अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा वार्ता बेनतीजा, ईरान परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध कायम, ट्रंप नाखुश
मध्यस्थता कर रहे ओमान ने बातचीत को “सकारात्मक” बताया है, लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूदा मतभेद दूर होने के स्पष्ट संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बरकरार है और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
दिल्ली में संसद भवन से करीब डेढ़ किमी दूर कदीमी मस्जिद है। करीब 114 साल पुरानी छोटी सी ये मस्जिद कृषि भवन के कैंपस में है। वक्फ की प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर्ड है। हाई सिक्योरिटी एरिया होने की वजह से आम लोग इसमें नहीं जा सकते, यहां ज्यादातर सरकारी कर्मचारी नमाज पढ़ते हैं। मस्जिद राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक 3 किमी एरिया के रिडेवलपमेंट वाले सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में आ रही है, इसलिए इसके हटाए जाने की आशंका है। सरकार ने इसके सुरक्षित रहने का भरोसा दिया है। फिर भी वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों को यकीन नहीं है, क्योंकि पहले भी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए तीन मजारें और एक मस्जिद तोड़ी जा चुकी है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण पथ पर आने वाली 6 मस्जिदों की हिफाजत के लिए सबसे पहले हाई कोर्ट जाने वाले एडवोकेट मशरूर खान से हमने पूछा कि क्या मस्जिदें सुरक्षित हैं? उन्होंने जवाब दिया, 'नहीं। इसीलिए तो कदीमी मस्जिद के बारे हमने खबरें पढ़ीं तो एक बार फिर कोर्ट के दिए भरोसे और भारत सरकार से लगाई उम्मीद डगमगाने लगी। हम इस मस्जिद से जुड़े कागजात इकट्ठे कर रहे हैं, ताकि अगर इसे गिराने की कोशिश की जाए, तो दावा ठोक सकें।' 1912 में लुटियन के बनाए नक्शे में कदीमी मस्जिद का जिक्रवक्फ बोर्ड में इन दिनों यही बातें हो रही हैं कि कहीं 6, मौलाना आजाद रोड (पुराना उपराष्ट्रपति भवन) पर बनी मस्जिद की तरह चुपचाप एक और मस्जिद ढहाने की तैयारी तो नहीं हो रही। वक्फ बोर्ड की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट मशरूर बताते हैं कि अब तक हमारे पास कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। छन-छनकर बोर्ड के पास आ रही खबरों से शक तो हो ही रहा है। मशरूर कहते हैं, 'कृषि भवन 1957 में बना था। कदीमी मस्जिद उससे बहुत पहले से है। 1912 में जब ब्रिटिश आर्किटेक्ट लुटियन एडवर्ड दिल्ली को नए सिरे से डिजाइन कर रहे थे, उस वक्त के नक्शे में भी ये मस्जिद है। इसे उस वक्त बनाया नहीं गया, क्योंकि ये पहले से मौजूद थी। इसलिए इसे बिना छेड़े दिल्ली को डिजाइन किया गया।’ ‘ये मस्जिद सिर्फ इस्लामिक ढांचा नहीं, हैरिटेज प्रॉपर्टी है। ब्रिटिश सरकार ने लुटियंस दिल्ली बनाई, तब भी इसे नहीं गिराया। पहली बार भारत सरकार बनी, तब भी ये इमारत सुरक्षित रही। इससे अगर छेड़छाड़ होगी, तो हम कोर्ट जाएंगे।' एडवोकेट मशरूर 1912 में एडविन लुटियन का बनाया नक्शा दिखाते हैं। इसमें दो सर्किल जरिए कहते हैं, 'बड़े सर्किल में सुनहरी मस्जिद है। इसे भी तोड़ा जाना था, लेकिन हमने इसे बचा लिया। हमें सही वक्त पर उसे गिराए जाने की सूचना मिल गई थी। हम कोर्ट चले गए और कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया। दूसरे छोटे सर्किल में कदीमी मस्जिद है। ये नक्शा सबूत है कि ये दोनों मस्जिदें 1912 से पहले की हैं।' ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की शुरुआत में पिटीशन डाली’एडवोकेट मशरूर कहते हैं, ‘1911 में ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली को राजधानी बनाने का फैसला लिया, तो 1911 में सरकारी इमारतें और संसद भवन बनाने के लिए जमीनें खरीदीं। फिर एडवर्ड लुटियन ने पूरी दिल्ली डिजाइन की। उस वक्त कदीमी मस्जिद के अलावा बाकी 5 मस्जिदें भी मौजूद थीं। अभी जहां कृषि भवन है, उसके पास तब रायसीना गांव हुआ करता था। शायद इस मस्जिद में गांव के लोग आते होंगे।’ ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट शुरू हुआ, तब हमने 2021-22 में हाईकोर्ट में पहले ही पिटीशन डाल दी थी, ताकि रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नक्शे में आने वाली इन 6 मस्जिदों को सुरक्षित कर सकें। कोर्ट ने सरकार से पूछा तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि फिलहाल इन्हें ध्वस्त करने की योजना नहीं है। कोर्ट ने भी हमें भरोसा दिया कि मस्जिदें सुरक्षित रहेंगी। अगर आपको इस प्रोजेक्ट के दौरान कुछ आशंका लगे, तो आप वक्फ कोर्ट जा सकते हैं।’ ‘कोर्ट के भरोसे के बाद भी एक मस्जिद चुपचाप हटा दी गई। अब महसूस होता है कि सरकारी वकील के जवाब में जो फिलहाल शब्द था, शायद वही भ्रमित करने वाला था।’ सरकारी वकील ने आपको भ्रमित किया? एडवोकेट मशरूर कहते हैं, ‘हां। उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद हटा दी गई, इससे तो यही लगता है। न कोई सूचना, न कॉन्टैक्ट किया गया। सरकारी वकील का जवाब टालमटोल वाला था। कोई इतनी बड़ी योजना का डिजाइन बनाता है, तो सब कुछ पहले ही तय हो जाता है। इसका मतलब है कि ये तय था कि उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद को गिराया जाएगा।’ ‘इतनी बड़ी योजनाओं में रोज फेरबदल नहीं होता, मतलब हमें बरगलाया गया। अब इसी तरह से कृषि भवन के परिसर में बनी मस्जिद को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। हमें जो अलग-अलग सोर्सेज से सूचना मिल रही है कि कृषि भवन और शास्त्री भवन को गिराया जाना है। टेंडर जारी कर दिया गया है। इस टेंडर के लिए जो नक्शा है, उसमें मस्जिद नहीं है।’ ‘हमने सुनहरी बाग मस्जिद बचा ली, क्योंकि इसमें ट्रांसपेरेंसी बरती गई। नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने 2023 में सूचना जारी कि इस मस्जिद की वजह से ट्रैफिक बहुत होता है। इसलिए इसे हटाने की योजना हैं। हमने तुरंत एतराज जताया और कोर्ट गए। हमने उसके हेरिटेज प्रॉपर्टी और वक्फ प्रॉपर्टी होने के सारे सबूत दिखाए। हमारा पक्ष सही था, कोर्ट ने इसे माना। आदेश दिया और मस्जिद बच गई। कम से कम इस मस्जिद को चुपचाप नहीं गिराया गया। प्रोसेस को फॉलो किया गया।' सुनहरी बाग मस्जिद को NDMC ने दिया था नोटिसकरीब 174 साल पुरानी सुनहरी बाग मस्जिद 125 वर्गमीटर जगह में बनी है। मस्जिद एक गोलचक्कर पर है, जहां मौलाना आजाद मार्ग, मोतीलाल नेहरू मार्ग, सुनहरी बाग मार्ग और रफी मार्ग मिलते हैं। मस्जिद के एक तरफ उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन का गेट और गवर्नमेंट ऑफिस हैं। सुनहरी बाग मस्जिद ऐतिहासिक स्मारक ग्रेड-3 लिस्ट में है और वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है। ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली नगर निगम, यानी NDMC को एक रिपोर्ट भेजी है कि विदेशियों, VIP और अधिकारियों का इस गोलचक्कर से आना-जाना होता है। सुनहरी मस्जिद की वजह से उन्हें जाम में फंसना पड़ रहा है। इसके बाद NDMC ने नोटिस जारी कर पूछा था कि क्या सुनहरी मस्जिद को हटाकर ट्रैफिक में सुधार किया जा सकता है। एक मस्जिद ही नहीं, तीन मजारें भी हटाई गईंएडवोकेट मशरूर कहते हैं, 'उद्योग भवन के गोलचक्कर में तीन मजारें थीं। ये कब बनीं, ये तो नहीं पता। ये लुटियन दिल्ली में हैं। आजादी के बाद तो किसी ने नहीं बनाई होंगी। जाहिर है ये लुटियन दिल्ली बनने से पहले की होंगी। लुटियन दिल्ली बनाते वक्त इन्हें भी ब्रिटिश गवर्नमेंट ने सुरक्षित रखा। भारत सरकार ने भी इन्हें नहीं छेड़ा। अब अचानक उन्हें हटा दिया गया।' वे आगे कहते हैं कि CPWD ने अब तक नहीं बताया कि कदीमी मस्जिद के बारे में क्या सोचा जा रहा है। इसीलिए चिंता ज्यादा हो रही है। ऐसे ही चुपचाप उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद गिरा दी गई थी। इसीलिए हमने सोचा है कि सारे सबूत जुटाने के बाद हम खुद विभाग से संपर्क साधेंगे। जरूरत हुई तो कोर्ट जाएंगे। कदीमी मस्जिद के हेरिटेज प्रॉपर्टी होने के सबूत 1. 1912 का नक्शा 2. वक्फ बोर्ड का रिकॉर्ड 3. इतिहास की किताबों में कदीमी मस्जिद का जिक्र 4. गजट नोटिफिकेशन गजट नोटिफिकेशन सरकारी डॉक्यूमेंट होता है, जो वक्फ की प्रॉपर्टी के सर्वे के बाद बनता है। ये डॉक्यूमेंट 1970 का है। इसमें ये मस्जिद मौजूद है। ‘उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद को भी यूं ही नहीं जाने देंगे, कोर्ट जाएंगे’एडवोकेट मशरूर आगे कहते हैं, ‘नियम है कि जो प्रॉपर्टी एक बार वक्फ की घोषित हो जाती है, वो हमेशा वक्फ की ही रहती है। नए कानून के हिसाब से भी देखें, तो सरकार ऐसे ही कोई वक्फ प्रॉपर्टी न कब्जे में ले सकती और न गिरा सकती है। कम से कम पब्लिक इंटरेस्ट से जुड़ा कोई कारण तो देना पड़ेगा।' 'वैसे तो वक्फ की जमीन अल्लाह की होती है। सरकार को कुछ जरूरी कंस्ट्रक्शन करना है और उसे वो जमीन चाहिए, तो स्टेकहोल्डर से बात करनी होगी। उसे एतराज जताने का समय देना होता है। 6 मौलाना आजाद रोड यानी उपराष्ट्रपति के आवास पर बनी मस्जिद के गिराने जाने का कारण हम सरकार से पूछेंगे। वाजिब जवाब नहीं मिला तो कोर्ट जाएंगे।' मस्जिद 2024 में गिराई गई थी, फिर इतनी देर क्यों हो रही है? जवाब मिला, ‘क्योंकि हमें कागज इकट्ठा करने में वक्त लगा। दूसरी बात वक्फ बोर्ड के पास पिछले दो साल से सिर्फ एक सेक्शन ऑफिसर है। यहां कम से कम तीन अधिकारी होते हैं। अभी 13-14 फरवरी को एक अधिकारी और दिया गया है।’ ‘हमने उपराष्ट्रपति भवन वाली मस्जिद के लिए RTI डाली है। पूछा है कि आखिर मस्जिद क्यों गिरानी पड़ी। इसका पब्लिक इंटरेस्ट क्या है।' कोर्ट जाने के लिए आपके पास कुछ तो आधार होना चाहिए। हम उस मस्जिद पर भी सवाल करेंगे। पहले डिपार्टमेंट से पूछ लें, फिर उसी जवाब को आधार बनाकर, अपने ऐतिहासिक दस्तावेजों के साथ कोर्ट जाएंगे। नई बिल्डिंग के नक्शे में मस्जिद का जिक्र नहींCPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के रीडेवलपमेंट के लिए टेंडर जारी किया है। इसके तहत मौजूदा बिल्डिंग की जगह कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग्स 4 और 5 बनना है। इस प्रोजेक्ट पर करीब तीन हजार करोड़ रुपए खर्च होने हैं। नए प्लान में कृषि भवन परिसर में बनी कदीमी मस्जिद शामिल नहीं है। हमने इस बारे में 25 फरवरी को हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स में डिप्टी डायरेक्टर सुशील कुमार को सवाल भेजे थे। उन्होंने जवाब दिया कि मिनिस्ट्री में संबंधित अधिकारियों को सवाल भेज दिए गए हैं। हालांकि उधर से जवाब नहीं आया। हमने हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के डायरेक्टर श्यामलाल पुनिया को फोन किए, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। हालांकि, CPWD के सोर्स ने बताया है कि नक्शे में मस्जिद का जिक्र नहीं है। ……………………ये खबर भी पढ़ें64 लाख बांग्लादेशियों का दावा, सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर खाली असम में मार्च-अप्रैल में चुनाव हैं। बांग्लादेशी घुसपैठिए मुद्दा हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा दावा कर चुके हैं कि असम की मुस्लिम आबादी में करीब 36% बांग्लादेशी हैं। हालांकि असम का मटिया डिटेंशन सेंटर खाली पड़ा है। हिमंता सरकार इसे होल्डिंग सेंटर कहती है। ऊंची-ऊंची दीवारों और लोहे के भारी-भरकम गेट वाला डिटेंशन सेंटर गुवाहाटी से करीब 120 किमी दूर गोलपाड़ा जिले में है। इसमें कैद 133 विदेशी ‘घुसपैठियों’ में सिर्फ 11 बांग्लादेशी हैं। पढ़ें पूरी खबर...
दिल्ली शराब नीति केस में CBI की जांच को बड़ा झटका लगा है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप साबित करने लायक ठोस सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने किन आधारों पर फैसला दिया? क्या सभी मामलों से राहत मिल गई है? और इसका राजनीति पर क्या असर होगा? समझते हैं 6 सवालों में… सवाल-1: शराब घोटाले के मामले में कोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया को किस आधार पर बरी किया? जवाब: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित शराब घोटाले के मामले में केजरीवाल और सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि चार्जशीट में ‘भ्रामक दावे’ किए गए हैं और साबित करने लायक सबूत नहीं हैं… कोर्ट ने चार्जशीट पर क्या कहा कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल पर क्या कहा कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह पर क्या कहा कोर्ट ने मनीष सिसोदिया पर क्या कहा सवाल-2: कथित शराब घोटाला आखिर है क्या, इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? जवाब: दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को शराब बिक्री से जुड़ी नई आबकारी नीति लागू की थी। इससे शराब दुकानें प्राइवेट हाथों में चली गईं। तब की केजरीवाल सरकार का दावा था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोत्तरी होगी। जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव ने आबकारी नीति में आर्थिक गड़बड़ी को लेकर एक रिपोर्ट उपराज्यपाल वीके सक्सेना को सौंपी थी। मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने CBI जांच की मांग की। 17 अगस्त 2022 को CBI ने केस दर्ज किया। इसमें मनीष सिसोदिया, 3 रिटायर्ड सरकारी अधिकारी, 9 बिजनेसमैन और 2 कंपनियों को आरोपी बनाया गया। विवाद बढ़ता देख 28 जुलाई 2022 को दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर दी। 22 अगस्त 2022 को ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। 28 फरवरी 2023 को दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई। 4 अक्टूबर 2023 को राज्यसभा संजय सिंह को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक ED ने केजरीवाल को 9 समन जारी किए, केजरीवाल एक भी बार नहीं पहुंचे। 21 मार्च 2024 को ED ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। 28 मार्च 2024 को केजरीवाल को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने 15 अप्रैल 2024 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 10 मई 2024 को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें 21 दिन की जमानत मिली। 2 जून को उन्हें फिर दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया। 20 जून 2024 को केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट से तो जमानत मिल गई, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। CBI के मामले में 13 सितंबर 2024 को जमानत मिलने के बाद ही वह जेल से बाहर आ सके। सवाल-3: केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर क्या आरोप लगे थे? जवाब: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर मुख्य रूप से दिल्ली की 2021-22 एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी के चलते आरोप लगे थे। इस नीति को आम आदमी पार्टी की सरकार ने लागू किया था। उन पर ED और CBI ने दो तरह के आरोप लगाए थे… ED का मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप CBI का भ्रष्टाचार का आरोप सवाल-4: क्या कोर्ट के आदेश के बाद केजरीवाल सभी आरोपों से बरी हो गए? जवाब: कोर्ट ने भ्रष्टाचार और घोटाले के जिस मामले में फैसला दिया है, वो CBI ने अगस्त 2022 में दर्ज किया था। CBI ने 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की और बाद में कई पूरक चार्जशीट भी दाखिल कीं। आज का फैसला केवल CBI वाले मामले में आया है, जिसमें केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपी बरी हो गए हैं। हालांकि इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED अलग से मामला दर्ज करके शराब नीति में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही थी। ED का कहना था कि इस नई शराब नीति में होलसेल बिजनेस ने 12% का कमीशन बुक किया, जिसमें से 6 प्रतिशत आम आदमी पार्टी को दिया गया। ED ने ये भी आरोप लगाया था कि जानबूझकर शराब नीति में ऐसे लूपहोल्स छोड़े गए हैं, ताकि आम आदमी पार्टी को बैकएंड से पैसा मिलता रहे। केजरीवाल पर भी ED ने PMLA यानी पीएमएलए यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इसी मामले में केजरीवाल के अलावा मंत्री मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी जेल में रहना पड़ा। चूंकि, दोनों मामले अलग-अलग दर्ज किए गए हैं, इसलिए इनमें केजरीवाल की गिरफ्तारी भी अलग-अलग हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि ED और CBI दोनों के मामले और ट्रायल अलग-अलग तरीके से चले। दोनों मामले अलग-अलग कानून के तहत अलग-अलग जांच एजेंसियां हैंडल कर रही हैं, इसलिए ये मर्ज नहीं किए जा सकते। CBI के मामले में तो केजरीवाल बरी हो गए हैं, लेकिन ED के मामले में चार्जशीट दायर हो चुकी है और केजरीवाल की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला रिजर्व हो गया है। इस मामले में आगे की सुनवाई में फैसला सुनाया जा सकता है। सवाल-5: क्या CBI कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दे सकती है? जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि CBI इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे सकती है। विराग गुप्ता कहते हैं कि अगर CBI हाई कोर्ट जाती है, तो हाई कोर्ट इस मामले में नए सिरे से सुनवाई शुरू कर सकता है, या फिर राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को बरकरार रख सकता है। सवाल-6: कोर्ट के फैसले से केजरीवाल और AAP की राजनीति पर क्या असर होगा? जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट आदेश रावल के मुताबिक केजरीवाल के दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के पीछे ये केस एक बड़ी वजह था। इससे पहले कोयला घोटाला, 2G स्पेक्ट्रम घोटाला और कामनवेल्थ घोटाले के कारण कांग्रेस चुनाव हारी थी और आज तक उभर नहीं पाई। बाद में किसी को सजा नहीं हुई। इन दोनों घटनाओं से फायदा BJP को हुआ। कोर्ट का फैसला आने के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक होकर रोने लगे। इस दौरान मनीष सिसोदिया उन्हें सहारा देते हुए दिखे। केजरीवाल ने मीडिया से कहा, ‘बीजेपी हमारे ऊपर शराब घोटाले का आरोप लगा रही थी। आज कोर्ट ने हमें बरी कर दिया। हम हमेशा कहते थे कि सत्य की जीत होती है। सत्य की जीत हुई। पीएम मोदी और अमित शाह ने यह सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। आम आदमी पार्टी के टॉप 4 लीडर को जेल में डाल दिया। सिटिंग मुख्यमंत्री को जेल में डाल दिया। 24 घंटे खबरें दिखाई जाती थीं कि केजरीवाल भ्रष्ट है। मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई।’ अब कोर्ट के इस फैसले को आम आदमी पार्टी अपनी जीत की तरह दिखाएगी। हालांकि अभी ED के मामले में फैसला आना बाकी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस फैसले से AAP को राजनीतिक फायदा होगा। 2026 में 5 राज्यों- असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में चुनाव हैं। हालांकि इन राज्यों में AAP की मौजूदगी लगभग नगण्य है। 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव हैं, जहां अभी AAP की सरकार है। दिल्ली में हार के बाद केजरीवाल फिलहाल पंजाब में ज्यादा समय दे रहे हैं। वह पंजाब में भी इस मुद्दे को उठाएंगे और बीजेपी पर राजनीतिक साजिश करके सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करेंगे। कोर्ट के फैसले से INDIA गठबंधन के इस आरोप को भी बल मिलेगा, कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को ED जैसी जांच एजेंसियों के जरिए निशाना बनाती है। यानी शुरुआत में ही ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं दिखा जिससे लगे कि उनके खिलाफ केस बनता है। --------- ये खबर भी पढ़िए… जब बागी हिमंता मिलने पहुंचे, राहुल कुत्ते से खेलते रहे:आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में बीजेपी सरकार; कांग्रेस कैसे उखड़ गई 2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी। आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। पूरी खबर पढ़िए…
चीन की संसद से नौ वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बाहर, शी जिनपिंग के कदम को मिली मंजूरी
2024 के दौरान भी शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाले शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) से कई शीर्ष अधिकारियों को बाहर किया गया था। यह आयोग चीन की सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है और सीधे राष्ट्रपति शी के नेतृत्व में काम करता है।
हिलेरी क्लिंटन का साफ इनकार: एपस्टीन से कभी मुलाकात नहीं
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने प्रतिनिधि सभा की 'निगरानी एवं सरकारी सुधार समिति' के समक्ष बयान दिया
ट्रंप प्रशासन विदेशी स्टूडेंट्स के लिए ओपीटी वर्क रूट की फिर से करेगा समीक्षा
अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हजारों विदेशी छात्रों पर असर डालने वाला एक बड़ा कदम उठाया गया है
पाकिस्तानी हमलों का अफगान पलटवार – 15 चौकियां कब्जे में
सीमा पर बढ़ा तनाव, अफगानिस्तान ने किया बड़ा दावा रात के अंधेरे में ऑपरेशन, पाक सैनिकों पर भारी पड़ा अफगान हमला यूएन रिपोर्ट: पाक एयर स्ट्राइक में 13 नागरिकों की मौत डूरंड लाइन पर अफगान रणनीतिक बढ़त, हालात संवेदनशील काबुल। अफगानिस्तान ने गुरुवार रात को दावा किया है कि वह हाल में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अफगान अधिकारियों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान अब तक दुश्मन की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि कार्रवाई के दौरान कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जबकि कुछ को जिंदा भी पकड़ लिया गया है। प्रवक्ता के अनुसार, दुश्मन के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और सीमा क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त हासिल की जा रही है। उन्होंने कहा कि दुश्मन की कुल 15 पोस्ट पर कब्जा कर लिया गया है तथा कई सैनिक हताहत हुए हैं। अफगान पक्ष ने यह भी बताया कि डूरंड लाइन पर तैनात अत्याधुनिक लेजर उपकरणों से लैस इकाइयों ने भी ऑपरेशन शुरू कर दिया है। बयान में कहा गया है कि रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए दुश्मन की हर गतिविधि को निशाना बनाया जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्षेत्र में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। बता दें कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। स्थानीय मीडिया ने यूएनएएमए के हवाले से मंगलवार को ये खबर प्रकाशित की थी। अफगानिस्तान की प्रमुख न्यूज एजेंसी खामा प्रेस ने यूएनएएमए की एक रिपोर्ट के हवाले से खुलासा किया था कि हालिया हवाई हमलों में 13 अफगान नागरिक मारे गए हैं, जबकि सात घायल हो गए थे। ये हमले नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में 21-22 फरवरी की दरमियानी रात किए गए थे। पक्तिका के बरमल में एक स्कूल और मस्जिद को निशाना बनाया गया था, जबकि ओर्गुन जिले में एक घर पर एयर स्ट्राइक की गई थी।
भारत में आतंकी बड़ा हमला करने की फिराक में हैं। कश्मीर से लेकर दिल्ली तक कई धार्मिक स्थल निशाने पर हैं। VIP स्पॉट और सेना भी टारगेट लिस्ट में हैं। फरवरी में महज 20 दिन के अंदर सुरक्षा एजेंसियों को इसके इनपुट मिले हैं। ये सीक्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट दैनिक भास्कर को भी मिली है। इसके मुताबिक, 10 फरवरी को होने वाला बड़ा हमला टाला जा चुका है, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से आतंकी एक्टिविटीज बढ़ी हैं। आतंकियों का नेटवर्क पाकिस्तानी कैंपों और बांग्लादेश रूट से ऑपरेट हो रहा है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा कश्मीर और दिल्ली के आसपास हमले की तैयारी में है। आतंकियों के पास 15-20 किलो RDX और IED होने के इनपुट हैं। 5 आतंकी पाकिस्तान से भारत में घुस चुके हैं। कुछ स्लीपर सेल बांग्लादेश लिंक से ऑपरेट कर रहे हैं। पूरा मामला आखिर क्या है, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में क्या इनपुट हैं, पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकी कौन हैं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों को लेकर बनाई खुफिया एजेंसियों की लिस्ट में क्या है। पढ़िए ये रिपोर्ट… फरवरी में 3 बड़े इंटेलिजेंस अलर्ट पहला: 8 फरवरी को जम्मू-कश्मीर में खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला, जो लश्कर-ए-तैयबा की धमकी से जुड़ा था। इसके मुताबिक, लश्कर के आतंकी IED ब्लास्ट की तैयारी में हैं। ये ब्लास्ट कश्मीर के नरबल से पट्टन या कुंजेर से नरबल के रास्ते में हो सकता है। इस धमाके के लिए आतंकी 15 से 20 किलो RDX का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये हमला सेना के काफिले पर भी हो सकता है। दूसरा: 18 फरवरी के इनपुट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद ने ओवरग्राउंड नेटवर्क एक्टिव कर दिया है। इसके लोगों ने हाल में जम्मू से कश्मीर को जोड़ने वाली काजीगुंड टनल की रेकी की है। इसमें 10 आतंकियों के दो अलग-अलग ग्रुप साजिश रच रहे हैं। आतंकी फिरदौस अहमद भट्ट रिमोट IED के जरिए सुरक्षा बलों को टारगेट कर रहा है। सुरक्षा बलों के वाहनों को भी निशाना बनाया जा सकता है। तीसरा: 8 से 20 फरवरी के बीच अलग-अलग इनपुट मिले। इसमें से एक इनपुट लश्कर-ए-तैयबा के बारे में है। इसके मुताबिक, आतंकी भारत के बड़े शहरों को निशाना बना सकते हैं। दिल्ली में चांदनी चौक के आसपास के मंदिर निशाने पर हैं। पुरानी दिल्ली भी टारगेट पर है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर 6 फरवरी को हुए हमले के बाद भारत में अटैक की साजिश है। जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाली काजीगुंड टनल, भीड़भाड़ वाली जगहों पर अलर्टखुफिया एजेंसियों को मिले अलर्ट में दो ज्यादा संवेदनशील हैं। पहला, जम्मू से कश्मीर के बीच काजीगुंड टनल की रेकी और दूसरा 15-20 किलो RDX के जरिए किसी हाइवे या सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की साजिश। दैनिक भास्कर ने इस पर सुरक्षा एजेंसियों में अपने सोर्स से बात की। वे बताते हैं कि काजीगुंड टनल की रेकी करना बहुत खतरनाक है। ये सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील है, लेकिन हम अलर्ट हैं। पूरे जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। जैश और लश्कर से जुड़े आतंकी मारे जा चुके हैं। कई एक्टिव आतंकियों की लिस्ट भी तैयार है। जम्मू में कठुआ के रास्ते 5 पाकिस्तानी आतंकी घुसेइसी महीने 5 पाकिस्तानी आतंकियों के भारतीय सीमा में घुसपैठ की इंटेलिजेंस रिपोर्ट मिली है। सोर्स ने बताया कि ट्रेंड पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू के कठुआ में हीरानगर के रास्ते घुसपैठ की है। आशंका है कि जैश-ए-मोहम्मद के कैंप में ट्रेनिंग लेने वाले ये आतंकी आर्मी कैंप या सेना के वाहनों पर आत्मघाती हमला भी कर सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे 2015 में दिनानगर पुलिस स्टेशन पर हमला हुआ था। जम्मू-कश्मीर में पांचों संदिग्ध आतंकियों की फोटो जारी कर दी गई है। पोस्टर लगाकर लोगों से जानकारी मांगी गई है। सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। सोर्स ने बताया कि इन आतंकियों की घुसपैठ और काजीगुंड टनल को लेकर मिले अलर्ट में काफी बातें एक जैसी हैं। असल में वो अलर्ट भी जैश से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर की तरफ से रेकी करने को लेकर था। अब जैश के आतंकी घुसपैठ कर आए हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की इन पर नजर है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों की दूसरी लिस्ट तैयार पिछले साल पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इसके साथ ही पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के लोकल आतंकियों की एक लिस्ट तैयार की गई थी। 17 आतंकियों की लिस्ट में से ज्यादातर आतंकी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। आतंकियों की पहचान कर अब दूसरी लिस्ट तैयार की गई है। इसमें पहलगाम हमले के बाद चर्चा में आए अनंतनाग के आतंकी आदिल अहमद ठोकर का नाम था। इस नई लिस्ट में भी उसका नाम है। अभी उसके पाकिस्तान में होने का शक है। नई लिस्ट में दो अलग-अलग कैटेगिरी में 25 आतंकियों के नाम हैं। इसमें एक्टिव और इनएक्टिव आतंकियों की कैटेगिरी भी है। इनमें 5 आतंकियों को सेना ने एनकाउंटर में मार दिया है। बाकी 20 पर सुरक्षा बलों की नजर है। इनमें 4 इनएक्टिव हो चुके हैं, बाकी 16 की लिस्ट दैनिक भास्कर के पास भी है। इनमें फिरदौस अहमद भट्ट का नाम शामिल है, जिसे लेकर हाल में अलर्ट मिला है। इसके बाद से काजीगुंड टनल भी टारगेट पर है। इसके अलावा नसीर अहमद वानी, आदिल रहमान, जाकिर अहमद, मुबाशिर अहमद डार, जुबैर अहमद, हारुन रशीद, आसिफ अहमद, आबिद कयूम, आबिद रमजान, सज्जाद अहमद वानी, जमील, मोहम्मद उमर मीर, बिलाल अहमद मीर और हाशिर रफीक पारे हैं। बांग्लादेश नेटवर्क से दिल्ली और दूसरे शहरों में हमले की तैयारी में आतंकीफरवरी की शुरुआत में ही खुफिया एजेंसियों को दिल्ली और आसपास के इलाके में आतंकी साजिश का अलर्ट मिला था। 7-8 फरवरी को दिल्ली के जनपथ मेट्रो स्टेशन के आसपास कुछ पोस्टर लगे मिले। ये पोस्टर पाकिस्तान के सपोर्ट में थे। इसमें भारत के खिलाफ भड़काने वाली बातें लिखीं थीं। पोस्टर में कश्मीर की आजादी का जिक्र था। आतंकी बुरहान वानी की तारीफ भी थी। 22 फरवरी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस पोस्टर वाले नेटवर्क का खुलासा किया। कुल 8 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इसमें पुलिस ने कोलकाता और तमिलनाडु मॉड्यूल का खुलासा किया। कोलकाता मॉड्यूल में उमर फारूक और रबीउल इस्लाम को अरेस्ट किया। इनमें उमर, पश्चिम बंगाल और इस्लाम, बांग्लादेश का रहने वाला है। तमिलनाडु मॉड्यूल में मोहम्मद मिजानुर रहमान, शफायत हुसैन, जाहिदुल इस्लाम, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद उज्जल और उमर को अरेस्ट किया गया। ये सभी बांग्लादेशी हैं। इनका मुख्य हैंडलर शब्बीर अहमद लोन उर्फ राजा है। ये श्रीनगर का रहने वाला है। पाकिस्तान में लश्कर के कैंप में ट्रेनिंग ले चुका है। शब्बीर को 27 जुलाई 2007 को दिल्ली के चांदनी चौक में एक रेस्तरां के पास से गिरफ्तार किया गया था। उसके रूम से विस्फोटक, हैंड ग्रेनेड और हथियार मिले थे। वो एक पॉलिटिकल किलिंग के लिए दिल्ली आया था। यहां सजा काटने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और बांग्लादेश चला गया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद शांत आतंकी फिर एक्टिवआतंकियों का हैंडलर शब्बीर अभी बांग्लादेश से ऑपरेट कर रहा है। वह कई साल तक एक्टिव नहीं था और गुमनाम स्लीपर सेल की तरह काम करता रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी नेटवर्क ने इसे फिर एक्टिव किया। तब इसने कोलकाता और तमिलनाडु नेटवर्क को एक्टिव किया। इसी शब्बीर अहमद के कहने पर दिल्ली और कोलकाता में पाकिस्तान के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे। शब्बीर को लेकर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के ACP प्रमोद कुशवाह बताते हैं, ‘जनपथ मेट्रो स्टेशन के पास पाकिस्तान के सपोर्ट में पोस्टर लगाए जाने के बाद जांच शुरू हुई। हमें पता चला कि इसमें उमर फारुक और इस्लाम की भूमिका है। इन्होंने कोलकाता में सेफ हाइडआउट बनाया था। पाकिस्तान में दोनों एडवांस्ड ट्रेनिंग लेने के बाद भारत में टारगेट किलिंग करने आए थे।‘ ‘शब्बीर लश्कर का पुराना आतंकी है और उसी ने पोस्टर लगवाए थे। इनका नेटवर्क कोलकाता और तमिलनाडु में एक्टिव है। शब्बीर आत्मघाती हमले का भी मास्टरमाइंड है। अभी ये लश्कर के लिए भारत में खतरनाक स्लीपर सेल तैयार कर रहा है। अब तक कुल 8 लोगों को अरेस्ट किया है। इन लोगों ने दिल्ली और इससे सटे शहरों की रेकी की थी।‘ दिल्ली पुलिस में हमारे सोर्स ने बताया कि इन आतंकियों ने खासकर धार्मिक स्थलों की रेकी की है। उसके वीडियो भी बांग्लादेश में मौजूद आतंकी शब्बीर अहमद को भेजे हैं। सोर्स का दावा है कि दिल्ली के चांदनी चौक के पास के मंदिर के साथ लोटस टेंपल और इस्कॉन टेंपल की भी रेकी की गई है। इसके अलावा अयोध्या, रामेश्वरम और कांचीपुरम में भी रेकी की है। पहले कश्मीरी पंडितों को मारने की धमकी, फिर नई पोस्ट सामने आईदैनिक भास्कर ने हाल ही में कश्मीरी पंडितों को मिली धमकी को लेकर स्टोरी की थी। हमने बताया था कि 3 फरवरी को लश्कर के प्रॉक्सी संगठन फाल्कन स्क्वॉड ने कश्मीरी पंडितों को धमकी दी है। अब उसी फॉल्कन स्क्वॉड के फिर धमकी वाले पोस्टर सामने आए हैं। इसमें कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा के दावे करने वाले जम्मू-कश्मीर के नामी राजनेताओं को मारने की धमकी दी गई है। आतंकियों ने पोस्टर में राजनेता की फोटो के आगे रेड कलर से क्रॉस किया है। इसे लेकर अब कश्मीरी पंडितों से जुड़े संगठन भी अलर्ट हैं। एक कश्मीरी पंडित ने बताया कि हमारी सिक्योरिटी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चाक-चौबंद हैं लेकिन जिस तरह से खुलेआम धमकियां मिल रही हैं। उसे देखते हुए जल्द बड़ा ऑपरेशन चलाने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर में जैश का ‘इजरायल ग्रुप‘ एक्टिवजम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हाल ही में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के वीडियो सामने आए हैं। ये आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था। इसने 'इजरायल ग्रुप' नाम से एक ग्रुप बनाया था। इसे लेकर जम्मू जोन के IG भीम सेन तुती ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में इजरायल ग्रुप के 7 आतंकियों को मार गिराया गया है। ये सभी 7 आतंकी अप्रैल 2024 में घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। इसके बाद सेना से इनका 17 अलग-अलग मौकों पर एनकाउंटर हुआ लेकिन पिछले 18 महीनों में सभी सात आतंकियों को मार गिराया गया। ये हार्डकोर आतंकी ग्रुप था। इसका मकसद सेना और आम लोगों को टारगेट करना था। …………………..ये खबर भी पढ़ें… घाटी में कौन बना रहा कश्मीरी पंडितों की ‘डेथ लिस्ट’ कश्मीर में पहलगाम के पास मट्टन में कश्मीरी पंडितों की बस्ती है। आबादी करीब 300 की है। यहां की गलियों में दिन के 4 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है। मट्टन में रहने वाले रमेश कौल (बदला हुआ नाम) अब अनजान नंबरों से आने वाले फोन नहीं उठाते। वजह पूछने पर बताते हैं, ‘कश्मीरी पंडितों को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। पढ़िए पूरी खबर…
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर किया भीषण हमला, 17 पाकिस्तानी चौकियों पर किया कब्जा, 40 सैनिक मारे
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जवाबी हमले सीमा से लगे पांच प्रांतों में चलाए गए। मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी सेना की 17 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है और 40 सैनिक मारे गए हैं। इनमें से 13 शव अफगानिस्तान ले जाए जाने का भी दावा किया गया है।
याद वाशेम में मैंने पीएम मोदी को पत्नी सारा के रिश्तेदारों के नाम दिखाए: नेतन्याहू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की एक तस्वीर कौतुहल का विषय बनी थी। आखिर पीएम मोदी के भाई समान सच्चे मित्र उन्हें क्या दिखा रहे थे और भारत के प्रधानमंत्री क्या गौर से देख रहे थे? इसका खुलासा खुद नेतन्याहू ने एक्स पोस्ट के जरिए किया है।
नेपाल चुनाव 2026 : मेयर से प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे रैपर बालेन शाह
नेपाल में आधिकारिक ओपिनियन पोल की परंपरा नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक और स्थानीय मीडिया बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे मान रहे हैं। उन्होंने देश की दो प्रमुख राजनीतिक शक्तियों केपी शर्मा ओली की चीन समर्थक मानी जाने वाली कम्युनिस्ट पार्टी और भारत के निकट मानी जाने वाली नेपाली कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी है।
भारतीय अंदाज़ में नेतन्याहू, डिनर पर मोदी को दिया सरप्राइज़
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर इजरायल में हैं। इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने पीएम मोदी का स्वागत किया। वहीं, नेतन्याहू ने पीएम मोदी के लिए रात्रि भोज भी होस्ट किया
ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का तीसरा दौर: जेनेवा रवाना विदेश मंत्री अराघची
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची बुधवार को अमेरिका के साथ होने वाली नई दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता में हिस्सा लेने के लिए एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में जेनेवा के लिए रवाना हुए
वसंत महोत्सव के बाद काम पर फोकस: ली छ्यांग की बड़ी बैठक
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 24 फरवरी को राज्य परिषद की स्थायी बैठक बुलाकर वसंत त्योहार के बाद सरकारी कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने का इंतजाम किया
दिल्ली के पॉश एरिया मालवीय नगर के खिड़की गांव में बनी पांच मंजिला एक इमारत में सन्नाटा पसरा है। इसके चौथे फ्लोर पर रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की तीन लड़कियां तीन दिन से बाहर नहीं निकली हैं। ये वही लड़कियां हैं, जिन्हें एसी लगवाने के दौरान हुई बहस के बाद मोमो, पार्लर वाली, धंधा करने वाली कहा गया। आरोप इसी बिल्डिंग में रहने वाले हर्ष और उनकी पत्नी रूबी जैन पर है। SC-ST एक्ट में केस दर्ज होने की वजह से रूबी को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन तीनों लड़कियां अब भी डरी हुई हैं। पहचान उजागर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए हैं। डर और प्रेशर की वजह से एक लड़की को परिवारवालों ने पढ़ाई छोड़कर घर वापस आने के लिए कह दिया है। पूरा केस समझने के लिए हमने आरोपी हर्ष और रूबी के अलावा पीड़ित लड़कियों की वकील और चश्मदीद AC मैकेनिक से बात की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से लड़कियां परेशानहमने पीड़ित लड़कियों से बात करने की कोशिश की। उन्होंने अपनी वकील लीयी मारली नोशी से बात करने के लिए कहा। लीयी बताती हैं कि तीनों लड़कियों की उम्र 20 से 23 साल है। वीडियो वायरल होने के बाद से वे परेशान हैं। उन पर बहुत ज्यादा पब्लिक और सोशल प्रेशर है। सब उनके चेहरे पहचानते हैं। परिवार भी डरे हुए हैं। उनमें से एक को तो परिवार ने वापस बुला लिया है। लड़की को अब पढ़ाई छोड़कर वापस जाना पड़ेगा। लीयी आगे बताती हैं कि लड़कियों को सोशल मीडिया पर लगातार मैसेज आ रहे थे। इसलिए उन्होंने अकाउंट डिलीट कर दिए हैं। AC वाले से बदसलूकी, इसी से शुरू हुआ विवादपीड़ित लड़कियों में एक UPSC एग्जाम की तैयारी कर रही हैं। बाकी दोनों भी स्टूडेंट हैं और खर्च निकालने के लिए फ्रीलांसिंग करती हैं। वे अपने किराए के फ्लैट में AC लगवा रही थीं। घर के अंदर कॉरिडोर में ही AC का कंप्रेसर लगाने की जगह है। इसी से विवाद की शुरुआत हुई। एडवोकेट लीयी बताती हैं, ‘आरोपियों ने AC लगाने वाले से बदसलूकी की। वे कह रहे थे कि ड्रिल करने से गिरी धूल से उनके AC को नुकसान हुआ है। लड़कियों ने कहा कि अगर आपके AC को नुकसान हुआ है, तो हम रिपेयर करवा देंगे।’ ‘राहुल गांधी ने मिलने बुलाया, लेकिन हम नहीं गए’लीयी बताती हैं कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी हुई है। अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने हमसे बात की है। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी और अल्का लांबा का फोन आया था। उन्होंने मुझे और लड़कियों को मिलने बुलाया। मैेंने साफ इनकार कर दिया कि यह राजनीतिक मामला नहीं है। लीयी आरोप लगाती हैं कि आरोपियों ने समझौते का दबाव बनाया था। पहले मकान मालिक के घर माफी मांगकर समझौते की कोशिश हुई, लेकिन उनकी कम्युनिटी पर जैसी बातें बोली गई है, इसके बाद कोई समझौता नहीं होगा। AC वाला चश्मदीद, बोला- मेरी टांगे तोड़ने की धमकी दीपीड़ित लड़कियों ने खिड़की गांव से सलीम (बदला हुआ नाम) को AC फिट कराने के लिए बुलाया था। दोपहर करीब 3:30 बजे AC का कंप्रेसर लगाने के लिए सलीम ने ड्रिलिंग की। इससे कुछ मलबा नीचे के बाकी AC और कॉरिडोर में जाकर गिरा। हम AC मैकेनिक सलीम से मिले। नाम और चेहरा छिपाने की शर्त पर वे बताते हैं, ‘बिल्डिंग पुरानी है, इसलिए थोड़ा कचरा और छोटे पत्थर नीचे गिर गए। नीचे के फ्लैट में रहने वाला शख्स इससे भड़क गया और मुझे गालियां देने लगा। मैंने दो बार माफी मांगी। इस पर उसने कहा कि तेरी टांगें तोड़ दूंगा।’ सलीम आगे कहते हैं, ‘मैं जिन मैडम के यहां एसी लगा रहा था, उन्होंने भी कहा कि एसी लगवाने में थोड़ा बहुत मलबा गिरता है। अगर ज्यादा गिरा है, तो सफाई करवा देंगे। उस शख्स ने उन्हें भी गाली दीं। इसके बाद बहस बढ़ गई।’ सलीम बताते हैं कि शुरुआत में बहस नीचे ही खत्म हो गई। 20 मिनट बाद आरोपी पति-पत्नी पुलिस को बुलाकर ऊपर आ गए। पुलिस के सामने ही नॉर्थ-ईस्ट के बारे में उल्टी-सीधी बातें करने लगे। लड़कियों से बोले कि तुम लोग पार्लर चलाते हो, धंधा करती हो, तुम्हारे यहां ड्रग्स चलता है। गिरफ्तारी से पहले रूबी बोलीं- अपने शब्दों के लिए माफी मांगती हूंआरोपी हर्ष पत्नी रूबी के साथ बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर किराए के फ्लैट में रहते हैं। बिल्डिंग में हर फ्लोर पर 4 फ्लैट हैं। इसी बिल्डिंग के चौथे फ्लोर पर पीड़ित लड़कियां भी किराए पर रहती हैं। दोनों के फ्लैट मालिक एक ही हैं। 25 फरवरी को रूबी को अरेस्ट कर लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि रूबी के खिलाफ SC-ST एक्ट में कार्रवाई की गई है। 24 फरवरी की शाम करीब 6 बजे हम रूबी और हर्ष के घर पहुंचे थे। करीब 7 बजे उनके घर अनिल कुमार नाम के हेड कॉन्स्टेबल आए। उन्होंने रूबी और हर्ष को मालवीय नगर थाने जाकर DCP से मिलने के लिए कहा। थाने में पहले रूबी और फिर हर्ष से अलग-अलग पूछताछ की गई। रूबी गिरफ्तारी को लेकर डरी हुई थीं। हर्ष उन्हें न घबराने की सलाह देते रहे। करीब रात 8 बजे पूछताछ के बाद रूबी और हर्ष वापस घर चले गए। 25 फरवरी की सुबह मालवीय नगर पुलिस ने रूबी को घर से अरेस्ट कर लिया। गिरफ्तारी से पहले रूबी ने हमें बताया कि सोशल मीडिया पर 4 मिनट का वीडियो वायरल हुआ है। ये झगड़े के दूसरे हिस्से का है। इससे पहले चार लड़कियां मेरे फ्लोर पर आई थीं। मैं सीढ़ियों पर खड़े होकर उन्हें जवाब दे रही थी, उसी को रिकॉर्ड कर वायरल किया गया, ताकि हमारे खिलाफ राय बन जाए। वायरल वीडियो में रूबी के हाथ में डंडा दिख रहा है। इस पर वे बोलीं कि हमने पुलिस बुलाई, तब तक लड़कियां हमारे फ्लोर पर आ गई थीं। मैं टीबी की मरीज हूं, मेरे शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं करता। इसलिए मैंने सेल्फ डिफेंस के लिए घर में रखी डॉग स्टिक हाथ में ली थी। ये किसी को मारने के लिए नहीं थी। रूबी आगे कहती हैं कि पुलिस के आने के बाद हमें ऊपर ले जाया गया। वायरल वीडियो उसी समय का है। वहां मुझे और पुलिस को धक्का दिया गया। पुलिस अधिकारी मुझ पर गिरे। उसी दौरान मेरे मुंह से भी भद्दे शब्द निकले। रूबी जैन ने नस्लीय कमेंट के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मैं अपने शब्दों के लिए दिल से माफी मांगती हूं। ये सब मैंने तब कहा, जब मेरे लिए धंधे वाली और हिजड़ा जैसे शब्द बोले गए। उस हालत में मुझसे क्या उम्मीद की जाती। फिर भी मैं मानती हूं कि मेरे शब्द गलत थे। हर्ष बोले- नस्लीय कमेंट के लिए हम शर्मिंदाहमने वीडियो में दिख रहे रूबी के पति हर्ष से भी बात की। 35 साल के हर्ष इवेंट मैनेजर हैं। वे बीते एक साल से इस फ्लैट में रह रहे हैं। हर्ष कहते हैं, ‘हमारे AC और कॉरिडोर में बड़े पत्थर गिरने पर मैं बाहर निकला था। AC के ऊपर बड़े पत्थर गिरे थे। दो बार जोर की आवाज आई। ऊपर से एक लड़का झांका। मैंने गुस्से में दिल्ली के स्लैंग में एक-दो बातें कहीं। तभी लड़की आई और बहस शुरू कर दी। दोनों तरफ से गाली-गलौज हुई।’ हर्ष आरोप लगाते हैं कि लड़कियों ने उनकी पत्नी को जातिसूचक शब्द कहे। इसके बाद हमने PCR को कॉल किया। पुलिस दोनों पक्षों की बात सुन रही थी, तभी लड़की ने वीडियो बनाया। वायरल वीडियो सिलेक्टिव है, उसमें सिर्फ उनका हिस्सा दिखाया गया है। मेरी पत्नी के साथ धक्का-मुक्की की गई। हमने उसी दिन लिखित शिकायत तैयार कर वॉट्सएप और ईमेल के जरिए एसएचओ, डीसीपी और जॉइंट सीपी को भेजी थी। गृह मंत्रालय को भी शिकायत भेजी थी। हर्ष नॉर्थ ईस्ट के लोगों पर की गई नस्लीय टिप्पणी के लिए माफी मांगते हैं। कहते हैं कि मैं और मेरी पत्नी इसके लिए शर्मिंदा हैं। सब गुस्से में हुआ, लेकिन यह गलती नहीं बल्कि गुनाह है। मैं कोर्ट में भी अपनी गलती मानूंगा। हर्ष आरोप लगाते हैं कि सोशल मीडिया पर मुझे जान से मारने की धमकी मिल रही है। पत्नी रूबी को रेप की धमकियां मिल रही हैं। हमारे नंबर सार्वजनिक कर दिए गए। हमने इसकी भी शिकायत की है। 4 मिनट के वीडियो में क्या है…वीडियो में पीड़ित लड़कियों के अलावा हर्ष, रूबी, एक पुलिसवाला और कुछ पड़ोसी दिख रहे हैं। शुरुआत में पीड़ित लड़की की आवाज आती है… पीड़ित: तुम क्या बोला, हम दारू पीता है। मेरा रूम चेक करो, अगर एक भी चीज मिला न, उसके बाद देखेंगे। रूबी: ऊंगली पीछे करके बात कर। हर्ष: चल, चल, गंदगी मसाज पार्लर। पीड़ित: मसाज पार्लर तू, बुड्ढा। रूबी: मेरा बेडरूम खाली है, आजमा ले जा। तेरे को पता चलेगा कितना बुड्ढा है। 35 साल का लड़का तेरे यहां बुड्ढा होता होगा, क्योंकि ड्रग्स इतने करते हो तुम लोग, हमारे यहां 35 साल में एक्चुअल जवान होते हैं। पीड़ित: मसाज पार्लर तू चलाती है न। रूबी: चलाती हूं, तेरे को कराना है, नौकरी चाहिए। तेरी औकात नहीं है, जहां से वो आया है। कस्टम ऑफिसर का बेटा है, पॉलिटिशियन है उसका बाप। पुलिसवाला: आप इन्हें अंदर कर दो, जो समझदार हो, वो बाहर रहो रूबी: तेरे यहां आदमी मसाज पार्लर में काम करते होंगे, हमारे यहां नहीं। एक दूसरी लड़की रूबी को समझाती है। रूबी कहती है, वो मेरे को बोली कि तेरा आदमी मसाज पार्लर में मिला होगा। हर्ष के BJP नेताओं के साथ फोटो, बोले- पार्टी से नहीं जुड़ाहर्ष के BJP नेताओं के साथ फोटो वायरल हुए हैं। झगड़े के वीडियो में भी रूबी उन्हें पॉलिटिशियन का बेटा बता रही हैं। इस पर हर्ष कहते हैं, ‘मैं सामान्य परिवार से हूं। मेरा किसी पार्टी से संबंध नहीं है। मैं इवेंट मैनेजर हूं। अलग-अलग नेताओं के साथ मेरी तस्वीरें प्रोफेशनल काम की वजह से हैं। मैंने किसी पार्टी से सीधा पेमेंट नहीं लिया, न किसी पार्टी का सदस्य हूं। मैंने BJP के लिए इवेंट मैनेज किया है। वायरल फोटो भी इसी से जुड़े हैं।' मकान मालिक बोले- नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से कभी दिक्कत नहीं हुईइस विवाद पर हमने बिल्डिंग में रहने वाले लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन वे बात नहीं करना चाहते। इसके बाद हम मालवीय नगर के प्रॉपर्टी कारोबारी विनोद चौहान से मिले। वे कहते हैं कि मेरे मकानों में नॉर्थ-ईस्ट के लोग किराए से रहते हैं। अब तक कोई दिक्कत नहीं आई। इस तरह के नस्लीय कमेंट नहीं होने चाहिए। हमारे बच्चे भी दूसरे राज्यों में पढ़ने और काम करने जाते हैं। अगर उनके साथ वहां भेदभाव हो, तो हमें भी बुरा लगेगा।
22 फरवरी 2026‘रात के करीब 8 बज रहे होंगे। मैं ओरियन मॉल से कुछ काम निपटाकर दोस्त के साथ कैंपस लौट रही थी। जैसे ही मॉल से निकली, मैंने महसूस किया कि बाइक से 3 लोग मेरा पीछा कर रहे हैं। शुरुआत में मैंने इग्नोर किया, लेकिन अचानक बाइक मेरे बगल में आ गई। वो लोग सिर्फ मेरे पीछे ही नहीं चल रहे थे, बल्कि रास्ते भर नस्लीय कमेंट और गंदी बातें बोलते रहे।’ 'उन लड़कों ने डेढ़ किलोमीटर तक मेरा पीछा किया। मैं आर्मी कैंप के पास कॉलेज के गेट नंबर 2 के पास पहुंचीं, तो उनमें से एक लड़का मेरे पास आया। उसने मुझे गलत तरीके से छुआ और अपने कपड़े उतारने लगा। मैं बहुत डर गई थी, मैंने मदद के लिए गुहार लगाई। तभी कैंपस के लोग वहां पहुंच गए। लोगों की भीड़ देखकर लड़के वहां से भाग निकले।' ये गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एक रेजिडेंट डॉक्टर की आपबीती है, जो नगालैंड की रहने वाली हैं। घटना के अगले दिन 23 फरवरी को एम्स पुलिस स्टेशन में विक्टिम ने शिकायत दर्ज करवाई। इसके 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। दैनिक भास्कर की टीम ने महिला डॉक्टर से कॉन्टैक्ट किया और गोरखपुर पुलिस से पूरा घटनाक्रम सिलसिलेवार जाना। इस घटना के अलावा हमने नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं पर देश भर में हुए नस्लवादी टिप्पणी के मामलों की भी लिस्टिंग की है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… विक्टिम के साथी डॉक्टर बोले- लड़के नीचता की हद तक गिर गएइस घटना के बाद हमने विक्टिम डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश की। हमें बताया गया कि वे घटना के बाद से बहुत परेशान हैं और किसी से बात नहीं करना चाहती। पीड़िता की सुरक्षा और देखभाल से लेकर उसकी कानूनी लड़ाई फिलहाल नेशनल फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स (NAFORD) संगठन लड़ रहा हैं। हमें विक्टिम का पक्ष जानने के लिए संगठन के अध्यक्ष डॉ. देवेश दुबे का फोन नंबर दिया गया। डॉ. देवेश कहते हैं, ‘घटना के बाद विक्टिम ने हॉस्टल पहुंचकर सबसे पहले NAFORD के ग्रुप पर मैसेज किया। वो बहुत डरी हुई थी, उसने बताया कि कैसे 3 लड़कों ने उसे रास्ते में परेशान किया।‘ ‘वो लड़के नीचता की उस हद तक गिर गए कि उन्होंने डॉक्टर पर न सिर्फ गंदे कमेंट किए, बल्कि उसके शरीर के पिछले हिस्से पर हाथ मारा। फिर उनमें से एक ने विक्टिम के सामने अपनी टी-शर्ट उतार दी। उन लड़कों की ये हरकत देखकर विक्टिम डरी नहीं, बल्कि बहादुरी से उनका सामना किया।’ NAFORD के मुताबिक, पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि उस रात तीनों लड़कों ने उसका डेढ़ किलोमीटर तक पीछा किया। इस दौरान नस्लवादी कमेंट पास करते हुए उसके साथ अभद्रता की, उसे गलत तरीके से छुआ। यहां तक कि कपड़े उतारकर उसे प्राइवेट पार्ट दिखाने की कोशिश की। ये देख विक्टिम ने मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद लड़के वहां से भाग गए। विक्टिम गोरखपुर AIIMS में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में थर्ड ईयर की रेजिडेंट डॉक्टर हैं। दैनिक भास्कर को विक्टिम डॉक्टर का वो मैसेज मिला है, जिसे उसने घटना के बाद NAFORD के ग्रुप में शेयर किया था। आइए जानते हैं कि पीड़िता ने मैसेज में क्या लिखा। ‘क्या मैं तीनों लड़कों को थप्पड़ मार सकती हूं’गोरखपुर एम्स अस्पताल के डॉक्टर अमित राय NAFORD से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने हमें विक्टिम डॉक्टर की कंडीशन के बारे में बताया, जब वे एम्स पुलिस स्टेशन में बयान दर्ज करवाने गई थीं। डॉ. अमित कहते हैं, ‘घटना के बाद विक्टिम डॉक्टर ने एम्स के सीनियर डॉक्टरों को आपबीती बताई। अगले दिन हम सभी उसे लेकर थाने गए। उसकी शिकायत, CCTV फुटेज और बयानों के आधार पर तीनों आरोपी लड़के गिरफ्तार कर लिए गए।‘ ‘22 फरवरी की रात हुई घटना ने विक्टिम को गहरा सदमा पहुंचाया। वो पुलिस स्टेशन में इतना गुस्सा गई थी कि उसने पुलिस अधिकारी से कहा कि क्या मैं तीनों लड़कों को थप्पड़ मार सकती हूं। उसकी बात सुनकर पुलिस ने भरोसा दिया कि आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।‘ घटना से आहत डॉक्टर ने कहा- ‘ये बहुत दुखद है कि 2026 में भी महिलाओं को हर दिन ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं को खुलेआम उत्पीड़न और हमले का सामना करना पड़ता है। हम सम्मान और सुरक्षा के हकदार हैं। हम बिना किसी डर के चलने की आजादी के हकदार हैं।‘ कौन हैं तीनों आरोपीगोरखपुर के SP सिटी अभिनव त्यागी के मुताबिक, 23 फरवरी को हमें महिला डॉक्टर की शिकायत मिली। विक्टिम के बयानों के आधार पर एम्स पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 74, 296 ए, 352 और 351 C के तहत FIR दर्ज की गई है। SP अभिनव कहते हैं, ‘शिकायत दर्ज होने के बाद हमने आरोपियों को पकड़ने के लिए 4 पुलिस टीमें बनाईं। CCTV फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की गई और 24 घंटे के अंदर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सूरज गुप्ता, आदित्य राजपूत और अमृत विश्वकर्मा के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 21 से 24 साल के बीच है। घटना में इस्तेमाल बाइक भी बरामद कर ली गई है।’ गोरखपुर पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला है कि सूरज और अमृत पड़ोसी हैं। सूरज फलों की दुकान चलाता है, जबकि अमृत देवरिया में ही एक जनरल मर्चेंडाइज स्टोर पर काम करता है। तीसरा आरोपी आदित्य BA सेकेंड ईयर का छात्र है। मेघालय CM बोले- नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं के साथ भेदभाव भुला दिया जाता हैइस घटना पर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, 'नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं के साथ नस्लीय भेदभाव और सेक्शुअल हैरेसमेंट को सिर्फ सुर्खियां बनाकर भूल नहीं जाना चाहिए। एम्स गोरखपुर में नगालैंड की एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुआ नस्लीय और सेक्शुअल उत्पीड़न बेहद शर्मनाक है।' 'किसी सभ्य देश में महिला के सम्मान से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। ये भी आपकी बहनें और बेटियां हैं। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।' ये छेड़छाड़ नहीं, नस्लीय और यौन उत्पीड़न का मामला: NAFORDइस मामले पर NAFORD सहित कई मेडिकल संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठनों ने इस घटना के बाद महिला डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। संगठन ने इस घटना को गंभीर नस्लीय और यौन उत्पीड़न का मामला बताया है। पोस्ट में कहा गया कि नॉर्थ ईस्ट से होने के कारण डॉक्टर को रूढ़िवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें गहरा सदमा और अपमान महसूस हुआ है। घटना में पुलिस के तुरंत एक्शन लेने और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी पर NAFORD के अध्यक्ष डॉ. देवेश दुबे कहते हैं, ‘विक्टिम डॉक्टर का मैसेज मिलते ही हमारे संगठन ने इसकी सूचना गोरखपुर पुलिस को दी। इसके कुछ घंटों में ही 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। तीसरा आरोपी भी 24 घंटे के अंदर पकड़ा गया। इस मामले पर सख्त एक्शन लेने के लिए हम CM योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर पुलिस को धन्यवाद देते हैं।‘ दिल्ली में 'मोमो बेचने वाली' और 'मसाज पार्लर वाली' बोला गयागोरखपुर एम्स की डॉक्टर से जुड़ी घटना के एक दिन पहले दिल्ली के मालवीय नगर में भी नॉर्थ ईस्ट की 3 महिलाओं पर नस्लवादी टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया था। इसमें उन्हें 'मोमो बेचने वाली' और '500 में मसाज पार्लर में धंधा करने वाली' जैसे कमेंट किए गए। इस केस में भी FIR दर्ज हुई है। मामला मालवीय नगर का है, जहां अरुणाचल प्रदेश की 3 महिलाएं चौथी मंजिल पर एक फ्लैट में रह रही थी। इनमें से एक UPSC की तैयारी कर रही थी। उन्होंने अपने फ्लैट में एयर कंडीशनर लगवाने के लिए मैकेनिक बुलाया था। ड्रिलिंग के दौरान धूल और मलबा नीचे की मंजिल पर गिर गया, जिससे नीचे रहने वाले पड़ोसी हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन नाराज हो गए। शुरुआत में ये विवाद फ्लैट पर मलबे को लेकर शुरू हुआ, लेकिन बाद में विवाद बढ़ते-बढ़ते नस्लीय और आपत्तिजनक हो गया। घटना के बाद बिल्डिंग के ब्रोकर ने महिलाओं से कहा कि उन्हें 2 महीने में फ्लैट खाली करना होगा। इससे पीड़ित महिलाओं में उनकी सुरक्षा लेकर डर बढ़ गया। मेघालय के CM कोनराड के संगमा ने इस घटना की भी निंदा की थी। उन्होंने X पर इस घटना को लेकर लिखा कि नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के साथ भेदभाव बंद होना चाहिए। ……………….ये खबर भी पढ़ें… जैश की महिला जिहादी ब्रिगेड, भारत के लिए नया खतरा जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर 2025 को पहली बार आतंकियों की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का ऐलान किया था। इसके ठीक 31 दिन बाद 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। 15 लोग मारे गए। NIA ने ब्लास्ट को जैश-ए-मोहम्मद के 'वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा बताया। पढ़िए पूरी खबर…
भारत–इजरायल व्यापार में नई उड़ान: पीएम मोदी का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत इजरायल के साथ व्यापार बढ़ाने, निवेश को मजबूत करने और संयुक्त बुनियादी ढांचा विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है
रूस का सनसनीखेज दावा, ब्रिटेन-फ्रांस यूक्रेन को परमाणु हथियार देने की योजना बना रहे
रूसी विदेश खुफिया सेवा (एसवीआर) ने अपने बयान में कहा कि पश्चिमी शक्तियां युद्ध में यूक्रेन की सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए संवेदनशील हथियारों की आपूर्ति पर विचार कर रही हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में रूस ने कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है।
रूसी युद्ध के खिलाफ यूक्रेनी हौसला पांचवें साल में भी बरकरार
रूसी हमलों ने यूक्रेनियों के लिए पहले से ही सख्त सर्दियों को और भी मुश्किल बना दिया है. फिर भी, चार साल की जंग के बावजूद ज्यादातर यूक्रेनी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं
अमेरिकी सांसदों की चेतावनी – चीन की पकड़ से डिफेंस इंडस्ट्री को खतरा
अमेरिका की ओर से 'महत्वपूर्ण खनिजों और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन्स' की ओर बढ़ते कदमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं
सूफी बांग्लादेश की रहने वाली हैं। उम्र करीब 25 साल। मार्च 2024 की एक रात पहली बार भारत में कदम रखा था। एक दोस्त भी साथ थी। दोनों बेहतर जिंदगी के लिए छिपते-छिपाते भारत आई थीं। दलाल ने उन्हें 34 हजार में बेच दिया, 18 महीने जेल में कटे। बीते 4 महीने से सूफी का नया पता असम के गोलपाड़ा में बना मटिया डिटेंशन सेंटर है। हिमंता सरकार इसे ट्रांजिट कैंप कहती है। सूफी के साथ मुख्तार, फूल मियां, मानिकजन बेगम भी हैं, जो अपराधी नहीं हैं, लेकिन आजाद भी नहीं हैं। असम में मार्च-अप्रैल में चुनाव हैं। बांग्लादेशी घुसपैठिए मुद्दा हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा दावा कर चुके हैं कि असम की मुस्लिम आबादी में 36% बांग्लादेशी हैं। 20 फरवरी को गृह मंत्री अमित शाह असम में थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में, जो भी अवैध रूप से देश में घुसा है, उसे वापस भेजा जाएगा। ऊंची-ऊंची दीवारों और लोहे के भारी-भरकम गेट वाला डिटेंशन सेंटर असम की राजधानी गुवाहाटी से करीब 120 किमी दूर है। इसमें कैद 133 विदेशी ‘घुसपैठियों’ में सिर्फ 11 बांग्लादेशी हैं। दैनिक भास्कर पहला मीडिया हाउस है, जो इस डिटेंशन सेंटर के अंदर पहुंचा। कैसा है भारत का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटरकरीब 20 बीघा जमीन में बना ये सेंटर ऊंची दीवारों से घिरा है। लोहे के बड़े गेट से एंट्री होती है। अंदर घुसते ही पहले खाली मैदान है। थोड़ा आगे चलने पर एक और बड़ा गेट है। इससे अंदर घुसते ही अफसरों के ऑफिस हैं। फिर एक मैदान है, जिसमें फुटबॉल खेलने की जगह और सब्जियां उगाने के लिए क्यारियां बनी हैं। यहीं चार-चार मंजिला करीब 15 बिल्डिंग हैं। इनमें से सिर्फ 5 इस्तेमाल में हैं। दो बिल्डिंग महिलाओं के लिए और तीन पुरुषों के लिए। यहां 3 हजार लोग रह सकते हैं। कैंपस में स्कूल, हॉस्पिटल, किचन, टॉयलेट और रहने के अलग-अलग ब्लॉक हैं। यह जगह किसी जेल जैसी नहीं, बल्कि स्कूल या हॉस्टल जैसी दिखती है। यहां मैं कुछ किरदारों से मिली। ज्यादातर पैसे देकर बॉर्डर पार आए, पकड़े गए और कभी अपने देश लौट नहीं पाए। पहचान उजागर न हो, इसलिए इन किरदारों के नाम बदले गए हैं। पहली कहानी सूफी की डिटेंशन सेंटर के अंदर कदम रखते ही लगता है, जैसे यहां वक्त थोड़ा धीमा चलता है। न ज्यादा शोर, न पूरी खामोशी। यहां एक कमरे में महिलाएं सिलाई कर रही थीं। एक तरफ सिलाई सिखाने वाली मास्टर खड़ी थीं। पास ही एक महिला पुलिसकर्मी निगरानी कर रही थीं। कमरे में सूट पहने छोटे बालों वाली एक दुबली लड़की पर नजर पड़ी। बहुत शांत और आंखों में गहरी उदासी। यही थी सूफी। कुछ देर की चुप्पी के बाद सूफी ने बोलना शुरू किया। उसकी आवाज में निराशा और बेबाकी दोनों थी। सूफी बताती है, ‘मैं बांग्लादेश की रहने वाली हूं। मार्च, 2024 में पहली बार भारत आई थी। मैं अकेली नहीं थी। मेरी दोस्त रिफत भी साथ थी। अनजान देश में हम दोनों एक-दूसरे के हमदर्द बन गए।’ ‘एक दलाल हमारी मदद कर रहा था। हमें बस से बॉर्डर के पास लाया गया। वहां से सामान ढोने वाली गाड़ियों में छिपाकर बॉर्डर तक पहुंचाया। ऊंचे कंटीले तार पार करना आसान नहीं था। दूसरी तरफ भारतीय दलाल मौजूद था। सुरक्षाबलों की निगरानी के बावजूद फेंसिंग के बीच लकड़ी का पटरा फंसाकर मुझे और रिफत को भारत में दाखिल करा दिया गया।’ ‘मेरे पास स्मार्टफोन था। उसी पर दलाल हमें रास्ते के बारे में बताता रहा। उसकी मदद से हम गुवाहाटी पहुंच गए। उसने फोन पर दिल्ली की ट्रेन के दो टिकट भेज दिए। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर हमें बंगाली बोल रहा एक शख्स दिखा। उसका नाम रफीक इस्लाम था। रफीक ने सीट ढूंढने में हमारी मदद की। अनजान देश में मदद करने वाला रफीक हमें भरोसेमंद लगा। हमने उसे बता दिया कि हम बांग्लादेश से आए हैं। रफीक ने कहा कि कभी जरूरत पड़े, तो मुझे फोन कर लेना।’ ‘दो दिन के सफर के बाद हम दिल्ली पहुंच गए। स्टेशन पर एक औरत हमें लेने आई। उसका नाम सुमैया था। वो हमें अपने घर ले गई। एक हफ्ते तक सुमैया हमें ब्यूटी पार्लर ले जाती रही। बाल स्ट्रेट करवाए, आइब्रो बनवाई और मॉल से नए कपड़े दिलवाए। सब बहुत अच्छा लग रहा था। एक दिन सुमैया हमें होटल ले गई।’ यहां सूफी की आवाज टूटने लगी। कुछ पल चुप रही, फिर फूट-फूटकर रोने लगी। बोली- ‘होटल में सब नंगे थे। गलत काम कर रहे थे। सुमैया चाहती थी कि हम भी वही काम करें। हमने इनकार कर दिया। फिर वो हमें घर ले आई। हमें पता चला कि जो दलाल हमारी मदद कर रहा था, उसने मेरा और रिफत का सौदा कर दिया। हमारे बदले में उसे 34 हजार रुपए मिले।’ ‘उस रात खाना खाने के बाद सुमैया और उसका पति सो गए। आधी रात को मैं और रिफत घर से भाग निकले। हमने रेलवे स्टेशन पर मिले रफीक को फोन किया और उसके कहने पर गुवाहाटी आ गए। यहां रफीक हमें बस से कहीं ले जा रहा था। रास्ते में बाइक से आए दो लोग बस के सामने खड़े हो गए। दोनों अंदर आए और 30 हजार रुपए मांगने लगे। इसी दौरान पुलिस आ गई और बाइकवालों को गिरफ्तार कर लिया।’ ‘पुलिसवालों ने मुझसे पूछा- तुम कहां की रहने वाली हो? मैंने जवाब दिया- बांग्लादेश। इसके बाद मेरी जिंदगी अदालतों और जेल के बीच उलझ गई। कोर्ट में केस चला। जज ने 18 महीने की सजा सुनाई। उन्होंने कहा था कि सजा काटने के बाद हम घर जा सकते है। सजा पूरी हुई, तो 28 अक्टूबर 2025 को हमें डिटेंशन सेंटर भेज दिया।’ इतना कहकर सूफी चुप हो गई। उसकी उंगलियां दोबारा सिलाई मशीन पर चलने लगीं, लेकिन आंखों से आंसू नहीं थमे। सूफी की शादी सिर्फ 15 साल की उम्र में हो गई थी। पति सलमान की उम्र 18 साल थी। दोनों ने लव मैरिज की थी। शादी के बाद ससुराल में मारपीट शुरू हो गई। एक दिन सूफी घर छोड़कर भाग निकली। पीछे एक साल का बच्चा छूट गया। यही दर्द आज भी उसे सबसे ज्यादा सताता है। सूफी आगे कहती है, ‘मैं घर जाना चाहती हूं। यहां अच्छा नहीं लगता। बच्चे की बहुत याद आती है। यहां अच्छा खाना नहीं मिलता। जेल में ज्यादा अच्छा था। वहां तो हमें क्लिप, काजल, समोसा, बिस्किट सब मिलता था। महिला सिपाही ही लाकर देती थीं।’ सूफी ये बातें बोल रही थी, तब डिटेंशन सेंटर के अफसर भी मौजूद थे। मतलब साफ था, यहां रहने वाले लोगों पर कोई जोर-जबरदस्ती नहीं होती। वे अपनी बात कह सकते हैं। सूफी के घर लौटने के सवाल पर एक अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश के असिस्टेंट हाई कमिश्नर जनवरी में आने वाले थे। वहां हालात ठीक नहीं होने की वजह से उनका आना कैंसिल हो गया। अब तक नहीं आए, इसलिए बात नहीं बनी। दूसरी कहानी लाल सेर पार और इयांग की डिटेंशन सेंटर में महिलाओं के लिए एक NGO ‘डेवलपमेंट एंड जस्टिस’ काम करता है। NGO के लोग महिलाओं को सिलाई-बुनाई सिखाते हैं। उनके बनाए कपड़े बेचते भी हैं। सूफी के अलावा और भी लड़कियों ने हमें अपने बनाए कपड़े दिखाए। इनमें दो बहनें थीं, इयांग और लाल सेर पार। दोनों बताती हैं, ‘हम म्यांमार से भारत आए थे। साथ में 30 और लोगों ने बॉर्डर पार किया था। हमारे देश में लंबे वक्त से गृह युद्ध चल रहा है।’ म्यांमार से आए लोगों में चार साल का एक बच्चा भी है। वह पेरेंट्स के साथ भारत आया था। ये लोग अपने देश लौटना भी नहीं चाहते, क्योंकि वहां हालात ठीक नहीं है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) इन्हें ऑस्ट्रेलिया भेजना चाहता है। प्रोसेस पूरी होने तक सभी इसी सेंटर में रहेंगे। तीसरी कहानी मुख्तार कीअब शाम के करीब 6 बज रहे थे। सिलाई की क्लास खत्म हो चुकी थी। खाने का वक्त होने वाला था। अब हमें सेंटर के बाकी लोगों से मिलना था। उनसे मिलने के लिए आगे एक दरवाजे से अंदर जाना था। दरवाजे के बायीं ओर एक बोर्ड पर लिखा था- ‘अंदर रहने वालों की संख्या कुल 133 है।’ इन लोगों में अलग-अलग देशों के और कुछ असम के डी-वोटर्स भी शामिल हैं। डी-वोटर्स, यानी डाउटफुल वोटर्स, वे लोग हैं जिनकी नागरिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यहां से आगे कैमरा ले जाना मना है। कैमरा बाहर रखकर हम अंदर दाखिल हुए। सामने ग्राउंड दिखा। कुछ लोग फुटबॉल खेल रहे थे। यहीं तीन युवक बैठे मिले। इनमें से एक असम का रहने वाला है। भारत की नागरिकता साबित नहीं कर पाने की वजह से उसे डी-वोटर माना गया। इसके बाद से वह डिटेंशन सेंटर में रह रहा है। बाकी दो बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत में आए थे। इनमें से एक 34 साल के मुख्तार हैं। मुख्तार पढ़े-लिखे नहीं हैं। वे ढाई साल से यहां हैं। मुख्तार बताते हैं, ‘भारत के एक दलाल ने 6 हजार रुपए लेकर बॉर्डर पार करवाया। मैं गुवाहाटी से कोलकाता जाना चाहता था। सोचा था कि पैसे कमाऊंगा, लेकिन स्टेशन पर पुलिस ने पकड़ लिया। 2 साल जेल में रहा, फिर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया।’ चौथी कहानी फूल मियां कीबांग्लादेश से आए दूसरे शख्स फूल मियां हैं। 5वीं तक पढ़े हैं। बॉर्डर पार करने के लिए भारत के एक दलाल को 25 हजार रुपए दिए थे। फूल मियां के साथ उनके गांव के 2 और लोग आए थे। इनमें एक नाबालिग था। 2 साल बाद नाबालिग बांग्लादेश लौट गया। फूल मियां और उनके दोस्त की रिहाई नहीं हो पाई। फूल मियां से मिलकर हम आगे बढ़े। ग्राउंड के किनारे करीब 15 बिल्डिंग हैं। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग बिल्डिंग हैं। पहले हम महिलाओं से मिलने पहुंचे। ग्राउंड फ्लोर बिल्कुल खाली था। साथ चल रहे एक अफसर ने हमें ऊपर चलने के लिए कहा। हम लोहे की चौड़ी सीढ़ियों से ऊपर पहुंचे। यहां एक बच्चा साइकिल चलाता मिला। अफसर ने बताया ये बच्चा म्यांमार से आया है और मां के साथ रहता है। पांचवी कहानी बियाखनचमपरमां कीहम बच्चे की मां से मिलने ऊपर चले गए। हमने उनसे बच्चे से मिलवाने की बात कही। पता चला वो पिता के पास गया है। पिता पुरुषों की बिल्डिंग में रहते हैं। उसे माता-पिता दोनों के साथ रहने की इजाजत है। मां बियाखनचमपरमां की उम्र 22 साल है, पिता 32 साल के है। हमने पूछा- बच्चे को लेकर बॉर्डर क्रॉस करने की क्या मजबूरी थी? बिना रुके हल्की मुस्कुराहट के साथ बियाखनचमपरमां ने जवाब दिया- ‘जान बचाने के लिए। और हमें इसका कोई अफसोस नहीं। बच्चा और पति दोनों आंखों के सामने रहते है। पति से भी ग्राउंड में मुलाकात हो जाती है। मै यहां खुश हूं।’ एक कमरे में 4 से 5 लोग, टीचर के जाने से पढ़ाई रुकीहम लड़कियों के कमरे में भीतर गए। एक कमरे में 4 से 5 लोग रहते हैं। रूम से सटा एक छोटा किचन है। एक कमरे में कुछ किताबें रखी दिखीं। पूछने पर पता चला कि पहले यहां पढ़ाई होती थी। कुछ महीनों से मास्टर नहीं आ रही हैं। उनकी नौकरी कहीं और लग गई है। एक लड़की बोली, ‘हमें हिंदी और अंग्रेजी भाषा सीखनी है। इसके लिए मास्टर चाहिए। हम पहले से अच्छी हिंदी और अंग्रेजी बोलने लगे थे, लेकिन अब कोई सिखाने नहीं आता।’ छठवीं कहानी सिंगतावागसियाम कीएक और कमरे में हमें गिटार दिखा। अब तक दिमाग में डिटेंशन सेंटर की तस्वीर किसी उबाऊ जगह जैसी थी। गिटार देखकर लगा कि यहां संगीत भी है। ये गिटार सिंगतावागसियाम का है। वे कहती हैं, ‘बाहर की दुनिया बहुत याद आती है। मां की याद आती है या बहुत खुश होती हूं, तब गिटार बजाती हूं। हमारी बातचीत चल रही थी, तभी लाइट चली गई। साथ मौजूद महिला पुलिसकर्मी और अधिकारी ने फोन का फ्लैश जलाया। उन्होने कहा, ‘बहुत देर हो रही है। ताला बंद करने का टाइम हो चुका है।’ सातवीं कहानी मानिकजन बेगम कीहम महिलाओं की दूसरी बिल्डिंग की तरफ चल पड़े। यहां सबसे ज्यादा असम की डी वोटर महिलाएं थीं। इनमें से एक मानिकजन बेगम की गोद में 17 महीने की बच्ची थी। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से हमें घर से दूर रहना पड़ रहा है। मानिकजन बेगम के बारे में शक है कि वे 1971 के बाद बांग्लादेश से भारत आई हैं। पहले असम के कोकराझार 7 बटालियन में बंद थीं। उन जैसी और भी महिलाएं यहां हैं। सब कहती हैं कि हम बांग्लादेशी नहीं हैं। इनके अलावा नाइजीरियन महिला मिशेल जैंडी भी हैं। पहली बार विजिटर वीजा पर 22 सितंबर, 2017 को दिल्ली आई थीं। 9 अगस्त, 2023 को उन्हें गुवाहाटी एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान रोक लिया गया। उनका वीजा फर्जी था। मिशेल ने जेल में 2 साल की सजा पूरी कर ली है। आगे की प्रोसेस पूरी करके उन्हें वापस भेज दिया जाएगा। सेंटर में तीन वक्त का खानाहम बाहर निकले, तब तक ताला बंद हो चुका था। कुछ दूर पुरुषों के रहने वाली बिल्डिंग थी। इसमें रहने वाले ज्यादातर लोग बांग्लादेश से बॉर्डर पार करके आए थे, लेकिन पकड़ लिए गए। सभी ने रात का खाना खा लिया था। खाने में दाल, चावल, रोटी, सब्जी मिली। लोगों ने बताया कि तीन वक्त खाना मिलता है। पसंद के हिसाब से मछली, मटन, अंडा भी दिया जाता है। डिटेंशन सेंटर जाने से पहले हमने IG जेल पुलक महंत से बात की थी। उन्होंने कहा था कि डिटेंशन सेंटर कोई जेल नहीं, बल्कि होल्डिंग प्लेस है। विदेशियों को वापस भेजने की कार्रवाई पूरी करने से पहले यहां होल्ड किया जाता है। इस जगह उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। …………………… ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें...असम में क्या महिलाएं खोलेंगी BJP की जीत का रास्ता, स्कीम से मुस्लिम भी खुश असम में करीब दो महीने बाद चुनाव होने हैं। हर चौक-चौराहे पर सरकारी योजनाओं और उनका फायदा लेने वालों की तस्वीरें हैं, जिनमें CM हिमंता बिस्वा सरमा महिलाओं को चेक देते दिख रहे हैं। ये चेक महिलाओं के खाते में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के हैं। सीएम हिमंता ने वही दांव खेला है, जो बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान BJP गठबंधन ने खेला था। मध्यप्रदेश, ओडिशा, दिल्ली जैसे 6 राज्यों में BJP के लिए ये जीत का फॉर्मूला रहा है। पढ़ें पूरी खबर...
सेना मुख्यालय की ओर से जारी आदेशों के तहत कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस कदम को नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और सैन्य ढांचे में संतुलन स्थापित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
व्हाइट हाउस ने माना – भारत है टेक्नोलॉजी का पावरहाउस
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख विज्ञान सलाहकार ने कहा है कि भारत एक “तकनीकी महाशक्ति” है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को आगे बढ़ाने की व्हाइट हाउस की योजना में उसकी अहम भूमिका है
नेपाल : नदी में गिरी बस, एक चीनी नागरिक की मौत
सेंट्रल नेपाल के ताडिंग जिले में एक बस नदी में गिर गई। 23 तारीख की सुबह 8:00 बजे तक, इस दुर्घटना में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई थी और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप का हमला – ‘मेरी शक्तियां और बढ़ीं’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर हाल ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी
‘मोहम्मद’ दीपक के नाम से मशूहर जिम ट्रेनर दीपक कुमार 23 फरवरी को दिल्ली में राहुल गांधी से मिले। साथ में उनके दोस्त विजय रावत भी थे। दोनों 26 जनवरी को एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान का नाम बदलवाने पहुंचे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से भिड़ गए थे। इसके बाद दीपक को धमकियां मिलने लगीं। वे उत्तराखंड के कोटद्वार में जिम चलाते हैं, उनके जिम में मेंबर कम हो गए। दीपक बताते हैं कि एक महीना होने वाला है, अब भी धमकियां मिल रही हैं। मुझे मारने के कोई दो लाख रुपए दे रहा है, तो कोई 5 लाख। इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। दीपक और विजय रावत दिल्ली में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के घर रुके थे। हमने उनसे राहुल गांधी से मुलाकात के बारे में बात की। पहले मोहम्मद दीपक से बात सवाल: राहुल गांधी से मिलने का प्लान कैसे बना?जवाब: मेरे पास फोन आया था कि राहुल जी आपसे मिलना चाहते हैं। हम उनसे मिलने आए। राहुल जी ने कहा कि आपने अच्छा काम किया है। आपने एक बुजुर्ग की जान बचाई है, मैं इससे बहुत प्रभावित हुआ हूं। राहुल जी ने कहा कि मैं आपके जिम की मेंबरशिप लेना चाहता हूं। मैंने उनसे कहा कि कोटद्वार आइए और ले लीजिए। सवाल: क्या आप कांग्रेस जॉइन करने वाले हैं?जवाब: मैं राहुल गांधी से इंसानियत के नाते मिला हूं। मेरा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। न ही मैं राजनीति करना चाहता हूं। लोग सोच रहे हैं कि दीपक कांग्रेस से जुड़ गया है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। मैं किसी पार्टी से नहीं जुड़ा हूं। कोई भी पार्टी वाला बुलाएगा, तो मैं जाऊंगा। मोदीजी बुलाएंगे, तो उनसे भी मिलूंगा। सवाल: अभी जिम कैसा चल रहा है, खबरें आई थीं कि मेंबर कम हो गए हैं?जवाब: उस वक्त जब माहौल खराब था, तब तो 15-16 मेंबर ही रह गए थे। अब थोड़े बढ़े हैं। करीब 30 मेंबर हो गए हैं। पहले 150 मेंबर थे। लोग डरे हुए हैं, इसलिए अपने बच्चों को जिम नहीं भेज रहे। सवाल: कोटद्वार में पहले और अब के हालात में क्या बदला है?जवाब: उस दिन के मुकाबले देखें, तो हालात बेहतर हैं। तब तो बहुत खराब माहौल था। सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही थीं। इससे परिवारवाले डर गए थे। अब माहौल बदल गया है। बेटी स्कूल जाने लगी है। मम्मी चाय का स्टॉल लगाने लगी हैं। सवाल: दुकान वाले बाबा से फिर मुलाकात हुई या नहीं?जवाब: हां, मिलना हुआ था। उन्होंने शाबाशी दी। कहा कि जो आपने किया, वो कोई अपना भी नहीं करता। सवाल: क्या अब भी धमकियां मिल रही हैं जवाब: धमकियां तो मिल ही रही हैं। सोशल मीडिया पर कोई मारने के लिए 2 लाख दे रहा है, कोई 5 लाख दे रहा है। ये सब तो चल ही रहा है। उस वक्त हालात ऐसे थी कि लग नहीं रहा था कि पुलिस-प्रशासन संभाल पाएंगे। अब सब ठीक है। बस जिन लोगों ने सब किया था, उनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही है। मैं चाहता हूं कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए। सवाल: एक केस आपके ऊपर भी हुआ था, उसका क्या हुआ?जवाब: ये तो मुझे भी समझ नहीं आया कि हमारे ऊपर केस क्यों हुआ है। हमने तो कोई गलत काम नहीं किया। सवाल: आगे का क्या प्लान है?जवाब: काम तो वही (जिम) करना है। और कोई काम भी नहीं है। मुझे अपने जिम से ही मतलब है। वही लाइफ बेहतर लगती है। अभी डर के माहौल की वजह से मेरा काम कम हुआ है। ये भी ठीक हो जाएगा। ऐसे हादसे आगे भी होंगे। मैं लोगों से कहना चाहता हूं कि हिंदू या मुसलमान, किसी के भी साथ गलत हो रहा हो तो आवाज उठाओ क्योंकि हमें इंसानियत को जवाब देना है, न कि धर्म को। सवाल: आप यात्रा निकालने वाले हैं?जवाब: हां, हम सोच रहे हैं कि इंसानियत के नाते यात्रा निकालें। हमने लोगों से राय मांगी है। अभी सोचा है कि उत्तराखंड से यात्रा शुरू करें। यात्रा कहां तक जाएगी, ये तय नहीं किया है। मैं चाहता हूं कि हर पार्टी के लोग इसमें शामिल हों। हमें किसी से दिक्कत नहीं है। दीपक के दोस्त विजय रावत बोले- इंसानियत जोड़ो यात्रा निकालेंगे 26 जनवरी को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं साथ बहस के वीडियो में दीपक के साथ उनके दोस्त विजय रावत भी दिखाई दे रहे थे। विजय रावत के खिलाफ भी कोटद्वार पुलिस ने FIR दर्ज की है। हमने विजय से भी बात की। सवाल: कोटद्वार में जो हुआ, क्या उसके बाद डर लगता है?जवाब: थोड़ा डर तो रहता ही है। मम्मी-पापा कहते हैं कि कहीं भी जाओ, थोड़ा देखकर जाओ। ये स्वाभाविक बात है। हमारे ऊपर केस दर्ज हुआ है, वह भी गलत है। रक्षा करने वालों पर केस हो रहा है। भक्षक खुलेआम घूम रहे हैं। हम चाहते हैं, ऐसी घटनाएं रुकें। सरकार इसे रोके और कार्रवाई करे। सवाल: दीपक को धमकी मिली थी, क्या आपको भी धमकी है?जवाब: नहीं, मुझे धमकी नहीं मिली। सवाल: राहुल गांधी से क्या बात हुई?जवाब: उन्होंने हमारा हौसला बढ़ाया। कहा कि आप लोगों ने बहुत सराहनीय काम किया है। देश के युवाओं को ऐसे ही आगे आना चाहिए। देश में जो नफरत फैल रही है, उसके खिलाफ ज्यादा से ज्यादा युवाओं को आना चाहिए। आपने युवाओं की सोच बदली है। सवाल: क्या पार्टी जॉइन करने पर बात हुई है? जवाब: मैं यूथ कांग्रेस का डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट रह चुका हूं। कोटद्वार से छात्र संघ का अध्यक्ष रहा। अभी हमारा एक यात्रा निकालने का प्लान है। देश में जो नफरत फैल रही है, उसके खिलाफ हम इंसानियत जोड़ो यात्रा निकालना चाहते हैं। अभी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, लेकिन लोगों से राय-मशविरा ले रहे हैं कि कैसे इसे आगे बढ़ाना चाहिए। अब भी मारपीट के बहुत से वीडियो वायरल हो रहे हैं। देश में बहुत सी चीजें गलत हो रही हैं। हमने जब बाबा मामले में आवाज उठाई थी, उससे कुछ लोगों की सोच बदली है। इसीलिए हम यात्रा निकालना चाहते हैं, जो देश में नफरत खत्म करे, सभी धर्म के लोग मिलकर रहें और भाईचारा बना रहे। राहुल गांधी ने भरोसा दिया है कि वे भी यात्रा में शामिल होंगे। सवाल: दुकान का नाम बाबा रखने पर विवाद हुआ था, क्या अब भी वही नाम है?जवाब: दुकान चल रही है। वे नाम भी नहीं बदलेंगे। बाबा नाम तो हर धर्म में होता है। ये कोई बड़ा इश्यू नहीं था। बोर्ड में बाबा के साथ दुकान मालिक का नाम शोएब भी लिखा है। लोगों का काम नफरत फैलाना था, वे वही कर रहे थे। सवाल: बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से बहस वाले दिन क्या हुआ था? जवाब: दीपक मेरा 20 साल पुराना दोस्त है। मेरे बड़े भाई जैसा है। 26 जनवरी को हम दुकान के बगल में बैठे थे। हमने देखा के बुजुर्ग परेशान हैं। उनके हाथ पैर कांप रहे थे। लग रहा था उनके साथ कुछ हो रहा है। इसीलिए हम मदद करने गए। सवाल: कोटद्वार में अब कैसा माहौल है?जवाब: अब ठीक है। 26 जनवरी से 12 फरवरी तक धमकियां मिलती रहीं। बहुत डर था। पुलिस तैनात थी। सख्त पहरा था। अब माहौल बेहतर है। इमरान प्रतापगढ़ी बोले- मोहम्मद दीपक, मोहब्बत के दीपकमोहम्मद दीपक दिल्ली में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के घर पर रुके थे। राहुल गांधी और दीपक की मुलाकात पर इमरान प्रतापगढ़ी कहते हैं कि राहुल गांधी जी देश में हर उस व्यक्ति से मिल रहे हैं, जो समाज को जोड़ने की बात कर रहा है। मोहम्मद दीपक, मोहब्बत का दीपक हैं। मैंने राहुल जी से गुजारिश की थी कि वे दीपक से मिलें। होना तो यह चाहिए था कि प्रधानमंत्री जी दीपक को बुलाकर सम्मानित करते, लेकिन ये काम नेता प्रतिपक्ष कर रहे हैं। इमरान केस में कोई गिरफ्तारी नहीं होने पर भी वे सवाल उठाते हैं। इमरान आरोप लगाते हैं कि वीडियो में गुंडों के चेहरे साफ दिख रहे हैं, वे खुलेआम धमकियां दे रहे हैं, फिर भी अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। ये खबर भी पढ़िए… ‘मोहम्मद’ दीपक से बोले राहुल- कोटद्वार आकर तुम्हारे जिम की मेंबरशिप लूंगा जिम ट्रेनर दीपक कुमार ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। राहुल ने इस मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए दीपक को 'साहस की लौ' बताया है। दीपक ने बताया कि राहुल जी ने मेरी फैमिली से बात की। मुझे तसल्ली दी कि घबराने वाली कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि वे कोटद्वार आकर मेरे जिम की मेंबरशिप लेंगे। अगर राहुल जी मेरे जिम आएंगे और मेंबरशिप लेंगे, तो यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात होगी। पढ़िए पूरी खबर…
‘अतीक अब जिंदा नहीं है। प्रयागराज में उसका खौफ भी खत्म हो चुका, लेकिन मैं आज भी डर में जी रही हूं। मेरे पति को बीच बाजार में घेरकर मारने वाला गुड्डू बमबाज और अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन आज तक नहीं पकड़े गए। उनके लोग हमें धमकियां देते हैं। वीडियो भेजते हैं, जिसमें लिखा होता है- बदला ऐसा लो, जिसे चार लोग याद करें। ये लोग जब तक फरार रहेंगे, मेरे परिवार पर खतरा बना रहेगा।‘ 24 फरवरी जया पाल की जिंदगी की सबसे बुरी तारीख है। तीन साल पहले इसी दिन उनके पति और पेशे से वकील उमेश पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड माफिया डॉन अतीक अहमद था। उमेश की मौत के बाद जया पाल ने अतीक समेत 10 लोगों के खिलाफ मर्डर का केस दर्ज करवाया। 36 महीने बाद भी केस की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है। उमेश की हत्या में शामिल 10 में 6 आरोपी मारे जा चुके हैं। अतीक की पत्नी शाइस्ता, गुड्डू मुस्लिम के अलावा शूटर अरमान और साबिर पकड़े नहीं गए। अतीक अहमद की मौत के बाद उसकी 'IS-227 गैंग' खत्म हो चुकी है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। यही वजह है कि 24 फरवरी, 2023 से लेकर अब तक उमेश के घर के मेन गेट और कमरों के बाहर 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है। यूपी का सबसे चर्चित उमेश पाल मर्डर केस 3 साल बाद भी आखिर कहां अटका है, हत्यारों को सजा मिलने में कितना वक्त और लग सकता है? इन सवालों के जवाब जानने दैनिक भास्कर की टीम प्रयागराज पहुंची। अतीक मरा, फिर 'IS-227 गैंग' का डर क्यों कायम अतीक की मौत के बाद भी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज 'IS-227 गैंग' का नाम पूरी तरह खत्म नहीं माना गया है। गैंग पर हत्या, लूट, रंगदारी, जमीन कब्जाने और किडनैपिंग जैसे कई केस दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, अतीक के मारे जाने के बाद उसका नेटवर्क कमजोर पड़ा है। फिर भी कानूनी रिकॉर्ड में गैंग तब तक खत्म नहीं मानी जाती, जब तक उससे जुड़े सभी मामलों का निपटारा न हो जाए। अतीक की गैंग पर चल रहा सबसे बड़ा मुकदमा उमेश पाल हत्याकांड का है। प्रयागराज के धूमनगंज थाने से महज 200 मीटर दूर सुलेम सराय इलाके में उमेश पाल का घर है। यहां 24 घंटे PAC और प्रयागराज पुलिस के 20 जवान तैनात रहते हैं। ये फोर्स 24 फरवरी के दिन डबल कर दी जाती है। बिना सिक्योरिटी जांच और प्रशासन की इजाजत के बगैर कोई मकान के अंदर नहीं जा सकता। अतीक मारा गया, फिर इतनी कड़ी सुरक्षा क्यों? इसके जवाब में उमेश की पत्नी जया कहती हैं, ‘अतीक बेशक मर चुका है, लेकिन उसके गिरोह के लोग आज भी फरार हैं। वो हमसे बदला लेना चाहते हैं। मेरे सामने गुड्डू मुस्लिम ने इसी घर में बम फेंका, जिससे मेरे पति उमेश पाल और उनके गनर राघवेंद्र की मौत हो गई। मैं गुड्डू मुस्लिम का चेहरा भला कैसे भूल सकती हूं।‘ ‘हमारी सुरक्षा में तो कोई कमी नहीं है, लेकिन फिर भी मन में हर वक्त घबराहट रहती है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, शूटर साबिर और अरमान अब भी हमारे लिए खतरा हैं। इन अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।‘ एक मिनट के वायरल वीडियो में हुआ उमेश हत्याकांड का खुलासा उमेश पाल की मौत के बाद घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो क्लिप में 24 फरवरी 2023 की शाम 4 बजकर 30 मिनट पर उमेश पाल कोर्ट से घर लौटते दिख रहे थे। उमेश जैसे ही घर के पास पहुंचे, बदमाशों ने उनकी कार पर फायरिंग शुरू कर दी। उमेश अपने गनर राघवेंद्र सिंह के साथ घर की तरफ भागे। तभी बदमाशों ने उन पर दो बम फेंकें। एक गनर संदीप निषाद कार में थे। बदमाशों ने उन्हें भी गोली मार दी। तीनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उमेश पाल और संदीप निषाद ने दम तोड़ दिया। दूसरे गनर राघवेंद्र सिंह को लखनऊ रेफर किया गया, लेकिन उनकी जान भी नहीं बच पाई। हत्याकांड के बाद विपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया। इसके जवाब में CM योगी ने विधानसभा में कहा- जिस अतीक अहमद के खिलाफ पीड़ित परिवार ने मामला दर्ज कराया है, वो समाजवादी पार्टी का पोषित माफिया है। उसकी कमर तोड़ने का काम हमारी सरकार ने किया है। मैं फिर इसी हाउस में कह रहा हूं कि इस माफिया को मिट्टी को मिला देंगे। 15 अप्रैल 2023 को अतीक और उसके भाई अशरफ की पुलिस सुरक्षा के बीच हत्या कर दी गई। फोन पर धमकी मिली- ‘ऐसा बदला लेंगे कि 4 लोग याद करेंगे’बातचीत के दौरान जया ने धमकी भरे मैसेज भी दिखाए, जो अनजान नंबरों से भेजे गए थे। जया का आरोप है कि अतीक की मौत के बाद उसकी गैंग के लोग हर महीने धमकी भरे मैसेज भेजते हैं। जया कहती हैं, ‘हमें 3 साल से धमकियां मिल रही हैं। घर पर बूढ़ी सास और दो बच्चे हैं। धमकियों की वजह से बच्चों को अकेले स्कूल नहीं भेजती। पुलिस साथ हो, तभी पढ़ाई के लिए घर से बाहर जाते हैं।‘ उमेश के घर के पास से नकाबपोश महिलाएं पकड़ी गईंउमेश पाल की 81 साल की मां शांति पाल कहती हैं, ‘हमें डराने के लिए अतीक के रिश्तेदार धमकियां दे रहे हैं। हम घर पर क्या करते हैं, कौन हमसे मिलने आ रहा है, बच्चे कब बाहर जाते हैं, इनकी जानकारी अतीक की गैंग तक बराबर पहुंचाई जा रही है।‘ पिछले साल अगस्त में बुर्का पहने चार महिलाओं को पुलिस ने हमारे घर के पास से पकड़ा था। उन्होंने पूछताछ में बताया कि वे अतीक के ड्राइवर के कहने पर हमारे बारे में जांच-पड़ताल कर रही थीं। ‘उन्होंने गली के अंदर आकर हमारे घर में भी घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिसवालों ने पकड़ लिया। इस घटना के बाद से हमारी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।‘ बेटे को याद कर शांति आगे कहती हैं, ‘मेरे बेटे ने एक माफिया से 18 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। उनकी तीसरी पुण्यतिथि है। उमेश की याद तो शायद कभी कम नहीं होगी, लेकिन अब उनके पीछे परिवार को संभालने वाला कोई नहीं है।‘ गुड्डू-शाइस्ता की गिरफ्तारी न होना केस अटकने की बड़ी वजह उमेश पाल की हत्या के बाद यूपी पुलिस ने सबसे पहले असद के ड्राइवर अरबाज को धूमनगंज के नेहरू पार्क में 27 फरवरी को मुठभेड़ में ढेर किया। इसके बाद दूसरे एनकाउंटर में 6 मार्च को उमेश पाल पर पहली गोली चलाने वाला विजय चौधरी उर्फ उस्मान मारा गया। 13 अप्रैल को झांसी में UP-STF ने माफिया अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम का एनकाउंटर कर दिया। मामले में शामिल 3 अपराधियों के एनकाउंटर के बाद 15 अप्रैल को पुलिस कस्टडी में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या कर दी गई। फिलहाल, उमेश पाल हत्याकांड में शामिल 5-5 लाख के इनामी 3 शूटर्स गुड्डू मुस्लिम, साबिर और अरमान फरार हैं। अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन भी फरार है। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम है। शाइस्ता के साथ अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और बहन आयशा नूरी भी मोस्टवांटेड लिस्ट में हैं। उमेश पाल हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी पर हमने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट विक्रम सिंह से बात की। वे कहते हैं, ‘जब तक पुलिस इस हत्याकांड के सभी आरोपियों को पकड़कर कोर्ट में हाजिर नहीं करती। मामले की सुनवाई का आगे बढ़ना मुश्किल होगा। गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। फिलहाल ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होना बाकी है।’ ’जया पाल ने 10 लोगों के खिलाफ शुरुआती FIR दर्ज करवाई थी। तीन साल के अंदर आरोपी बढ़कर 17 हो गए हैं। आरोपियों में अतीक का बहनोई डॉक्टर अखलाक अहमद, सदाकत खान, अतीक के वकील खान सौलत हनीफ, विजय मिश्रा और अतीक के बेटे मोहम्मद उमर और अली अहमद भी शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी के बाद केस एविडेंस स्टेज पर आ चुका है।’ महाकुंभ तक प्रयागराज में छिपी थी शाइस्ता, गुड्डू भारत में नहींगुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन की आखिरी लोकेशन क्या थी? उनके बारे में हमने प्रयागराज पुलिस के सीनियर अफसर से बात की। वे बताते हैं, ‘यूपी पुलिस और STF की टीमें गुड्डू मुस्लिम, शाइस्ता, साबिर और अरमान को पकड़ने के लिए अब तक 14 राज्यों में दबिश दे चुकी हैं। उनकी खोजबीन के दौरान हमें अतीक की IS-227 गैंग के कुल 121 बदमाशों और 74 सहयोगियों का पता चला है। इनमें कुछ बड़े व्यापारी भी शामिल हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है।' ‘नवंबर 2025 को हमें इनपुट मिला कि गुड्डू मुस्लिम फर्जी पासपोर्ट के सहारे दुबई भागा है। कोलकाता एयरपोर्ट के इमीग्रेशन रिकॉर्ड की जांच में ये सामने आया है कि 6 दिसंबर 2024 को सैयद वसीमुद्दीन नाम के एक शख्स ने एतिहाद एयरलाइंस की फ्लाइट पकड़ी थी। उसके पासपोर्ट पर लगी तस्वीर गुड्डू मुस्लिम से काफी मिल रही थी। हालांकि अभी इसकी जांच चल रही है।' पुलिस के मुताबिक, फरवरी 2025 तक शाइस्ता परवीन की लास्ट लोकेशन प्रयागराज में मिली थी। बाद में पुलिस को इनपुट मिला कि वो महाकुंभ मेले के दौरान प्रयागराज से फरार होकर पश्चिम बंगाल चली गई है। अब तक उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी है। शाइस्ता के अलावा, गिरोह की दो महिला सदस्य रूबी उर्फ जैनब (अशरफ की पत्नी) और आयशा नूरी (अतीक की बहन) भी फरार हैं। दोनों पर 25 हजार का इनाम रखा गया है। विधायकी का चुनाव लड़ना चाहते थे उमेश पाल साल 2004 की बात है, अतीक उस वक्त इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से विधायक था। उसने 1989 के बाद लगातार 5 चुनाव जीते थे। अतीक के सांसद बनने से ये सीट खाली हो गई। 2004 में अतीक ने अपने भाई अशरफ को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन BSP कैंडिडेट राजू पाल ने अशरफ को 4 हजार वोट से हरा दिया। अशरफ के चुनाव हारने पर अतीक बौखला गया। 25 जनवरी, 2005 को राजू पाल के काफिले पर हमला हो गया। राजू पाल को कई गोलियां लगीं, तब उमेश पाल ने ही उन्हें हॉस्पिटल पहुंचाया था। डॉक्टर राजू पाल को नहीं बचा पाए। पोस्टमॉर्टम में उनके सीने से 19 गोलियां निकाली गई थीं। राजू पाल की हत्या के बाद उमेश पाल का नाम चर्चा में आया। उन्हें इस केस में मुख्य गवाह बनाया गया। बताया जाता है कि अतीक ने उमेश को कई बार फोन कर केस से हटने के लिए कहा। जान से मारने की धमकी दी। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उनका अपहरण करा लिया। उन्हें रातभर पीटा। बिजली के शॉक दिए। मनमाफिक गवाही देने के लिए टॉर्चर किया गया। इसके बाद छोड़ दिया गया। 2007 में अतीक और अशरफ के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट लिखी गई। इसके बाद उमेश पाल पॉलिटिक्स में चले गए। 2006 से 2012 तक BSP में रहे। फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। 2022 में विधानसभा चुनाव के समय BJP जॉइन कर ली। उनकी पत्नी जया पाल के मुताबिक, उमेश प्रयागराज की फाफामऊ सीट से विधायक का चुनाव लड़ना चाहते थे। राजू पाल हत्याकांड में गवाह होने की वजह से उमेश पहले से अतीक गैंग के निशाने पर थे। 24 फरवरी, 2023 को उनकी हत्या कर दी गई। उमेश की मौत के बाद अतीक का साम्राज्य खत्मउमेश पाल के मर्डर से पहले अतीक पर हत्या, हत्या की साजिश, रंगदारी और किडनैपिंग के करीब 60 केस दर्ज थे। अतीक पॉलिटिक्स में भी तेजी से आगे बढ़ा। 2012 में उसका सियासी रसूख इतना बढ़ गया था कि उसने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी, तो हाईकोर्ट के 10 जजों ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। 11वें जज ने सुनवाई की और अतीक अहमद को जमानत मिल गई। अतीक ने एक बार लोकसभा और 5 बार विधानसभा का चुनाव जीता। 2004 में उसने फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा। इस दौरान दिए हलफनामे में अतीक ने अपनी संपत्ति 3.36 करोड़ रुपए बताई थी। 2012 में अतीक ने इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, तो संपत्ति 20.79 करोड़ रुपए हो गई। 2018 में फूलपुर सीट पर उपचुनाव हुआ। इसमें अतीक ने अपनी संपत्ति 25.50 करोड़ बताई। 2019 में अतीक ने PM मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। ये उसका आखिरी इलेक्शन था। उमेश पाल की हत्या में नाम आने के बाद अतीक का साम्राज्य ढहना शुरू हो गया। सरकार के मुताबिक, बीते 3 साल में अतीक की करीब 3000 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है। …………………ये खबर भी पढ़ें… जैश की महिला जिहादी ब्रिगेड, भारत के लिए नया खतरा जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर 2025 को पहली बार आतंकियों की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का ऐलान किया था। इसके ठीक 31 दिन बाद 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। 15 लोग मारे गए। NIA ने ब्लास्ट को जैश-ए-मोहम्मद के 'वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा बताया। पढ़िए पूरी खबर…

