ट्रंप को यूरोपीय देशों का करारा जवाब, कहा- धमकियों से डरनेवाले नहीं, ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं

यूरोपीय संसद की अध्यक्ष राबर्टा मेत्सोला ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड न तो बिक्री के लिए है और न ही उस पर किसी बाहरी दबाव से फैसला बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना अंतरराष्ट्रीय कानून और यूरोपीय मूल्यों का अनिवार्य हिस्सा है।

देशबन्धु 19 Jan 2026 2:23 am

ट्रंप ने बाइडेन प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप, ऑटोपेन से साइन आदेशों को बताया गैरकानूनी

Donlad Trump: 28 नवंबर को ट्रंप ने कहा था कि बाइडेन के कार्यकाल में ऑटोपेन से साइन किए गए सभी दस्तावेज अब खत्म माने जाएंगे और वे लागू नहीं होंगे. उनकी तरफ से यह भी दावा किया गया था कि करीब 92 प्रतिशत दस्तावेज ऐसे हैं जो ऑटोपेन से साइन किए गए थे और बाइडेन ने उन्हें मंजूरी नहीं दी थी.

ज़ी न्यूज़ 19 Jan 2026 1:59 am

टैरिफ और ट्रेड डील की टेंशन के बीच ट्रंप को पड़ गई पीएम मोदी की जरूरत, वजह है गंभीर; भेजा न्योता

Trump Invites India: भले ही भारत और अमेरिका के बीच सालभर से खुला ट्रेड वॉर चल रहा है, इसके बावजूद ट्रंप, पीएम मोदी को अपना सच्चा दोस्त बताते आए हैं, टैरिफ पर टैरिफ की धमकियों के बीच व्हाइट हाउस ने पीएम मोदी को न्योता भेजा है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 11:35 pm

Greenland Row: ट्रंप के नए टैरिफ बम का विरोध शुरू, फ्रांस जर्मनी ने खूब सुनाया; EU से की गई ये अपील

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड को खरीदने जा रहे हैं. हालांकि डेनमार्क की ओर से साफ और स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है. इस बीच जर्मन इंडस्ट्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की डिमांड को बेतुका बताया है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 9:01 pm

Karachi Mall Fire: कराची के गुल प्लाजा मॉल में लगी भीषण आग, 6 लोगों की मौत

Karachi Gul Plaza mall: राहत कार्य के लिए फायर ब्रिगेड की दर्जनों गाड़ी मौके पर मौजूद हैं और सीढ़ियों के जरिए पानी की लाइन को ऊपर ले जाया जा रहा है. गुल प्लाजा मॉल में अधिकतर कपड़े और प्लास्टिक के सामान की दुकाने हैं जिसकी वजह से आग तेजी से फैल गई.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 7:49 pm

'Gaza Peace Board में शामिल होना है तो 1 बिलियन डॉलर दो', ट्रंप प्रशासन का नया खेल; 60 देशों को भेजा मसौदा

US Gaza Peace Board Plan: अमेरिका गाजा में शांति के नाम पर गाजा पीस बोर्ड बनाने जा रहा है. इस बोर्ड में शामिल होने की चाह रखने वाले देशों के लिए उन्होंने 1 बिलियन डॉलर यानी 8 हजार करोड़ रुपये की मेंबरशिप फीस तय की है. उसने इस प्रस्ताव का मसौदा दुनिया के कई देशों को भेजा है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 7:46 pm

Iran Protest: ईरान के हिंसक विरोध प्रदर्शन में 5000 लोगों की मौत, अधिकारी के दावे ने फैलाई सनसनी; सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों ने भी गवाईं जान

ईरान में हुए हिंसक प्रदर्शन में कम से कम 5000 लोगों की मौत हुई है. मृतकों में 500 से अधिक सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर पर ईरान में अशांति फैलाने का आरोप लगाया है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 6:52 pm

बुर्ज खलीफा भूल जाइए, इस शहर में बनने जा रही दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग; नीचे इंसान देखने के लिए दूरबीन की पड़ेगी जरूरत!

New Tallest Building in World: दुनिया में सबसे ऊंची बिल्डिंग का खिताब अभी तक बुर्ज खलीफा के नाम है.लेकिन अब आप इसे भूल जाइए. दुनिया में इससे भी ज्यादा ऊंची बिल्डिंग बनने जा रही है. जिसमें ऊपर से इंसान देखने के लिए आपको दूरबीन की जरूरत पड़ेगी.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 6:25 pm

'ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे से NATO को लगेगा झटका, पुतिन होंगे सबसे खुश', ट्रंप पर भड़के स्पेनिश पीएम सांचेज

EU's reaction to Trump's Greenland plan: ग्रीनलैंड पर कब्जे की ट्रंप के सनक के खिलाफ यूरोप के सारे देश एकजुट हो रहे हैं. अब स्पेनिश पीएम सांचेज ने कहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे से NATO को लगेगा झटका. अगर ऐसा हुआ तो पुतिन दुनिया के सबसे खुश इंसान होंगे.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 5:16 pm

बेटे की शादी में दिखा मरियम नवाज का ग्लैमरस लुक, सोशल मीडिया यूजर्स बोले- दुल्हन को भी पीछे छोड़ा

Maryam Nawaz: एक यूजर ने लिखा कि मरियम नवाज का दुल्हन की तरह सजने का जुनून कभी खत्म नहीं होगा.वहीं एक यूजर ने लिखा की मरियम नवाज दुल्हन से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हैं. इसके बाद एक यूजर लिखते हैं कि मरियम ने अपनी पहली बहू के साथ भी ऐसा ही किया था और वो फिर से ऐसा कर रही हैं.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 5:03 pm

'ड्रैगन' से बड़े 'भू-माफिया' बन रहे ट्रंप? गाजा की आड़ में यूक्रेन तक करने जा रहे हैं जियोपॉलिटिकल खेला

U.S. foreign policy:डोनाल्ड ट्रंप, नॉन गाइडेड मिसाइल की तरह बरताव कर रहे हैं. उनके धुर विरोधी डेमोक्रेट्स आलोचकों का कहना है कि ट्रंप, खुद कंफ्यूज्ड हैं इसलिए ऊटपटांग फैसले ले रहे हैं. अमेरिका की पॉलिटिक्स के इतर कुछ एक्सपर्ट्स ट्रंप के ऊपर अमेरिका की छवि खराब करने का आरोप लगा रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 4:50 pm

'भारत में AI पर क्यों खर्च किए जाएं अमेरिकी डॉलर?', ट्रेड टॉक के बीच ट्रंप के करीबी ने उगला जहर; जानिए पूरा मामला

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार एडवाइजर पीटर नवारों ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है. नवारों ने कहा कि भारत में एआई को बढ़ाने के लिए अमेरिकी पैसे का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है. इससे पहले भी उन्होंने भारत को लेकर कई बार विवादित बयान दिया है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 4:29 pm

VIDEO: OMG! 'सफेद मौत' का झपट्टा, 10 फीट तक गहरी बर्फ में दब गया ये शहर, रास्ते बंद, इंसान अपने घरों में बना 'कैदी'

Heavy Snowfall News in Hindi: दिल्ली एनसीआर के लोग इन दिनों हाड़ कंपाने वाली ठंड से जूझ रहे हैं. लेकिन एक शहर में तो अति ही हो गई है. वहां पर पूरा शहर करीब 8-10 फुट गहरी बर्फ में समा गया है. इसके चलते रास्ते बंद हो गए हैं और इंसान अपने घरों में कैदी बन गए हैं.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 4:13 pm

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में डेंगू-मलेरिया से 103 की मौत, शहबाज सरकार के झूठ पर मीडिया ने खोल दी पोल

Pakistan News: सिंध इनफेक्शियस डिजीज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अस्पताल में मच्छरों से जुड़ी बीमारियों के 941 मामले सामने आए थे, इनमें 651 डेंगू और 290 मलेरिया के थे. यहां पर डेंगू के कारण 14 मौतें हुईं, जबकि मलेरिया से किसी मौत के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 3:44 pm

किसी भी बैग और पैकेट पर नहीं लिखा जाएगा 'अल्लाह' का नाम, इस देश ने लगा दी पाबंदी

Saudi Arabia News: सऊदी अरब के कॉमर्स मिनिस्ट्री ने एक नया और कड़ा निर्देश जारी किया है. सऊदी अरब ने ऑफिशियली बैग, पैकेजिंग और दूसरी चीजों पर अल्लाह का नाम लिखने पर बैन लगा दिया है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 1:29 pm

रात में 'लाल' हुआ यह देश! लोगों को डराने के लिए नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए लिया गया यह बड़ा फैसला

Denmark Red Streetlights: जब रात के समय सड़कें अचानक लाल रोशनी में डूबी हुई दिखाई दें तो किसी भी इंसान को पल भर के लिए डर या फिर अजीब जरूर लगेगा. लेकिन डेनमार्क में यह बदलाव किसी खतरे का संकेत नहीं बल्कि किसी के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है. कोपेनहेगन के पास एक इलाके में स्ट्रीटलाइट्स का रंग बदला गया है जहां टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर इंसानों के साथ जानवरों का भी ख्याल रखा जा रहा है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 1:04 pm

'ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं...' ट्रंप की धमकी का EU अध्यक्ष ने दिया कड़ा जवाब; कह दी ये बात

Greenland Dispute:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने की धमकी और 10% टैरिफ लगाने के बाद यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेट्सोला ने विरोध जताया. मेट्सोला ने कहा कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है और उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 1:01 pm

अमेरिका का बदला, सीरिया में एयर स्ट्राइक करके अलकायदा कमांडर बिलाल हसन अल-जसीम को किया ढेर; ISIS से जुड़े थे तार

US Air Strike: अमेरिका ने सीरिया में हवाई हमला कर अल-कायदा से जुड़े एक आतंकी बिलाल हसन अल-जसीम को मार गिराया. यह जवाबी कार्रवाई 13 दिसंबर के पल्मायरा हमले के बाद हुई जिसमें दो अमेरिकी सैनिक और एक सिविलियन मारे गए थे.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 11:33 am

'हां, हजारों लोगों की मौत हुई लेकिन कारण हम नहीं US है', खामेनेई बोले- सुरक्षा बल अपना काम कर रहे थे

Khamenei on protests: ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने हाल के विरोध प्रदर्शनों में हजारों मौतों की बात स्वीकार की है, लेकिन जिम्मेदारी अमेरिका और विदेशी ताकतों पर डाली है. ट्रंप ने इसे खतरनाक नेतृत्व बताया और नए नेतृत्व की मांग की है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 11:07 am

ग्रीनलैंड पर अमेरिकी टैरिफ धमकियां अस्वीकार्य, यूरोप देगा एकजुट होकर जवाब: इमैनुएल मैक्रों

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की तरफ से टैरिफ की धमकियों पर कड़ी आपत्ति जताई है

देशबन्धु 18 Jan 2026 10:37 am

'ईरान में अब नई लीडरशिप का समय', डोनाल्ड ट्रंप ने की खामेनेई शासन को खत्म करने की मांग

ईरान में गहराते संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है

देशबन्धु 18 Jan 2026 10:01 am

ग्रीनलैंड पर तनातनी! अमेरिका को घुटनों पर ला सकता है EU, क्या है वो ब्रह्मास्त्र जिससे हिल जाएगी US की इकोनॉमी

Anti-Coercion Instrument: यूरोपीय संसद के अध्यक्ष बर्न्ड लांगे ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड विवाद में धमकियों के जवाब में यूरोपीय आयोग से एंटी-कोएरशन इंस्ट्रूमेंट (ACI) लागू करने का आग्रह किया. आइए जानते है कि एंटी-कोएरशन इंस्ट्रूमेंट क्या है जिसके दम EU ट्रंप से भिड़ने की तैयारी में है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 9:38 am

जापान-फिलीपींस की टैक्स फ्री गोला-बारूद डील क्या है? भारत के लिए राहत और चीन की कैसे बढ़ेगी बेचैनी

Japan Philippines deal: जापान और फिलिपींस के बीच नया रक्षा समझौता चीन के लिए चुनौती बन गया है. भारत के लिए ये फायदेमंद हैं, क्योंकि चीन की नौसेना का ध्यान अब भारत से हटकर जापान, फिलिपींस और ताइवान पर केंद्रित हो जाएगा.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 8:29 am

ट्रंप को EU की चेतावनी और मैक्रों ने भी कहा झुकेंगे नहीं, टैरिफ से हालात बिगड़े तो यूरोप देगा साझा जवाब

Donald Trump: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति पूरी तरह से अड़ गए हैं. अब उन्होंने बात न मानने के केस में EU को धमकी दी है. साथ ही कहा है कि अगर इसमें शामिल देश उनकी बात नहीं मानते हैं तो उनपर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जिसपर फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने ये बात कही है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 8:06 am

जिस कीमत पर ट्रंप ग्रीनलैंड खरीदने निकले, उसी रकम में 4000 दिन जिंदा रह सकता है पाकिस्तान; देखिए आंकड़े

Greenland price 700 billion doller: अमेरिका की ग्रीनलैंड पर बढ़ती दिलचस्पी से वहां के लोग और सरकार चिंतित हैं, लेकिन ग्रीनलैंड ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना चाहता है. आज हम जानेंगे की अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदता है तो कितनी कीमत चुकानी होगी.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 7:26 am

55 साल का सफर, 31 साल महिला नेतृत्व; फिर भी बांग्लादेश में क्यों घटती जा रही महिलाओं की भागीदारी?

Bangladesh Election:बांग्लादेश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगातार घट रही है, जबकि देश में दो महिला प्रधानमंत्री रह चुकी हैं. आगामी आम चुनाव में अधिकांश राजनीतिक दलों ने महिला उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. जानकारी के अनुसार,30 पार्टियों ने महिलाओं को टिकट नहीं दिया है. देश की बड़ी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के 276 उम्मीदवारों में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 7:20 am

37 साल के शासन का होगा अंत! ईरान पर बोले ट्रंप- बस अब बहुत हो गया; डर नहीं, सम्मान से चलता है देश

New leadership in Iran: ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अयातुल्ला खामेनेई के शासन को खत्म करने की मांग करते हुए नए नेतृत्व की बात कही है. वहीं खामेनेई ने विरोध को विदेशी साजिश बताया है, जबकि निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी ने जनता से बदलाव के लिए सड़कों पर उतरने की अपील की है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 6:33 am

संडे जज्बात-17 का हूं, टीबी ने मेरा पूरा परिवार छीना:आखिरी सहारा भाई भी मरा, सगे-संबंधी डरकर दूर हुए- एक अजनबी ने गोद लेकर जिंदगी दी

मेरा नाम दीपक रावत है। 17 साल का हूं। मैं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के खनौली गांव का रहने वाला हूं। मैंने कुछ दिन पहले ही अपने बड़े भाई की चिता को आग दी। उस आग में सिर्फ उसका शरीर नहीं जला- मेरा आखिरी सहारा भी राख हो गया। मैं वहां खड़े-खड़े न रो पा रहा था, न चीख पा रहा था। मेरे अंदर जैसे कुछ बचा ही नहीं था। इससे पहले मैंने अपनी मां को खोया था। उससे पहले पिता को। फिर चाचा और अब भाई को। एक-एक करके टीबी ने मेरे पूरे परिवार को निगल लिया। मेरे सगे-संबंधी मुझे छूने से डरने लगे। उन्हें डर था के उन्हें भी टीबी हो जाएगी। इस धरती पर अब मेरा कोई सगा नहीं बचा है। हालांकि, भगवान ने एक-एक करके सब कुछ छीन लिया, लेकिन अंत में एक रिश्ता दे दिया…एक अजनबी विभोर जोशी के रूप में, जिन्हें अब मामा कहता हूं। उन्होंने मुझे गोद लिया है। उनके साथ कभी लगता ही नहीं के वो गैर हैं। दरअसल, हम एक छोटे से पत्थर के बने घर में रहते थे- मैं, मेरे पापा, मां, बड़ा भाई और चाचा। पापा खेती करते थे। उसी खेती से हमारे परिवार की जिंदगी चलती थी। लेकिन उस जिंदगी में सुकून कम, खौफ ज्यादा था। मुझे पापा की शक्ल याद नहीं है। जब उनकी मौत हुई, तब मैं बहुत छोटा था। मेरी मां बताती थीं कि पापा खेत से शराब पीकर घर आते थे। नशे में वह उनको अक्सर पीटते थे। मां एतराज करतीं, तो वह उन्हें पीटकर घर से बाहर निकाल देते। फिर वह रात दूसरे के घर गुजारती थीं। मेरे पास अपने पापा की बस इतनी ही याद है। इसके बाद टीबी ने हमारे घर में दस्तक दी। एक-एक करके सबको निगलती गई। पहले पापा को, फिर मां को, उसके बाद चाचा और आखिर में मेरे बड़े भाई को। मां बताती थीं कि पापा को टीबी हो गई थी। शुरू में सिर्फ खांसी थी। फिर खांसी के साथ खून आने लगा। गांव में कोई अस्पताल नहीं था, कोई डॉक्टर नहीं था। एक दिन अचानक पापा की हालत बहुत बिगड़ गई। खून की उल्टियां होने लगीं। मां घबरा गईं। अस्पताल लेकर भागीं, लेकिन अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बहुत देर हो चुकी थी। वहीं पापा की मौत हो गई। आज से करीब 15 साल पहले। उस वक्त मैं मुश्किल से दो साल का था। मुझे अपने पापा की शक्ल तक याद नहीं। मेरे लिए अब मां ही पूरी दुनिया थीं। पापा के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी चाचा ने संभाली। खेती-बाड़ी वही देखने लगे। मां पहले की तरह घर चलाती रहीं। लेकिन उस घर में टीबी की बीमारी फिर से लौटने वाली थी। 2017 की बात है। मां को खांसी रहने लगी। शुरू में किसी ने ध्यान नहीं दिया। पहाड़ में खांसी आम बात है, लेकिन तीन-चार महीने बीत गए और खांसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी। मां दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही थीं। एक दिन वह हम दोनों भाइयों को बिना बताए अकेले ही शहर के डॉक्टर को दिखाने चली गईं। वहां डॉक्टर ने बताया- टीबी है। मां घर लौटीं, लेकिन उन्होंने हमसे कुछ नहीं बताया। वह बीमारी छिपाकर जीती रहीं। हमारे लिए खाना बनातीं, कपड़े धोती, घर संभालतीं। अस्पताल मीलों दूर था। दवाइयां कभी समय पर मिलतीं, कभी नहीं। मां कभी दवा खाती, कभी छोड़ देतीं। फिर एक दिन सब बिखर गया। मां की हालत अचानक बहुत खराब हो गई। हम उन्हें अस्पताल लेकर भागे। डॉक्टरों ने भर्ती कर लिया। उधर, मां का इलाज चलता रहा और हम कड़ाके की सर्दी में दोनों भाई अस्पताल की कैंटीन के बाहर भूखे बैठे रहते। एक दिन एक विभोर जोशी नाम के अजनबी हमसे मिलने आए। अब उन्हें मामा कहते हैं। दरअसल, कैंटीन का मालिक उनका दोस्त था। उसने ही मामा को बताया कि यहां यह दो बच्चे आए हैं और इनकी मां बीमार है। इन बच्चों के पास पैसे नहीं हैं। ये बिना खाए-पिए कैंटीन के बाहर पड़े रहते हैं। उस दिन मामा पहली बार मेरी मां से मिले। मां बिस्तर पर पड़ी थीं। चेहरा पीला पड़ चुका था। सांस भारी थी। मामा ने देखा और उनका मन पसीज गया। बाहर निकलकर उन्होंने कैंटीन वाले से कहा- इन दोनों बच्चों को रोज खाना देना और मां के लिए रोज दो उबले अंडे। पैसे की चिंता मत करना। उसी दिन से हमारी भूख का इंतजाम हो गया। महीनों बीत चुके थे। हमारा स्कूल छूट गया था। अस्पताल ही हमारा घर बन गया था। एक दिन मां ने मुझसे चाय लाने को कहा। मैं भागकर चाय लेकर आया। चाय का घूंट लेते ही उनको खून की उल्टियां होने लगीं। वह बिस्तर पर तड़पने लगीं। उन्होंने हमें पास बुलाया। आवाज बहुत धीमी थी। कहा- विभोर मामा को बुला लो। मामा आए। मां ने उनकी तरफ देखा और कहा- मेरा एक भाई है, लेकिन वह अब मुझसे मतलब नहीं रखता। आज से आप ही मेरे भाई हैं। अगर मुझे कुछ हो जाए, तो मेरे बच्चों को अकेला मत छोड़ना। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं डॉक्टर को बुलाने भागा। डॉक्टर ने कहा- आ रहा हूं, लेकिन वह देर से आए। बहुत देर से। जब डॉक्टर कमरे में पहुंचे, तो हमें बाहर कर दिया गया। डॉक्टर ने कुछ दवाएं और इंजेक्शन दिया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसके तीसरे दिन ही मां की मौत हो गई। हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि अब क्या करें। अस्पताल में मां का शरीर पड़ा था और बाहर हम दो बच्चे खड़े थे- बिल्कुल खाली हाथ। उसी वक्त जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से आए गुरुद्वारे के कुछ लोग सामने आए। उन्होंने बिना कुछ पूछे मां के अंतिम संस्कार का पूरा खर्च उठाया। मामा ने उस दिन मेरे बड़े भाई के हाथों मां को मुखाग्नि दिलवाई। मां की चिता जल रही थी। आग की लपटें उठ रही थीं। तब मैं सिर्फ 9 साल का था। उसी चिता के पास मैं कंचे खेल रहा था। मुझे यह तक नहीं पता था कि मेरी मां अब कभी वापस नहीं आएगी। मुझे भूख लगी थी। मैंने मामा का हाथ खींचा और कहा- मुझे खाना चाहिए। मामा मुझे खाना खिलाने ले गए। अंतिम संस्कार के बाद मामा हमें अपने घर ले गए। उस दिन मामा के घर रातभर नींद नहीं आई। रात में बार-बार बिस्तर से उठकर बैठ जाता और मां को याद करके रोने लगता। मामा ने अपने ही घर मां की तेरहवीं की। लोगों को खाना खिलाया गया- पूरे रीति-रिवाज के साथ। मामा के घर में पहली बार मुझे अपनापन महसूस हुआ। मामा की पत्नी यानी मामी बैंक में नौकरी करती हैं, लेकिन घर में वह मां जैसी थीं। वह भी हमारा ख्याल करती हैं। नानी गरम-गरम खाना खिलाती और कहती थीं- अब से मैं तुम्हारी नानी हूं, डरने की कोई बात नहीं। धीरे-धीरे मुझे समझ आया- भगवान ने मुझसे एक घर छीन लिया था, लेकिन एक दूसरा घर दे दिया था। मामा के घर मैं कुछ दिन रहा। वह घर, जहां किसी ने पहली बार हमें बोझ नहीं, इंसान समझा। कुछ दिन बाद मामा हम दोनों भाइयों को लेकर मेरे गांव पहुंचे। शायद यह देखने कि अब हम वहां रह सकते हैं या नहीं, लेकिन गांव ने जवाब देने में देर नहीं की। उसी दिन पता चला कि मेरे चाचा को भी टीबी है। यह खबर फैलते ही गांव वालों का व्यवहार बदल गया। गांव के कुछ लोग मामा के लिए चाय बनाकर लाए, लेकिन हमें चाय नहीं दी गई। हम दोनों एक कोने में खड़े रहे। लोगों को डर था- ‘अगर हम उनके बर्तन में चाय पिएंगे, तो उन्हें भी टीबी हो जाएगी।’ उस वक्त मामा ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने बस हमें देखा। और शायद उसी पल तय कर लिया कि यह गांव अब इन बच्चों का नहीं है। मामा उसी दिन वापस हमें अपने घर ले आए। उन्हें हमारी सिर्फ भूख या बीमारी की नहीं, हमारी पढ़ाई की भी चिंता थी। कुछ दिन हमें अपने पास रखा, हमें संभाला, फिर उन्होंने एक फैसला लिया- ताकि हम रोजमर्रा की जिंदगी में लौट सकें, मामा ने हम दोनों को एक हॉस्टल में रख स्कूल में दाखिला करवा दिया। ऐसी जगह, जहां हमारे साथ काफी बच्चे थे। हम हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने लगे। जिंदगी जैसे एक नई पटरी पर दौड़ने लगी थी। इन सबके बीच विभोर मामा कभी हमें भूलते नहीं। फोन करके हाल-चाल पूछते हैं, मिलने आ जाते हैं। फिर एक दिन हॉस्टल में मेरे गांव से खबर आई। बताया गया कि मेरे चाचा की भी टीबी से मौत हो गई है। उस खबर ने मुझे अंदर से झकझोर दिया, लेकिन तब तक मैं यह भी नहीं जानता था कि टीबी की बीमारी क्या होती है। हॉस्टल में मुझे नहीं पता था कि मेरी जन्मतिथि क्या है। मामा को पता चला तो उन्होंने सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए, कागजात ढूंढे, रजिस्टर खंगाले। कई दिनों की भागदौड़ के बाद एक दिन मामा आए और मुस्कुराते हुए बताया- ‘आज से तुम्हारा भी जन्मदिन होगा।’ उस दिन पहली बार मुझे पता चला कि मेरी जिंदगी की भी एक तारीख है। पिता, मां और फिर चाचा के जाने के बाद हॉस्टल में अब मेरा सहारा मेरा भाई ही था। वह मेरे कपड़े धोता, मेरे लिए खाना बनाता और मेरी पढ़ाई का ख्याल रखता। मां मेरे लिए जो करती थीं, वह सब अब मेरा भाई कर रहा था- बिना थके, बिना शिकायत किए। वह मुझसे बहुत प्यार करता था, लेकिन सख्ती भी रखता था। मैं जब कोई गलत काम करता, तो वह मुझे टोकता। मुझे याद है, मैं अक्सर गुस्से में कॉपी के कागज फाड़ देता था। वह यह देखकर भड़क उठता। डांटते हुए कहता- ‘उसी कॉपी में तो तू लिखेगा-पढ़ेगा। अगर कॉपी ही नहीं रहेगी, तो पढ़ेगा कैसे?’ कभी-कभी वह मुझे मार भी देता था। तब मुझे लगता था कि वह मुझसे नाराज है। आज समझ आता है- वह मुझे बचा रहा था। मुझे दूसरों पर पत्थर फेंकने की आदत थी। इस पर भी वह मुझे डांटता, रोकता, कभी हाथ उठा देता। वह चाहता था कि मैं वही न बनूं, जो हालात मुझे बना रहे थे। मेरी बदनसीबी यह थी कि जिस बीमारी ने मेरे मां-पापा और चाचा को छीना, वही बीमारी मेरे भाई के शरीर में भी पल रही थी- और मुझे इसकी भनक तक नहीं थी। एक दिन हॉस्टल की ओर से हमें घुमाने के लिए ले जाया गया। मेरा भाई भी मेरे साथ था। हम दोनों ने साथ-साथ कचौड़ियां खाईं। रात में हॉस्टल लौटकर हमने दाल-चावल खाया और सोने की तैयारी कर रहे थे। तभी अचानक मेरा भाई बेचैन होने लगा। अगले ही पल उसे तेज उल्टियां होने लगीं। शोर सुनकर एक टीचर भागती हुई पहुंचीं। वह तुरंत उसे लेकर अस्पताल भागीं। जाते वक्त उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखते हुए कहा- ‘डरो मत, भाई ठीक होकर जल्दी आ जाएगा। तुम यहीं हॉस्टल में रहो।’ भाई अस्पताल में भर्ती था। उस रात हॉस्टल का कमरा मुझे पहले से कहीं ज्यादा सूना लग रहा था। मैं पहली बार भाई के बिना सोने जा रहा था। डर लग रहा था। टीचर ने मेरी हालत देखी और उस दिन मुझे अपने साथ सुला लिया। उस रात मैं सोया तो था, लेकिन पहली बार अपने भाई के बिना। अगली सुबह डॉक्टरों ने कहा- सब ठीक है। उस दिन भाई अस्पताल से लौट आया। मुझे लगा- सब टल गया। कुछ दिन बीते। एक रात हम खाना खाने जा रहे थे। थाली उठाने ही वाले थे कि भाई अचानक झुक गया। फिर उल्टियां होने लगीं। वही डर, वही घबराहट। इस बार उसे श्रीकोट के अस्पताल ले जाया गया। मुझे भरोसा था- पिछली बार की तरह वह फिर लौट आएगा, लेकिन अगली सुबह हॉस्टल के कमरे में एक अजीब सी हलचल थी। मेरे भाई के कपड़े उठाए जा रहे थे। अलमारी खाली की जा रही थी। मैंने घबराकर टीचर से पूछा- ‘ऐसा क्यों कर रहे हैं?’ उन्होंने मुझे सीने से लगा लिया। देर तक कुछ नहीं बोलीं। फिर कहा- ‘तुम्हारे भाई की मौत हो गई है।’ मैं सुन्न सा हो गया। मां के जाने के बाद वही मेरा सब कुछ था। अब वह भी चला गया था। उस पल मुझे लगा- अब इस दुनिया में मेरा कोई नहीं। मैं रोते हुए अस्पताल पहुंचा। मेरा भाई सामने एक सफेद चादर में बंधा हुआ था। वही भाई, जो मुझे जगाता था, मेरा होमवर्क देखता था, रात में मेरे साथ सोता था। अब वह कुछ नहीं बोल रहा था। उस पल मुझे समझ आ गया- अब मेरे आगे-पीछे कोई नहीं बचा। मामा के साथ भाई का अंतिम संस्कार कर मैं वापस हॉस्टल लौट आया, लेकिन उस रात नींद मुझसे बहुत दूर थी। सच तो यह है कि कई रातों से मैं सोया ही नहीं था। मुझे मां की एक बात बार-बार याद आ रही थी। मरने से एक दिन पहले मां ने भाई के हाथ में मेरा हाथ दिया था और कहा था- छोटे का ख्याल रखना। उसे कभी अकेला मत छोड़ना। भाई उस वादे को निभा रहा था, लेकिन अब वह भी चला गया था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं अपने भाई की चिता को आग दूंगा। जब मामा को पता चला कि मैं हॉस्टल में रात भर जागता रहता हूं, तो वे एक दिन चुपचाप आए। मेरा हाथ पकड़ा और कहा- अब तुम अकेले नहीं रहोगे। और मुझे अपने घर लेकर चले आए। उस दिन के बाद से मामा ने मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ा। वे मुझे हर जगह अपने साथ रखते हैं। अपने साथ बैठाकर खाना खिलाते हैं। मेरे सोने से लेकर जागने तक की हर चिंता करते हैं। वे मुझे जीना सिखा रहे हैं। उनसे मेरा कोई खून का रिश्ता नहीं है। फिर भी अब वही मेरी मां, मेरे पिता और मेरे भाई हैं। भगवान ने मुझसे बहुत कुछ छीन लिया, लेकिन एक रिश्ता ऐसा दिया, जिसने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं अकेला हूं। (दीपक रावत ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर नीरज झा से साझा किए हैं) --------------------------------------------------- 1- संडे जज्बात- किन्नर हूं, लड़के ने मेरी मांग भर दी:पिता ने बाजार में पीटा, बाल काट डाले, लेकिन लड़का पीछे नहीं हटा- मुझे दुल्हन बनाया मेरा नाम सोनी है। पश्चिम बंगाल के बनगांव की रहने वाली हूं। मैंने खुद को हमेशा एक लड़की ही माना, लेकिन लोगों ने मुझे पहचान दी- किन्नर, हिजड़ा जैसे शब्दों से। लोग कहते थे, ‘न मां बन पाएगी, न किसी की दुल्हन… फिर इसके जीने का क्या मतलब?’- पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया- 5 साल जेल रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी खबर यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 18 Jan 2026 5:35 am

क्या थलापति तमिलनाडु में BJP को जितवाएंगे 24 सीटें:कांग्रेस ने स्टालिन से मांगी 40 सीटें; गठबंधन टूटा, तो BJP को फायदा

27 अक्टूबर, 2024, तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के विक्रवंडी की सड़कें लोगों से भरी थीं। इतनी गाड़ियां आईं कि ट्रैफिक जाम होने के डर से प्रशासन को टोल प्लाजा फ्री करने पड़े। पॉलिटिकल पार्टी बनाने के बाद साउथ फिल्मों के सुपरस्टार थलापति विजय इस दिन पहली रैली करने वाले थे। रैली में लाखों लोग पहुंचे। तेज धूप में कुर्सी सिर पर रखकर बैठ गए। थलापति विजय की जैसे फिल्मों में एंट्री होती हैं, इस रैली से वैसी ही एंट्री पॉलिटिक्स में हो गई। तमिलनाडु में अप्रैल-मई में चुनाव होने हैं। उससे पहले विजय की वजह से CM एमके स्टालिन की पार्टी DMK और कांग्रेस का गठबंधन खतरे में आ गया है। कांग्रेस ने DMK से 40 सीटें मांगी हैं, जिन पर पार्टी राजी नहीं है। कांग्रेस का एक धड़ा विजय के साथ जाने की वकालत कर रहा है। एक्सपर्ट मान रहे हैं कि ऐसा हुआ तो DMK को नुकसान होगा। BJP नेता अन्नामलाई ने भी विजय को साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। दोनों स्थितियों में फायदा BJP को होगा। पिछले विधानसभा चुनाव में सिर्फ 4 सीटें जीतने वाली BJP 22 सीटों पर बढ़त बना सकती है। विजय की फिल्म को राहुल गांधी का सपोर्ट, क्या स्टालिन को मैसेज विजय की एक फिल्म आ रही है जन नायगन, यानी जन नेता। सेंसर बोर्ड ने इसके कुछ डॉयलाग की वजह से सर्टिफिकेट नहीं दिया। आरोप है कि डॉयलाग में पॉलिटिकल कमेंट हैं, जिनसे विवाद पैदा हो सकता है। ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। जन नायगन विजय की आखिरी फिल्म है, इसके बाद वे पूरी तरह पॉलिटिक्स पर फोकस करेंगे। 13 जनवरी 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी तमिलनाडु में थे। इसी दौरान उन्होंने X पर लिखा- ‘फिल्म 'जन नायगन' को रोकने की केंद्र सरकार की कोशिश तमिल संस्कृति पर हमला है। मिस्टर मोदी आप तमिल लोगों की आवाज दबाने में कभी कामयाब नहीं होंगे।’ राहुल गांधी का कमेंट उस वक्त आया है, जब DMK और कांग्रेस के बीच विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग पर खींचतान चल रही है। तमिलनाडु में विधानसभा की 234 सीटें हैं। कांग्रेस DMK से 40 सीटें मांग रही है। DMK उसे 25 से 30 सीटें देने पर ही राजी है। इससे नाराज तमिलनाडु कांग्रेस के नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK के साथ गठबंधन करना चाहते हैं। राहुल गांधी का विजय की फिल्म को सपोर्ट करना, तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK गठबंधन में पहली दरार माना जा रहा है। कांग्रेस ने विजय से हाथ मिलाया, तो BJP को फायदातमिलनाडु के पॉलिटिकल एक्सपर्ट जॉन जे केनेडी कहते हैं, ‘पिछले 50 साल में तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति ने नेशनल पार्टियों को बहुत पीछे धकेल दिया है। BJP हो या कांग्रेस, दोनों को यहां कि सियासत में पैर जमाने के लिए AIADMK और DMK से हाथ मिलाना पड़ा।' '2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की कामयाबी DMK के साथ गठबंधन की वजह से थी। चुनाव में DMK ने 133 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 18 सीटें मिलीं। कांग्रेस को DMK के कोर वोटर्स का साथ मिला। तमिलनाडु में कांग्रेस के पास न कैडर है, न ऐसी विचारधारा, जो तमिल वोटर्स को जोड़ सके। इसीलिए DMK उसे ज्यादा सीटें नहीं देना चाहती। ऐसे में राहुल गांधी का विजय की फिल्म को सपोर्ट करने के पीछे 3 मकसद हो सकते हैं।’ 1. विजय का भरोसा जीतने की कोशिश।2. राहुल ने DMK को मैसेज दिया कि तमिलनाडु में कांग्रेस के पास विजय भी विकल्प हैं।3. तमिल संस्कृति का विरोधी बताकर BJP पर निशाना साधा। तमिलनाडु में कांग्रेस अब भी DMK के साथ गठबंधन में है, लेकिन मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं है। 2021 के विधानसभा चुनाव में DMK ने सहयोगियों की मदद के बिना ही सरकार बनाई थी। सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. बसवराज इटनाल कहते हैं, ‘विधानसभा चुनाव में थलापति विजय की एंट्री और कांग्रेस-DMK का गठजोड़ टूटने पर BJP को फायदा हो सकता है। खासकर उन 18 विधानसभा सीटों पर, जहां कांग्रेस पिछला चुनाव जीती थी। इनमें से ज्यादातर सीटों पर DMK का पारंपरिक वोट बैंक यानी द्रविड़, OBC, अल्पसंख्यक, शहरी मिडिल क्लास कांग्रेस के पक्ष में ट्रांसफर हुआ। ऐसे में DMK के बिना कांग्रेस के लिए दोबारा 18 सीटें जीतना नामुमकिन है।’ ‘6 सीटें ऐसी हैं, जहां विजय का प्रभाव है। यहां भी BJP फायदा ले सकती है। हालांकि, सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए कांग्रेस का TVK के साथ जाना जोखिम भरा कदम भी हो सकता है। 10 सांसदों और 18 विधायकों को बनाए रखने के लिए उसे DMK के साथ रहना ही होगा।’ तमिलनाडु में BJP की 60 सीटों पर लड़ने की तैयारीBJP तमिलनाडु चुनाव में अपना पुराने रिकॉर्ड बेहतर करने के लिए हर दांव लगा रही है। 23 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन और NDA के नेताओं ने BJP के चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल और अर्जुन राम मेघवाल के साथ बैठक की थी। पार्टी सोर्स बताते हैं कि बंद कमरे में हुई इस मीटिंग में सीट शेयरिंग और गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी AIADMK के साथ चुनाव जीतने की रणनीति पर बात हुई। तमिलनाडु BJP के एक सीनियर लीडर दैनिक भास्कर को बताते हैं कि पार्टी AIADMK से सीटों के बंटवारे पर मोलभाव कर रही है। 2021 में BJP 20 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस बार हमने तय किया है कि इससे दोगुनी सीटों पर लड़ेंगे। BJP नेता आगे कहते हैं, 'पूर्व CM और AIADMK के जनरल सेक्रेटरी पलानीस्वामी चाहते हैं कि उनकी पार्टी 170 सीटों पर चुनाव लड़े। वे BJP को 23 सीटें देने को तैयार हैं, लेकिन BJP इस बार 60 सीटें मांग रही है। इस पर गृहमंत्री अमित शाह और पलानीस्वामी की दिल्ली में बातचीत हुई है। अब पलानीस्वामी NDA के सहयोगी दलों से बात करेंगे।' ‘हम थलापति विजय और कांग्रेस पर भी नजर बनाए हुए है। विजय की पार्टी कांग्रेस के साथ जाए या फिर DMK, विजय हमारे लिए बड़ी चुनौती नहीं हैं। हमारा ध्यान इन अटकलों पर जाने के बजाय DMK को हराने पर है।’ कांग्रेस-DMK में टूट पड़ी, तो BJP को कितना फायदा मिलेगा? सीनियर जर्नलिस्ट एन गोवर्धन इस सवाल का जवाब एक पुराने किस्से से देते हैं। वे कहते हैं, '2021 में मुझे कोलाचेल में नारियल का व्यापारी मिला। उसने बताया कि DMK कांग्रेस के साथ है। इसलिए चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार जीतेगा।' 'मैंने उस व्यापारी से पूछा कि तुम ये बात इतने भरोसे से कैसे बोल सकते हो? व्यापारी ने कहा- वोट कांग्रेस को दे रहे हैं, लेकिन हमारा भरोसा तो स्टालिन पर है। वे कांग्रेस के साथ हैं, इसलिए बैलेंस बनाना पड़ेगा।’ गोवर्धन कहते हैं, ‘कोलाचेल सीट पर कांग्रेस केंडिडेट प्रिंस ने BJP के पी. रमेश को 24 हजार वोट से हराया था। अगर इस बार कांग्रेस स्टालिन का साथ छोड़ देती है, तो BJP यहां बढ़त बना सकती है। आप खुद समझ लीजिए कि कांग्रेस-DMK का गठबंधन टूटता है, तो सबसे ज्यादा नुकसान किसका होगा।’ एक्सपर्ट बोले- किसी भी पार्टी का अकेले बहुमत तक पहुंचना मुश्किल तमिलनाडु और साउथ की पॉलिटिक्स पर 25 साल से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट टीएस सुधीर का मानना है कि तमिलनाडु में ऐसी कोई पार्टी नहीं है, जो इस बार बहुमत से सरकार बना सके। अगर चुनाव जीतना है तो राष्ट्रीय दलों को क्षेत्रीय पार्टियों से गठजोड़ करना ही पड़ेगा। हमने सुधीर से 3 सवाल पूछे...1. कांग्रेस-DMK गठबंधन में दरार आई, तो फायदा किसे मिलेगा?जवाब: BJP को फायदा होगा क्योंकि लोगों की DMK के खिलाफ धारणा बदलेगी। कांग्रेस का हर विधानसभा सीट पर छोटा ही सही, लेकिन वोट बैंक है। कड़े मुकाबले में यही मामूली अंतर निर्णायक साबित होता है। हालांकि, कांग्रेस तमिल पॉलिटिक्स में बड़ी खिलाड़ी नहीं है, इसलिए वोट बैंक के लिहाज से उसका असर बहुत ज्यादा नहीं होगा। सवाल 2: थलापति विजय का उभरना DMK और कांग्रेस में किसे ज्यादा असहज कर रहा है?जवाब: कांग्रेस का कैडर मानने लगा है कि पार्टी के तमिलनाडु में भविष्य और उसे नई एनर्जी के साथ खड़ा करने के लिए विजय के साथ जाना बेहतर रहेगा। उनका मानना है कि DMK कांग्रेस को बहुत कम सीटें देती है और सत्ता में भी हिस्सेदारी नहीं देती। सवाल 3: BJP को ज्यादा फायदा गठबंधन टूटने से होगा या विजय के राजनीति में आने से?जवाब: तमिलनाडु में BJP का कोई मजबूत वोटर बेस नहीं है। अकेले दम पर वह जीतने की स्थिति में नहीं है। उसका भविष्य AIADMK से होने वाले वोट ट्रांसफर पर टिका है। NDA को सीटें तभी मिलेंगी, जब वह DMK सरकार के खिलाफ गुस्से को भुना पाएगी। पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं... DMK: तमिलनाडु की परंपरा, सत्ता में कभी हिस्सेदारी नहीं हुईDMK अलायंस गठबंधन टूटने के कयासों पर तमिलनाडु सरकार में राज्यमंत्री और सीनियर DMK लीडर आई पेरियासामी कहते हैं, ‘कांग्रेस को सत्ता में हिस्सेदारी मांगने का पूरा अधिकार है, लेकिन DMK की ऐसी कोई प्लानिंग नहीं है। तमिलनाडु की परंपरा रही है कि यहां कभी दो पार्टियों की हिस्सेदारी वाली सरकार नहीं बनी।’ कांग्रेस: सत्ता में हिस्सेदारी के लिए DMK से बात कर रहे कांग्रेस-DMK के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान पर हमने तमिलनाडु कांग्रेस के स्टेट प्रेसिडेंट के. सेल्वपेरुंथगई से बात की। उन्होंने बताया, ‘हम चाहते हैं कि चुनाव जीतने के बाद हमारी पार्टी भी राज्य सरकार में हिस्सेदार बने। हम DMK से लगातार बात कर रहे हैं। आखिरी फैसला CM एमके स्टालिन और हमारे नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ही लेंगे।’ BJP: DMK-कांग्रेस में एक-दूसरे से पीछा छुड़ाने की होड़ तमिलनाडु BJP के स्टेट स्पोक्सपर्सन नरायणन तिरुपाठी कहते हैं, ‘बीते 5 साल में DMK ने तमिलनाडु के लोगों को सिर्फ लूटा है। कांग्रेस ने भी देश के लिए कुछ नहीं सोचा। DMK अलायंस को लेकर तमिलनाडु में जबरदस्त गुस्सा है। इसलिए दोनों पार्टियां चुनाव से पहले एक-दूसरे से पीछा छुड़ाने के लिए ड्रामा कर रही हैं।’ क्या भविष्य में BJP विजय की पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है? नरायणन जवाब देते हैं, ‘तमिलनाडु के विकास के लिए अगर कोई भी पार्टी NDA में आना चाहती है, तो BJP उसका स्वागत करेगी। अगर थलापति विजय हमसे संपर्क करेंगे, तो उनके साथ काम करने को तैयार हैं।’ कितनी सीटों पर थलापति विजय का असरचेन्नई, कांचीपुरम, कोयंबटूर, करूर, मदुरै, तंजावुर और मईलापुर में विजय की अच्छी फैन फॉलोइंग है। चेन्नई: यहां विजय के फैन क्लब हैं। वे यहां शूटिंग भी करते रहे हैं। यहां युवा वोटर्स की संख्या अच्छी है। कांचीपुरम: यहां आईटी प्रोफेशनल्स और फर्स्ट टाइम वोटर्स ज्यादा हैं, जो विजय के फैन क्लब से जुड़े हैं। कोयंबटूर: यहां कांग्रेस और DMK की सीमित पैठ है। इस इलाके में विजय के करीबी रहते हैं। करूर: यहां 18 से 35 साल के वोटर्स सबसे ज्यादा है। विजय के फैन क्लब एक्टिव हैं। विजय यहां आकर फिल्म रिलीज और सोशल मीडिया कैंपेन जैसे इवेंट में शामिल हो चुके हैं। 27 सितंबर 2025 को करूर में ही विजय की रैली में भगदड़ से 39 लोगों की मौत हुई थी। .....................................ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें सबरीमाला मंदिर से चोरी 6 करोड़ का सोना कहां गया केरल के सबरीमाला मंदिर से चोरी हुए 4.5 किलो सोने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। केरल पुलिस का दावा है कि चोरी में मंदिर प्रशासन और कई रसूखदार राजनीतिक चेहरे शामिल हो सकते हैं। इसमें बड़े इंटरनेशनल मूर्ति तस्करी रैकेट और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के शामिल होने का भी शक है। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 18 Jan 2026 5:29 am

करिअर सिर्फ डिग्री से नहीं, स्किल से बनेगा:जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू कहते हैं- AI को अपनाएं, पर इसके गुलाम न बनें

‘मेड इन इंडिया’ टेक अब बहस नहीं, जरूरत बन चुका है। जब सरकार के मंत्रालय गूगल-माइक्रोसॉफ्ट छोड़कर जोहो जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म अपना रहे हैं, तब सवाल है- क्या भारत AI और एडवांस टेक में आत्मनिर्भर हो पाएगा? दैनिक भास्कर से खास बातचीत में जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू साफ कहते हैं- गूगल ने एआई में 15 साल तक निवेश किया। रिसर्च हुई, पेपर पब्लिश हुए, प्रयोग हुए। अगर हमें बाजार से फल नहीं खरीदने तो खुद के पेड़ लगाने होंगे। शायद 1-2 साल में नतीजे न दिखें, लेकिन 5-10 साल में रिटर्न आएगा, और वही असली निवेश होता है। डिग्री बनाम स्किल, विदेशी निर्भरता, गांवों से टेक क्रांति और भारत के टेक भविष्य पर उनका बेबाक विजन जानने के लिए इस खास इंटरव्यू से गुजर जाइए... कई मंत्रालय विदेशी कंपनियां छोड़ जोहो पर शिफ्ट हो रहे, क्या यह स्वदेशी टेक में एक माइलस्टोन है? यह एक माइलस्टोन जरूर है, पर रास्ता अभी लंबा है। टेक्नोलॉजी में हमारी बाहरी निर्भरता बहुत ज्यादा है। एआई का उदाहरण लीजिए। हमें एआई के लिए एनवीडिया की जीपीयू चिप्स चाहिए होती हैं। कम लोग जानते हैं कि पूरे भारत को साल भर में सिर्फ 50 हजार जीपीयू चिप्स का कोटा मिलता है, जबकि ओपनएआई या ग्रोक जैसी कंपनियों के पास लाखों चिप्स हैं, यानी पैसा होने के बावजूद हम उन्हें खरीद नहीं सकते। हमें अब ये सभी तकनीकें घर पर विकसित करनी होंगी। सिर्फ AI पर अटकना गलती होगी। AI आज फैशन है, लेकिन देश को 100-200 क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज पहचाननी होंगी, मेटलर्जी से सेमीकंडक्टर्स तक, सभी क्षेत्र में फोकस जरूरी है। आपने ‘10 साल की टेक रेजिलिएंस’ की बात की, उसके बारे में बताएं? मैं अक्सर कहता हूं कि हम नेलकटर तक नहीं बनाते। आप बाजार से नेलकटर खरीदेंगे, तो वह चीन, कोरिया या जापान में बना होगा। कोरिया हमसे ज्यादा समृद्ध इसलिए है क्योंकि वह छोटे-छोटे प्रोडक्ट भी बनाता और बेचता है। अगर हमें ग्लोबल प्लेयर बनना है, तो 10 साल की नीति बनानी होगी। आलोचना सहनी भी सीखनी होगी। 20-25 साल पहले चीनी स्टार्टअप्स की भी खूब आलोचना होती थी, कहा जाता था, घटिया हैं, नकल करते हैं। आज चीन तकनीक में कहां हैं... हम जानते हैं। एआई के दौर में युवाओं का फोक्स क्या हो, डिग्री या स्किल? स्किल पर फोकस होना चाहिए। मैं यह नहीं कहता कि छात्र तुरंत कॉलेज छोड़ दें। लेकिन डिग्री के साथ-साथ अपनी फील्ड से जुड़ी नई-नई स्किल्स जरूर सीखें। अगर आप इंजीनियर हैं, तो कुछ बनाइए। शुरुआत में कोई भले समस्या हो... लेकिन करते रहिए। यानी अब आपको कॉलेज के समय से हेड्स–ऑन प्रोजेक्ट्स करने होंगे। क्या एआई आने वाले दिनों में नौकरियां छीन लेगा? आज स्विट्जरलैंड के एक टीचर को आईफोन खरीदने के लिए 3 दिन काम करना पड़ता है। भारत में वही आईफोन खरीदने के लिए टीचर को 3-6 महीने लग सकते हैं। तो क्या कोई टीचर इस बात को लेकर दुखी होगा कि कम काम करके वो आईफोन खरीद पा रहा है? एआई से दरअसल हमारी गुणवत्ता तो बढ़ेगी ही, लेकिन नौकरियों का नेचर बदलेगा। तकनीक सस्ती होगी और जो सामान्य काम हैं, उनकी जगह स्पेशिलाइज्ड जॉब्स विकसित होंगी। अर्थव्यवस्था मशीनों की नहीं होती। मशीनें उपभोक्ता नहीं हैं। इकॉनमी इंसानों से चलती है। यह बात साफ समझनी होगी कि एआई उन नौकरियों की जगह नहीं लेगा, जहां इंसानी जुड़ाव सबसे जरूरी है। शिक्षक, नर्स और डॉक्टर–इनका काम मशीन नहीं छीन सकती। हां, एआई इनके काम को बेहतर जरूर बना सकता है। यानी यहां नौकरी छिनने की नहीं, बल्कि काम को और मजबूत बनाने की बात है। टेक के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों का फोकस क्या होना चाहिए? हम देश में नीट-जेईई जैसी रैंकिंग छात्रों के लिए करते हैं, इसे कंपनियों के लिए क्यों न करें? कंपनियों के बीच प्रतियोगिता जरूरी है। स्वतंत्र एक्सपर्ट्स की एक पैनल हो, जो कंपनियों को क्षमताओं के आधार पर रैंक करे। हर साल ये रैंकिंग पब्लिश हो। एक बड़ा नेशनल इवेंट बने, वैसे ही जैसे नीट-जेईई के रिजल्ट्स। इससे जो कंपनियां अच्छा कर रही हैं, उन्हें पहचान मिलेगी, निवेश मिलेगा। 10 साल ऐसा लगातार किया गया, तो चमत्कार हो सकता है। 20 साल में हम ग्लोबल लीडर भी बन सकते हैं। भारत को एआई के क्षेत्र में क्या करने की जरूरत है? 1980 के दशक में कहा जा रहा था कि जापान हर टेक्नोलॉजी में नंबर वन बन जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि वहां जनसंख्या घट गई। भारत के पास आज युवा आबादी है। हमें अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना है, तो इनोवेशन करना होगा। टैलेंट को रोकना है तो मौके देने होंगे। आपने टेक कंपनी गांव से शुरू करने का मॉडल क्यों चुना? अगर आप भारत के बड़े मेट्रो शहरों को देखें, नोएडा, चेन्नई या बेंगलुरु तो पाएंगे कि वहां काम करने वाला बहुत बड़ा टैलेंट ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों से आया है। इसका मतलब है कि टैलेंट गांवों में पहले से मौजूद है, लेकिन उसे पहचानने और इस्तेमाल करने की सोच की कमी रही है। भारत में आज भी टॉप कॉलेजों के ग्रेजुएट्स विदेश में क्यों जा रहे? मैंने 1989 में IIT मद्रास से पढ़ाई की थी। उस समय करीब 80% छात्र विदेश चले जाते थे। आज वही आंकड़ा घटकर करीब 20% रह गया है। यानी टॉप संस्थानों से ब्रेन ड्रेन कम हुआ है, और यह एक अच्छा संकेत है। लेकिन टैलेंट वहीं जाता है जहां अवसर होते हैं। इसलिए सवाल यह है कि भारत में टैलेंट को रोकने के लिए अवसर कैसे बनाए जाएं। छात्र आज इसलिए रुक रहे क्योंकि देश में पहले से अधिक अवसर हैं। क्या रूरल वर्क मॉडल को बड़े स्तर पर स्केल किया जा सकता है? मैं इसे आंकड़ों से समझाना चाहूंगा। भारत में 832 जिले हैं, जिनमें से करीब 600 को ग्रामीण माना जा सकता है। इसके अलावा देश में लगभग 2 लाख 50 हजार पंचायतें हैं। अब सवाल यह है कि क्या हम 600 ऐसी कंपनियां ढूंढ सकते हैं, जो एक-एक जिले के लिए कमिट हों? बस इतना ही चाहिए। इसी तरह अगर हर पंचायत के लिए एक कमिटेड टेक्नोलॉजिस्ट मिल जाए, तो हमें कुल मिलाकर करीब ढाई लाख लोगों की जरूरत होगी। टेक इंडस्ट्री में आज कुछ मिलियन लोग काम कर रहे हैं। ऐसे में ढाई लाख लोगों का गांवों के लिए कमिट होना बिल्कुल संभव है। मुझे पूरा भरोसा है कि यही मॉडल स्केलेबल है। बस जरूरत है कमिटेड लोगों की। गांव से जुड़ी कोई याद, जो आपके लिए लाइफ लेसन बन गई हो? मैं गांव में पला-बढ़ा हूं। पढ़ने में काफी अच्छा था। एक बार मेरी गली की एक बुजुर्ग महिला ने मुझसे कहा था ‘तुम जैसे बच्चे हमारे गांव में कम ही होते हैं। लेकिन एक समय के बाद ऐसे बच्चे गांव छोड़ जाते हैं। लेकिन तुम इस गांव को मत भूलना और हमारे लोगों के लिए कुछ करना। वह महिला 5-10 साल बाद गुजर गईं, पर उनके शब्द आज भी मेरे साथ हैं। उस महिला ने जो बात कही थी… वाे आज भी कई मायनों में रेलेवेंट है। श्रीधर वेम्बू के जीवन में खुशी का मंत्र क्या है? मेरी खुशी अब ज्यादा आध्यात्मिक हो गई है। इस पल में खुश रहना… यही असली मंत्र है। पक्षियों की आवाज, सूरज उगना, तारों को देखना; यही असली खुशी है। बड़ी डील, लॉन्च, तारीफ- ये सब सेकेंडरी हैं। छोटी-छोटी चीजों में आनंद लेना सीखना ही असली खुशी है। ------------------------------------ये इंटरव्यू भी देखें... गांव में गोबर उठाते थे जयदीप अहलावत: आज बॉलीवुड के ‘महाराज' बने, इरफान खान से तुलना पर छलके आंसू, शाहरुख को अपना इश्क बताया जयदीप अहलावत ने हरियाणा के गांव-खेतों से निकलकर, एसएसबी के रिजेक्शन और कई अनगिनत जागती रातों से गुजरते हुए, एफटीआईआई पुणे से मुंबई की इस चकाचौंध भरी दुनिया में उन्होंने अपनी मजबूत जगह बना ली है। देखिए पूरा इंटरव्यू...

दैनिक भास्कर 18 Jan 2026 4:01 am

ग्रीनलैंड समर्थक 8 यूरोपीय देशों पर ट्रंप ने ठोका 10% टैरिफ, नहीं तो 25% की भी चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका और यूरोप के बीच पहले से मौजूद व्यापारिक तनाव को और गहरा सकता है। यूरोपीय संघ के कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।

देशबन्धु 18 Jan 2026 2:19 am

पाकिस्तान–सऊदी रक्षा साझेदारी से मिडिल ईस्ट ही नहीं कई जगह हो सकता है असर, एक्सपर्ट ने चेताया

Saudi-Pakistan Military Ties: इस नए इंतजाम से पाकिस्तान को अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति में राहत मिलेगी, वहीं सऊदी अरब को पश्चिमी देशों के महंगे विमानों के मुकाबले कम लागत वाला विकल्प आसानी से मिल जाएगा.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 2:04 am

ट्रंप की धमकियों से क्यों नहीं डरा खामेनेई? क्या अब बेअसर हो गई है अमेरिका की ताकत, जमकर दहाड़ा 'खलीफा'

Iran US Tension News: ट्रंप की धमकियों से भी ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई नहीं डरे. वे शनिवार को कई दिनों बाद पब्लिकली दिखाई दिए और अमेरिका पर जमकर दहाड़े. ऐसा में सवाल उठ रहा है कि क्या अब अमेरिकी ताकत बेअसर हो गई है.

ज़ी न्यूज़ 18 Jan 2026 12:05 am

गाजा पर US-इजरायल का बड़ा गेम! मुस्लिम देशों को मोहरा बनाकर हमास को करना चाहते हैं निहत्था

US Gaza Peace Plan News in Hindi: गाजा पर नियंत्रण हासिल करने के लिए US-इजरायल अब बड़ा बड़ा गेम करने जा रहे हैं. हमास के निहत्था करने के लिए अब वे खुद गोलियां चलाने के बजाय मुस्लिम देशों को मोहरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 10:55 pm

बांग्लादेश में नहीं रुक रही हिन्दुओं की हत्या, रिपन साहा के बाद अगले दिन लिटन घोष को उतारा मौत के घाट

Bangladesh News: लिटन मिठाई की दुकान पर काम करने वाले नाबालिग को बचा रहा था, उसी वक्त हमलावरों ने उस पर हमला बोल दिया. घटना का कारण 28 साल का मसूम मियां बना, जो सुबह के वक्त दुकान पर आया और वहां काम करने वाले नाबालिग के साथ खेत से तोड़े गए केले के पत्ते को लेकर लड़ाई करने लगा.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 10:05 pm

4 देश, ट्रंप की जिद और 2026, अभी से सच होने लगी बाबा वेंगा की ये सिंगल भविष्यवाणी?

Predictions for 2026:बाबा वेंगा ने 2026 को लेकर डरावनी भविष्यवाणियां की थीं. उन्होंने अपने मरने से काफी पहले 2026 को युद्ध और विनाश का साल बताया था. इस समय दुनिया में जैसी अशांति फैली है. 4 देशों में हाल बेहाल है, ट्रंप जिद पर अड़े हैं और पूरा साल बाकी पड़ा है. कहीं उनकी भविष्यवाणी सच होने की शुरुआत तो नहीं हो गई.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 9:35 pm

ग्रीनलैंड पर सपोर्ट न मिला तो नाटो से निकल जाएंगे ट्रंप? अमेरिकी राष्ट्रपति की नई धमकी

Greenland row: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताते हुए कहा कि अगर उनकी बात सुनी नहीं गई तो अमेरिका को नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन से बाहर निकलने में देर नहीं लगेगी.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 4:58 pm

कट्टरपंथियों की आग में जल गया ‘झुनू सर’ का घर, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले तेज; ब्रिटिश सांसद ने उठाया सवाल

Bangladesh Violence Latest Updates: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ इस्लामिक कट्टरपंथियों का आतंक जारी है. कट्टरपंथियों की भीड़ ने सिलहट जिले में एक हिंदू शिक्षक का घर जला दिया. लगातार बिगड़ती स्थिति पर ब्रिटिश सांसद ने सवाल उठाया है.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 4:57 pm

ईरान में सख्ती से थमे विरोध प्रदर्शन, पुतिन ने नेतन्याहू और पेजेश्कियन से की बात, ट्रंप ने मानी यह बात

ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने देश के विभिन्न हिस्सों में कई और लोगों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारियों पर “राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे” में डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

देशबन्धु 17 Jan 2026 11:21 am

खूनखराबे और कोहराम के बीच वापसी... ईरान से लौटे भारतीयों ने क्या बताया, क्यों हो गए भावुक?

Indians Return from Iran: ईरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार की एडवाइजरी के बाद कई भारतीय नागरिक शुक्रवार देर रात ईरान से दिल्ली लौटे. लौटने वालों ने हालात को बेहद खराब बताया और कहा कि विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट बंद होने और सुरक्षा चिंताओं के कारण मुश्किलें बढ़ गई थीं. उन्होंने सुरक्षित वापसी के लिए मोदी सरकार और दूतावास का आभार जताया.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 9:59 am

ग्रीनलैंड मुद्दे पर ट्रंप अलग-थलग पड़े, रिपब्लिकन–डेमोक्रेट सांसदों का संयुक्त दल डेनमार्क के समर्थन में उतरा

ग्रीनलैंड को लेकर यह विवाद अब महज विदेश नीति का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी गहराते मतभेदों का प्रतीक बन गया है। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर दोफाड़ की स्थिति ने राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बार फिर राजनीतिक शर्मिंदगी खड़ी कर दी है।

देशबन्धु 17 Jan 2026 9:54 am

बडगाम में ईरान के समर्थन में प्रदर्शन, अशांति फैलाने के लिए लोगों ने अमेरिका-इजरायल को घेरा

ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ लोगों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए दावों के अनुसार, दो हजार से ज्यादा लोग इस दौरान मारे गए और दस हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया

देशबन्धु 17 Jan 2026 9:24 am

मचाडो ने ट्रंप को पीस प्राइज दे तो दिया, लेकिन नोबेल कमेटी ने बता दी विनर की 'हद', याद दिलाई 2001 की घटना

Maria Corina Machado: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो अपना शांति का नोबेल भेंट किया था. उनकी भेंट के बाद अब नोबेल कमेटी का जवाब आया है. जानिए कमेटी ने क्या कहा है.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 9:21 am

मियामी में फिर आमने-सामने होंगे यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल

यूक्रेन और अमेरिका की टीमें शनिवार को मियामी में एक बार फिर बातचीत करने जा रही हैं

देशबन्धु 17 Jan 2026 8:19 am

ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका:नेतन्याहू ने किस मजबूरी में ट्रम्प को रोका; क्या बरकरार रहेगी खामेनेई की इस्लामिक सत्ता

15 जनवरी को लगने लगा कि ट्रम्प अब कुछ ही घंटे में ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं। नेतन्याहू का विमान इजराइली एयर स्पेस से बाहर कहीं 'सेफ जगह' पर चला गया। कतर के अमेरिकी एयरबेस से सैनिक हटाए जाने लगे। पेंटागन के आसपास पिज्जा के ऑर्डर्स बढ़ गए। ऐसा तभी होता है, जब अमेरिका कोई बड़ा एक्शन लेने वाला होता है। फिर अचानक ईरान को लेकर ट्रम्प के तेवर नरम पड़ गए। आखिर ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटे ट्रम्प, नेतन्याहू ने किस मजबूरी में ट्रम्प से हमला टालने को कहा, क्या अब सुप्रीम लीडर खामेनेई की सत्ता बनी रहेगी, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में... सवाल-1: ईरान पर हमले का आदेश देने से पीछे क्यों हटे ट्रम्प?जवाब: 13 जनवरी को ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ईरान के प्रदर्शनकारियों से कहा, 'प्रोटेस्ट करते रहिए। मदद रास्ते में है।' कई अमेरिकी रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प ईरान पर हमले का मन बना चुके थे, लेकिन अचानक उनके पीछे हटने की 4 बड़ी वजहें हैं... 1. नेतन्याहू ने ट्रम्प को हमला करने से मना किया 2. सऊदी अरब, कतर जैसे देशों ने विरोध किया 3. अमेरिका अभी हमले के लिए पूरी तरह तैयार नहीं 4. ईरान में प्रदर्शन कमजोर हुए, फांसी टाली गईं सवाल-2: सऊदी अरब, इजराइल ने ट्रम्प को हमला करने से क्यों रोका?जवाब: NYT की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत, कतर, सऊदी अरब जैसे देशों ने अमेरिकी ऑफिसर्स से कहा कि ईरान पर हमला हुआ, तो इलाके में एक बड़ा संघर्ष छिड़ जाएगा। ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेसेज को टारगेट कर सकता है। इससे पहले 22 जून 2025 को जब अमेरिका ने अपने B2 बॉम्बर विमानों से ईरान की 3 न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे, तब ईरान ने अगले ही दिन कतर में अमेरिकी एयरबेस 'अल-उदैद' पर एयरस्ट्राइक कर दी थी। जबकि कतर, इजराइल और ईरान के बीच सीजफायर के लिए मध्यस्थता कर रहा था। दरअसल, मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 19 मिलिट्री बेस हैं। इनमें से 8 अरब देशों में अमेरिका ने स्थायी अड्डे बनाए हैं। इनमें बहरीन, इजिप्ट, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे देश हैं। ये सभी देश अमेरिका के आर्थिक और डिफेंस मामलों में सहयोगी हैं। तेल व्यापार और डिफेंस पार्टनरशिप के बदले अमेरिका इन देशों को सुरक्षा की गारंटी देता है। वहीं ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को समर्थन देने के बावजूद इजराइल नहीं चाहता कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर हमला करे। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटजिक स्टडीज प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर विवेक मिश्र के मुताबिक, इसके पीछे 2 वजहें हैं… सवाल-3: क्या ईरान में सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट रुकने वाले हैं?जवाब: ईरान में प्रोटेस्ट धीमा पड़ता हुआ दिख रहा है, हालांकि इसके पूरी तरह खत्म होने के संकेत नहीं हैं। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के सख्त रुख के चलते हालात अस्थायी रूप से शांत होते नजर आ रहे हैं। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों के लोगों ने कहा है कि कुछ दिन पहले सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधे टकराव हो रहे थे, लेकिन अब शांति है। सड़कों पर पहले जैसी भीड़, गोलीबारी और आगजनी नहीं दिख रही। ईरान प्रशासन की तरफ से भी अब प्रदर्शनकारियों के लिए नरम भाषा में संदेश जारी किए जा रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि सरकार देश में स्थिति सुधारने, भ्रष्टाचार और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है। सवाल-4: क्या वाकई प्रदर्शनकारियों की फांसी पर रोक लगा दी गई है?जवाब: ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर तेज ट्रायल और जल्दी से फांसी देने का ऐलान किया था। हालांकि, अब फांसी पर रोक लगा दी गई है। NYT के मुताबिक, दो इजराइली ऑफिसर्स ने कहा कि ईरान में सरकार की सख्त कार्रवाई और इंटरनेट सर्विसेज ठप होने के चलते प्रोटेस्ट कमजोर हुए हैं और प्रदर्शनकारियों की हत्याओं में कमी आई है। यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका की धमकी के बाद ईरान ने प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रोकी हैं। इरफान को फांसी दिए जाने की चर्चा के बाद ट्रम्प ने कहा था , 'अगर वे फांसी देते हैं, तो आप कुछ भयानक देखेंगे।' ब्रिटिश वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि ईरान में करीब 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं। हालांकि अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ने बताया कि अब तक करीब 2,550 हत्याएं हुई हैं। चीन के बाद ईरान दुनिया का दूसरा देश है, जहां सजा के तौर पर सबसे ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है। इसके बाद दूसरे स्थान पर चीन है। 2025 में ईरान ने करीब 1,500 लोगों को फांसी दी थी। सवाल-5: क्या ईरान में खामेनेई की इस्लामिक सत्ता बनी रहेगी?जवाब: ईरान में जब विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, उस समय ट्रम्प ने वेनेजुएला से राष्ट्रपति मादुरो को उठवा लिया था। इसके बाद जब ट्रम्प ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को अपना समर्थन दिया, तो कहा जाने लगा कि अमेरिका खामेनेई का तख्तापलट करवा सकता है। विवेक मिश्र कहते हैं कि जब तक ईरान में सेना पर खामेनेई का कंट्रोल है, उन्हें हटाना या उनका तख्तापलट करना मुश्किल है। कमरतोड़ महंगाई के बावजूद ईरान में वेनेजुएला जैसे राजनीतिक हालात नहीं हैं। वहां कोई विपक्ष नहीं है और न ही विरोध प्रदर्शनों का कोई एक लीडर है। ईरान के आखिरी राजशाही शासक रहे मोहम्मद शाह के बेटे रजा पहलवी अमेरिका में रह रहे हैं। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि वह ईरान में सत्ता संभालने के लिए अभी तैयार नहीं हैं। रजा पहलवी ट्रम्प से मिलना भी चाहते थे, लेकिन ट्रम्प नहीं मिले। ईरान को उसके सहयोगी देशों से भी मदद मिल रही है। दरअसल, ईरान में इंटरनेट पर बैन के बाद मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने ईरान में फ्री इंटरनेट देना शुरू कर दिया था। कई शहरों में ईरान ने इस सर्विस को भी बंद कर दिया। विवेक मिश्रा कहते हैं कि स्टारलिंक को ठप करने की तकनीकी क्षमता ईरान में नहीं है। उसे चीन जैसे देश ये तकनीकी मदद दे रहे हैं। सवाल-6: क्या अमेरिका वाकई ईरान पर हमला करने वाला था?जवाब: 14-15 जनवरी के घटनाक्रम से ईरान पर अमेरिका के बड़े हमले के कयास लगाए जा रहे थे... सवाल-7: क्या ट्रम्प आगे ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं?जवाब: हां, आने वाले कुछ दिनों में ईरान पर अमेरिकी हमले की संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता। इसके पीछे 2 बड़े तर्क हैं…1. ट्रम्प के इरादे पर भरोसा नहीं किया जा सकता 2. अमेरिका सैन्य तैयारी का समय ले रहा विवेक मिश्र कहते हैं कि टैक्टिकली अभी अमेरिका के लिए ईरान पर हमले का सबसे बढ़िया मौका है। ईरान इस समय सबसे ज्यादा कमजोर है। इस पूरे तनाव की जड़ ईरान के न्यूक्लियर बम बनाने की कोशिश है। ऐसे सबूत नहीं हैं कि ईरान ने अपना वो प्रोग्राम रोक दिया है। इसलिए अमेरिका अपने मुताबिक सत्ता लाकर ईरानी तेल पर कब्जा और न्यूक्लियर खतरे को जड़ से खत्म करना चाहता है। ----- रिसर्च सहयोग- ऐश्वर्य राज ----- ये खबर भी पढ़िए... आज का एक्सप्लेनर: नेतन्याहू ने इजराइल छोड़ा, पेंटागन में पिज्जा खपत बढ़ी, युद्धपोत मुड़े; 7 संकेत बता रहे ईरान पर जल्द हमला करेगा अमेरिका इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के देश से बाहर जाने की खबरें हैं, अमेरिकी युद्धपोत मिडिल ईस्ट की तरफ मुड़ चुके हैं, ईरान के एयरस्पेस से विमान गायब हैं और पेंटागन में पिज्जा की डिमांड बढ़ गई है। ये सभी बातें इशारा कर रही हैं कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है… शायद आज रात ही। पूरी खबर पढ़ें...

दैनिक भास्कर 17 Jan 2026 7:43 am

महाराष्ट्र में शिवसेना-NCP का वोट अब BJP का:ठाकरे मुंबई तक सिमटे, शिंदे के पास ठाणे, सिर्फ BJP ‘ऑल स्टेट’ पार्टी

मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे, पिंपरी चिंचवाड और नासिक, महाराष्ट्र के ज्यादातर बड़े नगर निगम अब BJP के हैं। नगर निगम चुनाव में BJP एकतरफा जीती, लेकिन रिजल्ट के और भी मायने हैं। मराठी मानुस की राजनीति करने वाले उद्धव और राज ठाकरे मुंबई तक सिमट गए। एकनाथ शिंदे सिर्फ ठाणे जीत पाए। BJP का साथ छोड़ चाचा शरद पवार के साथ चुनाव लड़े अजित पवार सबसे बड़े लूजर बन गए। कांग्रेस लातूर और चंद्रपुर के अलावा हर जगह हार गई। अब सिर्फ BJP पूरे महाराष्ट्र की पार्टी है। रिजल्ट बताता है कि शिवसेना और NCP में टूट के बाद बंटे वोट अब BJP की तरफ शिफ्ट हो चुके हैं। ऐसा कैसे हुआ, नगर निगम चुनाव के रिजल्ट के मायने क्या हैं, ये समझने के लिए हमने BJP नेताओं के अलावा महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले एक्सपर्ट्स से बात की। पहला सवाल: BJP को इतनी बड़ी जीत कैसे मिली?इसका जवाब महाराष्ट्र BJP के एक सीनियर लीडर देते हैं। वे कहते हैं, ‘ये जीत भले आज मिली है, लेकिन इसकी तैयारी 6 साल पहले शुरू हो गई थी। 24 अक्टूबर 2019 को महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। BJP 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिलीं।’ ‘BJP देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने वाली थी, तभी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अड़ गए। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के लिए गठबंधन तोड़ दिया। पहली बार कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और 28 नवंबर को मुख्यमंत्री बन गए। तभी तय हो गया था कि शिवसेना को तोड़ना है। महाराष्ट्र में BJP को अपने दम पर खड़ी पार्टी बनाना है। आज जो नतीजे आए हैं, वो इसी प्लान का हिस्सा था।’ इस पर हमने BJP में हमारे सोर्स से बात की। वे बताते हैं कि हमारा पहला टारगेट था- एकनाथ शिंदे के जरिए शिवसेना को तोड़कर कमजोर करना। इसके बाद शिंदे को भी मजबूत न होने देना। दूसरा टारगेट था- अजित पवार के जरिए शरद पवार की NCP को तोड़ना, फिर टूटी हुई पार्टी को आमने-सामने की लड़ाई में हरा देना। 6 साल तक प्लान पर काम चलता रहा और BJP ने पहले विधानसभा और अब नगर निगम चुनाव में अपनी आखिरी चाल चल दी। महाराष्ट्र की दो बड़ी पार्टियां शिवसेना और NCP एक दायरे में सिमट गईं। महाराष्ट्र के 29 नगर निगम में से 23 BJP ने जीत लिए। ये पहली बार है जब महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय के चुनाव में पार्टी को इतनी बड़ी जीत मिली है। बाल ठाकरे की शिवसेना के गढ़ मुंबई-ठाणे, शरद पवार वाली NCP के गढ़ पश्चिम महाराष्ट्र के पुणे, सोलापुर, कोल्हापुर और कांग्रेस के दबदबे वाला विदर्भ, BJP ने तीनों पार्टियों को चुनाव में चित कर दिया। अब पार्टी इस स्थिति में है कि उसे सहयोगियों की जरूरत न पड़े। दूसरा सवाल: नगर निगम चुनाव के रिजल्ट के मायने क्या हैं? इसका जवाब एक्सपर्ट्स ने दिया। इसे 8 पॉइंट्स में समझते हैं… 1. BJP महाराष्ट्र में अपने दम पर खड़ी पार्टी बनीअप्रैल-मई 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में BJP को बड़ा झटका लगा। पार्टी सबसे ज्यादा 26.4% वोट लेकर भी सिर्फ 9 सीटें जीत पाई। कांग्रेस 13 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। विधानसभा चुनाव में BJP ने वापसी की और 288 में से 132 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। इस बार देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने। अब ऐसी ही जीत नगर निगम चुनावों में मिली है। सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘BJP ने अब एक तरह से पूरा महाराष्ट्र जीत लिया है। लोकसभा, विधानसभा और अब स्थानीय निकाय के चुनाव, तीनों जगह BJP के नेता सत्ता में हैं। हालांकि ये BJP के सहयोगियों के लिए खतरे की घंटी है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ठाणे तक सिमट गई है। अजित पवार की पार्टी NCP पूरे राज्य में एक भी जगह मेयर बना पाने की स्थिति में नहीं है।’ वहीं, BJP पॉलिटिकल एक्सपर्ट राजेंद्र साठे कहते हैं, ‘नगर निगम के चुनाव शहरी इलाकों में होते हैं। BJP को पहले से शहरों की पार्टी माना जाता है। शहरों में उसका सपोर्ट बेस रहा है। चुनाव से एक दिन पहले महिलाओं के खाते में लाडकी बहना स्कीम के 1500 रुपए भेजे गए। ये भी चुनाव में बड़ा फैक्टर रहा है।’ 2. एकनाथ शिंदे की शिवसेना सिर्फ ठाणे में सिमटीडिप्टी CM एकनाथ शिंदे शिवसेना में टूट से पहले ठाणे के बड़े लीडर माने जाते थे। शिवसेना तोड़कर शिंदे BJP के साथ आ गए और मुख्यमंत्री बने। उद्धव ठाकरे से पार्टी छीन ली। नगर निगम चुनाव ने साबित कर दिया है कि वे अब भी सिर्फ ठाणे के नेता हैं। सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘एकनाथ शिंदे ठाणे तो जीते, लेकिन आसपास के वसई-विरार, मीरा-भायंदर, नवी मुंबई, कल्याण डोंबिवली में हार गए। उन्हें ध्यान रखना होगा कि उन्होंने जितनी तोड़फोड़ की, अब सब खत्म हो चुकी है। सबकी अपनी जगह तय हो गई है।’ 3. उद्धव ठाकरे मुंबई हारे, लेकिन शिंदे को हरायाउद्धव ठाकरे के सामने अपना गढ़ मुंबई बचाने की चुनौती थी, लेकिन वे इसे बचा नहीं पाए। मुंबई में BJP-शिवसेना (शिंदे गुट) का गठबंधन जीत गया। 25 साल में पहली बार मुंबई में शिवसेना का मेयर नहीं होगा। उद्धव BJP से हार गए, लेकिन शिंदे को पटखनी दे दी। शिंदे साउथ मुंबई के कोर शिवसेना वोटर में सेंध नहीं लगा पाए। उद्धव ठाकरे हिंदुत्व के बजाय चुनाव में मराठी और मुंबई का मुद्दा लेकर आए। MNS नेता और भाई राज ठाकरे से गठबंधन कर मराठी और गैर मराठी के मुद्दे को हवा दी। उन्हें वोट तो मिले, लेकिन इतने नहीं कि मेयर चुन सकें। रात 11 बजे तक उद्धव की पार्टी 66 सीटों पर जीत चुकी थी, या आगे चल रही थी। संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘शिवसेना (उद्धव गुट) की मुंबई के अलावा भी हर जगह हार हुई है। साफ हो गया है कि वह सिर्फ मुंबई की पार्टी रह गई है। उद्धव ठाकरे 25 साल से चली आ रही मुंबई में सत्ता गंवा बैठे। हालांकि मुंबई में 60 से ज्यादा सीटें जीतकर उन्होंने अपनी पार्टी को खत्म होने से बचा लिया। एकनाथ शिंदे को मुंबई में करीब 26 सीटें मिली हैं। मुंबई में उद्धव ठाकरे की शिवसेना दूसरे नंबर की पार्टी रहेगी, शिंदे तीसरे नंबर पर आ गए हैं।‘ 4. पवार अपना गढ़ तक नहीं बचा पाएBJP सोर्स बताते हैं कि शिवसेना टूटने के बाद अजित पवार के जरिए NCP को तोड़ा गया। ये भी ध्यान रखा गया कि अजित पवार को कंट्रोल में रखा जाए। अजित पवार कोऑपरेटिव के बड़े नेता रहे हैं। उनकी राजनीति स्थानीय निकाय के चुनाव और सहकारी समितियों से जुड़ी रही है। निकाय चुनावों में उनकी पार्टी का हारना बड़ी मात है। संदीप सोनवलकर कहते हैं कि चुनाव के सबसे बड़े लूजर अजित पवार ही हैं। इसकी तीन सबसे बड़ी वजहें हैं- 1. उनका कोई भी मेयर नहीं बन रहा।2. अजित पवार ने ऐसे बयान दिए कि BJP के नेता नाराज हो गए।3. उन्होंने चाचा शरद पवार से हाथ मिला लिया और BJP को ये पसंद नहीं आया। वहीं, राजेंद्र साठे कहते हैं, ‘शरद पवार को पसंद करने वाले बहुत लोग हैं, लेकिन उनके सारे अच्छे साथी अजित पवार के साथ चले गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में शरद पवार को झटका लगा था। उसके बाद से वे राजनीति में एक्टिव नहीं रहे। उन्होंने इस चुनाव में भी ज्यादा मेहनत नहीं की। वे अपनी राजनीति कर चुके हैं। उनकी तबीयत साथ नहीं देती।' 5. ओवैसी ने दिखाया- वे मुसलमानों के नेताअसदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने निकाय चुनावों में 95 सीटें जीती हैं। AIMIM को संभाजीनगर और मालेगांव में बड़ी कामयाबी मिली। ये सीटें अब तक कांग्रेस को मिलती थीं। इससे साबित हो गया कि मुस्लिम वोट AIMIM की तरफ शिफ्ट हो रहा है। मुस्लिम आबादी वाले संभाजीनगर में पार्टी को 24 सीटें मिली हैं। मुस्लिम वोटर्स के ओवैसी के पाले में जाने का नुकसान कांग्रेस को हुआ है। इसके अलावा नासिक जिले के मालेगांव नगर निगम में AIMIM 21 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही। यहां इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र (ISLAM) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उसने 84 में से 35 सीटें जीती हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) को 18 सीटें मिलीं। समाजवादी पार्टी को 5 और कांग्रेस को 3 सीटें मिलीं। BJP सिर्फ दो सीटें जीत पाई है। 6. लातूर-चंद्रपुर के अलावा कांग्रेस पूरे महाराष्ट्र में लगभग खत्ममहाराष्ट्र में कांग्रेस विदर्भ रीजन में BJP को चुनौती देती रही है, लेकिन यहां चंद्रपुर को छोड़कर बाकी सभी जगह कांग्रेस बुरी तरह हारी। कांग्रेस को भिवंडी-निजामपुर, कोल्हापुर, अमरावती और लातूर में बढ़त मिली। लातूर में कांग्रेस को 70 में से 43 सीटें मिली हैं। विदर्भ के अलावा बाकी रीजन में कांग्रेस ने बहुजन वंचित अघाड़ी, NCP और शिवसेना के साथ गठबंधन किया था। लातूर पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का गढ़ हुआ करता था। मुंबई में कांग्रेस को 24 सीटें मिली हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट राजेंद्र साठे कहते हैं- मुंबई में कांग्रेस और शिवसेना साथ लड़ते तो BJP को कड़ी टक्कर दे सकते थे। आज भी दलित वोट कांग्रेस को मिलता है। इससे शिवसेना और कांग्रेस दोनों को फायदा हो सकता था। 7. राज-उद्धव ठाकरे साथ आए, लेकिन गठबंधन बेअसर20 साल बाद राज और उद्धव ठाकरे के साथ आने से सुर्खियां तो खूब बनीं, मराठी मानुष का मुद्दा भी बड़ा हुआ, लेकिन वोट नहीं मिले। शिवाजी पार्क मैदान में राज ठाकरे की सभा में भीड़ उमड़ी, लेकिन नासिक में वे अपनी सत्ता गंवा बैठे। मुंबई में भी कुछ खास नहीं कर पाए। राजेंद्र साठे इस पर कहते हैं, ‘राज ठाकरे अच्छे भाषणों से भीड़ जुटा लेते हैं, लेकिन वोट नहीं ला पाते। हालांकि राज ठाकरे की पार्टी अगर उद्धव की शिवसेना के साथ नहीं लड़ती, तो इतनी सीटें भी नहीं आतीं। ठाकरे बंधु मुंबई, ठाणे, पुणे और नासिक के अलावा कहीं चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं गए।’ 8. देवेंद्र फडणवीस BJP की विनिंग मशीननिकाय चुनाव में महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने खुद कमान संभाली थी। सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘देवेंद्र फडणवीस ने साबित कर दिया है कि वे हर तरह का चुनाव जिता सकते हैं। अब BJP देवेंद्र फडणवीस को हटाने का रिस्क नहीं ले सकती। BJP को संगठन का भी फायदा मिला। पार्टी ने सिर्फ 14 जगहों पर गठबंधन किया और 15 जगह अकेले चुनाव लड़ा। नागपुर में गुटबाजी नहीं दिखी। यही वजह है कि पार्टी इतनी बड़ी जीत हासिल कर पाई।’

दैनिक भास्कर 17 Jan 2026 5:05 am

कहीं ICE का खौफ तो कहीं सीधे सेना उतार रहे... क्या खामेनेई की राह पर चल रहे ट्रंप?

US News:ईरान में छिड़ी बगावत को हवा देने वाले ट्रंप खुद घिर गए हैं.अमेरिका में ईरान जैसी बगावत की चिंगारी दिख रही है. जिसे बुझाने के लिए ट्रंप अपने ही देश में लोगों के खिलाफ सेना उतारने की धमकी दे रहे हैं. इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट एजेंट्स को लेकर लोगों का आक्रोश इतना ज्यादा हो गया कि ट्रंप भड़क गए.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 1:11 am

पाकिस्तानी रेलवे का हाल-बेहाल, 20 साल से पुराने इंजनों के सहारे पटरी पर दौड़ रही ट्रेन

Pakistan Railway: कमेटी की तरफ से पैसेंजर कोचों में खराब एयर कंडीशनिंग की समस्या पर भी चर्चा की गई. जिसको लेकर अधिकारियों ने कहा कि ज्यादा पुराने एसी यूनिट होने की वजह से इनमें खराबी बढ़ रही है.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 12:19 am

DNA: नोबेल देकर सत्ता की आस? मचाडो की ‘मेडल डिप्लोमेसी’ क्या दिला पाएगी बड़ी कुर्सी, अवार्ड पाकर ट्रंप का खिला चेहरा

Maria Corina Machado-Donald Trump News: वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल पीस प्राइज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट कर दिया है. सवाल है कि क्या ये ‘मेडल डिप्लोमेसी’ मचाडो को बर्सी कुर्सी दिला पाएगी.

ज़ी न्यूज़ 17 Jan 2026 12:01 am

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के खिलाफ केप टाउन में जोरदार प्रदर्शन

वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका की विधायी राजधानी केप टाउन में प्रदर्शन किया गया

देशबन्धु 16 Jan 2026 11:40 pm

‘काफिर को वोट देना हराम’, बांग्लादेश चुनाव से पहले मौलवियों के भड़काऊ फतवे, हिंदू होना बना सबसे बड़ा अपराध

Violence against Hindus in Bangladesh News: बांग्लादेश में कुछ महीने बाद होने जा रहे आम चुनावों से पहले हिंदुओं के खिलाफ जमकर जहर उगला जा रहा है. कई ऐसे वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें मौलाना कह रहे हैं कि ‘काफिर को वोट देना हराम’ है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 11:36 pm

DNA: अचानक ट्रंप ने क्यों टाल दिया ईरान पर हमला? सब काम छोड़ अमेरिका पहुंचे मोसाद चीफ

DNA: डोनाल्ड ट्रंप ने ना सिर्फ अयातुल्ला खामेनेई जैसा रवैया अपना लिया है बल्कि उन्होंने खामेनेई के देश ईरान पर हमला करने का प्लान भी फिलहाल के लिए टाल दिया है. ट्रंप के इस फैसले से पूरी दुनिया हैरान है. आज हम, खामेनेई और ट्रंप में वॉर कैंसल की इनसाइड स्टोरी बताएंगे. ये डॉनल्ड ट्रंप ही थे जिन्होंने कुछ हफ्तों पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अगवा करा लिया था. आखिर वही ट्रंप हमला करने के फैसले से पीछे क्यों हटे.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 11:11 pm

इरफान सुल्तानी पर खाया रहम तो इस रेसलर को मिली थी मौत, कौन हैं नाविद अफकारी, जिसे प्रदर्शन करने के लिए ईरान ने दी थी फांसी

Iran Protest: ईरान में बढ़ते प्रदर्शन के बीच वहां की सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन ले रही है. बता दें कि साल 2020 में ईरान के फेमस रेसलर नाविद अफकारी को मौत की सजा सुनाई गई थी.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 9:00 pm

WATCH: चॉपर को उठाकर ले जा रहा था हेलीकॉप्टर, सैकड़ों फीट ऊपर आसमान में हादसा; ऐसा वीडियो पहले नहीं देखा होगा

इजरायल के नजदीक वेस्ट बैंक में एक अजीबोगरीब हादसा हुआ. जहां एक हेलीकॉप्टर दूसरे को आसमान में खींचकर ले जा रहा था. जिस हेलिकॉप्टर को खींच कर ले जा रहा था वो अचानक नीचे गिर जाता है. एयर क्रैश की ये दुर्घटना एक रिहायशी इलाके के पास घटी.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 5:15 pm

काबुल की मेडिकल शॉप से उठा भरोसे का तूफान! अफगानिस्तान में भारतीय दवाइयों की बढ़ रही मांग?

Indian Medicines Dominate Afghanistan Market: अफगानिस्तान में अब भारतीय दवाइयों की मांग तेजी से बढ़ रही है. काबुल के लोगों का कहना है कि भारत में बनी दवाइयां न सिर्फ सस्ती हैं बल्कि असर में भी पाकिस्तानी दवाइयों से बेहतर हैं. एक अफगान ब्लॉगर के अनुभव के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 12:32 pm

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की कब्जे की जिद से बढ़ा आर्कटिक तनाव, यूरोप ने बढ़ाई सैन्य मौजूदगी

ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और आर्कटिक मार्गों पर नियंत्रण इसे वैश्विक शक्तियों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाते हैं। अमेरिका, रूस और चीन के बीच आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने इस विवाद को और संवेदनशील बना दिया है।

देशबन्धु 16 Jan 2026 11:28 am

कभी दौलत और शक्ति के केंद्र थे ये शहर, समंदर में दफन हैं चौकाने वाले सबूत; श्री कृष्ण की नगरी भी शामिल

Ancient Cities Submerged Underwater: दुनिया में कई ऐसे बड़े और मशहूर शहर रहे हैं जो कभी आबाद थे. हालांकि प्राकृतिक आपदाओं के चलते हमेशा के लिए समुद्र ने उन्हें निगल लिया. हैरानी की बात यह है कि आज भी इन शहरों के साफ-साफ सबूत पानी के नीचे मौजूद हैं.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 10:30 am

150 साल बाद स्पेन में होने जा रही अनोखी बात, कौन है वो राजकुमारी जिसने 20 साल की उम्र में रच दिया इतिहास

Princess Leonor Spain: स्पेन में 150 साल बाद एक बार फिर महिला शासक बनने वाली हैं. 20 साल की राजकुमारी लियोनोर बहुत जल्द स्पेन की रानी बनेंगी. उन्होंने सिंहासन संभालने से पहले सेना, नौसेना और वायुसेना की पूरी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 10:02 am

गोलीबाज बने हीरो! शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने वालों को यूनुस का बड़ा तोहफा, ‘योद्धा’ बताकर कानून में दी खास छूट

बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने उन प्रदर्शनकारियों को बड़ा तोहफा दिया है जिन्होंने जुलाई 2024 में प्रदर्शन किए और 5 अगस्त को शेख हसीना की सरकार को गिराया. अब सरकार उनके लिए खास अध्यादेश लेकर आई है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 9:42 am

ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप... जानें कैसे सऊदी, कतर, मिस्र और ओमान ने टाला युद्ध का खतरा?

खाड़ी देश के अधिकारी ने बताया कि सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिकी प्रशासन को साफ शब्दों में आगाह किया कि ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैला सकता है।

देशबन्धु 16 Jan 2026 9:42 am

यूक्रेन पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखना जरूरी: क्रेमलिन

क्रेमलिन ने कहा कि यूक्रेन मुद्दे पर अमेरिका के साथ संवाद जारी रखना आवश्यक और महत्वपूर्ण है।

देशबन्धु 16 Jan 2026 9:37 am

212 साल पहले कैसे डेनमार्क के कब्जे में आया था ग्रीनलैंड, नेपोलियन बोनापार्ट की एक हार ने बदल दी थी पूरी कहानी

Greenland:अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाने के बीच ग्रीनलैंड का इतिहास फिर चर्चा में है. बता दें, ग्रीनलैंड आधिकारिक रूप से 14 जनवरी 1814 को कील संधि के तहत डेनमार्क के नियंत्रण में आया. यह संधि नेपोलियन युद्धों के दौरान डेनमार्क-नॉर्वे और नेपोलियन विरोधी गठबंधन के बीच हुई थी.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 9:36 am

बांग्लादेश में जनमत संग्रह जागरूकता अभियान की शुरुआत

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की सलाहकार परिषद के सदस्यों ने देशव्यापी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी है

देशबन्धु 16 Jan 2026 9:29 am

शैडो बैंकिंग, फरदिस जेल समेत कई अधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें; ट्रंप ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध

US-Iran Tensions: ईरान मेंअशांति के बीच अमेरिका ने कई ईरानी अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च परिषद के सचिव अली लारीजानी शामिल हैं. अमेरिका ने फरदिस जेल और ईरान के शैडो बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े 18 व्यक्तियों व संस्थाओं को भी प्रतिबंधित किया है जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग और दमन में शामिल होने के आरोप हैं.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 8:13 am

'1976 का शाही गिफ्ट, 2026 में भी उड़ रहा है...', ईरान ने क्यों संभाल रखा है 'टॉप गन' फाइटर F-14?

Iran F-14: ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है. दोनों देश के नेता एक दूसरे पर टिप्पणी कर रहे हैं. इसी बीच हम बताने जा रहे हैं उस फाइटर जेट्स के बारे में जो दुनिया से रिटायर हो गया है लेकिन ईरान ने इसे संभाल रखा है. आइए जानते हैं इसके पीछे की क्या वजह है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 7:43 am

कौन हैं महमूद खलील जिनकी रिहाई को अमेरिकी अदालत ने किया रद्द? हमास के लिए ट्रंप से ले चुके हैं पंगा

Donald Trump: अमेरिका की संघीय अपील अदालत ने फिलिस्तीन समर्थक महमूद खलील की रिहाई के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है जिसे ट्रम्प प्रशासन ने बड़ी जीत बताया. इससे खलील की दोबारा गिरफ्तारी और निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, हालांकि आदेश तत्काल लागू नहीं होगा.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 7:29 am

ट्रंप की चेतावनी से कांपा तेहरान! 800 फांसियों पर लगाई रोक, अमेरिकी दबाव के आगे झुका ईरान?

Iran Executions Halted: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने 800 लोगों की फांसी की योजना रोक दी है. व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की है. यह बता ऐसे समय पर सामने आई है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के दौरान हजारों लोगों की मौत की खबरें आ रही हैं.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 7:28 am

युद्धग्रस्त यमन में सत्ता पलटी, पीएम बिन ब्रिक आउट; सऊदी या यूएई- कौन चला रहा रिमोट?

Yemen PM Resigns: यमन से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यमन की सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 6:30 am

ट्रंप को मिल ही गया नोबेल पीस प्राइज? व्हाइट हाउस में मचाडो से मुलाकात के दौरान क्या हुआ?

Venezuela Opposition Leader Meets Trump: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की है. यह उनकी पहली आमने-सामने मुलाकात थी. इस बातचीत के दौरान माचाडो ने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया है.

ज़ी न्यूज़ 16 Jan 2026 6:22 am

दो हिस्सों में बंटी बांग्लादेश आर्मी, क्या सिविल वॉर होगी:हिंसा के पीछे पाकिस्तान समर्थक अफसर, स्टूडेंट लीडर बोले- तख्तापलट की साजिश

12 दिसंबर 2025...बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्टूडेंट लीडर शरीफ उस्मान हादी को गोली मार दी गई। वे ढाका से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले थे और उस दिन प्रचार कर रहे थे। 6 दिन चले इलाज के बाद 18 दिसंबर को हादी की मौत हो गई। इसके बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़क गई। हिंदू निशाने पर आ गए। 18 दिसंबर से अब तक 7 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। स्टूडेंट लीडर इस हिंसा के लिए सेना और पुलिस को जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका दावा है कि इसके पीछे आर्मी का एक धड़ा है, जो सत्ता में आना चाहता है। सोर्स के मुताबिक, बांग्लादेशी आर्मी कहने के लिए तो निष्पक्ष है, लेकिन पिछले कुछ महीने से उसके यूनुस सरकार से रिश्ते अच्छे नहीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में पहली बार 12 फरवरी को चुनाव होना है। ये पहला ही मौका है, जब बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनाव नहीं लड़ेगी। इसलिए सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। चुनाव के लिए आर्मी ने अलग से इंटेलिजेंस यूनिट बनाई है। इससे मिले इंटेल के आधार पर चुनाव में सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। सेना और सरकार के बीच कब तल्खी बढ़ी…पिछले करीब डेढ़ साल की अंतरिम सरकार के दौरान ऐसे दो मौके आए, जब बांग्लादेश में सरकार और आर्मी के बीच कलह खुलकर सामने आ गई। 1. चुनाव की तारीख को लेकर सेना की सख्तीनवंबर के आखिर में सेना प्रमुख वकार-उज-जमान ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से दिसंबर में चुनाव कराने के लिए कहा था। उन्हें चेतावनी दी थी कि चुनाव पर कोई भी फैसला लेने से पहले सेना को भी जानकारी देनी होगी। उस वक्त अंतरिम सरकार का रुख चुनाव टालने का दिख रहा था। हालांकि सेना ने फरवरी से ज्यादा देर न करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद सरकार और सेना के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। 3. बांग्लादेश की सीमा पर कॉरिडोर बनाने का फैसलासेना प्रमुख ने अंतरिम सरकार को चेताया था कि बांग्लादेश की सीमा पर कोई भी फैसला लेने से पहले आर्मी से बात करना जरूरी है। दरअसल यूनुस सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा था कि UN के तहत प्रस्तावित रखाइन गलियारे से होकर गुजरने वाले एक कॉरिडोर पर सहमति बनी है। इसके तहत रोहिंग्या शरणार्थियों को मदद दी जाएगी। इस पर आर्मी का कहना था कि इससे सरहदी इलाकों में घुसपैठ बढ़ सकती है। अगर फैसला लेना भी है, तो बिना आर्मी से बात किए नहीं लिया जा सकता। 'यूनुस सरकार को हटाने की कोशिश, टारगेट किलिंग के पीछे सेना'बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर हमने NCP (छात्रों की पार्टी) में इंटरनेशनल सेल के प्रमुख अलाउद्दीन मोहम्मद से बात की। वे दावा करते हैं कि आर्मी, यूनुस सरकार को हटाने की कोशिश कर रही है। अलाउद्दीन कहते हैं, ‘बांग्लादेश में हो रही टारगेटेड पॉलिटिकल किलिंग और हिंसा की कुछ घटनाओं के पीछे आर्मी का एक धड़ा है। एजेंसियां और आर्मी मिलकर ये हिंसा करवा रही हैं ताकि चुनाव न हो सकें।‘ स्टूडेंट लीडर हादी की हत्या को लेकर अलाउद्दीन कहते हैं, ‘पुलिस और आर्मी अपना काम नहीं कर रही है। राजधानी ढाका की सड़कों पर अगर पुलिस कुछ नहीं कर सकी, तो ये चौंकाने वाली बात है। अगर पुलिस हम स्टूडेंट्स को ही बता देती कि ऐसा कुछ हो रहा है, तो हम ये हिंसा रुकवा सकते थे। सब कुछ ऐसे अचानक होना चौंकाने वाला है।‘ बांग्लादेश में डॉ यूनुस की अंतरिम सरकार आर्मी का भरोसा नहीं जीत सकी है। अलाउद्दीन कहते हैं, ‘अंतरिम सरकार को चलाने के लिए पुलिस, ब्यूरोक्रेसी और आर्मी का सपोर्ट चाहिए होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। बांग्लादेश में फिलहाल 27 आर्मी जनरल कैद में हैं क्योंकि वे हसीना सरकार की राज्य प्रायोजित हिंसा का हिस्सा थे। चुनाव का ऐलान भी बिना अवामी लीग के ही कर दिया गया है।‘ ‘आर्मी नहीं चाहती कि नई राजनीतिक सरकार चुनकर आए। आर्मी का एक हिस्सा सरकार के साथ है, लेकिन एक धड़ा सरकार के साथ नहीं है।’ ‘अवाम के बीच आर्मी का भरोसा कमजोर पड़ा’बांग्लादेश के मौजूदा हालात और आर्मी की भूमिका को लेकर पॉलिटिकल एनालिस्ट सलाहउद्दीन शोएब चौधरी कहते हैं, ‘देश में तख्तापलट के बाद आर्मी चीफ वकार-उज-जमान ने कहा था कि सेना पर भरोसा रखिए। पिछले 18 महीनों में पूरे बांग्लादेश में तोड़फोड़ हुई, देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई। फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। बेरोजगारी बढ़ गई है। बांग्लादेश, पाकिस्तान के रास्ते पर चल रहा है। ऐसे में सेना ने भी लोगों के मन में अपना भरोसा खो दिया है।‘ ‘इसीलिए आर्मी तय समय में चुनाव कराकर चुनी हुई सरकार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. यूनुस लंबे वक्त तक सत्ता में रहना चाहते थे, लेकिन आर्मी ने उन पर नकेल कसी है। इसे लेकर आर्मी और सरकार के बीच भी खटास बढ़ी है। आर्मी में हमारे सोर्स बताते हैं कि आर्मी और अंतरिम सरकार के बीच कम्युनिकेशन चैनल भी ठीक से काम नहीं कर रहा है।‘ ‘पाकिस्तानी ISI ने हैंडलर्स के जरिए हिंसा करवाई’बांग्लादेश में हुई हिंसा को लेकर सलाहउद्दीन कहते हैं, ‘यहां हुई हादी की हत्या के बाद पाकिस्तान की ISI ने अपने हैंडलर्स से ये फैलाना शुरू कर दिया कि ये हत्या भारत ने करवाई है।’ ’पिछले साल हुए तख्तापलट के बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश में फिर से एक्टिविटी बढ़ाई है। आर्मी के अंदर जमात का जो धड़ा है, वो पाकिस्तान के इशारे पर काम करता है। पाकिस्तान फिर से बांग्लादेश में कट्टरपंथ को बढ़ावा देना चाहता है और हिंदू मुक्त पूर्वी पाकिस्तान बनाना चाहता है।’ बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों ही हत्या पर आर्मी चीफ चुप क्यों?बांग्लादेश में छात्रों की पार्टी NCP बहुत समय से BNP के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ना चाहती थी। हालांकि अंदरूनी सोर्स के मुताबिक, BNP से उन्हें पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला। इसलिए NCP ने जमात के साथ गठबंधन का फैसला किया, लेकिन जमात के साथ गठबंधन करते तो NCP में कलह मच गई। आर्मी में भी अफसरों का एक धड़ा है जो जमात-ए-इस्लामी का समर्थक रहा है, वो सेना के अंदर जमात के लिए गुटबंदी करता है। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर सेना की चुप्पी पर सलाहउद्दीन कहते हैं, ‘यूनुस सरकार ने आर्मी चीफ और सीनियर जनरल को केस करने की धमकी देकर डरा दिया है। कई आर्मी अफसरों पर पहले से मुकदमे चल रहे हैं। इसलिए आर्मी भी अंतरिम सरकार के साथ रिश्ते अच्छे रखना चाहती है। आर्मी के अंदर करीब 40% लोग कट्टर सोच वाले हैं। ऐसे में आर्मी चीफ के पास फैसला लेने के लिए कोई पावर नहीं है।’ ‘हिंदुओं के घरों और मंदिरों में आग लगाई जा रही है। देश के लोग खौफ के माहौल में जीने को मजबूर हैं। इन सबके दोषी खुद आर्मी चीफ हैं और इन घटनाओं पर चुप्पी साधे हैं, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।‘ बांग्लादेश में हो रही हिंसा पर आर्मी ने क्या कहाबांग्लादेश में हिंसा और उठापटक की खबरों को लेकर हमने बांग्लादेशी आर्मी के ऑफिशियल स्पोक्सपर्सन से बात करने की कोशिश की, लेकिन वे राजी नहीं हुए। फिर हमने आर्मी में अपने सोर्सेज के जरिए अंदर हो रहे कामकाज की जानकारी ली। सोर्स ने बताया कि चुनाव होने तक आर्मी को अलर्ट पर रखा गया है। आर्मी सीधे तौर पर किसी भी तरह के ऑपरेशन का हिस्सा नहीं है, लेकिन वो इंटेल जुटाकर चुनाव की मॉनिटरिंग कर रही है। म्यांमार और भारत के बॉर्डर पर सख्ती बढ़ा दी गई है। चुनाव तक यही व्यवस्था रहने की उम्मीद है। सोर्स बताते हैं कि बांग्लादेश में जिस तरह से अंतरिम सरकार और सेना के बीच तल्खी बढ़ी है। इस स्थिति में चुनाव के बाद पूर्ण बहुमत ना मिलने पर आर्मी का एक धड़ा तख्तापलट कर सैन्य सरकार भी बना सकता है। हालांकि व्यावहारिक तौर पर अभी इसकी उम्मीद कम है क्योंकि सेना ऐसा करके जनता का भरोसा नहीं खोना चाहेगी। ‘आर्मी में एक तबका जो राजनीति में दखल की कोशिश कर रहा’इसके बाद हमने इंटरनेशनल डिफेंस एक्सपर्ट रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी से बाद की। वे बांग्लादेशी सेना के कामकाज के तरीके को करीब से जानते हैं। सर्विस में रहते हुए वे बांग्लादेश की सेना के साथ जॉइंट एक्सरसाइज भी कर चुके हैं। संजय कहते हैं, ‘बांग्लादेश की सेना की ट्रेनिंग 1971 से पहले तक पाकिस्तान के तहत ही होती रही। इसलिए बांग्लादेश की आर्मी भी वैसी सी ट्रेनिंग से निकली है, जो सत्ता में आने की ख्वाहिश रखती है। अब भी आर्मी में एक तबका ऐसा है, जो बांग्लादेश की राजनीति में दखल देने की कोशिश करता है।’ ’बांग्लादेशी आर्मी में ये तबका जमात की सोच का समर्थक माना जाता है। आर्मी में भी एक्सट्रीमिस्ट सोच के लोग हैं, जो मौके-मौके पर कट्टरता को बढ़ावा देने और राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करते रहते हैं। बांग्लादेश के अंदर कुछ भी गलत हो रहा हो तो आर्मी कई बार न्यूट्रल रुख रखती है या पर्दे के पीछे से खेल करती है।’ ’बांग्लादेश की सेना में करीब 20-30% लोग ही कट्टरवादी सोच के हैं। ज्यादातर लोग अब भी बंगाली सोच वाले हैं। इसलिए बांग्लादेश में फौज की सोच और ट्रेनिंग बदल गई है, ये पूरी तरह से मानना सही नहीं होगा।’ ’बांग्लादेश के मौजूदा आर्मी चीफ सितंबर 2026 तक रिटायर हो जाएंगे। उनकी पत्नी शेख हसीना की बहन हैं। ऐसे में मौजूदा आर्मी चीफ के भी शेख हसीना से अच्छे संबंध रहे हैं। फौज ने अभी तक खुद को सीधे राजनीति में दखल देने से दूर रखा है। आर्मी भी फिलहाल चाहती है कि एक बार देश में चुनाव हो जाएं और अवाम क्या चाहती है, वो पता चल जाए।’ ’अगर चुनाव ठीक से नहीं हो पाते हैं तो फिर आर्मी की दखलंदाजी बढ़ सकती है। अभी सीधे तख्तापलट करने से आर्मी बच रही है, क्योंकि उन्हें अपने ही लोगों पर गोली चलानी पड़ सकती है। इससे फौज की बदनामी हो सकती है। फौज मैच्योरिटी के साथ अपनी जिम्मेदारी अदा कर रही है, लेकिन भविष्य में क्या होगा ये नहीं कहा जा सकता।’....................... ये खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ल, पश्चिम बंगाल तक असर 18 दिसंबर 2025, रात करीब 9 बजे का वक्त था। बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में भीड़ ने गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू दास को पकड़ लिया। ईशनिंदा का इल्जाम लगाकर भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद दीपू के शव को फैक्‍ट्री से कुछ दूर ले गए और आग लगा दी। उस दिन से अब तक बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों में 6 हिंदुओं की हत्या हुई है। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 16 Jan 2026 4:54 am

DNA: पेंटागन में अचानक क्यों बढ़ी पिज्जा की डिमांड? ईरान जंग से क्या है बड़ा कनेक्शन

America To Attack On Iran: ईरान और अमेरिका के बीच जल्द ही भाषण जंग होने वाली है या फिर अमेरिका ईरान पर जल्द ही कोई बड़ा हमला कर सकता है. इसको लेकर कई संकेत देखने को मिले हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 11:32 pm

क्या अमेरिका ही खत्म कराएंगा यूक्रेन युद्ध, रूस ने क्यों कहा ट्रंप से बातचीत जारी रखना जरूरी; क्या है मॉस्को का अगला प्लान?

रूस ने कहा है कि यूक्रेन के मसले पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखना जरूरी है. मॉस्को की ओर से बयान ऐसे समय पर आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों कहा था कि रूस किसी समझौते के लिए तैयार हैं, जबकि यूक्रेन उतना तैयार नजर नहीं आता.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 11:07 pm

आखिर क्या चाहता है अमेरिका! ट्रंप-मचाडो की बैठक से पहले US की बड़ी कार्रवाई, वेनेजुएला का एक और टैंकर जब्त

अमेरिका ने एक बार फिर वेनेजुएला से जुड़े तेल टैंकर वाले जहाज को जब्त किया है. अमेरिकी सेना की ओर से इस कार्रवाई को अंजाम दियाय गया है. अमेरिका की ओर से जब्त किया गया यह छठा जहाज है.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 10:39 pm

ईरान के साथ जंग नहीं चाहता अमेरिका? ट्रंप की धमकी के बाद आया बड़ा अपडेट, युद्ध से क्यों पीछे हट रहे सैनिक

US Army Not Ready For War With Iran: ईरान में विरोध प्रदर्शन के बीच ट्रंप ने अमेरिकी सैनिकों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने ऐसे एक्शन प्लान की डिमांड रखी है, जिसमें एक ही स्ट्राइक में ईरान के मामले का समाधान हो सके.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 10:27 pm

पहले मारी गोली फिर मांगी कीमत... क्या है ईरान की 'बुलेट फीस', जिसके बिना परिवारों को नहीं मिल रहे प्रदर्शनकारियों के शव

Iran Protest Bullet Fee: ईरान की राजधानी तेहरान में प्रदर्सन के दौरान मारे गए प्रदर्शनकारियों का शव तब तक उनके परिवारों को नहीं दिया जा रहा जब तक कि वे बुलेट फीस न भर दें.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 8:11 pm

Donald Trump: यूक्रेन-रूस वॉर का होगा The End? जेलेंस्की से मिलने जा रहे ट्रंप, पुतिन को लेकर किया बड़ा दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक मंच पर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे. हालांकि, एक साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध समाप्त कराने में जेलेंस्की कम इंटरेस्ट दिखा रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 4:59 pm

'क्या पुरुष भी हो सकते हैं प्रेग्नेंट?' अमेरिकी सीनेट में डॉक्टर से पूछा गया सवाल, जवाब ने दुनिया को कर दिया दंग

Men Pregnant News in Hindi: क्या पुरुष भी महिला की तरह प्रेग्नेंट हो सकते हैं? अमेरिकी सीनेट में भारतीय मूल की एक डॉक्टर से यह अजब सवाल पूछा गया. लेकिन उनका जवाब और भी कूटनीतिक था. जिससे सभी सीनेटर्स चुप रह गए.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 4:20 pm

ईरान में बढ़ते संकट के बीच भारत की एडवाइजरी, नागरिकों से तुरंत निकलने की अपील; 2000 कश्मीरी छात्र फंसे

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एक विस्तृत एडवाइजरी जारी कर छात्रों, पर्यटकों, कारोबारियों और धार्मिक यात्रा पर गए भारतीयों से उपलब्ध साधनों के जरिए जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलने का आग्रह किया है।

देशबन्धु 15 Jan 2026 4:18 pm

गायक जुबिन गर्ग की मौत को लेकर सिंगापुर में अदालत में बड़ा खुलासा, सामने आई यह बात

मामले के मुख्य जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि जुबिन गर्ग उस दिन एक निजी नौका पर करीब 20 लोगों के साथ मौजूद थे। इनमें उनके दोस्त और सहकर्मी शामिल थे। सभी लोग लाजरस द्वीप के पास समुद्र में समय बिता रहे थे।

देशबन्धु 15 Jan 2026 12:29 pm

ट्रंप तो फिर बम बरसा देंगे, पर ईरानी मिसाइलें कहां तक पहुंच पाएंगी? ये 8 टारगेट निशाने पर

अमेरिका तो 37 घंटे बॉम्बर उड़ाकर ईरान पर हमला कर सकता है लेकिन सवाल यह है कि जिस तरह से तेहरान जवाबी कार्रवाई की बात कर रहा है क्या उसकी मिसाइलें अमेरिका पहुंच पाएंगी? इसे समझने के लिए दुनिया का मैप देखना होगा. ईरान की लोकेशन और अमेरिका का मेनलैंड देखिए.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 12:20 pm

कनाडा की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी का मास्टरमाइंड भारत में छिपा! प्रीत पनेसर के प्रत्यर्पण की मांग, हवाला और फिल्म इंडस्ट्री तक फैला खेल

Canada Gold Heist Preet Panesar: कनाडा में हुए 20 मिलियन डॉलर के गोल्ड चोरी मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. कनाडा सरकार ने इस केस के मुख्य आरोपी प्रीत पनेसर को भारत से वापस लाने के लिए आधिकारिक तौर पर प्रत्यर्पण की मांग की है. यह चोरी कनाडा की अब तक की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी बताई जा रही है.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 11:39 am

ईरान में नहीं होगी इरफान सुल्तानी को फांसी? सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर ट्रंप बोले-क्या करूंगा वो नहीं बताऊंगा

ईरान में खामेनेई सरकार का तख्तापलट को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन को दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हैं। ईरान सरकार ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सरकार सख्ती बरतने के मूड में दिख रही है। सरकार ने 8 जनवरी को गिरफ्तार किए गए 26 साल के प्रदर्शनकारी को फांसी पर लटकाने का फरमान सुनाया था। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि उन्हें भरोसेमंद जानकारी मिली है कि ईरान में हत्याएं रोक दी गई हैं और जिन फांसियों को लेकर आशंका जताई जा रही थी, वे अब नहीं होंगी।

देशबन्धु 15 Jan 2026 11:20 am

ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौत पर जी-7 देशों ने चिंता जताई, तेहरान को कड़ी चेतावनी

सात बड़ी शक्तियों के संगठन जी-7 के विदेश मंत्रियों और यूरोपियन यूनियन के उच्च अधिकारियों ने ईरान के हालातों पर चिंता व्यक्त की है। इस दौरान, जी-7 देशों ने ईरानी अधिकारियों की ओर से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर किए जा रहे अत्याचार की निंदा करते हुए कहा कि अगर विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई जारी रहती है तो वे तेहरान के खिलाफ और कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

देशबन्धु 15 Jan 2026 11:16 am

अमेरिका में पाकिस्तानी नागरिकों की एंट्री बैन, ट्रंप के फैसले से क्यों खुश हुए इंडियन अमेरिकन लीडर? बताई वजह

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग रोक दिया है. जिसकी वजह से कई देश चिंतित हैं. जबकि राष्ट्रपति के इस फैसले का इंडियन अमेरिकन लीडर ने स्वागत किया है.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 10:05 am

लैंड ऑफ सिल्वर कहलाता है ये देश, कभी यहां बहती थी चांदी की नदी; नाम जानकर उड़ जाएंगे होश

Argentina Land of Silver: दक्षिण अमेरिका में स्थित अर्जेंटीना को दुनिया भर में लैंड ऑफ सिल्वर यानी चांदी की धरती कहा जाता है. इसके नाम से लेकर इतिहास तक हर जगह चांदी की कहानियों की झलक मिलती है. आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 9:28 am

गाजा शांति योजना का दूसरा चरण अमेरिका ने किया शुरू

अमेरिका ने बुधवार को गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की

देशबन्धु 15 Jan 2026 9:22 am

तेहरान से दिल्ली आया फोन! ईरान में उथल-पुथल भारत के लिए ठीक नहीं, चीन-पाक को कैसे फायदा होगा?

शिया बहुल ईरान अब तक सुन्नी आतंकियों के हमले झेलता रहा है, अगर वहां सुन्नी या अमेरिका समर्थक सरकार आती है तो भारत के लिए भी चीजें बदल सकती हैं. पाकिस्तान को क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने में मदद मिलेगी क्योंकि मौजूदा सरकार उसके प्रॉपगेंडा में 'हां में हां' नहीं मिलाती है. इस बीच, तेहरान से एक फोन दिल्ली क्यों आया?

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 9:20 am

'वही गलती न दोहराएं, इस बार निशाना नहीं चूकेगा...', बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दी ट्रंप को बड़ी चेतावनी

Iran America Tension: ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि मेरा मैसेज है कि आप वही गलती दोबारा न करें जो आपने जून में की थी. इसके अलावा क्या कुछ कहा जानते हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 8:14 am

ईरान प्रदर्शन के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- ‘रुक रही हैं हत्याएं, अब नहीं दी जाएगी किसी को फांसी’

Trump Iran Statement: ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि ईरान में हत्याएं अब रुक रही हैं. फिलहाल किसी भी तरह की फांसी देने की कोई योजना नहीं है. यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 15 Jan 2026 6:39 am

ब्लैकबोर्ड-राह चलते लोग कमर में हाथ डाल देते हैं:लड़के पूछते हैं- चिंकी पूरी रात का कितना लेती हो, आंखों की पलकें खींचकर बोलते हैं- ‘ऐ मोमो’

एक बार मैं दिल्ली में अपने दोस्तों के साथ एक कॉमन फ्रेंड के घर पार्टी में गया था। कुछ देर में एक लड़का मेरे पास आया और पूछा- ‘तुम नेपाली हो?’ मैंने बोला- ‘नहीं, मैं नॉर्थ ईस्ट से हूं।’ ये सुनते ही कहने लगा- ‘अच्छा… तुम लोग तो कुत्ता, बिल्ली, बंदर सब खाते हो न?’ उसकी बात सुनते ही वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे… मैं कोई जवाब नहीं दे पाया। कुछ देर बाद फिर एक लड़के ने पूछा- ‘तुम्हारे यहां तो ओपन सेक्स होता है न? लड़कियां होटल में काम करती हैं। कोई जान पहचान वाली लड़की हो तो मिलवाओ। वो तो मसाज भी अच्छा करती हैं। पूरी रात का कितना पैसा लेती हैं?’ वहां मौजूद सभी लोग दिलचस्पी से ये बातें सुन रहे थे। ये कोई पहली बार नहीं था, इसके पहले भी मेरी कई महिला दोस्तों के साथ ऐसा हो चुका है। दिल्ली के राह चलते लोग लड़कियों की कमर में हाथ डालकर पूछते हैं- ’कितने में चलोगी चिंकी?’ ब्लैकबोर्ड में इस बार स्याह कहानी नॉर्थ ईस्ट के लोगों की जो पढ़ाई और नौकरी के लिए अपने घर से दूर, दूसरे शहरों में रह रहे हैं और शक्ल-सूरत की वजह से नस्लभेद का शिकार होते हैं। त्रिपुरा के जॉर्ज चकमा 2014 में दिल्ली आए थे। फिलहाल, इंटरनेशनल स्टडीज में पीएचडी के चौथे साल के छात्र हैं। जॉर्ज बताते हैं कि ‘मेरे गांव में अब भी आंदोलन चल रहा है। उत्तराखंड में त्रिपुरा के एंजेल की हत्या के बाद से मेरे पेरेंट्स परेशान रहते हैं। हर रोज मेरी सुरक्षा को लेकर फोन करते हैं और कहते हैं कि सिर्फ जरूरी काम के लिए घर से बाहर निकलो। आखिर हम लोगों ने ऐसा क्या गुनाह किया है कि घर से बाहर न निकलें। यहां पढ़ने आए हैं और पढ़ना कोई गुनाह तो नहीं है?’ क्या एंजेल की तरह आपके साथ भी कभी नस्लीय हिंसा हुई? ‘हम नॉर्थ ईस्ट वालों के साथ ये सब बहुत सलीके से होता है। ऑटो वाले शक्ल देखकर ज्यादा पैसे मांगते हैं। किराए का कमरा लेने जाओ तो सबसे पहले पूछते हैं- क्या-क्या खाते हो? हमारे घर में कुत्ता-बिल्ली तो नहीं बनाओगे? पार्टी करते हो? ड्रग्स लेते हो? आखिर में पांच हजार का कमरा दस हजार में देते हैं। दुकानदार भी हमें महंगा सामान देते हैं।’ जॉर्ज खीझते हुए कहते हैं- ‘बार-बार ये साबित करना पड़ता है कि हम भारतीय हैं। एक बार मैं ताजमहल देखने गया। वहां आधार कार्ड दिखाने पर भी स्टाफ को यकीन नहीं हुआ कि मैं भारतीय हूं। वे बार-बार पूछते रहे- नेपाल से हो? वो मेरी बात पर यकीन ही नहीं कर रहे थे। विदेशियों की टिकट अलग होती है, इसलिए वो चाहते थे कि मैं ज्यादा पैसे दूं।' अपनी यूनिवर्सिटी के बारे में बताते हुए जॉर्ज कहते हैं कि हमारी यूनिवर्सिटी में भी लोग नॉर्थ-ईस्ट के बारे में नहीं जानते। एक बार किसी ने पूछा कहां से हो? मैंने कहा त्रिपुरा से हूं तो कहने लगे वही त्रिपुरा जो साउथ में है। जब मैंने बताया नॉर्थ ईस्ट तो कहने लगे तुम्हारे यहां बर्फ पड़ती है क्या? क्या खाते हो तुम लोग? वीडियो में देखा है कि तुम लोग कुत्ता, बंदर, यहां तक कि इंसान भी खा लेते हो।’ आप सोचिए ये सवाल पीएचडी स्टूडेंट पूछते हैं। कुछ देर चुप रहकर जॉर्ज कहते हैं कि सबसे ज्यादा तकलीफदेह बातें तो वो होती हैं जो हमारे यहां की लड़कियों के बारे में कही जाती हैं। लड़कों को लगता है कि नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां कुछ भी करने को राजी हो जाती हैं। उनके चरित्र पर सवाल उठाते हैं। रेट पूछते हैं, छूते हैं, बिना पूछे कमरे में घुस जाते हैं। यह आम है।’ वे कहते हैं, ‘हमारी अंग्रेजी और फैशन सेंस अच्छा होता है, इसलिए हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम मिलता है। बस इसलिए लोग मान लेते हैं कि हम होटल में ही काम करते हैं और वे हमें ‘एग्जॉटिक’ समझते हैं।’ जॉर्ज से मिलने के बाद मैं दिल्ली में रह रहे मणिपुर के काकचिंग जिले के गांव सौरा के निवासी कबीर अहमद से मिलने पहुंची। कबीर के सामने मैंने जैसे ही नस्लीय हिंसा का जिक्र किया, वो दुखी होकर आपबीती सुनाने लगे। कबीर कहते हैं, ‘दिल्ली के महारानी बाग की बात है। एक शाम मैं अपने चचेरे भाई के साथ घर जा रहा था। अचानक एक कुत्ते का पिल्ला हमारे पीछे-पीछे चलने लगा। हमने घर पहुंचकर जल्दी से दरवाजा बंद कर लिया। वो हमारे दरवाजे पर ही बैठकर रोने लगा और दरवाजे पर पंजे मारता रहा। उसकी आवाज सुनकर कुछ ही देर में पूरा मोहल्ला हमारे दरवाजे पर खड़ा हो गया। उन्हें शक हुआ कि हम कुत्ता खाते हैं। हम बार-बार कहते रहे कि कुत्ता नहीं खाते हैं, लेकिन वो लोग चिल्लाते रहे कि तुम नॉर्थ ईस्ट के हो, झूठ बोल रहे हो।’ जब मैंने बताया, ‘मैं मुस्लिम हूं। मुसलमान कुत्ता नहीं खाते। तब जाकर भीड़ शांत हुई, लेकिन जाते हुए वो लोग मुझे धमकी देकर गए कि हमारे मोहल्ले में ये सब मत करना, वरना बचोगे नहीं।’ कबीर कहते हैं, ‘कुछ महीनों बाद मैंने वह घर छोड़ दिया।’ कबीर अहमद 2013 में मणिपुर से दिल्ली आए। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद वह अब एमए कर रहे हैं। उनका परिवार बॉर्डर इलाके में रहता है और पिता मणिपुर राइफल्स में हैं। कबीर कहते हैं, ‘दिल्ली आते वक्त पापा ने कहा था- अगर कभी बहस हो जाए, तो पहले सुरक्षित निकलने का रास्ता देखना।’ वह कहते हैं, ‘मेरी मुश्किल दोहरी है। मैं मुस्लिम भी हूं और नॉर्थ ईस्ट से भी। कई बार अपना नाम बताने से डर लगता है।’ कबीर के मुताबिक, उन्हें अंदाजा नहीं था कि राजधानी में उन्हें ‘चिंकी’, ‘मोमो’, ‘नेपाली’, ‘नूडल्स’ और ‘चींचींचूंचूं’ जैसे शब्दों से पुकारा जाएगा। उनके अनुसार, दिल्ली में रह रहे करीब 30 हजार नॉर्थ-ईस्ट के लोग रोज नस्लवादी भेदभाव झेलते हैं। दिल्ली में किस तरह की दिक्कतें आती हैं? ‘दिक्कत कहां नहीं है। कमरा जल्दी नहीं मिलता और अगर मिल भी जाए, तो हमारी शक्ल देखकर पांच हजार का कमरा दस हजार में दिया जाता है।’ वह महारानी बाग का एक अनुभव बताते हैं, ‘किराए का कमरा पूछने गया था। कुर्ता-पायजामा पहना था। एक घर की घंटी बजाते ही सामने वाले ने चिल्लाकर कहा- इस गली में क्यों आए हो? दोबारा आए तो काटकर फेंक दूंगा।’ कबीर कहते हैं, ‘जब तक घर के अंदर या अपने नॉर्थ ईस्ट के लोगों के बीच हूं, सब ठीक रहता है। बाहर निकलते ही बेइज्जती शुरू हो जाती है।’ वह बताते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हिंदी समझ नहीं आती थी। ‘टीचर हिंदी में पढ़ाती थीं, इसलिए घर आकर कजिन से दोबारा पढ़ता था।’ डीयू के दिनों को याद करते हुए कबीर अफसोस भरे लहजे में कहते हैं, ‘ग्रेजुएशन के दौरान एक दिन मेरे ही क्लासमेट ने कहा- ‘ऐ मोमो, चिंकी। तुम लोग तो कुत्ता-बंदर सब खा लेते हो न?’ उस दिन बहुत धक्का लगा। उम्मीद नहीं थी कि दोस्त भी ऐसा बोलेगा।’ कबीर बताते हैं कि नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं को लेकर भी भद्दी टिप्पणियां आम हैं। ‘पूछते हैं- तुम्हारे यहां फ्री सेक्स होता है न? कहते हैं हमारी लड़कियां सेक्स वर्कर होती हैं। उन्हें नहीं पता कि मणिपुर महिला-प्रधान समाज है, जहां लड़कियां दिन-रात सुरक्षित घूम सकती हैं।’ वह लाजपत नगर की एक घटना याद करते हैं। ‘मैं एक दोस्त और एक महिला मित्र के साथ मार्केट में था। एक आदमी ने मेरी दोस्त को छेड़ते हुए कहा-‘ऐ चाइनीज, चिंकचांकमाऊंमाऊं।’ दोस्त ने रोका तो उसने थप्पड़ मार दिया। मैंने विरोध किया तो भीड़ जमा हो गई और हमें चोर-चोर कहकर दौड़ाने लगी। उस दिन किसी तरह जान बचाई।’ कबीर लाजपत नगर की एक और घटना बताते हैं। ‘एक दिन मैं दोस्त के साथ मार्केट जा रहा था। एक कम उम्र का लड़का कपड़े बेच रहा था। हमें देखकर चिल्लाने लगा- ‘ऐ मोमो, कपड़ा खरीदेगा क्या? ऐ मोमो, मोमो?’ मुझे गुस्सा आ गया। मैंने पूछा- किसे मोमो बोल रहा है? बात बढ़ी तो भीड़ जमा हो गई। हालात बिगड़ते देख मैं वहां से निकल गया।’ कबीर कहते हैं, ‘कुछ दिन पहले विजयनगर में नॉर्थ ईस्ट के एक दुकानदार को सिर्फ इस शक में पीट दिया गया कि उसकी दुकान में बीफ है। न जांच हुई, न कोई बात सुनी गई- बस भीड़ टूट पड़ी।’ ‘यहां हमारी पहचान ही कई बार हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।’ कबीर कहते हैं, ‘यह तो कुछ भी नहीं है। यहां हालात ऐसे हैं कि किसी कुत्ते को कुछ कह दो, तो जान पर बन आती है।’ ‘एक दिन मेरा भाई पार्क में टहल रहा था। एक आदमी अपने कुत्ते को घुमा रहा था। कुत्ता उसे काटने दौड़ा, तो भाई ने डर के मारे पांव से भगाया। उस पर कुत्ते का मालिक भड़क गया। उसने लोगों को इकट्ठा किया और भाई की पिटाई कर दी। उसी दिन उसे मोतीबाग का घर छोड़ना पड़ा।’ कबीर बताते हैं, ‘मैं एक जगह नौकरी करता हूं। हाल ही में ऑफिस ने पूरे दिन के लिए टैक्सी दी थी। ड्राइवर को बुलाया तो उसने कहा कि उसे सिर्फ एक जगह रुकने का आदेश है। मैंने कहा- ऑफिस ने पूरे दिन का भुगतान किया है, आप ऑफिस से बात कर लीजिए।’ कबीर के मुताबिक, ड्राइवर ने फोन पर ही उन पर चिल्लाते हुए कहा- ‘यह चिंकी, चाउमिन, नेपाली क्या बोल रहा है?’ फोन रखने के बाद उसने कहा, ‘मैं हरियाणा से हूं।’ उस दिन उससे काफी बहस हुई। कबीर बताते हैं, ‘मोहल्ले में तो कुछ लोगों की हिम्मत इतनी होती है कि वे हमारी आंखों की पलकें खींचकर कहते हैं- 'ऐ छोटी आंख, चिंकी इधर आ।' तब लगता है कि हमारी पहचान ही उनके लिए मजाक बन गई है।’ वह हाल की एक घटना का जिक्र करते हैं- ‘देहरादून में नस्लीय टिप्पणी के बाद त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। उसके पिता बीएसएफ में हैं। सोचिए, एक जवान के बेटे के साथ क्या हुआ?’ इस घटना के बाद उनके माता-पिता डर गए। कबीर बताते हैं, ‘पापा का फोन आया- कहां हो? घर लौट आओ। दिल्ली में रहने की जरूरत नहीं है। डर लगता है कि कहीं तुम्हें भी कुछ न हो जाए।’ सोचिए, हमारे माता-पिता किस डर में जीते हैं। इन बातों का आप पर क्या असर हुआ? कबीर कहते हैं, ‘लोग मुझे 'मोमो' कहकर चिढ़ाते थे। मुझे मोमोज पसंद थे, लेकिन अब खाना छोड़ दिया है। लगता है कोई ठेले के पास देख लेगा, तो फिर मजाक उड़ाएगा।’ हाथ जोड़कर वह कहते हैं, ‘हम कभी किसी से यह नहीं पूछते कि वह क्या खाता है। बस यही चाहते हैं कि हमारे खाने का भी सम्मान किया जाए।’ आंखों में आंसू भरे हुए कबीर पूछते हैं, ‘कहां है 'इंडिया एक'? मेरे पापा और भाई इस देश के लिए काम करते हैं, लेकिन यहां हमें अपनाया नहीं जाता।’ फिलहाल कबीर सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस की कोचिंग ले रहे हैं। क्या आप इस देश में स्वीकार किए गए हैं? वह कहते हैं, ‘मुझे शर्म आती है कि मुझे एक भारतीय के सामने खुद को भारतीय साबित करना पड़ रहा है। कई बार समझ नहीं आता- घर लौट जाऊं, खेत में काम करूं या कहां जाऊं। जितना भी कर लूं, यह देश हमें अपना नहीं मानता।’ क्या लगता है कि भारत आपका नहीं है? कबीर कुछ पल चुप रहते हैं, फिर कहते हैं, ‘अगर जवाब दूंगा, तो देशद्रोही कहलाऊंगा।’ थोड़ी देर बाद जोड़ते हैं, ‘घर के अंदर सब ठीक लगता है, लेकिन बाहर निकलते ही परेशानी शुरू हो जाती है। इसी डर से नॉर्थ ईस्ट के लोगों ने अपने संगठन बनाए हैं और हम एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।’ नॉर्थ ईस्ट से आई लड़कियों की मुश्किलें और भी ज्यादा हैं। 25 साल की सोजोम अरुणाचल प्रदेश के नेफ्रा जिले की हैं। 2023 में हायर स्टडीज के लिए जेएनयू आईं और फिलहाल दिल्ली के विजयनगर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। सोजोम कहती हैं, ‘मम्मी-पापा दोनों नौकरी करते हैं। मम्मी ने जेएनयू की पढ़ाई के बारे में सुना था, इसलिए मुझे यहां भेजा। दिल्ली आने के बाद मैं ज्यादातर जेएनयू परिसर तक ही सीमित रही। वहां लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, फिर भी कई बार लगता है कि मैं यहां की नहीं हूं।’ वह बताती हैं,‘एक दिन लाइब्रेरी में बैठी थी। मेरा एक क्लासमेट एक लड़की को लेकर गंदी बातें करने लगा। मैंने टोका और कहा कि मुझे ऐसी बातें सुननी पसंद नहीं। इस पर वह बोला- ‘मोमो, यहां से निकल।’ पहले लगा मजाक है, लेकिन उसने दोबारा वही कहा। मैं घबरा गई। जेएनयू ही वह जगह थी, जहां खुद को सुरक्षित समझती थी, और वहीं यह हुआ। उस रात कमरे में जाकर नींद नहीं आई। किताब खोली, फोन देखा, लेकिन दिमाग में बस ‘मोमो, मोमो’ गूंजता रहा। अगले दिन शिकायत करने की सोची। वाटर कूलर से पानी लेने गई तो वह भी वहीं मिला। मैंने कहा कि तुम्हारी चेयरपर्सन से शिकायत करने जा रही हूं। वह मेरे पीछे दौड़ा, मैं भाग रही थी। तभी एक साथी ने बीच-बचाव किया, तब मामला रुका। बाद में मैंने अपने कम्युनिटी के व्हाट्सएप ग्रुप में बताया। जवाब मिला-गलत हुआ है, लेकिन छोड़ दो। ‘नॉर्थ ईस्ट को मोमो’ कहे जाने की शिकायत कोई नहीं सुनता।’ सोजोम कहती हैं, ‘जब जेएनयू जैसी जगह पर यह हाल है, तो बाहर की स्थिति समझी जा सकती है। सड़क पर चलते वक्त हमेशा डर लगा रहता है कि कोई मुझे 'मोमो' या 'चिंकी' न कह दे। कुछ लोग कहते हैं कि 'मोमो' प्यार से बोला जाता है, लेकिन हमारे लिए यह नस्लभेदी शब्द है। अगर आप संवेदनशील हैं, तो कृपया इसे हमारे लिए इस्तेमाल न करें।’ क्या नॉर्थ ईस्ट वालों के लिए डबल मीनिंग बातें होती हैं? सोजोम कहती हैं,‘कुछ दिन पहले मेट्रो में दो लड़कों ने मेरी ओर देखकर कहा- 'येलो लाइन पर तो बहुत सारी चाइनीज और जापानी लड़कियां मिलती हैं।' मुझे पता था कि वे मुझे निशाना बना रहे हैं, लेकिन शिकायत का कोई सबूत नहीं था। यहां लड़कों को लगता है कि हमारा पहनावा अलग है, हम शॉर्ट स्कर्ट पहनते हैं, इसलिए हम सेक्स वर्कर हैं। वे कभी नॉर्थ ईस्ट जाकर देखें। वहां के लोग फैशनेबल भी हैं और पढ़े-लिखे भी। हो सकता है हमारा पहनावा अलग हो, लेकिन क्या कहीं लिखा है कि पढ़ाई के साथ फैशन नहीं हो सकता? हमें लगा था दिल्ली मेट्रो सिटी है, सब ठीक होगा, लेकिन हम गलत थे।’ क्लास में भी लोग अक्सर उल्टे-सीधे सवाल पूछते हैं, जैसे- 'तुम्हारे यहां फ्री सेक्स होता है?' वह कहती हैं, ‘लोग मेरे खाने को अजीब कहते हैं। अगर मैं दिल्ली आकर छोले-भटूरे, इडली-डोसा खा सकती हूं, तो मेरा खाना अजीब क्यों है? आपको नहीं खाना मत खाइए, लेकिन अजीब क्यों कहना?’ सोजोम बताती हैं,‘नस्लीय हमला सिर्फ सड़क पर नहीं, सोशल मीडिया पर भी होता है। कुछ महीने पहले राजनीतिक बहस के बाद एक लड़की ने मुझे डीएम में ‘मोमो’, ‘चिंकी’, ‘चाइनीज’ कहकर धमकी दी- 'रुको, सबक सिखाती हूं।' उसने मेरी 12–13 तस्वीरें अपलोड कर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। मैं बहुत डर गई। मां से कहा कि पुलिस में शिकायत करना चाहती हूं, लेकिन मां ने मना किया- डर था कि वह लड़की कुछ लड़कों के साथ मुझे नुकसान पहुंचा सकती है। मैं बस अपनी मां को परेशान नहीं करना चाहती। पढ़ाई के लिए आई हूं। कम से कम लोग नॉर्थ ईस्ट के उन लोगों को जानें, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना खून बहाया। क्या इन घटनाओं का आप पर मानसिक असर पड़ता है? सोजोम कहती हैं,‘जब कुछ गलत होता है, तो बार-बार वही बातें दिमाग में चलती हैं और परेशान करती हैं। खुद से कहती हूं- चलो, जाने दो। फोन देखती हूं, किताब खोलती हूं, फिर भी कई दिन किसी चीज में मन नहीं लगता। एंजेल चकमा की देहरादून में हत्या के बाद दोस्तों ने समझाया- बाहर ज्यादा मत बोलना, गलत चीजें नजरअंदाज करना। पेरेंट्स भी यही कहते हैं। लेकिन कई बार लगता है कि चीखूं- मैं भी भारतीय हूं। बेजवाड़ा कमेटी ने नस्लभेदी शब्दों का जिक्र किया, पर कौन मानता है? आज भी हमें ‘चींचींचूंचूं’ कहा जाता है। कार्रवाई कौन करेगा? पुलिस ने एंजेल चकमा मामले में कहा कि यह नस्लवाद नहीं था। हम शांतिप्रिय हैं, किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते, फिर भी बार-बार साबित करना पड़ता है कि हम इस देश के हैं।’ 1- ब्लैकबोर्ड-पापा को फांसी दिलाकर आत्महत्या कर लूंगी:कहते थे ब्राह्मण होकर नीच से शादी कैसे की, गोली मारकर बोले- अब मैं बहुत खुश हूं ‘हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-तलाक हुआ तो अनजान डोनर से स्पर्म लेकर मां बनी:विदेश ले जाकर पति ने घर से निकाला, बिना पति के महिलाओं की कहानियां मेरी चीख सुनकर पड़ोसी जमा हो गए। बिस्तर से उठी तो देखा- मेरी सास ही तौलिए से मेरा मुंह दबा रही थीं। वह जोर-जोर से कह रही थीं- तूने मेरे बेटे को खा लिया। तू मांगलिक है। कुलच्छन है। अब अपने बच्चे को लेकर यहां से भाग जा, नहीं तो तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगी। पूरी खबर यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 15 Jan 2026 5:02 am