9 साल की बच्ची को भी आ सकता है हार्ट अटैक? दिल्ली की घटना से जानें
दिल्ली के मयूर विहार के एक स्कूल में 9 साल की बच्ची की क्लासरूम में अचानक गिरकर मौत हो गई. इस मामले में हार्ट अटैक की आशंका जताई गई है. क्या इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक आ सकता है इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.
SP भानु प्रताप सिंह पर गिरी गाज, पटना पुलिस मुख्यालय बुलाए गए
बिहार के खगड़िया में एसपी रहे IPS अधिकारी भानु प्रताप सिंह को सरकार ने पद से हटाकर पटना पुलिस मुख्यालय बुला लिया है. उनकी पत्नी पूजा सिंह ने प्रताड़ना और छह साल की बेटी से बात नहीं करने देने के आरोप लगाए थे. महिला थाने में शिकायत दी गई है, लेकिन अभी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है. पत्नी तलाक के बजाय परिवार बसाना चाहती हैं.
देहरादून में भारी वाहनों का कहर, आशारोड़ी इलाके का केस
देहरादून के मोहब्बेवाला में कंटेनर ट्रक कार पर पलट गया. इस हादसे ने आशारोड़ी क्षेत्र में सड़क सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े किए हैं. जनवरी 2024 से अक्टूबर 2026 तक यहां कम से कम 17 हादसों में 10 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. वीडियो में जानें मामला.
दिवाली से पहले बाजारों में उमड़ी भीड़! दिल्ली के कई इलाकों में भीषण जाम
दिवाली और धनतेरस के त्योहारों से ठीक पहले दिल्ली के बाजारों में भारी भीड़ उमड़ी है, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है. खासकर साउथ एक्स मार्केट के आसपास रिंग रोड पर भीषण जाम लग गया है, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
अनाया बांगड़ का देसी दिवाली अवतार, सिल्वर लहंगे में ढाया कहर
अनाया बांगड़ ने दिवाली के खास मौके पर अपना एक खूबसूरत वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने सिल्वर और ग्रे रंग का शिमरी लहंगा और खूबसूरत ब्लाउज पहना है. उनका यह ट्रेडिशनल और ग्लैमरस अंदाज फैन्स को खूब पसंद आ रहा है और यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की बंपर जीत, डोनाल्ड ट्रंप को झटका
अमेरिका के मिड-टर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की है. सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में डेमोक्रेट्स ने बहुमत हासिल किया. महंगाई, इंधन की बढ़ती कीमतें और ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी जनता ने डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को नकार दिया है.
छोटी दिवाली पर क्यों होता है अभ्यंग स्नान? इस एक गलती से मिलता है नर्क
Narak Chaturdashi 2026: इस बार 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी पर सुबह अभ्यंग स्नान होगा. मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और अलक्ष्मी से मुक्ति मिलती है.
आधी से कम कीमत पर Asus के धांसू लैपटॉप्स, दिवाली धमाका सेल
दिवाली सेल में कई गैजेट्स पर अलग अलग डील्स और डिस्काउंट मिल रहे हैं. ASUS ने भी दिवाली सेल का ऐलान किया है. कंपनी का दावा है कि सेल में लैपटॉप्स आधी से भी कीम कीमत पर खरीदा जा सकता है.
Israel Election Results: चुनाव समिति ने राष्ट्रपति को सौंपे नतीजे, धांधली के दावे खारिज
(हरिंदर मिश्रा)यरुशलम, चार नवंबर वोट चोरी और धांधली के आरोपों के बीच, इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) के अध्यक्ष नोम सोहलबर्ग ने चुनाव के नतीजे बुधवार को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंप दिए, जिससे नयी सरकार के गठन को लेकर विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव परिणामों पर संदेह जताने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी देते हुए, उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश सोहलबर्ग ने कहा कि ऐसा करना इजराइल के लोकतंत्र के लिए “एक वास्तविक खतरा” है। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी धांधली का संदेह साबित भी हो जाए, तो भी उसका असर इतना नहीं होगा कि नतीजों को अमान्य किया जा सके। सोहलबर्ग ने यहां राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास पर आयोजित एक समारोह में कहा, “हाल के दिनों में, हमने ऐसी बातें सुनी हैं जो चुनाव परिणामों पर संदेह पैदा करने और उनकी वैधता को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। यह एक वास्तविक खतरा है।”उन्होंने कहा, “लोकतंत्र के आधारों में से एक यह है कि सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। यह इस समझ से आता है कि मतदाताओं की इच्छा हम सभी के लिए बाध्यकारी है।”इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके गठबंधन सहयोगियों ने चुनावी धांधली का आरोप लगाया और मांग की कि चुनाव परिणामों के प्रकाशन पर रोक लगाई जाए। सोहलबर्ग ने बताया कि बुधवार सुबह सीईसी सदस्यों के सामने आरोपों की जांच का सारांश पेश किया गया था, और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन संदेहों की गहन जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “फिलहाल ये केवल संदेह हैं, लेकिन अगर इनकी पुष्टि भी हो जाती है, तो भी इनका संभावित असर सीमित ही होगा। इसलिए, चुनाव परिणामों को प्रकाशित न करना... और नेसेट (संसद) का कार्यकाल, जो पहले ही समाप्त हो चुका है, उसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है।”सोहलबर्ग ने कहा, “इसके अनुसार, हम अब चुनाव परिणामों की घोषणा कर रहे हैं। अगर आगे कोई सबूत मिलता है, तो चुनाव परिणामों के खिलाफ अपील करने के लिए कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी।”उन्होंने अरब समुदायों में मतदान पर संदेह जताने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हमें अरब समाज में मतदान पर संदेह नहीं करना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे हमें इजराइली समाज के किसी अन्य समूह के मतदान पर भी संदेह नहीं करना चाहिए।”सोहलबर्ग ने कहा, “मतों की गिनती पूरी होने पर भी मतभेद खत्म होना जरूरी नहीं है, लेकिन नतीजे हम सभी पर लागू होते हैं।”इस बीच, हर्जोग ने कहा कि उन्हें शिन बेट सुरक्षा एजेंसी, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारियों के काम पर “पूरा भरोसा” है, जो चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से संयम बरतने का अनुरोध करते हुए कहा, “चुनाव परिणामों पर बाहरी ताकतों के विध्वंसक प्रभाव की किसी भी आशंका की शिन बेट और पुलिस द्वारा गहन जांच की जानी चाहिए।”हर्जोग ने इजराइल के अरब समुदाय को “बदनाम” करने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने हाल ही में सुनी गई नस्लवादी टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा, “... इजराइल के अरब समाज के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है। जीवन के हर क्षेत्र में देश के लिए उनके योगदान और मुख्यधारा में शामिल होने की उनकी इच्छा का मैं कद्र करता हूं।”उन्होंने कहा, “चुनाव खत्म हो चुके हैं। अब वास्तविकता का सामना करने का समय है।”राष्ट्रपति अब नेसेट के लिए चुने गए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे। वे यह तय करेंगे कि पार्टियों के समर्थन के आधार पर सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए। हर्ज़ोग द्वारा चुने गए उम्मीदवार के पास गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन होंगे; यदि राष्ट्रपति को लगता है कि और समय की जरूरत है, तो वे 14 दिन का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। सीईसी ने एक बयान में कहा, “समीक्षा में ऐसी किसी भी अनियमितता का कोई सबूत नहीं मिला, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर आंच आई हो या नतीजों पर कोई असर पड़ा हो।”न तो नेतन्याहू के गुट को और न ही प्रमुख प्रतिद्वंद्वी व विपक्ष के नेता आइजेनकोट के सहयोगियों के गुट को नयी सरकार बनाने के लिए जरूरी संसदीय बहुमत मिला है। इससे इन दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच या फिर आइजेनकोट और कुछ अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावना बन गई है। अरब पार्टियों ने 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में नेसेट की 120 में से 19 सीटें जीतीं, जिससे वे संभावित किंगमेकर बन गई हैं। अगर इनमें से कोई भी नेता सरकार नहीं बना पाता है तो अगले साल की शुरुआत में देश में फिर से चुनाव कराए जाएंगे।
कंबोज की खौफनाक गेंदबाजी का क्या है राज? गावस्कर ने कही बड़ी बात
भारतीय टीम के युवा गेंदबाज अंशुल कंबोज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अपना दमखम दिखाया. कंबोज ने जिस तरीके से अपनी गेंद से न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को परेशान किया. क्रिकेट के दिग्गज लगातार कंबोज की तारीफ कर रहे हैं.
अमेरिका की राजनीति में भारतीय प्रवासियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिसका ताज़ा प्रमाण हालिया मिडटर्म चुनावों के नतीजों में देखने को मिला। मिड टर्म इलेक्शन में डॉनल्ड ट्रंप ने अपने चहेते कैंडिडेट्स के लिए पूरी ताकत लगा दी। खुद प्रचार किया, रैलियां की, जनता से उन्हें जिताने की अपील की। लेकिन 3 नवंबर को आए अमेरिकी टर्म चुनाव के नतीजों ने ट्रंप को बड़ा झटका दिया। टैक्स, ओहायो और दक्षिणी कैरोलना में उनके समर्थन वाले तीनों उम्मीदवार चुनाव हार गए। इनमें भारतीय मूल के विवेक रामस्वामी भी शामिल हैं। वहीं टेक्सेस में डेमोक्रेट जेम्स टेलरिको ने रिपब्लिकन केन पैक्स्टन को हराकर इतिहास रच दिया। दक्षिणी कैरोलना में एनी एंड्र्यूस ने रिपब्लिकन डार्लिन ग्राहम को शिकस्त दी। यह तीनों नतीजे इसलिए अहम हैं क्योंकि इन राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी की मजबूत पकड़ मानी जाती है और इन तीनों उम्मीदवारों को ट्रंप का समर्थन हासिल था। अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर बनकर इतिहास रचा, वहीं अमी बेरा और प्रमिला जयपाल ने भी संसद में अपनी पकड़ मजबूत की। इनमें प्रमिला जयपाल का नाम विशेष रूप से ध्यान खींचता है, जो भारत सरकार की विभिन्न नीतियों और प्रक्रियाओं पर अपनी मुखर टिप्पणियों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रही हैं। इसे भी पढ़ें: US Midterm Election Results: Donald Trump की हार के बाद Gyanesh Kumar पर बने मीम्स टैक्सेस की। इसे रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने यहां करीब 14% वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। इस बार यहां अमेरिकी सेनेट की सीट के लिए मुकाबला था। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टेलरिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्स्टन को हरा दिया। टेलरिको को करीब 56% वोट मिले। जबकि पैक्स्टन को करीब 43% वोट मिले। 37 साल के जेम्स टेलरिको टेक्सस की विधानसभा के सदस्य और पूर्व शिक्षक हैं। उन्होंने महंगाई, भ्रष्टाचार और राजनीति [संगीत] में अमीरों के बढ़ते प्रभाव को चुनावी मुद्दा बनाया। वहीं केन पैक्सन टैक्सेस के अटर्नी जनरल रह चुके हैं। उनके उम्मीदवारों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में भी मतभेद थे। उन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। पैक्स्टन ने हार स्वीकार कर ली। ट्रंप को दूसरा बड़ा झटका ओहा में लगा। यहां ट्रंप के करीबी माने जाने वाले भारतीय मूल के विवेक रामस्वामी गवर्नर का चुनाव हार गए। उनके सामने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार एमी एक्सन थी। 2024 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी पेश की थी। बाद में ट्रंप का समर्थन करते हुए अपनी दावेदारी वापस ले ली। इसके बाद वह ट्रंप के करीबी नेताओं में गिने जाने लगे। इस चुनाव में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी रामस्वामी के लिए प्रचार किया था। लेकिन एमी एक्सन ने उन्हें हरा दिया। एकन ओहायो की 20 साल में पहली डेमोक्रेटिक गवर्नर और इस पद पर चुनी जाने वाली पहली महिला बनी है। तीसरी हार दक्षिणी कैरोलना में हुई। यहां रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लिंग ग्राहम को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्र्यूस ने हरा दिया। डार्लिंग ग्राहम को ट्रंप का समर्थन हासिल था। वह दिवंगत रिपब्लिकन सेनेटर लिंसे ग्राहम की बहन है। लिंसे ग्राहम की जुलाई 2026 में मौत के बाद उन्हें इस सीट पर नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी का प्राइमरी चुनाव भी जीता। इसे भी पढ़ें: चले थे ईरान की रिजीम बदलने, चुनाव में ट्रंप और नेतन्याहू दोनों पिटे डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अमी बेरा ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर जीत दर्ज की है। 61 वर्षीय अमी बेरा अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना आठवां कार्यकाल शुरू करेंगे। चेन्नई में जन्मी प्रमिला जयपाल ने वॉशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। 1965 में जन्मीं प्रमिला महज 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गई थीं। उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने 14 अक्टूबर 2026 को भारत में चल रहे SIR पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत सरकार वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने की कोशिश कर रही है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया। वह जनवरी में नए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के गठन के साथ अपना कार्यकाल शुरू करेंगी। भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में दोबारा जीत दर्ज की है। वह गवर्नर वेस मूर के साथ मिलकर अपना दूसरा कार्यकाल संभालेंगी। भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत दर्ज की है। वे डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं। 50 वर्षीय रो खन्ना का निर्वाचन क्षेत्र सिलिकॉन वैली का अहम हिस्सा है। डेमोक्रेटिक सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। 40 वर्षीय सुहास ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना दूसरा कार्यकाल पक्का किया।
'अरबों के वोट पर शक न करें', इजरायली राष्ट्रपति की नेतन्याहू को खरी-खरी, नतीजों को दी मंजूरी
इजरायल के राष्ट्रपति और मुख्य चुनाव आयुक्त दोनों ने कहा है कि अरब समुदाय के वोट पर शक नहीं किया जाना चाहिए. नेतन्याहू की पार्टी ने इजरायल के अरब क्षेत्रों में वोटिंग के दौरान अनियमितता का आरोप लगाया है. आज इजरायल के मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावी नतीजों को मंजूरी दे दी.
सिद्धू मूसेवाला को क्यों याद करने लगे राहुल गांधी?
पंजाब के संगरूर की रैली में राहुल गांधी ने सिद्धू मूसेवाला को याद करते हुए उनकी प्रतिभा, कांग्रेस में आने की इच्छा और हत्या का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सोच ने मूसेवाला की जान ली, वही आज पंजाब में हुनरमंद युवाओं को डरा रही है. वीडियो में जानें डिटेल्स.
सत्ता बदली है, नीयत नहीं...; अमेरिकी चुनाव पर मोजतबा खामेनेई की दो टूक
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अमेरिका में सत्ता में चाहे कोई भी पार्टी हो, तेहरान के प्रति वाशिंगटन की दुश्मनी नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद भी अमेरिकी रवैये में बदलाव नहीं होगा…
चले थे ईरान की रिजीम बदलने, चुनाव में ट्रंप और नेतन्याहू दोनों पिटे
ट्रंप और नेतन्याहू दोस्ती में इसराइल के लिए ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन को पलटने के लिए निकले थे और फरवरी के आखिर में हमला भी किया। ईरानी सुप्रीम लीडर को भी मार दिया। लेकिन ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन ज्यों का त्यों है। मगर सिर्फ 9 माह बाद पीएम नेतन्याहू सत्ता तक नहीं पहुंच पाए। वहां मुसलमानों की अरब पार्टियां सत्ता की चाबी ले गई और इधर अमेरिका में ट्रंप के हाथ से पावर निकल गया। वो वीटो पावर का डर जरूर दिखा रहे हैं लेकिन ईरान से पंगा लेना ही उनकी पार्टी को मिड टर्म इलेक्शन में खा गया। ट्रंप ने तो उस वक्त ईरान के लोगों से कहा था कि वह अपनी सरकार पर कब्जा कर लें। नेतन्याहू भी लगातार ईरान की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की बात करते रहे। लेकिन दोनों की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत के बावजूद ईरान नहीं हिला। इसराइल और अमेरिका की सत्ता जरूर हिल गई। इसराइल और अमेरिका की जनता इसी सवाल के साथ वोट देने पहुंची थी कि हमें जंग में क्यों झोंका? हम पर महंगाई का बोझ क्यों थोपा और उसका असर चुनावी नतीजों के तौर पर साफ दिखा। जनवरी 2026 के ईरान के महंगाई विरोधी प्रदर्शनों को ट्रंप ने सत्ता परिवर्तन के मौके के रूप में देखा था। उनकी सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाने पर विचार किया। जंग तक कर डाली। वह भी 40 दिनों तक। हासिल सिर्फ हार हुई। इसे भी पढ़ें: अमेरिका में जीती फिलिस्तीनी हिजाब वाली महिला, मुंह दिखाने लायक नहीं रहे ट्रंप मिडिल ईस्ट में अमेरिका के पैर उखड़ गए। इसराइल में नेतन्याहू की पार्टी इख्तदार में नहीं आ रही है और ट्रंप की ताकत भी चली गई। अब 2 साल जैसे तैसे चलेगा अमेरिका का निजाम मचेगी खूब खींचतान। डेमोक्रेट्स की कांग्रेस और सीनेट जंग के लिए बजट ही जारी नहीं करेगी तो लड़ेंगे किससे और कैसे? जंग के दौरान ट्रंप और नेतन्याहू ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन तो किया लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आया कि किसी देश के नेता को मार डालना और उसकी पूरी राजनीतिक व्यवस्था को बदल देना दो अलग-अलग बातें हैं। ईरान में सत्ता का आधार सिर्फ खामने ही नहीं बल्कि धार्मिक संस्थाओं, सुरक्षा बलों और ताकतवर इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉप्स यानी पांच दारा इस्लाम का पूरा नेटवर्क है। यही वजह रही कि ईरान के नेतृत्व को तो खत्म कर दिया गया लेकिन वहां के निजाम को नहीं बदला जा सका। दूसरी तरफ युद्ध की कीमत, आर्थिक दबाव और सियासी फैसलों को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू को अपने ही देशों में सवालों का सामना करना पड़ रहा है। इसे भी पढ़ें: US ने फिर हमले किए तो Middle East में और व्यापक होगा युद्ध, Iran की कड़ी चेतावनी अमेरिका में ट्रंप की हार पर ईरान ने सिर्फ इतना ही कहा है कि अंतरात्मा की आवाज हो या महंगाई का बोझ अमेरिकियों ने जंग के खिलाफ वोट किया है। हम उनके इस संदेश का समर्थन करते हैं। अगर अमेरिकी सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय आकाओं और ब्लैकमेल करने वालों के हितों की सेवा के लिए अपने ही नागरिकों की इच्छा के साथ विश्वासघात करती है तो उसे इसका खौफनाक अंजाम भुगतना पड़ेगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगी।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में 4 नवंबर की शाम 5 बजे तक के नतीजे देखें, तो ट्रम्प 84 साल की सबसे बड़ी हार की तरफ बढ़ रहे हैं। उनकी पार्टी अमेरिकी संसद के लोअर हाउस में पिछले चुनाव से रिकॉर्ड 79 सीटें पीछे है। ये पिछले 22 मिडटर्म चुनावों में किसी राष्ट्रपति का सबसे बड़ा घाटा है। हालांकि ये फाइनल नतीजे नहीं हैं, गिनती जारी है। आखिर ट्रम्प इतनी बुरी तरह क्यों हार रहे, क्या राष्ट्रपति की कुर्सी और हनक छिन सकती है, अमेरिका और बाकी दुनिया के लिए इसके क्या मायने, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: मिडटर्म में ट्रम्प की हार कितनी बड़ी है? जवाबः अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। इसी कार्यकाल के ठीक बीच, यानी दो साल बाद अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ के चुनाव होते हैं, इन्हें मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है। 3 नवंबर को मिडटर्म वोटिंग हुई थी और 4 नवंबर को नतीजे आ रहे हैं… हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में ट्रम्प ने 79 सीटें गंवाई सीनेट में ट्रम्प की पार्टी ने 7 सीटें गंवाई 84 सालों में किसी राष्ट्रपति को मिड टर्म में मिली सबसे बड़ी हार हो सकती है… सवाल-2: आखिर इतनी बुरी तरह क्यों हारे ट्रम्प, अमेरिकी अपने राष्ट्रपति से खुश क्यों नहीं? जवाबः 4 बड़ी वजहें हैं…1. बढ़ती महंगाई, कॉस्ट ऑफ लिविंग पर ट्रम्प से परेशान थे 71% अमेरिकी 2. ट्रम्प के ईरान जंग लड़ने के फैसले से 65% अमेरिकी नाखुश 3. ट्रम्प पर गलत तरीके से पैसा कमाने, निजी फायदे के आरोप ट्रम्प पर कई वित्तीय मामलों को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। डेमोक्रेट्स ने लगातार इन मुद्दों को उठाया… 4. लैटिन वोटरों की नाराजगी, ट्रम्प को मिला समर्थन घटा सवाल-3: इस हार से ट्रम्प की कुर्सी और सरकार पर कितना खतरा? जवाबः अमेरिका में राष्ट्रपति की शक्तियां और नियुक्ति संविधान के जरिए होती है, न कि सिर्फ संसद में बहुमत से। इसलिए मिडटर्म हारने से उनके पद पर फौरन कोई खतरा नहीं है। उनकी कई ताकतें भी बरकरार रहेंगी, जैसे- एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करना, कांग्रेस के किसी भी बिल पर वीटो करना, विदेश नीति और सैन्य कार्रवाइयों पर फैसले लेना। ट्रम्प के वीटो को पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई वोट चाहिए, जो मौजूदा हालात में मुश्किल है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस का काम कानून बनाने के अलावा सरकार की निगरानी करना भी है। चुनाव से पहले रिपब्लिकन्स के पास संसद में बहुमत होने से ट्रम्प कानून बनाने से लेकर बजट मंजूर करने तक सारे फैसले अपनी मर्जी से ले रहे थे। लेकिन अब हाउस और सीनेट दोनों विपक्षी डेमोक्रेट्स के हाथ में आने से ट्रम्प की 3 बड़ी ताकतें छिन जाएंगी… 1. समन और जांच करने की ताकत: हाउस की ओवरसाइट, ज्यूडिशियरी, इंटेलिजेंस और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कमेटियों के अध्यक्ष डेमोक्रेट्स बनेंगे। ये लोग किसी को भी सबपोना, यानी कानूनी समन भेजकर हाजिर होने और सबूत पेश करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। अब ये पद छिनने से ट्रम्प की निगरानी बढ़ेगी। ट्रम्प के करीबियों और सरकारी अफसरों से जुड़ी जांचें शुरू हो सकती हैं। 2. सरकारी खजाने पर कंट्रोल: अमेरिका में बजट या टैक्स से जुड़े प्रस्ताव पास करने का अधिकार हाउस को है। ऐसे में ट्रम्प और डेमोक्रेट्स के बीच सरकारी खर्चों को लेकर खींचतान बढ़ सकती है। सरकारी कामकाज ठप पड़ सकता है। 3. पसंदीदा नियुक्तियां करना: सीनेट ही नए जजों, कैबिनेट मंत्रियों और अन्य अधिकारियों की नियुक्तियों को मंजूरी देती है। डेमोक्रेट्स का बहुमत होने से ट्रम्प की पसंदीदा नियुक्तियों पर ब्रेक लग सकता है। ट्रम्प की अपनी पार्टी पर पकड़ कमजोर हो सकती है। ट्रम्प का यह दूसरा कार्यकाल है। कानूनन वे तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते। अगले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए कुछ रिपब्लिकन नेता ट्रम्प से दूरी बना सकते हैं। ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग का भी खतरा है। वे 2019 और 2021 में 2 बार महाभियोग झेल चुके हैं। डेमोक्रेट्स तीसरी बार भी महाभियोग ला सकते हैं। ट्रम्प भी कह चुके हैं कि अगर रिपब्लिकन नहीं जीते तो वे (डेमोक्रेट्स) महाभियोग में फंसाने की कोई वजह ढूंढ लेंगे। सवाल-4: भारत समेत बाकी दुनिया के लिए ये नतीजे क्या असर डालेंगे? जवाबः ईरान जंग के दौरान दुनिया में तेल के दाम 35 डॉलर बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने के चलते सप्लाई चेन में रुकावटें हैं। यूरोपीय देशों, सहित लगभग पूरी दुनिया में सामान की कीमतें बढ़ी हैं। अब अगर ईरान जंग रुकती है, तो ग्लोबल इकॉनमी दोबारा पटरी पर आती हुई दिख सकती है। मिडटर्म के नतीजों से ईरान जंग तुरंत खत्म होने की संभावना कम है, क्योंकि अमेरिकी संविधान के तहत मिलिट्री ऑपरेशन्स के आखिरी फैसले राष्ट्रपति ही लेते हैं। वे ही सेना के 'कमांडर-इन-चीफ' हैं, लेकिन डेमोक्रेट्स जंग खत्म करने के लिए ट्रम्प पर दबाव बना सकते हैं। अमेरिका में जंग के एलान और सेना के फंड का अधिकार संसद के पास है। डेमोक्रेट बहुमत वाली संसद बजट को रोक सकती है या सैन्य खर्च पर कड़ी शर्तें लगा सकती है। डेमोक्रेट्स वॉर पावर्स एक्ट के तहत ट्रम्प से बिना संसदीय मंजूरी के 9 महीने से जारी मिलिट्री ऑपरेशन्स का हिसाब भी मांग सकते हैं। वहीं भारत से अमेरिका के रिश्ते ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही बिगड़ने लगे थे। ट्रम्प ने भारत पर 50% तक टैरिफ लगाया। रूस से तेल खरीदने पर बार-बार बैन की धमकी दी। 2025-26 में 4800 से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किया। H-1B वीजा नियमों में कड़ाई की। इसके अलावा ट्रम्प ने 100 से ज्यादा बार कहा कि उन्होंने भारत-पाक सीजफायर कराया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ट्रम्प और अमेरिका ने पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ाईं। वहीं भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। अमेरिकी थिंकटैंक कार्नेगी एंडाउमेंट के साउथ एशिया प्रोग्राम के डायरेक्टर मिलन वैष्णव मानते हैं कि ट्रम्प का कमजोर पड़ना भारत के हित में होगा, क्योंकि जिस तरह मौजूदा प्रशासन ने भारत के साथ रिश्ते बनाएं हैं, उससे कई डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसद नाराज हैं। वे मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी में विश्वास रखते हैं। हालांकि साउथ एशिया एनालिस्ट माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि भारत के मामले में ट्रम्प की नीति नहीं बदलेगी। वो बाकी दोनों सालअमेरिकी फायदे के हिसाब से चलेंगे। वे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स के जरिए ‘अमेरिका फर्स्ट’ की पॉलिसी बरकरार रखेंगे। ----------- ये खबर भी पढ़िए… क्या अब इजराइल में मुस्लिमों का दबदबा होगा; नेतन्याहू बहुमत से 8 सीट पीछे, अरब पार्टियां कैसे बनीं किंगमेकर इजराइल में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिल रहा है। सत्ताधारी पीएम नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से 8 सीटें पीछे और विपक्षी नेता आइजेनकोट का गठबंधन 13 सीटें पीछे रह गया। 19 सीटें जीत रहीं अरब पार्टियां, इजराइल में किंग मेकर की भूमिका में हैं। नतीजों की घोषणा 4 नवंबर को होगी। पूरी खबर पढ़िए…
SIR और चुनाव आयुक्तों की कानूनी छूट पर SC में सुनवाई
वोटर लिस्ट के SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से तीखे सवाल पूछे. कोर्ट ने हटाए गए वोटरों की सूची स्थानीय भाषा में लगाने और फॉर्म-6 की बाध्यता पर सवाल उठाए. वहीं, चुनाव आयुक्तों को कानूनी छूट देने वाले कानून पर केंद्र से जवाब मांगा. वीडियो में जानें डिटेल्स.
US मिडटर्म में 'देसी' फ्लेवर... पिया, अरुणा, सुहास जीते, SIR पर सवाल उठाने वाली प्रमिला भी विजयी
यूएस मिडटर्म चुनाव में एक बार फिर से भारतीय मूल के अमेरिकी नेताओं ने कामयाबी हासिल की है. इस चुनाव में डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले ये नेता अब अमेरिकी संसद और प्रशासन में अहम जिम्मेदारियां निभाएंगे. खास बात यह है कि इन नेताओं की राजनीतिक प्राथमिकताएं और चुनावी मुद्दे अलग-अलग हैं.
मंदिर में प्रसाद की तरह बंटता है लाखों का खजाना, भक्तों को मिलेंगे सिक्के
काशी के प्राचीन मां अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस से पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव शुरू होगा. इस दौरान मां के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के साथ करीब 8 से 10 लाख रुपये के सिक्के भक्तों में बांटे जाएंगे. मान्यता है कि मां का यह खजाना घर ले जाने से धन-धान्य की कमी नहीं होती और परिवार में बरकत बनी रहती है.
बड़ा स्कैम: 100Cr डूबे, बिना अनुमति Apple-Nvidia के बेचे गए शेयर!
अमेरिकी बाजार में भारतीय द्वारा खरीदे गए Apple, Tesla, Nvidia के शेयर बिना उनकी अनुमति के ही बेच दिए गए है और उनकी जगह पर कुछ चीनी कंपनियों के शेयर खरीदे गए, जिस कारण उन्हें करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. आइए समझते हैं पूरा मामला...
US के इतिहास में बने पहले मुस्लिम सेनेटर बने डॉ. अब्दुल, जानिए भारत कनेक्शन?
अमेरिका के इतिहास में पहली बार मिशिगन से डॉ. अब्दुल पहले मुस्लिम सेनेटर चुने गए हैं. 42 वर्षीय महामारी विज्ञानी डॉ. अब्दुल ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रॉजर्स को हराया. चुनावी विवादों और तीखे बयानों के बावजूद उन्होंने जनहित के मुद्दों पर जीत दर्ज की. उनकी पत्नी सारा जुकाकू का संबंध कर्नाटक के भटकल से है, जिससे उनका भारतीय कनेक्शन चर्चा में है.
मिस्र से रिश्ता, कर्नाटक का दामाद, ट्रंप की नींद उड़ाने वाले अमेरिका के अब्दुल की कहानी!
अमेरिका ने अपना पहला मुस्लिम सीनेटर चुना है। डेमोक्रेट अब्दुल अल-सैयद ने 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों में मिशिगन सीनेट सीट जीतकर इतिहास रच दिया है। इन चुनावों में पूरे देश में 'ब्लू वेव' (डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर) देखने को मिली। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका कर्नाटक से भी संबंध है। उनकी पत्नी, डॉ. सारा जुकाकू, पूर्व मैसूर राज्य सरकार के एक पूर्व मंत्री की पोती हैं। सारा का परिवार कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल से ताल्लुक रखता है, जो मंगलुरु से लगभग 140 किमी उत्तर में स्थित एक तटीय शहर है। उनके दादा, जे.एच. शम्सुद्दीन जुकाकू, एक जाने-माने वकील, शिक्षाविद और राजनेता थे। उन्होंने 1950 के दशक में तत्कालीन मैसूर राज्य सरकार में उप-वित्त मंत्री के रूप में काम किया था। संदर्भ के लिए, मैसूर राज्य का गठन तब हुआ था जब 1950 में मैसूर साम्राज्य को भारतीय गणराज्य में शामिल किया गया था। 1 नवंबर 1956 को 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम' (States Reorganisation Act) के तहत इसका विस्तार किया गया और नवंबर 1973 में आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया। इसे भी पढ़ें: US ने फिर हमले किए तो Middle East में और व्यापक होगा युद्ध, Iran की कड़ी चेतावनी जे.एच. शम्सुद्दीन जुकाकू कौन थे? जे.एच. शम्सुद्दीन जुकाकू भटकल के एक जाने-माने वकील और सार्वजनिक हस्ती थे, जो नवायात मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते थे। यह एक प्राचीन मुस्लिम व्यापारी समुदाय है, जो मुख्य रूप से अरब प्रायद्वीप, ईरान और इराक से आया था और पिछले 600 वर्षों के दौरान दक्षिण भारत के तटीय शहरों में बस गया। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, शम्सुद्दीन अपने समुदाय के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की और बाद में मंत्री चुने गए। वे 1946 में बॉम्बे लेजिस्लेटिव असेंबली (विधान सभा) के लिए चुने गए थे। बाद में, उन्होंने मैसूर लेजिस्लेटिव असेंबली में होन्नावर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 1957 तथा 1962 के चुनाव जीते। 1958 में, वे मुख्यमंत्री बी.डी. जत्ती के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त उप-मंत्री बने। इसके बाद, उन्होंने मुख्यमंत्री एस. निजलिंगप्पा के कार्यकाल में बिजली उप-मंत्री के रूप में भी काम किया। 10 अक्टूबर को अमेरिकन बाज़ार में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, शम्सुद्दीन के गृहनगर भटकल के लोगों का मानना है कि भटकल और उसके आस-पास के इलाकों में बिजली और अन्य ज़रूरी बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने में उनका बड़ा योगदान था। वे 'अंजुमन हामी-ए-मुस्लिमीन' नामक एक चैरिटेबल ट्रस्ट से भी गहराई से जुड़े हुए थे, जो इस शहर में शिक्षण संस्थान चलाता है। भटकल के रहने वाले इंजीनियर मोहम्मद तनवीर कसरकोड़, जो इस परिवार के इतिहास के बारे में जानते हैं, ने 'अमेरिकन बाज़ार' को बताया कि शम्सुद्दीन उस दौर में वकील बने थे, जब शिक्षा तक पहुँच बहुत सीमित थी। कई दशकों तक, भटकल का एक प्रमुख चौराहा 'शम्सुद्दीन सर्कल' के नाम से जाना जाता था, जो उन्हीं के नाम पर रखा गया था। हालाँकि, सड़क विकास कार्य के दौरान इस चौराहे पर बनी संरचना को बाद में हटा दिया गया, लेकिन इसका नाम आज भी पूर्व मंत्री के साथ जुड़ा हुआ है। 52 वर्ष की आयु में शम्सुद्दीन का निधन हो गया। उनके परिवार में छह बेटियाँ और चार बेटे थे। बाद में उनका परिवार भारत के अलग-अलग हिस्सों में चला गया, जिनमें से कई सदस्य बेंगलुरु में बस गए। इसे भी पढ़ें: Cabinet ने सांख्यिकी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए VISTAR योजना को दी मंजूरी भटकल से अमेरिका तक शम्सुद्दीन के बेटों में से एक, डॉ. जुकाकू एस. तैयब, उन लोगों में शामिल थे जो बेहतर मौकों की तलाश में भटकल से बाहर चले गए थे। नेफ्रोलॉजिस्ट (गुर्दा रोग विशेषज्ञ) तैयब ने 1976 में बैंगलोर मेडिकल कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। 'द अमेरिकन बाज़ार' के अनुसार, 1980 के दशक में अमेरिका जाने से पहले उन्होंने सऊदी अरब में काम किया था। उन्होंने 1984 से 1987 के बीच मिशिगन के बॉन सेकर्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन में अपनी रेजीडेंसी पूरी की, और उसके बाद 1987 से 1989 तक हेनरी फोर्ड अस्पताल में नेफरोलॉजी फेलोशिप की। इसके बाद उन्होंने डेट्रॉइट इलाके में अपनी मेडिकल प्रैक्टिस शुरू की। सारा का जन्म और पालन-पोषण मिशिगन में एक भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ था। भले ही वह अमेरिका में पली-बढ़ीं, लेकिन उनके पिता ने यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की कि उनके बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहें; इसके लिए वे उन्हें बेंगलुरु और भटकल लेकर जाते थे। 'द अमेरिकन बाज़ार' के अनुसार, परिवार का कूर्ग से भी जुड़ाव रहा, जबकि उनके परिवार के कई अन्य सदस्य बाद में बेंगलुरु में बस गए। इसे भी पढ़ें: Kanika Kapoor का बड़ा फैसला, पति Gautam Hathiramani से शादी के चार साल बाद हुईं अलग सारा जुकाकू और अब्दुल अल-सैयद की मुलाकात कैसे हुई? सारा ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में पढ़ाई की, जहाँ उनकी मुलाकात अल-सैयद से हुई। दोनों यूनिवर्सिटी के 'मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन' से जुड़े हुए थे और मई 2006 में उन्होंने शादी कर ली। 'द अमेरिकन बाज़ार' के अनुसार, जब सारा और अल-सैयद की शादी हुई, तब सारा 19 साल की थीं और अल-सैयद 21 साल के थे। सारा ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी आगे की पढ़ाई की और 2015 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 'वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स' से मेडिकल की डिग्री हासिल की। इस प्रकाशन के अनुसार, बाद में उन्होंने मनोरोग विज्ञान (साइकियाट्री) के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और 'यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन हेल्थ' में मनोरोग विभाग में एक नेतृत्वकारी पद पर भी रहीं। अल-सैयद ने अपनी पत्नी की भारतीय विरासत से अपने जुड़ाव के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की है।
फिल्म 'एनिमल' की आलोचना पर भड़के संदीप रेड्डी वांगा, जमकर सुनाया
आंध्र प्रदेश में स्कूल पर हुए कथित हमले के बाद, हिंसक फिल्मों का असल जिंदगी के अपराधों पर असर पड़ने की बहस पर संदीप रेड्डी वांगा ने रिएक्शन दिया है.
होर्मुज से बेधड़क गुजर सकेंगे भारतीय जहाज, ईरान ने प्रतिबंधों से दी राहत
मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारत को प्रतिबंधों से छूट दे दी है. भारत के अलावा ईरान ने चीन, इराक और कतर को भी इन पाबंदियों से राहत दी है. ये फैसला भारत की ऊर्जा आपूर्ति और नौवहन के लिए अहम है. क्योंकि होर्मुज भारत के कच्चे तेल और LPG आयात का बड़ा हिस्सा संभालता है.
तेलंगाना ACB की कार्रवाई, करोड़ों की संपत्ति हुई सीज़
तेलंगाना में MEPMA के एडिशनल डायरेक्टर सैयद यदागिरी राव नल्लागुंटा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हुआ है. ACB की 10 ठिकानों पर छापेमारी में करीब 4.75 करोड़ की संपत्ति, 1.8 किलो सोना, 3 किलो चांदी और फॉर्च्यूनर समेत गाड़ियां मिली हैं. वीडियो में जानें पूरा मामला.
शेयर बाजार में असली दिवाली! 5 दिन में निवेशकों ने छापे 20.8 लाख करोड़
Indian Stock Market: पिछले 5 दिनों से सेंसेक्स करीब 4,055 अंकों से अधिक मजबूत हुआ है, जिससे निवेशकों की कुल संपत्ति में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सिर्फ बुधवार के कारोबारी दिन बीएसई-लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर ₹493.44 लाख करोड़ हो गया,
56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीये, दिवाली पर अयोध्या में देखें ये नजारा
दिवाली 2026 पर परिवार के साथ घूमने के लिए अयोध्या शानदार डेस्टिनेशन है. राम मंदिर रोशनी से सज चुका है और 7 नवंबर को यहां दीपोत्सव का आयोजन होगा. इस दौरान 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीये जलाने की योजना है. जानिए अयोध्या में घूमने की खास जगहें.
ऑकलैंड टी20 में हार का विलेन कौन,सेंटनर ने खोला हार का राज
ऑकलैंड वनडे में भारत ने न्यूजीलैंड को बारिश से प्रभावित मुकाबले में 5 विकेट से हरा दिया. भारतीय गेंदबाजों ने मेजबान टीम को 185 रन पर समेट दिया. इसके बाद विराट कोहली ने 74 रनों की शानदार पारी खेली. हार के बाद कप्तान मिचेल सेंटनर ने माना कि ईडन पार्क की पिच पर उम्मीद से ज्यादा बाउंस और तेजी थी.
इन कर्मचारियों को दिवाली का बड़ा तोहफा, 3% बढ़ा महंगाई भत्ता
गुजरात सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ा तोहफा मिला है. महंगाई भत्ते में 3 फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया गया है. यह बढ़ोतरी 1 जुलाई से प्रभावी मानी जाएगी.
यूरोप में 7 विमानों को बम से उड़ाने की धमकी: पोलैंड का एयरपोर्ट बंद करना पड़ा, इटली में फाइटर जेट ने विमान को दी सुरक्षा; जांच में नहीं मिला विस्फोटक
अमेरिका के इस शहर में पूरी पुलिस फोर्स ने दिया इस्तीफा, चीफ बोले- अब यहां काम करना मुमकिन नहीं
चीफ लामार बन का आरोप है कि सिटी हॉल के अधिकारियों ने अपने निजी पैसों से जीपीएस ट्रैकर खरीदा और उनकी जानकारी के बिना उनके निजी ट्रक में फिट कर दिया। इसकी जानकारी न तो सिटी काउंसिल को थी और न ही उनके वरिष्ठ अधिकारियों को।
यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी को बड़ी जिम्मेदारी, SP से सुलझाएंगी सीटों पर रार
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन की कमान प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपी गई है. दिवाली के बाद सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला होने की संभावना है. दिल्ली में हुई अहम बैठक में प्रदेश नेताओं के साथ चर्चा के बाद जल्द एक कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया है जो सपा के साथ बातचीत करेगी.
US ने फिर हमले किए तो Middle East में और व्यापक होगा युद्ध, Iran की कड़ी चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई ने ईरानियों से कहा है कि वे वाशिंगटन के तेहरान के प्रति रुख में किसी बदलाव की उम्मीद न रखें, भले ही डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया हो। उन्होंने कहा कि इस नतीजे को इस संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि ईरान के प्रति अमेरिकी नीति कम आक्रामक होने वाली है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब डेमोक्रेट्स ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में ऐतिहासिक जीत हासिल की है, जिससे उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों के दौरान उन्हें चुनौती देने की अधिक शक्ति मिल गई है। खमेनेई ने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमले फिर से शुरू किए, तो मध्य पूर्व में युद्ध और फैल सकता है। इसे भी पढ़ें: ट्रंप पर चौतरफा संकट, इधर चुनाव में हार, उधर ईरान में फूटा गुस्से का लावा खामेनेई का कहना है कि ईरान के प्रति अमेरिका की दुश्मनी अभी भी कायम है एक्स पर एक पोस्ट में खामेनेई ने कहा कि 4 नवंबर ने अमेरिका के प्रति ईरान के रुख को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे वाशिंगटन की दुश्मनी और ईरान के लगातार प्रतिरोध के कारणों पर विचार करें। उन्होंने लिखा, इस साल 4 नवंबर को, ईरानी लोग अपराधी अमेरिका के प्रति अपने रुख को पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और साफ तौर पर समझ रहे हैं। फिर भी, अमेरिका की दुश्मनी के कारणों और उनके खिलाफ ईरानी राष्ट्र के दृढ़ प्रतिरोध पर गौर करना, आगे के रास्ते के लिए एक मार्गदर्शक का काम करता है। मार्च में पदभार संभालने के बाद से खमेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका की ओर से फिर से हमले होते हैं, तो इससे पूरे क्षेत्र में एक बड़ा संघर्ष छिड़ सकता है। उन्होंने कहा, अगर इस तरह की आक्रामकता दोहराई जाती है, तो (युद्ध का) दायरा और भी व्यापक हो जाएगा। डेमोक्रेट्स को ट्रंप को चुनौती देने की ताकत मिली डेमोक्रेट्स ने हाउस और सीनेट, दोनों पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। इसे एक शानदार और ऐतिहासिक जीत बताया जा रहा है। ट्रंप की अलोकप्रियता का फायदा डेमोक्रेट्स को मिला और अब उनके पास राष्ट्रपति के कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों के दौरान उन पर लगाम कसने की ताकत आ गई है। इस बीच, 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप का रुख सुलह वाला दिखा। उन्होंने कहा कि वह इन नतीजों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने को भी तैयार हैं।
इजरायल के चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। बेंजामिन नेतन्याही की पार्टी भी बहुमत से दूर रह गई है। ऐसे में अब बड़ी पार्टियां अब छोटे दलों से समर्थन मांग रही हैं।
NVS-03 सैटेलाइट ने कर दिया काम, भारतीय जीपीएस हुआ एक्टिव
इसरो ने NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च कर NAVIC सिस्टम को चार सैटेलाइटों के स्तर पर बहाल किया. स्वदेशी रूबिडियम क्लॉक और एल1 सिग्नल से विदेशी निर्भरता घटेगी. 12 साल सेवा. ट्रेन ट्रैकिंग और सुरक्षा में उपयोगी है.
ट्रंप ने पोस्ट की 'VETO' लिखी कैप की खास फोटो, दिया ये संदेश
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रथ सोशल पर वेटो कैप वाली तस्वीर पोस्ट करके अपनी रणनीति साफ कर दी है. उन्होंने कहा कि वे खुद राजनीतिक विश्लेषक बनकर चुनाव नतीजों को समझा सकते हैं. ट्रंप के अनुसार हाउस में सीटों के समीकरण बदलने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति का पद बहुत ताकतवर होता है और वीटो पावर से फैसलों को पलटा जा सकता है.
US मिडटर्म इलेक्शन रिजल्ट पर ईरान ने जताई खुशी, कहा- अमेरिकी जनता ने युद्ध को नकारा
अमेरिका के मिडटर्म इलेक्श रिजल्ट पर ईरान खुशी जताई है और कहा कि अमेरिकी जनता ने युद्ध के खिलाफ अपना संदेश दे दिया है। ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने एक्स पर यह रिएक्शन पोस्ट किया।
राहुल गांधी ने दिया ओपन डिबेट चैलेंज, अमित शाह ने दिया जवाब
राहुल गांधी द्वारा दिए गए ओपन डिबेट के चैलेंज पर गृहमंत्री अमित शाह ने पलटवार किया है. अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार संसद में हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है. अगर विपक्ष में हिम्मत है तो वह संसद में आकर बहस करे. वहीं किरेन रिजिजू ने कहा कि बहस मैच्योर लोगों के बीच होती है.
स्पेन में भीषण ट्रेन हादसे के बाद परिवहन मंत्री का इस्तीफा
स्पेन में इस साल दो भीषण हाई-स्पीड रेल हादसों में कुल 115 लोगों की मौत हुई है, जिससे देश के रेल सुरक्षा नेटवर्क पर गंभीर सवाल उठे हैं. 28 अक्टूबर को मैड्रिड के दक्षिण में दो ट्रेनों की टक्कर में 69 लोगों की जान गई थी.
खराब रस्तों की HERO... धड़ाधड़ दौड़ेगी Himalayan की दुश्मन
हीरो ने अपनी दमदार एडवेंचर बाइक को इटली में चल रहे ईआईसीएमए 2026 में पेश किया है. ये कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी एडवेंचर बाइक है, जिसमें 421सीसी का इंजन दिया गया है. ये मोटरसाइकिल एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कार प्ले जैसे सेगमेंट फर्स्ट फीचर के साथ आती है. आइए जानते हैं हीरो की इस बाइक की खास बातें.
'EVM पर दोष मढ़ना बंद करे विपक्ष, जनता सब जानती है', बोले सीएम योगी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विपक्षी दल चुनाव हारने पर ईवीएम पर दोषारोपण करते हैं और फर्जी वोटरों को हटाने का विरोध करते हैं. 1975 के आपातकाल और 1984 के सिख दंगों के लिए जिम्मेदार कांग्रेस को देश से माफी मांगनी चाहिए. लोकतंत्र में बदला नहीं, जनता अपने वोट से बदलाव लाती है.
हाइट बढ़ाने के लिए हड्डियां कटवा रहे लोग, कितनी सेफ है ये सर्जरी?
कद बढ़ाने की सर्जरी कराने का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं. जोड़ों में अकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव और हड्डी के जुड़ने में देरी का रिस्क होता है. डॉक्टर ने बताया है कि कद बढ़ाने की सर्जरी कराना सेफ है या नहीं.
नॉर्मल डिलीवरी की बढ़ सकती है संभावना, इन बातों का रखें ध्यान
प्रेग्नेंसी के दौरान नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ाने के लिए डॉक्टर की बताई कुछ टिप्स आप फॉलो कर सकती हैं, हालांकि बच्चे की डिलीवरी नॉर्मल होगी या सर्जरी से ये पूरी तरह उस समय की मेडिकल कंडीशन पर निर्भर करता है.
नेतन्याहू को बड़ा झटका, इजरायल चुनाव आयोग ने धांधली के आरोप किए खारिज
इजरायल में हाल ही में हुए चुनाव के आधिकारिक नतीजों का ऐलान होने वाला है. इजरायली चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 27 अक्टूबर के चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बिना किसी सबूत के आरोप लगाया था कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने वोट चुराए हैं. आयोग की जांच के बाद नेतन्याहू के इन आरोपों को खारिज कर दिया गया है, जिससे उन्हें झटका लगा है.
यूएस मध्यावधि चुनाव: सीनेट और प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को मिला बहुमत, ट्रंप को झटका
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है. बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों में उछाल और ईरान युद्ध को लेकर जनता की नाराजगी के कारण रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा. अब संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से ट्रंप सरकार के लिए मनचाहे कानून, टैरिफ और बजट पास कराना बेहद मुश्किल होगा. अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी इस चुनाव परिणाम का महत्वपूर्ण असर देखने को मिल सकता है.
ट्रंप के निशाने पर रहे अब्दुल अल-सैयद की जीत का दावा
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन से रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराकर जीत का दावा किया है. ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें ‘जिहादी’ कहा था. अब्दुल की जीत को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है. वीडियो में जानें डिटेल्स.
यूपी का 'मिनी पंजाब' पीलीभीत: जानिए सियासत का पूरा लेखा-जोखा!
नेपाल सीमा से सटा पीलीभीत प्राकृतिक सुंदरता, टाइगर रिजर्व, बांसुरी उद्योग और गोमती नदी के उद्गम के लिए प्रसिद्ध है. बड़ी सिख आबादी के कारण इसे 'मिनी पंजाब' भी कहते हैं. राजनीतिक रूप से यह गांधी परिवार (मेनका और वरुण गांधी) का गढ़ रहा है, जहां कुर्मी, मुस्लिम और सिख मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. 2017 और 2022 के चुनावों में भाजपा ने जिले की सभी 4 सीटों पर क्लीन स्वीप किया था.
सादी पूड़ी छोड़ें, दिवाली लंच में बनाएं आलू मटर की कुरकुरी कचौड़ी
Aloo Matar Kachori: दिवाली पर अक्सर लोगों के घरों में पूड़ी बनती है लेकिन अगर आप इस बार कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं तो आप आलू और मटर की मिक्स कचौड़ी बना सकते हैं. ये घर वालों को खूब पसंद आएंगी और इन्हें बनाना भी सिंपल है.
केरल में एक इस्लामिक अकादमी के डायरेक्टर ने किया किशोरी का यौन शोषण, गिरफ्तार
केरल से एक बहुत ही चौंकाने और डराने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पर कोल्लम में एक नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया है।और वह यौन शोषण और किसी ने नहीं बल्कि एक इस्लामिक रिलीजियस लीडर ने किया है। इससे भी बढ़कर यह कि यह काम उसने इलाज के बहाने […]
'राम-कृष्ण में भेद करने वाला महापापी' धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भड़के संत
धीरेंद्र शास्त्री ने एक कथा के दौरान कहा था कि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े हैं और बंसी बजाना कोई मुश्किल काम नहीं है. लेकिन धनुष चलाना बड़ा काम है. उनका यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिस पर लोगों ने बड़ी नाराजगी जाहिर की है.
अल-नीनो से बिगड़ा मॉनसून, अब घटेगी पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग
अल-नीनो की वजह से मॉनसून कमजोर हुआ, जिससे मक्का-गन्ना की फसल प्रभावित हुई. खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने की वजह से इथेनॉल ब्लेंडिंग 20 से 15 प्रतिशत गिर सकती है. सरकार के तेल आयात घटाने के टारगेट को झटका लगा है. कीमतें रिकॉर्ड ऊंची हो गई हैं. डिस्टिलरीज पर दबाव है.
50 साल छोटी एक्ट्रेस संग दिखेंगे रजनीकांत, 'धर्मन' में हुई एंट्री
कमल हासन के प्रोडक्शन हाउस, 'राज कमल फिल्म्स इंटरनेशनल' ने रजनीकांत की फिल्म 'धर्मन' में श्रीलीला का स्वागत किया है. फिल्म की शूटिंग पूरी होने के करीब है और इस कास्टिंग के साथ ही श्रीलीला पहली बार सुपरस्टार के साथ काम करने जा रही हैं.
जिस बच्ची के लिए पूरा देश मांग रहा था दुआ, वो नन्ही परी घर लौटी
पंचकूला के स्कूल में बेरहमी से पिटाई का शिकार हुई केजी की मासूम बच्ची को चंडीगढ़ PGI से छुट्टी मिल गई है. घर पहुंचने पर फूल बरसाकर उसका स्वागत किया गया. परिवार ने देशभर के लोगों का आभार जताया है. पिता बेटी को बड़ा अधिकारी बनाना चाहते हैं, जबकि मासूम का सपना डॉक्टर बनने का है.
दूसरी तरफस ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने होर्मुज समुद्री मार्ग के निकट दक्षिणी प्रांत होर्मोजगान के बंदर खमीर के ऊपर अमेरिका के दो ड्रोन मार गिराने का दावा किया है।
4 साल बाद अग्निवीरों को क्या-क्या मिलता है? निधि सेवा से लेकर आरक्षण तक
भारतीय सेना में नौकरी पाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर बनने का मौका मिलता है. इस योजना में चुने गए युवाओं को सेना में चार साल तक सेवा करने का अवसर दिया जाता है.
ट्रंप पर चौतरफा संकट, इधर चुनाव में हार, उधर ईरान में फूटा गुस्से का लावा
ट्रंप ने ईरान को जो जख्म दिए हैं वो वहां की आवाम के ज़हन से निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन। यही वजह है कि वक्त-वक्त पर ईरान की जनता का यह उबाल फूट पड़ता है। इस बार तो तेहरान की सड़कों पर ऐसे पोस्टर्स और बिलबोर्ड लगा दिए गए हैं जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। आखिर क्यों ईरान का बच्चा-बच्चा आज ट्रंप के नाम से आग बबूला हो उठा है? इसकी वजह वो काली तारीखें हैं जब अमेरिकी और इसरली बमों ने ईरान की धरती को दहला दिया था। इस खूनी संघर्ष में ईरान के सिर्फ सैन्य ठिकाने ही तबाह नहीं हुए बल्कि लाखों परिवारों की दुनिया उजड़। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई समेत कई दिग्गज लीडर्स कमांडर्स इस जंग में मारे गए। ईरान के लोगों के दिल में अब भी जख्म इतने गहरे हैं कि समय के साथ भरने की बजाय वो और ज्यादा गहराते जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएंगे...अमेरिका में अल सैयद की जीत पर ओवैसी ने UP के मुस्लमानों को दिया बड़ा मैसज ईरानी आवाम आज भी उस बर्बादी को भूली नहीं और यह गुस्सा लावा बनकर सड़कों पर फूट पड़ता है। इस बार यह गुस्सा किसी बंद कमरे तक सीमित नहीं बल्कि राजधानी तेहरान की सड़कों पर खुलेआम दिख रहा है। एंगलाब स्क्वायर के व्यस्त इलाके में विशालकाय होल्डिंग्स पर साफ-साफ लिख दिया गया है कि हम ट्रंप को मार डालेंगे। पोस्टर में अमेरिकी राष्ट्रपति को जेल की सलाखों के पीछे बेबस दिखाया गया। सिर्फ ट्रंप ही नहीं बल्कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विचक और इसराइली पीएम विनिमिनेत्रू के खून से सने चेहरों वाले अपमानजनक पोस्टर भी शहर भर में टांग दिए। हाथों में लाल झंडे और खून का बदला खून। कुछ ऐसे बैनर थामे हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। इसे भी पढ़ें: अमेरिका में जीती फिलिस्तीनी हिजाब वाली महिला, मुंह दिखाने लायक नहीं रहे ट्रंप ईरान की राजधानी तेहरान इस वक्त एक सुलगते हुए रणक्षेत्र में तब्दील हो चुकी है। एक तरफ समंदर पार ईरान में मौत के बदले की ये कसमें खाई जा रही हैं तो दूसरी तरफ खुद अमेरिका के भीतर ट्रंप के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। देश में हो रहे मध्यवर्ती चुनावों में ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को तगड़ी हार मिली। सीनेट से लेकर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और कई राज्यों के गवर्नर चुनाव में पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप की आक्रामक विदेश नीतियों और मिडिल ईस्ट में छेड़ी गई इस तबाही भरी जंग से अमेरिकी आवाम भी अंदर ही अंदर खौफ और नाराजगी में। जाहिर है घरेलू मोर्चे पर चुनाव की हार और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर ईरान की इन खौफनाक धमकियों के बीच ट्रंप चारों तरफ से घिर चुके हैं। यूएस मिड टर्म इलेक्शन में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को हार का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप के हारने के पीछे की बड़ी वजह ईरान से पंगा लेना भी माना जा रहा है। आरोप लगता है कि ट्रंप और पीएम नितिन याू ने मिलकर ईरान पर बेवजह जंग थोपी। अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के हार के करीब पहुंचने पर ईरान ने रिएक्ट किया है। ईरान की पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा है कि अमेरिकी जनता ने जंग को नकार दिया है। गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा अंतरात्मा की आवाज हो या महंगाई का बोझ अमेरिकियों ने जंग के खिलाफ वोट किया है। हम उनके इस संदेश का समर्थन करते हैं। अगर अमेरिकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आकाओं और ब्लैकमेल करने वालों के हितों की सेवा के लिए अपने ही नागरिकों की इच्छा के साथ विश्वासघात करती है तो उसे इसका खौफनाक अंजाम भुगतना पड़ेगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगी। इलेक्शन के नतीजों से साफ हो गया है कि अमेरिका के लोग ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ संदेश दे रहे हैं। ट्रंप की हार के पीछे कई वजह हैं। उनमें से एक सबसे बड़ी ईरान और अमेरिका का युद्ध है। कई महीनों से यह जंग चल रही है।
MP-राजस्थान से नाबालिग लड़कियों की तस्करी का आरोप, 3 राज्यों को नोटिस
मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त और महाराष्ट्र में तस्करी की मीडिया रिपोर्ट पर NHRC ने संज्ञान लिया है. आयोग ने तीन राज्यों से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है.
'सिद्धू के गानों में पंजाब की आवाज थी', राहुल ने मूसेवाला को किया याद
पंजाब की रैली में राहुल गांधी ने सिद्धू मूसेवाला के पिता को मंच के पास बुलाया और गायक से अपनी पहली मुलाकात, कांग्रेस में उनकी एंट्री, धमकियों और हत्या को याद किया. उन्होंने आरोप लगाया कि मूसेवाला को निशाना बनाने वाली सोच अब पूरे पंजाब में घूम रही है और हुनरमंद लोगों को डराया जा रहा है.
गोल्ड मेडल जीतने वाली सरिता से निवेश के नाम पर हुई ठगी
एशियन गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट सरिता गायकवाड़ से 69.10 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. आरोप है कि रेत के कारोबार में हर महीने 4 फीसदी मुनाफे का लालच देकर उनसे पैसे निवेश कराए गए. सरिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. वीडियो में जानें मामला.
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप को बड़ा झटका, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है..इन चुनावों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा झटका लगा है...मतदाताओं नें बढ़ती महंगाई के लिए ट्रंप सरकार की नीतियों को जिम्मेदार माना है. देखें दुनिया की बड़ी खबरें.
निर्मला सप्रे की विधायकी पर 2 महीने में फैसला करें स्पीकर, SC सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार की याचिका पर मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में दो महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है.
'विराट भाई जब मैदान पर होते हैं तो...', जीत पर गिल ने क्या कहा?
भारतीय टीम की दमदार जीत के बाद कप्तान शुभमन गिल बेहद खुश नजर आए. गिल ने गेंदबाजों की जमकर तारीफ की. इसके साथ ही विराट कोहली को लेकर भी उन्होंने बड़े राज से पर्दा हटाया. विराट ने पहले वनडे में 74 रनों की पारी खेलकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी.
711KM रेंज, 10 मिनट में चार्ज! धांसू फैमिली इलेक्ट्रिक SUV लॉन्च
Mercedes GLC Electric: मर्सिडीज बेंज अपनी इस इलेक्ट्रिक एसयूवी को लोकली असेंबल करेगा. 400V आर्किटेक्चर पर बेस्ड इस एसयूवी को लेकर कंपनी का दावा है कि, ये कार सिंगल चार्ज में तकरीबन 711 किलोमीटर तक का ड्राइविंग रेंज (WLTP सर्टिफाइड) देगी.
यही चाहता था बाजार? इधर ट्रंप की हार, उधर अमेरिकी मार्केट में जोरदार तेजी के सिंग्नल
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजे ट्रंप की पार्टी के पक्ष में नहीं आने के बाद अमेरिकी बाजार में शानदार तेजी के संकेत दिखाई दे रहे हैं. साथ ही भारतीय बाजार में भी अच्छी तेजी है. चीनी बाजार में तो गजब की रैली है.
सेल में मची होड़! 30 हजार रुपये सस्ता हुआ Motorola का फोन
Motorola Edge 70 Pro पर Flipkart Big Bang Diwali Sale में शानदार ऑफर मिल रहा है. इस फोन की कीमत में 30 हजार रुपये से ज्यादा की कटौती हुई है. फोन में 144Hz डिस्प्ले, 6500mAh बैटरी, 50MP कैमरा और Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर जैसे फीचर्स मिलते हैं.
कौन हैं अमेरिकन पॉलिटिक्स में छाए सुहास सुब्रह्मण्यम?
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में वर्जीनिया के 10वें कोंग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज करने वाले सुहास सुब्रह्मण्यम सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं. पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के सलाहकार रह चुके सुहास एक वकील, तकनीकी उद्यमी और वॉलंटियर फायर फाइटर भी हैं. जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाले तथ्य.
लाल लहंगे में सजीं J&K के राजकुमार की दुल्हन, शादी में पहुंचे PM मोदी
जम्मू-कश्मीर के शाही परिवार के राजकुमार मार्तंड सिंह ने रिया बादल से शादी की है. 3 नवंबर को दिल्ली में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में पीएम नरेंद्र मोदी भी पहुंचे. इस खास मौके पर दुल्हन रिया लाल हैवी लहंगे, दो दुपट्टों और शाही जूलरी में बेहद खूबसूरत नजर आईं. उनकी फोटोज सोशल मीडिया पर सामने आई हैं.
मुस्लिम पहचान, मिस्र से रिश्ता और US राजनीति में बड़ा मुकाम, इतिहास रचने वाले अब्दुल की कहानी!
अब्दुल अल सैयद का अमेरिकी की विदेश नीति पर ट्रंप से जबर्दस्त टकराव रहा. वे गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान को 'नरसंहार' बताते हैं. अब्दुल के माता-पिता मिस्र से आकर अमेरिका में बसे हैं. चुनाव जीतने के बाद अब्दुल ने ट्रंप और वांस पर तंज कसा है.
UP में कांग्रेस की कमान प्रियंका के हाथ? जानें प्लान
UP विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. प्रियंका गांधी वाड्रा संगठन को मजबूत करने के साथ अखिलेश यादव से गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर बातचीत की अहम जिम्मेदारी संभाल सकती हैं. चुनाव से पहले उनकी सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं. वीडियो में जानें डिटेल्स.
'राहुल गांधी वो रॉकेट जिसका धुआं निकल चुका है', CM योगी का निशाना
गोरखपुर में बीजेपी की जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कांग्रेस पर बार-बार राहुल गांधी को लॉन्च करने की कोशिश का आरोप लगाया. साथ ही अखिलेश यादव के 'बदला लेने' वाले बयान पर भी पलटवार किया.
मां लक्ष्मी से लेकर 7 घोड़ों तक, दिवाली पर घर में लगाएं ये 8 शुभ तस्वीरें
Diwali Vastu Tips: दिवाली पर घर की सजावट के लिए मां लक्ष्मी, सात दौड़ते घोड़े, उगते सूरज और मनी ट्री समेत इन 8 शुभ पेंटिंग्स को वास्तु के अनुसार खास माना जाता है. जानें इन्हें घर में किस दिशा और जगह पर लगाना बेहतर है.
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। ट्रंप की पार्टी को दोनों सदनों में हार मिली है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 218 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले 21 मिडटर्म चुनावों में से 19 बार राष्ट्रपति की पार्टी हारी है। केवल 1998 बिल क्लिंटन और 2002 में जॉर्ज बुश की पार्टियों ने जीत दर्ज की थी। हाउस में कुल 435 सीटें हैं और सभी सीटों पर चुनाव हुए हैं। शुरुआती रुझानों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी 226 सीटों पर आगे चल रही है। राष्ट्रपति ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी 137 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। सीनेट की 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 31 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 19 और रिपब्लिकन पार्टी ने 12 सीटें जीती हैं। बाकी 4 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। इन नतीजों को मिलाकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 53 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 43 सीटें हैं। pc-business-standard.com
शादीशुदा प्रोड्यूसर से की शादी, एक्ट्रेस ने नहीं किए बच्चे, गोद लिए जानवर!
'देख भाई देख' और 'गुटर गू' जैसे शोज से पहचान बनाने वाली भावना बलसावर 59 साल की हैं, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं है. एक्ट्रेस ने बताया कि उन्होंने कभी बच्चों की प्लानिंग क्यों नहीं की. साथ ही अपनी लव स्टोरी पर भी बात की.
जब तेहरान में US दूतावास पर कट्टरपंथियों ने कब्जा कर लिया
आज के दिन ही तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कट्टरपंथी छात्रों ने हमला कर अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया था. इतिहास की यह अपने आप में सबसे बड़ी घटना थी.
'जात-पात की राजनीति से निकल जाइए', गोरखपुर में बोले सांसद रविकिशन
उत्तर प्रदेश अब दंगा और माफिया मुक्त होकर उत्तम प्रदेश बन चुका है. प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में रोजगार, उद्योग, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित हुई हैं. जातिगत राजनीति को छोड़कर राज्य को मजबूत बनाने की अपील की गई है.
कोहली ने ऑकलैंड में हिलाई रिकॉर्डबुक, सचिन को पछाड़ा, बनाए 3 कीर्तिमान
विराट कोहली ने ऑकलैंड वनडे में 74 रनों की शानदार पारी खेलकर तीन बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए. उन्होंने वनडे में 80वां अर्धशतक जड़ा, नंबर-3 पर 13 हजार रन पूरे करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने और रनचेज में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया. भारत ने न्यूजीलैंड को पांच विकेट से हराकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाई.
लाहौर से दिल्ली तक हवा हुई 'नापाक', AQI खतरनाक स्तर पर
उत्तरी भारत और पाकिस्तान में प्री-विंटर स्मॉग से वायु गुणवत्ता खराब है. लाहौर एक्यूआई 447 के साथ दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है. दिल्ली में पाबंदियां लागू. दीवाली प्रदूषण बढ़ा सकती है.
'सुबह 11 बजे उनके मुंह से शराब की बू आती थी', पंजाब CM पर राहुल गांधी का आरोप
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी संगरूर में इंसाफ रैली में पहुंचे. यहां जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पंजाब की कानून-व्यवस्था, ड्रग्स की समस्या और केंद्र सरकार पर हमले किए. उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी सवाल उठाए और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर शराब पीकर लोकसभा आने का आरोप लगाया.
चुनावी नतीजों से डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, संसद में खोया बहुमत
अमेरिकी चुनाव नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान हुआ है. डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों जगह अपना बहुमत खो दिया है. टेक्सास और कैंसास जैसे पारंपरिक गढ़ों में भी पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. संसद में सत्ता का संतुलन बदलने से डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे ट्रंप की आने वाली नीतियों और फैसलों पर गहरा असर पड़ेगा.
धूप की कमी से बढ़ सकता है डिप्रेशन, जानें इसके लक्षण
सर्दियों में धूप कम मिलने से कई लोगों में सुस्ती, उदासी और मानसिक थकान बढ़ सकती है. इसे विंटर ब्लूज या सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) कहते हैं. वीडियो में जानें इसके लक्षण, कारण और इससे बचने के तरीके. अगर उदासी दो हफ्ते से ज्यादा बनी रहे, तो एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है.
अमूल के घी-मक्खन हुए महंगे, 50 रुपये तक बढ़े दाम, जानें कितने में मिलेगा
Amul Price Hike Milk Product: डेयरी सेक्टर की बड़ी कंपनी अमूल ने अपने ग्राहकों को दीवाली से पहले एक बड़ा झटका दिया है. कंपनी ने अपने तमाम मिल्क प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा दिए हैं. घी तो एक झटके में 50 रुपये महंगा हो गया है.
‘डीजल-पेट्रोल सस्ता करो, बस किराया घटा देंगे’, केंद्र पर बरसे शिवकुमार
कर्नाटक में सरकारी बसों के किराए में 5 नवंबर से वृद्धि की गई है, जिसे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार की ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के कारण परिवहन निगमों पर आर्थिक बोझ बढ़ने का कारण बताया है.
'BJP खुद में अराजकता है', लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा को लेकर अखिलेश का हमला
रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली के बाद बीजेपी ने यूपी में लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा शुरू की है. इस पर अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी खुद ही अराजकता फैला रही है.
अमेरिका में जीती फिलिस्तीनी हिजाब वाली महिला, मुंह दिखाने लायक नहीं रहे ट्रंप
अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन से पहले ट्रंप खूब चिल्लाए थे। फ्रांस के खूब उदाहरण दिए थे। इटली हो, फ्रांस हो, अल्बेनिया हो, यूरोप के तमाम वो देश जिन देशों ने ओपन बॉर्डर पॉलिसी अपनाई थी, जहां इलीगल इमीग्रेंट्स आए थे और जिस तरीके से पिछले 21 सितंबर से लगातार फ्रांस जल रहा है। मतलब डेढ़ महीने के आसपास । उन लोगों का तमाम तरीके से हर लहजे में हर तरीके से उदाहरण दिया कि अगर ये मुस्लिम इमीग्रेंट्स आते हैं किसी विदेश में तो ये आपका वहां तबाही लेकर आते हैं। मेरी जो पॉलिसी है जिस तरीके से मैं इललीगल इमीग्रेंट्स को देश से वापस भेज रहा हूं उनकी तारीफ होनी चाहिए और उनके अगर आप अमेरिका में भी इस तरीके से आने देंगे तो यहां भी आपको वही सब देखने को मिलेगा जो यूरोप में देखने को मिला, फ्रांस इटली में देखने को मिला। लेकिन इस मिड टर्म इलेक्शन में यह सारा चुनाव प्रचार ट्रंप के लिए कोई काम नहीं आया। वहां एक फिलिस्तीन मूल की महिला जो हिजाब पहनकर चुनाव लड़ रही थी। मतलब ट्रंप ने ये कहा था कि आप इस तरीके से चुनाव को लेकर चलिए। आप चुनाव में इस तरीके से वोट करिएगा। यह मानकर कि हर सीट पर ट्रंप चुनाव लड़ रहे हैं। तो ऐसे में क्या यह मान लिया जाए कि अब कवास ने आपका डोनाल्ड ट्रंप को चुनावी मैदान में हरा दिया है। इसे भी पढ़ें: अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएंगे...अमेरिका में अल सैयद की जीत पर ओवैसी ने UP के मुस्लमानों को दिया बड़ा मैसज अमेरिका की मदद से अमेरिका की फंडिंग से अमेरिका के हथियारों से अमेरिका की टेक्नोलॉजी से अमेरिका के साथ से उस अमेरिका में फिलिस्तीन मूल की एक महिला सांसद चुनकर आती है विधायिका का हिस्सा हो जाती है जबकि वो इससे पहले अमेरिका के द्वारा इजराइल को फंडिंग दी जाती थी गाज़ा के लिए उसका विरोध कर चुकी हैं। उसके बावजूद लोगों ने अगर वोट किया है तो मतलब अमेरिका में यह मुद्दा नहीं है इललीगल इमीग्रेंट्स का या फिर मुस्लिम्स का। जोहरान ममदानी भी इससे पहले चुनाव जीत चुके हैं। इसे भी पढ़ें: लागत दक्षता से Bayer CropScience का मुनाफा बढ़ा, CFO विनीत जिंदल ने दी जानकारी कौन है ये एबर कवास ये न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट डिस्ट्रिक्ट 12 की सीट पर इन्होंने जीत हासिल की है। जीत के बाद कवास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमने इतिहास रच दिया फर्स्ट पैलेस्तीनियन इेड इन न्यूयॉर्क स्टेट। ब्रुकलिन की रहने वाली 34 वर्षीय फिलिस्तीनी अमेरिकी अब कवास ने 74.3% वोट हासिल किए। मतलब रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार हानखोट को बड़े अंतर से नहीं बल्कि बहुत बड़े अंतर से उन्होंने हराने का काम किया है। कवास ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरा ममदानी और सेनेटर बरनी सेंडर्स के समर्थन के प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल की थी और राज्य की दावेदारी पक्की की थी। अमेरिका में ये प्राइमरी चुनाव क्या होता है? जिस तरीके से अमेरिका में सिर्फ मुख्य तौर पर दो पार्टी चुनाव लड़ती है। एक डेमोक्रेट एक रिपब्लिकन। अब इसे इस तरीके से ले लीजिए जैसे वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ते हैं और बीजेपी में ही कुछ और उम्मीदवार भी ऐसे हैं जो वाराणसी सीट से चुनाव लड़ना चाहती है। तो पार्टी सबको चुनाव लड़ने के लिए कह देती है कि सब लड़िए। उसके लिए प्राइमरी इलेक्शन होता है। प्राइमरी इलेक्शन में लोग वोट करते हैं या फिर लोगों की पसंद लोगों से पूछा जाता है आप किसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं? तो उसे ही चुनाव लड़ाया जाता है। यहां हो सकता है कि जिस सीट से इन्होंने चुनाव लड़ा जब प्राइमरी इलेक्शन करवाना पड़ा तो मतलब और लोग भी यहां डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे होंगे और उन सबके ऊपर मतलब जोहरान ममदानी का भी इन्हें समर्थन मिला तब जाकर इन्हें टिकट मिला और ये चुनाव में जीती हैं।
'बैठने को कुर्सी भी नहीं है...' 12 घंटे खड़ा रहने वाले गार्ड का वीडियो वायरल!
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें एक गार्ड 12- 12 घंटे लगातार खड़े रहने का अपना दर्द सुनाता दिखाई दे रहा है. गार्ड को कुछ देर बैठने के लिए एक कुर्सी तक नहीं मिलती है.
त्योहार पर बनाकर खाएं अफगानी पनीर, रणवीर बरार ने बताई रेसिपी
Afgani Paneer Recipe: दिवाली और भइया दूज जैसे त्योहारों पर अक्सर घरों में छोले और मटर पनीर की सब्जी जरूर बनती है लेकिन अगर आप हर बार एक जैसी सब्जी खाकर बोर हो गए हैं तो यहां हम आपको अफगानी पनीर की रेसिपी बता रहे हैं जिसे सेलिब्रिटी शेफ रणवीर बरार ने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किया है.
केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में निकाली पदयात्रा, BJP के पदाधिकारी-कार्यकर्ता शामिल
प्रयागराज के सिविल लाइन्स में बीजेपी की ओर से लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ पदयात्रा निकाली गई. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में हुई इस पदयात्रा में पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. यह यात्रा पूर्वांचल की राजनीति में बीजेपी की चुनावी रणनीति का प्रमुख हिस्सा मानी जा रही है.
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप को बड़ा झटका, मुस्लिम उम्मीदवारों ने रचा इतिहास; अब्दुल एल-सईद बने पहले मुस्लिम सीनेटर
बंगाल की घटना से इलाके में दहशत: पत्नी की हत्या कर कटा सिर हाथ में लेकर घूमता रहा पति, मंदिर में बैठकर करने लगा प्रार्थना
हापुड़ में बन रही थी मिलावटी क्रीम, 5 क्विंटल माल नष्ट
हापुड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुचेसर चौपला स्थित क्रीम फैक्ट्री पर छापेमारी कर वनस्पति, रिफाइंड ऑयल, एसएमपी और दही से बनाई जा रही 500 किलो मिलावटी क्रीम नष्ट कराई. 1.10 लाख रुपये मूल्य की इस दूषित क्रीम को नष्ट कराकर यूनिट बंद कर दी गई है और सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं.

