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300 अरब डॉलर की फंडिंग, प्रतिबंध हटाना, होर्मुज से 60 दिनों तक टोल फ्री ट्रांजिट, जानें यूएस-ईरान डील में और क्या-क्या है?

वाशिंगटन, 18 जून (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहे संघर्ष और तनाव को खत्म करने के लिए गुरुवार को समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। इस समझौते का मकसद दोनों पक्षों के बीच सीजफायर को बढ़ाना और होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग ट्रांजिट फिर से शुरू करना है।

देशबन्धु 18 Jun 2026 2:59 pm

ईरान के सामने ट्रम्प का ‘सरेंडर’:110 दिन, 122 लाख करोड़ का नुकसान; न सत्ता बदली, परमाणु पर भी पुरानी वाली डील

27 फरवरी 2026; ओमान के विदेश मंत्री अल-बुसैदी ने टीवी पर आकर कहा- ईरान अपना पूरा एनरिच्ड यूरेनियम खत्म करने को राजी है। अल-बुसैदी ही अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील की मध्यस्थता कर रहे थे। वो बोले- अगर कूटनीति को थोड़ी और जगह दें, तो समझौता हमारी पहुंच में है। लेकिन उसी रात Mar-a-Lago में ट्रम्प का फोन बजा। दूसरी तरफ इजराइली पीएम नेतन्याहू थे। रॉयटर्स ने 3 सूत्रों के हवाले से लिखा- नेतन्याहू के पास ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के घर पर मीटिंग का एक मजबूत खुफिया इनपुट था। नेतन्याहू ने कहा- खामेनेई समेत ईरानी लीडरशिप को एक झटके में खत्म करते ही ईरानी जनता खुद 1979 की इस्लामिक सत्ता को उखाड़ फेंकेगी। हमारे लिए ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, मिसाइल प्रोग्राम और उसके प्रॉक्सीज को खत्म करने का यही मौका है। ट्रम्प राजी हो गए। 28 फरवरी की सुबह ईरान पर बम गिरने लगे। अब 110 दिनों बाद 18 जून को ट्रम्प ने जंग खत्म करने के दस्तावेजों पर दस्तखत कर दिए हैं। अमेरिका के लिए ये डील उससे भी बुरी है, जो जंग शुरू होने के एक दिन पहले उसकी मेज पर थी। इस बीच दुनिया को लाखों करोड़ रुपए की चपत लग गई और 7 हजार से ज्यादा जानें गईं। ट्रम्प ने ईरान जंग के 4 घोषित लक्ष्य बताए थे… 1. ईरान में इस्लामिक सत्ता उखाड़ फेंकना अमेरिका-इजराइल ने अपने पहले ही हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दिया। उसी दिन ट्रम्प ने कहा- ‘ईरान के महान लोगों, आपकी आजादी का समय आ गया है... जब हम अपना काम पूरा कर लेंगे, तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लीजिए।’ लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टा सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान के लोग एकजुट हो गए। खामेनेई के बेटे मुजतबा को नया सुप्रीम लीडर बना दिया। इसलिए ईरान अब भी धार्मिक शासन वाला अमेरिका-विरोधी देश बना हुआ है। यानी ट्रम्प का पहला ऑब्जेक्टिव फेल। 2. ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म करना ट्रम्प ने कहा था, 'अमेरिका की नीति रही है कि इस आतंकवादी रिजीम के पास कोई परमाणु हथियार न हो।' अमेरिका चाहता था कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह बंद कर दे और उसके पास जितना संवर्धित यूरेनियम है, अमेरिका को सौंप दे। ट्रम्प से डील में ईरान ने कहा है कि वह कभी परमाणु हथियार न तो बनाएगा और न ही खरीदेगा। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। ईरान ने पहली बार 1970 में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर करते समय यही वादा किया था। 2015 में अमेरिका के ओबामा शासन से हुए परमाणु समझौते में भी उसने यही वादा दोहराया था। ट्रम्प के समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को ‘डाउन-ब्लेंड’ करे। यानी उसे कम शक्तिशाली बनाए। इसमें करीब 970 पाउंड ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक संवर्धित किया जा चुका है। यह परमाणु बम बनाने के स्तर के काफी करीब है। ट्रम्प की डील ईरान को यह संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर भेजने या पूरी तरह छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करती। हालांकि 2015 के समझौते में उसने अपने लगभग 97% परमाणु भंडार को रूस भेज दिया था। इस वजह से कई सवाल अभी भी अगले दौर की बातचीत के लिए बचे हैं। जैसे-• क्या ईरान यह परमाणु सामग्री अपने पास रख सकेगा?• क्या उसे अपने प्रमुख परमाणु संयंत्र बंद करने होंगे?• क्या उसे नए परमाणु ईंधन को संवर्धित करने की अनुमति होगी? समझौते में ‘ईरान की परमाणु जरूरतों’ का जिक्र है। मसलन- बिजली उत्पादन और ऊर्जा जरूरतों के लिए। यही वह रास्ता है जिससे ईरान भविष्य में अपनी परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म होने से बचाए रखना चाहता है। यानी ट्रम्प का ये ऑब्जेक्टिव भी पूरी तरह सफल नहीं हुआ। 3. ईरान के प्रॉक्सी संगठनों को खत्म करना इजराइल और अमेरिका लेबनान में हिजबुल्ला, यमन में हूती और फिलिस्तीन में हमास जैसे ईरान के प्रॉक्सी संगठनों को खत्म करना चाहते थे। ईरान-अमेरिका जंग में सबसे ज्यादा मौतें लेबनान में हुई है। इजराइल ने दक्षिण लेबनान में करीब 2,000 वर्ग किमी की जमीन पर कब्जा कर लिया है। इससे हिजबुल्ला काफी कमजोर हो गया, लेकिन खत्म नहीं हुआ। उसके पास अभी भी हथियार, जमीनी नेटवर्क है और शिया मुसलमानों का समर्थन है। ट्रम्प से समझौते में भी लेबनान का तीन बार जिक्र है और कहा गया है कि वहां भी कोई मिलिट्री ऑपरेशन नहीं होगा। ऐसे ही यमन में हूती अब भी सक्रिय हैं। हमास कमजोर हुआ है, पर खत्म नहीं। यानी ट्रम्प और नेतन्याहू का ये ऑब्जेक्टिव भी पूरा नहीं हुआ। 4. ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम खत्म करना ट्रम्प ने हमले की वजह बताते हुए कहा था, ‘ईरान के पास हमारे मिलिट्री बेसेस और यूरोप तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं। जल्द ही वो अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें भी बना लेंगे।’ अमेरिका-इजराइल ने ईरान के प्रमुख मिसाइल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया। जैसे- तेहरान के पास खोजिर मिसाइल कॉम्प्लेक्स, शाहरूद मिसाइल फैसिलिटी, पर्चिन सैन्य परिसर, हकीमीयेह मिसाइल सेंटर जैसे कई ठिकानों पर हमले कर भारी नुकसान किया। 50 से ज्यादा मिलिट्री बेस को निशाना बनाया, ताकी मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता खत्म की जा सके। लेकिन 7 जून को इजराइल पर बैलेस्टिक मिसाइल हमले से साफ हो गया कि ईरान की क्षमता खत्म नहीं हुई है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान ने कई ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल फैसिलिटी को हुआ नुकसान सुधारना भी शुरू कर दिया है। समझौते में मिसाइल प्रोग्राम का जिक्र तक नहीं है, यानी ये ऑब्जेक्टिव भी पूरा नहीं हुआ। होर्मुज स्ट्रेट खुलने को ट्रम्प बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं, जो जंग के पहले खुला ही हुआ था। डील में एक प्रावधान है कि अब ईरान-ओमान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से ‘फीस’ वसूल सकता है। इसके अलावा डील में ईरान को हर्जाने के तौर पर 28 लाख करोड़ रुपए दिए जाने का भी प्रावधान है। ईरान: 307 अस्पतालों समेत 1.22 लाख इमारतें ढही इजराइल और खाड़ी देशों ने भी जंग की भारी कीमत चुकाई है… ग्लोबल इकोनॉमी को 122 लाख रुपए का नुकसान इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक एंड पीस यानी IEP के मुताबिक अमेरिका-ईरान जंग से ग्लोबल GDP को 1.3 ट्रिलियन डॉलर, यानी करीब 122 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। ये ग्लोबल GDP का 0.6% है। पहली नजर में यह नुकसान उतना बड़ा नहीं लगता। क्योंकि 2020में कोरोना के दौरान भी ग्लोबल GDP 3.1% सिकुड़ गई थी। हालांकि कोरोना का असर पुरानी दुनिया पर पड़ा था। ईरान जंग की सबसे बड़ी मार कुछ चुनिंदा देशों और उन लोगों पर पड़ेगी, जिनकी आय पहले से कम है और जो ऐसे झटकों को झेलने की स्थिति में नहीं हैं। ऑर्गनाइजेशन ऑफ इकोनॉमिक कॉपरेशन एंड डेवलपमेंट के मुताबिक, 2025 में ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ 3.4% थी, जो 2026 में घटकर 2.8% ही रह जाएगी। ईरान जंग से भारत पर 6 बड़े असर पड़े… 1. क्रूड ऑयल महंगा होने से इम्पोर्ट बिल बढ़ा: जंग शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरेल थी। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची। इससे मार्च में भारत का इम्पोर्ट बिल 15.22% बढ़ गया। भारत में पेट्रोल-डीजल 7.5 रुपए, घरेलू गैस की कीमत 89 रुपए और कमर्शियल गैस 1,350 रुपए महंगा हुआ। 2. विदेशी मुद्रा भंडार घटा, रुपया कमजोरः जंग शुरू होने से पहले भारत का फॉरेन रिजर्व 7.28 लाख डॉलर था, जो जून की शुरुआत में घटकर 6.82 लाख डॉलर रह गया है। फरवरी में 1 डॉलर की कीमत करीब 90 रुपए थी। मई में यह 96.8 के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई। अभी यह 94.5 है। 3. GDP की रफ्तार धीमी हुईः 2025 में जहां GDP 7% बढ़ी थी, 2026 में इसके 6.6% रहने का अनुमान है। 4. थोक महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादाः फरवरी 2026 में भारत में खुदरा महंगाई दर 3.21% थी, जो मई में बढ़कर 3.93% तक पहुंच गई है। थोक महंगाई दर फरवरी में 2.28% से मई में 9.68% पर पहुंच गई है, जो साढ़े तीन साल में सबसे ज्यादा 5. उर्वरकों के उत्पादन में गिरावट: भारत खाड़ी देशों से करीब 40% यूरिया और 60% LNG इम्पोर्ट करता है। फर्टिलाइजर बनाने के लिए यह दोनों जरूरी हैं। इनकी सप्लाई प्रभावित होने से मार्च 2025 की तुलना में मार्च 2026 में फर्टिलाइजर प्रोडक्शन 24.6% गिर गया। 2.5 मिलियन टन प्रति माह रहने वाला घरेलू यूरिया का प्रोडक्शन मार्च 2026 में करीब 1.5 मिलियन टन रह गया, यानी की 40% गिरावट। 6. भारतीय मारे गए, डिप्लोमेटिक नुकसानः ईरान और अमेरिका में सीजफायर कराने में पाकिस्तान, कतर, ओमान जैसे देशों मध्यस्थ की भूमिका निभाई। ईरान रूस और चीन से लगातार संपर्क में रहा। इस पूरे शांति समझौते में भारत की भूमिका कहीं नहीं दिखी। अमेरिका ने भारत के बैकयार्ड में ईरानी जहाज IRIS देना को डुबा दिया। 8 से 11 जून के बीच अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में भारतीय क्रू वाले 3 जहाजों पर हमला किया। इसमें 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई। **** ये खबर भी पढ़िए… अमेरिका ने ईरान जंग में हर मिनट ₹6 करोड़ लुटाए:क्या 28 लाख करोड़ हर्जाना और देना पड़ेगा; आखिर ट्रम्प को कितनी महंगी पड़ी ये जंग अमेरिका को ईरान जंग का हर सेकेंड 10 लाख रुपए का पड़ा। रोजाना करीब 9,400 करोड़ रुपए। 107 दिन बाद जंग खत्म करके भी मुसीबत नहीं टली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को हर्जाने के तौर पर 28 लाख करोड़ रुपए और देने पड़ सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 18 Jun 2026 1:01 pm

ईरान समझौते पर अमेरिका में सियासी बवाल, ट्रंप को अपनी ही पार्टी में झेलना पड़ रहा विरोध

समझौते की सबसे चर्चित शर्तों में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के संभावित पुनर्निर्माण फंड का प्रावधान शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा ईरान को तेल निर्यात की अनुमति, प्रतिबंधों में ढील और भविष्य में जमे हुए फंड जारी करने की संभावना ने भी आलोचना को जन्म दिया है।

देशबन्धु 18 Jun 2026 12:16 pm

जर्मनी की एयरोस्पेस इंडस्ट्री में युवा बना सकते हैं करियर

बर्लिन में एयरोस्पेस शो ‘आईएलए बर्लिन’ में देश-विदेश से आई कंपनियों ने हाई-टेक ड्रोन और मिसाइलों की नुमाइश की. इस शो की खास बात यह भी रही कि यहां युवाओं के लिए रोजगार के कई मौके दिखे

देशबन्धु 18 Jun 2026 10:09 am

ईरान युद्ध के लक्ष्यों में डॉनल्ड ट्रंप को क्या हासिल हुआ

ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों का उत्साह बढ़ाते डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के कुछ लक्ष्य तय किए थे. शुरुआती समझौता हो जाने के बाद सवाल पूछे जा रहे हैं कि उन लक्ष्यों में से कितना कुछ हासिल हुआ

देशबन्धु 18 Jun 2026 10:07 am

ईरान समझौते को ट्रंप ने बताया ऐतिहासिक सफलता, बोले- पीएम मोदी ने भी क‍िया स्‍वागत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए समझौते को एक ऐतिहासिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से मौजूदा संघर्ष खत्म हो गया है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल गया है और यह सुनिश्चित हो गया है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।

देशबन्धु 18 Jun 2026 8:00 am

भारतीय बेहद प्रतिभाशाली: ट्रंप ने की खुलकर तारीफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नेअमेरिका में भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए अवसरों का समर्थन किया। उन्होंने भारतीयों को 'बहुत प्रतिभाशाली' बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रोजगार के क्षेत्र में अच्छे संबंध रहे हैं।

देशबन्धु 18 Jun 2026 5:09 am

ब्लैकबोर्ड-तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाना पड़ा:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI भरने में जा रही

एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' वहां बैठे दूसरे शख्स ने कहा कि- ‘ऑडिशन के लिए आने से पहले अपना फिगर देखा नहीं था। पहले अपना फिगर ठीक कराइए, फिर आइएगा।’ ये सब सुनते ही मुझे ऐसा लगा कि मानो ऑडिशन नहीं, तमाशा चल रहा हो। मुंबई आने के बाद मायरा खन्ना एक साल तक ये ताने सुनती रहीं। कास्टिंग एजेंट, फोटोग्राफर, कोऑर्डिनेटर और ऑडिशन लेने वाले लोग उन्हें ये कहकर रिजेक्ट कर देते कि- आप तो फ्लैट हैं। आखिरकार उन्हें कर्ज लेकर 'ब्रेस्ट इम्प्लांट' करवाना पड़ा। आज भी उसकी ईएमआई भर रही हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अब वही लोग कहने लगे हैं कि- 'नकली शरीर बनवा लिया है।’ ब्लैकबोर्ड में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं मायरा खन्ना की कहानी, जिन्हें बॉडी शेप की वजह से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम मिलना मुश्किल हो गया। तानों से परेशान होकर उन्होंने ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया… चिलचिलाती धूप और उमस के बीच मैं मुंबई के वर्सोवा की गलियों में हूं। इन्हीं गलियों में किसी एक मकान में मायरा खन्ना रहती हैं। भटकते-भटकते एक छोटी-सी दुकान के सामने पहुंची। मायरा ने यहीं इंतजार करने को कहा है। पास में मछली बाजार है। मछलियों की तेज गंध और समुद्र से आती गर्म हवाओं के बीच खड़े रहना आसान नहीं है। कुछ देर बाद मायरा आईं और मुझे अपने घर लेकर चल पड़ीं। मायरा का घर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के स्ट्रगलिंग एक्टर की तरह है। कमरे में सिर्फ दो कुर्सियां और एक कोने में दीवान रखा है। दीवारों पर सादे सा रंग। न कोई फैंसी वॉलपेपर और न ही कोई सजावट का सामान। यहां तक की घड़ी भी नहीं है। कोने में छोटा-सा मंदिर है, जिसमें भगवान गणेश की मूर्ति रखी है। मैंने मायरा के सामने जैसे ही ब्रेस्ट इंप्लांट का नाम लिया वो फौरन बोल पड़ीं- नहीं करवाती तो क्या करती मैडम। साल भर से काम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटकर, ऑडिशन देकर थक चुकी थी। हर जगह बस एक जवाब मिलता- ‘सॉरी, यू आर फ्लैट! आप इस रोल के लिए फिट नहीं हैं।’ मायरा बताती हैं- मैं गुड़गांव में मिस नॉर्थ इंडिया चुनी गई थी। इसके बाद, दोस्तों ने मॉडलिंग में किस्मत आजमाने को कहा। काफी कोशिशों के बाद, गुड़गांव में मुझे मॉडलिंग के छोटे-मोटे मौके मिले। इस इंडस्ट्री में पैर जमाने के लिए मुंबई जाना जरूरी था, सो एक दिन टिकट कटाकर मैं आ गई। हालांकि, यहां रहना आसान नहीं है। शुरुआती दिनों में घर से पैसे मंगवाने पड़े। तब भी पैसे कम पड़ने लगे, तो टेलीकॉलर की नौकरी की। धीरे-धीरे जूनियर आर्टिस्ट के रूप में मौका मिलना शुरू हुआ और यही मेरी पहचान बनने लगा। हालांकि, ये वो काम नहीं था, जिसकी तलाश में मुंबई आई थी। इस काम के नाम पर मैं केवल भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाती थी। कभी भीड़ के साथ नारे लगाने का रोल, कभी रेस्तरां में हीरो-हीरोइन के पीछे बैठी बैकग्राउंड ऑडियंस का रोल। कई बार तो किसी फिल्मी सीन में ऑफिस का स्टाफ भी बन जाती थी। इस काम के बदले 700 से 1000 रुपए ही मिलते थे। महीने के हिसाब से देखें तो 30 हजार रुपए। मुंबई जैसे महंगे शहर में इतने पैसों से जिंदगी काटना आसान नहीं था। उसपर भी ये काम रोज नहीं मिलता था। इस तरह के काम से मेरी अपनी कोई पहचान नहीं बन पा रही थी। मैं बड़े बैनर्स के साथ काम करना चाहती थी, वेबसीरीज करना चाहती थी। उसके लिए कई कास्टिंग एजेंट्स, प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स के दफ्तरों के चक्कर काटे। आखिरकार मशहूर टीवी शो 'साथ निभाना साथिया' में एक छोटा रोल मिला। तब लगा कि शायद अब राह आसान हो जाएगी। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। इसके बाद भी जब किसी प्रोड्यूसर्स से मिलने जाती तो एक्टिंग से ज्यादा मेरे जिस्म पर बात करते। सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन इशारों-इशारों में अक्सर कहते- 'आगे बढ़ना है, तो शरीर ठीक कर लीजिए।’ यहां 'ठीक' करने का मतलब था कि शरीर का पूरा पैकेज इस इंडस्ट्री के स्टैंडर्ड के मुताबिक बनाना। कमर, हिप्स और सबसे जरूरी ब्रेस्ट, एकदं परफेक्ट रखना। मॉडलिंग और एक्टिंग की दुनिया में इसे 'आवरग्लास बॉडी शेप' कहते हैं। यह बताते हुए मायरा अचानक चुप हो जाती हैं। फिर घबराकर पूछती हैं- 'मैडम, आप स्टोरी में मेरा चेहरा तो नहीं दिखाएंगी ना?’ मैंने फौरन जवाब दिया- ‘नहीं, बिल्कुल नहीं। आपकी पहचान किसी हालत में जाहिर नहीं होगी।’ उसके बाद मायरा आगे बताना शुरू करती हैं- इस तरह जहां भी काम मांगने जाती, वहां एक ही बात सुनने को मिलती- ‘मैडम, बड़े काम के लिए आवरग्लास बॉडी शेप बनाना होगा।’ ये सब कहने की बात नहीं है, सुंदरता के तय पैमानों के हिसाब से ही महिलाओं को तवज्जो दी जाती है। यही वजह है कि एक के बाद एक कई प्रोजेक्ट मेरे हाथ से निकलते गए। जब भी कोई ऑफर आता तो अपना एक प्रोफाइल कास्टिंग एजेंट्स को भेजना पड़ता है। इसमें नाम, उम्र और बॉडी मेजरमेंट्स सब लिखना जरूरी होता है। मुझे तो प्रोफाइल देखकर ही रिजेक्ट कर देते थे, क्योंकि मेरा बॉडी शेप उनके तय पैमानों में फिट नहीं बैठता था। खासकर ब्रेस्ट… परखा जाता है कि शरीर पर कोई दाग-धब्बा या स्ट्रेच मार्क तो नहीं है। शरीर पूरी तरह टोंड होना चाहिए। फ्रंट, बैक और साइड, हर एंगल से फिटनेस देखी जाती है। एक्स्ट्रा चर्बी, सैल्यूलाइट या डबल चिन जैसी मामूली चीजों के लिए भी कोई जगह नहीं होती। मायरा अफसोस जाहिर करते हुए कहती हैं- शरीर के दूसरे हिस्सों को वर्कआउट और डाइट की मदद से टोंड किया जा सकता है, लेकिन ब्रेस्ट के लिए कोई वर्कआउट नहीं है। इसके लिए ब्रेस्ट इम्प्लांट ही एकमात्र जरिया है। एकबार मैंने मैगजीन के लिए बिकिनी शूट में किस्मत आजमाने की सोची, लेकिन उसके लिए तो सबसे पहले बॉडी शेप देखा जाता है। लुक टेस्ट होता है। जिसमें कैमरा और मेकर्स की नजरें शरीर के एक-एक हिस्से को बेहद बारीकी से खंगालती हैं। कुछ ऑडिशन और फिटिंग सेशन में तो असहज करने वाले फिजिकल टेस्ट भी किए गए। लोग पूरी बॉडी को छूकर चेक करते हैं कि फिगर परफेक्ट है या नहीं। ऐसे ही एक दूसरे ऑडिशन की बात बताती हूं। वहां मुझे एक कमरे के बीचोबीच खड़ा कर दिया गया। सामने तीन लोग बैठे थे। उनमें से एक ने मेरी प्रोफाइल शीट देखी और फिर मेरी तरफ देखकर कहा- 'यहां तो साइज 28 लिखा है?' दूसरे ने हंसते हुए कहा- ‘जरा कन्फर्म कर लो, कहीं मेजरमेंट गलत न लिख दिया हो।’ इसके बाद, एक महिला स्टाफ मुझे साइड में ले गईं और मेरी फिटिंग चेक करने लगी। कुछ मिनट बाद उन्होंने कहा- 'यह रोल शायद आपके लिए नहीं है।' ब्रेस्ट छूकर कहा- ‘आप हमारे स्टैंडर्ड को पूरा नहीं करतीं’ सबसे ज्यादा दुख तब हुआ, जब दुबई की एक मैगजीन के लिए मिलने वाला बिकिनी शूट मेरे हाथ से निकल गया। वहां ऐसे शूट के अच्छे पैसे मिलते हैं। वहां मेरा बेहद निजी और असहज करने वाला शारीरिक टेस्ट किया गया। एक शख्स ने मुझे गलत तरीके से छूते हुए कहा- ‘आप हमारे स्टैंडर्ड पर फिट नहीं। आपके बारे में क्या ही बात करूं?’ कुछ देर बाद उसने कहा- आप रिजेक्ट हो गई हैं। उस दिन बहुत बुरा लगा। जब मैं वहां से बाहर निकली, तो समझ आ गया था कि मुझे शरीर की वजह से ही बार-बार रिजेक्ट किया जा रहा है। काम न मिलने से गुजारा करना मुश्किल होने लगा था। तब मैंने कुछ लोगों से सलाह ली और ब्रेस्ट इम्प्लांट कराने का फैसला कर लिया। मायरा बताती हैं- ‘मैं ब्रेस्ट सर्जरी कराने एक क्लीनिक पहुंची। वहां पहले ब्लड से जुड़े कई टेस्ट किए गए, फिर हार्ट से जुड़े जरूरी टेस्ट हुए। उसके बाद सर्जरी की गई। सर्जरी वाले दिन ही शाम को मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टर ने तीन महीने आराम की सलाह दी। भारी सामान उठाने और वर्कआउट से मना कर दिया। इस सर्जरी पर करीब दो लाख रुपए का खर्च आया। इतने पैसे मेरे पास नहीं थे। कर्ज लेकर इसे कराया। अब जो भी कमाती हूं ईएमआई भर देती हूं।' मायरा कहती हैं- पहले ही पैसों की तंगी थी, ऊपर से दो नए खर्च और जुड़ गए। पहला- अब खास तरह की स्पोर्ट्स ब्रा पहननी होती थी। यह 5 से 10 हजार रुपए में आती है। दूसरा- हर 6 महीने में मेमोग्राफी यानी जांचा जाता है कि ब्रेस्ट के अंदर डाला गया सिलिकॉन लीक तो नहीं हो रहा या फट तो नहीं गया है। इस काम में 3 से 4 हजार रुपए लग जाते हैं। अब मुझे डाइट का भी खास ख्याल रखना होता है। बॉडी में जरा सा भी फैट बढ़ा तो सारा पैसा पानी में चला जाएगा। इसलिए हाई प्रोटीन डाइट लेती हूं। जिसका खर्च महीने में लगभग 30 हजार के आसपास पड़ता है। हालांकि, ब्रेस्ट इम्प्लांट से मुझे फायदा हुआ। अब काम मिलने लगा। एक हॉरर फिल्म कुछ ही दिनों में रिलीज होने वाली है। उसमें मुझे रोल मिला है। हालांकि, अब कई बार ये भी सुनने को मिलता है कि नकली शरीर है। सिलिकॉन वाला शरीर है। डॉक्टर बोले- शारीरिक बनावट शादी में भी समस्या इससे जुड़ी बातचीत के लिए अब मैं ब्रेस्ट इम्प्लांट सर्जरी के एक्सपर्ट मुंबई के अंधेरी स्थित एसए एस्थेटिक्स क्लीनिक पहुंची। यहां मेरी मुलाकात प्लास्टिक सर्जन और कंसल्टेंट डॉ. समीर अहीरे से हुई। समीर बताते हैं- ‘बीते 10 साल में ब्रेस्ट इम्प्लांट सर्जरी 56 फीसदी बढ़ी है। पहले यह सर्जरी मॉडल और एक्ट्रेस ही करवाती थीं, लेकिन अब मिडिल क्लास परिवारों की महिलाएं भी कराने लगी हैं।' वो दावा करते हैं- कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के अकोला की एक 18 साल की लड़की का ब्रेस्ट इम्प्लांट किया था। परिवार का कहना था कि उसके शरीर की वजह से शादी नहीं हो रही थी। वह बताते हैं- हमारे पास तो एक ऐसी महिला आई, जो दूसरी शादी के लिए ब्रेस्ट इंप्लांट करवाना चाहती है। इसके अलावा, कुछ महिलाएं तानों से परेशान होकर ऐसा करती हैं। उन्होंने ये भी बताया कि कुछ महिलाएं हैवी ब्रेस्ट को कम कराने के लिए भी आती हैं। गुड़गांव में आर्टेमिस हॉस्पिटल में कॉस्मेटिक एंड प्लास्टिक सर्जरी के हेड डॉ. प्रदीप कुमार सिंह बताते हैं- ब्रेस्ट इम्प्लांट सर्जरी में इन्फेक्शन के खतरे भी बढ़ जाते हैं। कई बार सूजन की शिकायतें आती हैं। मेरे पास महिलाएं सुंदर दिखने के लिए ब्रेस्ट सर्जरी कराने आती हैं। मेरी एक क्लाइंट के रिश्तेदार उसे तरह-तरह के ताने देते थे। उसका जिंदा रहने का कॉन्फिडेंस ही चला गया था। जबकि वह एक अमीर घर से थी। उसके बाद वह मेरे पास ब्रेस्ट इम्प्लांट कराने आई थी। इस तरह कई महिलाओं को शरीर की बनावट और अपने ब्रेस्ट को लेकर सोशल टैबू झेलना पड़ता है। हालांकि, प्लास्टिक सर्जन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेस्ट साइज किसी महिला की सुंदरता, प्रतिभा या आत्मविश्वास का पैमाना नहीं होता। बॉडी इमेज को लेकर सामाजिक दबाव और ऑनलाइन/ऑफलाइन बॉडी शेमिंग कई महिलाओं को कॉस्मेटिक सर्जरी की ओर धकेलती है। नोट- मायरा खन्ना बदला हुआ नाम है।

दैनिक भास्कर 18 Jun 2026 4:51 am

21 गांव, 933 परिवार, दो राज्यों का दावा:गांववालों के पास दोनों के राशन और आधार कार्ड, एक राज्य का बताने पर गिरफ्तारी

ग्राम पंचायत: कोटियाराज्य: आंध्र प्रदेश या ओडिशा? जवाब आसान नहीं है। यहां लोगों के पास दोनों राज्यों के राशन कार्ड हैं। वोटर लिस्ट में नाम है। कई लोगों के पास दो-दो आधार कार्ड भी हैं। बिजली ओडिशा से आती है, जबकि मोबाइल नेटवर्क आंध्र प्रदेश का है। इसकी वजह कोटिया ग्राम पंचायत के 21 गांवों को लेकर 70 साल पुराना सीमा विवाद है। इन गांवों में रहने वाले 933 परिवारों और 4,430 लोगों पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश, दोनों दावा करते हैं। 26 अप्रैल को ओडिशा के अधिकारी कोटिया के अपर सेंबी गांव में जनगणना के लिए पहुंचे। गांव वालों ने ये कहते हुए विरोध किया कि वे आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। इसके बाद ओडिशा पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आंध्र प्रदेश से आए वकीलों ने उनकी जमानत कराई। ओडिशा ने स्कूल-आंगनवाड़ी बनवाई, पेंशन आंध्र प्रदेश की ज्यादा कोटिया ओडिशा के कोरापुट जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर है। सीमा विवाद के बारे में पूछने पर गांव के लोगों ने लगभग एक सा जवाब दिया, ‘हमारे कागज दोनों राज्यों के हैं।’ ये बात कैमरे पर दोहराने के लिए कहा, तो झिझकने लगे। कैमरा हटाते ही सुनील गमेल बोले, ‘हमें दोनों तरफ की योजनाओं का फायदा चाहिए। इसका नुकसान ये है कि हम खुलकर बोल नहीं सकते। ओडिशा के पक्ष में बोलेंगे, तो आंध्र वाले परेशान करेंगे। आंध्र का साथ दिया, तो ओडिशा प्रशासन परेशान करेगा।‘ कोटिया से करीब 10 किलोमीटर दूर फागुनसिनेरी गांव है। बोर्ड पर गांव का नाम तेलुगु में लिखा है। यहां मिले मालती कागज दिखाते हुए कहते हैं, 'मेरे पास दोनों राज्यों के आधार और राशन कार्ड हैं। पेंशन भी दोनों जगहों से मिलती है, लेकिन आंध्र प्रदेश सरकार हमारा ज्यादा ध्यान रखती है।' ‘आंध्र सरकार से बुजुर्गों को 4 हजार और दिव्यांगों को 6 हजार रुपए पेंशन मिलती है। ओडिशा में ये सिर्फ 1 हजार रुपए है। आंध्र प्रदेश में स्कूल जाने वाले बच्चों की मां को हर साल 13 हजार रुपए मिलते हैं, जबकि ओडिशा में ऐसी कोई योजना नहीं है।’ ‘ओडिशा सरकार पेंशन भले नहीं देती, लेकिन स्कूल-आंगनवाड़ी और अस्पताल उसी ने बनवाया है। आंध्रप्रदेश सरकार के बनवाए स्कूल कुछ ही गांवों में हैं। यहां से कोरापुट काफी दूर है, इसलिए जरूरी सामान खरीदने के लिए सरकी, तिलम या लांडा जाना पड़ता है। वो आंध्र प्रदेश में है और वहां तेलुगु ही बोलते हैं।’ इसी गांव में मिलीं तुलसी पांगी बिना कैमरे पर आए कहती हैं, ’मेरा 4 साल का बेटा ओडिशा की आंगनवाड़ी में जाता है, जबकि बड़ा बेटा तेलुगु मीडियम में पढ़ता है क्योंकि वहां सरकार पैसे देती है।’ ज्यादातर लोग तुलसी पांगी जैसे ही हैं, जो कैमरे पर बात नहीं करते, लेकिन कैमरा बंद करते ही सब बताने को तैयार थे। ‘ओडिशा से नाम कटवाया, आंध्र प्रदेश के साथ रहना चाहते हैं’ बातचीत में पता चला कि अपर सेंबी गांव 10 किलोमीटर दूर है, जहां जनगणना को लेकर विवाद हुआ था। यहीं ताड़िंगी पिलुकु मिले, जिन्हें जनगणना विवाद में गिरफ्तार किया गया था। पिलुकु खुद को आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले का बताते हैं। एक साल पहले तक उनके पास ओडिशा के पोटांगी ब्लॉक और कोरापुट जिले के कागज भी थे। अब वहां से नाम कटवा लिया है। गिरफ्तारी पर पिलुकु कहते हैं, ‘26 अप्रैल को ओडिशा पुलिस के कुछ जवान और तीन अधिकारी यहां जनगणना के लिए आए। हमने कहा कि हमारे ज्यादातर कागज आंध्र प्रदेश के हैं, इसलिए पहले वहां के अधिकारी सर्वे कर लें, फिर ओडिशा की बात करेंगे।’ ‘इसी बात पर हमारे खिलाफ केस दर्ज कर दिया। कहा कि हमने अफसरों के साथ मारपीट और बदसलूकी की, जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। गांववाले इसके गवाह हैं। अफसरों में सिर्फ पुरुष थे, लेकिन हम पर महिला अधिकारियों को भी परेशान करने का आरोप लगा दिया गया।’ ‘हम आंध्र के साथ जाना चाहते हैं, जबकि ओडिशा वाले उड़िया भाषा सीखने का दबाव बनाते हैं। उड़िया ना आने पर नौकरी नहीं मिलती। गांव के ज्यादातर लोगों ने ओडिशा से नाम कटवा लिया है। जिनका अब भी है, वो सिर्फ राशन के लिए कागज रखे हैं।’ ‘खुद को आंध्र का बताने वाले ओडिशा के अस्पताल में आ रहे’ गांव में हमें रंजीत पांगी मिले। वे कहते हैं, ‘आंध्र की तरफ लोग सिर्फ इसीलिए जाना चाहते हैं, क्योंकि वहां राशन और पेंशन ज्यादा मिलती है। ओडिशा 5 किलो चावल देता है, जबकि आंध्र प्रदेश 35 किलो। इसके अलावा सभी जरूरी काम ओडिशा सरकार ने किए हैं। आंध्र वाले भी उड़िया बोलने वालों को नौकरी नहीं देते और तेलुगु सीखने के लिए मजबूर करते हैं।’ पांगी बताते हैं, ‘कोटिया और आसपास के गांवों में ओडिशा सरकार के 25 स्कूल और 23 आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जबकि आंध्र सरकार के इक्का-दुक्का स्कूल हैं। अस्पताल एक भी नहीं है, जबकि ओडिशा सरकार 24 घंटे एंबुलेंस सेवा दे रही है।’ पांगी के साथ बैठे लोगों में एक शख्स ओडिशा सरकार के कर्मचारी हैं। वो कोटिया के अस्पताल में काम करते हैं। नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, 'खुद को आंध्र प्रदेश का बताने वाले भी इसी अस्पताल में आते हैं।' हालांकि, यहां मिले सभी लोगों के पास दोनों राज्यों के दस्तावेज हैं। ‘चर्च में सो रहे आंध्र के पुलिसकर्मी, ओडिशा का अपना थाना’ इसके बाद हम कोटिया पुलिस स्टेशन पहुंचे। यहां ओडिशा का अपना थाना है। थाना प्रभारी राजकुमार कहते हैं, ‘21 गांव में से 14 का झुकाव आंध्र की तरफ है। वहां के लोग तेलुगु बोलते हैं। आंध्र वालों ने गूगल पर भी कोटिया को अपना हिस्सा बता दिया है, लेकिन ये हमारा हिस्सा है।' वो आगे कुछ बोलते, इससे पहले सिविल ड्रेस में आए एक पुलिसकर्मी ने उड़िया में उनसे कुछ कहा। इसके बाद थाना प्रभारी ने बात करने से मना कर दिया। थाने से बाहर निकलने पर एक पुलिसकर्मी ने ऑफ द रिकॉर्ड बताया कि जनगणना विवाद के बाद आंध्र से कुछ पुलिसकर्मी यहां आए हैं। अभी वे अपर सेंबी के पास रह रहे हैं। हम आंध्र पुलिस को ढूंढते अपर सेंबी पहुंचे। गांव के सामने एक चर्च में दो लोग सोते मिले। पता चला कि ये आंध्र प्रदेश पुलिस से हैं। बिना कैमरे पर आए एक पुलिसकर्मी कैलाश ने बताया, ‘जब से आंध्र के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया, तब से हम यहां आए हैं। यहां हमारा कोई थाना नहीं है। ओडिशा वाले बनाने नहीं देते। अपर सेंबी के नीचे जितने गांव हैं, वे सब आंध्र प्रदेश से जुड़ना चाहते हैं।’ हमने पूछा कि यहां आने पर ओडिशा पुलिस ने नहीं रोका? जवाब मिला, ‘दोनों राज्यों के बड़े अधिकारियों के बीच इसे लेकर बातचीत हुई। उसके बाद यहां आए हैं। ओडिशा वालों ने कहा कि हमें सिविल ड्रेस में रहना होगा, इसलिए वर्दी नहीं पहनते। इसी चर्च के आंगन में खाना बनाते हैं और यहीं सो जाते हैं।’ अब जानिए इस सीमा विवाद के पीछे अधिकारी क्या वजह बता रहे… 21 गांवों का औपचारिक सर्वे नहीं, यही विवाद की वजह ओडिशा के प्रशासनिक रिकॉर्ड में कोटिया पोटांगी तहसील का हिस्सा है। यहां के तहसीलदार देवेंद्र धरुआ का कहना है, ‘विवाद की सबसे बड़ी वजह सभी 21 गांवों का औपचारिक सर्वे न होना है। इसकी वजह से गांवों वालों के पास आज तक खाता नंबर या संख्या नहीं है। इससे जमीन की खरीद-बिक्री और मालिकाना हक से जुड़े मामलों में दिक्कत आती है।’ ‘टकराव तब पैदा होता है, जब आंध्र प्रदेश के अधिकारी इन गांवों में आकर सेवाएं देने की कोशिश करते हैं। इस पर ओडिशा के अधिकारी दखल देते हैं। उनका कहना होता है कि ये उनका क्षेत्र है और जरूरी सेवाएं यहां पहले से उपलब्ध हैं।’ वहीं, आंध्र प्रदेश के सालुर के मंडल रेवेन्यू ऑफिसर सुरेश साइविका कहते हैं, ‘कोटिया का विवाद सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक दावे का भी है। भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान यहां की सीमा तय नहीं हो सकी। 1956 में आंध्र प्रदेश बनने के बाद से ही हम इन गांवों पर अपना दावा करते रहे हैं।’ ‘ओडिशा का तर्क है कि 1936 तक कोटिया पंचायत जयपुर रियासत का हिस्सा थी, इसलिए ये उसका क्षेत्र है, लेकिन राज्यों का पुनर्गठन भाषाई आधार पर हुआ था। यहां के ज्यादातर लोग तेलुगु बोलते हैं और सांस्कृतिक रूप से भी आंध्र प्रदेश से जुड़े हैं। इसके बावजूद ओडिशा इन गांवों पर दावा करता है।’ दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री मिले, लेकिन नतीजा नहीं निकला सीमा विवाद पर ओडिशा के कोरापुट से सांसद और पोट्टांगी से चार बार विधायक रह चुके जयराम पांगी कहते हैं, ‘विवाद को सुलझाने के लिए कई बार बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 1968 में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी मिले थे। 2025 में ओडिशा सरकार ने एक समिति बनाई, लेकिन उससे भी कोई खास नतीजा नहीं निकला।‘ आंध्र प्रदेश के अराकू लोकसभा क्षेत्र की सांसद गुम्मा थानूजा रानी के मुताबिक, 9 नवंबर 2021 को भुवनेश्वर में तब ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के बीच बैठक हुई थी। इसमें कोटिया पर भी चर्चा हुई। दोनों राज्यों ने बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने पर सहमति जताई थी। वे बताती हैं, ‘इसके लिए दोनों राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और सीनियर अफसरों की टीम बनाने की भी बात हुई थी। जगन मोहन रेड्डी समाधान को लेकर गंभीर थे, लेकिन ओडिशा से कोई जवाब नहीं आया। वहां की सरकार विवाद सुलझाने को लेकर गंभीर नहीं है।‘ केंद्र-ओडिशा में BJP, आंध्र में NDA की सरकार, लेकिन समाधान नहीं कोटिया के लोग दोहरी पहचान के साथ जीना सीख चुके हैं। यहां परजा, गदबा, कोंध और भोट्टाडा समुदाय के लोग हैं, जो खेती करते हैं। सीनियर जर्नलिस्ट भूषित कहते हैं, 'ओडिशा सरकार ने कोटिया का विकास किया है, लेकिन वहां के लोगों का दिल नहीं जीत पाई है।' 'इस वक्त केंद्र और ओडिशा में BJP सरकार है। आंध्र प्रदेश में NDA की सहयोगी TDP की सरकार है। इसे ट्रिपल इंजन सरकार कहा जा सकता है। इसके बावजूद विवाद का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जा रहा है।' ………………….. ये खबर भी पढ़ें… क्यों नसबंदी की रिवर्स सर्जरी करा रहे पूर्व नक्सली छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 400 किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा का जबेली गांव। यहां कभी नक्सली रहे प्रदीप कुंजम का घर है। उन्होंने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला। गोद में 8 महीने की बेटी करिश्मा थी। प्रदीप 2008 में नक्सली बन गए थे। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 18 Jun 2026 4:50 am

जी-7 सम्मेलन में ट्रंप ने जमकर की पीएम मोदी की तारीफ, बताया- 'दुनिया के सबसे मजबूत वार्ताकार...'

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने पीएम मोदी को दुनिया के सबसे मजबूत और कड़क बातचीत करने वाले नेताओं में से एक बताया

देशबन्धु 18 Jun 2026 4:40 am

जी-7 समिट में पीएम मोदी ने कहा, 'साझेदारी, कनेक्टिविटी और समावेशी विकास से नए विश्व का निर्माण संभव'

फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समावेशी और टिकाऊ विकास पर जोर द‍िया

देशबन्धु 17 Jun 2026 11:10 pm

कैलिफोर्निया में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती नफरत पर चिंता, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने राज्य आयोग से लगाई गुहार

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एडवोकेसी समूह हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) ने कैलिफोर्निया में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती नफरत पर चिंता जताई है। एचएएफ ने स्टेट ऑफ हेट कमीशन से राज्य में बढ़ते एंटी-हिंदू गतिविधियों पर ध्यान देने और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

देशबन्धु 17 Jun 2026 7:39 pm

आज का एक्सप्लेनर:मोदी सरकार को क्यों चाहिए 362 सांसद; TMC के 20, शिवसेना UBT के 6 सांसद टूटे; बाकी 44 कहां से जुटाएंगे

14 जून को TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने गुमनाम सी पार्टी NCPI में विलय कर लिया। आज शिवसेना (उद्धव गुट) के 9 से 6 लोकसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी। इससे पहले 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी थी। ये सभी बागी BJP या NDA में शामिल हो रहे हैं। विपक्षी सांसदों की इस उछल-कूद के पीछे असली खेल क्या है, मोदी सरकार को और सांसदों का साथ क्यों चाहिए; आज के एक्सप्लेनर में इसी से जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: मोदी सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों का साथ क्यों चाहिए? जवाबः इसे समझने के लिए 2 महीने पीछे चलना होगा। 16 से 18 अप्रैल 2026। मोदी सरकार लोकसभा में 3 विधेयक लाई। तर्क दिया कि 2029 चुनाव तक महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए ये तीनों विधेयक पारित होने जरूरी हैं। इसमें एक संविधान संशोधन विधेयक था। इसमें लोकसभा की अधिकतम सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने और संविधान के आर्टिकल 81 और 82 में बदलाव करने के प्रावधान थे। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है, यानी वोटिंग में आधे से ज्यादा सदस्य सदन में मौजूद हों और जितने सदस्य मौजूद हैं, उनमें से कम से कम दो-तिहाई सांसद इसके पक्ष में वोट दें। सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल बताते हैं, ‘लोकसभा सीटें बढ़ाने वाला परिसीमन बिल मानसून सत्र में दोबारा जरूर लाया जाएगा और उसी के लिए सांसदों के समर्थन का आंकड़ा बढ़ाने की कवायद की जा रही है।’ NDA की सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी यानी TDP के प्रमुख और आंध्र प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू ने भी 15 जून को दावा किया है कि केंद्र सरकार जल्द ही परिसीमन बिल फिर से लाएगी। महिला आरक्षण और परिसीमन साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि राजनीति में महिला आरक्षण लागू करने के लिए डिलिमिटेशन जरूरी है और वह इसका पूरा समर्थन करते हैं। सवाल-2: अभी दोनों सदनों में मोदी सरकार का आंकड़ा कितना है? जवाबः संसद के दोनों सदनों में NDA का आंकड़ा… लोकसभा में NDA के साथ 318 सांसद राज्यसभा में NDA के साथ 154 सांसद सवाल-3: संसद में दो-तिहाई बहुमत से कितना पीछे है सरकार, बाकी कैसे आएंगे? जवाबः फिलहाल सरकार लोकसभा में दो-तिहाई के आंकड़े से 44 सीट और राज्यसभा में 10 सीट दूर है। ये कमी कुछ छोटे क्षेत्रीय दलों से पूरी हो सकती है… 1. लोकसभा में DMK और JMM के सांसदों पर दांव 2. राज्यसभा में YSR कांग्रेस और बीजू जनता दल की जरूरत BJP परिसीमन बिल को पास कराने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। बंगाल और महाराष्ट्र में जो स्थितियां बनीं, वो BJP की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है। आगे तमिलनाडु में DMK, बिहार में RJD और यूपी में सपा या बसपा के सांसदों पर भी दबाव बनाकर उन्हें तोड़ने की कोशिश हो सकती है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट और सीनियर पत्रकार रशीद किदवाई भी कहते हैं, ‘फिलहाल, BJP का सबसे बड़ा एजेंडा परिसीमन ही है। लॉन्ग टर्म एजेंडे में उसे विपक्षी क्षेत्रीय पार्टियों को सीमित करना है। देश में 200-250 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस का वोट शेयर महज 4-5% है। ऐसे में 2029 में कांग्रेस को सीटें जीतने के लिए क्षेत्रीय दलों और छोटी पार्टियों की जरूरत पड़ेगी। इसीलिए BJP इन पर अभी से लगाम लगा रही है।’ सवाल-4: आखिर परिसीमन बिल पारित होने से क्या हो जाएगा? जवाबः परिसीमन के बाद लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में सीटें बढ़ेंगी। सरकार जो बिल लाई थी, उसमें लोकसभा सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने की बात थी। तब गृहमंत्री अमित शाह ने इसका फॉर्मूला बताते हुए कहा था, ‘मान लीजिए कि 100 सीटें हैं, जिसमें 33% आरक्षण देना है, तो इसमें 50 सीटें बढ़ाएंगे। इस हिसाब से 150 सीट होती हैं। लोकसभा में ये राउंड ऑफ फिगर 850 है।' सरकार का कहना था कि सारे राज्यों में सीटें 'आनुपातिक रूप से' बढ़ेंगी। यानी, अगर 543 सीटों की लोकसभा में तमिलनाडु के पास 7.18% हिस्सेदारी, यानी 39 सीटें हैं, तो 850 सीटों की लोकसभा में भी 7.18% हिस्सेदारी यानी 61 सीटें होंगी। हालांकि परिसीमन विधेयक में सीटें 'आनुपातिक रूप से बढ़ाने’ की गारंटी देने वाला कोई प्रावधान नहीं है। इसके उलट संविधान का अनुच्छेद 81(2)(a) कहता है कि सीटें जनसंख्या के अनुपात में मिलेंगी, न कि सभी राज्यों में बराबर प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होगी। इसमें भी सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया। यानी 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या के अनुपात से ही परिसीमन होगा। ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें और कम जनसंख्या वाले राज्यों को कम सीटें मिलेंगी। इसीलिए दक्षिण के राज्यों को चिंता है कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं को होगा, क्योंकि इन राज्यों की जनसंख्या भारत के होल्ड वाले हिंदी भाषी राज्यों के मुकाबले कम है। तमिलनाडु, केरलम और आंध्र प्रदेश सबसे ज्यादा घाटे में होंगे। देश की पॉलिसीज से जुड़े निर्णयों में इन राज्यों का दबदबा घटेगा। 1976 और 2001 में भी परिसीमन इसीलिए टाला गया था, क्योंकि उत्तर और दक्षिण की जनसंख्या में बड़ा अंतर था। इससे यूपी, बिहार, राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा फायदा में होंगे। ये सभी हिंदी बेल्ट के राज्य हैं, जहां बीजेपी का स्ट्रॉन्ग होल्ड है। सवाल-5: क्या इससे बीजेपी को चुनावी फायदा भी मिल सकता है? जवाब: बीजेपी के पिछले तीन चुनावों के आंकड़ों के आधार पर बीजेपी के लिए अच्छे और बुरे दोनों सिनैरियो में फायदा है… 1. बीजेपी के लिए बेस्ट केस सिनैरियोः अगर 2019 का प्रदर्शन दोहराती है 2. बीजेपी के वर्स्ट केस सिनैरियो: अगर 2024 का प्रदर्शन दोहराती है *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें… क्या ममता की राजनीति अब कांग्रेस के सहारे, वापसी क्यों मुश्किल; कैसे बागी हुए 58 विधायक और 20 सांसद TMC के 58 विधायकों की टूट और अब 20 सांसदों के बागी होने का दावा। ममता बनर्जी के पास अब सिर्फ 22 विधायकों और 8 सांसदों का समर्थन बाकी है। खेमे के सांसदों से लेकर पार्टी नेताओं तक पर हमले हो रहे। इस बीच ममता लगातार दो दिन सोनिया गांधी से मिलीं। INDIA ब्लॉक की अगुवाई करने की भी इच्छा जताई। ये तक कहा जा रहा कि ममता ‘अपनी वाली TMC’ का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 17 Jun 2026 6:58 pm

होर्मुज में बढ़ी जहाजों की आवाजाही, ईरान के तीन तेल टैंकरों ने अमेरिकी नाकेबंदी को किया पार

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बढ़ने लगी है। मैरीटाइम एनालिसिस फर्म विंडवर्ड ने बताया कि मंगलवार को 14 जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे, जो इस महीने का सबसे बड़ा दैनिक आंकड़ा है। जो इस महीने का अब तक का सबसे बड़ा दैनिक आंकड़ा है। इस बढ़ोतरी को शिपिंग कंपनियों के बीच धीरे-धीरे लौटते भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

देशबन्धु 17 Jun 2026 4:54 pm

जी7 के देशों का ध्यान अब यूक्रेन युद्ध रोकने पर

फ्रांस में जी7 की बैठक से दुनिया के ताकतवर देशों के नेताओं ने यूक्रेन युद्ध की ओर ध्यान बढ़ाने के संकेत दिए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस को समझौता कर लेना चाहिए

देशबन्धु 17 Jun 2026 9:56 am

ईरान-अमेरिका शांति समझौते की दिशा में बड़ा कदम, शुक्रवार से अंतिम समझौते पर शुरू होगी वार्ता : ईरानी विदेश मंत्री

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष के बाद अब शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है

देशबन्धु 17 Jun 2026 9:35 am

ट्रंप–मोदी की बड़ी मुलाक़ात! व्यापार, एआई और सुरक्षा पर फोकस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को जी7 नेताओं, आउटरीच पार्टनर्स और प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित वर्किंग लंच से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

देशबन्धु 17 Jun 2026 8:49 am

जी-7 सम‍िट में पीएम मोदी-स्टार्मर की मुलाकात, व्यापार से एआई तक कई मुद्दों पर हुई चर्चा

फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन संबंधों को ज्यादा मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की

देशबन्धु 17 Jun 2026 8:10 am

अमेरिका की निगरानी में इजरायल-लेबनान समझौता, बनेंगे विशेष 'पायलट जोन'

मध्य पूर्व में स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने बताया कि इजरायल और लेबनान, अमेरिका की निगरानी में पायलट जोन बनाने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं

देशबन्धु 17 Jun 2026 7:10 am

जी-7 सम्मेलन में पीएम मोदी बोले, साझेदारी सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, निर्भरता पर नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज के समय में आपसी भरोसा ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है

देशबन्धु 17 Jun 2026 6:20 am

जी-7 सम‍िट में मार्क कार्नी से म‍िले पीएम मोदी, जी-20 से पहले एफटीए पूरा करने पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल कनाडा का दौरा कर सकते हैं। फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान उन्‍होंने इसके संकेत द‍िए

देशबन्धु 17 Jun 2026 5:50 am

अमेरिका ने ईरान जंग में हर मिनट ₹6 करोड़ लुटाए:क्या 28 लाख करोड़ हर्जाना और देना पड़ेगा; आखिर ट्रम्प को कितनी महंगी पड़ी ये जंग

अमेरिका को ईरान जंग का हर सेकेंड 10 लाख रुपए का पड़ा। रोजाना करीब 9,400 करोड़ रुपए। 107 दिन बाद जंग खत्म करके भी मुसीबत नहीं टली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को हर्जाने के तौर पर 28 लाख करोड़ रुपए और देने पड़ सकते हैं।ट्रम्प को कितनी महंगी पड़ी ईरान जंग; 8 ग्राफिक्स में देखिए… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा -------- ये खबर भी पढ़िए… अमेरिका-ईरान जंग में कौन जीता, क्या पाकिस्तान नहीं, कतर ने करवाई डील, पेट्रोल-डीजल कब सस्ता होगा; 7 सवालों में पूरी कहानी 107 दिनों की तबाही के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान जंग खत्म करने को राजी हैं। रविवार को ट्रम्प ने लिखा- समझौता हो गया। ईरान ने भी बयान जारी किया। अब 19 जून को स्विट्जरलैंड में दोनों देश MoU पर साइन करेंगे। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 17 Jun 2026 5:20 am

जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संदेश, भरोसे और समानता पर आधारित हो वैश्विक साझेदारी

जी-7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से ह्यूमैनिटी फर्स्ट (मानवता सबसे पहले) नजरिए के साथ आगे बढ़ता रहा है और सबको साथ लेकर चलने वाले वैश्विक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

देशबन्धु 17 Jun 2026 3:50 am

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर लगा नौसैनिक प्रतिबंध हटाया: ईरान उप विदेश मंत्री

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर लगाया नौसैनिक प्रतिबंध हटा लिया है। तेहरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने कहा, “शुरुआत से ही हम इस बात पर जोर दे रहे थे कि प्रतिबंध हटना चाहिए

देशबन्धु 16 Jun 2026 10:44 pm

आज का एक्सप्लेनर:वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंकाई खिलाड़ी को धक्का मारा, पाक गेंदबाज को जूता दिखा चुके; क्या ये गुस्सा उनका दुश्मन बन जाएगा

31 मई को विराट कोहली ने वैभव सूर्यवंशी के कंधे पर हाथ रखकर एक बात कही थी- ‘परवाह मत करो, कौन क्या कहता है।’ 2 हफ्ते बाद ही वैभव ये नसीहत भूल गए। 15 जून को श्रीलंकाई खिलाड़ी ने ताना मारा, तो वैभव भिड़ गए और उसे धक्का दे दिया। पहले भी वैभव मैदान पर गुस्सा करते दिखे हैं। श्रीलंकाई खिलाड़ियों से क्यों हुई धक्का-मुक्की, क्या सजा मिल सकती है और 15 साल के वैभव का गुस्सा क्या करियर पर असर डालेगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: वैभव ने श्रीलंका के खिलाड़ी से धक्का-मुक्की क्यों की? जवाबः भारत, श्रीलंका और अफगानिस्तान की क्लास-A टीमों के बीच 50 ओवर की ट्राई सीरीज जारी है। 15 जून को सुपर ओवर तक गए चौथे मैच में श्रीलंका ने भारत को हराया। इसके बाद ये पूरा विवाद हुआ.. दरअसल, इस मैच की शुरुआत से ही स्थितियां तनावपूर्ण होने लगी थीं। भारतीय बैटर विपराज निगम के पिच पर दौड़ने की वजह से अंपायर ने भारत पर 10 रन की पेनाल्टी लगा दी। अंधेरा हो रहा था, इसके बावजूद श्रीलंकाई बल्लेबाज क्रीज पर देरी से आए। एक नो बॉल को लेकर भी विवाद हुआ था। भारतीय स्पिनर आर. अश्विन X पर लिखते हैं, 'इन मैचों में IPL जितने कैमरे नहीं होते। नो-बॉल का फैसला विवादित था और श्रीलंकाई टीम के देर करने से भी भारतीय टीम नाराज थी। श्रीलंका ने भारतीय टीम पर मानसिक दबाव की स्ट्रैटेजी और माइंड गेम के तहत ये किया।' सवाल-2: इस धक्का-मुक्की में किसकी गलती थी, क्या सजा मिल सकती है? जवाबः अब तक श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड या भारतीय क्रिकेट बोर्ड यानी BCCI ने कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है। आखिरी फैसला मैच रेफरी प्रदीप जयप्रकाश का होगा। हालांकि, ICC की रूलबुक में ऐसी घटनाओं के लिए स्पष्ट नियम हैं। ICC कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.12 के मुताबिक, 'इंटरनेशनल मैच में खिलाड़ी, सपोर्टिंग स्टाफ, अंपायर, रेफरी या किसी दर्शक के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क नियमों के खिलाफ है।’ सवाल-3: क्या वैभव पहले भी मैदान पर ऐसा गुस्सा दिखा चुके हैं? जवाब: हां, इससे पहले दो बार वैभव मैदान पर ऐसे गुस्से में दिखे हैं.. 1. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गलत आउट से नाराज दिखे वैभव 7 अक्टूबर 2025। ऑस्ट्रेलिया में अंडर-19 यूथ टेस्ट मैच। वैभव 14 गेंदों 20 रन बना चुके थे। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज चार्ल्स लैचमंड की गेंद वैभव के थाई पैड को छूते हुए कीपर के ग्लव्स तक पहुंची। अंपायर ने कैच की अपील पर बिना वक्त लगाए आउट करार दिया। इस पर नाराज वैभव कुछ देर के लिए विकेट के सामने खड़े अंपायर को देखते रहे और फिर थाईपैड की तरफ इशारा करते हुए कहा कि गेंद बल्ले से नहीं लगी है। वे हाथ में बल्ला घुमाते हुए पवेलियन लौट गए। वीडियो रिप्ले से भी पता चला कि गेंद पैड से लगकर गई है। 2. आउट हुए तो पाकिस्तानी खिलाड़ी को जूता दिखाया 21 दिसंबर 2025. दुबई में भारत-पाकिस्तान के बीच अंडर-19 एशिया कप का फाइनल मुकाबला। वैभव ने 10 गेंदों में 26 रन बना लिए थे। तभी पाकिस्तानी गेंदबाज अली राजा की गेंद पर विकेट के पीछे कैच आउट हो गए। अली ने आक्रामक तरीके से जश्न मनाया। वैभव की तरफ देखकर कुछ कहा भी। इस पर वैभव ने एग्रेसिव रिएक्शन दिया और अली को देखते हुए अपने जूते की तरफ इशारा किया। भारतीय टीम सिर्फ 156 रन बना सकी और मैच हार गई। सवाल-4: तो क्या बड़े मैचों में खराब परफॉरमेंस के चलते आपा खो देते हैं वैभव? जवाब: जब भी वैभव मैचों में कथित ‘गुस्से’ में दिखे, तब उनकी या टीम की परफॉरमेंस अच्छी नहीं चल रही थी... सवाल-5: क्या वैभव का गुस्सा उनके करियर के लिए घातक बन जाएगा? जवाबः कई स्टार खिलाड़ी अपने शुरुआती दौर में एग्रेसिव रहे हैं, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपना तरीका बदला। गुस्से को कंट्रोल करके खेल पर फोकस बढ़ाया और खुद को हर मामले में बेस्ट स्पोर्ट्सपर्सन साबित किया। सीनियर क्रिकेट जर्नलिस्ट के. श्रीनिवास राव कहते हैं, ‘ये संभव नहीं है कि मैदान पर हमारी इच्छा के मुताबिक हमारा खिलाड़ी ऑस्ट्रेलियाई टीम को उसी आक्रामक भाषा में जवाब दे और वो संतुलित भी रहे। वैभव बच्चा है, उसने कोई क्राइम नहीं किया है, उसे गलती करने और उससे खुद सीखने का हक है। 15 साल की उम्र में 30 साल वाली परिपक्वता की उम्मीद नहीं की जा सकती।’ हालांकि सीनियर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बोरिया मजूमदार भी X पर लिखते हैं, 'वैभव को मैदान पर गुस्सा नहीं करना चाहिए। इससे इंसान अपना नजरिया खो देता है। मुझे यकीन है कि इस घटना से वो सीखेंगे। हम सब गलतियां करते हैं, वो भी अलग नहीं हैं।’ वैभव की पैदाइश 27 मार्च 2011 को बिहार के समस्तीपुर की है। कम उम्र में वैभव ने स्किल और परफॉरमेंस के मामले में विराट और रोजर फेडरर की तरह नई लकीर खींची है। उन्हें ‘वर्ल्ड क्रिकेट का बेबी बॉस’ और ‘वंडर किड’ कहा जाने लगा है। सवाल-6: वैभव में ऐसा क्या खास है कि उन्हें ‘वंडर किड’ कहा जाता है? जवाबः इसकी 4 बड़ी वजहें हैं… 1. सिर्फ पावर हिटिंग नहीं, कम्प्लीट बैटिंग स्किल सेट 2. 15 की उम्र में टीम इंडिया में सिलेक्शन, सचिन का रिकॉर्ड तोड़ा 3. क्रिस गेल, डीविलियर्स, रसल के रिकॉर्ड तोड़े 4. वैभव पर IIM इंदौर रिसर्च करेगा *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------क्रिकेट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…क्या IPL का डाउनफॉल शुरू:टीवी दर्शक 26% घटे, विदेशी खिलाड़ी आधा सीजन ही खेल रहे; टॉप एक्सपर्ट्स ने बताईं वजहें और समाधान 29 मई की शाम। फोन पर नोटिफिकेशन आया- राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी सेंचुरी के करीब हैं। मैंने जियो हॉटस्टार खोला, लाइव मैच चला लिया। तभी ध्यान आया कि इस पूरे सीजन में पहला मैच लाइव देख रही हूं। बाकी दो महीने? बस हाइलाइट्स, स्कोर अपडेट्स और कभी-कभी रील्स। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 16 Jun 2026 6:23 pm

G7 Summit से पहले Mark Carney का बड़ा बयान, बोले- दुनिया में बजा India का डंका

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते महत्व पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी तेज़ी से बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को दर्शाती है, जहाँ अब बड़े फ़ैसले केवल कुछ ही देश नहीं ले सकते। अपनी छह-दिवसीय यूरोपीय यात्रा के दौरान ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में बातचीत करते हुए कार्नी ने कहा कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच चर्चा में भारत जैसे देशों को शामिल करना यह दिखाता है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक वैश्विक सहयोग की ज़रूरत है। फ्रांस में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले कार्नी ने कहा कि यह इस बात की मान्यता है कि G7, अगर कभी दुनिया को चलाता भी था, तो अब वह दुनिया को नहीं चलाता और न ही ऐसा होने का दिखावा करता है। इसे भी पढ़ें: जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका दिखा अलग थलग, दुनिया जता रही मोदी पर भरोसा भारत की मौजूदगी बदलती ग्लोबल स्थितियों का संकेत है कार्नी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ग्लोबल हालात काफ़ी बदल गए हैं, इसलिए G7 के लिए ज़रूरी है कि वह अपने पारंपरिक सदस्यों के अलावा प्रभावशाली देशों के साथ भी जुड़े। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश ऐसे मुद्दों पर अनोखे नज़रिए और व्यावहारिक समाधान लाते हैं जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समिट में न सिर्फ़ G7 के सदस्य बल्कि कई सहयोगी देश भी शामिल होंगे। यह ग्लोबल चर्चाओं को ज़्यादा समावेशी और असरदार बनाने की एक बड़ी कोशिश है। इसे भी पढ़ें: France में G7 Summit से PM Modi का दुनिया को बड़ा संदेश, Sustainable Planet के लिए भारत प्रतिबद्ध समिट में कई उभरती ताक़तों को बुलाया गया है मंगलवार को एवियन में शुरू होने वाले 52वें G7 समिट में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ-साथ भारत, ब्राज़ील, मिस्र, केन्या और कई खाड़ी देशों जैसे आमंत्रित देशों के नेता भी शामिल होंगे। कार्नी के मुताबिक, इन देशों की भागीदारी से ग्लोबल प्राथमिकताओं पर चर्चा का दायरा बढ़ेगा और राष्ट्रीय सीमाओं से परे की चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह बैठक एक उभरती हुई विश्व व्यवस्था को आकार देने में भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में भी ऐसी ही बात कही थी, जहाँ उन्होंने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच मध्यम दर्जे की ताक़तों के बीच ज़्यादा सहयोग का आह्वान किया था।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 6:11 pm

डील से पलटा ईरान? फिर आने वाली है तबाही!

अमेरिका ईरान समझौते के बारे में यह कहा जा रहा है कि कहीं दस्तखत से पहले यह समझौता टूट तो नहीं जाएगा। डॉनल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान के साथ एक बड़ी डील कर ली है। लेकिन एमओयू पर डिजिटल साइन करने के 24 घंटे बाद इस डील के पेच सामने आ रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बयानों में भी विरोधाभास साफ-साफ झलक रहा है। ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि शुक्रवार से हॉर्मोस खुलने वाला है। जबकि ईरान का कहना है कि पहले अमेरिका की नियत को परखा जाएगा और उसके बाद ही हॉर्मोस ट्रेड खोला जाएगा। ईरान को 28 अरब के पुनर्निर्माण फंड पर भी मतभेद पैदा हो गए हैं। एमओयू में यह बात लिखी है कि अमेरिका ईरान को 28 अरब का फंड देगा। लेकिन ट्रंप ने इसे निराधार बताया है। इसे भी पढ़ें: डील हो या ना हो, मैं ईरान को...ट्रंप पर फूटा नेतन्याहू का गुस्सा ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह साफ-साफ लिखा है कि यह फेक न्यूज़ है। अमेरिका 28 अरब का फंड नहीं देने वाला। इसके अलावा परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी कंफ्यूजन है। ट्रंप यह कह रहे हैं कि ईरान के पास कोई परमाणु बम नहीं होगा। जबकि ईरान का कहना है कि इस पर 60 दिन की वार्ता के दौरान सहमति बनाई जाएगी। मतलब अभी इस पर कुछ हुआ नहीं है। अमेरिका ईरान डील से आईडीएफ मोसाद नाराज है। आईडीएफ और मोसाद ट्रंप की डील को कमजोर मानते हैं। न्यूक्लियर डील से खतरा कम नहीं होगा। द जेरुशसलेलम पोस्ट के हवाले से यह खबर सामने आ रही है। तो देखिए इजराइली डिफेंस फोर्सेस हो या फिर इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद। इसके अफसर मान रहे हैं कि यह डील इजराइल के पक्ष में नहीं है। इसका कहीं ना कहीं फायदा ईरान को होगा। इसे भी पढ़ें: जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका दिखा अलग थलग, दुनिया जता रही मोदी पर भरोसा न्यूक्लियर डील से खतरा कम नहीं होगा। यूरेनियम फ्रेमवर्क में कई कमियां हैं। प्रॉक्सी फंडिंग के मुद्दे पर इजराइल दरअसल भड़का हुआ है। हिजबुल्लाह का खात्मा चाहती है आईडीएफ। कमजोर डील से और मजबूत होगी ईरानी रिजीम। यह मानना है लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम है ट्रंप की डील। द जेरुसलम पोस्ट के हवाले से यह अहम खबर सामने आ रही है। लेबनान बारूद से दहलाए। ट्रंप गुस्से से आग बबूला। ट्रंप ने साफ कह दिया कि नेतन्याहू को बिल्कुल भी विवेक नहीं है।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 6:07 pm

EU-US Trade Deal को European Parliament की हरी झंडी, कई अमेरिकी सामानों पर खत्म होगा टैरिफ

यूरोपीय संसद ने उन दो कानूनों को अंतिम मंज़ूरी दे दी, जिनका मकसद अगस्त 2025 के EU-US संयुक्त बयान के तहत अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते को लागू करना है। इन कानूनों में टैरिफ में कटौती के साथ-साथ यूरोपीय उद्योगों और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उपाय भी शामिल हैं। यूरोपीय संसद की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यूरोपीय संसद के सदस्यों (MEPs) ने औद्योगिक और कृषि-खाद्य आयात से जुड़े मुख्य नियम का समर्थन किया। इसके पक्ष में 440 और विपक्ष में 151 वोट पड़े, जबकि 50 सदस्य वोटिंग से दूर रहे। यह कानून अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों पर टैरिफ खत्म करता है और अमेरिका के कई तरह के सीफ़ूड और कृषि उत्पादों को बाज़ार में प्राथमिकता के साथ पहुँच प्रदान करता है। एक दूसरे नियम को 444 वोटों के समर्थन और 152 वोटों के विरोध के साथ मंज़ूरी मिली (54 सदस्य वोटिंग से दूर रहे)। यह नियम अमेरिका से लॉबस्टर के टैरिफ-मुक्त आयात की सुविधा को बढ़ाता है और इसमें प्रोसेस्ड लॉबस्टर उत्पादों को भी शामिल करता है। इसे भी पढ़ें: पहले हंसे, फिर पिया पानी और ऐसे अमेरिका-यूरोप को डुबो आए जयशंकर, हिले सारे पत्रकार संसद ने कहा कि दोनों प्रस्तावों पर पहले ही संसद और काउंसिल के वार्ताकारों के बीच सहमति बन चुकी थी, और यूरोपीय आयोग के मूल प्रस्तावों को और मज़बूत करने के लिए उनमें कई संशोधन भी किए गए थे। इस कानून में शामिल मुख्य प्रावधानों में से एक सनसेट क्लॉज़ है, जिसके तहत इंडस्ट्रियल और एग्री-फूड इंपोर्ट से जुड़े नियम 31 दिसंबर, 2029 को खत्म हो जाएंगे, जब तक कि उन्हें रिन्यू न किया जाए। यूरोपीय आयोग को 30 जून, 2029 तक EU के उद्योगों, खेती, छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों और तीसरे देशों के साथ व्यापार के तरीकों पर इस नियम के असर का व्यापक मूल्यांकन करना होगा। अगर सही समझा जाए, तो इस समीक्षा के साथ नियम को आगे बढ़ाने का कानूनी प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: 2 देशों ने हिंदी में मोदी पर किया बड़ा ऐलान, पूरी दुनिया हैरान! यह कानून स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों पर US के टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को भी दूर करता है। यूरोपीय संसद ने ध्यान दिलाया कि अमेरिका ने अगस्त 2025 में टैरिफ के दायरे में आने वाले स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों की लिस्ट में 407 प्रोडक्ट कैटेगरी जोड़ी थीं, जिससे व्यापार में अनिश्चितता पैदा हुई। हाल ही में मंज़ूर किए गए उपायों के तहत, अगर अमेरिका 31 दिसंबर, 2026 तक EU के स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों पर 15 प्रतिशत से ज़्यादा टैरिफ दरें लागू रखता है, तो आयोग के पास टैरिफ में दी गई रियायतों को रोकने का अधिकार होगा। इसे भी पढ़ें: मोदी ने पकड़ी अमेरिका के कई खतरनाक लोगों की गर्दन! दुनिया हैरान आयोग 1 दिसंबर, 2026 तक इन प्रोडक्ट्स पर टैरिफ के तौर-तरीकों के बारे में यूरोपीय संसद और काउंसिल को एक रिपोर्ट भी सौंपेगा। इसके अलावा, अगर अमेरिका उन EU एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहता है, जिन्हें 24 फरवरी, 2026 तक 15 प्रतिशत की ऑल-इनक्लूसिव टैरिफ सीमा का फ़ायदा मिल रहा था, तो आयोग टैरिफ रियायतों को रोक सकता है। रिलीज़ में कहा गया है, अगर अमेरिका उन EU एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहता है, जिन्हें 24 फरवरी, 2026 तक 15% की ऑल-इनक्लूसिव टैरिफ सीमा का फ़ायदा मिल रहा था, तो आयोग टैरिफ रियायतों को रोक सकेगा।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 6:00 pm

France में G7 Summit से PM Modi का दुनिया को बड़ा संदेश, Sustainable Planet के लिए भारत प्रतिबद्ध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि वह फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स शहर में G7 शिखर सम्मेलन में दुनिया के नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हैं। दुनिया के सात प्रमुख औद्योगिक देशों (G7) के नेता शिखर सम्मेलन में बातचीत के अपने पहले पूरे दिन की बैठक कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत आधिकारिक तौर पर सोमवार को हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि वह G7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस के एवियन पहुँच गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध ग्रह के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इससे पहले मंगलवार (स्थानीय समय) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि स्लोवाकिया की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद वे स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा पहुँच गए हैं। इसे भी पढ़ें: रिकॉर्ड के मोर्चे पर कौन भारी, कौन कमजोर फ्रांस 15 से 17 जून तक होने वाले 52वें G7 शिखर सम्मेलन का मेज़बान देश है। दुनिया के सात प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह 'G7' में फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, इटली और कनाडा शामिल हैं। भारत भी एक सहयोगी देश के तौर पर 13वीं बार G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहा है और यह सम्मेलन प्रधानमंत्री मोदी की इस बैठक में लगातार सातवीं भागीदारी होगी। स्लोवाकिया की अपनी यात्रा के समापन पर प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक और फलदायी बताया और कहा कि इस यात्रा के नतीजे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करेंगे। भारत-स्लोवाकिया संबंधों की गर्मजोशी को दर्शाते हुए, स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने यात्रा पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी को व्यक्तिगत रूप से विदा किया। इसे भी पढ़ें: France पहुंचे PM Modi, G7 Summit में वैश्विक चुनौतियों पर दुनिया को दिखाएंगे रास्ता अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द ऑर्डर ऑफ़ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)' से सम्मानित किया। यह सम्मान किसी विदेशी देश द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया 33वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान था। पीएम मोदी की यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने शिक्षा, रिसर्च, टैलेंट मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिससे उनके संबंध और मजबूत हुए। स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के बाद, ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री मोदी की राजकीय यात्रा के दौरान जारी एक संयुक्त बयान में इन समझौतों को औपचारिक रूप दिया गया। इन पहलों में मुख्य रूप से टैलेंट मोबिलिटी, प्रोफेशनल सुरक्षा और उच्च शिक्षा व सांस्कृतिक क्षेत्रों में संस्थागत साझेदारी पर ध्यान दिया गया है।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 5:57 pm

G7 Summit में Japan ने खींची 'रेड लाइन', China की चुनौतियों से निपटने के लिए बनाया खास प्लान!

जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने मंगलवार को बताया कि G7 देशों के बीच वर्किंग डिनर के दौरान रूस-यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात और चीन से जुड़ी चुनौतियों जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। तकाइची ने बताया कि G7 के अपने समकक्षों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने अहम खनिजों (critical minerals) को लेकर G7 की 'जॉइंट स्टॉकपाइलिंग कोलैबोरेशन इनिशिएटिव' (संयुक्त भंडारण सहयोग पहल) का प्रस्ताव रखा। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि कल रात वर्किंग डिनर में हमने कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा की, जिनमें मध्य पूर्व के हालात, यूक्रेन की स्थिति, इंडो-पैसिफिक के हालात और अहम खनिजों सहित सप्लाई चेन की मज़बूती शामिल है। तकाइची ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बिना किसी रुकावट के समुद्री व्यापार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि मैंने फ़ारस की खाड़ी में फँसे सभी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने देने के महत्व पर ज़ोर दिया। साथ ही, युद्ध में परमाणु बमबारी झेलने वाले एकमात्र देश के तौर पर, मैंने IAEA के सहयोग से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा इसी क्रम में, होर्मुज़ संकट का ज़िक्र करते हुए, मैंने ज़रूरी खनिजों (critical minerals) के लिए G7 की 'संयुक्त स्टॉकपाइलिंग सहयोग पहल' (Joint Stockpiling Collaboration Initiative) का प्रस्ताव रखा। यह पहला G7 शिखर सम्मेलन है जिसमें तकाइची शामिल हो रही हैं। इसे भी पढ़ें: France पहुंचे PM Modi, G7 Summit में वैश्विक चुनौतियों पर दुनिया को दिखाएंगे रास्ता जापानी प्रधानमंत्री ने उत्तर कोरिया के पूरी तरह परमाणु-मुक्त होने के सिद्धांत के महत्व पर ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल विकास से निपटने और क्रिप्टोकरेंसी की चोरी – जो उसके लिए फंड का ज़रिया है – के ख़िलाफ़ जवाबी उपाय करने की ज़रूरत पर भी बात की। तकाइची ने एक्स पर लिखा, मैंने अपनी तरफ़ से इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र की स्थिति और चीन सहित वहाँ मौजूद विभिन्न चुनौतियों पर जापान की सोच और रुख़ के बारे में बताया। साथ ही, यह भी साफ़ किया कि G7 देश आपसी तालमेल के साथ इस पर प्रतिक्रिया देंगे। इसे भी पढ़ें: Iran Deal पर बोले Trump: दूसरा दौर आसान होगा, तेहरान को पैसा देने की बात 'बकवास' इस बीच, फ्रांस के एक रिसॉर्ट शहर में दुनिया भर के नेताओं के जमा होने के साथ ही, मंगलवार को G7 समिट के पहले सेशन में यूक्रेन में शांति बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। रॉयटर्स के अनुसार, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने दिन के पहले सेशन में हिस्सा लिया, जो यूक्रेन में शांति कायम करने पर केंद्रित था। इस बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद थे। रॉयटर्स के मुताबिक, ज़ेलेंस्की ट्रंप से अलग से बातचीत कर सकते हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति अन्य G7 नेताओं से भी अलग-अलग मुलाकात करेंगे। नेताओं के बीच यह बैठक कीव और मॉस्को के बीच बढ़ते तनाव के बीच हो रही है।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 5:56 pm

पूर्वी अफगानिस्तान में गाड़ी पलटने से बच्चे समेत चार लोगों की मौत, चार घायलों में कुछ की हालत गंभीर

पूर्वी अफगानिस्तान के वर्दक प्रांत में सोमवार को एक मिनी बस के पलट जाने से एक बच्चे समेत चार यात्रियों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। प्रांतीय पुलिस प्रवक्ता मोहम्मद यूसुफ इसरार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

देशबन्धु 16 Jun 2026 5:37 pm

डील हो या ना हो, मैं ईरान को...ट्रंप पर फूटा नेतन्याहू का गुस्सा

अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते को लेकर जहां वाशिंगटन इसी बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहा। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेहू इस डील से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे। नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इजराइल की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सोच हमेशा एक जैसी नहीं होती। अमेरिका और ईरान समझौते के सार्वजनिक होने के बाद नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान से पैदा हुए परमाणु खतरे को काफी हद तक कमजोर किया है। लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। समझौता हो या ना हो ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। इसे भी पढ़ें: Donald Trump की 'शांति डील' को Israel का बड़ा झटका, कहा- ये समझौता हम पर लागू नहीं होता नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप और उनके बीच मजबूत साझेदारी लेकिन कई बार दोनों नेताओं की राय अलग भी हो सकती है। उनके मुताबिक इजराइल अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि दशकों से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनका मिशन रहा है और वह भविष्य में भी इसी नीति पर कायम रहेंगे। इजराइली प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान और उसके सहयोगी संगठन के खिलाफ अभियान अभी जारी रहेगा। उन्होंने लेबनान का जिक्र करते हुए कहा कि इजराइली सेना जरूरत पड़ने तक सुरक्षा क्षेत्रों में मौजूद रहेगी और किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए कारवाई की पूरी स्वतंत्रता बनाए रखेगी। नेतन्याहू के मुताबिक हाल के सैन अभियानों में इजराइल ने ऐसे कई इलाकों पर नियंत्रण हासिल किया जिनका इस्तेमाल पहले उसके खिलाफ किया जाता था। दरअसल नेतन्याहू का यह बयान ऐसे वक्त पर सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद एक समझौते की रूपरेखा सामने आई। इसे भी पढ़ें: US-Iran Deal से इजरायल बाहर! क्या समझौते का होगा पालन, ट्रंप vs नेतन्याहू अब होने वाला है? वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने यह वादा किया है कि वो किसी परमाणु हथियार को नहीं बनाएगा। ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को $300 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देगा। उन्होंने इसे पूरी तरह फर्जी बताया। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वांस ने भी इस समझौते का समर्थन करते हुए कहा कि ट्रंप की कूटनीति एक बार फिर सफल रही और इस डील का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित ना करें। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह समझौता भविष्य की बातचीत का ढांचा तैयार करता है जिसमें परमाणु निरीक्षण, यूरेनियम एनरचमेंट की निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल थे। वहीं सूत्रों के मुताबिक समझौते के तहत ईरान को कुछ आर्थिक राहत मिल सकती है। लेकिन यह राहत तभी मिलेगी जब तेहरान परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी और सत्यापन की शर्तों का पालन करें।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 4:57 pm

सुंदर पिचाई के भाषण के दौरान स्टैनफोर्ड के 200 ग्रेजुएट्स ने वॉकआउट किया : रिपोर्ट

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में भाषण के दौरान करीब 200 छात्रों के वॉकआउट का सामना करना पड़ा। ऐसा तब हुआ, जब उन्होंने छात्रों की नाराजगी से बचने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जिक्र नहीं किया। यह जानकारी रिपोर्ट में दी गई।

देशबन्धु 16 Jun 2026 4:40 pm

Imran Khan की बहन Aleema Khanum ने PIMS के इलाज पर उठाए गंभीर सवाल, मांगी स्वतंत्र जांच

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान की बहन अलीमा खानम ने जेल में बंद नेता की स्वतंत्र मेडिकल जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि खान को फिर से इस्लामाबाद के पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया था और कहा कि परिवार उनकी सेहत या आंखों की रोशनी के बारे में अस्पताल की ओर से जारी किसी भी मेडिकल रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगा। एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में अलीमा ने कहा कि परिवार को खबर मिली थी कि खान को 15 जून की सुबह अदियाला जेल से PIMS ले जाया गया था, और उन्हें इस बात का पता उसी दिन सुबह बाद में PTI चेयरमैन बैरिस्टर गोहर की सोशल मीडिया पोस्ट से चला। उन्होंने एक्स पर लिखा कि हमें खबर मिली है कि इमरान खान को 15 जून की सुबह फिर से PIMS ले जाया गया। हमें यह जानकारी 15 जून की सुबह बैरिस्टर गोहर के एक ट्वीट से मिली। अलीमा ने लिखा हम इमरान खान की हालत के बारे में PIMS की ओर से जारी किसी भी मेडिकल रिपोर्ट को नहीं मानते। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान के पहले के दावों पर बाद में सवाल उठाए गए थे। उन्होंने पहले किए गए उन दावों का ज़िक्र किया जिनमें कहा गया था कि खान की 90 प्रतिशत नज़र वापस आ गई है; उन्होंने बताया कि जब बाद में उनके वकील ने अदियाला जेल में उनसे मुलाक़ात की, तो ख़ुद इमरान खान ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इसे भी पढ़ें: Patna Coaching War: रौशन आनंद का Khan Sir पर सनसनीखेज आरोप, 'भाई की हत्या की साज़िश रची' खान के इलाज के आधिकारिक विवरण पर सवाल उठाते हुए अलीमा ने पूछा, इमरान खान को पांचवें इंजेक्शन की क्या ज़रूरत है? उन्होंने कहा कि परिवार सरकार के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और मांग करता है कि क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की जांच और इलाज इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्वतंत्र, योग्य विशेषज्ञों द्वारा किया जाए। इसे भी पढ़ें: Patna Police सवालों के घेरे में! Roshan Anand का आरोप - किसके दबाव में Khan Sir को बचाया जा रहा है? इमरान खान की दृष्टि हानि के दावे अलीमा की ये टिप्पणियां 73 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य, विशेष रूप से उनकी बिगड़ती दृष्टि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई हैं। फरवरी में खान को रावलपिंडी की अडियाला जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच दृष्टि हानि से संबंधित आगे के इलाज के लिए पीआईएमएस ले जाया गया था। पिछली मुलाकातों के बाद जारी किए गए अस्पताल के आधिकारिक बयानों के अनुसार, खान को इंट्राविट्रियल एंटी-वीईजीएफ इंजेक्शन दिए गए थे - यह रेटिना रोग के इलाज और दृष्टि को संरक्षित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक विशेष प्रक्रिया है। एक मेडिकल बोर्ड ने उनका आकलन किया।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 4:28 pm

IAF का गेम चेंजर Kamikaze Drone: China को सीधी चुनौती, बनेगा आत्मनिर्भर भारत का 'ब्रह्मास्त्र'

भारतीय वायु सेना (IAF) ने घरेलू इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर स्वदेशी लंबी दूरी वाले कामिकेज़ ड्रोन विकसित करने का एक प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसका मकसद आत्मनिर्भरता बढ़ाना और भविष्य में होने वाले अपग्रेड और बदलावों पर बेहतर कंट्रोल हासिल करना है। IAF ने फिक्स्ड-विंग, वन-वे अटैक अनमैन्ड एरियल सिस्टम (OWA-UAS) – जिन्हें आम तौर पर कामिकेज़ ड्रोन कहा जाता है। उसके विकास के लिए भारतीय कंपनियों को चुनने के वास्ते एक लिमिटेड टेंडर इन्क्वायरी जारी की है। इस प्रोजेक्ट का कोऑर्डिनेशन कोयंबटूर के सुलूर में मौजूद वायु सेना के 5 बेस रिपेयर डिपो (BRD) द्वारा किया जाएगा, जो नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगा। खरीद के आम प्रोग्राम के उलट, जिनमें सेना ज़रूरतें बताती है और इंडस्ट्री प्रोडक्ट बनाती है, IAF डिज़ाइन और डेवलपमेंट प्रोसेस में सीधे तौर पर शामिल होगी। उम्मीद है कि इस कदम से सर्विस को बदलते ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से प्लेटफ़ॉर्म को ढालने में ज़्यादा फ़्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। इसे भी पढ़ें: US Iran Peace Treaty | 300 अरब डॉलर का वो 'सीक्रेट' पन्ना, जिसने अमेरिका-ईरान की महाडील पर लगाया ब्रेक! ट्रंप बोले- 'यह झूठ है!' तकनीकी ज़रूरतों के अनुसार, ड्रोन 16,000 फ़ीट तक की ऊंचाई पर काम करने, दिन और रात दोनों स्थितियों में चलने और कम से कम 30 किलोग्राम का मॉड्यूलर पेलोड ले जाने में सक्षम होना चाहिए। इस प्लेटफ़ॉर्म से कई तरह के मिशन कॉन्फ़िगरेशन को सपोर्ट करने की उम्मीद है, जिनमें सटीक हमले (precision-strike), हवाई डेटा रिले और सेंसर-आधारित मिशन शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट में एक ऐसे अत्यधिक ऑटोनॉमस सिस्टम की भी परिकल्पना की गई है जो बहुत कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ लॉन्च, वे-पॉइंट नेविगेशन, लोइटरिंग (हवा में चक्कर लगाना) और मिशन को पूरा करने में सक्षम हो। ऑपरेशनल ज़रूरतों के आधार पर, ड्रोन में 'रिटर्न-टू-बेस' (बेस पर वापस लौटने) की सुविधा भी शामिल की जा सकती है। इसे भी पढ़ें: Air India Express की Jeddah फ्लाइट में हवा में आई खराबी, Kannur में हुई Emergency Landing इस प्रोग्राम की एक खास बात यह है कि IAF इससे जुड़े इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) अपने पास रखना चाहती है। डिफेंस सूत्रों का कहना है कि इससे लंबे समय तक ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहेगी और भविष्य में सुधारों के लिए बाहरी वेंडर्स पर निर्भरता कम होगी। प्रोजेक्ट से जुड़े एक सूत्र ने कहा, डिज़ाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का मालिकाना हक अपने पास रखने से एयर फ़ोर्स को ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से सिस्टम में बदलाव, अपग्रेड और कस्टमाइज़ेशन करने की क्षमता मिलेगी। इससे वेंडर-कंट्रोल्ड टेक्नोलॉजी की पाबंदियों के बिना तेज़ी से क्षमता बढ़ाई जा सकेगी, जिससे एक निर्णायक बढ़त मिलेगी। IAF ने यह भी अनिवार्य किया है कि प्रोजेक्ट का डिज़ाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही हो और इसमें स्वदेशी कंपोनेंट्स और सिस्टम को प्राथमिकता दी जाए। ड्रोन में चीन की टेक्नोलॉजी, कंपोनेंट्स और मटीरियल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए; यह सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन के लिए सेना की लगातार कोशिशों को दिखाता है।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 3:57 pm

France पहुंचे PM Modi, G7 Summit में वैश्विक चुनौतियों पर दुनिया को दिखाएंगे रास्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के न्योते पर फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में हो रहे 52वें G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। वे G7 देशों और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ मिलकर आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसी अहम वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। शिखर सम्मेलन के व्यापक एजेंडे के बीच, सबकी नज़रें बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मोदी की होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं, जिसमें दोनों नेताओं के बीच व्यापार, वीज़ा, ऊर्जा सहयोग और व्यापक रणनीतिक संबंधों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसे भी पढ़ें: राजनाथ सिंह के घर आधी रात तक BJP-RSS नेताओं ने किया मंथन, पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची तैयार G7 समिट के लिए प्रधानमंत्री एवियन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 समिट में शामिल होने के लिए फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स पहुंचे। बैठक से पहले उन्होंने कहा दुनिया के नेताओं से बातचीत करने और अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का बेसब्री से इंतज़ार है। भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। G7 समिट के लिए फ्रांस के एवियन पहुंचा। दुनिया के नेताओं से बातचीत करने और अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का बेसब्री से इंतज़ार है। भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 3:53 pm

Hormuz में ईरान का 'माइन' गेम, US Peace Deal के बावजूद Global Oil Supply पर मंडराया संकट

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुल सकता है; इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। हालांकि इस समझौते ने दुनिया के सबसे अहम शिपिंग रूट में से एक के लंबे समय तक बाधित रहने की तत्काल चिंताओं को कम कर दिया है, लेकिन समुद्री मामलों के जानकारों का कहना है कि कामकाज के पूरी तरह सामान्य होने में काफी समय लग सकता है। इंडस्ट्री के अधिकारियों और समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना ​​है कि दुनिया के सबसे अहम एनर्जी कॉरिडोर में से एक से होने वाला कमर्शियल ट्रैफिक कई हफ़्तों तक सीमित रह सकता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें इस बात की चिंता है कि इस जलमार्ग और इसके आस-पास नेवल माइन्स (समुद्री बारूदी सुरंगें) हो सकती हैं; यह एक ऐसा खतरा है जो लड़ाई खत्म होने के बाद भी शिपिंग पर असर डाल सकता है। इसे भी पढ़ें: US-Iran Deal से इजरायल बाहर! क्या समझौते का होगा पालन, ट्रंप vs नेतन्याहू अब होने वाला है? पश्चिमी समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुमान के मुताबिक, जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को साफ़ करने और सुरक्षित नेविगेशन रूट बनाने में 40 से 50 दिन लग सकते हैं। इस दौरान, शिपिंग कंपनियों, बीमा कंपनियों और एनर्जी फर्मों का इस रूट पर भरोसा फिर से बहाल होने से पहले, इलाके की जांच और सुरक्षा के लिए माइनस्वीपर और अंडरवाटर ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का बड़ा बयान- ईरान को नहीं देंगे 300 अरब डॉलर, Peace Deal की खबर 'Fake News' माइन्स (बारूदी सुरंगें) क्यों एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं? संघर्ष से पहले, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से दुनिया की रोज़ाना की तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुज़रता था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, माइन्स की थोड़ी सी संख्या भी कीमती सामान ले जा रहे बड़े कमर्शियल जहाज़ों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ईरान ने इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण जमाने की कोशिशों के तहत, संघर्ष के दौरान नेवल माइन्स (समुद्री बारूदी सुरंगों) का इस्तेमाल करने की बार-बार धमकी दी थी। हालांकि तेहरान ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि असल में माइन्स तैनात की गई थीं या नहीं, लेकिन अमेरिका का कहना है कि यह खतरा वास्तविक है और उसने माइन्स बिछाने के काम में शामिल ईरानी जहाजों को निशाना बनाया है। 2 जून को, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीनेट की विदेश संबंध समिति की सुनवाई में बताया कि ईरान ने होर्मुज़ के बड़े हिस्से जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है में बारूदी सुरंगें (माइन्स) बिछाई थीं, हालांकि उन्होंने इस बारे में और जानकारी नहीं दी। बाद में जर्मनी की नौसेना ने कहा कि अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेनाओं से मिली जानकारी से पता चला है कि जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के आसपास चार जगहों पर बारूदी सुरंगें देखी गई थीं; हालांकि बर्लिन ने यह भी कहा कि उसने इन रिपोर्टों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 3:36 pm

ब्रिटेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लग सकती है रोक, सरकार कर रही है विचार

सोशल मीडिया प्रतिबंध का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पार्टी के अंदर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

देशबन्धु 16 Jun 2026 12:25 pm

मेक्सिको की राष्ट्रपति ने यूएसएमसीए का किया समर्थन, बोलीं- ट्रंप के साथ समझौते पर बातचीत करने को तैयार

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने मुक्त व्यापार पर यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (यूएसएमसीए) को अपना समर्थन दिया

देशबन्धु 16 Jun 2026 9:31 am

लंका प्रीमियर लीग के प्रमोटर आईपीजी ग्रुप ने की नैस्डैक-लिस्टेड पार्टनर से करोड़ों डॉलर की रणनीतिक फंडिंग की घोषणा

फंडिंग और साझेदारी से लीग के वैश्विक विस्तार, बेहतर व्यावसायिक लाभ और डिजिटल नवाचार को मिलेगी गति कोलंबो, श्रीलंका, 15 जून 2026: लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) का छठा सीजन 10 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और उससे ठीक पहले लीग को बड़ा वित्तीय बढ़ावा मिला है। एलपीएल के प्रमोटर इनोवेटिव प्रोडक्शन ग्रुप एफज़ेड, ... Read more

अजमेरनामा 16 Jun 2026 5:24 am

ईरान-अमेरिका समझौते पर इजरायल की नाराजगी, सुरक्षा जोखिमों को लेकर विवाद

इजरायल के नेता अमेर‍िका और ईरान के बीच हुए समझौते के पक्ष में नहीं द‍िख रहे हैं। इजरायली नेताओं ने ईरान के साथ अमेरि‍का के समझौते की कड़ी आलोचना की है

देशबन्धु 16 Jun 2026 4:10 am

मैं जनता को निराश नहीं करूंगाः शी चिनफिंग

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग जमीनी स्तर के नेता हैं। उन्हें जनता से गहरा लगाव है। उनका कहना है कि मेरे दिल में सिर्फ जनता है और मैं जनता को निराश नहीं करूंगा।

देशबन्धु 16 Jun 2026 2:50 am

श्रीलंका में उत्साह के साथ मनाया गया ड्रैगन बोट फेस्टिवल

2026 ड्रैगन बोट सांस्कृतिक महोत्सव और चीन-श्रीलंका मैत्री कप ड्रैगन बोट दौड़ का आयोजन रविवार को कोलंबो में बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ किया गया

देशबन्धु 15 Jun 2026 11:32 pm

अमेरिका-ईरान जंग पर ब्रेकथ्रू, MoU साइन लेकिन ट्रंप के बयान से बढ़ा सस्पेंस

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले चार महीनों से जारी जंग को रोकने के लिए दोनों देशों ने एक अहम समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं

देशबन्धु 15 Jun 2026 11:19 pm

आज का एक्सप्लेनर:अमेरिका-ईरान जंग में कौन जीता, क्या पाकिस्तान नहीं, कतर ने करवाई डील, पेट्रोल-डीजल कब सस्ता होगा; 7 सवालों में पूरी कहानी

107 दिनों की तबाही के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान जंग खत्म करने को राजी हैं। रविवार को ट्रम्प ने लिखा- समझौता हो गया। ईरान ने भी बयान जारी किया। अब 19 जून को स्विट्जरलैंड में दोनों देश MoU पर साइन करेंगे। अंदरखाने कैसे हुई ये डील, इसमें क्या-क्या शर्तें हैं, आखिर कौन जीता ये जंग और अब आगे क्या होगा; ऐसे 7 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: क्या अमेरिका और ईरान में वाकई जंग खत्म हो गई है? जवाबः 14 जून की देर रात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहजाब शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ऐलान किया, 'अमेरिका और ईरान में शांति समझौता हो गया है। दोनों देश लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तुरंत मिलिट्री ऑपरेशन बंद करने के लिए तैयार हो गए हैं।' थोड़ी देर बाद ट्रम्प ने भी एक पोस्ट से जरिए कंफर्म किया, 'ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।’ ईरान की तरफ से भी पुष्टि की गई कि दोनों पक्षों ने एक मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MoU फाइनल कर लिया है। इससे ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटेगी और मौजूदा सीजफायर आगे बढ़ेगा। हालांकि इस घोषणा को ‘जंग का अंत’ कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी। इसकी तीन बड़ी वजहें हैं… पहली- खुद ट्रंप का बयान: ट्रम्प का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध रोकने का समझौता हो गया है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। अगर परमाणु कार्यक्रम पर समझौते से अमेरिका संतुष्ट नहीं हुआ तो सख्त कदम उठाएगा। दूसरी- इजराइल का रवैयाः समझौते की घोषणा से कुछ घंटे पहले इजराइल ने लेबनान पर बमबारी की। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाने के संकेत दिए हैं। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने अमेरिका-ईरान पीस डील पर कड़ी नाराजगी जताई है। तीसरी- ईरान की शर्तेंः ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि ये डील कायम रखने के लिए अमेरिका को तीन कदम उठाने होंगे- 1. नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, 2. युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना, 3. ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना। जेनेवा में 19 जून को MoU पर साइन होंगे। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प या उप राष्ट्रपति जेडी वांस, समझौते पर डिजिटल साइन करेंगे। इसके बाद अगले 60 दिनों तक कई दौर की बातचीत होगी और फाइनल एग्रीमेंट तय किया जाएगा। सवाल-2: पाकिस्तान या कतर, अंदरखाने ये डील किसने कराई? जवाबः जंग शुरू होने के बाद सुलह कराने की कमान सबसे पहले पाकिस्तान ने संभाली, लेकिन आखिरी दौर में बाजी कतर के हाथ आ गई… दिल्ली स्थित थिंक टैंक ऑब्जर्वर्स रिसर्च फाउंडेशन यानी ORF में मिडिल ईस्ट से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट कबीर तनेजा बताते हैं, ‘इस समझौते में कतर की एंट्री आर्थिक वजहों से हुई। मसलन- आने वाले दिनों में ईरान फंड्स की मांग करता है, तो ये कतर से ही ट्रांसफर किए जाएंगे। क्योंकि ईरान के फ्रीज फंड का बड़ा हिस्सा कतर के बैंकों में बंद है। अगर ट्रम्प खुद अमेरिका के हवाले से फंड्स भेजेंगे, तो अमेरिका की स्थिति कमजोर दिखेगी।’ डिफेंस एनालिस्ट नितिन ए. गोखले का आकलन है कि पाकिस्तान के पास इतना दम या भरोसा नहीं था कि वह दोनों पक्षों को समझौते के करीब ला सके। आखिरकार कतर की दखल से ही डील मुमकिन हुई। हालांकि, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एसोसिएट रिसर्चर डॉ. यासिर अली मिर्जा इसे किसी एक देश की जीत मानने से इनकार करते हैं। उनके मुताबिक यह डील पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब और ओमान के साझा प्रयासों का नतीजा है। सवाल-3: इस समझौते में दोनों देश किन-किन बातों पर राजी हुए हैं?जवाबः आधिकारिक तौर से अभी शांति समझौते की शर्तें जारी नहीं की गई है। लेकिन ईरानी न्यूज एजेंसी मेहर और ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक शांति के लिए 14 पॉइंट का लेखा तैयार किया गया हैं- सवाल-4: आखिरकार इस जंग में कौन जीता? जवाबः समझौते की शर्तों और बयानों से तो इस जंग में ईरान का पलड़ा भारी दिख रहा है… ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने डील की घोषणा के बाद कहा, 'दुश्मन ने अपने नापाक इरादों को पूरा करने के लिए हम पर हमला किया था, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया और हमने जंग में बड़ी जीत हासिल की।' दूसरी तरफ ट्रम्प ने डील का ऐलान करते हुए जंग में जीत का कोई जिक्र नहीं किया। जबकि कुछ हफ्तों पहले तक वो ईरान को नेस्तनाबूद करने का दावा कर रहे थे। सवाल-5: इजराइल इस डील से खुश है या नाराज? जवाबः शुरुआती प्रतिक्रियाओं में इजराइल इस डील से नाखुश दिख रहा है। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने कहा है कि अमेरिका-ईरान समझौते से इजराइल बंधा हुआ नहीं है। कबीर तनेजा मानते हैं कि इजराइल के लिए ये डील बुरी खबर है। उसने ट्रम्प के बार–बार कहने के बाद भी लेबनान पर हमले नहीं रोके थे। 14 और 15 जून को भी इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में कई मिसाइलें दागीं। हालांकि इजराइल को एक बड़ी बढ़त भी मिल रही है। लेबनान की करीब 2,000 वर्ग किमी जमीन पर अब इजराइल का कब्जा है। पहले इजराइल कहता था कि उसका टारगेट सिर्फ लितानी नदी तक हिजबुल्ला लड़ाकों को खत्म करना है। लेकिन अब वो नदी पार कर लेबनान के दक्षिणी शहर नबातीह तक पहुंच गया है। इजराइल ने साफ कर दिया है कि इस जंग के दौरान उसने जो भी जमीन कब्जाई है, वह नहीं लौटाएगा। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार की नीति स्पष्ट है। सेना इन इलाकों में बनी रहेगी ताकि इजराइल की सीमाओं और वहां रहने वाले लोगों को जिहादी गुटों से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि इन सुरक्षा क्षेत्रों से स्थानीय निवासियों को हटाया जाएगा और जमीन के ऊपर तथा नीचे मौजूद सभी आतंकी ढांचों को नष्ट किया जाएगा। सीमा से सटे गांवों में जिन घरों का इस्तेमाल आतंकी ठिकानों के रूप में हुआ, उन्हें भी ध्वस्त किया जाएगा। काट्स ने कहा कि नेतन्याहू ने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को भी साफ कर दी है। उन्होंने खुद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस मुद्दे पर बात की है। सवाल-6: इस डील का भारत समेत दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? जवाबः होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में ईंधन का जो संकट पैदा हुआ था, उससे निजाद मिलेगी… हालांकि JNU में फॉरेन अफेयर्स के प्रोफेसर राजन कुमार कहते हैं, ‘जंग रुकती है, तो तेल के दाम पहले जैसे होने में 6-9 महीने लग सकते हैं। बड़ी तेल कंपनियां अक्सर पहले से तय कॉन्ट्रैक्ट पर तेल खरीदती-बेचती हैं। कई बार 3-6 महीने पहले ही यह तय हो जाता है कि कितना तेल खरीदना है और किस कीमत पर खरीदना है।’ यासिर अली मिर्जा बताते हैं, ‘जंग रुकने से ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलेगी और भारत और ईरान के बनाए चाबहार बंदरगाह पर व्यापार बढ़ेगा। इससे भारतीय सामान सीधे ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच सकेगा। हालांकि, इसका असर दिखने में अभी समय लगेगा।’ सवाल-7: क्या यह डील टिकेगी? टूटने का सबसे बड़ा खतरा क्या है? जवाबः डील टूटने के 3 बड़े खतरे हैं- हालांकि यासिर अली मिर्जा मानते हैं कि मौजूदा डील फाइनल एग्रीमेंट में बदलेगी और जंग खत्म होगी, क्योंकि दोनों देश इस समय जंग आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। ईरान को जंग से इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर भारी नुकसान हुआ है। वो चाहेगा कि उसके फंड्स रिलीज हों और नुकसान की भरपाई हो। ---------- ये खबर भी पढ़िए… पापा के कहने पर 'किलर' बने:5 बच्चे पैदा करने की जिद में 3 शादियां; ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ, 80वें जन्मदिन पर पूरा एनालिसिस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कमोबेश हर रोज दुनिया को अपनी बातों और हरकतों से हैरान करते हैं। वो खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। हालांकि जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 15 Jun 2026 4:28 pm

“डील पूरी!” ट्रंप ने ईरान समझौते का किया धमाकेदार ऐलान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि यूएस और ईरान ने एक डील पूरी कर ली है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म हो जाएगी।

देशबन्धु 15 Jun 2026 10:52 am

“रोटी-नमक से स्वागत!” स्लोवाकिया में पीएम मोदी का ऐतिहासिक आगाज़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (स्थानीय समयानुसार) को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचे। स्लोवाक के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने ग्रैंड होटल रिवर पार्क में उनका स्वागत किया

देशबन्धु 15 Jun 2026 8:14 am

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की कहानी:पाक आर्मी निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध AK-47 क्यों चला रही, 46 की मौत

11 जून 2026। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK का रावलकोट शहर। ईदगाह मैदान पर हजारों प्रदर्शनकारी जमा थे। साधारण सी मांगे थीं- किफायती आटा, चावल, बिजली और बुनियादी अधिकार। पाकिस्तानी सेना ने अचानक निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर AK-47 से गोलीबारी शुरू कर दी। 16 लोग मारे गए, 37 घायल हो गए। इससे दो दिन पहले भी PoK में 30 प्रदर्शनकारियों की हत्या हो चुकी थी। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की पूरी कहानी पर आज की मंडे मेगा स्टोरी… **** डिस्क्लेमर: भारतीय संविधान के अनुसार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) समेत संपूर्ण जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और दैनिक भास्कर इस संवैधानिक स्थिति का पूर्ण समर्थन करता है। इस स्टोरी का मकसद सिर्फ PoK के इतिहास, मौजूदा प्रशासनिक ढांचे और हालिया घटनाओं को तथ्यात्मक रूप से पेश करना है। इसमें इस्तेमाल हुए संदर्भ, नाम या ब्योरे जैसे 'आजाद जम्मू-कश्मीर', 'गिलगित-बाल्टिस्तान' आदि पाकिस्तान द्वारा दिए गए नामों का सिर्फ रिपोर्टिंग के लिए जिक्र हैं। इन्हें किसी दावे या अधिकार की स्वीकृति के तौर पर न देखा जाए। **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी, अंकलेश विश्वकर्मा, अंकुर बंसल ------------ ये खबर भी पढ़िए… क्या भारत-पाकिस्तान में फिर दोस्ती होने वाली है:4 देशों में बैकचैनल मीटिंग्स; कोशिशों के पीछे असली वजह और इसका असर क्या होगा पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की रेगुलर प्रेस ब्रीफिंग चल रही थी। एक पत्रकार ने प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से पूछा- क्या भारत और पाकिस्तान के बीच बैकचैनल बातचीत हो रही है? अंद्राबी बोले- अगर मैं टिप्पणी करूंगा, तो वो बैकचैनल नहीं रहेगा। इधर भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के नंबर-2 नेता दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 15 Jun 2026 5:18 am

10 मंदिर उड़ाने की धमकी, कौन है खालिस्तान नेशनल आर्मी:पाकिस्तान-अजरबैजान में मीटिंग, 7 राज्यों में नेटवर्क; RSS हेडक्वार्टर भी टारगेट

‘तुम्हारे हिंदू मंदिर निशाने पर हैं। दिल्ली और हरियाणा के लोगों, तुमने 6 जून, 1984 को भिंडरांवाले की मौत पर मिठाइयां बांटी थीं। अब हम इसका बदला तुम्हारे मंदिरों में ब्लास्ट करके लेंगे। इसलिए अपने बच्चों को बचाओ और 5-6 जून को कोई सफर न करो।’ 4 जून की सुबह 9:54 बजे पंचकूचा के मेयर श्यामलाल बंसल को धमकी भरा ये ई-मेल मिला। इसमें दिल्ली-हरियाणा के 6 बड़े मंदिरों में ब्लास्ट करने की धमकी थी। मेल मिलते ही लोकल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। डॉग स्क्वाड और एंटी-बम स्क्वाड बुलाई गईं। मंदिर खाली कराए गए, लेकिन कुछ नहीं मिला। जांच आगे बढ़ी, तो पता चला कि धमकी के पीछे पाकिस्तान में एक्टिव खालिस्तान नेशनल आर्मी है। इसके बाद दिल्ली और हरियाणा पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट को एक्टिव कर दिया गया। पाकिस्तान से सटे बॉर्डर के 50 किलोमीटर के दायरे में गांवों और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। अजरबैजान में भारत विरोधी सम्मेलन, तीन देशों से खालिस्तान समर्थक पहुंचे क्या खालिस्तान के नए टेरर मॉड्यूल में हिंदू मंदिर टारगेट पर हैं? खालिस्तान नेशनल आर्मी के काम करने का तरीका क्या है? दैनिक भास्कर ने NIA के अफसरों और डिफेंस एक्सपर्ट्स से ये सवाल पूछे। जवाब मिला कि धार्मिक स्थलों पर दहशत फैलाने की साजिश 16 जनवरी को अजरबैजान में हुए भारत विरोधी सम्मेलन का हिस्सा हो सकती है। इसमें कनाडा, अमेरिका और पाकिस्तान में रहने वाले खालिस्तानी संगठनों के बड़े नेता शामिल हुए थे। बीते 2 साल में खालिस्तानी टेरर मॉड्यूल देश के 10 बड़े मंदिरों को लेकर धमकी दे चुका है। उसके टारगेट पर नागपुर का RSS हेडक्वार्टर भी है। अलग-अलग संगठनों को मिलाकर बनी खालिस्तान नेशनल आर्मी 28 जनवरी से 10 जून 2026 तक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र में धमकी भरे ई-मेल मिले हैं। इसमें हिंदू मंदिर, सरकारी इमारतें, स्कूलों और रेल नेटवर्क को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। सभी की जिम्मेदारी खालिस्तान के नए मॉड्यूल KNA, यानी खालिस्तान नेशनल आर्मी ने ली है। खालिस्तानी टेरर फोर्सेस पर स्टडी कर चुके भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं, ‘भारत में बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स और सिख फॉर जस्टिस जैसे आतंकी संगठन दशहत फैला रहे हैं। इसमें खालिस्तान नेशनल आर्मी का नाम भी जुड़ गया है। ये कोई संगठन नहीं, बल्कि नया आतंकी मॉड्यूल है।’ ‘भारत के राजनीतिक दबाव के बाद कनाडा और अमेरिका में खुलकर ऑपरेट करना खालिस्तानी संगठनों के लिए मुश्किल हो गया है। इसलिए ये गुट नए नाम से पाकिस्तान और अजरबैजान जैसे इस्लामिक देशों में ऑपरेट कर रहे हैं। वहां ये बगैर रोक-टोक के भारत के खिलाफ रणनीति बना सकते हैं।’ पुराने संगठनों ने नया मॉड्यूल बनाया, पाकिस्तान-अजरबैजान में बेस केंद्रीय जांच एजेंसी NIA के मुताबिक, खालिस्तान नेशनल आर्मी की गतिविधियों में एक कॉमन पैटर्न दिखता है। 28 जनवरी को पहली बार इससे जुड़े ई-मेल में दिल्ली के द्वारका कोर्ट में ब्लास्ट की धमकी मिली। 30 जनवरी को पंजाब-हरियाणा सचिवालय को ई-मेल भेजा गया। फरवरी में संसद में ब्लास्ट की धमकी मिली। जांच एजेंसी से जुडे़ एक अधिकारी बताते हैं, ‘18 जून 2023 को खालिस्तान टाइगर फोर्स के चीफ हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद पाकिस्तान में एक्टिव खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे आतंकी संगठन नए मॉड्यूल तैयार कर रहे हैं। खालिस्तान नेशनल आर्मी इसी का हिस्सा है।’ ‘ISI के समर्थन से पाकिस्तान में बैठे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स प्रमुख रंजीत नीटा और बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सरगना बावधा सिंह तुर्किए और अजरबैजान में नेटवर्क फैला रहे हैं। 16 जनवरी, 2026 को अजरबैजान की राजधानी बाकू में एक सम्मेलन हुआ था। इसमें अमेरिका, कनाडा और पाकिस्तान के चरमपंथी नेता शामिल हुए।’ अधिकारी के मुताबिक, अजरबैजान सम्मेलन के 11 दिन बाद ही 28 जनवरी को गुजरात के स्कूलों, फिर फरवरी, मार्च और जून में मंदिरों-सरकारी इमारतों में ब्लास्ट की धमकियां मिलीं। धमकी भरे ई-मेल खालिस्तान नेशनल आर्मी ने भेजे थे। ये साबित करता है कि भारत में दहशत फैलाने का ये पैटर्न अजरबैजान बैठक में तैयार साजिश का हिस्सा है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि खालिस्तानी नेटवर्क को अजरबैजान के समर्थन की 2 अहम वजह हो सकती हैं- पहली: भारत अजरबैजान के दुश्मन आर्मेनिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। भारत आर्मेनिया को हथियार बेचता है। इसमें पिनाका रॉकेट लॉन्चर और आकाश-1S मिसाइल शामिल हैं। 2023 में अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच संघर्ष हुआ था। 2024 में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने भारत से आर्मेनिया को हथियार न देने की गुजारिश की थी। दूसरी: अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच संघर्ष की वजह नागोर्नो-काराबाख एरिया है। इस पर दोनों दावा करते हैं। पाकिस्तान इस मसले पर अजरबैजान के साथ है। इसके बदले अजरबैजान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का पक्ष लेता रहा है। पहलगाम हमले के बाद भारत के पाकिस्तान पर हवाई हमलों की अजरबैजान ने निंदा की थी। पूर्व DGP बोले- ई-मेल के जरिए धमकियां देना नया पैटर्न 1986 से 1988 के बीच पीलीभीत में खालिस्तानी संगठनों पर कार्रवाई कर चुके यूपी के पूर्व DGP बृजलाल ने खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ अपने ऑपरेशन से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। 1987 में सितंबर में आतंकियों ने पीलीभीत के उदासीन मठ में दो संतों की हत्या कर दी थी। वे डेरे से साधुओं की जीप लेकर भाग रहे थे। गश्त पर निकले दो सिपाहियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। आतंकियों ने उन्हें भी गोली मार दी। पीलीभीत में एक ही दिन में 4 मर्डर खालिस्तान सपोर्टर ग्रुप की पहली घटना थी। इसी दौरान यूपी में पहली बार भिंडरावाले टाइगर फोर्स के पोस्टर चिपकाए गए। उस वक्त बृजलाल पीलीभीत के SP थे। वे 13 पुलिसवालों की टीम लेकर आतंकियों को दबोचने पंजाब चले गए। उनकी टीम तरन तारन से 2 आतंकियों को पकड़कर यूपी लाई थी। ये खालिस्तान मूवमेंट के खिलाफ उस वक्त की बड़ी कार्रवाई थी। क्या अब खालिस्तान ने भारत में ऑपरेट करने का पैटर्न बदला है? जवाब में बृजलाल कहते हैं, ‘ई-मेल के जरिए धमकियां देना नया पैटर्न है। अब तक ये संगठन मौजूदगी दर्ज कराने के लिए गुरुद्वारों पर पर्चे लगाते या ऑडियो-वीडियो टेप रिलीज करते थे। अब ई-मेल भेजकर डिजिटल टेरर फैला रहे हैं।’ गुजरात का CM ऑफिस और नगर निगम कार्यालय भी टारगेट पर ई-मेल के जरिए धमकी भेजने का सबसे नया मामला गुजरात का है। 10 जून को खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम से सरकारी आईडी पर भेजे गए ईमेल में गांधीनगर में CM ऑफिस, अहमदाबाद नगर निगम और RSS के ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। यहां तलाशी अभियान भी चलाया गया, लेकिन कुछ नहीं मिला। गुजरात के DGP जीएस मलिक कहते हैं, ‘धमकी भरे ई-मेल्स को गुजरात पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। हर धमकी के बाद लोकल पुलिस, बम निरोधक दस्ते, खुफिया इकाइयों और साइबर विशेषज्ञों को एक्टिव किया जाता है।’ खालिस्तान का दावा- पूरे पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में फैला नेटवर्क अगस्त, 2024 में खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने मैप जारी कर 7 राज्यों में नेटवर्क होने का दावा किया था। इनमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं। NIA के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए 2 साल में पंजाब के 6 पुलिस स्टेशनों पर ग्रेनेड हमले किए गए। इसी साल 27 अप्रैल को पटियाला के राजपुरा में रेलवे ट्रैक पर बम लगाने की कोशिश के दौरान धमाका हुआ, जिसमें आरोपी की मौत हो गई थी। …………………………… ये खबर भी पढ़ेंकश्मीर में हिज्बुल्लाह जैसे ड्रोन अटैक का खतरा, पाकिस्तान से 4 आतंकी घुसे जम्मू कश्मीर में आतंकी हिजबुल्लाह की तर्ज पर हमले की साजिश रच रहे हैं। 26 अप्रैल को खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला कि साउथ लेबनान का रहने वाले आतंकी शादाब बाजी पाकिस्तान के रास्ते भारत में दाखिल हुआ। उसके साथ 3 पाकिस्तानी आतंकियों ने भी घुसपैठ की है। लेबनानी आतंकी हिजबुल्लाह ड्रोन हमलों में माहिर होते हैं। खुफिया एजेंसी को शक है कि संदिग्ध आतंकी कश्मीर में ड्रोन हमलों की तैयारी कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 15 Jun 2026 5:16 am

जनवरी से मई तक, चीनी रेलवे ने 1.67 अरब टन माल का परिवहन किया

चाइना रेलवे ग्रु के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से मई तक, चाइना रेलवे ने कुल 1.67 अरब टन माल का परिवहन किया, जो साल दर साल 1.8 प्रतिशत अधिक है

देशबन्धु 15 Jun 2026 3:04 am

पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने नीस में विला केर्लियोस का किया दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के नीस में विला केर्लियोस का दौरा किया। दोनों नेता विला केर्लियोस में घूमते हुए हल्की-फुल्की बातचीत करते नजर आए।

देशबन्धु 14 Jun 2026 11:09 pm

बेरूत पर इजरायली हमला: ट्रंप का गुस्सा फूटा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह लेबनान की राजधानी बेरूत पर हुए इजरायली हवाई हमले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है

देशबन्धु 14 Jun 2026 10:01 pm

आज का एक्सप्लेनर:भारतीय नाविकों के मारे जाने का अमेरिका को पछतावा नहीं, उल्टा ‘चेतावनी’ दे रहा; क्या भारत ने मजबूती से बात नहीं रखी

पिछले हफ्ते अमेरिकी हमलों में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई। विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात की और कड़ा विरोध दर्ज कराया। लेकिन इसी बातचीत का जो ब्यौरा रूबियो ने दिया, उस पर भारत में हंगामा मचा है। इसी से जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत का पूरा मामला क्या है?जवाबः 8 जून 2026 की दोपहर करीब सवा दो बजे। ओमान की खाड़ी में डूबते जहाज से एक आवाज गूंजी- सर, ये मोटर टैंकर मैरिवेक्स है। जहाज डूब रहा है। थोड़ी देर बाद एक और आवाज आई- ‘सभी 24 क्रू सदस्य भारतीय हैं। प्लीज जल्दी मदद करो।’ इसके बाद ओमान के मिलिट्री हेलीकॉप्टरों और इंडियन कोस्ट गार्ड की मदद से सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया। दो दिन बाद ही ‘MT सेटेबेलो’ नाम के जहाज पर भी हमला हुआ। इसमें सवार 28 में से 24 क्रू मेंबर्स भारतीय थे। इनमें 3 की मौत हो गई। तीसरा हमला 11 जून को ओमान तट के पास 20 भारतीय नाविकों वाले एमटी जलवीर पर हुआ। जहाज के इंजन वाले हिस्से पर दो हेलफायर मिसाइल दागी गईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुद इन तीनों हमलों की जिम्मेदारी ली। सेटेबेलो और जलवीर पर हमले का वीडियो भी शेयर किया, जिसमें भारतीयों की मौत हुई थी। शिपिंग मिनिस्टर सर्बानंद सोनोवाल के मुताबिक, 10 जून को मारे गए तीनों भारतीय नागरिक आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश के शव फिलहाल ओमान में हैं। विदेश मंत्रालय के सहयोग से जल्द भारत लाकर परिवारों को सौंपा जाएगा। सवाल-2: भारत ने अब तक इस मामले पर क्या रुख अपनाया है?जवाबः भारत ने 10 जून को सेटेबेलो पर हुए हमले के विरोध में अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब किया और चिंता जताई। जलवीर पर हमले के बाद एक बार फिर मीक्स को तलब किया गया। विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर हमलों की निंदा की। बयान में कहा, 'इस क्षेत्र में शिपिंग पर लगातार हमले की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इसकी सीधी वजह इस इलाके में चल रहा संघर्ष है। जल्द से जल्द अंतर्राष्ट्रीय समुद्री रास्तों से बिना रुकावट के दोबारा व्यापार शुरू होना चाहिए।' हालांकि इसमें अमेरिका का कहीं जिक्र नहीं था। हालांकि देश में बढ़ते आक्रोश के बीच 12 जून को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात कर हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने एक्स पर बताया, ‘आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के हमलों के खिलाफ़ भारत का कड़ा विरोध दोहराया, जिनमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने वाली ऐसी घातक कार्रवाई किसी भी तरह से उचित नहीं है।’ सवाल-3: क्या अमेरिका को भारतीय नाविकों के मारे जाने का पछतावा है?जवाबः अमेरिका की हालिया प्रतिक्रियाओं से नहीं लगता कि अमेरिका को इसका कोई पछतावा है… भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल के मुताबिक मार्को रूबियो का बयान बहुत ज्यादा कठोर था। उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत को सही ठहराने की कोशिश की। एक मित्र देश के निहत्थे नागरिकों की मौत पर उन्होंने कोई दुख नहीं जताया। कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने भी X पर लिखा, ‘रूबियो का बयान पढ़कर झटका लगा। इसमें भारतीय नागरिकों की मौत पर न तो दुख जताया गया है और न ही संवेदना। भारत का कोई 'मित्र' और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?’ कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि अमेरिका ने न तो लोगों की मौत को स्वीकार किया, न ही जिम्मेदारी ली और न कोई पछतावा जाहिर किया। इसके बजाय, विदेश मंत्री रुबियो ने कथित तौर पर चेतावनी जारी कर दी। कहा अमेरिकी मिलिट्री के आदेशों का पालन न करना 'बर्दाश्त नहीं' किया जाएगा। यह आदेश की भाषा है, पछतावे की नहीं।’ सवाल-4: क्या भारत ने अपने नाविकों की मौत का मुद्दा मजबूती से नहीं उठाया?जवाबः जियो-पॉलिटिक्स, डिप्लोमेसी और डिफेंस एक्सपर्ट्स भारत सरकार के रुख पर सवाल उठा रहे हैं। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में स्ट्रैटेजिक स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. ब्रह्म चेल्लानी के मुताबिक, ‘भारतीय नाविकों की मौत पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया कमजोर ही है। इसे 'उचित नहीं' बताया गया है, मानो निहत्थे नाविकों की हत्या कोई ऐसी बात हो जिस पर बस बहस की जा सकती है। अभी भी अमेरिका से माफी मांगने या पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने की कोई मांग नहीं की गई है। ऐसा कोई संकेत नहीं है कि नई दिल्ली इस मामले को सामान्य डिप्लोमैटिक औपचारिकताओं से आगे ले जाने का इरादा रखती है।’ भारतीय सेना से रिटायर्ड मेजर जनरल जी. डी. बख्शी के मुताबिक, ‘अब तक 100 से ज्यादा चीनी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी पार कर चुके हैं, लेकिन न तो किसी चीनी जहाज पर हमला हुआ है और न ही रूसी जहाज पर। इसके उलट भारत, जिसने अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उसके जहाजों को निशाना बनाया गया। जब भारत में लोगों का गुस्सा बढ़ा, तब जाकर विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।’ द हिन्दू अखबार के अंतरराष्ट्रीय संपादक स्टैनली जॉनी ने एक्स पर लिखा है, 'भारत यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा में किसी का नाम नहीं लेता समझ आता है, कतर पर इजराइली बमबारी की निंदा में नाम लेने से बचना भी समझ आता है। लेकिन भारत उस देश का नाम क्यों नहीं लेता, जिसने भारतीय नागरिकों को ले जा रहे जहाजों पर मिसाइलें दागीं और उनमें से तीन भारतीयों की जान ले ली। वह भी भारत के पड़ोस के समुद्री क्षेत्र में।’ पवन खेड़ा के मुताबिक, ‘भारत को मांग करनी चाहिए थी कि अमेरिका अपने हमले में तीन युवा भारतीय नाविकों की हत्या के लिए बिना शर्त माफी मांगे।’ हालांकि यूनाइटेड स्टेट्स इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के डायरेक्टर और विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव का मानना है, 'कूटनीतिक तरीके से भारत सरकार का रुख सबसे मजबूत है। ऐसे मामलों में सरकार बैलेंस रुख ही रखती है, लेकिन आम लोग न्यूयॉर्क में केस फाइल कर सकते हैं। पीड़ित परिवार अमेरिका से मुआवजा भी मांग सकता है।' सवाल-5: इससे पहले अमेरिका के साथ ऐसी क्राइसिस हुई, तब क्या हुआ?जवाबः भारत पहले कई बार अमेरिका के सामने कड़ा डिप्लोमैटिक प्रतिरोध दर्ज करा चुका है - 1. 2009: भारतीय डिप्लोमैट देवयानी खोब्रागड़े की गिरफ्तारी 2. 2009-2011: अमेरिकी एयलाइंस का दो बार पूर्व राष्ट्रपति कलाम की तलाशी लेना 3. 2010: साड़ी पहने होने के चलते भारतीय राजदूत की तलाशी *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…पापा के कहने पर 'किलर' बने:5 बच्चे पैदा करने की जिद में 3 शादियां; ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ, 80वें जन्मदिन पर पूरा एनालिसिस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कमोबेश हर रोज दुनिया को अपनी बातों और हरकतों से हैरान करते हैं। वो खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। हालांकि जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 14 Jun 2026 6:36 pm

ट्रंप ने कहा 'ईरान संग समझौता ओबामा के जेसीपीओए से बेहतर', आखिर क्या थी वो डील?

अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए जेसीपीओए समझौते से बेहतर डील करने का ऐलान किया। 2015 में ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ था, जिसे ज्वाइंट कंप्रेहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए), यानी 'संयुक्त व्यापक कार्ययोजना' (आसान भाषा में ईरान परमाणु समझौता) कहा जाता है। इसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत देना था।

देशबन्धु 14 Jun 2026 6:13 pm

फ्रांस में गूंजे 'मोदी-मोदी' के नारे, भारतीय समुदाय बोला-पीएम ने युवाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई प्रेरणा दी

फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारतीय समुदाय ने जोरदार स्वागत किया। इंतजार में खड़े लोगों ने पीएम के पहुंचते ही 'मोदी मोदी' और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए

देशबन्धु 14 Jun 2026 8:39 am