सोमवार, 16 मार्च को 3 राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों पर मतदान हुए। विधायकों ने जमकर क्रॉस-वोटिंग की। इसके चलते ओडिशा में बीजेपी ने 1 एक्स्ट्रा सीट जीत ली। वहीं बिहार में कांग्रेस के 3 और RJD के एक विधायक वोट डालने ही नहीं पहुंचे। इससे बीजेपी की शिवेश राम की जीत आसान हो गई। अब राज्यसभा में NDA ने फिर से बहुमत हासिल कर लिया है। फरवरी-मार्च 2026 में राज्यसभा में 10 राज्यों की 37 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 40 कैंडिडेट्स ने पर्चा भरा। इनमें से 7 राज्यों के 26 प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए। हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों पर वोटिंग हुई थी, जिसमें क्रॉस-वोटिंग का खेल हुआ। चुनाव के बाद अब राज्यसभा में कौन-सी पार्टी कितनी ताकतवर है, वोटिंग में कैसे खेल हुआ और मोदी सरकार ज्यादा मजबूत कैसे हुई; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… कैसे होती है राज्यसभा चुनाव की वोटिंग? किसी राज्य में राज्यसभा की जितनी सीटें खाली हैं, उन पर राज्य के विधायकों की संख्या के हिसाब से वोट डाले जाते हैं। ये फॉर्मूला थोड़ा पेचीदा लग सकता है, इसलिए हरियाणा के एग्जांपल से समझिए… बिहार में NDA ने कैसी जीतीं पांचों सीट? बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 6 कैंडिडेट्स ने नॉमिनेशन फाइल किया। NDA की ओर से बीजेपी के नितिन नबीन, RLM सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा, JDU के नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर की जीत पहले से तय थी। लेकिन पेंच फंस गया बीजेपी के शिवेश राम की सीट पर। दरअसल, RJD की ओर से एडी सिंह ने भी पर्चा भरा और उनका मुकाबला शिवेश कुमार से हुआ…. ओडिशा में कैसे हुआ क्रॉस वोटिंग का खेल? ओडिशा से राज्यसभा की 4 सीटें खाली हुई थीं। बीजेपी के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की जीत पक्की थी। वहीं BJD के संतृप्त मिश्रा का भी जीतना तय था। मुकाबला हुआ बीजेपी समर्थित कैंडिडेट दिलीप राय और BJD के डॉ. दत्तेश्वर होता के बीच… हरियाणा में देर रात क्यों आए नतीजे? हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटें के लिए चुनाव हुए। बीजेपी ने संजय भाटिया का जीतना पहले से तय था। जबकि बीजेपी समर्थित सतीश नांदल और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध के बीच मुकाबला हुआ… नियम होने के बावजूद क्रॉस-वोटिंग पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? बिहार, ओडिशा और हरियाणा में विधायकों ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार को छोड़ दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को वोट दिए। जबकि यहां पार्टियों ने व्हिप जारी किए थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता। विधायक अपने विवेक से वोट कर सकते हैं, लेकिन इसमें एक पेंच है। राज्यसभा चुनाव में ओपन वोटिंग होती है। यानी विधायकों को मतपत्र पर वरीयता भरने के बाद अपनी पार्टी के तय एजेंट को उसे दिखाना होता है। जो विधायक ऐसा नहीं करते या किसी अन्य व्यक्ति को मतपत्र दिखाते हैं, तो उनका वोट कैंसिल हो सकता है। वहीं जो विधायक अपनी पार्टी के खिलाफ जाते हैं, उन्हें पार्टी से निकालने का प्रावधान है। इसके लिए पॉलिटिकल पार्टी को एक एप्लीकेशन विधानसभा के स्पीकर को देना होता है और उस विधायक की सदस्यता रद्द कर दी जाती है। ऐसे में ये कहना कि राज्यसभा चुनाव में दूसरे दल के उम्मीदवार को वोट करने पर कार्रवाई नहीं होती है, ये सही नहीं है। लेकिन पार्टियां ऐसा करने से बचती हैं। 2003 में बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने ओपन वोटिंग का प्रावधान इसीलिए बनाया था, ताकि विधायक दूसरे दलों से पैसा लेकर राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं करें। NDA को राज्यसभा में फिर से बहुमत मिलने से कैसे मजबूत होगी मोदी सरकार? राज्यसभा में बीजेपी के 106 सांसदों के साथ अब NDA के कुल सांसदों की संख्या 140 हो गई है। यानी NDA को फिर से बहुमत मिल गया। इसके चलते केंद्र की मोदी सरकार और मजबूत होगी। कोई बड़ा बिल पास कराने के लिए अब उसे BJD, YSRCP या निर्दलीय सांसदों की जरूरत नहीं पड़ेगी। NDA के सांसद इसके लिए काफी होंगे। विपक्ष के वॉकआउट या विरोध के बावजूद बिल अटकेंगे नहीं। हालांकि बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को पिछले 2 साल से राज्यसभा और लोकसभा में बहुमत हासिल है। इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ कहते हैं कि भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा का चुनाव इस तरह से होता है कि लोकसभा और राज्यसभा में किसी एक दल को एक समय पर स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल होता है। अगर किसी बड़ी पार्टी के पास बहुमत है तो इसका फायदा यह है कि सरकार को क्षेत्रीय दलों या निर्दलीय सांसदों के समर्थन के बदले उनकी अनुचित मांगों के सामने झुकना नहीं पड़ता। हालांकि इसका नकारात्मक पहलू भी है। जब किसी एक दल के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगहों पर बहुमत हो तो संसदीय कामकाज में आम सहमति बनाने की स्थिति कम हो जाती है। बड़ी पार्टी अपने मन से फैसला लेती है। वह छोटे और दूसरे दलों से सलाह नहीं लेती है। यह लोकतंत्र के लिए सेहतमंद स्थिति नहीं है। 1989 तक कांग्रेस पार्टी के पास राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत होता था। तब ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की ही सरकार थी। लेकिन 1989 के बाद की सभी सरकारों को राज्यसभा में अहम बिल पास कराने में छोटे दलों को साधना पड़ा है या विपक्षी दलों के साथ मिलकर आम सहमति बनानी पड़ी है। ******** ये भी खबर पढ़िए… चुनाव से पहले BJP ने मुख्यमंत्री बदलने की स्क्रिप्ट लिखी: नीतीश के नाम पर भ्रम फैलाया, चिराग को ज्यादा सीटें; 4 पॉइंट में BJP की स्ट्रैटजी नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना तय है। भले ही नतीजों के लगभग चार महीने बाद ऐसा होने जा रहा है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट बीजेपी ने चुनाव से पहले ही लिख रखी थी। सीटों के बंटवारे से लेकर नीतीश के लिए मजबूती से कैंपेन करना, बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। पूरी खबर पढ़िए…
ईरान का पड़ोसियों पर वार: हमलों की इजाज़त नरसंहार को बढ़ावा
युद्धविराम की मांग वाली बात पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अब पड़ोसी देशों को नसीहत दी है।
दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह ठिकानों पर जमीनी अभियान शुरू : इजरायल
इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने दावा किया कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के प्रमुख ठिकानों के खिलाफ सीमित और लक्षित जमीनी अभियान शुरू कर दिया है।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका ने कई मौकों पर अपने सहयोगियों का साथ दिया है, लेकिन अब देखना होगा कि वे अमेरिका की कितनी मदद करते हैं। उन्होंने कहा, हमें यूक्रेन के मामले में उनकी मदद की जरूरत नहीं पड़ी।
दिल्ली यात्रा के दौरान DGFI प्रमुख राशिद चौधरी ने भारत के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अलावा भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया एजेंसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. रमन भी शामिल थे।
होर्मुज पर ट्रंप की उम्मीदों को लगा झटका! जापान-AUS का साफ इनकार, दक्षिण कोरिया बोला- सोचेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में योगदान देने के लिए कहा है।
ईरान की आईआरजीसी ने बयान जारी कर बताया कि इजराइल के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान पहली बार सेजिल मिसाइल दागी गई। यह एक सॉलिड फ्यूल वाली मध्यम दूरी की रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे ईरान की सबसे उन्नत मिसाइलों में गिना जाता है।
अमेरिका का 'लुकास' ड्रोन अरब देशों को बना रहा निशाना: ईरानी विदेश मंत्री
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल कुछ स्थानों से पश्चिम एशिया में अरब देशों पर हमले कर रहे हैं। यह बात उन्होंने पैन-अरब समाचार आउटलेट अल-अरबी अल-जहीद के साथ साक्षात्कार में कही।
स्टार्मर-ट्रंप वार्ता: होर्मुज स्ट्रेट खोलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात कर मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ रहे असर पर चर्चा की।
पूरी दुनिया की नजर ईरान जंग पर टिकी है। उधर इजराइल तेजी से लेबनान पर जमीनी कब्जा करने में जुटा है। पिछले 15 दिनों में ही इजराइल ने लेबनान में करीब 700 लोग मार दिए हैं। 20% जमीन खाली करा ली है और अपने सैन्य ठिकाने जमा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू अपने अल्टीमेट गोल ‘ग्रेटर इजराइल’ को हकीकत बनाने में जुटे हैं। आखिर ग्रेटर इजराइल क्या है और नेतन्याहू मिडिल ईस्ट में क्या करना चाहते हैं; जानेंगे मंडे मेगा स्टोरी में… लेकिन इस सब की शुरुआत क्यों और कैसे हुई? इसे समझने के लिए 4 हजार साल पीछे चलना होगा… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह -------- ये खबर भी पढ़िए… ईरान समेत 7 देशों पर हमले, आधी दुनिया पर नजर:ट्रम्प की 'सनक' एक सोची-समझी स्ट्रैटजी; क्या ऐसे ही तबाह होती हैं सुपर पावर्स डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति पद की शपथ लिए 13 महीने हुए हैं। इस दौरान ट्रम्प ने 7 देशों पर सैन्य हमले किए, ईरान के सुप्रीम लीडर को मार गिराया, वेनेजुएला के राष्ट्रपति को तो घर से उठवा लिया, दर्जनों देशों पर अनाप-शनाप टैरिफ लगाए और राष्ट्राध्यक्षों को बेइज्जत किया। पूरी खबर पढ़िए…
US Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने ठुकराया युद्धविराम का प्रयास, ईरान ने भी रखीं कड़ी शर्तें
व्हाइट हाउस ने साफ संकेत दिया है कि इस समय उसकी प्राथमिकता सैन्य अभियान जारी रखना है, न कि युद्धविराम पर चर्चा करना। दूसरी ओर ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले पूरी तरह बंद नहीं होते, तब तक किसी भी तरह की शांति वार्ता संभव नहीं है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। यह केवल हमारे दुश्मनों—अमेरिका और उसके सहयोगियों—के टैंकरों और जहाजों के लिए बंद है।
होर्मुज स्ट्रेट खुला है, पर नियंत्रण हमारे पास है : आईआरजीएस कमांडर
ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया है कि दुनिया में तेल ले जाने का एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट अभी भी खुला है और उस पर ईरान का नियंत्रण बना हुआ है
मैं रामकृष्ण, ओडिशा के मलकानगिरि जिले के तंडकी गांव का रहने वाला हूं। मेरे चार बच्चे हैं, सभी बिस्तर पर पड़े रहते हैं। हिल-डुल नहीं सकते। सभी जवान हैं, शादी की उम्र के हैं। इन्हें हाइपोटोनिया नाम की बीमारी है। पैदा होने पर ये बच्चे ठीक थे, लेकिन धीरे-धीरे ये इस बीमारी की जद में आते गए। पत्नी इनके गम में बीमार रहने लगी है। 8 हजार कमाता हूं। किसी का इलाज नहीं करा सकता। एक ऐसी परेशानी में हूं, जिसका कोई हल नहीं है। समझ नहीं आता कि मौत किसके लिए मांगू। आज से 23 साल पहले मेरे पहला बच्चा बेटी हुई। हमारे यहां बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं किया जाता। पिता बनकर बहुत खुश था, लेकिन 6 महीने बाद भी मेरी बेटी हिल-डुल नहीं पा रही थी। आवाज देने पर हमारी तरफ देखती भी नहीं थी। ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं, इसलिए कुछ समझ नहीं पा रहा था कि इन्हें क्या हुआ है। पहले लोकल डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। वैसे भी हमारा इलाका नक्सल प्रभावित है। यहां अस्पताल वगैरह कुछ खास नहीं हैं। डॉक्टरों ने कहा कि इसे भुवनेश्वर लेकर जाओ मलकानगिरि से भुवनेश्वर जाना इतना आसान नहीं था। पंचायत ऑफिस में अनाज बांटने से 8 हजार रुपए महीना कमा पाता हूं। फिलहाल, बेटी को दिखाने के लिए भुवनेश्वर लेकर गया। वहां डॉक्टर ने बताया कि इसे हाइपोटोनिया है। यह बीमारी कभी ठीक नहीं होगी। मैं समझ नहीं पाया कि यह बीमारी होती क्या है। बाद में लोगों से पता चला कि यह जेनेटिक बीमारी होती है। भुवनेश्वर के अलावा आंध्र प्रदेश का विशाखापट्टनम शहर हमारे घर से नजदीक पड़ता है, जहां इसका इलाज होता है। लेकिन विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर से भी ज्यादा मंहगा शहर है। आने-जाने के एक चक्कर में 20 से 25,000 रुपए लग जाते हैं। इतना पैसा चुका नहीं सकता। अब बच्चों का इलाज तो नहीं करा पा रहा, लेकिन इनकी सेवा कर रहा हूं। अब तो मेरी पत्नी बच्चों के बारे में सोच-सोच कर बीमार रहने लगी है। सोचती है कोई तो सामान्य औलाद पैदा हुई होती। तीन साल बाद मेरी पत्नी दोबारा प्रेगनेंट हुई। इस बार बड़ी उम्मीद थी कि भगवान हमारी सुनेगा। लेकिन डरे भी हुए थे कि कहीं यह बच्चा भी बेटी जैसा न हो जाए। खैर, मुझे फिर से एक बेटी हुई। शुरुआत में ठीक थी। सालभर तक पता नहीं चला कि उसे कोई बीमारी है। लेकिन हम सतर्क थे। जब वह चलने लायक हुई तो अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी। हमें लगा कुछ बच्चे देर में चलते हैं। इंतजार करते रहे, लेकिन नहीं चली। लगभग दो साल बाद भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई। हम पति-पत्नी तो सोचकर ही कांप गए कि यह बच्ची भी पहली बच्ची जैसी हो रही है। हमने उसे चलाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह धीरे-धीरे ठीक वैसे ही होती चली गई, जैसी बड़ी बेटी थी। हम घबराकर उसे भुवनेश्वर लेकर गए। वहां डॉक्टर ने बताया कि यह भी ठीक नहीं होगी। इसी भी हाइपोटोनिया बीमारी है। निराश होकर वापस घर लौट आया। अब हम दो-दो विकलांग बेटियों को पालने लगे। हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था। हमें लगा कि शायद भगवान की यही मर्जी हो। मैं सुबह काम पर चला जाता और मेरी पत्नी बेटियों की देखभाल करतीं। उन्हें नहलाती, खिलाती। जैसे-जैसे बेटियां बड़ी होती गईं। उनका वजन बढ़ता गया। खासकर बड़ी बेटी का वजन बढ़ने से पत्नी के लिए इन्हें उठा पाना मुश्किल होने लगा। परेशानी बढ़ गई। दो साल बाद मेरी पत्नी फिर प्रेगनेंट हुई। इस बार उम्मीद थी कि हमारी झोली भरी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भगवान को कुछ और ही मंजूर था। हमारे दो जुड़वा बेटे हुए। उनके पैदा होते ही हम उन्हें डॉक्टर के पास ले गए। लेकिन डॉक्टर बता नहीं पा रहे थे कि उन्हें कोई बीमारी है या नहीं। सालभर बद बदकिस्मती से मेरे दोनों जुड़वा बेटों को भी वही हाइपोटोनिया बीमारी होने का पता चला। अब मेरे चार बच्चे हैं। पहली बेटी 23 साल की हो गई है। दूसरी 20 साल की और दोनों बेटों की उम्र 19 साल है। चार-चार जवान बच्चे, सभी विकलांग और ऐसी बीमारी जो अब कभी भी ठीक नहीं हो सकती है। अब मैं हार चुका हूं। पत्नी बीमार रहने लगी है, उसका इलाज नहीं करा पा रहा हूं। बच्चों के बारे में सोच-सोचकर वह गुमसुम रहने लगी है। बस खाना बना देती है। उसके बाद सारा दिन चुप बैठी रहती है। सोचता हूं जिस उम्र में पिता बच्चों की शादी के रिश्ते ढूंढ़ता है, मैं उस में में चार-चार जवान बच्चों का मल-मूत्र साफ करने में लगा रहता हूं। सुबह अकेला उठता हूं। चारों बच्चों को शौच और ब्रश कराता हूं। नहालाता-धुलाता हूं। इस दौरान मेरी पत्नी नाश्ता तैयार कर रही होती हैं। चारों बच्चों को नाश्ता कराता हूं और फिर मैं नाश्ता करता हूं। सुबह पंचायत ऑफिस जाते वक्त इन बच्चों को कुर्सी पर बिठाकर चला जाता हूं। साथ में मोबाइल पर गाना लगाकर रख देता हूं। यह बच्चे गाना कितना सुन पाते हैं, पता नहीं। इस दौरान पंचायत का काम छोड़कर हर रोज दोपहर को घर आता हूं। वजन ज्यादा होने से अब मेरी पत्नी इनकी देखभाल नहीं कर पाती। दोपहर आकर इन्हें कुर्सी से उठाकर चटाई पर लिटाता हूं और फिर खाना खिलाता हूं। खाना खिलाने के बाद कुछ देर रुकता हूं। अगर कोई मल-मूत्र करता है तो उसे साफ करता हूं, फिर से ऑफिस चला जाता हूं। मैं अकेला ही घर और बाहर की जिम्मेदारी निभाता हूं। बस यही जिंदगी हो गई है। पंचायत में दिनभर हाथ अनाज उठाने में लगा रहता है और घर आकर बच्चों को उठाकर यहां से वहां करने में। कई बार बच्चे खुद को गंदा कर लेते हैं, लेकिन पत्नी उनकी परेशानी नहीं समझ पातीं। 23 साल हो गए हैं। हम पति-पत्नी न किसी के घर जा पाते हैं और न ही किसी के शादी-ब्याह में। चार-चार विकलांग बच्चों को किसके सहारे छोड़कर जाऊं। अब तो लोग हमारे घर आना भी बंद कर दिए हैं। रात में मेरे बच्चे चीखते हैं। हमें नहीं पता कि क्यों। शायद शरीर में दर्द होता होगा या फिर बैठे या लेटे-लेटे थक जाते होंगे। हमें कई लोगों ने कहा कि इन बच्चों को जहर दे दो। ऐसे ही एक दिन खास जान-पहचान के आदमी मेरे घर आए। मैं इन बच्चों एक-एक करके नहला रहा था। फिर सबको उठाकर चटाई पर लेटा रहा था। उस दिन उन्हें मेरी परेशानी नहीं देखी गई। वह मुझे घर से बाहर ले गए और बोले कि ऐसा कब तक करते रहोगे? तुम्हारा जीवन तो इसी में खत्म हो जाएगा। ऐसा करो, इन बच्चों को जहर दे दो। वो ऐसा कहकर चले गए। उनके जाने के बाद मैं सोचने लगा कि अपनी औलाद भला कैसे मारूं? हमारी किस्मत में इनकी सेवा ही लिखी है और मैंने इसे स्वीकार कर लिया है। (रामकृष्ण ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों की भारत ने की कड़ी निंदा
भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभु अफगानिस्तान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई बताया है। इन हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई है और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कार्रवाई की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की। उन्होंने कहा कि यह हमला मध्य पूर्व के इतिहास में किए गए सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक था।
ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि लोग पैनिक में रोजाना 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग कर रहे हैं। देशभर के शहरों-कस्बों से LPG के लिए लंबी कतारें दिख रही हैं। आलम ये है कि लोग अब रेस्टोरेंट में जाकर मेन्यू से पहले पूछते हैं- गैस है या नहीं? ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक कैसे पहुंची, देश में कितने दिन की LPG बची है और अगर जंग खिंची तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब... सवाल-1: LPG क्या है और भारत को इसकी कितनी जरूरत है? जवाबः LPG यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण है- प्रोपेन और ब्यूटेन। इसका इस्तेमाल रसोई गैस के रूप में होता है। LPG कोई ऐसी चीज नहीं है, जो सीधे जमीन से निकलती है। ये पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट से तैयार होती है। जैसे- दही से घी निकालने में मट्ठा भी बनता है। ऐसे ही ऑयल रिफाइनरी और नेचुरल गैस की प्रोसेसिंग में LPG बनती है। इसी तरह एक और अहम गैस है LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस। इसके नेचुरल गैस के भंडार होते हैं। इसका इस्तेमाल बिजली, फर्टिलाइजर बनाने और इंडस्ट्रीज में होता है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत में 30.8 मिलियन मीट्रिक टन यानी MMT एलपीजी की खपत हुई। घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से रोजाना औसतन 65 लाख सिलेंडर। LPG का 88% इस्तेमाल घरेलू और 12% कॉमर्शियल होता है। देश में 33.21 करोड़ एक्टिव कनेक्शन हैं। सवाल-2: भारत के जरूरत की गैस कहां से आती है? जवाबः भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG खरीददार है। ईरान जंग से पहले 67% एलपीजी विदेशों से आती थी, लेकिन 11 मार्च को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि 60% LPG विदेशों से इम्पोर्ट हो रही है। बाकी की गैस घरेलू रिफाइनरियां बना रही हैं। गैस सप्लाई करने के दो तरीके होते हैं- शिप और पाइपलाइन। भारत में शिप्स के जरिए गैस इम्पोर्ट होती है। खाड़ी, अफ्रीकी और अमेरिकी देशों से LPG और LNG खरीदी जाती है… सवाल-3: गैस आने के बाद भारत में उसका डिस्ट्रीब्यूशन कैसे होता है? जवाबः LPG और LNG से लदे जहाज जैसे ही बंदरगाह पर पहुंचते हैं, प्रोडक्ट्स के हिसाब से उन्हें अलग-अलग कर प्लांट्स में भेज दिया जाता है। लाल-नीले सिलेंडर में भरी जाती है LPG पाइपलाइंस से ट्रांसपोर्ट होती है LNG इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, 'भारत के लिए अच्छी बात है कि यह किल्लत उर्वरकों के इस्तेमाल के ऑफ-सीजन में हुई है। खेती अभी हो नहीं रही है और किसानों को फिलहाल फर्टिलाइजर्स की जरूरत नहीं है।' सवाल-4: होर्मुज बंद होने से भारत की गैस सप्लाई पर कितना असर पड़ा है? जवाबः ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में UAE, कतर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे दर्जनभर खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। इसके चलते यहां के गैस प्लांट का प्रोडक्शन बंद हो गया या प्रभावित हुआ। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो हॉर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे। यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से भारत की विदेश एलपीजी सप्लाई का 90% और एलएनजी का 70% खरीदता है। यहां से शिप महज 4-5 दिन में भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच जाते हैं। ये सारा शिपमेंट होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत आता है, लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है। 1 मार्च से पहले इस जलमार्ग से रोजाना औसतन 153 शिप्स निकलते थे, लेकिन अब ये आंकड़ा 13 के करीब है। 11 मार्च को शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 28 जहाज हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 क्रू मेंबर हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट पर 4 जहाज हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। जंग शुरू होने के बाद 12 मार्च को पहली बार एक टैंकर होर्मुज के रास्ते मुंबई बंदरगाह पहुंचा है। सवाल-5: भारत के पास कितने दिन की LPG मौजूद है? जवाबः भारत के पास इमरजेंसी के लिए 2 LPG स्टोरेज हैं, जहां कुल 1.4 लाख टन LPG स्टोर है। 80 हजार टन LPG कर्नाटक के मंगलुरू में और 60 हजार टन आंध्र प्रदेश के विशाखापतनम में स्टोर है। कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट्स और भरे जा चुके सिलेंडरों में भी काफी एलपीजी जमा है। हालांकि देश की जरूरतों के हिसाब से ये काफी कम है। वहीं, LNG के मामले में भारत के पास कोई स्पेशल स्टोरेज नहीं है। क्योंकि इसका सेटअप महंगा और कठिन है। इसके लिए क्रायोजेनिक यानी बेहद ठंडे टैंकर्स की जरूरत होती है। ऐसे में जितनी LNG गैस ग्रिड, पाइपलाइंस और बंदरगाहों के रिगैसिफिकेशन टर्मिनल्स में है, केवल उतनी ही LNG देश में मौजूद है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास 25-30 दिन की LPG और 10 दिन की LNG बची है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि घरों तक गैस की डिलीवरी ज्यादातर सामान्य है और औसत डिलीवरी समय करीब ढाई दिन है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न करें। सवाल-6: मौजूद गैस के संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है? जवाबः सरकार की ओर से गैस-तेल की कमी को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं… 1. सप्लाई रूट्स बदलना: पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, ‘हम करीब 40 देशों से क्रूड इम्पोर्ट करते हैं। तेल कंपनियों ने अलग-अलग सोर्सेस से तेल मंगाया है। इसके कारण हमारा 70% क्रूड इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्ते आ रहा है। ये पहले 55% था।’ 2. घरेलू उत्पादन बढ़ाना: पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक घरेलू प्रोडक्शन 28% बढ़ा है। रोजाना 50 लाख घरेलू LPG सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। 3. होर्मुज के लिए बातचीत: भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बीते कुछ दिनों में 3 बार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से बात की है। वहीं, 12 मार्च की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की। भारत चाहता है कि मिडिल-ईस्ट में हालात सामान्य हों और भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की छूट मिले। 4. आवश्यक वस्तु अधिनियम: LPG सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1995’ लागू किया है। साथ ही अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से सप्लाई की प्राथमिकता तय की गई है। रसोई गैस को पहली प्राथमिकता दी गई है। वहीं कॉमर्शियल गैस हर महीने की औसतन सप्लाई की 20% ही डिलीवर की जा रही है। ग्लोबल एनर्जी थिंकटैंक एम्बर के एनालिस्ट और भारत की सरकारी तेल-गैस कंपनी के पूर्व अधिकारी दत्तत्रेय दास मानते हैं कि जंग शुरू होने बाद एक हफ्ते तक हालात अनिश्चित थे और तब सरकार ने LPG को तरजीह नहीं दी। सरकार की गलती है कि उसने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश देने में 7 दिनों की देरी की। सवाल-7: अगर जंग लंबी छिड़ी, तो भारत कहां से गैस लाएगा? जवाबः केंद्र सरकार नए गैस सप्लायर्स से डील कर रही है। अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों से से LPG खरीदी जा रही है। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, करीब 2.2 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल लिए जहाज इस हफ्ते के आखिर तक भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया और कई अफ्रीकी देशों से भी सरकार भी गैस कारोबार कर सकती है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आमतौर पर यहां से शिपमेंट आने में ज्यादा वक्त लगता है। इसके चलते LPG की घरेलू खपत में कुछ समय की किल्लत हो सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा कि खाड़ी देशों के अलावा अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी गैस के कार्गो लाने की व्यवस्था की जा रही है। रूस को 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए गए हैं। ------------ एलपीजी संकट से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए… भारत के पास कितने दिन की LPG बची: जंग लंबी छिड़ी तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; आपको क्या करना चाहिए भोपाल के रहने वाले आदित्य ने 6 मार्च को IVRS कॉल से एक LPG सिलेंडर बुक किया। आमतौर पर 1 दिन बाद सिलेंडर की होम डिलीवरी हो जाती थी। जब 3 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, तो उन्होंने वापस IVRS डायल किया। नंबर इनवैलिड बताने लगा। आदित्य गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। वहां अफरा-तफरी मची थी। काफी मशक्कत के बाद एक सिलेंडर मिला। पूरी खबर पढ़िए…
करीब 3 साल पहले। साल 2023 का जुलाई महीना। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच चल रही हिंसा से जुड़ा एक वीडियो सामने आया। वीडियो में दो लड़कियां थीं, जिनकी न्यूड परेड कराई जा रही थी। इस वीडियो ने पूरे देश को झकझोर दिया। मणिपुर में हिंसा तो 3 मई से शुरू हो गई थी, लेकिन इस दौरान ऐसी दरिंदगी हुई होगी, किसी ने नहीं सोचा था। ये घटना मैतेई आबादी वाले थौबल जिले में 4 मई, 2023 को हुई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वीडियो दिखाने पर बैन लगा दिया गया। जुलाई, 2023 में CBI को जांच सौंप दी गई। इसके बाद भी उस घटना का पूरा सच सामने नहीं आया। न उस दरिंदगी का दर्द किसी को पता चला। 26 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को आदेश दिया कि वो पीड़ित परिवारों को चार्जशीट दे। 24 मार्च को इस केस की अगली सुनवाई होगी। दैनिक भास्कर ने कोर्ट में दाखिल CBI की 47 पेज की चार्जशीट की पड़ताल की। हम पहली बार उन दो लड़कियों के बयान से उस दिन की आपबीती बताएंगे। ये भी बताएंगे कि जिन दो लड़कियों के साथ दरिंदगी हुई, उनकी जिंदगी अब कैसे गुजर रही है। इस घटना की इकलौती गवाह महिला अब कहां हैं। वे उस दिन कैसे भीड़ से बच निकली थीं। ‘भीड़ ने गांव पर हमला किया, पुलिस मौजूद थी, लेकिन मदद नहीं की’CBI की चार्जशीट में तीन महिलाओं का जिक्र है। उन्हें विक्टिम नंबर 1, 2 और 3 नाम दिया गया है। न्यूड परेड के वीडियो में दिखीं महिलाएं विक्टिम नंबर 1 और 2 हैं। ये घटना बी. फैनम गांव में हुई थी। घटना का ब्योरा पेज नंबर 10 से शुरू होता है। आरोप है कि मैतेई समुदाय के लोगों ने दोपहर करीब 3 बजे कुकी और जो समुदाय के घरों पर हमला किया था। उनके पास राइफल, लाठी, कुल्हाड़ी और चाकू थे। भीड़ ने घरों और चर्च में आग लगा दी। गांव के लोग छिपने के लिए जंगलों की तरफ भाग गए। इन्हीं में तीन पुरुष, तीन महिलाएं और ढाई साल की एक बच्ची भी थी। सभी जंगल में छिपे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें देख लिया। एक-एक करके जंगल में छिपे सभी लोग बाहर निकाले गए। महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग कर दिया। भीड़ ने पुरुषों को बुरी तरह पीटा। हालांकि, इसी भीड़ में शामिल कुछ लोगों की मदद से 3-4 विक्टिम गांव के पास सड़क किनारे खड़ी पुलिस की गाड़ी तक पहुंच गए। पेज नंबर 15 पर लिखा है कि भीड़ से बचने के लिए दो लड़कियां पुलिस की गाड़ी में बैठ गईं। उसमें दो पुलिसवाले और ड्राइवर मौजूद थे। गाड़ी के बाहर 3-4 पुलिसवाले थे। एक लड़की ने ड्राइवर से कहा कि जल्दी गाड़ी स्टार्ट करो। ड्राइवर ने जवाब दिया कि मेरे पास चाबी नहीं है। पीड़ितों ने कई बार मदद मांगी, लेकिन पुलिस से मदद नहीं मिली। भीड़ चिल्लाकर पुलिस वालों से कह रही थी कि इन्हें वापस करो। कुछ देर बाद भीड़ बढ़ने लगी। दोनों लड़कियों को बाल पकड़कर गाड़ी से बाहर खींच लिया। भीड़ देखकर पुलिसवाले भाग गए। भीड़ ने लड़कियों के कपड़े फाड़ दिए। उन्हें बिना कपड़ों के सड़क पर घुमाया। चार्जशीट के पेज नंबर-16 पर लड़कियों से हुई दरिंदगी का पूरा जिक्र है। भीड़ में से कुछ लोगों ने लड़कियों से कहा कि अपने कपड़े उतारो, वरना तुम्हें जिंदा जला देंगे। विक्टिम 1 के भाई और पिता ने उसे बचाने की कोशिश की, तो भीड़ ने लाठियों और कुल्हाड़ी से हमला कर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद लड़कियों के कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इसी दौरान विक्टिम नंबर-1 ने भीड़ में शामिल अरुण खुंडोनगबम और लोया को पहचान लिया। लोया ने ही उनके परिवार के पुरुष सदस्यों को बुरी तरह पीटा था। चार्जशीट में आगे लिखा है, भीड़ में शामिल लोग दोनों लड़कियों के ब्रेस्ट टच कर रहे थे। उन्हें नोंच रहे थे। विक्टिम नंबर-1 के प्राइवेट पार्ट को छू रहे थे। बार-बार थप्पड़ मार रहे थे। इसी दौरान आरोपी विक्टिम नंबर-1 को खेत में ले गए। उसका गला दबाने की कोशिश की। उससे गैंगरेप किया। आरोपियों ने कहा- जिसे रेप करना है, खेत में आ जाएCBI ने घटना की दूसरी विक्टिम का बयान भी दर्ज किया है। विक्टिम नंबर-2 के बारे में चार्जशीट में लिखा है- आरोपियों ने कहा कि जान बचाने के लिए तुम्हारे पास एक ही रास्ता है। या तो खुद सारे कपड़े उतार दो या फिर हम खुद ये काम करेंगे। इसके बाद भीड़ ने कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इस लड़की की भी न्यूड परेड कराई गई थी। विक्टिम नंबर-1 से जहां दरिंदगी हो रही थी, उससे थोड़ी दूरी पर ही विक्टिम नंबर-2 को भी भीड़ ने घेरा हुआ था। भीड़ से कुछ लोग आवाज लगा रहे थे कि जिन लोगों को इससे रेप करना है, वे आ जाएं। इसके बाद उससे गैंगरेप किया। इस दौरान विक्टिम बेहोश हो गई। काफी देर बाद उसे थोड़ा होश आया। उसकी हालत बहुत बुरी थी। विक्टिम नंबर-2 ने बताया कि मैंने विक्टिम नंबर-1 के चीखने की आवाज सुनी थी। उसे देखा भी था। उसके आसपास काफी भीड़ थी। मैंने उस भीड़ में चिंगलेन और इनओतोन नाम के दो लोगों को पहचान लिया। इसके बाद दोनों को गांव के मेन रोड तक बिना कपड़ों के लाया गया था। भीड़ में कुछ लोग लड़कियों की मदद करना चाहते थे। उन्होंने दोनों को कपड़े देने चाहे, लेकिन आरोपियों ने उन्हें धमकाया कि दोबारा मदद करने आए तो तुम्हारा भी बुरा हाल करेंगे। चार्जशीट में लिखा है कि विक्टिम नंबर-3 भी वहीं पास में थीं। उसने पूरी घटना देखी थी। परिवारवालों की डेडबॉडी देखीं, पूरी रात जंगल में छिपी रहींजांच रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ दोनों लड़कियों को दूसरी जगह ले जाने लगी। रास्ते में विक्टिम नंबर-2 को अपने कपड़े बिखरे हुए मिले। उसने कुछ कपड़े उठा लिए, लेकिन फटे होने की वजह से उन्हें पहन नहीं सकीं। विक्टिम नंबर-1 ने कपड़े पहनने में उसकी मदद की। दोनों अब भी भीड़ से घिरीं हुई थीं। उन्होंने हिम्मत जुटाकर जान की भीख मांगी। इस पर भीड़ ने दोनों को छोड़ दिया। दोनों थोड़ा आगे बढ़ीं, तो उनके परिवार के दो पुरुष सदस्यों की लाशें एक दूसरे के ऊपर पड़ी देखीं। कुछ आगे गांव के पास सूखे नाले में विक्टिम नंबर 1 के भाई की डेडबॉडी मिली। उसकी खोपड़ी फटी हुई थी। आसपास कई लोग लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर खड़े हैं। कुछ के हाथ में बड़े-बड़े चाकू भी थे। ये लोग विक्टिम को रुका देखकर मारने के लिए दौड़े। कुछ बुजुर्गों ने भीड़ को रोक दिया। भीड़ का गुस्सा देखकर लड़कियां तेजी से जंगल की तरफ भागीं। आगे उन्हें गांव के दो लोग मिले। उनमें से एक के पास फोन था। विक्टिम नंबर-2 ने फोन से अपने परिचितों को घटना के बारे में बताया। इसके बाद पैदल चलते हुए दोनों इरॉन्ग तांगखुल गांव पहुंची। वहां विक्टिम नंबर-1 का दोस्त मिल गया। उसने दोनों को पहनने के लिए कपड़े दिए। वहां खतरा था, इसलिए दोस्त दोनों लड़कियों को जंगलों में ले गया। वहां उनके समुदाय के लोग छिपे थे। दोनों लड़कियों ने जंगल में ही रात बिताई। जांच के दौरान गवाहों ने माना कि दोनों के शरीर पर कपड़े नहीं थे। पोती को लेकर घर से भागी, जिंदा हूं इसलिए सब भूल गएबी. फैनोम गांव में भीड़ ने अटैक किया, तब विक्टिम नंबर 3 वहीं मौजूद थीं। उन्होंने ढाई साल की पोती को उठाया, पीठ से बांधा और घर से भागीं। भीड़ ने उसे घेरकर मारने की कोशिश की थी। कपड़े भी खींचे थे। अब ये महिला परिवार के साथ दिल्ली में रहतीं हैं। हमने उनसे बात करने वाले एक सोशल एक्टिविस्ट से विक्टिम की आपबीती समझी। विक्टिम की उम्र 55 साल है। वे घटना के बारे में बताती हैं, ‘वो डर आज भी दिलोदिमाग में है। मेरी पोती को भी सब याद है। उस समय वो ढाई साल की थी, अब 5 साल की हो चुकी है। उससे पूछो कि हम कैसे भागे थे। वो सब बता देगी।’ विक्टिम बताती हैं, ‘न्यूड परेड का जो वीडियो वायरल हुआ था, मैं उस घटना की गवाह हूं। उस दिन हमारे घरों में आग लगाई गई। हम 10 लोग बचने के लिए जंगल में भागे थे। भीड़ ने हमें खोज निकाला। मुझे भी पीटा। शायद मेरी पोती को देखकर उन्होंने मुझे छोड़ दिया था। अगर मेरी पोती न होती, तो शायद मैं भी जिंदा नहीं बच पाती। या मेरे साथ भी वैसी ही दरिंदगी होती।’ ‘मैं कई किमी तक पोती को पीठ पर बांधकर जंगल की ओर भागती रही। पूरी रात जंगल में छिपकर बिताई। बच्ची भूख से रोती रही। उस रात लगा कि अब नहीं बच पाएंगे। भूख से ही मर जाएंगे। फिर अगली सुबह पास के एक गांव में पहुंची। एक खाली घर में खाने का सामान मिल गया। इसके बाद हम राहत शिविर में पहुंचे। वहां कुछ महीने रही। मेरा 7 लोगों का परिवार है। सभी के साथ दिल्ली आ गई। यहां दो कमरे का मकान किराये पर लिया है। सब उसी में रह रहे हैं।’ पीड़ित आज भी घर से नहीं निकलतीं, आरोपी पकड़े गए, लेकिन डर बाकीजिन लड़कियों का वीडियो वायरल हुआ था, उनके बारे में गवाह बताती हैं, ‘वे अभी मणिपुर में ही रहती हैं। उस खौफ की वजह से आज भी घर से बाहर नहीं निकलती हैं। किसी से बात नहीं करतीं हैं। परिवारवालों और करीबियों से थोड़ी बात कर लेतीं हैं। डर इतना है कि आज भी कई दिन तक खाना नहीं खाती हैं। इस बात से भी डरती हैं कि वो वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर कभी सामने न आ जाए।’ ‘घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक कमेटी बनी। 12 लाख रुपए मुआवजा मिला, आरोपियों को जेल भेज दिया गया, लेकिन इससे हमारा दर्द खत्म नहीं हुआ। इसलिए मैं कभी मणिपुर वापस नहीं जाना चाहती। हम बेशक जिंदा हैं, लेकिन सब हमें भूल गए हैं। हमें दिल्ली में भी काफी दिक्कत हो रही है, लेकिन मणिपुर जाने से डर लगता है। हमारे पास यहां घर नहीं है।’ ‘मणिपुर में हम बहुत खुश रहते थे। साल भर का धान उगाते थे। चावल मिलता था। उस घटना के बाद से दिमाग काम नहीं करता। बस टेंशन रहती है। मणिपुर लौट गए, तो वही डरावनी यादें फिर ताजा हो जाएंगी। इसलिए अब यहीं रहना है।’ दैनिक भास्कर ने इस केस की अपडेट जानने के लिए गृह मंत्रालय और CBI से कॉन्टैक्ट किया। पहले हमने गुवाहाटी में CBI ऑफिस फोन किया। वहां बताया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए इसका जवाब आपको हेडक्वॉर्टर से मिलेगा। हमने दिल्ली में CBI हेड क्वॉर्टर में संपर्क किया। 9 मार्च को CBI और गृह मंत्रालय की ऑफिशियल ईमेल आईडी पर ये सवाल भेजे। 1. CBI ने मणिपुर हिंसा में जितनी FIR दर्ज की हैं, उनमें कितने मामलों में दोषियों को सजा हो पाई है? 2. न्यूड परेड निकालने की घटना में पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें जांच से जुड़ी जानकारी नहीं दी जा रही है। ऐसा क्यों हुआ?3. कई लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। ऐसा क्यों हो रहा है। अब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिला है। जवाब आते ही स्टोरी अपडेट की जाएगी। …………………………..ये रिपोर्ट पढ़ें मुस्लिम से की शादी, भाई की पढ़ाई और राशन बंद, मंदिर में एंट्री नहीं पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। मीता ने दो साल पहले एक मुस्लिम लड़के से लव मैरिज की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन अलग धर्म में शादी करने की ‘सजा’ मीता और उनके परिवार को अब तक मिल रही है। गांववालों का कहना है कि मीता मुसलमान हो गई है। दो साल बाद इसलिए गांव आई है, ताकि लड़के-लड़कियों का धर्म बदलवा सके। पढ़ें पूरी खबर…
ईरान युद्ध से भारत‑चीन‑यूरोप पर तगड़ा असर, रूस को फायदा
ईरान युद्ध के चलते दुनिया के लिए ऊर्जा की आवाजाही का सबसे अहम रास्ता बंद हो गया है. चीन, यूरोप और भारत के सामने आपूर्ति की बड़ी चुनौती है
जर्मनी में हिजाब पहनने वाली महिलाओं ने झेला ज्यादा भेदभाव
जर्मनी में रहने वाले कई लोग मानते हैं कि उन्हें रोजमर्रा में भेदभाव झेलना पड़ता है. एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि हिजाब पहनने वाली महिलाओं के साथ ऐसा और भी ज्यादा होता है
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई कौन हैं?
ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अली खमेनेई के बेटे मोजतबा खमेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है. ये दिखाता है कि अमेरिका और इस्राएल के साथ युद्ध में घिरा ईरान आगे भी उन्हें टक्कर देने का ही इरादा रखता है.
जेन-जी वाली नेपाल सरकार से कैसे होंगे भारत के रिश्ते
नेपाल चुनाव जीत कर भावी सरकार बनाने वाली आरएसपी के साथ संबंधों को लेकर भारत में उम्मीदें हैं तो कुछ आशंकाएं भी हैं. इसकी वजह है प्रधानमंत्री बनने जा रहे जेन-जी नेता बालेन शाह के पिछले कुछ बयान.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सुरक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार अमेरिका: व्हाइट हाउस
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देने के लिए पूरी तरह तैयार है
अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीन के प्रभाव की सीनेट कर रही है गहन जांच
अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी कि चीन संवेदनशील शोध और तकनीक तक पहुंच पाने के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों का दुरुपयोग कर सकता है
इराक में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त, खोज अभियान जारी
पश्चिमी इराक में ईरान से जुड़े युद्ध अभियान के दौरान अमेरिका की वायुसेना का एक हवाई रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी सेना ने इस घटना की पुष्टि की है
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों या बंदरगाहों पर हमला किया गया, तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। ईरानी सेना के केंद्रीय ऑपरेशन कमांड खातम अल-अंबिया के प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान क्षेत्रीय ऊर्जा संरचना को जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बना सकता है।
ईरान आतंक और नफरत फैलाने वाला देश है : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की कड़ी आलोचना करते हुए उसे “आतंक और नफरत फैलाने वाला देश” बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ईरान को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है
पाकिस्तानी वायुसेना ने कई अफगानी शहरों में की एयरस्ट्राइक, कंधार में फ्यूल डिपो पर भी हमला
अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने कंधार हवाई अड्डे के पास स्थित निजी एयरलाइन ‘काम एयर’ (Kam Air) के फ्यूल डिपो पर हमला किया। यह एयरलाइन न केवल नागरिक उड़ानों को सेवाएं देती है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के विमानों को भी ईंधन की आपूर्ति करती है।
‘शंकराचार्य विवाद सनातन एकता की मुहिम को प्रभावित कर रहा है। योगी सरकार हर तरीके से इस मुद्दे को काउंटर करे, ताकि समाज में सनातन को लेकर पॉजिटिव मैसेज जाए। ये विषय लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।' RSS का ये मैसेज यूपी में BJP के शीर्ष नेतृत्व के लिए है। 6 मार्च को कानपुर में संघ और BJP की मीटिंग हुई। सोर्स बताते हैं कि CM योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई बैठक में यूपी के राजनीतिक माहौल, संगठन में बड़े बदलावों के साथ-साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में साफ कहा गया है कि शंकराचार्य मामले से सरकार और पार्टी को लेकर पैदा हुई निगेटिविटी दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। ताकि लोगों के बीच ये मैसेज जाए कि सरकार सनातन और संतों के साथ खड़ी है। मीटिंग से पहले 24 नवंबर 2025 को RSS चीफ मोहन भागवत और CM योगी आदित्यनाथ अयोध्या में मिले थे। इस साल लखनऊ में दोनों के बीच हुई मुलाकातों को संगठनात्मक तालमेल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लिहाजा, BJP लीडरशिप को ये मैसेज दे दिया गया है कि विधानसभा चुनाव में योगी ही पार्टी के सबसे बड़े चेहरे होंगे। इसलिए किसी भी तरह की निगेटिव कैंपेनिंग का सख्ती से जवाब दिया जाएगा। क्या 2027 विधानसभा चुनाव में शंकराचार्य विवाद BJP की स्ट्रैटजी पर बड़ा इम्पैक्ट डाल सकता है? क्या RSS इस मुद्दे पर योगी के साथ है? ये सवाल हमने दिल्ली और यूपी में RSS से जुड़े पदाधिकारियों, BJP नेताओं और एक्सपर्ट से पूछे। कानपुर में करीब पौने तीन घंटे मीटिंग यूपी में RSS का स्ट्रक्चर 6 प्रांतों- पश्चिम, ब्रज, अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर-बुंदेलखंड में बंटा हुआ है। होली के एक दिन बाद कानपुर में RSS और BJP लीडरशिप ने विधानसभा चुनाव को लेकर पहली कोऑर्डिनेशन मीटिंग की। सुबह 11 बजे CM योगी आदित्यनाथ दीनदयाल विद्यालय पहुंचे। उनके साथ BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल भी बैठक में शामिल हुए। इसमें संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल और प्रांत प्रचारक श्रीराम, डॉ. अनुपम समेत कई सीनियर पदाधिकारी थे। राजनीतिक हलकों में इसे BJP के 'ट्रिपल-S मॉडल' यानी सरकार, संगठन और संघ की स्ट्रैटजी मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है। 2019 लोकसभा और 2022 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भी इस तरह की कई मीटिंग हुईं थीं, जिसके बाद BJP को चुनाव में बड़ी सफलता मिली। RSS के सोर्स बताते हैं, ‘बैठक करीब पौने तीन घंटे चली। इसकी शुरुआत में लोकसभा चुनावों में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी को हुए नुकसान, लोकल नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान और बढ़ती अनुशासनहीनता को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए कहा गया। इसके साथ 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बड़े बदलाव और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा हुई।‘ ‘बैठक के दौरान BJP नेताओं ने मुख्यमंत्री के सामने UGC के नए नियमों के कारण लोगों में असंतोष और शंकराचार्य विवाद का मुद्दा भी उठाया। इस पर संघ का साफ मैसेज था कि ऐसे मुद्दों से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है इसलिए शंकराचार्य मामले को हर तरीके से काउंटर किया जाना चाहिए। ताकि समाज में सनातन धर्म को लेकर पॉजीटिव मैसेज जाए।‘ BJP-संघ की बैठक में क्यों उठा ‘शंकराचार्य’ का टॉपिकयूपी में RSS और BJP की पॉलिटिक्स पर नजर रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी कहते हैं, ‘BJP, योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ, जब प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद के रथ को संगम तक जाने से रोक दिया था। विवाद तब और बढ़ गया, जब उनके अनुयायियों और बटुकों को चोटी खींचकर बुरी तरह मारा गया।‘ इस घटना को लेकर सनातनी समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों ने इसे सरकार की निरंकुशता माना। BJP और संघ को डर है कि एक प्रमुख धार्मिक पीठ के शंकराचार्य का सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने से ब्राह्मण वोट बैंक और कट्टर हिंदू समर्थकों में भ्रम पैदा हो सकता है। ‘विपक्षी दल (जैसे सपा और कांग्रेस) इस विवाद को हवा दे रहे हैं ताकि BJP के हिंदुत्व वाले नैरेटिव को तोड़ा जा सके। यही वजह है कि पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ता तक इसे लेकर परेशान हैं।‘ ‘शंकराचार्य विवाद की शुरुआत से लेकर अब तक CM योगी के तेवर में कोई कमी नहीं आई है। वो जब भी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिले या फिर कानपुर में जो बात हुई, उसमें शंकराचार्य विवाद को प्रमुखता से रखा गया। इसलिए RSS का रुख साफ है कि अगर अब इस मुद्दे पर पार्टी पीछे हटी तो उसे चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर योगी भी एग्रेसिव नजर आ रहे हैं।‘ अविमुक्तेश्वरानंद Vs योगी विवाद बढ़ने की 3 मुख्य वजहें 1. माघ मेले में शाही स्नान से पहले रोका गयाशंकराचार्य विवाद जनवरी 2026 में शुरू हुआ, जब प्रयागराज माघ मेले में यूपी पुलिस ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम पर 'राजसी स्नान' के लिए जाने से रोक दिया। उनके शिष्यों के साथ बदसलूकी भी हुई। पुलिस ने इसके पीछे भगदड़ और सुरक्षा का हवाला दिया, जिसे शंकराचार्य ने 'संतों का अपमान' और सरकारी अहंकार बताया। 2. 'शंकराचार्य' पद की वैधता पर कानूनी नोटिसप्रयागराज प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर पूछा कि वे 'शंकराचार्य' उपाधि का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। बात तब बढ़ी जब विधानसभा में CM योगी ने नाम लिए बगैर कहा कि कोई भी खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता, कानून सबके लिए बराबर है। इस पर पलटवार करते हुए अविमुक्तेश्वानंद ने कहा- ‘कोई राजनेता ये तय नहीं कर सकता कि धर्म का सर्वोच्च पद कौन संभालेगा।‘ 3. 'योगी बनाम स्वामी' की तीखी बयानबाजीदोनों ओर से शब्दों की मर्यादा की सीमाएं कई बार लांघी गईं। CM योगी ने नाम लिए बगैर 'कालनेमी' शब्द का जिक्र किया, जिसके जवाब में शंकराचार्य ने योगी की तुलना 'औरंगजेब' से की और कहा कि मुख्यमंत्री 'खलीफा' बनना चाहते हैं। हाल ही में उन्होंने योगी सरकार को 40 दिन की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यूपी में गौ-हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगा, तो वे योगी के 'हिंदू' होने पर सवाल उठाएंगे। अविमुक्तेश्वानंद के संघ प्रमुख पर बयान के बाद उनका विरोध बढ़ाक्या संघ भी स्वामी अविमुक्तेश्वानंद से नाराज हैं? ये सवाल हमने कानपुर में हुई बैठक में मौजूद BJP नेता से पूछा। नाम न जाहिर करने की गुजारिश पर वो कहते हैं, 'स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यूपी के अलग-अलग जिलों में यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान वो मीडिया से भी बात कर रहे हैं। वो पहले भी मुख्यमंत्री योगी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत पर विवादित टिप्पणी कर चुके हैं।' आप खुद बताइए क्या ऐसी भाषा का इस्तेमाल कोई शंकराचार्य कर सकता है। यही कारण है कि जनता के बीच अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध बढ़ता जा रहा है। 'पिछले महीने 20 फरवरी को वाराणसी में अविमुक्तेश्वरानंद ने संघ प्रमुख के लिए कहा था कि वो हिंदुओं को बच्चे पैदा करने की सलाह देने से पहले खुद शादी करें। जो व्यक्ति बच्चा पैदा करने वाली प्रक्रिया या जिम्मेदारी का हिस्सा ही नहीं है, उसे इन संवेदनशील बातों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।' RSS से जुड़े संगठन विद्या भारती से जुड़े भास्कर दुबे कहते हैं, ‘विधानसभा चुनाव से पहले संघ और सरकार के बीच 'ट्रिपल-S मॉडल' बैठकें हो रही हैं। इन मीटिंग्स का एजेंडा पार्टी के अंदर मौजूद नाराजगी दूर करना है।‘ ‘संघ की यही कोशिश रहती है कि किसी भी तरह के ज्वलंत मुद्दों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच टकराव न हों। ऐसे मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है ताकि चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनी रहे। समन्वय बैठक में बूथ स्तर के संगठन, क्षेत्र और प्रांत प्रचारकों को मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करने का मौका मिला। एक्सपर्ट बोले- BJP में शंकराचार्य और UGC को लेकर अंदरूनी मतभेद सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी कहते हैं, ‘शंकराचार्य विवाद के तूल पकड़ते ही डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने बटुकों को घर बुलाकर सम्मानित किया। केशव प्रसाद मौर्य भी उन्हें भगवान कहते हैं। दूसरी तरफ पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी UGC के नए नियमों का विरोध करते हुए इसे समाज को बांटने वाला और असंतुलित कानून बता रहे हैं।‘ ‘इन बातों से ये साफ हो गया है कि शंकराचार्य और UGC विवाद को लेकर BJP में अंदरूनी मतभेद की स्थिति है। जिसे खत्म करने के लिए अब पैचवर्क किया जा रहा है। इसी वजह से संघ और BJP की लीडरशिप भी परेशान है कि वो 2027 के चुनाव में किस मुंह से जनता के सामने वोट मांगने जाएंगे। 2019 लोकसभा चुनाव में BJP को यूपी में 62 सीटें मिलीं थीं। 2024 में ये घटकर 33 रह गईं।’ ‘संघ के लिए योगी फ्यूचर PM कैंडिडेट, इसलिए साथ खड़ा’ संघ मामलों के जानकार और सीनियर जर्नलिस्ट कुमार भवेश चंद्र कहते हैं, ’स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने समाज में 'शंकराचार्य परंपरा' को लेकर नए सवाल पैदा कर दिए हैं। कुछ लोग इसके समर्थन में हैं, तो एक धड़ा विरोध कर रहा है। मामले के तूल पकड़ने के बाद संघ-BJP दोनों अपनी-अपनी तरह से इसे काउंटर कर रहे हैं।’ ‘योगी आदित्यनाथ मौजूदा दौर में BJP के बड़े नेता माने जाते हैं, कई बार उनके लिए बोला जाता है कि वे अगले PM कैंडिडेट भी हैं। CM योगी के खिलाफ अविमुक्तेश्वरानंद के जैसे बयान आ रहे हैं, ऐसे में अब संघ के लिए ये बड़ा सवाल बन गया है कि वो अपने नेता को बीच मझधार में कैसे छोड़ सकती है।‘ वो 4 बड़े मामले, जिनमें RSS ने दिया BJP का साथ… 1. वक्फ संशोधन विधेयकRSS ने वक्फ संशोधन विधेयक मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख का पूरी तरह समर्थन किया था। संघ के एक सीनियर पदाधिकारी के मुताबिक, 'संघ का मानना है कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन पारदर्शी होना चाहिए। इसलिए बीते साल हुए कॉर्डिनेशन बैठकों में ये तय हुआ कि RSS इस मुद्दे को 'तुष्टिकरण बनाम सुधार' के रूप में जनता के बीच ले जाए।‘ ‘इसे लेकर खास रणनीति भी बनाई गई, जिसमें पसमांदा मुस्लिम कम्युनिटी और गरीब तबके को ये समझाने का जिम्मा स्वयंसेवकों को दिया गया है कि ये कानून उनके हक में लाया जा रहा है।’ 2. UGC रेगुलेशन 2026 और आरक्षण विवादजनवरी 2026 में नए UGC नियमों को लेकर सवर्ण और दलित दोनों समुदायों में नाराजगी देखी गई थी। तब संघ ने सरकार को सलाह दी थी कि वो दलित समुदायों (विशेषकर जाटव) के बीच जा रही नकारात्मकता को रोकने के लिए संत रविदास की 650वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाए। संघ इसके लिए 'सामाजिक समरसता' अभियान चला रहा है कि BJP आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। 3. धर्मांतरण और अवैध मदरसों-मजारों पर बुलडोजर एक्शनपश्चिमी यूपी और पीलीभीत, लखीमपुर खीरी जैसे तराई क्षेत्रों में धर्मांतरण की रिपोर्टों पर संघ ने चिंता जताई थी। इस पर RSS ने योगी सरकार के 'अवैध मजारों' को हटाने, धर्मांतरण विरोधी कानून को और सख्ती से लागू करने के फैसलों का खुलकर समर्थन किया। 4. मथुरा और काशी का मुद्दाअयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद संघ अब मथुरा और काशी के मुद्दों पर BJP को फ्री हैंड दिया है। हालांकि, अगस्त 2025 में संघ प्रमुख मोहन भगवत ने कहा कि RSS मथुरा हो या काशी, किसी भी मंदिर आंदोलन में भाग नहीं लेगा। अगर स्वयंसेवक मंदिरों के आंदोलन में शामिल होना चाहते हैं, तो संगठन उन्हें नहीं रोकेगा। ……………….ये खबर भी पढ़ें… पूरी तरह बदलने वाला है RSS 40 लाख सदस्य और 83 हजार से ज्यादा शाखाओं वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव करने वाला है। इसके मुताबिक अब अलग-अलग प्रांत प्रचारकों की जगह एक राज्य प्रचारक होगा। क्षेत्र प्रचारकों की संख्या भी कम होगी। जिला, तहसील, ब्लॉक और गांवों तक कार्यकर्ताओं को ज्यादा अधिकार मिलेंगे। इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? पढ़िए पूरी खबर…

