पवनमुक्तासन से पाएं बिगड़ रही सेहत से तुरंत राहत
नई दिल्ली, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खान-पान और घंटों एक जगह बैठकर काम करने की वजह से पेट संबंधी समस्या आम हो गई है।
यूट्यूब अब नया रोजगार है: क्रिएटर इकनॉमी का उभार: रोजगार के बदलते मायने
यूट्यूब ने देश में करीब 9.6 लाख रोजगार पैदा किए हैं। 2025 में इसका जीडीपी में योगदान 18,000 करोड़ रुपये रहा है।
क्या पौधे भी सुनते हैं संगीत की धुन?: मधुर धुनों से बढ़ती है वृद्धि या यह सिर्फ एक मिथक; जानें रोचक बातें
सफलता का मंत्र: हर अवसर के पीछे भागने के बजाय पहचानें अपनी ताकत, तभी बनेगी अलग पहचान
सफलता का मंत्र: हर अवसर के पीछे भागने के बजाय पहचानें अपनी ताकत, तभी बनेगी अलग पहचान
निष्पक्षता की नसीहत: दोहरे मानदंड छोड़ें, संप्रभुता का सम्मान करें
निष्पक्षता की नसीहत: दोहरे मानदंड छोड़ें, संप्रभुता का सम्मान करें
ललित सुरजन की कलम से मेरा चुनावी घोषणापत्र
इसका प्रमाण हमें वर्तमान में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौर में बखूबी मिल रहा है।
राहुल गांधी का सच, जिससे भाजपा हार गई
राहुल गांधी को जब भाजपा किसी तरह हरा नहीं पाती है, तो आखिर में उनके चरित्र हनन पर उतर आती है।
विचार: कानूनों के दुरुपयोग से उपजा संकट
कानूनों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग देश में विधि के शासन पर स्थापित व्यवस्था के समक्ष विश्वास का संकट खड़ा करता है।
विचार: भारत के भविष्य से खिलवाड़
ऐसे लोग कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो रहे हैं, जो भ्रम और अराजकता फैलाकर देश के विकास को बाधित करने पर आमादा हैं।
जागरण संपादकीय: नशे से जूझता पंजाब
अनेक युवा असमय ही काल के गाल में समा जा रहे हैं या शारीरिक-मानसिक रूप से इतने अशक्त हो जा रहे हैं कि परिवार वालों के लिए बोझ बन जा रहे हैं। राज्य में नशे के आदी लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।
छात्रः सपनों की उड़ान से सृजन की पहचान तक
विश्व छात्र दिवस- 15 अक्टूबर, 2026 किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी संसदों में पारित कानूनों से कम और उसके शिक्षण संस्थानों में गढ़े जा रहे विद्यार्थियों के चरित्र से अधिक निर्धारित होता है। छात्र केवल किसी देश की युवा आबादी नहीं, बल्कि उसकी संभावनाओं, विचारों, मूल्यों और विकास की जीवंत पूंजी होते हैं। उनकी आंखों ... Read more
उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना शुरू की गई है। इसके तहत पात्र किसानों को कृषि और कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन ऋण देने का प्रावधान है। खास बात यह है कि ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 6 फीसदी सालाना रखी गई है। योजना का संचालन उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के माध्यम से किया जा रहा है। 6 लाख रुपये के लोन के लिए पात्रता योजना मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए है। बैंक की ओर से पात्रता और ऋण स्वीकृति की जांच की जाएगी। - आवेदक उत्तर प्रदेश का किसान होना चाहिए। - कृषि योग्य भूमि से जुड़े वैध दस्तावेज जरूरी होंगे। - लोन का इस्तेमाल कृषि या कृषि आधारित गतिविधियों के लिए होना चाहिए। - बैंक की ओर से दस्तावेज, भूमि और ऋण चुकाने की क्षमता की जांच की जाएगी। केवल आवेदन करने से 6 लाख रुपये का लोन मिलना तय नहीं है। अंतिम राशि बैंक की मंजूरी पर निर्भर करेगी। इसे भी पढ़ें: इधर विपक्ष बेकार का हो-हल्ला करता रहा, उधर Modi Cabinet ने बड़े फैसले लेकर महीने भर पहले ही जनता को दे दिया Diwali Gift ब्याज में कितनी छूट मिलेगी? इस योजना की सबसे बड़ी खासियत ब्याज में राहत है। पहले उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की दीर्घकालीन कृषि ऋण योजनाओं में ब्याज दर करीब 11 फीसदी या उससे अधिक थी। नई योजना में पात्र किसानों के लिए प्रभावी दर 6 फीसदी रखी गई है। यानी सरकार की ओर से 5 प्रतिशत अंक का ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। यह लाभ निर्धारित समय पर किस्त चुकाने वाले पात्र किसानों को मिलता है। 6 लाख के लोन की किस्त कितनी होगी? किस्त की रकम लोन की अवधि और बैंक की repayment व्यवस्था पर निर्भर करेगी। उदाहरण के लिए, यदि 6 लाख रुपये पर 6% सालाना ब्याज और समान मासिक EMI मानकर गणना करें, तो अनुमानित किस्त इस तरह हो सकती है: - 5 साल: करीब 11,600 रुपये प्रति माह - 10 साल: करीब 6,660 रुपये प्रति माह - 15 साल: करीब 5,060 रुपये प्रति माह ये केवल उदाहरण के लिए EMI गणना हैं। किसान की वास्तविक किस्त बैंक द्वारा तय अवधि, ब्याज गणना और ऋण की शर्तों के अनुसार अलग हो सकती है। योजना के पोर्टल पर भी किस्त की गणना की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किन कामों के लिए मिल सकता है लोन? योजना के तहत कृषि और कृषि आधारित गतिविधियों में निवेश के लिए दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें कृषि यंत्रीकरण, सिंचाई और अन्य उत्पादक कृषि गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। संबंधित ऋण श्रेणी के नियमों के अनुसार पात्रता तय होगी। ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? सरकार ने योजना के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है: - आधिकारिक पोर्टल mksyldb.in पर जाएं। - ‘ऋण आवेदन करें’ विकल्प चुनें। - जनपद, बैंक शाखा, तहसील और ब्लॉक की जानकारी भरें। - ग्राम पंचायत और गांव का चयन करें। - कितनी ऋण राशि चाहिए, इसकी जानकारी दें। - मोबाइल नंबर दर्ज कर OTP से सत्यापन करें। - जरूरी व्यक्तिगत, भूमि और बैंक संबंधी जानकारी भरकर आवेदन पूरा करें। - इसके बाद बैंक दस्तावेजों और पात्रता की जांच करेगा। सरकार ने योजना के लिए 384 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है और अगले पांच वर्षों में करीब 5 लाख लघु एवं सीमांत किसानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा है। योजना का शुभारंभ 23 सितंबर 2026 को किया गया। कृषक समृद्धि योजना के फ़ायदे कृषक समृद्धि योजना उत्तर प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों को कई फ़ायदे देती है, जिसका मकसद उनकी फ़ाइनेंशियल स्थिरता और प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाना है, जैसे - - सस्ता लॉन्ग-टर्म एग्रीकल्चरल क्रेडिट: यह स्कीम 6% सालाना की रियायती ब्याज दर पर ₹6 लाख तक का लोन देती है, जिससे किसानों को फ़ायदेमंद खेती की चीज़ों में इन्वेस्ट करने में मदद मिलती है। - इंटरेस्ट सब्सिडी: उत्तर प्रदेश सरकार एलिजिबल लोन पर 5% इंटरेस्ट सब्सिडी देती है, जिससे किसानों के लिए उधार लेने की कुल लागत कम हो जाती है। - कोऑपरेटिव बैंकिंग तक पहुँच: यह स्कीम कोऑपरेटिव बैंकिंग सिस्टम को सपोर्ट करती है, जो किसानों को एग्रीकल्चरल क्रेडिट देने के लिए बहुत ज़रूरी है। - लॉन्ग-टर्म क्रेडिट ऑप्शन: किसान एलिजिबल एग्रीकल्चरल इन्वेस्टमेंट के लिए एक अलग लॉन्ग-टर्म क्रेडिट ऑप्शन ले सकते हैं, जबकि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सिस्टम शॉर्ट-टर्म क्रेडिट के लिए है। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत पात्र छोटे और सीमांत किसान 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन कृषि ऋण 6 फीसदी प्रभावी ब्याज दर पर ले सकते हैं। समय पर किस्त चुकाने पर ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा। हालांकि, 6 लाख रुपये अधिकतम सीमा है, हर आवेदक को इतनी राशि मिलना तय नहीं है। लोन लेने से पहले किसान को अपनी भुगतान क्षमता, ऋण अवधि, कुल ब्याज और बैंक की अन्य शर्तों को समझ लेना चाहिए। आवेदन के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल या उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की शाखा का इस्तेमाल करें। - जे. पी. शुक्ला
विश्व सफेद छड़ी दिवस - सिर्फ एक सहारा नहीं, नेत्रहीन लोगों की सुरक्षा और स्वतंत्रता का भी प्रतीक
हर साल 15 अक्टूबर को विश्व सफेद छड़ी दिवस मनाया जाता है। यह दिन खासतौर पर नेत्रहीन और दृष्टिबाधित लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
मालगाड़ी की छत पर बैठकर दिल्ली प्रदर्शन में पहुंचने के दावे से बांग्लादेश का वीडियो वायरल
बूम ने जांच में पाया कि यह वीडियो बांग्लादेश का है. इसका दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है.
भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी की क्या वजह है? भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी क्यों?
तमाम मंजूरियां मिलने के बावजूद, स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा अब भी अनिश्चितता में फंसी हुई है.
दिवाली पर फ्री गिफ्ट मांगना पड़ा भारी, मदुरै के इन्फ्लुएंसर के घर पहुंच गए लाखों के COD पार्सल
दिवाली पर फॉलोअर्स से मिठाइयां और गिफ्ट मिलने की उम्मीद तमिलनाडु के मदुरै में रहने वाले इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर वीरमणि के लिए बड़ी मुसीबत बन गई।
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में पर्यटक बर्फबारी का उठा रहे लुफ्त
श्रीनगर, पिछले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर के कई ऊंचे इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी हुई है और मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए भी खराब मौसम का पूर्वानुमान लगाया है।
मन को शांत और शरीर को मजबूत बनाता है तो करे शीर्षासन
नई दिल्ली, आधुनिक जीवनशैली में तनाव, थकान और मानसिक अस्थिरता ने व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है। ऐसे में शीर्षासन एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है। सही तकनीक और सावधानी के साथ किया गया शीर्षासन शरीर को अंदर से मजबूत और मन को शांत करने में सक्षम है।
बॉक्स ऑफिस: दुनियाभर में 500 करोड़ पार हुई 'दृश्यम 3' की कमाई, 'हनुमान अंश' भी दिखा रही दम
Box Office Collection: बॉक्स ऑफिस पर वीकएंड के बाद वीकडेज में भी 'दृश्यम 3' का जलवा बरकरार है। 'हनुमान अंश' भी अच्छी कमाई कर रही है। जानिए बाकी फिल्मों का कलेक्शन।
ब्रह्मांड को समझने का नया फलक: प्रकाश से आगे, दुनिया को जानने की नई राह
भौतिकी नोबेल विजेता फ्रांसिस हैलजेन ने सदियों से ब्रह्मांड को केवल प्रकाश के जरिये देखने के एकाधिकार को तोड़कर नया फलक प्रदान किया है।
चुनौतियां बाकी हैं: सात फीसदी की विकास दर, समावेशी तरक्की जरूरी
पश्चिम एशियाई तनाव से उपजी अनिश्चितताओं के बीच आईएमएफ का वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को बढ़ाना इस बात का संकेत है कि देश की अर्थव्यवस्था मुश्किलों के बावजूद आगे बढ़ रही है। लेकिन, चुनौतियां अब भी बाकी हैं।
'तुम्हारे पास केवल वर्तमान है': भविष्य की चिंता में आज को मत गंवाओ, बीता समय लौटता नहीं और कल का भरोसा नहीं---Seneca Philosophy of Life: Why You Should Never Lose the Present While Planning for Tomorrow
रहस्य: तूतनखामेन के मकबरे के पीछे छिपा है क्या कोई और राज? नई जांच में मिले गुप्त कमरों के संकेत
रहस्य: तूतनखामेन के मकबरे के पीछे छिपा है क्या कोई और राज? नई जांच में मिले गुप्त कमरों के संकेत---Tutankhamun Tomb Mystery: New Research Hints at Hidden Chambers Behind the Walls
ललित सुरजन की कलम से - वर्तमान समय और प्रगतिशील आंदोलन
'भारत में ऐसे विद्वतजनों की कमी नहीं है जो पाकिस्तान निर्माण के लिए गांधी-नेहरू को दोषी ठहराते हैं।
न्यायालय का कड़ा कदम और विपक्ष का दबाव हो सकते हैं इस्तीफ़े का कारण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को लेकर बड़ी उलझन में हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की विपक्ष की मांग से कैसे निपटा जाए।
ज्ञान के समुद्र को सूखने मत दीजिए
1911 में सम्राट जॉर्ज पंचम द्वारा ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा के साथ 1891 में स्थापित इम्पीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी भी दिल्ली लाई गई।
लोकतंत्र में जनता की नाराजगी की अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण स्थल बन चुके जंतर-मंतर पर अब मोदी सरकार की वक्र दृष्टि पड़ चुकी है।
विचार: उग्र आंदोलनों के आगे असहाय जनता
'भारत बंद' की पुकार पर कई आंदोलन और विरोध प्रदर्शन देशव्यापी भी होते हैं, लेकिन अब ऐसा करते हुए ऐसे नारे भी लगने लगे हैं, 'बंद दुकानें तुम्हारी, खुली दुकानें हमारी।'
विचार: मनमानी सजा पर दुर्भाग्यपूर्ण मौन
सारी दुनिया के हिंदुओं के लिए सिवारसा को मृत्युदंड की घोषणा कोई अप्रासंगिक विदेशी घटना नहीं है। ठीक वैसी घटनाएं यहां भी होती रही हैं, जिन पर भारतीय राजनीतिक और बौद्धिक वर्ग की चुनी हुई चुप्पियों और चुने हुए शोर-शराबों से एकतरफा विशेषाधिकार और एकतरफा जुल्म को शह मिलती है।
जागरण संपादकीय: विपक्ष का विचित्र रवैया
राहुल गांधी के यह कहने का क्या मतलब कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, क्योंकि वे तो उसके फैसले की प्रतीक्षा करने को तैयार ही नहीं। क्या वे यह चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट उनके हिसाब से निर्णय दे या फिर उनकी दिलचस्पी उन बिंदुओं पर उसकी राय जानने की है ही नहीं, जो उन्होंने अपनी याचिका में उठाए हैं?
रूस के आगे फिर नरम पड़ा अमेरिका
रूस से ‘डीजल समझौता’ करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साथ कई समस्याओं से पार पाने का प्रयास किया है। इस समझौते के तहत मॉस्को तुरंत तीन लाख टन डीजल वाशिंगटन को देगा और फिर नवंबर में पांच लाख टन। अगली आपूर्ति में यह आंकड़ा बढ़कर 10 लाख टन तक हो जाएगा…
पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या दुखद वारदात तो है ही, बेहद चिंताजनक भी है। इस घटना से पंजाब में ‘ड्रग्स’ की समस्या एक बार फिर उभरकर सामने आई है। जैसे कि प्रारंभिक ब्योरे हैं, झोटा को एक स्थानीय दवा…
दिल्ली की शूटर इशिका भारद्वाज ने स्वर्ण पदक पर साधा निशाना
तुगलकाबाद स्थित डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित इंडिया ओपन शॉटगन प्रतियोगिता में दिल्ली की इशिका भारद्वाज ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया…
बाज़ार से गोभी, गाजर और बैंगन आए। उन्हें बिना काटे नहाए फ्रिज में प्रवेश दिया गया ताकि पारिवारिक परम्परा का उचित सम्मान जारी रहे। इस प्रथा के अंतर्गत आधा दर्जन सब्जियां कई दिनों तक अडोस पड़ोस में रह सकती हैं लेकिन समझा नहीं जाता कि आज रात को कौन सी सब्जी खाएं । बनने, खाने और बचने के बाद सब्ज़ी फ्रिज में ठंडी रहती है और चर्चा गर्म कि दोपहर में क्या बनेगा। यह व्यव्हारिक समस्या राष्ट्रीय है। लाखों कुक खाना पकाते हुए रीलें पका रहे हैं, अखबार और पत्रिकाएं सिखा रही हैं लेकिन यह मसला फ्रिज का स्थाई वासी है। खैर, बात बैंगन की है जो बाज़ार से आकर, ठंड में इंतज़ार कर रहे हैं कि कब उनका भर्ता बनेगा। बैंगन उदास और उपेक्षित सही लेकिन चर्चा में रहते हैं। थाली के बैंगन हमेशा अपना रुतबा कायम रखते हैं और असामाजिक आलुओं को रिझाते रहते हैं। लीजिए, कई दिन बाद वह शुभ समय आया जब रात के खाने में बैंगन का भर्ता बनना सुनिश्चित हुआ। उस दिन कुछ साधारण खाना बनना था। भर्ता बनने की प्रक्रिया के दौरान जब हवा में भूने गए बैंगनों को आपस में मिलाने लगे तो उनके नाराज़ हिस्सों ने मिलने जुलने में हिचकिचाहट बरती। पत्नी ने घोषणा की, आज भर्ता ठीक से नहीं बन रहा है। बैंगन अच्छी तरह से फ्राय नहीं हुए, कहीं कहीं से कच्चे रह गए। मिक्स नहीं हो रहे। जब वह बैंगन के हिस्सों को आपस में मिला रही थी तब उसके चेहरे को भी अच्छा नहीं लग रहा था। सब्जी का रंग गहरा भूरा हो गया था। वह बोली, यह बैंगन तो अच्छे नहीं निकले। आज भर्ता अच्छा नहीं बनने वाला क्यूंकि इनमें बीज भी बहुत निकले, लगता है यह बैंगन पुराने होंगे। इसे भी पढ़ें: चुनाव उनके - व्यवस्था हमारी (व्यंग्य) पति ने कल्पना की कि पत्नी यह भी कह सकती है कि पता नहीं बैंगन कितने पुराने पौधे में लटके होंगे । उस पौधे को लगाने वाला व्यक्ति कैसा होगा जिसकी वजह से बैंगनों का ऐसा भर्ता बना। लेकिन पत्नी ने ठोक बजाकर कहा, इन बैंगनों का रंग भी कुछ उड़ा उड़ा सा था। कई टेढ़ी मेढ़ी लकीरें भी इन पर थी। जब मैनें इन्हें दबाकर देखा ठीक से दब भी नहीं रहे थे। हालांकि इन्हें मैंने अपनी पसंद के चाकू से ही काटा लेकिन अन्दर से इनका टेक्सचर भी कुछ जांच नहीं रहा था। इनके तो बीज भी अजीब से लगे। मैंने आज तक बैंगन में ऐसे बीज नहीं देखे तभी शायद इनका भर्ता ठीक नहीं बना। अगर बैंगन के साथ एक दो पत्ते भी होते तो स्वाद कुछ और ही होता। यदि इनका रंग लाल होता तो भर्ता स्वादिष्ट बनता। पति ने कहा, आपने पिछली बार ऐसे ही बैंगनों से स्वादिष्ट भर्ता बनाया था। पत्नी बोली, वो बैंगन ऐसे नहीं थे। पहली बार लगा..... क्या ऐसे भी बैंगन होते हैं। ये बैंगन तो बेगुण ही थे। इन बैंगनों में कोई विटामिन भी नहीं होगा। इन बैंगनों की तो शक्ल ही अजीब थी जिससे लगता था कि यह वज़न भी नहीं घटा सकते। पाचन सुधार नहीं सकते, दिल की सेहत बना नहीं सकते तभी इनका भर्ता ठीक नहीं बना। इनसे अच्छा भर्ता तो आलुओं का बन जाता। पत्नी द्वारा, कई हज़ार लाइक्स वाली रील में बताए, सुगम तरीके से पकाए भर्ते की, पति ने परम्परा अनुसार तारीफ की। बैंगन का भेजा फ्राय करने के लिए नए उपकरण का उद्घाटन पत्नी द्वारा किया गया। इस दौरान पति को याद आया कि इन बैंगनों ने नौ दिन पहले फ्रिज में प्रवेश किया था लेकिन उन्हें भर्ता होने का अवसर नहीं मिल रहा था। वे फ्रिज में पसरे हुए परेशान हो चुके थे तभी उनका भर्ता वैसा नहीं बना, जैसा बन सकता था। एक वजह यह भी रही कि पत्नी को बैंगन ज्यादा पसंद नहीं। - संतोष उत्सुक
जंतर-मंतर 2.0: RSS-BJP समर्थकों को वर्दी देने के दावे से पश्चिम बंगाल का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो पश्चिम बंगाल का है और इसका हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है.
रामलीला मैदान: आंदोलन की गूंज और चुनाव में सत्ता की विदाई
दिल्ली का रामलीला मैदान केवल राजनीतिक रैलियों का स्थल नहीं रहा। यह उस जन-असंतोष का प्रतीक भी बना, जिसने सत्ता के सामने सवाल खड़े किए। यहां जुटी भीड़ ने कई बार देश का ध्यान उन मुद्दों की ओर खींचा, जिन्हें राजनीतिक व्यवस्था नजरअंदाज नहीं कर सकती थी।
विश्व साहित्य का आकाश: प्रसिद्धि के बावजूद आत्महत्या
कुछ लोग जिन्हें खूब प्रसिद्धि, सम्पत्ति, सम्मान मिला होता है ऐसे लोग भी आत्महत्या करते हैं। इसके उदाहरण हैं, कुछ नोबेल पुरस्कृत लेखक, जैसे हेमिंग्वे और कावाबाता यासूनारी।
सेतुबंधासन : दूर होगी कब्ज की समस्या और मजबूत होगी रीढ़ की हड्डी
नई दिल्ली, आजकल की व्यस्त दिनचर्या और दफ्तर में घंटों में बैठे रहने से कमर दर्द, तनाव और थकान होना आम समस्या बन गई है। ऐसे में सेतुबंधासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इसके नियमित अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी लचीली रहती है और शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है।
जीवन धारा: बाहर के शोर से ज्यादा भीतर की आवाज सुनें, खुद पर विश्वास रखना सार्थक सूत्र
जीवन धारा: बाहर के शोर से ज्यादा भीतर की आवाज सुनें,खुद पर विश्वास रखना सार्थक सूत्र
दुर्गासप्तशती और वह अंग्रेज:इंग्लैंड में जन्म, कलकत्ता हाईकोर्ट में जज बने; क्यों खास हैं फेडरिक ईडन पार्जिटर
पर्यटन में चिकित्सा यात्रा का बढ़ता दायरा: भारत आर्थिक शक्ति बन सकता है, सामाजिक शक्ति की पहचान का रास्ता क्या?
तमिलनाडु की सियासत बदल रही है: सीएम विजय करिश्माई नेता जैसे, महत्वाकांक्षाओं के साथ वैचारिक ढांचे में भी बदलाव
पश्चिम एशिया तनाव: रियाद चिंतित, सऊदी का शाही परिवार बंकर में; भारत से अजीत डोभाल ने ईरान में किसे फोन किया?
आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराध मानने की मांग: यूएन में भारत ने उठाया मुद्दा, 2028 की संधि में क्या होगा?india United Nations terrorism crimes against humanity conventionR Mythili
आरजे मिट्टे: 'ब्रेकिंग बैड' फेम अभिनेता का 34 साल की उम्र में हुआ निधन, इस बीमारी से थे पीड़ित
34 साल के अभिनेता आरजे मिट्टे का निधन हो गया है। उनके प्रतिनिधि ने यह जानकारी दी। वह 'ब्रेकिंग बैड' में अपने किरदार के लिए मशहूर थे।
ललित सुरजन की कलम से - देहलीज पर चुनाव
'चुनावी माहौल में रायपुर के किसी अन्य अखबार में इसी सोमवार को यह खबर पढ़कर मुझे आश्चर्य हुआ कि सरकार का खजाना खाली हो चुका है और उसे बार-बार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से ओवर ड्रॉफ्ट लेना पड़ रहा है
जंतर मंतर खाली कराने के निहितार्थ
मोदी-शाह की जोड़ी चाहे तो इसके लिए अपने गाल बजा सकती है कि 10 अक्टूबर को और उसके बाद भी उसने जंतर-मंतर को प्रदर्शनकारियों से खाली रखा है
नीट पीजी काउंसलिंग 2026 में कॉलेज और कोर्स चुनते समय केवल अपनी रैंक पर निर्भर न रहें। पिछले वर्ष की कटऑफ, पाठ्यक्रम, कॉलेज की मान्यता, पूरी फीस, छात्रावास, अस्पताल में मरीजों की संख्या और प्रशिक्षण की सुविधाएं भी जांचें।
एक्सप्लेनर: समुद्री लुटेरों के झंडे से जोकर के मेकअप तक; विरोध में ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल क्यों करते जेन जी?
इंसानी दिमाग का अध्ययन:दुनिया में पहली बार 100+ दिमागों का 3डी एटलस बनाने की पहल, आईआईटी मद्रास का मकसद क्या?
पंचकूला में पुलिस और क्राइम ब्रांच-2 की संयुक्त टीम ने लॉरेंस बिश्नोई और अर्जू बिश्नोई गैंग के दो कुख्यात शूटरों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।
विचार: माता-पिता के रहते भी अनाथ होते बच्चे
इन दिनों पति और बच्चों के रहते कुछ महिलाओं का दूसरे पुरुष के साथ शादी करने के मामले बढ़ने लगे हैं।
विचार: भरोसे के संकट से जूझता विपक्ष
राजनीतिक दल यह समझें कि बगैर विश्वसनीयता के न तो आंदोलन लंबा खिंच सकता है और न ही राजनीति।
जागरण संपादकीय: एक जरूरी इनकार
वैसे तो राहुल गांधी एक लंबे अर्से से एसआईआर को वोट चोरी बताने में लगे हुए हैं, लेकिन जबसे यह समाचार आया कि एसआईआर के कुछ पहलुओं पर दोनों चुनाव आयुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त से असहमत थे, तबसे राहुल गांधी नए सिरे से आक्रामक हो गए।
ललित सुरजन की कलम से संसद की सर्वोच्चता कायम रखने की जरूरत
'अभी हाल में सर्वोच्च न्यायालय ने जनप्रतिनिधित्व कानून की जो व्याख्या दो अवसरों पर की है वह हमारे मन में चिंता उपजाती है
लोकतंत्र में सबको विरोध का अधिकार
लोकतंत्र केवल चुनाव कराने, सरकार बनाने और शासन करने की व्यवस्था का नाम नहीं है। इसकी वास्तविक शक्ति नागरिकों को अपनी बात कहने, असहमति जतानेे और अपनी सरकार से प्रश्न पूछने की आजादी में निहित है…
तमिलनाडु उप-चुनावों में मिली जीत विजय के लिए संदेश
तमिलनाडु में हाल ही में संपन्न हुए दोनों विधानसभा उप-चुनावों में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की टीवीके पार्टी को जीत तो मिल गई है, लेकिन इसके लिए पार्टी को जी-तोड़ मशक्कत करनी पड़ी। ये सीटें- पश्चिमी तमिलनाडु की धारापुरम और उत्तर…
रासायनिक प्रतिक्रिया को जिस तरह कोई ‘उत्प्रेरक’ गति दे देता है, ठीक वही काम मौजूदा राजनीति में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने किया है। उसने सियासत में एक नई ऊर्जा भर दी है, जिसका लाभ अब विपक्ष को मिल रहा है…
विश्व राजनय में विडंबना या विरोधाभास की पराकाष्ठा बेहद दुखद और शर्मनाक है। अमेरिका ने रूस के साथ डीजल आयात के लिए समझौता किया है। वह रूस से पहले ही यूरेनियम और उर्वरक आयात करता रहा है। स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने…
सुधारों को तेजी से लागू करके ही भारत बनेगा समृद्ध
भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, जिसमें बुनियादी ढांचे और डिजिटल भुगतान में प्रगति हुई है।
सबको बेहतर अवसर मुहैया कराना - आय बढ़ाना है चुनौती
विकसित भारत 2047 का संकल्प पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों से मजबूत हुआ है, जिसमें जन-कल्याण और डिजिटल सेवाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कंधे-पीठ के दर्द चाहते है राहत तो रोज करें गोमुखासन
नई दिल्ली, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को स्वस्थ और तनावमुक्त रखने के लिए योग करना एक अच्छा विकल्प है। योग के विभिन्न आसनों में गोमुखासन शरीर को लचीला और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करता है।
दोहरे तर्क: कटघरे में अमेरिकी नीतियों की विश्वसनीयता, खुद जरूरत पड़ी तो रूस से डीजल आयात करने को राजी हुए ट्रंप
अमेरिका में वीजा का एक पहलू यह भी: जेडी वेंस की बात अपमानजनक, लेकिनजिस निर्भरता की ओर इशारा किया, वह असली
साहस बिन करुणा के अधूरा है: कैप्टन स्मित, बिट्टू असाधारण मनुष्य बने, बच्चों को पढ़ाने के लिए मैराथन दौड़ीं मां
नरेंद्र मोदी सरकार के समक्ष वैधता और भरोसे का गंभीर संकट
भारत की भाजपा सरकार अपनी वैधता के संकट का सामना कर रही है।
हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति खत्म, जनता सड़कों पर
शकील अख्तर लोग टकराव की बात कर रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि आन्दोलनों के विभिन्न रूप होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जनता अपने आप पहचान जाती है कि कौन उसके लिए ईमानदारी से लड़ रहा है और कौन बेवजह दूसरे पर सवाल उठा रहा है। राहुल किसी पर सवाल नहीं उठा रहे। उन पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं वे दिखने में चाहे मोदी के विरोध में दिखें मगर राहुल पर सवाल उठा कर वे अप्रत्यक्ष रूप मोदी की ही मदद कर रहे हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का आखिरी दांव है और असफल जा रहा है। पूरा देश उनके खिलाफ उठ कर खड़ा हो गया है। ऐसा मोदी ने कभी सोचा नहीं था। उन्हें अपने हिन्दू-मुस्लिम अजेंडे पर बहुत भरोसा था। मगर जन आन्दोलन ही एक ऐसी चीज होता है जो हर बैरिकेड्स को तोड़ देता है। आज राजनीतिक नेता, पत्रकार और दूसरे तमाम लोग यह कह रहे हैं कि ये हिन्दू लड़कियों के साथ क्या हो रहा है? नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तो बीजेपी आरएसएस के गुंडे शब्द का शाम को बाद में प्रयोग किया मगर बहुत सारे लोग दिन में ही यह कहने लगे थे। और ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से बहुत सारे लोग मोदी समर्थक थे। पिछले एक हफ्ते से चले घटनाक्रम ने उनकी कई धारणाओं को तोड़ा है। उनमें सबसे खास यह है कि मोदी केवल मुस्लिम को टाइट करेंगे उन लोगों के लिए हर तरह की छूट और सुरक्षा है। लेकिन शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर जो हुआ लड़कियों, छोटी-छोटी बच्चियों के कपड़े जिस तरह उतारने की कोशिश की गई, मार-पीट, गाली-गलौज उनकी कीमत लगाना इन सब के बाद वे लोग जो सोच रहे थे कि ये हिन्दुओं की रक्षा के लिए आए हैं उनका मोहभंग हो गया। क्योंकि जितनी लड़कियों के साथ यौन दुर्व्यवहार हुआ है उनमें से लगभग सभी हिन्दू ही थीं। इससे पहले भी जन्तर मन्तर वन और उसके बाद हुई सड़क की हर दुर्व्यवहार की घटना और पकड़ के ले जाने पर थाने में जो कुछ लड़कियों और लड़कों के साथ भी हुआ वे भी वही लोग थे जिनकी रक्षा के नाम पर मोदी हर चुनाव में वोट मांगते हैं। श्मशान कब्रिस्तान तक की बातें करते हैं। पुलिस अत्याचार का शिकार लड़के- लड़कियों ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में जो बताया उसको सुनना भी मुश्किल था। अभी शनिवार को तो दिल्ली की सड़कों पर लड़कियों के साथ पुलिस की मौजूदगी में गुंडों ने कपड़े उतारने की कोशिश से लेकर हर तरह की बदतमीजी की। मगर उससे पहले इन्होंने थानों के अंदर जाकर लड़के-लड़कियों के साथ वह वह हरकतें कीं कि बच्चे बता नहीं पा रहे थे। लड़कों के भी कपड़े उतारे गए। जो ज्यादा विरोध कर रहा था उसे कहा गया कि तू मुस्लिम है। लड़के ने अपना नाम बताया। कहा आधार देख लो नहीं माने। लड़कियों की दुर्दशा तो आप सुन ही नहीं सकते। इनमें वह लड़की भी शामिल थी जिस पर एक पुलिस अधिकारी असिस्टेंट कमिश्नर आफ पुलिस रैंक के विवेक भगत ने तीन अक्टूबर को सड़क पर यौन हमला किया था। और उसके बाद उसके प्रमोशन का आर्डर आया। मगर सोशल मीडिया और थोड़ी सी जिन्दा बची पत्रकारिता ने इस मुद्दे को इतना उठाया कि प्रमोशन का आर्डर पेन्डिंग रखना पड़ा। सीमित सही मगर साहसिक पत्रकारिता का यह असर रविवार को भी देखने को मिला जब शनिवार को पुलिस के साथ मिलकर खुली गुंडागर्दी कर रहे चार गुंड़ों को पुलिस को ही गिरफ्तार करना पड़ा। यह सब गुंडे और इनके संरक्षक पहले से हाथों में लाठियां लिए वीडियो बनाकर धमकियां दे रहे थे। और 12 साल से यही कर रहे हैं। लेकिन शनिवार की घटनाएं, जो कैमरों में कैद हो गईं, उनके विडियो वायरल हो गए, उस के बाद जब खुद मोदी के समर्थक रहे लोग यह कहने कि अब तो ये हिन्दू लड़कियों के साथ करने लगे तब सबको एक बड़ा झटका लगा। नफरत चीज ही ऐसी है कि वह किसी एक के खिलाफ केन्द्रित नहीं रहती है। मोदी ने मुसलमानों के खिलाफ इसे लाया था। शाहीन बाग़ के आन्दोलन के समय इसे चरम पर पहुंचा दिया गया था। दिल्ली में दंगे करवाए गए। जबकि दिल्ली में ऐसा कहीं माहौल ही नहीं था। इसी हिन्दू-मुसलमान के सहारे मोदी 12 साल से राज करने में सफल रहे। मगर अब जब लोगों ने खासतौर से हिन्दुओं ने देखा कि किस तरह उनकी बच्चियों के साथ अनपढ़ गुंडे बुलाकर उनके कपड़े उतारने की कोशिश की जा रही है उनकी तीन-तीन सौ रुपए कीमत लगाई जा रही है तो वे चौंक गए। इससे पहले शाहीन बाग़ की औरतों के लिए भी ऐसा ही कहा गया था कि पचास-पचास रुपए देकर धरने पर बिठाया जा रहा है। किसान आंदोलन की महिलाओं के लिए भी। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी कहा जिससे आक्रोशित होकर सुरक्षा बल की एक महिलाकर्मी ने जो किसान की बेटी थी कंगना रनौत को चांटा भी मारा था। लेकिन अब जब सड़क पर निकलने वाली हर लड़की बच्ची को पकड़-पकड़ कर उसका चीरहरण किया जाने लगा तो लोगों के मन में मोदी भक्ति के बदले मोदी के खिलाफ आक्रोश पैदा होने लगा। हिन्दुओं की सुरक्षा के नाम पर तो मोदी आए थे। नारा नारी की सुरक्षा का भी था। मगर नारी में सब धर्म जाति के आ जाते हैं तो उसे लोगों ने ज्यादा अपने हित वाले भाव से नहीं लिया। मगर हिन्दू खतरे में हैं और मैं उनकी रक्षा करूंगा यह बात मोदी लोगों के दिमाग में उतारने में सफल हो गए। इसलिए वे मंगल सूत्र जैसे प्रतीक बोलते हैं कि छीन कर ले जाएंगे। मगर छात्र और युवा पहले पेपर लीक पर और अब चुनाव चोरी पर जब आवाज उठाने लगे तो वही नफरत जो मुस्लिम के खिलाफ लाए थे इन बच्चों के खिलाफ भी सामने आ गई। खासतौर से लड़कियों के। और लड़कियां भी ज्यादातर उस मध्यम वर्ग की जिनके माता- पिता सबसे ज्यादा मोदी से प्रभावित हुए थे। नेहा वोरा के बारे में आप लोगों को मालूम होगा कि उसके माता-पिता दोनों मोदी समर्थकों में आते हैं। लेकिन अब जब उनकी लड़की के साथ और दूसरी लड़कियों के साथ एक से एक गलत व्यवहार होता है तो अभी तक मोदी का समर्थन कर रहे लोगों के दिमाग में भी सवाल आता है कि हमारे साथ भी वैसा ही व्यवहार। नेहा वोरा इस आन्दोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। निर्भय और प्रतिबद्ध। उसकी हिम्मत सबने देख ली। जब सीजेपी के सब बड़े नेता घोषणा करके दिल्ली आए और जाहिर है कि उसके बाद उन्हें पकड़ा ही जाना था, के बरअक्स नेहा शनिवार को अचानक सड़क पर आई और हिरासत में लिए जाने से पहले अपना प्रतिरोध दर्ज कराया। जब सरकार इतनी जालिम हो तब प्रतिरोध इसी तरह छापेमारी के अंदाज में किया जाता है। राहुल ने चार दिन लगातार दिल्ली में यही किया। और उससे पहले पेपर लीक के मुद्दे के समय भी। खैर हम फिलहाल सीजेपी ( काक्रोच जनता पार्टी) पर बात नहीं कर रहे हैं। लोग टकराव की बात कर रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि आन्दोलनों के विभिन्न रूप होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जनता अपने आप पहचान जाती है कि कौन उसके लिए ईमानदारी से लड़ रहा है और कौन बेवजह दूसरे पर सवाल उठा रहा है। राहुल किसी पर सवाल नहीं उठा रहे। उन पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं वे दिखने में चाहे मोदी के विरोध में दिखें मगर राहुल पर सवाल उठा कर वे अप्रत्यक्ष रूप मोदी की ही मदद कर रहे हैं। अगर राहुल ही मैनेज हो जाएं तो फिर मोदी के लिए कोई समस्या बचती ही नहीं है। राहुल ही एकमात्र मोदी के लिए चैलेंज हैं। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)
विचार: आर्थिकी को नई धार देने की कोशिश
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विचार: आंदोलन वही, जो भरोसा पैदा करे
केवल मुद्दा सही होना ही पर्याप्त नहीं है, उसके खिलाफ सही नेतृत्व, सही भाषा और सही पद्धति भी चाहिए।
जागरण संपादकीय: दोहरे रवैये पर प्रहार
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भाजपा के राज में पूजा नए अंदाज में: ईडन गार्डन्स से पंडालों तक दिखेगा बदलाव?
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बेलोन में सर्व मंगला बेला भवानी मंदिर में दर्शनों के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर ट्राली की शनिवार की रात में डिबाई नरोरा मार्ग पर ट्रक से टक्कर हो गई। हादसे में ट्रैक्टर ट्राली में सवार 29 श्रद्धालु घायल हो गए।
भुस में लट्ठ मारते हम हिंदी वाले
एक संगोष्ठी में कई विद्वान मिलकर एक कवि के व्यक्तित्व और कृतित्व में मनुष्य खोज रहे थे और मैं उस कविता के कवि , उसकी पहचान को खोज रहा था। खोजते-खोजते पहले विद्वान ने…
वह कारों की दुनिया में किसी करिश्मे से कम नहीं थे। उनका एक ही मकसद था- बड़ी, शक्तिशाली और विश्वसनीय कार बनाना। बेहद साधारण परिवार से आए असाधारण मैकेनिकल इंजीनियर ने 30 की उम्र में एक कार कंपनी की नींव रखी…
सिर्फ सत्ता नहीं, व्यवस्था परिवर्तन के महानायक
पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान; लाहौर सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद 21 अप्रैल, 1946 को पहली बार जयप्रकाश नारायण का पटना आगमन; लाखों की भीड़ अपने नायक की एक झलक पाने को आतुर; जेपी के स्वागत में एक जनसभा का आयोजन…
विचार: मिसाल कायम करने वाले मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे किए, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका प्रभावी नेतृत्व शामिल है
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ विपक्ष के आरोपों के बीच, 124 पूर्व अधिकारियों ने जनता के नाम पत्र जारी कर इसका समर्थन किया है
बदलती परिस्थितियों में कांग्रेस क्षत्रपों के साथ सम्मानजनक समझौते कर सकती है। राहुल गांधी की यह तमाम मशक्कत इसीलिए है। उनकी नजर साल 2029 के लोकसभा चुनावों पर है, लेकिन नरेंद्र मोदी जैसी लोकप्रिय शख्सियत से टकराने के…
समाजवाद के प्रणेता अहिंसावादी अग्रवंशी सम्राट महाराजा अग्रसेन
निर्विवाद रूप से किसी भी राष्ट्र या समाज एवं परिवार को उन्नत विकसित और कल्याणकारी बनाने के लिये उसके आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक स्तम्भों का मजबूत होना अति आवश्यक है | इन चारों स्तंभों को दृढ़ करके ही राष्ट्र को प्रगतिशील एवं विकसित देश बनाया जा सकता है |लगभग 5141वर्ष पूर्व महाराजा अग्रसेनजी इन्हीं ... Read more
जेपी की संपूर्ण क्रांतिः राजनीति को नई दिशा देने का मंत्र
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