मचे कोहराम के बीच यूनुस सरकार का बड़ा उलटफेर, बीडा, बेजा-बेप्जा और मिडा को एक में कर दिया मर्ज; बांग्लादेश में बहुत कुछ बदल जाएगा?

Govt moves to merge Bida, Beza, Bepza, Mida: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से ही बांग्लादेश में कोहराम मचा हुआ है. राजनीतिक उथल-पुथल, विरोध-प्रदर्शन, अर्थव्यवस्था पर दबाव और फरवरी में होने वाले चुनाव से पहले यूनुस की अंतरिम सरकार ने एकदम धमाकेदार फैसला लिया है.बीडा, बेजा-बेप्जा और मिडा जैसी सारी प्रमुख निवेश एजेंसियों को एक ही संस्था में मर्ज कर दिया है. आइए जानते हैं इसका क्या होगा असर.

ज़ी न्यूज़ 27 Jan 2026 1:12 pm

पहले सीना ठोकर ट्रंप का किया विरोध, अब चीन से मदद मांगने जा रहे कीर स्टार्मर, अमेरिका- ब्रिटेन में खुलकर होगी दुश्मनी या बचा लेंगे शी जिनपिंग?

Keir Starmer China trip:ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सख्त बयान देने के बाद अब चीन के दौरे पर जा रहे हैं. इस यात्रा को ब्रिटेन की बदली हुई विदेश नीति के तौर पर देखा जा रहा है. जिसके बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इससे अमेरिका-ब्रिटेन रिश्तों में टकराव बढ़ेगा या चीन संतुलन साधेगा?

ज़ी न्यूज़ 27 Jan 2026 12:22 pm

20-21 जनवरी को वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका के बीच किस मामले में हो गई डील? पूरी दुनिया में पड़ेगा असर, सबसे ज्यादा किन्हें होगा फायदा

India-US step up counter-narcotics cooperation: 20-21 जनवरी 2026 को वाशिंगटन में भारत-अमेरिका ने पहली Drug Policy Executive Working Group की बैठक की. इसमें दोनों देशों ने नार्को-टेररिज्म रोकने, वैध व्यापार बचाने पर जोर दिया है. इससे ड्रग माफिया में खलबली मची हुई है. जानते हैं पूरी रिपो

ज़ी न्यूज़ 27 Jan 2026 10:52 am

‘कश्मीर हमारा था, है और रहेगा’- UN में भारत का सख्त संदेश, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भी पाकिस्तान के झूठ को किया बेनकाब

India Rejects Pakistan False Claims: भारत ने UN में पाकिस्तान के लगाए आरोपों का कड़ा जवाब दिया है. भारत ने साफ कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान जो बातें कह रहा है, वे झूठी और अपने फायदे के लिए गढ़ी जा रही हैं. भारत ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है. इस मुद्दे पर पाकिस्तान को बोलने का कोई हक नहीं है.

ज़ी न्यूज़ 27 Jan 2026 10:13 am

ट्रंप से पहले मोदी से मुलाकात! ब्राजील के राष्ट्रपति लुला का बड़ा फैसला; वाशिंगटन जाने से पहले क्यों आ रहे हैं भारत?

Lula da Silva confirms India visit: ब्राजील के राष्ट्रपति लुला फरवरी में भारत का दौरा करेंगे, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे. मोदी और लुला ने व्यापार, निवेश, रक्षा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है.

ज़ी न्यूज़ 27 Jan 2026 8:07 am

अमेरिका पर निर्भरता से परेशान ईयू, भारत बना नई उम्मीद

भारत और यूरोपीय यूनियन के लिए 27 जनवरी का दिन बेहद अहम और ऐतिहासिक माना जा रहा है। दरअसल, मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौता हो सकता है

देशबन्धु 27 Jan 2026 7:50 am

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर चीन के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बधाई संदेश भेजा

देशबन्धु 27 Jan 2026 6:40 am

बलूचिस्तान बना मौत की कोठरी: 1,200 से ज्यादा लोग जबरन गायब

मानवाधिकार समूह बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने बताया कि 2025 में 1,200 से ज्यादा लोगों को जबरदस्ती गायब किया गया और लगभग 200 एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याएं दर्ज की गईं

देशबन्धु 27 Jan 2026 5:10 am

क्या भारत ने ट्रम्प के टैरिफ की काट निकाल ली:आज यूरोपियन यूनियन के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’; इससे क्या-क्या बदल जाएगा

भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आज मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA का ऐलान हो सकता है। इससे 200 करोड़ लोगों का साझा मार्केट तैयार होगा, जो दुनिया की 25% GDP कवर करेगा। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन दोनों ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा है। इसे डोनाल्ड ट्रम्प के अनाप-शनाप टैरिफ का जवाब माना जा रहा है। क्या है ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, इस समझौते से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और क्या इससे ट्रम्प के टैरिफ की भरपाई हो पाएगी; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: भारत-EU के बीच होने वाली ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्या है? जवाबः जब दो या ज्यादा देश आपस में ये तय कर लेते हैं कि वे एक-दूसरे के सामान और सेवाओं पर टैक्स, पाबंदियां और रुकावटें कम या खत्म कर देंगे, तो उसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो FTA व्यापार का ‘टोल फ्री हाईवे’ है। बीते 4 साल में भारत 7 FTA साइन कर चुका है, जिसमें यूके, ओमान, न्यूजीलैंड शामिल हैं। अब 27 जनवरी को यूरोपियन यूनियन के साथ भी FTA की घोषणा हो सकती है। भारत-EU के बीच होने वाली ट्रेड डील 3 बड़ी वजहों से ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कही जा रही है… लंदन के इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की सीनियर एनालिस्ट सुमेधा दासगुप्ता के मुताबिक, ‘मौजूदा हालातों की वजह से व्यापार डगमगा रहा है। ऐसे में भारत और EU को भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर की जरूरत है। भारत अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करना चाहता है। जबकि EU चीन पर निर्भरता घटाना चाहता है, जिसे वह भरोसेमंद नहीं मानता।’ सवाल-2: भारत और EU इस डील पर साइन करने के लिए कैसे राजी हुए? जवाब: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील को लेकर जून 2007 में बातचीत शुरू हुई। तब इसे व्यापक व्यापार और निवेश समझौता यानी BTIA कहा गया। तब भारत की तरफ से इसकी अगुवाई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कर रहे थे। 15 दौर की बैठक हुई, लेकिन 2013 में BTIA की बातचीत पूरी तरह थम गई। EU चाहता था कि उसके 95% से ज्यादा एक्सपोर्ट पर टैरिफ खत्म किया जाए, जबकि भारत सिर्फ 90% तक ही तैयार था। इसके अलावा इन 5 बड़ी वजहों से भी डील ठंडे बस्ते में चली गई… जून-जुलाई 2022 में भारत-EU के बीच FTA की बात दोबारा शुरू हुई। तब से लेकर अक्टूबर 2025 तक दोनों पक्षों के अधिकारियों ने 14 मीटिंग्स की। इन बैठकों में 2007 से 2013 तक तय हुए मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ये तय हुआ कि… भारत के कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने पिछले हफ्ते बताया कि भारत और EU के बीच डील के 24 में से 20 चैप्टरों पर बात पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट्स हैं कि 27 जनवरी को दिल्ली में होने वाले 16वीं भारत-यूरोपीय यूनियन समिट दोनों पक्ष FTA साइन कर सकते हैं। सवाल-3: इस समझौते से भारत को क्या फायदा होगा? जवाब: भारत ने 2025 में EU देशों को 6.8 लाख करोड़ रुपए का सामान बेचा। वहीं EU से 5.5 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा। भारत-EU की ट्रेड डील से भारत के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा… यूरोप में भारतीय कपड़े ज्यादा बिकेंगे भारत में लग सकती हैं यूरोप की डिफेंस फैक्ट्रियां 20% बढ़ सकता है फार्मा और केमिकल ट्रेड कार्बन टैक्स से राहत की उम्मीद इसके अलावा भारत के लोगों को यूरोपियन शराब, यूरोपियन कारें और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे, क्योंकि इन पर लगने वाले प्रीमियम टैरिफ कम हो जाएगा। सवाल-4: इस समझौते से यूरोपियन देशों को क्या फायदा होगा? जवाब: भारत-EU की ट्रेड डील से यूरोपियन यूनियन के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा… भारत में यूरोपीय शराब और वाइन की खपत बढ़ेगी भारत में यूरोपीय कारों की डिमांड बढ़ेगी इसके अलावा यूरोप के आईटी, इंजीनियरिंग, बिजनेस सर्विसेज और टेलीकॉम जैसे हाई-वैल्यू सर्विस सेक्टर को भी भारत में ज्यादा मौके मिलेंगे। क्योंकि इन सेक्टर में दूसरे देशों के मुकाबले टैरिफ कम लगेगा। सवाल-5: क्या भारत-EU की ट्रेड डील ट्रम्प के टैरिफ का जवाब बनेगी? जवाब: ट्रम्प ने भारत के सामानों पर फिलहाल 50% टैरिफ लगा रखा है, जो उनके सत्ता में आने से पहले 10% से भी कम था। इससे भारत के एक्सपोर्ट पर बेहद नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, नवंबर 2025 में भारत का वस्तु निर्यात करीब 3 लाख करोड़ रूपए रहा। ये साल 2024 से 11% कम था। सिर्फ अमेरिका को जाने वाले निर्यात में 28.5% की कमी आई। मई 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 80 हजार करोड़ का निर्यात किया था। अक्टूबर में ये घटकर 56 हजार करोड़ रूपए रह गया। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को होने वाला निर्यात साल 2024–2025 के 86.5 अरब डॉलर से घटकर 2025–2026 में करीब 50 अरब डॉलर रह सकता है। यानी भारतीय घरेलू बाजार को 3 लाख करोड़ रूपए का नुकसान होगा। सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल, ज्वेलरी, झींगा (श्रिंप) और कालीन जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। द हिंदू के मुताबिक, इन सेक्टरों में निर्यात के करीब 70% तक गिरने की आशंका है, इससे लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। अमेरिका को होने वाले इस निर्यात पर बढ़े टैरिफ का असर जमीन पर दिखने लगा है। सूरत जैसे प्रमुख हब से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक हीरों के उत्पादन में कटौती शुरू हो चुकी है। सूरत की हीरा पॉलिशिंग इंडस्ट्री 12 लाख लोगों को रोजगार देती है। अर्थशास्त्री शरद कोहली कहते हैं ट्रेड डील के तहत कम से कम 90% चीजों पर टैरिफ जीरो हो जाएगा। इससे भारतीय सामान चीन जितना सस्ता हो सकता है और यूरोप में इसकी डिमांड भी बढ़ेगी। ट्रंप के टैरिफ की वजह से भारत को हीरों और जेम्स में जो नुकसान हुआ है, यहां से उसकी भरपाई हो सकती है। हालांकि, पूरी भरपाई के बारे में कहना संभव नहीं है। लेकिन 3 से 4 सालों में EU–भारत के बीच का व्यापार करीब 22 लाख करोड़ तक जा सकता है। सवाल-6: भारत-EU ट्रेड डील अमेरिका के लिए कैसे मुश्किलें पैदा करेगा? जवाबः EU और भारत के करीब आने से अमेरिका के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं… अंतरराष्ट्रीय मामलों में JNU के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह के मुताबिक, ‘ट्रंप के टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने से अमेरिका के रणनीतिक साझेदारों को पुरानी व्यापारिक व्यवस्थाओं के विकल्प तलाशने पर मजबूर होना पड़ा है। इससे भारत-EU के बीच FTA महज आर्थिक मजबूरी का नतीजा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक फैसला बन जाता है, जहां दो लोकतांत्रिक साझेदार वैश्विक आर्थिक ढांचे को नया आकार दे रहे हैं।’ यूरोप और अमेरिका पारंपरिक मित्र रहे हैं। ये रिश्ते 100 साल से ज्यादा पुराने हैं। लेकिन कुछ वक्त से अमेरिकी टैरिफ और ग्रीनलैंड को लेकर रिश्ते बिगड़े हैं। वहीं, भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए गए हैं। स्वर्ण सिंह कहते हैं, ‘इन घटनाओं ने EU को NATO से इतर साझेदारियां तलाशने की इच्छा को और मजबूत किया है। इसलिए EU–India FTA केवल आर्थिक कूटनीति तक सीमित न रहकर, अमेरिका के खिलाफ EU के लिए एक जियो-पॉलिटिकल इंश्योरेंस के रूप में सामने आता है।’ ----------------- भारत-EU से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... यूरोपीय यूनियन ने भारत से रक्षा समझौते को मंजूरी दी: EU बोला- आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में मदद मिलेगी यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते (सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट) को मंजूरी दे दी है। अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस पर साइन होंगे। पूरी खबर पढ़ें...

दैनिक भास्कर 27 Jan 2026 5:06 am

RO वाटर से बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर:विराट रामायण मंदिर में दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित, कंबोडिया सरकार के विरोध से बदला नक्शा

बिहार के मोतिहारी जिले का कैथवलिया गांव इन दिनों चर्चा में है। दरअसल, यहां अयोध्या के राम मंदिर से भी ऊंचा ‘विराट रामायण मंदिर’ बन रहा है। मंदिर में दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित किया जा चुका है। इस शिवलिंग की ऊंचाई 56 फीट है। दैनिक भास्कर रिपोर्टर नीरज झा मंदिर की भव्यता को रिपोर्ट करने कैथवलिया गांव पहुंचे। प्रोजेक्ट अधिकारियों से बातचीत के आधार पर नीरज बताते हैं कि विराट रामायण मंदिर 270 फीट ऊंचा होगा, जबकि ​​​​अयोध्या का राम मंदिर 161 फीट ऊंचा है। वहीं, विराट रामायण मंदिर का परिसर 120 एकड़ है, जबकि अयोध्या का राम मंदिर 70 एकड़ में फैला है। इस लिहाज से यह मंदिर अयोध्या के राम मंदिर का 1.7 गुना होगा। इसको बनाने में करीब 1,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। मंदिर का प्लेटफॉर्म यानी बेस बन चुका है। शिलान्यास के बाद से आसपास के इलाकों में जमीन की कीमतें 100 गुना तक बढ़ चुकी हैं। इस मंदिर को पटना का महावीर मंदिर न्यास बोर्ड बनवा रहा है। बोर्ड के सुपरिंटेंडेंट सायन कुणाल बताते हैं कि 17 जनवरी 2026 को स्थापित शिवलिंग की पूजा साल 2027 से शुरू होगी। मंदिर में वाल्मीकि, विश्वामित्र, दशरथ जैसे रामायण के 22 प्रमुख पात्रों की भव्य मूर्तियां भी लगेंगी। इसे बनाने के लिए RO का पानी, करीब 3 लाख क्विंटल सरिया और राजस्थान के लाल पत्थर का इस्तेमाल हो रहा है। विराट रामायण मंदिर से जुड़ी सभी अहम जानकारियां 11 स्लाइड्स में देखिए। टेंपल सुपरिंटेंडेंट के. सुधाकरण बताते हैं, 'कुणाल किशोर का ये ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्हीं की ख्वाहिश थी कि इसमें गुरुकुल की तरह एक रामायण यूनिवर्सिटी भी खोली जाए। बाद में इसमें इस्कान मंदिर की तरह सालाना सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू किया जाएगा।' मंदिर को डिजाइन करने वाले आर्किटेक्ट नवरत्न रघुवंशी बताते हैं, 'विराट रामायण मंदिर का मॉडल तीन बार बदला गया। आखिरकार मंदिर का मॉडल बनाने में 5 साल लगे, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर को भेजकर फाइनल किया गया।' ग्राफिक्स- अजीत सिंह

दैनिक भास्कर 27 Jan 2026 5:06 am

6 महीने बाद भी पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ‘बेघर’:अफसर बोले- बंगला रेनोवेट करा रहे, मंत्री ने कहा- अभी बंगला अलॉट नहीं, वे पसंद तो करें

21 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। पद छोड़ने की वजह को लेकर सवाल उठे। इसके 42 दिन बाद सितंबर में धनखड़ ने सरकारी बंगला भी छोड़ दिया। नए बंगले के लिए हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री को एप्लिकेशन भेजी गई। ये सब प्रोटोकॉल के मुताबिक हुआ। इस्तीफा हुए 6 महीने और एप्लिकेशन दिए 5 महीने गुजर चुके हैं, लेकिन पूर्व उपराष्ट्रपति अब भी एक निजी फार्म हाउस में रह रहे हैं। बंगला मिलने में देरी होने पर धनखड़ के करीबी कहते हैं, 'सितंबर में बताया गया था कि उनके नाम से बंगला अलॉट हो गया है। मरम्मत में करीब 3 महीने लगेंगे। नवंबर और फिर जनवरी में बंगले का स्टेटस पूछा गया तो फिर मरम्मत की बात कही गई।' दैनिक भास्कर ने देरी की वजह जानने के लिए विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन जवाब नहीं मिला। लिहाजा हमने हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री में राज्य मंत्री तोखन साहू से कॉन्टैक्ट किया। उनसे जवाब मिला- 'बंगला अभी अलॉट ही नहीं हुआ। जैसे ही पूर्व उपराष्ट्रपति पसंद करेंगे, फौरन अलॉट कर दिया जाएगा।' दोनों पक्षों की बातें और दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग मिले। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर सच कौन बोल रहा है। राज्य मंत्री तोखन साहू या वो अधिकारी, जो धनखड़ को बंगले के मरम्मत की बात कह रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने अपने सोर्सेज के जरिए पूरा मामला समझा। अफसरों ने 5 महीने में 3-4 बार कहा- मकान की मरम्मत होते ही हैंडओवर करेंगे सबसे पहले हमने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के एक करीबी सोर्स से बात कर बंगले का स्टेटस जाना। सोर्स ने बताया, ‘सरकारी बंगला छोड़ने के बाद सितंबर के तीसरे हफ्ते में धनखड़ को संबंधित मिनिस्ट्री के अफसरों ने भरोसा दिया था कि बंगला रेनोवेट किया जा रहा है। नवंबर तक हैंडओवर करने की पूरी उम्मीद है।' नवंबर में भी बंगला नहीं मिला। न ही ये पता चला कि रेनोवेशन में कितना वक्त और लगेगा। तब विभाग में एक-दो बार फिर पूछताछ की गई। इस बार भी पहले वाला ही जवाब मिला कि बंगले की मरम्मत की जा रही है। सोर्स ने आगे बताया, 'मेरी एक हफ्ते पहले धनखड़ जी से मुलाकात हुई थी। तब पता चला था कि 10-11 जनवरी को उन्होंने संबंधित अधिकारी को फिर फोन कराया था। वही जवाब मिला, जो पहले 2-3 बार मिल चुका है। उनसे कहा गया कि मकान की मरम्मत चल रही है। बंगला लंबे वक्त से खाली था। इसलिए ज्यादा वक्त लग रहा है। उम्मीद है जल्द ही बंगला सौंप दिया जाएगा।' बंगला नंबर-34 अलॉट होने का पता चलाचार महीने पहले हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के एक ऑफिशियल सोर्स ने बताया था कि एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर मौजूद 34 नंबर बंगला पूर्व उपराष्ट्रपति को अलॉट करने की प्रोसेस चल रही है। इसके बाद मीडिया में कई खबरें आईं कि बंगला अलॉट किया जा चुका है। धनखड़ के करीबी सोर्सेज ने भी इसे कंफर्म किया। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सितंबर, 2025 से हरियाणा की इनेलो पार्टी के प्रमुख अभय चौटाला के फार्म हाउस में रह रहे हैं। ये दिल्ली के छतरपुर में मौजूद है। सरकारी बंगला मिले बिना धनखड़ के ऐसे निजी फार्महाउस में शिफ्ट होने पर सवाल भी उठे। अभय चौटाला से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘जगदीप धनखड़ के साथ हमारे घरेलू संबंध हैं। उनके साथ जो हुआ, वो ठीक नहीं है। मैं उस विवाद पर कुछ नहीं कहूंगा। रही बात फार्महाउस की तो समझिए ये मेरा नहीं, उन्हीं का है। वे जब तक चाहेंगे, यहां रहेंगे।' हालांकि इन सबके बीच धनखड़ की इस्तीफे के वक्त साधी गई चुप्पी सरकारी आवास खाली करने और निजी फार्म हाउस में शिफ्ट होने के बाद भी नहीं टूटी। बंगला नंबर 34 में कोई मरम्मत नहीं हो रहीदैनिक भास्कर की टीम पूर्व उपराष्ट्रपति को अलॉट बताए जा रहे बंगला नंबर 34 पर पहुंची। दिल्ली में ये टाइप-8 बंगला बिल्कुल वीरान पड़ा है। इसे देखकर साफ अंदाजा होता है कि यहां सालों से कोई नहीं आया। यहां न साफ-सफाई हुई और न ही मरम्मत। हम बाहर से जितना देख सकते थे, उतना देखने की कोशिश की। वहां न कोई लेबर नजर आया और न मिस्त्री दिखा। इससे ये तो साफ था कि बंगले की मरम्मत नहीं चल रही है। इसे कंफर्म करने के लिए हमने गार्ड से भी बात की। हमने पूछा कि क्या ये बंगला अलॉट हो चुका है। गार्ड ने जवाब दिया- ‘नहीं, अगर अलॉट होता तो हमें पता चल जाता। अभी तो लोग इसे देखने ही आ रहे हैं।‘ इसकी मरम्मत हुई थी क्या या फिर मरम्मत का कोई ऑर्डर आया हो? जवाब मिला- ‘नहीं, अगर मरम्मत का हाल-फिलहाल में कोई प्लान होता, तो हमें सूचना मिल गई होती, लेकिन ऐसी कोई सूचना नहीं है।‘ क्या धनखड़ ने बंगला से मिलने से पहले दबाव में छोड़ा सरकारी घरहाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के ऑफिशियल सोर्स ने बताया, ‘21-22 अगस्त को धनखड़ की तरफ से डिपार्टमेंट को बंगले के लिए एप्लिकेशन मिल गई थी। पहले चर्चा हुई कि वो सरकारी बंगला मिलने के बाद ही मौजूदा सरकारी घर छोड़ेंगे। हालांकि उन्होंने सितंबर 2025 में नया ठिकाना मिले बिना ही बंगला छोड़ दिया।‘ इस बारे में पूछने पर धनखड़ के करीबी सोर्स बताते हैं, 'उन्हें कहा गया कि नया सरकारी बंगला मिलने में कम से कम 3 महीने लगेंगे। इसलिए वो उपराष्ट्रपति का आवास छोड़कर फार्म हाउस में शिफ्ट हो गए।' क्या उन पर सरकारी घर छोड़ने का दवाब था? सोर्स कहते हैं, इस पर उनसे मेरी ज्यादा बात नहीं हुई, लेकिन कोई दबाव तो रहा होगा। इसीलिए बिना सरकारी घर मिले ही उन्होंने पुराना बंगला छोड़ दिया। अफसरों से जवाब नहीं मिला, मंत्री बोले- धनखड़ पसंद करें, फौरन अलॉट होगादैनिक भास्कर की टीम ने हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की। सोर्स ने बताया था कि विभाग के मौजूदा सचिव को बंगले के लिए एप्लिकेशन दी गई है। हमने सचिव श्री कटिकिथाला श्रीनिवास से कई बार कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला। इसके बाद हमने विभाग के जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) डायरेक्टर ऑफ स्टेट संदीप कुल्हाड़िया और मानिकचंद्र सोनोवाल से संपर्क करने की कोशिश की। यहां भी हमारी कॉल नहीं उठी। इसके बाद हमने विभाग के राज्य मंत्री तोखन साहू से संपर्क किया। पूर्व उपराष्ट्रपति के बंगले के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया, 'अभी इस मसले पर जानकारी नहीं है। अधिकारियों से अपडेट लेकर बता पाऊंगा।' दो दिन बाद हमने उनसे दोबारा बात की, तब मंत्री ने कहा, 'सरकारी बंगला पूर्व उपराष्ट्रपति का हक है। वो तो मिलेगा ही। बस उन्हें कोई बंगला पसंद आ जाए। प्रोसेस चालू है। जैसे ही धनखड़ कोई बंगला पसंद करेंगे। विभाग फौरन उसे अलॉट कर देगा।' तो क्या अब तक बंगला अलॉट नहीं हुआ है? जवाब मिला, 'नहीं, बंगला तो तब अलॉट होगा, जब धनखड़ जी पसंद करेंगे।' हमें तो पता चला था कि बंगला अलॉट हो चुका है? मंत्री कहते हैं, 'नहीं, मुझे जो जानकारी मिली, मैंने वो आपको बता दी। बाकी इसके बारे में और पूछताछ कर लूंगा।' किसी पूर्व उपराष्ट्रपति को आवास मिलने में पहले इतनी देरी नहीं हुईविभाग के एक सोर्स से हमने पूछा कि क्या इससे पहले भी किसी पूर्व उप राष्ट्रपति को बंगले के लिए 5-6 महीने इंतजार करना पड़ा? जवाब मिला, ‘इससे पहले के दो पूर्व उपराष्ट्रपति का रिकॉर्ड देखें, तो मुझे अच्छे से याद है, दोनों को एक-दो महीने के अंदर बंगला मिल गया था। उनसे पहले के पूर्व उप राष्ट्रपतियों को भी प्रोटोकॉल के मुताबिक जल्द बंगले मिल गए थे।‘ फिर इन्हें बंगला मिलने में देरी क्यों हो रही है। क्या वाकई धनखड़ को कोई बंगला पसंद नहीं आ रहा? जवाब मिला, 'ये मामला बहुत सेंसिटिव है। कोई जानकारी लीक हुई, तो बवाल हो जाएगा। विभाग को सख्ती के साथ मना किया गया है कि किसी को भी इस मामले में जानकारी न दी जाए।' वेंकैया नायडू के रिटायर होते ही अलॉट हो गया था बंगला पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त 2022 को खत्म हुआ। सोर्स के मुताबिक, नायडू के लिए रिटायरमेंट के कुछ दिन पहले बंगला तय कर लिया गया था। रेनोवेशन की वजह से वो 20 अक्टूबर, 2022 में शिफ्ट हुए थे। 20 अक्टूबर 2022 को उन्होंने ट्वीट कर बताया भी था कि वे नए सरकारी बंगले में शिफ्ट हो चुके हैं। नायडू से पहले पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का दूसरा और अंतिम कार्यकाल 10 अगस्त 2017 को खत्म हुआ। अंसारी 11 अगस्त 2007 से 10 अगस्त 2017 तक 10 साल पद पर रहे। उनका भी रिटायरमेंट के बाद सरकारी बंगले में शिफ्ट होने को लेकर कोई देरी या विवाद नहीं मिलता। सोर्स के मुताबिक, वो भी रिटायरमेंट के 3-4 दिन बाद ही जनपथ स्थित एक बंगले में शिफ्ट हो गए थे। पूर्व उपराष्ट्रपति ने नहीं ली सरकारी शेफ की सुविधाधनखड़ के करीबी सोर्स बताते हैं, ‘उन्हें सरकारी बंगले के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। प्रोटोकॉल के मुताबिक पूर्व उपराष्ट्रपति को स्टाफ शिफ्ट होते ही मिल गया था। हालांकि उन्होंने शेफ की सुविधा नहीं ली है। किचन में वो अपना निजी स्टाफ इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें बाकी सिक्योरिटी गार्ड, साफ सफाई, गार्डनर और अधिकारी समेत सब कुछ मिला है। प्रोटोकॉल के मुताबिक, गाड़ियां और रेगुलर मेडिकल स्टाफ भी है। हमने पूछा कि किचन का स्टाफ न लेने की क्या कोई खास वजह है? जवाब मिला- ‘नहीं, कोई खास वजह तो नहीं लगती। शायद उन्हें फार्म हाउस का शेफ ज्यादा पसंद आया होगा।‘..................ये खबर भी पढ़ें... ‘क्या ब्राह्मणों पर कर्फ्यू लगा है, फिर मीटिंग होगी’ 23 दिसंबर 2025, लखनऊ में 50 से ज्यादा ब्राह्मण विधायक और MLC जुटे। जगह थी कुशीनगर के BJP विधायक पीएन पाठक का घर। ब्राह्मणों के मुद्दों पर बातें हुईं। पर पार्टी हाईकमान नाराज हो गया। यूपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इसे अनुशासनहीनता माना और आगे ऐसा नहीं करने की हिदायत दे डाली। तब तय किया था कि हर महीने जुटेंगे, पर अब तक सुगबुगाहट नहीं है। दैनिक भास्कर ने उसी बैठक में शामिल 7 विधायकों से बात की। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 27 Jan 2026 5:01 am

गो-माता, जय श्रीराम कहलवाया, मुकंदर की मॉब लिंचिंग:बीवी बोली- अफसर 20 हजार रुपए दे गए, इतने तो शौहर को दफनाने में खर्च हुए

35 साल के शेख मुकंदर मोहम्मद सुबह होने से पहले ही काम के लिए घर से निकल गए थे। तारीख 14 जनवरी थी। ओडिशा के बालासोर में रहने वाले मुकंदर राजमिस्त्री थे। राजमिस्त्री का काम न मिलने पर गाड़ियां लोड करते थे। उस दिन उन्हें लोडिंग का ही काम मिला था। परिवार शाम को लौटने का इंतजार कर रहा था, तभी फोन आया कि मुकंदर हॉस्पिटल में हैं। पता चला कि भीड़ ने उन्हें गो-तस्करी के आरोप में बुरी तरह पीटा है। कुछ घंटे इलाज के बाद मुकंदर ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मॉब लिंचिंग की धारा के तहत 6 लोगों को अरेस्ट किया है। ज्यादातर आरोपियों की उम्र 22 से 25 साल है। सभी हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हैं। आरोप है कि इन लोगों ने मुकंदर को लाठी-डंडों से पीटा, जय श्रीराम के नारे लगवाए। पिटाई का वीडियो भी बनाया, जो बाद में वायरल हो गया। मुकंदर की हत्या के आरोपी जेल में हैं, लेकिन सजा मुकंदर का परिवार भुगत रहा है। बीवी मनौरी की गोद में दो महीने की बेटी है। अब्बू को 6-7 साल पहले लकवा मार गया था, इसलिए चल नहीं पाते। दीवार से टिककर बैठे रहते हैं। कुल 6 लोगों का परिवार है, जिसकी जिम्मेदारी मुकंदर पर थी। परिवार को मदद के तौर पर तहसीलदार से 20 हजार रुपए मिले हैं। इस पर मनौरी कहती हैं, ‘20 हजार रुपए में क्या होगा। इतने पैसे तो शौहर को सुपुर्दे-खाक करने में खर्च हो गए।’ भीड़ के हमले का वही पैटर्न, गो तस्करी के शक में गाड़ी रोकी, बुरी तरह पिटाईशेख मुकंदर मोहम्मद बालासोर के अस्तिया गांव में रहते थे। इस गांव से करीब 15 किमी दूर ही चांदीपुर रेंज है, जहां भारत की सबसे ताकतवर मिसाइलों के परीक्षण होते हैं। मुकंदर के परिवार के पास खेत नहीं थे, इसलिए उन्होंने पढ़ाई नहीं की और राजमिस्त्री का काम सीख लिया। दिन में 500 रुपए कमाते थे। मकर संक्रांति की वजह से राजमिस्त्री का काम मिलने की उम्मीद नहीं थी, इसलिए वे 14 जनवरी को लोडिंग का काम करने चले गए। उनकी गाड़ी जयदेव कस्बे से गुजर रही थी। वैन में मुकंदर के साथ ड्राइवर भी था। रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि गाड़ी रुकते ही सभी मुकंदर और ड्राइवर को पीटने लगे। ड्राइवर तो बचकर भाग निकला, लेकिन मुकंदर को डंडों और प्लास्टिक के पाइप से पीटा गया। खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मुकंदर को बालासोर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसी दिन मुकंदर की मौत हो गई। शुरुआत में परिवार को लगा कि ये मामला लूटपाट का है। फिर घटना का वीडियो सामने आया। इसमें दिख रहा है कि कुछ लोग मुकंदर को पीट रहे हैं। ‘जय श्रीराम’ और ‘गाय मेरी माता है’ बोलने के लिए कह रहे हैं। जान बचाने के लिए मुकंदर सब बोलते जाते हैं, लेकिन भीड़ ने पीटना बंद नहीं किया। मुकंदर के घर में अब एक बेवा, तीन बच्चे और बीमार पिताअस्तिया गांव में घास-पूस के छप्पर और मिट्टी की दीवारों से बने घर में मुकंदर का परिवार रहता है। घर में 65 साल के अब्बू शेख सादर मोहम्मद हैं। लकवे की वजह से बीमार रहते हैं। बेटे की मौत के बाद खाना भी बंद कर दिया है। मुकंदर के चचेरे भाई 23 साल के शेख जितेंद्र मोहम्मद ने उन्हें आंखों के सामने तड़पते देखा था। वे दावा करते हैं कि जिस पिकअप गाड़ी में मुकंदर थे, वह खाली थी। तस्करी या किसी और गलत काम का सवाल ही नहीं उठता। वैन का ड्राइवर लापता है। उसकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। जितेंद्र बताते हैं, ‘14 जनवरी को भाई की राजमिस्त्री के काम से छुट्टी थी। इसके बावजूद वे सुबह करीब 4 बजे घर से निकल गए थे। वे धामरा-चांदीपुर रोड की ओर गए थे। सुबह करीब 7 बजे फोन आया कि जिला अस्पताल आ जाओ, मुकंदर का एक्सीडेंट हुआ है। मैं तुरंत अम्मी और भाभी को लेकर निकल गया।’ हम करीब 8 बजे अस्पताल पहुंचे। भाई बुरी तरह जख्मी थे। दर्द से तड़प रहे थे। शरीर का कोई हिस्सा नहीं था, जहां चोट न लगी हो। मैंने पूछा कि क्या आपको किसी ने मारा है। उन्होंने सिर हिलाकर हां में जवाब दिया। उन्होंने भाभी को पीटने वालों के नाम भी बताए थे। ‘शुरुआत में हमें लगा कि यह लूटपाट का मामला है। तब तक धार्मिक एंगल सामने नहीं आया था। वीडियो वायरल होने से पूरी बात पता चली। मैंने सोचा कि मेरी पत्नी को हॉस्पिटल लाना चाहिए। इसलिए मैं उसे लेने ससुराल चला गया। लौटते वक्त फोन आया कि भाई की तबीयत बिगड़ रही है। मैं हॉस्पिटल पहुंचा, तो डॉक्टर ने अपने केबिन में बुलाकर कहा कि मुकंदर अब दुनिया में नहीं रहे।’ पत्नी बोलीं- पति दर्द से छटपटा रहे थे, कुछ बोल भी नहीं पाएमुकंदर की पत्नी मनौरी को पता नहीं था कि वे किस वक्त घर से निकले। उन्होंने सोचा रोज की तरह काम पर गए होंगे। यही सोचकर वे बच्चों के साथ घर पर रहीं। पति की खबर मिलते ही, हॉस्पिटल पहुंची। मनौरी बताती हैं, ‘उनकी हालत बहुत नाजुक थी। वे दर्द से छटपटा रहे थे। ठीक से बोल भी नहीं पाए। इतना जरूर बताया कि उन्हें किन लोगों ने पीटा है। इशारे से बताया कि 10 से ज्यादा थे। सभी के नाम नहीं बता सके। कुछ देर में उनकी सांसें थम गईं।’ दो महीने की बेटी को गोद में लिए बैठीं मनौरी रोने लगती हैं। कहती हैं, ‘वही एक कमाने वाले थे। रोज के 500 रुपए मिलते थे। उसी से घर चलता था। ससुर बीमार रहते हैं, उनकी भी जिम्मेदारी उठाते थे।’ क्या सरकार से कोई मदद मिली? मनौरी जवाब देती हैं, ‘नहीं, तहसीलदार घर आए थे। रेड क्रॉस फंड से 20 हजार रुपए दिए हैं। इतने में क्या होता है। क्या 20 हजार रुपए से इन बच्चों को पढ़ा पाऊंगी।’ रिश्तेदार बोले- मुकंदर गो तस्करी कर रहा होता, तो मजदूरी क्यों करतामुकंदर के रिश्तेदार हुसैन बताते हैं, ‘मुकंदर को जहां भी काम मिलता, वो चला जाता था। घटना वाले दिन वो मछली की पेटियां लोड करने गया था। तभी भीड़ ने घेर लिया। ये सुबह 4 से 5 बजे के बीच की बात है।’ हुसैन 14 जनवरी की शाम करीब 5 बजे अस्पताल पहुंचे थे। तब मुकंदर की बॉडी का पोस्टमॉर्टम हो चुका था। सबने तय किया कि FIR कराएंगे। सभी 8:30 बजे सदर थाने गए और केस दर्ज कराया। हुसैन बताते हैं, ‘सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने स्टोरी डाली थी। इसमें मुकंदर को पीटते दिखाया था। उससे जय श्रीराम के नारे लगवाए जा रहे थे। जय श्री राम कहने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जबरदस्ती नारे लगवाना गलत है।’ 14 जनवरी की रात करीब 10 बजे मुकंदर की बॉडी घर लाई गई। 15 जनवरी को दोपहर 3 बजे उन्हें सुपुर्दे-खाक किया गया। एसडीपीओ ने परिवार को भरोसा दिया कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गो-तस्करी के आरोपों पर हुसैन सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘कोई कह रहा है गाड़ी में गाय थी, कोई कह रहा है कि गाड़ी खाली थी। अगर गाय थी, तो पुलिस को खबर देनी थी। पुलिस ने बताया कि मौके से एक गाय मिली है। गाय गाड़ी के अंदर थी या बाहर, यह साफ नहीं हो पाया है। इसकी जांच होनी चाहिए।’ पुलिस को मौके से घायल गाय मिली, मुकंदर की हत्या में 6 नामपुलिस को मौके पर जख्मी हालत में एक गाय मिली। उसे गोशाला भिजवा दिया। पुलिसवाले पिकअप वैन जब्त कर थाने ले गए। उसी दिन शाम को मुकंदर के भाई जितेंद्र मोहम्मद ने 5 लोगों पर हत्या का आरोप लगाकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने BNS की धारा 103(2) के तहत FIR दर्ज की है। ये धारा मॉब लिंचिंग में लगाई जाती है। इसमें उम्रकैद से लेकर मौत तक की सजा हो सकती है। पुलिस के मुताबिक, पांच नामजद आरोपियों में से तीन घटना वाली जगह मौजूद थे। तीनों को अरेस्ट कर कोर्ट में पेश किया गया। इनमें 25 साल का सरोज कुमार बेहेरा उर्फ पिंटू , 29 साल का चिन्मय कुमार दास उर्फ चिनु और 22 साल का सागर मोहालिक उर्फ चंदू शामिल हैं। बाकी दो आरोपियों को सबूत न मिलने पर छोड़ दिया गया। वीडियो फुटेज के आधार पर बाद में तीन और आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनमें 24 साल का आशीष कुमार नायक उर्फ लिपु, 24 साल का रमेश दास और 25 साल का चंदू दास शामिल हैं। गोसेवा संस्था का दावा- तेज रफ्तार की वजह से गाड़ी पलटी, पिटाई से मौत नहींबालासोर में मां भारती गोसेवा केंद्र के सचिव जितेंद्र स्वाईं के मुताबिक, ये पूरी घटना उनके घर के पास हुई। ये एरिया सदर थाना क्षेत्र के सुंदरी में आता है। जितेंद्र बताते हैं, ‘ओडिशा में गोकशी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इसे रोकने के लिए बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने कई बार पुलिस, जिला प्रशासन और सरकार से शिकायतें की हैं। फिर भी गोकशी नहीं रुकी।’ जितेंद्र दावा करते हैं, ये एरिया गोकशी का केंद्र माना जाता है। यह बात स्थानीय पुलिस को भी पता है। मुकंदर के बारे में वे बताते हैं, ‘उस दिन सुबह कुछ लोग टहल रहे थे। पिकअप वाहन के ड्राइवर को लगा कि उसे पकड़ने आ रहे हैं। घबराहट में उसने तेज रफ्तार से गाड़ी मोड़ दी, इससे वह पलट गई। गाड़ी पलटते ही ड्राइवर भाग गया। हेल्पर मुकंदर अंदर ही फंसा रह गया। वहां मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकाला और पानी पिलाया।’ जितेंद्र के मुताबिक, मुकंदर की हालत बिगड़ती दिखी, तो लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को फोन किया। कई बार कॉल करने के बाद पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची और करीब 7 बजे मुकंदर को अस्पताल में भर्ती कराया। दोपहर 3 बजे पता चला कि मुकंदर की मौत हो गई। वायरल वीडियो के बारे में जितेंद्र कहते हैं कि वीडियो की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। जितेंद्र कहते हैं, ‘मौत को सीधे तौर पर हत्या कहना जल्दबाजी होगी। अस्पताल में मौत जरूर हुई है, लेकिन असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ होगी। FIR में पवन भोई का नाम है। वह समर्पित गोरक्षक है। बापू पंडा जिम चलाते हैं, उनका क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। बजरंग दल के बालासोर सह-प्रमुख पिंटू का नाम भी है। वे मौके पर मौजूद ही नहीं थे।' 'हो सकता है कुछ लोग मॉर्निंग वॉक के लिए वहां गए हों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया हो। ऐसा है, तो इसके लिए किसी संगठन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।’ इस बारे में हमने बालासोर एसपी प्रत्यूष दिवाकर से भी बात की। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वीडियो के आधार पर आरोपियों को पकड़ा गया है। अभी हम मामले की जांच कर रहे हैं। ................................. ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िएतलवार बांटी, जेल गए, बोले- बाहर निकलकर फिर बांटेंगे 21 सेकेंड का एक वीडियो है। इसमें दिख रहे लोगों के हाथ में तलवारें और फरसे हैं। सभी एक घर के सामने रुकते हैं। घर से बाहर निकले शख्स को तलवार थमा देते हैं। ये वीडियो 29 दिसंबर का है। तलवार बांटने वाले हिंदू रक्षा दल के सदस्य थे। वीडियो सामने आने के बाद सभी को अरेस्ट कर लिया गया। संगठन का कहना है कि सदस्यों को जमानत मिलेगी, तो फिर से तलवार बांटेंगे। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 27 Jan 2026 5:01 am

चीन की छन यूफेई ने इंडोनेशिया बैडमिंटन मास्टर्स 2026 का महिला एकल खिताब जीता

वर्ष 2026 की इंडोनेशिया बैडमिंटन मास्टर्स प्रतियोगिता का फाइनल 25 जनवरी को जकार्ता में आयोजित हुआ

देशबन्धु 27 Jan 2026 3:10 am

चीन में मोटर वाहनों और नई ऊर्जा वाहनों की संख्या में तेज बढ़ोतरी

चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में पूरे चीन में मोटर वाहनों की कुल संख्या बढ़कर 46.9 करोड़ तक पहुंच गई

देशबन्धु 27 Jan 2026 2:50 am

UAE ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट ऑपरेशन से पीछे हटने का फैसला किया: राष्ट्रपति नाहयान का भारत दौरा और खाड़ी तनाव के बीच नई कूटनीतिक हलचल

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान के सबसे बड़े और अहम इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन (ऑपरेशन) से जुड़ी संभावित डील को खत्म कर दिया है। UAE ने एयरपोर्ट को लीज पर लेने या उसके प्रबंधन में शामिल होने की योजना से खुद को अलग कर लिया है।

देशबन्धु 27 Jan 2026 1:24 am

DNA: ईरान Vs अमेरिका..नया अपडेट क्या? खलीफा के एटम बम से डर गए ट्रंप?

Iran News:अमेरिकी नौसेना का सबसे विध्वंसक बेड़ा ईरान के अहाते में आकर खड़ा हो चुका है. आशंका जताई जा रही है किसी भी वक्त तेहरान में तबाही की घंटी बज सकती है. हालांकि ऐसी आशंका पिछले चार दिनों से जताई जा रही है. इस बीच अब दावा किया जा रहा है कि खलीफा ने परमाणु शक्ति हासिल कर ली है.

ज़ी न्यूज़ 27 Jan 2026 12:01 am

DNA: पहले पूछा धर्म फिर मारा चाकू, अमेरिका में पहलगाम जैसा हमला, दरवाजे तक पहुंची नफरती सोच

Attack in US:अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में एक शख्स को धर्म पूछकर मारा गया. वॉशिंगटन के पार्कलैंड में ये हमला हुआ है. एक शख्स पर और उसके पालतू कुत्ते पर जानलेवा हमला किया गया.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 11:56 pm

Exclusive: हिंसा रोकने से लेकर अर्थव्यवस्था बढ़ाने तक...अगर बांग्लादेश लौटीं तो क्या है शेख हसीना का प्लान, खुद बताया सबकुछ

Sheikh Hasina On Bangladesh Condition:बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने Zee Network के सहयोगी WION के साथ बातचीत में अपने मुल्क की स्थिति पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि अगर वह बांग्लादेश जाएंगी तो उनकी पहली प्राथमिकता क्या होगी. इसके अलावा उन्होंने उस्मान हादी पर भी बातचीत की.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 11:44 pm

ईरान पर अटैक का काउंटडाउन ON, मिडिल ईस्ट पहुंची US की 'किलिंग मशीन', कितना घातक है अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार (26 जनवरी) को इस बात का ऐलान कर दिया कि एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन और उसके साथ के वॉरशिप मिडिल ईस्ट पहुंच गए हैं, जिससे इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ताकत मजबूत हुई है.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 11:42 pm

DNA: ट्रंप की कमांडो यूनिट के विरोध में क्यों उतरे पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा? क्या अमेरिका में होने वाला है कुछ बड़ा!

DNA: जिनपिंग ने समय रहते तख्तापलट की साजिश को नाकाम कर दिया और ट्रंप का प्लान चौपट कर दिया. जिस ट्रंप पर जिनपिंग के तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लग रहा है. जो ट्रंप वेनेजुएला में तख्तापलट करवाते हैं.ईरान में तख्तापलट की कोशिश में हैं. उनकी खुद की कुर्सी इस वक्त खतरे में लग रही है. अमेरिका में ट्रंप के तख्तापलट की बात क्यों की जा रही है. आज हम उसी के बारे में बात करने वाले हैं.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 11:08 pm

अमेरिका में बर्फीले तूफान का कहर, हवा में क्रैश हो गया उड़ता विमान; 7 की मौत

फेडरल अधिकारियों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की रिकॉर्डिंग के अनुसार, जेट टेकऑफ की कोशिश करते समय पलट गया और उसमें आग लग गई. यह रविवार शाम 7:45 बजे के आसपास एयरफील्ड पर क्रैश हो गया. फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड जांच कर रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 10:19 pm

जिसने लिया इंटरव्यू उसको ही मिल गई नौकरी, भर्ती के नाम पर उम्मीदवार को लगा दिया चूना

Interviewer Took Candidate Job: सोशल मीडिया पर एक शख्स ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे इंटरव्यू लेने वाले शख्स ने ही उसका पद छीन लिया.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 10:14 pm

UAE में कंटेंट बनाना अब आसान नहीं, इंफ्लूएंसर्स को 31 जनवरी तक लेना होगा ये परमिट; वरना मिलेगी सजा

UAE Advertiser Permit Deadline: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कंटेंट क्रिएटर्स और एडवरटाइजर्स को किसी भी तरह का प्रोमोशनल कंटेंट पोस्ट करने पर एक नियम का पालन करना होगा.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 8:55 pm

धरती से 278 फीट नीचे सदियों तक बिना धूप के जी रहे थे 20,000 लोग, सालों बाद अचानक खुला रहस्या; दुनिया के सबसे बड़े अंडरग्राउंड शहर की हुई खोज

Largest Underground City In Cappadocia: तुर्की के कप्पाडोसिया शहर में एक विशाल भूमिगत शहर का पता चला है. इसमें कभी 20,000 लोग रहते थे.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 8:21 pm

एयरफोर्स की स्ट्राइक से रोने लगा था पाक, ऑपरेशन सिंदूर में भारत से मांगी थी रहम की भीख; यूरोपियन थिंक टैंक का दावा

पिछले साल के भारत-पाक संघर्ष का ज़िक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, 'पाकिस्तान और भारतीय वायु सेना के बीच इस (मई 2025) टकराव में शुरू में पाकिस्तान ने कई दुश्मन लड़ाकू विमानों को गिराकर एक साफ़ सामरिक जीत हासिल की, लेकिन फिर भारतीय क्षेत्र पर हमले करने में बड़े पैमाने पर नाकाम रहा क्योंकि उनका मुकाबला एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम ने किया था.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 8:07 pm

ट्रंप ने दी धमकी तो कनाडा को याद आए पीएम मोदी, भारत आएंगे मार्क कार्नी; कई डील्स पर होंगे दस्तखत

ट्रंप की धमकियों से जूझ रहे कनाडा को अब भारत की याद आई है. बताया जा रहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी भारत की यात्रा कर सकते हैं. ये यात्रा कई मायनों में खास मानी जा रही है.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 7:11 pm

IIA Deal: लोन कम करके पैसे कमाने की जुगत लगा रहे थे शहबाज शरीफ, 3 घंटे के लिए शेख साहब दिल्ली आए; सपने पर पानी फिर गया

Pakistan UAE IIA Deal: यूनाइटेड अरब अमीरात ने आखिरी मिनट में पाकिस्तान को झटका धीरे से देते हुए, उसकी हेकड़ी निकाल दी है. दावा किया जा रहा है कि इस्लामाबाद से जुड़े एक बड़े प्रपोजल से यूएई ने किनारा कर लिया है. इस डील को लेकर पाकिस्तान अगस्त 2025 से दुबई में बैठे शेखों की जी हुजूरी और खुशामद कर रहा था.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 6:13 pm

पाकिस्तान की टिकटॉक गर्ल का वीडियो लीक! क्या है एलीना आमिर की क्लिप का सच, इन्फ्लूएंसर ने किसे बताया दोषी?

Alina amir video: अलीना ने उनकी वीडियो बनाने वाले युवक के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है. उन्होंने वीडियो के जरिए लोगों से अपील की है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर कोई इस वीडियो बनाने वाले शख्स के बारे में जानकारी देगा तो वो उसे नकद पुरस्कार भी देंगी.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 6:02 pm

पहाड़ के अंदर 24 किलोमीटर का सफर, 20 मिनट तक नहीं दिखता सूरज, हॉलीवुड फिल्म जैसी लगती है दुनिया की सबसे लंबी टनल

Norway Laerdal Tunnel: फिल्मों में आपने कई गाड़ियों को बड़ी-बड़ी खूबसूरत सुरंगों से होकर गुजरते हुए देखा होगा, हालांकि यूरोप के एक देश में आपको असल जीवन में यह नजारा देखने को मिल जाएगा.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 5:07 pm

26 जनवरी के परेड में लड़ाकू विमानों का फॉर्मेशन देख दुश्मनों को पड़ा होगा हार्ट अटैक! लेकिन आसमान में क्या देखकर चौंके अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

Republic Day Parade:भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (US Ambassador Sergio Gor) ने गणतंत्र दिवस की परेड में अमेरिकी विमान भी शामिल किए जाने को भारत और अमेरिका के मजबूत रिश्तों का प्रतीक बताया है. गोर ने ये भी कहा उम्मीद है नई दिल्ली के साथ वाशिंगटन की ट्रेड डील भी एक दिन हो जाएगी.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 4:21 pm

बलूचिस्तान में पाक सेना का आतंक, घरों से उठाए जा रहे लोग, परिवारों में डर का माहौल

Balochistan News: 24 जनवरी को केच के दश्त इलाके में भी पाकिस्तानी सेना ने घर पर छापे के दौरान तीन अन्य नागरिकों यासीन, बशीर और अब्दुल्ला को जबरन गायब किया था. उसी दिन केच के ही जोसक इलाके से पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वाड ने वाजो जान मुहम्मद को जबरन गायब किया था.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 3:50 pm

ग्रीनलैंड संकट में आयरन लेडी बनकर उभरीं मेटे फ्रेडरिक्सन: शांत और अडिग रहकर अमेरिका को ‘ना’ कहने वाली नेता

आज मेटे फ्रेडरिक्सन दुनिया की सबसे जटिल कूटनीतिक चुनौतियों में से एक के केंद्र में हैं। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी ने यूरोप की संप्रभुता और सुरक्षा संतुलन पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया। ऐसे समय में फ्रेडरिक्सन ने महीनों तक बेहद नाजुक संतुलन साधे रखा।

देशबन्धु 26 Jan 2026 3:41 pm

ग्रीनलैंड पर अमेरिका‑यूरोप रिश्तों में बढ़ता अविश्वास,यूरोप की एकजुटता से ढीले पड़े ट्रंप के तेवर

यूरोपीय नेताओं के हालिया बयानों से साफ हो गया है कि अमेरिका के साथ ‘हर हाल में साथ’ वाली नीति अब अतीत की बात हो चुकी है। यूरोप ने यह तय किया है कि वह न तो ब्लैकमेल वाली कूटनीति स्वीकार करेगा और न ही किसी दबाव में आकर अपने मूल हितों से समझौता करेगा।

देशबन्धु 26 Jan 2026 3:01 pm

यूनुस के राज में क्या बांग्लादेश में मनाया गया भारत का 77वां गणतंत्र दिवस? जानिए ढाका की पूरी कहानी

Indian community celebrate 77th Republic Day in Bangladesh: 26 जनवरी को देश-दुनिया में भारत का 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया जा रहा है. क्या बांग्लादेश में भी26 जनवरी कोयूनुस के राज में भारत का 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया. जानें सच्चाई.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 2:58 pm

‘ड्रैगन और हाथी को एक साथ करना चाहिए डांस...' गणतंत्र दिवस पर शी जिनपिंग ने भारत को दिया संदेश

Republic Day 2026:भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर चीन और अमेरिका ने भारत को शुभकामनाएं दीं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका के गहरे और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अहम है. वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बधाई देते हुए भारत-चीन को अच्छे पड़ोसी, मित्र और साझेदार बताया.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 2:52 pm

मौत को छूकर निकले 8 मुसाफिर! बर्फीले तूफान के बीच टेकऑफ करते ही क्रैश हुआ बिजनेस जेट, दहला बैंगोर एयरपोर्ट

US bangor airport private jet crash: अमेरिका के बैंगोर एयरपोर्ट पर 8 लोगों को ले जा रहा एक प्राइवेट बिजनेस जेट टेकऑफ के दौरान क्रैश हो गया है. अभी तक किसी के मरने की खबर नहीं आई है. कहा जा रहा है कि दुर्घटना एक बर्फीले तूफान की वजह से हुई है.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 10:13 am

फिलीपींस में फेरी हादसा, 13 की मौत और 100 से अधिक लापता

सोमवार तड़के दक्षिणी फिलीपींस के बासिलान प्रांत के पास समुद्र में एक द्वीपों के बीच चलने वाली (इंटर-आइलैंड) फेरी डूब गई

देशबन्धु 26 Jan 2026 8:30 am

सिर्फ 2 पांडा… 1100cr का नुकसान! टोक्यो-बीजिंग के रिश्ते की खटास ने छीनी जापान की मुस्कान- जानें इनसाइड स्टोरी

China recalled his two pandas: जापान में फिलहाल सिर्फ 2 पांडा थे. जिन्हें चीन ने टोक्यो और बीजिंग के रिश्ते में आई खटास के कारण वापस बुला लिया है. जिससे वहा के लोग काफी नाखुश हैं. आज हम जानेंगे कि पांडा जापान के लिए क्यों इतना जरूरी है, और वापस जाने से देश को 20 अरब येन का नुकसान कैसे होगा.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 7:54 am

अमेरिका के लिए चेतावनी... नकाबपोश एजेंटों की गोली से मौत पर भड़के बराक ओबामा, पूछा- 'बिना जवाबदेही के कत्ल कब तक?'

Barack Obama on Minneapolis case: मिनियापोलिस में एलेक्स प्रेट्टी की गोली लगने से मौत पर बराक और मिशेल ओबामा ने एजेंसी और सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाया है. ओबामा ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है जिसमें उन्होंने सरकार को दोषी ठहराया है.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 6:53 am

खूनी जुलूस से रिपब्लिक डे परेड तक:आखिर क्यों होती है फौज और हथियारों की नुमाइश; यूरोप-अमेरिका परेड से अब क्यों कतराते हैं

हर 26 जनवरी की सुबह, जब धुंध को चीरती सूरज की किरणें दिल्ली के कर्तव्य पथ पर पड़ती हैं, तो वे केवल सैन्य रेजिमेंटों और रंगीन झांकियों को ही रोशन नहीं करतीं, वे परेड की हजारों साल पुराने इतिहास को भी छूती हैं। प्राचीन रोम में सैन्य परेड दुश्मन के खून से पूरी होती थी, जबकि मिस्र में परेड राजा को देवता की शक्ति पाने का जरिया थी। रूस की परेड का जासूसों को इंतजार रहता था, लेकिन आधुनिक दुनिया में पश्चिमी देश परेड से कतराने लगे। आखिर परेड का इतिहास क्या है, भारत हर साल क्यों करता है फौज और हथियारों की नुमाइश और पश्चिमी देश इससे क्यों कतराते हैं; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… आज से करीब चार हजार साल पहले। नील नदी के किनारे पूरा मिस्र सांस रोककर फराओ यानी अपने राजा का इंतजार कर रहा था। उसी दिन फराओ सेनुसरेत प्रथम, दक्षिण मिस्र पर विजय हासिल कर लौट रहे थे। सजे-धजे सैनिकों के पीछे लोगों की भीड उमड़ पड़ी। सैनिकों के आगे पुजारी चल रहे थे और सबसे आगे स्वयं सेनुसरेत। वे केवल युद्ध से नहीं लौट रहे थे, वे देवता से मिलने जा रहे थे और देवता बनकर लौटने वाले थे। यहीं से प्राचीन मिस्र के ‘ओपेट’ उत्सव की परंपरा ने आकार लिया। शुरुआत में यह विजय का उत्सव था, लेकिन जब जीतने को कुछ नहीं बचा, तब राजा के देवत्व की यात्रा ही परेड बन गई। मिस्रवासियों का विश्वास था कि समय के साथ फराओ की शक्तियां कमजोर पड़ने लगती हैं। उसे दोबारा ईश्वरीय शक्ति प्राप्त करनी होती थी। कर्नाक मंदिर से लक्सर मंदिर तक निकलने वाला यह विशाल जुलूस लगभग सत्ताइस दिनों तक चलता था। लेकिन इस परेड में एक रोचक रहस्य भी छिपा था। हर वर्ष यह तय नहीं होता था कि जुलूस जमीन से जाएगा या नील नदी के रास्ते। यह निर्णय नदी के मिजाज पर निर्भर करता था। यदि जल स्तर ऊंचा होता, तो देवता और फराओ नौकाओं पर सवार होकर यात्रा करते। यदि पानी कम होता, तो जुलूस सड़कों से होकर गुजरता। करीब तीन हजार पांच सौ साल पहले रानी हत्शेपसुत ने इस यात्रा को और अधिक भव्य बना दिया। उसने मार्ग में छह नौका स्टेशन बनवाए। हर स्टेशन पर जुलूस रुकता, देवताओं को बलि और भेंट चढ़ाई जाती और पुजारी घोषणा करते कि फराओ की आत्मा ईश्वरीय आत्मा से एकाकार हो रही है। जब उत्सव समाप्त होता, तो फराओ वही व्यक्ति नहीं रहता जो वह यात्रा से पहले था। लोगों का विश्वास था कि वह नए सिरे से जन्मा है। देवताओं की कृपा से पूरे मिस्र पर शासन करने के लिए फिर से सशक्त। लेकिन इतिहास यहीं ठहरता नहीं। रोम के उदय के साथ मिस्रवासियों को यह समझ में आने लगा कि फराओ की आत्मा और देवताओं की आत्मा के बीच कोई दिव्य संबंध नहीं था। सत्ता बदली, विश्वास बदले और परेड का रास्ता मिस्र से हटकर रोम की सड़कों तक पहुंच गया। प्राचीन रोम का ट्रायम्फ यानी एक दिन का देवता दो हजार साल पहले प्राचीन रोम में परेड यह तय करती थी कि सत्ता किसके हाथ में है। यहां परेड को ट्रायम्फ कहा जाता था, यानी विजय की सार्वजनिक नुमाइश। यह केवल एक जुलूस नहीं था, बल्कि राज्य द्वारा रचा गया ऐसा तमाशा था, जिसमें हारे हुए दुश्मनों को पहले अपमानित किया जाता और फिर मार दिया जाता था। उनके परिवारों को गुलाम बना लिया जाता था। उस समय रोम में संसद का शासन था। जब संसद से ट्रायम्फ की अनुमति मिलती, तो पूरा शहर समझ जाता कि रोम की सेना ने कोई साधारण नहीं, बल्कि बहुत बड़ी जीत हासिल की है। विजयी सेनापति रोम की पवित्र सड़क साक्रा विया से गुजरता था। वह चार घोडों वाले रथ पर खड़ा होता। उसका चेहरा लाल रंग से रंगा जाता था, ठीक उसी रंग में, जैसा देवता जूपिटर की मूर्ति का होता था। कुछ घंटों के लिए वह सेनापति मनुष्य नहीं रहता था। वह देवता बन जाता था। लेकिन इसी दृश्य में रोमन सत्ता की सबसे गहरी समझ छिपी थी। उसी रथ पर, उसके पीछे, एक गुलाम खड़ा रहता था। उसका काम कोई हथियार उठाना नहीं था। वह बस धीरे–धीरे उसके कान में फुसफुसाता रहता था- ‘याद रखो, तुम केवल एक मरणशील मनुष्य हो। तुम केवल एक दिन के देवता हो।’ जब परेड का अंत खून से होता था रोम में हर जीत पर ट्रायम्फ नहीं मिलता था। इसके लिए सीनेट ने एक कठोर नियम तय किया था। ट्रायम्फ पाने के लिए एक ही युद्ध में कम से कम पांच हजार दुश्मन सैनिकों का मारा जाना अनिवार्य था। यह केवल एक आंकड़ा नहीं था। यह एक स्पष्ट संदेश था कि रोमन सत्ता सस्ती और छोटी जीतों से संतुष्ट नहीं होती। ट्रायम्फ का सबसे असरदार हिस्सा जीते हुए जनरल की अगुआई नहीं थी। असली प्रभाव उस दृश्य का होता था, जिसे देखने के लिए जनता आती थी। सोना, चांदी, हथियार, दुश्मन की नावों के टूटे हुए हिस्से। सब कुछ जुलूस में प्रदर्शित किया जाता था, लेकिन सबसे भयावह दृश्य होते थे जंजीरों में बंधे दुश्मन राजा और सेनापति। जनता इनका इंतजार करती थी। आम रोमन नागरिकों ने आज से करीब 2072 साल पहले वर्सिंगजेटोरिक्स नाम के एक सेनापति को अपमानित होते देखा था। परेड के अंत में, शहर के एक चौराहे पर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया। वह केवल 36 साल का था। आज से करीब 1750 साल पहले पालमाइरा साम्राज्य की रानी जेनोबिया को भी ट्रायम्फ परेड में घुमाया गया था। यह साम्राज्य आज के फिलिस्तीन, मिस्र और अरब के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था। जेनोबिया को उसके सभी सोने के गहने पहनाकर परेड करवाई गई थी। भारी वजन के कारण वह चलते–चलते गिर पड़ती थी और जनता को इसमें क्रूर आनंद मिलता था। उसे बस मारा नहीं गया था। ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी, अजीत सिंह और अंकित द्विवेदी ***** गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... रिपब्लिक डे पर चीफ गेस्ट की कुर्सी कितनी कीमती: पहली बार यूरोपियन यूनियन को न्योता क्यों मिला रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट आमतौर पर उन्हीं देशों से होते हैं, जहां भारत तवज्जो देना चाहता है। 77वें गणतंत्र दिवस परेड के लिए भारत ने यूरोपीय यूनियन के टॉप-2 लीडर्स को चीफ गेस्ट बनाया है- उर्सुला वॉन और एंतोनियो कोस्टो। पूरी खबर पढ़िए...

दैनिक भास्कर 26 Jan 2026 5:13 am

यूपी, बिहार, बंगाल से हैं अजनाला के 282 शहीद:DNA और दांतों से खुलासा, तमिलनाडु-कनाडा से परिवार सामने आए; सरकारें क्यों सोई हैं

पंजाब के अजनाला में एक कुआं है। इस कुएं की खुदाई से 282 सैनिकों के कंकाल निकले। ये कंकाल अब भी कुएं के पास एक लोहे के बक्से में बंद पड़े हैं। ये 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले शहीदों के हैं। केंद्र, राज्य सरकार और ASI में से कोई भी न तो इनके अंतिम संस्कार के लिए वक्त निकाल पाए हैं, न ही इन्हें किसी म्यूजियम में रखा जा सका है। पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि कैसे सुरेंद्र कोछड़ नाम के शख्स ने इस नरसंहार को इतिहास के पन्नों से ढूंढा और फिर कुएं की खुदाई करवाकर इसे साबित कर दिया। होना तो ये चाहिए था कि बाकी शहीदों की तरह इनकी पहचान होती, सम्मान मिलता और अंतिम संस्कार होता, लेकिन सरकारें 168 साल गुजरने के बाद भी चिट्ठियां लिखकर खानापूर्ति कर रही हैं। इन कंकालों की वैज्ञानिक जांच और DNA सैंपलिंग की भी कोशिशें हुई हैं। जांच से ये तक साबित हो रहा है कि सैनिक पूर्वी यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के रहने वाले थे। दो से तीन परिवार भी सामने आए, लेकिन अवशेष लोहे के बक्से में कैद हैं। दैनिक भास्कर ने कंकालों की जांच करने वाले और सैनिकों के संभावित परिवार के लोगों से बात की। कनाडा से आया ईमेल, शायद कंकाल मेरे दादा का हैइन कंकालों और अवशेषों की वैज्ञानिक जांच में शामिल BHU के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, ‘2023 में सर्दियों की रात थी। मैं किसी रिसर्च वर्क में बिजी था। तभी एक ईमेल आया। ये ईमेल कनाडा से किसी ने भेजा था। इसमें लिखा था कि मेरे दादा ब्रिटिश राज में सैनिक थे और 1857 के आसपास अचानक गायब हो गए थे। कभी नहीं मिले, न लौटे। अंग्रेज सरकार ने हमारे परिवार के खिलाफ वारंट भी निकाला था। हम पहले यूपी में रहते थे, फिर भागकर तमिलनाडु चले गए थे। सिर्फ हम ही नहीं, तमिलनाडु के संथूर में कई ऐसे परिवार हैं, जो 1857 में यूपी से शिफ्ट होकर आए थे।’ ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, ‘पहली बार ये ईमेल पढ़कर मैं भावुक हो गया। एक नई उम्मीद दिखी कि शायद इन कंकालों की पहचान शुरू हो पाए। हमें इतना पता चल चुका था कि अजनाला के सूखे कुएं में जिन सैनिकों को दफनाया गया, वे उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, झारखंड समेत गंगा घाटी के आसपास के रहने वाले हैं। शायद उनके परिवार मिल जाएं, तो अंतिम संस्कार और सम्मान दोनों मिल सके।’ अंग्रेजों ने सैनिकों की लाशों पर चूना-कोयला डाला, फिर कुआं बंद कर दियासुरेंद्र कोछड़ की कोशिशों के बाद 2014 में खुदाई हुई और अवशेष सामने आए। इन कंकालों की जांच के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जेएस सहरावत की लीडरशिप में एक टीम बनी। इस टीम में BHU के प्रोफेसर बीरबल साहनी, प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और द सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) हैदराबाद के एक्सपर्ट शामिल हैं। दैनिक भास्कर ने प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे से साइंटिफिक फाइंडिंग्स पर बात की। वे बताते हैं, ‘मुझे जालियांवाला बाग हत्याकांड की जानकारी थी, लेकिन अजनाला केस कभी नहीं सुना था। अजनाला में कंकाल मिले, तो जांच की जिम्मेदारी अलग-अलग टीम को दी गई। हम लोग हैदराबाद के साथ मिलकर काम करने लगे।’ ‘कुएं की खुदाई सही तरीके से न होने से ज्यादातर सैंपल खराब हो चुके थे। कंकाल से डीएनए निकालने में इसलिए भी दिक्कत हुई क्योंकि अंग्रेजों ने सैनिकों को कुएं में डालने के बाद जानबूझकर उसमें चूना और कोयला डाल दिया था। इसके साथ मिट्टी भर दी थी। इससे हर लाश तक कोयला और चूना पहुंच गया था। ये दोनों चीजें डीएनए को खराब कर देती हैं।’ 'हमें शुरू में 244 सैंपल मिले थे। 100 के आसपास हैदराबाद लैब भेजे गए थे। केवल 50 सैंपल से ही हम डीएनए अलग निकाल पाए। इसकी जांच आगे बढ़ती गई और रिजल्ट आने लगे। तब पता चला कि अजनाला कुएं में मरने वाले सैनिक तो गंगा घाटी के ही लोग थे। यानी हमारे वाराणसी के आसपास वाले यूपी-बिहार के ही सैनिक थे।’ दांतों की बनावट और गंगा के पानी ने कराई पहचानप्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक, ‘हमें कंकालों से निकाले गए दांतों के सैंपल से रिजल्ट मिले। ये दांत काफी मजबूत थे। सैंपल की जांच से पता चला कि मरने वाले सैनिक ज्यादातर 21 से 42 साल के थे। उनकी लंबाई काफी अच्छी थी। वे दांतों का काफी ध्यान रखते थे। इसलिए दांत अच्छी हालत में मिले थे।’ ‘दांतों की जांच से ये भी पता चल जाता है कि इंसान किस इलाके का पानी पीता था। हर पानी में कार्बन और ऑक्सीजन की अलग-अलग मात्रा होती है। कंकालों से अलग-अलग डीएनए सैंपल लेकर जांच करने वाली टीम भी अलग-अलग काम कर रही थी। सभी टीम के रिजल्ट एक जैसे ही आए।’ प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे आगे बताते हैं, ‘हमें पहले ये डाउट था कि ये सैनिक पंजाब या फिर पाकिस्तान के इलाके के रहने वाले भी हो सकते हैं। एक शक ये भी था कि कहीं ये कंकाल 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के समय हुई किसी घटना से संबंधित तो नहीं हैं। हालांकि जांच से साफ हो गया कि ये 1857 के हैं और गंगा घाटी के आसपास रहने वाले लोग थे।’ ‘हालांकि मरने वाले किसी एक राज्य के नहीं थे। हमारी पड़ताल में ये भी पता चला कि 26वीं नेटिव इन्फैंट्री बटालियन के सैनिक पूर्वी यूपी, बिहार, बंगाल और झारखंड के आसपास के थे। ये पूरा गंगा घाटी वाला इलाका ही है। इनमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, मुस्लिम और दलित लोग भी थे।’ ‘न्यूक्लियर DNA जांच से तो हम सैनिकों के जिले भी बता देंगे’कंकालों की जांच पर प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया, ‘अभी तक की जांच में सैनिकों को अपनी मां से मिले माइटोकॉन्ड्रियल DNA की मदद से जानकारियां मिली हैं। ये DNA मां से बच्चों में ट्रांसफर होता है। 168 साल पहले भी जो माइटोकॉन्ड्रियल DNA था, वही आज भी उस एरिया की महिलाओं के DNA में मौजूद है।’ कई परिवारों ने फोन-मेल किए, ब्रिटेन मदद करे तो आसानी होगीइन शहीदों के परिवारों को ढूंढने के सवाल पर प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, ‘हम परिवारों को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। हमें ये पता है कि ब्रिटिश हर चीज का हिसाब-किताब लिखित में रखते थे। उनके आर्काइव में इन सैनिकों के नाम जरूर होंगे, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने आज तक गृह मंत्रालय और PMO को जवाब ही नहीं दिया।' 'चैलेंज ये है कि ये अब से 6-7 पीढ़ी पहले की बात है। हमें खुशी है कि 2022 में रिसर्च रिपोर्ट मीडिया में सामने आने के बाद अब तक कई लोग हमसे संपर्क कर चुके हैं। इन लोगों के दादा या परदादा ब्रिटिश आर्मी में थे। एकाएक गायब हो गए।’ इन परिवारों के खिलाफ वारंट तक निकले और कुछ देश के अलग-अलग इलाकों में भाग गए थे। ऐसा ही एक केस कनाडा से समीर पांडे का भी है। उन्हें लगता है कि शहीद सैनिकों में उनकी छठी पीढ़ी के दादा प्रकाश पांडे हो सकते हैं। प्रकाश पांडे ने लाहौर की मियां मीर छावनी में विद्रोह शुरू कियाकनाडा से दावा करने वाले समीर पांडे का अंदाजा है कि उनके परदादा प्रकाश पांडे का कंकाल भी इन शहीदों में शामिल हो सकता है। प्रकाश पांडे ने ही लाहौर की मियां मीर छावनी में अंग्रेज अधिकारी स्पेंसर को तलवार से मारकर विद्रोह शुरू किया था। फिर इन्हीं भारतीय सैनिकों को रावी नदी के पास से गिरफ्तार कर अंग्रेजों ने अजनाला के कुएं में दफना दिया था। प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक, ‘प्रकाश पांडे का पता हम समीर से मिले DNA की जांच से कर सकते हैं। समीर ने बताया है कि उनका परिवार यूपी के रायबरेली से है। वहां से 4 सिपाही थे, जो 26वीं बटालियन में थे। 1857 के बाद ये सैनिक गायब हुए तो परिवार के खिलाफ वारंट निकला और चारों परिवार चेन्नई के पास में संथूर गांव चले गए। हम लोग इस गांव में जाकर भी जांच करने की योजना बना रहे हैं।’ ‘दादा को अंग्रेजों ने मारा, फिर हमें भागने के लिए मजबूर किया’दैनिक भास्कर ने कनाडा में मौजूद समीर पांडे से भी बात की। समीर वहां जॉब करते हैं, लेकिन अगले एक साल में रिटायर होने के बाद इंडिया लौटने वाले हैं। समीर पांडे बताते हैं, ‘हमें खबरों के जरिए पता चला था कि अजनाला में 1857 क्रांति के सिपाहियों के कंकाल मिले हैं। इसी खबर में ज्ञानेश्वर चौबे का नाम था और मैंने उन्हें ईमेल से संपर्क किया। मेरे पूर्वज भी इसी बटालियन में थे। हमारे परिवार के सैनिक थे, जिन्हें 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी।’ ‘अंग्रेजों ने हमारे परिवार के लोगों को काफी परेशान किया था। मेरे दादा से पहले वाली पीढ़ी इससे परेशान होकर साउथ इंडिया शिफ्ट हो गई। मेरे दादाजी का जन्म भी चेन्नई के पास हुआ था। मेरे कई रिश्तेदार चेन्नई और आसपास रह रहे हैं। ब्रिटिश सरकार 26वीं बटालियन के सभी सिपाहियों के नाम की लिस्ट दे दे, तो नाम और घर की जानकारी मिल सकती है।’ समीर पांडे के अलावा दैनिक भास्कर ने संथूर गांव में रहने वाले उदय कुमार से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि हमारी पीढ़ी यूपी के कन्नौज की रहने वाली थी। 1857 में अंग्रेजों ने वारंट निकाला तो संथूर आ गए। तब से हमारी अगली पीढ़ियां यहीं रह रही हैं।’ ‘दो साल पहले से हम लोग अजनाला कुएं में मिले कंकाल की जांच करने वाली टीम के संपर्क में हैं। अभी हमारा DNA सैंपल नहीं लिया गया है। हम चाहते हैं कि 1857 क्रांति में जो सिपाही थे, उन सभी की पहचान हो। उन सभी परिवारों के साथ इंसाफ हो। उन शहीदों की पहचान हो और उन्हें सम्मान मिल सके। कम से कम उनका अंतिम संस्कार तो ठीक से किया जाए।’......................................... स्टोरी का पहला पार्ट यहां पढ़िएअंग्रेजों ने कुएं में जिंदा दफनाया, हत्यारे अफसर के नाम पर अमृतसर में सड़क पंजाब के अजनाला में गुरुद्वारा सिंह सभा के कैंपस में एक कुआं है। इसे ‘शहीदों का कुआं या ‘कलियांवाला खोह’ कहा जाता है। यहीं एक लोहे का बक्सा है। इस बक्से में इंसानों की हड्डियां भरकर रखी गई हैं। ये हड्डियां 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले 282 सैनिकों की हैं। इन सैनिकों को इस कुएं में जिंदा दफना दिया गया था। इनकी आज तक पहचान नहीं हो सकी। वहीं मारने वाले अफसर कूपर के नाम पर अमृतसर में आज भी सड़क है। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 26 Jan 2026 5:09 am

भारत में शेख हसीना के भाषण से तिलमिलाई बांग्लादेश सरकार, चुनाव से पहले राजनीतिक अस्थिरता की चेतावनी

ढाका का कहना है कि शेख हसीना की टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब देश में आगामी संसदीय चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और इससे राजनीतिक अस्थिरता, तनाव तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

देशबन्धु 26 Jan 2026 1:51 am

ऑनलाइन धोखाधड़ी पर अमेरिकी सांसदों में हड़कंप, चीन पर साधा निशाना, कहा- अरबों डॉलर चुरा रहे

US NEWS:गिलिब्रैंड ने कहा, 'यह एक ऐसा नुकसान है जो चुभता है. इससे रिटायरमेंट प्लान पटरी से उतर सकते हैं, परिवार टूट सकते हैं, और सीनियर सिटीजन को इमोशनल और पैसे का नुकसान हो सकता है.'

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 12:59 am

हसीना की सरकार गिराने का प्लाट अमेरिका ने रचा? लीक रिकॉर्डिंग से आया सियासी भूचाल!

Sheikh Hasina coup: बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट और मोहम्मद यूनुस को उनकी जगह बिठाने की साजिश किसने रची थी. इस अबूझ और अनसुलझी पहले को सुलझा लिए जाने का दावा किया जा रहा है. एक रिकॉर्डिंग ने 2-2 देशों में सियासी भूचाल कैसे उठा दिया और क्या है उस रिकॉर्डिंग में आइए बताते हैं.

ज़ी न्यूज़ 26 Jan 2026 12:38 am

‘जिन, जियान, आजादी’ से फिर गूंजने लगा ईरान, क्या है इस नारे का मतलब,जिससे दहशत में आया खलीफा?

Iran Women Protest News: खामेनेई के जबरदस्त दमन के बावजूद ईरान में फिर से विरोध विरोध प्रदर्शन की चिंगारी सुलगनी शुरू हो गई है. इस बार विरोध का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं. जिन्होंने ‘जिन, जियान, आजादी’ का नारा बुलंद कर युद्धघोष कर दिया है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 10:19 pm

फ्रांस की नेवी की करतूत, रूसी शैडो टैंकर के भारतीय कैप्टन को हिरासत में लिया; क्यों उठाया ऐसा कदम?

फ्रांस की नेवी ने कथित तौर पर एक संदग्ध रूसी तेल टैंकर को पकड़ा है. इतना ही नहीं नेवी ने जहाज में सवार भारतीयक कैप्टन को भी हिरासत में ले लिया है. बताया जा रहा है जहाज में सवार अन्य सभी क्रू सदस्यों को जहाज में ही रखा गया है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 10:13 pm

दुनिया शराब की लत से दूर हो रही है? बड़े ब्रैंड्स का स्टाक धड़ाम! रोकना पड़ा प्रोडक्शन

Gen Z: दुनियाभर में जेन ज़ी आबादी से जुड़ी नई-नई चीजें देखने सुनने को मिल रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के GEN Z अपनी पहले की पीढ़ी से ज्यादा सात्विक है, खासकर शराब की लत से कोसों दूर हैं. कहीं इसी वजह से लिकर बनाने वाली कंपनियों का भट्टा तो नहीं बैठ रहा, आइए जानते हैं.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 9:21 pm

पहले विष्णु मूर्ति हटाई, अब लगा दी बुद्ध प्रतिमा; क्या फिर भिड़ने जा रहे थाईलैंड-कंबोडिया?

Thailand-Cambodia News in Hindi: थाईलैंड ने कंबोडिया के साथ लगने वाले विवादित बॉर्डर पर पहले भगवान विष्णु की प्रतिमा हटाई थी. अब वहां पर गौतम बुद्ध की प्रतिमा लगा दी गई है. इस पर कंबोडिया भड़क गया है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 5:39 pm

ना रस्सी ना जाल... ताइवान की सबसे ऊंची इमारत पर चढ़ा शख्स, 91 मिनट में किया हैरतअंगेज कारनामा

Shocking News: अमेरिकी रॉक क्लाइंबर एलेक्स होनोल्ड (40 वर्षीय) ने संडे को बिना किसी रस्सी या सेफ्टी इक्विपमेंट के ताइवान की सबसे ऊंची गगनचुंबी इमारत ताइपे 101 की चढ़ाई की. होनोल्ड ने ऐसा कर सबको हैरान कर दिया है. चलिए विस्तार से जानते हैं.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 5:14 pm

ग्रीनलैंड की राजधानी Nuuk की अचानक बत्ती गुल, ट्रंप का हमला नहीं; फिर क्या थी वजह?

Greenland: ट्रंप की बुरी नजर के चलते ग्रीनलैंड लगातार लाइमलाइट में है. ग्रीनलैंड पर कब्जे की खुली धमकी से सहमें लोगों की धड़कने उस वक्त बढ़ गईं जब अचानक राजधानी और आस-पास की बत्ती अचानक गुल हो गई. किसी बर्फीले तूफान का अलर्ट नहीं था, ऐसे में कुछ लोग अनहोनी की आशंका से सिहर उठे.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 4:55 pm

ट्रंप की धमकी पर कार्नी ने खोला मोर्चा, कनाडा वासियों से की ये बड़ी अपील

Trump Tariffs: अमेरिका और कनाडा के बीच फिर तकरार छिड़ी गई है. ट्रंप ने कनाडा के पीएम को धमकी दी तो उन्होंने देश वासियों से एक बड़ी अपील कर दी. जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 2:26 pm

क्या ट्रंप के डर से बंकर में छिपे हैं ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई? बेटे मसूद को सौंपी ये बड़ी जिम्मेदारी

Ayatollah Ali Khamenei: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई किलेबंद बंकर में रह रहे हैं और उनके बेटे मसूद प्रशासनिक काम संभाल रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी हमले की आशंका बढ़ी है. इस बीच, ईरान ने चेतावनी दी है कि खामेनेई पर हमला युद्ध माना जाएगा.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 1:27 pm

सुलग उठा मिनेसोटा! बॉर्डर अधिकारी की गोली से भड़का गुस्सा, ट्रंप बोले- 'मेयर और गवर्नर ने किया अरबों का घोटाला'

trump on minnesota protests: मिनेसोटा में अवैध प्रवासियों और पुलिस संघर्ष के बाद भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे अरबों डॉलर की चोरी छिपाने वाला कवर अप बताया है. उन्होंने सैंक्चुअरी शहरों में फेडरल फंडिंग रोकने और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 1:13 pm

क्या है IPOI? जिसका नेतृत्व करता है भारत, अब स्पेन भी इस ग्रुप का हिस्सा, भारत की समुद्री साझेदारी को मिला बूस्ट

India spain IPOI deal: भारत ने स्पेन के IPOI में शामिल होने का स्वागत किया है, जिससे हिंद महासागर में भारत की समुद्री साझेदारी और मजबूत हुई है. यह कदम भारत के नेतृत्व पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दिखाता है और क्षेत्र में सुरक्षा व सहयोग को नया बूस्ट देता है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 12:11 pm

कनाडा में भारतीय मूल के शख्स की मौत, किसपर घूम रही है शक की सूई? पुलिस ने उठाया राज से पर्दा

Canada News: कनाडा में एक भारतीय मूल के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई, इस हत्या के बाद दहशत फैल गई. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और उन्हें शक है कि उसकी मौत टारगेट किलिंग के दौरान हुई है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 11:39 am

अफगानिस्तान युद्ध को लेकर NATO से भिड़ा US, इटली की PM मेलोनी ने निकाल दी ट्रंप की सारी हेकड़ी

NATO Vs Trump: इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने अफगानिस्तान में नाटो (NATO) सहयोगियों की भूमिका पर डोनाल्ड ट्रंप के बयान की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि ऐसे दावे 9/11 के बाद नाटो की एकजुटता और इटली के सहयोग को नजरअंदाज करते हैं. मेलोनी ने नाटो सहयोगियों के योगदान और पारस्परिक सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 10:58 am

बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, हैवानों ने गैराज में सोते हुए चंचल को जिंदा जलाया

Bangladesh Violence:बांग्लादेश के नरसिंगदी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जानकारी के अनुसार, यहां 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल भौमिक को उसकी दुकान के अंदर सोते समय जिंदा जला दिया गया.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 10:27 am

अमेरिका में बर्फीले तूफान का कहर, 20 राज्यों में इमरजेंसी घोषित

अमेरिका के बड़े हिस्से में आए भंयकर शीतकालीन तूफान ने भारी बर्फ और जमाव वाली बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में तापमान सामान्य से बहुत नीचे चला गया

देशबन्धु 25 Jan 2026 10:24 am

अमेरिका की नई रक्षा रणनीति शक्ति के दम पर शांति की तलाश

अमेरिका का कहना है कि वह अपने संभावित विरोधियों के साथ एक सम्मानजनक और टिकाऊ शांति चाहता है

देशबन्धु 25 Jan 2026 10:19 am

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, जल्द मिल सकती है मंजूरी

भारत और अमेरिका के अधिकारी प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में लगे हैं। समझौते के अधिकतर मुद्दों पर दोनों देशों की सहमति बन चुकी है

देशबन्धु 25 Jan 2026 9:43 am

आधा सच और आधा झूठ...ईरान के बाद अब यूरोप के इस देश में सड़कों पर जनता, सरकार के खिलाफ हिंसात्मक हुए प्रदर्शन

Albania News: ईरान में काफी संख्या में लोग सड़कों पर हैं, इसी बीच अल्बानिया की राजधानी तिराना में हजारों लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में सड़कों पर उतर आए हैं. यहां पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प भी हुई.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 9:23 am

आरएमबी के अंतर्राष्ट्रीयकरण को व्यवस्थित रूप से बढ़ाता रहेगा चीन

हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप ने चीन के केंद्रीय बैंक के रूप में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) गवर्नर पैन कोंगशेंग का विशेष साक्षात्कार लिया।

देशबन्धु 25 Jan 2026 9:11 am

ट्रंप के बयान पर इटली पीएम मेलोनी का कड़ा विरोध

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर कड़ी सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है

देशबन्धु 25 Jan 2026 9:05 am

कानून के नाम पर खून? ट्रंप की इमिग्रेशन कार्रवाई ने फिर ली जान; कौन है कत्ल किया गया शख्स?

Fatal Shooting Minneapolis: मिनियापोलिस में संघीय आव्रजन अधिकारियों की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत के बाद मिनेसोटा में तनाव बढ़ गया है. बता दें, राज्य में ये हाल के हफ्तों में हुई दूसरी ऐसी मौत है. गवर्नर टिम वाल्ज ने इसे घिनौना बताते हुए राष्ट्रपति ट्रंप से संघीय एजेंटों को राज्य से हटाने की मांग की है, जबकि घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 7:06 am

नहीं, यह कभी नहीं होने वाला... चीन से कनाडा की नजदीकियों पर भड़के ट्रंप, PM कार्नी को दी बड़ी चेतावनी

Donald Trump: चीन और कनाडा की बढ़ती नजदीकियों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी ज्यादा नाराज है. उन्होंने कहा कि दुनिया नहीं चाहती कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले, ऐसा नहीं हो सकता.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 6:35 am

संडे जज्बात- लोग भैंस और बुलडोजर आंटी कहते थे:92 किलो वजन था- किडनी खराब होने लगी तो 100 दिन में 20 किलो घटाया

मैं कानपुर की रहने वाली आभा शुक्ला हूं। भैंस, मोटी, 45 साल की आंटी, चलती-फिरती बुलडोजर, किसी के ऊपर गिर जाए, तो वो दबकर ही मर ही जाए… कभी ये सारे नाम मेरे ही थे। लोग मुझे इन्हीं नामों से बुलाते थे। मेरे असली नाम ‘आभा शुक्ला’ से नहीं। 30 साल की लड़की और 92 किलोग्राम वजन। लोग खूब मजाक उड़ाते थे। किसी को पलटकर जवाब देने की सोचती, तो क्या देती। कुछ नहीं… सिर झुकाए आगे बढ़ जाती थी। लेकिन जो लोग इन नामों से बुलाते थे, वही अब पूछते हैं- आभा, तुमने अपना वजन कैसे कम किया? जरूर कोई जड़ी-बूटी खाई होगी। नहीं तो, 92 किलो से सीधे 65 किलो वजन? यह तो सिर्फ फिल्मों में हो सकता है, असल जिंदगी में नहीं। हो ही नहीं सकता। लेकिन जब उन्हें इसके बारे में बताती हूं, तो वे खीझते हुए कहते हैं- झूठ बोल रही हो। मैं मुस्कुरा देती हूं। खैर… मेरी पुरानी और अब नई जिंदगी कहां से शुरू होती है, सब बताती हूं। 2007 की बात है। मेरी उम्र उस वक्त 15 साल थी। एकदम दुबली-पतली लड़की। करीब 35 किलोग्राम वजन था। पापा सरकारी टीचर थे। मैं उनके ज्यादा करीब थी और छोटा भाई मम्मी के करीब ज्यादा था। 2007 में फरवरी का महीना, तारीख 2। पापा मुझे हर रोज कंप्यूटर क्लास छोड़ने के लिए जाते थे। उस दिन भी वे मुझे छोड़ने गए। छोड़कर, किसी काम से शहर के बाहर चले गए। शाम 5 बजे उनके आने का वक्त था, लेकिन वे उस दिन आए नहीं। मैं गुस्से में थी। खुद ही कोचिंग से घर चली आई। मन ही मन सोच रही थी- पापा को आज आने दो, फिर उनसे जी-भरकर लड़ूंगी। घड़ी में पौने 6 बजे ही थे कि एक लड़का भागता हुआ मेरे घर आया, बोला- तुम्हारे पापा का एक्सीडेंट हो गया है। सुनते ही मैं जमीन पर गिर गई। मैं, मम्मी और भाई… सभी भागते हुए हॉस्पिटल पहुंचे। इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर पापा को CPR दे रहे थे। उनका एक पैर टूटा हुआ था। मुंह से खून निकल रहा था। अचानक पापा के हाथ-पांव जम गए। डॉक्टर उठकर खड़े हुए और पूछा- आपके पापा थे…? डॉक्टर ने डेड घोषित कर दिया। मैं खूब रोई। मां दीवार में सिर मारकर रोने लगीं। वहीं पर चूड़ी तोड़ने लगी। सभी के लिए फरवरी का महीना वसंत लेकर आता था, लेकिन मेरे लिए सिर्फ पापा के जाने का गम लेकर आया। आज भी जब फरवरी का महीना आता है, तो मैं 2 तारीख को पूरे दिन के लिए घर में खुद को बंद कर लेती हूं। खूब रोती हूं। ऐसा लगता है, सब कुछ कल की ही बात है। कोई मुझे उस हॉस्पिटल में ले जाए, तो मैं आज भी पूरी बात ऐसे बता सकती हूं, जैसे ये सब कल ही हुआ हो। एक-एक चीज… पापा के कफन पर रखे एक-एक फूल से लेकर शर्ट पर लगे खून के धब्बे तक याद हैं। मेरी चलती तो, उनके अस्थि से भरा कलश गंगा में प्रवाहित नहीं करती। उसे अपने घर की अलमारी में संभालकर रखती। आखिर उसी में तो उनके शरीर के आखिरी अंश बचे थे। मेरे 6 फीट के पापा एक कलश में सिमटे हुए थे! जब मैंने घर वालों से कहा, तो वे चीखते हुए बोले- ये कैसे हो सकता है? भला किसी आदमी का अस्थि कलश घर में रखा जाता है। इसे गंगा में प्रवाहित करना होता है। खैर, मजबूरी में वह अस्थि कलश गंगा में प्रवाहित करना पड़ा, लेकिन मैंने पापा का सफारी सूट आज भी संभालकर रखा हुआ है। उसे ही वे आखिरी बार पहन कर मुझे कोचिंग क्लास छोड़ने गए थे। उसमें आज भी खून के धब्बे लगे हुए हैं। हर साल 2 फरवरी को उसे निकालकर निहारती हूं। पापा के गुजरने के बाद किराएदारों ने मेरे घर पर कब्जा कर लिया। किराया देना बंद कर दिया। मांगने पर कहने लगे- न पैसे देंगे और न घर खाली करेंगे। ज्यादा बोलोगी, तो भाई पर पॉक्सो एक्ट लगवाकर रेप का मुकदमा करवा देंगे। फिर रहना जेल में सड़ते हुए। डर के मारे हमने कुछ साल बाद उस घर को चौथाई कीमत में बेच दिया। वहीं गांव की जमीन पर मेरे चाचा ने कब्जा कर लिया। उस वक्त मैं 12वीं में पढ़ती थी। ऐसा लगा- अब तो सब खत्म हो गया। सोचती- जब पापा ही नहीं रहे, तो फिर जीने का क्या फायदा। खुद को एक कमरे में बंद कर लेती। गहरे डिप्रेशन में जाने लगी। मां ने खुद को समझा लिया कि अगर वह घर को नहीं संभालेगी, तो उनके दोनों बच्चे बर्बाद हो जाएंगे। इकलौता भाई है। उसने खुद को संभाल लिया, क्योंकि उसे ही अब सब कुछ संभालना था। मैं चाहकर भी खुद को नहीं समझा पाई। हर वक्त बस एक ही ख्याल आने लगा- आत्महत्या कर लूं, तो पापा के पास चली जाऊंगी। अब इस धरती पर, इस घर में जीने का क्या ही मतलब है, जहां मुझे दुलार करने वाला ही न बचा हो। वहां किसलिए जिऊं।ऐसा नहीं है कि मेरी मां, भाई मुझसे प्यार नहीं करते थे, लेकिन पापा की कमी सही नहीं जा रही थी। इतना तनाव में थी कि डॉक्टर को दिखाना पड़ा। डिप्रेशन की दवाएं चलने लगीं। 24 घंटे में 16 घंटे सोने लगी थी। सोकर उठती तब भी नींद आती। ऐसे करीब 3-4 साल गुजरे। डिप्रेशन की दवाओं से ज्यादा नींद आने के कारण मेरा वजन बढ़ने लगा। चेक कराया तो पता चला 42 किलोग्राम हो गया है, फिर एक महीने बाद चेक कराया तो 60 किलोग्राम हो गया…। मैं सोचती थी, आगे चलकर वजन कम हो जाएगा, लेकिन यह बढ़कर 80 किलो के ऊपर पहुंच गया। उस समय लगने लगा कि अब बहुत मोटी हो गई हूं। मार्केट में मेरी पसंद के कपड़े नहीं मिलते थे। जींस की साइज अब 44 नंबर हो गई। 4XL साइज की कुर्ती ही हो पाती। कई बार मार्केट में कपड़ा खरीदने जाती, तो दुकानदार कहता- दीदी, अपनी साइज देखी हो। मेरे पास आपकी साइज के कपड़े नहीं हैं। जो इन्हीं में से पसंद कर लो। रिश्तेदार, आस-पड़ोस के लोग कहने लगे- अरे इसका वजन तो भैंस के बराबर हो गया। 45 साल की आंटी हो गई। तब तक मेरा वजन 92 किलोग्राम हो चुका था। इसी बीच, रिश्तेदार मेरे रिश्ते की बात करने लगे। कहने लगे- जितना वजन है, उतना दहेज देना पड़ेगा, तब शायद कोई लड़का शादी कर ले। ये तो चलती-फिरती बुलडोजर हो गई है। लोगों ने कहना शुरू किया। अरे! इसके पेट तो देखो। 7 महीने की प्रेग्नेंट लग रही है। सीना कितना बड़ा हो गया है। चेहरा भैंस जैसा लग रहा। जांघ और हाथ में कोई फर्क ही नहीं बचा है। वजन बढ़ने की वजह से मैंने शादी-ब्याह में जाना बंद कर दिया। मार्केट में मेरे साइज के कपड़े ही नहीं मिलते थे। कहीं आती-जाती तो लोग मुझे ही घूरते। मुझे याद है- मेरे मामा की बेटी की शादी थी। बचपन से ख्वाहिश थी कि बहन की शादी में सजूंगी, संवरूंगी। उसके लिए जब पार्लर गई, तो ब्यूटीशियन ने मेरे लिए बड़ा-सा ब्लाउज तैयार किया। पुराना-सा एक लंहगा दिया। बोली- तुम्हारे साइज का लहंगा तो है नहीं। उस दिन वही पहनकर बहन की शादी में गई। बाकियों के कपड़े देखकर उस दिन मुझे बहुत शर्म आई। एक कमरे में जाकर रोने लगी। जयमाल के समय बहन ने मुझे जबर्दस्ती बुलाया। उसके बाद से कभी किसी की शादी में नहीं गई। पहले तो मैं डिप्रेशन की दवा ले रही थी। अब, जब वजन बढ़कर 92 किलोग्राम हो गया, तो एक-एक करके चार-पांच डॉक्टर को दिखाया। कोलेस्ट्रॉल, ब्लड-प्रेशर, शुगर सब बढ़ने लगा था। थोड़ी देर चलती, तो हांफने लगती थी। ऐसा लगता, जैसे हार्ट-अटैक आ जाएगा। ब्लड की जांच हुई, तो पता चला कि किडनी में इन्फेक्शन है। डॉक्टरों ने कहा ऐसा ही रहा, तो किडनी फेल हो जाएगी। 2023 की बात है। यकीन हो चुका था कि अब जिंदगी बस कुछ महीनों की है। मैं मम्मी से कहने भी लगी कि मेरे गुजरने के बाद हमेशा भाई के साथ रहना। मम्मी, पापा की जगह सरकारी टीचर हो गई थीं। इसी बीच कानपुर के एक डॉक्टर से मिली। वह मेरी हालत देखते ही बोले- सबसे पहले इसके डिप्रेशन की दवा बंद करो। इसे कोई बीमारी नहीं है। उन्होंने मेरी सारी दवाएं बंद करा दीं। उस वक्त तक मैं हर दिन डिप्रेशन के 10 से ज्यादा टैबलेट खा रही थी। दवा छोड़ी तो पहले 15 दिन तक नींद ही नहीं आई। शरीर को डिप्रेशन और नींद की दवा खाने की आदत हो चुकी थी। सोचिए 13 साल से मैं लगातार डिप्रेशन की दवा खा रही थी। दवा छूटी तो डॉक्टर ने पहले एक महीने में कम-से-कम दो किलोग्राम वजन कम करने की सलाह दी। मैंने सुबह-शाम एक्सरसाइज करना शुरू किया। 16 घंटे की फास्टिंग करने लगी। 10 बजे के बाद सिर्फ एक-दो रोटी, दाल और सब्जी खाती। दोपहर में थोड़ा-सा भूना हुआ काला चना और शाम को फिर से दो रोटी, दाल और सब्जी। रात में भी रोज 6 से 7 किलोमीटर पैदल चलती थी। शुरू में वजन कम करने का इतना जुनून सवार हुआ कि ज्यादा चलने लगी। रास्ते में हाफंते हुए कई बार लगा कि गिर पड़ूंगी। ज्यादा वजन होने से मेरे फेफड़े में भी इन्फेक्शन हो चुका था। इतनी ज्यादा एक्सरसाइज कर रही थी कि घर पर जब मां की नींद खुलती, तो उन्हें मैं ट्रेडमिल पर दौड़ती नजर आती थी। रात के डेढ़ बजे, दो बजे भी मैं ट्रेडमिल पर दौड़ती थी। महीने के आखिर में जब मशीन पर अपना वजन चेक किया, तो 6 किलोग्राम घट चुका था। मैं हैरान थी कि यह कैसे हुआ। यकीन नहीं हो रहा था। डॉक्टर के पास गई। उन्होंने एक मशीन पर मेरा वजन चेक किया। तब मुझे लगा कि मशीन खराब होगी। फिर दूसरी मशीन पर चेक किया, तब कन्फर्म हो गया कि मेरा वजन कम हुआ है। इस तरह अब तो वजन घटाने का जुनून सवार हो गया था। अगले महीने फिर चेक कराया। 4 किलोग्राम और कम हो चुका था। तीसरे महीने में 8 किलोग्राम, फिर चौथे महीने में 2 किलोग्राम। 100 दिन के भीतर 20 किलो वजन कम हो गया। जब वजन कम होने की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की, तब मेरे आस-पड़ोस के लोग और सोशल मीडिया पर जो लोग न जाने मुझे क्या-क्या कहते थे, वे मुझसे वजन कम करने की टिप्स मांगने लगे। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि मैं वही मोटी वाली आभा शुक्ला हूं। दर्जनों लोग मेरे घर आए। कहने लगे कि आपको देखना था कि आप वाकई पतली हो गई हैं या कहीं AI से तो एडिट करके फोटो पोस्ट नहीं कर दी है? अब तक मैं हजार से ज्यादा लोगों को वजन कम करने की सलाह दे चुकी हूं। 2018-19 के बाद से मैंने कानपुर में सामाजिक कार्य शुरू कर दिए थे। सोच रही थी कि अब जिंदगी जब कुछ महीनों-साल की ही बची है, तो कुछ करके मरा जाए। उसी के बाद ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट बनी थी। (आभा शुक्ला ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर नीरज झा से साझा किए हैं) ------------------------------------------ 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात- किन्नर हूं, लड़के ने मेरी मांग भर दी:पिता ने बाजार में पीटा, बाल काट डाले, लेकिन लड़का पीछे नहीं हटा- मुझे दुल्हन बनाया मेरा नाम सोनी है। पश्चिम बंगाल के बनगांव की रहने वाली हूं। मैंने खुद को हमेशा एक लड़की ही माना, लेकिन लोगों ने मुझे पहचान दी- किन्नर, हिजड़ा जैसे शब्दों से। लोग कहते थे, ‘न मां बन पाएगी, न किसी की दुल्हन… फिर इसके जीने का क्या मतलब?’- पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 25 Jan 2026 5:40 am

रिपब्लिक डे पर चीफ गेस्ट की कुर्सी कितनी कीमती:पहली बार यूरोपियन यूनियन को न्योता क्यों मिला; क्या है 'मदर ऑफ ऑल डील्स'

2014 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट बने। उसी साल भारत-जापान ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए समझौता किया। 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि बने। अमेरिका ने भारत को 'मेजर डिफेंस पार्टनर' घोषित किया। 2016 में फ्रेंच राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद चीफ गेस्ट बने। उनके दौरे में ही भारत-फ्रांस ने 36 राफेल फाइटर जेट्स का एग्रीमेंट साइन किया। रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट आमतौर पर उन्हीं देशों से होते हैं, जहां भारत तवज्जो देना चाहता है। 77वें गणतंत्र दिवस परेड के लिए भारत ने यूरोपीय यूनियन के टॉप-2 लीडर्स को चीफ गेस्ट बनाया है- उर्सुला वॉन और एंतोनियो कोस्टो। आखिर भारत ने यूरोपीय यूनियन के लीडर्स को न्योता क्यों दिया, कैसे चुने जाते हैं रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट और इससे भारत क्या हासिल करता है, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: यूरोपीय यूनियन के नेताओं को भारत ने रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट क्यों बनाया? जवाब: यूरोपीय यूनियन किसी एक देश की तरह नहीं, बल्कि 27 देशों के ब्लॉक की तरह काम करता है। भारत ने इसके टॉप-2 लीडर्स को बुलाकर पूरे यूरोप को एक साथ साधने की कोशिश की है। दरअसल, उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष है। यह EU की एग्जिक्यूटिव विंग है, जो ट्रेड डील और रूल्स को लागू करती है। वहीं एंतोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष हैं। यह सभी 27 देशों के राष्ट्राध्यक्षों का रिप्रेजेंटेशन करते हैं और स्ट्रैटजिक डायरेक्शन तय करते हैं। यूरोपियन यूनियन के नेताओं को चीफ गेस्ट बनाने के पीछे भारत के 3 मकसद हो सकते हैं… 1. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से बनेगा 200 करोड़ ग्राहकों का मार्केट 2. अमेरिका-चीन की खींचतान में 'बफर स्ट्रैटजी' 3. IMEC के लिए EU का साथ जरूरी सवाल-2: गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बुलाने की परंपरा कब और क्यों शुरू हुई? जवाब: पहले गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को ही मुख्य अतिथि बुलाने की परंपरा शुरू हुई। उस दिन की परेड दिल्ली के इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम) में हुई थी। तब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो चीफ गेस्ट थे। इंडोनेशिया को पहले चीफ गेस्ट के तौर पर चुनना भी एक सिंबोलिज्म था। क्योंकि दोनों देश हाल ही में आजाद हुए थे और औपनिवेशिक शासन के लिए खिलाफ लड़े थे। दरअसल, 17 अगस्त 1945 को इंडोनेशिया ने आजादी का ऐलान किया था, जिसे 1949 में मान्यता मिली थी। चीफ गेस्ट बुलाने की परंपरा भारत की सॉफ्ट और स्ट्रैटजिक डिप्लोमेसी का हिस्सा है… सवाल-3: आखिर कैसे चुने जाते हैं रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट, प्रोसेस क्या है? जवाब: गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि को चुनना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें डिप्लोमेसी, ट्रेड, स्ट्रैटजी और मिलिट्री फायदे का बारीकी से एनालिसिस किया जाता है। ये प्रोसेस करीब 6 महीने पहले ही शुरू कर दी जाती है। भले ही 26 जनवरी का कार्यक्रम रक्षा मंत्रालय की जिम्मे है, लेकिन मुख्य अतिथि चुनने का काम विदेश मंत्रालय करता है। मेहमान के नाम चुनने से लेकर उनके कर्तव्य पथ तक पहुंचने का स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस… स्टेप-1: विदेश मंत्रालय में शुरुआती चर्चा विदेश मंत्रालय उन देशों की लिस्ट बनाता है, जिनके साथ भारत अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है। इसके इन 3 सवालों का जवाब ढूंढा जाता है और उनका एनालिसिस किया जाता है… स्टेप-2: प्रधानमंत्री की मंजूरी विदेश मंत्रालय अपनी सिफारिशों की फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO को भेजता है। पीएम और उनके सलाहकार तय करते हैं कि मौजूदा वैश्विक माहौल में किस नेता को बुलाना सबसे सही रहेगा। स्टेप-3: नेता का शेड्यूल पता करना स्टेप-4: राष्ट्रपति के सिग्नेचर के साथ न्योता भेजना PMO से मंजूरी मिलने और मेहमान का शेड्यूल चेक करने के बाद औपचारिक निमंत्रण भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जिस पर वे सिग्नेचर करती हैं। क्योंकि गणतंत्र दिवस का समारोह भारत के राष्ट्रपति आयोजित करते हैं। इसके बाद न्योता मेहमान देश को भेज दिया जाता है। स्टेप-5: सिक्योरिटी और प्रोटोकॉल व्यवस्था यह पूरी प्रोसेस गोपनीय रहती है, जब तक इसका आधिकारिक ऐलान न हो जाए। इसका मकसद फॉरेन रिलेशंस को मजबूत करना और ग्लोबल लेवल पर भारत की पॉजिशन को उभारना है। पूर्व IFS अधिकारी और 1999 से 2002 तक प्रोटोकॉल चीफ रहे मनबीर सिंह के मुताबिक, चीफ गेस्ट की दौरे में पूरा फोकस होता है कि वे प्रसन्न और संतुष्ट हों। उनकी यात्रा आराम से और बिना किसी दिक्कत के साथ हो। कई मेहमानों और उनके राजदूतों ने भारत के सामारोह और प्रोटोकॉल की जमकर तारीफ कर चुके हैं। सवाल-4: क्या यह सिर्फ सम्मान देने का तरीका है या कोई डिप्लोमैटिक मैसेज? जवाब: गणतंत्र दिवस में बतौर मुख्य अतिथि न्योता मिलना किसी देश के लिए प्रोटोकॉल के लिहाज से सर्वोच्च सम्मान की बात है। उन्हें राष्ट्रपति भवन में ऑफिशियल गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। फिर शाम में भारत के राष्ट्रपति उनके लिए स्वागत समारोह आयोजित करते हैं। मेहमान महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट भी जाते हैं। उनके लिए भारत के प्रधानमंत्री एक लंच भी रखते हैं, जिसमें सरकारी और गैर-सरकारी VIP मौजूद रहते हैं। पूर्व IFS अधिकारी मनबीर सिंह के मुताबिक, चीफ गेस्ट का दौरा सिंबोलिक अहमियत रखता है। उन्हें भारत के गौरव और खुशी का हिस्सा बनाया जाता है। ये दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती और बढ़ती साझेदारी की झलक दिखाती है। सम्मान से कहीं ज्यादा ये डिप्लोमैटिक स्ट्रेंथ नुमाइश होती है। चीफ गेस्ट के सिलेक्शन प्रोसेस में भी ये दिखाई देता है। फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट विनय कौरा के का मानना है कि भारत ऐसे सिंबॉलिक काम से अपनी डिप्लोमैटिक और स्ट्रैटजिक पैठ को मजबूत करता है। इसके जरिए भारत दुनियाभर में अपने रणनीतिक इरादे और विदेश नीति को व्यक्त करता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मेहमान-नवाजी के जरिए भारत बताता है कि उसके लिए कौन अहम है? साथ ही अपनी सॉफ्ट पावर और डिफेंस कैपेबिलिटी की ताल ठोकता है। मेहमान देश के साथ डील्स और पार्टनरशिप भी करता है। सवाल-5: क्या पाकिस्तान और चीन को कभी बतौर चीफ गेस्ट इनवाइट किया गया? जवाब: हां। भारत ने पाकिस्तान और चीन को उस दौर में न्योता दिया, जब वह ‘पड़ोसी पहले’ और ‘शांति के साथ रहने’ की नीति पर चल रहा था… रिश्ते सुधारने के लिए पाकिस्तान को 2 बार न्योता 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' के दौर में चीन को बुलाया तब के पीएम पं. नेहरू का मानना था कि ऐसे न्योते और सम्मान से पड़ोसियों के साथ तनाव कम किया जा सकता है। साथ ही वे एशियाई एकजुटता का नेतृत्व कर रहे थे। इसमें चीन और पाकिस्तान को साथ रखना बेहद जरूरी था। सवाल-6: किस देश को सबसे ज्यादा बार और सबसे कम बार न्योता दिया गया? जवाब: 2025 तक 47 देशों के 70 से ज्यादा नेताओं ने गणतंत्र दिवस के मेहमान के तौर पर शिरकत की है। भारत ने चीफ गेस्ट के लिए हमेशा अपने उन सहयोगियों को तरजीह दी है, जो डिफेंस, एनर्जी और स्ट्रैटजिक तौर से सबसे करीब रहे हैं। इसी के मद्देनजर भारत ने सबसे ज्यादा 6 बार फ्रांस को न्योता दिया। 1976, 1980, 1998, 2008, 2016 और 2024 के गणतंत्र दिवस में फ्रांस के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया। 5 बार ब्रिटेन, 4-4 बार भूटान, इंडोनेशिया और रूस के नेता चीफ गेस्ट बने। वहीं दुनिया के कई ताकतवर और अहम देश ऐसे हैं, जिन्हें भारत ने सिर्फ एक बार ही न्योता दिया। इसमें चीन (1958), ऑस्ट्रेलिया (1979), ईरान (2003), सऊदी अरब (2006), साउथ कोरिया (2010) और अमेरिका (2015) शामिल हैं। सवाल-7: क्या कभी ऐसा हुआ कि जब कोई मेहमान ही नहीं आए? जवाब: हां। 5 बार ऐसा हुआ है, जब गणतंत्र दिवस की परेड में राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर मुख्य अतिथि की कुर्सी खाली रही। इनमें से 3 मौके शुरुआती साल के थे, जबकि दो मौके कोविड के दौरान के थे। शुरुआती 3 साल नहीं बुलाए चीफ गेस्ट कोरोना महामारी में 2 साल कोई मुख्य अतिथि नहीं ****** गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... गणतंत्र दिवस की थीम वंदेमातरम्, परेड में निकलेंगी 30 झांकियां: सेना की नई भैरव बटालियन भी शामिल होगी भारत के 77वां गणतंत्र दिवस की परेड की थीम वंदेमातरम् पर रखी गई है। परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां निकलेंगी, जो 'स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम, समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत' थीम पर होंगी। पूरी खबर पढ़िए...

दैनिक भास्कर 25 Jan 2026 5:37 am

168 साल से सड़ रहे 282 शहीदों के कंकाल:अंग्रेजों ने कुएं में जिंदा दफनाया, हत्यारे अफसर के नाम पर अमृतसर में सड़क

पंजाब में वाघा बॉर्डर से सिर्फ 35 किमी दूर अजनाला नाम का एक छोटा सा शहर है। यहां गुरुद्वारा सिंह सभा के कैंपस में एक कुआं है। इस कुएं को ‘शहीदों का कुआं या ‘कलियांवाला खोह’ के नाम से जाना जाता है। कुएं तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। सीढ़ियों से उतरकर नीचे जाने पर कुआं नजर आने लगता है, पास में ही एक लोहे का बक्सा रखा है। इस बक्से में इंसानों की हड्डियां भरकर रखी गई हैं। आपको ये जानकर थोड़ा झटका लग सकता है कि ये हड्डियां 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले 282 सैनिकों की हैं। इन सैनिकों को इस कुएं में जिंदा दफना दिया गया था। 2014 में पहली बार खुदाई में ये अवशेष निकले। प्रधानमंत्री, केंद्र सरकार, राज्य सरकार सभी को लगातार चिट्ठियां लिखी गईं, लेकिन शहीदों के बचे-खुचे कंकाल और अवशेषों को अब तक लोहे का बक्सा ही हासिल हो पाया है। 168 से ज्यादा साल बीत चुके हैं। न तो किसी सरकार ने इन शहीदों का अंतिम संस्कार करवाने की पहल की। न इन अवशेषों को सम्मान के साथ किसी म्यूजियम में रखा गया। शर्म की बात ये है कि इस नरसंहार को अंजाम देने वाले अंग्रेज अफसर फ्रेडरिक हेनरी कूपर के नाम पर अमृतसर में एक रोड है। क्रिस्टल चौक से रेलवे ब्रिज की तरफ जाने वाली इस रोड का नाम है- कूपर रोड। राज्य में कांग्रेस, अकाली-BJP और AAP की सरकार भी आ गई, लेकिन किसी को फुर्सत नहीं मिली। केंद्र में मोदी सरकार को भी लेटर लिखे गए, लेकिन अभी तक ये शहीद सम्मान का इंतजार कर रहे हैं, पहचान का इंतजार कर रहे हैं। आइए, इस गणतंत्र दिवस पर इन शहीदों की कहानी याद करें… भारतीय सैनिकों का नरसंहार, जो इतिहास में खो गयाये कहानी सुरेंद्र कोछड़ नाम के शख्स को कबाड़ में मिली एक किताब से शुरू हुई। 1857 में अमृतसर का डिप्टी कमिश्नर था फ्रेडरिक हेनरी कूपर। इसी फ्रेडरिक ने 1858 में ब्रिटेन में एक किताब लिखी थी, द क्राइसिस इन द पंजाब। (The Crisis in the Punjab From The 10th Of May Until the fall of Delhi) इस किताब को भारत में कोई नहीं जानता था। ये अमृतसर की मोती लाल नेहरू लाइब्रेरी में रखी थी। ये लाइब्रेरी अंग्रेजों के जमाने में बने टाउन हॉल में है, जो गोल्डन टेंपल से महज कुछ दूरी पर है। सौ साल से ज्यादा समय तक रखी इस किताब को 2003 में लाइब्रेरी में ही रद्दी के ढेर में फेंक दिया गया। इसी लाइब्रेरी में अमृतसर के सुरेंद्र कोछड़ जाया करते थे। उन्होंने ये किताब पढ़ने के लिए ले ली। किताब के पेज नंबर 151 पर चैप्टर-6 है। इसमें 1857 में मौजूद 26वीं नेटिव इन्फैन्ट्री बटालियन का जिक्र है। इस चैप्टर में मेजर स्पेंसर की हत्या और उस रेजिमेंट के टोटल डिस्ट्रक्शन की बात है। इसी चैप्टर में हेनरी कूपर ने अजनाला के सूखे कुएं में 282 सैनिकों को मारकर दफनाने का जिक्र किया है। यहीं से सुरेंद्र कोछड़ की खोज शुरू हुई। 11 साल तक ढूंढा, 2007 में कुएं के ऊपर गुरुद्वारा बन गया थासुरेंद्र कोछड़ के मुताबिक, ‘किताब में लिखा था कि अजनाला थाने के पास कैंपिंग ग्राउंड है। पहले वहां एक छोटा कुआं था। इसमें 20-30 लोगों को ही फेंका जा सकता था। उससे करीब 100 मीटर दूर एक बड़ा सूखा कुआं मिल गया।' 'इसके बाद कूपर ने उसी कुएं में गोलियों से मारे गए सैनिक और भूख-प्यास से जिंदा, लेकिन अधमरे हो चुके सैनिकों को दफना दिया था। पहले तो ये लगा कि अगर ये सच होता तो पंजाब के अजनाला या अमृतसर में इसकी चर्चा जरूर होती। कई साल तक लगातार पड़ताल के बाद भी हमें ऐसे कुएं के बारे में जानकारी नहीं मिली।’ ‘कोई दस्तावेज नहीं मिल रहा था, कई साल गुजर गए। हमें 1928 में प्रयागराज से पब्लिश एक पत्रिका मिली। इस पत्रिका में अजनाला के रहने वाले बाबा जगत सिंह का इंटरव्यू छपा था। अजनाला हत्याकांड उन्होंने अपनी आंखों से देखा था।’ ‘उनके हवाले से लिखा गया था कि 26 नंबर की पलटन के कुछ थके हुए सिपाही अमृतसर की एक तहसील अजनाला से 6 मील दूर रावी नदी के किनारे पड़े थे। ये वही सिपाही थे, जो 30 जुलाई की रात को लाहौर की छावनी से भागे थे। इन्हें शक के आधार पर पकड़ लिया गया। इसके बाद मार दिया गया। इस पत्रिका में कूपर की दरिंदगी का भी जिक्र था।’ सुरेंद्र आगे बताते हैं, ‘इसी के बाद मुझे इस कहानी पर यकीन हो गया। जिस कैंपिंग ग्राउंड में छोटे कुएं और उसके 100 मीटर की दूरी पर बड़े कुएं की बात हो रही थी। उसकी 1857 और 1957 यानी 100 साल बाद की भी फोटो मिल गई। 1857 की पहली फोटो में बंद कुएं के आसपास झाड़ियां नजर आ रही हैं। 1957 की फोटो में उस कुएं के आसपास ईंट की चारदीवारी बना दी गई थी। कुछ बच्चे और लोग खड़े थे। साल 2007 के आसपास उसी कुएं के ऊपर गुरुद्वारा बना दिया गया था।’ पत्नी-बच्चों की कसम खाई तो खुदाई शुरू हुईसुरेंद्र ने कूपर की किताब तो पढ़ ली थी, लेकिन इस घटना की दूसरे ऐतिहासिक सोर्स से जांच-पड़ताल भी जरूरी थी। 11 साल तक वे अलग-अलग किताबों और जरियों से पड़ताल करते रहे। उन्हें भरोसा हो गया था, लेकिन कुएं की खुदाई कराने को कोई तैयार नहीं हो रहा था। गुरुद्वारा प्रशासन, स्थानीय लोग, राज्य सरकार सबको बताया, लेकिन कोई इस सच को मानने के लिए तैयार नहीं था। सुरेंद्र कोछड़ को कहना पड़ा कि अगर सिपाहियों के कंकाल न मिलें तो मुझे भी इसी कुएं में दफना देना। कंकालों के हाथ ऊपर की तरफ थे, मरने से पहले निकलना चाहते थेसुरेंद्र बताते हैं, ‘10 फीट के बाद लोग सवाल उठाने लगे थे, लेकिन थोड़ा ही नीचे पहला कंकाल नजर आ गया। वो कंकाल एक हाथ का हिस्सा था। कुएं में नीचे से ऊपर की तरफ। मानो मरने वाला कुएं से बाहर निकलने की आखिरी कोशिश में था, पर निकल न सका। उसी हालात में उस सैनिक की मौत हो गई होगी। इसके बाद एक-एक कर कंकाल निकलने लगे।’ सुरेंद्र ये बताते हुए इमोशनल हो जाते हैं। वे कहते हैं, ‘खुदाई के दौरान मिले दो सैनिकों के कंकाल को मैं कभी नहीं भूल सकता। एक सैनिक के कंकाल के जबड़े में कुछ दबा हुआ था। उसे खोला तो जबड़े में उंगली डाली हुई थी। उंगली में एक अंगूठी भी थी। वो अंगूठी किसी महिला की थी। सोने और हीरे की बनी हुई। शायद उसकी याद में मरते हुए सैनिक ने उसे मुंह में दबा लिया होगा। ऐसा लगता है कि या तो उस सैनिक की नई शादी हुई होगी या फिर सगाई होने वाली होगी। दूसरा कंकाल मुझे याद है, उसकी हाथ की मुट्ठी बंद थी। उस कंकाल की हथेली को खोला गया, तब उसमें 7 सिक्के मिले। उसने अपनी मेहनत की कमाई और परिवार की याद में सिक्के दबा रखे होंगे। इस उम्मीद में कि अगर कुएं से जिंदा निकल गए तो शायद परिवार को दे सकेंगे। दुख इस बात का है कि किसी ने भी इन सैनिकों की पहचान तक करने की कोशिश नहीं की।’ कूपर ने अपनी किताब में सैनिकों के कत्लेआम के बारे में क्या लिखा, पढ़िए कुएं से क्या-क्या मिलासुरेंद्र कोछड़ बताते हैं, ‘खुदाई के दौरान 282 लोगों के कंकाल मिले थे। इनमें जो काफी हद तक बेकार हो चुके थे, उन्हें तो हमने खुद हरिद्वार में जाकर जल प्रवाह करा दिया। कुछ कंकाल आज भी पंजाब यूनिवर्सिटी के पास हैं। बाकी जो दांत मिले थे, वो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में जांच के लिए रखे हैं।’ ‘इनके अलावा सैनिकों की काफी निशानियां मिली थीं, जैसे उस समय के चांदी के सिक्के, सोने की अंगूठियां, हीरे की अंगूठी, सोने के कई सामान, हाथ के कड़े और कुछ मालाएं। ये सब हमने गुरुद्वारा कमेटी के पास ही रख दिए थे। ये निशानियां आज भी उनके पास ही रखी हैं। हम चाहते थे कि ये सामान भारत सरकार के पास रहे। इन्हें लोगों को दिखाने के लिए किसी म्यूजियम में रखा जाए।’ सैनिकों को गोली मारी, गोलियां खत्म हुईं तो पत्थरों से मार डालादैनिक भास्कर ने हेनरी कूपर की लिखी किताब 'क्राइसिस इन पंजाब' पढ़ी। सुरेंद्र कोछड़ के अलावा बरामद कंकालों की साइंटिफिक जांच करने वाले प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे से भी बात की। कंकालों की DNA जांच में जुटे बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, ‘10-10 लोगों के हाथ पीछे की तरफ बांधकर कैंपिंग ग्राउंड में ले गए। फिर उन्हें गोली मार दी गई। गोलियां कम पड़ गईं, तो उन्हें पत्थर की गोलियां मारी गईं। इसके सबूत हमें कंकालों की जांच में मिले हैं। हथियार के बट से सैनिकों के सिर के पीछे हमला किया गया, जिसके निशान उन खोपड़ियों पर मिले हैं।’ हेनरी कूपर की किताब और सुरेंद्र कोछड़ से बात कर हम भारतीय सैनिकों के साथ हुई दरिंदगी की 3 बड़ी निशानियों तक पहुंचे। पहली निशानी- अंग्रेजों के जमाने की पुरानी तहसीलअब इस तहसील के पास ही टेलीफोन एक्सचेंज का दफ्तर है। पुरानी तहसील इतनी जर्जर हालत में है कि यहां ताला लगा रहता है। हम उस ताले को खुलवाकर अंदर पहुंचे। आसपास की दीवारें जर्जर, दरवाजे टूटे-फूटे। किनारे-किनारे आसपास घने और लंबे पेड़। इन्हीं पेड़ों और जर्जर दीवारों के बीच में जर्जर गुंबदनुमा बुर्ज वाली छोटी कोठरी है। इसमें एक भी खिड़की नहीं है। लोहे के दो गेट हैं, जिन्हें तहसील के जरूरी कागजात सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था। अजनाला थाने में जगह कम पड़ गई तो इसी 7 फुट चौड़े और करीब 8-9 फुट लंबे गुंबद के आकार वाली कोठरी में 60-70 सैनिकों को रखा गया था। इन सैनिकों को पहले यहीं के पेड़ों पर फांसी देने की तैयारी थी। बारिश और लकड़ियों की कमी से सैनिकों को जिंदा ही सूखे कुएं में डाल दिया गया था। दूसरी बड़ी निशानी कैंपिंग ग्राउंडये जगह उस सूखे कुएं से 100 मीटर और अजनाला थाने से चंद कदम दूर है। पहले भी यहां सैनिकों की छावनी हुआ करती थी। आज भी छावनी है। गेट पर आर्मी के जवान तैनात मिले। इन्होंने कैमरे पर बात नहीं की। न ही अंदर जाने दिया। बात करते हुए ये जरूर बताया कि यहां आने पर हमें पता चला कि अजनाला नरसंहार के दौरान अंग्रेजों ने इसी कैंपिंग ग्राउंड में 1857 के दौरान भारतीय सैनिकों को मारा था। इसी कैंपिंग ग्राउंड में थाने में बंद सैनिकों को 10-10 की संख्या में खड़ा करके गोली मारी गई थी। जब ये सैनिक मर गए तब उन्हें सूखे कुएं में फेंक दिया गया था। तीसरी निशानी सूखा कुआंहम इसी कैंपिंग ग्राउंड के किनारे-किनारे उस गुरुद्वारे तक पहुंचे, जहां सूखे कुएं में 282 सैनिकों को दफनाया गया था। उस कुएं तक पहुंचे तो वहां एक संदूक मिला। इसमें आज भी एक संदूक में उन गुमनाम सैनिकों की अस्थियां पड़ी मिलीं। इसके बाद अजनाला से करीब 10-11 किमी दूर रावी नदी तक पहुंचे। यहां सोफियां गांव से आगे रावी नदी से कुछ दूर पाकिस्तान शुरू हो जाता है। आखिर कब इन सैनिकों को सम्मान मिलेगा, अंतिम संस्कार होगाकुएं के पास ले जाकर सुरेंद्र हमें एक लोहे का बक्सा दिखाते हैं। ये एक सामान्य बक्सा है, जैसा घरों में सामान या कपड़े रखने के लिए इस्तेमाल होता है। वे इस बक्से का ढक्कन खोलते हैं और हाथ में एक इंसानी हड्डी लेकर हमें दिखाने लगते हैं। सुरेंद्र कोछड़ उदास होकर कहते हैं, ‘साल 2014 में 28 फरवरी से 3 मार्च के बीच गुरुद्वारे के नीचे खुदाई हुई थी। इसमें से 282 सैनिकों के कंकाल मिले। खुदाई के 12 साल बाद और दफन होने के 168 साल बाद भी इनके कंकाल आज भी उसी कुएं के पास 2 बाई 1 के एक संदूक में बंद हैं।' मैंने कई बार केंद्र और राज्य सरकार को जानकारी दी। सैनिकों के काफी अवशेष आज भी लैब में पड़े हैं। ये सैनिकों की सबसे बड़ी तौहीन है। इनके साथ ऐसा होगा इसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। न PMO ने सुनी न पंजाब सरकार ने, अभी जांच ही चल रहीऐसा भी नहीं है कि सरकारों को इस घटना की जानकारी नहीं है। दैनिक भास्कर के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक, सैनिकों के नाम और पहचान के लिए 16 मई 2022 को पीएमओ के ऑनलाइन पोर्टल पर डिमांड की गई थी। इसके तीन दिन बाद ही 18 मई को इसके लिए उस समय के अंडर सेक्रेटरी मुकुल दीक्षित को जिम्मेदारी दी गई थी। हमने उनसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। इससे पहले, गृह मंत्रालय की तरफ से भी 26 मार्च 2014 को लेटर जारी हुआ था। ये लेटर ब्रिटेन भी भेजा गया था। अब तक ब्रिटेन की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। सैनिकों के कंकाल और निशानियों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किए जाने के लिए भारतीय पुरातत्व संरक्षण को 2024 में लेटर लिखा गया था। हालांकि जवाब मिला कि ये स्थल संरक्षण योग्य नहीं है। सुरेंद्र कोछड़ ने 25 जुलाई 2025 को पंजाब के मुख्यमंत्री को एक लेटर लिखा था। इसका ज्ञापन अजनाला के एसडीएम रविंद्र सिंह अरोड़ा को भी दिया था। लेटर में सवाल किया गया था कि अजनाला से खुदाई में मिले अवशेषों को पंजाब सरकार कब्जे में क्यों नहीं ले रही है। जानकारी के मुताबिक, पूरे मामले की जांच के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेएस सहरावत को जिम्मेदारी दी गई है। उनका कहना है कि हम लोग इस पर लगातार काम कर रहे हैं। जल्द ही साइंटिफिक तरीके से एक रिपोर्ट पब्लिश करेंगे। उस रिपोर्ट पर सहमति मिल जाएगी, तभी हम उस बारे में मीडिया को जानकारी दे सकेंगे। .................................स्टोरी का दूसरा पार्ट 26 जनवरी, सोमवार को पढ़िएयूपी, बिहार, बंगाल से हैं अजनाला के 282 शहीदअजनाला के कुएं में मिले कंकालों की वैज्ञानिक जांच और DNA सैंपलिंग की भी कोशिशें हुई हैं। जांच से साबित हो रहा है कि सैनिक पूर्वी यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के रहने वाले थे। दो से तीन परिवार भी सामने आए, लेकिन अवशेष लोहे के बक्से में कैद हैं। दैनिक भास्कर ने कंकालों की जांच करने वाले प्रोफेसर और सैनिकों के संभावित परिवारों से बात की है। ये रिपोर्ट पढ़िए 26 जनवरी को...

दैनिक भास्कर 25 Jan 2026 5:36 am

अमेरिका ने सहयोगी देशों की सुरक्षा से पल्ला झाड़ा, कहा- अपनी रक्षा स्वयं करें, रक्षा नीति में बड़ा बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विरोधाभासी और आक्रामक रुख एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। नाटो सहयोगियों समेत पूरे अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा लेने और ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की बात करने वाले ट्रंप अब वैश्विक सुरक्षा से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।

देशबन्धु 25 Jan 2026 3:53 am

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की बौखलाहट क्या कहती है? दुनियाभर को सताने लगी चिंता

Trump and Greenland: ट्रंप की सिर्फ ग्रीनलैंड और कनाडा से ही अदावत नहीं चल रही. यूरोप के दूसरे हिस्सों में भी तनाव बढ़ा है, जिसके केंद्र बिंदु भी ट्रंप ही हैं. ग्रीनलैंड के मुद्दे पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप का विरोध किया है. इसी मुद्दे पर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और मैक्रों के बीच ठन गई है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 3:16 am

ट्रंप की कुंडली में दुनिया की तबाही लिखी है? कैसी है ग्रहों की चाल, सबसे बड़ी भविष्यवाणी

Donaldl Trump Kundli: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने ऊल-जुलूल फैसलोंसे दुनिया की शांति भंग करते हुए लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं. उनके राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि ऐसी हरकतों से वो अमेरिका को महान तो नहीं बना पाएंगे लेकिन उसका सत्यानाश कर देंगे. ज्योतिषियों ने उनकी कुंडली खंगाली तो पता चला कि फिलहाल उनकी दशा-महादशा सही नहीं चल रही है.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 1:29 am

3 दिन में ईरान पर कब्जा कर लेगा अमेरिका? ट्रंप ने जारी किया नोटिस, एक्सपर्ट्स ने समझाया WAR प्लान, संभावनाएं और भी हैं...

Middle east news:मोहम्मद मुवाहेदी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी हैं. ट्रंप के दावे पर खामेनेई के करीबी के तीखे जवाब से अमेरिका बौखला गया है. इसीलिए किसी भी वक्त ईरान पर हमला शुरू हो सकता है. हमले की सिर्फ यही वजह नहीं है, अमेरिका और पश्चिमी देशों के एक्सपर्ट कुछ और आशंकाएं जता रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 25 Jan 2026 12:58 am

ट्रंप का अल्टीमेटम चीन से डील पर कनाडा को 100% टैरिफ की धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर कनाडा चीन के साथ किसी तरह का व्यापार समझौता करता है, तो अमेरिका तुरंत सीमा पार से आने वाले सभी कनाडाई सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा

देशबन्धु 24 Jan 2026 10:56 pm

यूक्रेन में आई कयामत! तापमान 0 से बहुत नीचे, तीन तरफ से चल रही थी शांति की बातचीच, रूस ने बोल दिया हमला

Russia Ukraine war:24 फरवरी 2022 को रूस द्वारा यूक्रेन पर बोला गया हमला, दोनों के बीच फरवरी 2014 के युद्ध का विस्तार था. महीनेभर बाद ये जंग 5वें साल में प्रवेश कर जाएगी. ट्रंप लड़ाई रुकवाने की बहुत कोशिशें कर रहे हैं. शांति बहाली की बातचीत के बीच मास्को ने कीव पर भयानक हमला किया है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 10:55 pm

VIDEO: माइनस 21 डिग्री का आतंक! हवा में अटक गई चम्मच, नूडल्स बोले - अब नहीं पिघलेंगे

Frozen Noodles Video: इन दिनों तेज ठंड ने सभी को परेशान कर रखा है. लेकिन सच बताएं तो ये ठंड कुछ नहीं है. ऐसे भी इलाके हैं, जहां तापमान माइनस 21 डिग्री चल रहा है. वहां पर खुले में कुछ भी निकालते ही वह तुरंत जम जाता है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 10:54 pm

ट्रंप की धमकी का तोड़ ढूंढ रहा था कनाडा, चीन के साथ नए ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर आ गई 100 फीसदी टैरिफ जड़ने की धमकी

US Canada trade tension: अमेरिका और कनाडा के बीच तनाव गहरा गया है. कनाडा को हड़पने की नीयत पाले बैठे यूएस प्रेसिडेंट को कनाडाई पीएम की बात इतनी चुभ गई कि उन्होंने ये कह दिया कि अगर चीन के साथ ट्रेड एग्रीमेंट करके दोस्ती की पींगे बढ़ाने की कोशिश की तो ठीक नहीं होगा.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 10:06 pm

आज रात ही ईरान पर बड़ा हमला करने जा रहा अमेरिका? मिडिल ईस्ट के सूत्रों के हवाले से दावा

US attack on Iran: ईरान का हाल बेहाल है. सैकड़ों मौतों के बाद दावा है कि सर्वोच्च नेता खामेनेई के इशारे पर सरकार प्रदर्शनकारियों को कुचलने के साथ-साथ आंदोलन खत्म कराने में कामयाब रही है. इसके बाद अमेरिका की ओर से ईरान पर कभी भी होने वाले कथित अप्रत्याशित हमले की तारीख और टाइमिंग बताई जा रही है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 8:18 pm

क्या बांग्लादेश क्रिकेट तबाह हो जाएगा:ICC ने वर्ल्डकप से बाहर निकाला, करोड़ों का घाटा, बैन होने का भी खतरा; अब पाकिस्तान क्या करेगा

बांग्लादेश टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर हो गया है। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि हम अब सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, अगर उन्होंने मना कर दिया तो हम भी टूर्नामेंट नहीं खेलेंगे। भारत-श्रीलंका की मेजबानी में होने वाला T20 वर्ल्ड कप शुरू होने में महज 2 हफ्ते बाकी हैं। ऐसे में बांग्लादेश को वर्ल्ड कप नहीं खेलने से क्या घाटा होगा, क्या पाकिस्तान भी मैच नहीं खेलेगा और भारत पर क्या असर पड़ेगा; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बांग्लादेश ने भारत में खेलने से मना क्यों किया? जवाब: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड यानी BCB ने सुरक्षा का हवाला देते हुए भारत में न खेलने का फैसला किया है। BCB चाहता था कि उसके T20 वर्ल्ड कप मैच श्रीलंका में हों, लेकिन ICC ने इससे इनकार कर दिया। बांग्लादेश के स्पोर्ट्स एडवाइजर आसिफ नजरुल ने कहा, ‘हम वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं, लेकिन भारत में हमारे खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को लेकर चिंता है।’ सुरक्षा से जुड़ी इस वजह के अलावा बांग्लादेशी टीम के भारत न आने की 2 छिपी वजहें भी हैं… 1. मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर करना IPL की टीम KKR ने बांग्लादेशी पेसर मुस्तफिजुर रहमान को 9.2 करोड़ रुपए में खरीदा, लेकिन भारत में इसका विरोध होने लगा। BCCI ने KKR से उन्हें रिलीज करने को कहा। 3 जनवरी को KKR ने ऐसा कर दिया। BCB ने इसे अपमान माना और IPL का टेलिकास्ट बैन कर दिया। यहीं से ये विवाद शुरू हुआ। 2. भारत-बांग्लादेश में बिगड़ते हालात और रिश्ते पिछले कुछ महीनों में भारत और बांग्लादेश के डिप्लोमेटिक रिलेशंस बेहद खराब हुए हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और हत्या होने के बाद भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों और कलाकारों के विरोध की बात होने लगी। बिगड़ते माहौल का हवाला देते हुए बांग्लादेश सरकार ने टीम भेजने से मना कर दिया। हालांकि BCB के प्रेसिडेंट अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने कहा कि हम ICC से एक बार फिर बात करेंगे और कहेंगे कि वे हमारी चिंताओं पर ध्यान दें। बांग्लादेश इस मसले पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा। बांग्लादेश के बायकॉट के फैसले के बाद अब उसकी जगह स्कॉटलैंड की टीम T20 वर्ल्ड कप में खेल सकती है। सवाल-2: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश को क्या-क्या नुकसान होगा? जवाब: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से लेकर बांग्लादेश में बिजनेस को अच्छा-खासा नुकसान हो सकता है… पार्टिसिपेशन फीस नहीं मिलेगी, बोर्ड का घाटा मैच जीतने पर भी फीस मिलती है, इसका नुकसान स्पॉन्सर और कॉमर्शियल लॉस रैंकिंग पर असर दैनिक भास्कर डिजिटल के स्पोर्ट्स एडिटर बिक्रम प्रताप सिंह के मुताबिक बांग्लादेश ने पाकिस्तान से प्रभावित होकर फैसला तो ले लिया कि वह वर्ल्ड कप बायकॉट कर देगा, लेकिन ICC में पाकिस्तान का फिर भी दबदबा है। भारत-पाकिस्तान मैच से पूरे वर्ल्ड कप का 25% तक रेवेन्यू आता है, लेकिन बांग्लादेश के साथ ऐसा नहीं है। उसने वर्ल्ड कप बायकॉट कर अपना ही नुकसान किया है। हालांकि BCB की फाइनेंस कमेटी के प्रमुख और अंतरिम सरकार के स्पोर्ट्स एडवाइजर नजमुल हुसैन ने हाल ही में कहा था कि बांग्लादेश के वर्ल्ड कप न खेलने से बोर्ड को कोई नुकसान नहीं होगा। जो नुकसान होगा वो खिलाड़ियों को होगा। सवाल-3: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश के खिलाड़ियों को क्या नुकसान होगा जवाब: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेशी खिलाड़ियों के करियर और फाइनेंस को नुकसान होगा… हर खिलाड़ी को साढ़े सात लाख का नुकसान रैंकिंग पर असर स्पॉन्सर्स का पीछे हटना सवाल-4: क्या ICC बांग्लादेश टीम के खिलाफ कोई एक्शन ले सकती है? जवाब: ICC के पास कार्रवाई का अधिकार है। ICC के नियमों के मुताबिक वर्ल्ड कप का बायकॉट, मेंबर्स पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट के खिलाफ है। ऐसे मामलों में ICC आर्थिक दंड से लेकर सदस्यता निलंबन तक का फैसला ले सकती है। पहले भी ICC सख्त कदम उठा चुकी है। 2019 में जिम्बाब्वे क्रिकेट को राजनीतिक दखल के कारण निलंबित किया गया था, जिससे वह 2020 में कोई ICC टूर्नामेंट नहीं खेल सका। अगर ICC को लगता है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने राजनेताओं के दबाव में फैसला लिया है, तो ICC के सदस्य के तौर पर उसके निलंबन पर सोचा जा सकता है। अगर बांग्लादेश टीम टूर्नामेंट से हटती है तो ICC उसे ग्रुप स्टेज में भागीदारी पर मिलने वाले लगभग 3 लाख डॉलर भी नहीं देगी। इसके अलावा बोर्ड को ICC से मिलने वाला 30–40 मिलियन डॉलर का सालाना हिस्सा भी रोका जा सकता है। इसके अलावा ICC भविष्य में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से बड़े टूर्नामेंट्स की मेजबानी का अधिकार भी छीन सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्पॉन्सरशिप पर असर पड़ेगा। सवाल-5: क्या पाकिस्तान भी वर्ल्ड कप का बायकॉट कर सकता है? जवाब: पाकिस्तान के वर्ल्ड कप बायकॉट करने की संभावना कम है क्योंकि उसके मैच पहले से ही भारत में नहीं होना तय है। पाकिस्तान के सभी मैच श्रीलंका में शेड्यूल हैं। हालांकि PCB के चेरयमैन मोहसिन नकवी ने कहा है कि बांग्लादेश के साथ गलत हुआ है। अगर हमारी सरकार ने वर्ल्ड कप खेलने से मना किया, तो हम भी टीम नहीं भेजेंगे। लेकिन नकवी बार-बार बयान बदल रहे हैं। कुछ दिन पहले टेलिकॉम एशिया स्पोर्ट्स ने PCB सूत्रों के हवाले से लिखा कि पाकिस्तान वर्ल्ड कप न खेलने जैसा कदम नहीं उठाएगा। सवाल-6: बांग्लादेश के बायकॉट करने से क्या भारत को भी कोई नुकसान हो सकता है? जवाब: बांग्लादेश के वर्ल्ड कप बायकॉट करने से भारत से ज्यादा बांग्लादेश को ही नुकसान होगा। इससे भविष्य में अब भारत भी बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय सीरीज खेलने से इनकार कर सकता है। जब भारत-बांग्लादेश के मैच होते हैं तो बांग्लादेश के ब्रॉडकास्टर और स्पॉन्सर सबसे ज्यादा कमाई करते हैं। IPL से भी यह कमाई करते हैं। भारत से संबंध खराब कर BCB अपना ही नुकसान कर रहा है। हालांकि मैच टिकट और टूरिज्म से होने वाली कमाई का नुकसान भारत को झेलना पड़ेगा… ***** बांग्लादेश क्रिकेट विवाद से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... बांग्लादेश टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर होने की कगार पर: बोर्ड बोला- भारत में नहीं खेलेंगे; ICC ने कल कहा था- इंडिया में ही खेलना होगा बांग्लादेश ने गुरुवार को भारत में टी-20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार कर दिया, जिसके बाद टीम का टूर्नामेंट से बाहर होना तय माना जा रहा है। एक दिन पहले ही ICC ने स्पष्ट किया था कि बांग्लादेश के सभी ग्रुप मैच भारत में ही कराए जाएंगे। पूरी खबर पढ़िए...

दैनिक भास्कर 24 Jan 2026 8:04 pm

अमेरिका में सैकड़ों मौतों का मंडराया खतरा, 8000 से अधिक फ्लाइट्स रद्द; वजह ईरान पर संभावित हमला नहीं और गंभीर

US News: इस आफत से करीब 14 करोड़ लोगों के प्रभावित होने की चेतावनी दी गई है. बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान का खतरा टला नहीं है. पूर्वी टेक्सास से नॉर्थ कैरोलिना तक बड़े भारी नुकसान की चेतावनी जारी की है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 6:49 pm

ग्रीनलैंड पर नजर, साथ में पेंगुइन! व्हाइट हाउस की AI हरकत ने इंटरनेट को हंसा-हंसा कर लोटपोट क्यों कर दिया

Donald Trump Greenland News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर गहरी नजर है. वे इस बर्फीले द्वीप को किसी भी हाल में कब्जाना चाहते हैं. अब ट्रंप की एक AI हरकत ने इंटरनेट को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 5:24 pm

एआइ चैटबॉट ‘ग्रोक’ को लेकर वैश्विक चिंता: एक्स पर अश्लील तस्वीरों की बाढ़, कई देशों ने उठाए सख्त कदम

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह पूरा मामला दिसंबर के अंत में सामने आया, जब एक्स पर यूजर्स ने ग्रोक का इस्तेमाल कर वास्तविक लोगों की तस्वीरों को अश्लील रूप में बदलना शुरू किया।

देशबन्धु 24 Jan 2026 2:59 pm

‘पाकिस्तान पर ना करें भरोसा’, अमेरिकी सीनेटर ने रूबियो को लिखा खत- PAK में मानवाधिकारों को लेकर जताई चिंता

Us Senator Warner Letter: अमेरिका के सीनेटर मार्क आर. वॉर्नर ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो को एक चिट्ठी लिखकर पाकिस्तान में चल रही हालात पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि वहां राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स के खिलाफ गिरफ्तारियां हो रही हैं. दबाव बनाया जा रहा है. सीनेटर ने रूबियो से अपील की है कि अमेरिका को इस मुद्दे पर कूटनीतिक कदम उठाने चाहिए. पाकिस्तान सरकार से सीधे बात करनी चाहिए.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 2:48 pm

कौन है विजय कुमार जिसने US में पत्नी समेत 3 रिश्तेदार को मारी गोली? कैसे 3 नन्हें बच्चों ने बचाई अपनी जान

Vijay Kumar Indian Man Kills Wife: अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां भारतीय मूल के एक व्यक्ति विजय कुमार पर अपनी पत्नी और तीन रिश्तेदारों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है. यह घटना घरेलू विवाद के बाद हुई बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. मामले की जांच जारी है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 2:33 pm

'जनता को गुमराह कर रहे हैं मोहम्मद यूनुस...', आम चुनावों से पहले भड़की आवामी लीग, क्यों कहा- बना रहेगा काला धब्बा?

Bangladesh News: बांग्लादेश में सियासी तकरार छिड़ी है. इसी बीच अवामी लीग ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर तथाकथित रेफरेंडम (जनमत संग्रह) कराने की कोशिश का आरोप लगाया है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 2:33 pm

US: पति की फायरिंग में 4 भारतीयों की मौत; बच्चों ने अलमारी में छिपकर बचाई जान, फिर बुलाई पुलिस

USA Shooting: अमेरिका के जॉर्जिया के लॉरेंसविले में शुक्रवार तड़के पारिवारिक विवाद के दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें एक भारतीय नागरिक सहित चार लोगों की मौत हो गई. ग्विनेट काउंटी पुलिस के अनुसार, ब्रूक आइवी कोर्ट स्थित घर से गोलीबारी की सूचना मिली थी. मौके पर पहुंची पुलिस ने चारों वयस्कों को मृत पाया.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 12:20 pm

पैसे पर पीस कैसी? ट्रंप के गाजा 'प्राइवेट क्लब' में क्या भारत को शामिल होना चाहिए

Trump Board of Peace: शांति के नाम पर आने वाली पहलें अक्सर बड़ी-बड़ी बातों से सजी होती हैं. डोनाल्ड ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ भी कुछ ऐसी ही है. यह बोर्ड गाजा के लिए 1 अरब डॉलर के स्थायी फंड के साथ सामने आया है. इस घोषणा ने दुनिया भर के नेताओं और राजनयिकों को चौंका दिया है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 12:16 pm

दावोस में बड़ा धमाका: Elon Musk ने भरी सभा में खोली ट्रंप के Board of Peace की पोल, सन्न रह गई दुनिया!

Elon Musk On Trump: दुनिया के सबसे बड़े बिजनेसमैन और टेक जगत के दिग्गज एलन मस्क ने दावोस के मंच पर एक चौंकाने वाली बात कह दी है. एलन मस्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई पहल पर ऐसा तंज कसा कि माहौल अचानक गंभीर हो गया. मजाकिया शब्दों के पीछे छिपा तीखा तंज करते हुए मस्क ने शांति के नाम पर शुरू की गई एक योजना पर यह सवाल खड़ा कर दिया है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 11:21 am

मिडिल ईस्ट में बजी युद्ध की घंटी! ट्रंप ने भेज दिया जंगी जहाज; ईरान बोला- हमले का बदला सर्वनाश

Iran Response To US Threats: ईरान ने एक बार फिर अमेरिका को चेतावनी दी है कि किसी भी हमले को वह पूरी तरह से युद्ध मानेगा. जानकारी के अनुसार, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और अन्य सैन्य बल तैनात किए जा रहे हैं. ईरानी सेना हाई अलर्ट पर है और किसी भी हमले का कड़ा जवाब देने को तैयार है.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 11:08 am

कुछ महीनों में इंसानों को पीछे छोड़ देगा AI? एलन मस्क ने बताया 2030 तक क्या गजब होने वाला है

एलन मस्क ने कहा कि AI की क्षमता में जो उछाल देखने को मिल रहा है, वह पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेज है। उन्होंने कहा, “संभव है कि इसी साल के अंत तक AI किसी भी एक इंसान से ज्यादा समझदार हो जाए।

देशबन्धु 24 Jan 2026 10:48 am

'हम साथ-साथ हैं...', भारत ने ईरान का किया खुला समर्थन, UN में इंडिया का रुख देख उड़े पश्चिमी देशों के होश

UNHRC Iran Resolution: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 39वें सत्र में भारत ने कुछ ऐसा किया की पश्चिमी देश पूरी तरह से चौंक गए. एक प्रस्ताव में भारत ने विपक्ष में वोटिंग की जिससे हर कोई हैरान हो गया.

ज़ी न्यूज़ 24 Jan 2026 10:35 am