जानें क्यों आसान नहीं है डोनाल्ड ट्रंप के लिए ग्रीनलैंड को हड़पना, क्या है सबसे बड़ी दीवार
ग्रीनलैंड कोई अमेरिकी उपनिवेश नहीं, बल्कि डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसकी संप्रभुता डेनमार्क के पास है। ऐसे में किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई सीधे तौर पर डेनमार्क की संप्रभुता पर हमला मानी जाएगी।
पाकिस्तान में हिंदू किसान की हत्या, हजारों लोग सड़कों पर उतरे; प्रशासन को झुकना पड़ा
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदीन जिले में एक हिंदू युवक की हत्या के बाद तनाव फैल गया। 22 वर्षीय किसान कैलाश कोहली की हत्या से आक्रोशित हिंदू समुदाय के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और थार कोयला मार्ग पर यातायात ठप कर दिया।
बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बैठक के बाद इस नियुक्ति की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पार्टी ने मौजूदा राजनीतिक हालात और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तारिक रहमान को नेतृत्व सौंपने का निर्णय लिया है।
मेरा नाम सोनी है। पश्चिम बंगाल के बनगांव की रहने वाली हूं। मैंने खुद को हमेशा एक लड़की ही माना, लेकिन लोगों ने मुझे पहचान दी- किन्नर, हिजड़ा जैसे शब्दों से। लोग कहते थे, ‘न मां बन पाएगी, न किसी की दुल्हन… फिर इसके जीने का क्या मतलब?’ उन बातों को सुनते-सुनते मैं जी तो रही थी, लेकिन अंदर से लाश बन गई थी। पेट भरने के लिए ऑर्केस्ट्रा में नाचती थी। छपरा के जनता बाजार की एक दवा दुकान से शुरू हुई मेरे प्यार की कहानी। प्रेमी आदर्श को नहीं पता था कि मैं किन्नर हूं- फिर भी मुझे इंसान समझकर पास आया। वीडियो वायरल होते ही परिवार में बवाल मच गया। मां ने कहा- ‘किन्नर से शादी की तो बहनों का ब्याह नहीं होगा।’ मैं दो भाई, दो बहनों में सबसे छोटी हूं। पैदा होने पर जैसे एक लड़की होती है, मैं भी वैसे ही थी। जब थोड़ी बड़ी हुई, तो मेरे शरीर में अलग तरह के बदलाव दिखने शुरू हुए। 12-13 साल की उम्र के बाद जो बाकी लड़कियों में होता है, मेरे शरीर में नहीं हुआ। मुझे पीरियड्स नहीं आए। शरीर और मेरे हाव-भाव देखकर आस-पास के लोग कहने लगे- ये तो किन्नर पैदा हो गई है। अब तो इसे किन्नर लोग उठाकर ले जाएंगे। मैं उनकी बातें सुनकर डर के मारे कांपने लगती थी। मां पलटकर जवाब देती- मेरी बेटी है। मैंने पैदा किया है। अब वो जो भी है, जैसी भी है, मेरे ही साथ रहेगी। मेरे पापा खेती-बाड़ी और मछली-पालन करते हैं और मां घर संभालती हैं। 2019 की बात है। बीए दूसरे साल में थी। घर पर पैसे की दिक्कत थी तो मेरी एक सहेली ने मुझसे कहा- बिहार चलोगी। वहां पर काम है। पैसे मिलेंगे। मैंने पूछा- क्या काम है? सहेली बोली- वहां अलग-अलग कार्यक्रमों में डांस करना होगा। फिर मैंने सकुचाते हुए कहा- मुझे तो डांस नहीं आता। घूमने-फिरने का शौक है। घर पर पूछकर बताऊंगी। मैंने घर आकर मां को बताया कि बिहार जा रही हूं। एक महीने बाद घूमकर चली आऊंगी। मां ने इजाजत दे दी। मैं पश्चिम बंगाल से बिहार के छपरा आ गई। वहां मेरे ग्रुप में कई लड़कियां थीं। वे सभी मेरे पास के एक गांव की थीं। उस गांव की अमूमन लड़कियां दूसरे राज्यों में जाकर इसी तरह डांस करती हैं। उनके साथ मुझे भी ठेकेदार छपरा-सीवान के आस-पास जहां भी कार्यक्रम होता, साथ लेकर जाता था। स्टेज पर जब डांस होता तो मैं खड़ी की खड़ी रह जाती। मुझे डांस नहीं आता था। सामने भीड़ चिल्लाने लगती। भोजपुरी में कहती- इसे हटाओ, कहां से उठाकर ले आए हो। डांस नहीं करने आता, तो क्यों चली आती हैं। उस वक्त मुझे हिंदी, भोजपुरी नहीं समझ में आती थी। उसके बाद धीरे-धीरे डांस सीखना शुरू किया। एक महीना हुआ तो वापस घर आ गई। उस वक्त तक मैं आदर्श से नहीं मिली थी, न कभी देखी थी। 2021-22 की बात है। मेरे बड़े भाई तीन मंजिला बिल्डिंग से नीचे गिर गए। उनके शरीर की कई जगह से हड्डियां टूट गईं। वह महीनों बेड पर चले गए। उन्हीं की कमाई से घर चलता, जो कि मुश्किल हो गया था। मैंने सोचा- अब तो डांस सीख ही लिया है। बिहार जाकर ऑर्केस्ट्रा में नाचूंगी तो घर की हालत संभल जाएगी। फिर से वापस बिहार चली गई। वहां एक ठेकेदार के यहां रहने लगी। वह हमें कार्यक्रमों में नाचने के लिए ले जाता। इस समय तक मैं नाचना सीख गई थी। इतना अच्छा कि भीड़ मेरा ही डांस देखने के लिए बार-बार स्टेज पर बुलाती। मैं भी खूब नाचती थी। करीब 7 महीने डांस किया, लेकिन ठेकेदार ने पैसा नहीं दिया। मैं परेशान होने लगी। उसके साथ मेरी मार-पिटाई हो गई। उसके बाद मैं और बाकी लड़कियों को साथ लेकर छपरा के जनता बाजार आ गई। वहीं पर आदर्श की एक दवा की दुकान थी। उसकी परिवार को यह स्टोर खोले हुए कुछ ही महीने हुए थे। वह हर रोज दवा की दुकान पर सुबह से शाम तक बैठता था। मेरी टीम की कुछ लड़कियों की तबीयत खराब थी। सर्दी-खासी, बदन दर्द की दवा लेनी थी। मैं दवा लाने गई। आदर्श उस वक्त दुकान बंद कर रहा था। मैंने दवा का नाम बताया, तो उसने बोला- कुछ दवाइयां हैं। कुछ नहीं…। कल मंगवा दूंगा। मैंने अपना पता और मोबाइल नंबर दिया और कहा कि- वह मेरे कमरे पर पहुंचा दें। दूसरे दिन आदर्श दवा लेकर मेरे कमरे पर आया। उस दिन से वह अक्सर मुझसे बात करने लगा। उस वक्त तक उसे नहीं पता था कि मैं किन्नर हूं। करीब 6 महीने बाद आदर्श ने एक दिन मुझसे कहा कि वह मुझसे प्यार करता है। मैं मुस्कुराते हुए बोली- लोग ऐसे ही बोलते हैं। मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है। अमूमन हर लड़के मुझसे यही कहते हैं। जब डांस करने जाती हूं तो वे मेरा फोन नंबर मांगते हैं। कहते हैं कि वह मुझसे शादी करना चाहते हैं। आदर्श शर्माते हुए बोला- मैं सच में प्यार करता हूं। मैंने उसे अपने पास बैठाया और समझाया- मैं किन्नर हूं। मैं सामान्य लड़की नहीं हूं। मैं कभी मां नहीं बन सकती। आदर्श सुनते ही बोला- … तुम मां नहीं बन सकती हो, तो क्या हुआ। हम दोनों साथ तो रह सकते हैं न ! मैं उसे डांटते हुए बोली- हर लड़का यही कहता है। बाद में धोखा देकर चला जाता है। मैं नाचने वाली हूं। किन्नर हूं। तुम्हारे घर वाले मुझे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। नाचती हूं, तो सिर्फ पेट की खातिर। यदि सच में मुझसे प्यार करते हो, तो अपने घर वालों को बताओ। दुनिया के सामने मुझे इज्जत देनी पड़ेगी। आदर्श हर बात के लिए तैयार हो गया। आखिर में हम दोनों ने एक साथ वीडियो बनाया, जो कि वायरल हो गया। आदर्श के घर वालों को पता चल गया कि वह एक किन्नर से प्यार करता है। उसने अपनी मां को बताया, तो मां फटकारते हुए बोलीं- नाचने वाली छक्का, हिजड़ा से ब्याह करोगे? पगला गए हो? करीब डेढ़-दो महीने तक ये सब चलता रहा। उसके घर वाले बहुत परेशान थे। एक दिन आदर्श के पिता ने भरे बाजार में लोगों के सामने उसकी खूब बेइज्जती की। खूब मारा-पीटा। उसके बाल कटवा दिए, ताकि वह मुझे अच्छा न लगे। लेकिन वह पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।। उस दिन आदर्श की मां ने उसे समझाते हुए कहा था- तुम घर में सबसे बड़े हो। तुम नचनिया, किन्नर से शादी करोगे, तो बाकी बच्चों का क्या होगा? कोई तुम्हारी बहन से ब्याह नहीं करेगा। पिता ने सालों विदेश में नौकरी की। सारी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। लेकिन आदर्श ने कुछ नहीं माना। उसने खाना-पीना छोड़ दिया। उसकी मां परेशान होकर मुझे फोन करके कहतीं- बेटे ने अभी तक खाना नहीं खाया है। तुम बोलोगी, तो खा लेगा। लेकिन आदर्श जिद पर अड़ा था। करीब दो महीने बाद आदर्श ने मुझसे कहा- वह भी बंगाल आना चाहता है। आखिर मैंने उसे अपने पास बुला लिया। जिस दिन वह मेरे घर आया, उस दिन गांव के लोग मेरे दरवाजे पर जमा हो गए। कहने लगे- बिना शादी के अनजान लड़का कैसे किसी एक लड़की के साथ रह सकता है? पहले शादी करनी होगी, फिर दोनों साथ रह पाओगे। उसके बाद सारी रस्म-रिवाज के साथ हम दोनों पास के एक मंदिर में गए और शादी कर ली। क्या ही बताऊं। उस दिन जब आदर्श ने मेरी मांग भरी, तो ऐसा लगा जिंदगी की सारी मुराद पूरी हो गई। मुझे आज भी याद है- जब पहली बार पता चला था कि मैं किन्नर हूं, तो लगा था कि अब किसी की बहू नहीं बन पाऊंगी, न दुल्हन। उस वक्त किसी की मांग में सिंदूर देखती, तो लगता कि काश मैं भी ये सिंदूर, बिंदी बड़ी होकर किसी के नाम की लगा पाती! इस तरह आदर्श से मेरी शादी हो गई थी। आदर्श ने एक रोज कहा- तुम ऑर्केस्ट्रा में नाचना छोड़ दो। नाचती हो, तो मुझे अच्छा नहीं लगता। मैंने उसकी बात मान ली। अब हम दोनों मिलकर सोशल मीडिया पर ब्लॉगिंग करते हैं। वीडियो बनाते हैं। उससे कमाई अच्छी हुई है। उसी से अब अपना घर बनाने जा रही हूं। आदर्श अब भी अपने गांव जाता है। वह पटना से फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रहा है। वह अक्सर अफसोस जताता है कि- मेरा किन्नर पैदा होना गुनाह था क्या, जो इस समाज या उसके घर वालों ने नहीं अपनाया। उसे आज भी डर है कि अगर मैं उसके घर गई, तो घर और गांव वाले, बाहर कर देंगे। आदर्श के घर वालों का यही कहना है कि मुझसे शादी करने के बाद अब उनकी बेटियों की शादी नहीं हो पाएगी। उन्होंने हम दोनों को अपनाने से साफ-साफ इनकार कर दिया है। उनकी मां ने कहती हैं- यदि तुम लोग इस घर में आओगे, तो लोग हमें गांव से निकाल देंगे। उसके गांव के लोग कहते है- किन्नर ने मासूम से लड़के पर बंगाल का काला जादू कर दिया है। हिजड़ा कहीं का, अब किन्रर भी शादी करने लगी हैं भला, वो भी एक नॉर्मल लड़के से। लेकिन उन्हें क्या पता कि हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं। लेकिन सोचती हूं कि आखिर मैं भी तो एक लड़की ही हूं न। शरीर, आत्मा सब लड़की का है। मेरी भी तो बाकियों की तरह जिंदगी है। बस मां नहीं बन सकती। इसके लिए भी मैं डॉक्टर से दिखवा रही हूं। यदि मां नहीं बनी तो क्या हुआ, कोई बच्चा गोद ले लूंगी। नहीं तो IVF करवाऊंगी। अब लोग मेरे पति आदर्श से पूछते हैं- किन्नर से शादी किया है, खुश कैसे रहते हो? उन्हें क्या पता कि जो संबंध एक लड़की और लड़के के बीच होता है। वही पति-पत्नी के बीच भी हो सकता है। हमारे बीच वैसा ही संबंध है। अब तो मैंने लोगों को जवाब देना ही छोड़ दिया है… (सोनी ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर नीरज झा से साझा किए हैं) ----------------------------------------------------- 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया- 5 साल जेल रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी खबर यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-रिश्तेदार की लाश लेकर आया, मेरे गाल छूने लगा:लाशें जलाने के कारण शादी नहीं हुई- पति के बिना जी लूंगी, लाशों के बिना नहीं मैं टुम्पा दास- पश्चिम बंगाल में डोम समुदाय की पहली महिला हूं, जो पिछले कई सालों से कोलकाता के बड़िपुर गांव के श्मशान में लाशें जला रही हूं। पता नहीं भारत में कोई और महिला यह काम करती है या नहीं, पर मैंने यही रास्ता चुना… और यह रास्ता आसान नहीं था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
ईरान में खामेनेई के खिलाफ शोर गल्फ देशों तक पहुंचा, जीसीसी में बढ़ी हलचल, क्या सता रहा ट्रंप का डर?
ईरान में इन दिनों हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह खामेनेई के खिलाफ लोगों का गुस्सा देखने को मिल रहा है
21 सेकेंड का एक वीडियो है। इसमें दिख रहे लोगों के हाथ में तलवारें और फरसे हैं। भारत माता की जय का नारा लगाते हुए सभी एक घर के सामने रुकते हैं। घर से बाहर निकले शख्स को तलवार थमाते हैं और कहते हैं, ‘ये अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए, अगर बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा होती है, तो विधर्मियों से अपनी सुरक्षा के लिए।’ शख्स तलवार लेता है, माथे से लगाता है। सभी नारा लगाते हैं- जय श्री राम। ये वीडियो 29 दिसंबर का है। जगह गाजियाबाद का शालीमार गार्डन एरिया। तलवार बांटने वाले हिंदू रक्षा दल के सदस्य थे। 6 जनवरी को पुलिस ने इस संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र उर्फ पिंकी चौधरी को बेटे के साथ अरेस्ट कर लिया। 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए थे। संगठन का कहना है कि सदस्यों को जमानत मिलेगी, तो फिर से तलवार बांटेंगे। इनके अलावा एक कहानी उन लोगों की भी है, जिन्होंने तलवारें ले लीं। ये लोग भी हिरासत में हैं। इनमें एक सोसाइटी के गार्ड थे। उनकी पत्नी बताती हैं कि पति सो रहे थे। संगठन वाले आए, हाथ में तलवार दे दी। पुलिस उन्हें भी पकड़कर ले गई। दैनिक भास्कर ने इस मामले में हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय संयोजक संकेत कटारा से बात की। हम उन लोगों के परिवार से भी मिले, जिन्हें तलवार लेने की वजह से जेल जाना पड़ा। लोग बोले- अनजाने में तलवार ले ली, पुलिस ने पकड़ लियाहम गाजियाबाद के शालीमार गार्डन एरिया में पहुंचे। यहां ज्यादातर लोग इस मुद्दे पर बोलने से बचते रहे। हिंदू रक्षा दल ने कई घरों में तलवारें बांटी थीं, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। पुलिस ने जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से दो परिवारों से हमने बात की। हालांकि वे अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते। इसलिए सभी के नाम बदले गए हैं। अरेस्ट लोगों में एक शख्स सोसाइटी में गार्ड हैं। उनकी पत्नी भावना कहती हैं, ‘ मेरे पति किसी संगठन से नहीं जुड़े हैं। वे तो घर में सो रहे थे। संगठन के लोग आए और आवाज लगाई। पति गेट पर चले गए, उन लोगों ने अचानक हाथ में तलवार थमा दी और कहा कि ऐसा बोलो। मेरे पति ने बोल दिया। हमारा उनसे कोई नाता नहीं है। उसी दिन शाम को पुलिस आई और पति को ले गई। पुलिसवालों ने मुझसे कहा कि कोर्ट में जाकर बात करना।’ हमने भावना से पूछा कि हिंदू रक्षा दल वाले हथियार बांट रहे हैं, इसे वे सही मानती हैं या गलत। भावना कहती हैं, ‘अभी डर का माहौल है। सबके पास हथियार होना ही चाहिए। देखो बांग्लादेश में क्या हो रहा है। यहां हम सुरक्षित नहीं हैं।’ ‘नहीं पता था तलवार पकड़ना इतना बड़ा जुर्म है’भावना के घर के पास अमित की दुकान है। पुलिस ने उनके भाई को भी गिरफ्तार किया है। अमित कैमरे पर नहीं आना चाहते थे। वे कहते हैं, ‘यहां तलवारें दी जा रही थीं। आसपास के कुछ लोग वहां जाकर खड़े हो गए। मेरा भाई भी दुकान के बाहर खड़ा था। तभी उसके हाथ में आकर तलवार पकड़ा दी। उसने भी पकड़ ली। तभी किसी ने फोटो ले ली। उसे नहीं पता था कि तलवार पकड़ना इतना बड़ा जुर्म है।’ अमित कहते हैं, ‘हमारा इस सबसे कोई लेना-देना नहीं है। यहां सब ठीक है। हम अपना काम करने वाले लोग हैं। सच बताऊं तो हम उनकी (हिंदू रक्षा दल) चीजों पर ध्यान भी नहीं देते। बस इतना है कि हिंदू रक्षा दल हमारे बगल में है।' कोई अपराध होगा, तो उसके लिए प्रशासन है, हम क्यों हथियार उठाएंगे। ये भारत है। कहीं अगर कुछ हुआ है, तो ऐसा नहीं है कि हर जगह वैसा होगा। संगठन वाले गलत कर रहे हैं। हिंदू-मुस्लिम, जाति की बात नहीं होनी चाहिए। जगह: हिंदू रक्षा दल का ऑफिसशालीमार गार्डन एरिया में ही हिंदू रक्षा दल का ऑफिस है। हम यहां पहुंचे, तब राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी फरार चल रहे थे। बाद में पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया। ऑफिस में संगठन के राष्ट्रीय संयोजक संकेत कटारा मिले। तलवार बांटने पर केस दर्ज होने के बाद भी संकेत कटारा इसे गलत नहीं मानते। वे कहते हैं, ‘इससे कोई अपराध नहीं हुआ। शांति भंग नहीं हुई, कोई नुकसान नहीं हुआ। संगठन के सदस्यों को जमानत मिल जाएगी, तो आगे फिर से इस पर विचार करेंगे।’ सवाल: आप तलवार क्यों बांट रहे हैं?जवाब: बांग्लादेश में 15 दिन में तीन हिंदू लड़कों को मार दिया। इससे हमारे कार्यकर्ता गुस्से में थे। उन्होंने कहा कि हम एक कार्यक्रम करते हैं। शस्त्र पूजन करके घरों में तलवार बांटेंगे, ताकि बहन-बेटियां अपनी सुरक्षा में उस तलवार का इस्तेमाल कर सकें। सवाल: देश में कानून है, तो तलवार बांटने की क्या जरूरत है?जवाब: देश की व्यवस्था ऐसी है कि भीड़तंत्र के आगे पुलिस भी बेबस रही है। इसी इतिहास को देखते हुए हमने आत्मरक्षा में तलवार बांटी हैं। हमने किसी को घृणा की नजरों से नहीं देखा, हमने दंगा नहीं किया, मुझे नहीं लगता कि ये इतना बड़ा अपराध होना चाहिए, जो पुलिस ने बना रखा है। सवाल: तलवारें दिखाना, बांटना क्या कानून तोड़ना नहीं है?जवाब: हमने तो छोटा सा गैरकानूनी कदम उठाया है। अपने ही देश में जम्मू-कश्मीर हो या बंगाल, वहां खुलेआम हथियार दिए जा रहे हैं। हमने आत्मरक्षा में हथियार दिए हैं। हमें पता था कि हम पर केस होगा, लेकिन ये नहीं पता था कि पुलिस झूठा केस करेगी। सरकार हथियार का लाइसेंस देती है। अगर लाइसेंस वाले हथियार से कुछ हो जाता है, तो उसके लिए जिम्मेदार भी तो सरकार होगी। सवाल: आपके संगठन के लोग एक समुदाय के लिए नफरत फैला रहे हैं, ऐसा क्यों?जवाब: आपने हमारे जो भी भाषण सुने होंगे, वे क्रिया की प्रतिक्रिया हैं। देश के बड़े-बड़े शहरों में लव जिहाद, गाय काटने, हिंदुओं को प्रताड़ित करने की घटनाएं हो रही हैं। लोगों को अपने मकान पर लिखना पड़ रहा है कि ये मकान बिकाऊ है। अल्पसंख्यकों की आबादी जहां ज्यादा हुई है, वहां हिंदुओं को प्रताड़ित किया गया है। आप गलत काम छोड़ दो, तो हम कौन सा किसी को भगा रहे हैं। सवाल: 2024 में हिंदू रक्षा दल के सदस्यों ने बांग्लादेशी बताकर मुस्लिमों की झुग्गियां क्यों तोड़ी थीं?जवाब: हम बहुत भावुक लोग हैं। उस वक्त भी बांग्लादेश में हिंसा हो रही थी। अगर कानून पर भरोसा नहीं होता तो हम और बड़ा आंदोलन करते। हम अगर कुछ गलत करते हैं, तो कानूनी प्रक्रिया का भी सम्मान करते हैं। सवाल: इतनी तलवारें आप कहां से लाए?जवाब: आप दिल्ली में कहीं भी चले जाइए, तलवारें मिल जाएंगी। लोग पैसा खर्च नहीं करना चाहते या उनके पास पैसे नहीं हैं। हमने ऐसे ही लोगों को तलवारें बांटी हैं, ताकि जिनके घरों में लड़कियां हैं, वे अपनी सुरक्षा के लिए सजग रहेंगे। जिहादी किस्म के लोग भारत में भी मौजूद हैं। बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी हैं। वे यहां भी ऐसी हरकत करेंगे, इसलिए हम तलवार बांट रहे हैं। सवाल: जिहादी किस्म से आपका क्या मतलब है?जवाब: जो लोग हमारे धर्म की लड़कियों को गलत निगाहों से देखते हैं, उन्हें साजिशन नाम बदलकर फंसाएं, ऐसे लोगों को हम जिहादी प्रवृत्ति का कहते हैं। अगर वे हमारे साथ इस तरह का काम करेंगे तो बहन-बेटियों को आत्मरक्षा में तलवार उठानी पड़ेगी। सवाल: तलवारों के लिए पैसे कहां से आ रहे हैं?जवाब: संगठन के एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ता हैं। यही लोग संगठन के लिए पैसे देते हैं। इसी से हमारा काम होता है। हमारा कोई अलग से पैसे का सोर्स नहीं है। संगठन के एक और सदस्य ललित शर्मा कहते हैं, ‘तलवारों के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है। ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों तरह से ये मिल जाती हैं। हम कहीं भी जाते हैं, तो कार्यक्रमों में तलवारें मिल जाती हैं। गाजियाबाद में करीब 15 लोगों को तलवारें बांटी थीं। फिर पुलिस का फोन आ गया, तो बंद कर दिया। हमने खासकर उन घरों में तलवारें दीं, जहां लड़के नहीं हैं। हमारी मंशा किसी को मारना नहीं है। हम चाहते हैं कि हिंदुओं को मजबूत किया जाए।’ (आर्म्स एक्ट 1959 के अनुसार, 9 इंच से लंबी तलवार बिना लाइसेंस रखना और उसका सार्वजनिक प्रदर्शन करना अपराध है। इसके लिए 3 साल तक की सजा हो सकती है।) पिंकी चौधरी की बेटी बोली- तलवार बांटना सहीतलवार बांटने के मामले में केस दर्ज होने के बाद हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी फरार थे। इसी दौरान 3 जनवरी को उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। इसमें वो कह रहे हैं कि प्रशासन चाहे जो मुकदमे लगा दे, जब लौटकर आऊंगा तो मुंहतोड़ जवाब दूंगा। इससे पहले 31 दिसंबर को उन्होंने वीडियो जारी कर कहा था कि जो हम चाहते थे, वो करके दिखा दिया। आतंकवादियों को पता लग गया कि हिंदू अब हथियार उठाने को तैयार है। हम हटेंगे नहीं, चाहे कितने भी मुकदमे हो जाएं। 5 जनवरी को पिंकी चौधरी की बेटी करुणा चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस पूछताछ के लिए उसे थाने ले गई और घंटों तक पूछताछ की। करुणा ने तलवार बांटने को सही ठहराया और कहा कि बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए हर घर में एक पिंकी चौधरी होना चाहिए। मुस्लिमों की पिटाई, भड़काऊ वीडियो, पहले भी विवादों में रहा हिंदू रक्षा दलहिंदू रक्षा दल सांप्रदायिक नारों, मुसलमानों पर हमले और भड़काऊ बयानों की वजह से पहले भी विवादों में रहा है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद संगठन ने वीडियो जारी कर कहा था कि देहरादून में कहीं भी कश्मीरी मुसलमान दिखेगा, तो उसका इलाज किया जाएगा। सुबह 10 बजे से हिंदू रक्षा दल की टीम अलग-अलग इलाकों में जाएगी। हम अब सरकार के भरोसे नहीं बैठेंगे। अगस्त 2024 में संगठन के अध्यक्ष पिंकी चौधरी और कुछ सदस्यों ने गाजियाबाद की झुग्गी बस्ती में मुसलमानों को बांग्लादेशी बताकर पीटा। झुग्गियों को तोड़फोड़ की और सांप्रदायिक नारे लगाए थे। तब पुलिस ने पिंकी चौधरी के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। कुछ महीने बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। अगस्त 2021 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक रैली में खुलेआम मुसलमानों के खिलाफ नारेबाजी की गई थी। तब भी पिंकी चौधरी ने भड़काऊ बयान दिए थे। फिर गिरफ्तारी हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में वह बाहर आ गए। ...............................ये स्टोरी भी पढ़िए स्कैन कर बांग्लादेशी बताने वाली मशीन का सच क्या 23 दिसंबर की बात है। गाजियाबाद में कौशाम्बी थाने के SHO अजय शर्मा बिहारी मार्केट की झुग्गियों में पहुंचे। उनके साथ लोकल पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी थे। अजय शर्मा टीम के साथ वहां रहने वालों की नागरिकता चेक करने लगे। यहीं कह गए कि मशीन तो तुम्हें बांग्लादेशी बता रही है। क्या है इस मशीन का सच, पढ़िए पूरी खबर...
DNA: ट्रंप ने किया पावर शिफ्ट, उड़ गई 'दोस्तों' की नींद, पुतिन का नाम क्यों रटने लगा यूरोप?
Third World War:जिस रूस को यूरोप सबसे बड़ा दुश्मन समझता था, आज इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उसी रूस से बातचीत की नसीहत क्यों दे रहे हैं. पावर शिफ्टिंग की इस प्रक्रिया में अमेरिका रूस को धमका रहा है और चीन अमेरिका को धमकी दे रहा है.
DNA: सऊदी अरब के बाद पाकिस्तान के इस्लामिक नाटो में आएगा 'खलीफा'! भारत के लिए कितना खतरा?
Pakistan Islamic NATO: तुर्किये पाकिस्तान की तरह ही कट्टर इस्लामिक और भारत विरोधी मुल्क है. तुर्किए के इस गठबंधन में शामिल होने से कैसे मिडिल ईस्ट, यूरोप और दक्षिण एशिया में शक्ति का संतुलन बदल सकता है और इसे भारत के लिहाज से कितना बड़ा खतरा माना जाए..इसे समझने की जरूरत है.
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली ने उत्तर कोरिया में कथित ड्रोन घुसपैठ की त्वरित जांच का दिया आदेश
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने उत्तर कोरिया में कथित ड्रोन घुसपैठ की त्वरित जांच के आदेश दिए
Reza Pahlavi's Appeal in Iran Protest: ईरान में हालात दिनोंदिन गंभीर हो रहे हैं. खामेनेई के शासन के खिलाफ जनता आर-पार की जंग के मूड में है. इसी बीच अमेरिका में निर्वासित जीवन बिता रहे रजा पहलवी ने लोगों से अपील की है कि अब केवल नाराजगी जताने से काम नहीं चलेगा बल्कि शहरों पर कब्जा करना होगा.
Indonesia blocked Grok chatbot: इंडोनेशिया ने शनिवार को AI-जनरेटेड पोर्नोग्राफिक कंटेंट के जोखिम के कारण एलन मस्क के ग्रोक चैटबॉट को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया है. इंडोनेशिया ऐसा करने वाला पहला देश बन गया जिसने इस AI टूल तक पहुंच को रोक दिया है.
US News: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समय अपने सीक्रेट नोट को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने यूएस राष्ट्रपति को एक नोट दिया, जिसको ट्रंप ने जो-जोर से पढ़ दिया. इस दौरान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए.
Iran protest:ईरानी युवतियों के ऐसे तमाम वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वो अपने नेता खामेनेई की तस्वीर जलाकर सिगरेट सुलगा रही हैं. ऐसी तस्वीरेंविरोध की नई लहर को दिखाती हैं, जो महिलाओं पर 50 सालों से लगे प्रतिबंधों से किसी न किसी तरह जुड़ी है. ईरानी महिलाओं का यह ट्रेंड पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है.
मादुरो की तरह ट्रंप को उठा लो…! गरमाए ईरानी नेता ने ट्रंप को सुनाई खरी-खोटी; आखिर कौन हैं अजघादी?
hassan rahimpour to threat trump: ईरान में आर्थिक संकट के कारण देशभर में बड़े विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसी बीच ईरानी नेता हसन रहीमपुर अजघादी ने डोनाल्ड ट्रंप को धमकी दी है, जिससे अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है.
donald trump gifts shoes to vance or marco: डोनाल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को जूते भेंट किए हैं. इस दौरान उन्होंने दोनों को बच्चे कहकर बुलाया, ये सब उन्होंने ओवल ऑफिस में मीडिया से चले दो घंटे चली बातचीत के दौरान किया है. राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस का दौरा कराया और अपने करियर और पुरानी उपलब्धियों पर चर्चा की है.
ईरान में प्रदर्शन, ट्रंप की सख्त चेतावनी: “नागरिकों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं”
ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ दो हफ्तों से जारी प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए बल प्रयोग न किया जाएगा
वेनेजुएला के तेल पर ट्रंप का सख्त रुख, अमेरिका ने कैरेबियन में एक और टैंकर किया जब्त- Video
US Navy: ट्रंप सरकार ने वेनेजुएला से जुड़े तेल कारोबार पर कार्रवाई करते हुए कैरेबियन सागर में एक और तेल टैंकर को जब्त कर लिया है. अमेरिकी सेना के अनुसार, प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में तड़के अमेरिकी मरीन और नौसेना ने संयुक्त अभियान में टैंकर ‘ओलिना’ पर कब्जा किया है.
1971 Royal Party and Pahlavi Empire: 1971 में इतिहास की सबसे महंगी पार्टी की गई थी, जिसमें लगभग 4,150 करोड़ रुपये का खर्च आया था. जिसे रजा पहलवी ने फारसी साम्राज्य के 2500 साल पूरे होने पर मनाया था. जो आगे चलकर पहलवी साम्राज्य के पतन का कारण बना.
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर इसलिए कब्जा कर रहा है ताकि चीन और रूस वहां अपना प्रभाव न बढ़ा सकें. व्हाइट हाउस में तेल कंपनियों के प्रमुखों से बातचीत में उन्होंने कहा कि समय पर अमेरिकी कदम न उठाया जाता तो चीन या रूस वेनेजुएला के ऊर्जा संसाधनों पर कब्जा कर चुके होते.
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की चेतावनी: “जरूरत पड़ी तो अमेरिका करेगा कार्रवाई”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका ग्रीनलैंड को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाएगा
कई युद्धों को रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए मैं नोबेल पुरस्कार का हकदार : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए
ढाका यूनिवर्सिटी में अब मुजीबुर रहमान हॉल का बदलेगा नाम, कहलाएगा 'उस्मान हादी हॉल'
बांग्लादेश में अब शैक्षिक संस्थानों के नाम बदले जाने की परंपरा का आगाज हो रहा है। बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने शेख मुजीबुर रहमान हॉल का नाम बदलकर 'उस्मान हादी हॉल' रखने का फैसला किया है
अरब स्प्रिंग की परछाई ईरान तक पहुंची! क्यों याद आ रहे हैं मिस्र, लीबिया, सीरिया और यमन?
Iran Protest: ईरान में आर्थिक दबाव और सामाजिक पाबंदियों के खिलाफ जनता की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है. हाल के दिनों में युवाओं और महिलाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. इसी वजह से विशेषज्ञ ईरान में अरब स्प्रिंग के आने की बात कर रहे हैं. आइए समझते है कि आखिर ये अरब स्प्रिंग क्या है? और ये कैसे किसी देश की सत्ता को कैसे प्रभावित करती है...
Trump and the Nobel Prize: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोककर लाखों लोगों की जान बचाई है, जबकि भारत ने बार-बार कहा कि युद्धविराम पूरी तरह द्विपक्षीय समझौते से हुआ है. ट्रंप ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताया और नोबेल शांति पुरस्कार का खुद को हकदार बताया है. लेकिन भारत ने किसी तीसरी पार्टी की मध्यस्थता को नकार दिया है.
वेनेजुएला का तेल, चाबी अमेरिका के हाथ! ट्रंप बोले- भारत को तेल चाहिए तो शर्तें माननी होंगी
India's oil sales to Venezuela: अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की अनुमति दे सकता है, लेकिन यह सौदा पूरी तरह वॉशिंगटन के कंट्रोल में होगा.
Trump Warns Iran: ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है, अमेरिका ईरान की स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहा है. वह किसी भी हिंसा की स्थिति में चुप नहीं बैठेगा.
23 दिसंबर की बात है। गाजियाबाद में कौशाम्बी थाने के SHO अजय शर्मा बिहारी मार्केट की झुग्गियों में पहुंचे। उनके साथ लोकल पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी थे। अजय शर्मा टीम के साथ वहां रहने वालों की नागरिकता चेक करने लगे। SHO ने झुग्गी में रहने वाले 52 साल के मोहम्मद कैसर आलम से कागज दिखाने को कहा। पूछ कि कहां के रहने वाले हो, बांग्लादेशी तो नहीं हो। फिर बोले कि मशीन लगाओ इनकी पीठ पर। फिर उन्होंने मोहम्मद कैसर की पीठ की ओर हाथ किया, जैसे कुछ चेक कर रहे हों। फिर बोले, 'ये तो बता रही है कि तुम बांग्लादेशी हो।' घटना का वीडियो वायरल हुआ और पहचान के इस तरीके पर सवाल उठने लगे। SHO अजय शर्मा ने सफाई दी कि वे मजाक कर रहे थे। वहीं कैसर आलम इस तरह पूछताछ से परेशान हैं। वे कहते हैं, 'हमने बताया कि हम बिहारी हैं, लेकिन पुलिसवाले घर आकर आधार कार्ड, पहचान पत्र और बाकी कागजात मांगने लगे।' यूपी में पुलिस 'ऑपरेशन टॉर्च' चला रही है। इसके तहत पुलिस अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। दिल्ली में भी बांग्लादेशियों की धरपकड़ की जा रही है। पिछले साल दिल्ली और आस-पास के इलाकों में 2200 से ज्यादा बांग्लादेशी पकड़े गए हैं। गाजियाबाद पुलिस के पास स्कैन करके नागरिकता पहचानने वाली कौन सी मशीन है, 23 दिसंबर को चेकिंग के दौरान क्या हुआ था, वीडियो में दिख रहे कैसर आलम और बस्ती वालों से पुलिस ने क्या पूछताछ की, हमने ग्राउंड पर पहुंचकर जाना। बाढ़ से परेशान होकर बिहार छोड़ा, दिल्ली आकर बसेहम गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-3 में बने बिहारी मार्केट की झुग्गी में पहुंचे। ये इलाका कौशाम्बी थाना क्षेत्र में आता है। दिल्ली नगर निगम ने करीब 15 साल पहले बिहारी मार्केट के लिए 4 बाई 4 और 5 बाई 5 की करीब 30 दुकानें बनवाई थीं। इन्हीं में लोग बस्ती बसाकर रहने लगे। इनमें ज्यादातर मुस्लिम हैं। बस्ती के हाल बहुत अच्छे नहीं हैं। झुग्गियों के बाहर मिट्टी का चूल्हे बने है। नहाने और शौच के लिए पब्लिक टॉयलेट है, जहां रोज के 30 रुपए देने होते हैं। बस्ती में रहने वाले 52 साल के मोहम्मद कैसर आलम के पिता बिहार के अररिया जिले के जोकीहाट से काम की तलाश में दिल्ली आए और यहीं बस गए। कैसर बीते 25 साल से पेंटर का काम कर रहे हैं। वायरल वीडियो को लेकर कैसर दावा करते हैं कि सिर्फ उनकी बस्ती में ही जांच की गई। आसपास की बस्तियों में नहीं हुई। वीडियो भी पुलिसवालों ने ही बनाया। पुलिस ने सबके कागजात चेक किए और फिर चले गए। पुलिसवालों ने ऐसा नहीं कहा कि तुम बांग्लादेशी हो, यहां मत रहो। सब जानते हैं कि हम बिहार से हैं। अररिया में आज भी मोहम्मद कैसर का मकान है। इसी पते पर उनका आधार कार्ड बना है। वे बिहार छोड़कर दिल्ली आने की वजह बाढ़ को बताते हैं। कैसर कहते हैं, ‘वहां हर साल बाढ़ से फसल बर्बाद हो जाती है। साल भर की मेहनत पानी में बह जाती है। फिर यहां मजदूरी करके बाल-बच्चों का गुजारा करते हैं। अभी दो बेटियों की शादी की तो बहुत कर्ज हो गया। काम भी बंद है।’ वायरल वीडियो में आधार कार्ड दिखा रही महिला मोहम्मद कैसर की साली रोशनी खातून हैं। 22 साल की रोशनी भी बिहारी मार्केट की झुग्गी में पति और दो बच्चों के साथ रहती हैं। रोशनी कहती हैं कि हम सभी अररिया जिले से हैं। आधार और पैन कार्ड सब बिहार के एड्रेस पर हैं। 23 दिसंबर की घटना याद कर रोशनी बताती हैं, ‘मैं सामान लेने बाहर जा रही थी, तभी पुलिस वाले आ गए। बोले- आईडी दिखाओ। मैंने फोन पर दिखाई कि तभी जीजा जी (कैसर आलम) आ गए। उनसे भी आईडी मांगी। वो निकालने लगे तो पुलिस वाले बोले कि सही-सही बताओ कि कहां के रहने वाले हो।‘ ‘फिर पुलिसवाले कहने लगे कि उनके पास मशीन है, जिसे शरीर पर लगाते ही पता चल जाएगा कि बांग्लादेशी हो या बिहारी। एक पुलिस वाले ने जीजा जी के कंधे पर मशीन लगा दी। मशीन में बोला कि तुम बांग्लादेशी हो। पता नहीं कौन सी मशीन थी।‘ 'यहां कोई बांग्लादेशी नहीं, पहले ऐसी जांच नहीं हुई'38 साल के मोहम्मद दिलबर भी बिहारी मार्केट की झुग्गियों में रहते हैं। वे कहते हैं, ‘यहां पहले कभी ऐसी जांच नहीं हुई। हालांकि हमारी बस्ती में सभी बिहार से हैं, कोई बांग्लादेशी नहीं है। बिहार और बांग्लादेश के लोग अलग दिख जाते हैं। हमारी भाषा से ही पता चल जाता है।' 'अधिकारी पढ़े-लिखे हैं, वे दो मिनट में सब पकड़ लेते हैं। उन्होंने कोई जबरदस्ती नहीं की। इससे पहले भी पुलिस ने कभी बेवजह परेशान नहीं किया। वीडियो वायरल होने के बाद भी कोई दिक्कत नहीं हुई। पुलिस दोबारा बस्ती में नहीं आई।‘ 'लोग पहचान जानने आए, बस्ती का हाल कोई नहीं देखता'बिहारी मार्केट के पास ही रहने वाले तालिफ कॉन्ट्रैक्टर हैं। रंगाई-पुताई का काम करवाते हैं। वे खुद को मोहम्मद कैसर का रिश्तेदार बताते हैं। तालिफ कहते हैं, ‘पुलिस आईडी चेक कर रही थी और खुद ही वीडियो बना रही थी। वीडियो 23 दिसंबर को वायरल नहीं हुआ। 4-5 दिन बाद हुआ, तब लोगों ने देखा। हमने प्रूफ दिखा दिया, तो पुलिस चली गई। कोई दिक्कत नहीं हुई।‘ ‘वीडियो वायरल होने के बाद यहां काफी लोग आ चुके हैं, लेकिन किसी को बस्ती का हाल नहीं नजर आया। यहां कितनी गरीबी है, पढ़ाई-लिखाई की सुविधा तक नहीं है। गंदगी से बच्चे बीमार पड़ जाते हैं।‘ यहां सरकार से राशन या बाकी कोई मदद नहीं मिलती है। अब बांग्लादेशियों की जांच हुई, तब यहां पुलिस और मीडिया आई है। पहले तो कोई पूछने तक नहीं आता था। बस्ती के हालात से लोग नाराजरोशनी भी घटना के साथ ही बस्ती के खराब हालात का जिक्र करती हैं। वे कहती हैं, ‘बस्ती में संकरी गलियां हैं, छोटे-छोटे घरों में चार-पांच लोग मुश्किलों में रह रहे हैं। ज्यादातर लोग दिहाड़ी पर काम करते हैं। आसपास अस्पताल न होने और गरीबी की वजह से बच्चों की डिलीवरी घर पर ही होती है। इसलिए उनका बर्थ सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा। सरकारी स्कूल में एडमिशन नहीं मिल रहा। पुलिसवाले जांच करने तो झुग्गी में आ गए, लेकिन हमारी मदद करने कोई नहीं आता है।‘ मोहम्मद कैसर भी बस्ती की हालत पर चिंता जताते हुए कहते हैं, ‘30-35 झुग्गियां हैं। हर झुग्गी में 4 से 5 लोग रहते हैं। ऐसे में बच्चे पढ़ाई कहां और कैसे करें। इतनी कम कमाई में किसी एक बच्चे का एडमिशन ही करा पाते हैं, बाकी अनपढ़ रह जाते हैं। हमारे चारों बच्चे अनपढ़ हैं। हम भी पढ़ाना चाहते थे, लेकिन हालात ऐसे नहीं थे कि पढ़ा पाएं। हमारा बस एक ही काम है कि दिन भर मेहनत करके शाम को दो वक्त की रोटी खाओ।‘ सफाई में बोले SHO- कोई मशीन नहीं है, मजाक किया था5 जनवरी को हम कौशांबी थाना पहुंचे। SHO अजय शर्मा ने हमसे बात करने से मना कर दिया। हालांकि 2 जनवरी को उन्होंने दैनिक भास्कर से ही बात करते हुए घटना पर सफाई दी थी। तब उन्होंने कहा था, ‘झुग्गियों में लोगों का सत्यापन किया जा रहा था। मेरा मकसद सिर्फ इतना था कि तलाशी के दौरान ये लोग सच बोलें। इलाके में पहले भी 5 बांग्लादेशी गिरफ्तार हो चुके हैं। कौशाम्बी थाने में FIR भी दर्ज है। जो भी झुग्गी झोपड़ी में रह रहा है, उनकी जांच के लिए ऊपर से निर्देश हैं। सत्यापन जरूरी है।‘ क्या आपके पास कोई ऐसी मशीन है, जो नागरिकता चेक कर सकती है? इस सवाल पर अजय शर्मा कहते हैं, ‘मेरे पास ऐसी कोई मशीन नहीं है। मैंने ये गलत तरीके से नहीं कहा था। मजाकिया अंदाज में बोल रहा था कि आप कहां के रहने वाले हो, सही बताओ नहीं तो मशीन बता देगी। मेरा मकसद सिर्फ सच जानना था।‘ बांग्लादेशी कहने के सवाल पर अजय शर्मा कहते हैं कि मेरी मंशा सिर्फ इतनी थी कि वो लोग सच बोलें। मैं उनसे कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा था। SHO को वॉर्निंग मिली, पहले भी रहे हैं विवादों मेंACP इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि अपराध रोकने के लिए पुलिस समय-समय पर झुग्गी-झोपड़ी और अस्थायी बस्तियों में रहने वाले लोगों से पूछताछ करती है। उनकी जांच करती है। ऐसे ही कौशाम्बी पुलिस ने लोगों की पहचान के लिए उनके दस्तावेज देखे। वीडियो वायरल हुआ, तब SHO अजय शर्मा को डिपार्टमेंट से चेतावनी दी गई कि ऐसा व्यवहार दोबारा ना हो। सभी तथ्यों की जांच कर एक्शन लिया जा रहा है।’ अजय शर्मा का नाम पहले भी विवादों में रहा है। जून, 2022 में मेरठ के पल्लवपुरम थाने में उनके खिलाफ एक रेप केस दर्ज हुआ था। तब वे दरोगा हुआ करते थे। बाद में आरोप सही नहीं पाए गए और इस केस में एफिडेविट लगा दिया गया। अवैध नागरिकों को वापस भेजने की प्रोसेस मुश्किलअवैध तरीके से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की प्रोसेस बहुत मुश्किल है। इसमें सिक्योरिटी, कानून और डिप्लोमेसी शामिल होते हैं। भारत में इस प्रोसेस को डिपोर्टेशन या पुश बैक कहते हैं। पूरी प्रोसेस 5 स्टेप में होती है। 1. पहचान करके हिरासत में लेनापुलिस या खुफिया एजेंसियां संदिग्धों की पहचान करती हैं। इसके लिए अक्सर झुग्गी बस्तियों में छापेमारी होती है। अगर पकड़े गए संदिग्ध के पास भारतीय नागरिकता का सबूत जैसे- वोटर आईडी या पासपोर्ट नहीं मिलता तो उसे विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 के तहत हिरासत में लिया जाता है। डिपोर्ट करने की प्रोसेस पूरी होने तक उसे जेल की बजाय डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है। 2. दूतावास को खबर देनाहिरासत में लेने के बाद विदेश मंत्रालय बांग्लादेश हाई कमीशन को खबर देता है। बांग्लादेश के अधिकारी हिरासत में लिए गए शख्स से मिलते हैं और यह कंफर्म करते हैं कि क्या वो सच में बांग्लादेश का नागरिक है। 3. नागरिकता का वेरिफिकेशनये सबसे मुश्किल स्टेज है। बांग्लादेश के अधिकारी उस शख्स के बताए पते की जांच करवाते हैं। अक्सर अवैध प्रवासी गलत पता बताते हैं या बांग्लादेश सरकार उन्हें अपना नागरिक मानने से इनकार कर देती है। ऐसा होने पर भारत उन्हें वापस नहीं भेज सकता। 4. ट्रैवल परमिट जारी करनाएक बार नागरिकता की पुष्टि हो जाने पर बांग्लादेश हाई कमीशन ट्रैवल परमिट जारी करता है। ये एक तरह का अस्थायी पासपोर्ट होता है। ये परमिट सिर्फ एक बार यात्रा के लिए होती है ताकि कोई सीमा पार कर सके। 5. हैंडओवरपरमिट मिलने के बाद BSF और पुलिस उस व्यक्ति को भारत-बांग्लादेश सीमा पर ले जाती है। वहां फ्लैग मीटिंग होती है और कागजी कार्रवाई के बाद व्यक्ति को बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश को सौंप दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, किसी को भी सिर्फ शक के आधार पर विदेशी बताकर डिपोर्ट नहीं किया जा सकता। इसके लिए फॉरेनर ट्रिब्यूनल या कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। बिना साबित हुए किसी को बांग्लादेशी कहना मानहानि और मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बन सकता है।.................ये खबर भी पढ़ें... ‘4500 टका दिए, एजेंट ने भारत पहुंचा दिया’ दलाल के जरिए भारत आए। आधार कार्ड से लेकर वोटर आईडी तक बनवा ली। एक तो पश्चिम बंगाल पुलिस में सिपाही बन गया। ये कहानी उन बांग्लादेशियों की है, जो अवैध तरीके से भारत में घुसे हैं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR में पश्चिम बंगाल से करीब 58 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए आइडेंटिफाई किए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें...
एमईए ने शक्सगाम घाटी में चीन के अवैध निर्माण को किया खारिज : भारत का क्षेत्रीय दावा मजबूत
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह शक्सगाम घाटी में चीन की बुनियादी ढांचा निर्माण गतिविधियों को सिरे खारिज करता है
ट्रंप से आर-पार, पुतिन की यलगार! ऑयल टैंकर को लेकर जंग का खतरा अबतक टला नहीं
Russia US Tension: जिस मैरिनेरा तेल टैंकर पर कब्जे को समुद्री डकैती बताया गया है. उसे अमेरिका ने रूस का मानने से इनकार कर दिया. रूस के साथ टकराव टालने के लिए अमेरिका ने साफ-साफ कहा कि जिस जहाज को अमेरिकी फोर्स ने जब्त किया वो वेनेजुएला का था जिसने बचने के लिए रूस का झंडा लगाया था.
ट्रंप के टैरिफ पॉलिसी पर आज नहीं आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला, अब और कितना करना होगा इंतजार?
Court Verdict On Trump Tariff Case: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने वाली थी, हालांकि अब इसे टाल दिया गया है.
Pakistan Role In Gaza Stabilisation: भारत में इजरायल के राजदूत का साफ कहना है कि कई देशों ने यह स्पष्ट किया है कि वे गाजा के लिए अपने सैनिक भेजने के इच्छुक नहीं हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वे हमास से लड़ना नहीं चाहते हैं.
दुनिया की सबसे धीमी गति वाली मिसाइल, जिसकी स्पीड जानकर पीट लेंगे माथा; फिर भी इस्तेमाल कर रहे कई देश
World Slowest Missile: हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस युग में आज भी कई देश एक ऐसी मिसाइल इस्तेमाल कर रहे हैं. जिसकी बेहद धीमी स्पीड जानकर आप माथा पीट लेंगे. वह मिसाइल इतनी स्लो चलती है कि उसे आते देखकर कोई भी आसानी से छिप सकता है.
हम झुकेंगे नहीं... ईरान में विरोध-प्रदर्शनों के बीच खामेनेई का देश को संबोधन, अमेरिका को कड़ा संदेश
Iran Protest Against Goverment: ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं, लोग महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं. प्रदर्शन के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का संबोधन सामने आया है.
What is Storm Goretti powerful bomb cyclone: यूरोप इस समय ‘वेदर बम’ कहे जा रहे तूफान स्टॉर्म गोरेटी से कराह रहा है. हवाएं 160 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही हैं, जिससे ब्रिटेन और फ्रांस में परिवहन व्यवस्था लगभग ठप हो गई है. हीथ्रो एयरपोर्ट पर भारी उड़ानें रद्द हैं, ट्रेनों पर ब्रेक और कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी है. प्रशासन लोगों को घरों में रहने की सलाह दे रहा है.
ईरान की वो तीन खूबसूरत राजकुमारियां, जिन्होंने अमेरिका में बैठकर हिला दी खामेनेई की सत्ता
ईरान में क्या रजा शाह वाला दौर फिर लौटेगा? अमेरिका की धमकियों के बीच जिस तरह से शाह के बेटे रजा पहलवी एक्टिव हैं उससे प्रोटेस्ट बढ़ता ही दिख रहा है. ईरान में हो रहे प्रोटेस्ट में तीन खूबसूरत प्रिंसेस का बड़ा रोल है जिन्होंने अमेरिका में बैठकर ईरान के लोगों में सरकार के खिलाफ लोकतंत्र के लिए आशा पैदा की.
8 political killings In Bangladesh: बांग्लादेश में 13वें आम चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हिंसा चरम पर पहुंच गई है. 11 दिसंबर को चुनाव शेड्यूल आने के बाद से अब तक 8 बड़े नेता और एक्टिविस्ट मारे जा चुके हैं. अवामी लीग, BNP और जमात-ए-इस्लामी के लोग निशाने पर हैं. देखें सभी के नाम.
USA:वेनेजुएला, ईरान, सीरिया, नेपाल और बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक बदलावों और विरोध आंदोलनों के बीच डीप स्टेट की चर्चा तेज हो गई है. सत्ता परिवर्तन और विदेश नीति में अचानक बदलावों को लेकर बाहरी ताकतों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. खासतौर पर वेनेजुएला में अमेरिकी प्रभाव और ईरान में सरकार विरोधी आंदोलनों ने इस बहस को और हवा दी है. आइए जानते है कि आखिर ये डीप स्टेट क्या होता है...
Protest in Iran: ईरान में सरकार के खिलाफ लोगों का विरोध प्रदर्शन जारी है. इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक महिला के मुंह से खून आ रहा है और वह सरकार के विरोध में नारेजाबी कर रही है.
US ने निकाल दी चीन की हेकड़ी, पास कर दिया फंडिंग बिल; निर्यात पर लगेगी सख्त पाबंदी
US-China Relations:अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने चीन को लेकर सख्ती बढ़ाने वाला फंडिंग बिल पास किया है. कानून के तहत निर्यात नियंत्रण, व्यापार नियमों का कड़ा पालन, सरकारी तकनीक खरीद पर रोक और अमेरिका-चीन सहयोग सीमित किया गया है. साथ ही इस बिल में सरकारी चीन यात्राओं की निगरानी, ऊर्जा और परमाणु सुरक्षा से जुड़े नए प्रावधान भी शामिल किए गए हैं.
Russian flagged oil tanker seized by US military:अमेरिका ने नॉर्थ अटलांटिक में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर Marin(Bella 1) को जबसे कब्जे में लिया है, पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है. अब सूचना आई है कि इस जहाज पर मौजूद 28 क्रू में से तीन भारतीय भी अमेरिकी कब्जे में हैं.
1952 का वो कानून जिसके दम पर ग्रीनलैंड ने ट्रंप को धमकाया; पहले मारेंगे गोली, बात बाद में होगी
Greenland Denmark: ग्रीनलैंड पर बढ़ते तनाव के बीच डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमले की स्थिति में उसके सैनिक बिना आदेश के गोली चला सकते हैं. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह अधिकार 1952 के सैन्य नियमों के तहत अब भी लागू है. यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के लिए सैन्य विकल्प की बात दोहराई है.
अमेरिका का वेनेजुएला पर नियंत्रण कई साल तक रह सकता है : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वॉशिंगटन आने वाले कई वर्षों तक वेनेजुएला पर निगरानी बनाए रख सकता है और देश के विशाल तेल भंडार से तेल निकालता रहेगा
Trump paying Greenlanders to buy island for US: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर नया विवादित प्लान तैयार किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप हर ग्रीनलैंडर को $10,000 से $100,000 तक ऑफर कर अमेरिका के साथ जुड़ने के लिए मनाने की सोच रहे हैं. जिसके बाद डेनमार्क और NATO देश इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर चिंता में हैं. जानते हैं ट्रंप का प्लान.
अमेरिका ने दी हरी झंडी-भारत को मिलेगा वेनेजुएला का तेल
अमेरिका के व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका एक नए कंट्रोल्ड फ्रेमवर्क के तहत भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए तैयार है
सीजफायर के बाद बड़ा खेल, लेबनानी सरकार ने हिज्बुल्लाह की ताकत पर लगाया ब्रेक, छीने हथियार
Lebanon: सीजफायर के बाद अब लेबनानी सरकार स्थिति सही करने की कोशिश में है, इसके तहत अब सरकार गैर-सरकारी हथियारों को अपने कंट्रोल में लेने के लिए अभियान चला रही है. जिसे हिज्बुल्लाह से जोड़कर देखा जा रहा है.
Senator Graham warns Iran Supreme Leader:अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सीधी धमकी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर जुल्म जारी रहा, तो ट्रंप उन्हें मार देंगे. ईरान में आर्थिक संकट से बड़े विरोध हो रहे हैं, दर्जनों मौतें हुईं हैं.
अमेरिकी डेल्टा फोर्स के हेलिकॉप्टर जैसे ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो के सुरक्षित ठिकाने के पास पहुंचे, जमीन से भारी फायरिंग होने लगी। एक MH-47 चिनूक हेलिकॉप्टर और उसके फ्लाइट लीडर को गोली लग गई। इस एक पॉइंट पर मिशन नाकाम हो सकता था। अगर हेलिकॉप्टर गिरता, तो अमेरिकी सैनिक दुश्मन शहर में फंस जाते। 3D, मैप और AI के जरिए देखिए अमेरिका के ऑपरेशन 'एब्सोल्यूट रिजॉल्व' की पूरी कहानी। वीडियो देखने के लिए ऊपर तस्वीर पर क्लिक कीजिए…
तारीख 7 जनवरी, वक्त रात के 1 बजे। पुरानी दिल्ली सो रही थी, तभी 32 जेसीबी और बुलडोजर तुर्कमान गेट की गलियों में दाखिल हुए। हाईकोर्ट के आदेश पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास 36,400 वर्ग फीट में बने एक बंद पड़े बारात घर और प्राइवेट क्लिनिक के अलावा पार्किंग ढहाने की तैयारी थी। जेसीबी चलनी शुरू हुईं, तभी भीड़ जुट गई। MCD के स्टाफ और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। 5 पुलिस वाले घायल हो गए। पुलिस ने हालात संभाले और MCD के अमले ने कब्जे तोड़ दिए। दो दिन बीत गए, तुर्कमान गेट के आसपास पुलिस तैनात है। रैपिड एक्शन फोर्स के जवान गश्त कर रहे हैं। गलियों में बैरिकेडिंग हैं। दुकानें भी दो दिन से बंद हैं। फैज-ए-इलाही मस्जिद की मैनेजिंग कमेटी का दावा है कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई है, वह 100 साल से ज्यादा पुरानी नोटिफाइड वक्फ संपत्ति है। दैनिक भास्कर ने कमेटी के जनरल सेक्रेटरी मतलूब करीम, मस्जिद की तरफ से पैरवी कर रहे वकील इरशाद हनीफ और वक्फ बोर्ड की वकील फरहत जहान रहमानी से बात की। इससे समझ आया कि पूरा मामला कागजों की वजह से उलझा है। मस्जिद के पास उस जमीन के कागज नहीं हैं। मस्जिद कमेटी का दावा- 1913 के पेपर में 3 बीघा 17 बिस्वा जमीन का जिक्रमस्जिद कमेटी के जनरल सेक्रेटरी मतलूब करीम से हमने फोन पर बात की। जमीन के कागजों पर वे कहते हैं, ‘पेपर जमा करने की जिम्मेदारी वक्फ बोर्ड की थी। वक्फ बोर्ड दिल्ली सरकार के तहत आता है। दिल्ली सरकार में अभी कौन लोग हैं, आप जानते हैं। वे 1913 के पेपर नहीं दिखा रहे हैं, जिसमें 3 बीघा 17 बिस्वा जमीन का जिक्र है। उन्होंने सिर्फ 1940 का पेपर दिखाया, जिसमें 0.195 एकड़ जमीन के बारे में लिखा है।’ दरअसल, MCD कमिश्नर ने 22 दिसंबर के अपने आदेश में कहा था कि 1940 में बनी डीड के तहत मिली 0.195 एकड़ ज़मीन के अलावा मस्जिद कमेटी और वक्फ बोर्ड के पास बाकी जमीन पर मालिकाना हक नहीं है। मतलूब करीम मस्जिद के बाहर की जमीन के मालिकाना हक या पेपर की बात वक्फ बोर्ड की तरफ मोड़ देते हैं। वे कहते हैं कि कमेटी ने MCD को सारी बातें बताई थीं। हमारे पास जो डॉक्यूमेंट्स थे, हमने दे दिए। बाकी के लिए हमने समय मांगा था, लेकिन हमें समय ही नहीं दिया गया। वक्फ बोर्ड की वकील बोलीं- नहीं पता मस्जिद कमेटी ने कौन से कागज जमा किएहमने जमीन विवाद पर दिल्ली वक्फ बोर्ड की तरफ से कोर्ट में पेश हुईं वकील फरहत जहान रहमानी से बात की। वे कहती हैं, ‘दो साल से बोर्ड नहीं है, यानी अभी कोई पैनल नहीं है। पैनल की गैर-मौजूदगी में जिन्हें सीईओ बनाया गया था, वे भी रिटायर हो चुके हैं।’ ‘अभी कोई अधिकारी नहीं है, जो फाइल को मंजूरी दे। वक्फ बोर्ड की लीगल सेल से कोई निर्देश नहीं आता है, तब तक हम कोई फाइल जमा नहीं कर सकते। मुझे नहीं पता कि मस्जिद की मैनेजिंग कमेटी ने सुनवाई के दौरान कौन से पेपर जमा किए थे।’ मस्जिद कमेटी के वकील बोले- कोर्ट ने रोक लगाई थी, कार्रवाई मनमानीफैज-ए-इलाही मस्जिद कमेटी की तरफ से हाईकोर्ट में केस लड़ रहे सीनियर वकील इरशाद हनीफ भी दावा करते हैं कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई, वह वक्फ की है। वक्फ कानून की धारा-83 में प्रावधान है कि वक्फ की जमीन पर विवाद हो, तो उस पर वक्फ ट्रिब्यूनल ही फैसला ले सकता है। इरशाद आगे कहते हैं, ‘सेव इंडिया फाउंडेशन ने इस जमीन पर याचिका लगाई थी। 12 नवंबर, 2025 को याचिका लिस्ट हुई और उसी दिन हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ये वक्फ की जमीन है, तो उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाए। MCD के डिप्टी कमिश्नर ने दो बार सुनवाई की।’ ‘मस्जिद कमेटी ने डॉक्यूमेंट देने के लिए उनसे एक महीने का समय मांगा था। उन्होंने कहा कि 24 घंटे का समय देंगे। इसके पीछे क्या मकसद था, समझ नहीं आया। इसके बाद 22 दिसंबर को आदेश आ गया कि मस्जिद के बाहर की जमीन MCD की है।’ इरशाद कहते हैं, ‘हाईकोर्ट ने 6 जनवरी को कहा था कि मामले पर विचार करने की जरूरत है। फिर क्या जल्दबाजी थी कि आधी रात तोड़फोड़ शुरू कर दी। नोटिस तक नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने जो कहा था, मैं उसे एक तरह से रोक मानता हूं।’ ‘हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया था। ये समय 12 फरवरी 2026 को पूरा होता। हमने MCD के डिप्टी कमिश्नर से एक महीने का वक्त मांगा, जो हमें नहीं दिया गया। आप हमें दस्तावेज जमा करने के लिए सिर्फ 24 घंटे का समय दे रहे हैं। ये तो गलत है।’ इरशाद बताते हैं, ‘1940 के समझौते के तहत लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने करीब 900 गज जमीन मस्जिद को ट्रांसफर की थी। उसके बाहर 3 बीघा 17 बिस्वा जमीन कब्रिस्तान की है। यहीं तबलीगी जमात का मरकज चलता है। मस्जिद के बाहर के पूरे हिस्से को ढहा दिया गया है।’ ‘सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर, 2024 को फैसला दिया था, जिसमें कार्रवाई के नियम तय किए गए थे। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने आदेश दिया था कि डिमॉलिशन की प्रक्रिया देर रात या तड़के सुबह नहीं की जा सकती है। MCD ने इसका उल्लंघन किया है। रात में 2 बजे पुलिस तैनात करके बुलडोजर चलाया गया।’ कब्जे के खिलाफ याचिका लगाने वाले प्रीत सिरोही की बात ‘देश में कराची-लाहौर बन गए हैं, जब तक मैं हूं, इन्हें रहने नहीं दूंगा’प्रीत सिंह सिरोही का दावा है कि फैज-ए-इलाही के आसपास की जमीन का मालिकाना हक PWD और MCD के पास है। दिल्ली में रहने वाले प्रीत सिरोही सेव इंडिया फाउंडेशन नाम की संस्था चलाते हैं और सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाई मस्जिद, मजार, दरगाह और कब्रिस्तान के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। प्रीत सिरोही देशभर में 2500 से ज्यादा और दिल्ली में 275 इस्लामिक स्ट्रक्चर्स के खिलाफ पिटीशन डाल चुके हैं। इसके लिए दिल्ली में 37 वकीलों की टीम बनाई है। उनके पास ऐसे मामलों की लंबी लिस्ट है। अप्रैल, 2025 में दैनिक भास्कर ने प्रीत सिरोही का इंटरव्यू किया था। इसमें उन्होंने कहा था, ‘जब तक मैं हूं, इन्हें नहीं रहने दूंगा। बहुत पहले से कागज इकट्ठा कर रहा हूं। अब कोर्ट में पिटीशन डालनी शुरू की हैं।’ 'नेता मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। जनता को गुमराह कर रहे हैं कि कराची तक हमारे झंडे होंगे। यहां देश में कई जगह कराची, रावलपिंडी और लाहौर बन गए हैं। एक दिन ऐसा आएगा कि हमें ही झोला उठाकर भागना पड़ेगा। इसलिए मैंने तय कर लिया कि मैं नेताओं के भरोसे नहीं रहूंगा।' लोग बोले- मस्जिद के पास हमेशा से बारात घर ही देखा हैमस्जिद के पास ही हमें मुदस्सिर उस्मान मिले। उस्मान आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं। वे बताते हैं, ‘15 दिन पहले नोटिस आया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मैं 42 साल का हूं। हम इस जगह क्रिकेट खेला करते थे।’ इलाके की पीस कमेटी के मेंबर शहजाद खान बताते हैं कि बारात घर में 25 दिसंबर को ही नोटिस लगा दिया गया था कि यहां कोई कार्यक्रम नहीं होगा। आप इंतजाम कर लीजिए। नरेश रॉबिनसन भी पीस कमेटी के मेंबर हैं। वे बताते हैं, ‘5 जनवरी को DCP ऑफिस में बैठक बुलाई गई थी। इसमें करीब 250 लोग थे। DCP ने साफ किया था कि कोर्ट के आदेश पर मस्जिद के आसपास की जमीनों पर कार्रवाई होगी। मीटिंग में मस्जिद कमेटी के लोग भी थे। उन्होंने तब कार्रवाई पर कोई एतराज नहीं जताया था।’ पथराव करने वाले 11 आरोपी पकड़े, इनमें एक नाबालिगपुलिस सोर्स के मुताबिक, एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि मस्जिद को ढहाया जा रहा है। इसके बाद लोग इकट्ठा हो गए और पुलिस और MCD स्टाफ पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं। इससे 5 पुलिसवाले घायल हो गए। जांच की जा रही है कि क्या हिंसा के पीछे अभियान रुकवाने की साजिश है। पुलिस और MCD स्टाफ पर पथराव के आरोप में पुलिस ने 11 लोगों को पकड़ा है। 7 जनवरी को 25 साल के मोहम्मद अरीब, 23 साल के मोहम्मद कैफ, 25 साल के मोहम्मद काशिफ और 30 साल के मोहम्मद हामिद को अरेस्ट किया गया है। 17 साल के एक लड़के को भी कस्टडी में लिया गया। ये सभी चांदनी महल एरिया के रहने वाले हैं। अगले दिन 8 जनवरी को अरेस्ट आरोपियों के नाम अफान, आदिल, शाहनवाज, हमजा, अतहर और उबेद हैं। ये सभी तुर्कमान गेट इलाके के हैं। हिंसा में शामिल बाकी लोगों की पहचान के लिए CCTV फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की पड़ताल की जा रही है। पुलिस सोर्स के मुताबिक, विवाद पैदा करने वाले वीडियो में से एक को कथित तौर पर खालिद मलिक नाम के शख्स ने रिकॉर्ड किया था। वीडियो में लोगों से घरों से बाहर निकलने के लिए कहा गया था। ऐसी अफवाहें फैलाई गईं कि मस्जिद ढहाने के लिए बुलडोजर तैनात किए गए हैं, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। आरोपी की बहन बोली- भाई दुकान से लौट रहे थे, पुलिस ने पकड़ लियागिरफ्तार किए गए मोहम्मद अरीब की बहन उस पर लगे आरोप को झूठा बताती हैं। बहन सामने नहीं आना चाहतीं, इसलिए हम उनकी पहचान नहीं बता रहे हैं। वे कहती हैं, ‘अरीब एलईडी लाइट्स का काम करता है। बड़े भाई का कैफे है। कैफे रात तक चलता है। रात करीब डेढ़ बजे दोनों आ रहे थे। उन्हें पता चला कि मस्जिद के पास माहौल खराब है। दोनों अपने दोस्त के यहां रुक गए। रात तीन बजे घर के लिए निकले तो पुलिस वालों ने अरीब को पकड़ लिया।’ अरीब की बहन पुलिस पर सवाल उठाती हैं कि अरीब इस इलाके में था ही नहीं। न ही पुलिस के पास कोई सबूत है, तो आप उसे कैसे गिरफ्तार कर सकते हैं। अगर आप गिरफ्तार करते हैं, तो आपकी जिम्मेदारी बनती है कि घरवालों को बताएं। हम अगले दिन भी उसे हर जगह ढूंढते रहे। किसी थाने में पुलिस ने नहीं बताया कि उसे पकड़ा गया है। वो उस वक्त चांदनी महल थाने में था। हम वहां भी गए थे। आखिरकार रात में हमें उसके बारे में पता चला।’ डिप्टी कमिश्नर बोले- मस्जिद की जमीन सुरक्षितसिटी एस.पी. जोन के डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल ने बताया, ‘यह मामला लंबे समय से हाईकोर्ट में था। अदालत के आदेश के बाद ही कार्रवाई की गई है। यह करीब 36,400 स्क्वायर फीट एरिया था। इसके चारों ओर दो मंजिला दीवार थी, जिसके ऊपर एक मंजिला स्ट्रक्चर बना हुआ था। मस्जिद की जमीन सुरक्षित है।’ ‘हमें पर्याप्त पुलिस बल दिया गया था। रात भर सीनियर पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। रात में पथराव की एक घटना हुई थी, लेकिन पुलिस पूरी तरह तैयार थी। हमने 32 जेसीबी का इस्तेमाल किया। हमारी टीम के किसी भी सदस्य को नुकसान नहीं पहुंचा है। पूरे एरिया को 9 जोन में बांटा गया था। हर एक की मॉनिटरिंग एडिशनल डीसीपी रैंक के अधिकारी कर रहे थे।’ सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के DCP निधिन वाल्सन ने बताया कि कार्रवाई रात करीब 1 बजे शुरू हुई। इसी दौरान पुलिस पर पत्थर फेंके गए। CCTV और बॉडी कैमरा फुटेज मिलने के बाद हम दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करेंगे। ................................ ये रिपोर्ट भी पढ़ें मस्जिद पहुंचे सपा सांसद से पूछताछ करेगी पुलिस, नेता बोले- रिएक्शन तो होगा ही फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पत्थरबाजी को लेकर सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से पूछताछ की जाएगी। दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारियों के बार-बार कहने के बावजूद नदवी घटनास्थल से नहीं गए और आसपास मौजूद रहे। वहीं सपा नेता एसटी हसन ने कहा कि यहां 100 साल पुरानी मस्जिद और दुकानें हैं। अतिक्रमण के नाम पर ज़ुल्म किया जाएगा तो लोग कब तक विरोध नहीं करेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
फ्रांस में किसानों का विरोध प्रदर्शन, ईयू-मार्कोसुर समझौते को लेकर लोगों में नाराजगी
फ्रांस में सरकार के विरोध में वहां के किसान सड़कों पर उतर आए हैं। किसानों का यह गुस्सा यूरोपियन यूनियन और दक्षिण अमेरिकी ब्लॉक मर्कोसुर के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते को लेकर है
पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन पर एमनेस्टी ने उठाए सवाल, तुरंत समीक्षा की मांग
पाकिस्तान में हाल ही में संविधान में 27वां संशोधन कर कई बड़े बदलाव किए गए। इसके तहत असीम मुनीर की ताकत बढ़ा दी गई और प्रधानमंत्री से लेकर न्यायपालिका तक की शक्तियों को कम कर दिया गया
DNA: ईरान के लिए मंडराया बड़ा संकट? ट्रंप की सेना ने चारों तरफ से घेरा, अब क्या करेंगे खामेनेई
America-Iran Conflict: ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हिरासत में लेने के बाद अब कई छोटे देशों को धमका रहे हैं. अब माना जा रहा है कि उनका अगला टारगेट ईरान है. इसका सबसे बड़ा संकेत मिल चुका है.
वेनेजुएला के ऑयल रिजर्व पर अब अमेरिका का राज, मनमर्जी से तेज बेचेंगे ट्रंप; कर दिया बड़ा ऐलान
Trump To take Venezuela Oil reserves: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज से अमेरिका के साथ एक स्पेशल ऑयल पार्टनरशिप करने के लिए कहा है.
टैरिफ वॉर के बाद युद्ध की तैयारी में ट्रंप? 'वेनेजुएला मिशन' पूरा, भारत-चीन सहित इन देशों पर भी नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (7 दिसंबर) को 2027 के लिए पेंटागन का बजट 50% बढ़ाकर रिकॉर्ड 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 120 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा) करने का प्रस्ताव रखा है. 2026 में अमेरिकी सेना का बजट 901 अरब डॉलर है.
Bangladesh Deepu Chandra Das Case: बांग्लादेश में पिछले कुछ दिनों से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा जारी है. अब दीपू चंद्र दास की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है.
दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता की बात आए तो सबसे पहले भारत का नाम सामने आता है. श्रीलंका के प्रमुख सांसद और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे ने साफ-साफ कहा है कि इस पूरे इलाके में लंबी शांति बनाए रखने के लिए भारत की लीडरशिप सबसे अहम है. जानें पूरी बात.
दुश्मन की मदद करने वालों के लिए नहीं बरती जाएगी नरमी...ईरान में बवाल के बीच कड़ी चेतावनी
Iran News: ईरान में इस समय भारी बवाल हो रहा है, भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जिसके बाद अब बीच ईरान के टॉप ज्यूडिशियल अथॉरिटी, गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई ने चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि दुश्मन की मदद करने के आरोप में किसी के लिए भी कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.
वेनेजुएला में जो हुआ उसके बाद अमेरिका और कोलंबिया के बीच भयंकर तनाव हो गया था. ऐसे लग रहा था कि दोनों देशों के बीच जंग छिड़ने वाली हो. ट्रंप ने कोलंबिया को धमकी दी थी, पेट्रो को कोकीन वाला कहा, मिलिट्री एक्शन की बात की. लेकिन कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने पहले बॉर्डर पर 30 हजार सैनिक भेजा, फिर एक फोन कॉल से ट्रंप के सुर बदलवा दिए. अब दोनों व्हाइट हाउस में मिलने वाले हैं.
वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण, क्या है ट्रंप का तीन फेज वाला प्लान
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं
साल्ट लेक सिटी में ताबड़तोड़ फायरिंग, अंतिम संस्कार के दौरान तड़तड़ाई गोलियां, दो की मौत, कई घायल
Mass Shooting Utah: यूटा के साल्ट लेक सिटी के रेडवुड रोड पर एक LDS चर्च के पास भयंकर गोलीबारी हुई है, ये गोलीबारी अंतिम संस्कार के दौरान हुई है. जिसमें कई लोगों की मौत हो गई है.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति को सोते हुए उठवाने के बाद से अमेरिका आक्रामक मोड में है. अब उसने पीछा करते हुए रूस के झंडे वाले तेल टैंकर को पकड़ा है. बताया जा रहा है कि जंग लगे टैंकर में तेल नहीं है फिर क्या है? यह इतना जरूरी क्यों था कि बचाने के लिए रूस ने सबमरीन रवाना कर दी थी लेकिन देरी हो गई.
Pakistan Lobbying Firms USA: अमेरिका के Department of Justice में जमा दस्तावेजों से खुलासा हुआ है. ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान ने अमेरिका में जबरदस्त लॉबिंग अभियान चलाया. इस अभियान का मकसद अमेरिकी नेताओं और नीति बनाने वालों तक पाकिस्तान का नजरिया पहुंचाना था. इसके लिए पाकिस्तान ने पुरानी और नई दोनों तरह की लॉबिंग कंपनियों की मदद ली थी.
तारिक रहमान 17 साल बाद ढाका से बाहर दौरे पर
बांग्लादेश में राजनीतिक दलों की हलचल तेज हो चुकी है। चुनाव में अब बस महीनेभर का समय बचा है। ऐसे में सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है
जिस इंटरनेशनल सोलर अलायंस को पीएम मोदी ने बनाया, डोनाल्ड ट्रंप ने उससे क्यों खींचा हाथ?
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा फैसला लेते हुए भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस समेत 66 इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन से अमेरिका का नाम वापस ले लिया है. जानिए उन्होंने ये फैसला क्यों किया?
who was Azizur Rahman Musabbir:बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक हिंसा अपने चरम पर पहुंच गई है. कुछ ही दिनों के भीतर उस्मान हादी की हत्या के बाद अब BNP के एक और नेता अजीजुर रहमान मुसब्बिर की सरेशाम ढाका में गोली मारकर हत्या कर दी गई. आइए जानते हैं कि आखिर कौन थे अजीजुर रहमान मुसब्बीर.
सिर्फ US में बने प्रोडक्ट ही खरीदेगा वेनेजुएला...मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप क्यों लाद रहे भार?
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला को लेकर पूरी तरह से सख्त हो गए हैं. अब ट्रंप ने घोषणा करते हुए कहा है कि वेनेजुएला अब नई ऑयल डील से मिले पैसों से सिर्फ अमेरिका में बने प्रोडक्ट ही खरीदेगा.
जंग की तैयारी कर रहा अमेरिका? ट्रंप बोले 2027 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर होगा मिलिट्री बजट
US defense budget 2027: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को बड़ा ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा है साल 2027 के लिए अमेरिका का सैन्य बजट 1 ट्रिलियन डॉलर नहीं बल्कि 1.5 ट्रिलियन डॉलर होना चाहिए. ट्रंप ने यह बात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखी है.
‘हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया। मेरे पति राहुल क्लास में अटेंडेंस लगाकर कॉलेज के मेन गेट की ओर जा रहे थे। वहीं उनकी काली बुलेट खड़ी थी। मैं नर्सिंग डिपार्टमेंट से क्लास खत्म कर बाहर निकली ही थी, तभी कॉलेज के मेन गेट पर मुझे पापा दिखाई दिए। वे उजले रंग का मास्क और नीले रंग का कोट पहने हुए थे। कमर में कट्टा खोंसे वे बुलेट के पास खड़े हो गए। उन्होंने आसपास खड़े छात्रों से पूछा- ‘ये काली बुलेट किसकी है?’ छात्रों ने जवाब दिया- ‘राहुल मंडल की।’ कुछ ही देर बाद जैसे ही राहुल बुलेट लेने पहुंचे, पापा ने कट्टा निकाला और उसके सीने में दो गोलियां दाग दीं। राहुल का सीना खून से सना हुआ था। उस वक्त मैं राहुल से बस कुछ कदम की दूरी पर थी। वह लड़खड़ाकर जमीन पर गिरने ही वाला था कि मैं चीखते हुए उसकी ओर भागी। बदहवासी में वह मेरे सीने से आकर लग गया। पापा चीख-चीखकर कह रहे थे- ब्राह्मण होकर बेटी ने नीच से शादी कैसे की? मर गया, अब मैं बहुत खुश हूं। अब बेटी को भी मारूंगा।’, तनुप्रिया झा स्याह कहानियों की सीरीज ‘ब्लैकबोर्ड’ में आज कहानी इंटरकास्ट मैरिज करने वाली बिहार की तनुप्रिया की। जिसके पिता ने जाति की वजह से अपनी 20 साल की बेटी को विधवा बना दिया… तनुप्रिया आगे बताती हैं, 'मैं और आसपास के दोस्त राहुल को लेकर इमरजेंसी वार्ड की ओर भागे। भागते हुए मैं बार-बार पापा से चिल्लाकर पूछ रही थी- ‘तुमने मेरे पति को क्यों मारा? तुमने मेरा सुहाग क्यों उजाड़ दिया, हत्यारे?’ पापा कट्टा हाथ में लिए मेरे पीछे-पीछे इमरजेंसी वार्ड की ओर दौड़ रहे थे। तभी मेरे कुछ दोस्तों ने उन्हें पकड़ कर पीटना शुरू कर दिया। कुछ ही देर बाद राहुल मेरी गोद में हमेशा के लिए सो गया। वह मर गया। डॉक्टर चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। यह कहते हुए 20 साल की तनुप्रिया झा की बड़ी-बड़ी आंखों में आंसू भर आते हैं। गला भर जाता है, शरीर कांपने लगता है। लड़खड़ाती आवाज में वह कहती हैं- ‘ऐसे आदमी को मैं अपना बाप नहीं कहना चाहती। अब उससे मेरा कोई रिश्ता नहीं। प्रेम शंकर झा मेरे पति राहुल मंडल का हत्यारा है। मेरी आखिरी इच्छा है कि उस हत्यारे को फांसी पर झूलते हुए देखूं।’ बिहार के सुपौल से 15 किलोमीटर दूर तुलापट्टी गांव के रहने वाले राहुल मंडल क्रिकेट और बुलेट के शौकीन थे। इसी वजह से दोस्त और तनुप्रिया उन्हें महेंद्र सिंह धोनी के निकनेम पर प्यार से ‘माही’ कहते थे। आज यह गांव राहुल से ज्यादा तनुप्रिया को जानता है। गांव में किसी से भी पूछिए, इशारों में ही लोग राहुल के घर का रास्ता बता देते हैं। राहुल मंडल के घर जाने वाली सड़क के दोनों ओर जूट की टहनियों पर गोबर का लेप लगा है। ठंड के मौसम में यहां के लोग सूखने के बाद इसी गोबर के उपलों से खाना पकाते हैं। राहुल के घर के ठीक सामने कई बकरियां और गायें बंधी हुई हैं। घर पहुंचते ही पहली मुलाकात उनके पिता गणेश मंडल से होती है। वे मुझे बैठने के लिए कुर्सी लाकर देते हैं और फिर चुप्पी साधे इधर-उधर देखने लगते हैं। टोकने पर दबी जुबान में कहते हैं- ‘एक ही तो बेटा था। वह भी चला गया। अब किसी से क्या कहना, सब खत्म हो गया। जाते-जाते अपनी जगह दूसरा बेटे (तनुप्रिया) को दे गया है। अब उसी को देखकर जी रहा हूं।’ यह कहते हुए गणेश मुंह फेर लेते हैं और अपनी वीरान पड़ी दुकान की ओर चले जाते हैं। कभी यहां उनकी किराने की दुकान हुआ करती थी। अब वह सिर्फ लकड़ी की एक गुमटी भर रह गई है। इस दौरान मैं राहुल के घर के बाहर खड़ा था, तभी एक दुबली-पतली, लंबी लड़की बाहर निकलती है। देखते ही मैं पूछ बैठता हूं- ‘आप तनुप्रिया हैं?’ इशारों में वह हामी भरती हैं- ‘हां’। पीछे से उनकी सास और राहुल की मां अनिता देवी भी आ जाती हैं। वे दोनों मुझे घर के भीतर बरामदे में ले जाते हैं। तनु सिहरती हुई आवाज में कहती हैं- ‘सास के लिए अब मैं ही राहुल हूं। इनका बेटा हूं। बहू की तरह नहीं, बेटे की तरह इनके साथ रहती हूं। अगर बहू बनकर रहती, तो घर से बाहर आकर आपको बुला न पाती। ये जो डेनिम की जैकेट मैंने पहनी है, राहुल की ही है।’ घर में चारों ओर नजरें घुमाने के बावजूद मुझे राहुल की एक भी तस्वीर दिखाई नहीं देती। पूछने पर तनु मुझे एक कमरे की ओर ले जाती हैं। ऊपर छज्जे से दो तस्वीरें उतारती हैं। दोनों तस्वीरें राहुल की हैं। तस्वीर पर हाथ फेरते हुए, रुंधे गले से तनु कहती हैं- ‘ये दिसंबर 2024 की फोटो है। मैंने ही इसे कॉलेज कैंपस में खींचा था। अब तो बस इसी फोटो का सहारा है। राहुल का एक ऑडियो मैसेज भी है, जिसे मैं हर रात सुनकर सोती हूं। कोई ऐसी रात नहीं, जब यहां ससुराल में हम लोगों में से कोई रोता न हो। पहले जब यह तस्वीर घर में टंगी रहती थी, तो पापा… यानी हमारे ससुर इसे देखते ही फूट-फूटकर रोने लगते थे। एक दिन उन्होंने कहा- इसे छुपाकर कहीं रख दो। तब से यह तस्वीर इसी छज्जे पर रखी है।’ कमरे के सामने एक बैंगनी रंग की, धूल से सनी ट्रॉली बैग रखी हुई है। उसका रंग अब मटमैला हो चुका है। तनु उसकी ओर इशारा करते हुए कहती हैं- ‘इसी में हमारे कपड़े, शादी का जोड़ा, किताबें… सब कुछ है। जब से यह ट्रॉली बैग दरभंगा से आया है, तब से इसे खोलकर देखा नहीं है। देखने की हिम्मत नहीं होती।’ इसे दिखाकर तनु वापस बरामदे में रखे तख्त पर आकर बैठ जाती हैं। फिर बताने लगती हैं- ‘12वीं के बाद मैंने दरभंगा के DMCH कॉलेज में नर्सिंग कोर्स में एडमिशन लिया था। राहुल मुझसे सीनियर थे। दिसंबर 2024 में हमारी पहली मुलाकात हुई। धीरे-धीरे हम साथ उठने-बैठने लगे। पढ़ाई, घूमना-फिरना सब चल रहा था। उस वक्त हम सिर्फ अच्छे दोस्त थे। एक-दूसरे को प्रपोज भी नहीं किया था।’ राहुल के पास बुलेट बाइक थी। कभी-कभी हम दरभंगा के श्यामा माई मंदिर घूमने चले जाते थे। मुझे भी बुलेट चलाने का शौक है, तो मैं उसे चला लेती थी। एक दिन यह बात कॉलेज की प्रिंसिपल गुड़िया को पता चल गई। अगले दिन उन्होंने क्लास के करीब 60 छात्रों के सामने मुझे बुलाया और कहा- ‘तुम राहुल मंडल से बात करती हो? उसके साथ बुलेट पर घूमती हो? उसका सरनेम पता है? क्लास के बाद मेरे चैंबर में आकर मिलना। तुम्हें पता है कि वह छोटी जाति का है?’ यह कहकर प्रिंसिपल अपने ऑफिस चली गईं। क्लास खत्म होने के बाद जब मैं उनके चैंबर में पहुंची, तो वे मुझ पर चिल्लाने लगीं- ‘राहुल SC-ST जाति से है। तुम ब्राह्मण परिवार की हो। अपने मां-बाप की नाक कटाओगी क्या? कुल-खान-दान की इज्जत मिट्टी में मिलाना चाहती हो? तुम उसके साथ घूमती हो, बात करती हो। तुम्हारा उससे चक्कर चल रहा है न? आज के बाद तुम उससे बात नहीं करोगी।’ उस दिन मैं सिर झुकाए चैंबर से निकल आई। सोचने लगी- राहुल तो मेरा दोस्त है। दोस्ती में जाति का क्या मतलब? उस वक्त तो मुझे यह भी नहीं पता था कि ‘मंडल’ किस जाति का सरनेम होता है। मैंने प्रिंसिपल की बात नहीं मानी और पहले की तरह राहुल के साथ रहती रही। धीरे-धीरे हमारे बीच प्यार हो गया। एक दिन दरभंगा घूमते हुए राहुल ने मुझसे कहा- ‘तनु, हम दोनों कुछ बनने के बाद ही शादी करेंगे। अभी पढ़ाई पर फोकस करते हैं। जब अपने पैरों पर खड़े हो जाएंगे, तब घर वालों को बताएंगे। हम दोनों एक-दूसरे की फेमिली को मना लेंगे।’ क्या बनना चाहती थीं आप? तनु कहती हैं- ‘राहुल नर्सिंग ऑफिसर बनना चाहते थे। मैं यूपीएससी की तैयारी करना चाह रही थी। मैंने ऑनलाइन क्लासेज भी जॉइन कर ली थीं। स्टडी मटेरियल खरीदकर लाई थी। अब वो सारी किताबें तहखाने में धूल फांक रही हैं। राहुल की मौत के बाद कभी हिम्मत नहीं हुई उस कॉलेज में जाने की। उसके बाद उन किताबों के पन्ने भी नहीं पलटे मैंने। क्या ही पलटूं। अब तो जिंदगी का कोई सपना ही नहीं बचा। यूपीएससी क्रैक भी कर लूं, तो किसके लिए? कौन देखेगा अब? कुछ नहीं बचा। एक बाप ने अपनी ही बेटी को जिंदा लाश बना दिया। उसने यह भी नहीं सोचा कि वह अपनी बेटी की मांग उजाड़ने जा रहा है।’ यह कहते-कहते तनु फिर से फूट-फूटकर रोने लगती हैं। कुछ देर बाद मैं धीरे से उनके बचपन के बारे में पूछता हूं। लंबी सांस लेते हुए वह कहती हैं- ‘हम दो बहनें, एक भाई हैं। सहरसा के मेरे बनगांव में घर-घर ब्यूरोक्रेट्स यानी आईएएस-पीसीएस बने हैं। मैं भी बचपन से सिविल सर्विसेज में जाना चाहती थी। घर पर जो टीचर पढ़ाने आते थे, वे कहते थे- तनु पढ़ाई में होशियार है, इसे सिविल सर्विसेज की तैयारी ही करानी चाहिए। छठीं क्लास के बाद मैं सिमुलतला आवासीय विद्यालय चली गई। 12वीं पास करने के बाद DMCH (दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल) में नर्सिंग कोर्स में एडमिशन लिया। यह मेरे करियर का प्लान-बी था। पापा की दवा की दुकान थी।’ वह बताती हैं- ‘यहीं मेरी दोस्ती राहुल से हुई। जब मेरे कॉलेज की प्रिंसिपल ने पापा को बताया कि मैं राहुल के साथ बुलेट पर घूमती हूं, तो पापा ने फौरन मुझे सहरसा बुला लिया। तारीख थी- 28 मार्च 2025। मुझे नहीं पता था कि उन्होंने क्यों बुलाया है। शाम को जब पापा दुकान से लौटे, तो मुझे देखते ही चिल्ला पड़े। पूछा- ‘ये राहुल कौन है?’ मैंने सकुचाते हुए कहा- ‘कॉलेज का दोस्त।’ ‘तुम उसके साथ बुलेट पर घूमती हो?’ यह कहते हुए पापा ने कमर से बेल्ट निकाल लिया। मैं कांपते हुए बोली- ‘हां… मुझे बुलेट चलाना अच्छा लगता है। उसके पास है, तो हम घूमने गए थे।’ इतना सुनते ही पापा ने बेल्ट मेरी पीठ पर बरसानी शुरू कर दी। मैं दर्द से चीखने लगी। बेल्ट से पीटते हुए वह मेरे बाल खींचते हुए बोले- ‘किस जाति का है वह?’ मैं हकलाते हुए बोली- ‘वह अपना नाम राहुल मंडल लिखता है। सब उसे माही कहते हैं।’ ‘मंडल…’ सुनते ही पापा आग-बबूला हो गए- ‘तुम नीच जाति के लड़के के साथ घूमती हो। %$#@… पूरे खानदान का मुंह काला करोगी। कल थाने चलो और उसके खिलाफ रेप केस लिखवाओ।’ मैं रोते हुए बोली- ‘उसने मेरे साथ कुछ गलत नहीं किया है। मैं झूठा केस कैसे दर्ज करवाऊं?’ यह सुनते ही पापा ने फिर से बेल्ट उठाई। ऐसा एक महीने तक रोज हुआ। उन्होंने तीन-तीन बेल्ट के बक्कल मेरी पीठ पर तोड़ दिए। कमर से लेकर पैरों तक पूरी पीठ लाल हो चुकी थी। दर्द बढ़ता तो वही दवा लाकर दे देते। उस दौरान मेरे दोनों भाई कहते- ‘इसे उस लड़के से प्यार हो गया है। दोनों शादी करना चाहते हैं। इसलिए ये शिकायत नहीं लिखवाना चाहती। इसे और मारो।’ एक दिन पापा गुस्से में बोले- ‘लड़के की इंस्टाग्राम आईडी और पासवर्ड दो।’ मैंने मना कर दिया। उस दिन मम्मी, पापा, भाई, दादी- सबने मिलकर मुझे मारा। इतना कि मैं चल नहीं पा रही थी। घर में बेहोश पड़ी रही। अप्रैल में मैंने राहुल को इंस्टाग्राम पर मैसेज किया। लिखा- ‘मुझे यहां से किसी भी तरह ले चलो। नहीं तो घर वाले मुझे मार देंगे।’ एक दिन शाम को घर में सिर्फ मां और दादी थीं। दोनों रसोई में काम कर रहे थे। राहुल अपनी बुलेट से दरवाजे पर आया। मैं कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स उठाई और तुरंत उसके साथ दरभंगा भाग निकली।’ तनुप्रिया अपने मोबाइल में घर वालों की कुछ तस्वीरें दिखाने लगती हैं। मां की तस्वीर पर उंगली टिक जाती है। वह सरकारी टीचर हैं। तनु कहती हैं- ‘जिस दिन मैं घर से भागी थी, उस दिन जब पापा दुकान से लौटे, तो उन्होंने मेरे खोज-बीन शुरू कर दी। 1 मई को उन्होंने बनगांव थाने में राहुल और उसके परिवार के खिलाफ मेरा अपहरण करने का मामला दर्ज करा दिया। दूसरी तरफ मैंने राहुल के साथ 5 मई को लखीसराय के एक मंदिर में शादी कर ली।’ अचानक शादी कर ली? ‘और क्या करती? वे लोग मेरी शादी मेरे मुंहबोले भाई से कराना चाह रहे थे, जिसके हाथ में मैं राखी बांधती थी। पापा कह रहे थे कि मुझे उसी से शादी करनी होगी।’ तख्त पर तनुप्रिया के बगल में उनकी सास अनिता देवी बैठी हैं। तनु की बात सुनते ही अनिता रोने लगती हैं। तनु आगे कहती हैं- ‘5 मई को शादी के बाद हम दोनों एक किराए के कमरे में रहने लगे थे। सब कुछ सामान्य हो गया था। हम दोनों पहले की तरह पढ़ाई कर रहे थे। 9 अगस्त को रक्षाबंधन आने वाला था। राहुल ने कहा कि तुम भाइयों के लिए राखी कूरियर कर दो। 4 अगस्त को मैंने अपने दोनों भाइयों के लिए राखी भेज दी। अगले ही दिन, 5 अगस्त को, मेरे भाइयों और पिता ने मिलकर मेरे पति की जान ले ली और मुझे विधवा बना दिया। राखी शायद रास्ते में ही रह गई होगी। सब कुछ एक जाति की वजह से खत्म हो गया।’ वह ठहरकर कहती हैं- ‘अब मैं उस हत्यारे बाप की बेटी नहीं कहलाना चाहती। मैंने अपने मायके से सारे रिश्ते खत्म कर लिए हैं। मेरी आखिरी इच्छा है कि अपने बाप को फांसी के फंदे पर झूलते देखूं। उसके बाद खुद को खत्म कर लूंगी। राहुल के जाने के बाद मैंने आज तक आईने में अपना चेहरा नहीं देखा।’ यह कहते हुए तनुप्रिया की आंखें डबडबा जाती हैं। उनकी सास अनिता बीच में टोकती हैं- ‘अब रहने दीजिए। जितनी बार ये बातें दोहराती हैं, कई-कई दिन खाना-पीना नहीं खा पाती। घर में खुद को बंद कर मूर्ति की तरह बैठी रहती है। उस डाकू बाप ने मेरे बेटे को मार दिया। उसे तो फांसी दिलवाकर रहूंगी। बेटे के बदले अब यही तनु मेरा बेटा है। इसी को देखकर हम जी रहे हैं। मैं घर से बाहर नहीं निकलती। डर लगता है कि लोग कहेंगे- देखो, जिसने बेटे की हत्या की, उसी की बेटी को घर में बिठा रखा है। सोचती हूं, बेटी का बाप भला उसका सुहाग कैसे उजाड़ सकता है। अब यह अनाथ हो गई है। जब तक जिएगी, इसी घर में रहेगी। लोग कहते हैं, इसकी दोबारा शादी कर दो। अगर यह मेरी बेटी होती, तो शायद दोबारा शादी की सोचती, लेकिन यह अब मेरे लिए बेटा है। राहुल के बदले तनु है।’ यह कहते हुए तनुप्रिया और अनिता एक-दूसरे को गले लगाकर रोने लगती हैं। तनु सिसकते हुए कहती हैं- ‘कभी इसी हाथ से मैं मांग में सिंदूर भरती थी। उस दिन इसी हाथ से मैंने अपने पति की चिता को आग दी। अब तो भाई, बाप जैसे रिश्तों का नाम सुनकर भी डर लगता है।’ -------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-तलाक हुआ तो अनजान डोनर से स्पर्म लेकर मां बनी:विदेश ले जाकर पति ने घर से निकाला, बिना पति के महिलाओं की कहानियां मेरी चीख सुनकर पड़ोसी जमा हो गए। बिस्तर से उठी तो देखा- मेरी सास ही तौलिए से मेरा मुंह दबा रही थीं। वह जोर-जोर से कह रही थीं- तूने मेरे बेटे को खा लिया। तू मांगलिक है। कुलच्छन है। अब अपने बच्चे को लेकर यहां से भाग जा, नहीं तो तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगी। पूरी खबर यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- बेटी ने मारा तो घर छोड़ा:बस के नीचे मरने पहुंचे, भाई ने फर्जी साइन से पैसे हड़पे, वृद्धाश्रम में रोज सुबह सोचते हैं- कोई लेने आएगा मेरे बच्चे नहीं हैं। पत्नी की मौत के बाद अकेला हो गया था। मुझे आंख से दिखाई नहीं देता। एक रिश्तेदार के यहां रहने चला गया। वहां बहुत जलील हुआ तो एक दूसरे रिश्तेदार के यहां रहने पहुंचा, लेकिन उन्होंने अपने यहां रखने से साफ मना करा दिया। उस दिन मन में विचार आया कि सब खत्म कर दूं। सोचा कि यमुना में कूद जाऊं। फिर मरने के लिए एक बस डिपो पर गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
जापान में नए साल की पहली नीलामी में एक मछली रिकॉर्ड 29 करोड़ रुपए में बिकी। 243 किलो की ब्लूफिन टूना दुनिया की सबसे महंगी मछली बन चुकी है। इसके सिर्फ एक किलो मांस की कीमत में 5 रॉयल एनफील्ड बाइक आ जाएं। इससे पहले भी ये रिकॉर्ड ब्लूफिन टूना के ही नाम था। आखिर इस मछली में ऐसा क्या खास है, इसे किसने और क्यों खरीदा; ऐसे 6 सवालों के जवाब जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में... सवाल-1: 29 करोड़ की यह मछली किसने खरीदी? जवाब: जापान की राजधानी टोक्यो की तोयोसु फिश मार्केट में 5 जनवरी को नए साल की पहली नीलामी हुई। इसमें 243 किलो की ब्लूफिन टूना 510 मिलियन येन यानी करीब 29 करोड़ रुपए में बिकी। इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग टूना को खरीदा है जापान की मशहूर कंपनी कियोमुरा कॉर्पोरेशन के मालिक कियोशी कियोमुरा ने। उन्हें जापान में ‘टूना किंग’ कहा जाता है। वे ‘सुशी जनमई’ नाम से मशहूर सुशी रेस्टोरेंट चेन चलाते हैं और हर साल ऊंची बोली लगाने के लिए जाने जाते हैं। नीलामी के बाद कियोमुरा ने कहा- 'मैं कम कीमत की उम्मीद कर रहा था, लेकिन बोली इतनी तेजी से बढ़ी कि खुद को रोक नहीं पाया। अच्छी क्वालिटी की टूना देखकर मैं रुक ही नहीं सकता। सवाल-2: आखिर ब्लूफिन टूना इतनी महंगी क्यों होती है? जवाबः ब्लूफिन टूना को दुनिया की सबसे प्रीमियम खाने योग्य मछलियों में गिना जाता है। इसका मांस बेहद मुलायम, रसीला और फैट से भरपूर होता है। खासकर पेट का हिस्सा (ओटोरो) मक्खन जैसा माना जाता है। स्वाद, रंग और टेक्सचर में यह बाकी टूना से कहीं बेहतर होती है। हालांकि इसके इतनी महंगी होने के पीछे 4 बड़ी वजहे हैं... 1. ब्लूफिन टूना की कमी: यह मछली गहरे और खुले समुद्र में हजारों मील की यात्रा करती है, जिसके कारण इसे ढूंढना और पकड़ना बहुत मुश्किल काम है। पहले बहुत अधिक शिकार होने की वजह से अब समुद्र में इनकी संख्या काफी घट गई है, इसीलिए सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इसके शिकार पर सख्त नियम और कोटा तय कर दिया है। 2. ब्लूफिन टूना का साइजः कुछ मछलियों का वजन 450 किलो से भी ज्यादा हो सकता है। मछली जितनी बड़ी और पुरानी होती है, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती है। इसकी वजह यह है कि बड़ी और उम्रदराज टूना का स्वाद और मांस की बनावट बेहतर मानी जाती है। 3. पकड़ने और ढोने की मुश्किल: जापान के ‘ओमा’ तट के पास पकड़ी गई टूना सबसे महंगी मानी जाती है। क्योंकि वहां के मछुआरे इसे जाल नहीं, बल्कि एक खास तकनीकि लाइन फिशिंग से पकड़ते हैं। इससे मछली को चोट या तनाव नहीं होता और मीट क्वालिटी टॉप क्लास रहती है। क्वालिटी बनाए रखने के लिए बहुत तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा खर्च आता है, जो इसकी कीमत को और बढ़ा देता है। 4. सबसे बड़ी वजह है डिमांड: दुनिया भर में सुशी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। जैसे-जैसे लोग ज्यादा सुशी खाने लगे हैं, वैसे-वैसे इसके जरूरी इंग्रीडिएंट्स, खासकर ब्लूफिन टूना की मांग और कीमत दोनों बढ़ती चली गई हैं। जापान में ब्लूफिन टूना का महत्व सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। नए साल की पहली नीलामी को वहां शुभ माना जाता है। साल की पहली नीलामी में ऊंची बोली लगाने से पूरे साल व्यापार अच्छा चलने की मान्यता है। इसी वजह से बड़ी कंपनियां और फेमस रेस्टोरेंट सामान्य नीलामी में अधिक से अधिक बोली लगाकर इसे हासिल करना चाहते हैं। यह नीलामी उनके लिए कारोबार से कहीं ज्यादा ब्रांडिंग और सम्मान पाने का जरिया होती है। सवाल-3: ब्लूफिन टूना को जाल लगाकर क्यों नहीं पकड़ा जाता? जवाबः ब्लूफिन टूना को किसी बड़े जाल से नहीं, बल्कि 'लॉन्गलाइन' तकनीक से पकड़ा जाता है। जापान में मछली पकड़ने का ये पारंपरिक तरीका है। इस प्रक्रिया में समुद्र में एक बहुत लंबी रस्सी डाली जाती है। इस रस्सी पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर चारे (भोजन) लगे कांटे होते हैं। जब ब्लूफिन टूना चारा निगलती है, तो वह कांटे में फंस जाती है। इसके बाद मछुवारे उसे धीरे और सावधानी से बाहर निकालते हैं। जापान के ओमा शहर के मछुआरे कड़कड़ाती ठंड में समुद्र के बीचों-बीच घंटों तक संघर्ष करते हैं ताकि मछली को बिना किसी नुकसान के जिंदा या ताजी हालत में नाव तक लाया जा सके। अगर मछली बड़ी और अच्छी क्वालिटी की निकली, तो नीलामी में उसकी कीमत करोड़ों तक पहुंच सकती है। इससे मछुआरे की किस्मत बदल जाती है। सवाल-4: इससे पहले सबसे महंगी मछली कौन-सी थी? जवाब: 2019 में भी एक ऐसी ही चौंकाने वाली नीलामी हुई थी। उस समय 278 किलो की एक टूना को 333.6 मिलियन येन यानि उस समय के हिसाब से लगभग 20 करोड़ रुपए में खरीदा गया था। ये रिकार्ड भी 29 करोड़ की मछली खरीदने वाले कियोमुरा के नाम ही है। यानी उन्होंने अपनी ही रिकॉर्ड तोड़ा है। सवाल-5: क्या एक मछली पर 29 करोड़ रुपये खर्च करना समझदारी है? जवाब: पहली नजर में यह घाटे का सौदा लग सकता है, क्योंकि कोई भी रेस्टोरेंट 29 करोड़ की लागत को सिर्फ सुशी बेचकर वसूल नहीं कर सकता। दरअसल, इसके पीछे 'मार्केटिंग और ब्रांडिंग' का बड़ा खेल है। जब कोई व्यापारी इतनी महंगी मछली खरीदता है, तो उसका नाम दुनिया भर की मीडिया और सोशल मीडिया पर छा जाता है। इसे एक तरह का 'फ्री पब्लिसिटी स्टंट' माना जाता है जिसकी वैल्यू करोड़ों के विज्ञापन से कहीं अधिक होती है। इससे ग्राहकों के बीच यह मैसेज जाता है कि यदि यह रेस्टोरेंट मालिक दुनिया की सबसे बेहतरीन मछली खरीद सकता है, तो यहां मिलने वाली हर चीज की क्वालिटी बेहतर ही होगी। ये तरीका अमीर ग्राहकों को अपनी ओर खींचता है, जो केवल भोजन के लिए नहीं बल्कि बड़े होटल में सिर्फ एक एक्सपीरिएंस के लिए मोटी रकम खर्च करने को तैयार रहते हैं। सवाल-6: भारत में सबसे महंगी मछली कौन-सी नीलाम हुई है? जवाब: भारत की सबसे महंगी मछली की नीलामी में घोल मछली सबसे आगे है। महाराष्ट्र के पालघर में 1 सितंबर 2021 को 157 मछलियों के एक लॉट को ₹1.33 करोड़ में बेचा गया था। घोल मछली के पेट में औषधीय गुण होते हैं और यह कॉस्मेटिक्स व दवाओं में इस्तेमाल होती है। हांगकांग, जापान जैसे देशों में इसकी भारी मांग है और यह 'सी गोल्ड' कहलाती है। इसके अलावा अक्टूबर 2025 में पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में 88 तेलिया भोला मछली पकड़ी गई, जिसकी नीलामी में कीमत लगभग 60 लाख पहुंची थी। ---------------------- ये खबर भी पढ़िए... जवान बेटे के लिए मां-बाप क्यों मांग रहे इच्छामृत्यु:सुप्रीम कोर्ट में गुहार मंजूर, एम्स रिपोर्ट बना रहा; क्या है इज्जत से मरने का अधिकार गाजियाबाद के रहने वाले अशोक राणा और निर्मला राणा जवान बेटे हरीश के लिए सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु मांग रहे हैं। 11 दिसंबर को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एम्स को रिपोर्ट बनाने को कहा। अब अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होनी है। पूरी खबर पढ़िए
18 दिसंबर 2025, रात करीब 9 बजे का वक्त था। बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में भीड़ ने गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू दास को पकड़ लिया। ईशनिंदा का इल्जाम लगाकर भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद दीपू के शव को फैक्ट्री से कुछ दूर ले गए और आग लगा दी। उस दिन से अब तक बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों में 6 हिंदुओं की हत्या हुई है। बांग्लादेश में दीपू की हत्या का असर पश्चिम बंगाल में दिख रहा है। घटना के विरोध में यहां जगह-जगह बंगाली हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। सिर्फ कोलकाता में ही करीब 10 हजार लोग सड़कों पर उतरे। लोगों का कहना है कि वो दिन दूर नहीं, जब पश्चिम बंगाल में भी बांग्लादेश जैसे हालात होंगे। 23 दिसंबर को हुए प्रदर्शन में शामिल 74 साल के नकुल भट्टाचार्जी कहते हैं, ‘बांग्लादेश में दीपू दास को जैसे जिंदा जलाया गया, उससे खराब भला क्या हो सकता है। ये सब मेरे बेटे के साथ भी हो सकता है। ममता बनर्जी के राज में भी यही हो रहा है। बांग्लादेश में जैसे हिंदुओं को टॉर्चर किया जा रहा है, यहां हालात उससे अलग नहीं हैं। पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश का डुप्लीकेट बन गया है।‘ वहीं 29 साल की संगीता आरोप लगाती हैं कि ममता दीदी बांग्लादेशियों और जिहादियों को पश्चिम बंगाल लेकर आ रही हैं। इससे यहां का माहौल भी खराब हो रहा। इस पर रोक लगनी चाहिए। पश्चिम बंगाल में इसी साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। बांग्लादेश में हुई हिंसा और हिंदुओं को टारगेट किए जाने का चुनाव में क्या असर होगा, ये समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम कोलकाता पहुंची। पहले प्रदर्शन के दौरान अरेस्ट लोगों की बात…'परमिशन लेकर प्रदर्शन, फिर भी रोका, पुलिस वाले जिहादी हुए'कोलकाता में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल रहीं नीति भट्टाचार्जी कहती हैं, ‘दीपू दास को बहुत बुरी तरह मारा गया। वो हिंदू था, हम भी हिंदू हैं। हमें उसकी मौत का अफसोस है, इसलिए प्रदर्शन कर रहे हैं। कोलकाता पुलिस हमें ये भी नहीं करने दे रही। पुलिसवाले हमें पकड़कर मारने लगे। हमारे एक साथी की नाक तोड़ दी।‘ ‘महिलाओं के बाल खींचे और उन्हें पकड़कर जेल में डाला गया, जबकि हम शांति से विरोध कर रहे थे। हम बांग्लादेश हाई कमिशनर को वापस भेजना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगाकर हमें रोक दिया। हमने फिर कोशिश की, तो लाठीचार्ज कर 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस वाले जिहादी हो गए हैं।‘ परमिशन के बारे में पूछने पर नीति कहती हैं, ‘हिंदू जागरण मंच ने प्रदर्शन के लिए प्रशासन को मेल करके परमिशन मांगी थी। फिर भी हमें रोका गया। दोपहर 3 बजे ही हमें हिरासत में ले लिया गया। गिरफ्तार 19 लोगों में 7 महिलाएं थीं। हम पूछते रहे कि अब आगे क्या कार्रवाई होगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अचानक रात 2 बजे हमें मेडिकल के लिए ले जाने लगे। हम डर की वजह से नहीं गए।‘ ‘इसके बाद पुलिस वाले हमारे फोन का पासवर्ड मांगने लगे। हमने मना किया तो शर्त रखी कि जो पासवर्ड बताएगा, घर पर सिर्फ उसी की बात कराएंगे। हममें से 3 महिलाओं ने बच्चों से बात करने के लिए पासवर्ड बता दिया। इसके बाद भी उन्हें फोन नहीं दिया गया। पुलिस ने थाने में लगे लैंडलाइन से उनकी घर पर बात कराई। अब भी हमारा फोन पुलिस के पास है।‘ 'हम अपराधी नहीं, फिर हत्या की कोशिश का केस क्यों'कोलकाता की रहने वाली प्रयोनीती पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, ‘पुलिस ने हम पर ऐसे लाठियां बरसाईं, जैसे हम अपराधी हैं। हम पर BNS की धारा 109 के तहत FIR दर्ज कर अटेम्प्ट टू मर्डर का केस लगा दिया। गैरकानूनी हथियार रखने के भी चार्ज लगाए, जबकि मेरी जेब में सिर्फ एक पेन था।‘ नकुल भी यही आरोप लगाते हैं। वे कहते हैं, ‘हम सिर्फ प्रदर्शन करने गए थे, लेकिन हमें जेल में डाल दिया। 3 से 4 दिन जेल में ही रखा। बहुत टॉर्चर किया। मेरे सामने ही एक लड़की को पुलिस वालों ने इतना पीटा कि उसे देखकर मैं डर गया। हमने तो कोई चोरी-मर्डर भी नहीं किया। फिर हमें ऐसा टॉर्चर क्यों किया गया।' प्रदर्शन का हिस्सा रहे मोहम्मद सरफराज बताते हैं, ‘लाल बाजार हेडक्वार्टर के कुछ पुलिसवाले हमसे हमदर्दी रखते थे। उन्होंने कहा कि आप लोगों पर कई गलत इल्जाम लगे हैं। हम मजबूर हैं, हम पर ऊपर से दबाव है। कुल 8 धाराओं में केस हुआ, लेकिन सिर्फ सरकारी काम में बाधा डालने के अलावा सब धाराएं गलत लगाई गई हैं।‘ DCP बोले- प्रदर्शन में पुलिसवाले जख्मी हुए, इसलिए 8 धाराएं लगाईंइस मामले पर कोलकाता पुलिस के साउथ ईस्ट डिवीजन के DCP डॉ. भोलानाथ पांडे ने बताया, ‘प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसवाले जख्मी भी हुए हैं। उसी के आधार पर धाराएं लगाई गई हैं। प्रदर्शन के आयोजकों ने बयान दे दिया है और इन्वेस्टिगेशन भी जारी है। उसी के आधार पर चार्जशीट तैयार की जाएगी। मामले में BNS के तहत कुल 8 धाराएं लगाई गई हैं।' अब जानिए पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…TMC: बांग्लादेश की वजह से नहीं, SIR के कारण हिंदू खतरे में बांग्लादेश में हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल में बने माहौल को लेकर हमने TMC प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी से बात की। वे कहते हैं, ‘BJP चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में ऐसा नैरेटिव तैयार करना चाहती है कि TMC सरकार यहां रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों को बसा रही है। वे TMC के लिए वोट करते हैं और बदले में उन्हें प्रोटेक्शन मिलता है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।’ ’ये इंटरनेशनल डिप्लोमैटिक मुद्दा है, इसे लेकर TMC सरकार हमेशा से केंद्र के साथ है। देश की इंटीग्रिटी और यूनिटी को लेकर जो काम किया जाएगा, हम उसमें साथ देंगे। पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी पहले भी कह चुके हैं कि हम देश की अखंडता के लिए काम करेंगे।’ ’BJP लीडर शुभेंदु अधिकारी जानबूझकर गलत नैरेटिव तैयार करना चाहते हैं कि बंगाल में हिंदू खतरे में है। वे गलत खबर फैलाते हैं, जैसे एक फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती का डायलॉग है- आमी खबर देखी ना, खबर सुनी ना, आमी खुद ही खबर तैयारी करी। हम ये नैरेटिव तोड़ेंगे और विधानसभा चुनाव में 215 से ज्यादा सीटें जीतेंगे।’ वे आगे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में हिंदू खतरे में है, लेकिन वो बांग्लादेशियों की वजह से नहीं बल्कि SIR की वजह से। पश्चिम बंगाल में SIR के नाम पर 58 लाख मतुआ लोगों का नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो चुका है। इसमें कोई भी रोहिंग्या या बांग्लादेशी नहीं मिला है।’ BJP: ममता बनर्जी गाजा के लिए बोलती हैं, हिंदुओं के लिए नहींBJP प्रवक्ता ज्योति चटर्जी का कहना है, ‘बांग्लादेश में बंगाली हिंदुओं की संख्या बहुत कम हो गई है। आने वाले समय में बंगाली हिंदू खत्म हो जाएंगे। दीपू दास की तरह बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाप-बेटे को मार दिया। बांग्लादेश और बंगाल दोनों जगह बंगाली हिंदुओं की भाषा और कल्चर खत्म किया जा रहा है।‘ ‘मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गाजा के लिए बोलती हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए आवाज नहीं उठातीं। आने वाले वक्त में हम सब दीपू दास बन जाएंगे। हमारी संख्या घट रही है। जहां संख्या घटी, वहां हम पीड़ित हुए। हिंदू जाग रहा है और ये चुनाव का सवाल नहीं है। ये बंगाली हिंदुओं के अस्तित्व का सवाल है।‘ पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुस्लिम आ रहे हैं। डेमोग्राफी बदल रही है। यहां बांग्लादेशी मुस्लिमों के लिए अचानक गुलशन कॉलोनी बन गई। मुस्लिमों का फर्टिलिटी रेट ज्यादा है। वो पर्सेंटेज में बढ़ रहे है और बंगाली हिंदू की संख्या घट रही है। ‘बांग्लादेश में बंटवारे के वक्त वहां 22% और भारत में 79.2% बंगाली हिंदू थे। अब बांग्लादेश में 6% और 2011 की जनगणना के अनुसार बंगाल में 70.5% हैं। राज्य में बंगाली हिंदू मेजॉरिटी में हैं, लेकिन जिन जगहों पर माइनॉरिटी में हैं, वहां प्रताड़ित किए जा रहे हैं। मुर्शिदाबाद में बंगाली हिंदू पुलिस को कॉल करते हैं, तो पुलिस टाइम पर आती ही नहीं है।’ ’अगर यहां ममता बनर्जी फिर चुनकर आईं तो बंगाली हिंदू नहीं बचेंगे। पूरे बंगाल में मुर्शिदाबाद जैसे हालत हो जाएंगे। यहां चिकन नेक है और ये बॉर्डर स्टेट भी है। ऐसे में देश की सिक्योरिटी के लिए पश्चिम बंगाल में BJP का आना जरूरी है। अगर ये गलत हाथों में गया तो देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।’ एक्सपर्ट बोले- टारगेट पर अल्पसंख्यक, हिंदू वोटर एकजुट हो रहापॉलिटिकल एक्सपर्ट मैनाक पुटाटुंडा कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव मार्च 2026 के आसपास हो सकते हैं। इसे लेकर यहां सियासी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। TMC लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। BJP भी सत्ता पाने के लिए जोर लगा रही है। बांग्लादेश में हो रही हिंसा और घटनाओं का असर भी पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पड़ रहा है।‘ ‘बांग्लादेश में दीपू दास की हत्या दुर्भाग्यपूर्ण है। बांग्लादेश में कुछ राजनीतिक पार्टियां अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हमलों को सीधे तौर पर न सही, लेकिन बढ़ावा देती दिख रही हैं। इन सबके नतीजे पश्चिम बंगाल में भी दिखेंगे। यहां धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण होना तय है। बांग्लादेश में हो रही घटनाओं की वजह से पश्चिम बंगाल में हिंदू वोटर एकजुट हो सकते हैं।‘ यदि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के वोटिंग के आंकड़ों का एनालिसिस करें, तो साफ होता है कि पश्चिम बंगाल में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच वोट पर्सेंट का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसी स्थिति में अगर BJP के कोर वोट बैंक में महज 5 से 7% का भी इजाफा होता है, तो सत्ता संतुलन प्रभावित हो सकता है। 'अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अहम, ये सियासी मुद्दा नहीं'पूर्व TMC लीडर और जादवपुर यूनिवर्सिटी के VC ओमप्रकाश मिश्रा कहते हैं, ‘भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान ही नहीं, दुनिया के कई देशों में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होता रहा है। बांग्लादेश में जो दीपू दास के साथ हुआ, वो बहुत शर्मनाक है। इन घटनाओं का बांग्लादेश की सिविल सोसाइटी भी खुलकर विरोध कर रही है और भारत में भी विरोध किया गया। भारत हो या बांग्लादेश, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अहम मुद्दा है।‘ पश्चिम बंगाल में हिंदू की सुरक्षा के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में सभी मिल-जुलकर रहते हैं। यहां किसी तरह की कम्युनिटी के लिए असुरक्षा की स्थिति नहीं है। ये बात बार-बार साबित हो चुकी है। कुछ लोग इसे मुद्दा उठाकर सियासी फायदा लेने की कोशिश करते हैं।‘ ‘बाकी राज्यों में ऐसी राजनीति करके भले फायदा मिल सकता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में ये नहीं चल पाएगी। यहां धर्म के आधार पर राजनीति करने वाला व्यक्ति या पार्टी खुद ही पिछड़ जाएगी। BJP समर्थक ये दावा करते हैं कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी या रोहिंग्या रह रहे हैं। अगर ऐसा है तो उन्हें इसका जवाब देश के गृह मंत्री अमित शाह से मांगना चाहिए क्योंकि देश की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है।’ 'बांग्लादेश में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे, इसका असर पश्चिम बंगाल में पड़ेगा'BJP के राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता कहते हैं, ‘उस्मान हादी की मौत के बाद वहां के स्टूडेंट रेवोल्यूशनरी सरकार बनाना चाहते थे। वहां हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा है। बांग्लादेश का माहौल 1971 के मुक्ति संग्राम के उलट है। अभी वहां पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं। इसका असर पश्चिम बंगाल पर तो पड़ेगा ही।‘ ‘बांग्लादेश में हुए हिंदुओं के कत्लेआम का बंगाल से सीधा तो नहीं, लेकिन इमोशनली कनेक्शन है। बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कुछ करना चाहिए। BJP ये मुद्दा पहले से उठा रही है। SIR में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पहले से माहौल बना हुआ है। इसके खिलाफ भी हम 10-15 साल से लगातार आवाज उठा रहे हैं। ये दोनों हमारे लिए भी अहम मुद्दे हैं।‘ ‘पश्चिम बंगाल के हिंदुओं में इन सबको लेकर इनसिक्योरिटी है। लोग मानते हैं कि ये सब ममता बनर्जी के तुष्टीकरण के लिए हुआ है। कोई मुद्दा बनाया नहीं जा सकता, जब तक वो जनता के दिल से नहीं आता। पिछले पांच साल में हिंदुओं में इनसिक्योरिटी बढ़ी है, जिसका असर आने वाले चुनाव में दिखेगा।’...................... ये खबर भी पढ़ें... नीतीश ने हिजाब खींचा, पति ने नुसरत को कोलकाता भेजा ‘जब नीतीश कुमार ने नकाब खींचा, तो समझ नहीं आया कौन, कहां से मुझे खींच लेगा। वहां सब हंसने लगे थे। इतना कुछ पहले हो गया था, न जाने और क्या करते। मैं जल्दी-जल्दी वहां से निकली, ताकि मुझे कोई देख न ले। थोड़ी देर बाद दोबारा वहां गई अपॉइंटमेंट लेटर फाड़कर फेंकने, लेकिन तब तक सब जा चुके थे।’ नुसरत परवीन ने ये आपबीती भाई बबलू को सुनाई थी। पढ़िए पूरी खबर...
वेदांता संस्थापक अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश का न्यूयॉर्क में निधन
वेदांता कंपनी के संस्थापक अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल (49) का न्यूयॉर्क में बुधवार को एक दुर्घटना में निधन हो गया
अमेरिका की बड़ी कार्रवाई : रूसी तेल टैंकर मैरिनो जब्त
संयुक्त राज्य अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर मैरिनो को जब्त कर लिया है
सत्य साईं बाबा थे निकोलस मादुरो के 'गुरु', कैसे वेनेजुएला के घर-घर में हो गए मशहूर?
निकोलस मादुरो का जन्म कैथोलिक-बहुल देश में कैथोलिक परिवार में हुआ था. मादुरो उन प्रमुख वेनेजुएला के राजनेताओं में से थे जिन्हें दिवंगत भारतीय गुरु श्री सत्य साईं बाबा का भक्त बताया जाता था. इनमें मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोरेस, देश की नेशनल असेंबली की पूर्व अध्यक्ष और कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज शामिल थीं.
US New VISA Policy for Indian Student: अमेरिकी दूतावास की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब बड़ी संख्या में भारतीय छात्र हर साल अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं, और वीज़ा नियमों को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनती रहती है. दूतावास का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और कानूनी स्थिति सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन इसके लिए छात्रों का सहयोग और नियमों का पालन जरूरी है.
PM Modi-Netanyahu Phone Call: भारतीय पीएम मोदी और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बुधवार 7 जनवरी 2026 को फोन पर बातचीत हुई. डामाडोल से गुजर रही वैश्विक राजनीति के बीच आखिर यह फोन कॉल क्या संदेश देना चाहती है?
The Fall Of Maduro: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया का एक AI वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में दिखाया गया है कि मादुरो को कैसे अमेरिका के सैनिको ने अपने कब्जे में लिया था.
LIVE: 7 जनवरी की बड़ी खबरें और अपडेट्स
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Bangladesh Violence: बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा के बीच एक और नया मामला देखने को मिला है. यहां चोरी के आरोप में एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी.
Berlin power outage: बर्लिन में वामपंथी आतंकवादी हमले के कारण हजारों घरों और कारोबारों में बिजली गुल हो गई, जिससे लोगों को ठंड और अंधेरे का सामना करना पड़ा है. प्रभावित पावर ग्रिड की मरम्मत जारी है और जर्मन अधिकारी आतंकवादी गतिविधियों की जांच कर रहे हैं.
पाकिस्तान की समस्या बलोच प्रतिरोध से नहीं, पहचान से है: मानवाधिकार कार्यकर्ता
मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलोच यकजाहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सम्मी दीन बलोच ने कहा है कि पाकिस्तान बलोच लोगों को एक आबादी के रूप में नहीं, बल्कि दुश्मन के तौर पर देखता है
ग्रीनलैंड खुद कर देगा सरेंडर! वेनेजुएला से भी आसान रहने वाला है ट्रंप का ये ऑपरेशन? इनसाइड स्टोरी
इस समय दुनिया में हर कोई सोच रहा है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कैसे कब्जा करेगा? असल में ट्रंप के प्लान में ग्रीनलैंड की आबादी, वहां की जरूरत, डेनमार्क के रोल के साथ-साथ अमेरिका का फायदा जुड़ा है. अमेरिका इस ऑपरेशन को वेनेजुएला से थोड़ा और कम समय में पूरा करना चाहेगा. पढ़िए अंदरखाने क्या चल रहा है.
वेनेजुएला से अमेरिका को मिलेगा 50 मिलियन बैरल तेल : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 30 मिलियन से 50 मिलियन बैरल प्रतिबंधित तेल सौंपेगी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार 3 से 5 करोड़ बैरल तेल अमेरिका को सौंपेगी. यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा और कमाई का पैसा ट्रंप खुद कंट्रोल करेंगे, ट्रंप का यह ऐलान निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद आया है.
मादुरो के बाद अब उनके सबसे वफादार पर ट्रंप की टेढ़ी नजर, कहा,'...आपका भी यही हाल होगा'
Donald Trump: वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अमेरिका ने गिरफ्तार कर लिया था. जिसके बाद दुनिया भर में इसकी चर्चा हो रही है. अब ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के हार्डलाइन इंटीरियर मिनिस्टर को नोटिस दिया है. जानिए उन्हें क्या चेतावनी दी गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की जिद फिर दोहरा दी है. व्हाइट हाउस ने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है और जरूरत पड़ी तो मिलिट्री ऑप्शन भी खुला है. वेनेजुएला के बाद ट्रंप की इस नई रणनीति ने डेनमार्क और NATO देशों में खलबली मचा दी है.
मोदी मुझसे खुश नहीं हैं... अब भारत के बारे में क्या बोले ट्रंप, एक दिन पहले दी थी टैरिफ की धमकी
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी मुझसे खुश नहीं है. ऐसा उन्होंने क्यों कहा है आइए जानते हैं.
Donald Trumps speech: डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में नरेंद्र मोदी, निकोलस मादुरो और इमैनुएल मैक्रों को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं, दुनिया भर की राजनीति में हलचल मचा दी है.
तारीख: 17 दिसंबर, जगह: यूपी का गाजियाबादराज नगर एक्सटेंशन में रहने वाली दीपशिखा किरायेदार अजय गुप्ता के यहां किराया मांगने पहुंचीं। उनका करीब 90 हजार रुपए किराया बाकी था। इस पर पहले झगड़ा भी हो चुका था। इसी गुस्से में अजय और उसकी पत्नी आकृति ने दीपशिखा का गला घोंटकर मर्डर किया और लाश के टुकड़े करके सूटकेस में भर दिए। उसे फेंकने जा रहे थे, लेकिन पकड़े गए। अजय ट्रांसपोर्टर और आकृति हाउस वाइफ है। ये अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ साल में मर्डर के बाद लाश के टुकड़े करने का पैटर्न सामने आया है। मार्च, 2025 में मेरठ के रहने वाले सौरभ राजपूत की हत्या कर दी गई। आरोप सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल पर है। दोनों ने डेड बॉडी के 20 टुकड़े किए और ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट भर दिया। दिल्ली में मई 2022 में हुआ श्रद्धा वालकर हत्याकांड भी इतना ही भयानक था। लिव इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने श्रद्धा को गला दबाकर मार दिया, फिर 10 घंटे तक बाथरूम में शावर चलाकर उसकी लाश के टुकड़े करता रहा। फिर 35 टुकड़ों को धोया और पॉलिथीन में भरकर फ्रिज में रख दिया। आरोप ये भी है कि आफताब 18 दिन तक महरौली के जंगल में टुकड़े फेंकता रहा। इसी तरह तेलंगाना में सेना से रिटायर्ड गुरुमूर्ति ने पत्नी माधवी की हत्या कर दी। लाश के टुकड़े किए और प्रेशर कुकर में उबालकर झील में फेंक दिए। इन मामलों में मर्डर करने वाले अपराधी या गैंगस्टर नहीं, बल्कि आम लोग हैं। कोई पड़ोसी, करीबी या रिश्तेदार। आखिर सामान्य लोग इतने बेरहम कैसे हो जाते हैं। साइकोलॉजिकल स्टडी और एक्सपर्ट के हवाले से समझिए पूरी कहानी। लाश के टुकड़े क्यों, फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने बताईं वजहकोई इंसान मर्डर के बाद लाश के साथ इतनी क्रूरता क्यों करता है, इसे समझने के लिए 2012 में एक स्टडी की गई थी। फिनलैंड की रिसर्चर्स हेलिना और एइला ने 'जर्नल ऑफ फोरेंसिक साइंसेज' के नाम से रिसर्च पेपर पब्लिश किया था। इसमें डेडबॉडी को काटने या टुकड़े करने के पीछे 5 मकसद बताए गए। 1. खुद को बचाने के लिएअपराधी का मकसद क्रूरता करना नहीं, बल्कि खुद को बचाना होता है। वह लाश को काटता है, ताकि उसे सूटकेस या बैग में छिपाकर आसानी से ठिकाने लगा सके। हालिया मामलों में यही वजह सबसे ज्यादा सामने आई है। 2. गुस्से या नफरत की वजह सेमर्डर करने वाले के मन में मरने वाले के लिए बहुत ज्यादा नफरत हो। वह हत्या के बाद गुस्सा शांत करने के लिए डेडबॉडी को नुकसान पहुंचाता है। 3. सेक्शुअल डेविएशन या यौन विकृति यह गंभीर मानसिक बीमारी है। इसमें अपराधी फैंटेसी के लिए शरीर के अंगों को काटता है। 4. मानसिक विक्षिप्तता हत्यारा पूरी तरह मानसिक संतुलन खो चुका हो और उसे एहसास ही न हो कि वह क्या कर रहा है। 5. किसी को मैसेज देनागिरोह या अंडरवर्ल्ड में किसी को खौफजदा करने या मैसेज देने के लिए लाश के साथ वीभत्स बर्ताव किया जाता है। आम आदमी के हैवान बनने के 4 बड़े कारणनेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी NCRB के मुताबिक 2025 में भारत में हत्या के 27,300 केस सामने आए। हालांकि कितने केस में शव के टुकड़े किए गए, रिकॉर्ड में इसकी जानकारी नहीं है। हत्या के बाद बॉडी के टुकड़े करने के पीछे क्या वजह होती है, इस पर हमने AIIMS के पूर्व डायरेक्टर और फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. तीरथ दास डोगरा, साइकियाट्रिस्ट डॉ. नाहिद दवे, साइकॉलोजिस्ट हिमानी कुलकर्णी और सर गंगाराम अस्पताल में साइकियाट्रिस्ट डॉ. राजीव मेहता से बात की। एक्सपर्ट्स की बातचीत से चार फैक्टर समझ आए। 1. दूसरों के दुख-दर्द से मतलब न रखनाAIIMS के पूर्व डायरेक्टर तीरथ दास डोगरा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर आरुषि हत्याकांड जैसे केस में पोस्टमॉर्टम किया है। वे निठारी केस में फोरेंसिक एक्सपर्ट के तौर पर जांच में जुड़े थे। डॉ. डोगरा लोगों में संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों की कमी को ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार मानते हैं। वे कहते हैं, ‘आबादी बढ़ने के साथ नैतिक मूल्य बदल रहे हैं। इससे लोगों में क्रूरता बढ़ी है। पहले घर, परिवार और स्कूलों में मूल्यों की शिक्षा दी जाती थी। इससे लोगों में सहानुभूति और सहनशीलता बनी रहती थी।’ डॉ. डोगरा आगे बताते हैं कि अब लोगों को सिखाया जाता है कि तुम अपनी चिंता करो, दूसरों की नहीं। इससे इंसान अलग-थलग पड़ जाता है। दूसरों का दर्द महसूस नहीं कर पाता। लोगों में अहंकार और स्वार्थ हावी हो जाता है। भारत में यही हो रहा है। लोग अब अपने बारे में ज्यादा सोचते हैं। कम ही लोगों को चिंता है कि उनकी वजह से दूसरों पर क्या असर होगा। अपनी बात समझाने के लिए डॉ. डोगरा एक उदाहरण देते हैं। वे बताते हैं कि AIIMS में मॉर्च्युरी का बेसमेंट रेडियोलॉजी और इमरजेंसी डिपार्टमेंट के पास था। किसी की मौत होने पर डेडबॉडी के साथ 500 तक लोग आ जाते थे। पूरा गलियारा भर जाता था। अब ऐसा नहीं होता। 2. जल्दी आपा खो देनासाइकियाट्रिस्ट डॉ. नाहिद दवे कहती हैं, ‘फ्रंटियर ऑफ साइकोलॉजी जर्नल में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि लोगों में इंपल्सिविटी बढ़ी है। वे जल्दी आपा खो देते हैं। दूर के नतीजों की बजाय हालिया फायदे-नुकसान के बारे में सोचकर काम करते हैं। इससे बर्दाश्त करने की क्षमता कम हो गई है। इससे कुछ भी करते वक्त अब बर्दाश्त नहीं करूंगा वाली मानसिकता हावी हो जाती है। कुछ लोगों को क्राइम करने पर पछतावा नहीं होता। इससे अपराध करना आसान हो जाता है।’ बिना क्रिमिनल हिस्ट्री वाले लोग भी मर्डर करने के बाद लाश के टुकड़े करने की हिम्मत कैसे जुटा लेते हैं? इसका जवाब साइकोलॉजिस्ट हिमानी कुलकर्णी देती हैं। हिमानी आठ साल से दिल्ली में युवाओं की मेंटल हेल्थ पर काम कर रही हैं। वे कहती हैं, ‘लोग एक दिन में अपराधी नहीं बनते। छोटी-छोटी घटनाएं उन हालात तक पहुंचाती हैं। जघन्य अपराध के वक्त इंसान में भरा गुस्सा बाहर निकलता है। इसके पीछे परिवार की समस्याएं, नौकरी या दूसरी वजह हो सकती हैं।’ हिमानी मानती हैं कि ऐसे अपराध ‘इमोशनल ट्रिगर' यानी किसी बात के चुभ जाने से होते हैं। अपराधी खुद को सही ठहराते हैं कि वे गलत नहीं हैं। अपराध करने वाले को वही आखिरी रास्ता लगने लगता है। ऐसे में अपराधी लाश के टुकड़े-टुकड़े तक कर देते हैं। 3. कहीं और का गुस्सा दूसरी जगह निकलनादिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में साइकियाट्रिस्ट डॉ. राजीव मेहता कहते हैं कि बड़े स्तर पर देखा जाए तो ये समस्या निजी नहीं, बल्कि समाज से जुड़ी है। रेपिस्ट जेल से छूट रहे हैं। काम की कमी और करप्शन से लोगों के अंदर हताशा बढ़ी है। लोग देख रहे हैं कि ताकतवर लोग कुछ भी कर रहे हैं। यह समाज को अशांति की ओर ले जा रहा है। कहीं और का गुस्सा दूसरी जगह निकल जाता है। गाजियाबाद केस का जिक्र कर डॉ. राजीव बताते हैं, ‘आरोपियों ने 5 महीने से किराया नहीं दिया था। फिर मकान मालकिन को काटकर सूटकेस में भर दिया। आरोपी पति-पत्नी का कहना है कि बीमारी की वजह से किराया नहीं दे रहे थे। किराया मांगने पर इतना बड़ा विवाद नहीं होता। इस केस में पैसे की तंगी का गुस्सा था, जो उस समय मकान मालकिन दीपशिखा पर निकला।’ 4. इंटरनेट और फिल्मों की नकलहिमानी सोशल मीडिया पर क्राइम में मदद करने वाली जानकारी आसानी से मिलने पर चिंता जताती हैं। श्रद्धा वालकर केस में पता चला कि आरोपी आफताब ने वेब सीरीज से बॉडी के टुकड़े करने का आइडिया लिया था। लोगों में संवेदनशीलता कम होने के पीछे डॉ. नाहिद सोशल मीडिया की लत को जिम्मेदार मानती हैं। वे कहती हैं कि सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाला लगभग हर शख्स डूम स्क्रॉलिंग करता है। डॉ. नाहिद इसे समझाते हुए बताती हैं, ‘हम एक रील दुख के भाव की देखते हैं। 20 से 30 सेकेंड बाद फिर तुरंत खुशी या कोई दूसरे भाव की रील आ जाती है। इससे इंसान के दिमाग की आदत ज्यादा देर तक एक भावना पर टिकने वाली नहीं रह जाती। फिर हीनियस क्राइम करते हुए भी इंसान ज्यादा गिल्ट महसूस नहीं करता है।’ ‘फिल्मों में जरूरत से ज्यादा हिंसा दिखाना खतरनाक’डॉ. नाहिद कहती हैं कि हिंसा से भरे वीडियो गेम और फिल्में बहुत आम हैं। पहली बार खून या हिंसा देखने पर इंसान असहज होता है, लेकिन लगातार ये देखने से यह सामान्य लगने लगता है। दिमाग के मिरर न्यूरॉन्स आसपास चल रही चीजों की नकल करते हैं। ब्लड फोबिया यानी खून का डर भी धीरे-धीरे दूर हो जाता है।’ श्रद्धा वालकर केस के आरोपी आफताब पूनावाला ने पुलिस को दिए बयान में माना था कि वह क्राइम बेस्ड अमेरिकन सीरीज डेक्सटर देखता था। इस सीरीज में लाश के टुकड़े करने के सीन दिखाए गए हैं। ‘खबरों को सनसनी बनाकर दिखाने से उन्माद बढ़ रहा’फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. डोगरा कहते हैं कि ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं। अपने करियर के दौरान मैंने ऐसे कई मामले संभाले हैं। आरुषि केस, निठारी कांड, श्रद्धा वालकर या ऐसी ही हालिया घटनाओं को देखें तो रिपोर्टिंग करते हुए मीडिया भी असंवेदनशील हो जाता है। खबर को सनसनी बनाकर दिखाने से लोगों में उन्माद बढ़ता है। लगातार मीडिया में आ रही सनसनीखेज खबरें संवेदनशीलता को धीरे-धीरे कम कर देती हैं। इससे अपराधी हिंसा को आम मानने लगता है। इस पर एक्सपर्ट लोरेन कोलमैन की स्टडी कहती है कि किसी अपराधी की नकल करके हत्या करना यानी कॉपी कैट मर्डर असल में होता है। मीडिया ऐसी खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर बार-बार दिखाता है, तो यह बीमारी की तरह फैलता है और लोग इसे देखकर वैसे ही अपराध दोहराने लगते हैं। जरूरी है कि मीडिया अपराध की रिपोर्टिंग करते वक्त उसे सनसनी बनाने के बजाय चेतावनी के तौर पर पेश करे। ....................... ये रिपोर्ट भी पढ़ेंप्रेग्नेंट बेटी के पेट पर रॉड, सिर पर कुल्हाड़ी मारी, शादी के 6 महीने बाद मर्डर कर्नाटक के इनाम वीरापुर गांव में रहने वाले विवेकानंद की जिंदगी 22 दिसंबर के बाद पूरी तरह बदल गई। उनकी पत्नी मान्या की घर में ही हत्या कर दी गई। 20 साल की मान्या प्रेग्नेंट थीं। हत्या का आरोप मान्या के पिता पर है। विवेकानंद दलित हैं, जबकि मान्या लिंगायत समुदाय से थीं। दोनों ने 6 महीने पहले ही शादी की थी। पढ़िए पूरी खबर...

