डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी करार दिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तीन दिन बाद USCBP ने अहम फैसला लिया. अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि 24 फरवरी से IEEPA के तहत लिए जा रहे टैरिफ को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा.
US-Iran Tension: ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए भारत ने एडवाइजरी जारी की है, जिसमें वहां रहने वाले नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी गई है. नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है.
बताया जाता है कि व्हाइट हाउस के स्टेट डाइनिंग रूम में चल रही बैठक के बीच उनके व्यापार सलाहकार ने एक नोट राष्ट्रपति को थमाया। नोट पढ़ते ही ट्रंप ने कथित तौर पर पूछा, “तब तो नुकसान हो गया?” सलाहकार ने पुष्टि की कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को अवैध घोषित कर दिया है।
खामनेई के खौफ से परेशान ईरान! रमजान के पाक महीने में दिखाई ऐसी रहमदिली; मुस्लिम जगत बोला- 'मरहबा'
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच टकराव अपने चरम पर है. इसीईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई नेरमजान के पवित्र महीने में जरूरतमंद कैदियों की रिहाई के लिए अपना खजाना खोल दिया है. जिससेसैकड़ों परिवारों में नई उम्मीद जगी है और इसे इंसानियत व दया का बड़ा संदेश माना जा रहा है. जानें पूरी रिपोर्ट.
सिंगापुर दौरे पर सीएम योगी: वैश्विक निवेशकों से मुलाकात, यूपी में दीर्घकालिक साझेदारी पर जोर
सीएम ने निवेशकों के समक्ष प्रदेश की बेहतर कानून-व्यवस्था, विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी, विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर नीति, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स हब के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि यूपी आज भारत की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
ईरान के दो बड़े शहरों तेहरान और मशहद में विश्वविद्यालय परिसरों में लगातार दूसरे दिन सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। छात्र समूहों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार कम से कम सात विश्वविद्यालयों में छात्र इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बावजूद छात्रों ने परिसर में प्रदर्शन जारी रखा।
Bangladesh Army reshuffle:बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद सेना के शीर्ष स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है.कई वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और प्रमोशन हुए हैं.भारत में तैनात एक अधिकारी को वापस बुलाकर अहम कमान सौंपी गई है.इसके बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. लेकिन सबसे अधिक चर्चा भारत में रह रहे एक अफसर की है, जानें पूरी खबर.
Nepal dhading bus accident: नेपाल के धादिंग में सोमवार को एक यात्री बस नदी में गिर गई, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हैं. बचाव कार्य तेजी से चल रहा है और प्रशासन हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटा है.
चापो से मेंचो तक, कोई गलत काम इनसे बचा नहीं... कैसे 'धंधे' के लिए बदनाम हो गया पूरा मुल्क?
वहीं पर प्राचीन माया सभ्यता फली-फूली. 3000 साल पहले खेती होती थी लेकिन आज जिस चीज की खेती होती है उसने पूरे देश को बदनाम कर दिया है. एक माफिया के मारे जाने पर पूरे देश में आग लगा दी गई है. ये कहानी है अमेरिका के दक्षिणी छोर पर बसे मुल्क मैक्सिको की.
Greenland says no thanks to Trump’s US hospital boat:ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जो बुरी नजर है, उसमें हर तरफ से निराशा ही मिल रही है, ट्रंप ने मदद के नाम पर ग्रीनलैंड को‘हॉस्पिटल बोट' भेजने की पेशकश की थी, जिसे ग्रीनलैंड सरकार ने ठुकरा दिया है. जिसके बादअमेरिका-डेनमार्क रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है और आर्कटिक क्षेत्र की राजनीति फिर चर्चा में आ गई है.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से एक पॉडकास्ट में पूछा गया- क्या एलियंस सच में होते हैं? उन्होंने जवाब दिया- एलियंस होते हैं लेकिन मैंने उन्हें नहीं देखा। राष्ट्रपति बनने के बाद मेरा सबसे पहला सवाल यही था कि एलियंस कहां है? ये वीडियो वायरल होने के बाद मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ओबामा ने गुप्त जानकारी साझा की है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने बड़ी गलती कर दी। इसके बाद ट्रम्प ने एजेंसियों को एलियंस से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने को कहा है। क्या अमेरिका ने वाकई एलियंस छिपा रखे हैं, एलियंस का कॉन्सेप्ट कहां से आया? क्या पृथ्वी के अलावा कहीं और भी जीव बसते हैं; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी... **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह ---------- ये खबर भी पढ़िए…ट्रम्प दुनिया का $6.7 लाख करोड़ जब्त कर सकते हैं:क्या इसलिए अंधाधुंध सोना खरीद रहे देश, दुनिया में अंदरखाने क्यों मची इतनी उथल-पुथल सोना रोज 10 हजार-20 हजार रुपए गिर-चढ़ रहा है। ऐसा नॉर्मल तो नहीं है। फिर ऐसा क्यों हो रहा है? पूरी दुनिया में सोना खरीदने की होड़ मची है। निवेशक और ग्राहक तेजी से खरीददारी कर रहे हैं। कई देश भी इसमें जुटे हैं। चीन ने 2303 और भारत ने 880 टन सोना जमा कर लिया है। ये आंकड़े अपने रिकॉर्ड स्तर पर है। पूरी खबर पढ़िए…
8 सितंबर 2025, नेपाल में सरकार के खिलाफ जेन जी प्रोटेस्ट शुरू हुआ। अगले ही दिन प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। सरकारी इमारतें, होटल और दुकानें प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गए। राजधानी काठमांडू में होटल हयात रीजेंसी को भी निशाना बनाया गया। चारों तरफ गोलियों की आवाज और आग की लपटें थीं। इसी होटल में भारत के गाजियाबाद से आए रामबीर सिंह गोला और उनकी पत्नी राजेश देवी रुके थे। दोनों चौथी बार नेपाल तीर्थ करने पहुंचे थे। हर बार दोनों साथ आते और साथ लौटते थे लेकिन इस बार रामबीर सिंह को पत्नी की शव के साथ लौटना पड़ा। क्योंकि हिंसा के दौरान उनकी मौत हो गई। इन सबके करीब 5 महीने बाद अब 27 जनवरी 2026 को रामबीर सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। उन्होंने नेपाल में पत्नी की मौत के लिए इंडियन एंबेसी, भारतीय विदेश मंत्रालय और होटल हयात रीजेंसी को जिम्मेदार बताया है और 100 करोड़ जुर्माने की मांग की है। रामबीर कहते हैं, 'स्टाफ ने हमसे कहा था कि हम होटल में पूरी तरह सेफ हैं, लेकिन जब आग लगी तो स्टाफ सबसे पहले भाग गया। इंडियन एंबेसी को घंटों कॉल किया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। मेरी पत्नी की मौत नेचुरल नहीं, होटल, इंडियन एंबेसी और भारतीय विदेश मंत्रालय की लापरवाही से हुई है।' दैनिक भास्कर की टीम ने रामबीर सिंह गोला से बात कर 9 से 12 सितंबर के बीच उनके साथ बीता घटनाक्रम जाना। साथ ही उनके वकील अभिषेक चौधरी से पूरा केस समझा। सबसे पहले 18 घंटे होटल में फंसे रहने की कहानी…पत्नी कहती रहीं- चौथी मंजिल से नहीं उतर पाऊंगी, मैंने बोला- साथ घर चलेंगेगाजियाबाद के रहने वाले रामबीर सिंह गोला की कहानी किसी ट्रेजिडी फिल्म से कम नहीं है। वे पूरा घटनाक्रम बताते हुए कहते हैं, ‘7 सितंबर को हम काठमांडू पहुंचे थे। अगले ही दिन 8 सितंबर को नेपाल सरकार के खिलाफ यहां बड़ा जेन जी आंदोलन होने लगा।‘ ‘9 सितंबर को हमें काठमांडू से मिथिला के लिए निकलना था। सुबह निकलने की तैयारी भी हो गई थी। तभी पता चला कि प्रदर्शन हिंसक हो गया है। होटल के नीचे प्रदर्शनकारियों ने आग लगानी शुरू कर दी है। होटल स्टाफ ने हमें दूसरी से चौथी फ्लोर पर शिफ्ट कर दिया और भरोसा दिलाया कि यहां हम सेफ हैं। हमें भी लगा था कि 5 स्टार होटल है तो ये बात जिम्मेदारी से कह रहे होंगे।‘ रामबीर आगे बताते हैं, 'जब हिंसा ज्यादा भड़क गई तो हमने जनरल मैनेजर और दूसरे स्टाफ को ऊपर से आवाज लगाई लेकिन सब गायब थे। होटल का सारा स्टाफ जा चुका था। मैं और मेरी पत्नी दोनों सुबह 9 बजे से होटल के कमरे में बंद थे। हमने मदद के लिए नेपाल में इंडियन एंबेसी को भी 30 से 40 कॉल किए लेकिन फोन नहीं उठा। हम इंतजार कर रहे थे कि शायद कोई बचाने आएगा लेकिन कोई नहीं आया।’ ‘हम दोनों पूरे दिन कमरे में ही बंद रहे। क्योंकि चारों तरफ गोलियों की आवाज थी और जगह-जगह आगजनी हो रही थी। शाम करीब 7 बजे हमारे कमरे में दरवाजे के नीचे से धुआं आने लगा और हमारा दम घुटने लगा। अब आग के चलते सीढ़ियों के रास्ते उतरना मुमकिन नहीं था। हमने खिड़की के पर्दे निकाले और रस्सी बनाई। तय किया कि चौथी मंजिल से रस्सी के सहारे नीचे उतर जाएंगे।' 'हालांकि पत्नी राजी नहीं थी। वे कहती रहीं कि मैं नहीं उतर पाऊंगी। आप चले जाओ, कम से आपकी जान बच जाएगी। हालांकि मैं नहीं माना और कहा- दोनों साथ जाएंगे। रात करीब 8.45 से 9 बजे हम दोनों नीचे भी उतर आए लेकिन पत्नी उतरते वक्त कुछ ऊंचाई से नीचे गिर पड़ी थी। उन्हें पसलियों और सिर पर चोट आई थी लेकिन उस वक्त उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया। ‘अभी सबसे बुरा होना बाकी था, पत्नी भी मुझसे बिछड़ गईं’रामबीर बताते हैं, 'जब हम नीचे उतरे तो चारों तरफ आगजनी हो रही थी, गोलियां चल रही थीं। हमें बचाने वाला कोई नहीं था। कई और लोग भी फंसे हुए थे। मिलिट्री की गाड़ियां आते-जाते देखकर हमने उनसे मदद की गुजारिश की लेकिन वो नहीं माने।' ‘बड़ी मुश्किल के बाद मैंने पत्नी को एक गाड़ी पर चढ़ाया लेकिन मैं नहीं चढ़ सका और गाड़ी वहां से निकल गई। अब मैं पत्नी से भी बिछड़ गया था। पूरी रात हिंसा और गोलियों की आवाज के बीच यहां-वहां भटकता रहा। रात करीब 9.30 बजे से लेकर दूसरे दिन दोपहर तक मुझे पता नहीं चल सका कि मेरी पत्नी कहां हैं।’ '10 सितंबर को काफी पूछताछ और खोजबीन के बाद दोपहर करीब 1.45 बजे मुझे पत्नी का क्लू मिला। मिलिट्री के एक अधिकारी ने बताया कि वो काठमांडू के टीचर्स अस्पताल में भर्ती है। उसका इलाज चल रहा है। जब मैं अस्पताल पहुंचा तो उसकी मौत की खबर मिली। मैं भागा-भागा मोर्चरी पहुंचा तो उसकी लाश रखी थी।' इंडियन एंबेसी से मदद नहीं मिली, मोटी रकम देकर डेडबॉडी मिली रामबीर कहते हैं, 'हम 5 स्टार होटल में रुके थे। उम्मीद थी कि यहां सबसे ज्यादा सेफ रहेंगे लेकिन हमारी सेफ्टी की फिक्र किए बिना होटल स्टाफ गायब हो गया। हमने एंबेसी में घंटों कॉल किया लेकिन न फोन उठा और न कॉलबैक आया। क्योंकि एंबेसी से भी सब गायब थे।' 'अगर इंडियन एंबेसी में हमारा फोन उठा लिया जाता तो पत्नी जिंदा होतीं। हमने यूपी CMO ऑफिस में भी फोन किया था लेकिन वहां से भी मदद नहीं मिली। उसके बाद मुझसे पत्नी के कफन और डेडबॉडी फ्रीजर बॉक्स में रखने के नाम पर भी अनाप-शनाप पैसे वसूले गए। मैंने डेडबॉडी रखने के लिए 25 हजार रु. और पोस्टमार्टम के लिए करीब डेढ़ लाख रु. चुकाए।' 'फिर 12 सितंबर को मैंने करीब डेढ़-पौने दो लाख रुपए में एंबुलेंस बुक की और अकेले पत्नी का शव लेकर भारत लौटा। लेकिन मेरा सवाल यही है कि आखिर दूसरे देश में हमारी एंबेसी क्यों होती है? क्या हिंसा के वक्त एंबेसी का ऐसे गायब होना भारी लापरवाही नहीं है?' केस के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘हजार करोड़ भी मिल जाएं तो मेरी पत्नी वापस नहीं आ सकती है। इसलिए बात कंपन्सेशन की नहीं है, बात जिम्मेदारी तय करने की है। हमारी सरकार कहती है कि हम यूक्रेन से अपने लोग निकाल लाए तो फिर नेपाल में वही काम क्यों नहीं किया?’ वकील बोले- बुजुर्ग महिला की मौत सिर्फ लापरवाही का नतीजा केस को लेकर हमने रामबीर सिंह के वकील अभिषेक चौधरी से भी बात की। वे कहते हैं, 'दुर्भाग्य है कि बुजुर्ग महिला की जान एक ऐसे देश में गई, जहां आप सिर्फ आधार कार्ड लेकर भी जा सकते हैं। वहां वीजा और पासपोर्ट की भी जरूरत नहीं होती। यहां यूपी के गोरखपुर जिले से कुछ घंटों में पहुंचा जा सकता है। फिर भी हमारी सरकार अपने लोगों को नहीं बचा सकी। ये पूरी तरह से लापरवाही का मामला है।' हमने पूछा कि लापरवाही किसने की? जवाब मिला, 'काठमांडू में मौजूद इंडियन एंबेसी के एंबेस्डर और को-एंबेस्डर ने की। जिस होटल हयात रीजेंसी में ये लोग ठहरे थे, वो तो जिम्मेदार है ही। बाकी लापरवाही एंबेसी को निर्देश देने वाले विदेश मंत्रालय के संचालक यानी विदेश मंत्री की भी है।' एडवोकेट चौधरी कहते हैं, 'हमारी सरकार ने युद्ध के हालात में उन देशों से भी भारतीय स्टूडेंट्स निकाल लिए, जहां पासपोर्ट और वीजा की जरूरत थी। फिर नेपाल तो पड़ोस में था। वहां फ्लाइट भेजने की भी जरूरत नहीं थी।' हिंसा के बीच एंबेसी का फोन न उठाना, कानून की भाषा में लापरवाहीएडवोकेट चौधरी इसे डिटेल में समझाते हुए कहते हैं, ‘मेनका गांधी बनाम यूनियन गवर्नमेंट का एक केस है। इसमें भी वही सवाल था, जो इस केस में है। क्या दूसरे देश में जाने के बाद भी किसी भारतीय नागरिक के राइट टू लाइफ की रक्षा भारत सरकार करेगी? तो उस केस में तय हुआ था कि हां, भारत सरकार का ये कर्तव्य है कि अपने नागरिकों की सुरक्षा सिर्फ देश के अंदर ही नहीं, दूसरे देश में भी करे।’ ’केस के फैसले में साफ लिखा है कि दूसरे देशों में एंबेसी बनाई ही इसलिए जाती है कि अपने देश के नागरिकों के हितों और उनकी जान की सुरक्षा कर सकें। एंबेसी को बाकायदा एक जमीन का टुकड़ा दिया जाता है। इस जमीन के टुकड़े पर बनी भारतीय एंबेसी, भारत का ही हिस्सा मानी जाती है, ये भारत का ही प्रतिनिधित्व करती है।’ ’इसका काम ही है कि उस देश में पढ़ने, नौकरी करने, घूमने या तीर्थयात्रा करने आए अपने लोगों के अधिकारों और जीवन जीने के अधिकार को सुरक्षित करना।‘ एंबेसी के अफसर बोले- केस के बारे में जानकारी नहींइस केस को लेकर हमने नेपाल में मौजूद इंडियन एंबेसी का पक्ष जानने के लिए उनरके अफसर बशिष्ठ नंदन से बात की। लापरवाही के आरोप पर उन्होंने कहा कि अभी इस केस के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। मीडिया से ही पता चल रहा है। उस वक्त एंबेसी से जो मदद मुमकिन हो सकती थी, वो एंबेसी की तरफ से की गई थी। किसी एक केस के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते। इसके बाद हमने काठमांडू में मौजूद होटल हयात रीजेंसी से भी कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की। हमने होटल की वेबसाइट पर दिए सभी मोबाइल और फोन नंबरों पर कॉल किया लेकिन सभी बंद मिले। ……………………ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड के तीर्थों में मुस्लिम-ईसाइयों के लिए 'नो एंट्री' 16 जनवरी 2026, हरिद्वार में गंगा घाट पर जगह-जगह बोर्ड लगा दिए गए। लिखा था- ‘हर की पैड़ी पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।’ बोर्ड पर किसी संस्था का नाम नहीं है। नीचे सिर्फ इतना लिखा है कि आज्ञा से म्युनिसिपल एक्ट हरिद्वार। इसके बाद से उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ समेत 47 तीर्थस्थलों पर गैर हिंदुओं की एंट्री बैन करने की मांग ने जोर पकड़ लिया। पूरी खबर पढ़िए…
Who is Al Mencho: मैक्सिको की सेना ने रविवार को सबसे बड़े ड्रग माफिया Nemesio Oseguera Cervantes उर्फ अल मेन्चो को ढेर कर दिया है. हालांकि उसकी मौत से पहले और बाद में कई जगहों पर आगजनी जैसी घटनाएं देखने को मिली हैं.
Latest Study on Gold: अगर आप सोने की खरीद के लिए बेहतर समय का इंतजार कर रहे थे तो समझ लीजिए कि अब आपका वक्त आ गया है. एशिया के एक बड़े देश में हुई स्टडी में रेत के नीचे 221 टन गोल्ड का पता चला है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल बना हुआ है.
Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है. इस बीच मॉस्को पर एक बड़ा ड्रोन हमला हुआ, जिसके चलते सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स बंद कर दिए गए.
Epstein Files: दुनियाभर में इन दिनों एपस्टीन फाइल्स की चर्चा हो रही है. इन फाइल्स के सामने आने पर एपस्टीन की रईसी और उसके द्वारा खड़े किए गए भव्य साम्राज्य के पीछे शोषण के एक बड़े जाल का खुलासा हुआ, जिसमें बिल क्लिंटन से लेकर एलन मस्क और एंड्रयू माउंटबेटन विंडसर जैसे बड़े नाम छिपे हुए थे.
भारत के अलावा किन देशों में खेली जाती है होली? यहां देखें पूरी लिस्ट
Holi 2026: 4 मार्च को पूरे देश में होली का त्योहार मनाया जाएगा.ऐसा नहीं है कि होली का त्योहार सिर्फ भारत में ही मनाया जाता है. दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां होली खेली जाती है. आइए जानते हैं वो कौन से देश हैं.
Air India Flight Canceled: अमेरिका में वेदर एक्सपर्ट ने बर्फीले तूफान को लेकर चेतावनी दी है, जिसके बाद एयर इंडिया ने 23 फरवरी को न्यूयॉर्क जाने वाली और वहां से आने वाली फ्लाइटें रद्द कर दी है.
Gurinder Brar Video:लोकतंत्र में अपेक्षा की जाती है कि हर शख्स जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करे. जिंदगी का ये फलसफा कनाडा की अल्बर्टा विधानसभा के एक विधायक गुरिंदर बरार ने 'चार लाइनों' में समझाया, तो उनके सधे शब्दों, शानदार भाषा शैली और बेबाक अंदाज ने सात समंदर पार के लोगों का दिल कैसे जीत लिया आइए बताते हैं.
Trump Hikes Tariffs After Court Hearing: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है, जिसको लेकर इंडियन-अमेरिकन वकील ने कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाए हैं.
Trump Approval Rating: हाल ही में आई एक ओपिनियन पोल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ा दी हैं. सर्वे के अनुसार, ज्यादातर अमेरिकी नागरिक ट्रंप के देश चलाने के तरीके से खुश नहीं है.
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर लगी रोक, ट्रंप के नए टैरिफ विवाद के बीच अहम बैठक टली
सूत्रों के अनुसार, हाल के घटनाक्रम विशेषकर अमेरिका में टैरिफ को लेकर हुए कानूनी और राजनीतिक फैसलों के मद्देनजर दोनों पक्षों ने स्थिति का समुचित आकलन करने के लिए अतिरिक्त समय लेने का निर्णय किया है। नई तारीख पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
Trump plan to Khamenei assassination: अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर और उनके बेटे को निशाना बनाने सहित सैन्य कार्रवाई के कड़े विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है. पेंटागन की भारी तैनाती और ट्रंप के कड़े बयानों ने मिडिल ईस्ट में एक बड़े युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है.
अमेरिका के पूर्वी तट पर बर्फीले तूफान की चेतावनी, 1500 से अधिक उड़ानें रद्द
अमेरिका के पूर्वी तट पर बर्फीले तूफान की चेतावनी जारी की गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट और मौसम विभाग की माने तो तीव्र हो रहे शीतकालीन तूफान के कारण मध्य अटलांटिक और उत्तरपूर्वी अमेरिका में भारी बर्फबारी, तेज हवाएं और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ आने की आशंका है।
सीवेज रिसाव जारी रहने पर ट्रंप ने वाशिंगटन के लिए इमरजेंसी की घोषणा को मंजूरी दी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन डी.सी. में आपातकाल की घोषणा को मंजूरी दे दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि सीवर लाइन टूटने के बाद गंदा पानी लगातार पोटोमैक नदी में बह रहा है और स्थिति गंभीर बनी हुई है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट और प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “बेहद खराब तरीके से लिखा गया” और अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि उनका नया कदम पूरी तरह कानूनी और परखा हुआ है।
एक वीडियो में मकाक प्रजाति का बेबी बंदर कुछ खाता दिख रहा है। तभी एक बड़ा बंदर उसे पकड़कर जमीन में लथेड़ते हुए गोल-गोल घुमा देता है। बड़े बंदर की पकड़ से छूटते ही बेबी दौड़ लगाता है और कुछ दूरी पर पड़े एक ऑरेंज Orangutan खिलौने से चिपक जाता है। जापान के इस वायरल बेबी बंदर का नाम 'पंच-कुन' है। इसे देखने के लिए इचिकावा सिटी के चिड़ियाघर में भीड़ उमड़ रही है। आपने भी सोशल मीडिया पर इसे जरूर देखा होगा। आखिर बंदर एक खिलौने को अपनी मां क्यों समझ रहा और क्या बंदरों में ऐसा व्यवहार नॉर्मल है; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बेबी ‘पंच-कुन’ की कहानी क्या है?जवाब: 26 जुलाई 2025 को जापान के इचिकावा सिटी जू में करीब 6 महीने की गर्भवती मादा मकाक ने पहली बार एक बंदर को जन्म दिया। नाम रखा गया- ‘पंच-कुन’। जन्म के समय पंच-कुन का वजन केवल 500 ग्राम था। उसकी मां भीषण गर्मी में प्रसव की थकान से इतनी कमजोर हो गई कि उसने बच्चे पर ध्यान नहीं दिया।जापानी मकाक बंदर ग्रुप्स में रहते हैं, लेकिन समूह की किसी दूसरी मादा ने भी पंच-कुन को अपनाने की कोशिश नहीं की। इसलिए अगले दिन से चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने उसे बोतल से दूध पिलाना शुरू किया।बंदरों के एक्सपर्ट डारियो मेस्ट्रिपिएरी और केली ए कैरोल की साइंस डायरेक्ट पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मकाक मांएं आम तौर पर बच्चों को जन्म के शुरुआती कुछ घंटों या दिनों में ही छोड़ सकती हैं, ये कोई दुर्लभ बात नहीं है। मकाक मादाएं कई वजहों से ऐसा कर सकती हैं… जू में काम करने वाले लोगों ने पंच-कुन के सामने कंबल और खिलौने रखे। उनमें से पंच-कुन ने स्टफ्ड खिलौने ‘ओरांगुटान’ को चुना। सोशल मीडिया पर लोग इस खिलौने को ‘ओरा-मां’ कह रहे हैं। सवाल-2: बंदर खिलौने को ही अपनी मां क्यों समझने लगा? जवाब: वैज्ञानिक मानते हैं कि बंदरों को अपनी मां से सिर्फ इसलिए लगाव नहीं होता, क्योंकि वह उन्हें खाना देती है। असली लगाव 'टच कम्फर्ट' यानी छूने और गले लगने से बनता है। 1958 में अमेरिकी साइंटिस्ट हैरी हार्लो ने अपने मशहूर 'मंकी एक्सपेरिमेंट' से ये बात साबित की थी। हार्लों के मुताबिक, स्पर्श ही मां और बच्चे के बीच कम्युनिकेशन का पहला तरीका होता है और ये गर्भ से ही शुरू हो जाता है… ऐसी चीजें जो बच्चे को कम्फर्ट देती हैं, जैसे मनपसंद तकिया या कंबल उन्हें मनोवैज्ञानिक 'कम्फर्ट ऑब्जेक्ट्स' कहते हैं। बच्चे हर समय इनके पास रहना चाहते हैं। मनोवैज्ञानिक रिचर्ड पासमैन तो कहते हैं, 'कभी-कभी कंबल बच्चे के लिए मां से भी ज्यादा मायने रखता है, क्योंकि मां के उलट, इस पर बच्चो का पूरा कंट्रोल रहता है।’ हार्लो की इस रिसर्च के नतीजों को ब्रिटिश मनोचिकित्सक जॉन बॉल्बी की 'अटैचमेंट थ्योरी' ने और मजबूत किया। इस थ्योरी के मुताबिक, बच्चे जिंदा रहने के लिए अपनी देखभाल करने वाले के पास रहना चाहते हैं। वह जन्म से ही इसी तरह प्रोग्राम किए गए होते हैं। बॉल्बी के अनुसार, जो बच्चे अपनी मां के करीब रहते हैं, उनके बड़े होने तक जिंदा रहने की संभावना ज्यादा होती है। उम्र के शुरुआती कुछ सालों में मां या बच्चे की देखभाल करने वाला बच्चे के लिए एक ऐसा 'सिक्योर बेस' होता है, जहां बच्चा सुरक्षित महसूस करता है। सवाल-3: तो क्या बंदर वाकई इंसानों की तरह भावनाओं को महसूस करते हैं? जवाब: लाखों साल पहले बंदर और इंसानों के पूर्वज यानी प्राइमेट्स एक ही थे। मशहूर प्राइमेटोलॉजिस्ट फ्रांस डी वाल कहते हैं, 'ऐसा नहीं है कि इंसानों की भावनाएं सिर्फ इंसानों में ही होती हैं। हमारी फीलिंग्स ज्यादा विस्तृत और परिष्कृत हो चुकी हैं, लेकिन मूल रूप से वह बंदरों से अलग नहीं हैं। मैंने दोनों की फीलिंग्स में कोई बुनियादी फर्क नहीं देखा।' दिमाग की न्यूरोइमेजिंग की स्टडीज में भी पाया गया है कि बंदरों के दिमाग में भी वही हिस्से हैं, जो हम इंसानों में अलग-अलग तरह की फीलिंग्स पैदा करने के लिए जिम्मेदार हैं। हमारे दिमाग का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स नाम का हिस्सा फीलिंग्स पर कंट्रोल के लिए जिम्मेदार है। वहीं एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स, सहानुभूति पैदा करता है। इसके अलावा एमिग्डाला हिस्सा डर जैसी नकारात्मक भावनाओं के लिए जिम्मेदार है। बंदरों में भी दिमाग के ऐसे ही हिस्सों से उनकी अलग-अलग भावनाएं कंट्रोल होती हैं। इसीलिए बंदर भी हमारी तरह ही अलग-अलग भावनाओं को प्रोसेस करते हैं। तनाव की स्थिति में बंदरों में भी कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जो इंसानों जैसा ही जैविक रिस्पॉन्स है। किसी दुःख के चलते बंदरों में शारीरिक बदलाव तक देखे गए हैं। जैसे- दिमाग में खून का फ्लो कम होना या वजन घटना आदि। बंदर, चिंपाजी जैसी एप्स प्रजातियां हमारी तरह ही दुःख, चिंता, डर, खुशी, प्यार, संतोष और यहां तक कि हास्य और सहानुभूति की भावनाएं दिखाते हैं... हालांकि फीलिंग्स को लेकर कई मामलों में बंदर इंसानों से अलग या कम विकसित भी हैं। बंदर इंसानों के लेवल तक सहानुभूति महसूस नहीं करते। बंदरों में शर्म, गर्व या गहराई से सोचने की फीलिंग्स इंसानों जितनी डेवेलप नहीं हुई हैं। भाषा के जरिए अपनी फीलिंग्स जाहिर करने की बंदरों की क्षमता भी इंसानों जितनी विकसित नहीं है। सवाल-4: साथी बंदरों ने पंच-कुन को क्यों घायल किया?जवाब: 19 जनवरी 2026 को पंच-कुन को जू में बने बाड़े में लगभग 60 मकाक बंदरों के झुंड में शामिल किया गया। वहां देखा गया कि समूह के दूसरे बंदर पंच-कुन को परेशान कर रहे हैं। 20 फरवरी 2026 में जू ने कर्मचारियों ने कहा कि एक वयस्क मादा बंदर ने पंच-कुन को कई मीटर तक खींचा। दरअसल, पंच-कुन दूसरे बेबी मकाक के पास जाने की कोशिश कर रहा था। इसलिए मादा मकाक ने अपने बच्चे को बचाने की कोशिश में पंच कुन को घसीटा। नेचर वेबसाइट में छपी एक रिसर्च के अनुसार दूसरे बंदरों में ऐसा व्यवहार पंच-कुन को खुद से अलग-थलग मानने की सोच के चलते हो सकता है। मकाक बंदरों में सामाजिक तनाव के चलते झगड़े होते हैं। ऐसे में बड़े बंदर ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। खिलौने को अपनी मां समझने के चलते पंच कुल अलग-थलग दिखता था। उसका अपने खिलौने से लगाव बाकी बंदरों को असहज करने वाला था। छोटा होने के चलते वह दूसरे बंदरों के इशारे भी ठीक से समझ नहीं पा रहा था। ऐसे में वो आसान निशाना बन गया था। सवाल-5: अभी पंच-कुन किस हाल में है, क्या वो सामान्य जीवन जी पाएगा? जवाब: इचिकावा सिटी जू ने कर्मचारियों की दिनचर्या को इस तरह तैयार किया है कि वे पंच-कुन से समय-समय पर मिलते हैं। जब भी कोई कर्मचारी बाड़े के अंदर खाना खिलाने जाता है तो बेबी पंच-कुन तुरंत कर्मचारी के पैर से चिपक जाता है। वहीं दूसरे मकाक बंदर कर्मचारियों से एक दूरी बनाकर रखते हैं। पंच-कुन के इस व्यवहार पर जू के अधिकारी कहते हैं कि पंच धीरे-धीरे बंदरों के झुंड के साथ अपनी बातचीत बढ़ा रहा है। उसे समूह में रहने के लिए तैयार करने की कोशिश जारी है। अब वह दूसरे बंदरों के साथ सामान्य सामाजिक व्यवहार करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें हल्की नोकझोंक भी शामिल है। हर दिन उसे कई तरह के अनुभव मिल रहे हैं। उम्मीद है वह जल्दी ही सामान्य बंदर की तरह झुंड में रहना सीख जाएगा। सवाल-6: मकाक बंदरों के बारे में और क्या खास है?जवाब: मकाक दुनिया के सबसे बुद्धिमान और अनुकूलनशील यानी किसी माहौल में ढल जाने वाले बंदरों में से एक हैं। ये सोशल ग्रुप्स में रहते हैं। इनके समूह में एक हायरार्की यानी पदक्रम होता है। एक बंदर ग्रुप का लीडर होता है, उसके बाद मादाएं और फिर बच्चे अपने से बड़े बंदर से सीखते हैं और उसके निर्देश मानते हैं। मकाक इंसानों के साथ रहने में भी माहिर हैं। ये बंदर एक-दूसरे के बाल साफ करते हैं, ये इनका सामाजिक रिश्ते बनाने का तरीका है। भारत में आम तौर पर हम जो बंदर देखते हैं, वो मकाक बंदर की ही रीसस प्रजाति है। ---- रिसर्च सहयोग- सोमेश शर्मा ---- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: साथियों को छोड़ अकेले बर्फीले पहाड़ की तरफ क्यों गया पेंग्विन; क्या ये सुसाइड की कोशिश, वायरल 'डेथ वॉक' की असली कहानी आपने वो वायरल वीडियो तो देख लिया होगा, जिसमें एक पेंग्विन सबकुछ छोड़कर अकेला बर्फीले पहाड़ों की तरफ चल पड़ता है। जहां एक ही चीज निश्चित है- मौत। इस पेंग्विन से लोग खुद को रिलेट करके भावुक हो रहे हैं, मीम्स बना रहे हैं। इस वायरल ट्रेंड में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तक शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…
मैं पहलवान अंशिका बालियान हूं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कस्बे सिसौली, मुजफ्फरनगर की रहने वाली हूं। पहलवानी में अभी बहुत नाम तो नहीं कमा पाई हूं, लेकिन कोशिश यही है कि अपने गांव और परिवार का नाम रोशन कर सकूं। इस शौक की कहानी अद्भुत है, लेकिन बिल्कुल आसान नहीं। जब मैंने पहलवानी को अपना रास्ता बनाने का फैसला किया, तभी लोगों ने कहना शुरू कर दिया- ‘अब इसकी शादी नहीं होगी।’ कुछ ने ताना मारा कि मैं लड़कों जैसी लगने लगी हूं। रिश्तेदार कहते थे, ‘अखाड़ों में लड़कों से कुश्ती लड़ती है, इससे कौन शादी करेगा?’ लेकिन मैंने ठान लिया था कि लोगों की सोच से बड़ा मेरा सपना है। सोचिए, पहलवानी चुनते ही पहला फैसला मेरे शरीर और भविष्य पर सुना दिया गया था। पहलवानी करने से अब टूटे कान, खुरदरे हाथ, कद-काठी के कारण मुझे अधूरी लड़की समझा जाता है। लड़का समझकर महिला टॉयलेट से अक्सर मेरा हाथ खींचकर बाहर कर दिया जाता है। कुश्ती सिखाने वाले गुरुजी ने एक बार पानी की पाइप से पिटाई की और बेहोश होने तक प्रैक्टिस करवाई। एक बार एक पहलवान लड़के ने छेड़ा तो मैंने उसे दंगल में टंगड़ी मार-मारकर खूब पटका। दरअसल, हुआ यूं कि मेरी बड़ी बहन को छोटे बाल रखने का शौक था। पापा ने कोविड महामारी के दौरान उसके बाल कटवा दिए। मुझसे भी कहने लगे कि तुम भी कटवा लो, तुमसे संभलते तो हैं नहीं। लेकिन मैं इनकार कर रही थी। लेकिन पापा मेरे बालों के पीछे ही पड़ गए। मेरे बाल बहुत लंबे और घने थे। बहुत पसंद थे मुझे। दिनभर तरह तरह के हेयर स्टाइल बनाती थी, लेकिन पापा ने एक दिन जबरदस्ती कटवा दिए। मैं बहुत परेशान थी। मैंने तीन दिन तक उनसे बात नहीं की। दिनभर रोती रही। खाना छोड़ दिया था। उसके बाद पापा ने समझाया- बालों में रखा ही क्या है? घर की खेती है, फिर आ जाएंगे। उसके बाद शांत हुई। अब जब घर से बाहर निकलती तो आस-पास के लोग कहते- अरे तुम तो गीता, विनेश फोगाट लगने लगी हो। एकदम लड़का हो गई हो। उस दिन पहली बार मेरे मन में ख्याल आया। अच्छा, मैं पहलवान भी बन सकती हूं। कोविड के दौरान मैं घर बैठी थी। पहलवानी करने के बारे में सोच रही थी। एक दिन घर के पास गांव गढ़ी में मैंने स्टेयर्स अकादमी का एक पैम्फलेट देखा। उसमें कुश्ती सिखाने की बात छपी थी। मैंने दो-तीन दिन तक सोच-विचार किया। हिम्मत जुटाई और पापा से कहा- मुझे पहलवानी करनी है। वे कुछ देर चुप रहे। कहने लगे: तुम सजने-धजने की शौकीन हो, तुमसे कुश्ती नहीं हो पाएगी। कुश्ती में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन मैं नहीं मानी। मैंने फिर कहा। वह बोले- आखिर पैसे ही खराब करोगी। घूम फिर कर वापस लौट आओगी। रहने दो। लेकिन मैं पीछे पड़ गई। पापा मान गए। मुझे स्टेयर्स अकादमी ले गए। वहां गुरुजी मले, जो कि हमारे कोच बनने वाले थे। उन्होंने कहा कि यहां पर हॉस्टल सिर्फ लड़कों के लिए है। तुम्हें रोज घर से आना-जाना पड़ेगा। कैसे करोगी? मैंने कहां- कर लूंगी। उसके बाद मेरा एडमिशन करा दिया गया। उस दिन एडमिशन कराके मैं वापस घर आई। जब आस-पास के लोगों को पता चला। वे पापा से कहने लगे, ये सब क्या कर रहे हो? छोरी का ब्याह नहीं होगा? समाज में बड़ी बदनामी होगी? लेकिन उन सब बातों के बावजूद पापा ने मेरा साथ दिया। अकादमी में शुरुआती 10-15 दिन ठीक बीते। उसके बाद घबराने लगी। मुझे लगा कि नहीं कर पाऊंगी। गुरुजी से कहा, मुझसे नहीं हो पाएगा। लेकिन अब गुरुजी ने भी ठान लिया था। उन्होंने कहा अब वापस नहीं लौटना है। बस प्रैक्टिस में लग जाओ। वो मुझसे और ज्यादा प्रैक्टिस करवाने लगे। इतना ज्यादा कि कई बार बेहोश हो गई। होश आता तो फिर से प्रैक्टिस करवाते। घर आकर बहुत रोती। लेकिन सोचती थी- मैंने ही जिद की थी। अब कैसे घर वालों से कुश्ती छोड़ने की बात कहूं? खैर, मैंने भी ठान लिया कि अब वापस नहीं लौटूंगी। शुरुआत में तेज नहीं भाग पाती थी। थोड़ी दूर भागते ही सांस फूलने लगती, लेकिन धीरे-धीरे स्टैमिना मजबूत होने लगा। स्पीड से भागने लगी। अब तक दो महीने बीत चुके थे। कुछ समय बाद दिवाली आई। मैंने अकादमी के दोस्तों से पूछा- दिवाली पर भी अकादमी आना है? उन्होंने कहा- हम तो नहीं आ रहे। उस दिन मैं भी नहीं गई। घर पर थी। घर पर भी अखाड़े वाले टी-शर्ट और निक्कर पहनकर बैठी थी। उस दिन कुछ लोग पापा से कहने लगे- यह आखिर छोटे-छोटे कपड़े पहनती है। लड़कों के साथ कुश्ती लड़ती है, लोग क्या सोचेंगे? इसका यह सब बंद कराइए। लेकिन पापा ने कहा- कोई नहीं, अभी बच्ची है, बड़ी होने पर देख लेंगे। अगले दिन जब वापस अखाड़े में गई तो गुरुजी बहुत गुस्सा हुए। सजा के तौर पर 10 एक्स्ट्रा राउंड लगाने को कहा। किसी तरह मैंने लगा लिए। मैं थक चुकी थी, लेट गई। उसके बाद उन्होंने मुझे पानी की पाइप से पीटा। कहने लगे, कुश्ती के लिए मजबूत होना पड़ेगा। यहां होली, दिवाली सभी भूलना पड़ेगा। जब कहा था कि प्रैक्टिस पर आना है तो क्यों नहीं आई? गुरुजी से माफी मांगी और प्रैक्टिस में जुट गई। उसके बाद अपनी फिक्र करनी बंद कर दी। सारा दिन मिट्टी में प्रैक्टिस करती। अब मिट्टी ही मेरे लिए सनस्क्रीन बन गई थी। मेकअप, लिप्स्टिक लगाना सब बंद हो गया था। शक्ल लड़कों जैसी दिखने लगी। कान टूटने लगे थे और गंदे लगने लगे थे। हाथ खुरदरे हो गए थे। त्वचा लड़कों की तरह दिखने लगी थी। अब मुलायम नहीं रह गई थी। लेकिन सोचती थी- अब जो भी हो, सफल इसी में होना है। कान टूटने की वजह कुश्ती लड़ते वक्त उन पर बहुत रगड़ पड़ती थी। मुझे कानों को शीशे में देखकर बहुत खराब लगता। दर्द होता था, सोने में भी तकलीफ होने लगी थी। मेरे कान से खून आने लगा। वे सूजकर उभरे दिखने लगे थे। एक दिन दर्द से बहुत रोने लगी। उस दिन गुरु जी ने कह दिया- ‘पहलवानी तेरे बस की नहीं, वापस घर चली जा।’ जब गुरुजी ने कहा- पहलवानी मेरे बस की नहीं, तो अंदर से आवाज आई। अब तो हार नहीं मानूंगी। इस तरह दर्द में भी प्रैक्टिस करती रही। धीरे-धीरे शरीर और मन दोनों मजबूत होता गया। अखाड़े में कोई और लड़की नहीं थी। मेरी प्रैक्टिस लड़कों के साथ ही होती थी। अब तक मैं कुश्ती लड़ना सीख गई थी। लड़के मेरे साथ प्रैक्टिस करने से कतराते थे। उन्हें लगता था अगर वे लड़की से हार गए तो उनकी बेइज्जती हो जाएगी। लड़कों के गुरूर का एक किस्सा बताती हूं। एक बार मेरठ में कुश्ती प्रतियोगिता थी। वहां हरियाणा का एक पहलवान आया था। उसने मेरे ऊपर तंज कसा- ‘छोरियों गैल भी जोर हुआ करै क्या।' मतलब कि - 'छोरियों में भी दम होता है क्या।' मैंने सुन लिया। उस वक्त कुछ नहीं बोली। फिर जब दंगल शुरू हुआ तो मेरी कुश्ती उसी से तय हुई। अखाड़े में हम दोनों उतरे। मैं उसके कमेंट कारण गुस्से में भरी थी। सोच रही थी, आज दिखाऊंगी कि लड़कियों में भी जोर होता है। मैंने जोर से उसे लंगड़ी मारी और गिरा दिया। कई बार पटका। इतना कि उसकी हालत खराब कर दी। सोच रही थी अब इसे पता चला होगा कि लड़कियों में भी दमखम होता है। वह सोच रहा था- लड़कियां तो कोमल, कमजोर होती हैं। इस तरह मैं मैच खेलने अक्सर बाहर जाती हूं। कई बार तो महिला टॉयलेट में मेरी बांह पकड़कर बाहर निकाल दिया जाता है। वहां महिलाएं समझ ही नहीं पाती कि मैं लड़की हूं। कद-काठी की वजह से वे मुझे लड़का समझ लेती हैं। अक्सर कोच को बुलाना पड़ता है, तब जाकर बाथरूम जा पाती हूं। इसी तरह जब कहीं आती-जाती हूं तो लोग मेरी कद-काठी देखकर पूछते हैं- लौंडा है या लौंडी..। उन्हें बताना पड़ता है, ‘लड़की हूं।’ उस पर वहां औरतें सीधा मुंह पर बोल देती हैं- बाल नहीं बढ़ाने तुझे? छोटे बाल में तुमसे ब्याह कौन करेगा? उनकी बातों पर गुस्सा तो बहुत आता है, लेकिन कुछ कह नहीं पाती। सच कहूं तो शुरुआत में मुझे जरूर थोड़ा अजीब लगा, लेकिन अब नहीं लगता- अब तो छोटे, टाइट कपड़े पहनना आदत बन चुकी है। दंगल में सभी के सामने कपड़े बदलती हूं। लड़कों के साथ कुश्ती करती हूं। अब सब नॉर्मल लगता है। अब तक तो मैं मेकअप और लड़कियों वाला रंग-ढंग पूरी तरह छोड़ चुकी थी। टी-शर्ट और निक्कर ही पहनती थी। रिश्तेदार घर आते तो कहते- ये तो एकदम ही लड़का हो गई है। रात-रात पता नहीं कहां जाती थी। अखाड़े में लड़कों के साथ प्रैक्टिस करती थी। क्या ही लड़की बची होगी अब। वे पापा से कहते, लड़की से क्यों करवा रहे हो यह सब? शरीर बिगड़ गया तो इससे कौन ब्याह करेगा। घर बैठी रह जाएगी। पापा सब सुनकर चुप रहते थे। उनकी बातों पर सोचती थी, आखिर फिर लोग लड़का-लड़की बराबरी की बात क्यों करते हैं। लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी। बस यही सोचती हूं कि जिसे जैसा सोचना है सोचे। एक दिन जब लोग मेरी सफलता देखेंगे, तब मुझे समझेंगे। सफल होने पर शादी के रिश्तों की लाइन लग जाएगी। और शादी नहीं भी हुई तो क्या हो जाएगा, शादी ही कोई भविष्य नहीं होती। बिना शादी के भी जी लूंगी। हां, जब मेरी शादी को लेकर मेरे मम्मी-पापा को नीचा दिखाया जाता है, तो बहुत गुस्सा आता है। तब सोचती हूं कि जो लड़का मेरे लंबे बालों, गोरे रंग से शादी करना चाहता है, तो फिर उससे शादी करना ही क्यों? जिसे मेरी काबिलियत और तरक्की पसंद हो, वही मुझसे शादी करे। अब तो मुझे टी-शर्ट जीन्स में देखकर सहेलियां भी कहती हैं- थोड़ा सा तो लड़कियों की तरह रह लिया करो। गाउन पहनो, ऊंची हील की सैंडल पहना करो। लेकिन ये सब मुझसे अब नहीं होता। समय की बर्बादी लगती है। सोचती हूं- जींस पहनूं, बालों में हाथ फेरूं और जहां चाहे निकल जाऊं। आखिर कितना समय बच जाता है इससे। नहीं तो बाल संभालने, मेकअप में ही उलझी रहती थी। यह सब करने पर समाज को जो कहना था, कहा ही.. पैसे के लिहाज से सोचें तो भी यह आसान नहीं है। हर दिन 250 ग्राम बादाम, 300 ग्राम मुनक्का, काजू, दो किलो दूध, 250 ग्राम घी हर दिन चाहिए होता है। पापा बहुत पैसे वाले नहीं हैं, लेकिन खर्च कर रहे हैं। हर महीने 30,000 खर्च आता है, पापा से पूछती हूं कैसे कर लेते हो, तो कहते हैं- यह जानना तुम्हारा काम नहीं है, बस तुम जी-जान से पहलवानी करो। अब पापा का सपना है कि मैं अच्छी पहलवान बनूं। देश का नाम रोशन करूं। मेरी बड़ी बहन ने भी मेरे लिए कुश्ती छोड़ी है। दरअसल, वह भी पहलवान बनना चाहती थी। लेकिन पापा ने कहा- किसी एक की ही पहलवान बनाने का खर्च उठा सकता हूं। तुम दोनों तय कर लो कि किसे पहलवान बनना है। उस पर बड़ी बहन ने कहा था- कोई नहीं, इसे ही पहलवान बनाओ, मैं पढ़ाई कर लूंगी। आखिर मेरी बहन ने भी मेरी वजह से अपना सपना छोड़ दिया। अब मैं नाम रोशन करके उसका भी सपना पूरा करना चाहती हूं। इन सबके बीच पापा की मुश्किल बताना चाहती हूं। जब भी बाहर कुश्ती लड़ने जाती हूं तो पापा साथ होते हैं। घर से जाते समय ट्रेन में रिजर्वेशन मिल जाता है, लेकिन आते वक्त जनरल डिब्बे में घुसकर आना पड़ता है। बलिया जिले में नेशनल लेवल की कुश्ती का कंपिटिशन था। वहां मैंने ब्रॉन्ज जीता था। उस दिन वापस आते वक्त मैं पापा के साथ जनरल डिब्बे में घुसकर आई थी। पापा ट्रेन में खड़े होकर आए थे। पापा को इस तरह परेशान देखकर दुख होता है। मेरी वजह से वह भी कितना कुछ झेलते हैं। जरा सोचिए, कोई राज्य सरकार अपनी राष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ ऐसा करती है क्या? उसे तो ऐसी खिलाड़ियों का खर्च उठाना चाहिए। खैर, मैं बहुत खुश हूं अपने कान तुड़वाकर। लड़कों जैसी दिखने वाली शरीर से भी। अब बस ओलंपिक में मेडल लाने की सोच रही हूं। तब लोग नहीं, मेरा खेल बोलेगा। (अंशिका बालियान ने अपने जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए हैं) --------------------------------------------------- 1- संडे जज्बात-लोग भैंस, बुलडोजर आंटी कहते थे:30 की उम्र में 92 किलो वजन था- किडनी खराब होने लगी तो 100 दिन में 20 किलो घटाया मैं कानपुर की रहने वाली आभा शुक्ला हूं। भैंस, मोटी, 45 साल की आंटी, चलती-फिरती बुलडोजर, किसी के ऊपर गिर जाए, तो वो दबकर ही मर ही जाए… कभी ये सारे नाम मेरे ही थे। लोग मुझे इन्हीं नामों से बुलाते थे। मेरे असली नाम ‘आभा शुक्ला’ से नहीं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
‘हमारा दुश्मन हिंदू महिलाओं को फौज में भर्ती कर रहा है। मैं भी उनके खिलाफ लड़ने के लिए महिला जिहादियों को तैयार कर रहा हूं। जमात-उल-मोमिनात की हर जिहादी को मौत के बाद सीधे जन्नत में जगह मिलेगी। उम्मीद है कि जैश-ए-मोहम्मद के मर्द लड़ाके इस नई यूनिट के साथ खड़े होंगे।’ जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर 2025 को पहली बार आतंकियों की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का ऐलान किया था। इसके ठीक 31 दिन बाद 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। 15 लोग मारे गए। NIA ने ब्लास्ट को जैश-ए-मोहम्मद के 'वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा बताया। अब संयुक्त राष्ट्र की UNSC 1267 सैंक्शंस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ब्लास्ट की साजिश जैश ने ही रची थी। इसकी साजिश में जमात-उल-मोमिनात को भी शामिल किया गया था। UNSC की 10 पेज की रिपोर्ट, 95वें पॉइंट में दिल्ली ब्लास्ट का जिक्रदैनिक भास्कर के पास UNSC की रिपोर्ट है। 4 फरवरी को जारी इस रिपोर्ट में 22 अप्रैल, 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी जिक्र है। रिपोर्ट जारी करने वाली कमेटी जैश, ISIS और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों पर नजर रखती है। 95वें पॉइंट में लिखा है कि 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में जैश कमांडर मसूद अजहर भारत में ऐसे कई हमलों की प्लानिंग कर रहा है। इसमें जैश की महिला ब्रिगेड जमात-उल-मोमिनात को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकी मारे जा चुके हैं। आगे पढ़िए, कैसे बनी महिला आतंकियों की नई यूनिट पहलगाम से करीब 5 किमी दूर बायसरन घाटी में आतंकियों ने 26 लोगों को मार डाला था। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें जैश कमांडर मसूद अजहर के परिवार के यूसुफ अजहर, जमील अहमद, हमजा जमील और हुजैफा अजहर समेत 14 लोग मारे गए। इसके बाद मसूद अजहर की एक ऑडियो क्लिप सामने आई थी, जिसमें उसने कहा था कि मेरी बड़ी बहन अबबा बीबी भी हमले में मारी गईं। मैं उनके साथ मिलकर एक महिला ब्रिगेड बनाना चाहता था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत से बदला लेने के लिए आतंकी संगठन जैश का चीफ मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल सैफ ने महिला आतंकियों की भर्ती शुरू की है। इन लड़कियों में ज्यादातर बहावलपुर, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरिपुर और मंसेहरा के मदसरों में पढ़ती हैं। भारत में जमात-उल-मोमिनात का नेटवर्क बढ़ाने और स्लीपर सेल को मजबूत करने का काम सादिया अजहर और अफीरा बीबी को सौंपा गया। सादिया अजहर मसूद अजहर की बहन है। वही जमात-उल-मोमिनात की सबसे बड़ी लीडर है। सादिया का पति यूसुफ अजहर ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था। संगठन में कमांडर की हैसियत रखने वाली अफीरा बीबी मसूद अजहर के भतीजे उमर फारुख की पत्नी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश ने बदले नियमNIA से जुड़े एक सीनियर अधिकारी कहते हैं, ‘भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर और आतंकी ढांचे बर्बाद कर दिए थे। ये कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थी, जिसकी ब्रीफिंग कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने की थी।’ ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाया मसूद अजहर लगातार भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें रच रहा है। भारत की फौज में महिला ऑफिसर्स को देखकर उसने जैश की महिला ब्रिगेड शुरू करने का फैसला लिया। ‘जमात-उल-मोमिनात बनने के बाद लाल किले के पास ब्लास्ट हुआ। NIA ने इस मामले में लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला है कि वह जमात-उल-मोमिनात की कमांडर अफीरा बीबी के कॉन्टैक्ट में थी। उसी ने शाहीन को भारत में महिलाओं को आतंकी ब्रिगेड में शामिल कर फिदायीन बनाने का काम सौंपा था।’ NIA को दिल्ली कार ब्लास्ट केस में जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद के शामिल होने लिंक मिले हैं। इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की डॉक्टर शाहीन सईद सहित डॉ. आदिल और डॉ. मुजम्मिल शकील शामिल हैं। ये भी जैश के नेटवर्क से लगातार संपर्क में थे। यूनाइटेड स्टेट इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के फाउंडर रॉबिन सचदेवा कहते हैं, ‘जैश का इतिहास देखें, तो ये संगठन अब तक महिलाओं को सीक्रेट ऑपरेशन और फिदायीन हमलों में शामिल नहीं करता था। इसकी बजाय उन्हें लोकल सपोर्ट सिस्टम, मैसेज-इंफॉर्मेशन कैरियर और लॉजिस्टिक मैनेजमैंट का काम दिया जाता था।' 'पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद संगठन ने रुख बदला है। बीते एक साल में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें महिला फिदायीन के नाम सामने आए हैं।’ ‘महिलाओं की आतंकी यूनिट, भारत के लिए खतरे की घंटी’ रॉबिन सचदेवा आगे कहते हैं, ‘आतंकी मसूद अजहर ने हाल के दिनों में न सिर्फ खुले तौर पर महिलाओं का आतंकी नेटवर्क बनाया, बल्कि इसका ऐलान भी किया। जमात-उल-मोमिनात ग्रुप भी इसी का हिस्सा है। इसमें बकायदा महिला आतंकियों को कमांडर और कैप्टन जैसी पोस्ट दी गई हैं। इनका मकसद पाकिस्तान सहित भारत की पढ़ी-लिखी भारतीय महिलाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी संगठन में भर्ती करना है। ये भारत के लिए खतरे की घंटी है।’ रॉबिन कहते हैें, ‘दुनियाभर में देखें तो अब तक श्रीलंका में लिट्टे को ही एक्टिव वुमेन टेरर ग्रुप्स बनाने के लिए जाना जाता रहा है। लिट्टे ने सबसे पहले महिलाओं को संगठन में शामिल किया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या जैसी खौफनाक घटना की। धीरे-धीरे उनकी आइडियोलॉजी को बोको-हराम और ISIS जैसे आतंकी संगठनों ने फॉलो किया। इसी लिस्ट में अब जैश की आतंकी यूनिट जमात-उल-मोमिनात का नाम जुड़ गया है।’ दिल्ली ब्लास्ट का जमात-उल-मोमिनात से लिंक कितना खतरनाक जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद्य बताते हैं, ‘दिल्ली ब्लास्ट की जांच में NIA ने जिस सच से पर्दा उठाया है, वो होश उड़ाने के लिए काफी है। अब हमारा सामना सिर्फ मदरसों या गांवों से कट्टरपंथी बनकर आए युवाओं से नहीं है। जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी स्ट्रैटेजी को ISIS के लेवल पर अपग्रेड कर लिया है। ये अब वॉइट कॉलर टेररिज्म बन चुका है।’ ‘जैश का नया डॉक्टर मॉड्यूल, हमारी नाक के नीचे कश्मीर से निकलकर लखनऊ और हरियाणा तक फैल गया। ये इस बात का सबूत है कि अब टारगेट पर पढ़े-लिखे और अच्छा सैलरी पैकेज उठाने वाले लोग हैं। उन्हें इंक्रिपटेड ऑनलाइन चैनल्स के जरिए ब्रेनवॉश कर आतंकी बनाया जा रहा है।’ एसपी वैद्य के मुताबिक, दिल्ली ब्लास्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम डॉ. शाहीन सईद का है। वह मास्टरमाइंड डॉ. आदिल और मुजम्मिल शकील के साथ मिलकर साजिश रच रही थी। इससे जाहिर होता है कि पढ़ी-लिखी महिलाओं में कट्टरपंथ का जहर कितनी गहराई तक जा चुका है। जमात-ए-मोमिनात जम्मू-कश्मीर, यूपी और साउथ के राज्यों में एक्टिव भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं, ‘2019 में हुए पुलवामा अटैक के बाद सुरक्षाबलों ने जैश के आधे से ज्यादा कमांडरों को मार गिराया। ऑपरेशन सिंदूर में भी सेना ने जैश के हेडक्वार्टर समेत बहावलपुर में एक मदरसे को निशाना बनाया, जहां कई आतंकी पनाह लिए हुए थे। ये सब देखकर मसूद अजहर को महिलाओं को मोर्चे पर लाने के लिए मजबूर होना पड़ा।’ ‘जमात-उल-मोमिनात जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए एक्टिव हो रहा है। टेलीग्राम, स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म, VPN और वॉट्सएप ग्रुप्स नेटवर्क के जरिए इस ग्रुप की गतिविधियां फैल रही हैं।’ बड़े मंदिर लश्कर की हिट लिस्ट में, सिक्योरिटी बढ़ाई10 नवंबर को हुए कार धमाके के बाद दिल्ली एक बार फिर हाई अलर्ट पर है। खुफिया एजेंसियों से मिले आतंकी हमले के इनपुट के बाद सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है। लाल किले के आसपास ब्लास्ट के खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने भारत के बड़े धार्मिक स्थलों को हिट लिस्ट में रखा है। सोर्स बताते हैं कि दिल्ली में चांदनी चौक का मंदिर भी आतंकियों के टारगेट पर है। खुफिया एजेंसियों ने इनपुट दिया है कि लश्कर-ए-तैयबा IED ब्लास्ट की कोशिश कर सकता है। आतंकी पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक मस्जिद में 6 फरवरी को हुए विस्फोट का बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं। …………………………….ये खबर भी पढ़िए घाटी में कौन बना रहा कश्मीरी पंडितों की ‘डेथ लिस्ट’, पंडित बोले- हमें भी हथियार दो कश्मीरी पंडितों को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप द रेजिस्टेंस फोर्स यानी TRF ने टारगेट किलिंग की धमकी दी है। लिखा है कि कश्मीरी पंडितों थोड़े फायदे के लिए बलि का बकरा मत बनो। पहले ही देख चुके हो कि इस रास्ते पर चलने का अंजाम जान गंवाना होता है, जैसा राहुल पंडित, माखन लाल बिंद्रू, मोहन लाल और बाकी के साथ हुआ था। इसके बाद कश्मीरी पंडित हथियार और ट्रेनिंग देने की मांग कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें...
अपनी मर्जी से टीवी नहीं देख सकते इस देश के लोग, रिमोट पर भी है सरकारी पहरा!
North Korea TV Restriction: जैसे आप भारत में अपनी मर्जी से टीवी पर पसंदीदा कार्यक्रम देख सकते हैं. उस तरह इस देश में आप बिना सरकार की मर्जी के नहीं देख सकते हैं. यहां टीवी के रिमोट पर भी सरकार का पहरा है.
क्रीट में नाव हादसा : पांच प्रवासियों की मौत, 20 लापता
ग्रीस के सबसे बड़े द्वीप क्रीट के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में शनिवार की सुबह नाव पलटने से पांच प्रवासियों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि हादसे के बाद से करीब 20 लोग लापता हैं
Donald Trump: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ के मसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कल (शुक्रवार) को बड़ा झटका दिया था. ट्रंप की ओर से दुनिया भर देशों पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार देते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति के पास टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है. इसके अगले दिन ट्रंप ने टैरिफ पर एक नया ऐलान कर दिया है.
कुत्ते से करवाता था ये शर्मनाक काम... पुलिस ने सीसीटीवी देख पकड़ी मालिक की चालाकी; लगेगा जुर्माना?
Italy man fined training dog to dump illegal waste: इटली के सिसिली में एक व्यक्ति को अपने कुत्ते को अवैध रूप से कचरा फेंकने की ट्रेनिंग देने के लिए भारी जुर्माने का सामना करना पड़ा है.
लकड़ी की छत, कच्ची और टेढ़ी दीवारें... MBS ने छोटे गांव में क्यों बनवाई मस्जिद, क्या है खास?
सऊदी अरब प्रशासन ने हाल ही में एक मस्जिद का पुनर्निमाण कराया है. इस मस्जिद की दीवारों को कच्चा और बेढंगा सा बनाया गया है, जो अपने आप में कई सवाल खड़े कर रही है, हालांकि इसके पीछे एक बेहद खास वजह भी है. चलिए जानते हैं.
Austria grossglockner mountain death: ऑस्ट्रिया की एक अदालत ने पर्वतारोही थॉमस प्लाम्बरगर को उसकी गर्लफ्रेंड की ठंड से हुई मौत के मामले में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है.
Who is Neal Katyal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है. इस टैरिफ को रद्द करवाने में जिसने अहम भूमिका निभाई उसका ताल्लुक भारत से रहा है.
वे देश जहां रोजा नहीं रखना है 'गुनाह', कोड़े मारने से लेकर देश निकाला तक की है सजा
Ramadan 2026: रमजान का पवित्र महीना चल रहा है. इस महीने में लोग रोजा रखते हैं, मुस्लिमों का ये पवित्र महीना है. कई ऐसे देश हैं जहां पर रोजा न रखने की वजह से सजा मिलती है.
US Tariffs: 18% से घटकर सिर्फ 10% रह गया भारत पर टैरिफ, अमेरिकी कोर्ट के आदेश के बाद आया बड़ा अपडेट
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा था कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। अदालत के इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को नए कानूनी आधार की तलाश करनी पड़ी। इसी क्रम में राष्ट्रपति ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत एक नया वैश्विक टैरिफ आदेश जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश जॉन राबर्ट्स द्वारा लिखे गए 6-3 के बहुमत फैसले में अदालत ने साफ कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं देता। राबर्ट्स ने अपने निर्णय में लिखा, “आज हमारा कार्य केवल यह तय करना है कि आयात को ‘नियंत्रित’ करने की शक्ति क्या टैरिफ लगाने की शक्ति को समाहित करती है। ऐसा नहीं है।”
US सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ट्रंप के ‘आपातकालीन टैरिफ’ रद्द, 6-3 बहुमत से निर्णय
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मध्यावधि चुनावों से पहले बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा राष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को खारिज कर दिया है। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में अदालत ने कहा कि 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
Donald Trump: टैरिफ विवाद के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पटरी पर है और रिश्ते शानदार हैं. उन्होंने कहा कि अंतरिम समझौते में 18% टैरिफ लागू रहेगा, जबकि कुछ सेक्टरों पर 50% तक शुल्क जारी रहेगा.
America Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है. इसी बीच अमेरिका के कांग्रेसी संसद ट्रंप को रोकने की योजना बना रहे हैं. वो मतदान करने वाले हैं.
Trump Tariffs Quashed: अमेरिका की सर्वोच्च अदालत संयुक्त राज्य अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को उनके अधिकार से बाहर बताते हुए रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार संसद का है और अब पहले वसूली गई बड़ी रकम की वापसी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
‘भारत के प्रधानमंत्री के साथ रिश्ते फैंटास्टिक…’ लेकिन 18% टैरिफ अभी भी रहेगा जारी- बोले ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ ट्रेड डील सही दिशा में आगे बढ़ रही है. दोनों देशों के रिश्ते शानदार हैं. फिलहाल 18% टैरिफ लागू रहेगा और समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया कदम उठाया है. उन्होंने दुनिया भर पर 10% का नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. जो करीब 5 महीने तक लागू रहेगा. इस दौरान आगे और सख्त टैक्स लगाने की तैयारी भी की जाएगी.
बांग्लादेश में अब BNP की सरकार है। बीते 18 साल लंदन में रहे तारिक रहमान प्रधानमंत्री हैं। बहुमत से चुनी गई नई सरकार के सामने देश की इकोनॉमी को दोबारा पटरी पर लाने, भारत से रिश्ते सुधारने, अल्पसंख्यकों की हिफाजत करने के साथ ही कट्टरपंथ से निपटने की चुनौतियां हैं। दैनिक भास्कर ने BNP के सेंट्रल कमेटी मेंबर और सांसद डॉ. अब्दुल मोईन खान से बात की। पार्टी और सरकार की पॉलिसी बनाने में उनका अहम योगदान होता है। मोईन खान PM रहमान के करीबी सलाहकार माने जाते हैं। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: तारिक रहमान सरकार के सामने सबसे बड़ी तीन चुनौतियां क्या हैं?जवाब: सरकार के सामने पहली चुनौती इकोनॉमी को सुधारना है। बांग्लादेश से लाखों डॉलर बाहर ले जाए गए। इंडस्ट्री खत्म कर दी गई हैं। कारोबारी सरकार का हिस्सा बन गए। दूसरी चुनौती लोकतांत्रिक ढांचे को बेहतर बनाना है। तीसरी चुनौती संस्थाओं की बहाली करने की है। ब्यूरोक्रेसी से लेकर ज्यूडिशियरी और बैंकिंग सिस्टम तक, सब बहाल करना है। सवाल: बांग्लादेश और भारत ने बीते डेढ़ साल में रिश्तों का खराब दौर देखा है। नई सरकार इस पर क्या करने वाली है?जवाब: अवामी लीग की तानाशाही और गलत नीतियों की वजह से ये हालात बने हैं। बांग्लादेश की विदेश नीति का मूलमंत्र है- दोस्ती सभी के साथ, दुश्मनी किसी से नहीं। BNP इसी पर यकीन करती है। हम आगे भी इसी पॉलिसी को फॉलो करेंगे। विदेश नीति की ताली एक हाथ से नहीं बजती। इसमें दोनों तरफ से गर्मजोशी होनी चाहिए। भारत जैसे पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते इस बात पर निर्भर करते हैं कि भारत ने अपनी पॉलिसी में कैसे बदलाव किए हैं। भारत के नेताओं, फॉरेन और डिफेंस पॉलिसी बनाने वालों को साथ मिलकर बांग्लादेश के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए। मुझे लगता है कि भारत को बांग्लादेश के लिए विदेश नीति में बदलाव करना होगा। उसे समझना होगा कि पिछले डेढ़ दशक में क्या गड़बड़ी हुई है। सवाल: शेख हसीना अब भी दिल्ली में हैं। क्या ये बांग्लादेश-भारत के बीच टकराव की वजह बनेगा?जवाब: निश्चित तौर पर यह मुद्दा है। अगर आप किसी से पूछेंगे कि आपके देश को जिसने बर्बाद किया और वो दूसरे देश में पनाह लिए हुए है, तो ये भावना आनी स्वाभाविक है। सवाल: क्या आप शेख हसीना की वापसी चाहते हैं?जवाब: बिल्कुल। भारत पर निर्भर करता है कि वो क्या करना चाहते हैं। अगर किसी ने 18 करोड़ लोगों के साथ नाइंसाफी की है, तो इंसाफ होना चाहिए। मुझे लगता है कि भारत बांग्लादेश के बारे में अपनी समझ बढ़ाएगा। अगर वे अपनी विदेश नीति की खामियों पर सोचेंगे, तो निश्चित तौर पर कोशिश करेंगे। सवाल: क्या रहमान सरकार हसीना को वापस बांग्लादेश भेजने की मांग करेगी?जवाब: हमारे नेता तारिक रहमान ने कहा है कि हम नफरत की राजनीति नहीं करते हैं। हम ये तय करना चाहते हैं कि इंसाफ हो। बांग्लादेश के लोगों ने इस पर खुद राय बनाई है। इस मामले में कानूनी रास्ते और प्रक्रिया को देखा जाएगा। सवाल: अल्पसंख्यकों पर हाल में बार-बार हमले हुए हैं, क्या कानून व्यवस्था नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती रहेगी?जवाब: बांग्लादेश के लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। वे धार्मिक तौर पर कट्टर हैं, ये कहना सही नहीं होगा। बांग्लादेश में इस्लाम को मानने वाले ज्यादा हैं, लेकिन उनकी सोच हिंदू, क्रिश्चियन, बौद्ध सभी को लेकर खुली हुई है। कुछ लोग धर्म को राजनीति का टूल बनाने की कोशिश करते हैं। सवाल: बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध करने वाली जमात चुनाव हार गई। क्या उनकी राजनीति लोगों को पसंद नहीं आई?जवाब: बांग्लादेश का जन्म लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ हुआ था। हम पाकिस्तान से अलग इसलिए हुए थे क्योंकि तब ईस्ट पाकिस्तान के लोगों को लगा कि पाकिस्तान के लोकतंत्र में उनके लिए जगह नहीं है। हमने आजादी की लड़ाई में हजारों लोगों का खून दिया है। बांग्लादेश के लोगों ने हमेशा सही का साथ दिया है। बांग्लादेश के लोगों ने लोकतंत्र के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। इसलिए लोकतंत्र की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है। सवाल: बांग्लादेश में चुनाव के साथ रेफरेंडम भी हुआ है। संविधान में बदलाव के पक्ष में वोट डाले गए। नई सरकार इसे कैसे आगे ले जाएगी?जवाब: BNP ने रेफरेंडम पर साइन किए हैं। हम धीरे-धीरे इसे लागू करेंगे। विचार ये था कि ऐसे बदलाव किए जाएं कि बांग्लादेश में फिर कभी तानाशाही न आए। सवाल: चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय से सिर्फ 3 सांसद चुनकर आए हैं। 10% आबादी के लिए सिर्फ 3 सीटें?जवाब: बांग्लादेश में रिजर्व सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए हैं। अल्पसंख्यकों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है। हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल नहीं करते। हमारी पहचान धर्म नहीं बल्कि बांग्लादेश की नागरिकता है। मैं माइनॉरिटी शब्द को गरीब लोगों के लिए इस्तेमाल करना पसंद करूंगा। सवाल: आप नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के काफी करीब हैं, उनकी खूबियां क्या हैं?जवाब: वे काफी खुले विचारों के हैं। दूसरे लोगों को सुनना पसंद करते हैं। नए विचारों के लिए खुली सोच रखते हैं। उनकी उम्र करीब 60 साल है, लेकिन उन्हें देखकर नहीं लगता। कई लोग उन्हें युवाओं का लीडर भी कहते हैं। सवाल: तारिक रहमान के बारे में कोई वाकया बताइए, जिससे उनकी शख्सियत के बारे में पता चले?जवाब: तारिक रहमान का तरीका ट्रेडिशनल नहीं है। उसमें नयापन है। एक बार वे रैली में बोल रहे थे, तभी भीड़ में से एक शख्स को बुलाया और सभी के सामने उससे बात की। ये उनकी स्टाइल है। लोगों को ये पसंद आ रही है। सवाल: लोग बांग्लादेश की नई सरकार से क्या चाहते हैं?जवाब: सरकार गरीबों को सपोर्ट करने के लिए होती है। अमीर लोग सरकार से कुछ नहीं चाहते। वे खुद अपना ख्याल रख सकते हैं। ये सिर्फ हमारे देश की बात नहीं है, बल्कि आपके देश में भी यही होता है। लोग सरकार से अच्छा हेल्थ और एजुकेशन सिस्टम चाहते हैं। सवाल: अमेरिका में ट्रम्प सरकार आने के बाद पूरी दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है। अमेरिका, चीन, यूरोप, पाकिस्तान, भारत के बीच बांग्लादेश कैसे तालमेल बिठाएगा?जवाब: बांग्लादेश सभी के साथ दोस्ती चाहता है। ट्रम्प ने ट्रेड को बहुत तवज्जो दी है। भारत-बांग्लादेश के बीच भी ट्रेड अहम मुद्दा है। ट्रेड छोटे देश को दबाने का टूल बन जाता है, तो दिक्कत होती है। अमीर देशों को इससे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन गरीब देशों को परेशानी होती है। अमीर देशों को खुद को प्रायोरिटी पर नहीं रखना चाहिए, बल्कि दुनिया के बारे में सोचना चाहिए। हम सिर्फ किसी एक देश के नागरिक नहीं हैं, बल्कि ग्लोबल सिटीजन हैं। सवाल: सार्क बहुत वक्त से काम नहीं कर रहा है। क्या आप सार्क को फिर से एक्टिव करने की कोशिश करेंगे?जवाब: हमने साउथ एशिया के लिए ही सार्क बनाया था। इसे एक्टिव करेंगे। हम क्षेत्रीय तौर पर एकजुट रहेंगे, तो दुनिया पर ज्यादा असर डाल पाएंगे। क्षेत्रीय एकजुटता से दुनिया के कई देशों ने मजबूत मंच तैयार किए हैं और दूसरे देशों को चुनौती दी है। अगर सार्क अच्छे से काम करता, तो ये दिक्कत शुरू ही नहीं होती। ……………………………बांग्लादेश से ये रिपोर्ट भी पढ़िएअवामी लीग-हिंदुओं के वोट BNP को मिले, हसीना की सरकार गिराने वाले हारे बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए चुनाव में BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठबंधन ने 299 में से 212 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की जरूरत थी। कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन को सिर्फ 77 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। पार्टी सिर्फ 6 सीटें जीत पाई है। पढ़िए पूरी खबर...
Donald Trump Press Confrence: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सुप्रीम कोर्ट की ओर से उनके ग्लोबल टैरिफ को रद्द करने के फैसले के बाद अब व्हाइट हाउस में प्रेस कांफ्रेंस करने जा रहे हैं.
DNA: अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को आज यूएस संसद से बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी संसद ने ट्रंप की ओर से दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को खारिज कर दिया है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला न सिर्फ़ ट्रंप के लिए बड़ा झटका है बल्कि अमेरिका के खजाना पर भी भारी पड़ेगा.
संक्रमित मच्छरों से कटवाया, खतरनाक प्रयोग कर इंसानियत को आपदा से बचाने के लिए दे दी जान
1900 तक, साइंटिफिक सोच बदल गई थी. ब्रिटिश और इटैलियन रिसर्चर्स ने दिखाया था कि एनोफिलीज़ मच्छर मलेरिया फैलाते हैं. वेक्टर से होने वाली बीमारी अब बेतुकी नहीं थी. यह मुमकिन थी. लेज़ियर को लगता था कि फिनले सही हो सकते हैं. 8 सितंबर 1900 को, उन्होंने अपनी पत्नी को लिखा, 'मुझे लगता है कि मैं असली जर्म के निशाने पर हूं.'
Board Of Peace Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग बुलाई गई, हालांकि यह बैठक किसी ड्रामा से कम नहीं रही.
America Military Strike On Iran: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीमित हमला करने की बात कही है. यह स्थिति समझौते के असफल होने पर बन सकती हैं.
Trump Tariff: डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया है. यूएस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टैरिफ इतना बढ़ाने का राष्ट्रपति को अधिकार नहीं है.
दक्षिण कोरिया पर बंदूक रख चीनी इलाके में फाइटर जेट उड़ा रहा था US? क्यों आई डॉगफाइट की नौबत
US China Tension:चीन ने साउथ कोरिया में मौजूद अमेरिकी फौज के लड़ाकू विमानों को चुनौती देने के लिए अपने सिक्स्थ जेन फाइटर जेट का बेड़ा रवाना किया. नीचे अनंत गहराई का समंदर ऊपर आसमान में चीन और अमेरिका के फाइटर जेट, आखिर हुआ क्या था पूरा मामला आइए बताते हैं.
डरावना नहीं इतना खूबसूरत है इस देश का कब्रिस्तान, यूजर्स बोले- पता ही नहीं चल रहा पार्क है या...
New Zealand Beautiful Cemetery: आज हम आपको एक खूबसूरत कब्रिस्तान के बारे में बताने जा रहे हैं. यहां चारों ओर खूबसूरत फूलों के पौधे और हरी घास मौजूद है. जहां बाकी कब्रिस्तान में लोग जाने में भी संकोच करते हैं वहीं इस कब्रिस्तान से आने का मन ही नहीं करेगा. चलिए जानते हैं किस देश में है ये इतना खूबसूरत कब्रिस्तान?
Gemma Doyle:ओनलीफैंस क्रिएटर जेम्मा डॉयल नाम की एक महिला ने इंडोनेशिया के बाली में एक बिकिनी चुराते नजर आई. इस बिकनी की कीमत 30 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बताई जा रही है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद महिला ने माफी मांगी है.
उत्तर कोरिया के तानाशाह ने एक बार फिर पूरी दुनिया को चेतावनी दी है. उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अपनी पार्टी के अहम सम्मेलन से पहले सैन्य ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ा दिया है.
Silicon Valley Techies Stole Google Trade Secrets: सिलिकॉन वैली के 3 इंजीनियरों ने गूगल समेत कई लीडिंग टेक्नोलॉजी कंपनियों के ट्रेड सीक्रेट चुराकर ईरान भेजने की कोशिश की.
यमन में करीब 12 साल बाद एक बार फिर तख्तापलट की आहत है. देश की अस्थायी राजधानी अदन में स्थित अल-माशिक राष्ट्रपति महल के बाहर भारी बवाल देखने को मिला है.
अमेरिका संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार करते हुए दो प्रमुख ठिकानों डिएगो गार्सिया (हिंद महासागर) और RAF फेयरफोर्ड (ब्रिटेन) का इस्तेमाल करना चाहता है। डिएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है और 1970 के दशक से यह ब्रिटेन और अमेरिका का साझा सैन्य अड्डा है।
तारिक रहमान के शपथ ग्रहण के तीन दिन बाद विपक्ष के तीखे सवाल, बीएनपी का भारत के साथ गठजोड़ का आरोप
नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर राजनीतिक संकेत बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की तो राजनीतिक प्रतिरोध किया जाएगा।
ट्रंप ने ताइवान और ईरान पर अमेरिकी मिलिट्री स्ट्रैटेजी बताने से किया इनकार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान या ईरान को लेकर किसी भी संभावित मिलिट्री स्ट्रैटेजी के बारे में बताने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने तेहरान के लिए एक छोटी डेडलाइन तय की और ब्रिटेन के रॉयल फैमिली से जुड़े नए विवाद पर भी बात की
America News: अमेरिका में एक 25 साल के भारतीय को गिरफ्तार किया गया है. इस युवक ने अपने ट्रक से तीन गाड़ियों को टक्कर मार दिया था जिसकी वजह से एक आदमी की मौत हो गई है.
स्पिरिट एयरलाइंस ने रोकी उड़ान, 250 से ज्यादा फ्लाइट्स को किया कैंसिल, एयरपोर्ट पर फंसे पैसेंजर
Spirit Airlines Flight: स्टाफ की कमी से जूझ रही स्पिरिट एयरलाइंस ने सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसिल कर दी है. जिसकी वजह से काफी यात्री फंस गए हैं. साल में दूसरी बार ऐसा हुआ है जब इतने बड़े पैमाने पर एयरलाइंस ने उड़ानों को कैंसिल किया है.
बाल-बाल बचे थे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर, बोइंग के स्टारलाइनर पर NASA का बड़ा खुलासा
NASA ने माना कि बोइंग स्टारलाइनर मिशन के दौरान हालात बेहद गंभीर थे और इसे अब ‘टाइप A’ दुर्घटना के रूप में वर्गीकृत किया गया है. नासा ने माना है कि Sunita Williams के मिशन में थ्रस्टर में आई परेशानी से कोलंबिया मिशन जैसी त्रासदी का खतरा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में आयोजित ‘पीस बोर्ड’ की बैठक में ऐसा बयान दे दिया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया. नेताओं की तारीफ करते-करते ट्रंप ने निजी टिप्पणियां, मजाक और बड़े राजनीतिक दावे किए.
वॉशिंगटन में ‘शांति बोर्ड’ की पहली बैठक, ट्रंप ने दिया चीन-रूस को शामिल होने का न्योता
वॉशिंगटन डीसी में हुई इस उद्घाटन बैठक में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। ट्रंप ने इस मंच को वैश्विक संकटों से निपटने के लिए एक नए बहुपक्षीय तंत्र के रूप में पेश किया और स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि चीन और रूस भी इसमें शामिल हों।
अब खुलेगी UFO और ‘एलियन’ की सच्चाई, ट्रंप ने पेंटागन को दिया रिकॉर्ड जारी करने का आदेश
Area 51: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेंटागन को UFO और एलियन से जुड़े रिकॉर्ड डीक्लासिफाई करने का आदेश दिया है. यह कदम बराक ओबाना की हालिया टिप्पणियों के बाद उठाया गया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए वैश्विक मंच ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने ऑब्जर्वर के तौर पर हिस्सा लेकर कूटनीतिक संतुलन का संकेत दिया है. वॉशिंगटन में 50 देशों की मौजूदगी के बीच भारत ने सदस्यता पर जल्दबाजी नहीं दिखाई. इस कदम को पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति में भारत की रणनीतिक चाल माना जा रहा है. जानें पूरी खबर.
Nigeria News: नाइजीरिया में रोजा न रखने की वजह से 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसमें महिलाएं भी शामिल हैं. इन्हें इस साल रमजान के रोजे के पहले दिन खाना खाते हुए देखा गया था.
भारत-पाकिस्तान का नाम लेकर अचानक NOoooo कहते हुए क्यों चिल्लाए डोनाल्ड ट्रंप?
ट्रंप एक ही बात को कई बार कह चुके हैं. अब पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को फाइटर कहते हुए जोर से बोले- नो..अअअअअ. ट्रंप ने इस दौरान यह भी बताया कि वह भारत और पाकिस्तान पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने के मूड में थे.
पहले नहीं दिया किराया, फिर जड़ दिया ड्राइवर को थप्पड़, सिंगापुर में भारतीय मूल की महिला को जेल
Singapore News: भारतीय मूल की एक महिला को टैक्सी ड्राइवर को थप्पड़ मारने की वजह से जेल हुई है. उसे कोर्ट ने दो हफ्ते की सजा सुनाई है. जानिए आखिर पूरा मामला क्या है.
Iran Nuclear Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते पर 10-15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कड़े परिणामों की चेतावनी दी है. इस बीच ईरान-रूस ने संयुक्त युद्धाभ्यास से तनाव को और बढ़ा दिया है.
नहीं देंगे RAF बेस....ब्रिटेन ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका, ईरान पर हमले से पहले हाथ लगी निराशा
Iran US Tensions: ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है. इसी बीच UK के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने डोनाल्ड ट्रंप को RAF बेस का इस्तेमाल करने से रोक दिया है. जानिए ऐसा क्यों कहा.

