इजराइल-अमेरिका द्वारा ईरान और ईरान की और से बहरीन और दुबई में की जा रही बमबारी की दहशत मेवाड़-वागड़ तक महसूस हो रही है। दरअसल, खाड़ी देशों में उदयपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, सलूंबर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, सिरोही और पाली जिलों के 50 हजार से अधिक कामगार रहते हैं। जो वहां बमबारी के बीच दहशत में हैं। हालांकि, वहां लोकल स्तर पूरा सहयोग मिल रहा है। बावजूद इसके, परिजनों को भी बमबारी के बीच रह रहे अपनों की चिंता परेशान कर रही है। हज कमेटी राजस्थान के पूर्व संयोजक और जायरीनों को मक्का-मदीना की 100 से ज्यादा यात्राएं करने वाले जहीरुद्दीन सक्का बताते हैं कि अलग-अलग जत्थों में मक्का-मदीना गए मेवाड़-वागड़ के करीब 50 जायरीन भी हैं, जिन्हें उमरा कर 20 मार्च तक यानी ईद तक वतन वापस लौटना है। अगर यह युद्ध मार्च माह तक चला और जद्दा-मदीना एयरपोर्ट पर फ्लाइट का संचालन बहाल नहीं हुआ तो ये वहीं फंसे रहेंगे। क्योंकि, जेद्दा-मदीना-भारत के बीच फ्लाइट का संचालन कुवैत, दुबई, बहरीन, शारजहां होकर ही होता है और इन शहरों में बमबारी होने से फ्लाइट का संचालन रोक दिया गया है। हालांकि गनीमत यह है कि मक्का-मदीना में अभी तक किसी भी प्रकार की बमबारी नहीं हुई है। इसलिए जायरीनों के उमरा पर कोई फर्क नहीं है। फिलहाल, भारत से जाने वाले जायरीन उमरा के लिए नहीं जा पा रहे हैं। मेवाड़-वागड़ से दुबई भ्रमण पर जाने वाले यात्रियों के फंसे होने की भी प्रबल संभावना है। जिला कलेक्टर नमित मेहता बताते हैं कि इस मामले में जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। अगर किसी के भी किसी भी प्रकार समस्या की जानकारी प्राप्त होते ही सक्षम स्तर पर अवगत कराकर राहत प्रदान कराएंगे। मेवाड़ के लोग बोले- कुवैत, बहरीन, दुबई में हालात तनावपूर्ण उदयपुर निवासी मोहम्मद रिजवान बताते हैं कि वे कुवैत में पिछले दो साल से ऑयल फील्ड में काम करते हैं। कुवैत में हर आधे घंटे में बमबारी हो रही है। सवीना निवासी हामिद बताते हैं कि कुवैत व बहरीन में रुक-रुककर बमबारी हो रही है। कुवैत एयरपोर्ट पर भी बम गिराए गए। इससे माहौल तनावपूर्ण है। साजिदा दुबई में सैलून का संचालन करने के साथ-साथ करंसी बदलने का भी काम करती हैं। कई सालों से दुबई में परिवार के साथ रहकर रोजगार अर्जित कर रही हैं। वे बताती हैं कि दुबई में बमबारी की वजह से दहशत का माहौल है। अब दुबई से वतन वापसी चाहती हैं, लेकिन एयरपोर्ट पर फ्लाइट का संचालन बंद कर दिया गया है। दुबई का एयरपोर्ट भी बमबारी में क्षतिग्रस्त हुआ है, जिसकी मरम्मत का काम चल रहा है। उदयपुर इन जायरीनों का जत्था उमरा पर, युद्ध पूरे माह चला तो वहीं फंसने का डर खांजीपीर उदयपुर निवासी अमजद अली गत 16 फरवरी से 20 मार्च तक उदयपुर, भीलवाड़ा, हिम्मत नगर के 35 जायरीनों के साथ मक्का-मदीना के सफर पर हैं। अमजद अली बताते हैं कि जायरीन मक्का शरीफ से इबादत कर रविवार को ताइफ शहर में पहुंचे हैं। ताइफ में बड़ा उमरा करेंगे यानी तबाफ एवं सही के बाद हलक कराएंगे। ताइफ से वापस मक्का शरीफ आएंगे। मक्का शरीफ के बाद मदीना शरीफ जाएंगे, जहां कई दिनों तक जियारत करेंगे। खास बात यह है कि मक्का-ताइफ-मदीना में माहौल शांतिपूर्ण हैं। फिलहाल यहां ना कोई बमबारी है, ना कोई डर का माहौल है। अगर युद्ध पूरे मार्च चला तो वहीं फंसने का डर सता रहा है। जेद्दा-मदीना एयरपोर्ट पर फ्लाइटें बंद की जेद्दा-मदीना-भारत के बीच फ्लाइट का संचालन कुवैत, दुबई, बहरीन, शारजहां होकर होता है। कुवैत, दुबई, बहरीन, शारजहां में बमबारी होने से फ्लाइट का संचालन रोक दिया गया है। ऐसे में माह-ए-रमजान में उमरा करने जाने वाले जायरीनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सउदी अरब के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जेद्दा व मदीना पर फ्लाइटों का संचालन बंद कर दिया गया है। इससे जायरीनों का फिलहाल मक्का-मदीना जाने का सपना टूट सकता है। वहीं, उदयपुर के टूर ऑपरेटर्स को आर्थिक नुकसान होगा। इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र पर भी तात्कालिक प्रभाव संभव है, क्योंकि एमिरेट्स और कतर एयरवेज के जरिए आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या घट सकती है।
जून 2025- अमेरिका-ईरान में न्यूक्लियर डील पर बातचीत चल रही थी। ऐन मौके पर इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को अपने लिए खतरा बताते हुए उस पर हमला कर दिया। अमेरिका भी इसमें शामिल हो गया। जबकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ईरान के न्यूक्लियर हथियार बनाने के कोई सबूत नहीं मिले थे। फरवरी 2026- अमेरिका और ईरान में दोबारा न्यूक्लियर डील पर बात हो रही थी, डील लगभग होने ही वाली थी। इजराइल और सऊदी अरब ने ट्रम्प को दोबारा ईरान पर हमले के लिए मना लिया। जानकारों मानते हैं कि एकबार फिर ट्रम्प, नेतन्याहू की जंग लड़ रहे हैं। आखिर, नेतन्याहू ने ट्रम्प को ईरान के खिलाफ जंग में कैसे घसीटा, खामेनेई को मारने से इजराइल को क्या फायदा, भास्कर एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… सवाल-1: नेतन्याहू ने ट्रम्प को ईरान पर हमले के लिए कैसे तैयार किया?जवाब: नेतन्याहू करीब 2 दशक से यह कहते आ रहे हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने की कगार पर है, जो इजराइल के लिए खतरनाक है। बीते साल 4 फरवरी 2025 को इजराइली पीएम नेतन्याहू, ट्रम्प से मिलने अमेरिका पहुंचे थे। इसी मुलाकात के बाद ईरान पर इतने बड़े हमले की पृष्ठभूमि तैयार हुई… अमेरिकी हमलों में ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचा। वह न्यूक्लियर हथियार बनाने के लिए जरूरी यूरेनियम जुटाने के टारगेट से भी काफी साल पीछे चला गया था। इसके बाद ईरान और अमेरिका में दोबारा न्यूक्लियर डील पर बात शुरू हुई, लेकिन इस बार नेतन्याहू ने ईरान की मिसाइल्स के खतरे का जिक्र भी शुरू कर दिया। सवाल-2: जब ईरान के न्यूक्लियर ठिकाने तबाह, तो ट्रम्प ने दोबारा हमला क्यों किया?जवाब: जून में अमेरिकी हमलों के बाद कुछ रिपोर्ट्स में कहा जाने लगा कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अक्टूबर 2025 में नेतन्याहू ने ईरान से एक और खतरा बताया। उन्होंने कहा, 'लोगों को इस पर भरोसा नहीं होता, लेकिन ईरान 8 हजार किमी रेंज वाली इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल्स डेवेलप कर रहा है। ईरान किसी भी अमेरिकी शहर को निशाना बना सकता है।' इसके बाद ट्रम्प भी यही दावा दोहराने लगे। जबकि ईरान ने इससे लगातार इनकार किया। वह अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील और अपने मिसाइल प्रोग्राम को लेकर भी बातचीत कर रहा था। फरवरी की शुरुआत में ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के साथ संघर्ष से पीछे हटकर कूटनीतिक बातचीत से रास्ता निकालने के संकेत दिए थे। दोनों देशों के के बीच डील पर दोबारा बातचीत शुरू हुई। विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को लेकर ईरानी नेताओं से बातचीत कर रहे थे। ओमान इसकी मध्यस्थता कर रहा था। जेनेवा में 26 फरवरी को डील पर तीसरे दौर की बात हुई। 28 फरवरी को मध्यस्थता कर रहे ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी ने कहा, 'मुझे लगता है शांति समझौता हमारी पहुंच में है। हमने समझौते की तरफ काफी प्रगति की है। ईरान ने न्यूक्लियर बम के लिए जरूरी सामग्री त्यागने पर प्रतिबद्धता जताई है। उनके पास इसका कोई स्टोरेज नहीं है। अगर आप संवर्धित मटेरियल यानी यूरेनियम स्टोर नहीं कर सकते, तो बम भी नहीं बना सकते।' अलबुसैदी ने ये भी कहा, 'मीडिया ने इस तथ्य को काफी हद तक नजरअंदाज किया है। मैं एक मध्यस्थ के नजरिए से इसे साफ करना चाहता हूं।' अगले हफ्ते वियना में डील की तकनीकी शर्तों पर बाकी बातचीत होनी थी। इसके पहले ही इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया। ये दूसरी बार है, जब डील पर निर्णायक बातचीत से ऐन पहले ईरान पर हमला बोल दिया गया। अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, मामले से परिचित 4 लोगों ने बताया कि इजराइल और सऊदी अरब हफ्तों से ईरान पर अमेरिका के हमले की पैरवी कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 'सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान यानी MBS सार्वजानिक तौर पर तो मामले के कूटनीतिक समाधान की बात कह रहे थे, लेकिन पिछले महीने उन्होंने ट्रम्प को कई निजी कॉल किए और ईरान पर हमले की वकालत की। नेतनयाहू ने भी ईरान पर अमेरिका से हमला करवाने का अपना लंबे समय से चला आ रहा अभियान जारी रखा।' MBS ने अमेरिकी ऑफिसर्स से बातचीत में कहा कि अगर अमेरिका ने अभी कार्रवाई नहीं की, तो ईरान और भी खतरनाक बनकर उभरेगा। MBS के भाई और सऊदी के डिफेंस मिनिस्टर खालिद बिन सलमान ने भी जनवरी में अमेरिकी ऑफिसर्स के साथ सीक्रेट मीटिंग्स में कहा कि हमला न करने से नुकसान होगा। नेतन्याहू और MBS की इन कोशिशों के बीच 19 फरवरी को ट्रम्प ने कहा कि 10 दिन के अंदर या तो डील होगी या ईरान इसका अंजाम भुगतेगा। जबकि इससे पहले ट्रम्प खुद कह चुके थे कि जून में हुए हमलों में ईरानी न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह खत्म हो गया था। बीते शुक्रवार को ट्रम्प अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि ट्रम्प थके लग रहे थे। फिर वो ईरान पर हमले की घोषणा वाला वीडियो रिकॉर्ड करने अपने प्राइवेट रूम में चले गए। शनिवार को ट्रम्प ने ईरान पर बड़े हमले का आदेश दे दिया। सवाल-3: तो क्या ईरान के खिलाफ नेतन्याहू की निजी लड़ाई है?जवाब: शुरुआत से ही अमेरिकी जनता और अमेरिका के ज्यादातर सांसद ईरान पर अमेरिकी हमले के खिलाफ रहे हैं। मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के हालिया सर्वे में केवल 21% अमेरिकियों ने कहा कि वे ईरान के साथ युद्ध के पक्ष में हैं। अमेरिकी सांसद रशीदा तलैब कहती हैं, ‘ट्रम्प अमेरिकी राजनीति के एलीट क्लास के लोगों और इजराइली रंगभेदी सरकार की हिंसक कल्पनाओं के आधार पर काम कर रहे हैं, और उन ज्यादातर अमेरिकियों की अनदेखी कर रहे हैं जो साफ तौर पर कहते हैं कि अब और युद्ध नहीं चाहिए।’ ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से 'अमेरिका फर्स्ट' पॉलिसी की बात कही है, जिसमें पुराने दौर की तरह अमेरिका को युद्धों में घसीटने के बजाय तरक्की पर फोकस है। वहीं इजराइल और नेतन्याहू के पास इस जंग के पीछे दो बड़े ऑब्जेक्टिव थे.. 1. अमेरिका और ईरान के बीच डील रोकना 2. मिडिल ईस्ट में सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ईरान को कमजोर करना सवाल-4: इस जंग से इजराइल को ज्यादा फायदा या अमेरिका को?जवाब: अगर ईरान से अमेरिका के संबंध बेहतर हो जाते, तो इजराइल को मिडिल ईस्ट में एक मजबूत टक्कर मिल सकती थी। अभी तक इजराइल, अमेरिका से सबसे ज्यादा आर्थिक और सैन्य सहायता पाने वाला देश है। वहीं खामेनेई के बाद ईरान में नई सत्ता आने से अमेरिका को भी फयदे हैं। मिडिल ईस्ट में कतर, इराक, सीरिया, जॉर्डन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में अमेरिका ने अपने मिलिट्री बेस बनाए हुए हैं। ईरान के कब्जे वाले लाल सागर के रूट्स के जरिए अमेरिका का तेल और बाकी चीजों का ट्रेड भी चलता है। ईरान अकेला ऐसा देश है, जहां अमेरिका का कोई बेस नहीं है। अगर ईरान में अमेरिका के मन मुताबिक सरकार आती है, तो पूरे मिडिल ईस्ट पर उसका कंट्रोल हो जाएगा। सवाल-5: इस जंग में सऊदी जैसे अरब देशों ने ईरान का साथ क्यों नहीं दिया?जवाब: मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देशों में सुन्नी-शिया बाइनरी है। सऊदी अरब और ईरान के बीच इन देशों की लीडरशिप को लेकर वर्चस्व की पुरानी लड़ाई है। इसके अलावा सऊदी अरब, कतर, UAE जैसे सुन्नी बहुल अरब देशों से अमेरिका के सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते हैं। ईरान के कमजोर पड़ते ही इन देशों के अमेरिका से संबंध और बेहतर होंगे। वहीं इस इलाके में ईरान के अलावा इराक, लेबनान और सीरिया ऐसे देश हैं, जो शिया बाहुल्य हैं। हालांकि ये देश खुद बेहद कमजोर हैं और अंदरूनी सत्ता संघर्ष से जूझ रहे हैं। ईरान, जिन हूती और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को मदद करता रहा है, वो अलग-अलग समय पर बाकी इस्लामिक देशों के लिए खतरा बने रहे हैं। एक और वजह ये भी है कि दुनिया के सभी इस्लामिक देशों में सिर्फ पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर हथियार हैं। मिडिल ईस्ट के अरब देशों को अमेरिका ने सुरक्षा गारंटी दे रखी है, इसके बदले में उन्होंने न्यूक्लियर हथियार न रखने का वादा किया है। ऐसे में ये देश ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खुद के लिए भी एक खतरे की तरह देखते हैं। सवाल-6: क्या सुप्रीम लीडर खामेनेई को मार देने से ईरान-अमेरिका का मकसद पूरा हो जाएगा?जवाब: एक्सपर्ट्स का मानना है कि खामेनेई की हत्या करने से भी अमेरिका और इजराइल के लिए ईरान में सत्ता परिवर्तन करना आसान नहीं है... ---- ये खबर भी पढ़ें… खामेनेई से खुन्नस या ट्रम्प को जंग में घसीटना:नेतन्याहू का असली मकसद क्या; ईरान में परमाणु बम बनाने के सबूत नहीं, फिर क्यों हमला किया 5 फरवरी 2003 को अमेरिका के विदेश मंत्री कोलिन पॉवेल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक शीशी लहराने लगे। दावा किया कि इराक के शासक सद्दाम हुसैन के पास ऐसे रासायनिक हथियार हैं, जिनसे सामूहिक विनाश हो जाएगा। ऐसा माहौल बनाया गया कि इराक पर हमला जरूरी लगने लगा। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पूरे विश्व के शिया मुसलमानों में गम और गुस्से का माहौल है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी शिया मुसलमानों ने आक्रोश जताया और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का विरोध किया। शहर के मोमिनपारा इलाके में सड़क पर कई जगह ट्रंप, नेतन्याहू के पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों पर दोनों की तस्वीरों के साथ ‘डाउन टू अमेरिका’ और ‘डाउन टू इजरायल’ लिखा गया। पोस्टरों पर नीली स्याही भी फेंकी गई है। वहां से गुजर रहे लोग इन पोस्टरों को पैरों से रौंदते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इसके अलावा शिया समुदाय ने इमामबाड़ा और धार्मिक जगह पर शोक सभा का आयोजन किया। इससे जुड़ी तस्वीरें देखिए… इमामबाड़ा में शोक सभा का आयोजन रायपुर के शिया आबादी बहुल क्षेत्र मोमिनपारा, पंडरी जैसे इलाकों में लोगों ने इमामबाड़ा और अन्य धार्मिक स्थलों पर इकट्ठा होकर खामनेई की मौत पर शोक जताया। ईरानी समुदाय के लोगों ने पंडरी स्थित इमाम बारगाह में मजलिस कर शोक सभा का आयोजन किया था। वहीं खोजा जमात के लोगों ने भी खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग इकट्ठे हुए। कौन है खामेनेई जिसके लिए शोक सभा रखी गई अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान देश के सुप्रीम लीडर थे। इजराइल और अमेरिका ने ईरान के तेहरान पर हमला किया। हमले में ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया। जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। हमले के वक्त खामेनेई तेहरान में अपने ऑफिस में मौजूद थे। ईरानी स्टेट मीडिया के मुताबिक, जब हमला हुआ खामेनेई अपनी ड्यूटीज निभा रहे थे। इजराइली सैटेलाइट इमेज में कैंपस पूरी तरह तबाह दिखाई दिया। मलबे में किसी के जीवित बचने के संकेत नहीं मिले। इस घटना के बाद देश भर में शिया समुदाय विरोध में उतर आया है।
अमेरिका भेजने का झांसा देकर युवक से ठगे 15 लाख , धोखाधड़ी का केस दर्ज
लुधियाना| अमेरिका भेजने का झांसा देकर दो एजेंटों ने एक युवक के परिवार से 15 लाख रुपए हड़प लिए है। जब महीनों तक इंतजार के बावजूद न तो युवक को अमेरिका भेजा गया और न ही रकम वापस की गई तो ठगी का अहसास हुआ। उसके बाद पीड़ित परिवार ने थाना जमालपुर की पुलिस से शिकायत की। पीड़ित गुरदयाल सिंह निवासी सरपंच कॉलोनी, जमालपुर ने बताया कि वह अपने बेटे दिलप्रीत सिंह को विदेश भेजना चाहता था। इसी दौरान उसकी पहचान न्यू शक्ति नगर निवासी इंद्रप्रीत सिंह और हरियाणा के जिला हिसार के खारा खेड़ी गांव निवासी अजीत सिंह से हुई। दोनों ने खुद को इमिग्रेशन एजेंट बताते हुए बेटे को अमेरिका भेजने की जिम्मेदारी ली और सौदा तय कर अलग-अलग किस्तों में 15 लाख रुपए ले लिए। काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो कोई दस्तावेज बने और न ही वीजा लगा। जब गुरदयाल सिंह ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने पहले टालमटोल की और बाद में साफ इनकार कर दिया। पुलिस ने प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए और दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 120-बी और इमिग्रेशन एक्ट की धारा 24 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
अमेरिका-इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद यूपी में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में रविवार की रात आजमगढ़ जिले के शहर कोतवाली क्षेत्र के आसिफगंज में जामिया इमाम मेहंदी अरेबिक कॉलेज में शिया समाज के बड़ी संख्या में धर्म गुरुओं के साथ लोगों ने अमेरिका और इजरायल की एयर स्ट्राइक में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई को ताजियत (शोकसभा) पेश किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिया समाज के धर्मगुरु और लोग रोते बिलखते नजर आए। शिया समाज के पदाधिकारी बोले आज हो गए हम यतीम दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए शिया समाज के पदाधिकारी सैयद आज़ादार हुसैन का कहना है कि यह शोक सभा का कार्यक्रम जो रखा गया है। वह पूरी दुनिया के साथ-साथ इंसानियत के लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई जिन्हें इसराइल और अमेरिका की एयर स्ट्राइक में शहीद कर दिया गया है की याद में रखा गया है। हमें इतना गम अपने पिता के मरने पर नहीं हुआ है। जितना गम हम लोगों को आज हो रहा है। आज हम यतीम हो गए हैं। आज की लोकसभा के माध्यम से हम अपनी संवेदना को व्यक्त कर रहे हैं। धर्मगुरु बोले इसराइल और अमेरिका कर रहे हैं गुंडागर्दी दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद मोहम्मद मेहंदी का कहना है कि आज इस लोकसभा के माध्यम से हम लोग प्रोटेस्ट कर रहे हैं। अमेरिका और इजरायल की गुंडागर्दी के खिलाफ हम यही कहना चाहेंगे कि जिसको चाहता है जहां चाहता है मार देता है। अमेरिका लगातार हमारे मुल्क में भी बढ़ाकर टैरिफ लगा रहा है। जिस तरह से मुसलमान के सबसे बड़े इमाम ईरान के सुप्रीम लीडर को तेहरान में एयर स्ट्राइक में शहीद कर दिया गया। उसी के उपलक्ष में हम लोग अपनी संवेदना और शोक सभा करने आए हैं इसके साथ ही अमेरिका और इसराइल को अपने पैरों तले कुचलने आए हुए हैं। आज हम यह कहना चाहते हैं कि तुम्हारी दादागिरी बहुत दिनों तक नहीं चलेगी। अयातुल्ला अली खामेनेई को मार भले दिया है पर हर शिया के दिल में वह जिंदा है और आगे भी जिंदा रहेंगे। शहादत की खबर सुनते ही हम लोग बेचैन हो गए। अब जगह-जगह मजलिस होगी सरकार और प्रशासन से हम मांग करते हैं कि हमें शांतिपूर्वक प्रोटेक्ट करने दे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अयातुल्ला अली खामेनेई से मिलकर आए थे। उन्होंने पूरे जीवन शांति के लिए काम किया। हमारी केंद्र सरकार से मांग है कि इसराइल और अमेरिका को बाकायदा आतंकवादी घोषित कर इन्हें अपने यहां आने ना दें। इस घटना से सिर्फ मुसलमान के ही नहीं हिंदुओं के दिल भी आहत हुए हैं। इस अवसर पर मौलाना सुल्तान हुसैन मौलाना गुलाम हैदर मौलाना सैयद जमीरुल हसन, जमील हैदर सहित बड़ी संख्या में शिया समाज के लोग उपस्थित रहे।
इजराइल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामेनाई की मौत के बाद प्रयागराज में गुस्सा फूट पड़ा। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बड़ी लंख्या में विरोध जताया। हजारों की संख्या में दरियाबाद पीपल चौराहे पर मुस्लिम समुदाय के लोग इकठ्ठा हुए। लोगों की भीड़ देख भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। अचानक से जुटी हजारों की भीड़ मौला अब्बास की दरगाह पर पहुंची और शोक व्यक्त किया। जहां पुरुष के साथ भारी संख्या में महिलाएं भी पहुंची हुई थी। शोक व्यक्त करने के बाद सभी ने हांथ में पोस्टर और तस्वीरों को लेकर इजराइल और अमेरिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद लोग दरगाह में शोक व्यक्त करने के बड़ी संख्या में सभी लोग फूट फूट कर रो रहे थे। सभी की आंखों में आंसू था। एक के बाद एक सभी लोग अपनी अपनी बातों को रख रहे थे। पुतला बनाकर चप्पलों से पीटा सड़क पर हजारों की भीड़ में शामिल लोग नितिन याहू और ट्रंप का पुतला बनाकर चप्पलों से पिटाई की। इस दौरान पुरुषों के साथ-साथ भारी संख्या में पर्दानशीं महिलाएं भी शामिल रही। ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामेनाई की मौत के बाद तमाम मुस्लिम समुदाय के लोग इजरायल और अमेरिका के खिलाफ दरियाबाद के रौजा अब्बास की दरगाह पर प्रोटेस्ट करने लगे। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के बाद सभी कब्रिस्तान पहुंचे और फिर प्रदर्शन को समाप्त किया। इस दौरान सभी लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद, इसराइल मुर्दाबाद, अमेरिका मुर्दाबाद, या हुसैन के बारे लगाते रहे। सिविल लाइंस सुभाष चौराहे पर होगा प्रदर्शन दरियाबाद में दरगाह में शोक व्यक्त करने के दौरान ऐलान किया गया कि सोमवार को तीन बजे सिविल लाइंस सुभाष चौराहे पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। इसके लिए सभी लोगों से अपील भी की गई है। इस प्रदर्शन में पहुंचने के लिए सभी बड़ी संख्या में तैयारी भी कर रहे है।
संभल में शिया समुदाय ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित अमेरिकी-इजरायली हमले में मौत पर शोक व्यक्त किया है। इस दौरान सिरसी कस्बे में कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका मुर्दाबाद और इजरायल मुर्दाबाद के नारे लगाए। उक्त विरोध-प्रदर्शन रविवार रात 8 बजे जनपद संभल के हजरत नगर गढ़ी थाना क्षेत्र की नगर पंचायत सिरसी में हुआ। शिया समुदाय ने हाथों में कैंडल लेकर 'हैदर-हैदर' के नारे लगाए और ताज़िया जुलूस निकाला। पुलिस भी विरोध-प्रदर्शन को लेकर अलर्ट रही। मातमी जुलूस सिरसी कस्बे के मोहल्ला शर्की मस्जिद से शुरू होकर मोहल्ला बाजार, स्टेशन रोड, डाकखाना, मोहल्ला सड़क सारी इमामबाड़ा, गर्वी, मोहल्ला चौधरियान, इमाम बारगाह इमाम रजा और स्टेशन रोड होते हुए वापस लौटा। सिरसी में यह प्रदर्शन रात 10 बजे तक चला। वहीं, थाना असमोली क्षेत्र के गांव बुकनाला में भी रात 8 बजे कैंडल मार्च का कार्यक्रम निर्धारित था, लेकिन पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इसे रद्द करा दिया। मौलाना मिशम अब्बास ने अपने संबोधन में कहा कि यह कौम न कल डरने वाली थी और न आज डरने वाली है। उन्होंने कहा, हमने कल भी यज़ीद को ठुकराया था, आज भी यज़ीद को ठुकराया है। हमने कल भी फिरौन-ए-वक्त को ठुकराया था, आज भी फिरौन-ए-वक्त को ठुकराया है। मौलाना अब्बास ने आगे कहा कि हुसैन ने किसी भी कीमत पर यज़ीद के सामने सर नहीं झुकाया। उन्होंने खामेनेई की तुलना करते हुए कहा, हजरत खामेनेई सद्दाम की तरह किसी गुफा से नहीं पकड़े गए, न ही वह ओसामा बिन लादेन की तरह किसी पहाड़ी से ले जाए गए। वह हैदर-ए-करार का बेटा था, जो मैदान छोड़कर नहीं भागा, बल्कि मैदान में डटा रहा।
ईरान-अमेरिका महासंग्राम: क्या डूब जाएगा USS अब्राहम लिंकन?
खामेनेई की मौत के बाद ईरान का भीषण मिसाइल हमला! बहरीन, यूएई और इजरायल पर बरसीं मिसाइलें। पीएम मोदी ने बुलाई सीसीएस बैठक। मध्य पूर्व में महायुद्ध शुरू।
मुजफ्फरपुर में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। इजरायल और अमेरिकी हमले में उनकी शहादत की सूचना मिलने पर शिया समुदाय में विशेष रूप से गहरा दुख और आक्रोश देखा जा रहा है। इसी कड़ी में, शहर के कमरा मोहल्ला स्थित शिया जामा मस्जिद के बाहर से एक कैंडल जुलूस निकाला गया। इस जुलूस का नेतृत्व मौलाना इतरत हुसैन नदीम और मौलाना नेहाल हैदर ने किया। जुलूस नमाज़-ए-मग़रिबैन के बाद शुरू हुआ और बनारस बैंक चौक होते हुए कमरा मोहल्ला के रौज़ा-ए-अमीरुल मोमिनीन तक पहुंचा। शिया समुदाय के एक बड़े धर्मगुरु थे ईरानी न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, सैयद अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों की मौत 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिकी हमले में हुई है। ईरान ने इस घटना पर चालीस दिनों के शोक की घोषणा की है और अमेरिका और इजरायल को इस हमले की भारी कीमत चुकाने की चेतावनी दी है। सैयद अली खामेनेई न केवल ईरान के सर्वोच्च नेता थे, बल्कि शिया समुदाय के एक बड़े धर्मगुरु भी थे, जिन्हें 'मरजा' और 'मुजतहिद' कहा जाता है। मुजफ्फरपुर के शिया समुदाय में उनकी शहादत को लेकर गम और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गुस्सा है। शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इतरत हुसैन नदीम ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई कभी अमेरिका के सामने नहीं झुके और अंत तक लड़ते हुए शहीद हुए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। इस घटना को लेकर दुनिया भर के कई देशों में शोक का माहौल है और मुस्लिम समाज के लोग उनकी शहादत पर गहरा अफसोस व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रमजान के इस पाक महीने में इस तरह की जुर्म किया गया है इजराइल और अमेरिका के द्वारा उनकी शहादत को इतिहास में याद रखी जाएगा। उन्होंने कहा कि खुदा अमेरिका और इजरायल की इंसानियत विरोधी तानाशाही को जल्दी से जल्दी खत्म कर दे। मौलाना नेहाल हैदर रिज़वी इमाम सुगरा बेगम वक्फ एस्टेट ने कहा के आयतुल्ला ख़ामनाई क्रूर और अत्याचारी अमरीकी और इसराइली हुक़ूमत के सामने झुके नहीं और अपनी जान दे दी लेकिन इन साम्राजी ताकत के खिलाफ घुटना नहीं टेका। जबकि शिया बहुल इलाकों में शोक का निशाना काला परचम भी लगाया गया है । इस मौके पर तनवीर रज़ा विक्टर , मौलाना सादिक सैयद मुहम्मद बाकिर आदि के साथ बहुत बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।
हरदा में रविवार शाम शिया समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ईरान के सर्वोच्च धर्मगुरु अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या के विरोध में किया गया, जिसकी खबर से समुदाय में गहरा दुख और गुस्सा है। कांधला क्षेत्र के गांव गंगेरू में शिया मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान शिया मुसलमानों के साथ अन्य समुदायों के लोग भी एकजुट हुए। उन्होंने मस्जिद से एक जुलूस निकाला और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दुआएं कीं। अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारेबाजी प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए कथित हमले और अयातुल्ला अली खामेनेई सहित अन्य लोगों की हत्या का विरोध किया। मुस्लिम और सुन्नी समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ईरान के सरकारी मीडिया ने रहबरे मोअज्जम सय्यद अली खामेनेई की शहादत की पुष्टि की है। इसके बाद हरदा हुसैनी अंजुमन कमेटी की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि सभा में मौलाना कुमर अब्बास ने कथित 'जालिमों' की निंदा की। उन्होंने अयातुल्ला खामेनेई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने कभी इंसानियत पर जुल्म नहीं किया। इस श्रद्धांजलि सभा में कमेटी के अध्यक्ष मेहदी हसन रिज़वी, आदिल जैदी, साजिद हुसैन, रिज़वी हसन, अली नावेद, अली मुश्ताक, हुसैन जुनैद हुसैन सहित शिया समाज के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई की मौत के बाद पूरे विश्व के शिया मुसलमानों में गम और गुस्से का माहौल है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी शिया मुसलमानों ने आक्रोश जताया और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का विरोध किया। शहर के मोमिनपारा इलाके में सड़क पर कई जगह ट्रंप, नेतन्याहू के पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों पर दोनों की तस्वीरों के साथ ‘डाउन टू अमेरिका’ और ‘डाउन टू इजरायल’ लिखा गया। पोस्टरों पर नीली स्याही भी फेंकी गई है। वहां से गुजर रहे लोग इन पोस्टरों को पैरों से रौंदते हुए आगे बढ़े। इसके अलावा शिया समुदाय ने इमामबाड़ा और धार्मिक जगह पर शोक सभा का आयोजन किया। इससे जुड़ी तस्वीरें देखिए… इमामबाड़ा में शोक सभा का आयोजन रायपुर के शिया आबादी बहुल क्षेत्र मोमिनपारा, पंडरी जैसे इलाकों में लोगों ने इमामबाड़ा और अन्य धार्मिक स्थलों पर इकट्ठा होकर खामनेई की मौत पर शोक जताया। ईरानी समुदाय के लोगों ने पंडरी स्थित इमाम बारगाह में मजलिस कर शोक सभा का आयोजन किया था। वहीं खोजा जमात के लोगों ने भी खामनेई को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग इकट्ठे हुए। कौन है खामेनेई जिसके लिए शोक सभा रखी गई अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान देश के सुप्रीम लीडर थे। इजराइल और अमेरिका ने ईरान के तेहरान पर हमला किया। हमले में ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया। जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। हमले के वक्त खामेनेई तेहरान में अपने ऑफिस में मौजूद थे। ईरानी स्टेट मीडिया के मुताबिक, जब हमला हुआ खामेनेई अपनी ड्यूटीज निभा रहे थे। इजराइली सैटेलाइट इमेज में कैंपस पूरी तरह तबाह दिखाई दिया। मलबे में किसी के जीवित बचने के संकेत नहीं मिले। इस घटना के बाद देश भर में शिया समुदाय विरोध में उतर आया है। Topics: ईरान इजराइल जंग
जौनपुर के जफराबाद स्थित शिया जामा मस्जिद से रविवार शाम 8 बजे ईरान के सर्वोच्च नेता और शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई के निधन पर एक कैंडल मार्च निकाला गया। इसके बाद मजलिस का आयोजन किया गया। आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई की मृत्यु कथित तौर पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमले में हुई थी। उनके मौत के बाद शिया समुदाय में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। यह कैंडल मार्च जफराबाद के इमाम जुमा शाजान जैदी की अध्यक्षता में निकाला गया, जिसमें विभिन्न धर्मों के लोगों ने भाग लिया। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली राष्ट्रपति नेतन्याहू की निंदा की। कैंडल मार्च से पहले शिया मस्जिद में मगरिब की अजान हुई, जिसके बाद नमाज अदा की गई और रोजे खोले गए। इसके उपरांत शांतिपूर्वक कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें लोग मोमबत्तियां और आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई की तस्वीरें लिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे थे। कैंडल मार्च समाप्त होने के बाद मजलिस का आयोजन हुआ, जिसे इमाम-ए-जुमा जफराबाद शाजान जैदी ने संबोधित किया। वक्ताओं ने आयतुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 86 वर्ष की आयु में भी अपने देश की रक्षा करते हुए और अपने पद के कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए प्राण त्यागे। वक्ताओं ने उनके जज्बे और सादगी की सराहना की। इस अवसर पर हैदर रजा, शकील अहमद, मौलाना शाजान जैदी, फैजान आब्दी, औसाफ हुसैन आब्दी, हसन मेहंदी गुड्डू, बबलू, शाहनेयाज अहमद, दाऊद, मुर्शिद रजा, इमरान हैदर, कामरान हैदर, मकबूल हैदर, अरशद रजा, इजहार हुसैन, नफीस हैदर, वसीम अहमद और अरशद रजा सहित कई लोग उपस्थित रहे।
सुल्तानपुर में रविवार शाम ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनाई की मौत के विरोध में प्रदर्शन हुआ। नगर कोतवाली के अमहट और तुराबखानी क्षेत्रों में शिया समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान मजलिस का भी आयोजन किया गया। दरअसल, शनिवार को ईरान में अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त रूप से हमला किए जाने का आरोप है। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनाई, उनके परिवार के सदस्य और ईरान के सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई थी। रविवार सुबह यह खबर सामने आने के बाद दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय, खासकर शिया समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस नेता जफर खान ने इस घटना पर बयान देते हुए कहा कि आयतुल्लाह खामेनाई के घर पर बम से हमला हुआ, जिसमें उनके बच्चे शहीद हुए। उन्होंने कहा कि खामेनाई साहब ने अमेरिका और जुल्म के आगे झुकना पसंद नहीं किया और शहादत को अपनाया। जफर खान के अनुसार, खामेनाई बंकर में नहीं गए, बल्कि अपने घर या दफ्तर में ही रहे। उन्होंने कहा था कि “हमारी अवाम बंकर में नहीं गई तो हम भी नहीं जाएंगे।” जफर खान ने बताया कि आयतुल्लाह खामेनाई फिलिस्तीन और ईरान की अवाम की लड़ाई लड़ रहे थे। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि चूंकि भारत ईरान का व्यापारिक साझेदार रहा है, इसलिए देश में एक या दो दिन का शोक घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा इस घटना पर एक भी ट्वीट न करने पर अफसोस भी जताया। इस क्रम में हिंदुस्तान में भी शिया समुदाय ने विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए। सुल्तानपुर में भी रोजा इफ्तार के बाद शिया समुदाय ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अमेरिका इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस अवसर पर हैदर अब्बास, एमएच खान सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे। गोसाईंगंज के सुरौली में भी इसी तरह का प्रदर्शन और मजलिस आयोजित की गई।
PM Modi called a meeting of CCS today : अमेरिका-इसराइल हमले के बीच तमिलनाडु से दिल्ली लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रात सीसीएस यानी की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक बुलाई है। खबरों के अनुसार, सीसीएस की इस इमरजेंसी बैठक में ...
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से लखनऊ में शिया समुदाय के लोग गम में डूब गए हैं। अमेरिका-इजराइल के विरोध के साथ श्रृद्धांजलि का दौर जारी है। करीब 20 हजार लोग सड़कों पर उतरे हैं। हजारों की तादाद में छोटा इमामबाड़ा पर महिलाएं और पुरुष इकट्ठे होकर रो रहे हैं। मातम कर रहे हैं। छोटा इमामबाड़ा पर खामेनेई कि याद में मौलाना यासूब अब्बास, मौलाना फरीदुल हसन समेत दर्जनों उलमाओ ने मजलिस (शोकसभा) की। खोमेनई की तस्वीर लेकर प्रदर्शन किया छोटा इमामबाड़ा पर अयातुल्ला अली खामेनेई की बड़ी से तस्वीर लगाई गई। लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। छोटा इमामबाड़ा से बड़ा इमामबाड़ा तक विरोध मार्च निकाला गया। खामेनेई जिंदाबाद और अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगे। भारी पुलिस फोर्स तैनात है। प्रदर्शनकारियों ने छोटा इमामबाड़ा के गेट पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीर लगाई, जिसे लोग पैरों से रौंदकर विरोध कर कर रहे हैं। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से 3 दिन के शोक की घोषणा की गई है। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा- लोग अपने घरों पर काले झंडे लगाएंगे और काले कपड़े पहनेंगे। अयातुल्ला खामेनेई के नाम पर रोजाना मजलिस का आयोजन किया जाएगा। 3 दिनों तक दुकानें न खोले व्यापार न करें। देखिए VIDEO… देखिए 4 तस्वीरें…
अमेरिका, इजराइल और ईरान जंग के बीच पाकिस्तान शाहीन्स और इंग्लैंड लायंस के बीच दूसरा वनडे रद्द कर दिया गया है। शनिवार को यह मैच अबू धाबी में खेल जाना था। क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि आज होने वाला मुकाबला रद्द कर दिया गया है। सभी खिलाड़ियों और टीम अधिकारियों को होटल के अंदर ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। आज कोई अभ्यास सत्र भी नहीं होगा। इंग्लैंड बोर्ड की सलाह पर फैसला PCB अधिकारी ने बताया कि यह फैसला इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) की सलाह पर लिया गया। बोर्ड के अनुसार खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। PCB लगातार ECB के संपर्क में है और हालात पर नजर रखे हुए है। मध्य-पूर्व के हवाई क्षेत्र के दोबारा खुलने के बाद ही सीरीज के भविष्य पर फैसला किया जाएगा। इसमें यह भी तय होगा कि शाहीन्स टीम को पाकिस्तान वापस बुलाया जाए या बचे हुए मैच कराए जाएं। जॉनी बेयरस्टो ने मदद मांगी इस बीच इंग्लैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज जॉनी बेयरस्टो भी अबू धाबी में टीम के साथ मेंटर की भूमिका में मौजूद हैं। IPL में खेल चुके बेयरस्टो ने UK के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मदद की अपील की। स्टार्मर के एक सोशल मीडिया वीडियो पर कमेंट करते हुए उन्होंने लिखा, क्या आप हमें घर पहुंचा सकते हैं। उनका यह संदेश वायरल हो रहा है। ईरान ने मिसाइल दागी यह स्थिति 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद बनी। इसके जवाब में तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मिसाइल दागीं। इसके चलते कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद या सीमित कर दिया है। ईरान ने ---------------------------स्पोर्ट्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…वर्ल्डकप सुपर-8; 16 ओवर में जिम्बाब्वे का स्कोर 120/5 टी-20 वर्ल्ड कप में रविवार का पहला मैच साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे के बीच नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जा रहा है। जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर बैटिंग करने का फैसला लिया है। पढ़ें पूरी खबर…
जौनपुर में इमाम ख़ामेनई की शहादत पर प्रदर्शन:मुस्लिम समाज ने अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ की नारेबाज़ी
जौनपुर में रहबर अली ख़ामेनई की शहादत की खबर फैलते ही मुस्लिम समाज में शोक और आक्रोश देखने को मिला। विभिन्न मोहल्लों से बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और अमेरिका तथा इज़राइल के खिलाफ नारेबाजी की। शहर के सदर इमामबारगाह पर धर्मगुरु मौलाना सफदर हुसैन ज़ैदी के नेतृत्व में प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर इस घटना की कड़ी निंदा की। मौलाना ज़ैदी का संदेश मौलाना सफदर हुसैन ज़ैदी ने कहा कि रहबर की शहादत केवल ईरान का नहीं, बल्कि पूरी उम्मत का नुकसान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्व शक्तियाँ अन्याय का साथ देंगी, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने इंसाफ की मांग की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की। मौलाना ज़ैदी ने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज धैर्यपूर्वक लेकिन दृढ़ता से अपना विरोध दर्ज करा रहा है और किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाता रहेगा। प्रशासन की निगरानी प्रदर्शन के दौरान स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया और अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इस मौके पर मौलाना अम्बर अब्बास खान, मौलाना मोहसिन, मौलाना यासिर, मौलाना अहमद हसन खान, मौलाना शाज़ान, मौलाना जोहैर, अली मंज़र, नौशाद हुसैन, चुनमुन भाई, दिलदार हुसैन सहित बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं मौजूद रहीं।
Jamkaran Mosque में फहराया गया लाल झंडा, ईरान ने अमेरिका-इजराइल को दी तबाही की चेतावनी
इजराइल-ईरान (Israel Iran Tension) में युद्ध के हालात पैदा हो गए हैं। खामनेई की मौत के बाद ईरान ने इजराइल में घातक मिसाइल दांगी। ईरान ने अटैक को और ज्यादा बढ़ा दिया है। उसने तेल अवीव में हमला कर दिया है। इसके साथ और भी जगहों को निशाना बनाया है। ...
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कांसुलेट के मुख्य गेट को तोड़ने की कोशिश की और परिसर में घुसने का प्रयास किया। भीड़ ने पथराव किया, टायर जलाए और कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाएं भी हुईं।
अमेरिका-इजराइल का ईरान पर रविवार को लगातार दूसरे दिन हमला जारी है। मुजफ्फरपुर के दर्जनों लोग युद्ध के बीच ईरान में फंस गए हैं। हमले के कारण ईरान से आने वाली फ्लाइट रद्द होने से परिजनों की चिंता बढ़ गई है। वहां के हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। लगातार अटैक होने से लोग परेशान हैं। कथैया के आनंद कुमार भी ईरान में फंसे हैं। वो मनामा इलाके में पाइपलाइन कंपनी में काम करते हैं। भास्कर रिपोर्टर से बातचीत में आनंद ने बताया, यहां बम बरस रहे हैं। आनंद का दावा है कि मुजफ्फरपुर और आसपास के करीब 250 से 300 लोग ईरान में फंसे हैं। नींद उड़ी हुई है। दुबई में रह रहे बक्सर के सुजीत ने कहा, ऑनलाइन नहीं दिखूं तो समझ लेना गड़बड़ है। पढ़िए ईरान पर अमेरिकी हमले की आंखों देखी… पहले मुजफ्फरपुर के आनंद की ईरान से भेजी 2 तस्वीरें … बम बरस रहे, धरती कांप रही आनंद ने बताया, रात के समय आसमान अचानक लाल हो गया था। ऐसा लगा कि आसमान से आग के गोले बरस रहे हैं। इसके बाद एक के बाद एक कई तेज धमाके हुए, जिससे धरती हिल गई। यह मंजर बेहद डरावना था। वहां काम कर रहे मजदूरों और कर्मचारियों में खौफ का माहौल है। सभी सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। मेरे साथ यहां बिहार के कई लोग काम करते हैं। हमने वॉट्सऐप कॉलिंग के जरिए परिवार से संपर्क किया। पापा राजमंगल साहनी और परिवार के अन्य सदस्य मेरी सुरक्षा को लेकर बेहद डरे हुए हैं। वो मेरी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। किसी भी वक्त बम हम पर गिर सकता है आनंद ने आगे बताया, अकेले मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के इलाकों के लगभग 250 से 300 लोग ईरान में मजदूरी और तकनीकी काम कर रहे हैं। इन सभी की सुरक्षा को लेकर अब उनके परिवार वाले भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं। धमाके मेरी आंखों के सामने हुए। मानसिक तनाव और डर इतना बढ़ गया है कि रात को नींद तक नहीं आती। किसी भी वक्त लगता है अब एक बम आएगा और सब खत्म हो जाएगा। मैंने जिंदगी में ऐसा मंजर नहीं देखा। पिता बोले- बेटा कैसे भी जल्द घर लौट आए आनंद के पिता राजमंगल साहनी ने बताया, वॉट्सऐप पर बेटे से बातचीत हुई है। बेटा बता रहा था कि जहां वह रह रहा है, वहां फिलहाल स्थिति अन्य शहरों की तुलना में थोड़ी बेहतर है, लेकिन धमाके वहां भी महसूस किए गए हैं। हम लोग बस इसी उम्मीद में हैं कि ऊपर वाला सब ठीक कर देगा। हम तो सरकार और भगवान से यही प्रार्थना करते हैं कि बेटा सुरक्षित रहे। जल्द घर लौटे। अब उसे बाहर नहीं जाने देंगे। यहां रहेगा तो सुरक्षित तो रहेगा। ऑफलाइन हुआ तो समझना मामला गड़बड़ है बक्सर जिले के चौसा निवासी सुजीत कुशवाहा इस समय दुबई में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है। इसके बाद उनके परिवार के लोगों की बेचैनी बढ़ाृ गई है। सुजीत ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘मैं ऑनलाइन नहीं दिखाई दूंगा तो समझना मामला ज्यादा खराब हो गया है, लड़ाई मानवता के खिलाफ है।’ सुजीत बोले- पता नहीं कब क्या हो जाए सुजीत की परिवार से फोन पर बात नहीं हो पा रही है। सुजीत ने वॉट्सऐप चैट पर मैसेज किया। सुजीत ने बताया कि दुबई में एक कंपनी में काम करता हूं। फिलहाल सुरक्षित हूं, लेकिन माहौल तनावपूर्ण है। पता नहीं कब क्या हो जाए। रात में एक तरफ लगातार धमाके हो रहे थे और दूसरी तरफ मोबाइल पर अलर्ट रहने के सायरन बज रहे थे। हमें सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है सुजीत ने आगे बताया, सभी कर्मचारियों को सुरक्षित कमरों में वापस भेज दिया गया है। अगले दो दिन (रविवार और सोमवार) तक वर्क परमिट भी जारी नहीं होगा। रात में हुए एक तेज धमाके की आवाज से लोग सहम गए थे, जिससे दहशत का माहौल बन गया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है। अभी तक भारत लौटने के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। भारतीय दूतावास की ओर से आपातकालीन नंबर जारी किए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिक संपर्क कर सकें। अनहोनी की आशंका से दहशत में परिवार फिलहाल, ईरान के अलग-अलग शहरों में फंसे मुजफ्फरपुर और बक्सर के इन युवाओं के परिवार टकटकी लगाए खबरों पर नजर रखे हुए हैं। युद्ध के इस माहौल में उनकी एक ही मांग है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो सरकार उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए कदम उठाए। खौफ के इस मंजर ने हजारों किलोमीटर दूर बिहार के गांवों में भी बेचैनी भर दी है।
UN में अमेरिका का बड़ा दावा, ईरान ने Donald Trump को मारने की कोशिश की
आज भी ईरान में हमलों का दौर जारी है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिका ने बड़ा दावा किया है। अमेरिकी एम्बेसडर माइक वाल्ट्ज ने कहा है कि ईरानी सरकार ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कोशिश की है। अमेरिकी एम्बेसडर माइक वाल्ट्ज ने UNSC में ...
सादाबाद के युवा समाजसेवी और रालोद के वरिष्ठ युवा नेता प्रवीन पौनिया अपनी पत्नी, बहन और बेटी के साथ ओमान में फंसे हुए हैं। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रद्द होने के कारण उनकी वापसी में देरी हो रही है। यह स्थिति अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के कारण उत्पन्न हुई है। इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। प्रवीन पौनिया 26 फरवरी को ओमान घूमने गए थे। खाड़ी क्षेत्र में कई उड़ानें निरस्त कर दी गई हैं, जिससे दुबई का हवाई यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जल्द ही लौटेंगे सुरक्षित वापस... प्रभारी जनों से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि वे सभी सुरक्षित हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे जल्द ही सादाबाद वापस आ जाएंगे। उनके सहयोगी और पार्टी कार्यकर्ता लगातार उनसे संपर्क में हैं।
पंजाब में विदेश भेजने के नाम पर मासूम लोगों को ठगने वाले कबूतरबाजों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। ताजा मामला महानगर के जमालपुर इलाके से सामने आया है जहां दो कथित एजेंटों ने एक युवक को अमेरिका भेजने का झांसा देकर उससे 15 लाख रुपये हड़प लिए। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और इमिग्रेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शिकायतकर्ता गुरदयाल सिंह निवासी सरपंच कॉलोनी जमालपुर ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि वह अपने बेटे दिलप्रीत सिंह को सुनहरे भविष्य के लिए अमेरिका भेजना चाहते थे। इसी दौरान उनका संपर्क दो एजेंटों इंद्रप्रीत सिंह निवासी न्यू शक्ति नगर और अजीत सिंह निवासी खारा खेड़ी,जिला हिसार से हुआ। आरोपियों ने बड़े-बड़े वादे किए और दिलप्रीत को अमेरिका पहुँचाने की पूरी जिम्मेदारी ली। सौदा तय होने के बाद गुरदयाल सिंह ने अपनी मेहनत की कमाई से जुटाए 15 लाख रुपये आरोपियों को सौंप दिए। न विदेश भेजा, न लौटाए पैसे रकम लेने के बाद आरोपियों के सुर बदल गए। कई महीने बीत जाने के बाद भी जब दिलप्रीत को अमेरिका भेजने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो गुरदयाल सिंह ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए। आरोपियों ने शुरुआत में टाल-मटोल की और बाद में पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया। खुद को ठगा हुआ महसूस कर पीड़ित ने न्याय के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया। जमालपुर थाना पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए और मामला दर्ज किया। आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 24 इमिग्रेशन एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। हमने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जल्द ही दोनों पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर की इजरायली और US हमलों में मौत हो गई है। ईरान में 40 दिन के सार्वजनिक शोक की घोषणा की गई है। इस बीच अहमद वाजिदी ईरान के नए कमांडर इन चीफ बनाया गया है। ईरान ने कहा कि यह अपराध माफ नहीं किया जाएगा। ...
मध्य-पूर्व में जारी भारी बमबारी और तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार तड़के एक चौंकाने वाला ऐलान किया है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ट्रंप ने इसे ईरानी जनता के लिए अपने ...
फतेहाबाद में एमएसपी गारंटी कानून की मांग को लेकर किसानों की महापंचायत कल (सोमवार को) पुराना बस स्टैंड के सामने शेड के नीचे होगी। इस महापंचायत में किसान नेता सरदार जगजीत सिंह डल्लेवाल भी पहुंचेंगे। महापंचायत में जिलेभर से सैकड़ों किसान शामिल होंगे। भारतीय किसान यूनियन खेती बचाओ के प्रदेशाध्यक्ष जरनैल सिंह मलवाला ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा की गई वादा खिलाफी के विरोध और किसानों को जागरूक करने के लिए जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में कन्याकुमारी से कश्मीर तक किसान जागृति यात्रा निकाली जा रही है। उनके साथ काफी किसान भी यात्रा में शामिल हो रहे हैं। रतिया में होगा यात्रा का रात्रि ठहराव मलवाला ने बताया कि यह जागृति यात्रा आज रविवार को रतिया क्षेत्र में पहुंचेगी। यात्रा का रात्रि ठहराव गुरुद्वारा श्रीअजीतसर साहिब रतिया में होगा। इसके बाद अगले दिन सोमवार को यात्रा फतेहाबाद पहुंचेंगी। यहां जागृति यात्रा में शामिल सभी किसान नेता सुबह 10 बजे होने वाली किसान महापंचायत में भागीदारी करेंगे। ये उठाई जा रही प्रमुख मांगें मलवाला ने बताया कि इस जागृति यात्रा के जरिए एमएसपी पर फसल खरीद की कानूनी गारंटी लागू करने, स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फार्मूले के आधार पर एमएसपी तय करने, सभी फसलों पर एमएसपी की घोषणा और खरीद व्यवस्था मजबूत करने, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि व डेयरी क्षेत्र को बाहर रखने की मांग की जा रही है। साथ ही किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करने की भी मांग उठाई गई है। उन्होंने कहा कि एक बार फिर केंद्र सरकार को जगाने के लिए यह कोशिश हो रही है।
अमेरिका और इजराइल के निशाने पर अब ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम नहीं, बल्कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान में तख्तापलट चाहते हैं। इसी के चलते शनिवार को ईरान पर हुए हमले के बाद खामेनेई को तेहरान से निकालकर किसी सुरक्षित जगह ले जाया गया। रिपोर्ट्स हैं कि ट्रम्प के सामने खामेनेई और उनके उत्तराधिकारियों को मारने का प्लान पेश किया गया है, जिस पर फैसला लेना बाकी है। नेतन्याहू भी मानते हैं कि खामेनेई की हत्या के बाद क्षेत्र में स्थिरता आ जाएगी। आखिर क्या है अयातुल्ला अली खामेनेई की कहानी, कैसे बने ईरान के सुप्रीम लीडर और अमेरिका-इजराइल उनके पीछे क्यों पड़े; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… ईरान में मॉडलिंग के दौर में पैदा हुए, 11 साल की उम्र में ‘मौलवी’ बने 19 अप्रैल 1939। ईरान का सबसे बड़ा धार्मिक शहर मशहद। एक मौलवी सैयद जावेद खामेनेई के घर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई का जन्म हुआ। वे 8 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। 4 साल की उम्र में खामेनेई को मकतब भेजा गया, जहां उन्होंने कुरान, अरबी और इस्लामी तालीम हासिल की। आयतुल्लाह अली खामेनेई अपनी किताब 'सेल नम्बर 14: द ऑटोबायोग्राफी ऑफ अयातुल्लाह खामेनेई' में लिखते हैं, '1950 के दशक में मेरा दाखिला मशहद के एक नए इस्लामी स्कूल में हुआ। मुझे क्लास में सबसे आगे की सीट पर बैठाया जाता था। मैं मैथ्स और इंग्लिश में अच्छा था और ब्लैकबोर्ड पर लिखे हर सवाल का जवाब सुलझा देता था। एक बार स्कूल में प्रोग्राम हुआ, जिसमें मैंने कुरान की आयतें पढ़कर सुनाईं। मेरी जमकर तारीफ हुई और फिर मैंने अपने पिता की तरह मौलवी बनने की राह चुनी।' इसके बाद वो ईरान के कोम शहर में गए, जहां उन्होंने अयातुल्लाह रूहोल्लाह खोमैनी से तालीम ली और 11 साल की कम उम्र में ही मौलवी बन गए। खामेनेई उस दौर के ईरान में बड़े हो रहे थे जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी का शासन था। शाह पंथनिरपेक्ष और पश्चिमी विचारों को बढ़ावा देने वाले राजा माने जाते थे। उस दौर के ईरान में मॉडलिंग, फिल्में, नाइट क्लब पार्टीज और वेस्टर्न कपड़े पहने का चलन था। खामेनेई बचपन में मौलवियों की पोशाक पहनकर अपने हमउम्र बच्चों के साथ सड़कों पर खेलते, तो लोग उनका मजाक उड़ाया करते थे। मोहर्रम में फिल्म दिखाने के विरोध से शुरू की राजनीति, खोमैनी के फॉलोअर बने 'सेल नम्बर 14' में खामेनेई लिखते हैं, '1950 के दशक में ईरान में पश्चिमी कल्चर अपने चरम पर था। उन दिनों मॉर्डनाइजेशन की हवा चल रही थी। हालांकि, मुहर्रम के महीने में और खासतौर से पहले 10 दिनों के लिए सभी सिनेमाघरों और फिल्मों पर रोक लगा दी जाती थी। लेकिन 1955 में सब बदल गया। शहर के गवर्नर ने मुहर्रम के 1 से 12 दिनों के बंद पर पाबंदी हटाने का आदेश जारी किया। इस फैसले का हम लोगों ने विरोध किया। यही फैसला हमारे अंदर चिंगारी बनकर भड़का।' खामेनेई ने किताब में आगे लिखा, ‘मैं, मेरे दोस्त और कुछ लोग इकट्ठा हुए और एक लेटर तैयार किया, जिसमें इस्लामिक गुरुओं से अच्छाई के रास्ते पर चलने और बुराई से बचने का आदेश लिखवाया। हमारे प्रिंटिग मशीन नहीं थी, इसलिए हमने हाथ से लिखकर कई सारी कॉपियां बनाईं। हर एक कॉपी 4 पेज की थी और इसे नकल करने में 2 घंटे लगते थे। यह मेरा राजनीति में पहला कदम था।’ 1960 के दशक में खामेनेई पर ईरान के धर्मगुरु रुहोल्ला खोमैनी का गहरा असर हुआ। खोमैनी ईरान के शासक की नीतियों और 1963 में 'व्हाइट रिवोल्यूशन' के खिलाफ खड़े हो गए थे, जिसके तहत ईरान को पश्चिमी देशों की तरह डेवलप करना था। खोमैनी को लगता था कि यह इस्लाम और ईरानी संस्कृति के खिलाफ है। इस्लाम और राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता और देश में विलायत-ए-फकीह यानी इस्लामी धर्मगुरुओं का शासन लाने की बात कही। खामेनेई इससे बहुत प्रभावित हुए। 1962-63 में खोमैनी ने शाह के खिलाफ खुलकर विरोध शुरू कर दिया। खामेनेई ने खोमैनी की बात को मशहद समेत कई शहरों में फैलाने में मदद की। 1963 में खामेनेई ने मशहद की एक मस्जिद में कहा, 'शाह का शासन इस्लाम और लोगों के खिलाफ है। हमें अपने धर्म और देश की हिफाजत करनी होगी।' खामेनेई को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इससे वे युवाओं और शाह के खिलाफ आंदोलनों में मशहूर हो गए। 1970 का दशक आते-आते खामेनेई राजनीति में माहिर हो गए। उनके गुरु खोमैनी को देश से निकाल दिया गया, तो खामेनेई ही उनके भाषण लोगों तक फैलाते रहे। खामेनेई ने एक सभा में खोमैनी का सीक्रेट टेप चलाया, जिसमें खोमैनी ने कहा, ‘शाह का शासन एक गैर-इस्लामी तानाशाही है और इसे उखाड़ फेंकना हर मुसलमान का फर्ज है।’ 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति आई और शाह की सरकार गिर गई। इस्लामी सत्ता आई, तो खामेनेई सरकार में शामिल हो गए फरवरी 1979... ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद खोमैनी पेरिस से वापस ईरान आए। नई सरकार बनाई और अपने करीबी लोगों को बड़े पदों पर नियुक्त किया। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद यानी रिवोल्यूशनरी काउंसिल में शामिल कर लिया। यह परिषद नई सरकार का आधार थी और प्रशासन को बेहतर करने का काम करती थी। उस समय सांसद और बाद में ईरान के राष्ट्रपति बने हसन रूहानी ने संसद में खामेनेई को उप रक्षामंत्री बनाने का प्रस्ताव देते हुए कहा था, 'हमें ऐसे इंसान की जरूरत है जो इस्लामी क्रांति के लिए आगे बढ़ता रहे और सैन्य मामलों में खोमैनी के नजरिए को बुलंद करे। सैयद अली खामेनेई इस जिम्मेदारी के लिए सबसे बेहतर हैं।' खामेनेई को उप रक्षामंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC का गठन करने में बड़ी भूमिका निभाई। IRGC आगे चलकर ईरान की सबसे ताकतवर फौज बनी। IRGC को बनाने का मकसद ऐसी सेना खड़ी करना था जो देश के लिए धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक मोर्चों पर लड़ सके। जो इस्लामिक राष्ट्र ईरान को न सिर्फ बाहरी खतरों, बल्कि देश के अंदर के मामलों को भी सुलझा सके। टेप रिकॉर्डर से खामेनेई की हत्या को कोशिश, दायां हाथ और कान गंवाया 1980 का दशक। ईरान और इराक के बीच जंग छिड़ी हुई थी। तेहरान की जुमा की नमाज के इमाम अयातुल्ला अली खामेनेई जंग के अग्रिम मोर्चे का मुआयना कर लौटे थे। शनिवार, 27 जून 1981 को खामेनेई अपने तय कार्यक्रम के तहत तेहरान की अबुजार मस्जिद गए। इसके बाद वे लोगों के सवालों के जवाब देने लगे। उनके सामने रखी टेबल पर कागजों का पुलिंदा जमा था, जिन पर सवाल लिखे हुए थे। इस बीच एक शख्स ने टेबल पर एक टेप रिकॉर्डर रख दिया। खामेनेई ने जवाब देना शुरू किया। एक मिनट के भीतर ही टेप रिकॉर्डर से सीटी की आवाज आने लगी और तेज ब्लास्ट हुआ। खामेनेई लहूलुहान हो गए। टेप रिकॉर्डर के अंदर लिखा था- 'इस्लामिक रिपब्लिक को फोरकान समूह का एक उपहार।' फोरकान समूह एक ईरानी उग्रवादी विपक्षी संगठन था, जो शिया इस्लामवादी विचारधारा को मानता था। इस समूह को सद्दाम हुसैन का समर्थन मिला हुआ था। सद्दाम ईरान में खोमैनी की सत्ता पलटना चाहता था और IRGC के मुखिया खामेनेई बीच में थे। खामेनेई की दाईं बांह, वोकल कॉर्ड्स और फेफड़े को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इलाज के लिए उन्हें दक्षिणी तेहरान के बहारलू हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। कई महीनों बाद वे ठीक हुए, लेकिन दाएं हाथ में हमेशा के लिए लकवा मार गया और एक कान से सुनाई देना बंद हो गया। इस हमले को लेकर एक बार खामेनेई ने कहा था, ‘अगर मेरा दिमाग और जीभ काम करे तो मुझे हाथ की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेरे लिए मेरा दिमाग और जीभ काफी है।’ बम धमाके में राष्ट्रपति राजाई की मौत हुई, खामेनेई तीसरे राष्ट्रपति बने 30 अगस्त 1981, दोपहर का समय। तेहरान में प्रधानमंत्री कार्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक बैठक चल रही थी। इसमें राष्ट्रपति मोहम्मद अली राजाई और प्रधानमंत्री मोहम्मद जवाद बहरोन भी शामिल थे। तभी MEK का सीक्रेट एजेंट मसूद कश्मीरी कमरे में दाखिल हुआ। khamenei.ir के मुताबिक, कश्मीरी ने कमरे में एक ब्रीफकेस रख दिया, जिसमें बम छिपा हुआ था। कुछ ही देर बाद कमरे में धमाका हुआ और वहां मौजूद सभी लोग मारे गए। राजाई और बहोरन की फौरन मौत हो गई, जिसके बाद सरकार में मुश्किलें बढ़ गईं। एरवंड अब्राहमियन की किताब 'खामेनेईनिज्म: एसे ऑन द इस्लामिक रिपब्लिक' के मुताबिक, देशभर में नए राष्ट्रपति की मांग जोर पकड़ने लगी। खामेनेई इस समय तक IRP के बड़े नेताओं में शामिल हो गए थे। इस वजह से खोमैनी और IRP के नेताओं ने नए राष्ट्रपति के लिए खामेनेई का नाम आगे किया। अकबर हाशमी राफसंजानी ने खामेनेई का नाम बढ़ाते हुए कहा, ‘सैयद अली खामेनेई ने क्रांति के लिए अपनी जान जोखिम में डाली है। वे खोमैनी के भरोसेमंद आदमी हैं और इस मुश्किल वक्त में देश की कमान संभाल सकते हैं।’ इस पर खोमैनी ने कहा, ‘हमें ऐसे नेताओं की जरूरत है जो इस्लामिक रिपब्लिक ईरान की हिफाजत करें। खामेनेई ने बार-बार यह साबित किया है।’ 2 अक्टूबर 1981 को देशभर में राष्ट्रपति के चुनाव हुए और 13 अक्टूबर को नतीजा आया। खामेनेई 95% वोटों से राष्ट्रपति पद का चुनाव जीते और ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने। शपथ लेते हुए खामेनेई ने कहा, ‘मैं इस्लामी क्रांति की हिफाजत और जनता की सेवा के लिए अपनी जान भी दे दूंगा।’ खामेनेई को ‘रहबर’ बनाने के लिए बदला संविधान 1985 में रहबर अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी ने हुसैन अली मोंतजरी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। लेकिन किसी बात से नाराज होकर फैसला वापस ले लिया। इसी बीच 3 जून 1989 को खोमैनी का निधन हो गया। अगली सुबह 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' की मीटिंग शुरू हुई। तिजोरी में रखा सीलबंद वसीयतनामा लाया गया। राष्ट्रपति खामेनेई ने करीब 2 घंटे में 35 पन्नों की वसीयत पढ़ी। इसके बाद अगले रहबर को लेकर चर्चा शुरू हुई। प्रस्ताव रखा गया कि 'शूरे-ए-रहबरी' यानी एक नेतृत्व परिषद बनाए या 'रहबरी-ए-फरदी' यानी एक व्यक्ति को पूरी कमान सौंपी जाए। नेतृत्व परिषद के लिए तीन ग्रुप बने, जिनमें से 2 के अध्यक्ष खामेनेई और एक के अध्यक्ष रफसंजानी थे। वोटिंग हुई तो 45 वोट 'एक व्यक्ति' पक्ष में और 23 खिलाफ आए। जब तय हो गया कि एक व्यक्ति को ही ईरान की कमान सौंपनी चाहिए तो ग्रैंड अयातुल्ला मोहम्मद-रजा गोलपायगानी और अली खामेनेई ने नॉमिनेशन किया। वोटिंग में खामेनेई को 60 वोट मिले, जबकि गोलपायगानी को महज 14 वोट मिले। यानी खामेनेई अगले रहबर चुन लिए गए। रहबर बनने के लिए जरूरी था कि व्यक्ति मरजा या अयातुल्ला हो। इस मियाद को खत्म करने के लिए ईरानी संविधान में संशोधन किया गया। 6 अगस्त 1989 को फिर से असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की मीटिंग हुई और खामेनेई को 64 में से 60 वोट मिले। खामेनेई के पक्ष में वोट देने वाले इमामी काशानी ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘खामेनेई को चुनने के अलावा हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं था। खामेनेई खुद सुप्रीम लीडर नहीं बनना चाहते थे, लेकिन रफसंजानी और मैं ये जानते थे कि हमें जल्द ही फैसला करना होगा, क्योंकि सद्दाम हुसैन की सेना ईरान के बॉर्डर पर थी।’ अमेरिकी थिंक टैंक 'कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस' के सीनियर फेलो करीम सादजादपुर के मुताबिक, इतिहास की इस दुर्घटना ने एक कमजोर राष्ट्रपति को शुरुआत में कमजोर सुप्रीम लीडर से सदी के पांच सबसे शक्तिशाली ईरानियों में से एक बना दिया। फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस के एसोसिएट प्रोफेसर एरिक लोब के मुताबिक, '1989 में ईरानी संविधान में संशोधन किया गया ताकि खामेनेई जैसे निचली श्रेणी के मौलवी को यह पद मिल सके। खोमैनी का उत्तराधिकारी बनने के बाद खामेनेई को रातों-रात एक महान अयातुल्ला बना दिया गया। खामेनेई भले ही लंबे समय से वफादार और सत्ता के अंदरूनी व्यक्ति थे, लेकिन उनमें खोमैनी जैसा करिश्मा और धार्मिक ताकत नहीं थी।’ देश में विरोधियों को कुचलने से लेकर पत्रकारों को प्रताड़ित करने, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और महिलाओं की आजादी को खत्म करने की वजह से खामेनेई पर अकसर सवाल उठते हैं। खामेनेई की जान के पीछे क्यों पड़े हैं इजराइल-अमेरिका? पिछले साल जून में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया। तब हल्ला हुआ कि ईरान में सत्ता परिवर्तन होना चाहिए। फिर 2025 के आखिर में ईरान में आंदोलन हुए, जिनमें भी खामेनेई को हटाने की मांग हुई। अमेरिका-इजराइल ने इसे सपोर्ट किया, लेकिन ईरानी सत्ता ने आंदोलन को कुचल दिया। अब फिर से ईरान पर हमले हुए हैं। ट्रम्प और नेतन्याहू ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात कही है। दोनों नेताओं ने कहा है कि अब ईरानी लोगों को आगे आकर अपने देश और भाग्य की बागडोर संभालनी चाहिए। दोनों नेताओं के टारगेट पर खामेनेई हैं। दरअसल, ईरान के हर जरूरी मुद्दे या विदेश नीतियों पर आखिरी फैसला सुप्रीम लीडर यानी खामेनेई ही लेते हैं। इजराइल का मानना है कि न्यूक्लियर प्रोग्राम और IRGC के खात्मे के लिए खामेनेई की हत्या जरूरी है। इसके साथ वहां सत्ता परिवर्तन भी होगा। जून 2025 में ट्रम्प ने भी धमकी देते हुए कहा था कि खामेनेई एक आसान निशाना है। हम उसे मारने वाले नहीं हैं, कम से कम अभी तो नहीं। रिपोर्ट्स हैं कि खामेनेई के बाद सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ईरान की सत्ता संभाल सकते हैं। खामेनेई ने हाल ही में लारीजानी की शक्तियां बढ़ाईं, ताकि वे जंग जैसे हालातों में ईरान स्थिति में वे सरकार चला सकें। हालांकि खामेनेई के निधन के बाद नए रहबर का चुनाव इतना आसान नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स हैं कि ईरान में सैन्य, राजनीतिक और धार्मिक लीडरशिप के बीच पावर टसल हो सकता है। वहीं तख्तापलट हुआ तो इस्लामिक क्रांति के बाद देश छोड़कर भागे ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी अपने पिता की गद्दी पर दावा कर सकते हैं। वे अभी अमेरिका में हैं। ट्रम्प के चुनाव जीतने के बाद रजा पहलवी ने कहा था कि ईरान में लोकतांत्रिक सत्ता वापस आनी चाहिए, जो पश्चिमी देशों के साथ समृद्ध होगा, इजराइल के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते रखेगा और अपने पड़ोसियों से दोस्ती करेगा। दरअसल, इजराइल और ईरान की रंजिश की कई बड़ी वजहें हैं… अमेरिकी थिंकटैंक मिडिल-ईस्ट इंस्टीट्यूट में ईरान प्रोग्राम के डायरेक्टर एलेक्स वतांका का कहना है, 'खामेनेई जितने जिद्दी हैं, उतने ही सतर्क भी हैं। यही वजह है कि वह इतने लंबे समय से सत्ता के केंद्र में बने हुए हैं।' ----------- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… जब ईरान ने 53 अमेरिकियों को बंधक बनाया: छुड़ाने गए 8 कमांडोज की लाश लौटी, 444 दिनों तक अमेरिका कैसे गिड़गिड़ाता रहा 46 साल पहले 4 नवंबर 1979 को ईरान के अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ। भीड़ ने दूतावास पर कब्जा कर लिया और अमेरिकी अधिकारियों और लोगों को बंधक बना लिया। यहीं से शुरू हुई इतिहास की सबसे बड़ी 'होस्टेज क्राइसिस'। पूरी खबर पढ़िए…
सेंट पॉल स्कूल और क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़े शहर के महेश (मैक्स) गनोरकर अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना के चौथे कांग्रेशनल डिस्ट्रिक्ट से नवंबर 2026 में चुनाव लड़ने वाले हैं। भारतीय मूल के गनोरकर न सिर्फ अमेरिकी राजनीति में 18 सालों से मजबूती से डटे हैं, बल्कि अमेरिकी लोगों को भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व के बारे में बिना किसी शास्त्र प्रवचन के आसान भाषा में समझा और सिखा भी रहे हैं। इसके लिए वे एक किताब पर भी काम कर रहे हैं, जो जल्द ही अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं में भी प्रकाशित की जाएगी। हाल ही में इंदौर आए गनोरकर ने भास्कर से चर्चा में बताया अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के साथ वर्ष 2008 से जुड़े हैं। तब से अब तक उन्होंने अपनी राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से समाजवाद के खिलाफ जमकर आवाज उठाई है। उन्होंने लोगों को अध्यात्म, धर्म, अपनी पहचान और अपने परिवार से जुड़कर रहने का संदेश दिया है। गनोरकर कहते हैं कि अमेरिका को श्रेष्ठ बनाने के लिए जरूरी है कि सभी रंग, वर्ग और संस्कृतियों के लोग एक साथ सामंजस्य बनाकर जिएं। गनोरकर खुद भी अमेरिका में रहकर भारतीय संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं। 1996 में भारतीय मूल की मॉरेशियस महिला से विवाह किया, जिसके बाद उन्होंने तीन बच्चों का ख्याल रखने के लिए नौकरी छोड़कर घर पर रहने का निर्णय लिया। घर संभालते हुए उन्होंने राजनीति में कदम रखने का निर्णय लिया। गनोरकर कहते हैं कि उन्होंने बच्चों को भारतीय परंपरा के अनुसार हर सुबह उठकर पूजा करने के बाद ही घर से निकलने की शिक्षा दी है। साथी हर महीने पूर्णिमा पर उनके निवास पर सत्यनारायण कथा आयोजित की जाती है। गनोरकर मूलतः अमरावती के पास के छोटे से गांव दरियापुर के रहने वाले प्रतिष्ठित जमींदार परिवार के वंशज हैं, जहां पर उनका खेती-बाड़ी का बड़ा काम है। टैरिफ का विरोध, क्योंकि अंततः ग्राहकों को चुकाना पड़ता है मूल्य गनोरकर बताते हैं कि वे भारत और अमेरिका के बीच के संबंधों में अत्यधिक टैरिफ लगाने के सख्त खिलाफ हैं, क्योंकि किसी भी प्रकार का ट्रेड टैरिफ का भार अंततः आम जनता पर ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे चाहते हैं कि उनकी पार्टी के नेता और अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप पुनः विचार करें और टैरिफ को खत्म करें, जिससे फ्री और फेयर ट्रेड स्थापित किया जा सके। नवंबर में होंगे यूएस कांग्रेस के जनरल इलेक्शन नवंबर में होने वाले जनरल इलेक्शन भारतीय संसद व्यवस्था में लोकसभा चुनाव के समान हैं। हालांकि, अमेरिका में प्रेसीडेंट का चुनाव अलग से होता है। यूएस हाउस ऑफ कांग्रेस में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए चयनित कांग्रेस मैन का कार्यकाल 2 वर्ष का होता है। रिपब्लिक पार्टी की ओर से गनोरकर को पिछले महीने टिकट मिला। अब उनके समक्ष डेमोक्रेटिक पार्टी से कौन चुनाव लड़ेगा, इसका निर्णय 3 मार्च को होने वाले डेमोक्रेटिक प्राइमरी इलेक्शन में होगा। डेमोक्रेटिक पार्टी से वैलेरी फूशी, निदा आलम और मैरी पैटरसन टिकट की दौड़ में हैं। वैलेरी फूशी वर्तमान में इस सीट पर निर्वाचित हैं।
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव-मध्य पूर्व में बिगड़े हालात और सोशल मीडिया पर छिड़ी भविष्यवाणी की बहस
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया सैन्य हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद दुनिया भर में चिंता का माहौल है। जानिए जमीन पर क्या स्थिति है और सोशल मीडिया पर चल रही भविष्यवाणियों के पीछे की सच्चाई क्या है।
ईरान इजराइल अमेरिका युद्ध: ज्योतिष में किसकी जीत का संकेत? जानिए भविष्यवाणी
ज्योतिषीय गणना और ग्रहों की चाल के आधार पर फरवरी-मार्च 2026 का समय पूरी दुनिया और विशेषकर मध्य-पूर्व (Middle East) के लिए बहुत उथल-पुथल वाला दिखाई दे रहा है। यहां ज्योतिष के नजरिए से इजराइल-ईरान या अमेरिका ईरान युद्ध और वैश्विक स्थिति का विश्लेषण ...
भिवानी पुलिस ने अमेरिका भेजने के नाम पर 52 लाख 80 हजार रुपए की धोखाधड़ी करने के मामले में 2 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 3 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। भिवानी के गांव मित्ताथल निवासी मुकेश ने थाना सदर में दी शिकायत में बताया था कि उसका बेटा विक्रांत भिवानी में खेल की प्रैक्टिस करता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात बलकार नामक व्यक्ति से हुई, जो भीम स्टेडियम भिवानी में प्रैक्टिस करता था। आरोपी बलकार ने बताया कि उसका सगा भाई रमेश लोगों को अमेरिका भेजने का काम करता है और वह उनके बेटे विक्रांत को भी अमेरिका भेज सकता है। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग समय पर उनसे कुल 52 लाख 80,000 रुपए ले लिए और उनके बेटे को डंकी रूट से अमेरिका भेज दिया। वर्ष 2025 में डंकी रूट से अमेरिका भेजे जाने के बाद उसके बेटे को अमेरिका से भारत डिपोर्ट कर दिया। इस प्रकार आरोपियों ने फर्जी तरीके से विदेश भेजने के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी की। शिकायत के आधार पर थाना सदर में 7 अक्टूबर 2025 को धारा 420, 467, 468, 471, 120-B के तहत केस दर्ज किया। फतेहाबाद निवासी सगे भाई हिसार से गिरफ्तारजिला अनुसंधान इकाई के सहायक उप निरीक्षक सुरेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दोनों मुख्य आरोपी सगे भाइयों को हिसार के उकलाना मंडी से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जिला फतेहाबाद के गांव हंसावाला निवासी रमेश व बलकार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश कर तीन दिन का पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की। उनकी निशानदेही पर 25 हजार रुपए बरामद किए। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी रमेश प्राइवेट बॉक्सिंग एकेडमी चलाने का काम करता है, जबकि आरोपी बलकार गाड़ियां खरीदने-बेचने का कार्य करता है। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
ईरान पर अमेरिका-इजराइल का बड़ा हमला : क्या मोदी की यात्रा और 'स्ट्राइक' की टाइमिंग महज इत्तेफाक है?
Israel Iran War 2026: पश्चिम एशिया (West Asia) के समीकरण रातों-रात बदल गए हैं। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य ऑपरेशन इजराइल और अमेरिका का एक 'संयुक्त हमला' है। इस हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, ...
जंग का आगाज, इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तेहरान में धमाके, इजराइल में इमरजेंसी, अमेरिका ने कमर कसी
इजरायल और ईरान के बीच तनाव अचानक चरम पर पहुंच गया है। इजरायल ने ईरान में बड़ा हमला कर दिया है। तेहरान समेत ईरान के कई शहरों में कई जगह धमाके सुने गए हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कैट्ज ने देशभर में तत्काल राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा वार्ता बेनतीजा, ईरान परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध कायम, ट्रंप नाखुश
मध्यस्थता कर रहे ओमान ने बातचीत को “सकारात्मक” बताया है, लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूदा मतभेद दूर होने के स्पष्ट संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बरकरार है और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
इंदौर-पीथमपुर स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) लगातार धमाल मचा रहा है। एसईजेड कमिश्नर कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 के 12 महीनों में यहां की करीब 50 मल्टीप्रोडक्ट कंपनियों ने कुल 13,754 करोड़ रुपए (13,700 करोड़ से ज्यादा) का निर्यात किया है। हालांकि यूक्रेन- रूस, इजराइल-फिलीस्तीन और ईरान- अमेरिका के बीच आंशिक युद्ध का अंतर्राष्ट्रीय बाजार मतलब एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बिजनेस पर असर पड़ता नजर आ रहा है। एसईझेड कमिश्नर कार्यालय इन्दौर के अनुसार पिछले 2 साल में हुए एक्सपोर्ट में सिर्फ 171.21 करोड़ रुपए की ही बढ़ोतरी हो पाई है। साल 2025 में 12 महीने में 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक एसईझेड में संचालित 50 से ज्यादा मल्टीप्रोडक्ट कम्पनीज ने 13 हजार 754.53 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट किया है, जबकि इसके पहले साल 2024 में इन्हीं कंपनियों ने 13 हजार 583.32 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट किया था। इस तरह साल 2024 और 2025 के 24 महीनों में एसईझेड कम्पनियों ने जितना एक्सपोर्ट किया है, उस हिसाब से पिछले साल 2025 में सिर्फ 171.21 करोड़ रुपए का ज्यादा एक्सपोर्ट हुआ, जो कि पिछले अन्य सालों की अपेक्षा वाकई कम है। इन कम्पनियों ने यूएसए, यूएई सहित कई देशों में एक्सपोर्ट किया लगभग 50 कम्पनियों ने 13 हजार 500 करोड़ से ज्यादा रुपए का एक्सपोर्ट किया है। इनमें अमूल्य एक्सपोर्ट्स, एशियन मरीन सर्विसेज, एडवांस्ड एंजाइम्स टेक्नोलॉजीज, अजंता फार्मा, अपूर्वा इंडिया, बर्गवर्फ ऑर्गेनिक्स इंडिया, क्रिएटिव प्रोपैक, सिप्ला, कमिंस टेक्नोलॉजीज इंडिया, कमर्शियल सिन बैग्स, एमरल्ड टोबैको फ्लेक्सिटफ इंटरनेशनल, फेमी केयर, गोल्ड फिलामेंट्स, ग्लेनमार्क जेनेरिक्स, जियोटेक वर्ल्डवाइड (नियो कॉर्प इंटरनेशनल), इप्का लैबोरेटरीज, इनोवेटिव क्लैड सॉल्यूशंस, आईटीएल इंडस्ट्रीज, आईआईटीसी ऑर्गेनिक इंडिया, जश इंजीनियरिंग, जय कॉर्प, ख्याति फूड्स, कल्टेक्स, कुसुम हेल्थकेयर, ल्यूपिन, मायलान लैबोरेटरीज, मिशन विवाकेयर, मेडजेल फार्मास्यूटिकल्स, यू टेक पाइप्स, न्यू टेक एब्रेसिव्स, पिरामल हेल्थ केयर, प्रतिभा सिंटेक्स, परफेक्ट यूटिलिटीज, पीएसए केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स, रेडवुड पैकेजिंग्स, एसआरएफ, शक्ति पंप्स इंडिया, सोलर इंटरनेशनल, सिंगल कंक्रीट सेफफ्लेक्स इंटरनेशनल श्रीकृष्णा वेल पैक, सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शंस, सिम्बायोटेक फार्मालैब, सम्यक इंटरनेशनल, शंकर सोया कॉन्सेप्ट्स श्रीजी पॉलिमर्स (इ) एस.के. ट्रेडर्स सार्क्स मेटल, श्री तिरुपति बालाजी एफआईबीसी सिग्मा केमट्रेड स्टीमहाउस इंडिया, वीई कमर्शियल व्हीकल्स, टीजीडब्ल्यू मशीन नाइव्स, टफनेट्स इंडिया यह कम्पनियां प्रमुख हैं। पिछले सालों से तुलना और प्रभाव • साल 2024 में इन कंपनियों का निर्यात सिर्फ 171.21 करोड़ रुपए रहा था (जिसमें वैश्विक युद्ध और अन्य चुनौतियों का असर दिखा)।• 2025 में यह आंकड़ा 13,754.53 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में कई गुना ज्यादा है। इंदौर के लिए गौरव की बात पीथमपुर SEZ इंदौर को “डेट्रॉइट ऑफ इंडिया” की तरह मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। यहां 572 हेक्टेयर में फैले जोन में करीब 59 यूनिट्स हैं, जिनमें से 22 फार्मा सेक्टर की हैं। फार्मा निर्यात में अमेरिका प्रमुख बाजार है। कंपनियां अपनी कैपिबिलिटी बढ़ा रही आईटी एक्सपर्ट हेमंत पवार ने बताया कि इंदौर में कंपनियां अपनी कैपिबिलिटी बढ़ा रही है, अभी यहां बाजार खुला है। पहले इंदौर में चार कंपनियां थी, अब कई नई कंपनियां है। कंपनियां जो वर्तमान में है, वे अपना वर्क फोर्स बढ़ा रही है। कंपनियों को विश्वास होने लगा है कि नए शहरों में संभावनाएं है।
25 मई 2024 की बात है, जब अमेरिकी एक्टर जॉनी वेक्टर अपनी शूटिंग खत्म करके अपनी को-एक्टर के साथ घर लौट रहे थे। दोनों जैसे ही लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन पहुंचे, तभी चार लोग अचानक उनके पास आ गए और उनकी कार में चोरी करने की कोशिश करने लगे। शुरुआत में जॉनी कुछ समझ नहीं पाए कि आखिर क्या हो रहा है, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनकी कार में चोरी की जा रही है, तो उन्होंने अपनी को-एक्टर को बचाने की कोशिश की। उन्होंने अपनी साथी को अपने शरीर से ढक लिया। तभी गुस्से में आए चोरों ने गोली चला दी, जो सीधे जॉनी को लगी। आनन-फानन में जॉनी को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। बड़ी बात यह है कि जॉनी की मौत के तीन हफ्तों बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए। क्या जॉनी की हत्या सिर्फ चोरी की घटना के तहत हुई या इसके पीछे कोई और साजिश थी? और दूसरा सवाल यह कि आखिर जॉनी की मौत के तीन हफ्ते बाद उनका अंतिम संस्कार क्यों किया गया। आज अनसुनी दास्तानें के चैप्टर-3 में पढ़िए अमेरिकी एक्टर जॉनी वेक्टर की मौत की पूरी कहानी… जॉनी वेक्टर का जन्म 31 अगस्त 1986 को अमेरिका के साउथ कैरोलिना में हुआ था। उनके दो भाई लांस और ग्रांट हैं। जॉनी का बचपन यहीं बीता और उन्होंने 2004 में अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में बैचलर ऑफ साइंस (B.S.) और स्पैनिश में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री हासिल की। जॉनी दिखने में काफी स्मार्ट और आत्मविश्वासी थे। पढ़ाई के साथ-साथ उनका झुकाव एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों की ओर अधिक था। वे हमेशा कुछ अलग करना चाहते थे। उनके मन में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने की इच्छा लगातार मजबूत होती गई। आखिरकार उन्होंने अपने दिल की सुनी और एक्टिंग में करियर बनाने के लिए लॉस एंजेलिस का रुख किया। हालांकि, यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। पहला बड़ा मौका मिलने से पहले उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। लॉस एंजेलिस पहुंचने पर उनके पास कोई काम नहीं था, इसलिए अपना खर्च चलाने के लिए उन्हें रेस्तरां और बार में नौकरी करनी पड़ी। नौकरी के साथ-साथ वे लगातार ऑडिशन देते रहे और इस दौरान कई बार रिजेक्शन का सामना भी किया। आखिरकार साल 2007 में उन्हें अपने करियर का पहला बड़ा ब्रेक मिला। उन्होंने टीवी शो आर्मी वाइव्स से अपना डेब्यू किया। यह शो उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि इसी के जरिए उन्हें वह पहचान मिलनी शुरू हुई, जिसकी हर कलाकार को चाह होती है। इसके बाद उनके करियर ने रफ्तार पकड़ ली। 2020 से 2022 तक उन्होंने लोकप्रिय सीरीज जनरल हॉस्पिटल में ब्रैंडो कॉर्बिन की भूमिका निभाई, जिससे उन्हें और भी बड़ी पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने सीरीज Siberia में भी अभिनय किया। जॉनी ने टीवी के साथ-साथ फिल्मी दुनिया में भी कदम रखा और वहां भी अपनी अलग पहचान बनाई। जैसे ही जॉनी को इंडस्ट्री में पहचान मिलने लगी, उसी दौरान उनकी मुलाकात एक्ट्रेस और डायरेक्टर टीसा से हुई। पहले दोनों अच्छे दोस्त बने और फिर धीरे-धीरे एक-दूसरे को डेट करने लगे। साल 2010 में दोनों रिलेशनशिप में आए, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल सका और 2013 में दोनों अलग हो गए। हालांकि, जॉनी ने अपनी पर्सनल लाइफ को कभी भी अपनी प्रोफेशनल लाइफ पर हावी नहीं होने दिया और वे लगातार अपने काम पर ध्यान केंद्रित करते रहे। फिर आया 25 मई साल 2024 यह वो तारीख और साल था, जिसमें जॉन ने सोचा भी नहीं होगा कि उन्हें अपनी इस चकाचोंद भरी दुनिया को छोड़़ना पड़ेगा। दरअसल, उस रात जॉन ने अपनी शूटिंग खत्म की और फिर वह सेट से निकल गए। उनके साथ उनकी को-स्टार भी थीं। दोनों जैसे ही लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में पिको बुलेवार्ड और होप स्ट्रीट के कोने पर पहुंचे ही थे कि तभी अचानक वहां तीन लोग आ गए। शुरुआत में जॉन को लगा कि शायद उनकी कार को उठा कर ले जाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन जब उन्हें जॉन को पता चला कि उनकी कार टोयोटा प्रियस से कैटेलिटिक कन्वर्टर चोरी करने की कोशिश की जा रही है, तो सबसे पहले उन्होंने स्थिति को समझते हुए अपनी को-स्टार की जान बचाने की कोशिश की और उसे अपने शरीर से ढकने की कोशिश की। लेकिन चोर को पता चल गया था कि जॉन को उनके बारे में पता चल गया है तो उन्होंने जॉन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद तीन आरोपी मौके से फरार हो गए। जबकि जॉन को आनन-फानन में हॉस्पिटल में लाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो गई थी। जॉन की मौत के लगभग तीन हफ्ते बाद यानी 16 जून 2024 को उनका अंतिम संस्कार समरविल बैपटिस्ट चर्च में किया गया। इस तीन हफ्ते के अंतर के पीछे कई कारण थे। सबसे पहले हत्या की घटना की पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी था, ताकि सभी कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी हो सके। इसके अलावा, उनके परिवार और करीबी रिश्तेदार कई अलग-अलग शहरों और राज्यों में रहते थे, इसलिए उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए समय दिया गया। इसके साथ ही चर्च और अंतिम संस्कार के कार्यक्रम की व्यवस्था भी करने में समय लगा। इन सभी कारणों के चलते जॉन का अंतिम संस्कार तीन हफ्तों के बाद किया गया, ताकि परिवार, दोस्तों और फैंस उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने सकें। यूं सरेआम जॉन की हत्या ने हर किसी को चौंका दिया था सबके मन में एक ही सवाल था कि आखिर दिनदहाड़े चोर कैसे किसी व्यक्ति की जान ले सकते हैं और कोई जानी मानी हस्ती को लेकर कोई प्रोटेक्शन क्यों नही हुई। कई ऐसे सवाल थे जो जॉन के परिवार के साथ ही उनके फैंस भी जानना चाहते थे। ऐसे में पुलिस के ऊपर भी इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने का और आरोपियों की गिफ्तारी का दबाब बनता जा रहा था। इसी दौरान फिर 15 अगस्त 2024 को जॉन की मौत के संबंध में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद जॉनीज माइल फाउंडेशन की स्थापना जॉन वॉक्टर के परिवार और उनके दोस्तों ने की, ताकि एक्टर की विरासत का सम्मान करने और दूसरों की मदद करने के उनके जुनून को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। इस फाउंडेशन का उद्देश्य उन परिवारों का सपोर्ट करना है जो किसी त्रासदी का सामना कर रहे हैं, और जरूरतमंद लोगों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है। फाउंडेशन धन जुटाने और जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिनमें वार्षिक जॉनीज माइल गोल्फ क्लासिक भी शामिल है। ये कार्यक्रम न केवल जॉनी के जीवन का उत्सव मनाते हैं, बल्कि समुदाय को एक साझा उद्देश्य के समर्थन में एक साथ भी लाते हैं। अपने प्रयासों के माध्यम से, जॉनीज़ माइल फ़ाउंडेशन सकारात्मक प्रभाव डालने और जॉनी की भावना को जीवित रखने का प्रयास करता है।
रेवाड़ी में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के किसानों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने इस समझौते को भारतीय कृषि के लिए हानिकारक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उनका आरोप है कि यह डील भारतीय किसानों को बर्बाद कर देगी। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की। उन्होंने शहर के अग्रसेन चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला भी फूंका। किसान नेताओं का कहना है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या शून्य होने से सस्ते आयात के कारण देसी फसलों, डेयरी और पोल्ट्री का बाजार प्रभावित होगा। इससे किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। 2020 की तर्ज पर आंदोलन करने की चेतावनी किसान नेता समय सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 23 मार्च तक इस डील को रद्द नहीं किया, तो 2020 की तर्ज पर एक बड़ा किसान आंदोलन शुरू किया जाएगा। किसान नेताओं ने भाजपा और विपक्षी दलों के नेताओं से भी अपील की कि वे इस मुद्दे पर किसानों के साथ मिलकर सरकार पर दबाव बनाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह डील विदेशी दबाव में ली गई है और इसमें किसानों की राय नहीं ली गई, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को खतरा हो सकता है।
कुरुक्षेत्र जिले में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट गया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) चढूनी ग्रुप ने रोष मार्च निकाला। साथ ही केंद्र सरकार को जल्द डील वापस नहीं लेने पर बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी। रोष मार्च थीम पार्क से शुरू हुआ और पुराने बस अड्डे तक गया। इस दौरान सड़कों पर किसानों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। किसानों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री के पुतले जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। किसान नेताओं का कहना है कि यह ट्रेड डील किसानों के हितों पर चोट करेगी। इससे कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान होगा। अमेरिका के इशारे पर चल रही सरकार भाकियू चढूनी के कार्यकारी अध्यक्ष कर्म सिंह मथाना ने कहा कि यह डील सिर्फ किसानों के लिए नहीं, बल्कि इंडस्ट्री और मजदूरों के लिए भी बड़ा झटका है। सरकार की नीतियां अब अमेरिका के इशारे पर चल रही हैं। यह ट्रेड डील भी किसानों को बर्बाद कर देगी। सरकार की अपनी कोई नीति बची ही नहीं है। मोदी-ट्रंप का यारना किसानों के खिलाफ कर्म सिंंह ने कहा कि कृषि हमारा सबसे बड़ा सेक्टर है। यह डील दोनों देशों के बीच बंद होनी चाहिए। पहले अमेरिकी सामान जीरो प्रतिशत ड्यूटी पर आता था। अब कुछ चीजों पर 18 प्रतिशत लगाया है। अमेरिकी सब्सिडी वाले कृषि उत्पाद भारत में सस्ते दाम पर आएंगे। इससे यहां की फसलों के रेट गिरेंगे और किसानों की कमाई घटेगी और रोजगार पर असर पड़ेगा। डील में किसानों से नहीं ली कोई राय आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस डील को के लिए किसानों से पूछा तक नहीं है। अल्टीमेटम दिया कि अगर डील वापस नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा। 10 मार्च को ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। यह हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी और उत्तराखंड में होगा। इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो 23 मार्च को पिपली की अनाज मंडी में बड़ी किसान रैली होगी।
सुपौल लोकसभा क्षेत्र के सांसद दिलेश्वर कामैत को भारत और अमेरिका के बीच मजबूत, सकारात्मक तथा व्यापारिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गठित भारत-अमेरिका (USA) संसदीय मैत्री संघ का सदस्य नामित किया गया है। यह नामांकन 18वीं लोकसभा की अवधि के लिए किया गया है। इस संबंध में लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि संसद में अमेरिका के साथ संसदीय मैत्री समूह (Parliamentary Friendship Group) का गठन किया गया है। पत्र के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सांसद दिलेश्वर कामैत को भारत-अमेरिका संसदीय मैत्री संघ का सदस्य मनोनीत किया गया है। कूटनीतिक संबंध हुए है मजबूत इस आशय की आधिकारिक सूचना निदेशक एल.वी. रमणा द्वारा प्रेषित की गई है। पत्र में समूह की संरचना की प्रति भी संलग्न होने की जानकारी दी गई है। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक, आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। ऐसे में संसदीय मैत्री संघ की भूमिका दोनों देशों के सांसदों के बीच संवाद, सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में अहम मानी जाती है। इस मंच के माध्यम से व्यापार, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान होगी मजबूत सांसद के इस उपलब्धि पर सुपौल लोकसभा क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय युवा समाजसेवी मयंक, उमेश गुप्ता, जगरनाथ कामत सहित स्थानीय लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और सम्मान का विषय बताया है। लोगों का कहना है कि इससे न केवल सुपौल, बल्कि बिहार की भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मजबूत होगी। नागरिकों ने आशा जताई कि सांसद कामैत इस मंच के जरिए क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को भी प्रभावी ढंग से उठा सकेंगे।
राजस्थान में केसर? सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन ये सच है। हालांकि, ये केसर कश्मीर की वादियों वाला केसर नहीं है। ये है अमेरिकन केसर। जिसका इस्तेमाल फूड आइटम में नेचुरल कलरिंग के लिए किया जाता है। इस केसर की खेती की शुरुआत की है राजसमंद के एक किसान ने। परंपरागत खेती छोड़कर ये किसान एक ऐसी ‘जड़’ की भी खेती रहा है जिसकी डिमांड विदेशों तक है। ये जड़ है अश्वगंधा। खेती में किए गए नवाचार से किसान को इस साल 10 लाख रुपए तक की कमाई का अनुमान है। म्हारे देश की खेती में आज बात राजसमंद के झोर गांव के किसान की … आमेट उपखंड के झोर गांव के रहने वाले किसान रामकिशोर (52) 10वीं पास है। पिछले लगभग 25 वर्षों से वे परंपरागत खेती करते आ रहे थे। गेहूं, मक्का और अन्य सामान्य फसलें बोते रहे। लेकिन बढ़ती लागत और घटती आमदनी के बीच संतुलन बनाना कठिन होता जा रहा था। मेहनत भरपूर थी, लेकिन मुनाफा उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल रहा था। इसलिए इस बार कुछ अलग करने का फैसला किया। जानें- कैसे मिला औषधीय खेती का नया रास्ता किसान बताते हैं - साल 2025 के जून महीने में वे घूमने के लिए मध्यप्रदेश गए थे। इसी दौरान उन्हें नीमच की प्रसिद्ध मंडी देखने का अवसर मिला। वहां उन्होंने कई नई और औषधीय फसलें देखीं, जो पारंपरिक खेती से बिल्कुल अलग थीं। स्थानीय किसानों ने बताया कि कम पानी में भी अच्छी आमदनी देने वाली खेती संभव है। राजसमंद क्षेत्र की काली और पीली मिट्टी में नई फसल चुनना आसान नहीं था। सबसे बड़ी समस्या अच्छी गुणवत्ता का बीज मिलना भी थी। मंडी में ‘सिम पुष्टि’ अश्वगंधा और अमेरिकन केसर या अडक केसर का बीज सस्ते दाम पर उपलब्ध था, लेकिन उन्होंने जल्दबाजी नहीं की। पहले अनुभवी किसानों से सलाह ली और फिर बेहतर गुणवत्ता का बीज खरीदा। अश्वगंधा का 28 किलो बीज 600 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदा, जिस पर करीब 17 हजार रुपए खर्च हुए। वहीं अमेरिकन केसर (अड़क/कुसुम) का 9 किलो बीज 400 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदा, जिसमें लगभग 3600 रुपए खर्च आए। उनके अनुसार शुरुआत में बीज पर खर्च ज्यादा लगा, लेकिन यह निवेश आगे चलकर मुनाफे में बदलने वाला है। छिड़काव विधि से बुवाई, कम पानी में ज्यादा कमाई संभव रामकिशोर बताते हैं - अश्वगंधा और अमेरिकन केसर दोनों कम पानी की फसलें हैं, इसलिए पानी की कमी वाले क्षेत्र के लिए बेहद उपयुक्त हैं। खास बात यह भी है कि अश्वगंधा की फसल को जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते। इसकी जड़, तना और पत्तियां तीनों औषधीय उपयोग में आती हैं, जिससे बाजार में इसकी मांग बनी रहती है। खेत तैयार करने के लिए उन्होंने प्रति बीघा दो ट्रॉली गोबर खाद डाली। इसके बाद दो बार जुताई कर खेत को समतल किया और क्यारियां बनाई। बुवाई छिड़काव विधि से की जाती है, जिसमें एक बीघा में लगभग 4 किलो बीज लगता है। जड़ों में दीमक लगने का खतरा, बीजोपचार जरूरी अश्वगंधा की जड़ों में दीमक लगने का खतरा रहता है, इसलिए बीज को पहले दवा से उपचारित किया जाता है और सुखाने के बाद छिड़काव किया जाता है। बुवाई के बाद पहली सिंचाई की जाती है, फिर पांच दिन बाद दूसरी और 12 दिन बाद तीसरी सिंचाई दी जाती है। चौथी सिंचाई लगभग 45 दिन बाद करनी होती है। करीब 120 दिन में पौधा तैयार हो जाता है और इसकी ऊंचाई लगभग ढाई फीट तक पहुंचती है। 35 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मिलता है भाव रामकिशोर बताते हैं - मुख्य जड़ का बाजार भाव करीब 35 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मिल जाता है, जबकि जड़ों के तार 14 से 15 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिकते हैं। उनके अनुमान के अनुसार एक बीघा में करीब 3 क्विंटल जड़ उत्पादन संभव है और कुल उत्पादन लगभग 21 क्विंटल तक पहुंच सकता है। इससे करीब साढ़े सात लाख रुपए तक की कमाई की उम्मीद है। कोरोना के बाद अश्वगंधा के प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ी है। ये प्रोडक्ट इंडिया से यूरोप, अमेरिका तक भेजे जा रहे हैं। अंकुरण तेज करने की खास तकनीक रामकिशोर ने अपनी खेती में एक विशेष तकनीक भी अपनाई। यदि बीज को 24 घंटे पानी में भिगोकर, फिर उपचारित कर सुखाकर बोया जाए तो केवल 7 दिन में अंकुरण हो जाता है। सामान्य विधि में यही प्रक्रिया लगभग 25 दिन लेती है। इस तकनीक से समय की बचत होती है और पौधों की बढ़वार भी तेज होती है, जिससे पूरी फसल अधिक स्वस्थ और समान रूप से विकसित होती है। अमेरिकन केसर से फूल और बीज दोनों में कमाई किसान रामकिशोर बताते हैं - अमेरिकन केसर की खेती भी कम पानी में अच्छी उपज देती है, इसलिए उन्होंने इसे अश्वगंधा के साथ अपनाया। एक बीघा खेत के लिए करीब 3 किलो बीज पर्याप्त रहता है। बुवाई से पहले खेत में गोबर खाद डालकर रोटावेटर चलाया जाता है, फिर प्लाऊ से जमीन को समतल किया जाता है ताकि बीज समान रूप से फैल सके। इसके बाद छिड़काव विधि से बुवाई कर पहली सिंचाई की जाती है, दूसरी सिंचाई 10 दिन बाद और फिर 30-30 दिन के अंतर से दो और सिंचाई दी जाती हैं। पौधे को एक फीट की दूरी पर लगाने से अच्छी ग्रोथ पौधे निकलने के बाद उन्हें लगभग एक-एक फीट की दूरी पर रखा जाता है, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। यह पौधा लगभग चार फीट तक ऊंचा हो जाता है और करीब 120 दिन में फूल आना शुरू हो जाते हैं। शुरुआत में फूल पीले रंग के होते हैं, लेकिन पकने पर लाल हो जाते हैं। लाल होने पर ही तुड़ाई की जाती है। फूल और बीज से ढाई लाख रुपए कमाई का अनुमान रामकिशोर बताते हैं कि तुड़ाई के बाद फूलों को धूप में नहीं बल्कि छाया में सुखाया जाता है, क्योंकि तेज धूप में उनका रंग फीका पड़ जाता है और बाजार भाव कम हो जाता है। एक बीघा खेत से लगभग 50 किलो फूल प्राप्त होते हैं, जिनका बाजार भाव 800 से 1200 रुपए प्रति किलो तक मिल जाता है। इससे करीब डेढ़ लाख रुपए तक आय होने का अनुमान है। वहीं इसी फसल से लगभग 4 क्विंटल बीज भी निकलता है, जिसका भाव करीब 90 रुपए प्रति किलो तक मिल जाता है और इससे करीब एक लाख रुपए की अतिरिक्त कमाई संभव है। इस तरह अमेरिकन केसर से कुल मिलाकर लगभग ढाई लाख रुपए तक की आय की उम्मीद बनती है। किसान करने लगे बीज की बुकिंग रामकिशोर बताते हैं - उनकी फसल को देखने के लिए आसपास के किसान लगातार खेत पर पहुंच रहे हैं। कई किसानों ने तो बीज के लिए एडवांस बुकिंग भी कर रहे हैं। यदि स्थानीय किसान भी इस तरह की औषधीय खेती अपनाएं तो कम पानी में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। --- खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... कोरोना में नौकरी छूटी, चिया की फसल ने बदली जिंदगी:सही बीज की तलाश में लगे 2 साल, अब 50 लाख की कमाई की उम्मीद कभी टेक्सटाइल फैक्ट्री में मशीनों की फिटिंग करने वाला युवक आज चिया सीड की खेती से लाखों रुपए कमा रहा है। पांच साल की उम्र में उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। पूरी खबर पढ़िए
आपने ड्रग्स तस्करी, सोना-चांदी या हथियारों की तस्करी के बारे में खूब सुना होगा, लेकिन क्या कभी ‘डीएनए तस्करी’ के बारे में सुना? एकेडमिक रिसर्च की आड़ में ये तस्करी हो रही है। भास्कर खुलासा कर रहा है- राजस्थान के आदिवासियों का ‘जेनेटिक कोड’ अमेरिका की बड़ी फार्मा कंपनियों के पास पहुंच गया है, प्रिसिजन-टारगेटेड मेडिसिन बनाने की तैयारी है। इसकी भनक न तो सरकार को है ना ही उन आदिवासियों को जिनके ब्लड सैंपल लिए गए। इनमें सहरिया, भील, मीणा, गरासिया, डामोर और कथौड़ी जनजाति शामिल हैं। बता दें, 2011 की जनगणना के अनुसार ये 6 जनजाति राजस्थान में आदिवासियों की कुल आबादी का 96.18% हैं। ‘सेरो-जेनेटिक प्रोफाइल एंड फायलोजेनेटिक रिलेशनशिप्स ऑफ ट्राइब्स ऑफ राजस्थान’ नाम के रिसर्च के लिए सतीश कुमार व डॉ. एमके भसीन ने सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी की एथिक्स कमेटी से अनुमति ली, केंद्र से इसकी मंजूरी नहीं ली। इस रिसर्च में उदयपुर जिले से भील व कथौड़ी, सिरोही जिले से गरासिया, डूंगरपुर जिले से डामोर, सवाई माधोपुर जिले से मीना और बारां जिले से सहरिया जनजाति के 647 लोगों के ब्लड सैंपल लिए। रिसर्च के नतीजों में सभी 6 जनजातियों के ‘बायोलॉजिकल ब्लूप्रिंट’ हैं, क्योंकि सैंपल किसी घर या गांव से नहीं, बल्कि रैंडम आधार पर लिए गए। इसमें हर आयु के स्त्री–पुरुष शामिल थे। चौंकाने वाली बात- रिसर्च के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने फंड दिया, लेकिन इसके डाटा का उपयोग अमेरिकी फार्मा कंपनियां कर रही हैं, वो भी बिना खर्च। एकसाथ इतनी जनजातियों का जेनेटिक कोड फार्मा कंपनियों के पास पहुंचने का यह पहला मामला है। सबूत; ओपन एक्सेस से अमेरिका तक पहुंचा बायोलॉजिकल ब्लूप्रिंट दिल्ली यूनिवर्सिटी के सतीश कुमार और डॉ. एमके भसीन ने रिसर्च किया, जो ‘एंथ्रोपोलॉजिस्ट’ जर्नल में प्रकाशित हुआ। इसका प्रकाशक भारतीय है, लेकिन जर्नल ‘ओपन एक्सेस’ है। यहां से ये पेपर रिसर्चगेट और गूगल स्कॉलर जैसे ओपन प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक हुआ। ये अमेरिका के सरकारी पोर्टल जैनबैंक पर ‘एक्सेशन नंबर’ के साथ दर्ज है। इसका सीधा एक्सेस फाइजर और मोडेर्ना जैसी फार्मा कंपनियों के पास है। इतना ही नहीं, इसे यूरोप और जापान के डाटा सेंटर्स में भी साझा किया जा रहा है। इस पेपर को डिजिटल ऑब्जेक्ट आइडेंटिफायर (DOI) नंबर भी मिला हुआ है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर मूल वेबसाइट या लिंक डिलीट भी हो जाए, तो भी इसे खोला जा सकता है। आदिवासियों के ‘शुद्ध’ जीन की दुनिया के दवा बाजार में सबसे ज्यादा डिमांड जनजातियां सदियों से अपने ही समुदाय में शादी करती आई हैं। वैज्ञानिक इसे ‘इन-ब्रीडिंग’ कहते हैं। इससे उनका ‘जीन पूल’ शुद्ध रहता है। इनमें बीमारियां या इम्युनिटी स्पष्ट दिखती है। फार्मा कंपनियों के लिए यह एक ‘कंट्रोल ग्रुप’ की तरह काम करता है, जिससे वे दवाओं का सटीक असर जान सकती हैं। इनके म्यूटेशन के अध्ययन से ‘टारगेटेड दवाएं’ बनती हैं। संयोग या प्रयोग…? रिसर्चर अब अमेरिका की यूनिवर्सिटी में एसो. प्रोफेसर ये सतीश कुमार हैं। इन्होंने ही 6 जनजातियों पर रिसर्च किया। ये अब अमेरिका की टेक्सास रियो ग्रांडे वैली यूनिवर्सिटी में एसो. प्रोफेसर हैं। टेक्सास रियो ग्रांडे वैली यूनिवर्सिटी फाइजर और मोडेर्ना जैसी फार्मा कंपनियों के साथ जेनेटिक रिसर्च व ड्रग ट्रायल प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। सतीश कुमार ने क्या राजस्थान के आदिवासियों पर रिसर्च इनके बायोलॉजिकल ब्लूप्रिंट को फार्मा कंपनियों तक पहुंचाने के लिए ही किया? भास्कर ने सतीश कुमार को 19 फरवरी को ई-मेल किया, उन्होंने जवाब नहीं दिया है। साथी रिसर्चर डॉ. एमके भसीन की मृत्यु हो चुकी है। रिसर्च का डेटा दवा बनाने का कच्चा माल, बिना अनुमति कंपनियों तक पहुंच गया भास्कर एक्सपर्ट- विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील यह गंभीर अपराध, निजता के अधिकार का भी हननजनजातीय लोगों को विशेष संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। गुमराह करके लिए गए डाटा का व्यवसायिक इस्तेमाल आईपीसी और बीएनएस के तहत गंभीर अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के पुट्टूस्वामी फैसले में अनुचछेद-21 के तहत निजता को मौलिक अधिकार माना था। आईटी कानून की धारा-43-ए और 66-ई के अनुसार संवेदनशील निजी जानकारी को सार्वजनिक करने पर 3 साल की सजा, 2 लाख के जुर्माना के साथ हर्जाना भी देना पड़ सकता है। यहां तक कि कैदियों के अनिवार्य बायोलॉजिकल सैंपल लेने के लिए बनाये गये 2022 के क्रिमिनल प्रोसिजर आइडेंटीफिकेशन कानून के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुरुवार को दो दिवसीय प्रवास पर बालाघाट पहुंचे। यहां उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संवाद किया और विभिन्न राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय मुद्दों पर मीडिया से चर्चा की। सिंह ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील से लेकर प्रदेश की आर्थिक स्थिति और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवादों पर सरकार को आड़े हाथों लिया। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जताई चिंता दिग्विजय सिंह ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर गंभीर आशंका जताते हुए कहा कि इस समझौते से भारतीय किसानों का हक मारा गया है। उन्होंने कहा कि अब हमारे किसान अमेरिकी किसानों पर निर्भर हो जाएंगे। सिंह के अनुसार, किसानों की खेती की लागत तो बढ़ गई है लेकिन उपज के दाम नहीं बढ़े। साथ ही, उन्होंने मजदूरों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि न्यूनतम मजदूरी लागू न होने से मजदूरों को आज भी 12 साल पुरानी दर पर ही काम करना पड़ रहा है। कॉर्पोरेट जगत को लाभ और बढ़ती आर्थिक असमानता भाजपा सरकार पर कॉर्पोरेट घरानों का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में छोटे व्यापारियों या किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ, जबकि बड़े कॉर्पोरेट घरानों का 16 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया गया। उन्होंने आंकड़ा देते हुए बताया कि देश की 40 प्रतिशत संपत्ति केवल 200 लोगों के पास सिमट गई है, जो भविष्य में बड़े सामाजिक और आर्थिक तनाव का कारण बनेगी। कर्ज के बोझ तले मध्य प्रदेश प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 2003 में जब उन्होंने सरकार छोड़ी थी, तब प्रदेश पर 23 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो आज बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने इसे कर्ज के मापदंडों का खुला उल्लंघन बताया और कहा कि सरकार के पास अब बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए भी पैसा नहीं बचा है। शंकराचार्य विवाद को बताया राजनीतिक साजिश शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज पर दर्ज मामले को सिंह ने पूरी तरह राजनीतिक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराज पर झूठा प्रकरण दर्ज किया गया है। उन्होंने सरकार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर शंकराचार्य पर कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रतापगढ़ की युवती की शिकायत के बावजूद उत्तम स्वामी महाराज पर अब तक कोई मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया।
अमेरिका के आईस हॉकी प्लेयर जैक की शादी:मेहमानों के आने का सिलसिला शुरू, USA के कॉमर्स सचिव पहुंचे
जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में अमेरिकी आईस हॉकी प्लेयर जैक ह्यूज की शादी को लेकर मेहमानों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। यहां पर 28 फरवरी को उनकी आयशा अरोड़ा के साथ शादी होगी। गुरुवार को संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लूटनिक गुरुवार को USA के आईस हॉकी प्लेयर जैक ह्यूज की शादी में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। यहां एयरपोर्ट पर पुलिस सुरक्षा में वो उम्मेद भवन पैलेस के लिए रवाना हुए। इस दौरान एयरपोर्ट पर उन्होंने हाथ हिलाकर अभिवादन किया। बता दें कि 14 मई 2001 को जन्मे जैक ह्यूज अमेरिका के प्रमुख आइस हॉकी खिलाड़ी हैं। वे NHL की टीम न्यू जर्सी डेविल्स के सेंटर और वैकल्पिक कप्तान हैं। 2019 NHL ड्राफ्ट में पहली पोजीशन पर चुने गए थे। जैक की शादी में अमेरिका से कई मेहमान हिस्सा लेंगे।
सिरसा की विवाहिता को अमेरिका में ले जाकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला को घर पर अकेला रखा जाता था और बीमार होने पर उसे मानसिक परेशानी वाली दवा दे दी जाती थी। ससुराल वाले एक दिन विवाहिता को लेकर उसके मायके पहुंचे और घर पर छोड़कर चले गए। महिला के पिता से भी गाली-गलौज की और उनको धमकी देने का आरोप है। विवाहिता के भाई ने अब सिरसा एसपी को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को दी शिकायत में जिले के गांव निवासी युवक ने उसकी बहन की शादी करनाल के युवक से हुई थी। उनकी शादी को करीब 24 साल हो चुके हैं। उसकी बहन का पति अमेरिका में रहता है और बहन को ससुराल में अकेले रखते हैं, उसे मानसिक परेशान करते हैं। आरोप है कि जब कोई दवाई की उसकी बहन को जरूरत होती है तो उसे मानसिक परेशानी पैदा करने वाली दवाइंया दे दी जाती है। उसकी बहन को अमेरिका व यहां अकेले रखकर परेशान किया जाता है। अमेरिका से अकेले यहां देश में भेज देते हैं। कई बार उनके बीच पंचायत हुई और रिश्तेदारों को समझाया गया। वह कई बार अपनी बहन का इलाज करा चुका है। फिर उसकी बहन को अकेला छोड़ देते हैं और वह डरी व सहमी हुई है। शिकायत में आगे बताया, उसकी बहन को लेकर ससुराल वाले 22 फरवरी को उनके घर में आ गए और उसके पिता से गाली-गलौज करने लगे। उसने परिवार वालों को आवाज लगाई तो वे गाड़ी से डंडे लेकर आए। उसकी बहन के पति ने उसे धक्का दे दिया और गाड़ी का शीशी खोलकर कहा-तेरी बहन को छोड़ दिया है, वह नहीं रखेंगे। वह जल्द अमेरिका चले जाएंगे और धमकी देकर दो-दो गाड़ियों में भाग गए। उसके बहन बच्चों के बिना नहीं सकती। ऐसे में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में आज ओस (ड्यू) को बड़ा फैक्टर बनने से रोकने के लिए खास तैयारी की गई है। आज भारत और जिम्बाब्वे के बीच मैच शाम 7 बजे से खेला जाएगा, रात के समय मैदान पर काफी ओस पड़ेगी। जिससे ऐसे हालात में बैटिंग आसान और बॉलिंग उतनी ही मुश्किल हो जाती है। ऐसे में मैच को बराबरी पर लाने के लिए इम्पोर्टेड केमिकल इस्तेमाल किया जाएगा। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, चेपॉक स्टेडियम में ओस का प्रभाव कम करने के लिए 'ड्यू क्योर' नाम का एक इम्पोर्टेड केमिकल का इस्तेमाल किया जाएगा जिसे अमेरिका से मंगाया गया है। चेन्नई में बढ़ते तापमान से ओस की चिंताअब तक खेले गए शाम के मुकाबलों में ओस बहुत बड़ा कारण नहीं बनी है, लेकिन इस सप्ताह चेन्नई में तापमान बढ़ने के कारण ओस चिंता का विषय बन सकती है। आज मैच के दौरान ह्यूमिडिटी लेवल 80 से 90 परसेंट के बीच रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि दूसरी पारी के दौरान आउटफील्ड पर ओस का असर देखने को मिलेगा। मेजर लीग बेसबॅाल के मैदानों में इस्तेमाल होता हैरिपोर्ट में आगे बताया गया है कि मंगलवार और बुधवार को ग्राउंड पर 'ड्यू क्योर' स्प्रे किया गया था, और आज दोपहर को भी इसे स्प्रे किया जाएगा। जिससे भारत और जिम्बाब्वे के बीच रात के मैच के दौरान ओस का असर कम हो सके। यह केमिकल मेजर लीग बेसबॅाल के मैदानों में इस्तेमाल होता है। IPL में भी हो सकता है इस्तेमालसंभावना है कि BCCI इस तरीके का उपयोग सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में भी कर सकता है। IPL 2026 में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि हाल के साल में ओस ने टी-20 मैचों के नतीजों पर बड़ा असर डाला है। पिच रिपोर्ट और रिकॉर्डचेपॉक की पिच धीमी और स्पिनर्स को मदद करने वाली होती है, लेकिन इस बार फ्रेश पिच तैयार की गई है। इस बार अच्छा बाउंस देखने को मिल रहा है। ऐसे में यहां रन भी बन रहे हैं। इस वर्ल्ड कप में यहां अब तक 6 मैच खेले गए और सभी में 170+ स्कोर बना है। यहां अब तक 9 टी-20 खेले गए। पहले बैटिंग करने वाली टीम ने 4 और चेज करने वाली टीम ने 5 मैच जीते हैं। यहां का हाईएस्ट टीम स्कोर 200/4 है, जो अफगानिस्तान ने इसी वर्ल्ड कप में कनाडा के खिलाफ बनाया था। यहां पहली पारी का एवरेज स्कोर 182 है। भारतीय टीम ने इस मैदान पर अब तक 3 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, जिनमें से 2 में जीत दर्ज की है, जबकि 1 मैच में उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। वहीं, जिम्बाब्वे पहली बार यहां खेलेगी। गुरुवार को चेन्नई में मौसम अच्छा रहेगा। आसमान पूरी तरह से साफ रहेगा। 32 डिग्री सेल्शियस अधिकतम और 24 डिग्री सेल्शियस न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है। बारिश नहीं होगी। ----------------------------------------------------- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विजक्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें --------------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… सुपर-8 में आज भारत के सामने जिम्बाब्वे:हारने वाली टीम बाहर होगी, टीम इंडिया को वेस्टइंडीज की हार का भी इंतजार टी-20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 का 8वां मैच आज भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेला जाएगा। मुकाबला शाम 7 बजे से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में शुरू होगा। टॉस शाम 6.30 बजे होना है। दोनों ही टीमों के लिए करो या मरो का मुकाबला है। हारने वाली टीम सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो जाएगी। जीतने वाली टीम के पास चांस बना रहेगा। जीतने वाली टीम को वेस्टइंडीज की हार का इंतजार भी है, अगर विंडीज आज का पहला मैच जीत गई तो रात का मैच जीतकर भी टीम की राह मुश्किल ही रहेगी। सुपर-8 स्टेज में दोनों ही टीमों की शुरुआत खराब रही। भारत को साउथ अफ्रीका ने 76 रन से हराया। वहीं जिम्बाब्वे को वेस्टइंडीज ने 107 रन से हरा दिया। पूरी खबर
बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के एक युवा छात्र राजादित्य ने कैंसर पर ऐसी अनोखी रिसर्च की है, जो अब भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रही है। इस किशोर ने लो-इंटेंसिटी पल्स्ड अल्ट्रासाउंड (LIPUS) तकनीक का इस्तेमाल कर कैंसर कोशिकाओं को चुनिंदा तरीके से नष्ट करने की संभावनाओं का अध्ययन किया, बिना स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान पहुंचाए। इस शानदार उपलब्धि के चलते राजादित्य का चयन जुलाई 2026 में अमेरिका में आयोजित होने वाले जीनियस ओलंपियाड के लिए टीम इंडिया में हुआ है। यह रिसर्च सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन एजुकेशन द्वारा चलाए जा रहे RSI-इंडिया कार्यक्रम के तहत की गई, जो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के प्रसिद्ध रिसर्च मॉडल पर आधारित है। IISc में प्रोफेसर अजय तिजोरे और शोधकर्ता अल्का कुमारी के मार्गदर्शन में राजादित्य ने PDMS ऑर्गन-ऑन-चिप प्लेटफॉर्म पर प्रयोग किए। शोध में पाया गया कि 50 किलोपास्कल अल्ट्रासाउंड दबाव पर लगभग 55% कैंसर कोशिकाएं पूरी तरह नष्ट हो गईं, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका असर न के बराबर रहा। इतना ही नहीं, उपचार के बाद कैंसर कोशिकाओं की फैलने की क्षमता भी काफी कम हो गई। विशेषज्ञ इसे भविष्य की कैंसर थेरेपी में एक बड़ा कदम मान रहे हैं, जहां दुष्प्रभाव कम होंगे और इलाज ज्यादा प्रभावी। इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान मिला है। IRIS नेशनल फेयर और इंडियन नेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर (INSEF) में इसे गोल्ड मेडल से नवाजा गया। अब राजादित्य न्यूयॉर्क की सेंट जॉन फिशर यूनिवर्सिटी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जहां वे अपनी रिसर्च को वैश्विक मंच पर पेश करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि न केवल भारतीय युवा वैज्ञानिक प्रतिभा का उदाहरण है, बल्कि भविष्य में कैंसर के सुरक्षित और प्रभावी इलाज की दिशा में नई उम्मीद भी जगाती है।
अमेरिकी विद्यार्थियों ने राजस्थान के स्वास्थ्य सिस्टम का किया अवलोकन
भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था को नजदीक से जानने के लिए अमेरिका की एक टीम ने बुधवार को एमबी अस्पताल का दौरा किया। अमेरिकन यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ स्टूडेंट्स ने शैक्षणिक भ्रमण के तहत राजस्थान के स्वास्थ्य स्तर के बारे में जानकारी हासिल की। अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुमन ने विद्यार्थियों को बताया कि राजस्थान सरकार अपने नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में अब निशुल्क इलाज, सभी तरह की जांच और ऑपरेशन, और मरीजों के लिए इंश्योरेंस योजनाओं के तहत सुविधाएं उपलब्ध हैं। अमेरिकी टीम ने अस्पताल के कुपोषण वार्ड, सिकल वार्ड और अन्य जनरल वार्ड का भ्रमण किया।
ललित सुरजन की कलम से - अमेरिका: पूंजीवाद की शतरंजी चालें
विश्व राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले पाठकों को शायद पता हो कि कार्टर के चुनाव मैदान में उतरने से कुछ वर्ष पहले अमेरिका में ट्राइलेटरल कमीशन नामक एक संस्था स्थापित हुई थी
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत बुधवार को ललितपुर के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत में शंकराचार्य पर दर्ज मुकदमे और अमेरिका-भारत डील पर अपनी राय रखी। टिकैत ने शंकराचार्य पर दर्ज मुकदमे को लेकर कहा कि यह राजनीति है। उनके अनुसार, शंकराचार्य सरकार के खिलाफ सबसे ज्यादा बोल रहे थे, इसलिए उन पर मुकदमा दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का काम है कि जो उसके विरुद्ध बोलेगा, उस पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। टिकैत ने कहा कि अगर कांग्रेस यह प्रदर्शन कर लेती तो देश का यह हाल नहीं होता। उन्होंने विपक्ष के शांत रहने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अभी तक एक भी आंसू गैस का गोला नहीं चला, एक भी नेता जेल नहीं गया। उनके अनुसार, जहां गर्माहट न हो, वहां कोई प्रदर्शन सफल नहीं होता। इस मौके पर टिकैत ने अमेरिका-भारत डील को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस डील से छोटे किसान और दुकानदार सभी खत्म हो जाएंगे। उनके मुताबिक, किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। टिकैत ने आशंका जताई कि इस डील के तहत दूध, फल, सब्जियां और अनाज बाहर से आएंगे, जिससे ललितपुर जैसे क्षेत्रों के किसानों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने बताया कि इस डील की पूरी जानकारी मार्च में सामने आएगी। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का रेलवे स्टेशन पर कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। इसके बाद टिकैत एक खुली कार में शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए स्टेशन रोड स्थित एक होटल पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों से मुलाकात की। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष रंजीत यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष लखन सिंह पटेल, कीरत बाबा, शब्बीर खान, मलखान यादव, पहाड़ सिंह, राजपाल यादव सहित अनेक किसान नेता मौजूद रहे।
अमेरिका में सिख कुक की हत्या को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने बताया कि किडनैपरों ने किसी और को उठाना था, लेकिन गलत पहचान के कारण वह अवतार सिंह को उठाकर ले गए। रास्ते में जाते हुए जब किडनैपरों ने उससे कुछ सवाल पूछे तो अवतार सिंह जवाब नहीं दे पाया। किडनैपर्स ने अवतार सिंह को छोड़ने के बजाय उनकी हत्या कर दी। उसकी लाश किडनैपिंग की जगह से करीब 2 घंटे की दूरी पर स्थित लेक बेरीसा के पास हाइवे के किनारे फेंक दिया। जिसे तीन दिन बाद पुलिस ने बरामद किया। पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर गुरुद्वारा साहिब परिसर से किडनैपरों ने किसे उठाना था। गलत पहचान के कारण अवतार सिंह की हत्या के बाद लोगों में दहशत है। अवतार सिंह के घर 6 महीने पहले ही 3 बच्चों ने जन्म लिया था। बता दें कि अमेरिका के ट्रेसी शहर के गुरुद्वारा साहिब परिसर से लुधियाना के अवतार सिंह (57) को 17 फरवरी को किडनैप किया गया। किडनैपिंग के तीन दिन बाद यानी 20 फरवरी को उनका शव बरामद हुआ। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने कत्ल को लेकर क्या कहा… सिख कुक की किडनैपिंग का पता कैसे चला 3 दुधमुहें बच्चे, कुक का काम कर रहे थेअवतार सिंह के तीन बच्चे हैं और तीनों का जन्म एक साथ करीब छह महीने पहले हुआ था। जानकारी के अनुसार इन बच्चों का जन्म शादी के 20 साल बाद हुआ। अब इन तीनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। अवतार सिंह पिछले कई वर्षों से टकसाल के नियंत्रण वाले गुरुद्वारा 'गुरु नानक प्रकाश' में कुक के रूप में सेवा कर रहे थे। गुरुद्वारे के बाबा धुमा के अनुसार, वह लंबे समय तक चौक मेहता स्थित टकसाल के मुख्यालय 'गुरुद्वारा गुरदर्शन प्रकाश' में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। अवतार सिंह बुल्ट की हत्या के बाद उनके परिवार की आर्थिक मदद के लिए सिख समुदाय ने फंड जुटाना शुरू कर दिया है। सिख समुदाय गोफंडमी पोर्टल के जरिए उनके लिए फंड जुटा रहा है ताकि उनके परिवार को आर्थिक मदद मिल सके। फंड जुटाने के लिए सिख समुदाय की ये अपील “हमें यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि ट्रेसी गुरुद्वारा साहिब के प्रिय सेवादार, अवतार सिंह बुल्ट, जिनका अपहरण कर लिया गया था, उनकी दुखद मृत्यु हो गई है। एक बेहद चिंताजनक गुमशुदगी के रूप में जो शुरू हुआ था, उसका अंत उनके परिवार और पूरी संगत के लिए एक अकल्पनीय क्षति के रूप में हुआ है।” अवतार सिंह जी ने 20 वर्षों से अधिक समय तक एक समर्पित सेवादार और लांगरी के रूप में गुरुद्वारा साहिब की निष्ठापूर्वक सेवा की। वह अपनी विनम्रता, शांत समर्पण और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे, जिससे हर कोई उन्हें अपने परिवार जैसा महसूस करता था। उनकी सेवा, ईमानदारी और अटूट विश्वास ने अनगिनत जीवनों को छुआ, और उनकी अनुपस्थिति हमारे समुदाय में एक गहरा शून्य छोड़ गई है। उनके परिवार में उनकी पत्नी और उनके 6 महीने के तीन बच्चे हुए, जो अब एक समर्पित पति और पिता के बिना भविष्य का सामना कर रहे हैं। इस अत्यंत कठिन समय में, हम समुदाय से अपील करते हैं कि वे इस दुखद घड़ी में परिवार को संबल देने के लिए साथ आएं। एकत्र की गई राशि का उपयोग आने वाले महीनों और वर्षों में उनकी पत्नी और बच्चों को स्थिरता प्रदान करने के लिए किया जाएगा। एक अकेली मां के रूप में एक बच्चे का पालन-पोषण करना भी चुनौतीपूर्ण होता है और तीन शिशुओं के साथ, यह जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। आपकी उदारता, प्रार्थना और समर्थन इस युवा परिवार के लिए बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
कपास के किसानों का उदाहरण हमारे सामने है, जहां आयात शुल्क हटाने से घरेलू कीमतों में भारी गिरावट आई और किसान संकट में घिर गए
बांका जिले के धोरैया विधायक मनीष कुमार ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पुराने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों, लोकतांत्रिक मूल्यों और समकालीन राजनीति पर चर्चा की। उन्होंने नेतृत्व, सुशासन और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया। विधायक मनीष कुमार ने बताया कि उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार द्वारा प्रायोजित प्रतिष्ठित इंटरनेशनल विज़िटर लीडरशिप प्रोग्राम (IVLP) में भाग लेने का अवसर मिला था। वर्ष 2012 में निमंत्रण मिलने के बावजूद वे व्यस्तताओं के कारण शामिल नहीं हो सके थे। नीतिगत प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन कियावर्ष 2013 में उन्हें दोबारा यह अवसर मिला, जिसके बाद वे अमेरिका सरकार के आधिकारिक अतिथि के रूप में तीन सप्ताह तक संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न राज्यों में रहे। इस दौरान उन्होंने वहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था, प्रशासनिक संरचना, सामाजिक संस्थाओं और नीतिगत प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन किया। विधायक ने बताया कि उसी प्रतिनिधिमंडल में नितिन नवीन भी शामिल थे, जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं। साथियों को पार्टी में आने का आमंत्रण सम्मानजनकमनीष कुमार ने कहा कि उस समय से बनी उनकी मित्रता आज भी कायम है। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा उक्त समूह के साथियों को पार्टी में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित करने को सम्मानजनक बताया। विधायक मनीष कुमार के अनुसार, ऐसे अंतरराष्ट्रीय अनुभव और दीर्घकालिक संबंध न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि देश की लोकतांत्रिक सोच और वैश्विक संवाद को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने इसे अपने क्षेत्र और राज्य के लिए भी गौरवपूर्ण क्षण बताया।
भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के खिलाफ आज भोपाल में कांग्रेस की किसान महाचौपाल है। भोपाल के जवाहर चौक पर होने वाली इस चौपाल को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संबोधित करेंगे। भोपाल के जवाहर चौक के मुख्य चौराहे पर मंच बनाया गया है। इसके सामने अटल पथ के दोनों तरफ की सड़कों पर बड़ा डोम लगाया गया है। कांग्रेस का दावा है कि करीब 50 हजार लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई हैं। कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से होगा। महाचौपाल की तैयारियां पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भास्कर से कहा कि ये ट्रेड डील से किसानों की गर्दन ट्रंप की तलवार पर रख दी गई है। PM नरेंद्र मोदी को तीन काले कानून वापस लेने पडे़ थे। वैसे ही ये ट्रेड डील भी वापस लेनी पड़ेगी। राहुल-खड़गे के साथ मंच पर 250 नेता बैठेंगेकिसान महाचौपाल के लिए बनाए गए मंच पर मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ करीब 250 नेता बैठेंगे। इनमें एमपी कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश, कांग्रेस मीडिया डिपार्टमेंट के नेशनल चेयरमेन पवन खेड़ा मंच पर मौजूद रहेंगे। साथ ही पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, एमपी के सभी कांग्रेस विधायक, तीनों राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, विवेक तन्खा, अशोक सिंह, पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के मेंबर और सभी 71 जिला कांग्रेस अध्यक्ष बैठेंगे। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, सीईसी मेंबर भी शामिल होंगे। तीन दिन की तैयारी में लाखों लोग जुटेंगे: पटवारीमध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भास्कर से कहा- देश के हर किसान को चाहे वह भाजपा की विचारधारा को एक्सेप्ट करता हो, लेकिन जो किसान खेती से जुड़ा हुआ है। उसको ये अहसास हो गया है कि नरेन्द्र मोदी ने दबाव में आकर ट्रेड डील की है। उसी का असर है कि तीन दिन की तैयारी में लाखों लोग भोपाल आ रहे हैं। 21 फरवरी को यह तय हुआ कि 24 को भोपाल में महाचौपाल होगी। उसमें लाखों की तादाद में लोग आएंगे। भोपाल की सड़कें पट जाएंगी। ये अपने आप में मैसेज है कि ये ट्रेड डील देश विरोधी किसान विरोधी है। नरेन्द्र मोदी दबे हुए हैं उन्होंने कॉम्प्रोमाइज किया है। दुनिया भर में चल रही सेक्स फाइल का भी इस डील पर असर पड़ा है। यह कोई इल्जाम नहीं है। ट्रंप ने एक बार कहा था, कि मैं नरेंद्र मोदी का पॉलिटिकल करियर खत्म नहीं करना चाहता। यह हमारे देश की बेइज्जती है। PM का अपमान होगा तो हर भारतवासी को गुस्सा आएगा जीतू पटवारी ने कहा- आखिर नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री हैं। उनके खिलाफ विदेश का कोई राष्ट्राध्यक्ष इस तरह की बात करता है। भारत के हर नागरिक को गुस्सा आएगा, लेकिन सवाल ये है कि इसपर नरेन्द्र मोदी ने कोई बयान क्यों नहीं दिया। ये ट्रेड डील से किसानों की गर्दन ट्रंप की तलवार पर रख दी गई है। ट्रेड डील से एमपी के 70% किसान प्रभावितजीतू पटवारी ने कहा- राहुल जी और खड़गे जी को धन्यवाद। इस ट्रेड डील से सबसे ज्यादा किसान अगर कहीं प्रभावित हुए हैं तो मप्र में हुए हैं। सोयाबीन उत्पादक किसान सबसे ज्यादा हमारे यहां के हैं। हम सोया स्टेट थे। कपास, मक्का सबसे ज्यादा यहां पैदा होते हैं। 70% किसान इससे प्रभावित हैं। तो उन्होंने मप्र को सबसे पहले चुना। मेरी और उनकी आपस में बात हुई। पार्टी ने निर्णय लिया और अब हम किसान की लड़ाई लड़ेंगे। शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र से करेंगे लड़ाई की शुरुआतजीतू पटवारी ने कहा- यहां के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, देश के कृषि मंत्री हैं। उन्होंने जब अमेरिका के कृषि मंत्री का बयान आया तो उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी को बहुत साधुवाद वो विश्व के ऐसे नेता हैं कि जिसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने भारत के किसानों को बचा लिया। क्या भारत के किसानों की कोई गर्दन पकड़कर हत्या कर रहा था? अगर बचा लिया तो जीरो प्रतिशत टैरिफ के एग्रीकल्चर प्रोडक्शन आएगा। 18% टैरिफ पर यहां से अमेरिका जाएंगे। हम विदिशा, बुधनी से यह किसान संवाद यात्रा शुरू करेंगे। प्रदेश का हर नेता कार्यकर्ता इसे आगे लेकर जाएंगे। जैसे नरेंद्र मोदी को तीन काले कानून वापस लेने पडे़ थे। वैसे ही ये ट्रेड डील भी वापस लेनी पड़ेगी। पार्किंग और डायवर्जन प्लान जारी यातायात पुलिस ने व्यापक पार्किंग और डायवर्जन प्लान जारी किया है। मंच पर बैठने वाले करीब 200 विशिष्ट अतिथियों के वाहन रंगमहल चौराहा से यादव मेडिकल तिराहा, काटजू तिराहा और राजस्थान स्वीट्स तिराहा होते हुए मॉडल स्कूल के पास ड्रॉप किए जाएंगे। इसके बाद वाहन निर्धारित स्थल पर पार्क होंगे। रूट प्लान इंदौर, उज्जैन, आष्टा, सीहोर की ओर से आने वाले वाहनसीहोर बायपास से बिल्किसगंज-झागरिया, रातीबड़, भदभदा, डिपो चौराहा होते हुए लाड़ली लक्ष्मी पार्क (अटल पथ) पर पार्किंग कर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। नर्मदापुरम मार्ग से आने वाले वाहनआरआरएल ओवरब्रिज, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, मानसरोवर, लिंक रोड-2, माता मंदिर, प्लेटिनम प्लाजा होते हुए लाड़ली लक्ष्मी पार्क (अटल पथ) में पार्किंग करेंगे। रायसेन, सागर रोड की ओर सेपटेल नगर, आईटीआई तिराहा, प्रभात चौराहा, सुभाष ओवरब्रिज, बोर्ड ऑफिस, लिंक रोड-1, अपैक्स तिराहा, जैन मंदिर होते हुए टीटी नगर स्टेडियम के बायीं ओर पार्किंग रहेगी। राजगढ़ (ब्यावरा), गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, विदिशा की ओर सेमुबारकपुर, गांधीनगर, लालघाटी, वीआईपी रोड, रेतघाट, पॉलिटेक्निक चौराहा, बाणगंगा होते हुए टीटी नगर दशहरा मैदान में वाहन पार्क कर पैदल कार्यक्रम स्थल पहुंचना होगा। ये रहेंगे प्रमुख डायवर्जन
'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के आखिरी दिन भारत और अमेरिका ने 'पैक्स सिलिका' डिक्लेरेशन पर साइन किए हैं। इस समझौते का मकसद दुनिया भर में सेमीकंडक्टर और AI की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना और गैर-मित्र देशों पर निर्भरता कम करना है। अश्विनी वैष्णव बोले- सेमीकंडक्टर का हब बनेगा भारत केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी आर्थिक मामलों के सचिव जैकब हेलबर्ग ने इसपर साइन किए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अब पैक्स सिलिका का हिस्सा बन गया है, जिससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। उन्होंने बताया- भारत में पहले से ही 10 प्लांट्स पर काम चल रहा है। बहुत जल्द देश के पहले सेमीकंडक्टर प्लांट में चिप का कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। वैष्णव ने यह भी साझा किया कि भारतीय इंजीनियर अब देश में ही एडवांस '2-नैनोमीटर' चिप डिजाइन कर रहे हैं। सेमिकंडक्टर इंडस्ट्री को 10 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को आने वाले समय में करीब 10 लाख अतिरिक्त स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी और दुनिया की यह उम्मीद भारत से ही है। उन्होंने कहा, देश के पास अब एक साफ दिशा और लक्ष्य है। हमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में ग्लोबल लीडरशिप लेनी है। अमेरिका बोला- भारत का प्रवेश सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं समिट में शामिल अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस गठबंधन में भारत की एंट्री को रणनीतिक रूप से अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा, भारत के पास ऐसा टैलेंट है जो किसी भी चुनौती का मुकाबला कर सकता है। भारत की इंजीनियरिंग गहराई इस गठबंधन के लिए बहुत जरूरी है। मोदी और ट्रम्प की जल्द हो सकती है मुलाकात सर्जियो गोर ने भारत में हो रही इस समिट को बेहद प्रभावशाली बताया। जब उनसे पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने संकेत देते हुए कहा- बने रहिए। मुझे यकीन है कि सही समय पर यह मुलाकात जरूर होगी। भारत-अमेरिका की साझेदारी से बिजनेस के नए रास्ते खुलेंगे भारत और अमेरिका के बीच हुए 'पैक्स सिलिका' समझौते के दौरान गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि इस समझौते का मकसद सुरक्षा और भरोसेमंद सप्लाई चेन सुनिश्चित करना है। साथ ही, इससे अहम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बिजनेस के नए रास्ते खुलेंगे। सुंदर पिचाई ने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि एआई (AI) का फायदा सबको मिलना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि गूगल अपने प्रोडक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और खास बिजनेस सॉल्यूशंस के जरिए भारत में एआई की ग्रोथ को पूरा सपोर्ट कर रहा है। क्या है पैक्स सिलिका और इसमें कौन-कौन शामिल? इसे दिसंबर 2025 में लॉन्च किया गया था। इसका मकसद एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां कच्चे माल से लेकर एडवांस इंफ्रास्ट्रक्चर तक की सप्लाई चेन सुरक्षित रहे। सदस्य देश: भारत के अलावा इस गठबंधन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, इजरायल, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूएई, कतर, ग्रीस और ब्रिटेन शामिल हैं। विकासशील देश में होने वाली पहली AI समिट यह अपनी तरह का पहली एआई समिट है जो विकासशील देश में हो रही है। 5 दिन की समिट में दुनिया भर के लीडर्स, मंत्रियों और टेक कंपनियों के सीईओ ने हिस्सा लिया। समिट के दौरान टेक कंपनियों ने भारत में कई नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और डील्स का एलान किया है। आज शाम को ये लीडर्स AI को संभालने और इसके रिस्क को कम करने पर एक साझा विजन पेश करेंगे। 200 बिलियन डॉलर का निवेश आने की उम्मीद इस समिट के जरिए भारत ने खुद को ग्लोबल AI और चिप मैन्युफैक्चरिंग के केंद्र के रूप में पेश किया है। सरकार का अनुमान है कि अगले दो साल में देश में एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 200 बिलियन डॉलर का निवेश आएगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए AI टूल 'क्लॉड' का इस्तेमाल किया है। यह पहली बार है जब एआई का इस्तेमाल किसी इतने बड़े और गुप्त ऑपरेशन में किया गया है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। अमेरिकी सेना ने जनवरी की शुरुआत में काराकास में बमबारी करने के बाद मादुरो को गिरफ्तार किया था। उन पर ड्रग तस्करी के आरोप हैं। फिलहाल वे न्यूयॉर्क की जेल में हैं। डेटा फर्म पालान्टिर के जरिए हुआ AI का इस्तेमाल रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने सीधे एनट्रॉपिक से नहीं बल्कि डेटा कंपनी 'पैलेंटियर' के जरिए क्लॉड का इस्तेमाल किया है। पैलेंटियर पहले से ही अमेरिकी रक्षा विभाग और फेडरल पुलिस के लिए काम करती है। एनट्रॉपिक की चिंताओं को देखते हुए अब ट्रम्प प्रशासन उसके 200 मिलियन डॉलर (करीब ₹1,800 करोड़) के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने पर विचार कर रहा है। हिंसा के लिए क्लॉड AI के इस्तेमाल पर पाबंदी क्लॉड AI को बनानी वाली कंपनी एंथ्रोपिक ने कहा, हम किसी विशेष ऑपरेशन पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन हमारा हर यूजर हमारी 'यूसेज पॉलिसी' मानने के लिए बाध्य है। क्लॉड एआई की गाइडलाइन्स में साफ लिखा है कि इस तकनीक का इस्तेमाल हिंसा फैलाने, हथियार बनाने या किसी की जासूसी करने के लिए नहीं किया जा सकता। युद्ध लड़ने से रोकने वाले AI का इस्तेमाल नहीं करेगी अमेरिकी सेना अमेरिकी रक्षा विभाग चाहता है कि ओपनAI और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां अपने टूल्स को मिलिट्री के क्लासिफाइड नेटवर्क पर बिना किसी कॉमर्शियल पाबंदी के उपलब्ध कराएं। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हाल ही में कहा था कि हम ऐसे AI मॉडल इस्तेमाल नहीं करेंगे जो हमें युद्ध लड़ने से रोकें। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट भी इस रेस में शामिल एनट्रॉपिक पहली ऐसी एआई कंपनी है जिसका इस्तेमाल सेना के गुप्त ऑपरेशन्स में हुआ है, लेकिन वह अकेली नहीं है। इलॉन मस्क की कंपनी xAI, गूगल का जेमिनी और माइक्रोसॉफ्ट के निवेश वाली ओपन एआई भी सेना के लिए विशेष AI प्लेटफॉर्म तैयार करने में जुटी हैं। इनका इस्तेमाल फिलहाल डॉक्यूमेंट्स का विश्लेषण करने, रिपोर्ट बनाने और रिसर्च करने में हो रहा है। क्या है एंथ्रोपिक का 'क्लॉड' AI? क्लॉड एक एडवांस AI चैटबॉट है, जो टेक्स्ट जनरेशन, डेटा एनालिसिस और कोडिंग जैसे कामों में माहिर है। इसे ओपन AI के पूर्व एग्जीक्यूटिव्स ने 2021 में शुरू किया था। हाल ही में एक फंडिंग राउंड के बाद एंथ्रोपिक की वैल्यूएशन 380 बिलियन डॉलर यानी, करीब 34 लाख करोड़ रुपए हो गई है। नॉलेज पार्ट: युद्ध में कैसे मदद करता है AI? मिलिट्री ऑपरेशंस में AI का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन कामों के लिए किया जाता है:
भारत को कमजोर करने वाला अमेरिकी व्यापार समझौता
व्यापार समझौते के बदले में अमेरिका के आदेशों के आगे भारत झुक गया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत के किसानों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार में उनके मंत्री और वफादार विशेषज्ञों को जनता को यह समझाने में बहुत दिक्कत हो रही है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारत को क्या-क्या बड़े फायदे हो रहे हैं
विवादित हो सकते हैं भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के वायदे
महीनों की बातचीत और अनिश्चितताओं के बाद पिछले सप्ताहांत भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले हिस्से के सम्पन्न होने पर जो उत्साह था
क्या सोशल मीडिया बच्चों को बना रहा है ‘आदी’? अमेरिका में इंस्टाग्राम और यूट्यूब के खिलाफ मुकदमा
अमेरिका के लॉस एंजेलिस में इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ एक बहुचर्चित मुकदमा चल रहा है, जिसमें आरोप है कि इन प्लेटफार्मों के एल्गोरिदम और फीचर बच्चों में लत जैसी प्रवृत्ति पैदा करते हैं।
अमेरिका से व्यापार समझौते में सब गोलमाल!
अमेरिका से व्यापार समझौते पर मोदी सरकार बड़ी कामयाबी की डींगे हांक रही है, लेकिन धरातल पर नजर आ रहा है कि वह हारी हुई लड़ाई लड़ रही है।
मिशन-500 या कूटनीतिक आत्मसमर्पण? भारत-अमेरिका डील के अनकहे पहलू
मैंने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार वार्ता पर लगातार पांच आलेख लिखे—जो विभिन्न समाचार पत्रों में समय-समय पर प्रकाशित हुए
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति
- नित्य चक्रवर्ती किसी भी व्यापारिक समझौते में हमेशा लेन-देन होता है। इसलिए, अमेरिका से ऐसी रियायतें पाने के लिए भारत की तरफ से कुछ रियायतें देने में कुछ भी गलत नहीं है, जो राष्ट्रीय हितों के लिए भारत के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं। लेकिन बातचीत बराबरी के आधार पर होनी चाहिए क्योंकि भारत, वह भारत है, जो एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन जिस तरह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने सोशल मीडिया पर ऐसा किया, उससे बड़ा भ्रम पैदा हो गया है। नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद, ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिका ने भारत के साथ एक व्यापार समझौता किया है, जिसके तहत उन्होंने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए दंडात्मक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जिसके बदले में भारत कुछ अमेरिकी सामान पर अपने टैरिफ कम करेगा, अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा, और रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, मोदी ने लिखा कि वह टैरिफ में कमी से 'खुश' हैं, लेकिन उन्होंने विवरण नहीं दिया, जिसमें यह भी शामिल नहीं था कि क्या उनका देश रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा जैसा कि ट्रंप ने दावा किया था। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि व्यापार समझौता अंतिम रूप से तय हो गया है। मोदी ने लिखा, 'जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को फायदा होता है और आपसी लाभकारी सहयोग के लिए अपार अवसर खुलते हैं।' मोदी ने यह भी नहीं बताया जो ट्रंप ने कहा कि भारत '500अरब डॉलर से अधिक अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला, और कई अन्य उत्पादों के अलावा, अमेरिकी सामान खरीदने के लिए बहुत उच्च स्तर पर प्रतिबद्ध है,' और यह कि भारत 'संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करके शून्य पर लाने के लिए आगे बढ़ेगा।' फोन पर बातचीत के बाद अमेरिकी और भारतीय नेताओं द्वारा जारी किए गए बयानों के लहजे में एक ध्यान देने योग्य अंतर था। नई दिल्ली में भाजपा और सरकारी हलकों में काफी उत्साह था। हर कोई भारतीय सरकार की तरफ से विस्तृत जानकारी की उम्मीद कर रहा था, लेकिन कुछ भी सामने नहीं आया। यहां तक कि अपनी पार्टी के सांसदों की बैठक में भी, मोदी ने अधिक विवरण नहीं दिया, सिवाय इसके कि भारत की ओर से धैर्य रखने का फल मिला। सटीक स्थिति क्या है? सरकारी सूत्र वाशिंगटन से अधिक विवरण की प्रतीक्षा करने के अलावा और कुछ नहीं बता रहे हैं। यह स्पष्ट है कि ट्रंप ने मौजूदा 50 प्रतिशत जिसमें 25 प्रतिशत जुर्माना भी शामिल है, के मुकाबले पारस्परिक व्यापार दर को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है। ट्रंप के अनुसार, यह तुरंत प्रभाव से लागू होता है। अगर ऐसा है, तो यह भारत के लिए एक बड़ी जीत है, जबकि इसके मुकाबले चीन 37 प्रतिशत, वियतनाम 20 प्रतिशत, बांग्लादेश 20 प्रतिशत और यहां तक कि पाकिस्तान भी 19 प्रतिशत पर है। लेकिन भारत ने अमेरिका को सोयाबीन, डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों के सेक्टर में क्या रियायतें दीं? क्या मोदी ने रूस से सस्ते दाम पर भी तेल का सारा आयात बंद करने पर सहमति दे दी है? पहले भी ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने रूस से खनिज तेल का आयात इंपोर्ट बंद कर दिया है, लेकिन आयातप्रतिस्पर्धी मूल्य के आधार पर हो रहा था। असल में, अभी भी, अन्तरराष्ट्रीय खनिज तेल व्यापार सूत्रों के अनुसार, रूसी कच्चा तेल अमेरिकी कच्चे तेल की तुलना में16डॉलर सस्ता है। अगर भारत रूसी तेल का पूरा आयात बंद कर देता है, तो भारत को यह अतिरिक्त लागत उठानी पड़ेगी। क्या मोदी सच में इसके लिए सहमत हो गए हैं? अगर वह सहमत हो गए हैं, तो उन्हें सामने आकर यह बात खुलकर बतानी चाहिए। आजकल किसी भी व्यापारिक समझौते में हमेशा लेन-देन होता है। इसलिए, अमेरिका से ऐसी रियायतें पाने के लिए भारत की तरफ से कुछ रियायतें देने में कुछ भी गलत नहीं है, जो राष्ट्रीय हितों के लिए भारत के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं। लेकिन बातचीत बराबरी के आधार पर होनी चाहिए क्योंकि भारत, वह भारत है, जो एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और जिसमें 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है, जो चीन को भी पीछे छोड़ देगी। मोदी 1.4 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वह ट्रंप के कहने पर राष्ट्रीय हितों का बलिदान नहीं कर सकते। सवाल यह है कि क्या ट्रंप की शर्तों पर सहमत होते हुए भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी? अगर डील हो गई है, तो प्रधानमंत्री की यह बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वह डील के बारे में विस्तार से बताएं। या, अगर यह अभी तक फाइनल नहीं हुई है और 18 प्रतिशत टैरिफ सिर्फ एक फ्रेमवर्क है, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए। ट्रंप अपने ट्रूथ सोशल पर और भी बहुत कुछ कहते रहेंगे। अगर नरेंद्र मोदी असली स्थिति नहीं बताते हैं, तो वे बातें बिना चुनौती के बनी रहेंगी। यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ लगातार व्यापार समझौते - एक जिसे 'सभी ट्रेड डील्स की जननी' कहा जा रहा है और दूसरा भारतीय सामान पर टैरिफ को 18 प्रतिशत तक कम करने वाला यह समझौता-से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की व्यापक उम्मीद है, जिससे एक दशक में निर्यात में संभावित 150अरब डालर की वृद्धि होगी, ऐसा सरकार के करीबी विशेषज्ञ कहते हैं। ये समझौते टैरिफ कम करेंगे और बाज़ार की बाधाओं को आसान बनाएंगे, साथ ही भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बढ़ावा देंगे, जिसमें श्रम-प्रधान टेक्सटाइल सेक्टर भी शामिल है। हालांकि, भारत चीन के मुकाबले अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त के ज़्यादा समय तक बने रहने की उम्मीद नहीं कर सकता, क्योंकि ट्रंप इस साल अप्रैल में अमेरिका-चीन व्यापार समझौते को अन्तिम रूप देने के लिए चीन जा रहे हैं और चीन के लिए टैरिफ दर निश्चित रूप से 20प्रतिशत से कम हो जाएगा। यह यूरोपीय यूनियन के 15 प्रतिशत या यूनाइटेड किंगडम के 10प्रतिशत के स्तर पर हो सकता है। इसलिए भारत को बहुत जल्द चीन के मुकाबले अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त को भूलना होगा। 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ ने कई चीज़ों पर असर डाला है। इनमें स्टील, टेक्सटाइल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर शामिल हैं। उदाहरण के लिए, टैरिफ के बाद अमेरिका को स्टील की शिपमेंट में 40 प्रतिशत की गिरावट आई। यह सेक्टर पुन: सुधार की ओर जा रहा है और यह इस चरण में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत मददगार होगा। यह देखना होगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके कुल असर का मूल्यांकन करने से पहले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को आखिरकार उसके अन्तिम स्वरूप में आधिकारिक तौर पर कैसे पेश किया जाता है।
ललित सुरजन की कलम से - क्या अमेरिका भारत का दोस्त है?
दक्षिण अमेरिका के अधिकतर देश अभी हाल तक 'बनाना रिपब्लिक' के रूप में जाने जाते थे
बंदूक की नोक पर अमेरिकी राजनयिकता विश्व व्यवस्था को दे रही चुनौती
राज्य-प्रायोजित समुद्री डकैती के क्षेत्र पारंपरिक लाल सागर, ओमान की खाड़ी, सोमाली बेसिन से लेकर काला सागर और अब अटलांटिक तक फैल रहे हैं
ईरान में दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में आर्थिक संकट से भड़का आंदोलन अब सत्ता के खिलाफ खुले विद्रोह में बदल चुका है
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला और राष्ट्रपति का अपहरण ग्लोबल साउथ के लिए खतरा
वेनेजुएला पर अमेरिका की आक्रामकता, उसके चुने हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलियाफ्लोरेस का नार्कोटेररिज्म के मनगढ़ंत आरोपों में अपहरण, शेर और मेमने की जानी-पहचानी कहानी की याद दिलाता है
वेनेज़ुएला संकटः अमेरिकी निरंकुशता और वैश्विक कानूनों का हनन
वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था वास्तव में नियम-कानूनों से संचालित होती है या फिर ताकतवर राष्ट्रों की इच्छा ही वैश्विक न्याय का नया मानदंड बन चुकी है। निश्चित तौर पर वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमला महाशक्तियों ... Read more
अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला दुनिया भर के लिए चेतावनी
यह गुंडों जैसी हरकत है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को भी बेडरुम से घसीट कर बाहर निकालना और उठा कर ले जाना
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के दिल्ली दौरे से आया व्यापार समझौता वार्ता में निर्णायक मोड़
अमेरिका को भारत के शिपमेंट मुख्य रूप से खुशबूदार बासमती किस्म के होते हैं, जो खास उपभोक्ता वर्ग और ऐसे बाजार की जरूरतों को पूरा करते हैं।
भारत-अमेरिका विवाद में क्वाड का भविष्य दांव पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा समूह क्वाड की सुरक्षा वार्ता हेतु नई दिल्ली में इस साल के अन्त तक प्रस्तावित क्वाड शिखर सम्मेलन-2025 अब भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव, जिसमें व्यापार और राजनीतिक दोनों मुद्दे शामिल हैं
अमेरिका को दुनिया को परमाणु संकट की ओर धकेलने की इजाज़त नहीं दी जा सकती
29 अक्टूबर को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि 'अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों के कारण, मैंने युद्ध विभाग (पेंटागन) को समान आधार पर हमारे परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू करने का निर्देश दिया है
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

