अफगानिस्तान में सैकड़ों एकड़ अफीम की फसल नष्ट, भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त
अफगानिस्तान के उत्तरी बगलान प्रांत में पुलिस ने करीब 400 एकड़ जमीन पर उगाई गई अवैध फसलों को नष्ट कर दिया है। प्रांतीय पुलिस कार्यालय ने रविवार को यह जानकारी दी।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर शांति के संकेत? पुतिन बोले- संघर्ष अब अंत की ओर बढ़ रहा
मॉस्को में आयोजित रूस के विक्ट्री डे समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “मुझे लगता है कि यह मामला अब खत्म होने की ओर बढ़ रहा है।” उनके इस बयान को कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
हंतावायरस से प्रभावित जहाज पर सवार सभी लोग 'हाई-रिस्क' कॉन्टैक्ट : डब्ल्यूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि जिस क्रूज जहाज पर हंतावायरस फैलने का मामला सामने आया है, उसमें सवार सभी लोगों को “उच्च जोखिम” वाला संपर्क माना जाना चाहिए
मिस्र और कतर ने अमेरिका और ईरान से 'जिम्मेदारी और समझदारी' दिखाने की अपील की
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती और कतर के प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान जसीम अल-थानी ने अमेरिका और ईरान से इस संवेदनशील समय में 'जिम्मेदारी' और 'समझदारी' से काम लेने की अपील की है।
मैं अंजली चौधरी। पंजाब के लुधियाना की उस गली में रहती हूं, जहां से कई मशहूर कलाकार निकले हैं। बचपन में जब उन कलाकारों के किस्से सुनती थी, तो लगता था- स्टेज यानी मंच की जिंदगी कितनी अच्छी होती होगी। तेज म्यूजिक होती है। लोगों की तालियां बजती हैं, नाम होता है... और अच्छे पैसे भी मिलते हैं। तब नहीं जानती थी कि स्टेज की चमक के पीछे कितनी बेइज्जती छिपी है। एक लाइन में कहूं तो पंजाब में स्टेज डांसर की जिंदगी बर्बादी और दलदल में होती है, जहां बस धंसते जाना होता है। शुरू में सिर्फ पैसा दिखता है, आगे दलदल नजर नहीं आती। मैंने शौक में डांस शुरू किया, लेकिन अब दो बच्चों को पालने की मजबूरी में डांस करती हूं। छोटी जाति से हूं, इसलिए मेरे पास और कुछ करने का रास्ता नहीं है। 15 साल की थी। उन दिनों एक गाना जगह-जगह बजता सुनई देता था- ‘मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां हैं, जरा ठहरो सजन मजबूरियां हैं…’ वह गाना मेरे लिए जुनून बन गया। घर का काम करते हुए भी वही गाना चलाती। टीवी पर वह गाना दिखता सब छोड़कर नाचने लगती। घर वालों को यह बिल्कुल पसंद नहीं था। वे डांटते थे। कहते- ये क्या हर वक्त नाचती रहती हो, पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दो, लेकिन जब वो गाना बजता तो रुक नहीं पाती थी। एक दिन घर पर कोई नहीं था। वह गाना टीवी पर आया। वॉल्यूम तेज किया और कमरे में नाचने लगी। मम्मी-पापा बाहर से लौटे। काफी देर तक दरवाजा खटखटाते रहे, लेकिन मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया। फिर पापा ने दरवाजे पर जोर से लात मारी। मैं घबरा गई और दौड़कर दरवाजा खोला। घर में गाने की आवाज सुनकर पापा को बहुत गुस्सा आया। फिर उनके हाथ में जो कुछ आया, उससे मुझे पीटा। दो दिन तक रोती रही। सोचा अब कभी डांस नहीं करूंगी। लेकिन अब मम्मी-पापा के सामने नहीं नाचती थी। इंतजार करती कि वे कब बाहर जाएंगे। जैसे ही वे बाहर जाते, वही गाना चलाकर नाचना शुरू कर देती। इसी दौरान मेरी एक दोस्त अमृतसर में रहती थी। वह स्टेज डांसर थी। मैंने उसे फोन किया और कहा- डांस किए बिना रह नहीं पा रही हूं। घर वाले बहुत रोकते हैं। उसने कहा- अगर इतना ही मन है, तो अमृतसर आ जा। तब मैं 17 साल की हो चुकी थी। एक दिन मम्मी-पापा घर पर नहीं थे। जल्दी-जल्दी दो जोड़ी कपड़े सूटकेस में डाले। पास में सिर्फ 500 रुपए थे। बिना किसी को बताए घर से निकली और अमृतसर पहुंच गई। जब पापा को पता चला तो बहुत नाराज हुए। उनका साफ कहना था- ये काम ठीक नहीं है, वापस आ जाओ। मम्मी भी गुस्से में थीं। उस वक्त लगा कि अपना सपना पूरा करने निकली हूं। नहीं पता था कि असली मुश्किलें अब शुरू होने वाली हैं। अमृतसर पहुंचने के तीसरे दिन ही मेरा पहला शो था। मुझे पंजाबी गानों पर परफॉर्म करना था। स्टेज पर जाने से डर लग रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि इतने लोगों के सामने कैसे नाचूंगी। लेकिन जैसे ही म्यूजिक बजा और मैं स्टेज पर पहुंची, लोगों की तालियां बजीं। घबराहट दूर होती चली गई। परफॉर्मेंस खत्म हुई तो आयोजक बहुत खुश थे। लोग भी तारीफ कर रहे थे। उस रात मुझे पहली बार 3,000 रुपए मिले। उन पैसों को बार-बार देख रही थी। यकीन ही नहीं हो रहा था कि डांस करके इतने पैसे भी कमाए जा सकते हैं। लगा कि शायद सही रास्ता चुन लिया है। पांच दिन बाद मेरा दूसरा शो था। स्टेज पर डांस करने गई थी, तो सामने खड़ा एक आदमी लगातार गंदे इशारे कर रहा था। डबल मीनिंग बातें कर रहा था। बार-बार उससे नजरें हटा रही थी, लेकिन वह नहीं मान रहा था। उसके इशारों से परेशान हो गई। डांस बंद किया और स्टेज के पीछे चली गई। वहां पहुंचते ही रोने लगी। मेरे मैनेजर और बाकी लोग समझाने लगे- ये सब नॉर्मल है, स्टेज पर ये सब चलता है। मुझे उनकी बात पर गुस्सा आया। बोली- नॉर्मल कैसे है? हम डांस करते हैं तो क्या हमारी कोई इज्जत नहीं है? यहां शरीर बेचने नहीं आई हूं। उन्होंने मुझे वापस स्टेज पर भेजने की बहुत कोशिश की, लेकिन नहीं गई। मेरे साथ ऐसा पहली बार हुआ था। नहीं पता था कि स्टेज पर खड़ी लड़की को लोग इतनी आसानी से गलत समझ लेते हैं। उस रात मां को फोन किया और रोते हुए कहा- मुझे यहां से ले चलो। मम्मी-पापा सुबह ही अमृतसर पहुंचे और मुझे वापस लुधियाना लेकर आ गए। करीब दो महीने तक लुधियाना में घर पर रही। पापा ने मुझसे बात करना बंद कर दिया था। आज भी नहीं करते। मम्मी अक्सर कहतीं- समझाया था न कि बाहर की दुनिया बहुत खराब है। चुपचाप उनकी बातें सुनती रहती। एक दिन मम्मी के साथ एक शादी में गई। वहां कुछ लड़कियां स्टेज पर डांस कर रही थीं। उन्हें देखकर मेरे अंदर दबा हुआ शौक फिर जाग गया। बार-बार स्टेज पर जाने का मन कर रहा था। अगले दिन मम्मी से साफ कह दिया- मुझे फिर से डांस करना है। इस बार उन्होंने नहीं रोका। बस इतना कहा- अगर डांस ही करना है, तो अपनी जिम्मेदारी भी खुद उठाना। वापस लौटकर मत आना। अगले दिन तैयार हुई और वापस अमृतसर अपनी दोस्त के पास पहुंच गई। अब मैं पहले जैसी नहीं रह गई थी। दिन में रिहर्सल, रात में शादियां, तेज म्यूजिक, मेकअप और लगातार शो। यही अपनी दुनिया बना ली। एक रात का डरावना किस्सा बताती हूं। तब मुझे स्टेज पर डांस करते सिर्फ एक साल हुआ था। अमृतसर में एक शादी में परफॉर्म करने गई थी। मेरे साथ एक और डांसर भी थी। डांस शुरू हुआ। तभी नशे में धुत एक लड़का स्टेज पर चढ़ आया। उसने मेरी साथी का हाथ पकड़ लिया और कहा- मेरे साथ नाचो। उसने तुरंत हाथ छुड़ाया और उसके साथ नाचने से मना कर दिया। वह भड़क गया। उसने जेब से रिवॉल्वर निकाली और सीधा उसके माथे पर तान दिया। जोर से चिल्लाया- अगर तू मेरे साथ नहीं नाची, तो यहीं गोली मार दूंगा। उसके बाद हमारी तो हालत खराब हो गई। वहां मौजूद लोग उसे शांत कराने में जुटे थे। मेरी साथी रोते हुए मैनेजर से कह रही थी- मुझे यहां से ले चलो, लेकिन उन्होंने कहा- थोड़ी देर की बात है, नाच लो... मामला शांत हो जाएगा। आखिर में अपनी जान बचाने के लिए मेरी साथी ने उस लड़के के साथ डांस किया। तब जाकर मामला शांत हुआ। लेकिन उस रात मेरे अंदर कुछ हमेशा के लिए बदल गया। मुझे समझ आ गया कि स्टेज पर नाचने वाली लड़कियों को लोग कलाकार नहीं समझते। उन्हें लगता है कि पैसे दिए हैं, तो हमारे साथ कुछ भी कर सकते हैं। ऐसे ही मैं एक शादी में अकेले गई थी। स्टेज पर डांस कर रही थी, तभी कुछ लोग अचानक स्टेज पर चढ़े। पहले तो उन्होंने साथ में नाचने की कोशिश की, फिर मेरा हाथ पकड़ने लगे। कोई मेरे कंधे पर हाथ रख रहा था, तो कोई कमर पर हाथ डाल रहा था। मैं घबरा गई। डांस रोक दिया और साफ बोली- पहले इन्हें नीचे उतारिए, तभी परफॉर्म करूंगी। काफी कहने के बाद उन लोगों को स्टेज से नीचे उतारा गया, तब शो आगे बढ़ पाया। ऐसी बदतमीजियां बार-बार होने लगीं। लोग स्टेज पर चढ़ जाते, जबर्दस्ती करते। यही नहीं, शो खत्म होने पर लोग स्टेज के पीछे आ जाते और मेरा फोन नंबर मांगते। मना करने पर गाली देते, धमकाते। ऐसे ही एक कार्यक्रम में डांस कर रही थी। कुछ लड़के नीचे नाच रहे थे और कुछ स्टेज पर चढ़ गए थे। किसी तरह परफॉर्मेंस खत्म करके स्टेज के पीछे गई, तो उनमें से एक लड़का पीछे-पीछे आ गया। वह लगातार मेरा फोन नंबर मांग रहा था। काफी देर तक कोशिश करता रहा। जब मैंने नंबर नहीं दिया, तो उसने मुझे थप्पड़ मार दिया। उस दिन काफी बवाल हुआ था। कई बार तो लोग सीधे पूछ लेते हैं- मैडम, एक रात का कितना लेती हो? साथ चलोगी? मैं सन्न रह जाती हूं। ऐसे ही एक और शो में डांस करने गई थी। शो खत्म हुआ तो एक लड़का स्टेज के पीछे आया। बातों ही बातों में उसने मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया। उस दिन मैंने गुस्से में उसका कॉलर पकड़ लिया था यह सब इतना ज्यादा हो रहा था कि मन हुआ कि डांस छोड़ दूं, लेकिन वापस जाने का कोई रास्ता नहीं था। पापा बात नहीं करते थे। मम्मी ने भी फोन करना बंद कर दिया था। काफी परेशान थी। इस बीच मेरी मुलाकात एक भांगड़ा डांसर से हुई। वह मुझसे 10 साल बड़ा था। उसने शादी के लिए प्रपोज किया, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया। वह पीछे पड़ गया। अक्सर फोन करके मिन्नतें करता। कहता- तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। कभी धोखा नहीं दूंगा। तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं। उस समय मेरी जिंदगी ऐसी हो गई थी कि हर तरफ से घिरी नजर आ रही थी। स्टेज पर बेइज्जती झेल रही थी, घर वालों से दूरी थी और भविष्य को लेकर चिंता में थी। ऐसे में पहली बार लगा कि शायद कोई इंसान है, जो मुझे सिर्फ डांसर नहीं समझता। मेरी इज्जत करता है। खाली रहती तो उससे बात होती। एक दिन घर पर थी। मन हुआ कि उसे फोन करके शादी के लिए हां कह दूं। उस दिन सबसे पहले मम्मी को फोन किया। सारी बात बताई। उन्होंने तुरंत कहा- वह आदमी तुमसे 10 साल बड़ा है। तुम्हें बर्बाद कर देगा। उससे दूर हो जाओ। मम्मी से बात करने के बाद मैंने उसे फोन किया और शादी करने से मना कर दिया। उस दिन उसका एक बार भी दोबारा फोन नहीं आया। रात हुई। अब मेरा मन हुआ कि उससे एक बार बात करूं। मैंने रात में उसे फोन किया। वह फिर शादी करने की गुजारिश करने लगा। आखिर में मैंने हां कह दी। मम्मी को भी फोन करके बताया। मम्मी ने फिर रोका, लेकिन मैं नहीं मानी। सोच रही थी कि शादी के बाद मेरी जिंदगी शायद थोड़ी स्थिर हो जाएगी। शादी हुई। हम किराए के एक फ्लैट में रहने लगे। शुरुआत में करीब तीन महीने सब ठीक रहा। अचानक उसका व्यवहार बदलने लगा। वह मुझ पर शक करता, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने लगा और मारपीट भी करने लगा। वह फ्लैट पर अपने दोस्तों को बुलाता और उनके साथ पार्टियां करता। फ्लैट पर उसके दोस्त लड़कियां लेकर आते। मुझे बहुत बुरा लगता था। एक दिन अपनी सास को फोन किया और सारी बात बताई। उन्होंने पति को फोन करके तुरंत गांव वापस आने को कहा। उसके बाद हम गांव में रहने लगे। मुझे लगा था कि शायद अब जिंदगी थोड़ी शांत हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं गर्भवती हो गई। पति भांगड़ा डांस के लिए अक्सर घर से बाहर रहते थे, लेकिन एक पैसा भी नहीं देते थे। उधर, मेरे जेठ शुरू से नहीं चाहते थे कि मैं उस घर में रहूं। एक दिन किसी बात पर उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया। वह बार-बार यही कह रहे थे- ये नाचने वाली है, इसे हम अपने घर की बहू नहीं बना सकते। मेरी सास ने बीच-बचाव किया, तब मामला शांत हुआ। एक दिन तो हद हो गई। उस वक्त आठ महीने की गर्भवती हो चुकी थी। घर में मेरी सास, जेठ और घर के बाकी लोग आपस में धीमी आवाज में बातें कर रहे थे। मैं पास ही खड़ी थी। सास को कहते सुना- अभी इसे मत मारो-पीटो। बच्चा हो जाएगा, उसे अपने पास रख लेंगे... फिर इसे घर से निकाल देंगे। सुनकर मैं सन्न रह गई। सोचा अगर यहां रुकी, तो अपने बच्चे से भी हाथ धो बैठूंगी। चुपचाप अपना सामान पैक किया और घर से निकल गई। एक बस में बैठ चुकी थी, लेकिन ससुराल वाले पीछे-पीछे पहुंच गए। वे बस में चढ़े और ड्राइवर को धमकाने लगे कि- अगर तूने बस चलाई तो आग लगा देंगे। आखिरकार मुझे बस से उतरना पड़ा। करीब एक महीने बाद मेरे बेटे का जन्म हुआ। पैसे की बहुत किल्लत थी। पति जो भी कमा रहे थे, सिर्फ अपने ऊपर उड़ा रहे थे। मां को फोन करके मदद मांगी, तो उन्होंने मदद करने से इनकार कर दिया। कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैंने बच्चे की देखभाल के लिए एक पार्लर में नौकरी की। वहां दो साल काम किया और बच्चे को बड़ा किया। इस दौरान फिर गर्भवती हुई। सोचने लगी कि एक बच्चे का खर्च उठा नहीं पा रही हूं। दूसरे बच्चे को कैसे पालूंगी। इसी डर में अकेले ही डॉक्टर के पास अबॉर्शन कराने पहुंच गई। डॉक्टर ने जांच के बाद कहा- गर्भ तीन महीने से ज्यादा का हो चुका है, अब अबॉर्शन नहीं हो सकता। उस दिन वापस घर लौट आई। पति को सारी बात बताई और उनसे पैसों का इंतजाम करने को कहा। वह कहते- कहां से लाऊं पैसा? चोरी करूं या डाका डालूं? एक दिन पैसों को लेकर उनसे झगड़ा इतना बढ़ा कि उन्होंने मुझ पर चाकू से वार कर दिया। शिकायत के बाद घर पर पुलिस पहुंची। मैंने पुलिस को सारी बात बताई और अपने मायके पहुंचाने को कहा। पुलिस तुरंत मुझे लुधियाना मेरे मायके लेकर आ गई। घर पहुंची तो मेरी हालत देखकर मम्मी को दया आ गई। उन्होंने मुझे अपने साथ रख लिया। हालांकि, सालभर ही उनके पास रही। खर्च चल नहीं रहा था। एक किराए का कमरा लिया और फिर से स्टेज पर डांस शुरू कर दिया। अब डांस की कमाई से बच्चों को पाल रही हूं। पति आज भी बीच-बीच में झगड़ा करने आ जाता है। कई बार मारपीट करता है। कहता है कि बच्चों को अपने साथ लेकर जाएगा, लेकिन मैं अपने बच्चों से किसी भी कीमत पर अलग नहीं रह सकती। इन्हें अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हूं। चाहती हूं कि इनके साथ वैसा कुछ न हो, जैसा मेरी जिंदगी में हुआ। आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो लगता है स्टेज की चमक सिर्फ बाहर से खूबसूरत दिखती है। तेज म्यूजिक, रंग-बिरंगी लाइटें, लोगों की तालियां और उड़ते हुए नोट- सब कुछ कुछ देर के लिए बहुत अच्छा लगता है। लेकिन म्यूजिक बंद होते ही वही लोग चले जाते हैं, और हम अपनी जिंदगी की लड़ाई फिर अकेले लड़ते रह जाते हैं। शायद पंजाब की मेरी जैसी कई डांसरों की कहानी भी इससे बहुत अलग नहीं है। (अंजली ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-हम अधेड़ कुंवारे कौवों जैसे अपशकुन माने जाते हैं:सरकार हमें देती है पेंशन, जाने कितने जानवरों से रेप करते पकड़े गए लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
58 अश्लील वीडियो, 150 पीड़ित महिलाएं, 1500 करोड़ की संपत्ति, 100 फर्जी खाते, स्वयंभू बाबा अशोक खरात पर आरोपों की लिस्ट, अंधविश्वास, मंत्रियों-विधायकों से कनेक्शन से होते हुए सबसे अहम गवाह जितेंद्र शेलके की मौत तक आ पहुंची। मामला कोर्ट में है और खरात जेल में। जांच में नासिक-शिरडी पुलिस के अलावा SIT और ED भी शामिल हैं। SIT के सोर्स के मुताबिक, खरात ने माना है कि उससे गलती हुई है, लेकिन ये सब दैवीय शक्तियों ने कराया। 17 मार्च को खरात के खिलाफ रेप की पहली FIR दर्ज हुई थी और अगले दिन गिरफ्तारी। अब तक 13 केस दर्ज हुए हैं। इनमें 8 सेक्शुअल हैरेसमेंट, 4 आर्थिक धोखाधड़ी और एक मनी लॉन्ड्रिंग का है, जो ED ने दर्ज कराया है। 9 मई को शिरडी कोर्ट में खरात की पेशी हुई। कोर्ट ने खरात को 14 दिन की कस्टडी में भेज दिया। खरात का कबूलनामाशक्ति के वश में रहते हुए संबंध बनाए, महिलाओं की सहमति थी जांच टीम में शामिल सोर्स के मुताबिक, पूछताछ में खरात लगातार कहता रहा कि उसने महिलाओं के साथ सहमति से संबंध बनाए थे। हालांकि SIT इससे इत्तफाक नहीं रखती। खरात ने दावा किया कि उसके पास दैवीय शक्तियां हैं और लोग खुद अपनी समस्या लेकर उसके पास आते थे। सोर्स के मुताबिक, ‘खरात ने माना है कि उससे गलती हुई है, लेकिन वह इसे दैवीय शक्ति और ज्योतिष विद्या का नाम देकर बचने की कोशिश कर रहा है। पुलिस का मानना है कि वह महिलाओं को नशीली चीज या कोई दवा देकर उनका फायदा उठाता था। हालांकि, खरात अब भी यही कह रहा है कि वह समाधि जैसी स्थिति में रहता था और शक्ति खत्म होने पर उसे होश आता था।' गवाह का एक्सीडेंट ED की पूछताछ के तीन दिन बाद मौत, कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में घुसी 17 अप्रैल को अशोक खरात के करीबी और केस में अहम गवाह जितेंद्र शेलके की सड़क हादसे में मौत हो गई। 55 साल के जितेंद्र शेलके खरात के शिवनिका ट्रस्ट के उपाध्यक्ष थे। हादसे के वक्त वे पत्नी और बेटे के साथ छत्रपति संभाजीनगर से शिरडी जा रहे थे। दोपहर 12:30 से 1 बजे के बीच जितेंद्र की कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से पीछे से जा टकराई। वे खरात से जुड़े लेन-देन और जमीन के सौदों में शामिल थे। मौत से महज तीन दिन पहले ही ED ने उनसे पूछताछ की थी। सोशल एक्टिविस्ट अंजलि दमानिया अशोक खरात के कॉल डिटेल रिकॉर्ड के जरिए उसका विधायकों-मंत्रियों से कनेक्शन उजागर कर चुकी हैं। जितेंद्र शेलके की मौत पर शक जताते हुए अंजलि कहती हैं, ‘शेलके खरात की संस्था में नंबर दो की पोजीशन पर थे। वे खरात का हर काला चिट्ठा और अंदर की कहानियां जानते थे। ऐसे अहम गवाह की इस तरह मौत सवाल खड़े करती है।’ ‘हादसे के बाद की फुटेज में जितेंद्र शेलके की गाड़ी सड़क के एकदम बायीं ओर दिख रही है। पूरा रास्ता खाली था, तो कोई बिल्कुल बायीं तरफ गाड़ी क्यों चलाएगा। अगर गाड़ी का बैलेंस बिगड़ता है, तो वह मुड़ती है, लेकिन यहां गाड़ी बिल्कुल सीधी अंदर घुसी है।’ अंजलि एकनाथ शिंदे पर खरात को बचाने का आरोप लगाती हैं। वे दावा करती हैं कि पिछले चार साल से खरात उनके लिए काला जादू और ऐसे ही काम कर रहा था। रोहित पवार ने भी आरोप लगाया है कि संजय सिरसाट और दीपक केसरकर जैसे नेता लगातार खरात के संपर्क में थे। उनके रसूख की वजह से ही पुलिस इस मामले को दबा रही है। जितेंद्र के भाई बोले- कोई दबाव नहीं, एक्सीडेंट ही हुआ सड़क हादसे की वजह जानने के लिए फॉरेंसिक टीम से क्रैश एनालिसिस करवाया गया है। इसकी रिपोर्ट आना बाकी है। हालांकि, जितेंद्र के भाई महेंद्र गणपतराव शेलके हादसे कहते हैं, ‘हमें किसी संदिग्ध गतिविधि की आशंका नहीं है। भाई के सुसाइड या साजिश की जो भी खबरें चल रही हैं, वे गलत हैं।’ क्या परिवार पर कोई दबाव है? महेंद्र जवाब देते हैं, ‘नहीं, कोई दबाव नहीं है, न ही किसी ने धमकाया है।’ 56 अनुयायी, 100 फर्जी खाते, 70 करोड़ रुपए का लेनदेन ED ने पूछताछ के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट से खरात की कस्टडी मांगी है। ED अब तक नासिक, पुणे और मुंबई में खरात की संपत्तियों का पता लगा चुकी है। सोर्स के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कोपरगांव के समता संस्था पतपेढ़ी बैंक में खरात के 56 अनुयायियों के नाम पर 100 खाते खोले गए। इनमें करीब 70 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। सभी खातों में नॉमिनी के तौर पर अशोक खरात का मोबाइल नंबर दर्ज है, यानी खाते किसी और के नाम पर हैं, लेकिन लेन-देन का पूरा हिसाब खरात के हाथ में था। पुलिस ने खाताधारकों से पूछताछ की, तो उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि हमारे नाम पर कोई खाता खुला है। वीडियो बनाने वाला ऑफिस असिस्टेंट भी जांच के दायरे में केस की शुरुआत सिन्नर के वावी पुलिस स्टेशन से हुई थी। यहां अशोक खरात ने FIR दर्ज कराई थी कि कुछ लोग एक सीडी के जरिए उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। इस केस में नीरज जाधव के अलावा दो और लोगों को आरोपी बनाया गया था। नीरज पिछले साल तक अशोक खरात के ऑफिस में असिस्टेंट था। SIT को दिए बयान में उसने बताया, ‘2023 में प्रेग्नेंट पत्नी को लेकर मैं खरात के पास गया था ताकि बच्चा स्वस्थ पैदा हो। उसने धार्मिक पूजा के बहाने पत्नी से छेड़छाड़ की। इस घटना के बाद से ही मैंने खरात की करतूतों पर नजर रखनी शुरू कर दी। उसका पर्दाफाश करने के लिए दोस्त की मदद से ऑफिस में एक हिडन कैमरा लगाया। इससे बाबा का सच सामने आ गया।’ SIT नीरज जाधव की भूमिका की जांच कर रही है। उसका केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट राहुल कासलीवाल कहते हैं कि केस का ट्रायल शुरू होना बाकी है। नीरज जाधव इस केस में अहम गवाह साबित हो सकता है। नीरज लगातार मेरे संपर्क में है। उसने मुझे बताया है कि उसने पुलिस को सब बता दिया है। खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन पर SIT शिवसेना के सीनियर लीडर और पूर्व मंत्री दीपक केसरकर के सहयोगी बताए जा रहे दीपक लोंढे से भी पूछताछ कर चुकी है। दावा है कि दीपक ने ही खरात को एकनाथ शिंदे से मिलवाया था। हालांकि, दैनिक भास्कर से बातचीत में दीपक लोढे ने कहा कि न मेरा इस केस से कोई लेना-देना है और न अशोक खरात से कोई संबंध। मैं इस केस पर कोई बात नहीं कर सकता। उधर, खरात के घर और मंदिर में सन्नाटा नासिक के कर्मयोगीनगर में अशोक खरात का मकान है। गेट बजाने पर एक बुजुर्ग महिला और खरात की बेटी बाहर आईं। वे बात करने के लिए राजी नहीं हुईं। नासिक से करीब 40 किमी दूर सिन्नर में खरात का बनवाया मंदिर और फार्महाउस है। यहीं वो अपने फॉलोअर्स से मिलता था। यहां भी एकदम सन्नाटा है। आस-पड़ोस वाले भी खरात के बारे में बात नहीं करना चाहते। ………………………. अशोक खरात पर ये स्टोरी भी पढ़ें… 1. ‘बेटी हो, कन्यादान करूंगा बोलकर 3 साल रेप किया‘, कैप्टन बाबा के ऑफिस का सच ‘पहली बार मिली, तो बोला कि तू मेरी बेटी है। तेरा कन्यादान मैं खुद करूंगा। शादी से पहले मुझे ऑफिस में बुलाया और रेप किया।’ ये आपबीती कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के खिलाफ पहली FIR कराने वाली महिला की है। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित और उनका परिवार बदनामी की वजह से सामने नहीं आना चाहता। ज्यादातर घर छोड़कर जा चुकी हैं। पढ़ें पूरी खबर… 2. कैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर…
हंगरी के नए प्रधानमंत्री बने पीटर माग्यार, संसद में शपथ ली
पीटर मैग्यार ने शनिवार को हंगरी के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। नई संसद के उद्घाटन सत्र में हुए मतदान में जीत हासिल करने के बाद उन्होंने देश में “व्यवस्था बदलने” का संकल्प लिया।
चीन का विकास कभी भी किसी के लिए 'खतरा' नहीं रहा: विदेश मंत्रालय
चीन का विकास कभी किसी के लिए 'खतरा' नहीं रहा है, बल्कि यह एक ऐसी क्रमिक शक्ति है जो सभी देशों के बीच साझा विकास को बढ़ावा देती है
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की माता जी छि शिन हैं। शी चिनफिंग और अपनी माता के बीच गहरी भावना है। छि शिन जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध के दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नेतृत्व वाली सेना में शामिल एक महिला सैनिक थीं।
अमेरिका-ईरान अगले हफ्ते फिर इस्लामाबाद में बातचीत कर सकते हैं,ट्रंप बोले- ईरान के जवाब का इंतजार
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के सामने 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्तावित ड्राफ्ट रखा है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को कम करने और ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश भेजने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नया दांव: ‘पेट्रोयुआन’ से अमेरिका की आर्थिक ताकत को चुनौती?
ईरान का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था से उसे हर साल 40 से 50 अरब डॉलर तक की आय हो सकती है। इससे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कमजोर हुई उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पोप लियो बोले, हम ऐसे दौर में जहां इंसानियत से ज्यादा युद्ध प्राथमिकता
अमेरिका के पहले पोप माने जाने वाले लियो ने हाल के हफ्तों में युद्ध और तानाशाही के खिलाफ खुलकर बयान दिए हैं। ईरान युद्ध की आलोचना को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार इंटरनेट मीडिया पर उनकी आलोचना कर चुके हैं।
ये वीडियो शायद आपने देखा हो। इसमें दिख रहे शख्स जीतू मुंडा हैं। उम्र 52 साल। बदन पर सिर्फ एक कपड़ा। कंधे पर बड़ी बहन कलरा का कंकाल। कलरा के बैंक अकाउंट में 19,400 रुपए जमा थे। उनकी मौत के बाद जीतू 27 अप्रैल को पैसे निकालने बैंक पहुंचे। आरोप है कि बैंक मैनेजर ने कहा कि बहन को लाओ, तभी पैसे मिलेंगे। जीतू ने कब्र से बहन का कंकाल निकाला और तीन किमी दूर बैंक लेकर आ गए। मामला ओडिशा के क्योंझर जिले के दियानाली गांव का है। दैनिक भास्कर की टीम जीतू मुंडा के घर पहुंची, तो दो सवाल साथ थे… 1. जीतू को ऐसा क्यों करना पड़ा? 2. उन्हें ऐसा करने के लिए किसने मजबूर किया? पहले सवाल का जवाब ये फोटो है… कभी भी टूटकर गिर जाने की हालत में पहुंच चुका ये मकान जीतू का घर है। कच्चा फर्श, सीलन भरी दीवारें, दरवाजे की चौखट तक उखड़ चुकी है। पहले जीतू और उनकी बहन कलरा इसी घर में रहते थे। दो गाय भी इसी में बंधती थीं। एक साल पहले कलरा को सरकारी घर मिल गया। जीतू के पास कोई काम नहीं है। कलरा को सरकार से मिलने वाले 1 हजार रुपए और 35 किलो चावल में गुजारा होता था। पति की मौत के बाद से कलरा मायके में रह रही थीं। उन्होंने बछड़ा बेचकर 19,400 रुपए पटना ब्लॉक के मल्लीपासी ग्रामीण बैंक में जमा किए थे। जीतू और कलरा बीच-बीच में 100, 200, 500 रुपए निकालने बैंक जाते थे। एक दिन कलरा बीमार पड़ीं और 26 जनवरी को उनकी मौत हो गई। जीतू के गुजारे का सहारा खत्म हो गया। आखिरी आस बैंक में जमा पैसे थे। जीतू वही निकालने बैंक गए थे। 19 हजार के लिए बहन की कब्र खोदी, अब 15 लाख रुपए की मदद मिली जीतू के घर में बहन के अलावा एक भाई और उनका परिवार है। जीतू की शादी नहीं हुई है। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें बैंक में जमा पैसों के अलावा अलग-अलग संगठनों और पार्टियों से करीब 15 लाख रुपए की मदद मिल चुकी है। बहन के घर में बिजली कनेक्शन मिल गया है। जीतू अब उनके घर में ही रह रहे हैं। जीतू का गांव क्योंझर से करीब 40 किमी दूर जंगलों में बसा है। हम उनके घर पहुंचे तो मीडिया और नेताओं की भीड़ लगी थी। जीतू, उनके भाई शंकर और बहन कलरा के घर पास-पास ही हैं, लेकिन जीतू और कलरा साथ में जीतू के घर में रहते थे। फिर कलरा नए घर में रहने लगीं। इसी घर के पास उनकी कब्र बनी है। हमने जीतू से पूछा घर के पास बहन की कब्र क्यों बनाई है? जीतू बोले- मेरी बहन ही मेरा घर है। मुझे डर नहीं लगता। वह मेरे पास ही है। बहन के जाने के बाद अकेला हो गया हूं। माता-पिता के निधन के बाद वही मेरे लिए सब कुछ थीं। मेरे पास न राशन कार्ड है, न कोई कागज। सब बहन का ही था। पति की मौत के बाद बहन मायके आई, कहती थी- भाइयों को छोड़कर नहीं जाऊंगी जीतू इससे आगे नहीं बोल पाते। उनके छोटे भाई शंकर बताते हैं कि जिस दिन जीतू ने बहन की कब्र खोदी थी, मैं घर पर नहीं था। जीतू और कलरा के बीच बहुत अच्छा रिश्ता था। दोनों कई बातों में मुझे भी शामिल नहीं करते थे। मुझे बताए बिना ही बैंक जाते थे। हम चार भाई थे। दो भाइयों का निधन हो चुका है। पति की मौत के बाद कलरा भी हमारे पास आ गई। वह जीतू के साथ रहने लगी। वो कहती थी कि अब भाइयों को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी। जीतू ने कब्र खोदी, बहन का कंकाल निकाला, तब आसपास के लोगों ने रोका क्यों नहीं? जवाब गांव के मंसूर ने दिया, ‘जीतू उस दिन सुबह करीब 10 बजे बैंक गया था। 11:30 बजे लौटा। 12 बजे के करीब कब्र खोदना शुरू किया। तेज गर्मी की वजह से आसपास सन्नाटा था, इसलिए कोई उसे देख नहीं पाया।’ कलरा की मौत कैसे हुई थी? पड़ोसी करुणाकर महंत बताते हैं, ‘तेज बुखार हुआ था। जीतू बैंक गया और 500 रुपए निकालकर लाया। कलरा को अस्पताल ले गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके तीन महीने बाद जीतू पैसे निकालने बैंक गया था। स्टाफ ने उससे कागज मांगे। जीतू पढ़ा-लिखा नहीं है, उसे कागजों के बारे में पता नहीं था। वो एक ही बात कहता रहा कि मेरी बहन के नाम पर पैसा है, मुझे दे दो। स्टाफ ने कहा कि जाओ, बहन को लेकर आओ, तब पैसा मिलेगा।’ ‘हो सकता है बैंकवालों ने यह बात झुंझलाहट में कही हो, लेकिन जीतू उसे समझ नहीं पाया। वो गांव लौटा और कब्र खोदकर बहन का कंकाल निकाला। तीन किलोमीटर दूर बैंक ले गया। मैनेजर से कहा कि मैं बहन को ले आया हूं, अब मेरा पैसा दे दो। स्टाफ ने पुलिस बुला ली। पुलिसवालों ने जीतू को डांटा और कहा कि शव को फिर से दफनाओ। जीतू कंकाल कंधे पर रखकर वापस लाया और उसे फिर से दफना दिया।' पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी बैंक मैनेजर: मैनेजर के मुताबिक, जीतू पैसे निकालने आया था, तभी उसे पहली बार देखा था। उससे डॉक्युमेंट मांगे थे, डेडबॉडी लाने के लिए नहीं कहा। हालांकि, जीतू का दावा है कि मैनेजर ने ही कहा था कि बहन को लेकर आओ, तब पैसा मिलेगा। जीतू के मुताबिक, मैंने मैनेजर को बताया भी था कि बहन मर चुकी है, तब भी उन्होंने कहा कि बहन को लेकर आओ, नहीं तो पैसा नहीं मिलेगा। जांच में सामने आया है कि जीतू बहन के साथ कई बार बैंक आए थे। आखिरी बार दोनों 26 दिसंबर को 500 रुपए निकालने बैंक गए थे। हम मल्लिपासी ग्रामीण बैंक गए, जहां जीतू की बहन का अकाउंट है। बैंक मैनेजर मौजूद नहीं थे। सिर्फ दो कर्मचारी थे, जिनमें से एक डेपुटेशन पर हैं। उन्होंने बताया कि मैनेजर छुट्टी पर चले गए हैं। पुलिस-प्रशासन: जीतू बहन का कंकाल लेकर वापस जा रहा था, तब पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। सभी पीछे-पीछे चलते रहे, लेकिन जीतू की मदद नहीं की। मानवाधिकार आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक, शव का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार प्रशासन का कर्तव्य है। इस बारे में पता करने हम पटना पुलिस स्टेशन पहुंचे। यहां SI धनेश्वर पात्रा मिले। हमने उनसे पूछा कि डेडबॉडी ले जाने के लिए एंबुलेंस या कोई गाड़ी क्यों नहीं दी गई? उन्होंने जवाब दिया कि मैं उस दिन छुट्टी पर था। सब अचानक हुआ। स्टाफ तय नहीं कर पाया कि क्या करना है। जल्दबाजी में ऐसा हो गया। डेथ सर्टिफिकेट जारी करने वाले अफसर: जीतू ने बहन की मौत के बाद 26 फरवरी को डेथ सर्टिफिकेट के लिए सरकारी वेबसाइट पर आवेदन किया गया था। 7 दिन में सर्टिफिकेट मिल जाना चाहिए था, लेकिन अप्रैल तक भी जारी नहीं हुआ। पटना मेडिकल कॉलेज के इंचार्ज सुवेंदु कुमार नायक कहते हैं, ‘कलरा की मौत 26 जनवरी 2026 को हुई थी। ये मामला उनके पास 17 अप्रैल को आया।’ ‘नियम है कि 21 दिन में रजिस्ट्रेशन हो जाना चाहिए। मृत्यु के 7 दिनों के भीतर परिवार के लोग आवेदन करते हैं, तभी प्रक्रिया जल्दी पूरी हो पाती है। कलरा के परिवार ने समय पर आवेदन नहीं किया। बाद में उनकी भाभी गुरुबारी मुंडा ने 30 मार्च को डेथ सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया।’ ‘इसके लिए जो दस्तावेज दिए गए थे, वे स्पष्ट नहीं थे। इसलिए आवेदन वापस कर दिया गया। 25 अप्रैल को दोबारा सही दस्तावेजों के साथ आवेदन किया गया और 29 अप्रैल को डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। हमारी ओर से लापरवाही नहीं हुई। गुरुबारी मुंडा ने एक एफिडेविट दिया था, जिसमें लिखा था कि मेरे अलावा कलरा मुंडा का कोई और वैध वारिस नहीं है। उन्हें जो दस्तावेज और प्रमाण दिए, उसी आधार पर हमने कार्रवाई की।’ गुरुबारी मुंडा ने भी एफिडेविट देने की बात मानी है। उन्होंने बताया कि अकाउंट से पैसे निकालने में दिक्कत हुई, तब किसी ने ऐसा करने का सुझाव दिया था। एफिडेविट परिवार की सहमति से दिया था।
27 नवंबर 2020 की बात है। एक खबर आई- पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री और दीदी के 'खास सिपहसालार' सुवेंदु अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा चुनाव महज 5 महीने दूर थे। सुवेंदु का जाना किसी बड़े किले के ढहने जैसा था। आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हुई। रूठे हुए 'नंदीग्राम के शेर' को मनाने के लिए बिसात बिछाई गई। 1 दिसंबर की सर्द रात। कोलकाता के एक कमरे में 4 दिग्गज जुटे। बागी सुवेंदु अधिकारी, ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद सौगत रॉय और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर। घंटों माथापच्ची हुई। अगली सुबह सौगत रॉय ने ऐलान किया- ‘सब ठीक है। सुवेंदु कहीं नहीं जा रहे, वो हमारे साथ हैं।' लगा कि तूफान टल गया। कुछ ही दिन बीते थे कि सुवेंदु के एक वॉट्सऐप मैसेज ने फिर सियासी धमाका कर दिया। सौगत रॉय को भेजे मैसेज में उन्होंने लिखा- ‘मेरी टीस अभी भी बरकरार है। आपने बिना समाधान निकाले ही सब कुछ मुझ पर थोप दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुझे अपनी बात कहनी थी, लेकिन आपने पहले ही घोषणा करके मेरा मौका छीन लिया। अब साथ चलना मुमकिन नहीं। मुझे माफ कर दें।’ इधर मेदिनीपुर में सुवेंदु के दफ्तर से ममता दीदी के पोस्टर नदारद हो रहे थे और दीवारों पर भगवा रंग चढ़ने लगा था। 17 दिसंबर को उन्होंने आधिकारिक तौर पर टीएमसी को 'राम-राम' कह दिया। अगले ही दिन दिल्ली से 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा का फरमान आया, तो समझ में आ गया कि अब सुवेंदु की मंजिल का पता बदल चुका है। 19 दिसंबर 2020 का वो दिन, मेदिनीपुर का मैदान जनसैलाब से अटा पड़ा था। गृहमंत्री अमित शाह ने सुवेंदु के गले में बीजेपी का गमछा डाला। दोनों ने मिलकर झंडा लहराया। सुवेंदु ने झुककर शाह के पैर छुए और बंगाल फतह के लिए बीजेपी के सारथी बन गए। 3 सीटों वाली बीजेपी 2021 के चुनाव में 77 सीटों तक पहुंची और इस बार 2026 में 207 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। अब ऑब्जर्वर बनकर बंगाल पहुंचे अमित शाह, सुवेंदु को ही मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान कर सकते हैं। 7 ग्राफिक्स में जानिए सुवेंदु अधिकारी से जुड़े कुछ रोचक किस्से… ****** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और महेंद्र वर्मा --------------------------- ये खबर भी पढ़ें…जब ममता ने रातोंरात सोनिया की कांग्रेस को जीरो किया:34 साल की लेफ्ट सरकार को उखाड़ फेंका; अब दीदी की विदाई तय 30 अप्रैल 2026। रात करीब 8 बजे। कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल के बाहर भारी बारिश हो रही थी। तभी एक गाड़ी आकर रुकी। सफेद साड़ी, पैरों में रबर की चप्पल। अपने सिग्नेचर स्टाइल में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उतरीं, और सीधे स्ट्रॉन्ग रूम की तरफ बढ़ चलीं। पढ़ें पूरी खबर…
भारतीय एयर ऑपरेशन के सामने कमजोर साबित हुआ पाकिस्तान का डिफेंस नेटवर्क: रिपोर्ट
भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण था कि पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं निकली जितना दावा किया जाता था।
होर्मुज जलडमरूमध्य में टकराव: अमेरिकी जहाजों पर ईरानी मिसाइलें
मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान के बंदर अब्बास और केशम में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है
भवानीपुर में दीदी के खिलाफ सुवेंदु की जीत हो या 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से ममता की हार या फिर संदेशखाली केस, सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हर मोर्चे पर उनके साथ डटे रहे। 6 मई को कोलकाता के पास उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस इसे प्री-प्लांड मर्डर बता रही है। 42 साल के चंद्रनाथ रथ 6 मई की रात 10.30 बजे अपने घर बारासत जा रहे थे। स्कॉर्पियो में चंद्रनाथ के साथ ड्राइवर और एक शख्स था। चंद्रनाथ अगली सीट पर बैठे थे। पुलिस के मुताबिक, रात करीब 11 बजे कोलकाता से 20 किलोमीटर दूर एक कार ने उनका रास्ता रोक दिया। पीछे से बाइक से आए शूटर्स ने चंद्रनाथ पर 10 गोलियां चलाईं। चंद्रनाथ को तीन गोलियां लगीं। दो सीने से आर-पार हो गईं, एक पेट में लगी। ड्राइवर को भी गोली लगी। चंद्रनाथ की मां का कहना है कि हमें चुनाव के वक्त से ही धमकी मिल रही थी कि 4 तारीख के बाद दिल्ली के बाप भी नहीं बचा पाएंगे। उन्होंने वही कर दिया। जब से सुवेंदु बाबू ने ममता बनर्जी को हराया है, तभी से मेरे परिवार पर खतरा है। ‘TMC के गुंडों से निपटना हो या लीगल केस, चंद्रनाथ ही जरिया‘ इस बार सुवेंदु ममता के खिलाफ भवानीपुर से चुनाव लड़े। इसलिए चंद्रनाथ यहां डटे रहे। चुनाव के लिए राजस्थान से आई टीम में शामिल BJP विधायक गुरवीर सिंह बराड़ बताते हैं, ‘हम लोग भवानीपुर में थे, तब सारे इंतजाम चंद्रनाथ ही करते थे। चुनाव से जुड़ा लीगल मामला हो या TMC के लोगों की गुंडागर्दी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, सबकी जिम्मेदारी चंद्रभान के पास थी।’ कहीं किसी ने कार्यकर्ताओं को पीट दिया या कोई प्रचार में दिक्कत कर रहा हो, तो हम चंद्रनाथ से ही बात करते थे। चुनाव आयोग या पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराना, सब वही करते थे। 30 अप्रैल और 1 मई की रात भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम में EVM में टैंपरिंग और हेरफेर का आरोप लगा, तब चंद्रनाथ कहां थे? BJP में हमारे सोर्स बताते हैं, 'वहीं थे। उन्होंने ही पूरे विवाद का सामना किया। फिर चुनाव आयोग और फोर्स से कोऑर्डिनेट किया। हम सब बाहरी थे। TMC के लोग हमसे उलझते, तब चंद्रनाथ की टीम ही उनसे मुकाबला करती थी।’ वे आगे कहते हैं, ‘उन्हें अंदाजा था कि भवानीपुर में TMC कुछ न कुछ विवाद करेगी। अगर वे पहले से तैयार नहीं होते, तो TMC बड़ा कांड करती। हम प्रचार के लिए कहीं जाते थे, तो TMC के 2-3 लोगों की टीम हमारे वीडियो बनाती थी। ऑफिस के आसपास भी TMC के लोग मंडराते रहते थे।' भवानीपुर-नंदीग्राम में ममता को हार दिलवाई भवानीपुर में BJP के प्रभारी रहे राजस्थान के विधायक राजेंद्र सिंह राठौड़ की कोर टीम में 8 लोग थे। इनमें शामिल सुभाष नील बताते हैं, 'हमें पहले ही दिन चंद्रनाथ से मिलवाया गया। बताया कि यही सारे इंतजाम देखेंगे। मीटिंग फिक्स करने से लेकर बूथ का एजेंट तय करने और रैलियों के रूट तक सबका जिम्मा इनके पास है।' 'डोर टू डोर प्रचार के लिए टीम कैसे जाएगी, रास्ते में खाने की व्यवस्था कहां होगी, वो जगह सुरक्षित है या नहीं, इसकी देखरेख चंद्रनाथ करते थे। 2021 में नंदीग्राम में सुवेंदु ने ममता को शिकस्त दी थी, तब भी मैनेजमेंट चंद्रनाथ के हाथ में था।' भवानीपुर में BJP की चुनाव मैनेजमेंट की टीम में शामिल सोर्स ने बताते हैं, ‘पूरे बंगाल में TMC की गुंडागर्दी चल रही थी, लेकिन भवानीपुर सीट ज्यादा सेंसेटिव थी। यहां TMC के लोगों के निपटने के लिए चंद्रनाथ ने लोकल युवाओं की टीमें बनाईं थीं।’ 'प्रचार के वक्त 2-3 युवाओं की एक टीम हमारे साथ रहती थी। साथ नजर नहीं आती थी, लेकिन आसपास ही रहती थी। अगर कोई हमला करे या मारपीट की नौबत आ जाए, तो वो टीम संभाल ले। कई बार ऐसी स्थितियां बनी भी थीं।' 10 साल से सुवेंदु के साथ थे, हमेशा कमांडो की तरह चौकन्ने रहते सुवेंदु BJP में आने से पहले TMC में थे। पार्टी के एक पदाधिकारी बताते हैं, 'चंद्रनाथ और सुवेंदु को मैंने पहली बार 2016 में साथ देखा था। तब सुवेंदु अधिकारी परिवहन मंत्री बने थे। चाहे रैली हो, रोड शो हो या किसी से मिलने जाना हो, हर जगह दोनों साथ होते। तब तक चंद्रनाथ सरकारी कर्मचारी नहीं थे। वे सुवेंदु के प्राइवेट स्टाफ थे, लेकिन परछाई की तरह साथ रहते थे।' सरकारी स्टाफ कब बने? वो बताते हैं, ‘काफी बाद में। सुवेंदु BJP में शामिल हो गए और नेता प्रतिपक्ष बने, तब चंद्रनाथ उनके सरकारी स्टाफ बने। वे हमेशा किसी कमांडो की तरह चौकन्ने रहते थे।' मां बोलीं- कातिलों को फांसी नहीं, उम्रकैद जरूर हो चंद्रनाथ की हत्या के बाद उनकी मां हासिरानी रथ ने कहा, ‘ये सब इसलिए किया गया क्योंकि BJP सत्ता में आ गई है। हमारे नेता बार-बार राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहे हैं, लेकिन ममता की पार्टी के लोग भड़काऊ बातें कर रहे थे। नई सरकार दोषियों को सजा दिलाए। मैं एक मां होने के नाते नहीं चाहती कि किसी दोषी को फांसी दी जाए, लेकिन उम्रकैद जरूर होनी चाहिए।’ पुलिस का दावा- चंद्रनाथ की रेकी हुई, ये प्री-प्लांड मर्डर चंद्रनाथ की हत्या का केस CID ने अपने हाथ में ले लिया है। जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई है। अब तक 3 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। पुलिस का मानना है कि हमलावर कई दिन से चंद्रनाथ का रूटीन मॉनिटर कर रहे थे। DGP सिद्धनाथ गुप्ता ने बताया कि एक बात तय है कि चंद्रनाथ रथ को मारने के लिए पूरी टीम थी। ये लोग उनके आने-जाने के रूट पर नजर रखे हुए थे। हमला जिस तरह किया गया, वो बिना तय प्लान के नहीं हो सकता। हम इससे ज्यादा अभी कुछ नहीं बता सकते। ……………… पश्चिम बंगाल के भवानीपुर से ये रिपोर्ट भी पढ़ें… भवानीपुर में कचरे के ढेर की वजह से हारीं ममता भवानीपुर ममता बनर्जी का घर है। यहीं जन्मीं। तीन बार चुनाव जीतीं। इस बार सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। BJP ने TMC के डर और भवानीपुर की बदहाली, कचरे के ढेर को ममता के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया। पढ़िए पूरी खबर…
नेपाल की भ्रष्टाचार विरोधी संस्था ने गुरुवार को विशेष अदालत में एक भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से निकल चुके हैं।
पहली तिमाही में चीन के स्मार्ट उपभोक्ता उपकरण उद्योग में तेज वृद्धि
चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से मार्च तक चीन के स्मार्ट उपभोक्ता उपकरण निर्माण उद्योग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई
चीनी इलेक्ट्रिक सूचना विनिर्माण उद्योग के अतिरिक्त मूल्य में 13.6 प्रतिशत वृद्धि
चीनी उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही में पैमाने के ऊपर के इलेक्ट्रिक व सूचना विनिर्माण उद्यमों (सालाना कारोबार 2 करोड़ युआन या उससे अधिक) के अतिरिक्त मूल्य साल दर साल 13.6 प्रतिशत बढ़े, जो अलग-अलग तौर पर इसी अवधि में उद्योग और हाईटेक विनिर्माण उद्योग से 7.5 प्रतिशत और 1.1 प्रतिशत अधिक थे।
अबू धाबी में विक्रम मिस्री ने रीम अल हाशिमी से की मुलाकात, भारत-यूएई साझेदारी पर हुई चर्चा
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को अबू धाबी में यूएई की अंतरराष्ट्रीय सहयोग मामलों की राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी से मुलाकात की
'जुलाई 2022 की वो रात… जिस रात के लिए ज्यादातर लोग सपने बुनते हैं। उस दिन मेरी सुहागरात थी। कमरा सज चुका था। रिश्तेदार थककर सो गए थे। दुल्हन मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी। मैं उसके कमरे में गया और उससे बात किए बिना बगल में लेट गया। रात के करीब 3 बजे, चुपचाप उठा और घर से बाहर निकल गया। न पत्नी को कुछ बताया, न घरवालों को। एक सुनसान नुक्कड़ पर जाकर बैठा। जेब से शराब निकाली और पी… फिर गांजा पिया और दूसरे कई ड्रग्स लिया। एक के बाद एक… इतना नशा कर लिया कि वहां से उठ नहीं पाया। मुझे याद ही नहीं रहा कि उस रात मेरी सुहागरात थी’, 39 साल के मनोजीत चौधरी यह बताते हुए काफी अफसोस से भर जाते हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज ऐसे लोगों की कहानी, जो काफी पढ़े-लिखे होने के बावजूद नशे की लत में तबाह हो गए। शादी टूट गई। घर छूटा और नौकरी चली गई। अब रिहैबिलिटेशन सेंटर यानी पुनर्वास केंद्र में भर्ती हैं। मैं गुजरात के नाडियाड में हूं। यहां ‘लाइफ लाइव’ नाम के एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में 39 साल के मनोजित चौधरी पिछले चार महीनों से भर्ती हैं। मनोजित सुहागरात की बात आगे बताते हुए कहते हैं, 'सुबह जब पत्नी की आंख खुली, तो मैं कमरे में नहीं था। नई-नवेली दुल्हन घबरा गई। उसने घरवालों को बताया। कुछ ही देर में पूरे घर में हलचल मच गई। मां लगातार मुझे फोन करती रहीं, लेकिन मैंने एक भी कॉल नहीं उठाया। कई घंटे बाद घर लौटा। मुझे देखते ही सब समझ गए कि बुरी तरह नशे में हूं। घर का माहौल, जो कुछ घंटे पहले तक शादी की खुशियों से भरा था, अब चीख-पुकार में बदल चुका था। पत्नी ने मुझसे सवाल पूछे, लेकिन जवाब देने के बजाय उससे झगड़ा शुरू कर दिया। बात इतनी बढ़ गई कि उसे थप्पड़ मार दिया। हमारे रिश्ते में दरार सुहागरात के दिन ही पड़ गई। मेरी पत्नी उस वक्त सॉफ्टवेयर डेवलपर थी। फिलहाल, मामला किसी तरह शांत हुआ। उसके बाद भी अक्सर पत्नी से मारपीट करता। नशे में उससे अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड्स की बातें करता। कहता- मुझे उस गर्लफ्रेंड के साथ ज्यादा मजा आता था… तुम वैसी नहीं हो। भला कौन पत्नी ये सब बर्दाश्त करेगी? एक वक्त ऐसा भी आया, जब मैंने पत्नी के गहने बेचकर शराब और ड्रग्स में उड़ा दिए। करीब दो साल तक हम साथ रहे, लेकिन रिश्ते में रोज दरार बढ़ती गई। एक दिन पत्नी ने साफ कह दिया- मनोजित , तुम्हें मुझसे नहीं… ड्रग्स से प्यार है। अब तुम ड्रग्स के साथ ही रहो। इतना कहकर वह मायके चली गई। वहीं से उसने तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। तलाक के वक्त एक रुपया भी नहीं मांगा। आखिरकार 2024 में आपसी सहमति से हमारा रिश्ता खत्म हो गया। अब पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है- मैंने सिर्फ अपनी ही नहीं, पत्नी की भी जिंदगी बर्बाद कर दी। आखिर कौन पति अपनी सुहागरात पर पत्नी को सोता छोड़कर ड्रग्स लेने जाएगा? परिवार, शादी, नौकरी सब खत्म हो गया। मेरी आखिरी नौकरी 25 लाख रुपए के पैकेज की थी। मनोजित दिखने में बिल्कुल हट्टे-कट्टे हैं, किसी बाउंसर से कम नहीं। बात करते-करते अचानक कहते हैं- रुकिए… आपको अपनी पुरानी तस्वीरें दिखाता हूं। फैमिली की फोटो भी है। वह मोबाइल उठाते हैं। स्क्रीन ऑन करते हैं। पासवर्ड डालने की कोशिश करते हैं, फिर रुक जाते हैं। कुछ सेकेंड तक स्क्रीन को देखते रहते हैं। फिर दूसरा पासवर्ड डालते हैं। वह भी गलत निकलता है। तीसरी बार कोशिश करते हैं… और फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ बेहद टूटे हुए अंदाज में कहते हैं- ‘याद ही नहीं आ रहा…’ इस दौरान रिहैबिलिटेशन सेंटर में आस-पास बैठे बाकी लोग हंसने लगते हैं। मनोजित कुछ पल के लिए चुप हो जाते हैं। सिर झुकाकर धीमी आवाज में कहते हैं- ये लोग मुझे ऐसे देखते हैं, जैसे मैं कोई जाहिल हूं। इन्हें नहीं पता कि पढ़ा-लिखा हूं। एमटेक किया है… उसके बाद एमबीए भी। अच्छी नौकरी थी, लेकिन ड्रग्स की लत मुझे यहां तक ले आई। सच कहूं तो ये रिहैबिलिटेशन सेंटर मुझे जेल लगता है। इतना कहकर वह कमरे की दीवारों की तरफ देखने लगते हैं… जैसे उन दीवारों में अपनी बिखरी हुई जिंदगी तलाश रहे हों। इस दौरान कमरे में लोगों का तंज और हंसी जारी रहती है। परेशान होकर मनोजित अचानक उठते हैं और कहते हैं- आइए… यहां नहीं, दूसरे कमरे में बात करते हैं। वह मुझे सेंटर के भीतर बने दूसरे कमरे में लेकर जाते हैं। दरवाजा बंद करते हैं। फिर बोलना शुरू करते हैं- मैं असम के डिब्रूगढ़ का रहने वाला हूं। मम्मी-पापा दोनों रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में बड़े पद पर थे। अब रिटायर हो चुके हैं। असम में शराब पीना आम बात है। मेरे पापा हर रविवार को शराब पीते थे। मैं तब करीब 10-12 साल का था। एक दिन देखा कि वह एक बोतल से गिलास में कुछ डाल रहे थे। फिर उसमें बर्फ डाली… और एक ही सांस में पी गए। मैंने पूछा- पापा, ये क्या पी रहे हो? मुझे भी पिलाओ। उन्होंने जोर से डांटते हुए कहा- ये बच्चों की चीज नहीं है… भूलकर भी इसे मत छूना। एक दिन पापा घर पर नहीं थे। मैं चुपके से उस अलमारी तक पहुंचा, जहां शराब रखी थी। बोतल निकाली… गिलास में डाली… और पी लिया। पहला घूंट बहुत कड़वा लगा। बोतल वापस अलमारी में रख दी, लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं हुई। थोड़ी देर बाद जब नशा चढ़ा… तो अच्छा लग रहा था। अगले दिन फिर उस बोतल को निकाला। इस बार पहले से ज्यादा पी। शाम को जब पापा घर लौटे, तो उन्हें सब समझ आ गया। उन्होंने मुझे बुलाया और पूछने लगे। डरकर सच बता दिया। इसके बाद उन्होंने मेरी बहुत पिटाई की। कहने लगे- तू मेरा इकलौता बेटा है… शराब पीकर सब बर्बाद करेगा? उसके बाद घर में रखी बोतल को फिर कभी हाथ नहीं लगाया, लेकिन मन बार-बार उसी तरफ खींचता था। उस वक्त मेरे स्कूल के कुछ लड़के चोरी-छिपे नशा करते थे। उनसे दोस्त कर ली। तब 14 साल का हो चुका था। इसके बाद उनके साथ इतना पीने लगा कि अकेले दो-दो बोतल शराब खत्म कर देता था। दोस्त भी नए-नए ‘जुगाड़’ सिखाते थे। कहते- शराब पीने के बाद गुटखा खा लिया करो, फिर घरवालों को पता नहीं चलेगा। रोज दोस्तों के साथ पीता और गुटखा खाकर घर पहुंचता। सोचता था कि राज छिप जाएगा, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता था। पापा अक्सर समझ जाते कि नशे में हूं और पिटाई शुरू कर देते थे। हालांकि, पढ़ाई में बहुत तेज था। स्कूल में हमेशा नंबर अच्छे आते थे। फिर आया साल 2007। 12वीं अच्छे अंकों से पास की। रिजल्ट देखकर पापा बेहद खुश हुए। उन्हें लगा- शायद बेटा अब संभल रहा है। इसी उम्मीद में उन्होंने मुझे गुवाहाटी में बीटेक करने भेज दिया। अब नया शहर… घर से दूरी… और आजादी। गुवाहाटी में और ज्यादा शराब पीने लगा… लेकिन पढ़ाई भी अच्छे से करता रहा। इंजीनियरिंग पूरी हुई… और फिर 2011 में बेंगलुरु की एक कंपनी में नौकरी मिल गई। करियर की शुरुआत शानदार थी, लेकिन नहीं पता था कि असली बर्बादी अभी बाकी है। पहली बार हाथ में अच्छी सैलरी आई… और वहीं से मेरी जिंदगी ने खतरनाक मोड़ ले लिया। पहले सिर्फ शराब पीता था … अब गांजा भी जुड़ गया… और धीरे-धीरे दूसरे ड्रग्स भी लेने लगा। जिस कंपनी में काम करता था, वहां हर महीने कारोबार का नया टारगेट दिया जाता था। नए टारगेट के साथ शुरू होता मेरा नया तनाव। मैं टारगेट तो पूरा कर लेता था… लेकिन उसके लिए खुद को नशे में धकेलता जाता था। दिन में ऑफिस… रात में नशा। सैलरी अच्छी थी… लेकिन टिकती नहीं थी। जितना कमाता था, सब नशे में उड़ा देता था। महीने के करीब 80 हजार रुपए सिर्फ ड्रग्स और शराब में चले जाते थे। पैसे कम पड़ते, तो घर पर फोन करता। मां को अलग-अलग बहाने बताता- कभी घूमने जाने का, तो कभी तबीयत खराब होने का। अक्सर उनसे 50 हजार मंगवा लेता। इकलौता बेटा था, इसलिए भेज भी देती थीं। उन पैसों को बार-पब में उड़ाता। वहां ड्रग्स लेता और लड़कियों के साथ नाचता। कई बार तो वहीं बेहोश पड़ा रह जाता। मनोजित एक कड़वी हंसी के साथ कहते हैं- तब लगता था कि वाह, क्या जिंदगी जी रहा हूं… लेकिन धीरे-धीरे खुद को खत्म कर रहा था। हालात इतने बिगड़ गए कि ऑफिस भी नशा करके जाने लगा। मेरा परफॉर्मेंस अच्छा था, इसलिए कंपनी शुरू में बर्दाश्त करती रही, लेकिन बाद में चेतावनी देकर तीन बार नौकरी से निकाल दिया। एचआर वाले कहते- मनोजित, आपका काम अच्छा है, लेकिन हम कंपनी पॉलिसी से समझौता नहीं कर सकते। आप इस तरह नशा करके ऑफिस नहीं आ सकते। अब तक साल 2012 खत्म होने वाला था और यहीं से मेरी जिंदगी एक और लत की गिरफ्त में आ चुकी थी। अब नशे के साथ मुझे जिस्म की भी आदत लग गई थी। अच्छी सैलरी पाता था, हैंडसम था ही और बिंदास लाइफस्टाइल थी। नई-नई लड़कियों से मिलता, उन पर पैसे खर्च करता और जल्दी-जल्दी रिश्ते बदलता। हफ्तेभर में किसी नई लड़की से जुड़ जाता था और फिर आगे बढ़ जाता। यह सिलसिला एक-दो महीने नहीं, करीब आठ साल तक चला। सच कहूं तो मैं प्लेबॉय बन चुका था। एक रिश्ते में टिकता ही नहीं था। उधर मेरा करियर भी बिखरता गया। कई नई नौकरियां मिलीं, लेकिन कुछ दिन ही ऑफिस जाता… फिर नशा हावी हो जाता और नौकरी छोड़ देता था। एक समय तो ऐसा आया कि मेरी जिंदगी का पूरा रूटीन ही उल्टा हो गया। सुबह सोकर उठता और नाश्ते में खाना नहीं, शराब और ड्रग्स लेता। फिर घंटों सोता रहता। फिर उठता… तो वही नशा करता। दिन-रात यही जिंदगी बन गई थी। उस दौरान घर पर लड़कियां भी आतीं। मेरी जिंदगी 24 घंटे सिर्फ दो चीजों के आसपास घूम रही थी- नशा और लड़कियां। इसी हालत में करीब 12 साल नौकरी किया। फिर आया साल 2022। परिवार को मेरी हालत का पता चल चुका था। उन्हें लगा- शायद शादी मेरी जिंदगी को बदल दे। इसी उम्मीद में उन्होंने घर से करीब 40 किलोमीटर दूर एक लड़की से मेरा रिश्ता तय कर दिया। शादी तय होने के बाद होने वाली पत्नी से रोज बातें करता था। वह एक नई जिंदगी के सपने देख रही थी, लेकिन मैं दिनभर शराब, गांजा और ड्रग्स में डूबा रहता था। मैं उससे ज्यादातर चैट पर ही बात करता था, ताकि उसे मेरी हालत का पता न चले। रोज उससे वादा करता- रात 10 बजे के बाद वीडियो कॉल करूंगा, लेकिन रात होते-होते बहाना तैयार रहता। जैसे ही वीडियो कॉल की बात आती, कह देता- कल सुबह ऑफिस जाना है… बहुत नींद आ रही है। उसे लगता था कि वाकई काम में व्यस्त हूं… और मान जाती थी। लेकिन असलियत कुछ और थी। उससे बात खत्म होते ही शराब, गांजा और ड्रग्स लेने बैठ जाता। फिर पूरी रात नशा चलता था। कभी-कभी उसे शक भी होता। वह पूछती- ‘तुम कुछ छिपा तो नहीं रहे?’ हर बार बात टाल देता- अरे नहीं… बस कभी-कभार शराब पी लेता हूं। असम में तो ये सब आम बात है न। लेकिन झूठ ज्यादा दिन नहीं चला। शादी हुई… वह घर आई… और फिर वो सुहागरात आई, जिसकी बात मैंने ऊपर की है। सुहागरात वाले दिन घर से गायब रहा था… और दो साल बाद रिश्ता टूट गया था। आप गुजरात के नाडियाड कैसे पहुंचे? मनोजित बताते हैं- घर वालों ने मुझे करीब 4 महीने पहले इस रिहैबिलिटेशन सेंटर में भर्ती कराया है। दिसंबर 2025 की बात है। अहमदाबाद की एक कंपनी में 25 लाख रुपए सालाना पैकेज पर नौकरी लगी। बहुत खुश था। तय किया था कि अब नशा नहीं करूंगा। करीब 10-15 दिनों तक कोई नशा नहीं किया। एक दिन अचानक मन हुआ- एक पेग पी लेता हूं… क्या ही हो जाएगा। गुजरात में शराब पर बैन है, इसलिए आसानी से मिलती नहीं थी। ऑटो किया और एक एजेंट के पास पहुंच गया। उसने मुझे अवैध शराब पिलाई और काफी पैसे ले लिए। अगले दिन फिर उसी एजेंट के पास पहुंचा। इस बार उसने शराब के अलावा दूसरे कई ड्रग्स भी दिए। मैं एक सड़क किनारे गया और वहां बैठकर शराब पी… फिर गांजा और अलग-अलग तरह के ड्रग्स लिया। फिर क्या हुआ… मुझे कुछ पता नहीं। रातभर वहीं बेहोश पड़ा रहा। सुबह आंख खुली, तो देखा कि ऑफिस का लैपटॉप, मोबाइल, मेरा सूट-बूट… सब गायब था। यहां तक कि किसी ने मेरे कपड़े तक उतार लिए थे। सिर्फ अंडरवियर में पड़ा था। उस घटना के बाद फिर वही पुराना सिलसिला शुरू हो गया। रोज शराब पीने लगा। ऑफिस से निकलते ही सीधे ड्रग्स खोजने निकल जाता। मम्मी-पापा को शक हुआ। एक दिन वे अहमदाबाद आए और मुझे इस रिहैबिलिटेशन सेंटर में डाल दिया। तब से यहीं पड़ा हूं। मनोजित कमरे की दीवारों को देखते हुए कहते हैं- सब कहते हैं ये इलाज की जगह है… लेकिन मुझे ये जेल लगती है। मनोजित के साथ ही इस रिहैबलिशेन सेंटर में विनेश भी पिछले ढाई महीने से भर्ती हैं। वह वडोदरा के रहने वाले हैं। विनेश बताते हैं- पापा डॉक्टर हैं और मां बिजनेसमैन और मैंने बीबीए की पढ़ाई की है। पहली शादी टूटने के बाद पापा ने दूसरी शादी कर ली थी। पढ़ाई के दौरान ही दिल्ली के एक दोस्त के साथ पहले शराब पीना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे ड्रग्स लेने की आदत लगी। जब शराब पीकर घर आता, तब पापा मम्मी से कहते- देखो अपने संस्कारी बेटे को। तुमने शराबी बेटा पैदा किया है। जब मुझे लगने लगा कि मेरी वजह से मम्मी-पापा के बीच लड़ाई हो रही है, तब मैंने घर जाना बंद कर दिया। एक बार तो 23 दिन तक अपने दोस्त के फ्लैट पर रहा। वहां शराब, गांजा, नशे के लिए तमाम तरह के ड्रग्स ले रहा था। फ्लैट पर लड़कियां भी आती थीं। वे भी नशा करती थीं। उन्हीं में से एक लड़की से प्यार हो गया था। मेरा एक दोस्त पहले से उसे पसंद करता था। मैं लड़की को एक ग्राम ड्रग्स देता, तो मेरा दोस्त उसे 5 ग्राम ड्रग्स देता। आखिर में वह मुझे छोड़कर उस लड़के के साथ रहने लगी। उसके बाद और ज्यादा नशा करने लगा था। ड्रग्स लेकर पूरे दिन कमरे में बंद रहता। एक दिन घर वालों को पता चल गया। मम्मी मुझसे मिलने आईं। मेरी हालत देखर बहुत नाराज हुईं। उसके बाद यहां रिहैबिलेशन सेंटर लेकर आईं और भर्ती कर दिया। तब से यहीं हूं। सोचता हूं आखिरकार मेरे साथ के लड़के कनाडा, अमेरिका में अच्छी नौकरी कर रहे हैं और मैं ड्रग्स की वजह से इस जेलखाने में पड़ा हूं। खुद को बर्बाद कर लिया। विनेश के साथ ही सूरत के रहने वाले 22 साल के हिमांशु भी बैठे हैं। कहते हैं- दोस्तों ने पहले शराब पिलाना सिखाया, फिर ड्रग्स की लत लगाई। हालात इतनी खराब हो गई कि मेरे मौसा को पता चल गया। वह मुझे बहुत मानते हैं। उन्होंने इस रिहैबिलेशन सेंटर में लाकर भर्ती कर दिया। सोचता हूं, अच्छा हुआ कि समय रहते यहां आ गया, नहीं तो बाकी लोगों की तरह और ज्यादा बर्बाद हो जाता। ‘लाइफ लाइव’ रिहैबिलिटेशन सेंटर के फाउंडर हरिश केनी कहते हैं- 'ये हाल गुजरात का है, जहां शराब पर बैन है। हमारे पास इस समय 100 से ज्यादा पेशेंट हैं। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, डिफेंस समेत कई बड़े पेशे के लड़के शामिल हैं। ये नशे के आदी हो चुके हैं। सभी गांजा, चरस, अफीम और तरह-तरह के ड्रग्स लेते थे। अगर सरकार इसे कंट्रोल नहीं करती, तो कुछ ही सालों में गुजरात नशे के मामले में पंजाब को पीछे छोड़ देगा। नोट- पहचान छिपाने के लिए सभी नाम बदल दिए गए हैं। ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-जान बचानी थी, तो सिर पर बांध ली भगवा पट्टी:दंगे की तस्वीर ने मेरी जिंदगी बर्बाद की- हिंदुत्व का चेहरा बना, लेकिन मिला कुछ नहीं 2002 गुजरात दंगे के दो पोस्टर बॉय की कहानी, जिनमें हिंदुत्व का चेहरा बने मोची अशोक परमार आज दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात सड़क पर सोते हैं। वे उस वक्त 27 साल के थे। आज 51 साल के हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
26 मार्च से 3 अप्रैल 2026 के बीच नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की 9 महिला कर्मचारियों ने FIR दर्ज कराई। 9 में से 6 FIR में TCS नासिक के टीम लीडर तौसीफ अत्तार का नाम है। तौसीफ पर सेक्शुअल हैरेसमेंट, जबरन धर्म परिवर्तन और वर्कप्लेस पर डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इसके अलावा 6 टीम लीडर्स और HR मैनेजर निदा खान भी आरोपी बनाए गए हैं। केस सामने आने के करीब एक महीने बाद जांच का अपडेट जानने और TCS ऑफिस का माहौल समझने के लिए हम नासिक पहुंचे। नौकरी खोजने के बहाने अशोका बिजनेस इनक्लेव बिल्डिंग में TCS के दफ्तर पहुंचे। गार्ड ने बताया कि यहां BPO चलता है, अभी काफी वैकेंसी है। अधिकारी से मिलने के लिए कहा, तो मना कर दिया। कुछ कर्मचारियों से जरूर बात हुई। ऑफिस में टेलीकॉलर का काम करने वाले एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘केस सामने आने के बाद से करीब 20 लोग रिजाइन दे चुके हैं। हालात अब सामान्य होने लगे हैं, लेकिन ऑफिस में केस पर कोई बात नहीं करता है। ये जरूर है कि पहले कभी एक साथ इतने रिजाइन नहीं हुए थे। नई भर्तियां हो रही हैं, लेकिन पहले जितने लोग नहीं आ रहे हैं।’ निदा खान नहीं, तौसीफ अत्तार मास्टरमाइंड तौसीफ पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का भी आरोप है। TCS के एक पीड़ित पुरुष कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि तौसीफ उसे जबरदस्ती अपने घर ले गया, जहां उसे नमाज पढ़ाई और टोपी पहनने के लिए मजबूर किया। डरा-धमकाकर मांस भी खिलाया। केस की जांच कर रही नासिक पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) में शामिल हमारे सोर्स ने बताया, ‘पहला केस सामने आने के बाद हमने TCS जाकर कर्मचारियों को भरोसे में लिया। इसके बाद बाकी पीड़ित सामने आए, इसीलिए एक दिन में 8 FIR दर्ज की गईं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं, क्योंकि कुछ लोग अब भी डरे हुए हैं।‘ मीडिया में निदा खान के केस का मास्टरमाइंड होने की खबरें आई थीं। हालांकि सोर्स का दावा है, ‘अब तक तौसीफ ही मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आया है। सभी पीड़ितों और साथी कर्मचारियों ने बातचीत में निदा खान की जगह तौसीफ का नाम लिया है। निदा उसकी साथी थी, लेकिन मास्टरमाइंड तौसीफ ही लग रहा है।‘ ‘पीड़ितों का कहना है कि वही लड़कियों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाता था और बाकी आरोपियों को संरक्षण भी देता था। पुलिस को जो वीडियो पुलिस मिले हैं, उसमें भी तौसीफ ही धर्मांतरण करता दिख रहा है।‘ केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। तौसीफ अत्तार समेत 4 आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं, जबकि निदा खान फरार है। पिता बोले- बहू प्रेग्नेंट, तौसीफ को बेल मिले 2 मई को हम नासिक कोर्ट में तौसीफ के पिता और भाई से मिले। उन्होंने बात की लेकिन कैमरे पर आने से इनकार कर दिया। पिता बिलाल फकीर मोहम्मद अत्तार दावा करते हैं कि उन्हें केस से जुड़ी कोई जानकारी नहीं थी। परिवार को भी FIR दर्ज होने के बाद ही पता चला। वे बेटे पर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहते हैं, ‘पूरा मामला झूठा है। हमें अफेयर या ऐसी किसी भी एक्टिविटी के बारे में नहीं पता। लड़कियां ये आरोप किसी के दबाव में लगा रही हैं। तौसीफ की पत्नी की अगले 4-5 दिनों में डिलीवरी होनी है। इसी आधार पर हम बेल की कोशिश कर रहे हैं।’ तौसीफ के पिता मीडिया में आ रही खबरों पर भी नाराजगी जताते हैं। वे कहते हैं कि पता नहीं ये मलेशिया वाली बात कहां से आई, पुलिस ने भी ऐसा कुछ नहीं कहा है। दरअसल तौसीफ और निदा पर आरोप है कि उसने धर्मांतरण कराने के लिए एक पीड़ित को मलेशिया में नौकरी और प्रमोशन दिलाने का लालच दिया था। अब जानिए केस की जांच में क्या पता चला… ’धर्मांतरण जांच का केंद्र, लेकिन अलग से केस नहीं’ SIT में हमारे सोर्स का दावा है कि पुलिस 20 मई तक केस में चार्जशीट दाखिल कर देगी। पुलिस ने अरेस्ट आरोपियों और पीड़ितों से पूछताछ की है। TCS के अन्य कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं। सूत्र बताते हैं, ‘केस से जुड़े कुछ वीडियो रिट्रीव कर लिए गए हैं। TCS से बाकी CCTV फुटेज मांगे गए हैं। 2022 से अब तक के सारे CCTV मिलना मुश्किल हैं। गुड़ी पड़वा पर जब स्टाफ को टोपी पहनाई गई, पुलिस को तब का एक वीडियो मिला है। ये सोशल मीडिया पर भी वायरल है।‘ सोर्स दावा करते हैं कि जांच का मुख्य एंगल धर्मांतरण ही है। पुलिस के पास इसके पुख्ता सबूत भी हैं, लेकिन धर्मांतरण का अलग से कानून नहीं है, इसलिए पुलिस BNS की धारा-299 के तहत केस बनाने की तैयारी में है। इसमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का केस बनेगा। निदा अरेस्ट हुई, तो खुल सकता है फंडिंग का एंगल केस में फरार आरोपी निदा खान की तलाश में पुलिस ने 4 टीमें बनाई हैं। महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में तलाश जारी है। सोर्स के मुताबिक, निदा खान से पूछताछ करने पर फंडिंग वाला एंगल और खुल सकता है। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन हो सकता है कि ये विदेशी फंडिंग का केस भी निकले। हालांकि मामले में अभी और आरोपी जुड़ सकते हैं। निदा खान ने अपनी प्रेग्नेंसी का हवाला देते हुए कोर्ट से प्री-अरेस्ट बेल की मांग की थी, लेकिन नासिक की निचली अदालत ने 2 मई को ये याचिका खारिज कर दी। वकील बोले- धर्मांतरण का केस कमजोर तौसीफ, निदा खान समेत 4 आरोपियों की ओर से केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट राहुल कासलीवाल निदा के सरेंडर ना करने पर कहते हैं, ‘निदा अगर पुलिस को अपनी बात बताए, तो भी उसे अरेस्ट कर लिया जाएगा, जबकि जमानत उनका पहला हक है। अग्रिम जमानत की याचिका निचली अदालत में रिजेक्ट हुई है, तो हाईकोर्ट जाएंगे। ‘ वकील धर्मांतरण का केस ना होने का दावा करते हुए कहते हैं, 9 मामलों में से किसी भी पीड़ित ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है, इसलिए कानूनी तौर पर धर्मांतरण का मामला कमजोर है। महाराष्ट्र में जबरन या गैरकानूनी धर्मांतरण के खिलाफ कोई विशेष कानून भी नहीं है। ‘पुलिस ने धारा-299 लगाई है, वो धार्मिक भावनाएं आहत करने से संबंधित है। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और धर्मांतरण कराना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।’ राहुल एक दिन में 8 FIR दर्ज होने को भी असामान्य बताते हैं। वे कहते हैं कि अगर सभी घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी थीं, तो एक FIR में जांच हो सकती थी। उनका ये भी आरोप है कि अगर 2022 से ऐसी घटनाएं हो रही थीं, तो पीड़ित पक्ष चार साल चुप क्यों रहा? वे कंपनी छोड़ सकते थे या ऑफिस में लिखित शिकायत कर सकते थे। चार साल तक कोई शिकायत क्यों नहीं की। ‘ये सिस्टमैटिक ब्रेनवॉश, निदा से पूछताछ जरूरी‘ केस में स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर अजय मिश्र बताते हैं कि उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि ये सिर्फ व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि एक प्लान तरीके से किया जा रहा सिस्टमैटिक ब्रेनवॉश है। निदा खान पर आरोप है कि उसने एक पीड़ित को मलेशिया में नौकरी और प्रमोशन दिलाने का लालच दिया था ताकि उसका धर्मांतरण कराया जा सके। वे दावा करते हैं कि आरोपियों ने एक पीड़ित का नाम बदलकर 'हानिया' रख दिया था। उसे बुर्का पहनने जैसी धार्मिक ट्रेनिंग दी जा रही थी। पीड़ितों को मीडिया से बात न करने की हिदायत पीड़ितों का पक्ष जानने के लिए हम एक पीड़ित के घर भी पहुंचे। TCS कर्मचारी दानिश के खिलाफ शिकायत करने वाली पीड़ित ने हमसे बात करने से मना कर दिया। अन्य पीड़ितों ने भी यही कहा कि पुलिस ने उन्हें मीडिया से दूर रहने की हिदायत दी है। इसके अलावा हमने आरोपी निदा खान के पिता से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया। TCS की आंतरिक जांच कहां तक पहुंची है, ये जानने के लिए हमने कंपनी को भी मेल किया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला है। आगे मिलने पर जोड़ा जाएगा। ………………TCS केस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ‘तौसीफ बोला- शिव भगवान नहीं, ब्रह्माजी को गाली दी’ ‘तौसीफ ऑफिस में बिजनेस प्रोसेस लीडर है। हम एक टीम में नहीं थे, फिर भी वो मेरे पास आता और निजी जिंदगी के बारे में बातें करता। पूछता कि क्या तुम्हारा बॉयफ्रेंड है। वो ऑफिस की लड़कियों को सिर से पैर तक घूरता और आंख मारता।‘ ये आपबीती 25 साल की उस लड़की की है, जिसकी शिकायत पर नासिक पुलिस ने TCS के 7 अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। पढ़िए पूरी खबर…
भवानीपुर की गलियों में कदम रखते ही महसूस होता है कि कुछ बदल गया। एक तरफ जश्न, दूसरी तरफ खामोशी। ममता की हार के बाद सड़क पर कई जगह TMC के झंडे पड़े दिखे। थोड़ा आगे डीजे की तेज आवाज आई। ‘जय श्री राम’ का उद्घोष और गानों पर नाचते लोग दिखे। बोले, ‘खेला खत्म हो गया, अब शांति से रहेंगे।’ भवानीपुर ममता बनर्जी का घर है। यहीं जन्मीं। तीन बार चुनाव जीतीं। इस बार सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। BJP ने TMC के डर और भवानीपुर की बदहाली, कचरे के ढेर को ममता के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया। लेकिन ये हुआ कैसे… उससे पहले हालात की एक कहानी सुवेंदु घर आए तो TMC वालों ने BJP कार्यकर्ता की पत्नी को सफेद साड़ी भेजी कालीघाट के टर्फ रोड एरिया में रहने वाली रीता दत्ता के पति 38 साल से BJP में हैं। एक दिन सुवेंदु अधिकारी उनसे मिलने घर आए। रीता बताती हैं कि सुवेंदु दा के लौटने के 10 मिनट बाद ही तीन लड़के आए। उम्र 20-22 साल होगी। हाथ में एक पैकेट था। बोले- TMC की तरफ से है। पैकेट में सफेद साड़ी थी। उस पर लिखा था- सुवेंदु दो दिन, TMC सारा जीवन। रीता बताती हैं, ‘इसके बाद भी हमें धमकियां मिलती रहीं। कहा गया कि 4 तारीख के बाद देख लेंगे। हाथ-पैर तोड़ देंगे। हमने ये बात सुवेंदु दा तक पहुंचाई। उनकी मदद से कालीघाट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई। उन लोगों को अरेस्ट करवाया।’ ये हालात बदले कैसे…शुरुआत BJP के ऑफिस बनवाने से राजस्थान के BJP लीडर राजेंद्र राठौड़ भवानीपुर के प्रभारी थे। अमित शाह और सुनील बंसल के करीबी हैं। 7 बार के विधायक हैं। नेता प्रतिपक्ष भी रहे। वे करीब 50 दिन भवानीपुर में रहे। राठौड़ भवानीपुर पहुंचे, तो पता चला कि यहां BJP का ऑफिस ही नहीं है। उनके साथी विधायक गुरबीर बराड़ बताते हैं, ‘TMC के लोग ऑफिस बनने नहीं देते थे। हमने एक जगह तलाशी। उसके मालिक को ऑफिस बनाने के लिए तैयार किया।’ ‘ऑफिस बनाना अब भी मुश्किल था। कंस्ट्रक्शन का सामान पुलिस ने रास्ते में रोक लिया। वहां से गाड़ी छूटी, तो TMC के लोगों ने घेर लिया। धमकाने लगे। हमने CRPF की मदद ली और 4-5 दिन में ऑफिस बनकर तैयार हो गया। ममता को हराने से पहले हमने भवानीपुर में ऑफिस बनाकर उनके गुंडों को चैलेंज किया।’ 8 रणनीतियां, जिन्होंने भवानीपुर की कहानी बदल दी 1. वोटर से मिलने हर घर तक पहुंचीं तीन-तीन लोगों की टीम BJP ने कैसे ममता के मजबूत किले में बिना शोर मचाए सेंध लगा दी। इसका जवाब छिपा है, घर-घर पहुंचने वाली रणनीति में। BJP ने प्रचार के लिए डायरेक्ट कनेक्शन पर जोर दिया। तीन-तीन लोगों की टीमें बनाईं, दो पुरुष और एक महिला। इनका काम था हर घर तक पहुंचना, वोटर से बात करना और महसूस कराना कि उसका वोट मायने रखता है। इसके उलट TMC के लोग झुंड में चुनाव प्रचार के लिए जाते थे। इस वजह से लोग उनसे कतराते थे। 2. गलियों से ज्यादा हाईराइज बिल्डिंगों में प्रचार भवानीपुर की पहचान बहुमंजिला इमारतों से भी है। यहां प्रचार आसान नहीं होता। BJP कार्यकर्ता बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड को साथ लेते, फिर लिफ्ट से सबसे ऊपर जाते और वहां से नीचे आते हुए हर फ्लैट में दस्तक देते। हर घर में प्रधानमंत्री का लेटर, संकल्प पत्र और सुवेंदु अधिकारी की प्रोफाइल वाला पर्चा दिया जाता। पूरे प्रचार का सबसे अहम पहलू था सोशल मीडिया से दूरी। BJP ने घर-घर संपर्क की न फोटो पोस्ट कीं और न मीटिंग की जानकारी दी गई। किसी नेता के दौरे को हाईलाइट नहीं किया। पूरा अभियान खामोशी से चला। इससे बिना रुकावट प्रचार चलता रहा। 3. सुबह 10 से शाम 5 बजे का वक्त महिलाओं के लिए प्रचार के दौरान समझ आया कि सुबह जल्दी या देर शाम जाने पर अक्सर घर के पुरुष ही मिलते हैं। इससे घर की महिलाओं तक पहुंच नहीं बन पाती। तय किया गया कार्यकर्ता सुबह 10 बजे के बाद और शाम 5 बजे से पहले घर-घर जाएंगे। इससे सीधे महिलाओं से बात की गई। उनके मुद्दे सुने गए। पुरुषों के लिए सुबह का वक्त चुना, जब वे टहलने निकलते थे। बुद्धिजीवियों, डॉक्टरों, एडवोकेट, पत्रकारों, शिक्षकों, रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ अलग से मीटिंग की गई। 4. पुराने कार्यकर्ताओं के लिए कॉलसेंटर, फोन करके एक्टिव किया एक कॉल सेंटर बनाकर पुराने कार्यकर्ताओं को फोन किया गया। उनसे पूछा गया कि वे BJP से कब जुड़े थे। किसने मेंबर बनाया था। अब एक्टिव हैं या नहीं। अगर मीटिंग में बुलाया जाए तो आएंगे या नहीं। ये निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने का अभियान था। 5. 5 हजार नए और साइलेंट वोटर, जिन्होंने गेम बदल दिया SIR की वजह से भवानीपुर में वोटर लिस्ट से करीब 40 हजार नाम कट गए। 5 हजार से ज्यादा नए नाम जुड़े। इनमें ज्यादातर ऐसे युवा थे, जो पढ़ाई या नौकरी के लिए बाहर चले गए थे और चुनाव के लिए लौटे थे। इन लोगों को खास तौर पर टारगेट किया गया और उनसे संपर्क बनाया गया। भवानीपुर के रहने वाले गौतम कुमार बताते हैं, ‘लोग खुलकर कुछ नहीं बोल रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर फैसला कर चुके थे। इस बार साइलेंट वोटर सबसे बड़ा फैक्टर बने। वे सामने कुछ नहीं बोले, लेकिन वोटिंग के दिन फैसला दे दिया।’ 6. गुजराती, मारवाड़ी, राजस्थानी वोटर के हिसाब से टीमें बनाईं भवानीपुर में लगभग 42% वोटर बंगाली हिंदू और 34% गैर-बंगाली हिंदू हैं। लगभग एक चौथाई वोटर मुस्लिम हैं। बिहार, ओडिशा और झारखंड से आए प्रवासियों के अलावा सिख, मारवाड़ी और राजस्थान के लोग भी रहते हैं। इसलिए टीम में सिख, मारवाड़ी और राज्यों के हिसाब से लीडर रखे गए, ताकि वोटर से सीधा कनेक्ट कर पाएं। 8 वार्ड में 8 अलग-अलग प्रवासी अध्यक्ष भी बनाए। ये सभी राजस्थान से थे। 7. लोगों को भरोसा दिया, जीतें या हारें, सुरक्षा देते रहेंगे भवानीपुर सीट के प्रभारी राजेंद्र राठौड़ बताते हैं, ‘पिछले चुनाव में जिन लोग पर BJP को वोट डालने का शक था, नतीजे आने के बाद उनके घर की पाइपलाइन कटवा दी गई थी। उनके घरों के सामने कचरा फिंकवाया गया था। काउंसलर्स ने इनसे माफीनामा लिखवाया था। इस बार भी लोग हाथ जोड़कर कहते थे कि आप हमारे घर न आएं। अगर TMC फिर जीती, तो हमें जीने नहीं देंगे। हमने लोगों की सुरक्षा के लिए कार्यकर्ताओं के साथ सेंट्रल फोर्स की मदद ली। कहा कि BJP जीते या हारे, आपकी सुरक्षा होगी। 8. गंदी नाली, कचरे के ढेर को ममता के खिलाफ मुद्दा बना दिया राजेंद्र राठौड़ बताते हैं, 'हमने गंदी नालियों और कचरे के ढेर को मुद्दा बनाया। हमने कहा कि क्या ममता बनर्जी के इलाके के लोग गंदी नालियों और कचरे के ढेर के बीच रहने के हकदार हैं।' और इससे हासिल क्या हुआ… ममता हार गईं। 15,105 वोट से। भवानीपुर में पहली बार। 20 राउंड की काउंटिंग में ममता सिर्फ 7 राउंड और सुवेंदु 15 राउंड में आगे रहे, यानी एकतरफा जीत। इससे पहले यहां 5 बार चुनाव हुए थे, हर बार TMC जीती थी। BJP की जीत को कुछ लोग बदलाव और राहत मान रहे हैं, कुछ फिक्रमंद हैं, यानी हर गली की अपनी कहानी है। बबलू दास कहते हैं, ‘माहौल ठीक नहीं है। बहुत तोड़फोड़ हुई है। वहीं राजेश बर्मन कहते हैं, ‘अभी माहौल शांत है, लेकिन लोग थोड़े नाराज जरूर हैं।’ कई महिलाएं और बुजुर्ग मायूस भी नजर आए। कालीघाट की एक गली में मिली लीला शाह बोलीं, ‘हम चाहते थे दीदी जीतें। हमें लक्ष्मी भंडार से फायदा मिलता था, अब पता नहीं क्या होगा।’ ………………………..बंगाल में BJP की जीत पर ये खबर भी पढ़ें बंगाल में दीदी को हराने वाले BJP के 5 किरदार, मंच से पुलिस को धमकी भी स्ट्रैटजी बंगाल में BJP की मौजूदा जीत के 5 किरदार हैं। पहले अमित शाह, दूसरे उनका दाहिना हाथ रहे सुनील बंसल, फिर शिवप्रकाश सिंह, अमित मालवीय और भूपेंद्र यादव। अमित शाह की टीम ने बंगाल में ममता दीदी के खौफ से लेकर BJP के भरोसे तक के सफर के लिए नारे गढ़ने का काम किया। पुलिस को कैसे सरेआम चेतावनी दी जाए। कैसे जनता के बीच ममता के ऊपर शाह की दबंग छवि गढ़ी जाए, ये सब प्लानिंग का हिस्सा थी। पढ़िए पूरी खबर...

