भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमा पार की सैन्य कार्रवाई से निर्दोष नागरिकों की जान जा रही है और इससे मानवीय संकट और गंभीर होता जा रहा है। इसलिए सभी देशों को संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की जरूरत है।
क्या अब थम जाएगा ईरान युद्ध? जानें ट्रंप-पुतिन की बातचीत में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार तेज हो रहा है और वैश्विक स्तर पर इसके असर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। रूस की ओर से बताया गया कि बातचीत खुली, विस्तृत और रचनात्मक माहौल में हुई, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिका में राजनीतिक विवाद
अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच वहां के डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ चल रही जंग की कड़ी आलोचना की है
ईरान के खिलाफ सैन्य संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अमेरिका और इजराइल को “निर्णायक बढ़त” मिल रही है
मध्य पूर्व संकट: दोहा में फंसे भारतीयों की वापसी जारी, दूतावास ने जारी की एडवाइजरी
दोहा में फंसे भारतीय नागरिकों को भारत वापस लाने के प्रयास तेज हो गए हैं। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच कतर एयरवेज की सोमवार सुबह दोहा-नई दिल्ली की एक उड़ान ने 300 से ज़्यादा यात्रियों को भारत पहुंचाया।
ट्रंप की नई धमकी, होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त चेतावनी
ईरान को चेतावनी, तेल मार्ग रोकने पर बीस गुना हमला अमेरिकी नौसेना तैयार, खाड़ी में जहाजों की तैनाती वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडरा रहा संकट का साया चीन समेत एशियाई देशों के लिए अमेरिका का सुरक्षा वादा वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चेतावनी जारी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले महत्वपूर्ण तेल मार्ग को रोकने या उसमें बाधा डालने की कोई भी कोशिश की गई, तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, “अगर ईरान कुछ ऐसा करता है जिससे होर्मुज स्ट्रेट में तेल का फ्लो रुक जाता है, तो अमेरिका उन पर अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज्यादा जोरदार हमला करेगा।” उन्होंने इस चेतावनी के साथ ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करने की धमकी भी दी और कहा, “इसके अलावा, हम आसानी से नष्ट किए जा सकने वाले टारगेट को खत्म कर देंगे, जिससे ईरान के लिए एक देश के तौर पर फिर से बनना लगभग नामुमकिन हो जाएगा, लेकिन मुझे उम्मीद है और मैं प्रार्थना करता हूं कि ऐसा न हो!” इससे पहले, ट्रंप ने मियामी में ट्रंप नेशनल डोरल में रिपोर्टरों से कहा कि अमेरिका ईरान को दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी कॉरिडोर में से एक को खतरे में डालने की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने कहा, “जैसा कि हम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जारी रखे हुए हैं, हम दुनिया में एनर्जी और तेल का फ्लो बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहे हैं, और मैं किसी आतंकवादी सरकार को दुनिया को बंधक बनाने और दुनिया की तेल सप्लाई को रोकने की कोशिश नहीं करने दूंगा।” ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिकी सुरक्षा के तहत खुला रहेगा। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहेगा। वहां हमारी नौसेना के बहुत सारे जहाज हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पानी के रास्ते को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी नौसेना की ताकत और माइन-क्लियरिंग क्षमता को तैयार किया जा रहा है। हमारे पास दुनिया के सबसे अच्छे उपकरण हैं, जो माइन की जांच कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि स्ट्रेट में ईरान की कोई भी हरकत लड़ाई के मैदान से कहीं आगे तक असर डालेगी। उन्होंने कहा, अगर वे कुछ भी करते हैं, तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका कमर्शियल शिपिंग के संचालन को सीधे समर्थन देने के लिए तैयार है। ट्रंप ने कहा, “इस बीच, इस छोटी सी रुकावट के दौरान अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे किसी भी टैंकर को राजनीतिक जोखिम बीमा दे रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर खतरा बढ़ता है तो अमेरिका और उसकी साथी सेनाएं जहाजों को इस पतले पानी के रास्ते से एस्कॉर्ट कर सकती हैं। ट्रंप ने तर्क दिया कि रास्ता खुला रखना खुद अमेरिका की तुलना में एशिया और दूसरे एनर्जी-इम्पोर्ट करने वाले इलाकों के लिए ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, “इससे हम पर कोई खास असर नहीं पड़ता। हमारे पास बहुत ज्यादा तेल और गैस है, हमारी जरूरत से कहीं ज्यादा।” लेकिन उन्होंने कहा कि कई दूसरे देश इस रास्ते पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, खासकर चीन। ट्रंप ने कहा, “यह अमेरिका की तरफ से चीन और उन सभी देशों के लिए एक तोहफा है जो होर्मुज स्ट्रेट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। हम सच में यहां चीन और दूसरे देशों की मदद कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी बहुत सारी एनर्जी देशों से मिलती है।” ट्रंप ने कहा कि सरकार तेल बाजारों से जुड़े कुछ समय के लिए लगे प्रतिबंधों में राहत देने पर भी विचार कर रही है ताकि कीमतों में तेजी को रोका जा सके। उन्होंने ईरान के साथ बड़े संघर्ष में होर्मुज स्ट्रेट को एक मुख्य मोर्चे के तौर पर पेश किया और कहा कि वाशिंगटन कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरों को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, हाल के सालों में, सरकार और उसके आतंकी एजेंटों ने सैकड़ों कमर्शियल जहाजों पर हमले किए हैं। हम इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म कर रहे हैं। बता दें, होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा मार्ग है और इसे दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी के तेल उत्पादक देशों से निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए बड़ी चिंता पैदा कर सकता है।
‘मैं और मेरा परिवार गांव में अकेला हो गया है। शादी मैंने की थी, अब उससे बाहर भी आना चाहती हूं, लेकिन फिर भी सजा मिल रही है। छोटे भाई का स्कूल छूट गया क्योंकि कोई ऑटो वाला उसे ले जाने को तैयार नहीं है। खेतों में लगी आलू की फसल खराब हो गई क्योंकि उसे निकालने के लिए कोई मजदूर तैयार नहीं। मेरा परिवार मुसीबत में है।‘ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। मीता ने दो साल पहले एक मुस्लिम लड़के से लव मैरिज की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन अलग धर्म में शादी करने की ‘सजा’ मीता और उनके परिवार को अब तक मिल रही है। गांववालों का कहना है कि मीता मुसलमान हो गई है। दो साल बाद इसलिए गांव आई है, ताकि लड़के-लड़कियों का धर्म बदलवा सके। ‘न कोई दुकानदार राशन देगा, न मंदिर में मिलेगी एंट्री’मीता का गांव कोलकाता से करीब 250 किमी दूर है। परिवार गांव के आखिरी छोर पर रहता है। बुजुर्ग माता-पिता के अलावा छह साल का भाई है। सोशल बायकॉट की वजह से परिवार ज्यादातर घर के अंदर ही रहता है। परिवार का हाल पूछने पर मीता बांग्ला में लिखा पैम्फलेट पढ़कर सुनाती हैं, जिसमें उनके पिता के नाम के साथ बायकॉट के पॉइंट्स लिखे हैं। पैम्फलेट में लिखा है, ‘गांव के लोग सुदीप घोष के परिवार से कोई संपर्क नहीं रखेंगे। उनके किसी कार्यक्रम में नहीं जाएंगे। घोष परिवार न मंदिर में पूजा कर सकेगा और न कोई दुकान वाला इन्हें राशन देगा। किसी धार्मिक कार्यक्रम में भी शामिल नहीं किया जाएगा।‘ इसे पढ़ते हुए मीता भावुक हो जाती हैं। वे बताती हैं, ‘मैंने 2024 में एक मुस्लिम लड़के से शादी की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली। जुलाई 2025 में घर लौट आई। इसके बाद गांव में दिक्कतें शुरू हुईं। आसपास के लोगों ने बहुत बवाल किया। हमारे घर पर पत्थर फेंके। बाबा ने सबसे माफी मांगी। मंदिर जाकर समाज के सामने हाथ जोड़े, लेकिन गांव वाले नहीं माने। वे बस यही चाहते हैं कि मैं गांव में न रहूं।‘ ‘गांववालों ने बाबा से कहा कि अगर बेटी को घर में रखोगे तो पूरे परिवार को बाहर निकाल देंगे। ये सुनकर मैं डर गई। मैंने बाबा से कहा कि मुझे शहर छोड़ दो। गांव के हालात देखते हुए बाबा ने मुझे करीब 10 किमी दूर दुबराजपुर में हॉस्टल भेज दिया। छह महीने बाद हॉस्टल भी खाली हो गया। अब मेरे पास घर लौटने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।‘ ढोल बजाकर गांव में मुनादी- नियम तोड़े तो 5 हजार जुर्माना लगेगामीता आगे बताती हैं, ‘बाबा फरवरी के पहले हफ्ते में मुझे घर वापस ले आए। गांववालों का विरोध फिर शुरू हो गया। चासपाड़ा के लोगों ने ढोल बजाकर पूरे गांव में कहा कि कोई भी घोष परिवार से संबंध नहीं रखेगा। पूरे गांव में पर्चे बांटे गए, जिसमें नियम तोड़ने वाले पर 5 हजार रुपए जुर्माने का आदेश था।‘ हमने मीता से पति से अलग होने की वजह पूछी। उन्होंने कोई साफ वजह तो नहीं बताई, सिर्फ इतना कहा कि माता-पिता के बिना नहीं रह सकती, इसलिए घर वापस आ गई। मीता ने अब तलाक के लिए अर्जी लगाई है। इस साल जुलाई में आपसी रजामंदी से तलाक हो जाएगा। हमने मीता से पूछा, घर की जरूरत का सामान कहां से लाते हैं? वे कहती हैं, ‘सामान तो हम शहर से ले आते हैं, कभी ताऊ के बेटे ले आते हैं। समस्या ये है कि अगर कोई बीमार पड़ जाए तो गांव के डॉक्टर दवा नहीं देंते। दिन में कुछ होगा तो शहर चले जाएंगे, लेकिन रात में हुआ तो क्या करेंगे। हमें अब भी डर लगता है कि कोई हमला न कर दे। पहले ही पत्थर मारकर खिड़कियां तोड़ दी थीं, अब पता नहीं क्या करेंगे।‘ ‘बेटी से गलती हुई, माफी मांगी, लेकिन सब बदल नहीं सकते’मीता के बगल में उनके पिता सुदीप घोष (बदला हुआ नाम) बैठे थे। वे हिंदी नहीं बोल पाते। बंगाली में कहते हैं, ‘गांव वालों ने हमारा जीना मुश्किल कर दिया है। हालत ये है कि मेरा छह साल का बेटा स्कूल नहीं जा सकता। लोगों ने स्कूल वैन वाले को धमकाया है। इसलिए वो स्कूल नहीं जा पा रहा है। पढ़ाई में कोई रुकावट न हो, इसलिए अभी भाई की बहू के पास ट्यूशन जाता है।‘ ‘खेत में आलू लगे हैं, लेकिन उसे निकालने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। पहले जो लोग हमारी एक बोली पर खेत में काम करने आ जाते थे, आज वो बात करने को भी राजी नहीं हैं।‘ सुदीप आगे कहते हैं, ‘बेटी से गलती हो गई, मैंने पूरे गांव से हाथ जोड़कर माफी भी मांग ली है। इससे ज्यादा अब क्या कर सकता हूं, जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता।‘ अब गांववालों की बात…हमने मीता से विरोध करने वालों के बारे में पूछा तो उन्होंने गांव में रहने वाले पंकज चौधरी और आशीष मंडल का नाम लिया। उनसे मिलने के लिए गांव में आगे बढ़े। करीब सौ कदम दूर मनसा मंदिर पहुंचे। यहां बैठे लोगों से सुदीप घोष के बारे में पूछा। वे कुछ बोलने को राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि जो भी फैसला लिया है, वो सही है। इसके बाद हम आशीष मंडल के घर पहुंचे। वे घर पर नहीं थे। उनके भाई की पत्नी मिलीं, लेकिन कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं थी। उन्होंने बस इतना कहा कि आशीष हार्ट के मरीज हैं। कुछ वक्त पहले ही उनका ऑपरेशन हुआ है। घोष फैमिली के बायकॉट से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले में पूरा गांव शामिल है। घोष परिवार सिर्फ कुछ लोगों को टारगेट कर रहा है। ‘बेटी भागी तो थाना घिरवाया, लौट आई तो बताया भी नहीं’गली में आगे पंकज चौधरी का घर है। मिट्टी के मकान का ज्यादातर हिस्सा धान और दूसरी फसलों से भरा है। घर पर हमें पंकज के बुजुर्ग माता-पिता मिले। घोष फैमिली के सोशल बायकॉट के बारे में पूछने पर पिता तारापोदो चौधरी कहते हैं, ‘इसमें सिर्फ मेरा बेटा ही शामिल नहीं है, पूरा गांव विरोध कर रहा है। इस विरोध के कई कारण भी हैं।‘ कारण पूछने पर बताते हैं, ‘दो साल पहले घोष की बेटी मुस्लिम लड़के के साथ चली गई। तब गांव के हर घर से एक व्यक्ति थाने गया था। सब परिवार के साथ खड़े थे, ताकि लड़की समाज में लौट आए। वो वापस नहीं आई। लड़की बालिग थी, इसलिए जोर जबरदस्ती भी नहीं की जा सकी। उस मुश्किल वक्त में पूरे गांव ने घोष परिवार का साथ दिया।‘ ‘दो साल बाद लड़की अचानक गांव में वापस आ गई। तब उसके पिता ने किसी को ये बताना भी जरूरी नहीं समझा। गांव के लोगों को पता चला तो वे नाराज हुए। लोगों ने घोष को मंदिर पर बुलाया और लड़की को गांव से बाहर रखने के लिए कहा।‘ ‘दूसरी सबसे बड़ी बात ये है कि मीता ने मुस्लिम लड़के के साथ शादी की है। अब वो हिंदू समाज का हिस्सा नहीं है। आने वाले समय में गांव के बाकी लड़के-लड़कियां भी ऐसा काम न करें, इसलिए ये फैसला लिया गया।‘ ‘बायकॉट जरूरी, ताकि कोई और ये गलती न दोहराए’सोशल बायकॉट के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘पूरे गांव का यही फैसला है कि कोई भी शादी, प्रोग्राम, पूजा-पाठ या बाकी किसी आयोजन में उनके परिवार को शामिल नहीं करेगा। अगर उन्हें मंदिर में पूजा करनी है, तो वे अलग से जाकर करें।‘ गांव से राशन नहीं लेने वाली बात पूछने पर तारापोदो कहते हैं ‘ये सब झूठ है। मीता की नानी का घर इसी गांव में है। पूरा परिवार उनसे मिलता है और उनका सारा काम भी हो रहा है। विरोध इस बात का है कि कहीं भविष्य में कोई बच्चा समाज से बाहर जाने की गलती न करें।‘ घोष परिवार के विरोध में बांटे गए पैम्फलेट में लिखा था कि गांव से उन्हें किसी तरह की सुविधा नहीं दी जाएगी। इसे पुख्ता करने के लिए हम गांव के ही चैताली स्टोर में गए। दुकान मालिक समीर दास से बायकॉट के बारे पूछा। उन्होंने कहा, ‘सोशल बायकॉट का फैसला तो लिया गया है। फिर भी वे समान लेने आएंगे तो मैं दूंगा। अब तक तो समान लेने नहीं आए।‘ मीता अब मुसलमान, धर्मांतरण करने गांव में आईहमने आशीष मंडल और पंकज चौधरी से दोबारा मिलने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं मिले। आखिर में हमने पंकज चौधरी से फोन पर बात की। उनकी एक एडवरटाइजमेंट एजेंसी है। उनका मानना है कि गांव में माहौल सही रहे, इसलिए बायकॉट जरूरी है। हमने पूछा कि लव मैरिज करना या तलाक लेने का अधिकार तो संविधान देता है। क्या आप संविधान को नहीं मानते हैं? इसके जवाब में पंकज कहते हैं, ‘संविधान मानते हैं, लेकिन गांव के भी कुछ नियम-कायदे होते हैं, जिन्हें सभी को मानना होता है। मीता ने मुस्लिम लड़के से शादी की।’ सोशल बायकॉट नहीं हटा तो केस करेंगेगांव में ही रहने वाले धर्म जागरण समन्वय के सह संयोजक डॉ. रंजन बनर्जी इस मामले को पहले दिन से देख रहे हैं। उनकी राय गांव वालों से अलग है। वे कहते हैं, ‘मीता किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कर रही है। वो खुद पीड़ित है। उसने एक शादी की, जो नहीं चल सकी। इसके भी कई कारण है, क्योंकि दोनों का समाज और संस्कृति अलग-अलग है।‘ ‘रही बायकॉट की बात तो इसकी अनुमति न तो हिंदू धर्म देता है और न ही कानून। इसलिए हमने इसके खिलाफ मीता से पहले DM और फिर लोकल पुलिस स्टेशन में मेल करवाया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। हमने कोलकाता हाईकोर्ट में सोशल बायकॉट के खिलाफ नोटिस दिया है। अगर ये नहीं हटा, तो केस करेंगे।‘ इसके बाद हम गांव के प्रधान गौतम मंडल से मिले। वे कहते हैं, ‘जिस दिन ये घटना हुई, उस दिन मैं गांव में नहीं था। सुदीप घोष ने मुझे बाद में बताया। इसे लेकर गांव के लोगों से भी बात की, लेकिन कोई नहीं माना। दुबराजपुर थाना के पुलिस अफसरों ने आशीष मंडल और पंकज चौधरी के साथ कुछ लोगों को थाने बुलाकर समझाया था, लेकिन बात नहीं बनी।‘ मीता ने भी हमें मेल दिखाए थे। उस पर अधिकारियों का कोई रिप्लाई नहीं था। हमने केस की स्थिति जानने के लिए DM से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन जवाब नहीं मिला। वकील बोले- शादी निजी मामला, इसमें सोशल बायकॉट गैरकानूनीसोशल बायकॉट को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील सब्यसाची चटर्जी कहते हैं, ‘बंगाल में खासकर बांग्लादेश के साथ बॉर्डर साझा करने वाले इलाकों में अंतरधार्मिक विवाह का चलन पहले से है। पिछले कुछ साल में आदिवासी और बॉर्डर वाले इलाके में बड़े स्तर पर हिंदुत्व का प्रचार हुआ। इस कारण यहां धर्म को लेकर बड़ा भेदभाव दिखता है।‘ ‘किस इंसान को किसके साथ शादी करनी है, ये उसका निजी मामला है। इसमें समाज का कोई दखल नहीं होना चाहिए। अगर कोई इस आधार पर सोशल बायकॉट कर रहा है, तो ये गैर कानूनी है। संविधान के अनुसार विवाह धारा-21 के तहत मौलिक अधिकार है। अगर कोई इसमें किसी तरह की अड़चन डालता है तो सजा का प्रावधान है। साथ ही धारा-15 और 17 सोशल बायकॉट के खिलाफ है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘अपनी मर्जी से शादी करने के लिए किसी का भी बहिष्कार नहीं किया जा सकता है। इसमें भी अगर व्यक्ति शेड्यूल कास्ट से आता है, तो उसके खिलाफ ऐसा करने पर SC/ST एक्ट 1989 के मुताबिक सजा का प्रावधान है, जो गैर जमानती है।‘ ………………ये खबर भी पढ़ें… मॉरीशस में चलते शिप से कैसे गायब हुआ सार्थक 3 फरवरी रात करीब 8:30 बजे ओडिशा के भुवनेश्वर में रहने वाली रश्मिता साहू के पास एक कॉल आया। बताया गया कि उनका बेटा सार्थक लापता है। सार्थक मर्चेंट नेवी में इंटर्न है। 14 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर तैनात हुआ था। जब गायब हुआ, तब शिप मॉरीशस के पास समुद्री इलाके में था। पढ़िए पूरी खबर…
नेपाल में बालेन शाह होंगे पहले मधेशी प्रधानमंत्री, पुराने दलों को किया खारिज, पीएम मोदी ने की बात
इस जीत के साथ ही काठमांडू के मेयर और लोकप्रिय नेता बालेंद्र (बालेन) शाह देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो वह नेपाल के पहले मधेशी प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
तेहरान के आसमान में काला धुआं, तेल ठिकानों पर हमलों के बाद ‘जहरीली बारिश’ का खतरा
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हालिया हमलों के बाद जहरीली एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने की संभावना है, जो लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी प्रतिबंधों को खत्म करने के लिए अमेरिकी संसद में विधेयक पेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच-1बी से जुड़ी घोषणा के खिलाफ एक एक डेमोक्रेटिक सांसद ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पेश किया है
यूएई एयर डिफेंस ने ईरानी मिसाइलों को रोका, दुबई मरीना में टावर पर गिरा मलबा
यूएई ने ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, जिनका मलबा दुबई मरीना में टावर पर जाकर गिरा। इससे बिल्डिंग के सामने के हिस्से से धुआं उठने लगा और इलाके में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया
ईरान से संघर्ष के बीच अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरू मध्य की सुरक्षा का लिया संकल्प
संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुक्त प्रवाह को बनाए रखेगा क्योंकि ईरान के साथ संघर्ष तेज होता जा रहा है
रूस ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (पी-5) रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन का विशेष शिखर सम्मेलन बुलाने के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पुराने प्रस्ताव को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है।
पश्चिम एशिया में युद्ध का नया मोड़, ईरान के भीषण हमले में अमेरिकी 'थाड' रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने न केवल इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि जॉर्डन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर में स्थित कुछ महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भी प्रभावित किया है।
ईरान ने ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला होने पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी
ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने क्षेत्र के मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे अमेरिका और इजराइल को ईरान के ईंधन और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करने से रोकें
वैश्विक तेल बाजार स्थिर करने के लिए भारत से की तेल खरीद की बात: अमेरिकी ऊर्जा मंत्री
अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए भारत से उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने को कहा, जो अभी चीन के रिफ़ाइनरियों पर अनलोड होने के लिए इंतजार कर रहे थे।
UAE Air Defense: ईरानी ड्रोन को आसमान में किया ध्वस्त
यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए ईरानी यूएवी (ड्रोन) को रोककर नष्ट कर दिया, जो देश को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा था
2026 का टी20 वर्ल्ड कप सिर्फ भारत के वर्चस्व की कहानी नहीं, बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट के बदलते पैटर्न की कहानी भी है। कैसे? जानिए मंडे मेगा स्टोरी में… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अंकुर बंसल रिसर्च: ब्रज पांडे -------- क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 28 मार्च से शुरू होगा IPL 2026:टी-20 वर्ल्डकप फाइनल से पहले ऐलान, बंगाल-तमिलनाडु समेत 5 राज्यों में चुनावों के चलते शेड्यूल बदला IPL 2026 की शुरुआत 28 मार्च को होगी। इसकी घोषणा रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाले भारत-न्यूजीलैंड टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल से पहले ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स ने की। पहले टूर्नामेंट 26 मार्च से शुरू होना था। पूरी खबर पढ़िए…
मॉरीशस में चलती शिप से कैसे गायब हुआ सार्थक:34 दिन बाद भी पता नहीं, मां बोली- कंपनी कुछ छिपा रही
3 फरवरी रात करीब 8:30 बजे ओडिशा के भुवनेश्वर में रहने वाली रश्मिता साहू के पास एक कॉल आया। बताया गया कि उनका बेटा सार्थक लापता है। सार्थक मर्चेंट नेवी में इंटर्न है। 14 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर तैनात हुआ था। जब गायब हुआ, तब शिप मॉरीशस के पास समुद्री इलाके में थी। 4 फरवरी को दो लोग रश्मिता के घर पहुंचे। ये कैप्टन देबाशीष पटनायक और कैप्टन दासगुप्ता थे। दोनों उसी एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से आए थे, जिसकी शिप से सार्थक गायब हुआ। दोनों ने फैमिली को एक लेटर सौंपा, जिसमें सार्थक की गुमशुदगी की ऑफिशियल जानकारी थी। सार्थक को लापता हुए अब एक महीना गुजर चुका है लेकिन कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार परेशान है। मां का कहना है कि कंपनी जरूर कुछ छिपा रही है। मामला इंटरनेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी से जुड़ा है इसलिए MRCC मॉरीशस इस सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर रही है। इसमें एक और वेसल शिप की भी मदद ली जा रही है। सार्थक की गुमशुदगी को लेकर फैमिली और उसके दोस्तों का क्या कहना है? शिप मैनेजमेंट कंपनी ने अब तक क्या बताया, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची। शिप के सिंगापुर लौटने से 9 दिन पहले गायब हुआ सार्थक भद्रक जिले के केस्पुर गांव के रहने वाले हैं। बीते लगभग 11 साल से मां और नाना-नानी के साथ भुवनेश्वर में किराए के मकान में रह रहे थे। मां रश्मिता साहू निजी अस्पताल में असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट हैं। वहीं पिता सत्यजीत महापात्रा राउरकेला में एक निजी कंपनी में काम करते हैं और वहीं रहते हैं। परिवार के मुताबिक, 12 जुलाई 2025 को सार्थक भुवनेश्वर से मुंबई के लिए निकला था। 16 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर सवार हुआ। उसके साथ 23 क्रू मेंबर सवार थे। शिप हांगकांग से घाना होते हुए 11 फरवरी को सिंगापुर लौट रहा था। 2 फरवरी को जब शिप सिंगापुर के करीब था, तब सार्थक की मां और परिवार के बाकी लोगों से बात भी हुई थी। फिर 3 फरवरी की रात करीब 8:30 बजे परिवार को उसकी गुमशुदगी की खबर मिली हैं। बताया गया कि जिस जगह उसके लापता होने का पता चला, वो मॉरीशस कोस्ट स्टेशन के सबसे नजदीक है। मां बोलीं- चलते शिप से कोई कैसे गायब हो जाएगारश्मिता बताती हैं, ‘जब मुझे बताया गया कि सार्थक अपने कमरे और शिप में नहीं मिला तो मेरे लिए ये मानना मुश्किल था। मुझे सबसे पहले ये शंका हुई कि मेरे बेटे के साथ कुछ गलत हुआ है। क्योंकि चलती शिप से भला कोई व्यक्ति कैसे गायब हो सकता है। ‘1 फरवरी की रात करीब 9 बजे से 11 बजे तक सार्थक से मेरी फोन पर लंबी बातचीत हुई थी। उसमें किसी डर की बात सामने नहीं आई थी। अगले दिन फिर दोपहर और रात में हमारी फिर बात हुई। तब भी सब कुछ सामान्य था। वो बस मेरी तबीयत को लेकर परेशान था। अभी स्किन ट्यूबरकुलोसिस का इलाज चल रहा है। वहीं, डायबिटीज और थायरॉइड मुझे पहले से है।‘ फिर 2 फरवरी की ही रात रश्मिता के पास अनजान नंबर से दो से तीन बार फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को सार्थक का दोस्त बताया और कहा कि वो ओडिशा घूमने आना चाहता है। उसने घर का पता भी पूछा। ये बात उन्हें असहज लगी। लिहाजा उन्होंने घर का पता देने से मना कर दिया। हालांकि रश्मिता ने सार्थक को मैसेज कर इसकी जानकारी दे दी। वो बताती हैं, ‘बेटे को काफी देर तक मैसेज डिलीवर नहीं हुआ। पहले मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और सोचा नेटवर्क में नहीं होगा इसलिए नहीं पहुंचा होगा। जब 3 फरवरी को भी सार्थक ने फोन नहीं उठाया और न कॉलबैक आया। तब बेचैनी बढ़ने लगी।‘ कैसे-किन हालात में गायब हुआ बेटा, कंपनी छिपा रहीरश्मिता आगे बताती हैं, ‘3 फरवरी की शाम कंपनी से कैप्टन देबाशीष पटनायक का फोन आया। उन्होंने बताया कि सार्थक गायब हो गया है। वो सुबह करीब 6.20 बजे अपने कमरे में गया था लेकिन जब उसके लिए नाश्ता भेजा गया, तब वो कमरे में नहीं था।‘ ‘कोलकाता से आए कैप्टन दासगुप्ता और देबाशीष पटनायक ने भी कंपनी का लेटर देते वक्त यही बात दोहराई थी। जब हमने जानना चाहा कि जांच कैसे हो रही, किस स्तर तक पहुंची और इसमें कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल हैं, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला।‘ ‘मुझे ये भी नहीं बताया गया कि सार्थक कैसे लापता हुआ और ये सब किन हालात में हुआ। अगर सही तरह से खोजबीन की जाए तो वो शिप में ही मिल सकता है। लापता होने की बात बहुत जल्दी और बिना किसी ठोस आधार के फैला दी गई।‘ CCTV में आखिरी बार दिखने का दावा, फुटेज मांगने पर पलटी कंपनीरश्मिता आगे कहती हैं, ‘हमने शिप के चीफ अफसर से सीधे बात करने की भी कोशिश की लेकिन नहीं हो सकी। जब मैंने दासगुप्ता से इसकी शिकायत की तो कहा गया कि कंपनी के नियमों के तहत वो परिवार से सीधे बात नहीं कर सकते। काफी गुजारिश के बाद हमें वीडियो कॉल करके सार्थक का कमरा और आसपास का हाल दिखाया गया।‘ ‘कंपनी ने कहा था कि CCTV में सार्थक को फोन पर बात करते हुए रूम से बाहर जाते देखा गया है। जब हमने CCTV फुटेज मांगा, तब हमें वीडियो कॉल करके दिखाया गया कि वहां कोई कैमरा ही नहीं लगा है। जब हमने सवाल किया फिर उसे किस कैमरे में देखा गया तो कंपनी ने कुछ क्लियर नहीं किया। हर बार अलग-अलग बात कही गई।‘ सार्थक का परिवार अब सरकार से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। उन्हें कुछ जनप्रतिनिधियों ने केस में जल्द मदद का भरोसा दिलाया है। सार्थक के घर पहुंचे तो उसकी गुमशुदगी की खबर मिली इसके बाद हम सार्थक के बचपन के दोस्त शाश्वत महालिक से भी मिले। दोनों नर्सरी क्लास से साथ हैं। गांव में इनका घर भी अगल-बगल है। शाश्वत के मुताबिक, पढ़ाई और काम के बावजूद वे लगातार एक-दूसरे से बात करते और जिंदगी की हर बड़ी-छोटी बात शेयर करते हैं। वे बताते हैं, ‘2 फरवरी को रात करीब 10 बजे हमारी फोन पर बात हुई थी। सार्थक अच्छे मूड में था। वो दोस्तों का हालचाल पूछ रहा था। मुझसे भी आगे का प्लान पूछा और अपने प्लान भी शेयर किए। उसकी 18 महीनों की इंटर्नशिप लगभग पूरी होने वाली है। उसने एक कोर्स में भी दाखिला लिया है ताकि उसे पास करके प्रमोशन मिल सके।‘ ’उस रात सार्थक बस आंटी (अपनी मां) की तबीयत लेकर परेशान था। इसलिए चाहता था कि हम दोस्त घर जाकर एक बार उनसे मिल आएं। उसके कहने पर हम अगले ही दिन (3 फरवरी) आंटी से मिलने सार्थक के घर पहुंचे। तभी हमें उसके लापता होने का पता चला।’ अब कंपनी सार्थक की मेंटल कंडीशन पर सवाल उठा रही शाश्वत और उनके साथियों ने एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की लेकिन सीधा संपर्क नहीं हो सका। बस कंपनी के हेड ऑफिस से सार्थक की गुमशुदगी का एक मेल मिला। शाश्वत सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘आखिर चलती हुई शिप से सार्थक कैसे गायब हो सकता है। कैडेट को एक छोटा सा कमरा मिलता है। वहां से बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं होता। फिर वो कहां गायब हो गया। हम चाहते हैं कि शिप में लगे CCTV कैमरों के फुटेज और VDR (वॉयस डेटा रिकॉर्डर) दिए जाएं। इसी में शिप की गतिविधियां और आवाजें रिकॉर्ड होती हैं, जो किसी भी घटना की जांच में अहम होती हैं। हालांकि अभी कंपनी से कोई जवाब नहीं मिला है।‘ वे आगे बताते हैं, ‘सार्थक के शिप पर सभी से अच्छे संबंध थे। उसकी गुमशुदगी की खबर लेकर आए कंपनी के अफसर भी ये बात मान रहे हैं। फिर भी कंपनी ये दिखाने की कोशिश में लगी है कि सार्थक की मानसिक हालत ठीक नहीं थी। वो मां को याद कर रहा था और मानसिक रूप से कमजोर पड़ गया था। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल अलग है।’ अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी शाश्वत कहते हैं, ‘कंपनी ने बताया कि 2 फरवरी की रात सार्थक सोया नहीं था, इसलिए सुबह 4 बजे से 8 बजे वाली ड्यूटी भी नहीं कर सका। जब वो मेस भी नहीं पहुंचा तो 8.30 बजे नाश्ता उसके कमरे भेजा गया था लेकिन वहां भी नहीं मिला।‘ हालांकि शाश्वत इसे लेकर सवाल खड़े करते हैं। वे पूछते हैं कि अगर सार्थक सोया नहीं था, तो रात भर कहां था, किसके साथ था और क्या कर रहा था। कंपनी इन सवालों के जवाब क्यों नहीं दे रही है। कंपनी ने ये भी साफ नहीं किया कि वो डेक के पास गया था या शिप के किसी दूसरे हिस्से में। अफसर बोले- मुमकिन है कि सार्थक ने छलांग लगा दीकेस की जांच को लेकर हमने एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि देबाशीष पटनायक से भी बात की। वे बताते हैं कि इस मामले में फिलहाल कोई बड़ा अपडेट नहीं है। न ही सार्थक की मानसिक स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी है। देबाशीष ने दावा किया कि वे कंफर्म हैं कि सार्थक ने ओवरबोर्ड छलांग लगाई है। क्योंकि शिप से किसी का लापता होना बिल्कुल नामुमकिन है। ये भी संभव नहीं कि कोई किसी को उठाकर समुद्र में फेंक दे। हमने पूछा क्या शिप पर किसी तरह की निगरानी नहीं होती? इस पर देबाशीष बताते हैं, ‘निगरानी का काम ब्रिज पर होता है। वेसल स्टाफ को कोई अलग से मॉनीटर नहीं करता क्योंकि वे सभी एम्प्लॉयी होते हैं। अगर सार्थक ने वास्तव में छलांग लगाई होगी, तो समुद्र में उसकी लाश मिलना भी लगभग नामुमकिन है। क्योंकि बड़े से बड़ा तैराक भी ज्यादा से ज्यादा चार घंटे ही पानी में रह सकता है।‘ क्या सार्थक के केबिन में होने की कोई संभावना है? देबाशीष इसे सिरे से खारिज करते हैं और कहते हैं, ‘अगर केबिन में होता तो अब तक मिल चुका होता। सभी CCTV फुटेज रिट्रीव कर लिए गए हैं। उसी से पता चला है कि सार्थक फोन लेकर कमरे से बाहर निकला था। ये फुटेज जल्द ही परिवार को भी भेजा जाएगा।‘ थर्ड ऑफिसर से हुए विवाद के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘शिप में छोटे-मोटे विवाद होते रहते हैं। इसे लेकर कोई इतना बड़ा कदम नहीं उठाता। वैसे भी सार्थक को सभी पसंद करते थे। मुझे किसी केसाथ उसके गंभीर विवाद की जानकारी नहीं है।‘ फिलहाल MRCC मॉरीशस, सार्थक की तलाश में शुरू हुए अभियान को लीड कर रहा है। इसमें शानडोंग सिविलाइजेशन नाम के एक और वेसल शिप की मदद ली जा रही है। ओडिशा सरकार ने मदद के लिए पहल कीसार्थक के लापता होने के मामले में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार के कई अहम विभागों से दखल देने की मांग की है। सरकार ने शिपिंग महानिदेशालय और पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय से संपर्क कर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली स्थित ओडिशा के चीफ रेजिडेंट कमिश्नर ऑफिस से जारी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, ये मामला तब सामने आया, जब सार्थक की मां रश्मिता साहू ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने CM को लिखे पत्र में बताया कि उनका बेटा ड्यूटी के दौरान रहस्यमय हालात में गायब हो गया है। इधर ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने भी सार्थक के लापता होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि खोज और बचाव अभियान तेज किया जाए, ताकि सार्थक को जल्द से जल्द सुरक्षित तलाशा जा सके। अपने बयान में नवीन पटनायक ने भारत सरकार के शिपिंग महानिदेशालय और विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि वे इस मामले में तुरंत मदद करें और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर परिवार को सहयोग दें। साथ ही तलाशी अभियान में तेजी लाएं।………………….ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में पत्नी की मौत, पति ने मांगे 100 करोड़ 8 सितंबर 2025, नेपाल में सरकार के खिलाफ जेन जी प्रोटेस्ट शुरू हुआ। अगले ही दिन प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। सरकारी इमारतें, होटल और दुकानें प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गए। राजधानी काठमांडू में होटल हयात रीजेंसी को भी निशाना बनाया गया। चारों तरफ गोलियों की आवाज और आग की लपटें थीं। इसी होटल में भारत के गाजियाबाद से आए रामबीर सिंह गोला और उनकी पत्नी राजेश देवी रुके थे। पढ़िए पूरी खबर…
पश्चिम एशिया संघर्ष से बांग्लादेश में बिगड़े हालात, तेल संकट से महंगाई बढ़ने की आशंका
पश्चिम एशिया में संघर्ष का दौर जारी है। इस दौरान ईरान ने कतर के कई प्लांटों पर घातक हमले किए हैं, जिसके बाद कतर की तरफ से उठाए गए बड़े कदम के बाद एशियाई आपूर्ति बाधित हो गई है
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला हमारा आत्मरक्षा का अधिकार: अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला आत्मरक्षा के अधिकार का हिस्सा है
ईरान के परमाणु भंडार पर कब्जे की तैयारी?: अमेरिका-इस्राइल उतार सकता है विशेष बल, रिपोर्ट में दावा
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के परमाणु भंडार को सुरक्षित करने का यह संभावित मिशन मौजूदा युद्ध के अगले चरण में किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी यह केवल एक रणनीतिक विकल्प के रूप में विचाराधीन है और इसे तभी लागू किया जाएगा जब युद्ध की परिस्थितियां उस दिशा में आगे बढ़ेंगी।
Nepal PM : काठमांडू की सड़कों पर बालेन-बालेन की धूम, युवाओं के पसंदीदा नेता बने बालेंद्र शाह
काठमांडू: नेपाल की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम तेजी से उभरकर सामने आया है—बालेंद्र शाह (बालेन शाह)। राजधानी काठमांडू की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह “बालेन-बालेन” की चर्चा सुनाई दे रही है। महज 35 वर्ष की उम्र में बालेंद्र शाह (Balendra Shah) देश के युवाओं के बीच बदलाव के प्रतीक बनकर उभरे हैं। नेपाल के युवा वर्ग को उनमें ऐसा नेता दिखाई दे रहा है जो पारंपरिक राजनीति से अलग होकर व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता ला सकता है। यही वजह है कि हाल के चुनावों में जनता ने पुराने राजनीतिक चेहरों से दूरी बनाते हुए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में समर्थन दिया। निर्दलीय मेयर से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर बालेंद्र शाह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 2022 में काठमांडू के मेयर चुनाव से की थी। उन्होंने यह चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और अप्रत्याशित जीत हासिल की। मेयर बनने के बाद उन्होंने राजधानी काठमांडू के प्रशासन में कई बदलाव किए। शहर के विकास, सफाई व्यवस्था, यातायात सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर उन्होंने सक्रिय कदम उठाए। चार वर्षों के भीतर उनके कामकाज की शैली ने आम लोगों का भरोसा जीत लिया। लोगों को लगने लगा कि पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से अलग भी एक ईमानदार और परिणाम देने वाला नेतृत्व संभव है। टाइम मैगजीन की सूची में मिली पहचान बालेंद्र शाह की लोकप्रियता सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही। 2023 में प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 उभरते हुए नेताओं की सूची में शामिल किया। नेपाल जैसे सीमित संसाधनों वाले देश के एक युवा नेता के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मानी गई। इस सम्मान के बाद बालेंद्र शाह की पहचान वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई। ‘जेन जी आंदोलन’ के दौरान बढ़ी लोकप्रियता नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव 2025 के ‘जेन जी आंदोलन’ के दौरान देखने को मिला। इस आंदोलन में देश के युवाओं ने भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई। इस आंदोलन के दबाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से हटना पड़ा। उस समय देश में कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बालेंद्र शाह का नाम भी चर्चा में आया था। हालांकि उस समय विभिन्न दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया। मेयर पद छोड़कर आरएसपी में शामिल हुए जनता के बढ़ते समर्थन को देखते हुए बालेंद्र शाह ने जनवरी 2026 में काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए। इसके बाद देश में जब ओली सरकार ने आलोचना को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध लगाया, तब बालेंद्र शाह युवाओं की आवाज बनकर सामने आए। उन्होंने खुलकर इस फैसले का विरोध किया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। इससे उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने बालेन आरएसपी ने बालेंद्र शाह की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। हाल के चुनावों में पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली और लंबे समय बाद नेपाल की राजनीति में किसी नई पार्टी ने इतना मजबूत प्रदर्शन किया। यह नतीजा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नेपाल की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व से हटकर नई पीढ़ी के नेताओं को मौका देना चाहती है। इंजीनियर से रैपर और फिर राजनेता बालेंद्र शाह का जीवन सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वह मूल रूप से सिविल इंजीनियर हैं, लेकिन युवावस्था में उन्होंने रैप संगीत के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। उनके रैप गीतों में अक्सर सामाजिक समस्याओं, भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था की खामियों पर तीखा व्यंग्य देखने को मिलता था। यही कारण था कि नेपाल के युवाओं ने उनके संगीत में अपनी आवाज महसूस की। धीरे-धीरे उनका यह अंदाज उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाता गया और बाद में वही लोकप्रियता उनकी राजनीतिक ताकत बन गई। दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ा नेपाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय नेता जैसे केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और कमल थापा जैसे दिग्गजों के मुकाबले बालेंद्र शाह एक नए चेहरे के रूप में सामने आए। चुनाव में उन्होंने खुद चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके ही क्षेत्र में लगभग 50 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ी घटना मानी जा रही है। निजी जीवन भी चर्चा में राजनीतिक जीवन के साथ-साथ बालेंद्र शाह का निजी जीवन भी चर्चा में रहता है। उन्होंने 2018 में सबीना से विवाह किया था और उनकी लगभग तीन साल की एक बेटी भी है। नेपाल के युवा उन्हें केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने जैसे साधारण पृष्ठभूमि से आए व्यक्ति के रूप में देखते हैं, जिसने मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बनाई है। नेपाल की राजनीति में बदलाव की उम्मीद विश्लेषकों का मानना है कि बालेंद्र शाह का उभार नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। युवाओं की बड़ी आबादी वाले इस देश में अब ऐसी राजनीति की मांग बढ़ रही है जो पारदर्शिता, विकास और नई सोच पर आधारित हो। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बालेंद्र शाह वास्तव में उन उम्मीदों को पूरा कर पाते हैं, जिनके कारण आज नेपाल की जनता उन्हें बदलाव का प्रतीक मान रही है।
VIDEO: बांग्लादेश के कोमिल्ला में मंदिर के पास सिलसिलेवार पेट्रोल बम धमाके, पुजारी समेत तीन घायल
घटना कलागाछितला मंदिर और उसके पास की सड़क के आसपास हुई, जहां हमलावरों ने एक के बाद एक कई विस्फोट किए। घायलों में मंदिर के पुजारी केशव चक्रवर्ती, स्थानीय निवासी अब्दुल बारेक और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
ईरान के ट्रांजिशन प्लान में भारत के साथ संबंधों और चाबहार पोर्ट के फिर से शुरू होने पर जोर
ईरान के विपक्षी नेताओं ने एक ब्लू प्रिंट तैयार किया है, जिसमें भारत के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है
ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म, 70 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर तबाह : ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि एक हफ्ते से जारी सैन्य संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य ताकत लगभग पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है
ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद ईरान ने इजरायली रिफाइनरी पर किया हमला
ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद ईरान ने इजरायली रिफाइनरी पर हमला किया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने जानकारी दी
मैं योगिता श्री। एक ऐसी मां हूं, जो ईश्वर से अपने से पहले बेटे की मौत मांगती हूं। कोई भी मां ऐसी दुआ कभी नहीं कर सकती, लेकिन बेटे की पीड़ा देखकर यही कहती हूं- हे भगवान, हमसे पहले मेरे बेटे को उठा लेना। नहीं तो, हमारे बाद इसका क्या होगा? कौन इसकी देखभाल करेगा? यह सब सोचकर आंख भर आती है, लेकिन बेटे के सामने कभी नहीं रोती। अगर रोऊंगी, तो उसे लगेगा कि वह हमारे लिए बोझ है। अब तो उसकी तकलीफ दिन-पर-दिन बढ़ती ही जा रही है। हम गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले हैं। 5 साल पहले मेरा बेटा हितांशु दोनों हाथों और पैर के सहारे चलता था। फिर उसकी कमर और हाथ-पैर दोनों ने काम करना बंद कर दिया। अब तो हाल यह है कि वह खुद से खिसक भी नहीं सकता। अपने सिर के बाल तक नहीं खुजला सकता। शरीर पर बैठा मच्छर तक नहीं भगा पाता। हमें पता है कि आने वाले दिनों में हमारे बेटे का क्या हाल होगा। अभी तो उसके हाथ-पैरों ने काम करना बंद किया है। कुछ साल बाद वह ‘जिंदा लाश’ बन जाएगा, बिस्तर पर पड़ा रहेगा। सिर्फ सांस चलेगी। ऐसी जिंदगी किस काम की…। एक मां होकर मैं ये सारी बातें नहीं बोल सकती, लेकिन ये सच है कि ऐसी औलाद भगवान किसी को न दे। लेकिन फिर भी कभी-कभी खुद को समझाती हूं- मेरे पास एक औलाद तो है! ऊपर वाले ने मुझे मां बनने का सुख तो दिया है न! गोद तो सूनी नहीं रखी! बहुत परिवार तो औलाद के लिए भी तरस जाते हैं। न जाने किन-किन देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। इस समय मेरा बेटा हितांशु 18 साल का है, लेकिन इसकी देखभाल 6 महीने के बच्चे से भी ज्यादा करनी पड़ती है। 6 महीने या सालभर का कोई बच्चा बिस्तर पर पेशाब-पॉटी करता है, तो मां-बाप को उसे साफ करना बुरा नहीं लगता, लेकिन 18 साल का बच्चा जब ऐसा करे… तो दिल अंदर तक टूट जाता है। हितांशु का वजन इतना है कि हम उसे अकेले नहीं उठा सकते। मेरे पति अविनाश और मैं, मिलकर उसे पेशाब-पॉटी कराते हैं। उस वक्त तीन-चार तकियों के सहारे उसे बैठाना पड़ता है। पेट, पीठ की तरफ निकलता जा रहा है। थोड़ी देर ही सो पाता है, उसके बाद शरीर में तेज दर्द कारण उठकर बैठ जाता है। हम पति-पत्नी उसे उठाकर वॉशरूम ले जाते हैं। भले ही वह शरीर से विक्लांग है, लेकिन उम्र की वजह से हमसे झेप जाता है, शर्माता है। कहने लगता है- ‘मैं तुम्हारे सामने पॉटी कैसे करूं?’ आप लोगों को परेशान कर रहा हूं? ये बातें सुनकर कलेजा बैठ जाता है। इसे समझाती हूं- हम तुम्हारे मां-बाप हैं, दोस्त की तरह हैं, लेकिन इसे अच्छा नहीं लगता। मन-ही-मन इसे लगता है कि हमारे लिए बोझ बन गया है। कुछ दिन पहले की बात है, इसने आवाज देकर मुझे उठाया था। मैं गहरी नींद में थी। झल्लाकर बोल पड़ी- थोड़ी सी नींद तो लेने दो। हर वक्त मम्मी-मम्मी करता रहता है। तुम्हें कभी पानी पीना है, कभी करवट बदलना है, कभी उठकर बैठना है, कभी वॉशरूम जाना है, कभी पॉटी करनी होती है। मैं भी तो इंसान ही हूं, मशीन तो नहीं। तुम्हारी वजह से हमें 24 घंटे जागते रहना पड़ता है। देख रहे हो न हमारी हालत…। सुनकर बोला था- मुझे पता है कि तुम लोग मेरी वजह से तंग आ चुके हो, लेकिन क्या करूं, जब तक भगवान मुझे उठा नहीं लेता, तुम लोगों को तकलीफ तो देता ही रहूंगा न! यह सुनते ही मैं और इसके पापा फफक-फफककर रोने लगे। इसके पापा सो रहे होते हैं, और यह अचानक बोल पड़ता है- ‘मुझे वॉशरूम जाना है’ या ‘हाथ पर कीड़ा बैठ गया है'। वह तुरंत नींद से उठ जाते हैं। अब तो इसके पापा का चेहरा ऐसे दिखता है, जैसे वह हर वक्त नींद में हों। वह दिन में कुछ ही घंटे सो पाते हैं। पूरी रात टैक्सी चलाते हैं। अब बेटे की इसमें क्या ही गलती है। भगवान ने इसे ऐसा ही शरीर दिया है। हम भी सोचते हैं कि भगवान ने कुछ सोचकर ही इसे हमारे घर भेजा है। जब तक हम लोगों से सेवा करवानी है, करवा लेगा, फिर भगवान के पास हमसे पहले चला जाए, यही हमारे लिए अच्छा होगा! यह मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में धीरे-धीरे शरीर के अंग काम करना बंद करने लगते हैं। 2007 की बात है। मेरी शादी उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले अविनाश सिंह से हुई थी। अविनाश 13 साल की उम्र में ही अपने पिता के साथ अहमदाबाद आकर रहने लगे थे। शादी के एक साल बाद बेटे हितांशु का जन्म हुआ। मेरे पति तीन भाइयों में से एक हैं। उनमें यह पहला बेटा था। हर कोई खुश था कि घर का पहला चिराग आ गया। दो साल का था, तब यह अक्सर चलते-चलते गिर जाता था। तब हमें लगता था कि बच्चा है, बच्चे ऐसे ही गिर जाते हैं। शायद पैर कमजोर होंगे, मालिश या दवा की जरूरत होगी। फिर हम डॉक्टर को दिखाकर विटामिन की दवाएं लेकर आते। इसकी नानी और दादी सुबह-शाम इसकी मालिश करती थीं। जब 4 साल का हुआ तो इसके पैर थोड़े टेढ़े होने लगे। ऐसा लग रहा था कि पैरों में जान ही नहीं है। सीढ़ियां चढ़ने में इसे तकलीफ होती थी। मेरा भाई डॉक्टर है। वह समझ गया कि इसे कोई गंभीर या अलग तरह की बीमारी है। उसने 2012 में करीब 12 हजार रुपए खर्च करके इसका ब्लड टेस्ट करवाया। दो हफ्ते बाद जब रिपोर्ट आई, तो वो दिन हमारे लिए काला दिन जैसा था। भाई ने बताया, आगे चलकर इसके शरीर के अंग काम करना बंद कर देंगे। इसे मांसपेशियों की बीमारी है। यह पूरी तरह बिस्तर पर पड़ जाएगा। सुनते ही कई दिनों तक तो हम सो नहीं पाए। लोग जिस भी डॉक्टर को दिखाने को कहते, वहां लेकर चले जाते। शुरुआत में एक-दो डॉक्टरों ने इलाज की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पोलियो फाउंडेशन में जब दिखाया तो उन्होंने साफ कहा- इसे घर ले जाओ। जब तक है, तब तक इसकी सेवा करो। अब इसका कुछ नहीं हो सकता। एक डॉक्टर ने तो फाइल तक नहीं देखी। सीधे बोले- रिपोर्ट सब बोलती है। यह जिंदगीभर ऐसे ही रहेगा। अब देश में ऐसी कोई दवा ही नहीं है, तो हम क्या कर सकते हैं। उस दिन तो हमारा दिल बैठ गया। उस वक्त मेरा बेटा स्कूल में पढ़ रहा था। 11 साल का था। स्कूल की दूसरी मंजिल पर इसका क्लासरूम था। तेज गर्मी में यह दोनों हाथ-पैर के सहारे रेंगकर सीढ़ियां चढ़ता था। सीढ़ी गर्म रहती थी, जिसके कराण इसके दोनों हाथ जल जाते थे। एक दिन स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा- हमारी नौकरी का सवाल है। इसे घर पर रखिए। यह पढ़-लिखकर क्या ही कर लेगा। स्कूल के बच्चे भी इसे लंगड़ा-लंगड़ा कहकर चिढ़ाते थे। उसके बाद हमें इसका नाम कटवाना पड़ा। तब से यह कभी स्कूल नहीं गया। जब स्कूल से इसका नाम कटवाया और घर पर रहने लगा, तो हर रोज कहता- मम्मी, मुझे स्कूल जाना अच्छा लगता था। अब क्या मैं कभी स्कूल नहीं जा पाऊंगा? जब बच्चों के स्कूल जाने का समय होता था तो यह खिड़की से सड़क की तरफ नजरें गड़ाए देखता रहता। अब जब घर के बरामदे में बैठती हूं और बाहर स्कूल जाते बच्चों को देखती हूं, तो अपने बेटे को निहारने लगती हूं। काश! यह भी अच्छा होता, तो स्कूल जा पाता। हमारे बुढ़ापे का सहारा बनता। लेकिन क्या करें, जो किस्मत में है, उसे भुगतना ही पड़ेगा! शायद पिछले जन्मों के हमारे बुरे कर्म होंगे, जो इस जन्म में भुगत रहे हैं। अब तो यह भी अपनी जिंदगी से थक चुका है, लेकिन फिर भी कहता है- मेरा एक ही सपना है, बड़ा होकर खूब पैसे कमाना। इसके दोनों हाथों में मोबाइल पकड़ा देती हूं, तो धीरे-धीरे मोबाइल चलाकर वीडियो देखकर पढ़ाई करता है। आजकल तीसरी क्लास का सिलेबस देख रहा है। शुरू में आस-पड़ोस के लोग आकर मेरे बेटे को बेचारा और लाचार कहते थे। कहते थे- हाय! भगवान ने तुम्हें कैसी किस्मत दे दी। इससे अच्छा तो बेऔलाद ही रहते। कुछ लोगों ने कहा- दूसरे बच्चे का प्लान कर लो। यह सब सुनकर बुरा लगता, लेकिन किस-किस का मुंह बंद कराती? दूसरा बच्चा न पैदा करने की भी वजह है। हम इसे एक डॉक्टर को दिखाने ले गए थे। उन्होंने कहा, इसे जेनेटिक बीमारी है। आगे आपने बच्चा पैदा किया तो ऐसे दो और बच्चे पैदा हो सकते हैं। सोचने लगी कि ऐसा एक बच्चा संभालना हमारे लिए पहाड़ जैसा है, दो और ऐसे बच्चे कैसे संभालूंगी? दरअसल, हमारे मामा के बेटे को यही बीमारी थी। उसे एक परिवार से मिली थी, जिसके दोनों बच्चों को यह बीमारी थी। इसलिए हमने दूसरे बच्चे का सपना ही छोड़ दिया। सोचिए जरा, जब हमारी शादी हुई, तभी से इसके पापा ने ठान रखा था- एक ही बच्चा करेंगे। चाहे बेटा पैदा हो या बेटी। जब यह पैदा हुआ, तो इसके पापा ने संतोष कर लिया। अब यह जैसा भी है, हम केवल इसी के लिए जी रहे हैं। यह व्हीलचेयर पर चले, इसके पापा को अच्छा नहीं लगता। वह कहते हैं- मेरे पास फोर व्हीलर गाड़ी है और यह व्हीलचेयर पर चले, अच्छा नहीं लगता। यह जो भी मांगता है, लाकर देते हैं। एक बार तो इसे मॉल लेकर गए। वहां इसने कह दिया- पापा, क्या आपको मुझे व्हीलचेयर में बिठाकर चलाने में शर्म आती है? लेकिन इसे क्या पता कि हकीकत क्या है? कई बार हम थक-हारकर चुप रह जाते हैं। यह ऐसी बातें हमसे कहता रहता है। हम हां, हां करते रहते हैं। क्या करें। 24 घंटे इसी में कैसे लगे रहें। इसे नहलाना, सुलाना, करवट बदलना, सारी चीजें करना…। बहुत मुश्किल जिंदगी हो चुकी है हमारी। अब यह बिस्तर पर लेटे-लेटे 24 घंटे में से लगभग 16 घंटे छत के पंखे को निहारता रहता है। इसकी आंख से टप-टप आंसू बहते रहते हैं। इसका दिल ही जानता होगा कि यह क्या महसूस कर रहा है। ज्यादा बोलने पर इसका ऑक्सीजन लेवल घटने लगता है। इसलिए हर दिन ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट चेक कराना पड़ता है और अलग से ऑक्सीजन देनी पड़ती है। हर दिन इसके हाथ-पैर की मालिश करनी पड़ती है। अब इसके दोनों पैर तिकोने आकार में मुड़ गए हैं। हाथ भी धीरे-धीरे टेढ़े हो रहे हैं। कमर पूरी तरह से मुड़ चुकी है। बैठाने पर सिर झूलने लगता है। यह सब देखकर मैं टूट जाती हूं। तब इसके पापा एक ही बात कहते हैं, भगवान ने कुछ सोचकर ही इसे हमारे घर भेजा होगा। जितना हो पाए, इसकी सेवा करते रहो। जब तक यह हमारे घर है, इसे किसी चीज की कमी या तकलीफ न होने पाए। बस, अब तो कलेजे पर पत्थर रखकर हर वक्त एक ही दुआ करती हूं- हे ईश्वर, हमसे पहले मेरे बेटे को उठा लेना…। (हितांशु की मां योगिता श्री ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर नीरज झा से साझा किए) ------------------------------------- 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
‘मेरे साथ लव जिहाद हुआ है। ठगी हुई है। जिस दिन मैं शादी करने अलीगढ़ गया था, उसी दिन मैंने दो हिंदू लड़कियों को लव जिहाद से बचाया था। और देखिए, मेरे साथ ही कांड हो गया।’ शादी के नाम पर ठगी का आरोप लगा रहे बिट्टू बजरंगी गोरक्षा बजरंग फोर्स के अध्यक्ष हैं। फरीदाबाद में रहते हैं। असली नाम राजकुमार पांचाल है और उम्र 48 साल। 31 जुलाई 2023 को हरियाणा के नूंह में भड़की हिंसा में आरोपी थे। मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ बयान देते रहे हैं। अभी अपनी शादी की वजह से चर्चा में हैं। बिट्टू बजरंगी का आरोप है कि उनका रिश्ता पूजा नाम की महिला से हुआ था, लेकिन वह असल में शबनम थी। शबनम और उसके पति दानिश ने 1.3 लाख रुपए ठग लिए। बिट्टू बजरंगी शादी के लिए अलीगढ़ के लोधा गांव के एक मंदिर पहुंचे, तो वहां न पूजा मिली, न उसके रिश्तेदार और न पंडित। उनका दावा है कि उन्होंने सारे सबूत पुलिस को दे दिए हैं, लेकिन पुलिस कह रही है कि अब तक कोई सबूत नहीं मिला। इस फ्रॉड को समझने के लिए हमने बिट्टू बजरंगी और पुलिस अधिकारियों से बात की। अलीगढ़ में उस मंदिर और महिला के पते पर भी पहुंचे, जो बिट्टू बजरंगी को दिया गया था। पहले पढ़िए मामला शुरू कहां से हुआ… शादी के लिए 2 साल से लड़की देख रहे थे, पड़ोसी ने कहा- हम दुल्हन दिलाएंगे बिट्टू बजरंगी कहते हैं कि मैं बजरंग बली का भक्त हूं। मैंने शादी नहीं करने की ठानी थी, लेकिन क्या करें, भाई की मौत हो गई और उसकी पत्नी मायके चली गई। अब 7 साल की भतीजी मेरी जिम्मेदारी है। मैं अपने लिए पत्नी नहीं, बच्ची के लिए मां खोज रहा था। बिट्टू ने अपनी बात कहने के लिए बजरंगी बली का मंदिर चुना। कहा कि हनुमान जी हमारी-आपकी बात के साक्षी होंगे। बिट्टू बताते हैं, ‘मैं 2 साल से शादी के लिए लड़की तलाश रहा था। मुझे गोरक्षा और सनातन के काम के लिए बाहर जाना पड़ता है। इसलिए भतीजी को दूसरों के पास छोड़कर जाता हूं। संगठन के लोगों ने कहा कि मुझे शादी कर लेनी चाहिए। संगठन और समाज की सलाह पर मैंने हां कर दी।’ तीन लड़कियों को रिजेक्ट किया, फिर पूजा पसंद आई बिट्टू कहते हैं, ‘मेरे पड़ोस में हरि सिंह रहते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे पंकज का साला बंटी शादियां करवाता है। वो तुम्हारी भी शादी करवा देगा। मैं तैयार हो गया। मुझे अलीगढ़ में तीन लड़कियां दिखाई गई थीं। किसी न किसी वजह से तीनों पसंद नहीं आईं। अलीगढ़ की ही चौथी लड़की पसंद आई।’ 'मैं पहले तीन बार गया था, लेकिन इस बार नहीं गया। 5 सितंबर, 2025 को लड़की को लेकर उसका भाई, चाचा, पिता बिचौलिए यानी पड़ोसी के घर आए थे। रिश्ता तय होने के बाद 7 सितंबर को शादी के लिए लोधा गांव के मंदिर बुलाया।’ बिट्टू बजरंगी ने एक फोटो दिखाई, जिसमें वे एक महिला के साथ बैठे हैं। बिट्टू आगे कहते हैं, ‘लोग कह रहे हैं कि मैंने लड़की को खरीदा था। सब ये फोटो देख लें। उस दिन बाकायदा रस्मों के साथ टीका हुआ था। क्या लड़की की खरीद ऐसे होती है। हमने पूछा फोटो में लड़की की उम्र कम लग रही है। बिट्टू ने जवाब दिया, ‘नहीं, 38 साल की है। मैं 48 का हूं। 10 साल का गैप तो चलता है।’ हमने पूछा, लड़की अलीगढ़ में कहां की रहने वाली है? बिट्टू साफ-साफ नहीं बताते। बस इतना कहते हैं कि लड़की कहां है, मुझे सब पता है। पुलिस अगर मेरे साथ चले, तो सबको गाड़ी में भरकर ले आऊंगा। उन्होंने बताया कि वे शादी करने जिस मंदिर में गए थे, वो अलीगढ़ के लोधा गांव में है। फिर कहते हैं कि लड़की का घर लोधा गांव से 6-7 किलोमीटर दूर सूत मिल चौराहे के पास बने सरकारी फ्लैट में है। हालांकि, फ्लैट का नंबर या मंदिर के बारे में बहुत पूछने पर भी कुछ नहीं बताया। हमारे रिपोर्टर अलीगढ़ की दोनों लोकेशन पर पहुंचे। यहां लड़की के परिवार वालों को कोई नहीं जानता। बिट्टू ने हमें बताया था कि लड़की लोधा गांव की है। वहीं वो मंदिर था, जहां बिट्टू शादी के लिए गए थे। गांव के लोगों ने बताया कि यहां 3-4 मंदिर हैं। कोई भी लड़की के घर का पता नहीं बता पाया। शादी में चढ़ावे के लिए खरीदे जेवर और कपड़े दान किएबिट्टू बताते हैं, 'मेरे साथ 1.3 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी हुई है। मेकअप, फेशियल और लहंगे के लिए 30 हजार रुपए शादी से ठीक पहले दिए थे। लड़की वाले टीका करने आए थे, उस दिन गाड़ी के किराए के लिए 3 हजार रुपए मांगे थे। मैंने ऑनलाइन पैसे भेज दिए। आने-जाने, गाड़ी करने में मेरे करीब एक लाख रुपए खर्च हुए। चढ़ावे के लिए इयर रिंग, अंगूठी, चेन और साड़ियां खरीदी थीं। ये सब दान कर दिया।' रिश्ता कराने वाले बिचौलिए और पड़ोसी घर में नहींबिट्टू बजरंगी का रिश्ता कराने वाले बिचौलिए हरि सिंह और उनका परिवार घर में नहीं है। 19 फरवरी को फरीदाबाद के सारन थाने में दर्ज FIR में बिट्टू ने हरि सिंह के बेटे के साले बंटी, लक्ष्मी नाम की एक महिला और लड़की के भाई बनकर आए प्रदीप का नंबर दिया है। वे अब प्रदीप को दानिश बता रहे हैं। इन सभी लोगों के नंबर बंद आ रहे हैं। पुलिस का दावा- बिट्टू ने अब तक एक सबूत नहीं दियाहमने फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता से पूछा कि इस केस की जांच कहां तक पहुंची। क्या इसमें किसी रैकेट के शामिल होने की आशंका है? उन्होंने अपने PRO यशपाल सिंह से बात कराई। उन्होंने बताया- बिट्टू बजरंगी सिर्फ मीडियाबाजी कर रहे हैं। पुलिस ने उन्हें कई बार नोटिस भेजा, ताकि वे थाने आकर जांच में सहयोग करें। वे नोटिस ही रिसीव नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अब तक एक भी सबूत नहीं दिया है। न ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड दिखाया, न लड़की के घर की लोकेशन बताई। बिट्टू बजरंगी झूठ क्यों बोलेंगे, इसकी वजह क्या हो सकती है? जवाब मिला, 'जब तक बिट्टू खुद आकर सहयोग न करें, तब तक हम कुछ नहीं कह सकते। पीड़ित खुद थाने आकर सहयोग करता है, ताकि उसका केस जल्दी निपटे। यहां बिट्टू मीडिया में हंगामा कर रहे हैं। और पुलिस से किनारा कर रहे हैं।' बिट्टू बजरंगी बोले- पुलिस झूठ बोल रही, सारे सबूत दे दिएपुलिस के दावे पर बिट्टू बताते हैं कि मेरे पास पहला नोटिस एक मार्च को आया है। मैं सारे सबूत लेकर तीन बार थाने गया, लेकिन किसी ने लिए नहीं। सब एक-दूसरे का नाम लेकर टाल रहे हैं। वे दावा करते हैं कि पुलिस झूठ बोल रही है। मेरा पूरा सनातनी नेटवर्क उस लड़की की कुंडली खंगाल रहा है। सब कुछ मीडिया के सामने लाऊंगा। लड़की मुसलमान है। उसका नाम शबनम और पति का नाम दानिश है। पति ही उसका भाई बनकर आया था। ये पूरा मामला लव जिहाद का है। पुलिस ने जिस तरह मेरे भाई की हत्या का केस बंद कर दिया था, वैसे ही मेरा भी केस बंद करना चाहती है।’ बिट्टू के भाई को जलाकर मारा, पुलिस ने कहा- सबूत नहीं मिलाबिट्टू आगे बताते हैं, ‘2024 में जिहादियों ने मेरे भाई महेश पांचाल की हत्या कर दी थी। वे हत्या तो मेरी करने आए थे, लेकिन मेरा भाई उनके हत्थे चढ़ गया। उसे फरीदाबाद में जलाया गया। हम उसे लेकर अस्पताल भागे। वहां उसकी मौत हो गई। उसने पुलिस को दिए बयान में हत्यारे का नाम भी बताया था। पुलिस ने कुछ महीने जांच की और कहा कि सबूत नहीं मिले।’ ‘दरअसल नूंह दंगों में मेरा नाम आया था। जिहादियों के दिमाग में मैं बस गया। मेरे भाई के केस में भी पुलिस ने कह दिया कि हत्या का कोई सबूत नहीं मिला। इस बार भी पुलिस यही कह रही है, कि उसे सबुत नहीं मिल रहा। मैं भाई का केस हाईकोर्ट में ले गया हूं। शादी की इस साजिश का भी पर्दाफाश करूंगा।’ …………………………ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंमेरठ में मिली लाश, मरने वाली अर्चिता या तुर्कमेनिस्तान की मुहब्बत यूपी के मेरठ का मवाना खुर्द इलाका। 21 फरवरी को यहां फार्म हाउस के पास खेत में एक लड़की की लाश मिली। चेहरा जला हुआ था इसलिए पहचानना मुश्किल था। पुलिस ने डेडबॉडी दिल्ली की रहने वाली अर्चिता अरोड़ा की बताई। तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं ने दावा किया कि मरने वाली लड़की भारतीय नहीं, बल्कि तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत है। पढ़ें पूरी खबर...
AI युग सिर्फ अपग्रेड नहीं, पूरी इकोनॉमी का रीसेट: जियो
मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में मैथ्यू ओमेन ने रखा ‘इंटेलिजेंस ग्रिड’ का विजन बार्सिलोना, 4 मार्च 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर टेलीकॉम सेक्टर के लिए सिर्फ टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं, बल्कि इकोनॉमी और बिज़नेस मॉडल का रीसेट है। मैथ्यू ओमेन, ग्रुप सीईओ, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC) बार्सिलोना में कहा कि दुनिया अब “मिनट्स ... Read more
राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में लगातार मिसाइल हमलों, ड्रोन हमलों और हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव के बीच ईरान का यह बयान हालात को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
नेपाल में भ्रष्ट नेताओं और उनके अमीर बच्चों को मुद्दा बनाने वाली पार्टी बहुमत की ओर
नेपाल में तीन साल पुरानी राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी बहुमत की ओर बढ़ रही है. राजनेताओं के अमीर बच्चों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने वाली इस पार्टी की कमान 35 साल के बालेंद्र शाह संभाल रहे हैं.
ईरान युद्ध: रूस क्यों नहीं आ रहा ईरान की मदद के लिए सामने?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी कम सहयोगियों वाली ईरानी सरकार, अमेरिका और इस्राएल के जारी हमलों के बीच मॉस्को के समर्थन की उम्मीद कर रही थी. लेकिन अब तक तो उसे केवल निराशा ही हासिल हुई है
अली लारीजानी, जो पर्दे के पीछे से चला रहे हैं ईरान की हुकूमत
अमेरिका और इस्राएल के हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और अन्य बड़े नेताओं के मारे जाने के बाद, अब अनुभवी नेता अली लारीजानी ही सारे बड़े फैसले ले रहे हैं
युद्ध खत्म होने के बाद कैसा दिख सकता है ईरान का भविष्य
अभी कोई नहीं जानता कि अमेरिका, इस्राएल और ईरान के बीच छिड़ी यह जंग कब खत्म होगी. यह कहना भी मुश्किल है कि लड़ाई के बाद ईरान की हालत कैसी होगी
क्या ईरान पर हमले के दौरान तोड़ा गया अंतरराष्ट्रीय कानून?
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान पर किया गया हमला और वहां के सर्वोच्च नेता की हत्या संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है. इस्राएल इसे आत्मरक्षा बता रहा है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञ इसे गलत मान रहे हैं
अधिकांश जर्मन मतदाता ईरान युद्ध के खिलाफ; डर का माहौल
जर्मनी के एक नए सर्वे के अनुसार जर्मन मतदाता ईरान पर अमेरिका-इस्राएल हमलों और मध्य पूर्व की स्थिति के वैश्विक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं. अमेरिका पर जर्मन लोगों का भरोसा कम हो गया है
ट्रंप की हत्या की साजिश के आरोप में पाकिस्तानी को दोषी ठहराया गया
पाकिस्तान के एक व्यक्ति को ईरान के साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान युद्ध की स्थिति में आमने-सामने हैं।
व्हाइट हाउस ने पेश की नई साइबर रणनीति
व्हाइट हाउस ने अमेरिका के लिए एक साइबर रणनीति जारी की है, जिसमें साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, प्रतिद्वंद्वियों से डिजिटल खतरों का मुकाबला करने और वैश्विक भागीदारों के साथ सहयोग को गहरा करने की एक व्यापक योजना की रूपरेखा दी गई है।
ग्रीन टेक्नोलॉजी पर बांग्लादेश का फोकस, यही दुनिया का भविष्य : हाफिजुर रहमान
रनर ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन हाफिजुर रहमान खान ने शनिवार को कहा कि भविष्य के बाजार में धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित प्रौद्योगिकी (ग्रीन टेक्नोलॉजी) जैसे डीएमआई तकनीक, पीएचईवी वाहनों की ओर रुझान बढ़ेगा
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने किया ईरान को बड़े सैन्य नुकसान का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बड़े सैन्य नुकसान का दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन ने ईरान के सशस्त्र बलों को बहुत कमजोर कर दिया है और उसके सैन्य ढांचे को लगभग तबाह कर दिया है।
अमेरिका रूस पर तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार
स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि मध्य-पूर्व संघर्ष के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए वॉशिंगटन रूस के तेल आपूर्ति पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दे सकता है
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना तय है। भले ही नतीजों के लगभग चार महीने बाद ऐसा होने जा रहा है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट बीजेपी ने चुनाव से पहले ही लिख रखी थी। सीटों के बंटवारे से लेकर नीतीश के लिए मजबूती से कैंपेन करना, बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। 4 पॉइंट में जानेंगे बीजेपी ने कैसे लिखी स्क्रिप्ट… लेकिन उससे पहले बैकग्राउंड समझ लेते हैं… 2020 बिहार चुनाव में मुकाबला दो बड़े गठबंधनों के बीच था। एक तरफ बीजेपी, जेडीयू, मांझी की हम और साहनी की वीआईपी पार्टी वाला एनडीए और दूसरी तरफ आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट का महागठबंधन। ढाई साल पहले ही नीतीश पाला बदलकर वापस बीजेपी के साथ आए थे। एनडीए की तरफ से सीएम का चेहरा भी वहीं थे। पर पर्दे के पीछे से बीजेपी अपना सीएम बनाने की जुगत में थी। उसने जदयू के बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की, लेकिन नीतीश इसके लिए तैयार नहीं हुए। नीतीश को पता था कि बीजेपी ज्यादा सीटें जीत गई, तो सीएम की कुर्सी पर दावा ठोक देगी। इसलिए वे खुद बड़े भाई की भूमिका में रहना चाहते थे। चिराग की पार्टी एलजेपी तब एनडीए में शामिल होना चाहती थी। खुद को मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग ने एलजेपी के लिए 40 सीटों की मांग कर दी। नीतीश इसके लिए भी तैयार नहीं हुए। उन्होंने साफ कह दिया कि बीजेपी, एलजेपी को गठबंधन में शामिल करना चाहती है, तो अपने कोटे से सीटें दे दें। बीजेपी ने इनकार कर दिया। ऐसे में एलजेपी अकेले मैदान में उतरी और सोची समझी रणनीति के तहत नीतीश की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। इनमें से ज्यादातर उम्मीदवार बीजेपी छोड़कर आए थे। कई तो सीधे तौर पर संघ से ताल्लुक रखने वाले थे। तब सियासी गलियारों में चर्चा छिड़ी कि नीतीश को कमजोर करने के लिए एलजेपी, बीजेपी की बी टीम बनकर चुनाव लड़ रही है। चिराग ने भी कुछ ऐसा ही कैंपेन किया। जब नतीजे आए तो 115 सीटों पर लड़ने वाली जदयू 43 सीटों पर सिमट गई। 34 सीटों पर चिराग की पार्टी ने वोट काटकर उसे हरवा दिया। जबकि बीजेपी ने 110 सीटों पर लड़कर 74 सीटें जीत ली। 74 सीटें जीतकर बीजेपी NDA में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। HAM और VIP को मिलाकर वह 82 तक पहुंच गई, लेकिन नीतीश के बिना बहुमत के लिए जरूरी 122 से काफी पीछे रह गई। यानी उसे सत्ता के लिए नीतीश का साथ जरूरी हो गया। कम सीट जीतने के बाद भी नीतीश ने ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तब कहा गया कि कुछ समय बाद बीजेपी अपना सीएम बनाएगी। बीजेपी की तरफ से ऐसी कोशिशें भी हुईं। पर दो साल बाद ही नीतीश ने पाला बदलकर फिर से राजद के साथ सरकार बना ली। नीतीश ने आरोप भी लगाया कि उनकी पार्टी तोड़ने की साजिश रची जा रही थी। दो साल बाद यानी 2024 में जदयू फिर से एनडीए में लौटी, लेकिन इस बार भी बीजेपी अपना सीएम नहीं बना पाई। मुख्यमंत्री नीतीश ही बने। क्योंकि मैजिक फिगर नीतीश के साथ ही था। अब तक तो सियासी गलियारों में यह मान लिया गया कि नीतीश जब तक चाहेंगे वे सीएम रहेंगे और जिसके साथ जब जी करे सरकार बना लेंगे। लगातार चार बार पलटी मारकर उन्होंने यह बात बहुत हद तक साबित भी कर दी थी। नीतीश के लिए बीजेपी ने 2025 के चुनाव में 4 खास स्ट्रैटजी अपनाई… 1. बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ना 2019 के लोकसभा में बीजेपी और जदयू बराबर-बराबर सीटों पर लड़ीं, लेकिन 2020 के विधानसभा में नीतीश ही बिग ब्रदर रहे। 2025 के चुनाव में बीजेपी ने साफ कर दिया था कि वह बराबर सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी। इसलिए ही बीजेपी ने आखिर-आखिर तक चिराग फैक्टर को मौजू बनाए रखा। आखिरकार जदयू और बीजेपी 101-101 सीटों पर लड़ने के लिए राजी हो गए। वजह: बराबर सीटों पर लड़कर बड़ी पार्टी बनना। नतीजे भी बीजेपी के फेवर में आए और वो सबसे बड़ी पार्टी बनी। 2. सहयोगियों को ज्यादा से ज्यादा सीटें देना बीजेपी समझ चुकी थी कि नीतीश इस बार चिराग को अलग चुनाव लड़ाने की गलती नहीं करेंगे। ऐसे में चिराग ने फिर से 40 सीटों की मांग कर दी। शुरुआत में तो जदयू ना नुकर करती रही, लेकिन फिर वो राजी हो गई। इस तरह 43 सीटें सहयोगियों के खाते में चली गईं। इनमें से 29 सीटें चिराग की पार्टी को मिलीं। NDA के भीतर बिहार में पहली बार गैर बीजेपी-जदयू वाले दलों को 43 सीटें मिलीं। वजह: बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं- ‘बीजेपी चाहती थी कि जदयू कम से कम सीटों पर लड़े। ऐसा तभी संभव था जब एनडीए के भीतर सहयोगियों को ज्यादा से ज्यादा सीटें मिले। और हुआ भी वैसा ही। चिराग को 29, मांझी-कुशवाहा को 6-6 सीटें मिलीं। यानी 43 सीट। इस तरह एनडीए में बिना नीतीश आंकड़ा 143 पहुंच गया। बीजेपी यहीं चाहती थी कि वो नीतीश के बिना वह बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच सके।’ 3. चुनाव से पहले नीतीश के नाम पर भ्रम फैलाना ये 5 बयान पढ़िए… वजह: अमरनाथ तिवारी के मुताबिक बीजेपी चाहती थी कि पूरा चुनाव इस बात पर हो कि नीतीश सीएम होंगे या नहीं। राजद और कांग्रेस ने बार-बार कहा कि बीजेपी, नीतीश को सीएम नहीं बनाएगी। इन बयानों से जनता के बीच ये मैसेज चला गया कि नीतीश कमजोर हुए तो बीजेपी अपना सीएम बनाएगी। ऐसे में नीतीश के वोटर और पिछड़े तबके ने तय कर लिया कि नीतीश को इतना मजबूत बना दें कि बीजेपी उन्हें हटा नहीं पाए। कई लोगों ने नीतीश के आखिरी चुनाव समझकर भी उन्हें वोट किया। नतीजों में भी यह साफ दिखा। जदयू ने 101 में से 85 सीटें जीत ली। इसका सीधा नुकसान राजद को हुआ। 4. जदयू की सीटों पर मजबूती से प्रचार करना प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार चुनाव के दौरान कुल 16 रैलियां कीं। कुल 122 सीटें कवर कीं। इनमें से 42 सीटों पर जदयू लड़ रही थी। नतीजे आए तो 32 सीटें जदयू को मिलीं। इनमें से ज्यादातर वो सीटें थीं, जो 2020 में जदयू हार गई थी। इसी तरह गृहमंत्री अमित शाह ने 28 रैलियों से 141 सीटें कवर कीं। इनमें से 58 सीटों पर जदयू लड़ रही थी। 42 पर उसे जीत भी मिल गई। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 25 रैलियों से कुल 122 सीटें कवर कीं। इनमें से 47 सीटें जदयू के खाते की थीं। 40 पर उसे जीत भी मिल गई। यानी पीएम मोदी, शाह और योगी ने जहां रैली की वहां कुल 86 सीटों पर जदयू चुनाव लड़ रही थी। इनमें से 74 पर उसे जीत मिली। यानी स्ट्राइक रेट 86% रहा। वजह: करीब 65% सीटों पर जदयू की सीधी लड़ाई आरजेडी से ही थी। बीजेपी चाहती थी कि आमने-सामने की टक्कर की ज्यादातर सीटें जदयू जीत ले और राजद कमजोर पड़ जाए। हुआ भी ऐसा ही। बीजेपी के मनमुताबिक नतीजे आए, नीतीश का पाला बदलना मुश्किल नतीजे आए तो बीजेपी को 89, जदयू को 85, चिराग की पार्टी को 19, हम को 5 और कुशवाहा की पार्टी आरएलएम को 4 सीटें मिलीं। इस तरह NDA का आंकड़ा 202 पहुंच गया। जबकि आरजेडी को 25, कांग्रेस को 6 और बाकी सहयोगियों को 4 सीटें मिलीं। यानी महागठबंधन को 35 सीटें मिलीं। इस तरह एकतरफा सीटें NDA के खाते में आ गईं और राजद बेहद कमजोर हो गई। इसे ऐसे समझिए… नीतीश के बिना बहुमत के करीब पहुंच गई NDA नीतीश राजद के साथ गए तो भी बहुमत से दूर अगर नीतीश पाला बदलकर राजद के साथ जाते, तो भी बहुमत के आंकड़े से दूर रह जाते। गणित को ऐसा ही है। नीतीश की जदयू (85)+ राजद (25)+ कांग्रेस (6) + लेफ्ट+ (4)= 120 यानी बहुमत के लिए 122 से 2 कम। बीजेपी ने अपना सीएम बनाने के लिए तीन महीने इंतजार क्यों किया? चुनावी नतीजे बीजेपी के फेवर में थे। वह तब भी अपना मुख्यमंत्री बना सकती थी, लेकिन उसने नीतीश को सीएम बनाया। आखिर क्यों…? बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं- बीजेपी, नीतीश या विपक्ष को विक्टिम कार्ड खेलने का मौका नहीं देना चाहती थी। क्योंकि चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ा गया था और बीजेपी अपना सीएम बनाती तो पिछड़े वर्ग के वोटर नाराज हो सकते थे। नीतीश के कोर वोटर्स यानी कोईरी-कुर्मी बीजेपी से हमेशा के लिए कट सकते थे। ऐसे में बीजेपी चाहती थी कि नीतीश खुद आगे आकर सत्ता सौंपे। राज्यसभा के चुनाव उसके लिए सबसे मुफीद रहा। बीजेपी के प्लान के मुताबिक नीतीश ने राज्यसभा के लिए नामांकन किया और खुद ही सत्ता छोड़ने का ऐलान कर दिया। ------------- बिहार से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…बिहार में बीजेपी का सीएम बनना ही था: 6 राज्यों में बीजेपी की राजनीति से समझिए, आखिर नीतीश को क्यों जाना पड़ा राज्यसभा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के ठीक 105 दिन बाद नीतीश कुमार ने राज्यसभा का पर्चा भर दिया। मतलब वे सीएम नहीं रहेंगे। अब बिहार में पहली बार बीजेपी का सीएम बन सकता है। पूरी खबर पढ़िए…
‘गफ धेरै भयो, अब काम चाहिन्छ,नेपालको मुहार फेर्ने, बालेन चाहिन्छ।पुरानोलाई बिदाइ, नयांलाई अवसर,सबैको एउटै नारा- 'अबकी बार, बालेन सरकार'। एक महीने पहले तक ये एक गाना था। अब नेपाल की हकीकत है। नेपाल में बालेन सरकार आनी तय है। 165 सीटों पर हुए चुनाव में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 6 मार्च की रात 10 बजे तक 115 सीटों पर आगे थी। नेपाल में सरकार बनाने के लिए 138 सीटों की जरूरत है। बालेन शाह राजनीति में आने से पहले रैपर रहे हैं। नेपाल चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी नेता के लिए पॉप कल्चर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। इसे ऊपर दिए गीत के हिंदी में मतलब से समझिए-‘बातें बहुत हो गईं, अब काम चाहिए, नेपाल की सूरत बदलने के लिए बालेन चाहिए।’‘पुरानों को विदाई और नए को अवसर, सबका एक ही नारा है- अबकी बार, बालेन सरकार।’ बालेन शाह छापा-5 सीट से आगे चल रहे हैं। उनकी पार्टी जीत रही है, लेकिन ये भारत के लिए बुरी खबर हो सकती है। छोटे से पॉलिटिकल करियर में बालेन शाह भारत के खिलाफ खुलकर बयानबाजी करते रहे हैं। नेपाल सरकार और कोर्ट को भारत का गुलाम बता चुके हैं। बालेन ने नवंबर 2025 में सोशल मीडिया पर भारत, चीन और अमेरिका के लिए गाली लिख दी थी। बालेन शाह के सत्ता में आने पर क्या नेपाल-भारत के रिश्ते बिगड़ेंगे, नेपाल के लोग भारत के साथ कैसे रिश्ते चाहते हैं? इस पर हमने काठमांडू में आम लोगों, Gen Z लीडर्स, बालेन की पार्टी के नेताओं और एक्सपर्ट से बात की। राजनीति में आते ही बालेन का भारत विरोध शुरूनेपाल में 5 मार्च को वोटिंग हुई थी। चुनाव के अभी सिर्फ रुझान आए हैं, पूरे नतीजे 20 मार्च तक आएंगे। शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी एकतरफा जीत रही है। मई, 2022 में बालेन शाह काठमांडू के मेयर बने थे। इसके बाद से ही भारत विरोधी रुख के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने अपनी छवि राष्ट्रवादी नेता के तौर पर बनाई है। 2022 में मेयर रहते हुए फिल्म ‘आदिपुरुष’ से नाराज होकर काठमांडू में भारतीय फिल्में बैन कर दी थीं। उनका आरोप था कि आदिपुरुष में सीता को भारत की बेटी बताया गया है, जो नेपाल का अपमान है। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद बैन हट गया। बालेन शाह का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर नेपाल सरकार और कोर्ट का भारत का गुलाम बता दिया। भारत के साथ चीन के भी विरोधी2023 में भारतीय संसद में अखंड भारत का नक्शा दिखाए जाने के जवाब में बालेन शाह ने अपने ऑफिस में ग्रेटर नेपाल का मैप लगा लिया। इसमें भारत की कई जगहों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। सबसे ज्यादा विवाद नवंबर 2025 में फेसबुक पर की उनकी पोस्ट के बाद हुआ। बालेन शाह ने भारत, चीन समेत कुछ और देशों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट किया। बाद में इसे डिलीट भी कर दिया। हालांकि, तब तक ये पोस्ट वायरल हो चुकी थी। लोग बोले- राजनीति के लिए भारत से दोस्ती न टूटेबालेन शाह का रुख भले ही भारत विरोधी रहा हो, लेकिन नेपाल के लोग भारत से अच्छे रिश्ते चाहते है। काठमांडू यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले 23 साल के समीर मानते हैं कि भारत, नेपाल और चीन को मिलकर रहना चाहिए। बालेन शाह के भारत और चीन विरोधी बयानों को समीर राजनीति बताते हैं। वे कहते हैं, ‘नेपाल के लोगों में भारत के खिलाफ कोई भावना नहीं है। हम भारत से प्यार करते हैं। हमारा रोटी-बेटी का रिश्ता है। कई बार नेता अपने फायदे और वोट के लिए अलग-अलग बातें करते हैं।’ ‘भारत भी बालेन शाह पर भरोसा दिखाए’55 साल के कृष्णा विश्वकर्मा नई सरकार से भारत के साथ दोस्ताना बर्ताव की उम्मीद जताते हैं। वे कहते हैं कि हमारे बीच भाईचारा होना चाहिए। चीन पड़ोसी देश है, इसलिए उसे भी साथ लेकर चलना चाहिए। कृष्णा मानते हैं कि भारत और नेपाल के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई रिश्ते बहुत गहरे हैं। वे कहते हैं कि अभी लोगों में बालेन शाह के नेतृत्व को लेकर उम्मीद और भरोसा दिख रहा है। 40 साल के मिलन मानते हैं कि नेपाल को भारत और चीन का छोड़कर अपने बारे में सोचना चाहिए। बालेन शाह को भारत विरोधी बयानों पर मिलन कहते हैं, ‘भारत और नेपाल के रिश्तों के खिलाफ बोलना सही नहीं है। कुछ नेता या लोग अपने-अपने तरीके से बातें करते हैं, लेकिन आम लोगों की सोच ऐसी नहीं है। हमें आपसी रिश्तों को खराब करने की बजाय बेहतर बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।’ Gen Z लीडर बोले- बांटने वाली राजनीति से बचें बालेननेपाल में सितंबर में Gen Z प्रोटेस्ट हुआ था। इसके बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। उस वक्त भी बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की खबरें थी। वे युवाओं में पॉपुलर भी हैं। हमने Gen Z प्रोटेस्ट को लीड करने वाले नेताओं से भी बात की। 25 साल की तनुजा पांडे प्रोटेस्ट के बड़े चेहरों में से एक हैं। वे बालेन शाह की राजनीति को पॉपुलिस्ट और बांटने वाली मानती हैं। तनुजा कहती हैं कि बालेन युवा नेता हैं और लोगों को उनसे उम्मीदें हैं, लेकिन काठमांडू का मेयर रहते हुए उन्होंने काम नहीं किए। उनके ‘हम बनाम वे’ की राजनीति और उकसाने वाले बयान सुनकर फिक्र होती है। हम प्रोटेस्ट के समय इसी तरह की राजनीति से छुटकारा चाहते थे। तनुजा आगे कहती हैं कि नेपाल अपनी लोकेशन की वजह से अहम देश है। इसमें भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों की दिलचस्पी स्वाभाविक है। हमारी लीडरशिप पर निर्भर करता है कि वह इसे मौके में कैसे बदले। Gen Z प्रोटेस्ट के लीडर टंका धामी भी बालेन शाह से नाराज हैं। वे कहते हैं- हमें बालेन शाह के एजेंडे और डेवलपमेंट के रोडमैप पर शक है। हमें साफ दिखना चाहिए कि वे देश को आगे कैसे ले जाना चाहते हैं। टंका कहते हैं, ‘हम चाहते हैं कि भारत नेपाल की तरक्की में मदद करे। कुछ लोग एंटी-इंडिया प्रचार करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम भारत के लिए गलत भावना नहीं रखते। हम दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते चाहते हैं।’ एक्सपर्ट बोले- राजनीति से अलग भारत से अच्छे रिश्ते मजबूरीबालेन शाह ने दिसंबर 2025 में ही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी जॉइन की थी। ये पार्टी नेपाल के मशहूर होस्ट रहे रवि लामिछाने ने बनाई थी। रवि चितवन-2 सीट से आगे चल रहे हैं। बालेन और रवि दोनों ही फायरब्रांड और भारत विरोधी नेता माने जाते हैं। दोनों की राजनीति समझने के लिए हमने नेपाल के पत्रकारों से बात की। नेपाल की हिंदी साप्ताहिक पत्रिका हिमालिनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सच्चिदानंद मिश्र मानते हैं, ‘आने वाली सरकार को भारत से अच्छे संबंध रखने ही होंगे। वे कहते हैं, ‘बालेन शाह और रवि दोनों भारत विरोध के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस चुनाव में दोनों पूरी तरह शांत रहे। वे जानते हैं कि तराई का वोट भारत से जुड़े रिश्तों से प्रभावित होता है।’ ‘चीन भी इस बार खुलकर दखल करता नहीं दिख रहा। वह चुपचाप सब देख रहा है। उसकी चिंता दलाई लामा समर्थकों को लेकर ज्यादा है। खुलकर कोई भी पार्टी दलाई लामा के समर्थन में सामने नहीं आएगी, लेकिन हर पार्टी में कुछ न कुछ समर्थक मौजूद हैं।’ सीनियर पत्रकार कृष्णा डुंगाना भी मानते हैं नई सरकार को भारत और चीन दोनों से संबंध बनाए रखने होंगे। यही नेपाल की विदेश नीति रही है। वे कहते हैं, ‘उम्मीद है कि भारत सहित सभी देश चुनाव परिणाम को मानेंगे।’ सीनियर जर्नलिस्ट युबराज घिमिरे बताते हैं कि 2006 के बाद से भारत की छवि नेपाल में कमजोर हुई है। 2015 की अघोषित नाकाबंदी अब भी लोगों को याद है। दूसरी ओर, चीन ने निवेश के साथ अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। नेपाल में लोग बाहरी दखल से सावधान हैं। युबराज बालेन की सरकार बनने की स्थिति में Gen Z आंदोलन के वादे पूरे करने को चुनौती मानते हैं। बालेन की पार्टी बोली- भारत से अच्छे रिश्ते बनाए रखेंगेहमने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सीनियर लीडर कुमार आनंद मिश्र से बात की। वे पार्टी को बहुमत मिलने की उम्मीद जताते हैं। साथ ही दावा करते हैं कि अगर अपने घोषणा-पत्र के वादे पूरे नहीं किए, तो अगली बार वोट मांगने नहीं आएंगे। भारत और नेपाल के रिश्तों पर कुमार आनंद कहते हैं कि हमारी नीति संतुलित और व्यवहारिक रहेगी। आप अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते। नेपाल खुशनसीब है कि उसके दोनों ओर बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। बालेन शाह के भारत विरोधी बयानों पर कुमार आनंद कहते हैं कि वे राष्ट्रीय नेता हैं। चुनाव अभियान में उनका फोकस विकास और सुशासन पर है। पार्टी की नीतियां सामूहिक निर्णय से चलती हैं। किसी भी देश के साथ रिश्ते बिगाड़ने का कोई इरादा नहीं है। हमारा मानना है कि नेपाल अपने दोनों पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखेगा। नेपाल से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें...1. सेक्स वर्क के लिए बदनाम थामेल की नाइट लाइफ ठप नेपाल की राजधानी काठमांडू का थामेल एरिया विदेशी टूरिस्ट्स की पहली पसंद है। सबसे मशहूर बार-पब यहीं हैं। नेपाल में 5 मार्च को चुनाव हैं। थामेल में भी इसका असर साफ दिखता है। यहां स्पा सेंटर के नाम पर जिस्मफरोशी का धंधा चलता है। चुनाव में सख्ती और पुलिस की गश्ती की वजह से बीते 10-12 दिन से सब बंद है। पुलिस की सख्ती की वजह से एजेंट भी रिस्क नहीं लेना चाहते। पढ़ें पूरी खबर… 2. चुनाव में कहां गायब हैं सरकार गिराने वाले Gen Z लीडर नेपाल में हुए Gen Z प्रोटेस्ट के बड़े चेहरों में से एक टंका धामी आने वाले चुनाव को लेकर उत्साहित हैं। वे मानते हैं कि प्रोटेस्ट ने चुनाव में पॉलिटिकल पार्टियों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। हालांकि एक और Gen Z लीडर तनुजा पांडे की राय इससे अलग है। वे कहती हैं, ‘सियासी दलों ने हमारे आंदोलन का जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया और फिर नजरअंदाज कर दिया।‘ पढ़ें पूरी खबर...
जेफरी एपस्टीन केस में नए एफबीआई दस्तावेज जारी, महिला ने ट्रंप पर लगाए गंभीर आरोप
न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों के अनुसार, एफबीआई एजेंटों ने 2019 में इस अज्ञात महिला से चार बार पूछताछ की थी। ये साक्षात्कार जेफरी एपस्टीन के खिलाफ चल रही जांच के दौरान लिए गए थे।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संकेत दिया कि कुछ देश युद्ध समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। इसे संघर्ष खत्म करने के लिए संभावित कूटनीतिक पहल का शुरुआती संकेत माना जा रहा है।
जर्मनी में सैन्यीकरण की बहस के बीच बर्लिन की एक फैक्टरी सुर्खियों में
बर्लिन की एक फैक्ट्री के बाहर आंदोलनकारी प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि ऑटो पार्ट्स बनाने वाली यह फैक्ट्री अब हथियार बनाएगी. लेकिन मजदूर और यूनियन बंटे हुए हैं. वे शांति चाहते हैं. अलबत्ता हथियार नौकरी की गारंटी देते हैं
नेपाल चुनाव 2026: शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी सबसे आगे, बड़े नेताओं को कड़ी चुनौती
मतगणना के शुरुआती दौर में नेपाल की राजनीति के कई दिग्गज नेताओं को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रुझानों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने निर्वाचन क्षेत्र में हजार से ज्यादा वोटों से पीछे चल रहे हैं।
व्हाइट हाउस में ट्रंप ने फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी और इंटर मियामी टीम को किया सम्मानित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित समारोह में 2025 मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) चैंपियन इंटर मियामी टीम की मेजबानी की
इजरायल की चेतावनी, 'विदेशों में रहने वाले यहूदियों पर हमले का खतरा बढ़ा', सतर्क रहने की सलाह
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की घोषणा की है
ईरान के खिलाफ बढ़ेंगे अमेरिका-इजरायल के हमले, पेंटागन ने दिया संकेत
अमेरिका ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ उसका सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' आने वाले समय में आगे बढ़ सकता है। अमेरिकी और इजरायली सेना तेहरान की सेना और मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने के मकसद से हमले तेज करने की तैयारी कर रही है।
ईरान-चीन के दुष्प्रचार का मुकाबला करने को कूटनीति व संदेशों का इस्तेमाल कर रहा अमेरिका
अमेरिका के विदेश उप सचिव सारा रोजर्स ने एक संसदीय सुनवाई के दौरान सांसदों को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान और चीन जैसे देशों के दुष्प्रचार और प्रभाव अभियानों का मुकाबला करने के लिए अपने सार्वजनिक कूटनीति प्रयासों को मजबूत कर रहा है
ट्रंप ने दिए क्यूबा को लेकर अमेरिका की नीति में बदलाव के संकेत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर अमेरिका की नीति में संभावित बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कुछ प्रगति हो रही है और विदेश नीति से जुड़े मौजूदा मुद्दों से निपटने के बाद क्यूबा को लेकर नई पहल की जा सकती है।
ट्रंप का दावा, ईरान समझौता करने के लिए कर रहा है कॉल
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारी सैन्य नुकसान झेलने के बाद ईरान अब बातचीत करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इजरायल की सेनाएं तेहरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को निशाना बनाकर लगातार हमले कर रही हैं।

