Denmark की तर्ज पर मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने के लिए प्रकृति के बीच बिताएं कुछ पल
(टॉड लुकिंगबिल, यूनिवर्सिटी ऑफ रिचमंड)रिचमंड (अमेरिका), दो अगस्त (द कन्वरसेशन) आज की कामकाजी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा चारदीवारी के भीतर गुजरता है। घंटों का सफर, लगातार बैठकें और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बीतता दिन- इन सबके बीच प्रकृति के लिए समय निकालना किसी विलासिता जैसा लगने लगता है। कई लोगों को लगता है कि प्रकृति का आनंद तभी मिलता है, जब लंबी छुट्टी लेकर पहाड़ों पर ‘ट्रैकिंग’ की जाए या जंगलों में ‘कैंप’ लगाया जाए। लेकिन अब शोध कुछ और ही कहानी कहते हैं। वे बताते हैं कि प्रकृति का लाभ उठाने के लिए किसी रोमांचक यात्रा पर जाना जरूरी नहीं है। घर या दफ्तर के आसपास मौजूद किसी पार्क या हरियाली के बीच रोज कुछ मिनट बिताना भी तनाव कम करने, मन को शांत रखने और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए काफी हो सकता है। साल 2026 की वसंत ऋतु में मुझे डेनमार्क में शहरी परिदृश्य के बारे में पढ़ाने और उनका अध्ययन करने का अवसर मिला। दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में गिने जाने वाले डेनमार्क से मुझे पहले से ही सुंदर पार्क, खुले आंगनों और साइकिल चलाने के लिए बने रास्तों की उम्मीद थी। वहां यह सब तो मिला ही, लेकिन जिसने सबसे ज्यादा प्रभावित किया, वह यह था कि लोग इन हरित स्थानों का इस्तेमाल अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का स्वाभाविक हिस्सा मानते हैं। ये पार्क केवल छुट्टी बिताने या खास मौकों के लिए सुरक्षित जगहें नहीं थे। लोग यहां दोपहर का भोजन करते, दोस्तों से मिलते, दफ्तर से लौटते समय पैदल गुजरते या कुछ पल शांति से बैठकर सुकून महसूस करते थे। ऐसा लगता था जैसे खुले वातावरण में समय बिताना उनकी दिनचर्या का स्वाभाविक हिस्सा हो। डेनमार्क में यह संस्कृति केवल अच्छी योजना बनाकर बनाए गए उद्यानों की वजह से नहीं बनी, बल्कि इसलिए भी कि वहां हरियाली को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में इस तरह पिरोया गया है कि प्रकृति उनके दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। रोज पार्क जाने से मिलने वाले फायदे :प्रकृति के बीच समय बिताने से स्वास्थ्य को होने वाले लाभों के प्रमाण अब इतने मजबूत हो चुके हैं कि दुनिया के कई देशों की सार्वजनिक नीतियों पर भी उनका असर दिखने लगा है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में नेशनल पार्क सर्विस की ‘हेल्दी पार्क्स हेल्दी पीपल’ और पार्कआरएक्स’ जैसी पहलें इस सोच को बढ़ावा देती हैं कि पार्क तक आसान पहुंच लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। हालांकि, अधिकतर अमेरिकी जब ‘पार्क’ शब्द सुनते हैं, तो उनके मन में सबसे पहले येलोस्टोन, योसेमिटी या ग्रैंड कैन्यन जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों की तस्वीर उभरती है। लेकिन सच यह है कि स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक लाभ उन पार्कों से मिलता है, जहां लोग जीवन में एक बार नहीं, बल्कि बार-बार जा सकें। यानी घर या दफ्तर के पास मौजूद छोटे-छोटे पार्क, हरित क्षेत्र और खुले स्थान कहीं अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं। मेरे अपने शोध ने भी यही बात साबित की। मैंने अमेरिकी गृहयुद्ध के ऐतिहासिक युद्धस्थलों पर विकसित या संरक्षित पार्कों का अध्ययन किया। ये वे स्थान हैं, जिन्हें गृहयुद्ध के ऐतिहासिक युद्धक्षेत्रों की स्मृति में संरक्षित किया गया है। चूंकि इनमें से अधिकांश बड़े शहरों के बाहरी इलाकों में स्थित हैं, इसलिए यहां आज भी जंगल, घास के मैदान और पैदल चलने के रास्ते सुरक्षित हैं। करोड़ों अमेरिकी बिना लंबी यात्रा किए आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। इसी वजह से ये पार्क केवल पर्यटन स्थल नहीं रह जाते, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। कोई दोपहर के भोजन के समय यहां टहलने चला जाता है, तो कोई दफ्तर के बाद कुछ देर सुकून के लिए लौट आता है। यानी यदि हम ‘पार्क’ की अपनी पारंपरिक सोच बदल दें, तो हमें एहसास होगा कि प्रकृति हमारे आसपास पहले से मौजूद है। जरूरत केवल उसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की है। जब प्रकृति कामकाज का हिस्सा बन जाए :मैं जिस रिचमंड विश्वविद्यालय में काम करता हूं, वहां एक छोटी-सी नदी के पुनर्जीवन की परियोजना ने यह सोचने का अवसर दिया कि प्रकृति को विश्वविद्यालय के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा कैसे बनाया जाए। इस परियोजना के तहत एक ‘इको-कोरिडोर’ तैयार किया। इसमें पैदल चलने के रास्ते, लोगों के बैठने और बातचीत करने की जगहें तथा शांत माहौल में कुछ समय बिताने के लिए खुले स्थान विकसित किए गए। आसपास बहती जलधारा और स्थानीय पौधों ने इस पूरे क्षेत्र को प्राकृतिक स्वरूप दिया। इसका फायदा केवल पर्यावरण को ही नहीं मिला। एक ओर इससे जैव विविधता बढ़ी और पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ, वहीं दूसरी ओर छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को बैठकों के बीच टहलने, खुले वातावरण में दोपहर का भोजन करने या कुछ मिनट प्रकृति के बीच सुकून से बिताने की जगह भी मिल गई। इस हरित क्षेत्र की देखभाल भी लोगों की भागीदारी से होती है। स्वयंसेवक पेड़ों के आसपास गीली घास बिछाते हैं, स्थानीय वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाने वाले बाहरी पौधों को हटाते हैं और सामुदायिक उद्यान की देखभाल करते हैं। उनके लिए यह केवल सेवा कार्य नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ने का एक और अवसर बन जाता है। इस अनुभव ने हमें एक महत्वपूर्ण बात सिखायी कि प्रकृति और काम एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। यदि शहरों और परिसरों की योजना सोच-समझकर बनायी जाए, तो खुले वातावरण में कुछ मिनट बिताना भी दिनचर्या का उतना ही सामान्य हिस्सा बन सकता है, जितना किसी बैठक में शामिल होना। प्रकृति के साथ जीने का नजरिया :हरित स्थानों का अच्छा डिजाइन महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन पूरी कहानी सिर्फ इतनी नहीं है। शायद आपने डेनमार्क का प्रसिद्ध शब्द ‘ह्यूगे’ सुना होगा। इसका अर्थ है- आरामदायक, आत्मीय और सुकूनभरा माहौल। लेकिन स्कैंडिनेवियाई देशों में एक और विचार बेहद लोकप्रिय है- ‘फ्रिलुफ्ट्सलिव’। इसका शाब्दिक अर्थ है ‘खुले वातावरण में जीवन जीना’। यह केवल प्रकृति से प्रेम करने का विचार नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है, जो कहता है कि जितना अधिक समय ताजी हवा और प्राकृतिक वातावरण में बिताया जाए, उतना ही बेहतर। शोध भी इस सोच का समर्थन करते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान बर्लिन में रहने वाले 20 और 30 वर्ष की उम्र के अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जो छात्र नियमित रूप से अपने घर के आसपास के पार्कों में जाते थे, उनके सामाजिक संबंध बेहतर बने रहे और उनका मानसिक तथा भावनात्मक स्वास्थ्य भी अधिक अच्छा था। कोपेनहेगन में तो शिक्षकों और मनोचिकित्सकों ने विशेष रूप से विकसित किए गए जंगलों और ‘थेरेपी गार्डन’ को तनाव दूर करने और आत्मचिंतन के स्थान के रूप में अपनाया है। इन स्थानों पर आने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी रफ्तार धीमी करें, आसपास की आवाजों, खुशबुओं और प्राकृतिक दृश्यों को महसूस करें तथा कुछ समय के लिए काम और तकनीक की निरंतर भागदौड़ से खुद को अलग रखें। यही साधारण-से दिखने वाले पार्क तनाव और मानसिक थकान से राहत देने वाले स्थान बन जाते हैं। कम सुविधाओं वाले शहरों में भी दफ्तर जाने से पहले 10-15 मिनट की सैर या दिन खत्म होने पर किसी स्थानीय पार्क में कुछ समय बिताना लगभग वही लाभ दे सकता है। इस बात की पुष्टि 2026 में अमेरिका के नॉर्थ कैरोलाइना के रैले शहर में हुए एक अध्ययन से भी हुई। इसमें पाया गया कि कॉलेज के छात्र केवल 10 मिनट तक पार्क की बेंच पर बैठकर पक्षियों की चहचहाहट सुनने के बाद पहले की तुलना में कम तनावग्रस्त और अधिक तरोताजा महसूस कर रहे थे। प्रकृति को दिनचर्या का हिस्सा बनाने के पांच आसान तरीके :दोपहर का भोजन खुले वातावरण में करें। किसी पार्क की बेंच या पेड़ की छांव में बैठकर खाना खाएं। इससे मन को नया उत्साह मिलता है। हरियाली वाला रास्ता चुनें। यदि संभव हो तो दफ्तर या घर जाते समय पार्क, नदी किनारे या पेड़ों से घिरी सड़क से होकर गुजरें। रोज 10 मिनट का ‘नेचर ब्रेक’ लें। मोबाइल फोन अलग रख दें, धीरे-धीरे चलें और आसपास की आवाजों, रंगों और प्राकृतिक दृश्यों को महसूस करें। चलते-चलते बातचीत करें। बैठक या दोस्तों से मुलाकात कमरे में बैठकर करने के बजाय पार्क या खुले स्थान में टहलते हुए करें। प्रकृति में बार-बार लौटने की वजह खोजें। पक्षी-दर्शन, प्रकृति भ्रमण, वृक्षारोपण या स्वयंसेवी कार्यक्रमों में शामिल हों, ताकि बाहर निकलना आपकी आदत बन जाए। कोपेनहेगन में बिताए गए समय ने प्रकृति के प्रति मेरी सोच बदल दी। वहां के पार्क निस्संदेह बेहद सुंदर थे, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित वहां के लोगों की सोच ने किया। उन्होंने मुझे यह एहसास कराया कि प्रकृति से जुड़ने के लिए हर बार सप्ताहांत की लंबी यात्रा की योजना बनाने की जरूरत नहीं होती। कई बार सुकून और ताजगी हमें अपने घर, दफ्तर या मोहल्ले के आसपास मौजूद उसी हरियाली में मिल सकती है, जिसे हम रोज देखते तो हैं, लेकिन महसूस करने के लिए कभी रुकते नहीं।
बीजिंग Embassy के ओपन हाउस में भारतीय समुदाय ने उठाए वीजा और सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दे
(के जे एम वर्मा)बीजिंग, दो अगस्त चीन में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों ने भारतीय दूतावास के हाल के वर्षों में आयोजित पहले ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम में चीनी सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी अपमानजनक सामग्री, भारतीय पेशेवरों को कार्य वीजा मिलने में गिरावट तथा उनके जीवनसाथियों के रोजगार पर प्रतिबंध सहित कई मुद्दों पर चिंता जतायी। भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को इस जनसंपर्क पहल का आयोजन किया, जिसमें बीजिंग में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर शामिल हुए और समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। भारत के राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने एक अन्य राजनयिक (दूतावास, शिक्षा एवं सामुदायिक मामलों) नितिनजीत सिंह तथा दूसरे राजनयिक (वीजा) रमेश सिंह के साथ भारतीय समुदाय के सदस्यों से विभिन्न विषयों पर बातचीत की। बैठक के दौरान जिन प्रमुख चिंताओं को उठाया गया, उनमें चीनी सोशल मीडिया मंचों पर भारतीयों, उनके खान-पान और संस्कृति के खिलाफ बढ़ती अपमानजनक सामग्री, भारतीय पेशेवरों को जारी किए जाने वाले कार्य वीजा की संख्या में कमी, उनके जीवनसाथियों के रोजगार पर प्रतिबंध तथा दूतावास संबंधी सेवाओं से जुड़ी कठिनाइयां शामिल थीं। मई में चीन में भारत के राजदूत का पद संभालने वाले दुरईस्वामी ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयासों के तहत उन्होंने चीनी अधिकारियों के साथ संपर्क बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह से भारतीय दूतावास भारतीय वीजा के लिए आवेदन करने वाले चीनी नागरिकों के लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया को और सरल बनाएगा, ताकि भारत की यात्रा को बढ़ावा दिया जा सके। चीनी सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी और अपमानजनक सामग्री को लेकर जताई गई चिंताओं के जवाब में दुरईस्वामी ने कहा कि चीनी सरकार भी इस तरह की सामग्री में बढ़ोतरी को लेकर चिंतित है और इससे निपटने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास भी अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से तथ्य-आधारित जानकारी साझा कर भ्रामक सूचनाओं का जवाब दे रहा है। राजदूत ने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति और व्यंजनों की विविधता को प्रदर्शित करने के लिए दूतावास वसंत मेला जैसे वार्षिक कार्यक्रमों को मिली व्यापक प्रतिक्रिया के आधार पर और अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि दूतावास कार्यस्थल से जुड़े विवादों या समस्याओं का सामना कर रहे भारतीयों की सहायता के लिए कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक व्यवस्था विकसित करने पर भी काम कर रहा है। दुरईस्वामी ने कहा कि भारतीय समुदाय को बेहतर दूतावास संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए दूतावास समय-समय पर ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम आयोजित करेगा।
अमेरिका में बर्गर पार्टी के दौरान अंधाधुंध फायरिंग, दिल दहला देने वाली घटना में 3 लोगों की मौत
अमेरिका में गन कल्चर और हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, और एक बार फिर देश में हुई गोलीबारी की एक खौफनाक वारदात ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका में एक मामूली सी बर्गर पार्टी के दौरान अचानक उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब कुछ अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस अचानक हुए खूनी संघर्ष और अंधाधुंध गोलीबारी में तीन बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस सनसनीखेज घटना के बाद से स्थानीय इलाकों में भारी दहशत का माहौल है और पुलिस-प्रशासन हरकत में आ गया है।पार्टी की खुशियां पलभर में मातम में बदलींमिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना उस समय घटी जब लोग एक जगह इकट्ठा होकर बर्गर पार्टी का आनंद ले रहे थे और आपसी माहौल पूरी तरह खुशनुमा था। अचानक हुई इस हिंसक वारदात ने पलभर में सारी खुशियों को मातम में बदल दिया और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। चश्मदीदों के मुताबिक हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिससे वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों और आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।सुरक्षा व्यवस्था और गन वायलेंस पर उठे गंभीर सवालइस दर्दनाक गोलीबारी की घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर अमेरिका में खुलेआम मिलने वाले हथियारों और बढ़ते गन कल्चर पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन और सरकार की नीतियों की आलोचना हो रही है क्योंकि इस तरह की मास शूटिंग की घटनाएं देश में आम होती जा रही हैं। पुलिस फिलहाल इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और हमलावरों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि इस खौफनाक वारदात के पीछे की असली वजह का खुलासा हो सके।
दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने ग्लोबल डिफेंस एक्सपर्ट्स के भी होश उड़ा दिए हैं। ईरान के साथ कथित तौर पर चली पांच महीने लंबी लंबी और भीषण जंग ने अमेरिकी सेना की पोल खोलकर रख दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि लंबे संघर्षों से निपटने की उसकी ताकत और सैन्य क्षमता अंदर से कितनी खोखली हो चुकी है। इस जंग के बाद अमेरिकी रक्षा तंत्र की कमियां दुनिया के सामने खुलकर आ गई हैं, जिसे आठ मुख्य बिंदुओं के जरिए बेहद आसानी से समझा जा सकता है।मिलिट्री पावर और साजो-सामान का भारी संकटइस पूरे घटनाक्रम और जंग के दौरान सबसे बड़ा पहलू यह सामने आया है कि लगातार चलने वाले युद्धों के कारण अमेरिका के आधुनिक हथियारों और मिसाइलों के भंडार में भारी कमी आ गई है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान के उत्पादन की रफ्तार उस गति से नहीं हो पा रही है जितनी तेजी से जंग में उनका इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा, युद्ध के लंबे खिंचने से अमेरिकी रक्षा बजट पर भी अत्यधिक दबाव पड़ा है, जिससे देश के भीतर आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।महाशक्ति की रणनीतिक विफलताओं का सचईरान के साथ हुए इस लंबे गतिरोध ने अमेरिकी रणनीति की कमजोरियों को भी जगजाहिर कर दिया है, जहां लंबे समय तक चलने वाले पारंपरिक या क्षेत्रीय संघर्षों से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तैयार नहीं दिखती। इस जंग ने यह साबित कर दिया है कि केवल अत्याधुनिक तकनीक के भरोसे किसी लंबी और जटिल लड़ाई को आसानी से नहीं जीता जा सकता, बल्कि इसके लिए मजबूत जमीनी समर्थन और अटूट सप्लाई चेन की भी जरूरत होती है। इस पूरी रिपोर्ट ने वैश्विक पटल पर अमेरिका के अजेय होने के उस पुराने दावे को तगड़ा झटका दिया है जिस पर अब दुनियाभर में गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
उत्तर-पश्चिमी अमेरिकी राज्य इडाहो के ट्विन फॉल्स में एक इन-एन-आउट रेस्टोरेंट के इलाके में शनिवार को गोलीबारी की घटना सामने आई। इस गोलीबारी में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और कम से कम दो अन्य घायल हो गए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान ग्लास्गो के एक भारतीय रेस्त्रां में भारत का अधूरा नक्शा छपे नैपकिन परोसे जाने से विवाद खड़ा हो गया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा एथलीट सोमन राणा ने पुरुष एफ57 शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। भारतीय सेना में ड्यूटी के दौरान एक पैर गंवाने वाले सोमन ने बताया कि चुनौतियों से भरे सफर, परिवार और सेना के सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
काठमांडू: दुनिया के सबसे साहसी और विश्व रिकॉर्ड धारक नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (Nirmal Purja), जिन्हें लोग प्यार से 'निम्सदाई' कहते थे, का पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी 'ब्रॉड पीक' (Broad Peak) पर हुए भयंकर हिमस्खलन (Avalanche) में निधन हो गया। इस दुखद हादसे में उनके साथी गाइड पुर बहादुर गुरुंग और निमा शेरपा समेत अभियान दल में शामिल अन्य सदस्यों की भी जान चली गई है।शुक्रवार को ब्रॉड पीक के सामान्य वेस्ट रिज मार्ग पर करीब 21,600 से 21,850 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर यह दर्दनाक हादसा हुआ, जहां अचानक बर्फ का एक बड़ा हिस्सा (हिमस्खलन) खिसककर नीचे आ गया। हादसे के बाद लगातार कई घंटों तक चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उनकी एडवेंचर कंपनी 'एलीट एक्सपेड' (Elite Exped) ने आधिकारिक तौर पर उनके निधन की पुष्टि की है। हादसे से महज कुछ घंटे पहले निर्मल पुर्जा ने भारतीय पत्रकार को अपना आखिरी वॉयस मैसेज भी भेजा था।एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने दी भावुक श्रद्धांजलि: 'दुनिया ने खो दिया अपना सबसे महान हीरो'निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी 'एलीट एक्सपेड' ने सोशल मीडिया पर इस खबर को साझा करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया। कंपनी ने लिखा:दुनिया ने आज पर्वतारोहण इतिहास के सबसे महान और साहसी हीरोज में से एक को खो दिया है। निर्मल पुर्जा केवल एक पर्वतारोही नहीं थे, बल्कि वह लाखों लोगों के लिए यह साबित करने वाली एक मिसाल थे कि इंसान अपनी सोच से कहीं अधिक बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। उनकी विरासत, उनकी दूरदृष्टि और उनका निम्सदाई फाउंडेशन हमेशा दुनिया भर के लोगों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देता रहेगा।कंपनी ने लोगों से इस बेहद कठिन और दुखद घड़ी में दिवंगत पर्वतारोहियों के शोक संतप्त परिवारों की निजता (Privacy) का सम्मान करने की अपील भी की है।ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेस से विश्व रिकॉर्ड तक: निर्मल पुर्जा का ऐतिहासिक सफरनिर्मल पुर्जा का जीवन साहस और नामुमकिन को मुमकिन बनाने की कहानियों से भरा रहा है:सैन्य पृष्ठभूमि: पर्वतारोहण में नया इतिहास रचने से पहले निर्मल पुर्जा ने ब्रिटेन की 'ब्रिगेड ऑफ गोरखा' और रॉयल मरीन की एलीट कमांडो यूनिट 'स्पेशल बोट सर्विस' (SBS) में कई सालों तक अपनी सेवाएं दी थीं।6 महीने में 14 चोटियां (प्रोजेक्ट पॉसिबल): साल 2019 में उन्होंने अपने बहुचर्चित 'प्रोजेक्ट पॉसिबल' के तहत दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 सबसे खतरनाक चोटियों को मात्र 6 महीने और 6 दिन (189 दिन) में फतह करके एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड बनाया जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। इस अदम्य साहस पर नेटफ्लिक्स की प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री '14 Peaks: Nothing Is Impossible' भी बन चुकी है।के-2 (K2) पर विंटर फतह: इसके अलावा वर्ष 2021 में वह उन 10 नेपाली पर्वतारोहियों की उस ऐतिहासिक टीम के मुख्य सदस्य थे, जिसने पहली बार कड़ाके की सर्दियों के मौसम में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची और खतरनाक चोटी के-2 (K2) पर फतह हासिल की थी।
क्रैश हो गया पर्यटकों को ले जा रहा विमान, पायलट सहित सभी यात्रियों की मौत
यूरोपीय पर्यटकों को लेकर पेरू जा रहा एक विमान क्रैश हो गया जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। इसमें दो पायलट के अलावा 11 पर्यटक सवार थे। विमान में इटली के सात पर्यटक सवार थे।
स्वर्ण पदक विजेता अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने अपनी जीत का राज आत्मविश्वास बताया, जबकि लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने रजत जीतने के बाद एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने का लक्ष्य रखा।
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरान को तबाह करने और भीषण हमलों की चेतावनी देने के बाद, अमेरिकी प्रशासन ने फिलहाल तेहरान पर नए सिरे से प्रत्यक्ष सैन्य हमले (Airstrikes) करने से कदम पीछे खींच लिए हैं। हालिया घटनाक्रम में सऊदी अरब और खाड़ी देशों से मिली राजनयिक चेतावनियों तथा जारी कूटनीतिक बातचीत के बीच वॉशिंगटन ने हमलों पर रोक लगाने का संकेत दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर वे कौन-से मुख्य कारण हैं, जिनके चलते ट्रंप प्रशासन को ईरान पर सैन्य कार्रवाई का मन बदलना पड़ा।1. खाड़ी देशों की चिंता और सऊदी क्राउन प्रिंस का हस्तक्षेपट्रंप के फैसले में बदलाव का सबसे मुख्य कारण खाड़ी सहयोगी देशों का बढ़ता दबाव माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से फोन पर सीधी बातचीत कर तनाव कम करने (De-escalate) की अपील की। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को डर है कि यदि अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा या इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा हमला किया, तो जवाब में ईरान खाड़ी देशों के तेल रिफाइनरी और बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकता है, जिससे पूरा क्षेत्र संकट में आ जाएगा।2. होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) और वैश्विक ऊर्जा संकटदुनिया का एक-पांचवां (20%) कच्चा तेल 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर कड़ा नियंत्रण बना लिया है और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए हैं। यदि अमेरिका सीधे हमले तेज करता, तो ईरान इस पूरे रूट को पूरी तरह ब्लॉक कर सकता था, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छूने लगतीं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ता।3. बैकचैनल कूटनीति और वार्ता की संभावनाट्रंप ने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि यदि ईरान शांति समझौते की शर्तों को मानने और व्यापारिक समुद्री रास्तों को खोलने पर सहमत होता है, तो अमेरिका हमलों को रोक सकता है। पाकिस्तान और अन्य मध्यस्थ देश अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल कूटनीति (Backchannel Diplomacy) के जरिए एक कार्ययोग्य (Workable) समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।4. अमेरिकी कांग्रेस का राजनीतिक दबाव और युद्ध खर्चअमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में लगातार युद्ध शक्तियों को सीमित करने (War Powers Resolution) पर वोटिंग और बहस हो रही है। इसके साथ ही पेंटागन द्वारा अतिरिक्त अरबों डॉलर के बजट की मांग और आगामी अमेरिकी चुनावों को ध्यान में रखते हुए, अमेरिकी जनता के बीच लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है।5. क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी बेस पर खतरे का डरइराक, सीरिया और कुवैत जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान समर्थित गुटों द्वारा लगातार ड्रोन और मिसाइल दागे जा रहे हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि सीधे युद्ध में उतरने से मध्य पूर्व में मौजूद हजारों अमेरिकी सैनिकों और अमेरिकी दूतावासों पर बड़ा खतरा पैदा हो जाता।
अमेरिका के रेस्टोरेंट में अंधाधुंध फायरिंग, 3 लोगों की मौत, 7 घायल, हमलावर भी ढेर
अमेरिका के इडाहो स्थित एक रेस्टोरेंट में फायरिंग की घटना में तीन लोगों की मौत और सात लोगों के घायल होने की खबर है। जानकारी के मुताबिक सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्रवाई में हमलावर भी मारा गया।
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें बधाई दी।
US Mass Shooting: अमेरिका के इडाहो में ‘इन-एन-आउट’ बर्गर रेस्टोरेंट में अंधाधुंध गोलीबारी
संयुक्त राज्य अमेरिका में गन कल्चर का खौफनाक चेहरा एक बार फिर सामने आया है। इस बार दक्षिणी इडाहो (Idaho) राज्य का शांत रहने वाला शहर 'ट्विन फॉल्स' (Twin Falls) गोलियों की गूंज से कांप उठा। शनिवार शाम लगभग 4 बजे, जब लोग एक व्यस्त शॉपिंग इलाके के पास स्थित मशहूर 'इन-एन-आउट बर्गर' (In-N-Out Burger) रेस्टोरेंट में अपने परिवार और दोस्तों के साथ मौजूद थे, तभी अचानक एक सिरफिरे बंदूकधारी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बर्गर का स्वाद ले रहे मासूम लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही रेस्टोरेंट के भीतर और बाहर गोलियों की तड़तड़ाहट से चीख-पुकार मच गई। वारदात के समय इलाका काफी व्यस्त था, जिसके चलते वहां अफरातफरी और भगदड़ जैसा माहौल बन गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए टेबल और कुर्सियों के पीछे छिपने लगे।पुलिस चीफ का बड़ा बयान: हमलावर मारा गया, फिलहाल लोगों के लिए टला खतराघटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। ट्विन फॉल्स के पुलिस चीफ मैथ्यू हिक्स (Matthew Hicks) ने एक त्वरित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्थिति की जानकारी दी। पुलिस चीफ हिक्स ने बताया कि घटना के समय मौके पर बेहद खौफनाक और अफरातफरी का माहौल था। हालांकि, सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से स्थिति पर काबू पा लिया गया है। उन्होंने पुष्टि की कि हमलावर भी मरने वाले लोगों में शामिल है। हिक्स ने शहरवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा, हमें पूरा विश्वास है कि अब आम लोगों के लिए तत्काल कोई खतरा नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि हताहतों की सटीक संख्या और पहचान की पुष्टि की जा रही है तथा पुलिस अधिकारी संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों के परिवारों को सूचित करने की प्रक्रिया में जुटे हैं।सड़कों की नाकेबंदी और आपातकालीन अलर्ट: सेंट ल्यूक मैजिक वैली अस्पताल में हड़कंपगोलीबारी के तुरंत बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया। ट्विन फॉल्स काउंटी के कमिश्नर ब्रेंट रेनके (Brent Reinke), जो इडाहो डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शंस के पूर्व प्रमुख भी रह चुके हैं, ने बताया कि उन्हें शाम 4 बजे से ठीक पहले इस एक्टिव शूटर घटना की जानकारी मिली थी। शुरुआती दौर में ही कम से कम पांच लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर आई थी। सुरक्षा के मद्देनजर ट्विन फॉल्स पुलिस ने रेस्टोरेंट की ओर जाने वाली सभी प्रमुख सड़कों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया और आम जनता से इस व्यस्त वाणिज्यिक क्षेत्र से दूर रहने की अपील की। वहीं, पास स्थित 'सेंट ल्यूक मैजिक वैली' (St. Luke's Magic Valley) मेडिकल सेंटर के प्रवक्ता टेलर मार्शनर ने बताया कि अस्पताल का इमरजेंसी स्टाफ घायलों के त्वरित इलाज के लिए पुलिस और रिस्पॉन्स टीमों के साथ मिलकर चौबीसों घंटे काम कर रहा है।एफ़बीआई (FBI) संभालेगी जांच की कमान: हमलावर की पहचान और मकसद तलाश रहे अधिकारीइस बड़े हमले के पीछे की साजिश और हमलावर के इरादों को खंगालने के लिए अब अमेरिकी जांच एजेंसी एफ़बीआई (FBI) मैदान में उतर चुकी है। पुलिस चीफ मैथ्यू हिक्स ने जानकारी दी कि स्थानीय पुलिस की मदद के लिए एफ़बीआई की स्पेशल यूनिट्स पहुंच गई हैं। फॉरेंसिक टीमें और बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स रेस्टोरेंट परिसर से साक्ष्य जुटा रहे हैं। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावर अकेले इस वारदात को अंजाम देने आया था या उसका कोई मददगार भी था। इसके अलावा, हमलावर के पास से मिले हथियारों के लाइसेंस, उसके सोशल मीडिया बैकग्राउंड और हमले के पीछे के मुख्य कारण की गहनता से पड़ताल की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि यह कोई नफरती अपराध (Hate Crime) था या फिर किसी व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा।नेवादा बॉर्डर के पास बसा शांत शहर ट्विन फॉल्स: सीनेटर माइक क्रैपो ने जताया दुख और की यह अपीललगभग 56,000 की आबादी वाला ट्विन फॉल्स शहर इडाहो की राजधानी बोइस (Boise) से दक्षिण-पूर्व में लगभग 205 किलोमीटर और नेवादा (Nevada) राज्य की सीमा से उत्तर में करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित है। आमतौर पर शांत माने जाने वाले इस शहर में हुई इस हिंसक घटना से पूरा अमेरिका स्तब्ध है। इडाहो के रिपब्लिकन सीनेटर माइक क्रैपो (Mike Crapo) ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, मैं ट्विन फॉल्स से आ रही एक्टिव शूटर से जुड़ी हर पल की जानकारी पर सीधी नजर रख रहा हूं। सीनेटर ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और प्रभावित क्षेत्र की तरफ जाने से बचें। इस वारदात ने एक बार फिर अमेरिका में गन वायलेंस और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
दक्षिण अमेरिकी देश पेरू से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। प्रसिद्ध और ऐतिहासिक 'नाज्का लाइन्स' (Nazca Lines) का विहंगम दृश्य देखने के लिए पर्यटकों को लेकर उड़ा एक छोटा विमान अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नाज्का शहर के बाहरी इलाके में हुए इस खौफनाक प्लेन क्रैश में विमान में सवार सभी 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। खूबसूरत नजारों को अपनी आंखों में कैद करने निकले पर्यटकों के लिए यह सफर जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ। नाज्का की नगर सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए इस दुखद घटना की पुष्टि की है। शनिवार को हुए इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम छा गया है और स्थानीय प्रशासन राहत व जांच कार्यों में जुट गया है।उड़ान भरते ही एटीसी से टूटा संपर्क: मलबे से उठता दिखा धुआंस्थानीय अधिकारियों द्वारा साझा की गई प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण फ्लाइट पास के शहर इका और पिस्को एयरपोर्ट (Pisco Airport) से रवाना हुई थी। विमान ने नाज्का लाइन्स के ऊपर से हवाई सैर कराने के लिए उड़ान भरी थी। लेकिन उड़ान भरने के महज कुछ ही मिनटों बाद विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और कंट्रोल टावर से संपर्क पूरी तरह से टूट गया। संपर्क कटते ही इमरजेंसी एजेंसियां सतर्क हुईं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ अपुष्ट वीडियो में एक सूखे मैदानी इलाके में विमान का जलता और धुआं फेंकता हुआ मलबा बिखरा हुआ नजर आ रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटनास्थल का दृश्य बेहद भयावह बताया जा रहा है।कौन सी थी एयरलाइन और कितना सुरक्षित था यह विमान?हादसे का शिकार हुआ विमान पेरू की जानी-मानी एयरलाइन कंपनी 'एरोडियाना' (Aerodiana) का था। एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कंपनी पिछले 14 सालों से सेसना ग्रैंड कारवां (Cessna Grand Caravan) जैसे भरोसेमंद और दर्शनीय उड़ानों (Scenic Flights) के लिए इस्तेमाल होने वाले विमानों का संचालन कर रही है। यह विमान खासतौर पर पर्यटकों को नाज्का लाइन्स की आकृतियां हवा से दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। हादसे के तुरंत बाद जब इस विषय पर एरोडियाना एयरलाइन प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनकी तरफ से तत्काल कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी उपलब्ध नहीं हो सकी। विमान में सवार यात्री किन-किन देशों के नागरिक थे, इसकी आधिकारिक सूची भी अभी जुटाई जा रही है।क्या है नाज्का लाइन्स का रहस्य और क्यों हर साल आते हैं लाखों पर्यटक?जिस जगह पर यह हादसा हुआ, वह दुनिया के सबसे रहस्यमयी और प्राचीन पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है। 'नाज्का लाइन्स' यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल एक ऐतिहासिक स्थल है। यह पेरू के विशाल रेगिस्तान की सतह पर बनी विशालकाय आकृतियों (जियो-ग्लिफ्स) का एक अद्भुत समूह है। इन विशाल आकृतियों को सैकड़ों साल पहले पेरू के मूल निवासियों द्वारा बनाया गया था। इन जमीनी रेखाओं से विभिन्न प्रकार के जानवरों, पौधों और काल्पनिक आकारों की आकृतियां बनती हैं। सबसे खास बात यह है कि इन आकृतियों की विशालता के कारण इन्हें जमीन पर खड़े होकर पूरी तरह नहीं देखा जा सकता; इन्हें देखने का एकमात्र जरिया हवाई जहाज या फिर बहुत ऊंचे व्यूइंग टावर ही हैं। इसी वजह से दुनिया भर से हर साल लगभग 1,00,000 (एक लाख) पर्यटक इस अनूठे नजारे का आनंद लेने के लिए पेरू आते हैं और इनमें से अधिकांश लोग छोटे विमानों के जरिए ही साइडसीइंग करते हैं।क्या खराब मौसम और कम विजिबिलिटी बनी हादसे का कारण?हालांकि पेरू के नागरिक उड्डयन अधिकारियों ने अभी तक दुर्घटना की सटीक वजह का खुलासा नहीं किया है और विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन प्राथमिक रिपोर्टों में मौसम की खराबी की ओर इशारा किया जा रहा है। दुर्घटना से ठीक एक दिन पहले, पास में स्थित 'मारिया रीचे एयरपोर्ट' (Maria Reiche Airport) से चलने वाली सभी साइटसीइंग उड़ानों को सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह रोक दिया गया था। उस समय इलाके में 40 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक तेज रफ्तार से धूल भरी हवाएं चल रही थीं, जिससे हवा में धूल का गुबार फैल गया था और विजिबिलिटी (दृश्यता) न के बराबर रह गई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उस दौरान खराब मौसम के कारण पर्यटकों से भरे दो अन्य विमानों को सुरक्षित लैंडिंग के लिए 'मार्कोना एयरपोर्ट' (Marcona Airport) की तरफ डायवर्ट करना पड़ा था। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या अचानक बदले मौसम और हवा के झोंकों ने इस विमान का संतुलन बिगाड़ दिया।जांच की प्रक्रिया शुरू: सुरक्षा मानकों पर उठ रहे सवालघटना के बाद पेरू के विमानन सुरक्षा बोर्ड और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच दल इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी आई थी या फिर हवा के दबाव और कम विजिबिलिटी के कारण पायलट का विमान पर से नियंत्रण छूट गया। इसके साथ ही, एयरलाइन 'एरोडियाना' के मेंटेनेंस रिकॉर्ड्स और फ्लाइट डेटा की भी जांच की जाएगी। इस भयावह हादसे ने एक बार फिर छोटे साइडसीइंग विमानों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिकूल मौसम में उड़ान की अनुमति देने के नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि ब्लैक बॉक्स और मलबे के फोरेंसिक विश्लेषण के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पूरा सच सामने आ सकेगा।
ईरान ने नरमी को कमजोरी समझा, पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाना अमेरिका की रणनीतिक भूल
इतिहास बार-बार सिद्ध करता है कि किसी भी युद्ध का परिणाम केवल सैन्य शक्ति से तय नहीं होता। निर्णायक भूमिका निभाती है राजनीतिक इच्छाशक्ति, रणनीतिक स्पष्टता और यह विश्वास दिलाने की क्षमता कि घोषित राष्ट्रीय लक्ष्य किसी भी परिस्थिति में नहीं बदलेंगे। जब कोई महाशक्ति एक दिन कठोर संदेश देती है और दूसरे दिन समझौते […]
US-ईरान जंग खत्म होने के करीब? ट्रंप बोले- खाड़ी देशों के कहने पर टाले हमले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि मध्य पूर्व के देशों और ईरान के अनुरोध पर उन्होंने अमेरिका के नए हमलों को फिलहाल टाल दिया है. ट्रंप के अनुसार, एक समझौते के मापदंड तय हो चुके हैं, जिसमें होर्मुज को खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल है.
भविष्य के युद्ध: 50 स्वार्म ड्रोन्स का ग्रिड रखेगा दुश्मनों पर नजर,DRDO बनाएगा स्वदेशी ड्रोन; कैसी होगी ताकत?
ट्रंप ने द्वितीय विश्वयुद्ध जैसी धमकी देकर ईरान पर हमला रोका, रखी ये खास शर्त
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले बड़े सैन्य हमले को अभी के लिए रोकने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि ईरान और मध्य पूर्व के कुछ देशों के अनुरोध पर यह कदम उठाया गया है, क्योंकि एक समझौते की उम्मीद बन रही है। ट्रंप ने अपनी ट्रूथ सोशल पोस्ट में पूरी […]
शोध के नतीजों ने चौंकाया: घंटों रील्स देखने की आदत सोचने-समझने की क्षमता छीन रही, शार्ट वीडियो से भी तनाव
'पाकिस्तान बिकता नहीं, किराए पर चलता है': रिपोर्ट में बड़ा दावा, क्या अमेरिका को उल्लू बना रहा PAK?
'पाकिस्तान बिकता नहीं, किराए पर चलता है': रिपोर्ट में बड़ा दावा, क्या अमेरिका को उल्लू बना रहा पाकिस्तान? pakistan us report terrorism strategy national interest imf world bank china cpec
ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पूरी तरह खुलेगा, डोनाल्ड ट्रंप ने दी जानकारी
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि अमेरिका के साथ समझौते में इजरायल भी शामिल है। उन्होंने लिखा कि जल्द ही मिडिल ईस्ट में शांति होगी। ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलेगा और न्यूक्लियर बम नहीं बनाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने कैंसल कर दिया ईरान पर बड़े हमले का प्लान, दोस्त ने ही खींच लिए थे हाथ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़ा हमला करने की अपनी योजना टाल दी है। इससे पहले सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने भी वाइट हाउस से ईरान से युद्ध ना बढ़ाने की अपील की थी।
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
युद्धपोत कम, मिसाइलें घटीं: शीर्ष जनरल की पेंटागन को चेतावनी, इस्राइल को ईरानी हमले से बचा पाएगा अमेरिका?
रूस की राजधानी मॉस्को में एक रेस्टोरेंट के पास ब्लास्ट
मॉस्को के कुद्रिंस्काया स्क्वायर स्थित एक इटैलियन रेस्टोरेंट के पास शनिवार शाम भीषण विस्फोट हुआ। इस हादसे में 3 लोगों की मौत और 21 लोग घायल हो गए। खुलासा हुआ कि एक महिला के पास मौजूद होममेड बम फटने से धमाका हुआ।
'वर्दी उतारकर आओ, हैसियत पता चल चलेगी' POK में पाकिस्तान सेना का जमकर विरोध
पीओके में पाकिस्तान की सेना का विरोध लगातार जारी है। JAAC के नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी फौजी अधिकारियों को चुनौती दी है कि अगर उन्हें अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है, तो फौज छोड़कर जनता के बीच में आना चाहिए।
ईरान युद्ध खत्म!: ट्रंप का दावा- पश्चिम एशियाई देशों के बीच लड़ाई खत्म करने पर बनी सहमति, नए हमले भी रोके
Moscow Restaurant Blast: मॉस्को के रेस्तरां में बम धमाका, विस्फोटक ले जा रही महिला समेत तीन की मौत; कई घायल moscow-restaurant-blast-many-killed-several-injured-investigation-underway in russia
पीओके चुनावों को लेकर पश्चिमी देशों के रुख पर क्यों उठे सवाल?: रिपोर्ट में दावा- PAK को मिल रही रणनीतिक छूट questions-raised-over-selective-outrage-on-to-alleged-irregularities-in-pok-assembly-elections
पत्थरों पर लिखे विचार और हवा में बहता दर्शन... कहानी सिटी ऑफ फिलॉसफर्स की!
जब भी हम अपनी भागमभाग वाली जिंदगी से थक जाते हैं, अक्सर सोचते हैं कि काश कोई ऐसी जगह हो जहां चारों ओर नीरव शांति हो, मन में विचारों की निर्बाध नदी हो और एक ऐसा प्राकृतिक नजारा हो जहां जीवन में मौलिकता के अलावा कुछ और न हो. तो हां, इस धरती पर ऐसी जगहें हैं जहां सिर्फ फिलॉसफी पलती है और जिंदगी को खुद से करीब से जोड़ती भी है. आइए, चलते हैं सिटी ऑफ फिलॉसफर्स के एक बेहद दिलचस्प सफर पर.
ट्रंप के प्लान से चौकन्ना हुए सऊदी प्रिंस, अचानक लगाया फोन
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की संभावित बड़ी कार्रवाई पर चिंता जताई.
ग्रीनलैंड से एलियन तक... ट्रंप के AI पोस्ट के क्या मायने?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर कुछ पोस्ट किए हैं. इसमें ईरानी जहाजों से लेकर ग्रीनलैंड और एलियन तक देखे जा सकते हैं. इस पोस्ट के असली मायने क्या हैं आइए इसपर चर्चा करते हैं.
कतर ईरान से भी खतरनाक : नफ़ताली बेनेट का बड़ा बयान
इज़रायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ़ताली बेनेट ने कतर को ईरान से भी ज़्यादा खतरनाक बताते हुए उसे यहूदी देश के अस्तित्व के लिए एक और संभावित खतरा करार दिया है
Pakistan Rain Floods: मूसलाधार बारिश से पाकिस्तान बेहाल, रावलपिंडी-पेशावर में बाढ़ और बांध टूटने से तबाही
West Asia Tension LIVE: क्या आज रात हमले करेगी अमेरिकी सेना? US के नागरिकों को पश्चिम एशिया छोड़ने का फरमान
पेरू में विमान हादसा : नाज्का में 13 पर्यटकों की मौत
पेरू के दक्षिणी इलाके नाज्का में शनिवार को एक पर्यटक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी 13 लोगों की मौत हो गई
ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका, अपने नागरिकों से कहा- 'मिडिल ईस्ट छोड़ने के लिए तैयार रहें'
अमेरिका ने एडवाइजरी में कहा है कि मिडिल ईस्ट में कई एयरलाइंस अपनी फ्लाइट्स कैंसिल कर सकती हैं। ऐसे में अमेरिकी नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने के बारे में विचार करना चाहिए या इसके लिए तैयार रहना चाहिए।
Iraq और तुर्किये ने पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात बढ़ाने के समझौते पर किए हस्ताक्षर
बगदाद, एक अगस्त (एपी) इराक और तुर्किये ने शनिवार को तुर्किये के भूमध्यसागरीय बंदरगाह ‘सीहान’ तक जाने वाली पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इराक अपने तेल निर्यात मार्गों में विविधता लाना चाहता है और खाड़ी के समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करना चाहता है। इराक के तेल मंत्री बासिम मोहम्मद खुदैर अल-अबादी ने एक बयान में कहा कि यह समझौता एक साल तक लागू रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनों देश तेल, बिजली और जल संसाधन क्षेत्रों में सहयोग को लेकर एक व्यापक समझौते को अंतिम रूप देंगे। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब इराक अपने तेल निर्यात के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल भेजने में आई बाधाओं के बाद इराक ने यह कदम उठाया है। अल-अबादी ने कहा कि इस समझौते के तहत पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन कम से कम 7,50,000 बैरल इराकी कच्चे तेल का निर्यात किया जाएगा। यह पाइपलाइन उत्तरी इराक के किरकुक से तुर्किये के सीहान तक जाती है।
Broad Peak हिमस्खलन में निर्मल पुर्जा सहित 10 पर्वतारोहियों की मौत
(एम. जुल्करनैन/ शिरीष बी. प्रधान)काठमांडू/लाहौर, एक अगस्त दिग्गज नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल पुर्जा समेत 10 पर्वतारोहियों की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थित ‘ब्रॉड पीक’ पर हुए हिमस्खलन में मौत हो गई। पुर्जा की अभियान कंपनी ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुर्जा (43) के अलावा पांच नेपाली और पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन के एक पर्वतारोही समेत कुल 10 पर्वतारोही बृहस्पतिवार को लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ब्रॉड पीक पर आए हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे। ब्रॉड पीक काराकोरम पर्वत श्रृंखला में के2 के पास स्थित है। पुर्जा की मौत की पुष्टि शनिवार को उनकी अभियान कंपनी ‘एलीट एक्सपेड’ द्वारा जारी बयान में की गई। कंपनी ने कहा कि अभियान का कोई भी सदस्य हिमस्खलन से जीवित नहीं बचा। ‘एलीड एक्सपेड’ ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा, “बहुत दुख और गहरे सदमे के साथ हम पुष्टि करते हैं कि निर्मल निम्सदाई पुर्जा की ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन के बाद मौत हो गई।”बयान में कहा गया है, “हमें यह भी बताया गया है कि अभियान में शामिल अन्य सदस्य भी जीवित नहीं बच सके।”कंपनी ने कहा, “आज हम केवल निम्स को ही नहीं, बल्कि इस त्रासदी में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति को याद कर रहे हैं, जिनमें उनके साथी पर्वतारोही और गाइड पुर बहादुर गुरूंग (युक्ता) और निमा शेरपा भी शामिल हैं।”कंपनी ने कहा, “दुनिया ने पर्वतारोहण के सबसे महान पर्वतारोहियों में से एक को खो दिया है; एक ऐसे शख्स को खो दिया है, जिन्होंने अपने साहस, विनम्रता और इस अटूट विश्वास से लाखों लोगों को प्रेरित किया कि मनुष्य की क्षमता हमारी सोच से कहीं अधिक है।”पाकिस्तान के अल्पाइन क्लब (एसीपी) के अध्यक्ष मेजर जनरल इरफान अरशद के अनुसार, शुक्रवार को 10 शवों में से चार बरामद किए गए थे, जिनमें से तीन की पहचान ओमान की नधीरा अहमद अब्दुल्ला अल हरथी, नेपाल के पुर बहादुर गुरूंग और अमेरिका की मैलोरी गीस के रूप में हुई। उन्होंने बताया कि शवों को स्कर्दू ले जाया गया। शनिवार को किस्तान सरकार ने कहा कि वह बाकी पर्वतारोहियों के शवों को खोजने के अभियान के पूरा होने तक हर संभव सहायता जारी रखेगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक बयान में कहा, “पाकिस्तान ब्रॉड पीक पर्वतारोहण दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त करता है और नेपाल के लोगों के दुख में उनके साथ खड़ा है।”सनाउल्लाह ने कहा कि हिमस्खलन के तुरंत बाद पाकिस्तान ने खोज और बचाव अभियान को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि बेहद खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों के बावजूद खोज अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि अभियान पूरा होने तक पाकिस्तान हर संभव सहायता देता रहेगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भी पुर्जा और पांच अन्य नेपाली पर्वतारोहियों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “निर्मल पुर्जा और अन्य दिवंगत पर्वतारोहियों की केवल शारीरिक यात्राएं समाप्त हुई हैं; उनके साहस, समर्पण और योगदान की विरासत हमेशा जीवित रहेगी और प्रेरणा देती रहेगी। सभी दिवंगत पर्वतारोहियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। शोक संतप्त परिवारों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।”ब्रॉड पीक अभियान पुर्जा के शानदार पर्वतारोहण करियर का अंतिम अभियान था। यह दुनिया का 12वां सबसे ऊंचा पर्वत है और इसे चढ़ाई के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक माना जाता है। साल 2003 में शुरू हुए अपने 16 साल के सैन्य करियर में उन्होंने छह साल गोरखा और 10 साल ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज में सेवा दी। साल 2018 में पुर्जा को ‘मेंबर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर’ (एमबीई) से सम्मानित किया गया था। उन्हें 2018 में मेंबर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (एमबीई) के सम्मान से नवाजा गया था। पुर्जा ने वर्ष 2019 में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को केवल 6 महीने और 6 दिन में फतह कर नया रिकॉर्ड बनाया था। ब्रॉड पीक पर चढ़ाई पूरी करने के बाद वह आठ हजार मीटर की सभी 14 चोटियों पर दो बार चढ़ने का अपना मिशन पूरा करने वाले थे। एसीपी के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे पर्वत पर लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर हिमस्खलन हुआ, जिसने शिखर पर पहुंचने की कोशिश कर रहे 10 सदस्यीय पर्वतारोहण दल को अपनी चपेट में ले लिया। क्षेत्र में खराब मौसम के कारण शुक्रवार देर रात बचाव अभियान रोक दिया गया था, जो शनिवार को फिर शुरू हुआ। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, प्रसिद्ध पर्वतारोही सरबाज खान के नेतृत्व में तीन सदस्यीय नागरिक बचाव दल खोज अभियान में शामिल था। इस अभियान में पाकिस्तान सेना के हेलीकॉप्टरों ने भी सहायता की।
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
यूनिफिल के भविष्य को लेकर अनिश्चितता, दक्षिणी लेबनान के निवासी चिंतित
संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूनिफिल) का मौजूदा जनादेश 2026 के अंत में समाप्त होने वाला है।
EU प्रवासन संकट गहराया: सेउटा में हिंसक घुसपैठ, मंगलवार को इमरजेंसी बैठक बुलाई
अफ्रीका में मोरक्को के सेउटा इलाके से स्पेन में घुसपैठ करने वाले हजारों लोगों ने यूरोप की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। हालात इतना गंभीर हो गया है अब यूरोपियन यूनियन ने इस मामले पर चर्चा के लिए इमरजेंसी मीटिंग बुला ली है। मंगलवार को इस मुद्दे पर मीटिंग होगी। EU की मीटिंग EU के […]
प्लेन में सवार चालक दल समेत सभी लोगों की मौत हो गई। जमीन पर गिरते ही प्लेन पूरी तरह टूट गया और आग के गोले में तब्दील हो गया। मौके पर राहत एवं बचाव दल की टीम पहुंची पर किसी की जान नहीं बचाई जा सकी।
जानना जरूरी है: रावण को हराने वाले शक्तिशाली कार्तवीर्य अर्जुन आखिर परशुराम से कैसे हारे, युद्ध की वजह क्या?
Opinion: होर्मुज का अंधेरा और व्यापार की नई दुनिया, दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते का भी क्या अंजाम होगा?
अमेरिकी रेस्तरां के भीतर गोलीबारी: इडाहो में बंदूकधारी ने चलाईं गोलियां, कई हताहत; हमलावर ढेर
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Peru Aircraft Crash: दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में विमान हादसा, 13 लोगों की मौत; दुर्घटना का कारण क्या?
World News: जापान में मूल आबादी पहली बार 12 करोड़ से नीचे, घटती जन्मदर चुनौती
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Top News: 13 स्वर्ण पदकों के साथ भारत CWG पदक तालिका में चौथे स्थान पर; CJP को विदेशी फंडिंग की जांच तेज
पेरू के नाज्का में टूरिस्ट प्लेन क्रैश, प्लेन में सवार सभी 13 लोगों की मौत
पेरू के नाज्का में पर्यटकों को ले जा रहा एक विमान क्रैश हो गया. इस प्लेन में सवार सभी 13 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई. ये विमान नाज्का लाइंस की हवाई यात्रा के लिए उड़ान भर रहा था. प्रशासन मृतकों की पहचान करने और परिजनों से संपर्क करने में जुटा है.
दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आप पढ़ रहे हैं- ऑपरेशन बांग्लादेश। पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 1970 में पाकिस्तान में पहली बार आम चुनाव हुए। कुल 300 सीटों में से 167 सीटें पूर्वी पाकिस्तान के शेख मुजीब-उर-रहमान को मिलीं और पश्चिमी पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो की पार्टी को सिर्फ 86 सीट। मुजीब का पीएम बनना तया था, लेकिन तानाशाह राष्ट्रपति याह्या खान नहीं चाहते थे कि कोई बंगाली सत्ता संभाले। याह्या ने मुजीब के साथ कई बैठकें कीं, लेकिन बात नहीं बनी। पूर्वी पाकिस्तान में बगावत छिड़ गई। याह्या ने बंगालियों का दमन करने का फैसला किया। 25 मार्च को ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू हो गया। एक ही रात में 10 हजार लोग मारे गए। पाकिस्तानी फौज महिलाओं को उठाकर अपने कैंपों में ले गई और महीनों गैंगरेप किया। लाखों बंगाली भागकर भारत आने लगे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी फौरन जंग चाहती थीं, लेकिन सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ ने इस्तीफे की पेशकश कर दी। पार्ट-2 में उससे आगे की कहानी… अप्रैल 1971 की एक सुबह। घड़ी में 11 बज रहे थे। प्रधानमंत्री दफ्तर में पीएम इंदिरा गांधी और सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ बैठे थे। इंदिरा बेहद परेशान थीं। उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया था। उन्होंने सेना प्रमुख से कहा- ‘आपको वक्त चाहिए न… मिल जाएगा वक्त। जंग की तैयारी कीजिए।’ सैम ने कहा- ‘लेकिन मैं गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री की दखल नहीं मानूंगा। आप फैसला कर लीजिए।’ इंदिरा- ‘क्या मतलब?’ सैम- ‘मैं सिर्फ एक लीडर की बात मानूंगा। हर कोई दखल नहीं देगा।’ इंदिरा ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘सैम… आप मुख्य कमांडर होंगे। कोई दखलअंदाजी नहीं करेगा।’ सैम ने भी मुस्कुराते हुए कहा- ‘आई प्रॉमिस मैडम। जीत हमारी ही होगी।’ सेना प्रमुख को 6 महीने का वक्त मिल गया। इधर, पूर्वी पाकिस्तान में याह्या की सेना ने कत्लेआम मचा रखा था। हर दिन हजारों लोग मारे जा रहे थे। 6 महीने इंतजार का मतलब था पूर्वी पाकिस्तान का सफाया। RAW चीफ आरएन काव परेशान थे- ‘करें तो करें क्या…?’ फिर उन्होंने अपने साथी अफसर शंकरन नायर को बुलाया। ‘हम सीधे-सीधे मिलिट्री एक्शन नहीं ले सकते, लेकिन उस जगह तो चोट कर सकते हैं, जहां दर्द सबसे ज्यादा हो।’ RAW चीफ ने कहा। नायर ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘आपका इशारा गुरिल्ला वॉर है?’ काव ने कहा- ‘बिल्कुल।’ ‘पर ये काम करेगा कौन?’ नायर ने पूछा। ‘वही बंगाली, जो भागकर भारत आए हैं।’ काव ने जवाब दिया। अगले दिन नायर कोलकाता पहुंच गए। वे गुप्त रूप से 25 रिफ्यूजी कैंपों में गए। BSF की मदद से 18 से 35 साल के बंगालियों को संघर्ष के लिए तैयार किया। उन्हें हथियार चलाने, घात लगाकर हमला करने, कमांडो ऑपरेशन्स और छोटे रेडियो सेट के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई। एक महीने के भीतर 2.5 लाख बागी बंगाली गुरिल्ला वॉर के लिए तैयार हो चुके थे। लेकिन इतनी तैयारी काफी नहीं थी… एक रोज RAW चीफ ने इंदिरा से कहा- ‘हमें फौरन एक और वॉर की तैयारी करनी चाहिए।’ इंदिरा ने पूछा- ‘अब किस वॉर की तैयारी?’ RAW चीफ- ‘साइकोलॉजिकल वॉर। आप विदेशों में पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ पत्र लिखिए।’ इंदिरा ने विदेशी नेताओं को पाकिस्तान की बर्बरता के बारे में लिखना शुरू कर दिया। RAW ने विदेशी पत्रकारों को रिपोर्टिंग के लिए भारत बुला लिया। 13 जून 1971 को यूके के संडे टाइम्स में इन नरसंहारो के बारे में खबर छपी। संडे टाइम्स ने लिखा- ‘पूर्वी पाकिस्तान में 1 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया है। चाकू और छुरियों से उनके अंग काट दिए गए हैं। हजारों बच्चों की आंखें फोड़ दी गई हैं।’ पाकिस्तान दुनिया के सामने बेनकाब हो गया। भारत यही तो चाहता था। ताकि उसे मिलिट्री एक्शन की कोई ठोस वजह मिल जाए। अब तक जुलाई आ चुका था। RAW ने तय किया कि ग्राउंड पर जाकर बागी बंगालियों की तैयारियों का जायजा लिया जाए। एक अफसर आधी रात को बंगालियों के कैंप में पहुंच गया। हर तरफ धुएं की गंध और जलते हुए मांस की बदबू फैली हुई थी। कुछ ही घंटे पहले, पाकिस्तानी फौज ने एक गांव में ढूंढ़-ढूंढ़कर बंगालियों का कत्ल किया था। गुरिल्ला टीम के कमांडर ने दीवार पर चढ़कर झांका- सात पाकिस्तानी फौजी खाना खा रहे थे। तीन पहरा दे रहे थे। उसने नीचे उतरकर कहा- 'मैंने दस गिने हैं। ज्यादा भी हो सकते हैं। एक फौजी ट्रक भी खड़ा है।’ उसने अपनी असॉल्ट राइफल लोड की और हाथ हिलाकर साथियों को आगे बढ़ने का इशारा किया। 15 बंगाली दबे पांव निकल पड़े। आधे घंटे चलने के बाद वे जलती हुई इमारतों की रोशनी तक पहुंच गए। तभी एक पाकिस्तानी फौजी ने देख लिया। बंगाली कमांडर जोर से चिल्लाया- 'जॉय बांग्ला!' एक साथ 15 राइफलें गूंज उठीं- ठायं, ठायं। दसों पाकिस्तानी फौजी ढेर हो गए। गुरिल्ला टीम के कुछ लड़ाके उनकी लाशों पर चढ़ गए और थूकने लगे। वहां खड़े ट्रक से हथियार और गोला-बारूद निकाले और उसे आग के हवाले कर दिया। यह सब देखकर RAW अफसर ने मन ही मन मुस्कुराते हुए कहा- ‘अब तो पाकिस्तान का टूटना तय है।’ वक्त का पहिया घूमता रहा और आ गया अक्टूबर 1971, भारत जंग के लिए तैयार था, लेकिन एक खुफिया खबर ने नेवी अफसरों की नींद उड़ा दी थी। दिल्ली के वॉर रूम में रक्षा मंत्री जगजीवन राम, नौसेना चीफ एसएम. नंदा और RAW चीफ आरएन काव परेशान बैठे थे। नौसेना चीफ ने कहा- ‘काव साहब, कराची पोर्ट पर एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम लगे हैं। हमें उसकी सटीक जानकारी चाहिए।’ काव ने कहा- ‘नंदा साहब… अभी के माहौल में वहां की तस्वीरें जुटाना छोटे-मोटे एजेंटों के बस की बात नहीं है। बड़े बाजों को मैदान में उतारना होगा।’ उसी रोज RAW चीफ ने शंकरन नायर के साथ मीटिंग की। नायर ने मुंबई में मौजूद अपने टॉप एजेंट को फोन मिलाया और अपनी जरूरतें बता दी। पांच दिन बाद एजेंट का फोन आया- ‘सर, एक बंदा है जो हमारी मदद कर सकता है।’ नायर उससे मिलने के लिए फ्लाइट पकड़कर मुंबई पहुंच गए। एजेंट ने बताया- ‘जिस आदमी की हमें जरूरत है, उसका नाम कावसजी है। पारसी डॉक्टर हैं। उनका एक छोटा समुद्री जहाज है। वे भारत और पाकिस्तान के बीच कुवैत के रास्ते सामान और मरीज लाते-ले जाते हैं।’ नायर ने झट से कहा- ‘क्या हम उस पर आंख मूंदकर भरोसा कर सकते हैं?’ एजेंट मुस्कुराया- ‘सच कहूं तो भरोसा तो नहीं कर सकता, लेकिन हमारे पास एक ऐसा पत्ता है, जिससे हम उसे मना सकते हैं।’ एजेंट ने मेज पर एक फाइल खिसका दी। दरअसल, दो महीने पहले कावसजी अपने जहाज पर बिना टैक्स चुकाए महंगे सामान लाते हुए पकड़े गए थे। कस्टम्स विभाग उनके खिलाफ जांच कर रहा था। भारी जुर्माना लगना तय था। नायर का दिमाग घूमा। कस्टम्स के चीफ उनके पुराने दोस्त थे। उन्होंने तुरंत फोन घुमाया। दस मिनट की बातचीत में डील पक्की हो गई। तय हुआ कि RAW अपने सीक्रेट फंड से डॉक्टर का सारा जुर्माना भरेगी और कस्टम विभाग केस बंद करने का लेटर जारी करेगा, लेकिन यह लेटर सीधे डॉक्टर को नहीं दिया जाएगा। अगली सुबह वो लेटर नायर के हाथों में था। वे अपने दो एजेंटों को लेकर दक्षिण मुंबई में डॉक्टर के क्लिनिक पहुंच गए। नायर ने डॉक्टर से मिलते ही कहा- ‘हैलो मिस्टर कावसजी, आई एम कैप्टन मेनन फ्रॉम इंडियन नेवी।’ डॉक्टर कुछ कहते उससे पहले ही नायर ने वो लेटर टेबल पर रखा दिया। नायर ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘हमारा एक छोटा-सा काम कर दें, तो यह लेटर आपका हो जाएगा। मन ना हो तो आप मना भी कर सकते हैं। फिर मैं ये लेटर इसी वक्त जला दूंगा। जांच फिर शुरू हो जाएगी।’ डॉक्टर ने भारी मन से लेटर देखा। फिर कहा- ‘बोलिए, कौन सा काम है?’ ‘अगली पाकिस्तान ट्रिप पर हमारे दो आदमियों को साथ ले जाना है। जहाज दो दिनों के भीतर निकलना चाहिए।’ नायर ने कहा। डॉक्टर ने बेबसी में सिर हिलाते हुए कहा- ’ठीक है।’ नायर वहां से निकलने लगे तो डॉक्टर ने पूछा- ‘कम से कम इतना बता दीजिए कि मैं किन लोगों को अपने साथ ले जा रहा हूं।’ नायर ने चलते-चलते कहा- ‘बस इतना जान लीजिए कि उनके नाम 'रॉड' और 'मोरियार्टी' हैं।’ 'रॉड' नायर के नौसैनिक सहायक राव थे और 'मोरियार्टी' RAW के फोटोग्राफी डिपार्टमेंट के उस्ताद एजेंट मूर्ति थे। दो दिन बाद, डॉक्टर कावसजी, दोनों एजेंटों को लेकर रवाना हो गए। जब तक जहाज हिंदुस्तानी सीमा में रहा, सब शांत था, लेकिन अब असली खेल शुरू होने वाला था। जहाज जैसे ही कराची बंदरगाह पर रुका, पाकिस्तान CID की टीम वहां आ धमकी। एक इंस्पेक्टर दो सिपाहियों के साथ जहाज पर चढ़ गया। डॉक्टर की धड़कनें तेज हो गईं। अफसरों ने कागजात खंगालने शुरू किए। इंस्पेक्टर की नजर पैसेंजर लिस्ट पर अटक गई। उसने डॉक्टर से पूछा- ‘रॉड और मोरियार्टी… कहां हैं ये दोनों?’ डॉक्टर का दिल हलक में आ गया। उन्होंने अपनी घबराहट छुपाते हुए कहा- ‘ओह! समझ गया आप क्या सोच रहे हैं। अजीब नाम हैं ना? दरअसल ये भारतीय ईसाई हैं... उनके नाम ऐसे ही होते हैं। दोनों अंदर केबिन में पड़े हैं।’ ‘जाओ, चेक करो!’ इंस्पेक्टर ने कड़क आवाज में अपने सिपाही को हुक्म दिया। डॉक्टर ने हाथ जोड़ लिए- ‘साहब! भूलकर भी मत जाइएगा। दोनों को चेचक हो गया है। एक को हुआ और दूसरे को लग गया। जब तक वे ठीक नहीं होते, वहां कोई नहीं जा सकता। आपको भी इंफेक्शन हो जाएगा। डॉक्टर सालों से कराची आ-जा रहे थे, इसलिए इंस्पेक्टर को शक नहीं हुआ। उन्होंने जहाज को बंदरगाह में रुकने की इजाजत दे दी। जब CID की टीम जहाज से उतरी, तो डॉक्टर ने गहरी सांस ली। उनके हाथ कांप रहे थे। उन्होंने सोडे के साथ एक कड़क स्कॉच बनाया और एक ही घूंट में गटक गए। अब तक रात हो चली थी। सन्नाटा पसरा था। जहाज धीमे-धीमे बंदरगाह के मुहाने पर दो बड़ी चट्टानों के बीच आकर रुक गया। RAW के एजेंटों ने खिड़की से बाहर झांका। ‘क्या तुम भी वही देख रहे हो जो मैं देख रहा हूं?’ राव ने हैरान होकर पूछा। मूर्ति ने कहा- ‘यह तो कमाल है।’ सामने एक ताजा कंक्रीट का ढांचा खड़ा था, जिस पर भारी-भरकम एंटी-एयरक्राफ्ट गन तैनात थी। दोनों एजेंट दनादन तस्वीरें खींचने लगे। उन्होंने किलेबंदी, तोपों की स्थिति और बंदरगाह पर खड़े जंगी जहाजों की तस्वीरें कैद कर लीं। आधे घंटे तक कैमरे की क्लिक-क्लिक चलती रही। अब कैप्टन ने जहाज मोड़ा और ले जाकर किनारे पर लगा दिया। दोनों एजेंट फिर से उस खास केबिन में छिप गए। सुबह डॉक्टर जहाज से उतरे। मार्केट जाकर अपना काम निपटाया और फिर जहाज में लौट आए। जहाज को अब कुवैत जाना था। दोपहर में वह कराची से निकल पड़ा। बंदरगाह से बाहर निकलते वक्त एजेंटों ने चट्टान के दूसरे हिस्से की भी तस्वीरें खींच लीं। जहाज अरब सागर के रास्ते कुवैत पहुंचा। वहां राव और मूर्ति उतरे और सीधे भारतीय दूतावास पहुंच गए। उसी रोज कैमरों से निकालकर रीलें स्पेशल फ्लाइट से दिल्ली भेज दी गईं। दिल्ली के एक सीक्रेट लैब में दो फोटोग्राफर तैयार बैठे थे। रीलें आते ही तुरंत वॉर रूम पहुंचाई गईं। रक्षा मंत्री जगजीवन राम, नौसेना चीफ एसएम. नंदा और RAW चीफ काव बैठे हुए थे। सामने बड़ी प्रोजेक्टर स्क्रीन लगी हुई थी। RAW अफसर एक-एक करके तस्वीरें दिखाते जा रहा था। आखिर उन तस्वीरों में था क्या… कराची बंदरगाह के अंदर और बाहर का एक-एक नक्शा और तस्वीरें। पाकिस्तानी तोपें कहां हैं, उनके तेल के डिपो कहां हैं और जंगी जहाज किस जगह खड़े हैं… हर तस्वीर RAW के पास थी। एक रोज इंदिरा ने सेना प्रमुख से पूछा- ‘क्या आप जंग के लिए तैयार हैं?’ सेना प्रमुख सैम ने जवाब दिया- 'आई एम ऑलवेज रेडी स्वीटी।' दरअसल, सैम अक्सर इंदिरा के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करते थे। फिर आई 3 दिसंबर 1971 की रात। अचानक पाकिस्तानी एयरपोर्स ने भारत के कई ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी। रात 12 बजे पीएम इंदिरा गांधी ऑल इंडिया रेडियो पर आईं और जंग का ऐलान कर दिया। उसी रात पाकिस्तान की सबसे बड़ी पनडुब्बी पीएनएस गाजी डूब गई। दरअसल, गाजी गुपचुप तरीके से भारत के सबसे बड़े विमानपोत INS विक्रांत को डुबोने आई थी। वह कई घंटों से INS विक्रात के इंतजार में विशाखापट्टनम में खड़ी थी, लेकिन विक्रांत उसे दिखा नहीं। आखिर दिखता भी कैसे, RAW के एजेंटों ने उसे चुपचाप अंडमान भेज दिया था। गाजी में डीजल से बैटरियां चार्ज की जा रही थीं, जिसकी वजह से खतरनाक हाइड्रोजन गैस अंदर भरती जा रही थी। इसी के चलते वह खुद ही बिस्फोट होकर तबाह हो गई। 4 दिसंबर को भारतीय वायु सेना ने भी पाकिस्तान पर बमबारी शुरू कर दी। कराची और आसपास के हवाई अड्डों पर आसमान से रॉकेट बरस रहे थे। इधर, इंडियन नेवी की 3 ओसा-I मिसाइल बोट चुपचाप मुंबई से कराची की तरफ बढ़ रही थीं। भारत ने ये मिसाइल बोट रूस से खरीदी थी। जब बोट कराची से 250 समुद्री मील दूर थीं, तभी रडार पर 'बीप-बीप' की आवाज आने लगी। कैप्टन चिल्लाया- ‘पाकिस्तानी जहाज करीब आ रहा है। मिसाइल दागो।’ पहली मिसाइल छूटी, फिर दूसरी, फिर तीसरी। पाकिस्तानी का जंगी जहाज PNS खैबर तबाह हो गया। पाकिस्तान को लगा कि यह वायुसेना का हमला है। तभी मिसाइल बोट ने एक और पाकिस्तानी युद्धपोत और गोला-बारूद से भरे एक मालवाहक जहाज को तबाह कर दिया। अब मिसाइल बोट ने कराची बंदरगाह का रुख किया। भारत को कराची के फ्यूल टैंकों की सटीक लोकेशन पता थी। मिसाइलें सीधे निशाने पर लगीं और कराची बंदरगाह का तेल भंडार धू-धू कर जल उठा। 5 दिसंबर की सुबह तक पहला हमला पूरा हो चुका था। पाकिस्तानी नौसेना की रीढ़ टूट चुकी थी। उन्होंने अपने बचे-खुचे जहाजों को बंदरगाह के अंदर छिपा लिया। तीन दिन बाद यानी 8 दिसंबर की रात भारतीय नेवी ने पाकिस्तान के एक तेल टैंकर और युद्धपोत PNS दक्का को भी डुबो दिया। भारत अपना हवाई रास्ता तो पहले ही बंद कर चुका था, नेवी के इन हमलों से पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने का समुद्री रास्ता भी कट गया। अब पाकिस्तान बड़ा पलटवार करने वाला था, बहुत बड़ा पलटवार… 8 दिसंबर की रात भारत का युद्धपोत INS खुखरी मुंबई से कराची के लिए निकला। टारगेट था- पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS हैंगोर को डुबाना। 9 दिसंबर की सुबह खुखरी गुजरात तट पर पहुंच गया। कप्तान को लगा कि पाकिस्तानी पनडुब्बी आस-पास ही है। खुखरी में एक परंपरा थी। रात 8 बजकर 45 मिनट पर सभी इकट्ठा होकर एक साथ समाचार सुना करते थे। उस रोज भी समाचार शुरू हुए- ‘यह आकाशवाणी है। अब आप अशोक वाजपेयी से समाचार….’ तभी हैंगोर से निकले पहले टारपीडो ने खुखरी को हिट किया। कैप्टन मुल्ला कुर्सी से गिर गए। उनका सिर लोहे से टकराया और खून बहने लगा। दूसरा धमाका होते ही खुखरी की बिजली चली गई। खुखरी में 2 छेद हो चुके थे। जहाज के भीतर तेजी से पानी भर रहा था। अंदर आग लग चुकी थी। कुछ ही देर बाद खुखरी डूब गया। कैप्टन समेत 17 अफसर और 176 नौसैनिक भी डूब गए। ये उस जंग में डूबने वाला इकलौता भारतीय जहाज था। उसके बाद भारत ने पाकिस्तान को समुद्र में टिकने नहीं दिया। उधर जमीन पर, पूर्वी पाकिस्तान के दलदली इलाकों और टूटी सड़कों के चलते इंडियन आर्मी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई थी। पाकिस्तानी फौज ढाका जाने वाले रास्तों पर घेराबंदी करके बैठी थी। मकसद था- भारतीय सेना को तब तक रोके रखो, जब तक कि संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन दखल ना दे दे। इंडियन आर्मी की कुछ टुकड़ियां फंसी हुई थीं। ढाका पहुंचने के लिए उन्हें मेघना नदी पार करनी थी। इस पर बना पुल पाकिस्तानी पहले ही गिरा चुके थे। बंगाली लड़ाकों और इंडियन आर्मी को हेलिकॉप्टरों के जरिए नदी पार कराने का फैसला किया गया। 9 से 11 दिसंबर के बीच, 36 घंटों के अंदर 110 उड़ानों के जरिए 700 से ज्यादा जवानों को मेघना नदी के पार उतार दिया गया। 11 दिसंबर तक भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान में गहराई तक घुस चुकी थी। अब सिर्फ एक ही मंजिल बची थी- ढाका। पांच दिन बाद यानी 16 दिसंबर को भारत ने ढाका पर भी कब्जा जमा लिया। उसी रोज पाकिस्तान ने घुटने भी टेक दिए। ढाका के रेसकोर्स मैदान में पाकिस्तानी जनरल एएके नियाजी ने 93 हजार सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया। पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए। नए मुल्क का जन्म हुआ- ‘बांग्लादेश।’ ***** ऑपरेशन बांग्लादेश सीरीज का पार्ट-1 भी पढ़िए : पाकिस्तानी फौज ने गैंगरेप किया, हजारों बंगाली महिलाएं प्रेग्नेंट हुईं:इंदिरा गांधी बोलीं- हम युद्ध करेंगे, सेना प्रमुख बोल पड़े-आपने बाइबल पढ़ी है; पार्ट-1 रेफरेंस : 1. The Kaoboys of RAW: Down Memory Lane : By B. Raman 2. The War That Made RAW : By Anushka Nandakumar Sandeep Saket 3. Field Marshal Sam Manekshaw : By Maj Gen Shubhi Sood 4. A Stranger in My Own Country : By Maj. Gen. Khadim Hussain Raja 5. The Soldier and the Changing State : By Zoltan Barany
कम होगी खाड़ी देशों पर निर्भरता?: होर्मुज संकट के बीच इराक-तुर्किये का बड़ा तेल समझौता, ऐसे बढ़ाएंगे निर्यात
Oil Leak Oman: ओमान के तट पर फंसे तेल टैंकर से रिसाव बढ़ा, समुद्री संरक्षित क्षेत्र पर कौन सा संकट मंडरा रहा?
सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण: छह मिनट 23 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा, वैज्ञानिक क्यों मान रहे दुर्लभ घटना?
सिंगापुर। सिंगापुर में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान मंच पर फिलिस्तीनी झंडा प्रदर्शित करने और राजनीतिक नारेबाजी करने के मामले में ब्रिटिश ट्रिप-हॉप बैंड ‘मैसिव अटैक’ (Massive Attack) पर बड़ी कार्रवाई की गई है. सिंगापुर पुलिस ने बैंड को भविष्य में देश के भीतर किसी भी प्रस्तुति देने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित (Ban) कर […]
समुद्र में 1600 फीट की ‘दीवार’ बनाएगा स्पेन, मोरक्को से अवैध घुसपैठ के बाद अलर्ट
स्पेन ने घोषणा की है कि वह अपने उत्तरी अफ़्रीकी क्षेत्र स्यूटा और पड़ोसी मोरक्को के बीच समुद्री सीमा पर 500 मीटर लंबा (1,600 फीट) बैरियर बनाएगा।
Glasgow Commonwealth Games Day 10 Live Updates :नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महज 30 मिनट के भीतर दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
समुद्र से तैरकर घुस गए 60,000 घुसपैठिए, स्पेन ने खींच दी है 1,600 फ़ीट लंबी समुद्री दीवार
मोरक्को से स्पेन के इलाके 'स्यूटा' में दो दिनों में लगभग 60,000 प्रवासी घुस आए, जिसके बाद बवाल मच गया। इस घटना में अब तक 67 लोगों की मौत भी हो गई है। स्पेन ने घुसपैठ रोकने के लिए 1,600 फीट लंबी समुद्री दीवार बना लिया है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
इजरायल की ढाल बनने में हांफने लगा अमेरिका! नेवी पर बढ़ा दबाव; टॉप जनरल ने पेंटागन को दी चेतावनी
जनरल ग्रिनकेविच ने स्पष्ट किया है कि अगर नए युद्धपोत नहीं मिलते हैं, तो उन्हें इजरायल की सुरक्षा के बजाय खुद अमेरिका की मुख्य भूमि की रक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
भारत के करोड़ों रुपये के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में वांछित भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी इन दिनों लंदन की जेल में बंद है, लेकिन उसकी कार्यशैली और बेपरवाही लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल ही में एक कानूनी सुनवाई के दौरान वह अदालत में पेश नहीं हुआ। जब इस बारे में पूछताछ की गई तो जेल अधिकारियों ने कोर्ट को चौंकाने वाली जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि नीरव मोदी सुनवाई में शामिल होने के बजाय जेल के अंदर बने शतरंज (चेस) क्लब में मजे से समय बिता रहा था। हालांकि, इस मामले में उसकी कानूनी टीम का यह तर्क सामने आया कि चूंकि वे लोग खुद ही सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध कर रहे थे, इसलिए उनके मुवक्किल का अदालत में शारीरिक रूप से मौजूद रहना जरूरी नहीं था।प्रॉपर्टी विवाद से जुड़ा है मामला, वादी बेचना चाहता है मैरीलेबोन का अपार्टमेंटयह पूरा कानूनी मामला ट्राइडेंट ट्रस्ट कंपनी (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा हुआ है। यह वादी कंपनी मध्य लंदन के बेहद पॉश इलाके मैरीलेबोन क्षेत्र में स्थित एक अपार्टमेंट को बेचना चाहती है, जिसको लेकर अदालती प्रक्रिया चल रही है। इसी मामले की सुनवाई के सिलसिले में नीरव मोदी को वर्चुअली या पेश होना था, लेकिन वह चेस क्लब की व्यस्तता का हवाला देते हुए गायब रहा। ब्रिटेन की अदालतों में उसके मामलों की कानूनी खींचतान लगातार जारी है, लेकिन इन सबके बीच उसकी दिनचर्या और जेल के भीतर उसकी गतिविधियों को लेकर समय-समय पर नए खुलासे होते रहते हैं।भारत प्रत्यर्पण का मंडरा रहा है खतरा, फ्रांस में खारिज हो चुकी है आखिरी अपीलनीरव मोदी की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन लगातार बढ़ती जा रही हैं। धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में घिरे नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण अब लगभग तय माना जा रहा है। कुछ समय पहले फ्रांस में स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय में उसकी तरफ से दायर की गई अंतिम अपील भी पूरी तरह से असफल साबित हो चुकी है, जिसके बाद से ब्रिटेन से उसके भारत लाए जाने का रास्ता लगभग साफ होता नजर आ रहा है। भारतीय जांच एजेंसियां—सीबीआई और ईडी—लंबे समय से उसे कानूनी शिकंजे में कसने के लिए ब्रिटिश प्रशासन के संपर्क में हैं और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।क्या राजनीतिक शरण के लिए नीरव मोदी ने दिया है दूसरा आवेदनइन सबके बीच एक मीडिया रिपोर्ट और ब्रिटिश पॉडकास्ट ('द डेली टेलीग्राफ') के हवाले से बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यर्पण के आसन्न खतरे और कानूनी शिकंजे से बचने के लिए ऐसी तेज अफवाहें उड़ रही हैं कि नीरव मोदी ने अपनी तरफ से अंतिम कोशिश के रूप में एक बार फिर से राजनीतिक शरण (Political Asylum) के लिए आवेदन किया हो सकता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन इतना तय है कि ब्रिटेन की जेल में बैठा यह भगोड़ा कारोबारी भारतीय कानून के शिकंजे से बचने के लिए हर संभव पैंतरा आजमाने में लगा हुआ है।
पाकिस्तान: हिमस्खलन के बाद लापता दस पर्वतारोहियों में से तीन के शव बरामद
पाकिस्तान की खतरनाक चोटियों में से एक ब्रॉड पीक पर एक बड़े हिमस्खलन के बाद दस पर्वतारोहियों का दल लापता हो गया है. इस टीम में मशहूर ब्रिटिश-नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा भी शामिल हैं. बचाव दल को अब तक 3 शव मिले हैं
तुरंत खाली करो पश्चिम एशिया, US की अपने नागरिकों को सलाह; ईरान में कुछ बड़ा होने वाला है?
क्या अमेरिका, ईरान में कुछ बड़ा करने वाला है? यह सवाल पश्चिम एशिया के कई देशों में अमेरिकी दूतावासों ने अमेरिका नागरिकों से किए गए आग्रह के बाद उठा है। इसमें अमेरिका ने कहा है कि पश्चिम एशिया में रह रहे उसके नागरिक, इस क्षेत्र से निकलने पर विचार करें।
दुनियाभर में अपनी असाधारण पर्वतारोहण क्षमताओं के लिए पहचाने जाने वाले जाने-माने पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का एक दुखद हादसे में निधन हो गया है। 'निम्स-दाई' के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर निर्मल पुर्जा छह पर्वतारोहियों की एक टीम के साथ एक महत्वपूर्ण मिशन पर निकले थे, इसी दौरान वे पीओके (PoK) के खतरनाक ब्रॉड पीक पर भयानक हिमस्खलन (Avalanche) की चपेट में आ गए। इस हृदयविदारक घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर उनका अंतिम पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपनी इस यात्रा और सपनों का जिक्र किया था।'योजना में नहीं था ब्रॉड पीक', जानिए क्या था निर्मल पुर्जा का आखिरी प्लानअपने निधन से ठीक पहले 27 जुलाई को किए गए अपने अंतिम पोस्ट में निर्मल पुर्जा ने बताया था कि पीओके स्थित 'ब्रॉड पीक' पर चढ़ाई करना कभी भी उनकी मूल योजना का हिस्सा नहीं था। उन्होंने लिखा था कि मिशन अक्सर हालात के मुताबिक बदलते रहते हैं। मूल रूप से केवल 'जी2' पर चढ़ाई करने की योजना थी, लेकिन पाकिस्तान की यात्रा के दौरान उनके मन में यह विचार आया कि यदि वे ब्रॉड पीक फतह कर लेते हैं, तो उनके सामने सिर्फ 'चो ओयू' चोटी ही बचेगी। इसके साथ ही वे इतिहास के ऐसे पहले व्यक्ति बन जाते, जो 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर बिना ऑक्सीजन के दो बार चढ़ाई करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेते। इसी बड़े सपने और इतिहास रचने की चाहत में उन्होंने इस खतरनाक रास्ते को चुना था।खोज अभियान के दौरान मिला ड्रोन फुटेज, और खत्म हो गईं जिंदा बचने की उम्मीदेंघटना के तुरंत बाद जब गुरुवार को हिमस्खलन हुआ, तो शुरुआत में उनकी ट्रैकिंग डिवाइस में कुछ हलचल दर्ज की गई थी, जिससे बचाव दल और उनके चाहने वालों के मन में उनके जीवित होने की उम्मीद ब बची हुई थी। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता गया, मौसम की दुश्वारियों के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन धीमा पड़ा। आखिरकार खोज दल की सबसे बड़ी आशंका तब सच साबित हुई, जब बेस कैंप से उड़ाए गए एक ड्रोन ने कैंप 1 के ठीक नीचे चार पर्वतारोही—निर्मल पुर्जा 'निम्सदाई', किली पेंबा शेरपा, नीमा शेरपा और वांग झोंग—के शवों जैसे दृश्यों को चिन्हित किया। रेस्क्यू टीमों का मानना है कि इस भीषण हिमस्खलन में कॉन्कॉर्डिया साइड पर फंसे अन्य पर्वतारोही भी काल के गाल में समा चुके हैं।कौन थे निर्मल पुर्जा? गोरखा कमांडो से लेकर दुनिया के शीर्ष पर्वतारोही बनने का सफरनेपाल के म्यागदी जिले में जन्मे और चितवन में पले-बढ़े निर्मल पुर्जा का जीवन असाधारण साहस की मिसाल रहा है। पूर्व गोरखा सैनिक और ब्रिटेन की प्रतिष्ठित स्पेशल बोट सर्विस (SBS) के पूर्व कमांडो रह चुके निर्मल पुर्जा ने साल 2019 में 'प्रोजेक्ट पॉसिबल' नामक ऐतिहासिक अभियान के तहत महज छह महीने से कुछ अधिक समय में 8,000 मीटर से ऊंची दुनिया की सभी 14 चोटियों को फतह करके पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। सेना में करीब 16 साल तक अपनी देश सेवा देने के बाद उन्होंने पूरी तरह से पर्वतारोहण को अपना जीवन बना लिया था और आज वे ग्लोबल माउंटेनियरिंग कम्युनिटी के सबसे चमकते हुए सितारों में गिने जाते थे।
पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की खबरों के बीच तेहरान ने बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि अमेरिका ने उसके ऊर्जा संयंत्रों पर किसी भी प्रकार का बड़ा हमला किया, तो वह चुप नहीं बैठेगा। इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के कई खाड़ी देशों में स्थित दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस ठिकानों की एक व्यापक लिस्ट जारी कर दी है, जिन्हें अमेरिकी हमले की स्थिति में नेस्तनाबूद किया जा सकता है।ईरानी मीडिया का दावा, सऊदी अरब से लेकर यूएई तक के प्रमुख तेल क्षेत्र निशाने परईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने अमेरिकी आक्रामकता का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी रणनीति तैयार कर ली है। ईरान द्वारा जारी संभावित लक्ष्यों की इस सूची में सऊदी अरब के बेहद महत्वपूर्ण घरावार तेल क्षेत्र के साथ-साथ अबकाइक और खुरैस जैसे बड़े ठिकाने शामिल हैं। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विशाल जकुम तेल क्षेत्र और रुवाइस रिफाइनरी को भी इस सूची में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग एक मिलियन बैरल तेल का उत्पादन होता है और यहाँ से वैश्विक बाजारों को बड़े पैमाने पर ऊर्जा का निर्यात किया जाता है।कतर, कुवैत और इजरायल के गैस संयंत्र भी ईरान के रडार परसऊदी अरब और यूएई के अलावा ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और इजरायल के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी अपनी चेतावनी के दायरे में लिया है। दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक कतर के उत्तरी गैस फील्ड और रस लफ्फान को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है, जो वैश्विक एलएनजी (LNG) व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं। इसके साथ ही कुवैत के बर्गन तेल क्षेत्र, बहरीन की सित्राह और अल मिहाज रिफाइनरी तथा इजरायल के लेविथान और तमार गैस क्षेत्रों को भी संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल किया गया है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की किसी भी लापरवाही या दुस्साहस का कड़ा और बराबरी का जवाब दिया जाएगा।डोनाल्ड ट्रंप की नई रणनीति और ईरान का पलटवारयह पूरा तनाव तब और बढ़ गया जब मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को आर्थिक और सामरिक रूप से कमजोर करने के लिए उसके ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक इस तरह के किसी अंतिम हमले के आदेश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन अमेरिका द्वारा इस विकल्प पर विचार करने से ही खाड़ी देशों की नींद उड़ गई है। इससे पहले भी अमेरिका और इजरायल के संभावित सैन्य दबाव के खिलाफ ईरान ने अपने हल्के ड्रोन्स और मिसाइल क्षमताओं के जरिए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगियों को कड़ा संदेश दिया है। अब इस नई टारगेट लिस्ट के सामने आने के बाद पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा और अधिक गहरा गया है।
PoK पर ऐसा क्या बोले पाकिस्तानी? घसीटकर ले गई शहबाज की पुलिस
पाकिस्तान में लोगों को पुलिसकर्मी दबोच दबोच कर गाड़ियों में घसीट कर ले जा रहे हैं। दरअसल विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आई हैं। यह विरोध हो रहा है पाकिस्तान की सेना का पाकिस्तान की सरकार का। पाकिस्तान के कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाया है और पीओके में हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाया है। पाकिस्तान के लाहौर प्रेस क्लब के सामने एक रैली हुई और इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस दबोच ले गई। यह प्रदर्शनकारी हिंसा की निंदा करने और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कार्यकर्ताओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इकट्ठा हुए थे। जहां पर पाकिस्तान की सेना इस वक्त खुलेआम अत्याचार कर रही है। पाकिस्तानी कश्मीर में सिविल सोसाइटी समूहों के गठबंधन प्रतिबंधित जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी के समर्थन में कश्मीर एकजुटता प्रदर्शन का आयोजन हुआ। इसे भी पढ़ें: Kulgam Attack: Farooq Abdullah ने उठाया गंभीर सवाल, राज्य का दर्जा मांगते ही क्यों होती हैं हत्याएं? इसमें छात्र संघ मजदूर संगठनों ने इस मौके पर एक बड़ी रैली की। इस दौरान पुलिसकर्मियों को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों के हाथ में प्ले कार्ड थे। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के झंडे थे। वो नारे लगा रहे थे। जैसे ही उन्होंने रैली शुरू की कि देखिए कैसे उन पर पुलिस वाले टूट पड़े। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कारवाई की। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और तो और विरोध प्रदर्शन जैसे ही खत्म हुआ अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए लोगों पुलिस की जेल वैन में पहुंचा दिया गया। कैसे देखिए कि दबोच कर लोगों को इन गाड़ियों में ठूसा जा रहा है। इस मौके पर लोग क्या कुछ कह रहे हैं वह सुनवाते हैं। कश्मीर के लिए आवाज उठा रहे हैं कि कश्मीर में गोलियां बंद करें। पूरा मन जो है उनके साथ। दरअसल यह विरोध प्रदर्शन इसलिए हो रहा क्योंकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इस वक्त भीषण अत्याचार हो रहा है। पाकिस्तान की सेना लगातार पाक ऑक्यूपाइड कश्मीर में अपने हक मांगने वाले लोगों को सीधे गोली मार दे रही है। बताया जा रहा है कि अब तक पाकिस्तान की सेना ने सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। और इसमें सबसे ज्यादा विरोध इस बात का है क्योंकि पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर में जिस तरीके से पाकिस्तान की सेना चुनाव करवा रही है उसी का सबसे ज्यादा विरोध है क्योंकि पाकिस्तान की सेना अपने मनपसंद पार्टी को चुनाव जितवा रही है और इसी का विरोध हो रहा है और यही देखने को मिला जब पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज को पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के अंदर पहले फेज के चुनाव में चुनाव जितवाया गया। इसे भी पढ़ें: Farooq Abdullah के 'Statehood' वाले बयान पर भड़के Ravinder Raina, कहा- आतंक को सही ठहराना बंद करें 13 सीट पर चुनाव हुए और उसमें वो नौ सीटें जीत गई। पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर में तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं। जहां पहले चरण का चुनाव 27 जुलाई को हुआ। उसके बाद 2 अगस्त को चुनाव होने हैं और फिर 10 अगस्त को चुनाव होने हैं। क्षेत्र के मुख्य विरोध आंदोलन में जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी पर क्षेत्रीय सरकार ने जून में प्रतिबंध लगा दिया था। जिसके कारण लगातार घातक प्रदर्शन हो रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इस वक्त भीषण तनाव है। सिर्फ भारत ही पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के लिए आवाज नहीं उठा रहा। बल्कि ब्रिटेन के सांसदों तक ने पाकिस्तान ऑक्युपाइड कश्मीर के हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए ब्रिटेन के विदेश मंत्री को चिट्ठी लिखी है और अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
84 हजार की आबादी वाले शहर में घुस गए 60 हजार घुसपैठिए!
स्पेन के स्यूटा शहर में मोरक्को से हजारों अवैध प्रवासियों के प्रवेश के बाद गंभीर संकट पैदा हो गया है. स्पेन सरकार के मुताबिक, इस दौरान मरने वालों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है. हालात संभालने के लिए सेना तैनात की गई है और सीमा पर सुरक्षा बढ़ाते हुए नया बैरियर लगाने का फैसला किया गया है.
पश्चिम एशिया में कुछ नहीं बचेगा, US के हमले के बाद कहां निशाना लगाएगा ईरान; जारी की लिस्ट
ईरान ने पश्चिम एशिया के कुछ बड़े ऊर्जा संयंत्रों की लिस्ट जारी की है। तेहरान की तरफ से कहा गया कि अगर अमेरिका ने उसके ऊर्जा संयंत्रों पर हमला किया, तो वह इन ऊर्जा संयंत्रों को भी तबाह कर देगा। इस लिस्ट में सऊदी अरब, कुवैत, कतर, इजरायल के बड़े ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं।
मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा नहीं रहे! दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी पर हिमस्खलन बना काल
मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा नहीं रहे! दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी पर हिमस्खलन बना काल
आज और कल ईरान पर भारी?अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत निकलने की दी सलाह, क्या ट्रंप फिर ढाएँगे कहर
फिर तो मैं इतिहास बना दूंगा, क्या था निर्मल पुर्जा का प्लान; क्यों चुना था PoK पीक
जाने-माने पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का निधन हो गया। वह छह पर्वतारोहियों की टीम के साथ एक मिशन पर थे, जब एक हिमस्खलन की चपेट में आ गए। निम्स-दाई के नाम से मशहूर निर्मल की मौत के बाद उनका एक्स पर किया अंतिम पोस्ट वायरल हो रहा है।
पर्वतारोही निर्मल पुर्जा एक प्रसिद्ध शख्सियत थे। PoK की चोटी पर बर्फीले तूफान के बाद से वह लापता थे। उनकी मौत की पुष्टि उस कंपनी ने की है, जिससे वह जुड़े हुए थे।
'खाड़ी में इतने बम मारेंगे, गिन नहीं पाओगे', ट्रंप की धमकी पर ईरान ने जारी की तबाही की लिस्ट
अमेरिका ने कहा है कि वह जल्द ही ईरान पर बड़े हमले कर सकता है। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा किया तो पूरे मिडिल ईस्ट में तबाही मचा देंगे। इसे लेकर ईरान ने एक लिस्ट भी जारी की है।
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान गाली देती लड़की पर FIR, बचाव में अभिजीत दीपके का बयान और पीएम मोदी का माफ करने वाला वीडियो। पिछले 48 घंटे के इन तीन घटनाक्रम से सवाल उठा- क्या गाली देना क्राइम है? कुछ लोग ये भी कहे रहे कि जेन-जी के लिए गाली ‘न्यू नॉर्मल’ है। आखिर प्रोटेस्ट में खुलेआम गाली देने के पीछे जेन-जी की साइकोलॉजी क्या है और गाली देना कानूनी अपराध है या नहीं; आज के एक्सप्लेनर में समझेंगे… सवाल-1: गाली देने की वजह से लड़की पर FIR का पूरा मामला क्या है? जवाबः जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान एक लड़की का वीडियो वायरल है। वो पीएम मोदी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती है और गालियां देती है। 30 जुलाई को नोएडा पुलिस ने शांतिभंग, अपमानित करने और मानहानि के लिए BNS की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत FIR दर्ज कर ली। लड़की की मां ने कहा, 'हमने पुलिस को माफीनामा दिया है। जो हुआ उसका बहुत अफसोस है।’ 31 जुलाई की रात पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो मैसेज में कहा, ‘जंतर-मंतर पर कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी-भद्दी गालियां बोलीं। मुझे और मेरी स्वर्गीय माता को भी गालियां दीं। गुमराह बच्चों को गले लगाकर राह दिखाना हमारा काम है। सजा देने से परिस्थितियां नहीं बदलेंगी। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं।' इधर CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने लड़की के समर्थन में कहा, 'एक लड़की पर गाली देने के लिए केस हुआ। बीजेपी IT सेल के लोगों पर केस कब होंगे, जो सालों से ऑनलाइन लड़कियों को गालियां दे रहे थे। बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने एक सांसद के लिए कैसे शब्द इस्तेमाल किए थे। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी जर्नलिस्ट गालियां दी थीं।’ अभिजीत ने आगे कहा, 'गाली देना कोई क्राइम नहीं है। गाली देना बुरा हो सकता है, लेकिन उसको समझाइए कि गाली मत दो।’ सवाल-2: क्या वाकई गाली देना अपराध नहीं है? जवाबः 2 सिनैरियो हैं… 1. अगर ‘इरादा’ गलत न हो, तो गाली अपराध नहीं 2. अगर ‘इरादा’ गलत हो, तो गाली अपराध है गाली देने पर, मुख्य रूप से BNS की दो धाराओं में मुकदमा दर्ज होता है- धारा 352: शांति भंग के इरादे से किसी का अपमान करना। धारा 351: आपराधिक धमकी देना। दोनों धाराओं में अधिकतम 2 साल की जेल या जुर्माना हो सकता है। हालांकि केस-टू-केस कुछ और धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। जैसे- किसी महिला को गाली दी जाए, जो उसकी मर्यादा के खिलाफ हो, तो BNS की धारा 74 के तहत यौन अपराध का मुकदमा भी चल सकता है। इसी संदर्भ में विराग गुप्ता दो और सवाल उठाते हैं… सवाल-3: क्या गाली देना जेन-जी के लिए न्यू-नॉर्मल बन गया है? जवाबः हां, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस पीढ़ी में गालियां देना सामान्य चलन बन रहा है, जिसके पीछे 3 बड़ी वजहें हैं… 1. OTT, स्टैंडअप से एब्यूसिव भाषा का चलन 2. जेन-Z के एथिकल-मोरल फ्रेमवर्क में हिचक नहीं 3. हर जगह एक जैसे ‘इन्फॉर्मल’ हो रहे जेन-Z सवाल-4: क्या पहले भी इस तरह विरोध प्रदर्शनों में गालियां दी जाती थीं? जवाब: 1975 की इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ नारे लगे थे, 'इंदिरा हटाओ, देश बचाओ।' 1980 के बोफोर्स घोटाले के बाद पीएम राजीव गांधी के खिलाफ नारे लगे थे, 'गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर है।' हालांकि जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से पहले भारत के किसी आंदोलन में सार्वजनिक गाली-गलौच का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। इस प्रदर्शन में कॉकरोच पार्टी के नेताओं ने भी गालियों, अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। उनके समर्थन में आए कुछ लोगों ने आपत्तिजनक बातें कहीं। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, 'अपने समय में हमने भी आंदोलन किए, लाठियां खाईं और पत्थर भी फेंके, लेकिन तब ऐसी भाषा नहीं इस्तेमाल होती थी। अश्लील रील बनाने के लिए एक सीरियस मुद्दे का इस्तेमाल करना गलत था।' ----------- ये खबर भी पढ़िए… संसद पहुंचा वास्तेगुना-हुइंया और कुचु-पुचु; 56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा अचानक जेन-जी की भाषा क्यों बोलने लगी 56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा में इन दिनों 14 से 29 साल वाली जेन-जी के स्लैंग गूंज रहे हैं। कोई सांसद ‘वास्तेगुना-हुइंया’ और ‘कुच्चु-पुच्चु’ बोल रहा, तो किसी के भाषण में ‘डेलुलू’ और ‘क्लॉक्ड इट’ का इस्तेमाल हुआ। पूरी खबर पढ़िए…
नेपाल में बवाल के बीच बिहार बॉर्डर पर हाई अलर्ट, देखें सुरक्षा इंतजाम
नेपाल में बवाल इस कदर बढ़ गया है कि कई जिलों में कर्फ्यू लगाना पड़ा है और सेना को सड़कों पर उतरना पड़ा है. जगह-जगह हुए हिंसक झड़पों में तीन लोगों की मौत हो गई है. इस मामले में भारत के लिए चिंता और सतर्कता की जरूरत इसलिए है क्योंकि उसकी सीमा से लगे हुए इलाकों में माहौल तेजी से बिगड़ा है. देखें वीडियो.
PoK के समर्थन में लाहौर में प्रदर्शन, पुलिस का एक्शन
PoK में हिंसा के विरोध में लाहौर में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की. कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. क्षेत्रीय चुनावों के बाद हालात और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. जून की शुरुआत से ही क्षेत्र में लगातार विरोध-प्रदर्शन, धरने और बंद का दौर जारी है.
नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर स्थित ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन में निधन हो गया।
आंध्र प्रदेश में अविश्वसनीय गति से प्रगति-मोदी
विजयनगरम (आंध्र प्रदेश)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम में 17,900 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटनकर उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। स्वर्ण आंध्र की परिकल्पना केलिए इस दिन के अपार महत्व को उजागर करते हुए प्रधानमंत्री ने भगवान वराह लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी,...
ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन का कहर: नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा लापता, फुटेज में देंखे 4 पर्वतारोहियों के शव मिले
Scarborough Shoal विवाद पर दक्षिण चीन सागर में चीन का सैन्य अभ्यास
चीन की सेना ने विवादित दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल के पास संयुक्त हवाई और नौसैनिक अभ्यास आयोजित किए हैं। इन अभ्यासों का मुख्य उद्देश्य चीन की युद्धक तत्परता का परीक्षण करना और देश की क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा करना था। हुअंगयान द्वीप पर नए नियम इसी बीच, चीन ने हुअंगयान द्वीप राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व के लिए नए नियमों की घोषणा की है। इसके साथ ही, चीन के तटरक्षक बल ने इस क्षेत्र में गश्त और कानून प्रवर्तन गतिविधियों को बढ़ाने की भी घोषणा की है। दक्षिण चीन सागर में तनाव यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय तनाव पहले से ही बना हुआ है। स्कारबोरो शोल (जिसे फिलीपींस में पां.ग.सी.एन.श.य.ओ. ग.स. ग.न. और चीन में हुअंगयान द्वीप के नाम से जाना जाता है) पर चीन, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के बीच संप्रभुता को लेकर विवाद है। चीन इन अभ्यासों और नियमों के माध्यम से अपनी क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने और किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने की अपनी क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है।
WSJ की सनसनीखेज रिपोर्ट, President Donald Trump ने Iran पर सैन्य हमले का दिया आदेश
'वॉल स्ट्रीट जर्नल' में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को इसी वीकेंड ईरान पर नया हमला करने का निर्देश दिया है। अखबार ने नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा कि इस प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई का मकसद तेहरान को घुटने टेकने पर मजबूर करना है। यह घटनाक्रम राष्ट्रपति ट्रंप के उन बयानों के बाद सामने आया है जिनमें उन्होंने तेहरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत को लेकर अनिश्चितता जताई थी। साथ ही, उन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के बाद कड़ी सैन्य जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दोहराई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को मैरीलैंड में कैंप डेविड प्रेसिडेंशियल रिट्रीट में कैबिनेट की बैठक के दौरान कहा, हम उन पर बहुत ज़ोरदार हमला करेंगे और आगे कहा और किसी न किसी मोड़ पर वे कहेंगे कि अब वे इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसे भी पढ़ें: Donald Trump ईरान पर नए सैन्य हमलों पर कर रहे विचार, White House ने दिए संकेत इसके अलावा, CBS ने रिपोर्ट दी कि वॉशिंगटन ईरान की एनर्जी सुविधाओं, जैसे कि बिजली घरों और पेट्रोलियम रिफाइनरियों पर संभावित हमलों पर विचार कर रहा है। मानवाधिकार और वकालत करने वाले संगठनों ने कहा है कि आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए जानबूझकर हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। CBS की रिपोर्ट के बाद, शुक्रवार दोपहर पोस्ट-सेटलमेंट ट्रेडिंग के दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतें 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा ईरान को तब तक कीमत चुकानी होगी जब तक वे उस तरीके से बातचीत की मेज पर नहीं आते जिसे राष्ट्रपति ट्रंप सार्थक मानते हैं। इसे भी पढ़ें: ईरान की खुली धमकी: US और Israel के Energy Assets को बनाएंगे निशाना, Trump की कार्रवाई का देंगे करारा जवाब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना रुख बदलने से पहले कई बार बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है, लेकिन जारी संघर्षों ने अमेरिकी सैन्य भंडार को काफी कम कर दिया है, खासकर उन अहम एयर डिफेंस इंटरसेप्टर्स को जिनका इस्तेमाल सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए किया जाता है। यह संघर्ष, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद शुरू हुआ था, पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अस्थिरता का कारण बना है। इसके बाद तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया, जिससे कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक की महत्वपूर्ण समुद्री आपूर्ति रुक गई। फारस की खाड़ी के देशों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण कामकाज और अर्थव्यवस्था में भारी व्यवधान पैदा हुआ है।
पाकिस्तान: हिमस्खलन में लापता 3 पर्वतारोहियों के शव मिले
पाकिस्तान की ब्रॉड पीक पर्वत पर आए हिमस्खलन के बाद दस अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहियों का दल लापता है, जिसमें प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा भी शामिल हैं। बचाव दल ने अब तक तीन शव बरामद किए हैं। खराब...
मोबाइल पर रील देखने में मशगूल एक महिला ने अपने छह महीने के मासूम को तड़प-तड़प कर मरने पर मजबूर कर दिया। मामला अमेरिका के फ्लोरिडा का है। इस दिल दहला देने वाली घटना के सामने आने के बाद बच्चे की मां को गिरफ्तार कर लिया गया।
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यूक्रेन के कीव पर टूटा रूसी मिसाइल का कहर, देखें दुनिया आजतक
यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस ने मिसाइल हमला किया, जिसमें कम से कम नौ लोगों की जान चली गई. रूसी हमले की निशाना बनी इमारत में कई लोग फंस गए. एक दर्जन से ज्यादा धमाकों से शहर दहल उठा. कीव मेयर ने कई जगहों पर आग की भी बात कही. देखें दुनिया आजतक.
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