बुधवार की रात सोना महंगा हुआ। गुरुवार सुबह दूध। शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल और CNG महंगे हो गए। इन सबके बीच आंकड़ा आया कि थोक महंगाई 42 महीने में सबसे ऊपर और डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। 48 घंटे में महंगाई की चौतरफा मार। लेकिन यह शुरुआत है। आगे और क्या महंगा होगा, आपकी जेब पर कितना बोझ पड़ेगा, और क्या वाकई सरकार के हाथ से चीजें निकल रही हैं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: पिछले 48 घंटे में क्या-क्या महंगा हुआ? जवाब: 10 और 11 मई को पीएम मोदी ने लोगों से सोना न खरीदने, पेट्रोल कम खर्च करने जैसी 7 अपीलों से संकेत दे दिए थे। इसके बाद 4 चीजों के दाम सीधे बढ़े हैं- 1. इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से सोना-चांदी महंगे हुए 2. दूध के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़े 3. पेट्रोल-डीजल 3-3 रुपए महंगा हुआ 4. CNG के दाम 2 रुपए किलो बढ़े इससे पहले मई की शुरूआत में कमर्शियल LPG (19 किलो) की कीमत 993 रुपए बढ़कर अगल-अलग शहरों में 3,315 रुपए तक हो गई थी। ईरान जंग शुरू होने के बाद से 3 बार इसकी कीमत बढ़ चुकी है। वहीं घरेलू LPG (14.2 किलो) की कीमत 7 मार्च को 60 रुपए से बढ़ी थी। मार्च में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत भी 2 से 2.35 रुपए तक बढ़ी थी। इसके अलावा कई प्राइवेट प्रोवाइडर्स जैसे नायरा एनर्जी और शेल इंडिया ने भी मार्च और अप्रैल में पेट्रोल के दाम 5 से 7.4 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाए थे। सवाल-2: इन चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी पर कितना बोझ बढ़ेगा? जवाब: पहले कीमतें बढ़ने का सीधा असर समझते हैं… पेट्रोल-डीजल: अगर आप महीने में 50 लीटर पेट्रोल खर्च करते हैं, तो 3 रुपए प्रति लीटर कीमत बढ़ने से महीने का खर्च 150 रुपए बढ़ जाएगा। ऐसा ही डीजल के मामले में होगा। दूध: अगर हर दिन 2 लीटर दूध इस्तेमाल करते हैं, तो महीने का खर्च 120 रुपए बढ़ेगा। CNG: हर महीने 50 किलो CNG खरीदते हैं, तो महीने का 100 रुपए खर्च बढ़ेगा। सोना-चांदी: इनके दाम हर दिन बढ़ते-घटते हैं। आज के भाव के हिसाब से 10 ग्राम सोना खरीदना 8,148 रुपए और एक किलो चांदी खरीदना 9,313 रुपए महंगा हो गया है। (मार्केट बंद होने के बाद फाइनल डेटा) हालांकि इन चीजों के डायरेक्ट असर से बड़े हैं इनडायरेक्ट असर जैसे... सवाल-3: अभी और किन चीजों के दाम बढ़ सकते हैं? जवाब: अभी 4 और चीजों के दाम बढ़ सकते हैं… 1. पेट्रोल-डीजल 13-14 रुपए और महंगा हो सकता है अब सवाल आता है कितना? 14 मई का मोटा-मोटी कैलकुलेशन है कि कंपनियों को अपना घाटा पूरा करने के लिए पेट्रोल पर 16 रुपए और डीजल 17 रुपए बढ़ाने की जरूरत है। इसमें अभी सिर्फ 3 रुपए दाम बढ़े हैं, बाकी बढ़ोत्तरी आगे हो सकती है। हिसाब नीचे ग्राफिक में देख लीजिए- 2. खाने का तेल 5% महंगा हो सकता है 3. रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों के दाम 10% तक बढ़ सकते हैं 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस के दाम बढ़ सकते हैं सवाल-4: क्या हालात अब सरकार के कंट्रोल से बाहर जा रहे हैं? जवाब: 5 संकेत, जो बताते हैं कि चीजें सरकार के मन-मुताबिक नहीं चल रही हैं… 1. डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल-टाइम लो 2. थोक महंगाई दर 42 महीने में सबसे ज्यादा 3. फॉरेक्स रिजर्व में बड़ी गिरावट 4. विदेशी निवेशकों ने निकाले 2 लाख करोड़ 5. सरकार के घाटे में 0.3% का इजाफा इकॉनोमिक एक्सपर्ट शरद कोहली कहते हैं रुपए की कमजोरी, महंगाई या विदेशी निवेश में कमी जैसी दिक्कतों के पीछे रूट कॉज एक ही है- क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ना। फिलहाल ग्लोबल स्थितियों के हिसाब से ही भारत के हालात बदलेंगे। शरद कहते हैं कि पूरी दुनिया में इस समय ‘स्टैगफ्लेशन’ का दौर है, यानी एकसाथ आर्थिक वृद्धि में कमी, बेरोजगारी और महंगाई। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से ही ग्लोबल इकोनॉमी दोबारा पटरी पर आ सकती है। इस बीच आम भारतीयों को अपना बजट बनाना चाहिए। जिन खर्चों में कटौती की जा सकती है, उनमें कटौती करनी चाहिए। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…आज का एक्सप्लेनर:पीएम मोदी क्यों चाहते हैं कि आप सोना न खरीदें, ऐसी 7 अपील के पीछे की कहानी; क्या आपको चिंता करनी चाहिए पीएम मोदी ने रविवार को तेलंगाना की एक रैली में देश से 7 अपीलें कीं। इनमें एक अपील सोना न खरीदने की भी थी। पीएम मोदी ने कहा- देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। हालांकि सरकार ने खुद पिछले कुछ सालों से RBI के जरिए सोने की खरीद बढ़ा दी है। पढ़ें पूरी खबर…
ट्रंप-शी वार्ता में ताइवान को लेकर चीन की कड़ी चेतावनी, ईरान और व्यापार पर बनी सहमति
चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी चिनफिंग ने बैठक में ताइवान को चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय बीजिंग की ‘रेड लाइन’ है और इसमें किसी भी प्रकार की गलती या उकसावे की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
इस्लामाबाद की राजनयिक गलतियों के चलते पाकिस्तान-यूएई संबंधों में बढ़ रहा तनाव: रिपोर्ट
पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच राजनयिक तनाव अब महज छोटी-मोटी रुकावट नहीं लगता, बल्कि द्विपक्षीय साझेदारी को हुआ नुकसान अब स्थायी प्रतीत होता है
रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने आंधी-तूफान और बिजली गिरने से हुई जनहानि पर जताया शोक
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में बुधवार की शाम को आए तेज आंधी-तूफान, भारी बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने से हुई भारी जनहानि और बड़े पैमाने पर नुकसान पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शोक संदेश भेजा।
ब्रिक्स बैठक में अराघची ने अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बाधा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मौजूदा बाधाओं के लिए अमेरिका के प्रतिबंध जिम्मेदार हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज उन सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है, जो ईरानी नौसेना के साथ सहयोग करते हैं
जल्द खत्म नहीं होगा पश्चिम एशिया का संकट, मंदी का खतरा बढ़ा: सिंगापुर पीएम
दुनिया भर के नेताओं ने ईरान युद्ध और उससे पैदा हो रहे बड़े आर्थिक संकट को लेकर चेतावनी देनी शुरू कर दी है। इसी बीच सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भी कहा कि पश्चिम एशिया का यह संकट जल्दी खत्म होने वाला नहीं है और इसके आर्थिक नुकसान और बढ़ सकते हैं।
2026 चीन-अमेरिका रिश्तों का ऐतिहासिक साल बताएंगे : राष्ट्रपति शी
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 2026 एक ऐतिहासिक, लैंडमार्क साल होगा, जो चीन-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगा।
चीन के ग्रेट हॉल में ट्रंप का भव्य स्वागत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर पहुंचे हुए हैं। चीन के ग्रेट हॉल में गुरुवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति ट्रंप का स्वागत किया
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक बड़ी विशेषता उसकी खुली निवेश प्रणाली है। दुनिया का कोई भी देश या निवेशक अमेरिका में आसानी से निवेश कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पैसा निकाल भी सकता है। यही व्यवस्था अब अमेरिका के लिए जोखिम का कारण बनती दिख रही है।
बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप, एक नागरिक की मौत, दो लोग जबरन गायब
बुधवार को एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की ओर से बलूचिस्तान में कम से कम एक आम नागरिक को बिना कानूनी प्रक्रिया के मार दिया गया और दो अन्य लोगों को जबरन गायब कर दिया गया।
‘7 जनवरी 2025। सुबह के 10 बजे थे। पापा की किडनी फेल होने की वजह से मौत हो गई थी। देखते ही मां रो-रो कर बेहाल हो गई। शव बरामदे में रखते ही चीख-पुकार मच गई। सभी रिश्तेदार घर पहुंचने लगे। सभी कहने लगे- अंतिम संस्कार की तैयारी करो। जब तक लाश दरवाजे पर रहेगी, सब रोते रहेंगे। हम लोग अर्थी सजा रहे थे, तभी गांव के लोगों के साथ सरपंच आए। उनके साथ थानेदार और तहसीलदार भी थे। कुछ देर तक शव देखते खड़े रहे, फिर कड़क आवाज में बोले- ‘देखो, तुम अपने बाप की लाश गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकते। वहां केवल दलित हिंदू ही शव दफना सकते हैं। तुम लोगों ने धर्म बदला है। इसलिए गांव के बाहर लाश दफनाओ'। तुम लोगों ने महार जाति के खिलाफ जाकर ईसाई धर्म अपनाया है। इसलिए लाश को गांव के बाहर दफनाओ'। खाट पर बैठे रमेश बघेल अपने पापा की मौत का दिन याद करते हुए ये वाकया बताते हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज ऐसे परिवारों की कहानी, जिन्होंने ईसाई धर्म अपनाया तो गांव के लोगों ने विरोध किया। परिवार में किसी की मृत्यु हुई तो उसके शव को ईसाई धर्म के मुताबिक दफनाने से रोक दिया। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर छिंदावाड़ा गांव। रास्ते में कई जगह ईंट से बनी कब्र नजर आ रही हैं। गांव पहुंचते ही मेरी मुलाकात 42 साल के रमेश बघेल से हुई। रमेश बताते हैं, ‘उस दिन हम सभी पापा की लाश के पास बैठकर रो रहे थे। अचानक सरपंच और गांव के लोग कहने लगे- लाश को गांव की सीमा से बाहर दफनाओ या फिर किसी नाली या गटर में फेंक दो। तुम लोगों ने महार जाति के खिलाफ जाकर ईसाई धर्म अपनाया है, इसलिए लाश यहां नहीं दफना सकते। सोचने लगा कि लोग तो कुत्ते-बिल्ली को भी मौत के बाद अपनी जमीन में दफनाते हैं। मुझसे पापा की लाश नाली में फेंकने को कहा गया, जबकि पापा तो 13 एकड़ जमीन के मालिक थे। मरने के बाद उन्हें दो गज जमीन भी न दे सका।' रमेश कहते हैं- 'उनकी बातें सुनते ही मैं लोगों से मिन्नतें करने लगा। कहने लगा कि सिर्फ मूर्ति पूजा में यकीन नहीं करता हूं, इसलिए ईसा-मसीह को मानता हूं। मैंने घर पर बनी चर्च में भी ईसा मसीह की मूर्ति नहीं लगाई है। पक्का ईसाई नहीं हूं। मेरे पापा को कब्रिस्तान में जगह मिलनी चाहिए। जो आदमी इस गांव में पैदा हुआ। पला-बढ़ा, उसे मरने के बाद गांव की मिट्टी नसीब होनी चाहिए। इतनी गुहार लगाने पर सरपंच ने गाली देते हुए कहा- क्या तुम लोगों ने हमसे पूछकर धर्म बदला था? किसी भी कीमत पर तुम्हें ये लाश गांव में नहीं दफनाने देंगे। तुम ही नहीं, तुम्हारे पापा भी ईसाई धर्म मानते थे। ईसाइयों के कब्रिस्तान जहां हों, वहां लाश लेकर जाओ। यह सुनते ही मैं फूट-फूटकर रोने लगा। फिर से हाथ जोड़ते हुए कहा- अगर गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकता, तो अपनी जमीन में दफनाऊंगा। पापा ने बड़ी मेहनत-मजदूरी करके 13 एकड़ जमीन खरीदी थी। अपने भाइयों से कहा कि पापा की अर्थी तैयार करो। सरपंच और बाकी लोग फिर से भड़क गए। बोले- पंचायत ने फैसला लिया है कि तुम अपनी जमीन में भी लाश नहीं दफना सकते। पंचायत का फैसला तुम्हें मानना पड़ेगा। हमने एक साल पहले ही तय कर लिया था कि अब से ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों को गांव के कब्रिस्तान में शव नहीं दफनाने देंगे। केवल दलित हिंदू ही यहां शव दफना सकते हैं। अगर तुमने गांव वालों के खिलाफ जाकर शव दफनाया, तो बीवी-बच्चों के बारे में सोच लेना। ये बताते हुए रमेश की आंखें भर आईं। खुद को संभालते हुए वो बोले- उस वक्त ऐसा लगा कि सच में अनाथ हूं।' 'उनसे कहा- देखता हूं, कैसे आप लोग पापा की लाश को नहीं दफनाने देंगे। मामले को कोर्ट में लेकर जाऊंगा। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, पापा की लाश दफनाऊंगा नहीं। सुनते ही पुलिस बोली- अभी फिलहाल, लाश को जगदलपुर पोस्टमार्टम हाउस लेकर जाना होगा। उधर, पुलिस पापा की लाश पोस्टमार्टम हाउस लेकर गई और मैं रोते हुए तुरंत बिलासपुर हाईकोर्ट के लिए निकल पड़ा।' रमेश बघेल को उनके पिता की लाश न दफनाने देने का यह पहला मामला नहीं था। गांव में ऐसे कई ईसाई परिवारों को शव दफनाने से रोका गया था। रमेश ने बिलासपुर पहुंचकर एक वकील की मदद से हाईकोर्ट में अपील दायर की। कोर्ट ने करीब एक हफ्ते बाद फैसला सुनाया- 'ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए पहले से कब्रिस्तान बने हैं। वहीं ले जाना होगा। गांव में दफनाने का आदेश देने से माहौल खराब हो जाएगा।' कोर्ट के फैसले से मुझे बहुत निराशा हुई। उसके बाद दिल्ली के लिए फ्लाइट ली और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।' रमेश आगे बताते हैं कि, 'सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। कहा- बहुत दुख की बात है कि एक बेटे को अपने पिता का शव दफनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आना पड़ा। 4 महीने में राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट दे। सरकार ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों के लिए अलग से कब्रिस्तान की व्यवस्था करे। लेकिन उस रिपोर्ट का क्या हुआ, आज तक पता नहीं चला।' 'पिता की कोई तस्वीर है आपके पास?' मैंने पूछा ‘है न! बड़ी तस्वीर है, लेकिन एक बक्से में है। उनकी तस्वीर देखता हूं तो ये सारी बातें याद आने लगती हैं। मां भी उस तस्वीर को देखकर रोने लगती हैं। फिलहाल रुकिए, दिखाता हूं।’ रमेश घर से पास्टर यानी ईसाई धर्म के प्रचारक पिता सुरेश बघेल की एक बड़ी-सी तस्वीर निकालकर लाते हैं। उनकी नजर बार-बार उस तस्वीर पर रुक जा रही है। मानो वह खुद को रोने से रोक रहे हों। वह कहते हैं- 'पापा का शव 22 दिन तक जगदलपुर पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा रहा। जब सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय नहीं मिला तो उन्हें जगदलपुर में ही बने ईसाई कब्रिस्तान में दफनाया। गांव नहीं ला पाया, जिसका जिंदगीभर मलाल रहेगा। उन 22 दिनों तक घर का चूल्हा नहीं जला। शव को अंतिम संस्कार किए बिना चूल्हा कैसे जला सकते थे? पड़ोसी हमें खाना खिला रहे थे। आखिर केस लड़ने में ही हमारे लाख-दो लाख खर्च हो गए, लेकिन पिता की लाश को न्याय दिलाने का खर्च गिनाते हुए अच्छा नहीं लग रहा। वो सब याद करके रो देता हूं। अब एक साल बीत चुके हैं। दिसंबर 2024 की बात है। पिता को हाई लेवल डायबिटीज था। तबीयत लगातार खराब होती जा रही थी। करीब हफ्तेभर उन्हें जगदलपुर के अस्पताल में भर्ती रखा। 24 तारीख को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर आए थे। एकदम ठीक लग रहे थे। उसके 14 दिन बाद यानी 7 जनवरी 2025 की बात है। सुबह के 8 बजे थे। पत्नी ने नाश्ते में दलिया बनाया था। कहने लगीं- बाबूजी, अभी तक सो कर नहीं उठे हैं, रोज तो जल्दी उठ जाते थे। मैंने मां से पिताजी को जगाने के लिए कहा। मां ने आवाज दी, हिला-डुलाया। जब नहीं जगे तो रोने लगीं। पापा की मौत हो चुकी थी।' इस बातचीत के दौरान सामने एक अलग तरह का सफेद रंग का मकान दिख रहा है। बार-बार मेरी नजर उस पर जा रही है। रमेश कहते हैं- ‘यही मेरा चर्च है। पिताजी ने 1994 में बनवाया था। वह भी ईसा मसीह को मानते थे। दरअसल, मेरे घर में अक्सर लोगों पर देवी-देवता सवार हो जाते थे। झाड़-फूंक चलती रहती थी।’ रमेश कहते हैं कि- 'ओझा ने बताया था कि हमारी पड़ोसन ने करिश्मा कर दिया है। तुम्हारे परिवार पर भूत भेज दिया है। उससे कई बार पड़ोसियों से झगड़े हुए और मार-पिटाई भी। परेशान होकर पिताजी चर्च में जाने लगे। धीरे-धीरे उनका ईसाई धर्म के प्रति झुकाव बढ़ता गया और हिंदू धर्म से विश्वास उठने लगा। उसके बाद मेरा पूरा परिवार चर्च में प्रार्थना करने जाने लगा। ईसाई धर्म मानने के बाद हमारे घर में भूत-प्रेत की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई। उसके बाद पिताजी ने यह चर्च बनवाया। हमने चर्च में आज भी ईसा मसीह की मूर्ति नहीं रखी है। इसमें सिर्फ प्रार्थना करते हैं। आखिर इसमें बुराई क्या है?' बातचीत के बीच रमेश बघेल की मां आ जाती हैं। रमेश इशारा करते हैं- 'अब बातचीत बंद कीजिए। मां यह सब सुनेंगी, तो रोने लगेंगी। वह बताते हैं कि अब तो ईसाई धर्म मानने वाले लोगों की एक टीम तैयार कर ली है। जिसके घर में कोई दिक्कत आती है, जाकर हम उसकी मदद करते हैं। किसी के घर में मृत्यु होने पर इलाके में उसके दफनाने की व्यवस्था करते हैं। काश, पिता को अपनी जमीन में दफना पाता और उनकी कब्र पर जाकर उन्हें याद कर पाता!' रमेश बघेल के घर से दो किलोमीटर दूर चंद्रवती का घर है। कच्चे मकान के आंगन में वह कई घंटे से बैठी हैं। साथ में बेटी ओजमनी भी हैं। चंद्रवती को गोंडी भाषा ही आती है। उनकी बेटी ओजमनी बताती हैं- 'मैं तो अपने पापा के शव को गांव लेकर आई ही नहीं। कैसे आती? उनकी मृत्यु से पहले ही गांव के लोग घर के बाहर जुट गए थे। कह रहे थे- गांव में शव को लेकर आए, तो पूरे घर को तोड़ देंगे। 21 जनवरी 2026 की बात है। विशाखापट्टनम में पढ़ाई करती थी। घर से खबर आई कि पिता की तबीयत खराब है। उनके ब्रेन में खून जम गया है। मम्मी और मेरे भाई पापा को लेकर रायपुर भागे। दो दिन वहां भर्ती रहे। 23 तारीख की सुबह उनकी सर्जरी हुई। उसके कुछ घंटे बाद ही मौत हो गई। उस वक्त हम नहीं चाहते थे कि किसी तरह का झगड़ा-विवाद हो। इसलिए पापा के शव को जगदलपुर के ईसाई कब्रिस्तान में ले जाकर दफनाया।' मैंने ओजमनी से पूछा- ‘धर्म कब बदला?’जवाब मिला- 'बहुत साल पहले। अब तो 25 साल की हूं। ईसाई धर्म में ही पैदा हुई। मम्मी बताती हैं कि मेरे छोटे चाचा पास्टर यानी ईसाई धर्म के प्रचारक थे। उस वक्त मम्मी को जितने भी बच्चे होते, सभी की मौत हो जाती थी। चाचा के कहने पर मम्मी चर्च जाकर प्रार्थना करने लगीं। हम पैदा हुए और सभी बच गए। हम लोग तीन बहन और एक भाई हैं। तब से हम ईसाई धर्म को मानने लगे। लेकिन बस्तर और मेरे गांव में हाल-फिलहाल में जो कुछ हुआ है, वह तो कुछ भी नहीं है। यहां कई इलाके तो ऐसे हैं, जहां ईसाई धर्म मानने की वजह से कई दफनाए हुए शवों को कब्र से बाहर निकाल दिया गया।' उनकी बात सुनकर मेरी भौहें तन जाती हैं। मन-ही-मन सवाल उठ रहा है- शायद यह लड़ाई कफन और दफन की है। इसके बाद मैं बस्तर के उस इलाके के लिए निकल पड़ता हूं, जहां एक शख्स के पिता का शव 90 गांव के लोग कब्र से निकालकर ले गए। पूरी कहानी अगले गुरुवार, 21 मई को ‘ब्लैकबोर्ड’ की नई सीरीज में… ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-सुहागरात पर ड्रग्स लेने गया, रातभर नहीं लौटा:हर हफ्ते लड़कियां बदलता, सड़क पर अंडरवियर में मिला; नशे के लिए 25 लाख की नौकरी छोड़ी 'जुलाई 2022 की वो रात… जिस रात के लिए ज्यादातर लोग सपने बुनते हैं। उस दिन मेरी सुहागरात थी। कमरा सज चुका था। रिश्तेदार थककर सो गए थे। दुल्हन मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी। मैं उसके कमरे में गया और उससे बात किए बिना बगल में लेट गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 1- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
10 दिन बीत गए, बहुमत के बाद भी कांग्रेस केरलम में CM तय नहीं कर पाई। राहुल गांधी एक्टिव हैं, 12 मई की रात तीन बजे तक मल्लिकार्जुन खड़गे के घर मीटिंग चली, फिर भी नाम फाइनल नहीं कर पाए। केरलम के साथ ही 4 मई को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी के चुनाव नतीजे आए थे। चारों राज्यों में नए CM की शपथ हो गई, लेकिन केरलम को अब तक CM नहीं मिला। पार्टी नेता जयराम रमेश के मुताबिक, 14 मई को CM के नाम का ऐलान होगा। राहुल के भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल, राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े लीडर वीडी सतीशन और पार्टी के सबसे अनुभवी रमेश चेन्नीथला दावेदार हैं। बीते 5 दिन से CM तय करने के लिए मीटिंग चल रही हैं। इस उलझन में केरलम में पार्टी टूटने की हालत हो गई। सोर्स बताते हैं कि हाईकमान केसी वेणुगोपाल को CM बनाना चाहता है, सतीशन और रमेश चेन्नीथला इसके विरोध में हैं। कांग्रेस समर्थक सतीशन के साथ हैं, लेकिन विधायकों का समर्थन वेणुगोपाल को हासिल है। वहीं, पार्टी ने 2011 में रमेश से वादा किया था कि उन्हें आगे बड़ा पद मिलेगा। हो सकता है कि दो बड़े दावेदारों की लड़ाई में वे बाजी मार ले जाएं। 3 दिन से राहुल एक्टिव, रात तीन बजे तक खड़गे के घर मीटिंग पार्टी सोर्स के मुताबिक, केरलम का CM तय करने के लिए 12 मई की देर रात करीब 3 बजे तक मल्लिकार्जुन खड़गे के घर मीटिंग हुई। राहुल गांधी 3 दिन से केरलम के कांग्रेस नेताओं, समर्थकों, दावेदारों और सहयोगी पार्टियों से बात कर रहे हैं। फिर भी मामला फंसा हुआ है। आखिरी फैसला राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ही करेंगे। वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी नेताओं से बात कर रही हैं। केरल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनसे अलग से मुलाकात की है। सोर्स का दावा: राहुल चाहते हैं, CM हाईकमान की ओर से थोपा हुआ न लगे सोर्स बताते हैं कि सिर्फ विधायकों की संख्या के आधार पर फैसला करना होता, तो नतीजों के बाद 2 दिन में ही CM चुन लेते। हाईकमान विधायकों, पार्टी के नेताओं और समर्थकों की राय जानने की कोशिश कर रहा है। राहुल गांधी दिल्ली से CM चुनकर नहीं भेजना चाहते। वे चाहते हैं कि सबकी सहमति से फैसला हो। सहयोगी दलों और सिविल सोसायटी की भी राय ली जा रही है। राहुल गांधी 3 दिन में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष सनी जोसेफ और पूर्व अध्यक्षों से अलग-अलग मिल चुके हैं। अब तक ये तीन सिनेरियो सामने हैं… 1. 50% सहमति वेणुगोपाल के नाम पर राहुल गांधी की पहली पसंद केसी वेणुगोपाल हैं, लेकिन उनके लिए कांग्रेस नेताओं का फीडबैक अच्छा नहीं है। राहुल गांधी कोई चूक नहीं होने देना चाहते, इसलिए सबसे मिलकर नाम तय कर रहे हैं। वेणुगोपाल विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े। वे CM बने, तो उनके लिए उपचुनाव होगा। वेणुगोपाल केरल की अलाप्पुझा सीट से सांसद हैं। उन्हें इस्तीफा देना होगा और विधायक चुनकर आना होगा, यानी पार्टी को दो सीटों पर चुनाव में उतरना होगा। अभी ये रिस्क लेना आसान नहीं है। 2. 40% सहमति सतीशन के नाम पर वीडी सतीशन 5 साल से विपक्ष के नेता थे। लेफ्ट सरकार को घेरते रहे। सतीशन के चेहरे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन UDF ने चुनाव लड़ा। उनका ग्राउंड कनेक्ट अच्छा है। 22 सीटें जीतने वाली सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग भी सतीशन के नाम पर राजी है। अगर हाईकमान किसी और का नाम फाइनल करती है, तो गठबंधन पर आंच आ सकती है। पहले कांग्रेस में सतीशन के नाम पर सहमति बनी थी, इसलिए केसी वेणुगोपाल को चुनाव नहीं लड़ाया गया। चुनाव के बाद विधायकों ने केसी वेणुगोपाल का समर्थन किया, उससे सतीशन की सरकार चलाने की क्षमता पर सवाल उठा है। 3. 10% सहमति रमेश चेन्नीथला के नाम पर रमेश चेन्नीथला का नाम तीसरे नंबर पर है। अगर केसी वेणुगोपाल रमेश चेन्नीथला का समर्थन कर दें, तो समीकरण बदल जाएंगे। सतीशन भी वरिष्ठ होने की वजह से चेन्नीथला का विरोध नहीं कर पाएंगे और विधायकों का समर्थन चेन्नीथला के पक्ष में चला जाएगा। ऐसा भी हो सकता है कि सतीशन चेन्नीथला का समर्थन कर देें। ऐसे में केसी वेणुगोपाल को पीछे हटना पड़ सकता है। वायनाड में पोस्टर- राहुल-प्रियंका यहां से दोबारा नहीं जीत पाओगे कांग्रेस में टूट का एक संकेत वायनाड से है। ये 15 साल में कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीट है। 2019 में राहुल गांधी अमेठी से हारे, लेकिन वायनाड से 4.3 लाख वोट से जीते। अब यहां पोस्टर लगे हैं- राहुल और प्रियंका वायनाड को भूल जाओ, यहां फिर नहीं जीतोगे। वायनाड अगला अमेठी होगा। ये पोस्टर कांग्रेस समर्थकों ने लगाए हैं। उन्होंने हाईकमान को चेताया है कि केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया, तो ठीक नहीं होगा। एक्सपर्ट: कांग्रेस के पास अच्छे मैनेजर नहीं, इसलिए राहुल-प्रियंका फंसे वहीं, कांग्रेस को लंबे वक्त तक कवर करने वाले जर्नलिस्ट आदेश रावल कहते हैं कि हाईकमान के सामने संकट है कि विधायकों की सुने या समर्थकों की। इसलिए पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है। राहुल गांधी चाहते है कि ऑब्जर्वर भेजकर विधायकों की राय लें और उनके साथ जाएं, लेकिन यहां वे फैसला नहीं कर पाए हैं। …………………………… केरलम चुनाव पर ये खबर भी पढ़ें...49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं,1957 में केरलम से शुरुआत; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाला लेफ्ट अलायंस LDF हार गया। केरलम में इस हार के बाद 49 साल में यह पहली होने जा रहा है, जब देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं है। देश में वामपंथ का विस्तार, जीत और हार से जुड़ी बड़ी बातें… पढ़िए पूरी खबर...
भारत ‘दोस्त देश’, होर्मुज से जहाजों को निकलने की अनुमति किसी और को नहीं: गरीबाबादी
ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने भारत को 'दोस्त देश' बताते हुए कहा कि तेहरान और नई दिल्ली, मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से और ज्यादा भारत से जुड़े जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने पर लगातार काम कर रहे हैं।
अरबपति उद्योगपति एलन मस्क ने पुष्टि की कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कई बड़े अमेरिकी कारोबारी नेताओं के साथ एयर फोर्स वन में बीजिंग जा रहे हैं
बंकर में छिपने की अटकलों के बीच सामने आया पुतिन का वीडियो, पुरानी टीचर से मुलाकात की तस्वीरें वायरल
अब इन दावों के बीच क्रेमलिन ने एक नया वीडियो जारी किया है, जिसमें पुतिन मॉस्को की सड़कों पर खुद कार चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पुतिन अपनी पुरानी स्कूल टीचर से मुलाकात करते नजर आते हैं।
ट्रंप-चिनफिंग नहीं चाहते, ईरान संकट के कारण पटरी से उतरे द्विपक्षीय संबंध
इस यात्रा को केवल एक सामान्य द्विपक्षीय बैठक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ईरान संकट, ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से चीन पर दबाव बना रहा है कि वह ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे, ताकि युद्ध खत्म हो सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सके
यूक्रेन में युद्ध का अंत बहुत करीब : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की संभावना अब काफी करीब दिखाई दे रही है
डेमोक्रेटिक नेताओं ने दी ईरान में बढ़े पैमाने पर युद्ध बढ़ने की चेतावनी
अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका को मध्य पूर्व में एक और लंबे युद्ध की तरफ धकेल सकता है
रूस ने सरमत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया
रूस के स्ट्रेटेजिक मिसाइल फोर्सेज के कमांडर के मुताबिक, रूस ने 'सरमत' इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।
बन्नू पुलिस चौकी आत्मघाती हमला: तालिबान ने पाकिस्तान के आरोपों को किया खारिज
काबुल में तालिबान शासन ने पाकिस्तान के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि बन्नू में पुलिस चौकी पर हमले की साजिश अफगानिस्तान में रची गई थी। तालिबान ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 'विशेष सैन्य अभियान' के तहत रूसी सेना की कार्रवाई यूक्रेन के साथ सीजफायर खत्म होने के बाद भी जारी है।
23 अप्रैल 2026, NCP विधायक अमोल मिटकरी ने खेत में कटे पड़े बकरे और पूजा-पाठ की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं। दावा किया कि अजित पवार की मौत सामान्य हादसा नहीं था। अजित पवार के बारामती आने से पहले उनके खेत और फार्महाउस पर तंत्र-मंत्र और काला जादू कराया गया था। ये दावा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत के 85 दिन बाद किया गया। उनके भतीजे रोहित पवार भी ऐसे आरोप लगा चुके हैं। दैनिक भास्कर की टीम इन दावों की पड़ताल करने और फोटोज की असलियत जानने के लिए बारामती में अजित पवार के गांव काटेवाड़ी पहुंची। यहां दो चश्मदीद मिले, जिन्होंने पूजा होते देखी थी। चश्मदीद 1: पूजा हुई, लेकिन अजित दादा के खेत में नहीं काटेवाड़ी के उपसरपंच और NCP से जुड़े मिलिंद तुकाराम काटे जादू-टोने की बात को गलत बताते हैं। वे दावा करते हैं, ‘विधायक अमोल मिटकरी ने जो फोटो शेयर की हैं, वो अजित दादा के घर या खेत की नहीं है। मैंने वो पूजा देखी है, वो अजित दादा के खेत में नहीं हुई थी।‘ पूजा पास के दूसरे खेत में हादसे के 15 दिन बाद की गई थी। ये खेत दादा के घर से दूर है। आज विज्ञान का जमाना है, लोग इन बातों में यकीन नहीं रखते। उस पूजा का अजित दादा के परिवार या इस घटना से कोई लेना-देना नहीं। गांव में रहने वाले मिलिंद कहते हैं, ‘अजित दादा के लिए लोगों में बहुत प्यार है। मीडिया के जरिए अलग-अलग सवाल उठाए जाते हैं, तो गांव के लोगों के दिलोदिमाग में भी थोड़ी शंकाएं पैदा होती हैं।‘ ‘हमें तो ये एक्सीडेंट ही लग रहा है। कुछ लोग साजिश की आशंका जता रहे हैं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार गृह मंत्री अमित शाह और PM मोदी से मिली हैं। हमें भरोसा है कि अगर कुछ संदिग्ध होगा, तो सामने आएगा।‘ चश्मदीद 2: पूजा का दादा से लेना-देना नहीं हम काटेवाड़ी में उस जगह पहुंचे, जहां पूजा का दावा किया गया था। यहां किसान संजय मधुकर मिले। वे हमें खेत में ले गए। वहां पेड़ पर अब भी बकरे के अवशेष लटके हैं। यहीं बगल में संजय का खेत है। वे दावा करते हैं, ‘मैंने पूजा होते देखी थी। ये नहीं पता कि पूजा गांव में से किसने की थी।‘ ‘कई लोग पूजा की फोटो दिखाकर साजिश बता रहे हैं, लेकिन वहां किसी की फोटो नहीं रखी गई थी। मैंने देखा था कि वहां एक बोकड़ (बकरा) लटकाया गया था और उसका मुंडका (सिर) शरीर से अलग था। नीचे नींबू और नारियल रखकर पूजा की गई थी, लेकिन इसका अजित दादा के प्लेन क्रैश से कोई संबंध नहीं है। इसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।‘ विधायक बोले- प्लेन क्रैश हादसा नहीं, सोची-समझी साजिश गांव वालों के दावे जानने के बाद हमने NCP विधायक अमोल मिटकरी से भी बात की। वे अजित पवार के प्लेन क्रैश से पहले अघोरी पूजा के दावों पर कायम हैं। अमोल कहते हैं कि बारामती में उपचुनाव के समय मैं काटेवाड़ी गया था। वहां अजित दादा के फार्म हाउस की कुछ फोटो मिलीं, जिसमें जादू-टोने जैसी चीजें दिख रही थीं। ये सब काटेवाड़ी फार्म हाउस के पिछले हिस्से की थीं। अमोल कहते हैं, ‘अगर कोई प्लेन क्रैश को हादसा कहता है, तो इसे साबित करके दिखाए। प्लेन ट्रेंड पायलट उड़ा रहे थे, ऐसे में हादसे की गुंजाइश कम है। ये देखना जरूरी है कि 26, 27 और 28 जनवरी को अजित पवार कहां थे।‘ अजित के भतीजे रोहित बोले- काली पूजा से पीछे क्या मकसद, जांच हो अजित पवार के भतीजे और NCP (SP) के विधायक रोहित पवार भी कहते हैं कि अजित दादा के काटेवाड़ी वाले घर, बारामती और मुंबई के घर के बाहर काली पूजा की गई थी। इसके वीडियो भी हैं। काली पूजा से जुड़ा अशोक खरात अभी चर्चा में हैं। दादा की पार्टी के कई लोग उसके संपर्क में थे। हम जादू-टोने में भरोसा नहीं करते, लेकिन जो लोग ब्लैक मैजिक करते हैं, उनका मकसद क्या था, इसकी जांच होनी चाहिए। वे सियासी कारणों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ‘मौत के चार महीने पहले से अजित दादा BJP के खिलाफ आक्रामक प्रचार कर रहे थे। अगर शरद पवार साहब का दिमाग और दादा का काम करने का स्टाइल फिर साथ आ जाता, तो सत्ता में बैठे लोगों की मुसीबत हो जाती। क्या इस रंजिश के चलते कुछ किया गया, ये संदेह दूर होना चाहिए।‘ रोहित आगे कहते हैं कि VSR एविएशन कंपनी के मालिक वीके सिंह और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू के बीच अच्छे संबंध हैं, इसीलिए कंपनी की जांच ठीक से नहीं की जा रही है। वीके सिंह साजिश में शामिल लोगों के नाम बता सकते हैं। पुलिस के पास जादू-टोने की शिकायत नहीं बारामती तालुका पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर चंद्रशेखर यादव ने प्लेन क्रैश के बाद अजित पवार को सुलगते मलबे से बाहर निकाला था। फार्म हाउस में पूजा-पाठ या जादू-टोने के दावों पर चंद्रशेखर कहते हैं, ‘पुलिस के पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। हम खुद साइट पर गए थे। किसी ने अपने निजी खेत में कुछ किया हो, तो अजित पवार की मौत से उसका कोई लेना-देना नहीं है।‘ रोहित पवार के केस दर्ज न करने के आरोपों पर वे कहते हैं, ‘एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज होने के तुरंत बाद पूरा केस CID को हैंडओवर कर दिया गया। पुलिस ने सारी जानकारियां उन्हें सौंप दी हैं।‘ BJP नेता बोले- जादू-टोने जैसा कुछ नहीं, ये महज हादसा बारामती में BJP के जिला उपाध्यक्ष नितिन भामे कहते हैं, ‘शुरुआती जांच और पुलिस की अब तक की छानबीन में ये हादसा ही लग रहा है। बारामती तालुका पुलिस स्टेशन में पहले ही एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है।‘ ‘कुछ लोग इंजन के आवाज करने या प्लेन डगमगाने की बात कर रहे थे। जांच एजेंसियां इन सभी पहलुओं पर जांच कर रही हैं। ये पता लगाया जा रहा है कि हादसा के पीछे मैकेनिकल खराबी थी या फिर मानवीय लापरवाही। सच जांच पूरी होने पर सामने आ जाएगा।‘ वे कहते हैं कि अमोल जिन तस्वीरों को आधार बनाकर जादू टोने का दावा कर रहे हैं, उसका प्लेन क्रैश की घटना से कोई लेना-देना नहीं है। हमे जो भी स्थानीय इनपुट मिल रहे हैं, हम उन्हें जांच एजेंसियों के साथ शेयर कर रहे हैं। …………… ये खबर भी पढ़ें… 58 अश्लील वीडियो वाला खरात बोला-सब दैवीय शक्तियों ने कराया 58 अश्लील वीडियो, 150 पीड़ित महिलाएं, 1500 करोड़ की संपत्ति, 100 फर्जी खाते, स्वयंभू बाबा अशोक खरात पर आरोपों की लिस्ट, अंधविश्वास, मंत्रियों-विधायकों से कनेक्शन से होते हुए सबसे अहम गवाह जितेंद्र शेलके की मौत तक आ पहुंची। पढ़िए पूरी खबर…
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा पर महाभियोग की प्रक्रिया तेज, रिपोर्ट को अदालत में देंगे चुनौती
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने एक स्वतंत्र पैनल की रिपोर्ट को न्यायिक समीक्षा के लिए ले जाने के अपने इरादे की घोषणा की है
आने वाले हफ्तों में बढ़ सकते हैं हंता वायरस के मामले, फिलहाल वैश्विक खतरा नहीं: डब्ल्यूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने मंगलवार हंता वायरस के और मामले सामने आने की बात कही।
चीन-अमेरिका संवाद से वैश्विक स्थिरता को मिलेगा लाभ : संयुक्त राष्ट्र
चीन और अमेरिका के नेताओं के बीच होने वाली आगामी बैठक को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने 11 मई को कहा कि संयुक्त राष्ट्र, चीन और अमेरिका के बीच जारी संवाद और संपर्क की सराहना करता है।
चीन-अमेरिका संबंधों के बारे में धारणाओं पर सीजीटीएन का ग्लोबल सर्वे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। सीजीटीएन ने चीन के रेनमिन विश्वविद्यालय के सहयोग से इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल कम्युनिकेशन स्टडीज इन द न्यू एरा के माध्यम से चीन-अमेरिका संबंधों पर एक वैश्विक सर्वेक्षण किया।
हान चेंग ने 'विश्व डिजिटल शिक्षा सम्मेलन- 2026' के उद्घाटन समारोह में भाग लिया
चीन के चच्यांग प्रांत की राजधानी हांगचो में आयोजित 2026 विश्व डिजिटल शिक्षा सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में चीनी उपराष्ट्रपति हान चेंग ने भाग लिया और संबोधन दिया।
पेइचिंग बंदरगाह पर यात्रियों की संख्या 80 लाख के पार, विदेशी यात्रियों में तेज बढ़ोतरी
आव्रजन प्रबंधन को आसान बनाने वाली सिलसिलेवार नीतियों के लागू होने के साथ ही पेइचिंग बंदरगाह पर आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
CM बनते ही थलापति विजय किसी फिल्मी नायक की तरह फैसले ले रहे हैं। 48 घंटे में ही 700 से ज्यादा शराब की दुकानें बंद कराने का आदेश दिया। शपथ के मंच से ही 200 यूनिट फ्री बिजली का ऐलान कर दिया था। सोने की चेन, अंगूठी और कैश देने का भी वादा किया है। आखिर इन योजनाओं पर कितना पैसा खर्च करने वाले हैं सीएम विजय और तमिलनाडु सरकार के पास पर्याप्त पैसा मौजूद है या नहीं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: थलापति विजय ने सीएम बनते ही कौन से बड़े फैसले लिए हैं? जवाब: 10 मई को तमिलनाडु के सीएम पद की शपथ लेने के बाद 48 घंटे में विजय ने 4 बड़े फैसले लिए… 1. 200 यूनिट फ्री बिजली 2. हर जिले में एंटी-ड्रग टास्क फोर्स 3. महिलाओं के लिए स्पेशल टास्क फोर्स 4. 717 शराब की दुकानें बंद होंगी सवाल-2: विजय ने और कौन से बड़े वादे किए हैं, जिन्हें जल्द पूरा कर सकते हैं? जवाब: विजय की पार्टी TVK ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 4 कैटेगरी में फ्री योजनाओं सहित कई बड़े वादे किए हैं... 1. कैश, सोने की चेन, फ्री यात्रा जैसी महिलाओं से जुड़ी योजनाएं 2. रिजर्वेशन, बेरोजगारी भत्ता जैसी पढ़ाई से जुड़ी योजनाएं 3. कर्ज माफी, कैश जैसी किसानों से जुड़ी योजनाएं 4. 25 लाख के हेल्थ इंश्योरेंस जैसे स्वास्थ्य और अन्य सेक्टर के वादे सवाल-3: थलापति विजय की इन योजनाओं पर कितना पैसा खर्च होगा? जवाब: मोटा-मोटी एनालिसिस है कि इन वादों को पूरा करने के लिए विजय सरकार को सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं… Slide सवाल-4: क्या तमिलनाडु सरकार के पास इन योजनाएं के लिए पर्याप्त पैसा है? जवाब: तमिलनाडु दूसरे राज्यों के मुकाबले अपनी कमाई के लिए खुद के सोर्सेज पर ज्यादा निर्भर है। राज्य की करीब 75% कमाई खुद के टैक्स यानी राज्य की GST, पेट्रोल और शराब की बिक्री पर लगने वाले टैक्स और स्टैम्प ड्यूटी वगैरह से आती है। बाकी का करीब 25% हिस्सा केंद्र सरकार से टैक्स डिवॉल्यूशन और अनुदानों के जरिए आता है। महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु की स्टेट जीडीपी देश में सबसे ज्यादा है। 2025-26 में तमिलनाडु की अनुमानित GSDP करीब 35 लाख करोड़ रुपए है। हालांकि मौजूदा समय में तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। राज्य पर कुल 10.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। अगले वित्तीय वर्ष में इसके 10.71 लाख करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है। इस समय राज्य के खाते में कुल 3.31 लाख करोड़ का राजस्व यानी सालाना कमाई जमा है। इन्हीं पैसों से सरकार कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन देती है, योजनाएं चलाती हैं, अपना ब्याज चुकाती है और सड़क जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाती है। इस पर कुल कमाई का 60% से ज्यादा पैसा खर्च हो जाता है। इसके बाद नई योजनाओं के लिए बहुत कम पैसा बचता है। विजय सरकार की नई योजनाओं पर सालाना करीब एक लाख करोड़ रुपए यानी तमिलनाडु के रेवेन्यू का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खर्च हो जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय सरकार अगर शराब की बिक्री पर भी सख्ती करती है, तो सालाना कमाई करीब 30 हजार करोड़ रुपए घट जाएगी। इसके अलावा अगर नई योजनाएं लागू होती हैं, तो राजस्व घाटा GSDP के 1.2% से बढ़कर 3.8% हो जाएगा। साथ ही राजकोषीय घाटा यानी सरकार के पास मौजूद फंड में भी घाटा 3% से बढ़कर 5.6% हो सकता है। मार्च में चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने DMK को निशाना बनाते हुए कहा था, 'लोग पूछते हैं कि 'स्टालिन सर' जो नहीं कर पाए, वह मैं कैसे करूंगा? राज्य का कुल बजट 4.39 लाख करोड़ रुपए का है, लेकिन उसका 30% हिस्सा 'स्टालिन सर टैक्स' यानी 20% मुख्यमंत्री को और 10% उनके मंत्रियों के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। अगर हम इस लूट को रोक दें, तो हमारे पास इन योजनाओं के लिए पर्याप्त पैसा होगा। आप भरोसा रखें, जीत हमारी ही होगी।' सवाल-5: तो क्या ये योजनाएं पूरी तरह लागू हो पाएंगी? जवाब: तमिलनाडु के सीनियर जर्नलिस्ट भगवान सिंह कहते हैं, ‘सरकार पर मौजूदा कर्ज को देखते हुए चुनावी वादों को पूरा करने के लिए फंडिंग जुटाना विजय के लिए बड़ी चुनौती होगी।’ विजय भी जानते हैं कि ये सभी वादे पूरे करना आसान काम नहीं है। उन्होंने अपनी घोषणाओं को लेकर जनता से समय मांगते हुए कहा, ‘कृपया धैर्य रखें, मुझे थोड़ा समय दें, मैं कोई फरिश्ता नहीं, बल्कि आपकी ही तरह आम इंसान हूं। मैं झूठे वादों से कभी आपको धोखा नहीं दूंगा और वही वादे करूंगा जो संभव हो।’ सीएम पद की शपथ लेने के बाद विजय ने पहले ही भाषण में कहा कि DMK सरकार ने उन पर 10 लाख करोड़ का कर्ज छोड़ा है। उन्होंने कहा, ‘मैं एक व्हाइट पेपर जारी करूंगा, जिसमें 2021 से 2026 तक तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्थिति के बारे में बताया जाएगा।’ 2021 में DMK की सरकार आने पर स्टालिन ने अपनी पूर्ववर्ती AIADMK सरकार के दौरान का व्हाइट पेपर जारी किया था। इसमें कहा गया कि 2022 तक सरकार पर 5.7 लाख करोड़ रुपए के कर्ज के लिए पिछली AIADMK जिम्मेदार है। जब विजय के व्हाइट पेपर जारी किया, तो स्टालिन ने X पर लिखा, ‘मौजूदा कर्ज तय सीमा के अंदर ही है। हमारी सरकार ने फरवरी में जारी बजट में तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति साफ कर दी थी, लेकिन आपने उसके बाद भी जनता से इतने सारे वादे किए।’ सवाल-6: थलापति विजय इतनी फ्री योजनाएं क्यों शुरू कर रहे? जवाब: तमिलनाडु की राजनीति में ऐसी योजनाओं की परंपरा रही है। 1991 में तमिलनाडु की CM बनीं जयललिता ने अपने कार्यकाल में ‘अम्मा उनावगम’ या अम्मा कैंटीन योजना चलाई थी, जिसके तहत गरीब-मजदूरों को 1 रुपए में इडली और 5 रुपए में सांभर-राइस दिया जाता था। इसके अलावा गरीब परिवार की बेटियों की शादी में 8 ग्राम सोना देने की योजना भी उन्हीं के समय शुरू हुई, जिसे 'थलिक्कू थंगम स्कीम' कहा गया। इसी तरह पूर्व CM एमके स्टालिन ने महिलाओं, युवाओं के लिए कई स्कीम के अलावा 100 यूनिट फ्री बिजली जैसी योजनाएं चलाईं। अब विजय DMK और AIADMK की योजनाओं से भी आगे निकल गए हैं। मसलन- -------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…तमिलनाडु में नास्तिक के बाद ईसाई सीएम:थलापति विजय की कहानी, जिसने पहले ही चुनाव में स्टालिन की DMK, जयललिता की AIADMK को किनारे लगा दिया थलापति विजय। द्रविण राजनीति का नया सितारा। बचपन में एक्टर बने। जवानी में सुपरस्टार और पिछले दो साल में ही एक पूरी पार्टी खड़ी कर दी। विजय ने राज्य के नास्तिक मुख्यमंत्री स्टालिन की 50 साल पुरानी पार्टी DMK बनाम AIADMK की सियासत को किनारे लगा दिया। उनका तमिलनाडु का पहला ईसाई मुख्यमंत्री बनना तकरीबन तय है। पढ़ें पूरी खबर…
सूत्रों के मुताबिक, ईरान की ओर से भेजा गया जवाब अमेरिकी प्रशासन की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। इसी कारण ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई।
होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर जोर, रुबियो ने की यूके और ऑस्ट्रेलिया से बातचीत
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत की। इन चर्चाओं में मुख्य रूप से ईरान और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर जोर दिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी जानकारी दी है।
पाकिस्तान की पोल खुली! अमेरिका से किया मध्यस्थता का ड्रामा, चोरी-चोरी ईरान को ऐसे पहुंचाई मदद
अमेरिकी न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा किए जाने के बाद ईरान ने अपने कुछ सैन्य विमानों को पाकिस्तान भेजा था।
ट्रंप कराएंगे सालाना मेडिकल चेकअप, सेना के जवानों और कर्मचारियों से भी करेंगे मुलाकात
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 26 मई को वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर जाएंगे

