Dehradun DM को 1 हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट, Uttarakhand के मेडिकल कॉलेजों में फर्जीवाड़े पर एक्शन
उत्तराखंड के मेडिकल शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने उन आरोपों की ज़िला-स्तर पर जांच के आदेश दिए हैं, जिनमें कहा गया है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए फ़र्ज़ी स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने देहरादून के ज़िला मजिस्ट्रेट से एक हफ़्ते के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा है, क्योंकि मेडिकल एडमिशन और काउंसलिंग की प्रक्रिया अभी चल रही है। यह कदम प्रदीप बहुगुणा की शिकायत के बाद उठाया गया है। उन्होंने शुक्रवार को उनियाल से मुलाक़ात की थी और लगभग 350 उम्मीदवारों की एक सूची सौंपी थी, जिनके दस्तावेज़ों की जांच की ज़रूरत है। बहुगुणा ने कहा कि वह यह दावा नहीं कर रहे हैं कि सभी सर्टिफिकेट नकली हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और एडमिशन से जुड़ी जानकारी से इतना शक पैदा होता है कि इसकी आधिकारिक जांच होनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: Ganesh Godiyal के नेतृत्व में Congress का वनंतरा Resort मार्च, यमकेश्वर में पुलिस ने रोका उनियाल ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि एडमिशन की प्रक्रिया खत्म होने से पहले संदिग्ध मामलों की स्थिति साफ हो सके। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में कुछ सर्टिफिकेट नकली पाए गए हैं और स्थायी निवास प्रमाण पत्र के बारे में भी शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी बाहरी व्यक्ति को धोखाधड़ी से स्थायी निवास या स्वतंत्रता सेनानी पर आश्रित होने का प्रमाण पत्र जारी किया गया है, तो यह एक गंभीर मामला होगा। 350 उम्मीदवारों की जांच की मांग करने का कारण बताते हुए बहुगुणा ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि उन्होंने मेडिकल एडमिशन में शामिल उन उम्मीदवारों की एक सूची तैयार की थी जिनके दस्तावेजों की जांच की जानी थी। इसे भी पढ़ें: अंकिता हत्याकांड में CBI जांच से सच सामने आएगा, CM Dhami का बड़ा बयान उन्होंने बताया कि उनमें से कई लोगों ने अपनी हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई उत्तराखंड के बाहर की थी, और कुछ ने बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में NEET की परीक्षा दी थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी दूसरे राज्य में पढ़ाई करना या कहीं और NEET की परीक्षा देना, अपने आप में जाली सर्टिफिकेट का सबूत नहीं है। बहुगुणा ने कहा मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इन सभी लोगों के सर्टिफिकेट नकली हैं। लेकिन उनके दस्तावेजों की जांच ज़रूरी है। मैंने लगभग 350 नामों की पहचान की है, और हो सकता है कि ऐसे मामलों की असल संख्या इससे ज़्यादा हो।
Tamil Nadu Bypolls: CM Vijay और AIADMK प्रमुख Palaniswami करेंगे प्रचार
मदुरंतकम और धारापुरम में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी एससी-आरक्षित इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार करेंगे। अन्नाद्रमुक ने 2026 के विधानसभा चुनावों में इन दोनों सीट पर जीत हासिल की थी , लेकिन बाद में वहां के मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर सत्ताधारी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ पार्टी का दामन थाम लिया। पार्टी महासचिव पलानीस्वामी एक बार फिर दोनों सीटों पर जीत के लिये प्रयासरत हैं। टीवीके ने मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा को अपने ‘सीटी’ चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए नामित करने का फैसला किया है। ये दोनों 2026 के विधानसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक के टिकट पर चुनाव जीते थे। इस फैसले ने दल-बदल को उपचुनाव के प्रचार में एक अहम मुद्दा बना दिया है। अन्नाद्रमुक के पूर्व विधायक मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम) और पी. सत्यभामा (धारापुरम) के इस्तीफे के बाद ये दोनों सीटें खाली हो गईं। इन दोनों ने 2026 के विधानसभा चुनाव में “दो पत्ती” चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की थी, लेकिन जीत के एक महीने से भी कम समय में टीवीके में शामिल होने के लिए इस्तीफा दे दिया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पलानीस्वामी दोनों चुनाव क्षेत्रों में तीन-तीन दिन प्रचार करेंगे, जबकि विजय भी जल्द ही पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने की योजना बना रहे हैं। पलानीस्वामी मदुरंतकम में अपनी पार्टी की उम्मीदवार एस. कनिथा संपत और धारापुरम में के. भानुमति के लिए समर्थन जुटाएंगे। अन्नाद्रमुक का अभियान मुख्य रूप से उन उम्मीदवारों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है, जिन्होंने पाला बदलकर जनता के जनादेश के साथ “धोखा” किया है। विजय टीवीके उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे। टीवीके नेतृत्व द्वारा जल्द ही उनके प्रचार की तारीखों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है। मदुरंतकम में द्रमुक के आई. परंथमन और एस. सुगन्य, नाम तमिलर काची के उम्मीदवार के. जानकी रमन और एम. कार्तिका, और वामपंथी उम्मीदवार माकपा की पी. सुगंधी; तथा धारापुरम में माकपा के पी. लक्ष्मणन की मौजूदगी से छह अक्टूबर को इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में बहुकोणीय मुकाबला होगा।
MK Stalin के कार्यकाल में बने थे UK निवेश के आधार, TRB Rajaa ने TVK सरकार पर साधा निशाना
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री TRB राजा ने मुख्यमंत्री C जोसेफ विजय की हालिया यूनाइटेड किंगडम निवेश यात्रा के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इस यात्रा के दौरान साइन किए गए मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) असल में पिछली DMK सरकार द्वारा तैयार की गई निवेश पाइपलाइन का नतीजा थे। उन्होंने TVK के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा इन निवेशों को अपनी विदेशी आउटरीच का नतीजा बताने पर आपत्ति जताई। डीएमके नेता ने कहा कि CM के दौरे के दौरान घोषित निवेश में कुछ भी नया नहीं था और दावा किया कि कई समझौतों की नींव MK स्टालिन के कार्यकाल में ही रख दी गई थी। इसे भी पढ़ें: Kerala Student Election Result: SFI और KSU के प्रदर्शन पर Vijayan और Sunny Joseph ने दी बधाई तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि CM के छह दिन के UK दौरे से लगभग 15,300 करोड़ रुपये के निवेश का वादा मिला है, जिससे 10,000 से ज़्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा निवेश समझौता संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल और उसकी यूरोप और यूके स्थित जॉइंट-वेंचर कंपनियों के साथ हुआ, जिसमें लगभग 11,000 करोड़ रुपये शामिल थे। राजा ने उस समझौते का भी खास तौर पर ज़िक्र किया। पूर्व उद्योग मंत्री ने सवाल उठाया कि कंपनी के एक अपेक्षाकृत जूनियर लेवल के मार्केटिंग प्रतिनिधि की मौजूदगी में MoU पर साइन क्यों किए गए। राजा ने पूछा इसके लिए सीनियर लीडरशिप CM के साथ क्यों नहीं गई? इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Bypolls: CM Vijay और AIADMK प्रमुख Palaniswami करेंगे प्रचार उन्होंने यह भी कहा कि स्टालिन के विदेश दौरों में तमिल लोगों से बातचीत शामिल रही है, और उन्होंने इन मुलाकातों की तुलना विजय के दौरे के दौरान लोगों को हुई परेशानी से की। राजा ने दावा किया कि UK में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही, उन्होंने कहा कि तमिलनाडु एक बेहद मज़बूत राज्य है और तर्क दिया कि सत्ता में चाहे कोई भी राजनीतिक नेतृत्व हो, यह राज्य निवेश आकर्षित करता रहेगा।
CBI की जल्दबाजी पर Supreme Court सख्त, FIR और ट्रैप में खामियों के चलते पूर्व RPF अफसर बरी
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले में एक सरकारी कर्मचारी को बरी कर दिया है। यह मामला 20 साल से भी पहले रिश्वत मांगने के आरोप में बिछाए गए जाल (ट्रैप) के बाद शुरू हुआ था। कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के ऑपरेशन करने के तरीके पर गंभीर संदेह है और माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि बरामद पैसा अपीलकर्ता के लिए था। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के मई 2024 के आदेशों के खिलाफ़ दो अपीलें मंज़ूर करते हुए कहा कि ट्रैप (जाल बिछाने की कार्रवाई) को अपनी पूरी प्रक्रिया तक नहीं चलने दिया गया। हाई कोर्ट के उन आदेशों में एक स्पेशल ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सज़ा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच में CBI की गंभीर चूक और जल्दबाज़ी का फ़ायदा अपील करने वाले व्यक्ति को मिलेगा। इसे भी पढ़ें: अंकिता हत्याकांड में CBI जांच से सच सामने आएगा, CM Dhami का बड़ा बयान यह मामला उन आरोपों से जुड़ा था जिनमें कहा गया था कि अपील करने वाले व्यक्ति ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में डिविज़नल सिक्योरिटी कमिश्नर के तौर पर काम करते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया; उसने बिचौलिये के तौर पर काम करने वाले अपने मातहत अधिकारियों के ज़रिए गैर-कानूनी रिश्वत की मांग की और उसे हासिल किया। कथित तौर पर ये पैसे RPF के उन कर्मचारियों से लिए गए थे जो ट्रांसफर, पोस्टिंग और नौकरी से जुड़े दूसरे फ़ायदे चाहते थे। बाद में हुई जांच में कई फ़ाइनल रिपोर्ट सामने आईं और गैर-कानूनी तरीके से पैसे लेने के अलग-अलग मामलों के आधार पर कई लोगों पर मुक़दमे चलाए गए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि जिस तरह से ट्रैप (जाल) बिछाया गया, उसमें कुछ संदेह की गुंजाइश थी। कोर्ट ने गौर किया कि शिकायत करने वाले ने कथित तौर पर 3 अगस्त, 2005 को CBI को रिश्वत की मांग के बारे में जानकारी दी थी और एजेंसी ने अगले ही दिन ट्रैप बिछाने का फ़ैसला किया। इसे भी पढ़ें: LIC से 2684 करोड़ की धोखाधड़ी में CBI ने Anil Ambani पर दर्ज की FIR FIR 4 अगस्त, 2005 को दर्ज की गई थी और उसी दिन ट्रैप (छापा) भी डाला गया था। बेंच ने 16 सितंबर के अपने फ़ैसले में कहा, यह हैरानी की बात है कि CBI ने औपचारिक FIR दर्ज होने से पहले ही रिश्वत की शिकायत की पुष्टि करके एक संज्ञेय अपराध (cognizable offence) की जांच शुरू कर दी। यह भी देखा गया कि CBI ने ट्रैप को अंजाम देने से बहुत कम समय पहले दो स्वतंत्र ट्रैप गवाहों का इंतज़ाम किया था। बेंच ने कहा कि हालांकि जांच एजेंसी को इतनी असाधारण तेज़ी से ट्रैप आयोजित करने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन इससे संदेह ज़रूर पैदा होता है। उसने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता द्वारा उठाए गए संदेहों को नज़रअंदाज़ कर दिया था। उसने कहा ऊपर बताए गए ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले के पैरा 150 में की गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए, हमारा मानना है कि जिस तरह से ट्रैप को अंजाम दिया गया, उसमें निश्चित रूप से संदेह की गुंजाइश है, जिसे ट्रायल कोर्ट ने नज़रअंदाज़ कर दिया। हमारी राय में, ट्रायल कोर्ट द्वारा बताई गई कमियां अभियोजन पक्ष के मामले पर उचित संदेह पैदा करती हैं।
150 रुपये के अनुदान से शुरू हुआ था DUSU, आठ दशक में बना देश की छात्र राजनीति का बड़ा केंद्र
महज 150 रुपये के अनुदान से शुरू हुआ दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) लगभग आठ दशक बाद देश की छात्र राजनीति के सबसे चर्चित केंद्रों में से एक बन चुका है और इसके गठन का इतिहास उसके लंबे सफर की झलक पेश करता है। डूसू चुनाव के लिए मतगणना शनिवार को जारी है। डूसू का सफर देश की आजादी से कुछ ही दिन पहले छह अगस्त 1947 से उस समय शुरू हुआ था जब विश्वविद्यालय के कुलपति ने कार्यकारी परिषद को बताया था कि विद्यार्थियों का एक प्रतिनिधि निकाय विश्वविद्यालय छात्र संघ की स्थापना करना चाहता है। परिषद ने इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताते हुए कहा था कि एक समिति इसके लिए आवश्यक संविधान और प्रक्रिया का मसौदा तैयार करेगी। इसके साथ ही छात्र संघ का औपचारिक रूप से गठन होने के बाद शुरुआती खर्च के लिए 150 रुपये का छोटा-सा अनुदान देने का प्रस्ताव रखा गया। यह प्रस्ताव 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि से कुछ समय पहले रखा गया था। यहीं से उस संस्थागत यात्रा की शुरुआत हुई जिसने आगे चलकर डूसू को दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकतर महाविद्यालयों और संकायों के विद्यार्थियों का प्रतिनिधि निकाय तथा राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करने वाली छात्र राजनीति का एक प्रमुख मंच बना दिया। शुरुआती वर्षों में छात्र संघ के कामकाज और वित्तीय स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी रही। विश्वविद्यालय की कार्यकारी समिति ने 27 मार्च, 1953 को छात्र संघ के अनुदान संबंधी एक आवेदन पर विचार किया था। समिति ने कहा था कि उस वर्ष पहले ही 500 रुपये प्राप्त कर चुके छात्र संघ को आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए। छात्र संघ पर 14 मार्च, 1954 तक वित्तीय दबाव और स्पष्ट हो गया था। उसकी आय केवल 815 रुपये थी जबकि खर्च 1,995 रुपये हो चुका था। इसी बैठक में कुलपति ने इस बात पर गौर किया कि डूसू के लिए एक संविधान तैयार किया गया है और पहली बार चुनाव भी कराए गए हैं। उन्होंने अगले शैक्षणिक सत्र तक छात्र संघ का संचालन करने के लिए एक कार्यवाहक समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही, अगस्त 1954 तक नए खर्च पर सीमा लगाने और पहले से हो चुके खर्च का भुगतान करने के लिए अधिकतम 1,100 रुपये का अनुदान देने का प्रस्ताव भी रखा गया, बशर्ते छात्र संघ के कोषाध्यक्ष बिलों को मंजूरी दें। शुरुआती दस्तावेजों से पता चलता है कि छात्र संघ को वित्तीय जवाबदेही से लेकर प्रशासनिक निगरानी तक एक संस्थागत स्वरूप देने के प्रयास किए गए। लगभग दो दशक बाद डूसू की संवैधानिक संरचना पर फिर से विचार किया गया। कार्यकारी परिषद ने दो अगस्त, 1973 को छात्र संघ के ‘‘मौजूदा संविधान को निरस्त करने और अंतरिम संविधान लागू करने’’ के प्रस्ताव पर विचार किया। अंतरिम संविधान में वित्तीय नियंत्रण के प्रावधान किए गए। शुरुआत में 100 रुपये से अधिक के खर्च के लिए छात्र संघ की कार्यकारी समिति की मंजूरी जरूरी थी। इसमें एक विस्तृत प्रशासनिक ढांचा भी तय किया गया। कुलपति को डूसू का संरक्षक बनाया गया, जिसकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना था कि छात्र संघ संविधान के अनुरूप काम करे। छात्र संघ के ढांचे में एक शिक्षक सलाहकार का पद भी था, जिसकी नियुक्ति संरक्षक शिक्षकों में से करता था। कोषाध्यक्ष की नियुक्ति भी संरक्षक द्वारा की जाती थी। संविधान में चार निर्वाचित पदाधिकारियों-अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और सहायक सचिव-का प्रावधान किया गया था। इनका चुनाव डूसू के सदस्य साधारण बहुमत से सीधे करते थे। अध्यक्ष छात्र संघ का मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी होता था जबकि उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष उसके दायित्वों का निर्वहन करता था। सचिव को अध्यक्ष के परामर्श से और संविधान के अनुरूप छात्र संघ से जुड़े सभी मामलों में काम करना होता था। कई दशकों तक डूसू का सदस्यता शुल्क काफी कम रहा। विद्यार्थियों से वर्ष 2012-13 तक सदस्यता शुल्क के रूप में पांच रुपये लिए जाते थे। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, 2013-14 में इसे बढ़ाकर 20 रुपये किया गया और बाद में 21 जून 2024 को इसे बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया गया। कार्यकारी परिषद के समक्ष पहला प्रस्ताव रखे जाने के करीब आठ दशक बाद डूसू अब देश के सबसे प्रमुख छात्र प्रतिनिधि निकायों में शामिल हो चुका है। इसके चुनावों ने ऐसे कई नेता दिए हैं जिन्होंने आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इस साल 18 सितंबर को हुआ चुनाव डूसू के इसी इतिहास की ताजा कड़ी है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मतगणना शनिवार सुबह आठ बजे ‘नॉर्थ कैंपस’ स्थित विश्वविद्यालय खेल स्टेडियम के बहुउद्देश्यीय हॉल में शुरू हुई। केंद्रीय पैनल के चार पदों के लिए चुनाव मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), कांग्रेस से संबद्ध भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय छात्र संगठन (आइसा)-स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) का वाम गठबंधन प्रमुख दावेदार हैं। चुनाव प्रचार में विद्यार्थियों की सुरक्षा, आवास और परिसर की सुविधाएं प्रमुख मुद्दे रहे। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद सुरक्षा का मुद्दा विशेष रूप से चर्चा में रहा। इस इमारत में छात्रों के लिए ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) आवास का संचालन किया जाता था। इस हादसे में विद्यार्थियों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। अभाविप ने अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, उपाध्यक्ष पद के लिए ईशु मौर्य, सचिव पद के लिए रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद के लिए लक्ष्य राज सिंह को उम्मीदवार बनाया है। एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद के लिए विजय शंकर मीणा, उपाध्यक्ष पद के लिए वीर चतरथ, सचिव पद के लिए नम्रता चौधरी और संयुक्त सचिव पद के लिए गोपाल चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। आइसा-एसएफआई गठबंधन ने अध्यक्ष पद के लिए अनन्या रतूड़ी, उपाध्यक्ष पद के लिए अक्षत शिखर, सचिव पद के लिए स्टैनजिन डेस्क्योंग और संयुक्त सचिव पद के लिए बी. पारिजात को उम्मीदवार बनाया है। एक छोटे-से अनुदान और कार्यवाहक समिति से शुरू हुआ डूसू का सफर आज राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचने वाले चुनाव तक पहुंच चुका है। यह यात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति और प्रतिनिधित्व के बदलते स्वरूप को भी दर्शाती है।
79 स्किल्स सीखे और 41000 सैलरी से हुआ 1 करोड़ का पैकेज!
शशांक मिश्रा ने टेक इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत 41 हजार रुपये मासिक वेतन से की थी. उन्होंने समय के साथ डेटा इंजीनियरिंग में अपने कौशल को विकसित किया और 79 अलग-अलग स्किल्स सीखकर आज 1 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना पैकेज पर काम कर रहे हैं. उनकी कहानी यह दर्शाती है कि सही दिशा में मेहनत और अपस्किलिंग से करियर में बड़ा बदलाव संभव है.
नंदीग्राम से Congress उम्मीदवार Milan Pradhan गिरफ्तार, 2007 के मामलों में कोर्ट में पेशी
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में 2007 में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दंगा, हत्या और आपराधिक धमकी से जुड़े कम से कम चार मामलों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार मिलन प्रधान को शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने यह जानकारी दी। प्रधान नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार हैं। पार्टी ने प्रधान की गिरफ्तारी के विरोध में कोलकाता में एक रैली आयोजित करने का फैसला किया है। प्रधान को शुक्रवार शाम पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के चांदीपुर स्थित एक होटल से पार्टी के एक अन्य नेता सुभाशीष भट्टाचार्य के साथ गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने भट्टाचार्य को इसलिए गिरफ्तार किया था, क्योंकि उनपर प्रधान की गिरफ्तारी में बाधा डालने का आरोप है। अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘प्रधान को 2007 में दर्ज चार मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था... ये मामले दंगा, हत्या और आपराधिक धमकी से जुड़े हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘इनमें तीन नंदीग्राम और एक खेजुरी थाने में दर्ज मामले शामिल हैं... ये मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे। उन्हें आज हल्दिया के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।’’पश्चिम बंगाल पुलिस ने शनिवार को कहा कि प्रधान ‘‘फरार’’ थे और उन्हें काफी समय से लंबित चार गैर-जमानती वारंट के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। राज्य पुलिस ने एक बयान में कहा, ‘‘गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, हत्या के इरादे से अपहरण, सबूत मिटाना, घर में जबरन घुसना और घातक हथियारों का इस्तेमाल कर दंगा करने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। कुछ मामलों में शस्त्र अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं।’’पुलिस ने कहा, ‘‘प्रधान 2007 से फरार थे और इन मामलों में उन्हें फरार घोषित करते हुए आरोप-पत्र दायर किया गया था। वारंट तामील करने के संबंध में पूर्व में बार-बार किए गए प्रयास विफल रहने और समय-समय पर अदालतों में वारंट तामील नहीं होने की रिपोर्ट दी जाती रही है।’’पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी काफी समय से लंबित गैर-जमानती वारंट को तामील कराने के लिए चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान की गई। पुलिस के अनुसार, ‘‘चुनाव और उपचुनाव के दौरान भारत निर्वाचन आयोग की ओर से इस तरह की कार्रवाई के लिए स्थायी निर्देश जारी होते हैं। एक विशेष अभियान के तहत इन निर्देशों का पालन करते हुए प्रधान की गिरफ्तारी होना एक कानूनी कार्रवाई है।’’प्रधान को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस को अपनी पार्टी का समर्थन देने की घोषणा की थी, क्योंकि उनके उम्मीदवार ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था। प्रधान की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने कहा कि पार्टी को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया और उन्हें कहां रखा गया है। सरकार ने शुक्रवार शाम कहा, ‘‘हमें पता चला कि उन्हें हत्या के एक मामले में हिरासत में लिया गया है, लेकिन हमें इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। मिलन (प्रधान) उन नेताओं में शामिल थे, जो नंदीग्राम आंदोलन में सबसे आगे थे और उनपर कई मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन, आज उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?’’कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जब पार्टी ने निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क किया तो वह भी प्रधान की गिरफ्तारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके। सरकार ने कहा, ‘‘पुलिस ने प्रधान की गिरफ्तारी की कोई वजह नहीं बताई है। यह बेहद हैरानी की बात है। जब आचार संहिता लागू हो और उस खास सीट (नंदीग्राम) का प्रशासन निर्वाचन आयोग के अधीन हो तो पुलिस किसी उम्मीदवार को कैसे गिरफ्तार कर सकती है?’’सरकार ने शुभेंदु अधिकारी पर भी निशाना साधा और कहा कि प्रधान को इसलिए गिरफ्तार करवाया गया, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ‘‘चुनाव हारने का डर था’’। सरकार ने कहा, ‘‘प्रधान नंदीग्राम में एक लोकप्रिय उम्मीदवार हैं और भाजपा को चुनाव हारने का डर है। यही वजह है कि उन्हें गिरफ्तार किया गया। अगर पुलिस को उनसे पूछताछ करनी थी तो वह उन्हें बुला सकती थी।’’कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि यह हैरानी की बात है कि विधानसभा चुनाव में इतने बड़े जनादेश के साथ जीतने के बाद भी ‘‘भाजपा उपचुनाव जीतने के लिए निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल कर रही है’’। उन्होंने कहा, ‘‘इससे पता चलता है कि इतने कम समय में भाजपा ने अपनी प्रासंगिकता कितनी खो दी है।
‘वाइब तो है’, मगर क्या मडगांव एक्सप्रेस वाली बात है?
कुणाल खेमू की फिल्म वाइब सिनेमाघरों में बीते दिन रिलीज हुई. इस पिक्चर को बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत मिली हो. मगर इसका कंटेंट इतना जबरदस्त है कि ये आजकल आईं कुछ कॉमेडी फिल्मों को भी आराम से फेल कर देती है. मुझे कैसी लगी कुणाल की 'वाइब'?
सिर्फ मसाला नहीं लौंग, घर के इन 6 बड़े कामों में होती है यूज
खड़े मसालों में शामिल लौंग सिर्फ खाने के स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल नहीं होती है, बल्कि अपने गुणो की वजह से इसके कई दूसरे इस्तेमाल भी हैं. इसके इस्तेमाल जानकर आप हैरान रह जाएंगे और बोलेंगे कि यह पहले क्यों नहीं पता थे. जानिए लौंग के कुछ आसान और यूनिक घरेलू हैक्स.
यमन जंग का नया मोड़! सऊदी पर हुती हमलों से भारत समेत दुनिया की बढ़ा दी चिंता
शुक्रवार देर रात और शनिवार तड़के सऊदी अरब में कई जगह इमरजेंसी अलर्ट बजे और सरकार ने दुश्मन हवाई खतरे की चेतावनी दी. रियाद में कम से कम एक धमाका सुना गया, लेकिन नुकसान या घायलों की खबर नहीं है. यह हूती विद्रोहियों के साथ ताजा तनाव के बाद राजधानी का पहला अलर्ट था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हूती हमलों की निंदा की और हथियार प्रतिबंध लागू करने को कहा.
बिहार के रोहतास में सियार ने 10 से ज्यादा लोगों को काटा
रोहतास के बिक्रमगंज में एक सियार ने 10 से ज्यादा लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने लाठी-डंडों से सियार को घेर लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
नलखेड़ा में बरसाती नाले में तेज बहाव में कार बहने से ओडिशा के 7 श्रद्धालुओं समेत 8 की मौत
मां बगलामुखी मंदिर से दर्शन कर लौटते समय हादसा आगर मालवा। मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में शुक्रवार रात बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने आठ परिवारों को गम में डुबो दिया। मां बगलामुखी मंदिर के पास बरसाती नाले के तेज बहाव में श्रद्धालुओं से भरी कार बह गई। हादसे में […] The post नलखेड़ा में बरसाती नाले में तेज बहाव में कार बहने से ओडिशा के 7 श्रद्धालुओं समेत 8 की मौत appeared first on Sabguru News .
बलिया में पत्नी-बेटी की हत्या... 70 साल के पति ने रची थी साजिश
बलिया के रसड़ा में 17 सितंबर को 65 साल की महिला और उसकी 22 साल की दृष्टिबाधित बेटी की हत्या कर दी गई थी. महिला के पति 70 साल के रामचीज गुप्ता ने पुलिस से कहा था कि अज्ञात लोगों ने दोनों की हत्या की है. लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो कहानी पलट गई. पुलिस के मुताबिक, रामचीज ने ही दो साथियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी.
TATA का धमाका, लॉन्च की SIERRA Legend, इतने रुपये रखी कीमत
TATA Sierra मार्केट में अच्छा परफॉर्म कर रही है. कंपनी हर महीने औसतन इसकी 6 से 7 हजार यूनिट्स बेच रही है. कंपनी ने इस कार की नई सीरीज को लॉन्च किया है. ब्रांड ने टाटा सिएरा लेजेंड सीरीज को पेश किया है. इस सीरीज में कंपनी हायर वेरिएंट्स के फीचर्स को अफोर्डेबल प्राइस पर दिया है. आइए जानते हैं इसकी खास बातें.
छोटा लिविंग रूम भी दिखेगा बड़ा और चमकदार दीवारों के लिए चुनें ये 7 बेहतरीन कलर कॉम्बिनेशन
घर में मेहमानों के स्वागत से लेकर परिवार के साथ समय बिताने तक लिविंग रूम की खास अहमियत होती है।
‘चीनी सेना ने मेरे लोगों को पकड़ लिया, करियर खत्म था…’ अजीत डोभाल ने सुनाया खौफनाक किस्सा
IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में NSA अजीत डोभाल ने अपने युवा दिनों का किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे चीन ने एक इंटेलिजेंस मिशन से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो गया।
रायपुर में पत्नी से संबंध के शक में मकान मालिक की हत्या, किराएदार अरेस्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे राखी थाना क्षेत्र के ग्राम गनौद में पत्नी के साथ कथित संबंध के संदेह को लेकर मकान मालिक और किराएदार के बीच हुआ विवाद हत्या तक पहुंच गया। पुलिस के मुताबिक विवाद के दौरान किराएदार ने मकान मालिक का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले […] The post रायपुर में पत्नी से संबंध के शक में मकान मालिक की हत्या, किराएदार अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
Air Marshal Man Mohan Sinha:
सूरतगढ़ में कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद चार मदरसा छात्राओं की तबीयत बिगड़ी
श्रीगंगानगर। जिले के सूरतगढ़ शहर में एक मदरसे की चार छात्राओं की कोल्ड ड्रिंक पीने के कुछ देर बाद तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। छात्राओं को उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत होने पर मदरसा प्रबंधन ने उन्हें तत्काल सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार कराया जा रहा है। जानकारी के अनुसार घटना […] The post सूरतगढ़ में कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद चार मदरसा छात्राओं की तबीयत बिगड़ी appeared first on Sabguru News .
क्या है जो रिक्रूटर को आपका रिज्यूमे पढ़ने के लिए रोकता है?
आप चाहे फ्रेशर हों या एक्सपीरियंस, नौकरी के लिए सबसे पहले रिज्यूम ही तैयार करते हैं. लेकिन एक अच्छा CV केवल आपके एजुकेशन जर्नी या अनुभव के बारे में जानकारी नहीं देता है. इसके आपकी स्किल पर भी फोकस किया जाता है. लेकिन कई बार आप अपने रिज्यूमे की वजह से रिजेक्ट हो जाते हैं. लेकिन अगर ये बार-बार हो रहा है, तो आपको कई बातें समझनी होगी.
सीएम भगवंत मान के काफिले पर टमाटर फेंकने की कोशिश, रवनीत बिट्टू हिरासत में
पंजाब की राजनीति में इन दिनों काफी गर्माहट देखने को मिल रही है. खासकर रवनीत सिंह बिट्टू पर हुए कथित हमले के बाद से राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है. इसी कड़ी में लुधियाना के पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के बाहर एक हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. दरअसल, यूनिवर्सिटी में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. इसी दौरान कांग्रेस नेता रवनीत सिंह बिट्टू अपने हाथों में टमाटर लेकर वहां पहुंच गए. जैसे ही मुख्यमंत्री भगवंत मान का काफिला वहां से गुजरने लगा, रवनीत सिंह बिट्टू ने सुरक्षा घेरा तोड़कर काफिले पर टमाटर फेंकने की कोशिश की. हालांकि, मौके पर मुस्तैद पुलिस कर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया.
काला जठेड़ी को मिली 6 घंटे की पैरोल, करेगा जुड़वा बेटियों का नामकरण
कुख्यात गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी 6 घंटे की पैरोल पर सोनीपत स्थित अपने घर पहुंचेगा, जहां वह अपनी जुड़वा बेटियों के नामकरण कार्यक्रम में शामिल होगा. उसकी पत्नी अनुराधा ने बताया कि उसे सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक की पैरोल मिली है.
'सेमीकंडक्टर हब बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा भारत', बोले अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की शुरुआत और इसकी यात्रा बेहद दिलचस्प रही है. शुरुआत में इस क्षेत्र को लेकर काफी संदेह था, लेकिन सरकार की स्पष्ट सोच और ईमानदारी ने इसे हकीकत में बदल दिया. जब केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के सीईओ से मुलाकात की, तो उन्होंने बेहद विनम्रता से देश की स्थिति को उनके सामने रखा.
अलवर में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा, खड़ी स्लीपर बस में घुसा ट्रेलर; परिचालक की मौत
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के रैणी थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई और अन्य तीन घायल हो गए। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर देर रात दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। रैणी थाना क्षेत्र में चैनल नंबर 137 के पास सड़क किनारे खड़ी एक स्लीपर बस […] The post अलवर में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा, खड़ी स्लीपर बस में घुसा ट्रेलर; परिचालक की मौत appeared first on Sabguru News .
दिल्ली में आवारा कुत्ते का 18 महीने के बच्चे पर हमला, CCTV में कैद हुई घटना
दिल्ली के तिमारपुर इलाके में गली में खेल रहे 18 महीने के एक मासूम बच्चे पर आवारा कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया. यह पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है. वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्चा शांति से खेल रहा था, तभी सामने से आए आवारा कुत्ते ने सीधे उसके चेहरे पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह लहूलुहान कर दिया.
mera dil bhi kitna pagal hai Song: कुमार सानू 90 के दशक के जाने माने सिंगर्स की लिस्ट में आते हैं, जिन्होंने हिंदी ही नहीं अग्रेजी, मराठी, असमी, गुजराती, तेलुगू और कई भारतीय भाषाओं में गाने गाए. उनके गानों की लिस्ट लंबी है.
DUSU क्यों कहलाता है राजनीति की नर्सरी? अरुण जेटली, रेखा गुप्ता समेत कौन-कौन से दिग्गज यहां से निकले
दिल्ली विश्वविद्यालय भारतीय राजनीति की नर्सरी कहलाता है. यहां की छात्र राजनीति से निकले लोग विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय दलों के बड़े चेहरे बने हैं. आखिर इस संस्थान में ऐसा क्या है, जो छात्र राजनीति के लिहाज से अहम माना जाता है.
दिल्ली में नाबालिग से गैंगरेप, प्रियंका गांधी ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुई हैवानियत के मामले पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखे सवाल खड़े किए हैं. प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार और समाज दोनों की विफलता पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है.
इस फिल्म को लेकर उस दौर में ऐसी दीवानगी थी कि लोग इसे देखने और अपने पसंदीदा सितारों की एक झलक पाने के लिए हर मुश्किल को भूल जाते थे, और इसकी यादें दशकों बाद भी फीकी नहीं पड़ी हैं. इस फिल्म के सभी 12 गाने आज भी यादगार हैं.
नेटफ्लिक्स से लेकर प्राइम वीडियो तक सबसे ज्यादा देखे गए ये शो, एक को तो 1.2 बिलियन लोगों ने देखा
ओटीटी के कई सारे प्लेटफॉर्म हैं, जिस पर आप वीकेंड पर नई सीरीज और फिल्मों का लुत्फ उठा सकते हैं. इसमें आपको ढेर सारे ऑप्शन मिल जाएंगे. लेकिन आज हम आपको नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो, पैरामाउंट, एप्पल टीवी पर सबसे ज्यादा देखी गई सीरीज के बारे में बताने जा रहे हैं,
महाराष्ट्र के परली में आवारा कुत्ते की दहशत, एक दिन में 47 लोगों को काटा
महाराष्ट्र के बीड जिले में एक आवारा कुत्ते के हमले से हड़कंप मच गया. एक ही दिन में कुत्ते ने करीब 47 लोगों को काट लिया. घायलों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं. सभी को अस्पताल लाया गया, जहां एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिया गया. 19 लोगों को गंभीर चोटों के चलते रेफर किया गया है. घटना के बाद लोगों ने नगर परिषद से ठोस कदम उठाए जाने की मांग की है.
ग्रेटर नोएडा में कार ने कई लोगों को मारी टक्कर, दिल दहला देने वाला वीडियो आया सामने.
ग्रेटर नोएडा में एक तेज रफ्तार बेकाबू कार ने सड़क किनारे खड़े कई लोगों को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर मारने के बाद आरोपी ड्राइवर मौके से कार लेकर फरार हो गया. इस पूरी घटना का दिल दहला देने वाला मंजर सीसीटीवी में कैद हो गया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे यह कार लोगों को टक्कर मारते हुए तेजी से भाग रही है.
BJP नेता रवनीत बिट्टू हिरासत में, CM भगवंत मान को शराब, अंडे-टमाटर देने की कोशिश
Ravneet singh bittu news: पंजाब में भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को हिरासत में ले लिया गया है। उनके ऊपर मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने प्रदर्शन करने का आरोप है। उन्होंने शराब, अंडे, टमाटर देने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने ऐक्शन लिया।
EPFO ने वेज सीलिंग को बढ़ा दिया है, जिससे बेसिक सैलरी की सीमा में बड़ा बदलाव हुआ है.30 साल तक नौकरी करने वाले कर्मचारियों को अब हर महीने ₹4,571 तक अतिरिक्त पेंशन मिल सकती है.कम अवधि की सर्विस वाले कर्मचारियों की मंथली पेंशन में भी उनकी नौकरी के सालों के हिसाब से इजाफा देखने को मिलेगा.
CM Bhagwant Mann के काफिले के सामने High-Voltage Protest: हिरासत में BJP नेता Ravneet Bittu
शनिवार को पंजाब पुलिस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू को हिरासत में ले लिया। उन्होंने पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) गेट के पास तब विरोध प्रदर्शन किया, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान का काफिला वहां से गुजर रहा था। जब मान 'किसान मेले' के लिए यूनिवर्सिटी पहुंचे, तो बिट्टू PAU गेट पर मौजूद थे। विरोध के दौरान, बिट्टू ने मुख्यमंत्री के काफिले की ओर शराब की एक बोतल दिखाई और कहा कि वह मान को बोतल लौटा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि वे अपनी शराब का आनंद लें और अरविंद केजरीवाल को दिल्ली से पंजाब को लूटने दें। इसे भी पढ़ें: पंजाब में Manish Sisodia ने किया AAP के महासंपर्क अभियान का एलान, Sukhbir Badal ने कसा तंज पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) के मैदान में मुख्यमंत्री भगवंत मान के आने से पहले, शनिवार को BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 8 के बाहर CM को शराब की एक बोतल गिफ्ट की। हाथ में शराब की बोतल और टमाटर लिए बिट्टू ने कहा कि मान को अपनी शराब का मज़ा लेना चाहिए और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली से राज्य चलाने देना चाहिए। गेट नंबर 8 के बाहर जल्दबाजी में बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिट्टू ने कहा कि वह वे बचे हुए अंडे और टमाटर भी साथ लाए हैं, जो उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को उनके काफिले पर फेंके थे। इसे भी पढ़ें: Punjab में Ravneet Bittu के काफिले पर कथित पथराव, आप कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप इस डर से कि कहीं सत्ताधारी पार्टी सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उन्हें मीडिया से बात करने से न रोक दे, बिट्टू की मीडिया टीम ने पत्रकारों को टेक्स्ट मैसेज भेजे और उनसे मुख्यमंत्री के आने से कुछ मिनट पहले ही कार्यक्रम को कवर करने को कहा। बिट्टू ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) काले झंडे दिखाकर बीजेपी की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' का विरोध कर रही थी और उन्होंने मांग की कि ऐसे विरोध प्रदर्शन तुरंत बंद किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सत्ताधारी पार्टी ने बीजेपी की यात्रा में बाधा डाली, तो उसे भी इसी तरह के नतीजों का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिका के घर भारत से कितने अलग होते हैं?
अमेरिका के घर भारत के घरों से कई मायनों में अलग होते हैं. यहां कारपेट, बाथटब, सेंट्रल एसी-हीटिंग, ड्राईवॉल, गार्बेज डिस्पोजल और स्मोक अलार्म जैसी चीजें आम हैं, जो भारतीय घरों में कम देखने को मिलती हैं.
ईरान युद्ध में US सैनिकों की मौत का आंकड़ा पेंटागन के दावे से ज्यादा, रिपोर्ट में बड़ा दावा
ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पेंटागन के सार्वजनिक आंकड़ों से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों मारे गए हैं. हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है.
उदयपुर में शिव मूर्ति खंडित... सड़कों पर उतरे लोग, आरोपी फिरोज डिटेन
उदयपुर में शिव प्रतिमा खंडित किए जाने की घटना से लोगों में भारी नाराजगी है. हिंदू समाज के बड़ी संख्या में लोग, जिनमें युवा और महिलाएं शामिल हैं, सड़कों पर उतरे और आरोपी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. कुछ युवाओं ने आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाने की मांग भी रखी.
CTET 2026 में सफलता पाने के लिए उम्मीदवारों को सिर्फ सिलेबस ही नहीं, बल्कि पासिंग मार्क्स और परीक्षा पैटर्न की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए. सही रणनीति, नियमित अभ्यास और समय प्रबंधन के जरिए इस परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है.
Kerala Student Election Result: SFI और KSU के प्रदर्शन पर Vijayan और Sunny Joseph ने दी बधाई
केरलम विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) अध्यक्ष सनी जोसेफ ने राज्य में हाल में कॉलेज और स्कूल स्तर पर हुए चुनाव में प्रदर्शन के लिए अपने-अपने छात्र संगठनों को बधाई दी। राज्य के विभिन्न हिस्सों में शुक्रवार को कई कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और स्कूल यूनियनों के चुनाव हुए थे। विजयन ने शुक्रवार रात फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि केरलम का ‘‘वामपंथी रुझान’’ मजबूत वापसी की तैयारी कर रहा है और विधानसभा चुनाव में हार के साथ सब कुछ खत्म नहीं हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में विभिन्न स्तरों पर हुए छात्र चुनाव के नतीजे इस रुझान को दर्शाते हैं। विजयन ने कहा कि एसएफआई ने केरल विश्वविद्यालय में 71 में से 62 सीट, कन्नूर विश्वविद्यालय में 77 में से 53 सीट, पॉलिटेक्निक संस्थानों में 55 में से 45 सीट और स्कूल संसद चुनाव में 699 में से 604 सीट पर जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के तीन महीने के कार्यकाल में बिजली कटौती, ‘लाइफ’ आवास योजना, पेंशन और राशन जैसे मुद्दों को लेकर लोगों के बीच चिंताएं और चर्चाएं बढ़ रही हैं। विजयन ने छात्र समुदाय के ‘‘लोकतांत्रिक फैसले’’ का स्वागत किया और जीतने वाले सभी एसएफआई कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को बधाई दी। जोसेफ ने एक अलग फेसबुक पोस्ट में राज्य भर में कॉलेज यूनियन चुनाव में केएसयू कार्यकर्ताओं को उनकी ‘‘शानदार जीत’’ के लिए बधाई दी और कहा, ‘‘डर और हिंसा की राजनीति को नकारते हुए परिसरों ने घोषित किया है कि वे लोकतंत्र और रचनात्मक राजनीति के साथ हैं।’’ उन्होंने छात्र समुदाय का आभार जताया और जीत में योगदान देने वाले केएसयू कार्यकर्ताओं को बधाई दी।
अब 25000 सैलरी लिमिट, EPFO के नए नियम से किसे क्या-क्या फायदा?
EPFO Rule Change Impact: ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए सैलरी लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का फायदा 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा. उन्हें EPF, EPS और EDLI से जुड़ी तमाम लॉन्ग टर्म वित्तीय सुरक्षा प्राप्त होगी.
रेलवे स्टेशन पर महिला को बाल पकड़कर घसीटता दिखा शख्स
तेलंगाना के हफीजपेट रेलवे स्टेशन के पास महिला से कथित मारपीट का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति महिला के बाल पकड़कर घसीटता दिख रहा है। शुरुआत में उसे RPF कांस्टेबल बताया गया, लेकिन दक्षिण मध्य रेलवे ने स्पष्ट किया कि वह RPF जवान नहीं, बल्कि तेलंगाना स्टेट पुलिस का होम गार्ड है।
नया Trend Nonna-Maxxing, क्यों लौट रहे हैं दादी-नानी वाले हॉबीज?
Gen Z की फास्ट-पेस्ड लाइफ और स्क्रीन से भरी जिंदगी के बीच पुराने और Slow Hobbies का चलन बढ़ रहा है. Crochet, Gardening, Baking, Pottery और Knitting जैसी Activities उन्हें लगातार Notifications और Scrolling से ब्रेक देती हैं. इन Hobbies में कुछ Create करने, Patience रखने और बिना Productivity के Pressure के समय बिताने का सुकून मिलता है.
जेड प्लांट का पीला पड़ना इन बुरी चीजों का है संकेत, तुरंत अपनाएं ये उपाय
Vastu Tips Jade Plant : जेड प्लांट की पत्तियां पीली पड़ रही हैं? जानिए वास्तु और फेंगशुई के अनुसार इसके बड़े संकेत, आर्थिक तंगी का खतरा और पौधे को हरा-भरा रखने के आसान उपाय.
Rejinagar Bypoll: Mamata Banerjee के दखल के बाद TMC Candidate का यू-टर्न, अब लड़ेंगे चुनाव
रेजीनगर उपचुनाव से हटने की घोषणा करने के कुछ घंटों बाद, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को अपना फैसला बदल लिया और कहा कि वह चुनाव लड़ना जारी रखेंगे। चौधरी ने दिन में पहले राज्य प्रशासन द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए चुनाव से हटने की घोषणा की थी। खबरों के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि कार्यकर्ताओं को प्रचार करने से रोका जा रहा है और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। चौधरी ने कहा कि उन्होंने ममता बनर्जी के कहने पर चुनाव से हटने का अपना फैसला वापस ले लिया है। इसे भी पढ़ें: नंदीग्राम के बाद ममता को एक और झटका, TMC के रेजीनगर उम्मीदवार ने उपचुनाव से वापस लिया नाम 13 सितंबर को चौधरी को रेजीनगर के लिए और संचिता प्रधान (डे) को नंदीग्राम से पार्टी गुट का उम्मीदवार घोषित किया गया। पार्टी ने अपनी चेयरपर्सन ममता बनर्जी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से इन दोनों उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि मैं ममता बनर्जी के निर्देशों से हटकर कुछ नहीं कर रहा हूँ। उन्होंने आगे कहा कि पहले मैंने सोचा था कि हम नए चुनाव चिह्न और अन्य मामलों पर फ़ैसला करेंगे। अब मैं नए चुनाव चिह्न के साथ लोगों के बीच जाऊँगा। यह घटनाक्रम प्रधान द्वारा नंदीग्राम से अपना नामांकन वापस लेने के एक दिन बाद हुआ है। चौधरी का चुनाव से हटने का शुरुआती फ़ैसला, ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस की नंदीग्राम उपचुनाव की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के शुक्रवार को अपना नामांकन वापस लेने के एक दिन बाद आया। संचिता ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाक़ात के कुछ घंटों बाद ही अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसे भी पढ़ें: TMC चुनाव चिह्न विवाद पर BJP का हमला, Rahul Gandhi को याद दिलाया सरकारों को गिराने का इतिहास सूत्रों के मुताबिक़, पेशे से शिक्षिका प्रधान डे शुक्रवार दोपहर अपने पति सत्यजीत के साथ राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में अधिकारी से मिलीं। बाद में उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे नंदीग्राम में ममता की ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस बिना किसी उम्मीदवार के रह गई। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी।
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक अहम मोड़ पर दिखाई दे रहे हैं. ढाका ने भारत के साथ हुए 101 समझौतों और MoU की समीक्षा शुरू की है. इसमें कनेक्टिविटी, ऊर्जा, बंदरगाह, अवसंरचना और सुरक्षा सहयोग से जुड़े कई अहम समझौते शामिल बताए जा रहे हैं.
AI से AI पर अटैक! Anthropic ने ChatGPT हैक किया, दुनिया हैरान
AI इंडस्ट्री को तीन रिसर्चर ने हैरान कर दिया है, जिसमें OpenAI के ChatGPT को सिर्फ कुछ घंटों में हैक कर लिया. हैरान करने वाली बात यह है कि इसके लिए रिसर्चर्स ने राइवल कंपनी Anthropic के AI मॉडल का यूज किया है.
West Bengal By Election 2026:
मात्र 5,000 रुपये के बजट में दिल्ली के पास के इन 5 खूबसूरत हिल स्टेशनों
भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस के तनाव और महानगरों के शोरगुल से तंग आ चुके लोगों के लिए वीकेंड का समय किसी वरदान से कम नहीं होता है। जब भी हफ्ते के अंत में दो दिन की छुट्टी मिलती है, तो दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में रहने वाले हर शख्स का दिल यही चाहता है कि वह शहर की भीड़भाड़ से दूर किसी शांत, हसीन और प्राकृतिक वादियों से भरपूर जगह पर कुछ पल सुकून के बिताए। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि बजट की कमी या कम समय के कारण लोग लंबी और खर्चीली छुट्टियों का प्लान नहीं बना पाते हैं। अगर आप भी इसी असमंजस में रहते हैं कि कम पैसों में शानदार ट्रिप कैसे प्लान की जाए, तो यह आलेख सिर्फ आपके लिए है। राजधानी दिल्ली से बस कुछ ही घंटों की दूरी पर ऐसी कई जादुई और खूबसूरत जगहें मौजूद हैं, जहाँ आप मात्र 5,000 रुपये के कुल बजट में पहाड़, झील और जंगलों की सैर करके वापस लौट सकते हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत और रोमांचक आलेख में हम आपको उन 5 बजट-फ्रेंडली वीकेंड गेटवे की पूरी जानकारी दे रहे हैं।नंबर 1: उत्तराखंड का छिपा हुआ नगीना 'लैंसडाउन' (Lansdowne), जहाँ कम खर्च में मिलता है पाइन के जंगलों और पहाड़ों का असली सुकूनउत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित लैंसडाउन दिल्ली के पर्यटकों के लिए वीकेंड ट्रिप का सबसे बेहतरीन और किफायती विकल्प माना जाता है। दिल्ली से इसकी दूरी महज 250 किलोमीटर के आसपास है, जिसे आप अपनी गाड़ी, बाइक या उत्तराखंड रोडवेज की बसों से आसानी से 6 से 7 घंटे में तय कर सकते हैं। छावनी परिषद क्षेत्र होने के कारण यह शहर देश के सबसे शांत, स्वच्छ और सुरक्षित हिल स्टेशनों में गिना जाता है, जहाँ आपको बड़े-बड़े चीड़ और देवदार के घने जंगल, खूबसूरत वादियां और ब्रिटिशकालीन वास्तुकला देखने को मिलती है। यहाँ का प्रसिद्ध भुल्ला ताल (Bhulla Tal) और टिफिन टॉप पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं, जहाँ आप प्रकृति की गोद में बैठकर अपने वीकेंड को बेहद कम बजट में यादगार बना सकते हैं।नंबर 2: झीलों की नगरी 'भीमताल' (Bhimtal) और नौकुचियाताल, जहाँ नैनीताल की भीड़ से दूर मिलता है सस्ता और शानदार अनुभवउत्तराखंड के ही कुमाऊं मंडल में स्थित नैनीताल के बारे में तो हर कोई जानता है, लेकिन वहाँ के अत्यधिक पर्यटन और महंगे होटलों के मुकाबले उसके ठीक पास बसा भीमताल और नौकुचियाताल बजट यात्रियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। दिल्ली से भीमताल की दूरी लगभग 300 किलोमीटर है और यहाँ पहुँचने के लिए आपको हल्द्वानी तक की ट्रेन या सीधी बसें आसानी से मिल जाती हैं। भीमताल की विशाल झील के बीचों-बीच स्थित टापू और यहाँ के शांत जंगल बजट फ्रेंडली होमस्टे या गेस्ट हाउस में रुकने का शानदार मौका देते हैं। मात्र 5,000 रुपये के बजट में आप यहाँ बोटिंग करने के साथ-साथ स्थानीय कुमाऊँनी व्यंजनों का लुत्फ उठा सकते हैं और प्रकृति के बीच पूरी तरह तरोताजा हो सकते हैं।नंबर 3: हिमाचल प्रदेश का खूबसूरत और कम बजट वाला ऑफबीट डेस्टिनेशन 'कौसानी' या 'मशोबरा'यदि आपका दिल पहाड़ों की ऊंचाइयों और बर्फीली चोटियों के दीदार के लिए मचलता है, लेकिन आप मनाली या शिमला जैसी महंगी जगहों पर जाने से बचना चाहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड के छोटे और ऑफबीट पहाड़ी स्थल आपके लिए सबसे मुफीद हैं। दिल्ली से हिमाचल के सोलन या कसौली की दूरी भी बहुत अधिक नहीं है और यहाँ रोडवेज की बसों से सफर करने पर यात्रा का खर्च बहुत कम आता है। इन जगहों पर आपको चीड़ और ओक के जंगलों से घिरे ट्रैकिंग ट्रेल्स, शांत रास्ते और कम बजट वाले शानदार कैफे मिल जाते हैं, जहाँ आप बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी छुट्टियों का भरपूर आनंद उठा सकते हैं।नंबर 4: ऐतिहासिक विरासत और वन्यजीवों का अनूठा संगम 'सरिस्का टाइगर रिजर्व' (Sariska), राजस्थान का हरा-भरा जंगलअगर आपको पहाड़ों के बजाय जंगलों, वन्यजीवों और एडवेंचर का शौक है, तो राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व दिल्ली के लोगों के लिए सबसे नजदीक और बेहतरीन वीकेंड डेस्टिनेशन है। दिल्ली से सरिस्का की दूरी मात्र 200 किलोमीटर है, जिसे आप अपनी कार या कैब से 4 घंटे में तय कर सकते हैं। अरावली की पहाड़ियों से घिरे इस विशाल अभयारण्य में आपको पक्के जंगलों, प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर और सिलीसेढ़ झील जैसे अद्भुत स्थलों की सैर करने का मौका मिलता है। यहाँ सरकारी रेस्ट हाउस या कम बजट के रिसॉर्ट्स में ठहरकर आप बहुत कम खर्च में एक रोमांचक जंगल सफारी का अनुभव ले सकते हैं।नंबर 5: उत्तर प्रदेश की प्राचीन धरोहर और गंगा तट का आध्यात्मिक सुकून 'ऋषिकेश' (Rishikesh)दिल्ली से लगभग 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित योग नगरी ऋषिकेश केवल आध्यात्मिकता का केंद्र ही नहीं, बल्कि एडवेंचर और नेचर लवर्स के लिए भी सबसे सस्ता और पसंदीदा वीकेंड ठिकाना है। दिल्ली से कश्मीरी गेट या आनंद विहार से आपको ऋषिकेश के लिए 24 घंटे एसी और नॉन-एसी बसें मिल जाती हैं, जिनका किराया बहुत कम होता है। यहाँ पहुँचकर आप गंगा के तट पर शाम की दिव्य आरती का आनंद ले सकते हैं, राजाजी नेशनल पार्क के जंगलों के करीब घूम सकते हैं और कम बजट वाले हॉस्टल या कैंप में ठहरकर अपने वीकेंड को बेहद रोमांचक बना सकते हैं।
1993 में रिलीज हुई 'हम हैं राही प्यार के' का गाना 'मुझसे मोहब्बत का इजहार करता' आज भी लोगों की जुबां पर चढ़ा हुआ है. अलका याज्ञनिक और कुमार सानू की सुरमयी आवाज, समीर के दिल छू लेने वाले बोल और नदीम-श्रवण के म्यूजिक ने इसे एवरग्रीन बना दिया.
बाली से बैंकॉक तक... विदेशों में भी धूमधाम से विराजमान हैं गणपति बप्पा
भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आस्था का प्रकाश केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आज के समय में भगवान गणेश की महिमा सात समंदर पार विदेशों तक पूरी भव्यता के साथ फैली हुई है। जब भी गणेश चतुर्थी या सनातन पर्वों का जिक्र होता है, तो भारत के कोने-कोने में गणपति बप्पा की गूंज सुनाई देती है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि दुनिया के कई प्रमुख देशों में भी सदियों पुराने और आधुनिक भव्य गणेश मंदिर स्थापित हैं जहां विदेशी नागरिक भी उतनी ही श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। इंडोनेशिया के लोकप्रिय द्वीप बाली से लेकर थाईलैंड की आधुनिक राजधानी बैंकॉक तक, और अमेरिका से लेकर यूरोप के कई देशों तक भगवान गणेश के अनूठे और चमत्कारिक मंदिर भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बने हुए हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत और रोचक आलेख में हम आपको दुनिया भर में फैले उन प्रसिद्ध गणेश मंदिरों की सैर कराने जा रहे हैं जिनके बारे में हर सनातनी को जरूर जानना चाहिए।इंडोनेशिया के बाली द्वीप में गूंजता है 'गणेशो नमः', जहाँ की संस्कृति में रमे हैं विघ्नहर्तादुनिया में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया के भीतर स्थित बाली (Bali) द्वीप अपनी अनूठी हिंदू संस्कृति और कला के लिए पूरी दुनिया में एक अलग पहचान रखता है। बाली के चप्पे-चप्पे पर आपको भगवान गणेश की प्रतिमाएं और प्राचीन मंदिर देखने को मिल जाएंगे, जिन्हें स्थानीय लोग 'बत्रा गणेश' के रूप में बहुत श्रद्धा से पूजते हैं। हैरानी की बात यह है कि इंडोनेशिया की आधिकारिक मुद्रा (रुपिया) पर भी भगवान गणेश की तस्वीर छपी हुई है, जो इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि वहाँ की संस्कृति और अर्थव्यवस्था में गणपति बप्पा का कितना गहरा और पवित्र स्थान है। बाली आने वाले लाखों विदेशी सैलानी और स्थानीय नागरिक इन मंदिरों में जाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, जो भारत और इंडोनेशिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों की एक जीवंत मिसाल है।थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक और पटाया में गणपति बप्पा की अद्भुत आस्था, थाई भाषा में होती है पूजादक्षिण पूर्व एशिया का एक अन्य प्रमुख बौद्ध देश थाईलैंड (Thailand) भी भगवान गणेश की आस्था से अछूता नहीं है, बल्कि यहाँ गणेश जी को 'फ्रे पिकनेट' (Phra Phikhanet) के नाम से पूजा जाता है। बैंकॉक के बीचों-बीच और पटाया जैसे पर्यटन स्थलों पर कई ऐसे भव्य गणेश मंदिर हैं जहाँ स्थानीय थाई लोग अपनी हर नई शुरुआत, बिजनेस के उद्घाटन या परीक्षा से पहले गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने जरूर पहुंचते हैं। यहाँ के मंदिरों में भारतीय परंपरा के साथ-साथ थाई संस्कृति का भी सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है, जहाँ लोग पारंपरिक फूलों के साथ-साथ अपने स्थानीय रीति-रिवाजों से भगवान गणेश की पूजा करते हैं। ग्लोबल ट्रैवल और जियोफिकल ऑप्टिमाइजेशन के दृष्टिकोण से यह स्थान दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ और आकर्षण का केंद्र बन चुका है।संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और कनाडा के आधुनिक शहरों में बसे भव्य और दिव्य गणेश मंदिरकेवल एशियाई देशों में ही नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और कनाडा (Canada) के बड़े महानगरों में भी भारतीय प्रवासियों द्वारा भव्य और सुंदर गणेश मंदिरों की स्थापना की गई है। अमेरिका के न्यूयार्क, कैलिफ़ोर्निया, टेक्सास और न्यू जर्सी जैसे राज्यों में स्थित हिंदू मंदिरों में भगवान गणेश की विशाल प्रतिमाएं स्थापित हैं, जहाँ गणेश चतुर्थी का पर्व उतने ही उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है जितना भारत में मनाया जाता है। इन देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अपनी आने वाली पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने के लिए इन मंदिरों में एकत्रित होते हैं और गणपति महोत्सव के दौरान पूरे विधि-विधान से उत्सव मनाते हैं, जो विदेशी धरती पर भारतीय संस्कृति के प्रसार को दर्शाता है।यूरोप और ब्रिटेन के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों पर विघ्नहर्ता की विशेष कृपायूरोप महाद्वीप की बात करें तो यूनाइटेड किंगडम (UK) यानी लंदन और जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों में भी भगवान गणेश की महिमा लगातार फैल रही है। लंदन के प्रसिद्ध विंबलडन और अन्य क्षेत्रों में स्थित हिन्दू मंदिरों में गणपति बप्पा के दर्शन करने के लिए न केवल भारतीय बल्कि यूरोपीय मूल के वे लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं जो योग, ध्यान और सनातन दर्शन से जुड़े हुए हैं। इन मंदिरों में होने वाले गणेशोत्सव और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए पश्चिमी दुनिया के लोगों को भी भारतीय धर्म और दर्शन को करीब से जानने का अवसर मिलता है, जिससे वैश्विक स्तर पर भाईचारे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का संदेश प्रसारित होता है।दक्षिण पूर्व एशिया और मॉरीशस के कोने-कोने में गणपति की स्थापना का ऐतिहासिक सफरमॉरीशस (Mauritius), फिजी, और सिंगापुर जैसे देशों में तो भारतीय मूल के लोगों की बहुलता के कारण सनातन संस्कृति का प्रभाव हर तरफ दिखाई देता है। मॉरीशस के प्रसिद्ध 'गंगा तालाब' (Grand Bassin) और अन्य धार्मिक स्थलों पर भगवान गणेश के भव्य मंदिर और विशाल मूर्तियां स्थापित हैं, जो देश के राष्ट्रीय पर्वों और मेलों का मुख्य आकर्षण होती हैं। इन देशों में सरकार स्तर पर भी हिंदू त्योहारों पर विशेष अवकाश या उत्सव का माहौल रहता है, जो इस बात को साबित करता है कि विघ्नहर्ता गणेश की कृपा सीमाओं और राष्ट्रों के बंधनों से परे संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है।
UP में अगले 6 महीने में 1 लाख युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी, CM Yogi का ऐलान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि अगले छह महीने में राज्य में एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यहां उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (उप्रपीएससी) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (उप्रएसएससी) द्वारा विभिन्न विभागों के पदों पर चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी पारदर्शिता के साथ साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। उन्होंने अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पिछली समाजवादी पार्टी सरकार (सपा) पर निशाना साधते हुए कहा, “2017 से पहले जिन लोगों ने नियुक्ति पत्रों के वितरण में गड़बड़ी की थी, उनसे कहना चाहता हूं कि नोट कर लें, आज से फिर नियुक्ति पत्र वितरित कर रहे हैं और अगले छह महीने के अंदर एक लाख से अधिक युवाओं को उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी देंगे। वे (विपक्ष) गिनती करें, हम (नौकरी) देते जाएंगे।” मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले राज्य की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, “उस समय उत्तर प्रदेश के बारे में लोगों की धारणा क्या थी, हर दूसरे दिन दंगा होता था, महीनों-महीनों तक कर्फ्यू रहता था और कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं था।” उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने भर्ती बोर्डों और आयोगों में अपने रिश्तेदारों को बैठाकर पूरी प्रक्रिया को बदनाम कर दिया था। योगी ने कहा, “तब एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी। युवा पलायन करता था। उसके सामने एक ओर कुआं था और दूसरी ओर खाई, क्योंकि उत्तर प्रदेश में नौकरी नहीं थी और राज्य के बाहर उसके सामने पहचान का संकट था।” मुख्यमंत्री ने मिशन रोजगार के तहत चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। उन्होंने कहा कि भर्ती बोर्ड और आयोग अब सरकार की राजनीति का शिकार नहीं होते हैं तथा रीक्षाओं की प्रक्रिया पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से पूरी होती है, जिसके परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, संसदीय कार्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने भी समारोह को संबोधित किया।
साल 2026 में घूमने का बनाएं शानदार प्लान, जहां की लाइफस्टाइल और वास्तुकला देख उड़ जाएंगे होश
ग्लोबल ट्रैवल और टूरिज्म के नक्शे पर हर साल कुछ ऐसे नए और अद्भुत इलाके उभर कर सामने आते हैं, जो अपनी अनूठी संस्कृति, आधुनिक लाइफस्टाइल, आर्ट और बेहतरीन खान-पान के दम पर दुनिया भर के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अगर आप भी साल 2026 में किसी ऐसी अनोखी और ट्रेंडिंग जगह पर घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं, जहां की गलियों में घूमना ही अपने आप में एक अलग रोमांच हो, तो यह आलेख सिर्फ आपके लिए है। दुनिया के सबसे कूल और ट्रेंडी मोहल्लों की सूची में इस बार ऐसे 5 शानदार नेबरहुड्स ने अपनी जगह बनाई है जो अपनी ग्लोबल अपील और लोकल कल्चर के बेहतरीन मेल के लिए जाने जाते हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत और रोमांचक आलेख में हम आपको दुनिया के उन 5 सबसे कूल मोहल्लों की सैर कराने जा रहे हैं जहां आपको साल 2026 में जरूर जाना चाहिए।नंबर 1: मिलान का 'पोर्टा रोमाना' (Porta Romana, Milan), जहां इतिहास और आधुनिक कला का मिलता है अनूठा संगमइटली का फैशन कैपिटल कहे जाने वाला मिलान शहर यूं तो अपनी लग्जरी और स्टाइल के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन इन दिनों इस शहर का 'पोर्टा रोमाना' मोहल्ला युवाओं और ग्लोबल ट्रैवलर्स के बीच सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है। साल 2026 के सबसे ट्रेंडी नेबरहुड्स की सूची में इसे शीर्ष स्थान इसलिए मिला है क्योंकि यहाँ पारंपरिक इतालवी वास्तुकला के साथ-साथ आधुनिक आर्ट गैलरी, बुटीक कैफे और शानदार नाइटलाइफ़ का ऐसा अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है जो सैलानियों का दिल जीत लेता है। यहाँ की खूबसूरत और पुरानी गलियों में पैदल घूमना और स्थानीय बेकरी के स्वादिस्ट व्यंजनों का आनंद लेना किसी सपने जैसा अनुभव होता है, जो हर यात्री की बकेट लिस्ट में जरूर होना चाहिए।नंबर 2: लंदन का 'कैमडेन' या 'सोहो' (Soho, London), जो अपनी विब्रेंट और नाइटलाइफ़ के लिए है दुनिया भर में मशहूरब्रिटेन की राजधानी लंदन का दिल कहे जाने वाले और अपनी रंगीन संस्कृति के लिए विख्यात क्षेत्रों में आने वाला यह इलाका हमेशा से अपनी ऊर्जा और क्रिएटिविटी के लिए जाना जाता रहा है। साल 2026 में यह मोहल्ला दुनिया भर के डिजिटल नोमैड्स, कलाकारों और युवाओं की पहली पसंद बना हुआ है क्योंकि यहाँ आपको दुनिया के हर कोने का ऑथेंटिक स्ट्रीट फूड, इंडिपेंडेंट म्यूजिक क्लब्स और विंटेज मार्केट देखने को मिल जाएंगे। यहाँ की दीवारों पर बनी अद्भुत स्ट्रीट आर्ट (Street Art) और यहाँ का फेस्टिव माहौल हर आने वाले सैलानियों को एक अलग ही दुनिया का अहसास कराता है, जहाँ बोर होने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।नंबर 3: न्यूयॉर्क का 'ब्रुकलिन' (Williamsburg, Brooklyn), जहाँ की कूल वाइब्स और कैफे कल्चर है पूरी दुनिया में बेजोड़संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित विलियम्सबर्ग (ब्रुकलिन) की गिनती लंबे समय से दुनिया के सबसे कूल और फैशनेबल नेबरहुड्स में होती आ रही है, लेकिन 2026 में यहाँ का क्रेज अपने चरम पर है। मैनहट्टन की चकाचौंध से थोड़ा हटकर ईस्ट रिवर के किनारे बसा यह इलाका अपने इंडस्ट्रियल-चिक डिजाइन, रूफॉप बार्स, क्राफ्ट बीअरीज और सस्टेनेबल फैशन स्टोर्स के लिए ग्लोबल टूरिस्ट्स के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र है। अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है और आप एक ऐसे ट्रेंडी माहौल की तलाश में हैं जहाँ मॉडर्न और विंटेज का परफेक्ट कॉम्बिनेशन मिले, तो ब्रुकलिन की इन खूबसूरत सड़कों पर घूमना आपके लिए सबसे बेहतरीन अनुभव साबित होगा।नंबर 4: सियोल का 'सोंगसू-डोंग' (Seongsu-dong, Seoul), जो बन चुका है एशिया का सबसे बड़ा और ट्रेंडी आर्ट हबदक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल का 'सोंगसू-dong' मोहल्ला पिछले कुछ वर्षों में एशिया के सबसे तेजी से उभरते हुए और कूल इलाकों में शुमार हो चुका है, जिसे अक्सर सियोल का 'ब्रुकलिन' भी कहा जाता है। कभी कारखानों और वेयरहाउस के लिए पहचाना जाने वाला यह औद्योगिक क्षेत्र आज के समय में दुनिया के सबसे स्टाइलिश कैफे, कॉन्सेप्ट स्टोर्स, आर्ट स्टूडियो और इंडिपेंडेंट फैशन ब्रांड्स का घर बन चुका है। साल 2026 में कोरियन पॉप कल्चर और मॉडर्न लाइफस्टाइल के दीवाने लाखों सैलानी इस इलाके की खूबसूरती और यहाँ की अनूठी वास्तुकला को देखने के लिए सियोल की यात्रा कर रहे हैं, जो इसे इस सूची में एक अनिवार्य स्थान दिलाता है।नंबर 5: मेलबर्न का 'फिट्जरोय' (Fitzroy, Melbourne), जहाँ कला, संगीत और बहेतरीन कॉफी का मिलता है अद्भुत संसारऑस्ट्रेलिया के सांस्कृतिक केंद्र मेलबर्न का 'फिट्जरोय' मोहल्ला अपनी बोहेमियन संस्कृति, ऐतिहासिक विक्टोरियन इमारतों और दुनिया की सबसे बेहतरीन कॉफी संस्कृति के लिए विश्व प्रसिद्ध है। साल 2026 के सबसे कूल मोहल्लों की इस लिस्ट में फिट्जरोय अपनी यूनिक किताबों की दुकानों, विंटेज रिकॉर्ड शॉप्स और लाइव म्यूजिक वेन्यू के कारण अपनी खास जगह बनाए हुए है। यहाँ के स्थानीय लोग और कम्यूनिटी जिस तरह से कला और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहते हैं, वह सैलानियों को बहुत आकर्षित करता है। इस मोहल्ले की जीवंत और सुकून भरी सुबह से लेकर यहाँ की रंगीन शाम तक, हर पल एक नया अनुभव प्रदान करता है।
BJP नेता रवनीत बिट्टू हिरासत में, भगवंत मान के काफिले पर अंडे-टमाटर फेंकने की कोशिश
लुधियाना में आम आदमी पार्टी के बड़े कार्यक्रम के दौरान बीजेपी नेता और पूर्व रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. वे पीएयू गेट पर हाथ में टमाटर लेकर पहुंचे थे. पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका, लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान का काफिला निकलने पर उन्होंने गाड़ी पर टमाटर फेंकने की कोशिश की.
फिर लौट रही है अजय देवगन की आइकॉनिक टोली, 'गोलमाल 5' इस दिन होगी रिलीज
निर्देशक रोहित शेट्टी की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म 'गोलमाल 5' सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार हैं। शनिवार को मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट की आधिकारिक जानकारी दी है।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक माटी और लोक परंपराओं के केंद्र से इस वक्त राज्यभर से एक बेहद भव्य, अलौकिक और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने हर किसी का मन मोह लिया है। छत्तीसगढ़ की धरती पर हाल ही में एक ऐसा विशाल सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। राज्य के कोने-कोने में गांव से लेकर शहर तक एक साथ डेढ़ करोड़ से अधिक ‘आशीर्वाद के दीये’ जलाए गए, जिससे पूरा छत्तीसगढ़ रोशनी से सराबोर हो उठा और चारों तरफ केवल सेवा, समर्पण और संकल्प का ही संदेश गूंज उठा। इस अभूतपूर्व दीपोत्सव के माध्यम से राज्य की लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का जो अद्भुत नजारा देखने को मिला, उसने देश भर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत और विश्लेषणात्मक आलेख में हम आपको इस भव्य आयोजन की पूरी अंदरूनी कहानी और इसके गहरे सामाजिक संदेश से रूबरू करा रहे हैं।क्या है ‘आशीर्वाद के दीये’ अभियान की पूरी संकल्पना और कैसे सजा पूरा छत्तीसगढ़किसी भी राज्य की सांस्कृतिक पहचान और वहां के नागरिकों की आत्मीयता को दर्शाने के लिए इस प्रकार के वृहद आयोजनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। ‘आशीर्वाद के दीये’ नाम से चलाए गए इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक प्रेम, प्रकाश और संबल का संदेश पहुंचाना था। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों, कस्बों, जिला मुख्यालयों और सुदूर ग्रामीण अंचलों तक में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर अपने घरों के आंगन, चौपालों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर इन दीयों को पूरी श्रद्धा के साथ प्रज्वलित किया। जब एक साथ डेढ़ करोड़ से अधिक दीये एक ही समय पर जगमगा उठे, तो आसमान के नीचे धरती पर सितारों का कारवां उतर आया सा प्रतीत हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को एक नई ऊंचाई प्रदान की।गांव से लेकर शहर तक गूंजा सेवा-संकल्प का संदेश, स्थानीय नागरिकों की भारी भागीदारीइस अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती यह रही कि इसमें किसी एक वर्ग या शहर विशेष तक सीमित न रहकर, छत्तीसगढ़ के हर एक गांव और हर एक मोहल्ले के आम नागरिकों ने दिल खोलकर हिस्सा लिया। बस्तर के आदिवासी अंचलों से लेकर सरगुजा की पहाड़ियों तक, और रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई से लेकर राजनांदगांव तक हर जगह उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। स्थानीय स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने अपने हाथों से मिट्टी के दीये तैयार किए, जिससे स्थानीय कुम्हारों को भी एक बड़ा आर्थिक संबल मिला। भौगोलिक और स्थानीय ऑप्टिमाइजेशन के दृष्टिकोण से यह आयोजन इस बात का प्रतीक बन गया कि जब जनता किसी अच्छे और सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होती है, तो वह किसी भी बड़े उत्सव को एक ऐतिहासिक जनआंदोलन में बदल सकती है।सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का एक नया और अनूठा अध्यायआज के आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में जब लोग अपनी पारंपरिक जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे समय में छत्तीसगढ़ में हुआ यह दीपोत्सव नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का एक बहुत बड़ा माध्यम साबित हुआ है। इस आयोजन के जरिए समाज के सभी वर्गों के लोगों ने जाति, धर्म और वर्ग के भेदों से ऊपर उठकर एक साझा दीपक जलाया, जो इस बात का संदेश देता है कि एकता और भाईचारे से ही समाज और राज्य का वास्तविक विकास संभव है। राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का यह मानना है कि इस तरह के रचनात्मक और सकारात्मक अभियान समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों के भीतर एक-दूसरे के प्रति करुणा और सहयोग की भावना को जागृत करते हैं।छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और पर्यटन को मिल रही है एक नई वैश्विक पहचानइस प्रकार के भव्य आयोजनों के माध्यम से न केवल स्थानीय नागरिकों में उत्साह का संचार होता है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को भी एक बहुत बड़ा मंच मिलता है। डिजिटल और सोशल मीडिया के इस दौर में जब इन दीपोत्सव की तस्वीरें और वीडियो देश-विदेश में साझा किए गए, तो लोगों ने छत्तीसगढ़ की इस पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। स्थानीय हस्तशिल्पकारों, कलाकारों और छोटे व्यापारियों के लिए भी यह समय व्यावसायिक रूप से बहुत फायदेमंद साबित हुआ, क्योंकि दीयों और पारंपरिक पूजन सामग्रियों की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
कहीं आप भी तो नहीं खा रहे नकली पनीर? गुरुग्राम में 3 जगह FDA की छापेमारी; लैब भेजे गए सैंपल
गुरुग्राम में सिंथेटिक और घटिया पनीर की शिकायतों के बाद FDA की फूड सेफ्टी विंग ने 3 डेयरी और फूड आउटलेट्स पर छापेमारी की। टीम ने पनीर के कई सैंपल जांच के लिए लैब भेजे हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
घर बैठे ड्राइविंग लाइसेंस में बदलें अपना पता, जानें जरूरी दस्तावेज, फीस और ऑनलाइन पूरी प्रक्रिया
क्या आपने हाल ही में अपना मकान बदला है, या दूसरे राज्य में शिफ्ट हुए हैं. अगर हां, तो अपने ड्राइविंग लाइसेंस (DL) में नया पता अपडेट कराना बेहद जरूरी है. अब आरटीओ (RTO) के चक्कर काटने या एजेंटों को पैसे देने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. जानिए इस ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए किन दस्तावेजों (Documents) की आवश्यकता होगी और अगर आपने राज्य बदला है, तो एनओसी (NOC) कैसे प्राप्त करें.
भारत में हिंदी में MBBS की पढ़ाई का फॉर्मूला क्यों हुआ 'फेल'?
अगर चीन और जापान अपनी भाषा में डॉक्टर बना रहे हैं तो उन्होंने अचानक किसी दिन इसे लागू नहीं किया. वहां अनुवाद के सहारे मातृभाषा की थाली नहीं परोसी गई. वहां विषय की समझ ही उसी भाषा में दी गई है. जानिए क्यों हिंदी में एमबीबीएस पढ़ाने का फॉर्मूला भारत में हिट नहीं हो पा रहा.
7 महीने में 3 मौतें... IIT बॉम्बे में क्यों भड़का छात्रों का गुस्सा? ‘एक्शन और जवाबदेही’ की मांग
पुलिस और संस्थान से मिली जानकारी के अनुसार, द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े को कल शाम परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन से अपने क्वेश्चन पेपर की तस्वीर खींचे जाने और उसे उत्तर पाने के लिए ChatGPT पर अपलोड करते हुए पकड़ा गया था।
मायावती को एक और झटका... मयंक द्विवेदी सपा में हुए शामिल
बांदा-चित्रकूट से बसपा के पूर्व प्रत्याशी मयंक द्विवेदी ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली है. मयंक के सपा में शामिल होने से पार्टी को बुंदेलखंड में एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरा मिलेगा. इससे आगामी विधानसभा चुनाव में सपा की स्थिति मजबूत हो सकती है.
पंड्या के कमबैक का काउंटडाउन शुरू! GF संग डिनर डेट की फोटो आई सामने
हार्दिक पंड्या जल्द क्रिकेट मैदान पर वापसी की तैयारी में हैं. इस बीच शुक्रवार (18 सितंबर) को वह मॉडल गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा के साथ डिनर डेट पर नजर आए. माहिका ने इसकी तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की. हार्दिक को ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ इंडिया ए की तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए चुना गया है, जहां उनकी फिटनेस पर नजर रहेगी.
जैसलमेर की ये 10 जगहें हैं बेहद खास, मिस किया तो अधूरी रह जाएगी ट्रिप
Jaisalmer Best Tourist Places: राजस्थान का जैसलमेर अपनी सुनहरी इमारतों, ऐतिहासिक किलों और रेगिस्तान के लिए दुनियाभर में मशहूर है. ऐसे में अगर आप जैसलमेर घूमने की सोच रहे हैं तो हम आपको यहां की कुछ खास जगहों के बारे में बताएंगे जो आपके ट्रिप को हमेशा के लिए यादगार बना देंगी.
एशियन गेम्स में खिलाड़ियों के रुकने की व्यवस्था पर भारी हंगामा, बीसीसीआई ने किया अपना अलग इंतजाम
अंतरराष्ट्रीय खेल जगत और एशियाई खेलों (Asian Games 2026) के महाकुंभ से इस वक्त खेल के गलियारों से एक बहुत बड़ी, चौंकाने वाली और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने खेल प्रेमियों को हैरान कर दिया है। एशियन गेम्स के आधिकारिक विलेज (Games Village) में खिलाड़ियों और एथलीटों के ठहरने के लिए की गई व्यवस्थाओं को लेकर भारी हंगामा मच गया है, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और कमरों की खराब स्थिति के कारण खिलाड़ियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की भनक लगते ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपनी खिलाड़ियों की सुरक्षा, सेहत और आराम से कोई भी समझौता न करने का कड़ा फैसला लिया है। बीसीसीआई ने एशियन गेम्स में हिस्सा लेने गई भारतीय मेंस क्रिकेट टीम के लिए खेलगांव की व्यवस्थाओं को दरकिनार करते हुए एक अलग और आलीशान होटल में ठहरने का अपना निजी इंतजाम कर दिया है, जिसकी चर्चा अब चारों तरफ हो रही है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत और विश्लेषणात्मक आलेख में हम आपको इस पूरे हंगामे और बीसीसीआई के इस बड़े फैसले की पूरी अंदरूनी कहानी से रूबरू करा रहे हैं।क्या है एशियन गेम्स विलेज में ठहरने की व्यवस्था को लेकर मचा पूरा हंगामा और क्यों भड़के विभिन्न देशों के खिलाड़ीकिसी भी मल्टी-डिसिप्लिनरी महाद्वीपीय खेल आयोजन में आने वाले हजारों खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ के ठहरने के लिए आयोजन समिति द्वारा एक विशाल 'गेम्स विलेज' का निर्माण किया जाता है, जहां सभी के लिए आवास और भोजन की व्यवस्था होती है। लेकिन एशियन गेम्स 2026 के इस संस्करण में आयोजन स्थल पर पहुंचने वाले विभिन्न देशों के एथलीटों ने जब अपने आवंटित कमरों, बाथरूम की स्थिति और साफ-सफाई का हाल देखा, तो वे दंग रह गए। कई टीमों द्वारा यह आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई कि कमरों का आकार बेहद छोटा है, एयर कंडीशनिंग ठीक से काम नहीं कर रही है, और खाने-पीने की गुणवत्ता भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। इस प्रकार की बुनियादी कमियों और कुप्रबंधन के कारण खिलाड़ियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की आशंका बढ़ गई, जिसके बाद से खेल प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।बीसीसीआई ने उठाया सख्त कदम, खिलाड़ियों की सुविधाओं और आराम को दी सबसे पहली प्राथमिकताभारतीय क्रिकेट टीम जब अंतरराष्ट्रीय दौरों पर जाती है, तो उनके ठहरने और खान-पान के स्तर को लेकर बोर्ड हमेशा से बहुत अधिक सतर्क और पेशेवर रवैया अपनाता है। जब एशियन गेम्स विलेज में चल रही इन अव्यवस्थाओं और कमियों की खबर बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों और टीम मैनेजमेंट तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत बिना कोई जोखिम उठाए एक बड़ा और कड़ा फैसला ले लिया। बोर्ड ने आधिकारिक विलेज में खिलाड़ियों को रखने के अपने शुरुआती फैसले को बदलते हुए शहर के एक प्रतिष्ठित और फाइव-स्टार श्रेणी के होटल में भारतीय मेंस क्रिकेट टीम के लिए अत्याधुनिक कमरों की बुकिंग करवा दी। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी किसी भी प्रकार की मानसिक थकान या असुविधा से दूर रहें और पूरी तरह से अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें।क्रिकेट टीम के लिए अलग इंतजाम पर उठे सवाल, क्या अन्य खेलों के एथलीटों के साथ हो रहा है भेदभावबीसीसीआई द्वारा पुरुष क्रिकेट टीम के लिए किए गए इस अलग और आलीशान इंतजाम के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और कुछ अन्य खेल संघों के बीच यह बहस भी शुरू हो गई है कि क्या अन्य खेलों के एथलीटों को भी ऐसी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। भारत के कई ऐसे एथलीट जो व्यक्तिगत खेलों (जैसे कुश्ती, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और शूटिंग) से ताल्लुक रखते हैं, उन्हें अक्सर ऐसी ही प्रशासनिक और बुनियादी समस्याओं से जूझना पड़ता है क्योंकि उनके पास बीसीसीआई जैसी वित्तीय ताकतवर संस्था का समर्थन नहीं होता है। खेल विश्लेषकों का यह मानना है कि भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और खेल मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एशियन गेम्स या ओलंपिक में भाग लेने वाले हर एक भारतीय खिलाड़ी को चाहे वह किसी भी खेल से हो, ठहरने और खाने-पीने की बेहतरीन सुविधाएं मिल सकें ताकि देश के मान को बढ़ाने वाले एथलीटों का मनोबल ऊंचा रहे।मैदान पर स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य, प्रशासनिक विवादों को पीछे छोड़कर उतरी टीम इंडियाइन तमाम तरह के लॉजिस्टिक विवादों, होटल बदलने की चर्चाओं और प्रशासनिक हलचलों के बीच भारतीय मेंस क्रिकेट टीम का मुख्य फोकस सिर्फ और सिर्फ मैदान पर अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के जरिए देश के लिए स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतना है। टीम के खिलाड़ियों ने इन बाहरी चर्चाओं से खुद को पूरी तरह दूर रखते हुए प्रैक्टिस सेशन में अपना पसीना बहाना शुरू कर दिया है। एशियाई खेलों में क्रिकेट के इन रोमांचक मुकाबलों को देखने के लिए दुनिया भर के खेल प्रशंसकों की निगाहें टिकी हुई हैं, और भारतीय टीम इस बार किसी भी कीमत पर पोडियम के सबसे ऊंचे स्थान पर खड़े होकर तिरंगे का मान बढ़ाना चाहती है।
जेल में HIV पॉजिटिव मिली महिला, संपर्क में आए लोगों की तलाश शुरू
जेल में आमतौर पर बाहर की दुनिया से अलग जिंदगी चलती है. कभी-कभी जेल के अंदर की कोई स्वास्थ्य रिपोर्ट कई सवाल खड़े कर देती है. बाराबंकी जिला कारागार से सामने आया एक मामला भी ऐसा ही है. यहां महिला बंदियों की स्वास्थ्य जांच कराई गई. HIV, टीबी, सिफलिस और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की जांच हुई. रिपोर्ट आई तो एक महिला बंदी HIV पॉजिटिव मिली.
पार्थिव पटेल ही नहीं, टीम इंडिया का चीफ सिलेक्टर बनने के लिए ये 5 दिग्गज भी हैं पूरी तरह योग्य
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के गलियारों से इस वक्त खेल जगत की सबसे बड़ी और दिलचस्प चर्चा सामने आ रही है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों और खेल विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में जब पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) का नाम भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता (Chief Selector) की दौड़ में सबसे आगे होने की खबरें आईं, तो चारों तरफ इसी बात पर मंथन शुरू हो गया कि क्या वाकई युवा और आधुनिक सोच वाले पूर्व खिलाड़ियों को इस पद पर लाना चाहिए। लेकिन खेल विशेषज्ञों का यह मानना है कि केवल पार्थिव पटेल ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के इतिहास से जुड़े ऐसे कई अन्य शानदार और अनुभवी पूर्व दिग्गज भी मौजूद हैं जो चीफ सिलेक्टर की इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए पूरी तरह योग्य और सक्षम हैं। यदि इनमें से किसी भी दूरदर्शी और बेबाक शख्सियत को टीम इंडिया की चयन समिति की कमान सौंप दी जाती है, तो आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट टीम की किस्मत पूरी तरह चमक सकती है और चयन प्रक्रिया में एक नया क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत और विश्लेषणात्मक आलेख में हम उन पांच प्रमुख दिग्गजों के बारे में चर्चा कर रहे हैं जो इस पद के सबसे प्रबल दावेदार हो सकते हैं।क्यों पड़ती है भारतीय क्रिकेट टीम को एक मजबूत, दूरदर्शी और निडर चीफ सिलेक्टर की जरूरतअंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और व्यस्त दौर में जहां सालभर अलग-अलग फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और टी20) में ताबड़तोड़ मुकाबले खेले जाते हैं, वहां चयनकर्ताओं की भूमिका किसी भी कप्तान या कोच से कम महत्वपूर्ण नहीं होती है। एक सफल चीफ सिलेक्टर वही माना जाता है जो केवल मौजूदा प्रदर्शन के आधार पर ही टीम न चुने, बल्कि घरेलू क्रिकेट (Ranji Trophy, Syed Mushtaq Ali Trophy) और आईपीएल (IPL) की गहराइयों में जाकर भविष्य के उन मैच-विनर्स को तलाश सके जो देश के लिए लंबे समय तक खेल सकें। चयन समिति में पूर्व खिलाड़ियों का अनुभव, मैदान की नब्ज को समझने की उनकी क्षमता और बिना किसी दबाव के कड़े फैसले लेने का जज्बा ही यह तय करता है कि आने वाले वर्षों में भारतीय टीम विश्व क्रिकेट पर राज करेगी या नहीं। यही वजह है कि जब भी चीफ सिलेक्टर पद की रिक्तियों की बात आती है, तो क्रिकेट गलियारों में दिग्गजों के नामों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो जाता है।पहला नाम: पार्थिव पटेल की आधुनिक सोच और युवा प्रतिभाओं को परखने की अद्भुत क्षमताचयन समिति की चर्चा में सबसे ऊपर चल रहे पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) की गिनती भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में होती है जिन्होंने बहुत कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव झेलते हुए लंबा और सफल करियर बिताया है। संन्यास लेने के बाद से ही वे लगातार कोचिंग, कमेंट्री और घरेलू क्रिकेट के विभिन्न स्तरों से बहुत करीब से जुड़े रहे हैं, जिसके कारण उन्हें आज की युवा पीढ़ी की मानसिकता और आधुनिक क्रिकेट की तकनीकी बारीकियों की गहरी समझ है। यदि उन्हें मुख्य चयनकर्ता की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो वे आईपीएल और घरेलू सर्किट में शानदार प्रदर्शन करने वाले अनकैप्ड युवा खिलाड़ियों को बिना किसी झिझक के टीम इंडिया में मौका देने का साहस दिखा सकते हैं, जो टीम के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा सकारात्मक कदम साबित होगा।दूसरा नाम: अजीत आगरकर की निरंतरता और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का साहसिक अनुभववर्तमान में भी चयन समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे या इस रेस में हमेशा आगे रहने वाले दिग्गजों में अजीत आगरकर (Ajit Agarkar) का नाम एक अनुभवी और सुलझे हुए प्रशासक के रूप में लिया जाता है। उनके पास मुंबई क्रिकेट संघ और राष्ट्रीय चयन स्तर पर काम करने का लंबा अनुभव है, जिससे वे जानते हैं कि चयन के दौरान आने वाले आंतरिक दबावों और बाहरी उम्मीदों के बीच संतुलन कैसे बिठाया जाता है। आगरकर की यह खासियत रही है कि वे टीम संयोजन (Team Combination) को लेकर बहुत स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण रखते हैं, और यदि उन्हें और अधिक अधिकार तथा लंबा कार्यकाल मिलता है, तो वे भारतीय टीम के हर फॉर्मेट के ट्रांजिशन फेज को बहुत ही सुगमता के साथ पार करा सकते हैं।तीसरा नाम: मोहम्मद कैफ की मैदान की गहरी समझ और घरेलू क्रिकेट का बेजोड़ ज्ञानभारतीय क्रिकेट के सबसे बेहतरीन फील्डर्स में से एक और अपनी कप्तानी व रणनीतिक कौशल के लिए पहचाने जाने वाले मोहम्मद कैफ (Mohammad Kaif) का नाम भी इस पद के लिए एक बहुत ही शानदार विकल्प हो सकता है। कैफ ने घरेलू क्रिकेट (उत्तर प्रदेश की कप्तानी करते हुए) में लंबे समय तक संघर्ष किया है और वे देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाले उन युवा खिलाड़ियों के संघर्ष को बहुत अच्छी तरह समझते हैं जो संसाधनों के अभाव के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर आगे आते हैं। यदि वे चयन समिति की कमान संभालते हैं, तो उनका पूरा फोकस ऐसे खिलाड़ियों पर होगा जो मानसिक रूप से मजबूत हों और किसी भी विपरीत परिस्थिति में टीम के लिए मैच जिताने का माद्दा रखते हों।चौथा नाम: एस. श्रीसंत या अन्य तेज तर्रार पूर्व गेंदबाज जो चयन में ला सकते हैं आक्रामक दृष्टिकोणभारतीय गेंदबाजी आक्रमण को धार देने वाले और अपने दौर के सबसे जुनूनी गेंदबाजों में गिने जाने वाले पूर्व तेज गेंदबाज भी चयन समिति में एक अलग प्रकार का संतुलन ला सकते हैं। आधुनिक क्रिकेट में तेज गेंदबाजों का वर्कलोड मैनेजमेंट (Workload Management) और इंजरी प्रिवेंशन (Injury Prevention) किसी भी टीम के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। एक ऐसा मुख्य चयनकर्ता जो खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज गेंदबाजी की चुनौतियों को झेल चुका हो, वह खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी को बहुत बेहतर तरीके से समझ सकता है। ऐसे में किसी अनुभवी तेज गेंदबाज या ऑलराउंडर को इस पद पर लाना चयन समिति के फैसलों में एक नया आक्रामक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जोड़ सकता है।पांचवां नाम: वीवीएस लक्ष्मण या अन्य वरिष्ठ NCA विशेषज्ञ जो युवाओं की नस-नस से हैं वाकिफराष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) के जरिए देश की युवा और अंडर-19 प्रतिभाओं को तराशने का काम कर रहे वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) या उनके स्तर के अन्य तकनीकी विशेषज्ञों का चयन समिति से जुड़ना भारतीय क्रिकेट के लिए सोने पर सुहागा साबित हो सकता है। ये वे लोग हैं जिन्होंने राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर भारत की बेंच स्ट्रेंथ (Bench Strength) को मजबूत करने का काम किया है और वे जानते हैं कि किस खिलाड़ी में इंटरनेशनल लेवल पर सफल होने की क्षमता है। यदि इस स्तर के दूरदर्शी दिमाग को सीनियर टीम के चयन का मुख्य मुखिया बना दिया जाए, तो भारत की ए टीम और सीनियर टीम के बीच का कॉर्डिनेशन और अधिक मजबूत हो जाएगा।
51 हजार युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र, PM मोदी बोले- आपका बड़ा रोल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 20वें रोजगार मेले के तहत 51 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए. देशभर में 45 रोजगार मेलों का आयोजन हुआ. पीएम मोदी ने युवाओं की प्रतिभा, कौशल और रोजगार के अवसरों पर बात करते हुए विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी भूमिका पर जोर दिया.
एशियन गेम्स की रवानगी से ठीक पहले किट विवाद में फंसी भारतीय मेंस क्रिकेट टीम
भारतीय खेल जगत से इस वक्त खेल के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों और खेल प्रशंसकों को हैरान कर दिया है। एशियाई खेलों यानी एशियन गेम्स (Asian Games) में हिस्सा लेने के लिए भारतीय मेंस क्रिकेट टीम की रवानगी से ठीक पहले एक नया और बड़ा किट विवाद (Kit Controversy) खड़ा हो गया है। टीम की ऑफिशियल जर्सी, स्पॉन्सरशिप के लोगों और आधिकारिक किट की डिजाइनिंग को लेकर उपजा यह विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे खिलाड़ियों और खेल बोर्ड के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। महाद्वीपीय खेलों के इस सबसे बड़े मंच पर उतरने से ठीक पहले टीम का इस प्रकार की प्रशासनिक और लॉजिस्टिक परेशानियों में फंसना भारतीय खेमे के लिए एक बड़ा मानसिक झटका माना जा रहा है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत आलेख में हम आपको इस किट विवाद और उसके पीछे की पूरी अंदरूनी कहानी से रूबरू करा रहे हैं।एशियन गेम्स की रवानगी से पहले क्यों अचानक गरमाया किट और स्पॉन्सरशिप का यह विवादकिसी भी अंतरराष्ट्रीय मल्टी-डिसिप्लिनरी टूर्नामेंट जैसे एशियन गेम्स या ओलंपिक में भाग लेने वाली भारतीय टीमों के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और संबंधित खेल महासंघों द्वारा कुछ कड़े दिशा-निर्देश और नियम तय किए जाते हैं। भारतीय मेंस क्रिकेट टीम जब इन खेलों के लिए रवाना होने वाली थी, तब यह बात सामने आई कि खिलाड़ियों को मिलने वाली आधिकारिक किट और जर्सी पर लगाए जाने वाले स्पॉन्सरशिप के लोगों को लेकर ओलंपिक चार्टर और बोर्ड के नियमों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में आईओए के अपने प्रायोजक और नियम होते हैं, जबकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम के अपने कमर्शियल स्पॉन्सर्स के अनुबंध अलग दिशा में काम करते हैं। इन दोनों के बीच समय रहते समन्वय न बैठ पाने के कारण ऐन मौके पर यह किट विवाद सतह पर आ गया, जिससे खिलाड़ियों को भी मानसिक रूप से असहजता का सामना करना पड़ा।खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के सामने आई एक साथ कई लॉजिस्टिक और प्रशासनिक परेशानियांकिट विवाद के अलावा भारतीय मेंस क्रिकेट टीम के इस दौरे से ठीक पहले कई अन्य प्रशासनिक और लॉजिस्टिक परेशानियां भी एक साथ सामने आ गई हैं। खिलाड़ियों के वीजा दस्तावेज, ट्रेनिंग शेड्यूल, यात्रा की तारीखों में बदलाव और सहायक स्टाफ (Support Staff) के एकमुश्त संयोजन को लेकर भी बोर्ड और आयोजन समिति के बीच पत्राचार का दौर लंबा खींच गया। जब टीम को अपनी पूरी ऊर्जा सिर्फ अभ्यास, रणनीति और मैदान पर बेहतरीन प्रदर्शन करने में लगानी चाहिए थी, उस अहम वक्त पर इस तरह की प्रशासनिक उलझनों का सामने आना खिलाड़ियों का ध्यान भटकाने का काम करता है। खेल विशेषज्ञों का यह मानना है कि इतने बड़े बहु-राष्ट्रीय टूर्नामेंट में जरा सी भी लापरवाही या देरी टीम के मनोबल पर असर डाल सकती है, जिसे तुरंत सुलझाने की जरूरत है।एशियन गेम्स में क्रिकेट का बढ़ता महत्व और भारतीय टीम की जीत की बड़ी उम्मीदेंएशियन गेम्स के इस संस्करण में क्रिकेट को एक बार फिर से मुख्य स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया है, और भारत जैसी मजबूत टीम से देशवासियों को स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतने की सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं। क्रिकेट के इन मुकाबलों में भारत की युवा और प्रतिभाशाली टीम हिस्सा ले रही है, जिसके कंधों पर देश का नाम रोशन करने की बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में मैदान के बाहर चल रहे इस किट विवाद और प्रशासनिक खींचतान का असर यदि खिलाड़ियों के खेल पर पड़ा, तो यह भारतीय खेल प्रेमियों के लिए निराशाजनक हो सकता है। फैंस सोशल मीडिया पर यह उम्मीद जता रहे हैं कि बोर्ड जल्द से जल्द इन सभी छोटे-मोटे विवादों को पीछे छोड़कर टीम का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ खेल पर केंद्रित करवाएगा।खेल बोर्ड और आईओए के बीच समन्वय की कमी पर उठ रहे हैं गंभीर सवालइस पूरी घटना के बाद से खेल प्रेमियों और विश्लेषकों द्वारा यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या आईओए और क्रिकेट बोर्ड के बीच पहले से कोई स्पष्ट कार्ययोजना नहीं थी। हर बड़े टूर्नामेंट से पहले इस तरह के विवादों का सामने आना भारतीय खेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। भौगोलिक और स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भारत की छवि को मजबूत बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली इन कमियों को समय रहते दूर किया जाए, ताकि खिलाड़ियों को अनावश्यक मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।
दिवाली और छठ पर घर आना हुआ मुश्किल: दिल्ली से पटना आने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग
हर साल देश के सबसे बड़े और महापर्व कहे जाने वाले दीपावली और लोक आस्था के महान पर्व छठ पूजा (Chhath Puja) का समय नजदीक आते ही देश के विभिन्न महानगरों में रह रहे प्रवासियों के दिलों में अपने घर यानी बिहार लौटने की बेचैनी और उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। लेकिन इस उत्साह के बीच एक ऐसी कड़वी सच्चाई सामने आती है जो हर साल लाखों प्रवासियों के सपनों पर पानी फेर देती है। इस बार भी दीवाली और छठ के इस पावन अवसर पर अपने घर बिहार आने वाले यात्रियों के सामने संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दिल्ली, मुंबई, सूरत, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों से पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और भागलपुर आने वाली तमाम प्रमुख ट्रेनों में अभी से लंबी वेटिंग लिस्ट (Waiting List) और 'नो रूम' (No Room) की स्थिति बन चुकी है। इसके साथ ही, हवाई सफर करने का सपना देखने वाले यात्रियों के लिए एयरलाइंस कंपनियों के किराए आसमान छू रहे हैं, जहां मुंबई और बेंगलुरु से पटना की एकतरफा हवाई टिकट का दाम 40,000 रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत आलेख में हम आपको इस त्योहारी संकट और यात्रा की वास्तविक स्थिति से रूबरू करा रहे हैं।दिल्ली से पटना आने वाली ट्रेनों का बुरा हाल, स्लीपर से लेकर थर्ड एसी तक सभी सीटें फुलदिवाली और छठ के दौरान उत्तर भारत और विशेषकर बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या इतनी अधिक होती है कि भारतीय रेलवे की तमाम व्यवस्थाएं कम पड़ने लगती हैं। राजधानी दिल्ली से पटना, बरौनी और राजेंद्र नगर टर्मिनल की ओर आने वाली प्रतिष्ठित ट्रेनें जैसे संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, तेजस राजधानी एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस और विक्रमशिला एक्सप्रेस जैसी गाड़ियों में हालात यह हैं कि अक्टूबर और नवंबर के उन खास दिनों के लिए महीनों पहले ही बुकिंग फुल हो चुकी है। स्लीपर कोच (Sleeper Coach) से लेकर थर्ड एसी (3rd AC) और सेकंड एसी तक में वेटिंग लिस्ट का आंकड़ा 150 से 300 के पार पहुंच चुका है। जो लोग कन्फर्म टिकट के भरोसे बैठे थे, वे अब अपने हाथों में लंबी वेटिंग टिकट देखकर परेशान हो रहे हैं कि आखिर वे अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने घर कैसे पहुंचेंगे।मुंबई, सूरत और बेंगलुरु से हवाई सफर हुआ महंगा, फ्लाइट का किराया 40,000 के पारट्रेनों में सीट न मिलने के कारण जो लोग मजबूरी में विमान (Flights) से सफर करने का विकल्प चुन रहे हैं, उन्हें एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी के कारण भारी आर्थिक मोर्चे पर तगड़ा झटका लग रहा है। महाराष्ट्र के मुंबई, गुजरात के सूरत और अहमदाबाद, तथा दक्षिण भारत के बेंगलुरु और हैदराबाद से पटना आने वाली डायरेक्ट और कनेक्टिंग फ्लाइट्स का किराया सामान्य दिनों की तुलना में चार से पांच गुना तक बढ़ चुका है। स्थिति यह हो गई है कि त्योहार के ठीक दो-तीन दिन पहले का मुंबई से पटना का वन-वे इकॉनमी क्लास का एयर फेयर 40,000 रुपये से लेकर 45,000 रुपये तक वसूला जा रहा है। एक आम मध्यमवर्गीय परिवार या नौकरीपेशा इंसान के लिए इतने महंगे दाम पर हवाई टिकट खरीदना लगभग असंभव सा हो जाता है, जिससे उनके लिए घर जाने के सभी रास्ते बंद होते नजर आते हैं।रेलवे की स्पेशल ट्रेनों के दावों के बावजूद काउंटर पर उमड़ रही है भारी भीड़ और भगदड़हर साल की तरह इस बार भी रेलवे प्रशासन और भारतीय रेलवे बोर्ड द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि यात्रियों की सुविधा के लिए दिल्ली, आनंद विहार, मुंबई और पुणे जैसे महानगरों से बिहार के लिए दर्जनों स्पेशल ट्रेनें (Festive Special Trains) चलाई जाएंगी। लेकिन धरातल की हकीकत यह है कि इन स्पेशल ट्रेनों की घोषणा और उनके समय की जानकारी समय पर न मिलने के कारण रेलवे स्टेशनों पर भारी अफरातफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है। जब भी किसी नई स्पेशल ट्रेन की बुकिंग खुलती है, तो कुछ ही मिनटों में सारी सीटें बुक हो जाती हैं और आम यात्रियों के हाथ निराशा लगती है। जनरल कोच (General Coaches) की स्थिति तो इतनी भयानक होती है कि उसमें पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती और लोगों को खिड़कियों के रास्ते धक्का-मुक्की करके डिब्बों में घुसना पड़ता है।क्षेत्रीय परिवहन और बसों की मनमानी, सड़क मार्ग से सफर करना भी हुआ बेहद महंगाट्रेनों और उड़ानों की इस भयंकर किल्लत का फायदा उठाते हुए प्राइवेट बस संचालकों और ट्रेवल एजेंसियों ने भी अपने किराए में बेतहाशा वृद्धि कर दी है। दिल्ली के आनंद विहार, गाजीपुर और कश्मीरी गेट बस अड्डों से उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों के लिए चलने वाली वोल्वो और स्लीपर बसों का किराया सामान्य दिनों के मुकाबले दोगुना या तिगुना वसूला जा रहा है। इसके अलावा, लंबी दूरी तय करके सड़क मार्ग से आने वाले यात्रियों को उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं पर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम और हाइवे की खराब हालत का सामना भी करना पड़ता है, जिससे 12 से 15 घंटे का सफर बढ़कर 24 से 30 घंटे तक का हो जाता है।त्योहारों पर घर जाने की मजबूरी और अपनों से मिलने की ललक के आगे बेबस हैं प्रवासीइन तमाम प्रशासनिक और आर्थिक परेशानियों के बावजूद बिहार के प्रवासियों का जज्बा कम नहीं होता है, क्योंकि उनके लिए छठ और दिवाली केवल एक पर्व नहीं बल्कि अपनी मिट्टी और परिवार से जुड़ने का सालभर का सबसे बड़ा इमोशनल मौका होता है। लोग किसी तरह जनरल डिब्बों में लटककर, ट्रकों में बैठकर या भारी-भरकम कर्ज लेकर हवाई जहाज के महंगे टिकट खरीदकर अपने घर पहुंचने को मजबूर हैं। सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों का यह मानना है कि सरकार और रेलवे को इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सालभर पहले से एक मजबूत और पारदर्शी कार्ययोजना बनानी चाहिए ताकि देश के किसी भी कोने में रहने वाले प्रवासी को अपने घर लौटने के लिए इस तरह की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
Hazari Prasad Dwivedi के साहित्य में मनुष्य और लोक चेतना ही मुख्य लक्ष्य: डॉ. अरविंदाक्षन
हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार, आलोचक एवं निबंधकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने साहित्य को केवल राजनीति या अर्थशास्त्र के नजरिये से नहीं देखा, बल्कि उसे भारतीय समाज की दीर्घकालीन सांस्कृतिक निरंतरता और लोक चेतना से जोड़कर परखा। हिंदी और मलयालम साहित्य के विद्वान एवं लेखक डॉ. ए. अरविंदाक्षन ने एक संगोष्ठी में यह बात कही। ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट’ की ओर से शनिवार को जारी एक बयान के अनुसार,अरविंदाक्षन ने कहा कि द्विवेदी का साहित्य लोक मानस के लिए रचा गया था और उनके संपूर्ण लेखन में मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य रहा। ट्रस्ट और ‘क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ की ओर से आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुये अरविंदाक्षन ने कहा कि द्विवेदी ने साहित्य को केवल राजनीति या अर्थशास्त्र के चश्मे से नहीं देखा, बल्कि उसे भारतीय समाज की दीर्घकालीन सांस्कृतिक निरंतरता और लोक चेतना से जोड़कर परखा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के सम कुलपति रह चुके अरविंदाक्षन ने कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने संत साहित्य की जो व्याख्या की, उसका मुख्य लक्ष्य उसमें निहित सार्वभौमिक मानवीय भावना को उजागर करना था। ‘क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ की रजिस्ट्रार डॉ. ज्योति कुमार ने कहा, ‘‘मैं पहली बार देख रही हूं कि किसी लेखक के गद्य पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हो रही है, अन्यथा काव्य पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।’’उन्होंने कहा कि आचार्य द्विवेदी की साहित्यिक विरासत उत्तर भारत तक सीमित नहीं रही और दक्षिण भारत भी उसका साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस तरह की संगोष्ठियों और सम्मेलनों के आयोजन का प्रयास करेगा। रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वी. एन. पांडेय ने कहा कि आचार्य द्विवेदी स्वयं बेंगलुरु आए थे या नहीं, यह ज्ञात नहीं है, लेकिन उन्होंने अपने निबंध ‘शिरीष के फूल’ में कर्नाटक का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा, ‘‘द्विवेदी के साहित्य पर बात करना ‘ओर से छोर’ यानी पुरातन से अधुनातन तक की बात करने के समान है।’’‘ग्लोबल हिंदी फाउंडेशन’ की चित्रा गुप्ता ने सिंगापुर से अपने ऑनलाइन संदेश में कहा कि आचार्य द्विवेदी के निबंधों में बार-बार यह संदेश मिलता है कि ज्ञान का उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं, बल्कि एक बेहतर, संवेदनशील और विवेकशील मनुष्य बनना है। उन्होंने सुझाव दिया कि विदेशों में जहां-जहां हिंदी पढ़ाई जाती है, वहां आचार्य द्विवेदी के निबंधों को 12वीं कक्षा, स्नातक और परास्नातक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट’ की अध्यक्ष डॉ. अपर्णा द्विवेदी ने आचार्य द्विवेदी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला तथा हिंदी और साहित्य के क्षेत्र में ट्रस्ट की गतिविधियों एवं आगामी योजनाओं की जानकारी दी। बयान के अनुसार, संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र भी प्रस्तुत किए।
क्या यूपीआई के चलते सरकार से नाराज हो सकता है व्यापारी वर्ग
यूपीआई पर नया चार्ज लगने के एलान के बाद कई व्यापारियों ने चिंता जताई है कि इससे कैश के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है.
मुंबई में पांचवें दिन 32,345 गणेश मूर्तियों का विसर्जन
मुंबई में पांचवें दिन भी गणपति बप्पा की विदाई का नजारा बेहद खास रहा. कहीं ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी, तो कहीं भक्तों ने भावुक होकर बप्पा को अंतिम विदाई दी. हजारों मूर्तियों के विसर्जन के बीच मुंबई में आस्था, उत्साह और भक्ति का रंग देखने को मिला.
‘दीयों का कंपटीशन चल रहा, रुपया देखो…’, अखिलेश का BJP पर तंज
अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर कई मोर्चों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देश में दीयों का कंपटीशन चल रहा है और महंगाई के दौर में रुपये की हालत खराब हो गई है. डूसू चुनाव का हवाला देकर उन्होंने यूपी में भी चुनाव की मांग की.
'देश में चल रहा दीयों का कंपटीशन, रुपये की हालत तो देखो!', अखिलेश यादव का बीजेपी पर तीखा हमला
अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दीयों की होड़, महंगाई और रुपये की हालत पर सवाल उठाए. डूसू चुनाव का जिक्र करते हुए यूपी में भी चुनाव कराने की मांग की. उन्होंने श्रावस्ती, बलरामपुर, रायबरेली और संतकबीर नगर की घटनाओं का उदाहरण देकर सरकार को घेरा. साथ ही कानपुर देहात के नेता जुनैद समेत कई लोगों के पार्टी में आने पर खुशी जताई.
टिकट में उम्र लिखी 34, आधार में है 43! क्या TTE लगा सकते हैं फाइन?
अगर कोई ट्रेन टिकट में गलत एज भर देता है तो क्या उस पर टीटीई की ओर से कार्रवाई की जा सकती है? तो जानते हैं इस बारे में रेलवे के नियम क्या कहते हैं....
250Cr के बंगले में गणपति विसर्जन, भक्ति में डूबे रणबीर-आलिया
Alia Bhatt-Ranbir Kapoor Ganesh Chaturthi: कपूर परिवारने साथ मिलकर बीती रात गणपति विसर्जन किया. रणबीर और आलिया के साथ नीतू कपूर भी दिखाई दीं. सभी ने साथमिलकर अपने नए घर के बाहर पूरे रीति-रिवाजों से गणपति विसर्जन किया.
इंटरनेट डेस्क। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे के नामांकन वापसी के दूसरे दिन आज पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने अपना नामांकन वापस ले लिया। रबीउल आलम चौधरी ने इसका कारण टीएमसी का पुराना चुनाव चिह्न (घास-फूल-पत्ती) नहीं मिलना बताया है। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को नंदीग्राम में भी ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस लेकर सभी को चौंका दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की थी। हालांकि, इसके कुछ घंटे बाद पुलिस ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। आपको बता दें कि कोलाता की इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा। PC:aajtak
अमेरिका के पानी पर हैकर्स की नजर, कोलोराडो में वॉटर सिस्टम पर लगाई सेंध
अमेरिका के कोलोराडो में दो छोटे वाटर सिस्टम पर विदेशी हैकर्स ने साइबर अटैक किया और उपकरणों की सेटिंग में बदलाव कर दिए. हालांकि, इससे पानी की सप्लाई और क्वालिटी पर कोई खास असर नहीं पड़ा.
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर सवालों की कड़ी बढ़ती जा रही है। अब इस प्रक्रिया के खिलाफ एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो गई है। जिस तरह दिल्ली में एसआईआर के तहत 47 लाख नाम हटाए गए और 33 लाख लोगों को नोटिस दिया गया। उसे लेकर विवाद छिड़ गया है। चुनाव आयोग सवालों से घिर गया। कोर्ट ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दे दी है। तो क्या फिर सवालों से घिरा चुनाव आयोग? वोटर लिस्ट का इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग कटघरे में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट में उसकी इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नई याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जहरी ने चुनाव आयोग पर नियमों का पालन ना करने के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि 33 लाख लोगों को चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस जारी किए जाने पर याचिकाकर्ता का दावा है कि यह नाम वेबसाइट पर नहीं दिखाए गए और उन्हें नोटिस की वजह भी नहीं बताई गई। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सामने याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में मतदाता सूची से करीब 47 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा 33 लाख लोगों को चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग ने उन लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं जिन्हें नोटिस भेजे गए हैं। साथ ही यह भी साफ नहीं किया गया कि किन आधारों पर उनके नामों पर सवाल उठाए गए। आयोग ने यह भी नहीं बताया कि किन मतदाताओं के रिकॉर्ड में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी यानी तार्किक विसंगतियां पाई गई और किन लोगों को अनमैप्ड की श्रेणी में रखा गया है। दरअसल दिल्ली में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के बाद 31 अगस्त को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया जिसमें पिछली बार के 1 करोड़ 45 लाख लोगों की सूची से करीब 47 लाख नाम काट दिए गए और अब लगभग 33 लाख लोगों को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी और अनमैप्ड के आधार पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। याचिका के मुताबिक, दिल्ली की 31 अगस्त की ड्राफ्ट सूची में 97,53,577 वोटर शामिल हैं। वहीं 47,56,722 नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। 13,79,785 वोटर्स को 'नो मैपिंग' और 19,33,134 को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज' के आधार पर नोटिस के लिए चिन्हित किया गया है। इसे भी पढ़ें: Haridwar Suicide Case: निठारी कांड के मुख्य आरोपी Surendra Koli ने क्यों बदली Identity? जांच में जुटी Police बेघर, ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्कर्स के लिए 23-24 सितंबर को स्पेशल कैंप एसआईआर के दौरान बेघर लोगों, ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्कर्स को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे। दिल्ली के 13 जिलों में ये कैंप 23 और 24 सितंबर को शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक डीयूएसआईबी के नाइट शेल्टर और दूसरे चिन्हित स्थानों पर लगाए जाएंगे। कैंप में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) भी मौजूद रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों को पहचान, पते और जरूरी डॉक्यूमेंट देने में कई बार परेशानी होती है। कुन्ने बोले- मैं जिंदा हूं, SIR ने बताया 'मृत' स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में एक और जीवित शख्स का नाम डेथ लिस्ट में डालने का मामला सामने आया है। लाल गुम्बद के रहने वाले कुन्ने लाल (60) ने विडियो जारी कर कहा है कि वो जीवित है। वह 50 साल से इसी इलाके में रह रहे हैं और पिछले चुनावों में वोट देते रहे हैं। कुन्ने लाल की नातिन अनीता ने बताया कि दादाजी ठीक हैं। परिवार में पिता-माता, भाई और उनकी पत्नी और बाकी सभी के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में हैं, सिर्फ दादा का नाम नहीं है। दो दिन पहले एनजीओ में काम करने वाली एक महिला ने परिवार को बताया कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। अनीता के मुताबिक, जब एन्युमरेशन फॉर्म भरे जा रहे थे, तब कुन्ने लाल गांव में थे। परिवार ने इसकी जानकारी दी थी। अधिकारी ने कहा था कि उनका फॉर्म बाद में भरवा लिया जाएगा लेकिन कोई फॉर्म भरवाने नहीं आया। अब पता चला कि उनका नाम डेथ लिस्ट में डाल दिया गया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Two Language Policy | तमिलनाडु में 'भाषा युद्ध' पार्ट-2! सुप्रीम कोर्ट की नसीहत के बाद भी दो-भाषा नीति पर अड़ी विजय सरकार, DMK-TVK आए साथ 16 दिन में मिले सिर्फ 68 हज़ार दावे दिल्ली में SIR के तहत क्लेम और ऑब्जेक्शन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए करीब 47.5 लाख वोटर्स की तुलना में नाम जुड़वाने के लिए आने वाले आवेदनों की रफ्तार अभी भी धीमी है। 31 अगस्त से 16 सितंबर तक 16 दिनों में कुल 68.043 लोगों ने फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है। क्लेम और ऑब्जेक्शन दर्ज कराने की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के 17 सितंबर के आआंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त तक 2,12,400 फॉर्म-6 प्राप्त हो चुके थे। इसके बाद 16 दिनो में 68,043 नए आवेदन आए है।
आज बरसाना से लेकर हर तरफ मची है धूम, जीवन के सभी कष्ट मिटाने के लिए जरूर करें ये 5 अचूक उपाय
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में पर्व-त्योहारों की श्रृंखला में राधा अष्टमी का पावन पर्व अत्यंत विशिष्ट स्थान रखता है। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जगत जननी श्री राधा रानी का प्राकट्य उत्सव अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस प्रकार जन्माष्टमी के बिना भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है, ठीक उसी प्रकार राधा रानी की आराधना के बिना कान्हा की कृपा प्राप्त करना असंभव है। आज के इस पावन और अलौकिक दिन पर यदि सच्चे मन से कुछ विशेष उपाय और अनुष्ठान कर लिए जाएं, तो साधक के जीवन के समस्त दुख-दर्द और संकट दूर हो जाते हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विशेष पर्व और अचूक उपायों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया जा रहा है कि आखिर कैसे आज के दिन लाड़ली जी को प्रसन्न करके उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है।राधा अष्टमी के पावन पर्व का महत्व और ब्रजमंडल में सजी अलौकिक छटाभाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्याह्न काल में वृषभानुनंदिनी श्री राधा रानी का प्राकट्य हुआ था, जिसके चलते इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र बरसाना स्थित श्रीजी मंदिर से लेकर वृंदावन, मथुरा और दुनिया भर के इस्कॉन मंदिरों में इस उत्सव की अनूठी रौनक देखने को मिलती है। आज के दिन सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है और विधि-विधान से राधा-कृष्ण के विग्रह का अभिषेक किया जा रहा है। मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं और राधारानी का ध्यान करते हैं, उनके घर में कभी भी सुख-समृद्धि और वैभव की कोई कमी नहीं होती। भौगोलिक और स्थानीय ऑप्टिमाइजेशन के दृष्टिकोण से भी ब्रज की गलियों में आज 'राधे-राधे' के जयकारों से पूरा वातावरण पूरी तरह सराबोर नजर आ रहा है।पहला अचूक उपाय: राधा-कृष्ण का षोडशोपचार पूजन और महाअभिषेकआज के दिन का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह है कि सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर अपने घर के मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से उनका अभिषेक करें और उन्हें नए वस्त्र अर्पित करें। पूजन के दौरान सोलह श्रृंगार की सामग्री विशेष रूप से लाड़ली जी को अर्पित की जानी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और आपसी प्रेम तथा सामंजस्य में वृद्धि होती है। पूजा के समय 'ॐ श्री राधायै नमः' या 'श्रीराधे' मंत्र का कम से कम एक माला जाप अवश्य करना चाहिए, जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता का संचार होता है।दूसरा अचूक उपाय: जरूरतमंदों को दान और सुहागिन महिलाओं को उपहारसनातन परंपरा में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है, और राधा अष्टमी जैसे पावन अवसर पर किया गया दान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। आज के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल और श्रृंगार सामग्री का दान करना चाहिए। इसके अलावा, किसी सुहागिन महिला को भोजन कराकर उसे वस्त्र और सुहाग की वस्तुएं भेंट करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस उपाय को करने से मां लक्ष्मी और श्री राधा रानी दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है, जिससे घर के भंडार हमेशा भरे रहते हैं और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।तीसरा अचूक उपाय: भोग में लगाएं प्रिय वस्तुएं और करें कीर्तनश्री राधा रानी को खीर, मालपुआ, मक्खन-मिश्री और ताजे फलों का भोग अत्यंत प्रिय है, इसलिए आज के दिन भोग तैयार करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें। पूजा संपन्न होने के बाद परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर कुछ समय के लिए संकीर्तन या भजन-गायन अवश्य करें। संगीत और भक्ति का यह मेल भगवान को अति प्रसन्न करता है, और घर का माहौल पूरी तरह से पवित्र व आनंदमय हो जाता है। डिजिटल सर्च और एआई के इस दौर में लोग ऑनलाइन माध्यम से भी भजन और कथाओं का श्रवण कर रहे हैं, जो मानसिक शांति प्रदान करने का एक बेहतरीन जरिया है।चौथा और पांचवां अचूक उपाय: तुलसी की सेवा और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक प्रज्वलनआज के दिन तुलसी के पौधे की विशेष पूजा करनी चाहिए और उसके पास घी का दीपक जलाकर उसकी सात बार परिक्रमा करनी चाहिए, क्योंकि तुलसी को राधा रानी का ही स्वरूप माना गया है। इसके साथ ही शाम के समय किसी नजदीकी मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक प्रज्वलित करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है और जीवन के मार्ग में आने वाली सभी रुकावटें स्वतः समाप्त होने लगती हैं। इन पांचों छोटे-मोटे लेकिन अचूक उपायों को अपनाने से भक्त को अलौकिक शांति और दोनों लोकों में सुख की प्राप्ति होती है।
ब्रजमंडल में राधाष्टमी की अलौकिक धूम, बरसाना से लेकर हर तरफ गूंजे लाड़ली के जयकारे
भारतीय सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में जब भी प्रेम, त्याग और समर्पण की त्रिवेणी का जिक्र होता है, तो सबसे पहले राधा रानी का पावन नाम जुबान पर आता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले महाउत्सव यानी श्री राधाष्टमी (Radhashtami 2026) के पावन पर्व पर इस समय पूरा ब्रजमंडल भक्ति के समंदर में पूरी तरह डूब चुका है। बरसाना से लेकर वृंदावन, नंदगांव और मथुरा के प्राचीन मंदिरों में वृषभानुनंदिनी श्री राधा रानी के प्राकट्य उत्सव की धूम देखते ही बन रही है, जहां देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालु लाड़ली जी के दर्शन पाकर अपने को धन्य महसूस कर रहे हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस पावन पर्व का विस्तृत और विश्लेषणात्मक जायजा लिया जा रहा है कि आखिर कैसे ब्रज की हर एक गली इस समय राधा रानी के रंग में सराबोर नजर आ रही है।बरसाना के श्रीजी मंदिर में राधाष्टमी का भव्य आयोजन और अभिषेक की अलौकिक छटाराधाष्टमी के इस महाउत्सव का मुख्य और सबसे भव्य केंद्र बरसाना का प्रसिद्ध श्रीजी मंदिर (Lakhshminarayan Temple / Radharani Temple) बना हुआ है, जिसे फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से दुल्हन की तरह सजाया गया है। प्राकट्य उत्सव के इस पावन अवसर पर मध्य रात्रि या ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राधा रानी के अभिषेक की प्रक्रिया शुरू हो गई। दूध, दही, घी, शहद और सैकड़ों प्रकार की दिव्य औषधियों से युक्त महाअभिषेक के बाद जब लाड़ली जी का नया और मनमोहक श्रृंगार किया गया, तो उनके दर्शन कर रहे हर भक्त की आंखें नम और श्रद्धा से भर गईं। पारंपरिक लोकगीतों, बधाई गानों और ढोल-मंजीरों की थाप पर झूमते हुए गोस्वामी समाज के लोग जब 'वृषभान की दुलारी की जय' के जयकारे लगा रहे हैं, तो पूरा प्रांगण भक्तिमय ऊर्जा से गूंज उठता है।क्यों मनाई जाती है राधाष्टमी और क्या है वृषभानुनंदिनी के प्राकट्य से जुड़ी कथापौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की शक्ति और उनकी अर्धांगिनी श्री राधा रानी का प्रकटीकरण भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मध्याह्न काल में हुआ था। कथा के अनुसार, जब द्वापर युग में माता यशोदा और नंद बाबा कन्हैया को लेकर बरसाना पधारे थे, तब वृषभान जी और माता कीर्ती के यहां योगमाया के रूप में श्री राधा रानी प्रकट हुई थीं। चूंकि बाल्यकाल में राधा जी ने अपनी आंखें बंद रखी थीं और जब तक कृष्ण जी उनके सामने नहीं आए, तब तक उन्होंने आंखें नहीं खोलीं, इसलिए उनका और कन्हैया का प्रेम शाश्वत और अलौकिक माना गया है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से राधा-कृष्ण की पूजा करने से भक्तों के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उन्हें अखंड प्रेम, सुख तथा वैवाहिक जीवन में शांति की प्राप्ति होती है।ब्रजमंडल के चप्पे-चप्पे पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं का आगमनराधाष्टमी के इस पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी इस्कॉन और अन्य आध्यात्मिक संस्थाओं के लाखों श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं। यमुना स्नान से लेकर गोवर्धन परिक्रमा और बरसाना की पहाड़ियों पर स्थित राधारानी के महलनुमा मंदिर तक जाने वाले हर मार्ग पर भक्तों का रेला लगा हुआ है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समितियों द्वारा सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े। जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया जा रहा है और 'राधे-राधे' के संकीर्तन से पूरा वातावरण इतना पावन हो गया है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति अपनी तमाम सांसारिक चिंताओं को भूलकर सिर्फ और सिर्फ भक्ति भाव में लीन नजर आ रहा है।आधुनिक समाज में राधा-तत्व और प्रेम के आध्यात्मिक संदेश की प्रासंगिकताआज की इस तेज रफ्तार और तनावपूर्ण आधुनिक जीवनशैली में जहां स्वार्थ और दूरियां बढ़ती जा रही हैं, वहीं राधा रानी का चरित्र हमें निष्काम प्रेम, समर्पण और परोपकार का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाता है। राधा रानी ने कभी श्रीकृष्ण से विवाह की भौतिक मांग नहीं की, बल्कि उनका प्रेम आत्मा से परमात्मा का मिलन था, जो हर युग के इंसानों को यह सिखाता है कि प्रेम का वास्तविक अर्थ अधिकार जताना नहीं बल्कि सर्वस्व त्याग कर देना है। त्योहारों के इस डिजिटल और एआई सर्च के दौर में जब युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ने के नए रास्ते तलाश रही है, तब राधाष्टमी जैसे पावन पर्व हमारी सनातन जड़ों और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने का सबसे बड़ा जरिया बनते हैं।
TTD को गाय के नाम पर बेचा मिलावटी घी, ED ने Sukriti Foods के Kailash Mangala को दबोचा
एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) का आरोप है कि मशहूर तिरुपति लड्डू प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया घी असल में रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नल ऑयल, पामोलिन और कई तरह के केमिकल से बनाया गया था, जिसे बाद में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को गाय के घी के तौर पर सप्लाई किया गया। केंद्रीय एजेंसी की ये जानकारी 2019 से 2024 के बीच TTD को मिलावटी घी की कथित धोखाधड़ी वाली सप्लाई की जांच के दौरान सामने आई है। ईडी के अनुसार, इस दौरान कथित तौर पर धोखाधड़ी से की गई सप्लाई की कीमत 230 करोड़ रुपये थी। इसमें से 96 करोड़ रुपये का मिलावटी घी कथित तौर पर सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला ने बनाया था। ईडी ने इस मामले में मंगला को गिरफ्तार करने के बाद ये आरोप लगाए। इसे भी पढ़ें: Bhilai Steel Plant कबाड़ चोरी मामले में निजी कंपनी के MD समेत 2 अधिकारी गिरफ्तार कथित तौर पर घी किस चीज़ से बना था? ED के अनुसार, तिरुपति लड्डू प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया कथित मिलावटी घी रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नल ऑयल और पामोलिन के साथ-साथ कई तरह के केमिकल मिलाकर बनाया गया था। एजेंसी ने खास तौर पर MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवासेट सॉफ्ट 400 और एसिटिक एसिड एस्टर जैसे केमिकल्स का नाम लिया, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में किया गया था। ईडी ने कहा कि इसके बाद जो प्रोडक्ट बना, उसे TTD को सप्लाई करने के लिए एगमार्क स्पेशल ग्रेड गाय का घी बताकर भेजा गया। एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि गाय का घी बताकर सप्लाई करने से पहले, कथित तौर पर इन चीज़ों और केमिकल का इस्तेमाल करके यह घी बनाया गया था। इसे भी पढ़ें: Bhilai Steel Plant कबाड़ चोरी मामले में निजी कंपनी के MD समेत 2 अधिकारी गिरफ्तार 230 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी वाली सप्लाई ED ने कहा कि उसकी जांच 2019 से 2024 के बीच TTD को घी की कथित धोखाधड़ी वाली सप्लाई से जुड़ी है। एजेंसी के मुताबिक, इन कथित धोखाधड़ी वाली सप्लाई की कुल कीमत 230 करोड़ रुपये थी। ED ने आगे आरोप लगाया कि इसमें से 96 करोड़ रुपये का मिलावटी घी मंगला ने अपनी फैक्ट्री में बनाया था। एजेंसी ने मंगला को इस मामले में कथित साजिशकर्ताओं में से एक बताया। आरोप है कि उसने मिलावट की चीजें मंगवाने में मदद की और अपनी फैक्ट्री में मिलावटी घी बनाया। कथित तौर पर मिलावटी घी की सप्लाई कैसे की गई? ED का आरोप है कि मंगला ने कई ऐसी कंपनियों के ज़रिए मिलावटी घी की सप्लाई का इंतज़ाम किया, जिन्हें एजेंसी ने 'फ्रंट एंटिटी' (मुखौटा कंपनियाँ) बताया है। एजेंसी ने श्री वैष्णवी डेयरी स्पेशलिटीज़ प्राइवेट लिमिटेड, मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और एआर डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड का नाम लिया। ED के अनुसार, मंगला ने कथित तौर पर घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े झूठे रिकॉर्ड भी बनाए और उन्हें बनाए रखा। एजेंसी का आरोप है कि इन रिकॉर्ड्स को बनाए रखने का मकसद मिलावटी चीज़ों के असली इस्तेमाल को छिपाना और असली गाय के घी के सही उत्पादन और सप्लाई का दिखावा करना था।
दिल्ली में 18 महीने के बच्चे पर आवारा कुत्ते का हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम और विकसित देशों की तुलना में करीब छह गुना कम है। उन्होंने भारत की पर्यावरणीय पहलों और नवीकरणीय ऊर्जा में प्रगति का जिक्र किया।
नीट परीक्षा के बिना भी करें मेडिकल की और शानदार कोर्सेज की पढ़ाई
भारत जैसे देश में जब भी मेडिकल और हेल्थकेयर सेक्टर में करियर बनाने की बात आती है, तो सबसे पहले जहन में केवल एमबीबीएस (MBBS) और नीट (NEET) परीक्षा का ही नाम आता है। लाखों छात्र हर साल इस कठिन प्रवेश परीक्षा की तैयारी में अपना दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन सीटों की सीमित संख्या और कड़े कंपटीशन के कारण हर किसी को सफलता नहीं मिल पाती है। हालांकि, इसका यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि मेडिकल फील्ड में आगे बढ़ने के आपके सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। आज के आधुनिक और तेजी से विकसित हो रहे हेल्थकेयर इंडस्ट्री में ऐसे कई बेहतरीन, высоко-डिमांडेड और आकर्षक कोर्सेज मौजूद हैं जिन्हें आप बिना नीट परीक्षा दिए ही आसानी से कर सकते हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत लेख में हम आपको उन 5 प्रमुख मेडिकल कोर्सेज के बारे में बताने जा रहे हैं जो भविष्य के लिहाज से बेहद शानदार साबित होने वाले हैं।हेल्थकेयर सेक्टर में बिना नीट के करियर बनाने के बढ़ते अवसर और उनका बदलता स्वरूपपिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं, बायोमेडिकल रिसर्च, क्लिनिकल डेटा और पैरामेडिकल सेवाओं का दायरा बहुत तेजी से फैला है, जिसके कारण केवल डॉक्टर ही नहीं बल्कि अन्य सपोर्टिंग मेडिकल प्रोफेशनल्स की भी भारी डिमांड पैदा हो गई है। शिक्षाविदों और करियर एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि छात्रों को रूढ़िवादी सोच से बाहर निकलकर इन उभरते हुए क्षेत्रों की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। बिना नीट के उपलब्ध ये कोर्सेज न केवल कम समय में पूरे हो जाते हैं, बल्कि इनमें पढ़ाई पूरी करते ही देश-विदेश की नामी कंपनियों, अस्पतालों और शोध संस्थानों में शानदार सैलरी पैकेज पर नौकरियां मिलनी शुरू हो जाती हैं। भौगोलिक और स्थानीय ऑप्टिमाइजेशन के दृष्टिकोण से भी इन कोर्सेज की प्रासंगिकता टियर-1 और टियर-2 शहरों के बड़े मल्टीस्पेशलिटी अस्पतालों में लगातार बढ़ती जा रही है।पहला डिमांडिंग कोर्स: बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) और इसके अनगिनत फायदेबिना नीट के मेडिकल सेक्टर में करियर बनाने की फेहरिस्त में सबसे पहला और सबसे लोकप्रिय नाम बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी यानी बीपीटी (BPT) का आता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब पोश्चर, स्पोर्ट्स इंजरीज और बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के कारण फिजियोथेरेपिस्ट्स की मांग आसमान छू रही है। इस कोर्स के तहत मानव शरीर की हड्डियों, मांसपेशियों और नसों की कार्यप्रणाली का अध्ययन कराया जाता है ताकि मरीजों को दर्द से राहत दिलाई जा सके। अपनी खुद की क्लीनिक खोलने से लेकर बड़े खेल अकादमियों, फिटनेस सेंटर्स और इंटरनेशनल हॉस्पिटल्स में काम करने तक के ढेरों विकल्प इस क्षेत्र में युवाओं के लिए खुले हुए हैं।दूसरा कोर्स: बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी का आधुनिक संगमयदि आपकी रुचि विज्ञान, तकनीक और चिकित्सा के मेल में है, तो बायोमेडिकल इंजीनियरिंग (Biomedical Engineering) आपके लिए एक बेहतरीन और हाई-पेइंग विकल्प साबित हो सकता है। इस क्षेत्र में आधुनिक मेडिकल उपकरण, जैसे एमआरआई मशीनें, सीटी स्कैन, पेसमेकर और रोबोटिक सर्जरी टूल्स के निर्माण, डिजाइनिंग और रख-रखाव का काम किया जाता है। स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलाइजेशन के इस दौर में हॉस्पिटल्स और मेडिकल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को ऐसे एक्सपर्ट्स की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। इस कोर्स को करने के बाद आपको कॉर्पोरेट सेक्टर में तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में बेहतरीन करियर ग्रोथ देखने को मिलती है।तीसरा कोर्स: क्लिनिकल साइकोलॉजी और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञताआज के मानसिक तनाव और भागदौड़ भरे युग में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिसके चलते क्लिनिकल साइकोलॉजी (Clinical Psychology) के क्षेत्र में प्रोफेशनल्स की भारी कमी महसूस की जा रही है। इस कोर्स के माध्यम से छात्रों को मानव व्यवहार, मानसिक विकारों के अध्ययन और काउंसलिंग की वैज्ञानिक तकनीक सिखाई जाती है। स्कूल, कॉलेज, कॉर्पोरेट ऑफिस, रिहैबिलिटेशन सेंटर्स और बड़े अस्पतालों में काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट के रूप में करियर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जो आपको समाज सेवा के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाती हैं।चौथा और पांचवां कोर्स: मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (BMLT) और न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्सबिना नीट के किए जाने वाले कोर्सेज में बैचलर इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (BMLT) डायग्नोस्टिक सेक्टर की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि किसी भी बीमारी की सही पहचान लैब टेस्ट के बिना संभव नहीं है। पैथोलॉजी लैब्स और अस्पतालों में टेस्ट रिपोर्ट्स तैयार करने के लिए हमेशा प्रशिक्षित तकनीशियनों की मांग बनी रहती है। इसके अलावा, न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स (Nutrition and Dietetics) एक ऐसा उभरता हुआ क्षेत्र है जहां खान-पान और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के दौर में सर्टिफाइड डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट की पूछ परख हर जगह हो रही है। फिटनेस इंडस्ट्री से लेकर हॉस्पिटल्स तक यह एक सदाबहार करियर विकल्प है।निष्कर्ष: सही मार्गदर्शन और अपने हुनर के अनुसार कोर्स चुनकर संवारें अपना भविष्यसंक्षेप में कहा जाए तो एमबीबीएस या नीट की परीक्षा में सफलता न मिलना आपके करियर का अंत बिल्कुल नहीं है, बल्कि यह आपके लिए कई नए और आधुनिक रास्तों के द्वार खोलता है। इन 5 डिमांडिंग कोर्सेज को चुनकर आप कम समय और कम लागत में हेल्थकेयर सेक्टर में एक प्रतिष्ठित और सफल करियर का निर्माण कर सकते हैं। डिजिटल एआई सर्च के इस युग में सही जानकारी समय पर मिल जाना ही सफलता की सबसे पहली सीढ़ी होती है, इसलिए अपनी रुचि के अनुसार सही क्षेत्र का चुनाव करें और आगे बढ़ें।
मंगल-गुरु की युति से नीचभंग योग, 3 राशियों का चमकेगा भाग्य
Nichbhang Rajyog: 18 सितंबर 2026 को मंगल ने कर्क राशि में प्रवेश किया है. गुरु के साथ मंगल की युति से नीचभंग योग बन रहा है. जानें किन 3 राशियों को करियर, कारोबार और धन में लाभ मिल सकता है.
दिल्ली में SpiceJet की फ्लाइट्स में देरी, लेह-जम्मू समेत 5 उड़ानें प्रभावित
सुबह-सुबह दिल्ली से स्पाइसजेट की 4 घरेलू और 1 अंतरराष्ट्रीय उड़ान देर से चली, जिससे 500 से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए. टर्मिनल 1 से तीन उड़ानें लेह की और एक जम्मू की थी, जिनके करीब 450 यात्री परेशान रहे. लेह की SG127 सुबह 4.50 की जगह करीब 9 बजे उड़ी. सूत्रों के मुताबिक रात 2.30 बजे चेक इन स्टाफ नहीं आया, बाद में ड्यूटी मैनेजर ने यात्रियों को शांत कराया.
भारतीय छात्राओं के लिए खास स्कॉलरशिप का ऐलान, यूनिवर्सिटी और जरूरी शर्तें जानकर तुरंत करें आवेदन
उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का सपना देखने वाली भारतीय छात्राओं के लिए समुद्र पार से एक बेहद शानदार और करियर को नई उड़ान देने वाली खबर सामने आ रही है। यदि आप भी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहती हैं और दुनिया के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों में से एक से डिग्री हासिल करने की इच्छा रखती हैं, तो ऑस्ट्रेलिया की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी आपके लिए एक बेहतरीन अवसर लेकर आई है। यह यूनिवर्सिटी विशेष रूप से भारतीय महिला छात्रों को इंजीनियरिंग कोर्सेज में दाखिला लेने के लिए भारी-भरकम स्कॉलरशिप और आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे पढ़ाई का खर्च काफी हद तक कम हो जाता है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस स्कॉलरशिप प्रोग्राम का विस्तृत और विश्लेषणात्मक जायजा लिया जा रहा है ताकि आप इसकी हर एक शर्त और आवेदन प्रक्रिया को आसानी से समझ सकें।ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी की इस खास पहल से भारतीय छात्राओं को मिल रहा है बड़ा लाभआज के दौर में विदेशों में जाकर पढ़ाई करना हर होनहार छात्र का सपना होता है, लेकिन कई बार भारी-भरकम ट्यूशन फीस और रहने-खाने का खर्च इस सपने के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बन जाता है। इसी आर्थिक चुनौती को ध्यान में रखते हुए ऑस्ट्रेलिया की जानी-मानी यूनिवर्सिटी ने भारतीय छात्राओं के लिए विशेष स्कॉलरशिप प्रोग्राम की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्टेम (STEM - Science, Technology, Engineering, and Mathematics) क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इस स्कॉलरशिप के तहत योग्य छात्राओं को उनकी ट्यूशन फीस में भारी छूट या आंशिक से लेकर पूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे बिना किसी वित्तीय तनाव के अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस कर सकें। यह पहल न केवल भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि भारतीय मेधावी बेटियों को वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का एक सुनहरा अवसर भी देती है।कौन सी यूनिवर्सिटी दे रही है यह स्कॉलरशिप और इसके लिए पात्रता की शर्तें क्या हैंभारतीय छात्राओं के लिए इस विशेष स्कॉलरशिप की घोषणा करने वाली यूनिवर्सिटी का नाम ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में शुमार है। इस स्कॉलरशिप का लाभ उठाने के लिए यूनिवर्सिटी द्वारा कुछ निश्चित और स्पष्ट शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनका पालन करना हर आवेदक के लिए अनिवार्य है। सबसे पहले, आवेदक का भारतीय नागरिक होना और भारत के किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से स्कूली शिक्षा या स्नातक की डिग्री प्राप्त होना जरूरी है। इसके अलावा, छात्रा ने संबंधित इंजीनियरिंग कोर्स (जैसे मैकेनिकल, सिविल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल या एयरोस्पेस) के लिए यूनिवर्सिटी के आधिकारिक पोर्टल के जरिए एडमिशन के लिए आवेदन किया हो और उसका अकादमिक रिकॉर्ड शानदार रहा हो। अंग्रेजी भाषा पर पकड़ साबित करने के लिए आईलेट्स (IELTS), पीटीई (PTE) या टोपेल (TOEFL) जैसे इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्ट के न्यूनतम निर्धारित स्कोर भी अनिवार्य शर्तों में शामिल हैं।आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया और किन जरूरी दस्तावेजों की होगी आवश्यकतायदि आप इस स्कॉलरशिप के लिए अपनी योग्यता पूरी करती हैं और ऑस्ट्रेलिया में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहती हैं, तो आवेदन प्रक्रिया बेहद सरल और डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकती है। सबसे पहले आपको संबंधित ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपने पसंद के इंजीनियरिंग कोर्स के लिए एडमिशन फॉर्म भरना होगा। एडमिशन के साथ ही आपको स्कॉलरशिप के लिए अलग से एक आवेदन पत्र या निबंध (Statement of Purpose) जमा करना होता है, जिसमें यह बताना होता है कि आप इस स्कॉलरशिप की हकदार क्यों हैं। जरूरी दस्तावेजों में आपके शैक्षणिक प्रमाण पत्र, मार्कशीट, पासपोर्ट की कॉपी, अंग्रेजी दक्षता परीक्षा के स्कोरकार्ड, दो एकेडमिक रिकमंडेशन लेटर (LOR) और एक बेहतरीन बायोडाटा या सीवी की आवश्यकता होती है। आवेदन करने से पहले यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जाकर अंतिम तिथि (Deadline) की जांच जरूर कर लें, ताकि समय रहते आपकी एप्लीकेशन सबमिट हो सके।ऑस्ट्रेलिया में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद करियर के अनगिनत और शानदार अवसरऑस्ट्रेलिया को दुनिया के सबसे विकसित और सुरक्षित देशों में गिना जाता है, जहां इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स की मांग हमेशा बहुत उच्च स्तर पर बनी रहती है। जब कोई भारतीय छात्रा ऑस्ट्रेलिया से इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करती है, तो उसे पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा (Post-Study Work Visa) के तहत वहां की शीर्ष कंपनियों में काम करने का बेहतरीन अनुभव प्राप्त होता है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में ऑस्ट्रेलियाई डिग्रियों की मान्यता इतनी अधिक है कि आप चाहें तो भारत लौटकर देश की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में लीडरशिप भूमिकाएं निभा सकती हैं या फिर दुनिया के किसी भी कोने में अपने करियर की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। इस स्कॉलरशिप के जरिए न केवल आपकी विदेश में पढ़ाई का खर्च संभलता है, बल्कि आपके भविष्य के लिए एक मजबूत और सुरक्षित नींव भी तैयार हो जाती है।निष्कर्ष: सपनों को नई उड़ान देने का वक्त, बिना देर किए करें आवेदनसंक्षेप में कहा जाए तो ऑस्ट्रेलिया की इस यूनिवर्सिटी द्वारा भारतीय छात्राओं के लिए लाई गई यह स्कॉलरशिप योजना किसी वरदान से कम नहीं है। जो छात्राएं आर्थिक तंगी या जानकारी के अभाव में अपने विदेश में पढ़ने के सपने को पीछे छोड़ रही थीं, वे अब इस अवसर का लाभ उठाकर अपने भविष्य को पूरी तरह बदल सकती हैं। डिजिटल सर्च और एआई के इस दौर में इस तरह की सही और सटीक जानकारियां समय पर मिल जाना किसी भी करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, इसलिए बिना किसी देरी के अपनी तैयारी शुरू करें और इस शानदार स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करें।
मध्य प्रदेश 12वीं बोर्ड परीक्षा के 7,400 से अधिक मेधावी छात्रों को स्कूटर प्रदान करता है; यह कार्यक्रम सीए, इंजीनियरिंग
सफलता जब कड़ी मेहनत, अटूट संघर्ष और कभी हार ना मानने वाले जज्बे के साथ मिलती है, तो वह इतिहास बन जाती है। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली कहानी है केरल की पहली आदिवासी महिला आईएएस अधिकारी श्रीधन्या सुरेश (Sreedhanya Suresh) की, जिन्होंने अपनी जिंदगी के हर मोड़ पर विपरीत परिस्थितियों का डटकर सामना किया। वायनाड के एक बेहद साधारण और पिछड़े आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीधन्या के लिए आईएएस (IAS) बनने का यह सफर फूलों की सेज नहीं, बल्कि कांटों भरा रास्ता था। एक ऐसा समय भी उनकी जिंदगी में आया जब यूपीएससी (UPSC) के इंटरव्यू के लिए दिल्ली जाने तक के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, और वे अपनी शुरुआती पढ़ाई के दौरान हर रोज मीलों का सफर पैदल तय करती थीं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस प्रेरणादायक जीवन गाथा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया जा रहा है कि आखिर कैसे श्रीधन्या ने संघर्षों के आंधियों को चीरकर देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहराया।केरल के वायनाड जिले के एक बेहद गरीब आदिवासी परिवार से जुड़ा शुरुआती संघर्षकेरल के खूबसूरत लेकिन आदिवासी बहुल और पिछड़े जिले वायनाड के इडियमकुडी गांव में जन्मीं श्रीधन्या सुरेश का शुरुआती जीवन अभावों और तंगहाली के साये में बीता। उनके माता-पिता दैनिक मजदूरी करते थे और परिवार का गुजारा चलाना भी बेहद मुश्किल हुआ करता था। आर्थिक तंगी इतनी अधिक थी कि कई बार दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी संघर्ष बन जाता था। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उनके माता-पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी और उन्हें शिक्षित करने का संकल्प लिया। ग्रामीण इलाके में होने के कारण पक्की सड़कों और परिवहन के साधनों का अभाव था, जिसके चलते छोटी उम्र से ही श्रीधन्या को अपनी बुनियादी पढ़ाई पूरी करने के लिए रोज अपने घर से स्कूल तक की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती थी।स्कूल और कॉलेज के दिनों में पढ़ाई के प्रति लगन और मीलों पैदल चलने का सफरश्रीधन्या अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि उनके गांव से स्कूल की दूरी लगभग चार किलोमीटर थी, जिसे वे हर रोज पैदल चलकर ही तय करती थीं। उस दौर में न तो पक्के रास्ते थे और न ही उनके पास साइकिल जैसी कोई सुविधा थी, लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी लगन और कुछ कर दिखाने का जज्बा इतना मजबूत था कि धूप, बारिश या ठंड—हर मौसम में उनके कदम कभी नहीं रुके। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कालीकट यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद तिरुवनंतपुरम से एप्लाइड जूलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई तरह की छोटी-मोटी नौकरियों और छात्रवृत्तियों के सहारे अपने खर्चों को मैनेज किया, लेकिन उनके भीतर सिविल सेवा (Civil Services) में जाने का सपना पल-पल मजबूत होता जा रहा था।जब UPSC इंटरव्यू के लिए नहीं थे पैसे, दोस्तों की मदद से तय किया दिल्ली का सफरश्रीधन्या सुरेश के जीवन का सबसे संघर्षपूर्ण और परीक्षा की घड़ी वह दौर था जब उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर देश की सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य चरण को पास कर लिया और उन्हें इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया गया। लेकिन इस बड़ी खुशी के साथ उनके सामने सबसे बड़ा आर्थिक संकट यह खड़ा हो गया कि उनके परिवार के पास दिल्ली जाने के लिए ट्रेन या हवाई जहाज के टिकट के पैसे तक नहीं थे। ऐसे कठिन समय में उनके कुछ शुभचिंतक दोस्तों और कॉलेज के प्रोफेसरों ने आगे आकर उनकी आर्थिक मदद की और आपस में चंदा इकट्ठा करके उनके लिए दिल्ली जाने का किराया जुटाया। जब वे पहली बार दिल्ली के धौलपुर हाउस स्थित यूपीएससी बोर्ड के सामने इंटरव्यू के लिए बैठीं, तो उनके पास न तो महंगे कपड़े थे और न ही कोई हाई-फाई कोचिंग का अनुभव, लेकिन उनकी आंखों में अपने परिवार और समाज के उत्थान की एक चमक और अटूट आत्मविश्वास था।केरल की पहली आदिवासी महिला IAS बनकर रचा इतिहास और समाज के लिए बनी मिसालवर्ष 2018 की सिविल सेवा परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में जब श्रीधन्या सुरेश ने अखिल भारतीय स्तर पर 410वीं रैंक हासिल की, तो न केवल उनके गांव में बल्कि पूरे केरल राज्य में जश्न का माहौल बन गया। वे केरल के इतिहास में पहली ऐसी आदिवासी महिला बनीं जिन्होंने आईएएस अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता ने राज्य के आदिवासी समुदायों के सामने एक नई उम्मीद की किरण जगा दी। अपनी इस सफलता के बाद वे आज केरल के विभिन्न जिलों में प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी निभाते हुए समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही हैं। उनका यह सफर इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि इंसान के इरादे मजबूत हों, तो गरीबी और अभाव कभी भी आपकी मंजिल के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकते।निष्कर्ष: युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत और कभी हार न मानने का संदेशसंक्षेप में कहा जाए तो आईएएस अधिकारी श्रीधन्या सुरेश की यह प्रेरणादायक कहानी आज के दौर के उन तमाम युवाओं के लिए एक संजीवनी बूटी की तरह है जो जरा सी असफलता या आर्थिक तंगी से घबराकर अपने सपने छोड़ देते हैं। डिजिटल सर्च और एआई के इस युग में ऐसी सच्ची और प्रेरणास्पद कहानियां समाज को सकारात्मक ऊर्जा देने का काम करती हैं। यह साबित करता है कि सफलता का शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि संघर्ष की भट्टी में तपकर ही असली सोना निकलता है, और श्रीधन्या ने अपने जज्बे से यह कर दिखाया है।
ईरान ने जासूस को दी फांसी, इजरायल को मिसाइल ठिकानों की जानकारी देने का आरोप
होसैन पदरान नाम के एक शख्स को ईरान ने फांसी की सजा सुनाई है. उसके उपर इजरायल और अमेरिका को संवेदनशील सैन्य जानकारी देने के आरोप है. पदरान पर आरोप था कि उसने इस्फहान प्रांत के सैन्य ठिकानों की गोपनीय जानकारी विदेशी खुफिया एजेंसियों को दी.

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