवेंदु बाबू की सरकार भी बदलनी पड़ेगी।’ पूर्व मेदिनीपुर के सिलीपल्ली मोहल्ले में रहने वाले सुखदेव अकेले नहीं हैं। श्यामल मंडल भी रुंधे गले से यही दिक्कतें गिनाते हैं, ‘बैंक वाले घर पर पैसा लेने आ रहे हैं। गहने गिरवी रखकर पशुओं को पाला। अब इस फैसले से सड़क पर आ गए हैं। अगर सरकार ने साथ नहीं दिया, तो जहर खाने के सिवा हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं बचेगा।‘ पास में खड़े कृष्णबदर गुस्से में कहते हैं, ‘सरकार मुसलमानों को सबक सिखाने के चक्कर में हिंदुओं का बुरा कर रही है। कुर्बानी मुसलमान देते हैं, लेकिन इसका व्यापार तो हिंदू ही कर रहे हैं। गांव में सभी दलित हिंदुओं ने कुर्बानी के वक्त बेचने के लिए 8 से 10 गाय और बकरियां पाली हैं। साल भर इन्हें दाना-पानी दिया, ताकि मुनाफा कमा सकें।‘ ‘पशु खरीदने और पालने के लिए बैंक से 10 लाख रुपए लोन लिया था। अब सरकार बताए कि ये कैसे भरें। पशुओं को दाना-पानी कैसे खिलाएं।‘ ‘नए नियम-कायदों ने फंसाया, BJP वाले अलग धमका रहे’ इसके बाद हम हावड़ा पहुंचे। यहां संकराली में ज्यादातर परिवार दूध का व्यापार करते हैं। जब गाय या भैंस दूध देना बंद कर देती है, तो उसे बेच देते हैं। यहां मिली सोमा सुधका कहती हैं, ‘पिछले 16 साल से ये काम कर रही हूं। हर साल कुर्बानी के समय पशु बेचते हैं और उसी समय अगले साल के लिए नए खरीद लेते हैं। फिर साल भर उन्हें पालते हैं। अब जब इस साल बिकेंगे ही नहीं, तो इतने पशुओं को हम कहां से खाना खिलाएंगे।’ ’कुर्बानी से पहले फिटनेस टेस्ट करवाने की बात कही गई है। हमें नहीं पता कि इसका टेस्ट कहां होगा। हम सब इन नियम-कायदों में फंस गए हैं। जिनसे एडवांस पैसे लिए हैं, वो वापस मांग रहे हैं।’ यहीं मिले बरुण घोष भी दूध व्यापारी हैं। वो इस बात से परेशान हैं कि अगर अब बुजुर्ग हो चुकी गायें नहीं बिकीं, तो उधार कहां से चुकाएंगे और धंधा कैसे चलाएंगे। वे कहते हैं, ‘हम शहर में रहते हैं, यहां कहीं गाय-भैंसों को चरने के लिए भी नहीं छोड़ सकते हैं। खटाल में इतनी गाय-भैंसों के रहने के लिए जगह नहीं है। सरकार को ये फैसला थोड़ा पहले लेना चाहिए था, ताकि हम जैसे छोटे व्यापारी अपने लिए दूसरा रास्ता तलाश सकें।‘ मुस्लिम पक्ष की बात…‘बकरों के दाम दोगुने हुए, कुर्बानी भी नहीं दे पाएंगे’ गाय की कुर्बानी पर लगी रोक से हिंदू ही नहीं मुस्लिम भी परेशान हैं। मुर्शिदाबाद के रहने वाले समीम रहमान का कहना है कि इस बार बंगाल के कई घरों में कुर्बानी नहीं हो रही है। पहले कुछ परिवार मिलकर गाय-भैंस की कुर्बानी करते थे, लेकिन नए नियम के चलते इन्हें नहीं ले पा रहे हैं। वहीं गाय की बिक्री बंद होने के बाद बकरे के दाम दोगुने हो गए हैं, जिसका खर्च उठा पाना मुमकिन नहीं है। बेलडांगा के रहने वाले रहमान शेख कहते हैं, ‘हमारी मांग है कि सरकार बाकी राज्यों में भी बूचड़खाने बंद करे, लेकिन इससे नुकसान हिंदू भाइयों का ही है।‘ यहीं मिले शाहरुबद्दीन शेख खुद कुर्बानी से पहले बेलडांगा के हाट में गाय बेचते रहे हैं। वे कहते हैं, ‘बकरीद से पहले हाट में लगातार दो-तीन हफ्ते व्यापार होता है। इस बार भी हाट में गाय बेचने लाई गई थीं, लेकिन नया नियम आने के बाद सब कुछ बदल गया। मुझे भी काफी नुकसान हुआ। हिंदू भाईयों को ज्यादा नुकसान हुआ है।‘ ‘मैं खुद गाय की कुर्बानी देता था, लेकिन अबकी बकरे की दूंगा। गाय की बिक्री न होने से इस बार बकरे के दाम भी बढ़ गए हैं।‘ बकरीद पर हर साल कितने पशुओं की कुर्बानी दी जाती है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। बंगाल के पशुपालन विभाग से जारी पिछले एक साल का आंकड़ा देखें तो 2025 में राज्य में मांस के लिए करीब 4.76 करोड़ बकरे और करीब 1.33 लाख गाय, बैल, सांड काट दिए गए। मौलाना बोले- अगर गाय की कुर्बानी हुई, तो आंदोलन करेंगे कुर्बानी के फैसले पर आसनसोल के एक मौलाना नाम न लिखने की शर्त कहते हैं, ‘जरूरी नहीं है कि सभी कुर्बानी दें। जो सक्षम हैं, वो बकरे या भेड़ की कुर्बानी दे सकते हैं। इस बार गाय की कुर्बानी नहीं होगी।‘ वहीं, ऑल इंडिया इमाम मुअज्जिन एंड सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन (AIIMSWO) के स्टेट जनरल सेक्रेटरी मौलान अब्दुर रज्जाक कहते हैं, ‘हमने राज्य के सभी 26 जिलों में मस्जिद से ऐलान करवाया है कि इस बार बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं होगी। कुरान में भी कहीं गाय की कुर्बानी का जिक्र नहीं है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘कई मुस्लिम संगठन अलग-अलग जगहों पर गाय की कुर्बानी का बहिष्कार कर रहे हैं। इसके बाद भी अगर कहीं ऐसा हुआ, तो हम वहां आंदोलन करेंगे।’ क्या पहले कभी कुर्बानी को लेकर ऐसे नियम-कायदे बनाए गए। इसके जवाब में वे कहते हैं, ’ऐसा पहली बार हो रहा है, लेकिन इसका कोई सियासी मतलब नहीं है। राजनीतिक पार्टियां आती हैं और चली जाती हैं, लेकिन हमारी एक ही मांग है कि सरकार जो भी कानून बनाए, उसे पूरी तरह लागू करे। ऐसा न हो कि हमें कुर्बानी के लिए मना कर दिया जाए और बाद में गायें कहीं और सप्लाई हो जाएं।’ ………………. ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में दीदी को हराने वाले BJP के 5 किरदार बंगाल में BJP की मौजूदा जीत की कहानी के कई किरदार हैं। शुरुआत अमित शाह और उनका दाहिना हाथ रहे सुनील बंसल से। साथ ही तीसरे अहम किरदार शिवप्रकाश सिंह से, जो BJP के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री हैं। इसके अलावा दो किरदार और हैं। पढ़िए इस रिपोर्ट में पांचों किरदार की कहानी…

दैनिक भास्कर 28 May 2026 5:20 am

पाकिस्तान ने ट्रम्प की मांग ठुकरा दी, अब आगे क्या:अगर इजरायल से दोस्ती कर ली, तो क्या कयामत आ जाएगी

अमेरिकी थिंकटैंक अटलांटिक काउंसिल के एक्सपर्ट माइकल कुगेलमैन कहते हैं- ट्रम्प के जितना करीब जाओगे, उतना ही जोखिम बढ़ेगा। वह कुछ ऐसा मांग बैठेंगे, जो देना संभव न हो। पाकिस्तान इस वक्त उसी ‘कुआं और खाईं’ की सिचुएशन में आ गिरा है। 25 मई की रात ट्रम्प ने पाकिस्तान समेत 6 मुस्लिम देशों को कहा कि वे 'अब्राहम अकॉर्ड्स' पर दस्तखत करें, यानी इजराइल को देश मानें और उससे दोस्ती करें। सबसे पहले पाकिस्तान ने ही मना कर दिया। आखिर क्यों और अब होगा क्या, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… 1947: पाकिस्तान बनते ही दुश्मनी की शुरूआत बात नवंबर 1947 की है। भारत को आजाद हुए अभी कुछ ही महीने हुए थे और पाकिस्तान भी नया-नया बना था। संयुक्त राष्ट्र में एक अहम वोटिंग हुई- फिलिस्तीन को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव। एक हिस्सा यहूदियों को, एक अरबों को। पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने तब चेतावनी दी कि यह बंटवारा हुआ तो मुस्लिम उम्मा (मुस्लिम देश) खिलाफ उठ खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का अरबों को पूरा समर्थन रहेगा और उस प्रस्ताव के खिलाफ वोट भी किया। 14 मई 1948 को इजराइल बना। पाकिस्तान ने उसे मान्यता देने से इनकार कर दिया। जब पाकिस्तानी पायलट ने इजराइली जेट गिराए यह दुश्मनी सिर्फ कागजी बयानों तक नहीं रही। जून 1967 में अरब-इजराइल के बीच 'छह दिन की जंग' छिड़ी। पाकिस्तान ने अपने पायलट मिस्र, जॉर्डन और सीरिया की वायुसेनाओं में भेजे। 5 जून 1967 को इजराइली जेट जॉर्डन के माफ्रक एयरबेस पर हमला करने आए। जॉर्डन ने पाकिस्तानी पायलट सैफुल आजम को तैनात किया। आजम ने दो इजराइली विमान मार गिराए। अगले दिन उन्हें इराक भेजा गया, जहां उन्होंने दो और इजराइली विमान ध्वस्त किए। यह किस्सा आज भी पाकिस्तान में गर्व के साथ सुनाया जाता है। इस दुश्मनी की गहराई का अंदाजा एक और बात से लगाएं। पाकिस्तान के पासपोर्ट पर आज भी बड़े अक्षरों में छपा है- 'Not Valid for Israel', यानी यह पासपोर्ट इजराइल के लिए मान्य नहीं है। दुनिया में लगभग हर देश का पासपोर्ट हर देश के लिए वैध होता है। लेकिन पाकिस्तान ने अपने नागरिकों के दस्तावेज पर ही अपनी विदेश नीति लिख दी है। जब मुशर्रफ ने दरवाजा खटखटाया, फिर दबे पांव लौट आए इस 78 साल के इतिहास में एक दिलचस्प मोड़ 2005 में आया। पाकिस्तानी जनरल परवेज मुशर्रफ ने पर्दे के पीछे इजराइल से संपर्क शुरू किया। तुर्किए की मदद से 1 सितंबर 2005 को इस्तांबुल में पाकिस्तानी विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी और इजराइली विदेश मंत्री सिल्वान शालोम की मुलाकात हुई। दोनों देशों के बीच यह पहली सार्वजनिक और आधिकारिक बातचीत थी। इसके कुछ दिन बाद मुशर्रफ UN में इजराइली प्रधानमंत्री एरियल शेरॉन से मिले। किसी पाकिस्तानी शासक का इजराइली नेता से पहला सार्वजनिक मेलजोल था। मुशर्रफ इजराइल के बारे में इंटरव्यू देने वाले पहले पाकिस्तानी मुस्लिम नेता बने और अमेरिका में वर्ल्ड जूइश कांग्रेस को संबोधित करने वाले पहले मुस्लिम नेता भी। लेकिन इसके बाद पाकिस्तान में भूचाल आ गया। मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल, जमात-ए-इस्लामी और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम जैसे कट्टपंथी धार्मिक संगठनों ने मुशर्रफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन होने लगे। मुशर्रफ पर ‘इस्लाम और फिलिस्तीन से गद्दारी’ करने के आरोप लगे। अपनी कुर्सी बचाने के लिए मुशर्रफ को कदम पीछे खींचने पड़े। 2003 में जब मुशर्रफ ने कैंप डेविड दौरे पर इजराइल से बेहतर रिश्तों की बात की थी, तब भी इसे फौरन दबा दिया गया था, क्योंकि पाकिस्तान में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। 2005 की कोशिश भी आगे नहीं बढ़ी। यही पाकिस्तान की असली मुश्किल है। ऊपर से नेता चाहें भी, तो नीचे जनता और धार्मिक संगठन इसे नहीं होने देंगे। आज ट्रम्प ने इजराइल से दोस्ती की मांग क्यों रखी 23 मई को ट्रम्प ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन के नेताओं से वर्चुअल बैठक की। दो दिन बाद ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान से बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन इन सभी देशों को 'अब्राहम अकॉर्ड्स' पर साइन करना होगा। अब्राहम अकॉर्ड्स ट्रम्प ने ही अपने पहले कार्यकाल 2020 में बनाया था। मकसद था कि मुस्लिम देश इजराइल को मान्यता दें और उससे रिश्ते बनाएं। अब तक UAE, बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकिस्तान इस पर दस्तखत कर चुके हैं। ट्रम्प के पोस्ट में एक लाइन और थी- 'कुछ देशों के पास इसमें शामिल न होने की एक-दो वजहें हो सकती हैं।' जानकार इसे पाकिस्तान के लिए 'बाहर निकलने का दरवाजा' मान रहे हैं। शायद ट्रम्प पाकिस्तान को इससे बाहर रखने के लिए तैयार हों। पाकिस्तान ने साफ मना कर दिया पिछले साल भी चर्चा थी कि पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड साइन करने वाला है। तब पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि हम तब तक इजरायल को मान्यता नहीं देंगे, जब तक आजाद फिलिस्तीन नहीं बनता। ट्रम्प की मांग के बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी न्यूज चैनल 'समा टीवी' से कहा, 'हम ऐसे किसी समझौते में शामिल नहीं होंगे, जो हमारी सोच के खिलाफ हो।' अमेरिकी थिंकटैंक अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन मानते हैं कि इजराइल को लेकर पाकिस्तान का रूख अटल है। फिलहाल अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होना पाकिस्तान के लिए मुमकिन नहीं है। पाकिस्तान की पूर्व एम्बेसडर डॉ. मलीहा लोधी के मुताबिक, ट्रम्प की मांग को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। ईरान के साथ होने वाले संभावित समझौते की रिपब्लिकन पार्टी और इजरायली लॉबी आलोचना कर रही है। ट्रम्प इसी का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान, सऊदी अरब या कोई भी मुस्लिम देश इजरायल को मान्यता नहीं देगा और अब्राहम अकॉर्ड में शामिल नहीं होगा। यह इनकार इतनी आसानी से क्यों आया? क्योंकि पाकिस्तान के लिए इजराइल को मानने की कीमत सिर्फ कूटनीतिक नहीं, घरेलू राजनीतिक है। पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी पहले से ही सरकार के खिलाफ है। इस पर तहरीक-ए-तालिबान जैसे कट्टरपंथी संगठन भी हैं। इजराइल से दोस्ती की खबर आते ही इन सबको सड़कों पर उतरने का बड़ा मुद्दा मिल जाएगा। इसकी धार्मिक वजह भी है। पाकिस्तान खुद को इस्लामिक दुनिया का मसीहा मानता है और इकलौता इस्लामिक देश है, जिसके पास परमाणु बम है। ऐसे में इजराइल को देश मानना पाकिस्तान की सोच के खिलाफ है। ऐसा करने से इस्लामिक दुनिया में उसकी साख मिट्टी में मिल जाएगी। लेकिन ट्रम्प को 'न' कहना भी महंगा पड़ सकता है पाकिस्तान आर्थिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में है। 2024 में IMF से मिला 7 अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान का 24वां बेलआउट था। किसी भी देश के लिए सबसे ज्यादा। पाकिस्तान का कुल कर्ज उसकी GDP के 70% से ज्यादा है और सरकार की आधी से ज्यादा कमाई सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में चली जाती है। IMF में अमेरिका के पास सबसे ज्यादा 16.5% वोटिंग अधिकार हैं। अगर वाशिंगटन ने पाकिस्तान के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया, तो इस्लामाबाद के लिए अगला लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा पाकिस्तान की वायुसेना का सबसे ताकतवर विमान अमेरिकी F-16 है। इसकी मरम्मत, सॉफ्टवेयर अपडेट और तकनीकी सहायता के लिए पाकिस्तान पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है। पिछले साल ट्रम्प प्रशासन ने इसके रखरखाव के लिए 397 मिलियन डॉलर मंजूर किए थे। पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच बिचौलिया बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी साख बढ़ाने की कोशिश की। ट्रम्प ने इसके बदले में शहबाज शरीफ को 'दोस्त' और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को 'पसंदीदा फील्ड मार्शल' कहा। फिलहाल पाकिस्तान ने ट्रम्प की मांग पर 'नहीं' कह दिया है। अब देखना यह है कि ट्रम्प इस 'नहीं' को सुनते हैं, या अनसुना कर देते हैं। ----------- ये भी खबर बढ़िए… भारत पर अचानक इतना प्यार क्यों लुटाने लगे ट्रम्प; कोई बड़ी जरूरत या सिर्फ डैमेज कंट्रोल, रूबियो की यात्रा के मायने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो हाल ही में दिल्ली आएं। इस बीच पीएम मोदी को व्हाइट हाउस का निमंत्रण मिला है। ट्रम्प का भी बयान आया- ‘मुझे पीएम मोदी से प्यार है, पीएम मोदी महान हैं।’ पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के रिश्तों में खटास थी। फिर यह गर्मजोशी क्यों? ट्रम्प का यह प्यार असली है या सिर्फ डैमेज कंट्रोल? पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 28 May 2026 5:19 am

ब्लैकबोर्ड-लड़के को पेड़ से जंजीर में बांधा, ताला जड़ा:कहा- खाट में बांधने पर खाट सिर पर लेकर घूमता है, मां को जंजीर में बांधा

खेत के बीचोबीच एक पेड़ से जंजीरों में बंधा युवक जोर-जोर से चीख रहा है- भाग जाऊंगा… भाग जाऊंगा… नाम है- पीरे खान। वह बीच-बीच में पेशाब जाने के लिए कह रहा है। तभी घर से एक महिला बाहर निकलती हैं। नाम है चांदनी। यह पीरे की भाभी हैं। वह पीरे के पास पहुंचती हैं। पहले जंजीर में लगा ताला खोलती हैं, फिर पीरे को खोलती हैं। ऐसा लग रहा है, जैसे किसी जानवर को खोला जा रहा हो। चांदनी, पीरे को पकड़कर खेत में ले जाती हैं। कुछ देर बाद वापस लौटती हैं। फिर उन्हें उसी पेड़ से जंजीर में बांध देती हैं… और ताला लगा देती हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में मैं नीरज झा इस बार कहानी लाया हूं राजस्थान के बाड़मेर से, जहां अस्पताल न होने से मानसिक रूप से बीमार लोगों को जंजीरों में बांधकर रखा गया है। बाड़मेर की शिव तहसील से 40 किलोमीटर दूर कानासर गांव। तापमान करीब 48 डिग्री। यहां एक घर के चारों तरफ जहां तक नजर जा रही है, सिर्फ रेत नजर आ रही है। दुपट्टे से चेहरा छुपाए चांदनी बताती हैं, ‘एक महीने से सोई नहीं हूं। पीरे की मानसिक हालत बहुत खराब है। रोज शाम को जोर-जोर से चीखते हैं। कंकड़-पत्थर जो हाथ लगे, उसी से मारने दौड़ते हैं। जंजीर खोल दूं, तो रात में भाग जाते हैं। अब तो जिंदगी पहाड़ लगने लगी है,’ यह कहकर चांदनी घर में पानी लाने चली जाती हैं। 22 साल के पीरे खान चारपाई पर बेसुध लेटे हैं। करीब ही उनकी 65 साल की मां कम्मी खातून मटमैले कपड़े पहने बैठी हैं। मेरी नजर पेड़ में बंधी जंजीर और उसमें लगे ताले पर पड़ी। पूछने पर कम्मी खातून मारवाड़ी लहजे में कहती हैं- 'क्या करूं? बेटे को भेड़-बकरी की तरह इसी पेड़ में जंजीर से बांधकर रखती हूं। जब भी इसकी जंजीर खुली छोड़ी, कई-कई दिन गायब रहा। बड़ी मुश्किल से मिलता है। अब जंजीर में ताला लगा देती हूं, ताकि यह खोलकर भाग न सके। मैं क्या ही बताऊं। बाड़मेर और जोधपुर के अस्पतालों से लेकर दरगाहों तक के चक्कर लगा चुकी हूं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। पिछले दो सालों से इसे ऐसे ही पेड़ से बांधकर रखा है। खाना-पीना, सोना-जागना, लैट्रिन-पेशाब, सब इसी पेड़ के आस-पास करता है।’ मेरी मोटी जंजीर बंधे पीरे खान के पैर पर जाती है। जंजीर की रगड़ से उनके पैरों की चमड़ी काली पड़ चुकी है। कई जगह छिली हुई है। कम्मी बताती हैं, ‘यह बड़ा बेटा है। 10 साल पहले बीमारी से पति की मौत हो गई। उसके बाद यह भेड़ चराकर कुछ कमाई करता था। अप्रैल 2022 की बात है। अचानक यह बड़बड़ाने लगा। कुछ दिन बाद एक खेत से दूसरे खेत तक दौड़ने लगा। घर के पास ही एक श्मशान घाट है। वहां भी जाता था। गांववाले कहने लगे- यह जरूर श्मशान गया होगा, तभी इसके ऊपर कोई भूत-प्रेत आ गया है। इसे किसी तांत्रिक के पास ले जाओ। एक मौलवी के पास गई। उन्होंने कई ताबीज दिए। बोले- ‘इसके ऊपर भूत का साया है, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।’ हम भी उसी उम्मीद में इसे घर ले आए, लेकिन कुछ ही महीनों में हालत पहले से भी ज्यादा बिगड़ गई। अब यह अचानक जोर-जोर से चीखने लगा। सामने जो भी आता- ईंट, पत्थर या कोई सामान, उठाकर फेंककर मारता। आखिर मजबूर होकर हमने इसे रस्सियों से खाट में बांधना शुरू कर दिया, लेकिन रस्सियां भी ज्यादा देर इसे रोक नहीं पाती थीं। कई बार तो पूरी खाट सिर पर उठाकर गांव की गलियों में निकल पड़ता। एक बार इसे एक दरगाह पर ले गई। मौलाना ने हल्की झाड़-फूंक के बाद कहा- सुबह ठीक से झाड़-फूंक करूंगा। रातभर वहीं रही। सुबह उठी, तो यह गायब था। कई दिनों की तलाश के बाद यह बाड़मेर में भटकता मिला। तब से मेरे रिश्तेदारों ने इसे लाकर पेड़ से बांध दिया। जंजीर खोलकर भागे न इसलिए उसमें ताला भी लगा दिया। इस बातचीत के दौरान पीरे हमें देख रहे हैं। उनके गले में दो-तीन ताबीज हैं। तभी उनके चचेरा भाई शफी घर आ जाता है। शफी मेरे पास बैठकर बताते हैं- दो बार किसी तरह पैसा जुटाकर बाड़मेर और जोधपुर के अस्पताल ले गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। वहां से भागकर चला आया। क्या करें? दिहाड़ी न करें, तो घर का चूल्हा नहीं जलेगा। दिनभर में ढाई-तीन सौ रुपए ही कमा पाते हैं। कहां से इलाज करवाएं? इससे भी बड़ी दिक्कत बाड़मेर यहां से 90 किलोमीटर और जोधपुर 200 किलोमीटर दूर है।’ शफी बताते हैं- ‘पहले यह बिल्कुल भला-चंगा था, हंसता-बोलता था। लेकिन अब हालत ऐसी हो गई है कि हर त्योहार इसी पेड़ के नीचे पड़ा रहता है। पिछले दो सालों से इसकी पूरी जिंदगी इन्हीं जंजीरों में कैद होकर रह गई है। इसका छोटा भाई नसीर मेरे साथ काम करता है। उसी की कमाई से घर चल रहा है।' वह बताते हैं- बाड़मेर में कई ऐसे गांव हैं, जहां मानसिक रूप से बीमार लोगों को जंजीर से बांधकर रखा गया है। कानासर से करीब 150 किलोमीटर दूर खारी गांव है। वहां भी ऐसा ही मामला है। अब मैं खारी गांव के लिए निकल पड़ता हूं। खारी पहुंचने के बाद पैदल करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक झोपड़ी के पास पहुंचा, जहां 55 साल के दूद्धा राम मिले। उनकी 45 साल की पत्नी मोड़ी देवी झोपड़ी के बाहर जंजीरों में बंधी पड़ी हैं। दूद्धा राम ने मेरे पैर पकड़ लिए, उनकी आंखें भर आई। कांपती आवाज में बोले- ‘तीन साल से पत्नी को जंजीरों में बांधकर रखा है। इसे देखता हूं, तो कलेजा फट जाता है, लेकिन क्या करूं, कोई रास्ता नहीं बचा।’ 5 साल पहले की बात है। बेटी की शादी की थी। तब यह एकदम ठीक थी। उसके बाद पता नहीं क्या हुआ, अचानक लोगों को मारने-पीटने लगी। एक दिन मेरे हाथ पर जोर से डंडा मार दिया। हाथ में घड़ी थी, इसलिए बच गया, नहीं तो हाथ टूट जाता। इसी तरह घर के पास रास्ते से जो भी आता-जाता, उसे पत्थर फेंककर मारती। गांववालों ने डर के मारे इस रास्ते से आना-जाना छोड़ दिया। एक दिन मजबूरी में जंजीर खरीदकर लाया और इसे बांध दिया। तब से यह यहीं दिन-रात पड़ी रहती है।' वह बताते हैं- हमारा एक बेटा और एक बेटी है। मैं बचपन से विकलांग हूं, पैर में लकवा है,’ इतना कहते-कहते दूद्धा राम की आंखें फिर से डबडबा जाती हैं। वह अपने 18 साल के बेटे जोगा राम को घर से डॉक्टर की पर्ची लाने को कहते हैं। आगे बताते हैं- महाजन से 10 हजार रुपए कर्ज लेकर किसी तरह एक बार इसे जोधपुर ले गया था, लेकिन दवा खाते ही और बीमार पड़ गई। इस बीच घर में काफी खोजबीन के बाद जोगा राम सीटी स्कैन की रिपोर्ट लेकर आते हैं। कहते हैं, ‘हम लोग बहुत पढ़े-लिखे नहीं हैं। रिपोर्ट ज्यादा समझ नहीं पाते। आप ही जरा देखिए।' वह रिपोर्ट मुझे पकड़ा देते हैं। जोगा कहते हैं- पापा शुरू से विकलांग हैं। पहले वह दिहाड़ी पर काम करने जाते थे। जब मैं बड़ा हुआ, तो इन्हें काम करने से रोक दिया। अब मेरी ही कमाई से घर चलता है। मम्मी की हालत ऐसी है, क्या करूं? मजबूरी में इन्हें जंजीर से बांधकर रखना पड़ रहा है। किसे अच्छा लगता है कि अपनी मां को जंजीर से बांधकर रखे। कई ओझाओं और तांत्रिकों के पास गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यहीं के रहने वाले हरीश अब मुझे बताते हैं- ‘यहां से करीब 10-15 किलोमीटर दूर केकड़ गांव है। वहां एक महिला को पिछले 15 सालों से ऐसे ही बांधकर रखा गया है।’ हरीश की बात सुनते ही उनके साथ उस गांव की ओर निकल पड़ा। गांव पहुंचते ही दूर एक झोपड़ी दिखी। अंदर 65 साल की तुग्गी देवी बैठी हैं। सामने रखी सब्जी-रोटी खा रही हैं। जैसे ही उनकी नजर मेरे कैमरे पर पड़ती है, वे अचानक उठ खड़ी हुईं और पास आकर मुझे जोर से धक्का दे दिया। करीब खड़े तुग्गी देवी के जेठ के बेटे दुर्गा राम दौड़कर आए और उन्हें संभाला। वह बताते हैं- 'कैमरा देखकर यह ऐसा ही करने लगती हैं। डर जाती हैं। इनका कोई बच्चा नहीं है। 15-20 साल से ऐसी ही हालत में हैं। इनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। गांव-गांव घूमने लगीं। लोगों को डंडे-पत्थर से मारती थीं। कई बार इनका एक्सीडेंट हो चुका। तब जाकर हम लोगों ने इन्हें जंजीर बांधा। अब यहीं पड़ी रहती हैं। इन्हें इस हालत में देखकर तकलीफ होती है। हमारे छोटे बच्चे इन्हें देखकर क्या सोचते होंगे, लेकिन क्या करूं?’ तभी तुग्गी देवी के देवर मंगदा राम आते हैं। पास बैठकर बताते हैं, ‘जब ये ठीक थीं, तो घर का सारा काम करती थीं। पहले अचानक चुप रहने लगीं, फिर लोगों को मारने-पीटने लगीं। हमें लगा कि किसी ने इन पर भूत-प्रेत कर दिया है। ओझाओं से झाड़-फूंक करवाई, ताबीज भी पहनाए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अब कभी-कभी तो मन में यही आता है कि भगवान इन्हें जल्दी अपने पास बुला ले, ताकि इनकी और हमारी यह तकलीफ खत्म हो सके। इस तरह जंजीर से बांधकर रखना दर्द देता है, लेकिन कर ही क्या सकता हूं।’ इस तरह कई गांव घूमने के बाद अब शाम हो चुकी है। रास्ते में मिट्ठरा गांव आता है। मेरे साथी कहते हैं, ‘यहां भी इसी तरह का एक मरीज है। वह कई महीनों से घर में बंद है। चलेंगे क्या?’ अब यहां से निकल और करीब आधे घंटे में उस घर पर पहुंचा। यहां एक कमरे की खिड़की से एक महिला किसी को लोटे में पानी भरकर देती हैं, लेकिन अचानक भीतर से लोटा बाहर आकर गिरता है। महिला ने जिसे पानी दिया था, उसने लोटा बाहर फेंक दिया था। हम नजदीक पहुंचे। देखा कमरे में एक 20 साल की लड़की परमेश्वरी चटाई पर लेटी हुई है। 40 साल की पारू देवी पल्लू संभालते हुए बोलती हैं, ‘यह मेरी बेटी है। ढाई महीने से ऐसी ही पड़ी है। इसे इतना गुस्सा आता है कि किसी का भी गला पकड़ लेती है। इसीलिए कमरे में बंद करके रखती हूं। अभी पानी दिया, तो लोटा बाहर फेंक दिया। पता नहीं इसे क्या हो गया है। झाड़-फूंक का भी कोई असर नहीं है। एक दिन यह स्कूल से आई। अचानक गीत गाने लगी। हमें लगा इस पर भूत आ गया है। एक ओझा के पास लेकर गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अभी कमरा खोल दूं, तो बाहर निकलकर जो भी हाथ में आएगा, उसी से मारने दौड़ पड़ेगी। इसलिए खिड़की से ही खाना-पानी देती हूं। इस बीच मैंने कई बार परमेश्वरी को आवाज दी, लेकिन वह नहीं बोली। बेसुध लेटी रही। मेरे साथी बताते हैं, ‘यहां मानसिक रोगियों को सही समय पर इलाज नहीं मिलता, इसलिए इनके परिवार इन्हें जंजीर से बांधकर रखने को मजबूर हैं।’ अब मैं बाड़मेर पहुंचता हूं। जिले के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर विष्णु राम विश्नोई के पास। विष्णु राम बताते हैं, ‘बाड़मेर में ही नहीं, पूरे देश में मानसिक रोगी हैं। बाड़मेर में 3 साल पहले मानसिक इलाज की सुविधा नहीं थी, इसलिए लोगों को जोधपुर जाना पड़ता था। अब यहां इलाज है, लेकिन लोग जागरूक नहीं हैं। हम लोग गांव-गांव आशा वर्कर्स से ऐसे मरीजों के बारे में पता लगवाते हैं, लेकिन बड़ी दिक्कत यह है कि यहां घर दूर-दूर हैं। कुछ घरों के बीच एक-एक किलोमीटर की दूरी है। इसलिए हेल्थ वर्कर्स हर घर तक नहीं पहुंच पाते। हमें जहां भी ऐसे मानसिक रोगियों की जानकारी मिलती है, उनका रेस्क्यू कराते हैं। किसी इंसान को जंजीर से बांधकर रखना अमानवीय है। हालांकि, सरकार की अब तक ऐसी कोई विशेष नीति नहीं बना पाई है, जिसके जरिए इन लोगों की पहचान कर ठीक से इलाज किया जा सके। लोगों का झाड़-फूंक में ज्यादा यकीन है। इससे मरीज की हालत बिगड़ती जाती है। परिवार मरीजों का पूरा इलाज नहीं कराते, जिससे बीमारी बढ़ जाती है।’ बातचीत खत्म होने के बाद मैं वापस लौटता हूं। लेकिन रास्ते भर एक सवाल पीछा करता है- आखिर किसी इंसान को जानवर की तरह जंजीर से कैसे बांधा जा सकता है? मरीजों की इस हालत पर मेडिकल अफसर विष्णु राम विश्नोई के चेहरे पर मुझे जरा भी चिंता नहीं दिखी। उनका दावा है कि आशा वर्कर्स गांव-गांव जाकर मानसिक रोगियों की पहचान करती हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भी लाती हैं। लेकिन जिन परिवारों से मेरी बात हुई, उनमें से किसी ने भी नहीं बताया कि उनके यहां कभी कोई आशा वर्कर्स आई थीं। --------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-'तुम ईसाई बन गए, बाप की लाश नाले में बहाओ':22 दिन तक सड़ती रही लाश, सरपंच बोला- अंतिम संस्कार किया तो बीवी-बच्चों के बारे में सोच लेना ‘7 जनवरी 2025। सुबह के 10 बजे थे। पापा की किडनी फेल होने की वजह से मौत हो गई थी। देखते ही मां रो-रोकर बेहाल हो गई। शव बरामदे में रखते ही चीख-पुकार मच गई। सभी रिश्तेदार घर पहुंचने लगे। सभी कहने लगे- अंतिम संस्कार की तैयारी करो। जब तक लाश दरवाजे पर रहेगी, सब रोते रहेंगे। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 28 May 2026 5:19 am

नेपाल: आरएसपी प्रमुख लामिछाने जून में कर सकते हैं भारत दौरा

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर अनिश्चितता के बीच सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने जून के पहले सप्ताह में नई दिल्ली का दौरा कर सकते हैं।

देशबन्धु 28 May 2026 5:00 am

48वीं विश्व कौशल प्रतियोगिता के लिए लगभग 5,900 लोगों ने पूर्व-पंजीकरण कराया

चीन की राजधानी पेइचिंग में हाल ही में 48वीं विश्व कौशल प्रतियोगिता के लिए आयोजित एक स्वागत समारोह में प्रतियोगिता के लिए लगभग 5,900 लोगों ने पूर्व-पंजीकरण कराया है

देशबन्धु 28 May 2026 4:40 am

चीन ने नया दूरसंचार तकनीक परीक्षा उपग्रह लॉन्च किया

चीन ने 26 मई की देर रात 12 बजकर 16 मिनट पर दक्षिण चीन के हाईनान प्रांत में स्थित वनछांग प्रक्षेपण केंद्र में लॉन्ग मार्च-7 वाहक रॉकेट से सफलता पूर्वक एक नया दूरसंचार तकनीक परीक्षा उपग्रह लॉन्च किया

देशबन्धु 28 May 2026 4:30 am

चीन में प्रमुख औद्योगिक उद्यमों के मुनाफे में पहले चार महीनों में 18.2% की वृद्धि

चीनी राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अप्रैल तक, देश भर में प्रमुख औद्योगिक उद्यमों का कुल लाभ 24 ख़रब 35 अरब 84 हजार युआन तक पहुंच गया

देशबन्धु 28 May 2026 3:09 am

आज का एक्सप्लेनर:क्या अमित शाह कुछ बड़ा करने वाले हैं, इसी महीने 3 फैसले; क्या वाकई घुसपैठ से देश में मुस्लिम आबादी बढ़ रही

26 मई को गृहमंत्री अमित शाह ने एक पोस्ट लिखी- 'अवैध घुसपैठ से हो रहा अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।' बस इतने से शब्दों ने पूरे देश में बहस छेड़ दी कि कुछ बड़ा होने वाला है। लेकिन ये पोस्ट अकेली नहीं थी। इसी महीने 3 फैसले आए, जिनका निशाना एक है- अवैध घुसपैठ। क्या हैं ये फैसले, क्या सरकार कुछ बड़ा करने वाली है और क्या इससे देश के मुसलमानों को चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अवैध घुसपैठ से जुड़े कौन से 3 बड़े फैसले हुए हैं? जवाबः ये 3 फैसले हैं… 1. बंगाल में 600 एकड़ सीमाई जमीन BSF को देना 2. भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट 3. अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी सवाल-2: डेमोग्राफिक चेंज के लिए बनी हाई लेवल कमेटी क्या करेगी? जवाबः गृह मंत्रालय के मुताबिक, कमेटी 6 काम करेगी... इनके अलावा कमेटी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अवैध घुसपैठ, डेमोग्राफिक चेंज के मामले में बेहतर को-ऑर्डिनेशन के लिए पॉलिसी बनाने का भी सुझाव देगी। सवाल-3: तो क्या वाकई भारत में डेमोग्राफी अप्राकृतिक रूप से बदल रही है? जवाबः कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि असामान्य वजहों से देश के कुछ इलाकों में डेमोग्राफिक बैलेंस बिगड़ रहा है… 1. बांग्लादेश से घुसपैठ के चलते मूल-निवासी घट रहे 2. बंगाल, बिहार के सीमाई इलाकों में मुस्लिम आबादी बढ़ी 3. सुप्रीम कोर्ट ने घुसपैठ को ‘अघोषित बाहरी आक्रमण’ कहा 4. हिंदू 7.8% तक घटे व मुस्लिम 4.25% तक बढ़ गए सवाल-4: कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार क्या कर सकती है? जवाबः अवैध घुसपैठ से डेमोग्राफिक चेंज पर लगाम लगाने की इस कोशिश को 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' की पॉलिसी कहा जाता है। कमेटी के सुझाव के आधार पर सरकार 3 बड़े कदम उठा सकती है- 1. अवैध घुसपैठियों की सटीक संख्या तय करना 2. होल्डिंग सेंटर्स में रख सकती है 3. वापस बांग्लादेश डिपोर्ट कर सकती है हर्षवर्धन त्रिपाठी ये भी कहते हैं कि कमेटी की सिफारिशों के आधार पर बॉर्डर और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े कानून सख्त हो सकते हैं। नागरिकता से जुड़े कानून भी कड़े किए जा सकते हैं। हालांकि, सरकार के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं- सवाल-5: क्या भारतीय मुसलमानों को इससे चिंता करनी चाहिए? जवाबः सरकार के कदमों से भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के पूर्व उप-कुलपति और संविधान के एक्सपर्ट फैजान मुस्तफा कहते हैं, ‘डेमोग्राफिक चेंज को समझने के लिए बनाई जा रही ये कमेटी महज एक स्टडी करेगी, जिससे भारतीय मुसलमानों को कोई चिंता नहीं होनी चाहिए।’ फैजान मुस्तफा जोर देते हैं कि घुसपैठ जैसी वजहों से डेमोग्राफी नहीं बदली है। वो इस मुद्दे को हेडलाइन मैनेजमेंट मानते हैं। फैजान के मुताबिक, ‘सरकार इकॉनमी के मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ये कदम उठा रही है। अगर NDA सरकार मानती है कि देश में अवैध घुसपैठियों की संख्या बढ़ी है, तो उसने अपने 12 साल के कार्यकाल में कितने बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया? चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल, असम, बिहार में SIR करवाया गया, फिर भी सरकार नहीं बता पाई कि इन राज्यों में घुसपैठियों की संख्या ज्यादा है।’ ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 4 बच्चे होने पर मिलेंगे 95 हजार, आंध्र प्रदेश CM ने क्यों कहा- बच्चे ही हमारी दौलत; इसका भारत पर क्या असर आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू ने 16 मई को कहा, 'राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपए और चौथे के जन्म पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे। एक समय मैंने जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए बहुत मेहनत की थी, लेकिन अब जन्म दर बढ़ाने की जरूरत है।' पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 27 May 2026 6:28 pm

इजरायली हमलों से दहला लेबनान, 31 लोगों की मौत, 40 अन्य घायल.. नेतन्याहू ने दिए बड़े आदेश

इजरायल द्वारा लेबनान पर हाल के घंटों में किए गए सिलसिलेवार हमलों में 31 लोग मारे गए और 40 अन्य घायल हो गए।लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी

देशबन्धु 27 May 2026 6:03 pm

क्या है युद्धविराम के पीछे का असली खेल? अमेरिका-इजरायल रिश्तों को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने उठाए सवाल

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। अराघची ने अमेर‍िका और इजरायल के एकमत होने पर सवाल खड़े कर द‍िए हैं।

देशबन्धु 27 May 2026 6:01 pm

अब्राहम समझौते को लेकर बुरी तरह फंस गया पाकिस्तान, जानें क्‍या है ट्रंप का मकसद

विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान इस मुद्दे पर दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। यदि वह अब्राहम समझौते का खुलकर विरोध करता है तो अमेरिका के साथ उसके संबंधों पर असर पड़ सकता है। वहीं अगर वह इस पहल के समर्थन में जाता है, तो उसे घरेलू राजनीतिक विरोध और धार्मिक समूहों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है

देशबन्धु 27 May 2026 10:39 am

वाशिंगटन की पेपर मिल में बड़ा हादसा, केमिकल टैंक फटने से कई लोगों की मौत

अमेरिका के वाशिंगटन राज्य के लॉन्गव्यू शहर में एक पल्प और पेपर मिल में केमिकल टैंक फटने से कई लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए

देशबन्धु 27 May 2026 9:57 am

आज का एक्सप्लेनर:क्या रणवीर सिंह अब वाकई फिल्में नहीं कर पाएंगे; डॉन-3 को लेकर फरहान से किस बात का झगड़ा, जिससे FWICE ने लगाया बैन

अगस्त 2023 में डॉन-3 का टीजर रिलीज हुआ। अमिताभ बच्चन, शाहरूख खान के बाद फ्रेंचाइजी में रणवीर सिंह की एंट्री सुर्खियों में आ गई। इसके बाद एक लंबी खामोशी का दौर। न शूटिंग की तारीख, न फाइनल कास्ट और न कोई रिलीज डेट। करीब 3 साल बाद 25 मई को अचानक खबर आई कि फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉइज यानी FWICE ने डॉन-3 छोड़ने और नोटिस का जवाब न देने पर रणवीर सिंह पर बैन लगा दिया है। क्या वाकई रणवीर अब फिल्मों में काम नहीं कर पाएंगे, डॉन-3 का पूरा झगड़ा क्या है और आगे क्या होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: डॉन-3 को लेकर रणवीर सिंह का झगड़ा क्या है? जवाब: 2006 की डॉन और 2011 की डॉन-2 के हीरो शाहरुख थे। डॉन फ्रेंचाइज की तीसरी फिल्म को लीड करने वाले थे रणवीर सिंह। इसके राइटर-डायरेक्टर थे फरहान अख्तर। उन्हीं का प्रोडक्शन हाउस ‘एक्सेल एंटरटेनमेंट’ इसे बना रहा था। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, रणवीर को फिल्म में साइन करने के लिए 10 करोड़ रुपए का साइनिंग अमाउंट भी मिला था। फिल्म में रणवीर सिंह के अपोजिट पहले कियारा आडवाणी को कास्ट किया गया, लेकिन प्रेग्नेंसी के चलते कियारा ने फिल्म छोड़ दी, जिसके बाद कृति सेनन को कास्ट करने की खबरें आईं। 2025 में डॉन-3 की शूटिंग शुरू होनी थी, लेकिन फिर अचानक रणवीर ने फिल्म छोड़ दी। इसके पीछे 3 वजहें बताई जा रही हैं… 1. फिल्म में लगातार देरीः एनाउंसमेंट के सालों बाद भी फिल्म की कोई फाइनल स्क्रिप्ट नहीं थी और कहानी के कई पहलू उलझे हुए थे। रणवीर प्रोडक्शन की तरफ से इस देरी पर नाराज हुए। फिर वो धुरंधर की शूटिंग में व्यस्त हो गए। जबकि फरहान का कहना था कि स्क्रिप्ट कई फेज में तैयार हुई और रणवीर से शेयर की गई, उन्होंने बिना किसी आपत्ति के हर ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी। 2. रणवीर का क्रिएटिव दखलः फिल्म मेकर्स का ये भी आरोप है कि रणवीर फिल्म की स्क्रिप्ट में दखल दे रहे थे। वो डॉन का एक सीरियस और एग्रेसिव वर्जन बनाना चाहते थे। उनकी मांग थी कि फिल्म में गाली-गलौज, धारदार एक्शन और ज्यादा हिंसक सीन होने चाहिए। जबकि फरहान चाहते थे कि पिछली दोनों फिल्मों में जिस तरह की रियलिस्टिक कहानी थी, ये भी उसके करीब ही रहे। वो रणवीर की मांग पर राजी नहीं हुए। 3. रणवीर को निकालने की चर्चाः ये भी खबरें आईं कि रणवीर सिंह मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म नहीं कर रही थीं। इसलिए फरहान उनके अलावा किसी और एक्टर को शामिल करने की सोच रहे थे। जब रणवीर को ये पता चला, तो विवाद और बढ़ गया और उन्होंने फिल्म छोड़ने का ऐलान कर दिया। दिसंबर 2025 में धुरंधर का पहला पार्ट रिलीज होने के बाद ‘मिडडे’ अखबार में दावा किया गया कि रणवीर ने फिल्म छोड़ दी है और वो जल्द ही फिल्म का साइनिंग अमाउंट लौटा देंगे। इधर, मेकर्स पहले ही फिल्म के प्री-प्रोडक्शन और बाकी चीजों पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च कर चुके थे। फरहान ने प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया में शिकायत की और रणवीर से 45 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की। एक्टर आमिर खान ने भी इस विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। प्रोड्यूसर गिल्ड ने दोनों को सुलह का समय भी दिया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। इसके बाद 11 अप्रैल 2026 को फरहान अख्तर ने इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन यानी IFTDA में शिकायत की। IFTDA से ये मामला FWICE के पास पहुंचा। सवाल-2: FWICE ने रणवीर सिंह पर बैन क्यों लगाया? जवाब: फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े वर्कर्स और कलाकारों के हितों के लिए काम करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। ये फिल्मों और टीवी शोज में वर्कर्स के पेमेंट और अधिकारों की लड़ाई लड़ता रहा है। FWICE द्वारा जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि फरहान अख्तर ने अपनी शिकायत में कहा कि रणवीर के अचानक फिल्म छोड़ देने से आर्थिक नुकसान होगा और फिल्म के प्रोडक्शन पर भी असर पड़ेगा। इस तरह फिल्म छोड़कर जाना स्वीकार्य नहीं है। साथ ही इंडस्ट्री की नीतियों और प्रोफेशनल नियमों के खिलाफ है। फेडरेशन के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने कहा, ‘ रणवीर को 22 अप्रैल, 30 अप्रैल और 13 मई 2026 को रिमाइंडर भेजे। रणवीर सिंह का जवाब आया कि शिकायत करने वाले लोगों की समस्याओं का हल निकालने के लिए FWICE सही मंच नहीं है।’ इसके बाद 25 मई 2026 को FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ बैन लगाने का फैसला लिया। ये बैन एक नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव है, यानी FWICE ने एक्टर्स, डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स, कैमरामैन, टेक्नीशियंस जैसे बॉलीवुड से जुड़े लोगों को निर्देश दिया है कि कोई रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करेगा। सवाल-3: तो क्या अब रणवीर बॉलीवुड फिल्मों में काम नहीं कर पाएंगे? जवाब: FWICE ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियन फेडरेशन है। कोई यूनियन कानूनी तौर पर किसी व्यक्ति के खिलाफ नॉन-कोऑपरेटिव निर्देश जारी कर सकता है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 2017 में एक केस की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘FWICE को क्रू और टेक्नीशियंस की मांग उठाने वाला संगठन कहा जा सकता है, न कि संसद द्वारा बनाया गया कोई नियामक निकाय यानी रेगुलेटरी बॉडी। हालांकि, FWICE फिल्म इंडस्ट्री के कामकाजी माहौल को नियंत्रित करने की बड़ी ताकत रखता है। FWICE के जनरल सेक्रेटरी अशोक दुबे के मुताबिक जब तक विवाद नहीं सुलझता, तब तक फेडरेशन का कोई भी मेंबर रणवीर के साथ काम नहीं करेगा। कैमरामैन, स्पॉट बॉय और लाइट टेक्नीशियन कोई भी नहीं। इंडस्ट्री के करीब 90% लोग, FWICE के किसी न किसी एसोसिएशन के मेंबर हैं। अगर ये मेंबर रणवीर के साथ काम करने से मना कर दें, तो उनकी अपकमिंग फिल्मों की शूटिंग रुक सकती है। रणवीर 3-4 बहुत बड़े बजट की फिल्में कर रहे हैं। इसमें शाहरुख खान के साथ ‘किंग’, डायरेक्टर जय मेहता के साथ प्रलय, कियारा अडवाणी के साथ एक फिल्म और धुरंधर के डायरेक्टर आदित्य धर के साथ भी एक बड़ा प्रोजेक्ट शामिल है। इन फिल्मों के मेकर्स को प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ाने के लिए फेडरेशन से मंजूरी लेनी पड़ सकती है। यानी रणवीर के लीड रोल वाली ये फिल्में लटक भी सकती हैं। सवाल-4: इससे पहले FWICE ने ऐसे बैन लगाए, तब क्या हुआ? जवाब: FWICE अपनी बातें मनवा लेता है। 4 मामले- 1. सलमान खान: दबाव में पाकिस्तानी सिंगर आतिफ का गाना हटाया 2. मीका सिंह: पाक में मुशर्रफ के रिलेटिव के यहां गाना गया, माफी के बाद बैन हटा 3. दिलजीत दोसांझ: 2 बार बैन हुए, भारत में फिल्म रिलीज नहीं हो पाई 4. फिरोज नाडियाडवाला: डायरेक्टर, क्रू मेंबर्स का 8 साल पुराना बकाया चुकाना पड़ा इसके अलावा 2017 में FWICE के बैनर टेल ढाई लाख वर्कर्स ने क्रू मेंबर्स की सैलरी बढ़ाने, शिफ्ट टाइमिंग और इंश्योरेंस जैसे मुद्दों पर हड़ताल की थी, जिससे अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की शूटिंग रोकनी पड़ गई थी। इससे ‘पद्मावत’, ‘परमाणु’ और ‘जीरो’ जैसी फिल्मों की शूटिंग लेट हुई थी। सवाल-5: रणवीर के पास आगे क्या रास्ता है? जवाब: रणवीर ने इसे कांट्रैक्ट से जुड़ा मामला बताया है और कोर्ट जाने की बात कही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर ने FWICE को सीधे अपना जवाब भेजकर कहा, ‘FWICE इस शिकायत के लिए सही फोरम नहीं है। जो मुद्दा उठाया गया है, वो कांट्रैक्ट से जुड़ा हुआ है और इसके लिए कोर्ट या उचित कानूनी फोरम की जरूरत पड़ सकती है।’ अगर रणवीर कोर्ट जाते हैं, तो ये उनके और फरहान के प्रोडक्शन हाउस के बीच का कानूनी मामला हो जाएगा। इसमें कांट्रैक्ट और एग्रीमेंट के कानून के मुताबिक, कोर्ट ही कोई फैसला ले सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि FWICE के पास रणवीर को फिल्मों में काम करने से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ये विवाद अब मीडिया के सामने है, इसीलिए इसे बातचीत से सुलझा लिया जाएगा। दैनिक भास्कर के बॉलीवुड रिपोर्टर अमित कर्ण के मुताबिक, ‘रणवीर बड़े एक्टर हैं, उनके पास कई बड़े फिल्म स्टूडियोज का सपोर्ट है। उनके लिए इस विवाद को सुलझाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। दोनों पक्ष किसी नतीजे पर पहुंचना चाहेंगे। रणवीर की फिल्म में वापसी भी हो सकती है।’ जाने-माने फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श बताते हैं, ‘मुझे लगता है कि फिल्म प्रोड्यूसर फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी और रणवीर सिंह को आमने-सामने बैठकर विवाद सुलझा लेना चाहिए। 80-90 के दशक में भी ऐसे कई विवाद होते थे, आज भी होते हैं, लेकिन बातचीत से उनका हल निकाल लिया जाता है।’ ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… क्या थलापति विजय से जलते हैं रजनीकांत; कहां से उठी सीएम बनने में अड़ंगा लगाने की बात, पूरी कहानी जानिए 17 मई की शाम। थलाइवा रजनीकांत ने चेन्नई के पोएस गार्डेन स्थित अपने घर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। सफाई देते हुए कहा- मैं विजय को तब से देख रहा हूं, जब वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 26 May 2026 6:36 pm

खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को लेकर ईरान की चेतावनी, मुज्तबा खामेनेई बोले- अब पहले जैसी सुरक्षा नहीं

मुज्तबा खामेनेई ने अपना संदेश टेलीग्राम चैनल के माध्यम से जारी किया। उन्होंने हालिया संघर्ष को “इस्लामिक रेजिस्टेंस की जीत” करार देते हुए कहा कि इजराइल अपने “बुरे अंत” की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने अमेरिका और इजराइल दोनों के खिलाफ तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया।

देशबन्धु 26 May 2026 3:24 pm

सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी ठिकानों पर हमला

अमेरिकी सेना के अनुसार दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास संदिग्ध सैन्य गतिविधियां देखी गईं। इसके बाद अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई। अमेरिका ने माइन बिछाने की कोशिश कर रही कई बोट्स को निशाना बनाया।

देशबन्धु 26 May 2026 10:04 am

चिली में 6.7 तीव्रता का भूकंप, जनजीवन सुरक्षित

चिली के उत्तरी हिस्से में मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम करीब 5:52 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 3:22 बजे) 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया

देशबन्धु 26 May 2026 9:05 am

माकपा की समीक्षा: बंगाल में भाजपा की जीत पर गहरी चिंता

माकपा की केंद्रीय समिति (सीसी) ने हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक, संगठनात्मक और वैचारिक कारणों की प्रारंभिक समीक्षा की है

देशबन्धु 26 May 2026 7:12 am

मंत्री के बेटे पर पॉक्सो, RSS-BJP में दरार:शराब पिलाकर रेप और 4 महीने धमकाने का आरोप, नाम आने से संघ नाराज

17 साल की लड़की और उसके दोस्तों ने मिलकर नए साल की पार्टी रखी। 31 दिसंबर 2025 की रात एक फॉर्मफाउस पर जश्न शुरू हुआ। नाबालिग के साथ एक लड़की और 5 लड़के थे। इनमें एक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार का 25 साल का बेटा साई भागीरथ भी था। आरोप है कि पार्टी के दौरान भागीरथ ने नाबालिग पर शराब पीने का दबाव बनाया। इसके बाद उससे छेड़छाड़ करने लगा। भागीरथ नशे में धुत था। उसने लड़की को पहले गलत तरह से छुआ, फिर फिजिकल होने के लिए उकसाने लगा। लड़की अकेली पड़ गई, मजबूरी में विरोध नहीं कर सकी। घटना के बाद लड़की ने मां को आपबीती बताई। परिवार ने शिकायत कराने की कोशिश की, लेकिन उन पर केस न करने का दबाव डाला गया। करीब 4 महीने बाद 8 मई को मां की शिकायत पर भागीरथ के खिलाफ पॉक्सो का मामला दर्ज हुआ। भागीरथ को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी के बाद केस में RSS को भी खींचने की कोशिश की गई। इस पर संघ ने बयान जारी कर कहा कि ये पूरी तरह से BJP का आंतरिक मामला है, इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। 24 घंटे पुलिस निगरानी में पीड़ित फैमिली, मीडिया पर पाबंदी पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन हैदराबाद सिटी से 15 किलोमीटर दूर पड़ता है। इसी थाने में पॉक्सो का मामला दर्ज कराया गया था। सुरक्षा को देखते हुए पीड़ित परिवार अभी पुलिस निगरानी में है। वे मीडिया से बात करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि खतरा हो सकता है। पीड़ित के रिश्तेदार ने हमें AIDSO यानी ऑल इंडिया स्टूडेंट डेमोक्रेटिक एसोसिएशन का नंबर दिया। ये संस्था विक्टिम की कानूनी लड़ाई लड़ रही और उसके लिए विरोध प्रदर्शन कर रही है। AIDSO में लीगल टीम की मेंबर वैशाली ने हमें केस से जुड़े लीगल डॉक्यूमेंट्स दिए। इसमें पीड़ित की मां के स्टेटमेंट और अहम जानकारियां शामिल हैं। शिकायत में पीड़ित की मां ने बताया, ‘जून 2025 के आसपास मेरी बेटी की भागीरथ से पहचान हुई। इसके बाद इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के जरिए दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी। भागीरथ ने मेरी बेटी को बालिग होने पर शादी करने का झूठा भरोसा दिलाया और अपने जाल में फंसाया। उसका भरोसा जीतने के बाद भागीरथ उसे इमोशनली ब्लैकमेल करने लगा। इतना ही नहीं वो पढ़ाई-लिखाई और करियर से जुड़े फैसलों पर रोक लगाने लगा।’ ’भागीरथ के संपर्क में रहने के दौरान मेरी बेटी को कई बार निजी अपार्टमेंट और फार्म हाउस में ले जाया गया, जहां उसे यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। खास तौर पर 31 दिसंबर, 2025 की रात, जब मोइनाबाद के फार्महाउस में उसे जबरदस्ती शराब पिलाई गई। फिर उसका यौन उत्पीड़न किया गया। इस घटना के बाद 7 जनवरी 2026 को अचानक आरोपी ने उससे रिश्ता तोड़ दिया। क्या BJP नेता विक्टिम को पहले से जानते थे? पीड़ित की मां ने आरोप लगाया कि बेटी की हालत देखकर हमने मार्च से अप्रैल के बीच कोर्ट और वकीलों से संपर्क किया, तो हमें शिकायत वापस लेने की धमकी मिलने लगी। 21 अप्रैल 2026 को इसी दौरान भागीरथ के एक साथी ने निर्मल पुलिस स्टेशन में हमारे खिलाफ केस दर्ज करवाया। उसमें आरोप लगाया गया कि मेरी बेटी आरोपी को ब्लैकमेल कर रही और उससे पैसों की उगाही की कोशिश कर रही है। पीड़ित पक्ष ने अपने स्टेटमेंट के पॉइंट नंबर-8 में कहा है कि 22 अप्रैल 2026 को उनसे संगप्पा नाम का शख्स मिला। उसने एक दिन बाद 23 अप्रैल को उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार से करवाई। इस मुलाकात के दौरान हम लोगों पर समझौता करने का दबाव डाला गया। हमें सुरक्षा का भरोसा दिलाने के बजाय डराया और धमकाया गया। पीड़ित पक्ष के सरकारी वकील नागेश्वर राव ने बताया कि 16 मई को साइबराबाद पुलिस ने उसे अरेस्ट किया, तब पीड़ित परिवार को राहत मिली है। परिवार ने पुलिस को अपना स्टेटमेंट सौंप दिया है। इसके आधार पर पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। वो 29 मई तक पुलिस रिमांड पर है। अब जानिए बंडी संजय और आरोपी पक्ष के वकील क्या कह रहे…‘वो लड़की पहले मेरे बेटे की दोस्त थी‘ 12 मई को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार करीमनगर में हनुमान जयंती रैली में शामिल हुए। इस दौरान भाषण में उन्होंने बेटे पर लगे आरोपों का खंडन किया। उन्होंने इसे झूठी साजिश बताते हुए कहा, ‘आपने मेरे समर्थकों को नाराज किया है और मेरी पार्टी को मुश्किल में डाल दिया। आप उसी आग में जलकर भस्म हो जाएंगे, जो आपने खुद लगाई है।‘ हमने इस मामले पर भागीरथ का पक्ष जानने के लिए उनके वकील करुणासागर से बात की। उनके मुताबिक, पीड़िता की मां के सभी आरोप मनगढ़ंत लगते हैं। उन्होंने कहानी की फ्रेमिंग ऐसे की है, जिससे लगता है कि किसी ने जानबूझकर या फिर राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा किया हो। करुणासागर आगे कहते हैं, ‘तेलंगाना पुलिस साई भगीरथ की गिरफ्तारी का झूठा दावा कर रही है। जबकि केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के निर्देश पर मैंने और सीनियर एडवोकेट एंथनी रेड्डी ने साइबराबाद पुलिस स्टेशन के टेक पार्क के पास भागीरथ को खुद पुलिस के हवाले किया था।‘ ‘पुलिस BNS और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मुताबिक जांच कर रही है। हमने पुलिस को भागीरथ से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां और फोन हैंडओवर कर दिया है।‘ POCSO केस के बाद तेलंगाना RSS ने BJP से किनारा किया साल 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के वक्त तेलंगाना में RSS और BJP ने मिलकर 'अक्षत वितरण' अभियान चलाया। वहीं, लोकसभा चुनाव से पहले संघ ने बूथ लेवल पर डोर-टू-डोर कैंपेनिंग की। इसका फायदा BJP को मिला, उसे राज्य में रिकॉर्ड 8 सीटों पर जीत मिली। 2019 में पार्टी 4 सीट ही जीत सकी थी। अब भागीरथ के खिलाफ POCSO केस होने के बाद RSS ने खुद को मामले से अलग कर लिया है। तेलंगाना के प्रांत प्रचारक कट्टा राजगोपाल कहते हैं, ‘इस मामले में संघ के कुछ पदाधिकारियों को भी घसीटा गया। इस पर हमारे प्रांत संघचालक बार्ला सुंदर रेड्डी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा है कि इस विवाद से RSS का कोई लेना-देना नहीं है। अगर कोई हमारे पदाधिकारियों को इससे जोड़कर संघ की छवि खराब करने की कोशिश करेगा, तो हम उस पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।‘ तेलंगाना पुलिस क्या कह रही... पुलिस बोली- भागीरथ ने सरेंडर नहीं किया, हमने उसे पकड़ा तेलंगाना पुलिस ने पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन पर भागीरथ के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद 12 मई को एक नोटिस जारी किया। इसमें पुलिस ने बताया कि विक्टिम के बयान दर्ज होने के बाद पहले दर्ज की गई धाराओं में बदलाव किया गया है। नोटिस में भागीरथ से 13 मई को दोपहर दो बजे पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया, लेकिन वो पेश नहीं हुआ। उसकी जगह भागीरथ ने पुलिस को लिखे लेटर में कहा कि मैं पर्याप्त सबूतों के साथ पेश होऊंगा और अपनी दलीलें रखूंगा। हालांकि, कुकटपल्ली की डिप्टी कमिश्नर IPS रितिराज का कहना है, ‘भागीरथ ने पुलिस के सामने सरेंडर नहीं किया, बल्कि 16 मई को एक पुलिस अधिकारी ने उसे गिरफ्तार किया है।‘ …………. ये खबर भी पढ़ें… 58 अश्लील वीडियो वाला खरात बोला-सब दैवीय शक्तियों ने कराया 58 अश्लील वीडियो, 150 पीड़ित महिलाएं, 1500 करोड़ की संपत्ति, 100 फर्जी खाते, स्वयंभू बाबा अशोक खरात पर आरोपों की लिस्ट, अंधविश्वास, मंत्रियों-विधायकों से कनेक्शन से होते हुए सबसे अहम गवाह जितेंद्र शेलके की मौत तक आ पहुंची। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 26 May 2026 5:25 am

'10 दिन मरे हो गए, इसकी आत्मा कब ले जाओगे?':कंबल में ‘हिलता आदमी’ बोला- 42 दिन बाद, इसने खुदकुशी की है- अनोखे अडिया की कहानी

सुबह के ठीक 9 बजे हैं। जंगल के पथरीले और उबड़-खाबड़ रास्तों पर हमारे कदम बढ़ते जा रहे हैं। करीब 40 मिनट बाद कुछ घर नजर आने लगे। पास पहुंचे तो एक घर के आंगन में भीड़ लगी दिखी। आंगन के एक ओर महिलाएं चुपचाप बैठी हैं, तो दूसरी ओर मर्द। इनमें से तीन लोग डमरू जैसा एक वाद्य यंत्र और घुंघरू बजा रहे हैं। इनकी धीमी थाप जंगल के इस सन्नाटे को और गहरा कर रही है। तभी हमारी नजर आंगन के बीचोबीच पड़ी। झुलसाने वाली इस उमस और गर्मी के बीच जमीन पर एक शख्स बैठा है। उसे सिर से पैर तक कंबल में इस कदर बांधा गया है कि उसके शरीर का एक भी हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा। अचानक, कंबल में लिपटा वह जिस्म जोर-जोर से हिलने लगा। भीतर से अजीबोगरीब आवाजें आने लगी। आस-पास बैठे लोग टकटकी लगाए उसे देख रहे हैं। वे बातें कर रहे हैं कि अब इस जिस्म में पुरखों की आत्मा आने वाली है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं, केरल के वायनाड के जंगलों में रहने वाली अडिया जनजाति की कहानी, इनकी आबादी करीब 12 हजार है। मेरे साथ हैं अजयन। अजयन, यहीं जंगलों टूरिज्म काम काम करते हैं। वह अडिया जनजाति के रीति-रिवाज और इनकी भाषा समझते हैं। अजयन बताते हैं- ‘यह चेकाड़ी गांव है। यहां अडिया समुदाय की एक रस्म चल रही है, जिसे पैलेय रस्म कहते हैं। इस दौरान पुरखों की आत्मा को बुलाने का दावा किया जाता है।’ कंबल में लिपटा शख्स जोर से हिल रहा है। वाद्य यंत्र की थाप जिस तर तेज-धीमी होती है, उस शख्स के शरीर की हलचल भी उसी रफ्तार से बदल रही है। कई बार तो ऐसा लगा कि वह गिर जाएगा। थोड़ी देर बाद वह भारी आवाज में कुछ बोलता है। उसके पास एक बुजुर्ग बैठे हैं। वह कंबल में बंधे शख्स से अपनी भाषा में कुछ पूछ रहे हैं, जिसका वह जवाब देता है। आस-पास बैठे बाकी लोग भी सवाल पूछते हैं। कंबल में बंधा शख्स, बारी-बारी से सबको जवाब देता है। अजयन बताते हैं- ‘यह रस्म बीती रात से चल रही है। जो वाद्य यंत्र बज रहा है, उसे मुरथम कहते हैं।’ मैंने पूछा- इस रस्म की कोई खास वजह है? अजयन ने बताया- ‘10 दिन पहले इसी घर में 40 साल की एक महिला ने खुदकुशी कर ली थी। उसका नाम चिक्की था। उसने ऐसा क्यों किया? लोग यही सवाल कंबल में हिलते शख्स से पूछ रहे हैं। उनका मानना है कि शख्स में पुरखों की आत्मा आई हुई है और उसे इन बातों की जानकारी है।’ मैंने सवाल किया- क्या मरने के 10 दिन बाद ही आत्मा को बुलाते हैं? अजयन बताते हैं- ‘अडिया लोग मानते हैं कि मौत के बाद 42 दिनों तक घर के आसपास आत्मा रहती है। इस दौरान कभी भी पैलेय रस्म की जा सकती है।’ 'इस रस्म के समय पुरखों की आत्मा से प्रार्थना करते हैं कि वे मृतक की आत्मा को अपने साथ ले जाएं, ताकि वह भटकती न रहे।’ तभी एक लड़का कुछ सामान लाकर कंबल में बंधे शख्स के सामने रखता है। इसमें पानी, पान के पत्ते, सुपारी, दीये की बाती और अगरबत्ती है। इसके बाद, बुजुर्ग बाती और अगरबत्ती जलाते हैं। उसके तुरंत बाद कंबल की गांठ खोल देते हैं। कंबल में पसीने से तर-बतर एक बुजुर्ग निकलता है। वह धोती में है। उसके हाथ में सूप (सूपड़ा) है, जिस पर घुंघरू लगे हैं। इसी शख्स की शरीर में पुरखों की आत्मा आई थी। अब सामने बैठे और वाद्य यंत्र बजा रहे दूसरे बुजुर्ग अगरबत्ती से इस शख्स की आरती उतारते हैं। उसके बाद दोनों आपस में बातें करने लगते हैं। कुछ देर बाद, बगल में बैठा दूसरा बुजुर्ग केले के पत्ते पर जल रही अगरबत्ती को खेत में रखने जाता है। मैंने अजयन से पूछा- कंबल में लिपटे शख्स से बुजुर्ग ने क्या सवाल पूछे? मेरे पूछते ही अजयन सामने बैठे बुजुर्ग की तरफ मुड़ते हैं। दोनों के बीच कुछ देर बातें होती हैं। इसके बाद, अजयन बताते हैं- बुजुर्ग ने आत्माओं से पहला सवाल पूछा कि चिक्की ने खुदकुशी क्यों की? कंबल में बंधे शख्स में आई पुरखों की आत्मा ने क्या जवाब दिया? वह बताते हैं कि आत्माओं ने बताया कि चिक्की पिछले कुछ समय से तनाव में थी। घर वाले बात-बात पर उसे तंग करते थे, इसी कारण उसने खुदकुशी कर ली। अजयन बताते हैं- ‘चिक्की की मौत को 10 दिन हो चुके हैं, लोगों का मानना है कि उसकी आस-पास ही कहीं भटक रही है। अब कुछ दिन बाद फिर यह रस्म होगी।’ बाकी आस-पास बैठे लोगों ने क्या पूछा? बुजुर्ग बताते हैं- किसी ने अपने घर की कलह के बारे में पूछा तो किसी ने अपने बच्चों की बीमारी के बारे में। क्या आत्माओं ने सबके जवाब दिए?, मैंने सवाल किया बुजुर्ग बताते हैं- हां, आत्माओं ने सबको कुछ न कुछ उपाय बताए, लेकिन इस बारे में आपको नहीं बता सकता। नहीं तो उसका असर नहीं होगा। इसके बाद, बुजुर्ग वहां से चले गए। अजयन बताते हैं- ‘अडिया लोगों का मानना है कि पूर्वजों की आत्माएं केवल मृतक की आत्मा को रास्ता दिखाने नहीं आतीं, बल्कि वे अपने लोगों की परेशानियों और भविष्य के संकेतों के बारे में भी बताती हैं।’ ‘अगर किसी परिवार पर कोई संकट हो, घर में परेशानी चल रही हो या गांव पर कोई मुसीबत आने वाली हो, तो लोग पूर्वजों की आत्माओं से उसके बारे में सवाल पूछते हैं। उनसे समस्या का समाधान भी पूछते हैं।’ ‘खेती, बारिश, फसल और गांव के फैसलों तक के बारे में पुरखों की आत्माओं से सलाह ली जाती है। अडिया समुदाय का मानना है कि पुरखे हमेशा अपने लोगों की रक्षा करते हैं।’ क्या किसी भी शख्स के अंदर पुरखों की आत्मा आ जाती है?, मैंने सवाल किया अजयन कहते हैं- ‘ऐसा नहीं है। गांव में कुछ ही बुजुर्ग ऐसे होते हैं, जिनके शरीर में आत्मा आती है। जहां तक बात आत्मा को बुलाने की है, तो इसके लिए मुरथम की थाप जरूरी है। बिना मुरथम के थाप के आत्माएं नहीं आतीं’ 'मुरथम की थाप के बिना आत्माएं क्यों नहीं आती?' अजयन बताते हैं- ‘मुरथम, अडिया लोगों का प्रमुख वाद्य यंत्र है। इसकी खासियत यह है कि हर अवसर के लिए इससे निकलने वाली आवाज अलग-अलग होती है। पुरखों की आत्मा को बुलाने के लिए अलग आवाज, विवाह या मृत्यु के शोक पर अलग आवाज, मुरथम हर बार अलग तरह से बजता है। साथ में घुंघरू भी बजाना जरूरी होता है, क्योंकि इनके बिना कोई भी आयोजन पूरा नहीं माना जाता।’ इसी बीच, अडिया लोग आंगन में खड़े हो जाते हैं। बड़ी तादात में पान के पत्तों पर सुपारी सजाई जा रही है। अब एक लड़का इन पानों को बांटना शुरू करता है। उसके बाद एक दूसरा लड़का ग्लास में सभी को खीर जैसी कोई चीज परोसना शुरू करता है। पूछने पर वे बताते हैं- ‘यह पायसम है। इसे गन्ने के रस में नारियल, ड्रायफ्रूट और चावल मिलाकर बनाया जाता है। यह गाढ़ा और पौष्टिक होता है।’ इसके बाद महिलाओं को भी पान दिया जाता है। अब अजयन मुझे इस परिवार घर के अंदर ले जाते हैं। घर के अंदर चूल्हे पर खाना बन रहा है। दीवारों पर पेंटिंग की गई है। घर के अंदर एक पत्थर रखा है। मैंने पूछा यह पत्थर क्या है? अजयन बताते हैं- यह पत्थर ही इनका मंदिर है। यहां बैठकर अडिया परिवार के लोग अपने पुरखों का याद करते हैं। ये मूर्ति नहीं रखते, न पूजा में कोई सामान इस्तेमाल करते हैं। बस एक पत्थर, जिसे ये अपना रक्षक मानते हैं। यहां महिलाओं के पहनावे में काफी फर्क है। कुछ ने साड़ी के ऊपर ब्लाउज नहीं पहना है, तो कुछ ने पल्लू को ब्लाउज के तौर पर बांधा है। थोड़ी ही देर बाद, एक लड़का हमें खाना खाने के लिए बुलाता है। सभी मर्द कतार में बैठते हैं। महिलाएं पत्तलों में खाना परोसती हैं। खाने में चावल, सब्जी, दाल, रसम, पापड़, छाछ और अचार है। अजयन के साथ मैं भी खाने का स्वाद लेती हूं। कुट्‌टम त्योहार, पुरखों की आत्मा करती है न्याय खाना खाते-खाते मैंने पूछा- अडिया लोग कोई त्योहार भी मनाते हैं? अजयन बताते हैं- ‘कुट्टम, यहां का प्रमुख त्योहार है। फसलों की कटाई के बाद इस त्योहार को मनाते हैं। इस दौरान सभी लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं। नए धान से भोजन बनाकर पुरखों की आत्माओं को भोग लगाते हैं।’ ‘अडिया लोग मानते हैं कि इस दौरान जब मुरथम और ढोल की थाप गूंजती है, तो अडिया समुदाय के पुजारी के शरीर में पुरखों की आत्माएं उतरती हैं। गांव के आपसी विवाद या पारिवारिक झगड़े उन्हीं के सामने रखे जाते हैं। पुजारी जो भी फैसला सुनाता है, सबको मंजूर होता है।’ बीमारी और बुरी आत्माओं के लिए गाधिका अनुष्ठान अजयन बताते हैं- ‘अडिया समुदाय के लोग गाधिका अनुष्ठान भी करते हैं। इसे बीमारी और बुरी आत्माओं को दूर भगाने के लिए किया जाता है। अनुष्ठान में शामिल पुरुष और महिलाएं तरह सजते-संवरते हैं और गीतों की धुन पर नाचते हैं। अनुष्ठान के पूरा होने से पहले पुजारी बीमार व्यक्ति के पास जाकर मंत्रोच्चार करता है। साथ ही पुरखों से प्रार्थना करता है कि बुरी आत्माओं को गांव से दूर ले जाएं।’ अडिया लोग मंदिर में करते हैं शादी अब हम खाना खा चुके हैं। इसके बाद, अजयन मुझे अडिया लोगों के मंदिर ले जाते हैं। मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है, सिर्फ एक पत्थर है। वे बताते हैं- ‘अडिया लोग इसी मंदिर में शादी करते हैं। शादी से एक रात पहले मंदिर में दो तुलसी की माला रखते हैं। अगले दिन दूल्हा-दुल्हन बुजुर्गों के सामने एक-दूसरे को यह माला पहनाते हैं, और शादी की रस्म पूरी हो जाती है। इसे थापूकोडी कहते हैं। लड़की वाले दहेज में अनाज और नारियल देते हैं।’ शाम के 6 बज चुके हैं। हमें रात होने से पहले चेकाड़ी गांव से वायनाड के लिए निकलना है। जंगल को पैदल पार करने में करीब 40 मिनट लगेंगे। चलते-चलते मैंने अजयन को बताया कि जंगलों में हमें अडिया समुदाय के कुछ लोग दिखे थे। जैसे ही हम उनके पास पहुंचे तो किसी ने हमें दूर ही रुकने को कहा, तो कोई हमें देखते ही भाग गया, ऐसा क्यों? अजयन बताते हैं- ये लोग जल्दी किसी से घुलते-मिलते नहीं हैं। सरकार ने भी इनसे मिलने पर रोक लगाई है। बहुत मुश्किल से इनसे मिलने की परमिशन मिलती है। मैंने कहा- हां, मुझे भी काफी परेशानी हुई। दो-तीन दिन तक परमिशन नहीं मिली। बाद में वन विभाग के अधिकारियों ने हमारे साथ एक ड्राइवर को जंगल के मुहाने तक भेजा। आगे का रास्ता हमने खुद तय किया। वे बताते हैं- ‘यह जंगल हाथियों के उत्पात के लिए मशहूर है। इसलिए वन विभाग की सख्ती है। रात होते ही यहां से हाथियों के झुंड गुजरने लगते हैं।’ करीब 40 मिनट के बाद हम वहां पहुंच जाते हैं, जहां वन विभाग की गाड़ी खड़ी है। अजयन से विदा लेकर वायनाड की ओर चल देती हूं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए केरल के चोला नाइकन की कहानी…. --------------------------------------- 1- ‘-10C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 26 May 2026 5:20 am

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान समेत पांच देशों से की अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पांच देशों से अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग कर दी है। इन पांच देशों में पाकिस्तान का नाम भी शामिल है

देशबन्धु 25 May 2026 10:32 pm

शी चिनफिंग ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भेंट की

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पेइचिंग में यात्रा पर आए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की।

देशबन्धु 25 May 2026 10:30 pm

शनचो-23 का सफल प्रक्षेपण हुआ, चीनी अंतरिक्ष यात्रियों का 8वां अंतरिक्ष मिलन पूरा

चीनी मानवयुक्त अंतरिक्षयान शनचो-23 के अंतरिक्ष यात्री दल ने 25 मई को सही सलामत थ्येनकोंग अंतरिक्ष स्टेशन में सफलतापूर्वक प्रवेश किया, जो चीनी अंतरिक्ष यात्रियों के 8वें 'अंतरिक्ष मिलन' का प्रतीक है।

देशबन्धु 25 May 2026 10:27 pm

आज का एक्सप्लेनर:भारत पर अचानक इतना प्यार क्यों लुटाने लगे ट्रम्प; कोई बड़ी जरूरत या सिर्फ डैमेज कंट्रोल, रूबियो की यात्रा के मायने

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। इस बीच पीएम मोदी को व्हाइट हाउस का निमंत्रण मिला है। ट्रम्प का भी बयान आया- ‘मुझे पीएम मोदी से प्यार है, पीएम मोदी महान हैं।’ पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के रिश्तों में खटास थी। फिर यह गर्मजोशी क्यों? ट्रम्प का यह प्यार असली है या सिर्फ डैमेज कंट्रोल; आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: भारत-अमेरिका के रिश्तों में खटास क्यों आने लगी थी? जवाबः जनवरी 2025 में ट्रम्प दोबारा राष्ट्रपति बने। अगले ही महीने पीएम मोदी उनसे मिलने वाशिंगटन पहुंचे। माहौल गर्मजोशी भरा था, लेकिन इसके बाद 2 बड़ी चीजें हुईं, जिसने रिश्तों में दरार डाल दी… 1. ट्रम्प ने भारत पर दुनिया में सबसे ज्यादा 50% टैरिफ लगाया 2. भारत के दुश्मन पाकिस्तान से ट्रम्प की अप्रत्याशित नजदीकी इसके अलावा भी कुछ घटनाएं हुई। जैसे- सवाल-2: क्या अब भारत से रिश्ते सुधारने में जुट गए हैं ट्रम्प? जवाबः जनवरी 2026 में ट्रम्प ने अपने खास सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का राजदूत बनाया। इसके बाद रिश्तों में थोड़ी नरमी आनी शुरू हुई। फरवरी में ट्रेड डील पर सहमति बनी, अमेरिका के न्योते पर भारत ने पैक्स सिलिका जॉइन किया। यह एक संगठन है, जिसका मकसद कम्प्यूटर चिप्स और AI की सप्लाई चेन सुरक्षित बनाए रखना है। पिछले कुछ दिनों से अमेरिका ने ऐसे प्रयास काफी तेज कर दिए हैं- मार्को रूबियो की पहली भारत यात्रा ट्रम्प ने कहा- अमेरिका पर 100% भरोसा कर सकता है इंडिया मोदी को व्हाइट हाउस का न्योता सवाल-3: क्या ये सिर्फ डैमेज कंट्रोल या अमेरिका को भारत की सख्त जरूरत? जवाबः अमेरिकी मीडिया का कहना है कि भारत आए मार्को रूबियो डैमेज कंट्रोल मिशन पर हैं। रूबियो ने पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ होने वाली आतंकी गतिविधियों की बात मानी और इस पर विरोध जताया। रूबियो ने कहा, 'पाकिस्तान के मध्यस्थ बनने पर भारत ने कोई आपत्ति नहीं जताई। इससे भारत की कूटनीतिक मैच्योरिटी का पता चलता है।' एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस वक्त 4 वजहों से अमेरिका को भारत की सख्त जरूरत है… 1. भारत के साथ ट्रेड डील को अंजाम तक पहुंचाना 2. भारत को तेल बेचकर पैसे कमाना 3. भारत के जरिए चीन का काउंटर तैयार करना 4. अमेरिकी हथियार बेचकर कमाई, रक्षा साझेदारी बढ़ाना सवाल-4: क्या अमेरिका पर भारत आंख मूंदकर भरोसा कर सकता है? जवाबः भारत के पास विकल्प कम हैं, लेकिन फिर भी वो अमेरिका पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकता। स्ट्रैटजिक एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्म चेल्लानी के मुताबिक, ‘सत्ता में लौटने के बाद दोस्त कहते हुए ट्रम्प ने कई बार भारत का अपमान किया, दबाव डाला और पेनल्टी लगाई। अब फिर वो मोदी को दोस्त और खुद को उनका फैन बताने लगे।’ बेल्जियम बेस्ड थिंक टैंक इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट प्रवीण दोन्थी के मुताबिक, ‘भारत शायद धैर्य दिखाते हुए ट्रम्प का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करेगा।’ भारत को लेकर अमेरिका की पोजिशन अब भी बहुत साफ नहीं है। अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने भारत के एक कार्यक्रम में कहा- ‘हम भारत के साथ वह गलतियां नहीं दोहराएंगे, जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं। हम आपको सभी बाजारों को विकसित करने की छूट नहीं देंगे, जिससे आप कई क्षेत्रों में हमें ही पछाड़ दें।’ भारत भी संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिका पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करने वाला। मार्को रूबियो के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अमेरिका से तेल खरीदने के बारे में पूछा गया। उन्होंने साफ कर दिया कि भारत ईंधन सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिका के अलावा दूसरे देशों से भी ईंधन खरीदेगा। जब मार्को रूबियो भारत आए, तो जयशंकर उनका स्वागत करने भी नहीं पहुंचे थे। रूबियो की यात्रा के तीनों पड़ावों- कोलकाता, दिल्ली और आगरा में सरकार के किसी मंत्री या विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी ने उनका स्वागत नहीं किया। सवाल-5: मार्को रूबियो की भारत यात्रा से क्या हासिल होगा? जवाबः भारत का भरोसा जीतने के अलावा इस दौरे में रूबियो का फोकस 3 चीजों पर है… i. भारत-अमेरिका ट्रेड डील। ii. QUAD को दोबारा पटरी पर लाना। iii. वीजा पर भारत की चिंता का रास्ता खोजना। अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑफ फॉरेन रिसर्च, CFR के एक्सपर्ट सदानंद धूमे के मुताबिक, ‘रूबियो की महज एक यात्रा से काम नहीं चलेगा। दोनों देशों को अपने रिश्तों को फिर से सुधारने के लिए लगातार कोशिशें करनी होंगी।’ सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज, CSIS के रिचर्ड रोसो ने भी कहा, 'मुझे नहीं लगता कि रूबियो के भारत दौरे से दोनों देशों के रिश्तों के मौजूदा हालात को बदल पाएंगे। इस मुलाकात से फरवरी में अंतरिम ट्रेड डील को फाइनल ट्रेड एग्रीमेंट में बदलने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है।’ रिचर्ड रोसो ने ये भी कहा, ‘QUAD की यह लगातार तीसरी बैठक है, जो किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी के बिना हो रही है। इसे QUAD की प्राथमिकता घटने के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है।’ ****रिसर्च सहयोग: प्रथमेश व्यास ------------------------ ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर: 5 देशों से क्या लेकर लौटे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स क्रिटिकल मिनरल देगा, मेलोनी से भी डील PM मोदी 15 मई की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले थे। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आए। करीब 140 घंटे मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 25 May 2026 6:20 pm