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जापान भूकंप: कुमामोटो में 34 लोगों ने गंवाई जान, नौ मामलों में मौत की असली वजह की जांच जारी

जापान के कुमामोटो प्रीफेक्चर भूकंप हादसे के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। हालांक‍ि, मामले की जांच चल रही है क‍ि इन मौतों का सीधा संबंध रिक्टर स्केल पर 7.1 तीव्रता वाले भूकंप से था या नहीं। प्रीफेक्चरल डिजास्टर रिस्पॉन्स हेडक्वार्टर के अनुसार, इनमें नौ मामलों की जांच चल रही है।

देशबन्धु 31 Jul 2026 1:50 am

क्या ईरान को घेरने की ट्रंप की जिद में भारत को भी चुकानी पड़ेगी बड़ी कीमत?

वैश्विक कूटनीति के मंच पर एक बार फिर बड़ा भूचाल आता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए इस बार सैन्य मिसाइलों के बजाय 'टैरिफ' को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने का संकेत दिया है। सीधे तौर पर सेना भेजने या हवाई हमलों के बजाय ट्रंप प्रशासन का ध्यान अब ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने पर केंद्रित है। लेकिन इस कड़े फैसले की गूंज सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर भारत और चीन जैसे बड़े एशियाई देशों पर पड़ता दिख रहा है।मिसाइल की जगह 'टैरिफ वार' का पैंतरासैन्य संघर्ष में होने वाले भारी नुकसान से बचने के लिए अमेरिका अब 'सेकेंडरी प्रतिबंधों' और भारी आयात शुल्क (टैरिफ) की रणनीति पर काम कर रहा है। रणनीति बेहद साफ है: जो भी देश या विदेशी कंपनियां ईरान के साथ व्यापार करेंगी या वहां से कच्चा तेल खरीदेंगी, अमेरिका उन पर भारी पेनल्टी और टैरिफ लगाएगा। इसका मकसद ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजर से पूरी तरह से अलग-थलग करना है, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को मिलने वाला रेवेन्यू रुक जाए।निशाने पर भारत और चीन क्यों?ट्रंप की इस सख्त नीति के केंद्र में सीधे तौर पर चीन और भारत आते हैं। चीन वर्तमान में ईरान के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापारिक लेनदेन होता है। अगर अमेरिका ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो अमेरिकी बाजार में चीनी सामान और महंगा हो जाएगा, जिससे बीजिंग की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा।दूसरी तरफ भारत के लिए भी यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। भारत भले ही अमेरिकी दबाव के बाद ईरान से तेल का आयात कम कर चुका हो, लेकिन चाबहार पोर्ट जैसी सामरिक परियोजनाओं और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए ईरान के साथ भारत के रिश्ते बेहद अहम हैं। यदि अमेरिका ईरान के साथ हर तरह के आर्थिक संबंधों पर सख्ती बरतता है, तो भारत को अपने कूटनीतिक संतुलन और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?अगर यह आर्थिक युद्ध इसी दिशा में आगे बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि ट्रंप के इस कड़े फैसले के सामने भारत और चीन अपनी-अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को बचाते हुए किस तरह का कूटनीतिक रुख अपनाते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 11:06 pm

नेपाल का 'चाइना डायरेक्ट प्रोक्योरमेंट' ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च

नेपाल का पहला ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'चाइना मार्केट' 29 जुलाई को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया, जो नेपाली उपभोक्ताओं को चीनी कारखानों से सीधे प्राप्त माल उपलब्ध कराता है।

देशबन्धु 30 Jul 2026 11:02 pm

नेपाल में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ा बवाल: उपद्रव में युवक की मौत, भारत सीमा से सटे 3 जिलों में लगा कर्फ्यू

पड़ोसी देश नेपाल में सावन के पवित्र महीने में निकाली जा रही कांवड़ यात्रा के दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी। दो समुदायों/गुटों के बीच शुरू हुई कहासुनी ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया, जिसके बाद इलाके में पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। इस दुखद उपद्रव में एक स्थानीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है।भारत सीमा से सटे 3 जिलों में लागू हुआ कर्फ्यूयुवक की मौत की खबर फैलते ही आक्रोशित भीड़ सड़कों पर उतर आई और स्थिति बेकाबू होने लगी। बिगड़े हालात और कानून-व्यवस्था को काबू में करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारत-नेपाल सीमा से सटे 3 संवेदनशील जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है। कर्फ्यू लागू होने के बाद सुरक्षा बलों ने सड़कों पर फ्लैग मार्च निकाला है और लोगों से घरों के भीतर रहने की अपील की जा रही है।भारत-नेपाल बॉर्डर पर बढ़ाई गई चौकसीसीमावर्ती जिलों में कर्फ्यू लागू होने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सीमा सुरक्षा बल (SSB) को भी अलर्ट मोड पर रख दिया गया है।सघन चेकिंग: सीमा पार से आवाजाही करने वाले लोगों की कड़ी तलाशी और पहचान पत्र की जांच की जा रही है।अतिरिक्त बल की तैनाती: किसी भी अप्रिय घटना या असामाजिक तत्वों की घुसपैठ को रोकने के लिए सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।प्रशासनिक सतर्कता: दोनों देशों के सीमावर्ती अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है ताकि शांति व्यवस्था बनाए रखी जा सके।नेपाली पुलिस के अनुसार, उपद्रव में शामिल उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी आंशिक रूप से पाबंदी लगाई गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 10:13 pm

'धमकी देते हो…' खड़गे के बयान पर सदन में हंगामा:एंटी पेपर लीक बिल पर बहस, 'मनुस्मृति' को लेकर बयान पर सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों में हंगामा और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। खड़गे ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी जा रही है। बाद में उनके 'मनुस्मृति' संबंधी बयान पर हंगामा हुआ और सभापति ने टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए। वहीं, लोकसभा में राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। सुबह 11 बजे राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई। दोपहर 2 बजे कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया। विधेयक पर चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में भर्ती परीक्षाओं के लिए यूपीएससी, एसएससी, आईबीपीएस और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए एनटीए जैसी प्रमुख एजेंसियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा एजेंसी बनाने का सुझाव 1992 में आया था। एनडीए सरकार, यूपीए का अधूरा काम पूरा कर रही है। नेता प्रतिपक्ष खड़गे चर्चा में शामिल हुए। आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी जा रही है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि एक दिन संबंधित सदस्य को कमरे से बाहर खींचकर लाएंगे। इस टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। खड़गे बोले- शिक्षण संस्थानों में आरएसएस का दखल इसके बाद खड़गे ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों में आरएसएस का दखल बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 'मनुस्मृति' मानने वालों की संख्या बढ़ने से शूद्रों का पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। नड्‌डा ने कहा- खड़गे का बयान तथ्यों से परे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे का बयान तथ्यों से परे है और इससे अशांति फैल सकती है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 'मनुस्मृति' संबंधी टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए। खड़गे ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कानून तो बना दिया, लेकिन उसे रोकने की व्यवस्था क्या की गई, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था, तब धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया। सरकार जो कहती है, उसका उल्टा करती है। अगर शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आगे भी पेपर लीक की घटनाएं होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन अब तक किसी को सजा नहीं मिली। 2024 के पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों को क्लीनचिट मिल गई। लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण कुछ ही देर में दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसदों की मांग थी कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह माफी मांगें। दोपहर 2 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन संध्या राय ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। इस दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही फिर 3 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। साढ़े 3 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। सरकार ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया, जिस पर चर्चा हुई। सांसद संबित पात्रा ने कहा- गांधी परिवार की सरकारों ने गांधी परिवार को तो ऊपर रखा, लेकिन वंदे मातरम् को ऊपर नहीं रखा।वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 30 Jul 2026 9:31 pm

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चुनाव: तनाव कम करने की कोशिश या नई चुनौती?

आरक्षित सीटों के मुद्दे पर कई हफ्तों तक चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चुनाव हो रहा है. एक स्थानीय संगठन ने इन चुनावों के बहिष्कार की मांग की है

देशबन्धु 30 Jul 2026 9:00 pm

आज का एक्सप्लेनर:संसद पहुंचा वास्तेगुना-हुइंया और कुचु-पुचु; 56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा अचानक जेन-जी की भाषा क्यों बोलने लगी

56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा में इन दिनों 14 से 29 साल वाली जेन-जी के स्लैंग गूंज रहे हैं। कोई सांसद ‘वास्तेगुना-हुइंया’ और ‘कुच्चु-पुच्चु’ बोल रहा, तो किसी के भाषण में ‘डेलुलू’ और ‘क्लॉक्ड इट’ का इस्तेमाल हुआ। आखिर इन शब्दों के मतलब क्या हैं और जेन-जी के स्लैंग संसद क्यों पहुंच गए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: जेन-जी के कौन से स्लैंग संसद में गूंजे?जवाबः मानसून सत्र में एंटी-पेपर लीक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में ये 6 स्लैंग चर्चा में आए… 1. MIA 2. FOMO 3. DELULU 4. VASTEGUNA HUIYA 5. KUCHU-PUCHU 6. CLOCKED IT सवाल-2: जेन-जी के कुछ और मशहूर स्लैंग कौन से हैं?जवाबः सवाल-3: इंस्टाग्राम और स्नैपचैट से निकलकर संसद क्यों पहुंचे ये स्लैंग?जवाबः 3 वजहें हैं…1. कॉकरोच जनता पार्टी का सुपरहिट मूवमेंट 2. मौजूदा राजनीति में जेन-जी का असर 3. 2029 में जेन-जी सबसे बड़ा वोटर ग्रुप सवाल-4: क्या पहले भी संसद ऐसे मशहूर शब्दों या मुहावरों को अपनाती रही है?जवाबः हां, इसके कुछ उदाहरण देखिए… 1. 'हाउ इज द जोश?’ 2. ‘जय हो’ फिल्म स्लमडॉग मिलिनेयर में ए. आर. रहमान के इस गाने को 2009 में ऑस्कर मिला। कांग्रेस ने तब लोकसभा चुनाव के दौरान इसका खूब इस्तेमाल किया था। अक्सर राजनीतिक रैलियों में इसकी धुन बजती है। 3. ‘खेला होबे’ सवाल-5: संसद में ऐसे स्लैंग के इस्तेमाल पर जेन-जी क्या सोचते हैं?जवाबः जेन-जी मोटे तौर पर दो बातें कह रहे हैं… 1. हमारे स्लैंग गलत संदर्भ में इस्तेमाल हो रहे ‘Delulu का इस्तेमाल हम ज्यादातर पॉजिटिव तरीके से करते हैं, जैसे किसी फैंटेसी में होना। हम ‘Delulu is Solulu’ भी बोलते हैं, जिसका मतलब है- खुद को जानबूझकर पॉजिटिव डेल्यूजन में रखना, ताकि वो सपने पूरे हो जाएं। नेता Delulu जैसे कई स्लैंग गलत संदर्भ में इस्तेमाल कर रहे, इसलिए हम उनसे कनेक्ट नहीं हो सकते।’ 2. हमको कॉपी करने के बजाय अपने काम पर ध्यान दें ‘इस कॉपीकैट से जेन-जी पर कोई अच्छा असर नहीं पड़ने वाला। इसके बजाय नेता अपने काम पर ध्यान दें। हमारे लिए बेहतर मौके बनाएंगे, तो हमें ज्यादा खुशी होगी।’ ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो 6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 30 Jul 2026 6:09 pm

वाह रे पाकिस्तान! एक तरफ शांति दूत बनने का ढोंग, तो दूसरी तरफ चोरी-छिपे ईरान को पहुंचा रहा चीनी हथियार

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सुलग रही जंग के बीच पाकिस्तान का एक बार फिर बेहद दोगला और खतरनाक चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अमेरिका को खुश करने के लिए दोनों देशों के बीच शांति मध्यस्थ बनने का नाटक कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से वह ईरान को चीनी हथियार पहुंचाने के गुप्त खेल में जुटा हुआ है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान और चीन की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।अमेरिका-ईरान जंग के बीच पाकिस्तान का खतरनाक डबल गेमवर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले चुका है। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर बड़ा पलटवार किया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान खुद को एक तटस्थ और जिम्मेदार देश के रूप में पेश करते हुए शांति समझौते की मध्यस्थता कराने का दावा कर रहा था। लेकिन रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान के इस नकाब को पूरी तरह से उतार कर रख दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल करके चीन के अत्याधुनिक हथियार चोरी-छिपे ईरान तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे अमेरिका का नाराज होना लाजिमी है।क्या है चीन और ईरान के बीच हथियारों की इस सीक्रेट डील का सच?सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अपनी सैन्य ताकत और एयर डिफेंस सिस्टम को अचूक बनाने के लिए चीन से भारी मात्रा में हथियार खरीद रहा है। इस गुप्त डील के तहत ईरान लगभग 300 से 400 'मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम' (MANPADS) हासिल कर रहा है, जिसकी कुल कीमत करीब 60 से 70 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में 500 से 580 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पूरी रक्षा डील में चीन की अत्याधुनिक QW-12 और FN-16 शोल्डर-फायर्ड मिसाइलें शामिल हैं, जो ईरानी सेना को अमेरिकी हमलों और मिसाइलों का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम बना सकती हैं।कैसे अंजाम दिया जा रहा है हथियारों की इस तस्करी का खेल?खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन और ईरान के बीच हो रही इस हथियारों की सप्लाई का ट्रांजिट रूट पाकिस्तान से होकर गुजर रहा है। योजना के तहत चीन के पश्चिमी हिस्से यानी उरुमकी से हथियारों की यह खेप सबसे पहले पाकिस्तान पहुंचती है। इसके बाद पाकिस्तानी सैन्य और साजो-सामान के नेटवर्क की आड़ में इन घातक हथियारों को सड़क या हवाई मार्ग के जरिए सुरक्षित रूप से ईरान की सीमा तक पहुंचा दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और सैन्य तंत्र की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी और नाराजगीओवल ऑफिस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर गहरी हैरानी और नाराजगी जाहिर की है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे वादा किया था कि चीन ईरान को किसी भी प्रकार की हथियार सप्लाई नहीं करेगा। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि यह खबर सच साबित होती है, तो इससे उन्हें और अमेरिका को बेहद निराशा होगी, और आने वाले कूटनीतिक बैठकों में इस पर कड़ा रुख अपनाया जा सकता है। उधर, इस बड़े खुलासे के बाद से पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR और चीनी विदेश मंत्रालय ने इन तमाम रिपोर्टों को सिरे से खारिज करते हुए लीपापोती शुरू कर दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 5:04 pm

जापान में महाप्रलय का खतरा! टोक्यो से अलग देश की दूसरी राजधानी बनाने की तैयारी, संसद में पास हुआ नया कानून

दशकों से भीषण भूकंपों और प्राकृतिक आपदाओं के साये में जी रहे जापान ने भविष्य के किसी बड़े खतरे से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। जापान सरकार ने देश की मौजूदा राजधानी टोक्यो के अलावा एक 'बैकअप कैपिटल' यानी दूसरी वैकल्पिक राजधानी स्थापित करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जापानी संसद ने जुलाई में एक नया कानून भी पारित कर दिया है, ताकि आपातकाल के दौरान देश की सत्ता और व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, इस फैसले को लेकर देश की राजनीति में तीखा विरोध और घमासान भी शुरू हो गया है।क्यों पड़ी जापान को दूसरी राजधानी बनाने की जरूरत?ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए कानून को लाने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में किसी भीषण भूकंप की वजह से टोक्यो पूरी तरह तबाह हो जाता है, तब भी देश की शासन व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज में कोई रुकावट न आए। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 30 वर्षों के भीतर टोक्यो महानगर क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक तीव्रता का एक महाप्रलयकारी भूकंप आ सकता है। यदि ऐसा होता है, तो जापान का प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद भवन, तमाम केंद्रीय मंत्रालय और देश के मुख्य आर्थिक संस्थान एक ही झटके में पूरी तरह ठप हो सकते हैं।टोक्यो पर है देश की अर्थव्यवस्था और आबादी का सबसे बड़ा बोझवर्तमान समय में पूरे जापान देश का आर्थिक और प्रशासनिक भार अकेले टोक्यो पर टिका हुआ है। देश की 30 प्रतिशत से अधिक आबादी इसी क्षेत्र में निवास करती है, जबकि जापान की कुल जीडीपी का लगभग पांचवां हिस्सा अकेले टोक्यो से ही आता है। इसके अलावा, देश की 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां भी यहीं से संचालित होती हैं। सरकार का मानना है कि दूसरी राजधानी बन जाने से न केवल देश को प्राकृतिक आपदाओं के वक्त सुरक्षा कवच मिलेगा, बल्कि टोक्यो के बाहर के अन्य क्षेत्रीय शहरों में भी रोजगार, निवेश और समग्र विकास तेजी से पहुंचेगा।कौन-से शहर हैं बैकअप कैपिटल की रेस में शामिल?जापानी संसद द्वारा पारित किए गए नए कानून में अभी किसी एक निश्चित शहर का नाम फाइनल नहीं किया गया है। इसके बजाय देश के विभिन्न राज्यों को इसके लिए आवेदन करने की पूरी छूट दी गई है, हालांकि इस पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री द्वारा लगाई जाएगी। इस रेस में आईची, ओसाका, फुकुओका, होक्काइडो और मियागी जैसे प्रमुख राज्यों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। सरकार की तरफ से यह शर्त रखी गई है कि चुने जाने वाले वैकल्पिक शहर में टोक्यो के साथ एक ही समय में भूकंप आने का जोखिम न्यूनतम होना चाहिए और वहां प्रशासनिक व आर्थिक बुनियादी ढांचा पहले से ही मजबूत स्थिति में होना चाहिए।क्यों छिड़ गया है जापान की राजनीति में सियासी संग्राम?भले ही राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से यह योजना बेहद जरूरी लग रही हो, लेकिन जापान के राजनीतिक गलियारों में इस पर भारी घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दलों का कड़ा आरोप है कि यह बिल प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की गठबंधन सरकार की सहयोगी पार्टी 'जापान इनोवेशन पार्टी' को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है, क्योंकि ओसाका इस पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इसके साथ ही, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अभी तक इस विशाल परियोजना की कुल लागत और भविष्य के आर्थिक फायदों का कोई स्पष्ट आंकड़ा जनता के सामने नहीं रखा है, जिससे देश के सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 5:01 pm

बलूचिस्तान में BLA का खूनी तांडव: अगवा किए गए 6 मजदूरों की निर्मम हत्या, चीनी प्रोजेक्ट्स पर मंडराया बड़ा खतरा

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में आतंकवाद का एक बेहद खौफनाक चेहरा सामने आया है। तुर्बत के पास केच जिले में कुछ दिन पहले अगवा किए गए छह निर्दोष मजदूरों के शव बरामद होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सुरक्षा बलों ने इस जघन्य हत्याकांड के लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) को जिम्मेदार ठहराया है। इस खूनी खेल के बाद से क्षेत्र में काम कर रहे अन्य श्रमिकों और विकास परियोजनाओं से जुड़े लोगों के बीच भारी दहशत का माहौल पैदा हो गया है।क्या है पूरा मामला और कैसे दिया गया वारदात को अंजामसुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह खूनी सिलसिला 27 जुलाई को केच जिले के क्लाटुक इलाके से शुरू हुआ था। भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह ने विकास कार्यों में लगे मजदूरों के काफिले को बलपूर्वक रोक लिया। इस दौरान आतंकवादियों ने खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी जिले के रहने वाले जावेद नामक मजदूर की मौके पर ही गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद आंतकवादी छह अन्य मजदूरों को जबरन अगवा करके किसी अज्ञात ठिकाने पर ले गए थे। कई दिनों की तलाश के बाद आखिरकार तुर्बत के एक सुनसान और दूरदराज इलाके से इन सभी छह बंधक मजदूरों के शव बरामद किए गए। शवों की गंभीर हालत को देखकर साफ पता चलता है कि आतंकवादियों ने उन्हें बेहद बेदर्दी से मौत के घाट उतारा था। सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मारे गए इन मजदूरों में पंजाब प्रांत के चार और खैबर पख्तूनख्वा के दो मजदूर शामिल थे, जो बलूचिस्तान में विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे।BLए की रणनीति में खतरनाक बदलाव, चीनी परियोजनाओं को निशानाखुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, इस हमले को बलूच लिबरेशन आर्मी की ऑपरेशनल रणनीति में एक बड़े और खतरनाक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अतीत में यह संगठन मुख्य रूप से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सैन्य चौकियों को अपना निशाना बनाता था, लेकिन अब इसने अपनी रणनीति बदलते हुए चीनी निवेश, माइनिंग ऑपरेशंस और खनिज विकास से जुड़ी परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और यहां तक कि स्थानीय नागरिकों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। संगठन का मुख्य उद्देश्य इन आर्थिक और ढांचागत परियोजनाओं को पूरी तरह से ठप करना और क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मन में गहरा खौफ पैदा करना है।स्थानीय और बाहरी मजदूरों के लिए सीधी चेतावनीआतंकी संगठन BLA ने अपनी धमकियों में साफ कर दिया है कि चीन के सहयोग से चल रही किसी भी परियोजना, खदान या खनिज स्थल के आसपास काम करने वाले लोग तुरंत उन जगहों को छोड़ दें। यह खुली चेतावनी केवल दूसरे प्रांतों से रोजी-रोटी कमाने आए मजदूरों के लिए ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी और चीनी विकास परियोजनाओं से जुड़े स्थानीय मजदूरों, इंजीनियरों, अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए भी जारी की गई है। जानकारों का मानना है कि इन सुनियोजित हमलों के जरिए आतंकवादी बलूचिस्तान में चल रही आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचना चाहते हैं।पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी खौफनाक घटनाएंतुर्बत की यह घटना कोई पहली या अकेली वारदात नहीं है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस घटना से ठीक पहले मश्केल इलाके में हुए एक अन्य हमले में कम से कम पांच और मजदूरों की जान चली गई थी। ये लगातार होती घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में आतंकवादियों द्वारा हिंसा का एक सुनियोजित पैटर्न चलाया जा रहा है। कुछ हफ्ते पहले ही मस्तुंग जिले में हुए एक बड़े हमले की जिम्मेदारी भी BLA ने ली थी, जिसमें दर्जनों पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया था। बहरहाल, इन ताजा हत्याओं के बाद से बलूचिस्तान में काम कर रहे कामगारों की सुरक्षा एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल बन गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 4:59 pm

अमेरिका ने विदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट पर लगाई रोक, चीन को बड़ा झटका; राष्ट्रीय सुरक्षा और AI वर्चस्व पर बढ़ी टकराव की आशंका

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि महत्वपूर्ण सेवाओं और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों द्वारा विकसित रोबोट का बढ़ता उपयोग भविष्य में सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। सरकार को आशंका है कि यदि किसी भू-राजनीतिक तनाव या आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधान की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इन रोबोटों की उपलब्धता और संचालन प्रभावित हो सकता है।

देशबन्धु 30 Jul 2026 1:39 pm

ट्रंप से मिलते ही भड़के पुतिन: कीव पर बरसाए घातक 'अग्निबाण', यूक्रेन का अमेरिकी F-16 फाइटर जेट भी हुआ तबाह

यूक्रेन और रूस के बीच जारी भीषण युद्ध में एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा मोड़ आ गया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक बेहद अहम रणनीतिक मुलाकात कर वापस लौटे ही थे कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर अब तक का सबसे भीषण मिसाइल हमला बोल दिया। इस हवाई हमले में रूस ने कीव को दहलाने के साथ-साथ यूक्रेन की वायुसेना को सबसे बड़ा घाव दिया है, जहां युद्ध में गेमचेंजर माने जा रहे अमेरिकी मूल के एडवांस F-16 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया गया है।ट्रंप-जेलेंस्की की मुलाकात के तुरंत बाद रूस का भीषण पलटवारवैश्विक कूटनीति के गलियारों में इस हमले के समय को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ जेलेंस्की की इस बैठक पर मॉस्को की पैनी नजर थी। जैसे ही जेलेंस्की अपनी इस यात्रा से वापस लौटे, रूसी सेना ने बिना कोई वक्त गंवाए यूक्रेन के प्रमुख सैन्य ठिकानों और हवाई पट्टियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कीव के आसमान में एक के बाद एक कई रूसी हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलें गरजती हुई दिखाई दीं, जिसे स्थानीय रक्षा विशेषज्ञों ने पुतिन की तरफ से अमेरिका और यूक्रेन के नए गठजोड़ को दिया गया सीधा और आक्रामक संदेश बताया है।यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को तगड़ा झटका, अमेरिकी F-16 फाइटर जेट जमींदोजइस पूरे हमले की सबसे बड़ी और नुकसानदेह खबर यूक्रेन के लिए उसके F-16 लड़ाकू विमान का क्रैश होना रही। पश्चिमी देशों और अमेरिका से काफी मिन्नतें करने के बाद यूक्रेन को मिले इन आधुनिक लड़ाकू विमानों से उसे हवाई क्षेत्र में काफी बढ़त मिलने की उम्मीद थी। रूसी रक्षा मंत्रालय के करीबी सूत्रों और सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, इस भीषण हवाई हमले और एयर डिफेंस के जाल में फंसकर यूक्रेन का एक F-16 पूरी तरह तबाह हो गया। यह नुकसान यूक्रेन की वायुसेना के मनोबल पर एक बड़ा आघात माना जा रहा है, क्योंकि इन विमानों की खेप बेहद सीमित है।युद्ध के मोर्चे पर अब आगे क्या होगा, दुनिया भर के देशों में बढ़ी चिंताइस बड़े सैन्य घटनाक्रम के बाद अब पूर्वी यूरोप में युद्ध की आग और ज्यादा भड़कने की आशंका गहरा गई है। अमेरिका में सत्ता के समीकरणों के बीच पुतिन का यह आक्रामक रुख साफ दिखाता है कि रूस किसी भी तरह के दबाव में पीछे हटने को तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर, जेलेंस्की ने इस भारी नुकसान के बाद अपने पश्चिमी सहयोगियों से और अधिक एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों की मांग तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि वाशिंगटन इस बड़े नुकसान और पुतिन की खुली चुनौती पर क्या रणनीतिक कदम उठाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 12:48 pm

कैटी पेरी को सनस्क्रीन लगाते दिखे कनाडा के Ex PM जस्टिन ट्रूडो? सोशल मीडिया पर रोमांटिक तस्वीरों ने मचाई भारी हलचल

हॉलीवुड की मशहूर पॉप स्टार कैटी पेरी और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कुछ बेहद चौंकाने वाली तस्वीरें इस वक्त इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन वायरल तस्वीरों में जस्टिन ट्रूडो समंदर किनारे कैटी पेरी की पीठ पर सनस्क्रीन लगाते हुए नजर आ रहे हैं। दोनों के बीच की यह खास और रोमांटिक बॉन्डिंग सोशल मीडिया पर आते ही टॉक ऑफ द टाउन बन गई है और लोग दोनों के रिश्तों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाने लगे हैं।वायरल तस्वीरों के पीछे की क्या है असली कहानीतस्वीरें सामने आते ही नेटिजन्स के बीच बहस का दौर शुरू हो गया है। समंदर के खूबसूरत बैकड्रॉप में क्लिक की गई इन फोटोज में दोनों ही बेहद रिलैक्स और एक-दूसरे के करीब दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन तस्वीरों के सोशल मीडिया पर छाने के बाद कई तकनीकी और मीडिया एक्सपर्ट्स ने इस पर अपनी राय दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है, जहां डीपफेक और एआई-जनरेटेड इमेज (AI Generated Pics) के जरिए किसी भी नामचीन हस्ती को किसी के भी साथ फ्रेम में दिखाया जा सकता है। ऐसे में कई लोग इसे एआई का कमाल भी बता रहे हैं, जिसने पहली नजर में सबको धोखा दे दिया।फैंस और नेटिजन्स का रिएक्शन और कमेंट्स की बाढ़जस्टिन ट्रूडो अपनी पर्सनल लाइफ और लुक्स को लेकर हमेशा से ही सुर्खियों में रहे हैं, वहीं कैटी पेरी की दुनिया भर में तगड़ी फैन फॉलोइंग है। जैसे ही ये तस्वीरें एक्स (पहले ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर वायरल हुईं, फैंस ने इस पर मजेदार मीम्स और कमेंट्स की बौछार कर दी। कुछ यूजर्स ने इसे साल का सबसे बड़ा सरप्राइज अफेयर बताया, तो वहीं ज्यादातर समझदार यूजर्स ने इसे फेक बताते हुए साझा न करने की सलाह दी। फिलहाल दोनों ही स्टार्स की तरफ से इन वायरल हो रही तस्वीरों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।सेलिब्रिटीज और राजनेताओं के फेक एआई कंटेंट्स का बढ़ता खतराइस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर इंटरनेट पर डीपफेक और एआई की मदद से बनने वाली भ्रामक तस्वीरों के खतरे को उजागर कर दिया है। पिछले कुछ समय में वैश्विक नेताओं से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड के बड़े कलाकारों की ऐसी कई फर्जी तस्वीरें और वीडियो सामने आ चुके हैं, जो हूबहू असली जैसे लगते हैं। यही वजह है कि गूगल डिस्कवर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब ऐसी एआई जनरेटेड तस्वीरों को लेकर बेहद सख्त नीतियां अपना रहे हैं ताकि यूजर्स तक सिर्फ सही और प्रामाणिक जानकारी ही पहुंच सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 12:46 pm

चीन-ईरान डिफेंस डील से हड़कंप: अमेरिका ने तुरंत लिया बड़ा एक्शन, पाकिस्तान भी रडार पर

मिडल ईस्ट में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर तेजी से बदलते दिख रहे हैं। चीन द्वारा ईरान को आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम सप्लाई करने की खबर सामने आते ही वैश्विक महाशक्तियों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस रणनीतिक कदम से भड़के अमेरिका ने बिना वक्त गंवाए बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीजिंग और तेहरान के बीच हो रही इस बड़ी सैन्य डील की आंच भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान तक भी पहुंच गई है, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने अपने रडार पर ले लिया है।चीन और ईरान के बीच इस बड़ी सैन्य डील के क्या हैं मायनेरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी मिडल ईस्ट में अमेरिकी और इजरायली प्रभाव को सीधे तौर पर चुनौती देने की एक बड़ी कोशिश है। चीन द्वारा ईरान को दिए जा रहे उन्नत एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम से ईरानी हवाई क्षेत्र की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी। इस खबर के सार्वजनिक होते ही वॉशिंगटन के नीति निर्माताओं में खलबली मच गई। अमेरिका ने इसे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए चीन और ईरान से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ तत्काल कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।इस डिफेंस डील की आंच में पाकिस्तान कैसे आया अमेरिकी रडार परइस पूरे मामले में पाकिस्तान का नाम जुड़ने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। खुफिया रिपोर्टों और वैश्विक विश्लेषकों का दावा है कि चीन द्वारा ईरान को भेजे जा रहे सैन्य उपकरणों, कलपुर्जों या तकनीकी ट्रांसफर के लिए पाकिस्तानी जमीन, बंदरगाहों या कुछ संदिग्ध लॉजिस्टिक कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने का अंदेशा है। अमेरिका ने हाल के दिनों में पाकिस्तान की कई कंपनियों पर मिसाइल और सैन्य प्रोग्राम में मदद करने के आरोप में प्रतिबंध लगाए हैं। इस ताजा घटनाक्रम के बाद अमेरिकी जांच एजेंसियां इस्लामाबाद की हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं।वैश्विक प्रतिबंधों का खतरा और एशिया-मिडल ईस्ट पर इसका बड़ा असरबीजिंग, तेहरान और इस्लामाबाद के इस कथित सैन्य त्रिकोण पर अमेरिका की पैनी नजर से आने वाले दिनों में कड़े प्रतिबंधों का एक नया दौर शुरू हो सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर पाकिस्तान की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उस पर अमेरिकी आर्थिक मदद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले फंड को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। वहीं, भारत के दृष्टिकोण से भी यह बेहद संवेदनशील मामला है, क्योंकि पश्चिमी सीमा पर चीनी दखल का बढ़ना और मिडल ईस्ट में अस्थिरता का सीधा असर दक्षिण एशियाई सुरक्षा और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर पड़ेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 12:44 pm

US-Iran War Big Update: मिडिल ईस्ट युद्ध में हुई सऊदी अरब की सरप्राइज एंट्री

मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे भयावह मोड़ पर पहुंच चुका है। कूटनीतिक वार्ताओं का दौर पूरी तरह समाप्त होने के बाद मोर्चे पर सबसे बड़ा उलटफेर तब देखा गया, जब सऊदी अरब ने अपनी पुरानी निष्पक्षता छोड़कर अमेरिका का खुलकर साथ देने का फैसला किया। इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की वायुसेना ने संयुक्त रूप से हमला बोलकर ईरान समर्थित गुटों के लॉजिस्टिक्स डिपो और हथियारों के ठिकानों को तबाह कर दिया है। इस भीषण एयरस्ट्राइक में 20 लड़ाकों और 6 ईरानी सैन्य सलाहकारों की मौत हो चुकी है, जिससे इस क्षेत्रीय संघर्ष का संतुलन पूरी तरह बदल गया है।जॉर्डन एयरबेस पर मिसाइल दागने के बाद भड़का अमेरिकातनाव की यह नई चिंगारी तब सुलगी जब ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस 'मुवफ्फक साल्टी' को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते सभी मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पलटवार करते हुए ईरान के अंदर कई सैन्य ठिकानों पर फिर से घातक बमबारी शुरू कर दी। वाशिंगटन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कूटनीति के लिए दिया गया पांच दिनों का विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।मिस्र के तटीय क्षेत्र तक फैला जंग का दायराइराक में हुई भीषण एयरस्ट्राइक के अलावा, संघर्ष की लपटें अब मिस्र तक भी पहुंच गई हैं। मिस्र के 'दमिएटा' बंदरगाह के पास खड़े अमेरिका के स्वामित्व वाले दो लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकरों पर संदिग्ध ड्रोन से हमला किया गया है। अब तक इस युद्ध से अछूते रहे मिस्र के समुद्री क्षेत्र में यह हमला इस बात का बड़ा सबूत है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर पूरे मध्य-पूर्व को निगलने के लिए तैयार खड़ा है।सऊदी अरब की एंट्री से कैसे पलटा पूरा गेम?अब तक इस जंग से दूरी बनाए रखने वाले सऊदी अरब ने अपने तेल प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिका से हाथ मिला लिया है। सऊदी की इस सैन्य सहभागिता से इराक, सीरिया और यमन में सक्रिय ईरान समर्थक संगठनों जैसे 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस' (PMF) और 'हूती' विद्रोहियों पर दोहरी मार पड़ रही है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान युद्ध विराम की मिन्नतें कर रहा है, लेकिन अमेरिका उन्हें करारा जवाब देगा। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि अब हमारी बारी है और हम उन पर बहुत जोरदार प्रहार करने जा रहे हैं।वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर मंडराया गहरा संकटयुद्ध के विकराल रूप धारण करने से विश्व अर्थव्यवस्था पर संकट गहरा गया है। थिंक टैंक CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार मिसाइल इंटरसेप्ट करने से अमेरिका के 'पैट्रियट' और 'थाड' इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक कम हो गया है। वहीं दूसरी ओर, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही ठप होने से कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक सप्लाई रुकने की कगार पर है। अगर स्थिति नहीं संभली तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और ऊर्जा के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जो एक अंतरराष्ट्रीय मंदी का कारण बन सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 9:40 am

US Fed Interest Rate Decision: अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, डाऊ जोन्स में 1100 अंकों का भारी क्रैश

अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' ने अपनी पॉलिसी बैठक में लगातार पांचवीं बार ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए इन्हें 3.50% से 3.75% की सीमा पर बरकरार रखा है। हालांकि, फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की सख्त टिप्पणियों और महंगाई के खिलाफ लंबी लड़ाई की चेतावनी ने अमेरिकी बाजारों का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया।फेड के फैसले के तुरंत बाद वॉल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली का माहौल बन गया, जिससे डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1100 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह अप्रैल 2025 के बाद अमेरिकी बाजार के लिए एक दिन का सबसे खराब प्रदर्शन रहा।वॉल स्ट्रीट में मंदी: डाऊ जोन्स और नैस्डैक धराशाईफेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर रुख कड़ा बनाए रखने के कारण प्रमुख अमेरिकी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए:डाऊ जोन्स (Dow Jones): 1,100 से अधिक अंक (2.19%) टूटकर बंद हुआ।S&P 500: 1.5% की कमजोरी के साथ बंद हुआ।नैस्डैक कम्पोजिट (Nasdaq): 1.7% गिरा, जबकि नैस्डैक 100 में 2% से अधिक की गिरावट आई जिससे यह तकनीकी करेक्शन (Technical Correction) के दायरे में प्रवेश कर गया।2007 के बाद उच्चतम स्तर पर पहुंची 30 साल की बॉन्ड यील्डफेड की मौद्रिक नीति के बाद अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में जबरदस्त उछाल देखा गया। ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका से बॉन्ड यील्ड में तेजी आई:10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: एक बार फिर उछलकर 4.7% पर पहुंच गई।30 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: बढ़कर 5.21% हो गई, जो साल 2007 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।पॉलिसी बैठक में गहराया मतभेद: 3 सदस्यों ने उठाई दरें बढ़ाने की मांगइस बार फेड की ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के भीतर सर्वसम्मति देखने को नहीं मिली। 9 सदस्यों ने दरें यथावत रखने का समर्थन किया, जबकि 3 प्रमुख सदस्यों ने इस फैसले पर असहमति (Dissent) जताई:लॉरी लोगन (प्रेसिडेंट, डलास फेड)नील काशकारी (प्रेसिडेंट, मिनियापोलिस फेड)बेथ हैमैक (प्रेसिडेंट, क्लीवलैंड फेड)इन तीनों अधिकारियों का तर्क था कि चूंकि अमेरिका में महंगाई पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से 2% के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की सख्त जरूरत है।फेड चेयरमैन केविन वॉर्श का बयान: 'जादुई समाधान नहीं, लंबी होगी लड़ाई'पॉलिसी की घोषणा करते हुए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने स्पष्ट किया कि महंगाई पर काबू पाना इतना आसान नहीं होगा।केविन वॉर्श के मुख्य बिंदु:बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और ऐसे में कोई जल्दबाजी में पूर्वानुमान लगाना गलत होगा।महंगाई के खिलाफ हमारी लड़ाई लंबी और मुश्किल होगी। इसका कोई जादुई समाधान (Magic Solution) नहीं है।चीजें 1-2 दिनों या हफ्तों में ठीक नहीं होंगी। महंगाई को 2% के लक्ष्य तक लाने में अभी और वक्त लगेगा।अर्थव्यवस्था का हाल: ग्रोथ मजबूत, पर सप्लाई चेन में अड़चनेंफेड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी हुई है। देश में नौकरियों के आंकड़े और उत्पादकता सकारात्मक हैं। हालांकि, वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण ऊर्जा और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में चुनौती आ रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 8:32 am

US-Iran War Escalation: 'अब हमारी बारी है...' डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिका ने ईरान पर बोला हमला, परमाणु प्लांट वाले बुशेहर समेत कई शहरों में गूंजे जोरदार धमाके!

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए ईरानी मिसाइल हमले के ठीक एक दिन बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आग पूरी तरह भड़क उठी है। गुरुवार (30 जुलाई) तड़के अमेरिकी वायुसेना ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक शुरू कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए लिया गया एक निर्णायक और कड़ा कदम बताया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी ठिकानों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।परमाणु प्लांट के पास गूंजे धमाके: दहल उठे ईरान के कई प्रांतअमेरिकी फाइटर जेट्स के हमले शुरू होते ही पूरे ईरान में हड़कंप मच गया। ईरान के सरकारी मीडिया और टीवी चैनलों के अनुसार, देश के दक्षिणी और तटीय इलाकों में सिलसिलेवार जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सबसे ज्यादा घबराहट बुशेहर प्रांत में देखी गई, जहां ईरान का इकलौता मुख्य परमाणु पावर प्लांट स्थित है। इसके अलावा खुजेस्तान के अबादान क्षेत्र और होर्मोज़गान प्रांत के रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास सहित किश, क़ेश्म और अबू मूसा द्वीपों पर भी मिसाइलें गिरीं और कई ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है।'अब हमारी बारी है'— ट्रंप की सीधी चेतावनी और 5 दिनों का विराम समाप्तहमले से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि अब जवाब देने की बारी अमेरिका की है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने जॉर्डन पर दागी मिसाइलों को गलती बताते हुए हमला न करने का अनुरोध किया था, जिसे खारिज कर दिया गया। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा, हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे और उन्हें अच्छी तरह पता है कि क्या होने वाला है। अमेरिका ने पिछले शुक्रवार से हमलों में पांच दिनों का जो विराम लिया था, वह अब खत्म हो चुका है और सैन्य ऑपरेशन दोबारा तेज कर दिया गया है।इराक में अमेरिका-सऊदी का साझा अटैक: 20 लड़ाकों की मौत से हड़कंपईरान पर सीधे हमले के साथ-साथ इराक में भी अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सेनाओं ने बड़ा ऑपरेशन चलाया। दोनों देशों की वायुसेना ने इराक में मौजूद ईरान समर्थित सशस्त्र समूह 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस' (PMF) के हथियारों के डिपो और लॉजिस्टिक्स सेंटरों को निशाना बनाया। इस हवाई हमले में पीएमएफ के कम से कम 20 लड़ाकों की मौत हो गई और 32 से अधिक घायल हुए हैं। बगदाद, निनवे और बसरा समेत सात प्रांतों में हुए इस हमले के बाद इराक के प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई है।ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की जंग जारी रखने की कसमदूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की एयरोस्पेस फ़ोर्स ने अमेरिकी कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। आईआरजीसी ने दावा किया कि उन्होंने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयरबेस और सेंटकॉम (CENTCOM) के मुख्यालय को कई बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरान की सेना का कहना है कि जब तक अमेरिका का आक्रामक रुख और उसकी धमकियां बंद नहीं होंगी, तब तक उनका यह जवाबी प्रतिरोध पूरी ताकत से जारी रहेगा। दोनों महाशक्तियों के बीच छिड़े इस युद्ध से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jul 2026 8:30 am

अपनी नाकाम‍ी छिपाने के लिए यूक्रेन आम नागरिकों को बना रहा न‍िशाना : मारिया जाखारोवा

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने रूस के कई अहम सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर यूक्रेन के हमलों पर तीखी प्रत‍िक्र‍िया दी। उन्‍होंने आरोप लगाया क‍ि अपनी नाकाम‍ियों को छिपाने के लिए यूक्रेन नागरिक ढांचे पर हमले कर रहा है

देशबन्धु 30 Jul 2026 7:50 am

अमेरिका का ईरान पर एयरस्ट्राइक, तेहरान में कई ठिकाने निशाने पर

पश्चिम एशिया में हालात फिर बिगड़ गए हैं। अमेरिका ने ईरान पर ताज़ा हवाई हमले किए हैं। यह कदम उस चेतावनी के बाद उठाया गया जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर हुए हमले का जवाब ज़रूर दिया जाएगा

देशबन्धु 30 Jul 2026 7:25 am

होर्मुज स्‍ट्रेट में ‘शुल्‍क वसूली’ नेटवर्क पर अमेरिका का शिकंजा, ईरान की दो कंपनियों पर प्रतिबंध

अमेरिका ने ईरान की दो समुद्री सेवा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। वॉशिंगटन का आरोप है कि ये कंपनियां इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीस) के समर्थन से एक बीमा योजना चला रही थीं

देशबन्धु 30 Jul 2026 7:10 am

जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले के बाद ट्रंप की ईरान को चेतावनी, बोले- चुकानी होगी कीमत

जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हुए एक कथित ईरानी मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी करते हुए कहा क‍ि इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका पूरी ताकत के साथ जवाब देगा

देशबन्धु 30 Jul 2026 7:02 am

जंगल की आग से जूझ रहे फ्रांस और स्पेन, मदद के ल‍िए आगे आए यूरोपीय देश

यूरोप में जंगल की आग से जूझ रहे फ्रांस और स्पेन को रोमानिया, ग्रीस और पोलैंड का समर्थन मिल रहा है। यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इन देशों की एकजुटता की सराहना की है

देशबन्धु 30 Jul 2026 6:59 am

ब्लैकबोर्ड-मुझे लड़कियां पसंद थी, इसलिए मेरी सलवार उतारकर चेक किया:स्कूल में लड़के कहते- लड़कियों के टॉयलेट में क्यो जाता है, बॉयज टॉयलेट में चल

मैं आठवीं क्लास में था। नाम था अंकिता यादव। मेरे ही क्लास के दूसरे सेक्शन में प्रिया नाम की एक लड़की थी। बहुत पसंद थी वो मुझे। जब भी वो आस-पास होती मुझे अजीब सा महसूस होता। बस लगता कि उसे देखता रहूं। उससे बातें करूं। अब आप सोच रहे होंगे मेरा नाम लड़कियों जैसा, लेकिन बातें तो लड़कों जैसी हैं। सही सोचा आपने। हां, तब मैं शरीर से तो लड़की था, लेकिन मेरे भीतर एक लड़का था। भीतर का वो लड़का हमेशा घुटता रहता। मैं खुद से पूछता, दुनिया के लिए तो मैं लड़की हूं, ऐसे में जिस लड़की से प्यार करता हूं, उसे ये कैसे बताऊं। किस मुंह बताऊं। भास्कर सीरीज ब्लैकबोर्ड में मैं मनीषा भल्ला आज कहानी लाई हूं मनवीर की, जो पहले अंकिता थे, लेकिन सर्जरी से जेंडर चेंज करवा लिया इस दौरान उनके साथ क्या-क्या हुआ, सुनिए उन्हीं की जुबानी… जैसा कि मैंने ऊपर बताया मुझे प्रिया पसंद तो थी, लेकिन उससे कहने की हिम्मत नहीं हुई। तब मैंने उसके बारे में अपनी दोस्त मतलब सहेली आकांक्षा को बताया। वो चौंक गई और कहने लगी- ‘तू तो खुद लड़की है। ये कैसी बातें कर रही है। मैंने उससे कहा- भले ही मैं लड़की दिखता हूं, लेकिन मुझे लड़कों की तरह रहना पसंद है। मुझे शर्ट-पैंट पहनकर घूमना पसंद था। लड़कियों वाले कपड़ों में दम घुटता था। लंबे बाल संवारना मेरे लिए मुसीबत थी। हर बार उन्हें काटकर फेंकने का मन करता था। धीरे-धीरे ये बात पूरे स्कूल में फैल गई। सब मजाक उड़ाने लगे। एक दिन मैं वॉशरूम जा रहा था, तभी क्लास के कुछ लड़कों ने घेर लिया। कहने लगे- ‘तू तो हमारी तरह है ना। तू भी लड़का है ना, तभी तुझे भी हमारी तरह लड़कियां पसंद हैं। ब्यॉज टॉयलेट में चल, लड़कियों के टॉयलेट में क्यों जा रही है।’ ये बातें सुनकर मैं इतना घबरा गया कि पेट दर्द का बहाना बनाकर घर चला गया। अगले दिन पूरे स्कूल में ये बात फैल चुकी थी कि अंकिता दिखती भले ही लड़की है, लेकिन है वो लड़का। जब मैं दोबारा टॉयलेट गया तो कुछ सीनियर्स और क्लास की लड़कियों ने घेर लिया। उन्होंने जबरदस्ती मेरी सलवार उतारी और प्राइवेट पार्ट चेक किया। फिर ये कहते हुए वहां से चले गए- अरे तू तो लड़की है। फिर तुझे लड़कियां क्यों पसंद हैं। उस वक्त मेरे मन में क्या चल रहा था ये शायद ही कोई समझ पाएगा। ऐसा लग रहा था कि आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। किसी भी ट्रांसजेंडर की पहली लड़ाई परिवार और स्कूल से शुरू होती है। हम लोग दिल्ली के नजफगढ़ में रहते थे। मैं 6 भाई-बहनों में सबसे छोटा था। पापा चाय की दुकान लगाते थे। इसी से घर के 9 लोगों का खर्च चलता था। मेरे पैदा होने के बाद खर्च और बढ़ गया। ढाई साल का हुआ तो पापा को लकवा मार गया। वो बिस्तर पर आ गए। घर चलाने की जिम्मेदारी मां पर आ गई और वो दुकान पर बैठने लगी। तब किसी रिश्तेदार ने मां से कह दिया कि तुम्हारी छोटी बेटी मनहूस है। जबसे वो पैदा हुई है पूरा घर मुसीबतों से घिरा है। उसके बाद से भाई-बहनों समेत सभी रिश्तेदारों ने मनहूस कहना शुरू कर दिया। समय बीतता गया और मेरे ही घर में मेरे खिलाफ नफरत बढ़ने लगी। एकबार बड़ी बहन को देखने के लिए लड़के वाले घर आ रहे थे। सब तैयारियों में जुटे थे। मैंने मां से पूछा, क्या मेहमान आने वाले हैं? मां से पहले ही बड़ा भाई बोलने लगा- अगर तू उनके सामने आई तो मार-मार के हाथ-पैर तोड़ दूंगा। मनहूस, तेरी वजह से रिश्ता जुड़ने से पहले ही टूट जाएगा। मैं रोते हुए वहां से उठकर चला गया। जब मैं 10-11 साल का था तो मेरी उम्र की लड़कियां गुड्‌डे गुड़ियों से खेलती थीं, लेकिन मुझे तो लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना अच्छा लगता था। छठवीं क्लास की बात है। एक दिन कुछ लड़के घर आए। कहने लगे क्रिकेट खेलने चलो। उस वक्त पापा घर पर ही थे। वो सुनते ही चीखने लगे-’लड़कों के साथ खेलने जाएगी, बाहर निकली तो टांगे तोड़ दूंगा। जैसे बाकी बहनें घर पर रहती हैं, वैसे ही तू भी रह।’ पापा को चीखते हुए सुनकर मैं कांपने लगा। फिर भी हिम्मत जुटाकर रोते हुए बड़ी बहन से बोला- पापा से कहो मुझे इनके साथ बाहर जाने दें। मैं भी इनमें से ही हूं।’ लेकिन पापा ने एक न सुनी। मुझे कोई नहीं समझता था। इसलिए मैं अपनी सारी बातें डायरी में लिखता था। ये बात भी मैंने डायरी में लिखी थी। एक दिन किसी ने बड़ी बहन को बता दिया कि मुझे लड़कियां पसंद हैं। उसने घर आकर भाई-बहन, मम्मी, सबको बता दिया। तभी बड़े भाई को मेरी डायरी भी मिल गई। उसने सब पढ़ लिया। उस दिन मम्मी और दादी के अलावा सभी ने मुझे पीटा। तब तक पीटा, जब तक सब थक नहीं गए। उस दिन से भाई मुझे हिजड़ा कहने लगा। धीरे-धीरे पैसों की तंगी होने लगी। भाई ने घर में पैसे देना बंद कर दिया। कहने लगा कि इसे खिलाने के लिए पैसे नहीं हैं। मेरे पास चप्पल तक नहीं थी। नंगे पैर स्कूल जाता था। लड़कों वाले कपड़े पहनता था, वो भी भाई ने जला दिए। रिश्तेदारों से उतरन मांग कर पहनना पड़ा। मजबूरी में फुटपाथ पर चादर बिछा कर सब्जी बेची। कॉस्मेटिक और मिट्‌टी के बर्तन बेचे। जब थककर घर लौटता तो चुपचाप एक कोने में पड़ा रहता। जिस किसी का कोई काम बिगड़ जाता तो वो मुझे जिम्मेदार ठहराकर पीटने लगता। पड़ोस में ही मेरा एक रिश्ते का भाई रहता था। अक्सर घर आया करता था। एकबार वो आया तो घर पर कोई नहीं था। वो मेरे कमरे में घुस आया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। जब तक मुझे कुछ समझ आता वो जबरदस्ती करने लगा। उसने मेरा रेप किया। मैं मदद के लिए चीख रहा था। उसने मुझे धमकी दी कि तेरी बात पर कौन भरोसा करेगा। घरवाले तो तेरी शक्ल तक नहीं देखना चाहते, घर से भी निकाल देंगे। उस दिन के बाद से उसे जब भी मौका मिलता वो घर आ जाता। रेप करता और धमकी देकर चला जाता। उसने परिवार के कुछ और लड़कों को इसबारे में बता दिया। वो लड़के भी मेरा रेप करने लगे। लगातार तीन साल तक मेरे साथ ये सब होता रहा लेकिन मैं घरवालों को बता नहीं सका। हालांकि मैं उन लड़कों का नाम नहीं लूंगा। वरना मां दुखी हो जाएगी। 2013 में पापा की मौत हो गई। उसके बाद भाई के हौसले और बुलंद हो गए। वो कहने लगा कि मुझे कहीं बेच आएगा। मैं जब भी उसकी सामने आता, पीटने लगता। एक दिन मैं कूलर अपनी तरफ घुमाकर सो गया। इस बात पर उसने मुझे बहुत पीटा। चारपाई से उठाकर नीचे पटक दिया। दीवार पर सिर दे मारा। पास ही एक प्रेस पड़ी थी। वो उठाकर मेरे सिर पर मार दी। खून बहने लगा तो बहन और जीजा अस्पताल ले गए। अगले दिन जब सोकर उठा तो दादी और मां मेरे सिरहाने बैठे थे। कहने लगे कि तू ये घर छोड़कर चला जा। वरना भाई तुझे मार डालेगा। हम तुझे जिंदा देखना चाहते हैं। मैंने मां के पैर पकड़ लिए। गिड़गिड़ाने लगा कि मां, कहां जाऊं मैं। मां ने रोते हुए कहा- कहीं भी चला जा, कम से कम जिंदा तो रहेगा। उसके बाद मैंने घर छोड़ दिया। तब तक बारहवीं हो चुकी थी। सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई। नजफगढ़ में ही किराए का कमरा लेकर रहने लगा। कुछ ऐसे लोगों से दोस्ती हुई जो मेरी ही तरह थे यानी लड़की के शरीर में लड़के थे। वो अक्सर मुझसे मिलने आया करते थे। मकान मालिक को वो लोग पसंद नहीं आए और उसने कमरा खाली करवा लिया। तब तक कोरोना भी फैल चुका था। मैं सामान लिए पूरा दिन यहां-वहां भटकता रहा, लेकिन एक भी कमरा नहीं मिला। मैंने अपने कई जानने वालों को भी फोन किया, लेकिन सबने मना कर दिया। जब अंधेरा होने लगा तो वापस घर लौट जाने के अलावा मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा। घर पहुंचकर मां को सारी बात बताई। उन्होंने कहा- ‘भाई से दूर रहना, उसकी नजरों के सामने मत आना।’ एक-दो दिन बीते ही थे कि फिर वही सब होने लगा। रोज-रोज की मारपीट। एक महीने बाद मां और दादी के कहने- लगे घर छोड़ दे। मैंने फिर घर छोड़ दिया। किसी तरह एक कमरा किराए पर लेकर रहने लगा। जब मां से मिलना होता तो नजफगढ़ बैंक या किसी चाय की दुकान पर उन्हें बुला लेता। यूं ही सड़कों पर समय गुजरने लगा। कुछ महीने बाद पता चला कि बड़े भाई की अचानक मौत हो गई। सुनकर बुरा तो लगा लेकिन उतना नहीं। बस यूं कहिए कि जो हुआ ठीक हुआ। भाई की मौत के बाद फिर मेरा घर आना-जाना शुरू हुआ। आखिर मैंने तय किया कि अब सर्जरी करवाऊंगा। मम्मी और दादी को सर्जरी के बारे में बताया। वो कहने लगीं कि अगर तुम ये करवाकर खुश रहोगे तो करवा लो। तुम्हारी खुशी में ही हमारी खुशी है। छोटी-मोटी नौकरी से जो भी पैसे जोड़े थे, उससे इलाज शुरू हुआ। इसके लिए सबसे पहले जीआईडी सर्टिफिकेट यानी जेंडर आईडेंटिटी डिसऑर्डर सर्फिकेट की जरूरत होती है। जिसके लिए मैं मनोचिकित्सक के पास गया। इसमें काउंसलिंग से जायजा लिया गया कि मैं सच में ट्रांस हूं या नहीं। तीन सेशन होने के बाद जीआईडी सर्टिफिकेट मिला। इसके बाद हार्मोन हेल्थ के डॉक्टर यानी एंडोक्रोनॉलिस्ट के पास गया। उसने हार्मोनल टेस्ट करवाए और रिपोर्ट के हिसाब से हार्मोन बदलने वाले इंजेक्शन देने शुरू किए। यह इंजेक्शन किसी भी सर्जरी करवाने वाले को सारी जिंदगी लेने होते हैं। शरीर के हार्मोन जेंडर के अनुसार बदलते रहके हैं, इसलिए हर तीन महीने में ब्लड टेस्ट भी करवाने पड़ते हैं। इसमें हर महीने करीब 5 हजार रुपये का खर्च आता। इस पूरी प्रोसेस में एक से डेढ़ साल लग गया। तब जाकर 2024 के आखिरी में सर्जरी हुई, जिसमें ब्रेस्ट और यूटेरस हटा दिया गया। फिर बारी आई टीजी यानी ट्रांस जेंडर कार्ड लेने की। इसी से सभी दस्तावेजों में नाम और जेंडर बदलता है। इसके लिए मैंने डीएम ऑफिस में अप्लाई किया। तीन साल तक इस कार्ड के लिए चक्कर काटता रहा। एकबार तो वहां बैठे अधिकारी ने इतना तक कह दिया कि 'पैंट उतारकर दिखाओ, तब तो पता चलेगा जेंडर सच में बदला है या नहीं।' ये सुनते ही वहां बैठे सभी लोग हंसने लगे। मैं शर्मिंदा होकर वहां से चला आया। फिर भी कार्ड जरूरी था इसलिए हर रोज पहुंच जाता था। वेरिफिकेश के लिए एक टीम मेरे मोहल्ले में पहुंची और पूछने लगी कि यहां कोई हिजड़ा रहता है, जिसने टीजी कार्ड के लिए अप्लाई किया है। उस दिन के बाद से पूरा मोहल्ला मेरा मजाक उड़ाने लगा। आखिरकार मुझे वो मोहल्ला छोड़ना पड़ा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। 2019 में जो ट्रांसजेंडर एक्ट आया था उसमें इसी साल मार्च में बदलाव भी हुआ है। उसके अनुसार अब डीएम ऑफिस में मेडिकल बोर्ड बैठेगा। जो निर्णय लेगा कि अप्लाई करने वाला ट्रांस है भी या नहीं। टीजी कार्ड के लिए वेबसाइट से ही अप्लाई करना होगा। सर्जरी हुए लगभग दो साल हो चुके हैं लेकिन अब तक मेरा पैन कार्ड नहीं बन पाया है। जिसकी वजह से पीएफ के लिए अप्लाई नहीं कर पा रहा हूं। मुझे पैसों की सख्त जरूरत हैं, इसलिए दिन-रात सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता हूं। सर्जरी के बाद जिंदगी में काफी कुछ बदल गया, लेकिन पुरानी जिंदगी को जब भी याद करता हूं तो तकलीफ होती है। शायद वो सब जिंदगी में कभी भूल नहीं पाऊंगा। मैं जो भी था, जैसा भी था सब ऊपर वाले ने किया था, लेकिन सजा मुझे मिली। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-8 पुलिसवालों को मारने वाले विकास दुबे की बीवी हूं:आज वो जिंदा होते तो थप्पड़ मारती, बच्चे बाप का नाम तक नहीं सुनना चाहते साल 2020, 2-3 जुलाई की दरमियानी रात। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ वाले घर पर सो रही थी। बड़ा बेटा उन दिनों छुट्टी पर मॉस्को से इंडिया आया हुआ था और अपनी चाची के घर पर था। रात 2 बजे अचानक फोन बजा। पूरी कहानी यहां पढ़ें… 2- ब्लैकबोर्ड-पत्नी की साड़ी-पेटीकोट धोता हूं, झाडू-पोंछा करता हूं:दोस्त कहते हैं- ये मर्द नहीं, हाउस हसबैंड बनने से भाइयों की शादी नहीं हो रही कहानी ऐसे मर्द की जो पैसे कमाने बाहर नहीं जाता। घर पर रहकर झाड़ू-पोंछा करता है। बरतन धोता है। खाना बनाता है। वो हाउस हसबैंड है। ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां हाउस वाइफ होती हैं। पूरी कहानी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 30 Jul 2026 4:55 am

राहुल के 'इडियट, अंधभक्त' बयान पर हंगामा:'पैलेट गन' आरोप पर सरकार बोली- गोली मंत्री नहीं, मजिस्ट्रेट चलवाता है; ‘एंटी पेपर लीक बिल’ पास

संसद के मानसून सत्र में बुधवार को एक बार फिर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टकराहट पैदा कर दी। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन चलाने का आदेश देने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने अपने भाषण के दौरान 'विद्यार्थी, इडियट और अंधभक्त' शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष के सांसद लगातार टोकते रहे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे, जबकि राहुल ने सदन में आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। प्रश्नकाल के दौरान ही विपक्षी दलों के सदस्य नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के कारण अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन सदस्य एनके प्रेमचंद्रन ने सदस्यों से सदन के पटल पर दस्तावेज रखने की प्रक्रिया पूरी कराई, लेकिन विपक्षी सांसद 'गृहमंत्री सदन में आओ' के नारे लगाते रहे। हंगामा थमने के बजाय और तेज होता गया। करीब 12 बजकर 6 मिनट पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला सदन की कार्यवाही संभालने के लिए आसन पर पहुंचे। लगातार हो रही नारेबाजी पर उन्होंने नाराजगी जताई और सदन को चलने देने की अपील की। इसके बाद सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने विधेयक पर अपनी बात रखी और परीक्षा प्रणाली तथा नकल रोकने के उपायों को लेकर सरकार से सवाल किए। करीब 12 बजकर 59 मिनट पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चर्चा में हिस्सा लेने के लिए खड़े हुए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और खासकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर तीखे हमले किए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पैलेट गन चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था। उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए 'विद्यार्थी, इडियट और अंधभक्त' टिप्पणी भी की, जिस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। राहुल गांधी के आरोपों के बाद सदन का माहौल और गरमा गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तत्काल खड़े हुए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष बेहद गंभीर आरोप लगा रहे हैं, इसलिए उन्हें सदन में इसका प्रमाण देना चाहिए। सत्ता पक्ष के सांसद भी राहुल गांधी के बयान का विरोध करते हुए बार-बार उन्हें टोकते रहे। इसी दौरान राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया है और उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा। इस मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। लगातार बढ़ते शोर-शराबे और हंगामे के बीच अध्यक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर बाद जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान गोली चलाने का आदेश कोई मंत्री नहीं देता, बल्कि कानून के अनुसार यह अधिकार कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास होता है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को गैरजिम्मेदाराना और तथ्यों से परे बताया। इस दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे, लेकिन हंगामे के बीच ही लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। राज्यसभा में भी हंगामा उधर राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। इसके बाद प्रश्नकाल शुरू हुआ, लेकिन विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई। बहस के दौरान बिहार से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद प्रोफेसर मनोज झा ने सरकार की नीतियों और विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी बात रखी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर भी तीखी बहस देखने को मिली। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 29 Jul 2026 11:09 pm

पीओके हिंसा को लेकर ब्रिटेन में विरोध, लोगों ने पाक दूतावास के बाहर किया प्रदर्शन

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चल रहे तनाव के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के समर्थन में ब्रिटिश कश्मीरियों ने बर्मिंघम में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया।

देशबन्धु 29 Jul 2026 10:55 pm

US-Iran War Escalation: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा नया संग्राम, बेकाबू हुए हालात

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए भीषण मिसाइल हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधी जंग छिड़ने की आशंका काफी गहरी हो गई है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्तों से तनाव कम करने और सीधी मुठभेड़ से बचने के प्रयास जारी थे, लेकिन जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाए जाने के बाद स्थितियां पूरी तरह बेकाबू होती दिख रही हैं।ट्रंप की ईरान को सीधी चेतावनी: 'देंगे अब तक का सबसे सख्त सैन्य जवाब'जॉर्डन में हुए हमलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। एक अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल से बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी ठिकानों पर हुए इस दुस्साहसिक हमले का जवाब पूरी सैन्य ताकत से दिया जाएगा। ईरान की ओर से जॉर्डन की तरफ दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों के बाद ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सेंट्रल कमांड और एयरबेस को कई मिसाइलों से निशाना बनाया है। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसने हवा में ही ईरान की पांच मिसाइलों को नष्ट कर दिया। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा रहेगा, उनकी सैन्य कार्रवाइयां जारी रहेंगी।युद्ध में सऊदी अरब की सीधी एंट्री: इराक में अमेरिका के साथ मिलकर की एयरस्ट्राइकतनाव की इस आग में अब सऊदी अरब भी खुलकर कूद पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान से ठीक पहले अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त वायुसेना ने इराक में मौजूद ईरान समर्थित गुटों पर भारी एयरस्ट्राइक की। इस कार्रवाई में बगदाद समेत 7 प्रांतों में हथियारों के ठिकानों और लॉजिस्टिक्स डिपो को निशाना बनाया गया। इराक के हशद अल-शाबी (पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज) समूह ने इन हमलों में अपने 20 से अधिक लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की है। सऊदी अरब का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई उसके तेल प्रतिष्ठानों पर ईरान समर्थित समूहों द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के विरोध में की गई है।होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर कब्जा: दुनिया पर मंडराया तेल संकटमिसाइल हमलों के साथ-साथ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल परिवहन मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में भी तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रणनीतिक समुद्री मार्ग में तीन विदेशी तेल टैंकरों को रोकने का दावा करते हुए कहा कि इस रास्ते पर उनका पूर्ण नियंत्रण है। होर्मुज में बढ़ी इस सैन्य हलचल और सऊदी के तेल निर्यात पर बने खतरे की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता फैल गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक बार फिर उछलने लगी हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 10:00 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या CJP से किया वादा तोड़ रही सरकार; अब तक दर्जनों FIR वापस नहीं ली, प्रदर्शनकारियों से पूछताछ; क्या दोबारा आंदोलन होगा

अभिजीत दीपके ने दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने मंगलवार को कहा- 'कई राज्यों में पुलिस स्टूडेंट्स को परेशान कर रही है। सरकार छात्रों को डराना-धमकाना और डिटेन करना बंद करे। अगर ये जारी रहा, तो हम दोबारा बहुत बड़ा आंदोलन करेंगे।’ आखिर जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों के साथ हो क्या रहा है, क्या वाकई सरकार वादाखिलाफी कर रही, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: जंतर मंतर के प्रदर्शनकारियों के साथ क्या हो रहा है?जवाबः तीन तरह के बर्ताव सामने आए हैं… 1. प्रोटेस्टर्स को ट्रैक करके अपमानित किया जा रहा 2. कई राज्यों में दर्ज FIR रद्द की जा रहीं 3. कुछ जगह FIR रद्द नहीं, पुलिस एक्शन ले रही सवाल-2: तो क्या सरकार CJP से वादाखिलाफी कर रही है?जवाबः CJP और सरकार के बीच 3 दौर की बातचीत के बाद 25 जुलाई को प्रोटेस्ट खत्म हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा दोनों पक्षों के बीच कुछ बातें तय हुई थीं। मसलन- बीजेपी शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR वापस ली जाएंगी, सरकार मंगलवार तक इसकी लिखित गारंटी देगी, NEET पेपर लीक की वजह से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को अधिकतम मुआवजा और शिक्षा सुधार के चार्टर पर सरकार काम करेगी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन बातों पर सहमति जताई थी। हालांकि अब कॉकरोच जनता पार्टी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है। CJP का कहना है कि अब तक सरकार की तरफ से प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस करने की लिखित गारंटी नहीं मिली है। उलटे पुलिस प्रोटेस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। CJP ने ये भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से पुलिस को दर्ज FIR में जांच जारी रखने की इजाजत मिल गई है। ये सरकार के आश्वासन से बिल्कुल उलट है। इस आदेश को मंजूर नहीं करेंगे। सवाल-3: आखिर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्या कहा, जिसका विरोध कर रहे CJP नेता?जवाबः 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने CJP प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और ये संवैधानिक अधिकार है। पहली नजर में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखती है। जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कानून तोड़ने वालों को भी सजा मिलनी चाहिए। 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा- CJP का कहना है कि प्रदर्शनकारियों पर केस खत्म करने में हमें शर्तें मंजूर नहीं। सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल सरकार के फायदे के लिए नहीं होना चाहिए। पूरे देश के सामने एक गंभीर आश्वासन दिया गया था। उसका सम्मान किया जाना चाहिए। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर प्रोटेस्ट में अपराधी खुले घूम रहे थे, तो दिल्ली पुलिस को उनके पुराने मामलों में जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख करना चाहिए। सरकार पुराने आरोपियों के बहाने का इस्तेमाल FIR जारी रखने के लिए नहीं कर सकती। अगर सरकार को इसकी छूट दी गई, तो वह निश्चित तौर पर इसका इस्तेमाल करेगी। सवाल-4: क्या जमानत पर चल रहे आरोपी प्रोटेस्ट में शामिल नहीं हो सकते?जवाब: अगर किसी मामले में कोई आरोपी है, तो इससे उसके किसी प्रोटेस्ट में शामिल होने का अधिकार नहीं छीना जा सकता। अभिव्यक्ति की आजादी के तहत उसे प्रोटेस्ट में शामिल होने का अधिकार है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि दिल्ली प्रोटेस्ट के मामले में एक पेच ये है कि आयोजकों ने शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट की बात कही थी। उन्होंने प्रोटेस्ट के दौरान ये आरोप भी लगाया कि सत्तारूढ़ बीजेपी के इशारे पर अराजक तत्व शामिल हो गए हैं और प्रोटेस्ट को बदनाम करने की कोशिश में है। ऐसे में पुलिस ये जांच कर सकती है कि प्रोटेस्ट में शामिल लोग कौन थे, उनका इरादा प्रोटेस्ट का था या कोई गड़बड़ी करने का था। कानून में ये भी प्रावधान हैं कि अगर किसी व्यक्ति के शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, तो पुलिस उसे हिरासत में ले सकती है। पश्चिम बंगाल में तो इसके लिए हाल ही में ‘पब्लिक सेफ्टी और कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्ट’ बनाया गया है। सवाल-5: दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर अब तक केस वापस क्यों नहीं लिए गए?जवाबः सामान्य तौर पर कोई मामला दर्ज हो जाए, तो पुलिस चार्जशीट में उसे खत्म कर सकती है, क्लोजर रिपोर्ट लगा सकती है या फिर सुनवाई के दौरान कोर्ट FIR रद्द करने के आदेश दे सकता है।दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे भी अब तक सरकार से कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर पुलिस ने अपनी तरफ से जो मामले दर्ज किए हैं, उन्हें वापस लेने के लिए उपराज्यपाल से अनुरोध करेगी। उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद पुलिस कोर्ट को इसकी सूचना देगी।कई पत्रकारों ने अपने ऊपर हमले के मामले में केस दर्ज करवाए हैं, वो इतनी आसानी से वापस नहीं होंगे। उसके लिए उनकी सहमति जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने घायल हुए पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में भी जांच की बात कही है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि प्रदर्शन की आड़ में पुलिस पर हमला करने या वाहन जलाने वाले उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। इधर सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए SIT बनाने से पहले केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार को अपना पक्ष रखने का समय दिया है। महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को भी नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। ऐसे में कॉकरोच पार्टी और सरकार के बीच ये तनातनी लंबी खिंच सकती है। सवाल-6: क्या कॉकरोच पार्टी दोबारा प्रदर्शन शुरू कर सकती है? जवाब: कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट NEET पेपर लीक को लेकर था। CJP का कहना है कि वो आगे भी स्टूडेंट्स के मुद्दे को लेकर एक्टिव रहेगी। इन मुद्दों पर उन्हें युवाओं का समर्थन मिल सकता है। छात्रों पर कोई कार्रवाई न हो, इसका निर्देश सुप्रीम कोर्ट दे ही चुका है। हालांकि प्रोटेस्ट में शामिल पुराने आरोपियों पर दर्ज FIR वापस लेने का मामला पेचीदा है। इस मुद्दे पर CJP दोबारा उतना समर्थन जुटा पाए, ये आसान नहीं है। पॉलिटिकल एनालिस्ट विजय त्रिवेदी कहते हैं, ‘कोई विवाद बातचीत की टेबल तक आ जाए, तो दोबारा उतना नहीं बढ़ता। CJP की कुछ मांगें मान ली गई हैं। आगे भी बातचीत से रास्ता निकलने की उम्मीद है। सरकार भी कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी, जिसे नए सिरे से उसका विरोध शुरू हो जाए।' ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो

दैनिक भास्कर 29 Jul 2026 6:12 pm

'डील नहीं तो पूरी तबाही': डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को खुली धमकी, बोले- पुलों और पावर प्लांट्स को उड़ा देंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए सख्त सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर तेहरान प्रशासन वाशिंगटन के साथ किसी भी समझौते या डील को मानने से इनकार करता है, तो अमेरिकी सेना उसके देश के बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद कर देगी, जिसमें विशेष रूप से पुलों और पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप का यह ताजा और सनसनीखेज बयान प्रतिष्ठित अमेरिकी मीडिया संस्थान फॉक्स न्यूज को दिए गए एक फोन इंटरव्यू के दौरान सामने आया है, जिसमें उन्होंने खुलेआम सैन्य विकल्पों पर चर्चा करते हुए ईरान पर कूटनीतिक और सामरिक दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है।पुल और पावर प्लांट्स को तबाह करने में नहीं हिचकिचाएंगेफॉक्स न्यूज के साथ बातचीत करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आक्रामक रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि वे लोग कोई डील नहीं करते हैं, तो वे वापस लौटेंगे और अपना बचा हुआ काम पूरी तरह से पूरा करेंगे, जिसे दोबारा खड़ा करने में ईरान को कई लंबे साल लग जाएंगे। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर ईरान किसी नए समझौते के लिए राजी नहीं होता है, तो अमेरिका अपना सैन्य अभियान दोबारा शुरू कर सकता है। उन्होंने रणनीतिक रूप से पुलों को निशाना बनाने को एक बेहद मजबूत और तेज विकल्प बताया। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के पावर प्लांट्स को भी संभावित हमलों की सूची में सबसे ऊपर रखा और तर्क दिया कि पावर प्लांट और बड़े पुलों का निर्माण किसी भी देश के लिए सबसे कठिन और समय लेने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं होती हैं, जिन पर हमला होने से तेहरान की रीढ़ टूट जाएगी।डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हमला करने से किया साफ इनकारईरान के खिलाफ अपनी इस आक्रामक नीति के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने मानवीय पहलुओं पर भी अपनी बात रखी और साफ कर दिया कि अमेरिका डिसेलिनेशन यानी समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट्स को अपने हमलों का निशाना नहीं बनाएगा। उन्होंने इसके पीछे का तर्क देते हुए कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से वहां के सीधे तौर पर आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचेगा। ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान सवालिया अंदाज में कहा कि वे वहां किसे चोट पहुंचाना चाहते हैं क्योंकि इससे सीधे आम जनता प्रभावित होगी, इसलिए वे ऐसा करने के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य निशाना केवल सैन्य और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करना है, न कि किसी भी तरह से आम ईरानी जनता को संकट में डालना।नेतन्याहू के साथ रिश्तों और खुफिया जानकारियों पर क्या बोले ट्रंप?इस पूरे इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन तमाम मीडिया रिपोर्टों का भी सिरे से खंडन किया जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वाइट हाउस में अपनी आगामी मुलाकात से ठीक पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दोबारा जीवित करने से जुड़ी कोई खुफिया जानकारी अमेरिका के साथ साझा करना चाहते थे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी खुफिया एजेंसियों के माध्यम से पहले से ही ईरान की हर परमाणु गतिविधि पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और उसे किसी भी अन्य बाहरी देश से अतिरिक्त जानकारी की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इजरायली पीएम नेतन्याहू पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें यह बात बताने के लिए 'बीबी' की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि नेतन्याहू उन्हें इसलिए यह सब बता रहे हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि अमेरिका इस पूरे संघर्ष में खुलकर शामिल रहे। ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने नेतन्याहू को सार्वजनिक तौर पर ऐसा ऐलान करते हुए सुना और उनसे सीधा सवाल किया कि उन्हें दुनिया के सामने यह घोषणा करने की क्या जरूरत थी, वे यह बात सीधे तौर पर भी कह सकते थे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 5:22 pm

'ना फांसी की चिंता, ना जेल का डर': शेख हसीना ने किया स्वदेश लौटने का बड़ा ऐलान, बताई तारीख

बांग्लादेश की बेदखल हो चुकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान देते हुए ऐलान किया है कि वे गिरफ्तारी, जेल की सलाखों या मौत की सजा जैसी तमाम डरावनी आशंकाओं के बावजूद इसी साल दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। पिछले साल अगस्त 2024 में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद देश छोड़कर भारत की राजधानी नई दिल्ली में शरण लेने वाली शेख हसीना ने साफ कर दिया है कि स्वदेश लौटने पर उनके साथ जो भी होगा, वे उसका सामना करने से पीछे नहीं हटेंगी। प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी एएफपी को ईमेल के जरिए दिए गए अपने एक विस्तृत जवाब में शेख हसीना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि उनकी जान को खतरा है, उन्हें मारा जा सकता है, गिरफ्तार किया जा सकता है या जेल में डाला जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद वे वापस लौटना चाहती हैं क्योंकि उनके देश के आम लोग उन्हें पुकार रहे हैं।अदालत की मौत की सजा और अपनों की धरती पर अंतिम सांस की इच्छाइससे पहले रॉयटर्स को दिए गए एक इंटरव्यू में भी शेख हसीना ने इस बात को दोहराया था कि वे और उनके सभी राजनीतिक सहयोगी अपना निर्वासन समाप्त करके बहुत जल्द बांग्लादेश लौटेंगे और वहां की अदालतों के सामने कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा था कि उनकी अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार भीषण अत्याचार और उत्पीड़न किया जा रहा है, और यदि उनकी किस्मत में मौत भी लिखी है, तो वे चाहती हैं कि वह उनकी अपनी मातृभूमि की सरजमीं पर आए, जहां उनके माता-पिता को दफनाया गया है और जहां उनका खून बहा था। गौरतलब है कि बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण यानी आईसीटी द्वारा शेख हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में ही मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, जो उन्हें साल 2024 में छात्रों के ऐतिहासिक और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों से सख्ती से निपटने के उनके तौर-तरीकों के चलते दी गई थी।साल 2024 के छात्र आंदोलन और सत्ता परिवर्तन की पूरी कहानीयह पूरा राजनीतिक संकट साल 2024 की गर्मियों में तब शुरू हुआ था जब सरकारी नौकरियों में चली आ रही विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत की थी। हालांकि, सुरक्षा बलों और प्रशासन द्वारा अपनाई गई कड़ी कार्रवाई के बाद यह छात्र आंदोलन तेजी से एक राष्ट्रव्यापी सरकार विरोधी जन-आंदोलन में तब्दील हो गया, जिसमें महीनों तक चले संघर्ष के दौरान हजारों लोग घायल हुए और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। विरोध प्रदर्शनों के पूरी तरह उग्र होने और बेकाबू हालात के बाद अगस्त 2024 में शेख हसीना को आखिरकार अपने प्रधानमंत्री पद से अचानक इस्तीफा देना पड़ा था और देश छोड़कर भारत आना पड़ा था। इस सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद बांग्लादेश की नई व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उनके और उनके कई पूर्व सहयोगियों पर मानवता के खिलाफ अपराधों के गंभीर मामले दर्ज किए, जबकि उनकी पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।तारिक रहमान का नया शासन और बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक सियासतबांग्लादेश की इस बड़ी राजनीतिक उठापटक के बीच हाल ही में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के प्रमुख तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में आधिकारिक तौर पर शपथ ले ली है, जिसके साथ वे दशकों के लंबे अंतराल के बाद बांग्लादेश के पहले निर्वाचित पुरुष प्रधानमंत्री बन गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की सियासत लंबे समय तक शेख हसीना और तारिक रहमान की माता तथा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बीच की आपसी प्रतिद्वंद्विता के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जिसे देश के लोग अक्सर बेगमों की जंग के रूप में याद किया करते थे। अब ऐसे में शेख हसीना के दिसंबर तक वतन लौटने के इस सनसनीखेज ऐलान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की राजनीति में खलबली मचा दी है और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बांग्लादेश की नई सरकार और न्यायपालिका इस पर क्या रुख अपनाती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 5:16 pm

अमेरिका का नया 'रूस बिल': भारत और चीन पर लटकी 100% टैरिफ की तलवार, अमेरिकी सीनेटर ने बताया 'असली दोषी'

रूस से लगातार कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर बड़ा और शिकंजा कसने के लिए अमेरिकी संसद ने एक बेहद सख्त प्रतिबंध विधेयक को प्रक्रियागत वोटिंग के जरिए पास कर दिया है। अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर ने इस दौरान बिना किसी लाग-लपेट के खुलकर कहा है कि इस नए और कड़े कानून का मुख्य निशाना भारत और चीन जैसे देश हैं, जो लगातार मॉस्को से ऊर्जा संसाधन खरीदकर उसकी सैन्य ताकत और रूस-यूक्रेन युद्ध को आर्थिक रूप से समर्थन दे रहे हैं। इस प्रस्तावित बिल के प्रावधानों के मुताबिक यदि यह पूरी तरह से कानून बनता है, तो रूस से व्यापार करने या ऊर्जा खरीदने वाले देशों के उत्पादों पर अमेरिका में भारी-भरकम 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क यानी टैरिफ लगाया जा सकता है, जिसका सबसे सीधा और गहरा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर पड़ना तय माना जा रहा है।सीनेट में भारी बहुमत से मिला समर्थन और राजनीतिक पृष्ठभूमिदक्षिण कैरोलिना के दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की स्मृति में लाए गए इस महत्वपूर्ण 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' पर अमेरिकी सीनेट के भीतर भारी बहुमत के साथ 86-12 के अंतर से क्लोजर मोशन पास कर दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह मतदान ठीक उसी दिन संपन्न हुआ जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने के लिए वाशिंगटन पहुंचे थे और उन्होंने दिवंगत सीनेटर ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अमेरिकी सीनेटरों का यह आक्रामक रुख यह साफ संकेत दे रहा है कि वाशिंगटन अब मास्को के साथ ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए पूरी तरह से मानसिक रूप से तैयार हो रहा है।मित्र देशों को नहीं, बल्कि चीन और भारत को है टार्गेटएक विशेष प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर से इस बिल के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में बयान देते हुए कहा कि इस कानून का मसौदा बहुत ही करीने से डिजाइन किया गया है ताकि अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी देशों पर इसका कोई नकारात्मक असर न पड़े, बल्कि इसका पूरा वार सीधे तौर पर चीन और भारत पर पड़े। सीनेटर विकर ने भारत और चीन की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले में यही देश मुख्य कसूरवार हैं क्योंकि वे भारी मात्रा में रूस का तेल और गैस खरीद रहे हैं जिससे रूसी युद्ध मशीन को लगातार ईंधन मिल रहा है और वे वैश्विक मंच पर अमेरिकी हितों के अनुकूल काम नहीं कर रहे हैं।भारत का रणनीतिक रुख और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडराता खतराभारत सरकार की ओर से इस मामले पर पहले ही बेहद स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाया गया है, जिसमें नई दिल्ली ने बार-बार यह दोहराया है कि रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना देश के राष्ट्रीय हितों और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए बेहद आवश्यक है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इस 100 प्रतिशत टैरिफ वाले प्रावधान को कानून का रूप देता है, तो इससे न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों में भारी तनाव पैदा होगा बल्कि पहले से ही दबाव झेल रहा वैश्विक ऊर्जा बाजार और अधिक अस्थिर हो जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 5:14 pm

खाड़ी में पाकिस्तान का नया दांव: सऊदी के बाद अब कुवैत के साथ बड़ी डिफेंस डील, क्या भारत की बढ़ेगी टेंशन

पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के रक्षा समीकरणों में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आ रहा है। आर्थिक बदहाली और भारी कर्ज के जाल में फंसे पाकिस्तान ने अपनी रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाते हुए खाड़ी देशों के साथ सैन्य गठजोड़ बढ़ाना शुरू कर दिया है। सऊदी अरब के साथ हालिया रक्षा समझौतों के ठीक बाद, अब पाकिस्तान ने कुवैत के साथ एक बड़ी और महत्वपूर्ण डिफेंस डील पर मुहर लगा दी है। इस नए घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों और भारतीय रक्षा गलियारों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या खाड़ी देशों का यह बदला हुआ रुख नई दिल्ली के लिए किसी रणनीतिक चुनौती का संकेत है।कुवैत और पाकिस्तान के बीच क्या है यह नया सैन्य समझौतापाकिस्तान और कुवैत के बीच हुए इस नए रक्षा समझौते के तहत मुख्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त युद्धाभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करने और तकनीकी सहयोग को शामिल किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की सेना कुवैती सशस्त्र बलों को आधुनिक युद्ध कौशल और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए ट्रेनिंग देगी। इसके बदले में कुवैत से पाकिस्तान को मोटी रकम और वित्तीय मदद मिलने की उम्मीद है, जिसकी उसकी डूबती अर्थव्यवस्था को इस वक्त सख्त जरूरत है। विश्लेषक इसे पाकिस्तान की 'मिलिट्री डिप्लोमेसी' का हिस्सा मान रहे हैं, जिसके जरिए वह तेल समृद्ध देशों से नकद डॉलर जुटाने की कोशिश में है।सऊदी अरब के साथ पहले ही हो चुका है बड़ा गठजोड़कुवैत से पहले पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को एक नए स्तर पर पहुंचाया था। सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती और वहां की रॉयल सऊदी लैंड फोर्सेस को ट्रेनिंग देने के बदले रियाद हमेशा से इस्लामाबाद का बड़ा मददगार रहा है। हाल के महीनों में दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी हाथ मिलाया है। अब इसी तर्ज पर कुवैत को भी अपने पाले में लाकर पाकिस्तान ने यह साबित करने की कोशिश की है कि खाड़ी देशों की सुरक्षा में उसकी सेना की भूमिका आज भी काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है।क्या भारत के लिए सच में खड़ी हो सकती है कोई चुनौतीइस डिफेंस डील के सामने आने के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इसका भारत पर कोई विपरीत असर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि भारत को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने खाड़ी देशों, विशेषकर सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के साथ अभूतपूर्व रणनीतिक और आर्थिक संबंध स्थापित किए हैं। खाड़ी देश भली-भांति जानते हैं कि भारत एक बहुत बड़ा बाजार और मजबूत आर्थिक शक्ति है, जिसे वे किसी भी हाल में नाराज नहीं करना चाहेंगे। पाकिस्तान के साथ इन देशों का समझौता केवल द्विपक्षीय सुरक्षा जरूरतों और उनकी अपनी आंतरिक सुरक्षा तक ही सीमित है।बदलते दौर में जनरेटिव सर्च और एआई सुरक्षा के मायनेआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और रक्षा कूटनीति के विश्लेषकों का कहना है कि यह डील सीधे तौर पर भारत विरोधी किसी एजेंडे का हिस्सा नहीं है। कुवैत और सऊदी अरब जैसे देश अपनी सेनाओं को आधुनिक बनाने के लिए पाकिस्तान के सस्ते और अनुभवी मानव संसाधन (मैनपावर) का उपयोग कर रहे हैं। भारत की विशाल सैन्य क्षमता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन (जैसे ब्रह्मोस और तेजस का निर्यात) और मजबूत वैश्विक छवि के सामने पाकिस्तान की यह छटपटाहट महज अपनी अर्थव्यवस्था को वेंटिलेटर पर बनाए रखने की एक कोशिश भर है, जिससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई सीधा खतरा नहीं दिखता।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 12:26 pm

मिडिल ईस्ट में ड्रैगन का बड़ा धमाका: ईरान को ₹610 करोड़ के घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम दे रहा चीन

पश्चिम एशिया (Middle East) के सुलगते हालातों के बीच एक ऐसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है, जो वैश्विक महाशक्तियों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा सकती है। लंबे समय से पर्दे के पीछे से चालें चलने वाले चीन ने अब इस क्षेत्र में खुला खेल शुरू कर दिया है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, चीन जल्द ही ईरान को ₹610 करोड़ (लगभग 73 मिलियन डॉलर) की कीमत वाले अत्याधुनिक मैनपैड्स (MANPADS - मैन-पोर्टेबल एयर-डिफेंस सिस्टम) की एक बड़ी खेप सौंपने जा रहा है। ड्रैगन के इस कदम से न सिर्फ पश्चिम एशिया का सैन्य संतुलन बदलने की आशंका है, बल्कि अमेरिकी रक्षा खेमे में भी खलबली मच गई है।क्या होते हैं मैनपैड्स और क्यों इतने खतरनाक हैं ये हथियारमैनपैड्स (MANPADS) असल में कंधे पर रखकर दागी जाने वाली बेहद हल्की और घातक मिसाइलें होती हैं, जिनका इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को पलक झपकते ही मार गिराने के लिए किया जाता है। इन्हें एक या दो सैनिकों द्वारा आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है और बेहद कम समय में फायर किया जा सकता है। ईरान को इन चीनी मिसाइलों के मिलने से उसकी हवाई सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी, जिससे खाड़ी क्षेत्र में किसी भी संभावित हवाई हमले या रीइंजीनियरिंग ऑपरेशंस को नाकाम करने की उसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।चीन और ईरान के बीच गहराता रणनीतिक गठजोड़यह बड़ी सैन्य डील चीन और ईरान के बीच बढ़ते उस मजबूत आर्थिक और रणनीतिक गठबंधन का हिस्सा है, जो पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उभरा है। अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों (Western Sanctions) से घिरे ईरान को चीन का यह खुला समर्थन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन इस सौदे के जरिए न सिर्फ ईरान से सस्ते कच्चे तेल की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना चाहता है, बल्कि वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी वर्चस्व को सीधी चुनौती देने की तैयारी कर चुका है।अमेरिका और इजरायल के लिए पैदा हुआ नया सिरदर्दचीन के इस कदम से सबसे बड़ा झटका अमेरिका और उसके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल को लगा है। इजरायल और ईरान के बीच जारी सीधे टकराव के माहौल में ईरान को इतने आधुनिक हथियारों की सप्लाई मिलना इजरायली वायुसेना की रणनीतिक बढ़त के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके साथ ही, पेंटागन को डर है कि ये चीनी हथियार ईरान समर्थित अन्य गुटों (जैसे हूती विद्रोही या हिजबुल्लाह) के हाथों में भी पहुंच सकते हैं, जिससे लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना और वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा और अधिक गहरा हो जाएगा।वैश्विक व्यापार और एआई सर्च के नजरिए से बड़े मायनेआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और वैश्विक सुरक्षा के समीकरणों को देखें तो चीन का यह खुला हस्तक्षेप आने वाले समय में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को अस्थिर कर सकता है। यदि इस डील के जवाब में पश्चिमी देश चीन या ईरान पर नए कड़े प्रतिबंध लगाते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन एक बार फिर बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजिंग और तेहरान के इस नए सैन्य गठजोड़ पर वॉशिंगटन और यूरोपीय देश क्या जवाबी कदम उठाते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 12:25 pm

मौत के मुहाने पर 13 भारतीय: रूस-यूक्रेन जंग के बीच 'जंग लगे जहाज' में फंसे क्रू मेंबर, सिर पर मंडरा रही मिसाइलें

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के मैदान से एक बेहद विचलित करने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। ब्लैक सी यानी काले सागर के बेहद अशांत और खतरनाक वॉर जोन में एक मालवाहक जहाज फंसा हुआ है, जिसे अब 'मौत का जहाज' कहा जा रहा है। इस जहाज पर 13 भारतीय क्रू मेंबर (नाविक) सवार हैं, जिनकी जान इस वक्त बेहद गंभीर खतरे में है। युद्ध क्षेत्र के बिल्कुल बीचों-बीच फंसे होने के कारण इस जहाज के ऊपर से लगातार आत्मघाती ड्रोन और खतरनाक मिसाइलें गुजर रही हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि इन भारतीय नागरिकों के लिए मौत हर सेकंड महज कुछ इंच की दूरी पर खड़ी नजर आ रही है।युद्ध के सबसे खतरनाक हॉटस्पॉट में फंसा कमर्शियल वेसलयह पूरा मामला काले सागर के उस समुद्री हिस्से का है जहां रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ठिकानों पर लगातार हवाई और समुद्री हमले कर रहे हैं। फंसे हुए भारतीय क्रू मेंबर्स ने बेहद डरावने वीडियो और संदेश भेजकर अपनी आपबीती सुनाई है। उनके मुताबिक, जहाज के आसपास के पानी में लगातार धमाके हो रहे हैं और रात के समय आसमान मिसाइलों की रोशनी से दहल उठता है। दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे पर हमले करने के लिए जिस रूट का इस्तेमाल कर रही हैं, यह बदकिस्मत जहाज ठीक उसी के नीचे फंसा हुआ है, जिससे किसी भी वक्त इस पर सीधे हमले की आशंका बनी हुई है।राशन और पीने के पानी की भारी किल्लतजहाज पर फंसे इन 13 भारतीयों की मुश्किलें सिर्फ आसमान से बरसती मौत तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जहाज के भीतर के हालात भी बद से बदतर हो चुके हैं। पिछले कई दिनों से युद्ध क्षेत्र में फंसे होने के कारण जहाज पर मौजूद खाने-पीने का राशन लगभग खत्म होने की कगार पर है। पीने के साफ पानी की भारी किल्लत हो गई है और बिजली सप्लाई भी रुक-रुक कर आ रही है। मानसिक तनाव और मौत के साए में जीने के कारण कई क्रू मेंबर्स की तबीयत भी बिगड़ने लगी है, लेकिन इस हाई-रिस्क वॉर ज़ोन में किसी भी तरह की मेडिकल मदद का पहुंचना फिलहाल नामुमकिन बना हुआ है।भारत सरकार और डिप्लोमैटिक चैनल्स हुए एक्टिवइस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। भारतीय राजनयिक लगातार रूस और यूक्रेन दोनों देशों के दूतावासों और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क साध रहे हैं ताकि एक सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर (Safe Maritime Corridor) बनाकर इन 13 निर्दोष भारतीयों को वहां से सकुशल निकाला जा सके। हालांकि, युद्ध क्षेत्र में लगातार जारी बमबारी और माइनफील्ड्स (समुद्री बारूदी सुरंगों) की मौजूदगी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।परिजनों की बढ़ी धड़कनें, वतन वापसी के लिए लगाई गुहारइधर भारत में फंसे हुए क्रू मेंबर्स के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। मुंबई, केरल और तमिलनाडु समेत देश के विभिन्न हिस्सों के रहने वाले इन नाविकों के परिजनों ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय से हाथ जोड़कर भावुक अपील की है कि उनके बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए। सोशल मीडिया पर भी इन नाविकों को बचाने के लिए मुहिम तेज हो गई है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि जब तक दोनों देशों की तरफ से सीजफायर या किसी विशेष रेस्क्यू विंडो की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक इन भारतीयों के लिए हर एक पल भारी रहने वाला है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 12:05 pm

होर्मुज संकट पर ओमान का मास्टरस्ट्रोक: पेश किया धांसू शांति प्लान, क्या मान जाएगा ईरान

मध्य पूर्व (Middle East) में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव को कम करने के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz Crisis) में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए पड़ोसी देश ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। ओमान ने इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा और शांति बहाली के लिए एक बेहद मजबूत और व्यावहारिक प्लान पेश किया है। कूटनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर इस योजना पर आम सहमति बन जाती है, तो वैश्विक तेल संकट का बड़ा खतरा टल सकता है।वैश्विक तेल सप्लाई के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्यरणनीतिक और आर्थिक रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी दुनिया के लिए एक जीवन रेखा (Lifeline) की तरह है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। पूरी दुनिया में समुद्र के रास्ते होने वाले कुल कच्चे तेल (Crude Oil) के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा यानी करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत, चीन और जापान जैसे बड़े एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर इस रूट की स्थिरता पर निर्भर करती है। ऐसे में यहां मामूली सा भी तनाव वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर पहुंचा देता है।ओमान के धांसू प्लान में ऐसा क्या है खासओमान हमेशा से ही खाड़ी देशों के बीच एक तटस्थ और शांतिप्रिय मध्यस्थ के रूप में जाना जाता रहा है। ओमान द्वारा पेश किए गए इस नए शांति प्रस्ताव में सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखा गया है। इस प्लान के तहत होर्मुज क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Ships) की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने, क्षेत्र में सैन्य जमावड़े को कम करने और किसी भी संभावित टकराव को रोकने के लिए एक ज्वाइंट नेविगेशन मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने का सुझाव दिया गया है। ओमान की कोशिश है कि अमेरिका, पश्चिमी देशों और ईरान के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई में कमर्शियल रूट को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करवा दिया जाए।क्या ईरान इस समझौते के लिए तैयार होगाइस पूरे विवाद की मुख्य चाबी ईरान के पास है, जो होर्मुज के उत्तरी हिस्से पर पूरा नियंत्रण रखता है। अतीत में कई बार तनाव बढ़ने पर ईरान ने इस मार्ग को ब्लॉक करने की धमकियां दी हैं, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ उसका टकराव सीधा हो जाता है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक प्रतिबंधों (Economic Sanctions) और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहे ईरान के लिए ओमान का यह प्रस्ताव एक सुरक्षित एग्जिट रूट साबित हो सकता है। ओमान के ईरान के साथ बेहद करीबी और दोस्ताना संबंध हैं, इसलिए माना जा रहा है कि बैकचैनल कूटनीति के जरिए ईरान को इस समझौते के टेबल पर लाया जा सकता है।भारत और दुनिया पर इस शांति समझौते का क्या होगा असरयदि ओमान की यह पंचायत सफल रहती है और ईरान इस धांसू प्लान को मान लेता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बहुत बड़ी राहत होगी। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए इस रूट पर शांति रहने से देश में तेल की कीमतें स्थिर रहेंगी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में कमी आएगी। इसके अलावा, एआई सर्च इंजन और मॉडर्न जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में भी वैश्विक बाजारों में इस खबर से भारी सकारात्मकता देखने को मिल सकती है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आने की पूरी संभावना है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 12:03 pm

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के पास फंसे 13 भारतीय नाविक, IMO ने सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता

यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को कहा कि चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर फंसे मालवाहक जहाज एमवी आमिर1 सवार भारतीय नाविकों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

देशबन्धु 29 Jul 2026 11:51 am

भारत-चीन समेत 5 देशों पर अमेरिका लगाएगा 100% टैरिफ! सीनेट से पास हुआ बिल

वॉशिंगटन: यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिकी सीनेट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीनेट ने एक नया प्रतिबंध विधेयक पारित किया है, जिसमें रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े व्यापारिक उपाय लागू करने का प्रावधान किया गया है। इस प्रस्तावित कानून के तहत भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। विधेयक का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर असर डालना और उसे यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए आर्थिक रूप से मजबूर करना बताया गया है। भारी बहुमत से पारित हुआ विधेयक अमेरिकी सीनेट में इस विधेयक को व्यापक समर्थन मिला। मतदान के दौरान 86 सीनेटरों ने इसके पक्ष में जबकि 12 सदस्यों ने विरोध में मतदान किया। मतदान ऐसे समय हुआ, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की अमेरिका के कैपिटल हिल पहुंचे हुए थे। माना जा रहा है कि इस दौरान यूक्रेन को लेकर अमेरिकी समर्थन और रूस पर बढ़ते दबाव का संदेश भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचाया गया। क्या है विधेयक का उद्देश्य? इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनाना है। प्रस्ताव में रूसी अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उन देशों पर भी आर्थिक कार्रवाई का प्रावधान है, जो रूस से ऊर्जा आयात जारी रखे हुए हैं। अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि रूस की ऊर्जा बिक्री उसकी आय का प्रमुख स्रोत है और इसी के जरिए वह युद्ध का खर्च वहन कर रहा है। इसलिए रूस के ऊर्जा कारोबार को सीमित करना इस रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। भारत समेत पांच देशों पर बढ़ सकता है दबाव विधेयक में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का उल्लेख उन देशों के रूप में किया गया है, जो रूसी तेल और गैस का आयात करते हैं। यदि यह कानून अंतिम रूप से लागू होता है, तो इन देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य इन देशों को रूस पर ऊर्जा निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित करना बताया गया है। ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी रूस पर निर्भरता पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाओं के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से दबाव में है। ऐसे हालात में कई देशों ने वैकल्पिक स्रोतों के रूप में रूस से कच्चे तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है। भारत भी अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है। यही वजह है कि प्रस्तावित अमेरिकी विधेयक का असर भारत सहित कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। छूट का भी रखा गया है प्रावधान अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पहले संकेत दिया था कि यदि कोई देश रूस से सीमित मात्रा में गैस खरीदता है और उसका आयात रूस के कुल गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम है, तो उसे इस कानून के कुछ प्रावधानों से राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम नियम और पात्रता का निर्धारण कानून लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल क्या हैं मौजूदा टैरिफ? वर्तमान में भारत पर अमेरिका का 10 प्रतिशत टैरिफ लागू है। चीन पर औसतन 12.5 प्रतिशत शुल्क लागू है, जबकि कुछ चीनी उत्पादों पर 7.5 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क भी प्रभावी हैं। स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों पर भी 10 से 12.5 प्रतिशत के बीच अमेरिकी आयात शुल्क लागू है। नया विधेयक लागू होने की स्थिति में इन देशों पर टैरिफ बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

देशबन्धु 29 Jul 2026 8:47 am

US Sanctions & H-1B Visa Bill: अमेरिकी संसद के दो नए फैसलों से भारत पर गहरा संकट, जानिए H-1B वीजा पर 3 साल के बैन,

वाशिंगटन से आ रही दो बड़ी खबरों ने भारतीय अर्थव्यवस्था, आईटी उद्योग, छात्रों और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में उठाए गए दो नए विधायी कदमों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया तनाव देखने को मिल सकता है। एक तरफ जहां अमेरिकी सीनेट में H-1B वीजा प्रक्रिया को बेहद कड़ा करने वाला बिल पेश किया गया है, वहीं दूसरी तरफ रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने के लिए भारी बहुमत से 'रूस प्रतिबंध विधेयक' पास हुआ है। यदि ये दोनों प्रस्ताव कानून की शक्ल लेते हैं, तो इसका सीधा असर भारत के आईटी पेशेवरों, अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों, देश के निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा।1. 'एंड H-1B एब्यूज एक्ट': 3 साल की रोक और 1 लाख डॉलर फीस का प्रस्तावअमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन सीनेटर टिम शीही द्वारा 'End H-1B Abuse Act' नाम से एक नया विधेयक पेश किया गया है। इस बिल में अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों को दिए जाने वाले H-1B वीजा नियमों में कई सख्त बदलावों की सिफारिश की गई है।H-1B वीजा बिल से भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर असर:नए वीजा पर 3 साल का बैन: बिल में अगले तीन वर्षों के लिए नए H-1B वीजा जारी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इससे अमेरिका जाकर काम करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय डॉक्टरों, इंजीनियरों और आईटी विशेषज्ञों को बड़ा झटका लग सकता है।1 लाख डॉलर का भारी शुल्क: हर H-1B वीजा आवेदन पर 1,00,000 डॉलर का अनिवार्य शुल्क लगाने का प्रावधान है। इतनी अधिक लागत के कारण भारतीय आईटी दिग्गज (जैसे TCS, Infosys, Wipro) और अमेरिकी कंपनियां भारत से प्रतिभाओं को अमेरिका बुलाने से बचेंगी।OPT व्यवस्था समाप्त करने का प्रस्ताव: अमेरिकी विश्वविद्यालयों से शिक्षा पूरी करने के बाद वहां काम का अनुभव प्राप्त करने के लिए मिलने वाली 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) सुविधा को खत्म करने की बात कही गई है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद वहां नौकरी पाना लगभग असंभव हो जाएगा।आश्रितों (Dependents) पर रोक: H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी और बच्चों के अमेरिका आने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है, जिससे पेशेवर अपने परिवार को साथ नहीं ले जा सकेंगे।2. 'रूस प्रतिबंध विधेयक': भारतीय सामानों पर 100% टैरिफ का खतराअमेरिकी सीनेट में 86-12 के भारी बहुमत से पारित हुआ 'रूस प्रतिबंध विधेयक' भारत के लिए दूसरी बड़ी चिंता का विषय है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है। चीन के बाद भारत, रूस से कच्चा तेल आयात करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है।इस कानून का भारत के व्यापार और अर्थ व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?भारतीय निर्यात पर 100% तक टैरिफ: इस विधेयक के तहत अमेरिका, रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों से आने वाले सामान पर 100% तक का शुल्क (टैरिफ) लगा सकता है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद बेहद महंगे हो जाएंगे और देश के निर्यात को भारी नुकसान होगा।रिफाइनरियों पर वित्तीय संकट: जून 2026 में भारत का रूसी तेल आयात 34% बढ़ा था। IOC, BPCL और रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस से व्यापार जारी रखना अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग बाधाओं के कारण मुश्किल हो सकता है।पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई बढ़ने की आशंका: मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति पहले ही प्रभावित है। ऐसे में यदि अमेरिकी दबाव में भारत को रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल बंद करना पड़ता है, तो देश में ईंधन की कीमतें और आम महंगाई तेजी से बढ़ सकती हैं।द्विपक्षीय संबंध और भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता के सामने चुनौतीयह पहला मौका नहीं है जब व्यापारिक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तनाव देखा जा रहा है। इससे पहले अगस्त 2025 में जब अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, तब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता पूरी तरह रुक गई थी। अब 100% टैरिफ का खतरा दोनों देशों के कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को और अधिक संवेदनशील मोड़ पर ला सकता है। भारत हमेशा अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और विदेश नीति के फैसले स्वतंत्र रूप से लेता आया है, लेकिन अमेरिकी संसद के ये कदम भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को सीधी चुनौती देते नजर आ रहे हैं।वर्तमान स्थिति: क्या ये फैसले तुरंत लागू हो गए हैं?राहत की बात यह है कि ये दोनों प्रस्ताव अभी पूरी तरह कानून नहीं बने हैं:H-1B वीजा से जुड़ा बिल फिलहाल अमेरिकी सीनेट में केवल पेश किया गया है।रूस प्रतिबंध विधेयक सीनेट से पास होकर विधायी प्रक्रिया के अगले चरण में है।इन दोनों प्रस्तावों को अंतिम रूप से कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) से मंजूरी मिलना और अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। इसलिए, जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक H-1B वीजा और भारत का अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार मौजूदा नियमों के तहत ही जारी रहेगा।(डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट अमेरिकी संसद (सीनेट) में पेश किए गए विधेयकों, विधायी दस्तावेजों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।)

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jul 2026 8:44 am

इराक में अमेरिका-सऊदी के एयरस्ट्राइक, ईरान की मिसाइल जवाबी कार्रवाई; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

अमेरिकी सेना ने ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों को बनाया निशाना, ईरान ने आरोपों से किया इनकार; जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस और सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ी

देशबन्धु 29 Jul 2026 8:35 am

व्हाइट हाउस में डिप्लोमैटिक ड्रामा: ट्रंप से मिले जेलेंस्की और नेतन्याहू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अलग-अलग बैठकें कीं

देशबन्धु 29 Jul 2026 7:40 am

ओवल ऑफिस में ट्रंप और जेलेंस्की की बैठक, पैट्रियट सिस्टम और कूटनीति पर हुई बातचीत

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। जेलेंस्की ने बताया क‍ि इस दौरान यूक्रेन की सुरक्षा, शांति की कोशिशों और आगे की कूटनीतिक बातचीत को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की

देशबन्धु 29 Jul 2026 7:30 am

यूक्रेन बंदरगाह पर फंसे भारतीय: ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा

यूक्रेन के चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर खड़े मालवाहक जहाज एमवी अमीर-1 पर सवार 13 भारतीय नाविकों सहित कुल 15 सदस्य लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच फंसे हुए हैं

देशबन्धु 29 Jul 2026 7:07 am

ग्रीस में भारतीय राजदूत की अहम मुलाकातें, रक्षा, रोजगार और पर्यटन पर हुई चर्चा

ग्रीस में भारत के राजदूत रवि शंकर ने हेलेनिक एयर फोर्स जनरल स्टाफ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डेमोस्थनीज ग्रिगोरियाडिस से मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने भारत और ग्रीस की वायु सेनाओं के बीच चल रहे सहयोग और नई पहलों पर चर्चा की।

देशबन्धु 29 Jul 2026 6:20 am

जापान में भूकंप पीड़ि‍तों के प्रत‍ि व‍िदेश मंत्री ने जताई संवेदना, मदद और एकजुटता का द‍िया भरोसा

विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने जापान के कुमामोटो प्रांत में आए भूकंप की खबर पर चिंता जताई।

देशबन्धु 29 Jul 2026 4:30 am

जापान के कुमामोटो में हादसा: शॉपिंग सेंटर की बिल्डिंग का एक हिस्सा गिरा, कई लोगों के दबे होने की आशंका

जापान के कुमामोटो प्रांत के काशिमा टाउन में एक बड़े शॉपिंग सेंटर में विस्फोट हुआ। इस घटना में कई लोग फंस गए और कई घायल हो गए। जापान के सरकारी प्रसारक एनएचके ने यह जानकारी दी।

देशबन्धु 29 Jul 2026 4:20 am

अमेर‍िका से मुआवजा लेने वाले जहाजों को होर्मुज से न‍िकलने की अनुमत‍ि नहीं : ईरान

ईरान की सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के मुताब‍िक, ईरान के मुख्य सैन्य कमान, खात्म अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स ने कहा कि जो भी देश या कंपनी ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों से मुआवजा स्वीकार करेगी

देशबन्धु 29 Jul 2026 3:50 am

R|Elan™ Circular Design Challenge: Distinguished APAC Jury Names BYO By Tommy Tedji as Finalist, Building the Future of Circular Fashion

Hong Kong, July 28, 2026:The R|Elan™ Circular Design Challenge (RCDC) – India’s leading platform for circular innovation in fashion and textiles, presented by Reliance Industries Ltd.’s R|Elan™, the United Nations in India and Lakm Fashion Week – announced its distinguished APAC Jury, which convened to evaluate this year’s cohort of pioneering circular design innovations. Bringing ... Read more

अजमेरनामा 29 Jul 2026 3:34 am

Nepal Sunsari Violence Update: भारत सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक हिंसा; 1 व्यक्ति की मौत के बाद 5 इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू, भारी सुरक्षा बल तैनात

भारत के बिहार राज्य की सीमा से सटे नेपाल के कोशी प्रांत स्थित सुनसरी जिले में अचानक उपजे सांप्रदायिक तनाव के बाद हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका-3 के कप्तानगंज इलाके में दो समुदायों के बीच शुरू हुआ आपसी विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। स्थिति पर काबू पाने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें गोली लगने से एक 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि पुलिसकर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव है और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर जिले के पांच प्रमुख बाजार क्षेत्रों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है।लाउडस्पीकर और धार्मिक झंडों को लेकर शुरू हुआ था विवादप्राप्त जानकारी के अनुसार, हिंसा की शुरुआत देवानगंज-3 के कप्तानगंज बाजार इलाके से हुई। रविवार देर रात वहां दो अलग-अलग धार्मिक समूहों के लोग अपने-अपने कार्यक्रमों में शामिल थे। एक तरफ तीर्थयात्रा जुलूस के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर का तेज आवाज में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिस पर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताई। इसके अलावा क्षेत्र में लगे बिजली के खंभों पर धार्मिक झंडे हटाने और लगाने को लेकर भी कहासुनी शुरू हुई। मामूली बहस से शुरू हुआ यह विवाद जल्द ही पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ में बदल गया। उग्र भीड़ ने कई दुकानों, वाहनों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।पुलिस कार्रवाई में युवक की मौत, दर्जनों घायलउपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंची पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और चेतावनी के तौर पर हवाई फायरिंग की। हालांकि, जब स्थिति और बिगड़ने लगी तो सुरक्षा बलों को सीधी गोलीबारी करनी पड़ी। इस दौरान कप्तानगंज निवासी 24 वर्षीय ओम प्रकाश मेहता को गोली लगी और उनकी मौत हो गई। इस हिंसक झड़प और पुलिस कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) समेत करीब 10 से अधिक सुरक्षाकर्मी और कई स्थानीय लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।इन 5 प्रमुख इलाकों में लागू हैं कड़े प्रतिबंधतनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन अधिकारी ईश्वरी प्रसाद अर्याल ने धारा 6(क) के तहत निषेधाज्ञा और अनिश्चितकालीन कर्फ्यू का आदेश जारी किया। वर्तमान में सुनसरी के निम्नलिखित क्षेत्रों में यह पाबंदियां प्रभावी हैं:हरिनगरा बाजारभुटाहा बाजारकप्तानगंज बाजारघुस्की बाजारदेवानगंज बाजारकर्फ्यू के तहत 4 या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने, किसी भी तरह की रैली, जुलूस, विरोध-प्रदर्शन या सार्वजनिक सभा आयोजित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अलावा धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों में डीजे (DJ) और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सुनसरी में हुई हिंसा के बाद पड़ोसी जिले मोरंग में भी एहतियात के तौर पर डीजे साउंड सिस्टम पर बैन लगा दिया गया है।राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और निष्पक्ष जांच की मांगप्रशासनिक स्तर पर शांति बहाली के प्रयास जारी हैं। जिला अधिकारी ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ बैठक कर सौहार्द्र बनाने की अपील की है। वहीं, नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने इस पूरी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और सभी घायलों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाए। भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या अप्रिय घटना को रोका जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 11:02 pm

ट्रंप से मिलेंगे जेलेंस्की और नेतन्याहू, यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट पर होगी अहम बातचीत

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ऐसे समय ट्रंप से मुलाकात कर रहे हैं, जब रूस की ओर से यूक्रेन के कई इलाकों में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जेलेंस्की इस बैठक में अमेरिका से पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और उसके उत्पादन में सहयोग की मांग कर सकते हैं।

देशबन्धु 28 Jul 2026 8:21 pm

'पैलेट गन किसने चलवाई', प्रियंका के सवाल पर हंगामा:अखिलेश ने कहा- झुकती है सरकार, झुकाने वाला चाहिए; सत्तापक्ष-विपक्ष का हुआ आमना-सामना

करीब एक सप्ताहभर लगातार गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में आखिरकार नीट पेपर लीक और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। हालांकि चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप, तंज और नोकझोंक का दौर चलता रहा। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने आंदोलनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा की अवधि को लेकर सहमति बनी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि पहले छह घंटे की चर्चा तय हुई थी, फिर इसे 8 घंटे किया गया और यदि विपक्ष चाहे तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने को भी तैयार है। जितेंद्र सिंह ने बताया क्यों जरूरी है नया कानून दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि 2024 के कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन लाया गया है ताकि संगठित परीक्षा माफिया पर तेजी से कार्रवाई हो सके। गौरव गोगोई ने पूछा- दो साल पहले वाला कानून क्यों फेल हुआ? सरकार की दलीलों का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि 2024 में भी सरकार ने इसी तरह दावा किया था कि अब पेपर लीक नहीं होगा, लेकिन 2026 में फिर नीट परीक्षा लीक हो गई। उन्होंने कहा कि यदि पिछला कानून प्रभावी था तो नया संशोधन लाने की जरूरत क्यों पड़ी। गोगोई ने कहा कि 2024 के मामले में गिरफ्तार अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और जिस व्यक्ति को मास्टरमाइंड बताया गया, वह लंबे समय तक फरार रहा। उन्होंने सरकार से पूछा कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ और एनटीए की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बजाय सरकार युवाओं की चिंताओं को हल्के में ले रही है। साथ ही पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर भाजपा सांसदों द्वारा किए गए स्वागत पर भी उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उनका स्वागत ऐसे किया गया, जैसे वे ‘पाकिस्तान से युद्ध जीतकर लौटे हों।’ बांसुरी स्वराज ने कहा- यह बिल समय की जरूरत भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा माफिया अब संगठित अपराध का रूप ले चुका है और मौजूदा कानून को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि संशोधन जांच एजेंसियों के अधिकार स्पष्ट करता है, जांच और ट्रायल को समयबद्ध बनाता है तथा परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने समय रहते कानून को और मजबूत किया है। अखिलेश यादव का तंज- झुकती है सरकार... झुकाने वाला चाहिए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा, सरकार झुकती है सरकार... झुकाने वाला चाहिए। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों युवाओं के दबाव के कारण ही धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। अखिलेश ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 2024 में भी ऐसा ही कानून लाया गया था, लेकिन उसके बावजूद पेपर लीक नहीं रुके। उन्होंने तंज करते हुए कहा, ‘जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे?’ उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और छात्रों को न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अभिषेक बनर्जी बोले- कानून बदलने से भरोसा नहीं लौटेगा तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा हर छात्र का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी व्यवस्था विफल होती है तो सरकार नई समिति या नया कानून लेकर आ जाती है, लेकिन जवाबदेही तय नहीं करती। उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई, जिससे सदन में कुछ देर के लिए फिर शोर-शराबा हुआ। प्रियंका गांधी ने पूछा- पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रा की मां ने उनसे पूछा कि उसकी बेटी पर यह अत्याचार क्यों हुआ। प्रियंका ने सरकार से सवाल किया, ‘देश के युवाओं पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? बच्चों पर लाठियां किसके आदेश पर चलाई गईं?’ उन्होंने कहा कि यह सवाल सिर्फ कांग्रेस नहीं बल्कि देश के छात्र, अभिभावक और शिक्षक पूछ रहे हैं। प्रियंका ने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए बिलकिस बानो मामले का जिक्र किया। इस पर भाजपा सांसदों ने कड़ा विरोध किया और उनसे माफी मांगने की मांग की। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि किसी मंत्री पर इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी उचित नहीं है और वरिष्ठ सांसद होने के नाते प्रियंका गांधी को जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। इसके बाद सदन में कुछ समय तक तीखी नोकझोंक होती रही। प्रियंका ने कहा प्रधानमंत्री कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलें, तभी छात्रों की समस्या का समाधान होगा। राज्यसभा में भी हंगामा उधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। शून्यकाल के दौरान विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और गृहमंत्री के बयान की मांग को लेकर हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के कारण सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने सदन चलाने की कोशिश की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 28 Jul 2026 7:57 pm

आज का एक्सप्लेनर:ऑस्ट्रेलिया की गैराज में ऐसा क्या हुआ कि प्लास्टिक नोट लाने पड़े; जल्द आपके हाथों में भी होंगे, जानिए फायदे-नुकसान

भारत में 10 और 20 रुपए के प्लास्टिक नोट के फील्ड ट्रायल की मंजूरी मिल गई है। 3 हजार करोड़ रुपए कीमत के 200 करोड़ नोट जल्द लोगों की जेब में होंगे। ये बात 27 जुलाई को वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताई। 2012 में मनमोहन सरकार ने भी 10 रुपए के प्लास्टिक नोट के ट्रायल की मंजूरी दी थी, लेकिन यह कभी जमीन पर नहीं आ सके। 2016-17 में ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्लास्टिक नोट हैं क्या, पुराना प्रोजेक्ट क्यों अटक गया था और भारत में इन्हें फिर लाने की कोशिश क्यों हो रही; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सबसे पहले प्लास्टिक नोट की शुरुआत का रोचक किस्सा… साल 1966, ऑस्ट्रेलिया ने पाउंड करेंसी छोड़कर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लॉन्च किया। इसमें उस दौर के सारे एडवांस सेफ्टी फीचर मौजूद थे। इसके बावजूद कुछ ही महीनों में मार्केट में 10 डॉलर के नकली नोटों की बाढ़ आ गई। कोई असली-नकली में फर्क नहीं कर पा रहा था। इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह नहीं, सिर्फ चार लोग थे- दुकानदार, आर्टिस्ट, फोटोग्राफर और एक टेलर। फोटोग्राफर ने असली नोट की फोटो खींची, आर्टिस्ट ने उसका वॉटरमार्क कॉपी किया और टेलर ने एक हफ्ते की प्रिंटिंग ट्रेनिंग ली। मेलबर्न शहर में दुकानदार के गैराज में नकली नोट छपने लगे। इस पूरे रैकेट को फंड कर रहा था रॉबर्ट किड नाम का एक क्रिमिनल। एक रोज दुकानदार की भाभी अनजाने में घर में पड़ा 10 डॉलर का नोट उठाकर चॉकलेट खरीदने गईं। सेल्सगर्ल को नोट का टेक्सचर अजीब लगा। उसने फौरन पुलिस को बता दिया और यहीं से पूरा गिरोह बेनकाब हुआ। सरकार हैरान थी कि इतनी आसानी से नोट कॉपी किया जा सकता है। 1968 में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर डॉ. हर्बर्ट कूंब्स ने देश के टॉप साइंटिस्ट्स को ऐसा नोट बनाने की चुनौती दी, जिसकी नकल न की जा सके। करीब २० साल की रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक नोट तैयार किया, जिसकी कॉपी बनाना लगभग नामुमकिन था। जनवरी 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया का पहला प्लास्टिक नोट लॉन्च किया और आगे चलकर यह तकनीक 25 से ज्यादा देशों को एक्सपोर्ट भी की। सवाल-1: प्लास्टिक नोट है क्या और बनते कैसे हैं? जवाबः भारत में करेंसी नोट कागज से बनते हैं, लेकिन प्लास्टिक नोट एक खास और हाई क्वालिटी वाले प्लास्टिक से बनते हैं। ध्यान रहे, ये वो प्लास्टिक नहीं, जो घर के सामान में इस्तेमाल होता है। हर प्लास्टिक प्रोडक्ट अलग तरह के पॉलिमर से बनता है और नोट के लिए एक खास पॉलिमर इस्तेमाल होता है। इसे बाय-एक्सिअली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन, यानी BOPP कहते हैं, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से बनता है। ये आम प्लास्टिक से ज्यादा लचीला और मजबूत होता है। खिंचाव पड़ने पर इसका आकार नहीं बदलता। सवाल-2: भारत में प्लास्टिक नोट लाने की कोशिश कब से हो रही? जवाबः यह आइडिया 2009 में RBI ने दिया। 10 रुपए के 100 करोड़ नोट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर छापने की योजना थी। प्लास्टिक नोट वाले प्रोजेक्ट के ठंडे बस्ते में जाने की कोई पुख्ता वजह नहीं मिलती। जानकार ३ वजहें बताते हैं- ATM पॉलिमर नोटों को ठीक से पहचान और डिस्पेंस नहीं कर पा रहे थे, नोट हैंडलिंग में दिक्तत आ रही थी और 2016 में हुई नोटबंदी। 17 साल बाद, 2026 में वही आइडिया लौटा है। इस बार बड़े स्केल पर। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 10 रुपए के 100 करोड़ नोट और 20 रुपए के 100 करोड़ नोट लॉन्च होंगे। यानी कुल 3000 करोड़ वैल्यू के 200 करोड़ नोट। BRBNMPL ने प्लास्टिक नोट बनाने के लिए दुनिया भर की कंपनियों के प्रस्ताव भी मंगवाए हैं। भारत की पेपर करेंसी में करीब 25% 10 और 20 के नोट ही है। हालांकि कीमत के मामले में यह सिर्फ 1.3% है। सवाल-3: आखिर प्लास्टिक नोट के फायदे क्या हैं? जवाबः RBI की 3 बड़ी मौजूदा चुनौतियों का समाधान प्लास्टिक नोट कर सकती है… 1. कागजी नोट से 6 गुना ज्यादा तक लाइफ 2. छपाई की औसत लागत घटेगी 3. नकली नोटों पर लगाम लगेगी सवाल-4: प्लास्टिक नोट का क्या कोई नुकसान भी है? जवाबः सीधे तौर पर कोई बड़ा नुकसान तो नहीं है, लेकिन 3 चुनौतियां जरूर हैं…1. शुरुआती लागत ज्यादा 2. मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर बदलना पड़ेगा 3. प्लास्टिक नोट भी नकली बनाए जा रहे सवाल-5: क्या भारत में सभी नोट प्लास्टिक के हो जाएंगे, आगे क्या? जवाबः अभी सिर्फ 10 और 20 रुपए के 200 करोड़ नोट का फील्ड ट्रायल होना है। RBI ने पेपर नोट बंद कर प्लास्टिक पर शिफ्ट होने का कोई फैसला नहीं किया। हां, अगर ट्रायल सफल रहता है, तो आगे चलकर ₹50, ₹100, ₹200 और ₹500 के नोट भी प्लास्टिक में आ सकते हैं। लेकिन अभी ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है। पूरी तरह प्लास्टिक नोटों पर शिफ्ट होना कोई एक-दो साल का काम नहीं। ऑस्ट्रेलिया को भी अपनी पूरी करेंसी प्लास्टिक में बदलने में करीब 8 साल लगे थे। आज दुनिया के कुल कैश में सिर्फ 3% हिस्सा ही प्लास्टिक नोटों का है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रोमानिया, कनाडा, वियतनाम और मालदीव जैसे गिने-चुने करीब 12 देश ही पूरी तरह प्लास्टिक करेंसी पर गए हैं, और उन्हें भी इसमें 5 से 8 साल का वक्त लगा। ------------- ये खबर भी पढ़िए… गुलाबी पेट्रोल, टैंक में चींटी के वीडियो वायरल; सरकार पेट्रोल में जबरन एथेनॉल मिलाने पर क्यों तुली है, पीछे की पूरी कहानी कहीं गुलाबी रंग का पेट्रोल, कहीं टैंक से चिपकी चीटियां, कहीं पेट्रोल के साथ दिखता पानी। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 28 Jul 2026 6:20 pm

11 दिसंबर 2026 तक शनि की उल्टी चाल: जानिए युद्ध, सोने के दाम और देश की राजनीति पर क्या पड़ेगा बड़ा असर!

साल 2026 के शुरुआती 7 महीने वैश्विक स्तर पर युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और राजनीतिक हलचलों से भरे रहे हैं। अब साल के बाकी बचे 5 महीनों में देश और दुनिया की स्थिति कैसी रहेगी, इस पर शनि की उल्टी यानी वक्री चाल का बड़ा असर पड़ने वाला है। देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भाम्बी के अनुसार, शनि 11 दिसंबर 2026 तक वक्री अवस्था में ही रहेंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस साल के अंत तक जारी वैश्विक व राष्ट्रीय समस्याओं का कोई स्थाई हल निकलता नहीं दिख रहा है, और स्थितियों में सकारात्मक बदलाव या राहत साल 2027 की शुरुआत से ही संभव हो सकेगी।वैश्विक युद्ध और ट्रंप की शांति वार्ता: चर्चाएं तो होंगी, लेकिन नतीजे रहेंगे बेअसरअंतरराष्ट्रीय पटल की बात करें तो मध्य पूर्व में ईरान का अमेरिका व इजरायल के साथ जारी तनाव और यूरोप में जारी रूस-यूक्रेन युद्ध पर इस दौरान बातचीत के कई दौर चलेंगे, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना लगभग नामुमकिन रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भाम्बी के अनुसार, शनि की वक्री चाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध रोकने और कूटनीतिक समझौतों पर विचार करने के लिए मजबूर जरूर कर सकती है, परंतु इन वार्ताओं का कोई निर्णायक निष्कर्ष 2026 में नहीं निकलेगा। वहीं यूरोपीय देश ठंड बढ़ने के कारण रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने का प्रयास करेंगे, लेकिन वहां भी सफलता की संभावना कम है। यानी साल 2026 में भारत समेत पूरी दुनिया को युद्धों के सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव झेलते रहने पड़ेंगे।छात्र आंदोलन केवल थमा है: 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में फिर भड़क सकती है चिंगारीहाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जिस उग्र छात्र आंदोलन ने शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर किया, वह मामला भले ही इस वक्त शांत होता दिख रहा हो, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक यह शांति केवल कुछ समय की है। वक्री शनि के प्रभाव के कारण अगले 4-5 महीनों तक छात्र शांत रहकर सरकार के कदमों का जायजा लेंगे। इस दौरान सरकार डैमेज कंट्रोल करने की पूरी कोशिश करेगी और इसमें काफी हद तक सफल भी रहेगी। हालांकि, यह आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है बल्कि केवल 'पॉज' हुआ है। साल 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में युवा वर्ग एक बार फिर सड़कों पर उतर सकता है।सोने-चांदी की कीमतों में फिर आएगा उछाल, कच्चे तेल का संकट भी बना रहेगाआर्थिक क्षेत्र और कमोडिटी बाजार पर भी वक्री शनि की चाल का व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने और चांदी के दामों में जो गिरावट आई थी, वह अब फिर से तेजी में बदल सकती है। तुलनात्मक रूप से चांदी के मुकाबले सोने की कीमतों में बढ़ोतरी होने की अधिक संभावना है। इसके अलावा, जारी युद्धों के कारण कच्चे तेल और गैस की उपलब्धता का मुद्दा बना रहेगा। हालांकि, पहले की तरह ईंधन की बहुत भारी किल्लत नहीं होगी, लेकिन इस ऊर्जा संकट के पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद भी अभी नहीं की जा सकती।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 3:00 pm

E20 पेट्रोल विवाद में नाम घसीटे जाने से भड़के नितिन गडकरी: डीपफेक और फर्जी वीडियो के खिलाफ पहुंचे बॉम्बे हाईकोर्ट, जानिए केंद्रीय मंत्री ने 'इथेनॉल ब्लेंडिंग' नीति पर क्या दी बड़ी सफाई

देशभर के पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले (E20) पेट्रोल को लेकर जारी विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। गाड़ियों में आ रही तकनीकी खराबी और माइलेज घटने की शिकायतों के बीच सोशल मीडिया पर कई एआई-जनरेटेड (AI) और डीपफेक वीडियो वायरल हो रहे थे, जिनमें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार को इस नीति से आर्थिक लाभ मिलने का दावा किया जा रहा था। इन भ्रामक और मानहानिकारक दावों पर कड़ा रुख अपनाते हुए गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरीमामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अभय आहूजा ने नितिन गडकरी को मेटा (Meta), गूगल (Google), एक्स (X) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ दीवानी मुकदमा (Civil Suit) दायर करने की इजाजत दे दी है। याचिका में मांग की गई है कि अदालत सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दे कि वे केंद्रीय मंत्री और उनके परिवार के खिलाफ बनाए गए सभी फर्जी, मनगढ़ंत और एआई-जनरेटेड वीडियो को तुरंत हटाए। गडकरी के वकील ने कोर्ट को बताया कि इंटरनेट पर बड़े पैमाने पर उनके व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) का हनन किया जा रहा है।'E20 नीति पेट्रोलियम मंत्रालय की, सड़क परिवहन मंत्रालय का इससे संबंध नहीं'हाईकोर्ट में दाखिल याचिका और नागपुर स्थित उनके कार्यालय द्वारा जारी बयान में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की गई है। गडकरी ने बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) प्रोग्राम पूरी तरह से 'केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय' के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि उनके सड़क परिवहन मंत्रालय के अंतर्गत। उन्होंने साफ किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला पूरी केंद्रीय कैबिनेट का सामूहिक निर्णय था। इस पूरी नीति या इसके कार्यान्वयन से उनका या उनके परिवार का कोई व्यक्तिगत या वित्तीय लेना-देना नहीं है।स्वस्थ बहस का स्वागत, लेकिन चरित्र हनन बर्दाश्त नहींकेंद्रीय मंत्री की कानूनी टीम ने कोर्ट के समक्ष यह बात दोहराई कि इस याचिका का मकसद जनता को किसी नीति पर निष्पक्ष चर्चा, आलोचना या बहस करने से रोकना बिल्कुल नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नीतिगत समीक्षा का हर नागरिक को हक है, लेकिन एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल करके फर्जी तथ्य गढ़ना और किसी की छवि को धूमिल करना कानूनी रूप से अपराध है। कोर्ट इस मामले में जल्द ही अगली सुनवाई कर आपत्तिजनक कंटेंट को ब्लॉक करने के आदेश जारी कर सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 2:52 pm

छुट्टियों में होटल समझकर महिला ने 'जेल' के पेज पर ठोका मैसेज, फिर जेल स्टाफ का जवाब पढ़कर उड़ गए होश

छुट्टियों के दौरान किसी खूबसूरत हिल स्टेशन पर जाना और ऑनलाइन कमरा तलाशना बेहद आम बात है, लेकिन जरा सोचिए कि आप जिस जगह को लग्जरी रिसॉर्ट या होमस्टे समझकर बुकिंग की बात कर रहे हों, वह असल में कोई होटल नहीं बल्कि 'महिला जेल' निकले! ऐसा ही एक बेहद अतरंगी और मजेदार वाकया फिलीपींस के मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन बगुइओ (Baguio) शहर में सामने आया है। यहां एक महिला पर्यटक वीकेंड की छुट्टियां बिताने की प्लानिंग कर रही थी। इंटरनेट पर ठहरने की सस्ती और बेहतर जगह खोजते-खोजते उसकी नजर 'बगुइओ सिटी जेल फीमेल डॉरमेट्री' (Baguio City Jail Female Dormitory) के सोशल मीडिया पेज पर पड़ी। नाम में 'डॉरमेट्री' शब्द देखकर महिला को लगा कि यह कोई हॉस्टल या बैकपैकर्स होमस्टे है। फिर क्या था, उसने बिना सोचे-समझे सीधे पेज के इनबॉक्स में मैसेज दाग दिया— नमस्ते! क्या आने वाले वीकेंड के लिए आपके पास कोई कमरा खाली है?जेल स्टाफ का कूल रिप्लाई: 'मैडम! यहां कमरे नहीं, सीधे सलाखें मिलती हैं'जैसे ही यह मैसेज आधिकारिक पेज के इनबॉक्स में पहुंचा, स्क्रीन की दूसरी तरफ मौजूद जेल के कर्मचारियों का सिर चकरा गया। हालांकि, स्टाफ ने बिना किसी गुस्से के बेहद शालीन और चुटीले अंदाज में पर्यटक की यह बहुत बड़ी गफलत दूर कर दी। जेल प्रशासन की तरफ से जवाब आया— मैडम, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह रुकने के लिए कोई होटल, होमस्टे या रिसॉर्ट नहीं है... यह महिलाओं की जेल (Female Jail) है! यह रिप्लाई पढ़ते ही उस महिला पर्यटक के पैर तले जमीन खिसक गई। उसे अपनी भारी गलती का अहसास हुआ और उसने तुरंत जेल कर्मचारियों से अपनी इस गफलत के लिए माफी मांगी।जेल प्रशासन ने शेयर की चैट, सोशल मीडिया पर आ गई मीम्स और चुटकुलों की बाढ़इस पूरे मजेदार वाकये को छिपाने के बजाय ब्यूरो ऑफ जेल मैनेजमेंट एंड पेनोलॉजी (BJMP) ने उस पर्यटक की सहमति से इस चैट का स्क्रीनशॉट अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर शेयर कर दिया। पोस्ट के साथ उन्होंने एक हल्का-फुल्का कैप्शन लिखा कि 'हमारा मुख्य काम कैदियों का पुनर्वास और सुधार करना है, पर्यटकों को छुट्टियां बिताना नहीं! हालांकि, हम यह भरोसा दिला सकते हैं कि हमारी जेलें किसी भी होटल की तरह ही साफ-सुथरी और पूरी तरह सुरक्षित हैं।' जैसे ही यह चैट वायरल हुई, सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट सेक्शन में मीम्स की झड़ी लगा दी। एक यूजर ने लिखा कि 'अरे वाह! यहां तो फ्री यूनिफॉर्म के साथ तीनों समय का मुफ्त खाना भी मिलेगा।' वहीं दूसरे ने चुटकी ली कि 'होटल वाले भले रिप्लाई न दें, लेकिन जेल स्टाफ ने तुरंत सर्विस दी।' तीसरे यूजर ने लिखा कि '24 घंटे सिक्योरिटी और फ्री खाना, ऐसी जगह तो 5-स्टार होटल में भी नहीं मिलती!'क्यों हुई यह गफलत? जानिए बगुइओ शहर के इस चर्चित पते का पूरा सचआपको बता दें कि यह बहुचर्चित महिला जेल बगुइओ शहर के मुख्य इलाके में पुलिस हेडक्वार्टर और सिटी हॉल के ठीक सामने अबानाओ रोड (Abanao Road) पर स्थित है। चूंकि इसका नाम 'डॉरमेट्री' पर खत्म होता है, इसलिए बाहर से आने वाले पर्यटकों को अक्सर इसके नाम से भ्रम हो जाता है। हालांकि, पर्यटक की इस मासूम सी भूल और उस पर जेल अधिकारियों के हाजिरजवाबी वाले रिप्लाई ने इस मामले को फिलीपींस का सबसे बड़ा वायरल टॉपिक बना दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 2:36 pm

जब अचानक हिलने लगी पूरी धरती: 7.1 के भूकंप से थर्राया जापान, समुद्र से उठती सुनामी की लहरों के बीच बजा रेड अलर्ट

दक्षिणी जापान में मंगलवार दोपहर को प्रकृति का भीषण रूप देखने को मिला, जब पूरे क्यूशू (Kyushu) क्षेत्र में एक साथ शक्तिशाली और बेहद तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर 7.1 की विनाशकारी तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र क्यूशू द्वीप का कुमामोटो (Kumamoto) प्रीफेक्चर और उसके आसपास का इलाका रहा। अचानक आई इस कुदरती आफत से कुछ ही पलों के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इमारतों में तेज कंपन के तुरंत बाद जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने मुस्तैदी दिखाते हुए तटीय इलाकों के लिए आपातकालीन सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है।जापानी तीव्रता पैमाने पर खतरे का सबसे उच्चतम स्तर 'शिंदो 7' दर्जजापान के अपने सीस्मोलॉजिकल पैमाने, जिसे 'शिंदो स्केल' (Shindo Scale) कहा जाता है, उस पर इस भूकंप की तीव्रता को सबसे खतरनाक यानी 'लेवल 7' पर मापा गया है। जापानी पैमानों में शिंदो 7 को तबाही का चरम स्तर माना जाता है, जिसमें जमीन इतनी तेजी से हिलती है कि मजबूत से मजबूत इमारतों के गिरने, सड़कों के फटने और बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस तीव्र झटके ने कुमामोटो और आसपास के जिलों की जीवनशैली को पूरी तरह थाम दिया है।अरियाके और यात्सुशिरो तटीय क्षेत्रों में सुनामी का अलर्ट: नागरिकों के लिए 3 बड़े निर्देशभूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर मौसम एजेंसी ने अरियाके समुद्र (Ariake Sea) और यात्सुशिरो समुद्र (Yatsushiro Sea) से लगे तटीय इलाकों के लिए 1 मीटर (लगभग 3 फीट) तक ऊंची खतरनाक सुनामी लहरें उठने की आशंका जताई है। स्थिति की गंभीरता और मानवीय जीवन की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तटीय निवासियों के लिए तत्काल 3 सूत्री आपातकालीन निर्देश जारी किए हैं:तटीय इलाकों से दूरी: समुद्र तटों, तटीय सड़कों और नदियों के मुहाने के आसपास मौजूद लोग बिना एक पल गंवाए तुरंत वहां से दूर हट जाएं।ऊंचे स्थानों पर शरण: निचले और मैदानी इलाकों में रहने वाले नागरिक तुरंत सुरक्षित व ऊंचाई पर स्थित शरण स्थलों की ओर प्रस्थान करें।सावधानी बरतें: जब तक मौसम एजेंसी की ओर से आधिकारिक रूप से चेतावनी वापस न ले ली जाए, तब तक समुद्र या पानी के स्रोतों के पास जाने की भूल बिल्कुल न करें।हाई अलर्ट पर राहत और बचाव एजेंसियां: आफ्टरशॉक्स का बढ़ा खतराकुमामोटो प्रीफेक्चर समेत पूरे क्यूशू क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, दमकल विभाग और आपातकालीन राहत टीमों को हाई अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया गया है। प्रांतीय अधिकारी और पुलिस बल प्रभावित इलाकों में जान-माल के नुकसान और प्रभावित ढांचों का तेजी से आकलन कर रहे हैं। इसके साथ ही, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मुख्य भूकंप के बाद अगले कुछ घंटों या दिनों में तेज आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) आ सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सभी नागरिकों से पूरी तरह सतर्क, सुरक्षित और शांत रहने की अपील की है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 2:15 pm

अमेरिकी महिला मेसी गोंसाल्वेज को भारत में लगे 5 बड़े 'कल्चर शॉक', बोलीं- 5वां पॉइंट देखकर तो मेरी दादी को हार्ट अटैक आ जाएगा

इन दिनों सोशल मीडिया पर भारत की यात्रा करने वाले या यहां रहने वाले विदेशी कंटेंट क्रिएटर्स के अनुभव काफी पसंद किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में भारत में रह रहीं अमेरिकी नागरिक मेसी गोंसाल्वेज (Macy Gonsalvez) का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रहा है। मेसी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक रील शेयर करते हुए भारत की ऐसी 5 मुख्य बातों का जिक्र किया है, जो उनके अमेरिकी लाइफस्टाइल से बिल्कुल अलग थीं और जिन्हें देखकर वह पूरी तरह हैरान रह गईं।प्रेग्नेंसी में बच्चे का जेंडर रिवील बैन: कानून देखकर रह गईं हैरानमेसी ने अपनी लिस्ट में सबसे ऊपर भारत के एक सख्त कानून का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका में बच्चे के जन्म से पहले उसका लिंग (Gender) पता करना और 'जेंडर रिवील पार्टी' रखना एक बेहद सामान्य बात है। लेकिन भारत में गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का लिंग जांचना पूरी तरह गैरकानूनी है। मेसी के मुताबिक, शुरुआत में जब उन्हें इस नियम के बारे में पता चला तो वे चौंक गईं, क्योंकि अमेरिका की तुलना में यह कानून और सामाजिक व्यवस्था उनके लिए बिल्कुल नई थी।'रात 9:30 बजे सोने की आदत और यहां 9 बजे बनता है प्लान'अमेरिका और भारत की दिनचर्या में बड़ा अंतर बताते हुए मेसी ने भारत की लेट-नाइट लाइफस्टाइल पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोग शाम को जल्दी डिनर करके टाइम से सो जाते हैं, लेकिन भारत में रात की शुरुआत ही देर से होती है। भारत में अगर दोस्तों या परिचितों से मिलने का प्लान बनता है, तो वह अमूमन रात 8:30 या 9:00 बजे के बाद ही तय होता है। मेसी ने मुस्कुराते हुए बताया कि वे खुद अमेरिका में रात 9:30 बजे तक सो जाया करती थीं, इसलिए भारत का यह देर रात तक जगने वाला कल्चर उनके लिए एक बड़ा शॉक रहा।'नहाने से 15 मिनट पहले गीजर ऑन करो'भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले वाटर हीटर यानी गीजर के तरीके ने मेसी को सबसे ज्यादा मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि भारत में गर्म पानी से नहाने के लिए कम से कम 10 से 15 मिनट पहले गीजर का स्विच ऑन करना पड़ता है और फिर इंतजार करना होता है। जबकि अमेरिका में नल या शावर चालू करते ही तुरंत गर्म पानी आने लगता है। भारतीय घरों की इस आदत को उन्होंने काफी फनी और अनोखा अनुभव बताया।10 मिनट की सुपरफास्ट डिलीवरी ने जीता दिलजहां कुछ बातों ने उन्हें हैरान किया, वहीं भारत की क्विक-कॉमर्स यानी 10-15 मिनट की इंस्टेंट डिलीवरी सर्विस ने उनका दिल जीत लिया। मेसी ने भारत के ऑनलाइन डिलीवरी इकोसिस्टम की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि यहां ग्रॉसरी से लेकर तैयार खाना तक महज कुछ मिनटों में दरवाजे पर पहुंच जाता है। अमेरिका जैसे देश में इतनी तेज डिलीवरी सेवा की कल्पना करना भी मुश्किल है, इसलिए यह सुविधा उन्हें बेहद पसंद आई।सस्ती मेड और कुक सर्विस: दादी को लग जाएगा झटका!लिस्ट के पांचवें और आखिरी पॉइंट में मेसी ने भारत में मिलने वाली घरेलू मदद (Household Help) का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका की तुलना में भारत में खाना बनाने वाले कुक और सफाई के लिए मेड रखना काफी आसान और पॉकेट-फ्रेंडली है। यहां ज्यादातर मध्यवर्गीय और कामकाजी परिवारों में पार्ट-टाइम या फुल-टाइम मेड रखना आम बात है। इसी बात पर हंसी मजाक करते हुए मेसी ने कैप्शन में लिखा कि अगर उनकी दादी को पता चलेगा कि यहां घर के कामों के लिए मेड और कुक इतने कम बजट में मिल जाते हैं, तो उन्हें सचमुच हार्ट अटैक आ जाएगा!

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 2:00 pm

सहारा के सूखे और बंजर को मात देने निकली अफ्रीका की 'ग्रेट ग्रीन वॉल': जानिए 8,000 किलोमीटर लंबे उस कुदरती चमत्कार की कहानी जो बदल रहा है करोड़ों लोगों का जीवन

दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी पर्यावरणीय परियोजनाओं में शामिल अफ्रीका का 'ग्रेट GREEN WALL' (ग्रेट ग्रीन वॉल) अभियान इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। लगभग 8,000 किलोमीटर लंबी यह ऐतिहासिक पहल पश्चिमी अफ्रीका के सेनेगल के अटलांटिक तट से शुरू होकर पूर्वी अफ्रीका के जिबूती तक फैली हुई है। इस पूरी योजना का मुख्य मकसद सिर्फ पेड़ लगाना भर नहीं है, बल्कि उन इलाकों को दोबारा से हरा-भरा और जीवंत बनाना है जो दशकों से भीषण सूखे, रेगिस्तान के बढ़ते फैलाव और जलवायु परिवर्तन की तगड़ी मार झेल रहे हैं। अफ्रीकी संघ (African Union) ने इस दूरदर्शी परियोजना की शुरुआत साल 2007 में की थी।शुरुआत में सिर्फ पेड़ लगाने का था प्लान, फिर यूं बदली पूरी रणनीतिशुरुआती दिनों में वैज्ञानिकों और योजनाकारों की सोच सहारा रेगिस्तान की दक्षिणी सीमा पर पेड़ों की एक सीधी, लंबी और चौड़ी पट्टी तैयार करने की थी, ताकि रेगिस्तानी हवाओं और रेत को आगे बढ़ने से रोका जा सके। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीता, पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि केवल पेड़ों की कतारें खड़ी कर देने से इस गंभीर संकट का स्थायी हल संभव नहीं है। इसके बाद परियोजना की रणनीति में बुनियादी बदलाव किया गया। अब इसका मुख्य फोकस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को नए सिरे से पुनर्जीवित करने पर है। इसके तहत जंगलों, प्राकृतिक घास के मैदानों, कृषि योग्य जमीनों, आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) और स्थानीय प्रजाति की वनस्पतियों को फिर से पनपाया जा रहा है।आखिर साहेल क्षेत्र को क्यों पड़ी इस विशाल हरित दीवार की जरूरत?अफ्रीका का साहेल (Sahel) क्षेत्र कई दशकों से लगातार बड़े पर्यावरणीय संकट से जूझता रहा है। यहां रेगिस्तान का दायरा बढ़ता गया, लंबे समय तक अकाल और सूखे की स्थिति बनी रही, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता घटती गई और जलवायु परिवर्तन के असर से बारिश का समय व चक्र पूरी तरह अनिश्चित हो गया। साहेल की एक बड़ी आबादी पूरी तरह से पारंपरिक खेती और पशुपालन पर निर्भर है। जमीन की उर्वरता घटने और बारिश न होने से फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे क्षेत्र में भोजन का गंभीर संकट खड़ा हो गया और लोगों की कमाई के साधन छिन गए। यही वजह है कि इस अभियान के माध्यम से मिट्टी की सेहत सुधारने, जमीन में नमी व पानी रोकने की क्षमता बढ़ाने और खेती को दोबारा मुनाफेदार बनाने की कोशिश की जा रही है।सिर्फ पेड़ों की कतार नहीं, स्थानीय जरूरतों के हिसाब से तैयार हुई रणनीतिनाम में भले ही 'ग्रीन वॉल' यानी हरी दीवार जुड़ा हो, लेकिन यह कोई सीधी या एकसार पेड़ों की पट्टी नहीं है। असल में यह स्थानीय इलाकों की जरूरत के मुताबिक ढाली गई सैकड़ों छोटी-बड़ी पुनर्स्थापन परियोजनाओं का एक व्यवस्थित समूह है। जहां जिस चीज की जरूरत है, वहां वैसा काम किया जा रहा है—कहीं स्थानीय किस्म के पेड़ रोपे जा रहे हैं, तो कहीं खुद-ब-खुद उगने वाली प्राकृतिक वनस्पतियों को सुरक्षित किया जा रहा है। कई क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकने, वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा देने, घास के मैदानों को हरा-भरा करने और टिकाऊ खेती के नए तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। इस तरह हर इलाके की भौगोलिक स्थिति और जलवायु के अनुसार अलग रणनीति अपनाई गई है।वर्ष 2030 तक क्या हासिल करने का है महालक्ष्य?ग्रेट ग्रीन वॉल परियोजना के तहत साल 2030 तक के लिए कुछ बेहद ठोस और बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं:लगभग 10 करोड़ हेक्टेयर खराब और बंजर हो चुकी भूमि को फिर से उपजाऊ बनाना।वायुमंडल से करीब 25 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड को प्राकृतिक रूप से अवशोषित करना।अफ्रीका में लगभग 1 करोड़ नए हरित रोजगार (Green Jobs) के अवसर पैदा करना।साहेल क्षेत्र में रहने वाले करोड़ों लोगों के भोजन की सुरक्षा और आजीविका के साधनों को मजबूत करना।इस विशाल महाअभियान में 20 से भी अधिक अफ्रीकी देश एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन, वैश्विक विकास बैंक और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाएं भी इसमें वित्तीय और तकनीकी सहयोग दे रही हैं।अब तक कितना हुआ काम और क्या हैं जमीनी चुनौतियां?यह सच है कि परियोजना अभी अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुंची है, लेकिन कई भागीदार देशों में इसके शानदार परिणाम देखने को मिले हैं। सेनेगल में अब तक लाखों पेड़ लगाए जा चुके हैं और वहां की बड़े पैमाने पर बंजर हो चुकी जमीन दोबारा हरी-भरी हो गई है। इथियोपिया ने भी अपने स्तर पर बड़े पैमाने पर भूमि सुधार कार्यक्रम चलाए हैं। वहीं नाइजीरिया और नाइजर जैसे देशों में टिकाऊ भूमि प्रबंधन के जरिए सकारात्मक बदलाव आए हैं।हालिया सरकारी और पर्यावरण आकलनों के मुताबिक, अब तक लगभग 3 करोड़ हेक्टेयर भूमि को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया जा चुका है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि 2030 तक के सभी लक्ष्यों को शत-प्रतिशत हासिल करने के लिए और अधिक अंतरराष्ट्रीय निवेश, क्षेत्रीय देशों के बीच बेहतर आपसी तालमेल और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित क्षेत्रों में शांति व्यवस्था की सख्त आवश्यकता होगी।प्रकृति के साथ-साथ आम जनता के लिए भी वरदान बनी परियोजनाबंजर जमीन और हरियाली का यह पुनर्जीवन केवल प्रकृति के बचाव तक सीमित नहीं है। एक स्वस्थ और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र मिट्टी के बहाव को रोकता है, जमीनी जल स्तर (ग्राउंडवाटर) को सुधारता है और हवा से घातक कार्बन सोखता है। इसके साथ ही, स्थानीय कीटों, पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए एक बेहतर सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार होता है। दूसरी ओर, स्थानीय किसानों और पशुपालकों को फसलों का बेहतर पैदावार, मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा और नियमित आय की गारंटी मिलती है। भीषण सूखे जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी ऐसी संवारी गई जमीन ज्यादा समय तक टिकी रहती है।पूरी दुनिया के लिए क्यों बेहद खास है यह अफ्रीकी मॉडल?आज के समय में ग्रेट ग्रीन वॉल को दुनिया की सबसे बड़ी पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापना (Ecosystem Restoration) परियोजनाओं में गिना जाता है। इसकी महत्ता केवल अफ्रीका महाद्वीप तक सीमित नहीं है, क्योंकि जमीन का बंजर होना और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया की साझी समस्या हैं। अगर यह मॉडल पूरी तरह सफल रहता है, तो दुनिया के अन्य शुष्क (Arid) और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए भी यह एक बेहतरीन मिसाल साबित होगा। यह परियोजना साबित करती है कि पर्यावरण की रक्षा और आर्थिक विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।इंसानों और प्रकृति को जोड़ने वाली उम्मीद की एक अनोखी दीवारइतिहास गवाह है कि दुनिया में अधिकांश दीवारें इंसानों को आपस में बांटने और सीमाएं खींचने के लिए बनाई गईं, लेकिन अफ्रीका की यह 'ग्रेट ग्रीन वॉल' इंसानों और प्रकृति को दोबारा एक-दूसरे से जोड़ने की अनूठी कोशिश है। इस विशाल अभियान की असली सफलता सिर्फ इस बात से नहीं मापी जाएगी कि कितने पौधे रोपे गए, बल्कि इससे आंकी जाएगी कि कितनी बंजर जमीन फिर से अनाज उगाने लायक बनी, कितने परिवारों का जीवन स्तर सुधरा, जैव विविधता में कितना सुधार आया और जलवायु परिवर्तन के झटकों का सामना करने में स्थानीय समुदाय कितने सक्षम बने। यही वजह है कि यह हरित दीवार केवल आज का अभियान नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य के सामाजिक और आर्थिक बदलाव की एक मजबूत बुनियाद है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:55 pm

सीमा पर ड्रैगन की नई हिमाकत: चीन ने तैनात किए 11 खतरनाक J-20 स्टील्थ फाइटर जेट, भारत के लिए कितना बड़ा खतरा

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव के बीच चीन ने एक बार फिर भारतीय सीमा के बेहद नजदीक अपनी सैन्य ताकत का आक्रामक प्रदर्शन किया है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स (PLAAF) ने सीमा के पास स्थित रणनीतिक एयरबेस पर अपने 11 सबसे आधुनिक जे-20 (J-20) स्टील्थ फाइटर जेट तैनात कर दिए हैं। चीन के इस कदम से सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। पांचवीं पीढ़ी के इन लड़ाकू विमानों की फॉरवर्ड लोकेशन पर मौजूदगी को सीधे तौर पर भारत के खिलाफ मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।ड्रैगन का सबसे घातक हथियार: क्यों बेहद खतरनाक है J-20?चेंगदू J-20 'माइटी ड्रैगन' चीन का सबसे एडवांस्ड और शक्तिशाली फाइटर जेट है। यह एक पांचवीं पीढ़ी का (5th Generation) ट्विन-इंजन विमान है, जिसे विशेष रूप से रडार की नजरों से बचकर हमला करने (Stealth Technology) के लिए डिजाइन किया गया है। लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों से लैस यह विमान बेहद कम समय में भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब ऑपरेशन्स को अंजाम दे सकता है। चीन का दावा है कि यह अमेरिकी F-22 और F-35 को टक्कर देता है। लद्दाख और तिब्बत के ऊंचाई वाले इलाकों में इन विमानों की तैनाती भारतीय डिफेंस ग्रिड के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करती है।भारतीय वायुसेना के लिए कितनी बड़ी चुनौती और क्या है जवाब?J-20 की इस ताजा तैनाती के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत का राफेल (Rafale) इसका मुकाबला कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल भले ही 4.5 पीढ़ी का विमान है, लेकिन उसके कॉम्बैट प्रूवन रिकॉर्ड, उल्का (Meteor) और स्कैल्प (SCALP) जैसी मिसाइलें और बेहतरीन एवियोनिक्स इसे J-20 के खिलाफ बेहद घातक बनाते हैं। इसके अलावा, भारत ने सीमा पर अपने सबसे भरोसेमंद सुखोई-30 MKI और मिराज-2000 को भी अलर्ट मोड पर रखा है। साथ ही, लद्दाख सेक्टर में तैनात आकाश और S-400 जैसी एडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियां चीनी विमानों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही हैं।रणनीतिक एयरबेसों पर बढ़ी हलचल: क्या युद्ध की तैयारी में है चीन?तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) और झिंजियांग में स्थित चीनी एयरबेस जैसे होतान, काशगर और गार्गुनसा की सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि चीन वहां बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है। J-20 जैसे भारी स्टील्थ जेट्स के संचालन के लिए रनवे को लंबा किया गया है और मजबूत शेल्टर बनाए गए हैं। हालांकि भारतीय सेना और वायुसेना स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए हुए हैं, लेकिन सीमा के इतने करीब चीन के सबसे प्रीमियम फाइटर जेट्स की एक साथ मौजूदगी यह साफ करती है कि ड्रैगन आने वाले समय में सीमा विवाद को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:33 pm

नेतन्याहू की नो-एंट्री रणनीति फेल: 'खलीफा' पर मेहरबान ट्रंप, F-35 डील रोकने गए इजरायली पीएम को दी दो टूक नसीहत

वैश्विक कूटनीति के मंच से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को दुनिया के सबसे आधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट बेचने के मामले में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोध को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अक्सर खुद को इस्लामिक ब्लॉक का अगुआ या 'खलीफा' के तौर पर पेश करने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन पर ट्रंप की यह मेहरबानी मध्य पूर्व (Middle East) के पूरे पावर बैलेंस को बदलने वाली मानी जा रही है। व्हाइट हाउस में होने वाली एक अहम मुलाकात से ठीक पहले ट्रंप के इस सख्त रुख ने इजरायली खेमे में खलबली मचा दी है।'कोई मुझे नहीं सिखा सकता': एयरफोर्स वन से ट्रंप की दो टूकयह पूरा विवाद तब खुलकर सामने आ गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन से मिशिगन की यात्रा के दौरान एयरफोर्स वन विमान में पत्रकारों से खुलकर बात की। जब उनसे तुर्की को F-35 लड़ाकू विमान देने पर नेतन्याहू के सार्वजनिक विरोध के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने बेहद कड़े लहजे में कहा, मुझे कोई नहीं बता सकता कि हमें क्या बेचना चाहिए। उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की तारीफ करते हुए उन्हें अपना बेहतरीन दोस्त और अमेरिका का एक जबरदस्त सहयोगी करार दिया। ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर नेतन्याहू के लिए एक सख्त 'हड़काऊ' संदेश के रूप में देखा जा रहा है।क्यों डरे हुए हैं नेतन्याहू? इजरायल की बादशाहत पर खतराबेंजामिन नेतन्याहू पिछले काफी समय से वाशिंगटन में लॉबिंग कर रहे थे कि तुर्की को F-35 विमान और लड़ाकू इंजनों की सप्लाई न की जाए। इजरायल का तर्क है कि पूरे मिडिल ईस्ट में केवल उसी के पास F-35 जैसी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान हैं, जो उसे हवाई क्षेत्र में एकतरफा बढ़त (Military Edge) देते हैं। नेतन्याहू ने चेतावनी दी थी कि अगर एर्दोगन के हाथों में ये विनाशकारी विमान आ गए, तो पूरे क्षेत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा। उन्होंने तुर्की सरकार को मुस्लिम ब्रदरहुड से प्रभावित बताते हुए अमेरिका के लिए भी इसे खतरनाक घोषित करने की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप पर इसका कोई असर नहीं हुआ।क्या अब तुर्की को सच में मिल जाएंगे F-35 फाइटर जेट?हालांकि ट्रंप ने एर्दोगन के पक्ष में खुलकर बैटिंग की है, लेकिन तुर्की के लिए F-35 की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं है। तुर्की द्वारा रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के बाद अमेरिका ने उसे इस प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया था और प्रतिबंध लगा दिए थे। ट्रंप अब इन प्रतिबंधों को हटाने और डील को हरी झंडी देने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, भले ही अमेरिकी कांग्रेस में इसका विरोध हो रहा हो। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि इजरायल अमेरिका की मदद के बिना सर्वाइव नहीं कर सकता, इसलिए अमेरिकी हथियारों की बिक्री के फैसलों में किसी भी बाहरी देश का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:31 pm

ईरान का सिखाया खेल: हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दबोची सऊदी की गर्दन, अब भुगतेगी पूरी दुनिया

लाल सागर के रणनीतिक जलमार्ग पर इस समय एक ऐसा खतरनाक भू-राजनीतिक खेल खेला जा रहा है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। यमन के हूती विद्रोही इस समय लाल सागर में ठीक वही रणनीति अपना रहे हैं, जो उन्हें ईरान द्वारा सिखाई गई है। इस चक्रव्यूह में सऊदी अरब की गर्दन इस कदर फंस चुकी है कि इसका सीधा असर न सिर्फ खाड़ी देशों पर, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ना तय माना जा रहा है।ग्लोबल चोकप्वाइंट पर हूतियों का बड़ा दांवलाल सागर सिर्फ एक जलमार्ग नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवन रेखा है। हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और मिसाइल तकनीक के दम पर इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते (चोकप्वाइंट) को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश शुरू कर दी है। जानकारों का मानना है कि हूतियों का यह कदम सीधे तौर पर सऊदी अरब के आर्थिक हितों पर चोट करने के लिए उठाया गया है। सऊदी अरब अपनी तेल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है, और अब यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन चुका है।तेहरान की सीक्रेट स्क्रिप्ट और यमन के लड़ाकेइस पूरे घटनाक्रम के पीछे ईरान का हाथ होने के दावों को बल मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने सालों तक हूतियों को हथियारों, खुफिया इनपुट और रणनीतिक ट्रेनिंग से लैस किया है। फारस की खाड़ी में जिस तरह ईरान अक्सर दबाव बनाता है, ठीक उसी तर्ज पर हूती अब लाल सागर में सऊदी अरब और उसके पश्चिमी सहयोगियों को चुनौती दे रहे हैं। यह एक किस्म का प्रॉक्सी वॉर है, जहां मोहरे हूती हैं, लेकिन चालें तेहरान से चली जा रही हैं।कैसे भुगतेगी पूरी दुनिया इस जंग का हर्जानाअगर लाल सागर का यह संकट लंबा खिंचता है, तो इसका खामियाजा हर आम और खास इंसान को भुगतना पड़ेगा। इस रूट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को अब लंबा रास्ता तय करके अफ्रीका के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे जहाजों का किराया, बीमा की लागत और ईंधन का खर्च कई गुना बढ़ गया है। नतीजा यह होगा कि आने वाले दिनों में कच्चा तेल, गैस, अनाज और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान समेत हर चीज महंगी हो जाएगी, जिससे वैश्विक महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:30 pm

PoK में भड़की चिंगारी: रावलकोट में सेना की अंधाधुंध फायरिंग, 17 प्रदर्शनकारियों की मौत

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से इस वक्त एक बेहद परेशान करने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। रावलकोट में अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे स्थानीय कश्मीरियों पर पाकिस्तानी फौज काल बनकर टूट पड़ी है। इलाके में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर सेना ने सीधे गोलियां बरसा दीं। स्थानीय सूत्रों और चश्मदीदों के मुताबिक, इस अंधाधुंध फायरिंग में अब तक कम से कम 17 प्रदर्शनकारियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।हक की मांग पर बरसीं गोलियां: रावलकोट में बिछ गईं लाशेंमिली जानकारी के अनुसार, रावलकोट और उसके आसपास के इलाकों में लोग बुनियादी सुविधाओं, महंगाई और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना उनका लगातार शोषण कर रही है। देखते ही देखते इस प्रदर्शन को दबाने के लिए पाकिस्तानी फौज ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। बिना किसी चेतावनी के प्रदर्शनकारियों पर सीधे राइफलों से गोलियां चलाई गईं, जिससे रावलकोट की सड़कें कश्मीरियों के खून से लाल हो गईं।मानवाधिकारों की धज्जियां: PoK में हालात बेकाबूइस खूनी झड़प के बाद पूरे रावलकोट और आस-पास के जिलों में कर्फ्यू जैसा माहौल है। चश्मदीदों का कहना है कि अस्पताल घायलों से पटे पड़े हैं और मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तानी सेना की इस हरकत को 'नरसंहार' करार दिया है। सोशल मीडिया पर आ रही अपुष्ट तस्वीरों और वीडियो में रावलकोट की सड़कों पर अफरा-तफरी और खौफ का मंजर साफ देखा जा सकता है। इंटरनेट सेवाओं को भी प्रभावित किया गया है ताकि सच दुनिया के सामने न आ सके।अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चुप्पी पर उठे सवालइस दर्दनाक घटना के बाद PoK के नागरिकों में पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ भयंकर गुस्सा है। स्थानीय एक्टिविस्ट्स का कहना है कि जब भी कश्मीरी अपने अधिकारों की बात करते हैं, तो पाकिस्तानी फौज इसी तरह 'जल्लाद' बनकर उनका दमन करती है। अब देखना यह है कि इस गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और बर्बरता पर वैश्विक संगठन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल रावलकोट में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण और नाजुक बनी हुई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:28 pm

US Iran Conflict: सऊदी अरामको पर हूती हमला, रेड सी में बेराकटार ड्रोन ढेर और समुद्री रास्तों पर नाकेबंदी

अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत भले ही अस्थाई तौर पर रुक गई हो, लेकिन मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के धरातल पर ईरान ने एक ऐसा बारूद का ढेर बिछा दिया है जो आने वाले कई वर्षों तक शांत होता नहीं दिख रहा है। अमेरिका को अरब क्षेत्र से बाहर निकालने और पड़ोसी देशों को अपने आगे झुकाने के लिए ईरान ने अपने शक्तिशाली 'प्रॉक्सी नेटवर्क्स' को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया है। ट्रंप प्रशासन द्वारा बमबारी रोकने के बाद भी ईरान ने इस लड़ाई को अनिश्चित काल तक खींचने का मन बना लिया है। यमन के हूती विद्रोहियों से लेकर इराक के उग्रवादी गुटों तक, ईरान के सहयोगियों ने पूरे अरब इलाके को रणनीतिक संकट की आग में झोंक दिया है।अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन हमला और अत्याधुनिक 'अकिन्की' ड्रोन को गिराने का दावाईरान की इस आक्रामक रणनीति का सबसे खतरनाक असर अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देश सऊदी अरब पर देखने को मिला है। हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी—'सऊदी अरामको' (Saudi Aramco)—पर आत्मघाती ड्रोन से भीषण प्रहार किया है। इस हमले के बाद रिफाइनरी के स्टोरेज टैंक एरिया और मुख्य पाइपलाइन सेक्शन के ऊपर धुएं का विशाल गुबार उड़ता देखा गया। हालांकि रिफाइनरी का मुख्य यूटिलिटी जोन सुरक्षित है, लेकिन पाइपलाइनों को पहुंचे नुकसान और मरम्मत के दौरान बने खतरे के कारण तेल का उत्पादन और प्रोसेसिंग लंबे समय तक ठप रहने की आशंका है। इसके साथ ही, हूतियों ने अल-जौफ प्रांत के आसमान में उड़ रहे सऊदी अरब के सबसे आधुनिक 'बेराकटार अकिन्की' (Bayraktar Akinci) ड्रोन को मार गिराने का बड़ा दावा करके सुरक्षा एजेंसियों में सनसनी फैला दी है।होर्मुज और बाब अल-मंदाब में बिछाया सी-माइंस का जाल, जहाजों की आवाजाही पर ब्रेकईरान ने केवल जमीनी ठिकानों को ही निशाना नहीं बनाया है, बल्कि वैश्विक तेल व्यापार के दो सबसे प्रमुख समुद्री रास्तों पर अपना पूर्ण वर्चस्व कायम कर लिया है। पहला गेटवे 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) है, जहां ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इनबाउंड और आउटबाउंड दोनों शिपिंग लेन में भारी संख्या में 'सी-माइंस' (समुद्री सुरंगे) बिछा दी हैं, जिससे अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी के बावजूद यह पूरा समुद्री रास्ता ठप हो गया है।दूसरी तरफ, लाल सागर (Red Sea) के मुहाने पर स्थित 'बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य' पर हूती विद्रोहियों का कब्जा हो चुका है। हूतियों ने इस रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर लगातार हमले करके और सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन को ब्लॉक करके लाल सागर में अपना खौफ कायम कर दिया है।थम गया वैश्विक व्यापार: 11 जहाजों पर सिमटा ट्रैफिक, भीषण आर्थिक संकट की आहटईरानी लड़ाकों के इस दोहरे रणनीतिक चक्रव्यूह का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कार्गो जहाजों की संख्या गिरकर अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है। रविवार को इस बेहद व्यस्त मार्ग से महज 11 मालवाहक जहाज ही गुजर सके, जो दिखाता है कि हूतियों की नाकेबंदी किस हद तक प्रभावी हो चुकी है। वैश्विक बंदरगाहों को खाली कराने और सऊदी अर्थव्यवस्था को सीधे चोट पहुंचाने की इस ईरानी रणनीति ने पूरी दुनिया को एक भयंकर ऊर्जा संकट और आर्थिक तबाही की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 8:49 am

US Iran War Updates:एयर फोर्स वन से डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, क्रूड ऑयल के दामों में भारी गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग पर अहम बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ अच्छी कूटनीतिक बातचीत कर रहा है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस गंभीर विवाद का हल कूटनीति के जरिए निकल सकता है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यह बातचीत नाकाम साबित होती है, तो ईरान पर सैन्य हमले फिर से शुरू कर दिए जाएंगे। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी बलों द्वारा किए जा रहे भीषण हमलों के कारण ही तेहरान अब बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर कूटनीति काम नहीं करती है, तो अमेरिका वही कदम उठाएगा जो वह दो दिन पहले तक उठा रहा था।ट्रंप का यह बयान वाशिंगटन द्वारा ईरान पर चलाए जा रहे दो हफ्ते लंबे भारी बमबारी अभियान को अचानक रोके जाने के दो दिन बाद आया है। हालांकि, इस बेहद नाजुक शांति के बीच मध्य पूर्व में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक में हाल ही में हुए ड्रोन हमलों और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों के दावों ने एक बार फिर इस क्षेत्र में अनिश्चितता और खतरे को बढ़ा दिया है।'सीधी बातचीत हमारे डीएनए में नहीं', ईरान ने अमेरिकी दावों को किया खारिजदूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत के दावों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने वाशिंगटन के बयानों को मनगढ़ंत करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह अमेरिका से सीधी गुफ्तगू करना उनके 'डीएनए' में शामिल नहीं है। हालांकि, बघाई ने यह स्वीकार किया कि मध्यस्थ देशों के जरिए दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष संदेशों का आदान-प्रदान अभी भी जारी है। इसके साथ ही तेहरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' पर अपने पूर्ण नियंत्रण और संप्रभुता का दावा भी दोहराया है।ब्रेंट क्रूड 9% गिरा, गोला-बारूद की कमी की रिपोर्ट पर बोले डोनाल्ड ट्रंपअमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक रास्ते की उम्मीदों से वैश्विक बाजार पर तत्काल असर देखने को मिला और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले सप्ताह $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार करने वाला ब्रेंट क्रूड करीब 9% गिरकर $88 प्रति बैरल के आसपास आ गया। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने निशाना बनाने योग्य ठिकानों की कमी और अपने गोला-बारूद (इंटरसेप्टर मिसाइलों) के घटते स्टॉक को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद ट्रंप ने बमबारी रोकने का फैसला किया।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन मीडिया रिपोर्टों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास हथियारों और गोला-बारूद का कोई अभाव नहीं है और वह अपने सैन्य भंडारों को बहुत तेजी से फिर से भर रहा है। हालांकि, सैन्य अभियानों के रुकने के बावजूद क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित है और इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर भविष्य के नियंत्रण को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच कड़ा गतिरोध कायम है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 8:48 am

टूथपेस्ट के दावों की खुली पोल! बांग्लादेश की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: 76% सैंपल में मिले कैंसरकारी 'माइक्रोप्लास्टिक'

हम में से ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत दांतों की सफाई और ओरल हाइजीन के लिए टूथपेस्ट से करते हैं। टूथपेस्ट कंपनियां भी कैविटी से सुरक्षा और दांतों के मोती जैसे चमकने के बड़े-बड़े दावे करती हैं। लेकिन हाल ही में बांग्लादेश से सामने आई एक चौंकाने वाली वैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट ने करोड़ों लोगों की सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। एनवायरनमेंट एंड सोशल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (ESDO) द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन के अनुसार, बाजार में बिकने वाले ज्यादातर टूथपेस्ट सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक (प्लास्टिक के अति-सूक्ष्म कण) पाए गए हैं।34 में से 26 सैंपल में पाए गए प्लास्टिक के खतरनाक कणESDO द्वारा यह अध्ययन जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किया गया। इस जांच में बांग्लादेश, भारत, थाईलैंड और वियतनाम में निर्मित 19 प्रमुख ब्रांडों के कुल 34 टूथपेस्ट सैंपल शामिल किए गए थे। जहांगीरनगर विश्वविद्यालय की Laboratory of Environmental Health and Ecotoxicology में हुई वैज्ञानिक जांच में पाया गया कि 34 में से 26 सैंपल (लगभग 76.5 फीसदी) में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद थे।स्थानीय बनाम विदेशी ब्रांड: बांग्लादेश में बने 25 स्थानीय उत्पादों में से 22 में माइक्रोप्लास्टिक मिले।अन्य देशों के सैंपल: भारत से शामिल 5 में से 1, थाईलैंड के 2 में से 1 और वियतनाम के दोनों सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक की पुष्टि हुई है।बच्चों के टूथपेस्ट भी असुरक्षित: चिंता की बात यह है कि बच्चों के लिए खास तौर पर बनाए गए 6 में से 4 टूथपेस्ट सैंपल में भी प्लास्टिक के कण पाए गए। इनमें Kodomo Ultra Shield Formula Strawberry, Meril Baby Strawberry, Meril Baby Orange और Pepsodent Kids Orange शामिल हैं।किस टूथपेस्ट में मिले सबसे ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक कण?शोधकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि किसी भी ओरल केयर प्रोडक्ट या टूथपेस्ट में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा शून्य (Zero) होनी चाहिए। अध्ययन में प्रति 100 ग्राम टूथपेस्ट में 20 से लेकर 320 तक माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए:टूथपेस्ट ब्रांडमाइक्रोप्लास्टिक कण (प्रति 100 ग्राम)मेडिप्लस फ्लोराइड जेल (Mediplus Fluoride Gel)320 कण (सबसे ज्यादा)क्लोजअप रेड हॉट / मेंथॉल फ्रेश (Closeup Red Hot / Menthol Fresh)160 कणकोडोमो अल्ट्रा शील्ड फॉर्मूला (Kodomo Ultra Shield)140 कणसिग्नल ग्रीन टी (Signal Green Tea)120 कणपेप्सोडेंट एडवांस साल्ट / हिमालया कंप्लीट केयर100-100 कणसेंसोडाइन फ्रेश मिंट (Sensodyne Fresh Mint)80 कणहालांकि, राहत की बात यह है कि जांच किए गए 8 सैंपल पूरी तरह माइक्रोप्लास्टिक-मुक्त पाए गए, जिनमें जेनफ्रेश (Genfresh), पैराशूट जस्ट फॉर बेबी मैंगो (Parachute Just for Baby Mango) और क्लोजअप रेड-हॉट जिंक फ्रेश टेक्नोलॉजी शामिल हैं।क्या होता है माइक्रोप्लास्टिक और सेहत को कितना बड़ा खतरा?माइक्रोप्लास्टिक क्या हैं?माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर से भी छोटे प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं, जो औद्योगिक कचरे, सिंथेटिक कपड़ों और सौंदर्य प्रसाधनों में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोबीड्स से बनते हैं।शरीर और अंगों पर गंभीर असर:ब्रशिंग के दौरान ये सूक्ष्म कण आसानी से मुंह के जरिए या निगलने से शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में माइक्रोप्लास्टिक जमा होने से:पाचन और श्वसन तंत्र: पाचन क्रिया और फेफड़ों के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है।हार्ट और नर्वस सिस्टम: हृदय प्रणाली और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) में गंभीर सूजन आ सकती है।हार्मोनल असंतुलन: यह शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर हार्मोनल गड़बड़ी, प्रजनन क्षमता (Fertility) में कमी और भ्रूण के विकास में रुकावट पैदा कर सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 10:39 pm

PoJK में पाकिस्तानी सेना का खूनी तांडव: रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग, 5 की मौत और दर्जनों घायल

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) में स्थिति बेहद तनावपूर्ण और बेकाबू हो गई है। सोमवार को रावलाकोट में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना ने अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस दर्दनाक घटना में कम से कम 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों में से कई की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।यह खूनी गोलीबारी तब हुई जब हजारों की संख्या में नागरिक जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने की तैयारी कर रहे थे।52 दिनों से जारी आंदोलन और JAAC का अल्टीमेटमPoJK में पिछले 52 दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। स्थानीय नागरिक और JAAC के कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्ट्स की रिहाई, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज झूठे मुकदमों की वापसी और क्षेत्र के आर्थिक-सामाजिक अधिकारों की बहाली की मांग कर रहे हैं।गतिरोध को खत्म करने के लिए JAAC और स्थानीय प्रशासन के बीच बातचीत चल रही थी। JAAC ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करने के लिए 27 जुलाई की दोपहर 1:00 बजे तक की डेडलाइन दी थी। मांगें न माने जाने पर जैसे ही हजारों लोगों ने रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शुरू किया, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन पर बल प्रयोग करते हुए सीधी फायरिंग कर दी।धांधली के आरोप और चुनाव पर पड़ा गहरा असरयह भयानक हिंसा ऐसे समय में हुई है जब PoJK के मीरपुर डिवीजन के 13 निर्वाचन क्षेत्रों में पहले चरण का मतदान चल रहा था। एक तरफ लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ कोटली समेत कई इलाकों से चुनाव में भारी धांधली और बूथ कैप्चरिंग के आरोप सामने आए हैं।लगातार जारी हड़ताल, रैलियों पर पाबंदी और सेना की बर्बरता के कारण राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार पूरी तरह ठप हो गया है। आम जनता में इस चुनावी प्रक्रिया को लेकर भारी असंतोष और बेरुखी देखी जा रही है।रावलाकोट और सुधनोती में चुनाव 10 अगस्त तक टलेरावलाकोट में हुए इस खूनी नरसंहार और लगातार बढ़ते जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह बैकफुट पर आ गया है। बिगड़ते हालात और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए सुधनोती और रावलाकोट जिलों में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।इस घटना के बाद से पूरे PoJK में पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ गुस्सा चरम पर है और जगह-जगह विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 10:38 pm

'छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार पहले कभी नहीं हुआ':संसद में खड़गे का हमला, हंगामे के बीच पेश हुआ एंटी पेपर लीक बिल

संसद में मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत सोमवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के तीखे टकराव के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में आंदोलनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन खत्म हो चुका है, लेकिन छात्रों के साथ मारपीट का मुद्दा संसद में गरमाया हुआ है। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। सरकार ने लोकसभा में लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश किया। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने आवश्यक दस्तावेज सदन पटल पर रखने की प्रक्रिया पूरी कराई। करीब 12 बजकर 4 मिनट पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला फिर आसन पर आए। इस दौरान विपक्षी सांसद वेल में नारेबाजी कर रहे थे। इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष से कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और सदन की कार्यवाही चलने दें, लेकिन हंगामा नहीं थमा। इसके बाद सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। दोपहर 2 बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। करीब 2 बजकर 4 मिनट पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए समय तय कर दिया है, फिर भी विपक्ष नारेबाजी कर सदन क्यों नहीं चलने दे रहा है। हंगामा जारी रहने पर लोकसभा की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने की प्रक्रिया पूरी कराई। सुबह 11 बजकर 4 मिनट पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बोलने के लिए खड़े हुए। उस समय कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी सदन में मौजूद थीं। सभापति ने उन्हें नियमों का हवाला देते हुए रोकने की कोशिश की, लेकिन खरगे ने ऊंची आवाज में विरोध दर्ज कराते हुए कहा- ‘जिस तरह छात्रों को पीटा गया, घसीटा गया और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया, ऐसा भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।’ खरगे के बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। हंगामे के चलते सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक टाल दी। दोपहर 2 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। इस बार उपसभापति हरिवंश आसन पर थे। सरकार ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू कराई और सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया। हालांकि, विपक्ष लगातार छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाने की कोशिश करता रहा। पीठ की ओर से सदस्यों को केवल लिस्टेड विषयों की कार्यवाही तक सीमित रहने के लिए कहा गया, जिसके बाद फिर हंगामा शुरू हो गया। लगातार रुकावट के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 3 बजे तक और फिर दोबारा शुरू होने के महज एक मिनट बाद शाम 5 बजकर 15 मिनट तक के लिए स्थगित कर दी गई। क्या है लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। यह 2024 में लागू लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को और प्रभावी बनाने के मकसद से लाया गया है। प्रस्तावित संशोधन का मकसद भर्ती और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल, परीक्षा माफिया और तकनीक के जरिए होने वाली धांधली पर अधिक सख्ती से रोक लगाना है। इसमें दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 27 Jul 2026 7:06 pm

आज का एक्सप्लेनर:धर्मेंद्र प्रधान गए, अब विपक्ष के निशाने पर गृहमंत्री क्यों हैं; ये स्ट्रैटेजी कारगर होगी या दांव उल्टा पड़ जाएगा

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होते ही कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन खत्म कर दिया, लेकिन विपक्ष ने अपनी रणनीति बदल दी। अब निशाने पर गृहमंत्री अमित शाह हैं। 26 जुलाई को राहुल गांधी ने शाह को चिट्ठी लिखकर दो सवाल पूछे। 27 जुलाई को विपक्षी पार्टियों ने तय किया है कि संसद की कार्यवाही बाधित करेंगे और अमित शाह से जवाब मांगेंगे। आखिर विपक्ष की गृहमंत्री को टारगेट करने की नई स्ट्रैटेजी क्या है, ये कारगर होगी या दांव उल्टा पड़ जाएगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से क्या सवाल पूछे हैं? जवाब: 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्ट्रैटेजी शिफ्ट का पहला संकेत मिला। राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान की बजाए अमित शाह को घेरते हुए कहा- 'याद रहे, प्रदर्शन में किसी छात्र का हाथ टूटा, किसी का पैर, तो किसी की पसली। पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खाकर क्रिटिकल हो गए। इन सबके सीधे जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।' राहुल गांधी ने अमित शाह को चिट्ठी लिखकर 2 सवाल पूछे- लंबे वक्त से कांग्रेस कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल के मुताबिक, ' राहुल गांधी गृहमंत्री अमित शाह से मांग रहे हैं। यानी वे बोल रहे हैं कि गृहमंत्री के निर्देश पर छात्रों पर लाठी और पैलेट गन चलाई गई। सवाल-2: संसद के लिए विपक्ष ने क्या रणनीति बनाई है? जवाब: गृहमंत्री अमित शाह को घेरना विपक्ष की एक साझा रणनीति है, सोमवार यानी 27 जुलाई को इसके 6 साफ संकेत मिले… 1. सदन शुरू होते ही हंगामा: सुबह 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष छात्रों से मारपीट के मुद्दे पर चर्चा के लिए अड़ गया। लोकसभा स्पीकर ने 4 बार सदन की कार्रवाई स्थगित की। सिवाए एक बिल पेश होने के अलावा लोकसभा में और कोई चर्चा नहीं हुई। 2. दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव: लोकसभा में कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और हिबी ईडन ने स्थगन प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया। राज्यसभा में रेणुका चौधरी ने भी चर्चा के लिए नोटिस दिया। 3. सदन के बाहर प्रदर्शन: सदन के बाहर कांग्रेस सांसदों न मार्च निकाला और नारे लगाए, 'अमित शाह जवाब दो, जवाब दो।' 4. सोशल मीडिया पर पोस्ट: विपक्षी नेता सोशल मीडिया पर भी अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने X पर ट्वीट किया 'अमित शाह जवाब दो - लाठी का हिसाब दो' 5. मीडिया में बयानबाजी: TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'CRPF की रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस दोनों अमित शाह को रिपोर्ट करते हैं। या तो अमित शाह ने खुद ऑर्डर दिए हैं। या उनके विभाग से किसने ऑर्डर दिए हैं, इसका भी वे जवाब दें।' 6. खड़गे के कमरे में बैठक : यह सब सुबह सदन शुरु होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कमरे में विपक्षी दलों की बैठक के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें संसद की कार्रवाई को बाधित करने और अमित शाह से जवाब मांगने की रणनीति तय हुई है। दरअसल, देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी होने के नाते रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। 20 जुलाई का संसद मार्च संभालने यही दोनों बल तैनात थे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवाई कहते हैं, 'नीट पेपर लीक के मामले में कांग्रेस के लिए अब ज्यादा राजनीतिक लाभ बचा नहीं, लेकिन आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और बल प्रयोग से युवाओं में एक सेंटिमेंट है। कांग्रेस अब युवाओं का आक्रोश अमित शाह की तरफ डायवर्ट करने की कोशिश हो रही है, क्योंकि वे बीजेपी में अघोषित तौर पर नंबर-2 हैं।' सीनियर जर्नलिस्ट नीरज चौधरी बताती हैं, ‘अभी सरकार पर प्रेशर का एक मोमेंटम बना हुआ है। विपक्ष चाहता है कि इस सेंटिमेंट को और भुनाया जाए और सरकार को घेरा जाए। जवाबदेही तय की जाए।’ सवाल-3: मोदी सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी क्या है? जवाब: सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी इन तीन कदमों से समझिए… रशीद किदवाई बताते हैं कि सरकार चाहती है कि किसी भी तरह से संसद में चर्चा शुरू हो और इसमें सरकार का फायदा ही है। क्योंकि उसके पास दर्जनों अच्छे वक्ता हैं, जो विपक्ष पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में विपक्ष केवल हल्ला-हंगामा करके वॉकआउट कर सकता है। सीनियर जर्नलिस्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी मनाते हैं कि सरकार कतई नहीं चाहेगी कि ऐसा ऑप्टिक्स बने कि वो विपक्ष या कांग्रेस के सामने झुक गई। मानसून सत्र के पहले हफ्ते में कुछ खास नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार पूरी कोशिश करेगी कि गतिरोध टूटे और संसद में चर्चा हो। सरकार दिखाना चाहती है कि प्रदर्शनकारी छात्र पीएम मोदी के फैसलों के बाद खुश हैं। बीजेपी सांसद राहुल सिन्हा ने कहा, ‘जो छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, वे प्रधानमंत्री को आशीर्वाद देते हुए खुशी-खुशी वहां से चले गए। लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को जिंदा रखने की कोशिश कर रही है। उन्हें संसद में आने वाले विधेयक पर बोलना चाहिए। कांग्रेस बोलने से डरती है, क्योंकि इससे उनका पर्दाफाश हो जाएगा।’ सवाल-4: क्या विपक्ष का शाह को घेरने वाला दांव उल्टा भी पड़ सकता है?जवाबः इस स्ट्रैटेजी के दो पहलू हैं और दोनों तरफ के तर्क मजबूत हैं। ये किस करवट बैठेगी, ये जनता के परसेप्शन से तय होगा… यानी विपक्ष की बाजी इस बात पर टिकी है कि जनता के बीच छात्रों पर हुए एक्शन का गुस्सा अभी ठंडा हुआ है या नहीं। अगर सेंटिमेंट अभी भी गर्म है, तो अमित शाह को घेरना कारगर हो सकता है। अगर सरकार का ‘मसला सुलझ गया’ वाला नैरेटिव हावी हो गया, तो विपक्ष की रणनीति खुद उसके लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। सवाल-5: इन सबके बीच कॉकरोच जनता पार्टी का रुख क्या है? जवाब: फिलहाल CJP ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से कोई सवाल नहीं पूछे हैं। विपक्ष की स्ट्रैटेजी पर भी CJP की तरफ से कोई समर्थन या विरोध सामने नहीं आया है। CJP ने बार-बार अपने प्रदर्शन को गैर-राजनीतिक बताया और कहा कि हम सभी से अपील करते हैं कि वो हमारा साथ दें, भले ही आप बीजेपी से जुड़े हों। राहुल गांधी ने भी इस पूरे वाकये में एक भी बार CJP और अभिजीत दीपके का नाम नहीं लिया। 26 जुलाई को CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बयान जारी किया कि सरकार अपने वादे पूरे करे कि प्रदर्शन की वजह से किसी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। जिनके खिलाफ केस दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। 27 जुलाई को सौरव दास ने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि देश भर में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज केसों को ट्रैक कर रहे हैं और उन्हें मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। ----------- ये खबर भी पढ़िए… क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो 6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ पूरी खबर पढ़िए

दैनिक भास्कर 27 Jul 2026 5:48 pm

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आक्रामक रुख अपनाने की भारी कीमत ईरान को चुकानी पड़ रही है; तेहरान अंतरराष्ट्रीय जाल में

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और संवेदनशील भू-राजनीतिक खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद करने की धमकी देने वाले ईरान के कड़े तेवर अब पूरी तरह ढीले पड़ते नजर आ रहे हैं। वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बंधक बनाकर दुनिया को डराने की कोशिश कर रहा तेहरान खुद अपने ही बुने चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक ताकतों की सख्त सैन्य घेराबंदी के बाद अब ईरान कूटनीतिक मोर्चे पर बैकफुट पर आ गया है और दुनिया भर में अलग-थलग पड़ने के बाद उसकी छटपटाहट साफ देखी जा सकती है।क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों इस पर अड़ा था ईरान?भौगोलिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को आपस में जोड़ता है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान लंबे समय से इस रास्ते पर अपना नियंत्रण होने का दावा करता रहा है और जब भी उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है, वह इसे बंद करने की धमकी देने लगता है। इस बार भी ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए इस रूट को ब्लॉक करने की कोशिश की थी, ताकि भारत, चीन और यूरोपीय देशों समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाया जा सके।वैश्विक ताकतों की जवाबी कार्रवाई से कैसे पस्त हुआ तेहरान?ईरान की इस आक्रामक रणनीति का मुकाबला करने के लिए इस बार अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों ने बिना कोई वक्त गंवाए एक साझा नौसैनिक टास्क फोर्स को ओमान की खाड़ी में तैनात कर दिया। अंतरराष्ट्रीय नौसेना की इस भारी मौजूदगी और अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती ने ईरान की नौसैनिक घेराबंदी को पूरी तरह नाकाम कर दिया। इसके साथ ही, ईरान पर लगे नए आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंधों ने उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। अपनी ही धमकियों के जाल में घिरने और चौतरफा मार झेलने के बाद अब ईरानी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राहत की गुहार लगाता हुआ दिख रहा है।भारतीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर क्या होगा इसका असर?स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम होने और ईरान के बैकफुट पर आने की खबर से भारतीय तेल कंपनियों और घरेलू बाजार ने बड़ी राहत की सांस ली है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रूट के जरिए आयात करता है। रक्षा और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान इस रास्ते को बंद करने में कामयाब हो जाता, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती थीं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगते। ईरान के शांत होने से अब सप्लाई चेन सुचारू रूप से चलने की उम्मीद जगी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 12:13 pm

हिज्बुल्लाह का साथ देना ईरान की रणनीतिक नीति का हिस्सा: मोजतबा खामेनेई

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम को लिखे एक पत्र में कहा कि हिज्बुल्लाह के लिए ईरान का समर्थन एक 'रणनीतिक जिम्मेदारी' है।

देशबन्धु 27 Jul 2026 7:50 am

बर्लिन प्राइड परेड पर खूनी हमला: वैन से कुचलकर एक की मौत, 29 घायल; पुलिस मुठभेड़ में संदिग्ध आतंकी ढेर

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित 'बर्लिन प्राइड' परेड के दौरान एक भीषण और जानलेवा हमला हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार रात प्राइड के समापन संगीत कार्यक्रम के पास एक तेज रफ्तार सफेद रंग की वैन अचानक भीड़ में जा घुसी, जिससे एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई और 29 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। वैन से टक्कर मारने के बाद आरोपी ने धारदार हथियार से भी कई लोगों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इस सनसनीखेज घटना के बाद करीब 24 घंटे तक चले बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान के बाद, रविवार को शहर के बाहरी इलाके में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मुख्य संदिग्ध मारा गया।इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े तार और लेबनीज मूल का हमलावरअधिकारियों ने खुलासा किया है कि बर्लिन प्राइड हमले का मुख्य संदिग्ध अब्दुल बल्लूट था, जो लेबनानी मूल का जर्मन नागरिक था। जांच में यह बात सामने आई है कि यह संदिग्ध पहले भी इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकवादी समूह में शामिल होने की कोशिश कर चुका था। घटना के तुरंत बाद जर्मन अभियोजकों ने उसका 'वॉन्टेड' नोटिस जारी किया था और जनता के लिए चेतावनी जारी की थी कि आरोपी अत्यधिक खतरनाक और हथियारबंद है, इसलिए उसके करीब न जाएं। जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंट ने इस पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित 'इस्लामी आतंकी हमला' करार दिया है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है और राजधानी में सक्रिय कट्टरपंथी व इस्लामी चरमपंथी समूहों के संपर्क में होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था।टियरगार्टन पार्क के पास मचा कोहराम, चांसलर और मेयर ने की घटना की निंदायह खूनी खेल शनिवार रात करीब 10 बजे टियरगार्टन पार्क के पास हुआ, जो उस मार्ग के नजदीक है जहां से कुछ समय पहले ही यूरोप के सबसे बड़े LGBTQ+ आयोजनों में शुमार 'क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे' यानी बर्लिन प्राइड मार्च गुजरा था। बेकाबू वैन कई लोगों को कुचलते हुए अंत में एक पेड़ से जा टकराई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने तुरंत सोशल मीडिया के जरिए घटनास्थल को खाली करने की अपील की ताकि राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा सकें। बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने इस घटना को जर्मनी के स्वतंत्र और उदार समाज पर सीधा हमला बताया है। वहीं, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे समय में संयम बनाए रखें और समाज में डर व आपसी फूट पैदा करने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट रहें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 7:50 am

जिहाद ही एकमात्र रास्ता... हिजबुल्लाह के समर्थन में खुलेआम उतरे ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई, अमेरिका और इजरायल को दो टूक संदेश

पश्चिम एशिया में सुलग रहे महासंग्राम के बीच ईरान की तरफ से एक बेहद कड़ा और बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) मोजतबा खामेनेई ने लेबनान के सक्रिय संगठन हिजबुल्लाह की खुलकर सराहना की है और उसे इजरायल के खिलाफ मोर्चे पर डटी हुई एक मजबूत चट्टान करार दिया है। मोजतबा खामेनेई ने साफ शब्दों में अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक लेबनान के खिलाफ इजरायली हमले पूरी तरह नहीं रुकते, तब तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार का युद्धविराम समझौता मुमकिन नहीं है। खामेनेई का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब वैश्विक कूटनीति के स्तर पर लेबनान में शांति स्थापित करने और हिजबुल्लाह के भविष्य को लेकर बैठकों का दौर जारी है।एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस और हिजबुल्लाह की रीढ़ बना ईरानअंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के मुताबिक, हिजबुल्लाह ईरान के 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (प्रतिरोध की धुरी) का सबसे मजबूत और अहम हिस्सा है। यह ईरान समर्थित उन सशस्त्र समूहों का नेटवर्क है, जिसे पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के प्रभाव को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है। ईरान की तरफ से इन संगठनों को भारी मात्रा में आर्थिक मदद, आधुनिक हथियार और रणनीतिक ट्रेनिंग दी जाती है। लेबनान के हिजबुल्लाह के अलावा यमन के हुती विद्रोही और इराक के कई लड़ाका समूह इसी नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो ईरान के साए में पश्चिम एशिया की भू-राजनीति को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं।'अब सिर्फ जिहाद और प्रतिरोध ही बचा है रास्ता'हिजबुल्लाह प्रमुख शेख नइम कासिम द्वारा भेजे गए वफादारी पत्र का जवाब देते हुए ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई संदेश साझा किए। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में इजरायल के खिलाफ मुकाबले के लिए 'जिहाद और प्रतिरोध' के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। खामेनेई ने हिजबुल्लाह के दिवंगत पूर्व प्रमुख सैयद हसन नसरल्लाह और जंग में मारे गए अन्य कमांडरों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इन बहादुर लड़ाकों के बलिदान ने ही इस संगठन को एक छोटे से पौधे से बदलकर आज एक विशाल पेड़ के रूप में खड़ा किया है। उन्होंने दक्षिणी लेबनान की आम जनता के धैर्य और साहस की भी जमकर प्रशंसा की।अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के सामने रखी गई ईरान की कड़ी शर्तमोजतबा खामेनेई की यह आक्रामक टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात के तुरंत बाद आई है। व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक के दौरान लेबनानी क्षेत्र से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी, हिजबुल्लाह को हथियार मुक्त करने और लेबनानी सेना को अमेरिकी मदद देने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते की सबसे बड़ी शर्त लेबनान पर इजरायली हमलों पर तत्काल रोक लगाना होगी। ईरान के इस रुख से साफ है कि पश्चिम एशिया का यह संकट आने वाले दिनों में और अधिक गहरा सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 7:48 am