DNA: ट्रंप के यूएन से भारत की दूरी का विश्लेषण, खबर ये भी बड़ी है

Gaza peace board: गाजा के लिए जो पीस बोर्ड बना है उसमें अमेरिका समेत 20 देशों ने शामिल होने पर सहमति दी है. गौर से देखने पर पता चलेगा कि 20 में से 10 इस्लामिक देश हैं. इस वजह से सवाल उठता है कि गाजा पीस बोर्ड बनाने चले ट्रंप कहीं जाने-अनजाने आसिम मुनीर का प्रोजेक्ट यानी इस्लामिक नाटो तो नहीं बना रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 12:08 am

हिटलर के बाद सबसे ताकतवर सेना बना रहा जर्मनी, यूरोप में अंदरखाने क्या पक रहा है?

Germany:जर्मनी के मिलिट्री प्लान का विश्लेषण आपको बताएगा कि आज के जर्मनी को हिटलर जैसी फौज क्यों याद आ रही है. आपको ये भी पता चलेगा कि जिस अमेरिका ने हिटलर का अंत किया था वही अमेरिका इस हिटलर जैसी सेना के प्लान की वजह क्यों बना है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 11:50 pm

DNA: शुरु हुई जंग की तैयारी... इस बार ट्रंप नहीं खलीफा ने दी अमेरिका को चुनौती, कभी भी शुरु हो सकता है ईरान-US का युद्ध?

America-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी समय जंग होने की संभावना है. इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नहीं बल्कि खलीफा ने किया है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 11:12 pm

2027 तक ताइवान पर चीन का कब्जा? जीटीआई डायरेक्टर का चौंकाने वाला दावा

China Taiwan row: दावा किया जा रहा है कि चीन की सेना 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने की क्षमता हासिल कर लेगी. ताइवान के दैनिक अखबार ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, GTI की सीनियर नॉन-रेसिडेंट फेलो, कोवालेवस्की ने कहा कि 2026 चीन की पीएलए के लिए इस क्षमता तक पहुंचने का ये आखिरी साल है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 11:06 pm

गाजा के बोर्ड ऑफ पीस की अमेरिकी अखबार ने ही खोल दी पोल, क्यों बता दिया 'वन मैन शो'?

Trump Board Of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा में बोर्ड ऑफ पीस को लेकर खुद अमेरिका मीडिया संस्थान ने पोल खोल दी है. अखबार ने इसे वन मैन शो बताया है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 4:15 pm

पहले टैरिफ की मार अब चीन का दौरा; आखिर किस प्लान में ट्रंप? दावोस से लौटते ही कर दिया ये बड़ा ऐलान

US-China Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल में चीन की अपनी यात्रा की पुष्टि की है, जिसमें वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे. ट्रंप ने संकेत दिया कि शी साल के अंत में वाशिंगटन आ सकते हैं. बता दें, ये ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में चीन की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा होगी और अमेरिका-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 2:52 pm

ईरान के करीब पहुंचा अमेरिका का सबसे विध्वंसक युद्धपोत, ट्रंप की धमकी पर तेहरान की चेतावनी- उंगलियां ट्रिगर पर हैं

अमेरिकी विध्वंसक युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन अपने पूरे स्ट्राइक ग्रुप के साथ ईरान के करीब बढ़ रहा है। इसी बीच इस्राइल भी संभावित ‘सरप्राइज वॉर’ की तैयारी में जुटा हुआ बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर माहौल को और गरमा दिया है।

देशबन्धु 23 Jan 2026 12:13 pm

ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शहबाज शरीफ की एंट्री, पाकिस्तान में सियासी तूफान, विपक्ष बोला- यह कूटनीति नहीं, बूट पॉलिश है

दावोस में ट्रंप के ठीक बगल में बैठे मुस्कुराते और उनके कानों में कुछ फुसफुसाते शहबाज शरीफ की तस्वीरें सोशल मीडिया से लेकर पाकिस्तानी टीवी चैनलों तक चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। आलोचकों का कहना है कि यह तस्वीर केवल एक औपचारिक कूटनीतिक पल नहीं, बल्कि अमेरिका को खुश करने की पाकिस्तान की पुरानी नीति की नई मिसाल है।

देशबन्धु 23 Jan 2026 11:38 am

ट्रंप का बड़ा फैसला, कनाडा से वापस लिया 'बोर्ड ऑफ पीस' का न्योता; भारत समेत कई देश पहले ही कर चुके हैं मना

Canada: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को गाजा शांति बोर्ड ( बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने का निमंत्रण रद्द कर दिया. ट्रंप का ये फैसला WEF में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल के चार्टर पर हस्ताक्षर के ठीक बाद आया.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 10:11 am

ट्रंप के टैरिफ वॉर से दुनिया रही त्रस्त, PM मोदी ने सूझबूझ से भारत की इकोनॉमी चमकाई, यूरोपियन लीडर्स के बने रोल मॉडल; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

PM Modi pushed reforms India growth: Report-अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से जब पूरी दुनिया दबाव में है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालात को मौके में ऐसे बदला कि अब पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है. The Economist की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी ने विदेशी दबाव के बीच आर्थिक सुधार किए, भारत की ग्रोथ बनाए रखी और अब यूरोपीय नेता भी भारत के मॉडल को ध्यान से देख रहे हैं. जानें पूरी रिपोर्ट.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 9:57 am

'यह मेरा नहीं बाइडेन सरकार का युद्ध है...', क्यों जटिल बना रूस-यूक्रेन युद्ध? ट्रंप ने बताया असल मुद्दा

Donald Trump: रूस-यूक्रेन के बीच हो रही जंग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने कहा है कि पुतिन और जेलेंस्की डील चाहते हैं लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध की स्थिति काफी जटिल है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 9:25 am

दावोस भाषण की गूंज वॉशिंगटन तक: ट्रंप ने कनाडा का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ आमंत्रण लिया वापस, कार्नी से नाराज़गी के संकेत

दावोस में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति पर बोलते हुए कहा था कि अमेरिका का एकछत्र वैश्विक प्रभुत्व धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और दुनिया एक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। उन्होंने उभरती अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रीय सहयोग की भूमिका पर जोर दिया था।

देशबन्धु 23 Jan 2026 9:20 am

बांग्लादेश चुनाव की बिसात बदली: जमात-ए-इस्लामी सत्ता के करीब, तारिक रहमान उभरे पीएम पद के मजबूत दावेदार

बांग्लादेश में 12 फरवरी को 300 सीटों वाली संसद के लिए चुनाव होने हैं। अवामी लीग की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने और देश छोड़ने के बाद यह पहला आम चुनाव है। विपक्षी दलों और नए गठबंधनों को मजबूती मिलती दिख रही है।

देशबन्धु 23 Jan 2026 9:14 am

‘हमने 8 जंग रोकी, UN में दम नहीं’ अब संयुक्त राष्ट्र की जगह चलेगा ट्रंप का ‘Board of Peace’? 60 देशों को जोड़ने की तैयारी

Trump Says Board of Peace Will Be Good Thing for UN World: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने अब तक अपनी पूरी ताकत नहीं दिखाई. आठ युद्धों में UN कहीं नजर नहीं आया. अब ट्रंप ने ‘Board of Peace’ बनाया है और इसमें 60 देशों को एक साथ लाकर वैश्विक शांति के लिए काम करने की तैयारी कर रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 9:12 am

रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप का बयान: पुतिन-जेलेंस्की समझौते को तैयार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच समझौता न हो पाने की वजह वही पुरानी समस्याएं हैं

देशबन्धु 23 Jan 2026 8:53 am

अमेरिका ने WHO से क्यों तोड़ा नाता? जिनेवा मुख्यालय से हटाया अपना झंडा

अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक तौर पर अलग होने की घोषणा कर दी है. अमेरिकी स्वास्थ्य और विदेश विभाग ने बताया कि अमेरिका अब WHO का सदस्य नहीं रहा. इसके साथ ही जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा भी हटा दिया गया है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 8:23 am

कलम वाले हाथों में लगी हथकड़ी, स्कूल से लौटे 5 साल के मासूम को उठा ले गए एजेंट, रुला देगी ट्रंप की ये सख्ती

Donald Trump: अमेरिका की सत्ता दोबारा संभालने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप काफी सख्त हैं. उनकी सख्ती ये 5 साल के बच्चे पर भी देखी जा रही है. अमेरिका में 5 साल के बच्चे को हिरासत में लिया गया है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 8:21 am

वेनेजुएला में मादुरो की सत्ता पलटते ही 18 साल बाद तेल नीति भी बदली, अमेरिका की हो गई बल्ले-बल्ले, अब प्राइवेट कंपनियां खूब मचाएंगी लूट?

Venezuela Oil Revamp Will Allow Foreign Drillers: वेनेजुएला में अब तेल का खेल बदलने वाला है. .जनवरी 2026 में अमेरिका ने निकोलस मादुरो को कैप्चर कर लिया और उनकी जगह एक्टिंग प्रेसिडेंट डेलसी रोड्रिगेज ने संभाली. बस तीन हफ्ते बाद ही, 22 जनवरी को वेनेजुएला की नेशनल असेंबली ने तेल सेक्टर में बड़ा रिफॉर्म बिल पास कर दिया है, अगर ये बिल पास हो गया फिरअमेरिका की हो गई बल्ले-बल्ले हो जाएगाा.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 7:17 am

कौन हैं अनीस आलमगीर, जिनकी जमानत याचिका को कोर्ट ने किया खारिज; यूनुस सरकार ने आतंकवाद विरोधी मामले में किया था गिरफ्तार

Bangladesh:बांग्लादेश में जारी तनाव के बीच ढाका की एक अदालत ने आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत वरिष्ठ पत्रकार अनीस आलमगीर की जमानत याचिका खारिज कर दी. 14 दिसंबर को हिरासत में लिए गए आलमगीर पर राज्य को अस्थिर करने और प्रतिबंधित संगठन को उकसाने का आरोप है.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 7:10 am

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की जिद के बीच पुतिन ने लगाई इसकी कीमत, बोले- 'यह रूस की चिंता का विषय नहीं'

ग्रीनलैंड को लेकर इन दिनों बवाल मचा हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बात साफ कर दी है कि ग्रीनलैंड यूएस का होगा

देशबन्धु 23 Jan 2026 6:20 am

4 करोड़ लाशों पर बैठा था यूरोप:76 साल पहले कैसे बना NATO, क्या अब बिखरना तय है; आखिरी कील ठोक रहे ट्रम्प

ग्रीनलैंड की सबसे मशहूर इंफ्लूएंसर हैं क्युपानुक ओलसेन। वो अपने 5 लाख फॉलोअर्स को बर्फ पर सूखती मछलियां, पारंपरिक सूप और 24 घंटे लंबी बर्फीली रातों की कहानियां सुनाती रही हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनकी टाइमलाइन बदल गई है। अब उसमें एक नया विषय घुस आया है- डोनाल्ड ट्रम्प। थोड़ा पीछे चलते हैं। तारीख- 4 मार्च 2025। वॉशिंगटन डीसी की एक शाम। अमेरिकी कांग्रेस का संयुक्त सत्र चल रहा था। ट्रम्प मंच पर खड़े बोल रहे थे। उन्होंने अचानक कहा कि अमेरिका को हर हाल में ग्रीनलैंड लेना पड़ेगा। बात इतनी बेहिचक थी कि संसद में बैठे सांसद हंस पड़े, लेकिन ट्रम्प मजाक नहीं कर रहे थे। 14 जनवरी 2026, उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री से साफ कह दिया- ग्रीनलैंड नेशनल सिक्योरिटी का मसला है। उस पर पूरी तरह अमेरिकी अधिकार चाहिए। फिर उन्होंने चेतावनी की तरह वेनेजुएला का नाम लिया, जिसके राष्ट्रपति मादुरो को उन्होंने उठवा लिया था। मतलब साफ था कि जरूरत पड़ी तो ताकत का इस्तेमाल करने में हिचक नहीं होगी। ट्रम्प के इन बयानों ने यूरोप के डिफेंस हेडक्वार्टर्स में भी हलचल मचा दी। डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए। जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे, नीदरलैंड और फिनलैंड ने भी अमेरिका के खिलाफ एकजुटता दिखाई। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने धमकी भरे लहजे में कह दिया- 'दोस्तों, अब तख्तियां उतार देने का समय आ गया है।' नाटो के 76 साल के इतिहास में यह दृश्य कभी नहीं देखा गया था। एक ऐसा सैन्य गठबंधन, जो इस वादे पर खड़ा था कि ‘एक पर हमला, सब पर हमला’। अब उसके सदस्य एक-दूसरे पर हमलावर हैं। नाटो का जन्म द्वितीय विश्व युद्ध के मलबे से उपजी एक कड़वी मजबूरी थी। 3.65 करोड़ लोगों की मौत के बाद यूरोप एक कब्रिस्तान बन चुका था। सोवियत रूस के राष्ट्रपति जोसेफ स्टालिन को इस तबाही में एक अवसर नजर आया। उनका मानना था कि पूंजीवादी व्यवस्था यूरोप को इस हाल तक लाई है और अब सिर्फ कम्युनिस्ट विचारधारा ही इस डूबते महाद्वीप को बचा सकती है। 1948-49 के बीच सोवियत संघ ने दो बड़े कदम उठाए। पहला- फरवरी 1948 में चेकोस्लोवाकिया की लोकतांत्रिक सरकार को गिराकर सोवियत समर्थक कम्युनिस्टों के हाथों में सत्ता सौंप दी गई। दूसरा कदम और भी ज्यादा डरावना था। 24 जून 1948 की शाम, सोवियत संघ ने पश्चिमी बर्लिन की नाकेबंदी शुरू कर दी। रेल लाइनों पर ताले लग गए, सड़कें बंद हो गईं, जलमार्ग सूख गए। पश्चिमी बर्लिन भूख और अंधेरे में डूब गया था। इसी बीच वॉशिंगटन में बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने एक ऐसा फैसला लिया, जो इतिहास बन गया- बर्लिन एयरलिफ्ट। अमेरिकी विमान महीनों तक आसमान के रास्ते बर्लिन में खाना, दवाइयां और ईंधन पहुंचाते रहे। यह केवल राहत अभियान नहीं था, यह सोवियत दबाव के खिलाफ खुली चुनौती थी। यूरोप समझ चुका था कि सोवियत संघ एक-एक करके देशों को झुकाने की कोशिश कर रहा है। और यह भी साफ था कि बिना सामूहिक सुरक्षा के वह टिक नहीं पाएगा। इसी मजबूरी में 4 अप्रैल 1949 को वॉशिंगटन में 12 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन यानी NATO का जन्म हुआ। तस्वीर ये रही... इस दौरान मौजूद ब्रिटिश जनरल और नाटो के पहले महासचिव लॉर्ड इस्मे ने इसके मकसद को एक ही वाक्य में समेट दिया- ‘रूसियों को बाहर रखना, अमेरिकियों को अंदर रखना और जर्मनों को दबाकर रखना।’ इसे ‘इस्मे डॉक्ट्रिन’ के नाम से जाना जाता है। इस पूरे समझौते की आत्मा थी नाटो का आर्टिकल 5। इसके तहत एक सदस्य पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा। नाटो के जन्म के महज पांच महीने बाद, 29 अगस्त 1949 की सुबह, कजाखस्तान के सेमिपालातिंस्क मैदान में जमीन कांप उठी। एक जबरदस्त धमाका हुआ- सोवियत संघ ने अपना पहला परमाणु परीक्षण कर दिया था। इसी के साथ परमाणु हथियारों पर अमेरिका का एकाधिकार खत्म हो गया। नाटो की आत्मा माने जाने वाले अनुच्छेद-5 को लेकर अमेरिका कभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं था। जब यह अनुच्छेद लिखा जा रहा था, तब अमेरिकी सीनेट के भीतर एक गहरी बेचैनी थी। सीनेटरों को डर था कि कहीं यह समझौता अमेरिका को ऐसे युद्ध में न धकेल दे, जहां से लौटने का कोई रास्ता न बचे। इसलिए अनुच्छेद-5 की भाषा जानबूझकर धुंधली रखी गई। उसमें साफ लिखा गया कि हर देश ‘वही कार्रवाई करेगा, जिसे वह आवश्यक समझे।’ इस धुंधलेपन की असली तस्वीर 1949 के एक छोटे, लेकिन बेहद अहम किस्से में दिखती है। समझौते पर बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश उप-सचिव रॉबर्ट लवेट से सीधा सवाल पूछा गया- अगर लंदन पर हमला होता है, तो क्या उसे वॉशिंगटन पर हमला माना जाएगा? लवेट ने बिना हिचक जवाब दिया- ’नहीं, सर।’ यह जवाब नाटो की उस कमजोरी को उजागर करता है, जिसे बाद में ‘पवित्र गठबंधन’ जैसे शब्दों से ढक दिया गया। आज डोनाल्ड ट्रम्प इसी अंतर्विरोध और कमजोरी का राजनीतिक फायदा उठाते नजर आते हैं। 1950 के दशक की शुरुआत में नाटो ने खुद को एक संगठित मिलिट्री मशीन में बदलना शुरू किया। 19 दिसंबर 1950 को अमेरिका के राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर को नाटो का पहला सुप्रीम कमांडर नियुक्त किया गया, लेकिन आइजनहावर इस भूमिका से उत्साहित नहीं थे। 1951 की सर्दियों में आइजनहावर ने अपने सलाहकारों को चेतावनी दी- ‘हम अपनी सेनाओं के साथ दूर-दराज की सीमाओं की रखवाली करने वाला आधुनिक रोम नहीं बन सकते।’ विडंबना यह है कि अगले 76 वर्षों में अमेरिका धीरे-धीरे पूरी दुनिया की पुलिसिंग में उलझता चला गया। शीत युद्ध की असली रीढ़ परमाणु हथियार थे। 1950 और 1960 के दशक में यूरोप हर रात इसी डर में जीता था कि कहीं कोई बटन न दब जाए। ‘म्युचुअल एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन’ यानी MAD का सिद्धांत यही कहता था- अगर तुम मारोगे, तो हम भी मरेंगे, और तुम्हें भी साथ ले जाएंगे। नाटो परमाणु बम के साए से बचने के लिए और ज्यादा परमाणु बम जमा करता चला गया। MAD नीति के तहत नाटो ने हजारों परमाणु हथियार रखने का लक्ष्य तय किया था। रणनीति साफ थी- इतनी क्षमता होना कि सोवियत संघ की लगभग 30% आबादी और 70% औद्योगिक ढांचे को नष्ट किया जा सके। यह सुरक्षा की भाषा नहीं थी, यह विनाश के संतुलन की भाषा थी। 7 मार्च 1966 को फ्रांस के राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल ने नाटो से बाहर निकलने की घोषणा कर दी थी। डी गॉल का सवाल सीधा था- अगर सोवियत मिसाइलें पेरिस की ओर बढ़ें, तो क्या अमेरिका न्यूयॉर्क को दांव पर लगाकर फ्रांस को बचाएगा? उन्हें इस पर जरा भी भरोसा नहीं था। डी गॉल ने अमेरिकी सैनिकों को फ्रांस छोड़ने का आदेश दे दिया। कहा जाता है कि उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने व्यंग्य में पूछा था- ‘क्या हमें फ्रांस में दफन अपने सैनिकों की कब्रें भी साथ ले जानी होंगी?’ यह तंज नाटो के भीतर मौजूद गहरी भावनात्मक और रणनीतिक दरारों को उजागर करता है। कई दशकों की दूरी के बाद, साल 2009 में फ्रांस दोबारा नाटो की इंटिग्रेटेड मिलिट्री स्ट्रक्चर का हिस्सा बना, लेकिन डी गॉल का सवाल आज भी हवा में तैर रहा है- सुरक्षा के वादे पर कितना भरोसा किया जा सकता है? 26 दिसंबर 1991 की एक बर्फीली शाम, मॉस्को के क्रेमलिन में इतिहास ने चुपचाप करवट बदली। जिस किले से दशकों तक दुनिया की किस्मत तय होती रही थी, वहां से सोवियत संघ का लाल झंडा हमेशा के लिए उतार लिया गया। 40 साल से चला आ रहा शीत युद्ध, जिसमें देशों को मोहरे बनाकर खेला गया, आखिरकार खत्म हो गया। ऐसा लगा मानो नाटो का काम पूरा हो चुका हो। लेकिन नाटो इतिहास का हिस्सा बनने के बजाय और फैलने लगा। यही वह दौर था, जिसे बाद में ‘मिशन क्रीप’ कहा गया, यानी रेंगते हुए रूस के आंगन तक पहुंचने का अभियान। ये एक कसम के टूटने जैसा था। दरअसल, 9 फरवरी 1990 की दोपहर, अमेरिकी विदेश मंत्री जेम्स बेकर सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव से मिलने पहुंचे। बातचीत का मुद्दा था- जर्मनी से सोवियत सेनाओं की वापसी। बदले में एक वादा किया- अगर रूस जर्मनी खाली कर देता है, तो नाटो रूस की सीमा की ओर एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगा। यह वादा कभी कागज पर नहीं उतरा, लेकिन रूस की सामूहिक याद्दाश्त में यह एक टूटी हुई कसम बनकर रह गया। जब 1999 से 2004 के बीच नाटो पूर्वी यूरोप तक फैलता चला गया, तो मॉस्को में इसे एक ऐतिहासिक विश्वासघात के रूप में देखा गया। प्रसिद्ध अमेरिकी रणनीतिकार जॉर्ज केनन ने 1997 में ही चेतावनी दी थी कि नाटो का यह विस्तार अमेरिका की सबसे घातक रणनीतिक भूल साबित होगा। उनकी चेतावनी उस समय अनसुनी कर दी गई। 7 मई 2000 को जब व्लादिमीर पुतिन सत्ता में आए, तब तक पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य नाटो में शामिल हो चुके थे। इसके बावजूद पुतिन शुरुआती वर्षों में पश्चिम से टकराव से बचते रहे। उन्होंने यहां तक कहा कि रूस नाटो की सदस्यता की संभावना से इनकार नहीं करता, लेकिन नाटो रूस को बराबरी का भागीदार मानने को तैयार नहीं था- उसे सिर्फ एक थर्ड रेट पावर समझा गया। साल 2004 में नाटो ने एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया समेत सात पूर्व सोवियत गणराज्यों को अपने साथ जोड़ लिया। यह केवल विस्तार नहीं था- यह रूस की दहलीज तक सीधी दस्तक थी। पुतिन ने इसे रणनीतिक घेराबंदी के रूप में देखा। 10 फरवरी 2007 की शाम, म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में पुतिन का संयम टूट गया था। मंच से उन्होंने नाटो देशों से तीखे शब्दों में पूछा- ‘उन वादों का क्या हुआ कि नाटो एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगा? आखिर रूस के करीब आप अपने आप को किसके खिलाफ फैला रहे हैं?’ यहीं से सहयोग की बची-खुची उम्मीद भी खुली दुश्मनी में बदलने लगी थी। 2008 के बुखारेस्ट शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ऐलान कर दिया कि जॉर्जिया और यूक्रेन भी ‘नाटो के सदस्य बनेंगे।’ पुतिन के लिए यह बयान ऐसा था, मानो उनके आंगन में अमेरिकी मिसाइलें लगाने की घोषणा कर दी गई हो। राजनीति विज्ञान में इसे ‘सुरक्षा दुविधा’ कहा जाता है- जहां नाटो का हर ‘रक्षात्मक’ कदम रूस को सीधा ‘आक्रामक’ दिखाई देता है। यही सोच 2008 के जॉर्जिया युद्ध और आगे चलकर यूक्रेन संकट की बुनियाद बनी। पुतिन अपनी नाराजगी पहले ही उजागर कर चुके थे। साल 2011 में, लीबिया के शासक मुअम्मर गद्दाफी को सत्ता से हटाने के लिए नाटो ने हवाई हमले किए। रूस ने इसे केवल एक अमानवीय हस्तक्षेप नहीं माना, बल्कि अपने रणनीतिक हितों, खासतौर पर तेल और गैस व्यापार पर सीधा हमला समझा। अविश्वास और गहराता चला गया। फिर 2014 आया। यूक्रेन में पश्चिम समर्थक सरकार के सत्ता में आते ही पुतिन ने क्रीमिया का विलय रूस में कर लिया। यहीं से नाटो और रूस के बीच ‘छद्म युद्ध’ की शुरुआत मानी जाती है। अमेरिका और नाटो के देश यूक्रेन को हथियार देने लगे और रूस युद्ध के मौके तलाशने लगा। साल 2017। राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों को साफ शब्दों में सुना दिया- अपने हिस्से का पैसा खर्च करो, नहीं तो सुरक्षा भूल जाओ। उनके लिए नाटो कोई विचारधारा नहीं था, बल्कि एक कारोबारी सौदा था। इसी सोच ने नाटो की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी- भरोसा। यूरोप ने पहली बार गंभीरता से सोचना शुरू किया कि मुश्किल समय में अमेरिका पर भरोसा किया जा सकता है क्या? नवंबर 2019 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ऐसी बात कही, जिसने पूरी अटलांटिक दुनिया को झकझोर दिया- ‘नाटो ब्रेन-डेड है।’ असल में अमेरिका ने नाटो सहयोगियों से सलाह किए बिना ही सीरिया से अपनी सेना वापस बुला ली थी। दरअसल, वो यह बता रहे थे कि अगर गठबंधन में संवाद और भरोसा मर जाए, तो शरीर जीवित तो दिख सकता है, पर वो कुछ कर नहीं सकता। 29 अगस्त 1949 के सोवियत परमाणु परीक्षण से लेकर ग्रीनलैंड पर ट्रम्प के बयानों तक, नाटो एक ही सवाल से जूझता रहा है- सुरक्षा भरोसे से आती है या ताकत से? ट्रम्प के दौर में इस सवाल ने और भी डरावना रूप ले लिया। उन्होंने नाटो की सबसे कीमती पूंजी भरोसे को धीरे-धीरे छीलना शुरू कर दिया। इस भरोसे पर पहला सार्वजनिक प्रहार 25 मई 2017 को ब्रसेल्स में दिखा। नाटो मुख्यालय के उद्घाटन समारोह में ट्रम्प मंच पर खड़े थे। चारों ओर यूरोप के नेता, सामने कैमरे। यह वही मौका था जब हर अमेरिकी राष्ट्रपति परंपरागत रूप से अनुच्छेद 5 को दोहराता है- ‘एक पर हमला, सब पर हमला।’ लेकिन ट्रम्प ने वह वाक्य बोला ही नहीं। समारोह खत्म होते ही यूरोपीय राजनयिक एक-दूसरे से फुसफुसाने लगे- ‘क्या यह भूल थी, या संकेत?’ उसी शाम जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कह दिया- अब हमें अपनी किस्मत खुद अपने हाथ में लेनी होगी। यह बयान नाटो के भीतर एक मानसिक भूकम्प था। इसके बाद जुलाई 2018 की ब्रसेल्स समिट आई। नाटो के इतिहास की सबसे असहज बैठकों में से एक। बंद कमरे में ट्रम्प ने सीधे जर्मनी पर हमला बोला। उनका आरोप था कि जर्मनी रूस से गैस खरीदता है और हम उसे रूस से बचाने की उम्मीद करते हैं। आप रूस के कैदी हैं। कमरे में सन्नाटा पसर गया। नाटो का आर्थिक इंजन कहलाने वाला जर्मनी अचानक समस्या बना दिया गया। यहीं से यूरोप को पहली बार साफ दिखने लगा कि अमेरिका की नाराजगी अब रूस से ज्यादा अपने ही सहयोगियों पर है। ट्रम्प ने नाटो को कभी ‘खराब बिजनेस डील’ कहा, कभी ऐसा क्लब बताया, जहां अमेरिका बेवकूफ बनता आया है। अक्टूबर 2018 में यूरोप की ठंड अचानक और गहरी हो गई। ट्रम्प ने कहा कि अगर कोई छोटा नाटो देश रूस से उलझता है, तो ‘सोचना पड़ेगा’ कि अमेरिका उसकी मदद करे या नहीं। लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया जैसे देशों के लिए यह बयान किसी अलार्म से कम नहीं था। नीदरलैंड्स के शहर द हेग में मई 2025 की एक सुबह। दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के नेता यहां जमा थे। माहौल में नाटो के 75 साल पूरे होने का जश्न नहीं, बल्कि गहरी बेचैनी थी। सम्मेलन कक्ष के भीतर एक मेज पर एक पतली-सी फाइल रखी थी, जिस पर लिखा था- अमेरिका की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी 2025। यह नाटो के लिए ‘डेथ वारंट’ जैसा लग रहा था। ट्रम्प की इस रणनीति में नाटो को अब स्थायी सुरक्षा की गारंटी नहीं, बल्कि कंडीशनल सर्विस कहा गया है। फरमान सीधा, ठंडा और कठोर था- अपनी जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करो, वरना पुतिन के टैंकों के सामने अकेले खड़े रहने के लिए तैयार रहो। कमरे में सन्नाटा था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह चेतावनी है, सौदा है, या नाटो के अंत की घंटी। क्या एक दिन ऐसा आएगा जब ग्रीनलैंड में तैनात अमेरिकी बंदूकें पश्चिमी यूरोप की ओर मुड़ जाएंगी? क्या आदेश आएगा- फायर? और अगर ऐसा हुआ, तो क्या दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत नाटो को उसी क्षण खत्म मान लिया जाएगा? अखिरकार नाटो की सैन्य ताकत में अमेरिका अकेले 42% का हिस्सेदार है। नाटो के करीब 35 लाख सैनिकों में अकेले अमेरिका के 13 लाख हैं। कुल 22400 विमानों में अमेरिका के 14000 हैं। अमेरिका निकला तो नाटो सच में ‘पेपर नाटो’ हो जाएगा। आज नाटो के अंत की अटकलें सिर्फ अखबारों की सुर्खियों या टीवी डिबेट तक सीमित नहीं हैं। यह सवाल अब रणनीतिक दस्तावेजों, सैन्य मुख्यालयों और राष्ट्राध्यक्षों के भाषणों में घूम रहा है- क्या नाटो सच में खत्म हो सकता है? और अगर हुआ, तो क्या दुनिया नए-नए गठबंधनों में बंट जाएगी? नाटो पर दशकों तक काम करने वाले इतिहासकार मार्क ट्रेचटेनबर्ग अपनी किताब ए कंस्ट्रक्टेड पीस में लिखते हैं कि गठबंधन अक्सर किसी धमाके के साथ नहीं टूटते। वे धीरे-धीरे, भरोसे के घटने से खोखले होते हैं। अगर नाटो कमजोर पड़ेगा, तो वह किसी एक तारीख को बंद नहीं होगा। उसके झंडे फहराते रहेंगे, शिखर सम्मेलन होते रहेंगे, घोषणाएं जारी रहेंगी, लेकिन अनुच्छेद 5 का भरोसा सिर्फ एक औपचारिक वाक्य बन जाएगा। यही वह स्थिति है जिसे कई विश्लेषक पेपर नाटो कहते हैं। कुछ रणनीतिकार मानते हैं कि आज अमेरिका की असली चुनौती चीन है, रूस नहीं। इसलिए रूस से तनाव कम करके चीन को संतुलित करना चाहिए। इसे ‘रिवर्स निक्सन स्ट्रैटजी’ कहा जाता है। जैसे- 1970 के दशक में राष्ट्रपति निक्सन ने चीन को सोवियत संघ से अलग किया था। आज डोनाल्ड ट्रम्प जब पुतिन को ‘दोस्त’ कहते हैं, तो इसी रणनीति की झलक दिखती है, लेकिन समस्या यह है कि रूस खुद को अपमानित महसूस करता है। राजनीतिक वैज्ञानिक जॉन मियर्सहाइमर साफ कहते हैं- ‘महाशक्तियां अपमान को भूलती नहीं हैं, वे उसका जवाब देती हैं।’ यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के लिए बराबरी का भरोसा और भी दूर चला गया है। भविष्य की दुनिया शायद साफ-सुथरे खेमों में बंटी नहीं होगी। यह एक अस्थिर बहुध्रुवीय व्यवस्था होगी, जहां चीन आर्थिक और तकनीकी शक्ति बनेगा, अमेरिका सैन्य और वित्तीय ताकत रखेगा, रूस ऊर्जा और सैन्य बल से प्रासंगिक रहेगा और यूरोप लगातार तय करता रहेगा कि वह शक्ति बनना चाहता है या सिर्फ बाजार। नाटो का भविष्य इसी अस्थिरता में छिपा है। अगर नाटो बचा, तो पहले जैसा नहीं रहेगा। वह ज्यादा यूरोपीय और कम अमेरिकी होगा। अगर वह टूटा, तो दुनिया ज्यादा सुरक्षित नहीं, बल्कि ज्यादा अनिश्चित हो जाएगी। जैसा कि विंस्टन चर्चिल ने चेताया था- ‘मित्र देशों के आपसी असुरक्षा से लड़ने से भी बदतर केवल एक ही चीज है और वह है मित्र को साथ लिए बिना दुश्मन से लड़ना।’ —------ References…

दैनिक भास्कर 23 Jan 2026 5:54 am

ED रेड के बाद ममता की इमरजेंसी-मीटिंग में क्या हुआ:I-PAC स्टाफ के लिए ‘सीक्रेट गाइडलाइंस’ लागू, क्या रेड से BJP को नुकसान होगा

पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के लिए चुनावी रणनीति बना रहे I-PAC ने नए नियम लागू कर दिए हैं। दैनिक भास्कर को I-PAC के कर्मचारियों से मिली जानकारी के मुताबिक स्टाफ के लिए ‘रेड गाइडलाइंस’ लागू की गई हैं। ये बदलाव 8 जनवरी को कंपनी के दफ्तर में हुई ED की रेड के बाद किया गया। छापेमारी के अगले दिन CM ममता बनर्जी और I-PAC के बीच एक इमरजेंसी मीटिंग हुई और पूरे स्टाफ के लिए सीक्रेट एडवाइजरी जारी की गई। रूटीन के कामकाज में भी सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। हालांकि I-PAC का कहना है कि चुनावी तैयारियों पर छापेमारी का असर नहीं पड़ा है। ED की छापेमारी के दौरान CM ममता बनर्जी I-PAC के दफ्तर पहुंचीं, जहां से फाइलें लेकर निकलते वक्त उनकी ED अफसरों से बहस भी हुई। ममता ने गृह मंत्री अमित शाह पर TMC के डॉक्यूमेंट्स उठवाने का आरोप लगाया था। रेड के दिन I-PAC के दफ्तर में और क्या हुआ? उसके बाद I-PAC और TMC की स्ट्रैटजी में क्या बदला? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने I-PAC में काम करने वाले लोगों से बातचीत की। ‘सबके फोन जमा कराए, एक हॉल में बैठा दिया‘I-PAC ऑफिस में रेड के वक्त स्टाफ भी मौजूद था। एक स्टाफ ने छापे के दिन का हाल बताते हुए कहा, ‘ED की टीम ने दफ्तर में दाखिल होते ही पूरे स्टाफ को एक जगह इकट्ठा कर दिया। हमसे कहा गया कि ये कानूनी तलाशी है, सभी को सहयोग करना होगा। ऐसा लग रहा था, जैसे कोई फिल्म चल रही हो। हम सबके मोबाइल जमा करा लिए गए ताकि कोई बाहर खबर न दे सके। दफ्तर के सभी दरवाजे अंदर से बंद कर दिए। ED की टीम ने हमें एक बड़े हॉल में बैठाया था। जबकि वो छानबीन के लिए अलग-अलग केबिन में चले गए।‘ टीम क्या जांच कर रही थी? एक स्टाफ ने बताया, वो लैपटॉप, हार्ड डिस्क और ई-मेल खंगालने में लगे थे। अफसरों का फोकस उन अलमारियों और कंप्यूटर्स पर था, जिसमें TMC के फंड्स, वेंडर्स की पेमेंट और कैंडिडेट सिलेक्शन से जुड़ी फाइलें रखी थीं। करीब 5 से 6 घंटों तक दफ्तर का कोना-कोना तलाशा गया। ममता जो हरे रंग की फाइल लेकर निकलीं, उसमें क्या?रेड शुरू होने के करीब 5 घंटे बाद CM ममता बनर्जी I-PAC के चेयरमैन प्रतीक जैन के घर पहुंचीं। यहां से वे हरे रंग की फाइल लेकर निकलीं। ममता ने आरोप लगाया कि ED ने I-PAC चेयरमैन के घर पर छापेमारी करके TMC का इंटरनल डेटा जब्त करने की कोशिश की। फाइल लेकर उन्होंने कहा कि इसमें TMC से जुड़ी हार्ड डिस्क, स्ट्रैटजी और पॉलिसीज की जानकारी है। ममता ने गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाया और रेड को डराने-धमकाने की कार्रवाई बताया। अफसरों और ममता के बीच क्या बातचीत हुईप्रतीक जैन के घर से ममता सीधे I-PAC के ऑफिस पहुंची थीं। उनके साथ DGP, पुलिस फोर्स और Z-सिक्योरिटी के जवान भी थे। उस वक्त ऑफिस में मौजूद एक सोर्स ने बताया- ‘CM के पहुंचने के बाद दफ्तर का माहौल ज्यादा बिगड़ गया। वो सीधे उस कमरे में जा पहुंचीं, जहां ED के अफसर डॉक्यूमेंट्स खंगाल रहे थे। CM काफी गुस्से में थीं। उन्होंने अफसरों से रेड की वजह पूछी, इस दौरान बहस भी हुई। हालांकि इन सबका छापेमारी पर खास असर नहीं हुआ।’ ’CM ममता के साथ आए अफसर रेड के बीच से कई फाइलें लेकर बाहर चले गए। ED की टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की। इधर दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ बढ़ने लगी। ये सब देखकर स्टाफ में मौजूद कई लोगों की घबराहट बढ़ गई थी।’ इन फाइलों में क्या था? इसे लेकर सोर्स ने बताया, ’इनमें I-PAC के ग्राउंड पर किए जा रहे सर्वे से लेकर कई तरह का डेटा रहता है। चुनाव में कम समय बचा है इसलिए हर विधानसभा सीट के लिए हम एक अलग स्ट्रैटजी बना रहे हैं। इन फाइलों में इन्हीं से जुड़ा डेटा और रिसर्च रहता है।’ हालांकि ED का आरोप है कि ममता ने सरकारी काम में बाधा डाली और डॉक्यूमेंट्स चुराने की कोशिश की। वहीं, CM ममता ने इसे गलत बताया। रेड के बाद कोलकाता पुलिस ने ED अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज की, जिसके बाद ED ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने पुलिस जांच पर रोक लगा दी। इसे केंद्रीय एजेंसियों पर राज्य के दखल का केस बताते हुए ममता सरकार से जवाब मांगा है। रेड के बाद कैसा था दफ्तर का माहौलकरीब 6 घंटे बाद रेड खत्म हुई। ED की टीम वहां से भारी-भरकम बैग लेकर निकली। तब तक I-PAC के अंदर का नजारा बदल चुका था। सोर्स ने बताया, ’टीम अपने साथ कई लैपटॉप और हार्ड डिस्क का क्लोन डेटा लेकर गई है। इसके तुरंत बाद I-PAC मैनेजमेंट और TMC के नेताओं के बीच एक इमरजेंसी मीटिंग हुई। इसमें तय हुआ कि अब इस रेड को ही BJP के खिलाफ हथियार बनाया जाएगा।’ I-PAC ने स्टाफ को सख्त हिदायत दी कि वे किसी अजनबी से बात न करें। इस बीच न कोई डॉक्यूमेंट नष्ट किया जाएगा और न ही दफ्तर से बाहर ले जाया जाएगा, ताकि आगे किसी भी कानूनी अड़चन से बचा जा सके। I-PAC के स्टाफ के लिए नई 'रेड गाइडलाइंस'छापेमारी के अगले ही दिन I-PAC मैनेजमेंट ने स्टाफ के लिए एक सीक्रेट एडवाइजरी जारी की। इसमें तीन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा गया। 1. डिजिटल क्लिनिंग के तहत वर्क लैपटॉप और फोन पर कोई प्राइवेट या सेंसिटिव पॉलिटिकल डेटा न रखें।2. कोई भी कर्मचारी सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करेगा।3. जांच एजेंसी अगर दोबारा आती है तो कानूनी टीम की मौजूदगी के बिना कोई बयान दर्ज नहीं कराएगा। रेड के बाद I-PAC की रणनीति क्या? रेड के बाद I-PAC ने अपनी स्ट्रैटजी और आक्रामक कर दी है। संस्था में हमारे सोर्स ने बताया कि किस इलाके में रेड का मुद्दा फायदेमंद होगा और कहां नुकसान हो सकता है, इन पहलुओं को देखते हुए आगे की स्ट्रैटजी बनाई जा रही है। रेड के बाद I-PAC तृणमूल के लिए 3 लेवल प्लान पर काम कर रहा है… 1. TMC नेतृत्व को सुझाव दिया है कि रेड को बंगाल के गौरव पर दिल्ली का हमला बताया जाए। गांव-गांव में ये मैसेज भेजा जा रहा है कि BJP केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके आपकी लोकप्रिय योजनाएं बंद कराना चाहती है। 2. माइक्रो मैनेजमेंट के तहत I-PAC की टीमें उन बूथों की पहचान कर रही हैं, जहां वोट शेयर 5% से ज्यादा गिरा है। सरकारी योजनाओं का फीडबैक लिया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य साथी, कन्याश्री जैसी योजनाओं का फायदा किसे नहीं मिला, इसकी लिस्ट सीधे CM ऑफिस भेजी जा रही है। 3. I-PAC कैंडिडेट्स की लिस्ट फाइनल नहीं करता, लेकिन वो हर मौजूदा विधायकों की विनेबिलिटी रिपोर्ट यानी जीतने की क्षमता की रिपोर्ट बना रहा है। इसमें कार्यकर्ताओं से लेकर बूथ लेवल तक फीडबैक लिया जा रहा है। ED की छापेमारी ममता की चुनावी मशीनरी पर अटैकI-PAC पर छापेमारी का चुनाव पर असर समझने के लिए हमने पश्चिम बंगाल की राजनीति को करीब से देखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी से बात की। वे कहते हैं, ‘तृणमूल कांग्रेस इस रेड को BJP के खिलाफ एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल करेगी। ममता इसे बंगाल के अपमान, बंगालियों की अस्मिता और प्रवासी मजदूरों के मुद्दों से जोड़ेंगीं।‘ 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही TMC की चुनावी मशीनरी I-PAC संभाल रही है। ऑफिशियल तौर पर I-PAC प्रशासन नहीं चलाता, लेकिन चुनाव से जुड़ा हर छोटा-बड़ा काम देखता है। प्रभाकर इसीलिए रेड को ममता की पॉलिटिकल मशीनरी को कमजोर करने की कोशिश मानते हैं। वे आगे कहते हैं, ‘अगर आप उस जड़ पर वार करेंगे, जो आपकी पूरी रणनीति संभाल रहा है तो उसका कुछ असर होने की उम्मीद रहती ही है। BJP को भी शायद यही उम्मीद है कि इससे कुछ फर्क पड़ेगा। हालांकि असल में कितना और क्या असर होगा, ये कहना अभी जल्दबाजी होगी।‘ छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी जो 'ग्रीन फाइल' लेकर बाहर निकली थीं, प्रभाकर मणि उसे मैसेजिंग मानते हैं। 5 साल पुराने केस में छापा, मनी ट्रेल तलाश रही थी EDछापेमारी के तार 5 साल पुराने अनूप मांझी उर्फ लाला केस से जुड़े हैं। मांझी पर बंगाल में कोयला तस्करी का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। ED की फाइलों में ये भी दर्ज है कि मांझी के खिलाफ 2000 से 2015 के बीच अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़े 16 केस दर्ज हुए थे। इनमें से कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। ED का दावा है कि कोयला तस्करी से हुई करोड़ों की अवैध कमाई हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचाई गई। 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान TMC का प्रचार इन्हीं पैसों से किया गया। ED में हमारे सोर्स का दावा है कि मांझी के करीबियों ने I-PAC को फंडिंग दी, जिसके एजेंसी के पास पुख्ता सबूत हैं। रेड का मकसद फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड्स के जरिए उसी मनी ट्रेल को पकड़ना था। पुराने केस ओपन करने की टाइमिंग अहमप्रतीक जैन के TMC में जिम्मेदारी संभालने और ED की कार्रवाई की टाइमिंग को प्रभाकर मणि अहम बताते हैं। वे कहते हैं, ‘प्रतीक जैन पार्टी की IT सेल और सोशल मीडिया संभालते थे। जिस केस का हवाला दिया जा रहा है, वो करीब 5 साल पुराना है। उसमें आखिरी पूछताछ भी 2 साल पहले हुई थी। 2 साल तक कुछ नहीं हुआ और अब अचानक चुनाव के पहले छापेमारी एक संदेश तो देता ही है। वे कहते हैं कि ये रिकॉर्ड रहा है कि चुनाव के पहले गैर-BJP शासित राज्यों में ऐसी रेड बढ़ जाती हैं, जिसे जनता भी पॉलिटिकल टाइमिंग के तौर पर देखती है। पश्चिम बंगाल में I-PAC कैसे काम कर रहा है?इस वक्त I-PAC का पूरा फोकस पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव पर है। I-PAC सीधे राजनीति में शामिल हुए बिना एक मल्टीलेवल स्ट्रैटजी मैनेजमेंट टीम के तौर पर काम कर रहा है। उसका मेन मकसद डेटा आधारित रणनीति तैयार कर पार्टी नेतृत्व को मदद देना है। 1. बूथ लेवल पर माइक्रो मैनेजमेंटI-PAC हर विधानसभा क्षेत्र और हर बूथ स्तर पर आंकड़ों का एनालिसिस कर रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि किस बूथ पर TMC का वोट परसेंट घटा है, कहां जनता में असंतोष है और नाराजगी बढ़ रही है। 2. सर्वे और फीडबैक लेनाग्राउंड टीम के जरिए लगातार रिपोर्ट बनाई जा रही है। इसमें आम लोगों की समस्याएं, सरकारी योजनाओं पर लोगों की राय और लोकल नेताओं की स्वीकार्यता देखी जाती है। 3. सरकारी योजनाओं पर फीडबैक I-PAC ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी योजनाओं के असर पर भी सर्वे कर रही है। इसमें लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री, स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं पर फीडबैक लिया जा रहा है कि ये योजनाएं सही तरीके से लोगों तक पहुंच रही हैं या नहीं। ये भी देख रहे कि इन्हें लेकर कहां असंतोष है। 4. नेताओं की छवि और बयानबाजी की रणनीतिकौन नेता कहां क्या बोलेगा, किस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाना है या संयम बरतना है, इन सभी मामलों में I-PAC बैक एंड से इनपुट दे रहा है। I-PAC ही पश्चिम बंगाल में TMC की IT सेल का भी काम संभालती है। 5. कैंडिडेट सिलेक्शन में अहम रोलI-PAC कैंडिडेट की फाइनल लिस्ट तय नहीं करता, लेकिन पार्टी नेतृत्व को फीडबैक रिपोर्ट देता है। इस रिपोर्ट में बताया जाता है कि किस कैंडिडेट की जीत की संभावना ज्यादा है, कहां कड़ा विरोध है और कहां नए चेहरों की जरूरत है। इसके बाद उम्मीदवारों पर अंतिम फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है। ...................... ये खबर भी पढ़ें... क्या पाकिस्तान से आए लोगों ने ईरान में भड़काई हिंसा ‘हमारा गुस्सा महंगाई की वजह से है, लेकिन ईरान में जो हो रहा है, वो आम लोगों का गुस्सा नहीं है। ये तो साजिश है। कुछ लोग प्रदर्शनकारियों में घुसते हैं और आग लगाने लगते हैं, फायरिंग करते हैं। रश्त शहर में तो पूरा बाजार जला दिया। हॉस्पिटल पर हमले हुए, एक नर्स को जिंदा जला दिया। गिरफ्तार लोगों के पास हैंड ग्रेनेड मिले हैं। इन सबके पीछे अमेरिका और इजराइल हैं।’ ईरान का हाल बता रहे अहमद अब्बास राजधानी तेहरान में रहते हैं। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 23 Jan 2026 5:53 am

‘लड़की पसंद कर लो, फंसाने का काम हमारा’:कॉन्ट्रेक्ट लेकर हनीट्रेप–सेक्सटोर्शन करने वाले एक्सपोज, नाबालिग के साथ बनाते हैं वीडियो

‘14 प्लस बेस्ट है…। उसी में सीधा पॉक्सो लगता है। टच भी नहीं हुआ तब भी केस पक्का। 18 में सहमति का सवाल आ जाता है। 14 में आदमी पूरी तरह फंसता है।’ ये बात सेक्सटॉर्शन और हनीट्रेप का कॉन्ट्रेक्ट लेने वाली गैंग के एजेंट ने भास्कर के खुफिया कैमरे पर कही। ये गैंग बाकायदा कॉन्ट्रैक्ट साइन करके सेक्सटॉर्शन को अंजाम दे रही हैं। पर्दाफाश करने के लिए हमारी टीम ने नईदिल्ली में दो एजेंट्स से मुलाकात की। हम सोर्स के जरिए इन एजेंट्स तक पहुंचे। पढ़िए और देखिए ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट। कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली गैंग की एजेंट से रिपोर्टर की मुलाकात रिपोर्टर: आपका नाम क्या है एजेंट: पूजा रिपोर्टर: काम क्या है एजेंट: भाई ने समझा दिया है रिपोर्टर: क्या समझाया है एजेंट: लड़कियां अरेंज करनी हैं। पुराने कनेक्शन हैं रिपोर्टर: क्लाइंट मुंबई के बड़े बिजनेसमैन हैं। पैसा अच्छा है एजेंट: ठीक है रिपोर्टर: आपको क्या-क्या जानकारी है, बताइए एजेंट: दो सुंदर लड़कियां चाहिए। होटल में मीटिंग होगी रिपोर्टर: हनी ट्रैप समझती हैं एजेंट: हां रिपोर्टर: प्रोसेस कैसे होगा एजेंट: पीने के बाद टच होता है, बातें होती हैं। वही सब चाहिए रिपोर्टर: लड़की की उम्र कितनी होगी एजेंट: 14 प्लस बेस्ट है रिपोर्टर: 14 एजेंट: उसी में सीधा पॉक्सो लगता है। टच भी नहीं हुआ तब भी केस पक्का रिपोर्टर: 18 प्लस क्यों नहीं एजेंट: 18 में सहमति का सवाल आ जाता है। 14 में आदमी पूरी तरह फंसता है रिपोर्टर: रिकॉर्डिंग कैसे करोगी एजेंट: अपने फोन से। बस हाय-हेलो, बातचीत दिखानी है रिपोर्टर: उसके बाद एजेंट: होटल ले जाएंगे। रूम बुक कराएंगे। अंदर जाते ही काम बन जाता है रिपोर्टर: पुलिस को कब बुलाओगी एजेंट: जब हमारे लिए मजबूत हो जाएगा। फिर बोलेंगे बच्ची के साथ बदतमीजी की रिपोर्टर: पेमेंट कैसे लेते हो एजेंट: एडवांस, फिर काम होने पर। तीन हिस्सों में रिपोर्टर: आदमी अंदर चला जाता है एजेंट: हां। मेरी गवाही तक बाहर नहीं आता। तीन साल से लोग अंदर हैं रिपोर्टर: समझौता हो सकता है एजेंट: अगर पैसे दे दे तो पहले कमरे में ही मैनेज कर लेते हैं रिपोर्टर: होटल में बच्ची की एंट्री कैसे एजेंट: आधार नहीं लगता। हम मौसी-मामी बनकर जाते हैं। सब पैसे का खेल है रिपोर्टर: एक क्लाइंट पॉलिटिशियन है, हरियाणा से एजेंट: हो जाएगा। उम्रदार पॉलिटिशियन जल्दी फंसते हैं रिपोर्टर: उन्हें कैसे ट्रैप करोगी एजेंट: मीटिंग करवा दो। नंबर एक्सचेंज होगा। लड़की सामने आई तो काम हो जाएगा एजेंट दावा करती है कि उसने हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन के लिए चार मामलों में अलग अलग लोगों पर पॉक्सो लगवा रखा है जिसकी सुनवाई कोर्ट में चल रही है। गवाही उनके हाथ में होती है। बातचीत में वे यह भी कहती हैं कि अगर सामने वाला अंदर चला गया, तो बाहर निकलना उनकी मर्जी पर निर्भर करेगा। एजेंट और रिपोर्टर के बीच फिर आगे बातचीत होती है…। एजेंट: लड़की तय कर लो। सोच-समझकर मैसेज करना रिपोर्टर: आपको कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है। कैसे करना है, वो आप तय करें। मेरा काम सिर्फ मिलवाना है एजेंट: टारगेट शराब पीता है रिपोर्टर: हां एजेंट: हम पिलाने वाली बैठाएंगे। नशा होगा तभी काम बनेगा रिपोर्टर: पहली मीटिंग मैं कराऊंगा एजेंट: बस हाय-हेलो कराना। उसके बाद हम बाहर मिलेंगे। आदमी खुद कहता है होटल चलो रिपोर्टर: अगर वो टच करने लगे एजेंट: कोई दिक्कत नहीं। हमें फंसाना है महिला एजेंट ने हमसे कहा कि वो टारगेट (मुंबई के बिजनेसमैन) से एक बार मिलवाकर दोस्ती करवा दे। हमने उसे बताया कि मुंबई से उसका दोस्त दो दिन में आ रहा है आते ही मिलवाने का वादा कर हम उस दिन वहां से निकल जाते है। ठीक तीन दिन बाद अंडर कवर रिपोर्टर मुंबई का बिजनेसमैन बन एजेंट से मुलाकात करता है। रिपोर्टर बताता है कि, इन्हीं को फंसाना है। एजेंट बिजनेसमैन को दोस्ती करने के लिए मनाली ले जाने का कहती है। रिपोर्टर: फाइनल प्लान बताओ एजेंट: आठ तारीख रिपोर्टर: दिल्ली या हरियाणा एजेंट: मनाली ले चलेंगे एजेंट: घूमने के बहाने दोस्ती होगी। शराब, चैटिंग, हंसी–मजाक एजेंट: लौटते वक्त दिल्ली में होटल रुकेंगे रिपोर्टर: FIR कहां एजेंट: दिल्ली में। पुलिस सबूत मांगती है, वीडियो बना लेंगे रिपोर्टर: काम पक्का हो जाएगा एजेंट: पक्का इसके बाद हमारी टीम एक और गैंग की तलाश में जुटती है। मकसद यह जानना था कि सेक्सटॉर्शन का यह खेल किसी एक गिरोह तक सीमित है या इसके पीछे कई नेटवर्क एक्टिव है। इसी तलाश में हमारी बातचीत राजू नाम के एक बंगाली एजेंट से होती है। राजू से मुलाकात दिल्ली के महिपालपुर में तय होती है। वह होटल में मिलने से इनकार करता है और कहता है कि अगर गाड़ी है तो बातचीत गाड़ी में ही होगी। वजह, होटल के CCTV कैमरों से बचना। शुरुआत में राजू को टीम पर भरोसा नहीं होता। तय समय पर राजू आता है। उसके साथ उसकी गैंग की एक महिला सदस्य भी मौजूद रहती है। बातचीत की शुरुआत में हम पहले की तरह मुंबई के बिजनेसमैन को टारगेट बताते हैं। राजू और रिपोर्टर के बीच हुई बातचीत रिपोर्टर: टारगेट को हनी ट्रैप या सेक्सटॉर्शन—किसमें फंसाओगे राजू: सेक्सटॉर्शन। सेक्स कराओ और टॉर्चर करो रिपोर्टर: इंडियन या रशियन राजू: दोनों ऑप्शन हैं रिपोर्टर: पहले ऐसा काम किया है राजू: लूटपाट नहीं की, लेकिन काम हो जाएगा रिपोर्टर: रिकॉर्डिंग कौन करेगा राजू: लड़की करेगी एजेंट-2: हमें सब आता है रिपोर्टर: चार्ज कितना लोगे राजू: पार्टी से जो कटेगा, 50-50 रिपोर्टर: ब्लैकमेल कब राजू: अगले दिन फोन करेंगे। वीडियो भेजेंगे एजेंट-2: लोग डर जाते हैं। इज्जत का डर सबसे बड़ा होता है राजू: मोटी पार्टी हो तो एक करोड़ भी दे देता है रिपोर्टर: पुलिस बुलाने की व्यवस्था राजू: पूरी सेटिंग है। मंथली देते हैं। पांच मिनट में पहुंच जाती है रिपोर्टर: होटल कहां राजू: महिपालपुर। 300 होटल में सेटिंग है गैंग के काम करने के 3 तरीके पहला : खुद टारगेट से संपर्क करते हैं। दोस्ती, प्रेम या भरोसे का नाटक कर पहले नजदीकियां बढ़ाई जाती हैं और प्लानिंग के साथ शारीरिक संबंध बनाया जाता है, जिसे स्पाई कैमरा में रिकॉर्ड करते हैं। फिर ब्लैकमेल कर डिमांड पूरी करवाते हैं। अगर टारगेट डिमांड पूरा करने से मना करता है तो नाबालिक लड़कियों को सामने रख कर पुलिस बुला कर पॉक्सो में मामला दर्ज करा दिया जाता है। दूसरा : इस मामले में कोई अपना ही टारगेट से पैसे या गुप्त जानकारी हासिल करने लिए गैंग कि महिलाओं को दोस्त बता कर मिलवाता है। महिला टारगेट से दोस्ती बढ़ाती है। फिर शारीरिक संबंध बनाया जाता है, जिसे स्पाई कैमरा में रिकॉर्ड करते हैं। धमकी देकर डिमांड पूरी करवाते हैं। तीसरा : वीडियो कॉल के जरिए आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करते हैं। फिर इसी फुटेज के जरिए ब्लैकमेलिंग की जाती है। इस तरह के सेक्सटॉर्शन के शिकार उत्तर प्रदेश पुलिस के एक बड़े अधिकारी भी हो चुके हैं। हनीट्रेन–सेक्सटॉर्शन के 3 मामले पहला : 12 जुलाई 2023 को दिल्ली निवासी धीरज के खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज की गई। आरोप लगाया गया कि दिसंबर 2022 में एक मॉल की बेसमेंट पार्किंग में खड़ी कार में उन्होंने लड़की का रेप किया। एफआईआर के आधार पर धीरज को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि मुलाकात उस महिला से कभी हुई ही नहीं, जिसने उस पर बलात्कार का आरोप लगाया। गिरफ्तारी के दौरान धीरज का करीबी दोस्त मुकेश सामने आया और परिवार से 50 लाख रुपए की मांग करते हुए दावा किया कि वह लड़की को पैसे देकर धीरज को जेल से छुड़वा देगा। घबराए परिवार ने 33 लाख रुपए दे दिएञ इसके बावजूद धीरज को लगभग 3.5 महीने जेल में बिताने पड़े, जिसके बाद उसे जमानत मिली। जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला पैसों की उगाही के लिए रचा गया था। जिस महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया था, वह मुकेश के ही स्पा सेंटर में काम करती थी। यह भी उजागर हुआ कि साजिश का मास्टरमाइंड खुद मुकेश था, जिसने इस झूठे मामले के जरिए धीरज के परिवार से पैसे ऐंठे। मुकेश और पिंकी के खिलाफ एक्सटॉर्शन की एफआईआर दर्ज की गई और दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। दूसरा : गुरुग्राम में 8 जून 2023 को पुलिस ने बिनीता कुमारी और महेश फोगाट को झूठे बलात्कार के मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। बिहार की रहने वाली बिनीता कुमारी और रोहतक निवासी महेश फोगाट, गुरुग्राम में एक संगठित सेक्सटॉर्शन रैकेट के जरिए पुरुषों को निशाना बनाकर उनसे जबरन वसूली कर रहे थे। 28 मई 2023 को बिनीता ने एक डेटिंग ऐप के जरिए एक व्यक्ति को फंसाया। वह उसे मिलने के बहाने बुलाकर जबरन बीयर पीने का दबाव बनाने लगी। जब उस व्यक्ति को संदेह हुआ, तो वह वहं से निकल गया। इसके बाद बिनीता ने उस व्यक्ति से 5 लाख रुपए की मांग की और झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। डर के कारण पीड़ित व्यक्ति ने महेश फोगाट को 50 हजार रुपए दे दिए। लेकिन जब दोबारा पैसों की मांग की गई, तो एक एनजीओ के जरिए गुरुग्राम पुलिस को सूचना दी। दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 120B, 384 और 389 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तार किया गया। तीसरा : गुरुग्राम में एक सीनियर सिटीजन को दो महिलाओं ने झूठे रेप केस में फंसाया। एफआईआर के अनुसार, दोनों महिलाओं ने मिस्ड कॉल के जरिए संपर्क किया और धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाई। एक दिन वे उनके घर पहुंचीं, एक महिला ने उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाया। कुछ समय बाद वह यह कहते हुए वहां से चली गई कि ‘काम हो गया, सबूत मिल गया।’ इसके कुछ ही समय बाद पीड़ित को इन महिलाओं के फोन आने लगे। 10 लाख रुपए की मांग की गई। पैसे न देने पर झूठे बलात्कार के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। पैसे नहीं देने पर घटना के 14 दिन बाद महिला ने बलात्कार का मामला दर्ज करा दिया गया। पीड़ित परिवार ने पुलिस को पूरी कहानी बताई। एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुनाई, जिसमें वरिष्ठ नागरिक को झूठे केस से बचाने के बदले महिला और उसके गिरोह के सरगना को 6.5 लाख रुपए देने की मांग करते सुने गए। पॉक्सो और सेक्शन 376 का गलत इस्तेमाल हो रहा दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट शैलेंद्र बब्बर कहते हैं कि, ‘पोस्ट निर्भया के बाद पॉक्सो और सेक्शन 376 जैसे कानूनों का सबसे अधिक मिसयूज देखा गया है। मेट्रोमोनियल विवादों में भी पॉक्सो का मिसयूज़ होता है। कुछ मामलों में, व्यक्ति सेक्सटॉर्शन या हनीट्रैप के जरिए पैसे वसूलने या बदला लेने के लिए अपराधी गतिविधियां करते हैं। कुछ मामले ऐसे हैं जहां निजी लेन-देन कोर्ट में नहीं सुलझ रहे थे। तब एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के बच्चों को फंसाया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस इकट्ठा करना जरूरी है। झूठा सबूत बनाना गंभीर अपराध है, जिसमें 6 महीने से 10 साल तक की सजा हो सकती है। पॉक्सो एक्ट में विशेष प्रावधान है। अगर माइनर झूठी शिकायत कराता है, तो उसकी सजा छह महीने तक होती है। टारगेट डर जाता है और पैसे देने लगता है रिटायर्ड एसीपी वेद भूषण कहते हैं, ‘ अभी आपने देखा कि कर्नाटक के डीजी अपने ऑफिस में बैठे थे और एक लड़की के साथ वीडियो बन गया। जब ऐसे मामले सामने आते हैं, तो टारगेट डर जाता है और पैसे देने लगता है।’ ‘हनीट्रैप पुराने समय से हैं, जहां लड़कियां बड़े अधिकारी और राजनीतिक नेताओं को फंसाती थीं। वीडियो बनाकर पैसे की मांग की जाती थी। दिल्ली में एक सुप्रीम कोर्ट की वकील ने सांसद से सात करोड़ रुपए की डिमांड की थी। जांच के बाद उसे अरेस्ट कर लिया गया।’ ‘लोग मामले रिपोर्ट नहीं करते क्योंकि डर या परिवार की इज्जत को लेकर दबाव होता है। अब धीरे-धीरे लोग सामने आ रहे हैं, पुलिस जांच करती है और आरोपी अरेस्ट किए जाते हैं। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है सतर्क रहना और किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में न आना।’ वहीं, एकम न्याय फाउंडेशन की संस्थापक दीपिका नारायण भारद्वाज कहती हैं कि, ‘हमारे पास बलात्कार, हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन के कई मामले आते हैं, जिनमें से कुछ हम पहले ही सार्वजनिक कर चुके हैं। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।’ ‘अक्सर महिला अपनी मर्जी से संबंध बनाती है, लेकिन बाद में उसी पर बलात्कार का केस दर्ज कर देती है। कई बार यह पैसे वसूलने के लिए किया जाता है। कुछ मामलों में वकील और पुलिस भी इसमें शामिल पाए गए।’ कॉन्क्लूजन : हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन संगठित अपराध हैं। कानून मौजूद है, लेकिन डर की वजह से रिपोर्टिंग कम है। पॉक्सो और रेप कानून का डर उगाही का हथियार बन रहा है। .......................................... आप ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं ‘4500 टका दिए, एजेंट ने भारत पहुंचा दिया’:बांग्लादेश से आए घुसपैठिए, पुलिस में सिपाही; SIR के बाद भी वोटर लिस्ट में नाम दलाल के जरिए भारत आए। आधार कार्ड से लेकर वोटर आईडी तक बनवा ली। एक तो पश्चिम बंगाल पुलिस में सिपाही बन गया। ये कहानी उन बांग्लादेशियों की है, जो अवैध तरीके से भारत में घुसे हैं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR में पश्चिम बंगाल से करीब 58 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए आइडेंटिफाई किए गए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें...।

दैनिक भास्कर 23 Jan 2026 5:07 am

भारत-अमेरिका ने अवैध ड्रग तस्करी व प्रीकर्सर रसायनों के दुरुपयोग के खतरों पर की चर्चा

भारत और अमेरिका ने वॉशिंगटन डीसी में ड्रग पॉलिसी एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक सफलतापूर्वक संपन्न की। इस दौरान दोनों देशों ने सिंथेटिक ओपिओइड्स, नए प्रकार के प्रीकर्सर रसायनों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता दोहराई

देशबन्धु 23 Jan 2026 5:00 am

पाकिस्तान: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के फैसले पर विपक्ष का हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के पाकिस्तान सरकार के फैसले को लेकर देश में सियासी विवाद तेज हो गया है

देशबन्धु 23 Jan 2026 3:20 am

क्रोएशिया के जाग्रेब में भारतीय दूतावास में तोड़फोड़, भारत ने अधिकारियों के सामने मुद्दा उठाया

क्रोएशिया के जाग्रेब में स्थित भारतीय दूतावास में कुछ भारत विरोधी लोगों ने घुसकर हमला किया और तोड़फोड़ मचा दी। घटना को लेकर भारत ने गुरुवार को कड़ी निंदा की है

देशबन्धु 23 Jan 2026 3:10 am

DNA: ट्रंप-नेतन्याहू में 'आयरन डोम' वाली जंग! दोस्त और दुश्मन सबकुछ खत्म करके मानेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति?

अमेरिका और इजरायल की एक अच्छे दोस्त के तौर पर गिनती की जाती है. हालांकि, इस बीच डोनल्ड ट्रंप ने भी कुछ ऐसा कर दिया है, जिससे इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू नाराज हो सकते हैं. आइए आपको बताते हैं.

ज़ी न्यूज़ 23 Jan 2026 12:44 am

भारत ने अफगानिस्तान में 7.5 टन जीवन रक्षक कैंसर की दवाइयां पहुंचाईं

भारत ने अफगानिस्तान में कैंसर मरीजों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है

देशबन्धु 22 Jan 2026 11:50 pm

वर्ल्ड कप बायकॉट से बांग्लादेश को करोड़ों का घाटा:क्या ICC बैन भी कर सकता है, भारत को कितना नुकसान

BCCI को कभी बड़े भाई जैसा मानने वाले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अब भारत में ही खेलने से मना कर दिया है। वहीं पाकिस्तान भी कह रहा है कि हम बांग्लादेश का साथ देंगे। भारत-श्रीलंका की मेजबानी में होने वाला T20 वर्ल्ड कप शुरू होने में महज 2 हफ्ते बाकी हैं। ऐसे में बांग्लादेश के बायकॉट से उसे क्या घाटा होगा, क्या पाकिस्तान भी मैच नहीं खेलेगा और भारत पर क्या असर पड़ेगा; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बांग्लादेश ने वर्ल्ड कप बायकॉट क्यों किया? जवाब: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड यानी BCB ने सुरक्षा का हवाला देते हुए भारत में न खेलने का फैसला किया है। BCB चाहता था कि उसके T20 वर्ल्ड कप मैच श्रीलंका में हों, लेकिन ICC ने इससे इनकार कर दिया। बांग्लादेश के स्पोर्ट्स एडवाइजर आसिफ नजरुल ने कहा, ‘हम वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं, लेकिन भारत में हमारे खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को लेकर चिंता है।’ सुरक्षा से जुड़ी इस वजह के अलावा बांग्लादेशी टीम के भारत न आने की 2 छिपी वजहें भी हैं… 1. मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर करना IPL की टीम KKR ने बांग्लादेशी पेसर मुस्तफिजुर रहमान को 9.2 करोड़ रुपए में खरीदा, लेकिन भारत में इसका विरोध होने लगा। BCCI ने KKR से उन्हें रिलीज करने को कहा। 3 जनवरी को KKR ने ऐसा कर दिया। BCB ने इसे अपमान माना और IPL का टेलिकास्ट बैन कर दिया। यहीं से ये विवाद शुरू हुआ। 2. भारत-बांग्लादेश में बिगड़ते हालात और रिश्ते पिछले कुछ महीनों में भारत और बांग्लादेश के डिप्लोमेटिक रिलेशंस बेहद खराब हुए हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और हत्या होने के बाद भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों और कलाकारों के विरोध की बात होने लगी। बिगड़ते माहौल का हवाला देते हुए बांग्लादेश सरकार ने टीम भेजने से मना कर दिया। हालांकि BCB के प्रेसिडेंट अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने कहा कि हम ICC से एक बार फिर बात करेंगे और कहेंगे कि वे हमारी चिंताओं पर ध्यान दें। बांग्लादेश इस मसले पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा। बांग्लादेश के बायकॉट के फैसले के बाद अब उसकी जगह स्कॉटलैंड की टीम T20 वर्ल्ड कप में खेल सकती है। सवाल-2: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश को क्या-क्या नुकसान होगा? जवाब: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से लेकर बांग्लादेश में बिजनेस को अच्छा-खासा नुकसान हो सकता है… पार्टिसिपेशन फीस नहीं मिलेगी, बोर्ड का घाटा मैच जीतने पर भी फीस मिलती है, इसका नुकसान स्पॉन्सर और कॉमर्शियल लॉस रैंकिंग पर असर दैनिक भास्कर डिजिटल के स्पोर्ट्स एडिटर बिक्रम प्रताप सिंह के मुताबिक बांग्लादेश ने पाकिस्तान से प्रभावित होकर फैसला तो ले लिया कि वह वर्ल्ड कप बायकॉट कर देगा, लेकिन ICC में पाकिस्तान का फिर भी दबदबा है। भारत-पाकिस्तान मैच से पूरे वर्ल्ड कप का 25% तक रेवेन्यू आता है, लेकिन बांग्लादेश के साथ ऐसा नहीं है। उसने वर्ल्ड कप बायकॉट कर अपना ही नुकसान किया है। हालांकि BCB की फाइनेंस कमेटी के प्रमुख और अंतरिम सरकार के स्पोर्ट्स एडवाइजर नजमुल हुसैन ने हाल ही में कहा था कि बांग्लादेश के वर्ल्ड कप न खेलने से बोर्ड को कोई नुकसान नहीं होगा। जो नुकसान होगा वो खिलाड़ियों को होगा। सवाल-3: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश के खिलाड़ियों को क्या नुकसान होगा जवाब: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेशी खिलाड़ियों के करियर और फाइनेंस को नुकसान होगा… हर खिलाड़ी को साढ़े सात लाख का नुकसान रैंकिंग पर असर स्पॉन्सर्स का पीछे हटना सवाल-4: क्या ICC बांग्लादेश टीम के खिलाफ कोई एक्शन ले सकती है? जवाब: ICC के पास कार्रवाई का अधिकार है। ICC के नियमों के मुताबिक वर्ल्ड कप का बायकॉट, मेंबर्स पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट के खिलाफ है। ऐसे मामलों में ICC आर्थिक दंड से लेकर सदस्यता निलंबन तक का फैसला ले सकती है। पहले भी ICC सख्त कदम उठा चुकी है। 2019 में जिम्बाब्वे क्रिकेट को राजनीतिक दखल के कारण निलंबित किया गया था, जिससे वह 2020 में कोई ICC टूर्नामेंट नहीं खेल सका। अगर ICC को लगता है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने राजनेताओं के दबाव में फैसला लिया है, तो ICC के सदस्य के तौर पर उसके निलंबन पर सोचा जा सकता है। अगर बांग्लादेश टीम टूर्नामेंट से हटती है तो ICC उसे ग्रुप स्टेज में भागीदारी पर मिलने वाले लगभग 3 लाख डॉलर भी नहीं देगी। इसके अलावा बोर्ड को ICC से मिलने वाला 30–40 मिलियन डॉलर का सालाना हिस्सा भी रोका जा सकता है। इसके अलावा ICC भविष्य में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से बड़े टूर्नामेंट्स की मेजबानी का अधिकार भी छीन सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्पॉन्सरशिप पर असर पड़ेगा। सवाल-5: क्या पाकिस्तान भी वर्ल्ड कप का बायकॉट कर सकता है? जवाब: पाकिस्तान के वर्ल्ड कप बायकॉट करने की संभावना कम है क्योंकि उसके मैच पहले से ही भारत में नहीं होना तय है। पाकिस्तान के सभी मैच श्रीलंका में शेड्यूल हैं। मीडिया रिपोर्ट भी हैं कि पाकिस्तान भले ही बांग्लादेश का साथ देगा, लेकिन वर्ल्ड कप का बायकॉट नहीं करेगा। टेलिकॉम एशिया स्पोर्ट्स ने PCB सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान वर्ल्ड कप न खेलने जैसा कदम नहीं उठाएगा। 20 जनवरी को भी ऐसी खबरें PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी के हवाले से सामने आई हैं। हालांकि 22 जनवरी को पाकिस्तानी न्यूज आउटलेट Geo News में पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक, PCB सूत्रों का कहना है कि अगर बांग्लादेश भारत जाने से मना करता है तो पाकिस्तान भी टूर्नामेंट का बायकॉट करेगा। पाकिस्तान के पूर्व कैप्टन राशिद लतीफ ने PCB को बायकॉट करने की सलाह भी दी है। सवाल-6: बांग्लादेश के बायकॉट करने से क्या भारत को भी कोई नुकसान हो सकता है? जवाब: बांग्लादेश के वर्ल्ड कप बायकॉट करने से भारत से ज्यादा बांग्लादेश को ही नुकसान होगा। इससे भविष्य में अब भारत भी बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय सीरीज खेलने से इनकार कर सकता है। जब भारत-बांग्लादेश के मैच होते हैं तो बांग्लादेश के ब्रॉडकास्टर और स्पॉन्सर सबसे ज्यादा कमाई करते हैं। IPL से भी यह कमाई करते हैं। भारत से संबंध खराब कर BCB अपना ही नुकसान कर रहा है। हालांकि मैच टिकट और टूरिज्म से होने वाली कमाई का नुकसान भारत को झेलना पड़ेगा… ***** बांग्लादेश क्रिकेट विवाद से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... बांग्लादेश टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर होने की कगार पर: बोर्ड बोला- भारत में नहीं खेलेंगे; ICC ने कल कहा था- इंडिया में ही खेलना होगा बांग्लादेश ने गुरुवार को भारत में टी-20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार कर दिया, जिसके बाद टीम का टूर्नामेंट से बाहर होना तय माना जा रहा है। एक दिन पहले ही ICC ने स्पष्ट किया था कि बांग्लादेश के सभी ग्रुप मैच भारत में ही कराए जाएंगे। पूरी खबर पढ़िए...

दैनिक भास्कर 22 Jan 2026 9:26 pm

सिर्फ आम लोगों पर पाबंदियों की झड़ी? ईरान में कैसी होती है रईसजादों की जिंदगी, जिसको देख और भड़के Gen-Z

ईरान में चारों ओर इस समय अशांति फैली हुई है.इस बीच कुछ ऐसी खबरें सामने आई हैं, जिसने जेन जी के गुस्से को और भड़का दिया है. जहां एक ओर ईरान में फैली हिंसा में हजारों लोगों की जान गई है, तो दूसरी ओर ईरान के शासक वर्ग के जुड़े लोग पड़ोसी देशों में पार्टी करते दिख रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 8:02 pm

गाजा में शांति बहाल करने चले ट्रंप फिलिस्तीन को ही भूले, बोर्ड ऑफ पीस में महमूद अब्बास को नहीं मिली जगह; इजरायल होगा शामिल

अमेरिका के राष्ट्रति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक रूप से बोर्ड ऑफ पीस का एलान कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि यह बोर्ड यूएन समेत अन्य संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा. इस बीच भारत में फ़िलिस्तीन के एम्बेसडर अब्दुल्ला अबू शवेश ने ट्रंप पर कई आरोप लगाए. उन्होंने इस बोर्ड को ब्लैक कॉमेडी करार दिया.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 5:31 pm

अमेरिकी की 'वो' गलती, जिससे दुनिया का हो जाएगा 'सर्वनाश'? बाबा वेंगा की 2026 वाली भविष्यवाणी से दहशत

Baba Vanga 2026 Prediction in Hindi: अमेरिका दुनिया की एकमात्र महाशक्ति है. जिसका विश्व पर सिक्का चलता है. लेकिन इस साल इसी महाशक्ति की एक खास गलती पूरी धरती को सर्वनाश की ओर ले जा सकती है. बाबा वेंगा की इससे जुड़ी भविष्यवाणी से दुनिया में डर जताया जा रहा है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 5:16 pm

ट्रंप ने बना लिया अपना 'बोर्ड ऑफ पीस', पाकिस्तान भी होगा मेंबर, क्या मिल गया UN का नया विकल्प?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 'बोर्ड ऑफ पीस' का आधिकारिक एलान कर दिया है. उन्होंने दावा किया की इस बोर्ड में दुनिया के कई देश शामिल होना चाहते हैं. ट्रंप ने यह भी कहा ये बोर्ड यूएन के अलावा अन्य सभी संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 5:05 pm

भारत ने ऐसे ढीले किए ट्रंप के तेवर, ट्रैप में फंसने से पहले खेला दांव; यूरोपीय देश कैसे रह गए पीछे?

Trump Dealing With Europe: यूरोप ने ट्रंप से एक बड़ा सबक लिया है कि उनकी चापलूसी करने और व्यापार समझौते के बावजूद भी वह ट्रंप के निशाने से नहीं बच सकते हैं, हालांकि यह सबक भारत पहले ही ले चुका है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 4:40 pm

US एयरफोर्स में आने वाला है 'सबसे विनाशकारी विमान', F-47 से दहलेगा दुश्मन! ट्रंप ने दिखाई झलक

F-47 Stealth Fighter Jet: दुनिया की सबसे बड़ी वायुसेना US एयरफोर्स में अब 'सबसे विनाशकारी विमान' आने वाला है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने F-47 नाम के इस प्लेन की खूबियों का संकेत दिया है. उनका दावा है कि इस प्लेन के शामिल होने से दुश्मन पूरी तरह दहल जाएंगे.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 3:53 pm

दाल-बाटी-चूरमा... राजस्थान का वो हिंदू समुदाय, जिसने तब नहीं छोड़ा बांग्लादेश तो अब क्यों डर रहा?

मारवाड़ी कौन हैं, आप इन्हें दिल्ली, यूपी, बिहार, बंगाल, नॉर्थ ईस्ट, यहां तक कि दक्षिण भारत में भी पाएंगे. दुनिया के कोने-कोने में. लेकिन बांग्लादेश में रहने वाले मारवाड़ी इस समय सेफ महसूस नहीं कर रहे हैं. ये वो लोग हैं जो बंटवारे के समय भी वहां टिके रहे थे.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 3:02 pm

‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर पहला बड़ा झटका! ट्रंप के न्योते पर चीन ने कहा- ‘UN से बाहर शांति नहीं’, अमेरिका की पेशकश ठुकराई

China Rejects Board of Peace: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बनाए जा रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के न्योते को चीन ने ठुकरा दिया है. चीन ने साफ कहा है, वह संयुक्त राष्ट्र (UN) को केंद्र में रखकर बने अंतरराष्ट्रीय सिस्टम और अंतरराष्ट्रीय कानून से चलने वाली व्यवस्था के साथ मजबूती से खड़ा है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 2:10 pm

दुनिया में पहली बार खुली AI के लिए ‘कानून की किताब’, दक्षिण कोरिया ने बदला गेम; कंपनियों की जवाबदेही तय

South Korea AI Law: दक्षिण कोरिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर दुनिया का पहला पूरा कानून लागू कर दिया है. इस कानून का मकसद AI से फैलने वाली गलत जानकारी डीपफेक और लोगों की सुरक्षा से जुड़े खतरे रोकना है. सरकार ने कंपनियों और AI बनाने वालों की जिम्मेदारी तय की है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 1:30 pm

मार्शल लॉ पड़ा भारी! दक्षिण कोरिया के पूर्व PM हान डक-सू को 23 साल की जेल, कोर्ट बोला- ‘देश को तानाशाही की ओर ले जा रहे थे’

South Korea Martial Law Case: दक्षिण कोरिया के पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को मार्शल लॉ मामले में अदालत ने 23 साल की सजा सुनाई है. अदालत ने माना कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के साथ मिलकर दिसंबर 2024 में लगाए गए मार्शल लॉ में अहम भूमिका निभाई थी. इस फैसले के बाद उन्हें तुरंत हिरासत में भेज दिया गया.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 12:39 pm

गन साइलेंसर के नाम पर अमेरिका में 'आलू' को मिल गई कानूनी मान्यता, मालिक बना ये शख्स, समझिए क्या है माजरा?

America News: अमेरिका में एक मालिक ने आलू को कानूनी तौर पर 9mm गन साइलेंसर के रूप में रजिस्टर करवाया है. इस रजिस्ट्रेशन के बाद वह लीगल तरीके से पोटैटो साइलेंसर का मालिक बन गया. जानिए क्या है पूरा मामला.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 11:59 am

नए H-1B नियम से अमेरिका को 20 अरब डॉलर का मोटा फायदा? भारतीयों के लिए खुशखबरी या नई मुसीबत? GAO रिपोर्ट ने खोल दी पोल

New H-1B rule promises big gains:अमेरिकी सरकार की GAO रिपोर्ट के मुताबिक, H-1B वीजा के नए वेटेड सिलेक्शन नियम से 2026 से 2035 तक अर्थव्यवस्था को 20 अरब डॉलर से ज्यादा का फायदा होगा.नियम हाई स्किल्ड और ज्यादा सैलरी वाले विदेशी वर्कर्स को प्राथमिकता देगा.लेकिन GAO ने चेतावनी दी है कि ये नियम कांग्रेस रिव्यू एक्ट की 60 दिनों की समय-सीमा से पहले लागू हो रहा है, जिससे कानूनी सवाल उठ रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 11:57 am

न्यूजीलैंड में कुदरत का कहर! छुट्टियों की खुशियां पल भर में मातम में बदलीं, भूस्खलन में बच्चों समेत कई लोग लापता

New Zealand Landslide:न्यूजीलैंड के बे ऑफ प्लेंटी क्षेत्र में माउंट मौंगानुई के नीचे स्थित एक हॉलिडे पार्क में गुरुवार को भूस्खलन हुआ, जिसमें कई लोग लापता हो गए. इनमें बच्चे भी शामिल हैं.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 11:43 am

Davos 2026: ग्रीनलैंड पर ट्रंप के इरादों के खिलाफ यूरोप का खुला मोर्चा, नाटो युद्धाभ्यास की तैयारी; जानें किस नेता ने क्‍या कहा

नाटो सदस्य देश डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंशा ने ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में गंभीर तनाव पैदा कर दिया है। इस मुद्दे पर अब यूरोप के शीर्ष नेता खुलकर सामने आ गए हैं।

देशबन्धु 22 Jan 2026 10:37 am

वाह रे ट्रंप, क्या गजब दिमाग लगाया! पहले पूरी दुनिया में टैरिफ बम फोड़कर मचाया हाहाकार, फिर अमेरिका को कमवा दिया 55 लाख करोड़ रुपए

US to receive USD 600 billion in tariff revenue:दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. ट्रंप के मुताबिक, टैरिफ नीति से अमेरिका को करीब 600 अरब डॉलर की कमाई होगी, जो अगले साल और बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद निवेशकों का भरोसा तेजी से अमेरिका की ओर लौटा है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 10:17 am

एक दाना भी बाहर से नहीं मंगाता ये देश, भारत जैसा है यहां के खाने का स्वाद, अमेरिका-चीन भी नहीं कर पाए ये कमाल!

Guyana Agriculture Success: दुनिया में एक ऐसा भी देश है जो अपने लोगों के खाने-पीने की हर चीज खुद उगाता है. बाहर से कुछ भी आयात नहीं करता, यह देश है दक्षिण अमेरिका का छोटा सा देश है. इसका नाम हम आपको आगे बताएंगे. यहां फल, सब्जी, अनाज, दूध, मांस, मछली, दालें और मेवे सब कुछ देश के अंदर ही पैदा होता है. खास बात यह भी है कि यहां की करीब 40 फीसदी आबादी भारतीय मूल की है. यहां खाने में आज भी भारत जैसा स्वाद मिलता है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 10:15 am

ट्रंप की गाजा शांति परिषद पर वैश्विक असहमति: चीन ने बनाई दूरी, यूरोप के बड़े देशों का इनकार

अमेरिका का कहना है कि इजरायल-हमास युद्ध के बाद गाजा पट्टी में सामान्य स्थिति बहाल करने, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और पुनर्निर्माण कार्यों के समन्वय के लिए इस शांति परिषद का गठन किया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे एक वैकल्पिक वैश्विक मंच के रूप में पेश किया है, जो भविष्य में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को भी चुनौती दे सकता है।

देशबन्धु 22 Jan 2026 10:10 am

बोर्ड ऑफ पीस पर वर्ल्ड पॉलिटिक्स: कौन आया ट्रंप के साथ, किसने कहा ना, और कौन अब भी सोच में, देखें लिस्ट

Board of Peace Countries List: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर दुनिया के देशों की स्थिति अब धीरे-धीरे साफ हो रही है. कुछ देशों ने इसमें शामिल होने की हामी भर दी है कुछ ने दूरी बना ली है. वहीं कई बड़े देश अभी सोच-विचार में लगे हैं. यह बोर्ड पहले गाजा में संघर्षविराम की निगरानी के लिए सोचा गया था लेकिन अब इसे अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाने वाले मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 9:29 am

ट्रंप की ऐसी तानाशाही जिस दावोस में खुद गरज रहे थे, वहीं पर अपने ही कैलिफोर्निया के गवर्नर को अमेरिकी पैविलियन में घुसने तक नहीं दिया

California governor says he was barred from Davos event:वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान स्विट्जरलैंड के दावोस में कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजम को बोलने से रोक दिया गया. न्यूजम के दफ्तर का आरोप है कि यह फैसला ट्रंप प्रशासन के दबाव में लिया गया है. इसके बाद अमेरिका की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 9:24 am

20 दिनों में जवाब दो, वरना खेल खत्म! अमेरिका में ढहने वाला है पाकिस्तान का डेंटल साम्राज्य? चोरी पकड़ी गई तो सियालकोट तक मचा हाहाकार

US Action on Pakistan Dental Firms:वाशिंगटन से आई ये खबर पाकिस्तान के सियालकोट शहर के लिए एक बड़ा झटका बन सकती है. सियालकोट तो दुनिया भर में सर्जिकल और डेंटल टूल्स बनाने के लिए मशहूर है, लेकिन अब अमेरिका की तरफ से एक बड़ी जांच शुरू हो गई है.यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन ने पेटेंट और ट्रेडमार्क उल्लंघन के आरोपों की जांच खोलते हुए कंपनियों को 20 दिन में जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है. जवाब नहीं आया तो आयात पर रोक और कड़े आदेश लग सकते हैं.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 8:50 am

दावोस में ट्रंप का धमाका: पुतिन-जेलेस्की दोनों कट्टर दुश्मन फिर भी यूक्रेन-रूस की जंग होगी खत्म, अगर डील नहीं माने तो दोनों स्टूपिड

Trump says Russia Ukraine want deal:डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा कि रूस और यूक्रेन दोनों युद्ध खत्म करने के लिए डील चाहते हैं. बातचीत काफी करीब पहुंच गई है, हालांकि जेलेंस्की और पुतिन के बीच गहरी नफरत है. ट्रंप ने कहा कि अगर डील नहीं हुई तो दोनों वेवकूफ हैं. जानें और क्या ट्रंप ने कहा.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 8:49 am

गाजा पीस बोर्ड पर ट्रंप का झूठ हुआ जगजाहिर, पुतिन ने कह दी ये बड़ी बात; जानें क्या है पूरा मामला

Putin Rejects Trump Claim: दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस ने गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता मान लिया है. ट्रंप के इस दावे पर रूस ने तुरंत सफाई दी है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस बात से इनकार कर दिया है. पुतिन ने साफ कहा कि रूस अभी इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 8:32 am

ग्रीनलैंड से कनाडा तक विस्तार की जिद, अमेरिका खुद अपने पतन की पटकथा लिख रहा? डूबा US तो दुनिया का सितारा बन जाएंगे ये 3 देश

Impact of US collapse: ग्रीनलैंड से कनाडा तक विस्तार की जिद करके कहीं ट्रंप अमेरिका के पतन की पटकथा तो नहीं लिख रहे? अगर ऐसा हुआ तो 3 देश दुनिया के लिए नया चमकता सितारा बन जाएंगे.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 6:46 am

'उन्हें पूजा करने की मिले आजादी...',बांग्लादेश में हिंदुओं पर नहीं थम रहा अत्याचार, लंदन से भी उठी विरोध की आवाज

London News: बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर अत्याचार की वजह से दुनियाभर में गुस्सा है. अब लंदन में भी ये देखने को मिल रहा है. संसद भवन के बाहर सैकड़ों PIO और बांग्लादेशी मूल के हिंदुओं ने ठंडी और तेज बारिश में विरोध प्रदर्शन किया.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 6:32 am

ब्लैकबोर्ड- 1 लाख कर्ज पर 74 लाख ब्याज:साहूकारों ने कंबोडिया ले जाकर किडनी निकाली, घाव देखकर बच्चे पूछते हैं- पापा किडनी क्यों बेची

‘तुम्हें 8 लाख रुपए का कर्ज लिए हुए दो साल हो चुके हैं। कब तक लौटाओगे? तुम्हारे पास न अब जमीन बची है, न जायदाद। ट्रैक्टर, गाड़ी- सब बिक गए। अब क्या बेचकर पैसे दोगे? तुम ह%$#र सिर्फ कर्ज लेना जानते हो, देना नहीं। जब चुकाने की औकात नहीं थी, तो लिया क्यों? अब इस घर को बेचकर पैसे चुकाओ। नहीं तो…’ इतना कहते हुए साहूकारों ने मेरे गाल पर जोर से दो थप्पड़ जड़ दिए। मैं चिल्लाते हुए गाल सहलाने लगा। तभी एक साहूकार बोला, ‘पूरे पैसे तीन महीने के भीतर चुका दो। कर्ज चुकाने के लिए कुछ भी नहीं बचा है, तो अपनी किडनी बेचकर चुकाओ। किडनी बेचने से हमें पैसे मिल जाएंगे और किसी को जीवनदान।’ यह कहते हुए साहूकारों ने मेरे पेट पर जोर से लात मारी और घर से निकल गए। सितंबर 2023 की इन बातों को दोहराते हुए 36 साल के रोशन कुडे की आंखें डबडबा जाती हैं, मगर आंसू बाहर नहीं आते। रोशन कहते हैं, ‘अगर ये घर बेच देता, तो मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे, पत्नी, मां-बाप, भाई- सब कहां रहते? इसलिए आखिर में अपनी किडनी ही बेच दी। फिर भी पूरा कर्ज नहीं चुका पाया। क्या करता? उन साहूकारों ने दूसरा कोई रास्ता छोड़ा ही नहीं था।’ बोलते-बोलते रोशन कुडे अपनी गर्दन दूसरी तरफ घुमा लेते हैं। मानो उन्हें मुझसे आंखें मिलाकर बात करने में शर्म आ रही हो। सामने गाय के दालान में उनकी पत्नी ईंट के चूल्हे पर रोटी पका रही हैं। पिता लकड़ी के सोफे पर बैठे पागल की तरह कुछ बुदबुदा रहे हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज महाराष्ट्र के रोशन कुडे और उनके परिवार की कहानी। कैसे साहूकारों के चक्कर में पड़कर रोशन को अपनी किडनी बेचनी पड़ी। पूरी कहानी जानने के लिए मैं भोपाल से नागपुर पहुंचा और वहां से करीब 100 किलोमीटर दूर नागभीड़ कस्बे गया। यह इलाका महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में आता है। नागभीड़ के पास स्थित मिंथुर गांव में रोशन कुडे का परिवार रहता है। रोशन अपने आंगन से सटे चबूतरे पर कपड़े उतारकर नहाने की तैयारी कर रहे हैं। तभी उनके पेट की बायीं तरफ एक बड़ा-सा सर्जरी का निशान साफ दिखाई देता है। रोशन बताते हैं, ‘कंबोडिया में मेरे पेट की इसी जगह को चीरकर डॉक्टर ने किडनी निकाल ली थी। वहां से लौटने के बाद से मेरे बच्चे मुझसे पूछते हैं- पापा, आपने किडनी क्यों बेच दी? शर्म के मारे मैं बस इतना ही कह पाता हूं- नहीं, ऑपरेशन हुआ है। कैसे अपने बच्चों से कहूं कि उनके बाप ने कर्ज के बोझ में अपनी किडनी बेच दी।’ नहाते हुए रोशन की आंखें बार-बार उनके पिता शिवदास विस्तारी की ओर चली जाती हैं। विस्तारी सोफे पर लेटे हुए कुछ बुदबुदा रहे हैं। रोशन खीझते हुए कहते हैं, ‘पहले बहुत अच्छे थे। जब से उन्हें पता चला कि मैंने कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी बेच दी, तब से वह पागल-से हो गए हैं।’ रोशन नहाने लगते हैं। इसी दौरान मैं उनके पिता के पास चला जाता हूं। वह उठकर बैठ जाते हैं। पूछने पर कहते हैं, ‘मैं रेलवे के मैकेनिकल डिपार्टमेंट में था। जब मेरे दो बच्चे हुए और उन्हें पालने-पोसने में दिक्कत आने लगी, तो समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया। पता नहीं कैसी किस्मत थी कि बेटा इन साहूकारों के चक्कर में पड़ गया।’ वह आगे कहते हैं, ‘हालात ऐसे हैं कि मेरे नाती-पोते चॉकलेट-बिस्किट के लिए 5 रुपए मांगते हैं, तो दे नहीं पाता। पैसे ही नहीं हैं, तो कहां से दूं। अब कुछ भी बचा नहीं है। 2017 तक सब ठीक था- हंसता-खेलता परिवार। आज सब बर्बाद हो गया।’ उनकी आवाज भर्रा जाती है। कहते हैं, ‘अब कोई जहर पीकर मरना चाह रहा है, तो कोई फांसी लगाकर मरना चाहता है।’ कुछ देर चुप रहने के बाद वह कहते हैं, ‘साहूकारों ने सब लूट लिया। हमें जिंदा रहते हुए मार दिया। अब बेटे ने किडनी क्यों बेची, कैसे बेची- यह तो वही आपको बताएगा।’ नहाने के बाद रोशन सकुचाते हुए बातचीत के लिए खाट खींचकर मेरे सामने बैठ जाते हैं। कहते हैं, ‘2017 की बात है। मैंने 6 गायें पाली थीं। हर 10 दिन में करीब 28 हजार रुपए की आमदनी हो जाती थी। धीरे-धीरे यह संख्या बढ़कर 12 गायों तक पहुंच गई। फिर 2019 आते-आते गायें एक-एक करके बीमार पड़ने लगीं। उन्हें लम्पी वायरस हो गया था। जो पैसे दूध से आ रहे थे, वे गायों के इलाज में खर्च होने लगे। बीमारी की वजह से गायों ने दूध देना बंद कर दिया। आमदनी जीरो हो गई। हर दिन महीनों की तरह गुजरने लगा। इसी तरह दो साल बीत गए। आखिरकार सभी गायें मर गईं। अब सिर्फ पापा की पेंशन पर सब कुछ टिका था। घर किसी तरह चल रहा था।’ रोशन आगे कहते हैं, ‘गांव का ही मेरा एक दोस्त था। मेरे हालात देखकर उसने कहा- रोशन, तुम चाहो तो मेरे जानने वाले किशोर बावनकुडे और मनीष घाटबांदे से कर्ज ले सकते हो। जब पैसे हों, तब चुका देना।’ बोलते-बोलते रोशन माथा पीटने लगते हैं। बगल में बैठी उनकी पत्नी रोहिणी बार-बार अपना मंगलसूत्र निहारती हैं। उनकी आंखों से आंसू टपक रहे हैं। रोशन कहते हैं, ‘फरवरी 2021 की बात है। मैं इन दोनों साहूकारों के पास गया और अपनी पीड़ा बताई। दोनों 50-50 हजार रुपए देने के लिए राजी हो गए। बदले में पहले 15 दिन का 10 प्रतिशत ब्याज तय हुआ और भुगतान में देरी होने पर हर दिन 5 से 10 हजार रुपए तक का जुर्माना।’ ‘मैंने हामी भर दी। धीरे-धीरे उनका कर्ज बढ़ता गया। इसके बाद वे हर हफ्ते घर आकर धमकियां देने लगे।’ वह आगे बताते हैं, ‘2022 की बात है। मेरी दादी की मौत हो गई थी। उनकी तेरहवीं थी। उसी दिन सुबह-सुबह एक साहूकार मेरे घर आया और पापा को गालियां देते हुए धमकाने लगा।’ ‘मां उनके पैर पकड़कर गिड़गिड़ाने लगीं कि दादी की तेरहवीं के बाद वह कर्ज चुका देंगी। जाते-जाते उसने कहा- जमीन बेचकर पैसे चुकाओ, वर्ना…’ कर्ज लेने का कोई कागज बनवाया था? आवाज में तल्खी लाते हुए रोशन बोल पड़ते हैं, ‘साहब, सब कुछ बातचीत में ही हुआ था। जो उसने कहा, वही मुझे मानना पड़ा। चार महीने बाद साहूकार ने मुझे यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर ब्रह्मपुरी बुलाया। उस दिन उसने कहा- अगर तुम मेरा कर्ज नहीं चुका पा रहे हो, तो मेरे एक जानने वाले हैं। उनसे पैसे लेकर मेरा कर्ज लौटा दो।’ ‘उन साहूकारों ने मुझे लक्ष्मण नाम के एक साहूकार से मिलवाया। उसने कहा- पैसे तो दे दूंगा, लेकिन 40 प्रतिशत मासिक ब्याज के साथ चुकाने होंगे। मैंने हामी भर दी। उससे मैंने 3 लाख रुपए ले लिए और पहले वाले साहूकार का कर्ज चुका दिया।’ रोशन आगे कहते हैं, ‘अब इस 3 लाख पर हर महीने 1 लाख 20 हजार रुपए ब्याज लगने लगा। इतना पैसा मैं कैसे चुका पाता? डेटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी करके बमुश्किल 10-12 हजार रुपए महीना कमाता था।’ रोशन कहते हैं, ‘अब साहूकार फिर से धमकी देने लगे। कहने लगे- तुम अपनी जमीन बेचकर पैसे चुकाओ। हर हफ्ते सुबह उठते ही सभी साहूकार मेरे घर आ जाते थे। गुस्से में चीखते हुए घर में घुस आते। मेरे बच्चे और पत्नी डर के मारे रोने लगते। पैसे न देने पर वे गालियां देते हुए वापस लौट जाते।’ यह कहते हुए रोशन के पेट में दर्द होने लगता है। खाट पर बैठे-बैठे वह बेचैन हो उठते हैं। थोड़ा ठहरकर कहते हैं, ‘सर, थोड़ा रुक जाइए। किडनी जब से निकाली गई है, तब से इस हिस्से में दर्द बना रहता है। ज्यादा बोलता हूं तो यहां दबाव पड़ता है और बेचैनी होने लगती है।’ मैं हामी भरते हुए रुक जाता हूं। रोशन उठकर आंगन की ओर चले जाते हैं। पत्नी रोहिणी कुडे उसी खाट पर आकर बैठ जाती हैं। गोद में डेढ़ साल के बच्चे को उठाते हुए कहती हैं, ‘ये मेरे पेट में था। साहूकार हर दिन पैसे मांगने के लिए आते थे। भद्दी गालियां देते थे। कहते थे- पैसे नहीं हैं, तो पत्नी के गहने बेचकर चुकाओ।’ वह आगे कहती हैं, ‘मेरे पास करीब एक तोला सोना था। मेरे पति ने मेरा मंगलसूत्र समेत सारी ज्वेलरी बेच दी। कभी-कभी मन होता था कि सभी को जहर देकर मर जाऊं, या इसे (पति को) छोड़कर चली जाऊं। लेकिन क्या करती? दो-दो बच्चे हैं, कहां जाती।’ कहती हैं, ‘गहने बेचने के बाद भी हम साहूकारों का कर्ज नहीं चुका पाए। फिर अपने रिश्तेदारों और आसपास के लोगों से पैसे लेने लगे। ऐसा करते-करते 15 से 20 लोगों से कर्ज ले लिया। बैंक से भी कर्ज लिया। कुल मिलाकर 74 लाख रुपए का कर्ज हो गया। इसके बाद साहूकार जमीन बेचने का दबाव बनाने लगे।’ यह कहते-कहते रोहिणी फूट-फूटकर रोने लगती हैं। रोशन वापस आकर बगल में बैठ जाते हैं। कहते हैं, ‘पापा जमीन बेचना नहीं चाहते थे। उन्होंने खेती-किसानी करके ढाई एकड़ जमीन खरीदी थी। साहूकार कहने लगे- जमीन बेचकर पैसे लाओ, नहीं तो सभी को मार देंगे।’ वह आगे कहते हैं, ‘डर के चलते पापा करीब दस दिनों तक घर से गायब हो गए। एक रिश्तेदार के यहां जाकर छिपकर रहने लगे। इधर साहूकार रोज घर आकर गाली-गलौज करते थे, पैसे मांगते थे।’ ‘एक दिन जब पापा घर लौटे, तो साहूकार उन्हें जबरन उठाकर कचहरी ले गए और पूरी जमीन बिकवा दी। ढाई एकड़ जमीन थी, वह भी खत्म हो गई।’ रोशन की आवाज भारी हो जाती है। कहते हैं, ‘जमीन बिकने के बाद भी साहूकारों का कर्ज नहीं चुका पाया, तो उन्होंने हमारे ट्रैक्टर और गाड़ी बिकवा दी। उससे भी कर्ज नहीं उतरा, तो मेरी किडनी…’ यह कहते हुए रोशन कुछ देर के लिए सन्न रह जाते हैं। ठहरकर कहते हैं, ‘सितंबर 2023 की बात है। हर दिन सुबह-सुबह साहूकारों के फोन आने लगे। सब मिलाकर कर्ज 74 लाख से ज्यादा हो चुका था।’ ‘एक दिन साहूकारों ने ब्रह्मपुरी स्थित अपने ऑफिस में बुलाया और कहा- अब तुम्हारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है। अपनी किडनी बेच दो। एक किडनी के सहारे जिंदा तो रहोगे ही। इतना सोच क्या रहे हो?’ किडनी की बात सुनते ही मैं थर-थर कांपने लगा। एक साहूकार ने अपना फेसबुक पेज दिखाते हुए कहा, ‘देखो, कंबोडिया का ये हॉस्पिटल है। यहां दर्जनों पेशेंट भर्ती हैं, जिन्हें किडनी की ज़रूरत है। यहां सभी किडनी दान करते हैं। तुम भी किडनी दान कर दो। बदले में 8 लाख रुपए तो मिलेंगे ही। अगर किसी पेशेंट के परिवार वाले करोड़पति हुए, तो तुम्हारी किस्मत ही बदल जाएगी।’ वह आगे बोला, ‘मुंहमांगी कीमत पाओगे- 50 लाख, एक करोड़… जितना चाहोगे, उतना।’ उसके बाद हर दो-चार दिन में ये साहूकार मुझे बुलाकर घंटों समझाते रहते। मैं करीब छह-सात महीने तक साहूकारों की कही किडनी बेचने की बात टालता रहा। वे हर रोज घर आकर कहते- अब समय नहीं है, जल्दी पैसे चुकाओ। इधर साहूकारों के डर से घर के लोग हर वक्त रोते-बिलखते रहते थे। सुबह होते ही फोन की घंटी बजने लगती थी। सितंबर 2024 की बात है। मैंने मन बना लिया कि अब किडनी बेचनी ही पड़ेगी। सोच रहा था- वैसे भी परिवार भूखा मर रहा था। दिन में खाना बनता, तो रात में नहीं बनता था और रात में बनता, तो दिन में नहीं। जमीन, ज्वेलरी, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल… सब बेचने के बाद भी 40 लाख का कर्ज बचा था। साहूकारों ने बहुत जल्दी, साढ़े तीन हजार रुपए में मेरा पासपोर्ट बनवा दिया। फेसबुक के जरिए डॉ. कृष्णा नाम के एक डॉक्टर से मेरा संपर्क करवाया और फिर कंबोडिया जाने का प्लान बना लिया। साहूकार को अपनी पत्नी का बैंक अकाउंट नंबर दे दिया था। मन में बस यही चल रहा था- पता नहीं, वहां जाने के बाद जिंदा लौटूंगा या नहीं। 21 सितंबर की रात से एक दिन पहले की बात है। मैंने पत्नी से कहा- कर्ज बहुत ज्यादा हो चुका है। कई लोग विदेश जाकर कमाते हैं। मैं भी जा रहा हूं, शायद किस्मत पलट जाए। मन ही मन डर भी था- कंबोडिया जाने के बाद अगर मुझे कुछ हो गया, तो मेरी पत्नी विधवा हो जाएगी, बच्चे अनाथ हो जाएंगे। खैर, दो जोड़ी कपड़े और खाने-पीने का थोड़ा सामान लेकर मैं नागपुर से कोलकाता के लिए निकल गया। कोलकाता से हम लोगों की कंबोडिया के लिए फ्लाइट थी। हम लोगो की? ‘हां, मेरे साथ और भी छह लोग थे। सभी किडनी बेचने जा रहे थे। जब एयरपोर्ट पहुंचे, तो साहूकारों ने साफ कह दिया- अगर यहां से कोई वापस जाना चाहता है, तो पहले 5 लाख रुपए जमा करे। वरना कोई किसी से कोई बात नहीं करेगा और अपने बारे में किसी को कुछ नहीं बताएगा। 26 सितंबर की रात 8 बजे हम लोगों की कोलकाता से बैंकॉक के लिए फ्लाइट थी। उससे पहले साहूकारों ने कोलकाता की ही एक लैब में हमारी मेडिकल जांच करवाई, ताकि यह पता कर सकें कि जिन्हें लेकर जा रहे हैं, उनकी किडनियां ठीक हैं या नहीं- उन्हें बेचा जा सकता है या नहीं। इस तरह बैंकॉक के रास्ते 27 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे हम कंबोडिया पहुंच गए। वहां से हमें एक हॉस्पिटल ले जाया गया, जिसे लोग मिलिट्री हॉस्पिटल कहते थे। वहां दो कमरों में हम छह लोगों को बंधक बनाकर रखा गया। न कोई फोन कॉल कर सकते थे, न किसी से बातचीत। साथ आए लड़कों में कोई महाराष्ट्र का था, कोई दूसरे शहर का। कुछ राजस्थान के थे और कुछ बांग्लादेश के। वहां हर दिन सभी रोते-बिलखते रहते थे। कहते थे- हमें किडनी नहीं बेचनी है। इसी तरह लगभग दो हफ्ते बीत गए। 14 अक्टूबर की सुबह एक डॉक्टर आया और बोला- आज तुम लोगों का ऑपरेशन होगा। दोपहर करीब 2 बजे वह मुझे ऑपरेशन थिएटर में लेकर गया। एक इंजेक्शन लगाने के कुछ देर बाद मैं बेहोश हो गया। रात करीब 10 बजे होश आया, तो देखा- मेरे हाथ-पैर में कई मशीनें लगी हुई थीं।’ पेट पर गहरा चीरा था। मैं दर्द के मारे कराह रहा था। उस वक्त लगा कि इससे अच्छा तो मर ही गया होता। पूरी रात जागता रहा, नींद नहीं आई। तीसरे दिन जब पत्नी के खाते में 8 लाख रुपए पहुंचे, तब उसने मुझे फोन किया। वह चौंकते हुए बोली- अकाउंट में 8 लाख रुपए आए हैं। इतने पैसे कहां से आए? मैं रोते हुए बोला- हां, एक किडनी बेच दी है। 26 अक्टूबर को साहूकारों ने कंबोडिया से विशाखापट्नम की फ्लाइट से मुझे वापस घर भेज दिया। घर पहुंचा, तो मेरी पत्नी कलेजा पीटकर रोने लगी। मैं रात-रात भर करवट नहीं बदल पाता था। जिधर से किडनी निकाली गई थी, उस तरफ करवट लेते ही तेज दर्द होने लगता था। कुछ महीनों तक मैं बाथरूम में चुपके से नहाता रहा, ताकि पेट का चीरा कोई देख न ले। उस समय तक किडनी निकालने की बात सिर्फ मेरी पत्नी को ही पता थी। ठंड बढ़ने लगी, तो मैं आंगन में धूप में जाकर नहाने लगा। तभी सबको पता चल गया कि मेरे पेट पर चीरा लगा है। किडनी बेचने के बाद भी करीब 40 लाख रुपए का कर्ज बचा था। साहूकार अब भी हर रोज मेरे घर पैसे मांगने आते थे। 15 दिसंबर की बात है। शाम का वक्त था। अचानक कमरे से जोर की आवाज आई। भागकर देखा, तो पत्नी जमीन पर गिरी पड़ी थी। उसकी गर्दन में रस्सी बंधी थी। वह फूट-फूटकर रो रही थी। कह रही थी- अब जीने का कोई फायदा नहीं। वह फांसी के फंदे से लटकने जा रही थी, लेकिन अलमारी से टकराने के कारण रस्सी टूट गई और वह नीचे गिर गई। नहीं तो उस दिन सब खत्म हो जाता। तब मैंने कहा था- कल शहर जाकर एसपी के सामने पूरी रिपोर्ट दर्ज कराऊंगा। अगले दिन मैंने साहूकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। अब सभी साहूकार जेल में हैं।’ कहते-कहते रोशन अपना माथा रगड़ने लगते हैं। खीझते हुए कहते हैं, ‘अभी भी 30–40 लाख रुपए का कर्ज है। कैसे जिंदगी कटेगी, यही सोच-सोचकर नींद नहीं आती।’

दैनिक भास्कर 22 Jan 2026 5:11 am

DNA: जिस द्वीप को मॉरिशस को वापस लौटाने जा रहा है ब्रिटेन, उससे इतने परेशान क्यों हैं ट्रंप? बताया- बड़ी मूर्खता

Mauritius-UK Chagos Islands dispute: लंबे कानूनी विवाद में हार के बाद अब ब्रिटेन कब्जाए हुए चागोस द्वीप को मॉरिशस को वापस लौटाने जा रहा है. इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भड़के हुए हैं. उन्होंने इसके लिए ब्रिटेन को खरी-खोटी सुनाई है.

ज़ी न्यूज़ 22 Jan 2026 12:34 am

ग्रीनलैंड पर रातोंरात पलट क्यों गए ट्रम्प:बोले- ताकत इस्तेमाल नहीं करूंगा; यूरोप की धमकी से डरे या कोई छिपी वजह

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कहते थे कि इसे हर हाल में हासिल करेंगे, वेनेजुएला जैसे मिलिट्री एक्शन लेंगे, शांति के बारे में नहीं सोचेंगे। लेकिन रातोंरात ट्रम्प का रुख बदल गया है। 21 जनवरी को दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने ऐलान किया कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करेंगे, लेकिन ताकत से नहीं। ट्रम्प के 75 मिनट के भाषण के बाद माना जा रहा है कि अब अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए मिलिट्री एक्शन या ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगा। आखिर क्यों ट्रम्प ग्रीनलैंड पर हमला करने से पीछे हट गए; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में 5 पॉइंट्स में… 1. वर्ल्ड ऑर्डर में अमेरिका की लीडरशिप को खतरा 2. दुनियाभर में एंटी-ट्रम्प माहौल की लामबंदी 3. हमला NATO और UN के नियमों के खिलाफ होगा 4. NATO में अंदरूनी बंटवारे का खतरा 5. अमेरिका में ही ट्रम्प की इस पॉलिसी का विरोध ***** ट्रम्प से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए... सालभर में 7 देशों पर हमले, आधी दुनिया पर नजर: ट्रम्प की 'सनक' एक सोची-समझी स्ट्रैटजी; जानिए 200 साल पुरानी अमेरिकी डॉक्ट्रिन डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति पद की शपथ लिए एक साल पूरे हो रहे हैं। इस दौरान ट्रम्प ने 7 देशों पर सैन्य हमले किए, वेनेजुएला के राष्ट्रपति को तो घर से उठवा लिया, दर्जनों देशों पर अनाप-शनाप टैरिफ लगाए, राष्ट्राध्यक्षों को बेइज्जत किया और पूरे पश्चिमी हिस्से पर खुला दबदबा जताया। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि ट्रम्प क्या कर रहे हैं, सवाल यह है कि क्यों कर रहे हैं? पूरी खबर पढ़िए...

दैनिक भास्कर 22 Jan 2026 12:01 am

टैरिफ पर नहीं बनी बात लेकिन मोदी को बता रहे अपना परम मित्र, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत पर क्या बोले राष्ट्रपति ट्रंप?

Donald Trump Calls PM Modi His Friend: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत में भारी-भरकम टैरिफ लगाया है, हालांकि अब उन्होंने पीएम मोदी को अपना मित्र बताया है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 11:30 pm

‘शांति दूत’ या ‘Global Bully’? ट्रंप के फैसलों से चरमराया ग्लोबल पावर बैलेंस , क्या तीसरे विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रही दुनिया

Donald Trump Latest News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को शांति दूत बताते हुए नोबेल मिलने का दावा करते रहे हैं. लेकिन सच ये है कि अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में ही वे 8 देशों पर हमला करवा चुके हैं. अब उनके सनक भरे फैसलों से तीसरे विश्वयुद्ध की आहट आने लगी है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 11:14 pm

2026 में कई देशों में होंगे चुनाव, न्यूजीलैंड से हुआ शंखनाद; 7 नवंबर को डाले जाएंगे वोट

न्यूजीलैंड में इस साल नवंबर में वोटिंग होगी. पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने चुनावी तारीखों का एलान कर दिया है. एक बयान में बताया गया कि न्यूजीलैंड में 7 नवंबर 2026 को वोटिंग होगी.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 10:49 pm

'अमेरिकी टैरिफ के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना किया बंद', ट्रंप के मंत्री ने फिर किया हवाई दावा

अमेरिका के वित्तमंत्री स्कॉट बेसेंट ने फिर एक बार हवाई दावा किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने इंडिया पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया, इसके बाद उसने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 10:17 pm

ग्रीनलैंड पर कब्जे और यूरोप की नीतियों से लेकर भारत-पाक युद्ध तक... WEF में ट्रंप के संबोधन की बड़ी बातें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम में हिस्सा लिया और अपना संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने कई बड़े दावे किए. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर रहेगा.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 9:44 pm

'यूएस की वजह से है दुनिया में है कनाडा का वजूद', दावोस से डोनाल्ड ट्रंप की कार्नी को कड़ी चेतावनी

Donald Trump: ट्रंप ने दावोस मंच से कहा कि अमेरिका गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार करने की योजना बना रहा है, जिससे कनाडा की भी रक्षा होगी, लेकिन कार्नी अमेरिका के आभारी नहीं हैं.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 9:42 pm

'मेरे कार्यकाल के पहले साल से यूएस के लोग बहुत खुश', दुनियाभर में मची उथल-पुथल के बीच वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम में बोले ट्रंप

Donald Trump Davos 2026 Speech: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड की अपनी जिद से पीछे हटने को तैयार नजर नहीं आते हैं. दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम में बोलते हुए ट्रंप ने खुले तौर पर कहा कि यूएस किसी भी हालत में ग्रीनलैंड को पाकर रहेगा.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 8:17 pm

अजीबो गरीब फैसलों ने चौंकाया... दोस्त भी साध रहे निशाना, साल भर में ट्रंप ने बदल दिया दुनिया का समीकरण! लेकिन भारत पर चला दांव पड़ गया उल्टा

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर दूसरे कार्यकाल का एक साल पूर हो गया है. पिछले एक साल में ट्रंप ने कई बड़े फैसले लिए, जिसने सभी को चौंकाया है. उन्होने भारत पर भी दबाव बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनका दांव उल्टा पड़ गया.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 7:18 pm

'अगर आप टेबल नहीं होंगे तो मेन्यू पर होंगे...,' कनाडाई पीएम की अमेरिका के खिलाफ बड़ी चेतावनी, टैरिफ पर दुनिया को दिया बड़ा संदेश

Canadian PM In World Economic Forum: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में (WEF) में बड़ी चेतावनी दी है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 6:26 pm

मिडिल ईस्ट में बदलने जा रहे समीकरण! तुर्की और कतर के साथ गाजा बोर्ड ऑफ पीस में इजरायल भी होगा शामिल; नेतन्याहू ने दुनिया को चौंकाया

गाजा में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस में इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल होंगे. हालांकि, इससे पहले इजरायल ने इस बोर्ड को लेकर आपत्ति जताई थी. अब नेतन्याहू के फैसले ने सभी को चौंका दिया है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 5:23 pm

माथे पर तिलक लगाना बना ‘गुनाह’! स्कूल बोला- तिलक हटाओ या स्कूल छोड़ो, पैरंट्स ने उठा लिया बड़ा कदम

Controversy Over Tilak on Forehead in School: सनातन धर्म में माथे पर तिलक लगाना सामान्य परंपरा है. जिसे ईश्वर का आशीर्वाद माना जाता है. लेकिन एक प्राइवेट स्कूल ने इसी तिलक की वजह से 8 साल के बच्चे का जीना दूभर कर दिया. उसके उत्पीड़न से परेशान होकर पैरंट्स ने आखिरकार बड़ा कदम उठा लिया.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 4:43 pm

दुनिया में अब नहीं चलेगी अमेरिका की दादागिरी.... दावोस में कनाडाई पीएम का ट्रंप को तंज, किस तरफ किया इशारा?

Mark Carney Speech In World Economic Forum : वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने भाषण के दौरान कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 4:17 pm

चेरनोबिल में फिर मंडराया मौत का साया! रूसी हमले के बाद न्यूक्लियर प्लांट की बिजली गुल, क्या टल गया 1986 जैसा महाविनाश?

chernobyl power plant blackout: यूक्रेन के चेरनोबिल न्यूक्लियर प्लांट में रूस के हमले के बाद बिजली कटने से सुरक्षा पर खतरा पैदा हुआ, लेकिन बैकअप सिस्टम से बड़ी दुर्घटना टली है. प्लांट की बिजली बहाल हो गई है और फिलहाल लोगों व पर्यावरण के लिए कोई सीधा खतरा नहीं है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 2:29 pm

क्या धर्म की आड़ में बांग्लादेश में कुचली जा रही आजादी? भीड़ के दबाव में यूनिवर्सिटी ने दो टीचर्स को निकाला, दुनिया में मचा हंगामा

Two teachers dismissed by Bangladesh:बांग्लादेश की एक निजी यूनिवर्सिटी से दो शिक्षकों को ईशनिंदा के आरोप में हटाए जाने पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने कड़ी आपत्ति जताई है. संगठन का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए और बचाव का मौका दिए यह कार्रवाई अकादमिक स्वतंत्रता और न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. जानते हैं पूरा मामला.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 1:03 pm

टोरंटो में गूंजा ‘इंडिया-कनाडा एआई डायलॉग 2026’, जिम्मेदार तकनीक पर जोर

समावेशी, जिम्मेदार और समाज के हित में काम करने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारत की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए कनाडा के टोरंटो शहर में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इंडिया-कनाडा एआई डायलॉग 2026 का आयोजन किया

देशबन्धु 21 Jan 2026 11:33 am

अमेरिका ने छोड़ा नाटो का साथ तो क्या होगा? ट्रंप की चेतावनियों के पीछे 'डर और डील' की रणनीति तो नहीं?

Donald Trump on NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नाटो पर खुलकर बरस रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके बिना नाटो कुछ भी नहीं है.अगर मैं नहीं होता तो आज NATO नहीं होता!

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 11:16 am

मिस्टर प्रेसिडेंट, भाड़ में जाओ...ग्रीनलैंड डिबेट के दौरान भड़के डेनिश सांसद, क्यों उतारा ट्रंप पर गुस्सा?

Donald Trump: इन दिनों ग्रीनलैंड को लेकर काफी ज्यादा बहस छिड़ी है. इसी बीच डेनमार्क के एक सांसद ने अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप को कहा भाड़ में जाओ, ग्रीनलैंड बिकने के लिए नहीं है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 10:48 am

दावोस जा रहे थे ट्रंप, अचानक आसमान में ही मिला रेड सिग्नल, बीच रास्ते से वापस लौटे अमेरिका; अब व्हाइट हाउस ने बताई सच्चाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विमान एयर फोर्स वन स्विट्ज़रलैंड के डावोस जाते समय तकनीकी खराबी के कारण उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही वापस लौट आया. व्हाइट हाउस ने इसे “मामूली इलेक्ट्रिकल समस्या” बताया है. ट्रंप अब दूसरे विमान से वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने जाएंगे.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 10:17 am

मचाडो के नोबेल गिफ्ट से गदगद हैं ट्रंप, वेनेजुएला की सत्‍ता में दे सकते हैं अहम रोल!

Venezuela Maria Corina Machado gifts her Nobel Peace Prize to Trump:वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने जबसे अपना नोबेल शांतिपुरस्कार ट्रंप को गिफ्ट किया है, तब सेअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख मचाडो को लेकर अचानक बदल गया है. ट्रंप इतने गदगद हुए हैं कि वे मचाडो को वेनेजुएला की सत्ता में किसी अहम भूमिका में देख सकते हैं.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 9:13 am

क्यों इजरायल और फ्रांस जैसे करीबी दोस्त भी ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' को मान रहे हैं अपने लिए खतरा? जानें इनसाइड स्टोरी

Trump board of peace: ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना की योजना पेश की है, जिसका नियाभर के संघर्षों को सुलझाना और स्थायी शांति लाना है. हालांकि इसके महंगे सदस्यता शुल्क और अमेरिकी प्रभुत्व के कारण कई देशों ने इसमें शामिल होने को लेकर सवाल उठाए हैं.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 9:10 am

अमेरिका के बॉर्डर अब सुरक्षित, कड़े सीमा सुरक्षा नियमों से मिली सफलता : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार ने देश की सीमाओं पर नियंत्रण बहुत कड़ा कर दिया है। उनका दावा है कि सख्त कार्रवाई की वजह से अवैध रूप से अमेरिका में आने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है और कई गंभीर अपराधियों को देश से बाहर निकाला गया है।

देशबन्धु 21 Jan 2026 9:03 am

Diego Garcia: ग्रीनलैंड पर खींचतान के बीच पैसेफिक में बेचैनी: अब इस मिलिट्री बेस के लिए भिड़ेंगे ट्रंप, क्या बढ़ेगी भारत-चीन की टेंशन?

Diego Garciaट्रंप के लिए हर दिन नई समस्या जन्म ले लेती है. अभी ग्रीनलैंड पर अपने कब्जे को लेकर वो तीखी बयानबाजियां दे रहे थे कि इसी बीच हिंद महासागर में मौजूदडिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस ने उनकी चिंता बढ़ा दी है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 8:36 am

जनता को मिलेंगे 2,000 डॉलर! क्या ट्रंप की 'टैरिफ नीति' ने बदला अमेरिका का भाग्य? 18 ट्रिलियन डॉलर का होगा निवेश

Trump defends tariffs: ट्रंप ने अपने टैरिफ की नीति का बचाव करते हुए कहा कि इससे अमेरिका का व्यापार घाटा घटा है, आर्थिक निवेश बढ़ा है और आम अमेरिकियों को $2,000 तक का भुगतान किया जा सकता है. उन्होंने टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा और राजस्व के लिए भी जरूरी बताया है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 8:21 am

चौथी बार पिता बनेंगे जेडी वेंस, पत्‍नी उषा का है भारत से नाता; अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने शेयर किया भावुक पोस्ट

JD Vance: अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस चौथी बार पिता बनने जा रहे हैं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस खबर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 7:49 am

डोनाल्‍ड ट्रंप ने ऑफिस में एक साल किए पूरे, अमेरिका की कहानी सुनिए उनकी ही जुबानी!

Second term of Trump: ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने पर अमेरिका में उनकी नीतियों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार पर देश के इज्जत को कम करने का आरोप लगा है. वहीं ट्रंप ने इन आलोचनाओं के बीच अपनी उपलब्धियां गिनाई हैं और कहा कि उनकी सरकार ने अब तक सबसे ज्यादा काम किया है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 7:35 am

‘क्या ब्राह्मणों पर कर्फ्यू लगा है, फिर मीटिंग होगी’:अधिकारी सुनते नहीं, क्या हम अछूत; यूपी में ब्राह्मण विधायकों की मीटिंग से कौन परेशान

23 दिसंबर 2025, लखनऊ में 50 से ज्यादा ब्राह्मण विधायक और MLC जुटे। जगह थी कुशीनगर के BJP विधायक पीएन पाठक का घर। ब्राह्मणों के मुद्दों पर बातें हुईं। पर पार्टी हाईकमान नाराज हो गया। यूपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इसे अनुशासनहीनता माना और आगे ऐसा नहीं करने की हिदायत दे डाली। तब तय किया था कि हर महीने जुटेंगे, पर अब तक सुगबुगाहट नहीं है। महीने लगने को आ गए। दैनिक भास्कर ने उसी बैठक में शामिल 7 विधायकों से बात की। तीन बातें समझ आईं- 1. विधायकों को लगता है कि ब्राह्मण इस वक्त अछूत हो गया है।2. सरकार सम्मान नहीं देती और अधिकारी बदसलूकी कर रहे हैं।3. सरनेम से ही दोषी मान रहे और SC-ST एक्ट में झूठे केस लाद रहे। विधायकों ने नाम न छापने की शर्त पर बात की क्योंकि मीडिया में बोलने से मना किया है। विधायक 1: समुदाय के लोगों के साथ बैठना गुनाह कैसे हो गया सवाल: क्या लगता है, बैठक पर सवाल क्यों उठा?जवाब: समुदाय के लोगों का साथ बैठना गुनाह कैसे हो गया। कैसी अनुशासनहीनता। हम समाज की चिंताएं लेकर बैठे थे। ये न सीक्रेट मीटिंग थी, न बगावत की प्लानिंग। अगली बार बता देंगे कि बैठ रहे हैं। फिर कोई आपत्ति नहीं होगी न। जानता हूं फिर भी होगी क्योंकि ब्राह्मण अभी सबसे अछूत है। रोज उपेक्षा झेल रहे। हमें डांटकर चुप करा दिया गया, पर ब्राह्मण जनप्रतिनिधि, समाज और पार्टी में जो अपमान सह रहा, उसका गुस्सा आज नहीं तो कल फूटेगा। हम बुद्धिबल और संख्याबल में कम नहीं हैं। विधायक 2: बैठक होगी, लेकिन जल्दी नहीं सवाल: क्या अगली बैठक होगी?जवाब: प्लान था कि हर महीने बैठेंगे। समाज के बारे में सोचेंगे और ब्राह्मण कार्यकर्ता के अपमान के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होंगे। फिलहाल नहीं लग रहा कि दूसरी बैठक होगी। हालांकि ऐसा भी नहीं कि अब बैठक होगी ही नहीं। विधायक 3: जिन्हें डर लगा, उन्हें बिल्कुल डरना चाहिए सवाल: बैठक में कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं था, फिर बैठक न करने का आदेश क्यों?जवाब: अगर प्रशासन इस बैठक से डरा या उसे कोई चुनौती लगी, तो लगनी भी चाहिए। राज्य में हम करीब 12% हैं। अगर ब्राह्मण विधायक इग्नोर महसूस करता रहा, तो नुकसान तय है। यूपी में अधिकारी के पास जाओ तो लगता है, जैसे हैसियत ही नहीं है हमारी। जिस कम्युनिटी का बोलबाला है, उससे संख्या में दोगुने हैं। ऊपर बैठे लोगों को लगता है कि ब्राह्मण कहां जाएगा। तो वो जाएगा नहीं, लेकिन घर तो बैठ सकता है। विधायक 4: मुश्किल से बैठने का मौका मिला सवाल: बैठक अचानक प्लान की गई या पहले से तैयारी थी?जवाब: ये अचानक नहीं हुआ। डेढ़-दो साल से चर्चा कर रहे थे, पर मौका नहीं मिल रहा था। 50-60 विधायकों को जुटने में दिक्कत आ रही थी। मुश्किल से हमें साथ बैठने का मौका मिला। सवाल: 17 विधायक नहीं आए, क्या वे बाहर थे?जवाब: शायद डर हो कि निशाने पर आ जाएंगे। सवाल: तो क्या वे आप लोगों के साथ नहीं हैं?जवाब: पता नहीं, पर हम सबकी बात कर रहे थे, आगे भी करेंगे। विधायक 5: ब्राह्मणों के खिलाफ माहौल, इसलिए ये नौबत आई सवाल: बैठक का आइडिया किसका था?जवाब: देखिए साथ बैठना गुनाह नहीं है। क्षत्रिय, कुर्मी, दलित, कोई भी अपने समाज में बैठ सकता है, तो ब्राह्मण के बैठने में क्या गलत है। रही बात आइडिया की, तो ब्राह्मण विधायकों और कम्युनिटी के खिलाफ बन रहे माहौल की वजह से ये हुआ। बैठक पीएन पाठक जी के घर हुई, पर ऐसा नहीं कि वे इसके सूत्रधार हैं। कई लोग एक जैसा महसूस कर रहे थे। संपर्क में आए और प्लान बना। सवाल: क्यों लगता है कि आप लोगों का अपमान हो रहा है?जवाब: ब्राह्मण जनप्रतिनिधि अधिकारियों के निशाने पर हैं। SC/ST एक्ट का शिकार सबसे ज्यादा यही समुदाय बनाया जा रहा। झूठे केस लगते हैं। मेरी सीट पर 80 साल के बुजुर्ग पर SC/ST एक्ट लगा दिया। सब जानते हैं कि फंसाया है। थाने जाओ, तो सरनेम से ही आधा दोषी मान लेते हैं। अधिकारी हमारी नहीं सुनते, तो हम जनता की आवाज कैसे बनेंगे। सरकार को लगता है कि हमें किसी ने बरगलाया है, तो गलत हैं। क्षेत्र में जवाब हमें देना पड़ता है। आजकल ये चल रहा है कि ब्राह्मण पीड़ित हो तो अनसुना कर दो और खिलाफ शिकायत आए तो बढ़ा-चढ़ाकर लिखो और बोलो। विधायक 6: लेटर का लोड नहीं, इससे बगावत नहीं रुकती सवाल: बैठक पर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की हिदायत सही है?जवाब: बिल्कुल नहीं, लेकिन वो नए-नए अध्यक्ष बने हैं। उन्हें लगा कि कुछ बड़ा होने वाला है। सही तो ये होता कि वे तूल देने के बजाय कुछ विधायकों को बुलाकर बात कर लेते। जिसे पार्टी से बगावत करनी होती है, वो ऐसे लेटर्स का लोड नहीं लेता। इससे बगावत नहीं रुकती। विधायक 7: जब लगेगा फिर बैठेंगे, ब्राह्मण जुटान पर कर्फ्यू नहीं लगा हैमीटिंग में शामिल पूर्वांचल के एक विधायक बोले- 'हमें चुप रहने का आदेश मिला है। बैठक को छोड़कर कुछ और बात करें।' सवाल: दोबारा बैठेंगे या नहीं?जवाब: क्यों नहीं, जब लगेगा कि बैठना चाहिए तो बैठेंगे। क्या ब्राह्मण जुटान पर कोई कर्फ्यू लगा है। सवाल: क्या ये एकजुटता आगे भी बनी रहेगी?जवाब: मुंडे-मुंडे मतिर्भिन्ना। मतलब ब्राह्मण समुदाय ऐसा है, जिसमें हर व्यक्ति के विचार बहुत अलग हैं। ये झुंड में नहीं चलते। हम डरते रहते हैं कि अगर अपने समाज के साथ खुलकर आए तो हमें अनैतिक कहा जाएगा। हालांकि मैं तो अब अपने समाज के लिए आवाज उठाऊंगा। चाहें कोई साथ दे या न दे।‘ दिल्ली दरबार में MLA-MLC लगा चुके हाजिरीबैठक में शामिल 6 से ज्यादा MLA और MLC दिल्ली जाकर हाजिरी लगा चुके हैं। सोर्स के मुताबिक दिल्ली में इन लोगों ने वे मुद्दे साझा किए, जिन्हें लेकर बैठक हुई थी। यूपी में कथित तौर पर एक समुदाय को आगे बढ़ाने और उसके अधिकारियों के बुरे व्यवहार की शिकायत भी की। बैठक में खासतौर से 4 मुद्दों पर बात हुई 1. ब्राह्मण समाज के लिए फंड का इंतजामन आरक्षण है और न छूट। इसलिए 1-1 करोड़ रुपए चंदा कर फंड बनाया जाए। इससे समुदाय के लोगों को पढ़ाई और इलाज में मदद की जाए। 2. हर महीने बैठकहर महीने बैठक हो, जिसमें ब्राह्मणों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाए। 3. कॉमन प्लेटफॉर्म बनेसमाज के मुद्दों को बढ़ाने के लिए प्लेटफॉर्म बने। एक विधायक की बात दबाई जाएगी, इकट्ठे हुए तो सरकार सुनेगी। 4. अधिकारियों का बर्तावअधिकारियों की ब्राह्मण विधायकों के साथ बदसलूकी सामान्य बात हो गई है। अगली मीटिंग में तय करेंगे कि क्या करना चाहिए। यूपी में 52 ब्राह्मण विधायक, सबसे ज्यादा 41 BJP के यूपी विधानसभा में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं। इनमें BJP के 41, BJP के साथ गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी के 4, अपना दल (S) के 1, विपक्षी समाजवादी पार्टी के 5 और कांग्रेस के 1 विधायक ब्राह्मण कम्युनिटी से आते हैं। CSDS-लोकनीति के अनुमानित आंकड़े के मुताबिक, यूपी में ब्राह्मणों की आबादी 9% से 11% के बीच मानी जाती है। OBC 45% से 50%, अनुसूचित जाति 21% से 22%, अनुसूचित जाति 19% से 20%, राजपूत 7% से 8%, वैश्य 3% से 4% और अन्य 2% से 3% हैं। ............................ये खबर भी पढ़ें... जीरो सैलरी लेकर सबसे अमीर पार्टी संभालेंगे नितिन नबीन करीब 18 करोड़ सदस्य, देश के हर जिले में अपना ऑफिस, मजबूत जमीनी कैडर, 20 राज्यों में सरकारें, ये बातें BJP को देश की सबसे बड़ी पार्टी बनाती हैं। बिहार की बांकीपुर सीट से विधायक नितिन नबीन ने आज यानी 20 जनवरी से BJP की जिम्मेदारी पूरी तरह संभाल ली है। 14 दिसंबर 2025 को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नबीन BJP के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 21 Jan 2026 5:09 am

हिंदू वोटर के लिए विकास, मुस्लिम के लिए घुसपैठ-हिंदुत्व:मालदा-सिंगूर में मोदी का 59 सीटों पर निशाना, क्या सिंगूर लौट पाएगी टाटा की फैक्ट्री

हुगली के रत्नपुर की रहने वाली मोमिता 18 जनवरी को PM मोदी की रैली में सिंगूर आई थीं। मोमिता को उम्मीद थी कि पीएम टाटा के प्लांट पर कुछ बोलेंगे, लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं कहा। ये वही सिंगूर और टाटा का प्लांट है, जिसके खिलाफ 2008 में आंदोलन खड़ा कर ममता बनर्जी CM बनी थीं। BJP के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्‌टाचार्य ने सिंगूर में टाटा की वापसी कराने का वादा किया है। इससे माना जा रहा है कि मार्च-अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव में BJP इस मुद्दे को उठाने वाली है। PM मोदी बीते एक महीने में दो बार पश्चिम बंगाल आ चुके हैं। सिंगूर में जहां जॉब-विकास पर फोकस रहा, वहीं मालदा के जरिए उत्तरी दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद तक घुसपैठ और हिंदुत्व का मैसेज दिया गया। सिंगूर और मालदा के जरिए BJP ने हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर की 59 विधानसभा सीटों पर दांव खेला है। PM मोदी की जनसभा से क्या हासिल हुआ, पढ़िए रिपोर्ट… सिंगूर में टाटा का जाना अब भी मुद्दासिंगूर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 40 किमी दूर है। 2006 में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार ने टाटा ग्रुप को नैनो कार बनाने के लिए 1 हजार एकड़ जमीन दी थी। इसके खिलाफ किसानों ने विरोध किया। ममता बनर्जी तब विपक्ष में थीं। उन्होंने सरकार के फैसले के खिलाफ 21 दिन की भूख हड़ताल की और आंदोलन का चेहरा बन गईं। दो साल चले टकराव के बाद 2008 में टाटा मोटर्स ने अपनी फैक्ट्री सिंगूर से गुजरात के साणंद में शिफ्ट कर दी। अब BJP ने सिंगूर में टाटा की वापसी के वादे करने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने PM की रैली के अगले दिन सिंगूर की एक जनसभा में कहा, ‘सिंगूर में टाटा ने जो जमीन कार फैक्ट्री के लिए ली थी, वहीं ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बनाई जाएगी।’ मोदी की रैली में चंद्रपुर से सिंगूर आई मोमिता को टाटा के विरोध वाला पुराना वक्त याद है। वे पति और बेटी के साथ पीएम को सुनने आई थीं। उन्हें उम्मीद है कि BJP की सरकार आने से सिंगूर में इंडस्ट्री लगेगी। इससे रोजगार मिलेगा और बिजनेस भी शुरू हो जाएगा। 2006 का जिक्र करते हुए मोमिता कहती हैं, ‘यहां बहुत दिनों तक धरना चला था। इससे सिंगूर के लोगों का बहुत नुकसान हुआ। प्लांट बन रहा था, इसलिए कई लोग बाहर से आए थे। हम लोगों ने घर किराए पर दिए थे। नैनो का प्रोजेक्ट जाने से वे लोग भी चले गए। हमारी कमाई खत्म हो गई। अगर दोबारा प्लांट शुरू होता है, तो काम-धंधा बढ़ेगा।’ ‘प्रधानमंत्री ने पूरे राज्य के लिए इंडस्ट्री शुरू करने, रोजगार देने, भ्रष्टाचार और जंगलराज खत्म करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि बंगाल में इंडस्ट्री और इन्वेस्टमेंट तभी आएगा, जब कानून व्यवस्था अच्छी होगी। अगर आप लोग BJP को वोट देंगे, तो राज्य से सिंडिकेट राज खत्म हो जाएगा। हालांकि सिंगूर में फैक्ट्री लगाने पर वे कुछ नहीं बोले। इससे निराशा हुई है।’ ‘अधूरे वादों की वजह से लोग ममता के खिलाफ गुस्से में’सीनियर जर्नलिस्ट सुमन चट्टोपाध्याय कहते हैं, ‘BJP ने ऐसा माहौल बनाया है कि पीएम सिंगूर में इंडस्ट्री लाएंगे। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सिंगूर की अहम भूमिका रही है। लोगों ने अपनी जमीन के लिए आंदोलन किया, 34 साल की सत्ता बदली और उन्हें ममता बनर्जी में उम्मीद दिखी।’ ‘हालांकि ममता बनर्जी के वादे पोस्टर तक रह गए। इससे लोग गुस्सा हैं। BJP ने कोई वादा नहीं किया, लेकिन विकास की बातें कही हैं। पीएम ने सिंगूर के पास धूनिया गांव की चर्चा की, जहां साड़ियां बनती हैं। उन्होंने इसे ग्लोबल करने की बात कही। रोजगार यहां बड़ा मुद्दा है। लोग इस पर वोट करते हैं।’ PM का भाषण सुनने आए संजय मित्रो भी यही बात कहते हैं। टाटा प्लांट का जिक्र न होने पर उम्मीद जताते हुए कहते हैं- प्रधानमंत्री ने सिंगूर के विकास की बात कही है। इससे साफ है कि टाटा का प्रोजेक्ट यहां फिर आएगा। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं पिंकी मिश्रा कहती हैं, ‘अगर PM ने इस जगह को सभा के लिए चुना है, तो इसमें जरूर कोई खास बात होगी। उम्मीद है जिस प्लांट को यहां से भगाया गया था, उसे दोबारा लगाया जाए। ‘बंगाल में बेरोजगारी, यही मैसेज देने के लिए PM सिंगूर आए’सीनियर जर्नलिस्ट विश्वभर नेवर कहते हैं कि ममता बनर्जी के आंदोलन की वजह से टाटा को अपना सारा समान लेकर जाना पड़ा। सिंगूर में इंडस्ट्री नहीं लग पाई। लोगों को उम्मीद थी कि PM मोदी अपने भाषण में टाटा का जिक्र करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। BJP लंबे वक्त से प्रचार कर रही है कि ममता बनर्जी ने टाटा को भगाया, इसलिए यहां कोई इंडस्ट्री नहीं लगी।’ हालांकि सीनियर जर्नलिस्ट विनय बिहारी सिंह का नजरिया थोड़ा अलग है। वे कहते हैं, ‘PM मोदी ने टाटा प्लांट पर भले एक शब्द नहीं कहा, लेकिन जाहिर कर दिया कि अगर हमें सत्ता मिलेगी तो विकास जरूर होगा। इसलिए सिंगूर को चुना गया, ताकि लोगों तक साफ मैसेज जा सके।’ सीनियर जर्नलिस्ट अहमद हसन इमरान जनसभा के लिए सिंगूर को चुनने पर कहते हैं, ‘यहां मुस्लिम आबादी बहुत कम है। इसलिए हिंदुत्व की राजनीति नहीं की जा सकती। मोदी ने भले टाटा के प्लांट का जिक्र नहीं किया।’ ‘सिंगूर से बंगाल के लोगों को काम मिलेगा’प्रधानमंत्री के भाषण में सिंगूर में टाटा प्लांट का जिक्र न होने पर BJP प्रवक्ता देवजीत सरकार कहते हैं, ‘सिंगूर पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए प्रतीकात्मक जगह है। यहां से राजनीति में बदलाव आया है। पीएम ने जनसभा के दौरान कई प्रोजेक्ट का जिक्र किया। ट्रेन, पोर्ट की योजनाओं का शिलान्यास किया। ये सब सिंगूर के लिए भी हैं। इनके पूरा होने के बाद बंगाल के लोगों को काम मिलेगा।’ मालदा में मुस्लिम वोट बंटे तो BJP फायदे मेंपीएम मोदी ने सिंगूर के अलावा दूसरी रैली मालदा में की। आम के लिए मशहूर मालदा में करीब 63% मुस्लिम वोटर हैं। SC वोटर 29% और ST वोटर 9.49% हैं। मालदा की सीमा बांग्लादेश से लगती है। यह TMC का गढ़ है और BJP यहां जगह बनाने की कोशिश कर रही है। PM मोदी ने मालदा में घुसपैठ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बंगाल के सामने बहुत बड़ी चुनौती घुसपैठ की है। पश्चिम बंगाल से घुसपैठियों को बाहर निकालना बहुत जरूरी है। ये लोग गरीबों और मेहनतकशों के हक छीन रहे हैं। सीनियर जर्नलिस्ट विश्वभर नेवर बताते हैं, ‘मालदा कभी कांग्रेस का गढ़ था। कांग्रेस के अब्दुल गनी खां 1980 से 2004 तक लगातार 8 बार सांसद रहे। उनके परिवार का 73 साल से मालदा में दबदबा है। पिछले कुछ समय से मालदा और मुर्शिदाबाद के मुस्लिम वोटों को भी बांटने की कोशिश की जा रही है।’ ‘पिछले दिनों TMC ने भरतपुर सीट से विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी से निकाल दिया। उन्होंने अपनी पार्टी बना ली। दूसरी ओर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी यहां काम कर रही है। मुस्लिम वोट बंटेंगे, तो सीधा फायदा BJP को मिलेगा।’ ‘पिछले रिजल्ट देखें तो 2016 में BJP मालदा जिले में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। 2021 में रिजर्व सीटों पर उसे जीत मिली। यहां हिंदुओं को एकजुट करने के लिए BJP ने पीएम की जनसभा कराई है। अगर मुस्लिम वोट ओवैसी और हुमायूं कबीर की पार्टी में बंटे तो BJP की सीटें बढ़ सकती हैं।’ मालदा के जरिए मुर्शिदाबाद और दिनाजपुर भी साधासीनियर जर्नलिस्ट और राज्यसभा सांसद रहे चुके अहमद हसन इमरान कहते हैं, ‘PM की जनसभा के लिए मालदा को चुनने की वजह साफ है। मालदा तो मुस्लिम बहुल इलाका है ही, आसपास के जिलों मुर्शिदाबाद में 70% और उत्तर दिनाजपुर में 51% भी मुस्लिम आबादी है। यहां BJP को हिंदुत्व की राजनीति करने में आसानी होगी। मालदा के आदिवासी और दलित आबादी वाले एरिया में वे हिंदुओं को एकजुट कर सकेंगे। पिछले चुनाव में भी BJP ने आदिवासी क्षेत्र की हबीबपुर सीट जीती थी।’ वे आगे कहते हैं, ‘PM मोदी ने मालदा में घुसपैठ पर बात की। मालदा, उत्तरी दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद जिले बॉर्डर से सटे हैं। यहां घुसपैठ का मुद्दा उठाकर हिंदू वोटर्स को एक तरफ किया जा सकता है। लगातार घुसपैठ की वजह से डेमोग्राफी बदल रही है। मालदा और मुर्शिदाबाद में दंगे भी हुए है। घुसपैठ पश्चिम बंगाल के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। दुनिया के अमीर देश घुसपैठियों को भगा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही नीति की जरूरत है।’ ........................ये खबर भी पढ़ेंजीरो सैलरी लेकर सबसे अमीर पार्टी संभालेंगे नितिन नबीन करीब 18 करोड़ सदस्य, देश के हर जिले में अपना ऑफिस, मजबूत जमीनी कैडर, 20 राज्यों में सरकारें, ये बातें BJP को देश की सबसे बड़ी पार्टी बनाती हैं। नितिन नबीन पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। उन्हें नई जिम्मेदारी के बदले सैलरी नहीं मिलेगी, लेकिन वे जिस पार्टी को संभालने जा रहे हैं, वह कमाई, ऑफिस इन्फ्रास्ट्रक्चर और सदस्यों के मामले में कांग्रेस जैसी पार्टियों से मीलों आगे है। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 21 Jan 2026 5:09 am

ट्रंप की ग्रीनलैंड की दावेदारी से जानें चीन क्‍यों नाराज है लेकिन रूस है खुश?

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संकेतों में ट्रंप के दावे का समर्थन करते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड प्राकृतिक रूप से डेनमार्क का हिस्सा नहीं है और उपनिवेश काल से ही इसके स्वामित्व को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

देशबन्धु 21 Jan 2026 5:01 am

मैक्रों की न सुनकर बुरी तरह बौखलाए ट्रंप, फ्रांसीसी वाइन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी

पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने मैक्रों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कोई उन्हें नहीं चाहता, क्योंकि वह बहुत जल्द पद से हटने वाले हैं। मैं उनकी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाऊंगा और तब वह बोर्ड में शामिल हो जाएंगे। हालांकि, उन्हें शामिल होने की जरूरत नहीं है।”

देशबन्धु 21 Jan 2026 2:33 am

ग्रीनलैंड ही नहीं, ये 2 और देश भी निशाने पर ! ट्रंप ने दिखाया अमेरिका का नया नक्शा, यूरोप में मची हलचल

ट्रुथ सोशल पर साझा की गई एक एआइ तस्वीर में अमेरिकी मानचित्र को बदले हुए रूप में दिखाया गया है, जिसमें ग्रीनलैंड के साथ-साथ वेनेजुएला और कनाडा को भी अमेरिका के हिस्से के तौर पर दर्शाया गया है।

देशबन्धु 21 Jan 2026 2:12 am

DNA: एक साल में डॉनल्ड ने कैसे उथल-पुथल मचाई? एक साल में ट्रंप मालामाल, दुनिया कंगाल!

Donald Trump News:अपने निजी फायदे के लिए ट्रंप ने हर तरीके का इस्तेमाल किया. जो ट्रंप पहले क्रिप्टो को घोटाला बताते थे, उन्होंने चुनाव जीतने के बाद क्रिप्टो से जुड़े कई वेंचर शुरू कर दिए. वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल, ट्रंप कॉइन से उन्होंने काफ़ी कमाई की.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 12:12 am

संभावित मंदी की भरपाई कैसे करता है अमेरिका? क्या बताता है 132 साल पुराना कामयाब फॉर्मूला

US News:अमेरिका की वॉर टाइमिंग बता रही है साल 1893 से लेकर 2026 तक अमेरिका इसी एक सूत्रीय कामयाब फॉर्मूले से काम कर रहा है. जानकारों का मानना है कि ये ऐसा रामबाण उपाय है जिसकी वजह से डॉलर की सेहत आज 100 सालों बाद भी एकदम दुरुस्त बनी हुई है. दुनिया का करीब आधा बिजनेस आज भी यूएस डॉलर में होता है.

ज़ी न्यूज़ 21 Jan 2026 12:11 am

हादसा या साजिश... नदी में मिला बांग्लादेश में हिंदू छात्र का शव; 9 दिन पहले घर से हुआ था लापता

बांग्लादेश में एक हिंदू छात्र का शव नदी में मिला है. इसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई. जिस छात्र का शव मिला है, वह एक सरकारी कॉलेज में मैनेजमेंट डिपार्टमेंट में पढ़ाई करता था.

ज़ी न्यूज़ 20 Jan 2026 11:50 pm

2568 उम्मीदवारों में महज 109 महिलाएं, 'इस्लामिक' बांग्लादेश का काला सच उजागर, अधिकतर पार्टियों ने नहीं दिए टिकट

Bangladesh Election 2026 News in Hindi: बांग्लादेश में अगले महीने होने जा रहे संसदीय चुनाव में 2568 उम्मीदवारों ने नामांकन भरा है. हैरानी की बात है कि उनमें से महिलाओं की संख्या महज 109 है. महिला उम्मीदवारों की यह संख्या 'इस्लामिक' बांग्लादेश का काला सच उजागर करती है.

ज़ी न्यूज़ 20 Jan 2026 11:17 pm