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गुजरात भर के 40 शिक्षकों को 'राज्य के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक' पुरस्कार से सम्मानित किया गया

गुजरात भर के 40 शिक्षकों को 'राज्य के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक' पुरस्कार से सम्मानित किया गया

समाचार नामा 5 Sep 2026 11:32 pm

यूपी: सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर विपक्ष का हमला, बोले- कानून सभी के लिए समान होना चाहिए

यूपी: सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर विपक्ष का हमला, बोले- कानून सभी के लिए समान होना चाहिए

समाचार नामा 5 Sep 2026 10:23 pm

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 6 सितंबर से दो दिवसीय असम दौरे पर, कई कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 6 सितंबर से दो दिवसीय असम दौरे पर, कई कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा

समाचार नामा 5 Sep 2026 10:21 pm

कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल : सचिन पायलट बने पंजाब प्रभारी , सुरजेवाला को गुजरात और कर्नाटक की जिम्मेदारी

कांग्रेस ने शनिवार को बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए कई राज्यों के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के नए प्रभारी नियुक्त किए हैं

देशबन्धु 5 Sep 2026 10:10 pm

'दिमागी नक्सल वो होम्योपैथिक गोली जिसने सबको बाहर निकाल दिया, पीएम मोदी का विपक्ष पर तंज

'दिमागी नक्सल वो होम्योपैथिक गोली जिसने सबको बाहर निकाल दिया, पीएम मोदी का विपक्ष पर तंज

समाचार नामा 5 Sep 2026 9:42 pm

‘कानून और संविधान का उल्लंघन,' सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर विपक्षी दलों ने जताया एतराज

‘कानून और संविधान का उल्लंघन,' सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर विपक्षी दलों ने जताया एतराज

समाचार नामा 5 Sep 2026 9:26 pm

तमिलनाडु : मुख्यमंत्री विजय ने छात्रों के निर्माण और सामाजिक प्रगति में शिक्षकों की भूमिका की सराहना की

तमिलनाडु : मुख्यमंत्री विजय ने छात्रों के निर्माण और सामाजिक प्रगति में शिक्षकों की भूमिका की सराहना की

समाचार नामा 5 Sep 2026 5:29 pm

उत्तर प्रदेश 2027: चुनावी बिसात और बदलते समीकरण

उत्तर प्रदेश की राजनीति को भारतीय लोकतंत्र का हृदयस्थल माना जाता है। दिल्ली की गद्दी का रास्ता लखनऊ के गलियारों से होकर गुजरता है, यही कारण है कि देश के इस सबसे बड़े सूबे में होने वाली हर छोटी-बड़ी राजनीतिक हलचल का असर राष्ट्रीय फलक पर साफ दिखाई देता है। वर्ष 2026 की समाप्ति के करीब आते ही और 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच शह-मात का खेल पूरी तरह से शुरू हो चुका है। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने सूबे की राजनीतिक जमीन को जो नई शक्ल दी थी, उसके बाद हर दल अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटा है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होकर इतिहास रचने की कवायद में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अपने 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के सहारे दस साल के सत्ता के वनवास को खत्म करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। इस बार का चुनाव केवल पारंपरिक नारों या वादों पर आधारित नहीं रहने वाला, बल्कि यह जमीन पर रची जा रही नई सामाजिक और गठबंधन राजनीति की प्रयोगशाला बनने जा रहा है। इस राजनीतिक उठापटक और नए समीकरणों के निर्माण के बीच हाल ही में लखनऊ से एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक खबर सामने आई, जिसने राज्य के सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के बीच लखनऊ में लगभग 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे तक चली बंद कमरे की मैराथन मुलाकात ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। इस मुलाकात के मायने केवल एक शिष्टाचार भेंट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह 2027 के महासमर से पहले उत्तर प्रदेश की युवा और छात्र राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। आशुतोष रांका और अखिलेश यादव के बीच हुई इस चर्चा के केंद्र में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के नौजवानों के मुद्दे, लगातार होती परीक्षाओं के पेपर लीक, बेरोजगारी, छात्रों की समस्याएं और उच्च शिक्षा में आ रही गिरावट जैसे विषय शामिल रहे। इसे भी पढ़ें: Uttar Pradesh BJP Regional Team 2027 | यूपी बीजेपी ने सभी छह क्षेत्रों की नई टीमों का किया ऐलान, सामाजिक समीकरण साधने पर जोर | Full List पार्टी के भीतर और बाहर इस मुलाकात को 'प्लान 2027' के एक अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया और बेहद जागरूक मतदाता वर्ग तैयार हो चुका है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक 'जेन-जी' या पहली बार मतदान करने वाले युवा कहते हैं। यह युवा वर्ग पारंपरिक जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाओं और आधुनिक अवसरों की मांग कर रहा है। अखिलेश यादव बखूबी जानते हैं कि केवल पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण या केवल सामान्य गठबंधनों के बूते भाजपा जैसी विशाल और साधन-संपन्न चुनावी मशीनरी को मात देना असंभव है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद सपा अब छोटे-छोटे वैचारिक समूहों, छात्र संगठनों और युवाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरों को अपने पाले में लाकर भाजपा के उस युवा वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है, जो कभी भगवा दल की सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था। रांका और अखिलेश यादव की यह मुलाकात इस बात की तस्दीक करती है कि विपक्ष इस बार युवाओं के आक्रोश को एक ठोस राजनीतिक वोट बैंक में बदलने की मुकम्मल तैयारी कर चुका है। हालांकि, इस मुलाकात पर भाजपा ने भी फौरन तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि विपक्ष के पास कोई ठोस नीति या विकास का एजेंडा नहीं है, इसलिए वह केवल भ्रम फैलाने और छोटे-छोटे संगठनों के सहारे अपनी डूबती नैया बचाने का प्रयास कर रहा है। लेकिन राजनीति के जानकार इसे अलग नजरिए से देखते हैं। उनका मानना है कि उत्तर प्रदेश में जब भी कोई बड़ा सत्ता परिवर्तन हुआ है, उसके मूल में युवाओं और छात्रों का आंदोलन या उनका असंतोष ही रहा है। ऐसे में सीजेपी जैसी युवा केंद्रित ताकतों और सपा का करीब आना भविष्य के एक नए और बड़े सामाजिक-राजनैतिक मोर्चे की बुनियाद रख सकता है। यदि हम उत्तर प्रदेश की समूची राजनैतिक बिसात पर नजर डालें, तो इस समय सबसे बड़ा टकराव नैरेटिव यानी विमर्श गढ़ने को लेकर चल रहा है। समाजवादी पार्टी ने इस बार 'आरक्षण' और 'संविधान' को अपनी राजनीति के केंद्र में रख दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष को 'संविधान बचाओ' के नारे से जो अप्रत्याशित लाभ मिला था, अखिलेश यादव उसे 2027 तक कायम रखना चाहते हैं। हालिया महीनों में उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण की स्थिति, 69000 शिक्षक भर्ती का विवाद और पिछड़े-दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर सपा ने एक आक्रामक रुख अख्तियार किया है। अखिलेश यादव लगातार जनसभाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि वर्तमान सत्ताधारी दल दलितों और पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की साजिश रच रहा है। इस नैरेटिव के जरिए सपा सीधे तौर पर भाजपा के गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोट बैंक पर निशाना साध रही है, जिसने पिछले एक दशक से भाजपा की जीत में रीढ़ की हड्डी का काम किया है। सपा की इस रणनीति के जवाब में भारतीय जनता पार्टी भी खामोश नहीं बैठी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा ने अपनी संगठन मशीनरी को पूरी तरह से चुनावी मोड में डाल दिया है। भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका पन्ना प्रमुख और बूथ स्तर का ढांचा माना जाता है। पार्टी ने इस बार कागजी दावों को खारिज करते हुए हर एक बूथ कमेटी का भौतिक सत्यापन शुरू किया है। खासकर उन बूथों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जहां पिछले चुनाव में विपक्ष को बढ़त मिली थी। इसके साथ ही, भाजपा सरकार अपनी कानून-व्यवस्था की सख्त छवि, बुनियादी ढांचे का विकास (जैसे एक्सप्रेसवे और औद्योगिक गलियारे) और केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के एक बड़े नेटवर्क के भरोसे मैदान में उतर रही है। भाजपा का मानना है कि विकास और सुशासन का उनका यह 'डबल इंजन' मॉडल विपक्ष के जातिगत ध्रुवीकरण के प्रयासों को विफल कर देगा। लेकिन इस बार एनडीए गठबंधन के भीतर की आंतरिक खींचतान भी पूरी तरह सतह पर आ चुकी है। गठबंधन में शामिल छोटे दल जैसे निषाद पार्टी के डॉ. संजय निषाद, अपना दल (सोनेलाल) की अनुप्रिया पटेल और सुभासपा के ओम प्रकाश राजभर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और सीटों के सम्मानजनक बंटवारे के लिए भाजपा पर लगातार दबाव बना रहे हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के भावुक होने और आंसुओं के छलकने की घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भारी उबाल ला दिया था। जहां संजय निषाद ने इसे अपने समाज को हक न मिल पाने की पीड़ा बताया, वहीं अखिलेश यादव ने तुरंत इस पर तंज कसते हुए इसे भाजपा के साथ जाने का 'पश्चाताप और प्रायश्चित' करार दे दिया। यह घटना दर्शाती है कि निषाद और अन्य अति-पिछड़ी जातियों के वोट बैंक को लेकर दोनों पक्षों में कितनी जबर्दस्त रस्साकशी चल रही है। अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि निषाद समाज भी उनके 'PDA' का एक अभिन्न हिस्सा है और यदि उनकी सरकार आती है, तो वे जातीय जनगणना कराकर हर समाज को उसका वास्तविक हक देंगे। दूसरी तरफ, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच का 'इंडिया' गठबंधन भी एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। यद्यपि अखिलेश यादव और कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने बार-बार यह दोहराया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव दोनों दल मिलकर लड़ेंगे, लेकिन जमीनी स्तर पर सीटों के बंटवारे और प्रादेशिक नेतृत्व को लेकर दोनों दलों के स्थानीय नेताओं के बीच महत्वाकांक्षाओं का टकराव साफ दिखाई देता है। कांग्रेस जहां लोकसभा चुनाव के उत्साह के बाद उत्तर प्रदेश में अपने पुराने गौरव को हासिल करने के लिए अधिक सीटों की मांग कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी खुद को बड़े भाई की भूमिका में रखते हुए कांग्रेस को सीमित सीटों पर समेटने की रणनीति बना रही है। इसके अतिरिक्त, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की खामोशी और उनकी अंदरूनी बैठकें भी इस त्रिकोणीय मुकाबले को और दिलचस्प बना रही हैं। मायावती अपने खिसकते दलित वोट बैंक को सहेजने के लिए नए सिरे से कैडर कैंप आयोजित कर रही हैं। यदि बसपा अपने पारंपरिक वोट को बचाने में सफल रहती है, तो इसका सीधा नुकसान सपा-कांग्रेस गठबंधन को उठाना पड़ सकता है, जिससे अंततः भाजपा को लाभ होने की संभावना बढ़ जाएगी। सियासत के इस खेल में शह और मात के मोहरे बिछ चुके हैं। जनता शांत है, लेकिन वह हर दल की चालों को बहुत बारीकी से देख रही है। रोजगार की तलाश में भटकता युवा, महंगाई से जूझता आम नागरिक और अपने अधिकारों के प्रति सजग होता जातियों का समूह ही अंततः यह तय करेगा कि 2027 में लखनऊ के सिंहासन पर किसका राजतिलक होगा। फिलहाल, राजनैतिक दलों की यह सरगर्मी और रणनीतिक मुलाकातों का दौर यह बताने के लिए काफी है कि उत्तर प्रदेश का आगामी चुनावी संग्राम बेहद रोमांचक, अप्रत्याशित और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। - अशोक भाटिया वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार, लेखक, समीक्षक एवं टिप्पणीकार

प्रभासाक्षी 5 Sep 2026 4:28 pm

कॅरियर की अंधी दौड़ में हांफती युवा पीढ़ी!

भारत युवाओं का देश है। जाहिर है ऐसे देश की चिंताएं बहुत अलग होती हैं। उसकी ज्यादातर आबादी को शिक्षा, रोजगार और सुंदर जीवन की कामना होती है। उनकी महत्वाकाक्षाएं, अवसरों की होड़ और दौड़। पाने की खुशी और न मिलने का आक्रोश सब साझा होते हैं। करियर में सफल होने, जल्दी और ज्यादा पाने की कामनाएं इस दौर का मूल्य हैं। ऐसे में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को गहरी चुनौती है। संकट के बादल गहरे हैं। समाधान के सूत्र न्यूनतम। बदलती कार्य संस्कृति सरकारों में नौकरियों के दरवाजे सिकुड़ रहे हैं। ज्यादातर नौकरियां निजी क्षेत्रों में ही हैं। नौ से पांच बजे की पक्की नौकरियां अब स्वप्न ही हैं। उनकी जगह गिग इकोनामी (फ्री लांस, कांट्रैक्ट वर्क) ने ले ली है। आर्थिक स्वतंत्रता की तो छोड़िए यह माडल भविष्य की अनिश्चितता और वित्तीय अस्थिरता भी ला रहा है, जिसके नाते बढ़ता मानसिक तनाव और अवसाद संकट को गहरा कर रहा है। हिंदुस्तान अलग तरह से चलता रहा है। परिवार इसकी प्राणवायु रहे हैं। परिवार का कोई एक आदमी नौकरी पर रहता था, शेष अपने घर-इलाके-गांव में बैठकर स्थानीय स्तर पर जो कर सकते थे करते थे। परिवार की छाया में सुरक्षा थी, संरक्षण था, बच्चों को संस्कारित करने के पारिवारिक उपक्रम थे। नई व्यवस्था ने एक परिवार में कई परिवार खड़े कर दिए हैं। इससे एक की जगह अब चार परिवार, चार चूल्हे और चार व्यवस्थाएं खड़ी करनी पड़ रही है। आप कितना भी कमा रहे हैं वह कम ही है। इसने नई पीढ़ी को ईएमआई के दुष्चक्र में फंसा कर नई व्यवस्थाओं का गुलाम बना दिया है। परिवार व्यवस्था भारत की संस्कृति का आधार रही है। वह संस्कारशाला भी है। इसे भी पढ़ें: तेजी से बदल रही है भारत की तस्वीर कार्य और जीवन का संतुलन कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने हमारे सामने नई चुनौतियां पेश की हैं। वे बेहतर सहायक से ज्यादा तनाव के वाहक हैं। युवाओं में एआई के कारण नौकरियां जाने और खुद के अप्रासंगिक हो जाने का भय बैठ गया है। वे इस पूरे दृश्य को बहुत चिंता से देख रहे हैं। री-स्किलिंग का दबाव उन्हें गहरे भय में डाल रहा है। इससे मानसिक थकान होना स्वाभाविक ही है। इस समय सबसे बड़ी चिंता कार्य और जीवन संतुलन की है। वर्क फ्राम होम और डिजिटल कनेक्टिविटी ने सारा कुछ बदलकर रख दिया है। काम के घंटे अब प्रायः 24 घंटे ही हैं। देर रात तक ई-मेल, रिर्पोट्स और मैसेज का जवाब देते हुए युवा ‘आलवेज आन’ मोड में रहते हैं। जिससे पारिवारिक जीवन, व्यक्तिगत समय और नींद सब प्रभावित हो रही है। बर्नआउट की बढ़ती दर, काम के अनिश्चित घंटे, स्पर्धा का वातावरण और टारगेट पूरे करने का दबाव साथ चलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्लूएचओ) ने बर्नआउट को प्रोफेशनल बीमारी मान लिया है। यह अब भारतीय कारपोरेट जगत में एक अनिवार्य समस्या बन गयी है। सोशल मीडिया से बनती छवियां सोशल मीडिया ने समाज में अलग तरह की स्पर्धा की छवियां प्रस्तुत की हैं। अपने सुखद, आनंद के क्षणों को वायरल करने की बीमारी दूसरे की पीड़ा का कारण बन जाती है। किसी की बड़ी पदस्थापना, उसकी पार्टियां, रील्स, पर्यटन की तस्वीरें, महंगी जीवनशैली का विज्ञापन करना, सफलताओं के हाईलाइट्स देखकर तुलना और स्पर्धा की बातें तेज होती हैं। इससे हीनभावना और तनाव का जन्म भी होता है। परिजन और बच्चे भी अपने पालकों से ऐसी ही जीवन शैली की अपेक्षा करते हैं। ऐसे समय में युवाओं के लिए तनाव प्रबंधन की विधियां समझने और उन्हें जीवन की ठोस सच्चाइयों से जोड़ने की जरूरत है। योग, ध्यान के अनेक अभ्यास जीवन में शांति ला सकते हैं। जिंदगी के हमारे दृष्टिकोण में परिवर्तन ला सकते हैं। रील्स की तुरंतवादी जीवनशैली और जीवन के सतत संघर्ष को समझने की जरुरत है।सोशल मीडिया से प्रक्षेपित हो रही छवियों से प्रभावित होने के बजाए, लोगों के संघर्ष और उससे उपजी सफलताओं के पाठ भी पढ़े जाने चाहिए। उद्यमिता और उसके जोखिम नए समय ने युवाओं को उद्यमिता के गुर दिए हैं। यह पीढ़ी जोखिम उठाने और सफलताओं के नए शिखर छूने वाली पीढ़ी है। इसके मंत्र अलग हैं। वे जल्दी से सफलताओं के नए क्षितिज को छूना चाहते हैं। छू भी रहे हैं। कम आयु में उनकी सफलताएं विस्मित करने वाली हैं। उनके स्टार्टअप धूम मचा रहे हैं। सफलता की बड़ी कहानियां लिख रहे हैं। प्रेरित कर रहे हैं। इसके दूसरे पक्ष का विचार भी जरूरी है। हमें पता है कि 90 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप शुरुआती सालों में ही अन्यान्य कारणों से विफल हो जाते हैं। विफलता का डर, निवेशकों का दबाव, फंडिंग का संकट संस्थापकों और शुरुआती कर्मचारियों में मानसिक तनाव पैदा कर ही देता है। इतने बड़े देश में हर साल लाखों युवा हाथ काम मांगने के लिए खड़े हो जाते हैं। उनके पास डिग्रियां भी होती हैं। किंतु वे कौशल युक्त नहीं होते। वे डिग्रीधारी हैं किंतु किसी काम के नहीं हैं। बाजार की जरूरतें अलग हैं, उनके कौशल अलग हैं। ऐसे में बहुत योग्य लोगों को भी अपेक्षित नौकरी नहीं मिल पाती, अच्छे वेतन की तो जाने ही दीजिए। युवाओं के ज्यादातर संकट वास्तविक हैं। वे जानकारी से भरपूर हैं, उनके पास अवसरों का जनतंत्र है। आकांक्षाओं की बाढ़ है। वे सूचनाओं से लदे-फंदे हैं। यह ज्यादा सूचनाएं भी दुख और भ्रम का कारण बन रही हैं। आकांक्षाओं का बड़ा आकाश उतनी ही गहरी निराशा लेकर लाता है। यह साधारण नहीं है कि आईआईटी के विद्यार्थी आत्महत्या कर रहे हैं। ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का अवसान उनके परिवार,देश और समाज के लिए भी बड़ी क्षति है । परीक्षाओं में मिलती असफलताएं, लीक होते प्रश्नपत्र, परीक्षाओं की नष्ट होती शुचिता, सरकारी- प्रशासनिक तंत्र की कदाचार रोकने की विफलताओं ने युवाओं को गहरी चिंताएं दी हैं। शिक्षा के निजीकरण और उससे उपजे बाजारीकरण ने हालात बहुत बदल दिए हैं। महंगी शिक्षा के लिए परिवार कर्ज में डूब रहे हैं। प्रतिभा पलायन का संकट तो है ही। समाज में यह बात बहुत गहरे पैठ रही है इस देश में प्रतिभाशाली युवाओं की जगह नहीं बची है। यह तथ्य नहीं किंतु गहराई से फैलती धारणा है। आप बिना जुगाड़ के इस व्यवस्था में सफल नहीं हो सकते। किसी राष्ट्र जीवन में ऐसी धारणाएं ठीक नहीं हैं। हमें समझना होगा कि राष्ट्र से हम सबकी सामूहिक आकांक्षाएं,साझे प्रयासों से ही फलीभूत होंगी। भारत की आजादी के आठ दशक अभूतपूर्व प्रगति, एकत्व और जीवंत लोकतंत्र के प्रमाण हैं। हर राष्ट्र जीवन में चुनौतियां होती हैं, उससे जूझकर हम अपने संकटों का हल खोजते हैं। देश की युवा पीढ़ी भी अपने संकटों के बीच इस राष्ट्र जीवन के समक्ष उपस्थित प्रश्नों के ठोस और वाजिब हल जरुर तलाशेगी। युवा शक्ति की तेजस्विता, नवाचारों और आत्मविश्वास को देखकर यह विश्वास सहज ही होता है। - प्रो. संजय द्विवेदी (लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं।)

प्रभासाक्षी 5 Sep 2026 3:46 pm

शिक्षकों संग पीएम मोदी की खास बातचीत, पब्लिक स्पीकिंग पर मांगे टिप्स, बच्चों की 'रिपोर्टिंग स्किल्स' पर भी ली चुटकी

शिक्षकों संग पीएम मोदी की खास बातचीत, पब्लिक स्पीकिंग पर मांगे टिप्स, बच्चों की 'रिपोर्टिंग स्किल्स' पर भी ली चुटकी

समाचार नामा 5 Sep 2026 12:39 pm

China के सैन्य मॉडल की राह पर Pakistan! 50 साल बाद किए बड़े बदलाव, India के लिए क्या हैं मायने?

अब पाकिस्तान भी चीन के सैन्य मॉडल की राह पर चल पड़ा है। करीब पांच दशकों बाद पाकिस्तान ने अपने सैन्य कमांड ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वित कमान को नई दिशा देने की कोशिश की है। इस पुनर्गठन का सबसे बड़ा फायदा फील्ड मार्शल असीम मुनीर को मिलता दिखाई दे रहा है, जिनके हाथों में पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था की ताकत पहले से कहीं अधिक केंद्रित हो सकती है। यह बदलाव केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य शक्ति, रणनीतिक हथियारों और युद्धकालीन फैसलों को अधिक केंद्रीकृत करने की व्यापक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हम आपको बता दें कि नए कानूनों और संवैधानिक बदलावों के बाद पाकिस्तान में चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। असीम मुनीर पहले से सेना प्रमुख हैं और अब तीनों सेनाओं यानि थल सेना, नौसेना और वायुसेना, के बीच समन्वित कमान के केंद्र में भी हैं। पुरानी व्यवस्था में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की भूमिका निभाता था, लेकिन नई व्यवस्था में कमान का केंद्र और अधिक स्पष्ट रूप से एक व्यक्ति के आसपास सिमट गया है। इसे भी पढ़ें: SCO के मंच से चीन और पाकिस्तान को एक साथ धोकर मोदी ने दुनिया की वाहवाही लूट ली यही इस बदलाव का सबसे बड़ा संदेश है कि पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था में सेना अब केवल सबसे ताकतवर संस्था नहीं रहना चाहती, बल्कि अपनी ताकत को कानून और संस्थागत ढांचे के जरिए स्थायी रूप देना चाहती है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने रणनीतिक सैन्य ढांचे को भी नए सिरे से संगठित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड जैसी व्यवस्था के जरिए परमाणु हथियारों, मिसाइल क्षमताओं और अन्य रणनीतिक संसाधनों की कमान को अधिक केंद्रीकृत करने की कोशिश की जा रही है। इससे पाकिस्तान के सामरिक निर्णयों में सेना की भूमिका और मजबूत होती दिखाई देती है। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान का यह नया मॉडल चीन की सैन्य संरचना से भी प्रभावित माना जा रहा है। सेना, नौसेना, वायुसेना, मिसाइल और रणनीतिक क्षमताओं को एकीकृत कमान के तहत लाने की सोच का उद्देश्य युद्ध या संकट की स्थिति में तेज फैसले और संयुक्त सैन्य कार्रवाई बताया जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण में चीन के साथ सहयोग बढ़ाता रहा है और नया कमांड मॉडल भी उसी व्यापक रणनीतिक दिशा का हिस्सा माना जा रहा है। लेकिन भारत के लिए सवाल यह है कि क्या असीम मुनीर के हाथों में अधिक शक्ति आने से खतरा बढ़ जाएगा? देखा जाए तो इसका जवाब केवल हां या नहीं में नहीं दिया जा सकता। पाकिस्तान की सैन्य संरचना में केंद्रीकरण निश्चित रूप से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाक्रम है। एकीकृत कमान से पाकिस्तान सीमित युद्ध, मिसाइल संचालन और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों में बेहतर समन्वय की कोशिश कर सकता है। खासतौर पर भारत की पश्चिमी सीमा के संदर्भ में पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारी को अधिक संगठित करने का प्रयास करेगा। लेकिन पाकिस्तान को यह भ्रम पालने की जरूरत नहीं है कि कमांड स्ट्रक्चर बदलने से जमीन पर उसकी सामरिक वास्तविकता भी बदल जाएगी। भारत के सामने पाकिस्तान की चुनौती केवल हथियारों या पदों की नहीं है। भारत के पास कहीं अधिक व्यापक सैन्य, आर्थिक और तकनीकी क्षमता है। आधुनिक युद्ध केवल सैनिकों और मिसाइलों की संख्या से तय नहीं होते। अर्थव्यवस्था, रक्षा उत्पादन, तकनीक, खुफिया क्षमता, साइबर शक्ति, अंतरिक्ष क्षमता और राजनीतिक स्थिरता, ये सभी युद्ध शक्ति के महत्वपूर्ण आधार हैं। यहीं पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आती है। एक तरफ पाकिस्तान सैन्य कमान को मजबूत और केंद्रीकृत कर रहा है, दूसरी तरफ उसकी अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है। देश राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जूझता रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा समस्याएं अलग हैं। ऐसे में केवल सेना प्रमुख के हाथों में अधिक अधिकार देने से पाकिस्तान की मूल समस्याएं समाप्त नहीं हो जाएंगी। यहां एक सवाल यह भी है कि क्या सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण पाकिस्तान की संस्थाओं को और कमजोर करेगा? देखा जाए तो पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि वहां सेना और निर्वाचित सरकार के बीच शक्ति संतुलन हमेशा विवाद का विषय रहा है। अब यदि सैन्य कमान, रणनीतिक हथियारों और तीनों सेनाओं के समन्वय की शक्ति एक ही शीर्ष सैन्य नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित होती है, तो नागरिक नियंत्रण को लेकर सवाल और गहरे होंगे। उधर, भारत को इस घटनाक्रम पर नजर जरूर रखनी होगी, हालांकि चिंता की कोई वजह नहीं है। क्योंकि नई कमान व्यवस्था से पाकिस्तान की सैन्य योजनाओं में तेजी और समन्वय आ सकता है, लेकिन भारत की रणनीतिक तैयारी भी अब पुरानी नहीं रही। नई दिल्ली के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान की किसी भी सैन्य पुनर्संरचना का जवाब बयानबाजी से नहीं, बल्कि बेहतर तैयारी, मजबूत खुफिया तंत्र, आधुनिक तकनीक और निर्णायक सैन्य क्षमता से दिया जाए। असीम मुनीर के हाथों में ज्यादा ताकत आना पाकिस्तान के लिए शक्ति प्रदर्शन हो सकता है, लेकिन भारत के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि पड़ोसी देश अपनी सैन्य संरचना को नए सिरे से ढाल रहा है। साथ ही पाकिस्तान को भी यह समझ लेना चाहिए कि पदों की ताकत और वास्तविक राष्ट्रीय शक्ति में बड़ा अंतर होता है। सेना प्रमुख को अधिक अधिकार देने से न अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, न राजनीतिक संकट खत्म होता है और न ही सैन्य दुस्साहस की कीमत कम हो जाती है। बहरहाल, नई कमान, नया ढांचा और नए पद पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था को बदल सकते हैं, लेकिन दक्षिण एशिया की सामरिक सच्चाई नहीं बदल सकते। भारत तैयार है, सतर्क है और अपनी सुरक्षा के खिलाफ किसी भी चुनौती का जवाब देने की क्षमता रखता है। नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 5 Sep 2026 11:47 am

जीवन की राह में ज्ञान का दीप जलाते हैं शिक्षक

विश्वभर में लगभग सभी महापुरूषों ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता की संज्ञा दी है। गुरू रूपी इन्हीं शिक्षकों को सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को ‘शिक्षक दिवस’ मनाया जाता है। यह एकमात्र ऐसा दिन है, जब छात्र अपने शिक्षकों अर्थात् गुरुओं को उपहार देते हैं। पहले जहां गुरूकुल परम्परा हुआ करती थी और उस समय जीवन की व्यावहारिक शिक्षाएं इन्हीं गुरूकुल में गुरु दिया करते थे, आज नए जमाने में गुरूओं का वही अहम कार्य शिक्षक पूरा कर रहे हैं, जो छात्रों के सच्चे मार्गदर्शक बनकर उन्हें स्कूल से लेकर कॉलेज तक वह शिक्षा देते हैं, जो उन्हें जीवन में बुलंदियों तक पहुंचाने में सहायक बनती है। आज भले ही शिक्षा प्राप्त करने या ज्ञानोपार्जन के लिए अनेक तकनीकी साधन सुलभ हैं किन्तु एक अच्छे शिक्षक की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। जिस प्रकार एक अच्छा शिल्पकार किसी भी पत्थर को तराशकर उसे खूबसूरत रूप दे सकता है और एक कुम्हार गीली मिट्टी को सही आकार प्रदान कर सही आकार के खूबसूरत बर्तन बनाता है, समाज में वही भूमिका एक शिक्षक अदा करता है, इसीलिए शिक्षक को समाज के असली शिल्पकार का भी दर्जा दिया जाता है। इतिहास ऐसे शिक्षकों के उदाहरणों से भरा पड़ा है, जिन्होंने अपनी शिक्षा से अनेक लोगों के जीवन की दिशा ही बदल दी। भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर भारत में प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से शिक्षक दिवस मनाया जाता है। 13 मई 1962 को राधाकृष्णन देश के राष्ट्रपति बने और उसी वर्ष उनके कुछ छात्र उनका जन्मदिन मनाने के उद्देश्य से उनके पास गए तो उन्होंने उन छात्रों को परामर्श दिया कि उनके जन्मदिन को अध्यापन के प्रति उनके समर्पण के लिए ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाए और इस प्रकार 5 सितम्बर 1962 से ही देश में यह दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। 5 सितम्बर 1888 को एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में जन्मे डा. राधाकृष्णन ने अपने जीवनकाल के 40 वर्ष एक आदर्श शिक्षक के रूप में समर्पित कर दिए। मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज से शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी, कलकत्ता यूनिवर्सिटी तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्यापन किया और लंदन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी दर्शन शास्त्र पढ़ाया। 1931 में किंग जॉर्ज पंचम ने उन्हें नाइटहुड की उपाधि प्रदान की किन्तु उन्होंने देश की आजादी के बाद अपने नाम के साथ ‘सर’ लगाना बंद कर दिया। राधाकृष्णन 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य रहे और 1954 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। 1962 में ब्रिटिश अकादमी का सदस्य बनने पर उन्हें गोल्डन स्पर, इंग्लैंड के ‘ऑर्डर ऑफ मैरिट’ तथा 1975 में मरणोपरांत अमेरिकी सरकार द्वारा ‘टेम्पलटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। डा. राधाकृष्णन एक महान् दार्शनिक और आदर्श शिक्षक होने के साथ-साथ राजनीति में भी प्रवीण थे। इसे भी पढ़ें: Teachers Day 2026: जानिए Teachers Day का इतिहास, महत्व और देश के निर्माण में शिक्षकों का Role दर्शन शास्त्र जैसे गंभीर विषय को भी डा. राधाकृष्णन अपनी अद्भुत शैली से बेहद सरल और रोचक बना देते थे। जिस विषय का वे अध्यापन करते थे, पहले स्वयं उसका गहन अध्ययन करते थे। डा. राधाकृष्णन अपने व्याख्यानों के साथ-साथ विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से छात्रों को उच्च नैतिक मूल्यों को अपने आचरण में समाहित करने के लिए प्रेरित कर उनका बेहतर मार्गदर्शन भी करते थे। उनका कहना था कि हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि शिक्षक के बिना इस दुनिया में हम सभी अधूरे हैं। शिक्षक ही हैं, जो देश के भविष्य के वास्तविक आकृतिकार हैं और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। राधाकृष्णन का कहना था कि हमें मानवता को उन नैतिक जड़ों तक वापस ले जाना चाहिए, जहां से अनुशासन और स्वतंत्रता दोनों का उद्गम हो। उनका कथन स्पष्ट था कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा और शिक्षा को एक मिशन के रूप में नहीं अपनाएगा, तब तक अच्छी और उद्देश्यपूर्ण शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। आज के दौर में अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अक्सर यह रहती है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अव्वल आए, प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश पाए और आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी बने। निसंदेह जीवन में सफलता, उत्कृष्ट शिक्षा और व्यावसायिक उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं लेकिन केवल ऊंचे पद और बड़ी डिग्रियां किसी व्यक्ति को महान नहीं बनाती। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चे को सफल बनाने के साथ-साथ उसे एक संवेदनशील, विवेकशील, जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनाना भी होना चाहिए। यदि ज्ञान के साथ संस्कार, चरित्र और मानवीय मूल्यों का विकास नहीं हुआ तो ऐसी शिक्षा अधूरी ही मानी जाएगी। हर बच्चे को नैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, व्यावहारिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ी शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि वह जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही और गलत के बीच अंतर कर सके तथा अपने विवेक से बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने में सक्षम बने। शिक्षा ऐसी हो, जो केवल प्रतियोगिता में आगे बढ़ने की क्षमता न दे बल्कि सहयोग, सहानुभूति, अनुशासन, ईमानदारी, सहिष्णुता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करे। यही गुण आगे चलकर परिवार, समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षा-दर्शन भी इसी व्यापक दृष्टिकोण पर आधारित था। उनका विश्वास था कि सही शिक्षा व्यक्ति के चरित्र का निर्माण कर समाज की अनेक बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं बल्कि शिक्षा के उद्देश्य पर आत्ममंथन का दिन भी है। उनके आदर्शों, शिक्षाओं और जीवन-मूल्यों को अपनाकर ही हम ऐसी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं, जो ज्ञानवान होने के साथ संस्कारित, संवेदनशील और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान दे। - योगेश कुमार गोयल (लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)

प्रभासाक्षी 5 Sep 2026 11:45 am

राम और कृष्ण से जुड़े स्थान बनेंगे तीर्थ स्थल : सीएम मोहन यादव

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि भगवान राम और कृष्ण का मध्य प्रदेश से गहरा नाता रहा है, इसलिए उनसे जुड़े स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा

देशबन्धु 4 Sep 2026 11:25 pm

मणिपुर : सीएम खेमचंद का आह्वान, 'हिंसा खत्म करने और शांति कायम करने के लिए सब आएं साथ'

मणिपुर : सीएम खेमचंद का आह्वान, 'हिंसा खत्म करने और शांति कायम करने के लिए सब आएं साथ'

समाचार नामा 4 Sep 2026 10:20 pm

सैक्सनी-अनहाल्ट चुनाव: एएफडी का पलड़ा क्यों है भारी?

सैक्सनी-अनहाल्ट में 6 सितंबर को मतदान होना है. चुनाव से पहले के रुझानों में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी ‘एएफडी’ को 40 फीसदी से ज्यादा समर्थन मिलता दिख रहा है

देशबन्धु 4 Sep 2026 6:29 pm

पुणे भारत की 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' राजधानी बनने की राह पर: देवेंद्र फडणवीस

पुणे भारत की 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' राजधानी बनने की राह पर: देवेंद्र फडणवीस

समाचार नामा 4 Sep 2026 5:59 pm

हार्परकॉलिन्स इंडिया 10 नवंबर को प्रकाशित करेगा सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग'

हार्परकॉलिन्स इंडिया 10 नवंबर को प्रकाशित करेगा सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग'

समाचार नामा 4 Sep 2026 4:23 pm

भोपाल के व्यापारियों-रहवासियों का पक्ष मजबूती से सुप्रीम कोर्ट में रख रही है सरकार : सीएम मोहन यादव

भोपाल के व्यापारियों-रहवासियों का पक्ष मजबूती से सुप्रीम कोर्ट में रख रही है सरकार : सीएम मोहन यादव

समाचार नामा 4 Sep 2026 2:25 pm

भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद

मुंबई, भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ।

देशबन्धु 4 Sep 2026 1:07 pm

भारत का सर्विसेज पीएमआई 54.1 रहा

नई दिल्ली, भारत के सर्विसेज सेक्टर में अगस्त में जोरदार वृद्धि देखने को मिली है और एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है।

देशबन्धु 4 Sep 2026 12:38 pm

प्रशांत किशोर का शिक्षकों पर बड़ा हमला, बोले- ‘गुरुजी से मस्टरवा बन गए’, जाति के नाम पर वोट देने से बिगड़ी शिक्षा व्यवस्था

प्रशांत किशोर का शिक्षकों पर बड़ा हमला, बोले- ‘गुरुजी से मस्टरवा बन गए’, जाति के नाम पर वोट देने से बिगड़ी शिक्षा व्यवस्था

समाचार नामा 4 Sep 2026 8:40 am

Jaishankar in Kyiv: जेलेंस्की से मुलाकात, रूस से तेल खरीद पर भारत ने साफ किया रुख; युद्ध खत्म करने पर जोर

Jaishankar in Kyiv: जेलेंस्की से मुलाकात, रूस से तेल खरीद पर भारत ने साफ किया रुख; युद्ध खत्म करने पर जोर

समाचार नामा 4 Sep 2026 7:48 am

भोपाल सीलिंग विवाद सुलझाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार 'बीच का रास्ता' तलाश रही : कैलाश विजयवर्गीय

भोपाल सीलिंग विवाद सुलझाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार 'बीच का रास्ता' तलाश रही : कैलाश विजयवर्गीय

समाचार नामा 3 Sep 2026 11:38 pm

कश्मीरी पंडितों को धमकी और राम मंदिर सीईओ नियुक्ति पर 'सियासत', भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने

कश्मीरी पंडितों को धमकी और राम मंदिर सीईओ नियुक्ति पर 'सियासत', भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने

समाचार नामा 3 Sep 2026 11:25 pm

भूपेंद्र यादव ने एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए

भूपेंद्र यादव ने एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए

समाचार नामा 3 Sep 2026 11:24 pm

भाजपा की 'बी टीम' के रूप में काम कर रही बसपा का जनाधार खत्म: रविदास मल्होत्रा

भाजपा की 'बी टीम' के रूप में काम कर रही बसपा का जनाधार खत्म: रविदास मल्होत्रा

समाचार नामा 3 Sep 2026 11:19 pm

'देश में कानून का राज, अब न्याय मिलेगा,' दिशा सालियान केस पर भाजपा विधायक का बयान

पालघर, 3 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की सियासत में दिशा सालियान केस की सीबीआई जांच को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले को लेकर वसई-विरार की भाजपा विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने कहा कि न्याय व्यवस्था पर उन्हें पूरा भरोसा है और यह फैसला दिशा सालियान को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।

देशबन्धु 3 Sep 2026 11:16 pm

सीएम फडणवीस ने राष्ट्रीय राजनीति में जाने की संभावना को किया खारिज, कहा - 2029 तक महाराष्ट्र में ही रहूंगा

सीएम फडणवीस ने राष्ट्रीय राजनीति में जाने की संभावना को किया खारिज, कहा - 2029 तक महाराष्ट्र में ही रहूंगा

समाचार नामा 3 Sep 2026 7:54 pm

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्‍व में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही: केवल सिंह ढिल्लों

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही: केवल सिंह ढिल्लों

समाचार नामा 3 Sep 2026 7:50 pm

कश्मीरी पंडितों को धमकी पर शिवसेना सख्त, कहा- सुरक्षा सुनिश्चित करे उमर सरकार

कश्मीरी पंडितों को धमकी पर शिवसेना सख्त, कहा- सुरक्षा सुनिश्चित करे उमर सरकार

समाचार नामा 3 Sep 2026 7:49 pm

हीरे से लेकर हथियारों तक, Belgium के साथ मिलकर Modi ने Europe के लिए बनाया बड़ा गेम प्लान

भारत और बेल्जियम के रिश्तों की सबसे चमकदार पहचान हीरे रहे हैं। एंटवर्प से मुंबई और सूरत तक फैला कारोबार दोनों देशों को जोड़ता रहा है। लेकिन अब यह रिश्ता सिर्फ चमकते हीरों तक सीमित नहीं रहने वाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की नई दिल्ली में हुई मुलाकात ने भारत-बेल्जियम संबंधों को रक्षा, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और निवेश जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तार देने का स्पष्ट रोडमैप तैयार कर दिया है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की 2 से 4 सितंबर की भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच हुए समझौते इस बात का संकेत हैं कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत यूरोप के साथ अपने संबंधों को नई सामरिक गहराई दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि भारत अब द्विपक्षीय संबंधों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि व्यापार, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और वैश्विक राजनीति को जोड़कर एक व्यापक रणनीतिक ढांचे में आगे बढ़ा रहा है। इतिहास की साझी विरासत, भविष्य की रणनीतिक साझेदारी हम आपको बता दें कि भारत-बेल्जियम संबंधों की जड़ें गहरी हैं। प्रथम विश्व युद्ध में फ्लैंडर्स के युद्धक्षेत्रों में 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। बेल्जियम स्वतंत्र भारत के साथ 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले शुरुआती यूरोपीय देशों में शामिल था। अब 2027 में दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ मनाएंगे। प्रधानमंत्री डी वेवर ने भारत यात्रा की शुरुआत राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर की। यह प्रतीकात्मक घटना उस रिश्ते की ओर इशारा करती है जिसकी बुनियाद लोकतंत्र, कानून के शासन, बहुलवाद और आपसी विश्वास पर टिकी है। इसे भी पढ़ें: SCO के मंच से चीन और पाकिस्तान को एक साथ धोकर मोदी ने दुनिया की वाहवाही लूट ली लेकिन इस बार इतिहास से अधिक महत्वपूर्ण भविष्य है। 15 जुलाई 2026 को ब्रुसेल्स में शुरू हुआ पहला भारत-बेल्जियम रणनीतिक संवाद अब दोनों देशों के संबंधों को नियमित और व्यापक संस्थागत आधार देगा। इसके तहत व्यापार और निवेश से लेकर हरित परिवर्तन, प्रौद्योगिकी, संपर्क, रक्षा और सुरक्षा तक सहयोग के लिए एक स्थायी मंच तैयार किया गया है। भारत-ईयू समीकरण में बेल्जियम की बढ़ती अहमियत इस यात्रा का सबसे बड़ा वैश्विक महत्व भारत-यूरोपीय संघ संबंधों से जुड़ा है। जनवरी 2026 में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता का सफल निष्कर्ष एक ऐतिहासिक घटनाक्रम माना जा रहा है। मोदी और डी वेवर ने इसके शीघ्र क्रियान्वयन पर जोर दिया है। भारत और यूरोपीय संघ दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक और आर्थिक शक्तियां हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और आर्थिक प्रतिस्पर्धा से प्रभावित हैं, भारत-ईयू आर्थिक साझेदारी का विस्तार केवल व्यापारिक मामला नहीं है। यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को चीन-केंद्रित निर्भरता से बाहर निकालने और अधिक विविध तथा सुरक्षित व्यवस्था बनाने की रणनीति भी है। बेल्जियम इस समीकरण में विशेष भूमिका निभा सकता है। एंटवर्प यूरोप के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक और बंदरगाह केंद्रों में है। दूसरी ओर भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक विशाल बाजार और तेजी से उभरती आर्थिक शक्ति है। दोनों देशों का सहयोग यूरोप और भारत के बीच एक नए आर्थिक एवं लॉजिस्टिक गलियारे की नींव बन सकता है। पांच साल में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य दोनों प्रधानमंत्रियों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इंडिया-बेल्जियम इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म शुरू किया गया है, जो निवेश संबंधी बाधाओं को दूर करने और कंपनियों को सहायता देने का काम करेगा। बेल्जियम की संप्रभु निवेश संस्था एसएफपीआईएम और भारत के नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड यानि एनआईआईएफ के बीच सहयोग से एक संभावित भारत-बेल्जियम आर्थिक और निवेश गलियारे की दिशा में भी काम होगा। सहयोग के नए क्षेत्रों की सूची बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी, रसायन, रक्षा विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों की रिफाइनिंग और रिसाइक्लिंग, परमाणु ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि बेल्जियम की सेमीकंडक्टर विशेषज्ञता और भारत का विशाल औद्योगिक पैमाना एक-दूसरे के पूरक हैं। बेल्जियम के विश्वस्तरीय आईमेक संस्थान को भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जोड़ने की पहल भविष्य में तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। रक्षा सहयोग: रिश्तों का सबसे बड़ा रणनीतिक बदलाव इसके अलावा, भारत-बेल्जियम संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में दिखाई देता है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच हस्ताक्षरित लेटर ऑफ इंटेंट नियमित सैन्य संवाद, स्टाफ वार्ता, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रक्षा औद्योगिक साझेदारी का ढांचा तैयार करेगा। दोनों देश रक्षा सह-विकास और सह-उत्पादन की संभावनाएं तलाशेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्नत रक्षा उपकरणों, विशेष रूप से जोरावर टैंक जैसे क्षेत्रों में सहयोग का उल्लेख किया। साथ ही बेल्जियम का नई दिल्ली में रक्षा अताशे नियुक्त करना और भारत का ब्रुसेल्स में स्थायी रक्षा अताशे नियुक्त करने का फैसला रिश्तों की बदलती प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है। बेल्जियम का युद्धपोत एलईओपोल्ड 1 नवंबर 2026 को भारत आएगा। यह मात्र नौसैनिक दौरा नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का संकेत है। इसके अलावा, भारत और बेल्जियम ने आतंकवाद के खिलाफ भी मजबूत साझा रुख अपनाया है। बेल्जियम ने पहलगाम में 2025 के आतंकी हमले की निंदा दोहराई और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ एकजुटता दिखाई। दोनों देशों ने आतंकवाद, उसके सुरक्षित ठिकानों और वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, सीबीआई और बेल्जियम की संघीय पुलिस के बीच समझौता संगठित अपराध और साइबर अपराध के खिलाफ सहयोग को नई ताकत देगा। सूचना साझा करने, भगोड़ों का पता लगाने और क्षमता निर्माण में यह समझौता महत्वपूर्ण होगा। ग्रीन हाइड्रोजन से समुद्री शक्ति तक साथ ही हरित ऊर्जा सहयोग भी इस यात्रा की बड़ी उपलब्धि है। नवीकरणीय ऊर्जा पर नए एमओयू के तहत ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, अपतटीय पवन ऊर्जा, बायो-एनर्जी और पंप्ड स्टोरेज में सहयोग बढ़ेगा। ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन से लेकर परिवहन, भंडारण और अंतिम उपयोग तक पूरी वैल्यू चेन में साझेदारी की योजना बनाई गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में विकसित हो रहे विशाल ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया। समुद्री और बंदरगाह सहयोग भी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एंटवर्प और फ्लैंडर्स की बंदरगाह विशेषज्ञता, भारत के तेजी से विकसित होते बंदरगाह नेटवर्क और हिंद महासागर में भारत की भूमिका मिलकर नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं। लॉजिस्टिक्स, ड्रेजिंग, बंदरगाह विकास और अपतटीय पवन ऊर्जा में बेल्जियम की विशेषज्ञता भारत के लिए उपयोगी हो सकती है। वैश्विक राजनीति में साझा संदेश इसके अलावा, दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। बेल्जियम ने एक बार फिर विस्तारित और सुधारित सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। दोनों देशों ने एक-दूसरे की अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का भी समर्थन किया। यूक्रेन और पश्चिम एशिया पर दोनों देशों ने संवाद और कूटनीति के जरिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। यह भारत की उस विदेश नीति के अनुरूप है जो किसी सैन्य गुट का हिस्सा बनने के बजाय संवाद, बहुपक्षवाद और रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देती है। मोदी की कूटनीति का बड़ा संदेश देखा जाये तो भारत-बेल्जियम संबंधों का नया अध्याय प्रधानमंत्री मोदी की व्यापक कूटनीतिक सोच को दर्शाता है। मोदी ने पुराने हीरा व्यापार को आधुनिक रणनीतिक साझेदारी में बदलने का प्रयास किया है। अब एंटवर्प-मुंबई-सूरत का संबंध सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, रक्षा उत्पादन, समुद्री संपर्क और निवेश से जुड़ रहा है। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि भारत ने यूरोप के साथ अपने संबंधों को केवल बाजार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें सुरक्षा, तकनीक और भू-राजनीति से जोड़ दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की सफलता इस बात में है कि भारत आज एक साथ अमेरिका, यूरोप, रूस और ग्लोबल साउथ के साथ अपने हितों के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ा रहा है। बेल्जियम के साथ यह नई साझेदारी भी उसी संतुलित और बहुआयामी कूटनीति का उदाहरण है। बहरहाल, हीरों की चमक से शुरू हुआ भारत-बेल्जियम संबंध अब हाई-टेक, हरित ऊर्जा और रक्षा सहयोग की नई रोशनी में प्रवेश कर रहा है। यदि तय समझौते जमीन पर उतरे, तो यह साझेदारी केवल दो देशों के रिश्तों को नहीं, बल्कि भारत-यूरोप के पूरे रणनीतिक समीकरण को नई दिशा दे सकती है। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 3 Sep 2026 6:33 pm

'मैं इन युवाओं के साथ खड़ा हूं', बिहार छात्र आंदोलन के घायलों से मिले राहुल गांधी

'मैं इन युवाओं के साथ खड़ा हूं', बिहार छात्र आंदोलन के घायलों से मिले राहुल गांधी

समाचार नामा 3 Sep 2026 6:15 pm

राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के तौर पर जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर एनडीए नेता बोले-'ऑपरेशन सिंदूर संभाला था, पारदर्शिता लाएंगे'

राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के तौर पर जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर एनडीए नेता बोले-'ऑपरेशन सिंदूर संभाला था, पारदर्शिता लाएंगे'

समाचार नामा 3 Sep 2026 5:11 pm

राम मंदिर अयोध्या के सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के पीछे छिपे महत्वपूर्ण प्रशासनिक व सियासी संदेश को समझिए

उत्तरप्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारतीय राजनीति के सबसे लंबे और निर्णायक अध्यायों में से एक रहा है। इस मंदिर आंदोलन ने भारतीय राजनीति की दिशा बदली, भाजपा को राष्ट्रीय सत्ता के केंद्र तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और अंततः 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतीकात्मक लक्ष्य पूरा हुआ। लेकिन इतिहास का दिलचस्प मोड़ यह है कि मंदिर बनने के बाद असली प्रशासनिक चुनौती शुरू हुई है, जिसके दृष्टिगत 2 सितंबर 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र कुमार मिश्र को अपना पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया। इसलिए मिश्र की नियुक्ति के पीछे छिपे महत्वपूर्ण प्रशासनिक व सियासी संदेश को समझना होगा। इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor से अयोध्या तक: कौन है राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा, क्या होगी जिम्मेदारी मसलन, लगभग 5,585 आवेदनों में से बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद तीन नामों के पैनल में से उनका चयन हुआ। मिश्र अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना के पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख पद से सेवानिवृत्त हुए थे और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहे। सवाल इसलिए बड़ा है कि राम मंदिर जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक संस्थान का CEO एक पूर्व शीर्ष सैन्य कमांडर ही क्यों? और उससे भी बड़ा सवाल यह कि क्या यह सिर्फ प्रशासनिक नियुक्ति है या अयोध्या के लिए तैयार किए जा रहे किसी बड़े संस्थागत मॉडल का संकेत? मेरे अनुभवजन्य आकलन में इसके कम-से-कम सात बड़े प्रशासनिक व सियासी संदेश हैं, जो इसप्रकार हैं:- पहला, राम मंदिर अब ‘आंदोलन’ नहीं, ‘सुव्यवस्थित संस्थान’ है: राम मंदिर आंदोलन के समय सबसे बड़ी आवश्यकता राजनीतिक-सामाजिक लामबंदी की थी, जबकि मंदिर निर्माण के बाद आवश्यकता बदल गई है। अब करोड़ों श्रद्धालुओं की व्यवस्था, दर्शन प्रणाली, सुरक्षा, दान, वित्त, कर्मचारियों, तकनीक, निर्माण, यातायात और अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन का प्रबंधन करना है। इसलिए CEO की नियुक्ति मूलतः इस बात की घोषणा है कि राम मंदिर अब केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि एक विशाल संस्थागत व्यवस्था है। खासकर यह परिवर्तन भाजपा और संघ परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण है। जिस राम मंदिर ने राजनीतिक आंदोलन को ऊर्जा दी, वही मंदिर अब शासन और प्रशासन की क्षमता की परीक्षा का केंद्र बनने जा रहा है। दूसरा, ‘संत-आधारित प्रबंधन’ से ‘प्रोफेशनल मैनेजमेंट’ की ओर अग्रसर है: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मूल प्रकृति धार्मिक-सामाजिक है। लेकिन मंदिर के बढ़ते आकार और महत्व के साथ केवल पारंपरिक न्यास व्यवस्था पर्याप्त नहीं रह सकती। शायद CEO का पद बनाना इसी बदलाव का संकेत है। और CEO के लिए पूर्व एयर मार्शल का चयन और भी स्पष्ट संदेश देता है कि- संस्था को अब कॉरपोरेट-जैसी प्रशासनिक दक्षता, सैन्य-जैसी अनुशासनात्मक क्षमता और आधुनिक प्रबंधन की आवश्यकता महसूस हो रही है। मिश्र के चयन की प्रक्रिया भी असाधारण थी—5,585 आवेदन, 1,580 योग्य/उपयुक्त उम्मीदवार, 108 ऑनलाइन इंटरैक्शन, 16 आमने-सामने के उम्मीदवार और अंततः तीन नामों का पैनल। चयन समिति ने नेतृत्व, प्रबंधन अनुभव, ईमानदारी और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व की संस्था को संचालित करने की दृष्टि जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया। अर्थात संदेश साफ है कि अब राम मंदिर के प्रशासन में ‘कौन है?’ से ज्यादा महत्वपूर्ण ‘क्या कर सकता है?’ होने जा रहा है। तीसरा, ऑपरेशन सिंदूर से अयोध्या तक ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से ‘राष्ट्रीय संस्कृति’ का सेतु है यह निर्णय: जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति का सबसे प्रतीकात्मक पक्ष यही है कि जिस अधिकारी ने पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैन्य अभियानों की कमान से जुड़े रहे, वही अब राम मंदिर के प्रशासन का नेतृत्व करेंगे। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया है। इसका अर्थ निकालने में सावधानी जरूरी है। यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार या ट्रस्ट ने जानबूझकर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा मॉडल’ को मंदिर प्रशासन में उतारने का निर्णय लिया है। लेकिन प्रतीकात्मक अर्थ को नकारना भी मुश्किल है। सीमा की रक्षा करने वाले सैन्य कमांडर से लेकर देश की सांस्कृतिक अस्मिता के सबसे बड़े प्रतीक के प्रबंधन तक की यात्रा— अपने आप में एक शक्तिशाली राजनीतिक प्रतीक है। यह संदेश भी पढ़ा जा सकता है कि अयोध्या को अब केवल धार्मिक नगर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के सांस्कृतिक-सुरक्षा परिसर के रूप में विकसित करने की तैयारी है। चौथा, चढ़ावा विवाद के बाद ‘विश्वास’ की पुनर्स्थापना होगी: इस नियुक्ति के समय को सबसे अधिक गंभीरता से देखना होगा। राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले में गिरफ्तारियां हुईं और ट्रस्ट के प्रशासन पर सवाल उठे। हालिया ट्रस्ट बैठक में चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप घटाने के लिए तकनीक आधारित प्रणाली पर भी विचार किया गया। IIT और बैंकों से प्रस्ताव लिए जाने की खबर है। ऐसे समय में एक अत्यंत वरिष्ठ, गैर-राजनीतिक और अनुशासनप्रिय सैन्य अधिकारी को CEO बनाना एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि अब मंदिर प्रशासन में विश्वास केवल धार्मिक प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि संस्थागत पारदर्शिता से भी अर्जित करना होगा। लेकिन यहां राजनीतिक ईमानदारी जरूरी है। मिश्र की नियुक्ति को सीधे चढ़ावा विवाद का परिणाम कहना उपलब्ध तथ्यों से सिद्ध नहीं है। CEO चयन की प्रक्रिया जुलाई में शुरू हो चुकी थी और लगभग दो महीने चली। फिर भी दोनों घटनाओं का समय एक साथ आने से यह स्पष्ट है कि ट्रस्ट अपने प्रशासनिक ढांचे को अधिक मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। पांचवां, क्या RSS-BJP-VHP की पारंपरिक भूमिका बदल रही है?: यही वह सवाल है जिस पर सबसे ज्यादा राजनीतिक बहस होगी। राम मंदिर आंदोलन की राजनीतिक-सामाजिक धुरी में भाजपा के साथ RSS और विश्व हिंदू परिषद की भूमिका ऐतिहासिक रही है। अब जब मंदिर का संचालन एक पूर्व एयर मार्शल को सौंपा जा रहा है, तो क्या इसका अर्थ है कि पुराने राजनीतिक-सामाजिक नेटवर्क पर भरोसा कम हो रहा है? कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने इसी दिशा में राजनीतिक आरोप लगाया है कि भाजपा-RSS से जुड़े लोगों पर भरोसा कम होने के कारण सेना के अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई। लेकिन इस आरोप को तथ्य नहीं, राजनीतिक व्याख्या के रूप में देखना चाहिए। दूसरी व्याख्या ज्यादा व्यावहारिक हो सकती है। वह यह कि RSS और VHP आंदोलन चला सकते हैं, वैचारिक-सामाजिक आधार दे सकते हैं, लेकिन प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं, हजारों कर्मचारियों, वित्तीय प्रणालियों, तकनीकी ढांचे और सुरक्षा-समन्वय को चलाने के लिए अलग तरह की विशेषज्ञता चाहिए। इसलिए संभव है कि यह RSS/BJP से दूरी नहीं, बल्कि कार्य-विभाजन का नया चरण हो। छठा, मोदी मॉडल के बाद अब ‘अयोध्या मॉडल’ की परीक्षा का वक्त: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक विमर्श में राम मंदिर केवल धार्मिक मुद्दा नहीं रहा; वह सांस्कृतिक पुनर्जागरण, विरासत और विकास की राजनीति से भी जुड़ा रहा है। अब अयोध्या को विश्वस्तरीय धार्मिक-सांस्कृतिक शहर बनाने की चुनौती सामने है। यही वह जगह है जहां ‘अयोध्या मॉडल’ की परीक्षा होगी। क्या अयोध्या विश्वस्तरीय तीर्थ व्यवस्था बना पाएगी? वह करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित दर्शन करा पाएगी? वह दान और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता स्थापित करेगी? वह स्थानीय नागरिकों के हितों की रक्षा करेगी? वह धार्मिक पर्यटन से रोजगार पैदा करेगी? वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सांस्कृतिक छवि मजबूत करेगी? अगर इन सवालों का उत्तर सकारात्मक मिलता है तो राम मंदिर भाजपा के लिए केवल राजनीतिक प्रतीक नहीं रहेगा। वह प्रशासनिक सफलता का मॉडल भी बन सकता है। सातवां, 2027 की उत्तर प्रदेश राजनीति में अयोध्या का नया अर्थ कैसे समझाया जाएगा: यह सबसे बड़ा संदेश है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। ऐसे समय में अयोध्या का राजनीतिक महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि उसकी प्रकृति बदल गई है। 2017 और 2022 की राजनीति में राम मंदिर मुख्यतः निर्माण और आस्था के सवाल से जुड़ा था। हालांकि, अब सवाल बदल गया है—वह यह कि राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या कैसी बनी? यही प्रश्न 2027 के राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर अयोध्या में विश्वस्तरीय सुविधाएं, रोजगार, पर्यटन, बेहतर परिवहन और सुरक्षित तीर्थ व्यवस्था दिखाई देती है तो भाजपा इसे अपने विकास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के संयुक्त मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर सकती है। लेकिन यदि स्थानीय विस्थापन, महंगाई, यातायात, भीड़, पर्यावरण, प्रशासनिक भ्रष्टाचार या वित्तीय विवाद जैसे मुद्दे उभरते हैं तो विपक्ष को नया राजनीतिक हथियार मिल सकता है। इसलिए CEO की नियुक्ति का अप्रत्यक्ष चुनावी अर्थ भी है। अब राम मंदिर केवल भाजपा की वैचारिक पूंजी नहीं, बल्कि उसका प्रशासनिक प्रदर्शन भी राजनीतिक पूंजी बन सकता है। आठवां, ट्रस्ट का सामूहिक पुनर्गठन: गत 2 सितंबर की बैठक में केवल CEO नियुक्त नहीं किया गया, बल्कि तीन नए ट्रस्टियों—महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव—की नियुक्ति भी हुई। सबकी प्रमुख जिम्मेदारियों में फेरबदल हुआ और वित्तीय मामलों तथा दान प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसले किए गए। इसलिए इसे किसी एक पद की नियुक्ति कहना उचित नहीं होगा। यह राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दूसरे चरण के पुनर्गठन जैसा दिखाई देता है। पहला चरण था—मंदिर निर्माण, और दूसरा चरण है—मंदिर संचालन। और तीसरा चरण संभवतः होगा—अयोध्या को वैश्विक धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र बनाना। और जितेंद्र मिश्र इसी दूसरे चरण के प्रमुख प्रशासक बनने जा रहे हैं। नौवां, मोदी, RSS और योगी के लिए इन नियुक्तियों के अलग-अलग अर्थ: देखा जाए तो इन महत्वपूर्ण नियुक्तियों के मोदी, RSS और योगी—तीनों के लिए अलग-अलग अर्थ हैं, जिसके दृष्टिगत इस नियुक्ति को तीन राजनीतिक स्तरों पर पढ़ा जा सकता है। जहां मोदी के लिए यह प्रशासनिक दक्षता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जोड़ने का अवसर है। वहीं, RSS के लिए यह आंदोलन की वैचारिक सफलता के बाद संस्था को टिकाऊ और पेशेवर बनाने की चुनौती है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के लिए यह अयोध्या को केवल धार्मिक नगर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े पर्यटन और सांस्कृतिक-आर्थिक केंद्रों में बदलने की परीक्षा है। और यहीं पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। दसवां, ट्रस्ट स्वतंत्र धार्मिक न्यास है, उसका CEO सीधे राज्य सरकार का अधिकारी नहीं है: अब भले ही ट्रस्ट स्वतंत्र धार्मिक न्यास है और उसका CEO सीधे राज्य सरकार का अधिकारी नहीं है। इसलिए दोनों के बीच अधिकार-क्षेत्र अलग हैं। लेकिन अयोध्या की सड़क, परिवहन, पुलिस, कानून-व्यवस्था, नगर विकास, पर्यटन और नागरिक सुविधाएं राज्य सरकार से जुड़ी हैं। इसलिए CEO और उत्तर प्रदेश प्रशासन के बीच समन्वय अयोध्या मॉडल की सफलता की निर्णायक शर्त होगा। ग्यारहवां, राम मंदिर आंदोलन व मंदिर निर्माण मुहिम की असली परीक्षा अब हुई शुरू : कहना न होगा कि जिस राम मंदिर आंदोलन ने भारतीय राजनीति को बदल दिया और मंदिर निर्माण ने आंदोलन को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदला, उसकी असली परीक्षा अब शुरू हुई है। क्योंकि प्रशासन इस उपलब्धि को संस्थागत स्थायित्व में बदलने की कोशिश कर रहा है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति इसी परिवर्तन का सबसे बड़ा संकेत है। लेकिन उनकी सैन्य वर्दी की चमक से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा उनका प्रशासनिक परिणाम। वह यह कि वे कितनी पारदर्शिता ला पाते हैं? दान व्यवस्था कितनी विश्वसनीय बनती है?श्रद्धालुओं को कितनी बेहतर सुविधाएं मिलती हैं? स्थानीय लोगों को अयोध्या के विकास में कितना हिस्सा मिलता है? ट्रस्ट कितना स्वायत्त और जवाबदेह रहता है? अंततोगत्वा, महत्वपूर्ण संदेश यह कि क्या राम मंदिर की भव्यता के साथ उसकी प्रशासनिक विश्वसनीयता भी उतनी ही भव्य बन पाएगी? यही वह प्रश्न है जो आने वाले वर्षों में राम मंदिर की राजनीतिक विरासत तय करेगा। क्योंकि अब राम मंदिर का सवाल केवल यह नहीं है कि “रामलला का मंदिर कितना भव्य है?” बल्कि मौलिक सवाल यह है कि “रामलला के मंदिर की व्यवस्था कितनी आदर्श है?” और शायद यही कारण है कि एक पूर्व एयर मार्शल को मंदिर का पहला CEO बनाया गया है। राम मंदिर आंदोलन ने सत्ता को बदलने का काम किया था; अब राम मंदिर का प्रशासन यह तय करेगा कि वह भारतीय संस्थागत संस्कृति को कितना बदल पाता है। यहीं से अयोध्या की राजनीति का अगला अध्याय शुरू होता है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

प्रभासाक्षी 3 Sep 2026 4:41 pm

राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मजबूत करता जीएसएलवी-एफ17 का प्रक्षेपण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जल्द ही जीएसएलवी-एफ 17 लॉन्च करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाला है। यह मिशन अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-05 (जिसे पहले जीआई सैट-1ए कहा जाता था) को अंतरिक्ष में ले जाएगा। ईओएस-05 एक अत्याधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट है जिसे आपदाओं के समय तेज़ी से तस्वीरें लेने के लिए बनाया गया है। इसरो ने ही इस स्पेसक्राफ्ट को विकसित किया है और इसका लॉन्च के समय वज़न 2,367 किलोग्राम होगा। ईओएस-05/जीआई सैट-1ए उस कमी को पूरा करेगा जो 2021 में ईओएस-03/जीआई सैट-1 के लॉन्च में आई रुकावट के कारण पैदा हुई थी। जीएसएलवी-एफ 10 मिशन इसके क्रायोजेनिक अपर स्टेज में तकनीकी खराबी के कारण विफल हो गया था। हालांकि लिफ्ट-ऑफ के बाद पहला और दूसरा स्टेज सामान्य रूप से काम कर रहे थे, लेकिन तीसरे स्टेज का क्रायोजेनिक इंजन चालू नहीं हो पाया, जिससे ईओएस-03 सैटेलाइट का नुकसान हो गया। इसरो का नया आत्मविश्वास इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, ईओएस-05 सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर स्थित होकर पूरे देश की लगातार निगरानी करेगा। पीएसएलवी रॉकेट की लगातार दो विफलताओं के बाद, इसरो अपने अगले लॉन्च के लिए तैयार है। यह सैटेलाइट ठीक वैसे ही काम करेगा जैसे कोई पर्यवेक्षक ऊँची जगह से पूरे गाँव पर नज़र रखता है। डॉ. नारायणन ने बताया कि इसरो की योजना मार्च 2027 तक सात रॉकेट लॉन्च करने की है, जिसमें गगनयान मिशन (जीआई मिशन) की पहली बिना क्रू वाली उड़ान भी शामिल है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए, इसरो का लक्ष्य 12 सैटेलाइट बनाना और आठ रॉकेट लॉन्च करना है। ये मिशन संचार, नेविगेशन, पृथ्वी की निगरानी और वैज्ञानिक अनुसंधान को बेहतर बनाएंगे, साथ ही भविष्य में मानव अंतरिक्ष उड़ान और खोज के लिए आधार भी तैयार करेंगे। लॉन्च की तैयारियां इसरो, जीएसएलवी-एफ 17 लॉन्च के लिए अंतिम तैयारियां पूरी कर रहा है। यह लॉन्च 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:55 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से निर्धारित है। जीएसएलवी-एफ 17 को 29 अगस्त 2026 को रात लगभग 8 बजे दूसरे लॉन्च पैड (एसएलपी) पर ले जाया गया। यह मिशन एक अहम चरण में पहुँच गया है, क्योंकि रॉकेट को टेक-ऑफ से पहले व्हीकल इंटीग्रेशन सेंटर (वीआईसी) से लॉन्च पैड पर ले जाया गया है। इसे भी पढ़ें: ISRO का धमाका, स्पेस में तैनात होगी भारत की तीसरी आंख EOS-05, कांपे चीन-पाकिस्तान यह मिशन ईओएस-05 GEO इमेजिंग सैटेलाइट (जीआई सैट-1ए) को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में भेजेगा। इस ऑर्बिट का पेरिगी (पृथ्वी के सबसे करीब का बिंदु) 170 किमी और एपोजी (सबसे दूर का बिंदु) 28,934 किमी होगा। 2025 और 2026 की शुरुआत में लगातार दो पीएसएलवी मिशन फेल होने के बाद, इस मिशन पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी और इसके हर पहलू की विस्तार से जांच की जाएगी। इसरो पिछले आठ महीनों में कोई सफल रॉकेट लॉन्च नहीं कर पाया है, लेकिन अब एजेंसी एक बड़ी वापसी के लिए तैयार है। इसरो ने गड़बड़ी के कारणों की जांच के लिए लॉन्च रोक दिए थे, जिससे जीएसएलवी-एफ 17/ईओएस-05 मिशन उसके लॉन्च प्रोग्राम में भरोसा बहाल करने का एक अहम मौका बन गया है। उम्मीद है कि यह सैटेलाइट भारत की पृथ्वी की निगरानी, इमेजिंग और डेटा-आधारित गतिविधियों को बेहतर बनाएगा। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष-आधारित पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं में एक बड़ी प्रगति है और इससे और भी एडवांस्ड सैटेलाइट सिस्टम के विकास में मदद मिलेगी। ईओएस-05 के उद्देश्य ईओएस-05 एक पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट है जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप और आसपास के क्षेत्रों की लगभग रियल-टाइम, हाई-टेम्पोरल-रिज़ॉल्यूशन वाली इमेजिंग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ईओएस-05 के मुख्य उद्देश्य साफ मौसम (बिना बादलों के) में बार-बार और बड़े इलाके की निगरानी करने पर केंद्रित हैं। सैटेलाइट की मुख्य क्षमताओं और लक्ष्यों में ये शामिल हैं: ईओएस-05 विज़िबल/नियर-इन्फ्रारेड और शॉर्ट-वेव इन्फ्रारेड बैंड में मल्टीस्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेज लेता है। यह लगभग हर पाँच मिनट में चुनिंदा क्षेत्रों और हर तीस मिनट में पूरे भारतीय भू-भाग की इमेज लेता है, और मल्टीस्पेक्ट्रल मोड में लगभग 42 मीटर का स्थानिक रिज़ॉल्यूशन (स्पेशियल रिज़ॉल्यूशन) हासिल करता है। यह सैटेलाइट पृथ्वी के घूमने के साथ एक निश्चित स्थिति बनाए रखते हुए, लगभग 36,000 किमी की जियोसिंक्रोनस ऊंचाई से लगातार निगरानी करने में सक्षम बनाता है। यह कॉन्फ़िगरेशन एक ही बड़े इलाके को लगातार या लगभग लगातार कवर करता है, जबकि लो-अर्थ-ऑर्बिट इमेजिंग सैटेलाइट्स कुछ खास जगहों के ऊपर से केवल कभी-कभी ही गुज़रते हैं। इन क्षमताओं से जो मुख्य काम किए जा सकते हैं, उनमें ये शामिल हैं: (i) प्राकृतिक आपदाओं और अचानक होने वाली घटनाओं, जैसे चक्रवात, बाढ़, जंगल की आग, बादल फटने और आंधी-तूफान के लिए तेज़ी से निगरानी और समय रहते चेतावनी देना। (ii) मौसम पर नज़र रखना और पर्यावरण की निगरानी करना। (iii) खेती, वानिकी और प्राकृतिक संसाधनों का आकलन, जिसमें फसल की स्थिति, पेड़-पौधों की सेहत और जल निकायों की निगरानी शामिल है। (iv) रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए निगरानी, जिसमें राष्ट्रीय सीमाओं जैसे महत्वपूर्ण इलाकों पर लगातार नज़र रखना शामिल है। जीएसएलवी की जानकारी जीएसएलवी-एफ 17 मिशन इसरो का कुल मिलाकर 103वां और 2026 का दूसरा मिशन है। यह जीएसएलवी मार्क I और II के लिए 19वां और साल का पहला मिशन है। जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल एक एक्सपेंडेबल लॉन्च सिस्टम है, जो जीएसएलवी मार्क III से अलग है। जीएसएलवी मार्क-I में रूसी क्रायोजेनिक स्टेज का इस्तेमाल किया गया है, जबकि मार्क-II में भारत में बना अपर स्टेज इस्तेमाल होता है; तीसरे स्टेज को छोड़कर दोनों वर्शन का कॉन्फ़िगरेशन एक जैसा है। यह व्हीकल पीएसएलवी के भरोसेमंद पार्ट्स जैसे S125/S139 सॉलिड रॉकेट बूस्टर और विकास इंजन का इस्तेमाल करता है। 18 लॉन्च में से जीएसएलवी को 12 बार सफलता मिली है, जबकि चार बार पूरी तरह और दो बार आंशिक रूप से असफलता का सामना करना पड़ा है, जिससे इसकी सफलता दर 72.2% रही है। 2010 से ऑपरेशनल जीएसएलवी मार्क-II की लागत $47 मिलियन है। इसकी ऊंचाई 51.7 मीटर है, जो मार्क-I की 49.13 मीटर की ऊंचाई से ज़्यादा है। यह रॉकेट लो अर्थ ऑर्बिट में 5,000 किलोग्राम तक और जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में 2,500 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम है, जो इसके पिछले वर्शन की तुलना में लगभग 1,000 किलोग्राम ज़्यादा है। यह 7,887 किलोन्यूटन का थ्रस्ट देता है और तीन स्टेज में काम करता है। निष्कर्ष पीएसएलवी रॉकेट की लगातार दो असफलताओं के बाद, इसरो अपने अगले लॉन्च के लिए तैयार है। तकनीकी उद्देश्यों के अलावा, एक सफल मिशन इसरो टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ाएगा और जनता का भरोसा भी मजबूत करेगा। उम्मीद है कि यह सैटेलाइट कई तरह के कामों में मदद करेगा, जैसे मौसम की जानकारी, आपदा की निगरानी (खासकर बाढ़, चक्रवात और जंगल की आग), खेती, वानिकी, और रणनीतिक व राष्ट्रीय सुरक्षा की निगरानी। - प्रोफ़ेसर (डॉ.) डी.के. पांडे विज़िटिंग सीनियर फ़ेलो, सेंटर फ़ॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़, एडजंक्ट प्रोफ़ेसर, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, सलाहकार, एकेडमिक काउंसिल, फ़ॉरेन पॉलिसी स्कूल और GNOIT, पूर्व एसोसिएट डीन, SoB, गलगोटिया विश्वविद्यालय।

प्रभासाक्षी 3 Sep 2026 3:44 pm

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समाचार नामा 3 Sep 2026 2:31 pm

6,000 लीटर यूरिन प्रतिदिन, इंसानी पेशाब अब हिमालय पिघला रहा है, महाप्रलय का अल्टीमेटम

मई 2023, समुद्र तल से करीब 5300 मीटर की ऊंचाई पर खुंबू ग्लेशियर में हाड़ कंपा देने वाली ठंड, लेकिन वहां का नजारा किसी लग्जरी रिजॉर्ट जैसा था। करीब 1600 टेंट, गरजते हुए जनरेटर, एस्प्रेसो मशीन की खनक, बड़ी स्क्रीन वाले टीवी, गर्म पानी के शावर और कालीन बिछे टेंटों में अंडरफ्लोर हीटिंग। लेकिन चकाचौंध की इस भीड़ में एक शख्स हाथ में नोटबुक लिए चुपचाप घूम रहा था। वो न तो टेंट गिन रहा था और न ही एवरेस्ट फतह करने आए पर्वतारोहियों के चेहरे। वो बस एक अजीब सा हिसाब लगा रहा था कि इस बेस कैंप में लोग दिन भर में कितनी बार पेशाब करने जा रहे हैं। नोटबुक थामे इस शख्स का नाम था किमलाल गौतम, नेपाल के चीफ सर्वे ऑफिसर। उस वक्त शायद लोगों को उनका यह काम अजीब लगा होगा, लेकिन तीन साल बाद, जुलाई 2026 में जब उनकी यह गिनती साइंस जर्नल रीजनल एनवायरमेंटल चेंज में छपी, तो पूरी दुनिया के होश उड़ गए। आंकड़ा कहता है कि 2023 के सिर्फ एक क्लाइंबिंग सीजन में इंसानों की पैदा की गई गर्मी ने खुंबू ग्लेशियर की करीब 2,492 टन बर्फ पिघला दी। गौर कीजिए, यह तबाही सूरज की तपिश या मौसम के बदलाव से नहीं हुई, बल्कि कैंप में धुआं फेंकते जनरेटरों, धधकते चूल्हों और सबसे बढ़कर इंसानी शरीर से निकली गर्मी और पेशाब की वजह से हुई। तो अब सवाल सीधा और सनसनीखेज है-क्या इंसान का पेशाब दुनिया के सबसे ऊंचे ग्लेशियर को पिघला रहा है? आइए समझते हैं इस खौफनाक हकीकत की पूरी कहानी। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान से यारी पड़ी इतनी भारी, पुराना कर्ज चुकाने के लिए सऊदी ले रहा 8 अरब डॉलर का लोन क्या बेस कैंप का टॉयलेट बन चुका है टाइम बम? आप जवाब सुनेंगे तो आप हैरान हो जाएंगे क्योंकि इसका जवाब है हां। दरअसल जिन एवरेस्ट को हम एक दुर्गम और वीरान पहाड़ समझते हैं, उसका बेस कैंप अब सिर्फ कैंप नहीं रह गया है। सीजन में यहां पर करीब 2000 लोग आते हैं। पर्वतारोही होते हैं। गाइड, कुक, पोर्टर और डॉक्टर्स तक होते हैं। यानी कि कुछ महीनों के लिए यहां एक पूरा का पूरा मौसमी कस्बा बस जाता है। 2023 में नेपाल ने एवरेस्ट के लिए 478 परमिट जारी किए थे और उस वक्त यह रिकॉर्ड था। लेकिन 2026 में यह रिकॉर्ड भी टूट गया था क्योंकि संख्या पहुंच गई थी करीब 490 परमिट तक और यह नियम के मुताबिक हर विदेशी पर्वतारोही के साथ कम से कम एक नेपाली गाइड भी ऊपर जा रहा था। यानी कि एवरेस्ट का बेस जैसा कि हमने कहा कि वो एक सिर्फ कैंप नहीं रहा। क्या है ग्लेशियर लेक बर्स्ट फ्लड का खौफनाक सच? अब एक नई स्टडी से पता चला है कि इस गतिविधि की वजह से पिघल रहे खुम्बु ग्लेशियर को कितना नुकसान हो रहा है। रिसर्चर्स का अनुमान है कि हर वसंत में लगभग 30 लाख किलोग्राम ग्लेशियर की बर्फ पिघलकर खत्म हो जाती है, क्योंकि ये सुख-सुविधाएं जुटाने में काफी ऊर्जा खर्च होती है। 2023 में बेस कैंप में लगभग 1,600 टेंट में खाना पकाने, हीटिंग और बिजली के लिए 824 सिलेंडर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG), 18,935 लीटर केरोसिन और 5,130 लीटर गैसोलीन का इस्तेमाल किया गया। सबसे चौंकाने वाली बातों में से एक यह है कि खुम्बु ग्लेशियर में अनुमानित 154 टन बर्फ के पिघलने के लिए इंसानी पेशाब जिम्मेदार है। जियोस्पेशियल साइंटिस्ट और इस स्टडी के मुख्य लेखक तथा नेपाल के चीफ सर्वे ऑफिसर, खिम लाल गौतम ने कहा अगर आप ज़्यादा पानी पीते हैं, तो आपको उसे शरीर से बाहर निकालना ही पड़ता है। उन्होंने ज़्यादा ऊंचाई पर शरीर को हाइड्रेटेड रखने की ज़रूरत का ज़िक्र करते हुए यह बात कही। हज़ारों पर्वतारोही और गाइड रोज़ाना 6,000 लीटर से ज़्यादा कचरा पैदा करते हैं। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में अमेरिका का महा-ऑपरेशन! Iran से भारी तनाव के बीच 40 युद्धपोतों ने 1.8 करोड़ बैरल तेल को दिया सुरक्षा कवच इंसानी गतिविधियों से पिघल रही 30 लाख किलो बर्फ! बेस कैंप में बने पिट-वॉल्ट टॉयलेट लगभग 2,000 लोगों का कचरा इकट्ठा करते हैं, जिसे नीचे लाया जाता है, लेकिन ज़्यादातर लोग ग्लेशियर पर ही पेशाब करते हैं, जो आस-पास के समुदायों के लिए पीने के पानी का स्रोत है। गौतम ने कहा, यह देखने के लिए कि हम हर साल कितनी ज़्यादा बर्फ़ खो रहे हैं, आपको वैज्ञानिक होने की ज़रूरत नहीं है। आप इसे अपनी आँखों से भी देख सकते हैं। गौतम 2011 से अब तक एवरेस्ट पर 365 से ज़्यादा दिन बिता चुके हैं। हालाँकि इंसानी पेशाब का असर चिंताजनक है, लेकिन नेपाल के क्लाइमेट साइंटिस्ट और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. सुदीप ठाकुरि ने कहा कि ये नतीजे कोई हैरानी की बात नहीं थे और हीटिंग, खाना पकाने और रोशनी के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी तरह के ईंधन की तुलना में पेशाब का असर आख़िरकार कम ही होता है। इस स्टडी को करने के लिए गौतम ने बेस कैंप ऑपरेटरों से डेटा इकट्ठा किया। वहीं, लुइसियाना में अपने ऑफिस में, स्टडी की को-ऑथर और U.S. जियोलॉजिकल सर्वे की एमरिटस साइंटिस्ट वर्जीनिया बर्केट ने दशकों के सैटेलाइट डेटा को व्यवस्थित करने में मदद की। इस डेटा से ग्लेशियर पर समय के साथ तापमान में बदलाव का पता चलता था। जब गौतम ग्लेशियर पर हो रहे रियल-टाइम बदलावों की जांच कर रहे थे, तो बर्केट उन्हें ये आंकड़े भेजती रहती थीं। यह आसान नहीं था। लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट इन्फ्रारेड रेडिएशन या निकलने वाली गर्मी को मापते हैं, लेकिन अगर बादल छाए हों तो वे रीडिंग नहीं ले पाते—और एवरेस्ट पर बादल छाए रहना आम बात है। इसलिए टीम ने 1991 से 2023 तक की हर उस थर्मल इमेज को देखा जिसमें बादल नहीं थे। रिसर्चर्स ने उस दौरान ज़मीन की सतह के तापमान में आए बदलावों को देखा और बेस कैंप के नतीजों की तुलना ग्लेशियर के बर्फ़ीले हिस्से और ग्लेशियर के पास की एक दूसरी जगह से की। उन्होंने कहा कि यह चौंकाने वाला नतीजा था। हमने पाया कि बर्फ़ से ढके इलाके का तापमान बेस कैंप के मुकाबले सिर्फ़ आधा ही बढ़ा। इसे भी पढ़ें: US-Iran Tension के बीच फिर दहला West Asia, $100 के पार पहुंची Crude Oil की कीमतें ग्लेशियर झीलें’ बना लेता है ग्लेशियर के बाकी हिस्सों की तुलना में बेस कैंप का तापमान लगभग दोगुनी तेज़ी से बढ़ा। गौतम चेतावनी देते हैं कि इंसानों का असर इससे भी बुरा हो सकता है, क्योंकि उन्होंने हेलीकॉप्टर, ट्रेकर्स और याक जैसी गर्मी पैदा करने वाली चीज़ों को इसमें शामिल नहीं किया था। हालांकि हिमालय में बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन से बदलाव आ रहे हैं, लेकिन 2009 के बाद से एवरेस्ट के ग्लेशियरों में बर्फ पिघलने की दर लगभग दोगुनी हो गई है। और भले ही शरीर से निकलने वाले अपशिष्ट (मल-मूत्र) बर्फ पिघलने पर खाना पकाने जैसी गतिविधियों जितना असर न डालते हों, लेकिन इससे नेपाल की आर्थिक गतिविधियों खासकर पर्वतारोहण और पीने के पानी के स्रोतों, पनबिजली और सिंचाई के लिए खतरा पैदा होता है। गौतम का कहना है कि ग्लेशियर फटने से खतरनाक बाढ़ का भी खतरा है; शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि हाल ही में नेपाल और चीन में आई विनाशकारी बाढ़ की वजह यही थी। ऊंचाई पर शोध करने वाले पीटर हैकेट, जो इस अध्ययन में शामिल नहीं थे, कहते हैं कि बर्फ के इस तरह स्थानीय स्तर पर पिघलने से और अधिक हिमस्खलन हो सकते हैं और खतरनाक चढ़ाई और भी खतरनाक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका एक ऐसा असर भी है जिसे मापना मुश्किल है। 1981 में अकेले एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाले हैकेट ने कहा कि किसी ऊंचे कैंप में पहुँचने, सूर्यास्त के समय क्षितिज की ओर देखने और दर्जनों जमे हुए मल के ढेर देखने से ज़्यादा बुरा कुछ नहीं हो सकता।

प्रभासाक्षी 3 Sep 2026 2:10 pm

'भाजपा सांसद साबित करें वो इस देश के हैं या नहीं', पंजाब की मतदाता सूची से राघव चड्ढा का नाम कटने पर बोला विपक्ष

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समाचार नामा 3 Sep 2026 2:05 pm

परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड सरकार पर बरसे प्रदीप भंडारी, पंजाब में 'सिंडिकेट' चलाने का आरोप

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समाचार नामा 3 Sep 2026 1:59 pm

राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा पहुंचे अयोध्या, बोले-जीवन में दूसरी बार सेवा का मौका मिला

राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा पहुंचे अयोध्या, बोले-जीवन में दूसरी बार सेवा का मौका मिला

समाचार नामा 3 Sep 2026 12:21 pm

हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र, इसलिए 'वंदे मातरम' पर आपत्ति जताना बचकानी सोच: गीतांजलि अंगमो (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र, इसलिए 'वंदे मातरम' पर आपत्ति जताना बचकानी सोच: गीतांजलि अंगमो (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

समाचार नामा 3 Sep 2026 12:14 pm

140 KM दूर से दुश्मन को निशाना बनाएगा भारत का Khagantak 243 Glide Bomb, परीक्षण सफल होते ही China, Pakistan की बढ़ी टेंशन

दुश्मनों पर अब आसमान से कहर बरपाने की भारत की ताकत और बढ़ गई है। भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम ‘खगांतक-243’ का सफल परीक्षण किया है। 140 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम यह हथियार भारतीय लड़ाकू विमानों को दुश्मन के ठिकानों पर दूर से ही सटीक और घातक हमला करने की क्षमता देगा। भारतीय वायुसेना ने इस उपलब्धि को “Precision. Power. Pride” बताते हुए कहा है कि परीक्षण ने सभी निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। IAF के मुताबिक, यह भारतीय वायुसेना और भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया तथा रक्षा नवाचार के जरिए देश की मारक क्षमता को नई ऊंचाई तक पहुंचाने वाला कदम है। क्या है खगांतक-243, जो दुश्मन के लिए बन सकता है नया खतरा? हम आपको बता दें कि खगांतक-243 एक 300 किलोग्राम श्रेणी का एयरबोर्न लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि लड़ाकू विमान को लक्ष्य के ठीक ऊपर पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विमान सुरक्षित दूरी से इस हथियार को छोड़ सकता है और इसके बाद बम अपने पंखों और नियंत्रण सतहों की मदद से लक्ष्य की ओर ग्लाइड करेगा। यानी युद्ध की स्थिति में भारतीय लड़ाकू विमान दुश्मन के मजबूत एयर डिफेंस क्षेत्र में गहराई तक घुसने के जोखिम को कम करते हुए दूर से हमला कर सकते हैं। यही आधुनिक हवाई युद्ध की सबसे बड़ी जरूरत है। यानि दुश्मन पर हमला करो, लेकिन उसकी जवाबी मार की सीमा से बाहर रहो। इसे भी पढ़ें: SCO के मंच से चीन और पाकिस्तान को एक साथ धोकर मोदी ने दुनिया की वाहवाही लूट ली रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 12,000 मीटर की ऊंचाई से छोड़े जाने पर खगांतक-243 की रेंज 140 किलोमीटर से अधिक हो सकती है। इसका डिजाइन भी खास है। इसमें एक बेलनाकार बॉडी, बीच में घूमने वाले ग्लाइड विंग और पीछे पांच नियंत्रण सतहें हैं, जो इसे लक्ष्य की दिशा में नियंत्रित करने में मदद करती हैं। 125 किलो विस्फोटक भराव, दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार खगांतक-243 में Mk 81 जनरल-पर्पज ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वारहेड लगाया गया है, जिसमें करीब 125 किलोग्राम विस्फोटक भराव है। यह संयोजन इसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, संरचनाओं और अन्य लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी हथियार बना सकता है। इस हथियार श्रेणी की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसका मॉड्यूलर डिजाइन है। यानी भविष्य में मिशन की जरूरत और ग्राहक की मांग के अनुसार अलग-अलग वारहेड और गाइडेंस कॉन्फिगरेशन विकसित किए जा सकते हैं। यही लचीलापन खगांतक श्रेणी को केवल एक हथियार नहीं, बल्कि भविष्य में विकसित होने वाली एक व्यापक प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता का आधार बना सकता है। BEL और JSR Dynamics की स्वदेशी साझेदारी साथ ही खगांतक-243 भारत के रक्षा उद्योग की साझेदारी का भी उदाहरण है। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और JSR Dynamics ने मिलकर विकसित किया है। JSR Dynamics ने बम की बॉडी और नियंत्रण प्रणाली विकसित की है, जबकि BEL ने इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सबसिस्टम उपलब्ध कराए हैं। भारतीय वायुसेना पहले ही BEL को खगांतक-243 म्यूनिशन के लिए ऑर्डर दे चुकी है, हालांकि ऑर्डर की संख्या और अनुबंध की कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है। इसका प्रारंभिक फ्लाइट टेस्ट प्लेटफॉर्म Su-30MKI है और भविष्य में इसे वायुसेना के अन्य विमानों के साथ भी एकीकृत किए जाने की संभावना है। चीन और पाक की तुलना में भारत का हथियार कितना मजबूत? यहां एक सवाल उठता है कि क्या चीन और पाकिस्तान के पास भी ऐसे हथियार हैं? इस सवाल का जवाब हां है लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि चीन और पाकिस्तान के पास मौजूद ऐसे हथियारों की अपेक्षा भारत के हथियार गुणवत्ता और मारक क्षमता में कहीं आगे हैं। हम आपको बता दें कि चीन और पाकिस्तान के पास भी स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड हथियार मौजूद हैं, लेकिन खगांतक-243 भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की अपनी स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी क्षमता को मजबूत करता है। चीन के पास लंबे समय से LS सीरीज जैसे प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम मौजूद हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में LS परिवार को ऐसे हथियारों के रूप में वर्णित किया गया है, जिनमें पारंपरिक बमों को गाइडेंस और ग्लाइड किट के जरिए स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन हथियार में बदला जा सकता है। चीन इस क्षेत्र में लंबे समय से निवेश कर रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तान के पास भी H-2 और H-4 Stand-Off Weapons जैसे हथियार उपलब्ध हैं। H-4 की घोषित रेंज लगभग 120 किलोमीटर बताई गई है, हालांकि इसकी क्षमताओं और कॉन्फिगरेशन से जुड़े कई विवरण अलग-अलग रूप में सामने आते रहे हैं। चीन और पाकिस्तान की अपेक्षा भारत के हथियार की विशेषता देखें तो सामने आता है कि भारत तेजी से अपनी स्वदेशी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता को मजबूत कर रहा है। खगांतक-243 की 140 किलोमीटर से अधिक की रिपोर्टेड रेंज इसे पाकिस्तान के सार्वजनिक रूप से ज्ञात H-4 की घोषित 120 किमी रेंज से आगे रखती है। बदल जाएंगे सामरिक समीकरण इसके अलावा, खगांतक-243 का सबसे बड़ा रणनीतिक प्रभाव यह हो सकता है कि भारतीय वायुसेना को दूर से सटीक हमला करने का एक और स्वदेशी विकल्प मिलेगा। सीमा के पास तैनात दुश्मन के एयर डिफेंस, सैन्य ठिकाने, लॉजिस्टिक केंद्र और महत्वपूर्ण संरचनाएं भविष्य के संघर्ष में अधिक खतरे में आ सकती हैं। 140 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला करने की क्षमता का अर्थ है कि लड़ाकू विमान लक्ष्य के ऊपर मंडराए बिना भी प्रहार कर सकता है। इससे विमान और पायलट का जोखिम कम हो सकता है तथा दुश्मन के लिए जवाबी कार्रवाई की चुनौती बढ़ सकती है। देखा जाये तो खगांतक-243 सिर्फ एक नया बम नहीं है। यह उस दिशा में भारत की तेज रफ्तार का संकेत है, जहां युद्ध के मैदान में विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी और भारतीय उद्योग सीधे भारत की मारक शक्ति तैयार करेगा। भारतीय वायुसेना का सफल परीक्षण साफ संदेश देता है कि अब भारत सिर्फ दुश्मन की सीमा तक पहुंचने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि दूर आसमान से सटीक और घातक प्रहार करने की क्षमता को स्वदेशी ताकत के दम पर मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में खगांतक-243 जैसे हथियार भारत की हवाई रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और चीन से लेकर पाकिस्तान तक, दोनों मोर्चों पर भारत की स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता को नई धार दे सकते हैं। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 3 Sep 2026 11:21 am

अमेरिका, चीन और इजरायल आगे, लेकिन भारत भी बन सकता है वैश्विक एआई पावर: एलेक्स कार्प

चैपल हिल (नॉर्थ कैरोलिना), 3 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी सॉफ्टवेयर और डेटा एनालिटिक्स कंपनी पैलेंटिर टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलेक्स कार्प ने कहा है कि भारत एक प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शक्ति के रूप में उभर सकता है। उन्होंने इसके लिए देश की तकनीकी प्रतिभा, ऊर्जा क्षेत्र में की गई पहल और उन्नत एआई मॉडल विकसित करने की क्षमता को प्रमुख कारण बताया।

समाचार नामा 3 Sep 2026 8:29 am

'कर्नाटक को केंद्रीय फंड में अपना हिस्सा मिलना चाहिए', नीति आयोग के उपाध्यक्ष से बोले सीएम शिवकुमार

'कर्नाटक को केंद्रीय फंड में अपना हिस्सा मिलना चाहिए', नीति आयोग के उपाध्यक्ष से बोले सीएम शिवकुमार

समाचार नामा 2 Sep 2026 11:28 pm

लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी राष्ट्रीय स्तर के ट्रेनिंग हब के तौर पर उभर रही है: सरमा

लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी राष्ट्रीय स्तर के ट्रेनिंग हब के तौर पर उभर रही है: सरमा

समाचार नामा 2 Sep 2026 11:22 pm

'चुनिंदा लोगों का धन बढ़ रहा, आम आदमी की जेब खाली', जीडीपी ग्रोथ के दावों पर अधीर रंजन चौधरी

'चुनिंदा लोगों का धन बढ़ रहा, आम आदमी की जेब खाली', जीडीपी ग्रोथ के दावों पर अधीर रंजन चौधरी

समाचार नामा 2 Sep 2026 11:18 pm

गुजरात में नकली दवाओं पर सरकार सख्त, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- जीरो टॉलरेंस नीति

गांधीनगर, 2 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 'जीरो-टॉलरेंस' नीति अपनाई है। राज्य में 50 दवा कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं और घटिया दवाओं, खाने-पीने की चीजों में मिलावट और अवैध दवा नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

समाचार नामा 2 Sep 2026 10:37 pm

'सीता का चरित्र राम से भी महान था', सीएम शिवकुमार ने सोनिया गांधी के त्याग का दिया उदाहरण

'सीता का चरित्र राम से भी महान था', सीएम शिवकुमार ने सोनिया गांधी के त्याग का दिया उदाहरण

समाचार नामा 2 Sep 2026 10:18 pm

'इतिहास और संदर्भ को समझने की जरुरत', स्वरा भास्कर पर शाजिया इल्मी का पलटवार

'इतिहास और संदर्भ को समझने की जरुरत', स्वरा भास्कर पर शाजिया इल्मी का पलटवार

समाचार नामा 2 Sep 2026 10:17 pm

राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा ने जारी किया 'संकल्प पत्र', बड़ी जीत का किया दावा

राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा ने जारी किया 'संकल्प पत्र', बड़ी जीत का किया दावा

समाचार नामा 2 Sep 2026 10:15 pm

'सरकार मंदिर में धंधा चलाना चाहती है', राम मंदिर सीईओ की नियुक्ति पर भड़के इमरान मसूद

'सरकार मंदिर में धंधा चलाना चाहती है', राम मंदिर सीईओ की नियुक्ति पर भड़के इमरान मसूद

समाचार नामा 2 Sep 2026 9:38 pm

बलिया की बिटिया रागिनी के सपनों को मिले 'पंख', आप सांसद संजय सिंह के निर्देश पर 'आप' ने बढ़ाया मदद का हाथ

व्हीलचेयर और ₹25,000 की आर्थिक मदद से रागिनी की राह हुई आसान, जल्द लगेगा कृत्रिम पैर: संजय सिंह

देशबन्धु 2 Sep 2026 8:57 pm

1984 के सिख नरसंहार पर भगवंत मान सरकार राजनीति कर रही है : एचएस फूलका

1984 के सिख नरसंहार पर भगवंत मान सरकार राजनीति कर रही है : एचएस फूलका

समाचार नामा 2 Sep 2026 8:42 pm

केपीसीसी प्रमुख हरिप्रसाद ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की निंदा की, बताया- 'गंभीर अन्याय'

केपीसीसी प्रमुख हरिप्रसाद ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की निंदा की, बताया- 'गंभीर अन्याय'

समाचार नामा 2 Sep 2026 7:39 pm

तेजी से बदल रही है भारत की तस्वीर

भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों, टाटा, बिरला, रिलायंस, अडानी, आदि को अपना व्यवसायिक साम्राज्य खड़ा करने में दशकों लग गए थे। इन समूहों को अपनी सम्पत्ति को 100 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंचाने में लगभग 30 वर्षों का समय लगा था परंतु आज के युवावर्ग द्वारा स्थापित की जा रही कम्पनियों को अपनी सम्पत्ति को 100 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंचाने में केवल 1 से 3 वर्ष का समय लग रहा है। भारत में समय बहुत तेजी से बदल रहा है और भारतीय युवा आज भारत की तस्वीर बदलने को उतावाले होते दिखाई दे रहे हैं। जून 2026 में एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स) का व्यवसाय करने वाली सर्वम कम्पनी ने अपनी स्थापना के केवल 3 वर्ष के अंदर ही 150 करोड़ (1.5 बिलियन) अमेरिकी डॉलर की सम्पत्ति खड़ी कर ली है। इसी प्रकार, आज जेप्टो एवं मेन्सा नामक ब्राण्ड कुछ ही महीनों में व्यवसाय के उस स्तर को प्राप्त कर लेते हैं, जिसे हासिल करने में पुरानी बड़ी कम्पनियों को कई दशक लग गए थे। आज के समय में टेक्नॉलोजी के क्षेत्र में स्थापित हो रही कम्पनियों की तुलना यदि इसी क्षेत्र में लगभग 20/25 वर्ष पूर्व स्थापित कम्पनियों से भी की जाय तो सम्पत्ति खड़ी करने के समय में बहुत अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। वर्ष 2000 में स्थापित कम्पनियों को यूनिकोन (100 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सम्पत्ति बनाना) बनने में लगभग 20 वर्ष से अधिक का समय लग रहा था, वहीं वर्ष 2020 में स्थापित कम्पनियों को यूनिकोन बनने में केवल एक वर्ष का समय लग रहा है। वित्तीय क्षेत्र में स्थापित की गई कम्पनियों को यूनिकोन बनने में 30 वर्ष का समय लगा है। वहीं मेन्सा ब्राण्ड जैसी कम्पनी को यूनिकोन बनने में केवल 6 माह का समय लगा है। बाजार वही है, परंतु समय तेजी से बदल रहा है। इस परिवर्तन में भारतीय युवाओं की प्रमुख भूमिका रही है। आज भारत में व्यावसायिक घराने/खानदान एवं अमीर लोग कहीं पीछे छूट गए हैं एवं युवा पीढ़ी तेजी से बिलिनायर की सूची में अपनी जगह बना रही है। पिछले 5 वर्षों के दौरान भारत में एक लाख से अधिक नए स्टार्ट-अप स्थापित हुए हैं। आज भारत ने अपने आप को, अमेरिका एवं चीन के बाद, दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्ट-अप इको सिस्टम में स्थापित कर लिया है। भारत में आज अधिक से अधिक लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से उपभोक्ता उत्पादों को बढ़ावा देने वाले स्टार्ट अप बन रहे हैं। किराना उत्पादों से संबंधित ऐप अधिक संख्या में बनाए जा रहे हैं क्योंकि यूपीआई जैसा पेमेंट गेटवे पूर्व से ही उपलब्ध है और भुगतान प्रणाली को अलग से विकसित करने की आवश्यकता ही नहीं है। साथ ही, 140 करोड़ नागरिकों का बायोमेट्रिक डाटा पहिले से ही सत्यापित है और यह उपभोक्ता उत्पादों से सम्बंधित ऐप बनाने वाले इंजीनियरों को उपलब्ध भी है। भारत में डिजिटल लाकर में 750 करोड़ से अधिक दस्तावेज जमा हो चुके हैं। सस्ता इंटरनेट डाटा उपलब्ध है एवं 90 करोड़ से अधिक भारतीय इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। इन परिस्थितियों के बीच आज 20 वर्ष के युवा एंटरप्रेन्योर को व्यवसाय स्थापना के प्रथम दिवस से ही पूरा भारत उसके उत्पाद के बाजार के रूप में उपलब्ध है। उक्त कारकों के चलते ही वर्ष 2021 में भारत में 45 नए यूनिकोन विकसित हुए थे। इसे भी पढ़ें: दुनिया जब बुरे दौर में है तब भारत के आर्थिक उजाले भारत के पास आज दुनिया के सबसे स्मार्ट एवं कुशल इंजीनीयर तो हैं परंतु हमारे पास अपने गूगल, अपना यू ट्यूब एवं अपना फेस बुक नहीं है। क्योंकि, भारत में उच्च स्तर का तकनीकी नवाचार नहीं हो पा रहा है जिससे उच्च तकनीकी के ऐप भारत में कम बन रहे हैं। हालांकि, विकसित देशों में जो भी उच्च स्तर के तकनीकी नवाचार हो रहे हैं इनमें भारतीय इंजिनीयरों की भी महती भूमिका रहती है। इसी कारण से भारतीय इंजीनियरों की विकसित देशों में भारी मांग है। भारतीय युवाओं को दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन करने के स्थान पर भारत में उच्च तकनीकी के नवाचार करने की ओर पूरा ध्यान देना चाहिए। अब तो विकसित देश भी यह मानने लगे हैं कि वर्तमान सदी केवल भारत की है। कई विकसित देशों सहित चीन में जनसंख्या वृद्धि दर अब ऋणात्मक हो चुकी है। साथ ही, इन देशों में वृद्ध नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पूरे विश्व में आज भारत एक युवा देश के रूप में उभर रहा है। अतः भारतीय युवाओं से न केवल भारत में आर्थिक विकास को गति देने बल्कि विश्व के अन्य कई देशों में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देने की अपेक्षा की जा रही है। कई देशों ने तो अपनी संसद में प्रस्ताव पास करने के उपरांत भारत सरकार से भारतीय युवाओं को इन देशों में भेजने की मांग की है। भारतीय युवा आज न केवल भारत में तेजी से यूनिकोन विकसित कर रहा है बल्कि आज भारतीय अन्य देशों में पहुंच कर अपने व्यापार का विस्तार भी कर रहे हैं, इसी कारण से आज प्रतिवर्ष भारत से लगभग 7 लाख नागरिक विभिन्न देशों में जाकर बस रहे हैं। श्री लक्ष्मी मित्तल ने ब्रिटेन में आरसेलोर स्टील कम्पनी खरीद ली है। यह कम्पनी पूर्व में बीमार कम्पनी की श्रेणी में शामिल थी परंतु मित्तल समूह ने इसे आज विश्व की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कम्पनी बना दिया है। इसी प्रकार वर्ष 2008 में टाटा समूह ने जैग्वार एवं लैंड रोवर कम्पनी को खरीद लिया था। भारतीय मूल के नागरिक आज ब्रिटेन में जायदाद निवेशकों के क्षेत्र में सबसे बड़े निवेशक माने जा रहे है। यूरोप में आज भारतीय कम्पनियां सबसे अधिक राशि का निवेश करती हुई दिखाई दे रही हैं और यूरोपीयन कम्पनियों का अधिग्रहण कर रही है। अमेरिका में भी लगभग यही स्थिति है। अमेरिका में सबसे बड़ी एल्यूमिनियम उत्पादक कम्पनी को भारतीय ने खरीद लिया है। इसी प्रकार, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, अडोबी जैसी बड़ी कम्पनियों को भारतीय मूल के नागरिक ही चला रहे हैं। भारतीय मूल के ही अजय बांगा आज विश्व बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बन गए हैं। भारत में आज 15 लाख इंजिनीयर प्रतिवर्ष बन रहे हैं। विश्व के लगभग समस्त देशों को आज भारतीय युवाओं की अत्यधिक आवश्यकता है। विशेष रूप से जापान एवं यूरोपीयन देशों में प्रौढ़ नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। चीन से आज कई देश दूर भाग रहे हैं क्योंकि चीन ने विभिन्न देशों को कर्ज दे रखा है, यदि कोई देश इस कर्ज का भुगतान समय पर नहीं कर पाता है तो चीन उस देश के संसाधनों पर अपना अधिकार जताने लगता है। इससे इन देशों के साथ चीन के सम्बंध अच्छे नहीं रहे हैं। दूसरी ओर भारत में राजनैतिक स्थिरता है, जिसके चलते आज भारत के विश्व के लगभग समस्त देशों के साथ सौहार्दपूर्ण सम्बंध हैं। भारत आज विश्व के कई देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते सम्पन्न कर रहा है। आज स्थिति यह निर्मित हो रही है कि भारतीय यूनिकोन अमेरिकी कम्पनियों का अधिग्रहण करने की तैयारी कर रहे हैं। भारत आज जापान, इजराईल, रूस, यूएई एवं अमेरिका जैसे देशों का रणनीतिक साझीदार है। साथ ही, भारत के सम्बंध अब चीन के साथ भी सामान्य हो रहे है। भारत आज वैश्विक दक्षिणी क्षेत्र की आवाज बन रहा है क्योंकि विश्व के कई देशों का अब चीन पर भरोसा नहीं रहा है। भारत आज जी-20 देशों के समूह का भी सदस्य है, तो जी-7 देशों के समूह एवं वैश्विक दक्षिणी क्षेत्र के बीच एक पुल का काम करता हुए भी दिखाई दे रहा है। भारत एससीओ का भी सदस्य है तो ब्रिक्स का भी सदस्य है। साथ ही, भारत क्वाड का भी सदस्य है। इस प्रकार, भारत आज विश्व के लगभग समस्त महत्वपूर्ण समूहों का सदस्य है एवं भारत के विश्व के लगभग समस्त देशों के साथ बहुत अच्छे, सौहार्दपूर्ण, व्यावसायिक एवं व्यावहारिक सम्बंध हैं। इसी कारण से ही कुशल भारतीय युवाओं की मांग आज पूरे विश्व में कई देशों द्वारा की जा रही है। - प्रहलाद सबनानी सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक के-8, चेतकपुरी कालोनी, झांसी रोड, लश्कर, ग्वालियर - 474 009

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 6:56 pm

दुनिया जब बुरे दौर में है तब भारत के आर्थिक उजाले

दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, वह आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से असाधारण चुनौतियों का दौर है। रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सामने कठिन प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ऐसे समय में भारत की अर्थव्यवस्था ने जिस मजबूती का परिचय दिया है, वह केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते भारत की सामर्थ्य का प्रमाण है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत को ऐसी उम्मीद के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसकी ओर दुनिया आश्चर्य और विश्वास दोनों के साथ देख रही है। इस विकास दर ने वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत की आर्थिक शक्ति और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है एवं एक उजाला बिखेरा है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वृद्धि ऐसे समय दर्ज हुई है, जब परिस्थितियां सामान्य नहीं थीं। महंगाई, ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास पथ मजबूत बना रहा। पिछले वर्ष इसी तिमाही में विकास दर 6.9 प्रतिशत थी। यानी एक वर्ष में आर्थिक वृद्धि की गति में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दिया है। घरेलू मांग की मजबूती, सरकारी पूंजीगत व्यय, विनिर्माण, निर्माण और निर्यात जैसे क्षेत्रों का योगदान इस प्रदर्शन के पीछे महत्वपूर्ण रहा है। आर्थिक विकास का वास्तविक अर्थ तभी समझ में आता है, जब उसे उसके वैश्विक संदर्भ में देखा जाए। आज दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं केवल आर्थिक नीतियों से प्रभावित नहीं हो रहीं, बल्कि युद्ध, कूटनीतिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक संबंध भी उनकी दिशा तय कर रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया का तनाव ऊर्जा बाजार और वैश्विक आपूर्ति तंत्र के लिए चिंता पैदा करता है। इन परिस्थितियों में भारत का अपेक्षाकृत तेज आर्थिक विकास यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपने लिए ऐसे मजबूत घरेलू आधार तैयार किए हैं, जो बाहरी झटकों को सहने की क्षमता रखते हैं। यही वह परिवर्तन है जो भारत को केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे ले जा रहा है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल घरेलू बाजार है। करोड़ों उपभोक्ताओं की मांग, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार, बुनियादी ढांचे पर निवेश और बदलती उपभोग संस्कृति ने अर्थव्यवस्था को आंतरिक गति प्रदान की है। जब वैश्विक बाजार अनिश्चित हों, तब घरेलू मांग अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षा-कवच का काम करती है। इसीलिए वर्तमान विकास दर में घरेलू मांग की मजबूती को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में आर्थिक विकास दर ने चौंकाया इस आर्थिक प्रदर्शन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि वृद्धि केवल एक क्षेत्र के सहारे नहीं टिकी है। विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत धीरे-धीरे उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। लंबे समय तक भारत की अर्थव्यवस्था को मुख्यतः सेवा क्षेत्र की शक्ति के रूप में देखा जाता रहा, लेकिन अब देश में उत्पादन बढ़ाने, घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देने और बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में किए गए प्रयासों से औद्योगिक क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। निर्माण क्षेत्र भी रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सड़कें, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, आवास, औद्योगिक गलियारे और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश का प्रभाव केवल आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों में नहीं दिखाई देता, बल्कि उससे भविष्य की आर्थिक क्षमता भी निर्मित होती है। भारत की वर्तमान आर्थिक यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनाई गई नीतियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछले वर्षों में सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन, विनिर्माण, नए उद्यम, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा और औपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया है। जनधन खातों से लेकर डिजिटल भुगतान तक और राजमार्गों से लेकर रेलवे के आधुनिकीकरण तक, आर्थिक गतिविधियों का एक व्यापक तंत्र तैयार हुआ है। वस्तु एवं सेवा कर ने देश के बड़े बाजार को अधिक एकीकृत करने में भूमिका निभाई है। दिवाला एवं दिवालियापन संहिता जैसी व्यवस्थाओं ने कारोबारी वातावरण को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं ने अनेक क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन और निवेश को बढ़ावा दिया है। इन नीतियों का वास्तविक मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके परिणामों से होना चाहिए। सकल घरेलू उत्पाद के ताजा आंकड़े इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत अवश्य देते हैं। आम नागरिक के लिए आर्थिक विकास का अर्थ तभी सार्थक है, जब उसके जीवन में रोजगार के अवसर बढ़ें, आय में वृद्धि हो, महंगाई नियंत्रित रहे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हों तथा जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार आए। सकल घरेलू उत्पाद हमें अर्थव्यवस्था की गति बताता है, लेकिन यह नहीं बताता कि उस विकास का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक किस प्रकार पहुंच रहा है। इसलिए भारत की अगली चुनौती तेज विकास से आगे बढ़कर गुणवत्तापूर्ण और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। आर्थिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण कसौटी रोजगार है। विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र का विस्तार इसलिए आशाजनक है क्योंकि ये बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन भविष्य में भारत को ऐसे उद्योगों की आवश्यकता होगी, जो बड़ी संख्या में युवाओं को सम्मानजनक और स्थायी रोजगार दे सकें। भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। यदि उसे कौशल, शिक्षा, तकनीक और रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलते हैं तो यही युवा शक्ति भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की सबसे बड़ी ऊर्जा बन सकती है। भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना होना चाहिए। आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं को इतना मजबूत करना है कि भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सके। आज दुनिया चीन के विकल्प के रूप में विभिन्न उत्पादन केंद्रों की तलाश कर रही है। भारत के पास विशाल बाजार, युवा मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता और लोकतांत्रिक व्यवस्था जैसी विशिष्ट ताकतें हैं। यदि भारत विनिर्माण, अर्धचालक, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं में अपनी क्षमता बढ़ाता है, तो वह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में कहीं अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है। 2047 का विकसित भारत केवल सरकार का संकल्प नहीं, बल्कि देशवासियों की सामूहिक आकांक्षा है। 7.8 प्रतिशत की विकास दर इस यात्रा में एक उत्साहजनक पड़ाव है, मंजिल नहीं। भारत को लगातार उच्च विकास दर, मजबूत वित्तीय व्यवस्था और स्थिर आर्थिक वातावरण के साथ-साथ बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर भी समान ध्यान देना होगा। भारत की आर्थिक कहानी अब केवल आंकड़ों की कहानी नहीं रह गई है। यह आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की कहानी बन रही है। दुनिया जब युद्ध और आर्थिक अस्थिरता की छाया में अपनी दिशा तलाश रही है, तब भारत का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन उसे एक भरोसेमंद और संभावनाशील शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। 7.8 प्रतिशत की विकास दर निश्चित रूप से भारत के लिए गर्व का विषय है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि भारत ने यह संदेश दिया है कि वैश्विक संकटों के बीच भी उसकी आर्थिक बुनियाद मजबूत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही आर्थिक नीतियों और योजनाओं को अब अगले चरण में अधिक रोजगार, अधिक निवेश, अधिक उत्पादन और अधिक समान अवसरों से जोड़ना होगा। भारत के आर्थिक आकाश पर उगता यह उजाला तभी स्थायी प्रकाश बनेगा, जब विकास की रोशनी देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन तक पहुंचे। यही 2047 के विकसित भारत की वास्तविक कसौटी होगी और यही आर्थिक शक्ति को जनशक्ति में बदलने का मार्ग भी। - ललित गर्ग लेखक, पत्रकार, स्तंभकार

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 6:53 pm

मध्य प्रदेश: 'जनसेवा कनेक्ट' पहल के तहत शिवपुरी में पोस्ट ऑफिस को डिजिटल अपग्रेड मिला

मध्य प्रदेश: 'जनसेवा कनेक्ट' पहल के तहत शिवपुरी में पोस्ट ऑफिस को डिजिटल अपग्रेड मिला

समाचार नामा 2 Sep 2026 6:23 pm

'7 लाख घरों को पीएनजी कनेक्शन और शहरों में 24 घंटे बिजली', राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा का वादा

'7 लाख घरों को पीएनजी कनेक्शन और शहरों में 24 घंटे बिजली', राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा का वादा

समाचार नामा 2 Sep 2026 6:18 pm

जीडीपी : वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत होने पर केंद्र ने किया खारिज

नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के आंकड़े को अच्छा दिखाने के लिए पिछले साल की पहली तिमाही की चालू जीडीपी के आंकड़े को संशोधित करके 86 लाख करोड़ रुपए से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो चालू कीमतों में जीडीपी की ग्रोथ 2.6 प्रतिशत थी।

देशबन्धु 2 Sep 2026 6:10 pm

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की युवाओं से अपील, 'सिगरेट, गुटखा और शराब छोड़ें, स्वस्थ जीवन अपनाएं'

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की युवाओं से अपील, 'सिगरेट, गुटखा और शराब छोड़ें, स्वस्थ जीवन अपनाएं'

समाचार नामा 2 Sep 2026 5:13 pm

जी20 की आम सहमति को चीन ने रोका

एशविले, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि चीन ने जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में आम सहमति बनने से रोक दिया।

देशबन्धु 2 Sep 2026 4:52 pm

'छात्रों की जीत': सीजेपी के आशुतोष रांका ने राजस्थान के स्कूल की मरम्मत का स्वागत किया

'छात्रों की जीत': सीजेपी के आशुतोष रांका ने राजस्थान के स्कूल की मरम्मत का स्वागत किया

समाचार नामा 2 Sep 2026 4:36 pm

मनोज झा ने राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले बयान का किया समर्थन, भाजपा बोली-लगा रहे बेबुनियाद आरोप

मनोज झा ने राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले बयान का किया समर्थन, भाजपा बोली-लगा रहे बेबुनियाद आरोप

समाचार नामा 2 Sep 2026 4:07 pm

CJP प्रोटेस्ट क्यों हुआ कैंसिल, CJI ने ऐसा क्या कह दिया, PM मोदी से इसका क्या है कनेक्शन?

NEET-UG पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए रद्द किया, तब अदालत कक्ष में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बीच एक-दूसरे की सराहना देखने को मिली। यह पार्टी मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के व्यंग्यात्मक जवाब के रूप में अस्तित्व में आई थी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने यह फैसला दिल्ली पुलिस और चार राज्य सरकारों द्वारा शीर्ष अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का उपयोग करने की अपील के बाद सुनाया। केंद्र सरकार पर केस वापस लेने के वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए CJP ने 5 सितंबर को एक मार्च निकालने का ऐलान किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने के बाद इस विरोध प्रदर्शन को वापस ले लिया गया। क्यों सीजेपी ऐन मौके पर पीछे हट गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिक्चर में आ गए। बीजेपी के पीछे हटने का मतलब यह कि उन्होंने 5 सितंबर का अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया है। पर जो वजह बताई जा रही है असली बात वही है या फिर कहानी में कुछ ट्विस्ट भी है। सीजेपी का प्रोग्राम था, तारीख भी तय हो चुकी थी। 5 सितंबर की। पर फिर कहानी में यू टर्न आ गया। केंद्र सरकार पीछे हटी तो कॉकरोच जनता पार्टी वाले भी। सीजेपी वालों ने ऐलान किया 5 सितंबर को अब कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होगा। बस इसके कुछ ही देर बाद सीन में एंट्री हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। उन्होंने वर्टिकल में कोई इंस्टा पर रील नहीं डाला है। बच्चों से कोई अपील भी नहीं की है। बीजेपी के अंदर से जो खबर आई है वो यह है कि प्रधानमंत्री जेन जी से संवाद करेंगे। इसे भी पढ़ें: नीट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज प्राथमिकी रद्द होने पर कॉजपा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बताया बड़ी जीत PM मोदी की Gen Z के साथ प्रस्तावित बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस पर दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (SRCC) जाने की संभावना है। यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि SRCC अपने 100 साल पूरे कर रहा है। न्यूज़ एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी के कॉलेज के शताब्दी समारोह में शामिल होने और छात्रों से बातचीत करने की उम्मीद है। इस प्रस्तावित दौरे का एक अहम हिस्सा मोदी और Gen Z छात्रों के बीच सीधी बातचीत हो सकती है। इस सेशन से छात्रों को प्रधानमंत्री के साथ अपने विचार, उम्मीदें और चिंताएं साझा करने का मौका मिलने की संभावना है। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब BJP 'जेन-Z' (Gen Z) तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। पार्टी युवाओं से जुड़ने और वोटरों की अगली पीढ़ी के साथ बातचीत को मज़बूत करने के लिए एक खास रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी ने हाल ही में 'जेन ज़ेड' (Gen Z) तक पहुँचने के अपने कार्यक्रम के लिए एक टीम बनाई है। इसका मकसद सीनियर नेताओं और युवा प्रतिनिधियों को एक साथ लाना है। इस पहल का उद्देश्य युवा भारतीयों की उम्मीदों को समझना और बातचीत व भागीदारी के लिए और मौके बनाना है। उम्मीद है कि पार्टी युवाओं के साथ बातचीत को केवल पारंपरिक राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय, सीधे जुड़ने और बातचीत करने पर ध्यान देगी। बीजेपी का युवाओं तक पहुँचने का प्लान HT की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी ने 'जेन ज़ी' (Gen Z) तक पहुँचने के लिए एक खास टीम बनाई है। पार्टी नेताओं ने छोटी सभाओं, कैंपस प्रोग्राम और सीधे बातचीत के ज़रिए युवाओं को जोड़ने के तरीकों पर चर्चा की। अगस्त में, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने लोगों तक पहुँचने की योजना पर एक बैठक की। इसमें नेताओं ने कहा कि युवाओं को जोड़ने का काम लगातार चलना चाहिए, न कि यह सिर्फ़ बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों तक ही सीमित रहे। पार्टी की युवा रणनीति पर चर्चा के लिए अहम राज्यों जैसे चुनाव वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के करीब 45 नेताओं को भी शामिल किया गया। पार्टी युवाओं के लिए एक अभियान की भी योजना बना रही है, जिसमें बाइक यात्रा, हैकाथॉन, मैराथन, साइकिलिंग इवेंट और इनोवेशन चैलेंज जैसी गतिविधियाँ शामिल होंगी। बीजेपी की युवा शाखा 17 सितंबर को वडनगर-वाराणसी मोटरसाइकिल यात्रा शुरू करने वाली है। पार्टी के 'सेवा पखवाड़ा' में स्कूली छात्रों, कॉलेज जाने वाले युवाओं, पोस्ट-ग्रेजुएट स्कॉलर्स और युवा इनोवेटर्स के लिए कार्यक्रम शामिल होंगे। इसे भी पढ़ें: CJP ने 5 सितंबर का 'Delhi March' वापस लिया, SC में केंद्र के आश्वासन के बाद बड़ा फैसला BJP के लिए Gen Z क्यों अहम है? पिछले महीने, NEET विवाद को लेकर युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों ने सरकार को हिलाकर रख दिया था और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। बाद में प्रधान ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान Gen Z को गुमराह करने की कोशिशें की गई थीं। इन विरोध-प्रदर्शनों में हज़ारों युवा सड़कों पर उतर आए। छात्रों और युवा संगठनों ने पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्या और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही की मांग की। विरोध-प्रदर्शनों के दौरान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की आवाज़ भी प्रमुखता से सुनाई दी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि इन विरोध-प्रदर्शनों से बीजेपी की छवि को नुकसान पहुंचा है और विपक्षी पार्टियों को यह समझना चाहिए कि युवा CJP जैसे समूहों की ओर क्यों आकर्षित हुए। शिक्षा मंत्रालय छोड़ने के बाद, प्रधान ने अगस्त में कहा था कि NEET विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने 'जेन ज़ी' (Gen Z) को गुमराह करने की कोशिश की थी। उन्होंने इस विवाद के चलते अपना इस्तीफ़ा देने के फ़ैसले का भी बचाव किया। सीजेपी ने क्यों वापस लिया प्रोटेस्ट 5 सितंबर से फिर आंदोलन शुरू करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने अब अपने हाथ पीछे खींच लिए। तो सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई थी। इस बात पर कि स्टूडेंट प्रदर्शन को लेकर देश भर में दर्ज एफआईआर का क्या होगा? सीजीपी की शुरुआत से यह मांग थी कि एक छात्र के खिलाफ भी कारवाई नहीं होनी चाहिए। मोदी सरकार और बीजेपी के लोगों के बीच जिन कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी थी और जंतरमंतर वाला प्रोटेस्ट वापस हुआ था उनमें से एक तो यही था। तो देश की सबसे बड़ी अदालत में जब यह मामला गूंजा तो वहां सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों के संबंध में किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज एफआईआर पर आगे कारवाई या जांच नहीं होगी। इन सभी एफआईआर को हर मकसद के लिए बंद माना जाएगा। इसके बाद 5 सितंबर को होने वाले विरोध मार्च को वापस लेने की बात सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कह दी कि सितंबर 5 को जो हमारा पीसफुल प्रोटेस्ट मार्च था इंडिया गेट से न्यू पुलिस हेड क्वार्टर्स तक वो हम लोग कॉल ऑफ कर रहे हैं क्योंकि हमारे सारे डिमांड्स सरकार ने मान लिया तीन जजों की बेंच कर रही सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तीन जजों की बेंच कर रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अलावा बेंच में जस्टिस जॉय मौल्या बागची और जस्टिस बी मोहना भी शामिल है। भारत सरकार का पक्ष रख रहे हैं सॉललीिसिटर जनरल तुषार मेहता। मेहता ने अदालत में कहा कि सिर्फ दिल्ली पुलिस के मामले में केंद्र सरकार ही ने नहीं बल्कि बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट को लेकर दर्ज सभी एफआईआर रद्द करने की बात मान ली है। बच्चों के लिए हम कितना सोचते हैं। उनका दुख मेरा दुख है। यह अदालत में भी सरकार बता चुकी थी।

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 1:47 pm

मल्लिकार्जुन खड़गे की नजर में जीडीपी का मतलब 'गांधी परिवार डेवलपमेंट प्रोग्राम': शायना एनसी

मल्लिकार्जुन खड़गे की नजर में जीडीपी का मतलब 'गांधी परिवार डेवलपमेंट प्रोग्राम': शायना एनसी

समाचार नामा 2 Sep 2026 1:18 pm

कांग्रेस की शक्ति योजना ने कर्नाटक की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी : भाजपा

कांग्रेस की शक्ति योजना ने कर्नाटक की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी : भाजपा

समाचार नामा 2 Sep 2026 12:16 pm

यूपी के उत्पाद अब जर्मनी में मचाएंगे धूम, निवेश को भी मिलेगा नया विस्तार : केशव प्रसाद मौर्य

यूपी के उत्पाद अब जर्मनी में मचाएंगे धूम, निवेश को भी मिलेगा नया विस्तार : केशव प्रसाद मौर्य

समाचार नामा 2 Sep 2026 12:10 pm

जीडीपी में तेजी से हो रही वृद्धि रुपये की गिरावट और बेरोजगारी को नहीं छिपा सकती : शिवसेना (यूबीटी)

जीडीपी में तेजी से हो रही वृद्धि रुपये की गिरावट और बेरोजगारी को नहीं छिपा सकती : शिवसेना (यूबीटी)

समाचार नामा 2 Sep 2026 11:59 am

नितेश राणे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा-'ये लोग हिंदुत्व के खिलाफ कर रहे काम' (आईएएनएस इंटरव्यू)

नितेश राणे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा-'ये लोग हिंदुत्व के खिलाफ कर रहे काम' (आईएएनएस इंटरव्यू)

समाचार नामा 2 Sep 2026 11:51 am

जीतू पटवारी का सीएम मोहन यादव को पत्र-'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम की मांग

जीतू पटवारी का सीएम मोहन यादव को पत्र-'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम की मांग

समाचार नामा 2 Sep 2026 11:49 am

सुर्खियों में रहने के लिए विवादित बयान देने वालीं Swara Bhasker को Jauhar पर टिप्पणी करना भारी पड़ा, Priyanka Chaturvedi ने दिया करारा जवाब

फिल्म पद्मावत के जौहर दृश्य को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। दिल्ली में आयोजित ‘Woman, Life, Freedom’ कार्यक्रम में उनकी टिप्पणियों का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उन पर रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को अपमानित करने के आरोप लगे। विवाद बढ़ा तो स्वरा सामने आईं और कहा कि उनकी बात को “पूरी तरह गलत तरीके से अनुवादित और प्रसारित” किया गया है। लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि स्वरा ने वास्तव में क्या कहा। बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर उनकी सार्वजनिक टिप्पणियां बार-बार ऐसे विवादों का रूप क्यों ले लेती हैं, जिनके बाद उन्हें सफाई देनी पड़ती है कि “मेरा मतलब वह नहीं था”? हम आपको बता दें कि 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित चर्चा के दौरान स्वरा भास्कर ने पद्मावत के क्लाइमैक्स का जिक्र करते हुए कहा कि सैकड़ों महिलाओं को जौहर करते देख उन्होंने सोचा कि यदि वह स्वयं कभी यौन हिंसा की शिकार होतीं तो फिल्म का संदेश उन्हें क्या महसूस कराता। स्वरा का तर्क था कि ऐसी प्रस्तुति किसी बलात्कार पीड़िता को यह महसूस करा सकती है कि जीवित रहना कम सम्मानजनक है और मृत्यु को चुनना अधिक “बहादुरी” है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे समाज में, जहां यौन हिंसा गंभीर समस्या है, फिल्मों को महिलाओं की “पवित्रता” को उनके जीवन से अधिक मूल्यवान दिखाना चाहिए। उन्होंने जौहर दृश्य में एक गर्भवती महिला के शॉट पर भी आपत्ति जताई और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। इसे भी पढ़ें: GDP वृद्धि के आंकड़ों पर Mallikarjun Kharge का हमला, बेरोजगारी और महंगाई पर सरकार को घेरा विवाद तब बढ़ा जब सोशल मीडिया पर यह आरोप लगाया गया कि स्वरा ने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को “कायर” कहा है। इसके बाद स्वरा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो रानी पद्मावती को कायर कहा और न ही जौहर करने वाली अन्य महिलाओं को। स्वरा ने कहा कि उनका मूल आशय यह था कि फिल्म का दृश्य आधुनिक दौर के यौन हिंसा पीड़ितों तक कौन-सा संदेश पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई महिला बलात्कार के बाद जीवित रहती है, तो उसे कभी यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उसके जीवन या सम्मान का मूल्य कम हो गया है। यहां सवाल उठता है कि क्या स्वरा इतिहास के सबसे कठिन संदर्भ को नजरअंदाज कर रही हैं? स्वरा भास्कर का यह कहना कि बलात्कार या यौन हिंसा के बाद भी महिला का जीवन, सम्मान और अस्तित्व पूरी तरह मूल्यवान है, अपने आप में एक महत्वपूर्ण और आधुनिक मानवीय तर्क है। किसी भी पीड़िता को आत्महत्या, आत्मदाह या मृत्यु के लिए प्रेरित करना न तो स्वीकार्य है और न ही उसका महिमामंडन किया जाना चाहिए। लेकिन पद्मावत के जौहर प्रसंग और आधुनिक बलात्कार पीड़िताओं की परिस्थितियों को एक ही पैमाने पर रख देना इतिहास की जटिलताओं को अत्यधिक सरल बना देता है। जौहर की ऐतिहासिक चर्चा युद्ध, पराजय, सामूहिक हिंसा, दासता और विजेता की सत्ता के भयावह संदर्भ में होती है। उस समय महिलाओं के सामने सिर्फ यौन हिंसा का खतरा नहीं, बल्कि बंदी बनाए जाने, दासता, जबरन हरम में भेजे जाने और जीवन भर विजेता की संपत्ति बनकर रहने जैसी परिस्थितियों का भय भी मौजूद बताया जाता है। ऐसे में जौहर को केवल “महिलाओं को अपनी पवित्रता बचाने के लिए मरने का संदेश” कहकर खारिज कर देना क्या उस ऐतिहासिक त्रासदी को पर्याप्त रूप से समझना है? शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद रहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने भी स्वरा भास्कर के तर्क का विरोध करते हुए बहस में एक महत्वपूर्ण आयाम जोड़ा है। उनका कहना था कि युद्ध और आक्रमण जैसी चरम परिस्थितियों में मृत्यु, दासता या विजेता के हरम में जबरन जीवन बिताने के बीच महिलाओं द्वारा लिया गया निर्णय उनकी व्यक्तिगत राय के रूप में भी देखा जाना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी का तर्क मूलतः यह है कि उस निर्णय से असहमति हो सकती है, उसके ऐतिहासिक विवरणों पर बहस हो सकती है, लेकिन उन महिलाओं के सामने मौजूद परिस्थितियों को नजरअंदाज कर उनके फैसले को हल्के ढंग से देखना उचित नहीं है। देखा जाये तो यही इस विवाद का केंद्रीय प्रश्न है कि क्या आज की सुरक्षित, आधुनिक और संवैधानिक दृष्टि से सदियों पुराने युद्धकालीन निर्णयों का मूल्यांकन करना पर्याप्त है? इतिहास का अध्ययन करते समय यह याद रखना आवश्यक है कि अतीत के लोगों के पास वे विकल्प नहीं थे जो आज हमारे पास हैं। आधुनिक समाज में आत्मदाह का समर्थन नहीं किया जा सकता। लेकिन जौहर की ऐतिहासिक व्याख्या करते समय उसके संदर्भ को समझना आवश्यक है। जौहर को केवल “पवित्रता बचाने के लिए आत्महत्या” के रूप में देखना अधूरा दृष्टिकोण है। युद्धकालीन परिस्थितियों में यह सामूहिक रूप से विजेता के सामने समर्पण न करने और दासता को स्वीकार न करने की त्रासद प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जाता है। इसलिए यह कहना कि जौहर करने वाली महिलाएं “जीना नहीं चाहती थीं” या उनका निर्णय केवल स्त्री-विरोधी सामाजिक मानसिकता का परिणाम था, यह उस समय के हालात की वास्तविकता को नकारना है। हम आपको यह भी बता दें कि स्वरा भास्कर का पद्मावत से विवाद नया नहीं है। जनवरी 2018 में फिल्म की रिलीज के बाद उन्होंने निर्देशक संजय लीला भंसाली को एक खुला पत्र लिखा था। उस पत्र में भी उन्होंने फिल्म के जौहर दृश्य और महिलाओं की गरिमा को यौन शुचिता से जोड़ने पर सवाल उठाए थे। पद्मावत में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती की भूमिका निभाई थी, जबकि शाहिद कपूर और रणवीर सिंह भी फिल्म के प्रमुख कलाकार थे। फिल्म मलिक मोहम्मद जायसी की 16वीं शताब्दी की रचना पद्मावत से प्रेरित थी और रिलीज से पहले ही बड़े विवादों में घिर चुकी थी। फिल्म का जौहर दृश्य उसके सबसे चर्चित दृश्यों में शामिल रहा और आज, वर्षों बाद भी, वही दृश्य बहस का केंद्र बना हुआ है। वहीं स्वरा भास्कर के बयान के बाद उनके आलोचकों ने उन्हें निशाने पर ले लिया है। स्वरा भास्कर के आलोचकों का कहना है कि उनके साथ समस्या केवल विचारों की नहीं, बल्कि विचार व्यक्त करने की शैली की भी है। दरअसल, उनके बयान अक्सर इतने तीखे और उत्तेजक अंदाज में सामने आते हैं कि सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा हो जाता है। फिर विवाद बढ़ने पर स्वरा का स्पष्टीकरण आता है कि उनकी बात का अर्थ कुछ और था। इस बार भी स्वरा ने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती को “कायर” नहीं कहा। स्वरा भास्कर के आलोचक एक और असहज सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या लगातार सार्वजनिक चर्चा में बने रहने की इच्छा उनकी बयानबाजी को प्रभावित करती है? यहां एक और गंभीर प्रश्न उठता है कि क्या हम इतिहास को उसके अपने समय और परिस्थितियों में समझेंगे, या आज के नैतिक मानदंडों से उसका तत्काल फैसला करेंगे? स्वरा भास्कर और उन जैसी सोच रखने वालों को यह समझना होगा कि हर बार विवाद पैदा होने के बाद यह कहना कि “मेरा मतलब यह नहीं था”, सार्वजनिक संवाद की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। अगर बात बार-बार गलत समझी जा रही है, तो केवल श्रोताओं और आलोचकों को दोष देने की बजाय वक्ता को भी अपनी भाषा, उदाहरणों और प्रस्तुति पर विचार करना चाहिए। बहरहाल, पद्मावत और जौहर पर बहस जारी रह सकती है और जारी रहनी भी चाहिए। लेकिन बहस का आधार न तो इतिहास का अंध-महिमामंडन होना चाहिए और न ही आधुनिक दृष्टि के नाम पर अतीत की जटिल परिस्थितियों को खारिज कर देना चाहिए। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 11:38 am

जम्मू-कश्मीर में एक-दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन करेंगी एनसी और भाजपा, कानून व्यवस्था के मद्देनजर सुरक्षाबलों की तैनाती

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समाचार नामा 2 Sep 2026 11:13 am

पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को दी जन्मदिन की बधाई

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समाचार नामा 2 Sep 2026 11:12 am

तमिलनाडु भाजपा नेता तिरुचि में होने वाली बैठक में स्थानीय चुनावों और उपचुनावों पर करेंगे चर्चा

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समाचार नामा 2 Sep 2026 10:33 am

नितेश राणे का हिजाब-बुर्के पर सख्त रुख, बोले-जरूरत पड़ी तो प्रतिबंध पर विचार करेगी महाराष्ट्र सरकार (आईएएनएस इंटरव्यू)

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समाचार नामा 2 Sep 2026 10:19 am

'निर्माण स्थलों पर सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं', केरल मंत्री पीके बशीर का सख्त संदेश

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समाचार नामा 1 Sep 2026 11:27 pm

एलजी टीएस संधू ने 'वेस्ट-टू-वेल्थ' मॉडल अपनाने का आह्वान किया

एलजी टीएस संधू ने 'वेस्ट-टू-वेल्थ' मॉडल अपनाने का आह्वान किया

समाचार नामा 1 Sep 2026 9:19 pm

राम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर विहिप की डैमेज कंट्रोल की कवायद, केंद्रीय सलाहकार ने संतों से की मुलाकात,

राम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर विहिप की डैमेज कंट्रोल की कवायद, केंद्रीय सलाहकार ने संतों से की मुलाकात,

समाचार नामा 1 Sep 2026 8:25 pm

'डेड इकोनॉमी' विवाद पर कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा का पलटवार, बोले-जीडीपी आंकड़ों से नहीं छिपेगी जमीनी हकीकत

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समाचार नामा 1 Sep 2026 8:10 pm

'लोगों की बात सुनें, नियमों का पालन करें और काम की क्वालिटी सुनिश्चित करें', गुजरात सीएम की पंचायत प्रतिनिधियों से अपील

'लोगों की बात सुनें, नियमों का पालन करें और काम की क्वालिटी सुनिश्चित करें', गुजरात सीएम की पंचायत प्रतिनिधियों से अपील

समाचार नामा 1 Sep 2026 8:01 pm

7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ देश की तरक्की को दिखाती है: सीएम देवेंद्र फडणवीस

7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ देश की तरक्की को दिखाती है: सीएम देवेंद्र फडणवीस

समाचार नामा 1 Sep 2026 7:22 pm

भाजपा का 'बल्लारी चलो' मार्च: येदियुरप्पा ने कर्नाटक सरकार को उखाड़ फेंकने का लिया संकल्प

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समाचार नामा 1 Sep 2026 6:21 pm

'शुक्र है हम बिना वीजा के गोरखपुर जा सकते हैं', रवि किशन के 'स्पेन' वाले बयान पर चंद्रशेखर का तंज

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समाचार नामा 1 Sep 2026 6:11 pm

SCO के मंच से चीन और पाकिस्तान को एक साथ धोकर मोदी ने दुनिया की वाहवाही लूट ली

एससीओ शिखर सम्मेलन में वैसे तो सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने अपने अपने संबोधन में तमाम तरह के मुद्दे उठाये लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में शामिल मुद्दों की विविधता और सबको साथ लेकर चलने के जज्बे ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। साथ ही तमाम अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक भी यह देखकर हैरान हैं कि कैसे मोदी ने मंच पर साथ मौजूद चीन के राष्ट्रपति और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को जबरदस्त तरीके से घेर लिया। हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा किया तो वहीं संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सवाल पर चीन को भी आड़े हाथ लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आतंकवाद पर मोदी ने दो टूक कहा कि जो देश आतंकियों को पनाह देते हैं और आतंकवाद को अपनी नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंक कभी किसी की रणनीतिक संपत्ति नहीं बन सकता। वहीं कनेक्टिविटी के नाम पर संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौते को अस्वीकार करते हुए उन्होंने चीन को भी साफ संदेश दिया। किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भारत ने अपनी मौजूदगी को महज औपचारिक भागीदारी तक सीमित नहीं रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ के 25 वर्षों की यात्रा को अगले 25 वर्षों की दिशा तय करने के अवसर में बदलते हुए भारत का स्पष्ट एजेंडा सामने रखा। सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी के जरिये मोदी का संदेश था कि अब केवल घोषणाओं और संवाद से काम नहीं चलेगा, बल्कि सहयोग को ठोस परिणामों में बदलना होगा। इसे भी पढ़ें: BRICS 2026: क्या विस्तार के बाद Global Economy की दिशा बदल पाएगा भारत? 11 देशों के Leaders पर टिकी नजरें प्रधानमंत्री के भाषण का सबसे धारदार हिस्सा आतंकवाद पर था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर चुनौती है और इसके खिलाफ कार्रवाई केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आतंकवादी वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ, सुरक्षित ठिकानों और पूरे आतंकी तंत्र को ध्वस्त करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड को स्वीकार करने से साफ इंकार किया। यह संदेश ऐसे मंच से आया, जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ स्वयं मौजूद थे। भारत की कूटनीतिक उपलब्धि यहीं समाप्त नहीं हुई। एससीओ के 25 वर्ष पूरे होने पर स्वीकार की गई बिश्केक डिक्लेरेशन ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत की प्राथमिकताओं को मजबूती दी। घोषणा और शिखर सम्मेलन के अन्य फैसलों में आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। सुरक्षा चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए यूनिवर्सल सेंटर संबंधी नियमों को मंजूरी देना सदस्य देशों के बीच समन्वय और सूचना आदान-प्रदान को मजबूत करने वाला कदम है। भारत के लिए विशेष महत्व की बात यह भी रही कि अंग्रेजी को एससीओ के संस्थागत ढांचे में शामिल करने की दिशा में प्रगति हुई। साथ ही भारत द्वारा आगे बढ़ाई गई कई पहलों जैसे- एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम, यंग साइंटिस्ट फोरम और यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव को भी बिश्केक डिक्लेरेशन में स्थान मिला। यह संकेत है कि भारत अब एससीओ में केवल सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठाने वाला देश नहीं, बल्कि संगठन के बौद्धिक, सांस्कृतिक और संस्थागत भविष्य को आकार देने वाला सक्रिय साझेदार बन रहा है। मोदी ने अपनी विदेश नीति की व्यापक सोच को भी भाषण में स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यूरेशिया की सुरक्षा और शांति का संबंध अफगानिस्तान की स्थिरता से जुड़ा है और भारत वहां विकास तथा मानवीय सहायता जारी रखेगा। पश्चिम एशिया के संघर्षों का उदाहरण देते हुए उन्होंने आगाह किया कि आज की दुनिया में किसी एक क्षेत्र का युद्ध उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उसका असर ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है, जिसका सबसे अधिक बोझ ग्लोबल साउथ को उठाना पड़ता है। इसलिए भारत का स्पष्ट मत है कि युद्धों और तनावों का समाधान रणभूमि पर नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने नशे के कारोबार को भी क्षेत्रीय सुरक्षा का गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी केवल अपराध नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय स्थिरता पर हमला है। इस संदर्भ में एससीओ के तहत सुरक्षा, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नारकोटिक्स से निपटने के लिए बनाए जा रहे केंद्रों को प्रभावी और त्वरित कार्रवाई का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया। इस तरह आतंकवाद और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ भारत की चिंता को व्यापक एससीओ एजेंडे से जोड़ने में सफलता मिली। कनेक्टिविटी पर भी मोदी का संदेश उतना ही स्पष्ट और कूटनीतिक रूप से अहम था। भारत बाजारों को जोड़ने, व्यापार बढ़ाने और विकास के नए रास्ते खोलने वाली सभी पहल का समर्थन करता है, लेकिन ऐसी किसी भी परियोजना के लिए सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है। प्रधानमंत्री का यह संदेश चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल और विशेष रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसका एक हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है। भारत लंबे समय से इस परियोजना का विरोध करता रहा है और इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है। ऐसे में मोदी ने बिना किसी देश या परियोजना का नाम लिए एससीओ मंच से साफ कर दिया कि कनेक्टिविटी और विकास के नाम पर किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने सड़क, रेल और हवाई संपर्क बढ़ाने के अलावा कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। तीसरे स्तंभ यानि अपॉर्च्युनिटी के जरिए मोदी ने एससीओ सहयोग को आम लोगों से जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सफलता का वास्तविक पैमाना यह होना चाहिए कि युवाओं के लिए कितने अवसर बने, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुले, किसानों को तकनीक से कितना लाभ मिला और नागरिकों का जीवन कितना बेहतर हुआ। मोदी ने जोर दिया कि एससीओ सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं, बल्कि पीपुल-ड्रिवन पार्टनरशिप बनना चाहिए। इसी दिशा में भारत इस वर्ष पहले एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम की मेजबानी करेगा। इसके अलावा, शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय मुलाकातों ने भी भारत की सक्रिय कूटनीति को मजबूत किया। ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई, जबकि लाओस के राष्ट्रपति थोंगलून सिसौलिथ के साथ द्विपक्षीय संबंधों और संपर्क को मजबूत करने पर बातचीत हुई। ये मुलाकातें बताती हैं कि बहुपक्षीय मंचों पर भारत की रणनीति केवल भाषण देने की नहीं, बल्कि समानांतर रूप से द्विपक्षीय संबंधों का नेटवर्क मजबूत करने की भी है। बहरहाल, बिश्केक एससीओ समिट में मोदी ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा, दोहरे मापदंडों को चुनौती दी, संप्रभुता आधारित कनेक्टिविटी का सिद्धांत दोहराया और भारत की सांस्कृतिक व युवा-केंद्रित पहलों को एससीओ के एजेंडे में स्थापित किया। उनका संदेश साफ था कि “शेयर्ड जियोग्राफी” को “शेयर्ड अपॉर्च्युनिटीज” में बदलना होगा, विजन को परिणामों में और सरकार-केंद्रित सहयोग को जन-केंद्रित साझेदारी में परिवर्तित करना होगा। कुल मिलाकर, बिश्केक से भारत ने यही संकेत दिया है कि बदलते यूरेशियाई समीकरणों में वह एजेंडा तय करने वाला देश बन चुका है। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 1 Sep 2026 6:09 pm

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी, गृह मंत्रालय से सुरक्षा बढ़ाने की मांग

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी, गृह मंत्रालय से सुरक्षा बढ़ाने की मांग

समाचार नामा 1 Sep 2026 5:58 pm

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का संदेश- “E Pluribus Unum” से “वसुधैव कुटुम्बकम्” तक

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का भाषण सुनकर अमेरिका की एक प्रचलित कहावत स्मरण हो आई “E Pluribus Unum”, “ई प्लूरिबस यूनम” अर्थात् ‘अनेक से एक’। भागवत जी ने अनेक ऐसे बिंदु चिह्नित किए जहाँ, “वसुधैव कुटुम्बकम्” और अमेरिकी “E Pluribus Unum” परस्पर पूरक और पर्याय सिद्ध होते हैं। सबसे बड़ी बात, उनका संदेश केवल अमेरिका में बसे भारतीयों के लिए नहीं था; उसमें भारत, भारतीयता, विविधता, सह-अस्तित्व और विश्व-मानवता के प्रति एक व्यापक दृष्टि का विकास क्रम था। भागवत जी ने अपने प्रबोधन में विविधता को भारत की शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत की एकता विविधताओं से सजती है और विविधता में केवल परस्पर एडजस्ट करना पर्याप्त नहीं है, विविधता को स्वीकार कर उसे सम्मान और संरक्षण भी देना होगा। यही भारतीय दर्शन है। धार्मिक, नस्लीय और सांस्कृतिक ध्रुवीकरण के चक्र फँसे वर्तमान विश्व हेतु यही आवश्यक है। मोहनराव जी के न्यूयॉर्क उद्बोधन से निकला सबसे महत्वपूर्ण संदेश हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर स्पष्ट वक्तव्य था। उन्होंने दो टूक उस सोच को नकारा कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम समाज को साझा पूर्वजों से जोड़ते हुए “same DNA” की बात भी दोहराई। इसे भी पढ़ें: मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा: भारतीय चिंतन की सार्थक प्रस्तुति भारतीय-अमेरिकी समुदाय आज अमेरिका के सर्वाधिक सफल और प्रभावी प्रवासी समुदाय में से एक है। उसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और अनेक भाषाई-सांस्कृतिक समूह शामिल हैं। यदि भारतीय मूल के लोग अपनी भारतीय पहचान को किसी एक धार्मिक पहचान तक सीमित न करके एक साझा सभ्यतागत पहचान के रूप में देखते हैं, तो अमेरिकी समाज में भारतीय समुदाय की एकता और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। भागवत का संदेश अमेरिका में भारतीय मूल की नई पीढ़ी के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है। पहली पीढ़ी के प्रवासी प्रायः भारत से भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं, जबकि दूसरी और तीसरी पीढ़ी अमेरिकी सामाजिक परिवेश में पली-बढ़ी है। उनके सामने प्रश्न रहता है कि वे अपनी भारतीय सांस्कृतिक पहचान को अमेरिकी नागरिकता के साथ किस प्रकार संतुलित करें। भागवत का दृष्टिकोण इस प्रश्न का सकारात्मक उत्तर देता है, अमेरिका के प्रति पूर्ण निष्ठा और भारत की सभ्यतागत विरासत के प्रति सम्मान एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। ‘अपनी कर्मभूमि के प्रति निष्ठावान रहो’ विदेशी भूमि पर जाकर अपनों से यह कहने का सामर्थ्य, साहस और सहजता एक स्वयंसेवक या ‘संघ विचार’ के पास ही हो सकती है। यह विचार भारतीय-अमेरिकी समुदाय को “Hyphenated Identity” की समस्या से मुक्ति देकर एक आत्मविश्वासी नागरिक की पहचान देता है। मोहन भागवत जी के कहे पर चलें तो अमेरिकी भारतीय युवा श्रेष्ठ अमेरिकी होते हुए भी अपनी भारतीय जड़ों पर गर्व कर सकते हैं। भागवतजी ने भारतीयता को केवल धार्मिक आग्रह के रूप में नहीं बल्कि साझा सांस्कृतिक और मानवीय विरासत के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। विश्व में अमेरिका अब एक सर्वाधिक विविधता भरा समाज बन गया है। अमेरीका को सौजन्यशाली विविधता देने में भारत का सबसे बड़ा योगदान है। अमेरिका में बसे अनेक प्रकार के भारतीय समुदाय आज अमेरिकी समाज को एक इंद्रधनुष का रूप देते हैं। यह हमारे लिए गौरान्वित करने वाला विषय है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका की अर्थव्यवस्था, तकनीक, चिकित्सा, शिक्षा, उद्यमिता और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यदि इस समुदाय में सांस्कृतिक आत्मविश्वास और सामाजिक समरसता बढ़ती है तो उसका लाभ अमेरिकी समाज को भी मिलेगा। संघ प्रमुख ने भारतीय संस्कृति के प्रत्येक के रूप में तीन शब्द कहे “Acceptance, Respect and Protection”। उनके भाषण से यह पुनः सिद्ध हुआ कि ‘सहिष्णुता’ ‘Tolerance’ भारतीय शब्द है ही नहीं। भारतीयता का मूल स्वर है स्वीकार्यता। ‘सहिष्णुता’ ‘Tolerance’ से तो अहम् व्यक्त होता है। ‘सहिष्णुता’ शब्द से स्वर आता है कि “तुम मुझे पसंद नहीं किंतु फिर भी तुम यहाँ रह लो”। Acceptance और Respect का अर्थ है, सभी समुदाय को स्वीकारता हूँ और उनका सम्मान करता हूँ। सरसंघचालक के न्यूयार्क प्रवास के विषय में जोहरान ममदानी तो मध्ययुगीन मुस्लिम सिद्ध हो गए हैं। जोहरान ममदानी ने अप्रासंगिक बातें करके न्यूयार्क के मेयर पद की गरिमा को ही ध्वस्त कर दिया। ममदानी को पता ही नहीं कि भारत का दृष्टिकोण “Pluralistic” और “Secular republic” से बहुत आगे बढ़कर “वयं राष्ट्रे जागृयाम” का है। जिस प्रकार के शब्द ममदानी ने कहे हैं, उससे तो लगता है वे अपनी दिमागी हालत की चिंता करें, भारत की नहीं। यदि ममदानी के मूल्य लोकतांत्रिक नहीं हैं। वे इस कार्यक्रम के निजी स्थान, सार्वजनिक स्थान, कार्यक्रम रोकने जैसे शब्दों को प्रयोग करके ‘फासिस्ट’ और ‘मध्ययुगीन मुस्लिम’ सिद्ध हो गए हैं। जोहरान ममदानी ने अमेरिका के नागरिक और न्यूयार्क के मेयर की गरिमा के विरुद्ध जाकर यह व्यक्त किया कि यदि उनके पास अधिकार होते तो वे संघ प्रमुख को न्यूयार्क में भाषण ही नहीं देने देते। इससे अधिक शर्मनाक और वैचारिक निर्धनता भला और क्या हो सकती है। सरसंघचालक जी के भाषण के पूर्व ही “Exclusionary” जैसे शब्दों का प्रयोग करने वाले ममदानी इस भाषण के बाद अब वैचारिक रूप से कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रह गए हैं। न्यूयॉर्क के मेयर से नहीं किंतु ममदानी के घर जाकर आज उनसे प्रश्न किया जाना चाहिए कि वे अमेरिकी लोकतांत्रिक विचारों से इतने भिन्न क्यों हैं? और यदि वे न्यूयार्क नगर की सभ्यता, संस्कृति और सहजता को आत्मसात नहीं कर पा रहें हैं तो वे मेयर पद पर टिके ही क्यों हैं? जोहरान ममदानी ने तो न्यूयार्क में “Free Speech” के अधिकार पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। भागवत जी के न्यूयॉर्क भाषण ने हिंदुत्व, हिंदू संस्कृति, भारतीय सभ्यता, भारतीय सर्वसमावेशिकता, सर्व स्पर्शिता को बड़ी सहजता से स्थापित किया है। यद्यपि यह पहले भी स्थापित ही थी किंतु अब इसे एक नया आयाम मिल गया है। भारत के संदर्भ में अमेरिका में एक नए विमर्श का आरम्भ है, भागवत जी का यह वैचारिक प्रबोधन। “एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति”, “वसुधैव कुटुम्बकम्” और विविधता में एकता की परंपरा को मैडिसन स्क्वेयर से पुनर्परिभाषित करने हेतु मोहन राव जी का अभिनंदन कर रहा है ‘अमेरिकी भारतीय’ समुदाय। अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने का अर्थ दूसरे की पहचान से घृणा करना नहीं है, यह सिद्ध करने हेतु भी वे अभिनन्दनीय हैं। अमेरिका कहावत “E Pluribus Unum”, अर्थात् ‘अनेक से एक’, को स्थापित करता और भारतीयता के मूल से जोड़ता यह संघ संवाद एक अद्भुत सार्थकता, स्वीकार्यता, सहजता व सामुदायिकता के भाव को जन्म देता है। कहना ही होगा कि यदि शिकागो से अमेरिका और समूचे विश्व को स्वामी विवेकानंद जी ने एक वैचारिक माला दी थी तो मोहन राव जी भागवत ने इस ‘विवेकानंद माला’ का पुनर्जाप ही किया है। - डॉ. प्रवीण दाताराम

प्रभासाक्षी 1 Sep 2026 5:56 pm

सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, आईटी शेयरों में दिखी खरीदी

मुंबई, भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में करीब सपाट बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 12.99 अंक या 0.02 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,944.28 और निफ्टी 24.60 अंक या 0.10 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,055.80 पर था।

देशबन्धु 1 Sep 2026 5:14 pm