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OpenAI और Anthropic के AI मॉडल ने परीक्षण के दौरान कंप्यूटर प्रणालियों में लगाई सेंध

( वि5 आवश्यक सुधार के साथ रिपीट)(फ्रांसिस्को बेइलो, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी)सिडनी, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अग्रणी दो कंपनियों ने पिछले 10 दिनों के भीतर खुलासा किया है कि परीक्षण के दौरान उनके कुछ शक्तिशाली और अर्ध-स्वायत्त एआई मॉडल चार अलग-अलग घटनाओं में वास्तविक कंप्यूटर प्रणालियों में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर गए।ये घटनाएं केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं थीं। कई मामलों में एआई मॉडलों ने यह भी पहचान लिया कि वे वास्तविक प्रणालियों तक पहुंच चुके हैं, लेकिन केवल एक मॉडल ने यह समझने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी।विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अत्याधुनिक एआई मॉडलों का परीक्षण अब पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया नहीं रह गया है और इन्हें विकसित करने वाली कंपनियों को इनकी संभावित खतरनाक क्षमताओं को सुरक्षित रखने के लिए अधिक सख्त उपाय करने होंगे। ----- जब परीक्षण वास्तविक दुनिया तक पहुंच गया -----पहला मामला चैटजीपीटी विकसित करने वाली कंपनी ओपनएआई से सामने आया। कंपनी ने बताया कि अधिकतम साइबर क्षमताओं के परीक्षण के दौरान उसके कुछ नए एआई मॉडलों ने एक अज्ञात सुरक्षा खामी का पता लगाकर उस पृथक परीक्षण वातावरण से बाहर इंटरनेट तक पहुंच बना ली, जहां उन्हें सीमित रखा गया था।इसके बाद इन मॉडलों ने चोरी किए गए लॉग-इन विवरण और अन्य तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर मुक्त स्रोत एआई मंच ‘हगिंग फेस’ के सर्वरों तक पहुंच बनाई, ताकि उन्हें दिए गए परीक्षण कार्यों के समाधान खोजे जा सकें। ओपनएआई को इस सेंधमारी की जानकारी तब मिली, जब हगिंग फेस ने कई दिन पहले ही इसका पता लगाकर इसे रोक दिया था।कुछ ही दिनों बाद दूसरी प्रमुख एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी अपने साइबर सुरक्षा परीक्षणों की समीक्षा की। कंपनी ने पाया कि उसके तीन अलग-अलग ‘क्लॉड’ मॉडल, जिन्हें पूरी तरह पृथक वातावरण में रखा जाना था, गलती से इंटरनेट से जुड़ गए थे।इन मॉडलों को यह बताया गया था कि उनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और वे केवल एक काल्पनिक परीक्षण में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद एक मॉडल ने एक वास्तविक कंपनी के डेटाबेस से लॉग-इन जानकारी और अन्य आंकड़े प्राप्त कर लिए। दूसरे मॉडल ने एक हानिकारक सॉफ्टवेयर तैयार कर उसे सार्वजनिक कर दिया, जिसे एक वास्तविक साइबर सुरक्षा कंपनी ने डाउनलोड कर चलाया।रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि एआई मॉडलों की आंतरिक तर्क प्रक्रिया से पता चला कि एक मॉडल यह जान चुका था कि वह वास्तविक प्रणाली तक पहुंच गया है, लेकिन बाद में उसने स्वयं को यह विश्वास दिलाया कि वह अब भी एक काल्पनिक परीक्षण का हिस्सा है।एक अन्य मॉडल ने भी यह समझा कि लक्ष्य वास्तविक है, लेकिन उसने अपनी गतिविधि जारी रखी। कुछ परीक्षणों में उसने यह मान लिया कि संबंधित कंपनी भी परीक्षण प्रक्रिया का ही हिस्सा होगी। केवल तीसरे और सबसे उन्नत मॉडल ने वास्तविक प्रणाली तक पहुंचने का निष्कर्ष निकलने के बाद अपनी कार्रवाई रोक दी।एंथ्रोपिक के अनुसार, एआई मॉडलों के लिए यह समझना आवश्यक है कि वे किस परिस्थिति में काम कर रहे हैं, ताकि वे यह तय कर सकें कि कौन-से कदम उठाना उचित है। इन घटनाओं में उनकी परिस्थिति की समझ ही गलत साबित हुई। ----- सुरक्षा परीक्षण भी जोखिमपूर्ण -----दोनों कंपनियों की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि एआई मॉडलों की सुरक्षा जांच के लिए किए जा रहे परीक्षण भी अब पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित नहीं रह गए हैं। ये स्वयं ऐसे जोखिमपूर्ण अभियान बन चुके हैं, जिनसे वास्तविक दुनिया में नुकसान हो सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि इन मॉडलों की क्षमताएं अत्यंत तेज गति से बढ़ रही हैं। ऐसे में यह कहना कठिन है कि वे संभावित रूप से खतरनाक नहीं हैं, खासकर तब जब कंपनियों, सरकारों और अन्य संस्थानों के संवेदनशील आंकड़ों पर साइबर हमले पहले से ही गंभीर चुनौती बने हुए हैं।वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम के हालिया अनुमान के अनुसार, इस वर्ष एआई की मदद से किए जाने वाले साइबर हमलों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है, जबकि एक औसत डेटा सेंधमारी की लागत लगभग 50 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।एआई कंपनियों का मानना है कि उनकी तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित और इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए दो प्रमुख शर्तें आवश्यक हैं। पहली, एआई की वास्तविक नुकसान को पहचानने और समय रहते रुकने की क्षमता उतनी ही तेजी से विकसित हो, जितनी तेजी से उसकी नुकसान पहुंचाने की क्षमता बढ़ रही है। दूसरी, मॉडलों में लगाए गए सुरक्षा निर्देशों की वे हर स्थिति में सही और एक समान तरीके से व्याख्या करें, ताकि उन्हें ऐसे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल न किया जा सके जिनकी उनके निर्माताओं ने कल्पना भी न की हो।हालांकि हालिया घटनाओं ने इन दोनों धारणाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनियों के अपने परीक्षणों में यह सामने आया कि कुछ मॉडल स्पष्ट संकेत मिलने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका लक्ष्य वास्तविक है। इसके अलावा मुक्त स्रोत एआई मॉडलों से सुरक्षा प्रतिबंध हटाने के लिए तकनीकी उपायों पर काम करने वाला एक सक्रिय समुदाय भी मौजूद है। ----- भविष्य की नई चुनौतियां -----विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बहु-एजेंट एआई प्रणालियां और बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इनमें कई एआई मॉडल आपस में मिलकर काम करते हैं और उनके बीच होने वाली पारस्परिक गतिविधियों को नियंत्रित करना कहीं अधिक कठिन होता है।ऐसी प्रणालियों पर हुए शोध बताते हैं कि इनमें मॉडलों के बीच समन्वय की कमी, आपसी मिलीभगत और एक गलती के दूसरे मॉडल तक फैलने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन जोखिमों का अनुमान केवल प्रत्येक मॉडल का अलग-अलग परीक्षण करके नहीं लगाया जा सकता।लेख में विज्ञान कथा लेखक आइजैक एसीमोव के वर्ष 1957 के उपन्यास ‘द नेकेड सन’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें रोबोटों को मनुष्यों को नुकसान न पहुंचाने के लिए प्रोग्राम किया गया था, लेकिन उनकी परिस्थिति की समझ में बदलाव कर उन्हें अनजाने में हत्या में सहयोग करने के लिए इस्तेमाल कर लिया गया। ----- आगे क्या? -----विशेषज्ञों का मानना है कि एआई कंपनियों को अपने मॉडलों के परीक्षण के दौरान कहीं अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। साथ ही उन्हें यह भरोसा भी दिलाना होगा कि उनकी प्राथमिकता केवल बाजार या भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करना नहीं, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करना है।लेख के अनुसार, एआई तकनीक के विकास में व्यक्तियों, समाज और पर्यावरण की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। फिलहाल एआई के नियमन और शासन को लेकर ऐसी व्यापक और सहभागी व्यवस्था का अभाव है, जिसमें विभिन्न पक्ष मिलकर यह तय कर सकें कि तकनीकी प्रगति के लिए कितना जोखिम स्वीकार्य है। विशेषज्ञ इसे गंभीर चिंता का विषय मानते हैं।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 4:07 pm

'स्वतंत्रता दिवस भी घोषित, संविधान भी आ गया....' बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के दावे से PAK की बढ़ी चिंता, नए संविधान में हिंदी और हिंदुओं का भी जिक्र

'स्वतंत्रता दिवस भी घोषित,संविधान भी आ गया....'बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के दावे से PAK की बढ़ी चिंता,नए संविधान में हिंदी और हिंदुओं का भी जिक्र

समाचार नामा 4 Aug 2026 4:00 pm

जगद्गुरु कृपालु विवि कटक में शैक्षिक सत्र शुरू

कटक। राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन और प्रथम शिक्षण सत्र का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में कहाकि शिक्षा केवल ज्ञान एवं रोज़गार अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र के समृद्ध भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने...

स्वतंत्र आवाज़ 4 Aug 2026 3:23 pm

पाकिस्तान ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका! ईरान-अमेरिका वार्ता की मध्यस्थता से हुआ बाहर, अब कौन कराएगा डील?

पाकिस्तान ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका! ईरान-अमेरिका वार्ता की मध्यस्थता से हुआ बाहर, अब कौन कराएगा डील?

समाचार नामा 4 Aug 2026 3:20 pm

पीओके में प्रेस पर शिकंजा: पत्रकार हिरासत में और इंटरनेट भी बंद, मीडिया संगठन ने उठाई आवाज

पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) लगातार हुक्मरानों और सुरक्षा बलों की बर्बरता का शिकार हो रहा है। इन दिनों तनाव चरम पर है। इस बीच मीडिया की आवाज उठाने वाले स्वतंत्र पत्रकार संगठन ने कब्जे वाले इस क्षेत्र में मीडिया कर्मियों की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। संगठन ने इंटरनेट ब्लैकआउट, दूरसंचार सेवाओं पर रोक, रिपोर्टिंग पर पाबंदी और पत्रकारों को हिरासत में लेने या उन्हें अगवा करने जैसी घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया है।

देशबन्धु 4 Aug 2026 3:16 pm

बस एक 'गलती' मानने से टल गई नई जंग? यूक्रेन को लेकर ईरान का चौंकाने वाला दावा

ईरान के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि कैस्पियन सागर में एक ईरानी जहाज पर हुए हमले के बाद तेहरान यूक्रेन के अंदर तीन लक्ष्यों पर जवाबी हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार था, लेकिन...

लाइव हिन्दुस्तान 4 Aug 2026 2:44 pm

ईरानी हुकूमत में आ गई दरार! मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति पेजेशकियन को दी अंतिम चेतावनी

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बीच अनबन की खबरों सामने आई थीं। अब खबर है कि ईरानी सुप्रीम लीडर ने ईरानी राष्ट्रपति को आखिरी चेतावनी दे दी है।

लाइव हिन्दुस्तान 4 Aug 2026 2:28 pm

81 साल की महिला को 24 साल के युवक से हुआ प्यार, एयरपोर्ट पर पहली मुलाकात का वीडियो वायरल

Ajab Gajb News: फ्रांस की 81 वर्षीय महिला और सेनेगल के 24 वर्षीय युवक की ऑनलाइन शुरू हुई प्रेम कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

दैनिक जागरण 4 Aug 2026 2:28 pm

PoK की सच्चाई से घबराया पाकिस्तान... अल जजीरा की वेबसाइट को किया बैन, येलो जर्नलिज्म का लगाया आरोप

कतर आधारित अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थान 'अल जजीरा' द्वारा गुलाम कश्मीर में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और हालिया चुनावी गतिविधियों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग के बाद देश में उसकी आधिकारिक वेबसाइट की पहुंच (Access) को बाधित कर दिया गया है।

दैनिक जागरण 4 Aug 2026 2:27 pm

हिंदू संत चिन्मय दास की रिहाई के बाद बांग्लादेश की नई मांग: भारत से क्या है कनेक्शन और शेख हसीना से क्यों जुड़ा है पूरा मामला

पड़ोसी देश बांग्लादेश में मचे राजनीतिक घमासान के बीच एक बार फिर भारत और ढाका के रिश्तों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। प्रख्यात हिंदू संत चिन्मय दास की जमानत और रिहाई के ठीक बाद बांग्लादेश की ओर से भारत के सामने एक नया दावा पेश किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के तार सीधे तौर पर देश छोड़कर वहां शरण लिए हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।चिन्मय दास की जमानत और बांग्लादेश में गरमाई सियासतबांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय दास की गिरफ्तारी और उसके बाद कानूनी लड़ाई ने दुनिया भर का ध्यान खींचा था। अब जैसे ही उन्हें अदालत से जमानत मिली है, देश की राजनीति और कट्टरपंथी संगठनों की प्रतिक्रियाएं तेजी से बदल रही हैं। इस बीच अंतरिम सरकार और प्रशासनिक हलकों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि वे इस मामले का इस्तेमाल कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं, जिससे भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा होती दिख रही है।शेख हसीना से कैसे जुड़ा है इस नई मांग का सीधा कनेक्शन?संत चिन्मय दास की रिहाई के तुरंत बाद बांग्लादेशी प्रशासन और वहां के राजनीतिक हलकों से जिस तरह की मांगें उठ रही हैं, उसका मुख्य केंद्रबिंदु पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भारत से सौंपने का दबाव बनाना है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार लगातार यह जताना चाहती है कि वह भारत के साथ अपने कूटनीतिक समीकरणों को अपनी शर्तों पर चलाना चाहती है। हालांकि, भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि शरण और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मामलों में नियमों का पालन किया जाएगा, लेकिन इस नई मांग ने दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट बढ़ा दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Aug 2026 2:13 pm

पाकिस्तान से आज़ादी का बड़ा ऐलान: बलूचिस्तान ने खुद को घोषित किया स्वतंत्र देश

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक मानचित्र से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान के दमनकारी शासन और सालों के अत्याचार से तंग आकर बलूचिस्तान ने खुद को आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान से आज़ाद घोषित कर दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं, बलूचिस्तान के नेताओं ने अपनी स्वतंत्रता का दिन भी तय कर लिया है और एक नया संविधान भी जारी कर दिया है, जिसकी सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी जड़ें और भावनाएं भारत, यानी हिंदी और हिंदुओं की संस्कृति व सभ्यता से गहराई से जुड़ी हुई हैं।पाकिस्तान के अत्याचारों से तंग आकर बलूचिस्तान ने उठाया ऐतिहासिक कदमबलूचिस्तान के लोगों ने दशकों से पाकिस्तानी सेना और सरकार द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के हनन, संसाधनों की लूट और सैन्य जुल्म के खिलाफ खुली बगावत कर दी है। बलूच अवाम का कहना है कि उन्हें जबरन पाकिस्तान का हिस्सा बनाया गया था और तब से लेकर आज तक उन्हें केवल शोषण ही मिला है। इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद से इस्लामाबाद के हुक्मरानों की नींद उड़ गई है, क्योंकि यह घटना पाकिस्तान के टूटने और उसकी आंतरिक कमज़ोरी को दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब कर रही है।नए संविधान में क्या है खास और क्यों चर्चा में है हिंदी-हिंदुओं से जुड़ाव?बलूचिस्तान द्वारा जारी किए गए इस नए संविधान की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और क्षेत्रीय सद्भाव को सर्वोपरि रखा गया है। जानकारों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संविधान की रूपरेखा और वैचारिक ताने-बाने में प्राचीन भारतीय संस्कृति, सभ्यता और ऐतिहासिक साझी विरासत से जुड़ाव साफ झलकता है, जिससे बलूच नेतृत्व इस क्षेत्र में एक शांतिप्रिय, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील राष्ट्र की स्थापना करना चाहता है। पाकिस्तान के लिए यह भू-राजनीतिक मोर्चे पर अब तक का सबसे बड़ा और करारा झटका साबित हो रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Aug 2026 2:03 pm

ट्रंप का पाकिस्तान को बड़ा झटका: 'शांतिदूत' का तमगा छीना, मुनीर और शहबाज की बढ़ी मुश्किलें

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से पाकिस्तान के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और बुरी खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को तगड़ा गच्चा देते हुए उसे मिलने वाले 'शांतिदूत' यानी पीसमेकर के बैज या तमगे से वंचित कर दिया है। ट्रंप के इस अप्रत्याशित फैसले के बाद इस्लामाबाद में हड़कंप मच गया है। अमेरिका के इस कड़े रुख के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बुरे दिन आधिकारिक रूप से शुरू होते नजर आ रहे हैं, जिससे उनकी वैश्विक साख को तगड़ा झटका लगा है।ट्रंप के इस फैसले से पाकिस्तान की कूटनीति को क्यों लगा बड़ा आघात?अमेरिका द्वारा उठाया गया यह कदम पाकिस्तान की कूटनीति के लिए एक बड़े आघात के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान की सरकार और सेना अक्सर दुनिया के सामने अपनी छवि एक शांतिप्रिय देश के रूप में पेश करने की कोशिश करती रही है, लेकिन वाशिंगटन के इस कड़े फैसले ने उनकी पोल खोल दी है। ट्रंप प्रशासन के इस रुख से साफ हो गया है कि अमेरिका अब दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की दोहरी नीतियों और आतंकवाद को लेकर किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में बिल्कुल नहीं है।शहबाज और मुनीर के लिए आगे क्यों बढ़ेंगी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुश्किलें?पाकिस्तान के हुक्मरान शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर पहले से ही देश के भीतर गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं। ऐसे में अमेरिका की तरफ से मिला यह करारा झटका उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फेर गया है। जब दुनिया के बड़े देश इस तरह से दूरी बनाने लगते हैं, तो विदेशी मदद और कूटनीतिक समर्थन मिलना लगभग बंद हो जाता है, जिससे आने वाले समय में पाकिस्तान की मुश्किलें कई गुना बढ़ना तय माना जा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Aug 2026 2:01 pm

ड्रैगन की नई चाल: भारत के चिकन नेक को घेरने की साजिश, बांग्लादेश को दिए राफेल से टक्कर लेने वाले J-10CE फाइटर जेट्स

सीमाओं पर लगातार तनाव बढ़ाने वाला चीन अब भारत के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र 'चिकन नेक' यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास अपनी चालें चलने लगा है। ड्रैगन ने पड़ोसी देश बांग्लादेश को अपने आधुनिक और खतरनाक J-10CE फाइटर जेट्स देने का बड़ा लालच दिया है। खास बात यह है कि ये वही चीनी जेट्स हैं जिन्हें लेकर यह दावा किया जाता है कि वे भारत के पास मौजूद राफेल विमानों को भी कड़ी टक्कर दे सकते हैं। चीन की इस हरकत से भारतीय रक्षा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और सामरिक विशेषज्ञों ने इस पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है।क्या है चीन की 'चिकन नेक' को घेरने की खतरनाक रणनीति?पश्चिम बंगाल में मौजूद सिलीगुड़ी कॉरिडोर या 'चिकन नेक' भारत का वह भूभाग है जो पूर्वोत्तर के सात राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। भू-राजनीतिक रूप से यह भारत का सबसे संवेदनशील रक्षा गलियारा माना जाता है। चीन लंबे समय से इस क्षेत्र के आसपास अपनी पकड़ मजबूत करने की फिराक में रहता है। बांग्लादेश को J-10CE फाइटर जेट्स देने का यह प्रस्ताव सीधे तौर पर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी रणनीतिक घेराबंदी माना जा रहा है, जिससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ना लाजिमी है।भारतीय वायुसेना के राफेल के सामने कितने ताकतवर हैं J-10CE जेट्स?चीन द्वारा बांग्लादेश को ऑफर किए जा रहे J-10CE एक 4.5 जनरेशन के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट हैं, जिन्हें पाकिस्तान की वायुसेना पहले से ही इस्तेमाल कर रही है। चीन और उसके समर्थक इन विमानों को आधुनिक रडार और मिसाइल क्षमताओं से लैस बताते हैं। हालांकि, भारतीय वायुसेना के पास मौजूद राफेल फाइटर जेट्स तकनीक, मारक क्षमता और युद्ध कौशल के मामले में इनसे कहीं ज्यादा आगे और भरोसेमंद हैं। इसके बावजूद, भारत के पड़ोसी मुल्क में इन लड़ाकू विमानों की मौजूदगी से क्षेत्रीय संतुलन पर असर पड़ सकता है, जिसका जवाब देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Aug 2026 1:59 pm

मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले अमेरिका के एक रिटायर्ड जनरल और डिफेंस एनालिस्ट ने पाकिस्तान और कतर पर आरोप लगाया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर उनकी भूमिका प्रभावित रही है। उनका आरोप है कि दोनों देश अमेरिका के बजाय ईरान का पक्ष लेते हैं। रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान और कतर को चुनने से ईरान के साथ अमेरिका की कूटनीति पर असर पड़ा है और इससे तेहरान के इरादों को समझने में गलतफहमी पैदा हुई है। कीन की ये टिप्पणियां तब आई हैं जब ट्रंप ने तेहरान के साथ कूटनीतिक कोशिशों को फिर से शुरू करने के लिए ईरान पर बड़े सैन्य हमले की योजना को रोकने का फैसला किया है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री, भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान कीन 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर' के चेयरमैन हैं, 'सेक्रेटरी ऑफ़ डिफेंस पॉलिसी बोर्ड' के सदस्य हैं, चार अमेरिकी रक्षा मंत्रियों को सलाह दे चुके हैं और 'नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी' पर 2018 और 2022 के कांग्रेसनल कमीशन में भी काम कर चुके हैं। कीन ने कहा मिडिल ईस्ट में हमारी इंटेलिजेंस एजेंसियों और सभी संबंधित पक्षों को यह अच्छी तरह पता है कि पाकिस्तान और कतर की स्थिति संदिग्ध है, क्योंकि वे अमेरिका के बजाय ईरान का पक्ष लेते हैं। यह बात पुरानी है, कोई नई नहीं। फिर भी, वे ही मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि ईरान के असली इरादों के बारे में अमेरिका को गुमराह करने में उनके प्रभाव की भी भूमिका रही है। रिटायर्ड जनरल ने सऊदी अरब के रवैये की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि रियाद ने बार-बार वॉशिंगटन को ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई न करने की सलाह दी थी। कीन के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरबेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि ऐसा ऑपरेशन सफल नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: Donald Trump के हाथ से निकल गई ये जंग? ईरान ने फिर ठोका अमेरिका का MQ-9 उन्होंने आगे दावा किया कि सऊदी अरब ने लगातार अमेरिका को ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया। कीन ने कहा सऊदी अरब मध्य पूर्व क्षेत्र को ईरान की आक्रामकता से मुक्त कराने के लिए कोई कुर्बानी देने को तैयार नहीं है। यही वह सच्चाई है जो हम यहां होते हुए देख रहे हैं। कीन ने यह भी आरोप लगाया कि सऊदी अरब ईरान का सामना करने का बोझ अमेरिका और इज़राइल पर डालना चाहता था, जबकि वह खुद अपने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान या जान-माल के नुकसान का जोखिम नहीं उठाना चाहता था।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 1:51 pm

OpenAI और Anthropic के AI मॉडल परीक्षण के दौरान वास्तविक प्रणालियों में घुसे

(फ्रांसिस्को बेइलो, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी)सिडनी, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अग्रणी दो कंपनियों ने पिछले 10 दिनों के भीतर खुलासा किया है कि परीक्षण के दौरान उनके कुछ शक्तिशाली और अर्ध-स्वायत्त एआई मॉडल चार अलग-अलग घटनाओं में वास्तविक कंप्यूटर प्रणालियों में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने में सफल रहे।ये घटनाएं केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं थीं। कई मामलों में एआई मॉडल यह पहचानने में भी सफल रहे कि वे वास्तविक प्रणालियों तक पहुंच चुके हैं, लेकिन केवल एक मॉडल ने यह समझने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी।विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अत्याधुनिक एआई मॉडलों का परीक्षण अब पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया नहीं रह गया है और इन्हें विकसित करने वाली कंपनियों को इनकी संभावित खतरनाक क्षमताओं को सुरक्षित रखने के लिए अधिक सख्त उपाय करने होंगे। ----- जब परीक्षण वास्तविक दुनिया तक पहुंच गया -----पहला मामला चैटजीपीटी विकसित करने वाली कंपनी ओपनएआई से सामने आया। कंपनी ने बताया कि अधिकतम साइबर क्षमताओं के परीक्षण के दौरान उसके कुछ नए एआई मॉडलों ने एक अज्ञात सुरक्षा खामी का पता लगाकर उस पृथक परीक्षण वातावरण से बाहर इंटरनेट तक पहुंच बना ली, जहां उन्हें सीमित रखा गया था।इसके बाद इन मॉडलों ने चोरी किए गए लॉग-इन विवरण और अन्य तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर मुक्त स्रोत एआई मंच ‘हगिंग फेस’ के सर्वरों तक पहुंच बनाई, ताकि उन्हें दिए गए परीक्षण कार्यों के समाधान खोजे जा सकें। ओपनएआई को इस सेंधमारी की जानकारी तब मिली, जब हगिंग फेस ने कई दिन पहले ही इसका पता लगाकर इसे रोक दिया था।कुछ ही दिनों बाद दूसरी प्रमुख एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी अपने साइबर सुरक्षा परीक्षणों की समीक्षा की। कंपनी ने पाया कि उसके तीन अलग-अलग ‘क्लॉड’ मॉडल, जिन्हें पूरी तरह पृथक वातावरण में रखा जाना था, गलती से इंटरनेट से जुड़ गए थे।इन मॉडलों को यह बताया गया था कि उनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और वे केवल एक काल्पनिक परीक्षण में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद एक मॉडल ने एक वास्तविक कंपनी के डेटाबेस से लॉग-इन जानकारी और अन्य आंकड़े प्राप्त कर लिए। दूसरे मॉडल ने एक हानिकारक सॉफ्टवेयर तैयार कर उसे सार्वजनिक कर दिया, जिसे एक वास्तविक साइबर सुरक्षा कंपनी ने डाउनलोड कर चलाया।रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि एआई मॉडलों की आंतरिक तर्क प्रक्रिया से पता चला कि एक मॉडल ने सही ढंग से पहचान लिया था कि वह वास्तविक प्रणाली तक पहुंच चुका है, लेकिन बाद में उसने स्वयं को यह विश्वास दिलाया कि वह अब भी एक काल्पनिक परीक्षण का हिस्सा है।एक अन्य मॉडल ने भी यह समझा कि लक्ष्य वास्तविक है, लेकिन उसने अपनी गतिविधि जारी रखी। कुछ परीक्षणों में उसने यह मान लिया कि संबंधित कंपनी भी परीक्षण प्रक्रिया का ही हिस्सा होगी। केवल तीसरे और सबसे उन्नत मॉडल ने वास्तविक प्रणाली तक पहुंचने का निष्कर्ष निकलने के बाद अपनी कार्रवाई रोक दी।एंथ्रोपिक के अनुसार, एआई मॉडलों के लिए यह समझना आवश्यक है कि वे किस परिस्थिति में काम कर रहे हैं, ताकि वे यह तय कर सकें कि कौन-से कदम उठाना उचित है। इन घटनाओं में उनकी परिस्थिति की समझ ही गलत साबित हुई। ----- सुरक्षा परीक्षण भी जोखिमपूर्ण -----दोनों कंपनियों की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि एआई मॉडलों की सुरक्षा जांच के लिए किए जा रहे परीक्षण भी अब पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित नहीं रह गए हैं। ये स्वयं ऐसे जोखिमपूर्ण अभियान बन चुके हैं, जिनसे वास्तविक दुनिया में नुकसान हो सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि इन मॉडलों की क्षमताएं अत्यंत तेज गति से बढ़ रही हैं। ऐसे में यह कहना कठिन है कि वे संभावित रूप से खतरनाक नहीं हैं, खासकर तब जब कंपनियों, सरकारों और अन्य संस्थानों के संवेदनशील आंकड़ों पर साइबर हमले पहले से ही गंभीर चुनौती बने हुए हैं।वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम के हालिया अनुमान के अनुसार, इस वर्ष एआई की मदद से किए जाने वाले साइबर हमलों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है, जबकि एक औसत डेटा सेंधमारी की लागत लगभग 50 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।एआई कंपनियों का मानना है कि उनकी तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित और इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए दो प्रमुख शर्तें आवश्यक हैं। पहली, एआई की वास्तविक नुकसान को पहचानने और समय रहते रुकने की क्षमता उतनी ही तेजी से विकसित हो, जितनी तेजी से उसकी नुकसान पहुंचाने की क्षमता बढ़ रही है। दूसरी, मॉडलों में लगाए गए सुरक्षा निर्देशों की वे हर स्थिति में सही और एक समान तरीके से व्याख्या करें, ताकि उन्हें ऐसे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल न किया जा सके जिनकी उनके निर्माताओं ने कल्पना भी न की हो।हालांकि हालिया घटनाओं ने इन दोनों धारणाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनियों के अपने परीक्षणों में यह सामने आया कि कुछ मॉडल स्पष्ट संकेत मिलने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका लक्ष्य वास्तविक है। इसके अलावा मुक्त स्रोत एआई मॉडलों से सुरक्षा प्रतिबंध हटाने के लिए तकनीकी उपायों पर काम करने वाला एक सक्रिय समुदाय भी मौजूद है। ----- भविष्य की नई चुनौतियां -----विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बहु-एजेंट एआई प्रणालियां और बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इनमें कई एआई मॉडल आपस में मिलकर काम करते हैं और उनके बीच होने वाली पारस्परिक गतिविधियों को नियंत्रित करना कहीं अधिक कठिन होता है।ऐसी प्रणालियों पर हुए शोध बताते हैं कि इनमें मॉडलों के बीच समन्वय की कमी, आपसी मिलीभगत और एक गलती के दूसरे मॉडल तक फैलने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन जोखिमों का अनुमान केवल प्रत्येक मॉडल का अलग-अलग परीक्षण करके नहीं लगाया जा सकता।लेख में विज्ञान कथा लेखक आइजैक एसीमोव के वर्ष 1957 के उपन्यास ‘द नेकेड सन’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें रोबोटों को मनुष्यों को नुकसान न पहुंचाने के लिए प्रोग्राम किया गया था, लेकिन उनकी परिस्थिति की समझ में बदलाव कर उन्हें अनजाने में हत्या में सहयोग करने के लिए इस्तेमाल कर लिया गया। ----- आगे क्या? -----विशेषज्ञों का मानना है कि एआई कंपनियों को अपने मॉडलों के परीक्षण के दौरान कहीं अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। साथ ही उन्हें यह भरोसा भी दिलाना होगा कि उनकी प्राथमिकता केवल बाजार या भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करना नहीं, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करना है।लेख के अनुसार, एआई तकनीक के विकास में व्यक्तियों, समाज और पर्यावरण की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। फिलहाल एआई के नियमन और शासन को लेकर ऐसी व्यापक और सहभागी व्यवस्था का अभाव है, जिसमें विभिन्न पक्ष मिलकर यह तय कर सकें कि तकनीकी प्रगति के लिए कितना जोखिम स्वीकार्य है। विशेषज्ञ इसे गंभीर चिंता का विषय मानते हैं।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 1:19 pm

ट्रंप ने पाकिस्तान की कर दी छुट्टी, ईरान जंग में मध्यस्थ की सूची से नाम गायब; मुनीर-शरीफ की फिर फजीहत

अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग में पाकिस्तान मध्यस्थ बनने के लिए उछल रहा था। इसके लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर ट्रंप की जी हुजूरी भी कर रहे थे। लेकिन कुछ हाथ न लगा।

लाइव हिन्दुस्तान 4 Aug 2026 1:05 pm

पाकिस्तान में 'भारतीय एजेंट़स' का खौफ, अब तक मारे गए लश्कर के 30 से ज्‍यादा कमांडर

रिजवान हनीफ के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों में लश्कर के कई सदस्य मारे गए हैं। उसने पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलाकोट और मुजफ्फराबाद जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए 30 से अधिक आतंकियों की मौत का दावा किया।

देशबन्धु 4 Aug 2026 1:03 pm

सेंट्रल एशिया के खजाने तक पहुंचा भारत, Rare Earth Minerals पर मोदी के जय ने क्या बड़ा गेम कर दिया?

भारत मध्य एशिया के भू-राजनीतिक में अब बड़ा कदम उठा रहा है और आने वाले वक्त में यह पूरी दुनिया की तकनीक और ऊर्जा की तस्वीर बदल देगी। उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव भारत विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात करते नजर आए। इस मुलाकात ने एक नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रख दी है। चाहे वो डिफेंस हो, ट्रेड हो या फिर भविष्य की तकनीक के लिए जरूरी दुर्लभ खनिज भारत और उज़्बेकिस्तान अब एक नई ऊंचाई पर पहुंचने के लिए साथ में तैयार हैं। दरअसल उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव भारत के दौरे पर हैं। जहां पर उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अहम बैठक को अंजाम दिया है। इस मुलाकात की सबसे बड़ी और खास बात जो रही है वो है माइनिंग यानी कि खनन क्षेत्र में दोनों देशों का बढ़ता हुआ सहयोग। बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कह दिया कि अब वक्त आ गया है कि हमारे रिश्तों को कंस्ट्रक्शन, हेल्थ और डिजिटल सेक्टर से आगे बढ़ाकर जमीन के अंदर छिपे हुए खजाने तक ले जाया जाए। इसे भी पढ़ें: 5 अगस्त को दिल्ली से क्या बड़ा ऐलान करेंगी शेख हसीना? भड़क गए तारिक रहमान उज्बेकिस्तान दुर्लभ खनिजों के मामले में बहुत समृद्ध देश है जो स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों और डिफेंस इक्विपमेंट बनाने में काम आता है। भारत अब उज़्बेकिस्तान के साथ मिलकर खनिजों के खनन पर फोकस कर रहा है। इतना ही नहीं उज़्बेकी विदेश मंत्री ने भारतीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के साथ भी मुलाकात की है। और उस मुलाकात के दौरान भी इस बात पर जोर दिया गया कि एग्रीकल्चर और फार्मा के साथ-साथ आईटी और माइनिंग में भी असीम संभावनाएं हैं जिसे दोनों देश एक साथ मिलकर आगे बढ़ाएं। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कुछ कहा है पहले आप वो देखिए। फिलहाल भारत और उज्बेकिस्तान के बीच करीब $1 अरब डॉलर के आसपास का व्यापार होता है। लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नंबर काफी नहीं है और इसे कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका, रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवाल कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर भी गैन चर्चा हुई। इसके अलावा भारत ने अफगानिस्तान की 2027 से 29 की नॉन अलाइनमेंट मूवमेंट की अध्यक्षता का भी समर्थन किया है। वहीं ताशकंद से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत का साथ देने की बात को भी उन्होंने दोहराया है। सबसे अहम बात रही दोनों देशों ने एक साथ मिलकर एक आवाज में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को फिर से पुख्ता किया और पूरी दुनिया को संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। यानी कि रेयर अर्थ से लेकर आतंकवाद तक भारत और उज़्बेकिस्तान अब अपनी साझेदारी को बढ़ाने के लिए तैयार है। उज़्बेकिस्तान के साथ भरोसेमंद दोस्ती को आगे बढ़ाना भारत के लिए बड़ी बात है। मई में भारत और उज्‍बेकिस्तान के बीच नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श का 17वां दौर आयोजित किया गया था। इसमें व्यापार और निवेश, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा हुई थी। दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया था।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 12:53 pm

Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका, रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवाल

नेपाल में इस वक्त चीनी चीनी नहीं बल्कि सोना बन चुकी है। जिस चीनी से चाय और मिठाइयां होती है मीठी उसकी कड़वाहट ने पूरे नेपाल में हड़कंप मचा दिया। आलम यह है कि दुकानों से चीनी गायब हो रही है और जो मिल रही हैं उसके दाम आसमान छू रहे हैं। दरअसल कहानी शुरू होती है भारत के एक बड़े फैसले से। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश यानी हमारे भारत ने घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए चीनी के निर्यात यानी एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया। यह बैन मई के महीने में लगाया गया था। जो फिलहाल सितंबर 2026 तक या फिर अगले आदेश तक जारी रहेगा। भारत ने यह फैसला क्यों लिया यह जान लीजिए। दरअसल अलनीनो के चलते सूखे की आशंका और गन्ने की कम पैदावार को देखते हुए मोदी सरकार अपनी जनता के लिए स्टॉक सुरक्षित रखना चाहती थी। लेकिन भारत का यह सुरक्षा कवच नेपाल के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया। इसे भी पढ़ें: Nepal Violence : सड़कों पर उतरे हिंदू, नेपाल छोड़कर भागने लगे मुसलमान! नेपाल में चीनी की कीमतों का बड़ा धमाका दरअसल जैसे ही भारत से सप्लाई रुकी नेपाल के बाजारों में चीनी की कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर चली गई। जो चीनी कुछ समय पहले तक ₹95 प्रति किलो मिल रही थी उसकी कीमत अब ₹110 के पार जा चुकी है और यह सब बस शुरुआत है। नेशनल कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष प्रेमलाल कहते हैं कि सरकार इस पूरे संकट पर ऐसे खामोश है जैसे कुछ हुआ ही नहीं। अब जब सितंबर-अक्टूबर के बड़े त्यौहार, दशहरा, त्यौहार और छठ करीब आ रहे हैं तो सप्लाई मैनेजमेंट ना होने से कालाबाजारी और कीमतें और बढ़ने का डर सता रहा है। लेकिन दोस्तों, जहां कमी होती है, वहीं गैरकानूनी रास्ते भी खुल जाते हैं। नेपाल की दक्षिणी सीमा पर अब चीनी की तस्करी जोरों शोरों पर है। नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल यानी एपीएफ के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। मध्य जून से मध्य जुलाई के बीच चीनी की जप्त्ती दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई है। पुलिस ने महज एक महीने में सीमा से करीब 10 टन तस्करी की चीनी जप्त की है। जिसकी कीमत लाखों में है। छापा जैसे जिलों में तो हर दिन छापेमारी हो रही है। तस्कर चोरी छिपे भारतीय चीनी को नेपाल पहुंचा रहे हैं क्योंकि वहां इसकी भारी डिमांड है। लेकिन यह तस्करी सिर्फ राजस्व का नुकसान नहीं कर रही है। बल्कि बिना किसी जांच के आ रही यह चीनी स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे भी पढ़ें: नेपाल curfew में ढील: मधेश और कोशी प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात सुधरे क्या कहता है आंकड़ों का गणित नेपाल की डिमांड और सप्लाई की गणित। दरअसल दोस्तों नेपाल में हर महीने 20,000 से 25,000 टन चीनी की जरूरत होती है। त्योहारों के दौरान यह बढ़कर 3000 टन तक पहुंच जाती है। सालाना मांग 3 लाख टन है। जबकि नेपाल का अपना उत्पादन केवल 1.8 लाख से 2.15 लाख टन के बीच रहता है। यानी करीब 1 लाख टन चीनी के लिए नेपाल पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के पास फिलहाल स्टॉक बहुत कम है। सरकार भारत से जी टू जी यानी सरकार से सरकार समझौते के तहत चीनी मांगने की कोशिश कर रही है। लेकिन पिछला अनुभव अच्छा नहीं रहा। पिछले साल नेपाल ने 60 टन चीनी मांगी थी। लेकिन भारत ने केवल 25,000 टन की अनुमति दी थी। ऊपर से हाई कस्टम ड्यूटी के कारण आयातित चीनी बाजार भाव से भी महंगी हो जाती है। खैर कुल मिलाकर यह पहली बार नहीं है। सितंबर 2023 में भी जब भारत ने बैन बढ़ाया था, प्रतिबंध बढ़ाया था तब नेपाल में चीनी की कीमतें ₹88 से सीधे ₹160 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 12:45 pm

5 अगस्त को दिल्ली से क्या बड़ा ऐलान करेंगी शेख हसीना? भड़क गए तारिक रहमान

वो शेख हसीना जो कभी बांग्लादेश की सबसे ताकतवर नेता थी। करीब 15 साल तक देश की सत्ता पर उनका दबदबा रहा। लेकिन फिर 5 अगस्त 2024 आया और कुछ ही घंटों में पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया। सत्ता गई, देश छूटा और शेख हसीना भारत आ गई। तब से वह भारत में हैं और बांग्लादेश की राजनीति से लगभग पूरी तरीके से दूरी बनाए हुए हैं। लेकिन अब करीब 2 साल बाद शेख हसीना एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर अपनी आवाज बुलंद करने जा रही हैं और वो तारीख है 5 अगस्त 2026। दिलचस्प बात यह है कि जिस तारीख ने शेख हसीना की सत्ता का अंत किया था उसी तारीख को अब उनकी राजनीतिक वापसी का संकेत दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम फॉरेन कॉरेस्पोंडेंस क्लब ऑफ साउथ एशिया से जुड़ा बताया जा रहा है। कार्यक्रम में बांग्लादेश की राजनीति और शेख हसीना के भविष्य को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है और इस कार्यक्रम की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। इसे भी पढ़ें: Taslima Nasreen ने Bangladesh में अवामी लीग पर प्रतिबंध को बताया लोकतंत्र के खिलाफ 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन ने ऐसा रूप ले लिया था कि शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर बांग्लादेश से भागना पड़ा था, निकलना पड़ा था। इसके बाद उनकी सरकार गिर गई और देश की राजनीति पूरी तरह बदल गई। लेकिन अब सवाल यह है कि 2 साल बाद शेख हसीना अचानक सामने क्यों आ रहे हैं? क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक या फिर सार्वजनिक संबोधन है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति है? शेख हसीना के लिए यह जो मामला है सिर्फ राजनीति का नहीं है। बांग्लादेश में उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कारवाई हो चुकी है और नवंबर 2025 में एक ट्रिब्यूनल ने उन्हें मौत की सजा सुना दी। बांग्लादेश लगातार भारत से उनके प्रत्यार्पण की मांग भी कर रहा है। यानी अगर शेख हसीना वापस बांग्लादेश जाती हैं तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। और खुद शेख हसीना ने हाल ही में कहा है कि वह इस साल के अंत तक बांग्लादेश लौटने और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की योजना रखती हैं। हालांकि उनकी वापसी की कोई निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित कार्यक्रम पर Bangladesh ने India से मांगा रुख स्पष्ट करने को शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश में अंतरिम व्यवस्था आई। बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदली और अब बांग्लादेश की सत्ता में नई राजनीतिक ताकतें हैं। वहीं शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर भी बड़ा राजनीतिक दबाव है। ऐसे में 5 अगस्त का उनका संबोधन सिर्फ एक भाषण नहीं माना जा रहा। क्योंकि अगर शेख हसीना अपनी पार्टी के भविष्य बांग्लादेश लौटने की योजना या फिर वहां के राजनीतिक हालात पर खुलकर बोलती हैं तो इसका असर ढाका से लेकर नई दिल्ली तक दिखाई दे सकता है और भारत के लिए यह मामला आसान नहीं है। बांग्लादेश पहले ही भारत से शेख हसीना के प्रत्यार्पण की मांग कर चुका है। भारत कह रहा है कि प्रत्यार्पण से जुड़ा मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाएगा। अब बांग्लादेश ने शेख हसीना के 5 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर भारत से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को भी कह दिया है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री, भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान ढाका का कहना है कि भारत की जमीन से उनकी राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकती है। यानी कि साफ-साफ धमकी कह सकते हैं। एक तरफ शेख हसीना है जो करीब 2 साल से भारत में है। दूसरी तरफ बांग्लादेश की नई राजनीतिक व्यवस्था है जो उन्हें वापस लाना चाहती है। तीसरी तरफ भारत है जिसके सामने कानून, कूटनीति और पड़ोसी देश के साथ रिश्तों तीनों को संतुलित करने की चुनौती है। तो 5 अगस्त का दिन सिर्फ शेख हसीना के लिए नहीं बल्कि भारत बांग्लादेश संबंधों के लिए भी बेहद अहम होने वाला है। क्या शेख हसीना इस मंच से अपनी राजनीतिक वापसी का रोड मैप देंगी? क्या वह बांग्लादेश लौटने की तारीख का संकेत देंगी? क्या आवामी लीग को फिर से खड़ा करने की रणनीति सामने आएगी? या फिर यह सिर्फ अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने की एक कोशिश होगी। इन सवालों के जवाब 5 अगस्त को मिलने के लिए। एक बात जरूर साफ है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 12:39 pm

सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री, भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान

भारत के पड़ोस में एक ऐसी घटना हुई है जिसके बारे में जितनी चर्चा होनी चाहिए थी उतनी नहीं हुई। यह खबर इतनी बड़ी है कि भारत की किस्मत बदल सकती है। रूस ने पहली बार भारत के पड़ोस में ऐसा दांव खेला है जिसके बारे में जानकर सभी चौंक जाएंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भारत पर दबाव डालने के लिए आजकल बांग्लादेश के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इसी बीच रूस ने धमाकेदार एंट्री ली है। रूस ने अमेरिका और बांग्लादेश दोनों को एक साथ लपेट दिया है। दरअसल रूस ने बांग्लादेश से कहा है कि हमने तुम्हें जो लोन दिया था उसका भुगतान अब भारत की करेंसी यानी रुपए में करो। रुपए में पेमेंट लेने के लिए रूस ने बांग्लादेश को यहां तक कह दिया है कि वह ढाका में अपने बैंक की ब्रांच तक खोलने के लिए तैयार है। आपको बता दें कि रूस ने बांग्लादेश के रूपपुर में बिजली उत्पादन के लिए बांग्लादेश का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाया था। इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस ने बांग्लादेश को $1.38 अरब डॉलर का लोन दिया था। इसे भी पढ़ें: आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेना बांग्लादेश को 20 सालों के अंदर यह सारा पैसा रूस की कंपनी को लौटाना है। अब इसी पैसे को लेकर रूस ने बहुत बड़ा खेल कर दिया है। रूस ने बांग्लादेश से कहा है कि आप पेमेंट के लिए रुपए का इस्तेमाल कर सकते हैं। बांग्लादेश ने सोचा नहीं था कि रूस रुपए में पेमेंट मांगेगा। हालांकि रूस ने भारत से इस बारे में बात जरूर की होगी। आपको याद होगा कि जब रूस पर अमेरिकी सेंशंस चरम पर थे तब भारत ने रूस से जमकर तेल खरीदा था। उसी तेल की पेमेंट भारत ने रुपए में की थी। यानी भारत ने रूस को पेमेंट के लिए रुपए का एक नेटवर्क तैयार कर लिया था। अब रूस चाहता है कि बांग्लादेश भी इसी नेटवर्क का इस्तेमाल करें और पेमेंट रुपए में करें। आप जानते ही हैं कि कोई भी देश रूस को डॉलर में पेमेंट नहीं कर सकता क्योंकि अमेरिका ने रूस के लिए इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे बंद कर रखा है। बांग्लादेश चाहकर भी रूस को डॉलर में पेमेंट नहीं कर सकता। आपके मन में सवाल होगा कि रूस चीनी करेंसी युवान में भी तो बांग्लादेश से पेमेंट मांग सकता था। इसे भी पढ़ें: 12-13 सितंबर को दिल्ली में ऐसा दिखेगा नजारा, व्हाइट हाउस से लेकर NATO मुख्यालय तक मच जाएगी खलबली! लेकिन यहां पर एक बहुत बड़ा खेल है। बांग्लादेश और चीन के बीच ज्यादातर बटरल व्यापार डॉलर में होता है। उसके बाद लोकल करेंसी आती है। लेकिन बांग्लादेश और भारत के बीच जो बटरल व्यापार होता है वो पहले लोकल करेंसी में होता है। उसके बाद डॉलर आता है। यानी बांग्लादेश और भारत के बीच रुपए वाला सिस्टम पहले से ही चल रहा था और अब रूस और भारत के बीच रुपए वाला सिस्टम शुरू हो गया है। यानी बांग्लादेश आराम से रुपए के जरिए रूस का लोन चुका सकता है। आप समझ रहे हैं कि यह कितनी बड़ी खबर है। यह सीधे-सीधे डॉलर को झटका है। अमेरिका में बवाल है कि रूस अभी तक भारत के साथ बटरल व्यापार में ही रुपए का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन अब रूस दूसरे देशों पर भी रुपए को इस्तेमाल करने का दबाव डाल रहा है। अमेरिका को डर है कि अगर ब्रिक्स देशों ने अपना व्यापार लोकल करेंसी में शुरू कर दिया तो यह डॉलर को सबसे बड़ी चोट होगी। दुनिया की 42% जीडीपी ब्रिक्स देश ही बनाते हैं। बहरहाल आप सोचिए कि बांग्लादेश अगर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए मिला 11.38 अरब डॉलर का लोन अगर रुपए में चुकाता है तो यह कितनी बड़ी घटना होगी।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 12:27 pm

Nepal Violence : सड़कों पर उतरे हिंदू, नेपाल छोड़कर भागने लगे मुसलमान!

नेपाल में कावड़ यात्रा के दौरान हुए बवाल के बाद किस तरह से कई इलाकों में हिंसा भड़की की तस्वीरें आपने देखी होंगी। इस हिंसा की शुरुआत तब हुई जब कावड़ियों पर पत्थरबाजी हुई। 24 साल के एक हिंदू युवक की गोली लगने से मौत हो गई। जिसके बाद हिंदू संगठन सड़कों पर उतर गए और फिर जो हुआ वो सब ने देखा। हालात इतने बिगड़ गए कि कई हिस्सों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। भले ही अब यहां हिंसा की आग शांत होती हुई दिखाई दे रही हो लेकिन हिंदू संगठन अब भी भड़के हुए हैं। इसके पीछे की वजह वो रोहिंग्या बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठिए हैं जो यहां आकर माहौल खराब कर रहे हैं और नेपाल की डेमोग्राफी के लिए बहुत बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। क्योंकि जिस सुनसुरी जिले के कप्तानगंज इलाके में हिंसा भड़की वहां मुस्लिम आबादी लगभग 13% है। सोचिए पूरे नेपाल की कुल मुस्लिम आबादी लगभग 5% है। लेकिन अकेले सुनसरी इलाके में 13% मुस्लिम रहते हैं। इसे भी पढ़ें: नेपाल curfew में ढील: मधेश और कोशी प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात सुधरे बताया जा रहा है कि इनमें सबसे बड़ी संख्या घुसपैठियों की है। इसलिए अब इन्हें खदेड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। दरअसल अब हिंदूवादी संगठनों नेपाल सरकार को 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा है। जिसमें सबसे बड़ी मांग रोहिंग्या बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से खदेड़ने की की गई है। साथ ही सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के साथ ही साल 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी उठाई गई है और इस मांग के बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने घुसपैठियों के बीच भगदड़ मचा दी है। तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि भारी संख्या में मुस्लिम भीड़ अपने कंधों पर बैग टांग कर हाथों में सामान लेकर निकलते हुए दिखाई दे रही है। इस तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये बांग्लादेश और पाकिस्तानी घुसपैठियां हैं जो अब एक्शन के डर से नेपाल छोड़कर भाग रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे हाल ही में बंगाल से भागते हुए दिखाई दिए। दरअसल नेपाल के आईजी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि भारत से भगाए गए बांग्लादेशी और रोहिंग्या अब नेपाल में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा सिलीगुड़ी रूट से भी बांग्लादेश से रोहिंग्या नेपाल में आ रहे हैं। आईजी ने बताया था कि रोहिंग्या नेपाल के अलग-अलग इलाकों में बसने की कोशिश कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: घरों से इस्लामिक झंडे खींच रहा नेपाल, क्या बोले मुसलमान? जिससे डेमोग्राफी चेंज हो रही है। जहां पर मुसलमानों की संख्या ज्यादा हो रही है, वहां पर हिंदुओं के साथ उनका टकराव हो रहा है। दरअसल नेपाल में अब तक मुसलमानों की आबादी सिर्फ तराई इलाकों में बढ़ रही थी। लेकिन अब पहाड़ों में भी मुसलमानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नेपाल में राजा के शासन के दौरान पहाड़ों पर मुसलमान ना के बराबर थे। लेकिन अब पहाड़ों पर मुसलमानों की तादाद इतनी बढ़ गई है कि वहां इस्तमा का आयोजन किया जा रहा है। इस्तमा मुख्य रूप से तबबलीगी जमात की ओर से किए जाने वाले बड़े धार्मिक सम्मेलन को कहा जाता है। इसी के बहाने बांग्लादेश, पाकिस्तान और सोमालिया से भी मुसलमान नेपाल पहुंचते हैं और एक बार मुसलमान नेपाल में घुस जाते हैं तो वापस नहीं लौटते। यही वजह है कि नेपाल में इस्तिमा बंद करवाने की भी मांग उठ रही है। क्योंकि नेपाल में इसका आयोजन सिर्फ घुसपैठ के लिए होता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेपाल में बसने के बाद यह मुसलमान लव जिहाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इसे भी पढ़ें: घरों से इस्लामिक झंडे खींच रहा नेपाल, क्या बोले मुसलमान? मस्जिद और मदरसों ऐसी गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं जिससे नेपाल के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। मुसलमानों की तादाद बढ़ने के साथ-साथ नेपाल में मदरसों और मस्जिदों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। 2020 में नेपाल के अंदर 911 रजिस्टर्ड मदरसे थे। 2025 तक उनकी संख्या बढ़कर 1200 से ज्यादा हो गई। जबकि इस दौरान अनरजिस्टर्ड मदरसों की संख्या बढ़कर 2400 तक पहुंच गई।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 12:22 pm

आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेना

ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि पाकिस्तान लगातार अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक उसने चीन से मिले 250 अत्याधुनिक एसएच 15 सेल्फ प्रोपेल होवेसर भारत से लगी पूरी पश्चिमी सीमा पर तैनात करने शुरू कर दिए हैं। यानी जम्मू कश्मीर से लेकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात सेक्टर तक पाकिस्तान अपनी लंबी दूरी की आर्टिलरी को नए सिरे से व्यवस्थित कर रहा है। यह हाल के सालों में उसकी सबसे बड़ी आर्टिलरी तैनाती मानी जा रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने हाल ही में चीन से 250 एसएच 15 ट्रक माउंटेड सेल्फ प्रोपेल होत्सर हासिल किए। अब इन्हें चरणबंद तरीके से भारत से लगी पश्चिमी सीमा पर तैनात किया जा रहा है। यह तैनाती किसी एक जगह नहीं हो रही बल्कि पूरी सीमा पर अलग-अलग रणनीतिक इलाकों में की जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान अपनी आर्टिलरी फायर पावर को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाने की कोशिश में है। इसे भी पढ़ें: Pakistan में M2 Motorway के पास बस दुर्घटना, 13 लोग घायल और बुनियादी ढांचे पर सवाल अचानक पाकिस्तान यह तैनाती क्यों कर रहा है? इसका बहुत साफ और सीधा जवाब है ऑपरेशन सिंदूर। मई 2025 में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ढांचों पर सटीक हमले किए। उस अभियान ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत जरूरत पड़ने पर सीमा पार भी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है और अब माना जा रहा है कि उसी के बाद पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारियों में तेजी लाने में जुटा है और यही वजह है कि चीन से इतने बड़े स्तर पर उसने ये तोपें हासिल की और अब इनकी तैनाती शुरू की जा रही है। इसे भी पढ़ें: जानिए, भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रहे सरकारी दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही तय करने का आह्वान क्यों किया? अब अगर बात चीन के इस हथियार के बारे में करें यानी कि एसएच होवसर तोपो की तो आपको बता दें एसए 15 चीन की सरकारी रक्षा कंपनी नोरिंको ने बनाया है। यह चीन की सेना के पीसीएल 1881 का एक्सपोर्ट वर्जन है। यह कोई साधारण तोप नहीं इसे 6 * 6 यानी ट्रक पर लगाया गया है। यानी इसे किसी ट्रेलर से खींचने की जरूरत नहीं पड़ती। जहां जरूरत पड़ी वहां पहुंची। कुछ ही मिनटों में फायरिंग की और फिर तुरंत दूसरी जगह निकल गई। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। आधुनिक युद्ध में इसे शूटन स्कूट क्षमता कहा जाता है। यानी गोली चलाओ और जवाबी हमला आने से पहले अपनी जगह बदल दो। यही वजह है कि ऐसी तोपों को नष्ट करना पारंपरिक आर्टिलरी की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है। और अगर इसकी मारक क्षमता की अगर हम बात करें तो यह 155 एमएम और 52 कैलिबर की होवेस्टर है। सामान्य गोले से करीब 30 से 40 कि.मी. तक हमला कर सकती है। लेकिन अगर रॉकेट असिस्टेड बी लैप गोले इस्तेमाल किए गए तो इसकी रेंज 53 से 72 किमी तक बताई जाती है। इसमें ऑटोमेटेड फायर कंट्रोल सिस्टम है और यह 1 मिनट में छह राउंड तक फायर कर सकती है। यानी कम समय में भारी गोलाबारी और फिर तुरंत दूसरी जगह। इसे भी पढ़ें: Satyanjal Pandey इस्लामाबाद में बने भारत के नए प्रभारी राजदूत यहां पर खबर ये नहीं है कि पाकिस्तान ने चीन से तोपे ली क्योंकि पाकिस्तान ने 250 की संख्या में ये तोपे ली हैं तो इसी वजह से ये अपने आप में एक बड़ी खबर बन जाती है क्योंकि 250 अमित सर किसी एक ब्रिगेड के लिए नहीं होते। इतनी संख्या कई आर्टिलरी रेजीमेंट को पूरी तरह लेस कर सकती है। यानी पाकिस्तान सिर्फ नई तोपे नहीं खरीद रहा बल्कि अपनी पूरी लंबी दूरी की गोलाबारी क्षमता को अपग्रेड कर रहा है। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा किरदार चीन। पाकिस्तान भले ही यह हथियार सीमा पर तैनाती कर रहा हो लेकिन अगर बड़ी तस्वीर देखा जाए तो चीन की भूमिका यहां पर ज्यादा बड़ी है। आज पाकिस्तान की सेना का आधुनिकीकरण तेजी से चीन के भरोसे पर हो रहा है। लड़ाकू विमान चाहिए। चीन दे रहा है। ड्रोन चाहिए उसके लिए चीन है। यहां तक कि एयर डिफेंस चाहिए वो भी पाकिस्तान चीन से ले रहा है। अब आधुनिक सेल्फ प्रोपेल्ड ऑफिसर भी चीन ने दे दिए। यानी पाकिस्तान की सैन्य ताकत में जो भी नया जोड़ रहा है उसमें चीन की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 12:09 pm

टूटे सारे रिकॉर्ड, रूस से रोजाना 28 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा भारत!

दुनिया भर में इस वक्त तनाव चरम पर है। कहीं युद्ध का खतरा है तो कहीं ऊर्जा संकट की चिंता बनी हुई है और ऐसे ही माहौल में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को और बढ़ा दिया है। जुलाई महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल खरीदा जो देश के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से भी ज्यादा हिस्सा रहा। जुलाई महीने में भारत ने रूस से अब तक का सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदा। आंकड़ों के मुताबिक रूस से भारत को करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल मिला। यानी भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी पहली बार 55% से ज्यादा हुई। सीधे शब्दों में कहें तो जुलाई में भारत ने जितना भी कच्चा तेल विदेशों से खरीदा उसमें से आधे से ज्यादा हिस्सा रूस का था। इसे भी पढ़ें: Middle East में टला बड़ा युद्ध: क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील पर Trump ने Iran से बातचीत को दी मंजूरी दरअसल साल 2022 में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ था तब अमेरिका और यूरोप समेत कई पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद रूस ने अपना तेल कम कीमत पर बेचना शुरू किया और भारत ने भी अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से तेल खरीद बढ़ा दी। अब हालात यह हैं कि रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन चुका है। हालांकि ऐसा नहीं है कि भारत सिर्फ रूस पर निर्भर है। जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने पश्चिम एशिया के देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई। सऊदी अरब से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। वहीं इराक से भी तेल खरीद में तेजी आई और जुलाई में यह करीब 1.3 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। कुवैत ने भी दोबारा भारत को तेल सप्लाई शुरू की। वहीं संयुक्त अरब अमीरात से आयात थोड़ा कम हुआ लेकिन वह अभी भी भारत के बड़े तेल सप्लायर देशों में शामिल हैं। इसके पीछे वजह यह है कि कुछ समय पहले पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। लेकिन अब हालात सामान्य होने के बाद भारत ने वहां से भी खरीद बढ़ानी शुरू कर दी है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका आपको बता दें भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है। देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम लोगों की जरूरतों के लिए लगातार ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में भारत की नीति साफ है कि जहां से बेहतर कीमत और भरोसेमंद सप्लाई मिले वहां से तेल खरीदा जाए। भारत, रूस के अलावा अमेरिका, खाड़ी देशों और दूसरे देशों से भी तेल आयात करता है। हालांकि अब एक नई चुनौती सामने जरूर आ रही है। अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बिल को मंजूरी दी। इस बिल में उन देशों पर 100% तक अतिरिक्त टेरिफ लगाने का प्रावधान है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल या गैस खरीदते हैं। इस बिल के निशाने पर सीधे तौर पर रूस के बड़े तेल खरीददार देशों में भारत और चीन भी आ सकते हैं। हालांकि अभी तक यह बिल कानून नहीं बना। इसे आगे अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी मिलनी बाकी है। इसे भी पढ़ें: Iraq और तुर्किये ने पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात बढ़ाने के समझौते पर किए हस्ताक्षर भारत ने इस पूरे मामले पर कहा है कि वह घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी दबाव में नहीं बल्कि देश के हित और 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। यानी एक तरफ भारत रूस से सस्ता और भरोसेमंद तेल लेकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका जैसे देशों के साथ अपने रिश्तों का संतुलन भी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर भारत की इस रणनीति पर है क्योंकि तेल सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा हथियार बन चुका है। लेकिन जिस तरह से पिछले महीने भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदा यह जरूर दिखाता है कि भारत किसी भी दबाव में नहीं आने वाला है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 12:04 pm

गाजा में निरस्त्रीकरण के समझौते पर शांति बोर्ड के दूत ने नेतन्याहू से मुलाकात की, हमले रोकने की अपील

यरुशलम, चार अगस्त (एपी) गाजा में युद्ध के बाद के बदलावों की निगरानी कर रहे शांति बोर्ड के एक अधिकारी ने सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। एक बयान के अनुसार, इस बैठक में अन्य मुद्दों के अलावा उस नए निरस्त्रीकरण समझौते पर भी चर्चा हुई जिस पर शांति बोर्ड की हमास के साथ चर्चा के दौरान सहमति बनी है। शांति बोर्ड ने एक बयान में कहा कि गाजा के लिए उच्च प्रतिनिधि निकोले म्लादेनोव ने प्रधानमंत्री और उनकी टीम के साथ ‘‘रचनात्मक और विस्तृत’’ बातचीत की। बयान में कहा गया, ‘‘मकसद साफ है और इस पर कोई सवाल नहीं है। गाजा पट्टी में पूर्ण निरस्त्रीकरण और बंदूक के बल पर शासन की जगह नागरिक प्रशासन स्थापित करना हमारा उद्देश्य है।’’बैठक की जानकारी रखने वाले दो लोगों के अनुसार, म्लादेनोव ने नेतन्याहू से गाजा पट्टी में इजराइल के हमलों को रोकने के लिए भी कहा। म्लादेनोव और उनकी टीम इजराइल पर गाजा में हमले रोकने का दबाव बना रही है ताकि हमास के पास मौजूद हथियारों को निष्क्रिय कराने संबंधी समझौते को आगे बढ़ाया जा सके। म्लादेनोव की टीम में वरिष्ठ सलाहकार आर्ये लाइटस्टोन भी शामिल हैं। हमास ने सोमवार को एक बयान में कहा कि वह और फलस्तीन के अलग-अलग गुट ‘‘युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण को लागू करने के बारे में हुई सहमति पर कायम हैं जिसमें सभी पक्षों की जिम्मेदारियां भी शामिल हैं।’’बयान में यह भी कहा गया है कि समूह युद्धविराम को लेकर बनी सहमति पर म्लादेनोव और मध्यस्थों से ‘‘स्पष्ट और आधिकारिक जवाब’’ का इंतजार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष हुए व्यापक युद्धविराम समझौते के तहत इस नए समझौते की घोषणा पिछले बृहस्पतिवार को की थी। समझौते में इजराइल से अपने सैन्य अभियान रोकने और गाजा में हमास व उसके सहयोगियों से सभी उग्रवादी गतिविधियां बंद करने की बात कही गई है। समझौते में मोटे तौर पर यह भी बताया गया था कि हथियार हटाने की प्रक्रिया कैसे लागू की जाएगी। समझौते का मसौदा सार्वजनिक किए जाने के बाद इजराइल ने कहा कि उसे सुरक्षा को लेकर ‘‘गंभीर चिंताएं’’ हैं और उसने इन्हें अमेरिका के साथ साझा किया है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 11:55 am

Ethiopia Landslide में 14 की मौत, अम्हारा क्षेत्र की घटना

अदीस अबाबा, चार अगस्त (एपी) इथियोपिया के अम्हारा क्षेत्र में सोमवार को मूसलाधार बारिश के बीच हुए भूस्खलन में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए साथ ही कई लोग लापता हैं। यह हादसा त्सादकाने देब्रे मितमाक सेंट मैरी मठ में हुआ जहां पुरानी बीमारियों के आध्यात्मिक तरीके से उपचार के लिए लोकप्रिय, पवित्र जल से शुद्धिकरण अनुष्ठान में शामिल होने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु एकत्र हुए थे। मठ के महाप्रबंधक मेगाबे हादिस नेका तिबेब अबाबू ने कहा, ‘‘यह दुर्घटना सुबह लगभग सात बजे हुई। मृतकों में अधिकतर वे श्रद्धालु शामिल हैं, जो पवित्र जल से शुद्धिकरण के धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए पहुंचे थे।’’उन्होंने कहा कि मलबे के नीचे अब भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, हालांकि उनकी संख्या का अभी पता नहीं चल सका है। अबाबू के अनुसार, मृतकों में से 11 का अंतिम संस्कार मठ परिसर में ही कर दिया गया, जबकि अन्य के शव उनके पैतृक स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, कुछ मृतकों की पहचान अब भी नहीं हो सकी है। गंभीर रूप से घायल लोगों को मठ से लगभग 70 किलोमीटर दूर उत्तर शेवा प्रशासनिक क्षेत्र की राजधानी देबरे बिरहान के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 11:40 am

ट्रंप के बैंक अकाउंट पर क्यों लगा प्रतिबंध? जांच, शक और बड़े एक्शन की पूरी कहानी आई सामने

ट्रंप के बैंक अकाउंट पर क्यों लगा प्रतिबंध? जांच, शक और बड़े एक्शन की पूरी कहानी आई सामने

समाचार नामा 4 Aug 2026 11:30 am

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! कुवैत में अमेरिकी ठिकाने को बनाया निशाना, ट्रंप बोले - 'समझौते का आखिरी मौका'

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! कुवैत में अमेरिकी ठिकाने को बनाया निशाना, ट्रंप बोले - 'समझौते का आखिरी मौका'

समाचार नामा 4 Aug 2026 11:20 am

Narinder Singh समेत 25 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई

सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, चार अगस्त अमेरिका में पहचान संबंधी जानकारी में कथित फर्जीवाड़े से लेकर हत्या के प्रयास और बाल यौन शोषण जैसे आरोपों वाले मामलों में भारतीय मूल के एक व्यक्ति सहित 25 लोगों की नागरिकता रद्द की जा रही है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने 65 वर्षीय नरिंदर सिंह के खिलाफ डेलावेयर जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। उन पर अमेरिका में प्रवेश पाने के लिए फर्जी पहचान का सहारा लेने का आरोप है। न्याय मंत्रालय के मुताबिक सिंह ने 1996 में अमेरिका में प्रवेश के लिए गलत पहचान का इस्तेमाल किया और एक मई, 2008 को अमेरिका के नागरिक बन गए। शिकायत में उनके कई गलत बयानों और गैर-कानूनी कामों का जिक्र करते हुए सात आरोप लगाए गए हैं। जिन 25 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कार्यवाही शुरू की गई है उनमें पाकिस्तानी मूल के दो लोग – जिया मुराद भट्टी और मोहम्मद वासिफ भी शामिल हैं। उन पर पहचान से जुड़ी गलत जानकारी देने के आरोप हैं। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘‘अमेरिका की नागरिकता हमारे देश के सर्वोच्च विशेषाधिकारों में से एक है और इसे वैध तरीके एवं ईमानदारी से ही हासिल किया जाना चाहिए।’’ब्लांश ने कहा, ‘‘आज दर्ज की गई शिकायतों में आरोप है कि इन लोगों ने धोखाधड़ी से, तथ्यों को छिपाकर या गैर-कानूनी तरीके से नागरिकता हासिल की। ​​इसमें हिंसक अपराध, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, फर्जी पहचान और नागरिकता के लिए अयोग्य ठहराने वाली अन्य बातें छिपाना शामिल है।’’ये शिकायतें 20 जुलाई से तीन अगस्त के बीच दर्ज की गई हैं। नागरिकता पाने वाले इन लोगों में 17 देशों जैसे कि पाकिस्तान, मोल्दोवा, भारत, मेक्सिको, कोलंबिया, नाइजीरिया, लाइबेरिया, घाना, जमैका, ताइवान, होंडुरास, कैमरून, जॉर्डन, क्यूबा, ​​अल साल्वाडोर, हैती और स्वीडन के लोग शामिल हैं। ब्लांश ने कहा, ‘‘आज की ये कार्रवाई मंत्रालय के इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी समन्वित कोशिश है, लेकिन यह तो बस शुरुआत है। न्याय मंत्रालय नागरिकता प्रक्रिया की शुचिता और अमेरिकी लोगों की रक्षा के लिए हर उपलब्ध तरीके का इस्तेमाल करना जारी रखेगा।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 11:13 am

Prabhasakshi NewsRoom: Pakistan में आतंकवादियों पर कहर बनकर टूट रहे हैं Unknown Gunmen, Lashkar कमांडर के बयान से हुआ 'खौफ' का खुलासा

पाकिस्तान में Unknown men अथवा Unknown gunmen आतंकवादियों पर कहर बन कर टूट रहे हैं। अक्सर खबर आती है कि बड़े बड़े आतंकी संगठनों के खूंखार आतंकी को अचानक से अज्ञात व्यक्ति या अज्ञात बंदूकधारी ठोक कर चला गया। इसी बीच, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर रिजवान हनीफ ने ऐसा बयान दिया है, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के भीतर का खौफ दर्शा रहा है। हम आपको बता दें कि रिजवान हनीफ ने स्वीकार किया कि वर्ष 2020 से अब तक लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 30 से अधिक आतंकवादी पाकिस्तान के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों में लक्षित हमलों में मारे जा चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए हनीफ ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों के दौरान संगठन के कई सक्रिय सदस्य पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में निशाना बनाए गए। उसने कहा कि इन आतंकियों की मौत पेशावर, कराची, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और रावलाकोट जैसे शहरों में हुई। उसने कहा कि इन घटनाओं के पीछे भारतीय खुफिया एजेंसियों का हाथ था। हालांकि, उसने अपने दावों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। इसे भी पढ़ें: China के J-20 Stealth Fighter Jets और Pakistan की SH-15 Howitzer Guns भारत की ओर तैनात, अब क्या करेंगे PM Modi? अपने संबोधन में हनीफ ने कहा, “पिछले चार वर्षों में हमारे 30 लोग भारतीय खुफिया एजेंटों द्वारा मार दिए गए। कोई पेशावर में मारा गया, कोई कराची में, कोई रावलपिंडी में, कोई मुजफ्फराबाद में और कोई रावलाकोट में।” देखा जाये तो रिजवान हनीफ का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आतंकी संगठन आमतौर पर अपने नेटवर्क को हुए नुकसान या अपने सदस्यों की मौत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बचते हैं। ऐसे में संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा खुले मंच से इतनी बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने की बात स्वीकार करना लश्कर-ए-तैयबा के भीतर हुए नुकसान की ओर संकेत माना जा रहा है। हालांकि, इस दौरान हनीफ का पूरा भाषण कट्टरपंथी और भड़काऊ टिप्पणियों से भी भरा रहा। उसने विभिन्न धर्मों के प्रति आपत्तिजनक और घृणा फैलाने वाली टिप्पणियां कीं तथा धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया। अपने भाषण में उसने अन्य आस्थाओं और उनके अनुयायियों के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए और संगठन के समर्थकों को धार्मिक आधार पर उकसाने की कोशिश भी की। उधर, हनीफ के भाषण पर कई विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के संबोधन यह दर्शाते हैं कि आतंकवादी संगठन किस प्रकार धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कर कट्टरता, वैमनस्य और हिंसा को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं। ऐसे संगठन अक्सर समाज में विभाजन पैदा करने और युवाओं के कट्टरपंथीकरण के लिए धर्म आधारित प्रचार का सहारा लेते हैं। बहरहाल, लश्कर को हुए नुकसान की बात तो उसके कमांडर ने कबूल कर ली लेकिन पाकिस्तान में कई और आतंकी संगठन भी हैं जिन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। हम आपको बता दें कि हालिया वर्षों में पाकिस्तान में अज्ञात हमलावर या अज्ञात बंदूकधारी शब्द का इस्तेमाल उन रहस्यमय लक्षित हत्याओं के लिए व्यापक रूप से किया जाता रहा है, जिनमें भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों से जुड़े कई वांछित और हाई-प्रोफाइल आतंकवादी मारे गए हैं। कराची, लाहौर, सियालकोट और रावलाकोट सहित कई शहरों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अल-बद्र जैसे प्रतिबंधित संगठनों के कई वरिष्ठ कमांडरों की गोली मारकर हत्या की जा चुकी है। इनमें वर्ष 2016 के पठानकोट आतंकी हमले के साजिशकर्ता शाहिद लतीफ, मसूद अजहर के भाई मोहम्मद ताहिर अनवर और वर्ष 2019 के पुलवामा हमले से जुड़े हमजा बुरहान जैसे नाम भी शामिल हैं। इन घटनाओं को लेकर पाकिस्तान समय-समय पर विदेशी खुफिया एजेंसियों, विशेषकर भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर आरोप लगाता रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने ऐसे सभी आरोपों को लगातार खारिज किया है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 11:00 am

ईरान का कुवैत में अमेरिकी बेस पर हमला, ओमान तट पर जहाज निशाने पर

मंगलवार सुबह कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को कम से कम तीन ड्रोन से निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह हमला ईरान की आईआरजीसी से जुड़ा था।

देशबन्धु 4 Aug 2026 10:43 am

डील या टोटल सरेंडर: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दिया अल्टीमेटम, होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण का किया बड़ा दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और अधिक तेज करते हुए तेहरान को 'डील या टोटल सरेंडर' का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। सोमवार को एक तीखे बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पर्दे के पीछे निजी तौर पर बातचीत के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इसका खंडन कर रहे हैं। ट्रंप के इस ताजा और आक्रामक बयान से मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।ईरानी नेतृत्व का दोहरा चरित्र और गुप्त बातचीत का दावाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि ईरानी नेता बेहद दोहरा चरित्र अपना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक तरफ जहां गुप्त माध्यमों से बातचीत की गुहार लगाई जाती है और बैठकें तय होती हैं, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक रूप से यह ढिंढोरा पीटा जाता है कि वे अमेरिका के साथ किसी भी तरह की कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं और केवल ओमान के जरिए ही संवाद हो रहा है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि ईरान को दुनिया के किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मामले पर वाशिंगटन का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और अडिग है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना का पूर्ण दबदबाईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण किए जाने के दावों को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह महज खोखली बयानबाजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नौसेना और सख्त नाकेबंदी का पूरी तरह से नियंत्रण है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी अनुमति के बिना ईरान के अंदर कोई भी माल न तो आ सकेगा और न ही बाहर जा सकेगा। उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक ईरान पूरी तरह से समर्पण नहीं करता या कोई मजबूत कूटनीतिक डील नहीं होती, तब तक अमेरिका का आर्थिक और सैन्य शिकंजा यूं ही कसा रहेगा।कूटनीति के बीच तीखे बयानों से गरमाया मध्य पूर्व का राजनीतिक माहौलविशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह अल्टीमेटम ऐसे समय में आया है जब विभिन्न बिचौलियों के माध्यम से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनलों को खुला रखने की कोशिशें चल रही थीं। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर लगातार आ रहे तीखे और आक्रामक बयानों ने शांति वार्ताओं की उम्मीदों को झटका दिया है। ट्रंप के इस रुख ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर अपनी अधिकतम दबाव की नीति को और अधिक कड़ाई से लागू करने के मूड में है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Aug 2026 10:17 am

PoK में पाकिस्तान की पोल खुली तो मीडिया पर लगाया कड़ा प्रतिबंध, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने की फिराक में पाक सरकार

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कई हफ्तों से चल रहे भीषण विरोध प्रदर्शनों और बगावत के बीच पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अपनी नाकामियों और अत्याचारों को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए अब पाकिस्तानी हुक्मरानों ने मीडिया पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। स्थानीय और क्षेत्रीय समाचार पोर्टलों के साथ-साथ प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल 'अल जजीरा इंग्लिश' की पहुंच को भी देश के कई हिस्सों में बाधित कर दिया गया है। इसके अलावा इमरान खान की पार्टी, मुख्य विपक्षी दलों और सरकार की पोल खोलने वाले कई प्रमुख यूट्यूब चैनलों को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सच बाहर न आ सके।महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा बलों ने चलाई गोलियांPoK में हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं और स्थानीय पुलिस प्रशासन भी प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को थामने में नाकाम साबित हो रहा है। रविवार देर रात रावलकोट इलाके में सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर कथित तौर पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब प्रदर्शन स्थलों पर महिलाओं और बच्चों की भारी मौजूदगी थी। पिछले 50 दिनों से लगातार बच्चे और महिलाएं सड़कों पर डटे हुए हैं और रविवार को इनकी संख्या में अचानक और इजाफा हो गया था, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।संसाधनों के दोहन और अनदेखी से उबल रहा PoK, अब तक 40 मौतेंएक आधिकारिक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया है कि सुरक्षा बलों की इस बर्बर कार्रवाई में अब तक कम से कम 40 लोगों की जान जा चुकी है। खुफिया एजेंसियों में इस बात का बड़ा डर सता रहा है कि हताश हो चुकी पाकिस्तानी सरकार अब इलाके के लोगों में खौफ पैदा करने के लिए महिलाओं और बच्चों को सीधे तौर पर निशाना बना सकती है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि उनके इलाकों के प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है और पाकिस्तान सरकार उनकी लगातार उपेक्षा कर रही है, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।भारत ने नकारा PoK चुनाव का ढोंग, खैबर पख्तूनख्वा में आत्मघाती हमलादूसरी तरफ, PoK में हुए विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के बहुमत का दावा किया जा रहा है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है और यह चुनाव केवल मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने का एक दिखावा मात्र है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में एक शांति रैली के दौरान पुलिस थाने को निशाना बनाकर किए गए भीषण आत्मघाती हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Aug 2026 10:13 am

पाकिस्तान से नाता तोड़ने का ऐलान: बलूचिस्तान ने तय की स्वतंत्रता दिवस की तारीख, दुनियाभर के देशों से मांगी मदद

आतंकवाद को पनाह देने और दूसरे देशों के मामलों में दखल देने वाला पाकिस्तान अब खुद अपने ही आंतरिक विद्रोहों और टूट की कगार पर खड़ा है। गुलाम कश्मीर (PoK) में चल रहे तीव्र विरोध प्रदर्शनों के बीच अब बलूचिस्तान ने पाकिस्तान से पूरी तरह रिश्ता खत्म करने का बिगुल फूंक दिया है। 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वे हर साल 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। इस बड़े ऐलान के साथ ही बलोच नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया भर के देशों से अपने समर्थन की जोरदार अपील की है, ताकि इस क्षेत्र में पाकिस्तानी दमन से मुक्ति मिल सके।पाकिस्तान के बाहर भी विदेशों में फहराया जाएगा स्वतंत्र बलूचिस्तान का झंडाबलोच लिबरेशन नेता मीर यार बलूच ने दुनिया भर में रह रहे तमाम बलोच नागरिकों से अपील की है कि वे आगामी 11 अगस्त को एकजुट होकर अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएं। उन्होंने निर्देश दिया है कि लोग अपने घरों, बाजारों, दुकानों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' का झंडा फहराएं। बलोच नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान की दमनकारी और विस्तारवादी नीतियों ने न केवल इस भू-भाग को तबाह किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अशांति फैलाई है। चाहे कश्मीर के मुद्दे पर जहर उगलना हो, बलूचिस्तान में बर्बर सैन्य कार्रवाई करना हो या परमाणु परीक्षण, पाकिस्तान की नीतियों से केवल खून-खराबा ही हुआ है।11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का ऐतिहासिक और कानूनी कारणइतिहास के पन्नों का हवाला देते हुए बलूचिस्तान के नेताओं ने बताया कि आधिकारिक रूप से पहली बार 11 अगस्त 1947 को ही बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में घोषित किया गया था। उस समय भारत और पाकिस्तान का औपचारिक विभाजन भी नहीं हुआ था। दावा किया जाता है कि उस दौरान 'ऑल इंडिया रेडियो' और प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'न्यूजीलैंड/न्यूयॉर्क टाइम्स' ने भी इस स्वतंत्रता की घोषणा को प्रमुखता से कवर किया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर बलूचिस्तान के लोग 11 अगस्त को अपना असली स्वाधीनता दिवस मानते आए हैं, जबकि पाकिस्तान बाद में 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने लगा था।अंतरराष्ट्रीय समर्थन की गुहार: पाकिस्तान के साथ रहकर तरक्की नामुमकिन'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' की ओर से जारी बयान में दो टूक कहा गया है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे और उसके साथ रहकर बलूचिस्तान कभी भी समृद्ध या सुरक्षित नहीं हो सकता। पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से तंग आ चुके बलोच नेतृत्व ने वैश्विक शक्तियों और मानवाधिकार संगठनों से गुहार लगाई है कि वे बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करें, ताकि दक्षिण एशिया क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित हो सके। इस बड़े ऐलान के बाद वैश्विक कूटनीति के गलियारों में पाकिस्तान की मुश्किलें और अधिक बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Aug 2026 10:11 am

भारत पर नए टैरिफ लगाकर घर में घिरे डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के 25 राज्यों ने यूएस कोर्ट में ठोका मुकदमा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत दुनिया के कई देशों पर नए टैरिफ थोपा जाना अब खुद उनके लिए गले की फांस बनता जा रहा है। अमेरिका के 25 राज्यों के एक मजबूत गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के इस विवादास्पद फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में आधिकारिक रूप से मुकदमा दर्ज करा दिया है। राज्यों का आरोप है कि व्हाइट हाउस कानून का गलत इस्तेमाल करके अमेरिकी नागरिकों, परिवारों और व्यवसायों पर गैर-कानूनी तरीके से कर का बोझ डाल रहा है। इस कानूनी शिकंजे के बाद ट्रंप प्रशासन देश के भीतर ही चौतरफा घिरता नजर आ रहा है।60 से अधिक व्यापारिक साझेदारों पर लगाया गया है अतिरिक्त करबता दें कि इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत अपने करीब 60 ट्रेड पार्टनर्स पर 10 से 12.5 फीसदी तक का अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का बड़ा ऐलान किया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है जो बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के निर्यात को रोकने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव के तहत शुरुआती चर्चा में भारत पर 12.5% टैक्स लगाने की बात थी, जिसे बाद में घटाकर 10% कर दिया गया था। साथ ही, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खाद जैसी आवश्यक वस्तुओं को इस दायरे से बाहर रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद घरेलू स्तर पर भारी विरोध शुरू हो गया है।'1974 के ट्रेड एक्ट के नाम पर कानूनी नियमों की हो रही अनदेखी'मुकदमा दायर करने वाले अमेरिकी राज्यों ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत लागू किए गए इन नए शुल्कों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स और ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि धारा 301 का इस्तेमाल किसी विशिष्ट देश या कंपनी की व्यापारिक नीतियों की जांच के लिए किया जाता है, न कि सभी अमेरिकी आयातों पर एकमुश्त भारी टैरिफ थोपने के लिए। राज्यों का यह भी कहना है कि सामान्य तौर पर एक साल में पूरी होने वाली जटिल जांच प्रक्रिया को महज़ ढाई महीने में ही जल्दबाजी में पूरा दिखा दिया गया, जो पूरी तरह से संदिग्ध और बहानेबाजी है।सुप्रीम कोर्ट से पहले भी कई कानूनी लड़ाइयां हार चुके हैं ट्रंपयह पहला मौका नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी टैक्स नीतियों को लेकर अदालती लड़ाई का सामना करना पड़ रहा हो। इससे पहले इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए ट्रंप के शुल्कों को असंवैधानिक करार दिया था। सर्वोच्च अदालत से करारा झटका मिलने के बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत वैश्विक टैरिफ लगाने की कोशिश की, जिसे भी अदालतों ने गैर-कानूनी ठहरा दिया। अब धारा 301 का सहारा लेने के बाद 25 राज्यों के इस बड़े कानूनी दांव ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें और अधिक बढ़ा दी हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Aug 2026 10:10 am

पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.

आज तक 4 Aug 2026 10:04 am

अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.

आज तक 4 Aug 2026 9:58 am

Sheikh Hasina के वर्चुअल संबोधन को लेकर Bangladesh ने मांगी Bharat से सफाई

बांग्लादेश भारत से यह स्पष्टीकरण मांग रहा है कि क्या वह प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त को होने वाले वर्चुअल संबोधन का समर्थन करेगा। ढाका चाहता है कि भारत इस बात का आश्वासन दे कि उसकी धरती का उपयोग राजनीतिक बयानबाजी के लिए नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश की चिंताएं बांग्लादेश सरकार को इस बात की चिंता है कि ऐसे राजनीतिक बयान देश की स्थिरता को खतरे में डाल सकते हैं और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे पहले, भारत ने संकेत दिया था कि वह भगोड़ों से राजनीतिक बयानबाजी की उम्मीद नहीं करता है। तारीक रहमान और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस बीच, प्रधानमंत्री तारीक रहमान के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह मामला बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति और भारत के साथ उसके संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 9:50 am

UGC की मंजूरी से भारत में खुलेंगे 15 विदेशी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा का होगा विस्तार

भारत में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इन संस्थानों में ऑस्ट्रेलिया, इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के विश्वविद्यालय शामिल हैं। कहां खुलेंगे नए कैंपस? ये विदेशी विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख शहरों में अपने परिसर स्थापित करेंगे। स्वीकृत शहरों में बेंगलुरु, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई और चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण शैक्षिक और व्यावसायिक केंद्र शामिल हैं। यह कदम भारत को एक वैश्विक शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। UGC की मंजूरी और प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इन विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपनी शाखाएं खोलने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों का पालन करने वाले विश्वविद्यालयों को ही मंजूरी दी गई है। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत में खुलने वाले विदेशी कैंपस उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करें और स्थानीय नियामक निकायों के मानकों का पालन करें। शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर इन विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खुलने से भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल विदेशी शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या कम होगी, बल्कि यह भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा। साथ ही, यह विभिन्न देशों के साथ शैक्षिक सहयोग को भी बढ़ावा देगा। क्या होंगे फायदे? यह पहल भारत को उच्च शिक्षा के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में मदद करेगी। छात्रों को विभिन्न देशों के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और शोध के अवसरों तक पहुंच मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा और भारत में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 9:50 am

US Tariff Lawsuit | भारत समेत 60 देशों पर ट्रंप के नए टैरिफ का मामला फिर पहुंचा कोर्ट, अमेरिका के 25 राज्यों ने दायर किया मुकदमा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका के भीतर ही बड़ा कानूनी और राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले अमेरिका के 25 राज्यों के एक समूह ने सोमवार को अदालत का रुख किया है। इन राज्यों ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) समेत 60 व्यापारिक साझेदार देशों (Trading Partner Countries) से होने वाले आयात पर लगाए गए नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद एक बार फिर अपनी कानूनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहा है। न्यूयॉर्क में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर इस मुकदमे में 10% से 12.5% ​​तक के उन टैरिफ को निशाना बनाया गया है, जो पिछले महीने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये ड्यूटी उन देशों के खिलाफ हैं जो जबरन मजदूरी से बने सामान के एक्सपोर्ट को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहे हैं। यह मामला ट्रंप की टैरिफ स्ट्रैटेजी की नई परीक्षा है, जो US कोर्ट में बार-बार झटके लगने के बावजूद कायम रही है। US राज्यों का कहना है कि ट्रंप कोर्ट के फैसलों को नहीं मान रहे हैं यह मुकदमा ओरेगन और न्यूयॉर्क समेत 25 राज्यों ने दायर किया है, जिनके गवर्नर या अटॉर्नी जनरल डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप एक अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल करके उन बड़े इम्पोर्ट टैक्स को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें कोर्ट पहले ही गैर-कानूनी करार दे चुका है। शिकायत के अनुसार, धारा 301 का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोपी खास देशों या उद्योगों को निशाना बनाने के लिए किया गया है - न कि लगभग सभी US इम्पोर्ट पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए। शिकायत में यह भी तर्क दिया गया है कि प्रशासन जबरन मजदूरी का बहाना बनाकर उन टैरिफ को फिर से लागू कर रहा है जिन्हें कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने एक बयान में कहा, हर कदम पर हारने के बावजूद, ट्रंप एक बार फिर कामकाजी परिवारों और ओरेगन के स्थानीय व्यवसायों के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नए टैरिफ 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों पर लागू विवादित टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को की गई थी और ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों से होने वाले इम्पोर्ट पर लागू होते हैं। कुछ देशों को कड़े नियम लागू करने के बाद कम टैरिफ दरें मिलीं। उदाहरण के लिए, प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भारत के लिए टैरिफ दर 12.5% ​​से घटाकर 10% कर दी गई। कुछ खास प्रोडक्ट्स, जैसे तेल, नैचुरल गैस, फर्टिलाइज़र और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट के तहत ड्यूटी-फ्री सुविधा पाने वाले सामानों को नए टैरिफ से छूट दी गई। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने इस कदम का बचाव किया। अमेरिका में लगभग एक सदी से ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है; अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा ही करने का समय आ गया है। ट्रंप ने एक नई कानूनी रणनीति अपनाई ये टैरिफ ट्रंप के आर्थिक एजेंडा के मुख्य स्तंभों में से एक को बचाने की उनकी नई कोशिश है, क्योंकि इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में, US सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है, जिससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई। इसके जवाब में, ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत दुनिया भर में अस्थायी टैरिफ लगाए। बाद में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड ने उन लेवी को भी गैर-कानूनी करार दिया, हालांकि प्रशासन की अपील के दौरान वे लागू रहे। इसे भी पढ़ें: Ramayana की रिलीज से पहले स्पेशल स्क्रीन की मांग, श्री रामलीला महासंघ ने निर्माताओं को लिखा पत्र, विरोध प्रदर्शन की दी चेतावनी कानूनी चुनौतियों के कारण उन विकल्पों के बाद, प्रशासन ने अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का रुख किया है, एक ऐसा कानून जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से विदेशी सरकारों की अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए किया जाता है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर टैरिफ लगाने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया था, और वे उपाय कानूनी चुनौतियों में टिके रहे क्योंकि वे किसी खास देश को टारगेट करके लगाए गए थे। कोर्ट से बार-बार झटके मिलने के बावजूद ट्रंप US मैन्युफैक्चरिंग को फिर से शुरू करने और ग्लोबल ट्रेड को नया रूप देने के लिए टैरिफ को एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। पिछले साल, उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका का लंबे समय से चला आ रहा ट्रेड डेफिसिट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लगभग हर देश से होने वाले इंपोर्ट पर टैरिफ लगाए, हालांकि बाद में कोर्ट ने उन उपायों पर रोक लगा दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 9:46 am

Iran US Conflict | अमेरिकी सेना को ईरान पर 'नए और अनोखे' तरीकों से हमले की सलाह, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले जारी

अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास किसी समझौते पर पहुँचने का यह आखिरी मौका है। ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दावों को खारिज किया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान को सबक सिखाने और उस पर दबाव बनाने के लिए गैर-पारंपरिक और अपरंपरागत रणनीतियों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के अनुरोध पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन के साथ बातचीत के दावों को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप ने जोर देकर कहा कि चर्चा चल रही है। ट्रंप ने कहा, हम अभी बात कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, यह उनके लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है। मैं उन्हें कड़ी कार्रवाई से पहले हर संभव आखिरी मौका देना चाहता हूँ। CENTCOM ने ईरान पर कार्रवाई के लिए 'नए और अनोखे' विचारों की मांग की इस बीच, खबर है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर दबाव बनाने के नए तरीकों के लिए सैन्य विश्लेषकों से नए विचारों की मांग की है। इसे भी पढ़ें: FSSAI का Dabur India पर बड़ा एक्शन! '100% शुद्ध' और 'ऑर्गेनिक' के गुमराह करने वाले दावों पर लगी रोक, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, CENTCOM की खुफिया शाखा के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते एक ईमेल भेजा था जिसमें कर्मचारियों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे दंडित करने के नए, अनोखे और अपरंपरागत तरीकों का प्रस्ताव देने को कहा गया था। क्राउडसोर्सिंग-शैली के इस अनुरोध को अमेरिकी सेना के लिए एक असामान्य कदम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अपने विकल्पों पर फिर से विचार कर रहा है क्योंकि वह ईरान को वाशिंगटन की शर्तों पर समझौते के लिए मजबूर करना चाहता है। मामले से परिचित एक दूसरे सूत्र ने CNN को बताया कि CENTCOM सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा कर रहा है और उसने अपनी मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स ने CNN को दिए एक बयान में कहा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का नए और अनोखे तरीकों से सोचने और काम करने का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने आगे कहा, खासकर एडमिरल कूपर, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के उच्चतम स्तर को हासिल करने के लिए रैंक की परवाह किए बिना हमारी बेहतरीन टीम के सदस्यों से संपर्क करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर फोकस ट्रंप के अनुसार, चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से निपटने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक जलमार्ग सचमुच कल तक फिर से खुल सकता है, जबकि ईरान के परमाणु-मुक्त होने की प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। अमेरिका और ईरान 28 फरवरी से ही संघर्ष में उलझे हुए हैं, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अचानक हमले किए थे। हालांकि बीच-बीच में हुई कूटनीतिक कोशिशों से कुछ समय के लिए शांति रही है, लेकिन टकराव जारी है। ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार है और वह इस इलाके में अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की क्षमता रखता है। होर्मुज में कार्गो जहाज पर हमला एक नई घटना में, ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी, UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने मंगलवार सुबह बताया कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय एक अज्ञात कार्गो जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल (किसी अज्ञात चीज़) से हमला हुआ। एजेंसी ने कहा कि अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जहाज की पहचान या संभावित नुकसान या हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 9:36 am

असम: नाबालिग के साथ रेप और हत्या के मामले में तीन किशोर गिरफ्तार, पीड़ित परिवार ने की फांसी देने की मांग - Jagran

असम: नाबालिग के साथ रेप और हत्या के मामले में तीन किशोर गिरफ्तार, पीड़ित परिवार ने की फांसी देने की मांग Jagran असम में 'निर्भया' जैसा कांड! 15 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या; चेहरा कुचला, प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली! Hindustan असम में 15 वर्षीय किशोरी से दरिंदगी के बाद हत्या, 5 संदिग्ध हिरासत में ETV Bharat असम में नाबाल‍िग के साथ रेप के बाद बेरहमी से हत्‍या, तीन क‍िशोर ग‍िरफ्तार, मां ने की आरोप‍ियों को फांसी देने की मांग ndtv.in असम में 15 साल की लड़की की बेरहमी से हत्या, पांच लोग गिरफ्तार bhaskarhindi.com

गूगल न्यूज़ 4 Aug 2026 9:36 am

'पैसा हमारा, फेवर ईरान का ले रहे थे...', जंग में 'चौधरी' बन फिर मजधार में फंसा पाकिस्तान

रिटायर्ड अमेरिकी जनरल जैक कीन ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ये दोनों देश वॉशिंगटन के बजाय तेहरान के पक्ष में झुके हुए हैं. उन्होंने सऊदी अरब पर भी अमेरिका को सख्त सैन्य कार्रवाई से रोकने का आरोप लगाया.

आज तक 4 Aug 2026 9:32 am

ईरान और अमेरिका में बढ़ा तनाव, मुश्किल में फंसे ट्रंप, तेहरान ओमान की हुई दोस्ती, युद्ध लेगा U-turn?

अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी फिर बढ़ गई है। ईरान ने अमेरिका से बात करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, ट्रंप अपने ही देश में मुश्किलों में फंस गए हैं। ईरान और ओमान की दोस्ती बढ़ी, क्या युद्ध लेगा यू-टर्न?

खबर इंडिया टीवी 4 Aug 2026 9:14 am

आर्मी चीफ के बाद US राजदूत पर गिरी गाज, जेलेंस्की ने कर दी छुट्टी

जेलेंस्की ने यह फैसला तब किया है जब कीव रूस के हमलों से निपटने के लिए अमेरिका से अतिरिक्त पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मांग रहा है. यूक्रेन की राजदूत रहीं स्टेफानिशाइना भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी की जांच के दायरे में बताई जा रही हैं.

आज तक 4 Aug 2026 9:07 am

रूस के ब्लैक सी रिजॉर्ट में यूक्रेनी ड्रोन अटैक, देखें दुनिया आजतक

रूस के ब्लैक सी हॉलीडे रिसॉर्ट में यूक्रेन ने भीषण हमला किया है. इस हमले मे तीन बच्चों समेत 7 लोगों की मौत हो गई वहीं 40 से ज्यादा लोग घायल है. कई की हालत गंभीर है. समुद्री बीच के पास अचानक ड्रोन गिरा. हमले के बाद जगह पर अफरा-तफरी मच गई. पिछले कई दिनों से रूस के रिहायशी इलाकों को यूक्रेन निशाना बना रहा है.

आज तक 4 Aug 2026 9:04 am

Donald Trump के नए आयात शुल्क के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने खटखटाई अदालत

सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, चार अगस्त डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे। ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के वैश्विक आयात शुल्क के स्थान पर लागू किए गए हैं। इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है। जेम्स ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।’’भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली। बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे, लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 8:53 am

'ईरान के पास बातचीत का आखिरी मौका': ट्रंप ने तेहरान को फिर दी धमकी; ईरानी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

'ईरान के पास बातचीत का आखिरी मौका': ट्रंप ने तेहरान को फिर दी धमकी; ईरानी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

अमर उजाला 4 Aug 2026 8:52 am

प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत बीजेपी के लिए झटका और आरजेडी के लिए क्यों है ख़तरे की घंटी - BBC

प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत बीजेपी के लिए झटका और आरजेडी के लिए क्यों है ख़तरे की घंटी BBC प्रशांत किशोर की जीत पर क्या बोलीं उनकी पत्नी जाह्नवी दास? BBC बांकीपुर-दतिया उपचुनाव में BJP की हार पर नितिन नवीन ने क्या कहा? मांजलपुर जीत पर भी सामने आया बयान India TV Hindi बांकीपुर उपचुनाव में जीत पर जन सुराज कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न Dainik Bhaskar Beat Report: किला BJP का ढहा, लेकिन PK की जीत तेजस्वी यादव के लिए कैसे बनेगी चुनौती? AajTak

गूगल न्यूज़ 4 Aug 2026 8:49 am

सेउटा में विदेश से आकर फंसे 800 नाबालिग बच्चे, मां-बाप लापता

सेउटा में इस समय करीब 800 बच्चे बिना माता-पिता या किसी अभिभावक फंसे हैं. स्पेन के कानून के मुताबिक, बिना अभिभावक के आए नाबालिग बच्चों को विशेष संरक्षण दिया जाता है. फिलहाल कई बच्चे सरकारी संरक्षण केंद्रों में रह रहे हैं, लेकिन ये केंद्र भी अब पूरी तरह भर चुके हैं.

आज तक 4 Aug 2026 8:48 am

'मोदी हमारे ग्रेट फ्रेंड...', भारत का नाम लेकर नेतन्याहू ने US को दिखाया आईना

ईरान संघर्ष और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि इजरायल भारत के साथ अपने रिश्तों में भारी निवेश कर रहा है, नरेंद्र मोदी उनके सबसे बड़े दोस्तों में हैं. उन्होंने कहा कि भारत से इजरायल को मिलने वाला समर्थन उन्हें निजी तौर पर भी अविश्वसनीय लगता है.

आज तक 4 Aug 2026 8:44 am

H-1B Visa Renewal: अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों को लग सकता है बड़ा झटका, बढ़ सकती है रिन्यूअल फीस

H-1B Visa Renewal: अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों को लग सकता है बड़ा झटका, बढ़ सकती है रिन्यूअल फीस

समाचार नामा 4 Aug 2026 8:43 am

'अपने दोस्त नरेंद्र के साथ...' भारत की तारीफ में बोले नेतन्याहू, जानें क्या कहा इजरायली प्रधानमंत्री ने

'अपने दोस्त नरेंद्र के साथ...' भारत की तारीफ में बोले नेतन्याहू, जानें क्या कहा इजरायली प्रधानमंत्री ने

समाचार नामा 4 Aug 2026 8:41 am

आतंक के आकाओं में भरा खौफ: 30 से ज्यादा आतंकियों को अज्ञात हमलावरों ने किया ढेर, लश्कर कमांडर ने खुद कबूला

आतंक के आकाओं में भरा खौफ: 30 से ज्यादा आतंकियों को अज्ञात हमलावरों ने किया ढेर, लश्कर कमांडर ने खुद कबूला lashkar-e-taiba-commander-rizwan-hanif-claims-over-targeted-killings-india-denies-allegations

अमर उजाला 4 Aug 2026 8:35 am

यूक्रेन से भिड़ने वाला था ईरान! 3 ठिकानों पर हमले का प्लान, टली जंग

ईरान ने यूक्रेन के तीन ठिकानों पर जवाबी हमला करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन कीव की तरफ से आई कथित 'माफी' के बाद यह योजना रोक दी गई. ईरान की तरफ से यह बयान तब आया है जब कैस्पियन सागर में हमले के बाद ईरान-यूक्रेन के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बातचीत की थी.

आज तक 4 Aug 2026 8:14 am

भारत पर नए टैरिफ लगाकर बुरे फंसे ट्रंप, अमेरिका के 25 राज्यों ने ठोक दिया मुकदमा

ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि ये टैरिफ उन देशों पर लगाए गए हैं जो बंधुआ मजदूरी से बने सामान के निर्यात को रोकने के लिए कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि राज्यों का कहना है कि यह टैरिफ लगाने का एक बहाना है।

लाइव हिन्दुस्तान 4 Aug 2026 8:09 am

वेनेजुएला: जून में आए भीषण भूकंप में 6125 लोगों की मौत

वरिष्ठ सांसद जॉर्ज रोड्रिगेज ने दावा किया है कि वेनेजुएला में जून में आए भूकंप में मृतकों की संख्या 6125 हो गई है. वेनेजुएला में 24 जून को दो शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए थे.

आज तक 4 Aug 2026 8:06 am

ईरान को आखिरी मौका: ट्रंप बोले, जल्द नतीजे पर पहुंचेगी बातचीत

ईरान को लेकर अमेर‍िकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक इंटरव्‍यू के दौरान कहा क‍ि ये बातचीत जल्द ही किसी न किसी नतीजे पर पहुंच जाएगी। यह कोई बहुत मुश्किल बात नहीं है

देशबन्धु 4 Aug 2026 7:50 am

Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका

वाशिंगटन, तीन अगस्त (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ प्रस्तावित नयी वार्ता तेहरान के लिए समझौता करने और अमेरिका के हमलों से बचने का आखिरी मौका है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में बातचीत शुरू होगी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताओं का समाधान निकालने का रास्ता तैयार होगा। राष्ट्रपति ने कहा, “पहला चरण जलडमरूमध्य को खोलने का है। दूसरा चरण परमाणु निरस्त्रीकरण का है।”ट्रंप ने कहा कि “इसमें थोड़ा समय लगेगा।”ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सहयोगी खाड़ी देशों के आग्रह पर ईरान पर नए और बड़े हमले का आदेश देने का फैसला फिलहाल टाल दिया।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 7:35 am

ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला

ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.

आज तक 4 Aug 2026 7:27 am

Satyanjal Pandey इस्लामाबाद में बने भारत के नए प्रभारी राजदूत

इस्लामाबाद, तीन अगस्त भारतीय राजनयिक सत्यांजल पांडे ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में भारत के प्रभारी राजदूत के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। भारतीय मिशन ने सोमवार को यह जानकारी दी। वर्ष 2008 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी पांडे ने गीतिका श्रीवास्तव का स्थान लिया है, जिन्हें अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। भारतीय मिशन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, डॉ. सत्यांजल पांडे ने एक अगस्त 2026 को इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रभारी राजदूत के तौर पर कार्यभार संभाला। उच्चायोग की पोस्ट को दोबारा साझा करते हुए पांडे ने लिखा, एक शानदार टीम का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।’’इससे पहले वह श्रीलंका में भारत के उप उच्चायुक्त थे। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान द्वारा राजनयिक संबंधों का स्तर कम किए जाने के बाद इस्लामाबाद और दिल्ली स्थित भारतीय और पाकिस्तानी उच्चायोगों का नेतृत्व प्रभारी राजदूत कर रहे हैं।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 7:25 am

Sheikh Hasina के प्रस्तावित कार्यक्रम पर Bangladesh ने India से मांगा रुख स्पष्ट करने को

ढाका, तीन अगस्त बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के बुधवार को नयी दिल्ली में प्रस्तावित संवाददाता सम्मेलन को लेकर भारत से उसका रुख स्पष्ट करने को कहा है। यह संवाददाता सम्मेलन पांच अगस्त को हसीना सरकार के पतन के दो साल पूरे होने के मौके पर होना है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम ने सोमवार को ढाका में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि भारतीय क्षेत्र से हसीना की सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों का दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हसीना (78) के पांच अगस्त को नयी दिल्ली में ‘फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ की ओर से आयोजित एक निजी कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल होने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों में हसीना के अमेरिका में रहने वाले बेटे साजीब वाजेद जॉय, पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल और बांग्लादेश ह्यूमन राइट्स वॉच के महासचिव मोहम्मद अली सिद्दीकी शामिल हैं। शमा ने कहा, “बांग्लादेश चाहता है कि भारत इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करे।” उन्होंने कहा कि ढाका नहीं चाहता कि इस मुद्दे से दोनों देशों के आपसी संबंधों पर बुरा असर पड़े। शमा ने कहा कि “भारत में रह रहे भगोड़े, जो बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं”, उनकी राजनीतिक गतिविधियों से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ढाका ने लगातार दोहराया है कि “भगोड़ों या दोषी ठहराए गए लोगों” को बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने के मकसद से राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने के लिए भारतीय जमीन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। शमा ने कहा, “हम चाहते हैं कि भारत के साथ हमारे संबंध बेहतर हों। मेरा मानना ​​है कि भारत भी यही चाहता है।”उधर, सरकारी समाचार एजेंसी ‘बीएसएस’ की खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत की जमीन से हसीना का प्रस्तावित सार्वजनिक संबोधन “द्विपक्षीय संबंधों में आई सकारात्मक गति” को कमजोर कर सकता है। खबर में कहा गया है कि कबीर ने यह बात तब कही, जब बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने सोमवार को उनसे शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने बांग्लादेश-भारत संबंधों के विभिन्न पहलुओं का जायजा लिया और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बातचीत आपसी हित और आपसी फायदे के आधार पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच लोगों पर केंद्रित सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी।”गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सोमवार को कहा कि सरकार ने देशभर में लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच अगस्त से पहले कानून लागू करने वाली और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 7:23 am

अमेर‍िका ने ईरान पर बढ़ाया दबाव, सेंटकॉम ने होर्मुज स्‍ट्रेट पर और सख्‍त नाकाबंदी की

अमेर‍िकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की नाकेबंदी और सख्‍त कर द‍ी गई है

देशबन्धु 4 Aug 2026 7:20 am

China: चीन में हर विदेशी पर रहती है खुफिया नजर? डाटा लीक ने खोली पोल, हर गतिविधि की बनती है डिजिटल प्रोफाइल

China: चीन में हर विदेशी पर रहती है खुफिया नजर? डाटा लीक ने खोली पोल, हर गतिविधि की बनती है डिजिटल प्रोफाइल--China Surveillance Leak: Data Exposure Reveals Real-Time Monitoring of Foreign Visitors and Digital Profiling

अमर उजाला 4 Aug 2026 7:16 am

गाजा में कत्लेआम पर भड़के कतर-तुर्की-मिस्र, इजरायल नहीं रोक रहा बमबारी

कतर, मिस्र और तुर्की ने गाजा में इजरायली कार्रवाई, खासकर नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की है. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है. गाजा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में ताजा हमले में कम से कम दो लोग मारे गए हैं.

आज तक 4 Aug 2026 7:05 am

West Asia: ईरान में अब तक 50 जासूसी के आरोपियों को फांसी; ट्रंप बोले- तेहरान के पास अंतिम अवसर, कब थमेगी जंग?

West Asia: ईरान में अब तक 50 जासूसी के आरोपियों को फांसी; ट्रंप बोले- तेहरान के पास अंतिम अवसर, कब थमेगी जंग?

अमर उजाला 4 Aug 2026 6:57 am

ईरानी नेतृत्व दोहरे चर‍ित्र वाला, ग‍िड़ग‍िड़ाकर बातचीत की मांग करते हैं, फ‍िर कहते हैं कि कोई चर्चा नहीं हो रही : ट्रंप

अमेर‍िकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बातचीत के दावों के बीच एक बार फिर यू-टर्न ले लिया है। इस बार ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को 'दोहरे चरित्र वाला' बताया। ट्रंप ने कहा क‍ि वह एक तरफ तो अमेर‍िका के साथ बातचीत के ल‍िए ग‍िड़ग‍िड़ाते रहते हैं और बैठक तय होते ही खुलेआम कहते फ‍िरते हैं क‍ि कोई बातचीत नहीं हो रही है। यहां तक कि होर्मुज स्‍ट्रेट को लेकर भी बड़े-बड़े दावे करने लगते हैं।

देशबन्धु 4 Aug 2026 6:50 am

होर्मुज में नया संकट! ओमान के पास कार्गो जहाज पर 'अज्ञात' प्रोजेक्टाइल से हमला

UKMTO ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कार्गो जहाज़ पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमले की जानकारी दी है. UKMTO ने बताया कि ओमान के अल खसाब से 20 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में यह घटना हुई है.

आज तक 4 Aug 2026 6:49 am

'ईरान नहीं चाहता हमला, अब परमाणु समझौते पर फैसला लेने का समय', डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान

ट्रंप ने कहा कि हम ईरान के परमाणु-निरस्त्रीकरण (denuclearization) पर बात करना चाहते हैं। ईरान के लिए एक अच्छे दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का यह आखिरी मौका है।

खबर इंडिया टीवी 4 Aug 2026 6:35 am

मुद्दा: बदल रही बंगाल की हवा? तस्लीमा नसरीन के कार्यक्रम से बदले माहौल के संकेत, खत्म हो रही टकराव की राजनीति

मुद्दा: बदल रही बंगाल की हवा? तस्लीमा नसरीन के कार्यक्रम से बदले माहौल के संकेत, खत्म हो रही टकराव की राजनीति--Political Climate Changing in West Bengal Taslima Nasreen Event Sparks Debate

अमर उजाला 4 Aug 2026 6:29 am

Ethiopia Landslide: पूर्वी अफ्रीका में भूस्खलन से 14 मौतें, कई लापता; इथियोपिया में धार्मिक आयोजन के समय तबाही

Ethiopia Landslide: पूर्वी अफ्रीका में भूस्खलन से 14 मौतें, कई लापता; इथियोपिया में धार्मिक आयोजन के समय तबाही--Ethiopia Landslide Updates Tsadqane Debre Mitmaq St Mary Monastery casualties rescue operation hindi news

अमर उजाला 4 Aug 2026 5:54 am

PoK में पाकिस्तान की पोल खुली तो मीडिया पर लगाया बैन, महिलाओं और बच्चों पर निशाना

पीओके में कई सप्ताह से जारी अशांति के बीच अब पाकिस्तान की सरकार ने मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अल जजीरा इंग्लिश पर भी बैन लगाया गया है। वहीं पाकिस्तान अब महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है।

लाइव हिन्दुस्तान 4 Aug 2026 5:39 am

दक्षिण कोरिया में हीट वेव का कहर, तापमान 41 डिग्री पार

दक्षिण कोरिया भी अभूतपूर्व भीषण गर्मी से जूझता रहा। देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया और बड़ी संख्या में लोग गर्मी से जुड़ी बीमारियों का शिकार हुए।

देशबन्धु 4 Aug 2026 4:00 am

World: ऑस्ट्रेलिया में पुरुषों का यौन उत्पीड़न, पूर्व रग्बी कोच आरोपी; ब्रॉड पीक से तीन और शव बरामद, दो लापता

World: ऑस्ट्रेलिया में पुरुषों का यौन उत्पीड़न, पूर्व रग्बी कोच आरोपी;ब्रॉड पीक से तीन और शव बरामद, दो लापता

अमर उजाला 4 Aug 2026 3:01 am

ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.

आज तक 4 Aug 2026 2:38 am

Hamas Disarmament: नेतन्याहू और बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में हमास निरस्त्रीकरण समझौते पर चर्चा; गाजा में शांति कब?

Hamas Disarmament: नेतन्याहू और बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में हमास निरस्त्रीकरण समझौते पर चर्चा; गाजा में शांति कब?---Israel Gaza War Board of Peace Envoy Meets Netanyahu Over Hamas Disarmament Deal

अमर उजाला 4 Aug 2026 2:36 am

'समझौते का ये आखिरी मौका', ट्रंप की ईरान को फिर बड़ी धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई बातचीत के जरिए समझौता करने का आखिरी मौका दिया है. उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए बातचीत जल्द शुरू हो सकती है. ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि ये मौका आखिरी है और अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका हमले को तेज कर सकता है.

आज तक 4 Aug 2026 2:08 am

अफगानिस्तान में कबीलों के बीच जमीन विवाद ने ल‍िया हिंसक रूप, चौथे द‍िन जारी झड़प में कई घायल

दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में खोस्त और पक्तिया प्रांतों की सीमा पर स्थित एक पहाड़ी इलाके के मालिकाना हक को लेकर दो कबीलों के बीच हुई सशस्त्र झड़पें सोमवार को चौथे दिन भी जारी रहीं।

देशबन्धु 4 Aug 2026 2:00 am

Israel-India Ties: 'इस्राइल को अविश्वसनीय समर्थन'; नेतन्याहू ईरान में जंग के बीच भारत-PM मोदी पर और क्या बोले?

Israel-India Ties: 'इस्राइल को अविश्वसनीय समर्थन'; नेतन्याहू ईरान में जंग के बीच भारत-PM मोदी पर और क्या बोले?---Netanyahu Praises PM Modi, Calls India Support Unbelievable Amid Iran Conflict

अमर उजाला 4 Aug 2026 1:20 am

TMC में एक और टूट के कयास: पूर्व मंत्री और काकोली घोष के बीच कई मुलाकातें, क्या सियासी पाला बदलेंगी शशि पांजा?

TMC में एक और टूट के कयास: पूर्व मंत्री और काकोली घोष के बीच कई मुलाकातें, क्या सियासी पाला बदलेंगी शशि पांजा?---TMC Crisis Shashi Panja Repeat Visit to NCPI MP Kakali Ghosh Dastidar Sparks Fresh Defection Speculation

अमर उजाला 4 Aug 2026 1:09 am

तेल कंपनियों पर बिफरे ट्रंप: शवोन के CEO को अमेरिकी राष्ट्रपति की खरी-खरी, क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

तेल कंपनियों पर बिफरे ट्रंप: शवोन के CEO को अमेरिकी राष्ट्रपति की खरी-खरी, क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?--Trump Slams Chevron CEO, Demands Immediate Fuel Price Cuts Amid Rising Oil Costs

अमर उजाला 4 Aug 2026 12:20 am

खैबर पख्तूनख्वा सुसाइड अटैक का सामने आया CCTV, दहशत में चीखते-भागते दिखे लोग

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस स्टेशन के मुख्य गेट पर आत्मघाती हमला हुआ. जिसका CCTV वीडियो सामने आया है. CCTV में धमाके के बाद धुआं उठता और लोग जान बचाने के लिए भागते दिख रहे हैं. पुलिस स्टेशन के पास से एक शांति रैली गुजर रही थी. तभी एक आत्मघाती हमलावर मुख्य गेट के पास पहुंचा और खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. देखें वीडियो.

आज तक 3 Aug 2026 11:39 pm

शेख हसीना के भाषण से पहले बांग्लादेश में खलबली, भारत से लगाई ये गुहार

बांग्लादेश ने भारत से कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना या अवामी लीग से जुड़े किसी व्यक्ति को भारतीय जमीन से राजनीतिक भाषण देने या बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियां करने की अनुमति न दी जाए.

आज तक 3 Aug 2026 11:37 pm

PAK में भारतीय एजेंट्स ने 30 आतंकी मारे, लश्कर का कुबूलनामा

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले तीन-चार साल में संगठन के 30 से ज्यादा आतंकी मारे गए. उसने इन हत्याओं के पीछे भारतीय खुफिया एजेंसियों का हाथ होने का आरोप लगाया, हालांकि भारत पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है.

आज तक 3 Aug 2026 11:22 pm

'डील या फिर सरेंडर', भड़के ट्रंप बोले- बातचीत पर ईरान का दोहरा रवैया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ नई बातचीत होने वाली है, लेकिन तेहरान ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद ट्रंप ने ईरान को समझौता करने या 'पूरी तरह आत्मसमर्पण' करने की चेतावनी दी.

आज तक 3 Aug 2026 11:06 pm

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के भीषण Drone Attack से दहला रूस, 8 लोगों की मौत और जवाबी Air Strikes तेज

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। बीती रात यूक्रेन की ओर से रूस के कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए गए, जिनमें कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई। इन हमलों में नागरिक इलाकों के साथ-साथ व्यावसायिक ढांचे को भी निशाना बनाया गया। दूसरी ओर रूस ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में सैकड़ों यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। मौजूद जानकारी के अनुसार, रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में कुल 635 यूक्रेनी ड्रोन को नष्ट कर दिया। इसके बावजूद कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे, जिससे कई क्षेत्रों में जान-माल का नुकसान हुआ। बता दें कि रूस के सीमावर्ती बेलगोरोद क्षेत्र में एक ड्रोन हमला बच्चों के खेल मैदान के पास हुआ। कार्यवाहक गवर्नर अलेक्जेंडर शुवायेव के अनुसार, इस हमले में एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए। बाद में बेलगोरोद के अन्य हिस्सों में हुए अलग-अलग हमलों में तीन और लोगों की मौत तथा पांच लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं पड़ोसी सारातोव क्षेत्र के एंगेल्स शहर में एक रिहायशी इमारत पर ड्रोन गिरने से दो लोगों की जान चली गई। क्षेत्र के गवर्नर रोमन बुसारगिन ने बताया कि एंगेल्स और क्षेत्रीय राजधानी सारातोव दोनों जगह नागरिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। गौरतलब है कि एंगेल्स में रूस का एक महत्वपूर्ण सैन्य हवाई अड्डा मौजूद है, जबकि सारातोव अपने बड़े तेल शोधन संयंत्र के लिए जाना जाता है। इसी वजह से ये दोनों शहर पहले भी कई बार यूक्रेनी हमलों का निशाना बन चुके हैं। उदमुर्तिया क्षेत्र में भी ड्रोन हमले से तीन लोगों की मौत और दो अन्य के घायल होने की पुष्टि कार्यवाहक गवर्नर ओल्गा अब्रामोवा ने की है। वहीं बश्कोर्तोस्तान क्षेत्र के गवर्नर रादिय खाबीरोव ने बताया कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए गए बड़े ड्रोन हमले को वायु रक्षा प्रणाली ने विफल कर दिया। हालांकि क्षेत्रीय राजधानी उफा के औद्योगिक इलाके में एक ड्रोन गिरने के बाद आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए राहत दलों को तैनात किया गया। दूसरी ओर रूस ने भी यूक्रेन पर जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसकी सेना ने यूक्रेन के मिकोलाइव बंदरगाह पर सैन्य सामान ले जा रहे दो जहाजों और वहां मौजूद बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। इसके अलावा काला सागर में सैन्य सामग्री ले जा रहे एक अन्य जहाज पर भी हमला किया गया। उधर यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी शहर जापोरिज्जिया में रूसी निर्देशित बम हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य लोग घायल हुए। क्षेत्रीय गवर्नर इवान फेदोरोव ने इसकी पुष्टि की है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में यूक्रेन ने रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के तहत कई व्यावसायिक ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इसी अभियान के तहत रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन खुदरा कंपनी वाइल्डबेरीज़ के एक गोदाम पर भी हमला किया गया। बताया जा रहा है कि पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में इस कंपनी के एक दर्जन से अधिक गोदाम ड्रोन हमलों का शिकार बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमलों से युद्ध का दायरा और व्यापक होता जा रहा है। इसका असर अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम नागरिकों, व्यापारिक गतिविधियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

प्रभासाक्षी 3 Aug 2026 11:04 pm

South Korea में भीषण गर्मी का प्रहार, 42.5°C के बीच Emergency Warning जारी, PM Han Duck-soo ने दिए कड़े निर्देश

दक्षिण कोरिया इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और देश ने अपने मौसम इतिहास का नया रिकॉर्ड दर्ज किया है। दक्षिण-पूर्वी शहर यांगसान में रविवार दोपहर तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो वर्ष 1904 में आधुनिक मौसम रिकॉर्ड शुरू होने के बाद अब तक का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकार और मौसम विभाग ने लोगों के लिए कई चेतावनियां जारी की है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यांगसान में लगातार पांचवें दिन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। वहीं डेगू, बुसान और कई अन्य शहरों में भी पारा 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया। हालात को देखते हुए 20 से अधिक क्षेत्रों में आपातकालीन गर्मी चेतावनी लागू कर दी गई है। यह नई चेतावनी व्यवस्था इस वर्ष शुरू की गई है ताकि बढ़ते तापमान से लोगों की सुरक्षा बेहतर तरीके से की जा सके। बता दें कि दक्षिण कोरिया मौसम प्रशासन के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में महसूस किया जाने वाला तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या वास्तविक तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना होती है, तब आपात चेतावनी जारी की जाती है। लोगों से सभी बाहरी गतिविधियां तुरंत रोकने, ठंडी जगहों पर जाने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की अपील की गई है। प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने स्थानीय प्रशासन को बुजुर्गों, बच्चों और अन्य संवेदनशील लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिजली और पानी की आपूर्ति लगातार बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। गर्मी का असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राजधानी सियोल में बड़ी संख्या में लोग वातानुकूलित बाजारों, कैफे और सार्वजनिक शीतलन केंद्रों का सहारा ले रहे हैं। कई जगहों पर धुंध जैसी पानी की फुहार वाले केंद्र भी बनाए गए हैं, जहां लोग गर्मी से राहत पाने पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि ग्योंगजू शहर में भी तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले आठ वर्षों का सबसे अधिक स्तर है। वहीं उत्तर कोरिया में भी कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। राजधानी प्योंगयांग में लगातार एक सप्ताह तक रात का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया। भीषण गर्मी का असर खेलों पर भी पड़ा है। चांगवोन में पेशेवर बेसबॉल लीग का मुकाबला लगातार दूसरे दिन रद्द करना पड़ा, क्योंकि वहां तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव गतिविधियों से बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन और इस वर्ष फिर सक्रिय हुए अल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की ओर बढ़ रहे डॉल्फिन नामक तूफान की दिशा आने वाले दिनों में दक्षिण कोरिया के मौसम पर असर डाल सकती है। अगर तूफान की दिशा बदलती है तो बारिश और तेज हवाओं से कुछ राहत मिल सकती है, जबकि दूसरी स्थिति में गर्मी और उमस और अधिक बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

प्रभासाक्षी 3 Aug 2026 10:48 pm

डील या टोटल सरेंडर… ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम; होर्मुज पर अमेरिकी कंट्रोल का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए डील या टोटल सरेंडर का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि वे निजी तौर पर बातचीत चाहते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से इनकार करते हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 3 Aug 2026 10:12 pm

आतंकियों का काल बना 'अननोन', मारे 30 से ज्यादा लश्कर, पाकिस्तान में कौन कर रहा ऑपरेशन?

लश्कर-ए-तैयबा के एक वरिष्ठ कमांडर ने पहली बार खुलेआम यह बात स्वीकार की है कि पिछले तीन से चार वर्षों में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई शहरों में संगठन के 30 से अधिक सदस्य मारे जा चुके हैं। उसने इन हत्याओं का ठीकरा भारत से जुड़े 'अननोन' पर फोड़ा है।

लाइव हिन्दुस्तान 3 Aug 2026 9:15 pm

क्या नवाज़ शरीफ को मिलेगी नई ज़िम्मेदारी?

PoK चुनाव में PML-N की बढ़त के बाद नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा तेज है. हालांकि मौजूदा नियमों के तहत उनके लिए यह राह आसान नहीं मानी जा रही.

आज तक 3 Aug 2026 9:13 pm