डिजिटल समाचार स्रोत

...

Karnal News: 40 लाख में इकलौते बेटे को भेजा था अमेरिका भेजा, जन्मदिन से पहले घर पहुंची मौत की खबर

40 लाख में इकलौते बेटे को भेजा था अमेरिका भेजा, जन्मदिन से पहले घर पहुंची मौत की खबर

अमर उजाला 14 Sep 2026 1:44 am

रेलवे स्टेशन पर क्लॉक रूम नहीं, अमेरिकी पर्यटक ने सिर पर बैग रख किया विरोध

Satara Railway Station News: सतारा रेलवे स्टेशन पर क्लॉक रूम न मिलने से नाराज अमेरिकी पर्यटक ने सिर पर बैग रखकर जताया विरोध. प्रशासन ने दिया यह जवाब...

आज तक 13 Sep 2026 8:34 pm

अमेरिका के छोटे कॉलेजों से पढ़कर भी छात्र पीट रहे ₹95 लाख से ₹1 करोड़ का पैकेज, फोर्ब्स की नई रिपोर्ट ने चौंकाया

करियर की रेस में दशकों से यह धारणा सबसे आगे रही है कि अगर आपके बायोडाटा पर हार्वर्ड, एमआईटी, स्टैनफोर्ड या प्रिंसटन जैसी दुनिया की सबसे मशहूर आइवी लीग यूनिवर्सिटीज का ठप्पा नहीं है, तो कॉरपोरेट जगत में करोड़ों के पैकेज का सपना देखना मुश्किल है। हालांकि, अमेरिका के उच्च शिक्षा जगत से सामने आए फोर्ब्स की ताजा टॉप-500 कॉलेज रैंकिंग के आंकड़ों ने इस पारंपरिक सोच को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। रिपोर्ट के हैरान कर देने वाले आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि शानदार कमाई और सुरक्षित भविष्य के लिए किसी विश्वविख्यात संस्थान का नाम होना अब कोई अनिवार्य शर्त नहीं रह गया है। साधारण दिखने वाले क्षेत्रीय और छोटे अमेरिकी कॉलेजों से डिग्री लेने वाले छात्र भी अपने करियर के एक दशक पूरे होते-होते दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों के पूर्व छात्रों के लगभग बराबर कमाई कर रहे हैं।फोर्ब्स टॉप-500 रैंकिंग का बड़ा खुलासा: छोटे कॉलेजों के पास भी करोड़ों की कमाई का फॉर्मूलाफोर्ब्स की इस विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के टॉप-500 संस्थानों की सूची में जो कॉलेज सबसे निचले पायदान पर हैं, वहां से निकले ग्रेजुएट्स भी अपनी डिग्री पूरी करने के 10 साल बाद औसतन 95 लाख रुपये से अधिक का सालाना पैकेज उठा रहे हैं। अगर तुलनात्मक नजरिए से देखें तो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसे शीर्ष वैश्विक संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वाले पेशेवर अपने करियर के दसवें साल में औसतन 1.15 करोड़ रुपये सालाना कमाते हैं। इसके मुकाबले इस सूची में आखिरी पायदान यानी 500वें नंबर पर काबिज ओहायो के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में स्थित मेरिएटा कॉलेज (Marietta College) के पूर्व छात्र 10 साल के पेशेवर अनुभव के बाद सालाना लगभग 1 करोड़ रुपये कमा रहे हैं। यह मामूली 15 से 20 लाख रुपये का अंतर यह साबित करने के लिए काफी है कि सामान्य स्तर के समझे जाने वाले कॉलेज भी छात्रों को एक मजबूत और टिकाऊ करियर देने में पूरी तरह सक्षम हैं।लिस्ट के सभी 500 संस्थानों का औसत वेतन ₹86 लाख पार: कौशल बनाम कॉलेज का टैगइस अध्ययन का सबसे मजबूत पहलू यह है कि फोर्ब्स की 500 कॉलेजों की पूरी सूची में शामिल किसी भी संस्थान के ग्रेजुएट की 10 साल बाद की औसत सालाना आय 86 लाख रुपये से कम नहीं पाई गई। इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि आज के आधुनिक जॉब मार्केट में नियोक्ताओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की प्राथमिकता डिग्री जारी करने वाले कॉलेज के नाम से ज्यादा उम्मीदवार के वास्तविक तकनीकी ज्ञान, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक कौशल पर टिक गई है। छोटे कॉलेजों में फैकल्टी का छात्रों पर व्यक्तिगत ध्यान, व्यावहारिक इंटर्नशिप के अवसर और स्थानीय उद्योग जगत से सीधे जुड़ाव ने छात्रों को इस काबिल बना दिया है कि वे आइवी लीग के स्नातकों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।सिर्फ शुरुआती पैकेज देखकर फैसला न लें: अल्मनाई नेटवर्क और ब्रांड वैल्यू की अपनी ताकतहालांकि यह रिपोर्ट कम मशहूर संस्थानों की बड़ी सफलता को रेखांकित करती है, लेकिन शिक्षा और करियर विशेषज्ञ छात्रों को सिर्फ सैलरी पैकेज देखकर ही कॉलेज चुनने से बचने की हिदायत देते हैं। हार्वर्ड, येल या एमआईटी जैसे बड़े संस्थानों में दाखिला लेने के कई ऐसे अदृश्य और दीर्घकालिक लाभ होते हैं जो किसी भी वेतन आंकड़े में तुरंत दर्ज नहीं होते। इन दिग्गज संस्थानों का वैश्विक स्तर पर फैला बेहद मजबूत पूर्व छात्र नेटवर्क (Alumni Network) जीवनभर छात्रों के लिए वेंचर कैपिटल फंडिंग, अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व के अवसर और कॉरपोरेट बोर्डरूम के दरवाजे खोलता है। एक प्रतिष्ठित ब्रांड का नाम उम्मीदवार को भीड़ से अलग पहचान दिलाता है, जो मंदी या वैश्विक संकट के दौर में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनता है।आसमान छूती फीस और 33 लाख का एजुकेशन लोन: डिग्री का बढ़ता वित्तीय जोखिमदूसरी तरफ, अमेरिका की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद परेशान करने वाला सच भी सामने आ रहा है। एजुकेशन डेटा इनिशिएटिव की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में उच्च शिक्षा की लागत दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ चुकी है। आज के समय में केवल एक बैचलर डिग्री पूरी करने के लिए एक सामान्य छात्र को औसतन 33 लाख रुपये से अधिक का एजुकेशन लोन अपने सिर पर लेना पड़ रहा है। जब युवा भारी-भरकम कर्ज के साथ अपने करियर की शुरुआत करते हैं, तो उन पर मानसिक और वित्तीय दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में करोड़ों रुपये की फीस देकर नामी कॉलेज जाने के बजाय किफायती फीस वाले छोटे कॉलेजों से पढ़ाई करके लगभग बराबर का पैकेज हासिल करना छात्रों के लिए वित्तीय रूप से ज्यादा समझदारी भरा सौदा साबित हो रहा है।मार्क जकरबर्ग का सवाल: क्या आज के कॉलेज भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हैं?उद्योग जगत के दिग्गज भी अब इस बहस में खुलकर अपनी राय रख रहे हैं कि सिर्फ एक महंगी डिग्री सफलता की पक्की गारंटी नहीं हो सकती। मेटा (फेसबुक) के संस्थापक मार्क जकरबर्ग का मानना है कि पारंपरिक कॉलेज जाने का सबसे बड़ा लाभ नए और प्रतिभाशाली लोगों से मिलना तथा एक मजबूत पेशेवर नेटवर्क बनाना है। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक शिक्षा प्रणाली पर गहरा सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या मौजूदा पाठ्यक्रम छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और तेजी से बदलती जॉब मार्केट की अगली पीढ़ी की चुनौतियों के लिए सच में तैयार कर पा रहे हैं? तकनीक के इस युग में सेल्फ-लर्निंग, प्रोजेक्ट-बेस्ड एक्सपीरियंस और व्यावहारिक कौशल ने महंगी डिग्रियों के पुराने एकाधिकार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Sep 2026 7:50 pm

अमेरिका ने कमर्शियल जहाजों की हवाई सुरक्षा का दायरा घटाया, अब मिलेंगे सिर्फ 2 तय स्लॉट

पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर संकट और गहरा गया है। ईरान की बढ़ती आक्रामकता और लगातार होते ड्रोन व मिसाइल हमलों के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने कमर्शियल तेल टैंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा में भारी कटौती कर दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने विशेष रूप से लड़ाकू विमानों और ड्रोनों द्वारा दी जाने वाली रातभर की निरंतर हवाई निगरानी को सीमित करने का फैसला किया है। अब वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई के इस लाइफलाइन रूट से गुजरने वाले जहाजों को चौबीसों घंटे सुरक्षा मिलने के बजाय केवल प्रतिदिन दो तय ट्रांजिट स्लॉट में ही अमेरिकी हवाई छत्रछाया उपलब्ध कराई जाएगी।होर्मुज जलडमरूमध्य में नया सुरक्षा प्रोटोकॉल: रातभर की हवाई निगरानी पर ब्रेकफाइनेंशियल टाइम्स की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना मई 2026 से ही जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में ओमान के तटवर्ती रास्तों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सघन हवाई सुरक्षा प्रदान कर रही थी। इस रणनीतिक कवच का उद्देश्य ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के हमलों के बावजूद दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखना था। पुरानी व्यवस्था के तहत जहाज ऑपरेटर अमेरिकी नौसेना के कोऑर्डिनेशन सेंटर से संपर्क साधकर विशेष कोऑर्डिनेट्स और समय हासिल करते थे, जिसके दौरान अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के विमान आसमान से उनकी निगरानी करते हुए सुरक्षित रास्ता निकालते थे। हालांकि, सितंबर 2026 की शुरुआत से इस पूरे सुरक्षा तंत्र को अचानक संकुचित कर दिया गया है।नौसेना समन्वय केंद्र की एडवाइजरी: अब जहाजों को तय समय पर ही निकालना होगा काफिलानेवल कोऑपरेशन एंड गाइडेंस फॉर शिपिंग (NCAGS) द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री सलाहकारों और शिपिंग कंपनियों को भेजे गए गोपनीय ईमेल से इस बड़े नीतिगत बदलाव की पुष्टि हुई है। इस नए आदेश में साफ कहा गया है कि पहले मिलने वाली रातभर की लंबी सुरक्षा विंडो अब समाप्त कर दी गई है। जहाजों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे हर दिन निर्धारित किए गए दो विशेष टाइम स्लॉट के मुताबिक ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। यदि कोई टैंकर इन तय स्लॉट्स से पहले या बाद में इस संकीर्ण जलमार्ग में प्रवेश करता है, तो उसे अमेरिकी सेना से किसी भी तरह का हवाई बैकअप नहीं मिल सकेगा। मध्य पूर्व में तैनात यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस मुद्दे पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि जारी की गई आधिकारिक नौसैनिक एडवाइजरी अपने आप में अंतिम और स्पष्ट निर्देश है।तेहरान और वाशिंगटन में सीधा टकराव: मिसाइलें, ड्रोन और टैंकरों पर जवाबी प्रहारसुरक्षा घेरे को सीमित करने का यह अप्रत्याशित कदम ऐसे नाजुक मोड़ पर उठाया गया है जब खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हमले खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं। बीते बुधवार को ईरान ने आधिकारिक रूप से दावा किया कि उसने अपने पांच जहाजों पर हुए कथित अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में दो अमेरिकी नौसैनिक जहाजों और आठ विशाल तेल टैंकरों पर सटीक हमले किए हैं। इसके जवाब में अमेरिकी सैन्य सूत्रों ने पुष्टि की कि ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने हाल ही में अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिसके चलते दोनों महाशक्तियों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है।यूकेएमटीओ की चेतावनी: दुबई और इराक के समुद्री तटों तक फैला युद्ध का दायराब्रिटेन की नौसैनिक निगरानी एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी इस पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया है। एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी कमांडो और समुद्री ड्रोन अब केवल होर्मुज के मुहाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुबई के अपतटीय क्षेत्रों और इराक के निकटवर्ती समुद्री मार्गों में भी व्यापारिक जहाजों को लगातार निशाना बना रहे हैं। 28 फरवरी 2026 को क्षेत्रीय संघर्ष भड़कने के बाद से अब तक 70 से अधिक कमर्शियल जहाजों पर घातक हमले दर्ज किए जा चुके हैं। इस अभूतपूर्व समुद्री असुरक्षा के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों का बीमा प्रीमियम आसमान छू रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Sep 2026 7:47 pm

अमेरिका में हरियाणवी युवक ने मर्डर कर सुसाइड किया:आरोप- 16 साल बड़ी युवती से शादी करना चाहता था, मना करने पर गोली मारी

अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक रेस्टोरेंट के बाहर भारतीय मूल की युवती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आरोप हरियाणा के करनाल के रहने वाले 22 साल के युवक पर लगा। घटना के बाद युवक अपनी गाड़ी से फरार हो गया। पुलिस पीछा करते हुए उस तक पहुंची तो युवक भी गाड़ी में मृत मिला। उसने खुद को गोली मारी हुई थी। युवती की पहचान शालिनी ठाकुर (38) के तौर पर हुई है। अभी यह नहीं पता चल पाया है कि वह कहां की रहने वाली है। करनाल का रोहित 2023 में एरिजोना के रास्ते (डंकी रूट) अमेरिका गया था। अमेरिकी बॉर्डर पुलिस ने उसे पकड़ा था, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया। मर्डर-सुसाइड की घटना 8 सितंबर की है। आरोप है कि रोहित शालिनी पर शादी करने का दबाव बना रहा था। हालांकि, शालिनी के परिवार ने उम्र में 16 साल का अंतर होने की वजह से इनकार कर दिया था। सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… एक साल से शालिनी का पीछा करने का आरोप शालिनी की मां सुदेश कुमारी के अनुसार, शालिनी आर्डन आर्केड इलाके के एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थीं। उनके पति की दो साल पहले मौत हो गई थी। शालिनी उनकी इकलौती संतान थी। रोहित उसके काम की जगह पर डिलीवरी लेकर आता था। वह शालिनी से शादी करना चाहता था, लेकिन उम्र के अंतर के कारण उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके बाद रोहित नाराज हो गया और पीछा करना नहीं छोड़ा। रोहित के पिता जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती रोहित करनाल के जुंडला का रहने वाला था। उसके पिता जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती हैं। रोहित भी उनकी इकलौती संतान थी। वह 2023 में डंकी रूट से अमेरिका गया था। वह डोरडैश डिलीवरी का काम करता था।

दैनिक भास्कर 13 Sep 2026 7:46 pm

शी चिनफिंग ने 'ग्रेटर ब्रिक्स' का रखा प्रस्ताव, अमेरिका और यूरोप पर बिना नाम लिए कसा तंज

चिनफिंग ने 'ग्रेटर ब्रिक्स' का प्रस्ताव रखा और अमेरिका व पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए, 'जिसकी लाठी, उसकी भैंस' के सिद्धांत को अमान्य बताया।

जागरण 13 Sep 2026 7:40 pm

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका के सामने ईरान की शर्त!

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि ओमान के साथ नए समुद्री रास्ते का समझौता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने का संकेत नहीं है. उन्होंने बताया कि ओमान में होने वाली बैठक में नए रास्ते के नक्शे और समझौते की जानकारी साझा की जाएगी. अराघची के मुताबिक होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं पर लौटना होगा. क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी भी स्थानीय देशों को देने की बात कही गई है.

आज तक 13 Sep 2026 5:45 pm

नामी यूनिवर्सिटी को टक्कर दे रहे अमेरिका के आम कॉलेज

अक्सर युवाओं और उनके माता-पिता को लगता है कि एक शानदार करियर और भारी-भरकम सैलरी के लिए हार्वर्ड, प्रिंसटन या एमआईटी जैसे किसी बड़े और नामी कॉलेज से पढ़ाई करना बेहद जरूरी है। अमेरिका की फोर्ब्स टॉप-500 कॉलेज रैंकिंग की हालिया रिपोर्ट ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है। इस रिपोर्ट के …

इंडियन लेटर 13 Sep 2026 5:33 pm

दिल्ली से 6000 KM दूर समंदर में एक्सरसाइज, भारत-अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया आए साथ

क्वाड के चार देशों ने 3 और 4 सितंबर 2026 को टोक्यो में टेबलटॉप एक्सरसाइज किया, जिसमें प्राकृतिक आपदा के वक्त साझा रसद क्षमता और राहत समन्वय पर फोकस रहा. इस अभ्यास से आईपीएलएन के एसओपी बनाने की दिशा में अहम प्रगति हुई और क्षेत्रीय संकट में मानवीय मदद को तेज करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई.

आज तक 13 Sep 2026 5:10 pm

अमेरिका ने होर्मुज में टैंकरों की हवाई सुरक्षा का समय घटाया

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल टौंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा, खासकर हवाई सुरक्षा के समय को सीमित कर दिया है। यह कदम इस अहम समुद्री रास्ते पर चलने वाले जहाजों पर ईरान के हमलों में बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका मई से …

इंडियन लेटर 13 Sep 2026 5:02 pm

अंबानी की कंपनी ले रही अमेरिकी बैंक से ₹18268 करोड़, क्यों आई ये नौबत? इसलिए होगा फंड का इस्तेमाल

गैर-बैंकिंग ऋणदाता जियो क्रेडिट को दिसंबर तक बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) से 18,268 करोड़ रुपये की पूंजी मिलने की उम्मीद है, जिससे उसकी एयूएम में पांच गुना वृद्धि हो सकती है। इस निवेश से कंपनी अपनी व्यावसायिक रणनीति की समीक्षा करेगी और प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों (एयूएम) को 1.5 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य रखेगी।

जागरण 13 Sep 2026 3:30 pm

'ताकतवर होने से कोई सही नहीं हो जाता', जिनपिंग ने PM मोदी को कहा थैंक्यू, अमेरिका को मैसेज

BRICS समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ, अंतरराष्ट्रीय नियमों, UN, AI और आर्थिक सहयोग को लेकर चीन का विजन सामने रखा. उन्होंने BRICS देशों से एकजुट होकर दुनिया में स्थिरता और विकास के लिए काम करने की अपील की.

आज तक 13 Sep 2026 3:02 pm

फरीदकोट में अमेरिकन भांजा बन 14.10 लाख का फ्रॉड:अकाउंट में रुपए डालने का झांसा देकर मांगी बैंक डिटेल, फर्जी रसीद भेज ठगी

फरीदकोट के गुरु तेग बहादुर नगर निवासी लाल चंद को साइबर ठगों ने अपना शिकार बनाया। 6 सितंबर को लाल चंद के व्हाट्सऐप पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को अमेरिका में रहने वाला उनका भांजा पवन कुमार बताया और कहा कि 22 सितंबर को भारत आ रहा है। आरोपी ने कहा कि वह अपने माता-पिता को सरप्राइज देना चाहता है, इसलिए इस बात की जानकारी उन्हें न दी जाए। ठग ने लाल चंद को पैसे भेजने का झांसा देकर उनके एचडीएफसी बैंक खाते की डिटेल मांगी। बातों में आकर लाल चंद ने अपने बैंक चेक की फोटो व्हाट्सऐप पर भेज दी। इसके बाद आरोपी ने 18,00,550 रुपये खाते में ट्रांसफर करने की एक फर्जी रसीद लाल चंद को भेजी। पास्पोर्ट अटकने का बहाना बनाकर ऐंठे 14.10 लाख रुपये रसीद भेजने के बाद आरोपी ने फोन कर कहा कि उसका पासपोर्ट अटक गया है और उसे तुरंत पैसों की जरूरत है। उसने दावा किया कि उसके द्वारा भेजे गए पैसे जल्द ही खाते में आ जाएंगे। भांजे की परेशानी समझकर लाल चंद ने आरोपी के बताए खाते में 14,10,00,0 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपी ने जब दोबारा 1 लाख रुपये की मांग की, तो लाल चंद को शक हुआ। असली भांजे से बात करने पर खुली पोल संदेह होने पर लाल चंद ने अमेरिका में रह रहे अपने असली भांजे पवन कुमार के नंबर पर संपर्क किया। भांजे ने बताया कि उसने न तो कोई फोन किया है और न ही पैसे मांगे हैं। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने दर्ज किया केस, खाते खंगाले जा रहे थाना साइबर क्राइम के एसएचओ इंस्पेक्टर गुरविंदर सिंह ने बताया कि लाल चंद की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट (IT Act) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उन बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी की पहचान के प्रयास जारी हैं और जल्द ही पीड़ित के पैसे रिकवर कराने की कोशिश की जाएगी।

दैनिक भास्कर 13 Sep 2026 1:51 pm

पश्चिम एशिया: होर्मुज में ईरानी जहाज को बनाया निशाना, एक की मौत-तीन घायल; अमेरिका की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस

पश्चिम एशिया: होर्मुज के पास ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हमला, एक की मौत-तीन घायल; US की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस

अमर उजाला 13 Sep 2026 12:34 pm

9/11 से पहले ही ओसामा बिन लादेन की 'हिट लिस्ट' में था भारत! अमेरिकी खुफिया एजेंसी के डीक्लासिफाइड दस्तावेजों में सनसनीखेज खुलासा

11 सितंबर 2001 (9/11) को अमेरिका के ट्विन टावर्स और पेंटागन पर हुए भीषण आतंकी हमले ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया था। इस हमले के मास्टरमाइंड और कुख्यात आतंकी संगठन अलकायदा (Al-Qaeda) के सरगना ओसामा बिन लादेन को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA और FBI) के डीक्लासिफाइड दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिका की धरती पर हवाई जहाजों से तबाही मचाने से काफी पहले ही भारत लादेन और उसके आतंकी नेटवर्क की 'प्राइम हिट लिस्ट' में शामिल था। लादेन केवल पश्चिमी देशों से ही नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और आर्थिक प्रगति को भी गहरे आघात पहुंचाने की साजिश रच रहा था।1990 के दशक से ही रची जा रही थी भारत विरोधी साजिशअमेरिकी आतंकवाद रोधी विशेषज्ञों और खुफिया दस्तावेजों की समीक्षा से स्पष्ट होता है कि 1996 में अफगानिस्तान लौटने के बाद ओसामा बिन लादेन ने भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया था:पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुटों से गठजोड़: लादेन ने हरकत-उल-अंसार (बाद में हरकत-उल-मुजाहिदीन), लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत विरोधी आतंकी संगठनों को धन, हथियार और ट्रेनिंग मुहैया कराई थी।कंधार विमान अपहरण (IC-814) का कनेक्शन: 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के अपहरण के पीछे अलकायदा और तालिबान का सीधा साजो-सामान सहयोग था। इस घटना के बाद मसूद अजहर की रिहाई ने भारत के खिलाफ अलकायदा के मंसूबों को और हवा दी थी।भारतीय दूतावासों की रेकी: खुफिया फाइलों से यह खुलासा भी हुआ कि 1998 में केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर किए गए बम धमाकों के दौर में ही अलकायदा ने दक्षिण एशिया और खाड़ी देशों में भारतीय मिशनों की भी निगरानी करवाई थी।लादेन की 'हिट लिस्ट' में कौन से भारतीय ठिकाने थे?खुफिया विश्लेषकों के अनुसार, अलकायदा का मकसद भारत में किसी बड़े प्रतीकात्मक और आर्थिक केंद्र पर हमला कर व्यापक अस्थिरता पैदा करना था:परमाणु और रक्षा प्रतिष्ठान: लादेन भारत की परमाणु क्षमताओं को लेकर हमेशा चिंतित रहता था और उसके लड़ाके भारतीय सैन्य और अनुसंधान ठिकानों की जानकारियां जुटाने की फिराक में थे।आर्थिक राजधानी मुंबई और दिल्ली के प्रशासनिक केंद्र: 9/11 हमले से पहले ही लादेन के नेटवर्क ने भारत के प्रमुख वित्तीय संस्थानों, संसद भवन और वाणिज्यिक केंद्रों को निशाना बनाने की योजना पर काम शुरू किया था, जिसे बाद में उसके सहयोगी संगठनों ने अंजाम देने की कोशिश की।धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल: भारत के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने के लिए प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आत्मघाती हमलों का खाका तैयार किया गया था।9/11 के बाद भारत ने दुनिया को दी थी चेतावनी9/11 हमले के तुरंत बाद भारत के तत्कालीन नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट किया था कि आतंकवाद को 'क्षेत्रीय' या 'वैश्विक' के रूप में बांटना एक भारी भूल है। भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का दंश झेल रहा था, जिसे पश्चिमी देश लंबे समय तक स्थानीय कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानते रहे। सीआईए के दस्तावेजों से यह प्रमाणित हुआ कि लादेन का नेटवर्क एक एकीकृत वैश्विक जिहादी एजेंडे पर काम कर रहा था, जिसमें अमेरिका और भारत दोनों उसके प्राथमिक दुश्मन थे।एबटाबाद रेड से बरामद फाइलों में भी मिले थे भारत से जुड़े दस्तावेजमई 2011 में जब अमेरिकी नेवी सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में स्थित लादेन के गुप्त ठिकाने पर हमला कर उसे ढेर किया था, तब वहां से हजारों कंप्यूटर हार्ड ड्राइव और कागजात बरामद हुए थे। इन दस्तावेजों में भी भारतीय सुरक्षा बलों की गतिविधियों, कश्मीर मुद्दे और भारत में जिहादी नेटवर्क के विस्तार की रणनीतियों से जुड़ी कई गुप्त डायरियां और पत्र मिले थे। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि अपनी मौत के समय तक लादेन भारत के खिलाफ साजिशें रचने में लगातार लगा हुआ था।भारतीय खुफिया एजेंसियों की सतर्कता ने टाले बड़े खतरेभारतीय खुफिया एजेंसी रॉ (R&AW) और आईबी (IB) ने 1990 और 2000 के शुरुआती दशकों में पश्चिमी खुफिया तंत्र के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग कर अलकायदा के कई खतरनाक मंसूबों को समय रहते नाकाम किया। आज भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और सुरक्षा एजेंसियां अलकायदा के भारतीय उपमहाद्वीप विंग (AQIS) के स्लीपर सेल्स पर लगातार शिकंजा कस रही हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Sep 2026 11:06 am

Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump

Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा

लाइव हिन्दुस्तान 13 Sep 2026 10:15 am

ग्लोबल चेस लीग में कार्लसन की पहली हार:अलीरेजा फिरोजा ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी को हराया; अमेरिकन गैंबिट्स का फाइनल का सपना टूटा

ग्लोबल चेस लीग के चौथे सीजन में मैग्नस कार्लसन को पहली हार मिली। बेंगलुरु में शनिवार को खेले गए मुकाबले में त्रिवेणी कॉन्टिनेंटल किंग्स के अलीरेजा फिरोजा ने उन्हें हराया। इसके बावजूद कार्लसन की अल्पाइन पाइपर्स 18 मैच पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंच गई। रविवार को खिताबी मुकाबले में पाइपर्स का सामना गंगेज ग्रैंडमास्टर्स से होगा। कार्लसन की चेतावनी के बाद अलीरेजा ने दी मात टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले मैग्नस कार्लसन ने मजाकिया अंदाज में अलीरेजा फिरोजा को कम समय में हराने की चेतावनी दी थी। दोनों के बीच पहली बाजी ड्रॉ रही थी। शनिवार को अलीरेजा ने कार्लसन को हराकर टूर्नामेंट में उनकी जीत का सिलसिला तोड़ दिया। जीत के बाद अलीरेजा ने कहा, ‘यह टूर्नामेंट हमारे लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। हमारी टीम में फाइनल जीतने का दम था, लेकिन कुछ करीबी मुकाबलों ने खेल बिगाड़ दिया। दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी के खिलाफ यह जीत बेहद खास है।’ आनंद की टीम पहले ही हो चुकी थी बाहर टूर्नामेंट के 10वें दिन विश्वनाथन आनंद की PBG अलास्कन नाइट्स और त्रिवेणी कॉन्टिनेंटल किंग्स फाइनल की दौड़ से बाहर हो गई थीं। हालांकि, अलास्कन नाइट्स ने अपने आखिरी मैच में टेबल-टॉपर गंगेज ग्रैंडमास्टर्स को हराकर बड़ा उलटफेर किया। अमेरिकन गैंबिट्स का फाइनल में पहुंचने का सपना टूटा बेंगलुरु में खेल रही होम फेवरिट टीम अमेरिकन गैंबिट्स के पास फाइनल में जगह बनाने का मौका था। उसे मुंबा मास्टर्स के खिलाफ कम से कम 8 अंकों के अंतर से जीत की जरूरत थी। टीम के जावोखिर सिंदारोव ने मैक्सिम वाचियर-लाग्रेव को हराकर 3 अंक जुटाए। दानिल डुबोव और बिबिसारा असाउबाएवा की बाजियां ड्रॉ रहीं। लेकिन सारा खादेम, मार्क एंड्रिया मौरीज़ी और भारत के निहाल सरीन अपने-अपने मैच हार गए। निहाल अच्छी बढ़त पर थे, लेकिन समय समाप्त होने के कारण प्रानेश एम से हार गए। इस नतीजे के बाद गैंबिट्स तीसरे स्थान के मैच में मुंबा मास्टर्स से भिड़ेगी। ------------------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… 94 साल में पहली बार ऐसी क्रिकेट सीरीज:दिल्ली में मैच फिर भी विदेशी होगी टीम इंडिया, पिच भी अफगान टीम तय करेगी भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन टी-20 मैचों की सीरीज आज से शुरू हो रही है। तीनों मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होंगे। मुकाबले भले ही भारत में हो रहे हैं लेकिन इस सीरीज में होम टीम अफगानिस्तान की होगी और भारतीय टीम विजिटर्स होगी। पूरी खबर

दैनिक भास्कर 13 Sep 2026 9:31 am

9/11 से पहले ही ओसामा बिन लादेन की 'हिट लिस्ट' में था भारत! अमेरिकी खुफिया एजेंसी का सनसनीखेज दावा

Osama Bin Laden News: 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले से पहले ही भारत आतंकवादी संगठन अल-कायदा के सरगना और खूंखार पाकिस्तानी आतंकी ओसामा बिन लादेन के निशाने पर था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) द्वारा सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेजों से यह बड़ा खुलासा हुआ है। दस्तावेजों के मुताबिक, बिन लादेन कई देशों में आतंकी हमले कराने की योजना पर विचार कर रहा था, जिसमें भारत भी शामिल था। CIA ने 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर बिन लादेन से जुड़े 70 से ज्यादा प्रेसिडेंशियल इंटेलिजेंस ब्रीफ जारी किए हैं।इनमें 100 से अधिक पन्नों की खुफिया जानकारीशामिल है। ये दस्तावेज 1998 से लेकर 2001 तक की अवधि से जुड़े हैं। ये बताते हैं कि अमेरिका को उस दौर में बिन लादेन और अल-कायदा के संभावित हमलों को लेकर लगातार चेतावनियां मिल रही थीं। 1998 के प्रेसिडेंशियल ब्रीफ में बताया गया है कि बिन लादेन भारत समेत कई देशों पर हमले करना चाहता था।1998 के दस्तावेज में भारत का जिक्रCIA द्वारा जारी दस्तावेजों में 28 अगस्त 1998 की एक प्रेसिडेंशियल ब्रीफ बेहद महत्वपूर्ण है। इसका शीर्षक Bin Ladin Terrorist Network Still a Threat (बिन लादेन का आतंकवादी नेटवर्क अभी भी एक खतरा है) था। इस खुफिया रिपोर्ट में बताया गया था कि ओसामा बिन लादेन कई देशों में हमले करवाना चाहता था।भारत के साथ ये नाम भी थे शामिललिस्ट में भारत, पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन और युगांडा का नाम शामिल था। रिपोर्ट में संभावित रूप से नाइजीरिया का भी जिक्र किया गया था। हालांकि, दस्तावेज के कुछ हिस्से अभी भी ब्लैकआउट यानी रेडैक्ट किए गए हैं। इसमें भारत के किसी खास शहर, संस्थान या व्यक्ति को संभावित निशाना बताए जाने की जानकारी नहीं है। साथ ही किसी संभावित हमले की निश्चित तारीख या विस्तृत ऑपरेशनल प्लान का भी जिक्र नहीं किया गया है।60 देशों में नेटवर्क का इस्तेमाल करने की तैयारीरिपोर्ट के मुताबिक, बिन लादेन अफगानिस्तान में बैठे अपने सहयोगियों और आतंकी नेटवर्क के जरिए दुनिया के कई हिस्सों में हमले कराने की क्षमता रखता था। CIA के आकलन में कहा गया था कि अल-कायदा प्रमुख कम से कम 60 देशों में मौजूद लोगों और सहयोगी संगठनों के नेटवर्क का इस्तेमाल आतंकी हमलों के लिए कर सकता है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में बिन लादेन का पहले से मौजूद नेटवर्क इस बात को विश्वसनीय बनाता था कि वह इन क्षेत्रों में अमेरिकी हितों को भी निशाना बना सकता है।अमेरिकी हमलों के बाद भी कायम था अल-कायदा नेटवर्कदस्तावेज के अनुसार, अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में अल-कायदा के ठिकानों पर मिसाइल हमले किए जाने के बावजूद बिन लादेन और उसके साथ मौजूद अन्य आतंकी नेता बच गए थे। CIA का आकलन था कि उनका कम्युनिकेशन नेटवर्क अभी भीएक्टिव था। कुछ आतंकीट्रेनिंग शिविरों में गतिविधियां दोबारा शुरू हो गई थीं। जबकि कुछ अन्य कैंपों को दूसरी जगहों पर ले जाया जा रहा था। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई थी कि बिन लादेन अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन के खिलाफ भी नए हमले कराने की कोशिश कर सकता है।9/11 से पहले अमेरिका को मिल रही थीं लगातार चेतावनियांCIA द्वारा जारी इन दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों को 1998 से 2001 के बीच बिन लादेन और अल-कायदा के खतरे को लेकर कई बार खुफिया जानकारी दी गई थी। इन प्रेसिडेंशियल ब्रीफ का सिलसिला बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति कार्यकाल से शुरू होकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल तक पहुंचता है।CIA ने दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि यह रिलीज अमेरिका के इतिहास के सबसे संवेदनशील खुफिया दस्तावेजों में से एक को लेकर अभूतपूर्व पारदर्शिता प्रदान करती है। खासकर उस दौर को लेकर जो अमेरिका के इतिहास के सबसे भयावह दिनों में से एक से पहले और उसके तुरंत बाद का था।क्या हुआ था 11 सितंबर 2001 को?11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकियों ने अमेरिका में चार यात्री विमानों का अपहरण कर लिया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराए। हमले के बाद दोनों विशाल इमारतें पूरी तरह ढह गईं और हजारों लोगों की जान चली गई। 9/11 हमले ने पूरी दुनिया की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीति को बदल दिया। अब सार्वजनिक किए गए CIA दस्तावेज यह भी सामने लाते हैं कि इस हमले से वर्षों पहले ही ओसामा बिन लादेन का आतंकी नेटवर्क कई देशों को संभावित निशाने के तौर पर देख रहा था।ये भी पढ़ें- VIDEO: 'ख्वाब हो तुम या...'; BRICS में दिखा बॉलीवुड का रंग! किशोर कुमार के जबरा फैन निकले मलेशियाई PM अनवर इब्राहिम, हिंदी गायकी का वीडियो वायरल

ज़ी न्यूज़ 13 Sep 2026 9:12 am

अमेरिका ने बाढ़ पीड़ितों की पहचान करने में नेपाल की मदद के लिए अतिरिक्त 10 लाख डॉलर की दी मंजूरी

वॉशिंगटन, 13 सितंबर . अमेरिका ने नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की पहचान करने में मदद के लिए अतिरिक्त 1 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी है. इसके साथ ही, आपदा से निपटने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से दी जाने वाली कुल मदद 5 मिलियन डॉलर से अधिक हो गई है. अमेरिकी फोरेंसिक विशेषज्ञ ... Read more

डेली किरण 13 Sep 2026 8:48 am

अमेरिका-ईरान जंग पर क्या बोले मसूद पेजेशकियान? देखें US TOP-10

आजतक से बात करते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर बगैर उकसावे के हमला किया. अमेरिका को लगा था कि वो वेनेजुएला की तरह 24 घंटे के भीतर ईरान पर कब्जा कर लेगा. अपनी कटपुतली की सरकार बना लेगा लेकिन अमेरिका के हमले ने ईरान को एकजुट कर दिया. और अमेरिका के उम्मीद के विपरीट ईरान की सेना ने जान की बाजी लगाकर अम्रिका का मुकाबला किया.

आज तक 13 Sep 2026 8:46 am

BRICS में अमेरिका की मनमानी रोकने की तैयारी!

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने BRICS को अमेरिकी एकतरफा नीतियों और प्रतिबंधों के खिलाफ महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने डॉलर पर निर्भरता कम करने, सदस्य देशों के बीच निवेश और सहयोग बढ़ाने तथा दुनिया को एकध्रुवीय व्यवस्था से दूर ले जाने पर जोर दिया।

आज तक 13 Sep 2026 8:15 am

Industrial Corridor में पांच भूखंड आवंटित; चार पर चल रही प्रक्रिया... अमेरिकी कंपनी करेगी 2913 करोड़ का निवेश

मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे औद्योगिक गलियारे के पहले चरण में यूपीडा द्वारा 24 बड़े भूखंड आवंटित किए जाएंगे, जिनमें से 5 का आवंटन हो चुका है। अमेरिकी कंपनी बॉल कॉर्पोरेशन 20 हेक्टेयर भूमि पर 2913 करोड़ रुपये का निवेश कर एल्युमीनियम केन बनाएगी, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है।

जागरण 13 Sep 2026 5:55 am

ब्रिक्स पर दुनिया की नजर: अमेरिका से पाकिस्तान तक मीडिया ने माना-पश्चिम को चुनौती का मंच; मतभेद भी बड़ी चुनौती

ब्रिक्स पर दुनिया की नजर: अमेरिका से पाकिस्तान तक मीडिया ने माना-पश्चिम को चुनौती का मंच; मतभेद भी बड़ी चुनौतीbrics summit india global media western dominance diplomacy

अमर उजाला 13 Sep 2026 4:04 am

अमेरिका में भारतीय महिला की हत्या: आरोपी ने महीनों पीछा कर बरसाईं गोलियां; फिर खुद को भी मार डाला, क्या मामला?

अमेरिका में भारतीय महिला की हत्या: आरोपी ने महीनों पीछा कर बरसाईं गोलियां; फिर खुद को भी मार डाला, क्या मामला?indian origin woman shalini thakur killed california stalker

अमर उजाला 13 Sep 2026 12:20 am

क्‍या BRICS से खत्‍म होगा अमेरिका का दबदबा, ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान के दावे में कितना दम?

भारत की राजधानी नई दिल्‍ली में आयोजित ब्रिक्‍स समिट में यूं तो दुनिया के कई देश शामिल हुए हैं, लेकिन जिन देशों की चर्चा है, वो हैं चीन, रूस, ईरान और भारत। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ब्रिक्स को लेकर बड़ा दावा किया है।

वेब दुनिया 13 Sep 2026 12:01 am

ब्रिक्स घोषणापत्र पर सहमति बड़ी उपलब्धि, पश्चिम एशिया और यूक्रेन का हल अमेरिका पर निर्भर : केपी फैबियन

New Delhi, 12 सितंबर . India की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में घोषणापत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति को विदेश मामलों के विशेषज्ञ केपी फैबियन ने बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है. उन्होंने कहा कि ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे तनाव के बीच घिरे देशों के बावजूद साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना ... Read more

डेली किरण 12 Sep 2026 11:58 pm

भारत-ईरान रिश्तों से अमेरिका तक, ईरानी राष्ट्रपति का Exclusive इंटरव्यू

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आजतक के साथ खास बातचीत की. इस खास बातचीत में उन्होंने अमेरिका, ईरान और दोनों देशों के बीच के तनाव को लेकर तमाम सवालों पर खुलकर बात की.

आज तक 12 Sep 2026 11:37 pm

BRICS डिक्लेरेशन भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, अमेरिकी विश्लेषक कुगैलमैन का बड़ा बयान

अमेरिका के दक्षिण एशिया मामलों के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में जारी न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन भारत के लिए एक बड़ी डिप्लोमैटिक उपलब्धि है।

खबर इंडिया टीवी 12 Sep 2026 11:26 pm

'ताइवान को हथियार दिए तो रद्द होगी मुलाकात', चीन का अमेरिका को अल्टीमेटम

सूत्रों के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की तैयारियों के बीच चीन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक रेड लाइन है.

आज तक 12 Sep 2026 10:47 pm

'UAE या क्षेत्रीय देशों से समस्या नहीं, अमेरिकी ठिकाने असली मुद्दा हैं', ईरान के राष्ट्रपति ने कहा

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि हमें यूएई से कोई समस्या नहीं है. हमें क्षेत्र के किसी भी देश से कोई समस्या नहीं है. हमें समस्या अमेरिकी अड्डों से है जो इन देशों में स्थित हैं.

आज तक 12 Sep 2026 10:29 pm

ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की क्या स्थिति है? राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने बताया

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका के साथ टकराव के बीच बातचीत जारी रखने और शांति स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है. उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी आक्रामक भूमिका नहीं निभाई.

आज तक 12 Sep 2026 8:59 pm

BRICS से डॉलर को चुनौती? ईरान ने बताया अमेरिका के खिलाफ अपना पूरा प्लान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आजतक के साथ खास इंटरव्यू में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने पर बात की. उन्होंने कहा कि BRICS के सदस्य देश बहुत सारे मुद्दों पर एक-दूसरे का सहयोग कर सकते हैं.

आज तक 12 Sep 2026 8:33 pm

अमेरिका को लेकर क्या बोले राष्ट्रपति पेजेश्कियान? देखें दुनिया आजतक

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और इजरायल के सामने झुकेगा नहीं, बल्कि डट कर मुकाबला करेगा....ब्रिक्स समिट में शामिल होने दिल्ली आए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि हम आज़ाद रहें और वो अपने बुरे इरादे तेहरान पर थोपना चाहता है. देखें...

आज तक 12 Sep 2026 5:57 pm

आईफोन-18 प्रो और प्रो मैक्स की बुकिंग शुरू:भारत में अमेरिका से ₹41,000 महंगा मिलेगा, जानें कहां से ऑर्डर करें

एपल के नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स की बुकिंग भारत सहित दुनियाभर में शुरू हो गई है। भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1.65 लाख रुपए और आईफोन 18 प्रो मैक्स की कीमत 1.80 लाख रुपए रखी गई है। कंपनी ने इस बार अपने प्रो मॉडल लाइनअप में नया A20 Pro चिपसेट, एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम और मेन कैमरे में पहली बार DSLR कैमरे वाली वेरिएबल अपर्चर टेक्नोलॉजी दी है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट की तुलना में भारत में इन दोनों मॉडल्स की कीमतें काफी ज्यादा हैं। आईफोन्स 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स के स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स ग्राफिक्स में देखें… एपल Siri AI में 6 बड़े अपडेट्स स्क्रीन देखकर काम करना: स्क्रीन पर क्या दिख रहा है, सिरी उसे समझकर सीधे वही टास्क पूरा कर देती है। निजी डेटा से सटीक जवाब: ईमेल, मैसेज या कैलेंडर से जानकारी निकालकर आपकी फ्लाइट, मीटिंग या प्लान बता देती है। एप्स के अंदर काम: सिर्फ एप खोलती ही नहीं, बल्कि फोटो एडिट करके किसी को भेजने जैसा अंदर का काम भी कर देती है। इंसानों जैसी बात: अटक-अटक कर बोलने या अधूरा वाक्य बोलने पर भी बात आसानी से समझ लेती है। बिना बोले टाइपिंग: स्क्रीन के नीचे डबल टैप करके अब सिरी को लिखकर भी कमांड दे सकते हैं। चैटजीपीटी सपोर्ट: मुश्किल सवालों के जवाब, टेक्स्ट या रेसिपी के लिए सीधे 'चैटजीपीटी' से मदद ले लेती है। एपल के नए वियरेबल डिवाइसेस

दैनिक भास्कर 12 Sep 2026 5:54 pm

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अमेरिका का मनोबल तोड़ने का काम है:पर्यटन मंत्री ने कहा- बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों में भारत की भूमिका मजबूत हो रही

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दिल्ली के भारत मंडपम में हुए 18वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम दिखेंगे। मंत्री ने इसे बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका से जोड़ा और अमेरिका पर भी निशाना साधा। जयवीर सिंह ने कहा कि अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता। इससे भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी प्रभावित होती हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात में आर्थिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है और भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने दिल्ली में हुए इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को भारत के बढ़ते प्रभाव का संकेत बताया। मंत्री ने सम्मेलन को लेकर एक तीखा बयान भी दिया। उन्होंने कहा, यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अमेरिका का मनोबल तोड़ने का काम है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका और वैश्विक आर्थिक शक्ति-संतुलन पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। जनसुनवाई के दौरान मंत्री से उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनावों के बारे में भी पूछा गया। इस पर जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में चुनाव तय समय पर होंगे। महिलाओं को एक लाख रुपये देने की योजना पर विपक्ष के सवालों पर उन्होंने सरकार का पक्ष रखा। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी व्यवस्था पहले से कर रखी है। भाजपा जनता के लिए समर्पित सरकार है। विपक्ष द्वारा सरकार की योजनाओं को 'रेवड़ी' बताए जाने पर जयवीर सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले यह बताए कि अगर वह ऐसी घोषणाएं करेगा तो उनके लिए पैसे की व्यवस्था कहां से करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की योजनाओं के पीछे वित्तीय व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया है। गोंडा में हुई घटना को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। चुनावी दौर में सभी राजनीतिक दल और नेता जनता के हितैषी होने का दावा करेंगे, लेकिन जनता के हित में कौन कितना खरा उतरता है, इसका फैसला आखिरकार जनता ही करेगी।

दैनिक भास्कर 12 Sep 2026 5:17 pm

क्या अमेरिका में आमने-सामने होंगे पुतिन-जेलेंस्की? G20 समिट में हो सकती है मुलाकात

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच मियामी में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान आमने-सामने मुलाकात की संभावना बन रही है.

आज तक 12 Sep 2026 4:17 pm

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मणिपुर की लोकटक झील में नौका विहार किया

इंफाल, 12 सितंबर . India में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने अपने दो दिवसीय मणिपुर दौरे के दौरान Saturday को बिष्णुपुर जिले स्थित पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील लोकटक में नौका विहार किया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, कोलकाता की काउंसल जनरल कैथी गाइल्स-डियाज और अन्य अधिकारियों के ... Read more

डेली किरण 12 Sep 2026 3:53 pm

क्या अमेरिका, रूस और चीन के साथ मिलकर जी-3 बना सकता है? समझिए इसके पीछे की बदलती कूटनीति!

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीतिक स्वायत्तता वाली कूटनीति से जहां अमेरिका, चीन, रूस तीनों बड़े देश घबराए हुए हैं, वहीं फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देश इसमें ही अपना कूटनीतिक भविष्य देख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का भी मानना है कि यदि भारत अपने मिशन में कामयाब हो जाता है तो इससे न केवल बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि अमेरिका, रूस और चीन के हथियारों के सौदागरों के हाथ-पांव भी ठिठक जाएंगे। चूंकि समसामयिक वैश्विक परिदृश्य में अरब-खाड़ी देशों में अमेरिका-यूरोप की इज्जत दांव पर पड़ी हुई है, क्योंकि रूस-चीन का शह ईरान को हासिल है। इससे पहले यूक्रेन में रूस-चीन-उत्तर कोरिया की सैन्य साख दांव पर पड़ी हुई है, क्योंकि अमेरिका-यूरोप मिलकर यूक्रेन को भड़काए हुए हैं। वैसे तो चीन को ताइवान में और भारत को पीओके में उलझाने की साजिश पश्चिमी-पूर्वी देशों के इशारे पर रचाई गई, लेकिन भारत और चीन के सूझबूझ वाले नेतृत्व ने समय रहते ही स्थिति को संभाल लिया। इससे हथियारों के वैश्विक सौदागरों और ड्रग्स सप्लायर्स का भारत-चीन से खफा होना स्वाभाविक है। इससे होने वाले घाटे की भरपाई के लिए ही तो अमेरिका ने दोनों देशों के खिलाफ टैरिफ युद्ध छेड़ दिया। # मोदी डॉक्ट्रिन के चक्रव्यूह में हर ओर से घिरा महसूस करने लगा है अमेरिका और जब इसमें भी अमेरिका विफल हो गया और मोदी डॉक्ट्रिन के चक्रव्यूह में हर ओर से घिरा महसूस करने लगा तब उसने ग्रुप-तीन (G-3) का नया पैंतरा बदला। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के व्हाइट हाउस के जी तीन प्लान पर रूस के क्रेमलिन ने भी रजामंदी जताई है और बताया है कि पुतिन और जिनपिंग ने नवंबर में शेनजेन में होने वाले APEC सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ G3 बैठक करने पर चर्चा की है। अगर अमेरिका, रूस और चीन एक साथ बातचीत की मेज पर बैठ जाते हैं और किसी सहमति तक पहुंचते हैं, तो ये दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने उस ‘याल्टा सिस्टम’ का अंत होगा, जिसने यूएन सुरक्षा परिषद को बनाया था। इसे भी पढ़ें: ईरान, सऊदी अरब और UAE के मतभेदों के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, BRICS में साझा बयान पर बनी आम सहमति कहने का तात्पर्य यह कि अब अमेरिका, रूस और चीन परस्पर मिलकर दुनिया के अन्य मजबूत देशों भारत, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील आदि को अपने अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे पर चलाएंगे और इनसे मुनाफा कमाएंगे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ की जो वैश्विक चाल चली है, उसमें भारत विरोधी महारथियों का उलझना और छटपटाना तय है। वहीं, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों को ये त्रिपक्षीय पहल नागवार गुजरी तो फिर दुनियावी कश्मकश और दिलचस्प हो जाएगी। # वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों और कूटनीतिक विरोध के हल की कुंजी है अमेरिका, रूस और चीन के ही पास यूं तो वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों और कूटनीतिक विरोध के कारण अमेरिका, रूस और चीन का मिलकर 'जी-3' (G-3) बनाना वर्तमान परिदृश्य में अत्यधिक असंभावित चिंतन है। लेकिन जब मुख्य षड्यंत्रकारी राष्ट्र अमेरिका और उसके मनमौजी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ ही रूस-चीन युगलबंदी के समक्ष घुटने टेकते हुए ऐसा आकर्षक प्रस्ताव दे रहे हैं तो रूस-चीन दोनों के लिए भी यह आकर्षक डील होगी। चूंकि अमेरिका ने ही भारत-रूस की दोस्ती के मुकाबले चीन की तरक्की में योगदान दिया है तो चीन के लिए भी तो यह और अधिक फायदे का सौदा होगा। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अमेरिका-रूस में तनावपूर्ण संबंध हैं, और अमेरिका ने रूस पर कई प्रतिबंध भी लगा रखे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों के कारण अमेरिका और रूस के संबंध बहुत खराब हैं, ऐसे में बात कहां तक बढ़ेगी नवंबर 2006 तक इंतजार करना होगा। जहां तक अमेरिका और चीन की बात है तो दोनों देशों में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है। अमेरिका और चीन आर्थिक और सैन्य मामलों में दुनिया के मुख्य प्रतिद्वंद्वी देश हैं। खास बात यह कि अमेरिका, रूस और चीन में विचारधारा का अंतर है। अमेरिका एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का समर्थन करता है, जबकि रूस और चीन की शासन प्रणालियां उससे अलग हैं। ऐसे में जी-तीन की छतरी के नीचे आने के लिए तीनों देशों को भारी कीमत चुकानी होंगी और किसी सर्वमान्य निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले कई तरह के कूटनीतिक पापड़ बेलने पड़ेंगे। # दुनिया के लगभग सभी प्रगतिशील देश समझ चुके हैं अमेरिकी चतुराई देखा जाए तो पहले अमेरिका और सोवियत संघ की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में, फिर अमेरिका और चीन की अंतर्राष्ट्रीय तनातनी में और रूस के साथ चीन के खड़े होने और भारत द्वारा भी रूस की इज्जत करने से अमेरिका बेचैन है। वहीं यूरोप भी अमेरिका की चतुराई समझ चुका है। इससे जी-7 (G-7) और नाटो जैसे उसके पुराने हथियार अब एशियाई- यूरोपीय मामलों में भोथरे साबित हो चुके है। फिर उसने जी-20 (G-20) की चाल चली लेकिन यहां भी भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद कर अमेरिकी अरमानों पर पानी फेर दिया। इधर, भारत की रूसी सहभागिता, चीन की मौजूदगी, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान आदि की मौजूदगी वाले एससीओ (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) में बढ़ती दिलचस्पी से अमेरिकी चौधराहट को एक नया खतरा उत्पन्न हो गया है। वैसे तो अमेरिकी डीप स्टेट ने भारत-चीन संबंधों को बिगाड़ने की पूरी चाल चली, लेकिन परिपक्व भारतीय कूटनीति के सामने अकसर वह लाचार दिखा। वहीं, भारत के पड़ोसी देशों को भड़काकर भी वह अपना उल्लू सीधा नहीं कर सका। यही वजह है कि भारत में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता से पहले रूस-चीन के लिए उसने जी-तीन का नया चारा डाल दिया। # रूस के राष्ट्रपति पुतिन के पास भी अमेरिका से हाथ मिलाने की हैं कई बड़ी वजहें ऐसे में जहां रूस के राष्ट्रपति पुतिन के पास भी अमेरिका से हाथ मिलाने की अपनी बड़ी वजहें हैं। वास्तव में पुतिन की मजबूरी है कि करीब साढ़े चार साल से चल रहे यूक्रेन युद्ध में वो उलझे हुए हैं, जिसने रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और मोर्चे पर भी कोई साफ जीत नजर नहीं आ रही है। वहीं दूसरी तरफ, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग काफी मजबूत स्थिति में हैं। तभी तो वो बिश्केक, काहिरा और दिल्ली का दौरा खत्म करने के बाद सीधे व्हाइट हाउस, अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि शी जिनपिंग की स्थिति मजबूत है और वह हर मामले में सधी हुई चाल चलते हैं। इसलिए ट्रंप उनके मुरीद हैं। मुंह में राम, बगल में छुरी वाले अंदाज में। # भारत अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास दर की रफ्तार बढ़ाकर G-3 के वैश्विक कुचक्रों का कर सकता है मुकाबला हालांकि, भारत अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास दर की रफ्तार बढ़ाकर खुद को इतना मजबूत बना सकता है कि G-3 का कोई भी देश भारत को नजरअंदाज करने की स्थिति में न रहे। यानी भारत अपनी आर्थिक ताकत में इजाफा करके स्थिति को कभी भी अपने पक्ष में कर लेगा। वहीं, जिस तरह रूस और चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल करते हुए भी अमेरिका से सीधा फायदा निकालते आए हैं, ठीक वैसे ही भारत भी सभी बड़े देशों से अपने हितों के हिसाब से सीधे रिश्ते साधकर वैश्विक मेज पर अपनी जगह मजबूत रखेगा। इसके दृष्टिगत भारत स्मार्ट और व्यवहारिक कूटनीतिक का सहारा लेगा। इसके अलावा, भारत फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों के साथ मिलकर एक नया मजबूत मोर्चा खड़ा कर सकता है और इस प्रकार जो मिडिल पावर्स का नया फ्रंट बनेगा, उससे भारत लाभांवित होगा। दरअसल, ये वो देश हैं जो दुनिया की कमान सिर्फ तीन देशों के हाथों में सिमटे, ऐसा नहीं होने देना चाहते, इसलिए परस्पर एकजूट हैं। # अमेरिका, रूस और चीन का जी-3 (G-3) महज एक परिकल्पना, जमीनी हकीकत से दूर है यह त्रिकोणीय तालमेल यह बात दीगर है कि भू-राजनीतिक स्तर पर अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक संभावित जी-3 (G-3) त्रिकोणीय तालमेल या महान शक्ति समझौते की जो चर्चाएँ सामने आ रही हैं, वह अभी कोई औपचारिक और स्थायी गठबंधन नहीं है। चूंकि तीनों देशों के शीर्ष नेताओं की सीधी बातचीत होगी, इसलिए अमेरिकी नेतृत्व बहुपक्षीय संगठनों के बजाय सीधे रूस और चीन के राष्ट्र प्रमुखों से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क साधने की नीति को प्राथमिकता पर रखता है। विश्लेषकों का भी मानना है कि दुनिया की ये तीन सबसे बड़ी महाशक्तियाँ आपस में मिलकर वैश्विक व्यवस्था के नियमों को तय करने के लिए एक त्रिकोणीय ढांचा बना सकती हैं, ताकि वैश्विक सत्ता का संतुलन बरकरार रहे। चूंकि इन तीनों देशों के पास विशाल सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक ताकत है, जिसके बल पर वे बड़े भू-राजनीतिक सौदे कर सकते हैं। यह एक प्रकार की रणनीतिक सौदेबाजी होगी, उससे ज्यादा कुछ नहीं। # रूस और चीन के पारस्परिक सहयोग से अमेरिका को टेकने पड़ेंगे घुटने चूंकि रूस और चीन अपने पारंपरिक सहयोग या ब्रिक्स (BRICS) जैसे मंचों को छोड़कर अमेरिका के पाले में पूरी तरह नहीं आ रहे हैं; बल्कि वे इन मंचों के साथ-साथ वाशिंगटन से भी सीधे संवाद की गुंजाइश तलाश रहे हैं। ताकि ब्रिक्स का अंत नहीं हो और अमेरिका से रणनीतिक लाभ भी मिलता रहे। गौर करने वाली बात यह है कि तीनों देशों के बीच बुनियादी मतभेद हैं। खासकर व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और क्षेत्रीय आधिपत्य जैसे गंभीर मुद्दों पर तीनों देशों के हित एक-दूसरे के विपरीत हैं। इसलिए क्या जी-3 एक पक्का गठबंधन बनेगा, इसमें संदेह है। जब इसे लेकर कोई औपचारिक संधि होगी, या कोई लिखित समझौता होगा या फिर नाटो जैसा कोई नया सैन्य गुट बनेगा, तब यह समझा जाएगा कि अमेरिका, चीन और रूस अब एक दूसरे के करीब जा चुके हैं। चूंकि, यह नया राग अलापना अमेरिका की मजबूरी है, क्योंकि वह अरब-खाड़ी देशों में रूसी-चीनी चक्रव्यूह में घिर चुका है और निकलने का कोई रास्ता उसे नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में रूस और चीन बहुत अच्छे रणनीतिक और आर्थिक साझेदार हैं, जिन्हें अक्सर 'दोस्त' या 'जिगरी दोस्त' कहा जाता है। इस दोस्ती का मुख्य कारण भी अमेरिका विरोध है, क्योंकि दोनों देश अमेरिका और पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना चाहते हैं। चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। रूस चीन को तेल और प्राकृतिक गैस बेचता है, जबकि चीन से उसे औद्योगिक वस्तुएं मिलती हैं। वहीं यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के दृष्टिगत रूस का चीन पर आर्थिक और राजनीतिक रूप से भरोसा और निर्भरता दोनों बढ़ी है। यद्यपि 1960 और 1970 के दशक में दोनों कम्युनिस्ट देशों के बीच वैचारिक मतभेद और सीमा विवाद भी रहे हैं, जिसे उन्होंने समझदारी पूर्वक दूर कर लिया है। इसे औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं कहा जाता है, बल्कि यह साझा हितों पर आधारित एक मजबूत रणनीतिक तालमेल यानी रणनीतिक साझेदारी है। # अमेरिका ने कस रखी है चीन की व्यापारिक नकेल वहीं, अमेरिका ने चीन पर विभिन्न व्यापारिक नीतियों और उत्पादों के तहत अलग-अलग दर से टैरिफ लगाए हैं, जिसमें अक्टूबर 2025 में घोषित 100% अतिरिक्त टैरिफ और पहले से चले आ रहे धारा 301 (Section 301) के शुल्क शामिल हैं। इसकी प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:- पहला, अतिरिक्त टैरिफ: अक्टूबर 2025 में अमेरिका ने चीन पर चीनी सामानों की डंपिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स के विवाद के कारण 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का आदेश दिया था। दूसरा, पुराने शुल्क: साल 2018 से चले आ रहे धारा 301 (Section 301) के तहत लगाए गए बुनियादी शुल्क अभी भी कई चीनी उत्पादों पर लागू हैं। तीसरा, विशेष उत्पाद: कुछ खास उत्पादों (जैसे बैटरी सामग्री) पर यह दरें 205% तक भी पहुंच चुकी हैं। चौथा, कानूनी फेरबदल: साल 2026 की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ आपातकालीन टैरिफ को अमान्य भी करार दिया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत जारी है। # सैन्य और आर्थिक ताकत के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से है काफी आगे यह ठीक है कि सैन्य और आर्थिक ताकत के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से आगे और दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है। जहां तक सैन्य रैंकिंग (Military Ranking) की बात है तो यह इस प्रकार है:- पहला, ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग: रक्षा और सैन्य ताकत की सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है और रूस दूसरे स्थान पर आता है। दूसरा, रक्षा बजट: अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 850 बिलियन डॉलर है, जो रूस के बजट (लगभग 135 बिलियन डॉलर) से काफी अधिक है। तीसरा, अमेरिका की ताकत वायुसेना: अमेरिका के पास लगभग 13,000 विमान और 1,790 से ज्यादा फाइटर प्लेन हैं, जो इसे दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेना बनाते हैं। चौथा, वैश्विक पहुंच: अमेरिका के पास उन्नत तकनीक, विशाल नौसेना और दुनिया भर में फैले सैन्य ठिकाने हैं। जहां तक रूस की ताकत की बात है तो वह निम्नलिखित है:- पहला, परमाणु हथियार: परमाणु हथियारों के मामले में रूस सबसे आगे है। उसके पास करीब 6,000 परमाणु बम और खतरनाक मिसाइलें मौजूद हैं। दूसरा, जमीनी ताकत: रूस के पास जमीन पर मुकाबला करने के लिए 10,000 से अधिक टैंक और एस-400 व एस-500 जैसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम हैं। निष्कर्ष यह है कि कुल मिलाकर अमेरिका अधिक शक्तिशाली और व्यापक रूप से सक्षम है, जबकि रूस के पास परमाणु और रणनीतिक रक्षा बल बहुत मजबूत हैं। इसलिए यदि तीनों देश एक साथ आएंगे तो वह मध्यम दर्जे वाले देशों के उभार में कितना बाधक बनेंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। # आखिर ब्रिक्स की बैठक शुरू होने से पहले ही अमेरिका ने क्यों अलापा नया राग? राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन होने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन के साथ मिलकर एक नया 'G-3' गुट बनाने की घोषणा करना, अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की एक जबरदस्त बिसात समझी जा सकती है। क्योंकि अमेरिका अब यह मान चुका है कि बिना चीन और रूस की मदद के वह भारत पर लगाम नहीं लगा सकता है और ऐसा किए बिना वह अपना मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय अस्तित्व भी नहीं बचा पाएगा। इसलिए अब ट्रंप सीधे पुतिन और शी जिनपिंग से हाथ मिलाकर वैश्विक शक्ति प्रतिस्पर्धा को बदलना चाहते हैं। चूंकि भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जैसे वैश्विक नेता एक छत के नीचे होंगे और एग्रीकल्चर, हेल्थ सेक्टर और डिजिटल दुनिया में आपसी सहयोग बढ़ाएंगे, साथ ही बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत करेंगे। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन के साथ मिलकर G-3 गुट बनाने का जो ऐलान किया है, वह दुनिया के मध्यम दर्जे के उन देशों को खुली चुनौती है, जो इन तीनों देशों के अंतर्विरोध का फायदा उठाकर लाभ पीट रहे हैं। चूंकि वर्ष 2019 के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं, इसलिए पूरी दुनिया की नजरें पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी हुई हैं। चूंकि दोनों देश पिछले कुछ सालों से बॉर्डर टेंशन और ट्रेड खींचतान से जूझ रहे हैं, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली का ये मंच दोनों पड़ोसी देशों के बीच की कड़वाहट कम करेगा और व्यापारिक रिश्तों को फिर से पटरी पर लाएगा। इसके अलावा ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के आने से भी इस सम्मेलन की हलचल काफी बढ़ गई है। चूंकि ब्रिक्स हमेशा से खुद को अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबदबे के खिलाफ एक बड़े विकल्प के तौर पर दिखाता आया है. लेकिन जैसे-जैसे इस संगठन का विस्तार हुआ है, इसके अंदरूनी मतभेद और गुटबाजी भी खुलकर सामने आने लगी है। इस वक्त ईरान और UAE के बीच तनातनी चल रही है। जहां ईरान चाहता है कि ब्रिक्स का ये मंच अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के खिलाफ खुलकर बोले और सख्त बयान दे, वहीं दूसरी तरफ यूएई इस विवाद में पड़ने के बजाय अपनी समुद्री सीमा और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को ज्यादा अहमियत दे रहा है। दोनों देशों की इसी खींचतान की वजह से मई में दिल्ली में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान तक जारी नहीं हो सका था। चूंकि एक तरफ ब्रिक्स अपने अंदरूनी झगड़ों में उलझा हुआ है तो दूसरी तरफ वाशिंगटन, बीजिंग और मॉस्को के बीच एक नया समीकरण बन रहा है। वैसे भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ये मानते रहे हैं कि अगर वो पुतिन और शी जिनपिंग से सीधे बातचीत करें, तो दुनिया के बड़े-बड़े विवाद पलक झपकते ही सुलझ सकते हैं। लेकिन ट्रंप की इस पर्सनल कूटनीति से अमेरिका का अपना विदेश मंत्रालय, वहां की दूरदर्शी संसद और यूरोपीय सहयोगी देश काफी घबराए हुए हैं। वहीं, यूरोप को भय है कि ट्रंप यूक्रेन और यूरोप की सुरक्षा को दांव पर लगाकर रूस से हाथ मिला लेंगे। वहीं एशियाई देशों को चिंता है कि चीन के साथ कोई बड़ी डील करने के चक्कर में अमेरिका इस इलाके की सुरक्षा का अपना वादा कहीं तोड़ न दे। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

प्रभासाक्षी 12 Sep 2026 3:48 pm

‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

भारत में टेक सेक्टर की नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता। खासकर बड़ी टेक कंपनियों के इंटरव्यू में मुश्किल coding questions और कई दौर की technical screening उम्मीदवारों की अच्छी-खासी तैयारी करवा देती है। अब Reddit पर एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।पोस्ट करने वाले यूजर का कहना है कि भारत में टेक जॉब इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होते हैं, जबकि कई मामलों में मिलने वाली सैलरी काफी कम होती है। इस दावे के बाद Reddit पर टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।‘भारत में इंटरव्यू ज्यादा मुश्किलटेक प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में होने वाले इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में काफी कठिन हैं और इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी कम है। उसके मुताबिक अमेरिकी कंपनियां उम्मीदवार को परखते समय केवल coding skills पर निर्भर नहीं रहतीं। वहां practical experience, system design और behavioural skills को भी काफी महत्व दिया जाता है। इसके उलट भारत में कई कंपनियों के इंटरव्यू में कठिन algorithm और coding problems पर ज्यादा जोर दिया जाता है।45 मिनट में दो Hard सवाल? Reddit यूजर ने दावा किया कि भारत में कई कंपनियों के hiring process में उम्मीदवारों को कई coding rounds से गुजरना पड़ता है। उसने खास तौर पर दावा किया कि कुछ जगहों पर staff-level पदों के उम्मीदवारों से 45 मिनट में दो कठिन coding problems हल करने की उम्मीद की जाती है। यूजर के अनुसार, अमेरिका में senior candidates के लिए professional experience और system-design skills ज्यादा अहम हो सकती हैं, जबकि भारत में coding rounds का दबाव काफी ज्यादा दिखाई देता है।क्या असली नौकरी और इंटरव्यू की तैयारी अलग-अलग चीजें हैं?यही सवाल इस पूरी बहस के केंद्र में है। कई Reddit यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल coding problems हल करने में माहिर होना और असल दुनिया में किसी product या system को बनाने की क्षमता दो अलग चीजें हैं। एक यूजर ने दावा किया कि उसने ऐसे भारतीय उम्मीदवारों को देखा है जो coding questions में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन अपने वास्तविक काम को समझाने या system design पर चर्चा करने में संघर्ष करते थे। वहीं कुछ विदेशी उम्मीदवार experience-based सवालों में ज्यादा सहज नजर आए। ‘इंटरव्यू कभी-कभी इंटरव्यूअर का शो बन जाता है’एक अन्य यूजर ने भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि कई बार इंटरव्यू उम्मीदवार की क्षमता परखने से ज्यादा इंटरव्यू लेने वाले की अपनी समझ और ‘स्मार्टनेस’ दिखाने का मंच बन जाता है। उसका कहना था कि भारत में कुछ इंटरव्यू जरूरत से ज्यादा कठिन और वास्तविक नौकरी की जिम्मेदारियों से दूर होते हैं। खासकर तब, जब इंटरव्यू में उम्मीदवार को सीमित समय में ऐसे सवाल दिए जाएं जिनका रोजमर्रा के काम से सीधा संबंध न हो।कुछ लोगों ने कहा- ‘मुश्किल है तो खुद को अपस्किल करो’हालांकि Reddit पर हर कोई भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया के खिलाफ नहीं था। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि अगर कंपनियां कठिन सवाल पूछने के बावजूद पर्याप्त उम्मीदवार खोज पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि बाजार उस मॉडल को स्वीकार कर रहा है। एक यूजर ने कहा कि उम्मीदवारों को शिकायत करने के बजाय अपनी skills बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में hiring bar कम होने की संभावना नहीं है।(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)Grok से भारत के नियम पूछ रहा था आयरिश शख्स, वायरल हुई बातचीत तो Elon Musk ने भी दे दिया जवाब

ज़ी न्यूज़ 12 Sep 2026 3:10 pm

अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद कर रहा चीन? US को क्यों संदेह

अमेरिका यह भी देख रहा है कि कहीं चीन से मिली सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से ईरान अमेरिकी युद्धपोतों की निगरानी तो नहीं कर रहा। हाल के हमलों में ईरान ने अमेरिकी विमानवाहक पोत और दूसरे युद्धपोतों पर मिसाइलें दागी हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 12 Sep 2026 2:56 pm

क्यों एक नहीं हो सकते भारत, रूस और चीन? 'अमेरिका विरोधी' एजेंडे पर फंसा पेच

भारत ने मजबूती से रुख अपनाया कि BRICS पश्चिम-विरोधी नहीं, बल्कि गैर-पश्चिमी मंच होना चाहिए. भारत के इस रुख का समर्थन ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे सदस्यों ने भी किया.

आज तक 12 Sep 2026 2:47 pm

अमेरिका से पढ़ाई, पिता के बाद मिला पद, कौन हैं प्रिंस रहीम आगा खान?     

प्रिंस रहीम आगा खान पंचम इन दिनों अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर चर्चा में हैं, लेकिन उनकी पहचान केवल धार्मिक नेतृत्व तक सीमित नहीं है. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी खास है. उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित फिलिप्स एकेडमी एंडोवर से पढ़ाई करने के बाद ब्राउन यूनिवर्सिटी से तुलनात्मक साहित्य में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की.

आज तक 12 Sep 2026 2:05 pm

'अमेरिका के हमले से ईरान एकजुट', आजतक से इंटरव्यू में बोले पेजेशकियान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आजतक को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है. ये इंटरव्यू ऐसे वक्त में आया है जब जंग जारी है, ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करने दिल्ली आए पेजेश्कियान से आजतक ने एक्सक्लूसिव बात की. आजतक से बात करते हुए पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर बगैर उकसावे के हमला किया अमेरिका को लेकर लगा था कि वो वेनेजुएला की तरह चौबीस घंटे के भीतर ईरान पर कब्जा कर लेगा, अपनी कठपुतली सरकार बना लेगा, लेकिन अमेरिका के हमले ने ईरान को एकजुट कर दिया और अमेरिका की उम्मीद के विपरीत ईरान की सेना ने जान की बाजी लगाकर अमेरिका का मुकाबला किया. पेजेश्कियान ने कहा कि हम परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहते. फिर भी यह आरोप क्यों लगाया जा रहा है कि हम परमाणु हथियार बनाना चाहते हैं?

आज तक 12 Sep 2026 1:38 pm

लादेन से बगदादी तक... UN में अमेरिका ने गिनाया आतंकियों का हिसाब

9/11 की 25वीं बरसी पर UNSC में अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया. खास बात यह रही कि जब अमेरिकी प्रतिनिधि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का हिसाब बता रहे थे, उस वक्त पाकिस्तान भी वहीं मौजूद था.

आज तक 12 Sep 2026 1:27 pm

इंदौर में वार्ड 24 से पार्षद जीतू यादव की एमआईसी में वापसी, अमेरिका रवाना होने से पहले महापौर ने जारी किया पत्र

जीतू यादव को भाजपा के एक अन्य पार्षद कमलेश कालरा के नाबालिग बेटे के साथ घर में घुसकर मारपीट और अभद्रता के मामले में नाम सामने आने के बाद पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

दैनिक जागरण 12 Sep 2026 12:46 pm

BRICS समिट में अमेरिका पर भड़के रूस और ईरान, मेजबान भारत के लिए क्या होंगी चुनौतियां

रूस और ईरान ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की और समूह से ऐसी रणनीतियां बनाने का आग्रह किया जो चुनौतियों का सामना कर सकें।

जागरण 12 Sep 2026 10:42 am

India vs US job: भारत में नौकरी पाना अमेरिका से भी मुश्किल?

एक टेकी ने भारत और अमेरिका में नौकरी के इंटरव्यू की तुलना करते हुए दावा किया है कि भारत में कम सैलरी वाली नौकरी के लिए भी उम्मीदवारों को कई मुश्किल इंटरव्यू राउंड से गुजरना पड़ता है.

आज तक 12 Sep 2026 10:34 am

पेजेश्कियान का अमेरिका-इजराइल को दो टूक संदेश, बोले- दबाव और दादागीरी के आगे नहीं झुकेगा ईरान

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उनका देश अत्याचार के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल को निशाने पर लेते हुए कहा कि ईरान डराने-धमकाने की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा।

देशबन्धु 12 Sep 2026 10:27 am

अमेरिकी अभिनेत्री रेटा शॉ: सख्त मिजाज किरदारों से दर्शकों का दिल जीता, हॉलीवुड में बनाई अलग पहचान

New Delhi, 12 सितंबर . अमेरिकी Actress रेटा शॉ को 1960 व 1970 के दशक के सबसे लोकप्रिय टेलीविजन शो में मजबूत, सख्त मिजाज और कामकाजी महिलाओं का किरदार निभाने के लिए जाना जाता है. टेलीविजन सीरीज ‘द घोस्ट एंड मिसेज मुइर’ में हाउसकीपर मार्था ग्रांट और 1964 की फिल्म ‘मैरी पॉपिंस’ में कुक मिसेज ... Read more

डेली किरण 12 Sep 2026 10:23 am

भारत-चीन संबंधों को लेकर घबराया यूएसए, ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर अमेरिकी अखबारों में क्या छपा?

भारत-चीन संबंधों को लेकर घबराया यूएसए, ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर अमेरिकी अखबारों में क्या छपा?US world media on brics summit 2026 india china relations are hot topic

अमर उजाला 12 Sep 2026 10:15 am

US Midterm Elections 2026: ट्रंप की लोकप्रियता से लेकर महंगाई तक, क्यों अहम है अमेरिका का मिड-टर्म चुनाव?

US Midterm Elections 2026: ट्रंप की लोकप्रियता से लेकर महंगाई तक, क्यों अहम है अमेरिका का मिड-टर्म चुनाव?

समाचार नामा 12 Sep 2026 9:45 am

Russia पर प्रतिबंध और भारत पर Tariff से जुड़े विधेयक पर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अगले सप्ताह मतदान

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) अगले सप्ताह रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक बेहद कड़े और चर्चित विधेयक पर मतदान करने जा रही है। ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026’ नामक यह विधेयक यदि पारित हो जाता है, तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के साथ-साथ रूसी तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर भारी टैरिफ (शुल्क) लगाने के व्यापक अधिकार प्रदान करेगा। यह विधेयक पिछले महीने अमेरिकी सीनेट द्वारा भारी बहुमत से पारित किया जा चुका है। अब प्रतिनिधि सभा की नियम समिति (Rules Committee) सोमवार को इस पर विचार करेगी और इसके बाद इसे सदन के पटल पर मतदान के लिए रखा जाएगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। यदि प्रतिनिधि सभा भी इसे पारित कर देती है तो यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस एवं रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर और कड़े प्रतिबंध लगाने का अधिकार देगा। इसके अलावा ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी बढ़ाया जा सकेगा। प्रतिनिधि सभा में अल्पमत के नेता हकीम जेफ्रीज समेत कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस विधेयक का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे ट्रंप को शुल्क लगाने के व्यापक और जोखिम भरे नए अधिकार मिल जाएंगे। डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स, डॉन बेयर और रिचर्ड नील ने शुक्रवार को एक संयुक्त बयान में कहा, ‘‘प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सदस्य यूक्रेन के समर्थन में पूरी मजबूती से खड़े हैं लेकिन ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ से फायदा होने के बजाय नुकसान अधिक होगा।’’ इसे भी पढ़ें: Explained Story | दोस्त, दुश्मन और ट्रंप फैक्टर... भारत के लिए BRICS में संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती | BRICS Summit 2026 उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक शुल्क लगाने के राष्ट्रपति के अधिकारों का बहुत अधिक विस्तार करेगा लेकिन रूस पर प्रतिबंध लगाना अनिवार्य नहीं बनाएगा। ये दोनों ही बातें अस्वीकार्य हैं। इन खामियों के कारण अमेरिकियों के लिए वस्तुएं महंगी होंगी और दीर्घकाल के लिहाज से यूक्रेन के लिए समर्थन कमजोर होगा।’’ प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन नेतृत्व ने पहले इस विधेयक को कार्यसूची से हटा दिया था लेकिन अब इसे आपात कदम के तौर पर नियम समिति के विचार के लिए फिर से लाया गया है। सीनेट की विदेश संबंध समिति की ‘रैंकिंग’ सदस्य जीन शाहीन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘यह बहुत अच्छी खबर है कि प्रतिनिधि सभा रूस पर बेहद जरूरी प्रतिबंध संबंधी विधेयक पर मतदान करेगी।’’ इसे भी पढ़ें: 25th Anniversary of 9/11 Attacks | 'आतंकवाद के पूरी तरह खात्मे तक साथ लड़ेंगे भारत-अमेरिका', पेंटागन स्मारक पर भारतीय राजदूत ने दी श्रद्धांजलि उन्होंने कहा, ‘‘पुतिन की युद्ध मशीन के कारण यूक्रेन के आम नागरिक लगातार मारे जा रहे हैं और यह विधेयक क्रेमलिन के खजाने पर बड़ी चोट करेगा। अब इसे पारित करने और पुतिन को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर करने का समय है।

प्रभासाक्षी 12 Sep 2026 9:41 am

25th Anniversary of 9/11 Attacks | 'आतंकवाद के पूरी तरह खात्मे तक साथ लड़ेंगे भारत-अमेरिका', पेंटागन स्मारक पर भारतीय राजदूत ने दी श्रद्धांजलि

2001 में अमेरिका में हुए वीभत्स 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने पेंटागन स्थित राष्ट्रीय 9/11 स्मारक पहुँचकर पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका की ओर से आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया।इसे भी पढ़ें: Novak Djokovic बोले, सिनसिनाटी में जल्दी हारने से US Open की तैयारी के लिए मिला अतिरिक्त समय क्वात्रा ने एक संदेश में कहा कि जब तक आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक भारत और अमेरिका एकजुट होकर प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “आज से 25 साल पहले इसी दिन आतंकवादियों ने अमेरिका पर हमला किया था। आज हम उन हमलों के पीड़ितों को याद करते हैं और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने दुनियाभर में अनगिनत निर्दोष लोगों की जान ली है तथा इसे अंजाम देने वाले, इसका समर्थन करने वाले और इसे प्रायोजित करने वाले लोग साझा मानवता में निहित हर अच्छी और सभ्य भावना के खिलाफ खड़े हैं। क्वात्रा ने कहा, ‘‘ऐसे लोग करुणा, गरिमा और स्वयं सभ्यता के खिलाफ हैं।’’ इसे भी पढ़ें: Asha Bhosle के 93वें जन्मदिन पर रिलीज़ हुआ उनका आखिरी फ़िल्मी गाना Ae Meri Zindagi, म्यूज़िक वीडियो में दिखीं बिहाइंड-द-सीन्स झलकियाँ उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना करता आया है और इसके खिलाफ लड़ाई में हमेशा अग्रिम मोर्चे पर रहा है। क्वात्रा ने कहा, “हमारी नीति आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत और अमेरिका इस खतरे के खिलाफ एक साथ खड़े रहे हैं। जब तक आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक भारत और अमेरिका एकजुट होकर प्रयास जारी रखेंगे।

प्रभासाक्षी 12 Sep 2026 9:35 am

अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया की ड्रिल से भड़का उत्तर कोरिया! किम जोंग ने समुद्र में दाग दीं कई मिसाइलें

अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की 5 दिवसीय सैन्य ड्रिल खत्म होने के तुरंत बाद उत्तर कोरिया ने कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें समुद्र की ओर दागीं। दक्षिण कोरिया के मुताबिक मिसाइलों ने करीब 250 किलोमीटर दूरी तय की।

खबर इंडिया टीवी 12 Sep 2026 8:34 am

अमेरिकी मीडिया की नजर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बदलता समीकरण

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने एक खबर में कहा कि इस शिखर सम्मेलन में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग में से कौन विकासशील दुनिया की अधिक प्रभावशाली आवाज बनकर उभरेगा। चीन ब्रिक्स को अमेरिकी ताकत को चुनौती देने के एक प्लेटफॉर्म के तौर पर देखता है।

खास खबर 12 Sep 2026 8:15 am

ईरान: बघाई ने पीट हेगसेथ के बयान पर बोला हमला, कहा- 9/11 की आड़ में ईरान के खिलाफ जंग को सही ठहरा रहा अमेरिका

Perpetrators were not Iranians Baghaei slams Hegseth for using 9/11 anniversary to justify war against Iran- ईरान: बघाई ने पीट हेगसेथ के बयान पर बोला हमला, कहा- 9/11 की आड़ में ईरान के खिलाफ जंग को सही ठहरा रहा अमेरिका

अमर उजाला 12 Sep 2026 8:03 am

क्या है ट्रस्ट? भारत-अमेरिका किस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर हुए सहमत, अमेरिकी राजदूत ने एक्स पोस्ट में बताया

क्या है ट्रस्ट? भारत-अमेरिका किस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर हुए सहमत, अमेरिकी राजदूत ने एक्स पोस्ट में बताया- What is TRUST initiative US Ambassador reveals in post areas where India US agreed to enhance cooperation

अमर उजाला 12 Sep 2026 7:42 am

अमेरिका: अलास्का के ठंडे समुद्र में पलटी नाव पर दो दिन चिपका रहा 15 साल का किशोर; कैसे बची जान? भाई की मौत

अमेरिका: अलास्का के ठंडे समुद्र में पलटी नाव पर दो दिन चिपका रहा 15 साल का किशोर; कैसे बची जान? भाई की मौत

अमर उजाला 12 Sep 2026 6:09 am

अमेरिका का वर्क वीजा लगवाने के नाम पर 9 लाख रुपए की धोखाधड़ी

नग्गल क्षेत्र के घाघरु गांव निवासी अजैब सिंह के बेटे हसन को अमेरिका का वर्क वीजा दिलाने के नाम पर 9 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने खन्ना स्थित एनएआई इमिग्रेशन सेंटर के 3 संचालकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पीड़ित के अनुसार, मई 2025 में सोशल मीडिया विज्ञापन देखकर उन्होंने सेंटर संचालक बलप्रीत सिंह, सुखविंद्र सिंह और परमप्रीत कौर से संपर्क किया था। 35 लाख में सौदा तय हुआ, जिसमें 10 लाख एडवांस देने थे। पीड़ित ने मई 2025 में 5 लाख बैंक से और 4 लाख नकद (एग्रीमेंट के दौरान) कुल 9 लाख रुपए दे दिए। करीब 10-11 महीने बीतने पर भी वीजा नहीं लगा। जब रुपए वापस मांगे तो आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकियां दी।

दैनिक भास्कर 12 Sep 2026 5:30 am

विदेश के समाचार: उत्तर कोरिया में पूर्वी तट के पास से मिसाइल दागे जाने की खबर; अमेरिका में 9/11 हमले की बरसी

विदेश के समाचार: उत्तर कोरिया में पूर्वी तट के पास से मिसाइल दागे जाने की खबर; अमेरिका में 9/11 हमले की बरसी

अमर उजाला 12 Sep 2026 4:46 am

'ईरान धौंस जमाने वालों के सामने नहीं झुकेगा', नई दिल्ली में अमेरिका-इजरायल पर बरसे पेजेश्कियान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शुक्रवार को अमेरिका और इजरायल को सीधा संदेश देते हुए कहा कि ईरान धौंस व अहंकार के सामने नहीं झुकेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा।

जागरण 12 Sep 2026 2:52 am

अमेरिका: भारतीय मूल के कारोबारी को पांच साल की जेल, 2.7 करोड़ डॉलर की आय छिपाने का आरोप; कैसे हुआ खुलासा?

अमेरिका: भारतीय मूल के कारोबारी को पांच साल की जेल, 2.7 करोड़ डॉलर की आय छिपाने का आरोप; कैसे हुआ खुलासा?

अमर उजाला 12 Sep 2026 12:20 am

ईरान तेल की कीमत से अमेरिका को चोट पहुंचाएगा, भारत की रसोई पर भी पड़ेगा असर : एक्सपर्ट सुरिंदर सिंह लाली

नोएडा, 11 सितंबर . अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ सुरिंदर सिंह लाली ने कहा कि ईरान समझ गया है कि वह सीधे हमले की जगह तेल की कीमतों से अमेरिका को चोट पहुंचा सकता है. लाली ने चेतावनी दी कि तेल, उर्वरक और हीलियम की कीमतें बढ़ने से India के चालू खाते के घाटे, महंगाई और ... Read more

डेली किरण 11 Sep 2026 11:28 pm

जीसीएल सीजन 4: कार्लसन-विदित की शानदार जीत, अल्पाइन एपीएल पाइपर्स ने फाईर्स अमेरिकन गैम्बिट्स को दी शिकस्त

Bengaluru, 11 सितंबर . Bengaluru में चल रही ग्लोबल चेस लीग (जीसीएल) के सीजन 4 में दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जावोखिर सिंदारोव की लगातार तीन जीत का सिलसिला रोक दिया. दूसरी ओर, भारतीय ग्रैंडमास्टर विदित Gujaratी ने डैनिल डुबोव को एक रोमांचक मुकाबले में हराया. विदित ने ... Read more

डेली किरण 11 Sep 2026 10:58 pm

UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का सपोर्ट करे चीन, अमेरिकी अर्थशास्त्री ने उठा दी बड़ी मांग

अमेरिकी अर्थशास्त्री ने कहा कि मैं चीन से गुजारिश करता हूं कि वह यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के छठे परमानेंट मेंबर के तौर पर भारत का सपोर्ट करे। मुझे लगता है कि यह चीन के फायदे में है।

लाइव हिन्दुस्तान 11 Sep 2026 10:28 pm

अमेरिका में कॉपी हुआ था Lata Mangeshkar का ये गीत, 4000 करोड़ का चला मुकदमा; ओरिजिनल से ज्यादा हिट था रीमेक सॉन्ग

45 साल पहले Lata Mangeshkar एक फ्लॉप गाने को अमेरिका ने कॉपी कर लिया था जिसके बाद 4000 करोड़ रुपये का मुकदमा चला था। इस गाने का कॉपी सुपरहिट रहा था।

जागरण 11 Sep 2026 9:41 pm

दक्षिण कोरिया चाहता है कि युद्धकालीन सैन्य कमान अमेरिका से वापस मिले, रक्षा मंत्री पद के उम्मीदवार का बड़ा बयान

सियोल, 11 सितंबर . दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री पद के उम्मीदवार कांग शिन-चुल ने Friday को कहा कि सियोल अमेरिका से युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल बिना किसी अतिरिक्त शर्त के वापस लेना चाहता है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत “नो एडेड कंडीशंस” यानी बिना किसी नई शर्त के सिद्धांत ... Read more

डेली किरण 11 Sep 2026 7:58 pm

अमेरिकी पोस्टर में पंजाबी-सिखों को निशाना बनाने पर विरोध:SGPC अध्यक्ष धामी ने अमेरिकी दूतावास को पत्र लिख विदेश मंत्री से भी की अपील

अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने अमेरिकी सरकार के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी किए गए एक पोस्टर पर कड़ा एतराज जताया है। धामी ने आरोप लगाया है कि इस पोस्टर में पंजाबी और सिख समुदाय को कथित तौर पर निशाना बनाया गया है और इसके खिलाफ दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को विरोध पत्र भेजा गया है। साथ ही एसजीपीसी अध्यक्ष ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को भी पत्र लिखकर इस संवेदनशील मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाने की अपील की है। एसजीपीसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल चिंता-भाई चारे की खतरा एडवोकेट धामी ने चेतावनी दी कि इस तरह का व्यवहार विभिन्न प्रवासियों और समुदायों के बीच आपसी भाईचारे के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह सिख समाज के स्वाभिमान की रक्षा के लिए इस आपत्तिजनक व्यवहार का मुद्दा अमेरिकी प्रशासन के सामने मजबूती से रखे।

दैनिक भास्कर 11 Sep 2026 7:55 pm

मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले नस्लवादी विवाद में घिरी ट्रंप सरकार, भारतीय वोटर्स खिसकने के डर से हटाया गया कंट्रोवर्शियल एड

अमेरिकी राजनीतिक गलियारों और प्रवासी समुदायों के बीच इन दिनों एक ऐसा विज्ञापन भारी भूचाल लेकर आया है, जिसने सत्ताधारी डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) की सुगबुगाहट के बीच होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट यानी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी किया गया एक विवादित विज्ञापन अमेरिकी राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस विज्ञापन में 'मिस्टर सिंह' नाम के एक सिख पात्र को आधार बनाकर बिना लाइसेंस वाले वाणिज्यिक चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा था और उसे स्वेच्छा से देश छोड़ने का संदेश दिया जा रहा था। एआई (AI) तकनीक की मदद से तैयार की गई इस तस्वीर और उसके साथ लिखे गए आपत्तिजनक कैप्शन को लेकर मानवाधिकार समूहों, सिख संगठनों और विभिन्न अमेरिकी-भारतीय समुदायों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। चौतरफा आलोचनाओं से घिरने और चुनावी मौसम में भारतीय मूल के मतदाताओं की नाराजगी का कड़ा जोखिम भांपते हुए आखिरकार ट्रंप प्रशासन को झुकना पड़ा और विवाद बढ़ने के बाद उस नस्लवादी विज्ञापन को सोशल मीडिया से तुरंत हटा लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर अमेरिकी राजनीति में प्रवासियों की भूमिका और उनके चुनावी महत्व को उजागर कर दिया है।एआई से तैयार 'मिस्टर सिंह' विज्ञापन पर मचा बवाल और मानवाधिकार संगठनों का तीखा विरोधपूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अपने 'सीबीपी होम' कार्यक्रम के व्यापक प्रचार अभियान के तहत सोशल मीडिया पर एआई जनित तस्वीरों का एक विज्ञापन साझा किया। इस विज्ञापन में एक सिख समुदाय के व्यक्ति को ट्रक चलाते हुए दर्शाया गया था, जिसके साथ अपमानजनक लहजे में लिखा गया था कि 'हमारी सड़कों से दफा हो जाओ, मिस्टर सिंह, आपको वाहन चलाना नहीं आता।' इस विज्ञापन के सामने आते ही अमेरिकी समाज के उदारवादी तबके और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने इसे खुले तौर पर नस्लवादी, भेदभावपूर्ण और अमेरिका-विरोधी करार दिया। सिख संगठनों और नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूहों का कहना था कि अमेरिका में लाखों की संख्या में सिख नागरिक निवास करते हैं, जिनके उपनाम में 'सिंह' जुड़ा होता है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'शेर' होता है। संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सिख समुदाय अपनी अनूठी पहचान, पगड़ी और संस्कृति पर गर्व करता है, और यदि देश की अपनी संघीय एजेंसियां ही एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर उनका उपहास उड़ाएंगी, तो इससे समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा मिलेगा। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि 'सिंह' केवल एक नाम नहीं है, बल्कि इस देश में रहने वाले हिंदू, सिख और तमाम अमेरिकी नागरिक गर्व से गाड़ी चलाते हैं और देश के विकास में योगदान देते हैं। फाउंडेशन ने इस मामले की उच्च स्तरीय संघीय जांच की मांग करते हुए प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की।मध्यावधि चुनावों के मुहाने पर खड़े ट्रंप प्रशासन को सता रहा भारतीय वोटर्स के खिसकने का डरअमेरिकी राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि इस विवादित विज्ञापन को आनन-फानन में हटाए जाने के पीछे विशुद्ध रूप से राजनीतिक दूरदर्शिता और आगामी मध्यावधि चुनावों का डर काम कर रहा है। अमेरिका में जल्द ही मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, और वहां की राजनीतिक पार्टियों के लिए हर एक मतदाता समूह का समर्थन बेहद कीमती है। हालिया चुनावी सर्वेक्षणों और आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका में रहने वाले एशियाई-अमेरिकी और विशेष तौर पर भारतीय मूल के मतदाताओं का पारंपरिक झुकाव काफी हद तक डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है। हाल ही में किए गए एक प्रतिष्ठित सर्वे के अनुसार, पंजीकृत एशियाई-अमेरिकी और एएपीआई (AAPI) मतदाताओं में से 90 प्रतिशत से अधिक लोगों ने इस बार मतदान प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की इच्छा जताई है। हालांकि सर्वे में यह बात भी सामने आई थी कि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही दलों ने इन मतदाताओं तक पूरी तरह से पहुंच नहीं बनाई है, लेकिन जब बात वोटिंग पैटर्न की आती है, तो भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में से लगभग 66 प्रतिशत लोगों ने यह स्पष्ट किया है कि वे प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में अपना मतदान करेंगे। ऐसे संवेदनशील समय में जब भारतीय मूल का समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीक के क्षेत्र में एक शक्तिशाली स्तंभ बन चुका है, गृह सुरक्षा विभाग द्वारा इस प्रकार का नस्लीय विज्ञापन जारी किया जाना ट्रंप सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक आत्मघाती कदम साबित हो सकता था। इसी बड़े खतरे को भांपते हुए व्हाइट हाउस ने डैमेज कंट्रोल करते हुए उस विज्ञापन को फौरन डिलीट करवा दिया।सिख संगठनों और संघों का कड़ा रुख, फेडरल एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवालइस पूरे घटनाक्रम के दौरान अमेरिका के प्रभावशाली सिख संगठनों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और प्रशासनिक मशीनरी के नस्लीय रवैये को बेनकाब किया। 'सिख कोएलिशन' ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए याद दिलाया कि ऐतिहासिक 9/11 की घटना के 25 साल बीत जाने के बाद भी आज के आधुनिक अमेरिका में सिखों को उनके विशिष्ट पहनावे, दाढ़ी और रूप-रंग के आधार पर निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इसके अलावा, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस भेदभावपूर्ण पोस्ट के खिलाफ देश भर के नागरिकों को एक साथ खड़े होने का आह्वान किया और इस मामले में देश की शीर्ष हस्तियों जैसे सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों और एफबीआई निदेशक काश पटेल को टैग करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह केवल किसी साधारण कर्मचारी की गलती नहीं है, बल्कि एक संघीय एजेंसी की ओर से की गई सोची-समझी राजनीतिक संदेशबाजी और भेदभाव का गंभीर मामला है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। गृह सुरक्षा विभाग अपने जिस 'सीबीपी होम' कार्यक्रम का प्रचार कर रहा था, उसका उद्देश्य असल में उन प्रवासियों को स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना था जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, और इसके लिए स्वैच्छिक पंजीकरण कराने वालों को यात्रा सहायता के साथ-साथ 2,600 अमेरिकी डॉलर की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी किया गया था। लेकिन उस अभियान के प्रचार के लिए जिस भद्दे और नस्लीय तरीके का इस्तेमाल किया गया, उसने पूरी योजना की नीयत पर ही पानी फेर दिया और प्रशासनिक अधिकारियों की संकीर्ण मानसिकता को उजागर कर दिया।चुनावी समीकरणों पर पड़ता असर और अमेरिका की बहुसांस्कृतिक पहचान की रक्षाराजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि अमेरिका जैसे बहुसांस्कृतिक देश में जहां दुनिया भर के विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोग एक साथ मिलकर देश के निर्माण में अपना योगदान देते हैं, वहां इस तरह की नीतियां या विज्ञापन समाज में ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं। ट्रंप प्रशासन के शुरुआती दौर से ही आव्रजन नीतियों को लेकर कड़ा रुख रहा है, और अवैध प्रवासियों पर लगाम कसना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है, लेकिन उस नीति को लागू करने के लिए किसी एक धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान को निशाना बनाना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। जब सोशल मीडिया पर इस विज्ञापन के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हुए और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाना शुरू किया, तब जाकर रिपब्लिकन नेतृत्व को अपनी गलती का अहसास हुआ। अमेरिका में प्रवासी भारतीय और एशियाई समुदाय अब केवल एक छोटा समूह नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिकी राजनीति, वित्त, स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी क्षेत्रों के सर्वोच्च पदों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वे हर चुनाव में एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि जब बात उनके सम्मान और पहचान पर आई, तो प्रशासन को तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि वैचारिक और राजनीतिक लड़ाइयों के बीच अब अमेरिकी मतदाता अपनी गरिमा और अधिकारों को लेकर बेहद जागरूक हो चुके हैं, और कोई भी सरकार जनभावनाओं की कीमत पर अपनी मनमानी नहीं चला सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Sep 2026 6:40 pm

जेडी वेंस की रैली में हंगामा, प्रदर्शनकारी को दिया मेक्सिको जाने का ऑफर

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीति में इन दिनों चुनावी पारा सातवें आसमान पर है। अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों को लेकर चल रही सियासी गहमागहमी के बीच एक ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक चुनावी रैली को संबोधित करने के दौरान उस वक्त गुस्से से भड़क उठे, जब भीड़ के बीच से एक प्रदर्शनकारी ने अचानक व्यवधान पैदा करना शुरू कर दिया। डलास शहर में रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली में बोलते हुए जेडी वेंस देश के भविष्य, अर्थव्यवस्था और नीतियों पर अपनी बात रख रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने मेक्सिको और फिलिस्तीन के झंडे हवा में लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित और तीखी परिस्थिति में अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने अपना आपा खोने के बजाय बेहद तंज भरे और कड़े अंदाज में उस प्रदर्शनकारी को लताड़ लगाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। इस घटना ने एक बार फिर अमेरिका में आव्रजन, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक असहिष्णुता के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा कर दिया है, जिस पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।डलास की रैली में फिलिस्तीनी और मेक्सिकन झंडों के साथ हुआ जमकर हंगामाअमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डलास में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल चुनावी सभा में रिपब्लिकन पार्टी के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) अभियान को धार देने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहुंचे थे। वह अमेरिका के आर्थिक भविष्य, मजबूत सीमाओं और राष्ट्रीय अस्मिता पर अपने विचार रख रहे थे, तभी दर्शक दीर्घा में मौजूद एक उपद्रवी प्रदर्शनकारी ने खलल डालना शुरू कर दिया। उस प्रदर्शनकारी ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते हुए चिल्लाना शुरू किया कि 'जोर से कहो, खुलकर कहो, डोनाल्ड ट्रंप का यहां स्वागत नहीं है।' इसके साथ ही उसने अपने हाथों में मेक्सिको और फिलिस्तीन के झंडे थाम रखे थे, जिन्हें वह लगातार लहरा रहा था। अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में इस तरह के प्रदर्शन अक्सर ध्रुवीकरण को बढ़ाते हैं, और इस बार भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि, मौके की नजाकत को भांपते हुए सुरक्षा बलों और पुलिस ने तुरंत तत्परता दिखाई और उस प्रदर्शनकारी को धर दबोचा। पुलिस ने उसे आयोजन स्थल से घसीटते हुए बाहर का रास्ता दिखाया, लेकिन इस पूरी कार्रवाई के दौरान जो जुबानी जंग उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उस प्रदर्शनकारी के बीच हुई, उसने वहां मौजूद हजारों समर्थकों का पूरा ध्यान खींच लिया और रैली का माहौल पूरी तरह से गरमा गया।'मेक्सिको इतना ही पसंद है, तो वहीं चले जाओ, टिकट मैं खरीद दूंगा' - जेडी वेंसजब सुरक्षाकर्मी उस प्रदर्शनकारी को बाहर निकाल रहे थे, तो मंच से माइक पर बोल रहे जेडी वेंस ने तंज कसते हुए उसे सीधे तौर पर संबोधित किया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने बेहद आक्रामक और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, मेरे दोस्त, अगर तुम्हें मेक्सिको इतना ही पसंद है, तो तुम्हें वहीं चले जाना चाहिए। मैं व्यक्तिगत रूप से तुम्हारे लिए हवाई जहाज का टिकट खरीद दूंगा। वेंस के मुंह से यह तीखा और दो टूक बयान निकलते ही डलास की उस विशाल रैली में मौजूद हजारों समर्थकों ने तालियां बजाकर और शोर मचाकर उनका जोरदार समर्थन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस का यह अंदाज अमेरिकी मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को बहुत पसंद आता है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीयता के मुद्दों पर बेहद सख्त रुख रखते हैं। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले जेडी वेंस को भविष्य में ट्रंप का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है, और उनका यह आक्रामक तेवर पार्टी के कट्टर समर्थकों में एक नया जोश भर देता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में वैचारिक मतभेद अब किस हद तक तीखे होते जा रहे हैं, जहां चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की नाटकीय घटनाएं आम बात बन गई हैं।मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की जीत के लिए अमेरिकी जनता से जोरदार अपीलविवाद और हंगामे के इस वाकया के बाद जेडी वेंस ने अपने भाषण का रुख वापस देश के गंभीर मुद्दों और आगामी मिडटर्म चुनावों की ओर मोड़ा। उन्होंने वहां मौजूद अमेरिकी नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस साल नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में भारी संख्या में बाहर निकलें और रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में मतदान करें। वेंस ने देश की महान विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पूर्वजों ने उन्हें यह देश एक विरासत के रूप में सौंपा है, और इससे पहले उनके पुरखों ने इसे सहेज कर रखा था। हमें अपनी राष्ट्रीय नागरिकता का यह अधिकार विरासत में मिला है, जिसकी रक्षा के लिए हमें एकजुट होकर लड़ना होगा। इस वैचारिक लड़ाई को जीतने और अमेरिका को आर्थिक रूप से फिर से पटरी पर लाने के लिए रिपब्लिकन पार्टी को जिताना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पूरी पार्टी की शुरुआत से ही अमेरिका की 'बर्थराइट सिटीजनशिप' यानी जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने के नियमों के खिलाफ बेहद सख्त राय रही है। रिपब्लिकन नेताओं का यह दावा रहा है कि विदेशी लोग जानबूझकर अमेरिका में आकर अपने बच्चों को जन्म देते हैं, जिससे उनके बच्चों को स्वतः ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, और इस नीति का देश की डेमोग्राफी तथा अर्थव्यवस्था पर गलत असर पड़ता है।डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव: रिपब्लिकन पार्टी की जीत पर हर वयस्क को मिलेंगे 5000 डॉलरडलास की इसी बहुचर्चित चुनावी रैली के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा आर्थिक ऐलान भी किया, जिसने अमेरिकी नागरिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ट्रंप ने वादा किया कि यदि आगामी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को पूर्ण बहुमत और जीत हासिल होती है, तो उनकी सरकार देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक को 5000 अमेरिकी डॉलर की नकद राशि प्रदान करेगी। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि उनके प्रशासन द्वारा हाल ही में लिए गए कड़े और साहसिक व्यापारिक फैसलों की बदौलत अमेरिकी खजाने और अर्थव्यवस्था को भारी मुनाफा हुआ है। इसी मुनाफे के एक हिस्से को सीधे तौर पर देश के आम नागरिकों के बीच साझा करने के लिए यह योजना बनाई गई है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह 5000 डॉलर वाला मास्टरस्ट्रोक मिडटर्म चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकता है, क्योंकि मुद्रास्फीति और आर्थिक दबाव से जूझ रहे आम अमेरिकी मतदाताओं के लिए यह एक बहुत बड़ा प्रलोभन साबित हो सकता है। एक तरफ जहां जेडी वेंस रैलियों में राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा और आव्रजन नीतियों पर कड़े प्रहार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप का यह आर्थिक पैकेज रिपब्लिकन पार्टी की जीत की संभावनाओं को और अधिक मजबूत करता दिखाई दे रहा है, जिससे अमेरिका का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Sep 2026 6:27 pm

अमेरिका के जी-7 पर दिल्ली से व्लादिमीर पुतिन का तीखा तंज- ब्रिक्स के मुकाबले आधे से भी कम जीडीपी

पुतिन ने कहा किपिछले पांच सालों में दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा GDP BRICS देशों से आ चुकी है, जबकि तथाकथित G7 की हिस्सेदारी सिर्फ 29 फीसदी के करीब चल रही है. मुझे नहीं पता कि वे इसे ग्रुप ऑफ सेवन क्यों कहते हैं.

NDTV इंडिया 11 Sep 2026 6:22 pm

अमेरिका में 'मिस्टर सिंह' वाले विज्ञापन पर विवाद:विरोध के बाद अमरीकी गृह सुरक्षा विभाग ने हटाया एड; SGPC ने भी जताई आपत्ति

अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया एक विज्ञापन विवादों में घिर गया है। अमेरिकी सरकार की इस एजेंसी पर भारतीय-अमेरिकियों, सिखों और हिंदू समुदाय को निशाना बनाने तथा नस्लभेदी विचार फैलाने के आरोप लगे हैं। चौतरफा विरोध और नेताओं के कड़े एतराज के बाद आखिरकार विभाग को यह विवादित पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटानी पड़ी। वहीं, पोस्टर में पंजाबी और सिख समुदाय को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाने की अपील की है। क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विवाद? दरअसल, अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग सड़कों पर बिना लाइसेंस या बिना वैध दस्तावेजों के व्यवसायिक वाहन (जैसे ट्रक और बसें) चलाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ एक अभियान चला रहा था। इस अभियान के तहत विभाग ने सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार की गई कुछ तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए थे। विवादित टैगलाइन: एक तस्वीर में भूरी दाढ़ी वाले एक व्यक्ति को दिखाया गया था, जिस पर लिखा था - हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता मिस्टर सिंह। 'ट्रांसफॉर्मर्स' के किरदारों का इस्तेमाल: अभियान को प्रचारित करने के लिए मशहूर हॉलीवुड फिल्म 'ट्रांसफॉर्मर्स' के पात्रों का सहारा लिया गया। वीडियो में फिल्म के खलनायक 'मेगाट्रॉन' को दिखाया गया, जो सड़क हादसों और अपराधों में शामिल रहे कुछ ड्राइवरों (जिनमें हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार और जसवीर सिंह जैसे नाम शामिल थे) की रिहाई की मांग कर रहा था। एक अन्य तस्वीर में हीरो 'ऑप्टिमस प्राइम' को DHS का लोगो पहने दिखाया गया, जो दाढ़ी वाले व्यक्ति से कह रहा था- या तो खुद देश छोड़ दो (सेल्फ-डिपोर्ट), या अंजाम भुगतने को तैयार रहो। 'सेल्फ-डिपोर्टेशन' स्कीम से जुड़ा था अभियान यह पूरा विज्ञापन अमेरिकी सरकार के 'सीबीपी होम' नाम के एक विशेष कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। इस कार्यक्रम के तहत बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को अपनी मर्जी से अमेरिका छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सरकार ऐसे लोगों को देश छोड़ने के लिए यात्रा का खर्च और 2,600 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.15 लाख रुपए) का बोनस देने की पेशकश करती है। विवाद पर किसने क्या कहा? विज्ञापन में 'सिंह' सरनेम और दाढ़ी वाले व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने पर अमेरिका में भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के संगठनों तथा राजनेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी: गवर्नर गेविन न्यूसम (कैलिफोर्निया):उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक करार देते हुए कहा कि सरकार सिख समुदाय को निशाना बनाकर नस्लवादी दुष्प्रचार कर रही है। कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति (भारतीय-अमेरिकी सांसद): उन्होंने कहा कि अमेरिका में 1 लाख 60 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जिनका सरनेम 'सिंह' है। जब कोई सरकारी एजेंसी किसी खास सरनेम का मजाक उड़ाती है, तो इससे विदेशियों के प्रति नफरत बढ़ती है और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF): संगठन ने कहा कि 'सिंह' सरनेम वाले लोग हिंदू भी हैं, सिख भी हैं और सच्चे अमेरिकी भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सरकारी एजेंसी भारत-विरोधी और नस्लवादी सोच को बढ़ावा कैसे दे सकती है? संगठन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सिख कोएलिशन : सिख संगठन ने दुख जताते हुए कहा कि 9/11 की घटना के 25 साल बीत जाने के बाद भी सिखों को उनके पहनावे और पहचान के कारण निशाना बनाया जा रहा है और संदिग्ध नजरों से देखा जा रहा है। CoHNA (नॉर्थ अमेरिका के हिंदू संगठन): ने कहा कि कानून का पालन कराया जाना चाहिए, लेकिन किसी की पहचान या नाम का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले लोग किसी भी धर्म या जाति के हो सकते हैं। विज्ञापन हटने के बाद भी गुस्सा बरकरार चौतरफा दबाव और जनता के गुस्से को देखते हुए गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने विज्ञापन को सोशल मीडिया से डिलीट तो कर दिया है, लेकिन सिख और हिंदू संगठनों का कहना है कि केवल पोस्ट हटा देना काफी नहीं है। संगठनों की मांग है कि सरकारी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी समुदाय की पहचान को इस तरह गलत और नस्लवादी तरीके से पेश न किया जाए। धामी बोले-अमेरिका के विकास में पंजाबियों का अहम योगदान एडवोकेट धामी ने कहा कि अमेरिका के विकास और आर्थिक तरक्की में पंजाबियों ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और हुनर से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ट्रकिंग समेत कई क्षेत्रों में सिख और पंजाबी अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़े हैं और अमेरिकी समाज की सेवा कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के पोस्टर में विशेष रूप से ‘मिस्टर सिंह’ का उल्लेख कर पंजाबी और सिख समुदाय को निशाना बनाना नस्ली और सामुदायिक पक्षपात वाली सोच को दर्शाता है। विकसित देश के लिए इस तरह की सोच चिंताजनक है। धामी ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से अपील की कि सिख समाज के प्रति इस तरह के कथित भेदभावपूर्ण और आपत्तिजनक व्यवहार का मामला अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाया जाए।

दैनिक भास्कर 11 Sep 2026 6:05 pm

लता मंगेशकर के इस गाने की हुई थी चोरी, अमेरिकी सिंगर को देना पड़ा था 4000 करोड़ का हर्जाना

क्या आप जानते हैं लता मंगेशकर का एक आईकॉनिक सॉन्ग अमेरिकी रैपर को इतना पसंद आया कि उसने इसको कॉपी कर गाना बना दिया और बिना इजाजत।

लाइव हिन्दुस्तान 11 Sep 2026 6:05 pm

मिस्टर सिंह अमेरिका छोड़ दो, नहीं तो अंजाम भुगतो...US में ऐड पर विवाद, भारतीय समुदाय ने बताया नस्लवादी

मिस्टर सिंह अमेरिका छोड़ दो नहीं तो अंजाम भुगतो। अमेरिका की यह धमकी क्या सिर्फ भारतीयों के लिए है? जिस अमेरिका को पीएम मोदी अपना दोस्त कहते हैं। क्या वो भारतीयों को निशाना बनाने में जुट गया है? क्या ट्रंप सभी भारतीयों को अमेरिका से बाहर निकालने का प्लान बना रहे हैं? ट्रंप सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कारवाई करते हुए सीधे भारतीयों को निशाना बनाया। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग यानी कि डीएचएस ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में एक भारतीय मूल के व्यक्ति को दिखाया गया और उसे मिस्टर सिंह कहकर अमेरिका छोड़ने की चेतावनी दी गई। पोस्ट में लिखा था सेल्फ डिपोर्ट और फाइंड आउट यानी खुद अमेरिका छोड़ दो वरना अंजाम भुगतो। लेकिन विवाद सिर्फ इस लाइन को लेकर नहीं हुआ। पोस्ट में आगे लिखा गया गेट ऑफ आवर रोड्स यू डोंट नो हाउ टू ड्राइव मिस्टर सिंह। यानी कि मिस्टर सिंह हमारी सड़कों से हट जाओ। तुम्हें गाड़ी चलानी नहीं आती। इसके बाद डीएचएस ने एक वीडियो भी पोस्ट किया। इसे भी पढ़ें: Paris में फ्रांस के पहले पारंपरिक BAPS मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न, श्रद्धालुओं के लिए खुला द्वार भारतीय मूल के दंपती ने 2 करोड़ डॉलर दिए भारतीय मूल के अनुराधा और विकास सिन्हा ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सस को 20 मिलियन डॉलर दान दिए है। उनके सम्मान में यूनिवर्सिटी नया 'अनुराधा एड विकास सिन्हा कॉलेज ऑफ आर्टिफिशल इंटेलिजेस एड अडवास्ड एनालिटिक्स' बनाएगी। दोनो भारत में सिविल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए थे। विकास ब्रॉडकॉम में वरिष्ठ अधिकारी है। इसे भी पढ़ें: Bangladesh Politics: अल्पसंख्यक नहीं, हम सब बांग्लादेशी हैं, Janmashtami पर बोले PM Tarique Rahman हिंदू अमेरिकन संगठन ने बताया नस्लवादी हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन यानी एचएएफ ने डीएचएस पर आरोप लगाया कि सिंह सरनेम का इस्तेमाल करके भारतीयों और सिखों को निशा निशाना बनाया गया है। संगठन का कहना है कि सिख सिर्फ सिख ही नहीं लगाते सिंह बल्कि बड़ी संख्या में भारतीयों का सरनेम है यह और अमेरिका में सिख सरनेम वाले लोग अमेरिकी समाज का हिस्सा हैं। एचएफ ने इस पोस्ट को नस्ल भेदी और अमेरिका विरोधी बताया और कहा कि एक सरकारी एजेंसी की तरफ से इस तरह का पोस्ट किया जाना बहुत ही गंभीर मामला है। संगठन ने इसकी जांच की भी मांग की है। सिख कोलेशन ने भी इस पोस्ट की आलोचना की।

प्रभासाक्षी 11 Sep 2026 6:03 pm

अमेरिका के बाहर UAE में बन रहा था सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर, ईरान हमलों के बाद प्लान में बदलाव: सूत्र

इस प्रोजेक्ट के पहले चरण - 'स्टारगेट UAE' नाम के 30 अरब डॉलर के 1-गीगावाट कंप्यूट क्लस्टर - का कंस्ट्रक्शन पिछले साल शुरू हुआ था और इसकी पहली 200 मेगावाट क्षमता इस साल चालू होने वाली है.

NDTV इंडिया 11 Sep 2026 5:44 pm

Vishwakhabram: America for Americans या Racist Propaganda? ‘Mr Singh’ को निशाना बनाकर US ने अपना नस्ली चेहरा दिखाया

अमेरिका में अवैध प्रवासियों और गैर-नागरिक कमर्शियल ड्राइवरों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई अब एक ऐसे विवाद में बदल गई है, जिसने अमेरिकी सत्ता की नस्लीय सोच और भारतीय-अमेरिकियों के प्रति उसके रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने एक AI-जनरेटेड पोस्टर में ‘Mr Singh’ को निशाना बनाकर न केवल एक भारतीय उपनाम को अपराध और असुरक्षित ड्राइविंग से जोड़ने की कोशिश की, बल्कि इस अभियान ने अमेरिका में बसे लाखों भारतीयों और खासकर सिख समुदाय के बीच गहरी नाराजगी भी पैदा कर दी। हालांकि 10 सितंबर 2026 को विवाद बढ़ने के बाद DHS ने वह पोस्ट हटा दिया। हम आपको बता दें कि पोस्टर में Transformers शैली के एक विशाल DHS रोबोट के सामने सिर ढके और दाढ़ी वाले भूरे रंग के व्यक्ति को दिखाया गया था। उसके ऊपर लिखा था— “America for Americans. Get off our roads, you don't know how to drive, Mr Singh.” पोस्ट में ‘self-deportation’ का संदेश भी दिया गया था। सवाल यह है कि अगर निशाना केवल एक आरोपी ट्रक ड्राइवर था, तो उसके लिए ‘Mr Singh’ जैसे पूरे समुदाय से जुड़े उपनाम को क्यों चुना गया? इसे भी पढ़ें: Donald Trump के करीबी Joe diGenova ने जांच दल के प्रमुख पद से दिया इस्तीफा उधर, DHS ने आलोचना के बाद सफाई दी कि पोस्टर में दिखाया गया व्यक्ति कोई काल्पनिक विदेशी नहीं, बल्कि भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवर हरजिंदर सिंह का प्रतिनिधित्व करता था। हरजिंदर सिंह पर 2025 में फ्लोरिडा टर्नपाइक पर कथित तौर पर अवैध यू-टर्न लेने के बाद हुई दुर्घटना में तीन लोगों की मौत के मामले में आरोप लगाए गए थे। ट्रंप प्रशासन इसी हादसे को विदेशी मूल के कमर्शियल ड्राइवरों पर कार्रवाई के अपने अभियान के प्रमुख उदाहरण के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। इसके बाद संघीय नियामकों ने non-domiciled Commercial Driver's Licenses (CDLs) से जुड़े नियम भी कड़े किए। अमेरिकी सरकार ने 2025 में ऐसे CDL धारकों से जुड़े पांच घातक हादसों और राज्यों द्वारा विदेशी ड्राइविंग रिकॉर्ड तथा इमिग्रेशन दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर चिंताओं का हवाला दिया। देखा जाये तो सुरक्षा पर सवाल उठाना जायज है, लेकिन किसी ड्राइवर की गलती को उसके नाम, त्वचा के रंग, पगड़ी या इमिग्रेशन स्टेटस से जोड़ देना बिल्कुल अलग बात है। यही वह बिंदु है जहां DHS का प्रचार सवालों के घेरे में आता है। हम आपको बता दें कि आंकड़े DHS के पोस्टर की कहानी को पूरी तरह समर्थन नहीं देते। California DMV के 2022-24 के विश्लेषण में temporary legal residents के CDL धारकों के प्रति 100 लाइसेंसधारकों पर 11.9 police-reported crashes दर्ज हुए, जबकि अमेरिकी नागरिक CDL धारकों के लिए यह संख्या 14.8 थी। Fatal-crash involvement भी क्रमशः 0.09 और 0.12 प्रति 100 रहा। बेशक इन आंकड़ों को इस निष्कर्ष के रूप में नहीं लिया जा सकता कि immigrant drivers स्वाभाविक रूप से अधिक सुरक्षित होते हैं। आंकड़े यह नहीं बताते कि वाहन कितने मील चले और crash involvement का अर्थ दुर्घटना के लिए दोषी होना भी नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि ‘विदेशी ड्राइवर ज्यादा खतरनाक हैं’ जैसी सीधी और व्यापक धारणा आंकड़ों से साबित नहीं होती। इसके अलावा, संघीय स्तर पर भी immigration status के आधार पर crash rates की कोई साफ राष्ट्रीय तुलना उपलब्ध नहीं है। FMCSA दुर्घटनाओं में शामिल ड्राइवरों को citizenship या CDL category के आधार पर इस तरह व्यवस्थित नहीं करता कि उससे एक विश्वसनीय राष्ट्रीय तुलना निकाली जा सके। वहीं Federal Register में rule-making प्रक्रिया के दौरान Sikh Coalition की ओर से यह तर्क भी दर्ज हुआ कि non-domiciled CDL holders बड़े ट्रक हादसों के 2 प्रतिशत से भी कम मामलों में शामिल थे, जबकि 98 प्रतिशत से अधिक मामलों में US-domiciled CDL holders शामिल थे। हालांकि ये आंकड़े किसी अध्ययन के परिणाम नहीं, बल्कि rule-making में प्रस्तुत टिप्पणियों का हिस्सा हैं। इसका मतलब यह नहीं कि immigrant drivers से जुड़े सुरक्षा सवाल काल्पनिक हैं। फर्जी लाइसेंस, अपर्याप्त प्रशिक्षण, भाषा संबंधी कठिनाइयां और नियमों की अनदेखी वास्तविक समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन समाधान व्यक्ति की क्षमता की जांच है, उसका सरनेम नहीं। यही कारण है कि Sikh Coalition और Hindu American Foundation जैसे संगठनों ने DHS की कार्रवाई को महज एक राजनीतिक विज्ञापन नहीं माना। Hindu American Foundation ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि Singh हिंदू भी हैं, सिख भी, अमेरिकी भी और ड्राइवर भी। Sikh Coalition ने इसे appearance-based targeting की व्यापक समस्या से जोड़ा। हम आपको बता दें कि FBI के आंकड़ों के उसके विश्लेषण के मुताबिक 2025 में 177 anti-Sikh hate-crime incidents रिपोर्ट हुए। अमेरिका के इतिहास में सिख समुदाय के खिलाफ ऐसी गलत पहचान की कीमत पहले भी चुकानी पड़ी है। 9/11 के बाद सिखों को अक्सर मुसलमान समझकर निशाना बनाया गया। हमले के सिर्फ चार दिन बाद एरिजोना में गैस स्टेशन चलाने वाले बलबीर सिंह सोढ़ी की हत्या कर दी गई थी। 2012 में Wisconsin के Oak Creek में एक white supremacist हमलावर ने गुरुद्वारे में छह श्रद्धालुओं की हत्या कर दी थी। ऐसे इतिहास वाले समुदाय के सामने सरकारी प्रचार में दाढ़ी, सिर ढका हुआ चेहरा और ‘Mr Singh’ को खतरे तथा गैर-अमेरिकीपन के प्रतीक की तरह पेश करना स्वाभाविक रूप से बेहद गंभीर प्रतिक्रिया पैदा करता है। यहां सवाल यह भी उठता है कि अगर ‘America for Americans’ का अर्थ यह है कि भारतीय मूल के अमेरिकी, सिख, हिंदू, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, उद्यमी, शिक्षक, ट्रक ड्राइवर और कारोबारी अमेरिकी नहीं हैं, तो फिर अमेरिका की अपनी विकास गाथा इस नारे को झुठलाती है। भारतीय-अमेरिकियों ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, शिक्षा, उद्यमिता और परिवहन क्षेत्र में दशकों से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। Silicon Valley से लेकर अस्पतालों तक, विश्वविद्यालयों से लेकर छोटे कारोबारों तक और ट्रकिंग उद्योग से लेकर वैश्विक कंपनियों के नेतृत्व तक, भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिकी विकास में अपनी मेहनत और प्रतिभा का स्पष्ट योगदान दिया है। इसलिए किसी अपराध के आरोपी एक व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई को लेकर बहस हो सकती है। सरकार चाहे तो CDL नियम और कड़े करे, लाइसेंस सत्यापन बेहतर करे और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करे। लेकिन ‘Singh’ को एक नस्लीय शॉर्टहैंड बनाकर लाखों लोगों पर संदेह की छाया डालना कानून-व्यवस्था नहीं, profiling का रास्ता है। हम आपको यह भी बता दें कि California के डेमोक्रेट गवर्नर Gavin Newsom ने इसे “racist propaganda” बताया। वहीं कांग्रेस सदस्य Raja Krishnamoorthi और अन्य नेताओं ने भी विरोध किया। सीनेटर Adam Schiff ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि करोड़ों अमेरिकियों को उनकी पृष्ठभूमि और शक्ल-सूरत के आधार पर संदेह के घेरे में डालना स्वीकार्य नहीं है। वहीं DHS ने पलटवार करते हुए Schiff के आरोप को “सबसे आलसी झूठ” करार दिया। बहरहाल, अवैध इमिग्रेशन रोकना है तो कानून लागू कीजिए। लेकिन किसी पूरे समुदाय के नाम, चेहरे और पहचान को अपराध का प्रतीक मत बनाइए। क्योंकि अमेरिका की ताकत उसकी विविधता से बनी है और अगर ‘American’ होने की कसौटी नस्ल और सरनेम बन गई, तो सवाल सिर्फ ‘Mr Singh’ पर नहीं, बल्कि अमेरिकी लोकतंत्र पर उठेगा। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 11 Sep 2026 5:42 pm

नीम करोली बाबा का 'दास' अमेरिकी सिंगर, 'हनुमान अंश' में गाए भजन

Hanuman Ansh में अमेरिकी सिंगर कृष्ण दास का खास कनेक्शन है. कभी रॉक म्यूजिक से जुड़े कृष्ण दास नीम करोली बाबा के भक्त बने और अब फिल्म में उनके भजन सुनाई दे रहे हैं.

आज तक 11 Sep 2026 4:21 pm

9/11 के 25 साल: आतंकवाद के खिलाफ हमेशा खड़ा रहेगा अमेरिका, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी श्रद्धांजलि

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अमेरिका हमेशा आतंकवाद के खिलाफ खड़ा रहेगा।

खास खबर 11 Sep 2026 4:02 pm

भारत क्या चीन के मामले में अमेरिका के लिए अब उपयोगी देश नहीं रहा?

अमेरिका के लिए भारत से संबंधों में सेलिंग पॉइंट मुख्य रूप से यही था कि 'चीन से मुक़ाबले के लिए भारत ज़रूरी है. लेकिन अब चीज़ें तेज़ी से बदल रही हैं. ट्रंप इस सोच से लगभग बाहर निकल चुके हैं.

बीबीसी हिंदी 11 Sep 2026 2:37 pm

अमेरिका में ₹1.9 लाख और भारत में सीधे ₹3 लाख! ये है iPhone के महंगा होने की असली वजह

अमेरिका में करीब 1.9 लाख रुपये वाला iPhone Duo भारत में 2,99,900 रुपये का क्यों है? इसके पीछे सिर्फ टैक्स नहीं, बल्कि इंपोर्ट ड्यूटी, मैन्युफैक्चरिंग, करेंसी और Apple की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी जैसी कई वजहें हैं। आइए उन्हें समझते हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 11 Sep 2026 2:07 pm

भारतीयों को बाहर निकालो, भारत की कंपनी बैन कर दो; अमेरिका में इतनी नफरत क्यों?

‘मिस्टर सिंह’ नाम के साथ पोस्टर जारी करना, भारत की कंपनियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई और अब एच1 बी वीजा पर कड़े नियमों का प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से किया गया है। खास बात है कि इन सभी कदमों से भारतीय खासे प्रभावित हो रहे हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 11 Sep 2026 1:53 pm

अमेरिका के साथ तो खेला हो गया! क्लाउड AI से मिसाइल बना रहे ईरान के दोस्त हूती?

Anthropic की रिपोर्ट में यमन स्थित हूती हथियार सेल द्वारा AI मॉडल Claude के इस्तेमाल का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक AI की मदद से मिसाइल और गाइडेड रॉकेट के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने का काम किया गया।

लाइव हिन्दुस्तान 11 Sep 2026 1:42 pm

ईरान के साथ अमेरिका की जंग 2029 तक जारी रह सकती है, ऐसी संभावना क्यों है?

यह आकलन युद्ध के जल्दी खत्म होने के बारे में ट्रंप की ओर से बार-बार दिए गए सुझावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है.

बीबीसी हिंदी 11 Sep 2026 1:41 pm

सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘अमेरिका में संघ को विरोध से अधिक समर्थन मिला’

भुवनेश्वर में आयोजित ‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी से पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके संपादित अंश सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के अमेरिका प्रवास के दौरान कुछ लोगों और संगठनों ने संघ के विषय में विवाद […]

पांचजन्य 11 Sep 2026 1:34 pm

अमेरिका कर रहा है DMK के वादे की नकल! श्रीधर वेम्बू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैश स्कीम पर क्या बोले?

जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिकी एडल्ट्स को $5000 देने के वादे की तुलना तमिलनाडु की चुनावी राजनीति से कर दी है। वेम्बू ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति असल में भारत के तमिलनाडु की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की नकल कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने लिखा कि हमने इसका आविष्कार तमिलनाडु में किया और इसे पूरे भारत में फैलाया। राष्ट्रपति ट्रंप DMK की नकल कर रहे हैं।क्या है डोनाल्ड ट्रंप का $5000 ट्रम्प डिविडेंड वादा?श्रीधर वेम्बू का यह कमेंट डोनाल्ड ट्रंप के उस चुनावी वादे के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर अपना कंट्रोल बनाए रखती है, तो वह हर अमेरिकी एडल्ट को $5000 भेजेंगे। ट्रंप के वादे को ट्रंप डिविडेंड नाम दिया गया है।1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की लागत और भारी घाटाट्रंप के इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत होगी और इससे 1 ट्रिलियन डॉलर (1 खरब डॉलर) से अधिक का खर्च आ सकता है। यह स्थिति तब है जब अमेरिका पहले से ही लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर के एनुअल बजट घाटे का सामना कर रहा है और उसका नेशनल कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है। ट्रंप ने सुझाव दिया है कि टैरिफ से मिलने वाले रेवेन्यू की मदद से अमेरिकी लोगों को ये पैसा दिया जाएगा। वैसे रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने जितने का वादा कर दिया है वो टैरिफ से आने वाले रेवेन्यू से भी ज्यादा बैठ रहा है।इस पर 'कमिटी फॉर ए रिस्पॉन्सिबल फेडरल बजट' के सीनियर पॉलिसी डायरेक्टर मार्क गोल्डवेन ने कहा कि ट्रंप कांग्रेस की मंजूरी के बिना यह भुगतान नहीं कर सकते। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब सरकार पहले से ही बड़े बजट घाटे में चल रही है तो ऐसे में डिविडेंड शब्द का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।आपको बता दें कि श्रीधर वेम्बू द्वारा DMK का जिक्र तमिलनाडु के दशकों पुराने राजनीतिक इतिहास को ध्यान में रखकर किया गया है। तमिलनाडु में वेलफेयर स्कीम्स को चुनावी राजनीति के साथ जोड़ने का इतिहास काफी पुराना है। यहां 1950 और 1960 के दशक में मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में के कामराज ने मुफ्त शिक्षा का विस्तार किया और स्कूली बच्चों के लिए मिड डे मील स्कीम शुरू की थी।1967 के विधानसभा चुनाव में DMK के संस्थापक सीएन अन्नादुरई ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए रियायती दरों पर चावल देने का वादा किया था। DMK ने यह चुनाव जीता और इस योजना को लागू किया। बाद में फाइनेंशियल दिक्कतों की वजह से इसे सीमित करना पड़ा। 2006 के चुनाव में एम करुणानिधि की अगुवाई वाली DMK ने मुफ्त कलर टीवी, रियायती चावल, गैस चूल्हे और अन्य लाभ देने का वादा किया। इसी तरह 2011 के चुनाव में ये कंपीटिशन और तेज हो गया। तब DMK और AIADMK दोनों ने मिक्सर, ग्राइंडर, पंखे और लैपटॉप जैसे घरेलू सामान देने के वादे किए।तमिलनाडु से निकलकर पूरे भारत में फैला यह मॉडलतमिलनाडु से शुरू हुआ यह मॉडल बाद में देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया। आम आदमी पार्टी ने 2015 में दिल्ली चुनाव प्रचार में मुख्य रूप से सब्सिडी वाली बिजली और मुफ्त पानी का वादा किया था। इसके बाद से भारत भर के राजनीतिक दलों ने मुफ्त बिजली, लोन माफी, मुफ्त सार्वजनिक परिवहन, कैश स्कीम, लैपटॉप और दूसरे डायरेक्ट फायदे देने शुरू कर दिए.ट्रंप के पुराने वादे: DOGE डिविडेंड और टैरिफ रिफंडऐसा नहीं है कि ट्रंप कोई पहली बार कुछ इस तरह का वादा कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने एलन मस्क के डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) द्वारा की गई बचत को जनता में बांटने के लिए DOGE डिविडेंड का प्रचार किया था। इसके अलावा उन्होंने टैरिफ रिफंड का विचार भी पेश किया था। इसमें सुझाव दिया गया था कि इंपोर्ट फी से मिलने वाले रेवेन्यू को अंततः जनता को लौटाया जा सकता है।

मनी कण्ट्रोल 11 Sep 2026 12:55 pm

Indian-American कपल ने University of Houston को 40 लाख डॉलर किए दान

(सीमा हाकू काचरू)ह्यूस्टन, 11 सितंबर भारतीय-अमेरिकी दंपति ने इंजीनियरिंग अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ह्यूस्टन विश्वविद्यालय को 40 लाख डॉलर का दान दिया है। विश्वविद्यालय ने बताया कि ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को दिए गए इस दान से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में दो स्थायी प्रोफेसर पद, शिक्षकों के शोध के लिए कोष, स्नातक छात्रों के लिए फेलोशिप और एक संगोष्ठी श्रृंखला स्थापित की जाएगी। भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर मनमोहन सिंह कलसी और उनकी पत्नी मैरी-लुइस शूबर्ट कालसी ने शोध और शिक्षा के विस्तार के उद्देश्य से यह राशि दान की है। कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रदीप शर्मा ने कहा, ‘‘ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के स्नातक छात्र से लेकर उद्योग जगत के नवोन्मेषक और उद्यमी तक मनमोहन कलसी की यात्रा कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती है।’’यह योगदान इस दंपति के विश्वविद्यालय के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत करता है। मनमोहन कलसी ने ह्यूस्टन विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में परास्नातक और पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने दिवंगत प्रोफेसर गैब्रियल फाजेकास के मार्गदर्शन में अध्ययन किया था। वर्ष 1978 में उन्होंने हाइड्रोडायनेमिक रोटरी सीलिंग तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी कलसी इंजीनियरिंग की स्थापना की थी। इस दंपति ने इससे पहले 2014 में भी कॉलेज में एक स्थायी प्रोफेसर पद के लिए आर्थिक सहयोग दिया था, जिसे प्रोफेसर फाजेकास की स्मृति में स्थापित किया गया था।

प्रभासाक्षी 11 Sep 2026 12:13 pm

‘मिस्टर सिंह, सड़कों से हट जाओ’—अमेरिका का विवादास्पद विज्ञापन वापस, क्यों भड़के हिंदू-सिख संगठन?

अमेरिका में हिन्दू व सिख संगठनों के विरोध के चलते वहां की सरकार को एक विज्ञापन वापिस लेना पड़ा है। इस विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ से अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया था। वहां के गृह सुरक्षा विभाग ने बिना लाइसेंस वाहन चलाने वाले लोगों के खिलाफ यह अभियान शुरू किया था। इसी अभियान के […]

पांचजन्य 11 Sep 2026 11:10 am

US Strategic Petroleum Reserve: अमेरिका तेल को जमीन के नीचे क्यों रखता है? जानें नमक की गुफाओं का राज

US Strategic Petroleum Reserve: अमेरिका तेल को जमीन के नीचे क्यों रखता है? जानें नमक की गुफाओं का राज

समाचार नामा 11 Sep 2026 11:00 am

कच्चे तेल में भयंकर आग: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच 116 डॉलर हुए इंडियन बास्केट पर दाम

अमेरिकी ईरान युद्ध की वजह से अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई। ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल पार हो गया तो WTI क्रूड भी 103 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल हुई।

वेब दुनिया 11 Sep 2026 10:54 am

Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz

अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…

लाइव हिन्दुस्तान 11 Sep 2026 10:44 am

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल अमेरिका में ‘जी20 ऊर्जा मंत्रियों’ की बैठक में हिस्सा लेंगे

New Delhi, 11 सितंबर . केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल 14 से 16 सितम्बर 2026 तक जी20 ऊर्जा मंत्रियों की अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित बैठक में भाग लेंगे. अमेरिका की मेजबानी में आयोजित जी20 की अध्यक्षता वाली इस बैठक में जी20 सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि ... Read more

डेली किरण 11 Sep 2026 10:38 am

अमेरिका का ड्रग तस्करी वाली नाव पर हमले का दावा, देखें US Top-10

अमेरिकी दक्षिणी कमांड ने कैरेबियन में ड्रग तस्करी से जुड़े एक तेज रफ्तार जहाज पर हमले का वीडियो जारी किया है. अमेरिकी सेना के मुताबिक इस कार्रवाई में 3 लोगों की मौत हो गई. वॉशिंगटन इन हमलों को नार्को टेररिस्ट के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि मानवाधिकार संगठन इसे न्यायेतर हत्याएं करार दे रहे हैं. देखें यूएस टॉप-10.

आज तक 11 Sep 2026 10:33 am

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल अमेरिका में 'जी20 ऊर्जा मंत्रियों' की बैठक में हिस्सा लेंगे

नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल 14 से 16 सितम्बर 2026 तक जी20 ऊर्जा मंत्रियों की अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित बैठक में भाग लेंगे। अमेरिका की मेजबानी में आयोजित जी20 की अध्यक्षता वाली इस बैठक में जी20 सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि एकत्रित होकर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की वहनीयता, अवसंरचना विकास और सुदृढ़ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह जानकारी विद्युत मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई।

समाचार नामा 11 Sep 2026 10:28 am

अमेरिका का नया H-1B नियम बढ़ाएगा भारतीयों की टेंशन, नौकरी जाने के बाद तुरंत छोड़ना पड़ सकता है देश; नहीं मिलेगा 60 दिनों का ग्रेस पीरियड

अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी सरकार ने 60 दिन की ग्रेस पीरियड खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।

ज़ी न्यूज़ 11 Sep 2026 10:13 am

अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 107 डॉलर के पार, भारत की बढ़ी चिंता; युद्ध लंबा खिंचने का भी खतरा

भारत के लिए महंगे क्रूड का असर आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। खासतौर पर अगर तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बढ़ सकती है।

देशबन्धु 11 Sep 2026 10:08 am

अमेरिका: नेपाल में बाढ़ के बाद 70 अमेरिकी नागरिक अभी भी लापता, 18 बचाए गए; त्रासदी पर क्या बोला विदेश विभाग?

Nepal flash flood many Americans unaccounted for after Nepal flash flood rescue operation us state department- अमेरिका: नेपाल में बाढ़ के बाद 70 अमेरिकी नागरिक अभी भी लापता, 18 बचाए गए; त्रासदी पर क्या बोला विदेश विभाग?

अमर उजाला 11 Sep 2026 9:51 am

अमेरिकी पैरेंट्स से रिपब्लिकन को वोट देने की अपील, कैरोलिन लेविट बोली- ट्रंप अमेरिकी स्वतंत्रता के हैं रक्षक

अमेरिकी पैरेंट्स से रिपब्लिकन को वोट देने की अपील, कैरोलिन लेविट बोली- ट्रंप अमेरिकी स्वतंत्रता के हैं रक्षक

समाचार नामा 11 Sep 2026 9:31 am

9/11 आतंकी हमले की बरसी: ट्विन टावर से वॉर ऑन टेरर तक, अमेरिका को मिले जख्म और साजिशों की 25 साल पुरानी कहानी?

9/11 Anniversary: ट्विन टावर से वॉर ऑन टेरर तक, अमेरिका को मिले जख्म और साजिशों की 25 साल पुरानी कहानी?

अमर उजाला 11 Sep 2026 6:15 am

H-1B वीजा पर अमेरिका बना रहा तगड़ा प्लान, तुरंत छोड़ना पड़ सकता है देश!

ट्रंप प्रशासन अस्थायी कार्य वीजा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्ताव लागू हुआ तो H-1B समेत कुछ अन्य वीजा धारकों को नौकरी जाने के बाद नई नौकरी या नया स्पॉन्सर तलाशने के लिए मिलने वाली 60 दिन की मोहलत खत्म हो सकती है।

अमर उजाला 11 Sep 2026 5:21 am

Agra News: अमेरिका में नन्हे आरुष का स्वर्णिम प्रदर्शन

नन्हे वुशू खिलाड़ी आरुष श्रीवास्तव ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित विश्व वुशू ओपन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर आगरा का मान बढ़ाया।

अमर उजाला 11 Sep 2026 2:44 am

अमेरिका: 'मिस्टर सिंह' वाले विज्ञापन पर मचा बवाल, सरकार ने हटाया पोस्ट; क्यों हुआ इतना विरोध?

अमेरिका: 'मिस्टर सिंह' वाले विज्ञापन पर मचा बवाल, सरकार ने हटाया पोस्ट; क्यों हुआ इतना विरोध?

अमर उजाला 11 Sep 2026 2:38 am

Lucknow News: अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी के मामले की जांच करेगी ईडी

अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी के मामले की जांच करेगी ईडी

अमर उजाला 11 Sep 2026 2:32 am

अमेरिका: अवैध प्रवासी को अदालत से बाहर जाने देने के आरोप में जज पर कार्रवाई; आठ साल पुराने मामले में क्या हुआ?

अमेरिका: अवैध प्रवासी को अदालत से बाहर जाने देने के आरोप में जज पर कार्रवाई; आठ साल पुराने मामले में क्या हुआ?

अमर उजाला 11 Sep 2026 1:23 am

अमेरिका: ट्रंप के डाक मतदान के आदेश पर अदालत की रोक बरकरार, राज्यों में भेजे जा रहे मतपत्र; आगे क्या होगा?

अमेरिका: ट्रंप के डाक मतदान के आदेश पर अदालत की रोक बरकरार, राज्यों में भेजे जा रहे मतपत्र; आगे क्या होगा?

अमर उजाला 11 Sep 2026 1:20 am

अमेरिका को चुभता BRICS, भारत के लिए कितना फायदेमंद?

12 तारीख से दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। जिसमें शामिल होने के लिए रूस, चीन समेत दुनिया के कई देशों के राष्ट्र प्रमुख यहां पर आ रहे हैं। लेकिन समिट शुरू होने से पहले ब्रिक्स समिट को लेकर पी चिदंबरम ने कहा कि हालिया बैठकों से कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला। बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जरा 1947 से लेकर के 2014 तक का हिसाब भी देख लीजिए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं और 7 साल के बाद यह शी जिनपिंग का भारत दौरा होगा। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit में दिखेगी India Story की झलक, Bihar के सत्तू से Odisha की कॉफी तक MEA की खास पहल 7 साल बाद जिनपिंग का भारत आना क्या पुराने विवादों को खत्म कर देगा, सुलझा देगा? शी जिनपिंग का यह दौरा भारत और चीन के रिश्तों में आई तल्खी के बाद काफी अहम माना जा रहा है। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद सीमा पर सैन्य तैनाती के साथ-साथ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में भी खिंचाव देखने को मिला। अगर 12 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक होती है, तो गलवान की घटना के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत होगी। इसके अलावा शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आएंगे। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए ब्रिक्स समिट में क्या कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा? भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेजबानी भारत की जिम्मेदारी है। यही वजह है कि वाशिंगटन की नजर भी दिल्ली पर टिकी हुई है। इसमें डर की बात है कि दिल्ली में ईरान की एंट्री और क्या यही अमेरिका की बेचैनी बढ़ा रही है। दरअसल दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाली जो ब्रिक्स समिट है पूरी दुनिया की नजर जरूर है। लेकिन सबसे ज्यादा नजर अगर किसी की है तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की। वजह साफ है ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, डॉलर से दूरी की कोशिश और भारत की मेजबानी में रूस, चीन और ईरान जैसे देशों का एक मंच पर आना। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit के लिए छावनी बनी New Delhi, 15000 जवानों और Multi-layer Security के साथ अभेद्य सुरक्षा घेरा ईरान की मौजूदगी क्या अमेरिका की टेंशन को बढ़ा रही है? हालांकि उसमें करीब 11 देश हैं। लेकिन ये जो तीन चार नाम है भारत को छोड़कर रूस, चीन, ईरान यहीं पर तो फंसी है ट्रंप की जान। ट्रंप पहले ही ब्रिक्स को लेकर कई बार नाराजगी जता चुके हैं। 100% तक टेरिफ की धमकी दे चुके हैं। दिल्ली में इस बार मंच पर ग्लोबल साउथ की बड़ी उभरती इकॉनमीज़ एक साथ होंगी। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेजबानी भी वो करेगा और यही वजह है कि वाशिंगटन की नजर भी दिल्ली पर टिकी हुई है। ब्रिक्स अब सिर्फ ब्राजील, रशिया, इंडिया, चाइना और साउथ अफ्रीका तक सीमित नहीं है। ईरान समेत कई देश इसका एक हिस्सा बन चुके हैं। यानी एक ऐसा मंच जिसकी आर्थिक और राजनीतिक पहुंच लगातार बढ़ती जा रही है, स्प्रेड हो रही है। विस्तार उसका हो रहा है। यही विस्तार अमेरिका के लिए चिंता का कारण है। खासकर इसलिए भी क्योंकि ब्रिक्स के भीतर कुछ देश दुनिया को मौजूदा आर्थिक व्यवस्था जो है तो कुछ देश ऐसे हैं जो उसमें व्यवस्था में बदलाव की बात करते हैं।

प्रभासाक्षी 10 Sep 2026 8:39 pm

भारत-अमेरिका के Yudh Abhyas में पहली बार Counter-Drone System का ट्रायल, चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगी मारक क्षमता

भारतीय सेना और अमेरिकी सेना अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करते हुए 'एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास 2026' का 22वां संस्करण शुरू करेंगी। जारी जानकारी के अनुसार, इस साल की ट्रेनिंग में अलास्का के फोर्ट वेनराइट में तैनात अमेरिकी सेना के 11वें एयरबोर्न डिवीजन के आर्कटिक-ट्रेन्ड सैनिकों को भारत के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जाएगा। इस एक्सरसाइज में 3rd मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स (3MDTF) की भागीदारी से इसे और मजबूती मिलेगी, जो इस द्विपक्षीय ढांचे में एडवांस्ड लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन फायर और इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम को शामिल करेगी। यह संयुक्त एक्सरसाइज 28 सितंबर को समाप्त होगी। बताया गया है कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी सेना प्रशांत के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल जेबी वोवेल प्रमुख ट्रेनिंग कार्यक्रमों में शामिल होंगे, जो भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है। इसे भी पढ़ें: बलूचिस्तान में BLA का भीषण तांडव, 28 ऑपरेशनों में 52 Pakistani Soldiers के मारे जाने का दावा भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा युद्ध अभ्यास दिखाता है कि अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी कितनी मजबूत हो गई है। हमारे सैनिक साथ मिलकर ट्रेनिंग कर रहे हैं, एक-दूसरे से सीख रहे हैं और ऐसा भरोसा और क्षमताएं बना रहे हैं जो हमारे दोनों देशों को और मजबूत और सुरक्षित बनाती हैं। जहां राजदूत ने रणनीतिक संबंधों पर जोर दिया, वहीं वोवेल ने उस ऑपरेशनल पहुंच और व्यावहारिक तैयारी पर जोर दिया जो यह सालाना द्विपक्षीय अभ्यास संयुक्त सेना को देता है। वोवेल ने कहा, युद्ध अभ्यास का मकसद भरोसा बनाना, जानकारी साझा करना और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति हमारी प्रतिबद्धता दिखाना है। हर साल भारतीय सेना के साथ हमारी साझेदारी मजबूत होती जा रही है और हम मिलकर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। इसे भी पढ़ें: बलूचिस्तान में BLA का भीषण तांडव, 28 ऑपरेशनों में 52 Pakistani Soldiers के मारे जाने का दावा इस रिलीज़ में बताया गया है कि इस साल की एक्सरसाइज़ में 'कमांड पोस्ट एक्सरसाइज़' और 'फ़ील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज़' शामिल हैं, जो आखिर में एक जॉइंट 'लाइव-फ़ायर डेमोंस्ट्रेशन' के साथ खत्म होंगी। इस इवेंट में अमेरिका और भारत के कई लंबी दूरी और सटीक निशाना लगाने वाले फ़ायर और रॉकेट सिस्टम के डिजिटल इंटीग्रेशन को दिखाया जाएगा। 'ऑपरेशन पाथवेज़' के रणनीतिक फ़्रेमवर्क के तहत काम करते हुए, यह एक्सरसाइज़ एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि इसमें भारत में पहली बार एडवांस्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं।

प्रभासाक्षी 10 Sep 2026 8:26 pm

अमेरिका से डिपोर्ट हुआ सिंगापुर साइबर ठगी का मास्टरमाइंड:दिल्ली एयरपोर्ट पर CBI ने दबोचा, 2013 से फरार, इमिग्रेशन अधिकारी बनकर करते थे ब्लैकमेल

सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों से साइबर ठगी के मामले में एक दशक से अधिक समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी हरनेक सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। इंटरपोल रेड नोटिस और लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी होने के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने उसे डिपोर्ट किया। 9 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही सीबीआई की टीम ने उसे दबोच लिया। इसके बाद बुधवार को आरोपी को पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई मामले) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इमिग्रेशन अधिकारी बनकर करते थे ब्लैकमेल सीबीआई के मुताबिक, वर्ष 2013 में भारत से सक्रिय साइबर ठगों के एक गिरोह ने सिंगापुर में रह रहे भारतीयों को निशाना बनाया था। आरोपी खुद को सिंगापुर इमिग्रेशन विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को स्पूफ कॉल करते थे। वे धमकी देते थे कि एयरपोर्ट पर डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी भरने के कारण उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और देश से निर्वासन (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस डर का फायदा उठाकर ठग जुर्माने और सेटलमेंट फीस के नाम पर वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के जरिए भारत में मोटी रकम मंगवाते थे। जांच में खुलासा हुआ कि यह ठगी की पूरी रकम हरनेक सिंह द्वारा संचालित मनी ट्रांसफर आउटलेट के माध्यम से निकाली जाती थी। सह-आरोपी पहले ही हो चुके हैं दोषी करार इस सनसनीखेज मामले में हरनेक सिंह के अलावा आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन को भी आरोपी बनाया गया था। वारदात के बाद हरनेक सिंह मई 2013 में ही भारत से फरार हो गया था और बाद में अवैध तरीके से अमेरिका में जा छिपा। सीबीआई ने इस मामले में साल 2016 में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ पंचकूला की विशेष अदालत में ट्रायल पूरा हो चुका है और अदालत ने 26 मई 2025 को दोनों को दोषी करार दिया था। अमेरिका में नहीं माना समन, जारी हुआ था गैर-जमानती वारंट फरार चल रहे हरनेक सिंह को अमेरिका में रहते हुए भारतीय अदालत के समन और जमानती वारंट भी तामील कराए गए थे, लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए। सीबीआई ने इसके बाद इंटरपोल के जरिए शिकंजा कसा। इंटरपोल के जरिए रेड नोटिस जारी कराया गया और उसके पासपोर्ट पर लुक आउट सर्कुलर भी खुलवाया गया, जिसके आधार पर अंततः उसे अमेरिका से भारत लाने में सफलता मिली।

दैनिक भास्कर 10 Sep 2026 8:00 pm

डोनल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर और वोटर ID वाले प्रस्ताव से बदल रहा अमेरिका का चुनावी पैटर्न, क्या है भारत की DBT योजना से इसका कनेक्शन

दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र होने का दावा करने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीतिक और चुनावी संस्कृति में इन दिनों एक बहुत बड़ा वैचारिक और व्यावहारिक बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जिस प्रकार से अमेरिकी चुनाव प्रणाली को नया रूप देने की शुरुआत की है, उसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में डलास में आयोजित रिपब्लिकन मिडटर्म कन्वेंशन के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी मतदाताओं के सामने एक ऐसा आकर्षक और सीधा प्रस्ताव रखा, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। ट्रंप ने देश की जनता से खुलकर यह वादा किया है कि यदि आगामी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापस लाया जाता है, तो देश के प्रत्येक वयस्क अमेरिकी नागरिक को सरकार की तरफ से 5,000 डॉलर का भारी-भरकम डिविडेंड या नकद लाभ प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार की चुनावी घोषणाएं और नकद प्रोत्साहन देने की संस्कृति भले ही पश्चिमी देशों के लिए थोड़ी नई और अनोखी लग सकती है, लेकिन भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देशों के राजनीतिक इतिहास और चुनावी परिदृश्य से परिचित लोगों के लिए यह शैली अत्यंत जानी-पहचानी और पारंपरिक प्रतीत होती है।भारत की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना से प्रेरित लगती है ट्रंप की यह अनोखी रणनीतिराजनीतिक जानकारों का यह मानना है कि डोनल्ड ट्रंप द्वारा पेश किया गया यह 5,000 डॉलर वाला प्रस्ताव बहुत हद तक भारत की सफल और लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाओं से प्रेरित नजर आता है। अगर पिछले एक दशक के भारतीय राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास पर नजर डालें, तो भारत के कल्याणकारी राज्य के स्वरूप में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' यानी डीबीटी (DBT) योजना ने सरकार और आम जनता के बीच के पारंपरिक वित्तीय संबंधों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। इस डिजिटल व्यवस्था के तहत सरकारी सहायता का पैसा बिचौलियों के बिना सीधे पात्र नागरिकों और मतदाताओं के बैंक खातों में ट्रांसफर होने लगा है। आज स्थिति यह है कि जिस देश के किसी भी कोने में बैठे आम वोटर के बैंक खाते में सीधे सरकारी मदद या योजना का पैसा पहुंचता है, उसे सरकार की नीतियों या उपलब्धियों को समझाने के लिए किसी राजनीतिक नेता या भाषण की आवश्यकता नहीं होती। चुनावी नतीजों के लिहाज से भारत में यह तरीका एक अचूक और बेहद असरदार हथियार साबित हुआ है, जिसे देश के विभिन्न राज्यों की सरकारों ने और अधिक व्यापक रूप देते हुए महिलाओं और युवाओं के लिए नकद सहायता के रूप में आगे बढ़ाया है। ट्रंप की यह नीति भले ही अमेरिकी कांग्रेस की वैधानिक बाधाओं और जटिलताओं के कारण पूरी तरह से वैसी न हो, लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक मनोवैज्ञानिक सोच वही है जिसे भारतीय राजनेताओं ने बहुत पहले से अपनी चुनावी सफलता का आधार बना रखा है।फेडरल चुनावों में सख्त फोटो वोटर ID लागू करने पर जोर और भारत-ब्राजील की व्यवस्था का जिक्रनकद प्रोत्साहन के अलावा, अमेरिकी चुनावी प्रणाली में एक और बहुत बड़ा बदलाव डोनल्ड ट्रंप के उस कड़े रुख में दिखाई दे रहा है जिसमें वे मतदान के लिए सख्त फोटो पहचान पत्र (वोटर ID) को अनिवार्य बनाने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं। मार्च 2025 में फेडरल चुनाव प्रक्रियाओं और चुनावी पारदर्शिता में सुधार के लिए जारी किए गए अपने एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) में डोनल्ड ट्रंप ने विशेष रूप से भारत और ब्राजील जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों का हवाला दिया था। ट्रंप ने अपने आदेश और भाषणों में इस बात की सराहना की थी कि कैसे भारत और ब्राजील जैसे देशों में मतदाताओं की पहचान को पुख्ता करने के लिए बायोमेट्रिक डेटाबेस और सख्त फोटो पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फर्जी मतदान की गुंजाइश लगभग समाप्त हो जाती है। इसी तर्ज पर अमेरिका में भी चुनावी शुद्धता लाने के लिए ट्रंप ने 'द सेव अमेरिका एक्ट' को तुरंत पारित करवाने की मांग की है। इस प्रस्तावित सख्त कानून के तहत अब फेडरल स्तर पर होने वाले सभी चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता का ठोस सबूत और सरकार द्वारा जारी आधिकारिक फोटो ID होना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया जाएगा, जो अमेरिकी चुनावी इतिहास में एक बड़ा और कड़ा कदम माना जा रहा है।अमेरिकी लोकतंत्र में पारंपरिक तरीकों से हटकर आक्रामक और लोकलुभावन नीतियों का दौरडोनल्ड ट्रंप के इन नए और आक्रामक राजनीतिक प्रस्तावों से यह साफ जाहिर होता है कि अमेरिका की दो-दलीय चुनावी राजनीति अब पारंपरिक और वैचारिक बहसों से आगे निकलकर सीधे तौर पर आर्थिक लाभ और मतदाता के व्यक्तिगत कल्याण से जुड़ने लगी है। हालांकि ट्रंप के इन प्रस्तावों को लेकर अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में तीखा विरोध देखने को मिल रहा है और विपक्षी डेमोक्रेट्स तथा कई रिपब्लिकन नेता भी इसे लेकर आशंकित हैं कि देश के राजकोष पर इसका कितना भारी असर पड़ेगा, फिर भी ट्रंप की यह शैली अमेरिकी जनता के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने में पूरी तरह कामयाब रही है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि जब दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र एक-दूसरे की चुनावी रणनीतियों और कल्याणकारी मॉडलों से सीखने या उन्हें अपने अनुकूल ढालने लगते हैं, तो इससे वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र का एक नया ही स्वरूप उभरकर सामने आता है। आने वाले अमेरिकी चुनावों में ट्रंप के ये लोकलुभावन और कड़े प्रशासनिक वादे चुनावी परिणामों को किस हद तक प्रभावित करते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इसने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक राजनीति में जनता के सीधे सशक्तिकरण और पहचान की सुरक्षा के मुद्दे ही सबसे बड़े चुनावी हथियार बन चुके हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Sep 2026 7:45 pm

 सिंगापुर ठगी मामले का आरोपित अमेरिका से भारत लाया गया, पंचकूला कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा

सिंगापुर ठगी मामले में 2013 से फरार चल रहे आरोपित हरनेक सिंह को अमेरिका से भारत लाया गया है। सीबीआई ने उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर पंचकूला कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जागरण 10 Sep 2026 7:08 pm

अब Iran ने जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर कर दिया है मिसाइल हमला, आठ एफ-15 सहित कई लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त

इंटरनेट डेस्क। अमेरिका-ईरान विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दोनों ही पक्षों की ओर से हमले हो रहे हैं। अमेरिका द्वारा बीते कुछ दिनों में ईरान के कई तेल टैंकर तबाह किए जाने के बाद अब ईरान ने भी करारा जवाब दिया है। खबरों क अनुसार, ईरान ने जॉर्डन में आज तड़के अमेरिकी एयरबेस पर एक के बाद एक कई हमले किए, जिससे अमेरिका के कई मिलिट्री एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचा है। खबरों के अनुसार, मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर हुए ईरानी हमले में एक ए-10 थंडरबोल्ट का एक विंग (पंख) टूट गया। वहीं लगभग आठ एफ-15 विमानों को मामूली नुकसान हुआ है। ईरानी हमलों से बचाव के लिए अमेरिकी सेना की ओर से 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें दागीं। अमेरिका द्वारा ईरान के अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत को निशाना बनाए जाने के जवाब में ईरान द्वारा हमला किया गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने आठ टैंकरों और दो युद्धपोतों पर हमले किए, जिनमें जॉर्डन में मौजूद बेस भी शामिल था। PC: Ndtv अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें

समाचार जगत 10 Sep 2026 4:20 pm

ईरान से जारी जंग के बीच Trump ने किया बड़ा ऐलान, कहा- हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर…

इंटरनेट डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जारी जंग के बीच बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने अब ऐलान किया कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। डलास में रिपब्लिकन कन्वेंशन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये ऐलान किया है। इस दौरान ट्रंप ने बोल दिया कि अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों में जीतते हैं तो आपको 5000 डॉलर मिलेंगे। उन्होंने इसे ‘ट्रम्प डिविडेंड नाम दिया है। हालांकि इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की जानकारी नहीं दी कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा, भुगतान का दायरा क्या होगा और रकम किस तरह बांटी जाएगी। आपको बता दें कि अमेरिका में करीब 26.98 करोड़ वयस्क हैं। अगर सभी को 5,000 डॉलर प्रदान किए जाएंगे तो कुल खर्च करीब 1.35 ट्रिलियन डॉलर यानी 128.25 लाख करोड़ रुपए होगा। ये राशि विश्व के करीब 162 देशों की इकॉनॉमी से अधिक है। PC:newsonair अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें

समाचार जगत 10 Sep 2026 3:20 pm

अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर, 6 महीने में आयात 281% बढ़ा, खाड़ी देशों की हिस्सेदारी क्यों घटी?

भारत की रसोई गैस सप्लाई में पिछले छह महीनों में बड़ा बदलाव आया है। पश्चिम एशिया में युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच अमेरिका भारत के लिए LPG का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका […] The post अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर, 6 महीने में आयात 281% बढ़ा, खाड़ी देशों की हिस्सेदारी क्यों घटी? appeared first on https://rajsattaexpress.com .

राजसत्ता एक्सप्रेस 10 Sep 2026 10:22 am

IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump

IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न

लाइव हिन्दुस्तान 9 Sep 2026 9:20 pm

अमेरिका-ब्रिटेन में ग्रेजुएट्स की कमाई चार साल में 10% घटी:डिग्री नहीं, स्किल टेक्नोलॉजी और एआई बदल रहे नौकरी का गणित

अमेरिका और ब्रिटेन के नए आंकड़े बताते हैं कि नॉन-ग्रेजुएट्स के मुकाबले कॉलेज डिग्री वालों को मिलने वाला सैलरी का फायदा घट रहा है। अर्थशास्त्रियों होजे अजार, मिरेया गिने और जेवियर एस्पिन की रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में कॉलेज ग्रेजुएट्स का वेतन प्रीमियम 4 वर्षों में लगातार गिरा है। कुल गिरावट करीब 10% है। यह 1970 के दशक के बाद पहली बड़ी गिरावट मानी जा रही है। 100 साल से भी ज्यादा समय में पहली बार ग्रेजुएट्स की मांग घट रही है। ब्रिटेन में भी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की डिग्री वालों का फायदा कम हो रहा है। एआई खासतौर पर उन व्हाइट-कॉलर और नॉलेज-वर्क जॉब्स को बदल रहा है, जिन पर लंबे समय से ग्रेजुएट्स का दबदबा था। भारत में डिग्रीधारी बढ़े लेकिन नौकरियां नहीं अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2023 के बीच युवाओं में ग्रेजुएट्स की संख्या 10% से बढ़कर 28% हो गई। लेकिन हर साल बढ़ने वाले ग्रेजुएट्स के अनुपात में नौकरियां नहीं बन रहीं। करीब 50 लाख नए ग्रेजुएट्स जॉब मार्केट में आते हैं, जबकि करीब 28 लाख जॉब पैदा होती हैं। बेरोजगार युवाओं में अब करीब दो-तिहाई ग्रेजुएट हैं। सर्वे - 70-90% एम्पलॉयर्स स्किल बेस्ड भर्ती कर रहे अमेरिका के नेशनल एसोसिएशन ऑफ कॉलेजेस एंड एम्पलाइज की रिपोर्ट में करीब 70% नियोक्ता अब स्किल्स-बेस्ड हायरिंग कर रहे हैं। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अब 90% कंपनियां डिग्री के बजाय कौशल के आधार पर भर्तियां करती हैं। 94% एम्पलॉयर्स का मानना ​​है कि स्किल बेस्ड हायरिंग डिग्री, सर्टिफिकेट या अनुभव के आधार पर हायरिंग से बेहतर है। बदलाव - कई देशों में डिग्री की जरूरत में कमी आ रही देश - कमीयूएस - 3.9%यूके - 1.8%ऑस्ट्रेलिया - 1.6% (स्रोत- बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप)

दैनिक भास्कर 9 Sep 2026 12:51 pm

पठानकोट के रोमांच का अमेरिका में सम्मान:PETA के 'ट्री ऑफ लाइफ' में पहले भारतीय के तौर पर दर्ज हुआ नाम,'रोमांच लॉ' से खत्म होगी घोड़ा-बग्गी प्रथा

17 जून को अमेरिका के सेंट्रल पार्क में घोड़ा-बग्गी दुर्घटना के दौरान अपनी मां की जान बचाते हुए अपनी जान गंवाने वाले 18 वर्षीय पठानकोट निवासी रोमांच महाजन को अमेरिका में मरणोपरांत बड़ा सम्मान मिला है। दुनिया की सबसे बड़ी पशु अधिकार संस्था पेटा (पीपुल फॉर द् एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) द्वारा ये विशेष सम्मान पाने वाले रोमांच पहले भारतीय हैं। PETA ने अपने मुख्यालय स्थित 'ट्री ऑफ लाइफ' मेमोरियल में रोमांच की स्मृति में एक विशेष पत्ती समर्पित करने का फैसला किया है। इस सम्मान के साथ-साथ इसी साल न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल 'रोमांच लॉ' नाम के विधेयक पर मुहर लगाने जा रही है। जिसका उद्देश्य सेंट्रल पार्क में घोड़ा-बग्गी उद्योग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना है। कई दशकों से घोड़ा-बग्गी बंद करने की मांग पूरी होते देख अमेरिका के लोग और दुनिया भर के पशु प्रेमी खुश हैं। भास्कर ने इस बाबत रोमांच के पिता दीपक महाजन से बातचीत की। जिन्होंने इस पूरे मामले में जानकारी दी। पशुओं का फरिश्ता: PETA मेमोरियल में उकेरा जाएगा संदेशदीपक महाजन ने बताया कि PETA का 'ट्री ऑफ लाइफ' मेमोरियल वर्जीनिया स्थित उसके मुख्यालय (सैम साइमन सेंटर) में स्थापित है, जो उन नायकों और दयालु आत्माओं को याद करता है जिन्होंने जानवरों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। पत्ती पर लिखा संदेश: रोमांच के नाम की पत्ती पर लिखा होगा रोमांच महाजन की प्यारी याद में—पशुओं का एक फरिश्ता। पारिवारिक स्मृति: पठानकोट स्थित रोमांच के घर में उनके माता-पिता उनके कमरे में इस स्मारक पट्टिका की एक प्रति लगाने जा रहे हैं। स्वभाव से दयालु और धार्मिक था रोमांच देश के लिए गर्व की बात दीपक महाजन ने कहा कि भले ही इस हादसे ने उन्हें कभी खत्म न होने वाला दर्द दिया है। लेकिन, इस हादसे के बाद सरकारों और संस्थाओं की ओर से बरती जा रही संजीदगी से कई लोगों की जान बच जाएगी। बताया कि रोमांच के हादसे के बाद इजिप्ट, बॉम्बे, बेल्जियम, स्पेन, इटली और पराग में घोड़ा गाड़ी पर प्रतिबंध लग गया है। उसके इलावा, पेटा के 'ट्री ऑफ लाइफ' में पहले भारतीय के नाम जुड़ने और पहले भारतीय के नाम पर अमेरिका में कानून ‘रोमांच लॉ’ बनना हर देशवासी के लिए गर्व की बात है। क्या है 'रोमांच लॉ'? यह विधेयक न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके तहत घोड़ा-बग्गी चालकों के लिए नए लाइसेंस जारी करने पर तुरंत रोक लगाई जाएगी। इस उद्योग को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। हाल ही में सिटी काउंसिल की स्वास्थ्य समिति की सुनवाई के दौरान रोमांच के परिवार और एमी पुरस्कार विजेता अभिनेत्री एडी फाल्को सहित कई समर्थकों ने हिस्सा लिया। काउंसिल की स्पीकर जूली मेनिन इस प्रतिबंध का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने वाली पहली सीटिंग स्पीकर बन गई हैं। 51 में से 32 काउंसिल सदस्यों ने इस विधेयक का सह-प्रायोजन किया है। 70% न्यूयॉर्क निवासी प्रतिबंध के पक्ष में; परिवार ने किया केस सर्वेक्षणों के अनुसार, न्यूयॉर्क के 70% नागरिक घोड़ा-बग्गी उद्योग को बंद करने के पक्ष में हैं। घोड़ों को भीषण गर्मी और ठंड में कंक्रीट की सड़कों पर दौड़ना पड़ता है, जिससे वे सांस और पैरों की गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। गाड़ियों के धुएं और हादसों के कारण कई घोड़ों और इंसानों की जान जा चुकी है। गौरतलब है कि रोमांच के माता-पिता ने 14 अगस्त को न्यूयॉर्क शहर के खिलाफ गलत तरीके से हुई मौत का मुकदमा दर्ज कराने के लिए दावा नोटिस दायर किया है। उनका कहना है कि यदि उन्हें इस उद्योग में शामिल क्रूरता और खतरों के बारे में पहले से पता होता, तो वे कभी बग्गी की सवारी न करते। क्यों खास है पेटा का 'ट्री ऑफ लाइफ' पेटा का 'ट्री ऑफ लाइफ' एक विशेष मेमोरियल (स्मारक) है जिसे पशु अधिकारों और उनके प्रति करुणा की भावना को अमर बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसकी मुख्य खासियतों और महत्व को इस तरह समझें श्रद्धांजलि और सम्मान: पेटा अपने इस 'ट्री ऑफ लाइफ' स्मारक पर एक विशेष 'पत्ती'जोड़कर उन असाधारण इंसानों और पशु प्रेमियों को सम्मानित करता है जिन्होंने पशु कल्याण के लिए अपनी जान जोखिम में डाली या अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसके अलावा, यह उन बेजुबान जानवरों की याद में भी समर्पित होता है जो मानवीय क्रूरता या हादसों का शिकार हुए हैं। सहानुभूति और एकता का प्रतीक: पेटा का यह मेमोरियल केवल पशुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर तरह के उत्पीड़न और हिंसा के खिलाफ प्यार और न्याय का संदेश देता है। उदाहरण के लिए, ऑरलैंडो में हुए आतंकी हमले के पीड़ितों और उनके पीछे छूटे पालतू जानवरों के सम्मान में भी पेटा ने अपने 'ट्री ऑफ लाइफ' पर एक विशेष पत्ती समर्पित की थी। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा: इस पेड़ पर दर्ज नाम और कहानियां लोगों को हमेशा याद दिलाती हैं कि वे समाज में अहिंसा, शाकाहार और जीवों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा दें। यह पशु रक्षकों की विरासत को जीवित रखने का एक जरिया है। अब जानिए पूरा मामला… पठानकोट से अमेरिका घूमने गया था परिवारः न्यूयॉर्क में हादसे का शिकार हुए रोमांच महाजन (18) माता-पिता के साथ 14 जून को न्यूयॉर्क गया था। परिवार का 15 दिन का टूर था। इसमें परिवार ने 2-3 दिन और घूमने के बाद रोमांच की भुआ (अमेरिका) के घर जाना था। लेकिन, उसके पहले ही हादसा हो गया। परिवार पठानकोट के इंदिरा कॉलोनी में रहता है। अचानक बेकाबू हुआ घोड़ा, घोड़ा-गाड़ी पलटीः न्यूयॉर्क पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, रमन महाजन अपने पिता दीपक महाजन, मां प्रिया महाजन और छोटे भाई माणिक के साथ पारंपरिक घोड़ा-गाड़ी में बैठकर सेंट्रल पार्क की सैर कर रहा था। इसी दौरान 'चेरी हिल' इलाके के पास घोड़ा अचानक किसी बात से डर गया और बेकाबू होकर सरपट दौड़ने लगा। सड़क से टकराया सिरः बेकाबू घोड़ा बग्गी को घसीटते हुए 'वेस्ट ड्राइव' की तरफ भागा और मशहूर 'टैवर्न ऑन द ग्रीन' रेस्टोरेंट के पास दूसरी घोड़ा-गाड़ी से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बग्गी बीच सड़क पर ही पलट गई और रमन उछलकर कंक्रीट की सड़क पर जा गिरा, जिससे उसके सिर पर गहरी चोटें आईं। मां को बचाने के चक्कर में गई जानः रोमांच के दादा सुरेश महाजन ने बताया कि बग्गी में पूरा परिवार सवार था। घोड़ा जैसे ही बिदका उसके पीछे बग्गी चालक भी दौड़ा पर घोड़ा तेजी से बग्गी सहित निकल भागा। परिवार के मुताबिक रोमांच और मां प्रिया एक साइड बैठे थे। जैसे ही घोड़ा तेज दौड़ा तो बग्गी का संतुलन बिगड़ गया और प्रिया बग्गी से नीचे गिर गई। मां को बचाने के चक्कर में रोमांच ने भी छलांग लगा दी।इंटरनल ब्लीडिंग से मौतः हादसे में प्रिया महाजन के हलकी चोटें आईं। लेकिन, रोमांच सिर के बल नीचे गिरा। जिससे उसके हेड इंजरी हुई। अस्पताल में 2 दिन उसका इलाज चला लेकिन, इंटरनल ब्लीडिंग के कारण उसकी जान चली गई।

दैनिक भास्कर 9 Sep 2026 5:31 am

Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC

Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान

लाइव हिन्दुस्तान 8 Sep 2026 9:11 pm

अमेरिका में पंजाबी युवक गिरफ्तार:40 किलो कोकीन और पिस्तौल बरामद; पिज्जा रेस्तरां की आड़ में ड्रग सिंडिकेट चलाने का आरोप

अमेरिका के कैलिफोर्निया में एराउंड पिज्जा रेस्तरां की आड़ में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट चलाने वाले पंजाब निवासी कवंलप्रीत को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अवैध रूप से देश में दाखिल हुआ यह शख्स पिज्जा डिलीवरी के बहाने कोकीन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों का नेटवर्क चला रहा था। कैलिफोर्निया पुलिस और एफबीआई की संयुक्त कार्यवाही में उसके ठिकाने से 40 किलो कोकीन, कई पिस्तौलें और भारी मात्रा में डॉलर कैश बरामद हुआ है। आरोपी कवंलप्रीत को अब उम्रकैद तक की सजा और भारी-भरकम आर्थिक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। कोकीन के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाशजांच अधिकारियों के अनुसार, कवंलप्रीत (50) लंबे समय से गुप्त रूप से एक बड़ा ड्रग सिंडिकेट चला रहा था। वह अपने रेस्तरां नेटवर्क का फायदा उठाकर स्थानीय लोगों को मेथ और कोकीन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थ सप्लाई करता था। देखते ही देखते उसने एक विशाल सप्लाई चेन तैयार कर ली थी, जिससे वह भारी मुनाफा कमा रहा था। पुलिस की रेड में बरामद हुए हथियार, ड्रग्स और कैशपुलिस को जब इस अवैध कारोबार के बारे में गुप्त सूचना मिली तो अधिकारियों ने आरोपी के घर और ठिकानों पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। रेड के दौरान पुलिस को मौके से 40 किलो शुद्ध कोकीन, कई अवैध पिस्तौलें और भारी मात्रा में डॉलर कैश बरामद हुआ। हथियारों की बरामदगी से यह भी स्पष्ट हो गया कि वह सिर्फ ड्रग तस्करी ही नहीं, बल्कि एक हिंसक आपराधिक गिरोह भी संचालित कर रहा था। गैर-कानूनी तरीके से रह रहा थापुलिस जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि आरोपी बिना किसी वैध दस्तावेज के गैर-कानूनी तरीके से रह रहा था। वह पहचान बदलकर और अपने अवैध धंधे को पिज्जा बिजनेस के पीछे छुपाकर सालों से कानून की आंखों में धूल झोंकता आ रहा था। उम्रकैद की सजा और भारी जुर्माना लग सकता हैनशीले पदार्थों की इतनी बड़ी खेप, अवैध हथियार और गैर-कानूनी तरीके से रहने के गंभीर आरोपों के तहत पुलिस ने उस पर कड़े कानून लागू किए हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इन संगीन अपराधों के लिए उसे उम्रकैद की सजा मिलना लगभग तय है। इसके साथ ही, अदालत उस पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगा सकती है।

दैनिक भास्कर 8 Sep 2026 10:02 am

Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump

Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…

लाइव हिन्दुस्तान 7 Sep 2026 7:37 pm

Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।

लाइव हिन्दुस्तान 7 Sep 2026 11:12 am

द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला

7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।

अमर उजाला 7 Sep 2026 9:35 am

Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !

Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

लाइव हिन्दुस्तान 6 Sep 2026 3:56 pm

IIT : आईआईटी के PhD स्कॉलर को 40 लाख का पैकेज, दूसरे छात्र ने अमेरिका में बजाया डंका

आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी शोधार्थी डॉ शत्रुघ्न ठाकुर को इटली की हंसा टीएमपी में डिजाइन इंजीनियर के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव मिला है। वे 40.65 लाख सालाना पे-पैकेज पर कार्य करेंगे।

लाइव हिन्दुस्तान 5 Sep 2026 1:15 pm

अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर

यूएस ग्रीन कार्ड को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी और बुरी खबर सामने आई है, जहां अमेरिकी वीजा बुलेटिन के अनुसार ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी पूरी तरह 'अनअवेलेबल' हो चुकी है।अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर?अमेरिका में सालों से परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों और उच्च कुशल कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही निराशाजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) और आव्रजन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार-आधारित दूसरी श्रेणी यानी ईबी-2 (EB-2 - Employment-Based Second Preference) कैटेगरी को फिलहाल पूरी तरह से 'अनअवेलेबल' (Unavailable) यानी अनुपलब्ध घोषित कर दिया गया है। इस स्थिति का मतलब यह है कि चालू वित्त वर्ष के लिए इस श्रेणी के तहत तय किए गए कोटे के सारे वीजा पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी दूतावास या आव्रजन कार्यालय इस कैटेगरी में अब अगले आदेश या नए वित्त वर्ष के शुरू होने तक किसी भी नए ग्रीन कार्ड या अप्रवासन वीजा को जारी या स्वीकृत नहीं कर सकते हैं। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय वर्कफोर्स के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वर्षों से लंबित पेंडिंग फाइलों और भारी-भरकम बैकलॉग के बीच इस प्रकार अचानक श्रेणी का बंद होना उनके सपनों पर एक बहुत बड़ा विराम लगाता हुआ नजर आ रहा है।ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी के पूरी तरह से अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह क्या सामने आई है?इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कैटेगरी के अचानक बंद होने और अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी कानूनों के तहत तय की गई वार्षिक सीमा और देश-वार कोटा प्रणाली (Per-Country Ceiling) है। अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार, हर साल रोजगार-आधारित जितने भी ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, उनमें से किसी एक देश के नागरिकों को कुल कोटे का केवल 7 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकता है। भारत जैसे विशाल देश से एडवांस्ड डिग्री धारकों और विशेष योग्यताओं वाले प्रोफेशनल्स की संख्या और आवेदन इतने ज्यादा हैं कि यह तयशुदा कोटा निर्धारित समय से बहुत पहले ही पूरी तरह से खत्म हो जाता है। इस वर्ष भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही भारत के कोटे के सारे ईबी-2 वीजा नंबर पूरी तरह से एग्जॉस्ट यानी समाप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, अन्य देशों द्वारा अप्रयुक्त रहने वाले वीजा नंबरों का लाभ भी इस बार समय पर नहीं मिल पाने के कारण अमेरिकी प्रशासन को मजबूरन इस कैटेगरी को पूरी तरह से बंद या अनअवेलेबल करना पड़ा है, जिससे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, एच-1बी (H-1B) धारकों और उनके परिवारों पर इस संकट का क्या असर पड़ेगा?अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय नागरिकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए यह स्थिति भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता लेकर आई है। जो प्रोफेशनल्स अपनी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के अंतिम चरणों में थे, उनकी फाइलें अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई हैं और तब तक आगे नहीं बढ़ सकतीं जब तक कि नया कोटा शुरू नहीं होता। हालांकि आव्रजन वकीलों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस स्थिति के बावजूद यूएसिसिस (USCIS) द्वारा फॉर्म आई-485 (Adjustment of Status) की कुछ श्रेणियों के आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया पर तकनीकी नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन अंतिम अप्रूवल के लिए लंबा इंतजार करना ही होगा। इस लंबी प्रतीक्षा और अनिश्चितता के कारण कई कुशल भारतीय कर्मचारी अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं, क्योंकि ग्रीन कार्ड मिलने में लगने वाला यह बेहिसाब समय कई दशकों तक लंबा खींचता जा रहा है।इस गंभीर बैकलॉग और समस्या से निपटने के लिए आगे क्या उम्मीदें बची हैं?इस बड़ी प्रशासनिक रोक के बीच भारतीय प्रवासियों और नीति विश्लेषकों की निगाहें अब पूरी तरह से नए वित्त वर्ष और अमेरिकी संसद में होने वाले विधायी सुधारों पर टिकी हुई हैं। चूंकि हर साल 1 अक्टूबर को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही वार्षिक वीजा सीमाओं और कोटे का नया आवंटन दोबारा रिसेट होता है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि तब जाकर इस कैटेगरी में कुछ राहत मिल सकती है और कट-ऑफ डेट्स आगे बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही, आव्रजन सुधारों की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि जब तक अमेरिका देश-वार लगने वाली इस 7 प्रतिशत की सीमा को समाप्त नहीं करता या ग्रीन कार्ड की कुल संख्या में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक भारतीय प्रोफेशनल्स को इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना बार-बार करना पड़ेगा। अमेरिकी श्रम बाजार में अपनी योग्यता का लोहा मनवाने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में बुनियादी बदलाव कितनी बड़ी और तत्काल आवश्यकता बन चुके हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 5 Sep 2026 12:58 pm

अमेरिकी ग्रीन कार्ड : अब स्पॉन्सर का चेक होगा क्रेडिट स्कोर, USCIS के नए फॉर्म का जानिए भारतीयों के लिए क्या है असली मतलब

अमेरिका में बसने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली अपडेट सामने आ रही है। अमरीकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूएसएसीआईएस (USCIS) ने ग्रीन कार्ड और परमानेंट रेजिडेंसी से जुड़े नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने वाले व्यक्ति या परिवार के वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ उनके क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्थिरता की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इस बदलाव का सीधा असर उन हजारों भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल्स पर पड़ने वाला है जो अपने किसी परिजन या एम्प्लॉयी के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस नए फॉर्म और नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ है, क्योंकि अब स्पॉन्सरशिप की राह उतनी आसान नहीं रह गई है जितनी पहले हुआ करती थी।क्या है USCIS का नया फॉर्म और कैसे काम करेगा स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर की जांच का नया नियमयूएसएसीआईएस द्वारा लागू किए गए इन नए नियमों के केंद्र में एफिडेविट ऑफ सपोर्ट (Affidavit of Support) से जुड़ा नया फॉर्म है, जिसके जरिए स्पॉन्सर को अपनी वित्तीय क्षमता का पूरा ब्योरा देना होता है। पारंपरिक तौर पर स्पॉन्सर को सिर्फ अपनी आय का टैक्स रिटर्न दिखाना होता था, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत आव्रजन अधिकारी स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर, बैंक खातों की स्थिति, मौजूदा कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों का गहराई से आकलन करेंगे। इसका मतलब यह है कि यदि कोई स्पॉन्सर आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है या उसका क्रेडिट स्कोर खराब चल रहा है, तो वह किसी आवेदक के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं कर पाएगा। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अमेरिका आने वाला नया अप्रवासी कभी भी वहां की सरकारी सहायता या पब्लिक चार्ज (Public Charge) पर निर्भर न हो और अपनी आजीविका खुद चलाने में पूरी तरह से सक्षम हो।भारतीय आवेदकों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए इस बदलाव के क्या हैं गहरे मायनेअमेरिका में वर्क वीजा यानी एच-1बी (H-1B) पर काम कर रहे लाखों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता पहले से ही काफी लंबा और पेचीदा रहा है। ऐसे में फैमिली-बेस्ड या एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड स्पॉन्सरशिप के नियमों का कड़ा होना भारतीयों के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार परिवार के सदस्य जब अपने माता-पिता या भाई-बहनों को अमेरिका बुलाने के लिए स्पॉन्सर करते हैं, तो उन्हें इस नए वित्तीय कड़े मानदंड से गुजरना होगा। जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के बाद अब कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है, और जरा सी भी वित्तीय चूक होने पर आवेदन को सीधे खारिज किया जा सकता है। इसलिए जो भारतीय परिवार या पेशेवर आने वाले दिनों में ग्रीन कार्ड के लिए फाइल करने की सोच रहे हैं, उन्हें अपने स्पॉन्सर के वित्तीय रिकॉर्ड और क्रेडिट हिस्ट्री को पहले से ही दुरुस्त और मजबूत रखना बेहद जरूरी हो गया है।भविष्य की आव्रजन नीतियां और ग्रीन कार्ड चाहने वालों के लिए जरूरी सलाहअमेरिकी आव्रजन प्रणाली में हो रहे ये लगातार बदलाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले समय में ग्रीन कार्ड पाना और अधिक कठिन और अनुशासित होने जा रहा है। अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर साल नियमों में फेरबदल किए जाते हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े। ऐसे में भारतीय अप्रवासियों और छात्रों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कागजी कार्रवाई को शुरू करने से पहले इमीग्रेशन वकीलों या विशेषज्ञों से पूरी सलाह जरूर लें। नए फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि स्पॉन्सर की आय संघीय गरीबी रेखा (Federal Poverty Guidelines) से काफी ऊपर हो और उनका क्रेडिट इतिहास बिल्कुल साफ-सुथरा हो। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर सही कदम उठाकर ही इस नई प्रशासनिक चुनौती से पार पाया जा सकता है और अमेरिका में स्थायी कानूनी निवास का सपना साकार किया जा सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Sep 2026 2:07 pm

अमेरिका में पढ़ाई का सपना होगा पूरा: बिना एक भी पैसा खर्च किए फ्री में पाएं डिग्री, ट्यूशन फीस से लेकर रहने-खाने का पूरा खर्च फ्री

विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना हर उस छात्र की आंखों में पलता है जो अपनी मेहनत के दम पर करियर में ऊंची उड़ान भरना चाहता है। जब दुनिया भर के बेहतरीन विश्वविद्यालयों की बात आती है, तो अमेरिका का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटीज और शानदार करियर ग्रोथ की वजह से अमेरिका भारतीय छात्रों के बीच हमेशा से पहली पसंद रहा है। हालांकि, वहां की महंगी यूनिवर्सिटी फीस, ट्यूशन कॉस्ट और रहने-खाने का भारी खर्च कई बार मेधावी छात्रों के सपनों की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाता है। वित्तीय तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका जाने का विचार छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में ऐसी कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप प्रोग्राम्स मौजूद हैं, जो छात्रों के ट्यूशन फीस से लेकर उनके रहने, खाने और यहाँ तक कि हेल्थ इंश्योरेंस तक का पूरा खर्च खुद उठाती हैं? इन स्कॉलरशिप्स के जरिए आप बिना किसी आर्थिक तनाव के अमेरिकी धरती पर अपने सपनों की डिग्री हासिल कर सकते हैं।अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मिलने वाली फुल-ब्राइट और अन्य प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स के बारे में जानेंअमेरिका में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप (Fulbright-Nehru Fellowships) एक ऐसा नाम है जो भारत में बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित है। अमेरिकी सरकार और भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दी जाने वाली यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो मास्टर या पीएचडी करने अमेरिका जाना चाहते हैं। इसके तहत छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस माफ होने के साथ-साथ मासिक वजीफा, आने-जाने का हवाई किराया और स्वास्थ्य बीमा का पूरा खर्च कवर किया जाता है। इसके अलावा ह्यूबर्ट हम्फ्री फेलोशिप प्रोग्राम (Hubert Humphrey Fellowship Program) जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो अनुभवी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में नॉन-डिग्री स्टडी और लीडरशिप ट्रेनिंग का मौका देते हैं। इन स्कॉलरशिप्स को हासिल करने के लिए छात्रों को एक निश्चित चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू और अपने एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर खरा उतरना होता है, जिसके बाद उनके विदेश में पढ़ने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाता है।यूनिवर्सिटी-बेस्ड फाइनेंशियल असिस्टेंस और फुल-राइड स्कॉलरशिप्स का कैसे उठाएं लाभकेवल सरकारी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही नहीं, बल्कि अमेरिका के अधिकांश प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी अपने यहां आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को मेरिट और जरूरत के आधार पर फुल-राइड स्कॉलरशिप्स प्रदान करते हैं। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और येल जैसी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज की वित्तीय सहायता नीतियां बहुत मजबूत हैं। अगर आपका एकेडमिक रिकॉर्ड शानदार है और आपके पास बेहतरीन एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का रिकॉर्ड है, तो ये यूनिवर्सिटीज आपकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 100 प्रतिशत तक की छात्रवृत्ति दे सकती हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही मिलने वाली ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंटशिप (GRA) या टीचिंग असिस्टेंटशिप (TA) के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं, जिससे उनका रहने-खाने का खर्च आसानी से निकल जाता है। इन अवसरों के बारे में सही समय पर जानकारी जुटाकर समय से आवेदन करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और अमेरिका में फ्री एजुकेशन पाने के लिए स्मार्ट टिप्सअमेरिका में बिना पैसे की टेंशन के पढ़ाई करने का यह सुनहरा अवसर पाने के लिए छात्रों को अपनी तैयारी बहुत पहले से शुरू करनी होगी। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आपको अपने एकेडमिक ट्रांसक्रिप्ट्स, एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ पर्पस, प्रोफेसरों से मिलने वाले रिकमेंडेशन लेटर्स और आईईएलटीएस (IELTS) या टॉफेल (TOEFL) जैसे इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट के स्कोर कार्ड तैयार रखने होते हैं। अधिकांश स्कॉलरशिप्स के लिए आवेदन की प्रक्रिया साल में एक निश्चित समय पर खुलती है, इसलिए यूनिवर्सिटीज की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर डेडलाइन पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। अपनी प्रोफाइल को मजबूत बनाने के लिए इंटर्नशिप, रिसर्च पेपर पब्लिकेशन और नेतृत्व क्षमता से जुड़े अनुभवों को अपने आवेदन में जरूर शामिल करें। थोड़ी सी मेहनत, सही दिशा में की गई रिसर्च और समय पर किए गए आवेदन आपको बिना किसी वित्तीय बोझ के अमेरिका की बेहतरीन शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बना सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 4 Sep 2026 2:02 pm

Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump

Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump

लाइव हिन्दुस्तान 4 Sep 2026 11:35 am

Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East

Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला

लाइव हिन्दुस्तान 4 Sep 2026 11:04 am

अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें

अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...

आज तक 3 Sep 2026 5:44 pm

अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना

अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.

आज तक 2 Sep 2026 11:12 am

'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत

हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.

आज तक 2 Sep 2026 8:46 am

Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz

अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है

लाइव हिन्दुस्तान 1 Sep 2026 11:52 pm

Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।

लाइव हिन्दुस्तान 1 Sep 2026 7:32 pm

क्या भारत की तरह अमेरिका में भी है ट्यूशन कल्चर? 

भारत में स्कूल के बाद बच्चों के ट्यूशन जाना बेहद आम है. स्कूल में जो चीजें उन्हें समझ नहीं उसके लिए छात्र अलग से कोचिंग या ट्यूटर की मदद लेते हैं. लेकिन क्या अमेरिका में भी बच्चों के लिए ऐसा ही ट्यूशन कल्चर है? इस सवाल पर इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ नाम के अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में बताया.

आज तक 1 Sep 2026 3:48 pm

अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!

हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।

देशबन्धु 1 Sep 2026 3:21 am

Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump

Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump

लाइव हिन्दुस्तान 31 Aug 2026 11:59 pm

अमेरिका में CPT को लेकर क्या है ICE का नया मेमो? भारतीय छात्र तुरंत जानें इससे जुड़े सभी कड़े नियम और भविष्य पर पड़ने वाले असर की पूरी सच्चाई

संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग द्वारा CPT (Curricular Practical Training) को लेकर एक नया नीतिगत मेमो जारी किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है। CPT वह माध्यम है जिसके जरिए अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्र अपनी डिग्री कोर्स के दौरान ही इंटर्नशिप या व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। लेकिन ICE के इस नए मेमो ने इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक कड़ा और पेचीदा बना दिया है, जिससे भारतीय छात्रों के करियर और उनकी कानूनी स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है। गूगल डिस्कवर और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय इस विषय को लेकर लाखों छात्र सर्च कर रहे हैं कि आखिर इस नए बदलाव का उनकी पढ़ाई और जॉब करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आइए इस विस्तृत लेख के जरिए अमेरिका में CPT के पूरे गणित को समझते हैं और जानते हैं कि ICE के इस नए मेमो में क्या-क्या खास बातें कही गई हैं।अमेरिका में CPT (कर्रिकलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) असल में क्या है?सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि CPT क्या है और यह विदेशी छात्रों के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जब कोई भारतीय छात्र अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन (मास्टर्स या बैचलर्स) के लिए एडमिशन लेता है, तो उसे अपने कोर्स के करिकुलम के हिस्से के रूप में इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाती है, जिसे CPT कहा जाता है। इसके जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही अमेरिकी कंपनियों में काम करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं और साथ ही कुछ पैसे भी कमाते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए जीवनरेखा की तरह होता है जो अपने खर्चों का एक हिस्सा खुद उठाने और अमेरिकी कॉर्पोरेट कल्चर को नजदीक से समझने की कोशिश करते हैं। पारंपरिक रूप से CPT को F-1 वीजा धारक छात्रों के लिए एक बेहद लचीली और मददगार व्यवस्था माना जाता रहा है, जिसके जरिए वे आगे चलकर OPT (Optional Practical Training) और H-1B वीजा की ओर कदम बढ़ाते हैं।ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने क्यों जारी किया नया मेमो?हाल ही में अमेरिकी एजेंसी ICE द्वारा जारी किए गए नए मेमो ने विदेशी छात्रों की नींद उड़ा दी है। इस मेमो का मुख्य उद्देश्य CPT के नियमों का कथित तौर पर हो रहे दुरुपयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना है कि कुछ छात्र और विश्वविद्यालय CPT नियमों का अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई की आड़ में लंबे समय तक अमेरिका में अवैध रूप से काम करने के रास्ते तलाश रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब विश्वविद्यालयों को CPT के अनुमोदन (Approval) के मामले में और अधिक कठोर नियमों का पालन करना होगा। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि CPT सीधे तौर पर छात्र के अकादमिक पाठ्यक्रम और डिग्री की अनिवार्य आवश्यकता से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल अंशकालिक नौकरी पाने का एक आसान जरिया। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद से छात्रों में इस बात को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि क्या उनकी यूनिवर्सिटीज अब आसानी से CPT अप्रूव कर पाएंगी या नहीं।भारतीय छात्रों पर इस नए मेमो का क्या होगा सीधा असर?लोकल ऑप्टिमाइजेशन और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय छात्रों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में हर साल हजारों की संख्या में भारतीय छात्र कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस और डेटा साइंस जैसे कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने ट्यूशन फीस के कर्ज को चुकाने और अमेरिकी बाजार में फुल-टाइम जॉब पाने के लिए CPT और फिर OPT पर निर्भर रहता है। यदि ICE के नए नियमों के कारण CPT मिलना मुश्किल हो जाता है, या इसके घंटों (Hours) को सीमित कर दिया जाता है, तो भारतीय छात्रों की आर्थिक स्थिति और करियर प्लानिंग बुरी तरह चरमरा सकती है। जानकारों का मानना है कि छात्रों को अब पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने और अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISO) के संपर्क में रहने की जरूरत है।आधुनिक Generative Engine Optimization और डिजिटल सर्च ट्रेंड्स का परिदृश्यआधुनिक Generative Engine Optimization (AI सर्च) और गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेश में शिक्षा, वीजा नियमों में बदलाव और करियर से जुड़ी ऐसी जटिल कानूनी खबरों को छात्र और उनके परिवार सबसे ज्यादा खोजते हैं। आज का डिजिटल युग यह मांग करता है कि किसी भी ग्लोबल पॉलिसी बदलाव को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया जाए ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रेडिट (Reddit) और इमिग्रेशन फोरम्स पर इस समय CPT मेमो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहाँ छात्र अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं। सही और तथ्यात्मक जानकारी समय पर मिलना हर उस छात्र के लिए बेहद जरूरी है जो अमेरिका में अपने सपनों को साकार करने की राह पर है।भारतीय छात्रों को अब किन सावधानियों और नियमों का रखना होगा ध्यान?इस बदलते हुए परिदृश्य में अमेरिका में पढ़ रहे या जाने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को कुछ बेहद अहम बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, अपने कोर्स के दौरान लिए जाने वाले CPT का पूरा दस्तावेजीकरण (Documentation) एकदम दुरुस्त रखें और यह सुनिश्चित करें कि आपका एम्प्लॉयर और आपकी यूनिवर्सिटी का कोर्स करिकुलम पूरी तरह से नियमों के दायरे में हो। किसी भी शॉर्टकट या संदिग्ध तरीके से CPT प्राप्त करने से बचें, क्योंकि अमेरिकी आव्रजन विभाग (USCIS और ICE) इस मामले में अब बहुत अधिक आक्रामक हो चुका है। अपनी यूनिवर्सिटी के कानूनी सलाहकारों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें ताकि वीजा की स्थिति पर कोई आंच न आए।अमेरिकी शिक्षा और करियर की राह में आने वाली नई चुनौतियाँअंततः, अमेरिका में CPT को लेकर ICE द्वारा जारी किया गया यह मेमो इस बात की चेतावनी है कि अमेरिका में आव्रजन और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को लेकर प्रशासन अब और अधिक सख्त रुख अपनाने जा रहा है। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना और वहां टिके रहना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है, इसके लिए उच्च स्तर की शैक्षणिक ईमानदारी और नियमों की सटीक समझ होना अनिवार्य है। यदि छात्र सही दिशा में योजना बनाकर चलेंगे और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे, तो वे इन नई बाधाओं को पार करते हुए अपने अमेरिकी सपने को जरूर पूरा कर पाएंगे, बशर्ते हर कदम बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ उठाया जाए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 31 Aug 2026 10:01 am

अमेरिका में इंटर्नशिप और नौकरी का रास्ता मुश्किल, भारतीय छात्रों को ट्रंप का झटका; CPT नियम सख्त

अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। ट्रंप सरकार ने CPT इंटर्नशिप नियमों को सख्त कर दिया है, जिससे मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 29 Aug 2026 4:02 pm

जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी

एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।

जागरण 26 Aug 2026 11:19 pm

Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War

इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।

लाइव हिन्दुस्तान 25 Aug 2026 8:17 pm

US Education: अमेरिका में भारतीय छात्रों के UG एडमिशन में गिरावट, 15% कम हुए दाखिले; क्या है इसकी वजह? जानें

Indian Students in US: अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले दाखिलों में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

अमर उजाला 25 Aug 2026 11:59 am

एस्प्रेसो से अमेरिकानो तक, जानें कैफे में मिलने वाली 5 ब्लैक कॉफी का स्वाद, ऑर्डर करना होगा आसान

किसी कैफे में जाकर अलग-अलग तरह की कॉफी को देखकर आप भी कंफ्यूज हो जाते हैं तो आपकी कंफ्यूजन दूर करने के लिए हम यहां कैफे में मिलने वाली कुछ मुख्य ब्लैक कॉफी का स्वाद बता रहे हैं। जिसे जानने के बाद अगली बार ऑर्डर देना आसान हो जाएगा।

लाइव हिन्दुस्तान 24 Aug 2026 1:30 pm

Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।

लाइव हिन्दुस्तान 23 Aug 2026 3:53 pm

Career Tips: क्या अमेरिका में पहले साल कर सकते हैं Part-Time Job? भारतीय छात्र समझें USCIS गाइडलाइन्स

अमेरिका के फॉल इनटेक में एडमिशन ले चुके अधिकतर भारतीय छात्रों के मन में एक ही सवाल उठता है- क्या वह पहुंचते ही पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। अमेरिका में फीस और रहने-खाने के खर्च को देखते हुए छात्रों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि टॉप यूनिवर्सिटीज की सालाना फीस और रहने खाने का खर्चा करीब 50 से 60 लाख रुपए तक होता है। वहीं पूरी पढ़ाई का खर्च 1.5 करोड़ तक पहुंच जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अमेरिका के F-1 स्टूडेंट वीज पर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पार्ट टाइम जॉब के नियम बेहद सख्त हैं। अगर कोई इन नियमों को तोड़ता है, तो उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। यहां तक कि डिपोर्टेशन तक का समय आ सकता है। ऐसे में हम इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारतीय स्टूडेंट्स फर्स्ट सेमेस्टर में पार्ट-टाइम नौकरी कर सकते हैं और इसको लेकर क्या नियम हैं। इसे भी पढ़ें: क्या 40 की उम्र में संभव है LLB? BCI के नए नियमों के तहत Age Limit और Career Switch पर एक विशेष रिपोर्ट फर्स्ट ईयर में जॉब कर सकते हैं या नहीं USICS के नियमों क मुताबिक F-1 वीजा पर पहले पूरे अकेडमिक ईयर तक आप कैंपस के बाहर कोई नौकरी नहीं कर सकते हैं। USICS के नियमों में फर्स्ट सेमेस्टर वाले स्टूडेंट्स के लिए कोई खास छूट नहीं दी गई है। कैंपस के बाहर किसी भी स्थिति में जॉब नहीं करना है। फर्स्ट ईयर छात्रों के पास ऑन कैंपस जॉब का ऑप्शन जरूर है। छात्र कैंपस के अंदर आराम से पार्ट-टाइम जॉब कर सकते हैं। फर्स्ट सेमेस्टर में क्या करें अच्छी खबर यह है कि ऑन कैंपस जॉब के लिए आपको USCIS से अलग इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती है। इसको आपको फर्स्ट सेमेस्टर से ही शुरूकर सकते हैं। जब क्लास चल रही हो, तब आप सप्ताह में 20 घंटे तक काम कर सकते हैं। स्कूल की छुट्टियों के दौरान आप फुल टाइम यानी की सप्ताह में 40 घंटे काम कर सकते हैं। ऑन कैंपस जॉब का मतलब है, यूनिवर्सिटी के कैंपस पर होने वाला काम कैफेटेरिया में काम, लाइब्रेरी में असिस्टेंट, यूनिवर्सिटी बुकस्टोर में जॉब, या किसी प्रोफेसर के साथ रिसर्च असिस्टेंटशिप। यह जॉब कुछ मामलों में कैंपस के बाहर भी हो सकता है। बशर्ते वह जगह आपकी यूनिवर्सिटी से एजुकेशनली एफिलिएटेड हो। उसका सीधा संबंध आपकी पढ़ाई या यूनिवर्सिटी से हो। ऑन कैंपस जॉब के लिए क्लास शुरू होने से करीब 30 दिन पहले तक अप्लाई कर सकते हैं। इसलिए अगर आप फॉल इनटेक में अभी पहुंचे हैं। तो जल्द से जल्द अपने कैंपस जॉब पोर्टल या फिर इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं। अगर आप ऑन कैंपस जॉब ढूंढ रहे हैं, या भविष्य में ऑफ-कैंपस काम के बारे में जानना चाहते हों। तो सबसे जरूरी काम है कि अपने DSO से बात करें। DSO आपकी यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के मामलों को संभालने वाला अधिकारी होता है। वह आपको बताएगा कि कौन सी जॉब्स उपलब्ध हैं और आप उनके लिए एलिजिबल हैं या नहीं।

प्रभासाक्षी 20 Aug 2026 5:40 pm

Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी

लाइव हिन्दुस्तान 18 Aug 2026 11:40 pm

Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए

लाइव हिन्दुस्तान 18 Aug 2026 7:52 pm

शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके

अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.

आज तक 17 Aug 2026 8:36 pm

Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump

Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे

लाइव हिन्दुस्तान 14 Aug 2026 9:25 pm

Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin

Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.

लाइव हिन्दुस्तान 13 Aug 2026 8:31 pm

Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump

Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..

लाइव हिन्दुस्तान 12 Aug 2026 9:55 am

Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump

तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे

लाइव हिन्दुस्तान 11 Aug 2026 8:09 pm

Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?

Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?

अमर उजाला 11 Aug 2026 7:59 am

सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।

लाइव हिन्दुस्तान 9 Aug 2026 8:55 pm

ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

समाचार नामा 8 Aug 2026 6:10 pm

'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके

'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके

अमर उजाला 8 Aug 2026 9:38 am

अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?

अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?

समाचार नामा 6 Aug 2026 6:00 pm

अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद

अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.

आज तक 6 Aug 2026 1:55 pm

'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति

प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.

आज तक 6 Aug 2026 9:04 am

विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति

जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।

जागरण 5 Aug 2026 9:32 pm

'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा

ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.

आज तक 5 Aug 2026 6:36 am

भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला

भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.

आज तक 5 Aug 2026 2:01 am

पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका

ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…

लाइव हिन्दुस्तान 4 Aug 2026 11:12 pm

Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei

Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei

लाइव हिन्दुस्तान 4 Aug 2026 10:47 pm

अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता

अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता

समाचार नामा 4 Aug 2026 9:30 pm

पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.

आज तक 4 Aug 2026 10:04 am

अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.

आज तक 4 Aug 2026 9:58 am

अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।

आज तक 4 Aug 2026 8:14 am

ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला

ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.

आज तक 4 Aug 2026 7:27 am

ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट

ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks

अमर उजाला 4 Aug 2026 5:37 am

ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.

आज तक 4 Aug 2026 2:38 am

क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति

ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…

लाइव हिन्दुस्तान 3 Aug 2026 10:57 pm

Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख

ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था

लाइव हिन्दुस्तान 3 Aug 2026 1:07 pm

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'

समाचार नामा 3 Aug 2026 9:25 am

अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10

बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.

आज तक 3 Aug 2026 8:50 am

अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा

डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.

आज तक 3 Aug 2026 12:07 am

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.

आज तक 2 Aug 2026 9:34 pm

ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक

अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.

आज तक 2 Aug 2026 5:47 pm

US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?

US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?

लाइव हिन्दुस्तान 2 Aug 2026 1:34 pm

अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर

अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.

आज तक 2 Aug 2026 9:58 am

अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10

अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.

आज तक 2 Aug 2026 8:40 am

ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक

ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.

आज तक 2 Aug 2026 8:27 am

अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल

अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.

आज तक 2 Aug 2026 6:46 am

मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी

मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.

आज तक 1 Aug 2026 11:31 pm

ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें

बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.

आज तक 1 Aug 2026 10:04 pm

अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट

अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.

आज तक 1 Aug 2026 5:23 am

पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?

पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...

आज तक 31 Jul 2026 11:15 pm

विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत

कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।

जागरण 31 Jul 2026 10:49 pm

विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने

विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने

समाचार नामा 31 Jul 2026 10:10 pm

ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10

ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.

आज तक 31 Jul 2026 6:09 pm

अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में

वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।

देशबन्धु 28 Jul 2026 3:10 am

चौंकाने वाली रिपोर्ट: उम्र बढ़ी लेकिन स्वस्थ रहने के साल नहीं, अमेरिकी नागरिक बीमारी के साथ गुजार रहे 14 वर्ष

दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।

देशबन्धु 23 Jul 2026 10:22 am

अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more

अजमेरनामा 13 Jul 2026 10:32 pm

भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा

सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।

देशबन्धु 9 Jul 2026 3:30 am

अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है

ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।

देशबन्धु 30 Jun 2026 3:00 am

अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!

वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है

देशबन्धु 23 Jun 2026 2:06 am

अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान

एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं

देशबन्धु 20 Jun 2026 10:59 am

अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?

इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।

देशबन्धु 18 Jun 2026 3:00 am

मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान

इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...

वेब दुनिया 15 Jun 2026 12:05 pm

अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम

जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,

देशबन्धु 9 Jun 2026 3:20 am

अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा

आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।

देशबन्धु 3 Jun 2026 3:10 am

पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!

नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।

देशबन्धु 26 May 2026 3:10 am

अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप

क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।

देशबन्धु 22 May 2026 3:30 am

राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स

'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...

वेब दुनिया 8 May 2026 2:15 pm

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अबू धाबी में फंसी ईशा गुप्ता सुरक्षित लौटीं, बोलीं सब डरे थे, लेकिन किसी ने अफरा-तफरी नहीं मचाई

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।

वेब दुनिया 3 Mar 2026 3:13 pm

रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता

रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।

वेब दुनिया 19 Dec 2025 4:51 pm

अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज

एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...

वेब दुनिया 16 Oct 2025 4:34 pm

'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।

वेब दुनिया 19 Jul 2025 1:38 pm

कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी

असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...

वेब दुनिया 10 Jul 2025 2:39 pm

द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय

इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...

वेब दुनिया 27 Jun 2025 2:06 pm

तनिष्ठा चटर्जी को हुआ स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर, बेटी को भेजा अमेरिका, बोलीं- लाइफ में सबकुछ बिखर सा गया...

बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...

वेब दुनिया 11 Jun 2025 2:37 pm

मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो

नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...

वेब दुनिया 25 May 2025 4:18 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह

फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...

वेब दुनिया 15 May 2025 11:36 am

4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'

बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...

वेब दुनिया 12 Mar 2025 10:31 am

9/11 हमले के बाद पुलिस ने तान दी थी सुनील शेट्टी पर बंदूक, एक्टर ने बताया अमेरिका में हुआ खौफनाक किस्सा

बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...

वेब दुनिया 1 Mar 2025 11:33 am

भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट

67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...

वेब दुनिया 3 Feb 2025 10:49 am

अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च ना‍गरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी

हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...

वेब दुनिया 18 Dec 2024 1:21 pm

मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस

मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...

वेब दुनिया 4 Nov 2024 11:15 am

जूनियर एनटीआर की देवरा : पार्ट 1 का दुनियाभर में बेसब्री से इंतजार, अमेरिका में टिकट वेबसाइट हुई क्रैश

Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...

वेब दुनिया 28 Aug 2024 12:08 pm

बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम

Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...

वेब दुनिया 16 Aug 2024 5:51 pm

अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला

प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.

आज तक 14 Jun 2024 10:30 am

अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वाली Arshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल कि खड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस

अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस

समाचार नामा 3 Jun 2024 11:00 pm

Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा

Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा

समाचार नामा 21 May 2024 4:41 pm

American Accent में इंटरव्यू में बोली Kiara Advani, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वी़डियो, लोगों ने उन्हें नकली Kim Kardashian कहा

कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024

प्रभासाक्षी 20 May 2024 4:44 pm

'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द

'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द

समाचार नामा 19 May 2024 10:00 pm

सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा Goldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टर को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा

सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा

मनोरंजन नामा 2 May 2024 3:00 pm

जिंदा है Sidhu Moose Wala की ह्त्या करने वाला Goldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा

जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा

मनोरंजन नामा 2 May 2024 2:41 pm

कौन है Grammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल

कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल

समाचार नामा 20 Apr 2024 4:46 pm

अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.

आज तक 15 Apr 2024 3:04 pm

क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल

दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.

न्यूज़18 12 Apr 2024 10:59 am

शादीशुदा हैं Diljit Dosanjh! करीबी दोस्त ने किया खुलासा, इंडो-अमेरिकन है उनकी पत्नी, आखिर क्यों छुपाई एक्टर ने शादी की खबरें?

अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।

प्रभासाक्षी 9 Apr 2024 4:35 pm

Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च, ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

मनोरंजन नामा 21 Mar 2024 9:09 am