केरलम का त्रावणकोर इलाका। एक ब्राह्मण पुरुष तैयार होकर नायर बस्ती में जाता है। वहां एक घर के बाहर नहाता है। कपड़े बदलता है। एक अन्य ब्राह्मण उसे खाना परोसता है। फिर वह चप्पल उतारकर अंदर चला जाता है, जहां एक महिला उसका इंतजार कर रही होती है। जब महिला का पति लौटता है और उसे घर के बाहर एक आदमी की चप्पल दिखती है, तो बिना कुछ कहे वापस लौट जाता है। क्योंकि वो समझ जाता है कि उसकी पत्नी एक नंबुदरी ब्राह्मण पुरुष के साथ संबंधम में है। ये किस्सा केरलम की दशकों पुरानी परंपरा ‘संबंधम’ का है, जिसमें नंबूदरी ब्राह्मण नायर महिलाओं से शारीरिक संबंध बना सकते थे। अभी केरलम में चुनाव होने वाले हैं। आज कहानी इसी ‘संबंधम’ परंपरा की… एक से ज्यादा पुरुषों से संबंध बना सकती थीं नायर महिलाएं शादी के बाद भी पत्नी को घर नहीं ले जाते नंबूदरी ब्राह्मण कोच्चि के राजा का 16 साल की लड़की से संबंधम संबंधम, शोषण है या मातृसत्ता का प्रतीक? केरलम से कांग्रेस के लोकसभा सांसद और लेखक शशि थरूर संबंधम पर लिखते हैं, ‘नायर समाज के पुरुष तब ही अपनी पत्नियों के पास जा सकते थे, जब उनके घर के बाहर किसी और पुरुष की चप्पल उतरी हुई न रखी हो।’ CPI(M) की पूर्व सांसद सुभाषिनी अली संबंधम को नायर महिलाओं का शोषण और जातीय भेदभाव बताती हैं। वो कहती हैं, ’नायर परिवारों में घर के बाहर एक जगह होती थी- मड़म। नंबूदरी पुरुष पहले यहां आते। एक निचले दर्जे का पंडित उनके लिए खाना बनाता। मड़म में पुरुष खाना खाते, नहाते और कपड़े बदलते। फिर नायर महिला के कमरे में जाते। उनके परिवार के किसी और सदस्य को नहीं छूते। न ही संबंधम से जन्में बच्चों को हाथ लगाते।’ हालांकि, सभी इतिहासकार ऐसा नहीं मानते। कुछ का कहना है कि संबंधम परंपरा नायर जाति में मातृसत्ता और महिलाओं की आजादी का प्रतीक थी। इतिहासकार के. एम. पणिक्कर के मुताबिक, बहुविवाह के रिकॉर्ड 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच अंग्रेजों ने दर्ज किए हैं। इन्हें नायरों के घर के 60 गज, यानी 200 फीट के दायरे में आने की भी इजाजत नहीं थी, इसलिए यह रिकॉर्ड भरोसेमंद नहीं है। उस समय के मलयाली साहित्य में बहुविवाह का कोई जिक्र नहीं है। 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश अफसर डॉ. फ्रांसिस बुचानन जब सर्वे के लिए केरलम पहुंचे तो उन्होंने संबंधम के बारे में लिखा- नायर महिलाएं अपने प्रेमियों में अनेक ब्राह्मणों, राजाओं और उच्च कुल के पुरुषों के होने पर गर्व करती थीं। हालांकि केरलम के इतिहासकार नंदकुमार इसे महिलाओं की आजादी बताते हैं। वे कहती हैं कि उस वक्त की महिलाएं अपना साथी खुद चुन सकती थीं। उन्हें शादी के बाद अपना घर और नाम नहीं छोड़ना पड़ता था। पुरुष खुद उनके घर आते करते थे। क्या संबंधम नस्ल सुधारने की तकनीक? सुभाषिनी अली बताती हैं कि RSS के दूसरे सरसंघचालक एम. एस. गोलवलकर ने संबंधम को नस्ल सुधारने का प्राचीन तरीका बताया था। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर शम्सुल इस्लाम के मुताबिक, 17 दिसंबर 1960 को गुजरात यूनिवर्सिटी में दिए भाषण में गोलवलकर ने ये बात कही थी। गोलवलकर ने कहा… RSS के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ के जनवरी 1961 के एडिशन में भी इस भाषण का जिक्र है। ब्रिटिश मिशनरी के आने से संबंधम पर रोक लगी आज की राजनीति पर संबंधम का कोई असर है? संबंधम परंपरा में दो किरदार थे- नायर और नंबूदरी ब्राह्मण। दशकों पहले शूद्र माने जाने वाली नायर जाति आज सामान्य वर्ग में आती है। केरलम में नायर करीब 15% हैं। वहीं ब्राह्मण करीब 2% हैं। इनमें नंबूदरी सिर्फ 1% हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि केरलम की राजनीति में संबंधम का भले ही सीधा असर न दिखे, लेकिन ऐसी परंपराओं ने लोगों के बीच जातिगत खाई पैदा कर दी है। इसका इस्तेमाल पॉलिटिकल पार्टियां नायरों को साधने के लिए करती हैं। -------- केरलम की यह अनोखी परंपरा भी पढ़िए… ब्रेस्ट ढंकने के लिए टैक्स देती थीं केरलम की महिलाएं:विरोध में नंगेली ने अपने स्तन काट लिए; आज भी 50+ सीटों पर इसका असर साल 1803 यानी आज से करीब 223 साल पहले। केरलम के चेरथला नगर में ऐझावा जाति की एक मजदूर महिला की झोपड़ी के सामने राजमहल से एक टैक्स जमा करने वाला पहुंचा। महिला ने उसे वहीं रुकने के लिए कहा और झोपड़ी में चली गई। कुछ मिनट बाद जब वह बाहर निकली, तो उसके सीने से दोनों स्तन कटे हुए थे। उसने खून से लथपथ स्तनों को एक पत्ते पर रखकर टैक्स कलेक्टर की तरफ बढ़ा दिए। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 अप्रैल की शाम गालियों से भरा एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, 'मंगलवार को ईरान ऐसा नजारा देखेगा, जो उसने पहले कभी नहीं देखा होगा! ओ पागल, बास्टर्ड! होर्मुज स्ट्रेट खोल दो, वरना तुम नर्क के लिए तैयार रहो।' पहली नजर में लोगों को लगा कि ये फेक है। क्योंकि शायद ही किसी देश के नेता ने दूसरे देश के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया हो। लेकिन ये तो ट्रम्प हैं, जो कुछ भी कहते हैं और कुछ भी करते हैं। ऐसा पहली बार नहीं है कि ट्रम्प ने दुनिया को चौंकाया हो। वे खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? ट्रम्प के बचपन से लेकर अब तक के किस्सों में जानेंगे उनकी साइकोलॉजी, मंडे मेगा स्टोरी में… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह --------ट्रम्प से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… ईरान समेत 7 देशों पर हमले, आधी दुनिया पर नजर:ट्रम्प की 'सनक' एक सोची-समझी स्ट्रैटजी; क्या ऐसे ही तबाह होती हैं सुपर पावर्स डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति पद की शपथ लिए 13 महीने हुए हैं। इस दौरान ट्रम्प ने 7 देशों पर सैन्य हमले किए, ईरान के सुप्रीम लीडर को मार गिराया, वेनेजुएला के राष्ट्रपति को तो घर से उठवा लिया, दर्जनों देशों पर अनाप-शनाप टैरिफ लगाए और राष्ट्राध्यक्षों को बेइज्जत किया। पूरी खबर पढ़िए…
24 साल के परदुम ताती डिब्रूगढ़ के चाय बागान में काम करते हैं। उनके माता-पिता भी यहीं काम करते थे। परदुम पुलिस में नौकरी करना चाहते थे, लेकिन परिवार के हालात ने बागान पहुंचा दिया। यहां मिलने वाली दिहाड़ी से खुश नहीं हैं। हालात पूछते ही भावुक हो जाते हैं। कम दिहाड़ी मिलने की शिकायत करने वाले वो अकेले नहीं हैं। असम में लगभग 8 लाख से ज्यादा वर्कर्स चाय बागान में काम करते हैं। दिहाड़ी के नाम पर उन्हें रोज के महज 280 रूपए मिलते हैं। पिछले 10 सालों में दिहाड़ी सिर्फ 130 रुपए बढ़ी है। महिलाएं बागान में टॉयलेट जैसी बेसिक सुविधा न होने की शिकायत करती हैं। वर्कर की नाराजगी टी ट्राइब्स को अनसूचित जाति (ST) में शामिल न करने को लेकर भी है। 126 विधानसभा सीटों वाले असम की लगभग 45 सीटों पर चाय बागान मजदूरों का सीधा असर है। असम की सत्ता का रास्ता इन्हीं बागानों से होकर निकलता है। 9 अप्रैल को यहां चुनाव हैं। ऐसे में चाय मजदूरों के क्या मुद्दे हैं, वे किन हालात में हैं, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम डिब्रूगढ़ के चाय बागान पहुंची। बागान से बाजार तक 24 घंटे में पहुंचती हैं पत्तियांडिब्रूगढ़ शहर से 20 किलोमीटर दूर हम ढलाजन सब डिवीजन के कनाई गांव पहुंचे। यहां मोकलबाड़ी टी एस्टेट कंपनी का चाय बागान है। सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक काम होता है। बड़े बागानों में लगभग 12 से 14 हेक्टेयर के करीब 14 सेक्शन होते हैं। एक सेक्शन में कुल 60 से 70 लोग काम करते हैं। महिला और पुरुषों के सेक्शन अलग हैं। ऐसे करीब एक बागान में कुल 800 मजदूर काम करते हैं। हर सेक्शन में मजदूरों से काम कराने वाली एक महिला और एक पुरुष केयरटेकर यानी सरदार होता है। करीब 24 घंटे में बागानों से निकली पत्तियां पैक होकर बिकने के लिए रेडी हो जाती हैं। मजदूरों की 3 मांगें- दिहाड़ी, जमीन का हक और ST दर्जा बाग में काम करते मिले परदुम कम दिहाड़ी मिलने से नाराज हैं। वे शिकायत करते हुए कहते हैं, ‘अगर पढ़ा-लिखा होता, तो कहीं और नौकरी करता। अभी दिहाड़ी 250 से बढ़ाकर 280 रुपए कर दी लेकिन फिर भी कम है। हमने डिब्रूगढ़ में आंदोलन करके 551 रुपए की मांग की थी, लेकिन पूरी नहीं हुई।‘ परदुम बीते 3 साल से चाय बागान में काम कर रहे हैं। 4 साल पहले मां गुजर गईं। बुजुर्ग पिता काम नहीं कर सकते इसीलिए वो घर में अकेले कमाने वाले हैं। चुनाव को लेकर परदुम साफ कहते हैं, ‘हमारी तीन मांगें हैं। दिहाड़ी बढ़ाई जाए, जमीन का हक मिले और ST का दर्जा दिया जाए। जो ये मांगें पूरी करेगा, हम उसी का समर्थन करेंगे।‘ प्लांटेशन लेबर एक्ट के तहत 1 अप्रैल से पहले मजदूरों को 250 रुपए दिहाड़ी मिलती थी। हिमंता सरकार ने 30 रुपए बढ़ाकर इसे 280 रुपए कर दिया। केरलम में भी 1 अप्रैल को टी वर्कर्स की दिहाड़ी 48 रुपए बढ़ाकर 546 रुपए कर दी गई है। ये असम के मुकाबले लगभग दोगुनी है। वर्कर्स की हालत पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और ग्लोबल लिविंग वेज कोलीशन (GLWC) नजर रखते हैं। GLWC की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, असम के चाय बागान वाले इलाकों में परिवार का पेट पालने के लिए एक मजदूर की मंथली इनकम कम से कम 15,000 रुपए होनी चाहिए, जबकि अभी ये करीब 8 हजार रुपए है। न बीमा-न कोई सुविधा, छतों से पानी टपकता है आकाश नायक बागान में काम करते हैं और असम चाय मजदूर संघ से भी जुड़े हैं। वे शिकायत करते हैं कि कंपनी ने कोई बीमा नहीं कराया और न ही कोई खास सुविधाएं दी हैं। रहने के लिए मिले क्वार्टर की हालत भी खराब है। छतों से पानी टपकता है और दीवारें फटी हुई हैं, लेकिन कंपनी मरम्मत नहीं करवाती। आकाश आने वाले चुनाव में 'चाय जनजाति' की मांग को सबसे जरूरी बताते हैं। असम के जंगलों को साफ करके अंग्रेजों ने यहां चाय के बागान लगाए और काम करने के लिए कुछ लोगों को लाकर बसाया था। इन्हें असम में टी ट्राइब या चाय जनजाति कहा जाता है। तब से इनकी पीढ़ियां यहीं रह रही हैं। राज्य में इनकी आबादी करीब 70 लाख है यानी करीब 20% हिस्सेदारी है। असम के 10 जिलों की 45 विधानसभा सीटों पर टी-ट्राइब हार-जीत तय करते हैं। असम चाय बागान यूनियन के असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी लखींद्र कुर्मी ST के दर्जे को सबसे बड़ी मांग बताते हैं। वे कहते हैं, ‘झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उरांव, मुंडा, संथाल और खड़िया जैसी हमारी जातियों को ST दर्जा हासिल है। असम के चाय बागानों में हम उसी स्थिति में रह रहे हैं। हम प्रकृति के पुजारी हैं। हमारी कुल 108 उप-जातियां हैं, जिनमें सिर्फ 36 को ST दर्जा मिला है।’ अब महिला वर्कर्स की बात… टॉयलेट नहीं, खुले में जाने को मजबूरअसम के बागानों में करीब 60% महिला वर्कर्स हैं। पत्तियां तोड़ने का काम उन्हीं के जिम्मे है। 52 साल की बुरुन ताती पिछले 10 साल से महिला मजदूरों की केयरटेकर हैं। वे बताती हैं, ‘बागान में 18 से 58 साल तक के मजदूर हैं। रिटायरमेंट के बाद हमारा काम बेटे या बहुओं को मिल जाता है। PF के लिए कटने वाला पैसा हमें मिल जाता है।‘ महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं पर वे कहती हैं, ‘बागान में टॉयलेट न होना सबसे बड़ी परेशानी है। सरकार ने हमारी बस्ती में घरों पर टॉयलेट बनवाए हैं, लेकिन यहां नहीं। हर बार काम बीच में छोड़कर घर जाना मुमकिन नहीं होता। मजबूरन खुले में जाना पड़ता है।‘ ‘प्रेग्नेंट महिलाओं का ध्यान रखा जाता हैं। उन्हें हल्का काम देते हैं। अगर काम करते हुए कोई बीमार पड़ जाए, तो कंपनी की गाड़ी उसे अस्पताल भी ले जाती है।‘ महंगाई में खर्च चलाना मुश्किल, दिहाड़ी बढ़े-जमीन का हक मिले25 साल की भानुमती ताती बीते 6 साल से बागान में काम कर रही हैं। पति राजमिस्त्री हैं और 5 साल का एक बच्चा है। वे बताती हैं, ‘महंगाई की वजह से दिक्कत बढ़ गई है। बच्चे की पढ़ाई और बीमारी में कम पैसों में मैनेज करना मुश्किल हो जाता है। जब मैनेजर से दिहाड़ी बढ़ाने को कहते हैं, तो काम करने की बात कहकर टाल देते हैं।’ 26 साल की सपना ताती पिछले 5 सालों से काम कर रही हैं। वे चुनाव पर कहती हैं, ’नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन लौटकर नहीं आते। इसलिए किसी पर कोई दबाव नहीं है, सब अपनी मर्जी से वोट देते हैं। हमारी बस यही मांग है कि दिहाड़ी बढ़ाई जाए, हमारे घर ठीक कराए जाएं और सबसे जरूरी, जमीन का मालिकाना हक मिले।’ स्टाफ भी नाखुश, बोला- सरकार के वादे अधूरे, अबकी जवाब देंगे 4 अप्रैल को जब हम गांव पहुंचे तब सभी वर्कर्स काम खत्म कर पेमेंट लेने पहुंचे थे। हर 15 दिन बाद शनिवार को उनकी पेमेंट मिलती है। सेंटर पर काफी भीड़ थी। पे स्लिप के साथ लोगों के नाम बोले जा रहे थे, तीन डेस्क पर करीब 12 लोग पेमेंट बांट रहे थे। यहीं हमें पेमेंट देने वाले 35 साल के संतोष गोला मिले। वे बागान के हालात पर कहते हैं, जो नियम और सुविधाएं होनी चाहिए, असल में वो नहीं हैं। 10-12 साल में यहां किसी स्टाफ का प्रमोशन नहीं हुआ। 10-12 पद खाली पड़े हैं, लेकिन भरे नहीं जा रहे। सिर्फ लोगों से काम निकाला जा रहा है। ‘हमारी सबसे बड़ी दिक्कत कम मेहनताना है। पत्तियां तोड़ने वालों से लेकर पढ़े-लिखे लोगों तक सबको रोज के 250 रूपए ही मिलते हैं। ये काम मजबूरी में कर रहे हैं, क्योंकि थोड़ा पढ़ा-लिखा होने के कारण दूसरा काम नहीं कर सकते।‘ चुनाव के बारे में पूछने पर संतोष मौजूदा सरकार पर नाराजगी जताते हैं। वे कहते हैं, ‘BJP ने बड़े-बड़े वादे किए थे कि जमीन देंगे, दिहाड़ी बढ़ाएंगे, लेकिन कुछ नहीं मिला। अबकी हमने मन बना लिया है कि अगर हमें सुविधाएं और हक नहीं मिला, तो सब मिलकर मौजूदा सरकार को हटाएंगे।‘ मैनेजर बोले- मजदूरों को कोई खास दिक्कत नहीं हम बागान के मैनेजर अमित सिंह से भी मिले। वे बताते हैं कि चाय की पत्तियां तोड़ने से लेकर पैकिंग तक सारा काम उनकी कंपनी ही करती है। वे प्रोडक्शन को लेकर कहते हैं, ‘एक सीजन में 14 से 15 लाख किलो चाय बनाते हैं। हमारी तीन फैक्ट्रियों से रोजाना औसतन 5,000 किलो चाय निकलती है। ये यूरोपियन यूनियन और जापान एक्सपोर्ट होती है। अरब देशों में भी जाती है। फिलहाल जंग के चलते ईरान में सप्लाई बंद है।‘ लोगों की समस्याओं पर वे दावा करते हैं, ‘सुविधाओं को लेकर कोई खास समस्या नहीं है। महिलाओं के लिए वॉशरूम को लेकर सरकारी अफसरों से बात कर रहे हैं। वे सालाना यूरिनल और बाथरूम मुहैया कराते हैं। हमने आवेदन किया है। कंपनी अपने बजट और प्रोजेक्ट्स में भी इसे शामिल रखती है।‘ एक्सपर्ट बोले- चाय बागान मजदूरों के हाथ में 45 सीटेंअपर असम के सीनियर जर्नलिस्ट इकबाल अहमद मानते हैं कि सरकार बनाने में चाय जनजाति की बड़ी और निर्णायक भूमिका होती है। इस चुनाव में ST का दर्जा बड़ा मुद्दा है। सिर्फ चाय जनजाति ही नहीं, बल्कि 5 अन्य कम्युनिटी की कुल 6 जनजातियां ST दर्जे की मांग कर रही हैं। पार्टियों ने वादे किए, लेकिन केंद्र को रिपोर्ट नहीं भेजी। इससे लोगों में निराशा है। डिब्रूगढ़ के जर्नलिस्ट अभिक चक्रवर्ती 15 सालों से अपर असम में एक्टिव हैं। वे बताते हैं, अपर असम में 40 से 45 सीटों पर बागान मजदूरों का सीधा असर रहता है। यहां की आबादी का करीब 75% हिस्सा इन्हीं मजदूरों का है। चुनावों में महिला मजदूर अहम रोल निभाती हैं क्योंकि उनकी संख्या ज्यादा है। वे कहते हैं कि एक समय था जब ये कम्युनिटी कांग्रेस का पक्का वोट बैंक हुआ करती थी। उनके बड़े नेता कम्युनिटी के लिए ठीक से काम नहीं कर पाए, जिससे 2016 ये वोट BJP के पास आ गया। हालांकि अभिक मानते हैं कि इस बार चुनाव के मैदान में ST दर्जे का मुद्दा उतना हावी नहीं, जितना लैंड पट्टा और दिहाड़ी है। BJP बोली: असम सरकार ST दर्जा दिलाकर रहेगीअसम BJP के राज्य महासचिव और असम पर्यटन विकास निगम (ATDC) के अध्यक्ष रितुपर्णा बरुआ कहते हैं, 'सिर्फ टी-ट्राइब्स ही नहीं, कुल 6 कम्युनिटीज ST दर्जा मांग रही हैं। सरकार ने इसके लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स बनाया है। सभी कम्युनिटी के लीडर्स से चार राउंड बातचीत हो चुकी है। GoM ने रिपोर्ट भी दे दी है। असम सरकार भी यही चाहती है कि इन सभी 6 कम्युनिटी को ST दर्जा मिले। हम उसके लिए काम कर रहे हैं।' मेहनताने को लेकर बरुआ कहते हैं कि अगले तीन सालों में इसे बढ़ाकर 500 करने का हमारा वादा है। इसे हर हाल में पूरा करेंगे। वहीं, कांग्रेस लीडर गोपाल शर्मा का कहना है कि इनकी ST दर्जे की मांग को लेकर पार्टी का स्टैंड बिल्कुल साफ है, जो लोग तय क्राइटेरिया पूरा करेंगे, उन्हें दर्जा दिया जाएगा। अगर हमारी सरकार बनती है तो मजदूरी बढ़ाने समेत बाकी मांगों पर भी विचार करेंगे। ………………. ये खबर भी पढ़ें… गांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
नेपाल ने ऊर्जा संकट से निपटने का बनाया प्लान, 2 दिन की छुट्टी का ऐलान
पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से तमाम देश फ्यूल संकट से बचने के उपाय ढूंढ रहे हैं। इस फेहरिस्त में नया नाम नेपाल का जुड़ गया है
व्हाइट हाउस ने ट्रंप के अस्पताल में भर्ती होने की खबरों को बताया झूठ
व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही उन अटकलों को खारिज किया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अस्पताल में भर्ती किए जाने की बात कही जा रही थी
व्हाइट हाउस के पास लाफायेट पार्क में गोलीबारी, बढ़ाई गई सुरक्षा
अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने रविवार तड़के लाफायेट पार्क के पास गोलीबारी की सूचना मिलने पर कार्रवाई की, जिससे तहत व्हाइट हाउस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई
ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव ठुकराया, ‘स्थायी अंत’ को लेकर ये है शर्त
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बयान जारी करते हुए कहा कि तेहरान किसी तात्कालिक युद्धविराम से संतुष्ट नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान संघर्ष को “अवैध युद्ध” करार देते हुए ईरान ऐसी समाप्ति चाहता है जो दीर्घकालिक शांति की गारंटी दे।
ईरानी कमांडर ने बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने पर अमेरिका-इज़रायल को विनाशकारी कार्रवाई की धमकी दी
ईरान के एक शीर्ष कमांडर ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या इज़रायल ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला करते हैं
ईरान ने अमेरिकी हवाई ताकत को दी चुनौती, नई रक्षा प्रणाली बनी चर्चा का केंद्र
ईरानी सेना ने इन हमलों की सफलता का श्रेय अपनी नई विकसित हवाई रक्षा प्रणाली को दिया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने संकेत दिया है कि हाल ही में अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को मार गिराने में इसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
होर्मुज स्ट्रेट संकट: अमेरिका से अलग होकर दुनिया के देश खुद कर रहे हैं समाधान की कोशिश
दुनिया के कई बड़े देश होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुए संकट को संभालने के लिए अब अमेरिका के बिना ही आगे बढ़ रहे हैं
कुवैत में ड्रोन अटैक: वित्त मंत्रालय पर भारी नुकसान
कुवैत में वित्त मंत्रालय पर ड्रोन से हमला किया गया जिससे इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है जबकि शुवैख जिले में एक तेल रिफाइनरी में आग लग गई
7वीं सदी का एक किस्सा है। एक रात मालाबार के राजा चेरामन को सपना आया। उन्होंने देखा कि आसमान में चांद के दो टुकड़े हो गए हैं। अगले दिन राजा ने दरबार में ज्योतिषियों को बुलवाया और सपना समझने की कोशिश की, लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए। तभी अरब से आए कुछ मुस्लिम व्यापारी उनसे मिलने आ गए। राजा ने उन्हें अपने सपने के बारे में बताया। व्यापारियों ने राजा को मक्का-मदीना के पैगंबर मोहम्मद के बारे में बताया और कहा कि यह उन्हीं का चमत्कार होगा। राजा ने कहा, ‘मैं पैगंबर से मिलना चाहता हूं।’ मुस्लिम व्यापारी ये सुन काफी खुश हुए और मक्का-मदीना जाने की तैयारी करने लगे। राजा ने भी अपने दरबारियों को राज-पाट का काम सौंप दिया। इसके बाद राजा, व्यापारियों के साथ समुद्र के रास्ते नाव पर सवार होकर मक्का के लिए निकल पड़े। मक्का-मदीना पहुंचकर राजा पैगंबर मोहम्मद से मिले। कुछ समय उनके साथ रहे। वे यहां मौजूद दुनिया की पहली मस्जिद ‘अल-हरम’ में गए। पैगंबर से प्रभावित होकर राजा चेरामन ने इस्लाम अपना लिया और मुस्लिम बन गए। पैगंबर ने उन्हें नया नाम दिया- ‘ताजुद्दीन’। यानी ‘धर्म का मुकुट’। राजा चेरामन अपने देश लौटने के लिए जमीनी रास्ते से रवाना हुए। लेकिन बीच रास्ते में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। ओमान पहुंचते ही उनकी मृत्यु हो गई। बीमारी के दौरान राजा को पहले ही एहसास हो गया था कि वे जिंदा नहीं बचेंगे। इसलिए उन्होंने एक खत लिखा और इस्लामिक विद्वान मलिक बिन दीनार को सौंप दिया। दीनार कुछ वक्त बाद मालाबार पहुंचे। उन्होंने राजा चेरामन के अधिकारियों को खत सौंपा। खत में राजा का आदेश था- ‘कोडंगलूर में वीरान पड़े एक बौद्ध विहार की जगह पर मस्जिद बनाई जाए।’ अधिकारियों और दीनार ने राजा के नाम पर 629 ईस्वी में चेरामन जुमा मस्जिद बनावई। यानी आज से 1400 साल पहले एक हिंदू राजा ने केरलम में भारत की पहली और दुनिया की दूसरी मस्जिद बनवाई थी और यहीं से केरलम में इस्लाम धर्म फैला। अभी केरलम में चुनाव है और यहां की 140 में से 32 सीटों पर मुस्लिम विधायक हैं। यहां की 26.5% आबादी मुस्लिम है। यानी केरलम के चुनाव में मुस्लिम एक अहम कड़ी है। आज इस स्टोरी में जानेंगे, भारत की इसी पहली मस्जिद की कहानी… हिंदू राजा ने पैगंबर को अदरक का अचार दिया चेरामन जुमा मस्जिद के वाइस प्रेसिडेंट बशीर भी हिंदू राजा चेरामन के मस्जिद बनवाने और पैगंबर मोहम्मद से मिलने की यही कहानी बताते हैं। राजा की इस यात्रा का जिक्र अरबी पांडुलिपि ‘किस्सत शकरवती फार्माद’ में भी मिलता है, जिसे ‘महान चेरा शासक की कहानी’ माना जाता है। त्रावणकोर राजवंश की राज्यभिषेक परंपरा में भी चेरामन की मक्का-मदीना यात्रा के सबूत हैं। राज्याभिषेक में एक वाक्य बोला जाता रहा है- ‘मैं यह तलवार तब तक रखूंगा, जब तक मक्का गए चाचा वापस नहीं आ जाते।’ यहां चाचा राजा चेरामन को कहा गया है। राजा की पैगंबर से मुलाकात का एक और दिलचस्प किस्सा है। पैगंबर के साथ रहने वाले इस्लामिक विद्वान अबू सईद अल खुदरी ने अपनी किताब ‘अल मुस्तदरक’ में इसका जिक्र किया- ‘भारत के एक राजा ने पैगंबर मोहम्मद को एक मर्तबान, यानी चीनी मिट्टी का बर्तन भेंट किया। इसमें अदरक का अचार था। पैगंबर ने इसे अपने साथियों में बांटा और मुझे भी एक टुकड़ा खाने को मिला।’ इस्लाम से पहले ईसाई धर्म पहुंचा केरलम मानसून पर सवार होकर केरलम पहुंचा इस्लाम मुस्लिम महिलाएं भी पहनती हैं मंगलसूत्र घोड़ों पर सवार होकर मुस्लिम उत्तर भारत पहुंचे भारत की पहली मस्जिद का केरलम की राजनीति पर असर ******* References- ------------ केरलम चुनाव से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए… ब्रेस्ट ढंकने के लिए टैक्स देती थीं केरलम की महिलाएं: विरोध में नंगेली ने अपने स्तन काट लिए; आज भी 50+ सीटों पर इसका असर साल 1803 यानी आज से करीब 223 साल पहले। केरलम के चेरथला नगर में ऐझावा जाति की एक मजदूर महिला की झोपड़ी के सामने राजमहल से एक टैक्स जमा करने वाला पहुंचा। महिला ने उसे वहीं रुकने के लिए कहा और झोपड़ी में चली गई। कुछ मिनट बाद जब वह बाहर निकली, तो उसके सीने से दोनों स्तन कटे हुए थे। उसने खून से लथपथ स्तनों को एक पत्ते पर रखकर टैक्स कलेक्टर की तरफ बढ़ा दिए। पूरी खबर पढ़ें…
महाराष्ट्र में नासिक से करीब 65 किमी दूर शिरडी हाईवे पर मीरगांव है। यहीं प्रसिद्ध ईशान्येश्वर महादेव मंदिर है। 18 मार्च को स्वयंभू बाबा अशोक खरात के 58 अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद ये मंदिर और गांव चर्चा में आ गए। खरात ने 2010 में ईशान्येश्वर मंदिर बनवाया था। करीब 3 एकड़ में फैले इस मंदिर में कभी नेता और अफसर आते थे, अब सन्नाटा है। 20 एकड़ में बना फार्महाउस पुलिस की निगरानी में है। करीब 18 करोड़ रुपए का विला ‘ब्रह्मसदन’ सील हो चुका है। बीते 17 दिन में खरात के खिलाफ 10 केस दर्ज हुए। इनमें 8 सेक्सुअल हैरेसमेंट के हैं। SIT जांच कर रही है। अब तक बाबा की 1500 करोड़ की संपत्ति का खुलासा हुआ है। उसका बेटा हर्षवर्धन पुलिस हिरासत में है और पत्नी कल्पना फरार है। दैनिक भास्कर की टीम अशोक खरात उर्फ कैप्टन बाबा के फार्महाउस में पहुंची। ईशान्येश्वर मंदिर के पुजारी, गांववालों और खरात के भाई से बात की। भाई अब खरात से रिश्ता नहीं रखना चाहते, वे बोले कि उसने हमें बदनाम कर दिया। VIP के साथ अकेले पूजा करता था खरात, पुजारी को भी मंदिर में एंट्री नहीं हम मंदिर पहुंचे तो 2-3 लोग ही मिले। गर्भगृह में अंधेरा था। पुजारी भी नहीं थे। मंदिर में मिले लोगों ने बताया कि पहले रोज 100 से 150 भक्त दर्शन के लिए आते थे। खरात के वीडियो वायरल होने के बाद कोई नहीं आता। एक पुजारी सुबह और रात में आरती करने आते हैं। पुलिस के डर से यहां रुकते नहीं हैं। लोगों से पता लेकर हम पुजारी के घर पहुंचे। परिवार की सुरक्षा और पूछताछ के डर से उन्होंने ऑफ कैमरा बात की। वे कहते हैं, ‘मैं मध्यप्रदेश के जबलपुर का रहने वाला हूं। खरात पर भरोसा करके घर छोड़कर यहां आया था। 2022 से मंदिर में पूजा कर रहा हूं। हर महीने 16 हजार रुपए मिलते थे। अब कोई हालचाल पूछने वाला भी नहीं है। मन करता है कि सब छोड़कर घर लौट जाऊं, लेकिन पुलिस पूछताछ पूरी होने तक गांव नहीं छोड़ सकता।’ ‘मेरी 2 बेटियां हैं। बड़ी बेटी 21 साल की है। उसकी शादी की बात चल रही है। डर है कि इस केस की वजह से शादी में अड़चन न आ जाए। 15 दिन से यहां कोई नहीं आया। न दान मिल रहा है न तनख्वाह।’ क्या बाबा मंदिर में भी महिलाओं से मिलता था, कोई खास पूजा कराता था? इस सवाल पर पुजारी कहते हैं, ‘नहीं। देवस्थान पर कभी कुछ गलत नहीं हुआ। खरात यहां बहुत कम आते थे। कोई बड़ा नेता या VIP आता, तब विशेष पूजा करवाते थे। गर्भगृह का दरवाजा बंद करवा लेते थे। अंदर क्या होता था, मुझे नहीं पता।’ फार्महाउस के स्टाफ से 8 घंटे पूछताछ, अब मेन गेट पर तालाईशान्येश्वर महादेव मंदिर से सटा अशोक खरात का फार्महाउस ब्रह्मसदन है। 18 मार्च को खरात की गिरफ्तारी के बाद SIT ने यहां छापा मारा था। केयरटेकर, मैनेजर और सिक्योरिटी गार्डों से 8 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान पुलिस को एक रिवॉल्वर, 21 कारतूस और विजिटर बुक मिली। इससे पता चला कि यहां बड़े नेता और VIP आते-जाते थे। फार्महाउस के मेन गेट पर ताला लगा है। अंदर कुछ लोग दिखे। आवाज लगाने पर केयरटेकर बालाजी आया। बोला कि पुलिस ने बिल्डिंग सील कर दी है। अंदर आना मना है। हमारा ड्राइवर मीरगांव के पास ही सिन्नर तालुका का रहने वाला था। वो केयरटेकर को जानता था। इसलिए उसने गेट खोल दिया। अंदर पूरा फार्महाउस उन्हीं काले पत्थरों और ग्लास से बना है, जिनका इस्तेमाल ईशान्येश्वर मंदिर में हुआ था। बालाजी ने बताया कि पुलिस वाले बंगले की चाबी ले गए हैं। आप सिर्फ गार्डन एरिया और फार्म ही देख सकते हैं। गार्डन एरिया में चीकू, बेल, अंगूर और रसबेरी के पेड़ लगे हैं। बालाजी ने बताया कि साहब महीने में दो से तीन बार यहां आते थे। कभी परिवार के साथ, कभी मीटिंग करने दोस्तों के साथ। इनमें महिलाएं भी होती थीं। वे यहां आते थे, तब नौकरों के अलावा कोई अंदर नहीं जाता था।’ आम के 5 हजार पेड़ों का बाग, गांव वाले बोले- बाबा ने हमारी जमीन कब्जाईखरात का फार्महाउस मीरगांव के पास बहने वाली जामनदी के किनारे बना है। इससे सटे बाग में आम के 5 हजार पेड़ हैं। 15 एकड़ में फैले इस फार्म के लिए सीधे नदी से पानी आता है। बाग में वाटर पंपिंग स्टेशन भी है। मीरगांव के लोग खरात पर नदी का बहाव बदलने और उस पर कब्जा करने का आरोप लगाते हैं। गांव के राहुल शेलके बताते हैं, ‘साल 2004-05 में अशोक खरात यहां आए थे। उन्होंने मीरगांव, सिन्नर तालुका और आसपास के गांवों में 5-5 एकड़ करके करीब 50 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदी। सबसे पहले ईशान्येश्वर मंदिर बनवाया। धीरे-धीरे मंदिर का नाम हो गया। बड़े-बड़े नेता और उद्योगपति दर्शन करने आते थे।’ ‘बाबा मीरगांव में साधारण जमीन खरीदार की तरह आया था, लेकिन मंदिर बनवाने के बाद बड़ा आदमी बन गया। उसने जामनदी और ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर लिया। तीन साल पहले नदी के किनारे जाली लगाकर हमारा रास्ता बंद कर दिया। हमने पुलिस में शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।’ हालांकि वावी पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक गणेश शिंदे ने बताया कि पुलिस के पास गांववालों की कोई शिकायत नहीं आई। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 2020 में महाराष्ट्र सरकार ने अशोक खरात के शिवनिका संस्थान को 39 लाख लीटर पीने का पानी गांव से करीब 50 किलोमीटर दूर दारणा बांध से देने का फैसला किया था। फिलहाल, पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। अशोक खरात की लाइफस्टाइल पर गांव के शिवा हिंगे कहते हैं, ‘जब वो गांव में आता था, लगता था कि बड़ा कार्यक्रम होने वाला है। काला चश्मा, सदरी और सफेद कुर्ते में बिल्कुल नेता लगता था। उसके काफिले में मर्सिडीज, BMW और फॉर्च्युनर जैसी गाड़ियां चलती थीं।’ खरात के सौतेला भाई बोले- उसने हमें बदनाम किया, अब कोई रिश्ता नहींमीरगांव से 8 किलोमीटर दूर कहांडलवाडी में अशोक खरात का पुश्तैनी घर है। उसके पिता एकनाथ खरात की दो पत्नियां थीं। पहली पत्नी से दो और दूसरी पत्नी से चार बेटे हुए। खरात 6 भाइयों में दूसरे नंबर का है। उसके सौतेले भाई दत्तू खरात से भी पुलिस पूछताछ कर चुकी है। दत्तू को डर है कि उन पर भी कार्रवाई न हो जाए। इसलिए उन्होंने हमसे ऑफ कैमरा बात की। वे कहते हैं, ‘अशोक साल में एक या दो बार ही गांव आते थे। खासकर जब कोई फंक्शन होता था। 15 से 20 मिनट ही रुकते थे। उनका परिवार वालों से कोई खास संबंध नहीं था। तीन महीने पहले एक शादी में उनसे मिला था।’ ‘हमारा अनार का बगीचा है। आमदनी कम है, लेकिन आज तक उनसे एक रुपया नहीं लिया। उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस और मीडियावाले हमसे पूछताछ करने आ रहे हैं। परिवार की बदनामी हो रही है। हमारा अब उनसे कोई रिश्ता नहीं है।’ ‘पारस’ का लालच देकर कारोबारी से 5 करोड़ ठगे, SDM से पार्टनरशिप केस की जांच कर रही SIT के एक सीनियर ऑफिसर बताते हैं, ‘खरात के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी खातों के जरिए लेन-देन और जमीन हड़पने जैसे अपराधों का पता चला है। उसने तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को ठगा और 1500 करोड़ रुपए की संपत्ति बना ली।’ ‘खरात ने पारस की शक्ति दिलाने के नाम पर पुणे के बिजनेसमैन राजेंद्र जासूद से 2018 से 2025 के बीच करीब 5 करोड़ रुपए ठगे। राजेंद्र ने खरात को 90 लाख की मर्सिडीज कार और अमेरिका में इलाज के नाम पर लाखों रुपए दिए। नासिक के पाथर्डी में करीब 1 एकड़ जमीन के दस्तावेजों पर SDM अभिजीत भांडे पाटिल की पत्नी प्रीति भांडे पाटिल और खरात की बेटी तृप्तबाला के नाम जॉइंट पार्टनर के तौर पर दर्ज हैं। इस खुलासे के बाद SDM अभिजीत को पद से हटा दिया गया है।’ महाराष्ट्र पुलिस के मुताबिक, अशोक खरात, उसकी पत्नी, बेटी और दूसरे रिश्तेदारों के नाम पर अहिल्यानगर और नासिक जिले में 30 से ज्यादा प्लॉट और जमीन खरीदी गई हैं। इनकी अनुमानित कीमत 500 से 800 करोड़ रुपए हो सकती है। खरात के बैंक खातों से करीब 100 करोड़ रुपए दुबई ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है।’ खरात की पत्नी कल्पना पर शिरडी में 4 एकड़ की जमीन की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी का आरोप है। जमीन के मालिक रावसाहेब गोंडकर ने कल्पना और शिरडी में उनके मीडिएटर अरविंद बावके, किरण सोनवणे और अशोक तांबे के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। गोंडकर का दावा है कि उसने खरात से कर्ज लिया था, लेकिन कर्ज और ब्याज के नाम पर उनकी जमीन हड़प ली। नासिक पुलिस इस मामले में कल्पना की तलाश कर रही है। …………………………अशोक खरात पर ये स्टोरी भी पढ़ेंकैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर...
8 साल से हिंदी फिल्में नहीं देखी। कैसे देखूं? जिस फिल्म में 7-8 साल का कोई बच्चा दिखता है, मेरा अपना बेटा ‘माही’ उसमें दिखने लगता है। रास्ते में चलते-फिरते भी यदि कोई गोरा-चिट्ठा बच्चा दिख जाए, तो जी करता है- दौड़ गले लगा लूं। मेरी ऐसी कोई रात नहीं बीतती, जब आंसुओं से तकिया गीली न होता हो। पिछले चार साल कहीं भी जाती हूं तो अक्सर मुझसे पूछा जाता है- रश्मि, आपके कितने बच्चे हैं? दो बच्चे… कहना चाहती हूं, लेकिन यह बात जुबान पर आते-आते ठहर जाती है। फिर बोलती हूं- एक बेटी है। सोचती हूं- दो बच्चे बताऊंगी तो लोग सवाल पूछेंगे कि- दूसरा बच्चा कहां है? पति क्या करते हैं और कहां रहते हैं? लेकिन सच यह है कि मेरी कोख ने दो बच्चे को जन्म दिया। दूसरे बच्चे की मां होने का सुख पति ने छीन लिया। मैं रश्मि सहगल, दिल्ली की रहने वाली हूं। पैदा तो एक बड़े खानदान में हुई, लेकिन 15 साल की उम्र के बाद अनाथालय में पली। चौथी क्लास में थी, तभी पापा की मौत हो गई थी। कैसे हुई थी, पता नहीं। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा- आपकी मां ने पैसे के लिए आपके पापा को मार दिया। जबकि मां बताती हैं कि पापा को कैंसर था। खैर… पापा की मौत के बाद मां ने एक अमीर आदमी से दूसरी शादी कर ली। उनके साथ सौतेले पापा के यहां रहने लगी थी। 5वीं से 10वीं की पढ़ाई वहीं की। वहां मुझे हर रोज एहसास कराया जाता कि सौतेले पापा के पास रह रही हूं। हर बात पर टोका जाता। कहीं जाने-आने पर मनाही थी। कई बार तो कोई चीज अनजाने में टूट जाती, तो खूब पिटाई की जाती। बच्ची थी, कम समझती थी इसलिए सोचती कि मां-बाप तो बच्चे को मारते ही हैं। बड़ी हुई, तो पता चला कि सौतेले पापा मुझे जान-बूझकर मारते थे। अक्सर मुझे गंदे तरीके से छूते भी थे। एक दिन उन्होंने मेरी खूब पिटाई की। बेल्ट से मारा। एक हाथ की चमड़ी उधड़ गई। मारते हुए मां से कहा- इसे अभी घर से निकालो, वर्ना तुम्हें भी घर में नहीं रहने देंगे। उस समय रात के 10 बज रहे थे। मां ने मेरे खून से सने हाथ को पकड़ा और घर से बाहर कर दिया। फौरन अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। पूरी रात घर के बाहर बैठी रही कि शायद मम्मी का कलेजा पसीजेगा और वह मुझे भीतर बुला लेंगी। सुबह के लगभग 4 बज गए, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। मेरे हाथ से खून अब भी निकल रहा था। मैंने दुपट्टा फाड़ा और हाथ में लपेट लिया। घर से कुछ किलोमीटर की ही दूरी पर हमारी मेड का घर था। सुबह होते ही मैं उनके यहां चली गई। मुझे देखकर मेड डर गईं। कहने लगीं- क्या हुआ रश्मि? तुम यहां क्या कर रही हो? मेरे मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी। हकलाते हुए बोली, मम्मी-पापा ने घर से निकाल दिया। कुछ दिन आप अपने यहां मुझे रहने देंगी? कुछ देर बाद मेड बोली- नहीं, नहीं। तुम जवान हो। इस तरह किसी के घर कैसे रह सकती हो? जाओ अपने घर जाओ। यह कहते हुए उन्होंने भी दरवाजा बंद कर लिया। उसके बाद घर के पास एक अनाथालय था, वहां पहुंची। अनाथालय में मुझे रहने को जगह मिली। फिर वहीं रही और 12वीं तक पढ़ाई की। एक कंपनी में रिसेप्शनिस्ट की जॉब लग गई। यहीं पर एक कश्मीरी लड़के से मुलाकात हुई। वह बहुत हैंडसम लड़का था। उस ऑफिस की सारी लड़कियां उस पर फिदा थीं। 2014 की बात है। धीरे-धीरे हम दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। एक-दूसरे से मिलने लगे। बचपन में पिता की मौत, फिर मां के होते हुए भी मैंने अनाथ की जिंदगी जिया था। मुझे लगा कि- अब हर खुशी मिलने वाली है- पत्नी का सुख। मां बनने का सपना और अपना घर-परिवार, लेकिन किसे पता था कि यह खुशी ज्यादा दिन नहीं रहने वाली। उस लड़के ने कहा- अगर तुम्हें मेरे साथ शादी करनी है, तो इस्लाम को मानना होगा। मेरे पास कोई दूसरा चारा नहीं था- मैंने हां कह दिया। उसके बाद बुरका, पांच वक्त की नमाज… सब करने लगी। फिर हम दोनों कश्मीर चले गए। वहां मुस्लिम रीति-रिवाज से हमारी शादी हुई। कुछ ही महीने वहां रही, फिर पति के साथ दुबई चली गई। वहां पहुंचते ही पति का रवैया बदलने लगा। हर रोज गाली-गलौज, मार-पिटाई करने लगे। घर से निकल जाने को कहते। मन-ही-मन सोचती- हे भगवान! जिंदगी कितनी परीक्षा लेगी! पहले सौतेला बाप ने मार-पीटकर भगाया और अब पति भगाना चाहता है। किसी तरह रिश्ता निभाती रही। 2015 आते-आते गर्भवती हुई। पति को पता चला तो वह कहने लगे- अभी बच्चा नहीं पैदा करना है। इसे गिरा दो। सुनकर घबरा गई कि- एक बाप कोख में पल रहे अपने बच्चे को गिराने के लिए कह रहा है! लेकिन मैं अड़ गई, बोली- बच्चे पैदा करूंगी। 6-7 महीने की गर्भवती थी तब पति मेरे साथ संबंध बनाने की जिद करते थे। कहते - शौहर हूं, जब चाहूं संबंध बना सकता हूं। मैं मना नहीं कर पाती थी। जिद करके मेरे साथ संबंध बनाता। उससे मेरी प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ गई। बच्चे के पैदा होने की तारीख नजदीक आई और जब तेज दर्द हुआ तो हॉस्पिटल लेकर गए। डॉक्टर ने फौरन कहा- सर्जरी करके बच्चा निकालना होगा। उस वक्त भी मेरे पति बार-बार कह रहे थे- डॉक्टर नॉर्मल डिलीवरी होने दीजिए। डॉक्टर ने समझाया नॉर्मल डिलीवरी का इंतजार करोगे, तो जच्चा-बच्चा दोनों की जान जा सकती है। तब मेरे पति माने। डॉक्टर ने सर्जरी की। बेटी पैदा हुई, सुनते ही पति के होश उड़ गए। कहने लगा- क्या ही पैदा किया तुमने। बेटी जनमी हो। मेरे सास-ससुर भी कश्मीर से दुबई आ गए। सर्जरी के दूसरे दिन ही अस्पताल से घर आ गई। बच्ची को दूध पिलाने से लेकर डायपर लाने तक सब काम करना पड़ता। पेट में टांके कच्चे थे, घाव खुल गया और उसमें पस भर गई। उस दौरान भी सास-ससुर कोई मदद नहीं कर रहे थे। एक दिन तो अपने पति से डायपर लाने को बोली तो उन्होंने गुस्से में आकर मेरे मुंह पर थूक दिया और कहा- जानती हो कि तुम्हारी औकात क्या है? न तुम्हारे बाप का पता है, न घर का। सड़क से उठकर महल में आ गई हो। उस दिन समझ गई कि अब भी मैं अकेली हूं। पति का बेटी से कोई लगाव नहीं था। वह कुछ तय रकम दे देते। उसी में बच्चे और खुद की देखभाल करती। दो साल बाद, 2017 में बेटे माही का जन्म हुआ। तब लगा कि अब शायद सब ठीक हो जाएगा। देखभाल के लिए फिर से मेरी सास दुबई आ गईं। वह अक्सर कहतीं- तुम्हारे बच्चे मेरे हाथ से कुछ नहीं खाते, तुम ही इन्हें संभालो। दोनों बच्चों की जिम्मेदारी मुझ पर ही थी। आज भी वह हिजाब मेरे पास है, जिसमें गांठ बांधकर मैं अपने बेटे को पेट से बांधकर रखती थी। पेट पर बांधे हुए उसे दूध पिलाती और बेटी को खाना खिलाती। एक बार भी सास नहीं कहती कि लाओ मैं संभाल दूं। बस मुझे इतना भरोसा था कि बेटा अब बड़ा हो रहा है, शायद सब ठीक हो जाएगा। 2022 की बात है। उस वक्त हम पति-पत्नी सिंगापुर चले गए। वहां रोज दोनों बच्चों को स्कूल छोड़ने जाना पड़ता। सुबह पति को जगाती तो झगड़ पड़ते। एक दिन मैंने पति से कहा- मुझे ड्राइविंग सिखा दो, ताकि बच्चों को स्कूल छोड़ सकूं। उसके बाद मैंने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई किया। जिस दिन ड्राइविंग टेस्ट था, मेरे पति ने मुझे कार देने से इनकार कर दिया। मैं कार के सामने खड़ी गिड़गिड़ाती रही। चाबी देने को कहती रही, लेकिन उसने एक नहीं सुनी। जाते वक्त मेरे पैर पर कार चढ़ाते हुए ऑफिस निकल गए। सोचा जिस इंसान को मेरी बिल्कुल कद्र नहीं, उसके साथ रहना बेकार है। 2021 आते-आते हालात और बिगड़ गए। पुलिस के पास भी नहीं जा सकती थी। जाती, तो वापस उसी घर में आना होता और फिर से वही मार-पिटाई होती। बेटा हर वक्त पति के साथ ही रहता था। एक रात पति ने मुझे और मेरी बेटी को घर से धक्का मारकर निकाल दिया। उसे लगा कि हर बार की तरह रोऊंगी और वापस लौट जाऊंगी, लेकिन उस दिन मैंने ऐसा नहीं किया। रात में ही दोस्तों को फोन करके उधार पैसे मांगे। फ्लाइट का टिकट कराया और बेटी के साथ दिल्ली लौट आई। कुछ दिनों तक अपने एक जानने वाले के यहां रही, फिर नौकरी करने लगी। कोई रेंट पर मकान देने को तैयार नहीं था। पूछते थे- पति क्या करते हैं? कहां रहते हैं? बताती- हम मां और बेटी हैं। पति नहीं हैं। मकान मालिक कमरा देने से इंकार कर देता। बड़ी मुश्किल से एक फ्लैट मिला। जो बेटी सिंगापुर में पढ़ रही थी, उसे दिल्ली में कोई स्कूल एडमिशन देने को तैयार नहीं था। सभी स्कूल बच्चे के पिता की डिटेल्स मांग रहे थे। बड़ी मुश्किल से एक स्कूल में एडमिशन मिला। वहां महीने की फीस 15 हजार थी और मेरी सैलरी 30 हजार। करीब एक साल तक वहां पढ़ाया, फिर स्कूल ने फीस न जमा करने से बेटी को निकाल दिया। उसके बाद बेटी बीमार पड़ने लगी। जो भी पैसा मेरे पास था और ज्वैलरी थी, बेचकर उसका इलाज करवाने लगी। हर रात बेटी के साथ बेटे माही की याद आती है। कई बार मैंने उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन पति बात नहीं कराता। धमकी देते हुए कहता- दिल्ली में हो, चैन से रहो, नहीं तो इतने टुकड़े काटूंगा कि गिनती भी नहीं हो पाएगी। उसी दौरान मेरी भी तबीयत बहुत खराब हो गई। अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ गई। मैं बेटी को कुछ दिनों के लिए अपनी मां के पास छोड़ने के लिए लाजपत नगर गई, लेकिन मां ने दरवाजा बंद कर लिया और सीधे मना कर दिया- यहां मत आना। बीमार होने की वजह से मेरी नौकरी छूट गई। उस वक्त लोग सलाह देने लगे- दूसरी शादी कर लो। बच्ची के चक्कर में जिंदगी क्यों खराब कर रही हो, जिसका बच्चा है, उसे दे दो, लेकिन उन्हें क्या पता, मैं अपनी बेटी के लिए ही जी रही हूं। उस वक्त बेटी कुछ मांगती, तो कोई बहाना बना लेती। उससे सच बताने की हिम्मत नहीं होती। जब नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाती तो बेटी फोन करके पूछती- मां, नौकरी लगी? मैं हंसकर कहती- नहीं बेटा। मन-ही-मन सोचती- आज फिर उसे पिज्जा खिलाने और फिल्म दिखाने का वादा पूरा नहीं कर पाऊंगी। ऐसे ही चार महीने गुजर गए। तब जाकर फिर से एक नौकरी लगी। अब सिर्फ बेटी के लिए जी रही हूं। सिंगल मदर हूं। कई बार तो सोचकर ही कांप जाती हूं- अगर मुझे कुछ हो गया, तो मेरी 10 साल की बेटी का क्या होगा? बेटी का नाम लॉरिन है। मेरा बस एक ही सपना है कि उसे पढ़ा-लिखा दूं, उसके लिए एक घर बना दूं, जिसके गेट के बोर्ड पर लिखा हो- ‘लॉरिन हाउस’, ताकि कभी कोई उसे ताना दे, घर से निकाले तो वह कह सके- मेरा अपना भी घर है। बेटे की शक्ल देखे हुए सालों हो गए हैं। मुझे नहीं पता कि वह कहां है? किस देश में है? पति दूसरी शादी कर चुका है। शायद अब ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है। मैंने कई बार कश्मीर जाकर बेटे को तलाशने की कोशिश की। बहुत पहले वह एक बार मिला भी था। कश्मीर मानवाधिकार आयोग की मदद से। तब मैंने उससे गले लगकर कहा था- मैं तुम्हारी नजर में अपराधी हो सकती हूं। जब कभी लौटने का मन हो तो लौट आना। मुझे जितना मारने का मन करे, मार लेना। हूं तो तुम्हारी मां। जहां रहो खुश रहो। मेरे पास उसकी एक भी तस्वीर नहीं है। 5 साल हो गए हैं, उसकी शक्ल नहीं देखी है। हर दिन यही सोचती हूं कि आज भी बेटे की कोई खबर नहीं है। पति ने घर से निकालते वक्त धमकी दी थी कि बेटी से ही संतोष करना, वर्ना उसे भी छीन लूंगा। (रश्मि सहगल ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर नीरज झा से साझा किए) --------------------------------------- 1- संडे जज्बात-उन्होंने हेलिकॉप्टर से लाश भेजी, हम ट्रेनें भर देंगे:दिल्ली वालों ने पीट-पीटकर मार डाला मेरा बेटा, क्योंकि हमारी शक्ल अलग है मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
6 मार्च, 2026, जगह- केरलम का इडुक्की। कॉलेज इवेंट में पहुंचे राहुल गांधी से एक स्टूडेंट ने 'द केरल स्टोरी-2' के बारे में पूछा कि हम इस तरह के नैरेटिव और फिल्मों को कैसे देखें, जो हमारे राज्य की छवि खराब करती हैं। राहुल ने जवाब दिया, ‘यह अच्छी खबर है कि थिएटर हॉल खाली हैं। कोई इसे देख नहीं रहा है।’ प्यार का झांसा देकर लड़कियों का धर्म बदलवाने के प्लॉट पर बनी ‘द केरल स्टोरी’ विवादों में रही। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे BJP की प्रोपेगैंडा फिल्म बताते हुए बैन कर दिया। हाईकोर्ट ने इसे रिलीज करने का आदेश दिया, लेकिन सिनेमा हॉल मालिक इसे दिखाने को तैयार नहीं हुए। 9 अप्रैल को केरलम में विधानसभा की 140 सीटों के लिए वोटिंग होनी है। द केरल स्टोरी चुनाव में मुद्दा है, लेकिन लोग और नेता इस पर बंटे हैं। धर्म परिवर्तन के दावे करने वाले संगठनों का कहना है कि किरदार और किस्से अलग हो सकते हैं, लेकिन ऐसी कहानियां यहां भरी पड़ी हैं। 6 जिलों में सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन, यहां विधानसभा की 70 सीटें इस वक्त केरलम में महाकुंभ से वायरल हुई मोनालिसा की भी चर्चा में है। मोनालिसा ने बॉयफ्रेंड फरमान खान से केरल के एक मंदिर में शादी की है। राज्य में सरकार चला रही पार्टी CPM के सीनियर लीडर थॉमस आइजैक ने शादी की फोटो पोस्ट करते हुए लिखा कि यह रियल केरल स्टोरी है। केरलम के 6 जिलों कासरगोड, कोझिकोड, त्रिशूर, मलप्पुरम, कन्नूर और पलक्कड़ में धर्म परिवर्तन के सबसे ज्यादा मामले आते हैं। इनमें त्रिशूर के अलावा सभी जिलों में 30% से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। इन जिलों में केरलम की आधी, यानी 70 सीटें हैं। इनके अलावा एर्नाकुलम, तिरुवनंतपुरम और अलेप्पी के कुछ हिस्सों में भी ऐसे केस आते रहते हैं। BJP यहां CM पिनराई विजयन की बेटी की मुस्लिम से शादी करने का मुद्दा उठाती है। केरलम की सड़कों या रैलियों में द केरल स्टोरी की भले कम चर्चा है, लेकिन इसकी धमक जरूर है। लोग दबी जुबान से कहते हैं कि इससे हिंदू और क्रिश्चियन दोनों पीड़ित हैं। दो केस, जिन्हें हिंदूवादी संगठन केरल स्टोरी का सच बता रहे 1. सोना एल्डहोस: मुस्लिम लड़के से प्यार, धोखा मिलने पर सुसाइड एर्नाकुलम से करीब 50 किमी दूर पुथुपाडी की रहने वाली सोना एल्डहोस ने 9 अगस्त को घर में सुसाइड कर लिया। 23 साल की सोना ने सुसाइड नोट में रमीज का नाम लिखा। वह उसके साथ रिलेशनशिप में थी। 24 साल का रमीज कोच्चि एयरपोर्ट पर काम करता था। हिंदू ऐक्य वेदी के प्रेसिडेंट आरवी बाबू दावा करते हैं कि रमीज की शादी हो चुकी थी। उसके दो बच्चे थे। उसने ये बातें छिपाईं और सोना को शादी का झांसा दिया। सोना तब कॉलेज में पढ़ती थी। रमीज ने उसके साथ शारीरिक संबध बनाए। उसे कैद में भी रखा। पुलिस ने इस केस में रमीज और उसके माता–पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रमीज की कुछ वॉट्सऐप चैट मिली हैं, जिसमें वह सोना पर इस्लाम अपनाने का दबाव बना रहा था। रमीज के खिलाफ ड्रग्स के भी 7 केस दर्ज थे। रमीज सोना से कहता था कि तुम्हें पोन्नानी भेज दूंगा। मल्लपुरम जिले के पोन्नानी को मालाबार का मक्का कहा जाता है। यह 16वीं शताब्दी से इस्लामिक तालीम का सेंटर रहा है। मौनतुल इस्लाम सभा यहां की पुरानी संस्था है, जिसे आधिकारिक तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए मान्यता मिली है। 2. पुजारी की बेटी ने मुस्लिम लड़के से प्यार किया, अब घर में कैदएर्नाकुलम जिले के परवूर शहर में मूकाम्बिका सरस्वती मंदिर है। आरवी बाबू बताते हैं कि मंदिर के मुख्य पुजारी की इकलौती लड़की भी इस ट्रैप में फंस गई। पढ़ने में होशियार थी। रोज पूजा-पाठ करती थी। फिर एक एक मुस्लिम लड़के के साथ लिव–इन में रहने लगी। कुछ महीने बाद उसे पता चला कि उसके साथ धोखा हुआ है, तो घर लौट आई। अब बाहर नहीं निकलती। उनके पिता ने पुजारी का काम छोड़ दिया। परिवार मंदिर से दूर जाकर रहने लगा। अब वे किसी से नहीं मिलते। फादर बोले- क्रिश्चियन कम्युनिटी ज्यादा शिकार, डिलीवरी बॉय लड़कियों को फंसा रहेकेरल कैथोलिक बिशप काउंसिल से जुड़े फादर माइकल पुल्लीकल बताते हैं कि द केरल स्टोरी के कैरेक्टर और स्टोरी काल्पनिक हो सकते हैं, लेकिन ये सब्जेक्ट रिलेवेंट है। केरलम में हिंदू ही नहीं क्रिश्चियन कम्युनिटी भी इसके शिकार हैं। फंडामेंटलिस्ट मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशन जानबूझकर ये सब करवा रहे हैं। ज्यादातर केस में शादीशुदा मुस्लिम लड़के ही शामिल होते हैं। चर्च इसे रोकने के लिए क्या कर रहा है? माइकल जवाब देते हैं, ‘हमने हेल्पलाइन शुरू की है। एक साल में 22 लड़कियों ने मदद मांगी है। इनमें 9 नाबालिग हैं।’ ‘10 साल में 5 हजार से ज्यादा लड़कियों को धोखा देकर धर्म बदला’हिंदू ऐक्य वेदी के अध्यक्ष आरवी बाबू बताते हैं कि केरलम में ऐसे मामलों के सटीक नंबर तो नहीं हैं, लेकिन 10 से 12 केस हर महीने रिपोर्ट होते हैं। 2015 से 2025 तक 5 हजार से ज्यादा लड़कियों का इस्लाम में कन्वर्जन हुआ है। हम इसके खिलाफ मुहिम चला रहे हैं। जिलों में काउंसलिंग सेंटर्स खोले हैं। वहीं से हमें यह संख्या मिली है। आर्य विद्या समाजम् जैसे हिंदूवादी संगठनों ने जिलों में काम शुरू किया है। परिवार यहां अपनी लड़कियों को काउंसलिंग के लिए भेज रहे हैं। ‘केरल स्टोरी का 70 सीटों पर असर, क्रिश्चियन वोटर मुस्लिम कैंडिडेट के खिलाफ’सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. धनुराज बताते हैं कि द केरल स्टोरी यहां चुनावी मुद्दा है। इसकी चर्चा हर घर में होती है, लेकिन लोग इसके आधार पर वोट करेंगे, ये मुश्किल है। यही वजह है कि कुछ महीने पहले BJP इस मुद्दे को जोर–शोर से उठा रही थी, लेकिन समय के साथ इसे छोड़ दिया। उसे पता चल गया कि लोग इससे जुड़ नहीं रहे हैं। अब तो लोकल नेता भी कम ही बोल रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने खुद को इससे अलग कर लिया है।’ धनुराज कहते हैं कि धर्म परिवर्तन का मुद्दा केरल के 10 से 12 जिलों में है। नॉर्थ और सेंट्रल केरलम के 6 जिले ज्यादा प्रभावित हैं। यहां 70 सीटें हैं। मुस्लिम बोले- लव मैरिज को लव जिहाद कहना गलतकोच्चि के रहने वाले साजिल कहते हैं कि द केरल स्टोरी की कहानी सच नहीं है। कुछ साल पहले इस तरह के दो–तीन मामले आए थे। प्यार दो लोगों के बीच की बात है। इसे हिंदू–मुस्लिम–क्रश्चियन से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। लव मैरिज को लव जिहाद नहीं बोलना चाहिए। यह पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा है। मुझे नहीं लगता कि चुनाव पर इसका असर होगा। कोच्चि के रहने वाले अनूप कहते हैं कि CPM के लोगों ने मोनालिसा को फेमस कर दिया। वे खुद को प्रोग्रेसिव दिखाते हैं, ताकि मुस्लिम उन्हें वोट दें। यहां ज्यादातर मुस्लिम UDF के साथ हैं। ‘BJP बोली- लव जिहाद के खिलाफ सभी हिंदू एक होकर BJP को वोट देंगे, ऐसा मुश्किल’ केरलम में BJP के वाइस प्रेसिडेंट आर राधाकृष्णन कहते हैं कि इस्लाम में लव जिहाद एक्सीडेंटल तरीके से नहीं आया है। कुरान में मुस्लिम की गैर मुस्लिम से शादी को अच्छा बताया गया है। द केरल स्टोरी-2 की कहानी क्या झूठी है? राधाकृष्णन जवाब देते हैं, ‘बिल्कुल नहीं। ये सच्ची कहानी है। इसे हम चुनाव में भी उठा रहे हैं।’ क्या चुनाव में इसका फायदा मिलेगा? वे कहते हैं, ‘इलेक्शन अलग विषय है। हां, कुछ तो असर होगा ही। ऐसा भी नहीं है कि लव जिहाद का विरोध कर रहे सभी लोग BJP को ही वोट करेंगे। पूरी हिंदू कम्युनिटी भी एकजुट होकर BJP को वोट नहीं देगी।’ ‘CPM ने मोनोलिसा को प्रोटेक्ट किया, केरला स्टोरी बदनाम करने की साजिश’CPM के सीनियर लीडर और पूर्व सांसद सेबिस्टियन पॉल कहते हैं कि केरल स्टोरी–2 की कहानी बकवास और काल्पनिक है। इसीलिए हमारी सरकार ने इसे बैन कर दिया। मोनोलिसा की शादी में CPM नेताओं के शामिल होने पर सेबिस्टियन पॉल कहते हैं कि इसे बेवजह तूल दिया गया है। हमने उन्हें प्रोटेक्ट किया। हमारे मंत्री ने आशीर्वाद दिया। पूरी पार्टी उनके समर्थन में खड़ी है। उन्हें जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई हैं। यही रियल केरल स्टोरी है। …………………………. केरलम चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए 46 लाख कुडुंबश्री दीदियां लेफ्ट की वोटर, कैसे सेंध लगाएगी BJP केरलम सरकार की कुडुंबश्री योजना से 46 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, यानी राज्य के हर दूसरे घर में एक कुडुंबश्री मेंबर है। ये महिलाएं बिजनेस तो चलाती ही हैं, साथ में चुनाव लड़ती भी हैं और हार-जीत तय भी करती हैं। 2021 में चुनाव जीतने वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF को 48% महिलाओं ने वोट दिए थे। BJP इनमें सेंधमारी की कोशिश कर रही है। पढ़िए पूरी खबर...
ईरान का दावा: इजरायल से जुड़े जहाज पर ड्रोन हमला, पोत में लगी आग
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने शनिवार को दावा किया कि उसने इजरायल से जुड़े एक वाणिज्यिक जहाज पर ड्रोन हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया
बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले से मास्को नाराज: बताया 'क्रूर कृत्य', रूसी कर्मियों की निकासी तेज
ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट पर बढ़ते खतरे के बीच रूस ने जहां अपने कर्मियों की निकासी तेज कर दी है
ईरान संघर्ष के शुरुआती हफ्तों में 3 हजार से ज्यादा लोग मारे गए, 43 लाख हुए बेघर: डब्ल्यूएचओ
मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त एयर स्ट्राइक में ईरान के बड़े शहरों पर हमले किए
तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करेगा। इस रुख ने न केवल पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर किया है, बल्कि संकट के जल्द समाधान की संभावनाओं को भी पीछे धकेल दिया है।
मिडिल ईस्ट तनाव में नया मोड़: UAE पर ईरान का सख्त रुख, जंग के विस्तार का खतरा बढ़ा
तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान को अब यह भरोसा हो गया है कि UAE इस संघर्ष में निष्क्रिय नहीं है। ईरान का आरोप है कि UAE ने अमेरिका और इजरायल को अपने सैन्य ठिकानों और एयर फैसिलिटी का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है।
साइकोलॉजिकल वॉर ईरान ने उड़ाया अमेरिका का मजाक, ट्रंप प्रशासन में मची भगदड़ को बताया सफल तख्तापलट
ईरान में अमेरिकी सेना को झटका: रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 2 हेलिकॉप्टरों पर हमला, एक पायलट अब भी लापता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के गिराए जाने के बाद उसके पायलटों को बचाने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी हेलिकॉप्टर ईरानी हमले की चपेट में आ गए।
इस घटनाक्रम में भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण खबर यह रही कि भारतीय ध्वज वाला मालवाहक जहाज भी सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने में सफल रहा। AIS सिग्नल के जरिए इस जहाज की पहचान MSV कुबा (MNV 2183) के रूप में हुई है। यह जहाज 31 मार्च को दुबई से रवाना हुआ था और फिलहाल ओमान के दिब्बा पोर्ट से करीब 40 किलोमीटर दूर समुद्र में देखा गया है।
पंजाब में विधानसभा चुनाव को करीब एक साल बाकी है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने ‘पंजाब विजय प्लान’ लॉक कर लिया है। गृह मंत्री अमित शाह भी साफ कर चुके हैं कि BJP पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। 24 से 26 फरवरी तक सरसंघचालक मोहन भागवत पंजाब दौरे पर रहे। उन्होंने 4 साल का कामकाज देखा और स्वयंसेवकों की रणनीति में बदलाव किए। रणनीति पर 4 साल से काम चल रहा है, लेकिन चुनावी साल में स्वयंसेवक पहले से ज्यादा एक्टिव हैं। संघ के प्लान के केंद्र में पंजाब की 38% दलित आबादी है। इसे साधने के लिए 5 पॉइंटर रणनीति बनी है। टारगेट पर AAP की 92 सीटें हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने संघ पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं से चुनावी रणनीति और कामकाज के तरीकों पर बात की। 5 पॉइंट में संघ का पंजाब विजय प्लान…पंजाब में दलितों को उनकी जड़ों से जोड़ने और मोड़ने का काम स्वयंसेवकों की टोलियां कर रही हैं। धर्म जागरण मंच के कार्यकर्ता कहते हैं, 'संघ एक-दो साल का टारगेट लेकर नहीं चलता। हम 4 साल से इनके स्वाभिमान और सम्मान के लिए काम कर रहे हैं। भेदभाव मिटने पर ही इनमें हिंदू धर्म के लिए आस्था जगेगी।' 1. दलित और सवर्णों के लिए एक श्मशानधर्म जागरण मंच के एक पदाधिकारी बताते हैं, ‘2025 के अनुमान के मुताबिक पंजाब में दलित आबादी 38-40% हो चुकी है। हर तीसरा-चौथा वोटर दलित है। भागवत जी से साफ निर्देश मिले हैं कि एक साल के अंदर हर दलित के न घर और मन तक पहुंचना है।’ पंजाब के क्षेत्र प्रचारक बताते हैं, संघ ने पिछले साल एक सर्वे कराया। इसमें 23 जिलों के गांव चुने गए, जहां दलितों और सवर्णों के श्मशान अलग-अलग हैं। ऐसे 250 गांवों की लिस्ट बनी है। मिशनरीज यहां कब्जा कर चुके हैं। भेदभाव से पीड़ित 80% और कहीं-कहीं 100% दलित ईसाई बन चुके हैं। 'इन गांवों में समरसता अभियान चला रही टोलियों को भेदभाव मिटाने का काम मिला है। अगले एक साल में इन्हें मॉडल गांव की तरह पेश किया जाएगा। टारगेट ये है कि गांव में एक श्मशान हो, दूसरे को योग सेंटर या जिम में बदल दिया जाए, ताकि भेदभाव कम हो।' पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 34 सीटें रिजर्व हैं। यहां दलित आबादी 45-50% है। इनमें दोआबा क्षेत्र की 23 सीटों पर दलितों का प्रभाव सबसे ज्यादा है। पंजाब का मालवा, दलित आबादी वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। यहां की 69 सीटों पर दलित आबादी 31 से 42% है। इस एरिया की की 66 सीटें AAP के पास हैं। BJP को पंजाब में ताकत बढ़ाने के लिए इसमें सेंध लगानी होगी। 2. दलितों का राम कनेक्शनपंजाब में प्रांत प्रचारक स्तर के पदाधिकारी बताते हैं, 'धार्मिक भेदभाव पंजाब की सबसे बड़ी समस्या है। मंदिर और गुरुद्वारे तक अलग हैं। सवर्ण जातियां, दलितों को मंदिर और गुरुद्वारों में नहीं जाने देतीं। गुरुद्वारों तक तो हमारी ज्यादा पहुंच नहीं, लेकिन मंदिरों में तेजी से काम चल रहा है। हम दलितों के बीच हिंदू धर्म को लेकर आस्था बढ़ा रहे हैं, जो घर वापसी में मददगार होगा।' आस्था बढ़ाने के लिए ये 4 काम किए जा रहे… रामतीर्थ की जगह वाल्मीकि तीर्थ स्थल: इसकी शुरुआत अमृतसर से की गई। 2016 में रामतीर्थ का नाम बदलकर वाल्मीकि तीर्थ कर दिया गया। तब राज्य में शिरोमणि अकाली दल और BJP के गठबंधन वाली सरकार थी। यहां महर्षि वाल्मीकि आश्रम है। इसी जगह माता सीता ने दोबारा वनवास काटा था। दलित संत महर्षि वाल्मीकि ने उन्हें आश्रम में जगह दी थी। इससे दलित भी सम्मानित महसूस करते हैं। ये उन्हें बराबरी का एहसास दिलाने का पहला कदम था कि हिंदू धर्म में वो हाशिए पर नहीं, बल्कि मुख्यधारा में हैं। घर-घर वाल्मीकि रामायण: प्रांत प्रचारक स्तर के एक पदाधिकारी बताते हैं कि पंजाब के हर घर में वाल्मिकी रामायण पहुंचाई जा रही है। हमने पूछा क्या सिख रामायण पढ़ते हैं? वे जवाब देते हैं, ‘हां, संघ सिख, जैन और पारसी को हिंदू ही मानता है। समाज के तय मानकों के मुताबिक भी पंजाब की कुल आबादी में करीब 37-38% हिंदू हैं। हिंदू दलित करीब 12-13% हैं।’ ‘इसलिए सिख हों या हिंदू हर घर में वाल्मीकि रामायण पहुंचेगी। इसमें सवर्ण और दलित जातियां दोनों होगी, इसलिए भेदभाव दूर होगा। दलित संतों से ब्लॉक स्तर पर अखंड वाल्मीकि रामायण के पाठ कराए जा रहे हैं। इनकी संख्या बढ़ाने का प्लान है।’ रामलीला के लिए वाल्मीकि स्थल से जाएगी ज्योति: वाल्मीकि तीर्थ स्थल बोर्ड के प्रमुख बाल जोगी संत प्रगट नाथ जी महाराज कहते हैं, 'पिछले 4 साल में विश्व हिंदू परिषद भारत के कई राज्यों में रामलीला के लिए यहां से ज्योति लेकर गई। इनमें जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, यूपी, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्य शामिल हैं। यहां रामलीला के मंचन से पहले टोलियां आईं और ज्योति लेकर गईं।' क्या इसका पंजाब के दलितों पर कोई प्रभाव पड़ा है? बाल जोगी कहते हैं, 'हां, ये हाशिए पर खड़ी कम्युनिटी के बीच सम्मान पैदा करती है। मैं खुद दलित हूं, इसलिए बेहतर महसूस कर सकता हूं।' 3. संत रविदास की 650वीं जयंती पर पूरे साल उत्सवपंजाब में संघ के प्रचार विभाग के मुताबिक, संत रविदास जयंती इस साल जून से अगले साल जून तक मनाई जाएगी। ब्लॉक स्तर पर जयंती उत्सव होगा। संघ हर मंदिर में वाल्मीकि और रविदास की मूर्ति या फोटो लगाने का अभियान चला रहा है। 4. पिछले 4 साल में दलित संतों का नेटवर्क तैयार हो रहा गुरुदासपुर की दलित कम्युनिटी से आने वाले संघ कार्यकर्ता कहते हैं, ‘संघ, दलित कम्युनिटी के संतों का नेटवर्क बना रहा है। इनका काम रामकथा और लवकुश कथा सुनाना है। लवकुश के वंशज पंजाब में बेदी और सोढ़ी हैं। लवकुश के वंशजों का पंजाब में होने का सीधा मतलब है कि सिख हिंदू हैं।‘ फिर ये तो सवर्ण जाति के सिख हुए?, जवाब मिला- ‘हां, पहली बात ये कि सिख हिंदू हैं। दूसरी बात, जब दलित संत लवकुश की कथा सुनाएंगे, तभी दलितों को अपनापन महसूस होगा। वो ये भी बताएंगे कि लवकुश का जन्म दलित संत वाल्मीकि के आश्रम में हुआ यानी हिंदू धर्म में कोई भेदभाव नहीं है।‘ ‘दलित संत बताएंगे कि कबीरदास, रैदास (रविदास) और वाल्मीकि जैसे न जाने कितने संत हिंदू धर्म का हिस्सा हैं। संत रविदास पंजाब के दलित सिखों और दलित हिंदुओं के बीच सबसे ज्यादा स्वीकार्य हैं। रविदास कम्युनिटी से जुड़े डेरा सचखंड बल्लां का जालंधर में हेडक्वॉर्टर है। संत निरंजन दास डेरे के मुखिया हैं। 25 जनवरी 2026 को उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला। ये भी संघ के अभियान में मददगार साबित होगा।‘ 5. न लालच, न दबाव, सम्मान देकर दलितों की घर वापसी क्या कुछ दलित हिंदुओं और सिखों की घर वापसी हुई है? गुरदासपुर के एक कार्यकर्ता कहते हैं, 'हां कोशिश जारी है।' कोई डेटा है क्या? वे कहते हैं, 'हमारे पास आंकड़े भी हैं, लेकिन इन्हें साझा करना संघ के नियम के खिलाफ है। पिछले 4-5 साल में धर्मांतरण रुका है। लाखों न सही हजारों की तादाद में लोगों ने धर्म बदला भी है।' ‘मिशनरीज बच्चों के एजुकेशन का लालच देकर सबसे ज्यादा धर्म बदलवाती हैं। पंजाब में विद्या भारती नाम से संघ के 150 से ज्यादा स्कूल हैं। यहां आर्थिक रूप कमजोर बैकग्राउंड के ऐसे बच्चों को एडमिशन में प्राथमिकता मिलती है। यहां करीब 7-8 हजार बच्चे पढ़ते हैं।‘ पंजाब के बॉर्डर वाले इलाकों में धर्मांतरण ज्यादापंजाब के गुरदासपुर जिले में ईसाई आबादी सबसे तेजी से बढ़ी है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां दलित आबादी 7.68% यानी 1.77 लाख थी, जो अब बढ़कर अनुमानित तौर पर 4 लाख से ज्यादा हो गई है। यहां की 6 विधानसभा सीटों में से 4 पर कांग्रेस और दो पर AAP के विधायक हैं। वैसे धर्म परिवर्तन का ट्रेंड पूरे पंजाब में है, लेकिन बार्डर इलाकों में ज्यादा है। इनमें गुरदासपुर के साथ अमृतसर, पठानकोट, फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, लुधियाना, कपूरथला, बठिंडा और जालंधर जिले शामिल हैं। दलित वोटों के हिसाब से BJP कमजोरपंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में दलितों का वोट शेयर देखें तो BJP कमजोर दिखती है। दलित सिखों का सबसे ज्यादा 46% वोट AAP को और सबसे कम 3% ही BJP को मिला। हिंदू दलितों का वोट शेयर देखें तो कांग्रेस को 32% और AAP को 32% वोट मिले, जबकि BJP का वोट शेयर 10% ही रहा। इस बार चुनाव से उम्मीदों को लेकर जिला स्तर के एक स्वयंसेवक कहते हैं, ‘अभी पंजाब में माहौल AAP के खिलाफ है। दिल्ली में करप्शन के चार्ज और पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर खराब हाल में है। AAP की खिसकती जमीन और हिंदुओं पर मंडराते खतरे के बीच लोग दक्षिणपंथी विचारधारा की तरफ मुड़ रहे हैं।’ ‘RSS पांच साल के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए काम करता है। त्रिपुरा, ओडिशा जैसे राज्यों में संघ ने कई दशक खपाए, तब चुनाव में नतीजे नजर आए।’ AAP बोली- अगर धर्मांतरण की चिंता है, तो एंटी कन्वर्जन लॉ लाएंRSS और BJP के लिए भी धर्मांतरण बड़ा मुद्दा है। क्या ये AAP के एजेंडे में है? इस पर पंजाब में आम आदमी पार्टी के स्पोक्सपर्सन नील गर्ग कहते हैं, 'अगर RSS और BJP को धर्म परिवर्तन की इतनी ही चिंता है, तो केंद्र इसके खिलाफ एंटी कन्वर्जन लॉ क्यों नहीं लाती। ये हर राज्य में सिलेक्टिव राजनीति करना चाहते हैं। इन्हें धर्म परिवर्तन की चिंता नहीं है। इन्हें इस बात की चिंता है कि कैसे धर्म के नाम पर राजनीति करें।' AAP के एजेंडे में धर्म परिवर्तन है या नहीं? नील कहते हैं, ‘मैं इस पर न भी नहीं कहूंगा और हां भी नहीं कहूंगा। ये तय है कि पिछले मेनिफेस्टो में इसका जिक्र नहीं था। अभी जो हम चुनाव प्रचार कर रहे हैं, उसमें भी नहीं है। हमारे लिए स्वास्थ्य, बिजली, शिक्षा और नशे के खिलाफ अभियान चलाना प्राथमिकता है, न कि धर्म के नाम पर मुद्दे खोजकर उसका राजनीतिकरण करना।’ ……………. ये खबर भी पढ़ें कुरान-हदीस पर सवाल, एक्स मुस्लिमों ने क्यों छोड़ा इस्लाम 27 फरवरी 2026, सुबह करीब 8 बजे। गाजियाबाद के लोनी में यूट्यूबर सलीम वास्तिक अपने स्टूडियो में बेफिक्र सोफे पर लेटे थे। तभी दो लोग अंदर आए। सलीम कुछ समझते, उससे पहले दोनों ने चाकुओं से हमला कर दिया। सीने, पेट, कंधे और गले पर 14 बार चाकू मारा। सांस की नली कट गई। सलीम अभी ICU में हैं। पढ़िए पूरी खबर…
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव की मेजबानी करते हुए भारतीय नेतृत्व ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूती देने पर जोर दिया
धुबरी के संतोषपुर में रहने वाले अफसर अली कपड़े की दुकान चलाते हैं। परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। अफसर की 5 बाई 6 की दुकान 8 महीने से उनका घर भी है। 8 जुलाई, 2025 को अफसर के अलावा 1400 और घर तोड़ दिए गए। करीब 12 हजार लोग बेघर हो गए। बांग्लादेश बॉर्डर से सटे असम के धुबरी जिले में करीब 75% मुस्लिम हैं। अफसर अली मियां मुस्लिम समुदाय से हैं, जिन्हें परेशान करने की बात असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा कई बार दोहरा चुके हैं। अफसर हिमंता पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाते हैं। कहते हैं कि मेरा घर मुस्लिम होने की वजह से तोड़ा गया। और ऐसा कहने वाले वे अकेले नहीं हैं। कांग्रेस और AIUDF में मुस्लिम वोट नहीं बंटा, तो BJP को मुश्किलअसम की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग है। बुलडोजर, मियां मुस्लिम और बांग्लादेशी घुसपैठिए जैसे शब्द चर्चा में हैं। 2016 में पहली बार BJP की सरकार बनने के बाद से 17,600 घरों पर बुलडोजर चलाया गया। इनमें ज्यादातर मुस्लिम थे। मुस्लिम आबादी वाले लखीमपुर में 500, दरांग के ढालपुर में 800, धुबरी के संतोषपुर में 1400 और नगांव के बटाद्रवा में 1,000 से ज्यादा परिवार बेघर हो गए। मदरसे बंद कर दिए गए। बाल विवाह कानून के तहत मुस्लिमों को अरेस्ट किया गया। परिसीमन के बाद मुस्लिम बहुल सीटें भी 35 से घटकर 23 रह गईं। 2011 की जनगणना के मुताबिक, राज्य में 35% मुस्लिम आबादी है। इनका रुख चुनावों में काफी कुछ तय करता है। मुस्लिमों का वोट कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की AIUDF में बंटता है। इस बार भी यही हुआ तो BJP फायदे में रहेगी। मुस्लिमों ने कांग्रेस को एकतरफा वोट दिए, तो BJP को मुश्किल होगी। इस गणित को समझने दैनिक भास्कर गुवाहाटी से 250 किमी दूर धुबरी पहुंचा। 12 लाख वोट वाला धुबरी बदरुद्दीन का गढ़, असमिया गमछा पहचान असम के मुस्लिमों में टोपी से ज्यादा असमिया गमछे का चलन है। राज्य तीन हिस्सों लोअर, सेंट्रल और अपर असम में बंटा है। धुबरी लोअर असम में है। जिले में मियां, यानी बंगाली भाषी मुस्लिम सबसे ज्यादा हैं। जिले की 5 विधानसभा सीटों में 12.2 लाख वोटर हैं। धुबरी की सीमा में घुसते ही जगह-जगह मस्जिद और मदरसे दिखने लगते हैं। ये असम के तीसरी बड़ी पार्टी ऑल इंडिया यूनाइडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट, यानी AUIDF का गढ़ है। पार्टी चीफ बदरुद्दीन अजमल यहां के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। उनकी सभा में आए लोग आरोप लगाते हैं कि हिमंता मुसलमानों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने इसी साल जनवरी में कहा था कि मियां मुस्लिमों को किसी भी तरह परेशान करो, इससे वे असम छोड़ देंगे। धुबरी में जुलाई, 2025 में सबसे बड़ी बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। सरकार के मुताबिक, यहां असम पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और अडाणी ग्रुप के थर्मल पावर प्लांट के लिए जमीन खाली कराई गई है। यहां अब भी बाहर वालों की एंट्री पर रोक है। ये जगह लोहे का गेट लगाकर बंद कर दी गई है। दो पुलिस वाले भी तैनात हैं। हम गांववालों के रिश्तेदार बनकर अंदर दाखिल हुए। कुछ लोग टूटे घरों के मलबे से ईटें बीन रहे थे। बेघर हुए लोग दूसरी जगह रह रहे हैं, लेकिन बच्चे आज भी मैदान में खेलने आ जाते हैं। हमने इन परिवारों से बात की। पहली कहानी अफसर अली की‘70 साल पुराना घर उजाड़ दिया, ये ज्यादती याद रखेंगे’37 साल के अफसर अली दावा करते हैं कि उनका परिवार 70 साल से यहां रह रहा था। पिता यहीं पैदा हुए। यहीं के वोटर हैं, लेकिन अब बेघर हैं। CM हिमंता से नाराजगी जाहिर करते हुए अफसर कहते हैं, ‘यह सरकार मुसलमानों को देखना ही नहीं चाहती। चुनाव में लोग इन ज्यादतियों को याद रखेंगे।’ ‘हमारे इलाके में बुलडोजर चला, लेकिन बगल के हिंदू एरिया में घर नहीं गिराए गए। घर टूटने का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ा है। 6 साल का बेटा इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ता था। उसकी पढ़ाई छूट गई है।’ दूसरी कहानी सुनाउद्दीन की‘हमारी पुश्तें भारत में गुजरीं, अब हमें पाकिस्तानी-बांग्लादेशी बता दिया’फलों की दुकान चलाने वाले सुनाउद्दीन घर टूटने के बाद किराए के मकान में रहते हैं। आरोप लगाते हैं कि प्रशासन ने डरा-धमकाकर जमीन खाली करवाई और मुआवजा तक नहीं दिया। सुनाउद्दीन कहते हैं, ‘हमने सारे कागज दिखाए। 1991 का NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन), वोटर आईडी, आधार और राशन कार्ड दिखाया, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। हमें पाकिस्तानी और बांग्लादेशी कहा। हमारी पुश्तें यहीं गुजरी हैं, फिर भी हमें बांग्लादेशी कहते हैं। चुनाव में हम उसी पार्टी के साथ खड़े होंगे, जो हमारी मदद करेगी।’ तीसरी कहानी अब्दुल राशिद शेख की‘50 हजार रुपए मुआवजा मिला, नदी के बीच टापू पर घर’सरकार ने पट्टा, यानी मालिकाना हक के कागज दिखाने वाले कुछ लोगों को 50 हजार रुपए मुआवजा और ब्रह्मपुत्र नदी के पास घर देने का वादा किया है। 35 साल के अब्दुल राशिद शेख का घर चिराकुटा गांव में था। वे आरोप लगाते हैं कि सरकार हमें बांग्लादेशी और घुसपैठिया कहती है, फिर मुआवजा भी देती है। रहने के लिए नदी के बीचों-बीच जगह दे रही है, जहां इंसान जा ही नहीं सकता।’ चौथी कहानी आजाद की17 साल की उम्र में बेटी की शादी कराई, 14 साल बाद केसअसम में 3 फरवरी 2023 को पुलिस ने बाल विवाह कानून लागू करने के लिए अभियान शुरू किया। पहले दो दिन में 2 हजार से ज्यादा लोग अरेस्ट किए गए। आरोप लगा कि पुलिस जानबूझकर धुबरी, बारपेटा और दक्षिण सालमारा जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में कार्रवाई कर रही है। दिसंबर 2024 तक गिरफ्तारियों का आंकड़ा 5 हजार हो गया था। CM हिमंता ने भी माना कि गिरफ्तार लोगों में 55% मुस्लिम समुदाय से हैं। इनमें 60 साल के आजाद भी शामिल हैं। उन्हें दिसंबर 2025 में बेटे का बाल विवाह कराने के आरोप में जेल भेज दिया गया। फिलहाल जमानत पर हैं। वे आरोप लगाते हैं, ‘मेरे गांव का पंचायत सदस्य BJP में है। उसने मेरे बेटे के खिलाफ बाल विवाह की झूठी शिकायत कर दी। बेटा नहीं मिला तो पुलिस मुझे उठा ले गई। एक महीने जेल में रहा। बेटे के केस में जमानत मिली, तो बेटी की शादी का केस लगा दिया। उसकी शादी 2012 में हुई थी। तब वह 17 साल की थी। 14 साल बाद मुझे परेशान कर रहे हैं।’ पांचवी कहानी मदरसा टीचर अनवर हुसैन की‘200 बच्चियां पढ़ने आती थीं, सरकार ने मदरसा ही गिरा दिया’असम सरकार ने 1 अप्रैल 2021 से सरकारी मदरसों को स्कूलों में बदलना शुरू किया। तर्क दिया कि सरकारी पैसे से धार्मिक शिक्षा नहीं दे सकते। मदरसों पर बुलडोजर भी चलाया गया। धुबरी के मौलाना अनवर हुसैन साल 2000 से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जुलाई, 2025 में उनका मदरसा तोड़ दिया गया। प्रशासन का दावा था कि ये सरकारी जमीन पर था। बांग्लादेश बॉर्डर पर सिर्फ कांग्रेस-AIUDF के झंडे, BJP गायब बांग्लादेश बॉर्डर का करीब 134 किमी लंबा हिस्सा धुबरी से सटा है। सबसे अहम 61 किलोमीटर का एरिया है, जहां नदी वाला बॉर्डर है। ब्रह्मपुत्र नदी धुबरी से ही बांग्लादेश में जाती है। यहां कई धाराएं और रेतीले टापू बन गए हैं। दलदली जमीन और नदी वाले इलाके में बाड़बंदी मुमकिन नहीं है, इसलिए BSF यहां लेजर, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से निगरानी करती है। हम बांग्लादेश बॉर्डर से सटे आखिरी गांव घेवमारी पहुंचे। इस एरिया में AIUDF का दबदबा है। लगभग हर गली में AIUDF और कांग्रेस के झंडे हैं। BJP के झंडे कम हैं। गांव में सबसे ज्यादा आबादी मियां मुस्लिमों की है। कच्ची सड़क के बावजूद गाड़ियां बॉर्डर के करीब तक चली जाती हैं। बॉर्डर से करीब 600 मीटर दूर सड़क खत्म होती है और खेत शुरू हो जाते हैं। खेतों के पास ही ब्रह्मपुत्र नदी बहती है। यहां नदी और जमीन दोनों तरह के बॉर्डर हैं। बॉर्डर के करीब जाने पर BSF जवान ने हमें रोक दिया। बोला कि यहां वीडियो नहीं बना सकते। बॉर्डर पर रहने वाले बोले- CM के बोलने से हम बांग्लादेशी नहीं हो जातेहमने बॉर्डर पर रहने वाले लोगों से बात की। धुबरी के एडवोकेट तौफीक हुसैन हमें बॉर्डर तक लेकर गए थे। वे आरोप लगाते हैं कि CM हिमंता लोगों का ब्रेनवाश कर रहे हैं। हकीकत में बॉर्डर पर कड़ी सुरक्षा है। नदी के रास्ते भी घुसपैठ मुमकिन नहीं है। यहां मिले 26 साल के रफीकुल इस्लाम राजमिस्त्री हैं। वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री हमें मियां या बांग्लादेशी कहते हैं, तो बहुत खराब लगता है। उनके बोल देने से हम बांग्लादेशी नहीं हो जाएंगे। हमारे पास कागज हैं। 23 साल के सफीर आलम कहते हैं कि CM धर्म के नाम पर वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। इस बार BJP पक्का हारेगी। परिसीमन के जरिए मुस्लिम प्रभाव वाली सीटें घटाने का आरोपचुनाव आयोग ने 2023 में परिसीमन किया था। इसका असर मुस्लिम बहुल सीटों पर ज्यादा पड़ा है। पहले 126 विधानसभा सीटों में लगभग 35 सीटें मुस्लिम बहुल थीं। अब 23 रह गई हैं। एडवोकेट तौफीक हुसैन के मुताबिक, परिसीमन में दो तरीके अपनाए गए। मुस्लिम आबादी वाले बड़े इलाके को दो से तीन सीटों में बांट दिया। इससे मुस्लिम वोट बंट गए। दूसरे तरीके में अलग-अलग जगहों पर बिखरी मुस्लिम आबादी को समेटकर एक सीट में कर दिया। पहले मुस्लिम वोटर तीन सीटों पर असर डालते थे, अब एक सीट पर बड़े अंतर से जीतेंगे, लेकिन बाकी दो सीटों से कंट्रोल खत्म हो गया। धुबरी जिले में परिसीमन का सबसे ज्यादा असर परिसीमन से धुबरी जिले में 5 विधानसभा सीटों ही रहीं, लेकिन बॉर्डर बदल गए। बिलासीपारा ईस्ट और वेस्ट सीटों को खत्म कर बिरसिंग जरूआ सीट बनाई गई। आरोप है कि धुबरी के इलाकों को इस तरह बांटा कि AIUDF का अल्पसंख्यक वोट बिखर जाए। हिमंता परिसीमन को ऐतिहासिक जीत बता चुके हैं। उन्होंने कहा कि असम को बचाने के लिए जो काम NRC से नहीं हो सका, वह परिसीमन ने कर दिया। बदरुद्दीन अजमल इसे मुसलमानों के खिलाफ साजिश बताते हैं। वे कहते हैं कि इसका मकसद विधानसभा से मुसलमान नेताओं को बाहर करना है। …………………………असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंगांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
बलूचिस्तान में मोर्टार हमले में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों की ओर से की गई मोर्टार फायरिंग में एक बच्चे सहित बलूच परिवार के कम से कम तीन सदस्यों की मौत हो गई
अमेरिका और ईरान के महायुद्ध पर ट्रंप का सबसे बड़ा ऐलान,ईरान का खेल खत्म, हमारा मिशन लगभग पूरा
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका की बड़ी चूक ,स्ट्रिप क्लब में डांसर के सामने सीक्रेट उगल रहे सैनिक
इधर ट्रंप दे रहे थे पाषाण युग में धकेलने की धमकी, उधर ईरान ने इजरायल पर दाग दीं ताबड़तोड़ मिसाइलें
ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका को लिखा खुला पत्र, कहा-अमेरिकी जनता से कोई दुश्मनी नहीं
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरानी जनता अमेरिकी लोगों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखती है
अमेरिका सुप्रीम कोर्ट में जन्मजात नागरिकता पर हुई तीखी बहस, एच-1बी वीजा धारक भारतीयों में बढ़ी चिंता
मेरिकी सुप्रीम कोर्ट में स्थानीय समयानुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता समाप्त करने के उनके आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की
इंडोनेशिया में आया 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, तटीय क्षेत्रों में सुनामी की चेतावनी
इंडोनेशिया में जबरदस्त भूकंप आया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि गुरुवार तड़के पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में 7.4 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया
ट्रंप की धमकी: समझौता न हुआ तो ईरान को भेज देंगे पाषाण युग में
ईरान के खिलाफ युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही भ्रमित दिख रहे हैं वह कभी कहते हैं कि वह ईरान के विरुद्ध अपने अभियान को खत्म कर सकते हैं तो कहीं ईरान को धमकाते दिखते हैं
नासा का आर्टेमिस-2 आज लॉन्च, 10 दिन चांद के चारों ओर सफर
नासा के चार अंतरिक्ष यात्री एक ऐसे मिशन पर रवाना होने वाले हैं, जिसमें वे चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे
कोलिन मैकडॉनल्ड बने संयुक्त राज्य अमेरिका के सहायक अटॉर्नी जनरल, जेडी वेंस ने दिलाई शपथ
संयुक्त राज्य अमेरिका में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। उन्होंने कोलिन मैकडॉनल्ड को सहायक अटॉर्नी जनरल पद की शपथ दिलाई
‘डेढ़ महीने से मुझे ‘महाराजा’ पनिशमेंट दी जा रही थी, जिसमें सिर के बल डेढ़-डेढ़ घंटे रहना होता था। एक दिन मैं बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रहा था। तभी एक जोरदार पंच मेरे सिर पर लगा और मैं गिर पड़ा। अफसर चिल्लाए- चेतन, उठो और लड़ो। मैंने कहा- अब नहीं लड़ पाऊंगा, सर। लेकिन उन्होंने कहा- नहीं चेतन, तुम्हें भिड़ना होगा। आखिरकार मैं न चाहते हुए भी उठा और ट्रेनिंग पूरी की। आर्मी की ट्रेनिंग ऐसे ही होती है। हालत बहुत खराब हो चुकी थी। ट्रेनिंग खत्म कर लौटते वक्त अचानक आंखों के सामने अंधेरा छा गया और मैं जमीन पर गिर पड़ा। उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं। 8 महीने कोमा में रहा। जब होश आया, तो खुद को अस्पताल में पाया। मेरा आधा शरीर पैरालाइज्ड हो चुका था। उसके बाद में मुझे नौकरी से बाहर कर दिया गया। मेरी तरह ही ट्रेनिंग के दौरान घायल हुए अब तक लगभग 450 लोग सेना से बाहर हो चुके हैं, जिनकी जिंदगी बर्बाद हो गई।’, चेतन चौधरी बताते हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ‘ब्लैकबोर्ड’ में इस बार उन आर्मी जवानों की कहानी है, जिन्हें ट्रेनिंग के दौरान चोट लगी और अंग खराब होने पर नौकरी से बाहर कर दिया गया। चेतन अपने परिवार के साथ गाजियाबाद में रहते हैं। आर्मी में भर्ती होने के बाद उनकी ट्रेनिंग बिहार के पटना में हो रही थी, जहां उन्हें सिर में चोट लगी और उनका आधा शरीर पैरालाइज्ड हो गया। इसके बाद उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया। चार महीने पहले ही उनकी शादी हुई है। चेतन से मिलने जब मैं उनके घर पहुंचा, तो उन्होंने कहा, 'सॉरी सर, मैं आपका नाम भूल गया। आपने आने से पहले क्या नाम बताया था?’ सकुचाते हुए 27 साल के चेतन चौधरी हाथ मिलाते हुए मुझसे पूछते हैं। मैं दोबारा नाम बताता हूं, तो कहते हैं- अरे, हां याद आया! आपके आने से कुछ देर पहले तक मुझे याद था, लेकिन अचानक भूल गया। सिर में चोट लगने से कोमा में चला गया था। तब से मेरी शॉर्ट-टर्म मेमोरी यानी याददाश्त कमजोर हो गई है। अब कुछ देर पहले कही गई बातें भूल जाता हूं।’ यहां तक कि सिर की चोट से मेरी आंखों की रोशनी भी कमजोर हो गई है। इससे आपका चेहरा कैसा है, मुझे ठीक से नहीं दिखाई दे रहा है। आपसे बात करने के लिए मैंने आंख घुमाकर आपकी ओर सेट की है, तब आपको थोड़ा ठीक से देख पा रहा हूं। लेकिन अब भी आपकी दो तस्वीरें दिख रही हैं। एक तस्वीर में आप सामने बैठे हुए दिख रहे हैं तो दूसरी तस्वीर में उसी के ठीक बाई तरफ। दरअसल, आर्मी के ट्रेनिंग में एक हादसे में 8 महीने कोमा में रहा था। सिर में चोट लगने से शरीर का दाया हिस्सा और बाया पैर पैरालाइज्ड हो गया। बाए पैर से चल नहीं पाता। बेकार होने के कारण मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। मैंने पूछा- याद है कि क्या हुआ था? चेतन कहते हैं- मैं बिहार के गया में ओटीए- यानी ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहा था। करीब चार महीने हुए थे। 26 अप्रैल 2015 की बात है। सुबह करीब 8 बजे थे। उस दिन बॉक्सिंग की ट्रेनिंग चल रही थी। मैंने उससे पहले कभी बॉक्सिंग नहीं की थी। तभी एक पंच मेरे सिर की बाईं तरफ लगा। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। गिर पड़ा। मैंने अफसरों से कहा- अब बॉक्सिंग नहीं कर पाऊंगा, सर। अफसर दबाव डालते हुए कह रहे थे- ‘चेतन, दिस इज माय ऑर्डर, यू हैव टू फॉलो’। यानी यह मेरा आदेश है, तुम्हें मानना पड़ेगा। मै उठा और किसी तरह ट्रेनिंग पूरी की। इससे पहले करीब डेढ़ महीने तक मुझे ‘महाराजा’ पनिशमेंट दी जा रही थी- यानी रोज डेढ़-डेढ़ घंटे सिर के बल रहना होता था। इसे ट्रेनिंग का सामान्य हिस्सा माना जाता है। बॉक्सिंग खत्म होने के बाद मैं लौट रहा था कि अचानक चक्कर आया और चीखते हुए जमीन पर गिर पड़ा। साथ में चल रहे दोस्त हर्ष से कहा- ‘हर्ष, मैं मर गया… कुछ दिखाई नहीं दे रहा।’ उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं। जब होश आया, तो तीन दिन पहले की कोई बात याद नहीं थी। उधर, 27 अप्रैल को घर पर फोन आया कि आपके बेटे की तबीयत खराब है, आप पटना आ जाइए। वह एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती है। सबसे पहले मेरे नानाजी फ्लाइट से पहुंचे, फिर मम्मी-पापा भी पहुंच गए। मैं वेंटिलेटर पर था। मम्मी मेरी हालत में देखकर जमीन पर गिर पड़ीं। कुछ देर बाद उन्हें होश आया। डॉक्टर ने बताया कि गहरी चोट की वजह से सिर के एक हिस्से में खून जम गया था, जिसे ऑपरेशन करके हटा दिया गया है। उन्होंने कहा- अगर गया में 12 घंटे के भीतर ऑपरेशन हो जाता, तो बचने की संभावना ज्यादा थी। अब 14 घंटे बाद ऑपरेशन हुआ है, इसलिए 24 से 48 घंटे में होश आ गया तो ठीक, नहीं तो आपका बेटा नहीं बचेगा। इनके शरीर का ऊपर का दाहिना हिस्सा और निचला बायां हिस्सा पैरालाइज्ड हो चुका है। यह सुनने पर परिवार के लिए एक-एक पल काटना मुश्किल हो गया। मैं घर का इकलौता बेटा था। मम्मी वहां मौजूद आर्मी अफसरों से कह रही थीं- हमने 6 फीट का हट्टा-कट्टा 17 साल का बेटा दिया था, आपने विकलांग बना दिया? अब यह पूरी जिंदगी कैसे जीएगा? सीमा पर शहीद होता, तो तिरंगे में लिपटकर घर आता, लेकिन यह तो जीते-जी मर गया? करीब 2 महीने पटना के उस अस्पताल में भर्ती रहा। पेशाब-लैट्रिंग सब बेड पर कर रहा था। पाइप के सहारे पतला खाना अंदर डाला जा रहा था। उसके बाद मुझे दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया, जहां 6 महीने रहा। इस तरह कुल 8 महीने कोमा में रहा। अक्टूबर का महीना था। व्हीलचेयर पर था। अचानक मैं कोमा से बाहर आ गया। इधर-उधर देखकर, तो सोचने लगा- मैं तो एकेडमी में था, यहां हॉस्पिटल में कैसे आ गया। चोट लगने से तीन दिन पहले की बातें ही याद थीं। मुझे परेशान देख पापा कहने लगे- बेटा, तुम्हें बहुत तेज बुखार हुआ था। इसलिए यहां लाए हैं, लेकिन समझ गया था- जरूर कुछ बड़ी घटना हुई है। बाद में धीरे-धीरे सब पता चला। उस दौरान मुझे हर रोज चार-चार इंजेक्शन लग रहे थे। एक इंजेक्शन की कीमत ढाई लाख थी। हालांकि, सारे पैसे आर्मी ही खर्च कर रही थी। लेकिन 26 अक्टूबर 2016 को आर्मी ने मुझे 100 फीसदी विकलांग माना। नौकरी से निकाल दिया।बदले में 45 हजार रुपए दे रही थी। उस समय लगा कि- मेरी जान की कीमत केवल 45 हजार रुपए लगाई गई है। उसके बाद डेढ़ साल तक बिस्तर पर रहा। इस दौरान सिर्फ 34 किलो का रह गया था। कंकाल लग रहा था। मां मुझे बिस्तर पर ही लैट्रिंग-पेशाब कराती थीं। मुझे शर्म आती थी, लेकिन वह कहती- तुम समझो कि मुझे 3 साल का दूसरा बेटा हुआ है। उसकी सू-सू, पॉटी कर रही हूं। सोचिए मां ऐसी ही होती हैं। वह अपने बच्चे की देखभाल के लिए कोई न कोई बहाना खोज लेती हैं। यह कहते-कहते चेतन की आंखें डबडबा जाती हैं। वह कहते हैं- मम्मी-पापा मेरे सामने तो कभी नहीं रोते, लेकिन छुपकर अक्सर रोते थे। चेतन अपने सिर का बाया हिस्सा दिखाने लगते हैं, जो ऑपरेशन के कारण नारियल के छिलके की तरह दो हिस्सों में नजर आ रहा है। कहते हैं- सेना में अफसर बनने गया था, लेकिन विकलांग बनकर आ गया। मेरी चार पीढ़ियां सेना में रहीं। पापा भी सेना में थे। बचपन से वर्दी देखते हुए बड़ा हुआ था। पापा चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूं, लेकिन मेरा सपना फौज में जाने का था। 12वीं के बाद SSB यानी सर्विस सिलेक्शन बोर्ड का फॉर्म भरा और मेरा सिलेक्शन हो गया था। मुझे नहीं पता था कि इस तरह मैं उस सपने को केवल छूकर वापस लौट आऊंगा। इस बातचीत के दौरान मेरी नजर चेतन के ड्राइंग रूम की दीवारों पर गई उनकी वर्दी वाली कई तस्वीरें दिखती हैं। चेतन कहते हैं, ‘ये तस्वीरें तब की हैं मैं जब मेरे घर वाले और सभी मान चुके थे कि अब मैं सेना में अफसर बन चुका हूं। पूरा परिवार खुश था। जब थोड़ा ठीक हुआ अस्पताल से घर आया तो लेटे-लेटे सोचता- अब क्या ही जिंदगी बची है। आत्महत्या करके सारा किस्सा खत्म कर दूं! लेकिन मां-बाप का चेहरा देखकर रुक जाता था। घर पर रिश्तेदार मुझे देखने आते तो कहते- सेना में भर्ती होने के बाद वहां से कोई भला कैसे बाहर आ सकता है। नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। लेकिन हकीकत यह है कि ट्रेनिंग के दौरान इस तरह बीच में पैरालाइज्ड होने पर सेना में कोई जगह नहीं बचती। हमें मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया जाता है। अब मेरी जो हालत है, इसका कोई तो जिम्मेदार होगा ही। चोट लगने के 12 घंटे के भीतर अगर मेरी सर्जरी हो जाती, तो मैं शायद इतना ज्यादा बेकार न होता, कहते हुए चेतन का गला सूखने लगता है। सामने रखी पानी की बोतल तुरंत उनकी तरफ बढ़ा देता हूं। पानी पीकर वह कहते हैं- ज्यादा बोलने से गला सूख जाता है। गले की सर्जरी हुई है। आपको गर्दन में एक छेद दिख रहा होगा। इसकी नस काम नहीं कर रही थी। यही नहीं, हादसे के बाद तो मेरे हाथ भी बहुत कांपते थे। लगते थे कि मेरे शरीर का हिस्सा ही नहीं हैं। थेरेपी और एक्सरसाइज की बदौलत काफी ठीक हुए, लेकिन बाएं पैर से अब भी नहीं चल पाता। रोज थेरेपी लेता हूं। घुटने में सपोर्ट सिस्टम लगाता हूं, तब इस पैर से थोड़ा चल पाता हूं। आर्मी का सारा पैसा मेरे शरीर के इलाज में खर्च हो रहा है। मैं तो थोड़ा भाग्यशाली हूं कि कम-से-कम मेरी ऐसी हालत तो है, वर्ना ट्रेनिंग के दौरान ऐसे लोग भी निकाले गए हैं, जिनकी पूरी जिंदगी व्हीलचेयर पर चली गई है। मैं पढ़ने में तेज रहा हूं, इसलिए यादाश्त कम होने पर भी पढ़ाई शुरू की। दो साल पहले ही मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में मेरी नौकरी लगी है। अब जाकर पैसे की दिक्कत दूर हुई है। लेकिन आज भी मैं हर रात सेना की वर्दी वाली इस फोटो को देखता हूं। इससे बातें करता हूं कि- चेतन तुझे फिर से ठीक होकर ऐसा ही दिखना है। उसके बाद सोता हूं। शादी में क्या दिक्कत आई? मैंने तो सोच लिया था कि शादी नहीं करूंगा। जब पैरालाइज्ड पार्ट थोड़ा ठीक हुआ, नौकर लगी तब कुछ रिश्ते आए। जो भी देखने आता, शादी से मना कर देता। आखिर में मेरी बहन ने एक रिश्ता तय किया। चेतन से मिलने के बाद मैं दिल्ली के नारायणा विहार पहुंचा। मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए कैट की तैयारी कर रहे आशीष के पास। आशीष उत्तर प्रदेश के मथुरा के रहने वाले हैं। वह कहते हैं- अप्रैल 2022 में मैंने NDA की परीक्षा पास करके सेना में भर्ती हुआ था। पापा भी सेना में थे। जब मैंने नौकरी ज्वाइन की, तब लगा कि अब तो लाइफ सेट हो गई है। पापा से कहा- अब आपको नौकरी करने की जरूरत नहीं है। 18 साल आप नौकरी कर चुके हैं। वीआरएस लेकर अब घर रहिए। मेरी बात मानकर उन्होंने वीआरएस ले ली और घर पर रहने लगे। लेकिन जुलाई 2022 आते-आते सब कुछ बदल गया। मैं पुणे की आर्मी इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग ले रहा था। सेना में भर्ती हुए महज 4 महीने हुए थे। उस दिन 10 मीटर की तैराकी की ट्रेनिंग हो रही थी। जैसे ही मैंने पानी में छलांग लगाई। पानी के दबाव से मेरे दाएं कंधे की नस ऊपर की ओर खिसक गई। गंभीर रूप से घायल हो गया। मुझे पानी से निकालकर तुरंत पुणे के आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उस दौरान घर वाले फोन करते, तो कहता- सब ठीक है। हल्की चोट लगी है, जल्दी ठीक हो जाऊंगा। खैर, वहां डॉक्टर ने कंधे की सर्जरी की। इस तरह अक्टूबर तक एकेडमी में रहा। एक दिन आर्मी वालों ने कहा कि वह मुझे ट्रेनिंग से निकाला जा रहा है। उसके बाद घर वालों को बताया। मैं तो डिप्रेशन में चला गया। सोच रहा था कि यह क्या हो गया। ट्रेनिंग के दौरान सेना के लोग भले हमें अपना न मानें, लेकिन हम तो खुद को सेना का आदमी मान बैठते हैं। लेकिन सच यह है कि बिना ट्रेनिंग पूरी किए कोई सेना का नहीं होता। इस तरह मुझे सेना की नौकरी से निकाल दिया गया। पूरा घर परेशान था। उस दौरान गांव का एक लड़का लेफ्टिनेंट बनकर आया। लोगों ने फूल-माला से उसका स्वागत किया। उस दिन मुझे देखकर मेरी मां फूट-फूटकर रोई थीं। मेरा कंधा अब ऐसा हो गया कि हल्का जोर पड़े तो खिसक जाता है। गेंद नहीं फेंक सकता। न कोई भारी काम कर पाता हूं। अब तो ये हमेशा ऐसा ही रहेगा। बस एक चीज से संतोष कर लेता हूं कि चलो बाकी शरीर तो ठीक है न। इस तरह आर्मी के सपने देखते हुए मेरे 3 साल बर्बाद हो गए। वहां से आने के बाद 2025 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। साथ-साथ कैट एग्जाम की तैयारी कर रहा हूं। चेतन और आशीष से मिलने के बाद मैं दिल्ली के करोल बाग पहुंचा। यहां यूपीएससी की तैयारी कर रहे यश्मित कौशिक से मुलाकात हुई। यश्मित हरियाणा के बहादुरगढ़ के रहने वाले हैं। कुछ दिन पहले जब इनसे उनके गांव आकर मिलने की बात हुई थी, तब इन्होंने मना कर दिया था। यश्मित कहते हैं, ‘दरअसल गांव में मम्मी-पापा के सामने ये सारी बातें नहीं करना चाहता था। मेरे घर में तो कोई सेना में था भी नहीं। पापा टीचर थे। मैं पायलट बनना चाहता था, लेकिन कम दिखाई देने की वजह से पायलट नहीं बन पाया। ‘लक्ष्य’ जैसी देशभक्ति फिल्में देखी थी, तभी से सेना में जाने का मन हुआ था। 2021 का बात है। मैंने NDA की परीक्षा पास की और नौकर लग गई। 2 साल बीता। ढाई किलोमीटर की एक रनिंग के दौरान मेरे पैर में फ्रैक्चर आ गया। कुल्हे से सटी पैर की हड्डी टूट गई। पहले तो हेयर लाइन फ्रैक्चर था। यानि हल्का-हल्का क्रैक हुआ। मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। फिर धीरे-धीरे क्रैक ऐसा बढ़ा कि हड्डी टूट गई। अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई महीने व्हीलचेयर पर रहा। बाद में मुझे सेना से निकाल दिया गया। मेरा सपना वहीं का वहीं रह गया। पापा बार-बार समझाते हैं। कोई बात नहीं, कम-से-कम तू तो सही सलामत है। कुछ और कर लेना। जबकि अफसर होने का ख्वाब देखते हुए बड़ा हुआ था। फिलहाल, अब दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रहा हूं। सेना में अभी जो नियम है, उसके मुताबिक 4 साल की ट्रेनिंग के दौरान अगर किसी जवान का अंग गंभीर रूप से खराब हो जाए या उसकी मौत हो जाए, तो उसे मुआवजे में कुछ रुपए देकर ट्रेनिंग के बीच से ही नौकरी से निकाल दिया जाता है। वह सेना का हिस्सा नहीं माना जाता। न ही कोई सुविधा मिलती है। इस तरह अब तक लगभग 450 लोगों को बोर्डआउट यानी ट्रेनिंग के दौरान बाहर किया गया है। कई ऐसे कैंडिडेट भी हैं, जो पूरी तरह से विकलंगा हो गए हैं। इसको लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में गया है। वहां हम सभी की मांग है कि हमें सेना की तरफ से या तो पूर्वा सैनिक का दर्जा दिया जाए या सेना में ही कोई टेबल जॉब। यानी हल्की-फुल्की मेहनत वाली नौकरी। ------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड- सिर्फ पीरियड्स में नहा पाती हैं महिलाएं:कम खाती हैं, ताकि शौच न जाना पड़े; बोलीं- नमक के खेत में ही पैदा हुए, इसी में मर जाएंगे चिलचिलाती धूप में दूर तक फैला नमक का मैदान इतनी तेज चमक रहा है कि आंखों में चुभ रहा है। दूर तक कहीं छांव नहीं। अचानक एक महिला, रमिला, काम छोड़कर धीरे से कहती हैं- ‘दिन में हम शौच नहीं जाते… लोग देख लेंगे। इसलिए खाना भी कम खाते हैं… ताकि बार-बार जाना न पड़े…पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- भूख के बजाय, दवाओं के ट्रायल से मरना अच्छा:बच्चों को तो 25 लाख मिल जाएंगे; उन्हें रिसर्च के लिए खून चाहिए, हमें पैसा ‘किसे अच्छा लगता है कि वह पैसे के लिए अपनी जान की बाजी लगाए, लेकिन मुझे लगानी पड़ती है। अगर मर भी गई तो बच्चों को 20-25 लाख मिलेंगे। कम से कम उनकी जिंदगी तो बेहतर हो जाएगी। अभी तक खुद पर दवाओं के ट्रायल में 4 बार पास हुई हूं।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
बात जुलाई-अगस्त 1959 की है। जगह थी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास और सुबह का वक्त। पीएम जवाहर लाल नेहरू, उनकी बेटी इंदिरा गांधी और दामाद फिरोज गांधी नाश्ता कर रहे थे। नेहरू थोड़े परेशान लग रहे थे। फिरोज के चेहरे पर भी तनाव था, लेकिन उस वक्त की कांग्रेस अध्यक्ष इंदिरा गुस्से में थीं। फिरोज ने इंदिरा की तरफ इशारा करते हुए कहा- ‘यह बिल्कुल भी सही नहीं है। आप लोगों को डरा रही हैं। आप फासीवादी हो।’ इतना सुनते ही इंदिरा भड़क गईं। उन्होंने कहा- ‘आप मुझे फासीवादी कह रहे हैं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगी।’ वह उठकर कमरे से बाहर चली गईं। इस किस्से का जिक्र स्वीडन के लेखक और जर्नलिस्ट बर्टिल फाक अपनी किताब ‘फिरोज द फॉरगॉटन गांधी’ में किया है। दरअसल, तब नाश्ते की टेबल पर केरल, यानी अब के केरलम के सियासी हालातों की चर्चा हो रही थी। केरलम में वामपंथी सरकार बर्खास्त कर दी गई थी। फिरोज, इस फैसले के खिलाफ थे। उन्हें लगता था कि इंदिरा ने अपनी जिद पर लेफ्ट सरकार बर्खास्त की है। ये दुनिया में कम्युनिस्टों की पहली चुनी हुई सरकार थी और अब 67 साल बाद देश में इकलौता केरलम ही है, जहां वामपंथी सरकार बची है। पश्चिम बंगाल में लगातार 34 साल राज करने वाली लेफ्ट का ना कोई सांसद है ना विधायक। त्रिपुरा में 25 साल सत्ता में रही लेफ्ट आज मुख्य विपक्षी पार्टी भी नहीं बची। इलेक्शन एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि आखिर लेफ्ट केरलम में ही क्यों सर्वाइव कर रहा है… शुरुआत भारत में लेफ्ट के जन्म से करते हैं… 17 अक्टूबर 1920 को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में अमेरिकी और रूसी कम्युनिस्टों ने पहली बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) बनाने का ऐलान किया। तब पहले विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन मुसलमानों के ऑटोमन साम्राज्य के टुकड़े कर चुका था। तुर्की के खलीफा, यानी मुसलमानों की सबसे बड़ी धार्मिक और राजनीतिक सत्ता खत्म हो चुकी थी। भारत में खलीफा के समर्थन में खिलाफत आंदोलन चल रहा था। जैसे ही CPI बनाने का ऐलान हुआ, खिलाफत आंदोलन से जुड़े नौजवान बड़ी संख्या में इसमें शामिल हो गए। बावजूद इसके भारतीय कम्युनिस्टों का कहना था कि पार्टी विदेश में बनी है, इसलिए आमलोग इससे नहीं जुड़ रहे। नतीजन 1925 में कानपुर में एक बार फिर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) बनाने का ऐलान हुआ। जल्द इससे गरीब और मजदूर जुड़ गए और अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। नाराज अंग्रेजों ने 1934 में इस पर बैन लगा दिया। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, लेकिन कम्युनिस्ट इसमें शामिल नहीं हुए। बदले में अंग्रेजों ने कम्युनिस्ट संगठनों से पाबंदी हटा ली। दरअसल, तब दूसरे विश्वुयुद्ध में कम्युनिस्टों का गढ़, यानी सोवियत संघ, ब्रिटेन के साथ मिलकर हिटलर से लड़ रहा था, इसलिए कम्युनिस्ट अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन नहीं करना चाहते थे। अब बात केरलम की… 1956 में त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार को मिलाकर एक नया राज्य बना- केरल। मार्च 1957 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। 126 सीटों वालीं विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI को 60 सीट मिली। 5 निर्दलीय को मिलाकर उसने सरकार बना ली। ये दुनिया में वामपंथियों की पहली चुनी हुई सरकार थी। ईएमएस नंबूदिरीपाद ने मुख्यमंत्री बनने के एक हफ्ते बाद ही दो बड़े कानून लागू किए। पहला- भूमि सुधार कानून और दूसरा- शिक्षा में सुधार को लेकर। भूमि सुधार कानून के बाद बटाईदार किसानों को जमीन खरीदने की छूट मिल गई। लैंडहोल्डिंग की लिमिट तय हो गई। वहीं, एजुकेशन बिल के जरिए प्राइवेट संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए सख्त नियम बना दिए। दोनों कानूनों से आम लोगों का एक बड़ा वर्ग खुश था, लेकिन कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को ये बिल रास नहीं आए। केरलम के चर्च और नायर कम्युनिटी भी विरोध में उतर गए। दोनों के पास केरलम में सबसे ज्यादा स्कूल और चैरिटेबल ट्रस्ट थे। इसी बीच केरलम के स्कूल-कॉलेजों से गांधी की तस्वीर हटाकर माओ और स्टालिन की तस्वीर लगाई जाने लगीं। कहा जाने लगा कि नंबूदिरीपाद की सरकार बनाने के लिए कम्युनिस्ट देशों ने फंड भेजे हैं। केरलम के गांधी कहे जाने वाले मन्नथ पिल्लई की अगुवाई में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए। आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हजारों लोग जेल में डाल दिए गए। इसी बीच मछुआरे कम्युनिटी की एक प्रेग्नेट महिला की पुलिस लाठी चार्ज में जान चली गई। आंदोलन और भड़क उठा। जगह-जगह हिंसा होने लगीं। इंदिरा गांधी सहित कांग्रेस के कई लोग केरलम की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त करना चाहते थे। उनके लिए ये आंदोलन एक मौके जैसा था, लेकिन पीएम नेहरू ऐसा करने के लिए तैयार नहीं थे। उनका मानना था कि चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करने से दुनिया में अच्छा संदेश नहीं जाएगा। 2 फरवरी 1959 को इंदिरा गांधी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। इसके बाद वो केरलम गईं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नेहरू को सौंप दी। 31 जुलाई 1959 को केरलम सरकार बर्खास्त कर दी गई। तब कम्युनिस्ट अखबार न्यू एज ने लिखा था- ‘जवाहरलाल नेहरू आपको इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।’ 1960 में केरलम में फिर से चुनाव हुए। कांग्रेस ने इंडियन मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन कर लिया। फिरोज गांधी, इंदिरा के इस फैसले से खुश नहीं थे। उन्होंने कांग्रेस सांसदों की एक मीटिंग में कहा- ‘कांग्रेस कहां है? कांग्रेस के सिद्धांत कहां हैं? क्या कांग्रेस इतनी नीचे गिर गई है कि हम सांप्रदायिक तत्वों, जातिवादी नेताओं और उन लोगों के इशारों पर चलने लगेंगे जो लोगों में धार्मिक भावनाएं भड़काते हैं।’ हालांकि, कांग्रेस ने प्रजा सोशिलिस्ट पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन किया और चुनाव में 95 सीटें जीत ली, जबकि लेफ्ट 29 सीटों पर सिमट गई। प्रजा सोशिलिस्ट के पीए थानू पिल्लई सीएम बने, लेकिन दो साल बाद कांग्रेस ने थानू को राज्यपाल बनाकर खुद का मुख्यमंत्री बना दिया। चीन की जंग के बाद दो धड़ों में बंट गया लेफ्ट 1962 की जंग में कम्युनिस्ट पार्टी के कई नेताओं को चीन का समर्थन करने के आरोप में जेल में डाल दिया गया। उसी दौरान कम्युनिस्ट पार्टी दो धड़ों में बंट गई। चीन की नीतियों का समर्थन करने वाले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPI-M और सोवियत संघ का समर्थन करने वाले CPI बने रहे। हालांकि, 1967 के चुनाव में लेफ्ट ने फिर से सत्ता में वापसी कर ली। तब CPI-M ने 52 और CPI को 19 सीटें मिलीं। सीपीआई एम के नंबूदिरीपाद दूसरी बार सीएम बने। उसके बाद 1970 और 1978 के चुनाव में भी लेफ्ट की सरकार बनी। जनवरी 1980 में लेफ्ट ने सात दलों को मिलाकर गठबंधन बनाया, जिसे लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF कहा गया। लेफ्ट की तर्ज पर कांग्रेस ने भी एक गठबंधन बनाया, जिसे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी UDF कहा गया। आखिर लेफ्ट का दबदबा केरलम में ही क्यों बचा है? 5 बड़ी वजहें… 1. भूमि सुधार आंदोलन : भूमिहीन किसान और मजदूर लेफ्ट की तरफ शिफ्ट हो गए सीनियर जर्नलिस्ट नवीन जोशी बताते हैं- ‘लेफ्ट की सरकार ने गरीब और मजदूरों को राशन के बजाय जमीन का टुकड़ा दिया। कमाने का जरिया दिया। आय के संसाधनों पर हिस्सेदारी दी। इससे उनका झुकाव लेफ्ट की तरफ हो गया और आज भी वे उससे जुड़े हुए हैं।’ 2. ट्रेड यूनियन बनाकर लेफ्ट ने लाखों मजदूरों को वोटर बना लिया 3. आइडियोलॉजी के बजाय पावर और पैसे के जरिए पॉलिटकल मैनेजमेंट केरलम के सीनियर जर्नलिस्ट कैलाश के मुताबिक… 4. मुफ्त शिक्षा और प्राइवेट स्कूलों को भी सरकारी फंड देना 5. लेफ्ट और कांग्रेस के बीच लड़ाई, कोई तीसरा विकल्प नहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट और केरलम यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी प्रोफेसर जयप्रसाद के मुताबिक… केरल में तीसरा मोर्चा यानी बीजेपी के नहीं आने की एक वजह 30% आबादी वाली मुस्लिम कम्युनिटी भी है। दरअसल, उत्तर भारत की तरह केरल में मुस्लिम आक्रांता के रूप में नहीं आए। यहां वे कारोबारी बनकर आए थे। इसलिए यहां उत्तर भारत की तरह हिंदू-मुस्लिम पॉलिटिक्स नहीं हो पाती। यहां ध्रुवीकरण मुश्किल है। लेफ्ट के लिए इस बार का चुनाव मुश्किल क्यों हैं? 3 बड़ी वजह… 1. लोकसभा के हिसाब से 111 पर UDF आगे, LDF को महज 18 पर बढ़त 2. लोकल चुनावों में लेफ्ट वाले LDF को 30-35% तक नुकसान 3. तीसरे मोर्चे के रूप में बीजेपी की बढ़ती सेंधमारी पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर जयप्रसाद बताते हैं- ‘अब कांग्रेस और लेफ्ट का ट्रेडिशनल फॉर्म कमजोर पड़ रहा है। कम्युनिस्ट के बड़े-बड़े नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी और कांग्रेस में जा रहे हैं। उनके खिलाफ करप्शन के चार्ज हैं। मुस्लिम माइनोरिटी कांग्रेस की तरफ जा रही है। ऐसे में इस बार का चुनाव लेफ्ट के लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।’ ***** इलेक्शन एक्सप्लेनर से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बंगाल में 5% वोट बढ़े, तो बीजेपी नंबर-1 बनेगी:मुस्लिम एकजुट हुए, तो असम फिसल जाएगा; 5 राज्यों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंता बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा। अगले 30 दिनों में भारत के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इलेक्शन एक्सप्लेनर में जानेंगे आखिर इन पांचों प्रदेशों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा है…पूरी खबर पढ़िए…

