पीएम मोदी ने जारी किए वाल्मीकि रामायण और वेदांत भिक्षुओं की कहानियों के कन्नड़ अनुवाद
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मध्य प्रदेश : शिवराज सिंह चौहान ने देवास में की विकास कार्यों की समीक्षा, किसानों और महिलाओं के लिए कई घोषणाएं
तमिलनाडु: परिसीमन संबंधी टिप्पणी पर भाजपा ने राहुल गांधी को करारा जवाब दिया
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असम राइफल्स ने मणिपुर में मजबूत किए सिविल-मिलिट्री संबंध, युवाओं और जरूरतमंदों की मदद
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गुजरात: अहमदाबाद में पेड़-पौधों वाला पहला ग्रीन बस शेल्टर खुला
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तमिलनाडु: छठे दिन भी रजिस्टर में साइन करने पहुंचे सेंथिल बालाजी, कहा- कानूनी लड़ाई लड़ूंगा
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बांग्लादेश: सांसद को लेकर विवाद के बीच जमात-ए-इस्लामी के 'नैतिक मानकों' पर सवाल
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कोलकाता कभी भी आइए, अब आप सुरक्षित हैं: बंगाल के सीएम ने तस्लीमा नसरीन को आश्वासन दिया
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बिहार के मंत्री की जन सुनवाई के दौरान रिश्वत का आरोप, कर्मचारी निलंबित
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दिल्ली: एनडीएमसी के सुविधा शिविर में 80 जन शिकायतें प्राप्त हुईं
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प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को माफ कर मिसाल कायम की : आचार्य प्रमोद कृष्णम
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दिल्ली भाजपा प्रमुख ने ई-20 पर केजरीवाल के बयानों की आलोचना की, उनकी आईआईटी डिग्री पर सवाल उठाए
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राहुल गांधी मिलेनियल से रिजेक्टेड थे, अब जेनजी से रिजेक्टेड हैं : गौरव वल्लभ
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E20 पेट्रोलपरसियासतकेबीचपंजाबकेकिसानडटे, बोलेमक्काकीबढ़ीकमाईरोकनाहमारेभविष्यपरचोट
नईदिल्ली/चंडीगढ़. देशमें E20 पेट्रोल (20 प्रतिशतएथेनॉलमिश्रितपेट्रोल) कोलेकरछिड़ीराजनीतिकबहसअबपंजाबकेखेतोंतकपहुंचगईहै. जहांएकओरआमआदमीपार्टीकेराष्ट्रीयसंयोजकअरविंदकेजरीवालने E20 नीतिपरसवालउठातेहुएपुरानेवाहनोंपरइसकेअसर, माइलेजमेंकमीऔरउपभोक्ताओंकोपर्याप्तजानकारीनहींमिलनेजैसेमुद्देउठाएहैं, वहींदूसरीओरपंजाबकेकिसानइसयोजनाकेसमर्थनमेंखुलकरसामनेआगएहैं. किसानोंकाकहनाहैकिएथेनॉलमिश्रणकार्यक्रमकेवलईंधननीतिनहीं, बल्किउनकीआयबढ़ाने, फसलविविधीकरणकोबढ़ावादेनेऔरकृषिअर्थव्यवस्थाकोमजबूतीदेनेकाप्रभावीमाध्यमबनचुकाहै. उनकातर्कहैकियदिइसनीतिकोराजनीतिकविवादमेंउलझाकरकमजोरकियागयातोसबसेअधिकनुकसानउनकिसानोंकोहोगाजिन्होंनेधानकीपरंपरागतखेतीछोड़करमक्काजैसीवैकल्पिकफसलोंकीओरकदमबढ़ायाहै. पिछलेकुछवर्षोंमेंपंजाबमेंमक्काकीखेतीकेक्षेत्रफलमेंउल्लेखनीयवृद्धिदर्जकीगईहै. इसकासबसेबड़ाकारणएथेनॉलउद्योगद्वारामक्काकीबढ़तीमांगमानाजारहाहै. पहलेजहांराज्यकेअधिकांशकिसानगेहूंऔरधानकेपारंपरिकचक्रपरनिर्भररहतेथे, वहींअबएथेनॉलसंयंत्रोंकीमांगनेमक्काकोलाभकारीविकल्पबनादियाहै. इससेकिसानोंकोबाजारमेंबेहतरमूल्यमिलनेलगाऔरखेतीकाजोखिमभीकुछहदतककमहुआहै. पंजाबकेकृषिक्षेत्रसेजुड़ेकिसाननेताओंकाकहनाहैकिएथेनॉलउद्योगनेकिसानोंकोकेवलएकनयाबाजारहीनहींदिया, बल्किउन्हेंऐसीफसलेंअपनानेकाअवसरभीदियाहैजोजलसंरक्षणऔरकृषिविविधीकरणकीदिशामेंउपयोगीमानीजातीहैं. लंबेसमयसेपंजाबमेंभूजलस्तरलगातारगिरनेऔरधानकीअधिकजलखपतकोलेकरचिंताजताईजातीरहीहै. ऐसेमेंमक्काजैसीफसलेंखेतीकोअधिकटिकाऊबनानेमेंसहायकमानीजारहीहैं. माझाजोनआढ़तियाएसोसिएशनकेअध्यक्षनरेंद्रभेलनेकहाकि E20 कार्यक्रमकाविरोधकिसानोंमेंअनिश्चिततापैदाकररहाहै. उनकेअनुसारसरकारेंहमेशाकिसानोंकीआयबढ़ानेकीबातकरतीहैं, लेकिनजिसयोजनासेवास्तवमेंकिसानोंकोअतिरिक्तआमदनीमिलरहीहै, उसीपरसवालखड़ेकिएजारहेहैं. उन्होंनेकहाकिमक्काकीबेहतरकीमतमिलनेकेकारणअनेककिसानोंनेअपनीखेतीकास्वरूपबदलाहैऔरयदिएथेनॉलकार्यक्रमधीमापड़ताहैतोसबसेपहलेवहीकिसानप्रभावितहोंगेजिन्होंनेइसबदलावपरभरोसाकियाहै. नरेंद्रभेलनेयहभीकहाकिकिसानोंकेबीचयहचर्चाफैलरहीहैकियदि E20 कार्यक्रमपररोकलगीयाइसकीगतिकमहुईतोएथेनॉलसंयंत्रोंकीमांगप्रभावितहोगीऔरइसकासीधाअसरमक्काकेबाजारमूल्यपरपड़ेगा. पहलेसेहीलागतबढ़नेऔरकृषिउत्पादोंकेदामोंमेंउतार-चढ़ावसेजूझरहेकिसानोंकेलिएयहस्थितिऔरकठिनहोसकतीहै. अकबरपुरागांवकेकिसानदीदारसिंहनेबतायाकिउन्होंनेअधिकआयकीसंभावनादेखतेहुएअपनीखेतीमेंमक्काकाहिस्साबढ़ायाहै. पहलेउनकीखेतीमुख्यरूपसेगेहूंऔरधानपरआधारितथी, लेकिनएथेनॉलउद्योगकेकारणमक्काकीमांगबढ़नेसेउन्हेंबेहतरआर्थिकलाभमिलनेलगा. उनकाकहनाहैकिसरकारकोऐसीनीतियोंकासमर्थनजारीरखनाचाहिएजिनसेकिसानोंकीआयमेंवास्तविकवृद्धिहो. भुरलीगांवकेकिसानजगरूपसिंहनेकहाकिएथेनॉलसंयंत्रोंद्वारामक्काकीखरीदशुरूहोनेकेबादबाजारमेंइसकीकीमतोंमेंउल्लेखनीयसुधारआयाहै. उन्होंनेबतायाकिछोटेकिसानोंकेलिएकुछसौरुपयेप्रतिक्विंटलकाअंतरभीबहुतमायनेरखताहै. यदिमांगबनीरहतीहैतोकिसानोंकोस्थिरआयमिलतीरहेगी, लेकिनयदिनीतिपरअसमंजसबनारहातोबाजारमेंनकारात्मकप्रभावदिखाईदेसकताहै. एकअन्यकिसानजगजीतसिंहनेकहाकिमक्काकीबेहतरकीमतोंनेउनकेपरिवारकीआर्थिकस्थितिकोमजबूतकियाहै. घरेलूखर्चपूरेकरनेमेंआसानीहुईहैऔरखेतीकेप्रतिभरोसाभीबढ़ाहै. उन्होंनेस्पष्टकहाकिकिसानऐसीकिसीभीनीतिकाविरोधकरेंगेजिससेमक्काकीमांगकमहोनेकीआशंकापैदाहो. कृषिविशेषज्ञोंकामाननाहैकिपंजाबजैसेराज्योंमेंफसलविविधीकरणकीसफलताकेलिएएथेनॉलउद्योगमहत्वपूर्णभूमिकानिभासकताहै. दशकोंसेराज्यकीकृषिधानऔरगेहूंपरअत्यधिकनिर्भररहीहै, जिससेप्राकृतिकसंसाधनोंपरदबावबढ़ाहै. यदिमक्का, गन्नाऔरअन्यवैकल्पिकफसलोंकेलिएस्थायीबाजारउपलब्धहोताहैतोकिसानधीरे-धीरेपारंपरिकखेतीकेदायरेसेबाहरनिकलसकतेहैं. विशेषज्ञोंकायहभीकहनाहैकिएथेनॉलउद्योगग्रामीणक्षेत्रोंमेंएग्रो-प्रोसेसिंगइकाइयोंकेविकास, रोजगारसृजनऔरस्थानीयअर्थव्यवस्थाकोगतिदेनेमेंभीयोगदानदेताहै. केंद्रसरकारकाकहनाहैकिएथेनॉलमिश्रणकार्यक्रमकाउद्देश्यकेवलपेट्रोलमेंएथेनॉलमिलानानहींहै, बल्किदेशकीऊर्जासुरक्षाकोमजबूतकरना, कच्चेतेलकेआयातपरनिर्भरताकमकरना, प्रदूषणघटानाऔरकिसानोंकीउपजकेलिएअतिरिक्तबाजारतैयारकरनाभीहै. सरकारकेअनुसारभारतअभीभीअपनीतेलआवश्यकताकाबड़ाहिस्साआयातकरताहैऔरऐसेमेंघरेलूस्तरपरउत्पादितएथेनॉलऊर्जाक्षेत्रमेंरणनीतिकभूमिकानिभासकताहै. सरकारकायहभीदावाहैकि E20 ईंधनकोचरणबद्धतरीकेसेलागूकियागयाहैऔरइसेव्यापकपरीक्षणोंकेबादबाजारमेंउतारागयाहै. सरकारीपक्षकेअनुसारपिछलेकईवर्षोंसेलाखोंदोपहियाऔरचारपहियावाहनएथेनॉलमिश्रितईंधनकाउपयोगकररहेहैंतथाबड़ेस्तरपरकिसीगंभीरतकनीकीसमस्याकीपुष्टिनहींहुईहै. हालांकिदूसरीओरविपक्षऔरकुछउपभोक्तासंगठनोंनेइसनीतिपरकईसवालउठाएहैं. उनकाकहनाहैकिपुरानेवाहनोंकीअनुकूलता, माइलेजमेंसंभावितकमी, रखरखावलागतऔरउपभोक्ताओंकोपर्याप्तजानकारीउपलब्धकरानामहत्वपूर्णमुद्देहैं. आमआदमीपार्टीनेइसविषयकोलेकरराष्ट्रीयस्तरपरअभियानभीशुरूकियाहैऔरशुद्धपेट्रोलउपलब्धकरानेसहितकईमांगेंउठाईहैं. अबयहबहसकेवलईंधनयाऑटोमोबाइलक्षेत्रतकसीमितनहींरहगईहै. पंजाबमेंयहकिसानोंकीआय, कृषिनीतिऔरफसलविविधीकरणसेजुड़ाबड़ामुद्दाबनचुकीहै. किसानोंकामाननाहैकिएथेनॉलकार्यक्रमनेउन्हेंपारंपरिकखेतीसेआगेबढ़नेकाअवसरदियाहैऔरयदिइसनीतिकोराजनीतिकविवादकाशिकारबनायागयातोइसकाअसरसीधेग्रामीणअर्थव्यवस्थापरपड़ेगा. आनेवालेसमयमेंकेंद्रऔरराज्योंकीनीतियांयहतयकरेंगीकि E20 कार्यक्रमकेवलऊर्जासुरक्षाकामाध्यमबनताहैयाफिरकिसानोंकीआयबढ़ानेऔरकृषिसुधारकाभीमजबूतआधारसाबितहोताहै.
दिनेश शर्मा का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले-जो खुद कभी छात्र नहीं रहे, वे छात्रों का दर्द नहीं समझ सकते
जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य संस्थानों में परियोजना सारथी के विस्तार का आकलन करने के लिए बैठक की
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पीएम किसान योजना को 5 साल बढ़ाए जाने का किसानों ने किया स्वागत, राशि बढ़ाने की मांग
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भाजपा नेताओं ने कहा- 'पीएम मोदी के दिल में छात्र और युवा बसते हैं'
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पप्पू यादव को अपनी बात रखने का अधिकार, संसद परिसर में ड्रामा नहीं करना चाहिए था : रामदास आठवले
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तेलंगाना की प्रति व्यक्ति आय में 10.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी: सीएम रेवंत रेड्डी
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'केजरीवाल मानसिक रूप से बीमार', दिल्ली सरकार के मंत्री सिरसा का जोरदार तंज
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बलदेव सिंह औलख ने कुलगाम में आतंकी हमले को बताया निंदनीय, छात्रों को माफी पर पीएम मोदी को सराहा
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'दूसरों की भी मांएं हैं', राज ठाकरे ने पीएम मोदी से भाजपा की ट्रोल कल्चर पर लगाम लगाने की अपील की
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करीब दो दशक बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, 'फेरा' उपन्यास की कहानी से मेल खाती दिखी उनकी घर वापसी
करीब दो दशक बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, 'फेरा' उपन्यास की कहानी से मेल खाती दिखी उनकी घर वापसी
भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी से घिरी भाजपा सरकार, जनता अब माफ नहीं करेगी : अखिलेश यादव
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नैतिकता और कार्यकुशलता एक सफल लोक सेवक की सबसे मजबूत नींव हैं: भूपेंद्र यादव
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'100 लोगों के साथ पीएम मोदी के घर जाऊंगा....'E-20 को लेकर प्रधानमंत्री पर बरसे केजरीवाल, जाने पूरा बयान
आतंकी हमले पर फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की टिप्पणियां निंदनीय : सत शर्मा
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असम में बाढ़ से 11 लाख से अधिक लोग प्रभावित, बचाव अभियान तेज: हिमंता बिस्वा सरमा
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चंद्रबाबू और पवन कल्याण की अपील, पीएम मोदी के साथ खड़े हों लोग, वही बनाएंगे भारत को नंबर-1
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स्वामी विवेकानंद राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ समानता को भी अहम मानते थे: पीएम मोदी
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'दिल्ली लक्ष्मी योजना' का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना है : भाजपा
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पीएम मोदी के वीडियो संदेश पर कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा का तंज, कहा-सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए
पश्चिम बंगाल : भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने प्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी पर कहा- 'उनका स्वागत है'
भोपाल मे हो रहे जलापूर्ति की गहनता से जांच कराई जाए : जीतू पटवारी
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एफसीआरए बिल अगले हफ्ते लोकसभा में पेश होने की संभावना, विपक्ष ने कहा-ठप हो जाएगा एनजीओ का काम
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'एक भी बुर्के वाली बेटी ने भौंडा..' जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर एकबार फिर फायर हुई कंगना,हिंदू लड़कियों को लेकर कही बड़ी बात
'एक भी स्टूडेंट या पैरेंट्स से…' राहुल गांधी का PM मोदी के माफी वाले वीडियो पर तीखा हमला, कही दी ये बड़ी बात
'पीएम मोदी से इतना प्यार है तो....'विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन पर क्यों आगबबूला हुए राज ठाकरे ? जानिए क्या है मामला
बिहार : सिवान गोलीकांड की जांच के लिए कांग्रेस की टीम बिहार पहुंची, इमरान प्रतापगढ़ी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
जनता परेशान है, सरकार सुन नहीं रही, ई-20 मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने निकाला विरोध मार्च
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तमिलनाडु: नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवार से मिले राहुल गांधी
तमिलनाडु: नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवार से मिले राहुल गांधी
एनडीए सांसदों के सत्रीय 'मंगल मिलन' के सियासी मायने
केंद्र में पिछले 12 वर्षों से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार इन दिनों पुनः उस एकजुट विपक्ष के निशाने पर है, जिसे वह अबतक चुनावी सियासी पाट पर पछाड़ते आई है। लेकिन जिस तरह से बहुरूपिया विपक्ष कभी मुसलमानों के छद्म वेश में, कभी किसानों के रूप में और कभी छात्रों के छद्म वेश में जिस तरह से मोदी सरकार को घेरने पर तुला हुआ है, उसके पीछे विदेशी हाथ से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी सरकार सबसे जूझ रही है! हाल ही में छात्र आंदोलन की कथित सफलता से घबराई सरकार ने जिस तरह से अपने ओबीसी रणनीतिकार शिक्षा मंत्री की राजनीतिक बलि चढ़ाई है, और इससे उत्साहित कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने जिस घमंड का प्रदर्शन किया, उससे विपक्ष उत्साहित है। यही वजह है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लिया जाने लगा है। इसे भी पढ़ें: युवाओं को Pawan Kalyan का संदेश: PM Modi का त्याग समझो, देश सेवा का अपमान मत करो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का अतीत और खुद देश का भविष्य करार दिया है, उसके मुताल्लिक इतना ही इशारा करना काफी होगा कि भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने देश का भविष्य तय कर दिया है और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आगे करके एक तीर से कई शिकार करने की योजना बनाई है, क्योंकि भाजपा की ओबीसी राजनीति में श्री चौधरी अपने नैसर्गिक सियासी गुणों के चलते फिट बैठते हैं। ये अभी अंदरखाने की बात है, लेकिन राहुल गांधी को आगाह करने के लिए मैंने इस सच्चाई को डिस्क्लोज कर दिया है, जो हिंदी पट्टी के मिजाज पर फिट बैठता है। शायद यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व ने अपने सर्वाधिक संकटग्रस्त काल से गुजरते हुए अपने सांसदों और सहयोगी सांसदों को याद किया, जिसे राजनीतिक गलियारे में एनडीए सांसदों के मंगल मिलन की उपमा दी गई है। हालांकि यह अनौपचारिक बैठक, संवाद या सामूहिक कार्यक्रम संसद सत्र के दौरान हरेक मंगलवार को आहूत होती है। हालिया एनडीए संसदीय दल की मंगल मिलन बैठक गत 28 जुलाई 2026 (मंगलवार) को, संसद के मानसून सत्र के दौरान हुई। यह मंगल मिलन नाम से आयोजित होने वाली नियमित मंगलवार की संसदीय दल की बैठक थी। जो नई दिल्ली में संसद पुस्तकालय भवन (Parliament Library Building) के जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम (GMC Balayogi Auditorium) में संपन्न हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, संसदीय कार्य मंत्री तथा एनडीए के अनेक सांसद और वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। इसमें एनडीए के सभी प्रमुख घटक दलों के सांसद शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल (यूनाइटेड) [JD(U)], तेलगु देशम पार्टी (TDP),लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP(RV)], हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM), अपना दल (सोनेलाल) अन्य एनडीए सहयोगी दलों के सांसद शामिल हुए। खास बात यह कि पहली बार नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसद भी बैठक में शामिल हुए, क्योंकि पार्टी को हाल में एनडीए का सहयोगी बनाया गया है। इस बैठक की सबसे चर्चित बात NCPI सांसदों की पहली भागीदारी रही, जिसे एनडीए के विस्तार और संसद में संख्या एवं राजनीतिक समन्वय को मजबूत करने के संकेत के रूप में देखा गया। इस मंगल मिलन के कई राजनीतिक और संगठनात्मक संकेत/मायने निकलकर सामने आते हैं: पहला, संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन: यह विपक्ष और सहयोगी दलों को संदेश कि एनडीए के सभी घटक दल एकजुट हैं और सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं। दूसरा, संसद सत्र की रणनीति: संसद में सरकार के विधेयकों, विपक्ष की रणनीति और विभिन्न मुद्दों पर साझा रुख तय करने का अवसर समझा जाता है। तीसरा, आगामी चुनावों की तैयारी: देश के अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले सांसदों को बूथ स्तर तक सक्रिय रहने और जनता से संवाद बढ़ाने का संदेश दिया गया। चौथा, सरकार की उपलब्धियों का प्रचार: सांसदों को निर्देश दिया जा सकता है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुँचाएं। पांचवां, सहयोगी दलों को महत्व: एनडीए में शामिल छोटे और क्षेत्रीय दलों को सम्मान और भागीदारी का संदेश देकर गठबंधन को मजबूत बनाए रखना है। छठा, विपक्षी इंडिया गठबंधन को राजनीतिक संदेश: यह दिखाना कि एनडीए में नेतृत्व को लेकर कोई असमंजस नहीं है और गठबंधन स्थिर है। सातवां, 2029 की दीर्घकालिक रणनीति: केवल वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों पर नहीं, बल्कि अगले लोकसभा चुनाव तक संगठन और जनसंपर्क को मजबूत करने की दिशा में तैयारी। उल्लेखनीय है किभारतीय राजनीति में ऐसे कार्यक्रम अक्सर केवल सामाजिक मेल-मिलाप नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से राजनीतिक संदेश दिए जाते हैं, सांसदों का मनोबल बढ़ाया जाता है, संगठनात्मक अनुशासन मजबूत किया जाता है, और भविष्य की रणनीति पर अनौपचारिक चर्चा होती है। इसलिए मंगल मिलन को केवल सांस्कृतिक या सामाजिक आयोजन के बजाय राजनीतिक समन्वय, गठबंधन प्रबंधन और चुनावी तैयारी के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी देखा जा सकता है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा 2 अगस्त से डिब्रूगढ़, शिवसागर और चराइदेव का दौरा करेंगे
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा 2 अगस्त से डिब्रूगढ़, शिवसागर और चराइदेव का दौरा करेंगे
प्रयागराज में 8 अगस्त को छात्रों से संवाद करेंगे राहुल गांधी, शिक्षा-रोजगार के मुद्दों पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
हिमाचल में परिवर्तन तय, अगली सरकार भाजपा की बनेगी : जयराम ठाकुर
हिमाचल में परिवर्तन तय, अगली सरकार भाजपा की बनेगी : जयराम ठाकुर
कंगना रनौत के बयान पर विरोध तेज, लखनऊ में एफआईआर की मांग को लेकर थाने पहुंचीं महिला कांग्रेस नेता
कंगना रनौत के बयान पर विरोध तेज, लखनऊ में एफआईआर की मांग को लेकर थाने पहुंचीं महिला कांग्रेस नेता
दतिया में कांग्रेस और भाजपा ने किया जीत का दावा
दतिया में कांग्रेस और भाजपा ने किया जीत का दावा
पूंजीगत खर्च और विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने शनिवार को राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए 1,09,019 करोड़ रुपए की अतिरिक्त कर हस्तांतरण राशि जारी की।
पप्पू यादव के खिलाफ लखनऊ में उबाल! प्रदर्शनकारियों का बड़ा ऐलान, 'सिर लाने वाले को 51 लाख' ईनाम का एलान
मुंबई : कांग्रेस नेता जगताप के सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किए गए एआई वीडियो को लेकर एफआईआर दर्ज
मुंबई : कांग्रेस नेता जगताप के सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किए गए एआई वीडियो को लेकर एफआईआर दर्ज
स्वस्थ आलोचना स्वीकार, लेकिन आस्था का अपमान नहीं: गुरु प्रकाश
स्वस्थ आलोचना स्वीकार, लेकिन आस्था का अपमान नहीं: गुरु प्रकाश
'माफी की बात और कार्रवाई साथ-साथ क्यों?', पीएम मोदी के वीडियो संदेश पर कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का सवाल
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जांच करेगी कांग्रेस, इमरान प्रतापगढ़ी ने लगाए सरकार पर गंभीर आरोप
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जांच करेगी कांग्रेस, इमरान प्रतापगढ़ी ने लगाए सरकार पर गंभीर आरोप
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भाजपा में शामिल होने की बात से किया इनकार
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भाजपा में शामिल होने की बात से किया इनकार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, उसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ 1,816.22 करोड़ रुपए के कथित ईपीएफओ निवेश घोटाले में एफआईआर दर्ज की है।
कर्नाटक पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए धार्मिक पोशाक पर कोई प्रतिबंध नहीं: प्रियांक खड़गे
कर्नाटक पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए धार्मिक पोशाक पर कोई प्रतिबंध नहीं: प्रियांक खड़गे
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जीईईएल) और उसके शीर्ष अधिकारियों पुनीत गोयनका तथा सुभाष चंद्रा के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उन्हें प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। सेबी ने पाया कि कंपनी की हैदराबाद स्थित जमीन को आवश्यक कॉर्पोरेट मंजूरी के बिना एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के बदले गिरवी रखा गया था।
पीएम मोदी के वीडियो संदेश पर भाजपा नेताओं ने की सराहना, कहा-छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देने वाला बड़ा फैसला
Delhi Students Protest: क्षमादान या नई फजीहत? How PM Modi Failed to Appease Gen Z!
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कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु के पास सुप्रीम कोर्ट ही है एकमात्र विकल्प : निर्मल कुमार
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गुजरात ने स्थानीय विकास में तेजी लाने के लिए तालुका प्लानिंग निकायों को एक ही समिति में मिलाया
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पप्पू यादव और विपक्ष ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता का किया अपमानः सुनील बराल
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संसद परिसर में पप्पू यादव की वेशभूषा पर हिंदू सेना नाराज, लोकसभा सदस्यता रद्द करने की मांग
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कुलगाम आतंकी हमले पर मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा-आतंक फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
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'समुद्र मंथन' योजना को कैबिनेट ने दी मंजूरी
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'समुद्र मंथन' (नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम) को मंजूरी दे दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू करने के लिए 84,084 करोड़ रुपए के बजट को स्वीकृति दी गई है।
Jantar Mantar Lathicharge पर PM Modi ने माफ़ी मांगने की जगह क्यों दी माफ़ी? | Janadesh Charcha
गरीबी और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं टकराती हैं तब सीमाओं के मानचित्र धुंधले पड़ जाते हैं। और जब कोई देश मानव आबादी को एक जियोपॉलिटिकल हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगे तो मंजर वही होता है जो इस वक्त स्पेन के अफ्रीकी एनक्लेव सोटा में नजर आ रहा है। भूमध्य सागर का वो मुहाना जो अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापार का सेतु होना चाहिए था। पिछले 24 घंटों में एक अंतहीन मानवीय और सुरक्षा संकट का गवाह बन चुका है। नागरिक तैर कर बाढ़ फांदकर चट्टानों को पार कर स्पेनिश सरजमी पर दाखिल हो चुके हैं। कम से कम 34 जिंदगियां समुद्र के खारे पानी में खामोश हो गई। सड़कें इस वक्त सहमी हुई है। दुकानें बंद हैं और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांजेस को इसे देश की प्रादेशिक अखंडता पर हमला करार देकर सेना उतारनी पड़ी। लेकिन सवाल सिर्फ हजारों प्रवासियों का नहीं है। सवाल यह है कि आखिर क्या वजह है कि मोरक्को की सीमा से अचानक इतनी बड़ी इंसानी लहर स्पेन में उमड़ पड़ी? क्या यह महज बेहतर जिंदगी की तलाश है या फिर यूरोप की दहलीज पर खेला जा रहा एक बड़ा जिओपॉलिटिकल गेम। आंकड़ों को ध्यान से देखिए। सोटा की कुल आबादी है 83,000 के आसपास और सिर्फ एक दिन के भीतर वहां 60,000 लोग घुस आते हैं। यानी शहर की कुल आबादी का 70%। समुद्र के रास्त मीलों दूर तक तैर कर आते युवा चट्टानों के सहारे आगे बढ़ते बच्चे और महिलाएं और फिर थिएटर के बाजारों में पसरती दहशत। वहां के लोकल्स का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा उग्र और अनकंट्रोल्ड मंजर पहले कभी नहीं देखा। अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों से लेकर आम नागरिकों तक में डर का माहौल है। स्पेन की सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक फैसला दिया था कि समुद्र में रोके गए प्रवासियों को बिना कानूनी प्रक्रिया के तुरंत मुरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता। और इसी फैसले की आड़ में आपराधिक नेटवर्क और अफवाहों ने ऐसा तहलका मचाया कि हजारों लोग एक साथ सीमा पर टूट पड़े। इसे भी पढ़ें: खून से लाल हुई PoK की सड़कें, लाशों का लगा अंबार, पूरे इलाके में इंटरनेट सेवाएँ बंद स्पेन में क्यों बने इमरजेंसी जैसे हालात? मोरक्को के तटीय शहर फनीदेक से स्पेन की जो दूरी है यह सिर्फ 3 से 5 किमी है। एक तरफ मोरक्को है जहां पर बेरोजगारी है, भुखमरी है, बदहाली है। वहीं दूसरी तरफ थोड़ी ही दूरी पर ताकतवर यूरोपीय संघ और विकसित देश स्पेन मौजूद है। स्पेन में इस टाइम पर आपको बता दें कि इमरजेंसी जैसी सिचुएशन बन चुकी है। हजारों लोग स्विमिंग करते हुए स्पेन के कोस्टल टाउन की तरफ पहुंच रहे हैं ताकि वह बॉर्डर्स के अंदर घुसकर सीधे यूरोपियन यूनियन में फैल सके। फेवरेबल वेदर का फायदा उठाकर यह लोग धड़ल्ले से समंदर पार कर रहे हैं। इस दौरान कई लोग डूबे भी हैं। लेकिन भीड़ की रफ्तार जो है यह कम नहीं हो रही। इसमें से कई सारे लोग मोरक्को के हैं। कई अफ्रीकी युवा भी शामिल हैं। इन्हें यह सही वक्त क्यों लगता है बॉर्डर पार करने के लिए? अब आप उसे समझिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ऑफ स्पेन ने हाल ही में एक रूलिंग पास की थी कि जो भी लोग समंदर के रास्ते आ रहे हैं स्पेन के अंदर आप उनको तुरंत के तुरंत वापस नहीं भेजोगे। आपको बकायदा लीगल प्रोसेस देना होगा। बस अदालत की इसी फैसले ने इन घुसपैठियों के लिए खुला दरवाजा खोल दिया। स्थाई लोग यह कह रहे हैं कि लीडर्स नेशनल इमरजेंसी लगाओ। हम इन माइग्रेंट्स को हैंडल नहीं कर सकते हैं। हमारे पास रिसोर्सेज खत्म हो चुके हैं। दबाव 1000% बढ़ चुका है। लेकिन स्पेन की सरकार कोई स्ट्रांग एक्शन क्यों नहीं ले पा रही है? अब आप उसे समझिए क्योंकि वहां है कोलीजन गवर्नमेंट। इसे भी पढ़ें: जॉर्डन ने हवाई रक्षा प्रणाली से ईरानी मिसाइलें गिराईं, अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में किए हमले 48 घंटे के अंदर 8000 से ज्यादा माइग्रेंट्स यूरोप में पहले भी देखा गया है मई 202 में 2021 में ऐसा हुआ था कि 48 घंटे के अंदर 8000 से ज्यादा माइग्रेंट्स पहुंच गए यानी कि पहले भी इस तरीके से ओवरवेल्म हो चुका है। वहां का जो पूरा सिस्टम है, जो अपरेटस है वो बहुत ज्यादा ओवरवेल्म हो चुका है। लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन बन चुकी है। जो हुवा जीसस हैं उन्होंने भी ये इस बार भी अपील करी है कि फोर्सेस को भेजा जाए। यानी कि एक सिक्योरिटी फोर्सेस को भेजकर एक आर्म्ड उनको मदद दी जाए ताकि कोई सुरक्षा को लेकर कोई स्थिति ना बने। अगर इस तरीके से मोरक्को के रास्ते लोग आते हैं तो दिक्कत हो सकती है। इस बीच स्पेन के जो प्राइम मिनिस्टर हैं पेड्रो सशेस उन्होंने भी एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने बताया है कि जो गवर्नमेंट है स्पेन की वो पूरी तरीके से कमिटेड है में जो स्थिति बनी है उस पर एक इमीडिएट रिस्पांस देने के लिए। उन्होंने बताया है कि जितने भी जरूरी रिसोर्सेज हैं उन्हें मोबिलाइज कर दिया गया है। मुरक्को के साथ में भी बातचीत चल रही है। इंटरनेशनल अथॉरिटीज के साथ में बातचीत चल रही है और जैसी जरूरत पड़ेगी नॉर्मल को इस्टैब्लिश करने की उसके लिए कदम उठाए जाएंगे। स्पेन के पड़ोसी देशों की उड़ी नींद सोशलिस्ट पार्टी लेफ्ट और सेंटर लेफ्ट सब ने मिलकर यहां पर सरकार बना रखी है सबके अपने-अपने ओपिनियंस हैं। इसका खामियाजा भुगत रहे हैं वहां के नागरिक नेटिव्स। उधर पोलैंड जैसे देश का रवैया भी अलग है। पोलैंड साफ यह कहता है कि हम माइग्रेशन को अपने देश के खिलाफ हथियार नहीं बनने देंगे। बेलारूस बॉर्डर पर उसने इलेक्ट्रिफाइड सर्विलांस और आर्मी बिठा रखी है। कहा है कि ड्रामा यहां पर नहीं चल सकता। लेकिन स्पेन के इस कोहराम को देखकर यूरोप के जो बाकी देश हैं इनकी नींदें उड़ चुकी। इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सीधा अल्टीमेटम दे दिया है स्पेन को। मेलोनी ने यह साफ कहा है ट्वीट करते हुए कि अगर स्पेन बॉर्डर संभालने में नाकामयाब रहा तो इटली यहां पर मुख दर्शक बनकर नहीं रहेगा। जरूरत पड़ी तो स्पेन के साथ जो एग्रीमेंट हुआ है एरिया की व्यवस्था को संभालने का उसे यह निलंबित भी कर सकते हैं। आखिर सेटा इतना अहम क्यों है उसे समझिए क्योंकि यह अफ्रीका और यूरोप के बीच का इकलौता लैंड बॉर्डर है। इस बार हजारों की संख्या में युवा और नाबालिक बॉर्डर के गेट को तोड़ते हुए स्पेन के अंदर घुस आए हैं। कुछ ने मोरको की तरफ से वाटर कैनन का सामना भी किया तो कुछ ने समंदर में लाशों के बीज तैर कर अपनी जान को जोखिम में डालकर बॉर्डर पार। रिपोर्ट्स जो कहती है उसके मुताबिक इस रूट पर दर्जनों लोगों की जान अब तक जा चुकी है। लेकिन इसके बावजूद भी यह स्पेन में घुस रहे हैं। स्पेन इन सब में मजबूर क्यों है? स्पेन की जो जन दर दुनिया में है वो सबसे कम है और हर साल 1 लाख ज्यादा लोग जो हैं वो यहां पर रिटायर हो रहे हैं। कृषि पर्यटन और निर्माण क्षेत्रों को जिंदा रखने के लिए स्पेन को हर साल लाखों विदेशी कामगारों की जरूरत पड़ती है। यहां के जो प्रधानमंत्री हैं इनकी जो सरकार है यह प्रवासियों को कानूनी दर्जा और वर्क परमिट देने की योजना पर काम कर रही है ताकि देश की जो अर्थव्यवस्था है यह ठप ना पड़े। एक तरफ अपनी इकॉनमी को बचाने के लिए स्पेन मजबूर है तो दूसरी तरफ बेकाबू होती हुई यह भीड़ और टूटती हुई सीमाएं। सवाल यह है कि क्या यूरोप अपनी नीतियों के चक्कर में खुद अपने ही विनाश का रास्ता खोल रहा है या फिर स्पेन का यह नर्क से स्वर्ग वाला खेल यूरोप के बाकी देशों को भी तबाह कर देगा। मेलोनी ने दी स्पेन को धमकी सेउटा संकट पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्पेन के साथ शेंगेन फ्री-ट्रैवेल (बिना वीजा यात्रा) को रोकने दी धमकी दे डाली। मेलोनी ने कहा कि सेउटा से आ रही तस्वीरें चौंकाने वाली हैं और एक बार फिर यह दिखाती हैं कि बेकाबू आप्रवासन यूरोप की सीमाओं के लिए एक ठोस खतरा है। भारत के लिए अलर्ट रहने की जरूरत भारत के संदर्भ में असम और पश्चिम बंगाल दोनों राज्य लंबे समय से अवैध घुसपैठ की समस्या से प्रभावित रहे हैं। स्पेन के इस घटनाक्रम से सीख लेते हुए भारत को इन राज्यों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पश्चिम बंगाल और असम की बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा का एक बड़ा हिस्सा नदियों, दलदल और जंगलों से घिरा है। यहाँ भौतिक रूप से कंटीली बाड़ लगाना कठिन होता है, जिससे घुसपैठियों और मानव तस्करों को घुसपैठ का आसान अवसर मिल जाता है। उत्तर-पूर्व भारत को शेष भारत से जोड़ने वाला सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के पास स्थित है। इस क्षेत्र के आसपास अनियंत्रित घुसपैठ भारत की अखंडता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। स्पेन का संकट यह संदेश देता है कि घुसपैठ केवल एक मानवीय या क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़ा विषय है। भारत को असम और बंगाल की सीमाओं पर स्मार्ट फेंसिंग, ड्रोन निगरानी, BSF का सशक्तिकरण और अवैध दस्तावेजों पर सख्त कार्रवाई के जरिए सीमा तंत्र को अभेद्य बनाने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस अवधि के लिए सरकार ने 3.15 लाख करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान को स्वीकृति दी है। सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने, कृषि निवेश को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जनगणना 2027: पश्चिम बंगाल में स्व-गणना प्रक्रिया शुरू, 15 दिनों तक चलेगी
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बांकीपुर उपचुनाव के बहाने महागठबंधन में बढ़ी तकरार, कांग्रेस ने राजद की रणनीति पर उठाए सवाल
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Nepal में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा की चिंगारी क्या समूचे हिंदू समाज के लिए खतरे की घंटी है?
नेपाल की तराई इस समय किसी शांत पहाड़ी देश की तस्वीर नहीं, बल्कि ऐसी बारूद की ढेरी नजर आ रही है, जहां एक मामूली चिंगारी ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। कांवड़ यात्रा की तैयारियों के दौरान डीजे की तेज आवाज को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़पों में बदल गया। पत्थर चले, पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस छोड़ी, चेतावनी के तौर पर फायरिंग हुई और आखिरकार गोलियां चलीं। तीन लोगों की मौत ने इस विवाद को स्थानीय घटना से उठाकर राष्ट्रीय संकट का रूप दे दिया। हिंसा की शुरुआत सुनसरी जिले के देवानगंज क्षेत्र से हुई, लेकिन जल्द ही इसकी आग धनुषा, सिराहा, सप्तरी और जनकपुर सहित नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में फैल गई। प्रशासन को कई जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा, जबकि पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस, प्रदर्शन और सभाओं पर रोक लगा दी गई। नेपाल सेना तक को तैनात करना पड़ा, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: Nepal के Saptari में सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन ने लगाया अनिश्चितकालीन Curfew नेपाल के जिस कप्तानगंज इलाके से इस हिंसा की शुरुआत हुई, वह भारत के बिहार से लगी खुली सीमा के बेहद करीब स्थित है। यह क्षेत्र सुनसरी जिले की देवानगंज ग्रामीण पालिका के अंतर्गत आता है, जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय दशकों से एक-दूसरे के पड़ोसी के रूप में रहते आए हैं। स्थानीय बाजार, स्कूल और सामाजिक जीवन दोनों समुदायों के बीच साझा रहे हैं। यही नजदीकी सामान्य दिनों में सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनती है, लेकिन तनाव की स्थिति में यही भौगोलिक निकटता छोटी-सी कहासुनी को भी कुछ ही घंटों में बड़े सांप्रदायिक टकराव में बदल देने का खतरा पैदा कर देती है। हम आपको यह भी बता दें कि स्थिति कुछ सामान्य होने पर प्रशासन ने चुनिंदा इलाकों में कर्फ्यू में ढील देना शुरू किया है। हालांकि कई संवेदनशील क्षेत्रों में प्रतिबंध अभी भी जारी हैं। अस्पताल, एंबुलेंस, दवा, दूध, ईंधन और आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है। इसी के साथ विभिन्न जिलों में शांति रैलियां निकाली जा रही हैं, ताकि दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाल किया जा सके। जनकपुर में सर्वदलीय बैठक आयोजित कर राजनीतिक दलों, धार्मिक नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का प्रयास भी किया गया। उधर, इस मुद्दे पर लगातार आलोचना झेलने के बाद प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने हिंसा की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित करने की घोषणा करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने नागरिकों से अफवाहों और नफरत फैलाने वाले संदेशों से बचने तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की। सरकार ने मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख नेपाली रुपये का मुआवजा देने और उन्हें शहीद घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी वादा किया है। लेकिन सवाल केवल इतना नहीं है कि हिंसा कैसे भड़की। असली चिंता यह है कि नेपाल, जिसे लंबे समय तक धार्मिक सह-अस्तित्व का उदाहरण माना जाता था, वहां अब सामाजिक ध्रुवीकरण की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देने लगी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि स्थानीय विवाद, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें, कमजोर प्रशासनिक प्रतिक्रिया, बेरोजगारी और समुदायों के बीच बढ़ता अविश्वास ऐसे हालात को और विस्फोटक बना रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इस घटना को केवल हिंदू-मुस्लिम संघर्ष के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि इसके पीछे राजनीतिक, सामाजिक और संस्थागत कारण भी मौजूद हैं। दरअसल, नेपाल की तराई पहली बार बड़े पैमाने पर हिंसा का गवाह नहीं बनी है। वर्ष 2007 का गौर नरसंहार, कपिलवस्तु की जातीय हिंसा और 2015 की टीकापुर घटना इस क्षेत्र की संवेदनशील सामाजिक संरचना की याद दिलाती हैं। इन घटनाओं का स्वरूप धार्मिक नहीं था, बल्कि जातीय और राजनीतिक संघर्षों से जुड़ा था। लेकिन इन सभी घटनाओं में एक समानता स्पष्ट दिखती है कि बड़ी भीड़ रही, प्रशासन की देर से प्रतिक्रिया आई और स्थानीय तनाव ने तेजी से हिंसक रूप ले लिया। यही कारण है कि आज धार्मिक विवाद भी उसी संवेदनशील सामाजिक ढांचे में और अधिक विस्फोटक साबित हो रहे हैं। इसी संदर्भ में नेपाल में बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ राजनीतिक समूह नेपाल की बदलती जनसांख्यिकीय और धार्मिक राजनीति को लेकर चिंता जता रहे हैं तथा इसे बढ़ते इस्लामी प्रभाव या पहचान-आधारित राजनीति से जोड़ रहे हैं, जबकि अन्य विशेषज्ञ इसे सामाजिक अविश्वास, आर्थिक निराशा तथा राजनीतिक ध्रुवीकरण का संयुक्त परिणाम मानते हैं। देखा जाये तो नेपाल इस समय धार्मिक पहचान की राजनीति के बढ़ते प्रभाव का सामना कर रहा है, जिससे सभी समुदायों के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम पैदा हुआ है। हम आपको बता दें कि नेपाल की 2021 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन मधेश और तराई के कई सीमावर्ती जिलों में उनकी हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। सुनसरी, धनुषा, रौतहट, पर्सा और सराही जैसे जिले भारत की खुली सीमा से जुड़े हैं, जहां वर्षों पुराने पारिवारिक, वैवाहिक और व्यापारिक रिश्ते बिहार तथा उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि सीमा के दोनों ओर पैदा होने वाले सामाजिक या सांप्रदायिक तनाव एक-दूसरे को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। भारत के लिए चुनौती केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अफवाहों, कट्टरपंथी प्रचार, संगठित उकसावे और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाले दुष्प्रचार पर भी समान रूप से नजर रखना आवश्यक होगा। भारत के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है क्योंकि हिंसा प्रभावित अधिकांश जिले भारतीय सीमा से लगे हुए हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश से सटी खुली भारत-नेपाल सीमा दोनों देशों की सबसे बड़ी ताकत भी है और संवेदनशीलता भी। यदि नेपाल में सांप्रदायिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो उसका असर सीमा पार सामाजिक संबंधों, व्यापार, सुरक्षा और खुफिया चुनौतियों पर भी पड़ सकता है। भारत को नेपाल के साथ सुरक्षा समन्वय, सीमा पर सतर्क निगरानी, अफवाहों और कट्टरपंथी प्रचार पर नजर तथा स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर सूचना साझाकरण को और मजबूत करना होगा। नेपाल फिलहाल हिंसा की आग को बुझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वास्तविक चुनौती केवल कर्फ्यू हटाने की नहीं, बल्कि टूटते सामाजिक विश्वास को फिर से जोड़ने की है। यदि राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासन और समाज मिलकर समय रहते इस संकट का स्थायी समाधान नहीं खोजते, तो यह घटना भविष्य में और बड़े सामाजिक टकरावों की चेतावनी साबित हो सकती है। नेपाल की शांति केवल नेपाल का विषय नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत की सुरक्षा और स्थिरता से भी गहराई से जुड़ी हुई है। -नीरज कुमार दुबे
यूपीआई ट्रांजैक्शन में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी
नई दिल्ली, देश में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जुलाई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन्स की संख्या सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 23.66 अरब हो गई।
कुलगाम हमले की कांग्रेस ने की निंदा, राहुल गांधी बोले- 'आतंकियों पर हो सख्त कार्रवाई, मिले कड़ी से कड़ी सजा'
भगवंत मान 'मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना' की सम्मान राशि करेंगे जारी, 35.5 लाख महिलाओं के खातों में पहुंचेगा पैसा
मध्य पूर्व में उथल-पुथल से भारत-खाड़ी संबंधों के लिए चुनौतियां
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) एक समूह के तौर पर, विकासशील भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जीसीसी के सदस्य देशों के भारत के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक और सभ्यतागत संबंध बहुत पुराने हैं। हाल के वर्षों में, यह संबंध पारंपरिक खरीदार-विक्रेता रिश्ते से आगे बढ़कर एक रणनीतिक गठबंधन में बदल गया है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रक्षा सहयोग और वहां रहने वाले भारतीयों का कल्याण शामिल है। इस क्षेत्र में मौजूद तेल और गैस के बड़े भंडार भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं। जीसीसी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो हर साल अरबों डॉलर भारत भेजते हैं। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिलती है। साथ ही, खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी भारत के साथ व्यापार पर काफी हद तक निर्भर हैं। यह जीसीसी और भारत की संयुक्त कोशिश है, जिससे इस क्षेत्र की तरक्की और खुशहाली में मदद मिलेगी। कई संयुक्त परियोजनाओं के माध्यम से इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता और समृद्धि को बढ़ाने की क्षमता है। आपसी संबंधों को गहरा करने के लिए व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे और लोगों के बीच आपसी संपर्क में सहयोग बढ़ाना कारगर साबित हुआ है। इसे भी पढ़ें: बढ़ते अरबपति गतिशील इकोनोमी के परिचायक प्रवासी और रेमिटेंस (विदेश से भेजा गया पैसा): दक्षिण एशियाई व्यापार और व्यापक आर्थिक स्थिरता को प्रवासी कामगारों से काफी समर्थन मिलता है। जीसीसी देशों में लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) भारतीय रहते हैं। जीसीसी देशों ने इस क्षेत्र के विकास में भारतीय समुदाय की भूमिका को माना है। यह पश्चिमी एशिया (मुख्य रूप से जीसीसी) और दक्षिण एशिया के बीच व्यापार और रेमिटेंस की स्थिति है, जो हाल के आंकड़ों पर आधारित है। वित्त वर्ष 2024-25 में, भारत को दुनिया भर से रिकॉर्ड 135.46 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला। विश्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत को सबसे ज़्यादा रेमिटेंस मिला है। 2024 में मेक्सिको दूसरे स्थान पर रहा, जहां 68 अरब डॉलर आने का अनुमान है। तीसरे स्थान पर चीन रहा, जहां अनुमानित 48 अरब डॉलर आए। भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस में जीसीसी देशों की हिस्सेदारी लगभग 38% है, जो इस क्षेत्र में बड़ी आर्थिक आमद का जरिया है। भारत में रेमिटेंस पर निर्भरता कुछ खास इलाकों तक सीमित है; अकेले यूएई से भारत को कुल रेमिटेंस का लगभग 19.2% हिस्सा मिलता है। इसके बाद सऊदी अरब का स्थान है, जहां से 6.7% रेमिटेंस आता है। भारत में आने वाले कुल रेमिटेंस (हर साल लगभग $27–28 बिलियन) में महाराष्ट्र का हिस्सा करीब 20.5% है, और केरल का हिस्सा करीब 19.7% (लगभग $26–27 बिलियन) है। इसलिए, खाड़ी देशों (गल्फ) में मंदी का इन दोनों राज्यों पर बहुत ज़्यादा असर पड़ता है। भारत-जीसीसी व्यापार जीसीसी की कुल आबादी 6.15 करोड़ (61.5 मिलियन) है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) $2.3 ट्रिलियन है। कुल द्विपक्षीय व्यापार (वित्त वर्ष 2024-25) $178.56 बिलियन का है। सितंबर 2025 तक भारत में जीसीसी का कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) $31.14 बिलियन से ज़्यादा हो गया है। भारत इंजीनियरिंग का सामान, चावल, कपड़ा, मशीनरी, रत्न और आभूषण एक्सपोर्ट करता है; और कच्चा तेल, द्रवरूप प्राकृतिक गैस (एलएनजी) , पेट्रोकेमिकल्स और सोना जैसी कीमती धातुएं इंपोर्ट करता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-खाड़ी व्यापार रिकॉर्ड $178.56 बिलियन तक पहुँच गया, जो भारत के कुल ग्लोबल व्यापार का 15.42% है। इसमें $56.87 बिलियन का एक्सपोर्ट और $121.68 बिलियन का इंपोर्ट शामिल है — जिससे जीसीसी भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर ब्लॉक बन गया है, जो भारत के ग्लोबल व्यापार का 15.42% है। पाँच साल का ट्रेंड: द्विपक्षीय व्यापार सालाना औसतन 15.3% की दर से बढ़ा है। भारत और जीसीसी ने फरवरी 2026 में औपचारिक रूप से मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) बातचीत शुरू की। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक इस कॉरिडोर में कुल व्यापार $250 बिलियन से ज़्यादा हो सकता है। यूएई के साथ व्यापार $100 बिलियन से ज़्यादा (सीईपीए) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग $101.25 बिलियन) रहा, जिसमें भारत का व्यापार घाटा $26.53 बिलियन था; भारत ने $37.36 बिलियन का एक्सपोर्ट किया और $63.89 बिलियन का इंपोर्ट किया। सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन के साथ व्यापार क्रमशः $41.87 बिलियन (भारत का दूसरा सबसे बड़ा जीसीसी पार्टनर), $14.14 बिलियन, $10.61 बिलियन, $1.64 बिलियन का रहा। भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटना अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में तेज़ी से हो रहे बदलावों के कारण भारत-जीसीसी सहयोग के सामने चुनौतियां हैं। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच, सबसे बड़ी चुनौती जीसीसी देशों और भारत के लिए संतुलन बनाए रखने की है। पारंपरिक रूप से, भारत और खाड़ी देशों के बीच हाइड्रोकार्बन को लेकर आर्थिक निर्भरता रही है, लेकिन अब रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) की ओर वैश्विक झुकाव के कारण यह संबंध खतरे में है। भारत एक मुश्किल कूटनीतिक स्थिति में है, जहाँ उसे ईरान, इज़राइल और सऊदी अरब जैसे क्षेत्रीय दुश्मनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना पड़ रहा है, खासकर तब जब खाड़ी देश पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों से आगे बढ़कर उभरते एशियाई देशों के साथ नए रणनीतिक गठबंधन बना रहे हैं। इस क्षेत्र का सुरक्षा ढांचा भी बदल रहा है। चुनौतियों से निपटने के उपाय इन भू-राजनीतिक बाधाओं के बावजूद, भारत-जीसीसी सहयोग को नया रूप देने और उसे बेहतर बनाने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए जा सकते हैं। आर्थिक एकीकरण को बढ़ाने और व्यापारिक जोखिमों को कम करने की दिशा में पहला कदम भारत-जीसीसी एफटीए को जल्द से जल्द पूरा करना है। दूसरा कदम यह है कि सहयोग केवल ऊर्जा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए...इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, रिन्यूएबल हाइड्रोजन, खाद्य सुरक्षा, अहम टेक्नोलॉजी और मिलिट्री मैन्युफैक्चरिंग जैसे भविष्य से जुड़े क्षेत्रों को शामिल किया जाना चाहिए। कई बुनियादी रणनीतियां द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर सकती हैं और उन्हें भू-राजनीतिक तनावों से बचा सकती हैं: द्विपक्षीय जुड़ाव के ढांचे को क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर पर ले जाना: मध्य पूर्व की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्थाओं की नाजुकता और बहु-ध्रुवीय प्रकृति के कारण, भारत एक व्यापक क्षेत्रीय नीति से हटकर अधिक लक्षित द्विपक्षीय जुड़ाव के दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है। जीसीसी सदस्यों के साथ अलग-अलग बातचीत करके भारत भू-राजनीतिक तनाव वाले मुद्दों से बच सकता है। इससे उसे खाड़ी देशों के आपसी मुद्दों, जैसे राजनयिक संकट और ऐतिहासिक नाकेबंदी, को सुलझाने में मदद मिलेगी। आर्थिक और गैर-तेल संबंधित विविधीकरण के लिए मजबूत गठबंधन: गैर-तेल आर्थिक विविधीकरण में एक दीर्घकालिक बाजार और सहयोगी के रूप में, भारत खाड़ी देशों को सऊदी अरब के 'विज़न 2030' जैसी तेल-बाद की आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद कर सकता है। बाधाओं को दूर करने के लिए व्यापार समझौतों और व्यापक आर्थिक ढांचे पर तेजी से बातचीत होनी चाहिए। यदि भारत के निवेश-अनुकूल माहौल और नौकरशाही प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाया जाए, तो खाड़ी देशों के समृद्ध सॉवरेन वेल्थ फंड भारत के बुनियादी ढांचे, परिवहन और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में भारी निवेश कर सकते हैं। कामगारों की आवाजाही में सुधार और मानव पूंजी पर सहयोग: जीसीसी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों द्वारा समर्थित पारस्परिक रूप से लाभकारी श्रम संबंध को बदलती आर्थिक स्थितियों के अनुसार ढलना चाहिए। जानबूझकर उच्च-मूल्य वाली सेवाओं, तकनीकी शिक्षा और पेशेवर आदान-प्रदान की ओर बढ़ने से दोनों देशों को जीसीसी अर्थव्यवस्थाओं की बदलती अपेक्षाओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है, जो पारंपरिक रूप से कम-कुशल निर्माण श्रमिकों का समर्थन करती रही हैं। सप्लाई चेन कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना: भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा भारत-खाड़ी संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। क्षेत्रीय व्यवधानों से महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की रक्षा के लिए, भारत और जीसीसी समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत कर सकते हैं। भले ही भू-राजनीतिक मुद्दे 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (आईएमईसी) जैसी महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में देरी कर रहे हों, लेकिन कच्चे तेल और चावल जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों के लिए मजबूत और विविध सप्लाई चेन एक-दूसरे पर हमारी दीर्घकालिक निर्भरता को मजबूत करेंगी। इस गठबंधन को बाहरी झटकों से बेहतर ढंग से बचाना चाहिए और पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा पर सहयोग को गहरा करके तथा उच्च-स्तरीय रणनीतिक बैठकों के लिए अधिक नियमित समय-सारणी बनाकर बहु-ध्रुवीय दुनिया के लिए अपने हितों को फिर से व्यवस्थित करना चाहिए। निष्कर्ष भू-राजनीतिक टकरावों के जटिल माहौल में भारत और जीसीसी के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए एक ऐसी बहुआयामी रणनीति की जरूरत है जो पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों से आगे बढ़कर बदलती क्षेत्रीय वास्तविकताओं के अनुकूल हो। दोनों ही क्षेत्र तेल संबंधित मुद्दों के कारण आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहे हैं । साथ ही पाकिस्तान, इज़राइल और चीन जैसी प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय ताकतों के भारी दबाव का भी सामना कर रहे हैं। आवश्यक गहरी और मजबूत साझेदारी तभी बन सकती है जब खाड़ी देशों की ऊर्जा, श्रम और पूंजी की ताकत और भारत के संतुलन बनाने के प्रयासों के बीच अच्छा तालमेल हो। - प्रोफ़ेसर (डॉ.) डी.के. पांडे विज़िटिंग सीनियर फ़ेलो, सेंटर फ़ॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़, एडजंक्ट प्रोफ़ेसर, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, सलाहकार, एकेडमिक काउंसिल, फ़ॉरेन पॉलिसी स्कूल और GNOIT, पूर्व एसोसिएट डीन, SoB, गलगोटिया विश्वविद्यालय।
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अगस्त 2026 की शुरुआत के साथ ही आम लोगों, टैक्सपेयर्स, बैंक ग्राहकों और यात्रियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण वित्तीय बदलाव लागू हो गए हैं। इस महीने आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तारीख, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक, रेलवे के तत्काल टिकट बुकिंग नियमों में बदलाव, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें और कई बैंकों के डेबिट व क्रेडिट कार्ड नियमों में संशोधन जैसे बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में चलिए जानते हैं अगस्त में कौन-कौन से वित्तीय बदलाव आपकी जेब पर असर डाल सकते हैं।

