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US Election Security: क्या वाकई हैक हो सकता है अमेरिकी चुनाव? ट्रंप के दावों के बीच जानें 10 हजार सेंटर्स और मतपत्रों की सुरक्षा का पूरा सच!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर साइबर हमलों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसी विदेशी ताकतें और कुछ गैर-सरकारी समूह साइबर हमलों के जरिए अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि देश की डिजिटल चुनाव प्रणाली में सेंध लगाकर नतीजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक पटल पर अमेरिका के चुनावी सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। हालांकि, 'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) की विस्तृत रिपोर्ट और शीर्ष चुनाव विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका की चुनाव व्यवस्था दुनिया की सबसे जटिल, विकेंद्रीकृत और अभेद्य प्रणालियों में से एक है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली काम कैसे करती है और इसमें सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं।क्यों हैक करना नामुमकिन है अमेरिका का चुनाव सिस्टम?एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया भारत या अन्य देशों की तरह किसी एक केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित नहीं की जाती। पूरे अमेरिका में चुनाव किसी एक संस्था के बजाय 10,000 से ज्यादा स्वतंत्र और अलग-अलग स्थानीय चुनाव क्षेत्रों (लोकल ज्यूरिसडिक्शन) में कराए जाते हैं।अमेरिकी संविधान के तहत राज्यों को अपने तरीके से चुनाव कराने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) कुछ बुनियादी नियम तय कर सकती है, लेकिन वोटिंग मशीनों के चयन से लेकर गिनती तक की पूरी जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के कंधों पर होती है। यही वजह है कि पूरे देश में कोई एक सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीय) डिजिटल सिस्टम नहीं है जिसे एक साथ हैक करके नतीजे बदले जा सकें। हर क्षेत्र का अपना अलग और ऑफलाइन ढांचा होता है।वोटर फ्रॉड रोकने के लिए थ्री-लेयर सिक्योरिटी सिस्टमअमेरिकी चुनाव प्रणाली में गड़बड़ी या धोखाधड़ी (वोटर फ्रॉड) की आशंकाएं न के बराबर होती हैं, और यदि कोई ऐसा प्रयास करता भी है, तो वह तुरंत पकड़ में आ जाता है। अमेरिकी कानून के तहत चुनावी नियमों का उल्लंघन करना एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी का अपराध माना जाता है।सुरक्षा के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:कठोर कानूनी कार्रवाई: एक से अधिक बार मतदान करना, किसी अन्य मृत या जीवित व्यक्ति के नाम पर फर्जी वोट डालना, बैलेट पेपर से छेड़छाड़ करना या गलत दस्तावेज देना संघीय अपराध है, जिसके लिए भारी आर्थिक जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है।पहचान का कड़ा सत्यापन: मतदान केंद्र पर वोट डालते समय अधिकांश राज्यों में वैध फोटो पहचान पत्र (Photo ID) मांगा जाता है।मेल-इन बैलेट सुरक्षा: डाक (Mail-in Ballot) के जरिए होने वाले मतदान में सुरक्षा को दोगुना करने के लिए मतदाता के हस्ताक्षरों का मिलान (Signature Verification), आधिकारिक गवाहों की गवाही या नोटरी जैसी बेहद जटिल और अतिरिक्त कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।2020 चुनाव चोरी के दावों पर क्या कहते हैं आधिकारिक आंकड़े?डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह सार्वजनिक दावा करते रहे हैं कि साल 2020 का राष्ट्रपति चुनाव एक बड़ी धांधली के जरिए उनसे चुराया गया था। इस दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए एसोसिएटेड प्रेस ने साल 2021 में ट्रंप द्वारा विवादित ठहराए गए छह सबसे प्रमुख स्विंग स्टेट्स (राज्यों) में वोटर फ्रॉड के हर एक संभावित और संदिग्ध मामले की विस्तृत समीक्षा की थी।इस गहन पड़ताल में पाया गया कि इन राज्यों में कुल मिलाकर 475 से भी कम गड़बड़ी के मामले सामने आए थे, जो कि चुनाव के अंतिम परिणाम को बदलने के लिहाज से तिनके के बराबर भी नहीं थे। बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के ट्रंप के इन तमाम कानूनी आरोपों को अमेरिका की कई प्रांतीय व संघीय अदालतों, राज्य के चुनाव अधिकारियों और यहां तक कि ट्रंप सरकार के खुद के 'होमलैंड सिक्योरिटी विभाग' ने सिरे से खारिज कर दिया था। उस दौरान ट्रंप द्वारा ही नियुक्त किए गए तत्कालीन अमेरिकी अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि जांच में ऐसा कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है जो 2020 के चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सके।ट्रंप के आरोपों पर भड़का चीन, कहा- बेबुनियाद और मनगढ़ंतडोनाल्ड ट्रंप द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में लगाए गए साइबर घुसपैठ के आरोपों पर चीन ने बेहद कड़ी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान साफ कहा कि चीन ने कभी भी अमेरिका के आंतरिक मामलों या उनके चुनावों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही भविष्य में उसकी ऐसी कोई मंशा है।प्रवक्ता लिन जियान ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत, राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने वाशिंगटन को नसीहत देते हुए अपील की कि अमेरिका अपनी घरेलू राजनीति और चुनावी खींचतान में चीन का नाम घसीटना तुरंत बंद करे और इसके बजाय दोनों महाशक्तियों के द्विपक्षीय रिश्तों को रचनात्मक तरीके से बेहतर बनाने की दिशा में काम करे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 3:40 pm

सऊदी अरब पर हमला बना 'रेड लाइन', तो फिर ईरान-अमेरिका की मध्यस्थता का ठेका क्यों ले रहा पाकिस्तान? खुद ही फंसा बवंडर में

मिडल ईस्ट की राजनीति में इन दिनों एक अजीब कूटनीतिक पहेली सुलझती नजर नहीं आ रही है। एक तरफ सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके साम्राज्य की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा और किसी भी प्रकार का हमला उसके लिए 'रेड लाइन' है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान का ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का 'ठेकेदार' बनने का प्रयास गले की हड्डी बनता जा रहा है। इस्लामाबाद के इस कदम ने न केवल उसे अपने पुराने दोस्त सऊदी अरब की नजरों में संदिग्ध बना दिया है, बल्कि उसे एक ऐसे कूटनीतिक भंवर में धकेल दिया है जहां से निकलना अब मुश्किल होता जा रहा है।मध्यस्थता का दिखावा या कूटनीतिक मजबूरी?पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता आया है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए एक 'सेतु' (Bridge) का काम कर सकता है। लेकिन जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह रुख उसकी अपनी आर्थिक बदहाली और सऊदी अरब से मिलने वाली वित्तीय मदद के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर रहा है। सऊदी अरब मिडल ईस्ट में अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क है और वह ईरान को अपना सबसे बड़ा क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानता है। ऐसे में, यदि पाकिस्तान ईरान के करीब जाकर अमेरिका से डील कराने का प्रयास करता है, तो रियाद इसे अपनी पीठ में छुरा घोंपने जैसा महसूस करता है। पाकिस्तान का यह दोहरा रुख अब उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर रहा है।सऊदी अरब की 'रेड लाइन' और पाक की मुश्किलेंरियाद ने साफ कर दिया है कि यमन या समुद्री रास्तों से उसकी सुरक्षा को खतरा पहुँचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सऊदी अरब की इस सख्त नीति के बीच पाकिस्तान का ईरान के साथ मिलकर अमेरिका से 'डील' की वकालत करना उसके कूटनीतिक समीकरणों को बिगाड़ रहा है। सऊदी अरब से पाकिस्तान को मिलने वाले निवेश और सस्ते तेल पर अब तलवार लटकी हुई है। यदि इस्लामाबाद अपनी मध्यस्थता की नीति को नहीं बदलता, तो उसे रियाद की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पाकिस्तान का यह कूटनीतिक प्रयोग अब उसके अपने ही पाले में 'सेल्फ गोल' साबित हो रहा है।क्यों फंसा है पाकिस्तान?पाकिस्तान की यह स्थिति 'धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का' जैसी हो गई है। एक ओर उसे चीन का दबाव झेलना पड़ रहा है, दूसरी ओर अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने की मजबूरी है, और तीसरी ओर सऊदी अरब को नाराज न कर पाने की विवशता है। मध्यस्थता का 'ठेका' लेने के चक्कर में पाकिस्तान ने यह नहीं सोचा कि ईरान-अमेरिका के बीच दशकों से चली आ रही दुश्मनी इतनी आसानी से हल होने वाली नहीं है। अब इस्लामाबाद न तो ईरान को पूरी तरह संतुष्ट कर पा रहा है, न अमेरिका को और न ही सऊदी अरब का भरोसा जीत पा रहा है। अंततः, इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय मंच पर गिरती जा रही है, जो उसके भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 12:11 pm

अमेरिकी चुनाव में 'विदेशी दखल' का शोर: ट्रंप के दावों से मचा सियासी बवाल, खुफिया एजेंसियों पर ही उठाए सवाल

अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्राइम-टाइम संबोधन में चीन पर 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी 'डेटा सेंधमारी' (Data Breach) का गंभीर आरोप लगाया है। ट्रंप का दावा है कि चीन ने करीब 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का निजी डेटा अवैध रूप से हासिल किया था। इस खुलासे के साथ ही ट्रंप ने अपनी ही खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों को 'डीप स्टेट' करार देते हुए उन पर इस जानकारी को सालों तक छिपाने का आरोप लगाया है।ट्रंप का दावा: 'चुनावी सुरक्षा में सबसे बड़ी सेंध'ट्रंप ने व्हाइट हाउस से देश को संबोधित करते हुए दावा किया कि चीन ने 2020 के चुनाव चक्र के दौरान बड़ी योजना के तहत अमेरिकी मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर और राजनीतिक पसंद जैसी संवेदनशील जानकारी चुराई। राष्ट्रपति का आरोप है कि चीन ने इस डेटा का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने और अमेरिकी जनता को गुमराह करने के लिए एक 'डेटा एक्सप्लॉयटेशन यूनिट' बनाई थी। उन्होंने इसे अमेरिकी चुनाव प्रणाली की 'चौंकाने वाली कमजोरियां' (Shocking Vulnerabilities) करार दिया और कहा कि अब वे इससे जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि चुनाव प्रणाली की खामियों को सुधारा जा सके।खुफिया एजेंसियों पर भड़के राष्ट्रपतिट्रंप के बयानों का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा उनकी अपनी खुफिया एजेंसियों के प्रति अविश्वास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईए (CIA), एफबीआई (FBI) और अन्य इंटेलिजेंस विभागों के 'रॉग ब्यूरोक्रेट्स' (Rogue Bureaucrats) ने जानबूझकर चीन की इस दखलंदाजी को राष्ट्रपति और अमेरिकी जनता से छिपाए रखा। ट्रंप ने मांग की है कि इस 'कवर-अप' में शामिल अधिकारियों की जांच हो, उन्हें बर्खास्त किया जाए और उन पर आपराधिक मुकदमे चलाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें उन संस्थानों पर भरोसा नहीं है जिन्होंने देश की सुरक्षा से जुड़ी इस बड़ी जानकारी को दबाया।क्या ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं?ट्रंप के इन दावों को अमेरिका में आगामी नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। आलोचकों और डेमोक्रेटिक नेताओं का आरोप है कि ट्रंप इन 'संदेह पैदा करने वाले' बयानों के जरिए अपनी हार के पुराने दावों को फिर से जिंदा कर रहे हैं और मतदाताओं के मन में चुनाव प्रक्रिया के प्रति अविश्वास पैदा करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 2021 की खुफिया रिपोर्ट में ऐसी कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई थी कि किसी विदेशी शक्ति ने चुनाव नतीजों या वोटिंग मशीनों को प्रभावित किया हो। चीन ने भी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वह कभी भी अमेरिका के आंतरिक मामलों या चुनावों में दखल नहीं देता।नया चुनावी कानून: 'SAVE America Act' की वकालतअपने संबोधन में ट्रंप ने 'SAVE America Act' को तुरंत पास करने की अपील की। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को और अधिक कड़ा बनाना है, जिसमें फोटो आईडी और नागरिकता संबंधी सख्त नियम शामिल हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि ये कदम चुनावी अखंडता को बहाल करने के लिए अनिवार्य हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह सब चुनावी लाभ उठाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है ताकि आने वाले चुनावों में जनता का एक वर्ग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठाए

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 12:10 pm

हॉर्मुज में अमेरिका का 'समुद्री शिकंजा': ईरान की ओर जा रहे 3 जहाजों को रोका, मरीन कमांडर ने संभाली कमान

रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए ईरान की ओर बढ़ रहे तीन मालवाहक जहाजों को बीच रास्ते में ही रोक दिया है। इस चौंकाने वाली कार्रवाई के दौरान अमेरिकी मरीन कमांडो का एक दस्ता सीधे एक जहाज पर उतरा, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़े सैन्य संदेश के रूप में देखा जा रहा है।क्या है 'ऑपरेशन शिकंजा'?अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और ईरान द्वारा की जाने वाली संभावित गतिविधियों पर नजर रखने के लिए की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान की तरफ जा रहे तीन जहाजों को घेरा और उनकी तलाशी ली। इस दौरान एक जहाज पर अमेरिकी मरीन कमांडो के उतरने की तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें वे पूरी तरह से हथियारों से लैस नजर आ रहे हैं। अमेरिकी नौसेना का दावा है कि ये जहाज संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते थे, जिसके कारण यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है इतना अहम?स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से गुजरता है। पिछले कुछ महीनों में ईरान ने इस क्षेत्र में कई विदेशी तेल टैंकरों को जब्त करने या परेशान करने का प्रयास किया है, जिसके जवाब में अमेरिका ने इस इलाके में अपनी तैनाती को कई गुना बढ़ा दिया है। अब अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सैन्य मौजूदगी के जरिए इस समुद्री गलियारे को किसी भी तरह की दखलअंदाजी से मुक्त रखने के लिए प्रतिबद्ध है।ईरान की प्रतिक्रिया और भविष्य के हालातइस घटना के बाद तेहरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक बड़े सैन्य टकराव की आहट के तौर पर देख रहे हैं। ईरान पहले ही अमेरिका के इस 'शक्ति प्रदर्शन' को अपने समुद्री क्षेत्र की संप्रभुता का उल्लंघन बता चुका है। उधर, अमेरिका के इस कदम से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ गई है। आने वाले दिनों में हॉर्मुज के जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच यह 'बिल्ली-चूहे' का खेल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 12:08 pm

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को तगड़ा झटका: अब 'कोर्ट' में भारत की फीस भी भर रहा पाक, जानें क्या है पूरा मामला

सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की चालें उसी पर भारी पड़ रही हैं। सालों से भारत को पानी के विवाद में फंसाने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब खुद उसी जाल में फंस गया है। ताजा जानकारी के अनुसार, स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) में चल रही कानूनी लड़ाई का खर्च अब पाकिस्तान को खुद ही उठाना पड़ रहा है, जिसमें भारत की ओर से होने वाला कानूनी खर्च भी शामिल है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।पाकिस्तान की 'जालसाजी' का उल्टा असरदरअसल, सिंधु जल संधि के तहत किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पाकिस्तान की मंशा भारत के प्रोजेक्ट्स में रुकावट पैदा करने की थी, लेकिन भारत ने शुरू से ही स्पष्ट कर दिया था कि वह संधि के नियमों के भीतर रहकर ही काम कर रहा है। पाकिस्तान द्वारा एकतरफा मध्यस्थता की मांग करने के बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई, जिसका पूरा वित्तीय बोझ अब पाकिस्तान की ही तिजोरी पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय कानूनी जानकारों का कहना है कि यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सबक है कि बिना ठोस आधार के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को घेरने की कोशिश करना उसे कितना महंगा पड़ रहा है।भारत का रुख रहा स्पष्ट और अडिगभारत ने हमेशा से यह स्पष्ट किया है कि किशनगंगा और रतले प्रोजेक्ट्स पूरी तरह से सिंधु जल समझौते के प्रावधानों के अनुरूप हैं। भारत ने इन मंचों के साथ जुड़ने में हमेशा सावधानी बरती है क्योंकि भारत का मानना रहा है कि इन विवादों का समाधान आपसी बातचीत या संधि में वर्णित तटस्थ विशेषज्ञ (Neutral Expert) के माध्यम से होना चाहिए। पाकिस्तान ने जब इस प्रक्रिया को दरकिनार कर कोर्ट का रुख किया, तो कानूनी प्रक्रियाओं के तहत खर्चे का भुगतान करने की जिम्मेदारी भी उसी की बन गई।रणनीतिक जीत और भविष्य का रास्तायह घटनाक्रम न केवल भारत की कूटनीतिक और कानूनी मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष कितना सशक्त है। पाकिस्तान की इस हरकत ने उसे दुनिया के सामने एक ऐसा देश बना दिया है जो केवल भारत के विकास को रोकने के लिए अपनी आर्थिक स्थिति खराब कर रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस कानूनी फजीहत के बाद क्या पाकिस्तान सिंधु जल संधि के प्रति अपने रवैये में कोई बदलाव लाता है या नहीं। फिलहाल, भारत अपनी जल परियोजनाओं को लेकर पूरी तरह आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद राष्ट्रहित को सर्वोपरि रख रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 12:03 pm

US Israel Dispute 2026: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का इजरायली लॉबी पर फूटा गुस्सा, सरेआम कहा 'भाड़ में जाओ'

पश्चिम एशिया (Mid-East) में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिका और उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगी देश इजरायल के बीच अंदरूनी खींचतान अब खुलकर दुनिया के सामने आ गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ पिछले महीने हुए शांति समझौते का विरोध करने वाले और इसे सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश करने वाले इजरायली तत्वों को सीधे और बेहद तल्ख शब्दों में 'भाड़ में जाओ' (Go to Hell) कहकर कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बेहद लोकप्रिय पोडकास्ट 'द जो रोगन एक्सपीरियंस' (The Joe Rogan Experience) पर एक विस्तृत तीन घंटे की बातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति वेंस ने इजरायल के कड़े रुख पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए कि कुछ इजरायली ताकतें किसी स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य के बिना ईरान के साथ इस सैन्य संघर्ष को अनिश्चितकाल के लिए खींचना चाहती हैं।इजरायली सोशल मीडिया कैंपेन पर भड़के वेंस: अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने का लगाया आरोपपॉडकास्ट पर खुलकर बात करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि इजरायल के भीतर कुछ ऐसे प्रभावी लोग और समूह सक्रिय हैं जो अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने और उसे बदलने के लिए बड़े पैमाने पर गुप्त अभियान चला रहे हैं। वेंस ने आरोप लगाया कि इन अभियानों का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के साथ अमेरिका की जंग कभी खत्म न हो और यह अनिश्चितकाल तक चलती रहे। वेंस ने खुलासा किया कि इजरायली सरकार के करीबी सूत्रों और उनसे जुड़े व्यक्तियों ने खुद उनके खिलाफ एक बड़ा दुष्प्रचार अभियान चलाया क्योंकि वह ईरान के साथ एक ऐसा कूटनीतिक समझौता स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय और सुरक्षा लक्ष्यों के बिल्कुल अनुकूल था।लीक रिपोर्ट्स और ऑनलाइन हमलों का पर्दाफाश: वेंस बोले- 'मैं अमेरिकी हितों के लिए अडिग रहूंगा'उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रोपेगैंडा के काम करने के तरीके को बेनकाब करते हुए कहा कि इस अभियान के तहत अमेरिकी पत्रकारों को संवेदनशील और आधी-अधूरी जानकारियां जानबूझकर लीक की गईं ताकि अमेरिकी सरकार की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर किया जा सके। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन पर व्यक्तिगत हमले किए गए। इन साजिशों के पीछे काम करने वाले इजरायली सिंडिकेट का जिक्र करते हुए वेंस ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, भाड़ में जाओ। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विदेशी ताकतों के इस तरह के दबाव के आगे कभी नहीं झुकेंगे और वही करेंगे जो अमेरिकी नागरिकों और अमेरिका के व्यापक राष्ट्रीय हितों के लिए सबसे बेहतर और सही होगा।फंडिंग नेटवर्क का बड़ा खुलासा: पूर्व ट्रंप अधिकारी और इजरायली सरकार के बीच कनेक्शनबातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति वेंस ने उन खुफिया रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया जिनमें एक बड़े वित्तीय नेक्सस की बात सामने आई थी। इन खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले चुनावी अभियान से जुड़े रहे एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी को इजरायली सरकार के करीबियों से भारी-भरकम फंडिंग मिली थी। इस फंड का उपयोग कुछ विशेष सोशल मीडिया प्रभावितों और रणनीतिकारों को भुगतान करने के लिए किया गया था ताकि वे ईरान नीति को लेकर सीधे उपराष्ट्रपति वेंस पर तीखे हमले बोल सकें। वेंस ने साफ किया कि उन्हें वॉशिंगटन की नीतियों को प्रभावित करने वाली विदेशी सरकारों की कोशिशों या अमेरिकी सरकार के भीतर से होने वाली आलोचनाओं से कोई गुरेज नहीं है क्योंकि इजरायल और दुनिया के अन्य देश हमेशा अपने हितों के लिए ऐसा करते आए हैं। लेकिन उन्हें असल आपत्ति तब होती है जब अमेरिकी नीति निर्माता इन बाहरी प्रभावों के दबाव में आकर देश के फैसले बदलने लगते हैं।एकमात्र मजबूत सहयोगी पर निशाना: पिछले महीने के कूटनीतिक तनाव की यादें हुईं ताजाजेडी वेंस द्वारा की गई यह ताजा टिप्पणी ईरान युद्ध और कूटनीति के मुद्दे पर इजरायली अधिकारियों की अब तक की सबसे सीधी और सबसे तीखी अमेरिकी आलोचना मानी जा रही है। इससे पहले पिछले महीने भी तेहरान के साथ वॉशिंगटन के समझौते की सार्वजनिक रूप से निंदा करने वाले इजरायली कैबिनेट के मंत्रियों को वेंस ने कड़ा आड़े हाथों लिया था। तब उन्होंने बेहद गंभीर लहजे में इजरायली नेतृत्व को नसीहत देते हुए कहा था कि अगर वह खुद इजरायली सरकार के मंत्री होते, तो दुनिया में बचे अपने एकमात्र सबसे शक्तिशाली और मजबूत सहयोगी (अमेरिका) पर इस तरह के घटिया और सार्वजनिक हमले कभी नहीं करते।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 12:00 pm

US Election Integrity: डोनाल्ड ट्रंप का चीन पर महा-धमाका, 22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डेटा चुराने का लगाया आरोप

अमेरिका में आगामी नवंबर में होने वाले बेहद महत्वपूर्ण मिडटर्म इलेक्शंस (Midterm Elections) से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चीन के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। गुरुवार 16 जुलाई 2026 को व्हाइट हाउस से दिए गए अपने एक बेहद तीखे और सनसनीखेज 25 मिनट के विशेष संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कुछ ऐसी अत्यंत संवेदनशील और क्लासिफाइड खुफिया फाइलों को सार्वजनिक किया है, जो अमेरिकी चुनावी व्यवस्था में चीन की सीधी और अवैध दखलअंदाजी का पर्दाफाश करती हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप का यह नया और गंभीर दावा खुद अमेरिका की ही शीर्ष खुफिया एजेंसियों की उन पुरानी रिपोर्टों के बिल्कुल विपरीत है, जिनमें कहा गया था कि 2020 के चुनावों में चीनी हस्तक्षेप के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।चीनी हैकर्स के निशाने पर अमेरिकी वोटर: 22 करोड़ मतदाताओं के निजी डेटा में सेंधमारी का गंभीर आरोपराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए बेहद चौंकाने वाला आरोप लगाया कि उनके द्वारा डीक्लासिफाइड किए गए दस्तावेजों से साफ होता है कि चीनी खुफिया एजेंसियों और हैकर्स ने अवैध रूप से लगभग 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की गुप्त फाइलें हासिल कर ली थीं। ट्रंप के अनुसार, इस हैक किए गए डेटाबेस में अमेरिकी नागरिकों के नाम, उनके स्थायी पते, फोन नंबर और वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली बेहद संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं। ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने अमेरिकी खुफिया तंत्र (Intelligence Community) के ही कुछ अंदरूनी अधिकारियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन लोगों ने चीन की इस खतरनाक साइबर साजिश की गंभीरता को जानबूझकर छिपाया और दबाया था ताकि जनता को गुमराह किया जा सके।बीजिंग का पलटवार और ट्रेड वॉर की वापसी का खतरा: शी जिनपिंग से सुधरते रिश्ते फिर अधर मेंट्रंप के इस बेहद आक्रामक भाषण के तुरंत बाद चीन ने इन आरोपों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के आधिकारिक प्रवक्ता लियू चांग ने एक बयान जारी कर ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, चीन ने अमेरिका के आंतरिक और राष्ट्रपति चुनावों में कभी कोई हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही भविष्य में ऐसा करने की हमारी कोई मंशा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से दोनों महाशक्तियों के बीच हाल ही में पटरी पर लौट रहे व्यापारिक संबंध एक बार फिर पूरी तरह से पटरी से उतर सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल लंबे चले ट्रेड वॉर के बाद संबंधों को सुधारने के उद्देश्य से खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग जाकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बेहद सकारात्मक मुलाकात की थी, जिस पर अब पानी फिरता नजर आ रहा है।डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के दावों को नकारा: खुफिया जानकारियों को 'हथियार' बनाने की दी चेतावनीदूसरी ओर, अमेरिकी विपक्षी दल यानी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह चुनावी स्टंट और मनगढ़ंत करार दिया है। हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सांसदों ने कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बिल पुल्टे सहित देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) और एनएसए (NSA) के प्रमुखों को एक बेहद कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति ट्रंप को नवंबर के मिडटर्म चुनावों को प्रभावित करने के लिए चुनावी सुरक्षा से जुड़े झूठे दावों और संवेदनशील खुफिया जानकारियों को एक राजनीतिक हथियार (Weaponizing Intelligence) के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत बिल्कुल न दी जाए। सीनेट में मेजॉरिटी लीडर चक शूमर ने भी ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे इन भ्रामक दावों की आड़ में आगामी नवंबर के चुनावों में अपनी पार्टी के पक्ष में हेरफेर करने की जमीन तैयार कर रहे हैं।'सेव अमेरिका एक्ट' के जरिए चुनावी नियमों को बदलने की तैयारी: विपक्ष ने खड़े किए सवालजनवरी 2025 में व्हाइट हाउस में दोबारा ऐतिहासिक वापसी करने के बाद से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार देश की चुनावी प्रक्रिया पर संघीय सरकार का केंद्रीय नियंत्रण मजबूत करने की वकालत कर रहे हैं। ट्रंप इन दिनों सीनेट और कांग्रेस के रिपब्लिकन सदस्यों पर बेहद कड़े प्रावधानों वाले 'सेव अमेरिका एक्ट' (Save America Act) को जल्द से जल्द पारित करने का भारी दबाव बना रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून के तहत वोट डालने के लिए सरकार द्वारा जारी वैध फोटो आईडी और वोटर रजिस्ट्रेशन के समय केवल अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण (Proof of Citizenship) देना अनिवार्य कर दिया जाएगा। साथ ही, सभी राज्यों को अपने वोटरों का पूरा डेटा अनिवार्य रूप से संघीय सरकार के साथ साझा करना होगा। हालांकि, डेमोक्रेट्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कानून का पुरजोर विरोध करते हुए कहा है कि अमेरिका में वोटर फ्रॉड जैसी घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं और इस कानून का असली मकसद गरीब और अल्पसंख्यक मतदाताओं के वैध वोटों को दबाना है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 11:56 am

Nepal Political Crisis: गणेश नेपाली के आत्मदाह से दहला नेपाल, सड़कों पर उतरी आक्रोशित 'Gen Z'

नेपाल की राजधानी काठमांडू इस वक्त एक बड़े और अभूतपूर्व जन-आक्रोश की आग में जल रही है। महज चार महीने पहले देश की युवा आबादी यानी 'जेन-जी' (Gen Z) के बंपर और ऐतिहासिक समर्थन से सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) अब अपने कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से घिर गए हैं। कर्ज के भारी दबाव और पुलिस व सिस्टम की बेरुखी से तंग आकर 25 वर्षीय दलित युवक गणेश नेपाली द्वारा सरेआम खुद को आग के हवाले (आत्मदाह) करने की दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। काठमांडू की सड़कों पर उमड़े युवाओं के इस उग्र सैलाब और बढ़ते बवाल को देखते हुए नेपाल सरकार को चल रहे संसद सत्र तक को आनन-फानन में स्थगित करना पड़ा है। विपक्ष अब पीएम बालेन शाह के सिग्नेचर लुक पर तंज कसते हुए उनका 'काला चश्मा' उतारने की मांग कर रहा है।रोजी-रोटी छीनने पर सिस्टम के खिलाफ आत्मदाह: 60% झुलसे गणेश ने अस्पताल में तोड़ा दमदिल दहला देने वाली यह दुखद घटना 10 जुलाई 2026 की है। नेपाल के बेहद पिछड़े और सीमांत इलाके 'मुगु' का रहने वाला गणेश नेपाली काठमांडू में एक राइड-शेयरिंग ऐप के लिए बाइक चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। काठमांडू में पासपोर्ट विभाग के बाहर कथित तौर पर रास्ता अवरुद्ध करने के आरोप में ट्रैफिक पुलिस ने उसकी मोटरसाइकिल के पहियों पर क्लैंप लगा दिया और गाड़ी जब्त कर ली। मोटरसाइकिल ही गणेश की आजीविका का इकलौता सहारा थी, जिसे उसने भारी कर्ज लेकर खरीदा था और उसकी अगली बैंक किस्त की तारीख बेहद नजदीक थी। गाड़ी छुड़ाने को लेकर उसकी वहां मौजूद अधिकारियों से तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। पुलिस की इस कठोर कार्रवाई से बुरी तरह टूट चुके गणेश ने मानसिक तनाव में आकर अपनी ही बाइक से पेट्रोल निकाला, खुद पर छिड़का और माचिस लगा ली। 60 प्रतिशत से ज्यादा झुलस चुके गणेश को तुरंत काठमांडू के एक शीर्ष अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद उसने दम तोड़ दिया।सपनों का अंत और गरीबी का दंश: विदेश जाने की चाहत में थमा जीवनगणेश और उसका बड़ा भाई मदन नेपाली दोनों दलित समुदाय से आते हैं। मदन के पास सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की डिग्री होने के बावजूद काठमांडू की बेरुखी के कारण वह मजदूरी करने पर मजबूर है। उनके बुजुर्ग माता-पिता मुगु गांव में सीमांत किसान हैं और मामूली सरकारी पेंशन पर निर्भर हैं। मदन ने बताया कि गणेश ने इस उम्मीद में बाइक लोन पर ली थी कि वह कुछ पैसे जोड़कर अपने भाई के साथ खाड़ी देशों, जापान या दक्षिण कोरिया जाकर काम कर सकेगा और परिवार को गरीबी से बाहर निकालेगा। लेकिन पुलिस द्वारा उसकी आजीविका के साधन को सीज किए जाने के बाद उसे बैंक की किस्त चुकाने और अपनी गर्भवती पत्नी का खर्च उठाने का कोई रास्ता नजर नहीं आया, जिसने उसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।बैकफुट पर आई बालेन शाह सरकार: गृह मंत्री ने खुद जाकर सौंपा नागरिकता प्रमाण पत्रगणेश नेपाली की मौत के बाद काठमांडू का माहौल पूरी तरह बेकाबू हो गया, जिसने पहले से चल रहे सरकार विरोधी आंदोलनों में घी का काम किया। जब गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने विपक्ष पर इस दुखद मौत पर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया, तो जनता का गुस्सा और भड़क गया। हालात को हाथ से निकलता देख प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार तुरंत बैकफुट पर आ गई और भारी डैमेज कंट्रोल शुरू किया। सरकार ने मृतक गणेश की 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी एकमाया परियार (जो खुद आईटी में डिप्लोमा धारक हैं) के लिए तत्काल सरकारी नौकरी और उनकी 2 साल की मासूम बेटी की पूरी शिक्षा का खर्च उठाने का आधिकारिक ऐलान किया है। एकमाया के पास नेपाल का 'नागरिकता प्रमाण पत्र' नहीं था, जिसे गृह मंत्री गुरुंग ने खुद उनके घर जाकर सौंपा ताकि उन्हें सरकारी वित्तीय राहत मिल सके। इसके साथ ही, इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच के लिए डीआईजी (DIG) स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय विशेष टीम गठित की गई है और सरकार गणेश को शहीद का दर्जा देने पर भी विचार कर रही है।सिर्फ एक मौत नहीं, सरकार के इन तीन फैसलों के खिलाफ उबल रहा था बारूदराजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, गणेश की मौत तो महज एक तात्कालिक चिंगारी थी, असल में नेपाल की जनता और 'Gen Z' वोटर्स के भीतर सरकार के कुछ तानाशाही फैसलों के खिलाफ लंबे समय से बारूद इकट्ठा हो रहा था। पीएम बालेन शाह के तीन मुख्य कदमों ने जनता को सबसे ज्यादा नाराज किया है:ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों को भंग करना: सरकार ने युवाओं और मजदूरों की आवाज उठाने वाले प्रमुख संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया।अध्यादेश राज: लोकतांत्रिक बहस और संसद को पूरी तरह दरकिनार करते हुए सीधे अध्यादेश (Ordinance) पास करने की नीति अपनाई।अतिक्रमण विरोधी अभियान (Demolition Drive): अप्रैल 2026 में काठमांडू में चलाए गए क्रूर बुलडोजर एक्शन के कारण हजारों गरीब और रेहड़ी-पटरी वाले लोग रातों-रात बेघर हो गए।सोमवार को जब प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के घाट पर गणेश का अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां मुगु से आए उसके रोते बिलखते माता-पिता के साथ-साथ इस डिमोलिशन ड्राइव में बेघर हुए सैकड़ों पीड़ित परिवार भी एकजुट हुए। फिलहाल, सरकार प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए लगातार बातचीत की मेज पर बुला रही है और प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव ने 50,000 से अधिक संविदा कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की भावुक अपील करते हुए नौकरी सुरक्षा का भरोसा दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jul 2026 11:54 am

ट्रंप प्रशासन की चेतावनी, अमेरिका में चुनावी डेटा पर साइबर हमले का खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय खुफिया और साइबर सुरक्षा आकलनों में चेतावनी दी कि देश के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस अब भी विदेशी साइबर हमलों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। अगर यह डेटा चोरी होता है तो उसका दुरुपयोग कई वर्षों तक किया जा सकता है।

देशबन्धु 17 Jul 2026 11:29 am

राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच में बड़ा एक्शन, सिफारिश पर नियुक्त करीब 100 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट

पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) अब तक कई कर्मचारियों से पूछताछ कर चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ कर्मचारियों के जवाब जांच एजेंसियों को संतोषजनक नहीं लगे हैं। ऐसे मामलों में जांच आगे बढ़ाई जा रही है और यदि किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध या नियमों के विरुद्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

देशबन्धु 17 Jul 2026 9:36 am

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सुधार अभियान में तीन भारतीय मूल के विशेषज्ञ शामिल, रघुराम राजन को मिली अहम जिम्मेदारी

पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन को फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट नीति की समीक्षा करने वाले कार्यबल में शामिल किया गया है। यह समूह केंद्रीय बैंक की परिसंपत्तियों और मौद्रिक नीति के संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। राजन को वैश्विक स्तर पर वित्तीय स्थिरता, केंद्रीय बैंकिंग और मौद्रिक नीति के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है।

देशबन्धु 17 Jul 2026 8:41 am

ट्रंप प्रशासन ने सख्त किए वीजा नियम

ट्रंप प्रशासन ने एक नया अंतिम नियम जारी किया, जिसके तहत दशकों पुरानी उस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है जिसमें कई विदेशी छात्र और एक्सचेंज विजिटर अमेरिका में बिना किसी तय अंतिम तारीख के रह सकते थे

देशबन्धु 17 Jul 2026 7:50 am

ईरान का पलटवार: अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें

ईरान ने गुरुवार तड़के बहरीन, जॉर्डन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं

देशबन्धु 17 Jul 2026 7:20 am

ईरान पर अमेरिकी हमले जारी, पांचवीं रात भी बमबारी; व्हाइट हाउस ने कहा- बातचीत के दरवाज़े खुले

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने लगातार पांचवीं रात ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए

देशबन्धु 17 Jul 2026 6:55 am

सिर से जुड़ीं दो बहनें अब अलग नहीं होना चाहतीं:सलमान खान ने बहन बनाया, इलाज का वादा किया, अब फोन तक नहीं उठाते

ये हैं सबा और फरहा। उम्र 24 साल। दोनों का जन्म एक दिन, एक समय और एक ही मां की कोख से हुआ, सो ये जुड़वां कहलाती हैं। लेकिन… इनके जिस्म अलग-अलग नहीं, सिर से आपस में जुड़े हैं। वो भी इस तरह कि दोनों एक दूसरे को देख नहीं सकतीं। आईने में भी नहीं, अगर एक का रुख आईने की तरफ होता है तो दूसरी का उसके उलट। सबा और फरहा की कहानी लिखने में ‘लेकिन’ शब्द जल्द खत्म नहीं होते… इनके सिर जुड़े हुए हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग शख्सियतें हैं।इनके दिमाग अलग-अलग हैं, लेकिन उन तक खून पहुंचाने वाली नस एक ही है।इनके सिर को छोड़कर बाकी जिस्म अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों के पास किडनी सिर्फ एक जोड़ी हैं।दोनों सोचती अलग-अलग हैं, लेकिन ज्यादातर काम एक साथ करने होते हैं। फिर चाहे चलना-फिरना हो या सोना-जागना। दोनों के नर्वस सिस्टम अलग-अलग हैं, लेकिन कभी सबा के शरीर को फरहा कंट्रोल करती है तो कभी फरहा के शरीर को सबा। ये दो जिस्म एक जान हैं या दो जान एक जिस्म या फिर दो जिस्म दो जान, कहना मुश्किल है। खैर… मैं नीरज झा दुर्लभ बीमारियों की सीरीज ‘ऐ जिंदगी’ में इस बार इन्हीं दो बहनों की कहानी लाया हूं… दोपहर के करीब 1 बज रहे हैं। पटना के समनपुरा इलाके की मदरसा रोड। यहां एक चार मंजिला मकान है। दस्तक देने पर एक बुजुर्ग महिला ने दरवाजा खोला। बिना कुछ कहे वो मुझे पहली मंजिल पर बने एक कमरे की ओर ले गईं। पूछने पर उन्होंने अपना नाम- रबिया खातून बताया। मुझे सोफे पर बैठने का इशारा करते हुए बोली- यहीं बैठिए, मैं बेटियों को बुलाती हूं। उन्होंने सीढ़ियों पर खड़े होकर आवाज लगाई- ‘सबा... फरहा…’ करीब 5 मिनट के बाद, दो लड़कियां सीढ़ियों की रैलिंग के सहारे लड़खड़ाते, डगमगाते कदमों से आईं। छोटे-छोटे बाल। आंखों के नीचे काले घेरे। पैर की उंगलियां भी तिरछी। कदम बढ़ाते या उठते-बैठते, हर वक्त दोनों इस बात का ध्यान रख रही हैं कि एक-दूसरे का सिर न खिंचे। एक का सिर जरा सा ज्यादा हिलने पर दूसरी कराह उठती है। जैसे-तैसे दोनों सामने वाले सोफे पर आकर बैठीं। थोड़ी देर बाद, एक ने ऊपर की तरफ देखकर कहा- मैं सबा हूं और ये फरहा। सबा कहती हैं- जब आप आए, तब मैं खाना खा रही थी। फरहा को न चाहते हुए भी मेरे साथ बैठना पड़ा... क्या करे, मुझसे चिपकी हुई जो है। 24 सालों में हम दोनों में से कोई भी करवट लेकर सो नहीं सका है। मैं बीमार पडूं या फरहा... अस्पताल दोनों को जाना पड़ता है। अब तो जिंदगी से कोई शिकायत नहीं। अलग हुए तो शायद जिंदा न बचें। जब तक सांसें चल रही हैं, ऐसे ही हम साथ रहेंगी। तभी फरहा कहती हैं- जब छोटे थे, तो आस थी कि डॉक्टर ऑपरेशन करके हमको अलग-अलग कर देंगे। हम एक-दूसरे के गले लग सकेंगे। आमने-सामने बैठकर बातें करेंगे, लेकिन ये सब सपना ही रहा। अब तो हम ऐसे ही रहना चाहते हैं। मैं डॉक्टर बनना चाहती थी और सबा टीचर। जब हम 7-8 साल की हुईं, तो अम्मी-अब्बू स्कूल लेकर गए। टीचर कहने लगीं- ऐसे बच्चों को हम कैसे पढ़ाएंगे। इन्हें कौन संभालेगा। बच्चे इन्हें देखकर डर जाएंगे। बस, उनके शब्दों ने हमारे लिए स्कूल के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए। फरहा कहती हैं- उम्र के साथ हमारा थायराइड बढ़ गया और गठिया भी हो गया। पूरे जिस्म में हर वक्त दर्द रहता है। हम दोनों दिन-रात कराहती रहती हैं। जब भी आसपास के लोगों को हंसते-खेलते देखती हूं, तो खुदा से मन ही मन पूछती हूं- हम बहनों को किस बात की सजा दी। कुछ पल खामोश रहने के बाद फरहा कहती हैं- दर्द कितना भी हो, हम एक-दूसरे से अलग रहने के बारे में सोच नहीं सकतीं। मन करता है कि अम्मी-अब्बू के साथ हज पर जाएं, खुली हवा में सांस लें, दुनिया देखें और बाकी लड़कियों की तरह खुलकर अपनी जिंदगी जीएं, लेकिन मजबूरी है। इस चारदीवारी के बाहर कदम रखने से पहले हमें कई बार सोचना पड़ता है। इसी बीच, सबा कहती हैं- मेरी तो अब एक ही ख्वाहिश है- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुकेश अंकल से मिलना है। जब मिलूंगी, तो मन की बात कहूंगी। सबा यहां उद्योगपति मुकेश अंबानी को मुकेश अंकल कहती है। मैंने पूछा- उनसे क्या कहना चाहती हो? वो राज की बात है। आपको नहीं बता सकती। बस कोई हमें उनसे मिलवा दे। इसी बीच, एक शख्स कमरे में आता है। सबा बताती हैं- ये हमारे बड़े भाई मोहम्मद तमन्ना हैं। यही हमारी देखरेख करते हैं। फिर कहती हैं- हमारे लिए सजने-संवरने का कोई मतलब नहीं है। हम खुद कोई काम नहीं कर पातीं। ब्रश कराने और खाना खिलाने से लेकर नहाने और वॉशरुम ले जाने तक, सब कुछ घरवाले करते हैं। इसी बीच, भाई तमन्ना बोला- ये दोनों ज्यादा बात नहीं कर पातीं। ज्यादा देर तक बैठ भी नहीं सकतीं, दर्द होता है। तमन्ना के इतना कहते ही सबा और फरहा उठती हैं और लड़खड़ाते हुए उसी सीढ़ी के सहारे नीचे चली जाती हैं। तमन्ना बताते हैं- हम 8 भाई-बहन हैं। ये दोनों चौथे और पांचवें नंबर की है। मैं इनसे 13 साल बड़ा हूं। इनकी हर तकलीफ का गवाह हूं। अम्मी-अब्बू पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए मदद मांगने में हमेशा झिझकते हैं। नतीजा- पिछले 24 सालों से दोनों घर में कैद हैं। जब ये छोटी थीं, तो हम इन्हें पैदल या ऑटो से कभी-कभार मार्केट ले जाते थे, लेकिन ये जहां भी जातीं, लोग तमाशा बना देते। उल्टे-सीधे सवाल पूछते। तरह-तरह की बातें करते, इसीलिए हमने इन्हें बाहर ले जाना छोड़ दिया। 2002 की बात है। अम्मी पेट से थीं। तब हमारे यहां अल्ट्रासाउंड या एडवांस टेस्ट नहीं होते थे। जब घर पर डिलीवरी की कोशिश नाकाम हो गई। अम्मी की हालत बिगड़ने लगी, तो अब्बू आनन-फानन में उन्हें पटना के त्रिपोलिया हॉस्पिटल लेकर भागे। वहां डॉक्टरों ने बताया- पेट में जुड़वां बच्चे हैं, इसलिए नॉर्मल डिलीवरी मुमकिन नहीं। तुरंत बड़ा ऑपरेशन करना पड़ेगा। जैसे ही इन दोनों का जन्म हुआ, अस्पताल में सन्नाटा छा गया। दोनों के हाथ-पैर और जिस्म तो अलग-अलग थे, लेकिन सिर आपस में जुड़े थे। डॉक्टर से पूछा, क्या इनके सिर अलग हो सकते हैं? उन्होंने कहा- जब दोनों बड़ी होंगी, तो सर्जरी से अलग हो जाएंगे। अम्मी-अब्बू इन्हें लेकर गांव लौट आए। पूरे इलाके में बातें होने लगीं मोहम्मद शकील के घर सिर जुड़ी दो लड़कियां पैदा हुई हैं। तमन्ना कहते हैं कि- बहनों के घर आते ही सर्कस, तमाशे जैसी भीड़ हमारे घर के बाहर लगने लगी। लोग-रिश्तेदार सब इन्हें देखने के लिए आने लगे। कई लोग तो अम्मी-अब्बू को ये सलाह भी दे जाते थे कि ऐसी बेटियों को क्यों पाल रहे हो, कहीं छोड़ आओ। तब मेरे अब्बू ने हिम्मत दिखाई, कहा- जैसी भी हैं, मेरी बेटियां हैं। जब तक जिंदा हैं, देखभाल करेंगे। फिर वे सभी को लेकर पटना आ गए। यहां चाय का ठेला लगाकर गुजारा करने लगे। दरअसल, हम लोगों को लग रहा था कि जब ये बड़ी होंगी, तो सर्जरी करा देंगे। इनके शरीर अलग हो जाएंगे। फिर जैसे बाकी बहनें हैं, वैसे ये दोनों भी हो जाएंगी। इतने पैसे ही नहीं थे कि बड़े डॉक्टर से सलाह ले पाते। इनके जन्म के वक्त डॉक्टर ने जो बता दिया, वही अब्बू ने सच मान लिया। 2005 में उत्तरप्रदेश के किसी शहर से एक शख्स घर आया। उसने बताया कि अबूधाबी के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सबा-फरहा के बारे में मीडिया में देखा-सुना है। वो हमारी मदद करना चाहते हैं। उसने प्रिंस से हमारी बात कराई। प्रिंस ने वादा किया था कि वह सबा-फरहा के ऑपरेशन का पूरा खर्च उठाएंगे। उनकी पहल पर अमेरिका के मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ. बेंजामिन कार्सन भारत आए। उन्होंने दिल्ली के अपोलो अस्पताल में सबा-फरहा की एंजियोग्राफी और कई जटिल जांचें कीं। तब डॉ. कार्सन ने बताया था कि दोनों को अलग करना संभव है, लेकिन ऑपरेशन जोखिम भरा है। जान भी जा सकती है। इसी डर से अम्मी-अब्बू ने सर्जरी कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद से प्रिंस की ओर से बातचीत भी बंद हो गई। मो. तमन्ना बताते हैं- साल 2009 में, मीडिया के जरिए अभिनेता सलमान खान को पता चला कि सबा-फरहा उनकी फैन हैं। राखी बांधना चाहती हैं, तो उन्होंने खुद पूरे परिवार के लिए फ्लाइट की टिकटें भेजीं। मुंबई में अपने घर बुलाया और सबा-फरहा से राखी बंधवाई। खूब बातें कीं। सलमान ने वादा किया था दोनों को गोद लेंगे। मदद करेंगे। इलाज कराएंगे। हालांकि, बाद में कोई पूछने नहीं आया। जो शख्स उनसे बात करवाता था, अब वो फोन भी नहीं उठाता। इसके बाद, 2012 में इनके इलाज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम बनी। टीम पटना आई। डॉक्टरों ने दोनों की MRI, एंजियोग्राफी समेत तमाम जांचें करवाई। रिपोर्ट देखने के बात डॉक्टरों ने कहा-सबा-फरहा का सिर्फ सिर ही नहीं, बल्कि सिर से गुजरने वाली खून की नली और नसें भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अगर इन्हें सर्जरी के जरिए अलग करने की कोशिश की गई, तो दोनों या फिर किसी एक की जान जाना तय है। सबा के शरीर में किडनी नहीं है। अलग करने के बाद सबा को तुरंत किडनी की जरूरत होगी, जो इस खतरे को कई गुना और बढ़ा देगी। यह सुनते ही अम्मी-अब्बू ने सर्जरी से इनकार कर दिया। इसके बाद, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया कि दोनों के इलाज और दवाइयों का पूरा खर्च उठाएं। परिवार की आर्थिक सहायता भी करें। पटना के सिविल सर्जन को आदेश दिया कि हर तीन महीने में दोनों की जांच करें। रिपोर्ट दिल्ली एम्स भेजें, लेकिन चार-पांच साल से कोई पूछने तक नहीं आया। दोनों के लिवर में सूजन है। जोड़ों में दर्द रहता है। आपने तो देख लिया होगा कि दोनों कितनी कमजोर हो गई हैं। जब मैं इन्हें देखता हूं, तो दुख होता है। दूसरी ओर, समाज के ताने रोज हमारी रूह छीलते हैं। कहते हैं- बेटियों के इलाज के नाम पर हमें सलमान खान और अबू धाबी के प्रिंस से करोड़ों रुपये मिले हैं। मीडिया वालों से भी इंटरव्यू और वीडियो बनाने के बदले पैसे वसूलते हो। तुम्हें क्या फिक्र, तुम्हें तो बेटियां कमा कर दे रही हैं। मैं किस-किस का मुंह बंद करूं, किस-किस को सफाई दूं। लोग बस तमाशा देखते हैं। उंगलियां उठाते हैं, लेकिन हमारा दर्द, हम ही जानते हैं। बाकी बहनों की शादी हुई, तो अम्मी कहने लगीं- काश ! सबा-फरहा भी अच्छी होती, तो इनकी भी शादी होती, लेकिन क्या करें। मैं फूड स्टॉल लगाकर बमुश्किल 500-600 रुपए कमाता हूं। जैसे-तैसे इनकी देखभाल करता हूं। इनका आगे क्या होगा, अल्लाह ही जाने। ये कहकर तमन्ना एक गहरी सांस लेते हैं। इसके बाद, मैं सबा-फरहा की अम्मी रबिया खातून से बेटियों के बारे में कुछ पूछने की कोशिश करता हूं। तमन्ना फौरन इनकार कर देते हैं। तस्वीर भी नहीं खींचने देते। कहते हैं- इतनी बातचीत बहुत है। अब आप जाइए। मुझे दुकान के लिए निकलना है। अब एक सेकंड भी बात नहीं कर सकता। सबा-फरहा की जिंदगी को करीब से देखने के बाद बतौर रिपोर्टर मेरे मन में कई सवाल उठ रहे हैं। इनका जवाब जानने के लिए मैं पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (IGIMS) पहुंचा। जहां मेरी मुलाकात न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. समरेंद्र कुमार से हुई। सबा-फरहा की जांच के लिए AIIMS दिल्ली से जो टीम आई थी, डॉ. समरेंद्र उस टीम का हिस्सा थे। वो बताते हैं- सबा-फरहा को कोई बीमारी नहीं है, यह एक जैविक चूक है। इसे क्रेनियोपैगस कहते हैं। गर्भधारण के पहले दिन, महिला का अंडाणु और पुरुष का शुक्राणु मिलकर एक जायगोट (एकल कोशिका) बनाते हैं। सामान्यतः इससे एक ही बच्चा विकसित होता है। जब यह एक जायगोट गर्भ में विकसित होना शुरू होता है, तो एक समान जुड़वां बच्चे बनने के लिए इस जायगोट को दो अलग-अलग हिस्सों में बंटना पड़ता है। शुरुआती दो हफ्तों के भीतर, कोशिकाएं बंटकर दो अलग-अलग बच्चों का रूप ले रही होती हैं। लेकिन किसी जैविक चूक के कारण, बंटवारे की यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। यह प्रक्रिया जहां रुकती है, शरीर का वह हिस्सा आपस में जुड़ा रह जाता है। सबा और फराह के मामले में यह रुकावट सिर के हिस्से पर हुई। सबा-फरहा का जुड़ाव सिर्फ ऊपरी चमड़ी या हड्डी तक सीमित नहीं है। अगर ऐसा होता, तो सर्जरी आसान होती। उनके दिमाग में ब्लड सप्लाई करने वाली मुख्य नस भी आपस में गुथी हुई है। यही कारण है कि ऑपरेशन करने पर किसी एक या दोनों की जान जाने का खतरा है। दोनों बहनों का नर्वस सिस्टम एक ही जगह से जुड़ा होने के कारण सबा के दिमाग से निकला सिग्नल कभी-कभी फरहा के अंगों तक पहुंच जाता है और फरहा का सिग्नल सबा तक। इससे दोनों के दिमागी सिग्नलों में टकराव हो जाता है। ऐसे समझें- जब फरहा सोती है, तो सबा जाग सकती है क्योंकि सोने और जागने को नियंत्रित करने वाला दिमाग का केंद्र दोनों का अपना-अपना है। अगर सबा कुछ खाती है, तो उसका स्वाद सिर्फ सबा को ही आता है, फरहा को नहीं, क्योंकि दोनों की स्वाद ग्रंथियां और दिमागी सिग्नल अलग हैं। लेकिन जब सबा अपने पैर को आगे बढ़ाने का फैसला करती है, तो उसके दिमाग से निकला सिग्नल उस साझा नस से होकर गुजरता है जो फरहा से भी जुड़ी है। नतीजा-वह सिग्नल आधा सबा के पैर में जाता है और आधा फरहा के। इससे कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती है। ऐसे बच्चों की सर्जरी जन्म के कुछ साल बाद ही हो जानी चाहिए, लेकिन सबा-फरहा के मामले में यह कभी मुमकिन नहीं था। उम्र बढ़ने के साथ इनका शरीर कमजोर होता जाएगा। ऐसे बच्चे अधिकतम 30 से 40 वर्ष ही जी पाते हैं। डॉ. समरेंद्र से मिलने के बाद मैं IGIMS के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. विनित ठाकुर से मिला। उन्हें सबा और फरहा की तस्वीर दिखाई। वे कहते हैं- ऐसे मरीजों का दिमाग दो हिस्सों में विकसित होने के बावजूद आपस में इस कदर घुला-मिला है कि इसे सर्जरी से अलग करना असंभव है। यदि दोनों शरीर लिवर साझा कर रहे होते, तो उसे काटना मुमकिन था, क्योंकि लिवर दोबारा बढ़ जाता है। लेकिन दिमाग का जो हिस्सा एक बार कट गया, वह कभी दोबारा नहीं बढ़ता। सिर की मुख्य नसों के साझा होने के कारण यह सर्जरी जानलेवा है। सामान्य जुड़वां बच्चे 3 साल की उम्र तक अपनी अलग पसंद-नापसंद बना लेते हैं। लेकिन सबा-फरहा के मामले में ऐसा नहीं हो सका। वे एक जैसा ही सोच पाती हैं। चूंकि दोनों के शरीर की 'सप्लाई चेन' एक है, इसलिए एक की बीमारी दोनों को प्रभावित करती है। उनकी सबसे बड़ी पीड़ा उनका रोज का तालमेल है। जहां एक बहन सोना चाहती है तो दूसरी जागना, एक बैठना चाहती है तो दूसरी चलना। एक की शारीरिक जरूरत, दूसरी की मजबूरी है। ------------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पढ़ें… 1- चेहरे पर मांस के लोथड़े देख लोग कहते हैं भूत:शक्ल देखकर 5 लोग गड्ढे में जा गिरे, मां बोली-मरेगा तभी बला टलेगी ऊपर आपने जो तस्वीर देखी, उनका नाम है मिथुन चौहान। उम्र 29 साल। जो भी इन्हें पहली बार देखता है, डर जाता है। भूत कहता है या जानवर। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज ‘ऐ जिंदगी’ के लिए इस बार इन्हीं की तलाश है। मैं नीरज झा इसी तलाश में पहुंचा पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर नवादा जिले के नारदीगंज ब्लॉक। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें… 2- बेटे की सभी हड्डियां टेढ़ी, 4 करोड़ में होगा इलाज:बिस्तर से उठ नहीं पाता, 3 डॉक्टर बोले- आपसी रिश्तों में शादी का असर 8 साल का जावेद स्कूल के मैदान में क्रिकेट खेलते-खेलते अचानक गिर पड़ा। दोस्तों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं उठा। जमीन पर पड़ा कराहने लगा। टीचर भागते हुए आए, उन्होंने भी उठाने की कोशिश की। वो बार-बार कहता रहा- मेरे घुटने और कोहनियों में बहुत दर्द है। पैर मुड़ ही नहीं रहे। मैं उठ नहीं पाऊंगा। अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाऊंगा। प्लीज, अम्मी-अब्बू को फोन करके बुला दीजिए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 17 Jul 2026 5:18 am

कतर के पूर्व अमीर शेख हमद के निधन पर भारत ने जताया शोक, राजदूत विपुल ने दी श्रद्धांजलि

कतर में भारत के राजदूत विपुल ने कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर आयोजित सामुदायिक शोक सभा में हिस्सा लिया। भारतीय दूतावास, दोहा ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।

देशबन्धु 17 Jul 2026 5:00 am

भारत-थाईलैंड के बीच बढ़ेगा व्यापार और संपर्क, राजदूत पुनीत अग्रवाल ने कई मुद्दों पर की चर्चा

भारत के थाईलैंड में राजदूत पुनीत अग्रवाल ने गुरुवार को थाईलैंड के विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका मामलों की महानिदेशक (डीजी) उरासा मोंगकोलनाविन से मुलाकात की। दोनों ने भारत और थाईलैंड के स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम मुद्दों पर बातचीत की।

देशबन्धु 17 Jul 2026 4:50 am

पाकिस्तान: बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों के काफिले पर बड़ा आतंकी हमला, तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत

पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में आतंकियों ने सुरक्षा बलों के एक काफिले पर समन्वित हमला कर दिया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक इस हमले में तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि 29 अन्य घायल हो गए।

देशबन्धु 17 Jul 2026 4:40 am

एआई प्रौद्योगिकी के लाभों को अधिक देशों तक पहुंचाने की उम्मीद : संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने 15 जुलाई को न्यूयॉर्क में आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संयुक्त राष्ट्र को उम्मीद है कि 2026 के विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन (डब्ल्यूएआईसी) के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और सभी लोगों को लाभ होगा।

देशबन्धु 17 Jul 2026 4:10 am

बाकू में भारत की विश्व धरोहर की झलक, भारतीय दूतावास लगाएगा स्थायी प्रदर्शनी

अजरबैजान की राजधानी बाकू में भारतीय दूतावास जल्द ही भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों पर एक स्थायी प्रदर्शनी शुरू करने जा रहा है।

देशबन्धु 17 Jul 2026 3:40 am

कीव समेत कई शहरों पर रूस ने दागीं 13 मिसाइलें और 151 ड्रोन, दो की मौत और कई घायल : जेलेंस्की

कीव में बुधवार रात रूसी म‍िसाइल हमले में दो लोगों की मौत हो गई। यूक्रेन के राष्‍ट्रपत‍ि व्‍लोद‍िमिर जेलेंस्‍की ने दावा क‍िया क‍ि रूस ने 13 मिसाइलें दागीं, जिनमें आठ बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, और 151 ड्रोन भी इस्तेमाल किए। जेलेंस्‍की ने कहा क‍ि मॉस्को बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए डर फैलाने की कोशिश कर रहा है।

देशबन्धु 16 Jul 2026 6:39 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या ‘2 दिन में मर सकते हैं सोनम वांगचुक’, जबरन खाना खिलाने पर क्या खतरा; भूख हड़ताल से शरीर में होता क्या है

सोनम वांगचुक 19 दिन से भूख-हड़ताल कर रहे हैं। मांग है- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। सरकार ने अब तक उनसे कोई बात नहीं की है। दिल्ली हाई कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर कर कहा कि सोनम को फोर्स-फीडिंग करवाई जाए, वरना 2 दिन में जान जा सकती है। कोर्ट ने सरकार को रोजाना मेडिकल जांच कराने के आदेश दिए हैं। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के तीसरे फेज में हैं, चौथे फेज में कैसे जा सकती है जान और क्या जबरन खाना खिलाया जा सकता है; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में... फेज-3: कुछ हफ्ते शरीर के 'इमरजेंसी सिस्टम' कीटोसिस का सहारा फेज-4: एनर्जी का कोई सुरक्षित तरीका नहीं बचता, मौत सवाल-1: तो क्या अगले दो-तीन दिन में सोनम वांगचुक की जान को खतरा है? जवाब: भुखमरी से जुड़ी कई रिसर्च में 3 जरूरी बातें हैं.. सोनम का वजन अनशन की शुरुआत में 65.9 किलो था, जो 16 जुलाई तक 9 किलो घटकर 56.9 हो गया है। यानी करीब 14% की गिरावट। उनका ब्लड प्रेशर नॉर्मल 120/80 यूनिट्स से घटकर 101/65 यूनिट्स आ गया है। वहीं ब्लड शुगर 89 यूनिट्स है। उत्तर प्रदेश बेस्ड डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) अजय सिंह कहते हैं कि सोनम के हेल्थ पैरामीटर्स देखते हुए ऐसा कहना ठीक नहीं होगा कि उनको दो दिन में जान का खतरा है। वे पानी ले रहे हैं। हालांकि निगरानी की जरूरत है, क्योंकि उनकी उम्र 59 साल है। मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर में न्यूरोलॉजिस्ट और मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. टी.एन दुबे कहते हैं, ‘मेडिकल साइंस में इस बात कि साफ पुष्टि नहीं है कि इंसान कितने दिन तक भूख बर्दाश्त कर सकता है। भूख तब तक जानलेवा नहीं होगी, जब तक कीटोसिस न शुरू हो जाए। एक बार ये प्रक्रिया शुरू हो जाए, तो माना जाता है कि व्यक्ति कोमा में जा सकता है। सवाल-2: क्या सरकार जबरन सोनम का अनशन तुड़वा सकती है? जवाब: भूख-हड़ताल भी अभिव्यक्ति, यानी अपनी बात कहने का तरीका है। आर्टिकल 19 के तहत ये एक मूल अधिकार है। यानी सरकार किसी को भूख-हड़ताल करने से रोक नहीं सकती। वहीं आर्टिकल 21 से जीवन का अधिकार मिलता है और ये सरकार की ये जिम्मेदारी है कि वह किसी व्यक्ति की जान को बचाए रखे। इसीलिए भारत में आत्महत्या करना या इसके लिए किसी को उकसाना अपराध है। इन दो कानूनों से जुड़ा एकएक रोचक मामला मणिपुर की इरोम चानू शर्मिला का है, जो 2000 से 2016 तक 16 साल भूख हड़ताल पर रही थीं। उन्हें अनशन के तीसरे दिन ही आत्महत्या के प्रयास के आरोप में IPC की धारा 309 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया और 16 साल तक सरकारी अस्पताल में रखकर जबरन फीडिंग ट्यूब से खाना दिया गया। हालांकि 2021 में मद्रास हाई कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में कहा कि भूख-हड़ताल के चलते किसी को आत्महत्या के प्रयास में आरोपी नहीं बनाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि सोनम पर इरोम चानू की तरह आत्महत्या की कोशिश का मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। लेकिन सरकार आर्टिकल 21 का हवाला देकर उनका अनशन तुड़वा सकती है। सोनम का अनशन तुड़वाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कहा है, 'डॉक्टरों से उनकी नियमित जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। क्योंकि हर नागरिक की जान कीमती है।’ --------- ये खबर भी पढ़िए… प्रोटेस्ट कॉकरोच पार्टी का, फिर सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर क्यों; क्या सरकार मांगें मानेगी, तबीयत बिगड़ी तो क्या होगा 59 साल के सोनम वांगचुक 17 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। सिर्फ नमक का पानी ले रहे हैं। 8.5 किलो वजन गिर चुका है। उनके पीछे बैनर कॉकरोच जनता पार्टी का है, जिसकी मांग है- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- सरकार बात तक करने को तैयार नहीं, मरने के लिए छोड़ दिया है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 16 Jul 2026 6:19 pm

Sheikh Hasina Return Plan: शेख हसीना की ढाका वापसी की घोषणा से बांग्लादेश में खलबली

बांग्लादेश की निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) के वतन लौटने के फैसले ने ढाका से लेकर नई दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है। अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत में शरण लेने वाली अवामी लीग (Awami League) की सुप्रीमो ने जब से अपनी वापसी की योजना का खुलासा किया है, तब से बांग्लादेश की अंतरिम और नई सरकार के तेवर बेहद आक्रामक हो गए हैं। बांग्लादेश प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शेख हसीना जैसे ही ढाका के हवाई अड्डे पर कदम रखेंगी, उन्हें बिना किसी कानूनी ढील या आत्मसमर्पण (Surrender) का मौका दिए तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।गृहमंत्री का सख्त रुख: सरेंडर की कोई गुंजाइश नहीं, कोर्ट के आदेश का होगा शत-प्रतिशत पालनबांग्लादेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'द डेली स्टार' के अनुसार, देश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बुधवार 15 जुलाई 2026 को एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सरकार के इरादे स्पष्ट कर दिए। गृहमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा, शेख हसीना के लिए आत्मसमर्पण करने या किसी प्रकार की राहत पाने की कोई कानूनी गुंजाइश नहीं बची है। जैसे ही अवामी लीग की नेता बांग्लादेश की सीमा में प्रवेश करेंगी, सुरक्षा एजेंसियां उन्हें ऑन-स्पॉट हिरासत में ले लेंगी। उन्होंने आगे जोड़ा कि देश की शीर्ष अदालत द्वारा पूर्व में जारी किए गए सभी आदेशों और गैर-जमानती वारंटों का अक्षरशः पालन किया जाएगा और उन्हें सीधे जेल भेजा जाएगा।मानवता के खिलाफ अपराध: विशेष अदालत सुना चुकी है मौत की सजाशेख हसीना की मुश्किलें सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन पर कानून का सबसे कठोर शिकंजा कसा हुआ है। पिछले वर्ष नवंबर में ढाका की एक विशेष ट्रिब्यूनल अदालत ने साल 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर की गई कथित बर्बर कार्रवाई और बल प्रयोग को 'मानवता के खिलाफ अपराध' (Crimes Against Humanity) मानते हुए शेख हसीना को दोषी करार दिया था और उन्हें सजा-ए-मौत (Death Penalty) सुनाई थी। इस ऐतिहासिक न्यायिक फैसले के बाद से ही बांग्लादेश का नया प्रशासन लगातार भारत सरकार से शेख हसीना के आधिकारिक प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग कर रहा है ताकि उन पर अदालत के आदेश के मुताबिक कार्रवाई की जा सके।शेख हसीना का भावुक और साहसिक बयान: गिरफ्तार करें या मार दें, अपनी ही धरती पर मरना पसंद करूंगीइस भारी कानूनी और प्रशासनिक दबाव के बीच शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अपने साहसिक इरादे जाहिर किए हैं। उन्होंने पुष्टि की है कि वह दिसंबर 2026 के आसपास अवामी लीग के प्रमुख नेताओं और हजारों वफादार कार्यकर्ताओं के साथ एक बड़े मार्च के रूप में बांग्लादेश वापस जाने की रणनीतिक योजना बना रही हैं। हसीना ने बेहद भावुक होते हुए कहा, मैं जानती हूं कि मेरे वहां पहुंचते ही वे मुझे तुरंत गिरफ्तार कर सकते हैं और मेरी जान भी ले सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद मुझे अपने वतन वापस जाना ही होगा। मेरी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर भारी दमन हो रहा है। अगर मुझे मौत भी आती है, तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी मातृभूमि की मिट्टी पर आए।बांग्लादेश सरकार की खुली चुनौती: दुनिया के सबसे बेहतरीन वकील ले आएं, न्याय होकर रहेगाशेख हसीना की इस बड़ी घोषणा का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री के सूचना और रणनीति मामलों के मुख्य सलाहकार जाहिद उर रहमान ने एक तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता और नई सरकार अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को हर हाल में बरकरार रखना चाहती है। रहमान ने तंज कसते हुए कहा, हम हसीना के वापस आने के फैसले का स्वागत करते हैं क्योंकि इससे हमें न्याय सुनिश्चित करने में आसानी होगी। वे अपनी रक्षा के लिए दुनिया के सबसे बड़े और बेहतरीन वकीलों को क्यों न बुला लें, लेकिन देश के कानून और पीड़ित परिवारों की इच्छा के अनुसार उनकी सजा पर अमल होकर रहेगा।भारत का रणनीतिक रुख स्पष्ट: प्रत्यर्पण एक कानूनी प्रक्रिया, कानून के मुताबिक ही होगा फैसलाइस पूरे हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय विवाद के केंद्र में मौजूद भारत सरकार ने भी शेख हसीना की वापसी की खबरों के बीच अपना आधिकारिक पक्ष दोहराया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, शेख हसीना के मामले पर भारत की नीति और रुख में शुरुआत से ही कोई बदलाव नहीं आया है। किसी भी व्यक्ति का प्रत्यर्पण पूरी तरह से एक द्विपक्षीय कानूनी विषय होता है। इस मामले में भी जो भी कदम उठाए जाएंगे, वे स्थापित अंतरराष्ट्रीय कानूनों और दोनों देशों के बीच हुए विधिक समझौतों के दायरे में रहकर ही तय किए जाएंगे। भारत के इस संतुलित बयान के बाद अब दिसंबर में होने वाले इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजरें टिक गई हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jul 2026 4:39 pm

अमेरिका भेजने के नाम पर करोड़ों का खेल! नेपाल के पूर्व डिप्टी PM को मिली 4 साल की जेल

पड़ोसी देश नेपाल से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनीतिक खबर सामने आ रही है। नेपाली नागरिकों को अवैध तरीके से अमेरिका भेजने के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस बड़े घोटाले में काठमांडू जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री और ऊर्जा मंत्री टोप बहादुर रायमाझी को 4 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने साफ किया कि इस संगठित धोखाधड़ी ने नेपाल की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय छवि को गहरी ठेस पहुंचाई है।नेपाली नागरिकों को फर्जी भूटानी शरणार्थी बनाकर रच रहे थे साजिशइस पूरे मामले की तफ्तीश में जो सच सामने आया है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। दरअसल, यह पूरा रैकेट नेपाली नागरिकों से मोटी रकम वसूल कर उन्हें अमेरिका भेजने का झांसा देता था। इसके लिए आरोपियों ने बकायदा सरकारी सांठगांठ से फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन जाली कागजातों के जरिए मूल नेपाली नागरिकों को कागजों पर 'भूटानी शरणार्थी' (Bhutanese Refugees) घोषित कर दिया जाता था, ताकि वे अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे तीसरे देश के पुनर्वास कार्यक्रम का फायदा उठाकर आसानी से वाशिंगटन पहुंच सकें।पूर्व गृहमंत्री समेत 15 से ज्यादा रसूखदार दोषी करारकाठमांडू जिला अदालत के न्यायाधीश तेज बहादुर खड़का की एकल पीठ ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया। पूर्व डिप्टी पीएम टोप बहादुर रायमाझी के अलावा देश के पूर्व गृहमंत्री और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाल कृष्ण खांड को भी इस साजिश में मददगार होने का दोषी पाया गया है और उन्हें 2 साल जेल की सजा दी गई है। अदालत ने इस पूरे नेटवर्क में शामिल पूर्व गृह सचिव टेक नारायण पांडे और गृहमंत्री के सुरक्षा सलाहकार सहित कुल 15 से ज्यादा आरोपियों को धोखाधड़ी, राज्य के खिलाफ अपराध और संगठित अपराध की विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।कैसे हुआ नेपाल के इस सबसे बड़े 'मानव तस्करी' घोटाले का भंडाफोड़?इस महाघोटाले की शुरुआत साल 2023 में तब हुई, जब सैकड़ों पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि अमेरिका भेजने के नाम पर उनसे लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठ लिए गए लेकिन उन्हें विदेश नहीं भेजा गया। पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, सरकारी तंत्र में बैठे बड़े-बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के नाम सामने आते गए, जिसके बाद पूर्व डिप्टी पीएम रायमाझी कई दिनों तक फरार भी रहे थे। रक्षा और कानून विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया की राजनीति में किसी पूर्व प्रधानमंत्री या उप प्रधानमंत्री स्तर के नेता को मानव तस्करी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामले में जेल होना एक नजीर पेश करेगा और इससे नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूती मिलेगी

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jul 2026 12:50 pm

जिस रूस से भारत खरीदता था सस्ता कच्चा तेल, अब वही मांग रहा पेट्रोल! जानिए कैसे पलटी बाजी

वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से एक बेहद हैरान करने वाली और भू-राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच जो रूस भारत को रिकॉर्ड तोड़ मात्रा में बेहद सस्ता कच्चा तेल (Crude Oil) सप्लाई कर रहा था, अब उसी रूस को अपनी घरेलू ईंधन की मांग पूरी करने के लिए भारत से रिफाइंड पेट्रोल की मदद मांगनी पड़ रही है। यह वैश्विक व्यापार के इतिहास में एक ऐसा बड़ा उलटफेर है, जिसने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कुछ ही समय में यह पूरी बाजी कैसे पलट गई।कच्चे तेल के बादशाह को क्यों पड़ी रिफाइंड पेट्रोल की जरूरत?दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक होने के बावजूद रूस को यह कदम अपनी रिफाइनरी क्षमता में आई भारी गिरावट के कारण उठाना पड़ा है। दरअसल, यूक्रेन के साथ जारी लंबे संघर्ष के बीच रूसी तेल रिफाइनरियों (Refineries) पर हुए लगातार ड्रोन हमलों ने उसके घरेलू बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा, पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस को अपनी रिफाइनरियों की मरम्मत के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरणों और स्पेयर पार्ट्स की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते रूस कच्चे तेल का उत्पादन तो कर पा रहा है, लेकिन उसे पेट्रोल और डीजल जैसे तैयार ईंधन में बदलने की उसकी क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे उसके घरेलू बाजार में ईंधन संकट गहराने लगा है।कैसे भारत बना दुनिया का 'ग्लोबल रिफाइनिंग हब'?एक तरफ जहां रूस की रिफाइनरियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत ने इस पूरे परिदृश्य में खुद को एक ग्लोबल रिफाइनिंग पावरहाउस के रूप में स्थापित कर लिया है। भारत अपनी विशाल और आधुनिक रिफाइनरियों (जैसे जामनगर रिफाइनरी) की बदौलत भारी मात्रा में कच्चे तेल को बेहद कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले पेट्रोल और डीजल में प्रोसेस करने की क्षमता रखता है। भारत ने पिछले समय में रूस से भारी मात्रा में डिस्काउंटेड (सस्ता) क्रूड ऑयल खरीदा और उसे रिफाइंड करके यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में बड़े मुनाफे के साथ बेचा है। अब स्थिति यह हो गई है कि रूस खुद अपने ही बेचे गए तेल के रिफाइंड वर्जन को भारत से वापस खरीदने की स्थिति में आ गया है।दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों पर क्या होगा असर?यह नया व्यापारिक मोड़ भारत और रूस के बीच के आर्थिक समीकरणों को एक नया आयाम देने जा रहा है। भारत के लिए यह अवसर न केवल अपने रिफाइंड पेट्रोलियम निर्यात (Petroleum Export) को बढ़ाने का एक बड़ा जरिया बनेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और क्षमता का लोहा भी मनवाएगा। रूस के लिए भारत से पेट्रोल की यह मांग उसके घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने और आम जनता के बीच ईंधन की किल्लत को रोकने का एक त्वरित समाधान है। इस रणनीतिक उलटफेर ने साबित कर दिया है कि आधुनिक जियोपॉलिटिक्स में व्यापारिक समीकरण कितनी तेजी से बदल सकते हैं, जहां कल का सप्लायर आज खुद खरीदार की कतार में खड़ा नजर आ रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jul 2026 12:48 pm

300 साल की मेहनत पर पानी: यूक्रेन ने कैसे ब्लॉक किया रूस का 'होर्मुज'? चक्रव्यूह में फंसे पुतिन

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। यूक्रेन ने बेहद आक्रामक और रणनीतिक कदम उठाते हुए रूस के सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन माने जाने वाले समुद्री मार्ग को पूरी तरह से ठप कर दिया है। इतिहासकार और सैन्य विशेषज्ञ इस मार्ग की तुलना मध्य पूर्व के रणनीतिक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से करते हैं, क्योंकि रूस का पूरा व्यापार और नौसैनिक ताकत इसी रास्ते पर टिकी हुई है। इस नाकेबंदी के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालत वैसी ही होती दिख रही है, जैसी कभी भारी राजनीतिक और कानूनी घेराबंदी के दौरान डोनाल्ड ट्रंप की हुई थी।लाखों मजदूरों का पसीना और तीन सदियों का गौरव दांव परजिस समुद्री गलियारे और तटीय बुनियादी ढांचे को यूक्रेन ने निशाना बनाया है, उसका इतिहास बेहद गौरवशाली और संघर्षपूर्ण रहा है। रूसी साम्राज्य के दौर से लेकर सोवियत संघ के काल तक, लगभग 300 वर्षों की कड़ी मेहनत और लाखों मजदूरों के खून-पसीने से इस पूरे नौसैनिक नेटवर्क और व्यापारिक मार्ग को तैयार किया गया था। यह रूस के लिए सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि उसकी वैश्विक महाशक्ति वाली छवि का प्रतीक रहा है। यूक्रेन ने आधुनिक तकनीक, सटीक ड्रोन हमलों और एंटी-शिप मिसाइलों के कॉम्बिनेशन से इस अभेद्य माने जाने वाले रूसी चक्रव्यूह को भेदकर इसकी कमर तोड़ दी है।आखिर रूस का 'होर्मुज' क्यों कहा जाता है इसे?वैश्विक भू-राजनीति में जो अहमियत खाड़ी देशों के लिए 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की है, ठीक वही अहमियत रूस के लिए इस ब्लॉक किए गए समुद्री क्षेत्र की है। रूस के कच्चे तेल का निर्यात, अनाज की सप्लाई और ब्लैक सी (काला सागर) में उसकी नौसैनिक टुकड़ियों का मूवमेंट इसी रास्ते के जरिए नियंत्रित होता था। यूक्रेन ने इस पूरे रूट की घेराबंदी करके रूस की आर्थिक नस पर हाथ रख दिया है। अब रूस के लिए अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालना एक बेहद पेचीदा और लगभग नामुमकिन काम बन चुका है।चक्रव्यूह में पुतिन: क्यों हो रही है ट्रंप के हालातों से तुलना?इस अप्रत्याशित नाकेबंदी ने मॉस्को के सत्ता गलियारों में खलबली मचा दी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समय खुद को एक ऐसे चौतरफा दबाव में पा रहे हैं, जो सीधे तौर पर उनकी राजनीतिक साख को चुनौती दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ना, घरेलू स्तर पर आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव और अब इस महत्वपूर्ण मार्ग का बंद होना; पुतिन की यह स्थिति ठीक वैसी ही नजर आ रही है जैसी अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों और उसके बाद की घेराबंदी के दौरान थी, जहां हर कदम पर एक नया संकट खड़ा था। यूक्रेन के इस दांव ने रूस को बातचीत की मेज पर आने या फिर बहुत बड़ा सैन्य जोखिम उठाने के दोहरे संकट में डाल दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jul 2026 12:46 pm

किंग चार्ल्स के डिनर में लहसुन क्यों है पूरी तरह बैन? ब्रिटिश शाही डाइनिंग टेबल के 7 अनोखे नियम

ब्रिटिश राजघराने की भव्यता और उनकी जीवनशैली हमेशा से दुनिया भर के लोगों के लिए कौतूहल का विषय रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बकिंघम पैलेस या ब्रिटेन के शाही महलों में जब किंग चार्ल्स III डिनर के लिए बैठते हैं, तो वहां की डाइनिंग टेबल पर आम घरों से बिल्कुल अलग और बेहद सख्त नियम लागू होते हैं। इन नियमों में सबसे ज्यादा चर्चा खाने में 'लहसुन' के बैन होने की होती है। आइए एक नजर डालते हैं ब्रिटिश शाही परिवार के उन 7 नियमों पर, जो उनके डिनर को बेहद खास और थोड़ा अजीब बनाते हैं।महक नहीं, प्रोटोकॉल है जरूरी: इसलिए बैन है लहसुन और प्याजलहसुन और प्याज लगभग हर भारतीय और वैश्विक व्यंजनों का मुख्य हिस्सा हैं, लेकिन बकिंघम पैलेस की रसोई में इन पर कड़ा प्रतिबंध है। शाही रसोइयों को निर्देश होते हैं कि वे किंग चार्ल्स या शाही परिवार के किसी भी सदस्य के भोजन में लहसुन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। दरअसल, इसके पीछे की वजह कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि पूरी तरह से शिष्टाचार (Etiquette) है। शाही परिवार को हर दिन दुनिया भर के राजनेताओं, वीआईपी और आम लोगों से मिलना-जुलना होता है। ऐसे में मुंह से लहसुन की तेज गंध या दुर्गंध न आए, इसलिए क्वीन एलिजाबेथ के समय से चला आ रहा यह नियम किंग चार्ल्स ने भी जारी रखा है।राजा की प्लेट खाली, तो आपका डिनर भी खत्मशाही टेबल पर बैठकर आप आराम से देर तक खाना नहीं खा सकते। नियम के अनुसार, डिनर के दौरान मेहमानों को अपनी नजरें किंग चार्ल्स पर रखनी होती हैं। जैसे ही किंग चार्ल्स अपना चाकू-छुरी (कटलरी) प्लेट पर रखकर खाना समाप्त करने का संकेत देते हैं, टेबल पर मौजूद हर एक मेहमान को तुरंत खाना बंद करना पड़ता है। भले ही आपकी प्लेट में आधा खाना बचा हो या आपका पसंदीदा स्टेक रखा हो, किंग के रुकते ही आपका डिनर भी समाप्त मान लिया जाता है।फूड प्वाइजनिंग से बचने के लिए सी-फूड और कच्चे मांस पर रोकब्रिटिश रॉयल फैमिली जब भी किसी आधिकारिक दौरे, यात्रा या सार्वजनिक कार्यक्रमों में होती है, तो उनके मेन्यू से शेलफिश (जैसे केकड़ा, झींगा, ऑयस्टर) और कच्चा या कम पका हुआ मांस (रेयर मीट) पूरी तरह हटा दिया जाता है। शाही डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन खाद्य पदार्थों से फूड प्वाइजनिंग (भोजन विषाक्तता) होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। व्यस्त शाही शेड्यूल में किसी भी तरह की स्वास्थ्य खराबी से बचने के लिए इस एहतियाती नियम का सख्ती से पालन किया जाता है。खाने में नैतिकता: फॉय ग्रा (Foie Gras) पर किंग चार्ल्स का कड़ा प्रतिबंधकिंग चार्ल्स III पर्यावरण और जीव-जंतुओं के कल्याण को लेकर काफी संवेदनशील माने जाते हैं। यही वजह है कि उन्होंने राजा बनने से पहले ही शाही रसोइयों को फ्रांसीसी व्यंजन 'फॉय ग्रा' खरीदने और परोसने से साफ मना कर दिया था। फॉय ग्रा को बत्तख या बत्तख प्रजाति के जीवों को जबरन अनाज खिलाकर उनके लीवर को बड़ा करके तैयार किया जाता है, जिसे किंग चार्ल्स क्रूर और अनैतिक मानते हैं।फोर्क (कांटे) से खाना उठाने का अजीब और उल्टा तरीकाशाही परिवार में कांटेदार चम्मच (Fork) से खाना खाने का तरीका भी काफी अनोखा है। आम तौर पर लोग कांटे से भोजन को चुभोकर या सीधे तौर पर उठाते हैं。 लेकिन शाही नियमों के मुताबिक, कांटे को हमेशा उल्टा (तगड़ी तरफ नीचे की ओर) पकड़ना होता है। चाकू की मदद से खाने को कांटे के पिछले हिस्से (Rounded Side) पर धीरे से सरकाया जाता है और फिर उसे बेहद सावधानी से बिना चुभाए मुंह तक ले जाया जाता है।बातचीत का सख्त नियम: सिर्फ अगल-बगल वाले से ही बातशाही डिनर के दौरान कोई भी व्यक्ति टेबल के दूसरी तरफ बैठे मेहमान या राजा से सीधे चिल्लाकर बात नहीं कर सकता。 यहां बैठने की व्यवस्था (Seating Arrangement) बेहद सोच-समझकर तय की जाती है। नियम के तहत, डिनर के पहले हिस्से में राजा अपनी दाईं ओर बैठे मुख्य अतिथि से बात करते हैं और फिर दूसरे हिस्से में बाईं ओर मुड़ते हैं। बाकी मेहमानों को भी केवल अपने ठीक दाएं या बाएं बैठे व्यक्ति से ही धीमी और शालीन आवाज में बात करने की अनुमति होती है।नैपकिन को मोड़ने और बाथरूम जाने की घोषणा न करने का शिष्टाचारडिनर टेबल पर यदि आपको बाथरूम जाना है, तो आप कभी भी इसकी घोषणा सबके सामने नहीं कर सकते। आपको बस शालीनता से 'एक्सक्यूज मी' कहकर उठना होता है। इसके अलावा, उपयोग किए गए नैपकिन को हमेशा इस तरह से फोल्ड करके अपनी गोदी (Lap) में रखना होता है ताकि उसका गंदा हिस्सा किसी को दिखाई न दे। जब तक भोजन पूरी तरह समाप्त न हो जाए, नैपकिन को वापस टेबल पर नहीं रखा जाता

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jul 2026 12:45 pm

पीओके में बढ़ा तनाव: सख्ती के बीच JAAC नेतृत्व पर खतरे की आशंका, मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण विरोध से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रशासनिक कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

देशबन्धु 16 Jul 2026 10:08 am

ट्रंप ने दी नई धमकी-रूस से तेल खरीदा तो 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे

अमेरिकी सांसदों ने ऐसा विधेयक पेश करने का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा है कि इसे लागू करने का यही उचित समय है।

देशबन्धु 16 Jul 2026 10:06 am

ट्रंप का दबाव: नेतन्याहू से सीरिया-लेबनान से सेना हटाने की मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीरिया और दक्षिणी लेबनान से इजरायली सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का बार-बार आग्रह कर रहे है। इस आशय की रिपोर्ट अमेरिकी एवं इजरायली अधिकारियों के हवाले से 'एक्सियोस' ने दी है

देशबन्धु 16 Jul 2026 7:50 am

अमेरिका‑ईरान तनाव: पांचवे दिन भी हमले जारी, कई शहरों में धमाके

खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई को पांचवे दिन भी जारी रखा और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक खाली तेल टैंकर को निशाना बनाया

देशबन्धु 16 Jul 2026 7:08 am

ब्लैकबोर्ड-पत्नी की साड़ी-पेटीकोट धोता हूं, झाडू-पोछा करता हूं:दोस्त कहते हैं- ये मर्द नहीं, हाउस हसबैंड बनने से भाइयों की शादी नहीं हो रही

भास्कर की वीकली सीरीज ब्लैकबोर्ड में कहानी ऐसे मर्द की जो पैसे कमाने बाहर नहीं जाता। घर पर रहकर झाडू-पोछा करता है। बरतन धोता है। खाना बनाता है। वो हाउस हसबैंड है। ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां हाउस वाइफ होती हैं। यूं तो वो अपनी जिंदगी में खुश हैं, लेकिन उसे हाउस हसबैंड बनने की कीमत चुकानी पड़ रही है। ये उसकी जिंदगी का स्याह पहलू बन गया है, इसे जानने के लिए मैं नीरज झा पहुंचा हूं ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर… दोपहर के करीब 2 बजे। एक फ्लैट के किचन में एक 35-36 साल का शख्स बर्तन धो रहा है। कंधे पर एक तौलिया है। सिंक बर्तनों से भरा है। घर में कोई दूसरा नजर नहीं आ रहा। मुझे देखते ही जल्दी-जल्दी हाथ धोने लगे। मैंने पूछा- आप ही अमित दुबे हैं? वो सिर हिलाते हुए बोले- 'हां मैं ही हूं।' मैंने धीरे से पूछा- ‘घर पर कोई नहीं है?’ बेटी सो रही है। पत्नी दूसरे कमरे में है, आज बैंक की छुट्टी है न…। मैं बर्तन धोकर आपके लिए चाय-पानी लाता हूं। मेरे मना करने पर हंसते हुए बोले- ‘अरे! संकोच मत करिए। मेरे यहां कोई भी आता है, तो चाय-नाश्ता मैं ही बनाता हूं। जब कोई बाहरी आता है तो पत्नी ये सब करने के लिए मना भी करती है। कहती है- मर्द को झाड़ू-पोंछा, बर्तन, खाना, कपड़े धोने जैसे काम करते हुए कोई देखेगा तो मुझे ताने देगा।’ दरअसल, मैं हाउस हसबैंड या मेल होममेकर हूं। 10 साल पहले एक कंपनी में इंजीनियर था, फिर नौकरी छोड़कर घर संभालने लगा। पत्नी बैंक में नौकरी करती है। कहते-कहते अमित के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। वो कुछ पल चुप रहे, फिर वहां से उठकर किचन में बर्तन धोने चले गए। बर्तन धोने के बाद तौलिए से हाथ पोंछते हुए वो बोले- ‘ये टी-शर्ट, पैंट ठीक तो लग रहा है न! क्या करें, दिनभर घर का काम करते-करते कपड़े गंदे हो जाते हैं।’ मेरे हामी भरने पर वो कैमरे के सामने आकर बैठ गए। थोड़ी देर रुककर बोले- ‘2016 की बात है। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर था। सैलरी 16 हजार थी। शादी को 4 महीने हुए थे। अचानक पत्नी की तबीयत बहुत खराब हो गई। घर का कोई काम नहीं कर पा रही थी। ठीक से सांस नहीं ले पाती थी। लगता था, चार कदम चलेगी, तो चक्कर खाकर गिर जाएगी। उसे नौकरी पर जाने में भी दिक्कत होने लगी। डॉक्टर को दिखाया, तो पता चला फेफड़े में पानी भर गया है। डॉक्टर का कहना था कि प्रोसीजर करके इसे निकालना पड़ेगा, वरना जान को खतरा हो सकता है। फौरन प्रोसीजर हुआ। करीब दो महीने तक वो बिस्तर पर रही। उसका सारा काम… वॉशरूम से लेकर नहाना-धोना, सब कुछ मैं ही करता था। वो सूखकर 25 किलो की रह गई थी। घर के काम की पूरी जिम्मेदारी मां पर आ गई थी। मां की भी उम्र हो गई थी, इतना काम नहीं कर पाती थीं। इसलिए सुबह-शाम का खाना मैं बनाने लगा। धीरे-धीरे पत्नी की तबीयत ठीक होने लगी। वो फिर नौकरी के साथ-साथ घर भी संभालने लगी। उस वक्त हम लोग बिहार के मोतिहारी में रहते थे। सुबह-सुबह पत्नी घर का काम करती, फिर बैंक चली जाती। शाम को देर से लौटती, फिर घर का काम करती। करीब 10-15 दिन ऐसे ही चला। फिर उसकी तबीयत खराब होने लगी। सांस लेने में तकलीफ होने लगी। मुझे लगा कि घर संभालने के लिए किसी एक को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ेगी। मैंने पत्नी से कहा- ‘या तो तुम नौकरी छोड़ दो, नहीं तो मैं छोड़ देता हूं। पत्नी बिना कुछ बोले दूसरे कमरे में चली गई। मैं कहीं न कहीं उसकी खामोशी को समझ रहा था।’ अचानक ये बातें कहते-कहते अमित रुक जाते हैं। दोहराकर पूछने पर कहते हैं, ‘हम दोनों की लव मैरिज है। 2011 में एक दोस्त के जरिए हम दोनों पंजाब के जालंधर में मिले थे। तब वो बैंक में जॉब की तैयारी कर रही थी और मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा करने वाला था। उसने बड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद ये नौकरी पाई थी। मैंने उसके पुराने दिनों को याद करते हुए सोचा- ‘अगर मैं नौकरी करता रहा, तो इसे अपने करिअर को छोड़ना पड़ेगा। क्यों न, मैं ही अपनी नौकरी छोड़कर हाउस वाइफ की तरह ‘हाउस हसबैंड’ बन जाऊं।’ मैं उठकर पत्नी के पास गया और बोला- ‘तुम परेशान मत हो। मैं घर देखूंगा, तुम नौकरी करो।’ वो थोड़ी देर तक मेरी तरफ देखती रही, फिर बोली- ‘घरवाले क्या कहेंगे कि शादी होते ही बेटा नौकरी छोड़कर चूल्हा-चौका करने लगा। बीवी का गुलाम बन गया। कितना खराब लगेगा। मैं कैसे जी पाऊंगी। बात-बात पर लोग मुझे ताने देंगे।’ मैंने उसे समझाया कि- हमारा रिश्ता और घर बचाने के लिए हम दोनों में से किसी एक को अपने करिअर की कुर्बानी देनी पड़ेगी। इस तरह हम परिवार नहीं संभाल पाएंगे। तुम्हारी सैलरी भी ठीक-ठाक है। मैं अभी घर संभालता हूं, तुम जॉब देखो।’ पत्नी बोली- ‘जैसा ठीक लगे करिए।’ मैं कमरे से उठकर आंगन में चला गया। बस ये सोच रहा था कि घरवालों को कैसे बताऊंगा। अगले दिन की बात है। रात के करीब 10 बज रहे थे। मैंने मां-पापा को बुलाकर ये बातें बताई। उन्होंने सिर्फ इतना कहा- ‘तुम लोग समझदार हो। जो ठीक लगता है, करो।’ ‘अगली सुबह ऑफिस जाकर मैंने रिजाइन कर दिया। उसी दिन से मैं इंजीनियर से हाउस हसबैंड बन गया।’ अमित अभी बात कर ही रहे थे, तभी उनकी पत्नी प्रीति लता पांडे पास आकर बैठ गईं। अमित बोले- ‘औरों का तो छोड़िए, प्रीति के घरवालों ने ही सबसे पहले विरोध करना शुरू किया था। कहने लगे- शादी से पहले तो लड़का इंजीनियर था। अच्छी-खासी नौकरी थी। अब घर के काम करेगा।' एक दिन प्रीति की मां का फोन आया। वो कहने लगीं- 'तुम दामाद से औरतों वाला काम करवाओगी, चूल्हा-चौका करवाओगी। तुम्हें अच्छा लगेगा।’ ये सब सुनते ही प्रीति परेशान हो गईं। मेरे पास आकर बोली- ‘पहले ही आपसे कहा था। लोग ताने देंगे।’ मैंने सिर्फ एक ही बात कही- ‘जो लोग ये बातें कह रहे हैं, क्या वो मेरे घर का काम कर देंगे। नहीं न, फिर क्यों उनकी बातों पर ध्यान देना।’ अमित आगे बताते हैं- ‘मुझे हाउस हसबैंड बने हुए 10 साल हो गए, फिर भी लोगों के ताने बंद नहीं हुए। शुरुआत में जब पूरा दिन घर पर रहना शुरू किया तो मन नहीं लगता था। काम से फुरसत होता तो सोचता दोस्तों से ही बात कर लेता हूं। वो भी ताने ही देते। एकबार की बात है। दोस्तों से कॉन्फ्रेंस कॉल पर बात हो रही थी। सब अपने-अपने काम के बारे में बता रहे थे। बातों ही बातों में कहने लगे- अमित के ही मजे हैं। बीवी की साड़ी-पेटीकोट धोता है और आराम से घर पर रहता है। दूसरा दोस्त बोला अरे काहे के मजे, ये भी भला कोई जिंदगी है। लाज-शर्म सब घोलकर पी गया। मर्दों की नाक कटवा दी। अब ये मर्द नहीं रहा। कौन ही बात करेगा इससे।' मैं सुबह उठकर झाडू-पोंछा करता। खाना बनाता। सभी के कपड़े धोकर छत पर सुखाने जाता, तो मोहल्ले वाले ऐसे देखते जैसे कोई अपराध कर दिया हो। एक दिन खाना बना रहा था, तभी एक दोस्त का फोन आया। ताना मारते हुए बोला- गलत समय पर तो फोन नहीं कर दिया। मैंने बोला- 'नहीं- नहीं, बस खाना ही बना रहा था।' वो बोला- ‘हां, शाम हो गई है। बीवी के आने का भी समय हो गया है। तुम्हारा सही है, बीवी की कमाई खाओ। घर में पड़े रहो। ऐश की जिंदगी है तुम्हारी। किसी बात की चिंता ही नहीं है।’ ये बातें मुझे इतना चुभ गई कि फिर मैंने फोन लगाना ही बंद कर दिया। अमित कुछ देर के लिए एकदम खामोश हो गए। कुछ देर बाद मैंने पूछा- आप क्या बनना चाहते थे? ये सवाल सुनते ही उनकी आंखें भर आईं। रूंधे गले से कहते हैं, ‘मैं गरीब परिवार से हूं। पापा पुजारी थे। वह गांव में पूजा-पाठ कराते थे। गांव के लोगों से जो अनाज में मिल जाता, उसी से चूल्हा जलता। फूस का छप्पर वाला घर था। सर्दी हो या गर्मी हर मौसम में दादी बाहर ही सोती थी। मैं उन्हें पक्का मकान तक नहीं दे सका। पहले तो डॉक्टर बनना चाहता था, लेकिन बाद में पता चला कि बहुत पैसा लगेगा। इतनी जमीन भी नहीं थी कि मां-बाप बेचकर पढ़ा दें। ऊपर से मैं घर का बड़ा बेटा था। दो भाई और हैं। सारा पैसा मेरी पढ़ाई में लग जाता तो बाकि दो भाइयों का क्या होता। पापा ने जमीन बेचकर मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन करवा दिया। पास होने के करीब 3 साल तक एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की, फिर जो हुआ आपके सामने है…। मां-बाप के बहुत अरमान थे कि मैं पढ़-लिखकर नौकरी करूंगा। मैंने उनसे वादा किया था कि अपनी कमाई से सबसे पहले घर बनाऊंगा, लेकिन नहीं बना पाया। आज भी इस बात का मलाल है कि मैं अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पाया।’ अमित उदास होकर कहते हैं, ‘मेरे हाउस हसबैंड होने की वजह से भाइयों की शादी नहीं हो रही। उनकी उम्र 30-32 साल हो चुकी है। जब रिश्ता आता है, तो सबसे पहले पूछते हैं- लड़के का भाई क्या करता है? जैसे ही पता चलता है कि हाउस हसबैंड हूं। वो मना कर देते हैं। मां भी कई बार फट पड़ती हैं। कहती हैं- किसी से भी कर्ज मांगने के लिए जाती हूं, तो वे भी कह देते हैं। तुम्हारा बेटा तो बीवी की कमाई खाता है। पढ़ा-लिखाकर निकम्मे की तरह घर बैठा रखा है। उससे चूल्हा-चौका करवाती हो। बीवी का साड़ी-पेटीकोट धोता है। तुम्हें कर्ज भी दूं, तो कहां चुकाओगी। ये सब सुनते-सुनते 10 साल बीत चुके हैं। अब तो मैं कहीं जाता भी नहीं हूं। पहले रिश्तेदारी में, फंक्शन में जाता भी था, लेकिन अब नहीं। एक बार एक दोस्त की शादी में गया था। वहां एक शख्स ने पूछा- आप क्या करते हैं? मैंने कहा- घर का काम करता हूं। घर पर रहता हूं। सुनते ही वह आदमी अच्छा-अच्छा कहते हुए मुंह बनाकर चला गया। मैंने कई बार देखा है- जैसे ही अपने बारे में बताता हूं, लोगों का नजरिया ही बदल जाता है।’ भुवनेश्वर में कब से हैं? ‘दो साल से। इससे पहले कोलकाता में थे। शहर में तो उतनी दिक्कत नहीं होती है, लेकिन गांव में लोगों ने जीना दूभर कर दिया था। पत्नी का जैसे-जैसे ट्रांसफर हुआ। हम शहर बदलते गए। तभी अमित की बेटी दित्या आ जाती है। वो इशारों में कहते हैं, ‘इससे कुछ नहीं पूछिएगा। 2019 में इसका जन्म हुआ था। तबसे आजतक इसका डायपर बदलने से लेकर हर काम मैंने ही किया है। इसको भी स्कूल में बच्चे परेशान करते हैं। पूछते हैं कि- तुम्हारे पापा क्या करते हैं? जब बताती है कि घर के काम करते हैं, तो कहते हैं- नौकरी के लिए नहीं जाते क्या? फिर ये घर आकर हमसे पूछने लगती है। हम कोई जवाब ही नहीं दे पाते। लोग कुछ भी कहें लेकिन मैं जब सोचता हूं, तो लगता है कि उस दिन ये डिसीजन नहीं लिया होता, तो परिवार खत्म हो चुका होता। पत्नी के लिए बीमारी के साथ-साथ जॉब और घर, दोनों संभालना मुश्किल था। आज भी वह बीमार रहती है। दवाई चलती ही रहती है। अमित की पत्नी प्रीति कहती हैं, ‘जैसा इन्होंने कहा, वैसा ही हमने किया। शुरुआत में घरवालों को समझाना आसान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे सब हो गया। मैंने हमेशा जॉब पर ही फोकस किया। इससे आगे कुछ नहीं बोल पाऊंगी। लोग क्या कहते हैं, ये बात इन्होंने कभी मुझतक पहुंचने ही नहीं दी।’ ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-दूसरे के बच्चे धोखे से मेरी कोख में डाल दिए:शक्ल-सूरत नहीं मिली तो DNA करवाया, आखिर कहां गए मेरे बच्चे आज ब्लैकबोर्ड में कहानी ऐसे पति-पत्नी की जिनकी दो बेटियां हैं। इन्होंने एकबार फिर मां-बाप बनने का फैसला किया, लेकिन उम्र आड़े आ गई। डॉक्टर ने सलाह दी- ‘IVF आजमाइए।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI में जा रही एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 16 Jul 2026 5:04 am

आज का एक्सप्लेनर:शेख हसीना की फांसी लगभग तय, फिर भी बांग्लादेश क्यों जाना चाहती हैं; क्या भारत का रुख बदल गया

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद वो भागकर भारत आ गई थीं। उन्हें बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेशी नेता कह रहे- वापस आने पर इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। क्या वाकई बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना, फांसी की आशंका के बीच इससे हासिल क्या होगा और भारत का रुख क्या है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने की बात कहां से उठी?जवाबः ये चर्चा शेख हसीना के ही बयानों से शुरू हुई। उन्होंने 29 जून को एक टीवी चैनल से ई-मेल इंटरव्यू में कहा… ‘मुझे मौत का डर नहीं है। मैंने 1975 में अपना पूरा परिवार खो दिया था। 21 अगस्त को ग्रेनेड से मेरी हत्या की कोशिश हुई। मैं हर साजिश से लड़ते हुए बांग्लादेश की अवाम के साथ खड़ी रही और वोट से 5 बार पीएम चुनी गई। मेरी पूरी जिंदगी बांग्लादेश की जनता, अवामी लीग (हसीना की पार्टी) और बांग्लादेश के हित से जुड़ी रही है। मैं हर रुकावट, हर साजिश को पार करते हुए इस साल अपने मुल्क लौटूंगी।' इसके बाद 10 जुलाई की सुबह हसीना ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को भी टेलीफोनिक इंटरव्यू में बताया कि दिसंबर 2026 तक भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और अपनी पार्टी के कुछ और निर्वासित नेताओं के साथ सरेंडर करेंगी। शेख हसीना ने कहा, 'हो सकता है कि लौटने पर वे मुझे गिरफ्तार कर लें, वे मुझे मार भी सकते हैं। फिर भी, मुझे जाना ही होगा। मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का भयानक तरह से दमन हो रहा है।’ हसीना की सरकार में गृहमंत्री रहे असदुज्जमान खान भी निर्वासित हैं, उनको भी मौत की सजा सुनाई गई है। उन्होंने कहा, ‘हम सब मिलकर अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे।’ सवाल-2: बांग्लादेश लौटने पर उनके साथ क्या-क्या हो सकता है?जवाबः शेख हसीना पर उनके खिलाफ आंदोलन करने वाले स्टूडेंट्स की हत्याओं के लिए पुलिस और सेना को आदेश देने का आरोप है। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल, यानी ICT-BD नवंबर २०२५ में शेख हसीना को मौत की सजा सुना चुकी है। ये पहली बार है, जब बांग्लादेश में किसी पूर्व पीएम को मौत की सजा सुनाई गई है। अब अगर शेख हसीना बांग्लादेश जाकर सरेंडर करती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार करके फांसी देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील भी की जा सकती है। हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बांग्लादेश में बैन है। इसलिए गिरफ्तारी पर किसी बड़े विरोध प्रदर्शन की भी उम्मीद कम है। पुलिस इसे कुचल सकती है। बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के स्ट्रैटेजिक एडवाइजर जाहिद-उर-रहमान ने कहा है, ‘देश की जनता चाहती है कि उनके जुर्म के लिए उन्हें मौत की सजा दी जाए। अगर वो वापस आईं, तो इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। जनता यही चाहती है। उन्हें दुनिया के सबसे अच्छे वकील लाने दो।' सवाल-3: जब फांसी की सजा हो चुकी, तो फिर लौटने का दांव क्यों खेल रहीं हसीना?जवाबः हसीना के बांग्लादेश जाने के जोखिम भरे दांव के पीछे सबसे बड़ी वजह है- बांग्लादेश की राजनीति में वापसी की कोशिश। हसीना की अवामी लीग बांग्लादेश में बैन है। बीती 23 जून को पार्टी ने 77वां स्थापना दिवस मनाया, तो दर्जनों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय, फिलहाल अमेरिका में रहते हैं, लेकिन वो बांग्लादेश के मुद्दों पर एक्टिव हैं। अगर हसीना उनके लिए राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहें, तो भी ये बिना बांग्लादेश लौटे मुमकिन नहीं है। अल-जजीरा के मुताबिक, हसीना ने विदेश से ही अवामी लीग को दोबारा मजबूत करने की कोशिशें शुरू कर दीं हैं। वो 100 से ज्यादा संसदीय इलाकों में अपनी पार्टी के लोगों के साथ ऑनलाइन बैठकें कर रही हैं। एक इंटरव्यू में हसीना ने खुद कहा, 'अवामी लीग पर कई हमले हुए, बैन लगाया गया, लेकिन जनता की ताकत से पार्टी दोबारा उठ खड़ी हुई। ऐसी कोशिशों में वो पहले भी फेल हुए हैं, दोबारा होंगे। बैन लगाकर पार्टी के ऑफिस और पॉलिटिकल एक्टिविटी बंद कर सकते हैं, लेकिन पार्टी वर्कर्स जुलूस निकाल रहे हैं। आम लोग इसमें शामिल हो रहे हैं। ये संकेत है कि अवामी लीग फिर से मजबूत होने लगी है।' हालांकि एक्सपर्ट्स एक छिपी वजह भी बताते हैं… ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर विवेक मिश्र कहते हैं, 'आखिर कब तक हसीना भारत में या किसी और देश में रहेंगी? भारत भले ये बात न कहे, लेकिन उसके लिए एक एक्स्ट्रा जिम्मेदारी जैसा है। एक निर्वासित नेता को रखना आसान नहीं होता। शेख हसीना के साथ अमेरिका का भी सपोर्ट नहीं है। बांग्लादेश और चीन बहुत नजदीक आ चुके हैं। ऐसे में भारत तारिक रहमान के दौर में बांग्लादेश से अच्छे रिश्ते चाहता है।' इसके संकेत भी मिलने लगे हैं। जब तारिक रहमान पीएम बने, तो पीएम मोदी बधाई देने वाली शुरुआती नेताओं में से एक थे। BNP ने पीएम मोदी की बधाई को हाईलाइट किया और अच्छे रिश्तों की उम्मीद जताई। अगले ही दिन BNP के सीनियर नेता सलाहुद्दीन अहमद ने भारत से शेख हसीना का प्रत्यर्पण करने की पार्टी की मांग दोहराई। तारिक ने भी कहा कि कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की जाएगी। सवाल-4: तो क्या भारत दबाव में हसीना को वापस भेज देगा?जवाबः दिसंबर 2024 से अब तक बांग्लादेश कई बार भारत को हसीना के प्रत्यर्पण का अनुरोध भेज चुका है। १४ जुलाई को भी भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है- पूर्व पीएम (शेख हसीना) के मामले में हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रत्यर्पण का मामला कानूनी मुद्दा है, उसी तरीके से निपटा जाएगा। इस बयान और भारत के रुख का मतलब समझिए… हालांकि संधि में 3 आर्टिकल हैं, जिनके जरिए भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है… आर्टिकल 6- अगर अपराध राजनीतिक हो: हसीना को कई हत्याओं के मामले में सजा हुई है। इसलिए ये आर्टिकल लागू होना मुश्किल है। आर्टिकल 7- आरोपी पर दूसरे देश में भी कोई मामला चल रहा हो: शेख हसीना के मामले में ऐसा नहीं है। आर्टिकल 8- अगर आरोप न्याय के लिए नहीं, बल्कि गलत तरीके से लगा हो: भारत कह सकता है कि हसीना के खिलाफ आरोप सही नहीं हैं और बांग्लादेश लौटने पर उनको राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ सकता है। 9 जुलाई को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि हसीना को लाने के लिए लगातार कोशिश जारी है। प्रत्यर्पण इंटरनेशनल नियमों और कानून के तहत होता है, इसलिए इसमें समय लगता है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत इस मामले में सहयोग कर रहा है, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया। विवेक मिश्र कहते हैं कि बांग्लादेश में जब तक अंतरिम सरकार थी, तब तक भारत ने इस मुद्दे को टाले रखा। अब बांग्लादेश में स्थायी सरकार है। इसलिए भारत को जवाब देना होगा। ये बात शेख हसीना भी समझती हैं।' इसीलिए हसीना ने खुद कहा है, ‘मुझे किसी के भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद अपने देश लौटूंगी।' सवाल-5: बांग्लादेश में हसीना के पास सजा से बचने का कोई रास्ता है? जवाब: बांग्लादेश में मौत की सजा से बचने के लिए हसीना के पास दो रास्ते हैं… ट्रिब्यूनल में ही सजा को चुनौती दें और केस जीत जाएं ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हसीना वहीं अपील कर सकती हैं। हालांकि अपील की समयसीमा 30 दिन की है, लेकिन मार्च 2026 में हसीना के वकील ट्रिब्यूनल को पत्र भेजकर सजा को अवैध बताकर इसे रद्द करने की मांग कर चुके हैं। ह्यूमन राइट्स वाच और एमनेस्टी इंटरनेशनल भी बिना सुनवाई के हुई इस सजा पर चिंता जता चुके हैं। इसलिए हो सकता है, हसीना को ट्रिब्यूनल सुनवाई में शामिल होने का मौका दे दे। हालांकि ट्रिब्यूनल से हसीना आरोपों से बरी हो जाएं, ये मुश्किल है। सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करके स्टे ले लें हसीना सरेंडर से पहले ही इस फैसले के खिलाफ बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट फैसले पर सुनवाई शुरू कर सकता है या फिर स्टे दे सकता है। हालांकि बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट पर सत्ता का प्रभाव रहता है। मसलन- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प के करीबी लिंडसे ग्राहम की यूक्रेन से लौटते ही मौत, क्या रूस ने जहर दिया; भारत पर 500% टैरिफ के लिए उकसाते थे राष्ट्रपति ट्रम्प के बेहद करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम 11 जुलाई को यूक्रेन दौरे से अमेरिका लौटे, ट्रम्प से फोन पर बात की और सोने चले गए। कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। ग्राहम ईरान और रूस के धुर विरोधी माने जाते थे। भारत को भी निशाने पर रखा और मौत से एक दिन पहले तक 500% टैरिफ लगाने की जिद करते रहे। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 15 Jul 2026 6:10 pm

पाकिस्तान: कराची के सरकारी अस्पताल फैला रहे एचआईवी, 6 मासूमों की मौत और 120 नए मामले आए सामने

पाकिस्तान के कराची स्थित दो सरकारी अस्पतालों ने कई मासूमों को जानलेवा एचआईवी-पॉजिटिव के जाल में फंसा दिया। स्वास्थ्य महकमे के ढुलमुल रवैये ने एक-एक करके 120 को संक्रमित कर दिया। अब तक 6 बच्चे जान गंवा चुके हैं और इसकी पुष्टि प्रांतीय सरकार ने की है।

देशबन्धु 15 Jul 2026 2:15 pm

सऊदी अरब के साथ गहरी हुई पाकिस्तान की दोस्ती! निशाने पर भारत नहीं, बल्कि इस तीसरे देश को घेरने की है पूरी तैयारी

दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने द्विपक्षीय और आर्थिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है, और विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह तीर बिल्कुल निशाने पर जाकर लगा है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के विपरीत, पाकिस्तान की इस नई और मजबूत होती 'सऊदी यारी' के निशाने पर उसका पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारत नहीं है। तो फिर आखिर वह कौन सा मुल्क है जिसे घेरने या कूटनीतिक रूप से पीछे धकेलने के लिए पाकिस्तान और सऊदी अरब इतने करीब आ रहे हैं?सऊदी संग क्यों मजबूत हो रही है पाकिस्तान की कूटनीतिक साझेदारी?हाल के दिनों में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच उच्च स्तरीय बैठकों और आर्थिक समझौतों का दौर बेहद तेज हो गया है। गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब हमेशा से एक बड़ा संकटमोचक रहा है। पाकिस्तान की वर्तमान सरकार ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और वहां के निवेशकों को रिझाने के लिए अपने विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के जरिए बड़े नीतिगत बदलाव किए हैं। पाकिस्तान का यह कूटनीतिक तीर सीधे निशाने पर लगा है, जिसके बाद सऊदी की ओर से पाकिस्तान के ऊर्जा, कृषि और खनन क्षेत्रों में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता साफ होता दिख रहा है।भारत नहीं, तो फिर निशाने पर कौन सा देश है?अक्सर माना जाता है कि पाकिस्तान का हर वैश्विक कदम भारत को ध्यान में रखकर उठाया जाता है, लेकिन इस बार कूटनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले हुए हैं। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के इस रणनीतिक कदम के निशाने पर भारत नहीं, बल्कि ईरान है। हाल के वर्षों में ईरान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के समानांतर ईरान के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पाकिस्तान सऊदी अरब को अपने पाले में और मजबूती से बनाए रखना चाहता है। सऊदी अरब और ईरान के बीच के ऐतिहासिक और कूटनीतिक प्रतिद्वंद्विता का लाभ उठाकर पाकिस्तान इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त को पक्का करना चाहता है।मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के समीकरणों पर क्या होगा असर?स्थानीय (Geographical) और वैश्विक दृष्टिकोण से देखें तो इस नए गठजोड़ का सीधा असर पूरे मध्य-पूर्व और दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा और व्यापारिक नीतियों पर पड़ेगा। सऊदी अरब जहां एक तरफ पाकिस्तान के जरिए मध्य-पूर्व के बाहर अपने प्रभाव और सुरक्षा संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह भारत के साथ भी अपने बड़े व्यापारिक और रणनीतिक हितों को प्रभावित नहीं होने देना चाहता। नई दिल्ली, मुंबई, इस्लामाबाद और रियाद के विदेश नीति एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक साख के कारण सऊदी अरब भारत के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को पूरी तरह स्वतंत्र और मजबूत बनाए रखेगा।आधुनिक एआई सर्च (AEO/GEO) और सुरक्षा विश्लेषकों का क्या है निष्कर्ष?जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की यह कोशिश पूरी तरह से अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को बचाने और क्षेत्रीय संतुलन में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की है। सऊदी अरब से मिलने वाली बड़ी आर्थिक मदद और तेल आपूर्ति के जरिए पाकिस्तान घरेलू स्तर पर जारी संकटों को टालने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि इस साझेदारी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पाकिस्तान सऊदी अरब द्वारा किए जाने वाले वादों और निवेश सुरक्षा को धरातल पर कितनी गंभीरता से लागू कर पाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 1:49 pm

डॉलर इंडेक्स 101 के नीचे फिसला; फेडरल रिजर्व का बड़ा एलान- राजनीतिक दबाव में नहीं बदलेगी ब्याज दरें

वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी खबर अमेरिका से आ रही है। अमेरिकी महंगाई (US Inflation Rate) के मोर्चे पर आम जनता और दुनिया भर के बाजारों को बड़ी राहत मिली है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कंज्यूमर इन्फ्लेशन में गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) कमजोर होकर 101 के स्तर के नीचे फिसल गया है। इस बीच, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में आकर मौद्रिक नीतियों (Monetary Policy) पर फैसला नहीं लेगा।महंगाई घटने से डॉलर हुआ कमजोर, 101 के नीचे आया डॉलर इंडेक्सलंबे समय से ऊंचे स्तरों पर बनी हुई अमेरिकी महंगाई में उम्मीद के मुताबिक नरमी आने से वैश्विक निवेशकों ने राहत की सांस ली है। महंगाई दर में आई इस कमी का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ा है और दुनिया की प्रमुख करेंसीज के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में कमजोरी देखी जा रही है। डॉलर इंडेक्स का 101 के स्तर से नीचे जाना यह दर्शाता है कि अब फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में कटौती (Fed Rate Cut) शुरू करने का दबाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा फायदा भारतीय रुपये समेत अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं को मिल सकता है।फेड चेयरमैन का बड़ा बयान: राजनीतिक दबाव से दूर रहेगा केंद्रीय बैंकइस बीच, अमेरिका में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनाव के माहौल के बीच फेडरल रिजर्व के चेयरमैन ने स्वायत्तता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। फेड की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने का निर्णय पूरी तरह से आर्थिक आंकड़ों (Economic Data) पर आधारित होगा, न कि किसी राजनीतिक दबाव या बाहरी एजेंडे पर। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने और महंगाई को 2% के लक्ष्य तक लाने के लिए स्वतंत्र होकर फैसले लेना बेहद जरूरी है।भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों पर क्या होगा इसका सीधा असर?स्थानीय (Geographical) और वैश्विक मार्केट सेंटीमेंट्स के लिहाज से यह खबर भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए एक बड़ा बूस्टर डोज साबित हो सकती है। डॉलर के कमजोर होने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आने से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजारों (जैसे एनएसई और बीएसई) में निवेश बढ़ा सकते हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कानपुर जैसे भारत के बड़े वित्तीय केंद्रों के विश्लेषकों का मानना है कि इससे आईटी (IT), बैंकिंग और कमोडिटी सेक्टर के शेयरों में जोरदार तेजी का माहौल बन सकता है।आधुनिक एआई सर्च (GEO/AEO) और विश्लेषकों का बड़ा अनुमानजेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी महंगाई में यह गिरावट सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए भी सकारात्मक संकेत है। डॉलर इंडेक्स में गिरावट आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा, जिससे भारतीय सर्राफा बाजारों में भी सोने के दाम में उछाल आ सकता है। बाजार के जानकार मान रहे हैं कि अगले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में ब्याज दरों में 25 से 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की उम्मीद अब काफी प्रबल हो गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 1:48 pm

पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल! अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की फिर शुरू की सख्त नाकेबंदी

पश्चिम एशिया (Middle East) से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रणनीतिक और भू-राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ते गंभीर गतिरोध के बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के प्रमुख बंदरगाहों (Ports) की सख्त सैन्य और आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। इस अचानक उठाए गए कदम से पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मच गया है।अमेरिका की कड़ी नाकेबंदी से थमे जहाजों के पहिये, सप्लाई चेन पर बड़ा संकटअमेरिकी रक्षा और विदेश मंत्रालय के रणनीतिक फैसलों के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के व्यापारिक और तेल निर्यात करने वाले प्रमुख बंदरगाहों की घेराबंदी तेज कर दी है। इस नाकेबंदी का सीधा मकसद ईरान के आर्थिक स्रोतों, विशेष रूप से कच्चे तेल के अवैध निर्यात पर पूरी तरह से नकेल कसना है। हालांकि, इस आक्रामक कदम के कारण ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में तनाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। इससे वैश्विक लॉजिस्टिक्स और वैश्विक सप्लाई चेन के पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडराने लगा है।कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लग सकती है आग, भारत पर भी होगा असरस्थानीय और वैश्विक (Geographical) ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो पश्चिम एशिया का यह संकट भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर सीधा असर डाल सकता है। ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की आपूर्ति में भारी कमी आने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक खिंचा, तो कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका सीधा नतीजा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत भारत के तमाम शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है।आधुनिक एआई सर्च (GEO/AEO) और रक्षा विशेषज्ञों का क्या है बड़ा दावा?जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका का यह कदम पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन को बदलने की एक बड़ी कोशिश है। ईरान ने भी अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में अपनी सैन्य मुस्तैदी बढ़ा दी है और किसी भी आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने की चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय देशों की नजरें भी इस गंभीर होते हालात पर टिकी हैं, क्योंकि यह संकट केवल दो देशों का न रहकर वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।शेयर बाजार और गोल्ड मार्केट में मचेगी भारी उथल-पुथलइस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय और वैश्विक शेयर बाजारों (Stock Market) पर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में बाजार में भारी बिकवाली और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, अनिश्चितता के इस माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने (Gold) की तरफ भाग सकते हैं, जिससे सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को फिलहाल बाजार में फूंक-फूंक कर कदम रखने और ग्लोबल अपडेट्स पर नजर रखने की सलाह दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 1:46 pm

भारत के लिए बहुत बड़ी राहत! रूस से तेल आयात पर अब 500% नहीं, बल्कि सिर्फ 100% लगेगा टैरिफ

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से देश के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात को लेकर पिछले कुछ समय से चल रही टैक्स और टैरिफ की चिंताओं पर अब पूरी तरह विराम लग गया है। भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर जो भारी-भरकम 500 फीसदी टैरिफ लगने की आशंकाएं और चर्चाएं बनी हुई थीं, सरकार और वैश्विक व्यापार नीति के नए समीकरणों के तहत उसे घटाकर अब मात्र 100 फीसदी कर दिया गया है। इस बड़े फैसले से देश के चालू खाता घाटे (CAD) को कम करने और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में बहुत बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।500% से सीधे 100% पर आया टैरिफ, भारतीय रिफाइनरियों ने ली राहत की सांसवैश्विक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत लगातार अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। तेल आयात पर लगने वाले टैरिफ को 500% से घटाकर 100% करने के इस फैसले से देश की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल रिफाइनिंग कंपनियों (जैसे IOCL, BPCL, HPCL और Reliance) को बहुत बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी। जानकारों का कहना है कि टैक्स के इस ऊंचे स्लैब में इतनी बड़ी कटौती होने से तेल आयात की लागत में भारी कमी आएगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधा बूस्ट मिलेगा।क्या आम जनता के लिए सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल के दाम?इस खबर के सामने आने के बाद देश के आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्थानीय बाजारों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होंगी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों के बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की लैंडिंग कॉस्ट (आयात लागत) कम होने से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का प्रॉफिट मार्जिन सुधरेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह स्थिर रहीं, तो आने वाले समय में आम जनता को पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों में कटौती का बड़ा तोहफा मिल सकता है।आधुनिक एआई सर्च (GEO/AEO) और विशेषज्ञों का क्या है आकलन?जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और कमोडिटी मार्केट के विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिहाज से यह फैसला बेहद रणनीतिक है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। रूस से मिलने वाले इस बड़े नीतिगत सपोर्ट के बाद भारत को पश्चिमी देशों के दबाव के बीच भी एक मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक बढ़त मिल गई है। इससे देश के राजकोषीय घाटे को संभालने में सरकार को बड़ी मदद मिलेगी।घरेलू शेयर बाजार और एनर्जी स्टॉक्स में आ सकती है तेजीइस सकारात्मक खबर का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) पर भी देखने को मिल सकता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी एनर्जी इंडेक्स और तेल व गैस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की भारी खरीदारी देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि लागत घटने से कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बेहद सकारात्मक असर पड़ेगा, जो लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए एक शानदार मौका साबित हो सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 1:45 pm

अमेरिकी सेना की इराक से पूरी वापसी का ऐलान, 23 साल बाद खत्म होगा सैन्य अभियान

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका को इराक में बड़ी संख्या में सैनिक रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा, तेल और कारोबार के क्षेत्र में भी मजबूत हो चुके हैं।

देशबन्धु 15 Jul 2026 10:20 am

ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी, बोले- बातचीत नहीं हुई तो बिजली संयंत्र और पुल होंगे अगले निशाने

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ कार्रवाई और तेज करेगा। उन्होंने कहा, हम लगातार दबाव बनाए रखेंगे। पहले सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई होगी, उसके बाद बिजली संयंत्र और फिर पुल भी निशाने पर आ सकते हैं। अगर ईरान बातचीत नहीं करता, तो उसके लिए हालात लगातार कठिन होते जाएंगे।

देशबन्धु 15 Jul 2026 9:11 am

भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन का पहला अंतरिक्ष मिशन, 8 महीने के मिशन पर गए हैं ISS

49 वर्षीय अनिल मेनन के लिए यह पहला अंतरिक्ष मिशन है। वह पेशे से चिकित्सक और एयरोस्पेस विशेषज्ञ हैं तथा नासा के अंतरिक्ष यात्री दल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वहीं प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना अपने दूसरे अंतरिक्ष अभियान पर निकले हैं।

देशबन्धु 15 Jul 2026 8:45 am

Haldiram's London Price: लंदन में हल्दीराम की पानी पुरी ₹830 और पाव भाजी ₹1,270 की; भारत से 7 गुना महंगे दाम देख चौंके लोग

भारत में हर आम और खास परिवार का पसंदीदा और सबसे भरोसेमंद स्नैक्स व फूड ब्रांड 'हल्दीराम' (Haldiram’s) अब सात समंदर पार ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी अपनी धमक जमा चुका है। लंदन के मशहूर 'लेस्टर स्क्वायर' (Leicester Square) में हल्दीराम का नया आउटलेट खुलते ही वहां भारतीय प्रवासियों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सोशल मीडिया पर इस नए स्टोर के बाहर लगी लंबी-लंबी लाइनों के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय आउटलेट की जिस बात ने इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह है इसके मेन्यू कार्ड में लिखी व्यंजनों की चौंकाने वाली कीमतें...।लंदन के इस आउटलेट में मिलने वाले पकवानों के दाम देश की राजधानी दिल्ली या भारत के अन्य शहरों के मुकाबले आसानी से लगभग सात गुना अधिक हैं।लंदन बनाम भारत: खाने की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतरभारत में जो स्ट्रीट फूड बेहद किफायती दामों पर मिल जाते हैं, उनके लिए लंदन में ग्राहकों की जेब पर तगड़ा असर पड़ रहा है। आइए देखते हैं दोनों देशों के दामों का सीधा अंतर:पानी पूरी (गोलगप्पा): भारत में जहां अमूमन एक प्लेट स्वादिष्ट पानी पूरी ₹75 में मिल जाती है, वहीं लंदन के हल्दीराम में इसके लिए ग्राहकों को 6.50 यानी करीब ₹830 चुकाने पड़ रहे हैं।पाव भाजी: भारत की सबसे लोकप्रिय बजट-फ्रेंडली डिश 'पाव भाजी' के लिए लंदन स्टोर में 9.90 यानी लगभग ₹1,270 ढीले करने पड़ रहे हैं।गार्लिक नान: तंदूर से निकलने वाली एक गार्लिक नान की कीमत वहां 5 यानी करीब ₹640 रखी गई है।विदेशी ग्राहकों के लिए छोटा मेन्यू और खास डिस्क्रिप्शनलंदन आउटलेट का मेन्यू कार्ड भारत की तरह बहुत विशाल और फैला हुआ नहीं है। विदेशी मेहमानों और स्थानीय स्वाद को ध्यान में रखते हुए यहां का मेन्यू काफी छोटा और चुनिंदा व्यंजनों वाला बनाया गया है। खास बात यह है कि मेन्यू में हर एक डिश के साथ उसका पूरा विवरण (Details/Description) दिया गया है, ताकि ब्रिटिश और अन्य विदेशी ग्राहकों को भारतीय व्यंजनों के स्वाद, तीखेपन और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों को बेहतर ढंग से समझने में आसानी हो।आखिर लंदन में इतनी महंगी क्यों हैं कीमतें?हल्दीराम के इस प्रीमियम रेट कार्ड के पीछे बिजनेस एक्सपर्ट्स और मार्केट रिसर्चर्स ने दो मुख्य कारण बताए हैं:प्रीमियम ब्रांडिंग रणनीति: भारत में हल्दीराम खुद को एक किफायती और मिडिल-क्लास फैमिली रेस्तरां के रूप में पेश करता है। इसके विपरीत, लंदन में कंपनी ने खुद को एक 'प्रीमियम इंडियन कैजुअल डाइनिंग ब्रांड' (Premium Indian Casual Dining Spot) के रूप में स्थापित करने की रणनीति अपनाई है।हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट: लंदन जैसे दुनिया के सबसे महंगे शहरों में से एक में रेस्तरां चलाने का परिचालन खर्च (जैसे प्राइम लोकेशन का भारी-भरकम किराया, स्टाफ की मोटी सैलरी) भारत से कहीं ज्यादा है। इसके अलावा, प्रामाणिक भारतीय स्वाद देने के लिए मसालों और विशेष सामग्रियों के आयात पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) और वहां के कड़े टैक्स नियम भी इस 7 गुना ज्यादा कीमत के लिए जिम्मेदार हैं।24 साल की रिया अग्रवाल की सोच से खुला लंदन आउटलेटलंदन स्थित इस भव्य रेस्तरां में एक साथ 110 लोगों के बैठने की क्षमता है। हल्दीराम के इस बड़े अंतरराष्ट्रीय विस्तार के पीछे अग्रवाल परिवार की 24 वर्षीय युवा एंटरप्रेन्योर रिया अग्रवाल का दिमाग और उनकी अहम भूमिका बताई जा रही है।रिया ने खुद करीब 11 सालों तक लंदन में रहकर अपनी उच्च शिक्षा पूरी की है। लंदन में रहने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि ब्रिटेन के लोगों में भारतीय भोजन (Indian Cuisine) के प्रति दीवानगी लगातार बढ़ रही है। रिया का मानना है कि सही स्ट्रेटेजी के साथ हल्दीराम को यूके (UK) के बाजार में भी एक घरेलू और जाना-माना नाम बनाया जा सकता है। इसी विजन के साथ कंपनी ने ब्रिटिश फूड मार्केट में यह कदम रखा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 8:17 am

Trump's major U-turn: रूसी तेल खरीद पर भारत पर 500% की जगह अब लगेगा सिर्फ 100% टैरिफ, अमेरिकी सीनेट ने दी बड़ी राहत

वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीति के गलियारों से इस समय की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सीनेटरों ने मंगलवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विवादित विधेयक का एक नया संशोधित संस्करण (Revised Version) पेश किया है। दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा समर्थित इस ऐतिहासिक विधेयक में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव करते हुए भारत, चीन और रूसी ऊर्जा पर निर्भर अन्य देशों पर लगाए जाने वाले 500 प्रतिशत के विनाशकारी आर्थिक टैरिफ (आयात शुल्क) के खतरे को बेहद कम कर दिया गया है। अमेरिकी प्रशासन और व्हाइट हाउस के इस अप्रत्याशित यू-टर्न से भारतीय व्यापारिक क्षेत्रों और निर्यातकों ने बड़ी राहत की सांस ली है।दबाव बनाने की रणनीति बरकरार: 500% से घटकर 100% हुआ दंडात्मक शुल्करिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के संयुक्त समर्थन वाले इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य अभी भी मास्को के वित्तीय स्रोतों को सुखाना ही है। इसके तहत क्रेमलिन के शीर्ष अधिकारियों पर कड़े व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर आर्थिक दबाव बनाना जारी रखा गया है ताकि वे रूस से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे समाप्त करें। हालांकि, कूटनीतिक तल्खी और वैश्विक व्यापार चेन के पूरी तरह ध्वस्त होने के डर से अमेरिकी नीति-निर्माताओं ने एकमुश्त 500 प्रतिशत शुल्क लगाने के मूल प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे ईंधन के शीर्ष पांच खरीदारों के लिए अधिकतम 100 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है।इन देशों को मिलेगी बड़ी राहत: शीर्ष खरीदारों की सूची में भारत-चीन शामिलसीनेट की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों और सहयोगियों के विश्लेषण के अनुसार, रूसी कच्चे तेल के शीर्ष पांच खरीदारों के रूप में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान की पहचान की गई है। वहीं, रूसी प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के शीर्ष खरीदारों में चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम का नाम शामिल है। नए विधेयक में किए गए इस ऐतिहासिक संशोधन के बाद भारत जैसे बड़े विकासशील बाजारों पर से अमेरिकी मंदी थोपने का सीधा खतरा टल गया है। यह 100 प्रतिशत का अधिकतम स्लैब उन देशों के लिए एक रणनीतिक बफर की तरह काम करेगा, जो अचानक रूसी तेल को छोड़ पाने में अपनी व्यावहारिक और घरेलू असमर्थता जाहिर कर चुके हैं।यूरोपीय देशों और जापान के लिए विशेष छूट का नया प्रावधानइस संशोधित कानून की एक और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें उन देशों के लिए एक विशेष कानूनी छूट (Sanction Waiver) का रास्ता साफ किया गया है जो अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से होने वाले कुल गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से भी कम हिस्सा खरीदते हैं। इसके साथ ही शर्त यह भी होगी कि वे देश वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को तलाशने के लिए ठोस कदम उठा रहे हों। इस नई रियायत के तहत जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम जैसे अमेरिका के प्रमुख रणनीतिक सहयोगियों को प्रतिबंधों के कड़े दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जा सकता है, जिससे इन देशों को अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और घरेलू उद्योगों को चलाने में बड़ी मदद मिलेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 8:07 am

US-Iran War Update: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एलान-'ईरान को कभी नहीं बनने देंगे परमाणु ताकत', होर्मुज हमले में 1 भारतीय नाविक की मौत से भारत सख्त!

पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा बारूदी टकराव अब एक बेहद संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय संकट में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और ईरान को लेकर कई बड़े और आक्रामक एलान किए हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि रणनीतिक रूप से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) ईरान को छोड़कर बाकी सभी देशों के व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा, जबकि ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। इन सबके बीच, होर्मुज स्ट्रेट में हुए एक ताजा हमले में एक भारतीय नागरिक (नाविक) की दर्दनाक मौत हो गई है, जिससे भारत सरकार का रुख भी बेहद कड़ा हो गया है।'ईरान का हिंसक दौर अब खत्म होगा'-परमाणु हथियार पर ट्रंप का संकल्पराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक समुदाय को भरोसा दिलाते हुए एक बड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा उठाए गए इन सख्त आर्थिक और सैन्य कदमों के बाद अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में ईरान का हिंसक, आक्रामक और अस्थिरता फैलाने वाला दौर हमेशा-केशा के लिए खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना की मुस्तैदी की वजह से ही वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) इस युद्ध के बावजूद रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है।20% सुरक्षा टैक्स पर पलटे ट्रंप, खाड़ी देशों के साथ करेंगे सीक्रेट डीलइस महातनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने उस विवादास्पद बयान पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कमर्शियल जहाजों पर 20 प्रतिशत का भारी सुरक्षा शुल्क थोपने का एलान किया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के शीर्ष नेताओं के साथ हुई अत्यंत सकारात्मक बातचीत के बाद मैंने 20% अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क (Reimbursement Fee) लगाने की योजना को रद्द कर दिया है। अब इसकी जगह विभिन्न खाड़ी देश अमेरिका के भीतर बहुत बड़े पैमाने पर नए व्यापार और निवेश समझौते (Investment Agreements) करेंगे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह निवेश उनके पुराने दौरों के समझौतों से अलग है या उसी का हिस्सा।होर्मुज में तेल टैंकरों पर हमला: 1 भारतीय की मौत, 10 घायलइस युद्ध की आंच अब भारतीय नागरिकों तक भी पहुंच गई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो बड़े कमर्शियल तेल टैंकरों—'एमटी अल बहिया' (MT Al Bahiyah) और 'एमटी मोम्बासा' (MT Mombasa) पर होर्मुज स्ट्रेट में भीषण हमला हुआ।भारतीयों की मौजूदगी: इन दोनों जहाजों पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे।हताहतों की संख्या: इस हमले की चपेट में आने से 1 भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।बढ़ता आंकड़ा: गौरतलब है कि इस साल 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से खाड़ी क्षेत्र में जारी इस जंग में अब तक कुल 14 भारतीय नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं।भारत सरकार का बड़ा एक्शन: ईरानी राजनयिक तलब, जताई कड़ी चिंताअपने नागरिकों पर हुए इस जानलेवा हमले को लेकर नई दिल्ली में भारत सरकार बेहद सख्त नजर आ रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार सुबह तुरंत एक्शन लेते हुए भारत में मौजूद ईरानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी (राजनयिक) को साउथ ब्लॉक तलब किया और इस हिंसक हमले के खिलाफ भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया।भारत ने वैश्विक मंच पर इन हमलों की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है। विदेश मंत्रालय ने मारे गए नाविक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता पहुंचाने की बात कही। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यूएई (UAE) में मौजूद भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर पल-पल की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। इसके साथ ही भारत ने दोनों देशों से हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत व कूटनीति (Diplomacy) के जरिए शांति बहाल करने की अपनी पुरानी अपील को फिर दोहराया।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:57 am

रूसी तेल खरीद विवाद में डोनाल्ड ट्रंप ने किया ऐतिहासिक प्रतिबंध विधेयक का समर्थन, हिल सकती है देश की अर्थव्यवस्था

भारत और अमेरिका के रणनीतिक व व्यापारिक संबंधों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मोड़ सामने आया है। वैश्विक तेल बाजार और कूटनीति में तहलका मचाते हुए व्हाइट हाउस ने एक ऐसे सख्त अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक का खुला समर्थन किया है, जिसके कानूनी रूप से लागू होने पर रूसी कच्चे तेल की लगातार खरीद को लेकर भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर 500 प्रतिशत तक का रिकॉर्ड-तोड़ टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस के आर्थिक राजस्व को पूरी तरह ठप करने के लिए इस कड़े दंडात्मक कानून के पक्ष में आ गए हैं।क्या है 'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट' और भारत क्यों है इसके मुख्य निशाने परअमेरिकी संसद में पेश किए गए इस विवादित और बेहद आक्रामक कानून को 'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट' (Sanctioning Russia Act) के नाम से जाना जा रहा है। इसे दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल द्वारा तैयार किया गया था। इस बिल का मूल उद्देश्य केवल रूस पर ही नहीं, बल्कि उन देशों पर भी तगड़ा आर्थिक दबाव बनाना है जो यूक्रेन युद्ध के बावजूद मास्को के ऊर्जा क्षेत्र के साथ बड़ा व्यापारिक लेनदेन कर रहे हैं। अमेरिकी सीनेट में दिए गए बयानों के मुताबिक, रूस के कुल तेल, गैस और पेट्रोलियम निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर भारत और चीन को जा रहा है, जिससे मास्को को भारी राजस्व मिल रहा है। अमेरिका का मानना है कि इस मांग पर पूरी तरह रोक लगाने से रूस आर्थिक रूप से लाचार हो जाएगा और यूक्रेन युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है।कानूनी ग्रे जोन में फंसा भारत: 17 जून को समाप्त हुई अमेरिकी छूटभारत के लिए यह भू-राजनीतिक संकट इसलिए और भी ज्यादा गहरा गया है, क्योंकि बीती 17 जून 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा दी गई वह अस्थायी विशेष छूट (Sanction Waiver) आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुकी है, जिसके तहत नई दिल्ली को बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध के डर के रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने की कानूनी इजाजत मिली हुई थी। इस छूट की मियाद खत्म होने के बाद से ही भारत अब एक जटिल अंतरराष्ट्रीय कानूनी ग्रे जोन में आ गया है। यदि यह नया कानून पास हो जाता है, तो यह अमेरिकी इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति को कांग्रेस द्वारा दिया गया अब तक का सबसे व्यापक और खतरनाक 'सेकेंडरी टैरिफ' (Secondary Tariff) लगाने का अधिकार सौंप देगा।भारतीय जीडीपी (GDP) और इन प्रमुख सेक्टर्स पर मंडराया मंदी का खतराअंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्रियों और वैश्विक व्यापार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने भारत पर 500 प्रतिशत का यह दंडात्मक टैरिफ लागू कर दिया, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा वित्तीय झटका लगेगा। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इससे भारत की कुल जीडीपी में 0.5 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। अमेरिका को निर्यात करने वाले भारत के सबसे मजबूत सेक्टर्स जैसे फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग), टेक्सटाइल (कपड़ा निर्यात) और आईटी (IT) सर्विसेज पर इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय लगातार अपने पुराने और स्वतंत्र रुख पर कायम हैं कि देश का ऊर्जा आयात पूरी तरह से उसकी राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा और घरेलू जरूरतों से प्रेरित है, जिसका किसी भी अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।रिपब्लिकन पार्टी में ही अंतर्विरोध: वैश्विक व्यापार ठप होने की चेतावनीरिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अचानक निधन के बाद इस विधेयक को अमेरिकी संसद में एक नई भावनात्मक और राजनीतिक गति मिली है, जहां कई सीनेटर इसे उनके काम के सम्मान के रूप में पारित कराने पर अड़े हैं। हालांकि, इस विधेयक को लेकर खुद अमेरिकी राजनेताओं में गहरे मतभेद उभर आए हैं। सीनेट माइनॉरिटी व्हिप डिक डर्बिन सहित कई डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल अधिकारियों के बयान के बजाय खुद सार्वजनिक रूप से इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। वहीं दूसरी ओर, खुद ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर रैंड पॉल ने इस कठोर कानून का पुरजोर विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि भारत और चीन जैसे दुनिया के सबसे बड़े बाजारों पर ऐसे दंडात्मक आर्थिक प्रतिबंध लगाने से संपूर्ण वैश्विक व्यापार चेन ध्वस्त हो जाएगी और दुनिया में एक व्यापक आर्थिक मंदी और अस्थिरता फैल सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:54 am

अमेरिका ने होर्मुज में फिर की सख्त नौसैनिक नाकाबंदी, ईरान के अहवाज और केश्म द्वीप पर भीषण बमबारी

तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) का भू-राजनीतिक परिदृश्य एक बार फिर बारूद के ढेर पर आकर खड़ा हो गया है। अमेरिकी सेना ने आधिकारिक घोषणा करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में ईरान के प्रमुख बंदरगाहों की सख्त नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़े इस अप्रत्याशित सैन्य तनाव के कारण दोनों देशों के बीच हुआ नाजुक अंतरिम युद्धविराम समझौता पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में एक पूर्ण विनाशकारी युद्ध छिड़ने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।अहवाज, बुशहर और केश्म द्वीप पर विनाशकारी हवाई हमलेईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के अनुसार, अमेरिका की नई नाकाबंदी की घोषणा के तुरंत बाद ईरान के रणनीतिक रूप से संवेदनशील दक्षिणी शहर अहवाज, तटीय शहर बुशहर और केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी सैन्य सेंट्रल कमांड (US CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी तटीय प्रणालियों, मिसाइल ठिकानों और ड्रोन लॉन्च पैड्स को नष्ट करने के लिए हवाई हमलों की एक और विनाशकारी लहर शुरू की गई है। जवाब में ईरान ने भी बहरीन, कुवैत और जॉर्डन के पास तीन वाणिज्यिक टैंकरों को निशाना बनाया, जिसमें यूएई (UAE) से जुड़े दो टैंकरों पर हुए हमले में दो नाविकों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए हैं।ट्रंप ने बदला फैसला: जहाजों पर 20% टोल लगाने की योजना वापस लीइस बड़े सैन्य घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक यू-टर्न लिया है। इससे पहले ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क (टोल) लगाने की घोषणा की थी। हालांकि, ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि खाड़ी के मित्र देशों, राजाओं और अमीरों के विशेष अनुरोध के बाद उन्होंने इस योजना को वापस ले लिया है। खाड़ी देशों ने टोल के बदले अमेरिका में अरबों डॉलर के प्रत्यक्ष निवेश का वैकल्पिक प्रस्ताव दिया है। ट्रंप के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक उछला ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम $87 प्रति बैरल से गिरकर तत्काल $78 पर आ गया है।होर्मुज पर संप्रभुता की जंग और संकट में वैश्विक शांति वार्ताइस पूरे युद्ध का मुख्य केंद्र बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करना है, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरिबाबादी ने आरोप लगाया है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर तेहरान को उसकी वैध संप्रभुता का प्रयोग करने से रोक रहा है। वहीं, कतर के विदेश मंत्रालय ने जॉर्डन और बहरीन पर हुए ईरानी हमलों को संप्रभुता का घोर उल्लंघन बताते हुए कूटनीति की अपील की है। वर्तमान में पाकिस्तान के नेतृत्व वाली एक मध्यस्थता टीम युद्धविराम को बचाने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है, क्योंकि यदि अमेरिका-ईरान युद्ध भड़कता है, तो रोम में चल रही इजरायल-लेबनान शांति वार्ता और हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण की पूरी रूपरेखा भी हमेशा के लिए मलबे में तब्दील हो जाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:52 am

ट्रंप की ईरान को फाइनल वॉर्निंग: बोले- 'अगर समझौता नहीं किया, तो अगले हफ्ते से तबाह कर देंगे सारे पावर प्लांट और पुल'

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच वैश्विक राजनीति से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और कड़ा करते हुए एक बेहद तीखी और खुली सैन्य चेतावनी जारी की है। फॉक्स न्यूज (Fox News) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान तुरंत बातचीत की मेज पर आकर अमेरिका के साथ समझौता नहीं करता है, तो अगले सप्ताह से अमेरिकी वायुसेना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम उसके सामरिक बुनियादी ढांचों, प्रमुख बिजलीघरों (Power Plants) और बड़े पुलों को निशाना बनाकर पूरी तरह से जमींदोज कर देंगे।'अगला हफ्ता ईरान के लिए होगा बेहद खराब' – फॉक्स न्यूज पर गरजे ट्रंपअमेरिकी समाचार चैनल को दिए अपने साक्षात्कार में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अगला हफ्ता ईरान के लिए इतिहास का सबसे खराब हफ्ता साबित होने वाला है। ट्रंप ने खुली धमकी देते हुए कहा कि हम उनके सभी बिजलीघरों को पूरी तरह ठप कर देंगे और उनके सारे प्रमुख परिवहन पुलों को उड़ा देंगे। राष्ट्रपति ने आगे जोड़ा कि अमेरिका इस तबाही को केवल एक ही शर्त पर रोक सकता है, यदि ईरान बिना किसी शर्त के बातचीत के लिए आगे आए और नया वैश्विक समझौता करने के लिए तैयार हो जाए।नाजुक युद्धविराम खत्म: लगातार चौथे दिन अमेरिकी एयरस्ट्राइक और समुद्री नाकाबंदीअमेरिकी राष्ट्रपति का यह बेहद आक्रामक और युद्ध की चेतावनी देने वाला बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सेना (US Military) ने लगातार चौथे दिन ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले जारी रखे हैं। हवाई हमलों के साथ-साथ अमेरिकी नौसेना ने ईरान के आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाहों की घेराबंदी करते हुए कड़ा नौसैनिक ब्लॉक (Naval Blockade) लागू कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर जारी इस भीषण संघर्ष के कारण दोनों देशों के बीच बीती 17 जून को हुआ एक बेहद नाजुक युद्धविराम अब आधिकारिक रूप से पूरी तरह से टूट चुका है।जब तक मैं नहीं कहूंगा, तब तक नहीं रुकेंगे हमले: डोनाल्ड ट्रंपफॉक्स न्यूज के एंकर द्वारा जब इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप से यह सीधा सवाल पूछा गया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह सैन्य कार्रवाई और बमबारी आखिर कब तक जारी रहेगी? तो ट्रंप ने बिना किसी झिझक के सीधे शब्दों में जवाब दिया कि अमेरिकी सेना के ये विनाशकारी हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक कि मैं खुद व्हाइट हाउस से यह न कह दूं कि अब यह काफी है। उनके इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र में तनाव और भी ज्यादा हिंसक रूप ले सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:50 am

Italy Parliament Voting: इटली की पीएम जार्जिया मेलोनी को संसद में लगा बड़ा झटका, 1 वोट से गिरा चुनावी कानून संशोधन का प्रस्ताव

यूरोपीय राजनीति और इटली के सत्ता गलियारों से इस वक्त की एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) को चुनावी कानून में संशोधन करने के अपने एक बेहद महत्वपूर्ण एजेंडे पर संसद में बहुत बड़ा और करारा झटका लगा है। इटली की संसद के निचले सदन (Chamber of Deputies) ने पीएम मेलोनी की पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' (Brothers of Italy) द्वारा लाए गए वोटिंग नियमों में बदलाव से जुड़े एक अहम प्रस्ताव को महज 1 वोट के अंतर से खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 187 और विरोध में 188 वोट पड़े, जिससे मेलोनी सरकार को संसद के भीतर भारी फजीहत का सामना करना पड़ा है।क्या था प्रस्ताव और कैसे फेल हुई मेलोनी की रणनीति?यह पूरा विवादित प्रस्ताव देश की चुनावी प्रणाली में उम्मीदवारों के लिए 'प्राथमिकता-आधारित मतदान व्यवस्था' (Preference-Based Voting System) को फिर से लागू करने से संबंधित था। मेलोनी सरकार को पूरा भरोसा था कि वे इस संशोधन को आसानी से पास करा लेंगी, क्योंकि उनके गठबंधन सहयोगी दलों—'लीग' (League) और 'फोर्ज़ा इटालिया' (Forza Italia)—ने उन्हें संसद में पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया था।लेकिन, वोटिंग के दौरान सारा खेल तब पलट गया जब संसद में गुप्त मतदान (Secret Ballot) कराया गया। गुप्त मतदान होने की वजह से गठबंधन के कुछ सांसदों ने अपनी ही पार्टी लाइन के खिलाफ (क्रॉस वोटिंग) जाकर प्रस्ताव के विरोध में वोट डाल दिया, जिसके चलते यह प्रस्ताव सिर्फ एक वोट से धराशायी हो गया।इटली में क्यों बदले जा रहे हैं चुनावी नियम?इटली की संसद में फिलहाल एक बड़े चुनावी सुधार विधेयक (Election Reform Bill) पर विस्तार से चर्चा चल रही है। इस नए विधेयक में देश के भीतर पूर्ण आनुपातिक मतदान प्रणाली (Proportional Representation) लागू करने और चुनाव जीतने वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बोनस के रूप में कुछ 'अतिरिक्त सीटें' देने का प्रावधान शामिल है। मेलोनी सरकार इस कानून के जरिए देश में एक स्थायी सरकार की रूपरेखा तैयार करना चाहती थी, लेकिन इस शुरुआती झटके ने सरकार की राह मुश्किल कर दी है।विपक्ष का तीखा हमला: 'पीएम का बहुमत पर नियंत्रण खत्म'इस नतीजे के तुरंत बाद इटली के विपक्षी दलों ने मेलोनी सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है। विपक्ष ने इसे प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक राजनीतिक झटका करार दिया है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि मेलोनी सरकार अगले साल होने वाले आम चुनाव (General Elections) से ठीक पहले राजनीतिक रूप से डर गई है, और अपने निजी फायदे के लिए चुनावी नियमों को जबरन बदलना चाहती है। विपक्ष ने दावा किया कि इस एक वोट की हार ने पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री मेलोनी का अपने खुद के संसदीय बहुमत और सांसदों पर से नियंत्रण अब पूरी तरह खो चुका है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:39 am

Indian Railways Security: क्या Jio-Airtel का नेटवर्क ठप होने से थम जाएंगी भारतीय ट्रेनें? ऑस्ट्रेलिया के बड़े रेल संकट से भारत के लिए जरूरी सबक

अगर कोई आपसे कहे कि मोबाइल नेटवर्क बंद होने की वजह से ट्रेनें चलना बंद हो गईं, तो शायद आपको पहली बार में इस पर यकीन न हो। लेकिन हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में ऐसा असल में हुआ है, जहां एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क ठप पड़ने के बाद कई ट्रेन सेवाओं को इमरजेंसी के तौर पर रोकना पड़ा। यह घटना अब दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस संकट के बाद भारत में भी यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि अगर किसी दिन देश में जियो (Jio), एयरटेल (Airtel) या वोडाफोन-आइडिया (Vi) का नेटवर्क पूरी तरह बंद हो जाए, तो क्या भारतीय रेलवे की रफ्तार भी थम जाएगी?ऑस्ट्रेलिया में आखिर क्या हुआ था, जिससे थम गईं ट्रेनें?हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की सबसे प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में से एक 'टेलस्ट्रा' (Telstra) को अपने कम्यूनिकेशन नेटवर्क में एक बहुत बड़ी तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा। इसका असर सिर्फ आम लोगों के मोबाइल कॉल या इंटरनेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यू साउथ वेल्स (New South Wales) के कई बड़े इलाकों में इसके कारण ट्रेन सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं।दरअसल, इन क्षेत्रों में ट्रेनें मुख्य कंट्रोल सेंटर से संपर्क बनाए रखने के लिए टेलस्ट्रा के कमर्शियल 4G नेटवर्क पर निर्भर थीं। जैसे ही नेटवर्क बंद हुआ, ड्राइवरों और कंट्रोल सेंटर के बीच का जरूरी संवाद पूरी तरह टूट गया। इसे सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा जोखिम मानते हुए रेलवे प्रशासन ने तुरंत ट्रेन परिचालन रोक दिया।आधुनिक 4G सिस्टम होने के बावजूद क्यों आई परेशानी?यह कोई पुरानी या आउटडेटेड व्यवस्था नहीं थी। ऑस्ट्रेलियन रेल ट्रैक कॉरपोरेशन (ARTC) ने साल 2024 में देश में 3G नेटवर्क बंद होने के बाद अपने ट्रेन कम्यूनिकेशन सिस्टम को एडवांस 4G नेटवर्क पर अपग्रेड किया था।टेलस्ट्रा के नेटवर्क में आई खराबी का सीधा असर रेलवे के करीब 9,600 किलोमीटर लंबे विशाल रेल नेटवर्क पर पड़ा, जिससे हंटर लाइन और साउदर्न हाइलैंड लाइन जैसी कई प्रमुख यात्री सेवाएं ठप हो गईं। ट्रेनों को रोकने के बाद यात्रियों के लिए अस्थायी रूप से बसों का संचालन करना पड़ा। हालांकि, सिडनी शहर की लोकल ट्रेनें बच गईं क्योंकि वे इस नेटवर्क पर निर्भर नहीं थीं।क्यों ठप हुआ नेटवर्क? सेंट्रलाइजेशन बना बड़ी मुसीबतटेलस्ट्रा के अधिकारियों के अनुसार, समस्या कंपनी के मुख्य डेटा सेंटरों में मौजूद उन नेटवर्क नोड्स (Network Nodes) में आई खराबी के कारण हुई, जो पूरे नेटवर्क में टाइम सिंक्रोनाइजेशन (समय का तालमेल) बनाए रखते हैं। टेलीकॉम नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों का एक-दूसरे के साथ बिल्कुल सही समय पर तालमेल होना जरूरी होता है। जब यह टाइमिंग बिगड़ी, तो खराबी पूरे सिस्टम में फैल गई। इसके अलावा, नेटवर्क का अत्यधिक केंद्रीकृत (Highly Centralized) होना भी एक बड़ी वजह रहा, जिसके कारण एक जगह की खराबी ने पूरे बड़े हिस्से को पंगु बना दिया।क्या भारत में भी मोबाइल नेटवर्क ठप होने से रुक सकती हैं ट्रेनें?इसका सीधा और साफ जवाब है—नहीं। भारत में किसी निजी या सार्वजनिक टेलीकॉम ऑपरेटर (जैसे Jio, Airtel या Vi) का नेटवर्क पूरी तरह ठप होने से भी भारतीय रेलवे के परिचालन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:स्वतंत्र कम्यूनिकेशन नेटवर्क: भारतीय रेलवे अपनी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन और सिग्नलिंग के लिए आम जनता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यावसायिक 4G/5G मोबाइल नेटवर्क पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं है।विशाल ऑप्टिकल फाइबर जाल: रेलवे के पास पटरियों के साथ-साथ बिछाया गया अपना खुद का एक बेहद मजबूत और सुरक्षित डेडिकेटेड ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) नेटवर्क है।सुरक्षित रेडियो सिस्टम: कंट्रोल रूम, स्टेशन मास्टर और ट्रेन ड्राइवरों के बीच बातचीत के लिए रेलवे अपने विशेष रेडियो कम्यूनिकेशन सिस्टम और वायरलेस सेट का उपयोग करता है, जो बाहरी मोबाइल टावरों से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं।इसलिए, यदि किसी दिन देश का पूरा मोबाइल नेटवर्क भी बैठ जाए, तब भी भारतीय रेलवे का मुख्य सिग्नलिंग और परिचालन तंत्र बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।भारत के लिए इस घटना में क्या है बड़ा सबक?भले ही भारतीय रेलवे का अपना स्वतंत्र सुरक्षा ढांचा है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की यह घटना दुनिया भर के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक गंभीर चेतावनी और सीख है। यह साबित करती है कि किसी भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक या आपातकालीन सेवा (Emergency Services) को कभी भी पूरी तरह से किसी एक बाहरी सेंट्रलाइज्ड नेटवर्क पर निर्भर नहीं छोड़ना चाहिए। अगर बैकअप सिस्टम मजबूत न हो, तो एक छोटी सी तकनीकी चूक भी पूरे देश की रफ्तार को ब्रेक लगा सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jul 2026 7:22 am

पाकिस्तान ने तेज की नागरिकों की वापसी, 525 परिवार भेजे अफगानिस्तान, बन्नू के तीन कैंप खाली

तोरखम बॉर्डर के रास्‍ते पाकिस्तान से 525 अफगान परिवारों को वापस अफगानिस्तान भेज दिया गया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में बने तीन शरणार्थी शिविर अब पूरी तरह खाली हो चुके हैं

देशबन्धु 15 Jul 2026 6:50 am

बलूचिस्तान में हथियारबंद हमलावरों ने उड़ाए बिजली के टावर, कई क्षेत्रों में बिजली संकट

डेरा मुराद जमाली के पास अज्ञात हथियारबंद लोगों ने उच पावर प्लांट से जुड़ी 220 केवी की दो हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन टावरों को विस्फोट कर उड़ा दिया। हमले में द अन्य टावरों को भी नुकसान पहुंचा।

देशबन्धु 15 Jul 2026 6:46 am

पीओके में प्रदर्शन: रावलाकोट में सड़कों पर उतरे छात्र, पाकिस्तानी कार्रवाई के खिलाफ उठी आवाज

पाकिस्तान कब्‍जे वाले कश्मीर (पीओके) में बढ़ते तनाव के बीच रावलाकोट के ईदगाह मैदान में सैकड़ों स्कूली बच्चे अपने स्कूल यूनिफॉर्म में, शिक्षकों और माता-पिता के साथ जमा हुए। बच्चों ने हाथों में सफेद झंडे लिए और इलाके में पाकिस्तानी सेना की कथित सख्त कार्रवाई का विरोध कि

देशबन्धु 15 Jul 2026 6:37 am

होर्मुज स्‍ट्रेट पर अमेरिका के टोल प्रस्ताव का इटली ने किया विरोध

इटली की सरकार ने समुद्री मार्गों से गुजरने पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने का व‍िरोध करते हुए कहा क‍ि समुद्री स्‍ट्रेट्स कोई इंसानों की बनाई संरचना नहीं है

देशबन्धु 14 Jul 2026 11:10 pm

US Iran Conflict: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान; होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की 'पूर्ण नाकेबंदी' का आदेश, 20% टैक्स की जगह रखी यह बड़ी शर्त

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर एक बेहद आक्रामक घोषणा की है, जिसने ईरान की चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के व्यापारिक जहाजों के लिए यह समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला रहेगा। उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को झूठा, हिंसक और बुरी नीयत वाला बताते हुए कहा कि उनकी नीतियां देश को बर्बादी की ओर ले जा रही हैं। इसी के चलते अमेरिका अब होर्मुज स्ट्रेट में उन सभी जहाजों की पूर्ण नाकेबंदी (Blockade) करेगा, जो ईरानी बंदरगाहों से आ-जा रहे हैं या ईरानी कार्गो का सामान ले जा रहे हैं।अमेरिकी सेना की तारीफ और मध्य पूर्व के नेताओं से बातचीतडोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने लिखा, अमेरिकी सेना की अदम्य ताकत के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का फ्लो पहले से कहीं ज्यादा बेहतर ढंग से हो रहा है। इसके लिए उन्होंने वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन और यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की लीडरशिप की जमकर सराहना की। ट्रंप ने बताया कि मध्य पूर्व (Middle East) के नेताओं के साथ उनकी बेहद फायदेमंद बातचीत हुई है, जिसके बाद सुरक्षा नीतियों में यह बदलाव किया गया है।20% सुरक्षा टैक्स का फैसला बदला, अब अमेरिका में करना होगा भारी निवेशइससे पहले ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घोषणा की थी कि अमेरिका अब से ‘होर्मुज स्ट्रेट का संरक्षक’ होगा और सुरक्षा खर्च निकालने के लिए वहां से गुजरने वाले सभी कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा। हालांकि, नए फैसले के तहत उन्होंने इस 20% अमेरिकी रीइंबर्समेंट फीस (टैक्स) की योजना को वापस ले लिया है। इसकी जगह अब खाड़ी देशों (Gulf States) को अमेरिका के साथ बड़े पैमाने पर ट्रेड और इन्वेस्टमेंट डील करनी होंगी। ट्रंप के मुताबिक, यह निवेश इतिहास में सबसे बड़ा होगा, जिससे अमेरिका में बड़े स्तर पर फैक्ट्रियां, प्लांट और उपकरण आएंगे और लाखों उच्च वेतन वाली नौकरियां पैदा होंगी।'ईरान के पास कभी नहीं होगा परमाणु हथियार'अपने सख्त लहजे को बरकरार रखते हुए ट्रंप ने ईरान सरकार को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, अमेरिका एक बार फिर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर रहा है। ईरान द्वारा अपने ही लाखों लोगों, जिनमें 52,000 प्रदर्शनकारी भी शामिल थे, की हत्या करने के काले दिन अब हमेशा के लिए खत्म हो गए हैं। ट्रंप ने पूरी दुनिया को आश्वस्त करते हुए सबसे बड़ी बात यह कही कि उनके रहते ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 10:50 pm

आज का एक्सप्लेनर:प्रोटेस्ट कॉकरोच पार्टी का, फिर सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर क्यों; क्या सरकार मांगें मानेगी, तबीयत बिगड़ी तो क्या होगा

59 साल के सोनम वांगचुक 17 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। सिर्फ नमक का पानी ले रहे हैं। 8.5 किलो वजन गिर चुका है। उनके पीछे बैनर कॉकरोच जनता पार्टी का है, जिसकी मांग है- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- सरकार बात तक करने को तैयार नहीं, मरने के लिए छोड़ दिया है। कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक क्यों आमरण अनशन पर, क्या खुद अनशन तोड़ देंगे या सरकार तुड़वा देगी, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…सवाल-1: सोनम वांगचुक CJP के समर्थन में अनशन पर क्यों बैठे? जवाब: कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके ने 6 जून को जंतर-मंतर पर पहली बार प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया। 2 जून को X पर वीडियो जारी करके सोनम वांगचुक ने भी समर्थन दिया, 'मैं CJP के आंदोलन से जुड़ने आ रहा हूं। CJP वाले देशप्रेमी हैं, आपको भी उनके साथ जुड़ना चाहिए।’ 6 जून को कंधे पर एक झोला टांगे और हाथों में गुलाब लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। इस प्रोटेस्ट पर सरकार ने कोई बयान तक नहीं दिया। फिर 20 जून को CJP ने जंतर-मंतर पर दोबारा प्रोटेस्ट शुरू किया। सोनम ने भी केंद्र सरकार से 2 मांगें रखीं- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग। सोनम ने कहा कि इन दोनों मांगों पर 27 जून तक सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे। फिर अनशन शुरू करेंगे और अगर एक भी मांग पूरी हुई, तो अनशन वापस भी ले लेंगे। सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया, तो रविवार, 28 जून को सोनम CJP के प्रोटेस्ट में शामिल हो गए। वामपंथी स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑल इंडियन स्टूडेंट्स एसोसिएशन, यानी AISA के 6 मेंबर्स के साथ भूख हड़ताल शुरू कर दी। सोनम ने कहा, 'मैं मजबूर हूं, खुशी से यहां नहीं आया हूं। दोनों मुद्दों के समर्थन में अनशन पर बैठा हूं। लोग मुझसे पूछते हैं, 'आप लद्दाख में आंदोलन कर रहे थे, अब आप CJP के साथ क्यों हैं?' एजुकेशन, जो यहां का मुद्दा है, पिछले 40 सालों से मेरे दिल के बहुत करीब रहा है, जब मैं स्टूडेंट था तब से। जब कुछ युवा एजुकेशन सिस्टम की दिक्कतों पर आवाज उठा रहे हैं, तो मैं चुप कैसे रह सकता था?' हालांकि 13 जून को सोनम ने पत्रकारों से कहा कि अभी वह शिक्षा के मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर मौजूद हैं। लद्दाख के मुद्दे पर सरकार से बातचीत जारी है, कुछ सहमति भी बनी है, लेकिन जमीन पर उतरना बाकी है। सरकार चाहे तो मानसून सत्र में ही इसका समाधान कर सकती है। सवाल-2: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मामले पर सरकार का क्या रुख है? जवाब: CJP की मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें। मई में NEET पेपर लीक के बाद एग्जाम रद्द करना पड़ा था। देश भर में 14 से ज्यादा NEET की तैयारी करने वाले बच्चों ने सुसाइड कर लिया। इसकी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के आसार नहीं दिख रहे हैं… हालांकि सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होने वाला है। इसमें धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी लेकर कोई और मंत्रालय या बीजेपी संगठन में कोई जिम्मेदारी दी जा सकती है। सवाल-3: अगर सोनम ने अनशन नहीं तोड़ा, तो आगे क्या होगा? जवाब: कोई व्यक्ति 3 मिनट बिना ऑक्सीजन, 3 दिन बिना पानी और 3 हफ्ते बिना खाए रह सकता है। इसे सर्वाइवल का ‘रूल ऑफ थ्री’ कहते हैं। हालांकि इंसान बिना खाने के कितने दिन जिंदा रह सकता है, ये शरीर की संरचना, अनशन के दौरान हाइड्रेशन और शारीरिक बीमारी जैसी चीजों पर निर्भर करता है। डॉक्टर्स के मुताबिक कई लोग सिर्फ नमक वाला पानी पीकर ही 2 से 3 महीने तक जिंदा रह लेते हैं। जब भूख हड़ताल की वजह से व्यक्ति का वजन 10% से ज्यादा गिर जाता है, तो उसे डॉक्टर की निगरानी में रखने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर जब शरीर को खाना नहीं मिलता, तो ऊर्जा के लिए- दिल्ली के सी. के. बिरला हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉ. अमित प्रकाश सिंह कहते हैं, ‘करीब दो हफ्ते के उपवास के बाद दिल, लिवर, किडनी जैसे अंग कमजोर पड़ने लगते हैं। यह जानलेवा हो सकता है। कई लोग सोनम से अनशन तोड़ने की अपील कर रहे हैं। सोनम इस पर राजी नहीं हैं। कह रहे हैं, ‘मैंने जो शुरू किया है, उसे उसके निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा। 13 जुलाई को अभिजीत दीपके ने कहा, 'जब भी मैं उनसे अनशन खत्म करने के लिए कहता हूं, वे मुझे डांटते हैं और कहते हैं, 'तुम मेरी चिंता मत करो।' जबकि उन्हें चक्कर आते हैं। वॉशरूम तक पैदल जाना भी मुश्किल है।’ इधर CJP ने 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन ही जंतर-मंतर से संसद तक पैदल मार्च बुलाया है। सोनम ने लोगों से इसमें शामिल होने की अपील करते हुए कहा है, ‘मैं अपनी बची हुई ताकत के साथ इसमें शामिल रहूंगा। देश में आजादी से चलने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार है। इससे नहीं रोका जाना चाहिए।’ सीनियर पत्रकार अरुण दीक्षित कहते हैं, ‘अभी ऐसा नहीं लग रहा है कि सरकार सोनम की मांगों पर बहुत ध्यान देगी। हालांकि इस बीच अगर सोनम की तबीयत ज्यादा बिगड़ी, तो उनको उठाकर इलाज के लिए भेजा जा सकता है और अनशन तुड़वाया जा सकता है।’ जबरन अनशन तुड़वाने का सबसे चर्चित मामला मणिपुर की इरोम चानू शर्मिला का है। उन्होंने दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़ताल की थी। दरअसल, 2 नवंबर 2000 को इंफाल के पास एक गांव में असम राइफल्स के जवानों की गोलीबारी में 10 नागरिकों की हत्या हुई। 4 नवंबर को सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियां देने वाले कानून AFSPA हटानी की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की। तीसरे दिन उन्हें सरकार ने IPC की धारा 309, यानी आत्महत्या के प्रयास के तहत गिरफ्तार कर लिया और जबरन अस्पताल ले जाकर नाक में फीडिंग ट्यूब डालकर खाना देना शुरू कर दिया। 2016 तक इंफाल के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को अस्थायी जेल बनाकर रखा गया, और उन्हें ट्यूब से जबरन फ्लूइड दिया जाता रहा। 9 अगस्त 2016 को इरोम ने खुद ही अपना अनशन खत्म कर दिया। सवाल-4: क्या इससे पहले भी सोनम ने अनशन किए, तब सरकार का क्या रुख रहा? जवाब: इससे पहले सोनम लद्दाख के मुद्दों को लेकर कई बार भूख हड़ताल और पैदल यात्राएं वगैरह कर चुके हैं। कभी सरकार के आश्वासन पर उन्होंने अनशन तोड़ा, तो कभी हिरासत में ले लिए गए.. सवाल-5: लद्दाख का मुद्दा क्या है, जिस पर सरकार से भिड़े हुए हैं सोनम? जवाब: 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद लद्दाख को केंद्र-शासित प्रदेश (UT) बना दिया गया था। इससे जम्मू-कश्मीर विधान परिषद में लद्दाख का प्रतिनिधित्व लगभग खत्म हो गया और हिल डेवलपमेंट काउंसिल लेह और कारगिल (LAHDC) के जरिए लद्दाख का प्रशासनिक कामकाज शुरू हुआ। UT बनने से पहले LAHDC के पास कैबिनेट के बराबर अधिकार थे, लेकिन UT बनने के बाद इनकी ताकत सिर्फ कागजी रह गई हैं। LAHDC के पास आर्थिक मामले देखने के भी अधिकार भी नहीं हैं। लद्दाख के UT बनने के बाद से सोनम 4 मांगें कर रहे हैं… राज्यसभा में एक सीट आवंटित हो और लोकसभा सीटों की संख्या एक से बढ़ाकर दो हों, कारगिल और लेह अलग-अलग लोकसभा सीटें बनें। अगर ये मांगें मान ली जाएं, तो लद्दाख के जिलों में स्वायत्त जिला परिषदों का गठन हो सकेगा और जंगल, जमीन, पुलिसिंग, खेती आदि से जुड़े कानून बनाने का अधिकार स्थानीय लोगों को मिल जाएंगे। कई दौर की बैठकों के बावजूद अभी तक सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि 13 जुलाई को लद्दाख के प्रमुख सचिव आशीष कुंद्रा ने कहा है कि सभी 7 जिलों में ऑटोनॉमस हिल डेवेलपमेंट काउंसिल, यानी AHDC बनेगी। इस बॉडी को संविधान के आर्टिकल-371 के खास ढांचे के तहत विधायी, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार मिलेंगे। ये दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश और पूर्ण राज्य के बीच की व्यवस्था कही जा सकती है। आर्टिकल-371 के ही तहत महाराष्ट्र, गुजरात, मणिपुर जैसे 12 राज्यों को प्रशासन से जुड़े विशेष अधिकार मिले हुए हैं। 13 जुलाई को सोनम ने कहा कि बातचीत जारी है, लेकिन इसके जमीन पर उतरने का इंतजार है। उन्होंने ये उम्मीद भी जताई कि 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान इस पर कोई फैसला ले सकती है। सरकार चाहे, तो संसद से संविधान संशोधन विधेयक पास करवाकर लद्दाख में पूर्ण राज्य के प्रावधान लागू कर सकती है। हालांकि अभी सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। ----------

दैनिक भास्कर 14 Jul 2026 6:16 pm

क्या मुज्तबा खामेनेई बीजिंग पहुंच गए? रूसी स्पेशल विमान की उड़ान से तेज हुई अटकलें

रिपोर्टों के अनुसार, रूस का विशेष कमांड एयरक्राफ्ट Tu-214PU सोमवार को मॉस्को से तेहरान पहुंचा और कुछ घंटों बाद वहां से चीन की राजधानी बीजिंग के लिए रवाना हो गया।

देशबन्धु 14 Jul 2026 4:16 pm

Balochistan: बलूचों ने किया ISIS की बैठक पर हमला, लश्कर आतंकियों समेत 34 को मारा

BLA के प्रवक्ता जीयांद बलोच द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह हमला संगठन के नए अभियान 'ऑपरेशन मुर्ग-ए-गदरान' की शुरुआत है। बयान में दावा किया गया कि खुजदार में स्थित एक परिसर को निशाना बनाया गया, जिसे कथित तौर पर ISIS-K कमांडर शफीक मेंगल का ठिकाना बताया गया।

देशबन्धु 14 Jul 2026 3:58 pm

मिडल ईस्ट में महाविस्फोट! यमन में उतरने वाला था हूतियों से भरा ईरानी विमान, MBS और ट्रंप के प्लान से दहल उठी धरती

मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) के सुलगते मैदान से इस वक्त एक बेहद खतरनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। यमन के आसमान में हूती विद्रोहियों से भरे एक ईरानी विमान की लैंडिंग होने ही वाली थी कि उससे ठीक पहले रणनीतिक ठिकानों पर धुआंधार और भीषण हवाई हमले शुरू हो गए। इस अचानक हुई बमबारी ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यह कोई आम हमला नहीं है, बल्कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बेहद गोपनीय और बड़ी रणनीतिक प्लानिंग का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि यह नया चक्रव्यूह मिडल ईस्ट में एक नई और महाविनाशकारी जंग की शुरुआत कर सकता है।लैंडिंग से ठीक पहले आसमान से बरसी तबाहीसुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, हूती लड़ाकों और भारी हथियारों से लैस एक ईरानी विमान यमन के एयरपोर्ट पर उतरने की तैयारी में था। ईरान इस विमान के जरिए हूतियों को बड़ी सैन्य मदद पहुंचाने की फिराक में था। लेकिन जैसे ही यह विमान यमन के एयरस्पेस के करीब पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे लड़ाकू विमानों ने हूती ठिकानों और एयरपोर्ट के रनवे के आसपास धुआंधार बमबारी शुरू कर दी। आसमान से बरसी इस तबाही के बाद ईरानी विमान को मजबूरन अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस हैरतअंगेज ऑपरेशन ने ईरान और हूती गठबंधन को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है।MBS और ट्रंप का सीक्रेट प्लान आया सामनेइस पूरे घटनाक्रम के पीछे सऊदी अरब के ताकतवर नेता मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जुगलबंदी को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने रेड सी (लाल सागर) और अदन की खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद आक्रामक नीति तैयार की है। ट्रंप और MBS का यह जॉइंट प्लान ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने और यमन में हूतियों की कमर तोड़ने के लिए बनाया गया है। इस सीक्रेट ऑपरेशन की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि अब अमेरिका और सऊदी अरब इस क्षेत्र में किसी भी ईरानी दखल को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।भारत की सुरक्षा और लोकल मार्केट पर पड़ेगा सीधा असरजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर भारत की बात करें, तो यमन और रेड सी में बढ़ने वाला कोई भी तनाव नई दिल्ली के लिए बेहद चिंता का विषय है। भारत का एक बहुत बड़ा व्यापारिक हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर यूरोप और अमेरिका जाता है। अगर यहां जंग की स्थिति बनती है, तो मुंबई, गुजरात और अन्य भारतीय बंदरगाहों से जाने वाले जहाजों का किराया और इंश्योरेंस कॉस्ट काफी बढ़ जाएगी। इसके चलते भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आने का खतरा पैदा हो जाएगा। यही वजह है कि भारत के नीति निर्माता भी इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर रख रहे हैं।क्या मिडल ईस्ट में छिड़ने वाली है एक और बड़ी जंग?आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और ग्लोबल थिंक टैंक के विश्लेषण के अनुसार, इस ताजा हमले के बाद ईरान और हूती गुट की ओर से बड़े पलटवार की आशंका काफी बढ़ गई है। ईरान इस कड़े एक्शन को अपनी संप्रभुता और प्रभाव पर सीधे हमले के रूप में देख रहा है। यदि आने वाले दिनों में हूतियों ने लाल सागर में अमेरिकी या सऊदी अरब के ठिकानों पर मिसाइल दागकर जवाबी कार्रवाई की, तो यह पूरा क्षेत्र एक ऐसे युद्ध की आग में झुलस सकता है जिसे संभालना वैश्विक शक्तियों के लिए भी नामुमकिन हो जाएगा। पूरी दुनिया इस समय सांसें थामकर मिडल ईस्ट के अगले कदम का इंतजार कर रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:06 pm

दोस्त के लिए ढाल बना भारत: अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई दिल्ली ने लिया ऐसा कड़ा स्टैंड, देखकर पाकिस्तान के उड़े होश

वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों से एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। समय-समय पर दुनिया ने भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत का लोहा माना है, लेकिन इस बार भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी दोस्ती का जो फर्ज निभाया है, उसने वैश्विक महाशक्तियों को भी हैरान कर दिया है। अपने एक बेहद भरोसेमंद और पक्के दोस्त देश पर आए संकट के समय भारत ने किसी भी दबाव की परवाह न करते हुए उसके पक्ष में चट्टान की तरह डटकर खड़े होने का फैसला किया। नई दिल्ली के इस बेहद आक्रामक और साहसिक कूटनीतिक कदम को देखकर पड़ोसी देश पाकिस्तान के हुक्मरानों के पैरों तले जमीन खिसक गई है और उसके पूरे खेमे में भारी छटपटाती बेचैनी देखी जा रही है।जब पक्के दोस्त पर आया संकट तो भारत ने दिखाई आंखेंअंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र (UN) के भीतर कुछ समय से भारत के एक बेहद करीबी सहयोगी देश को घेरने की साजिशें रची जा रही थीं। कुछ कूटनीतिक गुटों द्वारा उस देश पर प्रतिबंध लगाने या उसे अलग-थलग करने की कोशिशें की जा रही थीं। ऐसे नाजुक मोड़ पर भारत ने बिना किसी हिचकिचाहट के वैश्विक मंच पर अपनी बुलंद आवाज उठाई। भारतीय राजनयिकों ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी एकतरफा कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भारत अपने रणनीतिक साझेदार के साथ हर परिस्थिति में मजबूती से खड़ा है। भारत का यह स्टैंड सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उन ताकतों को सीधी चेतावनी थी जो इस क्षेत्र का संतुलन बिगाड़ना चाहती हैं।पाकिस्तान के कलेजे पर क्यों लोट रहे हैं सांप?भारत के इस मास्टरस्ट्रोक ने सबसे ज्यादा नुकसान इस्लामाबाद को पहुंचाया है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि इस संकट के बहाने वह अपने आकाओं के साथ मिलकर भारत के मित्र देश को कमजोर कर सकेगा और इस क्षेत्र में अपना भू-राजनीतिक (Geopolitical) उल्लू सीधा कर लेगा। लेकिन जैसे ही भारत ने अपनी पूरी कूटनीतिक ताकत झोंक दी, पाकिस्तान का पूरा प्लान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। दिल्ली, मुंबई से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में इस बात की चर्चा है कि भारत ने जिस तरह से फ्रंट फुट पर आकर बैटिंग की है, उसने पाकिस्तान के कूटनीतिक मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है, जिससे उसके खेमे में केवल हताशा बची है।दिल्ली से लेकर कश्मीर और सीमांत इलाकों तक मजबूत संदेशइस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम का असर जियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर भी साफ देखा जा रहा है। भारत के इस कड़े रुख से जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान जैसे सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा और रणनीतिक मोर्चे पर देश की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है। आम भारतीय नागरिक और रक्षा विशेषज्ञ भी सरकार के इस कदम की सराहना कर रहे हैं। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि आधुनिक भारत अपनी सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ वैश्विक पटल पर अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा करने में भी पूरी तरह सक्षम है।आधुनिक एआई सर्च और दुनिया भर में भारत का बजआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और वैश्विक विश्लेषकों के मुताबिक, इस घटना के बाद एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) क्षेत्र में भारत का कद कई गुना बढ़ गया है। दुनिया भर के एआई सर्च इंजन और कूटनीतिक मंच अब भारत को एक ऐसी महाशक्ति के रूप में देख रहे हैं जो अपने दम पर वैश्विक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है। भारत की इस 'फ्रेंड-फर्स्ट' पॉलिसी ने यह साबित कर दिया है कि नई दिल्ली न तो किसी के दबाव में झुकती है और न ही संकट के समय अपने दोस्तों का हाथ छोड़ती है। आने वाले दिनों में भारत के इस कदम के दूरगामी परिणाम वैश्विक राजनीति में देखने को मिलेंगे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:05 pm

50 साल पुराना वो जख्म: जब UNSC में पाकिस्तान से मात खा गया था भारत, मगर आज कूटनीति के मंच पर पलट गया पूरा खेल

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और इतिहास के पन्नों को पलटें तो कुछ ऐसी घटनाएं मिलती हैं जो वक्त के साथ एक बड़ा सबक बन जाती हैं। आज से करीब 50 साल पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच पर भारत को एक ऐसा कूटनीतिक दर्द मिला था, जिसे देश आसानी से नहीं भूल सकता। उस दौर में वैश्विक समीकरणों और महाशक्तियों के वीटो पावर के खेल में पाकिस्तान कूटनीतिक मोर्चे पर भारत पर भारी पड़ गया था। लेकिन बीते पांच दशकों में वैश्विक राजनीति और भारत की ताकत में जो बदलाव आया है, उसने समय के पहिए को पूरी तरह 360 डिग्री पर घुमा दिया है। आज हालात यह हैं कि जिस मंच पर कभी पाकिस्तान भारत को घेरता था, आज वहीं वह खुद को बचाने के लिए छटपटा रहा है।आधा दशक पुराना वो कूटनीतिक झटका1970 के दशक के उस दौर को याद करें तो भारत और पाकिस्तान के बीच शीत युद्ध की छाया साफ दिखाई देती थी। कश्मीर मुद्दे से लेकर द्विपक्षीय तनावों तक, जब भी मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाता था, तो वैश्विक महाशक्तियों का झुकाव भारत के पक्ष में वैसा नहीं रहता था जैसा आज है। उस समय पश्चिमी देशों और कुछ अन्य वैश्विक ताकतों के छिपे और खुले समर्थन के दम पर पाकिस्तान कई बार कूटनीतिक मोर्चे पर बढ़त बना लेता था। कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, वह दौर भारतीय विदेश नीति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था, जहां हमें अपने सही रुख को साबित करने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़ा संघर्ष करना पड़ता था।कैसे बदला समय और घूम गया महाशक्तियों का रुखबीते कुछ दशकों में भारत ने अपनी आर्थिक और सैन्य क्षमता के साथ-साथ अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है। आज नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु से लेकर वाशिंगटन, लंदन और मॉस्को तक भारत की आवाज को बेहद गंभीरता से सुना जाता है। भारत अब सिर्फ एक विकासशील देश नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की एक बुलंद आवाज और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक महाशक्ति बन चुका है। दूसरी तरफ, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक कंगाली और आतंकवाद के मुद्दे पर घिरे पाकिस्तान की साख वैश्विक मंच पर पूरी तरह खत्म हो चुकी है। अब संयुक्त राष्ट्र में उसकी बातों को कोई तवज्जो नहीं देता।आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान हुआ अलग-थलगस्थानीय और वैश्विक स्तर पर अगर आज के समीकरणों को देखें, तो भारत ने कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान को उसके ही बुने जाल में फंसा दिया है। आतंकवाद को पालने-पोसने की अपनी नीतियों के कारण पाकिस्तान आज वैश्विक बिरादरी में पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से लेकर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची तक, पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग करके यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, और इस रुख को अमेरिका, फ्रांस और यूके सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों का खुला समर्थन मिला है।स्थायी सदस्यता की दहलीज पर खड़ा आज का भारतआज का भारत महाशक्तियों के पीछे चलने वाला देश नहीं, बल्कि खुद वैश्विक एजेंडा तय करने वाला देश है। यूएनएससी में स्थायी सदस्यता (Permanent Seat) के लिए आज भारत का दावा दुनिया में सबसे मजबूत माना जा रहा है। दुनिया के अधिकांश बड़े देश खुले तौर पर सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी जगह की वकालत कर रहे हैं। 50 साल पहले जो पाकिस्तान भारत को कूटनीतिक नुकसान पहुंचाने की हैसियत रखता था, आज वह खुद वैश्विक मंच पर अपनी प्रासंगिकता बचाने की भीख मांग रहा है। इतिहास का यह बदलाव साबित करता है कि कूटनीति में समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता और आज भारत वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में मजबूती से स्थापित है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:03 pm

Hormuz Attack: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में UAE के तेल टैंकरों पर ईरान का बड़ा मिसाइल हमला, 1 भारतीय की मौत और 6 घायल

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त एक बेहद परेशान करने वाली और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा भीषण मिसाइल हमला किया गया है। इस अचानक हुए हमले ने न सिर्फ खाड़ी देशों में युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है, बल्कि भारत के लिए भी यह बेहद दुखद खबर लेकर आया है। इन व्यापारिक जहाजों पर तैनात भारतीय क्रू मेंबर्स इस हमले की चपेट में आ गए हैं, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि हो चुकी है और छह अन्य भारतीय नाविक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।रात के अंधेरे में हुआ भीषण मिसाइल हमलाअंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम सुरक्षा एजेंसियों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, यूएई के ये दोनों कमर्शियल ऑयल टैंकर अपनी तय समुद्री सीमा से गुजर रहे थे, तभी ईरान की ओर से दागी गईं कई मिसाइलें सीधे इन जहाजों से जा टकराईं। मिसाइल लगते ही जहाजों पर भीषण आग लग गई और वहां चीख-पुकार मच गई। सुरक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह हमला बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक चोकपॉइंट पर किया गया है, जहां से दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस हमले के बाद पूरे समुद्री क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।भारतीय दूतावास हुआ अलर्ट, घायलों की मदद में जुटाइस दर्दनाक हादसे में भारतीय नागरिकों के हताहत होने की खबर मिलते ही नई दिल्ली से लेकर खाड़ी देशों में स्थित भारतीय दूतावास तक हड़कंप मच गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय इस पूरी स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए है। स्थानीय अधिकारियों के समन्वय से घायल 6 भारतीय नाविकों को तुरंत रेस्क्यू कर नजदीकी सैन्य और नागरिक अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मारे गए भारतीय नागरिक के शव को ससम्मान भारत वापस लाने और उनके परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है।लोकल और ग्लोबल मार्केट पर मंडराया संकटस्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुई इस हिंसक घटना का सीधा असर जियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर भारत सहित दुनिया भर के बाजारों पर देखने को मिल सकता है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति के लिए काफी हद तक इसी रूट पर निर्भर है, इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही, खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर भी मुंबई, दिल्ली और केरल जैसे राज्यों में रहने वाले उनके परिवारों की चिंताएं अचानक बढ़ गई हैं।खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात, दुनिया भर की नजरेंविशेषज्ञों और आधुनिक एआई सर्च इंजनों (GEO) के विश्लेषण के मुताबिक, इस हमले के बाद अमेरिका, यूएई और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। वैश्विक समुदाय इस हमले की कड़ी निंदा कर रहा है क्योंकि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है। आने वाले घंटों में संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक महाशक्तियां इस पर क्या कड़ा रुख अपनाती हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को एक बार फिर बारूद के ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 1:01 pm

'हम हैं हॉर्मुज के रखवाले': डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, स्ट्रेट रहेगा खुला पर हर कार्गो को देना होगा 20% टैक्स

मिडिल ईस्ट और खाड़ी देशों में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को चौंकाने वाला एक बड़ा और आक्रामक ऐलान किया है। फॉक्स न्यूज के लोकप्रिय कार्यक्रम में फोन पर दिए गए साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले हॉर्मुज स्ट्रेट पर रणनीतिक नियंत्रण स्थापित करेगा। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उठाने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने के एवज में वहां से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत की दर से शुल्क यानी टैक्स वसूला जाएगा।सोशल मीडिया पर ट्रंप की दो टूक चेतावनीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि हॉर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला हुआ है और ईरान की सहमति हो या न हो, यह खुला ही रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में ईरानी नाकाबंदी को तोड़कर अपनी खुद की सुरक्षा नाकेबंदी लागू कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में आवाजाही सुरक्षित रखने के खर्च की भरपाई के लिए गुजरने वाले कार्गो से 20 प्रतिशत रीइंबर्समेंट लिया जाएगा, क्योंकि अन्य अमीर देशों को भी अमेरिकी सैन्य सेवाओं का पूरा मूल्य चुकाना चाहिए।अमेरिका और ईरान के बीच चरम पर पहुंचा टकरावयह तीखा बयान ऐसे वक्त में आया है जब पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर चल रहा है। ईरान ने दावा किया था कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है और बिना अनुमति कोई जहाज नहीं गुजर सकता, जिसके जवाब में ट्रंप ने ईरान पर पूर्व समझौतों को तोड़ने और कड़े सैन्य हमलों की चेतावनी दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी चेतावनी दी है कि इस समुद्री मार्ग पर अमेरिकी हस्तक्षेप जारी रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में और बड़े भू-राजनीतिक संकट पैदा हो सकते हैं।वैश्विक तेल बाजार और महंगाई पर मंडराता खतराहॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया भर में होने वाले कुल तेल परिवहन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाता है। अमेरिका और ईरान के बीच इस जलमार्ग पर सीधा टकराव होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं बहुत ज्यादा गहरी हो गई हैं, जिससे दुनिया भर के बाजारों में नई चिंताएं शुरू हो गई हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 11:49 am

नेपाल की राजनीति में उबाल! बालेन शाह की सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे GenZ युवा, क्या गिर जाएगी नई सरकार

नेपाल के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता दिखाई दे रहा है। केपी शर्मा ओली की सरकार को गिराकर GenZ युवाओं के भारी समर्थन से सत्ता में आए बालेन शाह को प्रधानमंत्री बने अभी महज 104 दिन ही बीते हैं, लेकिन उनके फैसलों के खिलाफ जनआक्रोश चरम पर पहुंच गया है। काठमांडू में नदी किनारे बसी अवैध बस्तियों को हटाने और बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में राजधानी की सड़कें सुलग उठी हैं। जिस युवा वर्ग ने बढ़-चढ़कर बालेन शाह को सत्ता की कुर्सी तक पहुँचाया था, आज वही युवा और आंदोलन के प्रमुख चेहरे सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।अवैध बस्तियों पर बुलडोजर और बेघर हुए लोगकाठमांडू के पूर्व मेयर रह चुके बालेन शाह लंबे समय से शहर को अतिक्रमण मुक्त करना चाहते थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने काठमांडू घाटी में नदी के किनारों पर बनी अवैध बस्तियों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया, जिसके तहत पुलिस और सेना की भारी तैनाती की गई है। इस बेदखली अभियान के दौरान हजारों घर तोड़े जा चुके हैं, जिससे लगभग 3,500 लोग बेघर हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों का मुख्य आरोप यह है कि सरकार ने बिना किसी पूर्व पुनर्वास योजना या वैकल्पिक व्यवस्था के उनके आशियाने उजाड़ दिए हैं, जिसके कारण एक व्यक्ति ने आत्मदाह तक कर लिया और अन्य लोगों ने भी ऐसा प्रयास किया।सरकार बनाने वाले GenZ चेहरों पर पुलिस का शिकंजाबढ़ते विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए बालेन शाह प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है, जिसके तहत पुलिस ने कई प्रमुख आंदोलनकारियों और GenZ नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया है। विडंबना यह है कि जिन युवा चेहरों ने बालेन शाह को सत्ता तक पहुँचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी, आज उन्हें ही पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को काठमांडू के माइतीघर में हुए प्रदर्शन के दौरान आंदोलन की अगुआई कर रहे माजिद अंसारी और सरिश्मा थापा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई में माजिद अंसारी को गंभीर चोटें भी आईं, जिसके बाद जनता और युवाओं का गुस्सा सरकार के प्रति और अधिक भड़क उठा है।प्रशासन की सख्ती और गहराता राजनीतिक संकटबालेन शाह सरकार के इस एकतरफा और कठोर कदम ने देश में एक नया राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। सरकार की बेरुखी और पुनर्वास के अभाव में बेघर हुए लोगों की पीड़ा ने आंदोलन को और तेज कर दिया है। प्रदर्शनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि विस्थापितों को तुरंत बसाया जाए और हिरासत में लिए गए युवा नेताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए। विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशासन ने सूझबूझ से काम नहीं लिया और जनता के गुस्से को शांत करने की पहल नहीं की, तो यह जनआक्रोश बालेन शाह की नवनिर्वाचित सरकार के लिए भारी साबित हो सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 11:45 am

अफगानिस्तान के पुनर्वास में भारत की बड़ी पहल, लौट रहे परिवारों के लिए राहत सामग्री और टेंट सौंपे

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के लिए लगातार मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है। मंत्रालय के अनुसार, टेंट की यह खेप ऐसे परिवारों के लिए भेजी गई है जो अपने देश लौटने के बाद रहने की बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।

देशबन्धु 14 Jul 2026 8:55 am

US-Iran War Update: होर्मुज जलडमरूमध्य में भयंकर कोहराम! UAE के तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइल का बड़ा हमला, 1 भारतीय नाविक की मौत, 6 घायल

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Iran War 2026) ने अब एक बेहद खौफनाक और हिंसक मोड़ ले लिया है. पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो बड़े तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा दागी गईं क्रूज मिसाइलों से विनाशकारी हमला किया गया है.इस हाई-प्रोफाइल मिसाइल हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य (नाविक) की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि छह अन्य भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. इस भीषण सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पूरी तरह चरमरा गई है.ओमान के समुद्री क्षेत्र में UAE के टैंकरों को बनाया निशानायूएई के रक्षा मंत्रालय (UAE Ministry of Defence) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह कायरतापूर्ण हमला ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी नौवहन मार्ग से गुजर रहे दो राष्ट्रीय तेल टैंकरों— मोंबासा (Mombasa) और अल बहिया (Al Bahiyah) पर किया गया.ईरान की तरफ से दागी गईं दो हाइपर-सटीक क्रूज मिसाइलें सीधे इन जहाजों से टकराईं, जिसके बाद दोनों टैंकरों पर भीषण आग लग गई और भारी भौतिक नुकसान हुआ. मृत भारतीय नागरिक 'मोंबासा' टैंकर पर तैनात था. जहाज पर मौजूद अन्य क्रू मेंबर्स की मुस्तैदी के कारण आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बहुत बड़ा वैश्विक पर्यावरण और आर्थिक हादसा होने से टल गया.यूएई ने दी कड़ी चेतावनी; भारत से जताई गहरी संवेदनाइस बर्बर हमले की यूएई के विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने कड़े शब्दों में निंदा की है. यूएई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और 'आर्थिक ब्लैकमेलिंग' व समुद्री डकैती करार दिया है. यूएई प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि वह अपनी संप्रभुता, नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए ईरान को इस सैन्य उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है. इसके साथ ही यूएई ने भारत सरकार और पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है.क्यों भड़की होर्मुज में युद्ध की आग? (US Blockade Counter-Attack)यह विनाशकारी हमला उस समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर दोबारा से सख्त समुद्री नाकेबंदी (Naval Blockade) लागू करने का एलान किया था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरान के तटीय निगरानी तंत्र और मिसाइल ठिकानों पर की गई बमबारी के जवाब में ईरान की नौसेना ने इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी थी और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया.ईरान का कहना है कि वे किसी भी बाहरी ताकत को इस जलमार्ग पर नियंत्रण नहीं करने देंगे. इस युद्ध के कारण दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% हिस्सा प्रभावित होने की कगार पर पहुंच चुका है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jul 2026 7:57 am

ब्रिटेन का बड़ा फैसला: आईआरजीसी समेत तीन संगठनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की तैयारी

ब्रिटेन की सरकार ने कहा कि वह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और दो अन्य संगठनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है

देशबन्धु 14 Jul 2026 7:10 am