रूस-यूक्रेन में युद्धविराम पर तकरार
रूस और यूक्रेन ने रविवार को एक-दूसरे पर तीन दिन के युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया
11 मई 1951, गुजरात का प्रभास पाटन क्षेत्र। 1300 सालों में 7वीं बार सोमनाथ मंदिर नए सिरे से बनकर तैयार था। उद्घाटन के लिए मंदिर ट्रस्ट के मुखिया और तब केंद्रीय मंत्री रहे केएम मुंशी ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को न्योता दिया था। लेकिन नेहरू ने आने से साफ मना कर दिया। उन्होंने मुंशी से कहा था, 'सोमनाथ मंदिर को फिर से बनाना मुझे पसंद नहीं। ये हिंदू पुनरुत्थानवाद है।’ उनके मना करने के बावजूद राजेंद्र प्रसाद मंदिर पहुंचे और उद्घाटन में शामिल हुए। आज इसके 75 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ जाने वाले हैं। वे ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में शामिल होंगे और विशेष ध्वज फहराएंगे। यह पीएम मोदी की 5 महीने में दूसरी सोमनाथ यात्रा है। मंडे मेगा स्टोरी में सोमनाथ मंदिर के टूटने, बनने और उससे जुड़ी कंट्रोवर्सीज की पूरी कहानी... ***** ग्राफिक्स: दृगचंद भुर्जी ------ यह खबर भी पढ़िए… महिलाओं के मस्जिद जाने, लड़कियों का खतना:ऐसे 66 मामलों पर असर डालेगा सबरीमाला का फैसला, शिव-विष्णु के मिलन से जन्मे अयप्पा की कहानी भारत की सभी मस्जिदों में महिलाएं बिना रुकावट नमाज पढ़ने जा सकेंगी या नहीं? दाऊदी बोहरा समाज की लड़कियों का खतना क्या गैर-कानूनी हो जाएगा? क्या दूसरे धर्म में शादी करने के बाद भी पारसी महिलाएं अग्नि मंदिर में जा पाएंगी? इन सभी सवालों के जवाब तय होंगे सबरीमाला पर फैसले से। पूरी खबर पढ़िए…
नाम: कैप्टन राकेश वालियाउम्र: 65 सालकाम: रिटायर्ड आर्मी अफसर बात 2021 की है। 44 साल की एक महिला ने सोशल इनफ्लुएंसर बनकर राकेश को फोन किया और मिलने का वक्त मांगा। 29 दिसंबर, 2021 को 45 मिनट की मुलाकात हुई और राकेश पर रेप की FIR हो गई। केस सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट गया। पड़ताल शुरू हुई, तो सिर्फ दिल्ली में ही महिला की झूठी FIR के 9 शिकार मिले। राकेश 10वें टारगेट थे। 4 साल केस चलने के बाद फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कैप्टन राकेश वालिया के खिलाफ FIR रद्द कर दी। इससे पहले उन्होंने 2022 में ही आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ रिवर्स केस की एप्लीकेशन दी थी। पुलिस ने 3 साल बाद FIR तब की, जब सुप्रीम कोर्ट ने कैप्टन वालिया को बरी कर दिया। 45 मिनट की मुलाकात, जिसके बाद रेप की FIR हुई कैप्टन वालिया बताते हैं, ‘2017 में मेरी एक किताब पब्लिश हुई। 2019 के आखिर में किसी सिदरा मंसूर का फोन आया। खुद को सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बताया और कहा कि मेरी किताब का प्रमोशन और ट्रांसलेशन करेंगी। उसने मुझसे मिलने की इच्छा जताई। व्यस्तताओं की वजह से अपॉइंटमेंट टलता रहा, आखिरकार 29 दिसंबर 2021 को मिलना तय हुआ।’ 'सिदरा ने कहा कि वो पति के साथ आएंगी और गाड़ी में ही मेरा इंटरव्यू करेंगी। मैं नहीं जानता था कि ये मुलाकात मेरी जिंदगी और मान-सम्मान को तहस-नहस कर देगी। दोपहर 3.30 बजे पिकअप के लिए मैं छतरपुर मेट्रो स्टेशन पहुंचा, तो सिर्फ सिदरा मिलीं। उन्होंने बताया कि पति को किसी काम से जाना पड़ा। फिर मेरी ही गाड़ी में इंटरव्यू शुरू हुआ।' 'सिदरा के पास 2 फोन और एक वॉइस रिकॉर्डर था। सब सामान्य था, लेकिन शक तब हुआ, जब सिदरा ने कहा कि आपके लगातार फोन कॉल आने की वजह से हम ज्यादा बात नहीं कर सके। क्या किसी पार्क या होटल में चलकर डीटेल में बात कर सकते हैं। मैंने आगे बिना कोई बात किए शाम 4.15 बजे नोएडा के बोटैनिकल गार्डन (सेक्टर 38) पुलिस थाने के सामने उन्हें ड्रॉप कर दिया।' 'कुल 45 मिनट की मुलाकात थी। घर भी नहीं पहुंचा था कि नोएडा सेक्टर-37 थाने से फोन आया। पुलिस ने कहा कि शबनम नाम की महिला ने मुझ पर रेप का आरोप लगाया है। मैंने पुलिस को बताया कि मैं उन्हें नहीं जानता। फिर रात 11.30 बजे महरौली पुलिस स्टेशन से फोन आया। बताया गया कि शबनम ने मेरे खिलाफ रेप की FIR की है। तब मुझे सिदरा मंसूर की असली पहचान पता चली।’ FIR में दर्ज कहानी और तथ्यों में 3 गड़बड़ियां मिलीं… 1. कैप्टन वालिया बताते हैं, ‘FIR में लिखा था कि मैंने शबनम को दोपहर 3.30 बजे गाड़ी में बैठाया। 20 मिनट बाद 3.50 बजे प्यास लगने पर उसे कोल्ड ड्रिंक दिया, जिसमें नशा था। 15 मिनट बाद उसे नशा चढ़ने लगा, यानी अब तक 4.05 बज चुके थे। 10 मिनट बाद यानी 4.15 बजे वो बेहोश हुई, जिसका फायदा उठाकर मैंने रेप किया। जबकि असल में मैंने 4.15 बजे उसे ड्रॉप कर दिया था।‘ गड़बड़ी: ड्रॉप करने का समय और बेहोशी का समय एक है, तो रेप कब हुआ। 2. FIR के मुताबिक, रेप का स्पॉट नोएडा सेक्टर-34 या 35 था। यहीं मैंने नशे की हालत में महिला को आगे की सीट से उतारकर पीछे बैठाया। फिर इसी व्यस्त इलाके में गाड़ी घूमती रही। गड़बड़ी: क्या 60-62 साल का व्यक्ति 44 साल की महिला को बैक सीट पर इतनी सफाई से बैठा देगा कि कोई देख भी न सके। वो भी तब, जब वो नशे में है। 3. नशे में महिला दोपहर 4.15 से रात 11 बजे तक एक थाने से दूसरे और फिर तीसरे थाने घूमती रहीं। नोएडा में सेक्टर-37 और दिल्ली के घिटोरनी थाने में FIR नहीं लिखी गई। वो दिल्ली के महरौली थाने में रात 11 बजे पहुंची और महज 13 मिनट में यानी 11.13 बजे FIR दर्ज हो गई। गड़बड़ी: कोई व्यक्ति नशे की हालत में इतना ट्रैवल कैसे कर सकता है। रेप का आरोप लगाया, लेकिन मेडिकल नहीं कराया कैप्टन राकेश वालिया ने आगे बताया, ‘FIR में दर्ज घटना की रात 10.55 बजे बेटे को फेसबुक पर एक मैसेज मिला। लिखा था- 'Are you Rakesh Walia’s son, your father raped me. फैमिली तक ये बात पहुंचाकर, डराने की कोशिश हुई।’ ‘थाने गया, तो पूछताछ और मेडिकल हुआ। जबकि शिकायत करने वाली महिला ने मेडिकल कराने और जांच के लिए कपड़े देने से मना कर दिया। वो रेप का स्पॉट तक नहीं पहचान सकी। ’ 2022 में सबूत जुटाए और महिला पर केस किया कैप्टन वालिया आगे बताते हैं, ‘2022 में मैंने इस महिला के खिलाफ सबूत तलाशने शुरू किए और 3-4 FIR भी जुटा ली। ये महिला ने दूसरे पुरुषों पर की थीं। सभी को फंसाने का एक सा ही तरीका था। 25 फरवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मेरे खिलाफ हुई FIR रद्द कर दी।‘ ‘मैंने भी महिला के खिलाफ झूठी FIR दर्ज कराने और एक्सटॉर्शन की शिकायत की थी, लेकिन पुलिस को केस दर्ज करने में 3 साल लग गए। इसी पुलिस ने मेरे खिलाफ महज 13 मिनट में FIR लिख दी थी, जबकि महिला के पास सबूत के नाम पर सिर्फ उसका बयान था। मेरे पास 9 FIR थीं, जिनमें और भी लोगों को फंसाने के सबूत थे। आखिरकार मार्च 2025 में महिला पर FIR हुई।‘ कैप्टन वालिया के वकील भारत चुग की लीगल टीम के मेंबर अमित लखानी कहते हैं, 'ये केस इतना कमजोर था कि सुप्रीम कोर्ट में दूसरी सुनवाई में रद्द हो गया।' वे आरोप लगाते हुए कहते हैं, ‘पुलिस ने महिला को गिरफ्तार किया, लेकिन एक घंटे में छोड़ दिया। उसके बाद क्राइम ब्रांच ने जो प्रेस रिलीज जारी की, वो भी मजेदार है। उन्होंने लिखा था- क्राइम ब्रांच ने हनीट्रैप करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया। ये एक बड़ा ऑर्गनाइज्ड रैकेट है। मतलब आप मान रहे हैं कि ये एक बड़ा रैकेट है, लेकिन गिरफ्तार करके छोड़ भी दिया?’ रेप केस के जरिए सरकारी फंड से पैसों ऐंठने का खेल इन केसेज के पीछे क्या असल में कोई गिरोह एक्टिव है, ये समझने के लिए हम ऐसे मामलों पर काम कर रहे RTI एक्टिविस्ट सोनी कपूर से मिले। वे बताते हैं, ‘झूठी रेप की FIR लिखवाकर पैसे कमाना एक ऑर्गेनाइज्ड क्राइम बन गया है। दिल्ली के आंकड़े तो कम से कम यही बताते हैं।' ‘देखिए अगर कोई महिला थाने में पहुंचकर कहती है कि किसी व्यक्ति ने मेरा रेप किया है, तो FIR दर्ज करना पुलिस की मजबूरी है, वरना उस अधिकारी को ही सजा हो जाएगी। इसे जीरो ऑवर FIR कहते हैं। अब ये सब सहमति से हुआ या नहीं, ये महिला ही बताएगी। उसी की बात सच मानी जाएगी। उसे किसी गवाह की भी जरूरत नहीं।' ‘FIR लिखे जाने के बाद ही कोर्ट के निर्देश पर रेप पीड़ित को सरकारी मुआवजे के तौर पर आर्थिक मदद मिलने लगती है। दिल्ली में ये रकम 5 से 10 लाख रुपए है। चार्जशीट फाइल होने तक 50% तक पैसा मिल जाता है। आरोप सिद्ध न होने पर पैसों की रिकवरी करने का नियम है, लेकिन कम ही मामलों में हो पाती है।’ दिल्ली में 3097 रेप केस का ट्रायल, 133 में ही सजा सोनी कपूर आगे बताते हैं, 'मैंने पुलिस से उन महिलाओं का डेटा मांगा था, जो अलग-अलग पुरुषों पर रेप केस लगाती हैं। फिर पॉलिसी के तहत सरकार से पैसा ऐंठती हैं। ये नाम के अक्षरों में थोड़ा हेरफेर कर लेती हैं, ताकि सॉफ्टवेयर में पकड़ में ना आए।' ‘दिल्ली में हमने तीन जगह- पुलिस, दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (DSLSA) और कोर्ट से ऐसे केसेज का डेटा निकालने की कोशिश की। पुलिस मुख्यालय ने साफ मना कर दिया। ऐसे में हर थाने में RTI लगाकर डेटा निकलना नामुमकिन जैसा था। लिहाजा हम DSLSA गए। वहां से जवाब मिला कि हम ऐसा कोई डेटा मेंटेन नहीं करते।‘ ‘इसके बाद हम दिल्ली के 11 अलग-अलग कोर्ट गए। 10 से डेटा मिला, लेकिन द्वारका कोर्ट से अब तक नहीं मिला। इन सबमें करीब 4 महीने का वक्त लगा। अभी सिर्फ दिल्ली का डेटा देखें, तो 4 साल में कुल 3097 रेप केस के ट्रायल हुए, लेकिन सजा सिर्फ 133 मामलों में हुई, यानी दोषी ठहराए जाने का रेट महज 4.3% है।‘ क्या आपने दूसरे राज्यों का भी डेटा निकालने की कोशिश की? सोनी बताते हैं, ‘दिल्ली के अलावा सिर्फ कर्नाटक से ऐसा डेटा मिला है। वहां कन्विक्शन रेट और भी कम महज 0.36% है। ये भी किसी ने RTI से निकाला है। दो महीने पहले हमने हरियाणा में भी RTI लगाई है। देशभर का डेटा निकालने के लिए बड़ा नेटवर्क चाहिए, जबकि हमारे पास काफी छोटी टीम है।‘ 'फर्जी रेप केस का डेटा नहीं, मुआवजे की रिकवरी कोर्ट का काम' दिल्ली में हनीट्रैप के केसेज का डेटा मांगने पर नॉर्थ दिल्ली के एडिशनल DCP रविनंदन कहते हैं, ‘ये जानकारी पुलिस हेडक्वार्टर से मिलेगी। मेरी जानकारी में ऐसा कोई डेटा तैयार नहीं होता। मेरी यहां एक हफ्ते पहले ही पोस्टिंग हुई है, इसलिए ज्यादा नहीं बता सकता।‘ हम पुलिस हेडक्वार्टर से पहले ही कॉन्टैक्ट कर चुके थे, लेकिन कोई डेटा नहीं मिला। फिर हमने रेप केस झूठा साबित होने पर पीड़ित को मिलने वाली रकम की रिकवरी के बारे में पूछा। इस पर जवाब मिला, ‘पैसा देना और रिकवर करना कोर्ट का काम है, ये हम नहीं बता सकते।‘ ‘आपको ये आंकड़ा दिल्ली की कोर्ट से लेना होगा या फिर DSLSA से मिल सकता है। DSLSA से हमने उसके सरकारी नंबर पर संपर्क करने की कोशिश, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।’ उगाही के लिए पुरुषों को हनीट्रैप करतीं कॉनवुमैन हनीट्रैप के शिकार पुरुषों के लिए काम करने वाली एडवोकेट दीपिका नारायण कहती हैं, 'पूरे देश से हमारे पास ऐसे मामले आए हैं। जबलपुर, जयपुर, गुड़गांव और दिल्ली में केसेज की भरमार है। अभी मेरे पास 25-28 केस हैं, जहां औरतों ने 3 से लेकर 15 पुरुषों पर केस कर रखा है। हम इन्हें फॉलो कर रहे हैं।' क्या सटीक डेटा है? हमारी कैपेसिटी सरकार के बराबर नहीं, जो पूरे देश का डेटा इकट्ठा कर सकें। हमने हरियाणा के सभी जिलों से ऐसे मामलों की लिस्ट मांगी थी, लेकिन 8 जिलों से जवाब मिला। सिर्फ इन जिलों में 51 ऐसी महिलाएं मिलीं, जिन्होंने 3-15 पुरुषों के खिलाफ रेप, गैंगरेप और छेड़छाड़ के केस दर्ज कराए हैं। ………………. ये खबर भी पढ़ें… 58 अश्लील वीडियो वाला खरात बोला-सब दैवीय शक्तियों ने कराया 58 अश्लील वीडियो, 150 पीड़ित महिलाएं, 1500 करोड़ की संपत्ति, 100 फर्जी खाते, स्वयंभू बाबा अशोक खरात पर आरोपों की लिस्ट, अंधविश्वास, मंत्रियों-विधायकों से कनेक्शन से होते हुए सबसे अहम गवाह जितेंद्र शेलके की मौत तक आ पहुंची। पढ़िए पूरी खबर…
अफगानिस्तान में सैकड़ों एकड़ अफीम की फसल नष्ट, भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त
अफगानिस्तान के उत्तरी बगलान प्रांत में पुलिस ने करीब 400 एकड़ जमीन पर उगाई गई अवैध फसलों को नष्ट कर दिया है। प्रांतीय पुलिस कार्यालय ने रविवार को यह जानकारी दी।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर शांति के संकेत? पुतिन बोले- संघर्ष अब अंत की ओर बढ़ रहा
मॉस्को में आयोजित रूस के विक्ट्री डे समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “मुझे लगता है कि यह मामला अब खत्म होने की ओर बढ़ रहा है।” उनके इस बयान को कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
हंतावायरस से प्रभावित जहाज पर सवार सभी लोग 'हाई-रिस्क' कॉन्टैक्ट : डब्ल्यूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि जिस क्रूज जहाज पर हंतावायरस फैलने का मामला सामने आया है, उसमें सवार सभी लोगों को “उच्च जोखिम” वाला संपर्क माना जाना चाहिए
मैं अंजली चौधरी। पंजाब के लुधियाना की उस गली में रहती हूं, जहां से कई मशहूर कलाकार निकले हैं। बचपन में जब उन कलाकारों के किस्से सुनती थी, तो लगता था- स्टेज यानी मंच की जिंदगी कितनी अच्छी होती होगी। तेज म्यूजिक होती है। लोगों की तालियां बजती हैं, नाम होता है... और अच्छे पैसे भी मिलते हैं। तब नहीं जानती थी कि स्टेज की चमक के पीछे कितनी बेइज्जती छिपी है। एक लाइन में कहूं तो पंजाब में स्टेज डांसर की जिंदगी बर्बादी और दलदल में होती है, जहां बस धंसते जाना होता है। शुरू में सिर्फ पैसा दिखता है, आगे दलदल नजर नहीं आती। मैंने शौक में डांस शुरू किया, लेकिन अब दो बच्चों को पालने की मजबूरी में डांस करती हूं। छोटी जाति से हूं, इसलिए मेरे पास और कुछ करने का रास्ता नहीं है। 15 साल की थी। उन दिनों एक गाना जगह-जगह बजता सुनई देता था- ‘मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां हैं, जरा ठहरो सजन मजबूरियां हैं…’ वह गाना मेरे लिए जुनून बन गया। घर का काम करते हुए भी वही गाना चलाती। टीवी पर वह गाना दिखता सब छोड़कर नाचने लगती। घर वालों को यह बिल्कुल पसंद नहीं था। वे डांटते थे। कहते- ये क्या हर वक्त नाचती रहती हो, पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दो, लेकिन जब वो गाना बजता तो रुक नहीं पाती थी। एक दिन घर पर कोई नहीं था। वह गाना टीवी पर आया। वॉल्यूम तेज किया और कमरे में नाचने लगी। मम्मी-पापा बाहर से लौटे। काफी देर तक दरवाजा खटखटाते रहे, लेकिन मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया। फिर पापा ने दरवाजे पर जोर से लात मारी। मैं घबरा गई और दौड़कर दरवाजा खोला। घर में गाने की आवाज सुनकर पापा को बहुत गुस्सा आया। फिर उनके हाथ में जो कुछ आया, उससे मुझे पीटा। दो दिन तक रोती रही। सोचा अब कभी डांस नहीं करूंगी। लेकिन अब मम्मी-पापा के सामने नहीं नाचती थी। इंतजार करती कि वे कब बाहर जाएंगे। जैसे ही वे बाहर जाते, वही गाना चलाकर नाचना शुरू कर देती। इसी दौरान मेरी एक दोस्त अमृतसर में रहती थी। वह स्टेज डांसर थी। मैंने उसे फोन किया और कहा- डांस किए बिना रह नहीं पा रही हूं। घर वाले बहुत रोकते हैं। उसने कहा- अगर इतना ही मन है, तो अमृतसर आ जा। तब मैं 17 साल की हो चुकी थी। एक दिन मम्मी-पापा घर पर नहीं थे। जल्दी-जल्दी दो जोड़ी कपड़े सूटकेस में डाले। पास में सिर्फ 500 रुपए थे। बिना किसी को बताए घर से निकली और अमृतसर पहुंच गई। जब पापा को पता चला तो बहुत नाराज हुए। उनका साफ कहना था- ये काम ठीक नहीं है, वापस आ जाओ। मम्मी भी गुस्से में थीं। उस वक्त लगा कि अपना सपना पूरा करने निकली हूं। नहीं पता था कि असली मुश्किलें अब शुरू होने वाली हैं। अमृतसर पहुंचने के तीसरे दिन ही मेरा पहला शो था। मुझे पंजाबी गानों पर परफॉर्म करना था। स्टेज पर जाने से डर लग रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि इतने लोगों के सामने कैसे नाचूंगी। लेकिन जैसे ही म्यूजिक बजा और मैं स्टेज पर पहुंची, लोगों की तालियां बजीं। घबराहट दूर होती चली गई। परफॉर्मेंस खत्म हुई तो आयोजक बहुत खुश थे। लोग भी तारीफ कर रहे थे। उस रात मुझे पहली बार 3,000 रुपए मिले। उन पैसों को बार-बार देख रही थी। यकीन ही नहीं हो रहा था कि डांस करके इतने पैसे भी कमाए जा सकते हैं। लगा कि शायद सही रास्ता चुन लिया है। पांच दिन बाद मेरा दूसरा शो था। स्टेज पर डांस करने गई थी, तो सामने खड़ा एक आदमी लगातार गंदे इशारे कर रहा था। डबल मीनिंग बातें कर रहा था। बार-बार उससे नजरें हटा रही थी, लेकिन वह नहीं मान रहा था। उसके इशारों से परेशान हो गई। डांस बंद किया और स्टेज के पीछे चली गई। वहां पहुंचते ही रोने लगी। मेरे मैनेजर और बाकी लोग समझाने लगे- ये सब नॉर्मल है, स्टेज पर ये सब चलता है। मुझे उनकी बात पर गुस्सा आया। बोली- नॉर्मल कैसे है? हम डांस करते हैं तो क्या हमारी कोई इज्जत नहीं है? यहां शरीर बेचने नहीं आई हूं। उन्होंने मुझे वापस स्टेज पर भेजने की बहुत कोशिश की, लेकिन नहीं गई। मेरे साथ ऐसा पहली बार हुआ था। नहीं पता था कि स्टेज पर खड़ी लड़की को लोग इतनी आसानी से गलत समझ लेते हैं। उस रात मां को फोन किया और रोते हुए कहा- मुझे यहां से ले चलो। मम्मी-पापा सुबह ही अमृतसर पहुंचे और मुझे वापस लुधियाना लेकर आ गए। करीब दो महीने तक लुधियाना में घर पर रही। पापा ने मुझसे बात करना बंद कर दिया था। आज भी नहीं करते। मम्मी अक्सर कहतीं- समझाया था न कि बाहर की दुनिया बहुत खराब है। चुपचाप उनकी बातें सुनती रहती। एक दिन मम्मी के साथ एक शादी में गई। वहां कुछ लड़कियां स्टेज पर डांस कर रही थीं। उन्हें देखकर मेरे अंदर दबा हुआ शौक फिर जाग गया। बार-बार स्टेज पर जाने का मन कर रहा था। अगले दिन मम्मी से साफ कह दिया- मुझे फिर से डांस करना है। इस बार उन्होंने नहीं रोका। बस इतना कहा- अगर डांस ही करना है, तो अपनी जिम्मेदारी भी खुद उठाना। वापस लौटकर मत आना। अगले दिन तैयार हुई और वापस अमृतसर अपनी दोस्त के पास पहुंच गई। अब मैं पहले जैसी नहीं रह गई थी। दिन में रिहर्सल, रात में शादियां, तेज म्यूजिक, मेकअप और लगातार शो। यही अपनी दुनिया बना ली। एक रात का डरावना किस्सा बताती हूं। तब मुझे स्टेज पर डांस करते सिर्फ एक साल हुआ था। अमृतसर में एक शादी में परफॉर्म करने गई थी। मेरे साथ एक और डांसर भी थी। डांस शुरू हुआ। तभी नशे में धुत एक लड़का स्टेज पर चढ़ आया। उसने मेरी साथी का हाथ पकड़ लिया और कहा- मेरे साथ नाचो। उसने तुरंत हाथ छुड़ाया और उसके साथ नाचने से मना कर दिया। वह भड़क गया। उसने जेब से रिवॉल्वर निकाली और सीधा उसके माथे पर तान दिया। जोर से चिल्लाया- अगर तू मेरे साथ नहीं नाची, तो यहीं गोली मार दूंगा। उसके बाद हमारी तो हालत खराब हो गई। वहां मौजूद लोग उसे शांत कराने में जुटे थे। मेरी साथी रोते हुए मैनेजर से कह रही थी- मुझे यहां से ले चलो, लेकिन उन्होंने कहा- थोड़ी देर की बात है, नाच लो... मामला शांत हो जाएगा। आखिर में अपनी जान बचाने के लिए मेरी साथी ने उस लड़के के साथ डांस किया। तब जाकर मामला शांत हुआ। लेकिन उस रात मेरे अंदर कुछ हमेशा के लिए बदल गया। मुझे समझ आ गया कि स्टेज पर नाचने वाली लड़कियों को लोग कलाकार नहीं समझते। उन्हें लगता है कि पैसे दिए हैं, तो हमारे साथ कुछ भी कर सकते हैं। ऐसे ही मैं एक शादी में अकेले गई थी। स्टेज पर डांस कर रही थी, तभी कुछ लोग अचानक स्टेज पर चढ़े। पहले तो उन्होंने साथ में नाचने की कोशिश की, फिर मेरा हाथ पकड़ने लगे। कोई मेरे कंधे पर हाथ रख रहा था, तो कोई कमर पर हाथ डाल रहा था। मैं घबरा गई। डांस रोक दिया और साफ बोली- पहले इन्हें नीचे उतारिए, तभी परफॉर्म करूंगी। काफी कहने के बाद उन लोगों को स्टेज से नीचे उतारा गया, तब शो आगे बढ़ पाया। ऐसी बदतमीजियां बार-बार होने लगीं। लोग स्टेज पर चढ़ जाते, जबर्दस्ती करते। यही नहीं, शो खत्म होने पर लोग स्टेज के पीछे आ जाते और मेरा फोन नंबर मांगते। मना करने पर गाली देते, धमकाते। ऐसे ही एक कार्यक्रम में डांस कर रही थी। कुछ लड़के नीचे नाच रहे थे और कुछ स्टेज पर चढ़ गए थे। किसी तरह परफॉर्मेंस खत्म करके स्टेज के पीछे गई, तो उनमें से एक लड़का पीछे-पीछे आ गया। वह लगातार मेरा फोन नंबर मांग रहा था। काफी देर तक कोशिश करता रहा। जब मैंने नंबर नहीं दिया, तो उसने मुझे थप्पड़ मार दिया। उस दिन काफी बवाल हुआ था। कई बार तो लोग सीधे पूछ लेते हैं- मैडम, एक रात का कितना लेती हो? साथ चलोगी? मैं सन्न रह जाती हूं। ऐसे ही एक और शो में डांस करने गई थी। शो खत्म हुआ तो एक लड़का स्टेज के पीछे आया। बातों ही बातों में उसने मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया। उस दिन मैंने गुस्से में उसका कॉलर पकड़ लिया था यह सब इतना ज्यादा हो रहा था कि मन हुआ कि डांस छोड़ दूं, लेकिन वापस जाने का कोई रास्ता नहीं था। पापा बात नहीं करते थे। मम्मी ने भी फोन करना बंद कर दिया था। काफी परेशान थी। इस बीच मेरी मुलाकात एक भांगड़ा डांसर से हुई। वह मुझसे 10 साल बड़ा था। उसने शादी के लिए प्रपोज किया, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया। वह पीछे पड़ गया। अक्सर फोन करके मिन्नतें करता। कहता- तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। कभी धोखा नहीं दूंगा। तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं। उस समय मेरी जिंदगी ऐसी हो गई थी कि हर तरफ से घिरी नजर आ रही थी। स्टेज पर बेइज्जती झेल रही थी, घर वालों से दूरी थी और भविष्य को लेकर चिंता में थी। ऐसे में पहली बार लगा कि शायद कोई इंसान है, जो मुझे सिर्फ डांसर नहीं समझता। मेरी इज्जत करता है। खाली रहती तो उससे बात होती। एक दिन घर पर थी। मन हुआ कि उसे फोन करके शादी के लिए हां कह दूं। उस दिन सबसे पहले मम्मी को फोन किया। सारी बात बताई। उन्होंने तुरंत कहा- वह आदमी तुमसे 10 साल बड़ा है। तुम्हें बर्बाद कर देगा। उससे दूर हो जाओ। मम्मी से बात करने के बाद मैंने उसे फोन किया और शादी करने से मना कर दिया। उस दिन उसका एक बार भी दोबारा फोन नहीं आया। रात हुई। अब मेरा मन हुआ कि उससे एक बार बात करूं। मैंने रात में उसे फोन किया। वह फिर शादी करने की गुजारिश करने लगा। आखिर में मैंने हां कह दी। मम्मी को भी फोन करके बताया। मम्मी ने फिर रोका, लेकिन मैं नहीं मानी। सोच रही थी कि शादी के बाद मेरी जिंदगी शायद थोड़ी स्थिर हो जाएगी। शादी हुई। हम किराए के एक फ्लैट में रहने लगे। शुरुआत में करीब तीन महीने सब ठीक रहा। अचानक उसका व्यवहार बदलने लगा। वह मुझ पर शक करता, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने लगा और मारपीट भी करने लगा। वह फ्लैट पर अपने दोस्तों को बुलाता और उनके साथ पार्टियां करता। फ्लैट पर उसके दोस्त लड़कियां लेकर आते। मुझे बहुत बुरा लगता था। एक दिन अपनी सास को फोन किया और सारी बात बताई। उन्होंने पति को फोन करके तुरंत गांव वापस आने को कहा। उसके बाद हम गांव में रहने लगे। मुझे लगा था कि शायद अब जिंदगी थोड़ी शांत हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं गर्भवती हो गई। पति भांगड़ा डांस के लिए अक्सर घर से बाहर रहते थे, लेकिन एक पैसा भी नहीं देते थे। उधर, मेरे जेठ शुरू से नहीं चाहते थे कि मैं उस घर में रहूं। एक दिन किसी बात पर उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया। वह बार-बार यही कह रहे थे- ये नाचने वाली है, इसे हम अपने घर की बहू नहीं बना सकते। मेरी सास ने बीच-बचाव किया, तब मामला शांत हुआ। एक दिन तो हद हो गई। उस वक्त आठ महीने की गर्भवती हो चुकी थी। घर में मेरी सास, जेठ और घर के बाकी लोग आपस में धीमी आवाज में बातें कर रहे थे। मैं पास ही खड़ी थी। सास को कहते सुना- अभी इसे मत मारो-पीटो। बच्चा हो जाएगा, उसे अपने पास रख लेंगे... फिर इसे घर से निकाल देंगे। सुनकर मैं सन्न रह गई। सोचा अगर यहां रुकी, तो अपने बच्चे से भी हाथ धो बैठूंगी। चुपचाप अपना सामान पैक किया और घर से निकल गई। एक बस में बैठ चुकी थी, लेकिन ससुराल वाले पीछे-पीछे पहुंच गए। वे बस में चढ़े और ड्राइवर को धमकाने लगे कि- अगर तूने बस चलाई तो आग लगा देंगे। आखिरकार मुझे बस से उतरना पड़ा। करीब एक महीने बाद मेरे बेटे का जन्म हुआ। पैसे की बहुत किल्लत थी। पति जो भी कमा रहे थे, सिर्फ अपने ऊपर उड़ा रहे थे। मां को फोन करके मदद मांगी, तो उन्होंने मदद करने से इनकार कर दिया। कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैंने बच्चे की देखभाल के लिए एक पार्लर में नौकरी की। वहां दो साल काम किया और बच्चे को बड़ा किया। इस दौरान फिर गर्भवती हुई। सोचने लगी कि एक बच्चे का खर्च उठा नहीं पा रही हूं। दूसरे बच्चे को कैसे पालूंगी। इसी डर में अकेले ही डॉक्टर के पास अबॉर्शन कराने पहुंच गई। डॉक्टर ने जांच के बाद कहा- गर्भ तीन महीने से ज्यादा का हो चुका है, अब अबॉर्शन नहीं हो सकता। उस दिन वापस घर लौट आई। पति को सारी बात बताई और उनसे पैसों का इंतजाम करने को कहा। वह कहते- कहां से लाऊं पैसा? चोरी करूं या डाका डालूं? एक दिन पैसों को लेकर उनसे झगड़ा इतना बढ़ा कि उन्होंने मुझ पर चाकू से वार कर दिया। शिकायत के बाद घर पर पुलिस पहुंची। मैंने पुलिस को सारी बात बताई और अपने मायके पहुंचाने को कहा। पुलिस तुरंत मुझे लुधियाना मेरे मायके लेकर आ गई। घर पहुंची तो मेरी हालत देखकर मम्मी को दया आ गई। उन्होंने मुझे अपने साथ रख लिया। हालांकि, सालभर ही उनके पास रही। खर्च चल नहीं रहा था। एक किराए का कमरा लिया और फिर से स्टेज पर डांस शुरू कर दिया। अब डांस की कमाई से बच्चों को पाल रही हूं। पति आज भी बीच-बीच में झगड़ा करने आ जाता है। कई बार मारपीट करता है। कहता है कि बच्चों को अपने साथ लेकर जाएगा, लेकिन मैं अपने बच्चों से किसी भी कीमत पर अलग नहीं रह सकती। इन्हें अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हूं। चाहती हूं कि इनके साथ वैसा कुछ न हो, जैसा मेरी जिंदगी में हुआ। आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो लगता है स्टेज की चमक सिर्फ बाहर से खूबसूरत दिखती है। तेज म्यूजिक, रंग-बिरंगी लाइटें, लोगों की तालियां और उड़ते हुए नोट- सब कुछ कुछ देर के लिए बहुत अच्छा लगता है। लेकिन म्यूजिक बंद होते ही वही लोग चले जाते हैं, और हम अपनी जिंदगी की लड़ाई फिर अकेले लड़ते रह जाते हैं। शायद पंजाब की मेरी जैसी कई डांसरों की कहानी भी इससे बहुत अलग नहीं है। (अंजली ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-हम अधेड़ कुंवारे कौवों जैसे अपशकुन माने जाते हैं:सरकार हमें देती है पेंशन, जाने कितने जानवरों से रेप करते पकड़े गए लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
58 अश्लील वीडियो, 150 पीड़ित महिलाएं, 1500 करोड़ की संपत्ति, 100 फर्जी खाते, स्वयंभू बाबा अशोक खरात पर आरोपों की लिस्ट, अंधविश्वास, मंत्रियों-विधायकों से कनेक्शन से होते हुए सबसे अहम गवाह जितेंद्र शेलके की मौत तक आ पहुंची। मामला कोर्ट में है और खरात जेल में। जांच में नासिक-शिरडी पुलिस के अलावा SIT और ED भी शामिल हैं। SIT के सोर्स के मुताबिक, खरात ने माना है कि उससे गलती हुई है, लेकिन ये सब दैवीय शक्तियों ने कराया। 17 मार्च को खरात के खिलाफ रेप की पहली FIR दर्ज हुई थी और अगले दिन गिरफ्तारी। अब तक 13 केस दर्ज हुए हैं। इनमें 8 सेक्शुअल हैरेसमेंट, 4 आर्थिक धोखाधड़ी और एक मनी लॉन्ड्रिंग का है, जो ED ने दर्ज कराया है। 9 मई को शिरडी कोर्ट में खरात की पेशी हुई। कोर्ट ने खरात को 14 दिन की कस्टडी में भेज दिया। खरात का कबूलनामाशक्ति के वश में रहते हुए संबंध बनाए, महिलाओं की सहमति थी जांच टीम में शामिल सोर्स के मुताबिक, पूछताछ में खरात लगातार कहता रहा कि उसने महिलाओं के साथ सहमति से संबंध बनाए थे। हालांकि SIT इससे इत्तफाक नहीं रखती। खरात ने दावा किया कि उसके पास दैवीय शक्तियां हैं और लोग खुद अपनी समस्या लेकर उसके पास आते थे। सोर्स के मुताबिक, ‘खरात ने माना है कि उससे गलती हुई है, लेकिन वह इसे दैवीय शक्ति और ज्योतिष विद्या का नाम देकर बचने की कोशिश कर रहा है। पुलिस का मानना है कि वह महिलाओं को नशीली चीज या कोई दवा देकर उनका फायदा उठाता था। हालांकि, खरात अब भी यही कह रहा है कि वह समाधि जैसी स्थिति में रहता था और शक्ति खत्म होने पर उसे होश आता था।' गवाह का एक्सीडेंट ED की पूछताछ के तीन दिन बाद मौत, कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में घुसी 17 अप्रैल को अशोक खरात के करीबी और केस में अहम गवाह जितेंद्र शेलके की सड़क हादसे में मौत हो गई। 55 साल के जितेंद्र शेलके खरात के शिवनिका ट्रस्ट के उपाध्यक्ष थे। हादसे के वक्त वे पत्नी और बेटे के साथ छत्रपति संभाजीनगर से शिरडी जा रहे थे। दोपहर 12:30 से 1 बजे के बीच जितेंद्र की कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से पीछे से जा टकराई। वे खरात से जुड़े लेन-देन और जमीन के सौदों में शामिल थे। मौत से महज तीन दिन पहले ही ED ने उनसे पूछताछ की थी। सोशल एक्टिविस्ट अंजलि दमानिया अशोक खरात के कॉल डिटेल रिकॉर्ड के जरिए उसका विधायकों-मंत्रियों से कनेक्शन उजागर कर चुकी हैं। जितेंद्र शेलके की मौत पर शक जताते हुए अंजलि कहती हैं, ‘शेलके खरात की संस्था में नंबर दो की पोजीशन पर थे। वे खरात का हर काला चिट्ठा और अंदर की कहानियां जानते थे। ऐसे अहम गवाह की इस तरह मौत सवाल खड़े करती है।’ ‘हादसे के बाद की फुटेज में जितेंद्र शेलके की गाड़ी सड़क के एकदम बायीं ओर दिख रही है। पूरा रास्ता खाली था, तो कोई बिल्कुल बायीं तरफ गाड़ी क्यों चलाएगा। अगर गाड़ी का बैलेंस बिगड़ता है, तो वह मुड़ती है, लेकिन यहां गाड़ी बिल्कुल सीधी अंदर घुसी है।’ अंजलि एकनाथ शिंदे पर खरात को बचाने का आरोप लगाती हैं। वे दावा करती हैं कि पिछले चार साल से खरात उनके लिए काला जादू और ऐसे ही काम कर रहा था। रोहित पवार ने भी आरोप लगाया है कि संजय सिरसाट और दीपक केसरकर जैसे नेता लगातार खरात के संपर्क में थे। उनके रसूख की वजह से ही पुलिस इस मामले को दबा रही है। जितेंद्र के भाई बोले- कोई दबाव नहीं, एक्सीडेंट ही हुआ सड़क हादसे की वजह जानने के लिए फॉरेंसिक टीम से क्रैश एनालिसिस करवाया गया है। इसकी रिपोर्ट आना बाकी है। हालांकि, जितेंद्र के भाई महेंद्र गणपतराव शेलके हादसे कहते हैं, ‘हमें किसी संदिग्ध गतिविधि की आशंका नहीं है। भाई के सुसाइड या साजिश की जो भी खबरें चल रही हैं, वे गलत हैं।’ क्या परिवार पर कोई दबाव है? महेंद्र जवाब देते हैं, ‘नहीं, कोई दबाव नहीं है, न ही किसी ने धमकाया है।’ 56 अनुयायी, 100 फर्जी खाते, 70 करोड़ रुपए का लेनदेन ED ने पूछताछ के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट से खरात की कस्टडी मांगी है। ED अब तक नासिक, पुणे और मुंबई में खरात की संपत्तियों का पता लगा चुकी है। सोर्स के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कोपरगांव के समता संस्था पतपेढ़ी बैंक में खरात के 56 अनुयायियों के नाम पर 100 खाते खोले गए। इनमें करीब 70 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। सभी खातों में नॉमिनी के तौर पर अशोक खरात का मोबाइल नंबर दर्ज है, यानी खाते किसी और के नाम पर हैं, लेकिन लेन-देन का पूरा हिसाब खरात के हाथ में था। पुलिस ने खाताधारकों से पूछताछ की, तो उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि हमारे नाम पर कोई खाता खुला है। वीडियो बनाने वाला ऑफिस असिस्टेंट भी जांच के दायरे में केस की शुरुआत सिन्नर के वावी पुलिस स्टेशन से हुई थी। यहां अशोक खरात ने FIR दर्ज कराई थी कि कुछ लोग एक सीडी के जरिए उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। इस केस में नीरज जाधव के अलावा दो और लोगों को आरोपी बनाया गया था। नीरज पिछले साल तक अशोक खरात के ऑफिस में असिस्टेंट था। SIT को दिए बयान में उसने बताया, ‘2023 में प्रेग्नेंट पत्नी को लेकर मैं खरात के पास गया था ताकि बच्चा स्वस्थ पैदा हो। उसने धार्मिक पूजा के बहाने पत्नी से छेड़छाड़ की। इस घटना के बाद से ही मैंने खरात की करतूतों पर नजर रखनी शुरू कर दी। उसका पर्दाफाश करने के लिए दोस्त की मदद से ऑफिस में एक हिडन कैमरा लगाया। इससे बाबा का सच सामने आ गया।’ SIT नीरज जाधव की भूमिका की जांच कर रही है। उसका केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट राहुल कासलीवाल कहते हैं कि केस का ट्रायल शुरू होना बाकी है। नीरज जाधव इस केस में अहम गवाह साबित हो सकता है। नीरज लगातार मेरे संपर्क में है। उसने मुझे बताया है कि उसने पुलिस को सब बता दिया है। खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन पर SIT शिवसेना के सीनियर लीडर और पूर्व मंत्री दीपक केसरकर के सहयोगी बताए जा रहे दीपक लोंढे से भी पूछताछ कर चुकी है। दावा है कि दीपक ने ही खरात को एकनाथ शिंदे से मिलवाया था। हालांकि, दैनिक भास्कर से बातचीत में दीपक लोढे ने कहा कि न मेरा इस केस से कोई लेना-देना है और न अशोक खरात से कोई संबंध। मैं इस केस पर कोई बात नहीं कर सकता। उधर, खरात के घर और मंदिर में सन्नाटा नासिक के कर्मयोगीनगर में अशोक खरात का मकान है। गेट बजाने पर एक बुजुर्ग महिला और खरात की बेटी बाहर आईं। वे बात करने के लिए राजी नहीं हुईं। नासिक से करीब 40 किमी दूर सिन्नर में खरात का बनवाया मंदिर और फार्महाउस है। यहीं वो अपने फॉलोअर्स से मिलता था। यहां भी एकदम सन्नाटा है। आस-पड़ोस वाले भी खरात के बारे में बात नहीं करना चाहते। ………………………. अशोक खरात पर ये स्टोरी भी पढ़ें… 1. ‘बेटी हो, कन्यादान करूंगा बोलकर 3 साल रेप किया‘, कैप्टन बाबा के ऑफिस का सच ‘पहली बार मिली, तो बोला कि तू मेरी बेटी है। तेरा कन्यादान मैं खुद करूंगा। शादी से पहले मुझे ऑफिस में बुलाया और रेप किया।’ ये आपबीती कैप्टन बाबा उर्फ अशोक खरात के खिलाफ पहली FIR कराने वाली महिला की है। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित और उनका परिवार बदनामी की वजह से सामने नहीं आना चाहता। ज्यादातर घर छोड़कर जा चुकी हैं। पढ़ें पूरी खबर… 2. कैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर…
चीन में सोने की खपत में पहली तिमाही में साल दर साल 4.41 फीसदी की वृद्धि हुई
9 मई को चीनी गोल्ड एसोसिएशन से मिली जानकारी के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही में चीन का सोने का उत्पादन 81.065 टन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 7.08 फीसदी कम है। सोने की खपत 303.292 टन रही, जो साल दर साल 4.41 प्रतिशत अधिक है।
हंगरी के नए प्रधानमंत्री बने पीटर माग्यार, संसद में शपथ ली
पीटर मैग्यार ने शनिवार को हंगरी के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। नई संसद के उद्घाटन सत्र में हुए मतदान में जीत हासिल करने के बाद उन्होंने देश में “व्यवस्था बदलने” का संकल्प लिया।
चीन का विकास कभी भी किसी के लिए 'खतरा' नहीं रहा: विदेश मंत्रालय
चीन का विकास कभी किसी के लिए 'खतरा' नहीं रहा है, बल्कि यह एक ऐसी क्रमिक शक्ति है जो सभी देशों के बीच साझा विकास को बढ़ावा देती है
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की माता जी छि शिन हैं। शी चिनफिंग और अपनी माता के बीच गहरी भावना है। छि शिन जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध के दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नेतृत्व वाली सेना में शामिल एक महिला सैनिक थीं।
अमेरिका-ईरान अगले हफ्ते फिर इस्लामाबाद में बातचीत कर सकते हैं,ट्रंप बोले- ईरान के जवाब का इंतजार
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के सामने 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्तावित ड्राफ्ट रखा है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को कम करने और ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश भेजने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नया दांव: ‘पेट्रोयुआन’ से अमेरिका की आर्थिक ताकत को चुनौती?
ईरान का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था से उसे हर साल 40 से 50 अरब डॉलर तक की आय हो सकती है। इससे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कमजोर हुई उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ये वीडियो शायद आपने देखा हो। इसमें दिख रहे शख्स जीतू मुंडा हैं। उम्र 52 साल। बदन पर सिर्फ एक कपड़ा। कंधे पर बड़ी बहन कलरा का कंकाल। कलरा के बैंक अकाउंट में 19,400 रुपए जमा थे। उनकी मौत के बाद जीतू 27 अप्रैल को पैसे निकालने बैंक पहुंचे। आरोप है कि बैंक मैनेजर ने कहा कि बहन को लाओ, तभी पैसे मिलेंगे। जीतू ने कब्र से बहन का कंकाल निकाला और तीन किमी दूर बैंक लेकर आ गए। मामला ओडिशा के क्योंझर जिले के दियानाली गांव का है। दैनिक भास्कर की टीम जीतू मुंडा के घर पहुंची, तो दो सवाल साथ थे… 1. जीतू को ऐसा क्यों करना पड़ा? 2. उन्हें ऐसा करने के लिए किसने मजबूर किया? पहले सवाल का जवाब ये फोटो है… कभी भी टूटकर गिर जाने की हालत में पहुंच चुका ये मकान जीतू का घर है। कच्चा फर्श, सीलन भरी दीवारें, दरवाजे की चौखट तक उखड़ चुकी है। पहले जीतू और उनकी बहन कलरा इसी घर में रहते थे। दो गाय भी इसी में बंधती थीं। एक साल पहले कलरा को सरकारी घर मिल गया। जीतू के पास कोई काम नहीं है। कलरा को सरकार से मिलने वाले 1 हजार रुपए और 35 किलो चावल में गुजारा होता था। पति की मौत के बाद से कलरा मायके में रह रही थीं। उन्होंने बछड़ा बेचकर 19,400 रुपए पटना ब्लॉक के मल्लीपासी ग्रामीण बैंक में जमा किए थे। जीतू और कलरा बीच-बीच में 100, 200, 500 रुपए निकालने बैंक जाते थे। एक दिन कलरा बीमार पड़ीं और 26 जनवरी को उनकी मौत हो गई। जीतू के गुजारे का सहारा खत्म हो गया। आखिरी आस बैंक में जमा पैसे थे। जीतू वही निकालने बैंक गए थे। 19 हजार के लिए बहन की कब्र खोदी, अब 15 लाख रुपए की मदद मिली जीतू के घर में बहन के अलावा एक भाई और उनका परिवार है। जीतू की शादी नहीं हुई है। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें बैंक में जमा पैसों के अलावा अलग-अलग संगठनों और पार्टियों से करीब 15 लाख रुपए की मदद मिल चुकी है। बहन के घर में बिजली कनेक्शन मिल गया है। जीतू अब उनके घर में ही रह रहे हैं। जीतू का गांव क्योंझर से करीब 40 किमी दूर जंगलों में बसा है। हम उनके घर पहुंचे तो मीडिया और नेताओं की भीड़ लगी थी। जीतू, उनके भाई शंकर और बहन कलरा के घर पास-पास ही हैं, लेकिन जीतू और कलरा साथ में जीतू के घर में रहते थे। फिर कलरा नए घर में रहने लगीं। इसी घर के पास उनकी कब्र बनी है। हमने जीतू से पूछा घर के पास बहन की कब्र क्यों बनाई है? जीतू बोले- मेरी बहन ही मेरा घर है। मुझे डर नहीं लगता। वह मेरे पास ही है। बहन के जाने के बाद अकेला हो गया हूं। माता-पिता के निधन के बाद वही मेरे लिए सब कुछ थीं। मेरे पास न राशन कार्ड है, न कोई कागज। सब बहन का ही था। पति की मौत के बाद बहन मायके आई, कहती थी- भाइयों को छोड़कर नहीं जाऊंगी जीतू इससे आगे नहीं बोल पाते। उनके छोटे भाई शंकर बताते हैं कि जिस दिन जीतू ने बहन की कब्र खोदी थी, मैं घर पर नहीं था। जीतू और कलरा के बीच बहुत अच्छा रिश्ता था। दोनों कई बातों में मुझे भी शामिल नहीं करते थे। मुझे बताए बिना ही बैंक जाते थे। हम चार भाई थे। दो भाइयों का निधन हो चुका है। पति की मौत के बाद कलरा भी हमारे पास आ गई। वह जीतू के साथ रहने लगी। वो कहती थी कि अब भाइयों को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी। जीतू ने कब्र खोदी, बहन का कंकाल निकाला, तब आसपास के लोगों ने रोका क्यों नहीं? जवाब गांव के मंसूर ने दिया, ‘जीतू उस दिन सुबह करीब 10 बजे बैंक गया था। 11:30 बजे लौटा। 12 बजे के करीब कब्र खोदना शुरू किया। तेज गर्मी की वजह से आसपास सन्नाटा था, इसलिए कोई उसे देख नहीं पाया।’ कलरा की मौत कैसे हुई थी? पड़ोसी करुणाकर महंत बताते हैं, ‘तेज बुखार हुआ था। जीतू बैंक गया और 500 रुपए निकालकर लाया। कलरा को अस्पताल ले गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके तीन महीने बाद जीतू पैसे निकालने बैंक गया था। स्टाफ ने उससे कागज मांगे। जीतू पढ़ा-लिखा नहीं है, उसे कागजों के बारे में पता नहीं था। वो एक ही बात कहता रहा कि मेरी बहन के नाम पर पैसा है, मुझे दे दो। स्टाफ ने कहा कि जाओ, बहन को लेकर आओ, तब पैसा मिलेगा।’ ‘हो सकता है बैंकवालों ने यह बात झुंझलाहट में कही हो, लेकिन जीतू उसे समझ नहीं पाया। वो गांव लौटा और कब्र खोदकर बहन का कंकाल निकाला। तीन किलोमीटर दूर बैंक ले गया। मैनेजर से कहा कि मैं बहन को ले आया हूं, अब मेरा पैसा दे दो। स्टाफ ने पुलिस बुला ली। पुलिसवालों ने जीतू को डांटा और कहा कि शव को फिर से दफनाओ। जीतू कंकाल कंधे पर रखकर वापस लाया और उसे फिर से दफना दिया।' पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी बैंक मैनेजर: मैनेजर के मुताबिक, जीतू पैसे निकालने आया था, तभी उसे पहली बार देखा था। उससे डॉक्युमेंट मांगे थे, डेडबॉडी लाने के लिए नहीं कहा। हालांकि, जीतू का दावा है कि मैनेजर ने ही कहा था कि बहन को लेकर आओ, तब पैसा मिलेगा। जीतू के मुताबिक, मैंने मैनेजर को बताया भी था कि बहन मर चुकी है, तब भी उन्होंने कहा कि बहन को लेकर आओ, नहीं तो पैसा नहीं मिलेगा। जांच में सामने आया है कि जीतू बहन के साथ कई बार बैंक आए थे। आखिरी बार दोनों 26 दिसंबर को 500 रुपए निकालने बैंक गए थे। हम मल्लिपासी ग्रामीण बैंक गए, जहां जीतू की बहन का अकाउंट है। बैंक मैनेजर मौजूद नहीं थे। सिर्फ दो कर्मचारी थे, जिनमें से एक डेपुटेशन पर हैं। उन्होंने बताया कि मैनेजर छुट्टी पर चले गए हैं। पुलिस-प्रशासन: जीतू बहन का कंकाल लेकर वापस जा रहा था, तब पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। सभी पीछे-पीछे चलते रहे, लेकिन जीतू की मदद नहीं की। मानवाधिकार आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक, शव का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार प्रशासन का कर्तव्य है। इस बारे में पता करने हम पटना पुलिस स्टेशन पहुंचे। यहां SI धनेश्वर पात्रा मिले। हमने उनसे पूछा कि डेडबॉडी ले जाने के लिए एंबुलेंस या कोई गाड़ी क्यों नहीं दी गई? उन्होंने जवाब दिया कि मैं उस दिन छुट्टी पर था। सब अचानक हुआ। स्टाफ तय नहीं कर पाया कि क्या करना है। जल्दबाजी में ऐसा हो गया। डेथ सर्टिफिकेट जारी करने वाले अफसर: जीतू ने बहन की मौत के बाद 26 फरवरी को डेथ सर्टिफिकेट के लिए सरकारी वेबसाइट पर आवेदन किया गया था। 7 दिन में सर्टिफिकेट मिल जाना चाहिए था, लेकिन अप्रैल तक भी जारी नहीं हुआ। पटना मेडिकल कॉलेज के इंचार्ज सुवेंदु कुमार नायक कहते हैं, ‘कलरा की मौत 26 जनवरी 2026 को हुई थी। ये मामला उनके पास 17 अप्रैल को आया।’ ‘नियम है कि 21 दिन में रजिस्ट्रेशन हो जाना चाहिए। मृत्यु के 7 दिनों के भीतर परिवार के लोग आवेदन करते हैं, तभी प्रक्रिया जल्दी पूरी हो पाती है। कलरा के परिवार ने समय पर आवेदन नहीं किया। बाद में उनकी भाभी गुरुबारी मुंडा ने 30 मार्च को डेथ सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया।’ ‘इसके लिए जो दस्तावेज दिए गए थे, वे स्पष्ट नहीं थे। इसलिए आवेदन वापस कर दिया गया। 25 अप्रैल को दोबारा सही दस्तावेजों के साथ आवेदन किया गया और 29 अप्रैल को डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। हमारी ओर से लापरवाही नहीं हुई। गुरुबारी मुंडा ने एक एफिडेविट दिया था, जिसमें लिखा था कि मेरे अलावा कलरा मुंडा का कोई और वैध वारिस नहीं है। उन्हें जो दस्तावेज और प्रमाण दिए, उसी आधार पर हमने कार्रवाई की।’ गुरुबारी मुंडा ने भी एफिडेविट देने की बात मानी है। उन्होंने बताया कि अकाउंट से पैसे निकालने में दिक्कत हुई, तब किसी ने ऐसा करने का सुझाव दिया था। एफिडेविट परिवार की सहमति से दिया था।
27 नवंबर 2020 की बात है। एक खबर आई- पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री और दीदी के 'खास सिपहसालार' सुवेंदु अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा चुनाव महज 5 महीने दूर थे। सुवेंदु का जाना किसी बड़े किले के ढहने जैसा था। आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हुई। रूठे हुए 'नंदीग्राम के शेर' को मनाने के लिए बिसात बिछाई गई। 1 दिसंबर की सर्द रात। कोलकाता के एक कमरे में 4 दिग्गज जुटे। बागी सुवेंदु अधिकारी, ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद सौगत रॉय और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर। घंटों माथापच्ची हुई। अगली सुबह सौगत रॉय ने ऐलान किया- ‘सब ठीक है। सुवेंदु कहीं नहीं जा रहे, वो हमारे साथ हैं।' लगा कि तूफान टल गया। कुछ ही दिन बीते थे कि सुवेंदु के एक वॉट्सऐप मैसेज ने फिर सियासी धमाका कर दिया। सौगत रॉय को भेजे मैसेज में उन्होंने लिखा- ‘मेरी टीस अभी भी बरकरार है। आपने बिना समाधान निकाले ही सब कुछ मुझ पर थोप दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुझे अपनी बात कहनी थी, लेकिन आपने पहले ही घोषणा करके मेरा मौका छीन लिया। अब साथ चलना मुमकिन नहीं। मुझे माफ कर दें।’ इधर मेदिनीपुर में सुवेंदु के दफ्तर से ममता दीदी के पोस्टर नदारद हो रहे थे और दीवारों पर भगवा रंग चढ़ने लगा था। 17 दिसंबर को उन्होंने आधिकारिक तौर पर टीएमसी को 'राम-राम' कह दिया। अगले ही दिन दिल्ली से 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा का फरमान आया, तो समझ में आ गया कि अब सुवेंदु की मंजिल का पता बदल चुका है। 19 दिसंबर 2020 का वो दिन, मेदिनीपुर का मैदान जनसैलाब से अटा पड़ा था। गृहमंत्री अमित शाह ने सुवेंदु के गले में बीजेपी का गमछा डाला। दोनों ने मिलकर झंडा लहराया। सुवेंदु ने झुककर शाह के पैर छुए और बंगाल फतह के लिए बीजेपी के सारथी बन गए। 3 सीटों वाली बीजेपी 2021 के चुनाव में 77 सीटों तक पहुंची और इस बार 2026 में 207 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। अब ऑब्जर्वर बनकर बंगाल पहुंचे अमित शाह, सुवेंदु को ही मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान कर सकते हैं। 7 ग्राफिक्स में जानिए सुवेंदु अधिकारी से जुड़े कुछ रोचक किस्से… ****** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और महेंद्र वर्मा --------------------------- ये खबर भी पढ़ें…जब ममता ने रातोंरात सोनिया की कांग्रेस को जीरो किया:34 साल की लेफ्ट सरकार को उखाड़ फेंका; अब दीदी की विदाई तय 30 अप्रैल 2026। रात करीब 8 बजे। कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल के बाहर भारी बारिश हो रही थी। तभी एक गाड़ी आकर रुकी। सफेद साड़ी, पैरों में रबर की चप्पल। अपने सिग्नेचर स्टाइल में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उतरीं, और सीधे स्ट्रॉन्ग रूम की तरफ बढ़ चलीं। पढ़ें पूरी खबर…
ईरान का UAE पर मिसाइल और ड्रोन से हमला, 30 दिन की शांति के बाद मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव
यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब कुछ ही समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच भी तनावपूर्ण हालात देखने को मिले थे। एक रात पहले दोनों देशों के बीच मिसाइलों को लेकर टकराव की खबरें सामने आई थीं।
भारतीय एयर ऑपरेशन के सामने कमजोर साबित हुआ पाकिस्तान का डिफेंस नेटवर्क: रिपोर्ट
भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण था कि पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं निकली जितना दावा किया जाता था।
होर्मुज जलडमरूमध्य में टकराव: अमेरिकी जहाजों पर ईरानी मिसाइलें
मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान के बंदर अब्बास और केशम में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है

