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ट्रंप का बड़ा दावा: ‘ईरान के साथ समझौता खत्म’, 80 से अधिक ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ा तनाव

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है। उनके अनुसार, यदि ईरान परमाणु क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो यह केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।

देशबन्धु 8 Jul 2026 3:03 pm

डिजिटल अरेस्ट करने वाली इंडस्ट्री एक्सपोज, कंबोडिया-मलेशिया पहुंचा भास्कर:भर्ती से ट्रेनिंग तक कंपनी जैसा नेटवर्क; 55 दिनों की पड़ताल, पढ़िए कल से

बीते 11 महीनों में मुंबई के बिजनेसमैन से 58 करोड़, दिल्ली की बुजुर्ग महिला से 20 करोड़ और गांधीनगर की डॉक्टर से 19 करोड़ रुपए डिजिटल अरेस्ट करके ठगे गए। डिजिटल अरेस्ट का ये काम किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह चल रहा है। कंपनी में बकायदा HR हैं, हायरिंग और ट्रेनिंग होती है। टारगेट मिलता है। सैलरी के साथ इंसेंटिव भी दिया जाता है। भारत, अमेरिका, चीन समेत दुनियाभर के देशों के लोगों को ठगा जा रहा है। इस स्कैम का हब कंबोडिया और मलेशिया जैसे देश बन चुके हैं। इस स्कैम इंडस्ट्री को एक्सपोज करने के लिए भास्कर रिपोर्टर अक्षय बाजपेयी एजेंट बनकर नेटवर्क में शामिल हुए। 55 दिनों तक पड़ताल की। मुंबई से कंबोडिया और मलेशिया तक पहुंचे। उन एजेंट्स को कैमरे में कैद किया, जो इस नेटवर्क के पीछे हैं। पाकिस्तानी एजेंटों से डील की। एयरपोर्ट पर सेटिंग से लेकर स्कैम कंपाउंड्स का सच जाना। ‘ऑपरेशन स्कैम वर्ल्ड’ सीरीज के दो पार्ट में 9 और 10 जुलाई को पढ़िए और देखिए पूरा इन्वेस्टिगेशन।

दैनिक भास्कर 8 Jul 2026 1:28 pm

चीन की उड़ी नींद! समंदर के 3 चोक-पॉइंट्स पर भारत-इंडोनेशिया का कड़ा पहरा, ड्रैगन का तेल-राशन होगा कंट्रोल

हिंद महासागर (Indian Ocean) में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी और विस्तारवादी नीतियों पर लगाम कसने के लिए भारत ने एक बड़ा और रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक चला है। अब भारत और इंडोनेशिया ने मिलकर समंदर के उन तीन सबसे अहम 'चोक-पॉइंट्स' (Choke Points) पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की तैयारी कर ली है, जहां से होकर चीन का ज्यादातर व्यापार और कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई होती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों की यह संयुक्त साझेदारी ड्रैगन के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है, क्योंकि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में इससे सीधे तौर पर चीन की सप्लाई चेन भारत की मुट्ठी में आ जाएगी।समंदर के 3 अहम चोक-पॉइंट्स पर रहेगी पैनी नजर समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिहाज से हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर (South China Sea) को जोड़ने वाले रास्ते बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। नई रणनीतिक रूपरेखा के तहत भारत और इंडोनेशिया अब मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca), सुंडा (Sunda Strait) और लोम्बोक जलडमरूमध्य (Lombok Strait) पर अपनी नौसैनिक गश्त और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। मलक्का स्ट्रेट को दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में गिना जाता है। इन तीनों अहम चोक-पॉइंट्स पर दोनों देशों की मजबूत पकड़ का सीधा मतलब है कि संकट के समय में इस रूट को पूरी तरह से मॉनिटर या ब्लॉक किया जा सकता है, जो भारत को भारी रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।चीन के लिए क्यों है यह सबसे बड़ा झटका? रक्षा और भू-राजनीति के विशेषज्ञ इसे कूटनीतिक भाषा में 'मलक्का डिलेमा' (Malacca Dilemma) कहते हैं। दरअसल, चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 70 से 80 फीसदी कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खाड़ी देशों से इन्हीं समुद्री रास्तों के जरिए आयात करता है। अगर भारत और इंडोनेशिया मिलकर इन रास्तों पर कड़ी निगरानी रखते हैं या किसी सैन्य संघर्ष के दौरान आवाजाही रोक देते हैं, तो चीन में रातों-रात तेल और राशन का भारी संकट पैदा हो जाएगा। ईंधन के अभाव में उसकी पूरी अर्थव्यवस्था और सैन्य मशीनरी ठप पड़ सकती है। यही वजह है कि भारत और इंडोनेशिया का यह साझा कदम बीजिंग के नीति-निर्माताओं की चिंताएं बढ़ा रहा है।भारत-इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) के तहत इंडोनेशिया के साथ रक्षा, व्यापार और नौसैनिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट (Sabang Port) के विकास में भारत की भागीदारी ने इस रणनीति को और धार दे दी है। यह पोर्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से बेहद करीब है, जो भारतीय नौसेना को इस पूरे इलाके में एक मजबूत बेस प्रदान करता है। दोनों देशों की नौसेनाएं लगातार संयुक्त पेट्रोलिंग और युद्धाभ्यास कर रही हैं। यह आधुनिक जियो-पॉलिटिक्स (Geo-Politics) में भारत की उस आक्रामक कूटनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अब रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:21 pm

कराची के आसमान से रहस्यमयी तरीके से गायब हुआ विमान, समुद्र में मची खलबली, बड़े सर्च ऑपरेशन का ऐलान

पाकिस्तान में एक बड़ी विमानन त्रासदी की आशंका ने हलचल मचा दी है। कराची के आसमान में उड़ान भर रहा एक विमान अचानक रडार से गायब हो गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। विमान के लापता होते ही कराची और उसके आसपास के तटीय इलाकों में हड़कंप मच गया। प्राथमिक सूचनाओं के अनुसार, विमान से संपर्क टूटने के बाद से ही बचाव दल और सुरक्षा एजेंसियों ने युद्धस्तर पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। फिलहाल यह विमान समुद्र के ऊपर उड़ान भर रहा था, जिसके चलते सर्च ऑपरेशन का दायरा अरब सागर के तटों तक फैला दिया गया है।रडार से संपर्क टूटने के बाद बढ़ी चिंताविमान के रडार से ओझल होने की सूचना मिलते ही एविएशन अथॉरिटी ने 'इमरजेंसी प्रोटोकॉल' लागू कर दिया है। बताया जा रहा है कि विमान ने कराची एयरस्पेस में प्रवेश करते ही संपर्क खो दिया था, जिसके बाद से एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के साथ उसका कोई डेटा साझा नहीं हो पाया है। शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह कोई तकनीकी खराबी थी या मौसम के कारण विमान को अचानक नीचे आना पड़ा। हालांकि, विमान का मलबा या कोई ठोस सुराग अभी तक नहीं मिल सका है, जिससे परिवार वालों और प्रशासन की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।समुद्र में जारी है व्यापक सर्च ऑपरेशनपाकिस्तान की नौसेना (Pakistan Navy) और कोस्ट गार्ड ने विमान की तलाश में अपने जहाजों और हेलीकॉप्टरों को समुद्र में उतार दिया है। सर्च ऑपरेशन का मुख्य केंद्र कराची का तटीय इलाका है, जहां विमान के अंतिम बार देखे जाने की सूचना मिली थी। खराब मौसम और समुद्र की ऊंची लहरें बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने समुद्र के पास कुछ असामान्य हलचल देखी थी, जिसे देखते हुए सर्च टीम अब उन विशिष्ट पॉइंट्स पर फोकस कर रही है जहां विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की सबसे अधिक संभावना है।क्या हो सकती है घटना की वजह?इस विमान के लापता होने के पीछे के सटीक कारणों का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि उड़ान के दौरान अचानक संपर्क टूटना किसी बड़े टेक्निकल फेल्योर या हाइड्रोलिक समस्या का संकेत हो सकता है। फिलहाल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी है और किसी भी अनहोनी की पुष्टि करने से बच रहा है। जैसे-जैसे सर्च ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, पूरे पाकिस्तान की नजरें कराची के समुद्र तट पर टिकी हैं। फिलहाल, बचाव दल विमान का सिग्नल पकड़ने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:19 pm

पाकिस्तान में BLA का खूनी तांडव: पुलिस स्टेशन पर किया बड़ा हमला, 17 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या से दहला इलाका

पाकिस्तान में अशांति का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक बार फिर सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए खौफनाक हमले को अंजाम दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूचिस्तान के एक पुलिस थाने पर BLA के आतंकियों ने अचानक धावा बोल दिया। इस हमले में 17 पुलिसकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और बलूचिस्तान में जारी अलगाववादी संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है।कैसे दिया हमले को अंजाम?प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए पुलिस थाने को पूरी तरह घेर लिया था। हमला इतना अचानक और भीषण था कि सुरक्षाकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। BLA के आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें मौके पर ही पुलिसकर्मियों की जान चली गई। हमले के बाद आतंकी हथियार लूटकर और पुलिस स्टेशन में भारी तबाही मचाकर आसानी से फरार होने में कामयाब रहे। घटना के बाद इलाके में भारी सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।पाकिस्तान के लिए क्यों है यह बड़ा सिरदर्द?बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा किए गए इस हमले को सुरक्षा विशेषज्ञ पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं। बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रहा विद्रोह अब और अधिक हिंसक होता जा रहा है। विशेष रूप से पुलिस और सेना के जवानों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि विद्रोही गुट अब सरकारी तंत्र को सीधे चुनौती दे रहे हैं। इस हमले के बाद स्थानीय लोगों में भी डर का माहौल है और पाकिस्तान सरकार की विफलता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।क्षेत्र में तनाव और भविष्य के हालातइस हमले के बाद बलूचिस्तान के हालात और भी नाजुक हो गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद आतंकी बिना किसी खुफिया जानकारी के कैसे थाने तक पहुंच गए। BLA ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिससे साफ है कि वे सुरक्षा बलों के खिलाफ अपनी आक्रामक रणनीति को और तेज करने वाले हैं। आने वाले दिनों में बलूचिस्तान में सुरक्षा कड़ी की जा सकती है, लेकिन यह घटना साबित करती है कि पाकिस्तान के इस इलाके में शांति अभी काफी दूर है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:18 pm

होर्मुज में बढ़ता तनाव: क्या फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? भारत के लिए क्यों चिंता का विषय है ईरान-अमेरिका विवाद

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर भू-राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजारों को चिंता में डाल दिया है। अगर दोनों देशों के बीच प्रस्तावित डील टूटती है या हालात युद्ध जैसे बनते हैं, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आपकी जेब पर पड़ सकता है। तेल और गैस की सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर भारत में महंगाई बढ़ाने का कारण बन सकती है।क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज का रास्ता?होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है। दुनिया की कुल समुद्री तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण इस मार्ग पर सुरक्षा संबंधी समस्याएं खड़ी होती हैं, तो तेल के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होगी। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, बल्कि सप्लाई में देरी से भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगेगा।भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा बुरा असर?भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर पड़ता है। महंगा आयात होने का मतलब है कि भारत का फॉरेक्स रिजर्व तेजी से खर्च होगा और रुपये की कीमत पर दबाव बढ़ेगा। जब कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं, जिससे ढुलाई महंगी हो जाएगी और खाद्य पदार्थों सहित रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम बढ़ना निश्चित है।डील टूटी तो क्या बढ़ेगा संकट?ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी डील का टूटना वैश्विक तेल बाजार के लिए एक 'शॉक' की तरह होगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं या तनाव बढ़ता है, तो बाजार में डर का माहौल बनेगा, जिससे कच्चे तेल के दाम में अचानक उछाल आ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं, यह स्थिति एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर सकती है। हालांकि, भारत सरकार इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) का उपयोग करती है, लेकिन लंबे समय तक जारी रहने वाला संघर्ष स्थिति को कठिन बना सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:17 pm

खामेनेई के जनाजे के बीच अमेरिका का बड़ा हमला, ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर बरसाए बम!

ईरान की ओर से व्यापारिक जहाजों के निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने भी ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया कि ये हमले सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों से किए गए।

देशबन्धु 8 Jul 2026 11:37 am

ईरान पर अमेरिका का डबल अटैक! एयरस्ट्राइक के साथ तेल पर भी वार

संयुक्त राज्य अमेरिका ने मंगलवार को 80 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों पर सेंटकॉम के नए हवाई हमले शुरू किए। साथ ही, उसने अमेरिकी ट्रेजरी का वह महत्वपूर्ण लाइसेंस भी रद्द कर दिया

देशबन्धु 8 Jul 2026 10:18 am

ट्रंप का बड़ा ऐलान! सीरिया से हटेंगे अमेरिकी प्रतिबंध

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार सीरिया पर लगे प्रतिबंध हटा देगी। उन्होंने सीरिया को एक दोस्त देश बताया और कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने सीरिया की नई सरकार के साथ रिश्ते बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

देशबन्धु 8 Jul 2026 8:30 am

होर्मुज स्‍ट्रेट में तीन टैंकरों पर हमले, सऊदी और कतर के जहाजों को नुकसान

यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने मंगलवार को बताया कि होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर तीन अलग-अलग हमले हुए हैं। इन तीनों घटनाओं में किसी के घायल होने की खबर नहीं है

देशबन्धु 8 Jul 2026 7:50 am

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने एकजुटता पर उठाए सवाल, बोले- जरूरत पड़ने पर किसी ने साथ नहीं दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ⁠उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के कई सहयोगी देशों ने ईरान में अमेरिका के सैन्य अभियान के दौरान साथ देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नाटो में जिम्मेदारियों का बोझ बराबर नहीं बंटता।

देशबन्धु 8 Jul 2026 7:30 am

पश्चिम बंगाल: राज्यसभा उपचुनाव में तृणमूल को झटका लगने के आसार, भाजपा कर सकती है क्लीन स्वीप

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए राज्य से राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाला आगामी उपचुनाव एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकता है

देशबन्धु 8 Jul 2026 6:50 am

नाटो ने नए रक्षा प्रोजेक्ट किए घोषित, एयर टैंकर बेड़े और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर जोर

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सेक्रेटरी जनरल मार्क रूटे ने तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित रक्षा उद्योग फोरम में रक्षा क्षेत्र से जुड़े 'नए बड़े प्रोजेक्ट्स' की घोषणा की है।

देशबन्धु 8 Jul 2026 6:30 am

कैबिनेट से राजनाथ सिंह की विदाई लगभग तय:सोर्स का दावा- चिट्ठी मिली, दोनों बेटे वजह, फेरबदल के पीछे दो फैसले

मोदी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी लगभग पूरी है। 20 जुलाई से मानसून सत्र शुरू हो रहा। सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले कभी भी फेरबदल की सूचना आ सकती है। इसमें सबसे अहम नाम राजनाथ सिंह का है। सोर्स बताते हैं कि उनकी विदाई लगभग तय है और इसके लिए वो तैयार भी हैं। सोर्स के मुताबिक, निर्मला सीतारमण, हरदीप सिंह पुरी, पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा से भी मंत्री पद लिया जा सकता है। मंत्रालय में मौजूद हमारे सूत्रों ने बदलाव का आधार और इसकी वजहें भी बताईं। पढ़िए रिपोर्ट में… कैबिनेट में फेरबदल के दो आधार सोर्स के मुताबिक, इस बदलाव का आधार दो फैसले हैं- पहला: कैबिनेट अब ज्यादा युवा होगी। औसत उम्र BJP अध्यक्ष की उम्र के आसपास यानी 46 साल होगी। 2-4 साल कम-ज्यादा हो सकती है, लेकिन 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को बाहर जाना ही पड़ेगा। अपवाद ही बचेंगे। हालांकि, ये नियम PM पद के लिए लागू नहीं होगा। पिछले दो फेरबदल में कैबिनेट के जो चेहरे नहीं बदले, वो इस बार जरूर बदलेंगे।‘ दूसरा: जिन पार्टियों से टूटकर लोग BJP में आए, उन्हें भी कैबिनेट में जगह देनी है। इसमें पंजाब से टूटकर आने वाले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद शामिल हैं। इनके अलावा शिवसेना (उद्धव गुट) से टूटकर आए सांसद और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस के सांसद भी NDA के सपोर्ट में है। उन्हें भी कैबिनेट में शामिल करने की तैयारी है। कैबिनेट के 6 बड़े नाम, जिन्हें बदला जाएगा और उन्हें बदलने की वजह… 1. राजनाथ सिंह, केंद्रीय रक्षा मंत्री इस बार क्या राजनाथ सिंह कैबिनेट छोड़ेंगे या छोड़ना पड़ेगा? सोर्स बताते हैं, ‘कैबिनेट में किसी व्यक्ति का आना-जाना, कभी कोई मंत्री या पदाधिकारी तय नहीं करता। इसका फैसला होने के बाद संबंधित व्यक्ति को चिट्ठी दे दी जाती है। इस बार राजनाथ सिंह को चिट्ठी मिलने की खबर है। वो खुद भी बदलाव के लिए तैयार हैं।‘ फिर क्या उनकी विदाई तय है? सोर्स बताते हैं, ‘अभी तो यही दिख रहा है। आखिरी वक्त में क्या होगा, ये तभी पता चलेगा।‘ क्या वो सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (CCS) से भी हटेंगे? सोर्स कहते हैं, ‘हां, इस कमेटी का मेंबर होने के लिए डिफेंस मिनिस्टर होना जरूरी है। राजनाथ सिंह 2014 से लगातार इस सबसे अहम कमेटी के मेंबर हैं।‘ उनकी विदाई की वजह क्या हो सकती है? सोर्स साफ करते हुए कहते हैं, इसके पीछे कोई नाराजगी नहीं, बल्कि दोनों बेटों का सक्रिय राजनीति में होना है। राजनाथ के छोटे बेटे नीरज इस बार यूपी BJP में उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। हालांकि, वे यूपी में पिछले करीब 5 साल से बिना किसी पद के सक्रिय हैं। उनकी सक्रियता से पार्टी के कई पदाधिकारी असहज भी थे। इसे लेकर कई बार सवाल भी उठा? ‘बड़े बेटे पंकज सिंह 2002 से सक्रिय राजनीति में हैं। वे 2012 में यूपी BJP में महासचिव बने, जिसके विरोध में 3 प्रदेश सचिवों ने इस्तीफा भी दिया था। अभी वे नोएडा से विधायक भी हैं। राजनाथ अगर ना हटे, तो परिवारवाद का सबसे अच्छा उदाहरण पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह होगा।’ ‘विदाई की दूसरी वजह उनकी उम्र है। वो 75 साल के हो गए हैं।’ हमने पूछा कि क्या उन्हें कोई दूसरा पद दिया जाएगा? इस पर सोर्स कहते हैं, ‘अभी तय नहीं। मेरी जानकारी में न ही अब तक इसकी कोई चर्चा है। राजनाथ सिंह से एक पद लेकर उन्हें दूसरा पद देने की न कोई मजबूरी दिख रही है और न ही ऐसी कोई परंपरा है।‘ 2. हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को क्या कोई नया पद मिलेगा? इस पर सोर्स कहते हैं, ‘अभी कोई चर्चा नहीं हुई। विदाई लगभग तय है।‘ वजह क्या है? वे कहते हैं, ‘ज्यादा उम्र, साथ ही नए लोगों को लाने के लिए खाली पद चाहिए। एपस्टीन फाइल के खुलासे के वक्त भी इनके नाम की चर्चा हुई, लेकिन ठोस सबूत नहीं मिले।‘ क्या एपस्टीन फाइल भी एक वजह है? जवाब मिला, ‘नहीं, आरोपों के आधार पर पिछले पांच फेरबदल में कोई बाहर कहां गया। उनके बाहर जाने की सबसे बड़ी वजह उम्र ही होगी। अभी वे 74 साल के हैं। मोदी 3.0 कैबिनेट में युवा लोगों की जरूरत है।‘ 3. निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री सोर्स के मुताबिक, निर्मला सीतारमण का बाहर जाना भी लगभग तय है। इन्हें साउथ के इंचार्ज के रूप में देखा जा रहा है। 2029 से पहले इकोनॉमी में कुछ नए फैसले होंगे, जो नए चेहरे के साथ ज्यादा नयापन देंगे। सीतारमण से कोई नाराजगी नहीं है। वो मोदी और शाह की कोर टीम में हैं। उनकी जगह शक्तिकांत दास आ सकते हैं, क्योंकि PM मोदी उन्हें बहुत पसंद करते हैं। अभी वे PM के प्रधान सचिव भी हैं। एक और नाम है, जो वित्तमंत्री के तौर पर PM की लिस्ट में है, वो पीयूष गोयल का है। अभी वे कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर हैं। 4. धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री NEET पेपर लीक के बाद से चर्चा है कि धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय ले लिया जाएगा? इस पर सोर्स कहते हैं, ‘इसकी उम्मीद कम है। उन्हें तभी हटाया जाएगा, जब ओडिशा में उन्हें CM पद दिया जाए। ओडिशा में CM मोहन मांझी का कार्यकाल लगातार विवादों में है, इसलिए वहां भी फेरबदल के आसार हैं। अभी धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय लेकर उन्हें कोई और मंत्रालय दिया जा सकता है। उन्हें बाहर का रास्ता दिखाए जाने की उम्मीद कम है।‘ 5. पंकज चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और यूपी BJP के प्रदेश अध्यक्ष हैं। BJP में दो पद की नीति नहीं है। नए लोगों को पद देने के लिए जगह भी चाहिए। ऐसे में पंकज प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे, लेकिन मंत्री पद छोड़ना होगा। 6. हर्ष मल्होत्रा, केंद्रीय राज्य मंत्री दिल्ली में यही हर्ष मल्होत्रा के साथ होगा। वे अभी दिल्ली BJP के अध्यक्ष हैं। साथ ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री भी हैं। इनका भी मंत्री पद जाना तय है। दिल्ली की CM रेखा गुप्ता के काम और उनकी छवि पर केंद्र की सख्त नजर है। हर्ष मल्होत्रा अब दिल्ली सरकार के काम में इन्वॉल्व होंगे। उन्हें CM की छवि सुधारने और प्रचार का जिम्मा दिया गया है। नीचे ग्राफिक्स में पढ़िए कैबिनेट में किसकी एंट्री की सुगबुगाहट… ………………. ये खबर भी पढ़ें… मोदी कैबिनेट में 9 नए चेहरों के शामिल होने की सुगबुगाहट वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का मंत्रालय बदले जाने और RBI के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास को नया वित्तमंत्री बनाए जाने की सुगबुगाहट है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी मंत्रिमंडल में ये बड़ा फेरबदल अगले कुछ हफ्ते में हो सकता है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 8 Jul 2026 5:28 am

'मेलोनी अच्छी हैं, लेकिन गलती कर बैठीं'- ट्रंप का बड़ा हमला

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ न देकर 'गलती' की। इस फैसले की वजह से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई।

देशबन्धु 8 Jul 2026 3:37 am

चीन में बाढ़ का तांडव! 6 की मौत, 11 लापता, लाखों लोग संकट में

दक्षिण चीन के गुआंग्शी जुआंग स्वायत्त क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ में मंगलवार शाम तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोग अब भी लापता हैं।

देशबन्धु 8 Jul 2026 12:00 am

आज का एक्सप्लेनर:सतलुज फिल्म में ऐसा क्या, जो रिलीज होते ही भारत से गायब; जसवंत सिंह खालड़ा कौन हैं, पंजाब में उनके साथ हुआ क्या था

साल 1995, पंजाब का अमृतसर। ह्यूमन-राइट एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा ने दावा किया कि पुलिस ने 25 हजार से ज्यादा लोगों की हत्या करके लावारिस की तरह उनकी लाशें जला दीं। इस दावे के 7 महीने बाद जसवंत को भी घर से अगवा करके बेरहमी से मार दिया गया था। आज तक उनकी लाश बरामद नहीं हुई है। पंजाब की इसी कहानी पर बनी फिल्म 4 साल से थिएटर में रिलीज नहीं हो पाई है। 3 जुलाई को इसे चुपचाप OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया, लेकिन 48 घंटे के अंदर वहां से भी हटाना पड़ा। फिल्म के लीड एक्टर दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर ‘सतलुज’ नाम की इस फिल्म का एक वीडियो शेयर करके लिखा, ‘सतलुज के साथ जो हुआ, वही जसवंत सिंह खालड़ा के साथ हुआ था।’ आखिर कौन थे जसवंत सिंह, उनके खुलासे और उनकी हत्या की पूरी कहानी क्या है, फिल्म में ऐसा क्या है, जिसका देश-विरोधी एक्टिविटीज में इस्तेमाल होने का डर है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: कौन हैं जसवंत सिंह खालड़ा और उनके साथ पंजाब में क्या हुआ था? जवाब: 1990 के दशक के पंजाब के कई इलाकों में खालिस्तान की मांग जोर पकड़ रही थी। ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार' में 6 जून 1984 को खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह ‘भिंडरांवाले’ की मौत हो गई। जवाब में 31 अक्टूबर, 1984 को पीएम इंदिरा गांधी की उनके ही 2 सिख बॉडीगार्ड्स ने हत्या कर दी। इसके बाद खालिस्तान मूवमेंट को कुचलने का दौर शुरू हुआ। 1992 में बेअंत सिंह सीएम बने। तब के पंजाब पुलिस के DGP कंवर पाल सिंह गिल (केपीएस गिल) ने एंटी-टेररिज्म अभियान चलाया। पुलिस को खुली छूट थी। पंजाब के कई इलाकों से हजारों नौजवान रातोंरात गायब हो रहे थे। पुलिस पर निहत्थे लोगों को हिरासत में लेने और फर्जी एनकाउंटर के आरोप लग रहे थे। 1952 में अमृतसर जिले के खालड़ा गांव में जन्मे जसवंत सिंह, तब अमृतसर के एक बैंक में काम करते थे। जनवरी 1995 में वे शिरोमणि अकाली दल की मानवाधिकार यूनिट के महासचिव भी थे। लापता लोगों के डेथ सर्टिफिकेट न होने के चलते उनके परिवार वाले न उनकी संपत्ति पर दावा कर सकते थे और न ही बैंक में उनके खातों से पैसा निकाल पा रहे थे। ऐसे में जसवंत ने लापता लोगों, पुलिस हिरासत में हुई मौतों और श्मशानों में जलाई जा रही लावारिस लाशों के बीच कनेक्शन खोजना शुरू किया। उन्होंने अमृतसर और तरनतारन के श्मशान घाटों में जली लाशों के डिटेल्स इकट्ठा किए। 16 जनवरी 1995 को जसवंत ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी और 4 बड़े दावे किए.. प्रोफेसर मल्लिका कौर की किताब, 'फेथ, जेंडर, एंड एक्टिविज्म इन द पंजाब कॉन्फ्लिक्ट के मुताबिक, इस अपराध में साथ न देने वाले 2000 पुलिस वालों को भी मार दिया गया। जसवंत का कहना था कि पुलिस अधिनियम 1861 के तहत पंजाब पुलिस रूल्स, 1934 के चैप्टर 25 में नियम है कि किसी लाश का अंतिम संस्कार तभी हो सकता है, जब उसकी पहचान तय हो, लेकिन यहां तो सिस्टम खुद ही पहचान मिटा रहा था। दो दिन बाद DGP केपीएस गिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब दिया, 'हजारों सिख युवा फर्जी दस्तावेजों से विदेश चले गए हैं। उन्हीं की गुमशुदगी को खालड़ा पुलिस पर थोप रहे हैं।' इसके बाद खालड़ा ने गिल को ओपन डिबेट की चुनौती दी। उनके दावों के आधार पर पंजाब के लोकल अखबार खबरें छाप रहे थे। प्रशासन पर दबाव बढ़ा, तो उसने उल्टा खालड़ा से पूछताछ शुरू कर दी। इसी बीच 31 अगस्त को सीएम बेअंत सिंह की खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’, BKI ने बम धमाके में हत्या कर दी। इसके बाद 6 सितंबर 1995 का दिन आया। जसवंत सिंह अमृतसर के कबीर पार्क स्थित अपने घर के बाहर कार धो रहे थे। तभी एक सफेद गाड़ी आई। इसमें मौजूद हथियारबंद लोग उन्हें अगवा कर ले गए। पुलिस का कहना था कि जसवंत कैसे गायब हुए, इसकी जानकारी नहीं है। शायद वो गैंगवॉर का शिकार हुए। खालड़ा के मामले में जांच के बाद CBI ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, 'जसवंत सिंह ने लावारिस लाशों के मामले में आवाज उठाई। स्थानीय पुलिस को ये पसंद नहीं आया और उन्हें घर से अगवा कर लिया। उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने के बाद उनकी हत्या करके लाश हरीके इलाके में नहर में फेंक दी गई।' सवाल-2: जसवंत सिंह की हत्या का खुलासा कैसे हुआ, पत्नी ने कैसे दिलाई सजा? जवाब: 6 सितंबर को ही जसवंत की पत्नी परमजीत कौर ने शिकायत दर्ज करवाई कि उनके पति को पुलिस की वर्दी में कुछ लोगों ने अगवा किया है। किडनैपिंग का मामला दर्ज किया गया। जसवंत का सुराग देने पर एक लाख रुपए का इनाम भी रखा गया। हालांकि पुलिस ने जांच आगे नहीं बढ़ाई, तो परमजीत ने कोर्ट का रुख किया और नवंबर 1995 में कोर्ट ने CBI को जांच का आदेश दिया। CBI की रिपोर्ट के मुताबिक, जसवंत के पड़ोसी किरपाल सिंह रंधावा ने बताया कि जिस गाड़ी से जसवंत का अपहरण हुआ, उसमें 5 पुलिस अधिकारी- DSP जसपाल सिंह, सुरिंदर पाल सिंह, SHO जसबीर सिंह, प्रिथीपाल सिंह और अमृतसर के झबाल थाने के SHO सतनाम सिंह थे। इन्हीं ने जसवंत को अगवा किया। दो दिन पहले, यानी 4 सितंबर को अवैध ड्रग्स के मामले में एक आरोपी कुलवंत सिंह झबाल थाने लाया गया था। उसने भी CBI को बताया कि DSP जसपाल सिंह और SHO सतनाम सिंह ही खालड़ा को थाने लाए थे। इस मामले में सबसे अहम गवाह बने स्पेशल पुलिस अफसर कुलदीप सिंह। उनकी तैनाती झबाल थाने में सतनाम सिंह के साथ ही थी। कुलदीप ने खालड़ा की हत्या तक के पूरे ब्योरे दिए… कुलदीप सिंह की गवाही इस केस के लिए बहुत अहम साबित हुई। नवंबर 2005 में पटियाला की एक कोर्ट ने 4 आरोपी- सतनाम सिंह , सुरिंदर पाल, जसबीर और प्रिथीपाल को किडनैपिंग के आरोप में 7 साल जेल की सजा सुनाई। जबकी DSP जसपाल सिंह और अमरजीत सिंह को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा मिली। जबकि संधू ने मामले में फैसला होने से पहले ही 23 मई 1997 को खुदकुशी कर ली थी। जसवंत की पत्नी परमजीत कौर ने हाईकोर्ट में 4 आरोपियों की सजा बढ़ाने की अपील की। 2007 में पंजाब हाईकोर्ट ने अमरजीत सिंह को बरी कर दिया, जबकि 7 साल की सजा पाने वाले चारों आरोपियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। आरोपी पुलिस अधिकारी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 11 अप्रैल 2011 को उनकी अपील खारिज कर दी और हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। CBI ने अंतरिम रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट को बताया, ‘2097 लाशों का लावारिस की तरह अंतिम संस्कार किया गया था। अकेले तरनतारन में 984 लाशों को 'लावारिस' के बतौर जलाया गया। पुलिस ने बड़ी संख्या में बेकसूर लोगों की हत्या की थी।’ जसवंत की कहानी को फिल्म सतलुज के लिए लिखने वाले नीरेन भट्ट का कहना है, ‘इसमें एंटी-नेशनल जैसा कुछ नहीं है, ये एक बैंकर की कहानी है, जो गैर-कानूनी तरीके से मारे गए लोगों के परिवारों के लिए लड़े। फिर भी इसे रिलीज के बाद महज 48 घंटे में हटा दिया गया। सवाल-3: सतलुज को रिलीज के 48 घंटे के भीतर हटाना क्यों पड़ा? जवाब: 'सतलुज' फिल्म का मूल नाम 'घल्लूघारा' था, इसका मतलब होता है- नरसंहार। पंजाब में सिखों के कथित नरसंहार को लेकर ये शब्द प्रचलित है। फिल्म के घल्लूघारा से पंजाब 95 और सतलुज तक 3 बार नाम बदलने और रिलीज को लेकर 4 साल से विवाद चल रहा है… रिलीज के एक ही दिन बाद फिल्म में लीड एक्टर दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘अबतक सतलुज नहीं देखी, तो जल्द देख लें। सोमवार, 6 जुलाई तक इसे हटाया जा सकता है।’ इससे पहले ही रविवार शाम को सतलुज ZEE5 पर भारत में स्ट्रीम होना बंद हो गई। ZEE5 ने बयान में कहा, 'मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए, सतलुज भारत में अगली इन्फॉर्मेशन तक अवेलेबल नहीं होगी। हम इसको जल्दी वापस लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत हरसंभव कोशिश करेंगे।' नीरेन भट्ट कहते हैं, 'ZEE5 से किसी ने फिल्म रोकने के लिए कहा। साफ है कि CBFC या सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में किसी अधिकारी ने इसमें दखल दिया। CBFC वाले नहीं बताते कि उन्हें फिल्म में क्या आपत्तिजनक लगा या ये फैसले कौन ले रहा है। RSVP मूवीज के एक प्रवक्ता के मुताबिक, ‘फिल्म को सरकार ने हटाया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ’ये फैसला इसलिए हुआ, क्योंकि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ हो सकता है।' एक सरकारी ऑफिसर ने कहा, 'CBFC के सर्टिफिकेट के बिना फिल्म चुपचाप OTT पर रिलीज हुई। OTT CBFC के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इसलिए सरकार के संज्ञान में आने के बाद ZEE5 से फिल्म हटाने को कहा गया।' सवाल-4: आखिर कैसे तय होता है कि कोई फिल्म देश-विरोधी है? जवाब: सिनेमाघरों में किसी फिल्म को रिलीज करने के लिए सर्टिफिकेट मिलेगा या नहीं, यह सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के प्रावधानों से तय होता है। इस कानून में ‘एंटी-इंडिया फिल्म’ जैसा कोई शब्द नहीं है। हालांकि इसकी धारा 5B के मुताबिक, CBFC किसी फिल्म की रिलीज पर तभी रोक लगा सकता है, जब वह- वहीं OTT पर रिलीज होने वाले कॉन्टेंट की निगरानी IT एक्ट के जरिए होती है। धारा 69A से केंद्र सरकार को देश की संप्रभुता, सुरक्षा वगैरह के आधार पर कॉन्टेंट का ब्रॉडकास्ट रोकने की ताकत मिलती है। OTT प्लेटफॉर्म खुद भी कंटेंट हटा सकते हैं। कोर्ट में जसवंत सिंह खालड़ा का केस लड़ चुके सीनियर एडवोकेट राजविंदर सिंह बेंस कहते हैं, ‘अगर फिल्म की कोई बात पसंद न आए, तो उसे दबा देना समाधान नहीं है। यह फिल्म कहानी का दूसरा पहलू दिखाती है। केपीएस गिल कई लोगों के लिए हीरो हैं, जबकि पंजाब में सबसे बड़े विलेन हैं। फिल्म को दबाने से साफ है कि सच बाहर आने का डर है।’ वहीं सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट विनीत जिंदल के मुताबिक, 'फिल्म में अलगाववादी या आतंकवादी विचारधारा के लिए सहानुभूति वाले सीन हो, तो सवाल उठना भी जरूरी है। अभिव्यक्ति की आजादी के साथ नेशनल सिक्योरिटी और संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं के लिए भी जिम्मेदार होना चाहिए।' सवाल-5: क्या ये फिल्म दोबारा रिलीज हो सकती है? जवाब: हां, इसके दो तरीके हैं- या तो CBFC के मुताबिक, फिल्म में कट्स लगा दिए जाएं या हाईकोर्ट में अपील की जाए। नीरेन भट्ट का कहना है कि वे लोग हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। जी-5 का भी कहना है कि वे फिल्म को वापिस अपने प्लेटफॉर्म पर लाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। पहले भी ऐसे मामले हुए हैं, जब CBFC के सर्टिफिकेट न देने पर फिल्म मेकर्स कोर्ट गए और केस जीते। 2016 में आई फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ में CBFC ने 94 कट्स लगाने के निर्देश दिए थे। हालांकि कोर्ट ने सिर्फ 1 कट और 3 डिस्क्लेमर के साथ रिलीज की इजाजत दे दी थी। ---------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर:गुलाबी पेट्रोल, टैंक में चींटी के वीडियो वायरल; सरकार पेट्रोल में जबरन एथेनॉल मिलाने पर क्यों तुली है, पीछे की पूरी कहानी कहीं गुलाबी रंग का पेट्रोल, कहीं टैंक से चिपकी चीटियां, कहीं पेट्रोल के साथ दिखता पानी। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 6:40 pm

शुक्र है पीएम मोदी पर कोई कॉपीराइट नहीं! जब इंडोनेशियन राष्ट्रपति ने सरेआम खोला यह बड़ा राज, ठहाकों से गूंज उठा पूरा हॉल

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाला वाकया सामने आया है, जिसने वैश्विक मंच पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को एक बार फिर साबित कर दिया है। एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय समिट के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने खुले मंच से यह स्वीकार किया कि वह अपनी नीतियों और शासन व्यवस्था में पीएम मोदी को फॉलो यानी कॉपी करते हैं। उन्होंने बेहद मजाकिया लहजे में कहा कि यह भगवान का शुक्र है कि प्रधानमंत्री मोदी पर कोई कॉपीराइट नहीं है, वरना हम बड़ी मुश्किल में पड़ जाते। इस अनूठे खुलासे के बाद कार्यक्रम में मौजूद तमाम वैश्विक नेताओं और मेहमानों के ठहाकों से पूरा हॉल गूंज उठा।वैश्विक मंच पर जब इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने बांधे तारीफों के पुलयह ऐतिहासिक वाकया दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और आपसी तालमेल को मजबूत करने के लिए आयोजित एक समिट के दौरान हुआ। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारत की डिजिटल क्रांति, जन कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में जो मुकाम हासिल किया है, वह दुनिया के विकासशील देशों के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल (Role Model) है। इसी विकास मॉडल से प्रभावित होकर इंडोनेशिया भी अपनी कई राष्ट्रीय योजनाओं को भारत की तर्ज पर ही तैयार कर रहा है।'कॉपीराइट' वाले बयान पर क्यों ठहाके लगाने लगे वैश्विक नेता?संबोधन के दौरान जब इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने हल्के-फुल्के अंदाज में पीएम मोदी की नकल करने की बात कही, तो हॉल का माहौल बेहद खुशनुमा हो गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की काम करने की गति, जनता से जुड़ने का अनूठा अंदाज और उनकी दूरदर्शी सोच इतनी प्रभावी है कि कोई भी राष्ट्रप्रमुख उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। उन्होंने मुस्कुराते हुए पीएम मोदी की तरफ देखा और कहा कि हम आपकी अच्छी नीतियों को अपने देश में लागू कर रहे हैं, और हमें खुशी है कि इसके लिए हमें किसी 'बौद्धिक संपदा अधिकार' या कॉपीराइट (Copyright) के उल्लंघन का नोटिस नहीं मिलेगा। इस मजेदार टिप्पणी पर खुद पीएम मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।भारत के 'डिजिटल इंडिया' और 'यूपीआई' मॉडल के दीवाने हैं कई देशयह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष ने पीएम मोदी या भारत की नीतियों की इस तरह सराहना की हो। इंडोनेशिया विशेष रूप से भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम (UPI), वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के लिए चलाई जा रही जनधन योजना और कोविड प्रबंधन के दौरान अपनाई गई तकनीकी रणनीतियों का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा है। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि वे अपने देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर कई अन्य घरेलू तकनीकी परियोजनाओं (Geographical & Digital Joint Ventures) पर भी काम कर रहे हैं।बढ़ता वैश्विक कद और भारत की 'सॉफ्ट पावर' का नया प्रदर्शनअंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों (Global Dynamic Analysts) का मानना है कि विदेशी मंचों पर भारत के प्रधानमंत्री को मिलने वाला यह सम्मान और उनकी नीतियों को अपनाने की अन्य देशों की यह इच्छा, असल में भारत की मजबूत होती 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) का सीधा प्रमाण है। आज दुनिया के बड़े-बड़े देश भारत की विकास यात्रा को न केवल करीब से देख रहे हैं, बल्कि अपने यहां भी उसे दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति का यह बयान दिखाता है कि भारत अब केवल वैश्विक एजेंडा का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह दुनिया के सामने विकास की नई परिभाषा तय कर रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 5:06 pm

बांग्लादेश में फिर फूटा बारूद, 'जुलाई क्रांति' के छात्रों की रैली में जोरदार बम धमाका, दहल उठा इलाका

पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्तापलट और राजनीतिक बदलाव के बाद भी हिंसक घटनाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश में अमन-चैन बहाली की कोशिशों के बीच एक बार फिर से बम धमाके की गूंज सुनाई दी है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। ताजा मामला 'जुलाई क्रांति' (July Revolution) के छात्र आंदोलनकारियों से जुड़ा हुआ है। अपनी ऐतिहासिक जीत और संघर्ष की याद में छात्रों द्वारा निकाली जा रही एक शांतिपूर्ण रैली को निशाना बनाकर अज्ञात हमलावरों ने बम से हमला कर दिया, जिससे चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई।छात्रों की रैली को बनाया निशाना, अचानक हुआ जोरदार धमाकास्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के एक प्रमुख शहर में छात्र संगठन के बैनर तले सैकड़ों युवा 'जुलाई क्रांति' के शहीदों को याद करने और अपनी लोकतांत्रिक मांगों को लेकर मार्च निकाल रहे थे। रैली जैसे ही एक व्यस्त चौराहे के पास पहुंची, तभी अचानक एक के बाद एक जोरदार धमाके हुए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह हमला बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया गया था ताकि छात्रों के बीच खौफ का माहौल पैदा किया जा सके।बम विस्फोट में 3 छात्र गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्तीइस अचानक हुए कायरतापूर्ण बम विस्फोट की चपेट में आने से रैली में शामिल कम से कम तीन छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि छर्रे लगने के कारण घायल छात्र खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। घटना के तुरंत बाद सहमे हुए साथियों और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को नजदीकी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, दो छात्रों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात, सुरक्षा एजेंसियां अलर्टधमाके की सूचना मिलते ही बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियां, दंगा नियंत्रण पुलिस और सेना के जवान बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेरकर (Cordoned Off) सील कर दिया है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस तरह के विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना के बाद से पूरे देश के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को हाई-टेंशन मोड पर डाल दिया गया है।छात्रों में भारी आक्रोश, देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनीइस कायरतापूर्ण हमले के बाद बांग्लादेश के छात्र समुदाय और आम नागरिकों में बेहद भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। छात्र नेताओं ने कार्यवाहक सरकार और कानून व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों को आड़े हाथों लेते हुए दोषियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का अल्टीमेटम दिया है। छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर हमलावरों को तुरंत सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन और सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे, जिससे देश की कानून व्यवस्था एक बार फिर चरमरा सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 5:00 pm

His elder brother Yonatan was even more formidable than Benjamin Netanyahu: Here is how he snatched 102 Jews from the clutches of Uganda's cannibalistic dictator Amin.

इज़राइल के नेशनल हीरो: भाई की याद में बदला गया ऑपरेशन का नामयोनातन नेतन्याहू इस ऐतिहासिक मिशन में शहीद होने वाले एकमात्र इज़राइली सैनिक थे। उनकी इस शहादत और अदम्य साहस के सम्मान में इज़राइल सरकार ने इस मिशन का नाम बदलकर 'ऑपरेशन योनातन' रख दिया था। आज भी इज़राइल में उन्हें एक महान राष्ट्रीय नायक (National Hero) के रूप में पूजा जाता है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक जीवन और उनकी सख्त रणनीतियों पर उनके बड़े भाई योनातन की इस जांबाज विरासत का बहुत गहरा असर माना जाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 2:19 pm

Supreme Leader Khamenei's final journey: Iran's major show of strength amidst tensions.

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के जरिए दुनिया के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाले फैसले के तहत खामेनेई के पार्थिव शरीर को पड़ोसी देश इराक की सरजमीं पर भी ले जाया जाएगा

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 2:09 pm

खामेनेई की अंतिम विदाई में दिखे वे चेहरे जिन्हें मृत बताया गया था, अहमदीनेजाद समेत तीन नेताओं की मौजूदगी से उठे सवाल

पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद अंतिम यात्रा में शामिल होते हुए दिखाई दिए। हालिया संघर्ष के दौरान कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वह इजराइली हमले में मारे गए हैं। उस समय इन दावों पर ईरान की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

देशबन्धु 7 Jul 2026 1:47 pm

भारत-जापान के बीच हुई पहली रक्षा सह-विकास डील, अब भारत में बनेंगे यूनिकॉर्न नौसैनिक कम्युनिकेशन मास्ट

भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में संयुक्त रूप से उपकरण विकसित करने के लिए अपना पहला द्विपक्षीय समझौता किया है, जिसे दोनों देशों के बीच तेजी से मजबूत हो रही रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

देशबन्धु 7 Jul 2026 1:21 pm

ट्रंप के दखल से अमेरिकी खिलाड़ी का रेड कार्ड रद्द? फीफा के फैसले पर उठे निष्पक्षता के सवाल

25 वर्षीय फोलारिन बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में बोस्निया के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था। सामान्य परिस्थितियों में उन्हें अगले मैच से निलंबित रहना चाहिए था, लेकिन अनुशासनात्मक समीक्षा के बाद फीफा ने उन्हें बेल्जियम के खिलाफ खेलने की मंजूरी दे दी।

देशबन्धु 7 Jul 2026 1:11 pm

30 अरब रुपये की रिश्वत लेने वाले पूर्व अधिकारी को मौत की सजा, 30 साल तक पद का किया दुरुपयोग

चीन के जियांग्सू प्रांत के चांगझोउ इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यांग यौलिन ने वर्ष 1993 से 2023 के बीच करीब 2.21 अरब युआन (लगभग 325 मिलियन अमेरिकी डॉलर या करीब 30 अरब रुपये) की रिश्वत और अवैध लाभ हासिल किए।

देशबन्धु 7 Jul 2026 12:57 pm

मिस्र के रेगिस्तान में मिला बाइजेन्टाइन युग का एक शहर

मिस्र के पुरातत्विदों ने दो बेहद अहम खोज की हैं. इसमें पूरा का पूरा प्राचीन शहर और एक जगह कई कब्रें मिली हैं. मिस्र को उम्मीद है कि इन नई खोजों से उसके पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा

देशबन्धु 7 Jul 2026 10:31 am

इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी से बढ़ी यूक्रेन की मुश्किलें, कीव पर रूसी बैलिस्टिक हमले में 28 की मौत

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने इस हमले के दौरान कुल 68 मिसाइलें और 351 अटैक ड्रोन लॉन्च किए। यूक्रेनी वायुसेना ने 37 मिसाइलों और 326 ड्रोन को मार गिराने या उनके रास्ते से भटकाने का दावा किया, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सफलता नहीं मिली।

देशबन्धु 7 Jul 2026 10:08 am

जकार्ता में पीएम मोदी का भव्य तरीके से हुआ औपचारिक स्वागत, राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ करेंगे द्विपक्षीय बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे के पहले चरण में जकार्ता पहुंच चुके हैं। जकार्ता में पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया

देशबन्धु 7 Jul 2026 9:51 am

Bangladesh Bomb Blast: ढाका के पास छात्र नेताओं की 'NCP' रैली में भीषण बम धमाका, 3 लोग गंभीर रूप से घायल; पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत का बड़ा बयान

पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्तापलट और भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भी जमीनी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। देश के कई हिस्सों से अब भी लगातार हिंसा और अराजकता की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच एक बड़ी घटना में, राजधानी ढाका के नजदीक सावर (Savar) इलाके में नवगठित 'नेशनल सिटिजन पार्टी' (NCP) की एक जनसभा के दौरान जोरदार बम धमाका हुआ है। इस बम विस्फोट की चपेट में आने से कम से कम तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। गौरतलब है कि इस नई राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व मुख्य रूप से वही छात्र नेता कर रहे हैं, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ देशव्यापी हिंसक आंदोलन की अगुवाई की थी।ईदगाह मैदान में चल रही रैली को आतंकवादियों ने बनाया निशानानेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आतंकवादियों ने सावर थाना स्टैंड स्थित ईदगाह मैदान को निशाना बनाकर इस बम ब्लास्ट को अंजाम दिया। यह हमला उस समय हुआ जब मैदान में पार्टी की 'पोस्ट-मार्च रैली' (Post-March Rally) चल रही थी। यह रैली 'जुलाई मार्च' के पहले दिन आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य देश में जनमत संग्रह (Referendum) लागू करने, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने, देश के गंभीर बिजली संकट का स्थायी समाधान निकालने, दैनिक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने और सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने जैसी बड़ी मांगों को लेकर जनता का समर्थन जुटाना था।शेख हसीना के खिलाफ छात्र आंदोलन की दूसरी बरसी पर निकाला जा रहा मार्चपार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन की दूसरी बरसी के मौके पर इस देशव्यापी मार्च की रूपरेखा तैयार की गई थी। इसके तहत पूरे जुलाई महीने में अलग-अलग राज्यों में मार्च निकालने का ऐलान किया गया है। याद दिला दें कि व्यापक विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बाद 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना अचानक बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं, जिसके बाद से ही वहां उनके और उनकी पार्टी अवामी लीग के खिलाफ लगातार उग्र प्रदर्शन किए जा रहे हैं।पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) रिक्वेस्ट पर भारत का बड़ा कदमबांग्लादेश में मचे इस सियासी घमासान के बीच भारत सरकार के रुख पर भी पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इस संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए ढाका की नई सरकार द्वारा भेजे गए औपचारिक अनुरोध (Note Verbale) की तय कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा कर रहा है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से आंतरिक कानूनी प्रोटोकॉल और न्यायिक ढांचे के दायरे में चल रही है। भारत सरकार का यह बड़ा बयान ऐसे नाजुक समय पर आया है जब नई दिल्ली 'जुलाई क्रांति' के बाद ढाका में बनी नई अंतरिम व्यवस्था के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, ऊर्जा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा को स्थिर व मजबूत बनाए रखना चाहती है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत इस पूरे मामले में बांग्लादेश की जनता के सर्वोत्तम हितों और लोकतांत्रिक स्थिरता को सर्वोपरि रखते हुए ही कोई अंतिम फैसला लेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 9:20 am

होर्मुज स्ट्रेट में फिर भड़का तनाव, ईरानी मिसाइलों ने दो कारोबारी जहाजों को बनाया निशाना

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि दोनों कारोबारी जहाजों पर ईरानी मिसाइलों से हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों जहाजों पर सवार चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

देशबन्धु 7 Jul 2026 8:50 am

NATO बैठक से पहले ट्रंप का बड़ा दावा! बोले- पुतिन और जेलेंस्की दोनों चाहते हैं युद्ध का अंत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, दोनों ही यूक्रेन युद्ध खत्म करना चाहते हैं

देशबन्धु 7 Jul 2026 8:10 am

क्रिप्टो भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा: ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपनी सरकार के क्रिप्टोकरेंसी को समर्थन देने के फैसले का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इस क्षेत्र में दुनिया का नेता नहीं बना तो चीन इस तेजी से बढ़ते उद्योग पर कब्जा कर सकता है।

देशबन्धु 7 Jul 2026 6:50 am

हमास ने गाजा की इमरजेंसी सरकार भंग की, प्रशासन नेशनल कमेटी को सौंपने का ऐलान

हमास ने गाजा में बनी इमरजेंसी गवर्नमेंट कमेटी को भंग कर दिया है और गाजा पट्टी का एडमिनिस्ट्रेशन नेशनल कमेटी को ट्रांसफर करने की घोषणा की।

देशबन्धु 7 Jul 2026 6:30 am

कतर से मिले 'बोइंग 747-8' को मियामी में सजाना चाहते हैं ट्रंप, लेकिन एयर फोर्स वन के इस प्रोजेक्ट में हैं बड़ी अड़चनें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने कतर (Qatar) द्वारा अमेरिका को उपहार में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 (Boeing 747-8) विमान से अपनी आधिकारिक यात्राएं शुरू कर दी हैं। जरूरी बदलावों और कड़ी टेस्टिंग के बाद इस विशाल विमान को अमेरिकी राष्ट्रपति के 'एयर फोर्स वन' बेड़े में शामिल कर लिया गया है। लेकिन, ट्रंप की योजना सिर्फ इस विमान में सफर करने तक सीमित नहीं है; वह इसे अपने एक खास ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाना चाहते हैं।मियामी की प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में विमान प्रदर्शित करने का प्लानप्रसिद्ध अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप की दिली ख्वाहिश है कि कतर से मिले इस बोइंग विमान को रिटायरमेंट के बाद मियामी (Miami) में बनने वाली उनकी अपकमिंग 'प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी' में प्रदर्शित किया जाए। ट्रंप चाहते हैं कि यह विमान उनकी विरासत के एक शानदार प्रतीक के तौर पर मियामी में रखा जाए, जिसे लोग करीब से देख सकें।राह में खड़ी हैं राजनीतिक और सैन्य चुनौतियांहालांकि, ट्रंप का यह सपना जितना भव्य है, इसे हकीकत में बदलना उतना ही जटिल है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि एक विशालकाय बोइंग विमान को मियामी के किसी सिविलियन या लाइब्रेरी एरिया में शिफ्ट करना और उसे स्थायी तौर पर प्रदर्शित करना आसान नहीं है। इस योजना के रास्ते में कई गंभीर राजनीतिक (Political), सैन्य (Military) और लॉजिस्टिकल (Logistical) चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। फिलहाल, यह विमान अमेरिका के अस्थायी 'एयर फोर्स वन' के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा है और सुरक्षा कारणों से सेना इसे इतनी आसानी से किसी सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए नहीं सौंप सकती।नए बोइंग प्रोजेक्ट में क्यों हो रही है देरी?यह पूरा मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए तैयार हो रहे नए विमानों के प्रोजेक्ट में भारी देरी चल रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ही, साल 2017 में पुराने एयर फोर्स वन बेड़े को बदलने की कवायद शुरू कर दी थी। उन्होंने इसके लिए बोइंग को अगली पीढ़ी के दो नए प्रेसिडेंशियल विमानों का ऑर्डर दिया था।कार्यकाल के अंत तक ही मिल पाएंगे नए विमानशुरुआती योजना के विपरीत, बोइंग के इस अति-सुरक्षित प्रोजेक्ट में काफी विलंब हो चुका है। अब इन दोनों नए विमानों के मध्य 2028 तक ही अमेरिकी वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है। तकनीकी और लॉजिस्टिक दिक्कतों के चलते ट्रंप को मजबूरी में कतर से मिले इसी बोइंग 747-8 का इस्तेमाल एक अस्थायी एयर फोर्स वन के रूप में करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि जब 2028 में नए विमान बनकर पूरी तरह तैयार होंगे, तब तक राष्ट्रपति ट्रंप का मौजूदा कार्यकाल अपने अंतिम चरण में होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 6:12 am

ट्रंप का बड़ा ऐलान: सितंबर में अमेरिका आएंगे शी चिनफिंग, व्हाइट हाउस में बनेगा दुनिया का सबसे सुरक्षित 'महाल'

वैश्विक राजनीति के लिहाज से एक बेहद अहम खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस साल सितंबर के आखिर में अमेरिका का दौरा करेंगे। ट्रंप ने सिर्फ इस हाई-प्रोफाइल दौरे का ऐलान ही नहीं किया, बल्कि व्हाइट हाउस के कायाकल्प का एक बड़ा 'मास्टरप्लान' भी दुनिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि विदेशी मेहमानों की मेजबानी के लिए व्हाइट हाउस में एक बेहद भव्य और अभेद्य नया 'स्टेट बॉलरूम' (State Ballroom) बनाया जाएगा।24 सितंबर को वाशिंगटन पहुंच सकते हैं चिनफिंगरोज गार्डन में आयोजित एक लंच कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेताओं की मुलाकात का एजेंडा साफ किया। ट्रंप ने बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 24 सितंबर के आसपास वाशिंगटन पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिनफिंग जैसे बड़े वैश्विक नेता को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ेगी। ऐसे बड़े आयोजनों को सुरक्षित और शानदार तरीके से होस्ट करने के लिए ही हमें एक विशाल और अत्याधुनिक बॉलरूम की सख्त जरूरत है।150 साल पुरानी मांग होगी पूरी, अमेरिका दिखाएगा अपनी शानव्हाइट हाउस में जगह की कमी का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पिछले कई दशकों से बड़े राजकीय आयोजनों (State Dinners) की मेजबानी के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले 150 सालों से व्हाइट हाउस में एक डेडिकेटेड बॉलरूम बनाने की मांग हो रही थी, जो अब तक पूरी नहीं हुई। किंग चार्ल्स से लेकर दुनिया के तमाम राष्ट्राध्यक्ष यहां आते हैं, ऐसे में अमेरिका के पास एक ऐसी जगह होनी चाहिए जो दुनिया के किसी भी अन्य देश के पास न हो।चीन और ब्रिटेन से भी शानदार होगा व्हाइट हाउस का नया 'बॉलरूम'राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने अंदाज में इस नए प्रोजेक्ट की तुलना चीन और ब्रिटेन की ऐतिहासिक इमारतों से की। चीन के अपने हालिया दौरे का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, मैं हाल ही में चीन के 'ग्रेट हॉल' में था। उनका बॉलरूम बेहद विशाल और खूबसूरत है। हमारे पास अभी वैसा कुछ नहीं है, लेकिन अब हम जो बॉलरूम बनाने जा रहे हैं, वह दुनिया के बाकी सभी स्थानों पर भारी पड़ेगा। उन्होंने ब्रिटेन के विंडसर कैसल की भव्यता का भी जिक्र किया और कहा कि अमेरिका का नया बॉलरूम इन सबसे कहीं ज्यादा आधुनिक होगा।मिसाइल और ड्रोन से भी रहेगा सुरक्षित, 2028 में होगा तैयारसुरक्षा के मोर्चे पर यह नया बॉलरूम एक अभेद्य किले की तरह होगा। ट्रंप ने इसे वाशिंगटन की सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक इमारत करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह नया स्ट्रक्चर पूरी तरह से मिसाइल-प्रूफ, बुलेटप्रूफ और ड्रोन-प्रूफ होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग में शीर्ष सैन्य अधिकारियों और जनरलों की सलाह ली जा रही है।इस मेगा-प्रोजेक्ट के साल 2028 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। अपने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया, कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं यह अपने लिए बना रहा हूं, लेकिन असलियत यह है कि मैं इसे अमेरिका के भविष्य के राष्ट्रपतियों के लिए तैयार करवा रहा हूं, ताकि वे शपथ ग्रहण और राजकीय समारोहों को एक सुरक्षित माहौल में आयोजित कर सकें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 6:11 am

जयशंकर का बहरीन दौरा: राजा हमद से खास मुलाकात, भारत-बहरीन संबंधों को मिलेगी नई उड़ान

भारत की कूटनीतिक पहुंच को मध्य पूर्व में और अधिक मजबूत करने की दिशा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस समय खाड़ी देशों के एक बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। इसी कड़ी में सोमवार को उन्होंने बहरीन की राजधानी मनामा में बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से एक खास मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था।क्राउन प्रिंस को दिए राष्ट्रपति और पीएम के संदेशबहरीन के राजा से चर्चा के अलावा, भारतीय विदेश मंत्री ने क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से भी शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान जयशंकर ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बहरीन के नेतृत्व को शुभकामनाएं प्रेषित कीं। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को और अधिक गहरा करने पर जोर दिया गया।भारतीय समुदाय को बताया 'जीवंत सेतु'बहरीन में एक बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं जो वहां की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहे हैं। जयशंकर ने बहरीन के नेतृत्व और राजा हमद का विशेष रूप से आभार जताया कि उन्होंने भारतीय समुदाय की सुरक्षा, कल्याण और हितों का हमेशा ध्यान रखा है। जयशंकर ने कहा कि बहरीन के राजा का कुशल मार्गदर्शन भारत और बहरीन के रिश्तों को लगातार आगे बढ़ा रहा है। अपने दौरे में विदेश मंत्री ने प्रवासी भारतीयों के प्रतिनिधियों से भी सीधा संवाद किया और उन्हें दोनों देशों को जोड़ने वाला एक 'जीवंत सेतु' करार दिया।क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार पर विदेश मंत्री से मंथनशीर्ष नेतृत्व से मुलाकात से ठीक पहले, डॉ. जयशंकर ने अपने बहरीन के समकक्ष, विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायदानी के साथ एक विस्तृत और अहम बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने केवल द्विपक्षीय सहयोग पर ही नहीं, बल्कि तेजी से बदलते क्षेत्रीय घटनाक्रमों (Regional Developments) और आपसी हितों से जुड़े कई वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।चार खाड़ी देशों की अहम रणनीतिक यात्राआपको बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 5 से 10 जुलाई 2026 तक चार प्रमुख खाड़ी देशों—कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान—की अहम रणनीतिक यात्रा पर हैं। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी निवेश और व्यापार के लिहाज से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। जयशंकर अपने इस बहुआयामी दौरे में क्षेत्रीय नेताओं से मिलकर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 6:09 am

सिंधु नदी के पानी पर भारत के सख्त रुख से पाकिस्तान में हाहाकार! बौखलाई पाक सेना ने दी 'हर कदम उठाने' की गीदड़भभकी

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को लेकर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा उठाए गए सख्त कदम से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु नदी का जो पानी पाकिस्तान की तरफ जाता था, उसे रोक दिया है। भारत के इस मास्टरस्ट्रोक से तिलमिलाई पाकिस्तानी सेना अब खुलेआम धमकियों पर उतर आई है।आसिम मुनीर की अध्यक्षता में कोर कमांडरों की आपात बैठकसोमवार को पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की अध्यक्षता में रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में कोर कमांडरों की एक हाई-लेवल बैठक हुई। इस बैठक में सीधे तौर पर सिंधु जल समझौते का मुद्दा गूंजा। पाकिस्तानी सेना ने एक भड़काऊ बयान जारी करते हुए कहा है कि वह पाकिस्तान को सिंधु नदी के पानी का 'जायज हिस्सा' दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए पूरी तरह से संकल्पबद्ध है।इस बैठक में 24 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (NSC) की बैठक में लिए गए निर्णयों का भी हवाला दिया गया। सेना ने साफ तौर पर कहा कि वह सरकार के निर्देश और अवाम की प्रेरणा से इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ कोई भी एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेगी।भारत ने क्यों उठाया पानी रोकने का सख्त कदम?दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है। पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत सरकार का सब्र टूट गया था। आतंक और बातचीत (या समझौते) एक साथ नहीं चल सकते, इसी नीति के तहत भारत ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सिंधु नदी का वह पानी रोक दिया जो समझौते के तहत पाकिस्तान को जा रहा था।पाकिस्तान में गहराया सिंचाई और पीने के पानी का संकटसिंधु नदी का उद्गम हिमालय से होता है और यह भारत से होकर पाकिस्तान के बड़े हिस्से की प्यास बुझाती है। भारत के पानी रोकने के फैसले के बाद से ही पूरे पाकिस्तान में हाहाकार मचा हुआ है। वहां के पंजाब और सिंध प्रांतों में भयानक सिंचाई संकट खड़ा हो गया है, साथ ही पीने के पानी की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी जल बंटवारे का यह ऐतिहासिक समझौता साल 1960 में विश्व बैंक (World Bank) की मध्यस्थता में हुआ था।अपनी नाकामियां छिपाने के लिए गीदड़भभकी!रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना की यह धमकी अपनी आंतरिक नाकामियों से अवाम का ध्यान भटकाने की एक कोशिश मात्र है। कोर कमांडरों की बैठक में पाकिस्तानी सेना ने अपनी तैयारियों पर तो संतोष जताया, लेकिन साथ ही अफगानिस्तान की ज़मीन से पाकिस्तान के खिलाफ हो रहे आतंकी हमलों (TTP के हमले) पर गहरी चिंता भी व्यक्त की। पाकिस्तान एक तरफ खुद आतंक को पालता है और दूसरी तरफ अपने ही पाले हुए आतंकियों से त्रस्त होकर भारत पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिश कर रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 6:07 am

सूडान में हिंसा की कीमत चुका रहे मासूम, छह महीने में 330 बच्‍चे ड्रोन हमले का हुए श‍िकार: यूनिसेफ

साल 2026 के पहले छह महीनों में सूडान में कम से कम 330 बच्चे या तो मारे गए या घायल हुए। यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रन्स फंड (यूनिसेफ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दारफुर और कोर्डोफान राज्यों में बच्चों के हताहत होने की सबसे ज्‍यादा घटनाएं सामने आई हैं।

देशबन्धु 7 Jul 2026 4:20 am

ईरान को ट्रंप की खुली धमकी! बोले- 'या समझौता करो, वरना काम तमाम कर देंगे'

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की अपनी धमकी को फिर से दोहराया और कहा कि अमेरिका या तो ईरान के साथ कोई समझौता करेगा या फिर 'काम तमाम' कर देगा

देशबन्धु 7 Jul 2026 4:16 am

टोक्यो में भारत-जापान मित्रता पर जोर, भारतीय दूतावास ने जापानी संसद सदस्‍यों का जताया आभार

जापान में भारतीय दूतावास ने सोमवार को जापान की संसद (डाइट) के सदस्यों का भारत-जापान साझेदारी को मजबूत करने में दिए गए समर्थन के लिए धन्यवाद किया।

देशबन्धु 7 Jul 2026 3:40 am

चीन के मिसाइल परीक्षण से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता, जापान और ताइवान समेत कई देशों ने जताई आपत्ति

चीन की सेना ने सोमवार को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली एक पनडुब्बी से सफलतापूर्वक प्रशांत महासागर की ओर एक मिसाइल का परीक्षण किया

देशबन्धु 7 Jul 2026 2:13 am

आज का एक्सप्लेनर:‘हमारे पास भारत है’, नेतन्याहू ने जेडी वेंस को क्यों दिया ऐसा जवाब; भारत-इजराइल की ‘पक्की दोस्ती’ के पीछे की कहानी

5 जुलाई को इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- अमेरिका ही नहीं, बल्कि हमारे कुछ और दोस्त भी हैं। जैसे- 1.4 अरब आबादी वाला भारत। नेतन्याहू का ये बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जवाब था। वेंस ने पिछले महीने कहा था कि ट्रम्प दुनिया के इकलौते ताकतवर देश के नेता हैं, जो इजराइल से सहानुभूति रखते हैं। आखिर नेतन्याहू ने इकलौते भारत का ही जिक्र क्यों किया, दोनों देशों की ‘पक्की दोस्ती’ के पीछे की कहानी, 4 चैप्टर्स में… भारत-इजराइल में औपचारिक राजनयिक संबंध 1992 में बने, लेकिन उससे काफी पहले से इजराइल मुसीबत में भारत की गुपचुप तरीके से मदद करने लगा था… 1962: जब इजराइली झंडे लगे जहाज हथियार लेकर भारत पहुंचे 1965 और 1971: पाकिस्तान के खिलाफ मोर्टारों की खेप भेजी 1999: कारगिल में इजराइली तकनीक से उड़ाए पाकिस्तानी बंकर इजराइल को 14 मई 1948 को आजादी मिली। संयुक्त राष्ट्र में इजराइल और फिलिस्तीन को बांटकर दो देश बनाने का प्रस्ताव पेश हुआ, तो भारत ने इसके खिलाफ वोट किया था। हालांकि, अगले ही साल 17 सितंबर, 1950 को भारत ने आधिकारिक रूप से इजराइल को एक संप्रभु राष्ट्र के बतौर मान्यता दी। 'इंडिया इजराइल पॉलिसी' नाम की किताब लिखने वाले भारत के फॉरेन एक्सपर्ट पी.आर. कुमारस्वामी कहते हैं कि भारत और इजराइल के बीच 1950 से 1992 तक बिना रिश्तों के मान्यता वाला संबंध रहा।' 1971 की जंग में इजराइल ने विदेशी मंचों पर भी भारत का समर्थन किया और पाकिस्तानी सेना के पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में नरसंहार की आलोचना की थी। इजराइली पीएम गोल्डा मीर चाहती थीं कि इसके बदले इंदिरा गांधी इजराइल को पूर्ण राजनयिक मान्यता दें और औपचारिक राजनयिक संबंध कायम हों। हालांकि तब भारत ने मान्यता नहीं दी। उलटा 1988 में जब फिलिस्तीन देश की घोषणा हुई, तो भारत इसे मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश था। हालांकि 4 साल बाद स्थिति तब बदलनी शुरू हुई, जब पीएम नरसिम्हा राव ने इजराइल से राजनयिक संबंध बनाए और दोनों देशों में पहली बार दूतावास खोले गए। पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत-इजराइल रिश्तों का एक नया दौर शुरू हुआ। 2015 में इतिहास में पहली बार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत ने फिलिस्तीन में इजराइली हमलों की निंदा करने वाले एक प्रस्ताव पर वोटिंग से परहेज किया। जबकि इसे 45 देशों ने पारित किया था। पीएम मोदी के दौर में इजराइल को खुला समर्थन दिया इजराइली हथियारों की खरीद में भारत की एक-तिहाई हिस्सेदारी भारत-इजराइल के बीच 1 लाख करोड़ का कारोबार 1992 में भारत और इजराइल के बीच द्विपक्षीय रिश्तों की शुरुआत हुई, तब दोनों देशों का व्यापार 202 मिलियन डॉलर का था। 2022-23 तक बढ़कर यह 10.77 बिलियन डॉलर, यानी १ लाख करोड़ पहुंच गया। हालांकि बीते 2 सालों में द्विपक्षीय व्यापार में कमी आई है। इसकी वजह इजराइल-हमास जंग और इसकी वजह से समुद्री रास्ते में आई अड़चने हैं। टाटा, अडाणी जैसी कंपनियों के इजराइल में निवेश नेतन्याहू के बयान के 3 मायने हैं… 1. अकेला पड़ गया है इजराइल: स्ट्रैटजिक एक्सपर्ट ब्रह्म चेलानी के मुताबिक युद्ध के समय नेतन्याहू सरकार के तौर-तरीकों के चलते इजराइल दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। यह लंबे समय में इजराइल के लिए खतरनाक है। वो दूसरे देशों का समर्थन जुटाना चाहता है, इसीलिए भारत का जिक्र किया। भारत और इजराइल के संबंध अहम हैं, लेकिन भारत में इजराइल के लोगों के प्रति सद्भावना है, न कि नेतन्याहू की सरकार के लिए। 2. नेतन्याहू घरेलू राजनीति साध रहे: भारतीय थिंकटैंक ORF में नॉन-रेसिडेंट फेलो और मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार कबीर तनेजा कहते हैं, ‘नेतन्याहू के भारत को दोस्त बताने वाले बयान को उनकी घरेलू राजनीति से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन पर मुकदमे चल रहे हैं और चुनाव आने हैं। घरेलू समर्थन कम न हो, इसलिए वे दिखा रहे हैं कि इजराइल अलग-थलग नहीं पड़ा है।' कबीर तनेजा कहते हैं कि इजराइल-भारत की स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप खास तौर पर डिफेंस सेक्टर में है। इजराइल भारत को एडवांस हथियार देता है। ये साझेदारी नेतन्याहू के पहले भी थी और उनके बाद भी रहेगी। 3. भारत की संतुलन की पॉलिसी के लिए मुश्किल: जॉर्डन, लीबिया और रूस में भारत के राजदूत रहे अनिल त्रिगुणायत बताते हैं, ‘नेतन्याहू का का यह बयान भारत को गलत ब्रैकेट में डाल रहा है। भारत ने कभी भी इजराइल को बिना शर्त समर्थन नहीं दिया है। इस बयान के बाद भारत, इजराइल के साथ अपने संबंधों का पुनर्मूल्यांकन कर सकता है।’ दरअसल, भारत बाकी देशों से भी अपने रिश्ते संतुलित रखने की कोशिश करता है। मिसाल के लिए जून 2025 में SCO समिट के दौरान भारत ने ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों की निंदा वाले प्रस्ताव से दूरी बनाई। हालांकि सितंबर में दोबारा इसी प्रस्ताव की घोषणा पर भारत ने साइन कर दिए थे। -------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर:दर्जनभर लोगों से गुजरकर मुजतबा तक पहुंचती है कोई चिट्ठी; पिता को कंधा देने पर सस्पेंस, क्या इजराइल वाकई मार देगा रान के सुप्रीम लीडर रहे आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में जारी हैं। 100 से ज्यादा देशों के नेता पहुंच रहे हैं। काले कपड़ों में रोते-बिलखते लाखों ईरानी अपने ‘रहबर’ का आखिरी दीदार करना चाहते हैं। इन सबके बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गायब हैं। पिता के जनाजे को कंधा देंगे या नहीं, इस पर भी सस्पेंस है। क्या वो जिंदा भी हैं, अगर हां तो किस हाल में, पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 6 Jul 2026 6:23 pm

चीन में तख्तापलट का डर? शी चिनफिंग ने अचानक हटाए 101 टॉप सैन्य कमांडर, सेना में लागू किया 'माओ मॉडल'

चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर इस समय इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल मची है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपनी सत्ता और सेना पर पकड़ मजबूत करने के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 101 शीर्ष सैन्य अधिकारियों को पद से बर्खास्त या गायब कर दिया है। चीन की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था 'केंद्रीय सैन्य आयोग' (CMC) के लगभग खाली होने के बाद, चिनफिंग ने सेना की कमान पूरी तरह अपने दो सबसे भरोसेमंद वफादारों— झांग शुगुआंग और वांग गैंग को सौंप दी है।क्या है खतरनाक 'माओ मॉडल' और बंदूक पर चिनफिंग का कब्जा?शी चिनफिंग के इस आक्रामक कदम को चीन के संस्थापक माओ जेदोंग के ऐतिहासिक 'माओ मॉडल' से जोड़कर देखा जा रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की कम्युनिस्ट पार्टी और 20 लाख सैनिकों वाली दुनिया की सबसे बड़ी सेना का हर बड़ा अधिकारी सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रपति के प्रति वफादार रहे। साल 2024 में खुद चिनफिंग ने खुलेआम कहा था कि बंदूक सिर्फ वफादार हाथों में ही रहनी चाहिए। सात सदस्यीय टॉप कमांड सेंटर (CMC) में अब प्रभावी रूप से केवल चिनफिंग और उपाध्यक्ष झांग शेंगमिन ही बचे हैं, बाकी सभी सीटें भ्रष्टाचार जांच और अचानक गायब होने के कारण खाली हो चुकी हैं।भारत और ताइवान सीमा पर नई नियुक्तियों का क्या होगा असर?चिनफिंग द्वारा प्रमोट किए गए दोनों जनरलों की भूमिका बेहद संवेदनशील है:वायुसेना प्रमुख वांग गैंग: 61 वर्षीय वांग गैंग एक पूर्व स्टंट पायलट रहे हैं। भारत के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और ताइवान मोर्चे पर चीनी हवाई तैनाती, लड़ाकू विमानों, ड्रोन, मिसाइल सपोर्ट और हाई-एल्टीट्यूड सैन्य ऑपरेशन्स के सभी बड़े फैसले अब सीधे वांग गैंग के हाथों में होंगे।भ्रष्टाचार जांच प्रमुख झांग शुगुआंग: 67 वर्षीय झांग शुगुआंग को CMC की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई का नया बॉस बनाया गया है। इसका सीधा मतलब है कि चिनफिंग की 'सेना-सफाई' मुहिम के तहत अगले दौर की गिरफ्तारियां और जांच अब शुगुआंग के इशारे पर ही होंगी।सेना में खालीपन से कमजोर पड़ा चीन का युद्ध तंत्रथिंक टैंक सीएसआईएस (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सेना के शीर्ष 176 अहम पदों में से 101 अधिकारियों के हटने से सेना का आंतरिक तालमेल बेहद कमजोर हुआ है। इसका असर चीन की युद्ध तैयारियों पर भी दिखने लगा है। साल 2024 में जहां चीन ताइवान के खिलाफ महज 3 से 4 दिनों में बड़े सैन्य अभ्यास शुरू कर देता था, वहीं साल 2025 और 2026 में शीर्ष कमान में खालीपन के कारण चीन को प्रतिक्रिया देने और युद्धाभ्यास शुरू करने में 12 से 19 दिनों का लंबा वक्त लग गया। अमेरिका के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा रक्षा बजट खर्च करने वाले चीन में इस आंतरिक कलह से उसकी लड़ाकू क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 6:21 pm

भगोड़ा नीरव मोदी हारा आखिरी कानूनी जंग, लंदन से भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, किसी भी वक्त होगी वतन वापसी

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को अरबों रुपये का चूना लगाकर देश से भागे हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें अब अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई हैं। नीरव मोदी यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) में अपनी आखिरी कानूनी लड़ाई भी पूरी तरह हार गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब ब्रिटेन से उसकी भारत वापसी और प्रत्यर्पण का रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है। कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, नीरव मोदी के पास मौजूद सभी अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कानूनी विकल्प अब पूरी तरह खत्म हो गए हैं और ब्रिटिश सरकार उसे किसी भी वक्त भारत को सौंप सकती है।अप्रैल में गुपचुप लगाई थी गुहार, मानवाधिकार अदालत से भी लगा बड़ा झटकाब्रिटेन की निचली अदालतों और हाई कोर्ट से तगड़ा झटका लगने के बाद नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) का दरवाजा खटखटाया था। इस याचिका को अदालत ने शुरुआत में पूरी तरह गुप्त रखा था। नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों में खुद को बचाने के लिए मशहूर 'भंडारी जजमेंट' का हवाला दिया था, जिसमें रक्षा दलाल संजय भंडारी के मामले में भारत की जेलों में प्रताड़ना के डर को आधार मानकर प्रत्यर्पण से इनकार किया गया था। नीरव ने भी यही दलील दी कि भारत की जेलों में उसकी जान को खतरा हो सकता है और उसे प्रताड़ित किया जा सकता है। हालांकि, भारतीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) के अधिकारियों ने कोर्ट में जेल की स्थितियों को लेकर पुख्ता सबूत और सरकारी आश्वासन पेश किए, जिसके बाद ब्रिटेन के हाई कोर्ट और अब ECHR ने नीरव मोदी के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है पीएनबी घोटाले का मास्टरमाइंडनीरव मोदी मार्च 2019 में लंदन में हुई अपनी गिरफ्तारी के बाद से लगातार वहां की कुख्यात 'वैंड्सवर्थ जेल' (Wandsworth Prison) में बंद है। भारत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के महाघोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में उसकी लंबे समय से तलाश है। ब्रिटेन की अदालत ने अपनी अंतिम टिप्पणी में साफ कहा कि नीरव मोदी का मामला कोई असाधारण या मानवाधिकार उल्लंघन का मामला नहीं है और इस केस को दोबारा खोलने का कोई ठोस आधार नहीं बचता है।कूटनीतिक औपचारिकताएं शुरू, भारतीय जांच एजेंसियां लाने को तैयारराजनयिक और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद ब्रिटेन के गृह मंत्रालय और प्रशासनिक अधिकारियों ने नीरव मोदी को भारतीय अधिकारियों को सौंपने की अंतिम प्रक्रिया तेज कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सिर्फ कुछ कागजी और प्रशासनिक औपचारिकताएं ही शेष रह गई हैं। भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियां किसी भी समय लंदन के लिए उड़ान भर सकती हैं और नीरव मोदी को मुंबई या दिल्ली लाकर कानून के शिकंजे में खड़ा किया जा सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 6:17 pm

CIA का फर्जी एजेंट बनकर अरबों डॉलर की डिफेंस डील हड़पने की कोशिश, भारतीय मूल के गौरव श्रीवास्तव की खुली पोल

अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदों और खुफिया एजेंसियों के नाम पर धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने जकार्ता से लेकर वॉशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है। भारतीय मूल के बिजनेसमैन गौरव श्रीवास्तव पर आरोप लगा है कि उन्होंने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) का गुप्त एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से नजदीकियां बढ़ाईं। ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, श्रीवास्तव ने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल इंडोनेशियाई सरकार से फाइटर जेट और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की अरबों डॉलर की डिफेंस डील हासिल करने के लिए किया था।फोन कॉल से हुआ पर्दाफाश और अदालती मुकदमों में बड़े खुलासेइस पूरी अंतरराष्ट्रीय साजिश की पोल तब खुली जब गौरव श्रीवास्तव के पूर्व बिजनेस पार्टनर नील्स ट्रोस्ट ने कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अदालतों में मुकदमे दायर किए। इन मुकदमों और रिकॉर्ड की गई फोन कॉलों के आधार पर दावा किया गया है कि श्रीवास्तव ने खुद को रसूखदार CIA ऑपरेटिव बताकर इंडोनेशिया के वरिष्ठ अधिकारियों और तत्कालीन रक्षा मंत्री (अब राष्ट्रपति) प्राबोवो सुबियांतो तक सीधी पहुंच बनाई। वे वर्ष 2020 में वॉशिंगटन डीसी और जकार्ता में हुई हाई-लेवल डिफेंस मीटिंग्स में भी शामिल होने में कामयाब रहे, जहां सैन्य साजो-सामान की खरीद पर बड़ी चर्चाएं हुई थीं।शेल कंपनियों के जरिए 13.9 बिलियन डॉलर के F-15 फाइटर जेट्स का जालअपनी इस फर्जी साख के दम पर श्रीवास्तव ने साल 2020 से 2022 के बीच अपनी चार कंपनियों के जरिए इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय से पांच शुरुआती रक्षा समझौते, 'लेटर ऑफ इंटेंशन' और एक MoU हासिल कर लिए। इन प्रस्तावित सौदों में 36 F-15 फाइटर जेट, UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और एक जॉइंट कमांड सेंटर की आपूर्ति शामिल थी, जिसकी कुल अनुमानित कीमत करीब 13.9 बिलियन डॉलर (लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये) थी। हालांकि, बाद में कॉर्पोरेट जांच में खुलासा हुआ कि ये चारों कंपनियां महज 'शेल एंटिटीज' (कागजी कंपनियां) थीं, जिन्हें डिफेंस सेक्टर का कोई अनुभव नहीं था और टैक्स न भरने के कारण इनका रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया गया था। राहत की बात यह रही कि इंडोनेशियाई सरकार ने इनके तहत कोई वास्तविक भुगतान या खरीद नहीं की।राष्ट्रपति के भाई से नजदीकी और 51 मिलियन डॉलर के लोन का खेलअदालती शिकायतों के मुताबिक, गौरव श्रीवास्तव ने केवल सरकारी अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया के सबसे प्रभावशाली व्यापारियों को भी अपने जाल में फंसाया। उन्होंने राष्ट्रपति प्राबोवो के भाई और अरसारी ग्रुप के चेयरमैन हाशिम जोजोहादिकुसुमो से गहरी नजदीकियां बनाईं। श्रीवास्तव के कथित रसूख के झांसे में आकर उनके पार्टनर ट्रोस्ट ने अपनी कंपनी की 50% हिस्सेदारी उनके नाम कर दी, जिसके बाद श्रीवास्तव ने उस कंपनी से अरसारी ग्रुप को 51 मिलियन डॉलर का लोन भी दिलवा दिया। दूसरी तरफ, गौरव श्रीवास्तव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने पूर्व पार्टनर द्वारा मनगढ़ंत कहानी बताया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 6:14 pm

सुपर टाइफून का रौद्र रूप: 290 किमी की रफ्तार से टकराई तबाही, समंदर की लहरों ने मचाया हाहाकार

समुद्र में उठे सुपर टाइफून ने भीषण रूप धारण कर लिया है। 290 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से तटों से टकराई इस प्राकृतिक आपदा ने हर तरफ तबाही के निशान छोड़ दिए हैं। तेज हवाओं और ऊंची उठती लहरों ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे तटीय इलाकों के लोग दहशत में हैं।प्रशासन अलर्ट और बचाव कार्य जारीखतरनाक तूफानी हवाओं के कारण घरों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर बचाव अभियान तेज कर दिए हैं। समंदर की उफनती लहरें अभी भी संकट का संकेत दे रही हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 1:13 pm

नाटो समिट से पहले ट्रंप का मेलोनी पर बड़ा पोस्ट, पुरानी फोटो वायरल होने से मचा सियासी घमासान

नाटो शिखर सम्मेलन शुरू होने से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा कर हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप के इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर भारी हंगामा खड़ा कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस अचानक आई पोस्ट के मायने तलाशे जा रहे हैं, जिसे कुछ लोग नाटो की एकजुटता के लिए एक संदेश के रूप में देख रहे हैं।क्यों हो रही है चर्चा?यह पोस्ट ऐसे समय पर आई है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक तनाव गहराया हुआ है। ट्रंप और मेलोनी के बीच के रिश्तों को लेकर दुनिया भर के मीडिया में नई बहस छिड़ गई है, जिससे नाटो समिट की गंभीरता और भी बढ़ गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 12:52 pm

ट्रंप से 90 मिनट की बातचीत के बाद पुतिन का घातक हमला, नाटो बैठक से पहले यूक्रेन में मचा कोहराम

डोनाल्ड ट्रंप के साथ करीब 90 मिनट की टेलीफोनिक बातचीत के तुरंत बाद व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर मिसाइलों की बौछार कर दी है। नाटो की आगामी हाई-लेवल बैठक से ठीक पहले हुए इस भीषण हमले ने कीव समेत कई शहरों को दहला दिया है। यह सैन्य कार्रवाई वैश्विक कूटनीति के लिए एक बड़े संदेश के रूप में देखी जा रही है।युद्ध का बढ़ता दायराइस अचानक हुए हमले से यूक्रेन में भारी तबाही की खबर है और क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पुतिन की इस आक्रामकता ने सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि नाटो की बैठक से ठीक पहले हुई यह गोलाबारी पूरे यूरोप के लिए बड़ा खतरा बन गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 12:50 pm

इंडोनेशिया में पीएम मोदी: 90% मुस्लिम आबादी के बीच कैसे जीवित हैं राम-महाभारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को नई ऊंचाई देने के लिए अहम है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहाँ की संस्कृति में भारतीय जड़ों की गहरी छाप है। रामायण और महाभारत यहाँ के लोगों के लिए सिर्फ धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने का दर्शन हैं, जो कला और लोक-परंपराओं में आज भी रचे-बसे हैं।सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासतइंडोनेशियाई संस्कृति में राम और कृष्ण की गाथाओं का इतना गहरा प्रभाव है कि वे इस्लाम के साथ पूरी तरह से एकीकृत हो चुकी हैं। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ पीएम मोदी का प्रंबनन मंदिर दौरा दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 12:48 pm

इजरायल को 'अकेला' समझने की भूल कर बैठा अमेरिका, जेडी वेंस की हेकड़ी निकाल पीएम नेतन्याहू ने भारत का नाम लेकर दिया ऐसा करारा जवाब!

अमेरिका और इजरायल के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध जगजाहिर हैं, लेकिन अमेरिकी प्रशासन अक्सर यह जताने से बाज नहीं आता कि इजरायल का अस्तित्व केवल उसकी बदौलत है. हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने एक इंटरव्यू के दौरान इजरायल पर तंज कसते हुए कहा था कि इस वक्त दुनिया में डोनाल्ड ट्रंप ही इजरायल के प्रति सहानुभूति रखने वाले एकमात्र राष्ट्राध्यक्ष हैं और अमेरिका की मदद के बिना इजरायल दुश्मनों से नहीं बच सकता. इस पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी दावे की हवा निकालते हुए भारत का नाम लेकर ऐसा करारा जवाब दिया है कि वाशिंगटन में हड़कंप मच गया है.जेडी वेंस ने इजरायल को दी नसीहत, सैन्य सहायता की दिलाई याददरअसल, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में इजरायली नेताओं से अमेरिका-ईरान शांति समझौते की सार्वजनिक आलोचना बंद करने को कहा था. वेंस ने इजरायल को चेतावनी भरे लहजे में कहा, आप केवल 90 लाख की आबादी वाला देश हैं और हर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या को सिर्फ जंग से हल नहीं कर सकते. उन्होंने याद दिलाया कि इजरायल के दो-तिहाई सुरक्षात्मक हथियार अमेरिकी करदाताओं के पैसे से बने हैं. वेंस ने हिजबुल्लाह पर हुए हमलों की भी आलोचना की थी, जिससे अमेरिका-तेहरान वार्ताओं पर बुरा असर पड़ रहा था.140 करोड़ आबादी वाले भारत से मिलता है अगाध प्रेम: नेतन्याहूफॉक्स न्यूज (Fox News) को दिए एक तीखे इंटरव्यू में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जेडी वेंस के 'अकेले दोस्त' वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया. नेतन्याहू ने कहा, मैं जेडी वेंस का सम्मान करता हूं, लेकिन मैं उनकी हर बात से सहमत नहीं हूं. डोनाल्ड ट्रंप जरूर हमारे सबसे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन दुनिया में हमारे कई और मित्र भी हैं. उदाहरण के लिए 'भारत' नाम का एक महान देश है, जिसकी आबादी 1.4 अरब है और वहां से हमें जो जबरदस्त और अटूट समर्थन मिलता है, उसे कोई नकार नहीं सकता.मेरा फेसबुक अकाउंट भारतीयों के प्यार से भरा पड़ा है: इजरायली पीएमनेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर मिल रहे जनसमर्थन का जिक्र करते हुए गर्व से कहा, मेरा फेसबुक अकाउंट (Facebook) देखें, वह भारतीय यूजर्स के अपार और भावनात्मक समर्थन से पूरी तरह से भरा रहता है. उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कुछ चुनिंदा वर्गों में इजरायल की चाहे जितनी आलोचना हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है. दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष मुझे व्यक्तिगत तौर पर फोन करते हैं और कहते हैं कि भले ही उनके यहां पब्लिक ओपिनियन की दिक्कत हो, लेकिन वे इजरायल का पूरा सम्मान करते हैं.एआई (AI) और साइबर सुरक्षा में इजरायल का लोहा मानती है दुनियापीएम नेतन्याहू ने साफ किया कि आज पूरी दुनिया इज़राइल के साथ रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी करना चाहती है. उन्होंने कहा, वैश्विक नेता हमसे सैन्य रणनीतियों को सीखने की इच्छा जताते हैं. वे हमारी उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहते हैं. इजरायल साइबर सुरक्षा के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है और हमारी तकनीक बेहद एडवांस है। इस बीच, सूत्रों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति के नाटो शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद अगले हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच एक बड़ी बैठक प्रस्तावित है, जिसमें दोनों देशों के बीच उपजे हालिया मतभेदों को सुलझाया जाएगा.

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 8:01 am

ताइवान ने चीन की समुद्री गश्त को बताया अवैध, क्षेत्रीय शांति पर जताई चिंता

ताइवान ने चीन के कोस्ट गार्ड (सीसीजी) के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में गश्त करने की आलोचना की है। ताइवान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ अधिकार का अवैध विस्तार बताया है और कहा है कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा हो रहा है।

देशबन्धु 6 Jul 2026 7:40 am

जब ताबूत से गिरे खुमैनी, कफन के चीथड़े उड़े:खामेनेई के जनाजे में 3 करोड़ लोग जुटेंगे; शिया मुसलमानों में मातम इतना अहम क्यों

4 जुलाई से ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हुईं। उनका जनाजा तेहरान, कोम, नजफ और इराक के कर्बला शहर होते हुए, 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगा, जहां उन्हें दफन किया जाएगा। इस दौरान 100 से ज्यादा देशों के नेता और 3 करोड़ से ज्यादा लोग ‘शियाओं के रहबर’ का आखिरी दीदार करेंगे। शिया मुसलमानों में मातम इतना अहम क्यों है, खामेनेई की हत्या को कर्बला की शहादत से क्यों जोड़ा जा रहा और इस बड़े जलसे के पीछे असली वजह क्या है; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और महेंद्र वर्मा --------- यह खबर भी पढ़िए… दर्जनभर लोगों से गुजरकर मुजतबा तक पहुंचती है कोई चिट्ठी; पिता को कंधा देने पर सस्पेंस, क्या इजराइल वाकई मार देगा ईरान के सुप्रीम लीडर रहे आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में जारी हैं। 100 से ज्यादा देशों के नेता पहुंच रहे हैं। काले कपड़ों में रोते-बिलखते लाखों ईरानी अपने ‘रहबर’ का आखिरी दीदार करना चाहते हैं। इन सबके बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गायब हैं। पिता के जनाजे को कंधा देंगे या नहीं, इस पर भी सस्पेंस है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 6 Jul 2026 5:25 am

नाटो शिखर सम्मेलन से पहले अंकारा में कड़ी सुरक्षा, 46 संदिग्ध हिरासत में ल‍िए गए

तुर्की की राजधानी अंकारा में पुलिस ने 46 लोगों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई 7-8 जुलाई को होने वाले नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) शिखर सम्मेलन से पहले सुरक्षा व्यवस्था के तहत की गई। यह जानकारी रविवार को तुर्की के मीडिया ने दी।

देशबन्धु 6 Jul 2026 5:10 am

इटली के रक्षा मंत्री बोले-रक्षा खर्च पर नहीं कोई टकराव, सहयोग और सुरक्षा पर जोर

इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने रविवार को अंकारा में होने वाले नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) समिट को लेकर उम्मीद जताते हुए कहा क‍ि अंकारा शिखर सम्मेलन को इस तरह तैयार किया गया है कि सब कुछ ठीक से चले, सभी वादों का पालन हो और हर देश यह दिखाए कि उसने अपना हिस्सा पूरा किया है

देशबन्धु 5 Jul 2026 11:21 pm

फ्रांस-स्पेन सीमा पर आग का कहर – 1,500 हेक्टेयर जंगल राख

फ्रांस-स्पेन सीमा क्षेत्र में जंगल की आग भी जारी रही। पूर्वी पाइरेनीज इलाके में ट्रेविलाच के पास शनिवार रात शुरू हुई भीषण आग तेज हवा और भीषण गर्मी के कारण फिर से भड़क उठी

देशबन्धु 5 Jul 2026 10:52 pm

बांग्लादेश में खसरे का कहर; 24 घंटे में सात बच्चों की मौत, अब त‍क 738 की मौत

बांग्लादेश में खसरे जैसे लक्षणों के चलते रविवार सुबह 8 बजे तक सात और बच्चों की मौत हो गई है। इससे देश में 2026 में अब तक खसरे (पुष्टि और संदिग्ध दोनों) से हुई कुल मौतों की संख्या बढ़कर 738 हो गई है।

देशबन्धु 5 Jul 2026 10:21 pm

आज का एक्सप्लेनर:भारत को तेल बेचने वाला रूस, अब तेल खरीदने पर क्यों मजबूर; क्या यूक्रेन ने सभी रिफाइनरी तबाह कीं

दुनिया भर के देशों को कच्चा तेल बेचने वाला रूस अब दूसरे देशों से पेट्रोल मंगवाने को मजबूर है। भारत से भी पेट्रोल के कई टैंकर भेजे जाने की खबरें हैं। रूसी पेट्रोल पंपों पर पहली बार लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। पेट्रोल खरीदने पर पाबंदियां लागू हैं। इसकी वजह है- यूक्रेन के हमले। आखिर यूक्रेन ने रूस में पेट्रोल की किल्लत कैसे पैदा कर दी, क्या वाकई भारत, रूस को पेट्रोल बेच रहा; और रूस, यूक्रेन के हमले क्यों नहीं रोक पा रहा, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: दुनिया को तेल बेचने वाले रूस में तेल की कमी कैसे हो गई है? जवाब: रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से यूक्रेन लगातार रूसी ऑइल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। मार्च 2026 से अब तक रूस की ऑयल रिफाइनरी पर 50 से ज्यादा हमले किए हैं। 4 जुलाई को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन की सीमा से करीब 850 किमी अंदर रूस के सेंट पीटर्सबर्ग की रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक किया है। इस रिफाइनरी से हर साल 1.25 करोड़ टन पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स बनते हैं। 3 जून को भी इस रिफाइनरी पर हमला हुआ था। इसके अलावा 18 जून को मॉस्को के बाहरी इलाकों में स्थित रिफाइनरी पर हमला हुआ। यूक्रेनी मीडिया के मुताबिक, रूस की टॉप-10 रिफाइनरियों में से 8 पर यूक्रेन हमले कर चुका है। रिफाइनरियों पर हुए हमले से रूस में पेट्रोल की भारी कमी हो गई है… सवाल-2: क्या इस स्थिति से निपटने में भारत रूस की मदद कर रहा है? जवाब: रॉयटर्स के मुताबिक, भारतीय तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को पेट्रोल के 2 टैंकर रूस भेजे हैं। इन टैंकरों में करीब 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल है। नायरा एनर्जी में रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की 49% हिस्सेदारी है। हालांकि नायरा ने टैंकर भेजने की पुष्टि नहीं की है। रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि रूस कई दशकों बाद ईंधन आयात करने की तैयारी में है। दूसरे देशों के संपर्क से ईंधन खरीदने की बातचीत चल रही है। हालांकि भारतीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है, 'भारतीय सरकारी या प्राइवेट कंपनियां सीधे रूस को ईंधन नहीं बेच रही हैं। हो सकता है कि रूस अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों के जरिए भारतीय मूल का ईंधन खरीद रहा हो।' दरअसल, सीधे व्यापार के बजाय अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों के जरिए भी तेल खरीदने का एक विकल्प होता है। ये व्यापारी कई देशों की तेल कंपनियों से तेल खरीदकर उसका पेमेंट करते हैं। फिर ये सारा तेल सिंगापुर, UAE के फुजैरा या यूरोप के रोटरडैम जैसे बड़े बंदरगाहों पर ले जाते हैं। यहां कई बार अलग-अलग देशों का तेल मिक्स भी किया जाता है। फिर जब रूस या किसी अन्य देश को तेल की जरूरत पड़ती है, तो ये व्यापारी उसे तेल के टैंकर बेच देते हैं। सवाल-3: तेल की जरूरत पूरी करने के लिए रूस और क्या कर रहा है? जवाब: रूस 2 मुख्य तरीके अपना रहा है- 1. दूसरे देशों से खरीद 2. पेट्रोल एक्सपोर्ट और बिक्री पर पाबंदी रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है, ‘रिफाइनरी पर हमलों से ईंधन की कमी तो हुई है, लेकिन यह गंभीर नहीं है। पेट्रोल भंडार में पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 4% की कमी आई है।’ सवाल-4: रूस तेल की कमी से कब तक निपट पाएगा? जवाब: ग्लोबल बिजनेस कंसल्टेंसी फर्म मैक्रो-एडवाइजरी लिमिटेड के CEO और एनालिस्ट क्रिस वेफर कहते हैं, ‘रूस में फ्यूल का स्टोरेज पर्याप्त है, लेकिन दिक्कत ये है कि ये गलत जगह पर है। जिन इलाकों में फ्यूल की कमी है, वहां सप्लाई रातोंरात नहीं हो सकती। इस बड़े लॉजिस्टिक्स कई हफ्ते लग सकते हैं। ये एक बड़ा लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन है।’ जिन रूसी रिफाइनरीज को यूक्रेनी हमलों में नुकसान पहुंचा है, उनको रिपेयर करना भी मुश्किल है। इनमें कुछ मशीनरी और इक्विपमेंट ऐसी हैं, जिसे विदेशों से इम्पोर्ट किया जाता है, लेकिन रूस पर विदेशी व्यापार को लेकर कई तरह के बैन लगे हैं। वेफर के मुताबिक, मॉस्को रिफाइनरी की मरम्मत में कम से कम 3 महीने लग जाएंगे। इसी से मॉस्को और आसपास के इलाके में जरूरत के 40% फ्यूल की सप्लाई होती है। वहीं ऑयल मार्केट एनालिस्ट गैरी पीच कहते हैं कि मरम्मत के बावजूद रिफाइनरीज पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं। इनमें इतना ज्यादा नुकसान हुआ है कि गर्मियों के दौरान, यानी अगस्त तक रिफाइनिंग दोबारा पूरी तरह शुरू नहीं हो पाएगी। पीच के मुताबिक, जब तक यूक्रेन-रूस सीजफायर या कोई समझौता नहीं हो पाए, तब तक कई रिफाइनरीज की मरम्मत करने से कोई फायदा नहीं है, क्योंकि इन पर दोबारा हमला कर दिया जाएगा। वेफर कहते हैं कि अगर ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर को और नुकसान न पहुंचे, तो भी सितंबर तक फ्यूल की कमी बनी रहेगी, क्योंकि इसी दौरान खेती के लिए सबसे ज्यादा तेल की जरूरत होती है। सवाल-5: आखिर रूस यूक्रेन के हमलों का सामना क्यों नहीं कर पा रहा? जवाब: यूक्रेन और रूस के बीच जंग का पांचवां साल चल रहा है। यूक्रेन, रूसी रिफाइनरीज पर ज्यादातर ड्रोन अटैक ही करता है। 3 बड़ी वजहों से रूस इन्हें रोक नहीं पा रहा... 1. यूक्रेन के लॉन्ग-रेंज ड्रोन ट्रैक करना मुश्किल 2. सैकड़ों सस्ते ड्रोन रोकना महंगा 3. रूस का बड़ा इलाका ही उसका दुश्मन --------- यह खबर भी पढ़िए… दर्जनभर लोगों से गुजरकर मुजतबा तक पहुंचती है कोई चिट्ठी; पिता को कंधा देने पर सस्पेंस, क्या इजराइल वाकई मार देगा ईरान के सुप्रीम लीडर रहे आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में जारी हैं। 100 से ज्यादा देशों के नेता पहुंच रहे हैं। काले कपड़ों में रोते-बिलखते लाखों ईरानी अपने ‘रहबर’ का आखिरी दीदार करना चाहते हैं। इन सबके बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गायब हैं। पिता के जनाजे को कंधा देंगे या नहीं, इस पर भी सस्पेंस है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 5 Jul 2026 6:09 pm

गौतम अदाणी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा रुख, कहा- अभियोजन कानूनी रूप से कमजोर और कूटनीतिक रूप से नुकसानदेह था

यह जवाब उस समय सामने आया जब अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गरौफिस ने न्याय विभाग से पूछा कि वह इस मामले को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग क्यों कर रहा है। इससे पहले विभाग ने केस समाप्त करने के लिए आवेदन तो दिया था, लेकिन उसमें निर्णय के पीछे के कारणों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया था।

देशबन्धु 5 Jul 2026 1:58 pm

ट्रंप की धमकियों के बाद ईरान की चेतावनी- 'होर्मुज स्ट्रेट बाहरी ताकतों के लिए सैन्य शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं है'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद पलटवार करते हुए ईरान ने कहा है कि हॉर्मुज स्ट्रेट बाहरी ताकतों के लिए सैन्य शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं है। ईरान के एक वरिष्ठ राजनयिक ने आगाह किया कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल सैन्य ताकत दिखाने के बजाय क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए।

देशबन्धु 5 Jul 2026 1:45 pm

अमेरिका ने 250वें स्वतंत्रता दिवस का भव्य जश्न मनाया, ट्रंप का कम्युनिज्म पर हमला; देशभर में हुए विशेष आयोजन

अपने संबोधन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सराहना करते हुए कम्युनिज्म की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका में कम्युनिस्ट विचारधारा के लिए कोई स्थान नहीं है।

देशबन्धु 5 Jul 2026 12:35 pm

‘फर्जी आंसू’ का तंज: खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ट्रंप का हमला

तेहरान में दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया विवादित बयान दिया है

देशबन्धु 5 Jul 2026 10:34 am

अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में सीआईए ने विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और जेलों के इस्तेमाल की जांच की

इस हफ्ते हुई कांग्रेस की एक सुनवाई में अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) के कोल्ड वॉर के दौर के एमके-अल्ट्रा प्रोग्राम की फिर से जांच शुरू हुई

देशबन्धु 5 Jul 2026 10:00 am