US Iran tensions: अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिया है. परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.
चुनाव अभियान के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय आयाम भी जुड़ गया। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी राजनयिक जमात-ए-इस्लामी के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
रूस में व्हाट्सएप पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, सरकार ने ‘राष्ट्रीय मैसेंजर’ मैक्स अपनाने की अपील की
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि करते हुए कहा कि यह फैसला कंपनी द्वारा रूसी कानूनों का पालन न करने के कारण लिया गया है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से सरकार समर्थित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ‘मैक्स’ का उपयोग करने की अपील की।
बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने वाली है। उनकी पार्टी BNP ने 299 में से 165 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बीएनपी की जीत पर बधाई दी है। तारिक रहमान की बड़ी चुनौतियों में से एक अपने पड़ोसी भारत के साथ संबंधों को बहाल करना होगा। दशकों से भारत का दोस्त रहा बांग्लादेश, शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद से चीन और पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। बांग्लादेश में नई सरकार से जुड़े 6 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बांग्लादेश चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलीं? जवाब: 12 फरवरी को शाम 4:30 बजे तक 299 सीटों पर वोटिंग हुई। करीब 55% वोट पड़े। इसके बाद काउंटिंग शुरू हुई और 13 जनवरी की सुबह तक नतीजे आए… BNP के तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। उनकी पार्टी को 165 सीटें मिलीं हैं। 20 नवंबर 1965 को जन्में तारिक रहमान पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं। 17 साल के निर्वासन के बाद वे 25 दिसंबर 2025 को लंदन से लौटे। वापसी के सिर्फ 5 दिन बाद उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद BNP की कमान पूरी तरह तारिक के हाथों में आ गई। उन्हीं के चेहरे पर BNP चुनाव में उतरी। तारिक ने खुद दो सीटों- ढाका-17 और बोगरा-6 से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की। दरअसल, तारिक ने खुद को युवाओं और मध्यम वर्ग के मतदाताओं से कनेक्ट किया। उन्होंने खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस करने वाले नेता की तरह पेश किया। इसके अलावा तारिक को उनकी मां के निधन के बाद मिली सिम्पैथी और उनकी पॉलिटिकल रीलॉन्चिंग से भी फायदा हुआ। सवाल-2: क्या तारिक रहमान भारत के साथ रिश्ते सुधारेंगे? जवाब: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में गिरावट आई। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने भारत के परंपरागत विरोधी पाकिस्तान और चीन से दोस्ती बढ़ाई। ऐसे में भारत को उम्मीद थी कि बांग्लादेश की नई सरकार से रिश्ते ठीक किए जाएंगे। माना जाता है कि BNP भारत का पसंदीदा ऑप्शन है और वे संपर्क में भी है। जब खालिदा जिया का निधन हुआ तो पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट की। खालिदा के निधन पर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ढाका पहुंचे और तारिक से मिले। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग गए और शोक व्यक्त किया। BNP ने अपने मेनिफेस्टो में विदेश नीति ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ और ‘फ्रेंड यस, मास्टर नो’ नारों के इर्द-गिर्द तैयार की है। एक चुनावी रैली में तारिक रहमान ने कहा, ‘न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सर्वोपरि’। यानी उन्होंने भारत और पाकिस्तान के प्रभाव से मुक्त रहने की बात कही। पूर्व हाई कमिश्नर रीवा गांगुली दास मानती हैं कि हम पड़ोसी हैं और पड़ोसी बदले नहीं जा सकते। हमें एक-दूसरे के साथ काम करना ही पड़ता है। भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी सत्ता में आए हम उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं। BNP ने चुनावी वादा किया है कि… बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर रहे हर्षवर्धन श्रृंगला का कहना है कि तारिक रहमान समझ चुके हैं कि एक सफल पीएम बनने के लिए उन्हें भारत के समर्थन की जरूरत है, या कम से कम भारत की दुश्मनी वह मोल नहीं लेना चाहेंगे। अब देखना यह होगा कि उनकी कथनी और करनी मेल खाती हैं या नहीं। अमेरिकी थिंकटैंक Atlantic Council में साउथ एशिया सेंटर की सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन मानते हैं कि भारत को उम्मीद है कि नई सरकार बातचीत करने को तैयार होगी। वह उन किरदारों से प्रभावित न हो, जो भारत के हितों के लिए खतरा हैं। BNP और भारत दोनों ही एक-दूसरे के साथ काम करने को तैयार हैं। 13 फरवरी की सुबह पीएम मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा, यह जीत दिखाती है कि बांग्लादेश की जनता को आपके नेतृत्व पर भरोसा है। भारत हमेशा एक लोकतांत्रिक और आगे बढ़ते हुए बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा। मैं दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने और मिलकर विकास के लिए काम करने को तैयार हूं। सवाल-3: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सुधरना दोनों के लिए क्यों जरूरी है? जवाब: बांग्लादेश की 94% सीमा भारत से लगती है। बांग्लादेश लगभग चारों तरफे भारत से घिरा हुआ है, इसलिए इसे 'इंडिया लॉक्ड' देश कहा जाता है। ऐसे में बांग्लादेश सुरक्षा और व्यापार के मामले में भारत पर निर्भर है। वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों से बाकी भारत को जोड़ने में बांग्लादेश की अहम भूमिका है। शेख हसीना के सत्ता में रहते हुए भारत को कभी पूर्वोत्तर को लेकर बांग्लादेश की ओर से किसी परेशानियों की चिंता नहीं करनी पड़ी, लेकिन उनके तख्तापलट के बाद एक सिक्योरिटी थ्रेट खड़ा हो गया। मार्च 2025 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने चीन दौरे में कहा, 'भारत के पूर्वोत्तर राज्य जमीन से घिरे हुए हैं। समुद्र तक पहुंचने के लिए बांग्लादेश ही उनका एकलौता रास्ता है।' इसके अलावा कई बांग्लादेशी नेताओं ने 'सेवन सिस्टर्स' को अलग करने की धमकी तक दी और उसे बांग्लादेश का हिस्सा बताया। पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को बाकी देश से सिलिगुड़ी कॉरिडोर जोड़ता है, जो सिर्फ 40 किमी लंबा और 22 से 30 किमी चौड़ा है। इसे ही चिकन नेक कहते हैं। इसके एक तरफ नेपाल और दूसरी तरफ बांग्लादेश है। यहां से चीन महज 200 किमी दूर है। मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की सीनियर फेलो स्मृति पटनायक के मुताबिक, पूर्वोत्तर की सुरक्षा को लेकर भारत जरा भी ढील नहीं देगा। ये मुद्दा बेहद अहम है और इसको लेकर भारत कोई समझौता नहीं करेगा। ये मैसेज बांग्लादेश की पूरी लीडरशिप तक पहुंचा दिया गया है। रिटायर्ड ब्रिगेडियर रंजीत बरठाकुर मानते हैं कि बांग्लादेश में चिकन नेक से छेड़छाड़ करने की कुव्वत नहीं है। वह कट्टरपंथियों की मदद करके और घुसपैठ से भारत को परेशान कर सकता है, लेकिन चिकन नेक को निशाना बनाने की हिम्मत नहीं करेगा। असल दिक्कत चीन है और हमें तैयार रहना होगा। हालांकि बांग्लादेश में भारत के एम्बेस्डर रहे अनिल त्रिगुणायत मानते हैं कि तारिक रहमान के सत्ता में आने से भारत की सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश में घुसपैठ कर रहे पाकिस्तान और अन्य भारत-विरोधी आतंकवादी समूहों पर नजर रखना होगा। सवाल-4: क्या तारिक सरकार पाकिस्तान से और नजदीकियां बढ़ाएगी? जवाब: 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद से पाकिस्तान से उसके रिश्ते लंबे वक्त तक तनाव भरे रहे। BNP की पिछली सरकारों यानी खालिदा जिया के समय पाकिस्तान से रिश्ते सुधरे, लेकिन शेख हसीना ने फिर दूरी बना ली। हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से 3 बार मुलाकात की। दोनों देशों के नेता और सैन्य अधिकारी भी मिले। पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने भी मुलाकात की। दोनों देशों के बीच दशकों बाद सीधी समुद्री सेवा शुरू हुई। रक्षा साझेदारी बढ़ाने पर बात हुई। जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज और हथियार बनाने पर सोचा गया। पूर्व हाई कमिश्नर हर्षवर्धन श्रृंगला के मुताबिक, 2001-2006 के BNP शासन के दौरान बांग्लादेश ने भारत विरोधी रुख अपनाया और पाकिस्तान के बेहद करीब हो गया। तब तारिक रहमान सरकार में अहम व्यक्ति थे और उनका प्रभाव कहीं ज्यादा था। दरअसल, उस वक्त भारत में बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। वहीं बांग्लादेश में BNP की खालिदा जिया सरकार चला रहीं थीं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा, नदी जल बंटवारा, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, इमिग्रेशन और सशस्त्र विद्रोह जैसे मुद्दों पर विरोध था। तब भारत ने BNP पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की मदद करने का आरोप भी लगाया था, जिनका ढाका ने का खंडन किया था। ढाका यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डेलवर हुसैन मानते हैं कि सत्ता में कोई भी आए, बांग्लादेश-पाकिस्तान के रिश्ते और बेहतर होंगे और अचानक बदलाव की कोई संभावना नहीं है। BNP सरकार का पाकिस्तान से मजबूत रिश्ते होने का अतीत रहा है। हालांकि पाकिस्तान के लिए नई सरकार मुद्दा नहीं है। वह देखेगा कि नई सरकार की भारत को लेकर क्या पॉलिसी होगी और पाकिस्तान को किस हद तक सपोर्ट करेंगे? इंटरनेशनल रिलेशंस एक्सपर्ट स्मृति पटनायक मानती हैं कि बांग्लादेश पाकिस्तान से चाहे जितने मजबूत रिश्ते बना लें, उन्हें बिना सिक्योरिटी चेक के बांग्लादेश बुला ले। यह भारत की चिंता का मुद्दा नहीं है। दरअसल, पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ मिलकर SAARC को फिर से एक्टिव करना चाहता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई सरकार से कश्मीर जैसे मुद्दे पर साथ या तटस्थ रहने की उम्मीद करता है। सवाल-5: चीन से कैसे रिश्ते रखेंगे तारिक रहमान? जवाब: बांग्लादेश पर जैसे-जैसे भारत का प्रभाव कम हुआ, उस गैप को चीन ने भरा। आमतौर पर बांग्लादेशी नेता शपथ के बाद पहली विदेश यात्रा भारत की करते हैं, लेकिन यूनुस ने चीन को चुना। 26 से 29 मार्च 2025 तक उन्होंने चीन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चीन के साथ 9 समझौते साइन किए। इनमें तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट, 98% प्रोडक्ट्स पर जीरो टैरिफ, डिफेंस लॉजिस्टिक्स, डिजिटल कनेक्टिविटी और लालमोनिरहाट एयरपोर्ट को रिन्यू करने जैसे समझौते हैं। भारतीय थिंकटैंक सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के कॉन्स्टेंटिनो जेवियर का कहना है कि चीन भारत-बांग्लादेश रिश्तों में संकट का फायदा उठाते हुए खुले तौर पर और पर्दे के पीछे दोनों तरह से अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है। अमेरिकी थिंकटैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के फेलो जोशुआ कुर्लांट्जिक मानते हैं कि बंगाल की खाड़ी के मामले में चीन की स्ट्रैटजी का बांग्लादेश केंद्र बन चुका है। चीन को भरोसा है कि बांग्लादेश इसमें उसकी मदद करेगा। चीन में बांग्लादेश के एम्बेस्डर रहे मुंशी फैज अहमद के मुताबिक, बांग्लादेश के लिए चीन का जगह किसी अन्य देश से नहीं बदली जा सकती। क्योंकि पिछले कुछ साल में चीन एक बड़े निवेशक के साथ-साथ ट्रेड पार्टनर के तौर पर उभरा है। बांग्लादेश के नेशनल रेवेन्यू बोर्ड के मुताबिक, 2024-25 में बांग्लादेश का चीन के साथ ट्रेड 21.3 अरब डॉलर से ज्यादा का था। वहीं भारत के साथ करीब 11.5 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। अहमद मानते हैं कि भले ही लोग सोचते थे कि भारत हमारे बहुत करीब हैं, लेकिन ट्रेड और कॉमर्स के मामले में चीन से हमारे रिश्ते लगातार बढ़ रहे हैं। हमारे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में चीन का पैसा लगा है। लंबे समय तक बांग्लादेश चीन से नजदीकियां जारी रखेगा, क्योंकि चीन जो दे सकता है, वह कोई नहीं कर सकता। सवाल-6: बांग्लादेश में जनमत संग्रह का नतीजा क्या रहा और इससे क्या फर्क पड़ेगा? जवाब: जनमत संग्रह के पक्ष में 66.7% लोगों ने वोट दिया। वहीं इसके खिलाफ में 32.27% वोट पड़े। यानी अब बांग्लादेश में जुलाई चार्टर लागू हुआ। नई संसद पहले 180 दिनों तक एक 'संवैधानिक सुधार परिषद' की तरह काम करेगी और चार्टर की सिफारिशों को कानून में बदलेगी। दरअसल, बांग्लादेश में राजनीतिक और संवैधानिक सुधार लाने के लिए नेशनल कंसेंशन कमीशन बनाया गया। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इसके चेयरमैन बने। इस कमीशन के 5 अलग-अलग आयोगों ने 33 पॉलिटिकल पार्टियों और अलायंस से 72 मीटिंग कर 166 सिफारिशों पर चर्चा की। इसके बाद ‘नेशनल चार्टर ऑफ जुलाई 2025‘ तैयार हुआ, जिसमें 84 सिफारिशें शामिल थीं। इसमें कुछ बदलाव होने जा रहे हैं… ------------------ बांग्लादेश चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बांग्लादेश में 20 साल बाद BNP की जीत: तारिक रहमान का PM बनना तय; देश को 35 साल बाद मिलेगा पुरुष प्रधानमंत्री बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BNP ने 299 सीटों में से 209 हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया। अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच ड्रोन को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा हो गया है.
9 die during Bangladesh voting: 12 फरवरी को बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के मतदान के दौरान कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई. इनमें BNP नेता, प्रिसाइडिंग ऑफिसर, पोलिंग अधिकारी और आम मतदाता शामिल हैं. कुछ की मौत हार्ट अटैक से बताई जा रही है, तो कहीं धक्का-मुक्की और भगदड़ के आरोप लगे हैं. लाइन में खड़े-खड़े मौत की खबर ने लोगों को झकझोर दिया.
बांग्लादेश की मशहूर बैरिस्टर और पूर्व सांसद रूमीन फरहाना ने ब्राह्मणबारिया-2 सीट से इंडिपेंडेंट उम्मीदवार बनकर धमाकेदार जीत हासिल की है. लंदन से पढ़ीं ये मुस्लिम नेत्री BNP से निकाले जाने के बाद भी 1 लाख से ज्यादा वोट पाकर इतिहास रच दिया है. उनके पिता ओली अहद की विरासत को आगे बढ़ाते हुए वो अब संसद में नई ऊर्जा लाएंगी.
करीब ढाई महीने पहले ही लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है। सुबह 9:30 बजे तक आए नतीजों के मुताबिक उनकी पार्टी BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 299 में से 209 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की जरूरत थी। पहली बार सत्ता के करीब दिख रही कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी। उसके गठबंधन को सिर्फ 70 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। BNP की एकतरफा जीत और जमात की हार की तीन वजह समझ आईं। 1. पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है।2. जमात का अतीत आड़े आ गया, लोगों को याद रहा कि उसने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था। जमात इस दाग को नहीं धो पाई।3. स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी को आपसी फूट और जमात से गठबंधन करना भारी पड़ा। उन्हें लोगों ने पूरी तरह खारिज कर दिया। BNP की जीत के सबसे बड़े फैक्टर तारिक रहमानतारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। BNP की जीत का पूरा क्रेडिट तारिक रहमान के हिस्से में है। करीब 17 साल के निर्वासन के बाद वे 25 दिसंबर 2025 को लंदन से बांग्लादेश लौटे थे। 2008 में तारिक रहमान को देश छोड़कर भागना पड़ा था। शेख हसीना सरकार ने उन पर 80 से ज्यादा केस दर्ज किए थे। उन्हें अलग-अलग मामलों में उम्रकैद के अलावा 17 साल की सजा मिल चुकी थी। वे लंदन से ही पार्टी का काम संभालते रहे। चुनावों से ठीक पहले उनकी वापसी BNP के लिए बड़े पॉलिटिकल बूस्टर की तरह रही। तारिक रहमान 2018 से पार्टी के एक्टिंग चेयरमैन थे। 9 जनवरी 2026 को उन्हें चेयरमैन बनाया गया। पार्टी की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद यह पद खाली हो गया था। खालिदा जिया का निधन 30 दिसंबर, 2025 को हुआ था। देश लौटने पर तारिक रहमान का स्वागत हीरो की तरह हुआ। ढाका पहुंचने पर उन्होंने मिट्टी को छूकर सलाम किया। इसकी फोटो काफी वायरल हुई थीं। लौटने के बाद रहमान ने पूरे देश का दौरा किया। वे लोगों से सीधे बात करते। उन्हें मंच पर बुलाते। उन्होंने देश की इकोनॉमी सुधारने का रोडमैप पेश किया। तारिक रहमान की वापसी के अलावा खालिया जिया के निधन से उपजी सहानुभूति, अवामी लीग का चुनाव न लड़ना, लोगों को स्टूडेंट्स लीडर से मिली निराशा और जमात के लिए गुस्सा, सब BNP के पक्ष में गया। ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और पॉलिटिकल एनालिस्ट सैफुल आलम चौधरी कहते हैं, ‘BNP ने इस चुनाव में बहुत कुछ अलग या खास नहीं किया। BNP की जीत में एक बड़ा फैक्टर ये भी रहा कि अवामी लीग के करीब 10% वोटर्स ने मतदान किया है। दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने BNP को वोट किया है।’ जमात को अतीत और खराब इमेज ने डुबोयाजमात-ए-इस्लामी इस बार 10 पार्टियों के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी। इनमें स्टूडेंट्स की पार्टी NCP भी शामिल है। इसके बावजूद जमात बुरी तरह हारी। एक्सपर्ट मानते हैं कि जमात का अतीत और कट्टरपंथी इमेज लोगों को कभी पसंद नहीं आई। लोगों को याद है कि जमात ने बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था। सैफुल आलम चौधरी जमात की हार की मौजूदा वजहें बताते हैं। वे कहते हैं, ‘चुनाव से दो दिन पहले ऐसे वीडियो वायरल हो रहे थे, जिनमें जमात के लोग पैसे बांटते दिख रहे थे। इससे लोगों में मैसेज गया कि जमात गलत तरीके से चुनाव लड़ रही है। बैलेट पेपर में भी हेरफेर की कोशिश की खबरें आईं। इससे जमात को नुकसान पहुंचा।’ ‘हर वर्ग को खुश करना, जमात की सबसे बड़ी गलती’चौधरी आगे कहते हैं, ‘जमात इस्लामिक राज का सपोर्ट करती है। इस बार चुनाव से पहले उसने कहा कि सरकार बनी तब भी वे शरिया कानून नहीं लाएंगे। इससे जमात का कोर वोटर दूर हो गया। जमात ने खुद को आजाद ख्याल पार्टी साबित करने की कोशिश की। हर वर्ग को खुश करने की कोशिश की, लेकिन लोग समझ गए कि ये चुनावी बातें हैं। जमात ने चुनाव के पहले खुद को काफी हद तक बदलने की कोशिश की, लेकिन वो लोगों में भरोसा पैदा नहीं कर पाई।’ BNP के नेता फजीउल रहमान को एकतरफा जीत मिली है। उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। साफ दिखता कि लोगों ने आजादी की लड़ाई के पक्ष में वोट दिया और आजादी का विरोध करने वालों को खारिज किया है। वहीं सीनियर जर्नलिस्ट मॉन्जरूल आलम पन्ना कहते हैं, ‘लोगों का रुझान साफ है। वे जमात को रिजेक्ट करना चाहते थे, इसलिए दूसरा ऑप्शन BNP ही है। हिंदू वोटर्स ने बड़ी संख्या ने BNP को वोट दिया है। यह पहले से अंदाजा था कि हिंदू वोटर्स जमात को वोट नहीं देंगे।’ ‘अवामी लीग चुनाव लड़ती, तो जमात को फायदा होगा’सैफुल आलम चौधरी कहते हैं कि अवामी लीग का चुनाव न लड़ना जमात के लिए मुसीबत बन गया। जमात ने अंतरिम सरकार पर दबाव बनाया कि अवामी लीग को चुनाव न लड़ने दिया जाए। ऐसे में वह अनजाने में पिछले 18 महीनों से BNP के लिए जमीन तैयार कर रही थी। अगर अवामी लीग चुनाव लड़ती तो जमात को फायदा होता। अवामी लीग और BNP में वोट बंट जाते। दूसरी तरफ जमात अपने गठबंधन के साथ वोट एकजुट कर सकती थी। स्टूडेंट्स लीडर नाहिद इस्लाम जीते, लेकिन पार्टी हारी शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी NCP कुछ कमाल नहीं कर पाई। हालांकि, पार्टी के सबसे बड़े चेहरे नाहिद इस्लाम ढाका-11 सीट से जीत गए हैं। NCP ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन 4 सीटें ही जीत पाई। पार्टी ही हार की 5 वजहें… 1. आंदोलन का असर खत्म और आपसी फूटअगस्त, 2024 में हुए छात्र आंदोलन का असर बीते डेढ़ साल में काफी कम रह गया है। शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले कई छात्र नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। NCP ने जमात के साथ गठबंधन किया तो पार्टी के अंदर ही मतभेद हो गए। 2. कैडर का न होनाNCP कुछ महीने पहले बनी पार्टी है। उनके पास सरकार विरोधी आंदोलन में शामिल रहे छात्र तो थे, लेकिन वोट डलवाने वाली चुनावी मशीनरी नहीं थी। दूसरी तरफ BNP और जमात के पास पुराना कैडर है, जो हर बूथ पर मौजूद रहा। NCP सिर्फ जेन जी वोटर्स के भरोसे थी। 3. वोट का बंटवारा अवामी लीग के खिलाफ लोगों के पास दो ही विकल्प थे, BNP या NCP। लोगों ने नई पार्टी की बजाय अनुभव को चुना। उन्हें लगा कि देश चलाने के लिए पुरानी पार्टी स्टूडेंट्स से बेहतर विकल्प है। 4. अर्बन पार्टी की छविNCP की पहचान सोशल मीडिया और ढाका यूनिवर्सिटी तक है। देश के बाकी हिस्सों में वोटर तारिक रहमान की विरासत या जमात के इस्लामी कार्ड से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। छात्रों का 'रिफॉर्म एजेंडा' वहां तक नहीं पहुंच पाया। 5. अनुभव की कमी का डरलोगों को डर था कि बिना अनुभव वाले स्टूडेंट देश की कमजोर हो रही इकोनॉमी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं संभाल पाएंगे। इसलिए उन्होंने BNP को चुना। नेशनल गवर्नमेंट बनने की संभावना खत्मBNP को बहुमत मिलने के बाद सवाल है कि BNP अपने राजनीतिक एजेंडे पर चलेगी या अंतरिम सरकार संभाल रहे डॉ. मोहम्मद यूनुस के दबाव में काम करेगी। हालांकि, जिस मजबूती से BNP चुनाव जीती है, यूनुस के लिए दबाव बनाना आसान नहीं होगा। चुनाव से पहले जमात ने प्रस्ताव दिया था कि सभी की सहमति वाली नेशनल गवर्नमेंट बनाई जाए। तारिक रहमान ने ये प्रस्ताव खारिज कर दिया। जमात ने खुद को विपक्षी दल के तौर पर स्थापित किया है। ऐसे में BNP के लिए उसके साथ सरकार बनाना जोखिम भरा हो सकता है। BNP के लिए ज्यादा बेहतर यही है कि जमात विपक्ष में रहे।
बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत: 13वें संसदीय चुनाव में दो-तिहाई बहुमत, तारिक रहमान बनेंगे PM
चुनाव परिणामों के शुरुआती रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह चुनाव देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने बीएनपी को बांग्लादेश चुनावों में जीत की बधाई दी है।
बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में BNP ने जोरदार वापसी की है. अनौपचारिक नतीजों के मुताबिक पार्टी 200 से ज्यादा सीटों पर जीत या बढ़त बनाती दिख रही है. यह आंकड़ा अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है. लेकिन इस बड़ी सफलता के बावजूद पार्टी ने किसी तरह का विजय जुलूस या सार्वजनिक जश्न न मनाने का फैसला किया है. यही बात सबको हैरान कर रही है.
चीन का बड़ा फैसला: ईयू डेयरी उत्पादों पर सब्सिडी-विरोधी शुल्क
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने 12 फरवरी को एक घोषणा जारी कर यूरोपीय संघ से आयातित डेयरी उत्पादों पर सब्सिडी-विरोधी शुल्क जांच के अंतिम निर्णय की घोषणा की
ईरान को ट्रंप की चेतावनी: ‘डील नहीं हुई तो हालात दर्दनाक’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह जल्द से जल्द परमाणु समझौता करे, वरना उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है
ट्रंप ने 2009 का जलवायु फैसला रद्द किया, बताया ‘डीरेगुलेटरी कार्रवाई’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2009 में किए गए एक महत्वपूर्ण जलवायु संबंधी फैसले को रद्द करने की घोषणा की है
शेख हसीना को 2024 में उखाड़ फेंकने वाले छात्र लीडर्स की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने पहली बार चुनाव लड़ा और 30 सीटों पर उतरकर महज 5-6 सीटें जीतीं है. NCP के नाहिद इस्लाम ने ढाका-11 जीती, लेकिन कुल मिलाकर BNP की पुरानी ताकत ने युवा पार्टी को पीछे छोड़ दिया है.
कैरेबियन सागर में टकराए अमेरिकी नौसेना के जहाज, दो नाविक घायल, समंदर में कैसे हुआ हादसा?
बीते दिन कैरेबियन सागर में अमेरिका ने वेनेजुएला के कई तेल टैंकर को कब्जे में लिया था. इसके साथ ही यहां पर मिलिट्री फोर्स को बढ़ा दिया था. अब कैरिबियन सागर में दो नेवी जहाजों की कड़ी टक्कर हो गई,यह हादसा ईंधन भरने (रिफ्यूलिंग) के दौरान हुआ, इस घटना की वजह से दो नाविक घायल हो गए हैं.
Bangladesh election result 2026:बांग्लादेश के 2026 चुनाव में BNP ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल कर लिया है. तारिक रहमान, खालिदा जिया के बेटे अब प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं. जमात-ए-इस्लामी को सिर्फ कुछ सीटें मिलीं हैं. ये चुनाव 2024 की क्रांति के बाद पहला बड़ा चुनाव था, जहां युवाओं का जोश दिखा.
अप्रैल, 2024 की बात है। लोकसभा चुनाव होने वाले थे। मायावती के भतीजे आकाश आनंद यूपी के सीतापुर में रैली करने पहुंचे थे। उन्होंने BJP को नफरत फैलाने वाली और आतंकवादियों की पार्टी कहा। इससे बुआ मायावती इतनी नाराज हुईं कि फौरन आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर पद से हटा दिया। मायावती ने आकाश को पद से हटाने की बात सिर्फ दफ्तर के अंदर जारी लेटर तक नहीं रखी, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा, 'आकाश आनंद से पद ले लिया गया है। अभी उन्हें पूरी तरह परिपक्व होने में वक्त लगेगा।' आकाश समाजवादी पार्टी के खिलाफ भी खूब बोल रहे थे, लेकिन मायावती उस पर चुप रहीं। मैसेज साफ था कि मायावती BJP पर हमला करने से बच रही थीं। हां, राजनीतिक बयान देने की छूट थी। मायावती खुद रैलियों में BJP के खिलाफ राजनीतिक बयान दे रही थीं। इसके बाद उनकी BJP से करीबी के संकेत आने लगे। 9 अक्टूबर, 2025 को एक रैली में उन्होंने BJP को शुक्रिया कहा और CM योगी का आभार जताया। जनवरी, 2026 को मायावती को दिल्ली में एक और बंगला मिला है। ये टाइप-8 बंगला है, जबकि नेशनल पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते उन्हें टाइप-6 या 7 बंगला ही मिल सकता है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या BJP और मायावती के बीच कोई खिचड़ी पक रही है, दोनों में औपचारिक गठबंधन भले न हो, लेकिन क्या अंदरखाने सांठगांठ हो चुकी है, क्या मायावती को मिला बंगला इसी का नतीजा है? लोकसभा चुनाव से अब तक BSP-BJP का समीकरण समझिए… नेताओं को आदेश- BJP पर तीखे बयान न देंलोकसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद BJP पर हमलावर थे। एक रैली में उन्होंने कहा, ‘BJP ने केंद्र की ज्यादातर जांच एजेंसियों का राजनीतिकरण कर दिया है।‘ दूसरी रैली में कहा, ‘सवर्ण जातियों के गरीबों की हालत BJP के राज में बहुत खराब है। अगर निष्पक्ष चुनाव हुए तो BJP सत्ता से बाहर होगी।‘ 28 अप्रैल 2024 को सीतापुर की चुनावी रैली में आकाश ने BJP को नफरत फैलाने वालों की पार्टी कहा तो उन्हें पार्टी से बाहर होना पड़ा। हालांकि माफी मांगने के बाद उन्हें दोबारा पार्टी में जगह मिल गई। यहां मायावती का रुख साफ दिखा कि BJP पर तीखे हमलों से बचा जाए। इस पर BJP के प्रदेश स्तर के एक नेता बताते हैं, 'लोकसभा चुनाव के दौरान BJP को टारगेट करके तीखे बयान देने पर रोक थी। हमसे कहा गया कि सिर्फ राजनीतिक बयान दें। BJP की राष्ट्रभक्ति पर सवाल न उठाएं और न ही उसे सांप्रदायिक कहें। मीडिया में जो बयान चलते रहे हैं, वो दे सकते हैं। हम समझ गए थे कि हमें समाजवादी पार्टी को टारगेट करना है। BJP को लेकर बहन जी का रुख नरम है।' ‘हालांकि बहन जी कब, कौन सा फैसला करेंगी, कोई नहीं जानता। ये जरूर है कि अब अखिलेश के साथ तो समझौता नहीं करेंगी। हालांकि वे BJP के साथ बहुत अच्छे न सही लेकिन नॉर्मल रिलेशन रखना चाहती हैं।‘ क्या BSP और BJP में कोई सांठगांठ हुई है? सोर्स कहते हैं, ‘नहीं, कोई ऐसा सीधा मैसेज तो नहीं है लेकिन BJP पर हमला करने का कोई आदेश नहीं है।‘ BSP की बड़ी रैली से पहले योगी से मिलीं मायावतीBSP ने 9 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में कई साल बाद बड़ी रैली की। तब कांशीराम की पुण्यतिथि थी। सोर्स बताते हैं, 'मायावती और उनके करीबी सतीश चंद्र मिश्र इस रैली से करीब 15 दिन पहले यूपी के CM योगी आदित्यनाथ से मिले थे। उनके बीच क्या बात हुई, ये नहीं पता। हालांकि, इस मुलाकात के बाद रैली का प्रोग्राम और बड़ा किया गया। इसके बाद किसी ऑफिशियल गठबंधन पर बात नहीं हुई।' ‘रैली में मायावती समाजवादी पार्टी पर खूब बरसीं। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में रहते PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को याद नहीं रखती। कांशीराम की जयंती भूल जाती है, लेकिन सत्ता से बाहर होने पर उसे कांशीराम याद आते हैं।‘ रैली में कार्यकर्ताओं को कहा गया कि मायावती अपने वोटर्स (दलितों) को संदेश देंगी कि उनका मुकाबला सीधा समाजवादी पार्टी से है। कांग्रेस पर भी उनकी टेढ़ी नजर है। वहीं BJP के लिए उनका रुख आभार के तौर पर सामने आया। सोर्स बताते हैं, ‘रैली के बाद बहनजी का मैसेज जमीन तक पहुंच चुका है। विधानसभा चुनाव से पहले हम लोग घर-घर जाने की योजना बना रहे हैं। कुछ इलाकों में तो घर-घर जाओ अभियान शुरू भी हो गया है।‘ चुनावी रणनीति बनाने में क्या RSS बना BSP का मददगार हमने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के यूपी में सक्रिय पदाधिकारी से पूछा कि BSP अचानक BJP पर इतनी नरम क्यों हो गई? जवाब मिला, ‘BSP की जैसी स्थिति है, उसके जीतने के चांस बहुत कम हैं। अगर वह सही रणनीति से लड़ेगी, तो कुछ सीटें ला भी सकती है।‘ ‘दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इस बार पूरी तैयार है। ऐसे में BSP जितना एक्टिव होगी, उसका नुकसान समाजवादी पार्टी को होगा। अगर मायावती BJP पर नरम रहीं, तो उनके वोटर भी BJP पर नरम रहेंगे।' क्या RSS इस बार रणनीति बनाने में BSP की मदद कर रहा है? इस पर पदाधिकारी का जवाब सीधा नहीं था। वे कहते हैं, 'RSS के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। जो मदद मांगेगा, उसे देंगे।' इस बार BSP चुपचाप काम कर रही है। पार्टी ने कार्यकर्ता वोटर्स से घर-घर जा रहे हैं। प्लान है कि यूपी के हर मंडल में मायावती खुद जाएंगी और रात वहीं रुकेंगी। वे मार्च से ये अभियान शुरू कर देंगी। इस दौरान चौपालें लगाई जाएंगी।' पार्टी की चुनावी रणनीति पर BSP के एक नेता कहते हैं, ‘RSS के लोग रणनीति बनाने में तो शामिल नहीं दिखे, लेकिन जो रणनीति बनी है, वह RSS के मॉडल पर बनी है। इस बार डोर टू डोर अभियान पर जोर दिया जा रहा है।’ मायावती को लुटियन दिल्ली में कैसे मिला बड़ा बंगला मायावती को 7 दिसंबर 2021 को दिल्ली में लोधी रोड पर टाइप-6 का बंगला नंबर- 29 मिला था। कुछ महीनों बाद उन्होंने इसे केंद्रीय कार्यालय में बदल दिया। करीब दो साल बाद फरवरी 2024 में मायावती को इसी रोड पर एक और बंगला मिला। ये टाइप-7 का बंगला नंबर-35 था। ये भी मायावती और BJP के बीच अच्छे संबंधों का संकेत माना गया। मई-जून 2024 में वे बंगले में शिफ्ट हुईं, लेकिन एक साल बाद 20 मई, 2025 को इसे खाली कर दिया। वजह बताई गई कि सामने मौजूद स्कूल से मायावती को दिक्कत हो रही है। हालांकि ये स्कूल तब भी था, जब मायावती ने बंगला लिया था। सोर्स का कहना है कि मायावती ने बंगला खाली नहीं किया, बल्कि उनसे खाली करवाया गया था। हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री ने उनके पास दो बंगले होने का हवाला देकर इसे खाली कराया था। मायावती इसे खाली नहीं करना चाहती थीं, क्योंकि उन्होंने इसे अपनी पसंद के हिसाब से रेनोवेट कराया था। साथ ही बताई गई वजह भी उन्हें वाजिब नहीं लगी थी। ‘डिपार्टमेंट से आदेश आया, मायावती के लिए बड़ा बंगला देखो’बंगला उन्हें अलॉट किया गया था, तब भी मिनिस्ट्री को पता था कि उनके पास एक बंगला पहले से है। फिर इतने महीनों के बाद विभाग को आखिर दो बंगलों पर एतराज क्यों हुआ। हमने ये सवाल हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के ऑफिशियल सोर्स से पूछा। वे बताते हैं, ‘अक्टूबर 2025 के आखिरी हफ्ते में विभाग के पास मायावती के लिए टाइप-8 बंगले की तलाश का ऑर्डर आया। तब विभाग के पास कोई बंगला खाली नहीं था। विभाग को एक महीने पहले सितंबर में ही एक और पूर्व पदाधिकारी के लिए टाइप-8 बंगला खोजने का ऑर्डर मिल चुका था। उन्हें एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर बंगला नंबर-34 अलॉट भी कर दिया गया था। सोर्स के मुताबिक, बंगले में मरम्मत का काफी काम होना था। इसके लिए ऑर्डर भी जारी कर दिया था। तभी ऊपर से कहा गया कि अभी मरम्मत नहीं करनी है। फिर इस साल 20-21 जनवरी को ऑर्डर निकला कि ये बंगला मायावती के नाम अलॉट होगा।' हमने हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के एक अफसर से पूछा कि नियम के मुताबिक मायावती को किस टाइप का बंगला मिलना चाहिए? जवाब मिला, ‘नेशनल पार्टी की अध्यक्ष या संयोजक और केंद्र में मंत्री को विभाग टाइप 6 या 7 बंगला देता है।’ फिर टाइप-8 बंगला कैसे अलॉट हुआ? उन्होंने कहा- ये स्पेशल रिकमंडेशन में दिया जा सकता है। हो सकता है कि कोई टाइप-7 बंगला खाली ही न हो। इसलिए टाइप-8 अलॉट कर दिया गया।‘ मायावती वाले बंगले पर थी केजरीवाल की नजर, मोदी के मंत्री को मिलासोर्स ने बताया कि मायावती से लोधी रोड वाला बंगला नंबर-35 लेकर केंद्रीय मंत्री और बाद में यूपी के अध्यक्ष बने पंकज चौधरी को दिया गया। इस बंगले पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की भी नजर थी। मायावती ने बंगला खाली किया तो अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय पार्टी का संयोजक होने के हक से यही बंगला अलॉट करने की गुजारिश की थी। बंगला उन्हें नहीं मिला। अक्टूबर 2025 में उन्हें लोधी रोड पर बंगला नंबर- 95 अलॉट किया गया। मायावती के नए बंगले का रेनोवेशन शुरूहाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के GRPA विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बंगले का रेनोवेशन शुरू हो गया है। मई खत्म होने से पहले बंगले की मरम्मत पूरी करने के आदेश हैं। BSP के सोर्स के मुताबिक, मायावती तय करेंगी कि उन्हें यहां कब तक शिफ्ट होना है। पहले तो इस बंगले का रेनोवेशन होगा। फिर एक बार मायावती खुद भी बंगला देखने और अपने हिसाब से रेनोवेशन का निर्देश देने के लिए आ सकती हैं। …………………ये खबर भी पढ़ें… क्या RSS की तरह रणनीति बना रहीं मायावती 'मायावती ने लखनऊ में रैली की तो भीड़ उमड़ पड़ी। ये वो भीड़ थी, जो अपने साथ रोटियां बांधकर लाई थी। सोचिए कितनी कमिटेड जनता होगी, जो सिर्फ मायावती के नाम पर इकट्ठी हुई। वरना रैलियों में लोग तब जाते हैं, जब कम से कम खाने-पीने का अच्छा इंतजाम हो। कई बार तो लोग बारात जैसा स्वागत मांगते हैं।' सीनियर जर्नलिस्ट अमिताभ अग्निहोत्री इसे सिर्फ बसपा की रैली नहीं बल्कि मायावती की सक्रिय राजनीति में वापसी मान रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…
Argentina: अर्जेंटीना के गोडॉय क्रूज कब्रिस्तान में प्रशासन की लापरवाही ने मृतक के परिवार को खुद कब्र खोदने पर मजबूर कर दिया. इस घटना ने न केवल मानवता को शर्मसार किया है, बल्कि पीड़ित परिवार के दुख को और बढ़ा दिया है.
Shivratri at Pashupatinath Temple: इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जा रहा है. इस त्योहार को मनाने के लिए इस बार 20 लाख श्रद्धालुओं के नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है.
DNA: ट्रंप-नेतन्याहू की मीटिंग में 3 बातें तय, ट्रंप ने 'मिडनाइट हैमर' की याद क्यों दिलाई?
Iran-US War:ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इजरायली प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात काफी अच्छी थी. ईरान से बातचीत जारी रहनी चाहिए ताकि ये देखा जा सके कि डील होगी या नहीं. लेकिन इसके बाद ट्रंप ने जो कहा, वो किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. ट्रंप ने लिखा कि पिछली बार ईरान ने तय किया था कि उनके लिए डील न करना बेहतर होगा, और इसका जवाब उन्हें मिडनाइट हैमर से मिला था.
DNA: ट्रंप भले खलीफा को कितना भी डराएं-धमकाएं. लेकिन सच ये है कि वो आजकल अपनों से ही हार रहे हैं. टैरिफ को हथियार बनाकर अपने ही करीबी देशों के खिलाफ इस्तेमाल करने वाले ट्रंप को अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से करारा झटका लगा है.
रूस फिर से अपना सकता है डॉलर! ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक और चीन को तगड़ा झटका, जानें क्या है पूरा मामला
Russia US Economic Partnership: ग्लोबल इकोनॉमी में बड़े उलटफेर की संभावना जताई जा रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार रूस फिर से डॉलर अपना सकता है. हालांकि ये खबर चीन के 'डी-डॉलरलाइजेशन' अभियान के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है.
Why AI girlfriends craze in US: AI पार्टनर को लेकर दुनिया भर में क्रेज बढ़ता जा रहा है. लेकिन हैरत की बात ये है कि अमेरिका में जहां AI गर्लफ्रेंड बनाने के लिए दीवानगी है. वहीं चीन में AI बॉयफ्रेंड का चलन तेजी से बढ़ रहा है. सवाल है कि दोनों मुल्कों में एआई पार्टनर का अलग-अलग क्रेज क्यों है?
Sheikh Hasina on Bangladesh Elections: बांग्लादेश में बुधवार को हुए चुनाव पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं की कमी दर्शाती है कि अंतरिम सरकार की चुनावी प्रक्रिया को जनता ने सिरे से नकार दिया है.
क्या रिटायर होने जा रहे नॉर्थ कोरिया के किम जोंग? पत्नी या रिश्तेदार नहीं, इनको मिलेगी सत्ता!
North Kore Kim Jong Un Heir: साउथ कोरिया की इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक उत्तर कोरिया के तानाशह किम जोंग उन ने अपने अगले उत्तराधिकारी के तौर पर अपनी बेटी किम जू ऐ को चुन लिया है.
बांग्लादेश चुनाव में हिंसा की छाया: खुलना में बीएनपी नेता की मौत, कई जिलों में बम धमाके
खुलना के एक वोटिंग सेंटर के बाहर कथित तौर पर BNP और जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई। इसी दौरान BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई।
बांग्लादेश में आज आम चुनाव हो रहे हैं. साल 2024 में हुए जेन-जी प्रदर्शन के बाद यह पहला चुनाव है. इस बार के चुनाव में देश ही नहीं दुनिया के तमाम हिस्सों में बैठे बांग्लादेश के लोग हिस्सा ले रहे हैं. देश में लोग अपने बूथ पर वोटिंग कर रहे है, तो विदेशों में बैठे लोगों ने पोस्टल वोटिंग बैलेट के माध्यम से चुनाव में हिस्सा लिया है.
Jellyfish UFO: सोवियत युग के दस्तावेजों में खुलासा! रूसी शहर के ऊपर देखा गया था 'जेलीफिश' जैसी UFO
Jellyfish UFO: सोवियत-युग के दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से अनोखी रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में 1980 के दशक में रूस के एक शहर के ऊपर 'जेलीफिश' जैसे दिखने वाले (UFO) का जिक्र है.
बांग्लादेश के खुलना में आलिया मदरसा पोलिंग सेंटर के अंदर हुई झड़प के बाद BNP नेता महिफुज्जमान कोची की मौत हो गई. पार्टी ने आरोप लगाया कि धक्का-मुक्की में वे गिर पड़े. पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह बताने की बात कही है. घटना से चुनावी माहौल में तनाव बढ़ गया है.
अमेरिका के सिएटल शहर में भारतीय छात्रा जाह्नवी कंडुला की मौत के मामले में उनके परिवार को करीब 262 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. यह समझौता शहर प्रशासन और परिवार के बीच हुआ है. जाह्नवी की मौत जनवरी 2023 में एक तेज रफ्तार पुलिस गाड़ी की टक्कर से हुई थी.
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा पर लगाई गई टैरिफ नीति को लेकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है. कई रिपब्लिकन सांसदों ने पार्टी लाइन तोड़ते हुए डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर टैरिफ खत्म करने वाला बिल पास कर दिया है. 219 बनाम 211 वोटों से पारित यह प्रस्ताव मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप के लिए सियासी चेतावनी माना जा रहा है. समझें पूरी कहानी.
Digital Arrests: कंबोडिया में बड़े स्तर पर डिजिटल अरेस्ट के अड्डे का खुलासा हुआ है. यहां पर एक खाली पड़े कंपाउंड के अंदर नकली मुंबई पुलिस और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के लोगो वाले नकली साइनबोर्ड मिले हैं.
Tamil Brahmi Inscription: मिस्र के मशहूर वैली ऑफ किंग्स में करीब 2,000 साल पुराने ऐसे लिखे हुए नाम मिले हैं, जो भारत से जुड़े हैं. इन नामों में ज्यादातर तमिल भाषा में हैं. इससे पता चलता है कि उस दौर में भारतीय व्यापारी मिस्र तक जाते थे. वहां काफी समय भी बिताते थे.
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में टंबलर रिज शहर में 10 फरवरी 2026 को 18 साल की जेसी वैन रूटसेलार (ट्रांसजेंडर) ने पहले घर में अपनी 39 साल की मां जेनिफर स्ट्रांग और 11 साल के सौतेले भाई को गोली मार दी. फिर टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल जाकर एक महिला टीचर और पांच स्टूडेंट्स (12-13 साल के) को मार डाला. कुल 8 मौतें हुई हैं. जिसके बाद जेसी ने खुद को गोली मार ली.
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने मतदान के बाद कहा कि अगर चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हुआ तो उनकी पार्टी जनता का फैसला स्वीकार करेगी. 2014, 2018 और 2024 में जेल में रहने के कारण वोट न डाल पाने का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे “नए अध्याय की शुरुआत” बताया और सरकार बनाने का भरोसा जताया है.
हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि कतर स्थित अल-उदीद एयर बेस पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को मोबाइल लॉन्चरों पर तैनात किया गया है।
सूडान में नाव हादसा, नील नदी में 15 से ज्यादा लोगों की मौत
उत्तरी सूडान में एक नाव डूबने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने सूडान के नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
Great opportunities to work with India: BNPकड़ी सुरक्षा के बीच बांग्लादेश में मतदान हो रहा है. अवामी लीग की गैरमौजूदगी और जमात-ए-इस्लामी की चुनौती ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.BNP सत्ता की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही है. ऐसे में बहुत सारे सवाल लोगों के मन में है. क्या ढाका और दिल्ली के रिश्तों में नया मोड़ आने वाला है? बीएनपी ने अब वोटिंग के दौरान भारत के रिश्तों पर अपने पत्ते खोल दिए हैं.
विपक्षी सांसदों ने घेरकर जस्टिस मिनिस्टर को पीट दिया, तुर्किये की संसद में घमाघम फाइट
संसद का सत्र चलता है तो तीखी नोकझोंक, हल्ला-गुल्ला तो होता है लेकिन तुर्किये में गजब हो गया. यहां की संसद में सांसद ने नवनियुक्त जस्टिस मिनिस्टर को घमाघम कई पंच मारे.
बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव से ठीक एक दिन पहले ठाकुरगांव जिले के जमात-ए-इस्लामी अमीर बेलाल उद्दीन प्रधान को सैदपुर एयरपोर्ट पर 74 लाख टका कैश के साथ डिटेन किया गया. पूछताछ के दौरान सीने में दर्द हुआ, हार्ट अटैक आ गया. उन्हें रंगपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के CCU में भर्ती कराया गया है.
UN Report: संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले साल सीरिया के राष्ट्रपति, गृहमंत्री और विदेश मंत्री को मारने की 5 कोशिशों को नाकाम कियाा गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये साजिशें इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़े एक समूह ने रची थीं. इससे साफ है कि आईएस अब भी सीरिया में एक्टिव है और नई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है.
रस्सी से बंधे हाथ-पैर, शरीर पर जख्म के निशान; बांग्लादेश में मतदान के बीच मिली एक और हिंदू की लाश
Bangladesh Murder: बांग्लादेश में आज आम चुनावों के लिए वोटिंग की जा रही है. इसी बीच एक और हिंदू युवक की लाश बरामद हुई है. युवक के हाथ-पैर बंधे थे और शरीर पर गहरे जख्मों के निशान थे.
शेख हसीना के बगैर आज बांग्लादेश में दो वोट क्यों डलवाए जा रहे? गुलाबी बैलेट की कहानी
Bangladesh National Election 2026: बांग्लादेश में संसदीय चुनाव कराए जा रहे हैं.नई सरकार के लिए देश के 12 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालेंगे. युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद यह पहला चुनाव है. तब शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था.
बांग्लादेश में आम चुनाव आज, 12.77 करोड़ मतदाता करेंगे नई सरकार का चयन
बांग्लादेश में गुरुवार सुबह 7:30 बजे से 13वें आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। कुल 300 संसदीय सीटों में से 299 पर वोट डाले जा रहे हैं
तीन दिन तक सीता देवी की लाश बिस्तर पर पड़ी रही। उनका 38 साल का मनोरोगी बेटा बगल में बैठकर चिल्लाता रहता-मां खाना खा लो। अपनी मां को हिलाता-डुलाता, जब कुछ देर तक कोई हलचल नहीं होती तो उसे लगता मां गहरी नींद में सो रही है। फिर वो घर से चला जाता। रात में घर लौटता और फिर मां को उठाता। कुछ देर बाद थक हारकर मां की लाश के बगल में सो जाता। सीतादेवी की लाश पर मक्खियां भिनभिनाने लगीं। चीटियां लाश का हाथ-पैर और चेहरा खा गईं। लगभग तीन महीने पहले ये घटना उत्तराखंड के श्रीनगर में लोयगढ़ नाम के भुतहा गांव में हुई। इस घटना ने आसपास को गावों को भी हिलाकर रख दिया। खाली हो चुके गांव लोयगढ़ में सीतादेवी अपने मनोरोगी बेटे के साथ रहती थीं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में इस तरह के भुतहा गांवों की संख्या 1700 है। ब्लैकबोर्ड के इस एपिसोड में स्याह कहानी उत्तराखंड के खाली हो चुके ऐसे ही भुतहा गांव की, जहां लोग अपना घर, खेत-खलिहान सब छोड़कर जा चुके हैं… ये पूरी कहानी जानने के लिए मुझे लोयगढ़ गांव जाना था। जिसका रास्ता भालू और बाघों से भरे घने जंगल से होकर गुजरता है। सड़क का तो कोई नामो निशान नहीं है। पैदल चलने के लिए पगडंडी तक नहीं है। श्रीनगर से बड़ी मुश्किल से एक टैक्सी ड्राइवर मलछोड़ा गांव जाने को तैयार हुआ। दरअसल, हाईवे से नीचे उतरकर मलछोड़ा गांव है। इस गांव को पार करके एक पहाड़ चढ़ना पड़ता है, जिसके पार लोयगढ़ गांव है। हाईवे पर टैक्सी से उतरकर एक लंबा रास्ता पैदल ही तय करना था। कंटीली झाड़ियां पार करते हुए मैं ड्राइवर के साथ पैदल निकल पड़ी। पगडंडी से नीचे उतरना शुरू किया। जहां तक नजर दौड़ाओ केवल पहाड़ ही नजर आ रहे हैं। चलते-चलते मैं एक जगह रुकी तो ड्राइवर ने कहा- यहां रुकना खतरे से खाली नहीं। बाघ हमला कर सकते हैं। इसलिए हमने फिर चलना शुरू किया। लगभग आधे घंटे बाद हम मलछोड़ा गांव पहुंचे। यहां गांव वालों ने बताया कि लोयगढ़ गांव में बाघ भी मिल सकते हैं। क्योंकि जो गांव खाली हो जाते हैं, बाघ उसे अपना ठिकाना बना लेते हैं। सीतादेवी के बारे में पूछने पर गांव वालों ने बताया कि वहां केवल सीतादेवी का बेटा भीरू रहता है। बाकी हर घर में ताला लगा है। कुछ देर यहां बैठने के बाद हम लोयगढ़ के लिए चल पड़े। मलछोड़ा पार करने के बाद हम लोयगढ़ के लिए पहाड़ चढ़ने लगे। जंगल घना होता जा रहा था और चढ़ाई एकदम खड़ी। चढ़ते चढ़ते सांस फूलने लगी, लेकिन यहां रुक नहीं सकते हैं। आखिरकार एक छोटी सी मैदानी जगह आई, जिस पर घास उगी हुई है। ड्राइवर ने बताया कि ये लोयगढ़ गांववालों के खेत हैं, जो अब बंजर हो चुके हैं। हमने फिर चलना शुरु किया। थोड़ा और ऊपर जाने पर एक पानी की पाइप दिखाई दे रही है। घनी झाड़ियां आती तो ड्राइवर तेज आवाज में बातें करने लगता या फिर सीटी बजाता। उसका कहना था कि ऐसी आवाजों से बाघ दूर चले जाते हैं। लगभग 45 मिनट चढ़ाई चढ़ने के बाद एक मकान दिखाई दे रहा है। यह लयोगढ़ गांव का पहला मकान है। इस घर के करीब पहुंची तो देखे, खंडहर हो चुके घर के बगल में एक सफेद रंग से पुता दो मंजिला मकान बहुत सुंदर बना हुआ है। पत्थर की छत और बाहर खुला आंगन है। नीले और हरे रंग के दरवाजे पर ताला लगा हुआ है। थोड़ा और आगे जाने पर एक साथ दो घर दिखाई दिए हैं। यहां भी ताला लगा हुआ है। एक घर में डिश एंटीना भी लगा हुआ है। कुछ घर खंडहर बन चुके हैं। उनकी छतों और दीवारों पर तो पेड़ पौधे उग आए हैं। कुछ घर गिरने की कगार पर हैं। ये सब देखते हुए मैं गांव के आखिरी घर में पहुंची। जहां चूल्हे में राख है। लकड़ियां रखी हैं। आंगन में ओखली है। घर की दीवार पर एक मैली-कुचैली जैकेट टंगी है। घर खुला है, दरवाजा खोलकर मैंने देखा कि वहां कुछ बर्तन रखे हैं। आंगन में माल्टे का पेड़ है। बैंगन के पौधे भी लगे हुए हैं। यही सीतादेवी का घर है। उनका मनोरोगी बेटा भीरू यहीं रहता है। फिलहाल भीरू घर पर नहीं है। इसके अलावा गांव में करीब दस घर हैं। सभी में जंग लगे ताले जड़े हुए हैं। यहां पलायन की सबसे बड़ी वजह है कि आने-जाने के लिए सड़क नहीं है। कोई बीमार हो जाए तो उसे ठीक होने के लिए किसी चमत्कार का इंतजार करना पड़ता है। गांव में पानी की पाइप तो है लेकिन पानी नहीं है। न तो स्कूल है, न दुकान, न आंगनबाड़ी और न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। इस पूरे गांव में हमें एक आदमी नहीं मिला। हम वापस मलछोड़ा गांव के लिए निकल पड़े। यहां हमारी मुलाकात स्थानीय पत्रकार गंगा से हुई। लोयगढ़ के बारे में पूछने पर गंगा बताती हैं, 'उस गांव में केवल भीरू नाम का आदमी बचा है। वो भी लोगों को देखकर छिप जाता है। उसकी मां सीतादेवी की लाश ऐसी स्थिति मिली थी कि उसपर मक्खियां भिनभिना रहीं थी। लाश के हाथ-पैर और चेहरा चींटियां खा गई थीं। भीरू मनोरोगी है, इसलिए उसे पता ही नहीं चला कि मां जिंदा है या मर गई। मां के मरने के तीन दिन बाद वो मलछोड़ा आया और यहां महिलाओं से कहा कि मेरी मां ने तीन दिन से खाना नहीं खाया है। गांववालों को शक हुआ। वहां जाकर देखा तो पता चला कि सीतादेवी मर चुकी थी। भीरू की पत्नी भी उसे छोड़कर अपने चार बच्चों के साथ हरिद्वार चली गई है।‘ मैंने पूछा- ‘भीरू के खाने का इंतजाम कैसे होता है?’ इसपर गंगा कहती हैं कि ‘पास में ही एक छोटा सा पहाड़ी बाजार है। दिनभर वहीं रहता है। उसकी पत्नी वहां एक दुकानदार को पैसे दे जाती है, ताकि वह भीरु को खाना खिला दे।’ गंगा आगे कहती हैं कि ‘लोग अपनी जमीने छोड़कर जा चुके हैं। कुछ लोगों की जमीन पर चीड़ के पेड़ उग आए हैं। सरकार ने उस जमीन को वन विभाग के हवाले कर दिया है। जब उन लोगों ने लौटकर आना शुरू किया तो सरकार ने उन्हें पेड़ काटने की इजाजत भी नहीं दी। इसलिए अब कोई लौटकर आना भी नहीं चाहता।’ गंगा के बाद मेरी मुलाकात मलछोड़ा गांव के रहने वाली गुड्डी देवी से हुई। वो बताती हैं कि ‘हम लयोगढ़ में घास काटने जाते थे। सीतादेवी को सांस की तकलीफ थी। वह बीमार थी लेकिन न तो दवा मिली और न ही खाना। उन्हें कोई देखने वाला नहीं था। सीतादेवी के मरने की खबर मिली तो हमारे गांव को लोग ही गए थे। जब हम घर पहुंचे तो भीरू की मां की लाश को चीटियां खा गई थीं, मक्खियां भिनभिना रही थीं। वो अपनी मां की लाश छोड़कर सैर करने चला जाता था। बारिश का मौसम था इसलिए झाड़ियां और ज्यादा घनी थीं। कंधे पर उसकी लाश रखकर शमशान ले गए थे। मरने के बाद भी उनकी बहू नहीं आई।’ मलछोड़ा गांव के रहने वाले सतीशचंद्र पांडे बताते हैं कि 'लोयगढ़ गांव तक जाने का न तो रास्ता है और न ही गांव में पानी है। ऐसे में कोई वहां क्यों रहेगा। जरूरी काम के लिए पहाड़ उतरकर नदी के पास जाना पड़ता है पानी लेने के लिए। कुछ साल पहले तक लोग अपना घर देखने आया करते थे लेकिन अब वो भी बंद कर दिया। ऐसे ही हालात रहे तो जल्द ही मलछोड़ा गांव भी खाली हो जाएगा। मलछोड़ा गांव के राकेश पांडे बताते हैं कि हमारे गांव में भी अब ज्यादातर बुजुर्ग ही रहते हैं। हमारा गांव भी खाली होने के कगार पर है। कोई बीमार हो जाए तो अस्पताल ले जाना मुश्किल है। सिरदर्द की गोली खरीदने के लिए भी चार किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है।’ ------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-किडनैप कर 10 दिन तक मेरा रेप किया:होश आया तो हाथ-पैर बंधे थे, चादर खून से सनी थी, रिश्तेदार ने एक लाख में बेचा था ‘2021 की बात है। दोपहर के 2 बज रहे थे। मैं अपनी सहेली के घर कुछ काम से जा रही थी। अचानक दो लड़के दौड़ते हुए मेरी तरफ आए। उन्होंने मुझे जबरदस्ती एक बोलेरो गाड़ी में बैठा लिया। मैं चीख-चीखकर पूछ रही थी- मुझे कहां ले जा रहे हो। तभी एक लड़के ने थप्पड़ मारा और रूमाल से मेरा मुंह दबाते हुए बोला- चुपचाप बैठी रहो। सागर जिले में सब तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पापा को फांसी दिलाकर आत्महत्या कर लूंगी:कहते थे ब्राह्मण होकर नीच से शादी कैसे की, गोली मारकर बोले- अब मैं बहुत खुश हूं हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
बांग्लादेश में चुनाव के पहले राजधानी ढाका करीब-करीब खाली है। सड़कों पर ट्रैफिक न के बराबर है। देशभर से बड़ी तादाद में लोग काम के लिए ढाका आते हैं। वे 12 फरवरी यानी आज होने वाली वोटिंग के लिए लौट रहे हैं। अंतरिम सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को 3 दिन की छुट्टी दे दी है। प्राइवेट वर्कर्स को 4 दिन की छुट्टी दी गई है। ट्रेनें खचाखच भरी हैं। लोग छतों पर बैठकर सफर कर रहे हैं। बांग्लादेश में दो दिन पहले चुनावी प्रचार खत्म हो चुका है। इस बार पूर्व PM खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सरकार बनाने की रेस में सबसे आगे है। पार्टी ने पिछली बार 2001 में सरकार बनाई थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, BNP को कुल 300 में से 130-140 सीटें मिल सकती हैं। दूसरे नंबर पर जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन है, जिसे 90 से 100 सीटें मिलने के आसार हैं। लगातार 4 बार से चुनाव जीत रही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस बार मैदान में नहीं है। दैनिक भास्कर ने चुनाव के मुद्दों और पार्टियों की स्थिति पर आम लोगों के अलावा एक्सपर्ट्स से बात की। 9 घंटे वोटिंग, 13 फरवरी की सुबह तक रिजल्टचुनाव के लिए वोटिंग 12 फरवरी को सुबह 7:30 बजे शुरू होगी और शाम 4:30 बजे तक चलेगी। इसके बाद काउंटिंग शुरू हो जाएगी। बांग्लादेश में बैलेट पेपर से ही चुनाव होता है। इसलिए वोटों की गिनती में ज्यादा वक्त लगता है। बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, 300 सीटों पर वोटिंग के लिए 64 जिलों में 42,761 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ वोटर हैं। पहली बार डाक से वोट देने की सुविधा दी गई है। इसका फायदा करीब 1.5 करोड़ वोटर्स को होगा, जो काम के लिए घर से दूर चले गए हैं। 350 सीटों वाली संसद में 300 सांसदों के लिए चुनाव होता है। बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। रिजर्व सीटें चुनाव के नतीजों के हिसाब से मिलती हैं, जैसे अगर BNP को 120 सीटें मिलती हैं, तो उसे महिलाओं के लिए रिजर्व 20 सीटें मिलेंगी। अवामी लीग के न होने से BNP को फायदाबांग्लादेश में करीब 10% हिंदू आबादी हैं। हिंदू वोटर अवामी लीग के वोटर रहे हैं। अवामी लीग ने 2024 के चुनाव में 272 सीटें जीती थीं। उसे 30 से 40% वोट मिलते रहे हैं। इस बार ये वोट बैंक किसके हिस्से में जाएगा, यही सवाल है। अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध का फायदा BNP को होता दिख रहा है। हिंदू वोटर जमात से दूरी बनाते दिख रहे हैं क्योंकि जमात का नाम अल्पसंख्यकों पर हमले में आता रहा है। ऐसे में उनका झुकाव BNP की ओर दिख रहा है। ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर में मिले डॉ. सुनीरमल रॉय कहते हैं, ‘हमें पता है कि जमात-ए-इस्लामी इस्लामिक पार्टी है। BNP लोकतांत्रिक पार्टी है।’ पेशे से बिजनेसमैन मोहम्मद शौकत अजीज BNP के ऑफिस के बाहर खड़े मिले। वे कहते हैं, ‘बांग्लादेश के लोगों ने आजादी के लिए मुक्ति संग्राम लड़ा था। वह संग्राम इसी मतदान के अधिकार और लोकतंत्र के लिए तो था। उम्मीद है कि चुनाव में यही भावना दिखेगी। लोग वोट के जरिए गलत का विरोध करेंगे। जो पार्टियां झूठ बयान देकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, लोग उन्हें जवाब देंगे।’ ऑटो रिक्शा चलाने वाले अनवर हुसैन कहते हैं, ‘चुनाव में अच्छा माहौल है। मुझे भरोसा है कि BNP बड़े अंतर से जीतेगी।’ एक्सपर्ट बोले- सबसे बड़ी फिक्र चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहींढाका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट सैफुल इस्लाम चौधरी कहते हैं, ‘चुनाव के नतीजे क्या होंगे, मुझे इससे ज्यादा फिक्र इस बात की है कि चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहीं। लोग खुलकर वोट डाल पाएंगे या नहीं। एक रात पहले ही ढाका के बाहर कई घटनाएं हुई हैं।' 'कुछ न कुछ गड़बड़ करने की कोशिशें चल रही हैं। कैंडिडेट धमकी दे रहे हैं कि अगर वे नहीं जीते तो विरोधियों के घरों में तोड़फोड़ करेंगे। इसीलिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। अगर लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं होगा, तो वे डर की वजह से पोलिंग बूथ तक नहीं जाएंगे।’ चौधरी आगे कहते हैं, ‘अगर चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो कहना मुश्किल है कि कौन कितनी सीटें जीतेगा। मैं इस देश के लोगों के वोटिंग बिहेवियर को जानता हूं। यहां लोग कैंडिडेट की बजाय पार्टी को वोट देते हैं। अवामी लीग इस बार नहीं है। मुझे लगता है कि बहुत से लोग BNP को वोट देंगे। चुनाव में धांधली नहीं हुई, तो हो सकता है कि BNP सत्ता में आ जाए।’ हिंदू और अवामी लीग के वोट किसे वोट देंगे? चौधरी जवाब देते हैं, ‘अगर अवामी लीग के 10% वोटर भी मतदान करें और उनमें से 8 से 9% BNP को वोट दे दें, तो भी BNP आसानी से जीत सकती है। अगर वे जमात को वोट देंगें, तो जमात जीत सकती है। हालांकि, सैफुल इस्लाम चौधरी मानते हैं कि किसी भी पार्टी को बहुमत लायक 151 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। वे कहते हैं, ‘इस स्थिति में शायद जमात और BNP के बीच पर्दे के पीछे समझौता हो सकता है। ये थोड़ा अजीब होगा, लेकिन दोनों मिलकर सरकार बना सकते हैं।’ ‘जनमत संग्रह महज दिखावा, संवैधानिक बदलाव होना तय’बांग्लादेश में चुनाव के साथ संविधान में सुधार के लिए जनमत संग्रह भी होना है। डॉ. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने खुलकर इसके पक्ष में वोट करने के लिए कहा है। चुनाव की कवरेज करते हुए हमने देखा कि सरकारी कर्मचारी भी जनमत संग्रह के पक्ष में वोट करने की अपील करते हुए दिखे। चौधरी कहते हैं, सरकार खुद पक्ष लेती है, तो विपक्ष के जीतने की संभावना नहीं रहती। इसलिए लग रहा है कि संविधान में बदलाव के पक्ष में ज्यादा वोट आएंगे। ‘जनमत संग्रह दिखावा लगता है। सरकार पहले ही संविधान में बदलाव के पक्ष में है। बांग्लादेश जैसे देश में सरकार की इच्छा के खिलाफ रिजल्ट आना बहुत मुश्किल है। मान लीजिए एक हजार वोटर हैं, तो सरकार 900 वोट ‘हां’ के वोट दिखा सकती है। यह एक तरह का खेल है, पैसों की बर्बादी है। सरकार चाहे तो अध्यादेश के जरिए भी फैसला कर सकती है। जनमत-संग्रह की जरूरत नहीं है।’ ‘धांधली हुई, तभी जमात सत्ता में आएगी’सीनियर जर्नलिस्ट मोन्जुरुल आलम पन्ना का मानना है कि पहले के मुकाबले जमात के वोटर और समर्थक बढ़े हैं। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि उन्हें अपने दम पर सरकार बनाने लायक समर्थन मिल गया है। अगर चुनाव निष्पक्ष हुए, तो BNP काफी आगे रहेगी। वे इतनी सीटें जीत सकते हैं कि सरकार बना सकें। अगर कोई हेरफेर हुआ, तो हालात अलग हो सकते हैं। ऐसे में जमात भी आगे आ सकती है। इस बार बांग्लादेश चुनाव में कौन से मुद्दे हावी रहे? मोन्जुरुल बताते हैं, ‘पार्टियों ने एक करोड़ नौकरियां, फैमिली कार्ड, 5 करोड़ पेड़ लगाने जैसे वादे किए हैं। चाहे BNP हो या जमात, उनके वादे सुनने में अच्छे लगते हैं। अनुभव बताता है कि सत्ता में आने के बाद पार्टियां मुश्किल से 10 से 20% वादे ही पूरे करती हैं। वादा करने में कोई खर्च नहीं होता। इसलिए इन घोषणाओं को ज्यादा महत्व नहीं देता। मेरे लिए ज्यादा अहम उनका पिछला रिकॉर्ड है।’ ‘5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 18 महीनों में BNP पर वसूली, बदले और दमन के आरोप लगे हैं। इससे उनकी छवि को नुकसान हुआ है। जमात ने सीधा टकराव कम किया है, हालांकि उन पर भी टोकन के जरिए चंदा वसूली और जमीन कब्जाने के आरोप हैं। फिर भी ऐसे मामले कम हैं।’ अवामी लीग के कोर वोटर्स क्या करेंगे? मोन्जुरुल का मानना है कि अवामी लीग के कुछ वोटर वोट डालने न जाएं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि कोई भी नहीं जाएगा। अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो क्या होगा?मोन्जुरुल कहते हैं, ‘त्रिशंकु संसद की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। मान लीजिए BNP को 125–130 सीटें मिलती हैं और जमात को 120–125। तब गठबंधन की राजनीति के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। अगर BNP दूसरी पार्टियों से समझौता नहीं कर पाती, तो उसे जमात पर निर्भर होना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मिली-जुली सरकार भी बन सकती है। फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता।’ सीटें, जिन पर नजर रहेगी बांग्लादेश से ये स्टोरी भी पढ़ें1. हिफाजत-ए-इस्लाम के लीडर बोले- जमात इस्लामिक शासन नहीं लाई तो उससे भी लड़ेंगे बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है हिफाजत-ए-इस्लाम। ये संगठन बांग्लादेश में इस्लामिक राज चाहता है। पूरे बांग्लादेश में हिफाजत का नेटवर्क है। इसलिए चुनाव के दौर में हिफाजत की अहमियत बढ़ जाती है। संगठन के लीडर अजीज-उल-हक कहते हैं अगर जमात देश में इस्लामिक शासन नहीं लाता है तो हम उसके भी खिलाफ हो जाएंगे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू... 2. जमात के पहले हिंदू कैंडिडेट बोले- शरिया नहीं लाएंगे, पैसे बांटते कैमरे में कैद बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही माहौल हिंदुओं के खिलाफ है। शरिया कानून की वकालत करने वाली जमात की छवि हमेशा कट्टरपंथी पार्टी की रही है। हालांकि, इस बार जमात ने पहली बार चुनाव में हिंदू कैंडिडेट उतारा है। खुलना जिले की दाकोप सीट से लड़ रहे कृष्णा नंदी दावा करते हैं कि जमात बांग्लादेश में शरिया नहीं लाएगी। नंदी रैली में वोटरों को खुलेआम कैश बांटते कैमरे में भी कैद हो गए। पढ़िए पूरी खबर…
DNA: दूसरा पाकिस्तान या अफगानिस्तान? बांग्लादेश की वोटिंग पर कैसे टिक गई है भारत की सुरक्षा
Bangladesh Election Latest News: क्या बांग्लादेश दूसरा पाकिस्तान या अफगानिस्तान बनने जा रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बांग्लादेश चुनाव में यूएस और पाकिस्तान हद से ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं और उसे अपने हिसाब से हांकना चाहते हैं.
BNP हो या जमात, दोनों के टारगेट पर हिंदू, क्या बांग्लादेश में चुनाव हिंदुओं की बलि लेकर होंगे?
Bangladesh Hindu Crisis: बांग्लादेश में नई सरकार बनाने के लिए गुरुवार को वोट डाले जाएंगे. इन चुनाव में BNP और जमात, दो मुख्य पार्टियां हैं. लेकिन विडंबना ये है कि दोनों ही पार्टियां हिंदुओं की घोर दुश्मन हैं.
US-Iran War:इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू जब इजरायल से अमेरिका के लिए निकले थे तो उन्होंने साफ साफ कहा था कि इस दौरे में सबसे प्रमुख ईरान का मुद्दा होगा. और वॉशिंगटन में उतरने के बाद नेतन्याहू ने सबसे पहले डॉनल्ड ट्रंप के उन दूतों से मुलाकात की, जो ओमान में ईरान से समझौते की बातचीत में अमेरिकी वार्ताकार थे.
Brazil Pilot Got Arrested: ब्राजील से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आ रही है. यहां एक 60 साल के पायलट को विमान के अंदर से गिरफ्तार कर लिया गया. पायलट पर आरोप है कि वह गरीब परिवारों की लालच देकर उनके बच्चों को खरीदता था और उनका यौन शोषण करता था.
बांग्लादेश में होने वाले चुनाव में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी की सीधी टक्कर होने जा रही है. चुनाव के ठीक पहले जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख शफ़ीकुर रहमान ने एक बड़ा बयान दिया और कहा कि हमारे देश का कोई नागरिक अल्पसंख्यक नहीं है.
प्लेटफॉर्म पर टाइम पर पहुंची बर्फ से जमी ट्रेन, इस देश की पंक्चुअलिटी देख दुनिया हैरान!
Viral Frozen Train Reel: जापान की ट्रेन का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें दिखता है कि ट्रेन पूरी तरह बर्फ से जमी हुई है, खिड़कियां बर्फ से ढकी हुई हैं, लेकिन ऐसे में भी ट्रेन समय पर पहुंच रही है. चलिए देखते हैं ये खूबसूरत और अनोखा वीडियो.
Couple Kidnapped in Azerbaijan: गुजरात से अमेरिका जाने की चाहत लिए एक कपल ने एजेंट से संपर्क किया. एजेंट ने मोटी रकम लेकर उन्हें अजरबैजान पहुंचा दिया, जहां पर उन्हें बदमाशों ने किडनैप कर लिया. इसके बाद विदेश मंत्रालय को उनकी रिहाई के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा.
‘उनके नेता का लहजा नहीं आया पसंद...’ फोन कॉल पर भड़के ट्रंप; स्विट्जरलैंड पर लगा दिया 39% टैरिफ
US-Switzerland Trade Row:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्विट्जरलैंड पर टैरिफ 30% से बढ़ाकर 39% इसलिए किया क्योंकि उन्हें एक स्विस नेता का उनसे बात करने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आया. ट्रंप के अनुसार, स्विट्जरलैंड के साथ 42 अरब डॉलर के व्यापार घाटे और बातचीत के लहजे ने उनके फैसले को प्रभावित किया है.
चीन की मोनोपॉली पर जापान का बड़ा वार! समंदर की 6000 मीटर गहराई से निकालेगा ‘सोने से भी कीमती’ कीचड़
Japan Deep Sea Rare Earth Mining: जापान ने चीन पर रेयर अर्थ मिनरल्स की निर्भरता खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है. देश अब गहरे समुद्र से सोने से भी कीमती माने जाने वाले दुर्लभ खनिज निकालने की तैयारी में है. इस योजना के तहत समुद्र की गहराई में मौजूद कीचड़ से रेयर अर्थ एलिमेंट निकाले जाएंगे. जिससे जापान की ऑटोमोबाइल और दूसरी इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिल पाएगा.
बांग्लादेश में चुनाव से ठीक पहले करीब 3,350 करोड़ रुपए (370 मिलियन डॉलर) की बड़ी फंडिंग को मंजूरी मिली है. इस फंडिंग की टाइमिंग को लेकर चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि इसका असर पूरे देश पर पड़ सकता है.
Donald Trump Claims: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को उन्होंने रोका था. उनका कहना है कि अगर समय रहते दखल न दिया जाता तो हालात परमाणु युद्ध तक पहुंच सकते थे. ट्रंप का कहना है कि उन्होंने टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल कर दोनों देशों पर दबाव बनाया. वहीं भारत ने इन दावों को साफ तौर पर खारिज किया है.
व्हाइट हाउस की ओर से जारी पहले तथ्य पत्र में कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कुछ खाद्य व कृषि वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा। सूची में सूखे अनाज, लाल ज्वार, पेड़ के मेवे, फल और नट्स, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और वाइन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए थे।
खत्म होगी H1B वीजा योजना? भारतीय टेक और आईटी सेक्टर में मची खलबली, जानिए बिल की पूरी सच्चाई
America h1b visa scrap bill: अमेरिका में H1B वीजा योजना खत्म करने के लिए रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने नया बिल पेश किया है, जिसमें 2027 से हर साल H1B वीजा की संख्या शून्य करने का प्रस्ताव है. अगर यह कानून बना, तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, क्योंकि H1B वीजा पाने वालों में 70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय हैं.
क्या है एरिया 51? एलियंस और UFO की कहानियों से जुड़ा दुनिया का सबसे रहस्यमयी ठिकाना
Area 51 Real Truth: एरिया 51 का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में एलियंस और UFO की तस्वीर आ जाती है. फिल्मों और टीवी शो ने भी इसे रहस्य से भरी जगह के रूप में दिखाया है. हालांकि असल में यह जगह क्या है इसे लेकर अब काफी बातें साफ हो चुकी हैं. आज हम आपको उसी के बारे में बताएंगे.
जर्मनी में कार्निवाल परेड में होगा ट्रंप का पर्दाफाश
इस साल जर्मनी की मशहूर ‘रोज मंडे परेड’ में डॉनल्ड ट्रंप, फ्रीडरिष मैर्त्स और इमानुएल माक्रों का मजाक उड़ाने वाली झलकियां दिखाई देंगी, लेकिन व्लादिमीर पुतिन पर कोई कटाक्ष नहीं होगा. इसके पीछे एक खास वजह है
Jacques Leveugle: फ्रांस के 79 वर्षीय पूर्व शिक्षक जैक्स लेव्यूगल पर 1967 से 2022 के बीच भारत समेत नौ देशों में 89 नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप है. मामला यूएसबी ड्राइव से उजागर हुआ. आरोपी 2024 से हिरासत में है.
White house on epstein: ट्रंप ने जैफरी एपस्टीन को अपने क्लब से इसलिए निकाला क्योंकि वह संदिग्ध था और ट्रंप ने उसके साथ अपने संबंध सालों पहले ही खत्म कर दिए थे. एपस्टीन फाइलों की सार्वजनिकता से प्रशासन की पारदर्शिता सामने आई है और जुड़े लोगों को जवाब देना जरूरी हो गया है.
US-Bangladesh Trade Deal:बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी ने कहा कि बांग्लादेश-US व्यापार डील से भारत को चिंता नहीं करनी चाहिए. उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में शून्य टैरिफ मिलेगा, वहां भारत प्रतिस्पर्धी आपूर्ति कर सकता है.
कनाडा के स्कूल में गोलीबारी: हमलावर समेत 10 लोगों की मौत
ब्रिटिश कोलंबिया में सामूहिक गोलीबारी से दहशत हाई स्कूल के अंदर छह शव मिले, पुलिस जांच में जुटी स्थानीय MLA ने जताया दुख, समुदाय सदमे में वसूली नहीं, कारणों की जांच जारी; पुलिस सतर्क ब्रिटिश कोलंबिया। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में हुई एक सामूहिक गोलीबारी में हमलावर समेत कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह घटना मंगलवार (स्थानीय समय) को ब्रिटिश कोलंबिया के टंबलर रिज स्थित एक स्कूल में हुई। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के मुताबिक, हाई स्कूल के अंदर छह लोग मृत पाए गए। एक अन्य व्यक्ति की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार संदिग्ध हमलावर भी मृत पाया गया। पुलिस का कहना है कि उसकी मौत खुद को पहुंचाई गई चोट के कारण हुई। यह जानकारी कनाडा के प्रमुख मीडिया संस्थान सीबीसी ने दी है। इसके अलावा, एक घर से भी दो लोगों के शव मिले हैं। पुलिस का मानना है कि इस घर का संबंध इसी गोलीबारी की घटना से है। घटना में घायल सभी लोगों को प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल भेज दिया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। एमएलए लैरी न्यूफेल्ड ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा, टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल में हुई दुखद और बहुत परेशान करने वाली घटना के बाद मैं टंबलर रिज की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा हूं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने कन्फर्म किया है कि कई लोग मारे गए हैं। उन्होंने आगे बताया कि एक्टिव शूटर अलर्ट हटा लिया गया है, लेकिन जांच जारी है। न्यूफेल्ड ने आगे कहा, मैं फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स, स्कूल स्टाफ और लोकल अधिकारियों को इस बहुत मुश्किल हालात में उनके तेज़ और प्रोफेशनल रिस्पॉन्स के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मेरी दुआएं स्टूडेंट्स, परिवारों, टीचर्स और पूरी टम्बलर रिज कम्युनिटी के साथ हैं। यह एक छोटा और आपस में जुड़ा हुआ शहर है, जहां इस तरह की घटना का असर हर कोई महसूस करता है। उन्होंने आगे कहा, जिन लोगों पर असर पड़ा है, उनके सम्मान में, यह ज़रूरी है कि हम पुलिस को अपनी जांच पूरी करने और डिटेल्स कन्फर्म करने के लिए ज़रूरी समय दें। जैसे ही वेरिफाइड जानकारी मिलेगी, मैं उसे शेयर करता रहूंगा। एमएलए ने यह भी कहा कि अगर घटना के बाद किसी को मानसिक या भावनात्मक कठिनाई महसूस हो रही है तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं। इस बीच पुलिस ने कहा है कि गोलीबारी के कारणों की जांच अभी चल रही है। संदिग्ध के बारे में फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी जारी नहीं की गई है। आगे की डिटेल्स का इंतजार है।
Miguel Uribe father enters Colombia presidential race: कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मोड़ आया है. गोली से मारे गए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिगुएल उरीबे तुर्बे के पिता मिगुएल उरीबे लोंडोनो ने खुद चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने मैदान में उतरे हैं.जिसके बादभावनाओं ने कोलंबिया का सियासी खेल बदल दिया है.
ट्रेड वार के बीच ट्रंप की नई चेतावनी, नहीं खुलने देंगे अमेरिका-कनाडा ब्रिज
करीब ढाई किलोमीटर लंबे गार्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। यह पुल डेट्राइट (मिशिगन) को विंडसर (ओंटारियो) से जोड़ेगा और दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इस परियोजना की लागत लगभग 4.7 अरब डॉलर बताई जा रही है।
India-US Trade Deal: व्हाइट हाउस ने अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर पहली आधिकारिक फैक्ट शीट जारी की. जानकारी के अनुसार, इसमें वाणिज्यिक और डिजिटल उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ कटौती, भारत का डिजिटल सेवा कर हटाने का निर्णय और प्रौद्योगिकी सहयोग शामिल है. हालांकि, शीट में रूस से तेल की खरीद बंद करने पर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया.
बदल गए US के सुर! PoK और अक्साई चीन को भारत का हिस्सा बताने वाला मैप भी डिलीट किया
US removes India map showing pok aksai chin: अमेरिका ने अपने ट्रेड डील पोस्ट से भारत का नक्शा हटा दिया जिसमें पीओके और अक्साई चिन भारत में दिखाए गए थे. ये कदम भारत की आपत्ति के बाद विवाद को शांत करने के लिए उठाया गया था.
बांग्लादेश के बोगुरा जिले में BNP और जमात समर्थकों के बीच हिंसक झड़प में छह लोग घायल हो गए. BNP का आरोप है कि जमात-शिबिर कार्यकर्ताओं ने एक स्थानीय नेता की आंख निकाल ली है. जमात का ये रूप उस समय है, जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव है. बेटे की हालत जैसे ही मां ने सुनी उनका निधन हो गया.
Bangladesh holds its first election without Hasina:12 फरवरी को सुबह जब बांग्लादेश के लोग वोट डालने निकलेंगे, तो वो सिर्फ एक सरकार चुनने नहीं जा रहे होंगे, बल्कि ये तय कर रहे होंगे कि देश का भविष्य कैसा होगा. यानीशेख हसीना के देश का कल भविष्य तय होने वाला है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बांग्लादेश मेंपुरानी सियासत की वापसी होगी या फिर इस्लामी रंग में नया दौर आएगा? तो इस मौके पर जानते हैं 2024 छात्र क्रांति से लेकर 2026 चुनाव तक के सफर की पूरी कहानी.
घर के अंदर ट्रंप को लेकर झगड़ा, अमेरिकी राजनीति ने पिता को बनाया हत्यारा! बेटी का कर दिया कत्ल
Woman Shot Dead By Father: अमेरिका के टेक्सास में रहने वाले एक पिता ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी राजनीति पर हुए झगड़े के बाद अपनी ही बेटी को गोली मार दी. ब्रिटेन की रहने वाली लूसी हैरिसन की इस घटना में मौत हो गई. वह 23 साल की थीं. यह मामला अब ब्रिटेन की एक अदालत में हुई जांच के दौरान सामने आया है जहां लूसी के पूर्व बॉयफ्रेंड ने पूरी घटना के बारे में बताया है.
बांग्लादेश में कल यानी 12 फरवरी को चुनाव हैं। 13 साल बैन रहने के बाद जमात-ए-इस्लामी पहली बार चुनाव लड़ रही है। कट्टरपंथी पार्टी माने जाने वाली जमात ने पिछला चुनाव 2008 में लड़ा था। जमात ने इस बार एक हिंदू कैंडिडेट उतारा है, वहीं किसी महिला को टिकट नहीं दिया। दैनिक भास्कर से बातचीत में जमात के चुनाव प्रभारी एहसान-उल-जुबैर कहते हैं कि मर्दों के लिए चुनाव लड़ना जितना आसान होता है, उतना महिलाओं के लिए नहीं होता। विरोधी उन पर हमला करते है, हिजाब उतार देते हैं। सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। इसलिए सभी महिलाएं चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं। उन्होंने भारत से रिश्तों, संविधान में बदलाव के लिए हो रहे जनमत संग्रह और हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा पर भी जवाब दिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: अगर जमात सत्ता में आती है, तो भारत के साथ कैसे रिश्ते होंगे?जवाब: हम सम्मान और मर्यादा के आधार पर दूसरे देशों से रिश्ते रखना चाहते हैं। पिछले 16 साल में जो लोग सत्ता में थे, उन्होंने बांग्लादेश की विदेश नीति को पूरी तरह एक देश पर फोकस कर दिया था। ये बांग्लादेश के सम्मान और मर्यादा के मुताबिक नहीं था। हम चाहते हैं कि पड़ोसियों के साथ दोबारा रिश्ते बनाए जाएं। भारत के साथ हमारे कई मुद्दे हैं, जैसे तीस्ता बैराज, बॉर्डर पर हत्याएं और 54 नदियों के पानी का बंटवारा। भारत ऊपरी देश होने की वजह से पानी रोकता है। इससे बांग्लादेश को बहुत नुकसान होता है। यहां सूखे जैसे हालात बन रहे है। इन समस्याओं को आपसी समझ के जरिए सुलझाना चाहिए। सवाल: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा के मामले बढ़े हैं। इसकी क्या वजह है? जवाब: हम अपने लोगों को बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक में अलग नहीं बांटते। जो यहां जन्मे हैं, वे देश के नागरिक हैं। शेख हसीना के राज में कई घटनाएं हुईं। इन्हें हमारे और विपक्ष के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। बाद में साबित हुआ कि वे सच नहीं थीं। पिछले 17-18 महीनों में जो घटनाएं हुईं, उनकी वजह धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक है। हमने किसी घटना का समर्थन नहीं किया। उनकी निंदा की और कहा कि सरकार जांच करके दोषियों को कानून के सामने लाएं। हम कानून हाथ में लेने का समर्थन नहीं करते। सवाल: आपने खुलना-1 सीट से हिंदू कैंडिडेट कृष्णा नंदी को उतारा है। ये चुनाव जीतने की रणनीति है या आप वाकई सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं?जवाब: हमने कई बार कोशिश की, लेकिन बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति अस्थिर थी। 2014 में हमें चुनाव नहीं लड़ने दिया गया। 2018 में रातोंरात चुनाव हो गया। 2024 में भी हमें नहीं लड़ने दिया गया। इस साल हम बातचीत के बाद एक कैंडिडेट उतार पाए। जिन सीटों पर जमात-ए-इस्लामी और BNP को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया, वहां वास्तव में चुनाव हुआ ही नहीं। अब हालात मुफीद होने की वजह से हमें चुनाव लड़ने का मौका मिल रहा है। एक गैर-मुस्लिम उम्मीदवार ने इच्छा जताई, हमने उसे टिकट दिया। सवाल: 10% हिंदू आबादी वाले मुल्क में सिर्फ एक हिंदू कैंडिडेट, ये कैसे सही है?जवाब: अगर और लोग चाहेंगे तो हम उन्हें भी टिकट देंगे। हम देखते हैं कि उम्मीदवार में संसद के लायक काबिलियत हो, करप्ट न हो, चाहे वह मुस्लिम हो या गैर-मुस्लिम। हम उसकी निजी इच्छा भी देखते हैं। हमने ढाका यूनिवर्सिटी के चुनाव में एक स्टूडेंट को टिकट दिया था। उसके समुदाय और परिवार ने रोका, फिर भी वह चुनाव लड़ा और जीता। सुरक्षा की वजह से कई बार समुदाय या परिवार से दिक्कतें आती हैं। हम किसी को चुनते हैं, वह सहमति देता है, हम उसका नॉमिनेशन करवाते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह जीतेगा। सवाल: जमात पर 1971 में बांग्लादेश की आजादी के आंदोलन को दबाने और पाकिस्तान का साथ देने का दाग है, ये कैसे मिटेगा?जवाब: अवामी लीग ने अपनी राजनीति में इन मुद्दों का इस्तेमाल किया। हमारे खिलाफ उनके पास कहने को कुछ नहीं था, इसलिए उन्होंने यह सब किया। वे हमें राजनीति में नहीं हरा पाए, तो कानून और ट्रिब्यूनल बनाए। ये बाद में गलत साबित हुए। हमारे एक लीडर को बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। पूरे मामले की समीक्षा कर कहा कि यह इतिहास का सबसे बुरा ट्रायल था। इंग्लैंड के सुप्रीम कोर्ट ने भी यही कहा। अब साफ हो चुका है कि इन आरोपों के पीछे राजनीति थी। सवाल: जमात पर धर्म के आधार पर भेदभाव के आरोप लगते हैं, हिंसा में भी नाम आया है। इस पर क्या कहेंगे?जवाब: हिंदू, ईसाई, बौद्ध, सब इस देश के नागरिक हैं। हम सब मिलकर देश बनाना चाहते हैं। हर आपदा में हमने धर्म नहीं देखा, मानवता देखी। 5 अगस्त 2024 के बाद सभी धर्मों के पूजा स्थलों की सुरक्षा की। हमने उन्हें भरोसा दिया कि किसी तरह की नाइंसाफी नहीं होगी। सवाल: जमात ने एक भी महिला को टिकट नहीं दिया। ऐसा क्यों?जवाब: बांग्लादेश के कुल वोटर में आधी महिलाएं हैं। बांग्लादेश के समाज में महिलाओं के लिए कुछ तयशुदा नियम, परंपराएं और मान्यताएं हैं। हर देश का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक इतिहास और परंपराएं होती हैं। उसी के हिसाब से उस देश की राजनीति और सिस्टम चलता है। जमात-ए-इस्लामी में करीब 40% महिलाएं हैं। जमीनी कैडर से लेकर संगठन में ऊपर तक हर जगह महिलाओं की मौजूदगी है। हर जगह उन्हें सम्मान मिलता है। मर्यादा में रहकर संगठन चलाने का मौका मिलता है। कोई महिला राजनीति करे या चुनाव लड़े या न लड़े, यह उसका निजी और पारिवारिक फैसला होता है। हम किसी महिला पर चुनाव लड़ने के लिए दबाव नहीं डालते। फिर भी यूनियन परिषद और उपजिला परिषद में हमारी महिला प्रतिनिधि रही हैं। उन्होंने अच्छे से जिम्मेदारी निभाई है। संसद में भी 2001 और 1991 में हमारी महिला सदस्य रही हैं। उन्होंने अच्छा काम किया है। सवाल: आप कह रहे हैं कि महिलाओं और पुरुषों में फर्क नहीं है, फिर कुछ महिलाओं को तो टिकट देना चाहिए था?जवाब: हमने कोशिश की है। मर्दों के लिए जो आसान है, वह महिलाओं के लिए नहीं है। 11 दिसंबर को चुनाव की तारीख का ऐलान हुआ था। अगले ही दिन ढाका-8 सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे शरीफ उस्मान हादी को दिनदहाड़े गोली मार दी गई। चार दिन पहले हमारी पार्टी से जुड़े एक नेता की शेरपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा हमारी महिला कार्यकर्ता चुनाव में काम कर रही होती हैं, तब दूसरी पार्टी के कार्यकर्ता उन पर हमला करते हैं। उनका हिजाब उतार देते हैं। उनका सामान छीन लेते हैं। उन्हें परेशान करते हैं। महिलाओं की सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। इसलिए सभी महिलाएं चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं। वे राजनीति करेंगी या नहीं, यह उनका फैसला है। हम किसी पर दबाव नहीं डालते। हम मानते हैं कि माहौल और बेहतर बनाया जाए, तो भविष्य में महिलाएं चुनाव में ज्यादा हिस्सा लेंगी। सवाल: बांग्लादेश में दो महिलाएं प्रधानमंत्री रही हैं, फिर कोई काम महिलाओं के लिए कैसे मुश्किल हो सकता है?जवाब: दोनों ने पिछले 30 साल में दो पार्टियों का नेतृत्व किया और प्रधानमंत्री बनीं। आगे भी कोई महिला आ सकती है। इसमें बांग्लादेश के संविधान में कोई रुकावट नहीं है। संसद में बहुमत पाने वाली पार्टी तय करेगी कि उसका नेता कौन होगा। सवाल: बांग्लादेश के लोगों के पास दूसरे विकल्प भी हैं, फिर वे जमात जैसी कट्टर पार्टी को क्यों चुनें?जवाब: हर पार्टी की अपनी नीति और विचारधारा होती है। लोग नेताओं का बर्ताव, काबिलियत, लीडरशिप देखकर सही व्यक्ति और सही पार्टी को चुनेंगे। हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी को समर्थन मिलेगा। सवाल: बांग्लादेश में चुनाव के साथ जनमत संग्रह भी हो रहा है। अगर फिर से संविधान बनाने की बात आई, तो क्या ये इस्लामिक कानूनों के हिसाब से बनेगा?जवाब: 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से लोगों को बहुत उम्मीद हैं। 2014, 2018 और 2024 में हुए तीनों चुनाव देश की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सके। बल्कि चुनाव के नाम पर मजाक हुआ था। इस बार चुनाव के साथ-साथ जनमत संग्रह भी होगा। हमने लंबे विचार-विमर्श के बाद जुलाई चार्टर बनाया है। इसमें सुधार के कई प्रस्ताव शामिल हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि बांग्लादेश के करीब 13 करोड़ वोटर इसमें शामिल होंगे। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी डेमोक्रेटिक और इस्लामी उसूलों के हिसाब से काम करने वाली पार्टी है। ये बांग्लादेश के लोगों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन गई है। शेख हसीना सरकार के दौरान जमात पर बहुत ज्यादा जुल्म हुआ। इस वजह से जमात-ए-इस्लामी के लिए लोगों में भावनाएं, उम्मीदें और समर्थन बढ़ा है। हम लोगों के साथ रहे, उनकी मदद की। हमेशा हमारी पॉलिसी रही है कि लोगों के साथ खड़े रहें। इसलिए आने वाले चुनाव में हम उम्मीद कर रहे हैं कि जमात जनता के समर्थन से अच्छी स्थिति में रहेगी। सवाल: नए संविधान में क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं?जवाब: बांग्लादेश में हमने संविधान के लिए लड़ाई लड़ी है। पिछले डेढ़ साल से देश में अंतरिम सरकार है। उसके साथ राष्ट्रीय सुधार आयोग और जातीय ऐकमत्य कमीशन नाम से दो आयोग बने। इनके जरिए कई सुधार किए गए। इन सुधारों के आधार पर नया संविधान बन रहा है। बांग्लादेश अब उसी के आधार पर चलेगा। जनमत-संग्रह में कुल 48 धाराएं बदलेंगी। बांग्लादेश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच शक्तियों का बंटवारा होगा। अभी पूरी ताकत प्रधानमंत्री के पास है। ऐसी स्थिति अब नहीं रहेगी। कुछ शक्तियां राष्ट्रपति को मिलेंगी। प्रधानमंत्री का कार्यकाल ज्यादा से ज्यादा 10 साल का ही होगा। अगर जनमत संग्रह में हां के पक्ष में ज्यादा वोट होते हैं, तो फिर उसी के आधार पर बांग्लादेश और सरकारें चलेंगी। यह लोगों की उम्मीदों के मुताबिक होगा। सवाल: अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है, तो चुनाव के बाद जमात किसके साथ जाएगी?जवाब: तब हालात के मुताबिक, फैसला लेंगे। पहले भी बांग्लादेश में गठबंधन सरकारें रही हैं। 1991 में हमने BNP का समर्थन किया, 2001 में सरकार में रहे। इसमें कोई समस्या नहीं है। …………………….बांग्लादेश से ये स्टोरी भी पढ़ें1. हिफाजत-ए-इस्लाम के लीडर बोले- जमात इस्लामिक शासन नहीं लाई तो उससे भी लड़ेंगे बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है हिफाजत-ए-इस्लाम। ये संगठन बांग्लादेश में इस्लामिक राज चाहता है। पूरे बांग्लादेश में हिफाजत का नेटवर्क है। इसलिए चुनाव के दौर में हिफाजत की अहमियत बढ़ जाती है। संगठन के लीडर अजीज-उल-हक कहते हैं अगर जमात देश में इस्लामिक शासन नहीं लाता है तो हम उसके भी खिलाफ हो जाएंगे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू... 2. जमात के पहले हिंदू कैंडिडेट बोले- शरिया नहीं लाएंगे, पैसे बांटते कैमरे में कैद बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही माहौल हिंदुओं के खिलाफ है। शरिया कानून की वकालत करने वाली जमात की छवि हमेशा कट्टरपंथी पार्टी की रही है। हालांकि, इस बार जमात ने पहली बार चुनाव में हिंदू कैंडिडेट उतारा है। खुलना जिले की दाकोप सीट से लड़ रहे कृष्णा नंदी दावा करते हैं कि जमात बांग्लादेश में शरिया नहीं लाएगी। नंदी रैली में वोटरों को खुलेआम कैश बांटते कैमरे में भी कैद हो गए। पढ़िए पूरी खबर…
आपने ओला-उबर या रैपिडो से कैब बुक करके सफर तो किया होगा। 5 फरवरी को दिल्ली में देश की पहली को-ऑपरेटिव कैब सर्विस भारत टैक्सी एप लॉन्च हो गई। इसका पूरा किराया ड्राइवर के पास जाएगा क्योंकि ये किसी कंपनी का एप नहीं, ना ही इसमें किसी एक व्यक्ति या कंपनी का मालिकाना हक होगा। इसमें ड्राइवर ही मालिक है। किराया किफायती है। दावा ये भी है कि बारिश या पीक आवर में भी किराया नहीं बढ़ेगा। इन दावों को परखने और सर्विसेज आजमाने के लिए दिल्ली में दैनिक भास्कर की टीम ने भारत टैक्सी एप डाउनलोड किया। किराया बाकी कैब के मुकाबले कम मिला। एक ही लोकेशन के लिए उबर की तुलना में इसका किराया 14-15 रुपए कम था। वहीं ओला की तुलना में करीब 138 रुपए कम दिखा। सर्विसेज देखने के लिए 7 फरवरी को हमने कैब बुक की। बुकिंग के बाद वेटिंग टाइम पहले 7 मिनट था, फिर ये बढ़ते-बढ़ते 12-13 मिनट हो गया। दो बार बुकिंग कंफर्म हुई लेकिन कैब नहीं आई। आखिरकार दोनों बार राइड कैंसिल हो गई। इसके बाद कैब न मिल पाने की वजह जानने और भारत टैक्सी एप का एक्पीरिएंस समझने के लिए हम कुछ ड्राइवर्स से मिले। ड्राइवर्स बोले- राइड मिल रहीं लेकिन रेट खराबशिवराज सिंह बुलंदशहर के रहने वाले हैं। पिछले 10 साल से कैब चला रहे हैं। उन्होंने 25 दिन पहले भारत टैक्सी एप इंस्टॉल किया लेकिन सही रेट न मिलने के कारण राइड नहीं ले रहे हैं। शिवराज कहते हैं, ‘मैंने अब तक सिर्फ एक ही राइड ली है। इसमें टाइमिंग का ख्याल नहीं रखा गया है। सिर्फ किलोमीटर नहीं, किसी जगह जाने में कितना समय लग रहा है, उसके हिसाब से भी पैसे मिलने चाहिए। अगर दूरी कम है लेकिन जाम के कारण ज्यादा समय लग रहा है तो CNG ज्यादा ही जलेगी। मैं भारत टैक्सी एप भी खोलकर रखता हूं लेकिन ये दूसरे एप के मुकाबले कम पैसे दे रहा है।‘ ‘इस पर राइड भी ज्यादातर उन इलाकों में मिल रही है, जहां ड्राइवर नहीं जाना चाहते हैं या ऐसे इलाके में जहां ज्यादा जाम या भीड़भाड़ रहती है। अगर ये एप चल गया और दूसरी कंपनियों का मार्केट खराब हुआ तो कहीं हमें बंधुआ मजदूर ना बना लिया जाए। हमसे मनमाने दाम पर न टैक्सी चलवाई जाए। क्योंकि ये तो हमें अभी से रेट नहीं दे रहे हैं।‘ बाकी कैब कंपनियों के बारे में पूछने पर शिवराज कहते हैं, ‘अभी जो कंपनियां सब्सक्रिप्शन लेकर काम करा रही हैं, उसका कमीशन भी 20 परसेंट तक बैठता है। भारत टैक्सी जब तक सही रेट नहीं देगी, तब तक ड्राइवर कमीशन देने के बाद भी उन्हीं कंपनियों की कैब चलाएंगे।‘ किराया बहुत कम, ये दूरी और समय के हिसाब से तय होइसी तरह महेश कुमार भी 20 दिनों से भारत टैक्सी एप इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन वो भी रेट से खुश नहीं हैं। महेश कहते हैं, ‘पीक टाइम में इसका रेट नहीं बढ़ता है। दूरी और समय दोनों हिसाब से रेट तय होना चाहिए। अभी रेट 16-17 रुपए प्रति किलोमीटर है। कभी कम भी हो जाता है। हमें 25 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया मिलना चाहिए।‘ ‘कोई नहीं चाहता कि वो टैक्सी चलाए। हम मजबूर होकर टैक्सी चलाते हैं। अब प्राइवेट कंपनी कस्टमर को रिझाने के लिए कम किराया दिखाएगी तो वे उन्हीं के पास जाएंगे। मैं चाहता हूं कि सरकार सबके लिए एक रेट फिक्स करे। हमारा किराया हमें सरकार दिलवाए।‘ महेश को दिन भर में भारत टैक्सी से सिर्फ 4-5 बुकिंग मिलती है। ओला-उबर जैसी कंपनियों की खामियों पर वे कहते हैं, ‘ये कंपनियां अब सब्सक्रिप्शन लेकर काम करा रही हैं। कभी-कभी सही रेट मिल जाता है लेकिन उसके बाद 8 से 10 रुपए प्रति किलोमीटर का किराया ही देती हैं। इन कंपनियों ने ड्राइवरों को बहुत लूटा है। ये अच्छी बात है कि भारत टैक्सी हमारे भविष्य के लिए है लेकिन किराया सही मिलना चाहिए।’ ये हमारा एप लेकिन कम पैसे में कौन काम करेगाअजीत मिश्रा दिल्ली में एप के जरिए ऑटो चलाते हैं। पिछले डेढ़-दो महीने से भारत टैक्सी एप भी चला रहे हैं। वे कहते हैं कि पहले कम पिकअप मिलते थे लेकिन लॉन्च होने के बाद बुकिंग बढ़ रही है। हमने पूछा अब तक कितनी राइड ली? इस पर अजीत कहते हैं, ’अब तक दो ही राइड ली क्योंकि रेट बहुत कम है।’ ’हर व्यक्ति को पैसे चाहिए। जो अच्छे पैसे दे रहा है, हम उसी के पास जा रहे हैं। भारत टैक्सी कभी-कभी मीटर से भी कम किराया दे रहा है। पहले दिल्ली सरकार ने भी ऐसा एक मॉडल शुरू किया था लेकिन वो (पूछो ऐप) करप्शन की भेंट चढ़ गया। ड्राइवर को कोई फायदा नहीं हुआ।’ भारत टैक्सी में सुधार को लेकर अजीत कहते हैं, ’हम इसे अपना एप मान रहे हैं। 30 रुपए बेसिक के अलावा प्रति किलोमीटर 11 रुपए मिलने चाहिए। अगर हम जाम में खड़े हैं, तो उस वेटिंग टाइम के भी पैसे मिलने चाहिए। अगर ये मिल जाए तो हमें भारत टैक्सी से कोई दिक्कत नहीं है। बुकिंग मिल रही है लेकिन कम रेट के चलते राइड नहीं ले पा रहे हैं। हम सिर्फ उम्मीद ही कर सकते हैं कि आगे कुछ बढ़िया हो जाए।’ आशु खान अलग-अलग टैक्सी एप के जरिए बाइक सर्विस देते हैं। पिछले दो महीने से भारत टैक्सी भी इस्तेमाल कर रहे हैं। आशु कहते हैं, ‘जो लोग इस्तेमाल कर रहे थे, उन्हीं से इस एप का पता चला। अंतर यही है कि बाकी एप की तुलना में पूरे पैसे मिल रहे हैं। कोई कमीशन नहीं है। जबकि दूसरी कंपनियां 25 से 30% तक कमीशन लेती हैं। अगर 100 रुपए की राइड मिली तो 75-80 रुपए ही मेरे पास आते हैं।’ हालांकि आशु कहते हैं कि अभी उन्हें भारत टैक्सी के जरिए 3-4 राइड ही मिल रही हैं। जबकि दूसरी कंपनियों की बुकिंग दिन भर मिलती है। इसके बारे में ज्यादा लोगों को पता चलेगा तो हमें भी इसका फायदा होगा। गाड़ियों और ऑटो पर एड प्रिंट करवाकर इसका प्रचार करना चाहिए। एक्सपर्ट: प्री-पेड टैक्सी की तरह सरकार तय करे किरायाइंडियन फेडरेशन ऑफ एप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के नेशनल जनरल सेक्रेटरी शेख सलाउद्दीन 'भारत टैक्सी' को एक अच्छी पहल बताते हैं, हालांकि उनकी कुछ चिंताएं भी हैं। सलाउद्दीन कहते हैं, ‘सबसे बड़ी चुनौती किराया है। सरकार को सबके (प्राइवेट कैब कंपनियों समेत भारत टैक्सी) लिए एक किराया तय करना चाहिए। जो किराया है, वो ना तो बहुत कम हो, ना ही बहुत ज्यादा।‘ ‘सरकार को सभी संगठनों के साथ एक मीटिंग करनी चाहिए। इसके बाद अपने-अपने राज्यों के हिसाब से रेट तय करने चाहिए, तब जाकर भारत टैक्सी जैसा मॉडल सफल हो सकेगा। जैसे बड़े शहरों में प्री-पेड टैक्सी का किराया सरकार तय करती है, उसी तरह का सिस्टम बनना चाहिए।‘ भारत टैक्सी की चुनौतियों पर सलाउद्दीन कहते हैं कि प्लेटफॉर्म कंपनियों (प्राइवेट कैब कंपनियां) के पास ज्यादा पैसा है लेकिन जब उन कंपनियों को ड्राइवरों ने ही बड़ा बनाया है, तो वे भारत टैक्सी को बड़ा क्यों नहीं बना सकते हैं।‘ प्रचार की जरूरत ताकि बड़ी कंपनियों के कस्टमर शिफ्ट होंट्रांसपोर्ट सेक्टर पर रिसर्च करने वाले बासुदेव बर्मन भी सलाउद्दीन की बातों का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं कि अभी बड़ी कंपनियों का जो कस्टमर बेस बना हुआ है, उसे कैसे शिफ्ट कराया जाएगा, ये बड़ी चुनौती होगी। बर्मन कहते हैं, ‘अभी हमें पता चल रहा है कि भारत टैक्सी का किराया दूसरी कंपनियों की तुलना में थोड़ा ज्यादा है। इसके कारण भरोसा बनाना और कस्टमर बनाना एक चुनौती है। सरकार को ही पहल करनी होगी कि वो इस पर ड्राइवर और कस्टमर का भरोसा बनाए। इस मार्केट को रेगुलेट करने की जरूरत है। जब तक एक तय किराए पर कैब नहीं चलेगी, प्राइवेट कंपनियां मनमानी करती रहेंगी।‘ कैब मार्केट में आने वाले बदलावों पर बर्मन कहते हैं, ‘प्राइवेट कैब कंपनियों ने तो पहले ही रणनीति बदल ली है। अब वे कमीशन के बदले सब्सक्रिप्शन के मॉडल पर आ गए हैं। ज्यादातर ड्राइवर अब हर राइड पर कमीशन नहीं दे रहे हैं। कंपनियां ड्राइवर को एक तय समय के लिए सब्सक्रिप्शन दे रही हैं।‘ ‘इसकी तुलना में भारत टैक्सी के प्रचार के लिए सरकार को आगे आना होगा क्योंकि उसके पास संसाधन है। इसी से भारत टैक्सी का विस्तार हो सकता है। खुद ड्राइवर्स ये काम नहीं कर सकते हैं।‘ देश में 2 लाख करोड़ का टैक्सी मार्केटये सही है कि कैब कंपनियां पहले सिर्फ कमीशन मॉडल पर काम कर रही थीं। हर राइड के किराए पर कंपनियां 15 से 30% तक कमीशन लेती थीं। हालांकि अब सभी कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रही हैं। यानी महीने, हफ्ते या दिन के हिसाब से एक तय सब्सक्रिप्शन राशि देने के बाद ड्राइवर हर राइड का पूरा किराया रख सकते हैंं। जैसे उबर एक दिन के सब्सक्रिप्शन का 129 रुपए ले रही है। इसके बाद कैब ड्राइवर को पूरे दिन की कमाई में कोई कमीशन नहीं देना पड़ेगा। इसी तरह ओला में एक दिन का सब्सक्रिप्शन 149 रुपए का है। इस रिचार्ज के बाद दिन भर का किराया ड्राइवर के पास जाएगा। दूसरी कंपनियां भी यही मॉडल अपना रही हैं। मार्केट रिसर्च कंपनी मॉर्डर इंटेलिजेंस (Mordor Intelligence) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में भारत का कुल टैक्सी मार्केट 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का है। इसमें 65% हिस्सा एप बेस्ड कैब कंपनियों का है। यानी लगभग 1.31 लाख करोड़ रुपए। इसमें भी मुख्य रूप से उबर, ओला और रैपिडो का मार्केट शेयर सबसे बड़ा है। आने वाले सालों में एप बेस्ड राइड का मार्केट और ज्यादा बढ़ने वाला है। भारत टैक्सी के CEO बोले- हमेशा एक जैसा रेट होगाभारत टैक्सी के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) विवेक पांडे बताते हैं कि एप से अभी 4 लाख से ज्यादा ड्राइवर जुड़ गए हैं। वहीं करीब 13 लाख कस्टमर जुड़ चुके हैं। करीब 2-3 लाख लोग रोज भारत टैक्सी एप पर आकर सर्च कर रहे हैं। ड्राइवर्स को होने वाले फायदों पर विवेक कहते हैं, ‘सभी ड्राइवर्स धीरे-धीरे सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजना के तहत लाए जाएंगे, जैसे- आयुष्मान योजना, मुद्रा योजना। उन्हें जीरो कमीशन के अलावा इन सबका फायदा मिलेगा। कभी किसी की आईडी ब्लॉक नहीं होगी, उनकी सुनवाई होगी क्योंकि बोर्ड मेंबर में ड्राइवर भी हैं।‘ ‘दूसरा पक्ष कस्टमर का है। उन्हें सही रेट में कैब मिलेगी। ये नहीं होगा कि ज्यादा कस्टमर को लाने के लिए आज रेट घटा देंगे और फिर बढ़ा देंगे।‘ बैलेंस रेट रखकर कस्टमर लाने की कोशिशमार्केट कॉम्पिटिशन को लेकर विवेक कहते हैं, ‘अभी हम ड्राइवर से रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि रेट को लेकर परेशान ना हों क्योंकि अभी हमें कस्टमर लाने हैं। रेट ज्यादा कर देंगे तो कस्टमर नहीं आएंगे। इसलिए हम कहीं दावा नहीं कर रहे हैं कि भारत टैक्सी सबसे सस्ती है।‘ ‘हम एक बैलेंस कीमत रखने की कोशिश कर रहे हैं। कस्टमर से भी अपील है कि वे इसका इस्तेमाल करें, इसका पैसा किसी कंपनी के पास या बाहर के देशों में नहीं जा रहा है। बड़ी कंपनियां अनलिमिटेड समय तक तो डिस्काउंट देकर बुकिंग नहीं लेगी, इससे उनका बिजनेस भी नहीं चलेगा।‘ ‘एक साल के अंदर बड़े शहरों में भारत टैक्सी उपलब्ध होगी और तीन साल में ये सर्विस पूरे देश में शुरू हो जाएगी।‘ ड्राइवर्स के 'मालिक' बनने पर वे कहते हैं, ‘कोई भी ड्राइवर 500 रुपए तक के अधिकतम 5 शेयर खरीद सकते हैं। कल को अगर कंपनी को मुनाफा होता है, तो इसमें ड्राइवर की भी हिस्सेदारी होगी। वहीं इंश्योरेंस के लिए भी बहुत ही कम पैसे देने होंगे।‘ महिला ड्राइवर्स को लेकर विवेक कहते हैं कि अभी उस पर काम किया जा रहा है, जब एक साथ कई सारी महिला ड्राइवर्स हो जाएंगी तो ये विकल्प भी खोला जाएगा। अगर अभी खोला जाएगा और कस्टमर को ड्राइवर नहीं मिलेगी तो दिक्कत होगी। सभी के लिए एकसमान रेट की मांग पर विवेक कहते हैं कि ट्रांसपोर्ट राज्य सरकारों का विषय है, अगर सरकार किराया तय करती है तो हम उसका पालन जरूर करेंगे।………….. ये खबर भी पढ़ें… न बजट में कुछ-न कंपनियों ने सुनी; क्या हम रोबोट 3 फरवरी को ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स ने दिल्ली में हड़ताल की। इसमें शामिल अर्बन कंपनी की वर्कर नेहा (बदला हुआ नाम) 7-8 सालों से गुरुग्राम में काम कर रही हैं। वे कहती हैं, ‘12-13 घंटे काम करने के बाद 20-25 हजार रुपए बचते हैं। कंपनी 250 करोड़ का टर्नओवर कर रही है, लेकिन हम लोगों को नोचा जा रहा है।‘ पढ़िए पूरी खबर…
इस बार ईरान का परमाणु कवच तोड़ना मुश्किल? तेहरान में खलीफा का सबसे बड़ा ऑपरेशन
Israel Iran tension: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने अपने बयान में ईसाइयों की पवित्र धार्मिक पुस्तक बाइबल का जिक्र करते हुए कहा, यह शांति का नहीं युद्ध का समय है. इसीलिए माना जा रहा है नेतन्याहू, युद्ध की तारीख तय करने के मकसद से ही वॉशिंगटन जा रहे हैं और ईरान को भी हमले की पूरी आशंका है.
कनाडा में सिख फॉर जस्टिस पर बैन, SFJ आतंकी संगठन घोषित; डोभाल के दौरे के बाद बड़ी कूटनीतिक कामयाबी
SFJ Ban: कनाडा की सरकार ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए भारत में प्रतिबंधित टेरर ऑर्गेनाइजेशन संगठन सिख फॉर जस्टिस को आतंकी संगठन घोषित किया है.सिख फॉर जस्टिस (Sikhs for Justice case) पंजाब समेत अन्य जगहों पर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल है.
बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे. साल 2024 में हुई हिंसा और शेख हसीना के पीएम पद छोड़ने के बाद यह पहला चुनाव है. बांग्लादेश में ये चुनाव ऐसे समय पर हो रहा है, जब देश में अल्पसख्यकों के साथ तमाम हिंसा की खबरे आ रही हैं.
क्या ब्रिटेन की अलगी PM होगी मुस्लिम महिला? जानें कौन हैं शबाना महमूद, जो रच सकती हैं इतिहास
Who is Shabana Mahmood: ईरान में जारी तनाव के बीच ब्रिटेन में PoK मूल की मुस्लिम महिला शबाना महमूद के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में इस खबर में हम आपको शबाना महमूद के बारे में डिटेल में बताएंगे..
Gang Blow Up Cash Van In Italy: इटली में कुछ चोरों ने पुलिस अधिकारियों का वेश धारण एक कैश वैन पर अचानक हमला कर दिया. इसका वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है.
17 फरवरी को भारतीय दौरे पर होंगे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इन अहम मुद्दों पर होगी बात
Emmanuel Macron India Visit: फांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वे पीएम मोदी के साथ रक्षा, AI और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग पर बात करेंगे.
दीपू दास के परिवार को बांग्लादेश सरकार की ओर से मदद का ऐलान, परिजनों को मिलेगी 29 लाख की आर्थिक मदद
Bangladesh Mob Lynching: बांग्लादेश में लिंचिंग में मारे गए दीपू दास के परिवार को सरकार द्वारा 29 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है. ये दर्दनाक घटना पिछले साल 18 दिसंबर का घटित हुई है, जिसमें दीपू दास को पीट-पीटकर और जालकर मार दिया गया था.
ट्रंप ने किया था जीरो टैरिफ का क्लेम, व्हाइट हाउस की फैक्टशीट से क्या दिख रहा है?
भारत में अमेरिका के साथ हुई डील को लेकर मचा कोहराम थमने का नाम नहीं ले रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार देश के कृषि और डेयरी सेक्टर के सेफ होने का दावा कर रहे हैं.
हांगकांग एयरपोर्ट पर भीषण आग से हड़कंप, तीन बोर्डिंग ब्रिज किया गया बंद; यात्रियों में मची अफरा-तफरी
हांग कांग से एक बड़ी घटना की सामने आई है. यहां पर हांगकांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल एक पर भीषण आग लग गई. आग के कारण वहां पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया. एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से बताया गया कि ये घटना मंगलवार दोपहर तीन बजे की है.
Yunus Trump secret Trade Deal: अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता हुआ है, जिसमें अमेरिका ने ढाका के कुछ टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स पर टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया है.
बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने को हैं. बावजूद इसके वहां पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का सिलसिला जारी है. इस कड़ी में एक और हिंदू की बेरहमी से हत्या कर दी गई है.
US President Trump plans to visit Beijing:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल में चीन की राजधानी बीजिंग का दौरा करेंगे. जैसे ही यह खबर सामने आई, हर कोई हैरान हो गया. हैरान होने की बात ही है, यही ट्रंप कभी चीन को सबसे बड़ा दुश्मन बताते थे. और कोई दूसरा देश चीन चला जाए तो डराते-धमकाते थे. टैरिफ जंग के बीच ट्रंप का यह कदम बहुत चौंकाने वाला माना जा रहा है. जानें पूरी रिपोर्ट.
US President Trump plans to visit Beijing:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल में चीन की राजधानी बीजिंग का दौरा करेंगे. जैसे ही यह खबर सामने आई, हर कोई हैरान हो गया. हैरान होने की बात ही है, यही ट्रंप कभी चीन को सबसे बड़ा दुश्मन बताते थे. और कोई दूसरा देश चीन चला जाए तो डराते-धमकाते थे. टैरिफ जंग के बीच ट्रंप का यह कदम बहुत चौंकाने वाला माना जा रहा है. जानें पूरी रिपोर्ट.
अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौते में टैरिफ घटाया गया, कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनूस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि यह समझौता अप्रैल 2025 से चल रही करीब नौ महीने की बातचीत का परिणाम है। युनूस के अनुसार, अमेरिका ने ऐसी व्यवस्था पर सहमति दी है जिसके तहत अमेरिकी कपास और सिंथेटिक फाइबर से बने बांग्लादेशी परिधानों पर कोई जवाबी टैरिफ नहीं लगाया जाएगा।
कारिना शुलियाक मूल रूप से बेलारूस की रहने वाली हैं और पेशे से डेंटिस्ट बताई जाती हैं। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों में उन्हें एपस्टीन की “प्रेमिका” के रूप में उल्लेखित किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कारिना की एपस्टीन से पहली मुलाकात वर्ष 2010 में बेलारूस की राजधानी मिंस्क में हुई थी।
Nepal Elections: नेपाल में भी बजी रणभेरी, कोली के गढ़ झापा में बालेन ने गाड़ा झंडा
Nepal Election Highprofile Seat Jhapa:नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है. झापा में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह और अपदस्थ पीएम केपी शर्मा ओली को सीधी चुनौती दे रहे हैं. दोनों ने जोरदार प्रचार शुरू किया है, जबकि क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

