मचाडो ने ट्रंप को पीस प्राइज दे तो दिया, लेकिन नोबेल कमेटी ने बता दी विनर की 'हद', याद दिलाई 2001 की घटना

Maria Corina Machado: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो अपना शांति का नोबेल भेंट किया था. उनकी भेंट के बाद अब नोबेल कमेटी का जवाब आया है. जानिए कमेटी ने क्या कहा है.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 9:21 am

मियामी में फिर आमने-सामने होंगे यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल

यूक्रेन और अमेरिका की टीमें शनिवार को मियामी में एक बार फिर बातचीत करने जा रही हैं

देशबन्धु 17 Jan 2026 8:19 am

ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका:नेतन्याहू ने किस मजबूरी में ट्रम्प को रोका; क्या बरकरार रहेगी खामेनेई की इस्लामिक सत्ता

15 जनवरी को लगने लगा कि ट्रम्प अब कुछ ही घंटे में ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं। नेतन्याहू का विमान इजराइली एयर स्पेस से बाहर कहीं 'सेफ जगह' पर चला गया। कतर के अमेरिकी एयरबेस से सैनिक हटाए जाने लगे। पेंटागन के आसपास पिज्जा के ऑर्डर्स बढ़ गए। ऐसा तभी होता है, जब अमेरिका कोई बड़ा एक्शन लेने वाला होता है। फिर अचानक ईरान को लेकर ट्रम्प के तेवर नरम पड़ गए। आखिर ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटे ट्रम्प, नेतन्याहू ने किस मजबूरी में ट्रम्प से हमला टालने को कहा, क्या अब सुप्रीम लीडर खामेनेई की सत्ता बनी रहेगी, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में... सवाल-1: ईरान पर हमले का आदेश देने से पीछे क्यों हटे ट्रम्प?जवाब: 13 जनवरी को ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ईरान के प्रदर्शनकारियों से कहा, 'प्रोटेस्ट करते रहिए। मदद रास्ते में है।' कई अमेरिकी रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प ईरान पर हमले का मन बना चुके थे, लेकिन अचानक उनके पीछे हटने की 4 बड़ी वजहें हैं... 1. नेतन्याहू ने ट्रम्प को हमला करने से मना किया 2. सऊदी अरब, कतर जैसे देशों ने विरोध किया 3. अमेरिका अभी हमले के लिए पूरी तरह तैयार नहीं 4. ईरान में प्रदर्शन कमजोर हुए, फांसी टाली गईं सवाल-2: सऊदी अरब, इजराइल ने ट्रम्प को हमला करने से क्यों रोका?जवाब: NYT की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत, कतर, सऊदी अरब जैसे देशों ने अमेरिकी ऑफिसर्स से कहा कि ईरान पर हमला हुआ, तो इलाके में एक बड़ा संघर्ष छिड़ जाएगा। ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेसेज को टारगेट कर सकता है। इससे पहले 22 जून 2025 को जब अमेरिका ने अपने B2 बॉम्बर विमानों से ईरान की 3 न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे, तब ईरान ने अगले ही दिन कतर में अमेरिकी एयरबेस 'अल-उदैद' पर एयरस्ट्राइक कर दी थी। जबकि कतर, इजराइल और ईरान के बीच सीजफायर के लिए मध्यस्थता कर रहा था। दरअसल, मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 19 मिलिट्री बेस हैं। इनमें से 8 अरब देशों में अमेरिका ने स्थायी अड्डे बनाए हैं। इनमें बहरीन, इजिप्ट, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे देश हैं। ये सभी देश अमेरिका के आर्थिक और डिफेंस मामलों में सहयोगी हैं। तेल व्यापार और डिफेंस पार्टनरशिप के बदले अमेरिका इन देशों को सुरक्षा की गारंटी देता है। वहीं ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को समर्थन देने के बावजूद इजराइल नहीं चाहता कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर हमला करे। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटजिक स्टडीज प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर विवेक मिश्र के मुताबिक, इसके पीछे 2 वजहें हैं… सवाल-3: क्या ईरान में सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट रुकने वाले हैं?जवाब: ईरान में प्रोटेस्ट धीमा पड़ता हुआ दिख रहा है, हालांकि इसके पूरी तरह खत्म होने के संकेत नहीं हैं। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के सख्त रुख के चलते हालात अस्थायी रूप से शांत होते नजर आ रहे हैं। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों के लोगों ने कहा है कि कुछ दिन पहले सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधे टकराव हो रहे थे, लेकिन अब शांति है। सड़कों पर पहले जैसी भीड़, गोलीबारी और आगजनी नहीं दिख रही। ईरान प्रशासन की तरफ से भी अब प्रदर्शनकारियों के लिए नरम भाषा में संदेश जारी किए जा रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि सरकार देश में स्थिति सुधारने, भ्रष्टाचार और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है। सवाल-4: क्या वाकई प्रदर्शनकारियों की फांसी पर रोक लगा दी गई है?जवाब: ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर तेज ट्रायल और जल्दी से फांसी देने का ऐलान किया था। हालांकि, अब फांसी पर रोक लगा दी गई है। NYT के मुताबिक, दो इजराइली ऑफिसर्स ने कहा कि ईरान में सरकार की सख्त कार्रवाई और इंटरनेट सर्विसेज ठप होने के चलते प्रोटेस्ट कमजोर हुए हैं और प्रदर्शनकारियों की हत्याओं में कमी आई है। यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका की धमकी के बाद ईरान ने प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रोकी हैं। इरफान को फांसी दिए जाने की चर्चा के बाद ट्रम्प ने कहा था , 'अगर वे फांसी देते हैं, तो आप कुछ भयानक देखेंगे।' ब्रिटिश वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि ईरान में करीब 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं। हालांकि अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ने बताया कि अब तक करीब 2,550 हत्याएं हुई हैं। चीन के बाद ईरान दुनिया का दूसरा देश है, जहां सजा के तौर पर सबसे ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है। इसके बाद दूसरे स्थान पर चीन है। 2025 में ईरान ने करीब 1,500 लोगों को फांसी दी थी। सवाल-5: क्या ईरान में खामेनेई की इस्लामिक सत्ता बनी रहेगी?जवाब: ईरान में जब विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, उस समय ट्रम्प ने वेनेजुएला से राष्ट्रपति मादुरो को उठवा लिया था। इसके बाद जब ट्रम्प ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को अपना समर्थन दिया, तो कहा जाने लगा कि अमेरिका खामेनेई का तख्तापलट करवा सकता है। विवेक मिश्र कहते हैं कि जब तक ईरान में सेना पर खामेनेई का कंट्रोल है, उन्हें हटाना या उनका तख्तापलट करना मुश्किल है। कमरतोड़ महंगाई के बावजूद ईरान में वेनेजुएला जैसे राजनीतिक हालात नहीं हैं। वहां कोई विपक्ष नहीं है और न ही विरोध प्रदर्शनों का कोई एक लीडर है। ईरान के आखिरी राजशाही शासक रहे मोहम्मद शाह के बेटे रजा पहलवी अमेरिका में रह रहे हैं। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि वह ईरान में सत्ता संभालने के लिए अभी तैयार नहीं हैं। रजा पहलवी ट्रम्प से मिलना भी चाहते थे, लेकिन ट्रम्प नहीं मिले। ईरान को उसके सहयोगी देशों से भी मदद मिल रही है। दरअसल, ईरान में इंटरनेट पर बैन के बाद मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने ईरान में फ्री इंटरनेट देना शुरू कर दिया था। कई शहरों में ईरान ने इस सर्विस को भी बंद कर दिया। विवेक मिश्रा कहते हैं कि स्टारलिंक को ठप करने की तकनीकी क्षमता ईरान में नहीं है। उसे चीन जैसे देश ये तकनीकी मदद दे रहे हैं। सवाल-6: क्या अमेरिका वाकई ईरान पर हमला करने वाला था?जवाब: 14-15 जनवरी के घटनाक्रम से ईरान पर अमेरिका के बड़े हमले के कयास लगाए जा रहे थे... सवाल-7: क्या ट्रम्प आगे ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं?जवाब: हां, आने वाले कुछ दिनों में ईरान पर अमेरिकी हमले की संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता। इसके पीछे 2 बड़े तर्क हैं…1. ट्रम्प के इरादे पर भरोसा नहीं किया जा सकता 2. अमेरिका सैन्य तैयारी का समय ले रहा विवेक मिश्र कहते हैं कि टैक्टिकली अभी अमेरिका के लिए ईरान पर हमले का सबसे बढ़िया मौका है। ईरान इस समय सबसे ज्यादा कमजोर है। इस पूरे तनाव की जड़ ईरान के न्यूक्लियर बम बनाने की कोशिश है। ऐसे सबूत नहीं हैं कि ईरान ने अपना वो प्रोग्राम रोक दिया है। इसलिए अमेरिका अपने मुताबिक सत्ता लाकर ईरानी तेल पर कब्जा और न्यूक्लियर खतरे को जड़ से खत्म करना चाहता है। ----- रिसर्च सहयोग- ऐश्वर्य राज ----- ये खबर भी पढ़िए... आज का एक्सप्लेनर: नेतन्याहू ने इजराइल छोड़ा, पेंटागन में पिज्जा खपत बढ़ी, युद्धपोत मुड़े; 7 संकेत बता रहे ईरान पर जल्द हमला करेगा अमेरिका इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के देश से बाहर जाने की खबरें हैं, अमेरिकी युद्धपोत मिडिल ईस्ट की तरफ मुड़ चुके हैं, ईरान के एयरस्पेस से विमान गायब हैं और पेंटागन में पिज्जा की डिमांड बढ़ गई है। ये सभी बातें इशारा कर रही हैं कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है… शायद आज रात ही। पूरी खबर पढ़ें...

दैनिक भास्कर 17 Jan 2026 7:43 am

महाराष्ट्र में शिवसेना-NCP का वोट अब BJP का:ठाकरे मुंबई तक सिमटे, शिंदे के पास ठाणे, सिर्फ BJP ‘ऑल स्टेट’ पार्टी

मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे, पिंपरी चिंचवाड और नासिक, महाराष्ट्र के ज्यादातर बड़े नगर निगम अब BJP के हैं। नगर निगम चुनाव में BJP एकतरफा जीती, लेकिन रिजल्ट के और भी मायने हैं। मराठी मानुस की राजनीति करने वाले उद्धव और राज ठाकरे मुंबई तक सिमट गए। एकनाथ शिंदे सिर्फ ठाणे जीत पाए। BJP का साथ छोड़ चाचा शरद पवार के साथ चुनाव लड़े अजित पवार सबसे बड़े लूजर बन गए। कांग्रेस लातूर और चंद्रपुर के अलावा हर जगह हार गई। अब सिर्फ BJP पूरे महाराष्ट्र की पार्टी है। रिजल्ट बताता है कि शिवसेना और NCP में टूट के बाद बंटे वोट अब BJP की तरफ शिफ्ट हो चुके हैं। ऐसा कैसे हुआ, नगर निगम चुनाव के रिजल्ट के मायने क्या हैं, ये समझने के लिए हमने BJP नेताओं के अलावा महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले एक्सपर्ट्स से बात की। पहला सवाल: BJP को इतनी बड़ी जीत कैसे मिली?इसका जवाब महाराष्ट्र BJP के एक सीनियर लीडर देते हैं। वे कहते हैं, ‘ये जीत भले आज मिली है, लेकिन इसकी तैयारी 6 साल पहले शुरू हो गई थी। 24 अक्टूबर 2019 को महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। BJP 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिलीं।’ ‘BJP देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने वाली थी, तभी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अड़ गए। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के लिए गठबंधन तोड़ दिया। पहली बार कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और 28 नवंबर को मुख्यमंत्री बन गए। तभी तय हो गया था कि शिवसेना को तोड़ना है। महाराष्ट्र में BJP को अपने दम पर खड़ी पार्टी बनाना है। आज जो नतीजे आए हैं, वो इसी प्लान का हिस्सा था।’ इस पर हमने BJP में हमारे सोर्स से बात की। वे बताते हैं कि हमारा पहला टारगेट था- एकनाथ शिंदे के जरिए शिवसेना को तोड़कर कमजोर करना। इसके बाद शिंदे को भी मजबूत न होने देना। दूसरा टारगेट था- अजित पवार के जरिए शरद पवार की NCP को तोड़ना, फिर टूटी हुई पार्टी को आमने-सामने की लड़ाई में हरा देना। 6 साल तक प्लान पर काम चलता रहा और BJP ने पहले विधानसभा और अब नगर निगम चुनाव में अपनी आखिरी चाल चल दी। महाराष्ट्र की दो बड़ी पार्टियां शिवसेना और NCP एक दायरे में सिमट गईं। महाराष्ट्र के 29 नगर निगम में से 23 BJP ने जीत लिए। ये पहली बार है जब महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय के चुनाव में पार्टी को इतनी बड़ी जीत मिली है। बाल ठाकरे की शिवसेना के गढ़ मुंबई-ठाणे, शरद पवार वाली NCP के गढ़ पश्चिम महाराष्ट्र के पुणे, सोलापुर, कोल्हापुर और कांग्रेस के दबदबे वाला विदर्भ, BJP ने तीनों पार्टियों को चुनाव में चित कर दिया। अब पार्टी इस स्थिति में है कि उसे सहयोगियों की जरूरत न पड़े। दूसरा सवाल: नगर निगम चुनाव के रिजल्ट के मायने क्या हैं? इसका जवाब एक्सपर्ट्स ने दिया। इसे 8 पॉइंट्स में समझते हैं… 1. BJP महाराष्ट्र में अपने दम पर खड़ी पार्टी बनीअप्रैल-मई 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में BJP को बड़ा झटका लगा। पार्टी सबसे ज्यादा 26.4% वोट लेकर भी सिर्फ 9 सीटें जीत पाई। कांग्रेस 13 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। विधानसभा चुनाव में BJP ने वापसी की और 288 में से 132 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। इस बार देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने। अब ऐसी ही जीत नगर निगम चुनावों में मिली है। सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘BJP ने अब एक तरह से पूरा महाराष्ट्र जीत लिया है। लोकसभा, विधानसभा और अब स्थानीय निकाय के चुनाव, तीनों जगह BJP के नेता सत्ता में हैं। हालांकि ये BJP के सहयोगियों के लिए खतरे की घंटी है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ठाणे तक सिमट गई है। अजित पवार की पार्टी NCP पूरे राज्य में एक भी जगह मेयर बना पाने की स्थिति में नहीं है।’ वहीं, BJP पॉलिटिकल एक्सपर्ट राजेंद्र साठे कहते हैं, ‘नगर निगम के चुनाव शहरी इलाकों में होते हैं। BJP को पहले से शहरों की पार्टी माना जाता है। शहरों में उसका सपोर्ट बेस रहा है। चुनाव से एक दिन पहले महिलाओं के खाते में लाडकी बहना स्कीम के 1500 रुपए भेजे गए। ये भी चुनाव में बड़ा फैक्टर रहा है।’ 2. एकनाथ शिंदे की शिवसेना सिर्फ ठाणे में सिमटीडिप्टी CM एकनाथ शिंदे शिवसेना में टूट से पहले ठाणे के बड़े लीडर माने जाते थे। शिवसेना तोड़कर शिंदे BJP के साथ आ गए और मुख्यमंत्री बने। उद्धव ठाकरे से पार्टी छीन ली। नगर निगम चुनाव ने साबित कर दिया है कि वे अब भी सिर्फ ठाणे के नेता हैं। सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘एकनाथ शिंदे ठाणे तो जीते, लेकिन आसपास के वसई-विरार, मीरा-भायंदर, नवी मुंबई, कल्याण डोंबिवली में हार गए। उन्हें ध्यान रखना होगा कि उन्होंने जितनी तोड़फोड़ की, अब सब खत्म हो चुकी है। सबकी अपनी जगह तय हो गई है।’ 3. उद्धव ठाकरे मुंबई हारे, लेकिन शिंदे को हरायाउद्धव ठाकरे के सामने अपना गढ़ मुंबई बचाने की चुनौती थी, लेकिन वे इसे बचा नहीं पाए। मुंबई में BJP-शिवसेना (शिंदे गुट) का गठबंधन जीत गया। 25 साल में पहली बार मुंबई में शिवसेना का मेयर नहीं होगा। उद्धव BJP से हार गए, लेकिन शिंदे को पटखनी दे दी। शिंदे साउथ मुंबई के कोर शिवसेना वोटर में सेंध नहीं लगा पाए। उद्धव ठाकरे हिंदुत्व के बजाय चुनाव में मराठी और मुंबई का मुद्दा लेकर आए। MNS नेता और भाई राज ठाकरे से गठबंधन कर मराठी और गैर मराठी के मुद्दे को हवा दी। उन्हें वोट तो मिले, लेकिन इतने नहीं कि मेयर चुन सकें। रात 11 बजे तक उद्धव की पार्टी 66 सीटों पर जीत चुकी थी, या आगे चल रही थी। संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘शिवसेना (उद्धव गुट) की मुंबई के अलावा भी हर जगह हार हुई है। साफ हो गया है कि वह सिर्फ मुंबई की पार्टी रह गई है। उद्धव ठाकरे 25 साल से चली आ रही मुंबई में सत्ता गंवा बैठे। हालांकि मुंबई में 60 से ज्यादा सीटें जीतकर उन्होंने अपनी पार्टी को खत्म होने से बचा लिया। एकनाथ शिंदे को मुंबई में करीब 26 सीटें मिली हैं। मुंबई में उद्धव ठाकरे की शिवसेना दूसरे नंबर की पार्टी रहेगी, शिंदे तीसरे नंबर पर आ गए हैं।‘ 4. पवार अपना गढ़ तक नहीं बचा पाएBJP सोर्स बताते हैं कि शिवसेना टूटने के बाद अजित पवार के जरिए NCP को तोड़ा गया। ये भी ध्यान रखा गया कि अजित पवार को कंट्रोल में रखा जाए। अजित पवार कोऑपरेटिव के बड़े नेता रहे हैं। उनकी राजनीति स्थानीय निकाय के चुनाव और सहकारी समितियों से जुड़ी रही है। निकाय चुनावों में उनकी पार्टी का हारना बड़ी मात है। संदीप सोनवलकर कहते हैं कि चुनाव के सबसे बड़े लूजर अजित पवार ही हैं। इसकी तीन सबसे बड़ी वजहें हैं- 1. उनका कोई भी मेयर नहीं बन रहा।2. अजित पवार ने ऐसे बयान दिए कि BJP के नेता नाराज हो गए।3. उन्होंने चाचा शरद पवार से हाथ मिला लिया और BJP को ये पसंद नहीं आया। वहीं, राजेंद्र साठे कहते हैं, ‘शरद पवार को पसंद करने वाले बहुत लोग हैं, लेकिन उनके सारे अच्छे साथी अजित पवार के साथ चले गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में शरद पवार को झटका लगा था। उसके बाद से वे राजनीति में एक्टिव नहीं रहे। उन्होंने इस चुनाव में भी ज्यादा मेहनत नहीं की। वे अपनी राजनीति कर चुके हैं। उनकी तबीयत साथ नहीं देती।' 5. ओवैसी ने दिखाया- वे मुसलमानों के नेताअसदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने निकाय चुनावों में 95 सीटें जीती हैं। AIMIM को संभाजीनगर और मालेगांव में बड़ी कामयाबी मिली। ये सीटें अब तक कांग्रेस को मिलती थीं। इससे साबित हो गया कि मुस्लिम वोट AIMIM की तरफ शिफ्ट हो रहा है। मुस्लिम आबादी वाले संभाजीनगर में पार्टी को 24 सीटें मिली हैं। मुस्लिम वोटर्स के ओवैसी के पाले में जाने का नुकसान कांग्रेस को हुआ है। इसके अलावा नासिक जिले के मालेगांव नगर निगम में AIMIM 21 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही। यहां इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र (ISLAM) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उसने 84 में से 35 सीटें जीती हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) को 18 सीटें मिलीं। समाजवादी पार्टी को 5 और कांग्रेस को 3 सीटें मिलीं। BJP सिर्फ दो सीटें जीत पाई है। 6. लातूर-चंद्रपुर के अलावा कांग्रेस पूरे महाराष्ट्र में लगभग खत्ममहाराष्ट्र में कांग्रेस विदर्भ रीजन में BJP को चुनौती देती रही है, लेकिन यहां चंद्रपुर को छोड़कर बाकी सभी जगह कांग्रेस बुरी तरह हारी। कांग्रेस को भिवंडी-निजामपुर, कोल्हापुर, अमरावती और लातूर में बढ़त मिली। लातूर में कांग्रेस को 70 में से 43 सीटें मिली हैं। विदर्भ के अलावा बाकी रीजन में कांग्रेस ने बहुजन वंचित अघाड़ी, NCP और शिवसेना के साथ गठबंधन किया था। लातूर पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का गढ़ हुआ करता था। मुंबई में कांग्रेस को 24 सीटें मिली हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट राजेंद्र साठे कहते हैं- मुंबई में कांग्रेस और शिवसेना साथ लड़ते तो BJP को कड़ी टक्कर दे सकते थे। आज भी दलित वोट कांग्रेस को मिलता है। इससे शिवसेना और कांग्रेस दोनों को फायदा हो सकता था। 7. राज-उद्धव ठाकरे साथ आए, लेकिन गठबंधन बेअसर20 साल बाद राज और उद्धव ठाकरे के साथ आने से सुर्खियां तो खूब बनीं, मराठी मानुष का मुद्दा भी बड़ा हुआ, लेकिन वोट नहीं मिले। शिवाजी पार्क मैदान में राज ठाकरे की सभा में भीड़ उमड़ी, लेकिन नासिक में वे अपनी सत्ता गंवा बैठे। मुंबई में भी कुछ खास नहीं कर पाए। राजेंद्र साठे इस पर कहते हैं, ‘राज ठाकरे अच्छे भाषणों से भीड़ जुटा लेते हैं, लेकिन वोट नहीं ला पाते। हालांकि राज ठाकरे की पार्टी अगर उद्धव की शिवसेना के साथ नहीं लड़ती, तो इतनी सीटें भी नहीं आतीं। ठाकरे बंधु मुंबई, ठाणे, पुणे और नासिक के अलावा कहीं चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं गए।’ 8. देवेंद्र फडणवीस BJP की विनिंग मशीननिकाय चुनाव में महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने खुद कमान संभाली थी। सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘देवेंद्र फडणवीस ने साबित कर दिया है कि वे हर तरह का चुनाव जिता सकते हैं। अब BJP देवेंद्र फडणवीस को हटाने का रिस्क नहीं ले सकती। BJP को संगठन का भी फायदा मिला। पार्टी ने सिर्फ 14 जगहों पर गठबंधन किया और 15 जगह अकेले चुनाव लड़ा। नागपुर में गुटबाजी नहीं दिखी। यही वजह है कि पार्टी इतनी बड़ी जीत हासिल कर पाई।’

दैनिक भास्कर 17 Jan 2026 5:05 am

ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट, पैसे खत्म, हॉस्टल में कैद:फैमिली बोली- बच्चे चावल नहीं खरीद पा रहे, सरकार कह रही खुद टिकट खरीदो

‘ईरान में हम सब अच्छे हैं। शाम को प्रदर्शन होते हैं, लेकिन हम हॉस्टल से नहीं निकलते। आप लोग ज्यादा टेंशन मत लेना। यहां महंगाई की वजह से प्रदर्शन हो रहे हैं। 6 बजे के बाद कर्फ्यू लग जाता है। अभी हमें ईरान छोड़कर भारत लौटने को नहीं कहा गया है। ये भी नहीं पता है कि हम लौटेंगे ही, इसलिए इंतजार मत करना।‘ कश्मीर के बडगाम की रहने वाली अनीका जान ईरान में MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने अपनी खैरियत बताने के लिए एक वीडियो फैमिली को भेजा है। ईरान में 28 दिसंबर से महंगाई को लेकर सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका के दखल के बाद प्रदर्शन हिंसक हो गए। अब तक 2,677 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 19,097 लोग अरेस्ट किए गए हैं। ईरान में प्रदर्शन और हिंसा के बीच अनीका की तरह भारत के करीब 3 हजार मेडिकल स्टूडेंट्स फंसे हैं। परिवारों का आरोप है कि तेहरान में इंडियन एंबेसी मदद नहीं कर रही है। श्रीनगर में रहने वाले अब्दुल हमीद कहते हैं कि बैंक बंद हैं और बच्चों के पास पैसे खत्म हो गए हैं। रोजमर्रा के सामान खरीदना मुश्किल है। सरकार ने कहा है कि भारतीय नागरिक किसी भी तरह ईरान से निकल जाएं। बच्चे फ्लाइट के टिकट कहां से खरीदें। सरकार को उन्हें वापस लाना चाहिए। हमने कश्मीर में कुछ परिवारों से बात कर ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स का हाल जाना। स्टूडेंट्स के परिवारों से बात…हॉस्टल में कैद स्टूडेंट्स, खाने-पीने का सामान खत्म हो रहा कश्मीर के अनंतनाग में रहने वाले हिलाल अहमद भट की बेटी सहर तेहरान यूनिवर्सिटी से MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। हिलाल बताते हैं, 'वहां हालात बहुत खराब हैं। बेटी रोज परेशान हो रही है। हमारे रिश्तेदार और यार-दोस्त हमें दिन में 10-10 बार फोन करके उसकी खैरियत पूछ रहे हैं। वो जानना चाहते हैं कि सहर कब और कैसे वापस आ रही है।' क्या एंबेसी से बच्चों को कोई मदद मिल रही है? इस पर हिलाल बताते हैं, 'अफसर बेटी का नाम लिखकर ले गए थे और उसका पासपोर्ट भी लिया था। 15 जनवरी की शाम सहर का फोन आया, तो उसने बताया कि उसे पासपोर्ट लौटा दिया है। आसपास के लोग बार-बार कह रहे हैं कि यहां हालात बिगड़ रहे हैं और आप लोग निकल जाइए। बेटी के कॉलेज वाले भी ईरान छोड़ने की सलाह दे रहे हैं।' बेटी ने वहां के हालात के बारे में क्या बताया? हिलाल कहते हैं, 'महंगाई आसमान छू रही है। बच्चे हॉस्टल से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उन्हें खाने-पीने की बहुत दिक्कत हो रही है। 250 ग्राम की तेल की बोतल 300 से 400 रुपए में मिल रही है। एक किलो चावल की कीमत हजार रुपए पहुंच गई है। उनके लिए रोजमर्रा का सामान खरीदना मुश्किल हो गया है।' क्या महंगाई की वजह से ही हालात बिगड़े हैं? इस पर वे कहते हैं, 'नहीं, वहां पहले भी महंगाई थी, लेकिन विरोध बढ़ने के बाद से दिक्कत बढ़ गई है। अब खाने-पीने के सामान की कमी हो गई है। बच्चों ने जो सामान पहले से स्टोर करके रखा था, अब वो भी खत्म हो रहा है। हमारे बच्चे बहुत मुश्किलों में जी रहे हैं।' वहां लोगों के जख्मी होने की बात सामने आ रही है? इस पर हिलाल बताते हैं, 'वहां रहने वाले लोग तो ये भी बता रहे हैं कि लाखों लोग जख्मी हैं, लेकिन हम ज्यादा नहीं जानते हैं। बेटी ने इतना जरूर बताया था कि प्रदर्शन के दौरान कश्मीर की एक लड़की जख्मी हुई है। वो कौन है और किस शहर की रहने वाली है, ये नहीं जानते।' हिलाल बेटी की वतन वापसी के लिए सरकार से गुजारिश करते हुए कहते हैं, 'किसी भी तरह हमारी बेटी को वहां से निकाल लाएं। सरकार जो चाहे कर सकती है। सरकार चाहे तो रोज 10 फ्लाइटें चलाकर ईरान में फंसे लोगों को निकाल सकती है। उनके लिए ये कोई काम बड़ा नहीं है। फिर कुछ करके जल्द हमारे बच्चों को भी वहां से निकाल लाइए।' एंबेसी एयरलिफ्ट नहीं कर रही, बच्चे टिकट कैसे कराएंइसके बाद हमने श्रीनगर के रहने वाले सुहेल अहमद काजी से बात की। उनके दोनों बच्चे तेहरान यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। वे बताते हैं, 'इंटरनेट बंद होने की वजह से बेटे और बेटी दोनों से ही पिछले 7-8 दिन से कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा था। 15 जनवरी को ISD कॉल पर दोनों से बात हो सकी। मुश्किल से एक से दो मिनट की बात करने के बाद कॉल कट गया।' वे कहते हैं, 'सबकी तरह हम भी अपने बच्चों की सलामती चाहते हैं। सरकार से यही गुजारिश है कि अगर वहां बच्चों को किसी तरह का खतरा है और उन्हें निकालने की जरूरत है तो निकाला जाए।' श्रीनगर की ही रहने वाली रेहाना अख्तर की बेटी एलीजा भी तेहरान यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। वे बताती हैं, 'अब तक तो बच्चे गाइडलाइन फॉलो कर रहे थे। घर वापसी की उम्मीद में जैसे-तैसे हॉस्टल में रहकर ही दिन काट रहे थे। 16 जनवरी को एंबेसी ने अचानक बच्चों से कह दिया कि अपने खर्च पर ईरान से निकलो।' 'बच्चों ने रिक्वेस्ट भी की थी कि उनके पास पैसे नहीं हैं, ऐसे में टिकट कैसे कराएं। इंटरनेट बंद है, ऐसे में फैमिली भी टिकट नहीं करा सकती है। आप हमें एयरलिफ्ट करने में मदद करिए, लेकिन एंबेसी ने साफ मना कर दिया। अफसरों ने कहा कि हमने एक बार आपको एयरलिफ्ट किया, अब नहीं कर सकते हैं।' 'एंबेसी बच्चों पर ही दबाव बना रही है कि वे जल्द से जल्द यहां से निकलने की कोशिश करें। इस वक्त फ्लाइट बहुत महंगी हो गई है। बच्चों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे टिकट कराकर घर लौटे सकें।' बच्चों के पास टिकट के पैसे नहीं, मां-बाप लाचार, सरकार मदद करेश्रीनगर के रहने वाले सुलेमान अहमद का बेटा भी ईरान में पढ़ रहा है। वे जम्मू-कश्मीर सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय एंबेसी से अपील करते हुए कहते हैं, 'अधिकारियों को स्टूडेंट्स की मुश्किलों को गंभीरता से लेना चाहिए ताकि बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न हो और वे सुरक्षित रहें।' 'हम उनके पेरेंट्स हैं, लेकिन इस वक्त उनके लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं क्योंकि हम लाचार हैं। हमारे पास न तो इतने पैसे हैं और न ही वहां जाने का कोई साधन है। अभी बच्चों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे टिकट वगैरह करा सकें। सरकार ने ईरान-इजराइल जंग के दौरान भी स्टूडेंट्स को एयरलिफ्ट कराया था। इस बार भी उसी तरह कराना चाहिए। सरकार तय करे कि हमारे बच्चे घर तक सुरक्षित पहुंचें।' श्रीनगर के ही रहने वाले अब्दुल हमीद कहते हैं, 'ईरान की स्थिति बहुत खराब है। आज तक हमारी राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर एक भी बयान जारी नहीं किया कि हमें थोड़ा सुकून मिल सके। हमारी उनसे अपील है कि वे विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत करके हमारे बच्चों को ईरान से निकालने की कोशिश करें।' 'जबसे हमने सुना है कि इंडियन एंबेसी ने स्टूडेंट्स से कहा है कि वो अपने टिकट का इंतजाम खुद करें तो हमारा तनाव बढ़ गया है क्योंकि इस वक्त ये मुमकिन नहीं है। वहां बच्चे बहुत लाचार हैं। बाजार बंद हैं, बैंक बंद हैं, उनके पास पैसे नहीं है। वो बहुत परेशान और निराश हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि सरकार ठोस और वाजिब कदम उठाए और एंबेसी की मदद से बच्चों को घर वापस लाए।' स्टूडेंट्स को उनके हाल पर छोड़ा, सरकार के एक्शन से मायूसजम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहामी ने बताया कि ईरान में करीब 3 हजार भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं। ये अलग-अलग शहरों जैसे मशहद, तेहरान और शिराज में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से करीब 2 हजार स्टूडेंट्स कश्मीर घाटी के हैं। नासिर कहते हैं, ‘भारत सरकार ने एक सलाह जारी की है, जिसमें भारतीय नागरिकों, स्टूडेंट्स और युवा पेशेवरों से ईरान छोड़ने की गुजारिश की गई है। हालांकि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और मौजूदा हालात के बीच स्टूडेंट्स परेशान हैं कि वे कहां जाएं। उनके लिए अकेले निकलना सेफ नहीं है। स्टूडेंट्स के साथ ही उनके पेरेंट्स भी परेशान हैं कि उन्हें ईरान से कैसे निकाला जाए।‘ ‘कई पेरेंट्स ने जम्मू-कश्मीर सरकार से कॉन्टैक्ट कर गुजारिश की है कि इस मामले को भारत सरकार के साथ उठाए। हमने भी भारत सरकार से इस मामले में दखल देने और स्टूडेंट्स की वापसी का इंतजाम करने के लिए लेटर लिखा है। जैसे पिछले कई मौकों पर अभियान चलाकर भारतीयों को निकाला गया, वैसे ही इस बार भी किया जाए।‘ ‘हालांकि भारत सरकार की तरफ से अब तक ऐसा कुछ नहीं बताया गया है कि स्टूडेंट्स को निकालने के लिए कोई इंतजाम किया गया है या नहीं। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। स्टूडेंट्स से कहा जा रहा है कि वे खुद फ्लाइट बुक कर घर लौटें। ऐसे में उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए हमारी भारत सरकार से अपील है कि वो स्टूडेंट्स की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए उनके लौटने का इंतजाम करे।‘ भारतीयों को एयरलिफ्ट करने वाला ‘ऑपरेशन स्वदेश’ रुकाईरान से केंद्र सरकार ने भारतीयों को एयरलिफ्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन स्वदेश’ शुरू किया है। पहली स्पेशल फ्लाइट 16 जनवरी को तेहरान से नई दिल्ली पहुंचने वाली थी। हालांकि इसे स्थगित कर दिया गया है। तेहरान में इंडियन एंबेसी के अधिकारियों ने बताया कि अभियान को फिलहाल स्थगित किया गया है। दूतावास के अधिकारी स्टूडेंट्स के सीधे संपर्क में हैं और अगर उन्हें निकालने के लिए जरूरत पड़ी तो उन्हें बताया जाएगा। ईरान से कुछ भारतीय स्टूडेंट्स खुद फ्लाइट बुक करके भारत लौट रहे हैं। इनमें से ज्यादातर कश्मीर के रहने वाले हैं। स्टूडेंट्स का एक ग्रुप शिराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से शारजाह होते हुए नई दिल्ली पहुंच रहा है। भारतीय नागरिकों को ईरान न जाने की सलाह15 जनवरी को विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत हुई। उन्होंने ईरान के हालातों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारतीय नागरिकों को ईरान न जाने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं। भारत सरकार की ये एडवाइजरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस धमकी के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि अगर ईरान देशभर में हो रहे प्रदर्शनों का हिंसा से जवाब देना जारी रखता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है।....................ये खबर भी पढ़ें... क्या पाकिस्तान से आए लोगों ने ईरान में भड़काई हिंसा ईरान का हाल बता रहे अहमद अब्बास राजधानी तेहरान में रहते हैं। वे दावा करते हैं कि बढ़ती महंगाई से लोगों में बेचैनी थी। पेट्रोल की कीमत 15 से बढ़कर 25 रुपए हो गई। 10 रुपए की रोटी 15 रुपए में मिलने लगी। इसके विरोध में लोग पहली बार 28 दिसंबर 2025 को तेहरान की सड़कों पर उतरे। अहमद का दावा है कि अमेरिका और इजराइल के दखल से प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। देश में बीते 17 दिन में 2500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 17 Jan 2026 5:05 am

कहीं ICE का खौफ तो कहीं सीधे सेना उतार रहे... क्या खामेनेई की राह पर चल रहे ट्रंप?

US News:ईरान में छिड़ी बगावत को हवा देने वाले ट्रंप खुद घिर गए हैं.अमेरिका में ईरान जैसी बगावत की चिंगारी दिख रही है. जिसे बुझाने के लिए ट्रंप अपने ही देश में लोगों के खिलाफ सेना उतारने की धमकी दे रहे हैं. इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट एजेंट्स को लेकर लोगों का आक्रोश इतना ज्यादा हो गया कि ट्रंप भड़क गए.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 1:11 am

DNA: नोबेल देकर सत्ता की आस? मचाडो की ‘मेडल डिप्लोमेसी’ क्या दिला पाएगी बड़ी कुर्सी, अवार्ड पाकर ट्रंप का खिला चेहरा

Maria Corina Machado-Donald Trump News: वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल पीस प्राइज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट कर दिया है. सवाल है कि क्या ये ‘मेडल डिप्लोमेसी’ मचाडो को बर्सी कुर्सी दिला पाएगी.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 12:01 am

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के खिलाफ केप टाउन में जोरदार प्रदर्शन

वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका की विधायी राजधानी केप टाउन में प्रदर्शन किया गया

देशबन्धु 16 Jan 2026 11:40 pm

‘काफिर को वोट देना हराम’, बांग्लादेश चुनाव से पहले मौलवियों के भड़काऊ फतवे, हिंदू होना बना सबसे बड़ा अपराध

Violence against Hindus in Bangladesh News: बांग्लादेश में कुछ महीने बाद होने जा रहे आम चुनावों से पहले हिंदुओं के खिलाफ जमकर जहर उगला जा रहा है. कई ऐसे वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें मौलाना कह रहे हैं कि ‘काफिर को वोट देना हराम’ है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 11:36 pm

DNA: अचानक ट्रंप ने क्यों टाल दिया ईरान पर हमला? सब काम छोड़ अमेरिका पहुंचे मोसाद चीफ

DNA: डोनाल्ड ट्रंप ने ना सिर्फ अयातुल्ला खामेनेई जैसा रवैया अपना लिया है बल्कि उन्होंने खामेनेई के देश ईरान पर हमला करने का प्लान भी फिलहाल के लिए टाल दिया है. ट्रंप के इस फैसले से पूरी दुनिया हैरान है. आज हम, खामेनेई और ट्रंप में वॉर कैंसल की इनसाइड स्टोरी बताएंगे. ये डॉनल्ड ट्रंप ही थे जिन्होंने कुछ हफ्तों पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अगवा करा लिया था. आखिर वही ट्रंप हमला करने के फैसले से पीछे क्यों हटे.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 11:11 pm

इरफान सुल्तानी पर खाया रहम तो इस रेसलर को मिली थी मौत, कौन हैं नाविद अफकारी, जिसे प्रदर्शन करने के लिए ईरान ने दी थी फांसी

Iran Protest: ईरान में बढ़ते प्रदर्शन के बीच वहां की सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन ले रही है. बता दें कि साल 2020 में ईरान के फेमस रेसलर नाविद अफकारी को मौत की सजा सुनाई गई थी.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 9:00 pm

WATCH: चॉपर को उठाकर ले जा रहा था हेलीकॉप्टर, सैकड़ों फीट ऊपर आसमान में हादसा; ऐसा वीडियो पहले नहीं देखा होगा

इजरायल के नजदीक वेस्ट बैंक में एक अजीबोगरीब हादसा हुआ. जहां एक हेलीकॉप्टर दूसरे को आसमान में खींचकर ले जा रहा था. जिस हेलिकॉप्टर को खींच कर ले जा रहा था वो अचानक नीचे गिर जाता है. एयर क्रैश की ये दुर्घटना एक रिहायशी इलाके के पास घटी.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 5:15 pm

ब्रिटेन की संसद में गूंजा बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या का मुद्दा, सांसद बॉब ब्लैकमैन ने यूनुस सरकार से की कार्रवाई की मांग

British Parliament:यूके कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई. उन्होंने हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा कि हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं. ब्लैकमैन ने बांग्लादेश के 12 फरवरी चुनावों को लोकतांत्रिक चिंताओं के बीच बताया जिसमें अवामी लीग को चुनाव से बैन किया गया और इस्लामिक कट्टरपंथियों ने संविधान में बदलाव की मांग की है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 1:42 pm

काबुल की मेडिकल शॉप से उठा भरोसे का तूफान! अफगानिस्तान में भारतीय दवाइयों की बढ़ रही मांग?

Indian Medicines Dominate Afghanistan Market: अफगानिस्तान में अब भारतीय दवाइयों की मांग तेजी से बढ़ रही है. काबुल के लोगों का कहना है कि भारत में बनी दवाइयां न सिर्फ सस्ती हैं बल्कि असर में भी पाकिस्तानी दवाइयों से बेहतर हैं. एक अफगान ब्लॉगर के अनुभव के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 12:32 pm

कभी दौलत और शक्ति के केंद्र थे ये शहर, समंदर में दफन हैं चौकाने वाले सबूत; श्री कृष्ण की नगरी भी शामिल

Ancient Cities Submerged Underwater: दुनिया में कई ऐसे बड़े और मशहूर शहर रहे हैं जो कभी आबाद थे. हालांकि प्राकृतिक आपदाओं के चलते हमेशा के लिए समुद्र ने उन्हें निगल लिया. हैरानी की बात यह है कि आज भी इन शहरों के साफ-साफ सबूत पानी के नीचे मौजूद हैं.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 10:30 am

150 साल बाद स्पेन में होने जा रही अनोखी बात, कौन है वो राजकुमारी जिसने 20 साल की उम्र में रच दिया इतिहास

Princess Leonor Spain: स्पेन में 150 साल बाद एक बार फिर महिला शासक बनने वाली हैं. 20 साल की राजकुमारी लियोनोर बहुत जल्द स्पेन की रानी बनेंगी. उन्होंने सिंहासन संभालने से पहले सेना, नौसेना और वायुसेना की पूरी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 10:02 am

गोलीबाज बने हीरो! शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने वालों को यूनुस का बड़ा तोहफा, ‘योद्धा’ बताकर कानून में दी खास छूट

बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने उन प्रदर्शनकारियों को बड़ा तोहफा दिया है जिन्होंने जुलाई 2024 में प्रदर्शन किए और 5 अगस्त को शेख हसीना की सरकार को गिराया. अब सरकार उनके लिए खास अध्यादेश लेकर आई है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 9:42 am

ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप... जानें कैसे सऊदी, कतर, मिस्र और ओमान ने टाला युद्ध का खतरा?

खाड़ी देश के अधिकारी ने बताया कि सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिकी प्रशासन को साफ शब्दों में आगाह किया कि ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैला सकता है।

देशबन्धु 16 Jan 2026 9:42 am

यूक्रेन पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखना जरूरी: क्रेमलिन

क्रेमलिन ने कहा कि यूक्रेन मुद्दे पर अमेरिका के साथ संवाद जारी रखना आवश्यक और महत्वपूर्ण है।

देशबन्धु 16 Jan 2026 9:37 am

212 साल पहले कैसे डेनमार्क के कब्जे में आया था ग्रीनलैंड, नेपोलियन बोनापार्ट की एक हार ने बदल दी थी पूरी कहानी

Greenland:अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाने के बीच ग्रीनलैंड का इतिहास फिर चर्चा में है. बता दें, ग्रीनलैंड आधिकारिक रूप से 14 जनवरी 1814 को कील संधि के तहत डेनमार्क के नियंत्रण में आया. यह संधि नेपोलियन युद्धों के दौरान डेनमार्क-नॉर्वे और नेपोलियन विरोधी गठबंधन के बीच हुई थी.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 9:36 am

कराची मदरसे में मासूम की मौत, आरोपी शिक्षक को मिली जमानत

पाकिस्तान के कराची के मंघोपीर इलाके में एक मदरसे के शिक्षक को छह वर्षीय छात्र के साथ कथित रूप से मारपीट करने के मामले में जमानत मिल गई है। इस घटना में गंभीर रूप से घायल बच्चे ने बाद में दम तोड़ दिया था

देशबन्धु 16 Jan 2026 9:35 am

बांग्लादेश में जनमत संग्रह जागरूकता अभियान की शुरुआत

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की सलाहकार परिषद के सदस्यों ने देशव्यापी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी है

देशबन्धु 16 Jan 2026 9:29 am

'1976 का शाही गिफ्ट, 2026 में भी उड़ रहा है...', ईरान ने क्यों संभाल रखा है 'टॉप गन' फाइटर F-14?

Iran F-14: ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है. दोनों देश के नेता एक दूसरे पर टिप्पणी कर रहे हैं. इसी बीच हम बताने जा रहे हैं उस फाइटर जेट्स के बारे में जो दुनिया से रिटायर हो गया है लेकिन ईरान ने इसे संभाल रखा है. आइए जानते हैं इसके पीछे की क्या वजह है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 7:43 am

कौन हैं महमूद खलील जिनकी रिहाई को अमेरिकी अदालत ने किया रद्द? हमास के लिए ट्रंप से ले चुके हैं पंगा

Donald Trump: अमेरिका की संघीय अपील अदालत ने फिलिस्तीन समर्थक महमूद खलील की रिहाई के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है जिसे ट्रम्प प्रशासन ने बड़ी जीत बताया. इससे खलील की दोबारा गिरफ्तारी और निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, हालांकि आदेश तत्काल लागू नहीं होगा.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 7:29 am

ट्रंप की चेतावनी से कांपा तेहरान! 800 फांसियों पर लगाई रोक, अमेरिकी दबाव के आगे झुका ईरान?

Iran Executions Halted: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने 800 लोगों की फांसी की योजना रोक दी है. व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की है. यह बता ऐसे समय पर सामने आई है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के दौरान हजारों लोगों की मौत की खबरें आ रही हैं.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 7:28 am

युद्धग्रस्त यमन में सत्ता पलटी, पीएम बिन ब्रिक आउट; सऊदी या यूएई- कौन चला रहा रिमोट?

Yemen PM Resigns: यमन से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यमन की सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 6:30 am

ट्रंप को मिल ही गया नोबेल पीस प्राइज? व्हाइट हाउस में मचाडो से मुलाकात के दौरान क्या हुआ?

Venezuela Opposition Leader Meets Trump: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की है. यह उनकी पहली आमने-सामने मुलाकात थी. इस बातचीत के दौरान माचाडो ने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 6:22 am

दो हिस्सों में बंटी बांग्लादेश आर्मी, क्या सिविल वॉर होगी:हिंसा के पीछे पाकिस्तान समर्थक अफसर, स्टूडेंट लीडर बोले- तख्तापलट की साजिश

12 दिसंबर 2025...बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्टूडेंट लीडर शरीफ उस्मान हादी को गोली मार दी गई। वे ढाका से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले थे और उस दिन प्रचार कर रहे थे। 6 दिन चले इलाज के बाद 18 दिसंबर को हादी की मौत हो गई। इसके बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़क गई। हिंदू निशाने पर आ गए। 18 दिसंबर से अब तक 7 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। स्टूडेंट लीडर इस हिंसा के लिए सेना और पुलिस को जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका दावा है कि इसके पीछे आर्मी का एक धड़ा है, जो सत्ता में आना चाहता है। सोर्स के मुताबिक, बांग्लादेशी आर्मी कहने के लिए तो निष्पक्ष है, लेकिन पिछले कुछ महीने से उसके यूनुस सरकार से रिश्ते अच्छे नहीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में पहली बार 12 फरवरी को चुनाव होना है। ये पहला ही मौका है, जब बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनाव नहीं लड़ेगी। इसलिए सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। चुनाव के लिए आर्मी ने अलग से इंटेलिजेंस यूनिट बनाई है। इससे मिले इंटेल के आधार पर चुनाव में सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। सेना और सरकार के बीच कब तल्खी बढ़ी…पिछले करीब डेढ़ साल की अंतरिम सरकार के दौरान ऐसे दो मौके आए, जब बांग्लादेश में सरकार और आर्मी के बीच कलह खुलकर सामने आ गई। 1. चुनाव की तारीख को लेकर सेना की सख्तीनवंबर के आखिर में सेना प्रमुख वकार-उज-जमान ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से दिसंबर में चुनाव कराने के लिए कहा था। उन्हें चेतावनी दी थी कि चुनाव पर कोई भी फैसला लेने से पहले सेना को भी जानकारी देनी होगी। उस वक्त अंतरिम सरकार का रुख चुनाव टालने का दिख रहा था। हालांकि सेना ने फरवरी से ज्यादा देर न करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद सरकार और सेना के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। 3. बांग्लादेश की सीमा पर कॉरिडोर बनाने का फैसलासेना प्रमुख ने अंतरिम सरकार को चेताया था कि बांग्लादेश की सीमा पर कोई भी फैसला लेने से पहले आर्मी से बात करना जरूरी है। दरअसल यूनुस सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा था कि UN के तहत प्रस्तावित रखाइन गलियारे से होकर गुजरने वाले एक कॉरिडोर पर सहमति बनी है। इसके तहत रोहिंग्या शरणार्थियों को मदद दी जाएगी। इस पर आर्मी का कहना था कि इससे सरहदी इलाकों में घुसपैठ बढ़ सकती है। अगर फैसला लेना भी है, तो बिना आर्मी से बात किए नहीं लिया जा सकता। 'यूनुस सरकार को हटाने की कोशिश, टारगेट किलिंग के पीछे सेना'बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर हमने NCP (छात्रों की पार्टी) में इंटरनेशनल सेल के प्रमुख अलाउद्दीन मोहम्मद से बात की। वे दावा करते हैं कि आर्मी, यूनुस सरकार को हटाने की कोशिश कर रही है। अलाउद्दीन कहते हैं, ‘बांग्लादेश में हो रही टारगेटेड पॉलिटिकल किलिंग और हिंसा की कुछ घटनाओं के पीछे आर्मी का एक धड़ा है। एजेंसियां और आर्मी मिलकर ये हिंसा करवा रही हैं ताकि चुनाव न हो सकें।‘ स्टूडेंट लीडर हादी की हत्या को लेकर अलाउद्दीन कहते हैं, ‘पुलिस और आर्मी अपना काम नहीं कर रही है। राजधानी ढाका की सड़कों पर अगर पुलिस कुछ नहीं कर सकी, तो ये चौंकाने वाली बात है। अगर पुलिस हम स्टूडेंट्स को ही बता देती कि ऐसा कुछ हो रहा है, तो हम ये हिंसा रुकवा सकते थे। सब कुछ ऐसे अचानक होना चौंकाने वाला है।‘ बांग्लादेश में डॉ यूनुस की अंतरिम सरकार आर्मी का भरोसा नहीं जीत सकी है। अलाउद्दीन कहते हैं, ‘अंतरिम सरकार को चलाने के लिए पुलिस, ब्यूरोक्रेसी और आर्मी का सपोर्ट चाहिए होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। बांग्लादेश में फिलहाल 27 आर्मी जनरल कैद में हैं क्योंकि वे हसीना सरकार की राज्य प्रायोजित हिंसा का हिस्सा थे। चुनाव का ऐलान भी बिना अवामी लीग के ही कर दिया गया है।‘ ‘आर्मी नहीं चाहती कि नई राजनीतिक सरकार चुनकर आए। आर्मी का एक हिस्सा सरकार के साथ है, लेकिन एक धड़ा सरकार के साथ नहीं है।’ ‘अवाम के बीच आर्मी का भरोसा कमजोर पड़ा’बांग्लादेश के मौजूदा हालात और आर्मी की भूमिका को लेकर पॉलिटिकल एनालिस्ट सलाहउद्दीन शोएब चौधरी कहते हैं, ‘देश में तख्तापलट के बाद आर्मी चीफ वकार-उज-जमान ने कहा था कि सेना पर भरोसा रखिए। पिछले 18 महीनों में पूरे बांग्लादेश में तोड़फोड़ हुई, देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई। फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। बेरोजगारी बढ़ गई है। बांग्लादेश, पाकिस्तान के रास्ते पर चल रहा है। ऐसे में सेना ने भी लोगों के मन में अपना भरोसा खो दिया है।‘ ‘इसीलिए आर्मी तय समय में चुनाव कराकर चुनी हुई सरकार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. यूनुस लंबे वक्त तक सत्ता में रहना चाहते थे, लेकिन आर्मी ने उन पर नकेल कसी है। इसे लेकर आर्मी और सरकार के बीच भी खटास बढ़ी है। आर्मी में हमारे सोर्स बताते हैं कि आर्मी और अंतरिम सरकार के बीच कम्युनिकेशन चैनल भी ठीक से काम नहीं कर रहा है।‘ ‘पाकिस्तानी ISI ने हैंडलर्स के जरिए हिंसा करवाई’बांग्लादेश में हुई हिंसा को लेकर सलाहउद्दीन कहते हैं, ‘यहां हुई हादी की हत्या के बाद पाकिस्तान की ISI ने अपने हैंडलर्स से ये फैलाना शुरू कर दिया कि ये हत्या भारत ने करवाई है।’ ’पिछले साल हुए तख्तापलट के बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश में फिर से एक्टिविटी बढ़ाई है। आर्मी के अंदर जमात का जो धड़ा है, वो पाकिस्तान के इशारे पर काम करता है। पाकिस्तान फिर से बांग्लादेश में कट्टरपंथ को बढ़ावा देना चाहता है और हिंदू मुक्त पूर्वी पाकिस्तान बनाना चाहता है।’ बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों ही हत्या पर आर्मी चीफ चुप क्यों?बांग्लादेश में छात्रों की पार्टी NCP बहुत समय से BNP के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ना चाहती थी। हालांकि अंदरूनी सोर्स के मुताबिक, BNP से उन्हें पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला। इसलिए NCP ने जमात के साथ गठबंधन का फैसला किया, लेकिन जमात के साथ गठबंधन करते तो NCP में कलह मच गई। आर्मी में भी अफसरों का एक धड़ा है जो जमात-ए-इस्लामी का समर्थक रहा है, वो सेना के अंदर जमात के लिए गुटबंदी करता है। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर सेना की चुप्पी पर सलाहउद्दीन कहते हैं, ‘यूनुस सरकार ने आर्मी चीफ और सीनियर जनरल को केस करने की धमकी देकर डरा दिया है। कई आर्मी अफसरों पर पहले से मुकदमे चल रहे हैं। इसलिए आर्मी भी अंतरिम सरकार के साथ रिश्ते अच्छे रखना चाहती है। आर्मी के अंदर करीब 40% लोग कट्टर सोच वाले हैं। ऐसे में आर्मी चीफ के पास फैसला लेने के लिए कोई पावर नहीं है।’ ‘हिंदुओं के घरों और मंदिरों में आग लगाई जा रही है। देश के लोग खौफ के माहौल में जीने को मजबूर हैं। इन सबके दोषी खुद आर्मी चीफ हैं और इन घटनाओं पर चुप्पी साधे हैं, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।‘ बांग्लादेश में हो रही हिंसा पर आर्मी ने क्या कहाबांग्लादेश में हिंसा और उठापटक की खबरों को लेकर हमने बांग्लादेशी आर्मी के ऑफिशियल स्पोक्सपर्सन से बात करने की कोशिश की, लेकिन वे राजी नहीं हुए। फिर हमने आर्मी में अपने सोर्सेज के जरिए अंदर हो रहे कामकाज की जानकारी ली। सोर्स ने बताया कि चुनाव होने तक आर्मी को अलर्ट पर रखा गया है। आर्मी सीधे तौर पर किसी भी तरह के ऑपरेशन का हिस्सा नहीं है, लेकिन वो इंटेल जुटाकर चुनाव की मॉनिटरिंग कर रही है। म्यांमार और भारत के बॉर्डर पर सख्ती बढ़ा दी गई है। चुनाव तक यही व्यवस्था रहने की उम्मीद है। सोर्स बताते हैं कि बांग्लादेश में जिस तरह से अंतरिम सरकार और सेना के बीच तल्खी बढ़ी है। इस स्थिति में चुनाव के बाद पूर्ण बहुमत ना मिलने पर आर्मी का एक धड़ा तख्तापलट कर सैन्य सरकार भी बना सकता है। हालांकि व्यावहारिक तौर पर अभी इसकी उम्मीद कम है क्योंकि सेना ऐसा करके जनता का भरोसा नहीं खोना चाहेगी। ‘आर्मी में एक तबका जो राजनीति में दखल की कोशिश कर रहा’इसके बाद हमने इंटरनेशनल डिफेंस एक्सपर्ट रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी से बाद की। वे बांग्लादेशी सेना के कामकाज के तरीके को करीब से जानते हैं। सर्विस में रहते हुए वे बांग्लादेश की सेना के साथ जॉइंट एक्सरसाइज भी कर चुके हैं। संजय कहते हैं, ‘बांग्लादेश की सेना की ट्रेनिंग 1971 से पहले तक पाकिस्तान के तहत ही होती रही। इसलिए बांग्लादेश की आर्मी भी वैसी सी ट्रेनिंग से निकली है, जो सत्ता में आने की ख्वाहिश रखती है। अब भी आर्मी में एक तबका ऐसा है, जो बांग्लादेश की राजनीति में दखल देने की कोशिश करता है।’ ’बांग्लादेशी आर्मी में ये तबका जमात की सोच का समर्थक माना जाता है। आर्मी में भी एक्सट्रीमिस्ट सोच के लोग हैं, जो मौके-मौके पर कट्टरता को बढ़ावा देने और राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करते रहते हैं। बांग्लादेश के अंदर कुछ भी गलत हो रहा हो तो आर्मी कई बार न्यूट्रल रुख रखती है या पर्दे के पीछे से खेल करती है।’ ’बांग्लादेश की सेना में करीब 20-30% लोग ही कट्टरवादी सोच के हैं। ज्यादातर लोग अब भी बंगाली सोच वाले हैं। इसलिए बांग्लादेश में फौज की सोच और ट्रेनिंग बदल गई है, ये पूरी तरह से मानना सही नहीं होगा।’ ’बांग्लादेश के मौजूदा आर्मी चीफ सितंबर 2026 तक रिटायर हो जाएंगे। उनकी पत्नी शेख हसीना की बहन हैं। ऐसे में मौजूदा आर्मी चीफ के भी शेख हसीना से अच्छे संबंध रहे हैं। फौज ने अभी तक खुद को सीधे राजनीति में दखल देने से दूर रखा है। आर्मी भी फिलहाल चाहती है कि एक बार देश में चुनाव हो जाएं और अवाम क्या चाहती है, वो पता चल जाए।’ ’अगर चुनाव ठीक से नहीं हो पाते हैं तो फिर आर्मी की दखलंदाजी बढ़ सकती है। अभी सीधे तख्तापलट करने से आर्मी बच रही है, क्योंकि उन्हें अपने ही लोगों पर गोली चलानी पड़ सकती है। इससे फौज की बदनामी हो सकती है। फौज मैच्योरिटी के साथ अपनी जिम्मेदारी अदा कर रही है, लेकिन भविष्य में क्या होगा ये नहीं कहा जा सकता।’....................... ये खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ल, पश्चिम बंगाल तक असर 18 दिसंबर 2025, रात करीब 9 बजे का वक्त था। बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में भीड़ ने गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू दास को पकड़ लिया। ईशनिंदा का इल्जाम लगाकर भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद दीपू के शव को फैक्‍ट्री से कुछ दूर ले गए और आग लगा दी। उस दिन से अब तक बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों में 6 हिंदुओं की हत्या हुई है। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 16 Jan 2026 4:54 am

DNA: ईरान पर हमला लेकिन युद्ध से क्यों कतरा रहा अमेरिका? क्या है ट्रंप का खामेनेई पर 'लिमिटेड अटैक' प्लान

America Attack On Iran: ईरान पर हमले को लेकर हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बैठक की. इसमें उन्होंने खामेनेई शासन को मजबूत झटका देने की बात कही है.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 11:36 pm

DNA: पेंटागन में अचानक क्यों बढ़ी पिज्जा की डिमांड? ईरान जंग से क्या है बड़ा कनेक्शन

America To Attack On Iran: ईरान और अमेरिका के बीच जल्द ही भाषण जंग होने वाली है या फिर अमेरिका ईरान पर जल्द ही कोई बड़ा हमला कर सकता है. इसको लेकर कई संकेत देखने को मिले हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 11:32 pm

आखिर क्या चाहता है अमेरिका! ट्रंप-मचाडो की बैठक से पहले US की बड़ी कार्रवाई, वेनेजुएला का एक और टैंकर जब्त

अमेरिका ने एक बार फिर वेनेजुएला से जुड़े तेल टैंकर वाले जहाज को जब्त किया है. अमेरिकी सेना की ओर से इस कार्रवाई को अंजाम दियाय गया है. अमेरिका की ओर से जब्त किया गया यह छठा जहाज है.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 10:39 pm

ईरान के साथ जंग नहीं चाहता अमेरिका? ट्रंप की धमकी के बाद आया बड़ा अपडेट, युद्ध से क्यों पीछे हट रहे सैनिक

US Army Not Ready For War With Iran: ईरान में विरोध प्रदर्शन के बीच ट्रंप ने अमेरिकी सैनिकों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने ऐसे एक्शन प्लान की डिमांड रखी है, जिसमें एक ही स्ट्राइक में ईरान के मामले का समाधान हो सके.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 10:27 pm

पहले मारी गोली फिर मांगी कीमत... क्या है ईरान की 'बुलेट फीस', जिसके बिना परिवारों को नहीं मिल रहे प्रदर्शनकारियों के शव

Iran Protest Bullet Fee: ईरान की राजधानी तेहरान में प्रदर्सन के दौरान मारे गए प्रदर्शनकारियों का शव तब तक उनके परिवारों को नहीं दिया जा रहा जब तक कि वे बुलेट फीस न भर दें.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 8:11 pm

Donald Trump: यूक्रेन-रूस वॉर का होगा The End? जेलेंस्की से मिलने जा रहे ट्रंप, पुतिन को लेकर किया बड़ा दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक मंच पर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे. हालांकि, एक साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध समाप्त कराने में जेलेंस्की कम इंटरेस्ट दिखा रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 4:59 pm

'क्या पुरुष भी हो सकते हैं प्रेग्नेंट?' अमेरिकी सीनेट में डॉक्टर से पूछा गया सवाल, जवाब ने दुनिया को कर दिया दंग

Men Pregnant News in Hindi: क्या पुरुष भी महिला की तरह प्रेग्नेंट हो सकते हैं? अमेरिकी सीनेट में भारतीय मूल की एक डॉक्टर से यह अजब सवाल पूछा गया. लेकिन उनका जवाब और भी कूटनीतिक था. जिससे सभी सीनेटर्स चुप रह गए.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 4:20 pm

ईरान में बढ़ते संकट के बीच भारत की एडवाइजरी, नागरिकों से तुरंत निकलने की अपील; 2000 कश्मीरी छात्र फंसे

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एक विस्तृत एडवाइजरी जारी कर छात्रों, पर्यटकों, कारोबारियों और धार्मिक यात्रा पर गए भारतीयों से उपलब्ध साधनों के जरिए जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलने का आग्रह किया है।

देशबन्धु 15 Jan 2026 4:18 pm

तो गल गई शहबाज की दाल, ट्रंप की फैमिली ने मिलाया पाकिस्तान से हाथ, इस एग्रीमेंट पर किया साइन

US Pakistan Relation: पाकिस्तान पिछले कई महीनों से अमेरिका का चक्कर लगा रहा था. अब खबर है कि पाकिस्तान ने वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल से जुड़ी एक फर्म के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया है. ये कंपनी ट्रंप परिवार की है.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 1:31 pm

गायक जुबिन गर्ग की मौत को लेकर सिंगापुर में अदालत में बड़ा खुलासा, सामने आई यह बात

मामले के मुख्य जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि जुबिन गर्ग उस दिन एक निजी नौका पर करीब 20 लोगों के साथ मौजूद थे। इनमें उनके दोस्त और सहकर्मी शामिल थे। सभी लोग लाजरस द्वीप के पास समुद्र में समय बिता रहे थे।

देशबन्धु 15 Jan 2026 12:29 pm

कनाडा की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी का मास्टरमाइंड भारत में छिपा! प्रीत पनेसर के प्रत्यर्पण की मांग, हवाला और फिल्म इंडस्ट्री तक फैला खेल

Canada Gold Heist Preet Panesar: कनाडा में हुए 20 मिलियन डॉलर के गोल्ड चोरी मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. कनाडा सरकार ने इस केस के मुख्य आरोपी प्रीत पनेसर को भारत से वापस लाने के लिए आधिकारिक तौर पर प्रत्यर्पण की मांग की है. यह चोरी कनाडा की अब तक की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी बताई जा रही है.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 11:39 am

ईरान में नहीं होगी इरफान सुल्तानी को फांसी? सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर ट्रंप बोले-क्या करूंगा वो नहीं बताऊंगा

ईरान में खामेनेई सरकार का तख्तापलट को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन को दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हैं। ईरान सरकार ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सरकार सख्ती बरतने के मूड में दिख रही है। सरकार ने 8 जनवरी को गिरफ्तार किए गए 26 साल के प्रदर्शनकारी को फांसी पर लटकाने का फरमान सुनाया था। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि उन्हें भरोसेमंद जानकारी मिली है कि ईरान में हत्याएं रोक दी गई हैं और जिन फांसियों को लेकर आशंका जताई जा रही थी, वे अब नहीं होंगी।

देशबन्धु 15 Jan 2026 11:20 am

ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौत पर जी-7 देशों ने चिंता जताई, तेहरान को कड़ी चेतावनी

सात बड़ी शक्तियों के संगठन जी-7 के विदेश मंत्रियों और यूरोपियन यूनियन के उच्च अधिकारियों ने ईरान के हालातों पर चिंता व्यक्त की है। इस दौरान, जी-7 देशों ने ईरानी अधिकारियों की ओर से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर किए जा रहे अत्याचार की निंदा करते हुए कहा कि अगर विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई जारी रहती है तो वे तेहरान के खिलाफ और कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

देशबन्धु 15 Jan 2026 11:16 am

अमेरिका में पाकिस्तानी नागरिकों की एंट्री बैन, ट्रंप के फैसले से क्यों खुश हुए इंडियन अमेरिकन लीडर? बताई वजह

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग रोक दिया है. जिसकी वजह से कई देश चिंतित हैं. जबकि राष्ट्रपति के इस फैसले का इंडियन अमेरिकन लीडर ने स्वागत किया है.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 10:05 am

लैंड ऑफ सिल्वर कहलाता है ये देश, कभी यहां बहती थी चांदी की नदी; नाम जानकर उड़ जाएंगे होश

Argentina Land of Silver: दक्षिण अमेरिका में स्थित अर्जेंटीना को दुनिया भर में लैंड ऑफ सिल्वर यानी चांदी की धरती कहा जाता है. इसके नाम से लेकर इतिहास तक हर जगह चांदी की कहानियों की झलक मिलती है. आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 9:28 am

गाजा शांति योजना का दूसरा चरण अमेरिका ने किया शुरू

अमेरिका ने बुधवार को गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की

देशबन्धु 15 Jan 2026 9:22 am

तेहरान से दिल्ली आया फोन! ईरान में उथल-पुथल भारत के लिए ठीक नहीं, चीन-पाक को कैसे फायदा होगा?

शिया बहुल ईरान अब तक सुन्नी आतंकियों के हमले झेलता रहा है, अगर वहां सुन्नी या अमेरिका समर्थक सरकार आती है तो भारत के लिए भी चीजें बदल सकती हैं. पाकिस्तान को क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने में मदद मिलेगी क्योंकि मौजूदा सरकार उसके प्रॉपगेंडा में 'हां में हां' नहीं मिलाती है. इस बीच, तेहरान से एक फोन दिल्ली क्यों आया?

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 9:20 am

'वही गलती न दोहराएं, इस बार निशाना नहीं चूकेगा...', बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दी ट्रंप को बड़ी चेतावनी

Iran America Tension: ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि मेरा मैसेज है कि आप वही गलती दोबारा न करें जो आपने जून में की थी. इसके अलावा क्या कुछ कहा जानते हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 8:14 am

ब्लैकबोर्ड-राह चलते लोग कमर में हाथ डाल देते हैं:लड़के पूछते हैं- चिंकी पूरी रात का कितना लेती हो, आंखों की पलकें खींचकर बोलते हैं- ‘ऐ मोमो’

एक बार मैं दिल्ली में अपने दोस्तों के साथ एक कॉमन फ्रेंड के घर पार्टी में गया था। कुछ देर में एक लड़का मेरे पास आया और पूछा- ‘तुम नेपाली हो?’ मैंने बोला- ‘नहीं, मैं नॉर्थ ईस्ट से हूं।’ ये सुनते ही कहने लगा- ‘अच्छा… तुम लोग तो कुत्ता, बिल्ली, बंदर सब खाते हो न?’ उसकी बात सुनते ही वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे… मैं कोई जवाब नहीं दे पाया। कुछ देर बाद फिर एक लड़के ने पूछा- ‘तुम्हारे यहां तो ओपन सेक्स होता है न? लड़कियां होटल में काम करती हैं। कोई जान पहचान वाली लड़की हो तो मिलवाओ। वो तो मसाज भी अच्छा करती हैं। पूरी रात का कितना पैसा लेती हैं?’ वहां मौजूद सभी लोग दिलचस्पी से ये बातें सुन रहे थे। ये कोई पहली बार नहीं था, इसके पहले भी मेरी कई महिला दोस्तों के साथ ऐसा हो चुका है। दिल्ली के राह चलते लोग लड़कियों की कमर में हाथ डालकर पूछते हैं- ’कितने में चलोगी चिंकी?’ ब्लैकबोर्ड में इस बार स्याह कहानी नॉर्थ ईस्ट के लोगों की जो पढ़ाई और नौकरी के लिए अपने घर से दूर, दूसरे शहरों में रह रहे हैं और शक्ल-सूरत की वजह से नस्लभेद का शिकार होते हैं। त्रिपुरा के जॉर्ज चकमा 2014 में दिल्ली आए थे। फिलहाल, इंटरनेशनल स्टडीज में पीएचडी के चौथे साल के छात्र हैं। जॉर्ज बताते हैं कि ‘मेरे गांव में अब भी आंदोलन चल रहा है। उत्तराखंड में त्रिपुरा के एंजेल की हत्या के बाद से मेरे पेरेंट्स परेशान रहते हैं। हर रोज मेरी सुरक्षा को लेकर फोन करते हैं और कहते हैं कि सिर्फ जरूरी काम के लिए घर से बाहर निकलो। आखिर हम लोगों ने ऐसा क्या गुनाह किया है कि घर से बाहर न निकलें। यहां पढ़ने आए हैं और पढ़ना कोई गुनाह तो नहीं है?’ क्या एंजेल की तरह आपके साथ भी कभी नस्लीय हिंसा हुई? ‘हम नॉर्थ ईस्ट वालों के साथ ये सब बहुत सलीके से होता है। ऑटो वाले शक्ल देखकर ज्यादा पैसे मांगते हैं। किराए का कमरा लेने जाओ तो सबसे पहले पूछते हैं- क्या-क्या खाते हो? हमारे घर में कुत्ता-बिल्ली तो नहीं बनाओगे? पार्टी करते हो? ड्रग्स लेते हो? आखिर में पांच हजार का कमरा दस हजार में देते हैं। दुकानदार भी हमें महंगा सामान देते हैं।’ जॉर्ज खीझते हुए कहते हैं- ‘बार-बार ये साबित करना पड़ता है कि हम भारतीय हैं। एक बार मैं ताजमहल देखने गया। वहां आधार कार्ड दिखाने पर भी स्टाफ को यकीन नहीं हुआ कि मैं भारतीय हूं। वे बार-बार पूछते रहे- नेपाल से हो? वो मेरी बात पर यकीन ही नहीं कर रहे थे। विदेशियों की टिकट अलग होती है, इसलिए वो चाहते थे कि मैं ज्यादा पैसे दूं।' अपनी यूनिवर्सिटी के बारे में बताते हुए जॉर्ज कहते हैं कि हमारी यूनिवर्सिटी में भी लोग नॉर्थ-ईस्ट के बारे में नहीं जानते। एक बार किसी ने पूछा कहां से हो? मैंने कहा त्रिपुरा से हूं तो कहने लगे वही त्रिपुरा जो साउथ में है। जब मैंने बताया नॉर्थ ईस्ट तो कहने लगे तुम्हारे यहां बर्फ पड़ती है क्या? क्या खाते हो तुम लोग? वीडियो में देखा है कि तुम लोग कुत्ता, बंदर, यहां तक कि इंसान भी खा लेते हो।’ आप सोचिए ये सवाल पीएचडी स्टूडेंट पूछते हैं। कुछ देर चुप रहकर जॉर्ज कहते हैं कि सबसे ज्यादा तकलीफदेह बातें तो वो होती हैं जो हमारे यहां की लड़कियों के बारे में कही जाती हैं। लड़कों को लगता है कि नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां कुछ भी करने को राजी हो जाती हैं। उनके चरित्र पर सवाल उठाते हैं। रेट पूछते हैं, छूते हैं, बिना पूछे कमरे में घुस जाते हैं। यह आम है।’ वे कहते हैं, ‘हमारी अंग्रेजी और फैशन सेंस अच्छा होता है, इसलिए हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम मिलता है। बस इसलिए लोग मान लेते हैं कि हम होटल में ही काम करते हैं और वे हमें ‘एग्जॉटिक’ समझते हैं।’ जॉर्ज से मिलने के बाद मैं दिल्ली में रह रहे मणिपुर के काकचिंग जिले के गांव सौरा के निवासी कबीर अहमद से मिलने पहुंची। कबीर के सामने मैंने जैसे ही नस्लीय हिंसा का जिक्र किया, वो दुखी होकर आपबीती सुनाने लगे। कबीर कहते हैं, ‘दिल्ली के महारानी बाग की बात है। एक शाम मैं अपने चचेरे भाई के साथ घर जा रहा था। अचानक एक कुत्ते का पिल्ला हमारे पीछे-पीछे चलने लगा। हमने घर पहुंचकर जल्दी से दरवाजा बंद कर लिया। वो हमारे दरवाजे पर ही बैठकर रोने लगा और दरवाजे पर पंजे मारता रहा। उसकी आवाज सुनकर कुछ ही देर में पूरा मोहल्ला हमारे दरवाजे पर खड़ा हो गया। उन्हें शक हुआ कि हम कुत्ता खाते हैं। हम बार-बार कहते रहे कि कुत्ता नहीं खाते हैं, लेकिन वो लोग चिल्लाते रहे कि तुम नॉर्थ ईस्ट के हो, झूठ बोल रहे हो।’ जब मैंने बताया, ‘मैं मुस्लिम हूं। मुसलमान कुत्ता नहीं खाते। तब जाकर भीड़ शांत हुई, लेकिन जाते हुए वो लोग मुझे धमकी देकर गए कि हमारे मोहल्ले में ये सब मत करना, वरना बचोगे नहीं।’ कबीर कहते हैं, ‘कुछ महीनों बाद मैंने वह घर छोड़ दिया।’ कबीर अहमद 2013 में मणिपुर से दिल्ली आए। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद वह अब एमए कर रहे हैं। उनका परिवार बॉर्डर इलाके में रहता है और पिता मणिपुर राइफल्स में हैं। कबीर कहते हैं, ‘दिल्ली आते वक्त पापा ने कहा था- अगर कभी बहस हो जाए, तो पहले सुरक्षित निकलने का रास्ता देखना।’ वह कहते हैं, ‘मेरी मुश्किल दोहरी है। मैं मुस्लिम भी हूं और नॉर्थ ईस्ट से भी। कई बार अपना नाम बताने से डर लगता है।’ कबीर के मुताबिक, उन्हें अंदाजा नहीं था कि राजधानी में उन्हें ‘चिंकी’, ‘मोमो’, ‘नेपाली’, ‘नूडल्स’ और ‘चींचींचूंचूं’ जैसे शब्दों से पुकारा जाएगा। उनके अनुसार, दिल्ली में रह रहे करीब 30 हजार नॉर्थ-ईस्ट के लोग रोज नस्लवादी भेदभाव झेलते हैं। दिल्ली में किस तरह की दिक्कतें आती हैं? ‘दिक्कत कहां नहीं है। कमरा जल्दी नहीं मिलता और अगर मिल भी जाए, तो हमारी शक्ल देखकर पांच हजार का कमरा दस हजार में दिया जाता है।’ वह महारानी बाग का एक अनुभव बताते हैं, ‘किराए का कमरा पूछने गया था। कुर्ता-पायजामा पहना था। एक घर की घंटी बजाते ही सामने वाले ने चिल्लाकर कहा- इस गली में क्यों आए हो? दोबारा आए तो काटकर फेंक दूंगा।’ कबीर कहते हैं, ‘जब तक घर के अंदर या अपने नॉर्थ ईस्ट के लोगों के बीच हूं, सब ठीक रहता है। बाहर निकलते ही बेइज्जती शुरू हो जाती है।’ वह बताते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हिंदी समझ नहीं आती थी। ‘टीचर हिंदी में पढ़ाती थीं, इसलिए घर आकर कजिन से दोबारा पढ़ता था।’ डीयू के दिनों को याद करते हुए कबीर अफसोस भरे लहजे में कहते हैं, ‘ग्रेजुएशन के दौरान एक दिन मेरे ही क्लासमेट ने कहा- ‘ऐ मोमो, चिंकी। तुम लोग तो कुत्ता-बंदर सब खा लेते हो न?’ उस दिन बहुत धक्का लगा। उम्मीद नहीं थी कि दोस्त भी ऐसा बोलेगा।’ कबीर बताते हैं कि नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं को लेकर भी भद्दी टिप्पणियां आम हैं। ‘पूछते हैं- तुम्हारे यहां फ्री सेक्स होता है न? कहते हैं हमारी लड़कियां सेक्स वर्कर होती हैं। उन्हें नहीं पता कि मणिपुर महिला-प्रधान समाज है, जहां लड़कियां दिन-रात सुरक्षित घूम सकती हैं।’ वह लाजपत नगर की एक घटना याद करते हैं। ‘मैं एक दोस्त और एक महिला मित्र के साथ मार्केट में था। एक आदमी ने मेरी दोस्त को छेड़ते हुए कहा-‘ऐ चाइनीज, चिंकचांकमाऊंमाऊं।’ दोस्त ने रोका तो उसने थप्पड़ मार दिया। मैंने विरोध किया तो भीड़ जमा हो गई और हमें चोर-चोर कहकर दौड़ाने लगी। उस दिन किसी तरह जान बचाई।’ कबीर लाजपत नगर की एक और घटना बताते हैं। ‘एक दिन मैं दोस्त के साथ मार्केट जा रहा था। एक कम उम्र का लड़का कपड़े बेच रहा था। हमें देखकर चिल्लाने लगा- ‘ऐ मोमो, कपड़ा खरीदेगा क्या? ऐ मोमो, मोमो?’ मुझे गुस्सा आ गया। मैंने पूछा- किसे मोमो बोल रहा है? बात बढ़ी तो भीड़ जमा हो गई। हालात बिगड़ते देख मैं वहां से निकल गया।’ कबीर कहते हैं, ‘कुछ दिन पहले विजयनगर में नॉर्थ ईस्ट के एक दुकानदार को सिर्फ इस शक में पीट दिया गया कि उसकी दुकान में बीफ है। न जांच हुई, न कोई बात सुनी गई- बस भीड़ टूट पड़ी।’ ‘यहां हमारी पहचान ही कई बार हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।’ कबीर कहते हैं, ‘यह तो कुछ भी नहीं है। यहां हालात ऐसे हैं कि किसी कुत्ते को कुछ कह दो, तो जान पर बन आती है।’ ‘एक दिन मेरा भाई पार्क में टहल रहा था। एक आदमी अपने कुत्ते को घुमा रहा था। कुत्ता उसे काटने दौड़ा, तो भाई ने डर के मारे पांव से भगाया। उस पर कुत्ते का मालिक भड़क गया। उसने लोगों को इकट्ठा किया और भाई की पिटाई कर दी। उसी दिन उसे मोतीबाग का घर छोड़ना पड़ा।’ कबीर बताते हैं, ‘मैं एक जगह नौकरी करता हूं। हाल ही में ऑफिस ने पूरे दिन के लिए टैक्सी दी थी। ड्राइवर को बुलाया तो उसने कहा कि उसे सिर्फ एक जगह रुकने का आदेश है। मैंने कहा- ऑफिस ने पूरे दिन का भुगतान किया है, आप ऑफिस से बात कर लीजिए।’ कबीर के मुताबिक, ड्राइवर ने फोन पर ही उन पर चिल्लाते हुए कहा- ‘यह चिंकी, चाउमिन, नेपाली क्या बोल रहा है?’ फोन रखने के बाद उसने कहा, ‘मैं हरियाणा से हूं।’ उस दिन उससे काफी बहस हुई। कबीर बताते हैं, ‘मोहल्ले में तो कुछ लोगों की हिम्मत इतनी होती है कि वे हमारी आंखों की पलकें खींचकर कहते हैं- 'ऐ छोटी आंख, चिंकी इधर आ।' तब लगता है कि हमारी पहचान ही उनके लिए मजाक बन गई है।’ वह हाल की एक घटना का जिक्र करते हैं- ‘देहरादून में नस्लीय टिप्पणी के बाद त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। उसके पिता बीएसएफ में हैं। सोचिए, एक जवान के बेटे के साथ क्या हुआ?’ इस घटना के बाद उनके माता-पिता डर गए। कबीर बताते हैं, ‘पापा का फोन आया- कहां हो? घर लौट आओ। दिल्ली में रहने की जरूरत नहीं है। डर लगता है कि कहीं तुम्हें भी कुछ न हो जाए।’ सोचिए, हमारे माता-पिता किस डर में जीते हैं। इन बातों का आप पर क्या असर हुआ? कबीर कहते हैं, ‘लोग मुझे 'मोमो' कहकर चिढ़ाते थे। मुझे मोमोज पसंद थे, लेकिन अब खाना छोड़ दिया है। लगता है कोई ठेले के पास देख लेगा, तो फिर मजाक उड़ाएगा।’ हाथ जोड़कर वह कहते हैं, ‘हम कभी किसी से यह नहीं पूछते कि वह क्या खाता है। बस यही चाहते हैं कि हमारे खाने का भी सम्मान किया जाए।’ आंखों में आंसू भरे हुए कबीर पूछते हैं, ‘कहां है 'इंडिया एक'? मेरे पापा और भाई इस देश के लिए काम करते हैं, लेकिन यहां हमें अपनाया नहीं जाता।’ फिलहाल कबीर सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस की कोचिंग ले रहे हैं। क्या आप इस देश में स्वीकार किए गए हैं? वह कहते हैं, ‘मुझे शर्म आती है कि मुझे एक भारतीय के सामने खुद को भारतीय साबित करना पड़ रहा है। कई बार समझ नहीं आता- घर लौट जाऊं, खेत में काम करूं या कहां जाऊं। जितना भी कर लूं, यह देश हमें अपना नहीं मानता।’ क्या लगता है कि भारत आपका नहीं है? कबीर कुछ पल चुप रहते हैं, फिर कहते हैं, ‘अगर जवाब दूंगा, तो देशद्रोही कहलाऊंगा।’ थोड़ी देर बाद जोड़ते हैं, ‘घर के अंदर सब ठीक लगता है, लेकिन बाहर निकलते ही परेशानी शुरू हो जाती है। इसी डर से नॉर्थ ईस्ट के लोगों ने अपने संगठन बनाए हैं और हम एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।’ नॉर्थ ईस्ट से आई लड़कियों की मुश्किलें और भी ज्यादा हैं। 25 साल की सोजोम अरुणाचल प्रदेश के नेफ्रा जिले की हैं। 2023 में हायर स्टडीज के लिए जेएनयू आईं और फिलहाल दिल्ली के विजयनगर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। सोजोम कहती हैं, ‘मम्मी-पापा दोनों नौकरी करते हैं। मम्मी ने जेएनयू की पढ़ाई के बारे में सुना था, इसलिए मुझे यहां भेजा। दिल्ली आने के बाद मैं ज्यादातर जेएनयू परिसर तक ही सीमित रही। वहां लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, फिर भी कई बार लगता है कि मैं यहां की नहीं हूं।’ वह बताती हैं,‘एक दिन लाइब्रेरी में बैठी थी। मेरा एक क्लासमेट एक लड़की को लेकर गंदी बातें करने लगा। मैंने टोका और कहा कि मुझे ऐसी बातें सुननी पसंद नहीं। इस पर वह बोला- ‘मोमो, यहां से निकल।’ पहले लगा मजाक है, लेकिन उसने दोबारा वही कहा। मैं घबरा गई। जेएनयू ही वह जगह थी, जहां खुद को सुरक्षित समझती थी, और वहीं यह हुआ। उस रात कमरे में जाकर नींद नहीं आई। किताब खोली, फोन देखा, लेकिन दिमाग में बस ‘मोमो, मोमो’ गूंजता रहा। अगले दिन शिकायत करने की सोची। वाटर कूलर से पानी लेने गई तो वह भी वहीं मिला। मैंने कहा कि तुम्हारी चेयरपर्सन से शिकायत करने जा रही हूं। वह मेरे पीछे दौड़ा, मैं भाग रही थी। तभी एक साथी ने बीच-बचाव किया, तब मामला रुका। बाद में मैंने अपने कम्युनिटी के व्हाट्सएप ग्रुप में बताया। जवाब मिला-गलत हुआ है, लेकिन छोड़ दो। ‘नॉर्थ ईस्ट को मोमो’ कहे जाने की शिकायत कोई नहीं सुनता।’ सोजोम कहती हैं, ‘जब जेएनयू जैसी जगह पर यह हाल है, तो बाहर की स्थिति समझी जा सकती है। सड़क पर चलते वक्त हमेशा डर लगा रहता है कि कोई मुझे 'मोमो' या 'चिंकी' न कह दे। कुछ लोग कहते हैं कि 'मोमो' प्यार से बोला जाता है, लेकिन हमारे लिए यह नस्लभेदी शब्द है। अगर आप संवेदनशील हैं, तो कृपया इसे हमारे लिए इस्तेमाल न करें।’ क्या नॉर्थ ईस्ट वालों के लिए डबल मीनिंग बातें होती हैं? सोजोम कहती हैं,‘कुछ दिन पहले मेट्रो में दो लड़कों ने मेरी ओर देखकर कहा- 'येलो लाइन पर तो बहुत सारी चाइनीज और जापानी लड़कियां मिलती हैं।' मुझे पता था कि वे मुझे निशाना बना रहे हैं, लेकिन शिकायत का कोई सबूत नहीं था। यहां लड़कों को लगता है कि हमारा पहनावा अलग है, हम शॉर्ट स्कर्ट पहनते हैं, इसलिए हम सेक्स वर्कर हैं। वे कभी नॉर्थ ईस्ट जाकर देखें। वहां के लोग फैशनेबल भी हैं और पढ़े-लिखे भी। हो सकता है हमारा पहनावा अलग हो, लेकिन क्या कहीं लिखा है कि पढ़ाई के साथ फैशन नहीं हो सकता? हमें लगा था दिल्ली मेट्रो सिटी है, सब ठीक होगा, लेकिन हम गलत थे।’ क्लास में भी लोग अक्सर उल्टे-सीधे सवाल पूछते हैं, जैसे- 'तुम्हारे यहां फ्री सेक्स होता है?' वह कहती हैं, ‘लोग मेरे खाने को अजीब कहते हैं। अगर मैं दिल्ली आकर छोले-भटूरे, इडली-डोसा खा सकती हूं, तो मेरा खाना अजीब क्यों है? आपको नहीं खाना मत खाइए, लेकिन अजीब क्यों कहना?’ सोजोम बताती हैं,‘नस्लीय हमला सिर्फ सड़क पर नहीं, सोशल मीडिया पर भी होता है। कुछ महीने पहले राजनीतिक बहस के बाद एक लड़की ने मुझे डीएम में ‘मोमो’, ‘चिंकी’, ‘चाइनीज’ कहकर धमकी दी- 'रुको, सबक सिखाती हूं।' उसने मेरी 12–13 तस्वीरें अपलोड कर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। मैं बहुत डर गई। मां से कहा कि पुलिस में शिकायत करना चाहती हूं, लेकिन मां ने मना किया- डर था कि वह लड़की कुछ लड़कों के साथ मुझे नुकसान पहुंचा सकती है। मैं बस अपनी मां को परेशान नहीं करना चाहती। पढ़ाई के लिए आई हूं। कम से कम लोग नॉर्थ ईस्ट के उन लोगों को जानें, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना खून बहाया। क्या इन घटनाओं का आप पर मानसिक असर पड़ता है? सोजोम कहती हैं,‘जब कुछ गलत होता है, तो बार-बार वही बातें दिमाग में चलती हैं और परेशान करती हैं। खुद से कहती हूं- चलो, जाने दो। फोन देखती हूं, किताब खोलती हूं, फिर भी कई दिन किसी चीज में मन नहीं लगता। एंजेल चकमा की देहरादून में हत्या के बाद दोस्तों ने समझाया- बाहर ज्यादा मत बोलना, गलत चीजें नजरअंदाज करना। पेरेंट्स भी यही कहते हैं। लेकिन कई बार लगता है कि चीखूं- मैं भी भारतीय हूं। बेजवाड़ा कमेटी ने नस्लभेदी शब्दों का जिक्र किया, पर कौन मानता है? आज भी हमें ‘चींचींचूंचूं’ कहा जाता है। कार्रवाई कौन करेगा? पुलिस ने एंजेल चकमा मामले में कहा कि यह नस्लवाद नहीं था। हम शांतिप्रिय हैं, किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते, फिर भी बार-बार साबित करना पड़ता है कि हम इस देश के हैं।’ 1- ब्लैकबोर्ड-पापा को फांसी दिलाकर आत्महत्या कर लूंगी:कहते थे ब्राह्मण होकर नीच से शादी कैसे की, गोली मारकर बोले- अब मैं बहुत खुश हूं ‘हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-तलाक हुआ तो अनजान डोनर से स्पर्म लेकर मां बनी:विदेश ले जाकर पति ने घर से निकाला, बिना पति के महिलाओं की कहानियां मेरी चीख सुनकर पड़ोसी जमा हो गए। बिस्तर से उठी तो देखा- मेरी सास ही तौलिए से मेरा मुंह दबा रही थीं। वह जोर-जोर से कह रही थीं- तूने मेरे बेटे को खा लिया। तू मांगलिक है। कुलच्छन है। अब अपने बच्चे को लेकर यहां से भाग जा, नहीं तो तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगी। पूरी खबर यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 15 Jan 2026 5:02 am

क्या पाकिस्तान से आए लोगों ने ईरान में भड़काई हिंसा:कहां से आए अमेरिकी हैंड ग्रेनेड और हथियार, 2500 मौतों की जिम्मेदार पाकिस्तान आर्मी

‘हमारा गुस्सा महंगाई की वजह से है, लेकिन ईरान में जो हो रहा है, वो आम लोगों का गुस्सा नहीं है। ये तो साजिश है। कुछ लोग प्रदर्शनकारियों में घुसते हैं और आग लगाने लगते हैं, फायरिंग करते हैं। रश्त शहर में तो पूरा बाजार जला दिया। हॉस्पिटल पर हमले हुए, एक नर्स को जिंदा जला दिया। गिरफ्तार लोगों के पास हैंड ग्रेनेड मिले हैं। इन सबके पीछे अमेरिका और इजराइल हैं।’ ईरान का हाल बता रहे अहमद अब्बास राजधानी तेहरान में रहते हैं। वे दावा करते हैं कि बढ़ती महंगाई से लोगों में बेचैनी थी। पेट्रोल की कीमत 15 से बढ़कर 25 रुपए हो गई। 10 रुपए की रोटी 15 रुपए में मिलने लगी। इसके विरोध में लोग पहली बार 28 दिसंबर 2025 को तेहरान की सड़कों पर उतरे। अहमद का दावा है कि अमेरिका और इजराइल के दखल से प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। देश में बीते 17 दिन में 2500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। भारत के सीनियर जियो पॉलिटिक्स एक्सपर्ट कमर आगा इसके पीछे पाकिस्तान कनेक्शन देखते हैं। अहमद हिंसा के पीछे जिन ‘कुछ लोगों’ को जिम्मेदार बता रहे हैं, आगा के मुताबिक, उनकी ट्रेनिंग पाकिस्तान में हुई है। वे कहते हैं कि ईरान में हिंसा का पैटर्न बिल्कुल बांग्लादेश जैसा है। ईरान में अभी इंटरनेट बंद है। इसलिए कम ही जानकारी बाहर आ रही है। दैनिक भास्कर ने ईरान के लोगों से बात की। उनसे दो सवाल पूछे-1. ईरान के शहरों में अभी क्या चल रहा है, कैसा माहौल है?2. क्या इन प्रदर्शनों से ईरान में सत्ता बदलने वाली है? ईरान के प्रोफेसर बोले- बहुत बुरे हालात थे, लेकिन अब सब ठीकईरान के कुम शहर में रहने वाले जमीर अब्बास जाफरी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। वैसे मुंबई के रहने वाले हैं, लेकिन बीते 15 साल से कुम में रह रहे हैं। ये शहर तेहरान से 150 किमी दूर है। जाफरी बताते हैं, 'ईरान में हालात बिगड़े जरूर थे, लेकिन अब काबू में हैं। प्रदर्शन करने वालों ने 25 मस्जिदों में आग लगा दी। शॉपिंग सेंटर्स और बैंकों पर हमले किए हैं। उनका मकसद सिर्फ हिंसा फैलाना है।’ खबरें आई थीं कि सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की। इस पर प्रोफेसर जाफरी कहते हैं, ‘ईरान सरकार पर बहुत दबाव है। प्रदर्शनकारियों के पास हथियार हैं। सरकार उनके खिलाफ सख्ती करती है, तो दूसरे देश इसे मानवाधिकारों का हनन बताएंगे। अगर नरमी बरती जाती है, तो कहा जाएगा कि सरकार का कंट्रोल नहीं रहा।’ प्रोफेसर जाफरी प्रोटेस्ट के बारे में चल रही खबरों को प्रोपेगैंडा मानते हैं। वे आरोप लगाते हैं कि विदेशी मीडिया भ्रम फैला रहा है कि सरकार गिरने वाली है। हकीकत इसके उलट है। भारत सरकार की एडवाइजरी- जैसे भी हो, ईरान से तुरंत निकलेंईरान के हालात देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उनसे तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की गई है। एडवाइजरी के मुताबिक, हालात और बिगड़ सकते हैं। इसलिए इंतजार करना ठीक नहीं होगा। ईरान से जल्द बाहर निकलने की कोशिश करें। इस पर प्रो. जाफरी बताते हैं कि सभी उलेमा और स्टूडेंट सुरक्षित हैं। इंटरनेट न होने से कोई भी जानकारी शेयर नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन चिंता की बात नहीं है। ‘छोटे दुकानदारों का प्रदर्शन अमेरिका-इजराइल ने हाईजैक किया’तेहरान में रह रहे भारतीय मूल के अहमद अब्बास बताते हैं कि अब हालात नॉर्मल हो रहे हैं। 13 जनवरी की शाम से इंटरनेट सर्विस भी शुरू हो गई है। प्रदर्शन के बारे में अहमद बताते हैं, ‘डॉलर की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ईरानी रियाल की गिरती कीमत ने कारोबारियों और आम लोगों में बेचैनी पैदा की थी। शुरुआत में छोटे शहरों में प्रदर्शन हुए, जल्द ही ये बड़े हो गए।’ अब्बास मानते हैं कि प्रदर्शन हिंसक होने के पीछे साजिश है। वे कहते हैं- कुछ लोग प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर आगजनी और फायरिंग करने लगे। पश्चिमी ईरान में तो भीड़ को मिसाइल साइट्स की ओर भेजने की कोशिश की गई। यह गुस्सा नहीं, बल्कि सिस्टम को अस्थिर करने की कोशिश थी। ‘महिलाओं का हिजाब उतारकर विरोध करना वेस्टर्न मीडिया का नैरेटिव’प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के हिजाब उतारकर विरोध जताने के वीडियो सामने आए थे। इस पर अहमद अब्बास कहते हैं, ‘जेंडर और हिजाब जैसे मुद्दों पर पश्चिमी मीडिया ने यह नैरेटिव गढ़ा कि नौजवान ईरान के सिस्टम के खिलाफ हैं। हकीकत में यह प्रोपेगैंडा था। यह कोई क्रांति नहीं, बल्कि ईरान की पॉलिसी बदलने के लिए विदेशी ताकतों का दखल था। ईरान के लोग सरकार के साथ हैं।’ अब्बास दावा करते हैं कि अमेरिका का मकसद ईरान में सरकार बदलना है। इसमें वह नाकाम हो गया। उसकी खुफिया एजेंसियों ने प्रदर्शनों को हाईजैक कर लिया था। गिरफ्तार किए गए लोगों के पास हैंड ग्रेनेड जैसे घातक हथियार मिले। इनके तार इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और अमेरिका की CIA से जुड़े हैं। कुर्दिस्तान और सिस्तान-बलूचिस्तान जैसे सरहदी इलाकों में एक्टिव अलगाववादी गुटों का भी इस्तेमाल किया गया, जो 1979 की क्रांति से ही ईरान को बांटना चाहते हैं।’ भारत लौटे हाकिम रजा बोले- ईरान में विद्रोह जैसा कुछ नहीं, सभी भारतीय सेफ इंडो-ईरानी चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट सैयद हाकिम रजा ईरान में 40 दिन बिताकर जनवरी में लौटे हैं। वे बेंगलुरु में रहते हैं। भारत सरकार की एडवाइजरी के बावजूद रजा मानते हैं कि ईरान में सभी भारतीय सुरक्षित हैं। वे कहते हैं कि हमें ईरान में डर जैसा कुछ महसूस नहीं हुआ। हम शॉपिंग और जियारतें कर रहे थे। हम ईरान के तीन बड़े शहरों तेहरान, कुम और मशहद गए हैं। वहां बहुत ज्यादा प्रदर्शन नहीं दिखे। ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसे तख्तापलट या बड़ा विद्रोह कहा जाए। 50-60 लोग जमा होकर नारेबाजी करते हैं और उनकी वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दी जाती है। इजराइली, अमेरिकी और कुछ हद तक भारतीय मीडिया में जो दिखाया जा रहा है, वैसा जमीन पर कुछ नहीं है।’ प्रदर्शन में आम लोगों के शामिल होने पर रजा कहते हैं, ‘इसकी बड़ी वजह महंगाई है। एक साल पहले डॉलर का रेट 50-60 तोमान था। एक तोमान में 10 रियाल होते हैं। डॉलर का रेट बढ़कर 1400 तोमान तक पहुंच गया। इससे जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। पेट्रोल के रेट 3 तोमान से बढ़कर 5 तोमान (लगभग 25 रुपए) हो गए हैं। रोटी की कीमत 2 तोमान से 3 तोमान यानी 15 रुपए हो गई। भारतीयों के लिए यह बहुत सस्ता है, लेकिन ईरान में कम कमाने वाले लोगों के लिए यह बड़ा बोझ है।’ (प्रदर्शन के दौरान रियाल की कीमत यूरो के मुकाबले जीरो हो गई है। अभी भारत के एक रुपए की कीमत 12 हजार रियाल से ज्यादा है) एक्सपर्ट बोले- ईरान में हिंसा के पीछे पाकिस्तानसीनियर जियो पॉलिटिक्स एक्सपर्ट कमर आगा ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की कई वजहें मानते हैं। वे कहते हैं कि हिजाब विवाद, महंगाई, रोजगार की कमी से लोग नाखुश थे, लेकिन प्रदर्शनों में बाहरी ताकतों का भी हाथ है। आगा आगे कहते हैं, ‘ईरान में गरीबी भारत, पाकिस्तान या अफगानिस्तान जैसी नहीं है। वहां बेरोजगारी और ईरानी रियाल की घटती कीमत बड़ी समस्या बन गई है। ईरान की शहरी आबादी अच्छी जिंदगी जीने की आदी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने धीरे-धीरे हालात बिगाड़ दिए।’ ‘इसके अलावा ईरानी मिडिल क्लास और युवाओं को सरकार की सख्ती पसंद नहीं है। धर्म में हिजाब या नमाज के लिए जबरदस्ती का कोई प्रावधान नहीं है। यह पूरी तरह से निजी मसला है। लोग क्या पहनें या क्या खाएं, इसमें सरकार का दखल क्यों हो। ईरान के ऑफिसों में 70% तक महिलाएं काम करती हैं, लेकिन वे अच्छा माहौल और बदलाव चाहती हैं।’ ‘हिंसा में शामिल लोग पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आए’कमर आगा ईरान की हिंसा में पाकिस्तान का भी हाथ मानते हैं। वे कहते हैं, ‘ईरान की इंटरनल सिक्योरिटी में बड़ी सेंध लगी है। विरोध प्रदर्शनों में जिस तरह आगजनी हुई और 100 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए, वह बांग्लादेश की याद दिलाता है। ईरान में हिंसा का पैटर्न बांग्लादेश जैसा है। ईरान से पाकिस्तान का बॉर्डर भी मिलता है। इसीलिए सरहद से आतंकी और स्लीपर सेल ट्रेनिंग लेकर ईरान में घुसते हैं। इन्हीं लोगों ने प्रदर्शन को हिंसक बनाया है।’ ‘प्रदर्शनकारियों के बीच इराक में सद्दाम हुसैन के समय से एक्टिव रहे मुजाहिदीन-ए-खल्क जैसे संगठन और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से ट्रेंड होकर आए आतंकी एक्टिव हैं। उनके पास आधुनिक हथियार हैं। यह सिर्फ जनता का गुस्सा नहीं है, इसमें बाहरी ताकतों का भी हाथ है।’ ‘ईरान के लोग सुधार चाहते हैं, लेकिन वे पश्चिमी देशों के पिछलग्गू नहीं बनना चाहते। 12 जनवरी को सरकार के समर्थन में सड़कों पर निकले लोगों ने साबित कर दिया कि वे सरकार से असहमत हों, लेकिन अमेरिका-इजराइल के खिलाफ एकजुट हैं।’ ‘ईरान में सत्ता बदलना आसान नहीं है क्योंकि वहां की राष्ट्रवादी भावनाएं बहुत गहरी हैं। फिलहाल वहां कोई वैकल्पिक लीडरशिप मौजूद नहीं है। यह आंदोलन क्रांति नहीं है, बल्कि एक वर्ग का विद्रोह है। इसे बाहरी ताकतों ने हाईजैक करने की कोशिश की है।’ ईरान पर हमला हुआ, तो भारत के लिए भी खतराआगा चेतावनी देते हैं कि ईरान में अस्थिरता पूरी दुनिया खासकर भारत के लिए भी घातक साबित हो सकती है। अगर ईरान पर हमला होता है या हालात बेकाबू होते हैं, तो ईरान पूरे रीजन को युद्ध में झोंक देगा। ईरान ऑयल सप्लाई का रूट बंद कर सकता है, जिससे पूरी दुनिया में मंदी आ जाएगी। भारत के लिए यह स्थिति डरावनी है क्योंकि खाड़ी देशों में 90 लाख भारतीय रहते हैं। वे देश में 4.06 लाख करोड़ रुपए भेजते हैं। हमारा उनके साथ 200 बिलियन डॉलर या करीब 18 लाख करोड़ रुपए का कारोबार है। ईरान के अस्थिर होने का मतलब है कि भारत के आर्थिक हितों पर सीधी चोट पहुंचेगी। ………………………………..स्टोरी में सहयोग: रऊफ डार, जम्मू-कश्मीर

दैनिक भास्कर 15 Jan 2026 5:01 am

‘जो चल नहीं सकता, वो दंगों का मास्टरमाइंड कैसे’:दिल्ली मस्जिद हिंसा में 20 गिरफ्तार, फैमिली के आरोपों पर पुलिस बोली- CCTV फुटेज सबूत

दिल्ली में रहने वाले 36 साल के मोहम्मद इमरान का घर तुर्कमान गेट के पास है। यहीं उनकी कचौरी की दुकान भी है। 8 जनवरी की सुबह वो रोज की तरह दुकान गए, लेकिन शाम को घर नहीं लौटे। परिवार ने परेशान होकर जब ढूंढना शुरू किया तो करीब 2 घंटे बाद आसपास वालों ने बताया कि पुलिस उठा ले गई। थाने पहुंचने पर पता चला कि दंगे का केस लगा है। परिवार का कहना है कि पीठ में तकलीफ के चलते वो ठीक से चल भी नहीं पाते हैं। वे न मुड़ सकते है, न झुक सकते हैं। ऐसे में दंगा और पत्थरबाजी कैसे करेंगे। 7 जनवरी को तुर्कमान गेट पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा हुई थी। इमरान पर इसी दौरान पत्थरबाजी, पुलिस पर हमला करने, हत्या की कोशिश और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इमरान के साथ ही पुलिस ने अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी मुस्लिम हैं। इनमें से ज्यादातर तुर्कमान गेट और चांदनी महल के रहने वाले हैं। वहीं पुलिस का दावा है कि आरोपियों को सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर गिरफ्तार किया जा रहा है। कई लोग अब भी हिरासत में हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है। हमने इस केस में आरोपी बनाए गए लोगों के परिवारों से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर परिवार डरे हुए हैं इसलिए कैमरे पर बात करने से मना कर दिया। सिर्फ दो परिवार ही राजी हुए। आरोपियों के परिवारों से बात…वे न मुड़ सकते-न झुक सकते, मीडिया मास्टरमाइंड बता रहीगिरफ्तार आरोपियों के परिवार वाले पुलिस थाने और कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। इन्हीं में से एक मोहम्मद इमरान की पत्नी सुमैरा हैं। वे बताती हैं, ‘जब हिंसा हुई तब वे घर पर ही थे। रात करीब 1 बजे घर से दूध लेने निकले थे। उस दिन हमारे पास दूध नहीं था। छोटे-छोटे बच्चे हैं, वे रो रहे थे। इमरान दूध और बच्चों का कुछ सामान लेने के लिए नीचे गए और कुछ देर बाद लौट आए।‘ ‘अगले दिन वो रोज की तरह दुकान भी गए, लेकिन शाम को पता चला कि उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। परिवार को कोई जानकारी नहीं दी गई। कुछ समय तक हमें पता ही नहीं चला कि उन्हें कहां लेकर गए।‘ सुमैरा घर के पास की एक दुकान की सीसीटीवी फुटेज दिखाते हुए कहती हैं, ‘इमरान सामान लेकर आ रहे हैं। अगर उन्होंने कुछ किया होता तो इतने आराम से चलकर नहीं आते।‘ उन्हें पीठ में काफी दिक्कत है। वे आसानी से झुक नहीं सकते, मुड़ नहीं सकते तो फिर ये सब कैसे करेंगे। उन्हें पिछले 4-5 सालों से दिक्कत है। दवाई भी चल रही है। कुछ लड़ाई-झगड़ा होगा तो वो भाग तक नहीं सकते। सुमैरा पति की गिरफ्तारी के बाद से परेशान हैं। इमरान पर लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताती हुए कहती हैं, ‘इन्हें मीडिया में घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जबकि वीडियो में दिख रहा है कि वे सामान्य तरीके से गए और वापस आ गए। थाने में सिर्फ यही बताया गया कि वे किसी वीडियो में दिख रहे हैं।‘ ‘फिर भी पहले दो दिन उन्हें थाने में ही रखा गया। सिर्फ इतना कहा जा रहा था कि उन्हें छोड़ दिया जाएगा, लेकिन 9 जनवरी को उन्हें कोर्ट में पेश कर दिया गया।‘ 12 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में आरोपी9 जनवरी को इमरान समेत आठ आरोपियों को रिमांड में लेने के लिए दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया था। पुलिस ने कोर्ट में बताया कि आरोपियों को सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है और स्टाफ ने उनकी पहचान की है। वहीं आरोपियों के वकील ने कहा कि उनके खिलाफ 'हत्या की कोशिश' की धारा (BNS की धारा-109) गलत तरीके से लगाई है, क्योंकि पुलिस को आई चोटें मामूली थीं। इस पर कोर्ट ने कहा कि ये सब ट्रायल के दौरान तय होगा। इन सभी आरोपियों को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने 7 जनवरी को एक FIR दर्ज की थी। इसमें बताया गया था कि अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा में तैनात पुलिस बल पर करीब 30-35 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया। भड़काऊ नारेबाजी की, पुलिस बैरिकेड्स तोड़े और पथराव किया। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल भी हो गए। पुलिस ने भाई को अरेस्ट किया, परिवार को बताया भी नहींदिल्ली पुलिस ने 7 जनवरी को (घटना वाले दिन) ही पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें मोहम्मद आरिब भी थे। आरिब उसी इलाके में LED लाइट्स का काम करते हैं। उनका नाम FIR में भी दर्ज किया गया है। हालांकि आरिब की बहनें अपने भाई के खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा बताती हैं। आरिब की बहन अनुषा कहती हैं कि उनके बड़े भाई का अपना कैफे है। जब आरिब रात में कैफे से आ रहा था तो बड़े भाई ने इधर आने से मना कर दिया था क्योंकि दंगे के चलते सेफ नहीं था। इसलिए आरिब अपने दोस्त के यहां चला गया। हिंसा रुकने के बाद वो 3 बजे घर लौट रहा था। घर के पास से पुलिस उसे जबरदस्ती पकड़ ले गई। जबकि उसने कुछ नहीं किया है।’ कुछ साल पहले ही आरिब के अब्बू-अम्मी का निधन हुआ था। उनकी एक और बहन सवाल उठाते हुए कहती हैं, ’अगर आप किसी को गिरफ्तार कर रहे हैं, तो क्या उसके परिवार को जानकारी नहीं देनी चाहिए। हम सब पूरी रात परेशान रहे, लेकिन किसी पुलिस वाले ने कुछ नहीं बताया कि उसे पकड़ा गया है।’ ’आरिब इस इलाके में था ही नहीं, न ही पुलिस के पास कोई सबूत है। फिर ऐसे ही कैसे गिरफ्तार कर सकते हैं। अगर आप गिरफ्तार करते हैं तो आपकी जिम्मेदारी बनती है कि घर वालों को इसकी जानकारी दी जाए। हम अगले दिन भी हर जगह ढूंढते रहे, लेकिन किसी थाने में पुलिस ने नहीं बताया कि उसे पकड़ा गया है। जबकि वो चांदनी महल थाने में था और हम वहां भी गए थे। आखिरकार हमें उसके बारे में कल रात पता चला।’ एक और आरोपी के पिता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘पुलिस ने बिना किसी सबूत के मेरे बेटे को गिरफ्तार किया है। मीडिया ने भी बिना वेरिफाई किए सबको पत्थरबाज बता दिया। मेरा बेटा उस दिन वहां नहीं था। अगले दिन वो गली में गया था। उसे सांस की दिक्कत है, इसलिए उसने मास्क लगा रखा था। पुलिस ने उससे पूछा कि मास्क क्यों लगा रखा है, ये सब बोलते हुए उसे थाने लेकर चले गए।‘ वकील बोले- पत्थरबाजी की, तो पुलिस कोर्ट में वीडियो दिखाएइस मामले में कुछ आरोपियों की तरफ से केस लड़ रहे वकील दानिश अली कहते हैं, ‘जो कुछ भी मीडिया ने दिखाया है या जो बातें की जा रही हैं, उसमें अभी तक कोई भी बातें कोर्ट के सामने नहीं लाई गई हैं। अगर पत्थरबाजी करने का कोई वीडियो है तो पुलिस ने अभी तक कोर्ट में क्यों नहीं दिया।‘ ‘पुलिस ने वहां पर आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस वजह से जिन लोगों के घर सड़क किनारे थे, वे अपने घरों से निकलने लगे। जब वे सड़क पर आए तो कैमरे में आ गए और पुलिस ने उन्हीं को डिटेन कर लिया।‘ ‘पुलिस ने कई बार कहा कि लोगों ने उन्हें पत्थर मारे। कई बार उनके बारे में ही कहा गया कि इन्होंने वीडियो सर्कुलेट किया। अगर वो वीडियो सर्कुलेट कर रहे थे तो वो उसी वक्त पत्थर कैसे मार रहे थे? अगर कोई पत्थर मार रहा है या जो भी हुआ, उसका कोई वीडियो पुलिस के पास मौजूद ही नहीं है।‘ सीसीटीवी और ग्राउंड पर मौजूद स्टाफ से आरोपियों की पहचानदिल्ली पुलिस इस मामले में उन सोशल मीडिया हैंडल्स की भी पहचान कर रही है, जिन्होंने अपनी पोस्ट में दावा किया है कि 'फैज-ए-इलाही मस्जिद' को गिराया जा रहा है। इसके साथ लोगों के वॉट्सएप ग्रुप को भी खंगाला जा रहा है। जबकि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मस्जिद के आसपास होनी थी। सेंट्रल दिल्ली के DCP निधिन वालसन दावा करते हैं कि गिरफ्तार किए गए सारे लोग पत्थरबाजी में शामिल थे। वहां के सीसीटीवी कैमरों और ग्राउंड पर मौजूद स्टाफ के बयानों के आधार पर उन सबकी पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अब तक कोई मास्टरमाइंड सामने नहीं आया है। निधिन बताते हैं, ‘अभी पूरे मामले की जांच चल रही है। हम सभी संभावनाएं देख रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए जिन्होंने लोगों को भड़काने की कोशिश की है, हमारी टीम ने ऐसे 10 लोगों की पहचान की है। जैसे ही उनके खिलाफ सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया के मामले में अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। सपा सांसद (मोहिबुल्लाह नदवी) की भूमिका की भी जांच की जा रही है।‘ DCP के मुताबिक, पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की थी। जितने भी समझदार लोग थे, वो वहां से चले गए थे। इसके बावजूद कुछ लोगों ने निर्देश नहीं माने। ऐसा लग रहा है कि वे इलाके की शांति को भंग करना चाहते थे। परिवार के आरोपों (बिना सबूत के गिरफ्तारी) पर DCP कहते हैं, ‘ऐसा कुछ नहीं है, सबको वीडियो और फोटो में पहचान करने के बाद ही गिरफ्तार किया जा रहा है। हमें एमसीडी की तरफ से अनुरोध आया था, तभी हमने फोर्स तैनात की थी। उसके बाद ही पूरा डिमोलिशन हुआ।‘ अब जानिए 7 जनवरी​​​​​​​ फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास क्या हुआ था7 जनवरी की रात दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाया गया। 32 जेसीबी और बुलडोजर ने मस्जिद के पास 36,400 वर्ग फीट में बने एक बंद पड़े बारात घर और प्राइवेट क्लिनिक को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान भीड़ ने MCD के स्टाफ और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस दौरान 5 पुलिस वाले घायल हो गए। पुलिस ने हालात संभाले और MCD के अमले ने कब्जा तोड़ा। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने ये कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर की, जिसमें मस्जिद से सटी डिस्पेंसरी और बारात घर को अवैध घोषित कर दिया गया। वहीं फैज-ए-इलाही मस्जिद की मैनेजिंग कमेटी का दावा है कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई है, वो 100 साल से ज्यादा पुरानी नोटिफाइड वक्फ संपत्ति है। हालांकि मस्जिद के पास उस जमीन के कागज नहीं हैं।..................... ये खबर भी पढ़ें... दिल्ली में जहां पत्थरबाजी, मस्जिद के पास उसके कागज नहीं तारीख 7 जनवरी, वक्त रात के 1 बजे। पुरानी दिल्ली सो रही थी, तभी 32 जेसीबी और बुलडोजर तुर्कमान गेट की गलियों में दाखिल हुए। हाईकोर्ट के आदेश पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास 36,400 वर्ग फीट में बने एक बंद पड़े बारात घर और प्राइवेट क्लिनिक के अलावा पार्किंग ढहाने की तैयारी थी। जेसीबी चलनी शुरू हुईं, तभी भीड़ जुट गई। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 15 Jan 2026 5:01 am

DNA: कौन हैं वे 8 कैदी, जिनकी US ने की रिहाई की मांग? मान गया खामेनेई तो बर्बाद होने से बच जाएगा ईरान

DNA on Iran Protest News in Hindi: अमेरिका ने ईरान से जेल में बंद 8 कैदियों को छोड़ने की मांग की है. चेतावनी दी है कि खामेनेई इन कैदियों को तुरंत रिहा कर दे वरना ईरान को बर्बाद कर दिया जाएगा. सवाल है कि आखिर ये कैदी कौन हैं, जिनकी ट्रंप प्रशासन जान बचाना चाहता है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 11:56 pm

DNA: BRICS अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास से ईरान हुआ बाहर, क्या बिना गोली चलाए ट्रंप ने इस शिया मुल्क को घेर लिया है?

DNA Analysis Iran Protest News: BRICS अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास से ईरान हुआ बाहर, क्या बिना गोली चलाए ट्रंप ने इस शिया मुल्क को घेर लिया है?

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 11:50 pm

DNA: ईरान पर ट्रंप और मुनीर की हुई थी सीक्रेट डील? खलीफा के खिलाफ पाकिस्तान की बड़ी साजिश का खुलासा

डॉनल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर की सीक्रेट डील पर बड़ा खुलासा. मुनीर ने हाफिज सईद के आतंकियों को 2 नए टारगेट दिये हैं. इनमें से एक खलीफा के खिलाफ पाकिस्तान की बड़ी साजिश है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस समय दोस्त अमेरिका के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 11:34 pm

DNA: खामेनेई को नहीं पड़ रहा ट्रंप की धमकियों का असर, ईरान ने जंग के लिए संभाला मोर्चा; मिडिल ईस्ट क्यों हुआ परेशान?

US-Iran Conflict: ईरान में सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच जल्द ही अमेरिकी हमले की संभावना जताई जा रहा है. सवाल ये है कि अमेरिका किस तरह से तेहरान पर हमला कर सकता है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 11:22 pm

ट्रंप का बड़ा फैसला 75 देशों पर वीज़ा बैन

अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा (स्थायी निवास से जुड़े वीज़ा) की प्रक्रिया पर अनिश्चितकालीन रोक लगाने का आदेश दिया है। यह फैसला इस आशंका के आधार पर लिया गया है कि कुछ आवेदक अमेरिका में “पब्लिक चार्ज” बन सकते हैं और सरकारी कल्याण योजनाओं व सार्वजनिक लाभों पर निर्भर हो सकते हैं।

देशबन्धु 14 Jan 2026 11:19 pm

अब ग्रीनलैंड को कोई नहीं बचा सकता, ट्रंप ने दिया फाइनल अल्टीमेटम; NATO को लेकर किया बड़ा ऐलान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि ग्रीनलैंड पर कब्जे से कम उनको कुछ भी स्वीकार नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि गोल्डन डोम एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कंट्रोल बहुत जरूरी है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 7:04 pm

दुनिया अभी 2026 में आई है, यहां साल 2976 में जी रहे लोग, कौन हैं अमाजिग, जिनका 1 हजार साल आगे है कैलेंडर

उत्तरी अफ्रीका भर में अमाजिग लोग 2976 का स्वागत कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने तैयारियां की हैं. वे दुनिया के अधिकांश हिस्सों से करीब 1 हजार साल आगे चल रहे हैं क्योंकि वह ऐसे कैलेंडर का पालन करते हैं, जो 950 ईसा पूर्व से शुरू होता है. ये लोग तमाम प्रकार के पकवान बनाते हुए नए साल के स्वागत में लगे हैं.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 6:47 pm

ट्रंप की धमकी के बावजूद क्यों ईरान पर हमला नहीं कर सकता अमेरिका? इस वजह ने बनाया लाचार

Trump Attack On Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की चेतावनी दी है, हालांकि अमेरिका के लिए ऐसा करना मुश्किल साबित हो सकता है. इसके कई कारण हैं.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 4:39 pm

'गैर जरूरी यात्रा से बचें', ईरान में मौत का महा-तांडव; हिंसक प्रदर्शनों के बीच मोदी सरकार की भारतीयों को एडवाइजरी

MEA Advisory on Iran Protest: ईरान में जारी प्रोटेस्ट के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने बड़ी एडवाइजरी जारी की है. इस एडवाइजरी में लोगों से अपनी गैर-जरूरी ईरान यात्रा को टालने के लिए कहा गया है. साथ ही प्रोटेस्ट वाले इलाकों से भी दूर रहने की अपील की गई है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 4:12 pm

क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड? अमेरिका ने घोषित किया आतंकवादी संगठन; UAE खुश, तुर्की के लिए बड़ा झटका

US Declares Muslim Brotherhood Terrorist: अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित किया, ट्रेजरी और स्टेट डिपार्टमेंट ने मंगलवार को मुस्लिम ब्रदरहुड की लेबनानी, जॉर्डन और मिस्र की शाखाओं के खिलाफ कदम उठाने की घोषणा की है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 2:30 pm

The problems are going to increase for the Greenland PM Donald Trump makes a statement amid tensions with Denmark

राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह कहते आ रहे हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए बेहद अहम है। हाल के बयानों में उन्होंने यहां तक कहा कि वह इस आर्कटिक द्वीप को हासिल करने के लिए सैन्य बल सहित सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

देशबन्धु 14 Jan 2026 12:58 pm

15 दिनों में 3 नेताओं की हत्या! चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक हिंसा ने फैलाया खौफ; BNP ने अंतरिम सरकार पर साधा निशाना

Bangladesh Political Violence: बांग्लादेश में फरवरी चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा बढ़ गई है, 15 दिनों में तीन नेताओं की हत्या हुई है. BNP ने कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई और अंतरिम सरकार की आलोचना की है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 12:51 pm

स्पेन में 150 साल बाद बनने जा रही हैं नई रानी, जानिए कौन हैं 20 साल की राजकुमारी लियोनोर

स्पेन के मौजूदा राजा किंग फेलिप छठे और रानी लेटीजिया की बड़ी बेटी, 20 वर्षीय राजकुमारी लियोनोर भविष्य में देश की पहली महिला शासक बनेंगी। इससे पहले 19वीं सदी में इसाबेला द्वितीय स्पेन की रानी बनी थीं।

देशबन्धु 14 Jan 2026 12:26 pm

अंतिम दिनों में है शासन... प्रदर्शनकारियों को दी फांसी तो होगी कड़ी कर्रवाई- ट्रंप; स्पेसएक्स ने दिया इंटरनेट का सहारा

trump warning iran: इरान में विरोध प्रदर्शन में अब तक 2,500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, और सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट और फांसी जैसी कठोर कार्रवाई की है. अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, जिससे शासन पर दबाव बढ़ गया है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 11:21 am

थाईलैंड में भयानक रेल हादसा, क्रेन गिरने से पटरी से उतरी ट्रेन, 22 की मौत, कई घायल

Thailand Accident: थाईलैंड में एक भयानक हादसा हुआ है, यहां पर पटरी से ट्रेन उतरने की वजह से 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 10:56 am

थाईलैंड में भीषण रेल हादसा : क्रेन गिरने से ट्रेन पटरी से उतरी, 22 की मौत, 30 घायल

थाईलैंड में बुधवार सुबह एक भीषण रेल दुर्घटना हुई। राजधानी बैंकॉक से उत्तर-पूर्वी प्रांत की ओर जा रही ट्रेन पर निर्माणाधीन साइट की क्रेन अचानक गिर गई

देशबन्धु 14 Jan 2026 10:50 am

चुनाव पर हिंसा का साया, बांग्लादेश ने बंद किए ऑन-अराइवल वीजा के दरवाजे, किन देशों पर पड़ेगा असर?

Bangladesh News: बांग्लादेश में इन दिनों सियासी हलचल मची हुई है, इसी बीच बांग्लादेश ने चुनाव से पहले ऑन अराइवल वीजा सस्पेंड कर दिया है. ये सस्पेंड करने के बाद बांग्लादेश ने उन देशों की सरकारों को बता दिया है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 10:27 am

पैसा किसी का, सेना दूसरे की... ऑपरेशन सिंदूर से डरकर पाकिस्तान कौन सा 'छाता' बना रहा?

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान का डर दिखने लगा है. अब वह नाटो की तरह ऐसा सेफ्टी छाता बनाना चाहता है जिससे भविष्य में भारत के हमले को रोका जा सके. उसके इस प्रयास में दो मुस्लिम देश आगे आए हैं. इस डील में पैसा एक देश का लग रहा है और सेना दूसरे देश की फिर पाकिस्तान का अपना क्या है?

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 10:09 am

डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भड़का ईरान, अमेरिका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखा

Iran US Tension: हिंसा की हर कोने में फैलती चिंगारी के कारण ईरान मुश्किल के दौर से गुजर रहा है. इसी बीच, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अबुकर दाहिर उस्मान को एक पत्र लिखा है. जिसमें अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए गए.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 10:06 am

नदी, समंदर और पहाड़ पार कराता दुनिया का सबसे लंबा पुल, 2 घंटे तक चलता रहता है सफर, देख दिमाग चकरा जाएगा

World Longest Bridge: अगर आपसे पूछा जाए कि आपने अब तक सबसे लंबा पुल कौन सा देखा है, तो भारत में ज्यादातर लोग मुंबई के अटल सेतु का नाम लेंगे. जिसकी लंबाई करीब 23 किलोमीटर है. दुनिया का सबसे लंबे पुल के आगे ये बहुत छोटा लगता है. दुनिया का सबसे लंबा पुल चीन में बना है और इसकी लंबाई करीब 164 किलोमीटर है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 9:32 am

ट्रंप का दावा- वेनेज़ुएला से तेल आयात ने घटाए अमेरिका में ईंधन के दाम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा नीति पर बात करते हुए वेनेज़ुएला का ज़िक्र किया

देशबन्धु 14 Jan 2026 9:06 am

'मैं उन्हें जानता ही नहीं...!' डेनमार्क के साथ जाने की बात कहने पर गुस्साए ट्रंप; कहा- 'यह फैसला तुम्हें भारी पड़ेगा'

Donald trump angry on greenland: ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने अमेरिका को लेकर बयान दिया था, जिसमें उन्होंने डेनमार्क के साथ रहने की बात की थी. इस बयान को खारिज करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ये ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 6:54 am

ईरान में मौतों को लेकर अमेरिका सख्त, ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- ‘हम सही आंकड़ा निकालेंगे’

Trump warning Iran: ईरान में पिछले कई दिनों से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान लोगों की मौत और कथित फांसी की खबरें सामने आई हैं. इसी बीच अमेरिका की ओर से कड़ा बयान सामने आया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान को अब ठीक तरह से पेश आना होगा और वहां के लोगों के साथ इंसानियत दिखानी होगी.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 6:31 am

मुस्लिमों के एडमिशन का विरोध, हिंदू स्टूडेंट्स की पढ़ाई अटकी:वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता गई; स्टूडेंट लौटे, आगे एडमिशन का पता नहीं

कश्मीर के बडगाम की रहने वाली बिलकिस 6 जनवरी की शाम को कॉलेज हॉस्टल में थीं। बिलकिस जम्मू में कटरा के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस से MBBS की पढ़ाई कर रही थीं। उन्हें पता चला कि नेशनल मेडिकल कमीशन ने कॉलेज की मान्यता ही रद्द कर दी है। बिलकिस मुस्लिम हैं और कॉलेज की 50 सीटों में 42 पर मुस्लिम स्टूडेंट के एडमिशन की वजह से हिंदूवादी संगठन इसका विरोध कर रहे थे। बिलकिस फिलहाल घर पर हैं। उन्हें नहीं पता कि आगे की पढ़ाई कैसे होगी। किसी और कॉलेज में एडमिशन मिल भी गया, तो कैसे कोर्स कवर करेंगी। हिंदूवादी संगठनों की दलील थी कि कॉलेज माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में है और भक्तों के दान से बना है इसलिए इसमें सिर्फ हिंदू स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलना चाहिए। हालांकि बिलकिस कहती हैं कि बाहर भले कुछ भी हो रहा हो, लेकिन अंदर हम सभी अच्छे से पढ़ाई कर रहे थे। धर्म की वजह से किसी को परेशानी नहीं हुई। श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के तहत आने वाले इस मेडिकल कॉलेज में 2025 में MBBS की पढ़ाई शुरू हुई थी। मान्यता रद्द होने के बाद सभी स्टूडेंट घर लौट गए हैं। इस विवाद पर दैनिक भास्कर ने कुछ स्टूडेंट्स से बात की। क्या सच में ये कॉलेज दान के पैसों से चलता है, इसकी भी पड़ताल की। पता चला कि जम्मू-कश्मीर सरकार से यूनिवर्सिटी को हर साल मदद मिल रही है। 2017 से 2025 तक सरकार ने करीब 121 करोड़ रुपए की मदद की है। पहले स्टूडेंट्स की बातनाम: बिलकिसपता: बडगाम, कश्मीरMBBS, फर्स्ट ईयर बिलकिस ने हमें एडमिशन से अब तक की पूरी कहानी सुनाई। वे बताती हैं, ‘25 अक्टूबर, 2025 को NEET की थर्ड राउंड काउंसलिंग हुई थी। इसी में मुझे एडमिशन मिला। NEET में मेरे 490 नंबर आए थे। जम्मू-कश्मीर डिवीजन में 758वीं रैंक थी। 29 अक्टूबर को एडमिशन की प्रोसेस पूरी हुई और 3 नवंबर से क्लास शुरू हो गई।’ बिलकिस के घर से ये कॉलेज करीब 250 किमी दूर है। उन्होंने चॉइस फिलिंग में दूसरे कॉलेज भी रखे थे, इनमें श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस मिल गया। बिलकिस को कॉलेज के बारे में पता चला कि यहां फैकल्टी और बाकी सुविधाएं अच्छी हैं। इसलिए उन्होंने एडमिशन ले लिया। बिलकिस बताती हैं, ‘मैंने दो महीने 10 दिन पढ़ाई की। सुबह 9 बजे क्लास शुरू होती थी। सब ठीक चल रहा था। हमारा सेशन लेट शुरू हुआ था। हम दूसरे कॉलेजों से दो महीने पीछे थे। मेडिकल कॉलेज में हमारा पहला ही बैच था। गाइड करने के लिए सीनियर स्टूडेंट नहीं थे, इसलिए फैकल्टी कहती थी कि कोई दिक्कत हो तो हमें बताना।’ मुस्लिम स्टूडेंट्स के एडमिशन से हुए विवाद पर बिलकिस कहती हैं, ‘कॉलेज में हमें धर्म की वजह से कोई दिक्कत नहीं हुई। न कभी महसूस हुआ कि हम अलग धर्म से हैं। बाहर प्रोटेस्ट चल रहे थे, तब भी अंदर तक कोई नेगेटिविटी नहीं आई।’ ‘मैंने कॉलेज में 4.95 लाख रुपए ट्यूशन फीस दी है। हॉस्टल के पैसे अलग से थे। जो भी हुआ, उससे नुकसान तो हमारा ही हुआ है। हम अब घर बैठे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि जल्द ही हमारा एडमिशन कराएंगे। तब भी टाइम तो बर्बाद हो रहा है।’ कोर्स की मान्यता रद्द होने पर बिलकिस कहती हैं, ‘दो महीने से दिमाग में यही चल रहा है कि हमारा क्या होगा। आगे क्या करेंगे। विरोध करने वालों को लगता है कि उन्होंने एक कॉलेज बंद करा दिया, लेकिन उन्हें सोचना चाहिए कि कॉलेज बनाने में कितनी मेहनत, कितना टाइम लगता है।’ ये हम 50 स्टूडेंट का नुकसान नहीं है, पूरी पीढ़ी का नुकसान है। जैसे ही पता चला कि कॉलेज की मान्यता रद्द हो गई है, सारे स्टूडेंट अपने-अपने घर चले गए। अब सभी लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं, ताकि पता चले कि आगे क्या होगा। हमने बिलकिस से पूछा कि क्या आपको पता है कॉलेज को चलाने में श्राइन बोर्ड का क्या रोल है? वे जवाब देती हैं, ‘इस बारे में कोई आइडिया नहीं है। हम तो पढ़ाई कर रहे थे, जैसे बाकी कॉलेज में होती है। अब हमारी कोई डिमांड नहीं है, बस गुजारिश है कि जितना जल्दी हो सके, हमें दूसरे कॉलेज में शिफ्ट करना चाहिए। हमने बहुत प्रेशर झेल लिया है। अगस्त में हमारे एग्जाम हैं। हमें यही नहीं पता कि हमें कब शिफ्ट करेंगे।’ नेशनल मेडिकल कमीशन ने मान्यता रद्द करने की वजह बताई है कि कॉलेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और जरूरी मानकों में गंभीर कमियां थीं इसलिए अनुमति रद्द कर दी गई। बिलकिस इस पर कहती हैं, ‘कॉलेज में कोई कमी नहीं थी। मेरे दोस्त दूसरे कॉलेजों में हैं, उनके साथ बात करने पर पता चलता था कि उनसे ज्यादा सुविधाएं हमें मिल रही हैं। अगर कमियां होतीं तो पहले ही परमिशन नहीं मिलती।’ मैनत श्रीवास्तव कॉलेज की मान्यता रद्द होने पर कहते हैं, ‘विवाद और कोर्स की परमिशन खत्म होना बहुत परेशान करने वाला है। हमें यहां बहुत अच्छी सुविधाएं मिल रही थीं। हमें कॉलेजों में शिफ्ट किया जा सकता है, वहां शायद ही ऐसी सुविधाएं मिलेंगी।’ ‘हम ट्रांसफर प्रोसेस के बारे में सोचकर परेशान हैं। अब भी नहीं पता कि हमें किस मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा। ट्रांसफर किस आधार पर होगा। कुछ भी साफ नहीं है। इससे स्ट्रेस और इनसिक्योरिटी बढ़ रही है। अभी तो हमने पढ़ाई के रूटीन में सेटल होना शुरू किया था। आशिया कहती हैं, ‘हमारे इंस्टीट्यूट में ऐसी सुविधाएं थीं, जो कई जाने-माने मेडिकल कॉलेजों में भी नहीं हैं। हमने दूसरे मेडिकल कॉलेजों की हालत देखी है। यहां सच में बहुत अच्छी और स्टूडेंट फ्रेंडली फैसिलिटीज थीं। सिर्फ एनाटॉमी के लिए हमारे पास चार डेड बॉडी थीं। दूसरे मेडिकल कॉलेजों में स्टूडेंट्स के लिए एक भी डेड बॉडी नहीं है।’ ‘लाइब्रेरी में पढ़ाई के लिए शांत माहौल था। किताबों, बैठने की जगह या पढ़ाई के रिसोर्स की कमी नहीं थी। क्लासरूम कभी भीड़भाड़ वाले नहीं थे। प्रोफेसर हर स्टूडेंट पर ध्यान देते थे। लेक्चर के दौरान बेहतर बातचीत होती थी। हम जैसे स्टूडेंट्स के लिए, जिन्होंने अभी-अभी मेडिकल की पढ़ाई शुरू की है, ऐसे माहौल का खत्म होना बड़ा झटका है।’ विवाद की जड़: क्या सिर्फ दान के पैसों से चलता है कॉलेजश्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को सितंबर 2025 में 50 सीटों पर एडमिशन की परमिशन मिली थी। MBBS के पहले बैच में 42 कश्मीरी मुस्लिम, 7 हिंदू और एक सिख स्टूडेंट ने एडमिशन लिया। विवाद तब शुरू हुआ, जब वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने मुस्लिम स्टूडेंट्स के एडमिशन का विरोध किया। 22 नवंबर को बनाई गई इस समिति में 50 से ज्यादा संगठन शामिल थे, जिनमें RSS और BJP से जुड़े संगठन भी थे। बजरंग दल ने तो कॉलेज के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। संविधान के आर्टिकल-30 के मुताबिक, अल्पसंख्यकों को अपने समुदाय के लिए 50% तक आरक्षण के साथ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने का अधिकार है। हालांकि श्राइन बोर्ड के मालिकाना हक वाली 34 एकड़ जमीन पर बनी श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। 8 साल में यूनिवर्सिटी को 121 करोड़ रुपए की सरकारी मददवैष्णो देवी संघर्ष समिति ने दावा किया कि यूनिवर्सिटी श्राइन बोर्ड के फंड से बनी है, जो भक्तों के दान से इकट्ठा होता है। इसलिए यहां सिर्फ हिंदू स्टूडेंट्स को ही पढ़ने की परमिशन मिलनी चाहिए। इसके बाद कॉलेज से मुस्लिम स्टूडेंट्स को हटाने की मांग उठने लगी। जम्मू में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। सोर्स बताते हैं कि श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में सालाना फीस स्ट्रक्चर में 4.95 लाख रुपए ट्यूशन फीस, 50 हजार रुपए रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट, लगभग 51 हजार रुपए वन टाइम कॉलेज चार्ज और 20 हजार रुपए सालाना हॉस्टल फीस शामिल है। यूनिवर्सिटी और मेस चार्ज मिलाकर हर स्टूडेंट का सालाना खर्च करीब 5.5 लाख रुपए हो जाता है। हिंदू संगठन दावा कर रहे थे कि श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी देश की इकलौती मुस्लिम-मेजॉरिटी वाली सरकार से बिना फंड लिए चल रही है। हालांकि डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया, तब भी यूनिवर्सिटी को सरकार से मदद मिलती रही। सोर्स बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर सरकार से यूनिवर्सिटी को 2017-18 में 10 लाख रुपए की मदद मिली। 2018-19 में ये मदद बढ़कर 50 लाख रुपए और 2019-20 में 5 करोड़ रुपए हो गई। 2019 के बाद JK के बजट को 2025 तक संसद ने मंजूरी दी थी, जब उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में पहली चुनी हुई सरकार ने शपथ ली थी। बजट डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि 2020-21 में यूनिवर्सिटी को 19.70 करोड़ रुपए दिए गए थे। इसके बाद से ये ग्रांट लगातार बढ़ी है। 2021-22 में 21 करोड़ रुपए, 2022-23 में 23 करोड़ रुपए, 2023-24 में 24 करोड़ और 2024-25 में 28 करोड़ रुपए दिए गए। इस साल के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने यूनिवर्सिटी के लिए 28 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। मुस्लिम स्टूडेंट्स को एडमिशन देने के खिलाफ हुए प्रोटेस्ट में शामिल रहे राष्ट्रीय बजरंग दल के नेता राकेश बजरंगी बताते हैं, ‘ये यूनिवर्सिटी 2004 में बनी थी। इसके बाद 13 साल श्राइन बोर्ड ने इसे चलाने के लिए सरकार से कोई पैसा नहीं लिया। यूनिवर्सिटी श्राइन बोर्ड के पैसों से चलती थी। 2017 से सरकार ने पैसा देना शुरू किया। कुल 121 करोड़ रुपए दिए हैं। श्राइन बोर्ड ने यूनिवर्सिटी पर 600 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।’ ‘सरकार इस सेशन के लिए 28 करोड़ रुपए देने वाली है, लेकिन अब तक मिले नहीं हैं। इतने पैसे में तो यूनिवर्सिटी नहीं चलने वाली। ये एक हिस्सा हो सकता है। बाकी पैसा तो श्राइन बोर्ड ही खर्च करता है। मेडिकल कॉलेज अभी शुरू हुआ था और इस साल यूनिवर्सिटी ने सरकार से मदद ही नहीं ली। यानी मेडिकल कॉलेज में सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया।‘ मान्यता रद्द होने की वजह मानक पूरे न होनानेशनल मेडिकल कमीशन को मेडिकल कॉलेज में नाकाफी इन्फ्रास्ट्रक्चर, काबिल टीचिंग फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी, मरीजों की संख्या कम होने और बेड ऑक्यूपेंसी खराब होने की शिकायतें मिलीं। मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की टीम 2 जनवरी, 2026 को कॉलेज पहुंची। असेसमेंट रिपोर्ट में बड़ी कमियां सामने आईं। इस दौरान टीचिंग फैकल्टी में 39% और ट्यूटर, डेमोंस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट की 65% की कमी मिली। आउटपेशेंट डिपार्टमेंट में न्यूनतम जरूरी संख्या के मुकाबले 50% से भी कम मरीज थे। बेड ऑक्यूपेंसी कम से कम 80% होनी चाहिए, लेकिन ये सिर्फ 45% पाई गई। ICU में भी एवरेज बेड ऑक्यूपेंसी लगभग 50% थी। रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ डिपार्टमेंट में स्टूडेंट के लिए प्रैक्टिकल और रिसर्च लैब नहीं हैं। लाइब्रेरी भी नियमों के मुताबिक नहीं है। यहां जरूरी संख्या के मुकाबले सिर्फ 50% किताबें मिलीं। यहां 15 जर्नल होने थे, जो दो ही मिले। ART सेंटर, MDR-TB मैनेजमेंट फैसिलिटी, ऑपरेशन थिएटर और अलग-अलग मेल-फीमेल वार्ड जैसी जरूरी सुविधाएं भी या तो नहीं हैं या नाकाफी हैं। इसके बाद नेशनल मेडिकल कमीशन ने पाया कि संस्थान अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन नियमों के तहत न्यूनतम जरूरतें पूरी करने में नाकाम रहा। इसलिए मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने कमीशन के चेयरमैन की मंजूरी से मान्यता तुरंत वापस लेने का आदेश दिया। कांग्रेस के स्टूडेंट विंग NSUI के नेशनल प्रेसिडेंट रहे एडवोकेट फिरोज खान कहते हैं, ‘मेडिकल कॉलेज बंद होने से जम्मू-कश्मीर के स्टूडेंट्स का बड़ा नुकसान हुआ है। हेल्थ मिनिस्ट्री और नेशनल मेडिकल कमीशन ने कॉलेज को मान्यता दी थी। इसे कैसे और क्यों रद्द किया गया। अगर इसे माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन घोषित करना था, तो श्राइन बोर्ड को हिंदू-मुस्लिम बंटवारा करने के बजाय इसके लिए अप्लाई करना चाहिए था।’ ..........................................ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंदिल्ली के 300 घर यूपी सरकार ने क्यों सील किए, लोग बोले- दिल्ली की CM कहां 32 साल की शबाना का मकान 15 दिसंबर से सील है। शबाना दिल्ली के ओखला में रहती हैं। उनका घर आली गांव की मस्जिद कॉलोनी के 300 मकानों में से एक है, जिसे यूपी के सिंचाई विभाग ने सील कर दिया है। शबाना की तरह कॉलोनी के बाकी परिवार भी सड़क पर रह रहे हैं। इन लोगों को दिल्ली सरकार से शिकायत है क्योंकि इनके पास आधार और वोटर आईडी दिल्ली की ही हैं। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 14 Jan 2026 5:03 am

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव तो होगा विनाशकारी परिणाम: कतर

कतर ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने से इस क्षेत्र को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं

देशबन्धु 14 Jan 2026 4:20 am

पेरिस की सड़कों पर 350 ट्रैक्टर, किसानों का ईयू-मर्कोसुर समझौते के खिलाफ गुस्सा

फ्रांस के किसानों ने पेरिस में लगभग 350 ट्रैक्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किया

देशबन्धु 14 Jan 2026 4:00 am

DNA: ईरान में अधिकारियों के घर क्यों लगा रेड क्रॉस? खामेनेई की खूंखार फोर्स के खिलाफ साइकोलॉजिकल वॉरफेयर

DNA: क्या आप जानते हैं कि खलीफा को अपने समर्थकों की फौज को सड़कों पर उतारने की जरूरत क्यों पड़ी. मोहरिब की घोषणा क्यों करनी पड़ी, क्योंकि खलीफा की सबसे खतरनाक फौज इस वक्त खौफ में है. कल तक खलीफा के जो कमांडर ईरान की क्रांति के बीच कत्ल की इबारत लिख रहे थे. अब उनके खिलाफ ऑपरेशन रेड क्रॉस शुरू कर दिया गया है. ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने अब एक नया मोड़ ले लिया है.

ज़ी न्यूज़ 14 Jan 2026 12:31 am

शी चिनफिंग ने अधिक ऊंचे मापदंडों और ठोस कदमों से पार्टी के सख्त शासन पर बल दिया

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी के महासचिव, राष्ट्रपति और केंद्रीय फौजी आयोग के अध्यक्ष शी चिनफिंग ने मंगलवार को पेइचिंग में 20वें सीपीसी केंद्रीय अनुशासन निरीक्षण आयोग के पांचवें पूर्णाधिवेशन पर महत्वपूर्ण भाषण दिया

देशबन्धु 13 Jan 2026 11:20 pm

अफ्रीकी देशों का चीनी विकास एक्सप्रेस पर सवार होने का स्वागत करता है चीन: वांग यी

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी अफ्रीका यात्रा समाप्त करने के वक्त चीनी मीडिया को एक साक्षात्कार दिया

देशबन्धु 13 Jan 2026 11:00 pm

'उन्होंने यह बेहद बहादुरी से किया...,' जंग के समय PM मोदी की यूक्रेन यात्रा से गदगद कीव, क्या अब जेलेंस्की आएंगे भारत?

Volodymyr Zelenskyy India visit: यूक्रेन ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की जल्द ही भारत का दौरा करेने वाले हैं. इसको लेकर कीव व्यापार और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जॉइंट कमीशन की बैठक की योजना बना रहा है.

ज़ी न्यूज़ 13 Jan 2026 7:44 pm

Iran Unrest: ईरान में कई शहरों में दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन, 2,000 मौतों का दावा

इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत ईरान की खराब आर्थिक स्थिति के कारण हुई। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, मुद्रा की गिरती कीमत और रोजमर्रा की जरूरतों की कमी से आम जनता में गुस्सा लंबे समय से पनप रहा था।

देशबन्धु 13 Jan 2026 7:06 pm

जापान की राजकुमारी काको की बना दी बिकिनी इमेज, ग्रोक AI के कांड को 15 मिलियन लोगों ने देखा; क्या बोले मस्क?

दुनिया के सबसे बड़े उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी xAI का चैटबॉट ग्रोक फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है. इस चैटबॉट को मलेशिया और इंडोनेशिया में बैन कर दिया गया है. दावा किया जा रहा है कि xAI का चैटबॉट महिलाओं और बच्चों को अनड्रेस कर रहा है. इसके बाद एक नही बहस छिड़ गई है.

ज़ी न्यूज़ 13 Jan 2026 7:00 pm

20 बरस की राजकुमारी 150 साल के बाद बनने जा रही स्पेन की रानी, आखिर कौन हैं लियोनोर?

Spain queen: स्पेन में ऐसा कानून है जिसका पालन सिंहासन के उत्तराधिकारी को करना पड़ता है. कानून के अनुसार भावी उत्तराधिकारी को सेना, नौसेना और वायुसेना का सैन्य प्रशिक्षण हासिल करना जरूरी होता है.

ज़ी न्यूज़ 13 Jan 2026 5:51 pm

1,469 हीरे... 36 पन्ना... 105 मोती और फ्रांस के कारीगर, ईरान की महारानी फराह पहलवी की ताज की अनसुनी कहानी; सुर्खियों में क्यों है?

ईरान में इस समय बहुत बड़ा प्रदर्शन चल रहा है. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूटा है. इस बीच ईरान की महारानी फराह पहलवी की ताज की चर्चा खूब हो रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि वह मुस्लिम दुनिया में कहीं भी ताज पहनने वाली पहली महिला भी थीं.

ज़ी न्यूज़ 13 Jan 2026 5:06 pm

लंदन में नाबालिग सिख लड़की का यौन शोषण, 200 सिखों ने घेरा डालकर पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग से छुड़ाया

आरोप है कि एक कथित पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर अगवा किया और एक फ्लैट में बंधक बनाकर कई लोगों से दुष्कर्म कराया। यह घटना सामने आने के बाद इलाके में तनाव फैल गया और सिख समुदाय के लोगों ने आरोपियों के फ्लैट के बाहर कई घंटे तक प्रदर्शन किया।

देशबन्धु 13 Jan 2026 4:47 pm

बांग्लादेश में फरवरी चुनाव से पहले यूनुस के राज में खेली जा रही 'खून की होली'? टारगेट किलिंग और गोलियों की बौछार से उम्मीदवार कांप रहे हैं!

Bangladesh parliamentary election:बांग्लादेश में फरवरी 2026 के संसदीय चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक हिंसा तेज हो गई है. पिछले साल राजनीतिक झड़पों में 100 से ज्यादा मौतें हुईं, कई उम्मीदवारों की हत्या हो चुकी है. अवैध हथियारों का बोलबाला है, पुलिस 'ऑपरेशन डेविल हंट फेज-2' चला रही है लेकिन डर कम नहीं हो रहा. उम्मीदवार और वोटर दोनों सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. जानें पूरी रिपोर्ट.

ज़ी न्यूज़ 13 Jan 2026 2:46 pm

कोर्ट के निर्देश की अनदेखी पड़ी भारी! निर्वासित भारतीय को वापस बुलाने पर अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला

Indian deportation case USA: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने अपने तरह का एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे एक भारतीय नागरिक को फिर से अमेरिका वापस लाने की व्यवस्था करें, जिसे अदालत के साफ आदेश के बावजूद भारत भेज दिया गया था. जज ने फैसला सुनाया कि डिपोर्टेशन गैर-कानूनी था और न्यायिक अधिकार का उल्लंघन था.

ज़ी न्यूज़ 13 Jan 2026 1:04 pm

24 साल की उम्र में डिमेंशिया, ब्रिटेन के सबसे युवा मरीज ने खोले बीमारी के रहस्य

इंग्लैंड के नॉरफ़ोक निवासी आंद्रे यारहम को ब्रिटेन का सबसे युवा डिमेंशिया पीड़ित माना जाता है। हाल ही में केवल 24 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उन्हें महज़ 22 वर्ष की आयु में डिमेंशिया का औपचारिक निदान मिला था।

देशबन्धु 13 Jan 2026 12:57 pm

बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या: 23 दिन में 7 हिंदुओं का मर्डर

समीर कुमार दास की हत्या बांग्लादेश में बीते 23 दिनों के दौरान हिंदू समुदाय से जुड़ी सातवीं मौत की घटना है। इससे पहले 5 जनवरी को नरसिंदी जिले में 40 वर्षीय हिंदू दुकानदार शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी।

देशबन्धु 13 Jan 2026 12:10 pm

Money Heist जैसा प्‍लान! 180 करोड़ का गोल्‍ड चोरी, कनाडा पुलिस ने भारतीय को किया अरेस्‍ट

gold heist project 24k: कनाडा की पील पुलिस ने देश की सबसे बड़ी सोने की चोरी, प्रोजेक्ट 24K, में शामिल आरोपी अर्सलान चौधरी को गिरफ्तार किया है. अन्य आरोपी भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, जबकि एक मुख्य आरोपी भारत में है.

ज़ी न्यूज़ 13 Jan 2026 10:36 am

वेंस और रुबियो ने सर्जियो गोर को दी बधाई, भारत में संभाला अमेरिकी दूत का पद

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से सर्जियो गोर को बधाई दी है

देशबन्धु 13 Jan 2026 10:13 am