व्यापार वार्ता में अमेरिकी सोडा ऐश पर भारत के प्रस्तावित प्रतिबंध का मुद्दा उठाएगा ट्रंप प्रशासन
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि वह भारत सरकार से अमेरिका से आने वाले 'सोडा ऐश' पर प्रस्तावित आयात प्रतिबंधों को लेकर अपनी चिंता जताएगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बुधवार को सांसदों से कहा कि यह मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापक व्यापार वार्ताओं का हिस्सा होगा।
ब्लैकबोर्ड में कहानी- 8 पुलिसवालों की हत्या के बाद एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे की। आज वो बच्चों के साथ दुनिया की नजरों से छिपते-छिपाते जिंदगी जी रही हैं… साल 2020, 2-3 जुलाई की दरमियानी रात। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ वाले घर पर सो रही थी। बड़ा बेटा उन दिनों छुट्टी पर मॉस्को से इंडिया आया हुआ था और अपनी चाची के घर पर था। रात 2 बजे अचानक फोन बजा। फोन उठाते ही दूसरी तरफ से घबराई हुई आवाज आई- ‘रिचा, तुम बच्चों को लेकर कहीं चली जाओ। जितना जल्दी हो सके घर छोड़ दो।’ वो आवाज मेरे पति विकास दुबे की थी। मैंने पूछा- कहां चली जाऊं, वो भी इतनी रात में, आखिर बात क्या है। वो लगभग चिल्लाते हुए बोले- बिकरू में लड़ाई हो गई है। गोलियां चल गई हैं। तुम लोगों की जान को खतरा है। जो कह रहा हूं, वो करो। ये कहकर विकास ने फोन रख दिया। लड़ाई की बात पर मुझे विकास पर गुस्सा तो बहुत तेज आया। गांव में अक्सर उनकी लड़ाइयां होती रहती थी। मैंने बेटे से गुस्से में कहा- हमें घर छोड़कर जाना पड़ेगा। मैं तंग आ गई हूं तुम्हारे पापा के लड़ाई-झगड़ों से। अब मैं इस आदमी को तलाक दे दूंगी। गुस्से में बड़बड़ाते हुए मैंने अलमारी में रखे 4500 रुपए निकाले। छोटे बेटे को लेकर लखनऊ के आलमबाग बस स्टैंड पहुंच गई। हमारे साथ हमारा कुत्ता भी था। वहां वेटिंग रूम में सोच ही रही थी कि कौन सी बस का टिकट बुक करूं, तभी टीवी में देखा कि विकास ने आठ पुलिस वालों को गोली मार दी है। ये देखते ही मेरी धड़कनें बढ़ गईं। हाथ-पैर कांपने लगे। दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। मैंने अपने बेटे का हाथ कसकर पकड़ लिया और काफी देर वहीं बैठी रही। उस वक्त बड़ा बेटा 21 और छोटा बेटा 13 साल का था। उस दिन से हमारी जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो गई। हम दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गए। गैंगस्टर तो पति था, लेकिन उसके किए की सजा हम भुगत रहे हैं। रिचा दुबे ये बताते हुए रोने लगीं। कुछ देर चुप रहीं फिर बोलीं- विकास की मौत के बाद हमारी प्रॉपर्टी और बैंक खाते सीज कर दिए गए। अपना घर छोड़ना पड़ा। मेरे बच्चों की पढ़ाई छूट गई। उस दिन घर तो छोड़ दिया, लेकिन शहर नहीं छोड़ पाई। दिन में बेटे को लेकर किसी पार्क में बैठी रहती। एक दिन पार्क की तरफ दो पुलिस वालों को आते देखा। मैंने बेटे का हाथ पकड़ा और चुपचाप वहां से उठकर दूसरे पार्क चली गई। डर लगता था कि कहीं पुलिस हमें भी न पकड़ ले। ब्रेड खाकर दिन बिताएं हैं। रात में किसी अधूरी बनी बिल्डिंग में जमीन पर ही सो जाते थे। मुझे आज भी याद है एक रात अपने छोटे बेटे के साथ अधूरी बनी बिल्डिंग में सो रही थी। बेटे को नींद नहीं आ रही थी। कई बार पूछने पर उसने कहा- मुझे भूख लगी है, इसलिए सो नहीं पा रहा। इतने पैसे भी नहीं थे कि बेटे को खाना खिला सकूं। मैंने उसे 50 रुपए दिए और कहा जाकर चाय-बिस्किट ले आ। जितने पैसे थे उसमें तो बस यही आ सकता था। बेटा पैसे लेकर चला गया। उसके जाते ही मैं फूट-फूटकर रोई। मैंने कभी नहीं सोचा था कि बच्चों को ये दिन देखना पड़ेगा। उन्हें खाने के लिए तरसना पड़ेगा। सोचने लगी कि अच्छा हुआ बड़ा बेटा पहले ही अपनी चाची के घर चला गया था। वरना उसे भी भूखे तड़पना पड़ता। खाने के लिए तरसना पड़ता। इधर-उधर भटकते हुए लगभग 8-9 दिन बीत चुके थे। 9 जुलाई की बात है। मैं बेटे के साथ रेलवे स्टेशन पर बैठी थी। वहां टीवी में देखा कि विकास ने उज्जैन के महाकाल मंदिर कैंपस में सरेंडर कर दिया है। विकास के सरेंडर करते ही मैं बेटे को लेकर घर के लिए निकल गई। वहां पहले से ही पुलिस सेंध लगाए बैठी थी। हमें देखते ही पुलिस वाले बोले- ‘बैग को एक तरफ फेंकों और घुटनों के बल हाथ ऊपर करके बैठ जाओ।’ सिर्फ मुझे ही नहीं मेरे बेटे को भी इसी तरह बैठा दिया। उसकी तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखीं। उस वक्त एक मां होने के नाते मैं जो महसूस कर रही थी उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। बेटे को देखकर मन ही मन सोच रही थी कि विकास के किए सजा मेरे बच्चे को मिल रही है। रिचा आगे बताती हैं कि पुलिस वालों ने हमारी तलाशी ली उसके बाद पुलिस स्टेशन ले गए। मैं वहीं विकास का इंतजार करने लगी। कुछ घंटे बीते ही थे तभी एक लेडी पुलिस वाली ने आकर बताया कि विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारे गए। मेरे शरीर से तो जान ही निकल गई थी। उस दिन मुझे समझ आया कि जिंदा लाश होना किसे कहते हैं। तब भी छोटा बेटा मेरे साथ था। बेटे ने उस दिन जो कपड़े पहने थे, घर जाते ही उसे जला दिया। उसे उन कपड़ों से नफरत हो गई। उस दिन के बाद से उसने बोलना बंद कर दिया। आज तक उसे कई बार डॉक्टर के पास ले जाना पड़ता है। उसे कई बार समझाया कि तुम्हारे पापा ने गलत किया था। आठ पुलिस वालों को मारा था। फिर भी वो चुप ही रहता है। रिचा बताती हैं कि जिस वक्त विकास का एनकाउंटर हुआ, तब बड़ा बेटा मॉस्को से एमबीबीएस कर रहा था। उसका आखिरी साल था, लेकिन विकास की मौत के बाद वह वापस नहीं जा सका। उसकी फीस भरने के पैसे नहीं थे। फिर वह दिल्ली में रहकर पढ़ने लगा। विकास की मौत के बाद मैं खुद भी बीमार हो गई। नींद नहीं आती थी। बीपी, शुगर सब बढ़ गया। हर दिन थाने जाना पड़ता। पुलिस वाले घंटों पूछताछ करते। वकीलों के चक्कर लगाती। जो वकील कभी विकास के आगे-पीछे घूमते थे, वो मेरी शक्ल देखकर दूर से ही भाग जाते। साल 2022 तक यही सिलसिला चलता रहा। फिर एक दिन डीएम ऑफिस से एक लेटर आया। उसमें लिखा था कि आपकी पूरी प्रॉपर्टी सीज की जाएगी। अगले दिन एक पुलिस वाला घर आ आया और उसने कहा कि कल ही अपना ठिकाना ढूंढ लो, ये घर खाली कर दो। अगले दिन तेज बारिश हो रही थी। छोटे बेटे के साथ किराए का मकान ढूंढने निकल पड़ी। लखनऊ का चप्पा-चप्पा घूम लिया, लेकिन घर तो दूर किसी ने किराए पर एक कमरा तक नहीं दिया। तब बड़े बेटे को बताया कि यहां रहने का कोई ठिकाना नहीं मिल रहा। उसने हमें दिल्ली बुला लिया। हम सब दिल्ली में एक ही कमरे में रहते थे। खाना पकाने के लिए सिर्फ एक इंडक्शन और एक कढ़ाई थी। उसी में खाना बनाते थे। कई महीने तो केवल दाल-चावल बनता था। वो भी भरपेट नहीं। एक दिन घर में केवल इतना चावल बचा था कि दो लोग खा सकें। मैंने सोचा कम से कम बच्चों का पेट तो भर ही जाएगा। दाल-चावल बनते ही मैंने बच्चों को परोस दिया। कुछ देर बाद बच्चे बोले- मम्मी खाना नहीं खाओगी क्या। तब मैंने कह दिया आज भूख नहीं है, तुम लोग खा लो। एकबार कोरियर वाल पार्सल लेकर आया था। घंटी बजी तो बेटा इतना घबरा गया कि खुद को कमरे में बंद कर लिया। पूरा दिन अंदर ही बंद रहा। शाम में बड़ी मुश्किल से समझाकर उसको बाहर निकाला। उसकी हालत भी ठीक नहीं है। ज ब घर की घंटी बजती है तो वह डर जाता है। अगर कोई एक से ज्यादा बार घंटी बजा दे तो उसकी हालत खराब हो जाती है। वो कमरे से बाहर ही नहीं निकलता। हमारे घर में विकास का कोई फोटो नहीं है। न ही कोई उनका नाम लेता है। बच्चों के पास विकास का लाया हुआ एक भी सामान नहीं। रिचा बताती हैं कि जब हमारे पास गुजारा करने के पैसे नहीं बचे तो दोनों बेटों ने छोटी-मोटी नौकरियां ढूंढ़ी। अब दोनों अलग-अलग शहरों में हैं। अपनी पहचान भी छिपाकर रखते हैं। जब भी हम तीनों घर पर होते हैं, हमारी आपस में कोई बात नहीं होती। विकास की मौत के बाद अखबारों में मेरे लिए जाने क्या-क्या छपा। किसी ने छापा- अब बिकरू की कमान रिचा के हाथ रहेगी, रिचा बंदूक उठाएंगी। जिसे देखो वो मेरे बारे में लिख रहा था। किताबें छप गई, फिल्में बन गईं। मेरी दिमागी हालत और बिगड़ने लगी। लगता था कि बीपी बढ़ा हुआ। हमेशा मन में घबराहट होती। ऐसे लगता कि मरने पर सब ठीक हो जाएगा। छोटे-मोटे इलाज से फर्क नहीं पड़ा तो मेदांता अस्पताल में दिखाना पड़ा। रिपोर्ट में कुछ नहीं आया। डॉक्टरों ने काउंसलिंग की सलाह दी। पहले तो मैंने डॉक्टर से भी अपनी पहचान छिपाई, लेकिन बाद में सच बताना पड़ा। विकास का नाम सुनते ही डॉक्टर चौंक गए। कहने लगे कि रोज-रोज यहां आना मंहगा पड़ेगा। ऑनलाइन काउंसलिंग लीजिए। मैंने काफी दिनों तक ऑनलाइन काउंसलिंग ली। आज भी जब आंखें बंद करती हूं तो सारा मंजर सामने आता है। विकास की मौत से पहले का और बाद का भी। पत्नी होने के नाते सभी मामलों में सारी जांचे मेरे ही ऊपर आईं। ईडी, इनकम टैक्स और तमाम झूठे मुकदमें। विकास मुझसे 8-10 साल बड़े थे। मेरे भाई के दोस्त थे। घर आना-जाना था। धीरे-धीरे हमें एक दूसरे से प्यार हो गया। वो ब्राह्मण थे और मैं कायस्थ। परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं हुआ। छह-सात साल के रिलेशन के बाद साल 1996 में हमने कोर्ट मैरिज कर ली। साल 2022 में हमारी 25वीं सालगिरह थी। विकास ने वादा किया था कि हम दोबारा शादी करेंगे। उन्होंने कहा था कि तुम लहंगा पहनना, मेहंदी लगाना, मैं घोड़ी पर आऊंगा और हम अपने सारे शौक पूरे करेंगे। जिस दिन हमारी एनिवर्सरी थी उस दिन तो रो रोकर मेरा बुरा हाल हो गया था। कोर्ट कचहरी के खर्च उठाने के लिए जेवर बेचने पड़े। दो सोने के कड़े, दो मंगलसूत्र, अंगूठियां बेचकर वकील की फीस भरी। बहुत मायूस होकर रिचा कहती हैं कि बच्चों की पढ़ाई नहीं रोकनी चाहिए थी। बच्चे अगर गुंडई बदमाशी करते तो उनको वैसी सजा दी जाती। बच्चे पढ़ने वाले थे, मैं मानती हूं कि विकास ने गलती की, लेकिन उसकी सजा बच्चों को नहीं देनी चाहिए थी। रिचा कहती हैं कि विकास ने जो भी किया, मुझे उसका पछतावा है। उसने जिन आठ पुलिसवालों को गोली मारी, मैं उनके परिवार से हाथ जोड़कर माफी मांगती हूं। अगर विकास ने मुझे बताया होता कि उसने पुलिस वालों को गोली मार दी है, तो मैं उस दिन घर छोड़ती ही नहीं। मेरा तो विकास से झगड़ा ही केवल गांव की सियासत को लेकर होता था। कितनी बार उनको समझाया कि ये सब छोड़ दो। डर था कि कोई बच्चों को नुकसान न पहुंचा दे। मुझे हमेशा इस बात का अफसोस रहेगा कि विकास ने अगर मेरी थोड़ी सी भी सुनी होती तो आज जिंदगी कुछ और होती। गांव छोड़कर कानपुर रहने लगी। फिर बाद में बच्चों के साथ लखनऊ रहने लगी। लेकिन विकास बिकरू में ही रहे। कई बार विकास ने कहा कि मैं बच्चों के साथ रहूंगा, उन्हें स्कूल छोड़ने जाऊंगा। फिर गांव से कोई फोन आता, ये फिर चले जाते। महीनों-महीनों वहीं रहते। पति जब थे तब भी जिंदगी मुश्किल थी, उनके जाने के बाद और ज्यादा मुश्किल हो गई। मुश्किल से आंसू रोकते हुए रिचा कहती हैं कि विकास की लड़ाइयां कभी मुझ तक नहीं पहुंचीं। उस दिन भी अगर में बिकरू में होती तो ये सब न होता। शायद ये सुनकर लोग मुझपर हसेंगे, लेकिन वे मुझसे डरते थे। कभी बहस हो जाती थी, तो मैं फोन बंद कर लेती थी। विकास घबरा जाते थे। विकास को मेरे लंबे बाल बहुत पसंद थे। उनसे कुछ भी करवाने के लिए मैं बाल कटवा लेने की धमकी देती थी। उनके जाने के बाद मैंने सबसे पहले बाल कटवा दिए। मैं तो सिर मुंडवा लेना चाहती थी, लेकिन बच्चों ने रोक लिया। विकास अगर जिंदा होते तो मैं उन्हें थप्पड़ मारती और तलाक दे देती। उन्हें पता चलता कि परिवार से दूर होने का दर्द क्या होता है। मैं चाहती हूं कि मेरा लखनऊ वाला घर खुल जाए, सिर्फ इसलिए कि मेरे भगवान वहीं है। बारिश में घर छोड़ते वक्त उन्हें वहीं छोड़ आई थी। मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि 25 साल की पूजा का मुझे क्या फल मिला। विकास के एनकाउंटर के बाद कई किताबें लिखी गईं। संजीव मिश्रा ने तो किताब में बेडरूम तक की बातें लिख दीं। सब गलत है। कल को बच्चे सुनेंगे तो क्या सोचेंगे… विकास ने जो किया, उसके लिए मैं पत्नी होने के नाते सभी से माफी मांगती हूं। हर पुलिस वाले के परिवार से माफी मांगती हूं। वे मेरे पति थे, मैं इस सच को झुठला नहीं सकती। मैं शादी से खुश थी, पर उनके कर्मों से नाराज हूं। मैं किसे दोषी ठहराऊं। शायद ये मेरे ही कर्मों का फल है। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-दूसरे के बच्चे धोखे से मेरी कोख में डाल दिए:शक्ल-सूरत नहीं मिली तो DNA करवाया, आखिर कहां गए मेरे बच्चे कहानी ऐसे पति-पत्नी की जिनकी दो बेटियां हैं। इन्होंने एकबार फिर मां-बाप बनने का फैसला किया, लेकिन उम्र आड़े आ गई। डॉक्टर ने सलाह दी- ‘IVF आजमाइए।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI में जा रही एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
20 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के बीच पार्टी प्रवक्ता रहे विजेता दहिया एक बर्गर आउटलेट में दिखे। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। विवाद बढ़ा तो विजेता ने सफाई देते हुए कहा कि भूख लगी थी, इसलिए खाना खाने गए थे क्योंकि अच्छा खाने से दिमाग अच्छा महसूस करता है। उनकी ये दलील न लोगों को संतुष्ट कर सकी और न ही पार्टी को। वीडियो पर मचे बवाल के बाद पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया। दैनिक भास्कर ने विजेता दहिया से बर्गर पर मचे विवाद, इस्तीफे और प्रोटेस्ट पर बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: आपको पार्टी से क्यों निकाल दिया? जवाब: खाना एक बेसिक बात है। आपने इतने टाइम से खाया नहीं, अंतड़ियां बाहर आने को हैं। इस पर कहा गया कि देखो ये खाना खा रहा है। प्रोपगेंडा बनाया गया। हमने वीडियो में देखा भी कि वे प्रदर्शनकारी नहीं थे, वे मनुवादी गुंडे थे। उन्हें इस बात से दिक्कत थी कि मैंने प्रेमानंद को महाराज क्यों नहीं कहा। मैंने बताया भी कि वे मेरे लिए महाराज नहीं हैं। अगर कोई एक कन्विक्टेड रेपिस्ट आसाराम को कहे कि वो मेरे राम हैं, कृष्ण हैं, तो मैं इस पर आपत्ति जताऊंगा। इस बात पर किसी को धक्का मारना, कैसे सही हो सकता है। सवाल: पद से हटाए जाने से पहले आपकी अभिजीत दीपके या बाकी लोगों से क्या बात हुई? जवाब: मुझे सुबह से कई कॉल आए। सभी ने वीडियो देखने के बाद हालचाल पूछा। सलाह दी कि मास्क लगाकर जाया करो। तभी अभिजीत का कॉल आया, तो मुझे लगा कि उसने भी हालचाल जानने के लिए किया होगा। वो पूछेगा कि मारपीट करने वाले गुंडे कौन हैं, लेकिन उसने और आशुतोष ने अचानक से कहा कि विजेता आप यहां मत आना। मैंने पूछा क्या हुआ, तो उसने कहा कि यहां मार्च चल रहा था, आपने बर्गर खा लिया। वो वीडियो चल रहा है, इसलिए आपको हटा रहे हैं। मैंने समझाया कि ये सब प्रोपेगेंडा है। मैं तो तुम्हारे साथ हूं। मैं दो रातों से एक मिनट के लिए भी नहीं सोया हूं। पुलिस यहां क्रैकडाउन न कर दे, इसके लिए लड़ाई लड़ता रहा। इसके बाद सौरव, शीतल और महेंद्र बाकी लोगों के साथ मार्च में भी हिस्सा लिया। उसके बाद ये कहा जाए कि पुलिसवाले ने विजेता को लाठी नहीं मारी, तो ये बहुत बचकानी बात है। जबकि एक महीने पहले से मुझ पर ही हमले हो रहे हैं। मेरे लिए एनकाउंटर बटन चलाया जा रहा है, जिसे 1500 लोगों ने लाइक किया है। सवाल: प्रोटेस्ट वाले दिन गीतांजलि, अभिजीत और आशुतोष सब ट्रक पर बैठे दिखे। वे प्रदर्शनकारियों को समझा रहे थे, आप वहां क्यों नहीं थे? जवाब: ये लोग शाम को मार्च के लिए निकले, तो मैं और सुधीर स्टेज संभाल रहे थे। पुलिस जंतर-मंतर खाली कर सकती थी, इसलिए हम यहीं रूके। बाद में हमें भी जोश आया तो सोचा कि मार्च में चलते हैं। पूरे इलाके में इंटरनेट बंद था, तो पता नहीं चल रहा था कि कहां क्या हो रहा है। मैं दो रात से जागा हुआ था, तो लोगों के लौटने से पहले सोचा कि जल्दी से खाना खाकर तैयार हो जाऊं, ताकि मार्च खत्म करके वापस आने वालों को संभाल सकूं। ये सब बकवास फैलाने वाले वही लोग हैं, जो देश के बाकी मुद्दे पर नहीं बोलते। इनमें एक BJP का भी है। अब ये लोग वीडियो काट-छांटकर झूठ फैला रहे हैं कि मैंने CJP प्रोटेस्टर्स को बेवकूफ कहा है। सवाल: CJP में आपको हटाने का फैसला सबकी सहमति से हुआ या वहां दो-तीन लोगों की ही चल रही है? जवाब: नहीं छोड़िए, अब इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है। सवाल: आपने कहा कि मैं किसी के लिए अकाउंटेबल नहीं हूं, लेकिन आप और आपके साथियों के नाम पर हजारों लोग जुटे। फिर ये कहना असंवेदनशीलता नहीं? जवाब: नहीं, मैंने ये कहा था कि जो प्रदर्शनकारी हैं, वे मुझे देख रहे हैं कि मैं कैसे पिछले 50 दिन से अपनी हड्डियां गला रहा हूं। उनमें से किसी को कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत उन लोगों को है, जो न मणिपुर पर बोलते हैं, न किसानों पर और न हसदेव के जंगल काटे जाने पर बोलते हैं। मेरा उनसे सिर्फ इतना कहना है कि मेरा काम तुम्हारे जैसे लोगों खुश रखना नहीं है। तुम्हारे प्रति मेरी कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं। सवाल: आपने पार्टी के लोगों से सवाल नहीं किया कि बर्गर खाने के छोटे से मसले के लिए क्यों हटा रहे हैं? जवाब: मैंने पूछा लेकिन मुझसे कहा गया कि वीडियो वायरल हो रहा है। मैंने अभिजीत से कहा कि वायरल तो ये भी हो रहा है कि भाई तुम कचोरी खा रहे थे, तो मैंने तुम्हारा बचाव किया था। मैंने साफ कहा था कि अभिजीत में कोई छल-कपट नहीं। उसने नादानी में खा लिया। वो भूख हड़ताल पर नहीं था, सोनम सर थे। मैंने अभिजीत को इतनी मजबूती से बचाव किया, लेकिन मेरे खिलाफ ही ये हो गया। सवाल: पार्टी ने उनके कचौड़ी खाने को मुद्दा क्यों नहीं बनाया, क्योंकि वो लीडर हैं? जवाब: उस पर भी कोई एक्शन नहीं होना चाहिए था और मुझ पर भी नहीं। सवाल: CJP में फैसले कैसे होते हैं, पार्टी का काम करने का तरीका क्या है। जवाब: ये सवाल आप तब करते, जब मैं प्रवक्ता था। अब ये सब बताना सही नहीं लगेगा। सवाल: क्या पार्टी में लीडरशिप की कमी है, संसद मार्च के दिन लीडरशिप क्राइसिस दिखी भी? जवाब: CJP पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, जिसके पास सैकड़ों करोड़ का फंड हो, जो अपने लिए 1500 वॉलंटियर और कैडर इकट्ठा कर ले। हजारों लोग जुटे थे। उन्हें सुरक्षा देना पुलिस का काम था, लेकिन वहां गुंडे पुलिस के साथ खड़े थे। पुलिस और बदमाश साथ काम कर रहे हैं। अब पुलिस की क्रूरता के लिए CJP तो जिम्मेदार नहीं हो सकती। सवाल: ये कैसी स्ट्रेटजी है कि आप लोगों को संसद मार्च करने के लिए 9 बजे का वक्त दे रहे हैं और आप ही पीछे हैं? जवाब: बहुत सारी प्रैक्टिकल प्रॉब्लम रहती हैं। अपनी तरफ से पूरी कोशिश की गई लेकिन एक जनआंदोलन को सीमित टीम के साथ संभालना आसान नहीं होता। वैसे भी सुरक्षा देना पुलिस का काम है, इसे आउटसोर्स नहीं किया जा सकता। सरकार की जिम्मेदारी लोगों की बात सुनना है, अगर वो सुन लेती, तो भूख हड़ताल की जरूरत ही क्यों पड़ती। ये कितनी अजीब बात है कि अपनी ही सरकार से बात करने के लिए भूख हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है, उसको भी 25 दिन हो गए हैं। सवाल: आप लोग बदलाव की पॉलिटिक्स कर रहे थे, NEET की मांग लेकर इस्तीफा मांग रहे थे। आपके साथ जो पॉलिटिक्स हुई, उसका दोषी किसे मानते हैं? जवाब: किसी को अपने विचार रखने पर धक्का मारा जाए, ये कितना अजीब है। गुंडों की इतनी हिम्मत हो जाए कि किसी के खुलकर बोलने पर उसके पीछे लग जाएं और बिना अपनी पहचान छिपाए उसे परेशान करें। फिर अपनी ही आईडी से उसके वीडियो पोस्ट कर दें। ये तभी मुमकिन है, जब उन्हें पता हो कि पुलिस कुछ नहीं करेगी। अगर लॉ एंड ऑर्डर नहीं होगा, तो समाज में सब तहस-नहस हो जाएगा। सवाल: आपको नहीं लगता ये वक्त एकजुट रहने का था। पद से हटाने के बाद भी आपको प्रदर्शन वाली जगह पर रहना चाहिए था? जवाब: मैं वैसा बेवकूफ नहीं हूं कि मुझे धमकी मिल रही है, फिर भी मैं जबरदस्ती करूं। जान है तो जहान है। पॉसिबल होगा तो जाऊंगा। प्रदर्शनकारियों से असुरक्षा नहीं है। वहां गुंडे आते रहते हैं। किसी ने इंक डाल दी। कोई हुड़दंग करने लगा। पता ही है कि वे कौन लोग हैं। सवाल: 20 मार्च की शाम जंतर-मंतर पर प्रदर्शन वाली जगह खाली हो गई थी। लगा कि प्रदर्शन खत्म हो गया है। अब ये फिर से जिंदा हो गया है। इस आंदोलन का क्या भविष्य लग रहा है? जवाब: कोशिश होनी चाहिए कि ये आंदोलन पूरे देश में फैले। अभी यहां इतनी भीड़ आई, तो कम से कम ये हुआ कि सरकार बात करने के लिए मानी। ये देशभर में फैलेगा, तो सरकार का अहंकार टूटेगा। ……………. ये खबर भी पढ़ें… क्या ‘कॉकरोचों’ को पीटना मोदी सरकार को महंगा पड़ेगा 20 जुलाई के संसद मार्च में ‘कॉकरोचों’ की पिटाई के बाद सोनम वांगचुक ने 24वें दिन भी अनशन जारी रखा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर पीएम का इस्तीफा मांगा, जिसके बाद पुलिस वालों ने उन्हें मौके से हिरासत में ले लिया। आखिर इस संसद मार्च से कॉकरोच पार्टी को क्या हासिल हुआ, इससे सरकार की मुसीबतें क्यों बढ़ सकती हैं और आगे क्या होगा; पढ़िए पूरी खबर…
तारीख: 22 जुलाई, वक्त करीब 12 बजे। दिल्ली में BJP हेडक्वॉर्टर के 5वें फ्लोर पर पार्टी के महामंत्री जुटने शुरू हुए। 15-20 मिनट के अंदर आठों महामंत्री एक साथ थे। उनके अलावा भी कई पदाधिकारी भी पहुंच गए। मसला कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से बना माहौल था। BJP में हमारे सूत्र बताते हैं कि प्रोटेस्ट तो एक महीने से चल रहा है, लेकिन इस पर पहली बार BJP ऑफिस में बैठक हुई। वो भी शॉर्ट नोटिस पर। 3 घंटे तक चली इस मीटिंग में प्रोटेस्ट के असर को खत्म करने की स्ट्रैटजी पर बात हुई। जमीन और वर्चुअल, दोनों जगह इसे काउंटर करने का प्लान तैयार किया गया। ये भी साफ कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। दो चूक भी मानी कि कांग्रेस का प्रधानमंत्री आवास पर धरने की भनक नहीं लगी और जंतर-मंतर पर भीड़ का अंदाजा नहीं लग पाया। मीटिंग के बीच ही देशभर के कार्यकर्ताओं तक मैसेज पहुंचा दिया गया कि ब्रेन स्टॉर्मिंग करें। प्रोटेस्ट और राहुल गांधी के खिलाफ क्रिएटिव और मजबूत स्लोगन तैयार करें। इस प्रोटेस्ट से पार्टी में माहौल बहुत ज्यादा गरम है। 10 बजे मैसेज, दो घंटे में हेडक्वॉर्टर पहुंचे सभी महामंत्री सुबह 10 बजे के बाद BJP ऑफिस से पार्टी के सभी महामंत्रियों और कुछ पदाधिकारियों के पास मैसेज गया। सभी को दोपहर 12 बजे तक पहुंचने के लिए कहा गया। मीटिंग की अध्यक्षता नितिन नवीन ने की। शुरुआत में ही उन्होंने साफ कर दिया कि ये मामला पेचीदा है, लेकिन 3-4 दिन के अंदर सब साफ करना है, खत्म करना है। सरकार के खिलाफ बने माहौल और विपक्ष की घेराबंदी तोड़ना है। इसका काउंटर नरेटिव तैयार करना ही होगा। काउंटर नरेटिव की स्ट्रैटजी में क्या है… 1. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। ये संविधान का उल्लंघन है। अब कांग्रेस के ऑफिस के बाहर BJP कार्यकर्ता धरना देंगे। नारे लगाएंगे- PM के प्रोटोकॉल से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं। इसी तरह के कुछ और स्लोगन भी हो सकते हैं। 2. देशभर में संगठन के अलग-अलग विंग जैसे युवा, महिला, किसान मोर्चा रैली निकालेंगे, प्रोटेस्ट करेंगे। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध की कोशिश इसका मुद्दा होगा। जमीन पर ये मैसेज देने की कोशिश की जाएगी कि प्रोटेस्ट अराजक हाथों में था। 3. 20 जुलाई को PM मोदी को संसद से सुरक्षित निकालने की खबर आई थी। इस पर कांग्रेस ने उन्हें कायर कहा। इस पर सोर्स बोले, ‘आप ही बताएं, जिस तरह से भीड़ अराजक थी, क्या नेपाल-2 की आशंका नहीं थी।’ इससे साफ हो गया कि PM के खिलाफ लगे कायर होने के नारों को इस आशंका के जरिए खत्म किया जाएगा। 4. इंटेलिजेंस के इनपुट को सामने लाया जाएगा कि ये प्रोटेस्ट नहीं, साजिश थी। बिल्कुल नेपाल की तरह मौजूदा सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ। 5. सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के समर्थन, BJP के स्टैंड को सपोर्ट करते हुए कैंपेन चलाए जाएंगे। 6. प्रोटेस्ट में शामिल हुए अराजकतत्वों की कुंडली खंगालकर सबके सामने रखी जाएगी। मतलब ये प्रोटेस्ट स्टूडेंट्स से ज्यादा अराजक भीड़ के हाथ में था। आने वाले कुछ दिनों में ये प्रूफ किया जाएगा। 7. RSS सीधे तो नहीं, लेकिन उससे जुड़े बजरंग दल और विश्व हिंदू संगठन प्रोटेस्ट के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। RSS ने इस मामले में अब तक कोई दखल नहीं दिया है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उसका रुख साफ है कि इस्तीफा नहीं लिया जाना चाहिए। सोर्स कहते हैं कि इसकी वजह प्रधान की शिक्षा व्यवस्था में RSS की सलाह और कार्यकर्ता सर्वोपरि हैं। स्मृति ईरानी के समय में RSS इस व्यवस्था से दूर था। तय हुआ कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे सोर्स ने बताया, ‘बैठक में प्रोटेस्ट के सबसे अहम किरदार धर्मेंद्र प्रधान पर स्पष्ट बात हुई। अध्यक्ष ने साफ कहा कि इस्तीफा अभी तो नहीं होगा क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो प्रोटेस्ट की कामयाबी पर मुहर लग जाएगी। इस बारे में शीर्ष नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि प्रधान पद पर बने रहेंगे।’ दो चूक: कांग्रेस का प्लान नहीं समझ पाए, भीड़ का अंदाजा नहीं हुआ बैठक में पार्टी और इंटेलिजेंस के लेवल पर हुई चूक को भी स्वीकारा गया। प्रोटेस्ट इस रूप में आएगा, इसके आकलन में पार्टी से चूक हुई। विपक्षी पार्टियां खासतौर पर कांग्रेस प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देगी, इसका अंदाजा नहीं लगा। दूसरे राज्यों से पार्टी के CM और नेता दिल्ली में जमा हुए इसकी सूचना मिली, लेकिन उनके आने का मकसद नहीं समझ पाए। कांग्रेस के इस प्लान की भनक पार्टी को नहीं लगी। दूसरी और सबसे बड़ी चूक इंटेलिजेंस के लेवल पर हुई। जंतर-मंतर पर इतनी भीड़ आएगी, विपक्षी पार्टियां क्या प्लान कर रही हैं, इसका इनपुट इंटेलिजेंस के पास नहीं था। बैठक में कहा गया इस बारे में हाईकमान इंटेलिजेंस से बात कर रहा है।
केन्या : सोने की खदान में हादसा, सुरंग ढहने से पांच खनिकों की मौत, कई के फंसे होने की आशंका
दक्षिण-पश्चिमी केन्या के नारोक काउंटी में एक सोने की खदान ढहने से कम से कम पांच खनिकों की मौत हो गई। इस घटना की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने मृतकों की पुष्टि भी की।
जॉर्डन के अमेरिकी एयर बेस पर हमले में भारतीय मूल की अमेरिकी सार्जेंट लापता, मौत की आशंका
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के मुताबिक, भारतीय मूल की अमेरिकी सैनिक एंजेला रामप्रसाद के जॉर्डन में एक सैन्य अड्डे पर हुए ईरानी हमले में मारे जाने की आशंका है।
देश की कंपनियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी तरीकों का इस्तेमाल करने का पूरा समर्थन : चीन
20 जुलाई को, यूरोपीय आयोग ने यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट के तहत चीनी कंपनी अलीएक्सप्रेस पर 55 करोड़ यूरो का जुर्माना लगाने की घोषणा की। इस पर चीनी पक्ष की क्या टिप्पणी है?
डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन के पक्ष का दस्तावेज जारी
संयुक्त राष्ट्र वैश्विक साइबर सुरक्षा स्थाई तंत्र की पहली बैठक 20 से 24 जुलाई तक न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में चल रही है। चीनी प्रतिनिधि मंडल ने इस तंत्र के सामने डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन के पक्ष का दस्तावेज पेश किया।
मानसून सत्र के तीसरे दिन भी संसद के दोनों सदनों में NEET पेपर लीक और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा छाया रहा। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और मामले पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया। इसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही काले कपड़े पहने विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ओम बिरला ने करीब डेढ़ मिनट में सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने NEET पेपर लीक पर चर्चा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगाया। इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक टाल दी गई। दोपहर 2 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठा और सदन पहले 12 बजे, फिर 2 बजे तक स्थगित हुआ। दोपहर बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना निष्पक्ष चर्चा संभव नहीं है। जवाब में नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदार बताया। बाद में उपसभापति हरिवंश ने गतिरोध खत्म कर चर्चा शुरू करने की अपील की, लेकिन विपक्ष ने नियम 267 के तहत तत्काल चर्चा की मांग दोहराई। सहमति नहीं बनने पर राज्यसभा की कार्यवाही भी अगले दिन तक स्थगित कर दी गई। उधर, संसद परिसर के बाहर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो दिखाए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसी बीच लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर संवाद की अपील की, जबकि छात्रों के संगठन ने भी सरकार से जंतर-मंतर आकर बातचीत करने का आग्रह किया। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेन ने बुधवार को रूस के कई अहम सैन्य और लॉजिस्टिक्स ठिकानों और तेल भंडार केंद्रों को पर लंबी दूरी के हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद रूस पर दबाव बनाकर उसे कूटनीति और शांति की राह पर लाना है।
डियर दिल्ली पुलिस, 20 जुलाई को देश के युवा अपनी मांग के साथ संसद की तरफ जा रहे थे। 5 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी लाठी, आंसू गैस और पत्थरों के साथ उनपर टूट पड़े। इस बीच कैमरों पर उनकी कुछ ऐसी हरकतें भी रिकॉर्ड हो गईं, जो गैरकानूनी होने के साथ किसी प्रोफेशनल पुलिस के लिए बेहद शर्मनाक भी हैं। लड़कियों पर गलत तरीके से गलत जगह डंडा मारना, बिना नेमप्लेट की वर्दी, कई के पास तो वर्दी भी नहीं। कार्रवाई के चार तरह के वीडियोज का हमने कानून की कसौटी पर एनालिसिस किया है… 1. प्रदर्शनकारी लड़कियों को गलत तरीके से पीटना ये कुछ रिकॉर्डेड मामले हैं। लड़कियों ने मीडिया कैमरों पर बताया कि पुरुष सुरक्षाकर्मी लाठियां चलाते हुए गालियां दे रहे थे। अभिजीत दीपके ने दावा किया की दिल्ली पुलिस के पुरुष अफसर ने एक लड़की के कपड़े फाड़े और उसकी छाती पर पैर देकर पीटा है। नियम-कानून क्या है? 2. ज्यादातर सुरक्षाकर्मियों के नेमप्लेट गायब थे प्रदर्शनकारियों पर डंडे चलाने वाले दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के कई जवानों ने अपने नाम वाले बैज नहीं पहने थे। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाते हुए ऐसे कई वीडियोज बनाए हैं। RAF की असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सेहरावत ने मीडिया से कहा, ‘हम कुछ प्रोटेक्टिव गियर पहनते हैं, जिसकी वजह से नेमटैग गिर सकते हैं। ये किसी के पैर के नीचे आ सकते हैं। हमें अपने नाम का सम्मान रखना होता है, इसलिए बैज निकाल देते हैं।’ दिल्ली पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने दैनिक भास्कर से कहा कि ऐसी स्थिति में नेमप्लेट टूट जाती है। ये जानबूझकर नहीं किया गया है। नियम-कानून क्या है? 3. बिना वर्दी के प्रदर्शनकारियों को पीटने वाले कौन थे नियम-कानून क्या है? 4. जरूरत से बहुत ज्यादा बल का इस्तेमाल अगर ये दावे सही हुए तो ऐसा पहली बार होगा कि दिल्ली में सिविल प्रोटेस्ट में पैलेट गन और शॉक बैटन का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन और इलेक्ट्रिक स्टन गन (शॉक बैटन) का इस्तेमाल नहीं किया गया है। ये दावे झूठे और भ्रामक हैं। इन अफवाहों को आगे न बढ़ाएं। नियम-कानून क्या हैं? दैनिक भास्कर के सवालों पर दिल्ली पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि ये सब एकतरफा कहानियां हैं, जो पुलिस के खिलाफ नैरेटिव बना रही हैं। सब कुछ सीसीटीवी पर कैद है, वीडियोग्राफी कराई गई है, इसलिए कोई छिप नहीं सकता। एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनकारियों के साथ ही बर्बरता का मुद्दा उठाया। तर्क दिया कि पुलिस की सख्ती की वीडियो सबूत मौजूद है। हालांकि CJI सूर्यकांत ने सुनवाई करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, 'हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास देखने का समय नहीं है।' प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपों वाली याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड, जैसे CCTV और अन्य फुटेज, सुरक्षित रखने को कहा है। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. राजू ने कहा कि याचिकाओं का मकसद पब्लिसिटी पाना था।इस पर हाईकोर्ट ने पूछा, आप यह कैसे कह सकते हैं कि यह पब्लिसिटी के लिए दायर याचिका है? ***** डिस्क्लेमर: इस स्टोरी में इस्तेमाल सभी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। ये विजुअल्स कॉकरोच जनता पार्टी, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों द्वारा पोस्ट किए गए हैं। दैनिक भास्कर इनकी टाइमिंग, लोकेशन और सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता। स्टोरी में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों (प्रदर्शनकारी, CJP प्रवक्ता वगैरह) के दावे हैं। ------------ ये खबर भी पढ़िए… जंतर-मंतर न जाकर, पीएम आवास क्यों पहुंचे राहुल गांधी:क्या CJP का प्रोटेस्ट हाइजैक करने की कोशिश, आगे क्या होगा 21 जुलाई की दोपहर साढ़े तीन बजे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कुछ कांग्रेसी नेताओं के साथ पैदल ही पीएम मोदी के आवास की तरफ चल दिए। न पुलिस को खबर थी, न मीडिया को। हालांकि 3 घंटे 20 मिनट बाद ही पुलिस ने बलपूर्वक राहुल-प्रियंका को उठाकर धरना खत्म करा दिया है। पूरी खबर पढ़िए…
मनीला में विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर का विभिन्न देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात का सिलसिला जारी है। इसी के तहत वो अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग से मिले।
गाजा में इजरायल बना रहा 17 किमी लंबी मिट्टी की दीवार, 'पीली रेखा' पर बढ़ी सैन्य मौजूदगी
उपलब्ध उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, इस परियोजना का काम फरवरी 2026 में शुरू हुआ था। अब तक लगभग 11 किलोमीटर लंबी मिट्टी की दीवार तैयार की जा चुकी है। योजना के मुताबिक, यह दीवार दक्षिण में खान यूनिस से लेकर उत्तर में गाजा शहर के बाहरी क्षेत्र तक बनाई जाएगी।
12वीं मंजिल से नीचे गिरा शख्स फिर भी बच गई जान, लेकिन नीचे टहल रही महिला के ऊपर गिरते ही हो गई मौत
एक ऐसी हैरान और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जिसे सुनकर कानून, विज्ञान और आम इंसान सब हैरान हैं। बहुमंजिला इमारत की 12वीं मंजिल से एक शख्स अचानक नीचे गिर गया। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद जहां किसी के भी बचने की उम्मीद ना के बराबर होती है, वहां वह शख्स चमत्कारिक रूप से जिंदा बच गया। लेकिन इस हादसे का सबसे दुखद और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जब वह नीचे गिरा, तो वहां टहल रही एक बेकसूर महिला उसके नीचे दब गई और उसकी दर्दनाक मौत हो गई।कुदरत का अजीब न्याय? मौत के मुंह से जिंदा लौट आया शख्सयह हैरान करने वाला वाकया एक रिहायशी सोसाइटी में उस वक्त हुआ जब अचानक 12वीं मंजिल की बालकनी से एक व्यक्ति का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे आ गिरा। इतनी ऊंचाई से गिरने की वजह से हवा में उसकी रफ्तार बहुत तेज थी। जमीन पर गिरते ही वहां चीख-पुकार मच गई। डॉक्टरों और चश्मदीदों के मुताबिक इस शख्स को गंभीर चोटें जरूर आई हैं और वह अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है, लेकिन उसकी धड़कनें चल रही हैं और उसकी जान पूरी तरह से सुरक्षित है। इस चमत्कार को देखकर हर कोई हैरान है कि 12वीं मंजिल से गिरने के बाद भी कोई कैसे जिंदा रह सकता है।बेकसूर महिला के लिए काल बन कर गिरा आसमान से शख्सइस हैरतअंगेज हादसे में किस्मत का सबसे क्रूर चेहरा तब देखने को मिला जब वह शख्स सीधे जमीन पर न गिरकर, नीचे वॉक कर रही एक महिला के ऊपर जा गिरा। महिला को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिला और भारी वजन व तेज रफ्तार के दबाव के कारण वह गंभीर रूप से चोटिल हो गई। मौके पर मौजूद लोग तुरंत दोनों को लेकर नजदीकी अस्पताल भागे, जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। महिला रोजाना की तरह वहां शाम को टहलने निकली थी और उसे अंदाजा भी नहीं था कि आसमान से गिरती हुई कोई आफत उसकी जिंदगी छीन लेगी।क्या यह सिर्फ एक हादसा है या लापरवाही? पुलिस जांच में जुटीइस सनसनीखेज मामले के बाद दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और लखनऊ समेत देश के तमाम हाई-राइज सोसायटियों के निवासियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीमें इस बात की बारीकी से जांच कर रही हैं कि आखिर वह शख्स 12वीं मंजिल से नीचे कैसे गिरा? क्या यह कोई आत्महत्या का प्रयास था, पैर फिसलने का हादसा था या फिर इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही थी? पुलिस ने सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि इस खौफनाक हादसे की असली वजह सामने आ सके।
वैश्विक रक्षा और सामरिक गलियारों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने सुपरपावर अमेरिका की मिलिट्री स्ट्रैटेजी और हथियारों की क्षमता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। दुनिया की सबसे आधुनिक और ताकतवर सेना होने का दावा करने वाले अमेरिका को अब मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान के आक्रामक रवैये और उसकी उन्नत ड्रोन-मिसाइल तकनीक के सामने नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ताजा खुफिया और सैन्य रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान की काउंटर-रणनीति के आगे अमेरिकी रक्षा प्रणालियां उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं जैसी उम्मीद की जा रही थी, जिसके चलते अब वाशिंगटन को यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से मिले अनुभवों और इनपुट्स का सहारा लेना पड़ रहा है।ईरान की उन्नत ड्रोन-मिसाइल तकनीक के सामने अमेरिकी एयर डिफेंस पर उठे सवालबीते कुछ समय में ईरान ने अपनी स्वदेशी मिसाइल तकनीक और कामिकेज़ (आत्मघाती) ड्रोन्स की क्षमता को बेहद घातक स्तर पर पहुंचा दिया है। खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर में अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगियों पर हुए हमलों ने यह साबित किया है कि ईरान के सस्ते लेकिन अत्यधिक प्रभावी ड्रोन्स को रोकने में अमेरिका के महंगे पैट्रियट (Patriot) और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम्स को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान की इस झुंड-हमला (Swarm Attack) रणनीति ने अमेरिकी मिलिट्री टेक की कमियों को उजागर कर दिया है, जिससे वैश्विक मंच पर वाशिंगटन की साख को बड़ा झटका लगा है।यूक्रेन से सैन्य इनपुट्स और हथियारों के अनुभवों को साझा करने की आई नौबतइस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह आया है कि अमेरिका अब यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से मिले डेटा और सैन्य इनपुट्स पर निर्भर होने लगा है। यूक्रेन पिछले काफी समय से रूसी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ईरानी ड्रोन्स (जैसे शाहेद-136) का सामना कर रहा है और उसने इन हवाई खतरों को मार गिराने की कुछ बेहद प्रभावी और कम खर्चीली तकनीकें विकसित की हैं। अमेरिकी सेना अब यूक्रेन के इसी अनुभव, काउंटर-ड्रोन डेटा और युद्ध रणनीति का बारीकी से अध्ययन कर रही है ताकि मिडिल ईस्ट में अपने हथियारों को ईरान के खिलाफ अपग्रेड कर सके। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एक सुपरपावर का इस तरह यूक्रेन के युद्ध डेटा पर निर्भर होना उसकी वर्तमान तैयारियों की पोल खोलता है।भारत और एशियाई देशों की सुरक्षा पर क्या होगा इसका सीधा असर?इस सैन्य गतिरोध का प्रभाव सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि नई दिल्ली, मुंबई और पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा रणनीतियों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। भारत हमेशा से ही अपनी रक्षा जरूरतों के लिए हथियारों के विविधीकरण (Diversification) पर जोर देता रहा है। अमेरिका के रक्षा उपकरणों में दिख रही इन कमियों के बाद, भारतीय सैन्य रणनीतिकार अब स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम (जैसे इंद्रजाल) और रूस-यूरोप के साथ रक्षा करारों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पश्चिमी देशों की सैन्य तकनीक के इस इम्तिहान ने वैश्विक बाजार में हथियारों की होड़ को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां अब महंगे से ज्यादा प्रभावी हथियारों की मांग बढ़ गई है।
महाशक्ति अमेरिका और सऊदी अरब में हुई ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील, मिडिल ईस्ट में बदला सत्ता का समीकरण
ग्लोबल पॉलिटिक्स और मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका और खाड़ी के दिग्गज सऊदी अरब के बीच एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील (परमाणु समझौता) पर सहमति बन गई है। इस समझौते के बाद अब खाड़ी देशों में शक्ति का संतुलन पूरी तरह बदलने वाला है। इस डील को न सिर्फ रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि इसने इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।न्यूक्लियर डील के पीछे क्या है वॉशिंगटन और रियाद का बड़ा प्लान?इस ऐतिहासिक परमाणु समझौते के तहत अमेरिका अब सऊदी अरब को असैन्य परमाणु तकनीक (Civil Nuclear Technology) ट्रांसफर करेगा। इसके साथ ही सऊदी अरब को अपने देश में ही यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की तकनीकी सहायता मिलने का रास्ता भी साफ हो सकता है। जानकारों का कहना है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर एक नई दिशा में ले जाना चाहते हैं। वहीं, जो बाइडन प्रशासन इस डील के जरिए मिडिल ईस्ट में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को पूरी तरह से काउंटर करना चाहता है, जिससे अमेरिकी वर्चस्व कायम रहे।पाकिस्तान के लिए क्यों लगा तगड़ा झटका और पत्ता साफ होने का डर?इस न्यूक्लियर डील का सबसे बड़ा और सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ता दिख रहा है। अब तक पाकिस्तान खुद को सऊदी अरब के सबसे करीबी सैन्य और परमाणु सुरक्षा कवच के रूप में पेश करता आया था। इतिहास गवाह है कि सऊदी अरब की वित्तीय मदद के दम पर ही पाकिस्तान ने अपना परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाया था, और बदले में वह सऊदी को सुरक्षा की गारंटी देता था। लेकिन अब अमेरिका के सीधे मैदान में आ जाने से सऊदी अरब की पाकिस्तान पर सैन्य और तकनीकी निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब से मिलने वाली मदद और उसकी कूटनीतिक अहमियत अब लगभग शून्य होने के कगार पर पहुंच गई है।भारत के लिए क्या हैं इस डील के मायने और लोकल इंपैक्ट?इस बड़ी ग्लोबल डील का असर दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत के रणनीतिक हितों पर भी देखने को मिलेगा। भारत और सऊदी अरब के रिश्ते हाल के दिनों में बेहद मजबूत हुए हैं, खासकर ऊर्जा और सुरक्षा के मोर्चे पर। अमेरिका-सऊदी की यह नजदीकी खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाएगी, जिससे वहां काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों और भारत के कच्चे तेल के आयात को सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही, चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को कमजोर करने में यह डील भारत के लिए परोक्ष रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान और चीन इस अमेरिकी एंट्री का मुकाबला कैसे करते हैं।
मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब पूर्ण युद्ध (Full-Scale War) का रूप ले चुकी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire Agreement) पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। अमेरिकी सैनिकों की मौत और होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में तेल के टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी सेना को 'आर-पार' की कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। ट्रम्प ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि हर अमेरिकी सैनिक के खून का बदला ईरान से कई गुना भारी कीमत वसूल कर लिया जाएगा।अमेरिकी CENTCOM का बड़ा हमला: ईरान के सैन्य ठिकाने और कमान सेंटर तबाहअमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के नेतृत्व में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचों पर लगातार भीषण एयरस्ट्राइक (Airstrikes) की है।मिलिट्री ऑपरेशन्स सेंटर पर बमबारी: अमेरिकी बमवर्षक विमानों और मिसाइलों ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्य सैन्य कमान केंद्रों, संचार प्रणालियों (Communication Networks) और खुफिया अड्डों को सीधा निशाना बनाया है।ड्रोन व मिसाइल लॉन्च पैड्स नष्ट: तटीय इलाकों में स्थित ईरान की एंटी-शिप मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस रडार और ड्रोन स्टोरेज डिपो पर ताबड़तोड़ हमले कर उन्हें नष्ट कर दिया गया है।नौसैनिक बेड़ों पर प्रहार: होर्मुज के आसपास गश्त लगा रही ईरानी नौसेना की कई गश्ती नौकाओं और नौसैनिक ढांचों को तबाह कर दिया गया है।होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में ठप हुआ वैश्विक तेल व्यापारदुनिया भर के 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' इस समय युद्ध का केंद्र बन गया है। ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी यातायात पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। अमेरिकी सेना जहां जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए लगातार बमबारी कर रही है, वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज पर अपना नियंत्रण ढीला नहीं करेगा। इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।कूटनीति की राह बंद, मध्य पूर्व में महायुद्ध का खतराईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने बयान जारी कर माना है कि देश इस समय अमेरिका के साथ 'पूर्ण पैमाने के युद्ध' का सामना कर रहा है। यद्यपि मध्यस्थ देश (जैसे कतर और पाकिस्तान) कूटनीतिक बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी और रोजाना हो रही भारी बमबारी ने शांति की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है। खाड़ी के अन्य देशों (कुवैत, बहरीन और जॉर्डन) में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले ड्रग्स के काले कारोबार और संगठित अपराधों के खिलाफ अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई अब भारत और कनाडा से जुड़े एक बड़े ड्रग रैकेट में शामिल भारतीय नागरिक हार्मनवीर सिंह की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आरोप है कि हार्मनवीर सिंह कनाडा में सक्रिय कुख्यात रविंदर धांडा गैंग के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क को संचालित करने में अहम भूमिका निभा रहा था।'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के तहत की जा रही है बड़ी कार्रवाईएफबीआई की ओर से यह ताजा और सख्त कदम 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' (Operation Hard Ball) के तहत उठाया गया है। यह अभियान लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर धांडा जैसे कुख्यात अपराधियों द्वारा चलाए जा रहे ट्रांसनेशनल क्रिमिनल सिंडिकेट्स के खिलाफ अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चलाई जा रही एक समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई है।कनाडा से लेकर अमेरिका और मेक्सिको तक फैला है जालएफबीआई द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, वांछित आरोपी हार्मनवीर सिंह एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन का हिस्सा है, जो नियंत्रित पदार्थों (Controlled Substances) के अवैध व्यापार, कब्जे और उनके निर्यात की बड़ी साजिश में शामिल रहा है। जांच में सामने आया है कि रविंदर धांडा का संगठित अपराध समूह मुख्य रूप से कनाडा के वैंकूवर से संचालित होता है। यह गैंग कथित तौर पर अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के विभिन्न हिस्सों में कोकीन और मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) जैसी प्रतिबंधित और खतरनाक ड्रग्स की बड़ी मात्रा में तस्करी करता है।इस महीने की शुरुआत में हुई थी 24 आरोपियों की गिरफ्तारीगौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका, कनाडा और यूरोप की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक संयुक्त और खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान भारत से जुड़े तीन ट्रांसनेशनल संगठित अपराध समूहों के कुल 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 11 अकेले कैलिफोर्निया राज्य से दबोचे गए थे। अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice) ने अपने इस मेगा ऑपरेशन के तहत कुल 37 लोगों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए हैं, जिसके बाद से अंतरराष्ट्रीय अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।
ईरान पर अमेरिका का सबसे बड़ा और प्रचंड प्रहार! लगातार 11वीं रात गूंजे धमाके, थर्राए कई शहर
मध्य पूर्व (Middle East) में महाशक्तियों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है, बल्कि हालात लगातार और अधिक विस्फोटक होते जा रहे हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे आक्रामक और लंबे सैन्य अभियानों में से एक को अंजाम देते हुए ईरान पर लगातार 11वीं रात भी भीषण हवाई हमले किए हैं। इन ताबड़तोड़ हमलों से ईरान के कई प्रमुख शहरों में जोरदार धमाके गूंज उठे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में खलबली मच गई है।सेंटकॉम ने की पुष्टि, ईरान की सैन्य क्षमता को किया जा रहा टारगेटअमेरिकी सैन्य मुख्यालय के यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान के ठिकानों पर एक बार फिर नया और बड़ा हमला बोला है। कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए अपडेट में बताया कि ये लगातार हमले ईरान की उस सैन्य क्षमता को पूरी तरह तहस-नहस करने के लिए किए जा रहे हैं, जिसके जरिए वह वैश्विक व्यावसायिक जहाजरानी (Commercial Shipping) और समुद्री मार्गों को लगातार धमकी दे रहा था। हालांकि, अमेरिकी सेना ने अभी तक इन ताजा हमलों में निशाना बनाए गए सटीक ठिकानों का खुलासा नहीं किया है।हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर छिड़ी है जंगयह पूरा संघर्ष दुनिया के सबसे अहम और संवेदनशील जलमार्ग यानी 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण और रणनीतिक वर्चस्व को लेकर है। यह मार्ग वैश्विक तेल निर्यात (Global Oil Supply) का सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य रास्ता है। अमेरिका और ईरान के बीच इसी क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है, जो अब खुले सैन्य संघर्ष में बदल चुकी है। अमेरिकी स्टील्थ बॉम्बर्स और आधुनिक मिसाइलों के आगे ईरानी रक्षा तंत्र फिलहाल काफी संघर्ष करता नजर आ रहा है।ट्रंप के सख्त तेवर, हमले और तेज होने के संकेतयह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट संकेत दिए थे कि यदि ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो अमेरिका की तरफ से इन हमलों को और अधिक तीव्र व व्यापक बनाया जाएगा। व्हाइट हाउस के कड़े रुख और अमेरिकी सेना की लगातार एयरस्ट्राइक से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक समीकरण और अधिक तनावपूर्ण हो सकता है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया से एक बेहद दिल दहला देने वाली और दुखद खबर सामने आई है। कैलिफोर्निया में हुए एक भीषण सड़क हादसे में भारत के हैदराबाद शहर के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलने के बाद से हैदराबाद स्थित उनके पैतृक आवास और रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई है।हादसे में मां और दो बच्चों की मौत, पिता और छोटी बेटी घायलप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक सड़क दुर्घटना सोमवार रात (भारतीय समयानुसार) कैलिफोर्निया में हुई, जब परिवार की कार एक अन्य वाहन से जोरदार तरीके से टकरा गई। इस भीषण टक्कर में गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान नाजिया सलमा, उनकी बेटी और उनके बेटे के रूप में हुई है। वहीं, नाजिया के पति शेख नवेद और उनकी छोटी बेटी इस भयानक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है।10 साल पहले अमेरिका गए थे शेख नवेदमृतक परिवार के स्थानीय संपर्कों और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, शेख नवेद करीब 10 साल पहले तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के सैदाबाद इलाके से बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गए थे। सोमवार को वे अपने पूरे परिवार के साथ किसी यात्रा पर निकले थे, तभी यह अनहोनी घटित हो गई। जब परिवार के बुजुर्गों ने अमेरिका में उनसे संपर्क साधने की कोशिश की, तो वहां की स्थानीय पुलिस ने फोन पर इस सड़क दुर्घटना की दुखद सूचना दी।विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इमरजेंसी वीजा की गुहारइस बड़ी त्रासदी के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शेख नवेद के पिता शेख अब्दुल सईद ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पुरजोर अपील की है कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को अमेरिका की यात्रा के लिए तत्काल आपातकालीन (Emergency Visa) जारी किया जाए, ताकि वे इस संकट की घड़ी में वहां पहुंचकर पीड़ित परिवार की मदद कर सकें। इसके अलावा, मजलिस बचाओ तहरीक (MBT) के प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी है और विदेश मंत्रालय से तुरंत वीजा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने मंगलवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पहली बार आमने-सामने मुलाकात की है। यह कूटनीतिक मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, लेबनान-इजरायल संबंधों और हिजबुल्ला को निशस्त्र करने के लिए लेबनानी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर गहन चर्चा की गई। वर्ष 2009 के बाद से व्हाइट हाउस में आमंत्रित होने वाले जोसेफ औन पहले लेबनानी राष्ट्रपति हैं, जिससे इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।दक्षिणी लेबनान में शांति स्थापित करने और रूपरेखा समझौते पर चर्चाराष्ट्रपति जोसेफ औन पिछले शनिवार से ही आधिकारिक अमेरिकी दौरे पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने से पहले उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की थी। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, औन का यह दौरा दक्षिणी लेबनान में स्थायी शांति स्थापित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि बीते 26 जून को लेबनान और इजरायल ने एक रूपरेखा समझौते (Framework Agreement) पर सहमति जताई थी, जिसमें इजरायली सेना की वापसी, हिजबुल्ला का पूर्ण निरस्त्रीकरण और भविष्य के शांति समझौतों की रूपरेखा तैयार करना शामिल है।ट्रंप का बड़ा एलान, कहा- लेबनान की भरपूर मदद करेंगेव्हाइट हाउस में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान लेबनानी राष्ट्रपति ने हिजबुल्ला को बेअसर करने और इजरायल के साथ शांति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए वाशिंगटन से कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने लेबनानी सशस्त्र बलों (LAF) को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सेना के बिना देश की व्यवस्था संभालना मुमकिन नहीं है।लेबनानी राष्ट्रपति की इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आश्वासन दिया कि अमेरिका लेबनान की भरपूर मदद करेगा। ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि लेबनान एक ऐसा देश रहा है जिसे लंबे समय से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने माना कि कई मायनों में यह एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है, लेकिन लेबनानी लोग अपने देश से प्रेम करते हैं और अमेरिका इस मुश्किल वक्त में उनकी हरसंभव सहायता करेगा।जोसेफ औन का अमेरिका दौरा आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वैश्विक कूटनीति के दृष्टिकोण से इस मुलाकात के मुख्य बिंदु:ऐतिहासिक मुलाकात: साल 2009 के बाद व्हाइट हाउस आने वाले लेबनान के पहले राष्ट्रपति हैं जोसेफ औन।मुख्य मुद्दा: दक्षिणी लेबनान में संघर्ष विराम, अमेरिकी मध्यस्थता से हुआ रूपरेखा समझौता और हिजबुल्ला का निरस्त्रीकरण।सैन्य सहायता: लेबनानी सेना (LAF) को मजबूत करने के लिए अमेरिका से निरंतर समर्थन की मांग और अमेरिकी प्रशासन का सकारात्मक आश्वासन।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका में जारी तनातनी के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार को दावा किया कि अमेरिकी सेना ने दो तेल टैंकरों के गुमराह कर गलत रास्ते पर भेजा, जिस कारण उन्हें धमाकों का सामना करना पड़ा
हूतियों की नई धमकी: सऊदी बंदरगाहों से कारोबार करने वाले जहाज बन सकते हैं निशाना
यमन के हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि जो जहाज सऊदी अरब के बंदरगाहों के साथ कारोबार करेंगे, वे सैन्य कार्रवाई का निशाना बन सकते हैं
21 जुलाई की दोपहर साढ़े तीन बजे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कुछ कांग्रेसी नेताओं के साथ पैदल ही पीएम मोदी के आवास की तरफ चल दिए। न पुलिस को खबर थी, न मीडिया को। हालांकि 3 घंटे 20 मिनट बाद ही पुलिस ने बलपूर्वक राहुल-प्रियंका को उठाकर धरना खत्म करा दिया है। आखिर पीएम आवास के बाहर अचानक धरने के लिए क्यों गए राहुल गांधी, क्या कॉकरोच पार्टी का आंदोलन हाईजैक कर लेंगे; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… 20 जुलाई से पहलेः कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट से दूरी की स्ट्रैटेजी 20 जुलाई के बादः राहुल-प्रियंका ने लाठीचार्ज पर आक्रामक रवैया अपनाया जंतर-मंतर नहीं, पीएम आवास के बाहर धरने की सीक्रेट योजना पीएम मोदी के आवास के बाहर धरने की प्लानिंग कांग्रेस ने बेहद सीक्रेट तरीके से की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं को मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन की बधाई देने के लिए उनके आवास पर बुलाया गया। खड़गे का घर पीएम मोदी के आवास के करीब है। दोपहर 3:30 बजे पैदल ही पीएम आवास की तरफ निकले और धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते केरल सीएम वीडी सतीशन, कर्नाटक सीएम डीके शिवकुमार भी प्रोटेस्ट में पहुंच गए। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सरकार की तरफ से राहुल गांधी से बात करने पहुंचे। हालांकि बात नहीं बनी। आखिरकार पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें हटा दिया। राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई कहते हैं, 'राहुल गांधी छात्रों की बेचैनी की आवाज उठाने का श्रेय खुद को या कांग्रेस पार्टी को ही दिलाना चाहते हैं। इसे बिलकुल शेयर नहीं करना चाहते हैं। वो पहले जाकर सोनम वांगचुक को जूस नहीं पिला आए। ऐसा करते तो लगता, कांग्रेस वांगचुक के आंदोलन के पीछे हैं।’ किदवई कहते हैं, ‘राहुल ने सरकार की तरफ से गलती होने का इंतजार किया। राहुल CJP के साथ खड़े नहीं हुए हैं। छात्रों के साथ खड़े हुए हैं। इससे यह जरूर साफ होता है कि राहुल गांधी पूरा गुणा-भाग करके राजनीति में कोई भी फैसला लेते हैं।' पीएम आवास के बाहर धरने पर क्यों बैठे? राहुल गांधी ने X पर लिखा, ‘हम प्रधानमंत्री मोदी के घर तक पैदल मार्च करके गए हैं, ताकि कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के लिए उनसे जवाब मांग सकें। सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।’ वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल के मुताबिक, ‘छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे को राहुल गांधी गंभीरता से ले रहे हैं। साथ ही पार्टी के नेताओं को संदेश भी दिया है कि छात्रों के मुद्दों के साथ आगे बढ़ना है। वहीं यह गृह मंत्रालय की विफलता भी है।’ वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, ‘इतने समय से सभी को लग रहा था कि CJP का आंदोलन सिर्फ 2-4 हजार छात्रों का आंदोलन है। कल जब बड़ी संख्या में भीड़ आई तो कांग्रेस को इसकी ग्रैविटी का पता लगा। कांग्रेस को लग रहा था कि आम आदमी पार्टी इसका फायदा न उठा ले, इसलिए अब राहुल गांधी आगे आए हैं।’ वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं, ‘राहुल ने CJP के प्रोटेस्ट की मांगों को और ऊपर कर दिया है। वे न केवल शिक्षा मंत्री, बल्कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का भी इस्तीफा मांग रहे हैं।’ कॉकरोच पार्टी के आंदोलन पर क्या असर पड़ेगा? नीरज चौधरी कहती हैं कि अभी जो सिचुएशन दिल्ली में है, उसका असर न केवल सिर्फ कांग्रेस-बीजेपी पर नहीं, लेकिन लगभग पूरी पॉलिटिक्स पर पड़ेगा। राहुल गांधी भी इसका राजनीतिक फायदा जरूर मिलेगा। CJP के भविष्य को लेकर एक्सपर्ट्स 3 तरह की बातें कहते हैं… ------------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर: क्या ‘कॉकरोचों’ को पीटना मोदी सरकार को महंगा पड़ेगा, 3 नई मुसीबतें; राहुल गांधी को धरने से उठाया, अब आगे क्या 20 जुलाई के संसद मार्च में ‘कॉकरोचों’ की पिटाई के बाद सोनम वांगचुक ने 24वें दिन भी अनशन जारी रखा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर पीएम का इस्तीफा मांगा, जिसके बाद पुलिस वालों ने उन्हें मौके से हिरासत में ले लिया। अभिजीत दीपके की अगुवाई में जंतर-मंतर पर वापस भीड़ जुटने लगी है। पूरी खबर पढ़िए…
दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर मंगलवार को संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी हंगामा हुआ। नीट में गड़बड़ी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े विपक्ष के कड़े रुख के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार टाली गई। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए 'वेल' में पहुंच गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा न थमने पर कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इसके बाद भी गतिरोध जारी रहने पर सदन को पहले 2 बजे और फिर बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर छात्रों पर हुई कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली पर विस्तृत चर्चा की मांग रखी। संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबा रही है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को 'सड़क से संसद तक' उठाता रहेगा। राज्यसभा में भी यही स्थिति देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लाठीचार्ज का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, लेकिन शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर 2 बजे तक टालनी पड़ी। दोपहर बाद जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तब भी स्थिति नहीं बदली। खड़गे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जैसे ही उन्होंने छात्रों पर हुई कार्रवाई पर बोलना शुरू किया, उनका माइक बंद कर दिया गया। संसद स्थगित होने के बाद विरोध की आंच बाहर तक पहुंची। विपक्ष के प्रमुख नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रधानमंत्री आवास के नजदीक धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग दोहराई। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करिए…
20 जुलाई के संसद मार्च में ‘कॉकरोचों’ की पिटाई के बाद सोनम वांगचुक ने 24वें दिन भी अनशन जारी रखा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर पीएम का इस्तीफा मांगा, जिसके बाद पुलिस वालों ने उन्हें मौके से हिरासत में ले लिया। अभिजीत दीपके की अगुवाई में जंतर-मंतर पर वापस भीड़ जुटने लगी है। आखिर इस संसद मार्च से कॉकरोच पार्टी को क्या हासिल हुआ, इससे सरकार की मुसीबतें क्यों बढ़ सकती हैं और आगे क्या होगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: संसद मार्च से कॉकरोच पार्टी को क्या हासिल हुआ?जवाबः 3 बड़े हासिल हैं… 1. कॉकरोच पार्टी को उम्मीद से ज्यादा समर्थन मिला 2. सरकार पहली बार बातचीत को तैयार हुई, मेमोरैंडम लिया 3. राहुल जैसे विपक्षी नेताओं का सपोर्ट, राजनीतिक ताकत मिलेगी सवाल-2: प्रदर्शनकारियों की पिटाई से सरकार की मुश्किलें कैसे बढ़ गईं?जवाबः सरकार के लिए अब 3 बड़ी मुश्किलें हैं... 1. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज, पीएम का भी विरोध बढ़ा 2. सोनम वांगचुक ने अनशन जारी रखने का ऐलान किया 3. मानसून सत्र में बैकफुट पर रहना पड़ सकता है सवाल-3: प्रोटेस्ट आगे बढ़ा, तो सरकार क्या कदम उठा सकती है?जवाबः सरकार के सामने 2 रास्ते हैं… 1. मांगों पर CJP से बात आगे बढ़ाए सरकार CJP के लीडर्स के साथ उनकी मांगों पर बात आगे बढ़ा सकती है, जैसा 2020-21 के किसान आंदोलन के समय हुआ था। सीनियर जर्नलिस्ट नीलांजन मुखोपाध्याय कहते हैं, ‘प्रधानमंत्री ये मांगें तभी मानेंगे, जब उन्हें लगेगा कि CJP का जनसमर्थन इतना बढ़ गया है कि वो बीजेपी का कोर वोटबैंक खींचना शुरू कर सकती है।’ 2020-21 में किसानों ने दिल्ली में घुसने के सभी सीमाई रास्ते- अटारी बॉर्डर, सिंघु, गाजीपुर, टिकरी वगैरह पर कब्जा कर लिया था। करीब 700 किसानों की मौत हो गई थी। पूरे देश में किसानों के समर्थन में लोग खड़े होने लगे थे, तब सरकार को झुकना पड़ा और किसान कानून वापस लेने पड़े। 2. धर्मेंद्र प्रधान को दूसरे रास्ते से हटाए बीजेपी का अघोषित नियम है कि किसी राजनीतिक दबाव में किसी किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं होता। इसके बजाय मोदी सरकार में परफॉरमेंस के आधार पर मंत्रियों को हटाने या उनका विभाग बदलने का पैटर्न है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया, तो संदेश जाएगा कि सरकार से गलती हुई है। सरकार एक और कठोर रुख अख्तियार कर सकती है- प्रोटेस्टर्स पर गंभीर मुकदमे दर्ज करके आंदोलन कमजोर करने की कोशिश। दिल्ली पुलिस ने प्रोटेस्ट में शामिल अज्ञात लोगों के खिलाफ 5 FIR दर्ज की हैं। इनमें दंगा करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कर्मचारियों पर हमले जैसी गंभीर धाराएं हैं। 2020 में CAA के खिलाफ शाहीन बाग में हुए प्रोटेस्ट और फिर 2023 में रेसलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों के प्रदर्शन के दौरान ऐसा हुआ है- पुलिस ने झड़प के बाद हिरासत में लेकर जंतर-मंतर खाली करवा लिया था। सवाल-4: कॉकरोच पार्टी अब आगे क्या करेगी?जवाबः कॉकरोच पार्टी फिलहाल जंतर-मंतर से प्रोटेस्ट जारी रखेगी… दीपके ने कहा था कि 11 मार्च को दोबारा संसद मार्च करेंगे, हालांकि अब उन्होंने साफ किया है कि संसद की तरफ दोबारा कूच की कोई योजना नहीं है। दीपके ने कहा, ‘अब सरकार को यहां जंतर-मंतर पर आना होगा, अब हम उनके पास नहीं जाएंगे। हम मार्च इसलिए नहीं निकाल रहे हैं, क्योंकि पुलिस ने छात्रों का खून बहाया है। इन्हें छात्रों की परवाह नहीं, लेकिन हमें है। सोनम सर अपना अनशन जारी रखेंगे और आंदोलन भी जारी रहेगा।' ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:पीएम मोदी धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर आंदोलन खत्म क्यों नहीं करा देते; इसमें 4 बड़ी अड़चनें, सरकार का गणित क्या है सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, कॉकरोच पार्टी का संसद मार्च, रोकने के लिए आंसू गैस के गोले, लाठियां, अफरा-तफरी…। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान अब भी शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर जमे हैं। सवाल उठ रहे कि आखिर पीएम मोदी धर्मेंद्र प्रधान से हटाकर आंदोलन खत्म क्यों नहीं करा देते? पूरी खबर पढ़ें…
ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर भारतीयों का दबदबा और डंका पूरी दुनिया के सामने साबित हो गया है। कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने वाले एंडी बर्नहैम ने अपनी केंद्रीय कैबिनेट का पुनर्गठन कर दिया है। राजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट से 'नए राजनीतिक मॉडल' का वादा करने वाले बर्नहैम की कैबिनेट में भारतीय मूल के दो बड़े नेताओं को बेहद अहम और ऐतिहासिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें बिहार की माटी से ताल्लुक रखने वाले कनिष्क नारायण का नाम सबसे ऊपर छाया हुआ है।बिहार के मुजफ्फरपुर से 10 डाउनिंग स्ट्रीट तक का ऐतिहासिक सफर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्मे कनिष्क नारायण ने ब्रिटेन की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्हें प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम की कैबिनेट में पहली बार कैबिनेट स्तर का दर्जा देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्री नियुक्त किया गया है। कनिष्क का यूके तक का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वह महज 12 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ बिहार से यूके के कार्डिफ चले गए थे। कार्डिफ के कैथेज हाई स्कूल से शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने विश्वप्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।सिलिकॉन वैली के अनुभव से यूके कैबिनेट तक की छलांग कनिष्क नारायण के पास टेक और पॉलिसी का जबरदस्त अनुभव है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने सिलिकॉन वैली और ब्रिटेन के टेक सेक्टर में शीर्ष पदों पर काम किया। उन्होंने कई वैश्विक कॉरपोरेट घरानों और अंतरराष्ट्रीय सरकारों को परामर्श दिया। 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी के टिकट पर उन्होंने वेल ऑफ ग्लैमरगन सीट जीतकर सबको चौंका दिया था, जिस पर पिछले 14 वर्षों से कंजर्वेटिव पार्टी का मजबूत कब्जा था। सितंबर 2025 में वे जूनियर मंत्री बने थे, लेकिन अब एआई की बढ़ती अहमियत को देखते हुए बर्नहैम सरकार ने इस विभाग को कैबिनेट का दर्जा देकर कनिष्क को इसकी पूरी कमान सौंप दी है। कनिष्क का मानना है कि एआई ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक ताकत का मुख्य आधार है। 2020 के लॉकडाउन में उन्होंने 'हेल्प योर हाई स्ट्रीट' अभियान भी चलाया था और वे थिंक-टैंक चैथम हाउस के सलाहकार भी रह चुके हैं।कोलकाता से गहरा नाता, लिसा नंदी का कैबिनेट में जलवा बरकरार बर्नहैम कैबिनेट में दूसरा बड़ा भारतीय नाम लिसा नंदी का है, जिन्होंने संस्कृति सचिव (Culture Secretary) के रूप में अपना पद बरकरार रखा है। लिसा नंदी का भारत के पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से गहरा पारिवारिक संबंध है। साल 1979 में मैनचेस्टर में जन्मी लिसा के पिता दीपक नंदी कोलकाता के रहने वाले थे, जबकि उनकी मां लुईस बायर्स ब्रिटिश मूल की हैं। न्यूकैसल यूनिवर्सिटी से राजनीति की पढ़ाई और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स करने वाली लिसा ने राजनीति में कदम रखने से पहले बेघर लोगों और बच्चों के लिए काम करने वाली शीर्ष संस्थाओं में नीति सलाहकार के रूप में सेवाएं दीं।2010 से लगातार संसद में जीत की हैट्रिक लिसा नंदी ने साल 2010 में विगन (Wigan) संसदीय सीट से चुनाव जीतकर इतिहास रचा था, जहां से वे पहली महिला और पहली एशियाई सांसद बनी थीं। जुलाई 2024 में पहली बार संस्कृति सचिव बनाई गईं लिसा नंदी ने अपनी प्रशासनिक कार्यशैली से सभी को प्रभावित किया, जिसके चलते नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भी उन पर अपना भरोसा कायम रखा है। ब्रिटेन की नई सरकार में बिहार और बंगाल मूल के इन दो युवा नेताओं की एंट्री से न सिर्फ ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी भारतीय गदगद हैं, बल्कि भारत में भी इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेब होगा बंद! क्या ₹200 पार पहुंचेगा पेट्रोल? जानिए भारत पर असर
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर एक बार फिर महासंकट के काले बादल मंडराने लगे हैं। पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनातनी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया ईंधन संकट से जूझ रही थी। अब इस संकट में आग में घी डालने का काम ईरान समर्थित यमनी हूती विद्रोहियों के संगठन अंसार अल्लाह ने कर दिया है। हूतियों ने सऊदी अरब से बदला लेने के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर और बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandab) जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकेबंदी का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यदि यह नाकेबंदी प्रभावी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिल सकता है।सना एयरपोर्ट हमले का बदला: हूतियों का 'आंख के बदले आंख' का ऐलान हूती विद्रोहियों द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि हाल ही में यमन के सना हवाई अड्डे पर सऊदी अरब की अगुआई वाले गठबंधन द्वारा हवाई हमला किया गया था। इसी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हूतियों ने अरब सागर और लाल सागर की नाकेबंदी करने का फैसला लिया है। नाकेबंदी की इस धमकी से ठीक पहले हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एक प्रमुख हवाई अड्डे पर आत्मघाती ड्रोन हमला भी किया था। संगठन का स्पष्ट कहना है कि वे सऊदी अरब को 'आंख के बदले आंख' की नीति के तहत करारा जवाब देंगे और उनके व्यापारिक मार्गों को पूरी तरह से ठप कर देंगे।सऊदी अरब की लाइफलाइन पर सबसे बड़ा खतरा लाल सागर का बाब अल-मंदेब रास्ता होर्मुज के बाद ईंधन आपूर्ति का दुनिया का दूसरा सबसे अहम और संवेदनशील समुद्री रास्ता (Chokepoint) माना जाता है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण सऊदी अरब ने फारस की खाड़ी के बजाय अपने अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात लाल सागर के रास्ते करना शुरू कर दिया था। सऊदी अरामको अपनी 746 मील लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (जिसे 'पेट्रोलीन' कहा जाता है) के जरिए 70 प्रतिशत तेल लाल सागर तक पहुंचाता है। वहां से टैंकरों के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। हूतियों के इस कदम से सऊदी अरब का यह प्रमुख निर्यात मार्ग पूरी तरह से खतरे में पड़ गया है।होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों बंद: 30% फ्यूल सप्लाई पर पड़ेगा डाका आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, यह संकट कितना गंभीर है इसे गणित के इन साधारण आंकड़ों से समझा जा सकता है:होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभाव: दुनिया के कुल तेल प्रवाह का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज से गुजरता है, जिसे तेहरान ने पहले ही अवरुद्ध कर रखा है।बाब अल-मंदेब का प्रभाव: सामान्य दिनों में वैश्विक तेल शिपमेंट का 10 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।संयुक्त प्रभाव: यदि हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब को पूरी तरह से सील कर देते हैं, तो दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा एक झटके में कट जाएगा।क्या बेकाबू होंगे पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम? हूती मीडिया दफ्तर के उप प्रमुख नसरुद्दीन आमेर ने साफ किया है कि सऊदी अरब के दुश्मन जहाजों के लिए बाब अल-मंदेब का रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा। बाब अल-मंदेब का दक्षिणी प्रवेश मार्ग बेहद संकरा है, जिससे थोड़े से सैन्य प्रयास से भी जहाजों की आवाजाही को रोका जा सकता है। पूर्व में भी हूती विद्रोहियों ने इस इलाके में लगभग 100 वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था। यदि आपूर्ति में 30 फीसदी की भारी गिरावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी का खतरा पैदा हो गया है।
भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक ताकत के आगे पाकिस्तान किस कदर बेबस हो चुका है, इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। पानी की बूंद-बूंद को मोहताज होता पाकिस्तान अब सिंधु जल समझौते को दोबारा बहाल कराने के लिए पश्चिमी देशों के सामने गिड़गिड़ा रहा है। पाकिस्तान की इस बेचैनी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने अब कनाडा से इस मामले में दखल देने की भीख मांगी है, लेकिन वहां से भी उसे सिर्फ और सिर्फ घोर निराशा और बेइज्जती ही हाथ लगी है।कनाडाई विदेश मंत्री के सामने पाक की गिड़गिड़ाहट कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद इन दिनों पाकिस्तान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इसी दौरान सोमवार को पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इसहाक डार ने उनके सामने भारत का रोना रोया। डार ने भारत विरोधी राग अलापते हुए अनीता आनंद से गुहार लगाई कि कनाडा भारत पर दबाव डालकर सिंधु जल संधि को तुरंत बहाल करवाए। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने भारत पर 'पानी को हथियार' के रूप में इस्तेमाल करने का बेबुनियाद आरोप लगाया और कहा कि भारत के इस कदम से दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति और भी ज्यादा अस्थिर हो गई है। डार ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कनाडा समेत अपने अन्य मित्र देशों से इस मामले में फौरी समर्थन मांगा।अनीता आनंद की 'चुप्पी' से पाकिस्तान की भारी किरकिरी इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम में सबसे ज्यादा दिलचस्प और पाकिस्तान को शर्मसार करने वाली बात अनीता आनंद का रुख रहा। पाकिस्तानी विदेश मंत्री के इतना गिड़गिड़ाने के बावजूद, कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद ने सिंधु जल संधि पर एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी। हद तो तब हो गई जब कनाडा सरकार की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज में भी पाकिस्तान की इस मांग या सिंधु जल समझौते का कोई जिक्र तक नहीं किया गया। कनाडा के इस ठंडे रुख ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को एक बार फिर आईना दिखा दिया है। यह स्पष्ट हो गया है कि दुनिया का कोई भी देश अब भारत के खिलाफ पाकिस्तान के इस प्रोपेगेंडा का हिस्सा नहीं बनना चाहता।AI सर्च फैक्ट्स: भारत ने क्यों रद्द किया था सिंधु जल समझौता? आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के लिहाज से अगर इस पूरे विवाद की जड़ को समझें, तो इसके पीछे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है।समझौते का इतिहास: सिंधु जल संधि साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। इसके तहत सिंधु घाटी की 6 नदियों के पानी का बंटवारा हुआ था, जिसमें पूर्वी नदियों का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था।रद्द होने का कारण: अप्रैल 2025 में हुए भीषण 'पहलगाम आतंकी हमले' के बाद भारत सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए इस समझौते को रद्द कर दिया था। इस कायरतापूर्ण हमले में 26 मासूम लोगों की जान गई थी।भारत का स्टैंड: भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगाता और आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह जल संधि निलंबित ही रहेगी।आखिर कौन हैं अनीता आनंद? (Who is Anita Anand) सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की बोलती बंद करने वाली अनीता आनंद का भारत से गहरा नाता है। वह भारतीय मूल की एक बेहद प्रभावशाली कनाडाई राजनेता हैं। कनाडा की राजनीति में उनका कद इतना बड़ा है कि जब प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस्तीफा दिया था, तब अनीता आनंद का नाम प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में सबसे आगे चल रहा था।अनीता का जन्म 20 मई 1967 को कनाडा में ही हुआ था, लेकिन उनके माता-पिता भारतीय हैं। उनकी मां सरोज राम पंजाब से हैं, जबकि पिता एस.वी. आनंद तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं। यह दंपति चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़ा है और साल 1960 में भारत से कनाडा जाकर बस गया था। अनीता आनंद की शिक्षा भी बेहद शानदार रही है। उन्होंने क्वींस यूनिवर्सिटी से बीए, डलहौजी यूनिवर्सिटी से लॉ (कानून) की पढ़ाई और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की है।राजनीति में आने से पहले अनीता आनंद ने एक सफल वकील और टोरंटो यूनिवर्सिटी में कानून की प्रोफेसर के रूप में अपना करियर बनाया। साल 2019 में उन्होंने ओकविले से सांसद का चुनाव जीता और कनाडा की शीर्ष राजनीति में अपनी जगह पक्की की। उनकी शादी प्रोफेसर जॉन से हुई है और उनके चार बच्चे हैं। भारतीय मूल की होने के नाते उनके कड़े रुख को भारत के कूटनीतिक प्रभाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
'कोई समझौता नहीं...': PoK में शहबाज़ सरकार के खिलाफ भड़का जनआक्रोश, 23 जुलाई को बड़े धमाके की तैयारी
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में छिड़ा भीषण जनआक्रोश अब पाकिस्तान की शहबाज़ शरीफ सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा यह ऐतिहासिक आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र रूप धारण करता जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रशासनिक समझौते की उड़ रही अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए JAAC ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तानी हुक्मरानों के साथ कोई लिखित समझौता नहीं हुआ है और आंदोलन बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहेगा।फर्जी प्रोपेगैंडा खारिज: 'जब तक मांगें पूरी नहीं, तब तक आंदोलन जारी'JAAC की कोर कमेटी ने मंगलवार को एक प्रेस बयान जारी कर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसी भी तरह के समझौते की खबरों को बेबुनियाद प्रोपेगैंडा करार दिया। संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों से बातचीत जरूर हुई है, लेकिन जब तक हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई और स्थानीय जनता की बुनियादी मांगों पर लिखित सहमति नहीं बनती, तब तक आंदोलन खत्म करने का सवाल ही नहीं उठता। नेताओं ने समर्थकों से सावधान रहने और ऐसी किसी भी झूठी खबर पर भरोसा न करने की अपील की है।नीलम घाटी से लेकर पुंछ और मुजफ्फरपुर तक पूर्ण बंद की अपीलआंदोलन को और धार देने के लिए JAAC नेता राजा इखलाक अहमद ने नीलम घाटी के व्यापारियों और आम नागरिकों से पूरे क्षेत्र में बाजार बंद रखकर अभूतपूर्व एकजुटता दिखाने का आह्वान किया है। वहीं, संगठन के वरिष्ठ रणनीतिकार उमर नजीर कश्मीरी ने मीरपुर, मुजफ्फराबाद और पुंछ डिवीजनों के निवासियों से 23 जुलाई को होने वाले विशाल धरने और सिट-इन प्रदर्शनों में सड़कों पर उतरने की पुरजोर अपील की है। समूचे PoK में इस समय पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ भारी विरोध देखा जा रहा है।23 जुलाई को होने वाला है बड़ा ऐलान: पाकिस्तान की बढ़ी टेंशनJAAC ने 23 जुलाई की तारीख को इस जन आंदोलन के इतिहास में एक नया 'टर्निंग पॉइंट' घोषित किया है। कश्मीरी ने कहा कि 23 जुलाई को पूरे आंदोलन का भविष्य तय करने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घोषणा की जाएगी। हालांकि, इस घोषणा के सस्पेंस ने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। JAAC की मुख्य मांगों में गिरफ्तार नेताओं की रिहाई के साथ-साथ बिजली, पानी, सब्सिडी और बुनियादी अधिकारों की बहाली शामिल है, जिसके बिना जनता पीछे हटने को तैयार नहीं है।
CIA, RAW और मोसाद को तो सब जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है चीन की खुफिया एजेंसी का असली नाम
दुनियाभर के देशों में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, सामरिक हितों और सामरिक जानकारियों को सुरक्षित रखने के लिए शक्तिशाली खुफिया एजेंसियों का गठन किया जाता है। जब भी दुनिया की सबसे खतरनाक और ताकतवर जासूसी एजेंसियों का जिक्र होता है, तो लोगों की जुबान पर सबसे पहले अमेरिका की सीआईए (CIA), भारत की रॉ (RAW), इजराइल की मोसाद (Mossad), पाकिस्तान की आईएसआई (ISI) और रूस की केजीबी (KGB/FSB) जैसी एजेंसियों के नाम आते हैं। फिल्मों से लेकर किताबों तक में इन खुफिया तंत्रों के कारनामों के खूब चर्चे होते हैं, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आज के दौर में दुनिया की महाशक्ति बनने की होड़ में सबसे आगे रहने वाले चीन की खुफिया एजेंसी का असल नाम क्या है और यह कैसे काम करती है? आज के इस विशेष लेख में हम आपको दुनिया के सबसे रहस्यमयी और ताकतवर जासूसी तंत्र के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।क्या है चीन की खुफिया एजेंसी का नाम और इसका इतिहासदुनिया भर में अपनी विस्तारवादी नीतियों और अत्याधुनिक सर्विलांस तकनीकों के लिए चर्चित चीन की मुख्य खुफिया और सुरक्षा एजेंसी का नाम 'मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी' यानी एम्सएसएस (Ministry of State Security - MSS) है। चीनी भाषा में इसे 'गुओआनबू' (Guoanbu) के नाम से जाना जाता है। इस एजेंसी का गठन साल 1983 में कई पुरानी खुफिया और पुलिस इकाइयों का विलय करके किया गया था। तब से लेकर आज तक यह संस्था बीजिंग सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे बड़े हथियारों में से एक के रूप में काम कर रही है। एमएएस (MSS) का मुख्य कार्य देश के भीतर असंतोष को दबाना, विदेशी जासूसों का पता लगाना और दुनिया भर से सामरिक, वैज्ञानिक व आर्थिक गुप्त जानकारियां जुटाना है।मोसाद और सीआईए से कितनी अलग और खतरनाक है चीन की MSSजब तुलना इजराइल की मोसाद या अमेरिका की सीआईए से की जाती है, तो चीन की एमएसएस (MSS) काम करने के तरीकों में थोड़ी अलग नजर आती है। मोसाद अपनी आक्रामक टारगेटेड हत्याओं और अभियानों के लिए जानी जाती है, और सीआईए दुनिया भर में राजनीतिक तख्तापलट या सैन्य दखल के लिए चर्चित रही है, वहीं चीन की खुफिया एजेंसी 'साइबर जासूसी', 'इंडस्ट्रियल एस्पियोनेज' यानी औद्योगिक चोरी और बड़े पैमाने पर डिजिटल सर्विलांस में महारत रखती है। यह एजेंसी चुपचाप बिना किसी शोर-शराबे के दूसरे देशों की बड़ी टेक कंपनियों, सरकारी डेटाबेस और रक्षा अनुसंधान संस्थानों में सेंध लगाकर चीन के लिए आवश्यक तकनीक और रणनीतिक ब्लूप्रिंट चुराने का काम करती है।आधुनिक तकनीक और ग्लोबल इन्फ्लुएंस का खतरनाक मिश्रणआज के इस डिजिटल और एआई (AI) के दौर में चीन की खुफिया एजेंसी ने अपने काम करने के तरीकों में भारी बदलाव किया है। अंतरिक्ष तकनीक से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोमेट्रिक डेटा चोरी तक, एमएसएस दुनिया भर में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नए जमाने के हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। इसके एजेंट दुनिया के कोने-कोने में कूटनीतिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक आवरण के पीछे छिपकर काम करते हैं। यही वजह है कि आज के समय में इस रहस्यमयी चीनी एजेंसी को दुनिया की सबसे खतरनाक और चुनौतीपूर्ण खुफिया ताकतों में गिना जाता है, जिस पर पश्चिमी देशों की सुरक्षा एजेंसियों की हमेशा पैनी नजर रहती है।
होर्मुज में एक और तेल टैंकर स्वाहा, ओमान तट के पास हुआ हमला, ब्रिटिश सैन्य एजेंसी का दावा
मध्य पूर्व के बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान के तट के पास एक बार फिर से एक बड़े तेल टैंकर पर खतरनाक हमले की खबर सामने आई है। ब्रिटिश सेना की समुद्री व्यापार संचालन एजेंसी (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए दुनिया भर के देशों और शिपिंग कंपनियों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इस ताजा हमले के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से गहराने लगी हैं। आइए जानते हैं कि इस सनसनीखेज घटना के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ने वाला है।ब्रिटिश सैन्य एजेंसी का बड़ा दावा और हमले की पूरी डिटेलब्रिटिश सेना की मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने जानकारी दी है कि ओमान के तट के करीब गुजर रहे एक कमर्शियल तेल टैंकर को निशाना बनाया गया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हमला ओमान के डुक्म पोर्ट के आसपास हुआ, जिससे टैंकर को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही संबंधित सुरक्षा एजेंसियां और युद्धपोत हरकत में आ गए हैं और प्रभावित जहाज की मदद के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल हमले के बाद से इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले अन्य जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि किसी भी बड़ी अनहोनी से बचा जा सके।क्यों संवेदनशील है ओमान तट और होर्मुज जलडमरूमध्य का इलाकादुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने इस्तेमाल के लिए कच्चे तेल का आयात मध्य पूर्व के देशों से करता है, और इसके परिवहन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे मुख्य और व्यस्त रास्ता है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलमार्ग वैश्विक क्रूड ऑयल ट्रेड का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। जब भी इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले या नाकाबंदी जैसी घटनाएं होती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन की रफ्तार थम जाती है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस इलाके में लगातार हो रही इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय अस्थिरता को और ज्यादा बढ़ा रही हैं, जिससे दुनिया भर की बड़ी महाशक्तियों की नींद उड़ गई है।वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर मंडराया बड़ा खतराइस ताजा हमले के बाद से कमोडिटी मार्केट और शेयर बाजार के जानकारों में गहरी चिंता देखी जा रही है। यदि होर्मुज और ओमान के तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी नहीं की गई और इस तरह के हमले जारी रहे, तो ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग सकती है, जिसका सीधा असर भारत समेत तमाम देशों में पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों की महंगाई पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में निवेशकों और सरकारों की नजरें इस रणनीतिक रूट पर होने वाली हर एक गतिविधि पर टिकी रहेंगी।
अब्बा के इशारे पर हूतियों ने फंसाई पाकिस्तान के यार की गर्दन, हुक्का-पानी बंद और तेल में लगेगी आग
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मध्य पूर्व के घटनाक्रम में एक बार फिर से बेहद नाटकीय और तनावपूर्ण मोड़ आ गया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने अब सीधे तौर पर पाकिस्तान के सबसे करीबी रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार माने जाने वाले देश को अपने निशाने पर ले लिया है। हूतियों द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम से उस देश की आर्थिक गर्दन बुरी तरह फंस गई है और वहां हड़कंप मच गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे परोक्ष रूप से 'अब्बा' यानी वैश्विक ताकतों और क्षेत्रीय दिग्गजों का बड़ा इशारा है, जिसके चलते आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में भयंकर आग लग सकती है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल की पूरी कहानी और इसके दूरगामी प्रभावों को आइए आसान भाषा में समझते हैं।हूतियों के इस नए पैंतरे से कैसे कटी पाकिस्तान के यार की सांसेंमध्य पूर्व के जलमार्गों और कमोडिटी सप्लाई पर अपनी पकड़ मजबूत करने वाले यमन के हूती विद्रोहियों ने एक ऐसे देश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को संभालने में अहम भूमिका निभाता रहा है। हूतियों द्वारा की गई इस नाकाबंदी और सख्त आर्थिक पाबंदियों के कारण उस देश का हुक्का-पानी लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। आयात-निर्यात पूरी तरह से ठप होने की वजह से वहां की सरकार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। चूंकि यह देश पाकिस्तान का बहुत करीबी यार माना जाता है, इसलिए इस संकट की आंच सीधे तौर पर इस्लामाबाद तक भी पहुंच रही है और कूटनीतिक गलियारों में चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।वैश्विक इशारों पर चल रहा है पूरा खेल, तेल बाजार पर मंडराया संकटकूटनीतिक जानकारों का कहना है कि हूती विद्रोहियों की यह कार्रवाई कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े भू-राजनीतिक समीकरण और परोक्ष इशारे काम कर रहे हैं। इस विवाद के तूल पकड़ने से लाल सागर और आसपास के प्रमुख समुद्री मार्गों से होने वाले तेल के परिवहन पर सीधा असर पड़ा है। यदि यह गतिरोध जल्द ही नहीं सुलझाया गया, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होगी जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और ऊर्जा के दाम आसमान छूने लगेंगे। भारत समेत कई प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाएं भी इस वैश्विक उठापटक के प्रभाव से अछूती नहीं रहेंगी।निवेशकों और आम आदमी पर क्या पड़ेगा इसका असरजब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के बड़े ट्रेड रूट या ऊर्जा आपूर्ति वाले देशों में संकट गहराता है, तो उसका सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों और महंगाई पर पड़ता है। तेल की कीमतों में संभावित उछाल के कारण लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। जानकारों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में मिडिल ईस्ट के इन हालातों पर दुनिया भर के निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की पैनी नजर रहने वाली है, क्योंकि यह नया भू-राजनीतिक तनाव ग्लोबल इकोनॉमी की चाल को पूरी तरह से बिगाड़ सकता है।
Donald Trump का बड़ा झटका! कनाडा पर 50% टैरिफ का ऐलान, महंगाई और ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ा
वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पड़ोसी देश और पक्के सहयोगी माने जाने वाले कनाडा पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकांश कनाडाई सामानों पर भारी-भरकम 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यह नया शुल्क आदेश लागू होने से वैश्विक स्तर पर एक बार फिर से आर्थिक हलचल तेज हो गई है और एक नए ट्रेड वॉर का खतरा मंडराने लगा है। इस बड़े फैसले से किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव होगा, आइए इसे विस्तार से जानते हैं।क्यों उठाया गया यह सख्त कदम और किन उत्पादों पर गिरेगी गाजव्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम कनाडा द्वारा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के खिलाफ लगातार किए जा रहे भेदभावपूर्ण रवैये के जवाब में उठाया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कनाडा ने अमेरिकी सामानों के साथ अनुचित व्यवहार किया है, जिसके चलते यह कड़ा निर्णय लेना जरूरी हो गया था। इस नए 50% टैरिफ के दायरे में वाइन, सीमेंट और यहाँ तक कि खेल से जुड़े सामान जैसे हॉकी स्टिक भी शामिल किए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस सूची से ऊर्जा उत्पादों, मछली, क्रिटिकल मिनरल्स और पोटाश को फिलहाल बाहर रखा गया है।30 दिन का मिला वक्त, बातचीत से हल निकालने की उम्मीदयह नया टैरिफ आदेश तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किया गया है, बल्कि इसे प्रभावी होने में अभी 30 दिन का समय है। व्हाइट हाउस के इस फैसले से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के रास्ते खुले रखने का मौका मिला है। दूसरी ओर, कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी सरकार ने अमेरिकी पक्ष के साथ इस विवाद को सुलझाने के लिए पहले ही व्यापक प्रस्ताव दिए हैं। कनाडाई अधिकारियों और व्यापार संगठनों का मानना है कि इस 30 दिन की अवधि का उपयोग करके दोनों देशों को आपसी बातचीत के जरिए इस गंभीर गतिरोध को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए।वैश्विक बाजार और महंगाई पर क्या होगा असरअमेरिका और कनाडा के बीच इस प्रकार का बड़ा व्यापारिक टकराव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के शेयर बाजारों और कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिलता है। जानकारों का मानना है कि यदि यह विवाद समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इससे ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। आयात शुल्क में इतनी भारी बढ़ोतरी होने से अमेरिका में उपभोक्ताओं के लिए चीजें महंगी हो सकती हैं, जिससे महंगाई के एक नए दौर के शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। अब पूरी दुनिया की नजरें अगले 30 दिनों के दौरान होने वाली बैठकों और दोनों देशों के रुख पर टिकी हुई हैं
अंतरिक्ष (Space) की असीम गहराइयों में सुपरपावर्स के बीच वर्चस्व की नई जंग छिड़ चुकी है। चीन के एक नए और बेहद गोपनीय स्पेस मिशन— सीक्रेट रीयूजेबल स्पेस प्लेन (Shenlong ) और उसकी ऑर्बिटल गतिविधियों ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) और अमेरिकी स्पेस फोर्स (US Space Force) की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अमेरिका को डर सताने लगा है कि यदि चीन की यह रफ्तार जारी रही, तो वह बहुत जल्द अंतरिक्ष में अमेरिका के दशकों पुराने एकछत्र दबदबे को खत्म कर देगा। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो उपग्रहों को ट्रैक करने वाले विशेषज्ञों और यूएस स्पेस कमांड ने चीन द्वारा पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में बिना किसी पूर्व सूचना के रहस्यमयी ऑब्जेक्ट्स (Mysterious Objects) छोड़ने और सिग्नल ट्रांसफर करने पर गहरी चिंता जताई है।चीन के सीक्रेट स्पेस प्लेन ने क्यों बढ़ाई अमेरिका की टेंशन?चीन का यह स्पेस प्लेन देखने में अमेरिका के मशहूर एक्स-37बी (US Space Force X-37B) जैसा ही एक मानव रहित रीयूजेबल स्पेसक्राफ्ट है:अंतरिक्ष में रहस्यमयी गतिविधियां: हालिया मिशन के दौरान चीन के इस स्पेस प्लेन ने कक्षा में लंबे समय तक चक्कर लगाते हुए कुछ अज्ञात पेलोड और स्मॉल सैटेलाइट्स छोड़े हैं, जो अमेरिकी सैन्य उपग्रहों के करीब मंडराते देखे गए हैं।एंटी-सैटेलाइट और सर्विलांस क्षमता: पेंटागन के जनरलों का मानना है कि चीन इस गुप्त मिशन के जरिए 'काउंटर-स्पेस' तकनीकों का परीक्षण कर रहा है—जैसे कि युद्ध की स्थिति में दुश्मन के सैटेलाइट्स को जाम करना, सिग्नल इंटरसेप्ट करना या उन्हें नष्ट करना।उत्तर अमेरिका के ऊपर सिग्नल बीमिंग: सैटेलाइट ट्रैकर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जब यह चीनी यान उत्तरी अमेरिका के ऊपर से गुजरता है, तो यह जमीन पर मजबूत सिग्नल भेजता है, जिससे खुफिया जासूसी की आशंका गहरा गई है।अमेरिका खो सकता है अपना दबदबा - US स्पेस फोर्स की चेतावनीअमेरिकी स्पेस कमांड के शीर्ष अधिकारियों ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम (Chinese Space Program) केवल वैज्ञानिक खोजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य बढ़त हासिल करना है:स्पेस रेस में चीन की छलांग: चीन ने अपना खुद का 'तिआंगोंग' (Tiangong) स्पेस स्टेशन स्थापित कर लिया है और वह 2030 तक चंद्रमा पर इंसानों को भेजने और लूनर बेस बनाने के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है।सस्ते और फास्ट-टैप लॉन्च: चीन हर साल दर्जनों वाणिज्यिक व सैन्य उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर रहा है, जिससे अंतरिक्षीय निगरानी क्षमता में अमेरिका और चीन का अंतर बहुत तेजी से घट गया है।क्या शुरू हो चुकी है 'स्पेस वॉर' की नई होड़?विशेषज्ञों का कहना है कि जहां अमेरिका स्पेसएक्स (SpaceX Starshield) और नासा के जरिए अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं चीन अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में झोंक रहा है। अंतरिक्ष का यह ध्रुवीकरण भविष्य में भू-राजनीतिक (Geopolitical) संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।
यूक्रेन में कार्गो जहाज पर हमला, चार भारतीयों की मौत; भारत ने जताया कड़ा विरोध
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह हमला 19 जुलाई की शाम उस समय हुआ जब गिनी-बिसाऊ के झंडे वाला कार्गो जहाज ओडेसा से रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 17 क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे।
अमेरिका और कनाडा के बीच जारी व्यापारिक तनाव अब अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कनाडाई उत्पादों पर 50% का भारी सीमा शुल्क (Tariff) लगाने का बड़ा ऐलान किया है। ट्रम्प प्रशासन ने कनाडा पर अमेरिकी ऑटोमोबाइल, अल्कोहल (शराब) और डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ भेदभावपूर्ण रवैया (Discriminatory Treatment) अपनाने का आरोप लगाते हुए यह कड़ा कदम उठाया है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो 1930 के ऐतिहासिक 'टैरिफ एक्ट की धारा 338' (Section 338 of the Tariff Act of 1930) का इस्तेमाल कर लगाया गया यह टैरिफ दोनों पड़ोसी देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (USMCA/CUSMA) की नींव को हिलाकर रख देगा।किन कनाडाई सामानों पर लागू होगा 50% का टैरिफ?व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी और राष्ट्रपति के तीन आधिकारिक आदेशों के अनुसार, यह 50% टैरिफ अगले 30 दिनों के भीतर प्रभावी हो जाएगा:शामिल सामान: कनाडाई वाइन, बीयर, व्हिस्की, सिमेंट, फर्नीचर, कपड़े, कागज, हॉकी स्टिक और अन्य खेल के सामान पर 50% टैक्स लगेगा।छूट प्राप्त क्षेत्र: ऊर्जा (ऑयल एंड गैस), पोटाश, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) और समुद्री मछलियों जैसे आवश्यक कच्चे माल को फिलहाल इस भारी टैरिफ से बाहर रखा गया है।USMCA समझौते पर चोट: ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह 50% शुल्क उन सामानों पर भी लागू होगा जो अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (USMCA) के तहत आते हैं।ट्रम्प प्रशासन ने क्यों उठाया यह सख्त कदम?व्हाइट हाउस और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने इस फैसले के पीछे 3 प्रमुख कारण बताए हैं:अल्कोहल पर प्रांतीय प्रतिबंध: कनाडा के अधिकतर प्रांतों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अमेरिकी शराब और अल्कोहल उत्पादों की खरीद व बिक्री पर रोक लगाना।ऑटो सेक्टर में भेदभाव: अमेरिकी निर्मित वाहनों पर 25% का जवाबी टैरिफ और कोटा सिस्टम लागू करना, जिससे अमेरिकी ऑटो कंपनियों का निर्यात 22% तक घट गया।डेयरी कोटा (Dairy Quotas): यूरोपीय संघ (EU) के मुकाबले अमेरिकी पनीर और डेयरी उत्पादों के साथ कनाडाई बाजार में असमान व्यवहार करना।कनाडा का पलटवार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असरकनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने ट्रम्प के इस कदम को USMCA समझौते का एकतरफा उल्लंघन करार दिया है। कनाडा का कहना है कि उन्होंने अमेरिका द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ के जवाब में ही केवल समान कदम उठाए थे।महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता: अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। इस ट्रेड वॉर से दोनों देशों में सप्लाई चेन बाधित होगी, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें और महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है।भारत और वैश्विक बाजारों पर प्रभाव: दो बड़े पश्चिमी आर्थिक भागीदारों के बीच ट्रेड वॉर छिड़ने से वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि, भारत जैसे देशों के लिए उत्तर अमेरिकी बाजार में कपड़ा, सीमेंट और मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट के कुछ नए अवसर भी खुल सकते हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध का दायरा अब पूरी दुनिया के लिए खतरनाक और बेहद चिंताजनक बनता जा रहा है। काला सागर (Black Sea) में यूक्रेन के ओडेसा (Odesa) बंदरगाह के पास गश्त कर रहे एक वाणिज्यिक व्यापारिक जहाज (Commercial Vessel) पर हुए अचानक मिसाइल हमले ने भारत को गहरा झटका दिया है। इस भयावह हमले में जहाज पर सवार 4 भारतीय नाविकों (Indian Seafarers) की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि कई अन्य चालक दल के सदस्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो निर्दोष भारतीय नागरिकों की इस जानलेवा घटना पर भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा रुख अपनाया है।विदेश मंत्रालय (MEA) का सख्त बयान: निष्पक्ष जांच की मांगभारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने इस घटना पर गहरा दुख और कड़ा ऐतराज जताते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है:कड़ी निंदा: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और व्यापारिक समुद्री रास्तों (Commercial Shipping Lanes) में निर्दोष नागरिकों और मालवाहक जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग: भारत ने मामले की पूरी निष्पक्ष जांच कराने और हमला करने वाले जिम्मेदार पक्षों पर कानूनी व राजनयिक दबाव बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।दूतावास अलर्ट पर, पार्थिव शरीर भारत लाने की कवायद शुरूविदेश मंत्रालय और यूक्रेन व पोलैंड स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassies) लगातार स्थानीय अधिकारियों और शिपिंग कंपनी के संपर्क में बने हुए हैं:मृतकों की पहचान: मारे गए चारों भारतीय नाविकों के परिवारों को सूचित किया जा रहा है और उनकी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।पार्थिव शरीर वापसी: भारतीय दूतावास की टीम घायलों को तुरंत बेहतर इलाज मुहैया कराने और मृत नाविकों के पार्थिव शरीरों को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक भारत वापस लाने की कागजी व कूटनीतिक कार्रवाई में जुटी हुई है।ब्लैक सी में बढ़ा समुद्री व्यापार का खतरायूक्रेन-रूस संघर्ष के बीच ओडेसा और ब्लैक सी का समुद्री रास्ता वैश्विक अनाज और ईंधन आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस ताजा मिसाइल हमले के बाद से वाणिज्यिक जहाजों (Merchant Ships) के चालक दल में दहशत का माहौल है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इस मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए अलर्ट स्तर बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे इन हमलों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) पर और बुरा असर पड़ सकता है।
पीओके में जेएएसी का आंदोलन जारी, 23 जुलाई को बड़े प्रदर्शन का ऐलान
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्वैच्छिक बंद और चक्का जाम जारी रहेगा। समिति ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग धरना-प्रदर्शनों में शामिल हैं और आंदोलन लगातार जारी है
अमेरिका की ओर से जारी हमले और बयानबाजी पर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों ने शायद हमारी समझ को अपनी बुद्धि की तरह ही कमजोर मान रखा है
पंजाब के अमृतसर से करीब 115 किमी दूर फिरोजपुर का चक मारन गांव। रात करीब 9 बजे का वक्त। एक गुरुद्वारे के बाहर चप्पलों का ढेर लगा दिखा। गेट खोला तो अंदर बरामदे की दीवार पर बड़ा सा प्रोजेक्टर लगा था, जिस पर फिल्म चल रही थी। फिल्म के सीन में लोगों के हाथों में 'स्टॉप फेक किलिंग' का पोस्टर था और आसपास पुलिस खड़ी थी। लोग चिल्ला रहे थे- ‘पंजाब पुलिस जवाब दो। CBI जांच शुरू करो। सुरजीत सिंह सुग्गा हाय हाय।‘ सीन फिल्म सतलुज का है, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर बनी है। उन्होंने पंजाब में 1990 के दशक में हुई 2 हजार से ज्यादा हत्याओं को फेक एनकाउंटर बताया और उसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। 3 जुलाई को सतलुज OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज की गई, लेकिन 48 घंटे बाद ही हटा ली गई। तब से लगातार पंजाब के गांव-गांव में ये लोगों को बड़ी स्क्रीन लगाकर दिखाई जा रही है। सबसे पहले लोगों की बात…‘पुरखों से किस्से सुने थे, अब फिल्म में देखा- कैसे बेगुनाह मारे गए’ चक मारन गांव में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान मिले 19 साल के गुरमेल सिंह कॉलेज स्टूडेंट हैं। वे कहते हैं, ‘पुरखों से इन किलिंग के बारे में सुना था। फिल्म में पहली बार देखा। इसे देखकर पता चला कि कैसे बेगुनाहों को मारा गया। सिर्फ सिख ही नहीं, हिंदुओं का भी कत्ल हुआ।‘ गुरुद्वारे में फिल्म देखने आने वालों में ज्यादातर महिलाएं हैं। इन्हीं में से एक बलजीत कौर कहती हैं, ‘फिल्म देखकर पता चला कि 1995 के आस-पास तरनतारन जिले में कैसे परिवार के परिवार उजाड़ दिए गए। किसी का पिता, पति, भाई और बेटा कहां गया, कोई नहीं जानता। इनके लिए लड़ने जसवंत सिंह खालड़ा की कुर्बानी नई पीढ़ी को जाननी चाहिए और उसे याद रखना चाहिए।’ पीड़ित परिवारों की बात…‘3 की उम्र में पिता को खोया, आज फिल्म से दरिंदगी पता चली‘ फिरोजपुर के कई गांवों में पिछले 10 दिनों में 100 से ज्यादा जगहों पर सतलुज की दिखाई गई। फिरोजपुर से करीब 12 किमी दूर वालिके गांव में रंजीत सिंह मिले। उनका दावा है कि 1990 से 1992 के बीच पंजाब पुलिस ने पिता और चाचा दोनों को फेक एनकाउंटर में मार दिया। हमने रंजीत से पूछा कि क्या आपने सतलुज फिल्म देखी। उसमें कितना सच है। इस पर वे कहते हैं, ‘फिल्म में हकीकत तो महज 20 फीसदी ही है, बाकी सब तो काट दिया गया। हालांकि इतनी फिल्म से ही पंजाब पुलिस की सच्चाई सामने आ गई है।‘ ‘चार बार कोशिश की, लेकिन पूरी फिल्म नहीं देख सका। रो-रोकर बुरा हाल हो जाता। किसी तरह पांचवीं बार में पूरी फिल्म देखी। मां तो देख ही नहीं सकीं। वो कई बार बेहोश हुईं, तो मैंने ही उन्हें रोक दिया।‘ हड्डियां तोड़ीं-नाखून उखाड़े, न लाश मिली, न मौत का सर्टिफिकेट पिता के बारे पूछने पर रंजीत कहते हैं, ‘हम किसान परिवार से हैं। 1991-92 की बात है। पुलिस ने पहले चाचा सरदार परमात्मा सिंह को उठाया और उन्हें मार डाला। पुलिस को शक था कि हमारे घर उग्रवादी आते हैं। हम ही नहीं, उस वक्त हर सिख को टारगेट किया, जैसा फिल्म में दिखाया गया है।‘ ‘चाचा के बाद पुलिस ने पापा (आत्मा सिंह) को उठा लिया। तब मैं 3 साल का था और बड़ी बहन 5 की। पुलिस ने पापा के केश (बाल) खोले और खुली जिप्सी के दो हिस्सों में बांध दिए। इसी हाल में उन्हें गांव में 3-4 किमी घुमाया गया। फिर पुलिस सुल्तानपुर लोदी थाने ले गई, जहां उन्हें जानवरों की तरह पीटा गया।‘ ‘तीन दिन बाद दादा जी किसी तरह उनसे मिल सके। पुलिस की पिटाई में पापा का दाहिना हाथ दो जगह से टूटा था। एक आंख बाहर आ चुकी थी। जांघ से खून रिस रहा था। दोनों हाथों के नाखून उखाड़ दिए गए थे। दादा को देखकर पापा ने उठने की कोशिश की, लेकिन खड़े नहीं हो सके।‘ ‘पापा को छुड़ाने के लिए दादा कई पुलिस अफसरों से मिले, लेकिन सबने पैसे मांगे। उन्हें 24 घंटे का समय दिया और 4 लाख रुपए की डिमांड की। तय समय में दादा जितने पैसे जोड़ सके लेकर थाने पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। पापा को भी मार दिया गया था। उनकी लाश भी उसी हरिके कैनाल में बहा दी गई, जहां जसवंत सिंह खालड़ा को फेंका गया था। उस वक्त न किसी ने हमारी शिकायत सुनी और न रिपोर्ट लिखी।‘ ‘सतलुज देखकर महसूस हुआ- पापा के साथ क्या हुआ था‘ इसके बाद हम हरिके कैनाल पहुंचे। जहां 90 के दशक में हुए फर्जी पुलिस एनकाउंटर के बाद लाशें फेंकी गईं। यहां कई पीड़ित परिवार इंसाफ की मांग लेकर जुटे थे। यहीं बैसाखी के सहारे आईं गुरप्रीत कौर बताती हैं, ‘1993 में जब पुलिस ने पापा को घर से उठाया, तब छोटी बहन मां के पेट में थी और मैं 3 साल की थी।‘ ‘मां ने बचपन में कुछ नहीं बताया। बड़े हुए तो पता चला कि पापा फेक पुलिस एनकाउंटर में मारे गए थे। अब सतलुज फिल्म देखकर महसूस हो रहा है कि पापा के साथ क्या हुआ होगा।‘ ‘फिल्म ने पिता की शहादत समझाई, बेटियां वर्दी देख सहम जाती हैं’ हरिके कैनाल के पास ही मिले रविंद्र सिंह तरनतारन जिले के नागो गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता बिजली बोर्ड में कैशियर थे। 2 जुलाई 1989 को फेक एनकाउंटर में उन्हें मार दिया गया। रविंद्र बताते हैं, ‘तब मैं 3 साल का था। मां से पिता के बारे में पूछता, तो कहतीं- बाबा के पास गए हैं। बड़ा हुआ, तो सच पता चला।‘ ‘मैंने सतलुज के OTT पर रिलीज होते ही देख ली थी। फिल्म से ही पिता की शहादत समझ आई। मेरी दोनों बेटियों को भी इसी से अपने दादा के फर्जी पुलिस एनकाउंटर का पता चला। अब बेटियां पुलिस की वर्दी देखकर भी डर जाती हैं।’ ’हमारे गांव में भी सतलुज दिखाई गई। फिल्म देखकर सबकी आंखें नम थीं। बच्चों को भी पंजाब का ये काला इतिहास पता चलना चाहिए।’ फेक एनकाउंटर के चश्मदीद बोले…’फिल्म में पूरा सच नहीं, असलियत में इससे ज्यादा दरिंदगी हुई’ फिरोजपुर में सतलुज फिल्म देखने पहुंचे सतवंत सिंह मानक एनकाउंटर के कई केस में गवाह हैं। गांवों में फिल्म दिखाने को जरूरी बताते हुए कहते हैं, ‘90 के दशक में बहुत झूठे एनकाउंटर किए गए। हम खुद 15 केस से जुड़े रहे हैं। फिल्म में जितना दिखाया, वो पूरा सच नहीं। असल में इससे कहीं ज्यादा दरिंदगी हुई थी।‘ ‘हमारे गांव में रहने वाले चरण सिंह को पुलिस सबके सामने उठा ले गई थी। उनके दोनों पैरों को रस्सी के जरिए दो गाड़ियों में बांधा गया और सड़क पर खींचकर मार डाला गया। फिर लाश नहर में फेंक दी। तब पुलिस एनकाउंटर करने के बाद लाश के पेट चीरकर नहर में फेंक देती थी, ताकि लाश तैरकर पानी के ऊपर न आ जाए। पेट काटने से अंदर पानी भर जाता और लाश नहर की गहराई में चली जाती। फिर तेज धार के साथ बह जाती।‘ अब फिल्म की स्क्रीनिंग कराने वालों से बात…500 से ज्यादा स्क्रीनिंग कराई, जब प्रोपेगेंडा फिल्मों पर रोक नहीं तो इस पर क्यों पंजाब में कुछ राजनीतिक पार्टियां, सामाजिक संस्थाएं और आम लोग गांवों में बड़ी स्क्रीन लगाकर फिल्म दिखा रहे हैं। इनमें सांसद अमृतपाल की पार्टी वारिस पंजाब दे, सामाजिक संस्था मिसल सतलुज और कुछ पार्टियां शामिल हैं। इसे फिरोजपुर, गुरदासपुर, रूपनगर, बठिंडा, तरनतारन और मोगा समेत उन इलाकों में दिखाया जा रहा है, जो 90 के दशक में ऐसे मामलों से ज्यादा प्रभावित थे। हम मिसल सतलुज संस्था के जनरल सेक्रेटरी देवेंद्र सिंह बताते हैं कि वे अब तक 400-500 जगहों पर सतलुज की स्क्रीनिंग करा चुके हैं। वे कहते हैं, ‘इसके लिए हमें फिल्म प्रोड्यूसर या हीरो ने कोई मैसेज नहीं भेजा। हम चाहते हैं कि 90 के दशक में हुई किलिंग की जानकारी बच्चों तक पहुंचे।’ मिसल सतलुज और सतलुज फिल्म के बीच संबंध पूछने पर कहते हैं, ’हमारी संस्था का इस फिल्म से कोई लेना-देना नहीं है। सतलुज नदी पंजाब की पहचान है, इसलिए हमने संस्था का नाम सतलुज रखा। फिल्म का नाम सतलुज इसलिए रखा गया, क्योंकि एक्स्ट्रा जुडिशियल किलिंग में ज्यादातर लाशें सतलुज में बहाई गई थी।’ हमने पूछा क्या स्क्रीनिंग को लेकर पुलिस-प्रशासन ने कोई रोक-टोक की। इस पर देवेंद्र कहते हैं, अगर रोक-टोक करेगा भी, तब भी लोग नहीं रुकेंगे। जब धुरंधर जैसी प्रोपेगेंडा फिल्म दिखाई जा सकती है, फिर ये तो पंजाब की हकीकत बयां कर रही है। इसे कैसे रोका जा सकता है। फिल्म दिखाने के पीछे राजनीतिक मंशा या पंजाब में चुनाव की बात वो सिरे से नकारते हैं। ‘युवाओं को फिल्म दिखाना जरूरी, ताकि खालड़ा की कुर्बानी जान सकें’ फिरोजपुर के जीरा इलाके में सतलुज की स्क्रीनिंग करा रहे जसनूर सिंह बराड़ मिले। वे कहते हैं, ‘ये फिल्म दिखाना जरूरी है। हमारे युवा इमोशनली और मेंटली 1990 के दौर से जुड़ रहे हैं। हमें जसवंत सिंह खालड़ा की कुर्बानी जाननी चाहिए।‘ हमने पूछा क्या आने वाले चुनाव की वजह से फिल्म दिखा रहे या सतलुज की टीम ने अप्रोच किया है। जवाब में जसनूर कहते हैं, ‘चुनाव तो यहां की जनता तय करेगी। हमें एक्टर दिलजीत सिंह दोसांज या फिल्म मेकर्स से कोई मैसेज नहीं आया। न किसी ने अप्रोच किया। ये गांव के लोगों का फैसला है।‘ फिल्म स्क्रीनिंग गैरकानूनी, हाईकोर्ट से FIR कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विनीत जिंदल ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक याचिका लगाई है। इसमें फिल्म सतलुज की स्क्रीनिंग, स्ट्रीमिंग और सार्वजनिक प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की गई है। इन्होंने पिटीशन में दावा किया है कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने फिल्म में करीब 127 कट सुझाए थे, लेकिन फिल्म मेकर्स ने थिएटर रिलीज के बजाय नाम बदलकर इसे ZEE5 पर रिलीज कर दिया। उनका ये भी दावा है कि फिल्म में कथित रूप से खालिस्तानी उग्रवादियों के प्रति सहानुभूति दिखाई गई है। ……………… ये खबर भी पढ़ें… सतलुज फिल्म रिलीज होते ही भारत से क्यों गायब साल 1995, पंजाब का अमृतसर। जसवंत सिंह खालड़ा ने दावा किया कि पुलिस ने 25 हजार से ज्यादा लोगों की हत्या करके लावारिस की तरह उनकी लाशें जला दीं। इसके 7 महीने बाद जसवंत को भी घर से अगवा करके मार दिया गया। उनकी लाश आज तक नहीं मिली। पढ़िए पूरी खबर…
रूस-यूक्रेन के बीच जारी घातक हमलों में रविवार को चार भारतीय नागरिकों की मौत की खबर सामने आई। ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए व्यावसायिक जहाज 'एमवी गोल्डन लियो' पर यह हमला हुआ
अफगानिस्तान में अचानक आई बाढ़ में 20 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा लापता
पूर्वी अफगानिस्तान के नूरिस्तान प्रांत में सोमवार को भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। करीब 80 लोग घायल हुए हैं, जबकि 100 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
मानसून सत्र के पहले ही दिन सोमवार को संसद में हंगामा देखने को मिला। जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन की गूंज सीधे संसद तक पहुंची। नीट परीक्षा में गड़बड़ी, जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और राम मंदिर चंदा चोरी जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने संसद के दोनों सदनों में नारेबाजी की। हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए और 'चंदा चोरी' के पोस्टर्स लेकर वेल में आ गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से शांत रहने की अपील की, लेकिन नारेबाजी जारी रही। हंगामे के कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। सदन करीब 7-8 मिनट ही चला। विपक्ष के हंगामे के चलते स्पीकर ने कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। इसके बाद पांच बार और स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में भी इन मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। यहां कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीट एग्जाम और जंतर-मंतर प्रदर्शन के मुद्दे को उठाया। खड़गे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा- जंतर-मंतर पर बच्चे इकट्ठा हुए थे। सरकार उनकी आवाज दबा रही है और उन पर लाठियां चला रही है। खड़गे के तीखे तेवरों से सदन में हंगामा हुआ, जिसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी बार-बार स्थगित करनी पड़ी। इधर, सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज वक्त की मांग है कि संसद में मिल-जुलकर देश को आगे बढ़ाने पर चर्चा हो। सभी दलों को तथ्यों और तर्कों के साथ सदन की चर्चा को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रो-एक्टिव हों तो बेहद प्रोडक्टिव होते हैं। इससे देश का कल्याण होता है। पीएम मोदी ने कहा- भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में नई उड़ान भरी है। ये जो स्काईरूट स्टार्टअप है, उसमें जो युवा काम कर रहे हैं, उनकी औसत उम्र 28 साल है। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा- मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा। इसके बाद उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के युद्ध और पेट्रोल, डीजल व फर्टिलाइजर्स के वैश्विक संकट के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत रही है। भारत 7.7% की विकास दर हासिल करने वाला देश बना है। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करिए…
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, कॉकरोच पार्टी का संसद मार्च, रोकने के लिए आंसू गैस के गोले, लाठियां, अफरा-तफरी…। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान अब भी शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर जमे हैं। सवाल उठ रहे कि आखिर पीएम मोदी धर्मेंद्र प्रधान से हटाकर आंदोलन खत्म क्यों नहीं करा देते? धर्मेंद्र प्रधान को अब तक न हटाए जाने के पीछे 4 बड़े फैक्टर्स हैं… *** सवाल-1: तो क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो ही नहीं सकता?जवाबः 20 जुलाई के प्रोटेस्ट के बाद सरकार पर दबाव बढ़ा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कॉकरोच पार्टी के दो राष्ट्रीय प्रवक्ताओं को मिलने बुलाया। कॉकरोच पार्टी ने तीन मांगे रखीं, जिनमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी है। जेपी नड्डा ने इन मांगों पर लीडरशिप से चर्चा करने का आश्वासन दिया है। सरकार राजनीतिक नुकसान का कैलकुलेशन करके ही कोई अगला कदम उठाएगी। 2020-21 में किसान आंदोलन एक बड़ा उदाहरण है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान धरने पर बैठ गए। सरकार ने महीनों तक ‘कृषि कानून’ वापस नहीं लिए। आखिरकार नवंबर 2021 में उसे झुकना पड़ा और पीएम मोदी ने खुद कानून वापसी का ऐलान करते हुए कहा- हमारी तपस्या में ही कोई कमी रह गई होगी। चर्चा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल और बीजेपी के संगठन में बदलाव होने वाला है। सरकार के सामने 2 विकल्प हैं… ऐसा पहले भी हो चुका है… नवंबर 2014 में सुरेश प्रभु को केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में कई रेल हादसे हुए, जिनको लेकर विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग की। अगस्त 2017 में प्रभु ने इस्तीफे पेशकश भी की। हालांकि सरकार ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया। एक महीने बाद उन्हें कॉमर्स मिनिस्ट्री में शिफ्ट कर दिया गया। वे 2 साल तक मंत्री रहे। 2019 के बाद वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाए। सवाल-2: प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया, तो क्या CJP का प्रोटेस्ट फेल माना जाएगा? जवाब: CJP ने अपना पूरा आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के इर्ग-गिर्द भुनाया था। आज जेपी नड्डा से बातचीत के बाद भी प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, तो दिल्ली पहुंचे हजारों प्रदर्शनकारियों में निराशा आएगी। वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष CJP के भविष्य को लेकर आश्वस्त नहीं है। उनके मुताबिक, 'इस आंदोलन में प्लानिंग और लीडरशिप की कमी दिखी है। जब कोई इतना बड़ा आंदोलन शुरू करता है, भूख हड़ताल करता है तो पहले इसे खत्म करने का एग्जिट रूट भी होना चाहिए। लेकिन CJP के पास ऐसा नहीं था। जो मोदी सरकार को समझता है, उसे पता होना चाहिए कि वे दबाव में फैसले नहीं लेते।' हालांकि विजय त्रिवेदी कहते हैं, 'आंदोलनों की कामयाबी दो तरीकों से देख जा सकती है। एक तो अपनी बात जनता तक पहुंचा पाए या नहीं पहुंचा पाए और सरकार को बात सुननी पड़ी या नहीं। इस हिसाब से यह आंदोलन आधा सफल रहा है।' ----------- ये खबर भी पढ़िए… क्या कॉकरोच पार्टी का सरकार से 'समझौता':सोनम वांगचुक की 3 शर्तों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा गायब, जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे CJP प्रवक्ता अनशन खत्म करने के लिए सोनम वांगचुक ने जो 3 ताजा शर्तें रखी हैं, उनमें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का सीधा जिक्र नहीं है। इसे एक बड़ा U-टर्न माना जा रहा है। वांगचुक ने 28 जून को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर ही भूख हड़ताल शुरू की थी। प्रोटेस्ट के बैनर्स से लेकर ज्यादातर बयानों में इसी मांग का जिक्र होता था। पूरी खबर पढ़िए…
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच भड़के सीधे युद्ध के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी को लेकर रहस्य और गहरा गया है। 28 फरवरी को अमेरिकी सैन्य हमलों में तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा को ईरान की कमान सौंपी गई थी। हालांकि, मोजतबा का कोई भी सार्वजनिक वीडियो या प्रत्यक्ष बयान सामने नहीं आने से वैश्विक स्तर पर अटकलें तेज हो गई हैं। अब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के ताजा और चौंकाने वाले बयान ने इस सस्पेंस को चरम पर पहुंचा दिया है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि वे खुद भी नए सुप्रीम लीडर से अब तक नहीं मिल सके हैं।विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बड़ा खुलासा: सुप्रीम लीडर बनने के बाद चंद लोग ही मिल पाए मोजतबा सेईरानी समाचार एजेंसी मेहर (Mehr News Agency) के साथ हुई खास बातचीत में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बेहद संवेदनशील जानकारी साझा की है। अराघची ने कहा कि सर्वोच्च पद संभालने के बाद से अब तक मोजतबा खामेनेई से केवल कुछ बेहद खास और चुनिंदा लोग ही व्यक्तिगत रूप से मिल पाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद भी नए सुप्रीम लीडर से आमने-सामने की मुलाकात का इंतजार है। अराघची ने अल अरबिया को दिए एक अन्य इंटरव्यू में माना था कि सुरक्षा व्यवस्था में हुई भारी चूक के कारण ही पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सटीक लोकेशन लीक हुई थी और वे अमेरिकी हमले का शिकार हुए थे, और उस सुरक्षा खामी को पूरी तरह से ठीक किया जाना अभी बाकी है।आम जनता और मीडिया की नजरों से पूरी तरह गायब हैं मोजतबा: क्या अमेरिकी हमले में हुए थे गंभीर रूप से घायल?मोजतबा खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक मंचों से नदारद हैं। 28 फरवरी को अपने पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत और उसके बाद हुए अंतिम संस्कार में भी उनका शामिल न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब तक अमेरिका के साथ भीषण सैन्य टकराव और हवाई हमले जारी रहेंगे, मोजतबा पूरी तरह से गुप्त और अज्ञात स्थान पर ही रहेंगे। खुफिया और मीडिया रिपोर्टों में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि अमेरिका द्वारा किए गए शुरुआती हमलों में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे और फिलहाल वे किसी सुरक्षित बंकर में अपना इलाज करा रहे हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान का शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ढांचा तबाहइस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में ईरान की मौजूदा सैन्य क्षमता और शीर्ष नेतृत्व पर कड़ा हमला बोला है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी एयरस्ट्राइक में ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस सिस्टम और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख कमांडर पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए ट्रंप ने मोजतबा का जिक्र करते हुए बड़ा दावा किया कि उनका बेटा भी हमले में 90 प्रतिशत तक खत्म हो चुका है। ट्रंप के इस बयान ने मोजतबा की शारीरिक स्थिति को लेकर चल रही अटकलों को और हवा दे दी है।होर्मुज जलडमरूमध्य से फैला युद्ध: अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे हफ्ते भी ताबड़तोड़ हमले जारीअस्थायी सीजफायर टूटने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष अब अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर शुरू हुई यह जंग अब भीषण रूप ले चुकी है। अमेरिकी वायुसेना और टॉमहॉक मिसाइलों ने ईरान के पावर प्लांट, बुनियादी ढांचों, पुलों और रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के गुप्त ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। जवाब में ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं, जिससे इजरायल समेत पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध व्यापक होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब तक के सबसे खतरनाक और चरम स्तर पर पहुंच गया है। जॉर्डन में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए घातक हमले में एक और अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि के बाद वॉशिंगटन ने ईरान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोमवार, 20 जुलाई की सुबह ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से ताबड़तोड़ बमबारी की। इस भीषण अमेरिकी हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 517 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।अमेरिकी एयरस्ट्राइक से दहला ईरान: परमाणु अड्डे और आईआरजीसी के सैन्य ठिकाने तबाहअमेरिकी सेना द्वारा जारी की गई फुटेज के अनुसार, यह हमला समुद्र और हवा दोनों ओर से बेहद सटीक रणनीति के तहत किया गया। सेंट्रल कमांड ने बयान जारी कर बताया कि हमले का मुख्य लक्ष्य ईरान के तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल व ड्रोन भंडारण परिसरों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करना था। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने उसके एक निर्माणाधीन परमाणु प्रतिष्ठान को भी निशाना बनाया है, जिसके बाद तेहरान ने अमेरिका को इसके बेहद गंभीर अंजाम भुगतने की सीधी धमकी दी है।रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज फिर से ठप: वैश्विक ऊर्जा संकट का बड़ा खतरा मंडरायादोनों देशों के बीच पिछले महीने हुई अंतरिम शांति डील अब पूरी तरह से निष्प्रभावी हो चुकी है और दोनों ही पक्षों ने समझौतों को मानने से इनकार कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में दो वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और आगजनी के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है। ईरान ने दावा किया कि अमेरिका ने जहाजों को बारूदी सुरंग वाले रास्ते पर धकेला। दुनिया के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर भारी ऊर्जा संकट का खतरा गहरा गया है।खाड़ी देशों में रेड अलर्ट: कुवैत, बहरीन और इजरायल में एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवअमेरिका और ईरान की इस सीधी जंग की चपेट में खाड़ी देश भी आ गए हैं। ईरान की ओर से खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे जा रहे हैं। कुवैत के एक महत्वपूर्ण पावर जनरेशन और वॉटर डिजैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया गया है, जिसके बाद कुवैत, बहरीन और जॉर्डन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह एक्टिवेट कर दिया है। उधर इजरायल ने भी चेतावनी जारी की है कि जॉर्डन की दिशा से दागी गई ईरानी मिसाइलें उसके क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकती हैं।युद्ध में अब तक 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत, जंग और भीषण होने के आसारअमेरिकी रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जॉर्डन में हुए हालिया हमले के बाद अब तक इस संघर्ष में कुल 17 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जबकि 430 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह बड़ी सैन्य कार्रवाई जॉर्डन में मारे गए अपने जवानों का बदला लेने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की आक्रामक पकड़ को कमजोर करने के लिए की गई है। खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदलते इस घटनाक्रम से विश्व स्तर पर कूटनीतिक तनाव उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
अमेरिकी राजनीति और व्हाइट हाउस के गलियारों से एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और भारतीय मूल की सेकंड लेडी उषा वेंस के घर रविवार को एक बार फिर नन्हें मेहमान की किलकारियां गूंजी हैं। वेंस दंपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने चौथे बच्चे के जन्म की खुशखबरी साझा की है। इस नवजात शिशु के आगमन के साथ ही अमेरिकी इतिहास में 156 साल पुराना एक दुर्लभ और ऐतिहासिक कीर्तिमान भी दोहराया गया है।156 साल बाद पद पर रहते हुए पिता बने अमेरिकी उपराष्ट्रपति, बना अनोखा रिकॉर्डजेडी वेंस वर्तमान पद पर रहते हुए पिता बनने वाले पिछले 156 वर्षों में पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति बन गए हैं। अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में इससे पहले यह अद्भुत संयोग साल 1870 में देखने को मिला था, जब तत्कालीन उपराष्ट्रपति स्कायरलर कोलफैक्स और उनकी पत्नी एलेन वेड कोलफैक्स के घर बेटे का जन्म हुआ था। उससे भी पूर्व, वर्ष 1829 में उपराष्ट्रपति जॉन सी. कैलहून के कार्यकाल के दौरान उनके बेटे विलियम का जन्म हुआ था। इस तरह जेडी वेंस अमेरिकी इतिहास के ऐसे महज तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए हैं जिनके कार्यकाल के दौरान संतान का जन्म हुआ है।बेटे का नाम रखा 'ऐलेक नील वेंस', मेडिकल टीम का जताया आभारवेंस दंपति ने अपने नवजात बेटे का नाम ऐलेक नील वेंस (Alec Neal Vance) रखा है। सोशल मीडिया पर एक संयुक्त बयान जारी करते हुए जेडी वेंस और उषा वेंस ने अपनी खुशी व्यक्त की और लिखा कि वे अपने बेटे ऐलेक के आगमन से बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने जानकारी दी कि उषा और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनके तीनों बड़े बच्चे अपने छोटे भाई का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। दंपति ने वाशिंगटन स्थित वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों, चिकित्सा कर्मियों और व्हाइट हाउस की मेडिकल टीम का विशेष आभार व्यक्त किया।अमेरिका में बढ़ती जन्म दर के समर्थक रहे हैं जेडी वेंस41 वर्षीय जेडी वेंस लंबे समय से अमेरिका में घटती जन्म दर पर अपनी चिंता व्यक्त करते आए हैं और वे लगातार अमेरिकी नागरिकों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं। वाशिंगटन में आयोजित एक सार्वजनिक रैली के दौरान भी वेंस ने खुलकर कहा था कि वे अमेरिका में अधिक से अधिक बच्चों का जन्म देखना चाहते हैं। वेंस दंपति के इससे पहले तीन बच्चे हैं और अब परिवार में चौथे बच्चे ऐलेक नील वेंस के आने से उनका परिवार और भी समृद्ध हो गया है।भारतीय मूल से जुड़ाव: आंध्र प्रदेश से कैलिफोर्निया और फिर व्हाइट हाउस तक का सफरअमेरिका की सेकंड लेडी उषा वेंस का मूल नाता भारत के आंध्र प्रदेश राज्य से है। उषा के माता-पिता 1980 के दशक में भारत छोड़कर अमेरिका में बस गए थे, जिसके बाद वर्ष 1986 में कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में उषा का जन्म हुआ। उषा के पिता पेशे से एक मैकेनिकल इंजीनियर और मां जीवविज्ञानी हैं। जेडी वेंस और उषा की पहली मुलाकात येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान एक राइटिंग प्रोजेक्ट पर काम करते समय हुई थी, जो आगे चलकर गहरे प्रेम में बदल गई। वर्ष 2014 में केंटकी में परिणय सूत्र में बंधे इस जोड़े के लिए यह नया अध्याय बेहद खास है।
यूक्रेन ने रूस के आसमान को कर दिया धुआं-धुआं, मॉस्को की ओर दागे 400 सुसाइड ड्रोन; और फिर...
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने सोमवार, 20 जुलाई को बेहद भयानक रूप ले लिया। यूक्रेन ने रूसी राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी ड्रोन हमला बोल दिया। रविवार देर रात से शुरू होकर सोमवार सुबह तक यूक्रेनी सेना ने मॉस्को की दिशा में 400 से अधिक आत्मघाती (सुसाइड) ड्रोन दागे, जिससे पूरे रूस में हड़कंप मच गया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि रूसी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) ने अधिकांश ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि 85 ड्रोनों को मॉस्को के हवाई क्षेत्र में ही इंटरसेप्ट कर गिराया गया।मॉस्को के पास इंडस्ट्रियल पार्क और तेल डिपो में लगी भीषण आग, 10 लोग घायलयूक्रेन के इस अचानक हमले से मॉस्को के आसपास के इलाकों में अफरातफरी मच गई। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के अनुसार, ड्रोन हमलों के कारण कई आवासीय भवनों और नागरिक बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा है और कम से कम 10 लोग घायल हुए हैं। डोमोडेडोवो जिले की प्रशासनिक प्रमुख येवगेनिया ख्रुस्तलेवा ने बताया कि मॉस्को से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण में स्थित 'युज्नी व्राटा इंडस्ट्रियल पार्क' में आग लग गई। इसके अलावा, पोडोल्स्क स्थित एक महत्वपूर्ण तेल डिपो (Oil Depot) में भी आग लगने की खबरें सामने आई हैं। यह बड़ा हमला रूस द्वारा यूक्रेन की राजधानी कीव पर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों के जवाब में किया गया माना जा रहा है।ड्रोन युद्ध में यूक्रेन की बढ़ती मारक क्षमता: रूसी ईंधन सप्लाई चेन पर सीधा प्रहारयूक्रेन युद्ध के इस दौर में अपनी लंबी दूरी की स्वदेशी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल काफी बढ़ा चुका है। यूक्रेनी सेना रणनीतिक रूप से रूस की ऊर्जा संपत्तियों और तेल सुविधाओं को लगातार निशाना बना रही है ताकि रूसी सेना की ईंधन आपूर्ति को बाधित किया जा सके। रूस का रक्षा मंत्रालय दावा करता रहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली सैकड़ों ड्रोनों को मार गिरा रही है, लेकिन यूक्रेन के सटीक हमलों ने रूस की सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। दूसरी ओर, यूक्रेन अपने पश्चिमी सहयोगी देशों से उन्नत इंटरसेप्टर मिसाइलों की लगातार मांग कर रहा है ताकि रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों के घातक हमलों का मुकाबला किया जा सके।रूस का खौफनाक पलटवार: ओडेसा पोर्ट और बैलिस्टिक मिसाइलों से तबाहीयूक्रेनी हमलों के जवाब में रूस ने भी अपनी सैन्य कार्रवाई काफी तेज कर दी है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी सेना ने दक्षिणी यूक्रेन के रणनीतिक ओडेसा बंदरगाह (Odesa Port) पर स्थित विशाल ईंधन टैंकों को मिसाइल हमलों से तबाह कर दिया है। यूक्रेनी वायुसेना ने पुष्टि की है कि रूस ने रातभर में दो घातक बैलिस्टिक मिसाइलें और 94 लंबी दूरी के ड्रोन दागे। हालांकि यूक्रेनी रक्षा तंत्र ने 81 ड्रोनों को निष्क्रिय कर दिया, लेकिन कई मिसाइलों और ड्रोनों ने यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई महीने में रूस ने मिसाइलों का अभूतपूर्व इस्तेमाल किया है।राष्ट्रपति जेलेंस्की के सामने दोहरा संकट: मोर्चे पर युद्ध और देश में राजनीतिक बवंडरमॉस्को पर बड़े हमले के बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को अपने ही देश में गंभीर आंतरिक राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। पिछले सप्ताह यूक्रेनी कैबिनेट और शीर्ष सैन्य नेतृत्व में किए गए व्यापक फेरबदल के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। 35 वर्षीय मिखाइलो फेडोरोव को रक्षा मंत्रालय की कमान सौंपने और 60 वर्षीय जनरल ओलेक्सांद्र सिरस्की को सशस्त्र बलों का प्रमुख बनाए रखने के फैसले का व्यापक विरोध हो रहा है। कीव की सड़कों पर सिरस्की के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं। अब जेलेंस्की के सामने जनता और सेना में विश्वास बहाल करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
अनशन खत्म करने के लिए सोनम वांगचुक ने जो 3 ताजा शर्तें रखी हैं, उनमें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का सीधा जिक्र नहीं है। इसे एक बड़ा U-टर्न माना जा रहा है। वांगचुक ने 28 जून को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर ही भूख हड़ताल शुरू की थी। प्रोटेस्ट के बैनर्स से लेकर ज्यादातर बयानों में इसी मांग का जिक्र होता था। क्या सोनम वांगचुक और CJP का रुख वाकई नरम पड़ा, अगर हां तो क्यों; समझेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अनशन खत्म करने के लिए सोनम वांगचुक की ताजा शर्तें क्या हैं?जवाबः 20 जुलाई की सुबह सोनम वांगचुक के X हैंडल पर हाथ से लिखा नोट शेयर हुआ। इसमें सोनम वांगचुक ने 3 शर्तें लिखीं और कहा है कि जब तक इन तीनों में से कोई एक पूरी नहीं हो जाती, वो अनशन नहीं तोड़ेंगे… पहली शर्तः अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में बीते दिनों हुई चूक, जैसे- पेपर लीक वगैरह की जिम्मेदारी ले। दूसरी शर्तः अगर CJP के लीडर्स और मैं संसद भवन तक पहुंच जाएं और सांसद हमें आश्वासन दें कि शिक्षा का मुद्दा संसद में उठाया जाएगा।तीसरी शर्तः अगर मेरी तबीयत और खराब हुई और पार्टियों के सांसद, नेता मुझसे मिलने आए। मुझे ऊपर कही बातों का आश्वासन दें, तो मैं अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दूंगा। अनशन के 22वें दिन, यानी 19 जुलाई की रात में सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे अंगमो ने भी कहा था कि अगर राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल में उनसे बात करने आएं और शिक्षा और जवाबदेही के मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाने का आश्वासन दें, तो सोनम भूख हड़ताल खत्म कर देंगे। सवाल-2: क्या सोनम वांगचुक ने वाकई U-टर्न मार लिया है?जवाबः कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत से एक ही मांग थी- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। 6 जून के पहले प्रोटेस्ट में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाला बैनर सबसे आगे था। इसमें सोनम वांगचुक भी कंधे पर झोला टांगे और हाथों में गुलाब लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। फिर 20 जून को CJP ने जंतर-मंतर पर दोबारा प्रोटेस्ट शुरू किया। सोनम ने केंद्र सरकार से 2 मांगें रखीं- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करके पूर्ण राज्य का दर्जा देना। सोनम ने कहा कि इन दोनों मांगों पर 27 जून तक सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे, फिर अनशन शुरू करेंगे। सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया, तो 28 जून को सोनम ने अनशन शुरू कर दिया। हालांकि 13 जून को सोनम ने पत्रकारों से कहा कि अभी वह शिक्षा के मुद्दे को लेकर अनशन पर हैं। लद्दाख के मुद्दे पर सरकार से बातचीत जारी है। कुछ सहमति भी बनी है। सोनम की बिगड़ती तबीयत का हवाला देकर दिल्ली पुलिस 18 जुलाई को सफदरगंज अस्पताल ले गई। अब 20 जुलाई को सामने आईं अनशन तोड़ने की 3 शर्तें कई सवाल खड़े करती हैं। सोनम वांगचुक की शर्तों में न कही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग है न उनके जिम्मेदारी लेने का कोई जिक्र। उन्होंने कहा है कि सांसद और राजनीतिक दल अगर उन्हें आश्वासन देते हैं, तो वे अनशन खत्म कर देंगे। इसमें भी सरकार या BJP सांसदों या नेताओं का कोई जिक्र नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने X पर लिखा- ‘अस्पताल में पॉलिटिकल लीडर के मिलने और संसद सत्र में चर्चा की बात जंतर-मंतर के आंदोलन के स्टैंड में बड़ा बदलाव है। सोनम वांगचुक ने मंत्री के इस्तीफे की मांग छोड़ दी है। क्या उनका अकेले का फैसला है या आंदोलन का? यह सरकार की बड़ी जीत है।’ वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम लिखते हैं, 'विपक्ष के सांसद तो बिना अनशन के भी संसद में सवाल उठा सकते थे, फिर 21 दिन के अनशन के बाद ये कहने का क्या मतलब है? कांग्रेस तो पहले से इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है और दर्जनों प्रदर्शन कर चुकी है। क्या सोनम के साथ ही उनकी जगह मंच पर भूख हड़ताल शुरू कर चुके अभिजीत दीपके भी अनशन खत्म करेंगे?’ सवाल-3: क्या कॉकरोच पार्टी ने भी प्रधान के इस्तीफे की मांग छोड़ दी?जवाबः कॉकरोच पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने रविवार को बताया, ‘हम हजारों की संख्या में 9 बजे संसद के लिए निकलेंगे। हम कोशिश करेंगे कि डेलिगेशन को अंदर जाने दिया जाए ताकि हम अपनी मांग वहां रख सकें।’ इस बीच, सोमवार सुबह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, यानी AISA के तीनों स्टूडेंड लीडर्स नेहा, आमीन और मनीष ने 23 दिनों तक चली भूख हड़ताल खत्म कर दी है। सोमवार की सुबह 11 बजे कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर ले जाया गया। उन्होने बताया कि सरकार हमसे बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रही है। इन सभी डेवलपमेंट में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात सामने नहीं आई। यानी अब ये प्रोटेस्ट संसद मार्च की सफलता तक सीमित हुआ दिखता है। सवाल-4: सोनम वांगचुक और कॉकरोच पार्टी के नरम रुख की वजह क्या हो सकती है? जवाबः अभी कोई साफ वजह सामने नहीं आई है। अलग-अलग तरह की थ्योरीज चल रही हैं… 23 दिन बाद भी समाधान नहीं दिख रहा थाः सोनम पिछले 22 दिनों से अनशन पर है। उनका 10 किलो के करीब वजन घट गया है। इतने समय भूखे रहने पर शरीर की मासपेशियां प्रोटीन खोने लगती है। उस पर पुलिस ने जंतर-मंतर से उठाकर सफदरगंज अस्पताल ले गई। उनकी पत्नी ने सोनम को प्राइवेट हॉस्पिटल शिफ्ट करने की हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी, जो खारिज हो गई। इसके बाद ही उनकी पत्नी ने पहली बार अनशन खत्म करने का जिक्र किया। ये मौजूदा हालात देखते हुए लिया फैसला लगता है। सरकार ने अंदरखाने कोई आश्वासन दे दियाः वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह लिखते हैं, 'सरकार ने अंदरखाने ये तय कर लिया होगा कि किसी नेता या मंत्री को भेजकर जूस पिला आएंगे। इससे सरकार के रवैये पर उठते सवाल को झुठलाने में भी मदद मिलेगी।' लद्दाख वाले मुद्दे पर सरकार के किसी आश्वासन की वजह से भी हो सकता है सोनम ने धर्मेंद्र प्रधान के मुद्दे पर रुख नरम किया हो। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी X पर पोस्ट किया है, 'मैं और आशुतोष रांका कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से जे पी नड्डा से मिलने जा रहे हैं। आज सुबह ही सरकार ने हमसे बात करने की पहल की है।' इससे भी संकेत मिल रहा है कि सरकार और प्रदर्शनकारी समझौते की तरफ बढ़ रहे हैं। ---------------- ये खबर भी पढ़िए… जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, कई के सिर फूटे:बैरिकेडिंग तोड़कर पार्लियामेंट थाने तक पहुंचे; दीपके बोले- हमें संसद जाने से कोई नहीं रोक सकता पुलिस ने सोमवार को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। इससे कई लोगों को चोटें आई हैं और कई लोगों के सिर भी फूट गए हैं। हालांकि, पुलिस ने इससे इनकार किया है। पूरी खबर पढ़िए…
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक और चिंताजनक मोड़ ले लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की आग में अब क्षेत्र के अन्य शांतिप्रिय देश भी झुलसने लगे हैं। सोमवार को ईरान ने कुवैत के एक प्रमुख 'बिजली और जल अलवणीकरण संयंत्र' (Water Desalination & Power Plant) को निशाना बनाकर एक भीषण आत्मघाती हमला किया। इस सुनियोजित हमले के कारण कुवैत के इस बेहद महत्वपूर्ण एनर्जी हब में भयंकर आग लग गई और कई बिजली उत्पादन इकाइयां पूरी तरह तबाह हो गईं। दुखद बात यह है कि इस हमले में प्लांट में काम करने वाले एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले इस हमले ने पूरे रेगिस्तानी देश में पीने के पानी और बिजली का एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।कुवैत का 90% पानी सप्लाई ठप होने की कगार परकुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, ईरान की ओर से किए गए इस ड्रोन और मिसाइल हमले ने उनके सबसे संवेदनशील बुनियादी ढांचे को चोट पहुंचाई है। रेगिस्तानी देश होने के कारण कुवैत अपनी पीने के पानी की लगभग 90 प्रतिशत जरूरतों के लिए समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले इसी 'डिसैलिनेशन प्रोसेस' पर निर्भर रहता है। हमले के बाद प्लांट में लगी भीषण आग पर काबू तो पा लिया गया है, लेकिन बिजली और पानी की कई मुख्य यूनिट्स के क्षतिग्रस्त होने से देश में हाहाकार मच गया है। कुवैती अधिकारी फिलहाल नुकसान का आकलन करने और प्लांट को आंशिक रूप से फिर से चालू करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी के बाद तेहरान पर भीषण एयरस्ट्राइकईरान की इस आक्रामक हरकत के बाद अमेरिकी सेना भी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार सुबह अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और उसके रणनीतिक ठिकानों पर अपनी सैन्य कार्रवाई का दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के कई अहम पुलों, सैन्य साइटों और एक प्रमुख बंदरगाह पर बने 'पोर्ट कंट्रोल टावर' को हवाई हमलों में पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है।यह भीषण कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा तेहरान को दी गई उस कड़ी चेतावनी का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि यदि ईरान वैश्विक तेल मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) और क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ने की कोशिश करेगा, तो उसके पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।हॉर्मुज संकट से दुनिया भर में बढ़े कच्चे तेल के दामईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस आमने-सामने के युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आंशिक रूप से बंद होने के खतरे ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया का एक बड़ा तेल निर्यात इसी समुद्री रास्ते से होता है, जिस पर ईरान ने नए सेवा शुल्क और सख्त नियम लगाकर खलबली मचा दी है। इस सुरक्षा संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों ने तुरंत संयम नहीं बरता, तो यह संघर्ष एक पूर्ण वैश्विक युद्ध में बदल सकता है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में युद्ध के गहराते बादलों और तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान में रह रहे और वहां की यात्रा करने वाले सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक बेहद अर्जेंट और महत्वपूर्ण सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने ईरान में मौजूद सभी भारतीयों को सख्त हिदायत दी है कि वे बिना किसी देरी के उपलब्ध कमर्शियल उड़ानों (फ्लाइट्स) का विकल्प चुनकर तुरंत देश छोड़ दें और भारत लौट आएं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह कदम साफ तौर पर संकेत देता है कि क्षेत्र में जमीनी हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं और किसी भी समय स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।विदेश मंत्रालय की दो टूक: ईरान की यात्रा करने से पूरी तरह बचेंभारत सरकार की तरफ से जारी की गई इस नई एडवाइजरी में न केवल वहां रह रहे लोगों को वापस आने को कहा गया है, बल्कि नए यात्रियों के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि भारतीय नागरिक अगले आदेश तक ईरान की किसी भी प्रकार की गैर-जरूरी या व्यावसायिक यात्रा करने से पूरी तरह परहेज करें। जो लोग पहले से ही वहां मौजूद हैं, उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर सर्वोच्च प्राथमिकता बरतने की सलाह दी गई है।दूतावास के संपर्क में रहें नागरिक, जारी हुए हेल्पलाइन नंबरतेजी से बदलते घटनाक्रम को देखते हुए तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy in Tehran) पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। एडवाइजरी में कहा गया है कि:पंजीकरण अनिवार्य: ईरान के अलग-अलग शहरों में रह रहे सभी भारतीय नागरिक, चाहे वे छात्र हों, नौकरीपेशा हों या कारोबारी, तुरंत तेहरान स्थित भारतीय दूतावास में अपना रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) करवाएं।लगातार संपर्क: किसी भी आपातकालीन स्थिति (इमरजेंसी) से निपटने के लिए नागरिक दूतावास के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत सुरक्षित निकाला जा सके।क्यों अचानक बढ़ गया है मिडिल ईस्ट में इतना बड़ा तनाव?दरअसल, पिछले कुछ समय से ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच सैन्य तनातनी चरम पर पहुंच गई है। खुफिया रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी भी समय एक बड़े हवाई हमले या सैन्य संघर्ष की शुरुआत हो सकती है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने पहले ही ईरान की हवाई सीमा का उपयोग बंद कर दिया है और अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। यही वजह है कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती और समय रहते सभी को सुरक्षित वतन वापस लौटने की अपील कर रही है।
अमेरिकी सेना ने लगातार नौवीं रात किया ईरान पर हमला : सेंट्रल कमांड
ईरान के खिलाफ अमेरिकी की सैन्य कार्रवाई लगातार 9वें दिन जारी रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक नया दौर शुरू हुआ है
कैमरून में अपहरण का खौफ़: नॉर्थवेस्ट में सात यात्री बंधक
कैमरून के नॉर्थवेस्ट क्षेत्र में शनिवार देर रात सात यात्रियों का अपहरण कर लिया गया। रविवार को सुरक्षा सूत्रों ने यह जानकारी दी
कतर में इराकी पीएम से मिले अमीर, अमेरिका-ईरान समझौते को आगे बढ़ाने पर जोर
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने इराक के प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी से मुलाकात की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने की अपील की
23 अगस्त 2025, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर पीएम ने मोदी गर्व से कहा था- भारत जल्द ही गगनयान की उड़ान भरेगा, अपना स्पेस स्टेशन बनाएगा और चांद-मंगल के भी पार जाएगा। 11 महीने भी नहीं बीते कि बड़े पैमाने पर वैज्ञानिकों के ISRO छोड़ने की खबरें आ रही हैं। इससे गगनयान जैसे कई बड़े स्पेस मिशन भी अटक सकते हैं। घबराए अंतरिक्ष विभाग ने इस्तीफों की मंजूरी का नियम और सख्त कर दिया है। दुनिया की सबसे सफल स्पेस एजेंसियों में शुमार भारत की ISRO में अंदरखाने क्या चल रहा; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और विपुल शर्मा ------- ये खबर भी पढ़िए… क्या यूक्रेन से हारने वाला है रूस: क्रीमिया फिसल रहा, तेल के लिए लंबी कतारें, पुतिन बोले- मुश्किल दौर; यूक्रेन ने कैसे बाजी पलटी 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला किया। दुनियाभर के मिलिट्री एक्सपर्ट्स बोले- रूस 24 घंटे के भीतर यूक्रेन को घुटनों पर ला देगा। लेकिन 4 साल, 4 महीने और 18 दिन की जंग के बाद रूस खुद बेहाल दिख रहा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जंग के दौरान पहली बार माना कि देश मुश्किल में है। पूरी खबर पढ़िए…
लगातार आठवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले, हाई अलर्ट पर 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि मध्य पूर्व में तैनात 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों का एक और दौर पूरा कर लिया है।
यरुशलम/लखनऊ। पश्चिम एशिया (West Asia War 2026) में जारी भीषण जंग अब और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने इजरायली सीमा से सटे जॉर्डन के प्रमुख तटीय शहर अकाबा (Aqaba) को निशाना बनाकर धड़ाधड़ कई मिसाइलें दाग दी हैं। मिसाइल हमले की भनक लगते ही पूरे जॉर्डन में हवाई हमले के सायरन (Sirens Sounded) गूंज उठे, जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी दहशत फैल गई।मनीकंट्रोल हिंदी (Moneycontrol Hindi) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के तुरंत बाद इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) और जॉर्डन की वायुसेना ने मिलकर एक बड़ा रक्षात्मक अभियान चलाया और ईरान की तरफ से आ रही मिसाइलों को बीच हवा में ही सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट (नष्ट) कर दिया। इजरायली सेना के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि इन मिसाइलों के मलबे से संभावित नुकसान को रोकने के लिए दोनों देशों की सेनाओं ने त्वरित जवाबी कार्रवाई की।अकाबा एयरपोर्ट के पास धमाके, इजरायल के इलियट शहर तक दिखा असरअंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों का मुख्य निशाना अकाबा शहर था, जो इजरायल के सीमावर्ती शहर इलियट (Eilat) के बिल्कुल नजदीक स्थित है:एयरपोर्ट के पास धमाका: कुछ शुरुआती खबरों में दावा किया गया कि एक ईरानी मिसाइल अकाबा एयरपोर्ट के पास जाकर गिरी, जिससे जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके की चमक और धुएं का गुबार इजरायल के इलियट शहर से भी साफ तौर पर देखा गया।जॉर्डन सरकार का खंडन: हालांकि, बढ़ते तनाव के बीच जॉर्डन सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि सुरक्षा खतरों के चलते अकाबा के हवाई अड्डे (Airport) और समुद्री बंदरगाह (Seaport) को खाली करा लिया गया है।अमरीकी सैनिकों की मौत का बदला: US ने ईरान पर किए ताबड़तोड़ हवाई हमलेजॉर्डन पर हुए इस मिसाइल अटैक के पीछे की मुख्य वजह पिछले दिनों क्षेत्र में हुई सैन्य कार्रवाई को माना जा रहा है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने रविवार को बयान जारी कर बताया कि उन्होंने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के ठिकानों पर 'कड़ी और त्वरित सजा' देने के लिए ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।दरअसल, जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए एक हालिया हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए थे, एक लापता हो गया था और चार गंभीर रूप से घायल हुए थे। अमेरिका ने इसी का बदला लेने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों के आवागमन को सुरक्षित रखने के लिए ईरान के खिलाफ यह जवाबी मोर्चा खोला है।परमाणु संयंत्र पर हमले के बाद बढ़ा तनाव, UN ने जताई चिंताइस बीच ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने अमेरिका पर बेहद गंभीर आरोप लगाया है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी वायुसेना ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए देश के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में बन रहे 'दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र' (Darkhovin Nuclear Power Plant) पर बर्बरतापूर्वक हवाई हमला किया है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था ने दोनों देशों से अत्यधिक संयम बरतने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह सीधी गोलाबारी नहीं रुकी, तो पूरा मिडिल ईस्ट एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध की आग में झुलस सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और शेयर बाजारों पर पड़ेगा।
यूक्रेन का रूस पर जवाबी हमला, तेल ठिकानों और 'शैडो फ्लीट' को बनाया निशाना
रूस के अब तक के सबसे घातक हमले के जवान में यूक्रेन ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन रूस के हमलों का पूरी तरह उचित और सटीक जवाब दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेनी बलों ने रूस के कई रणनीतिक ठिकानों और ईंधन केंद्रों को निशाना बनाया है।
18 जुलाई को सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का 21 वां दिन था। सुबह करीब 7 बजे दिल्ली पुलिस के कई जवान सादे कपड़ों में आए, सोनम के मंच पर चढ़े, चारों तरफ सफेद चादरें लगाईं और महज 1 मिनट के अंदर सोनम को उठाकर ले गए। जबकि 20 दिन से सरकार ने कोई बयान तक नहीं दिया था। आखिर सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों थी? अचानक अकेले वांगचुक को इस तरह उठाने के पीछे 3 फैक्टर्स जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… 20 जून को कॉकरोच जनता पार्टी, CJP ने जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट शुरू किया। सोनम ने भी 28 जून को समर्थन में भूख-हड़ताल शुरू कर दी। 21वें दिन वांगचुक को उठाकर अस्पताल ले जाने के पीछे 2 बड़ी राजनीतिक वजहें हैं… 1. संसद सत्र के पहले दिन तीन-तरफा दबाव की आशंका सीनियर पत्रकार अरुण दीक्षित कहते हैं कि 20 जुलाई को संसद सत्र के दिन केंद्र सरकार और प्रशासन के लिए उमर अब्दुल्ला, CJP और सोनम, तीन तरफ से दबाव की स्थिति बन सकती थी। सरकार किसी तरह इस दबाव को कम करना चाहती थी। 2. विपक्षी नेता सोनम के साथ एकजुट होने लगे सोनम के पक्ष में विपक्षी नेताओं के एकजुट होने और उमर अब्दुल्ला की 17 जुलाई की घोषणा के मद्देनजर आनन-फानन में सोनम को उठाने का फैसला लिया गया।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसीलिए 17 जुलाई को दिल्ली कमिश्नर सतीश गोलचा को अचानक हटाकर उनकी जगह खुफिया एजेंसी ‘IB’ के स्पेशल डायरेक्टर रहे अनुराग कुमार लाए गए। 17-18 जुलाई की रात डेढ़ बजे सोनम को हटाने के निर्देश मिले। फिर मंदिर मार्ग थाने में रणनीति बनी। सुबह 5 बजे अधिकारी जंतर-मंतर पहुंचे, आखिरी ब्रीफिंग दी। फिर उसी हिसाब से एक्शन हुआ। सोनम से CJP को मिला ‘डिजिटल मोमेंटम’ सोनम की तबीयत बिगड़ने की चर्चा से बढ़ा मीडिया कवरेज सेलेब्रिटीज सोनम के सपोर्ट में आए 14 जुलाई से सोशल मीडिया पर हैशटैग के साथ सोनम के सपोर्ट वाली पोस्ट्स की बाढ़ आ गई… दरअसल, भुखमरी से जुड़ी कई रिसर्च के मुताबिक, कोई दुबला-पतला व्यक्ति खाना न खाए, तो उसके शरीर के वजन का करीब 18% तक कम होने पर भूख से मरने की नौबत आ जाती है। ऐसा औसतन 30 से 50 दिनों के बाद होता है। कोई स्वस्थ व्यक्ति है या पानी और नमक वगैरह ले रहा है, तो कुछ ज्यादा दिन चला जा सकता है। उत्तर प्रदेश बेस्ड डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) अजय सिंह कहते हैं कि सोनम के हेल्थ पैरामीटर्स देखते हुए ये नहीं कहा जा सकता कि तत्काल उनकी जान को कोई खतरा था। वे हाइड्रेटेड थे। हालांकि 20 दिन के अनशन के बाद लगातार निगरानी की जरूरत तो थी, क्योंकि उनकी उम्र 59 साल है।19 जुलाई की सुबह गीतांजलि ने X पर पोस्ट सफदरजंग हॉस्पिटल पर आरोप लगाया कि वह सोनम के हेल्थ पैरामीटर्स की सही जानकारी नहीं दे रहा है। उन्होंने सोनम को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को 3 दिन में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार का उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाने का फैसला मनमाना नहीं कहा जा सकता। सवाल-1: सोनम वांगचुक को उठाकर क्या सरकार से मिस-कैलकुलेशन हो गई?जवाबः राजनीतिक मोर्चे पर इसे 'मिस-कैलकुलेशन' माना जा रहा है, क्योंकि वांगचुक को हटाने के बाद से आंदोलन खत्म होने के बजाय प्रोटेस्ट मजबूत होता दिखा है। अब धर्मेंद्र प्रधान के साथ पीएम नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगा जा रहा है। सीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी का मानना है, ‘सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल ले जाना मोदी सरकार की चूक हो सकती है। वांगचुक की छवि एक बेदाग, देशप्रेमी और पर्यावरण कार्यकर्ता की है। जब सरकार ऐसे किसी चेहरे पर हाथ डालती है, तो जनता में मैसेज गलत जाता है।’ 18 जुलाई को अभिजीत खुद भूख हड़ताल पर बैठ गए और उन्होंने रात का पहरा शुरू किया, ताकि पुलिस वहां से उन्हें पूरी तरह न खदेड़ दे। इसके चलते पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा लोग जुटे। पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, RJD सांसद मनोज झा, AAP नेता गोपाल राय, आजाद समाज पार्टी के नेता चन्द्रशेखर आजाद जैसे तमाम नेता भी जंतर-मंतर पहुंचे। सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने भी सरकार से बातचीत की अपील की। लोकसभा में विपक्षी के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, अखिलेश यादव, केजरीवाल, डिंपल यादव, संजय सिंह, किसान नेता राकेश टिकैत जैसे लोगों ने भी पुलिस एक्शन का विरोध किया है। वहीं वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो खुलकर सामने आ गई हैं। उन्हें भी सपोर्ट मिल रहा है। सवाल-2: कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट किधर जाता दिख रहा है?जवाबः CJP 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ की तैयारी कर रही है। सोनम वांगचुक की तरफ से भी उनके सोशल मीडिया पर अपील की गई- ‘20 जुलाई को आजादी का दूसरा आंदोलन। भयमुक्त भारत, अन्यायमुक्त भारत। संसद मार्च को सफल बनाएं।’ CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि अस्पताल में जबरन डिटेंशन में रखे गए सोनम सर जंतर-मंतर पर वापस आकर इस संघर्ष को जारी रखना चाहते हैं। वहीं गीतांजलि ने कहा है कि अगर सोनम 20 जुलाई के मार्च में शामिल नहीं हो पाते हैं, तो मैं उनकी तरफ से मार्च को लीड करूंगी। हालांकि 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया, तो पुलिस से टकराव होना तय है। दिल्ली पुलिस ने साफ कहा है कि CJP को संसद तक मार्च की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि इससे दिल्ली के संवेदनशील इलाके में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। अगर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। सवाल-3: क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की कोई संभावना है?जवाबः पहले सुगबुगाहट थी कि मानसून सत्र से पहले कैबिनेट में बदलाव होगा। धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदल सकता है या फिर बीजेपी संगठन में भेजा जा सकता है। हालांकि बीते कुछ दिनों से ऐसी कोई चर्चा नहीं है। 18 जुलाई को जंतर-मंतर पर पुलिस एक्शन हुआ, तो प्रधान के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मोदी सरकार का एक अनकहा नियम है कि इसमें मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते। पिछले 12 साल में अकेले एमजे अकबर को #MeToo आरोप के चलते विदेश राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। मोदी सरकार जानती है कि अगर किसी दबाव में कोई इस्तीफा हुआ, तो ये नजीर बन जाएगी और फिर बार-बार ऐसी मांगे होंगी। -------------------------------- ये खबर भी पढ़िए… क्या सोनम वांगचुक को जबरन खाना खिलाना गैरकानूनी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और एक्सपर्ट्स से समझिए; अब आंदोलन का क्या होगा जंतर-मंतर पर 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस उठा ले गई। अभिजीत दीपके ने कहा- ‘पुलिस ने सोनम सर को गालियां दीं और घसीटकर जबरन ले गए।’ पूरी खबर पढ़िए…
'ऑपरेशन सिंदूर' पर इमरान खान की बहन का सनसनीखेज दावा, इजरायल को मान्यता देने की शर्त पर रुकी थी जंग
भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए भीषण सैन्य टकराव और भारतीय सेना के गुप्त 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindhoor) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला अंतरराष्ट्रीय खुलासा सामने आया है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सगी बहन नूरीन नियाजी (Noureen Niazi) ने एक इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान और शहबाज शरीफ सरकार पर देश की संप्रभुता को गिरवी रखने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। नूरीन नियाजी का दावा है कि भारतीय वायुसेना और थलसेना के भीषण मिसाइल व ड्रोन हमलों के सामने पाकिस्तानी फौज पूरी तरह पस्त हो चुकी थी और भारत की आक्रामक सैन्य कार्रवाई को रुकवाने के लिए पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व गिड़गिड़ाते हुए वैश्विक शक्तियों के पास पहुंचा था। भारत के खौफ से बौखलाया रावलपिंडी का सैन्य मुख्यालय युद्ध रोकने के एवज में इजरायल को एक संप्रभु देश के रूप में मान्यता देने तक के लिए राजी हो गया था।रावलपिंडी मुख्यालय में मची थी हड़बड़ी: पाकिस्तान का 'मारका-ए-हक' अभियान हुआ था पूरी तरह फेलनूरीन नियाजी ने पाकिस्तान के आंतरिक हालातों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भारतीय सेना के विनाशकारी हमलों के सामने पाकिस्तानी फौजी ताकतों की हालत बद से बदतर हो गई थी। पाकिस्तान ने अपनी तरफ से भारतीय जवाबी कार्रवाई को रोकने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन वे हर मोर्चे पर नाकाम रहे। पाकिस्तानी सेना इस भारी दबाव को संभालने में पूरी तरह विफल साबित हुई। स्थिति यह थी कि रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय (GHQ) में पूरी तरह अफरा-तफरी और हड़बड़ी का माहौल था। जिस सैन्य अभियान को पाकिस्तानी जनरलों ने बड़े तामझाम के साथ ‘मारका-ए-हक’ (Maarka-e-Haq) के नाम से शुरू किया था, वह भारतीय मिसाइलों की गड़गड़ाहट के बीच ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इसके बाद लाचार होकर पाकिस्तानी नेतृत्व ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन के सामने भारत के साथ किसी भी तरह समझौता कराने की गुहार लगाई।डोनाल्ड ट्रंप की वो सीक्रेट शर्त: इजरायल को मान्यता और अब्राहम अकोर्ड पर झुक गया था पाकिस्तानइमरान खान की बहन के मुताबिक, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरुआत में इस दक्षिण एशियाई सैन्य संघर्ष से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन पाकिस्तान की लाचारी देखकर वे मध्यस्थता के लिए तैयार हुए, जिसके पीछे एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक शर्त थी। चूंकि भारत के इजरायल (Israel) के साथ बेहद मजबूत और रणनीतिक संबंध हैं, इसलिए ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के सामने इजरायल को आधिकारिक मान्यता देने और ऐतिहासिक 'अब्राहम अकोर्ड' (Abraham Accords) में शामिल होने की कड़ी शर्त रख दी। भारतीय हमलों की तीव्रता और तबाही से बुरी तरह डरे सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (General Asim Munir) और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस शर्त को मानने के लिए तुरंत तैयार हो गए। दूसरी ओर, भारत ने भी दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक बढ़त और शक्ति संतुलन (Power Balance) को मजबूत होते देख हमलों की गति को नियंत्रित किया।नूर खान एयरबेस की तबाही छिपाई: आवाम को जीत की झूठी कहानियां सुना रहे हैं आसिम मुनीर और शहबाजनूरीन नियाजी ने आरोप लगाया कि युद्ध विराम होते ही सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने अपनी गर्दन बचाने के लिए पाकिस्तानी जनता के बीच इसे अपनी 'झूठी जीत' बताकर प्रचारित करना शुरू कर दिया। सैन्य प्रशासन का प्लान था कि इस तथाकथित जीत के जश्न की आड़ में इजरायल को मान्यता देने के फैसले से देश के भीतर उठने वाले संभावित जन-आक्रोश और मजहबी गुस्से को आसानी से दबा दिया जाएगा। हालांकि, इससे पहले कि पाकिस्तान इस सीक्रेट डील को सार्वजनिक करता, पश्चिम एशिया में ईरान का नया मोर्चा खुल गया और यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया। खुफिया अधिकारियों के अनुसार, नूरीन नियाजी का यह बयान कोई साधारण राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि यह परोक्ष रूप से भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' की 100% सफलता की पुष्टि करता है।क्या था भारतीय सेना का 'ऑपरेशन सिंदूर': 9 आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद कर नूर खान एयरबेस को किया था टारगेटगौरलतब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले (Pahalgham Terror Attack) का करारा बदला लेने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था। इस हाई-प्रिसिजन ऑपरेशन के तहत भारतीय वायुसेना और मिसाइल रेजिमेंट ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सक्रिय करीब 9 प्रमुख लॉन्च पैड और आतंकवादी कैंपों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था। इसके जवाब में जब पाकिस्तान की एयरफोर्स ने भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने की कोशिश की, तो भारत के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम (Air Defense System) ने उनके मंसूबों को हवा में ही क्रैश कर दिया। भारत ने दोबारा आक्रामक रुख अपनाते हुए ड्रोन और गाइडेड मिसाइलों की झड़ी लगा दी, जिसने पाकिस्तान के मुख्य 'नूर खान एयरबेस' (Noor Khan Airbase) सहित कई सामरिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद पाकिस्तान पूरी तरह घुटनों पर आ गया था।
मार्को रुबियो बोले- 'खत्म हुआ जिहादी खतरा', भड़के भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब
आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा को लेकर अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में आयोजित एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत सहित दुनिया के 67 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस महाबैठक में अमेरिका के नवनियुक्त विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने वैश्विक मंच से दुनिया भर के देशों को वामपंथी आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ एकजुट होने का खुला आह्वान किया। हालांकि, बैठक के दौरान उस समय एक बड़ा राजनयिक विरोधाभास खड़ा हो गया, जब अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में यह विवादास्पद दावा कर दिया कि वैश्विक स्तर पर अब जिहादी या इस्लामिक आतंकवाद (Jihadist Terrorism) का खतरा काफी हद तक कम हो चुका है। अमेरिका के इस जमीनी हकीकत से परे बयान पर बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा (Vinay Kwatra) ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार करते हुए नई दिल्ली की तीव्र आपत्ति दर्ज कराई।भारत का दोटूक जवाब: आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ अपनानी होगी जीरो टॉलरेंस की नीतिअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के इस एकतरफा बयान के तुरंत बाद भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने आतंकवाद के प्रति भारत के पारंपरिक, कड़े और बेहद स्पष्ट रुख को वैश्विक मंच पर दोबारा दोहराया। राजदूत क्वात्रा ने भारत के भीतर वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद (Naxalism) से निपटने के देश के दशकों पुराने और लंबे रणनीतिक अनुभवों को साझा किया, लेकिन साथ ही अमेरिका को आईना दिखाते हुए साफ कर दिया कि आतंकवाद को अच्छी या बुरी श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता। भारत ने दोटूक शब्दों में कहा कि दुनिया को आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनानी होगी। क्वात्रा ने विशेष रूप से भारत को अस्थिर करने वाले सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) और अलगाववादी एजेंडे को हवा देने वाले आतंकी समूहों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं।67 देशों की बैठक में जूनियर डिप्लोमैट्स का पहुंचना: अमेरिका के एजेंडे से कई देश असहमतइस हाई-लेवल बैठक में भले ही कागजों पर 67 देशों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक कई प्रमुख देशों ने इस बैठक में अपने मुख्य मंत्रियों को भेजने के बजाय जूनियर राजनयिकों (Junior Diplomats) को भेजना ही बेहतर समझा। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि अमेरिका ने इस अंतरराष्ट्रीय बैठक के पूरे एजेंडे को केवल वामपंथी उग्रवाद के खतरे पर ही केंद्रित कर रखा था। भारत सहित दुनिया के कई अन्य देश इस अमेरिकी आकलन से पूरी तरह असहमत थे कि इस्लामिक चरमपंथ की तुलना में केवल वामपंथी हिंसा को ही दुनिया का सबसे बड़ा खतरा मान लिया जाए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) को भी इस बैठक के लिए व्यक्तिगत आमंत्रण मिला था, लेकिन उनके पहले से तय अन्य यात्राओं पर होने के कारण राजदूत विनय क्वात्रा ने इस मंच पर भारत का मोर्चा संभाला और देश का पक्ष मजबूती से रखा।मार्को रुबियो ने समझाया आधुनिक आतंकवाद का ग्लोबल नेटवर्क: सीमाओं के पार सहयोग ही एकमात्र रास्ताअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दुनिया भर में बढ़ रही वामपंथी हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि अब इस हिंसक दौर का अंत होना बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि व्यापार, आप्रवासन (Immigration) और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर अमेरिका के साथ गंभीर वैचारिक मतभेद होने के बावजूद 60 से अधिक देशों के नेताओं, आतंकवाद-विरोधी विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों का यहां जुटना यह साबित करता है कि वैश्विक स्तर पर इस खतरे को लेकर चिंताएं गहरी हैं। आतंकवाद के आधुनिक और बदलते स्वरूप की व्याख्या करते हुए रुबियो ने कहा, आज के दौर में धुर-वामपंथी आतंकवादी एक देश से अवैध रूप से फंड जुटाते हैं, दूसरे देश के सुरक्षित सर्वर पर अपनी गोपनीय बातचीत होस्ट करते हैं, तीसरे देश के कैंपों में हथियारों की ट्रेनिंग लेते हैं, चौथे देश से नए लड़ाकों की भर्ती करते हैं और इन सब के नेटवर्क से किसी पांचवें देश में बड़ा हमला अंजाम देते हैं। उन्होंने जोर दिया कि इस खतरनाक सीमा-पार नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सभी देशों को अपनी कानूनी सीमाओं से बाहर निकलकर खुफिया सहयोग बढ़ाना होगा।अमेरिका और भारत की सोच में बड़ा विरोधाभास: पहलगाम हमले का जिक्र कर भारत ने चेतायावाशिंगटन की इस बैठक में भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता और असहमति का विषय मार्को रुबियो का वह आकलन रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा अपनाई गई सफल काउंटर-टेररिज्म रणनीतियों के कारण वैश्विक जिहादी आतंकवाद का खतरा अब काफी हद तक सिमट कर रह गया है। अमेरिका की यह सोच भारत की सुरक्षा वास्तविकताओं के बिल्कुल विपरीत है। भारत के लिए सीमा पार से प्रायोजित जिहादी आतंकवाद आज भी उतना ही बड़ा, क्रूर और घातक खतरा बना हुआ है जितना एक दशक पहले था, जिसका सबसे ताजा और दुखद उदाहरण 2025 में जम्मू-कश्मीर में हुआ भीषण पहलगाम आतंकवादी हमला (Pahalgan Terror Attack) है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक पाकिस्तान जैसे देशों से मिलने वाले सीमा पार आतंकी बुनियादी ढांचे और फंडिंग को पूरी तरह नष्ट नहीं किया जाता, तब तक किसी भी वैश्विक आतंकवाद-विरोधी अभियान को सफल नहीं माना जा सकता।
'मोजतबा खामेनेई ईरान में नहीं हैं', तो फिर कहां हैं? ताजा दावे को लेकर बढ़ी हलचल
मध्य पूर्व (Middle East) की राजनीति से इस समय की एक बेहद हैरान करने वाली और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को हिला देने वाली खबर सामने आ रही है। सऊदी अरब के प्रतिष्ठित समाचार चैनल 'अल-हदथ' ने एक शीर्ष इजरायली सुरक्षा सूत्र के हवाले से एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) इस समय अपने देश ईरान में मौजूद ही नहीं हैं। इस खुफिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के रणनीतिकारों को चौंका दिया है। रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई के नाम से इस समय जो भी आधिकारिक आदेश और संदेश जारी किए जा रहे हैं, वे सीधे उनकी ओर से नहीं आ रहे हैं, बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नए प्रमुख अहमद वहीदी खुद इन संदेशों को तैयार कर रहे हैं। हालांकि, ईरान सरकार की तरफ से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।तेहरान के सत्ता गलियारों में भयानक अंदरूनी कलह: अमेरिका से सीक्रेट डील के बाद भड़के कट्टरपंथीइस खुफिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद ईरान के भीतर चल रहे गहरे राजनीतिक मतभेद और सत्ता संघर्ष की परतें पूरी तरह खुल गई हैं, जो IRGC की आंतरिक एकता और देश की पूरी इस्लामिक शासन व्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई हैं। इजरायली सूत्रों का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक गोपनीय 14 सूत्रीय समझौता हुआ है, जिसके बाद से तेहरान में सत्ता के भीतर का गृहयुद्ध चरम पर पहुंच गया है। ईरान का सबसे शक्तिशाली कट्टरपंथी धड़ा मौजूदा सरकार पर परोक्ष रूप से तख्तापलट (Coup) करने का संगीन आरोप लगा रहा है। कट्टरपंथियों का साफ कहना है कि अमेरिका के साथ यह गुप्त समझौता करके मौजूदा सरकार ने देश के राष्ट्रीय हितों और सर्वोच्च नेता के मूल निर्देशों की सरेआम अनदेखी की है, जिससे देश की सेना और जनता में असंतोष की आग भड़क उठी है।विदेश मंत्री पर सरेआम पथराव: पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में फूटा गुस्साईरान की जनता और कट्टरपंथी गुटों में पनप रही यह भयानक नाराजगी उस समय दुनिया के सामने खुलकर आ गई, जब ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चल रहा था। वहां मौजूद आक्रोशित भीड़ ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) पर सरेआम पथराव कर दिया। बता दें कि अब्बास अराघची ने ही अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे चल रही युद्धविराम वार्ता में सबसे अहम और मुख्य भूमिका निभाई थी। अंतिम संस्कार के दौरान प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री को 'अमेरिका का दलाल' और देश से गद्दारी करने वाला बताते हुए उनके खिलाफ जमकर आक्रामक नारेबाजी की। रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि मोजतबा खामेनेई पिछले काफी लंबे समय से किसी भी सार्वजनिक मंच पर या कैमरे के सामने बिल्कुल नहीं देखे गए हैं।तीन नेताओं के हाथ में आई ईरान की कमान: मोजतबा खामेनेई की रहस्यमयी अनुपस्थिति का बड़ा खेलसर्वोच्च नेता की लगातार रहस्यमयी गैरमौजूदगी के बीच अब ईरान के सभी बड़े रणनीतिक और सैन्य फैसले तीन प्रमुख नेताओं की त्रिमूर्ति लेती हुई दिखाई दे रही है। इनमें संसद के पूर्व अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf), नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं। अमेरिकी रिसर्चर और ईरान मामलों के विशेषज्ञ अराश अजीजी के अनुसार, मोजतबा खामेनेई के न होने के कारण यही तीन नेता पूरी सरकार और देश का संचालन कर रहे हैं। इस नई व्यवस्था से ईरान का पुराना कट्टरपंथी गुट खुद को सत्ता से पूरी तरह अलग-थलग और बेदखल महसूस कर रहा है, यही वजह है कि वे गालीबाफ और राष्ट्रपति पेजेशकियन पर सत्ता पर अवैध कब्जा करने की गहरी साजिश रचने का खुला आरोप लगा रहे हैं।राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को सुपर-पावर बनाने की तैयारी: कट्टरपंथी सांसदों ने खोला मोर्चाईरान की संसद के भीतर भी इस प्रशासनिक बदलाव को लेकर विद्रोह के सुर तेज हो गए हैं। ईरान के बेहद प्रभावशाली कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान और कमरान गजनफारी जैसे बड़े नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मंचों से यह आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि वर्तमान सरकार जानबूझकर सर्वोच्च नेता और देश की चुनी हुई संसद की संवैधानिक भूमिका व शक्तियों को कमतर कर रही है। उनका दावा है कि सरकार एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश के तहत सारी विधायी और सैन्य शक्तियां 'राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद' को सौंपना चाहती है ताकि अमेरिका के साथ हुए समझौतों को बिना किसी रुकावट के देश पर थोपा जा सके। इस आंतरिक टकराव ने ईरान को एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां आने वाले दिनों में किसी बड़े आंतरिक सैन्य विद्रोह से इनकार नहीं किया जा सकता।
अमेरिकी कार्रवाई उस हमले के बाद तेज हुई, जिसमें जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया गया था। इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की ओर से की गई सीधी कार्रवाई में अमेरिकी सैनिकों की मौत का एक बड़ा मामला है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में सरकार और कट्टरपंथी गुटों के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं, जिससे ईरान की आंतरिक राजनीति में नई उथल-पुथल देखने को मिल रही है।
ईरान के हमले में पहली बार दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। इसके बाद अमेरिकी सेना ने शनिवार को कहा कि उसने सैनिकों के मारे जाने के जवाब में ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ। फिल्म निर्देशक नितेश तिवारी की मोस्ट एंटीसिपेटेड मेगा-बजट फिल्म ‘रामायण’ (Ramayana Movie) को लेकर दर्शकों और सिनेमा जगत में भारी उत्साह देखा जा रहा है। हाल ही में नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में भव्य ‘रामायण: प्रथम संकल्प’ इवेंट का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म की पूरी स्टारकास्ट—रणबीर कपूर, यश, साई पल्लवी और सनी देओल जैसे दिग्गज कलाकार मौजूद रहे। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में मशहूर सितारवादक ऋषभ रिखीराम शर्मा (Rishab Rikhiram Sharma) भी शामिल हुए। लेकिन इस बार लोगों का ध्यान उनके लुक या संगीत से ज्यादा उनकी कलाई पर बंधी एक बेहद खास और दुर्लभ लग्जरी घड़ी ने खींचा। ऋषभ ने इस इवेंट में स्विस लग्जरी ब्रांड 'जैकब एंड कंपनी' (Jacob & Co) की विशेष 'राम जन्मभूमि एडिशन' घड़ी पहनी थी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर आते ही इसकी कीमत टॉक ऑफ द टाउन बन गई है।भगवान राम और हनुमान जी की नक्काशी, कीमत ने उड़ाए होशसितारवादक ऋषभ रिखीराम शर्मा ने इस मेगा इवेंट में शिरकत करने से ठीक पहले अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर कुछ तस्वीरें साझा की थीं, जिसका कैप्शन उन्होंने लिखा था—आज रात मिलते हैं. जय श्री राम. इन तस्वीरों में जहां एक तरफ वे रामायण की पूरी कोर टीम के साथ पोज देते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तस्वीर में उनकी कलाई पर बंधी ‘जैकब एंड कंपनी एपिक X राम जन्मभूमि टाइटेनियम एडिशन’ (Jacob & Co Epic X Ram Janmabhoomi Edition) साफ दिखाई दे रही है। 'एथोस वॉच बुटीक' की आधिकारिक लिस्टिंग के मुताबिक, ऋषभ द्वारा पहने गए इस शुरुआती टाइटेनियम वेरिएंट की कीमत ही ₹35.88 लाख है। गौरतलब है कि ऋषभ ने इस फिल्म में प्रभु श्री राम के लिए एक विशेष नया भजन तैयार किया है, जिसे इस इवेंट के दौरान पहली बार दर्शकों के सामने प्ले किया गया।अयोध्या राम मंदिर की झलक और करोड़ों का गोल्ड वेरिएंटअयोध्या की पवित्र राम जन्मभूमि और सनातन संस्कृति से प्रेरित इस लिमिटेड एडिशन लग्जरी घड़ी को कलात्मकता की पराकाष्ठा के साथ डिजाइन किया गया है, जो इसे दुनिया की बाकी घड़ियों से बिल्कुल अलग और बेमिसाल बनाती है:अद्भुत डायल डिजाइन: घड़ी के मुख्य डायल पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को उनके चिर-परिचित धनुष-बाण वाले रूप में बेहद सूक्ष्मता से दर्शाया गया है।बारीक कलाकृति: डायल के दूसरी तरफ राम भक्त भगवान हनुमान की प्रार्थना की मुद्रा में एक बेहद खूबसूरत और बारीक नक्काशी की गई है। इसके साथ ही, पृष्ठभूमि में अयोध्या के भव्य राम मंदिर की ऐतिहासिक संरचना को उकेरा गया है।वेरिएंट्स और करोड़ों की कीमत: जैकब एंड कंपनी की यह सुपर-लग्जरी घड़ी कुल तीन अलग-अलग वेरिएंट्स में आती है। इसके बेस टाइटेनियम एडिशन की कीमत जहां ₹35.88 लाख है, वहीं इसके प्रीमियम 'रोज गोल्ड एडिशन' की कीमत ₹78 लाख और सबसे टॉप 'गोल्ड एडिशन' की कीमत ₹83 लाख से शुरू होकर ₹1.08 करोड़ तक जाती है।
वाशिंगटन/तेहरान/लखनऊ। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी अमेरिका और ईरान का युद्ध अब अपने सबसे खौफनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरान द्वारा किए गए सीधे ड्रोन और मिसाइल हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है। युद्ध के शुरुआती दिनों के बाद यह पहला मौका है जब ईरान की सीधी गोलीबारी में अमेरिकी जवानों की जान गई है। इस घटना से बौखलाए अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को कई गुना तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उसने ईरान के कुख्यात 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) को सजा देने के लिए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास सिरिक के निकट तड़के 1:30 बजे भीषण हवाई हमले किए हैं। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे बड़े मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह ध्वस्त करना है।कुवैत में तबाही: डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला, पीने के पानी का संकटअमेरिका के इन हमलों के जवाब में ईरान और उसके सहयोगी विद्रोही गुटों (Axis of Resistance) ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को ईरान ने रेगिस्तानी देश कुवैत पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिससे वहां के एक प्रमुख ऑयल फैसिलिटी सेंटर और 'वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट' (खारे पानी को मीठा बनाने वाला संयंत्र) को भारी नुकसान पहुंचा है। दो दिनों के भीतर कुवैत के पानी के प्लांट पर यह दूसरा बड़ा हमला है। कुवैत अपनी जरूरत का 90% पीने का पानी इसी तकनीक से हासिल करता है। इस हमले के बाद प्लांट में भीषण आग लग गई और कई बिजली उत्पादन इकाइयां ठप हो गईं, जिससे पूरे कुवैत में पीने के पानी और बिजली का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए कुवैत ने आपातकाल लागू कर कुछ समय के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) पूरी तरह बंद कर दिया था।इराक और जॉर्डन में भी मिसाइल और ड्रोन युद्ध, बहरीन-सऊदी में बजे सायरनइस युद्ध की लपटें अब पूरे मध्य पूर्व में फैल चुकी हैं। इराक के अर्ध-स्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र की राजधानी इरबिल में रविवार तड़के आसमान धमाकों से गूंज उठा। यहां कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के बेस पर हुए ड्रोन हमले में 8 सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद इराकी एयर डिफेंस ने कई हमलावर ड्रोनों को मार गिराया। वहीं पड़ोसी देश जॉर्डन ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए अपनी सीमा में घुस रही कई ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सऊदी अरब और बहरीन में दिन भर हवाई हमलों के सायरन बजते रहे, जिससे वहां के नागरिकों में दहशत का माहौल है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने ईरान की इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उसे आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए 'युद्ध अपराध' (War Crimes) का दोषी ठहराया है।खामेनेई की 'कभी न भूलने वाले सबक' की चेतावनी, अंतरिम डील टूटीअमेरिकी सेना द्वारा अपने जवानों की मौत की पुष्टि करने से ठीक पहले ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला खामेनेई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस्लामिक रिपब्लिक पर हमले नहीं रोके गए, तो वाशिंगटन को 'कभी न भूलने वाले सबक' सिखाए जाएंगे। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टीवी पर घोषणा की है कि अमेरिका द्वारा प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन के बाद तेहरान ने एक महीने पहले हुई उस 'अंतरिम डील' को पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है, जिसका मकसद युद्ध को स्थायी रूप से रोकना था। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 16 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 430 से अधिक घायल हुए हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए ग्लोबल ट्रैवल अलर्ट जारी कर दिया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर मंदी के बादल मंडराने लगे हैं।
तेहरान/लखनऊ। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अब ईरान के भीतर एक बहुत बड़ा आंतरिक राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। वैश्विक मीडिया संस्थान सीएनएन (CNN) की एक ताजा और बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के भीतर सत्ता पर कब्जे को लेकर गृहयुद्ध और तख्तापलट (Coup) जैसी स्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं। ईरान के शक्तिशाली कट्टरपंथी गुटों ने अपनी ही सरकार पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत और समझौता करने वाले उदारवादी नेता इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ एक 'सॉफ्ट तख्तापलट' (Soft Coup) की साजिश रच रहे हैं। कट्टरपंथियों का दावा है कि नए सुप्रीम लीडर को पूरी तरह दरकिनार कर देश की कमान कुछ चुनिंदा नेताओं ने अपने हाथों में ले ली है।खामेनेई के अंतिम संस्कार में बवाल: विदेश मंत्री पर पथराव, लगे गद्दार के नारेईरान के भीतर सुलग रहा यह आंतरिक असंतोष उस समय सार्वजनिक रूप से हिंसक रूप में सामने आ गया, जब पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी। गौरतलब है कि खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए शुरुआती हवाई हमलों में हो गई थी। अंतिम संस्कार के दौरान जब ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब कट्टरपंथी समर्थकों ने 'समझौता करने वालों की मौत हो' के उग्र नारे लगाए। हद तो तब हो गई जब भीड़ ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थरों से हमला कर दिया और उन्हें 'देश बेचने वाला गद्दार' करार दिया। यही नहीं, ईरानी शासन से जुड़े एक प्रमुख धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति पजशकियान को सीधे तौर पर धमकी देते हुए कहा, राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।कट्टरपंथी गुटों के गंभीर आरोप: मुज्तबा खामेनेई के नाम पर खेल?ईरान के इन कट्टरपंथी गुटों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सरकार को अमेरिका से बदला लेना चाहिए था, लेकिन उसने देश के स्वाभिमान को ताक पर रखकर वाशिंगटन से गुप्त समझौता कर लिया। उनका आरोप है कि यह समझौता नए संभावित सुप्रीम लीडर और दिवंगत खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) की इच्छा के बिल्कुल खिलाफ जाकर किया गया है। रहस्यमयी बात यह है कि मुज्तबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से जनता के सामने नहीं आए हैं, न ही उन्होंने देश को संबोधित किया है। इसके बावजूद, राष्ट्रपति और उनकी टीम उनके नाम का इस्तेमाल कर बड़े फैसले ले रही है। कट्टरपंथियों ने सरकार पर संसद को जबरन निलंबित करने, सुप्रीम लीडर के पुराने निर्देशों की धज्जियां उड़ाने और रात में होने वाली सरकार विरोधी रैलियों को बलपूर्वक रोकने का भी आरोप मढ़ा है। ईरान के सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ लिखा है, ईरान की जनता सावधान रहे, क्या देश में तख्तापलट होने वाला है? हम खामेनेई के खून का बदला लेने और तख्तापलट के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं।क्यों पैदा हुआ यह नेतृत्व का संकट? क्या कहते हैं एक्सपर्ट्सईरान मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और प्रसिद्ध पुस्तक ‘What Iranians Want’ के लेखक अराश अजीजी ने सीएनएन से बातचीत में इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी समझाई है। उनके मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई के पूरी तरह से पर्दे के पीछे रहने के कारण ईरान में एक पावर वैक्यूम (नेतृत्व शून्यता) पैदा हो गया है। इसके चलते संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति पेजेशकियन और विदेश मंत्री अराघची ही इस समय ईरानी सरकार के मुख्य चेहरे बन चुके हैं। चूंकि कट्टरपंथी तत्वों की पहुंच मुज्तबा तक सीधे नहीं हो पा रही है, इसलिए वे इन तीन शीर्ष नेताओं को विलेन मान रहे हैं और उन पर अवैध तरीके से सत्ता हथियाने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं। इस भयंकर अंदरूनी राजनीतिक खींचतान के बीच सीमा पर अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले भी बदस्तूर जारी हैं, जिससे ईरान दोहरे संकट में फंस गया है।

