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यूपी में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना मंजूर: मेधावी छात्राओं को मिलेंगी फ्री स्कूटी, जानें किसे मिलेगा लाभ

उत्तर प्रदेश की मेधावी छात्राओं के लिए योगी सरकार ने एक बहुत बड़ा और तोहफा देने वाला कदम उठाया है। राज्य सरकार ने बहुप्रतीक्षित 'रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना' (Rani Laxmibai Scooty Scheme) के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही कॉलेज और यूनिवर्सिटी की छात्राओं को परिवहन सुविधा प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। आइए एक एजुकेशन रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि इस योजना का लाभ किसे और कैसे मिलेगा।किन छात्राओं को मिलेगा फ्री स्कूटी योजना का लाभ?सरकार द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए छात्राओं को कुछेक पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा:शैक्षणिक योग्यता: यह योजना मुख्य रूप से कॉलेज, विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थानों में ग्रेजुएशन (स्नातक) या पोस्ट-ग्र ग्रेजुएशन (स्नातकोत्तर) की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्राओं के लिए है।मेधा और अंक: पिछली परीक्षाओं में प्राप्त अंकों (Academic Merit) के आधार पर छात्राओं का चयन किया जाएगा, जिससे पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्राथमिकता मिल सके।उत्तर प्रदेश की मूल निवासी: इस योजना का लाभ केवल उत्तर प्रदेश की मूल निवासी छात्राओं को ही मिलेगा, जो राज्य के सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्थानों में अध्ययनरत हैं।आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज (Documents Required)यदि आप इस योजना के तहत आवेदन करना चाहती हैं, तो निम्नलिखित दस्तावेजों का तैयार होना अनिवार्य है:आधार कार्ड (Aadhaar Card)उत्तर प्रदेश का मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate)कॉलेज या यूनिवर्सिटी का करंट ईयर का आईडी कार्ड / फीस रसीदपिछले शैक्षणिक वर्षों की मार्कशीट (मेरिट निर्धारण के लिए)पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ और मोबाइल नंबरयोजना से छात्राओं को क्या होंगे बड़े फायदे?अक्सर ग्रामीण या दूर-दराज के इलाकों से कॉलेज आने वाली छात्राओं को परिवहन साधनों की कमी या सुरक्षा कारणों से पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता था। सरकार की इस फ्री स्कूटी योजना से न केवल छात्राओं की आवाजाही आसान होगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होगी। आने वाले दिनों में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और पोर्टल की विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:31 pm

मोटापा घटाने की नई दवा GLP-1 क्या है? जानें कैसे कम करती है वजन और इसके चमत्कारिक फायदे व साइड इफेक्ट्स

मोटापे (Obesity) और टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आया GLP-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) ड्रग्स का ट्रेंड इस समय दुनिया भर में तेजी से चर्चा बटोर रहा है। अंतरराष्ट्रीय हस्तियों से लेकर आम लोगों तक, तेजी से वजन घटाने के लिए इस दवा (जैसे Ozempic, Wegovy और Mounjaro में इस्तेमाल होने वाले सॉल्ट) का सहारा ले रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि GLP-1 आखिर क्या है, यह हमारे शरीर में काम कैसे करती है और क्या बिना डॉक्टर की सलाह के इसे लेना सुरक्षित है? आइए एक हेल्थ रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि यह दवा कैसे काम करती है, इसके फायदे क्या हैं और इसके संभावित साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं।GLP-1 दवा क्या है और यह शरीर में कैसे काम करती है?GLP-1 दरअसल हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाले एक हार्मोन (Glucagon-like peptide-1) का सिंथेटिक या कृत्रिम रूप है, जिसे GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट कहा जाता है।जब हम खाना खाते हैं, तो हमारी आंतें (Intestines) यह हार्मोन रिलीज करती हैं। GLP-1 आधारित दवाएं मुख्य रूप से तीन तरीकों से काम करती हैं:मस्तिष्क को तृप्ति का अहसास कराना: यह दवा दिमाग के उस हिस्से को सिग्नल भेजती है जो भूख को नियंत्रित करता है, जिससे व्यक्ति को पेट भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार खाने (Cravings) की इच्छा खत्म हो जाती है।पाचन की गति धीमी करना: यह पेट से भोजन के खाली होने की प्रक्रिया (Gastric Emptying) को धीमा कर देती है, जिससे व्यक्ति लंबे समय तक खुद को फुल महसूस करता है।इंसुलिन रिलीज को बढ़ाना: यह अग्न्याशय (Pancreas) को पर्याप्त इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।GLP-1 दवाओं के मुख्य स्वास्थ्य लाभतेजी से वजन में कमी: क्लीनिकल ट्रायल्स और अध्ययनों के अनुसार, सही खुराक और डॉक्टरी देखरेख में इस दवा के इस्तेमाल से कुछ ही महीनों में शरीर का 10% से 15% तक वजन आसानी से कम हो सकता है।टाइप-2 डायबिटीज पर नियंत्रण: यह दवा मुख्य रूप से ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई थी, इसलिए यह शुगर के मरीजों मेंHbA1c लेवल को तेजी से सुधारती है।हृदय रोगों (Heart Diseases) का खतरा कम होना: वजन घटने और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित होने से दिल का दौरा (Heart Attack) और स्ट्रोक आने का जोखिम काफी हद तक घट जाता है।साइड इफेक्ट्स और खतरे: जिन्हें जानना बेहद जरूरी हैभले ही GLP-1 दवा वजन घटाने में चमत्कारिक लगे, लेकिन बिना डॉक्टरी परामर्श और लापरवाही से इसका सेवन करने पर कई गंभीर दुष्प्रभाव (Side Effects) हो सकते हैं:पाचन संबंधी समस्याएं: शुरुआती दिनों में उल्टी, जी मिचलाना (Nausea), दस्त (Diarrhea), कब्ज और पेट में तेज ऐंठन होना बहुत आम है।मसल लॉस (मांसपेशियों का घटना): तेजी से वजन घटने के दौरान फैट के साथ-साथ शरीर की मांसपेशियां (Muscle Mass) भी तेजी से कम होने लगती हैं, जिससे कमजोरी आ सकती है।गंभीर साइड इफेक्ट्स: दुर्लभ मामलों में अग्न्याशय में सूजन (Pancreatitis), गॉलब्लाडर (पित्ताशय) की पथरी और किडनी पर बुरा असर देखने को मिल सकता है।डॉक्टरों की सलाह: शॉर्टकट नहीं, जीवनशैली में बदलाव जरूरीहेल्थ एक्सपर्ट्स और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स का स्पष्ट मानना है कि GLP-1 दवाएं कोई 'जादुई गोली' नहीं हैं। दवा बंद करते ही यदि खान-पान पर नियंत्रण न रखा जाए, तो घटा हुआ वजन फिर से तेजी से वापस आ जाता है। इसलिए, इसका सेवन केवल गंभीर मोटापे और डायबिटीज के मरीजों द्वारा डॉक्टर की कड़ी निगरानी में ही किया जाना चाहिए। संतुलित आहार और नियमित कसरत ही वजन को स्थायी रूप से नियंत्रित रखने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:29 pm

उम्र से पहले घट रही है मांसपेशियों की ताकत? जानें क्या है सारकोपेनिया (Sarcopenia) और क्यों बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा

अक्सर हम मांसपेशियों के नुकसान और कमजोरी को केवल बुढ़ापे की समस्या मानते हैं। लेकिन आजकल की अस्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और खराब खान-पान के कारण कम उम्र के युवाओं में भी मसल्स लॉस (Muscle Loss) की समस्या तेजी से देखी जा रही है। चिकित्सा विज्ञान में मांसपेशियों के घटने और उनकी ताकत कम होने की इस स्थिति को सारकोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि सारकोपेनिया न केवल शरीर को शारीरिक रूप से कमजोर बनाता है, बल्कि यह कम उम्र में ही टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) और मेटाबॉलिक विकारों का बड़ा कारण बन रहा है। आइए एक हेल्थ रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि सारकोपेनिया क्या है, इसके खतरे और इससे बचाव के उपाय क्या हैं।कम उम्र में क्यों हो रहा है सारकोपेनिया? जानें मुख्य कारणआमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद प्रति दशक 3% से 8% तक मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से घटने लगती हैं। लेकिन आजकल 20 से 30 साल के युवाओं में भी यह समस्या देखी जा रही है, जिसके मुख्य कारण हैं:सेडेंटरी लाइफस्टाइल (घंटों बैठे रहना): शारीरिक गतिविधि न करने और लगातार डेस्क जॉब में घंटों बैठे रहने से मांसपेशियां निष्क्रिय होकर कमजोर होने लगती हैं।प्रोटीन और पोषण की कमी: आहार में पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन-डी और बी-12 की कमी के कारण मांसपेशियां अपना घनत्व (Mass) खोने लगती हैं।अत्यधिक तनाव और नींद की कमी: क्रोनिक स्ट्रेस से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है, जो मसल टिश्यू को तोड़ता है।सारकोपेनिया और डायबिटीज का क्या है आपस में कनेक्शन?सारकोपेनिया और टाइप-2 डायबिटीज का आपस में गहरा और सीधा संबंध है:इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): हमारे शरीर में लगभग 80% ग्लूकोज (शर्करा) की खपत हमारी मांसपेशियों (Skeletal Muscles) द्वारा की जाती है। जब मांसपेशियों का द्रव्यमान कम हो जाता है, तो शरीर ग्लूकोज को सही तरीके से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता।ब्लड शुगर का बढ़ना: मांसपेशियों की कमी के कारण खून में शुगर का स्तर बना रहता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और व्यक्ति कम उम्र में ही टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो जाता है।सारकोपेनिया के शुरुआती लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाजथोड़ा सा सामान उठाने या सीढ़ियां चढ़ने में अत्यधिक थकान और कमजोरी होना।बिना किसी बड़े कारण के अचानक शरीर का वजन और शारीरिक क्षमता कम होना।बार-बार संतुलन बिगड़ना, जोड़ों में दर्द या चलने की गति धीमी होना।सारकोपेनिया से बचने के 4 अचूक उपायडाइट में बढ़ाएं प्रोटीन: अपने दैनिक आहार में दालें, पनीर, अंडे, अंकुरित अनाज, सोयाबीन और नट्स जैसे प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें।स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कसरत: हफ्ते में कम से कम 3 से 4 दिन रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (वेट लिफ्टिंग), योग या बॉडीवेट एक्सरसाइज जरूर करें।विटामिन-डी की खुराक: धूप में समय बिताएं या डॉक्टर की सलाह से विटामिन-डी3 सप्लीमेंट लें, क्योंकि यह मांसपेशियों के फंक्शन को मजबूत करता है।पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम कंट्रोल: रोजाना 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लें ताकि मसल्स रिकवरी सही तरीके से हो सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:29 pm

पीरियड्स के दौरान ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानिए इसके पीछे का सच और डॉक्टरों की राय

मासिक धर्म यानी पीरियड्स (Periods) के दौरान अक्सर हमारी माताओं, दादियों या घर के बुजुर्गों द्वारा सलाह दी जाती है कि इस समय 'ठंडा पानी' या 'ठंडी तासीर' वाली चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। आमतौर पर माना जाता है कि ठंडा पानी पीने से यूट्रस (गर्भाशय) में एंठन बढ़ती है, ब्लीडिंग रुक जाती है या दर्द काफी ज्यादा बढ़ जाता है। लेकिन क्या इस पुरानी मिथक (Myth) में कोई वैज्ञानिक सच्चाई है, या फिर यह महज एक सुनी-सुनाई धारणा है? आइए एक हेल्थ रिपोर्टर के नजरिए से गायनेकोलॉजिस्ट्स (महिला रोग विशेषज्ञों) की राय और इसके पीछे के वैज्ञानिक सच को गहराई से समझते हैं।क्या पीरियड्स में ठंडा पानी पीने से ब्लीडिंग रुकती है? जानें वैज्ञानिक सचडॉक्टरों और मेडिकल साइंस के अनुसार, यह बात पूरी तरह से एक मिथक (Myth) है कि ठंडा पानी पीने से ब्लीडिंग रुक जाती है या खून के थक्के (Blood Clots) बनने लगते हैं।हमारी पाचन प्रणाली (Digestive System) और प्रजनन प्रणाली (Reproductive System) पूरी तरह से अलग-अलग अंगों द्वारा संचालित होती हैं। जब आप ठंडा पानी पीते हैं, तो वह आपके पेट (Stomach) में जाता है और शरीर के अंदर पहुंचते ही बॉडी टेम्परेचर (37C) के अनुसार तुरंत सामान्य हो जाता है। इसका यूट्रस की ब्लीडिंग या मेंस्ट्रुअल ब्लड फ्लो पर कोई सीधा नकारात्मक असर नहीं पड़ता है।फिर क्यों महसूस होता है दर्द या ऐंठन (Cramps)?हालांकि ठंडा पानी ब्लीडिंग को नहीं रोकता, लेकिन संवेदनशील शरीर वाली महिलाओं में पीरियड्स के समय ठंडा पानी पीने से कुछ हल्की समस्याएं जरूर महसूस हो सकती हैं:मांसपेशियों का खिंचाव: बहुत ज्यादा ठंडा या बर्फ का पानी पीने से कुछ महिलाओं की आंतों और पेट की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव (Gastrointestinal Spasm) महसूस हो सकता है, जिसे लोग गलती से पीरियड्स का दर्द मान लेते हैं।प्रोस्टाग्लैंडिन्स हार्मोन: पीरियड्स के दौरान गर्भाशय की परत को बाहर निकालने के लिए शरीर में 'प्रोस्टाग्लैंडिन्स' नाम का हार्मोन बनता है, जिससे प्राकृतिक रूप से ऐंठन (Cramps) होती है। इसका पानी के तापमान से कोई लेना-देना नहीं होता।पीरियड्स में गुनगुना पानी क्यों माना जाता है ज्यादा फायदेमंद?भले ही ठंडा पानी पीना हानिकारक न हो, लेकिन डॉक्टर पीरियड्स के दिनों में गुनगुना या हल्का गर्म पानी (Warm Water) पीने की सलाह देते हैं। इसके पीछे कई स्वास्थ्य लाभ छिपे हैं:ब्लड सर्कुलेशन में सुधार: गुनगुना पानी पीने से पेल्विक एरिया (पेड़ू के हिस्से) में रक्त प्रवाह तेज होता है और गर्भाशय की मांसपेशियां रिलैक्स (शिथिल) होती हैं, जिससे ऐंठन और दर्द में तुरंत राहत मिलती है।ब्लॉटिंग (पेट फूलना) से राहत: पीरियड्स के दौरान वॉटर रिटेंशन और गैस/अपच की समस्या आम होती है। गर्म पानी पाचन को दुरुस्त रखता है और ब्लॉटिंग को कम करता है।एनर्जी बनी रहती है: अजवाइन, अदरक या सौंफ का उबला हुआ गुनगुना पानी पीने से शरीर की थकान दूर होती है और मूड स्विंग्स में सुधार होता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:27 pm

गुरुवार को केले के पौधे की पूजा क्यों है इतनी फलदायी? जानें सही पूजन विधि, नियम और चमत्कारी लाभ

सनातन धर्म में गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की साधना-आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, गुरुवार के दिन केले के पौधे (Banana Tree) की पूजा करने का विशेष विधान है, क्योंकि इसमें भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का साक्षात वास माना जाता है। मान्यता है कि जो साधक गुरुवार के दिन विधि-विधान से केले के वृक्ष की पूजा करते हैं, उनके जीवन से आर्थिक तंगी, विवाह में आ रही रुकावटें और दुर्भाग्य हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। आइए एक रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि गुरुवार को केले के पौधे की पूजा कैसे करें, इसके नियम क्या हैं और इससे क्या-क्या आध्यात्मिक व ज्योतिषीय लाभ मिलते हैं।गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा की प्रामाणिक और सरल विधिगुरुवार के दिन केले के पौधे की पूजा करते समय शुद्धता और सही नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है:स्नान और संकल्प: गुरुवार को प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।जल अर्पित करना: एक तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें थोड़ा सा गुड़, चने की दाल, हल्दी और मुनक्का मिलाएं।पूजा प्रक्रिया: केले के पौधे की जड़ में यह हल्दी-मिश्रित जल अर्पित करें। इसके बाद पौधे के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप-दीप से आरती करें।हल्दी और चंदन का तिलक: केले के तने पर हल्दी या पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीले फूल अर्पित करें।कथा व मंत्र जप: पूजा के समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें और गुरुवार की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।केले की पूजा से मिलने वाले 4 चमत्कारी लाभविवाह योग्य जातकों के लिए वरदान: जिन युवाओं के विवाह में बार-बार बाधाएं आ रही हों या शादी तय होने में देरी हो रही हो, उन्हें लगातार 16 गुरुवार केले के पौधे की पूजा और जल अर्पित करना चाहिए। इससे शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति: घर में धन की कमी को दूर करने और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए केले के पौधे की जड़ में चने की दाल और गुड़ चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है।बृहस्पति ग्रह की मजबूती: कुंडली में बृहस्पति (Guru) ग्रह कमजोर होने पर ज्ञान, शिक्षा और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। केले के वृक्ष की सेवा करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है।दांपत्य जीवन में मधुरता: जिन पति-पत्नी के बीच अक्सर मतभेद रहते हों, उन्हें गुरुवार का व्रत रखकर केले के पौधे की साथ में पूजा करनी चाहिए।पूजा करते समय रखें इन सावधानियों का ध्यानफल का सेवन न करें: जिस घर में गुरुवार का व्रत रखा जाता है और केले के पौधे की पूजा की जाती है, उस दिन व्रती को केला (Banana Fruit) खाने से परहेज करना चाहिए। फल को केवल प्रसाद स्वरूप भगवान को अर्पित करें या दान करें।घर के मुख्य द्वार पर स्थान: वास्तु शास्त्र के अनुसार, केले का पौधा घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में ही लगाना चाहिए। इसे कभी भी घर के दक्षिण या पश्चिम कोण में न रखें।पत्तियों को न तोड़े: गुरुवार के दिन केले के पौधे की पत्तियों या तने को नुकसान न पहुंचाएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:26 pm

भगवान श्रीकृष्ण मुकुट में क्यों धारण करते हैं मोरपंख? जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथाएं और गहरा आध्यात्मिक रहस्य

भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप अत्यंत मनमोहक है—हाथ में बांसुरी, चेहरे पर मंद मुस्कान और सिर पर सुशोभित मोरपंख (Peacock Feather)। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अनगिनत सुंदर पक्षियों और आभूषणों के बीच कान्हा केवल मोरपंख को ही अपने मुकुट में क्यों धारण करते हैं? सनातन परंपरा और ग्रंथों में इसके पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि कई बेहद भावुक पौराणिक कथाएं और गहरे आध्यात्मिक व वास्तु रहस्य छिपे हैं। आइए एक रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि मोरपंख और बांके बिहारी का यह संबंध इतना पवित्र क्यों माना जाता है।1. मोर के अखंड ब्रह्मचर्य और पवित्रता का सम्मानपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मोर को संसार के सबसे पवित्र पक्षियों में से एक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि मोर अपने जीवनकाल में अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करता है। मोर और मोरनी के मिलन के समय मोरनी मोर के आंसुओं को पीकर गर्भधारण करती है। भगवान श्रीकृष्ण ने मोर के इसी परम पवित्र और निष्काम भाव का आदर करने के लिए उसके पंख को अपने मुकुट पर सर्वोच्च स्थान दिया।2. माता राधा का निश्छल प्रेम और नृत्य की कथामोरपंख धारण करने के पीछे एक बेहद सुंदर कथा माता राधा रानी से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब कान्हा वृंदावन के जंगलों में बांसुरी बजाते थे, तो उसकी मधुर धुन सुनकर मोर मुग्ध होकर नृत्य करने लगते थे।एक दिन श्रीकृष्ण के बंसी वादन पर प्रसन्न होकर मोरों के राजा ने अपने पंख श्रीकृष्ण के चरणों में न्योछावर कर दिए। प्रभु ने उन पंखों को सहर्ष स्वीकार कर अपने मस्तक पर सजा लिया। इसके अलावा, एक मान्यता यह भी है कि जब माता राधा रानी नृत्य करती थीं, तो मोर उनके साथ नाचते थे और उनके झड़ चुके पंखों को श्रीकृष्ण प्रेम के प्रतीक रूप में अपने सिर पर धारण कर लेते थे।3. शत्रुओं को मित्र बनाने और ग्रहों के संतुलन का संदेशशत्रु मित्र का भाव: मोर और सर्प (सांप) परस्पर घोर शत्रु माने जाते हैं, जबकि श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम शेषनाग का अवतार हैं। मोरपंख धारण कर श्रीकृष्ण यह संदेश देते हैं कि वे शत्रु और मित्र सभी को समान रूप से स्वीकार करते हैं और वैमनस्य को मिटाते हैं।सभी रंगों और ग्रहों का समावेश: मोरपंख में प्रकृति के सात रंग मौजूद होते हैं। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, मोरपंख में सभी 9 ग्रहों और नवग्रहों का प्रभाव समाहित होता है। इसे धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:22 pm

करौली में ट्रक की चपेट में आने से दो किशोरों, एक युवक की मौत

करौली। राजस्थान में करौली के कोतवाली थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग -23 पर बुधवार को एक मोटर साइकिल के ट्रक से टकराने से दो किशोर और एक युवक की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि मृतकों की पहचान करौली के गुलाब बाग निवासी आशीष (16), हर्ष (16) और धौलपुर के पुरानी छावनी […] The post करौली में ट्रक की चपेट में आने से दो किशोरों, एक युवक की मौत appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 23 Jul 2026 3:16 pm

25 जुलाई से शुरू हो रहा चातुर्मास 2026: जानिए देवशयनी एकादशी का महत्व, नियम और क्यों थम जाएंगे शुभ कार्य

सनातन परंपरा में चातुर्मास (Chaturmas) को आत्मिक शुद्धि, जप, तप और स्वास्थ्य साधना का सबसे पवित्र काल माना गया है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी (25 जुलाई 2026, शनिवार) से इस बार 120 दिनों का चातुर्मास शुरू होने जा रहा है, जो 20-21 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव और अन्य देवशक्तियों के हाथों में होता है। आइए एक रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि चातुर्मास क्यों इतना महत्वपूर्ण है और इस दौरान किन-किन नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।4 महीने क्यों बंद रहेंगे शादी, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य?शास्त्रों में विधान है कि जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, तब किसी भी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य (जैसे विवाह, मुंडन संस्कार, जनेऊ, गृह प्रवेश या नया व्यवसाय शुरू करना) आयोजित नहीं किए जाते।मान्यता है कि शुभ कार्यों के साक्षी और फलदाता भगवान श्री हरि होते हैं, इसलिए उनके शयन काल के दौरान मांगलिक कार्यों में देव-आशीर्वाद का अभाव रहता है। हालांकि, यह समय केवल ईश्वर भक्ति, भागवत कथा, गुरु सेवा, दान-पुण्य और आत्मचिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।खान-पान और दैनिक जीवन के कड़े नियम: महीने-दर-महीने समझें तालिकाआयुर्वेद और धर्मशास्त्र दोनों ही चातुर्मास के दौरान खान-पान को लेकर बेहद सख्त संयम बरतने की सलाह देते हैं, क्योंकि वर्षा ऋतु में पाचन अग्नि (Digestive Fire) मंद हो जाती है और संक्रमण का खतरा रहता है।महीनावर्जित चीजें (क्या न खाएं)धार्मिक व स्वास्थ्य संबंधी कारणसावन (Sawan)हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी आदि)वात दोष बढ़ता है और कीड़े-मकोड़ों का खतरा रहता है।भाद्रपद (Bhadrapada)दही और छाछकफ और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।आश्विन (Ashwin)दूध और दूध से बनी चीजेंपित्त दोष में असंतुलन आ सकता है।कार्तिक (Kartik)लहसुन, प्याज, बैंगन और बैंगन-दालेंतामसिक प्रभाव बढ़ता है, सात्विकता बनी रहे।इसके अतिरिक्त, चातुर्मास में बैंगन, मूली, कद्दू, तेल-मसालेदार भोजन और बैंगन का त्याग करने का विधान है। श्रद्धालु पूरे चार महीने भूमि पर शयन करने और एक समय सात्विक भोजन करने का संकल्प लेते हैं।वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से चातुर्मास का महत्ववैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से चातुर्मास का समय मौसम परिवर्तन का काल होता है। वर्षा ऋतु और उसके बाद की आर्द्रता (Humidity) में बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन तेजी से फैलते हैं।इस दौरान कम खाना खाने (उपवास रखने) और खान-पान में सात्विकता बरतने से शरीर को डिटॉक्सिफाई (Detoxify) होने का मौका मिलता है और इम्युनिटी (Immunity) मजबूत होती है। वहीं, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह समय अपनी इंद्रियों को वश में करने और मानसिक शांति हासिल करने का सबसे उत्तम अवसर है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:13 pm

क्या रिचार्ज खत्म होते ही बंद हो जाएगी इनकमिंग कॉल? सरकार ने संसद में दिया जवाब, जानें नियम

मोबाइल डेटा और प्लान की वैलिडिटी खत्म होते ही क्या टेलीकॉम कंपनियां (Airtel, Jio, Vi) आपकी इनकमिंग कॉल (Incoming Calls) सेवाएं बंद कर सकती हैं? इस सवाल को लेकर देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं के मन में लंबे समय से असमंजस बना हुआ है। हाल ही में संसद के सत्र के दौरान जब यह मुद्दा उठा और सांसदों ने सरकार से पूछा कि क्या रिचार्ज खत्म होने के बाद भी एक तय समय तक बिना किसी अतिरिक्त प्लान के इनकमिंग कॉल चालू रखने का कोई कानूनी नियम है, तो संचार मंत्रालय (Ministry of Communications) ने संसद में लिखित जवाब देकर पूरी स्थिति साफ कर दी। आइए एक टेक और पॉलिसी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि सरकार और ट्राई (TRAI) का इस पर क्या रुख है।संसद में सरकार का जवाब: क्या है आधिकारिक नियम?संसद में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत टेलीकॉम कंपनियों को अपने टैरिफ प्लान, वैलिडिटी पीरियड और ग्रेस पीरियड तय करने की व्यावसायिक आजादी है।सरकार ने बताया कि वर्तमान में ऐसा कोई बाध्यकारी नियम या अनिवार्य न्यूनतम समय-सीमा नहीं है जो टेलीकॉम कंपनियों को रिचार्ज प्लान खत्म होने के बाद भी अनिश्चित काल के लिए मुफ्त में इनकमिंग कॉल सुविधा जारी रखने के लिए बाध्य करे। कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल और नेटवर्क मैनेजमेंट के हिसाब से वैलिडिटी समाप्त होने के बाद इनकमिंग सेवाएं रोक सकती हैं।वैलिडिटी खत्म होने पर कैसे काम करती हैं कंपनियां?वर्तमान में देश की प्रमुख निजी टेलीकॉम कंपनियां (Airtel, Jio, Vodafone Idea) ग्राहक द्वारा न्यूनतम रिचार्ज न कराने पर एक निर्धारित व्यवस्था के तहत काम करती हैं:ग्रेस पीरियड (Grace Period): प्लान खत्म होने के बाद कंपनियां आमतौर पर 7 से 15 दिनों का 'ग्रेस पीरियड' देती हैं, जिसके दौरान केवल आउटगोइंग कॉल बंद होती हैं लेकिन इनकमिंग कॉल आती रहती हैं।सेवा का निलंबन (Suspension): ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद यदि कोई नया रिचार्ज नहीं कराया जाता है, तो इनकमिंग सेवाएं भी पूरी तरह से निलंबित (Suspend) कर दी जाती हैं।नंबर डिएक्टिवेशन (Number Deactivation): ट्राई के नियमानुसार यदि किसी सिम कार्ड में लगातार 90 दिनों तक कोई रिचार्ज या कमर्शियल एक्टिविटी (कॉल/मैसेज) नहीं होती है, तो उस नंबर को डिएक्टिवेट करके किसी नए यूजर को अलॉट किया जा सकता है।उपभोक्ताओं की मांग और ट्राई का रुखआम उपभोक्ताओं और जनप्रतिनिधियों की मांग रही है कि केवल नंबर चालू रखने के लिए बार-बार महंगे प्लान्स का रिचार्ज कराना गरीब और ग्रामीण वर्ग के लोगों के लिए आर्थिक बोझ बनता है। इसलिए बैंक ओटीपी (OTP) और जरूरी कॉल्स के लिए कम से कम इनकमिंग सुविधा मुफ्त रहनी चाहिए।हालांकि, टेलीकॉम कंपनियों का तर्क है कि नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेक्ट्रम को मेंटेन करने के लिए प्रति यूजर औसतन आय (ARPU) बनाए रखना जरूरी है। फिलहाल सरकार या ट्राई की तरफ से मुफ्त में हमेशा के लिए या लंबे समय तक इनकमिंग जारी रखने का कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है, यानी सिम एक्टिव रखने के लिए न्यूनतम वैलिडिटी रिचार्ज कराना अनिवार्य रहेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:11 pm

EPS-95 न्यूनतम पेंशन ₹7500 होगी या नहीं? सरकार ने संसद में स्थिति की साफ, जानें क्या दिया जवाब

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS-95) के 78 लाख से अधिक पेंशनभोगियों और करीब 6 करोड़ अंशदाताओं की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि क्या सरकार न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने जा रही है। लगातार बढ़ती महंगाई और पेंशनर्स यूनियनों (NAC) के देशव्यापी आंदोलनों के बीच संसद के सत्र के दौरान इस मुद्दे पर तीखे सवाल पूछे गए। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने संसद में लिखित जवाब देकर न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी, महंगाई भत्ता (DA) जोड़ने और फंड की बजटीय स्थिति पर सरकार का रुख पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। आइए एक बिजनेस और पॉलिसी रिपोर्टर की नजर से समझते हैं कि सरकार ने इस पर क्या कहा है।संसद में सरकार का जवाब: क्या न्यूनतम पेंशन ₹7,500 होगी?संसद में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए श्रम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ईपीएस-95 योजना के तहत न्यूनतम पेंशन को सीधे ₹7,500 करने का कोई अंतिम प्रस्ताव या मंजूरी स्वीकृत नहीं है।정부 (सरकार) ने साफ किया कि 2014 में केंद्र सरकार ने अपने बजटीय सहायता के माध्यम से ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह तय की थी, जिसके लिए सरकार हर साल अलग से बजटीय सहायता प्रदान करती है। पेंशन कोष में अतिरिक्त वित्तीय भार और actuarial (बीमांकिक) घाटे को ध्यान में रखते हुए बिना अतिरिक्त बजटीय आवंटन के पेंशन को ₹7,500 तक बढ़ाना और उस पर महंगाई भत्ता (DA) देना पेंशन फंड के अस्तित्व के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।पेंशनर्स यूनियनों की मांग और सरकार का तर्कराष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) और विभिन्न कर्मचारी संघ लंबे समय से सरकार के सामने 4 मुख्य मांगें रख रहे हैं:न्यूनतम पेंशन: न्यूनतम पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह किया जाए।महंगाई भत्ता (DA): पेंशन राशि को महंगाई सूचकांक से जोड़ते हुए डीए लागू किया जाए।मेडिकल सुविधा: पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी को फ्री मेडिकल सुविधा (जैसे आयुष्मान भारत) का लाभ मिले।हायर पेंशन (Higher Pension): सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वास्तविक वेतन पर हायर पेंशन के दावों का त्वरित निपटारा हो।सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि पेंशन फंड एक 'पूल फंड' (Pooled Fund) है, जो सदस्यों और नियोक्ताओं (Employers) के 8.33% अंशदान से चलता है। किसी भी बदलाव से पहले फंड की वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक प्रभाव का मूल्यांकन करना अनिवार्य है।पेंशनरों पर क्या पड़ेगा असर और आगे क्या है रास्ता?सरकार के इस लिखित जवाब से उन लाखों पेंशनर्स की उम्मीदों को झटका लगा है जो इस सत्र में ₹7,500 पेंशन और डीए की घोषणा का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठकों में पेंशन ढांचे की समीक्षा पर लगातार चर्चाएं जारी रहती हैं। फिलहाल, पेंशनर्स संगठन अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने और कानूनी रास्ते तलाशने की रणनीति बना रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 3:10 pm

गुजरात में बारिश का तांडव, वलसाड में 36 इंच, 7 ट्रेनें रद्द, सेना अलर्ट पर

Gujarat Heavy Rain: दक्षिण गुजरात में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी है। विशेष रूप से वलसाड जिले में भारी तबाही देखने को मिली है, जहां उमरगाम में लगभग 35.67 इंच जितनी भीषण बारिश दर्ज की गई। ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 3:09 pm

सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, जब्त हुई जमानत, 3 माह में करना होगा सरेंडर

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मेघालय के बहुचर्चित हनीमून मर्डर केस की आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने सोनम को बड़ा झटका देते हुए उसे 3 हफ्ते में सरेंडर करने को कहा है।

वेब दुनिया 23 Jul 2026 2:53 pm

जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज के खिलाफ भड़का युवाओं का गुस्सा: छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग को बताया लोकतंत्र की हत्या

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में छात्रों और युवाओं पर हुए पुलिस बल प्रयोग और लाठीचार्ज की आंच अब पड़ोसी राज्यों तक फैल चुकी है। अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस द्वारा की गई सख्ती के विरोध में हरियाणा के युवाओं और छात्र संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में युवा सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं का साफ कहना है कि लोकतांत्रिक देश में अपनी आवाज उठाना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन पुलिस द्वारा जिस तरह से छात्रों पर लाठियां भांजी गईं और उन्हें खदेड़ा गया, वह सीधे तौर पर लोकतंत्र का गला घोटने जैसा है। इस बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता का आरोपयुवाओं और छात्र नेताओं का आरोप है कि वे पूरी शांति के साथ अपनी जायज मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर अपनी बात रख रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग करना उचित समझा। इस अमानवीय कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जिससे पूरे देश के छात्र वर्ग में रोष व्याप्त हो गया है। हरियाणा में हुए इस विरोध मार्च के दौरान युवाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि युवाओं की आवाज को इस तरह लाठी और डंडों के जोर पर दबाया नहीं जा सकता, और यह कार्रवाई देश के संविधान द्वारा दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का खुला उल्लंघन है।सरकार विरोधी नारों के साथ देशव्यापी आंदोलन की चेतावनीप्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित छात्रों के पक्ष में उचित कदम नहीं उठाए गए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक उग्र किया जाएगा। युवाओं का यह बढ़ता जनसैलाब आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर अब छात्र संगठन पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:37 pm

DU में हॉस्टल पाना नहीं होगा आसान: जानें क्या हैं आवंटन के नए कड़े नियम और मेरिट का गणित

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में दाखिला मिलने के बाद बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है—एक सुरक्षित और किफायती हॉस्टल हासिल करना! देश-विदेश से आने वाले लाखों स्टूडेंट्स के बीच हॉस्टल की सीमित सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है। ऐसे में सिर्फ अच्छे अंक होना ही काफी नहीं है, बल्कि यूनिवर्सिटी के कड़े नियमों और प्राथमिकताओं को समझना भी बेहद जरूरी है। आइए एक रिपोर्टर के नजरिए से पूरी प्रक्रिया और नियमों को आसान भाषा में समझते हैं।मेरिट और घर की दूरी: हॉस्टल मिलने के दो सबसे बड़े आधारदिल्ली यूनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेजों और यूनिवर्सिटी हॉस्टलों में कमरों का आवंटन मुख्य रूप से दो प्रमुख पैमानों पर निर्भर करता है—आपकी अकादमिक मेरिट (Academic Merit) और घर की दूरी (Distance from Delhi)।यूनिवर्सिटी के नियमानुसार, जिन छात्रों के नाम प्रवेश परीक्षा या कट-ऑफ (CUET/Merit) की लिस्ट में टॉप पर होते हैं, उन्हें पहली प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर (NCT) के निवासी छात्रों को हॉस्टल अलॉट नहीं किया जाता। अभ्यर्थी का घर दिल्ली से जितना अधिक दूर होगा, उसके हॉस्टल मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।कैसे होती है आवेदन प्रक्रिया और चयन की स्टेज?कॉलेज में एडमिशन कंफर्म होने के बाद छात्रों को संबंधित कॉलेज या यूनिवर्सिटी हॉस्टल की आधिकारिक वेबसाइट/कार्यालय से हॉस्टल फॉर्म भरना होता है।शॉर्टलिस्टिंग (Shortlisting): आपके अंकों और श्रेणी (UR, OBC, SC, ST, PwD, EWS) के आधार पर पहली ड्राफ्ट मेरिट लिस्ट जारी की जाती है।इंटरव्यू और वेरिफिकेशन (Interview & Verification): शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों को हॉस्टल एडमिशन कमेटी (प्रॉवोस्ट/वार्डन) के सामने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है।लोकल गार्जियन का होना अनिवार्य: दिल्ली में रहने वाले एक अधिकृत 'लोकल गार्जियन' (Local Guardian) की जानकारी देना फॉर्म में अनिवार्य है, जो किसी भी आपात स्थिति में जवाबदेह हों।सीमित सीटें और बैकअप प्लान का ध्यान रखना क्यों जरूरी?डीयू के पास छात्रों की कुल संख्या की तुलना में हॉस्टल सीटें काफी सीमित हैं। उदाहरण के लिए, किसी एक कोर्स या कैटेगरी के हिस्से में महज 2 से 5 सीटें ही आती हैं। ऐसे में अगर किसी कारणवश मेरिट लिस्ट में नाम नहीं आता है, तो छात्रों को पहले से ही कैंपस के आसपास (जैसे नॉर्थ या साउथ कैंपस) पेइंग गेस्ट (PG) या शेयरिंग फ्लैट्स का विकल्प तलाश कर रखना चाहिए। इसलिए, समय रहते सही दस्तावेजों के साथ आवेदन करना ही हॉस्टल पाने की संभावनाओं को मजबूत बनाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:35 pm

'मुझे बिना पूछे Kiss किया और फिर थप्पड़ मारा': सान्वी तलवार ने करण कुंद्रा पर लगाया गंभीर आरोप

टीवी इंडस्ट्री के चर्चित अभिनेताओं में शामिल करण कुंद्रा एक बार फिर अपनी पुरानी कंट्रोवर्सी को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। टीवी सीरियल 'ये कहां आ गए हम' में उनकी सह-कलाकार रहीं एक्ट्रेस सान्वी तलवार ने एक इंटरव्यू में सालों पुराना दर्द बयां किया है। सान्वी ने खुलासा किया कि शो की शूटिंग के दौरान करण कुंद्रा ने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया था और बिना सहमति के किस करने की कोशिश की थी।बिना 'क्यू' दिए Kiss और थप्पड़ का विवादसान्वी तलवार के मुताबिक, एक सीन की शूटिंग के दौरान निर्देशक के एक्शन या 'क्यू' बोलने से पहले ही करण कुंद्रा ने उन्हें जबरन किस कर दिया। इस अचानक हुई हरकत से आहत होकर जब सान्वी ने विरोध स्वरूप करण को थप्पड़ जड़ दिया, तो माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। सान्वी ने आरोप लगाया कि इसके 10-15 मिनट बाद करण वापस आए और उन्होंने पूरी यूनिट के सामने सान्वी को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वह जमीन पर गिर गईं।एकता कपूर की मध्यस्थता: सान्वी का दावा है कि इस घटना के बाद करण ने उन्हें और उनके माता-पिता को गालियां भी दीं। जब वह सेट छोड़कर जाने लगीं, तब शो की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने करण की तरफ से माफी मांगी और उन्हें काम जारी रखने के लिए मनाया।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:32 pm

शेख हसीना के वापसी के ऐलान से ढाका में हड़कंप, राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को हटाने की तैयारी में तारिक रहमान सरकार

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के साल के अंत तक बांग्लादेश लौटने के अचानक किए गए ऐलान ने ढाका के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। 79 वर्षीय हसीना के इस फैसले से तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी (BNP) सरकार में भारी बेचैनी देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने आनन-फानन में रणनीतिक कदम उठाते हुए राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को पद से हटाने का मन बना लिया है। राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकार ने उनसे अगस्त तक इस्तीफा देने को कहा है, हालांकि 2028 तक कार्यकाल होने के कारण राष्ट्रपति ने अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है।राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को पद से क्यों हटाना चाहती है बीएनपी सरकार?मोहम्मद शहाबुद्दीन को शेख हसीना का बेहद करीबी माना जाता है, जिन्हें 2023 में आवामी लीग की सरकार के दौरान इस पद पर बैठाया गया था। रहमान सरकार को आशंका है कि यदि शेख हसीना बांग्लादेश लौटती हैं, तो राष्ट्रपति अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर कानूनी व राजनीतिक रूप से कोई बड़ा दांव चल सकते हैं। इसके अलावा, बीएनपी सरकार चाहती है कि हाल ही में लंदन में दिल का ऑपरेशन करा चुके राष्ट्रपति अपनी खराब सेहत का हवाला देकर खुद ही पद छोड़ दें, ताकि किसी कानूनी विवाद से बचा जा सके।600 मुकदमों और फांसी की सजा के बावजूद हसीना के कड़े तेवरअगस्त 2024 के भारी तख्तापलट के बाद से भारत में रह रहीं शेख हसीना पर बांग्लादेश में 600 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और दर्जनों मामलों में मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका राजनीतिक संघर्ष थमा नहीं है और वे ढाका लौटकर अपनी पार्टी आवामी लीग की जमीन मजबूत करेंगी। इसी वापसी के खौफ ने मौजूदा सरकार की रातों की नींद उड़ा दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:28 pm

हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी की जमानत सुप्रीम कोर्ट से रद्द, 3 हफ्ते में सरेंडर का हुक्म

मेघालय में हनीमून के दौरान पति की हत्या के चर्चित मामले में आरोपी सोनम रघुवंशी को सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई उसकी जमानत को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोनम को तीन हफ्ते के भीतर अदालत में सरेंडर करने का कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस मोड़ पर आरोपी को जेल से बाहर रखने से मामले की निष्पक्ष सुनवाई और जारी जांच में रुकावट आ सकती है।हत्या के बाद गायब होना और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर अदालत की टिप्पणीशीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि वारदात के बाद से ही आरोपी सोनम गायब थी और उसके पास अपनी अनुपस्थिति की कोई ठोस वजह नहीं थी। बेंच ने साफ किया कि पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के समय आरोपी को हिरासत के कारणों की पर्याप्त जानकारी दी गई थी, इसलिए प्रक्रियात्मक खामी का हवाला देकर मेरिट पर जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि, अदालत ने यह राहत जरूर दी कि यदि अगले 6 महीनों के भीतर केस का ट्रायल आगे नहीं बढ़ता या पूरा नहीं होता है, तो आरोपी दोबारा जमानत के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र होगी।सुनवाई के दौरान रिश्तों और न्यूक्लियर फैमिली पर सुप्रीम कोर्ट की अहम चर्चामामले की सुनवाई के दौरान अदालत और सॉलिसिटर जनरल के बीच आधुनिक दौर के पारिवारिक रिश्तों पर भी गंभीर चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी जानकारी के मामले में तो आगे है, लेकिन मानसिक दबाव और तनाव झेलने के मामले में काफी कमजोर साबित हो रही है। अदालत ने माना कि पहले की संयुक्त परिवार प्रणाली (Joint Family System) में लोग त्याग और परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाना सीखते थे, जबकि एकल परिवारों (Nuclear Families) के बढ़ते चलन और गैजेट्स की निर्भरता के कारण लोगों में धैर्य की कमी आ रही है, जिसका असर व्यक्तिगत रिश्तों पर पड़ रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:27 pm

NEET Paper Leak Case: संजीव मुखिया को CBI से बड़ी राहत, जानिए जांच एजेंसी ने क्लीन चिट पर क्या कहा?

NEET-UG 2024 परीक्षा विवाद में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले के प्रमुख संदिग्ध माने जा रहे संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी है। जांच एजेंसी का स्पष्ट कहना है कि महीनों चली गहन पड़ताल के बाद भी संजीव मुखिया के खिलाफ पेपर चोरी या उसे बांटने की साजिश में शामिल होने का एक भी ठोस सबूत नहीं मिला है। CBI ने सोशल मीडिया पर चल रही उन तमाम अफवाहों को भी खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि आरोपी को जानबूझकर बचाया जा रहा है।शुरुआती FIR में क्यों जुड़ा था संजीव मुखिया का नाम?मामले की शुरुआत में बिहार पुलिस ने प्रश्नपत्र चोरी की प्राथमिक दर्ज की थी। संजीव मुखिया का अतीत में कुछ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में नाम आ चुका था, इसी संदेह के आधार पर पुलिस ने NEET-UG की शुरुआती FIR में उसका नाम भी शामिल कर लिया था। बाद में जब जांच CBI को सौंपी गई, तो एजेंसी ने पूरे रैकेट, प्रश्नपत्र चोरी करने वालों और इससे फायदा उठाने वाले गिरोह की गहराई से तफ्तीश की।जांच की मुख्य बात: CBI अब तक इस पूरे मामले में पटना की विशेष अदालत में 45 आरोपियों के खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, लेकिन इनमें संजीव मुखिया का नाम शामिल नहीं है।रिमांड पर पूछताछ और सीबीआई का आधिकारिक रुखफरारी के दौरान बिहार पुलिस द्वारा अन्य मामलों में गिरफ्तार किए जाने के बाद CBI ने संजीव मुखिया को पुलिस रिमांड पर लिया था। घंटों की पूछताछ, कॉल डिटेल्स की जांच और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालने के बाद भी एजेंसी को उसके खिलाफ कोई आपराधिक लिंक नहीं मिला। CBI के अनुसार, NEET मामले में जमानत मिलने के बाद भी वह बिहार पुलिस के अन्य मुकदमों के कारण न्यायिक हिरासत में ही रहा। एजेंसी ने साफ किया कि पूरी साजिश का पर्दाफाश हो चुका है और मुख्य अपराधियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, इसलिए संजीव मुखिया को बचाने का दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:25 pm

करनाल में बड़ा सियासी उलटफेर: बीजेपी जिला परिषद अध्यक्ष प्रवेश कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास

हरियाणा के करनाल जिले की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जिला परिषद अध्यक्ष प्रवेश कुमारी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हो गया है। अध्यक्ष पद को लेकर पिछले काफी समय से भीतरखाने चल रही खींचतान आखिरकार आज सतह पर आ गई और पार्षदों की खुली बगावत ने भाजपा को बड़ा झटका दिया है। जिला परिषद सभागार में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान विपक्षी और बागी पार्षदों ने एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाई, जिसके परिणामस्वरूप अध्यक्ष की कुर्सी छिन गई। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से पूरे जिले की सियासत गरमा गई है और आगामी राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है।17 पार्षदों की एकजुटता से पास हुआ अविश्वास प्रस्तावजिला परिषद के भीतर अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव पर जब वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हुई, तो आंकड़े हैरान करने वाले रहे। कुल 17 पार्षदों ने प्रवेश कुमारी के खिलाफ मतदान करते हुए उनके नेतृत्व पर अविश्वास जताया। जानकारों का कहना है कि लंबे समय से विकास कार्यों में अनदेखी और आंतरिक कलह के आरोप जिला परिषद के सदस्यों द्वारा लगाए जा रहे थे, जो आखिरकार इस बड़े राजनीतिक विद्रोह के रूप में बाहर आए। इतने भारी समर्थन के साथ प्रस्ताव के पास होने से यह साफ हो गया कि अधिकांश पार्षदों का मौजूदा अध्यक्ष से मोहभंग हो चुका था, जिसके चलते उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।भाजपा के लिए स्थानीय निकाय स्तर पर बड़ा झटकाप्रदेश में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी के लिए करनाल में जिला परिषद अध्यक्ष का पद इस तरह से छिन जाना एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों के लिहाज से इसे पार्टी के भीतर समन्वय की कमी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा भी तेज हो गई है कि अब जिला परिषद के नए अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए जोड़-तोड़ और राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू होगा। विपक्षी दल इस मौके को भुनाने में जुट गए हैं, जबकि स्थानीय भाजपा संगठन इस पूरे घटनाक्रम के बाद आंतरिक समीक्षा करने में व्यस्त हो गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:18 pm

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में गरमाया स्वास्थ्य कर्मियों का पारा: ठेका प्रथा पूरी तरह खत्म करने की उठी जोरदार मांग

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दूरदराज के जिले बीजापुर में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा है। संविदा और ठेका प्रथा के खिलाफ लामबंद हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बेहद संवेदनशील सेवा में भी ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग सिस्टम लागू होना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर इन कर्मचारियों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक सख्त ज्ञापन सौंपा है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।स्वास्थ्य सेवाओं में ठेका प्रथा से कर्मचारियों का हो रहा शोषणप्रदर्शन कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों और विभिन्न संघों के प्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेका प्रथा के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को न तो समय पर उचित मानदेय मिल पाता है और न ही उन्हें किसी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा लाभ या बीमा की सुविधा मिलती है। कम वेतन में भारी काम करवाने और जॉब सिक्योरिटी न होने के कारण इन कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है। कोरोना काल समेत हर आपदा के वक्त अपनी जान हथेली पर रखकर जनता की सेवा करने वाले ये कर्मचारी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक इस अन्यायपूर्ण ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर उन्हें नियमित नहीं किया जाता, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन, बड़े आंदोलन की चेतावनीबीजापुर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि राज्य सरकार तुरंत इस मामले में संज्ञान ले और स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग या ठेके पर कर्मचारियों की भर्ती बंद करे। कर्मचारियों ने सरकार को दो टूक अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे प्रदेश स्तर पर काम बंद हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमरा सकती हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:16 pm

छत्तीसगढ़ में सियासी संग्राम उग्र: बीजेपी-कांग्रेस के टकराव के बीच 12 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में राजनीतिक पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। सत्ताधारी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच चल रहा टकराव अब सड़कों पर हिंसक झड़प का रूप ले चुका है। हाल ही में एक बड़े राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। इस दौरान उग्र भीड़ द्वारा पुलिस बल पर पथराव करने और कांच की बोतलें फेंकने की गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें कुछ सुरक्षाकर्मियों के चोटिल होने की भी खबर है। इस भारी उपद्रव और कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने के मामले में पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कांग्रेस के 12 प्रमुख नेताओं समेत कई अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है और दोनों दल एक-दूसरे पर हमलावर हैं।कैसे भड़का विवाद और क्यों उग्र हुआ प्रदर्शन?प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसी स्थानीय या जनहित के बड़े मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी की ओर से एक बड़ा विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन का यह सिलसिला देखते ही देखते उस वक्त हिंसक हो गया जब कार्यकर्ताओं ने तयशुदा बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की। पुलिस ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया तो माहौल गर्मा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों की भीड़ में से कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिसकर्मियों पर लाठी-डंडों के साथ-साथ कांच की बोतलें और पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरातफरी मच गई और पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।12 नामजद कांग्रेस नेताओं और अन्य पर गंभीर धाराओं में केस दर्जघटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करनी शुरू कर दी है। पुलिस ने कानून अपने हाथ में लेने और सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप में कांग्रेस के 12 नामजद दिग्गज नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और वर्दीधारी कर्मचारियों पर इस तरह का जानलेवा हमला करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस कानूनी कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और विपक्षी नेता इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बता रहे हैं।राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज, प्रशासन अलर्ट परइस हिंसक घटना के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति पूरी तरह गरम हो गई है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के नेता कानून और संविधान का सम्मान करना भूल चुके हैं और वे अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने से बौखलाकर उपद्रव पर उतर आए हैं। वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पुलिस प्रशासन पर सत्ता के दबाव में काम करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दमनात्मक कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है। सूबे में बढ़ते इस राजनीतिक तनाव को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 2:15 pm

स्पेस में भारत का Axiom-4 मिशन क्यों है खास, एलन मस्क के स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल से होगी वापसी

भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम (Gaganyaan Programme) और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के निर्माण की दिशा में Axiom-4 (Ax-4) मिशन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध हुआ है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर भारत के गगनयात्री (भारतीय अंतरिक्ष ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 2:00 pm

कोई मंत्री इस्तीफा देता है, तो इससे पूरी सरकार नहीं गिर जाएगी : अन्ना हजारे

अहिल्यानगर/मुंबई। वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने नीट पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा है अगर जवाबदेही तय की जाती है और मंत्री इस्तीफा देते हैं, तो इससे पूरी सरकार नहीं गिर जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्र पिछले 25 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान […] The post कोई मंत्री इस्तीफा देता है, तो इससे पूरी सरकार नहीं गिर जाएगी : अन्ना हजारे appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 23 Jul 2026 1:49 pm

समय और तारीख तय करे विपक्ष, पेपर लीक पर चर्चा के लिए सरकार तैयार : किरेन रिजिजू

मानसून सत्र के चौथे दिन भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नीट पेपर लीक मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ गए। गुरुवार को लोकसभा में शून्यकाल शुरू होने पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने फिर से अपील की कि विपक्ष समय और तारीख तय करे, सरकार पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

देशबन्धु 23 Jul 2026 1:37 pm

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगा प्रदर्शन, किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे: अभिजीत दिपके

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बीच सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने गुरुवार को कहा कि यह प्रदर्शन किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा और उनकी सभी मांगें पहले की तरह कायम हैं। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन ऐसे ही चलेगा। उन्होंने कहा कि साथ ही उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील भी की।

देशबन्धु 23 Jul 2026 1:22 pm

थर्ड डिवीजन पास टॉपर: सीएम योगी आदित्यनाथ ने खोल दी अखिलेश यादव के कार्यकाल की पुरानी कुंडली

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से जातिगत आरक्षण, भाई-भतीजेवाद और पुरानी नियुक्तियों को लेकर घमासान छिड़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उनके कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों की पोल खोल दी है। सीएम योगी ने एक सार्वजनिक मंच से चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए दावा किया कि पिछली सरकारों के दौरान किस तरह से चयन आयोगों में धांधली की जाती थी और भाई-भतीजावाद हावी रहता था। मुख्यमंत्री के इन बयानों और पुरानी फाइलों से पर्दा उठाने के बाद से सूबे की सियासत में भूचाल आ गया है और दोनों दलों के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।चयन आयोगों में धांधली और एक ही जाति के अधिकारियों का बोलबालामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों के कामकाज की शैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने विशेष तौर पर एक पुरानी चयन सूची का जिक्र करते हुए कहा कि एक विशेष भर्ती प्रक्रिया के दौरान चुने गए कुल 86 एसडीएम में से अकेले 56 अधिकारी एक ही जाति या परिवार विशेष से ताल्लुक रखते थे। सीएम ने आरोप लगाया कि किस प्रकार पूरी चयन प्रणाली को हाईजैक कर लिया गया था और योग्यता को दरकिनार करके चुनिंदा लोगों को बड़े प्रशासनिक पदों पर बैठाया गया था। इस खुलासे के बाद से प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि कैसे एक ही वर्ग के लोगों को मलाईदार पद बांटे गए।थर्ड डिवीजन पास छात्र के टॉपर बनने पर भी उठाए सवालभ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस दौर में ऐसे अजीबोगरीब वाकये सामने आते थे जहां अकादमिक रिकॉर्ड में थर्ड डिवीजन से पास होने वाला छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे टॉप कर जाता था। सीएम योगी ने कहा कि बिना किसी योग्यता और मेरिट के बंदरबांट करने वाली ऐसी व्यवस्थाओं ने प्रदेश के मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आने के बाद लोक सेवा आयोग और अन्य चयन बोर्डों में पूरी पारदर्शिता लाई गई है ताकि केवल योग्य युवाओं को ही उनका हक मिल सके।राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप, सपा और बीजेपी आमने-सामनेइन सनसनीखेज खुलासों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा हाई हो गया है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे के जरिए विपक्ष पर जातिवाद और परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी इन दावों को राजनीतिक स्टंट करार दे रही है। आगामी चुनावों के मद्देनजर पुराने इतिहास को कुरेदकर जनता के बीच रखना दोनों दलों की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुका है। बहरहाल, 86 में से 56 एसडीएम और टॉपर के चयन से जुड़ा यह मामला एक बार फिर से बहस के केंद्र में आ गया है और हर कोई इसके सियासी नफा-नुकसान का आकलन करने में जुटा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:57 pm

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

Ram Mandir Trust Meeting: ​अयोध्या स्थित श्री मणिराम दास छावनी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। प्रमुख साधु-संतों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में राम ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 12:57 pm

रामपुर की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का बदलेगा नाम? योगी सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक की चर्चा तेज

उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक बड़े और संभावित फैसले को लेकर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है। रामपुर की शान कही जाने वाली और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान से जुड़ी बहुचर्चित 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' (Mohammad Ali Jauhar University) के नाम को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार जल्द ही एक बड़ा और निर्णायक कदम उठा सकती है। सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए और छात्रों तथा स्थानीय युवाओं की नाराजगी से बचने के लिए राज्य सरकार इस संस्थान के नाम परिवर्तन या इसके संचालन को लेकर कोई बड़ा कानूनी और प्रशासनिक फैसला ले सकती है। इस संभावित कदम को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो चुकी है, जिससे यह मुद्दा एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में आ गया है।जौहर यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की चर्चा क्यों तेज हुई?रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी अपनी स्थापना के समय से ही किसी न किसी वजह से विवादों और चर्चा में रही है। पिछले कुछ वर्षों में इस विश्वविद्यालय से जुड़े कई मामलों पर प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी पेंच फंसे रहे हैं। अब राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियों के बीच सरकार इस बात पर गंभीरता से विचार कर रही है कि किस प्रकार इस संस्थान के जरिए युवाओं और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखते हुए राजनीतिक समीकरणों को साधा जाए। यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की इन चर्चाओं ने एक बार फिर से रामपुर के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है और हर कोई यह जानना चाहता है कि इसके पीछे सरकार की अगली बड़ी रणनीति क्या होगी।यूपी चुनाव और छात्रों के मुद्दों पर टिकी सबकी निगाहेंकिसी भी चुनाव में युवा वर्ग और छात्र समुदाय की नाराजगी किसी भी सत्ताधारी दल के लिए भारी पड़ सकती है। जौहर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले हजारों छात्र और स्थानीय युवा इस बात को लेकर लंबे समय से चिंतित रहे हैं कि इन राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों के बीच उनके करियर और डिग्री की वैधता पर कोई संकट न आए। यही वजह है कि योगी सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि एक तरफ जहां नियमों का कड़ाई से पालन हो सके, वहीं दूसरी तरफ छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोई ऐसा संतुलित निर्णय लिया जाए जिससे किसी भी प्रकार के असंतोष से बचा जा सके।राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की राहइस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों की पैनी नजर बनी हुई है। समाजवादी पार्टी और अन्य विरोधी दल इस संभावित फैसले को राजनीतिक बदले की भावना से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष का यह तर्क है कि कानून और व्यवस्था तथा नियमों के दायरे में रहकर ही सभी संस्थानों का संचालन किया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ले सकता है, क्योंकि रामपुर और आसपास के जिलों में इस यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले का सीधा असर चुनावी नफा-नुकसान पर पड़ना तय माना जा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:55 pm

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का 90 वर्ष की आयु में निधन: पांच बार रहे विधायक

उत्तर प्रदेश की राजनीति से इस वक्त एक बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे आलम बदी आज इस दुनिया में नहीं रहे। करीब 90 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है और उनके समर्थकों में भारी मायूसी छा गई है। अपनी पूरी जिंदगी में राजनीति को जनसेवा का माध्यम मानने वाले आलम बदी अपनी बेदाग छवि और सादगी भरी जीवनशैली के लिए जाने जाते थे। उनके निधन को उत्तर प्रदेश की राजनीति और खासकर समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है, क्योंकि वे जनता के बीच बेहद लोकप्रिय और जमीन से जुड़े हुए नेता थे।राजनीति में लंबी पारी: पांच बार संभाली विधायक की जिम्मेदारीआलम बदी का राजनीतिक सफर संघर्ष और जनसेवा की एक बेहतरीन मिसाल रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में जनता के अधिकारों के लिए लगातार लड़ाई लड़ी और अपनी मजबूत पकड़ के दम पर कुल पांच बार विधानसभा पहुंचे। वे जब भी चुनाव मैदान में उतरे, जनता ने उन पर भरपूर भरोसा जताया। विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर उन्होंने हमेशा आम जनता, गरीबों और पिछड़ों के मुद्दों को पूरी मुखरता के साथ उठाया। उनकी कार्यशैली और जनता के प्रति समर्पण भाव ने उन्हें क्षेत्र का एक ऐसा राजनेता बना दिया था, जिससे हर दल के लोग सम्मान से देखते थे।सादगी ही थी उनकी सबसे बड़ी पहचान और ताकतआज के दौर में जहां राजनीति और रहन-सहन में चकाचौंध आम बात हो चुकी है, वहीं आलम बदी इसके ठीक विपरीत अपनी सादगी के लिए मिसाल पेश करते थे। वे एक साधारण जीवन जीते थे और हमेशा आम आदमी की पहुंच में रहते थे। बिना किसी बड़े तामझाम या दिखावे के जनता के बीच रहना और उनकी समस्याओं का समाधान करना उनकी फितरत में शुमार था। उनकी इसी सादगी और इमानदार छवि के कारण विरोधी भी उनका आदर करते थे। उनके जाने से एक ऐसा राजनीतिक अध्याय समाप्त हो गया है जो सिद्धांतों और जनसेवा की नींव पर टिका हुआ था।राजनीतिक जगत में शोक की लहर, नेताओं ने दी श्रद्धांजलिआलम बदी के निधन की सूचना मिलते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत तमाम दिग्गजों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पार्टी कार्यालयों में उनके सम्मान में शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। उनके पैतृक आवास और क्षेत्र में उनके अंतिम दर्शन के लिए समर्थकों का तांता लगा हुआ है। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा किए गए जनहित के काम और उनकी सादगी की यादें हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:54 pm

चेहरे के दाग-धब्बों और पिंपल्स ने छीन लिया है ग्लो? डर्मेटोलॉजिस्ट के इन असरदार नुस्खों से लौट आएगा नेचुरल निखार

आज के भागदौड़ भरे लाइफस्टाइल, बढ़ते प्रदूषण और खानपान की गड़बड़ियों के कारण चेहरे पर पिंपल्स, एक्ने और डार्क स्पॉट्स होना एक आम समस्या बन चुका है। युवावस्था से लेकर हर उम्र के लोग चेहरे के काले धब्बों और जिद्दी कील-मुहासों से परेशान रहते हैं। बाजार में मिलने वाले महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स और विज्ञापनों पर हजारों रुपये खर्च करने के बावजूद जब चेहरे पर मनचाहा ग्लो और चमक नहीं दिखती, तो निराशा हाथ लगती है। यदि आप भी चेहरे की इन तमाम समस्याओं से तंग आ चुके हैं, तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। जाने-माने स्किन एक्सपर्ट्स और डर्मेटोलॉजिस्ट्स का मानना है कि सही स्किन केयर रूटीन और कुछ प्राकृतिक उपायों को अपनाकर आप घर बैठे ही बेदाग, साफ और खूबसूरत त्वचा पा सकते हैं। आइए जानते हैं पिंपल्स और काले धब्बों से छुटकारा पाने के कुछ बेहद असरदार और वैज्ञानिक तरीके।चेहरे पर पिंपल्स और काले धब्बे उभरने के मुख्य कारणत्वचा पर पिंपल्स और डार्क स्पॉट्स अचानक पैदा नहीं होते, बल्कि इसके पीछे हमारी दैनिक जीवन से जुड़ी कई वजहें जिम्मेदार होती हैं:त्वचा की सही से सफाई न करना: चेहरे पर धूल-मिट्टी, पसीना और प्रदूषण जमा होने से रोमछिद्र (Pores) बंद हो जाते हैं, जो आगे चलकर पिंपल्स का रूप ले लेते हैं।हार्मोनल असंतुलन: शरीर में हॉर्मोन्स के बदलाव के कारण भी तैलीय त्वचा वाले लोगों में एक्ने की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती है।गलत स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल: अपनी स्किन टाइप को जाने बिना रासायनिक उत्पादों का प्रयोग करने से त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचता है।अस्वास्थ्यकर खानपान: ज्यादा तली-भुनी चीजें, जंक फूड और पानी कम पीने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते, जिसका असर सीधे चेहरे पर दिखाई देता है।डर्मेटोलॉजिस्ट के बताए गए असरदार घरेलू और मेडिकल उपायत्वचा को अंदर से स्वस्थ और साफ बनाने के लिए एक्सपर्ट्स कुछ खास आदतों को अपनाने की सलाह देते हैं:जेंटल क्लींजर का करें इस्तेमाल: दिन में कम से कम दो बार किसी माइल्ड या सैलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश से चेहरा धोएं, ताकि अतिरिक्त तेल और गंदगी साफ हो सके।हाइड्रेशन का रखें पूरा ख्याल: रोजाना कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। पानी शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर त्वचा में नेचुरल चमक बनाए रखता है।धूप से बचाव (Sunscreen): घर से बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी का सनस्क्रीन लगाना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि सूरज की हानिकारक यूवी किरणें काले धब्बों और पिगमेंटेशन को और ज्यादा गहरा कर देती हैं।प्राकृतिक फेस पैक का प्रयोग: हफ्ते में एक या दो बार मुल्तानी मिट्टी, नीम पाउडर या एलोवेरा जेल से बने नेचुरल फेस पैक का इस्तेमाल करें, जो त्वचा की सूजन को कम करने में मदद करते हैं।इन आदतों को बदलकर पा सकते हैं लंबे समय तक बेदाग त्वचात्वचा की देखभाल केवल बाहरी क्रीम लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए लाइफस्टाइल में भी थोड़े बदलाव करने जरूरी हैं। अपने खान-पान में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और विटामिन-सी से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इसके अलावा पूरी नींद लें, क्योंकि तनाव और कम सोने से भी चेहरे की रौनक फीकी पड़ने लगती है। यदि पिंपल्स की समस्या बहुत ज्यादा गंभीर है और दाग गहरे हो चुके हैं, तो किसी सर्टिफाइड डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेकर केमिकल पील या सही मेडिकल ट्रीटमेंट जरूर करवाएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:52 pm

ऑफिस में घंटों बैठना और गलत तकिया बन सकता है मुसीबत: गर्दन के दर्द को न करें नजरअंदाज

आज के भागदौड़ भरे लाइफस्टाइल में डेस्क जॉब या कंप्यूटर के सामने लगातार घंटों बैठे रहने की आदत लोगों के लिए एक आम बात बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी आदत आपकी सेहत पर कितना भारी पड़ सकती है? आजकल कम उम्र के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में सर्वाइकल पेन (Cervical Pain) यानी गर्दन और कंधे के दर्द की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ऑफिस में गलत पोश्चर में लंबे समय तक काम करना और रात को सोते समय बहुत ऊंचा तकिया लगाना इस समस्या को और ज्यादा गंभीर बना देता है। अगर समय रहते गर्दन के इस दर्द के कारणों को न समझा जाए और जीवनशैली में सुधार न किया जाए, तो यह परेशानी भविष्य में भयंकर रूप ले सकती है। आइए जानते हैं सर्वाइकल पेन बढ़ने के पीछे की 5 मुख्य वजहें और इससे राहत पाने के कुछ आसान घरेलू उपाय।सर्वाइकल पेन बढ़ने की 5 प्रमुख और चौंकाने वाली वजहेंगर्दन और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी यह समस्या अचानक पैदा नहीं होती, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ बुरी आदतें इसके लिए जिम्मेदार होती हैं:लंबे समय तक गलत पोश्चर में बैठना: ऑफिस या घर में कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करते समय झुककर बैठना या गर्दन को लगातार एक ही एंगल में झुकाए रखना सर्वाइकल का सबसे बड़ा कारण है।बहुत ऊंचा या सख्त तकिया इस्तेमाल करना: सोते समय गलत मोटाई या बहुत ज्यादा ऊंचा तकिया लगाने से गर्दन की मांसपेशियां रात भर खिंची रहती हैं, जिससे सुबह उठने पर भयंकर जकड़न और दर्द होता है।मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल (Text Neck): आज के समय में लोग घंटों सिर झुकाकर मोबाइल फोन की स्क्रीन पर लगे रहते हैं, जिससे गर्दन के पीछे की नसों और हड्डियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।शारीरिक गतिविधि और एक्सरसाइज की कमी: बिल्कुल भी कसरत न करने से गर्दन और कंधे की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे वे वजन और तनाव सहन नहीं कर पाती हैं।तनाव और मानसिक चिंता: अत्यधिक मानसिक तनाव या एंग्जाइटी के कारण शरीर की मांसपेशियां विशेषकर कंधे और गर्दन के हिस्से में सिकुड़ने लगती हैं, जिससे दर्द उभर आता है।सर्वाइकल पेन से राहत पाने के आसान और असरदार घरेलू उपाययदि आपको भी अक्सर गर्दन में खिंचाव या दर्द महसूस होता है, तो इन घरेलू नुस्खों से पा सकते हैं तुरंत आराम:सिकाई (Hot and Cold Compress): दर्द वाले हिस्से पर दिन में दो से तीन बार गर्म पानी की थैली या आइस पैक से सिकाई करें। इससे मांसपेशियों की जकड़न दूर होती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।हल्की स्ट्रेचिंग और योग: काम के बीच में थोड़ा ब्रेक लें और गर्दन को धीरे-धीरे आगे-पीछे और दाएं-बाएं घुमाएं। इसके अलावा भुजंगासन जैसे योगासन करने से गर्दन को मजबूती मिलती है।सही पोश्चर और आर्थोपेडिक तकिए का इस्तेमाल: सोते समय हमेशा गर्दन को सपोर्ट देने वाले सर्जिकल या आर्थोपेडिक तकिए का ही प्रयोग करें और बैठते समय अपनी पीठ को हमेशा सीधा रखें।तेल से मालिश: गुनगुने सरसों या महानारायण तेल से हल्के हाथों से गर्दन और कंधों की मालिश करने से मांसपेशियों का तनाव कम होता है और दर्द में बहुत राहत मिलती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:50 pm

त्रेता युग में क्या भोजन करते थे भगवान श्री राम? वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में छिपे हैं उनके खान-पान से जुड़े बड़े राज

सनातन धर्म के आराध्य और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और उनके पराक्रम के बारे में तो हर कोई जानता है, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता सीता अपनी दिनचर्या में क्या खाते थे? आज के आधुनिक दौर में जहां लोग चटपटे, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड के शौकीन हैं, वहीं हमारे पौराणिक ग्रंथों में भगवान श्री राम के सात्विक और प्राकृतिक खान-पान का बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक वर्णन मिलता है। महर्षि वाल्मीकि की रामायण और गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के पन्नों को पलटने पर पता चलता है कि प्रभु श्रीराम का भोजन बेहद साधारण, शुद्ध और प्रकृति के करीब था, जो उनके संयमित जीवन और उच्च विचारों का प्रतीक था। आइए जानते हैं कि त्रेता युग में भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता अपने भोजन में किन चीजों का सेवन करते थे।महर्षि वाल्मीकि की रामायण में मिलता है भोजन का प्रामाणिक विवरणवाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड और अरण्य कांड में भगवान राम के वनवास के दिनों का बहुत ही सूक्ष्मता से वर्णन किया गया है। जब प्रभु राम ने पिता के वचनों का पालन करते हुए चौदह वर्षों के लिए महलों के सुख-सुविधाओं का त्याग किया और वनों की ओर प्रस्थान किया, तो उनका शाही खान-पान पूरी तरह बदल गया। महलों में जहां छप्पन भोग और राजसी पकवान उपलब्ध होते थे, वहीं जंगलों में उनका जीवन पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर हो गया। वे और उनके भाई लक्ष्मण जंगलों से मिलने वाले कंदमूल और फलों को ही अपना मुख्य आहार बनाते थे।कंदमूल, फल और सात्विक आहार ही था मुख्य भोजनग्रंथों के अनुसार, भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जंगलों में घूमकर बेर, जामुन, आम, कटहल, पपीता और विभिन्न प्रकार के जंगली कंदमूल (जमीन के अंदर उगने वाले फल-मूल) एकत्रित करते थे। उस दौर में खान-पान पूरी तरह मौसमी और शुद्ध रूप से ऑर्गेनिक होता था। वे किसी भी जीव को कष्ट दिए बिना केवल प्राकृतिक रूप से मिलने वाले वनफलों पर ही निर्भर रहते थे। भोजन पकाने के लिए वे जंगलों में लकड़ियां इकट्ठा कर ऋषि-मुनियों की तरह सात्विक तरीके से भोजन तैयार करते थे या कई बार कच्चे फल-मूल खाकर ही अपनी क्षुधा शांत कर लेते थे।राजमहलों में कैसा था श्रीराम का खान-पान?जब भगवान राम अयोध्या के राजकुमार थे, तब भी उनका भोजन बहुत अधिक विलासितापूर्ण नहीं, बल्कि राजर्षि परंपरा के अनुसार अत्यंत सात्विक और ऊर्जावान होता था। महलों में उन्हें गाय के शुद्ध दूध, दही, घी, शहद, और विभिन्न प्रकार के धान्य (अनाज) से बने पकवान परोसे जाते थे। भगवान राम हमेशा संतुलित और कम आहार ग्रहण करते थे, जो उनके शारीरिक और मानसिक संतुलन का मुख्य आधार था। उनका यह खान-पान यह सिखाता है कि जीवन में संयम और सादगी अपनाकर ही दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:48 pm

सावन में इस दिन है नाग देवता की पूजा का महासंयोग, नोट कर लें काल सर्प दोष निवारण का सिर्फ ढाई घंटे का खास मुहूर्त

सावन के पवित्र महीने में आने वाले पर्व-त्योहारों का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना गया है। शिव आराधना के इस पावन काल में आने वाली 'नाग पंचमी' (Nag Panchami 2026) का पर्व प्रकृति, जीव-जंतुओं और भगवान शिव के प्रति आस्था का एक अनूठा संगम है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता और भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। खासकर जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु की महादशा चल रही है, उनके लिए यह दिन सभी कष्टों से मुक्ति पाने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। इस साल नाग पंचमी की सही तारीख और पूजा के लिए केवल ढाई घंटे का सबसे दुर्लभ और शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, आइए जानते हैं इसकी पूरी विस्तृत जानकारी।कब है नाग पंचमी 2026? नोट करें सही तिथिवैदिक पंचांग के मुताबिक, सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ और समापन इस प्रकार निर्धारित किया गया है कि भक्त विधि-विधान से नाग देवताओं का पूजन कर सकें। नाग पंचमी के दिन देश भर के प्रसिद्ध नाग मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और लोग नाग देवता को दूध, दूर्वा, अक्षत और फूल अर्पित कर आशीर्वाद मांगते हैं। इस पावन अवसर पर विशेष रूप से उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट भी खुलते हैं, जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।पूजा के लिए सिर्फ ढाई घंटे का विशेष मुहूर्तज्योतिष आचार्यों के अनुसार, नाग पंचमी के दिन पूजा-पाठ और कालसर्प दोष की शांति के लिए ग्रहों की स्थिति बेहद अनुकूल रहने वाली है। इस दिन पूजा के लिए केवल करीब ढाई घंटे का अत्यंत ही शुभ और फलदायी मुहूर्त प्राप्त हो रहा है। इस निश्चित समयावधि के दौरान विधि-विधान से शिव जी और नाग देवता की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। जानकारों का कहना है कि जो जातक इस विशेष मुहूर्त में रुद्राभिषेक या नाग देवता की पूजा करते हैं, उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता और जीवन में आ रही समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं।काल सर्प दोष मुक्ति और पूजा के विशेष उपायजिन लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष या पितृ दोष होता है, उनके लिए नाग पंचमी का दिन किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें और तांबे या चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा मंदिर में अर्पित करें। इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र या 'ॐ कुरुभ्यः नमः' का जाप करना बेहद लाभकारी माना जाता है। इस दिन किसी भी नाग या सांप को नुकसान न पहुंचाने का संकल्प लें और प्रकृति की रक्षा का संदेश अपनाएं, जिससे भोलेनाथ अति शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वरदान देते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:47 pm

सावन के पवित्र महीने में घर ले आएं ये 3 चमत्कारी पौधे: भोलेनाथ की असीम कृपा से बरसेगी बरकत और आएगी सुख-समृद्धि

पवित्र सावन का महीना चल रहा है और इस पूरे महीने में देवों के देव महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू धर्म में सावन के इस पावन काल को साधना, आराधना और प्रकृति से जुड़ने का सबसे उत्तम समय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दौरान घर के आंगन या बालकनी में कुछ खास और शुभ पौधे लगाए जाएं, तो न केवल भगवान शिव प्रसन्न होते हैं बल्कि घर की नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में ऐसे 3 विशेष पौधों का जिक्र किया गया है जिन्हें सावन के महीने में लगाना बेहद फलदायी माना जाता है। इन पौधों को घर में लाने मात्र से भोलेनाथ की विशेष कृपा बरसती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि व खुशहाली का वास होता है। आइए जानते हैं कौन से हैं वे 3 चमत्कारी पौधे।1. बेलपत्र का पौधा: भगवान शिव को सबसे प्रियहिन्दू धर्म और सावन मास में बेलपत्र का पौधा (Bel Patra Plant) सबसे ज्यादा पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान शिव की पूजा बिना बेलपत्र के अधूरी मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में बेलपत्र का पौधा लगा होता है, वहां पर माता लक्ष्मी और भगवान शिव का वास हमेशा बना रहता है। सावन के महीने में घर में बेलपत्र का पौधा लगाना या उसकी नियमित रूप से सेवा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और घर के सदस्यों पर भोलेनाथ की असीम अनुकंपा बनी रहती है। इसे हमेशा घर के उत्तर-पश्चिम कोने में लगाना सबसे शुभ माना गया है।2. शमी का पौधा: शनि दोष से मुक्ति और ऐश्वर्य का प्रतीकशमी के पौधे (Shami Plant) का संबंध भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव से भी जोड़ा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भोलेनाथ को शमी के पत्ते अर्पित करने से वे अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं। सावन के महीने में शमी का पौधा घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना बहुत ही शुभ फल देता है। यह पौधा न केवल घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है, बल्कि घर में कलह-क्लेश को समाप्त कर आपसी प्रेम और सुख-शांति को बढ़ावा देता है। सावन में शमी का पौधा लगाने से बिजनेस और नौकरी में तरक्की के रास्ते भी खुलते हैं।3. श्वेतार्क (सफेद आक) का पौधा: साक्षात भगवान गणेश और शिव का वासश्वेतार्क या सफेद मदार (White Arka Plant) का पौधा भगवान शिव को बेहद प्रिय है और इसे बहुत ही चमत्कारी माना जाता है। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि श्वेतार्क के पौधे की जड़ में स्वयं भगवान गणेश और शिव जी का वास होता है। सावन के महीने में इस पौधे को घर के पास या गमले में लगाने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। यह पौधा घर की रक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी नजर या तांत्रिक बाधाओं से परिवार की रक्षा करता है। हालांकि, इसे लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसमें से निकलने वाला दूधिया रस आंखों में न जाए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:46 pm

पूर्व अग्निवीरों के लिए बंपर खुशखबरी: BSF, CRPF और CISF की भर्तियों में मिलेगा सीधा 50% आरक्षण

देश की सेवा के बाद भविष्य को लेकर चिंता करने वाले पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद राहत भरा कदम उठाया है। सशस्त्र बलों से अपनी सेवा पूरी कर बाहर आने वाले अग्निवीरों को अब देश के प्रमुख अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) में रोजगार के सुनहरे अवसर मिलने जा रहे हैं। सरकार की नीति के तहत अब सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) समेत अन्य प्रमुख सुरक्षा बलों की कॉन्स्टेबल और अन्य पदों पर होने वाली भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए भारी-भरकम 50 प्रतिशत (50%) आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया गया है। इस बड़े फैसले से उन युवाओं को सीधा फायदा मिलेगा जो 'अग्निवीर' योजना के तहत अपनी तय सेवा अवधि पूरी कर चुके हैं और अर्धसैनिक बलों में शामिल होकर देश सेवा जारी रखना चाहते हैं।अर्धसैनिक बलों में अग्निवीरों के लिए नई राह और नियमकेंद्र सरकार के इस नए फैसले के तहत BSF, CRPF, CISF और ITBP जैसे केंद्रीय बलों में भविष्य की नियुक्तियों के दौरान पूर्व अग्निवीरों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस आरक्षण नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो युवा सेना में कड़े प्रशिक्षण और अनुशासन के बीच अपनी सेवाएं दे चुके हैं, उनके बेहतरीन अनुभव और हुनर का देश की आंतरिक सुरक्षा और अन्य रक्षात्मक मोर्चों पर पूरा इस्तेमाल किया जा सके। इसके साथ ही, सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए ऊपरी आयु सीमा में भी विशेष छूट देने का प्रावधान किया है, ताकि वे आसानी से इन नौकरियों के लिए योग्य साबित हो सकें और उन्हें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा का सामना न करना पड़े।देश के युवाओं और पूर्व अग्निवीरों के लिए क्यों है यह बड़ा कदम?जब से 'अग्निवीर' योजना की शुरुआत हुई थी, तब से इसके भविष्य और सेवा समाप्ति के बाद युवाओं के रोजगार को लेकर कई तरह की चर्चाएं और राजनीतिक सवाल उठ रहे थे। सरकार का यह कदम उन तमाम चिंताओं का एक ठोस और दूरदर्शी जवाब माना जा रहा है। इस व्यवस्था से न केवल पूर्व अग्निवीरों का करियर सुरक्षित होगा, बल्कि अर्धसैनिक बलों को भी अनुशासित, प्रशिक्षित और शारीरिक रूप से बेहद फिट सैनिक तुरंत मिल सकेंगे, जिन्हें बेसिक ट्रेनिंग पर ज्यादा वक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। देश के युवाओं के बीच इस फैसले को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है और इसे रक्षा मंत्रालय व गृह मंत्रालय का एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।आगे की प्रक्रिया और भर्ती से जुड़ी जरूरी बातेंअर्धसैनिक बलों में इस 50% आरक्षण का लाभ उठाने के लिए पूर्व अग्निवीरों को निर्धारित शारीरिक, चिकित्सीय और लिखित परीक्षाओं के मानकों को पूरा करना होगा, हालांकि उनके पिछले सैन्य अनुभव को देखते हुए कई चरणों में उन्हें विशेष छूट या प्राथमिकता दी जाएगी। जो युवा अपनी चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं या करने वाले हैं, वे इन आगामी भर्तियों के लिए आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं और अपनी तैयारी को धार दे सकते हैं। सरकार के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि देश की रक्षा करने वाले वीरों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित और उज्ज्वल हाथों में है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:37 pm

डीयू में नए सेशन से पहले रैगिंग के खिलाफ कड़ा पहरा: प्रशासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ठीक पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन ने परिसरों में रैगिंग जैसी असामाजिक गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए कमर कस ली है। हर साल नए सत्र में देश भर से आने वाले हजारों नए छात्रों को किसी भी तरह की मानसिक या शारीरिक परेशानी से बचाने के लिए डीयू प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। रैगिंग मुक्त कैंपस सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय ने विशेष एंटी-रैगिंग सेल को सक्रिय कर दिया है और इसके साथ ही एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं, ताकि कोई भी छात्र जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मांग सके। प्रशासन के इस कड़े रुख से सीनियर्स में भी स्पष्ट संदेश चला गया है कि कैंपस में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी कार्रवाई की जाएगी।क्या हैं डीयू प्रशासन के नए निर्देश और एंटी-रैगिंग उपाय?दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों और विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने परिसरों में एंटी-रैगिंग कमेटियों का गठन करें और उनकी सक्रियता बनाए रखें। नए छात्रों के स्वागत और उनकी सुरक्षा के लिए हर कॉलेज के मुख्य द्वार और हॉस्टल्स के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, छात्रों को जागरूक करने के लिए कैंपस की दीवारों और नोटिस बोर्ड्स पर एंटी-रैगिंग नियमों से जुड़े पोस्टर लगाए जा रहे हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए छात्रों का कॉलेज का पहला दिन बिना किसी डर या संकोच के एक खुशनुमा माहौल में बीते।किसी भी आपात स्थिति के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरछात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए डीयू ने 24 घंटे काम करने वाले हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी जारी किए हैं। यदि किसी भी छात्र के साथ रैगिंग, बदसलूकी या अनावश्यक दबाव बनाने जैसी कोई भी घटना होती है, तो वह बिना डरे तुरंत इन नंबरों पर संपर्क कर सकता है। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि शिकायत करने वाले छात्र की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और दोषी पाए जाने वाले सीनियर छात्रों या परिसरों के भीतर अनुशासनहीनता करने वालों पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।नए छात्रों के लिए जरूरी सलाह और आत्मविश्वास का संदेशविश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने नए सत्र में प्रवेश लेने वाले सभी फ्रेशर्स से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में न आएं और पूरी बेझिझक अपने कॉलेज जीवन की शुरुआत करें। प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है। डीयू की यह पहल न केवल अभिभावकों के मन से अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता दूर करती है, बल्कि एक स्वस्थ, सुरक्षित और अकादमिक रूप से समृद्ध शैक्षणिक माहौल को भी बढ़ावा देती है, जिससे छात्र बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:35 pm

कम स्कोर पर भी मिलेगा मनपसंद कॉलेज में एडमिशन! अपनाएं ये स्मार्ट तरीके और बदलें अपनी किस्मत

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG 2026) के परिणाम आने के बाद कई छात्रों के मन में यह चिंता सताने लगती है कि यदि उनका स्कोर कम आया है, तो क्या उन्हें देश के शीर्ष और प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों या कॉलेजों में दाखिला मिल पाएगा या नहीं। परीक्षा के इस कड़े मुकाबले में कम अंक पाना किसी भी छात्र के लिए निराशाजनक हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपके हायर एजुकेशन का सपना अधूरा रह जाएगा। यदि आप सही स्ट्रैटेजी, सूझबूझ और काउंसलिंग के वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, तो कम स्कोर के बावजूद आसानी से एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन पा सकते हैं। आइए जानते हैं वे कौन से स्मार्ट और असरदार तरीके हैं जो आपके करियर को नई दिशा दे सकते हैं।कम स्कोर आने पर न हों निराश, काउंसलिंग प्रोसेस को समझेंसबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कम स्कोर आने पर घबराने या पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं है। कई बार छात्र रिजल्ट देखकर तुरंत हिम्मत हार बैठते हैं और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं लेते, जो उनकी सबसे बड़ी भूल साबित होती है। विश्वविद्यालय अपने एडमिशन के लिए कई चरणों (Rounds) में काउंसलिंग और स्पॉट राउंड आयोजित करते हैं। शुरुआती कटऑफ लिस्ट में भले ही सीटें भर जाती हैं, लेकिन बाद के राउंड्स में कई सीटें खाली रह जाती हैं जिन पर कम स्कोर वाले छात्रों को भी मौका मिल जाता है। इसलिए हर यूनिवर्सिटी के पोर्टल पर नजर रखें और काउंसलिंग के हर चरण में एक्टिव रहें।वैकल्पिक और उभरते हुए विश्वविद्यालयों का करें चयनअगर आपका स्कोर देश के चुनिंदा टॉप टियर-1 कॉलेजों जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) या जेएनयू (JNU) के कटऑफ से थोड़ा कम रह गया है, तो आपको अपनी पसंद का दायरा थोड़ा बढ़ाना चाहिए। देश में ऐसे कई बेहतरीन सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, स्टेट यूनिवर्सिटीज और प्राइवेट संस्थान हैं जो CUET स्कोर के आधार पर एडमिशन देते हैं और जिनकी पढ़ाई का स्तर बेहद ऊंचा है। इन संस्थानों में कटऑफ थोड़ी कम जाती है और प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी शानदार होता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला लेकर भी आप अपने भविष्य को मजबूत बना सकते हैं।कोर्स कॉम्बिनेशन और ऑफबीट कोर्सेस पर दें ध्यानअक्सर छात्र पारंपरिक कोर्सेस जैसे ऑनर्स डिग्री या चुनिंदा प्रोग्राम्स के पीछे भागते हैं, जिससे वहां कंपटीशन बहुत ज्यादा हो जाता है। अगर आपका स्कोर कम है, तो आप वोकेशनल कोर्सेस, इंटीग्रेटेड प्रोग्राम्स या लैंग्वेज कोर्सेस का विकल्प चुन सकते हैं। कई यूनिवर्सिटीज में ऐसे कई नए और आधुनिक कोर्स चलाए जा रहे हैं जिनमें छात्रों का रुझान कम होता है लेकिन भविष्य में उनकी मांग बहुत ज्यादा होती है। इन कोर्सेस में कम स्कोर पर भी आसानी से एडमिशन मिल जाता है और आप अपनी पसंद के कॉलेज में पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।स्पॉट राउंड और मॉप-अप राउंड का उठाएं पूरा फायदानियमित काउंसलिंग प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अधिकांश विश्वविद्यालय खाली बची सीटों को भरने के लिए 'स्पॉट एडमिशन' या 'मॉप-अप राउंड' निकालते हैं। इन राउंड्स की सबसे खास बात यह होती है कि इसमें कई बार प्रवेश के नियम थोड़े लचीले होते हैं और कम मार्क्स पाने वाले छात्रों को भी सीधे तौर पर खाली सीटों पर प्रवेश दे दिया जाता है। इसके लिए आपको संबंधित विश्वविद्यालयों की ऑफिशियल वेबसाइट पर लगातार विजिट करते रहना होगा ताकि किसी भी महत्वपूर्ण नोटिफिकेशन की जानकारी आपसे न छूट जाए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:34 pm

न्याय प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, ज्योति सिंह मथारू ने की निष्पक्ष जांच की मांग; सीएम को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

झारखंड के चर्चित फुसबंगला तेजाब कांड (Phusbangla Acid Attack Case) ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है और इस जघन्य मामले में न्याय की मांग को लेकर आवाजें तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले की तह तक जाने के लिए सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में जानी-मानी शख्सियत ज्योति सिंह मथारू ने इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में मांग की है कि इस घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले की सच्चाई से पर्दा उठाने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य के मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी, जिससे पीड़ित को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।क्या है फुसबंगला तेजाब कांड और क्यों गरमाया है मामला?फुसबंगला इलाके में हुई तेजाब हमले की इस खौफनाक घटना ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया था। इस अमानवीय कृत्य में पीड़िता को शारीरिक और मानसिक रूप से जो प्रताड़ना झेलनी पड़ी, उसने पूरे समाज को हैरान कर दिया था। घटना के बाद से ही स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। शुरुआत में मामले की रफ्तार और पुलिस की तफ्तीश पर पीड़ितों के परिजनों ने असंतोष जताया था। उनका आरोप है कि यदि समय रहते कड़े कदम उठाए जाते और आरोपियों पर सख्त शिकंजा कसा जाता, तो आज पीड़ित परिवार को इस तरह दर-दर की ठोकरें न खानी पड़तीं।ज्योति सिंह मथारू ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांगइस संवेदनशील मामले में खुलकर सामने आते हुए ज्योति सिंह मथारू ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि तेजाब जैसे गंभीर मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। राजनीतिक या अन्य दबावों से ऊपर उठकर इस मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि असली गुनाहगार कानून की गिरफ्त से बचने न पाए। उनका यह भी कहना है कि जब तक इस मामले में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जाती, तब तक समाज में सुरक्षा का संदेश नहीं जा सकता।मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट, आगे क्या होगा?इस पूरे प्रकरण को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए अब एक ठोस कदम उठाया जा रहा है। फुसबंगला तेजाब कांड से जुड़े तमाम तथ्यों, पुलिस जांच की कमियों और पीड़िता की स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस रिपोर्ट को जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ताकि सरकार के स्तर पर इस मामले का संज्ञान लिया जा सके और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए एसआईटी (SIT) या किसी अन्य उच्चाधिकार प्राप्त एजेंसी से जांच कराई जा सके। इस हाई-प्रोफाइल हस्तक्षेप के बाद अब प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द इस मामले में कड़ी कार्रवाई करे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:33 pm

JPSC विवाद: कौन हैं झारखंड लोक सेवा आयोग के चेयरमैन एल. खियांग्ते? भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरी संस्था पर ACB

झारखंड की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर जेपीएससी (JPSC) यानी झारखंड लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भूचाल आ गया है। योग्य युवाओं के भविष्य और परीक्षा की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच अब आयोग सीधे तौर पर केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में जेपीएससी के चेयरमैन एल. खियांग्ते (L. Khiangte) और आयोग के प्रशासनिक फैसले आ गए हैं, जिन पर गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की परतों को टटोलने के लिए राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), सीआईडी (CID) के साथ-साथ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी बड़ी जांच एजेंसियों के शिकंजे में आयोग घिरता चला जा रहा है। आइए जानते हैं कौन हैं एल. खियांग्ते और क्या है पूरा जेपीएससी विवाद।कौन हैं जेपीएससी चेयरमैन एल. खियांग्ते?एल. खियांग्ते झारखंड प्रशासनिक और पुलिस सेवा के एक बेहद वरिष्ठ और जाने-माने चेहरे रहे हैं। झारखंड लोक सेवा आयोग के चेयरमैन बनने से पहले वे राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) जैसे सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अपनी लंबी प्रशासनिक सर्विस के दौरान उन्हें एक कड़क और अनुभवी अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है। हालांकि, मुख्य सचिव के पद से रिटायरमेंट के बाद जब उन्हें जेपीएससी की कमान सौंपी गई, तो उम्मीद की जा रही थी कि आयोग के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और पुरानी गलतियों से सबक लिया जाएगा। लेकिन हालिया परीक्षाओं, रिजल्ट और नियुक्तियों में कथित गड़बड़ियों के खुलासे के बाद अब खुद उनके नेतृत्व पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।क्यों जांच के घेरे में आया झारखंड लोक सेवा आयोग?जेपीएससी पर हमेशा से पेपर लीक, कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी और भाई-भतीजावाद के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुई परीक्षाओं और इंटरव्यू प्रक्रियाओं में नियमों की अनदेखी करने के गंभीर मामले सामने आए हैं। उम्मीदवारों और विभिन्न छात्र संगठनों ने आयोग के कामकाज के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि काबिल युवाओं के अधिकारों का हनन करके चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। परीक्षाओं में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ने के कारण झारखंड के युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसके बाद सरकार और न्यायपालिका के स्तर पर इस पूरी धांधली की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।ACB, CID और CBI जांच का शिकंजामामला तूल पकड़ने के बाद अब जांच एजेंसियों ने जेपीएससी के दफ्तर और फाइलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। राज्य स्तर पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और सीआईडी (CID) की टीमें इस पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं कि आखिर पर्दे के पीछे बैठकर कौन लोग इस खेल को अंजाम दे रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, भ्रष्टाचार के तार दूर तक जुड़े होने और बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के शामिल होने की आशंका के चलते केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई (CBI) के दखल की मांग भी जोर पकड़ रही है। जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आयोग के कई अधिकारियों और चेयरमैन एल. खियांग्ते की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:30 pm

थलापति विजय की बड़ी मांग: क्या शिक्षा को राज्य सूची में लाने से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा यह बवाल

देश भर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (नीट) के पेपर लीक और कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच, दक्षिण भारतीय सिनेमा के मेगास्टार से राजनेता बने थलापति विजय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर एक बेहद कड़ा और बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। विजय ने केंद्र सरकार के पाले से गेंद निकालते हुए शिक्षा को वापस 'राज्य सूची' (State List) में शामिल करने की जोरदार मांग की है। उनका तर्क है कि जब तक राज्यों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था तय करने का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक इस तरह के पेपर लीक और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले घपले बंद नहीं हो सकते हैं। थलापति विजय के इस बयान के बाद दक्षिण भारत से लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक सियासी गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई यह कदम देश की शिक्षा व्यवस्था की सभी समस्याओं का स्थायी समाधान साबित हो सकता है।NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद ने क्यों पकड़ी है तूल?पिछले कुछ समय से नीट परीक्षा की पारदर्शिता, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने देश के लाखों मेधावी छात्रों और उनके अभिभावकों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। छात्रों का कहना है कि साल-दर-साल कड़ी मेहनत करने के बावजूद जब सिस्टम की कमियों के कारण पेपर लीक हो जाते हैं, तो उनका पूरा भविष्य अंधकारमय हो जाता है। इसी जनआक्रोश और छात्रों के दर्द को समझते हुए राजनीतिक दलों और क्षेत्रीय नेताओं ने अब खुलकर केंद्र सरकार की सेंट्रलाइज्ड परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।शिक्षा को राज्य सूची में लाने से क्या होगा बदलाव?भारतीय संविधान में शिक्षा मूल रूप से राज्य सूची का विषय हुआ करती थी, जिसे साल 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) में डाल दिया गया था, जिसका मतलब है कि इस पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। थलापति विजय और अन्य क्षेत्रीय दलों का मानना है कि शिक्षा को दोबारा पूरी तरह राज्य सूची में लाया जाना चाहिए। इसके पीछे मुख्य तर्क यह दिया जा रहा है कि:स्थानीय जरूरतें: हर राज्य की सामाजिक, आर्थिक और भाषाई स्थिति अलग होती है, इसलिए वहां की शिक्षा और प्रवेश परीक्षाएं स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर होनी चाहिए।पारदर्शिता और जवाबदेही: जब परीक्षा का नियंत्रण राज्य सरकारों के पास होगा, तो किसी भी गड़बड़ी या लीक की स्थिति में तुरंत और कड़े स्थानीय कदम उठाए जा सकेंगे।सेंट्रलाइज्ड सिस्टम का दबाव खत्म: दिल्ली से संचालित होने वाली केंद्रीकृत व्यवस्था के बोझ से छात्रों को मुक्ति मिलेगी और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के बच्चों को न्याय मिल सकेगा।क्या वाकई खत्म हो जाएगा NEET और पेपर लीक का बवाल?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाना एक जटिल और दूरगामी प्रक्रिया है, जिस पर देश भर में आम सहमति बनना आसान नहीं है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार का यह तर्क रहता है कि एक देश, एक परीक्षा प्रणाली से पूरे देश के छात्रों को एक समान मंच मिलता है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय दल इसे राज्यों के अधिकारों में सीधा दखल मानते हैं। बहरहाल, थलापति विजय की इस मांग ने नीट विवाद को एक नया राजनीतिक और वैचारिक मोड़ दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर और अधिक घमासान देखने को मिल सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:27 pm

धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करें': पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट वाले ऐलान के बाद राहुल गांधी का बड़ा हमला

देश की राजनीति में इन दिनों महिलाओं की सुरक्षा, न्याय प्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर घमासान मचा हुआ है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में गंभीर मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' के गठन और मजबूती को लेकर किए गए बड़े ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के इस ऐलान के तुरंत बाद सीधा मोर्चा खोलते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाने की मांग कर डाली है। राहुल गांधी का यह तीखा हमला ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, जिससे सियासत का पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है।पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट के ऐलान के क्या हैं मायने?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और संवेदनशील बनाने के लिए गंभीर अपराधों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करने के वास्ते फास्ट ट्रैक अदालतों के नेटवर्क को और ज्यादा मजबूत करने की बात कही है। सरकार का यह कदम पीड़िताओं को समय पर न्याय दिलाने और कानूनी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। देश भर में इस पहल की सराहना की जा रही है, क्योंकि लंबे समय से लंबित मामलों के कारण आम जनता को न्याय मिलने में होने वाली परेशानियों को दूर करना एक बड़ी प्राथमिकता बन चुका है।राहुल गांधी ने क्यों की धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग?प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बीच राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया है। उनका तर्क है कि जब तक सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों और व्यवस्थागत कमियों पर खुद जवाबदेह नहीं बनती, तब तक केवल अदालतों के भरोसे बड़े बदलाव नहीं लाए जा सकते। इसी सिलसिले में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लेते हुए सीधे तौर पर उनकी बर्खास्तगी की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि विभिन्न मंत्रालयों और शैक्षणिक संस्थानों के कामकाज में कई मोर्चों पर नाकामी देखने को मिल रही है, जिसके लिए शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।सियासी गलियारों में मचा भूचाल, आगे क्या होगा?राहुल गांधी के इस आक्रामक तेवर और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। बीजेपी ने विपक्ष के इस हमले को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए पलटवार किया है, जबकि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहरा सकता है, क्योंकि सरकार जहां अपनी विकासवादी और न्यायोचित योजनाओं का प्रचार कर रही है, वहीं विपक्ष प्रशासनिक विफलताओं को हथियार बनाकर सियासी जमीन मजबूत करने में जुटा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:26 pm

इस्तीफा नहीं, सिर्फ इन शर्तों पर टूटेगा अनशन': सोनम वांगचुक ने खोल दिए सरकार के सामने रखे गए सारे पत्ते

लद्दाख के पर्यावरण और अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे प्रसिद्ध शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आंदोलन एक बार फिर देश भर में चर्चा का केंद्र बन गया है। उनके अनशन और विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच, सोनम वांगचुक ने खुद सामने आकर उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि उनका यह आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर है। वांगचुक ने साफ कर दिया है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति के इस्तीफे के लिए नहीं, बल्कि लद्दाख के भविष्य और वहां की संवैधानिक सुरक्षा से जुड़ी है। इसके साथ ही उन्होंने उन स्पष्ट शर्तों का भी खुलासा किया है जिनके पूरा होने पर ही वे अपना यह लंबा अनशन समाप्त करेंगे।क्या सचमुच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं सोनम वांगचुक?हाल ही में सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर कई तरह की बातें फैलाई गईं। लोगों का मानना था कि शायद यह प्रदर्शन केंद्र सरकार के किसी खास मंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत आक्रोश का परिणाम है। लेकिन इन तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए सोनम वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका यह विरोध प्रदर्शन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान या किसी अन्य व्यक्ति के इस्तीफे की मांग से बिल्कुल जुड़ा हुआ नहीं है। उनका यह आंदोलन लद्दाख के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और संविधान की छठी अनुसूची के तहत मिलने वाले विशेष दर्जे की बहाली के लिए है, जो इस क्षेत्र की मूल पहचान से जुड़ा हुआ है।किन शर्तों पर टूटेगा अनशन? सोनम वांगचुक ने रखी अपनी मुख्य मांगेंसरकार के सामने अपनी बात पूरी दृढ़ता से रखते हुए सोनम वांगचुक ने उन मुख्य शर्तों का जिक्र किया है जिनके माने बिना उनका अनशन खत्म नहीं होगा। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule): लद्दाख के आदिवासी बहुल इलाके को विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना, ताकि वहां की जमीन, संस्कृति और संसाधनों का संरक्षण किया जा सके।पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख को एक अलग और पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए ताकि स्थानीय लोगों की अपनी लोकतांत्रिक चुनी हुई सरकार हो।लोकतांत्रिक अधिकार और रोजगार: युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और लद्दाख के विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना।सरकार और लद्दाख के बीच आगे क्या होगा रुख?सोनम वांगचुक के इस कड़े रुख और स्पष्टीकरण के बाद अब केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यावरणविदों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों का समर्थन लगातार वांगचुक को मिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार जल्द ही लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत का दौर शुरू नहीं करती है, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार सोनम वांगचुक की इन जायज शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और कब तक कोई ठोस समाधान निकलता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:25 pm

CJP Protest: जंतर-मंतर पर हुई हिंसा पर बड़ा खुलासा, Delhi Police पर अभिजीत दिपके का आरोप

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के हालिया प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म 'CJP' (Citizens for Justice ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 12:25 pm

CJP प्रोटेस्ट का अनोखा राज: पुलिस भी खा गई गच्चा! पाकिस्तान नहीं, ईरान और हांगकांग से आई है यह खतरनाक तकनीक

हाल ही में सामने आए मुख्य न्यायाधीश (CJP) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक आंदोलनों के दौरान एक ऐसा हैरान करने वाला तकनीकी पहलू सामने आया है जिसने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। अमूमन हर आधुनिक प्रदर्शन या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस सबसे पहले इंटरनेट और मोबाइल डेटा पर नजर रखती है या कम्यूनिकेशन जैमर का इस्तेमाल करती है। लेकिन इस बार का प्रोटेस्ट पूरी तरह अलग साबित हुआ। जांच में यह खुलासा हुआ है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की गई सीजेपी प्रोटेस्ट की यह खुफिया तकनीक पाकिस्तान से नहीं, बल्कि ईरान और हांगकांग के रास्तों से भारत और अन्य एशियाई देशों के डिजिटल नेटवर्क तक पहुंची है। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि यह तकनीक बिना किसी सिम कार्ड और बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी बेहद प्रभावी तरीके से काम करती है, जिसे आज की आधुनिक पुलिस और साइबर सेल के लिए ट्रेस करना असंभव सा साबित हो रहा है।क्या है यह मिस्टीरियस तकनीक और कैसे करती है काम?आधुनिक संचार के इस दौर में जहां हर कोई स्मार्टफोन, 4G, 5G और वाई-फाई पर निर्भर है, वहां इस वैकल्पिक तकनीक ने सुरक्षा तंत्र को चिंता में डाल दिया है। जानकारों के अनुसार, यह तकनीक दरअसल 'मेश नेटवर्किंग' (Mesh Networking) और लोकल पीयर-टू-पीयर (P2P) कम्यूनिकेशन ऐप्स पर आधारित होती है। इसके जरिए डिवाइस ब्लूटूथ या रेडियो फ्रिक्वेंसी के माध्यम से सीधे एक-दूसरे से कनेक्ट हो जाते हैं। इसमें न तो किसी टेलीकॉम ऑपरेटर की सिम कार्ड की जरूरत होती है और न ही एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन की। एक फोन से दूसरे फोन तक संदेश चेन की तरह आगे बढ़ते जाते हैं, जिससे पुलिस या खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित होती हैं कि असल में यह मैसेज कहां से और किसने जनरेट किया है।ईरान और हांगकांग से क्या है इसका कनेक्शन?सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस तरह के बिना इंटरनेट वाले कम्यूनिकेशन टूल्स और तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले कड़े प्रतिबंधों और डिजिटल सेंसरशिप वाले देशों जैसे ईरान में देखने को मिला था, जहां सरकार द्वारा इंटरनेट बंद किए जाने के बाद जनता ने विरोध प्रदर्शनों के लिए इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। इसके अलावा, हांगकांग के राजनीतिक आंदोलनों के दौरान भी पुलिस की नजरों से बचने के लिए इसी तरह के डिसेंट्रलाइज्ड कम्यूनिकेशन टूल्स का खूब सहारा लिया गया था। अब यही अंतरराष्ट्रीय तर्ज पर विकसित तकनीक विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के जरिए अन्य जगहों पर प्रोटेस्ट को-ऑर्डिनेट करने के लिए अपनाई जा रही है, जिससे पारंपरिक पुलिस सर्विलांस पूरी तरह फेल हो रहा है।पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए क्यों बन गई है बड़ी चुनौती?साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। पारंपरिक पुलिसिंग और साइबर सर्विलांस हमेशा से कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), आईपी एड्रेस (IP Address) और इंटरनेट ट्रैफिक पर निर्भर रहे हैं। लेकिन जब कोई प्रोटेस्ट पूरी तरह से ऑफलाइन, सिम-फ्री और एनक्रिप्टेड मेश नेटवर्क पर शिफ्ट हो जाता है, तो पुलिस के पास अपराधियों या प्रदर्शनकारियों के डिजिटल पदचिन्हों को ट्रेस करने का कोई साधन नहीं बचता। यही वजह है कि इस बार के विरोध प्रदर्शनों की रणनीति ने सुरक्षा बलों को हैरान कर दिया है और अब एजेंसियां इस नई डिजिटल सेंधमारी से निपटने के लिए काउंटर-मेज़र्स तलाशने में जुटी हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:24 pm

सीजेपी प्रदर्शन के बीच 16 मेट्रो स्टेशन बंद, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा असर; सीजेआई बोले- दोपहर तक समाधान नहीं हुआ तो करेंगे हस्तक्षेप

दिल्ली में 16 मेट्रो स्टेशन बंद होने से सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही प्रभावित हुई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोपहर तक स्थिति सामान्य नहीं हुई तो वह स्वयं हस्तक्षेप करेंगे। SCBA ने वकीलों की आवाजाही की विशेष अनुमति की मांग की।

देशबन्धु 23 Jul 2026 12:22 pm

504 करोड़ रुपए के सरकारी धन गबन मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, चंडीगढ़-लुधियाना में छापेमारी

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से सरकारी धन गबन मामले में कार्रवाई करते हुए गुरुवार को चंडीगढ़ और लुधियाना में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं।

देशबन्धु 23 Jul 2026 12:18 pm

जंतर-मंतर आंदोलन को देश-विदेश से मिल रहा समर्थन, फूड डिलीवरी ऐप्स के जरिए पहुंच रहा खाना

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP आंदोलन के लिए Swiggy और Zomato के जरिए देशभर के साथ विदेशों से भी भोजन भेजे जाने के दावे सामने आए हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

देशबन्धु 23 Jul 2026 12:05 pm

'सड़क पर खड़ा होना कब से अपराध हो गया?' मुंबई छात्र प्रदर्शन में हिरासत के बाद अभिनेत्री आयशा खान का छलका दर्द

दिल्ली के जंतर मंतर की तर्ज पर मुंबई के शिवाजी पार्क में भी नीट मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शन में शामिल धुरंधर फिल्म की अभिनेत्री आयशा खान को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

वेब दुनिया 23 Jul 2026 12:00 pm

सिक्किम टनल हादसा: मृतकों की संख्या 22 पहुंची, मलबे में फंसे अन्य कर्मचारियों की तलाश जारी

दक्षिण सिक्किम में समरडुंग टनल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि टनल से अब तक 22 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि मलबे में फंसे बाकी कर्मचारियों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान जारी है।

देशबन्धु 23 Jul 2026 11:57 am

सिक्किम सुरंग हादसा : मृतकों की संख्या 22 हुई, रातभर चला बचाव अभियान

सिलीगुड़ी। सिक्किम के नामची जिले में एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच विशेषज्ञ बचाव दलों ने पूरी रात राहत एवं बचाव अभियान जारी रखा। बुधवार रात करीब 10 बजे ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), आसनसोल की […] The post सिक्किम सुरंग हादसा : मृतकों की संख्या 22 हुई, रातभर चला बचाव अभियान appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 23 Jul 2026 11:57 am

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को लगाई कड़ी फटकार; कश्मीर और आतंकवाद पर दिया दोटूक जवाब

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और सिंधु जल संधि पर अपना स्पष्ट रुख रखा। भारत ने कहा कि पाकिस्तान पहले अपने आंतरिक हालात सुधारने पर ध्यान दे।

देशबन्धु 23 Jul 2026 11:56 am

राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास पर हमला करना चाहते थे क्या : एकनाथ शिंदे

कोल्हापुर/सतारा। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास के बाहर दिये गये धरने को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए बुधवार को सवाल किया कि क्या वह प्रधानमंत्री के आवास पर हमला करना चाहते थे। सतारा जिले के दारे गांव में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में श्री शिंदे ने मंगलवार […] The post राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास पर हमला करना चाहते थे क्या : एकनाथ शिंदे appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 23 Jul 2026 11:50 am

सीजेपी के जारी प्रदर्शन के मद्देनजर डीएमआरसी ने फिर किए 16 मेट्रो स्टेशन बंद

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जारी प्रदर्शन के मद्देनज़र दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने गुरुवार को सुबह साढ़े सात बजे से अगले आदेश तक 16 मेट्रो स्टेशनों का संचालन बंद कर दिया। डीएमआरसी ने सुबह छह बजकर 55 मिनट पर प्रभावित स्टेशनों की सूची जारी की। इनमें लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, […] The post सीजेपी के जारी प्रदर्शन के मद्देनजर डीएमआरसी ने फिर किए 16 मेट्रो स्टेशन बंद appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 23 Jul 2026 11:45 am

पेपर लीक के दोषियों को जल्द कठोर दंड देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करेंगे : मोदी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) पेपर लीक मामले को लेकर हो रहे व्यापक प्रदर्शनों के बीच सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा है कि पेपर लीक के दोषियों को जल्द कठोर दंड देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार […] The post पेपर लीक के दोषियों को जल्द कठोर दंड देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करेंगे : मोदी appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 23 Jul 2026 11:40 am

संसद परिसर में सरकार-विपक्ष आमने-सामने, लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित; छात्र आंदोलन पर बढ़ा सियासी घमासान

संसद के मानसून सत्र में NEET और छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही हंगामे के कारण स्थगित हुई, जबकि संसद परिसर में NDA और विपक्ष ने अलग-अलग प्रदर्शन किए।

देशबन्धु 23 Jul 2026 11:30 am

असम में बाढ़ का प्रचंड रूप: 24 घंटे में 10 लोगों की मौत, 6.53 लाख से अधिक आबादी प्रभावित

असम में मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति विनाशकारी हो चुकी है। राज्य के 11 से अधिक जिलों में तबाही का मंजर है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में बाढ़ की चपेट में आने से 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद इस सीजन में जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 40 के पार पहुंच गया है।939 गांव डूबे, शिवसागर में सबसे ज्यादा तबाहीबाढ़ के पानी ने राज्य भर के लगभग 939 गांवों को जलमग्न कर दिया है, जिससे 24,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पूरी तरह तबाह हो चुकी है। जिलों की बात करें तो शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां अकेले 4 लाख से अधिक लोग पानी में घिरे हैं। इसके अलावा चराईदेव में 1.11 लाख और जोरहाट में 97,000 से अधिक लोग बेघर होने की कगार पर हैं।प्रशासन चला रहा 400 से ज्यादा राहत शिविरतबाही से निपटने के लिए जिला प्रशासन और राहत टीमों ने 10 प्रभावित जिलों में करीब 487 राहत शिविर और सहायता केंद्र स्थापित किए हैं। इनमें हजारों लोग शरण लिए हुए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें नावों के जरिए फंसे हुए लोगों तक सूखा राशन और पीने का पानी पहुंचाने में जुटी हुई हैं।मौसम विभाग ने जारी किया 'ऑरेंज अलर्ट'असमवासियों के लिए फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों में आगामी दिनों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी के चलते नदियों का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है, जिससे प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:18 am

8th Pay Commission: कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बदलेंगे 5 बड़े नियम! सैलरी और पेंशन में आएगा बंपर उछाल

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। नए वेतन आयोग के लागू होने से 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों व पेंशनर्स की बेसिक सैलरी, पेंशन और भत्तों का पूरा गणित बदलने वाला है। वेतन आयोग के गठन के साथ ही 5 मुख्य पैमानों पर बड़ा संशोधन देखने को मिल सकता है।1. फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) में बढ़ोतरीवेतन समीक्षा का सबसे अहम जरिया फिटमेंट फैक्टर होता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था। कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि 8वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.86 से 3.68 (या 5-मेंबर फैमिली फॉर्मूले के तहत और अधिक) किया जाए। इससे न्यूनतम बेसिक सैलरी में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।2. न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) में बड़ा उछालवर्तमान में 7th CPC के तहत न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 प्रति माह है। फिटमेंट फैक्टर में बदलाव और 5-सदस्यीय पारिवारिक मानक लागू होने पर न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹34,000 से लेकर ₹41,000 प्रति माह के पार पहुंच सकती है।3. पेंशनधारकों के लिए पेंशन संशोधन और 0% DR रिसेटपेंशनभोगियों की न्यूनतम पेंशन (जो अभी ₹9,000 है) बढ़कर लगभग ₹20,500 से ₹25,000 तक होने की उम्मीद है। इसके अलावा, नया पे-मैट्रिक्स लागू होते ही मौजूदा महंगाई राहत (DR) शून्य (0%) पर रिसेट हो जाएगी और नए बेसिक पेंशन के आधार पर नई दरें तय होंगी।4. महंगाई भत्ता (DA) का बेसिक पे में विलयजब भी महंगाई भत्ता 50% की सीमा पार करता है, तो इसे मूल वेतन में मर्ज करने की सिफारिशें की जाती हैं। 8th CPC के तहत संचित डीए को बेसिक पे में जोड़कर एक नया सैलरी स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, जिससे टेक-होम सैलरी सीधे बढ़ जाएगी।5. एलाउंस (HRA & TA) और पे-मैट्रिक्स का पुनर्गठनहाउस रेंट एलाउंस (HRA) और ट्रैवल एलाउंस (TA) जैसे प्रमुख भत्ते भी नए बेसिक पे के हिसाब से दोबारा रिवाइज होंगे। शहरों की कैटेगरी (X, Y, Z) के आधार पर HRA में बढ़ोतरी होगी, जिससे कर्मचारियों को महंगाई के दौर में बड़ी राहत मिलेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:15 am

गुजरात में बारिश का तांडव: उमरगाम में 35.67 इंच बारिश, वलसाड-डांग जलमग्न, 365 सड़कें बंद

दक्षिण गुजरात में मानसून के रौद्र रूप के कारण वलसाड, डांग और तापी सहित कई जिलों में भीषण जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य की 213 तहसीलों में भारी बारिश दर्ज की गई है। इनमें सबसे अधिक 35.67 इंच बारिश अकेले उमरगाम में दर्ज ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 11:14 am

देश के 21 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट: IMD ने 2 राज्यों के लिए जारी किया 'रेड अलर्ट', जानें अपने इलाके का मौसम

देशभर में मानसूनी बारिश का दौर काफी तेज हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 23 जुलाई को देश के 21 राज्यों में मूसलाधार बारिश और गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। बारिश की भीषण तीव्रता को देखते हुए 2 राज्यों में 'रेड अलर्ट' जारी किया गया है, जबकि कई इलाकों में ऑरेंज और येलो अलर्ट प्रभावी है।इन राज्यों में जारी हुआ 'रेड अलर्ट', भारी नुकसान की आशंकामौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों (कोकण और गोवा) में अत्यंत भारी बारिश का अंदेशा जताया गया है, जिसके चलते प्रशासन ने रेड अलर्ट घोषित किया है। इन इलाकों में भारी जलभराव, निचले इलाकों में पानी भरने और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए लोगों को बेवजह घरों से बाहर न निकलने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।उत्तर भारत और मध्य भारत के 21 राज्यों में मूसलाधार का सायाआईएमडी ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के मैदानी व पहाड़ी राज्यों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया है। वहीं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों में भी बिजली कड़कने के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदी-नालों के उफान पर आने का खतरा बढ़ गया है।पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत का हालपूर्वोत्तर के राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में भी मानसूनी बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की उम्मीद है। उधर दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक और केरल में तेज मानसूनी हवाओं के साथ बारिश जारी रहेगी। मौसम विभाग ने किसानों और मछुआरों को समुद्र के पास न जाने और सुरक्षित जल निकासी का इंतजाम करने की सलाह दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:13 am

होर्मुज संकट के बीच क्या महंगे होंगे LPG सिलेंडर? जानिए अपने शहर में घरेलू और कमर्शियल गैस के दाम

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में जारी संकट की वजह से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। चूंकि भारत अपनी जरूरतों की अधिकांश एलपीजी इसी समुद्री मार्ग से आयात करता है, इसलिए आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर के दाम फिर आसमान छूने वाले हैं।होर्मुज संकट और भारत पर असरफारस की खाड़ी के इस रणनीतिक जलमार्ग से भारत की बड़ी मात्रा में एलपीजी और कच्चा तेल आता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण लॉजिस्टिक्स और शिपिंग लागत बढ़ी है। हालांकि, भारतीय तेल विपणन कंपनियों और सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए रूसी क्रूड और अन्य वैकल्पिक स्रोतों का सहारा लिया है ताकि देश में घरेलू गैस की किल्लत न हो।जानिए आपके शहर में क्या हैं एलपीजी के ताजा रेट?हालिया अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू सिलेंडर (14.2 किग्रा) की सप्लाई सामान्य बनाए रखी है। वर्तमान में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव के हिसाब से बदलाव देखने को मिल रहा है।क्या बढ़ेगी गैस की तंगी?सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के पास पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है और पैनिक बुकिंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है। जमाखोरी रोकने और सभी उपभोक्ताओं तक सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बुकिंग नियमों और समय-सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:11 am

किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध सीएम डॉ. मोहन यादव, कृषि यंत्रों के निर्माण में आत्मनिर्भर हो रहा एमपी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों की सहूलियत के लिए हर विधानसभा में एक कृषि यंत्र किराए की दुकान अनिवार्य रूप से खोलने की तैयारी कर रहे हैं। कृषक कल्याण वर्ष में जल्दी ही इस पहल के परिणाम मिलेंगे। छोटे और सीमांत किसानों को अपने खेत तैयार करने ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 11:10 am

होटलों के कमरों में छिपे होते हैं अनगिनत बैक्टीरिया! कमरे में घुसते ही भूलकर भी न छुएं ये 4 चीजें

जब भी हम किसी ट्रिप या बिजनेस टूर पर जाते हैं, तो होटल के साफ-सुथरे दिखने वाले कमरे हमें बहुत आरामदायक लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कमरा भले ही कितना भी चमक रहा हो, उसमें मौजूद कुछ चीजें कीटाणुओं और बैक्टीरिया का सबसे बड़ा अड्डा होती हैं? होटल में कदम रखते ही थोड़ी सी लापरवाही आपको बीमार कर सकती है।टीवी का रिमोट और डोर हैंडल: बैक्टीरिया का सबसे बड़ा जरियाहोटल के कमरों की सफाई के दौरान अक्सर टीवी रिमोट और दरवाजों के हैंडल सैनिटाइज नहीं किए जाते। रोजाना सैकड़ों मेहमानों के संपर्क में आने के कारण टीवी रिमोट पर सबसे ज्यादा जर्म्स पाए जाते हैं। इन्हें बिना सैनिटाइज किए या प्लास्टिक बैग में लपेटे बिना इस्तेमाल करने से बचें।लाइट के स्विच और फोन का इस्तेमाल करते वक्त बरतें सावधानीकमरे में घुसते ही सबसे पहले हम लाइट स्विच ऑन करते हैं या रिसेप्शन पर कॉल करने के लिए लैंडलाइन फोन उठाते हैं। ये वो जगहें हैं जिन्हें हाउसकीपिंग स्टाफ गहराई से साफ नहीं करता। इन चीजों को छूने के तुरंत बाद हाथों को अच्छे से धोएं या सैनिटाइज़र का उपयोग करें।बाथरूम के नल और ग्लास को इस्तेमाल करने से पहले धोएंहोटल रूम के बाथरूम में रखे कांच के गिलास या पानी के नल भी पूरी तरह से बैक्टीरिया फ्री नहीं होते। हमेशा नल का इस्तेमाल करने से पहले उसे पोंछ लें और गिलास को बिना अच्छी तरह धोए पानी पीने के लिए इस्तेमाल में न लाएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:09 am

करण कुंद्रा संग विवाद पर सान्वी तलवार का बड़ा खुलासा: 'सेट पर जड़ा था थप्पड़, बदले में उसने...'

टेलीविजन इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस सान्वी तलवार ने अपने करियर की सबसे विवादित घटना को लेकर सालों बाद चुप्पी तोड़ी है। एक इंटरव्यू के दौरान सान्वी ने एक्टर करण कुंद्रा के साथ काम करने के अपने कड़वे अनुभव को साझा करते हुए कई हैरान करने वाले दावे किए हैं।बिना डायरेक्टर के आदेश के कर दिया किस, गुस्से में मारा थप्पड़सान्वी तलवार के अनुसार, शूटिंग के दौरान एक किसिंग सीन फिल्माया जाना था। लेकिन डायरेक्टर के ओके या आदेश देने से पहले ही करण कुंद्रा ने उन्हें किस कर लिया। इस हरकत से आहत होकर और असहज महसूस करने पर सान्वी ने तुरंत करण को थप्पड़ जड़ दिया। एक्ट्रेस ने यह भी साफ किया कि करण उनमें दिलचस्पी रखते थे, जबकि उनकी तरफ से ऐसा कुछ नहीं था।क्रू के सामने मिला करारा थप्पड़, जमीन पर गिर पड़ीं एक्ट्रेससान्वी का आरोप है कि थप्पड़ खाने के कुछ देर बाद करण वापस आए और पूरी क्रू के सामने उन्हें जोर से थप्पड़ मार दिया, जिससे वे जमीन पर गिर गईं। सान्वी का कहना है कि उस वक्त सेट पर मौजूद किसी भी व्यक्ति या डायरेक्शन टीम ने उनकी मदद नहीं की। इसके साथ ही करण पर गाली-गलौज करने का भी आरोप लगा, जिससे दुखी होकर एक्ट्रेस सेट छोड़कर चली गई थीं।एकता कपूर ने मांगी माफी, तब जाकर शांत हुआ मामलाइस विवाद के गहराने के बाद प्रोड्यूसर एकता कपूर ने मामले को संभाला। सान्वी के मुताबिक, एकता कपूर ने करण की तरफ से उनसे माफी मांगी और अपने ऑफिस बुलाकर व्यक्तिगत बातचीत की। एकता कपूर के आश्वासन और सम्मान के बाद ही शो की शूटिंग दोबारा शुरू हो सकी, जिसके बाद शो के डायरेक्टर को भी बदल दिया गया था।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:05 am

मुंबई में भारी बारिश का कहर: क्या आज बंद हैं स्कूल-कॉलेज? जानिए बीएमसी का ताजा अपडेट

मुंबई और आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम विभाग (IMD) की ओर से जारी चेतावनी के बाद शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। खराब मौसम और जलभराव की स्थिति को देखते हुए शिक्षण संस्थानों को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।मौसम विभाग का अलर्ट और स्थानीय प्रशासन का फैसलाभारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने क्षेत्र में भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही मानसूनी बारिश के कारण कई निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सर्वोपरि रखी जा रही है।क्या आज खुले हैं स्कूल और कॉलेज?प्रशासन की ताजा गाइडलाइंस के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए स्कूलों और कॉलेजों के संचालन पर पैनी नजर रखी जा रही है। पालघर और अन्य पड़ोसी जिलों में जहां भारी बारिश के चलते कड़े कदम उठाए गए हैं, वहीं मुंबई शहर में स्थिति के अनुसार ही अपडेट्स जारी किए जा रहे हैं। अभिभावकों और छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी भ्रम से बचने के लिए केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:03 am

घर में नहीं टिकता पैसा? अपनाएं फेंगशुई के ये 5 अचूक उपाय, बरसेगी कृपा

अगर लाख कोशिशों के बाद भी घर में बरकत नहीं होती और लगातार आर्थिक तंगी घेरे रहती है, तो इसकी एक बड़ी वजह घर का वास्तु दोष या नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है। ऐसे में फेंगशुई के कुछ बेहद आसान और असरदार नुस्खे आपके जीवन की गाड़ी को दोबारा पटरी पर ला सकते हैं। इन उपायों को अपनाने से घर का माहौल खुशनुमा बनता है और तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं।पानी का फव्वारा और फिश एक्वेरियम से दूर होगी तंगीफेंगशुई के जानकारों के अनुसार घर की उत्तर दिशा में बहता हुआ साफ पानी का फव्वारा रखना बेहद शुभ माना जाता है। यह पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है और मन को शांत रखता है। इसके अलावा घर में फिश एक्वेरियम रखना भी धन से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में मददगार होता है, बशर्ते उसका पानी हमेशा साफ रखा जाए और मछलियों की सही देखभाल हो।चीनी सिक्के औरफलाफिंग बुद्धा से आएगी संपन्नताआर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए फेंगशुई में चीनी सिक्कों को बहुत कारगर माना गया है। इन्हें लाल धागे में बांधकर तिजोरी या मुख्य दरवाजे के पास रखने से धन का प्रवाह बढ़ता है। वहीं लाफिंग बुद्धा को घर के मुख्य द्वार के सामने ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां आते-जाते ही नजर पड़े, इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास होता है।विंड चाइम की मधुर आवाज से भगाएं नकारात्मक ऊर्जाघर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने और सकारात्मक माहौल बनाने के लिए विंड चाइम का इस्तेमाल करना एक बेहतरीन तरीका है। इसे खिड़की, बालकनी या मुख्य दरवाजे के पास लगाया जा सकता है। हवा के झोंके से जब इसकी मधुर आवाज गूंजती है, तो घर में सुकून और सकारात्मकता का अहसास होता है जो मानसिक शांति के साथ प्रगति के द्वार खोलता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:03 am

ग्रेटर नोएडा वेस्ट निवासियों को बड़ी सौगात: PIB ने दी 8.4 किमी मेट्रो लाइन को हरी झंडी, गौर चौक समेत बनेंगे 5 स्टेशन! जानिए कनेक्टिविटी कैसे बदलेगी

ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) के लाखों निवासियों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार अब खत्म हो गया है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो एक्सटेंशन परियोजना के पहले चरण को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस 8.4 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण से नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बीच आवाजाही बेहद सुगम और तेज हो जाएगी। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की इस संयुक्त पहल से क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।गौर चौक समेत बनेंगे 5 आधुनिक मेट्रो स्टेशन (रूट मैप)स्वीकृत की गई इस 8.4 किमी लंबी मेट्रो लाइन पर कुल 5 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। इस नए रूट का मुख्य केंद्र गौर चौक (चार मूर्ति) होगा, जो ग्रेटर नोएडा वेस्ट का सबसे व्यस्त चौराहा माना जाता है। रूट के प्रमुख स्टेशनों में सेक्टर-51 (इंटरचेंज स्टेशन), सेक्टर-122, सेक्टर-123, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-4 और गौर चौक (सेक्टर-2) शामिल हैं। यह एक्सटेंशन लाइन एक्वा लाइन के नोएडा सेक्टर-51 स्टेशन को ब्लू लाइन के नोएडा सेक्टर-52 से सहजता से जोड़ेगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को सीमलेस इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी।कनेक्टिविटी में सुधार और रियल एस्टेट मार्केट पर असरमेट्रो के आगमन से ग्रेटर नोएडा वेस्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले कामकाजी लोगों और स्थानीय निवासियों को ऑटो या निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे पीक आवर्स में भारी जाम लगता था। मेट्रो सेवा शुरू होने से नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम तक की राह आसान हो जाएगी। इस मेट्रो एक्सटेंशन से गौर चौक, टेकजोन 4, सेक्टर 1 और सेक्टर 16बी के आसपास के आवासीय व व्यावसायिक रियल एस्टेट मार्केट को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी और प्रॉपर्टी के दामों में तेजी आने की संभावना है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 11:01 am

पेपर लीक मामलों पर केंद्र का बड़ा फैसला, पीएम मोदी का दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने लिखा कि पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों में दोषियों को शीघ्र और कठोर दंड दिलाने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा।

देशबन्धु 23 Jul 2026 10:31 am

पेपर लीक पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा ऐलान, फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई; बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों पर बड़ा फैसला लेते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

देशबन्धु 23 Jul 2026 10:18 am

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर पलटवार, बोले- युवाओं का भविष्य आपने बर्बाद किया, धर्मेंद्र प्रधान को हटाइए

छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फास्ट ट्रेक कोर्ट के एलान पर लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और इसके जिम्मेदार ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 10:10 am

CJP Protest : आख़िर पेपर लीक पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, किया फास्ट ट्रेक कोर्ट का ऐलान

CJP Protest : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच गुरुवार को पेपर लीक पर फास्ट ट्रेक कोर्ट का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड मिलेगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ ...

वेब दुनिया 23 Jul 2026 9:42 am

CJP प्रदर्शन के कारण आज भी 16 मेट्रो स्टेशन बंद, DMRC ने जारी की सूची

CJP Protest : जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध के चलते दिल्ली मेट्रो ने गुरुवार को भी सुरक्षा कारणों से 16 स्टेशनों को बंद करने का फैसला किया है। मेट्रो बंद होने की वजह से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

वेब दुनिया 23 Jul 2026 7:59 am

नीट पेपर लीक मामले में अनुराग ढांडा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई

नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है

देशबन्धु 23 Jul 2026 7:00 am

रोहिणी आचार्य ने पटना में छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की

परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़पों के बाद बुधवार को राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।

देशबन्धु 23 Jul 2026 6:00 am

जम्मू-कश्मीर को मिले राज्य का दर्जा, जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर न चले: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने, रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित कार्रवाई और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर प्रतिक्रिया दी

देशबन्धु 23 Jul 2026 5:00 am

'नीट पेपर लीक से सीजेपी के संसद मार्च तक', जेपी नड्डा ने विपक्ष को दिखाया आईना

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च, नीट पेपर लीक और राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन समेत कई मुद्दों पर विस्तार से बात की

देशबन्धु 23 Jul 2026 4:00 am

केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना: मध्य प्रदेश सरकार ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का दावा किया

मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने पन्ना और छतरपुर जिलों में केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना से प्रभावित परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास पर चिंता जताई।

देशबन्धु 23 Jul 2026 12:08 am

अशोक वर्णवाल होंगे मध्य प्रदेश के नए कार्यवाहक मुख्य सचिव

मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 1991 बैच में एमपी कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी अशोक वर्णवाल को कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त किया है। बुधवार को जारी आदेश के अनुसार वे आगामी आदेश तक राज्य के मुख्य सचिव का दायित्व संभालेंगे।

वेब दुनिया 22 Jul 2026 11:01 pm

CJP प्रोटेस्ट में हिंसा पर सलमान खान का रिएक्शन, किस बात को लेकर दुखी हुए अभिनेता

गुरुवार देर रात जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन हिंसक हो गया। पुलिस पर पत्थरबाजी की गई है। इसमें पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। छात्रों के आंदोलन पर अभिनेता सलमान खान देर रात एक्स पर पोस्ट किया। ...

वेब दुनिया 22 Jul 2026 10:58 pm

कोटा में 1000 रुपए की रिश्वत लेते JVVNL का कनिष्ठ अभियंता, संविदा कर्मचारी अरेस्ट

कोटा। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक (एसीबी) ने जेवीवीएनएल के कोटा जिले के सुल्तानपुर में कनिष्ठ अभियंता और संविदा कर्मचारी को एक हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। ब्यूरो की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि एसीबी कोटा देहात को शिकायत मिली कि परिवादी के पिताजी के नाम पर घर पर […] The post कोटा में 1000 रुपए की रिश्वत लेते JVVNL का कनिष्ठ अभियंता, संविदा कर्मचारी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 10:40 pm

पश्चिम एशिया संकट के कारण हिंदुस्तान पेट्रोलियम को 17,446 करोड़ रुपए का कर पूर्व नुकसान

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को पश्चिम एशिया संकट के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एकल आधार पर 17,446 करोड़ रुपए का कर पूर्व नुकसान हुआ है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने बुधवार को निदेशकमंडल की बैठक के बाद वित्तीय परिणामों को मंजूरी प्रदान की। इसमें […] The post पश्चिम एशिया संकट के कारण हिंदुस्तान पेट्रोलियम को 17,446 करोड़ रुपए का कर पूर्व नुकसान appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 10:24 pm

अलवर में वृद्ध महिला से दुष्कर्म, दो आरोपी अरेस्ट

अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के खेड़ली थाना क्षेत्र में एक वृद्ध महिला से दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और महज 30 मिनट में मुख्य आरोपी एवं उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया। मामले में पीड़िता का मेडिकल, फोरेंसिक जांच और न्यायालय […] The post अलवर में वृद्ध महिला से दुष्कर्म, दो आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 10:14 pm

कांग्रेस ने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जयपुर में किया विरोध प्रदर्शन

जयपुर। राजस्थान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व में बुधवार को जयपुर में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे, केन्द्र सरकार द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अनियमितता, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर एवं आपराधिक मुकद्में वापस लेने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया गया। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव एवं […] The post कांग्रेस ने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जयपुर में किया विरोध प्रदर्शन appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 10:10 pm

अमेठी में धर्मांतरण और रेप के आरोपी ने पीड़ित परिवार को दी धमकी

अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में धर्मांतरण और दुष्कर्म के आरोपी ने पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी दी है। जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की दलित किशोरी के भाई ने बताया कि उसकी नाबालिग बहन को गांव का ही जाबिर नाम का मुस्लिम युवक अपने प्रेम जाल में […] The post अमेठी में धर्मांतरण और रेप के आरोपी ने पीड़ित परिवार को दी धमकी appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 10:01 pm

भजनलाल शर्मा ने जयपुर मेट्रो द्वितीय चरण के निर्माण कार्य का किया शुभारंभ

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को यहां जयपुर मेट्रो द्वितीय चरण के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। शर्मा ने सीतापुरा स्थित मेट्रो डिपो में भूमि एवं शिला पूजन कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। उन्होंने लगभग 41 किमी लम्बे मेट्रो द्वितीय चरण के मॉडल का भी अवलोकन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री इलेक्ट्रिक […] The post भजनलाल शर्मा ने जयपुर मेट्रो द्वितीय चरण के निर्माण कार्य का किया शुभारंभ appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 9:57 pm

अलवर : उम्रकैद की सजा के 4 दिन बाद महिलाओं पर तलवार-कृपाण से हमला

अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के नौगावां थाना क्षेत्र में पाटा गांव में एक बार फिर पुरानी दुश्मनी हिंसा में बदल गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 के चर्चित अवतार सिंह हत्याकांड में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह समेत 9 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के महज चार दिन […] The post अलवर : उम्रकैद की सजा के 4 दिन बाद महिलाओं पर तलवार-कृपाण से हमला appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 9:51 pm

Paper Leak पर सरकार का विपक्ष को खुला न्योता, जेपी नड्डा बोले- संसद में 18 घंटे भी चर्चा को तैयार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की मांगों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है, जिस पर राजनीति करने के बजाय गंभीर चर्चा और ठोस ...

वेब दुनिया 22 Jul 2026 9:51 pm

कांग्रेस को करारा जवाब, जयपुर में भाजपा का विरोध प्रदर्शन

जयपुर। राजस्थान भारतीय जनता पार्टी ने लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने, संसद की कार्यवाही बाधित करने तथा जंतर-मंतर पर हुए कथित पथराव के विरोध में बुधवार को जयपुर में प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। इसके लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के नेतृत्व […] The post कांग्रेस को करारा जवाब, जयपुर में भाजपा का विरोध प्रदर्शन appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 9:43 pm

बारां : MBA करने के बाद भी नहीं मिली नौकरी, दोस्त के साथ करने लगा साइबर ठगी

बारां। राजस्थान में बारां की साइबर पुलिस ने 18 लाख रुपए से अधिक की ठगी के मामले में तीसरे आरोपी विनोद सिंह को मंगलवार शाम को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी विनोद सिंह ने मार्केटिंग में एमबीए किया हुआ है, […] The post बारां : MBA करने के बाद भी नहीं मिली नौकरी, दोस्त के साथ करने लगा साइबर ठगी appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 9:33 pm

हनुमानगढ़ सेंट्रल जेल में कैदी से मोबाइल फोन बरामद

श्रीगंगानगर। राजस्थान में हनुमानगढ़ जंक्शन की सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन सिम कार्ड और डाटा केबल मिलने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार देर शाम को जेल में स्टाफ द्वारा तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान जेल की बैरिक नंबर 11 में एक बंदी की तलाशी में एक मोबाइल फोन, सिम […] The post हनुमानगढ़ सेंट्रल जेल में कैदी से मोबाइल फोन बरामद appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 9:27 pm

फिरोजाबाद : बेटी और बहू से रेप के आरोपी को अंतिम सांस तक जेल की सजा

फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक व्यक्ति को नाबालिग बेटी और बहू के साथ दुष्कर्म का दोषी करार देते हुये अंतिम सांस तक कारावास की सजा सुनाई है। जिला न्यायालय मे फास्ट ट्रैक एडीजे प्रथम ने इस गंभीर मामले में सुनवाई के पश्चात मंगलवार देर शाम को अपना निर्णय […] The post फिरोजाबाद : बेटी और बहू से रेप के आरोपी को अंतिम सांस तक जेल की सजा appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 22 Jul 2026 9:06 pm