सैन डिएगो में क्रैश हुआ F-35B स्टील्थ फाइटर जेट, जोरदार धमाके के साथ लगी आग
अमेरिका के सैन डिएगो में मिरामार एयर बेस के पास F-35B स्टील्थ फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ये हादसा स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को हुआ।
Spain Unrest: स्पेन में सेना क्यों बुलानी पड़ी; इटली-फ्रांस में कैसी सख्ती, यूरोपीय देशों में क्या हो रहा?---Spain Faces Massive Migrant Crisis as Thousands Enter Ceuta, Italy Suspends Schengen Travel Agreement
ईरान पर नए हमले की तैयारी कर रहा है अमेरिका? WSJ की रिपोर्ट में किया गया बड़ा दावा
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर इस वीकेंड नए सैन्य हमले की तैयारी कर सकता है ताकि तेहरान को अपनी शर्तों पर वार्ता के लिए मजबूर किया जा सके। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से तेल कीमतों में उछाल आया है और क्षेत्रीय संघर्ष गहराने की आशंका बढ़ गई है।
West Asia Tension LIVE: ईरान से जंग में ट्रंप के तेवर और उग्र, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर नई रिपोर्ट में क्या?
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने बलूचिस्तान में हुए दो अलग-अलग हादसों पर गहरी चिंता जताई
सांस्कृतिक बर्बरता: AI को स्मार्ट बनाने की कैसी कीमत? सदियों पुरानी किताबें खरीदकर स्कैन कीं, फिर कर दीं नष्ट--AI Companies Accused of Destroying Rare Books After Scanning to Train Artificial Intelligence Models
Nirmal Purja समेत छह पर्वतारोही पाकिस्तान में Broad Peak पर हिमस्खलन के बाद लापता
(शिरीष बी प्रधान)इस्लामाबाद/काठमांडू, 31 जुलाई नेपाल के अनुभवी पर्वतारोही निर्मल पुर्जा दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक पाकिस्तान की ‘ब्रॉड पीक’ पर हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद अब भी लापता बताए जा रहे छह पर्वतारोहियों में शामिल हैं। हालांकि, बचाव कर्मियों ने शुक्रवार को खराब मौसम के बावजूद चार शव बरामद किए और तलाशी अभियान जारी है। पाकिस्तान की काराकोरम पर्वत शृंखला में के2 के निकट स्थित 8,047 मीटर ऊंची ‘ब्रॉड पीक’ दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी है। इसे पर्वतारोहण की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक माना जाता है। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (एसीपी) के अनुसार, बृहस्पतिवार को लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ पर बर्फीला तूफान आया जिससे 10 सदस्यों वाली पर्वतारोहियों की टीम लापता हो गई। तूफान आने के वक्त यह टीम चोटी पर चढ़ने की कोशिश शुरू कर चुकी थी। एसीपी अध्यक्ष मेजर जनरल इरफान अरशद ने बताया कि शुक्रवार को बचाव अभियान के दौरान चार शव बरामद किए गए। उन्होंने मृतकों में से दो की पहचान ओमान की नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल हारथी और नेपाल के पुर बहादुर गुरुंग के तौर पर की। बाकी दो शवों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। बर्फीले तूफान के बाद बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे ये पर्वतारोही (जिनमें नेपाल के छह, और पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका व चीन के एक-एक सदस्य शामिल हैं) लापता हो गए। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि लापता पर्वतारोहण दल की तलाश के लिए चलाए गए बचाव अभियान में खराब मौसम के कारण गंभीर बाधाएं आ रही हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। पुर्जा और गुरुंग के अलावा अन्य नेपाली पर्वतारोहियों में किली पेम्बा शेरपा, निमा शेरपा, नवांग थिंडू शेरपा और ग्यालु शेरपा हैं। लापता अन्य पर्वतारोहियों में पाकिस्तान के सोहेल सखी, चीन के वांग झोंग और अमेरिका की मैलोरी गीस शामिल हैं। नेपाल पर्वतारोहण संघ के महासचिव राज बहादुर लामा ने बताया कि निर्मल पुर्जा सहित नेपाल के पांच पर्वतारोहियों और पांच विदेशी पर्वतारोहियों का दल बृहस्पतिवार सुबह स्थानीय समयानुसार करीब नौ बजे से लापता है। यह दल लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन की चपेट में आ गया था। बचाव और तलाश अभियान जारी है, लेकिन खराब मौसम के कारण राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नेपाल पर्वतारोहण संघ के पूर्व अध्यक्ष आंग छेरिंग शेरपा के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्र में मौसम अत्यंत खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर उतर नहीं पा रहे हैं। पूर्व गोरखा सैनिक और ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज में रह चुके निर्मल पुर्जा हिमालय की ऊंची चोटियों को फतह करने वाले दुनिया के अग्रणी पर्वतारोहियों में गिने जाते हैं। 2019 में उन्होंने ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के तहत छह महीने से कुछ अधिक समय में 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़कर इतिहास रच दिया था। पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को गंडकी प्रांत के म्यागदी जिले में हुआ था, पर वे चितवन में पले-बढ़े। पुर्जा ने वर्ष 2003 से 16 साल तक सेना में रहे जिसमें से उन्होंने छह साल गोरखा के तौर पर और 10 साल ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज (एसबीएस) के सदस्य के रूप में बिताए। नेपाल के पर्यटन, संस्कृति और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क प्रसाद पौडेल ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि नेपाल सरकार पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा , ‘‘पाकिस्तान में हिमस्खलन और निर्मल पुर्जा निम्स दाई तथा अन्य नेपाली पर्वतारोहियों से संपर्क टूटने की खबरों से मैं बेहद चिंतित हूं।’’पौडेल ने कहा, ‘‘हम पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में हैं और स्थिति की लगातार जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। हमारी संवेदनाएं पर्वतारोहियों और उनके परिवारों के साथ हैं। हम सभी की सुरक्षित वापसी की उम्मीद करते हैं।’’पाकिस्तान का ग्रीष्मकालीन पर्वतारोहण सत्र जून से अगस्त तक चलता है। इस दौरान अक्सर हिमस्खलन और मौसम में अचानक बदलाव जैसी घटनाएं होती रहती हैं, जिससे पर्वतारोहियों के सामने गंभीर जोखिम उत्पन्न हो जाता है। ‘अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान’ ने एक बयान में कहा कि वह तत्काल खोज एवं बचाव अभियान शुरू कराने के लिए सरकारी अधिकारियों के संपर्क में हैं। इसमें कहा गया है कि हेलिकॉप्टर की मदद हासिल करने और उपलब्ध सभी संसाधनों को जल्द से जल्द जुटाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। बयान में कहा गया है, ‘‘क्लब सभी पर्वतारोहियों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित बचाए जाने की प्रार्थना करता है और इस मुश्किल समय में उनके परिवारों तथा अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय के साथ एकजुटता से खड़ा है।
Manipur के Churachandpur में भारी बारिश से अचानक आई बाढ़, एक व्यक्ति लापता
मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ आने से एक व्यक्ति लापता हो गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘न्यू लामका वेंगनुआम साउथ’ का रहने वाला थांगजॉनसन नाम का एक व्यक्ति बृहस्पतिवार शाम लानवा नदी के पानी में बह गया। उन्होंने बताया कि नदी के किनारे तटबंध बनाने का काम जारी था तभी तेज बहाव में बह गई निर्माण सामग्री को वापस पाने की कोशिश करते समय वह भी बह गए। लापता व्यक्ति का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में उन्हें बाढ़ के पानी में बहते हुए देखा जा सकता है। उपायुक्त कृष्णा कुमार ने अचानक आई बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए सबसे अधिक प्रभावित इलाकों जैसे सिएलमैट, लोअर चैपल लेन, हियांगटाम लामका, चिएंगकोनपांग और बेउलालेन का दौरा किया। उपायुक्त ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की, राहत सामग्री का वितरण किया और उन्हें जिला प्रशासन की ओर से हर संभव मदद प्रदान करने का भरोसा दिलाया।
ईरान पर हमला रोकना अब मुश्किल?: अमेरिकी सीनेट में एक वोट से गिरा अहम प्रस्ताव, ट्रंप के पक्ष में गया फैसला---US Senate Rejects Bill to Limit Trump Military Action Against Iran by One Vote
भारत-पाकिस्तान युद्ध नहीं भूल पा रहे डोनाल्ड ट्रंप, इस बार बोले- दोनों चीखने-चिल्लाने लगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया था। ट्रंप ने कहा कि जब उन्होंने 250 फीसदी टैरिफ की धमकी दी तो दोनों नाराज हो गए और खूब चीखे-चिल्लाए।
World News: इस्राइल पर ट्रंप का नया एलान, कहा- नेतन्याहू को बचाने के लिए ICC तक संघर्ष; भारत-PAK का भी जिक्र
‘यूरोप के दरवाजे’ में दाखिल हो रहे अफ्रीकियों का बहा खून, 57 की हो गई मौत; हजारों को लौटना पड़ा
मोरक्को से बड़ी घुसपैठ के बाद स्पेन के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। समुद्री रास्ते से तैरकर करीब 60 हजार लोग स्पेन के स्यूटा पहुंचे और इसके बाद सुरक्षाबलों से मुठभेड़ हो गई। करीब 57 लोगों की जान गई है।
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आज कहानी ऑपरेशन बांग्लादेश की, जिसने पाकिस्तान के टुकड़े कर दिए… साल था 1971 और तारीख 17 जनवरी। सुबह के 8 बज रहे थे। पाकिस्तान के लरकाना ड्रिग झील में दो नाव धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं। पहली नाव में थे तानाशाह राष्ट्रपति याह्या खान और दूसरी नाव में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के फाउंडर जुल्फिकार अली भुट्टो। अचानक बत्तखों का एक झुंड ऊपर उड़ा। याह्या खान ने फायर कर दिया- ‘ठायं, ठायं…।’ निशाना चूक गया। याह्या ने झुंझलाकर पिस्टल नाव के फर्श पर पटक दी। व्हिस्की का ग्लास उठाते हुए कहा- ‘मुजीब क्या समझता है खुद को? असेंबली में बैठकर मुझे ऑर्डर देगा? इतनी औकात हो गई उसकी?’ अब भुट्टो ने अपनी पिस्टल निकाली। एक बत्तख पर निशाना साधा- ‘ठायं।’ बत्तख पानी में गिर पड़ी। भुट्टो ने गहरी सांस लेते हुए कहा- ‘जनरल साहब, आपने इलेक्शन करवाकर मुजीब के हाथ में हुकूमत दे दी।’ याह्या ने गुस्से में कहा- ‘मुझे क्या पता था कि पूरा ईस्ट पाकिस्तान उस काले बंगाली के पीछे खड़ा हो जाएगा’ भुट्टो ने कहा- ‘जनरल साहब…मुजीब को गद्दी नहीं, लाहौर की सलाखें भेंट करो।’ ‘ऐसा किया तो ढाका जल उठेगा।’ याह्या ने कहा। भुट्टो ने पिस्टल में मैगजीन डालते हुए कहा- ‘डेमोक्रेसी सिर्फ गिनती का खेल है साहब, असल हुकूमत बंदूक की नोक से ही चलती है।’ ‘ठायं।’ दोनों नाव से उतरे और अल-मुर्तजा हवेली की तरफ बढ़ गए। ये भुट्टो का खानदानी घर था। रात करीब 10 बजे याह्या खान, भुट्टो और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अब्दुल हमीद एक बंद कमरे में थे। मेज पर पूर्वी पाकिस्तान का नक्शा और फाइलें रखी थीं। जनरल हमीद ने नक्शे पर निशान लगाते हुए कहा- ‘ढाका, चटगांव, सिलहट, खुलना…इन इलाकों को बंद कर दें, तो बंगालियों के पास भागने का रास्ता नहीं बचेगा।’ भुट्टो ने सिगार का धुआं छोड़ते हुए कहा- ‘तो बंद कर दीजिए।’ जनरल हमीद- ‘फौज भेजने के लिए वक्त चाहिए।’ याह्या खान ने व्हिस्की का घूंट भरते हुए कहा- ‘हमीद, हम वक्त जुटा लेंगे। तुम तैयारी करो। मुझे बंगाली नहीं, उनकी जमीन चाहिए। किसी भी हाल में।’ क्या पाकिस्तान अपने ही मुल्क में कत्लेआम मचाने वाला था…? कहानी की शुरुआत होती है दिसंबर 1970 से। पाकिस्तान में पहली बार आम चुनाव हुए। कुल 300 सीटों में से पूर्वी पाकिस्तान के शेख मुजीब-उर-रहमान ने 167 सीटें जीत लीं। पश्चिमी पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो को सिर्फ 86 सीटें मिलीं। मुजीब का प्रधानमंत्री बनना तया था, लेकिन याह्या खान नहीं चाहते थे कि कोई बंगाली सत्ता संभाले। बस यहीं से बैठकों, बहसों और टालमटोल का खेल शुरू हो गया। 12 जनवरी 1971 को याह्या खान ढाका पहुंचे। मुजीब को बहुत समझाया, हर तरह का जोर लगाया, पर बात नहीं बनी। मुजीब अड़े रहे- ‘प्राइम मिनिस्टर पद से कोई समझौता नहीं होगा।’ नाराज याह्या आर्मी हेडक्वार्टर रावलपिंडी लौट गए। ठीक 15 दिन बाद… 27 जनवरी को जुल्फिकार अली भुट्टो, मुजीब को मनाने ढाका पहुंचे। तीन दिन तक वहीं डेरा डाले रहे। बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन सब बेनतीजा रहा। ना मुजीब पीछे हटने को तैयार हुए, ना पूर्वी पाकिस्तान के लोग झुकने के मूड में थे। अब बारूद बिछ चुका था, बस एक चिंगारी की देरी थी। इधर, भारत अपनी आंख-कान खोलकर सबकुछ देख-सुन रहा था। दरअसल, आजादी के बाद से ही भारत को एक चिंता सता रही थी- 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' यानी ‘चिकन नेक’। पश्चिम बंगाल का यह 22 किलोमीटर चौड़ा हिस्सा पूरे पूर्वोत्तर को भारत से जोड़ने वाला अकेला जमीनी रास्ता है। अगर जंग के दौरान पाकिस्तान इस पर कब्जा कर लेता, तो पूर्वोत्तर के सातों राज्य भारत से कट जाते। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तय कर चुकी थीं कि रास्ते का कांटा हटाने का यही मुफीद वक्त है। इसके लिए जरूरी था पाकिस्तान के टुकड़े करना, लेकिन सवाल था- कैसे? इस पूरे प्लान की जिम्मेदारी संभाली RAW ने। RAW के सामने पहला टारगेट था- हवाई रास्ते से पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान पहुंचने वाली फौज और रसद को रोकना। 30 जनवरी को गंगा नाम का एक भारतीय विमान कश्मीर से हाईजैक कर लिया गया। आतंकियों ने विमान को लाहौर ले जाकर आग लगा दी। इंदिरा सरकार ने इस घटना को आधार बनाकर भारत के ऊपर से उड़ने वाले सभी पाकिस्तानी विमानों पर रोक लगा दी। पाकिस्तान समझ रहा था कि हाईजैकर कश्मीरी अलगाववादी हैं, लेकिन असल में वो RAW के डबल एजेंट थे। भारत ने जानबूझकर अपना विमान हाईजैक कराया था। अब पूर्वी पाकिस्तान में फौरन कोई फौजी मदद नहीं पहुंच सकती थी। पाकिस्तान के सामने समुद्र ही एक रास्ता था, जहां भारतीय नौसेना तैनात थी। तभी पाकिस्तान ने एक नई चाल चल दी… फरवरी 1971, शाम का वक्त था और जगह थी कराची। मूंगफली बेच रहे दानिश ने देखा कि दर्जनभर फौजी गाड़ियां एक कतार में एयरपोर्ट की तरफ जा रही हैं। भारी असलहों और हथियारों से लदी हुईं। तभी आसमान में जहाजों की गड़गड़ाहट गूंजी। दानिश ने ऊपर देखा- एक के बाद एक, तीन जहाज एक ही दिशा में उड़ते जा रहे थे। उसका माथा ठनका, ‘कुछ तो गड़बड़ है।’ उसने तुरंत कागज के एक टुकड़े पर कोड वर्ड में कुछ लिखा और उसे मोड़कर मूंगफली के एक खाली छिलके के अंदर ठूंस दिया। फिर स्कूटर स्टार्ट किया और एयरपोर्ट की तरफ निकल पड़ा। कुछ ही मिनटों में वह कराची एयरपोर्ट के एग्जिट गेट के सामने था। वहां रफीक नाम का शख्स पहले से उसका इंतजार कर रहा था। दुआ-सलाम के बहाने दानिश ने मूंगफली का वो पैकेट रफीक के हाथ में थमाया और चुपचाप वहां से निकल गया। रफीक, एयरपोर्ट पर लोडमास्टर का काम करता था। उसने पैकेट खोला। मूंगफली के छिलके से कागज का वो टुकड़ा निकाला, ध्यान से पढ़ा और फिर फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया। अब वो रनवे की तरफ चल पड़ा। वहां उसने जो कुछ देखा, उसका दिमाग प्रेशर कुकर की तरह खौलने लगा। दो दिन बाद… दिल्ली में लोधी रोड़ पर RAW का दफ्तर। एक बंद कमरे में RAW चीफ आरएन काव और डिप्टी चीफ शंकरन नायर बैठे थे। तभी एक अफसर अंदर आया। उसने शंकरन को एक लिफाफा थमाया और चला गया। शंकरन ने लिफाफा खोला। उनकी भौंए तन गईं। तमतमा उठे। तभी RAW चीफ ने पूछा- ‘क्या हुआ?’ शंकरन ने लिफाफा RAW चीफ की तरफ बढ़ाते हुए कहा- ‘पाकिस्तान अपने पैसेंजर प्लेनों में भर-भरकर सैनिक, हथियार और बारूद ईस्ट पाकिस्तान भेज रहा है।’ ‘हमने तो अपनी एयरस्पेस बंद कर रखी है?’ काव ने लिफाफा अपने हाथ में लेते हुए कहा। शंकरन बोले- ‘वे श्रीलंका के कोलंबो में लैंड करके फ्यूल भरवा रहे हैं और वहां से सीधे ढाका। तीन प्लेन पहुंच चुके हैं।’ RAW चीफ ने गहरी सांस ली और कहा- ‘कुछ करना पड़ेगा। कोलकाता में अपने बाजों को एक्टिव करो।’ पाकिस्तानी संसद की बैठक इस्लामाबाद में होती है, लेकिन मुजीब के दबाव में इसे ढाका में करने का फैसला किया गया। 3 मार्च की तारीख तय की गई थी, लेकिन 2 दिन पहले ही बैठक रद्द कर दी गई। फिर क्या था, पूर्वी पाकिस्तान सड़कों पर उतर आया। सरकारी दफ्तर, अदालतें, बैंक सब ठप हो गए। लोगों ने हड़ताल कर दी। इससे पश्चिमी पाकिस्तान में बैठे हुक्मरान आग बबूला हो गए। 3 मार्च की शाम दिल्ली के RAW दफ्तर में एक चिट्ठी मिली। लिखा था- ‘पाकिस्तानी हुकूमत ढाका में दमन करने वाली है। कर्नल मेनन से कहिए कि वे आकर ‘हमारे दोस्तों’ को यहां से ले जाएं।’ कर्नल मेनन, शंकरन नायर का कोड नेम था और हमारे दोस्तों का मतलब था- मुजीब और उनकी पार्टी के नेता। अगले दिन RAW चीफ ने एक सीनियर अफसर पीएन बनर्जी को बुलाया और कहा- ‘आप तुरंत ढाका निकलिए और मुजीब से संपर्क करिए।’ बनर्जी उसी रोज ढाका के लिए निकल गए। 5 मार्च को वे मुजीब से मिले। बनर्जी ने कहा- 'हमारे पास पक्की खबर है। याह्या खान आपको निशाना बनाने वाले हैं। आपको यहां से निकलना चाहिए।’ मुजीब ने कहा- 'मैं मुल्क छोड़कर नहीं जाऊंगा। मैं भगोड़ा नहीं बनना चाहता। मुझे नायक की मौत मंजूर है।’ ‘एक बार ठंडे दिमाग से सोच लीजिए मुजीब साहब।’ बनर्जी ने जोर देकर कहा। मुजीब ने फौरन जवाब दिया- ‘मैं सोच चुका हूं। आप चाहें तो हमारी पार्टी के लोगों को यहां से निकालकर ले जा सकते हैं।’ बनर्जी भारत लौट आए। मुजीब को ये इनकार भारी पड़ने वाला था… इसी बीच याह्या खान ने पूर्वी पाकिस्तान का गवर्नर बदल दिया। उन्होंने अपने सबसे खूंखार कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल टिक्का खान को नया गवर्नर बना दिया। 7 मार्च को टिक्का चुपचाप ढाका पहुंच गए, लेकिन बंगालियों की बगावत जारी रही। चीफ जस्टिस बीए सिद्दीकी ने टिक्का को गवर्नर पद की शपथ दिलाने से इनकार कर दिया। गवर्नर हाउस के नौकर भाग गए। अगली सुबह मुजीब ने ऐलान किया- ‘हर घर में किले बना लो। तुम्हारे हाथ में जो कुछ भी है, उससे दुश्मन का सामना करना है। याद रखो, हम बहुत खून दे चुके हैं, जरूरत पड़ी तो और खून देंगे, लेकिन इंशा अल्लाह, अपने मुल्क को आजाद कराएंगे। जोय बांग्ला।’ 15 मार्च को याह्या खान फिर से ढाका पहुंच गए। इस बार उनके साथ आर्मी चीफ जनरल अब्दुल हमीद भी थे। एक तरफ ढाका में याह्या और मुजीब की मीटिंग हो रही थी, तो दूसरी तरफ चटगांव में पाकिस्तानी जहाजों से गोला-बारूद उतारा जा रहा था। 17 मार्च 1971, रात के 10:00 बजे। ढाका कमांड हाउस सिगार के धुएं से भरा हुआ था। टेबल पर पूर्वी पाकिस्तान का नक्शा रखा था। कोने में व्हिस्की और गिलास। लेफ्टिनेंट जनरल टिक्का खान ने अपनी मूंछों पर हाथ फेरते हुए कहा- ये बंगाली बात से नहीं मानने वाले हैं। मिलिट्री एक्शन की तैयारी करो। आर्मी चीफ अब्दुल हमीद ने सिगार का कश खींचते हुए कहा- ‘इलाका पूरा उबल रहा है, टिक्का। मुजीब का एक इशारा और बंगाली सड़कों पर उतर जाएंगे। हालात बेकाबू हो जाएंगे।’ टिक्का खान ने मेजर जनरल खादिम की तरफ इशारा करते हुए कहा- बगावत की एक चीख भी बाहर नहीं निकलनी चाहिए। सफाया कर दो सबका। खादिम हुसैन ने थोड़ा सोचते हुए कहा- सर, इसके लिए प्लान बनाना होगा। टिक्का खान- तो बनाइए प्लान। मुझे कल सुबह तक ड्राफ्ट चाहिए। कोई रहम नहीं, कोई ढील नहीं। जो बागी है, उसे ढूंढो और खत्म करो। 18 मार्च 1971, सुबह 10 बजे का वक्त। कमांड हाउस में लेफ्टिनेंट जनरल टिक्का खाना, आर्मी चीफ अब्दुल हमीद और मेजर जनरल खादिम बैठे थे। खादिम हुसैन ने नीली पेंसिल उठाई और एक पेपर पर लिखा- ऑपरेशन सर्च लाइट। यानी बगावती बंगालियों को ढूंढों और खत्म करो। ड्राफ्ट पर ऑपरेशन की कार्रवाई का डिटेल्ड प्लान लिखा हुआ था। टिक्का खान ने सिगार का लंबा कश भरते हुए कहा- अब बस बटन दबाने का इंतजार है। वक्त जल्द मुकर्रर होगा। 21 मार्च को भुट्टो भी अपने सलाहकारों के साथ ढाका पहुंच गए। अब राष्ट्रपति याह्या खाना और भुट्टो दोनों ही पूर्वी पाकिस्तान में थे। मुजीब को उलझाए रखने का ये एक बड़ा दांव था। पूर्वी पाकिस्तान की जनता इस खेल को समझ चुकी थी। वहां फौज में भी बगावत की चिंगारी सुलग चुकी थी, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा था। 25 मार्च की शाम 7 बजे राष्ट्रपति याह्या खान चुपचाप कराची के लिए निकल गए। जैसे ही यह खबर फैली, ढाका की सड़कों पर लोग बैरिकेड्स लगाने लगे। पेड़ काटकर रोड ब्लॉक किया जाने लगा। बंगाली समझ चुके थे कि उनपर कहर बरपने वाली है… इधर, पूर्वी पाकिस्तान की फौजी टुकड़ियों में से चुन-चुनकर बंगालियों को अलग कर दिया गया। ताकि विद्रोह की स्थिति में वे एकजुट नहीं हों सकें। हर बैरक में पश्चिमी पाकिस्तान की फौज पहुंच चुकी थी। पैदल सेना के अलावा PT-76 टैंक तैनात थे। शाम साढ़े सात बजे, RAW दफ्तर में लगे खुफिया उपकरणों में कुछ आवाज आने लगीं। अफसरों ने जब डिकोड किया तो पता चला- ‘आज रात याह्या खाना जैसे ही कराची पहुंचेंगे, पूर्वी पाकिस्तान में कत्लेआम शुरू हो जाएगा।’ RAW चीफ ने पूछा- ‘अभी याह्या कहां हैं?’ अफसर ने बताया- ‘सर, कोलंबों में। उनका विमान फ्यूल भरवाने के लिए रुका था।’ रात करीब 8 बजे। RAW दफ्तर में फिर से एक मैसेज पहुंचा- ‘फौज मुजीब के घर पर छापा मारने वाली है। वे मुजीब को कार में बिठाकर ले जाएंगे और रास्ते में उसपर हैंडग्रेनेड फेंक देंगे। इसका दोष बंगालियों पर मढ़ देंगे।’ ढाका में मौजूद RAW के एजेंटों ने फौरन मुजीब से बात की। उनसे कहा कि अभी वक्त है यहां से निकल जाएं। मुजीब ने मना कर दिया। उन्होंने कहा- ‘मैं अपने घर में मरूंगा, तो मेरा खून मेरे लोगों को पवित्र कर देगा।’ 2 घंटे बाद ही फौज ने मुजीब का घर घेर लिया। गोलियां चलने लगीं। मुजीब ने पत्नी और बच्चों को ड्रेसिंग रूम में धकेल दिया। जब गोलियां उनके सिर के ऊपर से सनसनाते हुए गुजरने लगीं, तो वे फर्श पर लेट गए। जैसे ही दरवाजा तोड़कर फौज उनके घर में घुसी, मुजीब हाथ हवा में उठाए ड्रेसिंग रूम से बाहर आ गए। पत्नी और बच्चों को अलविदा कहने के बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया। इधर, दिल्ली में RAW की कोर टीम मुजीब से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बात नहीं हो पा रही थी। उस रात RAW का पूर्वी पाकिस्तान के साथ कम्युनिकेशन पूरी तरह से ठप हो गया था। अचानक RAW को एक इनपुट मिला। ये इनपुट कराची से एजेंटों ने ISI के रेडियो मैसेज इंटरसेप्ट करने के बाद भेजा था। वो इनपुट था- ‘बड़ी चिड़िया पिंजरे में है। बाकी घोंसले में नहीं हैं। दोहराता हूं, बड़ी चिड़िया पिंजरे में है।’ RAW अफसर ने कहा- ‘बड़ी चिड़िया मतलब मुजीब गिरफ्तार हो चुके हैं। बाकी घोंसले में नहीं हैं, मतलब अवामी लीग के नेता भाग चुके हैं।’ इधर, पाकिस्तानी फौज ने कत्लेआम मचाना शुरू कर दिया। बंगालियों को ढूंढ-ढूंढकर मारा जा रहा था। फिर उनके घरों में आग लगा दी जा रही थी। एक महिला, पति के साथ कोने में दुबकी हुई थी। फौजी उसके पति को घीसटते हुए बाहर ले जाने लगे। महिला ने पति का हाथ पकड़ लिया। वह चीखने लगी- ‘कहां ले जा रहे हो। छोड़ो इसे।’ फौजी ने जोर से लात मारी। महिला दूर जा गिरी। फौजी महिला पर झपट पड़ा। उसके कपड़े फाड़ दिए। पति के सामने ही महिला से गैंगरेप किया गया। यह सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं थी, उस रात हर घर में ऐसा ही कोहराम मचा था। फौजी घरों में घुसकर 15-20 साल की लड़कियों को उठा ले गए। उन्हें बैरकों में रखा गया और रात-दिन उनके साथ रेप हुआ। यह सिलसिला महीनों चलता रहा। उस रात जुल्फिकार अली भुट्टो ढाका में ही थे। वे शेरेटन होटल की खिड़की से शहर को जलते हुए देख रहे थे। खुशी से सिगार पी रहे थे। हर रोज हजारों लोग मारे जाने लगे। लाखों लोग भागकर भारत के पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, असम, बिहार जैसे राज्यों में शरण लेने लगे। ये कत्लेआम, बंगालियों के साथ-साथ भारत के लिए भी मुसीबत बनता जा रहा था। इसी दौरान, 30 मार्च को अवामी लीग के कुछ नेता दिल्ली पहुंचे। RAW के जरिए उनकी मुलाकात इंदिरा गांधी से हुई। इन नेताओं ने इंदिरा से पूर्वी पाकिस्तान सीमा पर एक मुक्त क्षेत्र बनाने की मांग की। इंदिरा ने फौरन हामी भर दीं। 4 अप्रैल 1971 को, पूर्वी पाकिस्तान के फौजियों ने अपना अलग गुट बना लिया। 10 अप्रैल को अस्थाई सरकार की घोषणा कर दी गई। मुजीब-उर-रहमान को राष्ट्रपति, सैयद नजरुल इस्लाम को उपराष्ट्रपति और ताजुद्दीन अहमद को प्रधानमंत्री बनाया गया। RAW की मदद से यह सरकार कोलकाता से चल रही थी। इस बीच, इंदिरा ने असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल का दौरा किया। नरसंहार की रिपोर्टों से वे इतनी दुखी थीं कि बहुत मुश्किल से बोल पा रही थीं। उनके मन में कुछ ऐसा चल रहा था, जिससे पाकिस्तान का भूगोल बदलना तय था। दिल्ली लौटकर उन्होंने कैबिनेट की बैठक बुलाई। विदेश मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह, रक्षा मंत्री जगजीवन राम, वित्त मंत्री यशवंतराव चव्हाण और आर्मी चीफ सैम मानकशॉ बैठक में मौजूद थे। इंदिरा बेहद परेशान और गुस्से में थीं। उन्होंने कुछ फाइलें बढ़ाते हुए सेना प्रमुख से कहा- ‘सैम देखो इसे। किस तरह से लाखों शरणार्थी भारत आ रहे हैं। आप इस बारे में क्या कर रहे हैं?’ सेना प्रमुख ने तुरंत जवाब दिया- ‘कुछ भी नहीं, इसमें मैं क्या कर सकता हूं?’ इंदिरा ने सख्त लहजे में कहा- ‘आप कुछ क्यों नहीं करते?’ सैम- ‘आप मुझसे क्या चाहती हैं?’ ‘सैम, मैं चाहती हूं पूर्वी पाकिस्तान में आर्मी उतार दो।’ इंदिरा ने कहा। सैम हैरान रह गए। उन्होंने कहा- ‘क्या आप जंग चाहती हैं?’ इंदिरा ने झट से कहा- ‘मुझे नहीं पता, यदि यह जंग है तो जंग ही सही।' सैम ने कहा- 'क्या आपने बाइबल पढ़ी है?' इंदिरा ने कुछ नहीं कहा। तभी विदेश मंत्री बोल पड़े- ‘बाइबल से क्या मतलब है आपका?’ सैम ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘बाइबल के पहले चैप्टर में लिखा है- वहां प्रकाश हो जाए, तो वहां प्रकाश हो गया। ठीक उसी तरह आप चाहते हैं कि वहां जंग हो जाए और जंग हो गई। मैं बिल्कुल तैयार नहीं हूं। सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे। सैम ने फिर कहा- ‘15-20 दिन में मानसून शुरू हो जाएगा। पूर्वी पाकिस्तान में नदियां सागर बन जाएंगी। आप एक किनारे से दूसरे किनारे को भी नहीं देख पाएंगे।’ रक्षा मंत्री जगजीवन राम ने कहा- ‘सैम प्लीज, मान जाओ।’ सैम ने कहा- ‘मैंने अपना मत दे दिया। प्रधानमंत्री मुझे आदेश दे सकती हैं, लेकिन हार तय है।’ इंदिरा का चेहरा लाल हो गया। उन्होंने कहा- ‘हम चार बजे फिर से कैबिनेट में मिलते हैं।’ सभी उठकर जाने लगे। जैसे ही सैम अपनी कुर्सी से उठे, इंदिरा बोल पड़ीं- ‘आर्मी चीफ बैठ जाइए।’ सैम ने कहा- ‘क्या आप चाहती हैं कि मैं स्वास्थ्य के आधार पर इस्तीफा दे दूं?’ पाकिस्तान के दो टुकड़े कैसे हुए, पूरी कहानी कल यानी रविवार को दूसरे एपिसोड में पढ़िए…***** रेफरेंस : 1. The Kaoboys of RAW: Down Memory Lane : By B. Raman 2. The War That Made RAW : By Anushka Nandakumar Sandeep Saket 3. Field Marshal Sam Manekshaw : By Maj Gen Shubhi Sood 4. A Stranger in My Own Country : By Maj. Gen. Khadim Hussain Raja
Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन टकराव कब थमेगा; जेलेंस्की ट्रंप से क्या बोले, दोनों के बीच मस्क का जिक्र कैसे?---Zelenskyy Seeks Trump Help to Secure Elon Mus Approval for Starlink Use in Strikes Inside Russia
'टैरिफ धमकी से टला भारत-पाक परमाणु युद्ध', 'ऑपरेशन सिंदूर' पर ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टालने में अपनी भूमिका का दावा किया है. उन्होंने कहा कि उनके कूटनीतिक दबाव और टैरिफ की धमकी से होने जा रहा युद्ध रुक गया. ट्रंप ने दावा किया कि इसी तरह उन्होंने 5 युद्ध रोक दिए.
रूसी सेना में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी, 139 को मिली रिहाई : विदेश मंत्रालय
भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि अब तक 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से मुक्त कराया जा चुका है और बाकी बचे लगभग 24 भारतीयों की रिहाई के लिए प्रयास जारी हैं।
ब्रॉड पीक में हिमस्खलन: 4 पर्वतारोहियों की मौत, निम्स दाई समेत 6 लापता
पाकिस्तान की ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन में 4 पर्वतारोहियों की मौत हो गई है, जबकि 6 अन्य लापता हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में यशवीर सिंह ने आखिरी थ्रो में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर कांस्य पदक जीत लिया।
गाजा में अमेरिका की 15 सूत्रीय योजना: ट्रंप का दावा- हथियार डालेगा हमास, क्या इस्राइल अब छोड़ देगा गाजा पट्टी?---Trump 15-Point Gaza Peace Plan: Hamas Agrees to Disarm, Will Israel Withdraw from Gaza Strip?
Neeraj Chopra CWG 2026: भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में नीरज चोपड़ा समेत तीन भारतीय, कितनी दूर फेंका जैवलिन?
नेपाल में हिंसा के बाद जबरदस्त तनाव, जानिए कैसे फैला पूरा विवाद
नेपाल के सुनसरी में भड़की सांप्रदायिक हिंसा अबकई शहरों तक फैल चुकी है. कई इलाकों में तोड़फोड़, पथराव और पुलिस से झड़प की घटनाएं देखने को मिली हैं.आधे दर्जन शहरों में कर्फ्यू का आदेश जारी किया गया. वहीं, अब तक तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है.
PoJK में पाकिस्तान के अत्याचारों की जांच कराए विश्व समुदाय, भारत ने की अपील
नई दिल्ली। भारत ने विश्व समुदाय से पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तान की गतिविधियों की जांच करने और वहां किए जा रहे अत्याचारों के लिए उसे जवाबदेह ठहराए जाने की अपील की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकार वार्ता में कहा कि मीडिया जगत को भी पता है कि कैसे पाकिस्तानी […]
2026 में अमेरिका से अब तक 2,273 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया: विदेश मंत्रालय
भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग स्पष्ट करते हुए कहा कि साल 2026 में अब तक अमेरिका से 2,273 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा गया है।
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
US Immigration Fraud: भारतीय वकील Suraj Raj Singh पर 4 करोड़ का जुर्माना, फर्जी Asylum आवेदन का आरोप
अमेरिका में इमिग्रेसन मामलों से जुड़े एक भारतीय मूल के वकील पर गंभीर आरोप लगने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने अपने कई मुवक्किलों की ओर से कथित रूप से गलत और भ्रामक शरण आवेदन दाखिल किए। इस मामले में अब उनके खिलाफ करोड़ों रुपये के बराबर का नागरिक जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि मामले की कानूनी सुनवाई अभी जारी है और अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों द्वारा लिया जाना बाकी है। मौजूद जानकारी के अनुसार, भारतीय मूल के आव्रजन वकील सूरज राज सिंह अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में इमिग्रेसन से जुड़े मामलों की पैरवी करते हैं। बताया गया है कि उन्होंने मुख्य रूप से भारतीय मूल के लोगों के लिए शरण से संबंधित आवेदन तैयार किए और उन्हें अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया। अब अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग और आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी ने उनके खिलाफ नागरिक दंड की कार्रवाई शुरू की है। अधिकारियों का आरोप है कि सूरज राज सिंह ने 54 अलग-अलग इमिग्रेसन मामलों में कुल 118 कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर दाखिल किए। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कई आवेदनों में इस्तेमाल की गई भाषा, घटनाओं का विवरण और तथ्यों का उल्लेख लगभग एक जैसा था। यहां तक कि अलग-अलग आवेदकों द्वारा कथित उत्पीड़न की कहानी भी काफी हद तक समान पाई गई, जिससे अधिकारियों को दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह हुआ है। बता दें कि इन्हीं आरोपों के आधार पर इमिग्रेसन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी ने सूरज राज सिंह पर अधिकतम 4 लाख 70 हजार 584 अमेरिकी डॉलर का नागरिक जुर्माना लगाने की मांग की है। भारतीय मुद्रा में इसकी अनुमानित राशि लगभग 4 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। हालांकि यह प्रस्तावित दंड है और अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। गृह सुरक्षा विभाग के महाधिवक्ता जेम्स पर्सिवल ने कहा कि कथित रूप से फर्जी शरण आवेदन केवल आव्रजन व्यवस्था को कमजोर नहीं करते, बल्कि इससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों के मामलों में भी देरी होती है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों के कारण गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान आव्रजन नियमों के दुरुपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है और इस तरह के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि गृह सुरक्षा विभाग ने बताया है कि यह कार्रवाई मई 2026 में जारी उस निर्देश के तहत की जा रही है, जिसमें कथित फर्जी शरण दावों पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। विभाग का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य आव्रजन प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और नियमों के दुरुपयोग को रोकना है। यह भी उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में यह दूसरा बड़ा मामला है, जिसमें किसी आव्रजन वकील के खिलाफ दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी को लेकर नागरिक दंड की कार्रवाई की गई है। इससे पहले जून 2026 में भारतीय मूल के एक अन्य आव्रजन वकील विनोद दोड्डमणि को भी कथित रूप से फर्जी शरण आवेदन दाखिल करने के आरोप में 2 लाख 55 हजार अमेरिकी डॉलर से अधिक के प्रस्तावित जुर्माने का नोटिस जारी किया गया था। मौजूद जानकारी के अनुसार, सूरज राज सिंह के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। फिलहाल संबंधित एजेंसियां मामले की जांच और सुनवाई कर रही है।
अगस्त से और मजबूत होगा अल नीनो, बढ़ेगी गर्मी और बदलेगा बारिश का पैटर्न
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने 2026 के अगस्त से अक्टूबर के बीच प्रबल अल नीनो की संभावना जताई है, जिससे वैश्विक तापमान में वृद्धि और वर्षा के असामान्य पैटर्न देखने को मिल सकते हैं.
'भारतीय नाविकों पर न हो हमला', जयशंकर की ईरान को दो टूक
इरानी विदेश मंत्री अराघची के साथ बातचीत से पहले एस. जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के सामने ब्लैक सी में कमर्शियल शिपिंग और भारतीय नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई थी.
बीते समय की जलवायु के हिसाब से सड़कें क्यों बना रहा है जर्मनी?
गर्मी से जर्मनी के ऑटोबान हाईवे भले ही टूटने लगे हों, लेकिन वहां की सरकार अब भी पुराने मौसम के हिसाब से ही सड़कें बना रही है. इंजीनियरों को अच्छी तरह पता है कि इस समस्या को हल कैसे किया जा सकता है, तो फिर देरी क्यों
London में चीन के विवादित Super Embassy निर्माण को मिली अदालत से मंजूरी
(अदिति खन्ना)लंदन, 31 जुलाई ब्रिटेन के ‘टावर ऑफ लंदन’ के पास चीन के विवादित नये ‘सुपर दूतावास’ के निर्माण का रास्ता शुक्रवार को इंग्लैंड उच्च न्यायालय में कानूनी बाधा दूर होने के बाद साफ हो गया। ब्रिटेन की राजधानी में चीन के स्वामित्व वाली रॉयल मिंट कोर्ट साइट पर रहने वाले लोगों के एक संगठन ने इस विवादित परियोजना के लिए ब्रिटेन सरकार द्वारा दी गई निर्माण अनुमति को कानूनी चुनौती देने के लिए हजारों पौंड की राशि जुटाई थी। रॉयल मिंट कोर्ट रेजिडेंट्स एसोसिएशन (आरएमसीआरए) ने इस साल की शुरुआत में आवास, समुदाय और स्थानीय सरकार मंत्रालय तथा ‘लंदन बरो ऑफ टावर हैमलेट्स’ द्वारा लिये गए फैसले की न्यायिक समीक्षा का अनुरोध किया था। रॉयल मिंट कोर्ट रेजिडेंट्स एसोसिएशन इस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों और व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करता है। अदालत की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस नथाली लीवेन और लॉर्ड जस्टिस जेम्स डिंगेमन्स ने कहा कि इसमें ‘कोई संदेह नहीं’ है कि सरकार ने इस बात को ध्यान में रखा था कि निर्माण अनुमति चीन सरकार द्वारा मांगी गई थी। उन्होंने फैसला दिया कि इस प्रक्रिया के दौरान निवासियों के संगठन के साथ ‘कोई अन्याय नहीं’ हुआ। एसोसिएशन ने कहा कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेगा और इस सप्ताह उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए जुटाए गए 2,20,000 पौंड से अधिक की राशि में और बढ़ोतरी के लिए लोगों से समर्थन मांगना जारी रखेगा। एक प्रवक्ता ने कहा, “एसोसिएशन हमेशा से इस मामले को उच्चतम न्यायालय तक ले जाने के लिए तैयार रहा है।”उन्होंने कहा, “मकसद अब भी वही है। हम इस विशाल दूतावास से हमारे निवासियों के सामने उत्पन्न होने वाले गंभीर और अनसुलझे सुरक्षा जोखिमों को स्वीकार नहीं कर सकते। साथ ही, हम अपने ऐतिहासिक इलाके को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के यूरोपीय शक्ति केंद्र में बदलने की अनुमति नहीं देंगे।’’प्रवक्ता ने कहा, “हमने साबित कर दिया है कि जब हम एकजुट होकर खड़े होते हैं, तो हम दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों को भी चुनौती दे सकते हैं। अब हमें इस लड़ाई के अगले चरण में ले जाने की जरूरत है।”चीन ने 2018 में इस ऐतिहासिक स्थल को 22.5 करोड़ पौंड में खरीदा था और इसके बाद स्थानीय ‘टावर हैमलेट्स काउंसिल’ के पास इस जगह को लंदन में अपने मौजूदा दूतावास से कहीं बड़ा दूतावास बनाने की योजना पेश की थी। वर्तमान दूतावास बेकर स्ट्रीट के पास पोर्टलैंड प्लेस में है।
Sri Lanka 2019 ईस्टर संडे हमले में पूर्व पुलिस प्रमुख और नौकरशाह को मौत की सजा
श्रीलंका पुलिस के पूर्व प्रमुख पुजित जयसुंदरा और रक्षा मंत्रालय के तत्कालीन शीर्ष नौकरशाह हेमासिरी फर्नांडो को 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमले के मामले में शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई गई। इस हमले में 270 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उच्च न्यायालय ने दोनों पूर्व अधिकारियों को पहले से मिली खुफिया चेतावनियों पर कार्रवाई नहीं करने का दोषी माना। अदालत ने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई की जाती, तो इन हमलों को रोका जा सकता था। पुलिस के मुताबिक, 21 अप्रैल 2019 को गिरजाघरों और महंगे होटलों पर हुए सिलसिलेवार आत्मघाती बम धमाकों में 279 लोगों की मौत हुई थी तथा मरने वालों में 45 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। जयसुंदरा और फर्नांडो को 2019 में गिरफ्तार किया गया था। चार महीने तक हिरासत में रहने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। नवंबर 2021 में दोनों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे और उन पर स्थानीय जिहादी हमले की साजिश रचने की भारतीय एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी की अनदेखी करने का आरोप था। उच्च न्यायालय ने फरवरी 2022 में दोनों को बरी कर दिया था और उनके खिलाफ लगाए गए सभी 855 आरोप खारिज कर दिए थे। नवंबर 2024 में अटॉर्नी जनरल द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले की फिर से सुनवाई शुरू हुई। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि पिछली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया था। न्यायमूर्ति प्रियंथा लियानागे और न्यायमूर्ति तिलकरत्ने बंडारा ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए कहा कि खुफिया जानकारी की अनदेखी के कारण 268 लोगों की मौत हुई और 586 लोग घायल हुए। पीठ ने कहा कि जयसुंदरा नागरिकों की जान की रक्षा करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे। तीन सदस्यीय पीठ के न्यायमूर्ति विराज वीरसूरिया ने इससे अलग फैसला दिया और दोनों को बरी कर दिया था। जयसुंदरा 150 से अधिक वर्षों के इतिहास में श्रीलंका पुलिस के सबसे वरिष्ठ अधिकारी बन गए, जिन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ा और दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई गई।
ट्रंप ने बताया हमास डालेगा हथियार, लेकिन इसराइल ने रखी ये शर्त - BBC
ट्रंप ने बताया हमास डालेगा हथियार, लेकिन इसराइल ने रखी ये शर्त BBC 'अगर गाजा से इजरायली सेना वापस नहीं बुलाई तो ट्रंप...', US की नेतन्याहू को सीधी वॉर्निंग AajTak ट्रम्प का दावा- हमास-इजराइल में शांति समझौता: हमास हथियार छोड़ेगा, इजराइली सेना पीछे हटेगी; नई फिलिस्तीनी स... Dainik Bhaskar हमास ने हथियार छोड़ने के समझौते पर जताई सहमति DW.com गाजा में लौटेगी शांति? डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, हथियार छोड़ने को तैयार हमास, International Hindi News Hindustan
EU ने AI कंपनियों पर निगरानी के लिए बनाई नई टीम, ब्रसेल्स में कार्यालय का विस्तार
दुनिया भर की एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) ने शुक्रवार को एक नयी टीम का गठन किया। दुनिया भर में तेजी से बढ़ती एआई तकनीक से लोगों, राजनीति और अर्थव्यवस्था पर मंडराते खतरों को लेकर चिंताएं बढ़ गयी हैं। ईयू का यह दल नए नियमों के उल्लंघन के मामलों पर नजर रखेगा। इसमें यौन सामग्री का प्रकाशन, फर्जी फोटो-वीडियो और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर साइबर खतरे शामिल हैं। जैसे ही इस संगठन का एआई कानून लागू होगा, एआई कंपनियों के लिए यह अनिवार्य हो जाएगा कि वे उपभोक्ताओं को लेबल या डिजिटल वाटरमार्क के जरिए स्पष्ट रूप से बताएं कि तस्वीर या सामग्री एआई द्वारा बनाई गई है। ईयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे नियम लागू हो रहे हैं, हम एक ऐसे एआई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं जिसे लोग समझ सकें, जिस पर भरोसा कर सके और जिसके लाभ पूरे समाज में साझा हों।’’ईयू अतिरिक्त 38 कर्मियों के साथ ब्रसेल्स में अपने एआई कार्यालय का विस्तार कर रहा है, जो नयी कंपनियों से लेकर ओपेनएआई और डीपसीक जैसी अमेरिकी और चीनी तकनीकी दिग्गजों तक की निगरानी करेगा।
Nepal के Saptari में सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन ने लगाया अनिश्चितकालीन Curfew
(शिरिष बी प्रधान)काठमांडू, 31 जुलाई नेपाल के अधिकारियों ने सुनसरी जिले में हाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में प्रदर्शन शुरू होने के बाद शुक्रवार को भारत की सीमा से लगे सप्तरी जिले के कुछ हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तनावपूर्ण स्थिति पर गहरी चिंता जताई तथा लोगों से शांति, एकता एवं संयम बनाए रखने की अपील की। नेपाल पुलिस ने एक बयान में बताया कि मधेश प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने में कथित रूप से शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, इन आठ लोगों में से पांच को सिरहा और तीन को धनुषा से गिरफ्तार किया गया। सप्ताहांत में कोशी प्रांत के सुनसरी में सांप्रदायिक झड़पें शुरू होने के बाद से नेपाल के कई जिलों में तनाव बना हुआ है। तनाव के कारण अधिकारियों ने कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू की है तथा सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री शाह ने मधेश प्रांत का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं के साथ शुक्रवार को बैठक की। बैठक में महंत ठाकुर, राजेंद्र महतो, सीके राउत, प्रभु शाह और समीम अंसारी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शाह ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से जुड़े मधेश क्षेत्र के सांसदों से भी मुलाकात की। बैठक में मधेशी लोगों की आजीविका और वहां जारी विकास एवं निर्माण कार्यों पर चर्चा की गई। सप्तरी जिला प्रशासन कार्यालय ने एहतियाती कदम के तौर पर राजबिराज नगरपालिका के कुछ हिस्सों में सुबह आठ बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया। यह फैसला सांप्रदायिक झड़पों के विरोध में कुछ समूहों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के बाद लिया गया। इस नये आदेश के बाद अब चार जिलों में कर्फ्यू लागू हो गया है। नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में भारत की सीमा से लगे सुनसरी, धनुषा और सिरहा जिलों के कुछ हिस्सों में पहले से ही कर्फ्यू लागू है। अधिकारियों को तनाव को नियंत्रित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। बीते रविवार को दो धार्मिक समुदायों के कार्यक्रमों के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षा कर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। हिंसा उस समय शुरू हुई, जब अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे दोनों समुदायों के लोगों के बीच लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे लगाने को लेकर विवाद हो गया। बातचीत के दौरान हुई बहस ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। बृहस्पतिवार को हिंसा मधेश प्रांत तक फैल गई, जहां सिरहा जिले में हुई झड़पों में एक नाबालिग की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सुनसरी में हुई हिंसा में घायल एक व्यक्ति की कोशी प्रांत में मौत हो गई। सहायक मुख्य जिला अधिकारी होम प्रसाद घिमिरे ने बताया कि इस बीच, सीमा से लगे सरलाही जिले की जिला सुरक्षा समिति ने फैसला लिया कि सीमा पार से नेपाल में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा।
Algeria में भीषण Bus Accident: गहरी खाई में बस गिरने से 25 की मौत, 44 घायल
अल्जीरिया में शुक्रवार को एक बस दुर्घटना में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि 44 घायल हो गए। अल्जीरिया के नागरिक सुरक्षा विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। बस यात्रियों को सेतीफ से अल्जीरिया की राजधानी अल्जीयर्स ले जा रही थी। बस अल्जीयर्स से लगभग 50 किलोमीटर दूर एल कर्मा क्षेत्र में सड़क से फिसलकर एक गहरी खाई में जा गिरी। इस घटना में 25 लोगों की मौत हो गई और 44 घायल हो गए। घटनास्थल पर बचाव दल मौजूद थे और एंबुलेंस के माध्यम से लगातार घायलों को नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा था। सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अल्जीरिया के राष्ट्रपति अब्देलमजीद तेब्बौने ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। पंद्रह अगस्त 2025 को अल्जीयर्स में एक सार्वजनिक परिवहन बस पुल के सुरक्षा अवरोधक को तोड़ते हुए नीचे नदी में जा गिरी थी। इस नदी में शहर का सीवेज (मलजल) प्रवाहित होता है। उस दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हुई थी और 21 लोग घायल हुए थे।
कुलगाम में आतंकी हमला, गैर-कश्मीरियों को मारी गोली, 1 की मौत - ABP News
कुलगाम में आतंकी हमला, गैर-कश्मीरियों को मारी गोली, 1 की मौत ABP News J-K: कुलगाम में आतंकियों ने दो गैर-कश्मीरी मजदूरों को मारी गोली, एक की मौत AajTak कश्मीर में टारगेट किलिंग में एक की हत्या: आतंकवादियों ने कुलगाम में मजदूरों पर फायरिंग की, एक घायल, सर्च ऑप... bhaskar.com जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने बरसाईं गोलियां, एक की मौत, National Hindi News Hindustan जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में 'टारगेट किलिंग': आतंकियों की फायरिंग में एक गैर-स्थानीय मजदूर की मौत, दूसरा गंभीर Amar Ujala
भारत बॉर्डर केस: बम भोले बोलते ही नेपाल में हो गया बवाल
Nepal Violence: नेपाल के सुनसरी जिले से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा अब कई शहरों तक फैल चुकी है. कई इलाकों में कर्फ्यू लागू है, नेपाली सेना तैनात है और हेलिकॉप्टर से निगरानी की जा रही है. हिंसा में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है.इस बीच भारत-नेपाल सीमा से लगे बिहार के सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आने-जाने वाले लोगों की सघन जांच की जा रही है.
PoJK में चुनाव पर भारत सख्त! पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, बर्बरता और अधिकारों के मुद्दे पर उठाए सवाल
PoJK में चुनाव पर भारत सख्त! पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, बर्बरता और अधिकारों के मुद्दे पर उठाए सवाल
सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहा नेपाल, देखें अब कैसे हैं हालात
नेपाल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में अब कई जिले आ गए हैं. हिंसा की शुरुआत हुई सुनसरी जिले से, जिसने अब कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है और इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. नेपाल में भड़की हिंसा में अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है. स्थिति को काबू में करने के लिए सेना की भी तैनाती की गई है. लेकिन हालात काबू में नहीं आ रहे हैं.
भारत के 'कॉकरोचों' से क्यों डरी पाकिस्तान सरकार? मंत्री बोले-ये एकजुट हुए तो सब उलट पुलट कर देंगे
भारत में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए अब पाकिस्तान में भी सरकार युवाओं से डरी हुई है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा, अगर ये जेन-जी एकजुट हो जाएंगे तो सब उलट पुलट कर देंगे।
आसिम मुनीर को धमकी, PoK में 40 की मौत पर भड़के प्रदर्शनकारी
PoK में आसिम मुनीर और शहबाज़ शरीफ ने मिलकर कत्लेआम मचा रखा है. भले ही मुनीर की फौज PoK वालों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रही है, लेकिन अपने हक की आवाज़ उठाने वाले प्रदर्शनकारी, पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. PoK में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC अब आर-पार पर उतर आई है. देखें...
Russia-India Oil Deal: भारत-रूस की यारी के सामने अमेरिकी बैन फेल! 3 मिलियन बैरल का नया रिकॉर्ड
जब दुनिया में संकट गहराया, तब एक पुरानी दोस्ती भारत की सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरी। पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बीच कयास लगाए जा रहे थे कि भारत का एनर्जी सेक्टर संकट में आ जाएगा। लेकिन आज जो खबर वाशिंगटन से लेकर यूरोप तक हलचल मचा रही है, उसने सारे समीकरण बदल दिए हैं। भारत और रूस मिलकर तेल आयात का एक ऐसा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। आख़िर क्या है वो रिपोर्ट जिसने ग्लोबल ऑयल मार्केट में खलबली मचा दी है? ग्लोबल कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म केप्लर का कहना है कि भारत का रूस से कच्चे तेल यानी कि क्रूड ऑयल का आयात लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। लेकिन ये खबर सिर्फ तेल की नहीं है। यह खबर तब आ रही है जब अमेरिका में नए टेरिफ बिल को लेकर चर्चाएं तेज है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अमेरिका के संभावित दबाव के आगे झुकेगा? या फिर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए रूस के साथ इस रिकॉर्ड तेल आयात को अंजाम देगा। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदे दरअसल इस पूरी खबर के पीछे एक बड़ा कारण है लाल सागर यानी रेड सी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में बढ़ता हुआ तनाव। कैप्टनर की रिपोर्ट बताती है कि अगर रेड सी में सप्लाई बाधित होती है तो भारतीय रिफाइनरियों के पास रूस ही सबसे भरोसेमंद विकल्प बचेगा। भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी तेल खरीद को काफी ज्यादा डायवर्सिफाई कर लिया है। चाहे वो वेनेजुएला हो, अफ्रीका हो या अटलांटिक बेसिन। लेकिन जब बात बफर की आती है तो रूस का कोई भी मुकाबला नहीं है। सऊदी अरब का ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन भारत को कुछ राहत तो देता है लेकिन वो रूस की विशाल सप्लाई की बराबरी नहीं कर सकता। रूस भारत के लिए एक हैच की तरह काम करता है। यानी दुनिया में कहीं भी सप्लाई रुके। रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए खड़ा है। केप्लर की लीड एनालिस्ट सुमित रितोलिया का मानना है कि अनुकूल परिस्थितियों में रूस से शिपमेंट 30 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ऊपर जा सकता है। हालांकि इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं। रूस के ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष के कारण हमले हो रहे हैं। जुलाई में रूस का निर्यात पहले की तुलना में कम भी हुआ है। इसके बावजूद भारत की रिफाइनरियों ने अपनी रणनीति को इतना लचीला बनाया है कि वह रूस से अधिक तेल खरीद कर भी शॉर्ट टर्म गैप को भर सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध? वैसे यहां एक टेक्निकल बात समझना बेहद जरूरी हो जाता है। रूस के इन ओरस्कियस एक्सपोर्ट टर्मिनल की भी भूमिका बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ रूस का ओरसल तेल ही नहीं बल्कि कजाकिस्तान का तेल भी दुनिया तक पहुंचाता है। अगर ब्लैक सी में कोई बड़ी बाधा उत्पन्न होती है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत इसी रिस्क को मैनेज करने के लिए रूस के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है। तो क्या भारत अमेरिका के टेरिफ बिल से पहले यह बड़ा कदम उठाएगा? जानकारों का मानना है कि भारत ने हमेशा ही इंडिया फर्स्ट की नीति अपनाई है। रूस से सस्ता तेल ना केवल हमारी अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाता है बल्कि हमारी रिफाइनरी को भी दुनिया के कंपटीशन में बनाए रखता है। खैर 30 लाख बैरल ऑयल प्रतिदिन का यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है बल्कि यह भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमाण है। रूस के साथ यह दोस्ती भविष्य में भारत को एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?
स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.
मर्जी से काम, घंटे के हिसाब से कमाई और बॉस की चिकचिक से दूर... युवा क्यों बन रहे गिग वर्कर्स? Jagran गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत मिली कानूनी मान्यता: श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया News On AIR Jobs For 10th-12th: कम पढ़े लिखे लोगों के लिए आ रहीं 1.6 करोड़ नौकरियां, होगी बंपर कमाई News18 Hindi Gig Workers: देश में गिग जॉब्स का बड़ा उछाल? 2030 तक 2 करोड़ कामगार, महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी सिर्फ 1% Amar Ujala गिग वर्कर्स के हितों की रक्षा के लिए नयी श्रम संहिताओं में पर्याप्त प्रावधान: सरकार univarta.com
'गाजा से इजरायली सेना वापस नहीं बुलाई तो ट्रंप...', US की नेतन्याहू को सीधी वॉर्निंग
गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 20-सूत्रीय प्लान को अगर इजरायल आगे बढ़ने से रोकता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज हो सकते हैं. यह जानकारी एक अमेरिकी अधिकारी ने दी है.
पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी? इस्लामाबाद से क्या बड़ा ऐलान होने वाला है!
क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी पाकिस्तान में ऐसा क्या हो रहा है कि जिसमें पीएम मोदी को बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है क्या पाकिस्तान अपने कुकर्मों की पीएम मोदी से मांगेगा माफ। पाकिस्तान ने ऐसा क्या ऐलान किया है जिसने भारत को भी चौंका दिया है। इआप चौंक रहे होंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि पीएम मोदी मोदी पाकिस्तान जाएं। वो भी तब जब लगातार पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव बढ़ाने वाली हरकतें कर रहा है। अपने पालतू आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने के लिए आए दिन बॉर्डर पर गोलीबारी करता रहता है। पहलगाम हमले के बाद से ही पाकिस्तान और भारत के बीच किस तरह से तनाव की स्थिति बनी हुई है। क्या ऐसे हालातों के बीच पीएम मोदी पाकिस्तान जा सकते हैं? इसे भी पढ़ें: Jammu के खौर सेक्टर में सेना की बड़ी कार्रवाई, Pakistan का Chinese Drone मार गिराया दरअसल कुछ ही महीने बाद पाकिस्तान में एसइओ समिट होने वाला है क्योंकि इस बार एसइओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी पाकिस्तान ही कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से यह संकेत दे दिए हैं कि वो इस्लामाबाद में होने वाले एसइओ शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा। दरअसल पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में भारत और एसइओ समिट को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। लेकिन जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्या अगले साल इस्लामाबाद में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा। तो इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्रावी ने कहा कि एससीओ के सभी मेंबर देशों को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्र अध्यक्ष और शासन अध्यक्ष भी शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: POJK में प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता की जांच के लिए India ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की मतलब साफ है कि भारत भी आमंत्रित देशों में शामिल है। पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि एससीओ की प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करना उनकी दायित्व है। हालांकि एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी शिरकत करेंगे या नहीं? इसको लेकर सस्पेंस है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या पाकिस्तान यह हिम्मत जुटा पाएगा कि वह पीएम मोदी को एसइओ समिट में आने का न्योता दे सके। क्योंकि भारत के खिलाफ वो जिस तरह की कायराना हरकतों को अंजाम देता रहता है उससे तो नहीं लगता कि वो न्योता भेजने लायक बचा हो। पाकिस्तान वो आतंकी मुल्क है जो किसी भी तरह से भारत के आगे मुंह दिखाने लायक नहीं है। उसके चेहरे पर ना जाने कितने बेगुनाहों के खून बहाने के दाग हैं जिससे भारत कभी भी माफ नहीं कर सकता। दरअसल एसइओ बहुपक्षीय बैठकों के तहत सदस्य देशों के बीच निमंत्रण भेजे जाते हैं। एसओ शिखर सम्मेलन एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसमें 10 सदस्य देश हैं।
Iran vs US: कुवैत में अमेरिकी Airbase पर बड़ा Drone Attack, ईरान ने लिया Qeshm Island का बदला
ईरानी सेना ने कहा है कि उसने 'ऑपरेशन लाइटनिंग' के 27वें चरण के दौरान कुवैत में अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर मौजूद अमेरिका के अहम ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने सेना के जनसंपर्क विभाग के बयान का हवाला देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया था; इसमें खास तौर पर केशम द्वीप पर एक रिहायशी घर पर हुए हमले का ज़िक्र किया गया। सरकारी ब्रॉडकास्टर ने बताया कि इन हमलों में कुवैती बेस पर मौजूद फाइटर जेट के ठिकानों, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और उपकरणों के गोदामों को निशाना बनाया गया। इस बेस को अमेरिकी एयर सपोर्ट, निगरानी और ऑपरेशन्स के लिए एक अहम केंद्र माना जाता है। इसे भी पढ़ें: Pakistan ने ट्रंप से कर दी गद्दारी, ईरान कैसे पहुंचा हथियारों का जखीरा? IRIB ने आगे बताया कि ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लगातार बड़े हमलों की वजह से दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के लिए ड्रोन और मिसाइलों को रोकना मुश्किल और महंगा हो गया है। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया है कि हताहतों और हुए नुकसान की खबरों को दबाने के लिए कड़ी सेंसरशिप लागू की जा रही है। इससे पहले, ईरान के सरकारी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत में अमेरिका द्वारा संचालित अली अल सलेम एयरबेस पर दो ड्रोन हैंगर और मिलिट्री एयरक्राफ्ट व हेलीकॉप्टर के लिए बनाए गए फ्यूल स्टोरेज सेंटर को नष्ट कर दिया है। इसे भी पढ़ें: Mahan Air की एजेंट भारत की Skies Travels समेत कई कंपनियों पर US Sanctions शुक्रवार को कुवैत के नागरिकों को संबोधित करते हुए, IRGC के बयान में कहा गया कि तेहरान की सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक कि इस इलाके से अमेरिका की कब्जा करने वाली और लूटने वाली सेनाओं को पूरी तरह से हटा नहीं दिया जाता। कुवैत में तनाव बढ़ने की यह घटना तेहरान द्वारा गुरुवार को जॉर्डन के अल-अज़राक एयरबेस पर एक अलग जवाबी मिसाइल हमले के दावों के बाद हुई है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने ईरान के इन दावों को खारिज कर दिया है कि हमले में अमेरिकी F-35 फाइटर जेट नष्ट हो गए थे। सेना का कहना है कि किसी भी अमेरिकी विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उसकी सेनाएं पूरे इलाके में ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के दावे का जवाब देते हुए, US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने X पर पोस्ट किया, ईरान के हालिया हमलों की कोशिशों में कोई भी अमेरिकी विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं हुआ।
Russian Army में फंसे 139 भारतीयों की घर वापसी, MEA ने Job Fraud को लेकर नागरिकों को किया सावधान
विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को भारतीय नागरिकों को विदेशों में नौकरी दिलाने वाली धोखाधड़ी करने वाली एजेंसियों के बारे में कड़ी चेतावनी जारी की। मंत्रालय ने बताया कि राजनयिक कोशिशों से रूसी सेना में शामिल 139 भारतीयों को छुड़ा लिया गया है और लगभग दो दर्जन अन्य लोगों को भी छुड़ाने की कोशिशें जारी हैं। राष्ट्रीय राजधानी में हर दो हफ़्ते में होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नौकरी चाहने वालों से कहा कि वे विदेश में नौकरी के ऑफ़र पर विचार करते समय बहुत सावधानी बरतें। जायसवाल ने कहा हम रूसी सेना में बचे हुए भारतीय नागरिकों को छुड़ाने के लिए रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। अब तक हमारी कोशिशों से 139 भारतीय नागरिकों को छुड़ाया जा चुका है। हम बाकी बचे लगभग दो दर्जन भारतीय नागरिकों को भी छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके बारे में खबर है कि वे रूसी सेना में हैं। खतरनाक मानव तस्करों से जुड़े खतरों का ज़िक्र करते हुए जायसवाल ने कहा हम एक बार फिर अपने लोगों को उन नौकरी के ऑफ़र के बारे में सावधान करना चाहते हैं जिनमें जोखिम हो और जो बेईमान लोगों या एजेंसियों की तरफ़ से दिए गए हों। MEA का यह अपडेट उसी दिन आया जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित परिवारों को राहत पहुँचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई ज़रूरी निर्देश जारी किए। रूस-यूक्रेन संघर्ष में फँसाए गए भारतीय नागरिकों के रिश्तेदारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने MEA को एक खास नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया, जिसकी संपर्क जानकारी सीधे पीड़ित परिवारों के साथ साझा की जाएगी। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: 280 अटैक ड्रोन और मिसाइल बारिश से दहला यूक्रेन, Zelensky ने बताया 'रूसी आतंक' का खौफनाक मंजर कोर्ट ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि वह शवों की पहचान के लिए DNA जाँच की सुविधा दे, मुफ़्त कानूनी मदद मुहैया कराए और मुआवज़े के दावों व स्वदेश वापसी से जुड़े दस्तावेज़ों का अनुवाद करवाए। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को यह भी निर्देश दिया कि वह प्रभावित परिवारों के लिए एक कंबाइंड डॉकेट (जानकारी का सेट) तैयार करे। इसे स्थानीय भाषाओं में अनुवादित किया जाना चाहिए और इसमें रूसी अधिकारियों के सामने मुआवज़े का दावा करने की प्रक्रिया समझाई जानी चाहिए। कोर्ट ने साफ़ किया कि मुआवज़े के दावे विदेश मंत्रालय के ज़रिए भेजे जाएंगे, लेकिन इनके पेंडिंग रहने की वजह से शवों की वापसी या अंतिम संस्कार में देरी नहीं होनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: MEA Press Conference : Pakistan पर India का अब तक का सबसे बड़ा हमला, विदेश मंत्रालय ने दुनिया के सामने खोली आतंकिस्तान की पूरी पोल कोर्ट ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों के सदस्य सचिवों को यह भी निर्देश दिया कि वे प्रभावित परिवारों को मुआवज़े का दावा करने और DNA टेस्टिंग में मदद के लिए मुफ़्त कानूनी सहायता दें। विदेश मंत्रालय से यह भी कहा गया कि वह रूसी अधिकारियों से मिले उन दस्तावेज़ों का अनुवादित वर्शन उपलब्ध कराए जो शवों की वापसी और मुआवज़े के दावों से संबंधित हैं। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि 2024 और 2025 में, कई भारतीय युवा अलग-अलग वीज़ा पर रूस गए थे, क्योंकि उन्हें कंस्ट्रक्शन, हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर में नौकरी का वादा किया गया था। हालाँकि, वहाँ पहुँचने पर उनके पासपोर्ट और पहचान के दस्तावेज़ ज़ब्त कर लिए गए और उन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया, जिसके बाद उन्हें लड़ाई के मोर्चे पर भेज दिया गया।
पाकिस्तान की कोयला खदान में भीषण ब्लास्ट, देखें दुनिया आजतक
दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान की कोयला खदान में धमाके से कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई. अंदर फंसे 10 लोगों को निकालने की कोशिशें जारी है. बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाके की खदान में मिथेन गैस से धमाके की आशंका है. देखें दुनिया आजतक.
Balochistan में Pakistani Army पर भीषण हमला, UBA और BRG के धमाकों में 8 जवानों की मौत
बलूचिस्तान के कच्छी ज़िले में हुए अलग-अलग हमलों की ज़िम्मेदारी दो बलूच हथियारबंद गुटों - यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) - ने ली है। इस दौरान इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और हथियारबंद लड़ाकों के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी होती रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, कच्छी के सन्नी इलाके में एक धमाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की एक गाड़ी को निशाना बनाया गया, जबकि आस-पास के इलाकों से भी गोलीबारी की खबरें मिलीं। UBA के प्रवक्ता मज़ार बलूच ने एक बयान में कहा कि उनके गुट ने धादर और सन्नी के बीच चिघार्डी इलाके में पाकिस्तानी बलों के सात गाड़ियों वाले काफिले में शामिल एक गाड़ी पर रिमोट-कंट्रोल विस्फोटक डिवाइस से हमला किया। प्रवक्ता ने बताया कि हमला तब हुआ जब काफिला एक मिलिट्री चेकपॉइंट की ओर जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में आठ जवान मौके पर ही मारे गए और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इसे भी पढ़ें: Pakistan के Balochistan में कोयला खदान विस्फोट, 34 खनिकों की मौत और बचाव अभियान जारी उन्होंने आगे आरोप लगाया कि UBA के लड़ाकों ने इलाके से पीछे हटने से पहले काफिले की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों के साथ थोड़ी देर गोलीबारी की। TBP की रिपोर्ट के अनुसार, मज़ार बलूच ने कहा हमारा संगठन, UBA, इस हमले की ज़िम्मेदारी लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज़ाद बलूचिस्तान बनने तक ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे। इस बीच, बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने बताया कि उसके लड़ाके बुधवार सुबह 7:00 बजे से पाकिस्तानी सेना के दो अलग-अलग काफिलों पर हमले कर रहे थे। संगठन ने दावा किया कि बयान जारी होने के समय भी झड़पें जारी थीं। इसे भी पढ़ें: Balochistan Civil War Like Situation: बलूचिस्तान में बेकाबू हुए हालात, Army और Rebels के बीच खूनी संघर्ष तेज़ समूह ने कहा कि वह बाद में इन झड़पों के बारे में विस्तार से बयान जारी करेगा। एक अलग बयान में, BRG के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच ने कहा कि समूह ने कच्छी के धादर इलाके में सरकारी सिंचाई विभाग के दफ़्तर को निशाना बनाया और वहां विस्फोटक उपकरण लगाए।
Saudi Arabia ने समुद्री सुरक्षा के लिए बनाया 14 देशों का गठबंधन, लेकिन ओमान और UAE क्यों रहे अलग? जानें वजह
Russia-Ukraine War में China की 'चुपचाप' मदद, US Weapon Stock खत्म होने से बढ़ी Xi Jinping की ताकत
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐसी लड़ाई में अमेरिका को उलझा दिया है जिसे शायद जीता नहीं जा सकता, और इससे चीन की स्थिति मज़बूत हुई है। इसके अलावा, बीजिंग दुनिया भर में अपना असर बढ़ा रहा है और यूक्रेन और पश्चिमी देशों के साथ रूस की लड़ाई में चुपचाप उसका साथ भी दे रहा है। अमेरिका के मिसाइल और हथियारों का स्टॉक कम होने की बात लंबे समय से पता है - और ईरान युद्ध ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है - जिसका सीधा फ़ायदा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मिल रहा है। बहुत मुमकिन है कि चीन और रूस अपनी अगली चालों (क्रमशः ताइवान और यूक्रेन के ख़िलाफ़) की योजना बनाते समय इस बात को ध्यान में रख रहे हों। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदेश जैसा कि ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर एनालिस्ट डॉ. मैल्कम डेविस ने कहा यह बात उतनी ही पक्की है जितनी कि दिन के बाद रात का आना यह स्थिति अब अमेरिकी सैन्य क्षमता के लिए एक बहुत ही खतरनाक संकट पैदा कर रही है और यह संकट एक दशक या एक-दो साल बाद नहीं, बल्कि अभी आ रहा है। बेशक, रूस को समर्थन देने के मामले में चीन का रवैया उत्तर कोरिया जितना खुला नहीं रहा है। बीजिंग ने न तो तोप का चारा बनने वाले सैनिक भेजे हैं और न ही मिसाइलें बेची हैं, लेकिन फिर भी वह यूक्रेन में व्लादिमीर पुतिन की लंबी खिंचती लड़ाई का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने चीन को रूस की लड़ाई को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने वाला बताया है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बीजिंग की तथाकथित तटस्थता असल में वैसी नहीं है। यह शुरू से ही एक दिखावा रहा है; चीन ने तुरंत मॉस्को की बातों को दोहराया और यहाँ तक कि अनिवार्य कोर्स भी चलाए, जिनमें शिक्षकों और लेक्चररों को यह बताया गया कि पुतिन की लड़ाई के बारे में आधिकारिक नैरेटिव को कैसे पेश किया जाए। तब से चीन अपनी इस बात पर अडिग रहा है। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध? चीन अपनी आलोचना को लेकर बहुत सोच-समझकर कदम उठाता है। जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तुरंत कहा, चाहे कोई भी वजह हो, बिना सोचे-समझे ताकत का इस्तेमाल मंज़ूर नहीं है, और बेगुनाह नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले की निंदा की जानी चाहिए। फिर भी, यूक्रेन के खिलाफ पुतिन की चार साल से ज़्यादा चली लड़ाई में, चीन ने मॉस्को को सिर्फ़ एक ही चेतावनी दी है कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करे। यह बात ही चीन के दोहरे रवैये को दिखाती है। इसके बावजूद, रूस में जन्मे पूर्व शतरंज ग्रैंडमास्टर गैरी कास्पारोव ने कहा, चीन बिना किसी बुरे नतीजे के रूस की सीधे और परोक्ष रूप से मदद करता है। रूस की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने के बावजूद, उसे कोई खास सज़ा नहीं मिली है। हाँ, कुछ चीनी कंपनियों पर अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन उन्हें कोई खास राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा है। तो फिर, रूस के लिए चीन का समर्थन किस तरह का है? काम के बँटवारे के तहत, मॉस्को 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी' (PLA) को लड़ाई के गुर सिखाता है, जबकि बदले में चीन रूस को इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और मशीनरी भेजता है ताकि उसके सैन्य-औद्योगिक ढांचे को मदद मिल सके। चीन रूस से लड़ाई के सबक सीखने के लिए उत्सुक है, क्योंकि ये सीधे तौर पर ताइवान को लेकर उसकी सैन्य योजनाओं से जुड़े हैं।
Xinjiang Victims Database का बड़ा खुलासा, China के Detention Campaign से 1.4 लाख Uyghur Kids हुए अलग
'उइघुर टाइम्स' के हवाले से 'शिनजियांग विक्टिम्स डेटाबेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस डेटाबेस द्वारा प्रकाशित एक नए विश्लेषण में अनुमान लगाया गया है कि 2018 के अंत तक, चीन के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने के अभियान के कारण उइघुर मातृभूमि के दक्षिणी इलाकों के चार प्रान्तों में कम से कम 143,228 बच्चे (जिनमें ज़्यादातर उइघुर थे) अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों से अलग हो गए थे। 27 जुलाई को प्रकाशित यह विश्लेषण काशगर प्रान्त के कोनाशेहर (शुफू) काउंटी के विस्तृत दस्तावेज़ों पर आधारित है। यहाँ शोधकर्ताओं ने हिरासत से जुड़े डेटा के साथ-साथ चीन सरकार के लीक हुए रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके पारिवारिक रिश्तों की जानकारी जुटाई। रिपोर्ट के अनुसार, यह अध्ययन उइघुर परिवारों और बच्चों पर चीन के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने के अभियान के असर का अब तक का सबसे व्यापक अनुमान पेश करता है। इसे भी पढ़ें: China ने नई Sports Development Plan से 2030 तक विश्व-अग्रणी खेल शक्ति बनने का लक्ष्य रखा 'शिनजियांग विक्टिम्स डेटाबेस' के अनुसार, शोधकर्ताओं ने कोनाशेहर काउंटी में ऐसे 21,809 लोगों की पहचान की, जिन्हें 2017 से लंबे समय तक हिरासत में रखा गया था। घर के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और पारिवारिक रिश्तों के डेटा का विश्लेषण करके, उन्होंने ऐसे 3,772 बच्चों की जानकारी दर्ज की जो अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों के हिरासत में लिए जाने के बाद पीछे छूट गए थे। रिपोर्ट में इस संख्या को एक न्यूनतम अनुमान बताया गया है और कहा गया है कि जैसे-जैसे और सरकारी दस्तावेज़ उपलब्ध होंगे, और मामले सामने आ सकते हैं। विश्लेषण में पाया गया कि प्रभावित परिवारों में अक्सर कई बच्चे थे। जिन परिवारों में माता-पिता को हिरासत में लिया गया था, उनमें औसतन 2.4 बच्चे प्रभावित हुए, जबकि 700 से ज़्यादा परिवारों में तीन या उससे ज़्यादा बच्चे अपने माता-पिता से अलग हो गए थे। हालांकि उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि कई बच्चों को बोर्डिंग स्कूलों में रखा गया या रिश्तेदारों ने उनकी देखभाल की, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा दस्तावेजों से हर प्रभावित बच्चे के भविष्य के बारे में पता नहीं लगाया जा सकता। इसे भी पढ़ें: OpenAI और Anthropic AI आउटपुट का चीनी सेना ने रक्षा प्रणालियों के लिए किया उपयोग इस अध्ययन में माता-पिता को हिरासत में लेने के एक बार-बार दिखने वाले पैटर्न की भी पहचान की गई। नतीजों के अनुसार, दर्ज किए गए ज़्यादातर मामलों में पहले पिताओं को हिरासत में लिया गया, जिन्हें अक्सर 2017 के दौरान लंबी जेल की सज़ा हुई, जबकि माताओं को बाद में 2018 में नज़रबंदी कैंपों में भेजा गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन परिवारों में हिरासत की समय-सीमा का साफ़ तौर पर पता लगाया जा सका, उनमें से लगभग 56 प्रतिशत मामलों में यही क्रम देखा गया।
PAK: उजैर बलोच के भाई जुबैर को गोलियों से भूना, ल्यारी में फिर गैंगवार से दहशत
पाकिस्तान की पुलिस के मुताबिक ल्यारी के मिर्जा आदम खान रोड पर हुई फायरिंग में तीन लोग घायल हुए. घायलों में एक की पहचान जुबैर बलोच के रूप में की जा रही है. ल्यारी के गैंगवार की कहानी भारत के लोगों को आदित्य धर की मूवी धुरंधर से पता चली.
Lyari में Gangster Uzair Baloch के भाई को मारी गोली, क्या फिर शुरू होगा खूनी Gang War?
कराची के लियारी इलाके में अपने घर के बाहर गोली लगने से पाकिस्तानी गैंगस्टर उज़ैर बलोच का भाई ज़ुबैर बलोच गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना में दो राहगीर भी घायल हुए, जिन्हें मेडिकल मदद दी गई। मीडिया की कई रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम को हुई। 40 साल के ज़ुबैर की छाती और पेट में गोली लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए; इसके बाद उन्हें इलाज के लिए कराची के सिविल अस्पताल ले जाया गया। पाकिस्तान के प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक 'डॉन' ने खबर दी है कि हमलावर मोटरसाइकिल पर आए थे और उनके चेहरे ढके हुए थे। ज़ुबैर, जिनकी सर्जरी हो चुकी है, सिंगु लेन में अपने घर के बाहर बैठे थे, तभी बाइक पर सवार दो हमलावरों ने उन पर गोली चलाई। पास ही मौजूद एक दुकानदार के जवाबी फायरिंग करने पर वे मौके से भाग गए। इसे भी पढ़ें: Pakistan Economic Crisis: महंगाई की मार से कराह रहा ट्रांसजेंडर समुदाय, Karachi में सड़कों पर उतरा प्रदर्शनकारी सभी पहलुओं की जांच की जा रही है साउथ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) सैयद असद रज़ा ने 'डॉन' को बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पाकिस्तानी अखबार ने एक सामाजिक कार्यकर्ता का हवाला देते हुए यह भी बताया कि ज़ुबैर हाल ही में एक 'राजनीतिक पार्टी' में शामिल हुए थे। इस घटना से लियारी में एक और गैंग वॉर (गिरोहों के बीच संघर्ष) का डर पैदा हो गया है। 'डॉन' के अनुसार, ईरान और दुबई भाग गए कई गैंगस्टर, अमेरिका (US) और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद लियारी लौट आए हैं। इसे भी पढ़ें: वर्दी उतारकर लड़ो चुनाव...Pakistan में सेना-सियासत में घमासान, Maulana Fazlur Rehman की Asim Munir को सीधी चुनौती उज़ैर बलोच पाकिस्तानी जेल में बंद है ज़ुबैर बलोच, उज़ैर बलोच का 40 साल का भाई है। उज़ैर बलोच प्रतिबंधित 'पीपल्स अमन कमेटी' (PAC) का पूर्व प्रमुख था। उसे पाकिस्तान के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में से एक माना जाता है। 2009 में पुलिस मुठभेड़ में रहमान डकैत के मारे जाने के बाद, उज़ैर ने लियारी के अंडरवर्ल्ड में अपना नाम बनाया और उस पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। पाकिस्तान के जियो न्यूज़ के अनुसार, उज़ैर के खिलाफ 100 से अधिक मामलों में जांच चल रही है। इन मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, पुलिस और रेंजर्स पर हमले और विदेशी खुफिया एजेंसियों के लिए जासूसी करना शामिल है। उसे 30 जनवरी 2016 को पाकिस्तानी रेंजर्स ने कराची में चुपके से घुसने की कोशिश करते समय गिरफ्तार किया था। अप्रैल 2020 में, जासूसी के आरोपों के चलते एक पाकिस्तानी अदालत ने उसे 12 साल की जेल की सज़ा सुनाई थी।
Ceuta में मोरक्को से दाखिल हुए 60000 प्रवासी, Spain के प्रधानमंत्री ने की निंदा
पिछले 24 घंटों में मोरक्को से लगभग 60,000 प्रवासी स्पेन के सेउटा में दाखिल हुए हैं। सेउटा के प्रशासनिक प्रमुख ने यह जानकारी दी। यह संख्या सेउटा शहर की नियमित जनसंख्या के 70 फीसद के बराबर है। सेउटा के प्रशासनिक प्रमुख जुआन जीसस विवास के अनुसार प्रवासन की इस प्रक्रिया में कम से कम 34 लोगों की मौत हो गयी। उन्होंने शुक्रवार को कहा, ‘‘ सेउटा जिस स्थिति से गुज़र रहा है, वह बिल्कुल भी टिकाऊ नहीं है।’’बृहस्पतिवार को सीमा पर भड़का संकट शुक्रवार को भी जारी रहा जहां सीमा के मोरक्को वाले क्षेत्र में सुरक्षाबलों एवं प्रवासियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने शुक्रवार को सेउटा में अपने संबोधन में सीमा उल्लंघन की निंदा की और इन घटनाओं को ‘स्पेन की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन’ बताया। स्पेन के नेता ने मानव तस्करों को दोषी ठहराते हुए कहा कि वे ‘बहुत से युवाओं को बहकाते हैं और अंततः उनमें से कई को मौत के मुंह में धकेल देते हैं - चाहे वह समुद्र में हो या, जैसा कि इस मामले में हुआ, स्पेन की सीमा पर स्वायत्त शहर सेउटा में।’’सीमा के सीधे प्रसारण में नजर आ रहा है कि सेउटा के ऊपर एक पहाड़ी पर सैकड़ों प्रवासी जमा थे, जिन्हें मोरक्को की सेना ने आंसू गैस के गोले दागकर तितर-बितर कर दिया, जबकि अन्य लोग तैरकर स्पेनिश क्षेत्र की ओर बढ़ते रहे।
नितेश तिवारी की 4 हजार करोड़ की लागत से बनी फिल्म 'रामायण' का ट्रेलर आते ही सोशल मीडिया पर डिबेट शुरू हो गई। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले 'ग्लैमरस लुक' पर मीम बन रहे। रणबीर कपूर की राम के रूप में कास्टिंग पर भी सवाल उठे और यश के रावण और साई पल्लवी के सीता का किरदार निभाने को लेकर भी लोग दो खेमे में बंटे हैं। असलियत में कैसे दिखते रहे होंगे रामायण के किरदार; इसके लिए हमने सबसे प्रामाणिक ग्रंथ वाल्मीकि रामायण का सहारा लिया है। इन किरदारों को कुछ पुरानी मूर्तियों और पेंटिंग्स के जरिए भी देखेंगे… ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:सैयारा ने पहले हफ्ते 175 करोड़ कमाए; पुरानी लव स्टोरी, कोई बड़ा स्टार नहीं, फिर सिनेमाघरों में रो-रोकर बेहोश क्यों हो रहे लोग सैयारा मूवी देखने पहुंची एक लड़की इतना रोई कि थिएटर में ही बेहोश हो गई। एक लड़का दहाड़ें मारकर छाती पीटने लगा। ऐसे वायरल वीडियोज के बीच मोहित सूरी की फिल्म ने एक हफ्ते में 175 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श इसे ऐतिहासिक मानते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
रूस ने कीव समेत कई शहरों पर की भीषण बमबारी, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की सभी उम्मीदों पर फिलहाल विराम लगा हुआ है...दोनों देशों के बीच जंग और भीषण हो गई है...रूस ने यूक्रेनी राजधानी कीव समेत कई शहरों पर भीषण बमबारी कर जान-माल का भारी नुकसान पहुंचाया है...उधर रूस में एक बार वाइल्डबेरीज़ के गोदाम को निशाना बनाया गया. देखें...
दुनियाभर में अपनी अदम्य साहस और पर्वतारोहण के रिकॉर्ड्स के लिए पहचाने जाने वाले नेपाल के नामचीन पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (Nimsdai Purja) और उनका 10 सदस्यीय दल पाकिस्तान की खतरनाक ब्रॉड पीक पर लापता हो गया है। जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित 8,047 मीटर ऊंची इस बर्फीली चोटी पर चढ़ाई के दौरान अचानक आए एक भीषण हिमस्खलन की चपेट में पूरा दल आ गया है। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद से पर्वतारोहियों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत में हड़कंप मच गया है।ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन और लापता दल की पूरी डिटेलपाकिस्तान के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे काराकोरम पर्वतमाला में स्थित ब्रॉड पीक पर हुआ। दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची और चढ़ाई के लिहाज से बेहद जोखिम भरी इस चोटी पर अचानक आए हिमस्खलन ने पर्वतारोहियों को अपनी चपेट में ले लिया। लापता हुए 10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय दल में एक अमेरिकी, एक चीनी, एक ओमानी और पांच नेपाली नागरिक शामिल हैं, जिनका नेतृत्व खुद प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा कर रहे थे। खराब मौसम और दुर्गम इलाके के कारण तुरंत संपर्क साधना संभव नहीं हो पाया था।शुक्रवार सुबह से शुरू हुआ हेलिकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशनबीबीसी और अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान की रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने हालात का जायजा लेते हुए शुक्रवार सुबह मौसम के साफ होने पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए विशेष हेलिकॉप्टर्स की मदद ली जा रही है। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान ने इस कठिन घड़ी में अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय के एकजुट होने की बात कही है, जबकि रेस्क्यू टीमें लगातार बर्फीले इलाकों में जीवन बचाने की उम्मीद के साथ खोजबीन में जुटी हुई हैं।कौन हैं रिकॉर्ड होल्डर पर्वतारोही निर्मल पुर्जालापता पर्वतारोही निर्मल पुर्जा नेपाल के एक प्रतिष्ठित पर्वतारोही हैं, जो ब्रिटिश सेना की प्रतिष्ठित रॉयल मरीन यूनिट में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। साल 2012 में माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचने के बाद उनके भीतर पर्वतारोहण का ऐसा जुनून जागा कि उन्होंने इतिहास रच दिया। साल 2019 में निर्मल पुर्जा ने महज 6 महीने और 6 दिन के रिकॉर्ड समय में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंची सभी 14 चोटियों को फतह करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने एवरेस्ट, मकालू और ल्होत्से जैसी कठिन चोटियों को महज 48 घंटे के भीतर फतह करने का अनूठा कारनामा भी किया है। उनकी इस असाधारण जीवनयात्रा पर '14 पीक्स: नथिंग इज इंपॉसिबल' नाम से एक चर्चित डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है। फिलहाल, मौसम की दुश्वारियों के बीच रेस्क्यू टीमों के सामने लापता दल को सुरक्षित ढूंढ निकालना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मध्य एशिया की भू-राजनीति में इस वक्त एक ऐसा रहस्य गहराया हुआ है जिसने अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA और इजरायल की कुख्यात एजेंसी मोसाद (Mossad) दोनों की नींद उड़ा रखी है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) म पिछले पांच महीनों से पूरी तरह से नजरों से ओझल हैं और दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियां भी उनका सुराग लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं। अपने पिता अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता की बागडोर संभालने वाले मोजतबा ने अब तक एक बार भी कोई सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय गलियारों में उनके ठिकाने और स्वास्थ्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।CIA और मोसाद का हाई-प्रियोरिटी ऑपरेशन, फिर भी कोई सुराग नहींमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों ने ईरानी सुप्रीम लीडर की सही लोकेशन का पता लगाने के लिए एक विशेष हाई-प्रियोरिटी ऑपरेशन शुरू कर रखा है। फरवरी महीने में हुए हमलों के दौरान अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत के बाद मोजतबा के भी गंभीर रूप से घायल होने और यहां तक कि उनकी मौत के दावे किए गए थे। हालांकि, 8 मार्च को उन्हें आधिकारिक तौर पर ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया गया, लेकिन पिछले पांच महीनों में उन्होंने न तो कभी टीवी पर कोई संबोधन दिया और न ही वे अपने पिता के जनाजे में शामिल हुए। एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी पहेली यह है कि उनका कोई भी डिजिटल फुटप्रिंट या सुराग हाथ नहीं लग रहा है।'कोई फोन नहीं, कोई लैपटॉप नहीं': बेहद गोपनीय है कार्यशैलीईरानी सुप्रीम लीडर की सुरक्षा और गोपनीयता इतनी चाक-चौबंद है कि खुफिया विशेषज्ञों के होश उड़े हुए हैं। एक वरिष्ठ खुफिया सूत्र के हवाले से सामने आया है कि पिछले पांच महीनों में मोजतबा की तरफ से कोई फोन कॉल, कोई लैपटॉप इस्तेमाल या किसी भी तरह का डिजिटल संपर्क नहीं किया गया है। अपने पिता अली खामेनेई के विपरीत—जो अक्सर सोशल मीडिया और टेलीविजन के माध्यम से संदेश जारी करते थे—मोजतबा पूरी तरह से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर हो चुके हैं। वे केवल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बेहद भरोसेमंद और चुनिंदा सहयोगियों के जरिए अपने हाथ से लिखे गए लिखित बयान ही बाहर भेज रहे हैं, जिससे उनकी लोकेशन को किसी भी तकनीकी सर्विलांस से ट्रैक कर पाना नामुमकिन हो गया है।अंडरग्राउंड बंकर या गुप्त सुरंगों का नेटवर्क? कहां छिपे हैं मोजतबा?इंटेलिजेंस विश्लेषकों का यह मानना है कि मोजतबा खामेनेई इस समय राजधानी तेहरान के किसी बेहद सुरक्षित और गुप्त अंडरग्राउंड बंकर में छिपे हो सकते हैं। इसके अलावा यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि वे ईरान के धार्मिक और पवित्र शहर कॉम के आसपास बने जटिल सुरंगों के नेटवर्क से देश की सत्ता चला रहे हैं। हालांकि, हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दावा किया था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम लीडर से मुलाकात की है, लेकिन इस दावे के समर्थन में कोई भी ठोस सबूत या तस्वीर सामने नहीं आई है, जिससे रहस्य और अधिक गहराता जा रहा है।
भारत के पड़ोसी मुल्क नेपाल में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच भड़की हिंसक झड़पों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब तक हुई खूनी हिंसा और आगजनी में 3 लोगों की जान जा चुकी है, जिसके बाद से भारत की सीमा से लगे कई प्रमुख जिलों में तनाव चरम पर है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू बढ़ा दिया है। इस बीच, देश के प्रधानमंत्री बालेन शाह खुद मोर्चे पर आ गए हैं और उन्होंने एक उच्चस्तरीय सर्वदलीय बैठक बुलाने के साथ-साथ नागरिकों से शांति और संयम बरतने की पुरजोर अपील की है।चार जिलों में बढ़ा अनिश्चितकालीन कर्फ्यू, तेराई क्षेत्र में तनावनेपाल के दक्षिण तेराई क्षेत्र में स्थिति बेहद विस्फोटक बनी हुई है। ताजा आधिकारिक आदेशों के अनुसार, भारत की सीमा से लगे सप्तारी जिले में भी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है, जिससे पाबंदी वाले जिलों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है। इससे पहले सुनसरी, धानुषा और सिराहा जिलों में भी सख्त कर्फ्यू लागू किया गया था। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, गोलबाजार क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शनकारियों ने भारी उपद्रव मचाते हुए एक शॉपिंग मॉल को आग के हवाले कर दिया था, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़े।कैसे भड़की थी हिंसा? उत्सव के विवाद से लेकर पुलिस फायरिंग तकइस पूरे तनाव की शुरुआत सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके में हुई थी, जहां एक उत्सव के दौरान दो धार्मिक समुदायों के बीच मामूली बात पर खूनी संघर्ष छिड़ गया था। उग्र भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद यह हिंसा मधेश क्षेत्र तक फैल गई, जहां सिराहा जिले में एक किशोर की मौत हो गई और इलाज के दौरान एक अन्य घायल ने भी दम तोड़ दिया। इस दौरान झड़प में पुलिस कांस्टेबल नारद पेरियार को भी गोली लगने की खबर सामने आई है।प्रधानमंत्री बालेन शाह की राष्ट्र के नाम अपील, बुलाई सर्वदलीय बैठकबिगड़ते हालातों के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह ने टेलीविजन के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित किया और देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की। पीएम शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार इस पूरी हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाएगी तथा इसके लिए जिम्मेदार उपद्रवियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। स्थिति को तुरंत नियंत्रित करने के लिए काठमांडू में एक आपातकालीन सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से यह भी विशेष आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली अफवाहों, भ्रामक जानकारियों और नफरत फैलाने वाले संदेशों से दूर रहें तथा देश में आपसी भाईचारा बनाए रखें।
भारत की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में समाप्त हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की गूंज अब पड़ोसी देश पाकिस्तान तक सुनाई देने लगी है। भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चले उग्र युवा आंदोलन के बाद अब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी को भी 'कॉकरोचों' का खौफ सताने लगा है। नकवी ने सार्वजनिक रूप से आशंका जताई है कि यदि पाकिस्तानी युवाओं का असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो ये 'कॉकरोच' मिलकर पूरे सिस्टम को पलट कर रख देंगे।पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का बड़ा बयानएक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और गहराते आर्थिक संकट खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समय भारी-भरकम कर्ज के जाल में फंस चुका है और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे महंगाई चरम पर है। नकवी ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार युवाओं की उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आप उन्हें युवा कहें या कॉकरोच, लेकिन जब ये एक साथ सड़कों पर उतरेंगे, तो मौजूदा सत्ता और सिस्टम को पूरी तरह पलट देंगे।'पिछले 70 सालों से पूरी तरह ढह चुका है पाकिस्तान का सिस्टम'पाकिस्तान की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए गृह मंत्री नकवी ने माना कि देश का प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 70 वर्षों से इस नाकाबिल सिस्टम को जबरन घसीटा जा रहा है, लेकिन अब सुधार की गुंजाइश कम और कर्ज लेने की आदत ज्यादा हो गई है। बजट का अधिकांश हिस्सा केवल नए कर्ज चुकाने और पुराने ऋणों को संभालने में ही निकल जाता है, जिससे आम जनता और खास तौर पर युवाओं में सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा सुलग रहा है।भारत में अभिजीत दीपके के आंदोलन और CJP का असरविशेषज्ञों का मानना है कि मोहसिन नकवी के मुंह से 'कॉकरोच' शब्द का यह इस्तेमाल भारत में हाल ही में हुए उस युवा आंदोलन से प्रेरित है, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले अभिजीत दीपके के नेतृत्व में महीनों तक ऐतिहासिक प्रदर्शन चला था। इस दबाव के चलते तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। भारत के इस सफल युवा विद्रोह से सहमे पाकिस्तानी हुक्मरानों को अब अपने ही देश में युवाओं के बड़े विद्रोह का डर सताने लगा है।
FIFA अध्यक्ष के सलाहकार Carlos Cordero का इस्तीफा, विश्व कप योजना पर उठाए सवाल
फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो के सबसे करीबी सलाहकारों में से एक, कार्लोस कॉर्डेरो ने संगठन की विवादास्पद विश्व कप निवेश प्रस्ताव के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कॉर्डेरो ने इस प्रस्ताव को फुटबॉल के लिए एक बुरा सौदा बताते हुए इसकी शासन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। प्रस्ताव पर बढ़ता विरोध कॉर्डेरो का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब फीफा को UEFA, Concacaf और AFC जैसे प्रमुख फुटबॉल संगठनों से बढ़ते विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह विरोध फीफा के विश्व कप के लिए प्रस्तावित निवेश योजना को लेकर है, जिसे कई लोग फुटबॉल के भविष्य के लिए हानिकारक मान रहे हैं। शासन व्यवस्था पर सवाल कॉर्डेरो ने विशेष रूप से फीफा की निर्णय लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव फुटबॉल के हितों के बजाय किसी और एजेंडे को पूरा करता दिख रहा है। उनके इस्तीफे से फीफा के भीतर और बाहर दोनों तरफ से बढ़ते प्रतिरोध का संकेत मिलता है। सदस्यों के मतदान से पहले दबाव फीफा के सदस्य आगामी एक महत्वपूर्ण मतदान में इस प्रस्ताव पर निर्णय लेने वाले हैं। कॉर्डेरो जैसे करीबी सलाहकार का इस्तीफा इन्फैंटिनो के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है और यह प्रस्ताव के पारित होने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। यह घटनाक्रम फीफा के नेतृत्व और उसकी भविष्य की योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
Nepal के सप्तरी जिले में सांप्रदायिक तनाव के बाद अनिश्चितकालीन Curfew लागू किया गया
(शिरीष बी. प्रधान)काठमांडू, 31 जुलाई नेपाल के अधिकारियों ने सुनसरी जिले में हाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में प्रदर्शन शुरू होने के बाद शुक्रवार को भारत की सीमा से लगे सप्तरी जिले के कुछ हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तनावपूर्ण स्थिति पर गहरी चिंता जताई है तथा लोगों से शांति, एकता व संयम बनाए रखने की अपील की। सप्तरी जिला प्रशासन कार्यालय ने एहतियाती कदम के तौर पर राजबिराज नगरपालिका के कुछ हिस्सों में सुबह आठ बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया। यह फैसला सांप्रदायिक झड़पों के विरोध में कुछ समूहों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के बाद लिया गया। सप्ताहांत में सुनसरी में सांप्रदायिक झड़पें शुरू होने के बाद से नेपाल के कई जिलों में तनाव बना हुआ है। अधिकारियों ने इस कारण कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू की तथा सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। इस नए आदेश के बाद अब चार जिलों में कर्फ्यू लागू हो गया है। नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में भारत की सीमा से लगे सुनसरी, धनुषा और सिरहा जिलों के कुछ हिस्सों में पहले से ही कर्फ्यू लागू है। अधिकारियों को तनाव को नियंत्रित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार को दो धार्मिक समुदायों के कार्यक्रमों के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षा कर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। हिंसा उस समय शुरू हुई, जब अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे दोनों समुदायों के लोगों के बीच लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे लगाने को लेकर विवाद हो गया। बातचीत के दौरान हुई बहस ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। बृहस्पतिवार को हिंसा मधेश प्रांत तक फैल गई, जहां सिरहा जिले में हुई झड़पों में एक नाबालिग की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सुनसरी में हुई हिंसा में घायल एक व्यक्ति की कोशी प्रांत में मौत हो गई। सहायक मुख्य जिला अधिकारी होम प्रसाद घिमिरे ने बताया कि इस बीच, सीमा से लगे सरलाही जिले की जिला सुरक्षा समिति ने फैसला लिया कि सीमा पार से नेपाल में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा।
इजरायल ने तोड़ दी हिज्बुल्लाह की कमर! साउथ लेबनान में तबाह कर दिया उसका अंडरग्राउंड टनल नेटवर्क
इजरायल डिफेंस फोर्सेज ने साउथ लेबनान में कई अहम अंडरग्राउंड सुरंगों को नष्ट कर दिया है। यहीं, हिज्बुल्लाह का सेंट्रल कमांड सेंटर था, जिससे हमलों के निर्देश दिए जाते थे।
पाकिस्तान का ईरान से 'डबल गेम', उसके दुश्मनों को बेचे हथियार
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान डबल गेम खेल रहा है. एक तरफ, तो वह खुद को मध्यस्थ की तरह पेश करने की कोशिश कर रहा है. वहीं, सूत्रों के मुताबिक, खाड़ी देशों को हथियार बेचने की कोशिश कर रहा है.
स्पेन में बड़ा प्रवासी संकट! समुद्र के रास्ते पहुंचे 49 हजार लोग, बॉर्डर पर भगदड़ में गई 18 लोगों की जान
क्या नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र? पीएम बालेन शाह ने साफ किया रुख
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन् शाह ने कहा है कि उनकी सरकार हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना और राजशाही की वापसी के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे संघीय व्यवस्था कमजोर हो सकती है. उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है.
भारत-चीन रिश्तों में नई पहल, गलवान के बाद पहली बार दिल्ली पहुंचेंगे शी जिनपिंग; क्यों अहम है ये दौरा?
PM-किसान पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा, Business Hindi News Hindustan मोदी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा! 2031 तक जारी रहेगी पीएम किसान योजना, कैबिनेट ने लगाई मुहर India TV Hindi सोलर से खेलो तक... संसद में हंगामे के बीच मोदी कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले Jagran PM Kisan:क्या दूसरे के खेत में काम करने वाले किसान ले सकते हैं पीएम किसान योजना का लाभ? यहां दूर करें कंफ्यूजन Amar Ujala मोदी सरकार ने पीएम किसान योजना को 5 साल और बढ़ाया, 3.15 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च Jansatta
नेपाल में कांवड़ यात्रा के दौरान हिंसा भड़की, फुटेज में देंखे 2 की मौत; सुनसरी और सिराहा के कई इलाकों में कर्फ्यू, पुलिस ने की फायरिंग
अमेरिकी सीनेट में ईरान पर सैन्य कार्रवाई सीमित करने का प्रस्ताव खारिज, वीडियो में जाने ट्रम्प को राहत; संसद की मंजूरी वाला नियम फिलहाल टला
ट्रम्प का बड़ा दावा: हमास हथियार छोड़ने को तैयार, गाजा से पीछे हटेगी इजराइली सेना; वीडियो में जाने शांति समझौते का किया ऐलान
भारत मालदीव में डिजिटल लेनदेन सेवा शुरू
माले/ नई दिल्ली। मालदीव मोनेटरी अथॉरिटी (एमएमए) ने मालदीव की तत्काल भुगतान प्रणाली 'फवारा' और भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) केबीच एकीकरण के सफल शुभारंभ की घोषणा कर दी है। यह मालदीव और भारत केबीच सीमापार डिजिटल वित्तीय संपर्क और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में एक रूपांतरकारी उपलब्धि है। रियल टाइम ट्रांसफर सेवा...
अभिजीत दीपके के आंदोलन के बाद थर-थर कांप रहा पाकिस्तान, गृह मंत्री बोले- कॉकरोच सबकुछ पलट देंगे
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी को कॉकरोचों का डर सताने लगा है। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि कॉकरोच सबकुछ पलट देंगे। भारत में अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हुए सीजेपी के आंदोलन के चलते धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा है।
नेपाल में भड़की हिंसा का कहर: 4 नए जिलों में बढ़ा तनाव, कई शहरों में लगा कर्फ्यू, सेना हाई अलर्ट पर
नेपाल में भड़की हिंसा की आग अब और भी भयावह रूप लेती जा रही है. देश के चार और जिलों में अचानक तनाव बढ़ने के बाद स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है. हालात की गंभीरता को देखते हुए कई प्रमुख शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है, वहीं शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए नेपाली सेना को हाई अलर्ट पर तैनात कर दिया गया है.कई शहरों में लगा कर्फ्यू और थमे वाहनों के पहिएहिंसा के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन कड़े कदम उठाए हैं. जिन इलाकों में उपद्रव और झड़पों की आशंका थी, वहां पूरी तरह से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही बंद है और सुरक्षाबल चप्पे-चप्पे पर गश्त लगा रहे हैं. अचानक लगे कर्फ्यू की वजह से आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है.शांति व्यवस्था कायम करने के लिए सेना हाई अलर्ट परउपद्रवियों पर नकेल कसने और हालात को बेकाबू होने से रोकने के लिए नेपाली सेना को अलर्ट मोड पर रखा गया है. संवेदनशील इलाकों और मुख्य चौराहों पर सेना की फ्लैग मार्च शुरू कर दी गई है. प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि माहौल बिगाड़ने या कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही पड़ोसी जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है.
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय निवासियों पर वहां की सेना और सुरक्षाबलों का भयानक अत्याचार चरम पर पहुंच गया है. अपनी बुनियादी जरूरतों, आटे-बिजली की किल्लत, भारी-भरकम बिलों और आर्थिक बदहाली के खिलाफ आवाज उठा रही निहत्थी अवाम पर गोलियां बरसाकर पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरी हमदर्दी का उसका दावा केवल एक ढोंग है.125 से अधिक निर्दोषों की मौत और महिलाओं पर बर्बरताशुरुआती रिपोर्टों में नुकसान कम आंका जा रहा था, लेकिन स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार सेना की गोलीबारी में अब तक 125 से ज्यादा बेगुनाह लोग जान गंवा चुके हैं. रावलकोट, मीरपुर और कोटली जैसे शहरों में अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया. पुलिस व सेना के लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल से 50 से अधिक महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुई हैं. इस दरिंदगी को छिपाने के लिए PoK में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, फिर भी सच उजागर होने पर वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला.संयुक्त राष्ट्र ने लगाई कड़ी फटकारसंयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने इस स्थिति पर गहरा दुख जताते हुए पाकिस्तान को सख्त कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाना, नागरिकों को अपराधी ठहराना और अत्यधिक बल प्रयोग करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का सीधा उल्लंघन है. संयुक्त राष्ट्र की इस टिप्पणी ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की बची-कुची साख भी खत्म कर दी है.'मुजफ्फराबाद मार्च' के साथ आंदोलन फिर शुरू'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा यह जनआंदोलन पाकिस्तान की गोलियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है. समिति के नेताओं ने साफ किया कि अपने शहीदों का अंतिम संस्कार करने और घायलों के इलाज के लिए आंदोलन को कुछ समय रोका गया था, लेकिन अब 'मुजफ्फराबाद मार्च' को और अधिक मजबूती के साथ दोबारा शुरू कर दिया गया है. जनता का संकल्प है कि जब तक सैन्य तानाशाही का अंत नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा.क्यों भड़की आक्रोश की आग और क्या है 12 सीटों का विवाद?PoK के लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा और महंगे बिजली बिलों से त्रस्त हैं. इस आर्थिक शोषण के साथ-साथ राजनीतिक अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है. PoK विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के नाम पर 12 सीटें आरक्षित रखी गई हैं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन 12 सीटों का गलत इस्तेमाल करके अपनी मनपसंद कठपुतली सरकार बनाता है. प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि इन आरक्षित सीटों को तुरंत खत्म किया जाए ताकि PoK के मूल निवासियों को उनका वास्तविक राजनीतिक हक मिल सके.
स्पेन और मोरक्को के बीच हुआ बड़ा बवाल, तो फिर इटली की पीएम जॉर्जियो मेलोनी क्यों हो गईं लाल
यूरोपीय महाद्वीप और उत्तरी अफ्रीका के बीच रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले स्पेन और मोरक्को के रिश्तों में अचानक बड़ा तनाव पैदा हो गया है। इस सीमावर्ती और कूटनीतिक बवाल ने न सिर्फ इन दोनों देशों को आमने-सामने ला खड़ा किया है, बल्कि इसकी तपिश अब भूमध्य सागर को पार करते हुए इटली तक पहुंच गई है। स्पेन और मोरक्को के इस आपसी विवाद पर इटली की फायरब्रांड प्रधानमंत्री जॉर्जियो मेलोनी (Giorgia Meloni) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी तीखी नाराजगी जाहिर की है। मेलोनी के इस औचक गुस्से ने यूरोपीय संघ (EU) के गलियारों में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है कि आखिर दो अन्य देशों के झगड़े में इटली की पीएम क्यों भड़क उठी हैं?स्पेन और मोरक्को सीमा पर सुलगता विवाद और अवैध घुसपैठ का मुद्दास्पेन और मोरक्को के बीच विवाद की जड़ें काफी पुरानी हैं, लेकिन हालिया दिनों में दोनों देशों की सीमाओं, खासकर सेउटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla) जैसे स्पेनिश क्षेत्रों में सुरक्षा और अवैध प्रवासियों (Illegal Migrants) के प्रवाह को लेकर गतिरोध चरम पर पहुंच गया है। मोरक्को की तरफ से होने वाली घुसपैठ और स्पेनिश अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बयानबाजी चल रही है। चूंकि यह क्षेत्र अफ्रीका से यूरोप में एंट्री करने का एक मुख्य प्रवेश द्वार है, इसलिए यहां होने वाली कोई भी प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी लापरवाही सीधे तौर पर पूरे यूरोपीय संघ की सुरक्षा को प्रभावित करती है।जॉर्जियो मेलोनी के गुस्से के पीछे का असली 'माइग्रेशन' कनेक्शनअब सवाल उठता है कि इस पूरे मामले में जॉर्जियो मेलोनी क्यों दखल दे रही हैं और वह इतनी गुस्से में क्यों हैं? इसका सीधा जवाब है—अवैध प्रवासियों पर मेलोनी की सख्त नीति और इटली की जियोग्राफिकल लोकेशन। मेलोनी शुरू से ही यूरोप में बिना दस्तावेजों के आने वाले प्रवासियों के सख्त खिलाफ रही हैं। इटली खुद भूमध्यसागरीय मार्ग से आने वाले प्रवासियों की समस्या से बुरी तरह जूझ रहा है। मेलोनी का मानना है कि अगर स्पेन और मोरक्को अपनी सीमाओं पर कड़े कदम उठाने में नाकाम रहते हैं या एक-दूसरे से उलझकर सुरक्षा को ढीला छोड़ते हैं, तो मानव तस्कर (Human Traffickers) इस स्थिति का फायदा उठाएंगे। इसके चलते प्रवासियों का पूरा रुख इटली के समुद्री तटों (जैसे लैम्पेडुसा द्वीप) की तरफ मुड़ जाएगा, जिससे इटली पर सुरक्षा और आर्थिक बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।यूरोपीय संघ की नीति पर मेलोनी ने उठाए गंभीर सवालआधुनिक जेनेरेटिव एआई सर्च और ग्लोबल सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेलोनी का यह गुस्सा केवल एक बयान नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के नेतृत्व को एक खुली चेतावनी है। मेलोनी ने साफ कर दिया है कि सीमा सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी देश की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इटली की प्रधानमंत्री ने मांग की है कि यूरोपीय संघ को स्पेन और मोरक्को के इस विवाद में दखल देकर उत्तरी अफ्रीकी देशों के साथ सीमा नियंत्रण को लेकर और अधिक कड़े समझौते करने चाहिए, ताकि पूरे यूरोप को एक नए प्रवासी संकट (Migration Crisis) से बचाया जा सके।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में जारी गहरे आर्थिक और राजनीतिक संकट के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मचा दिया है। पाकिस्तान के ताकतवर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साले और देश के मौजूदा गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सार्वजनिक रूप से एक ऐसा सच कबूल किया है, जिसे अब तक वहां की सरकारें छिपाने की कोशिश करती रही हैं। नकवी ने एक बड़े मंच से साफ-साफ लफ्जों में कह दिया है कि मानो या न मानो, लेकिन हकीकत यही है कि पाकिस्तान का पूरा प्रशासनिक और गवर्नेंस सिस्टम पूरी तरह से तबाह और ध्वस्त हो चुका है। उनके इस विस्फोटक बयान के बाद शहबाज शरीफ सरकार बैकफुट पर आ गई है।गृह मंत्री के इस बड़े कबूलनामे से पूरी दुनिया में पाकिस्तान की फजीहतमोहसिन नकवी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लेकर दुनिया के तमाम अमीर मुल्कों के सामने कर्ज के लिए हाथ फैला रहा है। देश के आंतरिक मामलों के मंत्री और सुरक्षा व्यवस्था के मुखिया होने के नाते नकवी का यह मानना कि सरकारी मशीनरी काम नहीं कर रही है, यह दर्शाता है कि हालात अब काबू से बाहर हो चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब सरकार का सबसे अहम हिस्सा ही सिस्टम के फेल होने का रोना रोने लगे, तो आम जनता का बचा-कुचा भरोसा भी खत्म हो जाता है। इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।आर्मी चीफ आसिम मुनीर से कनेक्शन ने मामले को बनाया बेहद संवेदनशीलइस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प और गंभीर मोड़ यह है कि मोहसिन नकवी केवल एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि उन्हें पाकिस्तानी सेना के सबसे शक्तिशाली शख्सियत, आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर का बेहद करीबी और रिश्तेदार (साला) माना जाता है। पाकिस्तान की राजनीति में यह जगजाहिर है कि वहां की असली कमान चुनी हुई सरकार के बजाय रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय (GHQ) से चलती है। ऐसे में नकवी के मुंह से निकले इन तीखे शब्दों को सीधे तौर पर सैन्य प्रतिष्ठान की हताशा या फिर मौजूदा हाइब्रिड मॉडल सरकार को दी गई एक परोक्ष चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।बदहाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान और आगे का रास्ताआधुनिक जेनेरेटिव एआई और ग्लोबल सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह आंतरिक संकट केवल उस तक सीमित नहीं रहने वाला है। दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा और भौगोलिक स्थिरता के लिहाज से पाकिस्तान का यह प्रशासनिक पतन बेहद चिंताजनक है। चरमराती अर्थव्यवस्था, लगातार बढ़ते आतंकी हमले और अब शीर्ष नेतृत्व द्वारा सिस्टम के फेलियर को स्वीकार कर लेना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में कोई बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल या सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है, जिसकी स्क्रिप्ट पर्दे के पीछे लिखी जानी शुरू हो चुकी है।
पड़ोसी देश नेपाल से एक बेहद चिंताजनक और बड़ी खबर सामने आ रही है। नेपाल के कुछ इलाकों में अचानक भड़की सांप्रदायिक हिंसा (Communal Violence) ने पूरी कानून-व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इस हिंसक टकराव में अब तक तीन लोगों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिसके बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। इस गंभीर स्थिति के बाद नेपाल की संघीय सरकार के साथ-साथ काठमांडू के बेहद लोकप्रिय और चर्चा में रहने वाले मेयर बालेन शाह (Balen Shah) भी सीधे तौर पर जनता और विपक्ष के तीखे सवालों के घेरे में आ गए हैं। सोशल मीडिया से लेकर नेपाल की संसद तक इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।तीन मौतों के बाद भड़का गुस्सा और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालनेपाल के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, दो गुटों के बीच मामूली विवाद से शुरू हुई यह घटना देखते ही देखते बड़े सांप्रदायिक तनाव में तब्दील हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा, लेकिन तब तक उपद्रवियों ने भारी नुकसान पहुंचा दिया था। इस हिंसा में तीन नागरिकों की जान जाने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी और खुफिया तंत्र की विफलता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालात को काबू में करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और कुछ जगहों पर कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।मेयर बालेन शाह और संघीय सरकार के बीच कूटनीतिक तनातनीइस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब काठमांडू के मेयर बालेन शाह पर इस तनाव को सही समय पर न संभाल पाने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ माहौल को रोकने में नाकाम रहने के आरोप लगे। बालेन शाह, जो अपने आक्रामक अंदाज और स्वतंत्र कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, इस समय नेपाल की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर हैं। आलोचकों का कहना है कि जब देश का एक हिस्सा सुलग रहा था, तब स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच बेहतर तालमेल की भारी कमी दिखी। वहीं, बालेन शाह के समर्थकों का दावा है कि यह उनके बढ़ते राजनीतिक कद को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।भारत-नेपाल सीमा और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा का हाई अलर्टइस सांप्रदायिक झड़प का असर नेपाल के सीमावर्ती इलाकों पर भी देखने को मिल रहा है। भौगोलिक रूप से भारत से सटे होने के कारण दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बल भी अलर्ट मोड पर आ गए हैं। नेपाल में होने वाली किसी भी बड़ी उथल-पुथल का असर सीधे तौर पर भारत के सीमावर्ती राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार के सामाजिक ताने-बाने पर भी पड़ता है। जेनेरेटिव एआई और आधुनिक वैश्विक सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स को देखें तो अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर नेपाल सरकार ने समय रहते इस सांप्रदायिक आग को पूरी तरह नहीं बुझाया, तो इसका दूरगामी असर देश के पर्यटन और आर्थिक मोर्चे पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कोयला खदान के अंदर मीथेन गैस से हुए धमाके में 34 मजदूरों की मौत हो गई। रेस्क्यू टीम मलबे में फंसे अन्य खनिकों को निकालने में जुटी है।
चीन, तिब्बत और नेपाल में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके, कुछ ही घंटों में कई बार हिली धरती
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, शुक्रवार सुबह कुछ ही घंटों में चीन, तिब्बत और नेपाल के कई हिस्सों में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। इनमें सबसे तेज भूकंप चीन में आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई।
आधुनिक तकनीक और विकास के मामले में दुनिया भर में मिसाल कायम करने वाला जापान इन दिनों एक बेहद अहम और रणनीतिक योजना पर काम कर रहा है। जापान सरकार टोक्यो के अलावा एक 'दूसरी राजधानी' (Second Capital / Backup Capital) स्थापित करने की योजना को आगे बढ़ा रही है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में टोक्यो में कोई भीषण भूकंप या प्राकृतिक आपदा आती है, तो देश की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकार और आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से सुरक्षित रहें और बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलती रहें। आइए जानते हैं कि इस रेस में कौन-कौन से प्रमुख शहर शामिल हैं और उनकी क्या खासियतें हैं।1. ओसाका (Osaka): सबसे मजबूत और अग्रणी दावेदारजापान की दूसरी राजधानी बनने की इस रेस में ओसाका को सबसे आगे और सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।ओसाका टोक्यो के बाद जापान का दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण महानगर (Metropolitan Area) है।इसके पास विशाल आर्थिक महत्व, मजबूत कमर्शियल नेटवर्क और एक विकसित शहरी बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पहले से मौजूद है।यहां बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और व्यावसायिक संचालन करने की पूरी क्षमता है, जो इसे इस दर्जे के लिए सबसे मुफीद बनाती है।2. नागोया और आइची (Aichi / Nagoya): देश का प्रमुख इंडस्ट्रियल हबआइची प्रिफेक्चर और उसके मुख्य शहर नागोया ने भी आधिकारिक तौर पर इसके लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।यहां के प्रशासकों का दावा है कि नागोया और आइची क्षेत्र के पास देश की दूसरी राजधानी के रूप में कार्य करने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक, राजनीतिक और औद्योगिक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।यह क्षेत्र जापान के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल हब के रूप में जाना जाता है, जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।3. फुकुओका (Fukuoka): पश्चिमी जापान का तेजी से उभरता केंद्रफुकुओका प्रिफेक्चर ने स्थानीय नगर पालिकाओं और बिजनेस कम्युनिटी के साथ मिलकर इस रेस में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।यह पश्चिमी जापान का एक प्रमुख और तेजी से उभरता हुआ आर्थिक व व्यापारिक केंद्र है।इसकी भौगोलिक स्थिति और आधुनिक कनेक्टिविटी इसे आपदा प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों के लिहाज से एक बेहद सुरक्षित और सक्षम विकल्प बनाती है।(इन प्रमुख शहरों के अलावा होक्काइडो (Hokkaido) और मियागी (Miyagi) जैसे प्रिफेक्चर भी इस योजना के तहत अपनी हिस्सेदारी और संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।)
अमेरिका में नौकरी के लिए विदेशी छात्रों को देंगे 1 लाख डॉलर शुल्क, भारतीय छात्रों पर पड़ेगा बड़ा असर
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसके तहत वहां की यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने वाले विदेशी छात्रों को नौकरी करने के लिए 1 लाख डॉलर (करीब 96 लाख रुपये) तक का शुल्क देना पड़ सकता है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। प्रांतीय राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाके में स्थित एक कोयला खदान में मीथेन गैस के रिसाव के कारण जोरदार धमाका हो गया। इस खौफनाक हादसे में कम से कम 18 खनिकों की मौके पर ही मौत हो गई है। वहीं, लगभग 24 मजदूर अभी भी खदान के मलबे में बुरी तरह फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी है।1200 मीटर गहरी खदान में जिंदगी की जद्दोजहदराहत और बचाव टीमें 1,200 मीटर की गहराई में फंसे 24 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कड़ी मशक्कत कर रही हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मीथेन गैस के धमाके के बाद ऑक्सीजन का स्तर शून्य हो जाता है, जिससे फंसे हुए मजदूरों के जिंदा बचने की उम्मीद बहुत कम रह गई है। फिर भी, जब तक हर एक मजदूर का पता नहीं चल जाता, तलाश जारी रहेगी।परिजनों का बुरा हाल और मुआवजे का ऐलानइस दर्दनाक घटना के बाद से ही खदान के बाहर मजदूरों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। बलूचिस्तान के खदान मंत्री शोएब नोशेरवानी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। लेबर यूनियन ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसके बाद सरकार ने हादसे के कारणों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
मिडिल ईस्ट में सालों से चल रहे खूनी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में शांति स्थापित करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया है। इस डील के तहत यह तय किया गया है कि हमास अपने सभी हथियार डाल देगा और इसके बदले इजराइली सेना गाजा से पूरी तरह वापस लौट जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने इसे 'शांति परिषद' (Board of Peace) की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। लेकिन इस घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और खुद हमास इस समझौते को पूरी तरह से मानेंगे? आइए इस बहुचर्चित डील की जमीनी हकीकत को समझते हैं।कैसे लागू होगा ट्रंप का यह शांति फार्मूला?ट्रंप द्वारा पेश किए गए इस शांति रोडमैप के मुताबिक, हमास का निरस्त्रीकरण एक झटके में नहीं, बल्कि कई चरणों में होगा। योजना यह है कि गाजा में मौजूद सभी छोटे-बड़े हथियार और सैन्य ठिकाने एक नई फिलिस्तीनी तकनीकी सरकार (NCAG) और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) के नियंत्रण में सौंप दिए जाएंगे। जैसे-जैसे हमास अपने हथियार सौंपने की प्रक्रिया पूरी करेगा, वैसे-वैसे इजरायली सेना गाजा पट्टी से अपने कदम पीछे खींचना शुरू कर देगी। अमेरिका का मानना है कि इससे इजरायल को अपनी सुरक्षा की गारंटी मिलेगी और गाजा के आम नागरिकों को फिर से एक सुरक्षित जीवन मिल सकेगा।क्या नेतन्याहू और हमास इस डील को मानेंगे?भले ही अमेरिका ने इस समझौते को एक बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया हो, लेकिन राह अभी इतनी आसान नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने अभी तक इस प्रस्ताव पर आधिकारिक तौर पर अपनी मुहर नहीं लगाई है। नेतन्याहू सरकार का साफ कहना है कि इजरायली सेना के पीछे हटने से पहले गाजा का पूरी तरह से सैन्यीकरण खत्म होना चाहिए। इजरायल किसी भी शर्त पर हमास के पास एक भी हथियार छोड़ने के पक्ष में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, हमास की ओर से भी अभी तक कोई सीधा बयान नहीं आया है, हालांकि मिस्र की राजधानी काहिरा में मध्यस्थों (कतर, मिस्र और तुर्की) के साथ उसकी बातचीत काफी एडवांस स्टेज में चल रही है।आगे का रास्ता क्या है?अगर यह डील अपने तय स्वरूप में लागू हो जाती है, तो यह मध्य पूर्व के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी। लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह से दूर नहीं किया जाता और हमास जमीनी स्तर पर अपने हथियार नहीं सौंपता, तब तक यह समझौता सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले कुछ दिनों में काहिरा में होने वाली अहम बैठकों में क्या ठोस नतीजा निकलकर सामने आता है।
ईरान युद्ध पर ट्रंप का नियंत्रण: नेतन्याहू ने किया बड़ा खुलासा
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान युद्ध से जुड़े सभी निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही ले रहे हैं
ईरान और अमेरिका में जारी तनातनी के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन के अल अजराक एयर बेस पर अमेरिका के जवाबी हमले का दावा किया
20वीं सीपीसी केंद्रीय कमेटी का पांचवां पूर्णाधिवेशन अक्टूबर में आयोजित होगा
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) केंद्रीय कमेटी के पोलित ब्यूरो ने बैठक कर फैसला किया कि इस अक्टूबर में 20वीं सीपीसी केंद्रीय कमेटी का पांचवां पूर्णाधिवेशन पेइचिंग में आयोजित होगा।

