अब एआई क्रांति की तैयारी में है भारत
सोमवार से भारत में एआई इंपैक्ट समिट शुरू हो रही है, जिसके लिए दुनियाभर से उद्योग और राजनीति के नेता पहुंच रहे हैं.
खाली पेट ब्रेड खाने से हो सकते हैं खतरनाक नुकसान, बढ़ सकता है वजन और शुगर लेवल
आज कई घरों में ब्रेड नाश्ते का अहम हिस्सा है। ऑफिस जाने के लिए लंच बॉक्स तैयार करना हो या बच्चों का स्कूल टिफिन, ब्रेड ने हर जगह अपनी जगह बना ली है
मोदी जी सवालों से परे : एपस्टीन फाइलों का डर सामने आया!
मोदी जी को सवालों से परे बताने की शुरुआत हो गई है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को नया काम दिया गया है
बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की बड़ी जीत एक अच्छा संकेत
बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की बड़ी जीत न सिर्फ दक्षिण एशिया की भूराजनीति में एक अच्छी बात है
ललित सुरजन की कलम से - वेलेंटाइन डे के लिए कुछ विचार
'वेलेन्टाइन डे का विरोध, नववर्ष का विरोध; इसके बरक्स सड़ी-गली मान्यताओं को पुनर्जीवित करने के उपक्रम- ये सभी काम स्वस्फूर्त नहीं, बल्कि किसी सोची-समझी योजना के अंतर्गत होते हैं
भारत से पड़ोसी देश बांग्लादेश में एक बड़ा राजनैतिक बदलाव आया है। देश आखिरकार एक स्थिर सरकार हासिल करने की तरफ बढ़ा है
संघ-समर्थित बौद्धिक दावों की सीमाएँ
रायपुर साहित्य उत्सव के दौरान वरिष्ठ कवि-आलोचक नरेश सक्सेना के इस कथन कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी काल में, अनेक तथाकथित बौद्धिक उत्सव आयोजित करने के बावजूद, ऐसा एक भी बुद्धिजीवी नहीं पैदा कर पाया जिसका नाम संघ के बाहर जाना-पहचाना हो और जिसे व्यापक बौद्धिक समुदाय में गंभीरता से स्वीकार किया गया हो - के साथ एक तीखी बहस का सूत्रपात हुआ
'तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ'
दूर तक फैले कीकर और बबूल के पेड़ों के बीच कच्ची पगडंडी पर सीताफल के दो पेड़ थे
पश्चिम के उस देश में जो सदा कलाकारों को प्रिय रहा है
सैंट पीटर गिरजाघर के बाद सैंट पाल रोम का सबसे बड़ा गिरजाघर है। 1823 के अग्निकांड में जल जाने के बाद लगभग समूचा गिरजाघर ही फिर से बनाया गया है
भारत का सबसे बड़ा हिरण: विशाल कद और ऐसे पैंतरे, जिनके सामने कांपते हैं शिकारी
भारत के हरे-भरे जंगलों में कई अजीबो-गरीब, विचित्र पशु-पक्षी पाए जाते हैं। ये ताकतवर होने के साथ ही शातिर और कुशल शिकारी भी होते हैं। ऐसा ही एक हिरण पाया जाता है
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की वैचारिक क्रांति
बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर इतिहास के मोड़ पर खड़ी है। लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद यदि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लौटती है और तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की दावेदारी तक पहुंचते हैं, तो यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा परिवर्तन का संकेत ... Read more
पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस: एआई के भविष्य पर भारत में चर्चा
16 से 20 फरवरी के बीच भारत में विश्व का चौथा एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित हो रहा है. इससे भारत के लिए वैश्विक निवेश और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है
13 फरवरी की प्रमुख खबरें और अपडेट्स
भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.
भारत को कमजोर करने वाला अमेरिकी व्यापार समझौता
व्यापार समझौते के बदले में अमेरिका के आदेशों के आगे भारत झुक गया है।
यह परंपरागत खेती खाद्य सुरक्षा, मिट्टी-पानी के संरक्षण, पशुपालन में मददगार, जैवविविधता व पर्यावरण का संरक्षण सभी दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
तनाव, आतंक और अंधकार के बीच शिव का प्रकाश
15 फरवरी 2026 को जब समूचा भारत महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएगा, तब यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं होगा, बल्कि आत्मजागरण का विराट अवसर होगा। महाशिवरात्रि वह रात्रि है जब साधक अपने भीतर के अंधकार को पहचानकर शिवत्व के प्रकाश से उसे आलोकित करने का संकल्प लेता है। शिव केवल देवता नहीं, वे चेतना ... Read more
वैलेंटाइन डे प्यार, स्नेह , प्रेम, आपसी समझ और रोमांस का वैश्विक उत्सव
निर्विवाद रूप में वैलेंटाइन डे प्यार, स्नेह , प्रेम, आपसी समझ और रोमांस का वैश्विक उत्सव है, जो रोमांटिक साथियों के बीच ही नहीं किन्तु सभी लोगों का परस्पर समन्वय सहयोग भाई चारे ,सच्ची दोस्ती और स्नेह व्यक्त करने का दिन है। आधुनिक समय में, यह भागदौड़ भरी जिंदगी में रिश्तों को प्राथमिकता देने, अपने ... Read more
T20 वर्ल्ड कप: पाकिस्तान की कूटनीति की तारीफ करते शशि थरूर का डीपफेक वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि शशि थरूर के इस वीडियो में एआई की मदद से छेड़छाड़ की गई है और मूल वीडियो में एक नकली आवाज अलग से जोड़ दी गई है. कई एआई डिटेक्टर टूल्स ने भी इसकी पुष्टि की है.
भारत में एप्पल का विस्तार: 26 फरवरी को खुलेगा छठा स्टोर
अमेरिकी टेक दिग्गज कंपनी एप्पल 26 फरवरी को भारत में अपना छठा स्टोर खोलने जा रही है। यह स्टोर मुंबई के बोरीवली इलाके में खुलेगा और मुंबई में कंपनी का दूसरा स्टोर होगा
भारत में तेजी से बढ़ रहा डिजिटल लेनदेन, डिजिटल पेमेंट इंडेक्स पहली बार 500 के पार
भारत में डिजिटल लेनदेन में तेजी से इजाफा हो रहा है, इससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (डीपीआई) बढ़कर पहली बार 500 के पार 516.76 (सितंबर 2025 तक) पर पहुंच गया है, जो कि मार्च 2025 में 493.22 था
विश्व रेडियो दिवस: डिजिटल वर्ल्ड का भी एंटरटेनमेंट बॉक्स, एआईआर से लेकर एआई वर्ल्ड तक रेडियो का सफर
क्या आपको याद है वह पुराने जमाने का लकड़ी का भारी-भरकम 'बक्सा' जिसकी सुई (डायल) घूमते ही कभी लंदन की खबरें गूंजती थीं
सदन में किताब की जानकारी पर चर्चा नहीं हो सकती जैसा तर्क भी लचर है पर ये छोटी बातें हैं बड़ी बात सदन न चलना और संसदीय कामकाज का पटरी से उतरना है
ललित सुरजन की कलम से - चाट भण्डार का जूठा दोना
'जब नया राज्य बना तो हमारे मन में उत्साह था कि प्रदेश में कुछ नई परंपराएं डलेंगी जो भावी पीढ़ियों के पथ-प्रदर्शन में काम आएंगी। लेकिन यह नायाब मौका देखते न देखते गंवा दिया गया
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत के किसानों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार में उनके मंत्री और वफादार विशेषज्ञों को जनता को यह समझाने में बहुत दिक्कत हो रही है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारत को क्या-क्या बड़े फायदे हो रहे हैं
पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद फाइबर से भरपूर हरा चना, अपच और कब्ज से दिलाता है राहत
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सबसे ज्यादा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ा है। गलत समय पर खाना, तला-भुना, फाइबर की कमी और तनाव की वजह से गैस, अपच, कब्ज और पेट का भारीपन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं
डीपफेक का धोखा और डिजिटल सख्त नियमों की अनिवार्यता
डिजिटल युग में सूचना की गति जितनी तीव्र हुई है, उतनी ही तेजी से भ्रम, छल और दुष्प्रचार की संभावनाएँ भी बढ़ी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डीपफेक तकनीक ने इस चुनौती को और जटिल बना दिया है। अब केवल शब्दों से नहीं, बल्कि चेहरों, आवाजों और भाव-भंगिमाओं से भी झूठ को सच की तरह प्रस्तुत ... Read more
हाथ-कंधे और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है उत्थित पद्मासन, छात्रों के लिए भी कारगर
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वस्थ रहने का आसान उपाय योगासन में छुपा है। ये योगासन न केवल तन बल्कि मन को भी भला चंगा रखते हैं। ऐसे ही एक आसन का नाम उत्थित पद्मासन है, जिसके रोजाना थोड़े अभ्यास से कई फायदे मिलते हैं।
मध्य प्रदेश: हाईकोर्ट ने बाघों की मृत्यु में अचानक हुई वृद्धि पर मांगी रिपोर्ट
हाल के महीनों में बाघों की मौतों के मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को 25 फरवरी तक इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
नरेन्द्र मोदी सरकार में संसद सत्र के सुचारू रूप से न चलने के लिए विपक्ष को कई तरह से जिम्मेदार ठहराया जाता है
विवादित हो सकते हैं भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के वायदे
महीनों की बातचीत और अनिश्चितताओं के बाद पिछले सप्ताहांत भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले हिस्से के सम्पन्न होने पर जो उत्साह था
हे राम…, कैसे कहूं बजट है रंगीन !
चौथा स्तंभ सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लायक भी नहीं !!? – मोहन थानवी राजस्थान में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने का खमियाजा राजस्थान के पत्रकार, युवा, महिलाएं और मध्यम से लेकर निम्न आय वर्ग के लोगों को उठाना पड़ रहा है । बीते दिनों जिन राज्यों में चुनाव हुए वहां-वहां राजनीतिक दलों ने ... Read more
डिजिटल क्रांति पर साइबर प्रहार गंभीर चुनौती
डिजिटल युग ने भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं ने लेन-देन को सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाया है। आज एक सामान्य नागरिक भी कुछ सेकंड में देश के किसी भी कोने में धन भेज सकता है, बिल जमा कर सकता है या ... Read more
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती एक महान विचारक, समाज सुधारक थे। उनका जन्म गुजरात के टंकारा में ओडीच य परिवार के अंदर 12 फरवरी 1824 को हुआ था उनके बचपन का नाम मूल शंकर’ था। उन्होंने ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा दिया और मूर्तिपूजा, छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया। उन्होंने ... Read more
पीएम मोदी और जशोदाबेन की शादी से संबंधित इंडियन एक्सप्रेस की वायरल पेपर कटिंग फर्जी है
BOOM ने पाया कि इंडियन एक्सप्रेस ने ऐसी कोई खबर प्रकाशित नहीं की थी. वायरल पेपर कटिंग को डिजिटली एडिट करके तैयार किया गया है.
ललित सुरजन की कलम से— रक्षा सौदों का सच
भ्रष्टाचार के राग अलापने के अलावा और कोई मुद्दा जैसे बात करने के लिए बचा ही नहीं है।
मोदी-शाह के दौरों के बावजूद भगवा पार्टी का मनोबल अधिक मजबूत नहीं हुआ
— तीर्थंकर मित्रा भगवा खेमे का हिंदू वोटों का समीकरण सही नहीं है। हो सकता है कि समुदाय सत्ताधारी सरकार से खुश न हो, लेकिन इसके भाजपा को एक साथ वोट देने की उम्मीद कम है। हालांकि विपक्ष के नेता, शुभेंदु अधिकारी अब तक के सबसे लोकप्रिय और दिखने वाले भाजपा नेता हैं, लेकिन उनके अपने खेमे में भी उनके विरोधी हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हराने की बात कहना भाजपा के लिए जितना आसान है, करना उतना आसान नहीं है, भले ही भाजपा नेता इस साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनाने की बात कर रहे हों। पूरी कोशिश करने के बावजूद लगातार लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने में नाकाम रहने के बाद, भगवा पार्टी की 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने की उम्मीदें सत्ता विरोधी भावना, पूरे बंगाल में हिंदू एकजुटता, और टीएमसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली कहानी पर टिकी हैं। इन मुद्दों के आधार पर, इस चुनावी राज्य में भाजपा का प्रचार टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करिश्मे और उनकी सरकार के उन लोकप्रिय परियोजनाओं के खिलाफ होगा, जिनसे उन्हें चुनावी फायदा हुआ था। टीएमसी के इन चुनावी प्लेटफॉर्म से पार पाना भगवा खेमे के लिए अब तक की सबसे मुश्किल चुनावी परीक्षा होगी। टीएमसी नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना भाजपा के लिए सबसे अच्छा दांव लगता है क्योंकि वह चुनाव प्रचार शुरू करने वाली है। रुपये के बदले नौकरी देने का आरोप और टीएमसी के पूर्व महासचिव और शिक्षा मंत्री पार्थ चट्टोपाध्याय के साथी के घर से मिले नकदी के बंडल और आरजीकार मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल की एक लेडी डॉक्टर के बलात्कार और उसकी हत्या ने टीएमसी नेतृत्व को मुश्किल में डाल दिया है। इसके साथ ही, भगवा खेमे की नज़र सत्ताविरोधी कारक और हिंदू वोटों के एकजुट होने पर है। सत्ताविरोधी कारक इसलिए बेअसर है क्योंकि राज्य के भगवा खेमे के पास ऐसा कोई नेता नहीं है जिसे मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश किया जा सके। भगवा खेमे का हिंदू वोटों का समीकरण सही नहीं है। हो सकता है कि समुदाय सत्ताधारी सरकार से खुश न हो, लेकिन इसके भाजपा को एक साथ वोट देने की उम्मीद कम है। हालांकि विपक्ष के नेता, शुभेंदु अधिकारी अब तक के सबसे लोकप्रिय और दिखने वाले भाजपा नेता हैं, लेकिन उनके अपने खेमे में भी उनके विरोधी हैं। राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रीय नेतृत्व को बताया है कि वे तब से भाजपा में हैं जब शुभेंदु तृणमूल में थे और ममता बनर्जी के खास सिपहसालार थे। इसके अलावा, टीएमसी संगठन के मामले में भाजपा से बहुत आगे है। तृणमूल के सांगठनिक नेटवर्क ने पार्टी को संभाला, भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले भी राज्य में आए हों और चुनावी माहौल को और गरमाया हो। हालात ऐसे हो गए हैं कि भगवा खेमा अपनी सांगठनिक कमज़ोरी को ठीक करने के लिए राज्य से किसी नेता को नहीं ला सका। इसने पिछले सितंबर में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को प्रभारी चुना और उन्हें पार्टी को चुनाव के लिए तैयार करने का काम सौंपा। केंद्रीय नेतृत्व के इस आदमी ने पार्टी के ज़मीनी नेटवर्क को मज़बूत करना शुरू कर दिया। लेकिन राज्य के भगवा खेमे के सूत्रों ने बताया कि यादव को उन्हें दिए गए काम के लिए समय काफी नहीं लगा। सूत्रों ने बताया कि राज्य भाजपा के पास बूथ लेवल के इतने कार्यकर्ता नहीं हैं जिनकी मौजूदगी या गैरमौजूदगी मतदान के दिन किसी उम्मीदवार की जीत या हार तय कर सके। अगर ये कार्यकर्ता 2021 के विधानसभा चुनाव में मतदान के दिन बाहर रहते तो भगवा खेमे में विधायकों की संख्या और ज़्यादा होती। इस बीच, तृणमूल प्रमुख अपनी 2021 की रणनीति को जारी रखते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को 'बाहरीÓ कहती रही हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) की पृष्ठभूमि में, पश्चिम बंगाल में चुनाव के समय कोई भी 'बाहरी' का टैग नहीं लगवाना चाहता। गुमशुदा लोगों ने पहले ही भाजपा के विधायकों की संख्या कम कर दी है। ममता बनर्जी का करिश्मा और टीएमसी की लगातार तीन जीत आने वाले चुनावों में भगवा खेमे के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए बहुत से लोगों को उत्सुक नहीं करेंगी। एसआईआर को लेकर चिंता और मतुआ समुदाय में भाजपा नेतृत्व में फूट आने से आने वाले चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हो सकता है। भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर और उनके भाई, भाजपा विधायक सुब्रत ठाकुर के बीच सार्वजनिक रूप से झगड़ा हुआ है। मतुआ पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में फैला एक दलित धार्मिक ग्रुप है, जिसके भारी समर्थन की वजह से 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को शानदार नतीजे मिले थे। वे भगवा खेमे और उसके कार्यनिष्पादन की मज़बूती रहे हैं, हालांकि इस बात पर शक है कि इसे दोहराया जा सकेगा। भगवा खेमे के लोकप्रिय नेता बहुत ज़्यादा अगर-मगर पर निर्भर लग रहे हैं। राज्य भाजपा के कुछ बड़े नेताओं को लगता है कि कई मुस्लिम ग्रुप टीएमसी की नाकामी से नाखुश हैं, जो उन्हें अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) की लिस्ट से बाहर होने से नहीं रोक पाई, इस बार भाजपा को वोट देंगे। लेकिन इस सोच के चक्कर में, इन नेताओं ने अल्पसंख्यक समुदाय के कई वर्गों को 'बाहरी' और 'घुसपैठिए' बताने की अपनी ही बात को नज़रंदाज़ कर दिया है। अगर ये अल्पसंख्यक वर्ग के एक विशेष खेमे के लोग अपनी राजनीतिक निष्ठा बदल भी लेते हैं, तो भगवा खेमा आखिरी पार्टी होगी जिसे वे वोट देंगे। इन अल्पसंख्यक खेमों को वर्तमान में चल रही एसआईआर अभियान के दौरान वोटर लिस्ट से बाहर होने का डर है। भाजपा के साथ अपने पिछले अनुभव को देखते हुए, उन्हें लगता है कि भगवा पार्टी के सत्ता में आने के बाद उन्हें कम अहमियत मिलेगी। एसआईआर अभ्यास के दौरान पश्चिम बंगाल के लोगों को परेशान करने के आरोप लगाने के बाद टीएमसी प्रमुख पर नाटक करने का आरोप लगा है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में राज्य की जनता के हित में उनकी बहस ने उनके मतदाताओं के लिए एक संदेश दिया है, जो शायद उनके मतदान करने के तरीके में दिखेगा। महिलाओं की भलाई की योजनाओं में खर्च बढ़ाने के बाद ममता बनर्जी सरकार का संदेश सहयोग देने का है। महिलाओं पर केंद्रित नकद लाभ देने की योजना में बढ़ोतरी पाने वाली महिला मतदाताओं के अपने हितैषी टीएमसी के खिलाफ वोट करने की संभावना कम है। यह बात भाजपा नेता भी अकेले में मानते हैं। भाजपा आलाकमान पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी उम्मीदवारों की सूची पर विचारण कर रहा है। आखिरी तस्वीर इस महीने के आखिरी हफ्ते में ही सामने आएगी। एक बार उम्मीदवारों के नाम आधिकारिक तौर पर घोषित हो जाने के बाद भाजपा पूरे जोर-शोर से चुनाव प्रचार शुरू कर देगी।
मोदी जी, कृपया कभी तो प्रधानमंत्री की तरह बोलिए
नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने 12 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन इतने वर्षों के दौरान का उनका एक भी ऐसा भाषण याद नहीं आता जो उन्होंने इस विशाल देश के प्रधानमंत्री की तरह दिया हो।
देश की सुरक्षा और सच-झूठ की परीक्षा
पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पर सियासी घमासान अब सच और झूठ की परीक्षा में तब्दील हो चुका है। एक तरफ सरकार का दावा है कि यह किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है। दूसरी तरफ राहुल गांधी इस किताब की प्रति पिछले हफ्ते ही संसद में लेकर आ गए थे और उन्होंने कहा था कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह किताब देंगे, ताकि वे खुद उन बातों और तथ्यों को पढ़ सकें, जिन्हें लोकसभा में पढ़ने से राहुल गांधी को रोका गया। लेकिन नरेन्द्र मोदी इसके बाद लोकसभा में पहुंचे ही नहीं और न ही राहुल गांधी से उनका सामना हुआ। हालांकि यह एक अच्छा मौका नरेन्द्र मोदी के पास था, जब वे एक साथ अपनी देशभक्ति, बहादुरी और 56 इंची सीने की सच्चाई देश-दुनिया को दिखा देते। राहुल गांधी का कहना है कि नरेन्द्र मोदी एक किताब से डर गए, क्योंकि इसमें चीन के घुसपैठिया अभियान की हकीकत बयां की गई है। श्री मोदी चाहते तो राहुल गांधी से ये किताब लेकर साबित कर देते कि वे डरे हुए नहीं हैं और जो कुछ उस किताब में लिखा है उसे भी पढ़ लेते। अगर कुछ गलत लिखा है तो उसकी सच्चाई बता देते, इससे उनका ही हाथ ऊंचा होता। लेकिन बजाए इतना सीधा सा काम करने के, अब इस मामले को कानूनी पचड़े में उलझा दिया गया है। अब पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब की सॉफ्ट कॉपी के ऑनलाइन प्रसारित होने पर एफ़आईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है, 'हमने सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म पर जानकारी मिलने पर जांच शुरू की। किताब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा तैयार की गई लगती है, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने से यह अभी अप्रकाशित है। स्पेशल सेल में एफ़आईआर दर्ज की गई है और जांच चल रही है। गौरतलब है कि किताब में जनरल नरवणे ने लिखा है कि 2020 में गलवान घाटी में चीन के साथ टकराव के दौरान जब उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल और अन्य नेताओं को जानकारी दी कि, 'चीनी टैंक आ रहे हैं', तो लंबे समय तक कोई सीधा जवाब नहीं मिला। करीब ढाई घंटे बाद प्रधानमंत्री मोदी का संदेश आया- 'जो उचित समझो, वो करो'। राहुल गांधी इसी पर सरकार से जवाब चाह रहे हैं। हालांकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा, 'मुझे यक़ीन है कि यह किताब कभी प्रकाशित नहीं हुई।' उन्होंने राहुल गांधी से कहा, 'जो किताब का दावा कर रहे हैं, उसे सदन में पेश करें, हम देखना चाहते हैं।' सरकार द्वारा ऐसी किसी किताब के छपे होने के दावे को खारिज किए जाने के बाद राहुल गांधी ने 4 फरवरी को संसद परिसर में किताब की प्रकाशित प्रति दिखाई और पत्रकारों से कहा, 'देखिए, किताब है, सरकार कह रही है कि किताब नहीं है।' बता दें कि 'फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी' जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा है। जनरल नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक सेना प्रमुख रहे। किताब में उनकी 40 साल की सेवा, सिक्किम में चीन से पहला आमना-सामना, गलवान संघर्ष, पाकिस्तान के साथ सीजफायर आदि का •िाक्र है। किताब 448 पेज की है और अप्रैल 2024 में रिलीज होने वाली थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिली। अमेजन और फ्लिपकार्ट पर 'अभी उपलब्ध नहीं' लिखा था। बहरहाल, दिल्ली पुलिस अब इस मामले की जांच-पड़ताल में करेगी कि आख़िर यह किताब पीडीएफ फॉर्मेट में ऑनलाइन लोगों तक कैसे पहुंच रही है। किताब को प्रकाशित करने की जरूरी मंजूरी रक्षा मंत्रालय से अभी नहीं मिली है। इसलिए यह लीक या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। ऐसा लग रहा है मानो दिल्ली पुलिस के पास और कोई जरूरी काम बचे ही नहीं है। हालांकि सोमवार को ही कम से कम पांच हत्याओं के मामले दिल्ली में घटित हुए हैं, इसके अलावा चोरी, छीना-झपटी, झगड़े-फसाद, लड़कियों की सुरक्षा जैसे अनगिनत मामले हैं, जिन्हें संभालने या कम करने के लिए पुलिस बल की जरूरत होती है। मगर इन सबको छोड़कर अमित शाह के गृह मंत्रालय ने अपनी पुलिस को इस काम में लगाया है कि किताब का पीडीएफ लोगों तक कैसे पहुंच रहा है। इस बीच किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की भी सफाई आई है। पेंगुइन प्रकाशन ने कहा है कि इस किताब के प्रकाशन का अधिकार केवल उसके पास है और यह पुस्तक अब तक प्रकाशित नहीं हुई है। लेकिन सोशल मीडिया पर 2023 में मनोज नरवणे का लिखा एक ट्वीट भी सामने आ गया है, जिसमें वे अपनी किताब के प्रकाशन की जानकारी दे रहे हैं और ऑनलाइन बुक करने का आग्रह भी कर रहे हैं। मंगलवार को राहुल गांधी ने यही ट्वीट पत्रकारों को सुनाया भी और साफ कहा है कि या तो मनोज मुकुंद नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन झूठ बोल रहा है। मुझे नहीं लगता कि पूर्व आर्मी चीफ झूठ बोलेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि पेंगुइन का कहना है कि किताब पब्लिश नहीं हुई है। लेकिन किताब अमेजन पर उपलब्ध है, मुझे पेंगुइन से ज़्यादा नरवणे जी पर भरोसा है। राहुल ने पत्रकारों से ही पूछ लिया कि क्या आपको नरवणे जी से ज़्यादा पेंगुइन पर भरोसा है? मुझे लगता है कि नरवणे जी ने अपनी किताब में कुछ ऐसी बातें कही हैं जो भारत सरकार और भारत के प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक हैं। जाहिर है, आपको तय करना होगा कि पेंगुइन सच बोल रहा है या पूर्व आर्मी चीफ...' असल में राहुल ने पत्रकारों के जरिए यह सवाल सीधे मोदी सरकार से किया है, जिसे अब यह बताना होगा कि क्या वह अपने पूर्व सेनाध्यक्ष पर भरोसा करती है या नहीं। इसके अलावा राहुल गांधी ने पत्रकारों को संसद में दिखाए जा रहे बैनर भी दिखाए, जिसमें नरेन्द्र मोदी को अमेरिका के सामने सरेंडर करते हुए दिखाया जा रहा है। राहुल गांधी का कहना है कि अमेरिका के साथ हुआ व्यापार समझौता या एपस्टीन फाइल्स में नाम आने पर सरकार घिरी हुई है, और विपक्ष को जवाब देने से बच रही है। इसलिए किताब की आड़ में छिप रही है। राहुल गांधी का यह आरोप भी मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका है। क्योंकि अमेरिका से हुए सौदे के बाद बड़े कारोबारियों को चाहे जितना फायदा हो, किसानों के लिए बहुत नुकसान होने वाला है। जनता भी बहुत दिनों तक टैरिफ कम होने के फायदे के झांसे में नहीं आने वाली है, क्योंकि आखिर में रोजगार और व्यापार का नुकसान उसे ही होगा और जब वो कारणों की तलाश में जाएगी, तो जवाब राहुल गांधी के दावों में उसे मिलेगा। जैसे एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं, कुछ वैसा ही हाल मोदी सरकार का हो गया है। अमेरिका से डील या एपस्टीन फाइल्स में नाम आने का सच तो सरकार ही बताएगी, लेकिन संसद में नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकने के लिए किताब के प्रकाशित न होने का जो बहाना मोदी सरकार ने बनाया है, उसे वो अब जितना ज्यादा खींचेगी, उतना बुरा फंसेगी।
सक्रिय हो रहे दो पश्चिमी विक्षोभ, इन राज्यों में होगी बारिश; यूपी-बिहार में कोहरे का अलर्ट
मौसम विभाग ने यूपी और बिहार में कोहरे का अलर्ट जारी किया है। वहीं राजधानी दिल्ली में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पहाड़ों में दो पश्चिमी विक्षोभ ऐक्टिव हो रहे हैं जिसकी वजह से बर्फबारी और बारिश हो सकती है।
ललित सुरजन की कलम से—स्मार्ट सिटी का सपना-3
'भारतीय समाज ने हाल के बरसों में अपने आपको बहुत संकुचित कर लिया है। आज से कुछ साल पहले तक हिन्दु, मुसलमान, सिख, ईसाई सब एक मुहल्ले में एक साथ रह सकते थे। अधिकतर इलाकों में अमीर और गरीब भी साथ-साथ बसते थे। एक-दूसरे के साथ संपर्क घना था। अब ऊंचे-ऊंचे अपार्टमेंट भवनों में यह स्थिति है कि जहां हिन्दु रह रहे हैं वहां कोई मुसलमान या ईसाई शायद ही रहता हो। फिर अभी कुछ दिन पहले बंगलुरू में तंजानिया की एक छात्रा के साथ जनता ने जो सलूक किया उससे भी हमारी संकुचित, असहिष्णु, संवेदनहीन, रंगभेदी और नस्लवादी मानसिकता के कम होने के बजाय बढऩे का परिचय मिलता है। अगर भारत की साइबर राजधानी जिसमें देश के सबसे स्मार्ट लोग रहते हैं उसमें ऐसे हालात हैं तो बाकी की बात क्या करें?' (देशबन्धु में 11 फरवरी 2016 को प्रकाशित) https://lalitsurjan.blogspot.com/2016/02/3.html
ओरण के अस्तित्व के लिए 'राष्ट्रीय गौसेवा नीति'
आयुर्वेद में गाय के दूध से बने देसी घी की तुलना अमृत से की गई है। स्वास्थ्य के लिए इसे हानिकारक बताने की राजनीति भी इस कड़ी में शामिल है।
संविधान की छाती पर पाइंट ब्लैंक फायर!
भाजपा के आधिकारिक हैंडल से प्रसारित एक वीडियो संदेश में, बिश्वशर्मा हाथों में तरह-तरह की बंदूकें/ पिस्तौलें लिए, अमरीकी फिल्मों के कॉउबाय की मुद्राओं में प्रकट ही नहीं हुए, वह अपने हथियारों से गोलियां दागते हुए दिखाई भी दिए।
सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को स्वत: संज्ञान लेकर शिकायत का इंतजार किए बिना अपराधियों के खिलाफ तत्कालीन आईपीसी की धारा 153 ए, 153 बी, 295 ए और 505 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।
महर्षि दयानंद की ऋषि -दृष्टि का जीवंत विश्वविद्यालय
महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती पर विशेष भारतीय शिक्षा परंपरा केवल सूचना प्राप्ति का माध्यम नहीं अपितु मनुष्य के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वित विकास का साधन रही है। इसी दिव्य परंपरा को पुनर्जीवित करने का महान संकल्प महर्षि दयानंद सरस्वती ने लिया था। उन्होंने ऐसी शिक्षा की कल्पना की थी जो वेदसम्मत हो, ... Read more
पीएम बनने के बाद PoK भारत में शामिल करने को कहते सीएम योगी का क्रॉप्ड वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वायरल दावा भ्रामक है. मूल वीडियो में योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि मोदी जी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने दीजिए, अगले 6 महीने में 'पाक अधिकृत कश्मीर' भी भारत का हिस्सा होगा.
प्रसव के बाद क्यों झड़ने लगते हैं तेजी से बाल, जानें कारण से लेकर समाधान
प्रसव के बाद मां के शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। वजन बढ़ने लगता है और शरीर बहुत कमजोर महसूस करता है
ललित सुरजन की कलम से -ओबामा यात्रा के पांच अध्याय
'भारत ने अमेरिका के साथ सुरक्षा के मुद्दों पर राष्ट्रपति ओबामा की यात्रा के दौरान जो बहुसूत्रीय समझौता किया है उसकी कुछ धाराएं विशेषकर धारा-36 आशंका उपजाती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लागू हो जाने के बाद भारत के जितने भी सैनिक प्रतिष्ठान हैं वे सब अमेरिका की निगरानी में अपने आप आ जाएंगे। अगर ऐसा है तो यह एक गंभीर घटना होगी। यह तो हम जानते हैं कि भारत पिछले बीस साल से बल्कि उसके पहले से भी अमेरिका और उसके पिठ्ठू इ•ाराइल के साथ सैन्य मामलों में लगातार सहयोग बढ़ाते आया है। यही वजह है कि आज भारत इ•ारायली शस्त्रास्त्र का ग्राहक नंबर-1 बन चुका है। इस बढ़ती हुईर् दोस्ती की जो कीमत हमें देश में फैल रही आंतरिक अशांति के रूप में चुकाना पड़ रही है उससे हमारा सत्तातंत्र जानबूझ कर अनभिज्ञ बना हुआ है। हम काश्मीर के मसले पर अमेरिकी रुख देख ही चुके हैं। यह भी कैसे भूला जाए कि बंगलादेश युद्ध के समय अमेरिका ने अपने सातवें बेड़े का इंटरप्राइज नामक युद्धपोत हिन्द महासागर में भेजकर भारत को घुड़काने की कैसी कोशिश की थी। हम मानते हैं कि परिस्थितियां बदलती हैं, लेकिन नये माहौल में, नये मित्रों पर आंख मूंद कर विश्वास किस हद तक किया जा सकता है? अभी जो रिपोर्टें आ रही हैं उनके अनुसार रूस और चीन दोनों इस कारण से भारत से नाखुश हैं। हम चीन को कुछ देर के लिए छोड़ दें, लेकिन रूस के साथ भारत के परस्पर गहरे संबंध रहे हैं और उस ओर ध्यान न देना दुर्भाग्यपूर्ण होगा।Ó (देशबन्धु में 5 फरवरी 2015 को प्रकाशित) https://lalitsurjan.blogspot.com/2015/02/blog-post.html
मतदाताओं को सीधे कैश ट्रांसफर मामले की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
कोर्ट ने चुनावी हार, सीटों के नुकसान, या प्रचार पाने का •िाक्र करते हुए राजनीतिक टिप्पणी को कानूनी क्षेत्राधिकार के साथ मिलाकर गलती की है।
भारत पर नजर रखो, क्या दिन ला दिए मोदी जी!
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल यह तो बता रहे हैं कि कौन कौन से उत्पाद भारत में नहीं आएंगे। मगर यह नहीं बता रहे कि कौन कौन से आएंगे।
अमेरिका से व्यापार समझौते में सब गोलमाल!
अमेरिका से व्यापार समझौते पर मोदी सरकार बड़ी कामयाबी की डींगे हांक रही है, लेकिन धरातल पर नजर आ रहा है कि वह हारी हुई लड़ाई लड़ रही है।
बेटे के बारे में सोच सोच कर हम दोनों पति पत्नी बहुत परेशान थे। बारहवीं कक्षा के साथ साथ तनिष्क कोचिंग भी कर रहा था
'बजट' जिसे मैं अपनी भाषा में महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज मानता हूं । वह इसलिए कि इसी के आधार पर वर्ष भर देश और देश की जनता के लिए उसी तरह कार्य किए जाते हैं
चांदनी छिटकी है चहुँ ओर दो दिनों से मेघ उमड़-घुमड़ रहा है पर जेठ की पूनो तिमिर का सीना चाक कर अपनी उपस्थिति दर्ज कर रही थी
गड्ढों वाली व्यवस्था और खतरे में पड़ता जीवन
गड्ढों में गिरी व्यवस्था में समाप्त होता जीवन आज के भारत की एक ऐसी विडंबना बन चुका है, जिसे देखकर मन भीतर तक सिहर उठता है। नोएडा में कार सवार युवा इंजीनियर की गड्ढे में गिरकर मौत का दर्द अभी समाज के मन से उतरा भी नहीं था कि दिल्ली में बाइक सवार युवक की ... Read more
बजट: दूर-दूर तक नहीं दिखती विकास की राह
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट के बारे में महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका भाषण बहुत लंबा और मुद्दों पर प्रकाश डालने वाला कतई नहीं था
मिशन-500 या कूटनीतिक आत्मसमर्पण? भारत-अमेरिका डील के अनकहे पहलू
मैंने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार वार्ता पर लगातार पांच आलेख लिखे—जो विभिन्न समाचार पत्रों में समय-समय पर प्रकाशित हुए
जंगल कैसे बचाते हैं पातालकोट के भारिया?
बाबा मायाराम तामिया के पास पातालकोट प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। पर्यटकों की पसंदीदा जगह है। गहराई में बसा यह इलाका जंगल और पहाड़ से घिरा है। यहां मुख्यत: गोंड और भारिया आदिवासी रहते हैं, जो पीढ़ियों से परंपरागत देसी बीजों के साथ खेती करते आ रहे हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे परंपरागत बीज लुप्त होने के कगार पर हैं। यहां कुछ समय पहले निर्माण संस्था ने देसी बीज बचाने की कोशिश की है। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की तामिया तहसील में आने वाला पातालकोट, सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच स्थित है। पाताल की तरह गहराई वाली जगह और कोट यानी दुर्ग, दीवारों से घिरी है, यही है पातालकोट। यहां दीवार का अर्थ पहाड़ों से घिरा हुआ है और इसी गहराई में बसे हुए हैं 12 गांव और उनके ढाने यानी मोहल्ले। यहां भारिया आदिवासियों का निवास है, मैं यहां कई बार गया हूं। इस कॉलम में आप से बात करना चाहता हूं कि कैसे रहते हैं, कैसे खेती करते हैं और प्रकृति के साथ उनका रिश्ता क्या है, जिससे हम उनकी सरल व सहज जीवनशैली समझ सकें। तामिया के पास पातालकोट प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। पर्यटकों की पसंदीदा जगह है। गहराई में बसा यह इलाका जंगल और पहाड़ से घिरा है। यहां मुख्यत: गोंड और भारिया आदिवासी रहते हैं, जो पीढ़ियों से परंपरागत देसी बीजों के साथ खेती करते आ रहे हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे परंपरागत बीज लुप्त होने के कगार पर हैं। यहां कुछ समय पहले निर्माण संस्था ने देसी बीज बचाने की कोशिश की है। मुझे यहां कई बार जाने का मौका मिला है। एक बार मुझे स्कूली बच्चों के साथ जंगल में पेड़ पौधे, खाद्य पदार्थ जानने-पहचानने और वन खाद्य चखने का मौका मिला मिला। कोदो का भात, और जंगली हरी पत्तीदार भाजियां भोजन में शामिल थीं। हम बच्चों के साथ जंगल में घूमे थे। साथ में गांव के अनुभवी बुजुर्ग थे, जो पेड़-पौधे से स्थानीय नाम व उनके गुणधर्म बता रहे थे। इससे बच्चों को उनके आसपास के जंगल और जैव विविधता को जानने का मौका मिल रहा था। निर्माण संस्था के नरेश विश्वास ने बहुत मेहनत से वन खाद्यों के बारे में कुछ पुस्तिकाएं भी प्रकाशित की हैं। इसी प्रकार, मुझे यहां एक जैव-विविधता प्रदर्शनी में शामिल होने का मौका मिला था। यह निर्माण संस्था द्वारा आयोजित थी, जो इस इलाके में देशी बीजों की जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इस प्रदर्शनी में कई तरह के अनाज जैसे तुअर दाल, डोंगरा सावां, भदेली, बेउरी, कोदो, मडिया, करिया कंगनी, कुसमुसी,जगनी, ज्वार, सिकिया, रजगिरा, बाजरा, काली कुरथी, दूधिया मक्का थे। इसके अलावा, बल्लर, बरबटी, लौकी, गिलकी, लाल सेमी इत्यादि के बीज शामिल थे। इन अनाजों से कई तरह के व्यंजन बनाकर भी टेबल पर सजाए गए थे। जैसे कुटकी पापड़, सावां चटली, कोदो पापड़ी, मड़िया पापड़ी, मड़िया सेव, कोदो चाटला, बाजरा के बड़े, महुआ हलवा, सावां के लड्डू, कोदो के लड्डू, ज्वार के लड्डू, महुआ का भुरका, कोदो पुलाव, कुटकी खीर, सावां की खिचड़ी, ज्वार का भात, मड़िया का हलवा इत्यादि। गैलडुब्बा गांव की महिलाओं ने बतलाया था कि, 'यहां की ज़मीन पथरीली है, इसलिए इसमें कुटकी, सांवा, मक्का, बाजरा और कांग की फसल होती हैं। हम मक्का और ज्वारी का भात पकाकर खाते हैं। कम-ज्यादा बारिश होने पर भी फसलें पक जाती हैं। हम पीढ़ियों से ऐसी पारंपरिक खेती करते आ रही हैं।' वे आगे कहती हैं कि इस जमीन में हमारे पुरखों के बीज ही काम आते हैं। यह अनाज कम पानी में भी पक जाते हैं। महिलाएं इस खेती में अपनी भागीदारी निभाती हैं, बीज बोने से लेकर, निंदाई-गुड़ाई-कटाई तक और बाद में बीजों को संभालने का काम करती हैं। परिवार के सदस्यों को भोजन पकाकर भी देती हैं। गैलडुब्बा गांव के भगलू चलथिया बताते हैं कि आदिवासियों का जीवन जंगल और खेती पर निर्भर है। होली के आसपास महुआ की बिनाई 15 दिन तक चलती है। इसके बाद, चिरौंजी भी एक पखवाड़े तक बीनते हैं। जब 15 जून के आसपास बारिश आ जाती है तो खेती-किसानी शुरू हो जाती है। खेतों की जुताई, बौनी-बखरनी होती है। दिवाली के समय फसलों की निंदाई-गुड़ाई करनी पड़ती है। वे आगे बताते हैं कि 'आदिवासी जंगल को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते। जिस तरह बच्चों की परवरिश जतन से करनी पड़ती है, उसी तरह पेड़ों की और जंगल की परवरिश करनी पड़ती है। हम समय-समय पर पेड़ों की कटाई-छंटाई करते रहते हैं। उनकी आड़ी-टेढ़ी टहनियां काटते हैं। पेड़ों के नीचे बीजों से जो पौधे बनते हैं, उनकी देखरेख करनी पड़ती हैं। जिनके बीज से पौधे उगते हैं, उनके बीज जंगल में फेंकते हैं, जिससे वे बारिश में अंकुरित हों, और फले-फूले।' वे आगे बतलाते हैं कि इसी प्रकार, पानी के स्रोतों व नदियों की भी साफ-सफाई चलती रहती हैं। यहां पनिया झरना है, उसकी नियमित सामूहिक रूप से साफ-सफाई करनी होती है। इनके किनारे के पेड़-पौधों व झाड़ियों की देखरेख करनी होती है। यह पेड़-पौधे व झाड़ियां पानीदार होते हैं, जिससे नदी में पानी बहता रहता है, वह सदानीरा बनी रहती है। डोंगर (पहाड़) से दुधी और गायनी नदी निकली हैं। दुधी, नर्मदा की सहायक नदियों में से एक है। हालांकि कई कारणों से अब यह बारहमासी नदियां सूखने लगी है, और बरसाती नदी बन गई है। भगलू चलथिया के अनुसार, 'अगर जंगल रहेगा तो आदिवासी भी रहेगा, अगर जंगल कट जाएगा तो आदिवासी भी जंगल के आसपास नहीं रह पाएगा, वह कैसे जियेगा?' इसलिए उनके बुजुर्ग कहते हैं कि जंगल को कभी काटना नहीं है। उन्होंने बताया कि जंगल को आग से बचाने के लिए कोशिश की जाती है। गर्मी के दिनों में आग की घटनाएं ज्यादा होने लगती हैं इसलिए महुआ फूल बीनने के लिए उसके नीचे के पत्तों को एक जगह एकत्र करके जलाते हैं, जिससे जंगल में आग न लगे, न फैले। अगर आग लग भी जाती है तो वे भी आग बुझाने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि 'जंगल से हमारा मां-बेटे का रिश्ता है। जितनी जरूरत है उतना ही जंगल से लेते हैं। नई पीढ़ी को भी जंगल बचाकर रखना है।' हमें पेड़ों की छांव चाहिए, अच्छी हवा चाहिए, पानी चाहिए, पेड़ रहेंगे तो पानी भी मिलेगा। जंगल से खाने के लिए पौष्टिक कंद-मूल, हरी भाजियां व फल-फूल मिलते हैं। पातालकोट में तो अब भी वन कलेवा (जंगल के कांदा व फल का नाश्ता) करने का चलन है। निर्माण संस्था के नरेश विश्वास ने बताया कि पहले पातालकोट में बहुत गिद्ध हुआ करते थे। यह गिद्धों का घर माना जाता था। कोई मवेशी मर जाता था, तो गिद्ध खा जाते थे। स्वच्छ व साफ-सुथरा वातावरण करने का यह प्राकृतिक तरीका था। उन्होंने बताया कि जलवायु बदलाव के दौर में परंपरागत पौष्टिक अनाजों की खेती बहुत उपयोगी हो गई है। इनमें कम पानी व प्रतिकूल मौसम में पकने की क्षमता होती है। देसी बीजों की खेती स्वावलंबी होती है और इसमें कम मेहनत भी लगती है। किसी भी तरह के रासायनिक खाद व कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें किसी भी तरह की मशीन जैसे ट्रेक्टर आदि का इस्तेमाल भी नहीं होता, किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता। यानी इसमें पर्यावरण की सुरक्षा भी होती है, यह खेती टिकाऊ है, यह पूरी तरह जैविक व पौष्टिक अनाजों की खेती है। लागत खर्च नहीं के बराबर है। अगर इसमें उत्पादन कम भी हो जाए तो भी किसान को घाटा नहीं होता। इस खेती से जमीन का उर्वरता बनी रहती है। कुल मिलाकर, यह कहना उचित होगा कि पारंपरिक स्वावलंबी खेती के साथ आदिवासियों ने परंपरागत ज्ञान को भी बचाया है। अपनी पारंपरिक व्यवस्था को कायम रखकर प्रकृति की पूजा और प्रकृति के संरक्षण व संवर्धन का उनका अपना तरीका है, इससे पर्यावरण की रक्षा भी होती है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के दौर में परंपरागत बीजों की खेती महत्वपूर्ण है। नई पीढ़ी के लिए विरासत है, जिसे सहेजा जा रहा है। और यह सब वे आपस में एकजुटता, सामूहिकता और एक-दूसरे की मदद से कर पाने में सक्षम हैं। क्या हम इनसे कुछ सीखना चाहेंगे?
हामिद अंसारी की नाम के आगे मोहम्मद लगाने की सलाह के दावे से फर्जी ग्राफिक वायरल
बूम से बातचीत में जी मीडिया के डिजिटल विंग के ग्रुप एडिटर अनुज खरे ने वायरल ग्राफिक को फर्जी बताया है.
एपस्टीन फाइल्स में यूएई के राष्ट्रपति का नाम आने के दावे से एडिटेड तस्वीर वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रही तस्वीर एडिट की गई है. मूल तस्वीर में दिख रहे शख्स यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान नहीं हैं.
ललित सुरजन की कलम से - कांग्रेस: ठोस कदम उठाने की जरूरत
ललित सुरजन की कलम से - कांग्रेस: ठोस कदम उठाने की जरूरत
इस छोटे से पर्वतीय राज्य में, जहां मुस्लिम अल्पसंख्यकों की आबादी बहुत ही थोड़ी है
दो व्यापार समझौते और तीन चुनौतियां
करोड़ों गिग वर्कर्स को न्यूनतम मजदूरी और काम के तय घंटे जैसी बुनियादी चीजें देना भी उसका काम है
डराने लगी है ऑनलाइन गेमिंग की लत एवं आभासी दुनिया
ऑनलाइन गेमिंग की लत एवं आभासी दुनिया कितनी भयावह एवं घातक हो सकती है, इसकी एक ही दिन में दो अलग-अलग जगह घटी घटनाओं ने न केवल झकझोरा है, बल्कि यह हमारे समय, हमारी सामाजिक संरचना और हमारी सामूहिक असावधानी पर लगा हुआ एक गहरा प्रश्नचिह्न बना है। धीरे-धीरे किशोरवय को अपने चपेट में लेने ... Read more
कौन हैं पूर्व सेना प्रमुख General Naravane ? उनके किताब पर क्यों छिड़ा है संग्राम? जाने विस्तार से
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब 'Four Stars of Destiny' को लेकर लोकसभा में भारी हंगामा। राहुल गांधी ने अग्निपथ और चीन सीमा विवाद से जुड़े अंश पढ़ने की कोशिश की, जिसे सरकार ने रोका। गलवान के नायक रहे नरवणे की इस किताब पर क्यों लगी है रोक? सेना और रक्षा मंत्रालय की जांच के बीच छिड़ी इस सियासी जंग की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
मासिक धर्म के दौरान पेट और कमर दर्द से चाहिए छुटकारा? अपनाएं ये 5 आसान घरेलू नुस्खे
मासिक धर्म के दौरान कई महिलाओं में पेट और कमर में दर्द एक आम समस्या है, जिसे डिस्मेनोरिया कहते हैं
ललित सुरजन की कलम से-राजनीति में वंचित समाज के लिए जगह कहाँ?
'जनतांत्रिक राजनीति के मंच पर अपने को हमेशा नेपथ्य में अथवा छोटी-छोटी भूमिका में देखने से जो असंतोष उभरा उसी का परिणाम है कि कांशीराम के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी बनी और उसकी ताकत जितनी भी है, आज दिखाई दे रही है। इसी तरह आदिवासियों ने भी अपने लिए एक स्वतंत्र मंच की बुनियाद रखना शुरू कर दिया है। श्री संगमा की उम्मीदवारी इस तैयारी का ही संकेत है। यह लगभग तय है कि प्रणब मुखर्जी जीत जाएंगे, लेकिन श्री संगमा हारने के बाद भी आदिवासियों के बीच नेतृत्व का केन्द्र बिन्दु बनकर उभरेंगे। यह ठीक है कि आदिवासी नेताओं ने शायद अपनी रणनीति भलीभांति तैयार नहीं की, लेकिन कांग्रेस और भाजपा में जो बड़े-बड़े नेता बैठे हैं, उन्होंने भी तो ये नए संकेत पढ़ने की परवाह नहीं की। सोनिया गांधी अगर चाहतीं तो आदिवासी नेताओं को बुलाकर बात कर सकती थीं और शायद पी.ए. संगमा को इस बार उपराष्ट्रपति पद देकर सुंदर समन्वय स्थापित किया जा सकता था। दूसरी ओर भाजपा में जिसकी भी चलती हो, श्री अडवानी या श्री गडकरी, भी ऐसी या इससे बेहतर पहल कर सकते थे। आज के समय में जबकि जल, जंगल और जमीन के मुद्दे हमारे राष्ट्रीय विमर्श का एक प्रमुख अंग बन चुके हैं और जिनसे आदिवासी ही सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं; इसके साथ ही जब देश के आदिवासी अंचलों में माओवाद एक गंभीर चुनौती बनकर सामने मौजूद है, तब आदिवासी समाज के अंर्तद्वंद्व को न समझ पाना अथवा उसकी ओर दुर्लक्ष्य करना राजनीतिक दलों के लिए आगे चलकर नुकसानदेह हो सकता है।' (देशबन्धु में 05 जुलाई 2012 को प्रकाशित) https://lalitsurjan.blogspot.com/2012/07/blog-post.html
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति
- नित्य चक्रवर्ती किसी भी व्यापारिक समझौते में हमेशा लेन-देन होता है। इसलिए, अमेरिका से ऐसी रियायतें पाने के लिए भारत की तरफ से कुछ रियायतें देने में कुछ भी गलत नहीं है, जो राष्ट्रीय हितों के लिए भारत के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं। लेकिन बातचीत बराबरी के आधार पर होनी चाहिए क्योंकि भारत, वह भारत है, जो एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन जिस तरह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने सोशल मीडिया पर ऐसा किया, उससे बड़ा भ्रम पैदा हो गया है। नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद, ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिका ने भारत के साथ एक व्यापार समझौता किया है, जिसके तहत उन्होंने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए दंडात्मक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जिसके बदले में भारत कुछ अमेरिकी सामान पर अपने टैरिफ कम करेगा, अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा, और रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, मोदी ने लिखा कि वह टैरिफ में कमी से 'खुश' हैं, लेकिन उन्होंने विवरण नहीं दिया, जिसमें यह भी शामिल नहीं था कि क्या उनका देश रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा जैसा कि ट्रंप ने दावा किया था। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि व्यापार समझौता अंतिम रूप से तय हो गया है। मोदी ने लिखा, 'जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को फायदा होता है और आपसी लाभकारी सहयोग के लिए अपार अवसर खुलते हैं।' मोदी ने यह भी नहीं बताया जो ट्रंप ने कहा कि भारत '500अरब डॉलर से अधिक अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला, और कई अन्य उत्पादों के अलावा, अमेरिकी सामान खरीदने के लिए बहुत उच्च स्तर पर प्रतिबद्ध है,' और यह कि भारत 'संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करके शून्य पर लाने के लिए आगे बढ़ेगा।' फोन पर बातचीत के बाद अमेरिकी और भारतीय नेताओं द्वारा जारी किए गए बयानों के लहजे में एक ध्यान देने योग्य अंतर था। नई दिल्ली में भाजपा और सरकारी हलकों में काफी उत्साह था। हर कोई भारतीय सरकार की तरफ से विस्तृत जानकारी की उम्मीद कर रहा था, लेकिन कुछ भी सामने नहीं आया। यहां तक कि अपनी पार्टी के सांसदों की बैठक में भी, मोदी ने अधिक विवरण नहीं दिया, सिवाय इसके कि भारत की ओर से धैर्य रखने का फल मिला। सटीक स्थिति क्या है? सरकारी सूत्र वाशिंगटन से अधिक विवरण की प्रतीक्षा करने के अलावा और कुछ नहीं बता रहे हैं। यह स्पष्ट है कि ट्रंप ने मौजूदा 50 प्रतिशत जिसमें 25 प्रतिशत जुर्माना भी शामिल है, के मुकाबले पारस्परिक व्यापार दर को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है। ट्रंप के अनुसार, यह तुरंत प्रभाव से लागू होता है। अगर ऐसा है, तो यह भारत के लिए एक बड़ी जीत है, जबकि इसके मुकाबले चीन 37 प्रतिशत, वियतनाम 20 प्रतिशत, बांग्लादेश 20 प्रतिशत और यहां तक कि पाकिस्तान भी 19 प्रतिशत पर है। लेकिन भारत ने अमेरिका को सोयाबीन, डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों के सेक्टर में क्या रियायतें दीं? क्या मोदी ने रूस से सस्ते दाम पर भी तेल का सारा आयात बंद करने पर सहमति दे दी है? पहले भी ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने रूस से खनिज तेल का आयात इंपोर्ट बंद कर दिया है, लेकिन आयातप्रतिस्पर्धी मूल्य के आधार पर हो रहा था। असल में, अभी भी, अन्तरराष्ट्रीय खनिज तेल व्यापार सूत्रों के अनुसार, रूसी कच्चा तेल अमेरिकी कच्चे तेल की तुलना में16डॉलर सस्ता है। अगर भारत रूसी तेल का पूरा आयात बंद कर देता है, तो भारत को यह अतिरिक्त लागत उठानी पड़ेगी। क्या मोदी सच में इसके लिए सहमत हो गए हैं? अगर वह सहमत हो गए हैं, तो उन्हें सामने आकर यह बात खुलकर बतानी चाहिए। आजकल किसी भी व्यापारिक समझौते में हमेशा लेन-देन होता है। इसलिए, अमेरिका से ऐसी रियायतें पाने के लिए भारत की तरफ से कुछ रियायतें देने में कुछ भी गलत नहीं है, जो राष्ट्रीय हितों के लिए भारत के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं। लेकिन बातचीत बराबरी के आधार पर होनी चाहिए क्योंकि भारत, वह भारत है, जो एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और जिसमें 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है, जो चीन को भी पीछे छोड़ देगी। मोदी 1.4 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वह ट्रंप के कहने पर राष्ट्रीय हितों का बलिदान नहीं कर सकते। सवाल यह है कि क्या ट्रंप की शर्तों पर सहमत होते हुए भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी? अगर डील हो गई है, तो प्रधानमंत्री की यह बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वह डील के बारे में विस्तार से बताएं। या, अगर यह अभी तक फाइनल नहीं हुई है और 18 प्रतिशत टैरिफ सिर्फ एक फ्रेमवर्क है, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए। ट्रंप अपने ट्रूथ सोशल पर और भी बहुत कुछ कहते रहेंगे। अगर नरेंद्र मोदी असली स्थिति नहीं बताते हैं, तो वे बातें बिना चुनौती के बनी रहेंगी। यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ लगातार व्यापार समझौते - एक जिसे 'सभी ट्रेड डील्स की जननी' कहा जा रहा है और दूसरा भारतीय सामान पर टैरिफ को 18 प्रतिशत तक कम करने वाला यह समझौता-से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की व्यापक उम्मीद है, जिससे एक दशक में निर्यात में संभावित 150अरब डालर की वृद्धि होगी, ऐसा सरकार के करीबी विशेषज्ञ कहते हैं। ये समझौते टैरिफ कम करेंगे और बाज़ार की बाधाओं को आसान बनाएंगे, साथ ही भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बढ़ावा देंगे, जिसमें श्रम-प्रधान टेक्सटाइल सेक्टर भी शामिल है। हालांकि, भारत चीन के मुकाबले अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त के ज़्यादा समय तक बने रहने की उम्मीद नहीं कर सकता, क्योंकि ट्रंप इस साल अप्रैल में अमेरिका-चीन व्यापार समझौते को अन्तिम रूप देने के लिए चीन जा रहे हैं और चीन के लिए टैरिफ दर निश्चित रूप से 20प्रतिशत से कम हो जाएगा। यह यूरोपीय यूनियन के 15 प्रतिशत या यूनाइटेड किंगडम के 10प्रतिशत के स्तर पर हो सकता है। इसलिए भारत को बहुत जल्द चीन के मुकाबले अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त को भूलना होगा। 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ ने कई चीज़ों पर असर डाला है। इनमें स्टील, टेक्सटाइल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर शामिल हैं। उदाहरण के लिए, टैरिफ के बाद अमेरिका को स्टील की शिपमेंट में 40 प्रतिशत की गिरावट आई। यह सेक्टर पुन: सुधार की ओर जा रहा है और यह इस चरण में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत मददगार होगा। यह देखना होगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके कुल असर का मूल्यांकन करने से पहले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को आखिरकार उसके अन्तिम स्वरूप में आधिकारिक तौर पर कैसे पेश किया जाता है।
देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करते प्रधानमंत्री
नरवणे ने रक्षा मंत्री को एक और फोन किया, जिन्होंने वापस कॉल करने का वादा किया। समय खिंचता गया। हर मिनट चीनी टैंकों के शिखर तक पहुंचने के और करीब ले जा रहा था।
ममता बनर्जी का आसमान में सुराख करने का इरादा
देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी मुख्यमंत्री ने वकील की भूमिका भी निभाई है।
प्राकृतिक दिनचर्या: स्वस्थ, संतुलित एवं तनावमुक्त जीवन की आधारशिला
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपने शरीर और मन की जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। देर रात तक जागना, अनियमित भोजन, मोबाइल और स्क्रीन पर ज्यादा समय और लगातार तनाव, ये सब धीरे-धीरे हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं
भूख नहीं लग रही? ये आसान घरेलू उपाय आएंगे काम और बेहतर होगा पाचन
भूख न लगना एक आम समस्या है, जो अक्सर बीमारी से उबरते समय कमजोरी, तनाव या पाचन ठीक न होने की वजह से होती है। ऐसे में शरीर को दवा के साथ-साथ सही देखभाल और घरेलू उपायों की भी जरूरत होती है।
व्हाट्सएप निमंत्रण : सुविधा के साथ संवेदना भी जरूरी
–बाबूलाल नागा समय के साथ समाज बदला है और उसके साथ बदल गया है हमारे आपसी संवाद का तरीका भी। एक दौर था जब शादी-ब्याह,गृह प्रवेश या किसी अन्य पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण स्वयं घर आकर दिया जाता था। वह कार्ड केवल सूचना नहीं होता था,बल्कि रिश्तों की औपचारिक अभिव्यक्ति होता था। दो शब्दों ... Read more
जुबीन गर्ग की अंतिम यात्रा का वीडियो UGC गाइडलाइंस समर्थित प्रदर्शन का बताकर वायरल
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो असम के गुवाहाटी का है, जहां सितंबर 2025 में दिवंगत गायक जुबीन गर्ग की अंतिम यात्रा के दौरान हजारों लोग जुटे थे.
पद्म अलंकरणों की बंदरबांट का शर्मनाक सिलसिला
केद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने पद्म अलंकरणों के जरिये अपनी चुनावी राजनीति के समीकरण साधने का जो सिलसिला 2015 में शुरू किया था
अब तक अपनाए गए स्टैंडर्ड मॉडल से अलग है 2026-27 का भारतीय बजट
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में एक बजट पेश किया, जो सरकार की आय, खर्च और वित्त को कैसे मैनेज किया जाएगा
ललित सुरजन की कलम से - बजट क्या कहता है-1
'यह तथ्य संभवत: स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि बजट भाषण के दो हिस्से होते हैं
भारत और अमेरिका के बीच सोमवार रात को व्यापार समझौते की घोषणा हुई। इस समझौते का ऐलान भी ऑपरेशन सिंदूर के बीच युद्धविराम की घोषणा की तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ही किया
ललित सुरजन की कलम से — बौने टिड्डी बनकर छा गए
'यह हमारे समय की विडम्बना है कि एक तरफ यह नजारा है तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में ऐसे लोग जो बुध्दि विवेक में बौने हैं, आए दिन किसी न किसी रूप में सम्मानित, पुरस्कृत और अलंकृत होते रहते हैं। उन्हें सर-आंखों पर बैठाते समय कोई भी यह सवाल नहीं पूछता कि उनका बौध्दिक स्तर क्या है। बौध्दिक स्तर से आशय यहां सिर्फ कॉलेज या विश्वविद्यालय की डिग्री से नहीं है। ऐसा व्यक्ति विवेक सम्पन्न है या नहीं, उसमें सिध्दांतों पर टिके रहने की जिद है या नहीं, वह बौध्दिक रूप से कितना ईमानदार है- इन बातों की तरफ शायद ही किसी की तवज्जो जाती हो। इस अनदेखी का ही परिणाम है कि देश की जनतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण और निर्णयकारी स्थानों पर ऐसे-ऐसे लोग काबिज हो चुके हैं जो कि उसके सर्वथा अयोग्य थे और इस गफलत की भारी कीमत हमें सामूहिक रूप से चुकाना पड़ रही है।' (देशबंधु में 11 अप्रैल 2013 को प्रकाशित) https://lalitsurjan.blogspot.com/2013/04/blog-post_11.html
विकासशील देशों को नई चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ काम करना होगा
'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (मगा) के नारे के तहत, डोनाल्ड ट्रंप ने डब्ल्यूटीओ और संयुक्त राष्ट्र दोनों को नज़रअंदाज़ करते हुए एकतरफ़ा व्यापार नियम फिर से लिखना शुरू कर दिया।
कमजोरों के लिए खतरनाक रसूखदार लोग
इन नए खुलासों में ऐसे घिनौने और भयानक अपराध सामने आए हैं, जिन्हें देखकर साधारण इंसान की रूह कांप जाए।
क्या यही हमारे राजस्थान का कानून है …..
क्या यही हमारे राजस्थान का कानून है कि अगर कोई धार्मिक रैली, राजनीतिक रैली या अन्य किसी रैली में दो पहिया वाहन चालक बिना हेलमेट गाड़ी चलाएं तो उसका पुलिस कभी भी चालान नहीं बनाती ना ही अभय कमांड के कैमरे उनकी कवरेज करते हैं, दूसरा बात कोई नेता को लेने एयरपोर्ट गाड़ियां जाती है ... Read more
यूजीसी : पिछड़े दलितों का नेतृत्व पूरी तरह असफल
दलित पिछड़ों को क्या मिला? मंडल के 35 साल बाद फिर वैसा ही सवर्ण आंदोलन हुआ और इस बार उन्होंने जीत भी हासिल कर ली
ललित सुरजन की कलम से - इतिहास बनाम डॉ. सिंह
'मेरे विचार में श्रीमती गांधी इस बात को नहीं समझ पाईं कि सिर्फ लोक-लुभावन कार्यक्रमों से राजनीति नहीं चलती
अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ युद्ध से ज़्यादा फ़ायदा उठा रहे हैं शी
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्रिटिश प्रधान मंत्री कीर स्टारमर के बीच गुरुवार, 29 जनवरी को बीजिंग में हुई मीटिंग खास मायने रखती है
मोदी सरकार ने एक बार एक ऐसा बजट पेश किया है, जिसमें आम जनता के लिए कुछ नहीं है, जबकि धनपतियों के लिए पूरा मौका है कि वे अपनी तिजोरी का धन दोगुना-चौगुना कर लें
विकसित भारत की उड़ान: बजट 2026 के आर्थिक संकल्प
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत नवीन केंद्रीय बजट को यदि समग्र दृष्टि से देखा जाए तो यह केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के स्वप्न की ठोस आधारशिला के रूप में सामने आता है। यह बजट उस रिफॉर्म एक्सप्रेस की तरह है जो बीते वर्षों में चली आर्थिक सुधारों ... Read more
जाने Budget 2026 में बताई हुई Orange Economy क्या है ? और इसका युवाओं के लिए क्या है ताल्लुक?
केंद्रीय Budget 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया। IICT के सहयोग से देशभर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC व कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित होंगी, जिससे 2030 तक लाखों युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
इस बार भारत रत्न मुझे दीजिए न!
भारत में रत्न व्यवसाय अत्यंत प्राचीन काल से चला आ रहा है। हमारे रत्न आज विश्व प्रसिद्ध हैं
रविदास-क्रांतिकारी चेतना चेतना के संवाहक संत
भारतीय समाज के इतिहास में संत रविदास केवल एक संत या कवि नहीं, बल्कि एक ऐसी वैचारिक आग हैं जो सदियों से जली आ रही है ऐसी आग जो रोशनी भी देती है
ऋत्विक घटक का चिन्तन अपने देशवासियों के प्रति था
सन्दर्भ : 6 फरवरी, महान फिल्मकार ऋत्विक घटक का स्मृति दिवस

