New Delhi, 26 अगस्त . केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका की यात्रा पर जा सकते हैं. प्रस्तावित दौरे का मुख्य उद्देश्य जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भाग लेना है, लेकिन यह यात्रा India और अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में भी काफी ... Read more
अमेरिका के फ्लोरिडा में भीषण सड़क हादसा, तेलंगाना के तीन छात्रों की मौत
तेलंगाना के तीन छात्रों की फ्लोरिडा के ब्रेवार्ड काउंटी में हुए एक सड़क हादसे में मौत हो गई. हादसा इंटरस्टेट 95 हाईवे पर हुआ, जहां छात्रों की कार अचानक हाईवे से बाहर निकलकर पेड़ से टकरा गई और आग लग गई. परिवार ने भारत में पार्थिव शरीर लाने के लिए सरकार से मदद मांगी है.
RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर विवाद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका दौरे पर न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। 29 अगस्त को वे Madison Square Garden में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे, लेकिन कार्यक्रम से पहले ही विवाद छिड़ गया है।
ट्रम्प का दावा, अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज से हटाये सभी बारूदी सुरंगे
अमेरिका ने घोषणा की है कि उसकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के मुख्य नौवहन मार्ग से सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को साफ कर दिया है।
वीडियो! ट्रंप का नया बयान- लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने पर विचार
वीडियो! ट्रंप का नया बयान- लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने पर विचार
ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: दुनियाभर में अमेरिकी वीजा अपॉइंटमेंट पर अस्थाई रोक, जानिए क्या है वजह
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन और आप्रवासन नीतियों को लेकर बढ़ती सख्ती के बीच अमेरिका ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। अमेरिका ने दुनिया भर के वीजा आवेदकों के अपॉइंटमेंट पर अस्थाई रूप से रोक लगा दी है। अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में अधिकारियों के लिए एक नई ग्लोबल ट्रेनिंग पहल शुरू की गई है, जिसके चलते वीजा सेवाओं के शेड्यूल में बदलाव किए जा रहे हैं।ग्लोबल ट्रेनिंग के चलते वीजा सेवाओं में बदलावअमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि करते हुए मंगलवार को जानकारी दी कि दुनिया भर के सभी अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में एक व्यापक ग्लोबल ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के कारण ही वीजा सेवाओं के अपॉइंटमेंट में अस्थायी फेरबदल और रोक लगाई गई है।ट्रंप प्रशासन देश से अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने (डिपोर्टेशन) और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा करने के लिए लगातार आक्रामक अभियान चला रहा है। इस अभियान के तहत वीजा और ग्रीन कार्ड रद्द करने के साथ-साथ कई तकनीकी व राजनीतिक कारणों से आवेदनों को खारिज किए जाने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें गाजा संघर्ष के दौरान हुए फिलिस्तीन-समर्थक प्रदर्शनों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।कानूनी अड़चनों और अदालती झटकों के बीच प्रशासन की सख्तीट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि इन कड़े कदमों का मुख्य उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा और व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि, प्रशासन की इन नीतियों को कई स्तरों पर कानूनी अड़चनों और अदालती झटकों का भी सामना करना पड़ रहा है।हाल ही में एक अमेरिकी संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया था, जिसके तहत 75 देशों के आवेदकों के अप्रवासी वीजा जारी करने पर रोक लगाई गई थी। अदालत का कहना था कि यह नीति सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर थी। इन कानूनी चुनौतियों के बावजूद प्रशासन अपनी नीतियों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।
किराना हिल्स पर बेइरादा हमले से घबरा गया था पाकिस्तान, अमेरिका की सक्रियता बढ़ी : रक्षा विशेषज्ञ
New Delhi, 26 अगस्त . ऑपरेशन सिंदूर के दौरान Pakistan के किराना हिल्स इलाके में हुए प्रहार को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान की टिप्पणी कि “India का वहां हमले का कोई पूर्व निर्धारित इरादा नहीं था” चर्चा में है. रक्षा विशेषज्ञ और रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने से बातचीत ... Read more
अमेरिका ने दुनियाभर में वीजा अपॉइंटमेंट पर लगाई रोक
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन पर अपनी सख्त कार्रवाई के तहत कॉन्सुलर अधिकारियों के लिए एक ग्लोबल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर रहा है। इस बीच यूएस में दुनिया भर में वीजा अपॉइंटमेंट रोक दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि विभाग ने दुनिया भर में सभी अमेरिकी दूतावासों और …
अमेरिका का वीजा चाहिए तो जान लें ये बदलाव, देखें नया अपडेट
अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए जरूरी खबर है. ट्रंप प्रशासन ने दुनियाभर में अमेरिकी वीजा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट प्रक्रिया में अस्थायी बदलाव किया है. वैश्विक ट्रेनिंग प्रोग्राम के चलते कई आवेदकों की पहले से तय अपॉइंटमेंट दोबारा शेड्यूल की जा रही हैं.
टॉप जनरलों की छुट्टी! अमेरिकी सेना में क्यों छाया लीडरशिप का संकट?
इराक और अफगानिस्तान युद्ध के बाद से अमेरिकी सेना वर्तमान समय में सबसे जटिल और व्यस्त अभियानों में शामिल है, लेकिन नेतृत्व में खाली पड़े पद रक्षा विशेषज्ञों और अमेरिकी सांसदों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों अमेरिका के कनेक्टिकट में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वो अपने 1 एकड़ से बड़े घर की झलक दिखाते हुए उसे मिडिल क्लास फैमली का मकान बता रही है. देखें वीडियो.
भाजपा नेता ने आरक्षण पर सुनाई सवर्णों को खरीखोटी! खुद के बच्चों को दिलाई अमेरिका की नागरिकता
आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर चल रही बहस के बीच BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक के एक बयान ने नई चर्चा श
अमेरिका के मोंटाना में 8 रिश्तेदारों को गोलियों से भूना, मृतकों में चार बच्चे
यूनाइटेड स्टेट्स के मोंटाना राज्य के बिलिंग्स शहर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो इंसानियत को लेकर सवाल खड़े करती है। यहां एक शख्स ने अपने 8 रिश्तेदारों को जान से मार कर दिया और फिर खुद भी सुसाइड कर ली। मोंटाना के बिलिंग्स शहर में हुई इस घटना में शख्स ने जिन …
एंटी मोदी हैं सनकी ममदानी, अमेरिकी सिंगर ने मोहन भागवत के विरोध से जोड़े तार
अमेरिका के प्रमुख शहरों में से एक न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का कार्यक्रम होना है, जिसपर मेयर जोहरान ममदानी ने सवाल उठाए हैं। अब सिंगर मैरी मिलबेन ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।
भारत की सामरिक ताकत, सैन्य पराक्रम और कूटनीतिक रणनीतियों का लोहा आज पूरी दुनिया मानती है। जब भी देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई आंच आती है, भारतीय सशस्त्र बल दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। हाल ही में सेना से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और बड़े खुलासे ने देश की राजनीति और सामरिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) या शीर्ष सैन्य अधिकारियों द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर किए गए एक सनसनीखेज खुलासे ने पड़ोसी मुल्क की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भारत सरकार या सैन्य मुख्यालय की तरफ से युद्धविराम (सीजफायर) या किसी बड़े सैन्य अभियान को रोकने का आधिकारिक ऐलान होने से पहले ही उसकी गुप्त सूचना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक कैसे पहुंच गई? इस खुलासे ने भारत की खुफिया सुरक्षा व्यवस्था और पड़ोसी देश की कूटनीतिक चालबाजियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ऑपरेशन सिंदूर और सामरिक गोपनीयता की अनकही कहानीसैन्य अभियानों में गोपनीयता (Secrecy) सबसे बड़ा हथियार मानी जाती है। 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे रणनीतिक अभियानों की हर एक हरकत पर देश की सर्वोच्च कमान की सीधी नजर होती है। लेकिन जब ऐसे किसी अति-संवेदनशील मिशन के दौरान होने वाले फैसलों की जानकारी भारत के आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा से पहले ही वाशिंगटन या अमेरिकी नेतृत्व तक पहुंच जाती है, तो यह सुरक्षा चूक (Security Breach) या हाई-लेवल लीकेज की ओर इशारा करता है। पूर्व सीडीएस के बयानों और रक्षा मामलों के विशेषज्ञों के विश्लेषण के मुताबिक, पड़ोसी मुल्क ने अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने और अपनी रणनीतिक विफलता को छुपाने के लिए किस प्रकार से गुप्त चैनलों का इस्तेमाल किया, यह अब किसी से छुपा नहीं है। भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह घटना इस बात का सबक है कि सामरिक मामलों में डिजिटल और कूटनीतिक स्तर पर सूचनाओं की सुरक्षा कितनी अधिक जरूरी है।पड़ोसी देश की दोहरी चाल और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबावयुद्ध के मैदान में मुंह की खाने के बाद पड़ोसी देश अक्सर वैश्विक मंचों और पश्चिमी देशों के सामने गिड़गिड़ाने की पुरानी आदत से बाज नहीं आता है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जब भारतीय सेना ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद करना शुरू किया, तो पड़ोसी मुल्क की नींद उड़ गई। अपनी हार को सामने देख उसने तुरंत अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के राजनयिक चैनलों का दरवाजा खटखटाया। पूर्व सीडीएस द्वारा खोले गए इन राज़ों से यह साफ हो गया है कि कैसे पड़ोसी देश ने परोक्ष रूप से दबाव बनाने की कोशिश की ताकि भारत को अपने सैन्य कदमों को रोकने के लिए मजबूर किया जा सके। हालांकि, भारत ने हमेशा अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को सर्वोपरि रखा है और किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने से साफ इंकार किया है।रक्षा विशेषज्ञों की राय और भविष्य के लिए कड़े सामरिक सबकइस पूरे घटनाक्रम पर देश के जाने-माने रक्षा विश्लेषकों और रणनीतिकारों का मानना है कि भारत को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा वास्तुकला (National Security Architecture) को और अधिक चाक-चौबंद बनाने की जरूरत है। आधुनिक युद्ध केवल हथियारों और सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सूचना युद्ध (Information Warfare), साइबर सुरक्षा और कूटनीतिक खुफिया तंत्र का भी एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। पूर्व सीडीएस द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' के रहस्यों से पर्दा उठाने के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में इस बात की समीक्षा तेज हो गई है कि संवेदनशील कूटनीतिक और सैन्य सूचनाएं लीक होने के रास्तों को कैसे पूरी तरह से बंद किया जाए। भारत अब एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जो अपनी सुरक्षा के फैसले खुद लेने में पूरी तरह सक्षम है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को कतई बर्दाश्त नहीं करता है।
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे पर छिड़ी सियासी जंग, विरोध करने वालों पर बरसीं अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन
New Delhi, 26 अगस्त . अमेरिकी दिग्गज गायिका और Actress डॉली पार्टन का 80 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन की खबर सामने आने के बाद संगीत की दुनिया से लेकर अमेरिकी राजनीति तक शोक की लहर है. हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है. इसी कड़ी में अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ... Read more
एच-1बी वीजा में बड़े बदलाव की तैयारी: अमेरिका ने दुनियाभर में सभी वीजा अपॉइंटमेंट रोके, क्या कर रहा ट्रंप प्रशासन?
अमेरिकी दिग्गज गायिका और अभिनेत्री डॉली पार्टन का 80 साल की उम्र में निधन हो गया।
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी दिग्गज गायिका और अभिनेत्री डॉली पार्टन का 80 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद संगीत की दुनिया से लेकर अमेरिकी राजनीति तक शोक की लहर है। हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी डॉली पार्टन को श्रद्धांजलि दी और उन्हें महान कलाकार बताया। ट्रंप ने उनके सम्मान में पूरे अमेरिका में एक हफ्ते तक अमेरिकी झंडे को आधा झुकाए रखने का आदेश दिया है।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किया है। जानिए ईरान के शीर्ष आयातक-निर्यातक देश, अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंध और चाबहार बंदरगाह से लेकर भारतीय व्यापार पर इसके गंभीर असर का पूरा विश्लेषण।
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज के ड्राइवर के परिवार से 50 लाख रुपए का फ्रॉड हो गया। आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को अमेरिका भेजने के नाम पर ट्रैवल एजेंट को अलग-अलग समय में किस्तों में यह रकम दी। एजेंट ने बेटे को लीगल तरीके से अमेरिका भेजने का भरोसा दिया था, लेकिन उसने डंकी रूट के जरिए मेक्सिको पहुंचाया और वहां से अवैध तरीके से अमेरिका में दाखिल करा दिया। अमेरिका पहुंचते ही बॉर्डर पुलिस ने नवीन को पकड़ लिया और उसे करीब 14 महीने तक डिटेंशन सेंटर में रहना पड़ा। दिसंबर 2025 में अमेरिकी सरकार ने उसे डिपोर्ट कर भारत भेज दिया। इसके बाद परिवार को ठगी का पता चला। पंचायत में एजेंट ने एक महीने के भीतर 50 लाख रुपए लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन आरोप है कि समय सीमा पूरी होने के बाद उसने पैसे लौटाने के बजाय फोन उठाना बंद कर दिया। पानीपत के ओल्ड इंडस्ट्रियल थाने में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सिलसिलेवार ढंग से जानिए शिकायत में क्या आरोप लगाए… सरकारी विभाग में ड्राइवर हैं राकेश गोहाना निवासी राकेश कुमार ने शिकायत में कहा कि वह हरियाणा सरकार के मिनिस्ट्री कार सेक्शन में बतौर ड्राइवर तैनात हैं। इस समय वह अंबाला कैंट स्थित शास्त्री कॉलोनी में मंत्री अनिल विज के आवास पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका छोटा बेटा नवीन वर्मा सीनियर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और वह उच्च शिक्षा व रोजगार के लिए अमेरिका जाना चाहता था। साले के दोस्त ने पानीपत के ट्रैवल एजेंट से मिलवाया राकेश ने बताया कि उनके साले के दोस्त, जींद के पिल्लूखेड़ा निवासी मनोज कुमार ने उनकी मुलाकात पानीपत की गोपाल कॉलोनी निवासी ट्रैवल एजेंट कुलदीप से करवाई थी। पानीपत में हुई पहली मीटिंग में एजेंट कुलदीप ने नवीन को वैध तरीके से (बाय-एयर) कानूनी प्रक्रिया के जरिए अमेरिका पहुंचाने का भरोसा दिलाया। इस सौदे के लिए कुल 40 लाख रुपए तय हुए। पहली मुलाकात में 5 लाख एडवांस दिए राकेश ने बताया कि बड़े बेटे प्रवीण वर्मा ने अपने दोस्त अमित की मौजूदगी में पहली ही मुलाकात में एजेंट कुलदीप को 5 लाख रुपए एडवांस दे दिए। अक्टूबर 2024 में एजेंट गोहाना स्थित उनके घर पहुंचा, जहां से वह नवीन का पासपोर्ट ले गया। इसके कुछ ही दिनों बाद पानीपत के सनौली रोड पर एजेंट को 10 लाख रुपए नकद थमा दिए गए। वीजा के नाम पर 8 लाख रुपए और लिए राकेश के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2024 को वीजा लगवाने के नाम पर एजेंट कुलदीप और उसके साथी आशू ने 8 लाख रुपए की मांग की। बड़े बेटे प्रवीण और उसके दोस्त अमित पानीपत के होटल मिड टाउन पहुंचे, जहां प्रवीण की ID पर कमरा बुक हुआ था। वहां दोनों आरोपियों को 8 लाख रुपए कैश दिए गए। अलग-अलग खातों में ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करवाई राकेश ने बताया कि एजेंट के कहने पर दुबई में रह रहे लाडवा निवासी सिद्धार्थ गोयल के अकाउंट में 92,150 रुपए ऑनलाइन डलवाए गए। नवीन के खाते में 95,000 रुपए चार किस्तों में डलवाए गए। इसके अगले ही दिन सिद्धार्थ गोयल के खाते में 52,000 रुपए और 2,800 रुपए दोबारा ट्रांसफर करवाए गए। एजेंट कुलदीप अपने साथी सोनू रंधावा निवासी ब्यास, पंजाब के साथ गोहाना स्थित घर पहुंचा और 12 लाख रुपए कैश ले गया। पिहोवा में 10 लाख रुपए और दिलवाए राकेश के मुताबिक, 3 दिसंबर को एजेंट पीड़ित के बेटे प्रवीण को गाड़ी में बैठाकर कुरुक्षेत्र के पिहोवा ले गया और वहां किसी अनजान व्यक्ति को 10 लाख रुपए दिलवाए। 5 दिसंबर को गोहाना स्थित घर आकर 5 लाख रुपए और ले लिए गए। इसके बाद 5 नवंबर 2024 को नवीन को फ्रांस की फ्लाइट में बैठाया गया। दिल्ली एयरपोर्ट पर एजेंट कुलदीप ने उससे 95,000 रुपए और लिए। लीगल रास्ते के बजाय डंकी रूट से अमेरिका भेजने का आरोप राकेश ने कहा कि एजेंट ने परिजनों को यह कहकर गुमराह किया कि प्रोसीजर के तहत कुछ दिन बेटे से बात नहीं हो पाएगी। आरोप है कि एजेंट ने लीगल रास्ते के बजाय नवीन को अवैध तरीके से डंकी रूट से मेक्सिको पहुंचा दिया और वहां से बॉर्डर पार कराकर अमेरिका में अवैध घुसपैठ करवा दी। अमेरिका में दाखिल होते ही वहां की बॉर्डर पुलिस ने नवीन को पकड़ लिया। इसके बाद उसे 14 महीने तक अमेरिका के डिटेंशन सेंटर में जेल की सलाखों के पीछे अत्यंत कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ा। आखिरकार, दिसंबर 2025 में अमेरिकी सरकार ने उसे डिपोर्ट कर भारत वापस भेज दिया। डिपोर्ट होकर लौटने पर ठगी का पता चला राकेश ने बताया कि दिसंबर 2025 में जब बेटा बदहवास हालत में डिपोर्ट होकर घर लौटा तो ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद परिजनों ने एजेंट कुलदीप को दबोचा। बिरादरी की पंचायत बुलाई गई, जिसमें एजेंट ने 1 महीने के भीतर पूरे 50 लाख रुपए लौटाने का लिखित और मौखिक वादा किया। हालांकि, समय सीमा बीतते ही आरोपी अपनी बात से मुकर गया। उसने फोन उठाना बंद कर दिया और छिपने लगा। रुपए मांगने पर जान से मारने की धमकी का आरोप राकेश का आरोप है कि अब जब भी वे रुपए वापस मांगते हैं तो आरोपी कुलदीप, आशू, सोनू रंधावा और उनके साथी उन्हें जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। आरोपी अपनी ऊंची राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच का रौब दिखाते हुए पीड़ित परिवार को झूठे पुलिस केस में फंसाने की धमकियां भी दे रहा है।
अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों और 3 कारोबारियों पर क्यों लगाया प्रतिबंध? लिस्ट में कौन-कौन
US sanctions Indian Companies:
आरएसएस प्रमुख का दौरा अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं पर चर्चा करने का अवसर: सिख-अमेरिकी नेता
वॉशिंगटन, 26 अगस्त . आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर सिख-अमेरिकी समुदाय के नेता जसदीप सिंह जस्सी ने उनका स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह दौरा अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं पर चर्चा करने का अवसर है. जस्सी ने कहा कि भागवत का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण और चर्चा में रहने वाला है. ... Read more
नेशनल अवॉर्डी और गुलाबी मीनाकारी के मास्टर आर्टिजन कुंज बिहारी सिंह बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों से रक्षाबंधन के लिए कारीगर एक महीने पहले से इसकी तैयारी में जुट जाते हैं।
रूस में अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ की सीक्रेट लैंडिंग! अचानक उतरा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, मॉस्को हैरान
मॉस्को/वाशिंगटन: मॉस्को के अति-सुरक्षित एयरपोर्ट पर उस समय हड़कंप मच गया जब अमेरिकी वायुसेना का एक विशेष सीक्रेट ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट अचनाक लैंड हुआ। सूत्रों के मुताबिक, इस सीक्रेट फ्लाइट में कोई साधारण प्रतिनिधिमंडल नहीं, बल्कि अमेरिका के सीआईए (CIA) चीफ खुद मॉस्को पहुंचे हैं। अचानक हुई इस सीक्रेट लैंडिंग ने न सिर्फ रूसी सुरक्षा एजेंसियों […] The post रूस में अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ की सीक्रेट लैंडिंग! अचानक उतरा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, मॉस्को हैरान first appeared on Sanjeevni Today .
US Sanctions Indian Firms: अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक शिकंजा कसने के लिए अपने नए वैश्विक अभियान 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत बड़ा कदम उठाया है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के व्यापार में कथित संलिप्तता के आरोप में 4 भारतीय कंपनियों और 3 भारतीय नागरिकों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा दुनिया भर में ईरान के सैन्य नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और तेल व्यापार से जुड़ी करीब 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर की गई व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।किन 4 भारतीय कंपनियों पर लगा प्रतिबंध?अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बड़े सौदों में मुख्य भूमिका निभाई है:Portease Partners LLP: यह एक कस्टम ब्रोकर फर्म है, जिस पर ईरान से भारत में पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों की आवाजाही को सुगम बनाने का आरोप है।Sadashiva Overseas Ltd: अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, इस कंपनी ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच लगभग $6.9 करोड़ (करीब ₹575 करोड़) मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया।PP Softtech Pvt Ltd: इस फर्म पर जनवरी 2024 से जून 2025 के दौरान लगभग $2.5 करोड़ (करीब ₹208 करोड़) के ईरानी तेल उत्पादों के आयात का आरोप है।Prakrutees Infra Impex India Pvt Ltd: इस कंपनी ने मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच करीब $2.5 करोड़ (करीब ₹208 करोड़) मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की।प्रतिबंधित 3 भारतीय नागरिक कौन हैं?अमेरिकी विदेश विभाग ने इन कंपनियों से जुड़े तीन प्रमुख अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से ब्लैकलिस्ट किया है: इद्रिसमिया अशरफमिया शेख (Indrismiya Ashrafmiya Shekh)– पोर्टीज पार्टनर हरीश रामचंद्र रंगी (Harish Ramchandra Rangi)– पोर्टीज पार्टनर प्रशांत गर्ग (Prashant Garg)– पीपी सॉफ्टटेक अमेरिका ने इन सभी पर कार्यकारी आदेश 13846 के तहत कार्रवाई की है, जो जानबूझकर ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल से जुड़े बड़े वित्तीय लेनदेन करने वाली विदेशी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है।क्या है 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट'?अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को इस नए और आक्रामक अभियान की घोषणा की। 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का लक्ष्य ईरान के वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संपर्कों को पूरी तरह से काटना है।अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान सरकार के उन राजस्व स्रोतों को बंद करना है, जिनका इस्तेमाल वह अपने पड़ोसी देशों पर हमलों, सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ावा देने में करता है।वाशिंगटन ने दुनिया भर की सरकारों और निजी कंपनियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ किसी भी तरह के कारोबार से दूर रहें, अन्यथा उन्हें अमेरिका के द्वितीयक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।अमेरिका द्वारा भारतीय फर्मों पर लगाए गए इन प्रतिबंधों का सीधा असर उनके अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, डॉलर लेनदेन और विदेशी व्यापार पर पड़ेगा। वाशिंगटन द्वारा वैश्विक स्तर पर ईरान के व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने से भारत समेत कई देशों की आयात-निर्यात बेस्ड कंपनियों के लिए कंप्लायंस जोखिम बढ़ गया है।
ईरान के खिलाफ अमेरिका ने आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने ‘Operation Economic Outcast’ के तहत ईरान से जुड़े करीब 60 संस्थानों और नेटवर्क पर नई पाबंदियां लगाई हैं। इसी कार्रवाई में चार भारत-आधारित कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंधों की चपेट में आई हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान […] The post ‘इकोनॉमिक डी-डे’ के नाम पर अमेरिका का ईरान पर कड़ा वार, भारत तक पहुंची आंच; चार भारतीय कंपनियों पर बैन, निर्यात और तेल आयात दोनों प्रभावित होने के आसार first appeared on Sanjeevni Today .
कैरिबियाई सागर में अमेरिका ने एक और नाव को बनाया निशाना: चार की मौत, ट्रंप के ड्रग्स अभियान पर क्यों उठे सवाल? US targets another boat Caribbean Sea Four dead why are questions being raised about Trump anti-drug campaign
अमेरिका में वीजा अपॉइंटमेंट पर लगा ब्रेक, दुनिया भर के आवेदकों की बढ़ी चिंता; जानें क्या है पूरा मामला
दुनियाभर में अमेरिकी वीजा अपॉइंटमेंट पर अस्थाई रोक, ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन को लेकर बढ़ती सख्ती के कारण अमेरिका ने दुनिया भर के आवेदकों के वीजा अपॉइंटमेंट पर रोक लगा दी है. अमेरिकी दूतावासों में एक ग्लोबल ट्रेनिंग पहल शुरू की गई है। अमेरिका ने दुनिया भर के आवेदकों के वीजा अपॉइंटमेंट पर रोक ...
खाने में थोड़ी दिक्कत, बाकी सब बढ़िया..' 1 महीना रहकर पिता को कैसा लगा अमेरिका, बेटी ने शेयर किया रिएक्शन; Video
कंपनियों को चीन-रूस की खुफिया एजेंसियों से दूर रखना जरूरी, अमेरिकी लॉमेकर्स ने उठाई आवाज
वॉशिंगटन, 26 अगस्त . अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों के लॉमेकर्स के एक समूह ने ट्रंप प्रशासन से मांग की है कि अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को चीन और रूस की सिविलियन खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने से रोका जाए. लॉमेकर्स का कहना है कि मौजूदा कमियों की वजह से विदेशी दुश्मन देश अमेरिका ... Read more
ईरान से तेल खरीदा... अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों और 3 बिजनेसमैन पर लगाए प्रतिबंध
अमेरिका ने साफ कहा है कि जो देश ईरान को पैसे की अवैध तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग करने की अनुमति देते रहेंगे, उन्हें अमेरिकी डॉलर वाली वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर दिया जाएगा.
अमेरिका में ड्रग कार्टेल के लिए 7.5 लाख डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग, मैक्सिकन नागरिक गिरफ्तार
वॉशिंगटन, 26 अगस्त . अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट ने कहा है कि मिनेसोटा में एक मनी ट्रांसफर कंपनी में काम करने वाले मेक्सिको के एक नागरिक पर आरोप है कि उसने मेक्सिको के सबसे शक्तिशाली ड्रग कार्टेलों में से एक के लिए 750,000 डॉलर की कथित ड्रग कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग करने में मदद की. मिनियापोलिस ... Read more
LPG Price Today: घरेलू गैस सिलेंडर के दाम फिर स्थिर, दिल्ली में ₹942, अमेरिका से बढ़ा LPG आयात
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विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी कंट्री सिंगर, गीतकार, अभिनेत्री और समाजसेविका डॉली पार्टन (Dolly Parton) का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. उनके परिवार और टीम की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रही थीं. उन्होंने वेंडरबिल्ट-इंग्राम कैंसर सेंटर में अपने परिजनों के बीच अंतिम सांस ली.
अमेरिका के बिना कनाडा आर्थिक रूप से नहीं टिक सकता : ट्रंप
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अमेरिका से भारत लौटे शख्स ने पार्किंग और भीड़भाड़ पर कही ऐसी बात, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
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ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का विस्तार, भारत की चार कंपनियां भी निशाने पर
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। इस बार भारत भी इसकी चपेट में आ गया है। ट्रंप प्रशासन ने चार भारतीय कंपनियों और तीन नागरिकों पर कार्रवाई की है
अमेरिकी प्रतिबंधों पर ईरान ने दी चेतावनी, देखें US TOP-10
ईरान ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर कड़ा पलटवार किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रुभता का गंभीर उल्लंघन है. उन्होनें चेतावनी दी की ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा के रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा. बघाई ने यह भी कहा कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई के स्रोत को निशाना बनाना ईरान का अधिकार है.
ईरान पर अमेरिका का यू-टर्न? रुबियो बोले- नए हमले की तैयारी नहीं
मार्को रुबियो ने सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों से कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर नए हमले की तैयारी नहीं कर रहा है. इससे संकेत मिला है कि वॉशिंगटन अभी सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय प्रतिबंध, नौसैनिक दबाव और होर्मुज में तेल आवाजाही पर फोकस रखेगा.
NRI कोटे से किसी भी स्कोर पर MBBS सीट दिलवा देंगे। 30 हजार आप इंडिया में हमें दे दीजिएगा। बाकी का 1 करोड़ अमेरिका, दुबई से कैंडिडेट के अकाउंट में डलवाएंगे। कोई नहीं कह पाएगा कि NRI नहीं है। मैं बिहार से हूं। एमपी में 11 साल से रह रहा हूं। अब तक 3 हजार से ज्यादा डॉक्टर बना चुका हूं। अपना नेटवर्क तो पूरे देश में फैला है। जहां जिस कॉलेज में बोलिएगा MBBS की सीट लॉक करा दूंगा। कोई भी ऐसा राज्य नहीं जहां अपनी सेटिंग से कॉलेज की सीट फिक्स न हो जाए। हम लोगों ने ऐसी नेटवर्किंग बनाई है, एक कॉल पर एडमिशन होता है। पैसा खर्च कीजिए किसी भी कोटे से सेट करा दूंगा। हम लोग ऐसे काम नहीं करते हैं, पैसा देकर पहले ही कॉलेजों से सीट होल्ड करा लेते हैं..। ऐसे दावे देश के अलग-अलग राज्यों में बैठे एजेंट्स कर रहे हैं जो MBBS की सीट बेच रहे हैं। हर एजेंट का कनेक्शन बिहार से है। बिहार के एजेंट्स ने पूरे देश में नेटवर्क मार्केटिंग की तरह अपना जाल फैला दिया है। ऑपरेशन MBBS पार्ट 3 में पढ़िए और देखिए बिहार के एजेंट्स ने देश में कैसे खड़ा किया MBBS की सीट बेचने वाला नेटवर्क..। भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम ने इन्वेस्टिगेशन के दौरान देश के 6 से अधिक राज्यों में बात की है। हर राज्य में MBBS सीट की डील करने वाला एजेंट्स बिहार का निकला। रिपोर्टर्स के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि देश के अलग-अलग राज्यों में कैसे नेटवर्क मार्केटिंग की तरह एजेंट्स ने अपना जाल फैलाया और कैसे MBBS की सीट बेच रहे हैं। इन्वेस्टिगेशन में सबसे बड़ा नाम प्रिंस का सामने आया जो बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है, लेकिन पूरे देश में अपना नेटवर्क खड़ा कर रखा है। वो खुद मध्य प्रदेश के भोपाल में रहता है, वहीं से MBBS की पूरी डील करता है। इनपुट मिला कि फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर वह अब तक 3000 से अधिक डॉक्टर बना चुका है, इसी कमाई से भोपाल में खुद हॉस्पिटल चलाता है। प्रिंस से मिलने भास्कर रिपोर्टर अंडर कवर बनकर 1100 किमी दूर भोपाल के सलैया पहुंचे। बातचीत में खुद प्रिंस ने ही पूरा खुलासा कर दिया। रिपोर्टर - मैं बिहार से आया हूं, एडमिशन के संबंध में बात करनी है। प्रिंस - बढ़िया है, हो जाएगा। अपना तो काम ही यही है, देश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में जाइए अपना आदमी मिलेगा। रिपोर्टर - आप बिहार से भोपाल कैसे पहुंच गए।प्रिंस - मैने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, नौकरी नहीं लगी तो यही काम शुरू कर दिया। अब तक तीन हजार से अधिक छात्र-छात्राओं का डॉक्टरी में एडमिशन करा चुका हूं। रिपोर्टर - तब तो आपकी पूरी सेटिंग होगी?प्रिंस - एमपी और बिहार नहीं देश में कोई भी मेडिकल कॉलेज ऐसा नहीं है, जहां अपनी सेटिंग नहीं है। रिपोर्टर - आपके साथ तो बहुत लोग काम करने वाले होंगे?प्रिंस - पूरा नेटवर्क है, बिहार के लोग देश के हर राज्य में हैं, सब एक दूसरे से जुड़े हैं। MBBS एडमिशन के लिए हम लोगों की मार्केटिंग की पूरी चेन है। रिपोर्टर - स्टूडेंट्स का पता कैसे चलता है?प्रिंस - अलग-अलग शहरों में लोग हैं, स्टूडेंट्स की जानकारी जुटाते हैं, फिर नंबर और मार्क्स देखकर उन्हें आगे भेज देते हैं। हम लोग भी कैंडिडेट्स के इंटरेस्ट के हिसाब से उन्हें कॉलेज दिला देते हैं। रिपोर्टर - काउंसलिंग तो करानी ही पड़ती होगी?प्रिंस - प्रक्रिया तो सभी पूरी की जाती है, लेकिन कोटा तो अपना पहले से सेट करके रखा जाता है। कैंडिडेट्स के आधार पर डॉक्यूमेंट्स तैयार करा दिए जाते हैं। रिपोर्टर - इसमें तो बहुत लोगाें और बड़ी सेटिंग की जरूरत पड़ती होगी। प्रिंस - NRI डॉक्यूमेंट्स और कॉलेज तक पहुंचाने की प्रक्रिया में अलग-अलग लोग जुड़ते हैं। प्रिंस बोला- छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में ही एडमिशन करवा दूंगा प्रिंस ने अंडर कवर रिपोर्टर्स से डील के दौरान MBBS सीट बेचने में कमाई का पैकेज भी बताया। प्रिंस ने दावा किया कि 220 नंबर पाने वाले स्टूडेंट्स के लिए NRI कोटे से MBBS में एडमिशन का पैकेज करीब 1 से 1.5 करोड़ तक का है। हॉस्टल का खर्च अलग से देना होगा। प्रिंस ने छत्तीसगढ़ की सेटिंग का दावा करते हुए बताया कि वहां 1 करोड़ में ही MBBS में एडमिशन करा देंगे। प्रिंस का दावा है कि हर कोटे के लिए उसकी सेटिंग है। पहले से ही कॉलेज से सीट को लेकर डील हो जाती है। इसके बाद काउंसलिंग शुरू होते ही सीट की डीलिंग भी शुरू हो जाती है। किसी कैंडिडेट्स के परिवार में कोई NRI हो या ना हो, प्रिंस डॉक्यूमेंट्स से उसे NRI बनवा देगा। इतना ही नहीं NRI स्पॉन्सर की व्यवस्था भी प्रिंस खुद करता है। दावा किया कि स्टूडेंट यादव है तो यादव सरनेम वाला NRI स्पॉन्सर भी ढूंढकर दिया जाएगा। प्रिंस ने बताया कि कागजों में NRI स्पॉन्सर छात्र की पढ़ाई का खर्च उठाने वाला दिखेगा, जबकि असली पैसा छात्र का परिवार देगा। प्रिंस से डील करने के बाद हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम को प्रदीप का इनपुट मिला। प्रदीप बिहार के कटिहार का रहने वाला है, फिलहाल वो नोएडा में रहता है। प्रदीप के बारे में जानकारी मिली कि वो बिहार और यूपी के अधिकतर स्टूडेंट्स की कॉलेज में सेटिंग नोएडा में बैठकर करता है। प्रदीप का दावा- राजस्थान और बंगाल में सेटिंग भास्कर के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने प्रदीप से दो स्टूडेंट्स के एडमिशन के लिए अलग-अलग डील की। हमने बताया कि 215 और 220 स्कोर वाले स्टूडेंट्स का MBBS में एडमिशन कराना है। प्रदीप ने भी वही रास्ता बताया जो बाकी एजेंट्स ने बताया। प्रदीप ने दावा किया कि MBBS में जितनी भी NRI कोटे की सीट होती है, हम लोग ही उसकी सेटिंग करते हैं। अगर कॉलेज एजेंट्स से अलग हो जाए तो ये सीट भर ही नहीं पाएंगी। प्रदीप ने दावा किया कि 215-220 नंबर पर एडमिशन के लिए राजस्थान और बंगाल में सेटिंग है। प्रदीप ने ऑल इंडिया काउंसलिंग के अलावा राजस्थान और पश्चिम बंगाल में एडमिशन के विकल्प बताए। उसने दावा किया कि राजस्थान और बंगाल में NRI दस्तावेज नहीं होने के बावजूद एडमिशन का रास्ता निकाला जाता है। डेढ़ लाख रुपए में लिस्ट क्लियर करा देंगे, इसके बाद NRI डॉक्यूमेंट्स के लिए साढ़े 4 लाख रुपए लेंगे। इसके अलावा NRI के खाते से 10 लाख रुपए के बराबर अमेरिकी डॉलर ट्रांसफर कराने और विदेशी लेनदेन पर करीब 2 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज लगने की बात भी कही। एजेंट्स की विदेशों में सेटिंग प्रदीप से बातचीत में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदीप के मुताबिक NRI कोटे में एडमिशन के लिए विदेश से पैसे का ट्रांजेक्शन दिखाना पड़ता है। कॉलेज में एडमिशन के बाद वह विदेश में बैठे अपने आदमियों से ट्रांजेक्शन कराएगा। अमेरिका से फंड ट्रांजेक्शन कराने का एक नया ट्रेंड भी सामने आया। प्रदीप ने बताया कि जितने भी एडमिशन NRI कोटे से होते हैं, इसमें फंड बाहर से ही आता है। प्रदीप ने बताया कि जितने भी एजेंट्स हैं, उनकी विदेशों में सेटिंग होती है। वह वहां से ही पैसे ट्रांसफर कॉलेज के खातों में कराते हैं। प्रदीप ने बताया कि स्टूडेंट्स की सीट सेट करने के लिए नीट स्कोर में सेटिंग से लेकर काउंसलिंग, NRI डॉक्यूमेंट्स लिस्ट में नाम और पैसे के लेनदेन तक की अलग-अलग व्यवस्था बनानी पड़ती है। प्रदीप से डील के दौरान ही निखिल यादव का मोबाइल नंबर मिला। निखिल बिहार के रक्सौल का रहने वाला है, लेकिन उसका नेटवर्क देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों तक फैला है। वह दिल्ली में बैठकर MBBS की सीट बेच रहा है। प्रदीप और निखिल ने डील के दौरान बिहार के कई एजेंटस के नाम लिए जो देश के अलग-अलग राज्यों में बैठकर MBBS सीट की डील कर रहे हैं। इस तरह से एक एजेंट से दूसरे एजेंट तक पहुंचने पर नेटवर्क की एक और कड़ी सामने आई। निखिल का दावा- कॉलेज पहले ही कोटे वाली सीट बेच देते हैं कॉलेज से पहले ही हम लोगों की डील हो जाती है। कॉलेज पहले ही कोटे वाली सीट का रेट बता देते हैं। हम लोग उसका सौदा कर एडवांस देकर सीट होल्ड करा लेते हैं। इसके बाद एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स को भेज देते हैं। कॉलेज से हिसाब किताब बाद में हो जाता है स्टूडेंट एडमिशन के लिए आए तो उसे आगे कॉलेज तक ले जाने की व्यवस्था करा दी जाती है। जरूरत पड़ने पर दिल्ली से फ्लाइट से बेंगलुरु ले जाकर एडमिशन कराते हैं। MCC के NRI नियमों से हम लोगों को मदद मिलती है, इससे हम कम स्कोर के बाद भी स्टूडेंट्स को कोटे वाली सीट दिला देते हैं। बिहार और बंगाल में NRI दाखिले से जुड़े कुछ नियम और डॉक्यूमेंट्स स्पष्ट नहीं होने के कारण कॉलेजों से बातचीत में दिक्कत आ रही है। जबकि दूसरे राज्यों में प्रक्रिया पूरी तरह आसान है। बड़ी ही आसानी से हम एडमिशन की पहले से ही डील करके रखते हैं। हम लोगों के नेटवर्क में हर व्यक्ति का अपना-अपना काम तय है। कोई छात्र और उसके परिवार से संपर्क करता है, कोई NRI डॉक्यूमेंट्स बनवाता है तो कोई स्पॉन्सर फिक्स कर विदेश से पैसे का ट्रांजेक्शन करने की सेटिंग करता है। इसी में से कुछ को कॉलेज तक पहुंचाने और वहां बातचीत कराने की जिम्मेदारी दी जाती है। हैदराबाद से लेकर बंगाल तक सेटिंग निखिल ने तेलंगाना के हैदराबाद और पश्चिम बंगाल में एडमिशन कराने का दावा किया। उसने कहा, देश का कोई भी राज्य हो और वहां का कोई भी मेडिकल कॉलेज हो, सब कोई जानता है। निखिल का दावा है कि राजस्थान में तीसरे राउंड की काउंसलिंग में बड़ा ऑप्शन निकलेगा। कॉलेजों से लगातार बातचीत हो रही है। डीम्ड कॉलेजों में NRI और मैनेजमेंट सीटों को लेकर पहले से ही सेटिंग हो गई है। निखिल ने कहा कि किसी कॉलेज से सीधे फोन पर एडमिशन की बात नहीं होती। पहले काउंसलिंग, रजिस्ट्रेशन और NRI डॉक्यूमेंट्स की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद कैंडिडेट्स को कॉलेज ले जाकर संबंधित लोगों से आमने-सामने बातचीत करा दी जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि कोई भी एजेंसी किसी को नहीं पकड़ पाए। ऐसा करने से कॉलेज और एजेंट्स दोनों सेफ होते हैं। निखिल का दावा है कि देश में फैले बिहार के एजेंट्स कोटे वाली सीट की पहले से ही डील कर लेते हैं। कोटे की जितनी भी सीट होती है वह सेटिंग से ही भरती है। अगर एजेंट्स हाथ नहीं डाले तो कॉलेज की सीटें खाली जाएंगी और कॉलेज एक्सपोज भी हो जाएंगे। सबसे अधिक डील NRI कोटे की होती है। इस कोटे से एडमिशन सबसे आसान होता है। एजेंट्स कॉलेज की फीस अलग से दिलवाते हैं, अपना कमीशन वह अलग से लेते हैं। हॉस्टल के करीब 2 लाख रुपए सालाना खर्च में भी एजेंट्स अपना कमीशन फिक्स कर लेते हैं। निखिल बोला- एडमिशन के पहले 35-40 लाख लगेंगे निखिल ने बताया कि कैंडिडेट्स के पैरेंट्स को पहले एडमिशन के बाद पहले साल कम से कम 35 से 40 लाख रुपए तैयार रखने पड़ते हैं। उसने कुछ कॉलेजों के लिए करीब 95 लाख रुपए के पैकेज का भी जिक्र किया। बातचीत में उसने हैदराबाद के महेश्वरा और राजा राजेश्वरी कॉलेज का नाम लिया। वहां हाल में उसने एक कैंडिडेट्स की बुकिंग और दूसरे की प्रक्रिया चलने का दावा किया। एक लड़की के लिए करीब 95 लाख रुपए के पैकेज में एडमिशन होने की बात भी कही। निखिल ने कहा कि वह केवल फोन पर कॉलेज का नंबर देकर कैंडिडेट्स को भेजने के बजाय खुद फ्लाइट से कॉलेज ले जाएगा और वहां संबंधित लोगों से आमने-सामने बातचीत कराएगा। एजेंट से एजेंट तक जुड़ती गई कड़ियां प्रिंस, प्रदीप और निखिल से बातचीत अलग-अलग जगहों पर हुई, लेकिन तीनों की बातचीत को जोड़ने पर एक जैसा तरीका सामने आया। पहले छात्र के नंबर और कैटेगरी की जानकारी ली जाती है। इसके बाद उसके लिए कॉलेज और कोटे का विकल्प बताया जाता है। NRI दस्तावेज नहीं होने पर स्पॉन्सर की व्यवस्था की बात होती है और फिर काउंसलिंग से लेकर कॉलेज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने का दावा किया जाता है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि यह काम सिर्फ एक एजेंट तक सीमित नहीं है। इसके लिए पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। नेटवर्क में शामिल अधिकतर लोग बिहार के हैं। बिहार से बच्चों की अधिक डिमांड होती है, इसलिए इस नेटवर्क में यूपी बिहार के एजेंट्स का सिक्का चलता है। कॉलेज भी उनके संपर्क में रहते हैं ताकि कोई सीट खाली नही जाए। इन्वेस्टिगेशन में यह भी साफ हो गया कि कहीं कोई एजेंट फंसे नहीं, इसका भी बहुत ख्याल रखा जाता है। इसलिए एक एजेंट दूसरे एजेंट का नंबर देता है और आगे की प्रक्रिया के लिए दूसरे एजेंट से बात कराई जाती है। यानी पूरा सिस्टम एक तरह से नेटवर्क मार्केटिंग चेन की तरह काम करता दिखाई देता है। एक तरफ ऐसे लोग हैं जो स्टूडेंट और उसके परिवार तक पहुंचते हैं। इसके बाद मार्क्स और बजट के हिसाब से एडमिशन का विकल्प बताया जाता है। फिर NRI डॉक्यूमेंट्स और स्पॉन्सर की व्यवस्था की बात करने वाला एजेंट सामने आता है। आगे काउंसलिंग और रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोग और आखिर में कॉलेज तक ले जाकर सीट और फीस पर बातचीत कराने का दावा करने वाले एजेंट जुड़ते हैं। कम नंबर वाले स्टूडेंटस को तलाशते हैं एजेंट हमारी इन्वेस्टिगेशन में एक और बात सामने आई वह कम स्कोर वाले स्टूडेंट्स पर टारगेट करने वाली थी। एजेंट्स का पूरा जोर कम नंबर वाले स्टूडेंट्स पर अधिक होता है। 215, 220 और इसके आसपास के नंबर बताए जाने पर एजेंटों ने अलग-अलग राज्यों और NRI कोटे के विकल्प बताने शुरू किए। इसके बाद बातचीत सीधे पैकेज और अतिरिक्त खर्च तक पहुंची। ऐसा इनपुट भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को पहले ही मिला था, इसलिए रिपोटर्स अंडर कवर बनकर कम स्कोर वाले स्टूडेंट्स पर ही बात की। एजेंट प्रिंस ने 220 नंबर पर 1.10 से 1.20 करोड़ रुपए के पैकेज की बात की और एजेंट प्रदीप ने 215-220 नंबर वाले छात्रों के लिए राजस्थान और बंगाल में सेटिंग बताई। निखिल ने डॉक्यूमेंटस, सर्विस, काउंसलिंग और कॉलेज तक पहुंचाने की कड़ी को जोड़ा और पैकेज की जानकारी दी। एजेंट्स और कॉलेज की कड़ी बिहार से जुड़ी भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार, मध्य प्रदेश, बंगाल, राजस्थान, यूपी, दिल्ली में 50 से अधिक एजेंट्स से बात की है। इसमें 80 प्रतिशत बिहार के एजेंट्स निकले हैं। जो बिहार के रहने वाले नहीं हैं, वह बिहार के एजेंट्स के संपर्क में है। इन्वेस्टिगेशन में यह साफ हो गया कि देश में कहीं भी MBBS की सीट बिक रही है, इसमें बिहार के एजेंट्स शामिल हैं। इन्वेस्टिगेशन में यह भी पता चला कि जो एजेंट पहले बिहार में काम करते थे, वह अब देश के अलग-अलग राज्यों में सेट हो गए हैं। बिहार के रहने वाले 3 एजेंट प्रिंस, प्रदीप और निखिल ने राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में बड़ी सेटिंग होने का दावा किया है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आए एजेंट्स की बातचीत के आधार पर यह नेटवर्क एक ऐसे मार्केटिंग सिस्टम की तरह काम करता दिखाई देता है, जिसमें छात्र को पहले संभावित ग्राहक के तौर पर जोड़ा जाता है और फिर उसके नंबर, कैटेगरी और बजट के हिसाब से अलग-अलग विकल्प बताए जाते हैं। इसके बाद एजेंट से दूसरे एजेंट तक छात्र को पहुंचाने, NRI दस्तावेज और स्पॉन्सर की व्यवस्था करने तथा कॉलेज तक ले जाने की बात कही जाती है। एजेंट्स के दावों की पुष्टि अलग-अलग कॉलेजों या संबंधित संस्थानों से भी हुई है। हालांकि बातचीत में जिस तरह एक एजेंट से दूसरे एजेंट का नंबर मिलता गया और एडमिशन की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग लोगों के जरिए संभालने की बात सामने आई, उससे इस नेटवर्क की आपसी कनेक्टिविटी का भी खुलासा होता है। बिहार के एजेंट प्रिंस, प्रदीप और निखिल से बातचीत के दौरान ही बंगाल में MBBS सीट के लिए नेटवर्क चलाने वाली मौसम का इनपुट मिला। वह पश्चिम बंगाल से काम करती है, जबकि मौसम पूर्णिया की रहने वाली है। मौसम ने दावा किया कि वह लंबे समय से बंगाल में रह रही है। मौसम से रिपोटर्स ने फोन पर बात की। NEET में 545 नंबर के स्कोर कार्ड के साथ रिपोर्टर्स ने बातचीत शुरु की। मौसम का दावा- राजस्थान और बंगाल के कॉलेज का नेटवर्क है मौसम ने कहा, देखिए 545 नंबर पर सामान्य तरीके से सरकारी मेडिकल कॉलेज एडमिशन मिलना मुश्किल है, लेकिन मेरे पास सरकारी कॉलेज में एडमिशन कराने का रास्ता है। इसके लिए फीस ज्यादा देनी होगी। कई कोटे हैं अपने पास। हम किसी न किसी कोटे से स्टूडेंट्स की सीट सेट करा देंगे। राजस्थान और बंगाल के सरकारी कॉलेज के लिए मेरे पास नेटवर्क है। दोनों स्टेट में काम हो जाएगा। सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेने के कई फायदे हैं, एडमिशन तो पूरा जुगाड़ से होगा, लेकिन इसका फायदा स्टूडेंट्स को आगे मिलेगा। इसी वजह से लोग सरकारी कॉलेज के लिए इतना पैसा खर्च करने को तैयार होते हैं। सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल से सेटिंग का दावा बिहार की रहने वाली और बंगाल में नेटवर्क चलाने वाली मौसम ने दावा किया कि उसकी सेटिंग सरकारी कॉलेजों में तगड़ी है। वह सीधा प्रिंसपल से डील करा देगी। मौसम ने कहा, आप बंगाल आइए एक लाख रुपए जमा कर दीजिए और फिर मैं प्रिंसपल से आमने-सामने डील करा दूंगी। इसके लिए कोलकाता आना पड़ेगा। रिपोर्टर ने पूछा कि क्या कॉलेज में जाकर सीधे बात होगी? मौसम ने कहा कि हां, कॉलेज में बैठकर बात हो सकती है। रिपोर्टर ने सवाल किया कि किस कॉलेज में बात होगी तो मौसम ने दावा किया कि राजस्थान के साथ पश्चिम बंगाल के कई सरकारी कॉलेजों में वह आमने-सामने बैठाकर डील करा देगी। मौसम ने राजस्थान और बंगाल के कई कॉलेजों का नाम लिया। मौसम ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (कोलकाता), एसएसकेएम मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (कोलकाता), नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (कोलकाता) जैसे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कराने का दावा किया। रिपोर्टर ने पूछा कि अगर हमें कॉलेज में जाकर देखना हो तो क्या करना होगा? मौसम ने कहा कि सरकारी कॉलेज में आम आदमी सीधे जाकर इस तरह बातचीत नहीं कर सकता। उसके मुताबिक पहले उनके ऑफिस आना होगा और वहां से कॉलेज में ले जाकर मुलाकात कराई जाएगी। पहले MCC रजिस्ट्रेशन, फिर कॉलेज ले जाने की बात मौसम ने बातचीत में एक बात पर खास जोर दिया कि पहले MCC में रजिस्ट्रेशन करना होगा। उसने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन के आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती। रिपोर्टर ने पूछा कि क्या पहले कॉलेज में जाकर बात नहीं हो सकती? मौसम ने कहा कि पहले रजिस्ट्रेशन जरूरी है। उसके बाद ही कॉलेज में बात कराने का दावा किया। उसने यह भी कहा कि अगर रजिस्ट्रेशन करने में कोई परेशानी होती है तो उसका नेटवर्क फोन पर स्टेप-बाय-स्टेप मदद करेगा। कैफे जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने की बात भी कही। बिहार के एजेंटस के देश में नेटवर्क एक्टिव होने का दावा रुपेश ने भी किया है। रुपेश पटना के बोरिंग रोड से एडमिशन की कड़ी जोड़ता है। कैंडिडेट्स बनकर अलग-अलग डेट्स में पहुंचे भास्कर के अंडर कवर रिपोर्टर्स से रूपेश ने एडमिशन के बहाने देश के कई राज्यों में सेटिंग का खुलासा किया। रूपेश का दावा- ब्लैक मनी लाइए, एडमिशन में खप जाएगी मेरा नेटवर्क बिहार के बाहर के मेडिकल कॉलेजों तक भी है। बैंगलुरु में भी अपना ऑफिस है। देश के किसी भी राज्य में एडमिशन चाहिए, यहां से ही सेटिंग हो जाएगी। कर्नाटक के निजी मेडिकल कॉलेजों में 213 से 250 अंक वाले स्टूडेंट्स के लिए करीब 1 करोड़ से 1.50 करोड़ रुपए तक के बजट में काम हो जाएगा। करीब 1.40 करोड़ रुपए के एडमिशन में 36 लाख रुपए कॉलेज फीस और करीब 40 लाख रुपए ब्लैक में देने होंगे। वहीं अगर 1.75 करोड़ रुपए के बजट में पहले साल करीब 84 लाख रुपए देने होंगे, जिसमें करीब 44 लाख रुपए कॉलेज फीस और करीब 40 लाख रुपए अलग से बलैक में देने होंगे। पश्चिम बंगाल, राजस्थान, चेन्नई और पुडुचेरी में भी एडमिशन हो जाएगा। पश्चिम बंगाल में करीब 1.05 से 1.10 करोड़ रुपए, राजस्थान में करीब 1.05 करोड़ रुपए और हिमालयन मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 1.15 करोड़ रुपए का बजट हो सकता है। बैंक गारंटी से बचने के लिए 2 साल की फीस पहले लेने का दावा पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए रूपेश ने बैंक गारंटी की व्यवस्था भी बताई। कुछ कॉलेजों में फीस की बड़ी पैसे की बैंक गारंटी मांगी जाती है। परिवार के पास इतनी बड़ी बैंक गारंटी नहीं होने पर कॉलेज पहले ही दो साल की फीस लेने का विकल्प अपनाता है। ऐसे मामलों में आधिकारिक फीस के साथ और पैसों डिमांड की जाती है। जब उससे पूछा गया कि अतिरिक्त पैसे कॉलेज के नाम पर लिए जाते हैं या नहीं, तो रूपेश ने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज सीधे तौर पर ऐसा पैसे नहीं लेते। उसके अनुसार, पैसा देने का तरीका अलग होता है और एजेंट के जरिए इसे मैनेज कराया जाता है। रूपेश ने यह भी दावा किया कि बेंगलुरु में उसका अपना ऑफिस है और एडमिशन से जुड़ी सारी व्यवस्था वहीं से कराई जाती है। रूपेश के इस खुलासे से बिहार के एजेंट्स के देश में फैले नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। बिहार के एजेंट्स ने हर स्टेट में तैयार किए लोकल एजेंट्स इन्वेस्टिगेशन में यह सामने आया कि बिहार के एजेंट्स पूरे देश में फैले हैं। इन्वेंस्टिगेशन में यह भी खुलासा हुआ कि बिहार के रहने वाले एजेंट्स ने ही देश में कई लोकल एजेंट्स खडे किए हैं जो अलग-अलग राज्यों में MBBS की सीट बेच रहे हैं। लोकल एजेंट्स तैयार करने के पीछे बिहार के एजेंट्स की मंशा है कि उस स्टेट में उनका विरोध ना हो।
इंडो अमेरिकन पब्लिक स्कूल : छात्र परिषद ने ली शपथ
उदयपुर | इंडो अमेरिकन पब्लिक स्कूल में सत्र 2026- 27 के लिए विद्यालय छात्र परिषद का गठन एवं शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। शपथ ग्रहण समारोह के मुख्य अतिथि विद्यालय प्राचार्या डॉ.रीनिका राय, डॉ.अतुल रावत ( 17 जेकेएल आर्मी) एवं डॉ. राजश्री गांधी अध्यक्ष राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार संरक्षण मंच रहे।
नमस्कार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जाति जनगणना के सवालों को लेकर पीएम मोदी को लेटर लिखा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नाबालिग छात्रा की हिजाब में स्कूल आने और क्लास लेने की याचिका खारिज कर दी। मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ में आगे अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के डायरेक्टर की रूस में सीक्रेट लैंडिंग के बारे में बताएंगे। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... कल की बड़ी खबरें... 1. राहुल-खड़गे की मोदी को चिट्ठी, लिखा- जाति जनगणना के सवाल बदलें, इसमें पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लेटर लिखा। इसमें जाति जनगणना में जातियों के नाम दर्ज करने और डेटा जुटाने के तरीके का विरोध किया और जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। दोनों ने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए। साथ ही जनगणना के सवालों में पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं होने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे देश में ओबीसी आबादी का सही आंकड़ा सामने आने में परेशानी हो सकती है। तेलंगाना और बिहार जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग की है। लेटर की 4 प्रमुख बातें… पूरी खबर पढ़ें... 2. इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत नहीं, सेक्युलरिज्म के लिए यूनिफॉर्म जरूरी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत देने से इनकार किया। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने कहा कि स्कूल में यूनिफॉर्म के नियम का पालन करना जरूरी है। बेंच ने नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यूनिफॉर्म की बदौलत बिना किसी धार्मिक भेदभाव वाला माहौल बना रहता है और बच्चों में भी बराबरी की भावना रहती है। स्कूल की अपनी पहचान भी बनती है। हिजाब की अनुमित यूनिफॉर्म के विचार के खिलाफ बेंच ने कहा कि स्कूल में व्यक्तिगत आधार पर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह यूनिफॉर्म के विचार के खिलाफ होगा। इससे स्कूल के अनुशासन को तय करने का अधिकार संस्थान के बजाय अलग-अलग छात्रों के हाथ में चला जाएगा। इसलिए कोई भी छात्र या छात्रा स्कूल के तय किए गए ड्रेस कोड को बदलने की जिद नहीं कर सकती। पूरी खबर पढ़ें... 3. यूपी में बुजुर्ग महिलाओं को रोडवेज बसों में यात्रा फ्री, योगी कैबिनेट में 24 प्रस्ताव पास रक्षाबंधन से पहले योगी सरकार ने प्रदेश की करीब एक करोड़ बुजुर्ग महिलाओं को बड़ा तोहफा दिया। अब 60 साल के ऊपर की महिलाएं रोडवेज बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। इसके लिए उन्हें स्पेशल स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे। मंगलवार शाम करीब 6 बजे सीएम योगी की कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। हर महीने 22.50 करोड़ रुपए खर्च करेगी यूपी सरकार: महिलाओं के लिए लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना के तहत यूपी सरकार हर महीने 22.50 करोड़ रुपए खर्च करेगी। अनुमान है कि हर दिन 88,438 बुजुर्ग महिलाएं रोडवेज बसों से सफर करेंगी। यात्रा के दौरान स्मार्ट कार्ड, आधार कार्ड या वोटर आईडी दिखाना होगा। 26 अगस्त से योजना की शुरुआत: सीएम योगी आज बुधवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से खुद इस योजना की शुरुआत करेंगे। जिलों में इसके लिए प्रभारी मंत्री रहेंगे। वहीं, रक्षाबंधन के मौके पर रोडवेज बसों में महिलाओं को निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा 27 अगस्त सुबह 6 बजे से 29 अगस्त रात 12 बजे तक लागू रहेगी। पूरी खबर पढ़ें 4. चंपत राय के खिलाफ संतों की बैठक पुलिस ने रोकी, गुस्साए संतों ने चंदा चोर के नारे लगाए अयोध्या में कारसेवकपुरम के पास मंगलवार को ओम आश्रम में राम मंदिर चढ़ावा चोरी और चंपत राय के खिलाफ चल रही संतों की बैठक को पुलिस ने रोक दिया। संतों का आरोप है कि बैठक के बीच पुलिस पहुंची और हम सभी को बाहर निकालकर आश्रम में ताला लगा दिया। इससे गुस्साए संतों ने ‘चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो’ के नारे लगाए। हालांकि, पुलिस का कहना है कि रोकने से पहले ही संत खुद आश्रम से बाहर निकल गए और नारेबाजी करने लगे। संतों का कहना है- चंदा चोरी के छोटे आरोपियों पर कार्रवाई की गई, जबकि बड़े आरोपियों को बचाया जा रहा है। जिला प्रशासन आरोपियों का साथ दे रहा है। वह नहीं चाहता कि आरोपी पकड़े जाएं। इसलिए संतों की बैठक नहीं होने दी जा रही है। पूरी खबर पढ़ें 5. पूर्व CDS बोले- पाकिस्तान की किराना हिल्स से टकराया था ड्रोन, वह टारगेट नहीं था, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उठे थे सवाल देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बताया कि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की न्यूक्लियर ठिकाने किराना हिल्स पर लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन गिरा था। पूर्व CDS ने कहा कि कभी-कभी सवाल उठता है कि क्या किराना हिल्स पर हमला हुआ था। दरसअल, हमने सरगोधा में कई 'लोइटरिंग मिशन' भेजे थे। किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10km नॉर्थ में है। इस ड्रोन का काम सरगोधा और उसके आस-पास मौजूद राडार को खोजना था। ड्रोन करीब 2 घंटे तक हवा में घूमता है पूर्व CDS ने कहा कि यह ड्रोन लगभग 2 घंटे तक हवा में घूमता है। अगर टारगेट नहीं मिलता, तो यह नीचे आकर टकरा जाता है। हो सकता है कि ऐसा ही कोई ड्रोन जाकर पहाड़ियों से टकराया हो। पाकिस्तानी मीडिया ने भी कुछ ऐसी तस्वीरें दिखाई थीं जिनमें किराना हिल्स से धुआं निकलता दिख रहा था। पूरी खबर पढ़ें 6. अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी के चीफ की रूस में सीक्रेट लैंडिंग, रूस बोला- हमें इसकी जानकारी नहीं अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ मॉस्को पहुंचे। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, वह अमेरिकी वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर से मॉस्को गए और वहां अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। CIA चीफ बनने के बाद रैटक्लिफ की रूस की पहली यात्रा है। रैटक्लिफ के रूस दौरे की पहले कोई घोषणा नहीं की गई थी। अमेरिकी सैन्य विमान के मॉस्को पहुंचने के बाद उनकी यात्रा की खबर सामने आई। इससे पहले रूसी अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें C-17 ग्लोबमास्टर की मॉस्को यात्रा की जानकारी नहीं है। अमेरिकी सरकार ने भी अभी इस दौरे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अमेरिका से लातविया और फिर मॉस्को पहुंचा C-17 फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना का C-17 पहले अमेरिका से लातविया की राजधानी रीगा पहुंचा। इसके बाद विमान मंगलवार सुबह करीब 9 बजे मॉस्को के लिए रवाना हुआ और व्नुकोवो एयरपोर्ट पर उतरा। यह विमान RCH4555 कॉल साइन से उड़ रहा था। इसकी उड़ान की एक खास बात यह थी कि विमान रूस के हवाई क्षेत्र से होकर मॉस्को पहुंचा। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें इस विमान की मॉस्को यात्रा की जानकारी नहीं थी। पूरी खबर पढ़ें... 7. गूगल ने प्ले स्टोर से हटाए 3 फर्जी लोन एप, डेटा चोरी और भारी ब्याज वसूलने की शिकायत पर एक्शन गृह मंत्रालय की शिकायत पर गूगल ने 3 और फर्जी लोन एप होराइजन कैश सर्विस, मनी स्कोर मॉनिटर और जेलीक्रेडिट को प्ले स्टोर से हटा दिया। इस महीने में अब तक 9 ऐसे ठग एप्स बंद कराए जा चुके हैं। गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा टीम (I4C) ने 19 अगस्त को गूगल को नोटिस भेजकर इन एप को हटाने का कहा था। आरोप है कि ये एप कम ब्याज पर 5 मिनट में लोन देने का लालच देकर लोगों को फंसाते थे। बाद में उनसे ज्यादा ब्याज और पेनाल्टी वसूलते थे। साथ ही यूजर-कंज्यूमर की निजी जानकारी भी चुराते थे। I4C और सरकारी नियम क्या हैं? I4C (साइबरक्राइम सेंटर): यह गृह मंत्रालय की एक खास टीम है, जिसका काम देश में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों को रोकना है। सरकारी नियम (IT Act 79): इसका मतलब है कि अगर सरकार किसी कंपनी को किसी गलत या खतरनाक एप के बारे में बताएगी, तो कंपनी को उसे तुरंत हटाना पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. नेशनल: सुप्रीम कोर्ट बोला-बांके बिहारी में चढ़ावा चोरी नहीं होने देंगे: एक-एक पैसा दानपेटी में डालें; श्रद्धालुओं का दिया दान भगवान के लिए (पूरी खबर पढ़ें) 2. इंटरनेशनल: पूर्व वर्ल्ड स्नूकर चैंपियन बच्चों के यौन शोषण में दोषी:1993 से 2010 के बीच लड़की और लड़के से दुर्व्यवहार; स्नूकर संस्था ने सदस्यता खत्म की (पूरी खबर पढ़ें) 3. उत्तर प्रदेश: चंपत राय के खिलाफ संतों की बैठक पुलिस ने रोकी: आश्रम से निकालकर ताला लगाने का आरोप; गुस्साए संतों ने चंदा चोर के नारे लगाए (पूरी खबर पढ़ें) 4. महाराष्ट्र: 'आईफोन के लिए खुदकुशी की बात अफवाह': खाई हादसा का पीड़ित परिवार बोला- वो चाहता था परिवार साथ रहे, 3 की मौत हुई थी (पूरी खबर पढ़ें) 5. हरियाणा: दो महीने बाद फिर जेल से बाहर आया राम रहीम:लैंड क्रूजर-फॉर्च्यूनर के काफिले में सिरसा डेरे पहुंचा; 17वीं बार पैरोल-फरलो मिली (पूरी खबर पढ़ें) 6. क्रिकेट: सरफराज श्रीलंकाई कप्तान से बोले- यहां टाइमपास करने नहीं आया: चोटिल पंत की जगह जुरेल ने विकेटकीपिंग की, बारिश से दो बार खेल रुका; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स (पूरी खबर पढ़ें) 7. जम्मू-कश्मीर: शोपियां में 6 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार: हैंड ग्रेनेड और हिजबुल मुजाहिदीन के पोस्टर बरामद; पुलवामा में भी 2 सहयोगी पकड़ाए (पूरी खबर पढ़ें) 8. पटना: छात्रों पर लाठीचार्ज, दौड़ाकर पीटा: पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल, वाटर कैनन चली, CRPF से झड़प; TRE-4 एग्जाम में बदलाव की मांग (पूरी खबर पढ़ें) 9. महाराष्ट्र: क्या खिलाड़ियों को पता था उन्होंने कॉकरोच वाली चाय पी: हाईकोर्ट का मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से सवाल, रेस्टोरेंट में गंदगी का आरोप (पूरी खबर पढ़ें) 10. एंटरटेंमेंट: राहुल गांधी ने एक्ट्रेस कृति सेनन का सपोर्ट किया:बोले- महिलाओं की ऑनलाइन पुलिसिंग गलत, राखी एड में रिवीलिंग ड्रेस पहनने पर कंगना ने ट्रोल किया (पूरी खबर पढ़ें) 11. नेशनल: संसद मार्च में पुलिस ज्यादती-जांच समिति दोबारा बनाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल बोले- किसी ने शरारत की, यह कोर्ट राजनीतिक मंच नहीं (पूरी खबर पढ़ें) 12. नेशनल: TMC सांसदों की अयोग्यता पर समयसीमा में फैसला लें स्पीकर:सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया (पूरी खबर पढ़ें) 13. राजस्थान: 5-स्टार होटल का 5.74-लाख का बिल चुकाए बिना भागा टूरिस्ट: उदयपुर के उदय विलास में परिवार समेत ठहरा था दिल्ली का युवक (पूरी खबर पढ़ें) 14. क्रिकेट: वैभव सूर्यवंशी ने 4 गेंद में 2 विकेट लिए:दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की तरफ से गेंदबाजी की; बैटिंग में 8 रन ही बना सके (पूरी खबर पढ़ें) 15. मध्य प्रदेश: मंत्री शाह पर केस की परमिशन नहीं देगी MP सरकार: अफसरों को बाहर निकालकर कैबिनेट का फैसला; कर्नल सोफिया पर विवादित बयान दिया था (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... कूड़े के ढेर से चॉकलेट की लूट यूपी के कानपुर में लोग कूड़े के ढेर से एक्सपायरी चॉकलेट और टॉफियां लूटते नजर आए। बाइक सवार हो या कार सवार, लोगों ने वाहन रोड पर खड़े करके जितना हो सका, उतना सामान लूटा। घटना का वीडियो वायरल है। पूरी खबर पढ़ें... फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. आज का एक्सप्लेनर: क्या बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होकर सऊदी-पाक-तुर्किये के साथ लड़ेगा; भारत के तीन तरफ से घिरने का खतरा 2. भास्कर इंटरव्यू: हाथ में तिरंगा था, तभी पैलेट गन चली:साहिल बोला- होश आया तो अस्पताल में था; शरीर में अब भी छर्रे, आंख से दिख नहीं रहा 3. भास्कर इन्वेस्टिगेशन: ‘NEET-2027 की डील, 180 दिन कैंडिडेट दुबई रहेगा’:एजेंट बोला- Gen-Z आंदोलन के बाद सख्ती, एंबेसी से NRI डॉक्यूमेंट्स बनेंगे, कोई पकड़ेगा नहीं 4. भास्कर इंटरव्यू: हाथ में तिरंगा था, तभी पैलेट गन चली:साहिल बोला- होश आया तो अस्पताल में था; शरीर में अब भी छर्रे, आंख से दिख नहीं रहा 5. भास्कर इन्वेस्टिगेशन: ‘NEET-2027 की डील, 180 दिन कैंडिडेट दुबई रहेगा’:एजेंट बोला- Gen-Z आंदोलन के बाद सख्ती, एंबेसी से NRI डॉक्यूमेंट्स बनेंगे, कोई पकड़ेगा नहीं 6. क्राइम फाइल्स: शादी का गिफ्ट बना मौत का पैकेट:होम थिएटर का स्विच दबाते ही दूल्हे और भाई की मौत, फिर…अचानक गायब हुआ संदिग्ध 7. भास्कर एक्सक्लूसिव: गैंगस्टर-लॉरेंस से मिलने के लिए 20-दिन भूखे रहे थे कैदी: हाई सिक्योरिटी जेल में ब्रांडेड कपड़े पहनते हैं खूंखार क्रिमिनल, गर्लफ्रेंड से भी बात करते हैं 8. ग्राउंड रिपोर्ट: 'चारों तरफ समंदर, रेत... तेज धूप स्किन जलाती थी':काम, वेतन सब बदला था; 20 दिनों बाद दुबई से लौटे सीमांचल के लड़कों की आपबीती 9. ग्राउंड रिपोर्ट: गुरुग्राम में 300 परिवार घरों में कैद:सीवर के लिए गली खोदी, बरसात में दलदल बनी; लोग बोले-महिला-बच्चे फिसल रहे करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें... ⏳आज के दिन का इतिहास बाजार का हाल ️ मौसम का मिजाज मिथुन राशि वाले नया बिजनेस शुरू करने से करने का बचें। मीन राशि वाले जोखिम वाले निवेश से बचें। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
ईरान के साथ तेल डील... भारत आधारित 4 कंपनियों पर लगा अमेरिकी प्रतिबंध
ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार से जुड़ी इंडिया-बेस्ड कंपनियों पर अमेरिका मे प्रतिबंध लगा दिया है. वहीं, तीन भारतीय नागरिकों को भी निशाने बनाया गया है.
Panipat News: अमेरिका भेजने के नाम पर 25 लाख की ठगी में एक साल कैद
अमेरिका भेजने के नाम पर 25 लाख की ठगी में एक साल कैद
अमेरिका पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम को करेंगे संबोधित
वॉशिंगटन, 25 अगस्त . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका पहुंच गए हैं. वह न्यूयॉर्क शहर में 29 अगस्त को आयोजित होने वाले एक बड़े हिंदू समुदाय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जिसका उद्देश्य एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देना है. कार्यक्रम के आयोजकों के अनुसार, भागवत का स्वागत ‘यूनिवर्सल ... Read more
अचानक मॉस्को पहुंचे CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ, रूस में अमेरिकी प्लेन पहुंचने से मची थी हलचल
CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ मंगलवार को मॉस्को पहुंचे, जो CIA प्रमुख बनने के बाद उनकी पहली ज्ञात रूस यात्रा बताई जा रही है। उनके दौरे का मकसद सामने नहीं आया है। बता दें कि अमेरिकी C-17 सैन्य विमान के मॉस्को पहुंचने की खबर सामने आई थी, तभी से पूरी दुनिया की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी थीं।
तीसरा चीन-अमेरिका ट्रैक 1.5 संवाद आयोजित
बीजिंग, 25 अगस्त . तीसरा चीन-अमेरिका ट्रैक 1.5 संवाद 25 अगस्त को चीन की राजधानी पेइचिंग में आयोजित हुआ. चीन के संबंधित विभागों, क्षेत्रीय Governmentों, थिंक टैंक और एशिया सोसाइटी से आए चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने आपसी Political विश्वास मजबूत करने, आर्थिक व व्यापारिक सहयोग का विस्तार करने और एआई व तकनीक के ... Read more
क्या अपने मकसद में कामयाब होगा अमेरिका? ईरान में पेट्रोल पंपों पर लगीं लंबी लाइनें
अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकाबंदी के दबाव के बीच ईरान में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और महंगाई बढ़ रही है। अमेरिका आर्थिक दबाव से ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ऊर्जा आपूर्ति के जरिए जवाब दे रहा है। फिलहाल ईरानी नेतृत्व पीछे हटता नहीं दिख रहा।
5 हजार डॉलर से 50 हजार पेड़ तक: चीन-अमेरिका मैत्री की आशा जनता में मौजूद
5 हजार डॉलर से 50 हजार पेड़ तक: चीन-अमेरिका मैत्री की आशा जनता में मौजूद
अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर फिर तेज हो गया है। कनाडा ने अमेरिकी सामान पर नए जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। साथ ही कनाडा सरकार ने प्रभावित कर्मचारियों और कारोबारियों के लिए C$5.4 अरब का राहत पैकेज भी घोषित किया है।कनाडा की सरकार अमेरिकी सामान पर 15% से 50% तक के जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है। ये टैरिफ 8 सितंबर से लागू होंगे। सरकार का कहना है कि इससे अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित कंपनियों और कर्मचारियों को राहत देने में मदद मिलेगी।अमेरिका ने कनाडा के सामान पर 50% तक टैरिफ लगायाअमेरिका ने शनिवार से कनाडा के कई सामान पर 50% तक के नए टैरिफ लागू कर दिए हैं। इससे करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई एक्सपोर्ट पर असर पड़ने का अनुमान है। यह अमेरिका को कनाडा के कुल एक्सपोर्ट का करीब 5.5% है।अमेरिका के इस कदम के बाद कनाडा ने जवाबी कार्रवाई का फैसला किया है। Oxford Economics के मुताबिक, नए अमेरिकी टैरिफ से कनाडा के अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट पर प्रभावी टैरिफ रेट 5.1% से बढ़कर 6.9% हो सकता है।किन सेक्टर पर ज्यादा असर?इस ट्रेड विवाद का असर कई इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। प्लास्टिक, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लकड़ी और पेपर प्रोडक्ट्स पर इसका बड़ा असर होने की उम्मीद है। Quebec, New Brunswick और Ontario के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी दबाव बढ़ सकता है। कंपनियों के लिए लागत और सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।ऑटो सेक्टर भी निशाने परट्रेड विवाद अब ऑटो सेक्टर तक भी पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगले साल कनाडा से आने वाली कारों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% किया जा सकता है। फिलहाल गैर-अमेरिकी कंटेंट पर 25% टैरिफ है। इस प्रस्ताव के बाद कनाडाई ऑटो इंडस्ट्री पर दबाव और बढ़ सकता है।अमेरिका पर कनाडा की बड़ी निर्भरताकनाडा के लिए यह ट्रेड वॉर इसलिए ज्यादा अहम है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ कारोबार पर काफी निर्भर है। कनाडा के कुल एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 70% है। वहीं कनाडा इस साल अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा गुड्स ट्रेडिंग पार्टनर है।विवाद अब सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहींदोनों देशों के बीच तनाव अब ट्रेड से आगे राजनीतिक मुद्दों तक पहुंच गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी वार्ताकारों ने कनाडा के दूसरे देशों के साथ ट्रेड समझौतों और फ्रेंच भाषा व Quebec की संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर भी दबाव बनाया।ट्रंप ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वह कनाडाई लोगों के फ्रेंच बोलने के मामले में कभी दखल नहीं देंगे।USMCA पर भी नजरअब दोनों देशों के बीच USMCA यानी US-Mexico-Canada Agreement का भविष्य भी अहम हो गया है। ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह मौजूदा समझौते को उसी रूप में आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।ESDS Software IPO: 28 अगस्त से खुलेगा ₹720 करोड़ का आईपीओ, GMP 58% के पार; आशीष कचोलिया का भी है निवेश
चीन ने ईरान का साथ दिया तो क्या बेअसर होंगे अमेरिका के प्रतिबंध? - BBC
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ट्रंप को कनाडा का करारा जवाब, अमेरिकी सामानों पर 20 अरब डॉलर का टैरिफ
कनाडा ने अमेरिका के खिलाफ करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगा दिए हैं. इसमें स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण और रोजमर्रा की चीजें शामिल हैं, जिनमें कुछ पर 50% तक शुल्क लगाया गया है.
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को हटाने का व्यापक अभियान पूरा कर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिकी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिछाए गए सभी माइंस को पूरी तरह निष्क्रिय या विस्फोटित (Removed and Detonated) कर रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई भी ईरानी नाव या जहाज दोबारा माइंस बिछाने की कोशिश करेगा, तो उसे तुरंत और व्यवस्थित तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा।'जीरो टॉलरेंस नीति लागू': ईरान को दी गई अंतिम सैन्य चेतावनीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी प्रकार की नौसैनिक रुकावट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा:तत्काल तबाही का आदेश: ट्रंप ने कहा, ईरान को स्पष्ट रूप से सूचित कर दिया गया है कि यदि कोई भी जहाज या नाव नए माइंस बिछाते हुए पाई गई, तो उसे बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।माइन प्लेसमेंट पर जीरो टॉलरेंस: जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance Policy) नीति पूरी तरह प्रभावी हो चुकी है।स्पेस फोर्स की 24x7 निगरानी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि यूएस स्पेस फोर्स (Space Force) के उन्नत उपग्रहों और निगरानी प्रणालियों के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी संदिग्ध हलचल को रडार पर तुरंत पकड़ा जा सके।वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज का रणनीतिक महत्वफारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत संवेदनशील 'चोकपॉइंट' है:20% कच्चे तेल की आवाजाही: दुनिया में समुद्री मार्ग से होने वाले कुल कच्चे तेल (Crude Oil) और एलएनजी (LNG) निर्यात का लगभग 20% हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।सप्लाई चेन पर असर: हाल के तनाव और माइंस बिछाए जाने की आशंकाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियों ने अपने कार्गो रूट बदल दिए थे और समुद्री बीमा प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।बाजार को राहत: अमेरिकी नौसेना द्वारा जलमार्ग से माइंस हटाने की पुष्टि के बाद तेल आयातक देशों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों ने राहत की सांस ली है।
कर्ज में डूबा अमेरिका दुनिया पर फोड़ रहा है टैरिफ बम
डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के देशों को धमका रहे हैं... या फिर अमेरिका की बिगड़ती आर्थिक हालत उन्हें और आक्रामक बना रही है? क्योंकि जिस अमेरिका को दुनिया सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था मानती है... उसी पर अब 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका है.
अमेरिका के खिलाफ कनाडा ने उठा लिया बड़ा कदम, US के 700 से ज्यादा सामानों पर टैरिफ का ऐलान
अमेरिका और उसके पड़ोसी देश कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव काफी बढ़ गया है। अब कनाडा ने अमेरिका के खिलाफ बड़े स्तर पर जवाबी टैरिफ का ऐलान किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अटपटा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह अमेरिका-कनाडा की सीमा से लगने वाले लेक ओंटारियो का नाम बदलकर लेक अमेरिका कर देने पर विचार कर रहे हैं।
LPG को लेकर भारत का बड़ा दांव, अमेरिका से रिकॉर्ड मात्रा में खरीदी गैस; क्या है वजह?
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से आपूर्ति में कमी के चलते भारत ने अमेरिका से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खरीद बढ़ा दी है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और तनावपूर्ण खबर सामने आ रही है। ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो ने अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के कार्यकाल में अमेरिका के खिलाफ तल्खी लगातार बढ़ती जा रही है। ईरानी सरकारी टीवी चैनल 3 और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित इस भड़काऊ वीडियो में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 वर्षीय बेटे बैरन ट्रंप को निशाना बनाने की बात कही गई है। इस वीडियो में बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीकों का सनसनीखेज खुलासा करते हुए लगभग 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 96 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की गई है, जिसने वैश्विक स्तर पर सनसनी फैला दी है।वीडियो में बैरन ट्रंप की गतिविधियों और गेमिंग अकाउंट्स का जिक्रमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 'बैरन ट्रंप को कहां मारें' शीर्षक से जारी किए गए इस वीडियो क्लिप में बैरन की दैनिक गतिविधियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर दावे किए गए हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि उन पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि सुरक्षा घेरे को भेदकर एक महिला निजी बैठक में उनके करीब तक पहुंच गई थी। इसके अलावा, वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि बैरन अपनी सुरक्षा के दायरे से दूर किस तरह ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म जैसे एक्सबॉक्स, फीफा वीडियो गेम और डिस्कॉर्ड अकाउंट्स के जरिए वॉयस और टेक्स्ट चैट पर बातचीत करते हैं। इस तरह की संवेदनशील जानकारियों के सार्वजनिक होने से अमेरिकी खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।पहले मेलानिया ट्रंप को भी बनाया जा चुका है निशानायह पहली बार नहीं है जब ईरानी मीडिया ने ट्रंप परिवार के किसी सदस्य को सीधे तौर पर इस तरह की धमकियां दी हों। इससे पहले पिछले महीने भी ईरान के सरकारी टेलीविजन पर एक अन्य वीडियो जारी किया गया था, जिसका शीर्षक 'मेलानिया को कहां मारें' था। उस वीडियो में अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के काफिले, न्यूयॉर्क शहर में उनके आवागमन के रास्तों और उनके पसंदीदा लग्जरी डिजाइनर स्टोरों को चिह्नित किया गया था, जहां वे अक्सर खरीदारी के लिए जाती हैं। उस वीडियो के अंत में बैरन ट्रंप का जिक्र करते हुए सीधी चेतावनी दी गई थी कि यह महज एक शुरुआत है। हालांकि, इन तमाम धमकियों के बीच सीक्रेट सर्विस द्वारा मेलानिया और बैरन दोनों को चौबीसों घंटे कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है और व्हाइट हाउस से लेकर मार-ए-लागो तक तमाम संपत्तियां अत्यधिक सुरक्षित हैं।
अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं के लिए राहें अब कठिन होती जा रही हैं। कड़े आव्रजन नियमों और वीजा नीतियों के चलते शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में अमेरिकी कॉलेजों में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 15 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। 'कॉमन ऐप' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 1,100 से अधिक अमेरिकी संस्थानों के इस मंच पर अंतरराष्ट्रीय आवेदनकर्ताओं की संख्या में 10 प्रतिशत की कमी आई है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। भारत वर्तमान में अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत है, लेकिन अब अमेरिका की बदलती नीतियों के कारण छात्रों का रुझान अन्य देशों की ओर बढ़ रहा है।'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' नियम की समाप्ति और भारी फीस का दबावइस गिरावट के पीछे अमेरिकी सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदम मुख्य वजह माने जा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने पारंपरिक 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' नियम को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत अब छात्रों के वहां रहने की अवधि को अधिकतम चार साल तक सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा, ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के अवसरों से जुड़े 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) कार्यक्रम का लाभ उठाने वाले विदेशी छात्रों पर एक लाख डॉलर तक का भारी शुल्क लगाने पर भी विचार किया जा रहा है। 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ फॉरेन स्टूडेंट एडवाइजर्स' और शोध फर्म 'जेबी इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के अनुसार, इन अनिश्चितताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय छात्र पंजीकरण में लाखों की कमी आने की आशंका है।अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी उठाना पड़ रहा है बड़ा आर्थिक नुकसानभारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों के इस तरह मोहभंग होने का असर केवल विद्यार्थियों के करियर पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दौरान अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने स्थानीय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगभग 41.77 अरब डॉलर का योगदान दिया था, जो आने वाले समय में घटकर 38.37 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वीजा नीतियां और अनुपालन नियम ऐसे ही सख्त बने रहे, तो अमेरिका वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में अपनी साख खो सकता है, क्योंकि अब भारतीय छात्र ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय देशों के विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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मॉस्को में उतरा अमेरिकी एयरफोर्स का विमान? रूस ने कहा- हमें इस बारे में कुछ नहीं पता
अमेरिका के एक C-17A सैन्य परिवहन विमान के मॉस्को पहुंचने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान एंड्रयूज एयरफोर्स बेस से रवाना हुआ, रीगा के रास्ते रूस पहुंचा, लेकिन क्रेमलिन ने कहा कि उसे विमान के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
चीन ने ईरान का साथ दिया तो क्या बेअसर होंगे अमेरिका के प्रतिबंध?
अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए अपने ताज़ा प्रतिबंधों को आर्थिक डी-डे बताया है, लेकिन ईरान का कहना है कि उसके पास इनसे निपटने की योजना है.
यूक्रेन जंग के बीच मॉस्को में क्यों उतरा अमेरिकी मिलिट्री C-17 विमान? गहराया राज
एक तरफ रूस और यूक्रेन के बीच जंग और इन सबके बीच मॉस्को पहुंच गया अमेरिकी जंगी विमान। आखिर क्या है इसके पीछे मकसद और क्या है इरादा? इसको लेकर राज गहरा गया है…
जमुई की लक्ष्मी भार्गव ने मॉडलिंग की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नक्सल प्रभावित जमुई जिले के हरनाहा निवासी उमाकांत सिंह और विभा देवी की बेटी लक्ष्मी ने मिस रीना हिस्पानोअमेरिकाना इंडिया 2026 का खिताब जीता है। उन्होंने बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के विभिन्न राज्यों से आई प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए यह सफलता प्राप्त की। यह भव्य ग्रैंड फिनाले गुजरात के अहमदाबाद स्थित ईकेए एरिना में आयोजित किया गया था। ग्रैंड फिनाले से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. लगातार सपोर्ट के लिए आभार व्यक्त किया इस जीत के साथ ही लक्ष्मी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। वह वर्ष 2027 में बोलीविया में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। खिताब जीतने के बाद लक्ष्मी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने इस सफर में परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। साल 2021 में बेस्ट स्माइल अवार्ड जीता लक्ष्मी ने कहा कि अब उनकी कोशिश अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की संस्कृति, आत्मविश्वास, खूबसूरती और मजबूती को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की होगी। लक्ष्मी का मॉडलिंग का सफर चुनौतियों भरा रहा है। करियर की शुरुआत में उन्हें सामाजिक सोच और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी उपलब्धियों की शुरुआत वर्ष 2021 में पटना में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से हुई, जहां उन्होंने बेस्ट स्माइल अवार्ड जीता। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी लक्ष्मी फरवरी 2022 में उन्होंने मिस बेतिया का खिताब अपने नाम किया और उसी वर्ष मिस टीन इंडिया सुपरमॉडल भी बनीं। वर्ष 2025 में लक्ष्मी ने मिस फेस ऑफ इंडिया का खिताब जीता और मिस साउथ एशिया यूनिवर्स प्रतियोगिता में सेकंड रनर अप रहीं। मिस रीना हिस्पानोअमेरिकाना इंडिया 2026 का खिताब जीतने के बाद अब उनकी निगाहें अंतरराष्ट्रीय मंच पर टिकी हैं। जमुई की इस बेटी की उपलब्धि से उनके परिवार, जिले और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है।
अमेरिका ने ईरान पर क्या नए प्रतिबंध लगाए? देखें दुनिया आजतक
अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर पर नए प्रतिबंध लग दिए हैं...वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान को अलग-थलग करने और तेहरान के साथ व्यापार करने वाले दूसरे देशों को सजा देने के मकसद से ये प्रतिबंध लगाए गए हैं. देखें...
US Canada Trade War:
अमेरिका का ईरान पर बड़ा आर्थिक प्रहार, वीडियो में जाने क्रिप्टो से लेकर शिपिंग तक 5 सेक्टरों पर लगाए नए प्रतिबंध
अमेरिका में बड़ा वीजा एक्शन, 2 लाख विदेशी नागरिकों के B1-B2 वीजा रद्द करने की तैयारी; वीडियो में जाने शरण मांगने वालों पर नजर
अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या घटी, अंडरग्रेजुएट दाखिलों में 15% गिरावट; वीडियो में जाने वीजा नीतियों की अनिश्चितता का असर
US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक' करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे 'इकोनॉमिक डी-डे' करार दिया है।वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।सीधे नहीं, 'चीन फैक्टर' से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दीएनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।क्या रूस से मिलेगा सहारा?भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटकामिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का 'वॉर-रिस्क इंश्योरेंस' 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभावभारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह 'सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट' के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।
Crude oil prices fall: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। क्रूड ऑयल 3 फीसदी से ज्यादा टूटा। ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 के स्तर से नीचे गिरकर $89.25 प्रति बैरल हो गई, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 3% से ज़्यादा गिरकर $82.20 पर आ गया।कच्चे तेल में यह गिरावट पिछले सत्र में शुरू हुई गिरावट का ही सिलसिला है, क्योंकि बाज़ार ने ईरान पर अमेरिका की बढ़ी हुई पाबंदियों के तुरंत असर को नजरअंदाज़ किया और मध्य पूर्व से कच्चे तेल की सप्लाई में बड़ी रुकावट की आशंकाओं के कम होने पर ध्यान केंद्रित किया।सोमवार को दोनों बेंचमार्क 2% से ज़्यादा नीचे बंद हुए थे, जिसमें WTI एक हफ़्ते के निचले स्तर पर आ गया था, क्योंकि निवेशकों ने दो हफ़्ते की तेज़ी के बाद मुनाफ़ा वसूली की थी। यह ताज़ा गिरावट तब आई जब बाज़ार ने ईरान पर तुरंत सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के अमेरिकी प्रशासन के फैसले का आकलन किया।सैक्सो बैंक में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के प्रमुख ओले हैनसेन ने रॉयटर्स को बताया, ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल संघर्ष में सैन्य टकराव से आर्थिक दबाव की ओर बढ़ने से तेल बाज़ार की कुछ चिंताएं कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि पाबंदियों की घोषणा उतनी सख़्त नहीं थी जितनी बाज़ार को आशंका थी।अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान की आर्थिक जीवनरेखा को काटने के उद्देश्य से पाबंदियों के विस्तार की घोषणा की और देशों से तेहरान के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने या डॉलर-आधारित वित्तीय प्रणाली से बाहर किए जाने के जोखिम का सामना करने का आह्वान किया।हालांकि, बेसेंट ने उन देशों की पहचान नहीं की जिन्हें दंड का सामना करना पड़ सकता है या उनके कार्यान्वयन के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई। उन्होंने कहा कि इसके बजाय देशों को नियमों का पालन करने के लिए समय दिया जाएगा।ईरान ने बढ़ी हुई पाबंदियों का जवाब देने का संकल्प लिया है, साथ ही भरोसा जताया है कि प्रमुख व्यापारिक साझेदार वाशिंगटन के दबाव अभियान का विरोध करेंगे।अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि वाशिंगटन ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं करेगा। हालांकि, आर्थिक दबाव पर ज़्यादा ज़ोर देने से क्षेत्र में तेल की सप्लाई के लिए और खतरों के बारे में तत्काल चिंताएं कम हो गई हैं।सप्लाई में रुकावट का जोखिम बना हुआ हैतत्काल जोखिम प्रीमियम में कमी का मतलब यह नहीं है कि तेल बाज़ार सप्लाई को लेकर निश्चिंत हो गया है।KCM के मुख्य बाज़ार विश्लेषक टिम वॉटरर ने रॉयटर्स को बताया, ईरान के पास अभी भी शिपिंग में रुकावट डालकर जवाब देने की क्षमता है, जिससे तेल की कीमत में कुछ प्रीमियम बना हुआ है।होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग एक विशेष चिंता का विषय बनी हुई है। शिपिंग डेटा के अनुसार, सोमवार को इस अहम समुद्री रास्ते से सामान ले जाने वाले सिर्फ़ दो टैंकर गुज़रे; मई की शुरुआत के बाद से यह एक दिन में गुज़रने वाले टैंकरों की सबसे कम संख्या है।आमतौर पर दुनिया में इस्तेमाल होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुज़रता है, इसलिए वहां लंबे समय तक रुकावट आने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने बताया कि मंगलवार को एक तेल टैंकर पर किसी अज्ञात चीज़ से हमला हुआ, जिससे वह ओमान के 'अश शिशाह' से लगभग नौ नॉटिकल मील (16.7 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में खराब होकर रुक गया।इस टकराव की वजह से कई देशों ने अपने कमर्शियल और रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, क्योंकि सरकारें सप्लाई में संभावित रुकावटों के लिए तैयारी कर रही हैं।इसके अलावा, क्षेत्रीय गवर्नर ने बताया कि रात में रूस के दक्षिणी रोस्तोव इलाके में यूक्रेनी ड्रोन हमले से नोवोशाख्तिंस्क तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा, जिसके कारण वहां कामकाज रोकना पड़ा।हालांकि, फिलहाल तेल बाज़ार का ध्यान इस बात पर ज़्यादा है कि सप्लाई से जुड़े जोखिमों में अभी कोई अचानक बढ़ोतरी नहीं हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से पता चलता है कि ट्रेडर हालिया प्रतिबंधों को नज़रअंदाज़ करने को तैयार हैं — कम से कम तब तक, जब तक कि इस बात के साफ़ सबूत न मिल जाएं कि टकराव की वजह से तेल की असल सप्लाई में रुकावट आ रही है।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
अमेरिका का $950 अरब का मास्टरप्लान: शेयर, बॉन्ड और डॉलर के निवेशकों और भारतीय बाजार पर असर
अमेरिका का $950 अरब का मास्टरप्लान: शेयर, बॉन्ड और डॉलर के निवेशकों और भारतीय बाजार पर असर
कनाडा कैसे पलटवार करके ट्रंप और अमेरिका को नुक़सान पहुंचा सकता है? - BBC
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ऑल टाइम फेवरिट हैं कैप्टन अमेरिका के ये 5 एक्शन सीन, इनमें से कौन सा है आपका पसंदीदा?
Top 5 Most Powerful Action Scenes: कैप्टन अमेरिका को मार्वल के सबसे पसंदीदा सुपरहीरोज में इसलिए भी गिना जाता है, क्योंकि उसके बिना फैंसी सुपरपावर्स के उसके एक्शन सीन काफी रियलिस्टिक लगते हैं।
चीनी लंबे समय से हमारे खानपान का हिस्सा रही है. खासकर 17वीं सदी से 19वीं सदी तक विश्व में चीनी के व्यापार और उत्पादक देशों पर वर्चस्व को लेकर कई युद्ध लड़े गए.
ईरान की तरफ से पहले डोनाल्ड ट्रंप की पत्नि मेलानिया ट्रंप को धमकियां मिल चुकी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि यह पहली बार है जब उनके छोटे बेटे बैरन को सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया गया है.
अमेरिका ने ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर कसा शिकंजा, आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी
वाशिंगटन, 25 अगस्त 2026 । अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी प्रशासन की नई प्रतिबंध रणनीति का उद्देश्य ईरान की कमाई के प्रमुख स्रोतों और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क को प्रभावित करना है। वॉशिंगटन ने यह भी चेतावनी दी है कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों […] The post अमेरिका ने ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर कसा शिकंजा, आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी appeared first on Rashtriya Ujala .
ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाएगा कनाडा, आज हो सकता है ऐलान
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर है। दोनों ओर से जुबानी जंग छिड़ी हुई है।
अमेरिका की हरकत से भारत के 1.63 अरब डॉलर के कारोबार पर चोट, ईरान के बाजार तक पहुंच हुई मुश्किल!
अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों से भारत-ईरान का 1.63 अरब डॉलर का व्यापार प्रभावित होगा, खासकर चावल, चाय और दवाइयों का निर्यात। UAE के माध्यम से होने वाले भुगतान में बाधा आने और तुर्की को वैकल्पिक मार्ग बनाने से माल ढुलाई लागत व समय में भारी वृद्धि होगी।
अमेरिकी आयोग USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है, जिस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। जानिए क्या है यूएससीआईआरएफ, इसका इतिहास और पिछले 20 वर्षों के बड़े विवाद।
हवा चली, आग बेकाबू... अमेरिकी शहर में जंगल राख, 24 हजार लोग बेघर
अमेरिका के नेवादा में रेनो शहर के पास लगी भीषण जंगल की आग तेजी से फैल रही है. 15 हजार एकड़ से ज्यादा इलाका जल चुका है, जबकि 24 हजार लोग बेघर हो गए हैं.
दुश्मनों को जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए: ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी
ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिज़ादेह ने अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों को और बढ़ाने के फैसले को खारिज कर दिया है और कहा है कि तेहरान अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। एक बयान में, अली मदानिज़ादेह ने कहा कि दुश्मन ईरान के खिलाफ आर्थिक हमला करना चाहते हैं, लेकिन ईरान […] The post दुश्मनों को जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए: ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
पाकिस्तान बॉर्डर के पास अभ्यास करेगा अमेरिकी F35 फाइटर जेट!
अमेरिकी वायुसेना के पांचवीं पीढ़ी के F35 फाइटर जेट संभवतः पहली बार भारत के तरंग शक्ति 2026 अभ्यास में शामिल होंगे. जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक होने वाले बहुराष्ट्रीय अभ्यास में 30 से अधिक देश भाग लेंगे.
Indian Students in US: अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले दाखिलों में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
अमेरिकी सांसद ने जेल में बंद पाक के पूर्व पीएम इमरान के साथ ‘अमानवीय’ व्यवहार का मुद्दा उठाया
वॉशिंगटन, 25 अगस्त . भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने जेल में बंद Pakistan के पूर्व Prime Minister इमरान खान के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता जताई है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के घटनाक्रम Pakistan में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर चिंताजनक संकेत देते हैं. सुब्रमण्यम ने ... Read more
‘रवैया बदले अमेरिका, तभी होगी बात’, अमेरिका की टैरिफ धमकी पर कार्नी सख्त; जवाबी टैक्स की तैयारी
ओटावा, 25 अगस्त . अमेरिका की ओर से नए टैरिफ लगाने की धमकियों के बाद कनाडा के Political नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया और सख्त कर दी है. क्यूबेक में बोलते हुए कनाडा के Prime Minister मार्क कार्नी ने कहा कि अगर अमेरिका अपना रवैया बदलता है, तो कनाडा बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने कहा ... Read more
डोनाल्ड ट्रंप पिछले दिनों चीन की यात्रा कर चुके हैं और अब उन्होंने दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो सप्ताह के भीतर अमेरिका आने वाले हैं। सामने से दिख रहा है कि दोनों देशों के नेता बातचीत कर रहे हैं, उच्चस्तरीय संपर्क बनाए हुए हैं और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तनाव को नियंत्रित करने का संदेश दे रही हैं। लेकिन इस कूटनीतिक मुस्कान के पीछे हकीकत बिल्कुल अलग है। वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच एक नया शीत युद्ध पूरी रफ्तार से चल रहा है और उससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह है कि दोनों पक्ष भविष्य के संभावित युद्ध की तैयारी अभी से कर रहे हैं। हम आपको बता दें कि व्यापार, तकनीक, ताइवान, दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक में प्रभाव की लड़ाई अब कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गयी है। चीन अपनी मिसाइल और हाइपरसोनिक ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है, जबकि अमेरिका प्रशांत महासागर के द्वीपों, सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों के नेटवर्क के जरिए बीजिंग को घेरने की रणनीति तैयार कर रहा है। यानी सामने बातचीत है, लेकिन पर्दे के पीछे युद्ध की शतरंज बिछ चुकी है। इसे भी पढ़ें: Russia में Jaishankar, China में Doval, Japan में Piyush Goyal ने संभाला मोर्चा, आखिर क्या है Modi का मिशन? चीन का नया हाइपरसोनिक दांव, अमेरिका की युद्ध मशीन पर सीधा निशाना इस उभरते टकराव में चीन का सबसे नया और सबसे खतरनाक कदम उसकी हाइपरसोनिक क्षमता से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक चीनी सेना ने ऐसे हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल विकसित किए हैं, जो हवा से हवा में मार करने वाले हथियार लॉन्च कर सकते हैं। यह क्षमता अमेरिका के उन महंगे और अत्यंत महत्वपूर्ण विमानों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है, जो अब तक युद्धक्षेत्र से हजारों किलोमीटर दूर रहकर अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते थे। चीन का निशाना केवल किसी लड़ाकू विमान को गिराना नहीं है। उसकी रणनीति अमेरिका की पूरी एयर ऑपरेशन आर्किटेक्चर को चोट पहुंचाने की है। अमेरिकी टैंकर विमान, एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम और E-4B Nightwatch जैसे उड़ते कमांड पोस्ट अमेरिका की सैन्य ताकत की रीढ़ हैं। टैंकर लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी तक पहुंच देते हैं, AWACS दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखता है और एयरबोर्न कमांड प्लेटफॉर्म युद्ध संचालन को नियंत्रित करते हैं। अगर चीन इन “दूर लेकिन निर्णायक” लक्ष्यों तक पहुंचने की क्षमता हासिल कर लेता है, तो अमेरिका की पूरी हवाई युद्ध प्रणाली दबाव में आ सकती है। चीन की मिसाइल ताकत का पैमाना भी इस खतरे को और गंभीर बनाता है। अमेरिकी आकलन के अनुसार चीन के पास 2024 तक कम से कम 3,150 बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 300 ग्राउंड लॉन्च्ड क्रूज मिसाइलें थीं। DF-17 से लॉन्च किया गया हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल लगभग 1,500 मील तक जा सकता है, जबकि DF-27 की अनुमानित रेंज लगभग 5,000 मील है। यानी चीन अब केवल अपने तटीय क्षेत्र की रक्षा की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूरस्थ ऑपरेशनल नेटवर्क को भी खतरे में लाने की क्षमता बढ़ा रहा है। हालांकि इस हथियार के इस्तेमाल की अपनी जटिलताएं भी हैं। हजारों किलोमीटर दूर उड़ते विमान को निशाना बनाने के लिए बेहद सटीक और लगातार अपडेट होने वाली टारगेटिंग जानकारी चाहिए। मिसाइल की लंबी “किल चेन” को बाधित किया जा सकता है और बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च को परमाणु हमले के रूप में गलत समझे जाने का खतरा भी मौजूद है। लेकिन अगर चीन इन तकनीकी चुनौतियों को प्रभावी ढंग से पार कर लेता है, तो अमेरिका के लिए यह रणनीतिक सिरदर्द बन सकता है। अमेरिका की घेराबंदी, चीन का जवाब अमेरिका की रणनीति भी कम आक्रामक नहीं है। वॉशिंगटन प्रशांत क्षेत्र में जापान, ताइवान और फिलीपींस जैसे सहयोगियों के सहारे चीन को पहली द्वीप श्रृंखला के भीतर सीमित रखने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर गुआम, कैरोलाइन द्वीप और टिनियन जैसे ठिकाने अमेरिकी सैन्य अभियानों के महत्वपूर्ण लॉन्चपैड हैं। अमेरिका की योजना है कि छोटे-छोटे द्वीपों और ठिकानों पर अपनी सैन्य क्षमता को फैलाया जाए ताकि चीन के सामने एक ही बड़ा लक्ष्य न रहे, बल्कि उसे असंख्य ठिकानों और लॉन्च पोजीशन से जूझना पड़े। इन द्वीपों को समुद्र में किलों की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी है। NMESIS जैसे लगभग 300 किलोमीटर रेंज वाले हथियारों के जरिए चीन की नौसेना के लिए समुद्री इलाकों को खतरनाक बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। इसके पीछे अंतरिक्ष, हवा, जमीन और समुद्र के नीचे तक फैला निगरानी नेटवर्क काम करेगा। लेकिन चीन भी इस अमेरिकी घेराबंदी को समझ चुका है। बीजिंग की रॉकेट फोर्स अब उन्हीं अमेरिकी एयरबेस और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी कर रही है, जिनके सहारे वॉशिंगटन भविष्य के किसी संघर्ष में चीन पर दबाव बनाना चाहता है। यही इस नए हथियारों के मुकाबले की असली तस्वीर है। यानि अमेरिका चीन को द्वीपों से घेरना चाहता है, जबकि चीन मिसाइलों से उन द्वीपों और अमेरिकी ठिकानों को निशाने पर लेना चाहता है। ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात, लेकिन तनाव जस का तस इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि शी जिनपिंग दो सप्ताह में अमेरिका आ सकते हैं। ट्रंप ने अपने चीन दौरे और बीजिंग के ग्रेट हॉल का उल्लेख करते हुए व्हाइट हाउस परिसर में नए निर्माण, बॉलरूम और एक सैन्य परिसर की योजना का भी जिक्र किया। हालांकि जिनपिंग की प्रस्तावित यात्रा को लेकर चीन की ओर से उपलब्ध सामग्री में कोई अलग आधिकारिक घोषणा नहीं थी। यह संभावित मुलाकात दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहने का संकेत जरूर है, लेकिन इससे रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिलते। ताइवान, व्यापार, तकनीक, दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक पर दोनों देशों के हित सीधे टकराते हैं। इसलिए कूटनीतिक बातचीत का एक उद्देश्य तनाव को नियंत्रित करना भी है, ताकि यह प्रतिस्पर्धा अनियंत्रित सैन्य टकराव में न बदल जाए। अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी है खाली होते हथियार भंडार उधर, शिंगटन के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि जिस समय वह चीन के साथ संभावित लंबे संघर्ष की तैयारी कर रहा है, उसके हथियार भंडार पहले ही भारी दबाव में हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका और उसके सहयोगियों ने बड़े पैमाने पर हथियार उपलब्ध कराए। इसके बाद ईरान के साथ संघर्ष ने प्रिसिजन हथियारों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की मांग और बढ़ा दी। स्थिति इतनी गंभीर है कि अमेरिका के सामने अब केवल महंगे और अत्याधुनिक हथियारों का उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं माना जा रहा। कई सिस्टमों की उत्पादन अवधि तीन से चार साल तक हो सकती है। इसलिए अब “प्रिसाइज मास” की सोच पर जोर दिया जा रहा है। यानी बड़ी संख्या में सस्ते ड्रोन, सेंसर और ऐसे हथियार तैयार करना जिन्हें तेजी से बनाया जा सके और युद्ध में बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सके। बहरहाल, ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकातें दुनिया को तनाव कम होने का संदेश दे सकती हैं, लेकिन जमीन पर अमेरिका और चीन दोनों भविष्य के संघर्ष के लिए अपनी-अपनी सैन्य मशीन को तैयार कर रहे हैं। चीन हाइपरसोनिक हथियारों और विशाल मिसाइल शक्ति से अमेरिकी सैन्य नेटवर्क की नसों पर वार करने की क्षमता विकसित कर रहा है। वहीं अमेरिका द्वीपों, गठबंधनों, पनडुब्बियों और फैले हुए सैन्य ठिकानों के जरिए चीन को घेरने की कोशिश कर रहा है। अब सवाल यह उठता है कि बातचीत की मेज के पीछे दोनों महाशक्तियां जिस युद्ध की तैयारी कर रही हैं, अगर वह कभी वास्तविक संघर्ष में बदल गया तो प्रशांत महासागर में पहला वार कौन करेगा और कौन उसे सहने के लिए ज्यादा तैयार होगा? -नीरज कुमार दुबे
अमेरिका में विदेशी छात्रों की कमी: आवेदन 10% घटे, नए दाखिले में भी गिरावट; वीजा नियम में सख्ती से बदला रुझान?
अमेरिका ने ईरान पर लगाए 'अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध', भारत पर ये असर - BBC
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'रवैया बदले अमेरिका, तभी होगी बात', अमेरिका की टैरिफ धमकी पर कार्नी सख्त; जवाबी टैक्स की तैयारी
अमेरिका की ओर से नए टैरिफ लगाने की धमकियों के बाद कनाडा के राजनीतिक नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया और सख्त कर दी है। क्यूबेक में बोलते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अगर अमेरिका अपना रवैया बदलता है, तो कनाडा बातचीत के लिए तैयार है।
'रवैया बदले अमेरिका, तभी होगी बात', अमेरिका की टैरिफ धमकी पर कार्नी सख्त; जवाबी टैक्स की तैयारी
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अमेरिका से भारतीय छात्रों का मोहभंग! UG एडमिशन में 15% गिरावट, अब जर्मनी-कनाडा समेत इन देशों का रुख
अमेरिका से भारतीय छात्रों का मोहभंग! UG एडमिशन में 15% गिरावट, अब जर्मनी-कनाडा समेत इन देशों का रुख
भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में ढेरों छात्र अमेरिका स्थिति दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी या संस्थानों से पढ़ाई का सपना देखते हैं। लेकिन हाल फिलहाल में अमेरिकी संस्थानों से छात्रों का मोहभंग देखने को मिल रहा है। कम से कम भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की कमी देखने को मिल रही है। ये गिरावट इसलिए भी बड़ी हो जाती है, क्योंकि शैक्षिक सत्र 2026-27 में अमेरिकी शैक्षिक संस्थाना में कुल अंडरग्रेजुएट आवेदन की संख्या बढ़ी है।अमेरिका में 1,100 से अधिक इंस्टीट्यूशन का प्रतिनिधित्व करने वाली गैर लाभकारी संस्था (NGO) कॉमन ऐप के डेटा के मुताबिक, इमिग्रेशन पॉलिसी सख्त होने और स्टूडेंट वीजा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की गिरावट आई है। इस बीच, कई अमेरिकी यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय छात्रों से 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौटने की अपील कर रही हैं। यहां पारंपरिक स्टेटस की ड्यूरेशन व्यवस्था की जगह निश्चित अवधि वीजा स्टे वाले नए नियम लागू होने वाले हैं।कॉमन ऐप की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए 1 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय अंडरग्रेजुएट आवेदन में 10% की गिरावट आई थी। इसने इस गिरावट को अपने डेटा में दर्ज सबसे बड़ी गिरावट बताया, जबकि कुल मिलाकर आवेदन में बढ़ोतरी बनी हुई है। भारत में 15% की गिरावट दर्ज की गई, जो इस बात को देखते हुए काफी है कि यह अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शैक्षिक सत्र 2024-25 के दौरान 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने अमेरिकी संस्थानों में प्रवेश लिया।अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का एक नया नियम है, जो स्टूडेंट और एक्सचेंज वीजा के लिए ट्रेडिशनल स्टेटस की ड्यूरेशन सिस्टम को ऑथराइज्ड स्टे के फिक्स्ड पीरियड से बदल देता है। यह नियम 15 सितंबर से लागू होने वाला है। विश्वविद्यालय हर संभव तरीके से छात्रों और स्कॉलर्स को संपर्क कर सूचित कर रहे हैं कि उनके इमिग्रेशन के स्टेटस पर इसका क्या असर होगा।द हार्वर्ड क्रिमसन के मुताबिक, हार्वर्ड के अंतरराष्ट्रीय कार्यालय ने ऑन-कैंपस कार्यक्रम में प्रवेश लेने वाले F-1 और J-1 छात्रों के साथ-साथ J-1 स्कॉलर्स को सलाह दी है कि नए नियम लागू होने के बाद वे अमेरिका में रहने पर विचार करें। यह अंतर इसलिए जरूरी है क्योंकि जो लोग नियम लागू होने के समय पहले से अमेरिका में हैं, उनके साथ उन लोगों से अलग बर्ताव किया जाएगा जो बाद में देश में दाखिल होते हैं। पीटीआई ने एक यूनिवर्सिटी एडवाइजरी का जिक्र किया है जिसमें कहा गया है कि जो छात्र पहले से अमेरिका में हैं, उनके I-94 रिकॉर्ड पर मौजूदा “D/S” नोटेशन बना रहेगा, जबकि 15 सितंबर से आने वालों को एक फिक्स्ड “एडमिट टिल डेट” मिलेगी।जो स्टूडेंट्स अभी अमेरिका में हैं, वे अपने शैक्षिक कार्यक्रम के खत्म होने या काम पूरा होने के बाद काम करने की मंजूरी खत्म होने तक, अधिक से अधिक चार साल के समय तक बिना एक्सटेंशन मांगे रह सकते हैं। जो लोग विदेश यात्रा करके 15 सितंबर के बाद लौट रहे हैं, वे इसके बजाय नए फिक्स्ड-टर्म सिस्टम के तहत आ सकते हैं। इन बदलावों से इस बात पर भी असर पड़ सकता है कि स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका छोड़ने या अपना स्टेटस ठीक करवाने में कितना समय लगेगा।मौजूदा व्यवस्था के तहत, F-1 छात्रों को आम तौर पर 60 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है, जबकि J-1 भागीदारों को 30 दिन का। नए नियम में F-1 ग्रेस पीरियड को घटाकर 30 दिन किया जाएगा। पीटीआई के मुताबिक, शिकागो यूनिवर्सिटी, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी, ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी जैसी यूनिवर्सिटीज ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों, स्कॉलर और लोगों को वैकल्पिक प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के बारे में जानकारी दी है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को 8 सितंबर को क्लास शुरू होने से पहले न्यूयॉर्क लौटने की सलाह दी है, और कहा है कि यह सलाह नए नियम को लागू करने की टाइमलाइन से जुड़ी है।पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की अनुमानित संख्या 2025-26 में लगभग 11.69 लाख से घटकर 2026-27 में 10.57 लाख होने का अनुमान है। इस गिरावट का बड़ा आर्थिक असर हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने फॉल 2025-26 के दौरान स्थानीय अमेरिकी इकॉनमी में लगभग $41.77 अरब का योगदान दिया, और 2026-27 में यह आंकड़ा घटकर $38.37 अरब होने का अनुमान है।भारतीय छात्रों के लिए एक और बड़ी चिंता ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम का भविष्य है, जो योग्य अंतरराष्ट्रीय स्नातकों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने की इजाजत देता है। ट्रंप प्रशासन ओपीटी का इस्तेमाल करने वाले विदेशी छात्रों के लिए $100,000 फीस पर विचार कर रहा है। यह एक ऐसा प्रस्ताव है जिससे उन छात्रों के लिए अमेरिकी डिग्री हासिल करने की लागत काफी बढ़ सकती है जो ग्रेजुएशन के बाद वहां काम का अनुभव हासिल करना चाहते हैं।School Holiday Tomorrow: क्या कल बंद रहेंगे स्कूल? जानें यूपी, बिहार, झारखंड और दिल्ली-एनसीआर पर क्या है ताजा अपडेट
US: अमेरिका ने कसा ईरान पर शिकंजा, भारत की चार कंपनियों पर भी प्रतिबंध; पेट्रोलियम कारोबार से जुड़ा है मामला---US Sanctions Four India-Based Companies Over Alleged Iran Petroleum Trade Links
अमेरिका का ईरान पर बड़ा आर्थिक वार, 5 सेक्टर पर प्रतिबंध से भारत पर भी पड़ सकता है असर
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ड्रोन युद्ध का नया दौर ! लेजर और माइक्रोवेव से दुश्मन के UAV गिराने निकला अमेरिका, भारत भी रेस में
रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान-अमेरिका तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद एंटी-ड्रोन तकनीक पर दुनिया का फोकस बढ़ा है. अमेरिकी सेना लेजर और माइक्रोवेव हथियारों का बड़ा परीक्षण करने जा रही है. जानिए यह तकनीक कैसे काम करती है और भारत D4 जैसे सिस्टम के साथ इस रेस में कहां खड़ा है.
अमेरिका को ईरान के प्रति अपना रवैया और भाषा बदलनी होगी: राष्ट्रपति पेजेश्कियन
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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव को और तेज करते हुए उसकी अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम सेक्टरों को निशाने पर लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त 2026 को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का ऐलान करते हुए कहा कि वॉशिंगटन का मकसद ईरान की उन आर्थिक लाइफलाइन को कमजोर करना है, […] The post ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर अमेरिका का बैन! सोना-टेक्नोलॉजी से शिपिंग तक निशाना, बिजनेस करने वालों को भी चेतावनी first appeared on Sanjeevni Today .
ईरान को अलग-थलग करने के लिए अमेरिका ने शुरू किया आर्थिक युद्ध, नेतन्याहू ने दी बधाई
वॉशिंगटन, 25 अगस्त . अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य तेहरान की आर्थिक जीवनरेखाओं को काटकर उसे पूरी तरह अलग-थलग करना है. साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि जो लोग खुद को तेहरान से जोड़कर रखेंगे उन्हें भी ... Read more
वॉशिंगटन, 25 अगस्त . अमेरिका के 30 सीनेटरों के एक समूह ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से छात्र और एक्सचेंज विजिटर वीजा की प्रक्रिया में हो रही देरी को दूर करने की अपील की है. उनका कहना है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो कई छात्र नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले अमेरिका नहीं ... Read more
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर किए जा रहे प्रयास आतंकियों को रास नहीं आ रहे।अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद कथित तौर से कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र से टारगेट किया गया है।
आतंकवाद प्रायोजक देशों में शामिल नहीं सीरिया, अमेरिकी सूची से नाम हटाए जाने का किया स्वागत
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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार मेंगिरावट दिखी। सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर खुले।
अमेरिका की टेररिज्म लिस्ट से सीरिया आउट, ट्रंप ने अपने फेवरेट को दिया 'तोहफा'
ट्रंप प्रशासन ने सीरिया को अमेरिका की टेरर ब्लैकलिस्ट से हटाते हुए एचटीएस की अलग सूचीबद्धता भी खत्म कर दी. वॉशिंगटन का कहना है कि इससे निवेश, आर्थिक बहाली और वैश्विक तंत्र में सीरिया की वापसी का रास्ता खुलेगा.
अमेरिका में AI की वजह से नहीं जाएगी शिक्षकों की नौकरी: शिक्षा मंत्री बोलीं- मशीन नहीं ले सकता इंसान की जगह- Teachers will not lost job due to AI Linda McMahon US Secretary Education says machines cannot replace humans
रेवंत रेड्डी बोले- अमेरिका यात्रा की अनुमति न देना तेलंगाना का अपमान, वीडियो में जाने केंद्र से पूछा- पहले मंजूरी क्यों दी गई?
अमेरिका-ईरान तनाव फिर गहराया, नए प्रतिबंधों के बाद तेहरान ने दिखाया सख्त रुख
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अमेरिका ने ईरान पर लगाए 'अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध', भारत पर ये असर
अमेरिका के लगाए नए प्रतिबंधों का असर सिर्फ़ ईरान ही नहीं दूसरे देशों पर भी पड़ेगा. ईरान के आर्थिक हालात बेहद ख़राब हो चुके हैं. जानिए ये नई पाबंदियां पुराने प्रतिबंधों से कैसे अलग हैं.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो हफ्ते में अमेरिका आएंगे: ट्रंप
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो हफ्ते में अमेरिका आएंगे: ट्रंप
पश्चिम एशिया में जारी लंबे तनाव और भू-राजनीतिक टकराव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और आक्रामक आर्थिक घेराबंदी शुरू कर दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' (Operation Economic Outcast) का आधिकारिक ऐलान करते हुए इसे आर्थिक मोर्चे का 'डी-डे' (Economic D-Day) करार दिया है।इस नई नीति का सीधा उद्देश्य ईरान के वैश्विक व्यापारिक संपर्कों को पूरी तरह काटकर उसकी अर्थव्यवस्था को अलग-थलग (Isolate) करना और उसकी वित्तीय जीवन रेखा को समाप्त करना है। अमेरिका ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी देश, बैंक या कंपनियां ईरान के साथ व्यापार करेंगी, उन पर सख्त सेकेंडरी सैंक्शन्स (Secondary Sanctions) लगाए जाएंगे और उन्हें अमेरिकी डॉलर क्लियरिंग सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।क्या है 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' और अमेरिका का 'जीरो-लीकेज' रुख?अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह केवल नियमित प्रतिबंधों की घोषणा नहीं है, बल्कि एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नाकेबंदी है। इस ऑपरेशन के तहत अमेरिकी प्रशासन ने उन सभी माध्यमों और नेटवर्कों का नक्शा तैयार किया है जिनका इस्तेमाल ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने, मनी लॉन्ड्रिंग करने और गुप्त तरीके से धन जुटाने के लिए करता रहा है।ग्लोबल नेटवर्क्स पर एक्शन: अमेरिका के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने अवैध मिसाइल व न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी खरीद, साइबर हमलों और तेल तस्करी से जुड़ी करीब 60 वैश्विक संस्थाओं, जहाजों और व्यक्तियों को एक साथ प्रतिबंधित किया है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त चेतावनी: अमेरिका ने वैश्विक जहाजरानी कंपनियों को आगाह किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के लिए ईरान को किसी भी प्रकार का टैक्स या टोल (Toll) देना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन माना जाएगा।तीसरे देशों को अल्टीमेटम: अमेरिकी अधिकारियों की टीमें दुनिया भर के सहयोगी व साझीदार देशों से संपर्क कर रही हैं और उन्हें ईरान के साथ अपने सभी वित्तीय सौदे बंद करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा (Timeline) दे रही हैं।इन 6 अहम क्षेत्रों पर होगा अमेरिका का सीधा और निर्णायक वार'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले 6 प्रमुख स्तंभों को चिन्हित कर उन पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है:कच्चा तेल और शैडो फ्लीट (Crude Oil & Shadow Fleet): ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह शून्य करने के लिए उसके 'शैडो फ्लीट' (अवैध तेल ले जाने वाले गुप्त टैंकरों के नेटवर्क) पर शिकंजा कसा गया है। चीनी रिफाइनरियों और बिचौलियों को तेल पहुंचाने वाले जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया गया है।डिजिटल एसेट्स और क्रिप्टोकरेंसी (Digital Assets & Crypto): अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान द्वारा इस्तेमाल की जा रही वर्चुअल करेंसी और डिजिटल एसेट्स प्लेटफॉर्म्स को ट्रैक कर उन्हें ब्लॉक किया जा रहा है।सोना और कीमती धातुएं (Gold & Precious Metals): स्थानीय मुद्रा (रियाल) की भारी गिरावट को थामने और विदेशी संपत्तियों के बदले गोल्ड ट्रांसफर के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।एविएशन सेक्टर (Aviation): नागरिक और सैन्य विमानन कंपनियों, विमानों के पुर्जों की आपूर्ति और हवाई मार्गों के जरिए हथियारों या नकदी की ढुलाई से जुड़े नेटवर्क को निशाना बनाया गया है।शिपिंग और समुद्री परिवहन (Shipping): ईरान के सरकारी और निजी समुद्री शिपिंग नेटवर्क, कंटेनर लॉजिस्टिक्स और बंदरगाहों से संचालित होने वाले कार्गो मूवमेंट पर कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और साइबर नेटवर्क (Technology & Cyber): मिसाइल और ड्रोन तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले हाई-टेक पुर्जों की खरीद और महत्वपूर्ण अमेरिकी व वैश्विक बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले करने वाले ऑपरेटरों पर कानूनी कार्रवाई की गई है।वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर क्या होगा असर?अमेरिकी वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दुनिया भर के बैंकों को ईरान से अलग होने के लिए एक संक्षिप्त मोहलत (Cure Period) दी जा रही है, लेकिन यदि किसी बड़े वित्तीय संस्थान ने नियमों का उल्लंघन जारी रखा, तो उस पर इसी सप्ताह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।दूसरी ओर, इस आक्रामक आर्थिक वार ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह इस 'आर्थिक युद्ध' का जवाब देने के लिए तैयार है, जिससे आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया का तनाव और अधिक गहराने के आसार हैं।
अमेरिका के चुनाव में ट्रंप का खेला या बदलाव? SC ने भी दी मंजूरी
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनके उस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ कर दिया है, जिसमें मेल से वोट डालने की प्रक्रिया पर नए प्रतिबंध लगाने की बात है. हालांकि, कई राज्यों की आपत्ति और आगे की कानूनी चुनौती का रास्ता अभी खुला है.
अमेरिका में नौकरी चाहने वालों के लिए एक और बैड न्यूज, अब ट्रंप H-1B वीजा पर वसूलेंगे 1 करोड़ की फीस!
इससे पहले अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप सरकार की H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने की योजना को रद्द कर दिया था.
पश्चिम एशिया में जारी लंबे सैन्य टकराव और कूटनीतिक गतिरोध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच की जंग अब सबसे आक्रामक वित्तीय और आर्थिक मोर्चे पर पहुंच गई है। सैन्य अभियानों और बंदरगाहों की नाकेबंदी के बाद भी तेहरान को झुकाने में असफल रहने पर वाशिंगटन ने अब उसकी अंतिम आर्थिक जीवन रेखा को पूरी तरह काट देने का खुला ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने वैश्विक स्तर पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' (Operation Economic Outcast) शुरू करते हुए दुनिया भर के देशों को दो-टूक चेतावनी दी है कि वे ईरान के साथ अपने सभी व्यापारिक और वित्तीय संबंध तुरंत तोड़ लें, अन्यथा उन्हें अमेरिकी डॉलर-आधारित बैंकिंग प्रणाली से पूरी तरह बेदखल कर दिया जाएगा।अमेरिकी घोषणा के तुरंत बाद तेहरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के इस आर्थिक आतंकवाद का करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।अमेरिका का 'इकोनॉमिक डी-डे': 5 प्रमुख सेक्टरों और 60 संस्थाओं पर नए प्रतिबंधअमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक वित्तीय घेराबंदी शुरू की गई है:5 अहम सेक्टर निशाने पर: अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले 5 प्रमुख क्षेत्रों—डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टो), टेक्नोलॉजी, गोल्ड (सोना), एविएशन (विमानन) और शिपिंग (समुद्री परिवहन)—को सीधे तौर पर लक्षित किया है।60 संस्थाओं पर एक्शन: ईरान के मिसाइल, न्यूक्लियर, साइबर और शैडो-फ्लीट (अवैध तेल टैंकर नेटवर्क) से जुड़ी करीब 60 कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए गए हैं।वैश्विक देशों को अल्टीमेटम: स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सभी वित्तीय चैनलों का नक्शा तैयार कर लिया है और दुनिया के हर देश को एक निश्चित समय-सीमा (Defined Timeline) दी जा रही है ताकि वे ईरान से जुड़े सभी लेन-देन और तेल खरीद पूरी तरह बंद कर दें।अमेरिकी वित्त मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, हमारा स्पष्ट लक्ष्य तेहरान को सहारा देने वाली हर एक आर्थिक जीवन रेखा को काट देना है ताकि यह शासन पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाए। कोई भी बैंक या संस्था यदि ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग या तेल तस्करी में शामिल पाई गई, तो वह अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दी जाएगी। हमारे प्रतिबंधों के दायरे से कोई भी ऊपर नहीं है।'ईरान का तीखा पलटवार: 'हमारा रुख अब रक्षात्मक नहीं, दुश्मन हमले के लिए तैयार रहे'अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों का नया जाल बिछाए जाने पर ईरानी नेतृत्व ने कड़ा और बेबाक जवाब दिया है:ईरानी वित्त मंत्री का बयान: ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, हम अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। स्वाभाविक रूप से दुश्मन हम पर एक आर्थिक आतंकवादी हमला करना चाहता है, लेकिन हमारे पास भी अपने प्रभावी हथियार हैं और हम यह खेल खेलना अच्छी तरह जानते हैं। अब हमारा रुख केवल रक्षात्मक नहीं रहा है; दुश्मनों को हमारे जवाबी वार के लिए तैयार रहना चाहिए।आईआरजीसी की खुली चेतावनी: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचे या ऊर्जा नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो पश्चिम एशिया के सभी महत्वपूर्ण 'एनर्जी चोकपॉइंट्स' और अमेरिकी रणनीतिक ठिकानों पर भारी और विनाशकारी चोट की जाएगी।राष्ट्रपति पेजेशकियन का रुख: पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ तेहरान में हुई शांति वार्ता के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका को ईरान से बात करने का अपना लहजा और रवैया बदलना होगा। दादागीरी और आर्थिक दबाव से हालात केवल और अधिक जटिल होंगे, सुलझेंगे नहीं।वैश्विक ऊर्जा बाजार और प्रमुख साझेदारों की चुनौतीविशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भले ही प्रतिबंधों की घोषणा कर रहा हो, लेकिन इसे पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होगा। ईरान पिछले कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच जीवित रहने और पैरेलल बैंकिंग व तीसरे देशों के जरिए व्यापार करने की कला में पारंगत हो चुका है।इसके साथ ही, यदि अमेरिका चीन, भारत या तुर्की जैसी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की संस्थाओं पर सीधे सेकेंडरी सैंक्शन्स लगाने का जोखिम उठाता है, तो इससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली और तेल आपूर्ति में भारी उथल-पुथल मच सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से बने तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच यह नया आर्थिक टकराव दुनिया को एक नए महासंकट की ओर धकेल रहा है।
Sudan War: सूडान में 59 हजार मौतों के बाद अमेरिका सख्त, UN से पूरे देश में हथियार बैन की मांग; बढ़ेगा दबाव?---US Seeks Tougher UN Sanctions to Push Sudan Rivals Toward Peace Talks
कनाडाई अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका ने वार्ता के अंतिम चरण में ऐसी अनुचित शर्तें और मांगें रखीं जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था। इनमें एक शर्त यह भी शामिल थी जिसके तहत कनाडा किन देशों के साथ भविष्य में व्यापार समझौते कर सकता है, उस पर सीमाएं तय करने का दबाव बनाया जा रहा था।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने सोमवार शाम पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से तेहरान में उच्चस्तरीय मुलाकात की। इस बैठक के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह ईरान के प्रति अपने लहजे और आक्रामक रवैये में बदलाव लाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दबाव, प्रतिबंधों और धौंस के जरिए आगे बढ़ने की नीति से समझौतों को लागू करने की प्रक्रिया केवल जटिल और बाधित ही होगी।
ट्रंप का बड़ा खुलासा: दो हफ्ते में अमेरिका आएंगे शी जिनपिंग, व्हाइट हाउस में बन रहा ‘चीन जैसा’ ग्रेट हॉल- Trump major revelation Xi Jinping visit US in two weeks China-style Great Hall being built at White House
कनाडा आज करेगा जवाबी टैरिफ का ऐलान, ट्रंप की धमकी पर बोले कार्नी-'हमारा देश अमेरिका का गुलाम नहीं'
ट्रंप प्रशासन के साथ ट्रेड को लेकर बातचीत के विफल होने के बाद अमेरिका और कनाडा के बीच छिड़ा 'ट्रेड वॉर' अब बेहद चरम स्थिति में पहुंच गया है। जहां एक ओर अमेरिका आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं वहीं कनाडा मंगलवार को संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ बड़े और सख्त जवाबी टैरिफ की घोषणा करने जा रहा है।
ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की तैयारी में अमेरिका, देखें US TOP-10
अमेरिका ईरान पर अबतक का सबसे बड़ा आर्थिक अभियान शुरु करने की तैयारी में है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे इकोनॉमिक डी डे बताया है. बेसेंट के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप के सैन्य अभियान के बाद अब ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे. अमेरिका का लक्ष्य ईरान की आर्थिक और वित्तीय नीतियों को पूरी तरह अलग-थलग करना है.
‘12वीं पास’ कंगना, अमेरिका से आए अभिजीत दीपके- किसकी अंग्रेजी अच्छी? एक्ट्रेस ने उड़ाया मजाक
कंगना रनौत ने अभिजीत दीपके की अंग्रेजी बोलने की शैली की तुलना अपनी अंग्रेजी से की है। एक्ट्रेस ने वीडियो शेयर किया, जिसमें ‘12वीं पास’ कंगना और Boston Graduate दिपके की अंग्रेजी का जिक्र है।
आज के दिन: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कनाडा और अमेरिका का दौरा, TMC के 20 बागी सांसदों के खिलाफ सुनवाई
अमेरिका ने 47 साल बाद सीरिया को स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म सूची से हटा दिया है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह कदम देश में निजी निवेश, आर्थिक पुनर्बहाली और वैश्विक अर्थव्यवस्था में पुनः एकीकरण को बढ़ावा देगा.
अमेरिका का वीजा चाहिए तो 1 लाख डॉलर लगेंगे, ट्रंप का भारतीयों को एक और झटका
भारत से बड़ी संख्या में अमेरिका जाने वाले आवेदक H-1B वीजा के लिए आवेदन देते हैं, लेकिन अब जब अमेरिका सरकार इस मोटी फीस को लागू करने पर विचार कर रही है, तो कई देशों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, सिर्फ प्रस्ताव ही रखा गया है।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का प्रतीक: अमेरिकी राजदूत ने टाटा-लॉकहीड मार्टिन संयंत्र का किया दौरा
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हैदराबाद में टाटा-लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर्स संयंत्र का दौरा किया।
तेहरान में मुनीर से मिले गालिबाफ: ईरान ने अमेरिका पर लगाया समझौता तोड़ने का आरोप; चीन ने क्या कहा?
तेहरान में मुनीर से मिले गालिबाफ: ईरान ने अमेरिका पर लगाया समझौता तोड़ने का आरोप; चीन ने क्या कहा?
Kurukshetra News: थानेसर के राकेश ने अमेरिका में रहकर कराई श्रीराम कथा
थानेसर के राकेश ने अमेरिका में रहकर कराई श्रीराम कथा
ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'ट्रंप कार्ड', ट्रेड रूट पर सीधा वार; चेतावनी के साथ निशाने पर ये देश
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को चेतावनी दी कि नए प्रतिबंधों से ईरान के सभी राजस्व स्रोत बंद किए जाएंगे। उन्होंने अन्य देशों से आर्थिक संबंध तोड़ने को कहा, वरना जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
'ईरान से रिश्ते तोड़ो वरना प्रतिबंध झेलो', अमेरिका की दुनिया को खुली चेतावनी
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने उन नेटवर्क की पहचान कर ली है, जिनका इस्तेमाल ईरान तेल की आवाजाही, फंड हासिल करने और प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है.
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अमेरिका का नया H-1B प्लान, ₹98 लाख से ज्यादा फीस की तैयारी; भारतीयों पर सीधा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन नए एच-1बी वीजा पर 1,03, 265 डॉलर का भारी शुल्क लगाने की तैयारी में है। सोमवार को जारी प्रस्तावित नियम के तहत अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए यह शुल्क लागू किया जा सकता है…
अमेरिका को खुश करने तेहरान पहुंचे असीम मुनीर! फिर शांतिदूत बनने का नया ढोंग
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर ईरानी अधिकारियों से बातचीत के लिए तेहरान पहुंचे हैं. उनके साथ गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी हैं. दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना और मध्य पूर्व के संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों को आगे बढ़ाना है.
‘तेलंगाना के 4 करोड़ लोगों का अपमान’, अमेरिका यात्रा की अनुमति न मिलने पर सीएम रेड्डी
हैदराबाद, 24 अगस्त . तेलंगाना के Chief Minister ए. रेवंत रेड्डी ने Monday को केंद्र Government द्वारा उनके अमेरिका दौरे की इजाजत न दिए जाने को तेलंगाना के 4 करोड़ लोगों का ‘अपमान’ बताया. उन्होंने मोदी Government पर ‘Political भेदभाव’ करने और तेलंगाना में निवेश व विकास की राह में बाधा डालने का आरोप लगाया. ... Read more
'तेलंगाना के 4 करोड़ लोगों का अपमान', अमेरिका यात्रा की अनुमति न मिलने पर सीएम रेड्डी
'तेलंगाना के 4 करोड़ लोगों का अपमान', अमेरिका यात्रा की अनुमति न मिलने पर सीएम रेड्डी
'सरकार ने मुझे अमेरिका जाने से रोका', CM रेवंत रेड्डी का PM मोदी पर आरोप
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “राजनीतिक आधार” पर उनकी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा की मंजूरी रोक दी, क्योंकि वह कांग्रेस सरकार का नेतृत्व करते हैं. उन्होंने केंद्र पर तेलंगाना में निवेश को हतोत्साहित करने और गुजरात के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया.
भारत ने इस साल जून में फ्रांस के एवियान में जी7 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान ‘सावधानीपूर्ण रुख’ अपनाया था। शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि यह फैसला ट्रंप के अप्रत्याशित व्यवहार को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।
कनाडा और अमेरिका दौरे पर जाएंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आर्थिक और वित्तीय साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा फोकस
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नया दांव, जहाजों से लेगा टोल, वीडियो में अमेरिका बोला- आर्थिक दबाव का आखिरी दौर शुरू
सीधी के खोरबा टोला की बुनी दरी की अमेरिका में बढ़ाएगी भारत की शान, ऐसे बना लोकल फाॅर ग्लोबल
यह कहानी सिर्फ दरी की बिक्री की नहीं, बल्कि उस आत्मनिर्भर सीधी की है, जहां महिलाओं के हाथ अब रोजगार ही नहीं, बल्कि विदेशी बाजार की पसंद भी बुन रहे हैं। 30 महिलाओं के समूह ने करीब 25 लाख रुपये का कारोबार खड़ा किया है।
अमेरिका के नेवादा में जंगल की आग का कहर, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में नेवादा राज्य के रेनो शहर तक जंगल की आग पहुंच चुकी है. जिससे कई घर जलकर खाक हो गए. अब तक 42 हजार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है. जबकि 45 हजार लोगों को घर छोड़ने के लिए तैयार रहने को कहा गया है. देखें दुनिया आजतक.
अमेरिकी चाबुक से ईरानी करेंसी कंगाल! 20 लाख रियाल के बराबर 1 डॉलर
ईरान की मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है. यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका नई और कड़ी आर्थिक पाबंदियां लगाने की तैयारी कर रहा है. युद्ध, महंगाई और कमजोर आर्थिक वृद्धि से पहले से जूझ रही ईरान की अर्थव्यवस्था पर इन प्रतिबंधों से दबाव और बढ़ने की आशंका है.
पंजाब में किसान संगठन 30 अगस्त से जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरने-प्रदर्शन करेंगे। भारतीय किसान यूनियन उगराहां ने मानसा में आज जिले भर के किसानों की संयुक्त बैठक की, जिसमें धरने की रूपरेखा तैयार की गई। भारतीय किसान यूनियन उगराहां के जिला अध्यक्ष राम सिंह भैणी बाघा ने बताया कि इन प्रदर्शनों की मुख्य मांगों में भारत-अमेरिका डील को रद्द करना और जबरन भूमि अधिग्रहण से संबंधित 'लैंड पूलिंग' नीति को समाप्त करना शामिल है। किसान पंजाब सरकार की इस नीति का भी विरोध कर रहे हैं। कर्ज माफ करने की मांग भी की जाएगी किसानों द्वारा सभी किसानों के कर्ज माफ करने की मांग भी की जाएगी। किसानों ने अपनी 13 जायज मांगें रखी हैं। इन मांगों को लेकर जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकाल के लिए मोर्चे लगाए जाएंगे और पंजाब तथा केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। आने वाले समय में संघर्ष तेज किया जाएगा किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारें उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती हैं, तो आने वाले समय में इन संघर्षों को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
क्या अब जंग खत्म होगी क्योंकि ईरान को तोड़ने में अमेरिका भी आर्थिक रूप से टूटा
अमेरिका आर्थिक रूप से टूटा The post क्या अब जंग खत्म होगी क्योंकि ईरान को तोड़ने में अमेरिका भी आर्थिक रूप से टूटा appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
भारतीय वायुसेना के साल के सबसे बड़े मल्टीनेशनल अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2.0’ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
चीनी AI से टेंशन में अमेरिका! Nvidia ने खेला 7 लाख करोड़ का दांव
अमेरिकी चिप मेकर Nvidia इस समय मार्केट कैप के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है. ये कंपनी दुनिया भर की बड़ी AI कंपनियों चिप सप्लाई करती है. लेकिन अब ये खुद AI मॉडल डेवेलप कर रही है. DeepSeek चीनी AI कंपनी है, लेकिन काफी छोटी. बावजूद इसके ये कंपनी बड़े प्लेयर्स के लिए चुनौती है.
Iran-US: ईरान की अमेरिका की आर्थिक कार्रवाई का समर्थन करने वाले देशों की दी युद्ध की चेतावनी
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर दोनों ओर से बयानबाजी का दौर जारी है। ईरान की सर्वाेच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नए प्रमुख मोहसिन रेजाई ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक कार्रवाई का समर्थन करने वाले किसी भी देश के कदम को युद्ध माना जाएगा। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन का बचाव किया। ईरान की सर्वाेच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कट्टरपंथी नेता मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह चेतावनी दी। उन्होंने सरकारी प्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, अगर (डोनाल्ड ट्रंप) कुछ करना चाहते हैं, तो हम भी मुंह तोड़ पलटवार करेंगे। दूसरी ओर, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट सोमवार को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा कर सकते हैं। इस बीच, मध्यस्थों के जरिए वार्ता फिर शुरू कराने के प्रयासों के तहत पाकिस्तान के सेना प्रमुख भी सोमवार को ईरान की यात्रा कर सकते हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने अपनी खबर में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई के हवाले से बताया कि पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर सोमवार को तेहरान पहुंचेंगे और एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। pc- parstoday.ir
अमेरिका का साथ देने वाले देशों को ईरान की खुली चेतावनी
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने अब सीधे तौर पर उन देशों को चेतावनी दी है जो अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों में उसका समर्थन करने की सोच रहे हैं. ईरान की सरकार ने कड़े शब्दों में एक नया फरमान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि अगर किसी भी देश ने ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों के मामले में अमेरिका का साथ दिया, तो ईरान उस देश को अपना दुश्मन मानेगा.
बढ़ता बजट घाटा, भारी सरकारी खर्च और कर्ज़ पर चुकाया जाने वाला ब्याज अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है और क्या ईरान से टकराव तथा बढ़ते रक्षा खर्च ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं?
एस्प्रेसो से अमेरिकानो तक, जानें कैफे में मिलने वाली 5 ब्लैक कॉफी का स्वाद, ऑर्डर करना होगा आसान
किसी कैफे में जाकर अलग-अलग तरह की कॉफी को देखकर आप भी कंफ्यूज हो जाते हैं तो आपकी कंफ्यूजन दूर करने के लिए हम यहां कैफे में मिलने वाली कुछ मुख्य ब्लैक कॉफी का स्वाद बता रहे हैं। जिसे जानने के बाद अगली बार ऑर्डर देना आसान हो जाएगा।
बेटा 9 महीने से अमेरिका के लिए लड़ रहा युद्ध, ट्रंप ने बाप को भेज दिया जेल, सैनिक का छलका दर्द
अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने जवान के पिता की गिरफ्तारी पर कहा- “परिवार में किसी व्यक्ति का सेना में होना देश के कानूनों का उल्लंघन करने की खुली छूट नहीं देता.”
अमेरिका ने ईरान को दी आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी
अमेरिका की ओर से नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा से पहले अमेरिका और ईरान के बीच तीखे बयानों का दौर जारी रहा। इन प्रतिबंधों का असर इस्लामिक रिपब्लिक और तेहरान के सबसे अहम व्यापारिक साझेदारों पर पड़ सकता है। इन साझेदारों में चीन भी शामिल है। इकोनॉमिक टाइम्स में रविवार को छपे एक लेख में …
अमेरिका की मध्यस्थता में सीरिया और इजरायल की जॉर्डन में बातचीत, तनाव कम करने को लेकर हुई चर्चा
अमेरिका की मध्यस्थता में सीरिया और इजरायल की जॉर्डन में बातचीत, तनाव कम करने को लेकर हुई चर्चा
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की गौरवगाथा अब अमेरिका की सिलिकॉन वैली में भी आकर्षण का केंद्र बनी। फ्रेमोंट शहर में आयोजित इंडिया डे परेड एंड फेयर-2026 में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और मध्य प्रदेश की थीम ‘एमपी-द इनोवेशन हब’ पर तैयार झांकी को ‘मोस्ट ब्यूटीफुल फ्लोट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। भारत की स्वतंत्रता के 80वें और अमेरिका की स्वतंत्रता के 250वें वर्ष के आयोजनों की श्रृंखला के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, विरासत और मध्यप्रदेश की उपलब्धियों को अमेरिकी धरती पर प्रदर्शित किया गया। झांकी में दिखाया अहिल्याबाई का योगदान झांकी में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के राष्ट्रनिर्माण, सुशासन, जनकल्याण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में योगदान को प्रदर्शित किया गया। इसमें देशभर के मंदिरों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प में उनके योगदान को भी दर्शाया गया। परेड के दौरान झांकी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद निर्णायकों ने इसे ‘मोस्ट ब्यूटीफुल फ्लोट अवार्ड’ के लिए चुना। इंदौर-मध्यप्रदेश के लोगों ने लिया हिस्सा फेस्टिवल ऑफ ग्लोब के चेयरमैन डॉ. रमेश जापरा के आतिथ्य में हुए कार्यक्रम में इंदौर और मध्यप्रदेश से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। झांकी की ओर से यह पुरस्कार केपी माहेश्वरी, रितू माहेश्वरी और अमेरिकंस फॉर हिंदू के प्रेसिडेंट प्रमित माकोड़े ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में काउंसिल जनरल ऑफ इंडिया, सैन फ्रांसिस्को के डॉ. के. श्रीकर रेड्डी भी मौजूद रहे। टीम मध्यप्रदेश की दीपाली साकल्ले, शीतल गुप्ता, पूजा तिवारी, सोनाली शर्मा, पल्लवी विश्वकर्मा, रैना मराठे, राधिका ठाकुर, राखी चौहान, स्वाति निगम और वंदना गोहिल ने भी सहभागिता की। टीम के सदस्यों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर भारतीय और मध्यप्रदेश की संस्कृति को भी प्रस्तुत किया। अमेरिका में आयोजित इस परेड में मध्यप्रदेश की झांकी को मिला सम्मान प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के योगदान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान की अमेरिका की आर्थिक कार्रवाई के साथ खड़े देशों को चेतावनी! कहा- ''मुंहतोड़ जवाब देंगे'
ईरान की अमेरिका की आर्थिक कार्रवाई के साथ खड़े देशों को चेतावनी! कहा- ''मुंहतोड़ जवाब देंगे'
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का बड़ा बयान, अमेरिका की शर्तें पूरी होने तक रास्ता खोलने से इनकार; ट्रंप के दावे पर भी पलटवार
पिज्जा डिलीवर करते समय न्यूयॉर्क में पंजाब के युवक की गोली मारकर हत्या, 13 साल पहले गया था अमेरिका
न्यूयॉर्क, 24 अगस्त . अमेरिका में पंजाब के एक युवक की पिज्जा डिलीवरी करते समय गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में न्यूयॉर्क स्थित भारतीय मिशन ने इस घटना पर गहरा दुख जताया और पीड़ित के परिवार को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है. अमेरिका में रह रहे पंजाब के कपूरथला निवासी 28 ... Read more
विशेषज्ञ का खुलासा: ईरान ने 40 साल पहले ही शुरू कर दी थी अमेरिका से युद्ध की तैयारी, बनाई थी रणनीति
विशेषज्ञ का खुलासा: ईरान ने 40 साल पहले ही शुरू कर दी थी अमेरिका से युद्ध की तैयारी,बनाई थी रणनीति
अमेरिका में कौन से प्रोफेशन के लोग करते हैं सबसे ज्यादा कमाई?
अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले लोगों के मन में अक्सर एक सवाल रहता है कि आखिर वहां किस प्रोफेशन में सबसे ज्यादा कमाई होती है? डॉक्टर, पायलट, इंजीनियर या फिर CEO कौन-सा करियर आपको लाखों रुपये की कमाई तक पहुंचा सकता है? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर Sarika in America ने अमेरिका के सबसे ज्यादा कमाई वाले प्रोफेशन को लेकर जानकारी शेयर की है. वहीं अमेरिकी सरकार के ताजा आंकड़े भी बताते हैं कि कुछ खास प्रोफेशन हैं, जिनकी सालाना कमाई करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है.
US Open: क्या यूएस ओपन में फिर दिखेगा फेडरर का जादू? इस अमेरिकी दिग्गज के खिलाफ खेलेंगे खास मुकाबला
20 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन रोजर फेडरर बुधवार को यूएस ओपन के एक खास प्रदर्शनी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। न्यूयॉर्क में पांच बार खिताब जीत चुके फेडरर का सामना 2003 के यूएस ओपन चैंपियन एंडी रॉडिक से होगा।
भारत ने PM मोदी की मुलाकात से पहले समझा दी थी शर्त, लेकिन ट्रंप भूल गए: अमेरिकी राजदूत
फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में बीते 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुलाकात हुई थी। यह मुलाकात होर्मुज में एक जहाज पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद हुई थी।
अमेरिकी जेन-जी ज्यादा आक्रामक: भाषण पसंद न आने पर वक्ता को जबरन रोकने के समर्थक, हिंसा से भी परहेजनहीं
Iran-US Tension: ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, ‘फारस की खाड़ी से तेल की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे’, होर्मुज पर बढ़ा संकट
मोहन भागवत का 17 दिवसीय विदेश दौरा आज से, अमेरिका-कनाडा और ब्रिटेन में करेंगे कई कार्यक्रम
डॉ. मोहन भागवत सोमवार को नई दिल्ली से कनाडा के लिए रवाना होंगे। उनके दौरे की शुरुआत टोरंटो से होगी, जहां वह एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद उनका अमेरिका जाने का कार्यक्रम है। 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध मेडिसन स्क्वायर में आयोजित समारोह में डॉ. भागवत लोगों को संबोधित करेंगे।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपनी अमेरिका यात्रा के सातवें दिन न्यू जर्सी में स्थित विश्व प्रसिद्ध BAPS (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, ...
ईरान-अमेरिका तनाव फिर चरम पर, नए प्रतिबंधों की धमकी पर तेहरान का पलटवार
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि प्रतिबंधों की धमकी अब कोई नई बात नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने पहले भी आर्थिक दबाव, नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जिसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कथित 'आर्थिक युद्ध' जारी रखा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) समेत फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात पूरी तरह रोक सकता है। ईरान की इस धमकी ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को लेकर चिंता बढ़ा दी है।सवाल यह है कि अगर Hormuz से तेल की आवाजाही वास्तव में रुकती है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया के पेट्रोल, डीजल, LPG और दूसरे ईंधनों की कीमतों पर कितना पड़ेगा?'एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा'ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है।न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है तो होर्मुज के रास्तेयाफारस की खाड़ी के किसी अन्य हिस्से से एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा।रेजाई ने केवल अमेरिका को ही चेतावनी नहीं दी, बल्कि उन देशों को भी निशाने पर लिया जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होते हैं या उसका समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान ऐसे किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।अमेरिका करने जा रहा है बड़ा आर्थिक हमलाईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका उसके खिलाफ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इसमें ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाने वाली नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया जा सकता है।Financial Times में लिखे एक लेख में बेसेंट ने आने वाले कदमों को किसी विरोधी के खिलाफ अब तक की गई सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई बताया है। अमेरिका ने अभी इन संभावित प्रतिबंधों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन संकेत दिया है कि ईरान के साथ आर्थिक और वित्तीय संबंध बनाए रखने वाले देशों पर भी दबाव डाला जा सकता है।चीन को भी अमेरिका की चेतावनीअमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को लेकर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। Reuters के अनुसार, बेसेंट ने चीन से भी अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन की ऊर्जा जरूरतों में खाड़ी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने तेल आयात का करीब आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से प्राप्त करता है।चीन ने हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की नीति पर आपत्ति जताई है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या के समाधान में मदद नहीं करते और कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत है। ईरान के नेताओं ने अमेरिकी दबाव के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है।ईरानी सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने अमेरिकी आर्थिक दबाव को लेकर कहा कि यह सैन्य मोर्चे पर अमेरिका की कथित हार की स्वीकारोक्ति है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए युद्ध और प्रतिबंध कोई नई चीज नहीं हैं। ईरान करीब दो दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।होर्मुजपर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्णतेल रूट्स में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के लिए यह प्रमुख समुद्री रास्ता है। इसलिए यहां किसी भी बड़े सैन्य या राजनीतिक संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।Reuters के मुताबिक, ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आर्थिक दबाव में है। इसके अलावा हालिया हमलों के कारण उसके बुनियादी ढांचे को नुकसान, व्यापार में बाधा, उत्पादन में कमी और पुनर्निर्माण की लागत का दबाव भी बढ़ा है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अब भी पर्याप्त मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है, जिससे वह खाड़ी के पड़ोसी देशों को निशाना बना सकता है। होर्मुजसे गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और LPG का आयात करता है। ऐसे में अगरहोर्मुज के जरिए तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।ये भी पढ़ें- LPG Price Today August 24: आज फिर बढ़ गए एलपीजी गैस सिलेंडर के रेट? जानिए दिल्ली से मुंबई तक कितनी है कीमतइसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। खासकर LPG के मामले में भारत के लिए आयात और अंतरराष्ट्रीय कीमतें महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है किहोर्मुज में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति या सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम आदमी की रसोई और वाहन के खर्च से भी जुड़ा हुआ मामला है।
ईरान के खिलाफ अमेरिका का ‘इकोनॉमिक डी-डे’: तेहरान बोला- नहीं जाने देंगे तेल की एक भी बूंद
ईरान के खिलाफ अमेरिका का ‘इकोनॉमिक डी-डे’: तेहरान बोला- नहीं जाने देंगे तेल की एक भी बूंद- US Economic D-Day against Iran Tehran says it won’t let a single drop of oil pass
US: अमेरिका में नेवाडा-कैलिफोर्निया बॉर्डर पर जंगल में लगी भीषण आग, हजारों एकड़ जंगल खाक; 42 हजार लोगों को इलाका छोड़ने का आदेशUS nevada california border wildfire thousand evacuate
अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव और कड़े प्रतिबंधों के बीच ईरान ने दक्षिणी फार्स प्रांत में 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस का विशाल भंडार खोजा है।
अमेरिका के नए टैरिफ पर कनाडा के PM ने जताया ऐतराज, देखें US TOP-10
अमेरिका के नए टैरिफ पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ऐतराज जताया है. उन्होनें कहा कि इन टैरिफ का मकसद कनाडा को आर्थिक नुकसान पहुंचाना और देश को बांटना है. जवाब में कनाडा 8 सितंबर से अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाएगा.
Lucknow News: अमेरिकी लोगों से ठगी की आरोपी महिला को मिली जमानत
अमेरिकी लोगों से ठगी की आरोपी महिला को मिली जमानत
ICC: नए अमेरिकी प्रतिबन्ध न्यायालय की स्वतंत्रता पर ‘खुला हमला’
अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने अपने अध्यक्ष और एक वरिष्ठ अभियोजक पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबन्धों की कड़ी निन्दा करते हुए कहा है कि ये उसकी स्वतंत्रता पर“खुला हमला” हैं.
ट्रंप ने पिछले हफ़्ते ईरान की अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करने के लिए एक नए अभियान की घोषणा की थी. उन्होंने तेहरान की मदद करने या उसके साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को गंभीर आर्थिक नतीजों की चेतावनी दी थी.
अमेरिका: समुद्र में गिरी कार, भारतीय मूल की छात्रा की मौत
अमेरिका में भारतीय मूल की 19 वर्षीय UC Santa Cruz छात्रा एल्ली रेनी सिंह की कार के चट्टान से प्रशांत महासागर में गिरने से मौत हो गई. हादसे में कार चला रहा पुरुष साथी मामूली चोटों के साथ बच गया. हादसा 13 अगस्त को सांता क्रूज के वेस्ट क्लिफ ड्राइव पर स्टीमर लेन के पास हुआ.
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका से बढ़ा तनाव, तेहरान ने वाशिंगटन को दी कड़ी चेतावनी
अमेरिका द्वारा ईरान पर नए कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
ट्रंप टैरिफ: अमेरिका के साथ कनाडा की नाकाम ट्रेड बातचीत से भारत क्या सीख सकता है?
कनाडा ने अमेरिका के साथ अपनी व्यापार वार्ता रद कर दी, क्योंकि वाशिंगटन ने रियायतों के बदले बहुत कम छूट दी, जिससे कनाडा की मैन्युफैक्चरिंग और संप्रभुता प्रभावित हो सकती थी।
सीएम भूपेंद्र पटेल ने अमेरिका के बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम को भारतीय संस्कृति और सेवा का बताया वैश्विक प्रकाशस्तंभ
गिफ्ट सिटी से लेकर सेमीकंडक्टर तक, सीएम भूपेंद्र पटेल ने अमेरिकी प्रवासियों के सामने विकास का रखा रोडमैप
ईरान ने देशों को अमेरिका के ‘आर्थिक दबाव अभियान’ में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी
तेहरान, 23 अगस्त . ईरान ने Saturday को पड़ोसी देशों और अन्य राज्यों को चेतावनी दी कि वे उनके देश के खिलाफ अमेरिका के ‘आर्थिक दबाव अभियान’ में शामिल न हों. ईरान के एक अधिकारी ने साफ किया कि तेहरान ऐसे देशों को ‘दुश्मन’ मानेगा. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ... Read more
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर फंसा पेच! फिर तेहरान जाएंगे आसिम मुनीर
पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ईरान दौरे पर जाने वाले हैं. यहां वो द्विपक्षीय संबंधों और मिडिल-ईस्ट के मौजूदा क्षेत्रीय हालातों पर उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे. इस दौरे का मकसद द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्र में शांति-सुरक्षा बनाए रखना है.
ईरान ने देशों को अमेरिका के 'आर्थिक दबाव अभियान' में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी
ईरान ने देशों को अमेरिका के 'आर्थिक दबाव अभियान' में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी
होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी इलाका बताकर वास्तविक दुनिया से कटे हुए दिख रहे डोनाल्ड ट्रंप: पूर्व राजनयिक
चीन का डर... अमेरिकी नौसेना की नई मिसाइल AIM-424 मैलिस से हटा पर्दा
अमेरिकी नौसेना ने AIM-424 मैलिस नामक नई लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल का खुलासा किया. यह F-35C के इंटरनल वेपन बे में फिट होती है. स्टेल्थ प्रोफाइल बनाए रखती है. 463 किलोमीटर से अधिक रेंज देती है.
मार्केट आउटलुक: फेड चेयर स्पीच, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमत और घरेलू आर्थिक डेटा से तय होगी बाजार की चाल
अमेरिकी टैरिफ पर कनाडा के PM कार्नी का पलटवार, देखें दुनिया आजतक
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, अमेरिका की ओर से कनाडा पर लगाए गए नए टैरिफ का मकसद कनाडा को नुकसान पहुंचाना और बांटना है. कार्नी ने साथ ही कहा कि 8 सितंबर से कनाडा भी अमेरिकी समानों पर जवाबी टैरिफ लगाएगा. देखें दुनिया आजतक.
अमेरिका में भारतीय परिवार पर टूटा कहर, बेटी के सामने पिता की गोली मारकर हत्या
अमेरिका के टेनेसी राज्य के जैक्सन शहर में एक दुकान में लूटपाट के दौरान 56 वर्षीय भारतीय मूल के व्यक्ति सुरेश परसोत्तमदास पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक गुजरात के मेहसाना जिले के रहने वाले थे।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
डॉ. स्मिता जोशी एवं डॉ. शुक्लाबेन रावल को अमेरिका में मिला “भारत सेवा सम्मान” से सम्मानित
बाल्यावस्था में होने वाले टाइप-1 डायबिटीज़ की स्क्रीनिंग, समय पर पहचान, बेहतर प्रबंधन और प्रभावी स्वास्थ्य नीति के लिए भारत में पिछले आठ वर्षों से निरंतर जन...
यह केंद्र AI शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री आधारित समाधान विकसित करने पर काम करेगा. इस पहल को भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
अमेरिका में अमेरिकन एयरलाइंस की एक फ्लाइट में लैंडिंग से ठीक पहले उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक यात्री के लैपटॉप में अचानक आग लग गई। घटना के बाद विमान के केबिन में धुआं फैल गया। पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना देते हुए बताया कि लैपटॉप की वजह से लगी आग में […] The post अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट में लैपटॉप में लगी आग! केबिन में फैला धुआं, 4-5 यात्रियों के झुलसने की खबर first appeared on Sanjeevni Today .
बेटी ने पूछा अमेरिका कैसा लगा? पिता बोले- 'अच्छा है, पर भारत जैसी रौनक नहीं'; VIDEO हुआ वायरल
बेटी ने पूछा अमेरिका कैसा लगा? पिता बोले- 'अच्छा है, पर भारत जैसी रौनक नहीं'; VIDEO हुआ वायरल
New Delhi, 23 अगस्त . भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से करीब पूरी हो गई है और अब दोनों पक्ष कानूनी और तकनीकी भाषा पर कार्य कर रहे हैं. यह जानकारी India में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी. राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में गोर ने कहा कि समझौते की मुख्य ... Read more
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से करीब पूरी हो गई है और अब दोनों पक्ष कानूनी और तकनीकी भाषा पर कार्य कर रहे हैं। यह जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी।
अमेरिका ने इजरायल के लिए खाड़ी देशों की सुरक्षा दांव पर लगाई: बाकर कालीबाफ
अमेरिका ने इजरायल के लिए खाड़ी देशों की सुरक्षा दांव पर लगाई: बाकर कालीबाफ
लोकप्रिय वीडियो एप टिकटॉक और उसकी मूल कंपनी बाइटडांस ने बच्चों के प्राइवेसी उल्लंघन मामले में अमेरिकी न्याय विभाग के साथ बड़ा समझौता किया है। इस कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए कंपनी 400 मिलियन डॉलर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोबोटिक्स प्रतियोगिता में विश्व विजेता बनने की उपलब्धि हासिल करने वाली इनाया खान (14) अजमेर पहुंचीं। उन्होंने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह शरीफ में अकीदत के साथ जियारत कर चौखट पर मखमली चादर एवं अकीदत के फूल पेश किए। साथ ही देश-दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगी। दरगाह शरीफ के खादिम सैयद आकिफ चिश्ती ने इनाया खान को जियारत कराई। इस दौरान उन्होंने दरगाह शरीफ की परंपरा के अनुसार ओढ़नी उड़ाकर उनका इस्तकबाल किया तथा तबर्रुक भेंट किया। बता दें कि इनाया खान ने महज 14 वर्ष की उम्र में अमेरिका में आयोजित रोबोफेस्ट वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2026 में विश्व स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर भारत का नाम रोशन किया। इनाया खान केवल शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी हुई हैं। वे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, बालिका शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियानों में सक्रिय योगदान दे रही हैं। इस अवसर पर मोहम्मद जैद,बेनजीर खान, सलमा खान, नजमा खान,मोहम्मद जुनेद, मोहम्मद जाहिद, जफिरा आदि मौजूद थे। (इनपुट-नजीर कादरी, अजमेर) पढें ये खबर भी… जयपुर की इनाया खान बनीं वर्ल्ड चैंपियन:अमेरिका में हुए रोबोफेस्ट वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में पहला स्थान हासिल किया जयपुर की इनाया खान ने अमेरिका में आयोजित रोबोफेस्ट वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में पहला स्थान हासिल किया है। इनाया ने जूनियर बिल्डिंग ब्रिजेस श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया है। पूरी खबर पढें
किनसे मिलने को अमेरिका जाने वाले थे रेवंत रेड्डी, केंद्र सरकार ने क्यों नहीं दी इजाजत?
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री ने केंद्र के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का उद्देश्य केवल राज्य में विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों और निवेश को लाना था।
वॉशिंगटन, 23 अगस्त . अमेरिका के कुछ सांसदों ने चेतावनी दी है कि कनाडा के साथ व्यापार वार्ता के टूटने और 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने से कीमतें बढ़ेंगी, सीमा पार कारोबार प्रभावित होगा और अमेरिका तथा कनाडा के बीच सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक संबंधों में अनिश्चितता और बढ़ेगी. कनाडा के कई उत्पादों पर अमेरिका की ... Read more
जब पापा ने बेटी की नजरों से देखा पहली बार अमेरिका, वीडियो वायरल
अमेरिका में सेटल बच्चों को देखकर एक भारतीय पिता का गर्व इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहा है. पहली बार अमेरिका पहुंचे पिता से जब बेटी ने पूछा, पापा, कैसा है अमेरिका? तो उन्होंने अपनी सादगी भरी बातों से बताया कि कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके दोनों बच्चे अमेरिका जाकर पढ़ेंगे, जॉब करेंगे और अच्छी तरह से सेटल हो जाएंगे.
गुजराती व्यापारी की अमेरिका में सरेआम हत्या, बेटी के सामने पिता को मारा
गुजरात के 62 वर्षीय व्यापारी सुरेश पटेल की जैक्सन में उन्हीं के स्टोर में लूट के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई. उनकी 19 वर्षीय बेटी की आंखों के सामने यह पूरा मंजर हुआ.
होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा दावा! तस्वीर में बताया ‘नया अमेरिकी इलाका’, ईरान बोला- जलडमरूमध्य रहेगा बंद
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक नक्शा साझा किया, जिसमें रणनीतिक होर्मुज स्ट्रेट को ‘NEW US Territory’ यानी ‘नया अमेरिकी इलाका’ बताया गया। यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच जलडमरूमध्य […] The post होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा दावा! तस्वीर में बताया ‘नया अमेरिकी इलाका’, ईरान बोला- जलडमरूमध्य रहेगा बंद first appeared on Sanjeevni Today .
गुरदीप सिंह करीब 13 साल पहले रोजी-रोटी कमाने और परिवार का बेहतर भविष्य बनाने की उम्मीद में कर्ज लेकर अमेरिका गया था।
US Store Shooting: अमेरिका में गुजराती स्टोर मालिक की गोली मारकर हत्या, बेटी बाल-बाल बची; हमलावर फरार gujarati-store-owner-suresh-patel-killed-tennessee-robbery-shooting-in-us
कपूरथला जिले के बेगोवाल कस्बे के गांव जब्बोवाल के 28 वर्षीय युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। गुरदीप सिंह करीब 10 साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गए थे। जानकारी के अनुसार, गुरदीप सिंह न्यूयॉर्क शहर की रिचमंड स्ट्रीट पर पिज्जा डिलीवरी का काम करने जा रहे थे। यह वारदात 22 अगस्त को हुई। इसी दौरान कुछ हथियारबंद बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार और गांव में शोक छा गया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि अमेरिका पहुंचने के बाद गुरदीप को शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करना पड़ा था। पिता प्यारा लाल ने 30 लाख का कर्ज लेकर गुरदीप को विदेश भेजा था। गुरदीप ने भी हार नहीं मानी औरकड़ी मेहनत करते रहे। वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और उन्हें बेहतर जीवन देने के लिए दिन-रात काम कर रहे थे। अविवाहित था गुरदीप सिंह परिजनों के मुताबिक, गुरदीप सिंह अविवाहित थे। उनका परिवार गांव में डीजे का काम करता है। परिवार को उम्मीद थी कि गुरदीप विदेश में मेहनत कर उनके सपनों को पूरा करेंगे, लेकिन उनकी हत्या की खबर से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। परिवार ने शव वापस लाने की लगाई गुहार गुरदीप सिंह के परिवार ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार से अपील की है कि उनके बेटे का शव जल्द से जल्द भारत लाने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान की जाए। परिवार ने अमेरिकी प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और हत्या के जिम्मेदार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाने की भी मांग की है। गांव के लोगों ने भी सरकार से परिवार की मदद करने और गुरदीप सिंह का शव भारत लाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आग्रह किया है।
विश्व व्यापार में बड़ा भूचाल: कनाडा-अमेरिका में ट्रेड वॉर भारत को मिलेगा लाभ, किन क्षेत्रों को लाभ के आसार?
अमेरिका के आर्थिक युद्ध में शामिल देश को दुश्मन मानेगा ईरान : मोहसिन रेजाई
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान को सहारा देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाया जाएगा।
NEW US Territory, होर्मुज पर ट्रंप का दावा, अमेरिका-ईरान टकराव ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर होर्मुज जलडमरूमध्य की एक तस्वीर साझा की, जिसमें इसे “NEW US Territory” यानी “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया गया है। ट्रंप के इस कदम से ईरान के साथ बढ़े तनाव ...
अमेरिका के ‘आर्थिक युद्ध’ में शामिल देश को दुश्मन मानेगा ईरान: मोहसिन रेजाई
तेहरान, 23 अगस्त . ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक लड़ाई में शामिल होगा, उसे तेहरान अपना ‘दुश्मन’ मानेगा. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव रेजाई ने Saturday को Governmentी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए एक इंटरव्यू में ... Read more
अमेरिका के 'आर्थिक युद्ध' में शामिल देश को दुश्मन मानेगा ईरान: मोहसिन रेजाई
अमेरिका के 'आर्थिक युद्ध' में शामिल देश को दुश्मन मानेगा ईरान: मोहसिन रेजाई
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका का 'नया इलाका', ट्रंप ने शेयर किया मैप, मिडिल ईस्ट में बढ़ी हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नया मैप शेयर किया है। इस बार उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका बताया है।
फरीदाबाद के सेक्टर-14 निवासी दो लोगों से फ्लाइट टिकट बुक कराने के नाम पर करीब 9.03 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी राकेश बिष्ट के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सेक्टर-14 निवासी दीप चौधरी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी के लिए नई दिल्ली से अमेरिका के सिएटल तक आने-जाने की तीन फ्लाइट टिकट बुक कराने के लिए राकेश बिष्ट से संपर्क किया था। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग माध्यमों से कुल 4.20 लाख रुपए का भुगतान किया। पहले लुफ्थांसा की टिकट देने का दावा शिकायत के अनुसार, राकेश बिष्ट ने पहले उन्हें लुफ्थांसा एयरलाइंस की टिकट और पीएनआर उपलब्ध कराया। उसने बताया कि यात्रा से 15 दिन पहले तक टिकट बिना किसी शुल्क के रद्द कराई जा सकती है। कम किराए का झांसा देकर कतर की टिकट बुक कराई कुछ दिन बाद राकेश ने कम किराए और ज्यादा सामान ले जाने की सुविधा बताते हुए कतर एयरवेज की टिकट बुक कराने की सलाह दी। उसने भरोसा दिया कि 15 दिन के अंदर टिकट रद्द कराने पर पूरी रकम वापस मिल जाएगी। दीप चौधरी के अनुसार 11 जून को कतर एयरवेज की टिकट रद्द करा दी गई। आरोपी ने दो दिन के अंदर पूरी रकम वापस करने का आश्वासन दिया, लेकिन पैसे वापस नहीं किए। बेटी के इंटरव्यू से पहले पीएनआर की जांच की जब दीप चौधरी की बेटी अपनी टिकट इंटरव्यू लेने वाले अधिकारी को भेजने वाली थी, उससे पहले टिकट में दिए गए लुफ्थांसा पीएनआर को ऑनलाइन जांचा गया। जांच में पता चला कि पीएनआर फर्जी था और टिकट बुक ही नहीं हुई थी। फर्जी टिकट के कारण महंगी टिकट खरीदनी पड़ी फर्जी टिकट की जानकारी मिलने के बाद दीप चौधरी ने आरोपी से रकम वापस करने को कहा। टिकट फर्जी होने के कारण बेटी को समय पर इंटरव्यू में पहुंचाने के लिए उन्हें दूसरी जगह से महंगी फ्लाइट टिकट खरीदनी पड़ी। इससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हुआ। बार-बार पैसे लौटाने का देता रहा भरोसा दीप चौधरी का आरोप है कि 19 जून से वह लगातार आरोपी से पैसे वापस मांग रहे हैं। आरोपी हर बार थोड़ा और समय देने की बात कहता रहा, लेकिन आज तक रकम वापस नहीं की। दूसरे व्यक्ति से भी 4.82 लाख रुपए लेने का आरोप इसी मामले में सेक्टर-14 निवासी विशाल गुप्ता ने भी राकेश बिष्ट के खिलाफ शिकायत दी। पुलिस के अनुसार, विशाल गुप्ता से भी फ्लाइट टिकट के नाम पर 4.82 लाख रुपए लिए गए थे। जांच के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस दोनों शिकायतों की जांच के बाद पुलिस को धोखाधड़ी का मामला मिला। इसके बाद थाना सेंट्रल फरीदाबाद में मामला दर्ज किया गया है। जांच अधिकारी एसआई देवेंद्र सिंह ने अनुसार पुलिस अब टिकट, पीएनआर, बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में गुरु घर की सेवाओं के लिए संगत और श्रद्धालुओं का समर्पण लगातार जारी है। इसी कड़ी में अमेरिका निवासी श्रद्धालु सरदार बलवंत सिंह और उनके परिवार ने गुरु घर के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए ₹4 लाख की नकद राशि और एक वाहन (गाड़ी) भेंट किया है। यह दान संगत की सुविधा और मरीजों के लिए चलाई जा रही लंगर सेवा को और सुचारू बनाने के उद्देश्य से दिया गया है। पारिवारिक सदस्यों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार ₹4 लाख की राशि श्री हरमंदिर साहिब परिसर स्थित सरायों में आने वाली संगत के लिए चादरें, तकिए और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए दी गई है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा गुरु नानक देव अस्पताल, अमृतसर में उपचाराधीन मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए चलाई जा रही निरंतर लंगर सेवा के उपयोग हेतु एक विशेष वाहन भेंट किया गया है। SGPC अध्यक्ष ने जताया आभार वाहन की चाबियां प्राप्त करते हुए SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने सेवक परिवार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरदार बलवंत सिंह और उनका परिवार लंबे समय से समय-समय पर गुरु घर की विभिन्न सेवाओं में अपना बहुमूल्य योगदान देता रहा है। यह समर्पण गुरु साहिब के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा और निष्ठा का प्रतीक है। इस अवसर पर एडवोकेट धामी ने गुरु साहिब के चरणों में अरदास करते हुए सेवक परिवार की 'चढ़दी कला' (खुशहाली और प्रगति) की कामना की और उम्मीद जताई कि यह परिवार भविष्य में भी इसी तरह मानवता और गुरु घर की सेवा में तत्पर रहेगा इस मौके पर उपस्थित रहे प्रमुख व्यक्तित्व इस सेवा कार्य और चाबी सौंपने के कार्यक्रम के दौरान सरदार शेर सिंह मंडवाला (महासचिव, SGPC) सरदार रणजीत सिंह काहलों और सरदार नवतेज सिंह काउणी (सदस्य) सरदार सतबीर सिंह धामी (OSD) बलविंदर सिंह काहलवां (सचिव) और सरदार गुरिंदर सिंह मथरेवाल सरदार शाहबाज सिंह (निजी सचिव), विजय सिंह (अतिरिक्त सचिव) सरदार हरभजन सिंह वक्ता (उप सचिव) सरदार मेजर सिंह (मैनेजर, श्री दरबार साहिब) और सरदार गुरतिंदरपाल सिंह कादियां (अतिरिक्त मैनेजर) सहित सिख जगत और SGPC की कई प्रमुख शख्सियतें मौजूद रहीं।
पलवल में संयुक्त किसान मोर्चा और सीटू के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम और पृथला क्षेत्र के विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया को ज्ञापन सौंपे। प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द करने की प्रमुख मांग रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। यह ज्ञापन संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत सौंपे गए हैं। इस अभियान का उद्देश्य पूरे देश में जनप्रतिनिधियों को किसान-मजदूरों की मांगों से अवगत कराना है। इसी निर्णय के तहत पलवल के किसान-मजदूर प्रतिनिधियों ने भी अपने जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए। ज्ञापन देते समय ये रहे मौजूद ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, रूप राम तेवतिया, धर्मचंद घुघेरा, दरयाबसिंह सौरोत, डॉक्टर रघुवीर सिंह, करण सिंह आर्य, समय राम कुंडू, चरणजीत डागर, रमेश आर्य, सतीश बैंसला, राहुल कौशिक, तथा ट्रेड यूनियन नेता रमेश सौरोत और ताराचंद प्रधान शामिल थे। समझौता तत्काल रद्द करने की मांग की किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौता गैर-बराबरी पर आधारित है। उनका तर्क है कि इस समझौते के लागू होने से देश का किसान और कृषि बर्बाद हो जाएगी, क्योंकि भारतीय किसान अमेरिकी किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। इसलिए उन्होंने इस समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की। ये हैं प्रमुख मांगें अन्य प्रमुख मांगों में पूरे देश के किसान-मजदूरों को एक बार कर्ज मुक्त करना, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देना, बिजली संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेना, और मजदूर विरोधी चार लेबर कोड को रद्द करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये लागू करने और अस्थाई कर्मचारियों को स्थायी करने की भी मांग की।
कश्मीर पर अमेरिकी सुर बदलेः भारत का कद बढ़ा, पाक बेचैन
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का 19 अगस्त 2026 को श्रीनगर में दिया गया यह बयान कि जम्मू-कश्मीर “भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा” है, सामान्य कूटनीतिक टिप्पणी मानकर नजरअंदाज करने योग्य नहीं है। यह ऐसे समय आया है जब कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान की धारणाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नए समीकरण बन रहे हैं। गोर ने जम्मू-कश्मीर की निरन्तर सुधर रही सुरक्षा स्थिति की बात कही और अमेरिकी यात्रा संबंधी परामर्श पर पुनर्विचार के संकेत भी दिए। पाकिस्तान ने इस बयान पर अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब कर तीखा विरोध दर्ज कराया। इस पूरे घटनाक्रम को केवल कश्मीर के संदर्भ में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसे भारत-अमेरिका संबंधों में आ रहे व्यापक परिवर्तन, दक्षिण एशिया की बदलती सामरिक संरचना और पाकिस्तान की घटती कूटनीतिक प्रभावशीलता के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा। अमेरिका की कश्मीर नीति में लंबे समय से एक प्रकार की सावधानी रही है। वाशिंगटन सामान्यतः भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद तथा शांतिपूर्ण समाधान की बात करता रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग की पूर्व घोषित नीति भी जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति और राजनीतिक-आर्थिक स्थिरता की वापसी का समर्थन करती रही है। इसलिए गोर का श्रीनगर में जाकर जम्मू-कश्मीर को भारत का “महत्वपूर्ण हिस्सा” कहना निश्चित रूप से भाषा के स्तर पर एक उल्लेखनीय परिवर्तन है। लेकिन इसे अमेरिका की पूरी कश्मीर नीति में तत्काल और औपचारिक परिवर्तन मानना भी जल्दबाजी होगी। किसी राजदूत का बयान और किसी सरकार की औपचारिक नीति में अंतर होता है। फिर भी कूटनीति में शब्दों का अपना महत्व होता है। विशेष रूप से तब, जब वही शब्द उस भूभाग में बोले जाएं जिसे पाकिस्तान दशकों से अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। इस दृष्टि से गोर का बयान भारत के लिए मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। इसे भी पढ़ें: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा ने चीनी-पाकिस्तानी चालों को किया दुरुस्त! इस बयान का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष जम्मू-कश्मीर की बदलती जमीन से जुड़ा है। गोर ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए यात्रा संबंधी अमेरिकी परामर्श में कमी लाने की संभावना जताई है। इसका अर्थ यह है कि वाशिंगटन अब कश्मीर को केवल सुरक्षा संकट या आतंकवाद की दृष्टि से देखने के बजाय पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और सामान्य जनजीवन की संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में भी देख रहा है। यहीं से भारत-अमेरिका संबंधों की नई रोशनी दिखाई देती है। दोनों देशों के संबंध अब केवल व्यापार या रक्षा तक सीमित नहीं हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, आपूर्ति-शृंखला और वैश्विक शक्ति-संतुलन जैसे विषयों ने भारत को अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार और शुल्क जैसे मुद्दों पर मतभेद भी मौजूद हैं, फिर भी व्यापक सामरिक साझेदारी अपनी उपयोगिता बनाए हुए है। हाल में अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा का उद्देश्य भी तनावों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करना और व्यापार तथा ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाना था। इसलिए कश्मीर पर अमेरिकी भाषा को भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक पुनर्संतुलन का हिस्सा मानना अधिक तार्किक होगा। अमेरिका के लिए भारत अब केवल दक्षिण एशिया का एक बड़ा देश नहीं, बल्कि एशिया में शक्ति-संतुलन का प्रमुख आधार है। भारत के लिए भी अमेरिका महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत ने अपनी विदेश नीति को किसी एक शक्ति के साथ पूर्ण निर्भरता के बजाय रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रखा है। यही कारण है कि भारत अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ाते हुए रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया और अन्य शक्तियों के साथ भी अपने संबंध बनाए रखता है। कश्मीर के संदर्भ में यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए निश्चित रूप से असहज करने वाला है। इस्लामाबाद ने गोर के बयान को अस्वीकार करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और उसका अंतिम निर्धारण होना बाकी है। पाकिस्तान ने इसे अमेरिका की पूर्व स्थिति से विचलन बताते हुए औपचारिक विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान की समस्या यह है कि वह कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी विदेश नीति का केंद्रीय विषय बनाए रखना चाहता है, जबकि विश्व राजनीति की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। आतंकवाद, आर्थिक स्थिरता, चीन का बढ़ता प्रभाव, पश्चिम एशिया का संकट, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति-शृंखलाएं आज बड़ी शक्तियों की चिंता के केंद्र में हैं। ऐसे वातावरण में केवल कश्मीर के प्रश्न को बार-बार अंतरराष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तानी कोशिशों की प्रभावशीलता सीमित होती जा रही है। भारत ने दूसरी ओर लगातार यह रेखांकित किया है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े विषय भारत की संप्रभुता और द्विपक्षीय संबंधों के दायरे में आते हैं। गोर का श्रीनगर दौरा स्वयं इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि एक प्रमुख अमेरिकी राजनयिक ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा की, वहां के निर्वाचित नेतृत्व से मुलाकात की और क्षेत्र की सुरक्षा तथा आर्थिक संभावनाओं पर सकारात्मक टिप्पणी की। यह पाकिस्तान की उस कोशिश के विपरीत है जिसमें वह कश्मीर को केवल विवाद और अस्थिरता के चश्मे से प्रस्तुत करना चाहता है। फिर भी भारत को इस बयान से अत्यधिक उत्साहित होकर यह मान लेने से बचना चाहिए कि अमेरिका ने कश्मीर पर अपनी संपूर्ण नीति बदल दी है। अमेरिका की विदेश नीति परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है और वह भारत तथा पाकिस्तान दोनों के साथ अपने हितों को संतुलित करने की कोशिश करता है। आज भी वाशिंगटन के लिए पाकिस्तान आतंकवाद-रोध, क्षेत्रीय सुरक्षा और अफगानिस्तान सहित कुछ विषयों में उपयोगी साझेदार है। अतः भारत के लिए इस बयान का वास्तविक महत्व किसी औपचारिक अमेरिकी नीति-परिवर्तन से अधिक उस कूटनीतिक वातावरण में है, जिसमें भारत की स्थिति को पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है। यहां एक और महत्वपूर्ण बात है। कूटनीति में किसी देश का महत्व केवल इस बात से तय नहीं होता कि कितने देश उसके पक्ष में बयान दे रहे हैं, बल्कि इससे तय होता है कि वैश्विक शक्तियों के हित उसके साथ कितने गहरे जुड़े हैं। आज भारत की आर्थिक क्षमता, विशाल बाजार, तकनीकी सामर्थ्य, लोकतांत्रिक संस्थाएं, युवा शक्ति और सामरिक स्थिति उसे विश्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाती हैं। इसी बदलती वास्तविकता का प्रभाव कश्मीर पर भी दिखाई देना स्वाभाविक है। गोर का बयान इसलिए भारत के लिए एक उपलब्धि से अधिक एक संकेत है-संकेत इस बात का कि जम्मू-कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय विमर्श धीरे-धीरे बदल रहा है। पाकिस्तान के लिए यह चेतावनी है कि केवल पुराने नारों और कूटनीतिक दबाव से वह कश्मीर को विश्व राजनीति के केंद्र में नहीं रख सकता और अमेरिका के लिए यह उसके बदलते हितों के अनुरूप संतुलन साधने की कोशिश है। अंततः कश्मीर की स्थायी शांति केवल अंतरराष्ट्रीय बयानों से नहीं, बल्कि लोकतंत्र, विकास, सुरक्षा, जनभागीदारी और सीमा-पार आतंकवाद के अंत से सुनिश्चित होगी। भारत को इस नए कूटनीतिक वातावरण का उपयोग आक्रामक प्रचार के बजाय जिम्मेदार और आत्मविश्वासी राष्ट्र की तरह करना चाहिए। सर्जियो गोर का बयान इस बदलती तस्वीर की एक महत्वपूर्ण झलक है-जहां कश्मीर को लेकर भारत की स्थिति पहले की अपेक्षा अधिक स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता प्राप्त करती दिखाई दे रही है और पाकिस्तान की कूटनीतिक चुनौती पहले से अधिक कठिन होती जा रही है। - ललित गर्ग लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरा रद्द, जेडी वेंस और जोहरान ममदानी से होने वाली मुलाकातों पर उठे सवाल
केंद्र के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि प्रस्तावित अमेरिकी कार्यक्रम में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से संभावित मुलाकातों ने मामले को संवेदनशील बना दिया।
एफबीआई ने बिश्नोई गैंग के कथित सदस्य कमल को अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया है। उस पर अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रंगदारी और मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क चलाने का आरोप है।
अमरीकी राजदूत सर्जियो गोर का दो दिवसीय लद्दाख दौरा थिक्से मठ के भ्रमण और जांस्कर-इंडस नदी में राफ्टिंग तक सीमित रहा। दलाई लामा से उनकी मुलाकात अंतिम समय में रद हो गई।
USCIRF बनाम RSS: आरोप, अधिकार-सीमा और भारत-अमेरिका संबंधों की अग्निपरीक्षा
अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने एक बार फिर भारत को लेकर अपनी कठोर भाषा तेज कर दी है।गत 20 अगस्त 2026 को RSS प्रमुख मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से ठीक पहले आयोग के अध्यक्ष आसिफ महमूद (मुस्लिम) और आयुक्त जीन मिल्स (ईसाई) ने RSS नेताओं को उच्चस्तरीय अमेरिकी मुलाकातों और रजनयिक सम्मान से दूर रखने तथा धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की। उल्लेखनीय है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में Universal Oneness Celebrations में शामिल होने का कार्यक्रम है। यह आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue (AHEAD) कर रहा है। बता दें कि जहां USCIRF चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं और RSS को उन्होंने एक “umbrella organisation” बताया, जिसके कुछ सहयोगी संगठनों पर ईसाइयों और मुसलमानों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि RSS प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका आने वाले हैं। इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat US Visit से पहले USCIRF ने फिर अलापा Anti India Narrative राग, RSS पर प्रतिबंध लगाने की उठाई माँग वहीं, USCIRF कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले RSS से जुड़े लोगों पर targeted sanctions लगाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि RSS नेताओं को उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक सम्मान की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए, भले ही कोई RSS नेता भारत सरकार से संबद्ध हो। देखा जाए तो उन दोनों का यह बयान मार्च 2026 की USCIRF वार्षिक रिपोर्ट से अलग कोई मामूली टिप्पणी नहीं है, क्योंकि मार्च की रिपोर्ट में USCIRF ने भारत को फिर Country of Particular Concern (CPC) घोषित करने की अमेरिकी सरकार से सिफारिश की और RSS तथा R&AW जैसी भारतीय संस्थाओं/संगठनों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों की अनुशंसा की थी। लेकिन यहीं से तथ्य और राजनीतिक व्याख्या को अलग करना जरूरी है। ऐसा इसलिए कि- पहला, USCIRF ने वास्तव में क्या आरोप लगाया? USCIRF का मूल आरोप यह है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, भेदभाव और धार्मिक स्वतंत्रता के क्षरण की स्थिति गंभीर हुई है और सरकार ने कुछ मामलों में इसे रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। लिहाजा 2026 की रिपोर्ट में आयोग ने भारत के संबंध में RSS को भी अपनी प्रतिबंध-संबंधी सिफारिश में शामिल किया। उसका तर्क RSS और उससे जुड़े संगठनों/समूहों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा या दबाव से जुड़े आरोपों पर आधारित है। लेकिन तथ्य-जांच का महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि USCIRF की रिपोर्ट को यह साबित करने वाला न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता कि RSS या उसके प्रत्येक सदस्य ने धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किया है। आयोग एक fact-finding और policy-recommendation body है, अदालत नहीं। यदि उसका रुख भारत विरोधी है तो इसके किसी भी सदस्यों या उनके संरक्षकों की भारत सम्बन्धी गतिविधियों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए और पाकिस्तान व बंगलादेश में अल्पसंख्यकों की बद्तर स्थिति के बारे में उनकी राय पर सवाल पूछना चाहिए। दूसरा, क्या USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया है? नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है। USCIRF अमेरिकी सरकार की स्वतंत्र, द्विदलीय संघीय आयोग है, जिसे 1998 के International Religious Freedom Act के तहत बनाया गया था। उसका काम विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करना और राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें देना है। इसलिए headlines में यदि यह कहा जाए कि अमेरिका ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया, तो वह तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। जबकि सही बात यह है कि USCIRF ने अमेरिकी सरकार से RSS से जुड़े व्यक्तियों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। गत 20 अगस्त के बयान में भी आयोग ने प्रतिबंध लगाने की वकालत की है; यह स्वयं लागू किया गया अमेरिकी प्रतिबंध नहीं है। तीसरा, क्या USCIRF अमेरिकी विदेश नीति तय करता है? नहीं। यही उसकी अधिकार-सीमा की सबसे बड़ी सीमा है।USCIRF की सिफारिशें राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस के लिए प्रभावशाली इनपुट हो सकती हैं, लेकिन वे अपने-आप बाध्यकारी नहीं हैं। CPC का अंतिम सरकारी निर्धारण USCIRF नहीं करता; अमेरिकी व्यवस्था में संबंधित कार्यपालिका संस्थाओं की भूमिका रहती है। इसलिए USCIRF की रिपोर्ट को अमेरिकी न्यायिक निर्णय, अमेरिकी प्रतिबंध आदेश या भारत के खिलाफ अमेरिकी सरकार की अंतिम नीति के रूप में प्रस्तुत करना गलत होगा। चौथा, फिर भारत सरकार इतनी तीखी प्रतिक्रिया क्यों देती है? भारत ने मार्च 2026 की USCIRF रिपोर्ट को स्पष्ट शब्दों में खारिज किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने USCIRF की भारत संबंधी प्रस्तुति को motivated and biased बताया और कहा कि आयोग वर्षों से भारत की स्थिति की distorted and selective तस्वीर पेश करता रहा है। भारत की आपत्ति का सार तीन स्तरों पर समझा जा सकता है: पहला—चयनात्मकता। इसके तहत भारत का तर्क है कि USCIRF घटनाओं को व्यापक भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक और संवैधानिक संदर्भ से अलग करके देखता है। दूसरा—स्रोतों की विश्वसनीयता। इसके तहत नई दिल्ली का आरोप है कि आयोग कई बार ऐसे स्रोतों और नैरेटिव पर निर्भर करता है जिन्हें भारत पक्षपाती या वैचारिक मानता है। तीसरा—सार्वभौमिकता। इसके तहत भारत यह स्वीकार नहीं करता कि किसी विदेशी आयोग को भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था का अंतिम निर्णायक बनने दिया जाए। यह प्रतिरोध केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं है; भारत और USCIRF के बीच यह विवाद कई वर्षों से चला आ रहा है। USCIRF 2020 से भारत को CPC बनाए जाने की सिफारिश करता रहा है पांचवां, USCIRF की विश्वसनीयता का निष्पक्ष परीक्षण यहां अंध-समर्थन और अंध-विरोध—दोनों से बचना चाहिए। USCIRF कोई निजी NGO नहीं है। यह अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित स्वतंत्र और द्विदलीय संघीय आयोग है। इसलिए उसकी रिपोर्ट को महज एक एनजीओ की राय कहकर खारिज करना भी तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। लेकिन दूसरी ओर, उसकी रिपोर्ट को अंतिम सत्य मान लेना भी उचित नहीं। सवाल है आखिर ऐसा क्यो? क्योंकि USCIRF स्वयं policy recommendations देता है; वह न्यायालय नहीं है और उसके निष्कर्ष किसी आरोपी संगठन के खिलाफ स्वतः कानूनी दोषसिद्धि नहीं बनते। अतः सही पत्रकारिता यह होगी कि USCIRF को गंभीर स्रोत माना जाए, लेकिन उसके आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाए। यही संतुलित तथ्य-जांच है। छठा, सबसे विवादास्पद बिंदु: RSS और हिंसा के बीच संबंध USCIRF का तर्क RSS और उससे जुड़े संगठनों के कथित व्यवहार को व्यापक धार्मिक स्वतंत्रता संकट के संदर्भ में रखता है। लेकिन यहां भी RSS, RSS से जुड़े संगठन, स्थानीय कार्यकर्ता और किसी घटना में आरोपी व्यक्ति को एक ही श्रेणी मान लेना विश्लेषणात्मक गलती होगी। किसी संगठन के किसी सदस्य या उससे जुड़े समूह पर आरोप लगना अपने-आप पूरे संगठन की कानूनी जिम्मेदारी सिद्ध नहीं करता। इसलिए पत्रकारिता का मूल प्रश्न होना चाहिए कि किस घटना में किस व्यक्ति पर क्या आरोप लगा? जांच किस एजेंसी ने की? अदालत ने क्या कहा? दोषसिद्धि हुई या नहीं? और उस व्यक्ति का RSS से संस्थागत संबंध किस स्तर का था? यही वह जगह है जहां USCIRF के व्यापक राजनीतिक निष्कर्षों की स्वतंत्र fact-checking आवश्यक हो जाती है। सातवां, क्या प्रधानमंत्री मोदी को RSS का सदस्य कहना तथ्यात्मक रूप से सही है? USCIRF के वर्तमान अध्यक्ष ने 20 अगस्त के बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को RSS का सदस्य बताया और RSS को BJP का ideological parent कहा। यहां भाषा का चुनाव महत्वपूर्ण है। नरेंद्र मोदी का RSS से गहरा और सार्वजनिक रूप से documented ऐतिहासिक संबंध है; वे RSS के प्रचारक रहे हैं और उनका राजनीतिक जीवन संघ की पृष्ठभूमि से निकला है। लेकिन वर्तमान औपचारिक सदस्यता और RSS से ऐतिहासिक/वैचारिक संबंध एक ही बात नहीं हैं। अतः मोदी का RSS से कोई संबंध नहीं कहना गलत होगा, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए RSS के औपचारिक संगठनात्मक सदस्य के रूप में कार्य कर रहे हैं कहना भी बिना स्पष्ट प्रमाण के अत्यधिक सरलीकरण होगा। आठवां, क्या यह महज धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है? नहीं—इसमें कूटनीति भी स्पष्ट रूप से शामिल है। गत 20 अगस्त का बयान मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से ठीक पहले आया है। USCIRF ने विशेष रूप से अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को उच्चस्तरीय बैठकों और राजनयिक सम्मान से दूर रखने की बात कही है। इससे विवाद का स्वरूप बदल जाता है। अब प्रश्न केवल यह नहीं है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति कैसी है, बल्कि प्रश्न यह भी है कि क्या अमेरिकी सरकारी प्रतिष्ठान RSS को भारत की राजनीति और समाज में उसकी भूमिका के कारण एक राजनीतिक actor की तरह treat करे या धार्मिक स्वतंत्रता के अपने मानकों के आधार पर अलग से scrutinize करे? यहीं से मामला भारत-अमेरिका संबंधों की संवेदनशील सीमा को छूता है। नौवां, भारत-अमेरिका संबंधों पर कितना असर पड़ेगा? मेरे आकलन में तत्काल रणनीतिक संकट की संभावना कम, लेकिन राजनीतिक friction बढ़ने की संभावना अधिक है। भारत और अमेरिका के संबंध अब केवल धार्मिक स्वतंत्रता के प्रश्न पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि इनमें शामिल हैं: Indo-Pacific और QUAD, चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला, रक्षा सहयोग, तकनीक और semiconductor supply chains, ऊर्जा और व्यापार, आतंकवाद-विरोधी सहयोग, critical minerals और वैश्विक supply chains आदि। इसलिए USCIRF की सिफारिश अकेले भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को पटरी से उतारने की संभावना कम है। लेकिन यदि अमेरिकी कार्यपालिका USCIRF की सिफारिशों को व्यापक प्रतिबंध नीति में बदलती है, तब स्थिति गंभीर हो सकती है। दसवां, असली Red Line क्या होगी? इसे तीन स्तर पर अलग-अलग समझने होंगे। स्तर 1 — USCIRF की रिपोर्ट: राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव। प्रभाव सीमित लेकिन मीडिया और कांग्रेस में महत्वपूर्ण। स्तर 2 — अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ व्यक्तियों पर visa/financial restrictions: भारत-अमेरिका संबंधों में वास्तविक friction। स्तर 3 — RSS जैसी संस्था पर व्यापक अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध अथवा भारत की रक्षा/रणनीतिक साझेदारी से जोड़कर punitive measures: यह कहीं अधिक गंभीर diplomatic confrontation पैदा कर सकता है। अभी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर हम स्तर 1 पर हैं; इसलिए अमेरिका ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया कहना अतिशयोक्ति होगी। ग्यारहवां, भारत को क्या करना चाहिए? सबसे मजबूत जवाब केवल आक्रोश नहीं हो सकता, बल्कि भारत को तीन समानांतर मोर्चों पर काम करना चाहिए: पहला—तथ्य आधारित counter-narrative: जहां USCIRF का तथ्य गलत है, वहां घटना-दर-घटना जवाब दिया जाए। आप गलत हैं से अधिक प्रभावी होगा— यह आरोप है, यह उसका स्रोत है, यह जांच का परिणाम है और यह न्यायिक रिकॉर्ड है। दूसरा—अपनी संस्थागत पारदर्शिता मजबूत करना: यदि कहीं धार्मिक हिंसा, जबरन धर्मांतरण, मंदिर-मस्जिद-चर्च पर हमला या अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो दोषी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए—चाहे आरोपी किसी भी राजनीतिक या सामाजिक विचारधारा से जुड़ा हो। यही भारत की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता का सबसे मजबूत कवच होगा। तीसरा—Washington में राजनीतिक संवाद: भारत को अमेरिकी प्रशासन, कांग्रेस, think tanks और diaspora के साथ लगातार संवाद रखना चाहिए। क्योंकि USCIRF की राय और पूरी अमेरिकी विदेश नीति एक ही चीज नहीं हैं। # क्या भारत-अमेरिका संबंधों के लिए यह विरोधाभास वास्तविक कूटनीतिक संदेश पैदा करता है? सवाल है कि आखिर भारत के बारे में अमेरिकी संस्थाओं के रुख अलग-अलग क्यों दिखते हैं? क्योंकि इस विरोधाभास से भारत-अमेरिका संबंधों के निमित्त वास्तविक कूटनीतिक संदेश पैदा करता है। वह यह कि- एक, अमेरिका में विदेश नीति एक ही आवाज से नहीं चलती: व्हाइट हाउस, विदेश विभाग, व्यापार प्रतिनिधि (USTR), कांग्रेस और USCIRF जैसी संस्थाओं के अपने-अपने अधिकार, प्राथमिकताएं और राजनीतिक दृष्टिकोण हैं। इसलिए एक संस्था भारत को रणनीतिक साझेदार मान सकती है, जबकि दूसरी मानवाधिकार या धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर कड़ी आलोचना कर सकती है। दो, रणनीतिक हित बनाम मूल्य-आधारित दबाव: भारत- अमेरिका के लिए Indo-Pacific, चीन की चुनौती, रक्षा, तकनीक, सप्लाई-चेन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार है। दूसरी तरफ USCIRF का मूल कार्य ही धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी और उस पर दबाव बनाना है। USCIRF की 2026 India page पर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर लगातार गंभीर चिंता दर्ज है। तीन, व्यापार में भी यही पैटर्न दिखाई देता है: व्यापार में भी यही पैटर्न दिखाई देता है, उदाहरण के लिए, 2026 में USTR ने भारत को कुछ कथित unfair trade practices के संदर्भ में निशाना बनाया और अतिरिक्त शुल्क की संभावना जताई, जबकि व्यापक रणनीतिक संबंध अपनी जगह चलते रहे। चार, भागवत प्रकरण में असली पेच: 20 अगस्त को USCIRF ने मोहन भागवत की प्रस्तावित 29 अगस्त की न्यूयॉर्क यात्रा से पहले RSS के सदस्यों पर targeted sanctions और RSS नेताओं को उच्चस्तरीय राजनयिक सम्मान न देने की मांग की है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह USCIRF की मांग है, अमेरिकी सरकार का घोषित फैसला नहीं। यही अंतर इस पूरे घटनाक्रम को समझने की कुंजी है। पांच, क्या इससे भारत-अमेरिका संबंध सुधरेंगे? अल्पकाल में—नहीं, तनाव बढ़ने की संभावना अधिक है। यदि USCIRF जैसी संस्थाएं लगातार RSS, भारत की धार्मिक स्वतंत्रता और भारतीय संस्थाओं पर दबाव डालती हैं, तो नई दिल्ली में इसे भारत के आंतरिक राजनीतिक-सामाजिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप के रूप में देखा जा सकता है। भारत पहले भी USCIRF की रिपोर्टों को selective और distorted बताकर खारिज करता रहा है। लेकिन दीर्घकाल में इससे भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंध टूटने की संभावना कम है, क्योंकि दोनों देशों के साझा हित बहुत बड़े हैं—विशेषकर चीन, Indo-Pacific, रक्षा, तकनीक, निवेश और वैश्विक सप्लाई-चेन। लिहाजा मेरा आकलन है कि इस पूरे घटनाक्रम को मैं “रणनीतिक साझेदारी बनाम मूल्य-आधारित अमेरिकी दबाव” के टकराव के रूप में देखता हूँ। इसमें अमेरिका की दुविधा यह है कि वह भारत को चीन के मुकाबले महत्वपूर्ण रणनीतिक शक्ति भी मानना चाहता है और भारत की घरेलू नीतियों पर अपना मूल्य-आधारित दबाव भी बनाए रखना चाहता है। वहीं, भारत की दुविधा उलटी है—वह अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी चाहता है, लेकिन अपनी राजनीतिक-सामाजिक व्यवस्था पर अमेरिकी संस्थाओं की निगरानी या टिप्पणी स्वीकार करने को तैयार नहीं है। इसलिए “रिश्ते सुधरेंगे या बिगड़ेंगे?” का सबसे सटीक उत्तर है—रिश्ते टूटेंगे नहीं, लेकिन उनमें अधिक लेन-देन वाली कूटनीति और अधिक सार्वजनिक खींचतान देखने को मिल सकती है। और भागवत प्रकरण इस बड़े सवाल को और तीखा करता है: क्या अमेरिका भारत को समान संप्रभु रणनीतिक साझेदार मानता है, या साझेदारी के साथ अपनी घरेलू राजनीतिक-वैचारिक शर्तें भी जोड़ना चाहता है? यही आने वाले महीनों का महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रश्न होगा। वस्तुतः, USCIRF को न तो अमेरिका का अंतिम फैसला समझना चाहिए और न ही उसकी हर रिपोर्ट को साजिश कहकर समाप्त कर देना चाहिए। और भारत को भी धार्मिक स्वतंत्रता के वास्तविक प्रश्नों पर आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। लेकिन दूसरी तरफ, किसी विदेशी आयोग द्वारा लगाए गए व्यापक आरोपों को बिना न्यायिक परीक्षण के RSS, भारत सरकार या करोड़ों भारतीयों के सामूहिक चरित्र का प्रमाण मान लेना भी गंभीर बौद्धिक त्रुटि होगी। USCIRF की शक्ति उसकी रिपोर्ट में है; उसकी सीमा यह है कि वह अदालत नहीं है। जबकि भारत की शक्ति उसकी संप्रभुता में है; उसकी चुनौती यह है कि उस संप्रभुता को लोकतांत्रिक संस्थाओं, कानून के शासन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की विश्वसनीय रक्षा से लगातार प्रमाणित करना होगा। यहां सबसे बड़ा खतरा USCIRF की एक रिपोर्ट नहीं है, अपितु सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होगा जब भारत और अमेरिका इस विवाद को तथ्य-जांच और संवाद के बजाय परस्पर अविश्वास की स्थायी राजनीति में बदल दें। और सबसे बड़ी रणनीतिक भूल यह होगी कि धार्मिक स्वतंत्रता के प्रश्न को भारत-अमेरिका की व्यापक रणनीतिक साझेदारी का विकल्प बना दिया जाए। दिल्ली को Washington की हर आलोचना से डरने की जरूरत नहीं—लेकिन उसे हर आलोचना को तथ्य के तराजू पर तौलने की जरूरत जरूर है। इसी तरह Washington को भी यह समझना होगा कि भारत कोई ऐसा देश नहीं है जिसकी लोकतांत्रिक और संवैधानिक वैधता किसी विदेशी आयोग के प्रमाणपत्र से तय होगी। अंततः फैसला रिपोर्ट नहीं, तथ्य करेंगे; आरोप नहीं, प्रमाण करेंगे; और दबाव नहीं, लोकतांत्रिक संस्थाओं का आचरण भारत की वैश्विक साख तय करेगा। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने लद्दाख के थिकसे मठ का दौरा किया, जो गलवान झड़प के बाद किसी शीर्ष अमेरिकी राजनयिक का रणनीतिक सीमा क्षेत्र का पहला दौरा है।
रेवंत रेड्डी को अमेरिका जाने की नहीं मिली मंजूरी, 23 अगस्त को लंदन से हैदराबाद लौटेंगे तेलंगाना सीएम
तेलंगाना सरकार के मुताबिक, अमेरिका की यात्रा को मंजूरी नहीं दिए जाने की जानकारी उस समय दी गई, जब मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाला आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ब्रिटेन पहुंच चुका था। मुख्यमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान शिक्षा, कौशल और उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े कई कार्यक्रम प्रस्तावित थे।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
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अमेरिका में कुल नफरती अपराधों में कमी आई है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर वीरवार को लद्दाख की पहली यात्रा पर लेह पहुंच गए।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा ने चीनी-पाकिस्तानी चालों को किया दुरुस्त!
जरा गौर कीजिए, जब चीन अरुणाचल प्रदेश में भारत को आंखें दिखा रहा हो, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर/लद्दाख पहुंचना और जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना भारतीय कूटनीति की कितनी बड़ी सफलता है, क्योंकि यह परोक्ष रूप से चीन को संदेश है कि भारत का साथ मिलते ही अमेरिका अन्य एशियाई 'बदमाशों' को रौंद डालेगा। उधर, पाकिस्तान को संदेश है कि इस्लामिक नाटो उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं बनेगा, यदि अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा रहेगा। जी हां, अमेरिकी राजदूत की 19–20 अगस्त 2026 की जम्मू-कश्मीर और लद्दाख यात्रा को केवल एक राजनयिक दौरा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: Sergio Gor के बयान से तिलमिलाये Pakistan ने Trump Administration पर उतारी भड़ास, US Diplomat Natalie Baker को तलब कर थमाया Strong Demarche खासकर श्रीनगर में उनका यह कहना कि जम्मू-कश्मीर “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” है और अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत देना, वाशिंगटन के पुराने कश्मीर-संबंधी सार्वजनिक रुख की तुलना में महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामरिक संकेत देता है। इससे कई सवाल उपजते हैं, जिनके निहितार्थ को समझना भी जरूरी है:- पहला सवाल है कि क्या वास्तव में अमेरिकी स्टैंड बदल गया है? तो जवाब होगा कि अपेक्षित सावधानी जरूरी है। अभी इसे अमेरिका की औपचारिक कश्मीर-नीति में पूर्ण परिवर्तन कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन राजनयिक भाषा और व्यवहार में बदलाव का संकेत स्पष्ट है। पहले अमेरिकी नीति का सार्वजनिक ढांचा मुख्यतः यह रहा कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित विषय है और दोनों देशों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। 2019 के बाद भी अमेरिकी अधिकारियों ने इस मूल स्थिति को बनाए रखा था। इसके विपरीत, गोर ने भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर में जाकर उसे “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा। पाकिस्तान ने इसे अमेरिकी पारंपरिक रुख से विचलन मानते हुए अमेरिकी प्रभारी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। इसलिए फिलहाल इसे “नीति परिवर्तन” से अधिक “नीति-संकेत में परिवर्तन” कहना उचित होगा। दूसरा सवाल है कि इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश क्या है? क्या कश्मीर को जमीन पर देखकर आकलन हुआ है? तो जवाब होगा कि गोर का दौरा छह साल से अधिक अंतराल के बाद किसी अमेरिकी राजदूत की कश्मीर यात्रा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और सुरक्षा व्यवस्था तथा बदलते माहौल का प्रत्यक्ष आकलन किया। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि अमेरिका की कश्मीर संबंधी धारणा अब केवल इस्लामाबाद, नई दिल्ली या अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर निर्भर नहीं रह सकती। राजदूत का स्वयं श्रीनगर जाना और फिर सुरक्षा स्थिति पर सकारात्मक टिप्पणी करना वाशिंगटन के नीति-निर्माताओं को एक अलग जमीनी इनपुट देता है। तीसरा सवाल यह है कि Travel Advisory में बदलाव—छोटा दिखने वाला बड़ा संकेत है? तो जवाब होगा कि गोर ने जम्मू-कश्मीर के लिए अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत दिए हैं। अगर आगे अमेरिका अपने मौजूदा “Do Not Travel” स्तर को नीचे करता है, तो इसका असर केवल अमेरिकी पर्यटकों पर नहीं पड़ेगा। यह संदेश जाएगा कि सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार हुआ है। सामान्य आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। पर्यटन के लिए क्षेत्र अधिक खुल रहा है। अंतरराष्ट्रीय जोखिम-धारणा बदल रही है। यानी कश्मीर के लिए यह सुरक्षा से पर्यटन और पर्यटन से निवेश की दिशा में सकारात्मक कूटनीतिक संकेत बन सकता है। चौथा सवाल यह है कि क्या यह परिदृश्य पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका है? तो कहना न होगा कि इस बयान की सबसे तीखी प्रतिक्रिया पाकिस्तान से आई है। इस्लामाबाद ने इसे अपनी दशकों पुरानी कश्मीर कूटनीति के प्रतिकूल माना और अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। पाकिस्तान के लिए समस्या सिर्फ गोर का बयान नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि यदि अमेरिका जैसा प्रभावशाली देश धीरे-धीरे कश्मीर को “भारत-पाकिस्तान के विवाद” की भाषा से हटाकर “भारत के महत्वपूर्ण हिस्से” की भाषा में संबोधित करने लगे, तो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रणनीति कमजोर हो सकती है। पांचवां सवाल यह है कि क्या चीन का कोण भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता? तो जवाब होगा कि गोर का कार्यक्रम केवल श्रीनगर तक सीमित नहीं रहा; वह लद्दाख भी गए। यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि लद्दाख भारत-चीन सीमा-सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए यात्रा का एक व्यापक संदेश यह भी हो सकता है कि अमेरिका भारत के पश्चिमी और उत्तरी दोनों रणनीतिक मोर्चों को अपने Indo-Pacific और South/Central Asia दृष्टिकोण से देख रहा है। छठा सवाल यह है कि क्या भारत-अमेरिका संबंधों में कश्मीर की भूमिका बदल सकती है? तो कहना न होगा कि यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका संबंधों के उस व्यापक पुनर्संतुलन का हिस्सा हो सकता है जिसमेंआतंकवाद के विरुद्ध सहयोग, चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला, हिंद-प्रशांत रणनीति, रक्षा एवं तकनीकी साझेदारी, ऊर्जा एवं व्यापार, और दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। गोर स्वयं भारत में अमेरिकी राजदूत होने के साथ South and Central Asian Affairs के Special Envoy भी हैं। इसलिए उनकी टिप्पणी का महत्व सामान्य राजदूत की टिप्पणी से अधिक माना जा सकता है। सातवां सवाल यह है कि क्या भारत को अति-उत्साहित होने से भी बचना होगा? तो जवाब होगा कि यहां एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सावधानी बरतनी जरूरी है क्योंकि एक राजदूत का बयान अमेरिकी सरकार की पूरी औपचारिक विदेश नीति का विकल्प नहीं होता। जब तक अमेरिकी विदेश विभाग या व्हाइट हाउस अपनी आधिकारिक नीति में स्पष्ट बदलाव घोषित नहीं करता, तब तक यह कहना कि “अमेरिका ने कश्मीर पर पाकिस्तान को छोड़कर भारत का पक्ष ले लिया है” अतिशयोक्ति होगी। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि अमेरिकी सार्वजनिक कूटनीतिक भाषा में एक उल्लेखनीय बदलाव दिखाई दे रहा है। आठवां सवाल यह है कि सबसे बड़ा रणनीतिक निहितार्थ क्या है? तो जवाब होगा कि मेरे आकलन में इस यात्रा का वास्तविक महत्व चार शब्दों में है: “Narrative → Ground Reality → Policy.” यदि अमेरिका को जमीनी स्तर पर कश्मीर में सुरक्षा, राजनीतिक प्रक्रिया, पर्यटन और आर्थिक सामान्यीकरण दिखाई देता है और उसके आधार पर उसकी यात्रा चेतावनी कम होती है, तो धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव भी बदल सकता है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा। निष्कर्षतः, सर्जियो गोर की कश्मीर यात्रा को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे अभी अमेरिकी कश्मीर नीति का अंतिम परिवर्तन घोषित करना जल्दबाजी होगी। असली परीक्षा अगले चरण में होगी—क्या Washington अपनी आधिकारिक भाषा बदलेगा, क्या travel advisory घटेगी और क्या भविष्य में अमेरिकी अधिकारी कश्मीर को भारत के आंतरिक प्रशासनिक-सुरक्षा संदर्भ में अधिक स्पष्टता से देखेंगे? अगर इन तीनों प्रश्नों का उत्तर “हाँ” होता है, तो गोर की यह यात्रा दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण turning point सिद्ध हो सकती है। # क्या ईरान में पिटी अमेरिकी भद्द और पाकिस्तान के दोगले रवैये से अचंभित अमेरिका ने ऐसा किया हाँ—इसे एक संभावित कारण के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन निर्णायक कारण कहना अभी जल्दबाजी होगी। उपलब्ध घटनाक्रम को जोड़ें तो अमेरिकी सोच में पाकिस्तान को लेकर विश्वसनीयता का प्रश्न जरूर उभरता है। सवाल है कि क्या ईरान प्रकरण ने अमेरिका को पाकिस्तान को नए नजरिये से देखने पर मजबूर किया? जवाब होगा कि ईरान-अमेरिका संकट में पाकिस्तान ने एक तरफ अमेरिका के साथ संवाद और मध्यस्थता की भूमिका निभाई, जबकि दूसरी तरफ ईरान के प्रति अपनी निकटता और क्षेत्रीय हितों को भी साधता रहा। विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं—विशेषकर ईरान, अफगानिस्तान और सऊदी अरब से उसके एक साथ जुड़े हितों को देखते हुए। यानी Washington के लिए संदेश यह हो सकता है कि पाकिस्तान को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार की बजाय आवश्यकता पड़ने पर उपयोगी लेकिन स्वार्थ-आधारित साझेदार के रूप में देखना अधिक व्यावहारिक है। लेकिन कश्मीर पर गोर का बयान सिर्फ पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए? मेरे आकलन में नहीं। क्योंकि सर्जियो गोर ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर को “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए अमेरिकी Travel Advisory की समीक्षा की बात कही। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि यह अमेरिकी पारंपरिक कश्मीर-रुख के विपरीत है। इसलिए इसके पीछे कई परतें हो सकती हैं: 1. ईरान: पाकिस्तान की मध्यस्थता और दोहरे हितों से अमेरिकी रणनीतिक संदेह बढ़ा हो। 2. आतंकवाद: अमेरिका के लिए पाकिस्तान की उपयोगिता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन फिर से हो रहा हो। 3. भारत: चीन के मुकाबले भारत का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। 4. कश्मीर: जमीनी सुरक्षा परिस्थितियों को देखकर अमेरिकी धारणा में बदलाव की शुरुआत हुई हो। 5. पाकिस्तान: Washington अब Islamabad को South Asia का अनिवार्य रणनीतिक केंद्र मानने की बजाय भारत को अधिक महत्व दे रहा हो। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि यह बदलाव ईरान संकट के बाद पाकिस्तान की भूमिका बढ़ने के ठीक उसी दौर में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अपनी कूटनीतिक उपयोगिता बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन यदि उसी समय अमेरिका का शीर्ष राजनयिक भारत में जाकर कहता है कि J&K भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, तो यह पाकिस्तान के लिए निश्चित रूप से बड़ा कूटनीतिक झटका है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि अमेरिका का संदेश है: “Pakistan may be useful, but India is strategically indispensable.” हालांकि अभी इसे अमेरिकी नीति का औपचारिक परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। अगली निर्णायक परीक्षा यह होगी कि Washington अपनी आधिकारिक Kashmir language और Travel Advisory में वास्तव में क्या बदलाव करता है। और एक बड़ा प्रश्न इससे निकलता है—क्या ईरान संकट, पाकिस्तान की कथित दोहरी कूटनीति और चीन की बढ़ती चुनौती ने अमेरिका को अंततः यह समझा दिया है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान से अधिक भरोसेमंद और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार भारत है? यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण यक्ष प्रश्न है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
अमेरिका के फॉल इनटेक में एडमिशन ले चुके अधिकतर भारतीय छात्रों के मन में एक ही सवाल उठता है- क्या वह पहुंचते ही पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। अमेरिका में फीस और रहने-खाने के खर्च को देखते हुए छात्रों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि टॉप यूनिवर्सिटीज की सालाना फीस और रहने खाने का खर्चा करीब 50 से 60 लाख रुपए तक होता है। वहीं पूरी पढ़ाई का खर्च 1.5 करोड़ तक पहुंच जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अमेरिका के F-1 स्टूडेंट वीज पर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पार्ट टाइम जॉब के नियम बेहद सख्त हैं। अगर कोई इन नियमों को तोड़ता है, तो उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। यहां तक कि डिपोर्टेशन तक का समय आ सकता है। ऐसे में हम इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारतीय स्टूडेंट्स फर्स्ट सेमेस्टर में पार्ट-टाइम नौकरी कर सकते हैं और इसको लेकर क्या नियम हैं। इसे भी पढ़ें: क्या 40 की उम्र में संभव है LLB? BCI के नए नियमों के तहत Age Limit और Career Switch पर एक विशेष रिपोर्ट फर्स्ट ईयर में जॉब कर सकते हैं या नहीं USICS के नियमों क मुताबिक F-1 वीजा पर पहले पूरे अकेडमिक ईयर तक आप कैंपस के बाहर कोई नौकरी नहीं कर सकते हैं। USICS के नियमों में फर्स्ट सेमेस्टर वाले स्टूडेंट्स के लिए कोई खास छूट नहीं दी गई है। कैंपस के बाहर किसी भी स्थिति में जॉब नहीं करना है। फर्स्ट ईयर छात्रों के पास ऑन कैंपस जॉब का ऑप्शन जरूर है। छात्र कैंपस के अंदर आराम से पार्ट-टाइम जॉब कर सकते हैं। फर्स्ट सेमेस्टर में क्या करें अच्छी खबर यह है कि ऑन कैंपस जॉब के लिए आपको USCIS से अलग इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती है। इसको आपको फर्स्ट सेमेस्टर से ही शुरूकर सकते हैं। जब क्लास चल रही हो, तब आप सप्ताह में 20 घंटे तक काम कर सकते हैं। स्कूल की छुट्टियों के दौरान आप फुल टाइम यानी की सप्ताह में 40 घंटे काम कर सकते हैं। ऑन कैंपस जॉब का मतलब है, यूनिवर्सिटी के कैंपस पर होने वाला काम कैफेटेरिया में काम, लाइब्रेरी में असिस्टेंट, यूनिवर्सिटी बुकस्टोर में जॉब, या किसी प्रोफेसर के साथ रिसर्च असिस्टेंटशिप। यह जॉब कुछ मामलों में कैंपस के बाहर भी हो सकता है। बशर्ते वह जगह आपकी यूनिवर्सिटी से एजुकेशनली एफिलिएटेड हो। उसका सीधा संबंध आपकी पढ़ाई या यूनिवर्सिटी से हो। ऑन कैंपस जॉब के लिए क्लास शुरू होने से करीब 30 दिन पहले तक अप्लाई कर सकते हैं। इसलिए अगर आप फॉल इनटेक में अभी पहुंचे हैं। तो जल्द से जल्द अपने कैंपस जॉब पोर्टल या फिर इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं। अगर आप ऑन कैंपस जॉब ढूंढ रहे हैं, या भविष्य में ऑफ-कैंपस काम के बारे में जानना चाहते हों। तो सबसे जरूरी काम है कि अपने DSO से बात करें। DSO आपकी यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के मामलों को संभालने वाला अधिकारी होता है। वह आपको बताएगा कि कौन सी जॉब्स उपलब्ध हैं और आप उनके लिए एलिजिबल हैं या नहीं।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
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Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश सम्पूर्णानंद पांडेय ने हाल ही अपने करियर की यात्रा का एक किस्सा शेयर किया है। ये बात उस वक्त की है जब वो स्ट्रगल कर रहे थे।
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
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सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
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अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
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पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
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अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
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अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
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