Asian Champions Trophy 2026 से हटा Pakistan, 1 नवंबर को Malaysia से भिड़ेगा India
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का असर अब हॉकी के मैदान पर भी देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान ने भारत में होने वाली पुरुष एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2026 से हटने का फैसला किया है। इस टूर्नामेंट में अब उसकी जगह बांग्लादेश की टीम हिस्सा लेगी। प्रतियोगिता 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक पंजाब के जालंधर और मोहाली में आयोजित होनी है। पाकिस्तान के हटने के बाद भारतीय टीम के मुकाबलों के कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत को पहले 1 नवंबर को पाकिस्तान के खिलाफ खेलना था। अब इसी तारीख पर भारतीय टीम मलेशिया से भिड़ेगी। इस टूर्नामेंट में कुल 6 टीमें हिस्सा लेने वाली हैं। पाकिस्तान के बाहर होने के बाद बांग्लादेश को प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। हालांकि, इस बदलाव से टूर्नामेंट का आयोजन तय कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ने की उम्मीद है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ के अध्यक्ष मोहिउद्दीन अहमद वानी ने पहले ही संकेत दिया था कि भारत में खेलने का फैसला सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा था कि महासंघ सरकार के निर्देशों का पालन करेगा। इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी घोषणा की थी कि पाकिस्तान सहित 6 टीमें इस प्रतियोगिता में भाग लेंगी। उन्होंने केंद्र सरकार की उस नीति का हवाला दिया था, जिसके तहत पाकिस्तान को भारत की धरती पर बहु-देशीय खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाती है। हालांकि, पाकिस्तान हॉकी महासंघ ने 16 सितंबर को एशियाई हॉकी महासंघ को पत्र लिखकर प्रतियोगिता के लिए किसी तटस्थ स्थान की मांग की थी। महासंघ का कहना था कि इससे टीम की बिना रुकावट और पूरी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वानी ने उस समय कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा संवेदनशील हालात और सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए यह मांग की गई है, ताकि खिलाड़ियों और अधिकारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिल सके। टूर्नामेंट की शुरुआत 27 अक्टूबर को जालंधर के सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में होगी। वहीं, फाइनल मुकाबला 5 नवंबर को मोहाली के बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेला जाएगा। एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी महाद्वीप की प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताओं में शामिल है, जिसमें एशिया की मजबूत टीमें खिताब के लिए मुकाबला करती हैं। ऐसे में पाकिस्तान की गैरमौजूदगी से भारत-पाकिस्तान मुकाबले का इंतजार कर रहे हॉकी प्रशंसकों को निराशा हो सकती है। गौरतलब है कि इसी सप्ताह पाकिस्तान ने भारत से जुड़े एक अन्य खेल आयोजन से भी दूरी बनाई है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स प्रतियोगिता के लिए अपनी टीम को अनापत्ति प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान की टीम ने टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया। पाकिस्तान ने प्रतियोगिता के आयोजकों पर दोहरे मापदंड और पक्षपात के आरोप भी लगाए थे और भविष्य में भी इसमें भाग नहीं लेने की बात कही थी। पिछले संस्करण में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 2 मुकाबलों में खेलने से इनकार किया था, जिनमें एक सेमीफाइनल भी शामिल था। उस सेमीफाइनल में पाकिस्तान को बिना खेले जीत मिली थी। वहीं, ग्रुप चरण के मुकाबले में भारत के हटने के बावजूद उसे अंक दिए जाने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने नाराजगी जताई थी। बता दें कि खेलों में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत हमेशा दर्शकों के बीच खास उत्साह पैदा करती है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव का असर कई बार खेल आयोजनों पर भी पड़ता रहा है। अब एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान की जगह बांग्लादेश की भागीदारी और भारत के बदले हुए कार्यक्रम पर सभी की नजरें टिकी हैं।
एशियाई खेलों में सफलता के बाद भी विदेशी Archery Coach Dave Cousins को तीन माह से वेतन नहीं मिला
(तपन मोहंता)रांची, नौ अक्टूबर भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों ने एशियाई खेलों के जरिये ओलंपिक कोटा हासिल करने वाला पहला देश बनकर इतिहास रच दिया लेकिन उन्हें इस उपलब्धि तक पहुंचाने वाले विदेशी कोच को कार्यभार संभालने के तीन महीने बाद भी वेतन नहीं मिला है। अमेरिका के डेव कजिंस को मई में भारत का मुख्य कंपाउंड तीरंदाजी कोच बनाया गया था। समझा जाता है कि बकाया भुगतान नहीं मिलने पर उन्होंने भारत छोड़कर जाने की धमकी दी है। भारतीय तीरंदाजी संघ के कोषाध्यक्ष डॉक्टर जोरिस पाउलोस उम्माचेरिल और भारतीय खेल प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा कि भुगतान में विलंब तकनीकी कारणों से हुआ है जो अब सुलझ गया है और अगले कुछ दिन में उन्हें भुगतान हो जायेगा। कजिंस के मार्गदर्शन में भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों ने एशियाई खेलों में तीन स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता। भारत ने तीरंदाजी में पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य हासिल किया। सूत्रों ने कहा ,‘‘ उन्होंने कुछ अधिकारियों से बात की और कहा कि अगर भुगतान नहीं होता है तो वह स्वदेश लौट जायेंगे। पिछले तीन महीने में उनके साथ जिस तरह बर्ताव हुआ है, उससे वह खुश नहीं है। अभी तक उन्हें वेतन नहीं मिला है।’’इस बीच महासंघ दक्षिण कोरिया के पार्क चाए सून से भी लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 से पहले भारत के रिकर्व तीरंदाजों का प्रभार देने को लेकर बात कर रहा है। उनके दिसंबर में टीम से जुड़ने की उम्मीद है। उधर जोरिस ने कहा ,‘‘ भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ कुछ मसला था जिससे भुगतान में विलंब हुआ लेकिन अब सब सुलझ गया है और दो दिन में भुगतान हो जायेगा।’’दिल्ली में साइ के एक अधिकारी ने कहा ,‘‘ हम उनसे बात कर चुके हैं और बता दिया है कि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बैंक के साथ कुछ तकनीकी कारणों से विलंब हुआ था लेकिन अब दो दिन में भुगतान हो जायेगा।
Kumkum Mohod ने तोड़ा कोरियाई दबदबा, Asian Games में रिकर्व स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास
(अजय मसंद)नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर रिकर्व तीरंदाजी में दक्षिण कोरिया का दबदबा लंबे समय से कायम रहा है और उसे चुनौती देना लगभग नामुमकिन माना जाता था लेकिन आइची-नागोया एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली कुमकुम मोहोद का मानना है कि अब यह तस्वीर बदल चुकी है। उनका कहना है कि एशियाड में उनके ऐतिहासिक स्वर्ण पदक ने भारतीय तीरंदाजों में नया विश्वास जगाया है और उन्हें उम्मीद है कि भारत आने वाले टूर्नामेंट में कोरियाई तीरंदाजों को और कड़ी टक्कर दे सकेगा। महाराष्ट्र के अमरावती की 17 वर्षीय कुमकुम ने एशियाड में व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता जबकि धीरज बोम्मादेवरा के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया। व्यक्तिगत स्पर्धा में उनकी जीत से भारत ने लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए एक महत्वपूर्ण कोटा स्थान भी हासिल किया। कुमकुम के करियर का सबसे यादगार पल दक्षिण कोरिया की ओ येजिन के खिलाफ व्यक्तिगत फाइनल में आया। ओ येजिन 2023 विश्व तीरंदाजी युवा चैंपियनशिप के अंडर-21 वर्ग में दो स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं। कड़े मुकाबले में भारतीय तीरंदाज ने दबाव के बावजूद धैर्य बनाए रखा और निर्णायक निशाना लगाकर जीत हासिल की। भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) की ओर से आयोजित बातचीत में कुमकुम ने कहा, ‘‘एक दिन कोरिया का दबदबा टूटना ही था। सभी को लगता था कि उन्हें हराना नामुमकिन है, लेकिन यह पदक बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे पहले रिकर्व में कोई व्यक्तिगत पदक नहीं मिला था। मुझे लगता है कि भविष्य की प्रतियोगिताओं में हमारा प्रदर्शन और बेहतर होगा क्योंकि अब सभी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। ’’फाइनल मुकाबला 5-5 की बराबरी के बाद शूट-ऑफ में पहुंच गया। कुमकुम ने दबाव के बावजूद परफेक्ट 10 का निशाना लगाकर स्वर्ण पदक पक्का कर लिया जबकि ओ येजिन केवल आठ अंक ही हासिल कर सकीं। कुमकुम ने कहा, ‘‘उस समय मेरी धड़कनें बहुत तेज हो रही थीं, लेकिन मैंने खुद को शांत किया, सहज हुई और खुद से कहा कि मुझे सिर्फ सही तरीके से तीर छोड़ना है और किसी चीज के बारे में नहीं सोचना है। मुझे पता था कि यही वह एक तीर था, जो मुझे स्वर्ण पदक दिला सकता था। मेरे सयंम का मुझे पूरा फायदा मिला। ’’दबाव के बीच उनका संयम वर्षों की मानसिक तैयारी का नतीजा था। कुमकुम ने अपने प्रदर्शन के हर पहलू की कल्पना करने का अभ्यास किया है जिसमें निशाना साधने की मुद्रा से लेकर तीर छोड़ने, उसके लक्ष्य पर लगने और अंत में पदक जीतने तक का अभ्यास शामिल रहा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी मुद्रा से लेकर तीर छोड़ने और उसके लक्ष्य पर लगने तक हर चीज की कल्पना करती हूं। मैं खुद को स्वर्ण पदक जीतते हुए भी देखती हूं। ’’कुमकुम ने कहा, ‘‘मैं कई वर्षों से अलग-अलग परिस्थितियों की मानसिक कल्पना करके खुद को तैयार कर रही हूं और मुझे खुद पर भरोसा था। शुरुआत में मेरी धड़कनें बहुत तेज हो रही थीं, लेकिन मैंने सांस लेने का अभ्यास किया, खुद को शांत किया और अपना हौसला बढ़ाया। मैंने खुद से कहा कि मैं यह कर सकती हूं, मुझे सिर्फ तीर चलाना है, किसी और चीज पर ध्यान नहीं देना है और अपनी प्रक्रिया का पालन करना है। ’’यह स्वर्ण पदक उनके परिवार के त्याग और संघर्ष से भरे सफर की भी कहानी है। उनका पहला धनुष (जिसकी कीमत महज 3,000 रुपये थी) उनकी दादी ने उन्हें उपहार में दिया था। उस समय उनके पिता ऐसे खेल में निवेश करने को लेकर हिचकिचा रहे थे, जिसमें काफी पैसा खर्च होता है। कुमकुम ने बताया, ‘‘मेरे पिता कहते थे कि मुझे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। वह खेल को लेकर ज्यादा समर्थन नहीं कर रहे थे क्योंकि यह महंगा खेल है। इसलिए मेरी दादी ने मुझे वह धनुष उपहार में दिया। शुरुआत में बहुत मुश्किलें आईं, लेकिन बाद में मेरे पिता ने भी मेरी मदद की। यह सफर बहुत कठिन रहा है।
Mansukh Mandaviya से मिले पैरा निशानेबाज, Asian Para Games चयन में PCI पर लगाया पक्षपात का आरोप
नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर आगामी आइची-नागोया पैरा एशियाई खेलों के लिए चयन प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पैरा निशानेबाजों ने शुक्रवार को यहां खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की और खेल प्रशासन में कथित खामियों को लेकर अपनी चिंताएं उनके सामने रखीं। तीन निशानेबाजों के एक प्रतिनिधिमंडल ने खेल मंत्री से मुलाकात की और अपना आरोप दोहराया कि भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) ने 18 अक्टूबर से शुरू होने वाले खेलों के लिए चार ऐसे निशानेबाजों को शामिल करने के उद्देश्य से चयन के नियमों में ढील दी जो निर्धारित मानदंडों पर खरे नहीं उतरते थे। एशिया में तीसरी रैंकिंग पर काबिज पैरा पिस्टल निशानेबाज संदीप कुमार ने पहले चयन प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि महाद्वीपीय रैंकिंग में 14वें स्थान पर मौजूद रुद्रांश खंडेलवाल को उनसे और मौजूदा एशियाई नंबर एक आकाश पर तरजीह देते हुए चुन लिया गया। खेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘‘मंत्री ने उनकी बातें सुनीं और उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। इस स्थिति को बेहतर तरीके से कैसे सुलझाया जाए, इस पर चर्चा अभी जारी है। ’’पैरा निशानेबाजों ने पैरा एशियाई खेलों के लिए चयन प्रक्रिया में कथित वित्तीय भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और हेरफेर की तत्काल स्वतंत्र जांच की मांग की थी। भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के महानिदेशक को बुधवार को सौंपे गए एक ज्ञापन में पैरा निशानेबाजों ने पीसीआई के अधिकारियों और उसकी निशानेबाजी तकनीकी समिति (एसटीसी) पर गैर-कानूनी तरीके से पैसे वसूलने, खुलेआम भ्रष्टाचार और खेल मंत्रालय के दिशानिर्देशों के उल्लघंन करने का आरोप लगाया। बैठक में मौजूद एक निशानेबाज ने कहा, ‘‘पीसीआई को लगता है कि चूंकि यह मामला मीडिया में उजागर हो चुका है इसलिए अब खिलाड़ियों के नाम भेजना उनके लिए अपमानजनक होगा। उनका कहना है कि ‘हमने कोटे छोड़ दिए हैं और अब कुछ नहीं हो सकता’। ’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने खेल मंत्री को बताया कि पीसीआई खिलाड़ियों को नहीं भेजकर देश की पदक संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही है। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा? ’’खेल मंत्री के साथ यह बैठक उस घटना के एक दिन बाद हुई जिसमें पैरा निशानेबाजों ने पैरा एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले भारतीय दल के विदाई समारोह के दौरान विरोध प्रदर्शन किया था।
एशियाई खेलों में चूके Dhiraj Bommadevara, अब 2028 Olympics के लिए सुधार पर नजर
(तपन मोहंता)रांची, नौ अक्टूबर विश्व में चौथे नंबर के खिलाड़ी धीरज बोम्मादेवरा लगातार दूसरे एशियाई खेलों से बिना किसी व्यक्तिगत पदक के लौटे हैं, लेकिन इस शीर्ष भारतीय रिकर्व तीरंदाज को इसका कोई अफसोस नहीं है और इसके बजाय वह अपने रिकॉर्ड क्वालीफाइंग स्कोर से प्रेरणा लेकर 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए सुधार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। धीरज एशियाई खेलों से ठीक एक सप्ताह पहले मैक्सिको में तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने थे। लेकिन एशियाई खेलों में व्यक्तिगत पदक एक बार फिर उनके हाथ नहीं लगा, हालांकि उन्होंने मिश्रित और पुरुष टीम स्पर्धाओं दोनों में रजत पदक हासिल किए। धीरज ने हैदराबाद से पीटीआई से कहा, ‘‘मुझे अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर कभी पछतावा नहीं हुआ। क्वालीफाइंग राउंड में मैंने एशियाई खेलों का रिकॉर्ड बनाया। हमने टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में रजत पदक भी जीते।’’धीरज आर्चरी प्रीमियर लीग में माइटी मराठाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनसे पहले, डोला बनर्जी एकमात्र भारतीय तीरंदाज थीं जिन्होंने 2007 में महिलाओं की रिकर्व श्रेणी में विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था। एशियाई खेलों में क्वालीफाइंग राउंड में रिकॉर्ड 698 अंक बनाने वाले धीरज ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत मुकाबले में जीत और हार का अंतर मामूली होता है। यह खेल का हिस्सा है। इसने मुझे यह अहसास दिलाया है कि मुझे और अधिक मेहनत करने की जरूरत है। इस लिहाज से यह मेरे लिए और भारत के लिए अच्छा है, क्योंकि (व्यक्तिगत) कांस्य पदक भारत को मिला।’’उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे किसी तरह का मलाल नहीं है। हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा और इससे हमें ओलंपिक चक्र को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी आत्मविश्वास भी मिला। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि हमारे पास पदक भी हैं और आत्मविश्वास भी। हमने उन कमियों की पहचान कर ली है जिन्हें हमें दूर करना है।’’धीरज ने कहा, ‘‘परिस्थितियां कैसी भी हों हमें उन कमियों पर काम करते रहना होगा। हमने उन चीजों की पहचान कर ली है जिन पर हमें काम करना है और ओलंपिक से पहले यह काफी महत्व रखता है।
Asian Games गोल्ड मेडलिस्ट ऋतु नेगी का नाम 1 करोड़ के Cash Award से हटा, गहराया विवाद
अर्जुन पुरस्कार विजेता भारतीय महिला कबड्डी टीम की पूर्व कप्तान और जापान में हाल ही में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम की सदस्य ऋतु नेगी का नाम हिमाचल प्रदेश सरकार की पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों की सूची से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ऋतु हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र की रहने वाली हैं और उनकी शादी हरियाणा के पानीपत में हुई है। हिमाचल सरकार ने एक करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार के लिए पात्र खिलाड़ियों की सूची से अंतिम समय में उनका नाम हटा दिया, जिससे ऋतु और उनका परिवार निराश है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एशियाई खेलों में कबड्डी में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला टीम की सदस्य रही हिमाचल प्रदेश की तीन खिलाड़ियों पुष्पा राणा, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर तथा भारतीय महिला क्रिकेटर रेणुका ठाकुर के लिए एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि की घोषणा की थी। ऋतु ने सरकार के इस कदम को बेहद अपमानजनक बताया। उन्होंने मीडिया से कहा, ‘‘एक सप्ताह पहले तक मैं हिमाचल की बेटी थी और मुख्यमंत्री ने फेसबुक पर बधाई संदेश साझा किया था, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सांसद अनुराग ठाकुर ने मुझे बधाई देने के लिए फोन किया था। मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि दो दिन में अचानक क्या बदल गया।’’ ऋतु ने कहा कि एक ऐसी खिलाड़ी के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया जा रहा है जिसने लगातार तीन एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया है और दो स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता है। उन्होंने बताया कि वह भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं, लेकिन उन्होंने घरेलू प्रतियोगिताओं में हरियाणा का नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने पूछा, ‘‘मेरे करियर के इस पड़ाव पर हिमाचल प्रदेश सरकार मेरे साथ इस तरह का व्यवहार क्यों कर रही है।’’ ऋतु के पिता भवन सिंह नेगी ने सवाल उठाया कि क्या किसी लड़की की शादी दूसरे राज्य में हो जाने से वह अपने गृह राज्य की बेटी नहीं रह जाती। उन्होंने बताया कि ऋतु को 2023 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद हिमाचल सरकार से नकद पुरस्कार मिला था, जबकि उनकी शादी हरियाणा में हुई थी। पुरस्कारों की सूची से ऋतु का नाम हटाए जाने के मामले को भाजपा ने हिमाचल प्रदेश के गौरव और राज्य की बेटी के सम्मान से जोड़ दिया है। शिलाई के पूर्व भाजपा विधायक और भाजपा के राज्य प्रवक्ता बलदेव सिंह तोमर ने कहा कि हिमाचल सरकार ने न केवल हिमाचल की एक बेटी की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि पुरस्कार सूची से ऋतु का नाम हटाकर राज्य के गौरव को भी धूमिल किया है। उन्होंने हिमाचल सरकार को इस फैसले पर फिर से विचार करने के लिए कहा और ‘हिमाचल की बेटी’ को उचित सम्मान देने की अपील की। राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि सरकार इस मामले पर हरियाणा सरकार के रुख पर बारीकी से नजर रख रही है। हरियाणा सरकार ने अभी तक ऋतु के लिए किसी भी प्रकार के नकद पुरस्कार की घोषणा नहीं की है, इसलिए हिमाचल सरकार बाद में निर्णय ले सकती है। हिमाचल प्रदेश के खेल मंत्री यादविंदर गोमा ने कहा कि नकद पुरस्कार पाने वाले हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों की सूची में बदलाव का कारण उन्हें पता नहीं है और वह इस मामले में मुख्यमंत्री से बात करेंगे।
Asian Games में Indian Army के एथलीटों का जलवा, जीते 6 स्वर्ण सहित कुल 20 पदक
नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने हाल ही में संपन्न हुए आइची-नागोया एशियाई खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 20 पदक जीते। भारत के 501 सदस्यीय दल में सेना के 62 खिलाड़ी शामिल थे जिन्होंने 15 स्पर्धाओं में भाग लिया तथा छह स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक जीते। भारत ने कुल 85 पदक जीते जिनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल हैं। यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘भारत के कुल पदकों में से 23.52 प्रतिशत पदक सेना के खिलाड़ियों ने जीते। उन्होंने देश के 85 पदकों में से 20 पदक जीते। उनके छह स्वर्ण पदक भारत के 21 स्वर्ण पदकों का 29 प्रतिशत है।’’सेना के जिन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया उनमें नायब सूबेदार नीरू ढांडा प्रमुख हैं, जिन्होंने ट्रैप निशानेबाजी में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। लंबी दूरी के धावक नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने भी दो रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया। गुलवीर ने किसी एक एशियाई खेल में तीन व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष ट्रैक एवं फील्ड एथलीट बनकर नया इतिहास रचा। निशानेबाजी में सेना के चार निशानेबाजों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक सहित तीन पदक जीते। सेना के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और एशियाई खेलों के रिकॉर्ड भी बनाए। हवलदार सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन में दो घंटे, 11 मिनट, 37 सेकेंड के समय के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। सूबेदार धीरज बोम्मादेवरा ने पुरुषों की रिकर्व तीरंदाजी में 698 के स्कोर के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। हवलदार कमलजीत ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में 484.6 के स्कोर के साथ जबकि नीरू ने महिलाओं की ट्रैप निशानेबाजी में 118 अंक के साथ एशियाई खेलों के नए रिकॉर्ड बनाए। रोइंग में नायब सूबेदार सलमान खान ने पुरुषों की डबल स्कल्स स्पर्धा में भारत के लिए एशियाई खेलों का पहला पदक जीता। महिला खिलाड़ियों ने सेना के कुल पदकों में 15 प्रतिशत और स्वर्ण पदकों में 33 प्रतिशत का योगदान दिया। विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘एशियाई खेल 2026 में सेना का प्रतिनिधित्व भी काफी बढ़ गया है। भारतीय दल में सेना के खिलाड़ियों की संख्या 12.6 प्रतिशत थी, जबकि 2023 के एशियाई खेलों में यह नौ प्रतिशत थी।’’इसके अनुसार, ‘‘सेना के 62 खिलाड़ियों में नौ महिला खिलाड़ी थी जिन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता।
Asian Market Today: एशिया बाजारों में गिरावट, AI पर खर्च को लेकर बढ़ी चिंता, निक्केई 1% टूटा,
Asian Market Today: एशियाई शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। इसकी वजह वॉल स्ट्रीट पर हुई बिकवाली रही। जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर खर्च में तेज़ी के लंबे समय तक बने रहने को लेकर नए शक के कारण हुई थी। शुरुआती कारोबार में MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.1% नीचे आ गया। जापान में, निक्केई (Nikkei) बाजार खुलने पर 1% से ज़्यादा गिरा, लेकिन बाद में नुकसान कम हुआ और यह 0.58% नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि टोपिक्स (Topix) में लगभग 0.15% की गिरावट थी। हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.1% की मामूली बढ़त हुई।दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजार बंद रहने के कारण इस सत्र में शामिल नहीं हुए। कोरियाई अल्फाबेट के निर्माण की याद में मनाए जाने वाले 'हंगुल दिवस' के कारण कोस्पी बंद था, जबकि ताइवान अपने राष्ट्रीय दिवस के कारण बंद था।जापानी येन 0.1% कमजोर होकर 158.06 प्रति डॉलर पर आ गया, और ऑफशोर युआन 6.7034 पर लगभग स्थिर रहा।गुरुवार की बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों पर पड़ा। नैस्डैक 100 में 1.4% की गिरावट आई, जो सात हफ्तों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट थी, जबकि अमेरिकी चिपमेकर्स का इंडेक्स 3.4% गिर गया। S&P 500 में 0.5% की गिरावट आई। हालांकि, नुकसान सीमित रहा। S&P 500 की दो-तिहाई से ज़्यादा कंपनियों के शेयरों में बढ़त हुई, स्मॉल-कैप शेयरों में कोई खास हलचल नहीं हुई, और निवेशकों ने डिफेंसिव सेक्टर (सुरक्षित माने जाने वाले सेक्टर) का रुख किया।फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के कारण यह गिरावट आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि OpenAI का सालाना रेवेन्यू उसके पहले बताए गए स्तर से 20 अरब डॉलर कम है, और ChatGPT बनाने वाली कंपनी लगभग 50 अरब डॉलर के रेवेन्यू की राह पर है।गुरुवार को यूएस लेबर सचिव के अनुसार यूएस लेबर डिपॉर्टमेंट ने कई सक्रिय संघीय जांचों का हवाला देते हुए माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को अपने परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से निलंबित कर दिया। विभाग ने यह भी कहा कि वह कॉग्निजेंट, इंफोसिस, कैपजेमिनी, विप्रो, टीसीएस और एचसीएलटेक जैसी कंपनियों से नए आवेदन न तो स्वीकार करेगा और न ही उन पर कोई कार्रवाई करेगा।आईटी इंडस्ट्री की संस्था नैसकॉम ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने H-1B वीज़ा पर अपनी निर्भरता कम कर दी है और अमेरिका में स्थानीय स्तर पर लोगों को नौकरी पर रखने का काम लगातार बढ़ाया है। संस्था ने यह भी कहा कि बहुत कम कर्मचारी PERM प्रक्रिया के ज़रिए H-1B स्टेटस से स्थायी निवासी (परमानेंट रेजिडेंसी) बनते हैं।गुरुवार को US ट्रेजरी बॉन्ड में तेज़ी आई, क्योंकि 30 साल के बॉन्ड की नीलामी में मज़बूत मांग के कारण लॉन्ग-टर्म बॉन्ड यील्ड (लंबे समय के बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) उन ऊंचे स्तरों से नीचे आ गई, जो दो दशकों से ज़्यादा समय में नहीं देखे गए थे। यह तेज़ी तब और बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वह ईरान पर दोबारा हमला नहीं करेंगे।इसके बावजूद, लंबे समय के डेट (कर्ज़) में महीनों से जारी बिकवाली की मुख्य वजह यह डर रहा है कि ईरान युद्ध से ऊर्जा की कीमतें और महंगाई ज़्यादा बनी रहेगी, साथ ही सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं।ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, US फेडरल रिज़र्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने कहा कि महंगाई को काबू में करने के लिए शायद ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की ज़रूरत होगी।ट्रंप के वादे से ईरान के साथ नए टकराव का डर कम हुआ, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.5% गिरकर लगभग $103.80 प्रति बैरल पर आ गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी 0.5% की गिरावट आई और यह लगभग $91.05 पर आ गया।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Asian Games में बैडमिंटन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, बोले पूर्व कोच Prakash Padukone
मुंबई, आठ अक्टूबर पूर्व राष्ट्रीय कोच प्रकाश पादुकोण ने एशियाई खेलों में भारत के बैडमिंटन में प्रदर्शन को बृहस्पतिवार को ‘थोड़ा निराशाजनक’ बताया और कहा कि देश के खिलाड़ियों को अपने पिछले पदकों की बराबरी करनी चाहिए थी या उससे बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए था। भारत ने एशियाई खेलों में केवल टीम कांस्य पदक जीता जिसे पादुकोण ने देश में उपलब्ध प्रतिभा को देखते हुए उम्मीदों से कम माना। एक प्रचार कार्यक्रम के दौरान 1980 ऑल इंग्लैंड चैंपियन पादुकोण ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह थोड़ा निराशाजनक था। हमें बहुत बेहतर करना चाहिए था। ’’उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने पिछली बार अच्छा प्रदर्शन किया था। और हमारे पास जिस तरह की प्रतिभा है, उसे देखते हुए हमें काफी बेहतर करना चाहिए था। मैं भी कम से कम पिछली बार की पदक तालिका के बराबर की उम्मीद कर रहा था। ’’हालांकि पादुकोण ने कहा कि इस नतीजे से व्यापक निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने खिलाड़ियों के साल भर चलने वाले व्यस्त कार्यक्रम की ओर इशारा किया और अधिक निरंतरता की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘ ये पूरे साल खेलते हैं इसलिए हर किसी के लिए हर समय शीर्ष पर बने रहना बेहद मुश्किल है। लेकिन मैं निश्चित रूप से चाहता हूं कि खिलाड़ी अधिक निरंतर रहें, और यह संभव है। यह निश्चित रूप से समर्थन की कमी नहीं है। ’’पादुकोण ने कहा, ‘‘उन्हें काफी समर्थन मिलता है। मुझे लगता है कि उन्हें थोड़ा और प्रयास करने की जरूरत है। वे अच्छा कर रहे हैं। उन्होंने एक बड़ा टूर्नामेंट जीता भी है। लेकिन उन्हें अधिक निरंतर रहने की जरूरत है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप जिन भी टूर्नामेंटों में खेलते हैं, उन सभी को जीतें। लेकिन कम से कम क्वार्टर, सेमीफाइनल तक पहुंचें। आप एक टूर्नामेंट जीतते हैं और फिर अगले में हार जाते हैं। पहले दौर में, आप किसी से हार जाते हैं। तो मुझे लगता है कि इससे बचना चाहिए। ’’उन्होंने सुझाव दिया कि शीर्ष खिलाड़ियों को हर सत्र में चार या पांच प्रमुख टूर्नामेंट की पहचान करनी चाहिए और पूरे साल अपना सर्वश्रेष्ठ फॉर्म बनाए रखने की कोशिश करने के बजाय उनमें शीर्ष प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हमेशा कहा है कि पूरे साल में चार या पांच महत्वपूर्ण टूर्नामेंट चुनें और उन टूर्नामेंटों के दौरान शीर्ष पर पहुंचने की कोशिश करें। इसका मतलब यह नहीं है कि आप अन्य टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन नहीं करें। लेकिन उन्हें जिस तरह का सहयोग मिलता है, उसे देखते हुए मुझे लगता है कि उनके लिए अधिक निरंतर रहने की गुंजाइश है। ’’पादुकोण ने दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू का भी विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि उनकी हाल में जापान ओपन में जीत ने उस भूख को दिखाया है जिसे अन्य भारतीय खिलाड़ियों को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि इतने सारे पदक जीतने के बावजूद उनमें अब भी भूख है। इसलिए मुझे लगता है कि इसी तरह की भूख बाकी सभी को भी दिखानी चाहिए। खासकर लक्ष्य और यहां तक कि युगल जोड़ियों को भी। उन्होंने जो हासिल किया है उससे संतुष्ट नहीं हों। बड़े टूर्नामेंट जीतने का लक्ष्य रखें। अच्छा खेलें और अगले पांच-छह वर्षों में पूरी ताकत लगा दें। क्योंकि वे सभी अभी भी बहुत युवा हैं।
Asian Games में निराशाजनक प्रदर्शन पर Sports Ministry सख्त, 13 अक्टूबर को होगी समीक्षा बैठक
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर खेल मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय महासंघों के साथ एक दिवसीय बैठक में हाल में संपन्न एशियाई खेलों में भारत के प्रदर्शन की समीक्षा करेगा जिसमें फोकस बैडमिंटन, निशानेबाजी और एथलेटिक्स में कुछ ‘अनुभवी’ खिलाड़ियों के निराशाजनक प्रदर्शन पर रहेगा। इसके साथ ही ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (टॉप्स) के जरिए धनराशि जारी करने की भी फिर से समीक्षा की जाएगी। भारत ने आइची-नागोया खेलों में 21 स्वर्ण सहित 85 पदक जीते जो हांग्झोउ में पिछले चरण में हासिल किए गए 106 पदकों से काफी कम था। खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हमें कम से कम 150 पदक जीतने चाहिये थे और हम जीत भी सकते थे। कुछ अनुभवी खिलाड़ी स्पष्ट रूप से ‘कम्फर्ट जोन’ में थे और इसका असर उनके प्रदर्शन में दिखा। मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ बैठक में इसकी समीक्षा करेगा।’’भारत को 2026 एशियाई खेलों में बैडमिंटन में सिर्फ एक टीम कांस्य पदक मिला जबकि पिछले खेलों में एक स्वर्ण, एक रजत और कांस्य पदक जीता था। निशानेबाजों (विशेषकर पिस्टल में) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब रहा जबकि दोनों खेलों के भारतीय दल में ओलंपिक पदक विजेता शामिल थे। सूत्र ने कहा ,‘‘ यह ताज्जुब की बात है कि ओलंपिक पदक विजेता एशियाड में पदक नहीं जीत पाये जबकि एशियाई खेलों में पदार्पण करने वाले भारत के 310 खिलाड़ियों में से 106 ने पदक जीते। 23 स्पर्धाओं में करीब 89 अनुभवी खिलाड़ी नाकाम रहे। बैठक में समीक्षा की जायेगी कि नीति में क्या बदलाव करने की जरूरत है। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी कुछ खेलों में अपेक्षित परिणाम क्यो नहीं मिले।’’एथलेटिक्स में भारत को पिछले एशियाई खेलों में छह स्वर्ण पदक मिले थे जबकि इस बार सिर्फ एक पदक महिला चार गुणा 400 मीटर रिले टीम हासिल कर सकी। खेलों के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने को लेकर भी सवाल उठे हैं। एथलेटिक्स में ज्योति याराजी ने चोट के कारण महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ में हिस्सा ही नहीं लिया और त्रिकूद में प्रवीण चित्रावेल पहले प्रयास में ही चोटिल हो गए। वहीं 400 मीटर बाधादौड़ में यशस पलाक्षा अपनी हीट के बीच से हट गए थे। इसके अलावा एमएमए में वरूण सान्याल स्पर्धा से पहले अनफिट हो गए। सूत्र ने कहा, ‘‘ कुछ खिलाड़ी खेलों में पहुंचने के बाद चोटों की घोषणा कर रहे थे। अगर एथलीट चोटिल थे तो वे गए कैसे। उन्हें तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। ’’टॉप्स के जरिये खिलाड़ियों को मनचाही धनराशि आवंटित करने की भी समीक्षा का जिक्र करते हुए सूत्र ने कहा ,‘‘ टॉप्स फंडिंग की समीक्षा निश्चित तौर पर होगी। टॉप्स के खिलाड़ियों को मनचाहे कोचों, विदेश में अभ्यास और हर सुविधा के लिये सरकार ने भारी खर्च किया लेकिन नतीजे अपेक्षित नहीं मिले।’’उन्होंने आगे कहा ,‘‘ टॉप्स के तहत नौ स्पर्धाओं के 34 खिलाड़ियों पर 27 करोड़ रूपये से अधिक खर्च हुए लेकिन प्रदर्शन निराशाजनक रहा जिनमें बैडमिंटन और निशानेबाजी के प्रमुख खिलाड़ी हैं।’’खेल मंत्रालय ने एशियाई खेलों से पहले कहा था कि तीन साल के चक्र में खिलाड़ियों को तैयार करने में 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। भारत ने 14 खेलों में पहली बार पदक जीते जिनमें साफ्ट टेनिस, एमएमए, रिकर्व तीरंदाजी शामिल है जबकि क्रिकेट , कबड्डी और हॉकी जैसे टीम खेलों में महिला और पुरूष दोनों वर्गों में भारत को स्वर्ण पदक मिले। महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। पहली बार भारत की महिला और पुरूष दोनों हॉकी टीमों ने एक साथ स्वर्ण जीता और ओलंपिक के लिये भी क्वालीफाई कर लिया।
रजनीकांत से मिलीं एशियाई खेलों की स्टार विथ्या रामराज, तीन पदक जीतने पर सुपरस्टार ने दी बधाई
चेन्नई, 8 अक्टूबर . एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करने वाली स्टार एथलीट विथ्या रामराज से तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत ने मुलाकात की. रजनीकांत ने विथ्या को उनकी शानदार कामयाबी के लिए बधाई दी. विथ्या ने इन खेलों में India का नाम रोशन करते हुए तीन पदक अपने नाम ... Read more
Devendra Jhajharia ने Asian Para Games चयन को बताया पारदर्शी, कहा- सुलझाएंगे समस्याएं
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के अध्यक्ष देवेंद्र झाझडिया ने जापान में होने वाले आगामी एशियाई पैरा खेलों की चयन प्रक्रिया का बृहस्पतिवार को बचाव करते हुए कहा कि पीसीआई, खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा निर्धारित सभी मानदंडों का पालन किया गया है। हालांकि, उन्होंने विरोध कर रहे खिलाड़ियों की ओर से उठाई गई चिंताओं के समाधान की संभावना से इनकार नहीं किया। झाझडिया ने कहा कि सभी खेलों में चयन प्रक्रिया पारदर्शी रही है और खिलाड़ियों के हित पीसीआई की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। झाझडिया ने कहा, ‘‘चाहे एथलेटिक्स हो, साइकिलिंग, तैराकी या निशानेबाजी, हमने सुनिश्चित किया है कि चयन के सभी मानदंड पूरे किए जाएं। हमने मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन किया है। खिलाड़ी हमेशा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है और रहेगा। हम खेलों में सुविधाएं बढ़ा रहे हैं जिससे कि खिलाड़ियों को बेहतर सहयोग मिल सके और हर चयन में पारदर्शिता बरती गई है।’’झाझडिया ने कहा कि पीसीआई ना केवल अपने नियमों से बल्कि सरकार और एशियाई पैरा खेलों की आयोजन समिति द्वारा बनाए गए दिशानिर्देशों से भी बंधा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल पीसीआई के दिशानिर्देश नहीं हैं। मंत्रालय के साथ-साथ आयोजन समिति के भी दिशानिर्देश हैं और हम संबंधित दिशानिर्देशों के अनुसार काम करते हैं। हर चयन निष्पक्ष तरीके से किया गया है।’’हालांकि पूर्व पैरालंपिक चैंपियन ने कहा कि खिलाड़ियों की ओर से उठाई गई शिकायतों को अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा और चर्चा के बाद बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। झाझडिया ने कहा, ‘‘यह मुद्दा हमारी जानकारी में है और हम इस पर गौर करेंगे। हम चर्चा करेंगे। जब भी खिलाड़ियों के हित की बात आती है, हम उनकी चिंताओं को हमेशा उठाते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले पर चर्चा करेंगे। खिलाड़ियों ने जो भी चिंताएं उठाई हैं उन्हें हम सामने रखेंगे और मंत्रालय के साथ चर्चा करेंगे। खिलाड़ियों को अपनी चिंताएं उठाने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।’’झाझडिया ने कहा कि वह विरोध कर रहे खिलाड़ियों से पहले ही मिल चुके हैं और उनके साथ आगे भी चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं विरोध कर रहे खिलाड़ियों से पहले ही मिल चुका हूं और उनसे फिर मिलूंगा। हमारे खिलाड़ी नियमित रूप से हमारे साथ मुलाकात करते रहते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘खिलाड़ियों ने कुछ चिंताएं उठाई हैं और उनकी बात सुनी गई है। अब हम साथ बैठकर इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे।’’यह पूछे जाने पर कि क्या चयन संबंधी फैसलों पर पुनर्विचार किया जा सकता है, झाझडिया ने कहा कि फिलहाल किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया गया है। झाझडिया ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पिछले प्रदर्शन या विश्व रैंकिंग के आधार पर चयन की गारंटी नहीं दी जा सकती क्योंकि निर्धारित ट्रायल और मानदंडों का पालन करना जरूरी है। झाझडिया ने कहा कि वह खिलाड़ियों के लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं खिलाड़ियों से बात करता हूं और उनके साथ लगातार संवाद में रहता हूं। यह संभव है कि विचारों, पसंद या नापसंद में अंतर हो लेकिन यह हमारा देश है और खिलाड़ी हमारी प्राथमिकता हैं।
Asian Market : क्रूड में उछाल, टेक शेयरों में बिकवाली से गिरे एशियाई बाजार, निक्केई 700 अंक टूटा
Asian Market : अमेरिकी बाजारों में गिरावट के बाद 8 अक्तूबर को एशियन शेयर मार्केट में भी बिकवाली देखने को मिल रही है। क्रूड की ऊंची कीमतों ने महंगाई की आशंकाओं को हवा दी और निवेशकों ने एक बार फिर टेक्नोलॉजी शेयरों की बिकवाली की। MSCI के एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 0.3% की गिरावट आई, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया सबसे आगे रहे। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.12% गिरा, जबकि व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 1.42% की गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) में 0.56% की गिरावट आई और हैंग सेंग फ्यूचर्स ने हांगकांग में 0.6% की गिरावट के साथ खुलने का संकेत दिया। चीन के मुख्य बाजार छुट्टी के बाद फिर से खुले।सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा गया। चिप बनाने वाली इस प्रमुख कंपनी ने रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया, लेकिन ब्लूमबर्ग के अनुसार, नतीजे विश्लेषकों के अनुमान से कम रहे।वॉल स्ट्रीट ने बाजार का रुख तय किया। महंगाई की चिंताएं फिर से उभरने के कारण S&P 500 और नैस्डैक 100 दोनों में 0.2% की गिरावट आई, और फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 1.2% नीचे आ गया।भारत में, GIFT निफ्टी (जो यह बताता है कि देश का शेयर बाजार दिन के कारोबार के लिए कैसे खुलेगा ) ने गिरावट के साथ शुरुआत का संकेत दिया, जिससे 50-स्टॉक वाला इंडेक्स पूरे सप्ताह के लिए नुकसान में जा सकता है।कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए स्थिति को मुश्किल बना रही हैं क्योंकि वे महंगाई का दबाव बढ़ाती हैं, ठीक उसी समय जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी नीति को सख्त कर रहा है। पिछले महीने, केंद्रीय बैंक ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी।फेड की सितंबर की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) से पता चला कि सभी 19 अधिकारियों ने बेंचमार्क दर की टारगेट रेंज को 3.75%-4% तक बढ़ाने का समर्थन किया, जो जुलाई 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी थी। अमेरिकी नीति निर्माताओं ने अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के संकेत मिलने के बाद यह कदम उठाया। अधिकारियों ने वित्तीय स्थितियों की भी समीक्षा की। कई लोगों ने कहा कि लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) बढ़ने के बावजूद, स्थितियां अभी भी विकास के अनुकूल थीं क्योंकि शेयरों में तेजी आई थी और कॉर्पोरेट बॉन्ड स्प्रेड कम बने हुए थे। जापानी येन 158 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर रहा और 0.1% बढ़कर 157.92 पर पहुंच गया। मीटिंग के मिनट्स से यह भी पता चला कि जुलाई के आखिर में येन को सपोर्ट करने के लिए किए गए इंटरवेंशन में अमेरिका की भूमिका फेड ने अपने फंड का इस्तेमाल करके नहीं, बल्कि US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने निभाई थी।ऑफशोर युआन 6.7020 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।इस बीच, जियोपॉलिटिकल रिस्क और सप्लाई में रुकावट की वजह से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड 1% बढ़कर लगभग $101.20 प्रति बैरल हो गया। यह बढ़ोतरी एक रिपोर्ट के बाद हुई जिसमें कहा गया था कि व्हाइट हाउस ने पेंटागन से ईरान के खिलाफ स्ट्राइक के ऑप्शन तैयार करने को कहा है, जिन्हें मिडटर्म इलेक्शन से पहले अंजाम दिया जा सकता है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $89.09 प्रति बैरल हो गया।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Panipat News: एशियाई खेलों में सात ने बढ़ाया मान
एशियाई खेलों में सात ने बढ़ाया मान
Asian Para Games: Pramod Bhagat और Bhavina Patel होंगे उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर पैरालंपिक चैंपियन प्रमोद भगत और भाविना पटेल 18 से 24 अक्टूबर तक जापान के नागोया में होने वाले एशियाई पैरा खेलों के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे। भारत के सबसे सफल पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल भगत ने 2014 से 2023 के बीच एशियाई पैरा खेलों में छह पदक जीते हैं जिनमें दो स्वर्ण और चार कांस्य पदक शामिल हैं। शीर्ष पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना ने 2018 से 2023 के बीच एशियाई पैरा खेलों में एक रजत और एक कांस्य पदक जीता है। भाविना ने विज्ञप्ति में कहा, ‘‘भारत का ध्वजवाहक चुना जाना मेरे लिए बेहद गर्व का क्षण है।’’उन्होंने कहा, ‘‘जब आप तिरंगा थामते हैं तो आपको एहसास होता है कि आप अपने से कहीं बड़ी चीज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मैं प्रमोद के साथ उद्घाटन समारोह में भारतीय दल का नेतृत्व करने को लेकर उत्साहित हूं। मुझे उम्मीद है कि हमारे सभी खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे, इस पल का आनंद लेंगे और भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।’’भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) आठ अक्टूबर को विशेष विदाई समारोह में भारतीय दल को औपचारिक रूप से रवाना करेगी। समारोह में खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि होंगे जबकि युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी। पीसीआई अध्यक्ष देवेंद्र झाझडिया ने कहा, ‘‘उद्घाटन समारोह में प्रमोद भगत और भाविना पटेल का भारतीय दल का नेतृत्व करना हमारे लिए बेहद गर्व की बात है।’’उन्होंने कहा, ‘‘दोनों असाधारण चैंपियन हैं और उन्होंने भारतीय पैरा खेलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका सफर, उपलब्धियां और जुझारूपन उन्हें भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपयुक्त बनाता है। मुझे विश्वास है कि वे इस महत्वपूर्ण अभियान पर आगे बढ़ रहे हमारे खिलाड़ियों को प्रेरित करेंगे।
एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली चंबा की सीमा से भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष नीता अंबानी मुलाकात करेंगी, जिससे उनके ओलंपिक सपने को साकार होने की उम्मीद है।
एशिया में बदला इकॉनमी का गेम! भारत से भी तेज दौड़ रहीं इन 3 पड़ोसी/एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाएं
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Archer Ganesh Mani Ratnam ने Asian Games में जीता Gold और Bronze, अब LA 2028 पर नजर
जापान में हुए 2026 एशियाई खेलों में दो मेडल जीतने के बाद, जब भारतीय तीरंदाज गणेश मणि रत्नम तिरुमुरु आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा लौटे, तो स्पोर्ट्स एसोसिएशन, परिवार के सदस्यों और समर्थकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। गणेश मणि रत्नम ने साहिल जाधव और कुशल दलाल के साथ मिलकर पुरुषों के कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता और पुरुषों के कंपाउंड व्यक्तिगत मुकाबले में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया। इसे भी पढ़ें: 6 October, 2026 Stock Market Updates: BSE Sensex में 125 अंकों की बढ़त, शुरुआती कारोबार में 10% उछला Trent अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए मणि रत्नम ने कहा कि मैंने तीरंदाजी में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया है और मैंने एक व्यक्तिगत ब्रॉन्ज़ मेडल और एक टीम गोल्ड मेडल जीता है। मुझे बहुत गर्व है कि मैंने टीम इंडिया और अपने राज्य संघ के लिए दो मेडल जीते हैं। मेरे पहले एशियाई खेलों के लिए यह एक शानदार पल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि LA 2028 ओलंपिक में मिक्स्ड टीम इवेंट के लिए भारत के कोटा ने 2028 के खेलों को उनका अगला लक्ष्य बना दिया है। उन्होंने कहा कि चूंकि हमें ओलंपिक में मिक्स्ड टीम के लिए LA 2028 का कोटा मिल गया है, इसलिए मेरा अगला लक्ष्य LA 2028 होगा और मैं इस पर काम करूंगा। सरकार ने मुझे आर्थिक और नैतिक समर्थन दिया है। हर कोई हमें बहुत समर्थन दे रहा है, जिससे मुझे अपने पहले एशियाई खेलों में ये दो मेडल जीतने में मदद मिली। मणि रत्नम ने वियतनाम के कांग डुक डैंग को 149-144 से हराकर पुरुषों के कंपाउंड व्यक्तिगत इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। इसे भी पढ़ें: Craig Fulton बोले, भारतीय टीम के लिए Paris Olympics का कांस्य पदक सबसे खास रहा इससे पहले, मणि रत्नम, कुशल दलाल और साहिल जाधव वाली भारतीय पुरुष कंपाउंड टीम ने चीन को 238-237 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। साहिल जाधव का प्रदर्शन शानदार रहा, उन्होंने हर शॉट पर 10 अंक हासिल किए, जबकि कुशल दलाल और गणेश मणि रत्नम ने भी अहम 10 अंक दिलाए। हालांकि भारत फाइनल के ज़्यादातर समय पीछे चल रहा था, लेकिन उन्होंने दबाव बनाए रखा और आखिरी राउंड में चीन से आगे निकलकर जीत हासिल की।
हिमाचल प्रदेश के चंबा की धाविका सीमा कुमारी ने जापान में 2026 एशियन गेम्स की 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता है। वह अपनी सफलता का श्रेय केंद्र सरकार की नीतियों को देती हैं।
एशियाई खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों ने भारत के कुल 85 पदकों में से 32 पदक (14 स्वर्ण, 9 रजत, 9 कांस्य) जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। खेल मंत्री गौरव गौतम ने इन धाकड़ खिलाड़ियों का स्वागत किया।
झांगझोऊ (चीन) एशियाई खेलों की तुलना में आइची- नागोया (जापान) एशियाई खेल यूपी के लिहाज से फीके साबित हुए।
Varanasi News: पैरा एशियाई खेल में स्वर्ण पर निशाना साधने उतरेंगी सुमेधा
Sumedha to aim for gold at the Para Asian Games.
अंतरराष्ट्रीय धाविका सीमा कुमारी का 2026 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने के बाद चंबा पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। उनके परिवार द्वारा शिव नुआला का आयोजन किया जाएगा।
बेटियों का जलवा: एशियाई खेलों में भारत की स्वर्णिम कहानी, 10 में से 8 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम
बेटियों का जलवा: एशियाई खेलों में भारत की स्वर्णिम कहानी, 10 में से 8 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम asian-games-indian-women-athletes-eight-gold-medals-neeru-dhanda-trap-shooting-archery-kabaddi
Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारत ने जीते हैं अब तक कुल 60 मेडल
Asian Games 2026 Day 12 Live Updates: एशियन गेम्स का आज 12वां दिन है. कई खेलों में आज भारत को मेडल की उम्मीदें रहेंगी. वहीं कुछ खेल ऐसे हैं, जहां से मेडल पक्का हो सकता है, ऐसे में इस पेज को रिफ्रेश करते रहें.
पश्चिम एशियाई देशों के छात्रों के लिए सीबीएसई विशेष परीक्षा 2026 की एलओसी भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। छात्र 22 से LOC भर सकते हैं और एक या अधिक विषय चुन सकते हैं।
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई?
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई? Rahul Gandhi Anwar Ibrahim Meeting को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को मलेशिया के प्रधानमं
गन्तव्य देशों के हालात खराब होने से दक्षिण एशियाई प्रवासन में कमी
आशीष विश्वास अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है। हाल के दिनों में अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रवासन और वहां जाकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है, जो बड़े झगड़ों और लगातार सामाजिक उथल-पुथल और अशांति का सीधा नतीजा है। इस इलाके के बड़े देशों की तरह, भारत और बांग्लादेश पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। लंबे समय में दोनों देशों के सामने दोहरी चुनौती है: घरेलू श्रम बाजार में नौकरी के लिए बेचैनी और बढ़ जाएगी, क्योंकि वे बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही प्रवासी कामगारों द्वारा घर भेजे जाने वाली बड़ी राशि (रेमिटेंस) से होने वाली अच्छी-खासी आय भी समय के साथ कम हो जाएगी। खबरें हैं कि कम से कम 1500 और भारतीयों को अल्पावधि में अमेरिका से वापस भेजा जा रहा है और केनडा में भी हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि नौकरी के मौके कम हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टियों पर गैर-कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगता है। आरोप है कि पहले से ही स्थानीय संस्कृति के कमज़ोर होने और गंभीर सुरक्षा चिंताओं जैसी स्थानीय समस्याएं हैं। ज़्यादातर हाथ से काम करने वाले अस्थायी कामों में लगे, हज़ारों प्रवासी ऐसे कमज़ोर लक्ष्य बन गए हैं जिन्हें तुरंत और बिना किसी औपचारिकता के वापस भेजा जा सकता है। यह विकसित देशों में अपनी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए शासन और नीतिगत कदमों का नतीजा है। यूनाइटेड किंगडम से लेकर अमेरिका तक, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना नए कड़े कानूनों से प्रभावित हुआ है, पढ़ाई की फीस बहुत ज़्यादा बढ़ा दी गई है और कानूनी तौर पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार कम कर दिया गया है। प्रवासियों के खिलाफ नकारात्मक रूझान सिर्फ़ पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 तक, सऊदी अरब से किसी न किसी वजह से करीब 11,000 से ज़्यादा भारतीयों को वापस उनके अपने देशों में भेजा जा चुका था, जो एक रिकॉर्ड है। अमेरिका ने उसी समय तक करीब 3800 भारतीयों को वापस भेजा था। साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई अच्छी दोस्ती का अमेरिका-भारत के आपसी रिश्तों के सभी मामलों में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार ने करीब 1600 'गैर-कानूनीÓ रूप से वहां रह रहे भारतीयों को वापस भेजा, जबकि मलेशिया और यूएई ने 2025 में करीब 1600 लोगों को वापस भेजा। भारत सरकार और अन्य स्रोतों का दावा है कि कई भारतीय अपनी मज़ीर् से भी अपने गोद लिए हुए देशों को छोड़ रहे हैं। इसकी वजहें हैं बेकाबू महंगाई, जिससे रहने का खर्च बढ़ रहा है, मुश्किल समय में काम का बोझ बढ़ रहा है, अधिकारियों की तरफ़ से बढ़ती परेशानी और घर पैसे भेजने में भारी कमी का आना। इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारत के बाहर मौके नहीं देख रहे हैं। दुबई एक पसंदीदा नई जगह है। केनडा से 2025 में लगभग 2830 भारतीय लौटे, जबकि पिछले साल यह संख्या 2000 थी। कुछ मामलों में केनाडाई अधिकारियों के तरीकों पर शक जताते हुए, भारत सरकार ने प्रवासियों को वापस भेजने के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वापस भेजे गए लोगों को वापस आने के दौरान कोई सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। यहां तक कि हमेशा मूलभूत मानवीय सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं, हालांकि लौटने वाला हर कोई घोषित अपराधी नहीं होता है। पड़ोसी बांग्लादेश की बात करें तो, इज़रायली हमलों के जारी रहने के कारण लेबनान में कम से कम 5000 लोगों की नौकरी चली गई। कम से कम 200 लोग स्वयं वापस चले गए क्योंकि प्रवासियों को जानलेवा काम के हालात में धकेला जा रहा था। यह स्थानीय श्रम कानूनों और नौकरी की शर्तों का खुला उल्लंघन था। साथ ही 'आपातकाल' के नाम पर अक्सर वेतन में कटौती भी की जाती थी। मध्य पूर्व में प्रवासी संगठनों के एच आर ग्रुपों और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबनान और आस-पास के इलाकों में 11 बांग्लादेशी कामगार मारे गए, जबकि कई घायल हुए, जिन पर स्थानीय अधिकारियों ने बहुत कम ध्यान दिया। अप्रशिक्षित कामगारों को सहयोगी, रेस्क्यू स्टाफ और दूसरे कामों के तौर पर समुद्री झड़पों में भी हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसा लगता है कि ऐसे मामलों में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ़ एक मामले में फिलिपिनो कामगार के एक ग्रुप ने ऐसे आदेश मानने से मना कर दिया था। एचआर ग्रुपों का आरोप है कि कई बमबारी और मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरनाक आदान-प्रदान के दौरान मरने वाले ज़्यादातर पीड़ित आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रवासी कामगारों के असुरक्षित ग्रुप से थे। अलग-अलग अन्तरराष्ट्रीय प्राधिकारी, देश के प्रमुखों, संयुक्त और दूसरी संस्थाओं से बार-बार गुहार लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। कामगारों के लिए एक और चिंता यह थी कि क्या प्रवासियों को रखने वाले देश उनके ज़िंदा रहते हुए उनकी बुरी हालत के प्रति लगभग पूरी तरह से बेपरवाह होने के मद्देनजर उनके बकाए का इंतज़ाम भी करेंगे। ऐसे डर से इन्कार नहीं किया जा सकता। न सिफ़र् आपूर्तिकर्ता देश को कानूनी तौर पर मिलने वाले पैसे के सवाल पर नुकसान होगा, बल्कि घर पर पीड़ितों के परिवारों को भी बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी। कई परिवार विदेश में नौकरी करके पैसे कमाने के लिए किसी सदस्य को भेजने और सक्षम बनाने हेतु भारी-भरकम कर्ज भी लेते हैं।
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
मनोरंजन जगत से सामने आई बेहद दुखद खबर! Asia की सबसे बड़ी फिल्म सिटीके संस्थापकRamoji Rao का हुआ निधन

