मिठाई लेने के लिए उतरा शख्स, स्टार्ट कार लेकर भाग गया बदमाश!
हापुड़ में बच्चों के लिए मिठाई लेने उतरे एक शख्स की स्टार्ट कार कथित तौर पर एक युवक लेकर फरार हो गया. कार में उसका वर्कर भी बैठा था, जिसे आरोपी हाजी नौशाद की फैक्ट्री के पास उतारकर भाग गया. कार लूट की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया और मौके पर पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगालनी शुरू कर दी गई.
स्वतंत्र भारद्वाज बुलंदशहर से गिरफ्तार, आज पटियाला हाउस कोर्ट में होगी पेशी
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तमिलनाडु के स्कूल में युवक ने सांभर में मिलाया गोबर पाउडर
तमिलनाडु के ईरोड में सरकारी स्कूल के मिड-डे मील के सांभर में गोबर पाउडर मिलाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने अरुमुगम को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि पत्नी को स्कूल की नौकरी से हटाए जाने का बदला लेने के लिए उसने एक छात्र पर दबाव डालकर ऐसा करवाया।
बेकरी के लॉकर से गायब हुए 24 लाख रुपए, राज खुला तो हर कोई रह गया हैरान
हैदराबाद की एक बेकरी के ऑफिस में रखे 24.49 लाख रुपए चोरी हुए तो पुलिस ने जांच शुरू की. CCTV और तकनीकी जांच से शक के बाद पुलिस ने पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया गया. घर से नकदी बरामद होने पर आरोपी ने चोरी की बात कबूली.
CBI को बिहार में जांच के लिए लेनी होगी परमिशन, एक छूट; क्या है ‘जनरल कंसेंट’?
बिहार सरकार ने CBI जांच को लेकर नया नियम लागू किया है। अब राज्य सरकार के अधिकारियों-कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच से पहले CBI को बिहार सरकार की पूर्व अनुमति लेनी होगी। जानें नोटिफिकेशन में और क्या प्रावधान हैं।
बादशाह संग तलाक के बाद दर्द में एक्ट्रेस, रचाएगी दूसरी शादी?
बादशाह संग ईशा की भले ही शादी टूट गई है. लेकिन उन्होंने कहा कि प्यार को लेकर उनका भरोसा नहीं उठा है.
‘कब्र से शव तक निकाल दिया’ पश्चिम बंगाल में ईसाइयों की प्रार्थना सभाओं पर हमलों से क्यों बढ़ा डर?
ताजा मामला हावड़ा के उलुबेरिया का है, जहां एक घर में चल रही प्रार्थना सभा पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया। इसके अलावा पूर्व बर्धमान में अंतिम संस्कार रोकने और दक्षिण 24 परगना के सुभाषग्राम में निर्माणाधीन चर्च में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण: इमरान-इकरा समेत दूसरे नेताओं ने क्या कहा
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अवैध घोषित मस्जिद को प्रशासन द्वारा बुलडोजर से ध्वस्त करने के बाद राज्य में बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है. सपा सांसद इकरा हसन, विधायक आशु मलिक और इमरान मसूद समेत कई नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र और संविधान पर हमला बताते हुए कोर्ट जाने का ऐलान किया है.
इकरा हसन और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक का वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक तीखी बहस देखने को मिल रही है. इस वीडियो में बातचीत के दौरान एक व्यक्ति दूसरे से थोड़ा रुकने और कुछ प्रेजेंट करने के लिए कह रहा है. हालांकि, दूसरी तरफ से तुरंत जवाब आता है कि आदेश इसमें कभी नहीं होता और हर बार यही बात सामने आती है. इस नोकझोंक में बात क्या है, इस पर स्पष्टता मांगी जा रही है.
नेपाल में पानी का घट रहा स्तर, सामने आ रहे तबाही के खौफनाक मंजर
नेपाल में कुदरत ने ऐसी तबाही मचाई है कि मौत का आंकड़ा 1222 के पार पहुंच गया है और करीब 4200 लोग अब भी लापता हैं. हिमालयी ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने घरों, सड़कों और पुलों को मलबे में बदल दिया. सबसे बड़ी चिंता उन करीब 100 हाइड्रोपावर कर्मचारियों को लेकर है, जो मलबे से भरी सुरंगों में फंसे बताए जा रहे हैं.
SP सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट में लिया गया
समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है. सहारनपुर जाने की कोशिश में थीं इकरा हसन. कलेक्टरेट परिसर में मस्जिद तोड़े जाने के को लेकर सहारनपुर जा रहीं थी इकरा हसन. यूपी कैराना से समाजवादी पा्टी सांसद हैं इकरा हसन सांसद है.
Coal Crisis: देश में गहराया कोयला संकट, सिर्फ 9 दिनों का स्टॉक बचा, 50 संयंत्रों में स्थिति खराब
कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी संवेदनशील संयंत्रों की एक अंतर-मंत्रालयी टीम द्वारा रोजाना निगरानी की जा रही है और उन्हें लगातार ईंधन भेजा जा रहा है।
प्रधानमंत्री की शिक्षकों से उत्साहपूर्ण बातचीत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा हैकि शिक्षक दिवस हमारे समाज में शिक्षकों के अहम योगदान की सराहना करने
सपा सांसद इकरा हसन को किया गया हाउस अरेस्ट
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 5 सितंबर की सुबह डीएम परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने इसे सरकारी जमीन पर बना पाया था और मस्जिद कमेटी की पहली अपील भी खारिज हो चुकी थी।
ईरान के ऑयल टैंकर पर अमेरिकी सेना का मिसाइल अटैक! खार्ग द्वीप के पास जोरदार धमाका
ईरान के खार्ग द्वीप के पास शनिवार को धमाकों की आवाजें सुनी गईं. स्थानीय सूत्रों के हवाले से ईरानी टैंकर को अमेरिकी मिसाइल से निशाना बनाए जाने की अपुष्ट रिपोर्ट है. हालांकि, धमाकों की वजह की पुष्टि नहीं हुई है और ईरानी अधिकारियों ने तत्काल कोई बयान नहीं दिया.
ईरान के खार्ग आइलैंड के पास जोरदार धमाके, हमले की रिपोर्ट से हड़कंप
ईरान के खार्ग आइलैंड के पास जोरदार धमाके, हमले की रिपोर्ट से हड़कंप
UP में सरकारी स्कूलों को लेकर सियासत तेज, SP का योगी सरकार पर हमला
यूपी में सरकारी स्कूलों को लेकर सियासत तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी ने शिक्षक दिवस के बहाने बीजेपी के घेरने का प्लान तैयार किया है. आज से 11 सितंबर तक समाजवादी पार्टी प्रदेश में पाठशाला अभियान चला रही है. बड़ी बात ये है कि स्कूलों के लेकर समाजवादी पार्टी का ये अभियान कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं से मुलाकात के बाद शुरू हुआ है, ऐसे में इसे लेकर बीजेपी का हमला और भी तेज हो गया है.
UP: बुजुर्ग पर भरभराकर गिरी मिट्टी की दीवार, हुई मौत
सुल्तानपुर के दोस्तपुर थाना क्षेत्र के खालिसपुर डिंगुर गांव में शुक्रवार रात मिट्टी की दीवार गिरने से 72 वर्षीय हरीश नारायण मिश्रा की मौत हो गई. खाना खाने के बाद वह कच्चे मकान में खाट पर आराम कर रहे थे, तभी अचानक दीवार उनके ऊपर गिर गई.
Assam Police का बड़ा एक्शन, फर्जी पुलिसकर्मी बनकर ठगी करने वाले 330 आरोपी गिरफ्तार
गुवाहाटी, पांच सितंबर असम के पुलिस महानिदेशक हरमीत सिंह ने कहा कि राज्य पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ शनिवार तड़के चलाए गए एक विशेष अभियान में लगभग 330 लोगों को गिरफ्तार किया है। सिंह ने कहा कि खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों से ठगी करने वाले आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी के खिलाफ यह कार्रवाई अभी जारी है और गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़ सकती है। सिंह ने कहा कि कुछ संदिग्धों का पता असम के बाहर भी चला है। इनमें हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में मौजूद लोग शामिल हैं। उन्हें भी जल्द पुलिस की गिरफ्त में लाया जाएगा। पुलिस महानिदेशक ने कहा, “शनिवार तड़के से चलाए जा रहे विशेष अभियान में विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी में शामिल होने के आरोप में करीब 330 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।”उन्होंने बताया कि गिरफ्तार लोगों पर पुलिस से जुड़े मामलों को निपटाने का झांसा देकर लोगों को फंसाने, खुद को पुलिस अधिकारी बताकर और फोन पर लोगों को धमकाकर उनसे पैसे ऐंठने जैसी धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप है। सिंह ने कहा, “पुलिस धोखाधड़ी के इस तरह के मामलों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों केवल एक ही नाम की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है और वह नाम है भारतीय टीम के महज 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी का। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली और बेखौफ अंदाज से दुनिया भर के गेंदबाजों के दिलों में खौफ पैदा करने वाले वैभव ने बहुत कम समय में वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसके लिए बड़े-बड़े खिलाड़ियों को सालों-साल मेहनत करनी पड़ती है। हाल ही में साउथ अफ्रीका के युवा और प्रतिभाशाली बल्लेबाज लुआन ड्रे प्रीटोरियस ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम किया है, जिसने पूरी क्रिकेट बिरादरी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रीटोरियस के इस कारनामे के बाद अब हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि क्या भारत के यह युवा किशोर खिलाड़ी आगामी सीरीज में इस रिकॉर्ड को ध्वस्त करने में कामयाब हो पाएंगे। क्रिकेट के जानकारों और आंकड़ों पर गौर करें तो वैभव के पास इस बड़े मुकाम को हासिल करने का सुनहरा मौका बेहद करीब आ चुका है, जिसे लेकर फैंस में भी जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।Lhuan-dre Pretorius World Record in T20I Cricketसाउथ अफ्रीका के उभरते हुए और आक्रामक बल्लेबाज लुआन ड्रे प्रीटोरियस ने कुछ दिन पहले ही नामीबिया के खिलाफ खेली गई एक रोमांचक टी20 ट्राई सीरीज के दौरान इतिहास के पन्नों में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया। इस मुकाबले में प्रीटोरियस ने मैदान के चारों तरफ चौकों और छक्कों की बरसात करते हुए महज 53 गेंदों में ही अपनी शतकीय पारी पूरी कर ली। यह उनके अंतरराष्ट्रीय टी20 करियर का पहला शतक था और इस शानदार पारी के साथ ही वह आईसीसी के फुल-मेंबर देशों के बीच टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र में शतक जड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए। प्रीटोरियस ने जब यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, तब उनकी उम्र 20 साल और 161 दिन थी। इस जादुई पारी के साथ उन्होंने अफगानिस्तान के धुरंधर बल्लेबाज हजरतुल्लाह जजई के सात साल पुराने उस रिकॉर्ड को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया, जो उन्होंने साल 2019 में 20 साल 337 दिन की उम्र में आयरलैंड के खिलाफ बनाया था। इस रिकॉर्ड के बनने के बाद से ही वैश्विक स्तर पर युवा खिलाड़ियों की फेहरिस्त में एक नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है, जिसमें अब भारतीय prodigy वैभव सूर्यवंशी का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है।Vaibhav Suryavanshi Chasing Historic Milestone in Upcoming Seriesभारतीय क्रिकेट टीम के नन्हे जांबाज वैभव सूर्यवंशी की उम्र फिलहाल महज 15 साल कुछ महीने ही है, जो कि साउथ अफ्रीका के रिकॉर्डधारी बल्लेबाज लुआन ड्रे प्रीटोरियस से उम्र के लिहाज से लगभग पांच साल छोटे हैं। कम उम्र में ही अपनी काबिलियत का लोहा मनवाने वाले वैभव के पास अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट इतिहास का सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाला बल्लेबाज बनने के लिए लंबा वक्त मौजूद है। आगामी 13 सितंबर से भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की बहुप्रतीक्षित टी20 इंटरनेशनल सीरीज का आगाज होने जा रहा है, जिसका पहला मैच नई दिल्ली में खेला जाएगा। इस आगामी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सीरीज को वैभव के लिए अपने करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। जिम्बाब्वे दौरे पर अपने बल्ले का जौहर दिखाते हुए वैभव ने शानदार प्रदर्शन किया था और उनका अब तक का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर टी20 फॉर्मेट में 81 रनों का रहा है, जिसे उन्होंने महज कुछ ही गेंदों पर हासिल कर लिया था। यदि वह अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी मुकाबलों में अपनी नेचुरल आक्रामक फॉर्म को बरकरार रखते हुए एक भी शतकीय पारी खेलने में सफल हो जाते हैं, तो वह प्रीटोरियस के इस ताजा विश्व रिकॉर्ड को बहुत पीछे छोड़ते हुए एक ऐसा नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे, जिसे तोड़ना आने वाली कई पीढ़ियों के लिए बेहद कठिन चुनौती साबित होगा।Exceptional Rise and Future Prospects of India Teen Sensationवैभव सूर्यवंशी का क्रिकेट सफर किसी परी कथा से कम नहीं रहा है, जहां उन्होंने घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल और फिर सीनियर नेशनल टीम तक का सफर बहुत ही कम समय में तय किया है। हाल ही में दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट में ईस्ट जोन की तरफ से खेलते हुए इस बाएं हाथ के युवा बल्लेबाज ने अपनी तकनीकी दक्षता और लाल गेंद के क्रिकेट में भी टिककर खेलने की अद्भुत क्षमता का शानदार परिचय दिया है। फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए क्रिकेट के साथ-साथ टी20 फॉर्मेट में उनकी निरंतरता ने विरोधी टीमों के रणनीतिकारों की नींद उड़ा रखी है। राजस्थान जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी के साथ अपने आईपीएल अभियान के दौरान भी उन्होंने दुनिया भर के दिग्गज गेंदबाजों की जमकर खबर ली थी और कई मैच जिताऊ पारियां खेली थीं। खेल प्रेमियों और क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह का आत्मविश्वास और टेंपरामेंट इस 15 साल के खिलाड़ी के भीतर नजर आता है, वह आधुनिक युग के सबसे खतरनाक और उपयोगी बल्लेबाजों में से एक बनने की पूरी क्षमता रखता है। अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज के लिए जब भारतीय स्क्वाड मैदान पर उतरेगी, तो करोड़ों देशवासियों की निगाहें इसी युवा स्टार पर टिकी होंगी कि क्या वह अपने बल्ले की धमक से एक बार फिर पूरी दुनिया को हैरान करते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज करा पाते हैं या नहीं।
महिला एशिया कप 2026: भारत और पाकिस्तान की महामुकाबले से पहले जानिए हेड-टू-हेड आंकड़े और पिच रिपोर्ट
क्रिकेट के गलियारों में एक बार फिर से रोमांच अपने चरम पर है क्योंकि महिला एशिया कप के सबसे बड़े और रोमांचक मुकाबले में आज भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने हैं। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होने वाले इस हाई-वोल्टेज मैच को लेकर दोनों देशों के फैंस में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही है और सेमीफाइनल का टिकट पहले ही पक्का कर चुकी है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तानी टीम भी इस मुकाबले में अपनी पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार है।महिला एशिया कप में भारत बनाम पाकिस्तान की ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विताभारत और पाकिस्तान का जब भी क्रिकेट के मैदान पर आमना-सामना होता है, तो रोमांच अपने तय मानकों को पार कर जाता है। महिला टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास पर नजर डालें तो दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 17 मुकाबले खेले गए हैं। इन आंकड़ों में भारतीय टीम का पलड़ा पूरी तरह से भारी रहा है। टीम इंडिया ने इन 17 में से 14 मैचों में शानदार जीत दर्ज की है, जबकि पाकिस्तान की टीम सिर्फ 3 बार ही बाजी riuscire (सफल) हो पाई है। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस पारंपरिक और हाई-प्रेशर मैच में भारतीय टीम मनोवैज्ञानिक रूप से काफी मजबूत स्थिति में मैदान पर उतरेगी।दोनों टीमों का मौजूदा प्रदर्शन और खिलाड़ियों का फॉर्मविमेंस एशिया कप के मौजूदा संस्करण में टीम इंडिया का प्रदर्शन बेहद आक्रामक और शानदार रहा है। भारतीय ओपनर बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते नजर आई हैं। खासकर स्मृति मंधाना ने पिछले मैचों में रिकॉर्डतोड़ शतकीय पारी खेलकर अपनी बेहतरीन फॉर्म का सबूत दिया है। गेंदबाजी की बात करें तो स्पिनर दीप्ति शर्मा लगातार विकेट चटकाकर टीम के लिए सबसे बड़ी मैच विनर साबित हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तानी टीम को अपने पिछले मुकाबलों में मिलीजुली सफलता मिली है और उन्हें इस महामुकाबले में टिके रहने के लिए अपनी बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण दोनों में सौ फीसदी से ज्यादा देना होगा।दुबई की पिच रिपोर्ट और मैच से जुड़ी मुख्य बातेंदुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की पिच हमेशा से ही स्पिन गेंदबाजों के अनुकूल मानी जाती रही है। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, पिच धीमी होती जाएगी और टर्न लेने वाली गेंदों को खेलना बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं होगा। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम बोर्ड पर एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा करके विरोधी टीम पर दबाव बनाना चाहेगी। इस मुकाबले का लाइव प्रसारण भारतीय समयानुसार शाम 8:00 बजे से सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और सोनीलिव ऐप पर किया जाएगा, जिससे दुनिया भर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को इस ऐतिहासिक जंग का लुत्फ उठाने का पूरा मौका मिलेगा।
WhatsApp वालों के लिए गुड न्यूज, FASTag रिचार्ज से बिल पेमेंट तक होगी
WhatsApp Se Recharge Kaise Kare : WhatsApp ने बिल पेमेंट की सर्विस लॉन्च कर दी है, जिसके बाद यूजर्स मैसेजिंग ऐप की मदद से बिजली बिल, पानी बिल, और पाइप्ड लाइन से आने वाले गैस की पेमेंट कर सकते हैं. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
घर में लगाएं 5 पौधे, धन-समृद्धि के साथ बढ़ेगी पॉजिटिविटी!
Vastu Tips: वास्तु के अनुसार घर में कुछ पौधों को सुख-समृद्धि और धन लाभ से जोड़कर देखा जाता है. जानें मनी प्लांट, जेड प्लांट, तुलसी समेत कौन-से 5 पौधे घर में लगाना शुभ माना जाता है, इन्हें कहां रखें.
शिक्षकों का सम्मान करने का दिन यानी शिक्षक दिवस हर साल हमारे समाज में एक खास उम्मीद और प्रेरणा लेकर आता है, लेकिन जब बात एक ऐसे शख्स की हो जो हाथों में कानून की किताब और राइफल थामने के साथ-साथ झुग्गी-झोपड़ियों और गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए किताबें बांटता रहा हो, तो कहानी अपने आप में अद्भुत हो जाती है। बात हो रही है बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और जाने-माने शिक्षाविद् अभयानंद की, जिनकी पहचान सिर्फ एक कड़क आईपीएस अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि उन अनगिनत इंजिनियरों और डॉक्टरों के गॉडफादर के रूप में भी दर्ज है जिन्होंने कभी अभावों में अपनी जिंदगी बिताई थी। एक वर्दीधारी अधिकारी के तौर पर उन्होंने जिस तरह शिक्षा का संचार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक किया, उसने यह साबित कर दिया कि ज्ञान वह रोशनी है जो हर अंधेरे कोने को रोशन कर सकती है।भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक उच्च पद पर आसीन अधिकारी के लिए अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर गणित और भौतिकी के जटिल समीकरणों को पढ़ाना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, लेकिन अभयानंद ने इस असंभव लगने वाले काम को अपनी जिंदगी का मुख्य मकसद बना लिया था। जब वे दिनभर अपराधियों की धरपकड़ और कानून-व्यवस्था की समीक्षा में व्यस्त रहते थे, तब उनकी शामें उन होनहार और गरीब बच्चों के नाम होती थीं जिनके पास महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भरने के लिए एक फूटी कौड़ी भी नहीं होती थी। फिजिक्स (भौतिकी) के उनके पढ़ाने के अनूठे अंदाज और कॉन्सेप्ट्स को क्लियर करने की उनकी क्षमता ने छात्रों के मन से विज्ञान का डर हमेशा के लिए निकाल दिया। उन्होंने साबित किया कि प्रतिभा किसी की बपौती नहीं होती, उसे बस सही मार्गदर्शन और एक अदद मौके की जरूरत होती है जो उन्होंने अपनी कक्षाओं के माध्यम से हजारों बच्चों को दिया।किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसके परिवार का जो प्रभाव होता है, वही उसके भविष्य की नींव तय करता है और अभयानंद के मामले में भी यह बात पूरी तरह सटीक बैठती है। उनका शुरुआती परिवेश बौद्धिक और वैचारिक रूप से बेहद समृद्ध रहा, जहां शिक्षा को ही सबसे बड़ा धन माना जाता था। उनके घर का माहौल हमेशा से ऐसा था जहां किताबों के बीच चर्चाएं होना आम बात थीं और उनके पिता से मिले अनुशासन व समाज सेवा के संस्कारों ने उनके भीतर बचपन से ही एक गहरी सामाजिक जिम्मेदारी का भाव भर दिया था। परिवार से मिले इन्हीं शुरुआती पाठों ने उन्हें यह सिखाया कि प्रशासनिक पद पर रहकर जनता की सेवा करना अपनी जगह एक कर्तव्य है, लेकिन समाज के बौद्धिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए ज्ञान का दान सबसे बड़ा पुण्य है। यही कारण था कि उन्होंने अपनी पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए शिक्षा के प्रसार को अपना अनौपचारिक मिशन बना लिया।बिहार की धरती से उपजी वह क्रांतिकारी शैक्षिक पहल जिसे आज पूरी दुनिया 'सुपर 30' के नाम से जानती है, उसके शुरुआती संस्थापकों में अभयानंद का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। गणितज्ञ आनंद कुमार के साथ मिलकर उन्होंने समाज के सबसे गरीब तबके के 30 ऐसे मेधावी बच्चों को चुनना शुरू किया जो आईआईटी (IIT) जैसी दुनिया की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने का सपना तो देखते थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण कदम पीछे खींच लेते थे। अभयानंद ने अपने आवास और सीमित संसाधनों के जरिए इन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और अपनी अनूठी रणनीतिक सोच से यह साबित कर दिया कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो संसाधनों की कमी कभी सफलता के आड़े नहीं आ सकती। उनके पहले ही प्रयास में जब इन बच्चों ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की, तो देश-दुनिया का ध्यान इस अनूठे प्रयोग की ओर आकर्षित हुआ और शिक्षा जगत में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ।वक्त के साथ भले ही शुरुआती संस्थागत साझेदारियों में कुछ वैचारिक अंतर आए और रास्ते अलग हुए, लेकिन अभयानंद के भीतर सुलग रही शिक्षा की वह लौ और अधिक तेज हो गई। उन्होंने अपनी राह खुद चुनी और ग्रामीण क्षेत्रों के उन इलाकों का रुख किया जहां शिक्षा की पहुंच अब भी एक सपना बनी हुई थी। पटना के पास बाढ़ (Barh) अनुमंडल के एक छोटे से ग्रामीण इलाके मसौढ़ी और अन्य सुदूर गांवों में उन्होंने 'आनंद शिक्षा निकेतन' जैसी पहलों की शुरुआत की, जहां उन्होंने सीधे तौर पर समाज के सबसे पिछड़े और मुसहर जैसी जातियों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि केवल शहरी और संभ्रांत वर्ग के बच्चे ही नहीं, बल्कि खेतों में काम करने वाले और ईंट-भट्ठों पर मजदूरी करने वाले परिवारों के बच्चे भी कलम पकड़ना सीखें और अपने भविष्य की पटकथा खुद लिखें।पुलिस विभाग के सर्वोच्च पद से सेवानिवृत्त होने के बाद जब अमूमन लोग अपने परिवार और विश्राम की जिंदगी चुनते हैं, तब अभयानंद ने अपने इस शैक्षिक आंदोलन को और अधिक विस्तार दे दिया। आज भी वे अपनी कक्षाओं में पूरी तल्लीनता से युवाओं को पढ़ाते नजर आते हैं और उनका यह समर्पण इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। उनके पढ़ाए हुए छात्र आज देश और दुनिया के नामी-गिरामी तकनीकी संस्थानों, वैज्ञानिक शोध केंद्रों और प्रशासनिक पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं, जो उनके द्वारा बोए गए बीज का ही वटवृक्ष रूप है। शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर उनकी यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल पदों की नहीं, बल्कि सच्ची नीयत, दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ भाव से ज्ञान बांटने की जरूरत होती है।
बिहार के 12 साल की वैष्णवी ने जन्मदिन पर जीता सबका दिल
बिहार के सहरसा की 12 वर्षीय वैष्णवी आनंद ने जन्मदिन पर अपनी छह महीने की बचत खुद पर खर्च करने के बजाय नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए देने का फैसला किया। 4 सितंबर को जन्मदिन और जन्माष्टमी के दिन उसने यह नेक पहल की।
पटना में बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे पप्पू यादव, लोगों को बांटे 500-500 रुपये
पटना के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे पप्पू यादव ने परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने मौके पर राहत व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए लोगों की मदद की.
'मस्जिद पहले बनी, बाद में कलेक्ट्रेट आया', Saharanpur बुलडोजर कार्रवाई पर Owaisi का तीखा हमला
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 5 सितंबर को सहारनपुर कलेक्ट्रेट में एक मस्जिद को गिराए जाने की आलोचना की। उन्होंने 1911 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि यह जगह लंबे समय से पूजा-स्थल रही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आपका मन किया, आप हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते। ओवैसी ने मस्जिद गिराए जाने के बाद मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी की सुरक्षा पर सवाल उठाए; यह कार्रवाई सुबह लगभग 5 बजे शुरू हुई थी। X पर एक पोस्ट में उन्होंने पूछा कि क्या धर्म की आज़ादी की संवैधानिक गारंटी अब मुसलमानों पर लागू नहीं होती? ऐसा क्यों है कि कमज़ोर वजहों से हमारे पूजा-स्थलों पर लगातार बुलडोज़र चला दिया जाता है? इसे भी पढ़ें: Kharge विवाद में Zero FIR दर्ज, BJP ने Congress पर ओछी राजनीति का लगाया आरोप उन्होंने कहा कि मस्जिद कमेटी ने मस्जिद के अस्तित्व को साबित करने के लिए 1911 के दस्तावेज़ पेश किए हैं और बताया कि वहाँ एक सदी से भी ज़्यादा समय से लगातार नमाज़ पढ़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह 'इस्तेमाल के आधार पर वक्फ़' (waqf by user) की सही परिभाषा है, जिसे कानून के तहत वक्फ़ के तौर पर सुरक्षा मिली हुई है। ओवैसी ने लिमिटेशन एक्ट और अचल संपत्ति पर कब्ज़े से जुड़े मुद्दों का ज़िक्र करते हुए संपत्ति पर सरकार के दावे को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि लिमिटेशन एक्ट आम तौर पर सरकार को यह छूट नहीं देता कि वह किसी भी दिन अचानक जागे और अचल संपत्ति पर कब्ज़े का दावा कर दे। उन्होंने आगे तर्क दिया कि लंबे समय से चले आ रहे कब्ज़े को कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए: वहाँ एक सदी से भी ज़्यादा समय से खुला, लगातार और सार्वजनिक कब्ज़ा रहा है। सरकार यह नहीं कह सकती कि यह कब्ज़ा कल ही शुरू हुआ है, इसलिए अगर हम सरकार के तर्कों को मान भी लें, तब भी 'एडवर्स पज़ेशन' (adverse possession) का सिद्धांत लागू होगा। इसे भी पढ़ें: सोनिया गांधी की किताब Belonging: A Journey of Love पर विवाद खत्म! पेंगुइन के इनकार के बाद अब HarperCollins India छापेगा संस्मरण उन्होंने कहा कि मस्जिद कलेक्टर ऑफिस से पहले बनी थी, पहले मस्जिद बनी, बाद में कलेक्टर ऑफिस। ओवैसी ने आगे कहा कि कुछ लोगों को शायद मस्जिद को देखना ही बुरा लगता है। यह उनकी समस्या है, हमारी नहीं। अगर चाहें तो नज़रें फेर लें। सिर्फ़ इसलिए कि आपको खुजली हो रही है, आप हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते। मेरी धार्मिक आज़ादी आपकी दया पर निर्भर नहीं है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
बिहार में मूसलाधार बारिश से उफनाई गंगा, पटना के गांधी घाट पर जलस्तर ने पार किया उच्चतम बाढ़ स्तर
बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। गंगा नदी का जलस्तर लगातार तेजी से ऊपर चढ़ रहा है और इसने पटना के प्रमुख गांधी घाट पर 'उच्चतम बाढ़ स्तर' (Highest Flood Level) के पुराने रिकॉर्ड को पार कर लिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि नदी के किनारे बसे निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में पानी तेजी से फैलने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों की सांसे अटक गई हैं। प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और लगातार स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है, लेकिन कुदरती आपदा के आगे जनजीवन अस्त-व्यस्त होता दिखाई दे रहा है।गांधी घाट पर इस वक्त जो नजारा देखने को मिल रहा है, वह किसी भी आम इंसान को डराने के लिए काफी है। मूसलाधार बारिश और ऊपर के जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार आ रहे पानी के सैलाब ने गंगा के तेवर को बेहद आक्रामक बना दिया है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के अनुसार, पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को बहुत पीछे छोड़ते हुए अपने उच्चतम ऐतिहासिक स्तर के करीब पहुंच चुका है और कई बिंदुओं पर इसे पार भी कर गया है। घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह डूब चुकी हैं और पानी अब सड़कों और बस्तियों की ओर रुख कर रहा है। नाविकों और स्थानीय दुकानदारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दे दिए गए हैं, क्योंकि गंगा का यह प्रचंड प्रवाह किसी भी समय विकराल रूप ले सकता है।गांधी घाट के पास के इलाकों के साथ-साथ पटना के कलेक्ट्रेट घाट, महेंद्रू घाट, दीघा और बांकीपुर क्षेत्र के निचले हिस्सों में पानी का रिसाव शुरू हो चुका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। जिन बस्तियों में पानी घुसने का सबसे ज्यादा खतरा है, वहां के लोगों को सुरक्षित ठिकानों और राहत शिविरों में जाने की अपील की जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ेगा, इसका अनुमान उन्हें नहीं था। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही वृद्धि ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। किसान और पशुपालक सबसे ज्यादा परेशान हैं क्योंकि उनके सामने अपने मवेशियों और चारे को बचाने की बड़ी चुनौती आन खड़ी हुई है।भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो पटना का भूगोल ऐसा है कि गंगा के जलस्तर में हल्की सी भी वृद्धि शहर के बड़े हिस्से को प्रभावित करती है। वर्तमान स्थिति में पटना जिले के दियारा क्षेत्र, मनेर, दानापुर, दीघा, पटना सिटी के कंगन घाट और खाजेकलां जैसे इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में चारों तरफ पानी ही पानी नजर आने लगा है। संपर्क मार्ग कट चुके हैं जिसके कारण आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने नाव चालकों को हिदायत दी है कि वे ओवरलोडिंग न करें, क्योंकि तेज बहाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है ताकि आपात स्थिति में तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सके।बिहार सरकार और पटना जिला प्रशासन इस संभावित आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। मुख्यमंत्री स्तर से भी लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों की समीक्षा की जा रही है। पटना के जिलाधिकारी खुद मैदानी स्तर पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। राहत शिविरों में बिजली, पानी, दवा और भोजन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि विस्थापित लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मेडिकल टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि जलजनित बीमारियों से समय रहते निपटा जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने विशेष निर्देश जारी किए हैं कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की गोलियों और ओआरएस के पैकेट का वितरण बड़े पैमाने पर किया जाए।मौसम विज्ञान केंद्र और जल संसाधन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ और दिनों तक स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रह सकती है। नेपाल और उत्तर बिहार की अन्य नदियों से लगातार आ रहे पानी का दबाव अभी गंगा पर बना रहेगा। ऐसे में पटना वासियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अनावश्यक रूप से नदी के घाटों की तरफ जाने से बचने की अपील की जा रही है। सोशल मीडिया और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से लगातार अपडेट साझा किए जा रहे हैं ताकि जनता तक सही समय पर सटीक जानकारी पहुंच सके। इस आपदा की घड़ी में नागरिकों का सहयोग और प्रशासन की मुस्तैदी ही इस संकट से पार पाने का एकमात्र जरिया है।
(फाइल फोटो के साथ जारी)नयी दिल्ली, पांच सितंबर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की ऐसी पीढ़ियां तैयार करने का शनिवार को आह्वान किया जिनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो और जो ‘‘राष्ट्र सर्वोपरि’’ की भावना से आगे बढ़ें। मुर्मू ने शिक्षक दिवस के अवसर पर लिखे एक लेख में कहा कि विद्यार्थियों को अच्छा व्यक्ति बनाना शिक्षक का पावन कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता के पथ पर चलते हुए समृद्धि और यश प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ही शिक्षक की सफलता के जीवंत प्रतिमान होते हैं। उन्होंने कहा कि देश सामाजिक समावेश के साथ विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘‘मैं चाहूंगी कि विकास यात्रा के इस क्रम में हमारे शिक्षकगण ऐसी पीढ़ियों का निर्माण करें जो हमारी संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझें, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ मानवता के हित में कार्य करें, अंत्योदय के आदर्शों को आत्मसात करें, पर्यावरण और सभी जीव-जंतुओं के संरक्षण में सक्रिय रहें, व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों में उत्कर्ष प्राप्त करें तथा ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से आगे बढ़ें।’’‘शिक्षक गढ़ते कल का भारत’ शीर्षक वाले लेख में राष्ट्रपति ने कहा कि माता-पिता और अभिभावक बड़े विश्वास के साथ अपने बच्चों को शिक्षकों के पास भेजते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वे यह मानकर चलते हैं कि शिक्षक अपनेपन की भावना से बच्चों की सुरक्षा और प्रगति पर ध्यान देंगे। इस पवित्र आस्था की रक्षा करना प्रत्येक शिक्षक का धर्म है।’’राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक की भावना, आचरण और व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे बच्चों में भय और आशंका पैदा न हो, उनका मनोबल न टूटे तथा उनमें हीन भावना विकसित न हो। उन्होंने कहा कि अच्छे शिक्षक यह सुनिश्चित करते हैं कि विद्यार्थी अपने सर्वोत्तम स्वरूप को प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहित करना, उनमें जिज्ञासा उत्पन्न करना, प्रश्न करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना, उनकी तर्क और निर्णय क्षमता को विकसित करना तथा उनके स्वतंत्र व्यक्तित्व के निर्माण में मदद करना शिक्षण के सबसे उपयोगी और प्रेरक आयामों में शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ऐसी प्रेरक शिक्षा से ही सफल उद्यमियों, प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों, सृजनशील कलाकारों और उभरती चुनौतियों के नवीन समाधान प्रस्तुत करने वाले नागरिकों की पीढ़ियां तैयार होंगी।’’राष्ट्रपति मुर्मू अपने शिक्षकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए ने कहा कि स्नेही और समर्पित शिक्षक विद्यार्थियों में असीम क्षमता और प्रेरणा का संचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रोत्साहन से विद्यार्थियों में जीवन की कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने का साहस और बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल करने का आत्मविश्वास पैदा होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम ही नहीं पढ़ाते, बल्कि अपने आचरण और उदाहरण से विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मेरा सभी देशवासियों से अनुरोध है कि वे निष्ठावान और समर्पित शिक्षकों के प्रति सदैव सम्मान की भावना रखें। मेरी कामना है कि हमारे समर्पित शिक्षकों के योगदान से भारत पढ़े और बहुत आगे बढ़े।
दही-हंडी खत्म होते ही हादसे में महिला की मौत, परिवार ने केस करने से किया इनकार
पुणे के ओल्ड सांगवी इलाके में दही-हंडी कार्यक्रम के बाद लोहे का अस्थायी ढांचा हटाते समय हादसा हो गया. जहां शुक्रवार देर रात हुए हादसे में 45 वर्षीय सलमा सलाउद्दीन पठान के सिर पर लोहे के ढांचे का भारी हिस्सा गिर गया और उनकी मौत हो गई.
गांजे ने रोक दिया LIVE मैच, स्टार खिलाड़ी हुईं तेज बदबू से परेशान
US Open में आर्यना सबालेंका और कामिला राखिमोवा के मुकाबले के दौरान अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई. एक दर्शक के गांजा पीने की शिकायत के बाद सबालेंका ने अंपायर से खेल रुकवाने को कहा. तेज बदबू से परेशान वर्ल्ड नंबर-1 की शिकायत पर स्टेडियम स्टाफ को स्टैंड्स में भेजा गया. हालांकि, सबालेंका ने मैच जीतकर चौथे दौर में जगह बना ली.
बिहार के सीवान में हुए भीषण AK-47 गोलीकांड में रायबरेली का कनेक्शन कैसे जुड़ा और क्या है पूरा मामला
बिहार के सीवान जिले में हाल ही में परीक्षा व्यवस्था और धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिसिया बर्बरता और गोलीबारी ने पूरे देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस भयंकर गोलीकांड और लाठीचार्ज में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनमें से एक घायल युवक का सीधा कनेक्शन उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से निकलता है। सीवान में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर युवा सड़कों पर उतरे थे, जहां प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए एके-47 और पिस्तौल से गोलियां चलाईं। इस फायरिंग में घायल होने वाले युवाओं में एक छात्र आकाश कुमार है, जो मूल रूप से रायबरेली का रहने वाला है। चूंकि राहुल गांधी खुद रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं, इसलिए इस घटना का सीधा तार उनके संसदीय क्षेत्र से जुड़ने के कारण यह मामला राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति के केंद्र में आ गया है। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की इस तानाशाही के खिलाफ छात्रों और उनके परिजनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।घायलों को न्याय दिलाने के लिए दिल्ली क्यों जाना पड़ा और राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान क्या खुलासे हुए?सीवान की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब स्थानीय अस्पतालों में पीड़ितों को उचित और बेहतर इलाज तथा न्याय नहीं मिला, तो वे अपनी फरियाद लेकर सीधे नई दिल्ली पहुंचे। सीवान के मोहम्मद आरिफ, बुलेट कुमार गौड़ और रायबरेली के रहने वाले आकाश कुमार ने दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की और अपनी आपबीती सुनाई। पीड़ितों ने राहुल गांधी को बताया कि किस तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे एक युवा का पैर एके-47 की गोली लगने से बुरी तरह उड़ गया और उसकी सेना में भर्ती होने का सपना हमेशा के लिए टूट गया। इन युवाओं का दिल्ली जाकर देश के बड़े नेता से मिलना और अपनी पीड़ा साझा करना इस बात को साबित करता है कि राज्य स्तर पर पीड़ितों की आवाज को किस तरह दबाने का प्रयास किया जा रहा था, जिसके चलते उन्हें न्याय की आस में दिल्ली का दरवाजा खटखटाना पड़ा।राहुल गांधी के लिए यह सीवान गोलीकांड एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा क्यों बनता जा रहा है?इस पूरे घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आक्रामक रुख अपनाते हुए बिहार सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर तीखा हमला बोला है। चूंकि इस गोलीकांड में घायल होने वाला एक युवक उनके अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली से ताल्लुक रखता है, इसलिए यह मामला उनके लिए और अधिक संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार मांगने वाले युवाओं पर एके-47 से गोलियां चलाना और छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े अधिकारियों को बचाना सरकार की घोर नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि आगामी संसद सत्र और लोकसभा की बैठकों में इस गंभीर मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा ताकि बिहार के इन युवाओं को न्याय मिल सके। विपक्षी दलों के लिए यह मुद्दा रोजगार, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और पुलिस स्टेट बनती जा रही व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ा हथियार साबित हो रहा है।आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल मामले का उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?बिहार के एक स्थानीय छात्र आंदोलन से शुरू हुआ यह विवाद अब रायबरेली कनेक्शन और राष्ट्रीय राजधानी तक पहुँचने के बाद एक बड़े अंतर-राज्यीय राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता जा रहा है। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार अपने बच्चों के भविष्य और आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी नेता इसे सत्ताधारी दल की तानाशाही के रूप में पेश कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में जल्द ही सभी दोषियों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ेगा। राहुल गांधी द्वारा इस मामले में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेने और पीड़ितों के साथ खड़े होने से यह साफ हो गया है कि विपक्षी गठबंधन इस मुद्दे को आसानी से भुने बिना छोड़ने वाला नहीं है, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों पर नैतिक दबाव काफी बढ़ गया है।
Saharanpur Bulldozer Action: Mayawati भड़कीं, बोलीं- मस्जिदें गिराना ठीक नहीं
सहारनपुर के ज़िला मजिस्ट्रेट के ऑफ़िस कॉम्प्लेक्स में बनी एक अवैध मस्जिद को शनिवार को गिरा दिया गया। अदालत ने इसे हटाने के पहले के आदेश को सही ठहराया था। राजनीतिक नेताओं के विरोध के बीच कलेक्ट्रेट में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। शुक्रवार को ज़िला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा, जिसके बाद सुबह-सुबह बुलडोज़र से उस ढांचे को हटाने का काम शुरू हुआ। इसे भी पढ़ें: Kharge विवाद में Zero FIR दर्ज, BJP ने Congress पर ओछी राजनीति का लगाया आरोप BSP प्रमुख मायावती ने भी पूरे राज्य में कथित तौर पर अवैध मस्जिदों को गिराने के उत्तर प्रदेश सरकार के कदम की आलोचना की और इसे रोकने की अपील की। X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि सरकार बहुत जल्दबाजी में मस्जिदों को अवैध घोषित कर उन्हें गिरा रही है, और ऐसे विवादों को सुलझाने के लिए वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की बात कही। मायावती ने कहा कि एक संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों के मानने वालों का सम्मान करे और उनके धार्मिक स्थलों की रक्षा करे। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों को इस्लामी धार्मिक प्रथाओं में मस्जिदों के महत्व पर विचार करना चाहिए। BSP प्रमुख ने अलग से आरोपियों के घरों को गिराए जाने पर चिंता जताई और कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना परिवारों को सामूहिक रूप से सजा नहीं दी जानी चाहिए या बेघर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कानून के जरिए कानून का शासन बनाए रखने की बात कही और सरकार व न्यायपालिका से इस मुद्दे पर ध्यान देने और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की। तोड़-फोड़ की कार्रवाई के दौरान SDM और सिटी मजिस्ट्रेट समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे। कलेक्टर ऑफिस के परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसमें प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) के जवान भी शामिल थे, और एहतियात के तौर पर कॉम्प्लेक्स के सभी गेट बंद कर दिए गए थे। इसे भी पढ़ें: सोनिया गांधी की किताब Belonging: A Journey of Love पर विवाद खत्म! पेंगुइन के इनकार के बाद अब HarperCollins India छापेगा संस्मरण सहारनपुर के DIG अभिषेक सिंह ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पाया था कि मस्जिद सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी और इस आदेश के खिलाफ की गई अपील को खारिज कर दिया गया था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 17 जुलाई को मस्जिद को अवैध घोषित कर दिया था और उसे गिराने का आदेश दिया था। साथ ही, सरकारी ज़मीन पर कथित अवैध कब्ज़े और उसके गलत इस्तेमाल के मामले में वहां मौजूद लोगों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये का मुआवज़ा भी लगाया था। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
अजमेर के एक प्रसिद्ध स्कूल परिसर में कैसे ताश के पत्तों की तरह ढह गई भारी-भरकम और लंबी दीवार
राजस्थान के ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी कहे जाने वाले अजमेर शहर से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक लापरवाही को बेनकाब करने वाली घटना सामने आई है, जिसने वाहन चालकों और स्थानीय नागरिकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। अजमेर के एक प्रतिष्ठित स्कूल की भारी-भरकम और पुरानी चारदीवारी अचानक से आधी रात को या तड़के ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर नीचे आ गिरी, जिसकी चपेट में वहां पार्क की गई कई महंगी और शानदार गाड़ियां आ गईं। जिस समय यह हादसा हुआ, उस दौरान आसपास कोई इंसान मौजूद नहीं था, वरना एक बहुत बड़ा जानी नुकसान भी हो सकता था, लेकिन गाड़ियों की जो दुर्गति हुई उसे देखकर हर किसी का कलेजा कांप उठा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दीवार काफी समय से जर्जर हालत में थी और इसके रख-रखाव को लेकर स्कूल प्रबंधन तथा स्थानीय प्रशासन को कई बार चेताया भी गया था, लेकिन किसी ने समय रहते इस पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा। जब सुबह के वक्त आसपास के लोगों ने इस भयंकर मलबे का ढेर और उसके नीचे दबी हुई गाड़ियों को देखा, तो उनके होश उड़ गए और तुरंत इसकी सूचना पुलिस तथा संबंधित अधिकारियों को दी गई।500 रुपये की भारी-भरकम पार्किंग फीस चुकाकर गाड़ी खड़ी करने वाले चालकों पर क्या बीती?इस हादसे का सबसे दर्दनाक और हैरान करने वाला पहलू यह था कि जिन लोगों की गाड़ियां इस मलबे के नीचे दबकर कबाड़ बन चुकी हैं, उन्होंने कोई मुफ्त में अपनी गाड़ियां वहां नहीं खड़ी की थीं। वाहन चालकों ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा और संरक्षा का भरोसा जताते हुए संबंधित पार्किंग प्रबंधकों को पूरे 500 रुपये की भारी-भरकम पार्किंग फीस (Parking Fee) चुकाई थी, यह सोचकर कि उनकी गाड़ियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। लेकिन सुबह जब वे अपनी गाड़ियां लेने पहुंचे, तो उन्हें पार्किंग की जगह केवल ईंटों, पत्थरों और मलबे का एक विशाल ढेर दिखाई दिया, जिसके नीचे उनकी गाड़ियां बुरी तरह पिचक चुकी थीं। अपनी गा गाड़ियों की इस हालत को देखकर वाहन मालिकों के सिर पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वे गुस्से से आगबबूला हो गए कि जब पैसे वसूलने के बाद भी गाड़ियों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है, तो ऐसी अवैध या लापरवाह पार्किंग चलाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।प्रशासनिक लापरवाही और स्कूल प्रबंधन की सुस्ती के खिलाफ स्थानीय लोगों और वाहन मालिकों का क्यों फूटा गुस्सा?घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने स्कूल प्रबंधन तथा पार्किंग ठेकेदारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर के बीचों-बीच इस तरह के जर्जर निर्माणों की समय पर जांच न होना और मानसून या बारिश के मौसम में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना नगर निगम और प्रशासन की बड़ी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है। लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा दिन के वक्त हुआ होता जब स्कूल के बच्चे या आम राहगीर इस रास्ते से गुजरते हैं, तो कई मासूमों की जान भी जा सकती थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करते हुए क्रेन की मदद से मलबे को हटवाने का काम शुरू किया, साथ ही यह आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करके दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।इस बड़े हादसे से शहर के अन्य स्कूलों और सार्वजनिक परिसरों के जर्जर निर्माणों को लेकर क्या सबक मिलता है?अजमेर की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे राज्य के प्रशासनिक अमले को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या शहर के अन्य पुराने स्कूलों, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक परिसरों की चारदीवारी भी इसी तरह खतरे के साए में जी रही हैं। बारिश के मौसम में नमी और सीलन के कारण पुरानी ईंटों की पकड़ कमजोर हो जाती है, और यदि समय रहते उनकी मरम्मत या प्लास्टर न कराया जाए, तो वे कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती हैं। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने शहर के सभी स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों के जर्जर भवनों का सर्वे कराने के निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। 500 रुपये की पार्किंग फीस के बदले गाड़ियों के मलबे में तब्दील हो जाने की यह घटना भले ही वाहन मालिकों के लिए एक आर्थिक और मानसिक झटका हो, लेकिन यह पूरे सिस्टम के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि जनसुरक्षा से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ अब और सहन नहीं किया जाना चाहिए।
बलोच लिबरेशन आर्मी का बड़ा हमला, मारे गए पाकिस्तानी फोर्स के 25 जवान
पाकिस्तान के बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ दो अलग-अलग हमलों को लेकर बलोच लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने बड़ा दावा किया है. संगठन का कहना है कि 3 सितंबर को हुए इन हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 25 जवान मारे गए.
ना बजट, ना मशीन... 21 साल के ‘बिट्टू तबाही’ ने बदल दी एक नदी की तस्वीर
मध्य प्रदेश के ब्यावरा में रहने वाेल 21 साल के छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी ने अकेले नदी साफ करने का बीड़ा उठाया. फावड़े से शुरू हुई इस मुहिम ने अजनार नदी की तस्वीर बदल के रख दी है.
भारतीय राजनीतिक गलियारों में चुनावी सरगर्मी जैसे-जैसे तेज होती जा रही है, वैसे-वैसे सभी राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए अपने तरकश से एक से बढ़कर एक तीर छोड़ रहे हैं। इसी क्रम में विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने अपना एक नया और बेहद महत्वाकांक्षी घोषणा पत्र (Manifesto) सार्वजनिक किया है, जिसमें समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े गरीब, मजदूर, सफाई कर्मचारी और आम शहरी नागरिकों को साधने के लिए कई बड़े वादे किए गए हैं। इस घोषणा पत्र की सबसे खास बात यह है कि इसमें बुनियादी नागरिक सुविधाओं जैसे कि हर घर से बिल्कुल मुफ्त कचरा उठाव (Free Garbage Collection) और शहरी बस्तियों में रहने वाले गरीबों को मात्र 500 रुपये की न्यूनतम और प्रतीकात्मक कीमत पर जमीन के पट्टे (Land Lease) देने की गारंटी दी गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस घोषणा पत्र को जारी करते हुए दावा किया है कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक भ्रष्टाचार को खत्म करेंगे और जनता के अधिकारों को पूरी पारदर्शिता के साथ उनके हाथों में सौंपेंगे, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एक नया बदलाव देखने को मिल सके।सफाईकर्मियों की रेगुलर भर्ती और उनके पक्के रोजगार को लेकर घोषणा पत्र में क्या ठोस प्रावधान रखे गए हैं?देश के शहरी स्थानीय निकायों और नगर निगमों में वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर शहर को साफ-सुथरा रखने वाले सफाई कर्मचारियों की स्थिति हमेशा से दयनीय और उपेक्षित रही है, जिन्हें ज्यादातर जगहों पर ठेका प्रथा (Contract System) के तहत बेहद कम मानदेय पर काम करना पड़ता है। कांग्रेस के इस नए घोषणा पत्र में सफाई कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सभी संविदा और ठेके पर काम करने वाले सफाईकर्मियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित (Regularize) करने और उनकी सीधी रेगुलर भर्ती करने का पुख्ता वादा किया गया है। पार्टी का यह तर्क है कि जो कर्मचारी शहर की गंदगी साफ करके हमारे जीवन को स्वच्छ बनाते हैं, उन्हें सामाजिक सुरक्षा, भविष्य निधि (PF), स्वास्थ्य बीमा और एक सम्मानजनक वेतन पाने का पूरा कानूनी अधिकार मिलना चाहिए। इस घोषणा के सामने आते ही राज्यभर के सफाई कर्मचारी संगठनों और श्रमिक यूनियनों में एक प्रकार की उम्मीद की किरण जग गई है, क्योंकि लंबे समय से वे अपने पक्के रोजगार और बेहतर कार्यदशाओं के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे।हर घर से मुफ्त कचरा उठाव और शहरी बुनियादी ढांचे को सुधारने की इस योजना के क्या होंगे जमीनी मायने?आज के आधुनिक दौर में शहरीकरण के बढ़ने के साथ-साथ कचरा प्रबंधन (Waste Management) नगर पालिकाओं और स्थानीय प्रशासनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए शहरवासियों से अक्सर भारी-भरकम टैक्स या मासिक शुल्क वसूला जाता है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में हर घर से मुफ्त कचरा उठाने का जो वादा किया गया है, उसका सीधा फायदा मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को मिलेगा जिनके मासिक बजट पर इन छोटे-छोटे शुल्कों का भी असर पड़ता है। इसके साथ ही, इस योजना के तहत आधुनिक कचरा पृथक्करण (Segregation) और रीसाइक्लिंग यूनिट्स स्थापित करने की बात कही गई है ताकि शहरों को पूरी तरह से स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके। जब जनता से जुड़े इन बुनियादी मुद्दों पर कोई राजनीतिक दल खुलकर बात करता है, तो आम मतदाता के मन में यह विश्वास पैदा होता है कि प्रशासन उनकी दैनिक परेशानियों के प्रति संवेदनशील है, जो चुनाव के मैदान में वोटों की फसल काटने के लिए एक बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।500 रुपये में जमीन के पट्टे देने के इस लोकलुभावन वादे पर राजनीतिक गलियारों और जनता की क्या प्रतिक्रिया है?झुग्गी-झोपड़ियों और अनधिकृत कॉलोनियों में दशकों से अपनी छत के लिए तरस रहे गरीबों को मात्र 500 रुपये में जमीन का मालिकाना हक देने का वादा कांग्रेस पार्टी का सबसे बड़ा और चर्चा का विषय बनने वाला चुनावी दांव साबित हो रहा है। पट्टे मिलने से न केवल गरीबों को बेघर होने का डर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा, बल्कि वे बैंक से लोन लेकर अपने कच्चे मकानों को पक्का भी करवा सकेंगे। हालांकि, विरोधी दलों ने इस घोषणा पत्र पर तंज कसते हुए इसेरी केवल चुनावी जुमला और अव्यवहारिक वादा करार दिया है, जिनका कहना है कि सरकार बनने के बाद ऐसे वादे कभी धरातल पर नहीं उतरते। इसके बावजूद, आम जनता और झुग्गीवासियों के बीच इस वादे ने एक गहरी उत्सुकता पैदा कर दी है, और यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आगामी चुनावों में जनता कांग्रेस के इन वादों पर कितना भरोसा जताती है और यह घोषणा पत्र राजनीतिक समीकरण को किस हद तक बदल पाता है।
बीजेपी संगठन में बढ़ती अंदरूनी कलह और बगावत को रोकने के लिए बीएल संतोष ने कौन-सा बड़ा मंत्र दिया
भारतीय राजनीति के गलियारों में चुनावी तैयारियों का दौर जैसे-जैसे परवान चढ़ता है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर होने वाली खींचतान और असंतोष भी खुलकर सामने आने लगता है। देश की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर इस प्रकार की आंतरिक गुटबाजी और बगावत के सुरों पर समय रहते लगाम लगाने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दो टूक संदेश दिया है। पार्टी की एक उच्च स्तरीय संगठनात्मक बैठक के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह बात कही कि 'कोई तेरा मेरा नहीं है, जिसे भी पार्टी हाईकमान ने चुनाव मैदान में टिकट दिया है, वह किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी पार्टी और हर कार्यकर्ता का उम्मीदवार है।' उनका यह मंत्र इस बात का प्रतीक है कि चुनाव के समय व्यक्तिगत पसंद और नापसंद को दरकिनार करके केवल और केवल पार्टी की जीत और कमल के निशान को सर्वोपरि रखना ही हर सच्चे कार्यकर्ता का सबसे बड़ा धर्म होना चाहिए। जब भी पार्टी में टिकट वितरण के बाद स्थानीय स्तर पर कुछ असंतुष्ट चेहरे विरोध का झंडा उठाते हैं, तो इस प्रकार के कड़े और स्पष्ट संगठनात्मक निर्देश ही संगठन की एकजुटता को बनाए रखने का सबसे बड़ा आधार बनते हैं।टिकट बंटवारे के बाद राजनीतिक दलों में बगावत और भीतरघात की समस्या क्यों एक गंभीर चुनौती बन जाती है?किसी भी बड़े राजनीतिक दल के लिए चुनाव के वक्त सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा टिकट वितरण के बाद शुरू होती है, क्योंकि सैकड़ों दावेदारों में से टिकट किसी एक को ही मिल पाता है और बाकी के समर्थकों में निराशा होना स्वाभाविक है। जब पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के घोषित उम्मीदवार के खिलाफ बागी तेवर अपना लेते हैं या भीतरघात (Sabotage) करना शुरू कर देते हैं, तो इससे मजबूत से मजबूत संगठन की नींव भी अंदर से हिल जाती है। बीएल संतोष ने इस हकीकत को भली-भांति समझते हुए पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को यह नसीहत दी कि यदि संगठन को किसी भी राज्य या चुनाव क्षेत्र में विजय हासिल करनी है, तो सबसे पहले व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और आपसी मनमुटाव को तिलांजलि देनी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का भी यह मानना है कि चुनाव हारने या जीतने से ज्यादा खतरनाक पार्टी के भीतर का वह असंतोष होता है जो छुपे तौर पर नुकसान पहुंचाता है। इस तरह की बगावत को कुचलने के लिए केवल डंडे या अनुशासन के डरे हुए रवैये से काम नहीं चलता, बल्कि कार्यकर्ताओं को यह समझाना पड़ता है कि पार्टी की सामूहिक जीत ही व्यक्तिगत राजनीतिक भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।संगठन को मजबूत करने और अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व किस प्रकार की रणनीतियों पर काम कर रहा है?भारतीय जनता पार्टी अपनी अनुशासित कार्यशैली और मजबूत बूथ प्रबंधन के लिए दुनिया भर में जानी जाती है, और इस अनुशासन को बनाए रखने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय संगठन महामंत्री जैसे पदों पर बैठे वरिष्ठ नेताओं के कंधों पर होती है। बीएल संतोष ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि पार्टी का कोई भी नेता या कार्यकर्ता संगठन से बड़ा नहीं हो सकता है, चाहे उसका कद कितना भी ऊंचा क्यों न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी को गिले-शिकवे भुलाकर एक टीम के रूप में मैदान में उतरना होगा, जहाँ हर कार्यकर्ता का लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ पार्टी के उम्मीदवार को जिताना होना चाहिए। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा समय-समय पर इस तरह की समीक्षा बैठकें आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि चुनाव के मैदान में उतरने से पहले ही पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की फूट या असंतोष के बीज को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके। जब पार्टी का कैडर एकजुट होकर पूरी ताकत के साथ काम करता है, तो विरोधी दलों के तमाम सियासी समीकरण अपने आप ध्वस्त होने लगते हैं।इस अचूक मंत्र का आगामी चुनावों और पार्टी के कार्यकर्ताओं पर कितना व्यापक असर देखने को मिल सकता है?बीएल संतोष द्वारा दिए गए इस 'सबका उम्मीदवार' वाले मंत्र ने बीजेपी के भीतर चल रही तमाम सुगबुगाहटों और अंदरूनी कलह पर एक प्रकार से विराम लगाने का काम किया है। जब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इतनी स्पष्टता और दृढ़ता के साथ अनुशासन का संदेश देता है, तो नीचे स्तर तक के कार्यकर्ताओं और टिकट के दावेदारों को यह संदेश साफ मिल जाता है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे न केवल चुनावी मैदान में भितरघात की संभावना कम होती है, बल्कि कार्यकर्ताओं का वह मनोबल भी ऊंचा उठता है जो टिकट कटने के बाद निराश हो गया था। राजनीति के इस महासमर में अनुशासन और एकजुटता ही वे दो सबसे बड़े अस्त्र हैं जो किसी भी दल को फर्श से अर्श तक पहुँचा सकते हैं, और बीएल संतोष की यह सीख आने वाले सभी चुनावों के लिए बीजेपी के सांगठनिक ढांचे की एक बहुत बड़ी ताकत साबित होने जा रही है।
एथलीट के शक से घोटाले का खुलासा, नौकरी के लिए बांटे गए फर्जी सर्टिफिकेट
पुणे सिटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सरकारी नौकरी में 5 प्रतिशत स्पोर्ट्स कोटा का फायदा दिलाने के लिए फर्जी खेल प्रमाणपत्र बनाने और बेचने वाले कथित रैकेट का खुलासा किया है. पुलिस के मुताबिक, इन प्रमाणपत्रों को 3 लाख से 5 लाख रुपये तक में बेचे जाने का शक है जिससे करीब 500 से 600 लोगों को फायदा मिला है.
बंगाल के बाद बिहार ने बढ़ाई बांग्लादेश की टेंशन, क्या करेंगे तारिक? मोदी सरकार के पाले में गेंद
गंगा जल संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार की आपत्ति ने बांग्लादेश की चिंता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री ने बिहार के हितों का ध्यान रखने का भरोसा दिया है। जानिए 1996 की संधि, बिहार की मांग और तारिक रहमान के सामने चुनौती क्या है।
PAN Card खोने का नो टेंशन! मोबाइल से 2 मिनट में डाउनलोड करें डिजिटल कॉपी
क्या आपका पैन कार्ड खो गया है या आप कहीं ले जाना भूल गए हैं? अब परेशान होने की जरूरत नहीं है. दरअसल, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की Protean यानी NSDL की वेबसाइट से आप बेहद कम शुल्क में कभी भी अपना डिजिटल E-PAN Card डाउनलोड कर सकते हैं. जानिए e-PAN डाउनलोड करने का पूरा ऑनलाइन प्रोसेस, जरूरी दस्तावेज और फीस की पूरी जानकारी.
आखिर एक अच्छी टीचर कौन होता है? इस सवाल का जवाब देते हुए दृष्टि IAS के फाउंडर विकास दिव्यकीर्ति ने कहा, एक अच्छा टीचर वो है जो फालतू का ज्ञान न दे और सिर्फ नोट्स बनवाए.
Mumbai में Dahi Handi का उत्साह, मानव पिरामिड बनाकर मटकियां फोड़ने उतरे Govinda
मुंबई, पांच सितंबर मुंबई और आसपास के शहरों में शनिवार को कई जगह दही हांडी का आयोजन किया गया और हजारों ‘गोविंदा’ ने मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकाई गई दही से भरी मटकियां फोड़ने की कोशिश की। इस दौरान मध्य मुंबई के लालबाग और दादर की संकरी गलियों से लेकर ठाणे के बड़े आयोजन स्थलों तक ढोल की थाप गूंजती रही। महीनों के अभ्यास के बाद युवक और युवतियों की ‘गोविंदा’ टोलियां शहर एवं उपनगरों के अलग-अलग हिस्सों में दही हांडी आयोजनों में भाग लेने और लाखों रुपये के इनाम जीतने पहुंचीं। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर शुक्रवार आधी रात के बाद महानगर की कई आवासीय सोसाइटी, व्यस्त चौराहों और खुले मैदानों में फूलों तथा गुब्बारों से सजाई गई सैकड़ों ‘हांडियां’ ऊंचाई पर लटकाई गईं। दही हांडी के तहत युवक और युवतियां कई स्तरों वाले मानव पिरामिड बनाकर जमीन से कई मीटर ऊपर लटकाई गई दही से भरी मटकी फोड़ते हैं। रंग-बिरंगी पोशाक पहने ‘गोविंदा’ टोलियां सुबह से ही खुले ट्रकों और टेंपो में सवार होकर शहर के प्रमुख आयोजन स्थलों की ओर निकल पड़ीं। नगर निकाय अधिकारियों ने हांडी फोड़ते समय घायल होने वाले ‘गोविंदाओं’ के उपचार के लिए अस्पतालों में 100 से अधिक बिस्तर और आपात चिकित्सा दल तैयार रखे हैं। परेल, लालबाग, वर्ली, दादर, भांडुप, मुलुंड, जोगेश्वरी और अंधेरी के अलावा पड़ोसी ठाणे तथा नवी मुंबई में स्पीकर पर लोकप्रिय हिंदी और मराठी गीत बजाए गए जिससे उत्सव का माहौल और जोशीला हो गया। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में नेताओं द्वारा आयोजित दही हांडी कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में आकर्षण के मुख्य केंद्र के रूप में उभरे हैं। पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। वहीं, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने हांडी फोड़ने के दौरान घायल होने वाले ‘गोविंदाओं’ के उपचार के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। महानगरपालिका ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि उसके 16 उपनगरीय अस्पतालों के अलावा सायन स्थित लोकमान्य तिलक महानगरपालिका सामान्य अस्पताल, परेल के केईएम अस्पताल और मुंबई सेंट्रल स्थित नायर अस्पताल में 100 से अधिक बिस्तर तैयार रखे गए हैं।
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण पर गरमाई सियासत, क्या बोले इकरा हसन और इमरान मसूद?
सहारनपुर/शामली। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने प्रशासन की कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए इसे संविधान और कानून के खिलाफ बताया है। सांसद ने कहा ...
कायरों के झुंड के खिलाफ रेस कर रहा था... ओलंपिक चैम्पियन का फूटा गुस्सा
ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मायर्स के लिए यह जीत उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई. 20 वर्षीय मायर्स नेजून में पेरिस डायमंड लीग के दौरानराष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था. अब डायमंड लीग फाइनल का खिताब उनके खाते में जुड़ गया है. मायर्स ने बताया कि उन्होंने रेस के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय सही मौके का इंतजार किया और आखिरी हिस्से में मिली जगह का फायदा उठाया.
अकाल मृत्यु के बाद क्यों जरूरी है 'नारायण बलि'? गरुण पुराण से जानें
Garud Puran: गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु दुर्घटना, असामान्य परिस्थितियों में या अकाल होती है तो उसका सामान्य रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार संभव नहीं हो पाता है. ऐसी स्थिति में दिवंगत आत्मा की शांति और सद्गति के लिए 'नारायण बलि' का विशेष कर्मकांड किया जाता है.
सिल्क स्मिता मौत से एक रात पहले वह क्या कहना चाहती थीं? यह एक ऐसा सवाल है, जिसके बारे में आज भी उनके फ्रेंड्स और फैंस जानना चाहते हैं.
'सिर्फ खुन्नस मिटाने के लिए मस्जिद पर बुलडोजर...' भड़के ओवैसी
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी अवैध घोषित मस्जिद को शनिवार तड़के प्रशासन ने चार बुलडोजर लगाकर ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई के बाद सपा सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किया गया और असदुद्दीन ओवैसी समेत कई राजनीतिक नेताओं ने प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है.
EAM S Jaishankar 26 सितंबर को UNGA को करेंगे संबोधित, दुनिया की निगाहें भारत पर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सालाना हाई-लेवल सेशन को संबोधित करेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सेशन 8 सितंबर को शुरू होगा। इसमें 22 से 28 सितंबर के बीच होने वाली आम बहस (जनरल डिबेट) के दौरान दुनिया भर के नेता 193 सदस्यों वाले इस संगठन को संबोधित करेंगे। शुक्रवार को जारी स्पीकर्स की बदली हुई अस्थायी लिस्ट के अनुसार, जयशंकर 26 सितंबर को दोपहर के सेशन में आम बहस को संबोधित करेंगे। उन्होंने पिछले साल भी संयुक्त राष्ट्र के मंच से दुनिया भर के नेताओं को संबोधित किया था। इसे भी पढ़ें: Rajasthan में निकाय चुनाव को लेकर BL Santhosh ने BJP कार्यकर्ताओं को दिए जीत के मंत्र 22 सितंबर को जब आम बहस (जनरल डिबेट) शुरू होगी, तो परंपरा के अनुसार ब्राज़ील सबसे पहले बोलेगा और उसके बाद अमेरिका की बारी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी 22 सितंबर को दुनिया भर के नेताओं को संबोधित करेंगे; यह उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान UN जनरल असेंबली में उनका दूसरा संबोधन होगा। साल भर चलने वाले इस 81वें सत्र की अध्यक्षता बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान करेंगे, जिन्हें जून में 193 सदस्यों वाले इस संगठन का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था। UN मुख्यालय में साल के सबसे व्यस्त राजनयिक दौर के तौर पर देखे जाने वाले इस उच्च-स्तरीय सत्र का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब कई भू-राजनीतिक संघर्ष जारी हैं, जिनमें ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल का महीनों से चल रहा टकराव भी शामिल है। इस टकराव का असर 'ग्लोबल साउथ' के देशों और सबसे कम विकसित देशों पर भी पड़ा है, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावटों के कारण भोजन और ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान बॉर्डर के पास 40,000 फीट की ऊंचाई पर भारत का 'शक्ति प्रदर्शन'! भारतीय वायु सेना के NOTAM जारी करते ही इस्लामाबाद में हड़कंप UNGA सत्र के दौरान कई हाई-लेवल बैठकें होनी हैं, जिनमें 'विकास के अधिकार पर घोषणापत्र' की 40वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक बैठक और क्लाइमेट एक्शन व 'न्यायपूर्ण बदलाव' (just transition) पर एक अन्य बैठक शामिल है। अन्य बैठकों में समुद्र का जलस्तर बढ़ने से पैदा होने वाले खतरों, महामारी की रोकथाम और तैयारी, तथा परमाणु हथियारों को पूरी तरह खत्म करने के प्रयासों पर ध्यान दिया जाएगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
EPFO का खुलासा: 31 लाख खातों में पड़े हैं 9000 करोड़, ऐसे निकालें अपना पैसा!
नई EPF Scheme 2026 के लागू होने के बीच एक RTI खुलासे से पता चला है कि देश में करीब 31 लाख से ज्यादा निष्क्रिय पीएफ खातों में करीब 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लावारिस राशि जमा है. अगर आपका भी पुराना पीएफ फंड अटका हुआ है, तो जानिए इसे घर बैठे ऑनलाइन क्लेम करने और बैंक खाते में ट्रांसफर करने की पूरी प्रक्रिया.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने शासकीय आवास पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सीएम धामी ने भारतीय शिक्षा और संस्कृति को दिशा देने में उनके योगदान को याद किया और ...
Kerala के Thrissur में NH-66 पर दर्दनाक हादसा, 8 छात्रों की मौत
त्रिशूर (केरलम), पांच सितंबर केरलम के त्रिशूर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-66 पर एक कार के सड़क किनारे “अवैध रूप से” खड़ी लॉरी से टकरा जाने से तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज के आठ छात्रों की मौत हो गई। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। इस हादसे के बाद, कोडुंगल्लूर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले केरलम के खेल मंत्री ओ जे जनीश ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पुलिस के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार रात 11 बजकर 40 मिनट पर काईपमंगलम के पनमबिक्कुन्नू में उस समय हुआ, जब गुरुवायुर से कोडुंगल्लूर की ओर जा रही कार महाराष्ट्र में पंजीकृत लॉरी से जा टकराई। प्राथमिकी के अनुसार, निर्माण कार्य की वजह से वाहनों के मार्ग में परिवर्तन के लिए अवरोधक लगाए गए थे। लॉरी अवरोधक वाले हिस्से के पास सड़क के दाहिनी ओर अवैध रूप से खड़ी थी। पुलिस ने बताया कि कार की रफ्तार तेज थी और चालक अवरोधक को संभवत: देख नहीं पाया, जिससे कार लॉरी के पिछले हिस्से में जा घुसी। पुलिस ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि छह छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य को नजदीकी अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित कर दिया गया। ये सभी डिंडीगुल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र थे और एनएच-66 से होते हुए कोडुंगल्लूर की ओर जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान डिंडीगुल निवासी सूर्या, युवासंजीत, जोशुआ, मुरली व जीवा, मदुरै निवासी संतोष व प्रसन्ना तथा सेलम निवासी विश्व के रूप में हुई है। स्थानीय निवासियों, दमकलकर्मियों और पुलिस ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और शवों को कार से बाहर निकाला। पुलिस ने बताया कि शवों को त्रिशूर मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर में रखवाया गया है। काईपमंगलम पुलिस ने लॉरी चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। हादसे के बाद चालक लॉरी छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने छात्रों के पास मिले पहचान पत्रों के जरिए उनके परिजनों को सूचित किया। पुलिस के मुताबिक, कुछ परिजनों को तो यह जानकारी भी नहीं थी कि उनके बच्चे केरलम गए हुए हैं। रिश्तेदारों ने पुलिस को बताया कि संतोष ने हाल में एक नयी कार खरीदी थी और सभी ने कोच्चि जाने की योजना बनाई थी। हालांकि, नयी कार का पंजीकरण पूरा न होने के कारण उन्होंने इस यात्रा के लिए एक गाड़ी किराए पर ली थी। त्रिशूर मेडिकल कॉलेज में शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया, जहां परिजन पहुंच चुके हैं। अस्पताल प्रशासन ने शवों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की। त्रिशूर के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मोहम्मद नदीमुद्दीन ने बताया कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि हादसा लॉरी चालक की गलती के कारण हुआ। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “निश्चित रूप से यह लॉरी चालक की गलती के कारण हुआ। इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और ठेकेदार की भूमिका की भी जांच की जाएगी तथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।”नदीमुद्दीन ने बताया कि लॉरी चालक फरार है, लेकिन वाहन मालिक की पहचान कर ली गई है और आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि क्षेत्र में राजमार्ग पुलिस की गश्ती इकाई तैनात थी, लेकिन लॉरी चालक अक्सर अपने वाहनों को खड़ा करके वहां से चले जाते हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा, “निश्चित रूप से यहां वाहनों को खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। हम यह भी जांच करेंगे कि क्या राजमार्ग प्राधिकरणों और ठेकेदारों ने उचित साइनबोर्ड लगाए थे या नहीं। हालांकि प्राथमिक आकलन के अनुसार, यह लॉरी चालक की ही गलती थी।”केरलम के खेल मंत्री जनीश ने आरोप लगाया कि एनएच-66 पर जारी निर्माण कार्य के संबंध में जब भी जनप्रतिनिधि बैठकें बुलाते हैं या चिंता व्यक्त करते हैं, तो एनएचएआई का रवैया असहयोगात्मक रहता है। उन्होंने कहा, ‘‘घटना के दृश्य देखकर ऐसा लगता है कि कार खड़ी गाड़ी के पिछले हिस्से से टकराई। राजमार्ग पर जहां वाहन खड़ा था, वह पार्किंग के लिए कोई निर्धारित क्षेत्र नहीं था। यह एक बड़ी समस्या है।’’मंत्री ने राजमार्ग पर अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जिन स्थानों पर निर्माण कार्य किया जा रहा है वहां साइनबोर्ड लगाने और गति-नियंत्रण के उपायों में गंभीर कमियां हैं। जनीश ने कहा, ‘‘मैं और जनप्रतिनिधि इस राजमार्ग मार्ग पर स्थित दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के संबंध में लगातार बैठकें कर रहे हैं और उचित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।’’उन्होंने बताया कि वे इस मुद्दे पर बुलाई गई लगभग तीन बैठकों में शामिल हुए थे, जिनमें जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के अलावा उन क्षेत्रों के विधायक भी मौजूद थे जहां से राजमार्ग गुजरता है। मंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर साइनबोर्ड और उचित चेतावनी नहीं हैं, उनकी पहचान करने तथा सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एनएचएआई अक्सर स्थानीय अधिकारियों के साथ पर्याप्त समन्वय किए बिना या जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान किए बिना निर्माण कार्य करता है। जनीश ने कहा, ‘‘प्राधिकरण अक्सर इस तरह से काम करता है जैसे उसे मानव जीवन की कोई परवाह ही न हो।’’इन आरोपों पर एनएचएआई की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कोडुंगल्लूर के पुलिस उपाधीक्षक को मामले की जांच सौंपी गई है। मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी तथा जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ तत्काल व सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिखरे जूते, चिथड़े हुए लोग... ईरान में शादी के घर पर गिरा बम, चश्मदीदों ने बताया मंजर
ईरान के कुहेस्तक में शादी वाले घर पर हुए अमेरिकी हमले ने खुशियों को मातम में बदल दिया. पांच लोगों की मौत और 60 से ज्यादा के घायल होने के बाद चश्मदीदों ने जो खौफनाक मंजर बयां किया, वह रोंगटे खड़े करने वाला है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह विरोध करने वाले सभी नागरिक समाज के समूहों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। संघ ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी राय रखने की पूरी आजादी होनी चाहिए। संघ प्रमुख मोहन भागवत के लंदन दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शनों के बाद RSS की ओर से यह प्रतिक्रिया आई है। गौरतलब है कि मोहन भागवत 2 सितंबर से 7 सितंबर 2026 तक ब्रिटेन (UK) के दौरे पर हैं, जो उनके तीन देशों के शताब्दी आउटरीच कार्यक्रम का अंतिम चरण है। इससे पहले उनके अमेरिकी दौरे के दौरान भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन देखे गए थे। इसे भी पढ़ें: Mirzapur The Movie का क्लाइमैक्स! क्या मारे जाएंगे कालीन भैया? जानिए गुड्डू, मुन्ना और बीना भाभी के चौंकाने वाले ट्विस्ट मोहन भागवत अभी 2 सितंबर से 7 सितंबर, 2026 तक लंदन (UK) के दौरे पर हैं। यह उनके तीन देशों के शताब्दी आउटरीच दौरे का आखिरी चरण है। जब उनसे नागरिक समाज के समूहों द्वारा लंदन के मेयर सादिक खान को लिखे गए उस पत्र के बारे में पूछा गया जिसमें ग्रेटर लंदन अथॉरिटी से RSS के कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का आग्रह किया गया था, तो संगठन के मीडिया प्रभारी सुनील अंबेडकर ने कहा कि अलग-अलग आवाज़ें उठना बहुत सामान्य बात है। इसे भी पढ़ें: Kairana MP Iqra Hasan का बड़ा बयान: Saharanpur मस्जिद demolition लोकतंत्र की हत्या, भुगतना होगा अंजाम लंदन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबेडकर ने कहा, हम शांति, एकता और एकजुटता के लिए यहां हैं और हम सभी के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। लोकतंत्र में अलग-अलग आवाज़ें हो सकती हैं। मुझे लगता है कि अलग-अलग आवाज़ें उठना बहुत सामान्य बात है। इसलिए हम बातचीत के लिए तैयार हैं और जो लोग बातचीत करना चाहते हैं, हम उनसे जुड़ रहे हैं। नागरिक समाज के 20 समूहों ने मेयर सादिक खान को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे लंदन में भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम की निंदा करें, जैसा कि न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने किया था। अंबेडकर ने ज़ोर देकर कहा कि छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और RSS खुले तौर पर अपने विचार साझा करने को तैयार है। उन्होंने कहा, हम यहां यह बताने आए हैं कि हम क्या हैं, हम क्या सोचते हैं, हम कैसे सोचते हैं और दुनिया के बारे में हमारी क्या सोच है। हम बहुत खुले हैं, छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। हम बहस और विचारों के आदान-प्रदान की उम्मीद करते हैं। हम बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्हें अपनी बात कहने दें। UK के समूहों का लंदन के मेयर को पत्र 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के अनुसार, UK के विदेश कार्यालय को लिखे एक पत्र में संगठनों ने दावा किया कि भागवत का दौरा जनसंपर्क के ज़रिए लोगों को लुभाने की एक कोशिश का हिस्सा है, जिसे UK में उनके सहयोगियों का समर्थन प्राप्त है। RSS को एक तानाशाही और सैन्यवादी समूह बताते हुए, जिसने यूरोपीय फासीवाद से स्पष्ट प्रेरणा ली थी, समूहों ने मेयर से आग्रह किया कि वे प्रस्तावित कार्यक्रम की निंदा करें और इसके लिए कोई जगह (वेन्यू) न दें। इस पत्र पर 'हिंदूज़ फ़ॉर ह्यूमन राइट्स', 'यूके-इंडियन मुस्लिम काउंसिल', 'इंडिया लेबर सॉलिडैरिटी', 'साउथ एशिया सॉलिडैरिटी ग्रुप' और अन्य संगठनों ने हस्ताक्षर किए थे। न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का कार्यक्रम रविवार को मोहन भागवत ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' (सार्वभौमिक एकता उत्सव) में 5,000 से ज़्यादा लोगों को संबोधित किया और एकता, विविधता और धर्म के विचारों को रखा। उन्होंने कहा था, वह मूल सिद्धांत जिसे हम धर्म कहते हैं... धर्म का मतलब मज़हब या पंथ नहीं है। यह पूजा-पाठ भी नहीं है। यह इन सबसे कहीं ऊपर है। भारत के लिए, एकता और विविधता दोनों ही उसके DNA में हैं। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
धर्मांतरण की सूचना पर पुलिस का छापा, मौके से 5 आरोपी पकड़े गए
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में कथित धर्मांतरण की सूचना पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. मामला रौनापार थाना क्षेत्र के कादीपुर गांव का है, जहां एक स्थान पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने और धर्म परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियां होने की सूचना मिली थी. पुलिस ने छापेमारी की और 5 लोगों को मौके से पकड़ा है.
16 साल के लड़के ने निगल लिए रेजर ब्लेड, डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान
हैदराबाद के उस्मानिया जनरल अस्पताल में डॉक्टरों ने 16 साल के लड़के के पेट से एंडोस्कोपी के जरिए रेजर ब्लेड के तीन नुकीले टुकड़े निकाल लिए. प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि अंदरूनी चोट और छेद होने का खतरा था. फिलहाल लड़के की हालत ठीक है.
Kharge विवाद में Zero FIR दर्ज, BJP ने Congress पर ओछी राजनीति का लगाया आरोप
बेंगलुरु पुलिस ने उत्तराखंड बीजेपी प्रमुख महेंद्र भट्ट और पार्टी के अन्य सदस्यों के खिलाफ 'ज़ीरो FIR' दर्ज की है। यह मामला हल्द्वानी के एक मैदान में कथित तौर पर किए गए 'शुद्धिकरण अनुष्ठान' से जुड़ा है, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद किया गया था। यह FIR आदिवासी कांग्रेस के अनुसूचित जनजाति विभाग सेल के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा की शिकायत पर विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई। इसे भी पढ़ें: Rajasthan में निकाय चुनाव को लेकर BL Santhosh ने BJP कार्यकर्ताओं को दिए जीत के मंत्र शिकायत के अनुसार, खड़गे ने 8 अगस्त को नैनीताल ज़िले के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। रमाप्पा का आरोप है कि इसके बाद स्थानीय बीजेपी नेताओं ने उसी जगह पर एक धार्मिक शुद्धि अनुष्ठान (जिसे 'शुद्धिकरण' कहा गया) आयोजित किया। शिकायतकर्ता का तर्क था कि इस अनुष्ठान का मकसद जातिवादी सोच को बढ़ावा देना था कि खड़गे की मौजूदगी की वजह से मैदान अपवित्र हो गया था। राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे, अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। बेंगलुरु पुलिस द्वारा ज़ीरो FIR दर्ज किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, BJP नेता राम कदम ने कांग्रेस पर निशाना साधा और पार्टी पर जनता को गुमराह करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का नाम बदलकर ‘झूठ बोलने वाले नेताओं की पार्टी’ रख देना चाहिए... नैतिक आधार पर यह नाम उन पर बिल्कुल सही बैठेगा। वे एक ऐसे झूठ को लेकर जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं—एक ऐसी घटना जो असल में कभी हुई ही नहीं और जिसका किसी ने समर्थन भी नहीं किया। और चूंकि कर्नाटक में उनकी सरकार है, वे चाहते हैं कि पुलिस मामला दर्ज करे ताकि यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ जाए... लेकिन ऐसी मनगढ़ंत बातों से जनता को बार-बार बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को यह बात समझनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान बॉर्डर के पास 40,000 फीट की ऊंचाई पर भारत का 'शक्ति प्रदर्शन'! भारतीय वायु सेना के NOTAM जारी करते ही इस्लामाबाद में हड़कंप तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष रामचंद्र राव ने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी के पास कोई मुद्दा नहीं है। इसलिए, वे अब पुराने मुद्दे, यानी हल्द्वानी वाले मामले को फिर से उठाने की कोशिश कर रहे हैं और तथाकथित शुद्धिकरण की रस्म को लेकर देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि कर्नाटक पुलिस ने उत्तराखंड बीजेपी नेताओं के खिलाफ ज़ीरो FIR दर्ज की है... यह कांग्रेस पार्टी की बांटने वाली राजनीति है। उन्होंने आगे कहा कि शुद्धिकरण जैसा कोई मुद्दा नहीं है, जिसे कई बीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया है, लेकिन फिर भी कांग्रेस पार्टी इसे मुद्दा बना रही है; यह एक ऐसी बात है जिसका कोई महत्व नहीं है, लेकिन उसे बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कर्ज का ब्याज नहीं दिया तो महिला के कपड़े उतरवाए, वीडियो बनाया; चारों आरोपी अरेस्ट
बेंगलुरु में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां कर्ज का ब्याज ना देने पर एक महिला को निर्वस्त्र करके प्रताड़ित किया गया और वीडियो बनाया गया। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
बालों में धूनी कैसे लगाएं? जानें केश धूपन में किन-किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है
आइए जानते हैं कि आखिर केश धूपन क्या है, इससे बालों को क्या फायदा होता है, साथ ही जानेंगे इसे करने का सही तरीका क्या है-
उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में अपराध का ग्राफ एक बार फिर से किस खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, इसका अंदाजा हाल ही में हुई एक सनसनीखेज वारदात से लगाया जा सकता है। इलाके के जाने-माने फाइनेंसर हरभजन सिंह की निर्मम हत्या के मामले में अब एक ऐसा खौफनाक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है जिसने पूरे व्यापारिक जगत और पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। कुख्यात अपराधी और खुद को गैंगस्टर बताने वाले शुभम पंडित ने सोशल मीडिया पर खुलेआम यह कबूल किया है कि फाइनेंसर हरभजन सिंह की हत्या उसी ने और उसके गुर्गों ने मिलकर की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे इस कबूलनामे के बाद से न केवल मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, बल्कि स्थानीय कारोबारियों और व्यापारियों के मन में भी दहशत का माहौल पैदा हो गया है। इस तरह से सरेआम सोशल मीडिया पर किसी हाई-प्रफाइल मर्डर की जिम्मेदारी लेना और पुलिस को चुनौती देना यह साबित करता है कि बदमाशों के मन में कानून का खौफ किस हद तक कम हो चुका है। पुलिस और एसटीएफ की टीमें अब इस सोशल मीडिया पोस्ट को आधार बनाकर अपनी जांच को आगे बढ़ा रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस जघन्य अपराध के पीछे और कौन-कौन से चेहरे छिपे हुए हैं।हत्या के बाद कुख्यात गैंगस्टर शुभम पंडित द्वारा हरभजन सिंह के अन्य करीबियों को दी गई धमकियों के क्या मायने हैं?फिनेंसर हरभजन सिंह की हत्या की जिम्मेदारी लेने के साथ ही कुख्यात गैंगस्टर शुभम पंडित यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने सोशल मीडिया के जरिए मृतक के परिवार, दोस्तों और अन्य व्यावसायिक करीबियों को भी चुन-चुनकर निशाना बनाने की खुली धमकियां दी हैं। वायरल पोस्ट और संदेशों में साफ तौर पर यह चेतावनी दी गई है कि जो कोई भी हरभजन सिंह के मामलों में दखल देगा या पुलिस की मदद करेगा, उसका अंजाम भी इसी तरह भुगतना पड़ेगा। इस प्रकार की सरेआम धमकियों के सामने आने के बाद से मृतक के करीबी रिश्तेदार और शहर के अन्य बड़े फाइनेंसर तथा व्यवसायी गहरे मानसिक तनाव और डर के साये में जीने को मजबूर हो गए हैं। सुरक्षा की मांग को लेकर स्थानीय व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इन धमकियों को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं और साइबर सेल की मदद से उस आईपी एड्रेस और सोशल मीडिया अकाउंट की लोकेशन ट्रेस की जा रही है जहाँ से यह पोस्ट अपलोड किया गया था।इस सनसनीखेज वारदात के पीछे आपसी रंजिश, वित्तीय विवाद और रंगदारी के कोण की क्या सच्चाई है?शुरुआती पुलिस जांच और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, फाइनेंसर हरभजन सिंह की हत्या केवल एक सामान्य आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि इसके पीछे करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन, आपसी रंजिश और रंगदारी का एक बड़ा जाल जुड़ा हो सकता है। फाइनेंसर के तौर पर काम करने वाले हरभजन सिंह का शहर के कई रसूखदार लोगों और कारोबारियों के साथ पैसों के आदान-प्रदान को लेकर विवाद चल रहा था, जिसकी सुगबुगाहट पहले से ही दबी जुबान में हो रही थी। अपराधियों और फाइनेंसरों के बीच प्रोटेक्शन मनी या रंगदारी वसूलने को लेकर अक्सर इस तरह के खूनी संघर्ष देखने को मिलते हैं, और इस मामले में भी पुलिस इसी थ्योरी पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है। गैंगस्टर शुभम पंडित का इस मामले में कूदना और सोशल मीडिया पर अपनी धौंस जमाना यह इशारा करता है कि शायद इस हत्या के पीछे कोई सोची-समझी सुपारी किलिंग या वसूली का पुराना विवाद मुख्य वजह रहा हो। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें मृतक के कॉल डिटेल्स, बैंक खातों और पिछले कुछ दिनों की गतिविधियों की गहनता से छानबीन कर रही हैं ताकि इस बात का ठोस सबूत मिल सके कि पैसों के इस खेल में कौन-कौन से पर्दे के पीछे के खिलाड़ी शामिल थे।उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ (STF) के लिए यह मामला क्यों बन गया है एक बड़ी चुनौती और क्या हैं ताजा कार्रवाई के कदम?कुख्यात गैंगस्टर शुभम पंडित द्वारा सोशल मीडिया पर इस प्रकार खुलेआम चुनौती दिए जाने के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ के सामने अपराधियों की यह खुली दबंगई एक बहुत बड़ी नाक का सवाल बन गई है। राज्य के उच्चाधिकारियों ने इस घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत विशेष टीमों का गठन करें और आरोपी शुभम पंडित तथा उसके साथियों को जल्द से जल्द दबोचकर सलाखों के पीछे भेजें। पुलिस लगातार उन संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है जहाँ इन अपराधियों के छिपे होने की आशंका जताई जा रही है, और उनके कई करीबियों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है। सोशल मीडिया कंपनियों को भी पत्र लिखकर उस आपत्तिजनक और धमकी भरे पोस्ट को तुरंत ब्लॉक या डिलीट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि समाज में और अधिक भय का माहौल न फैले। पुलिस प्रशासन का यह दावा है कि कानून का हाथ बहुत लंबा होता है और चाहे अपराधी सोशल मीडिया पर कितनी भी बड़ी डींगें हांक लें, उन्हें जल्द ही उनके किए की सजा कानून के जरिए जरूर मिलेगी।इस प्रकार की वारदातों से व्यापारिक जगत, आम जनता और कानून-व्यवस्था पर क्या गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?फिनेंसर हरभजन सिंह जैसी हत्याएं और उसके बाद अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया पर इस तरह का खुला आतंक फैलाना पूरे समाज और कानून व्यवस्था की साख पर एक बहुत बड़ा आघात है। जब एक आम व्यापारी, फाइनेंसर या उद्यमी अपनी मेहनत की कमाई के साथ सुरक्षित महसूस नहीं करता है, तो इसका सीधा असर क्षेत्र के आर्थिक विकास और निवेश पर पड़ता है। अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया को अपनी धमकियां देने और खौफ पैदा करने का हथियार बना लेना साइबर सुरक्षा और पुलिस की खुफिया तंत्र के लिए भी एक नई और बड़ी चुनौती बन गया है, जिससे निपटने के लिए डिजिटल पुलिसिंग को और अधिक मजबूत करना होगा। आम जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि यदि अपराधी इस तरह सरेआम सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी लेकर लोगों को डराते रहेंगे, तो समाज में कानून का राज कैसे स्थापित होगा। इसके लिए जरूरी है कि पुलिस और न्यायपालिका मिलकर इस तरह के बदमाशों के खिलाफ इतनी सख्त और त्वरित कार्रवाई करें कि आने वाले समय में कोई भी अपराधी कानून और समाज को इस तरह चुनौती देने की हिम्मत तक न जुटा सके।
यूनेस्को विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर ट्रेन संचालन बहाल होने की क्या है पूरी खुशखबरी
देश और दुनिया के पर्यटकों के लिए उत्तर भारत के पहाड़ों की गोद में बसी वादियों का सफर करने का सपना पूरा करने वाली यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर कालका-शिमला टॉय ट्रेन सेवा को लेकर एक बहुत ही राहत भरी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय से मौसम की मार और तकनीकी बाधाओं के कारण आंशिक रूप से प्रभावित चल रहे इस ऐतिहासिक टॉय ट्रेन रूट पर अब रेलवे प्रशासन ने धर्मपुर से शिमला के बीच रेल संचालन को पूरी तरह से दोबारा सुचारू रूप से शुरू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पहाड़ों की खूबसूरत और घुमावदार पटरियों पर छुक-छुक करती हुई यह टॉय ट्रेन जब एक बार फिर से अपनी पूरी रफ्तार और क्षमता के साथ दौड़ेगी, तो देश-विदेश से हिमाचल प्रदेश की वादियों में घूमने आने वाले पर्यटकों के चेहरों पर एक बार फिर से मुस्कान लौट आएगी। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि ट्रैक की युद्ध स्तर पर मरम्मत और सुरक्षा जांच का काम पूरा कर लिया गया है, जिसके बाद सुरक्षा प्रमाण पत्र मिलते ही इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को हरी झंडी दिखा दी गई है। इस ऐतिहासिक रेलवे ट्रैक का दोबारा से पूरी तरह से चालू होना न केवल स्थानीय पर्यटन व्यवसाय के लिए संजीवनी का काम करेगा, बल्कि शिमला आने वाले पर्यटकों के लिए सफर का यह अनुभव हमेशा की तरह बेहद रोमांचक और यादगार बन जाएगा।कालका-शिमला के इस बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक रेलवे ट्रैक का इतिहास और इसका वैश्विक महत्व क्या है?ब्रिटिश काल के दौरान साल 1903 में बनकर तैयार हुआ यह कालका-शिमला नैर गेज रेलवे ट्रैक अपनी अद्भुत इंजीनियरिंग और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में एक बेजोड़ मिसाल माना जाता है। लगभग 96 किलोमीटर लंबे इस ऐतिहासिक मार्ग पर कुल 18 से अधिक स्टेशन, 100 से ज्यादा काम करने वाली सुरंगे (Tunnels) और सैकड़ों खूबसूरत आर्च ब्रिज बने हुए हैं, जो उस दौर के इंजीनियरों की हुनरमंद कारीगरी की दास्तान बयां करते हैं। पहाड़ों, गहरी खाइयों और देवदार के घने जंगलों के बीच से गुजरने वाले इस रेल मार्ग की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए ही यूनेस्को (UNESCO) ने साल 2008 में इसे 'विश्व धरोहर स्थल' (World Heritage Site) की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया था। हर साल इस रूट पर सफर करने के लिए लाखों की संख्या में देश और दुनिया के पर्यटक शिमला पहुँचते हैं, क्योंकि टॉय ट्रेन की खिड़की से बाहर झांकते हुए पहाड़ों के मनोरम दृश्यों को देखना अपने आप में एक अलग ही मानसिक शांति और आनंद देता है। यही वजह है कि जब कभी भी इस ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन बाधित होता है, तो पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों और प्रकृति प्रेमियों की चिंताएं स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं।हाल ही में किन प्राकृतिक आपदाओं और कारणों की वजह से कालका-शिमला रेल मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ था?पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से मौसम के बदलते मिजाज, भारी मानसूनी बारिश और अचानक आने वाले बादलों के फटने की घटनाओं ने इस प्राचीन रेलवे ट्रैक को भारी नुकसान पहुंचाया था। हिमाचल प्रदेश में लगातार हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन (Landslides) के कारण ट्रैक के कई संवेदनशील हिस्सों पर पहाड़ों की भारी चट्टानें और मलबा आ गिरा था, जिससे पटरियां हवा में लटक गई थीं और कई जगहों पर सुरंगें भी मलबे से पट गई थीं। सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रेलवे बोर्ड और स्थानीय प्रशासन ने किसी भी बड़े हादसे को टालने के तुरंत बाद इस रूट पर ट्रेनों का संचालन एहतियात के तौर पर अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया था। धर्मपुर और सोलन के बीच के कुछ हिस्सों में तो स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर हो गई थी कि रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी पूरी तरह से बह गई थी, जिसकी वजह से ट्रेनों का गुजरना यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ साबित हो सकता था। मौसम की इन लगातार मार और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पिछले कुछ महीनों में इस ऐतिहासिक रेल मार्ग को करोड़ों रुपये के वित्तीय नुकसान के साथ-साथ परिचालन संबंधी भारी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा था।रेलवे प्रशासन और इंजीनियरिंग टीम ने किस प्रकार दिन-रात मेहनत करके इस ट्रैक को दोबारा दुरुस्त किया है?ट्रेनों का संचालन लंबे समय तक बंद रहने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को हो रही भारी असुविधा को देखते हुए उत्तर रेलवे (Northern Railway) की इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस टीमों ने इस चुनौती को एक बड़े मिशन के रूप में स्वीकार किया। आधुनिक मशीनों, भारी भरकम पोकलेन और सैकड़ों कुशल कामगारों की टीमों ने दिन-रात अथक परिश्रम करके मलबे को हटाने, क्षतिग्रस्त पटरियों को बदलने और कमजोर हो चुके पुलों तथा दीवारों को कंक्रीट से मजबूत करने का काम युद्ध स्तर पर पूरा किया। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद मौके पर कैंप करके हर एक किलोमीटर के ट्रैक की बारीकी से जांच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अब यह मार्ग हर मौसम में पूरी तरह से सुरक्षित और चाक-चौबंद है। पटरियों की री-अलाइनमेंट और सिग्नलिंग सिस्टम को भी आधुनिक तकनीक के साथ अपडेट कर दिया गया है ताकि ट्रेनें बिना किसी तकनीकी बाधा के अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ सकें। इंजीनियरिंग टीम की इस शानदार और जांबाज मेहनत का ही परिणाम है कि आज धर्मपुर से शिमला के बीच का यह जटिल रेल मार्ग एक बार फिर से ट्रेनों के स्वागत के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका है।इस रेल सेवा के बहाल होने से हिमाचल के पर्यटन और स्थानीय कारोबारियों को कितना बड़ा आर्थिक फायदा मिलेगा?कालका-शिमला टॉय ट्रेन के दोबारा पटरी पर लौटने की खबर से हिमाचल प्रदेश के होटल व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स, टैक्सी चालकों और स्थानीय दुकानदारों में एक बार फिर से भारी उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई है। शिमला आने वाले अधिकांश पर्यटक सड़क मार्ग के ट्रैफिक जाम से बचने के लिए कालका से शिमला तक का यह टॉय ट्रेन का सफर करना अपनी प्राथमिकता मानते हैं, क्योंकि यह यात्रा इस पूरे टूर का सबसे बड़ा आकर्षण होती है। जब पिछले कुछ महीनों से ट्रेनें बंद थीं, तो पर्यटन कारोबार में भारी मंदी आ गई थी और कारोबारियों को आर्थिक मोर्चे पर काफी संघर्ष करना पड़ रहा था। अब जबकि धर्मपुर से शिमला के बीच का यह रूट पूरी तरह चालू हो चुका है, तो वीकेंड और छुट्टियों के सीजन में पर्यटकों की आमद में भारी बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है, जिससे राज्य की आर्थिकी को भी मजबूत संबल मिलेगा। प्रशासन और रेलवे विभाग ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की बुकिंग समय पर ऑनलाइन या रेलवे काउंटर से कर लें ताकि उन्हें पीक सीजन में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कौन है स्वतंत्र भारद्वाज, जंतर-मंतर पर ऐसा क्या हुआ था? जिससे दिल्ली से पटना तक मचा बवाल
Swatantra Bhardwaj: स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया गया है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुए विवाद के बाद यह मामला फिलहाल देशभर में चर्चा में बना हुआ है. ऐसे स्वतंत्र भारद्वाज कौन है और क्यों यह विवाद शुरू हुआ है.
गुरुग्राम में मौसम का मिजाज हुआ बेहद खतरनाक, डीडीएमए द्वारा भारी बारिश का नया अलर्ट जारी
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सबसे बड़े और चमकते कॉर्पोरेट हब गुरुग्राम में मौसम ने एक बार फिर से बेहद विकराल और खतरनाक तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, जिससे शहरवासियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) और मौसम विभाग ने अगले दो से तीन घंटों के भीतर गुरुग्राम और उसके आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश तथा आकाशीय बिजली चमकने का भारी रेड अलर्ट जारी किया है। आसमान में छाए काले बादलों और अचानक से तेज हुई हवाओं के कारण शहर के कई हिस्सों में अभी से अंधेरा छा गया है और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ ही पलों में बादलों की फौज शहर पर टूट पड़ेगी। पिछले कुछ हफ्तों में हुई भारी बारिश के कड़वे अनुभवों को याद करते हुए जिला प्रशासन इस बार कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है, और यही कारण है कि प्रशासन ने बिना किसी देरी के तुरंत प्रभाव से हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। शहर के लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम की इस गंभीर स्थिति को हल्के में न लें और अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए पूरी तरह से सतर्क और सावधान रहें।गुरुग्राम प्रशासन द्वारा जारी की गई नई एडवाइजरी में नागरिकों और कामकाजी लोगों के लिए क्या सख्त निर्देश दिए गए हैं?स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए गुरुग्राम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने एक बेहद सख्त और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि जब तक कोई अत्यंत आवश्यक और टाला न जा सकने वाला काम न हो, तब तक लोग अपने घरों से बाहर बिल्कुल भी न निकलें। कॉरपोरेट कंपनियों, बहुराष्ट्रीय कार्यालयों और दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों के प्रबंधन से भी अपील की गई है कि वे संभावित जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम से बचने के लिए अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (Work from Home) की अनुमति दें या ऑफिस के समय में लचीलापन लाएं। पिछले दिनों सड़कों और अंडरपास में हुए भीषण जलभराव के दौरान लोगों को हुई भारी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन इस बार किसी भी प्रकार की अनहोनी को टालने के लिए पहले से ही पूरी तरह से कमर कस चुका है। ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम के तमाम अधिकारियों की छुट्टियों को रद्द करके उन्हें मैदानी इलाकों में तैनात कर दिया गया है ताकि जल निकासी के राहत कार्यों में एक सेकंड की भी देरी न हो सके।शहर के मुख्य एक्सप्रेसवे, मिलेनियम सिटी के चौराहों और निचले इलाकों में जलभराव का कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है?गुरुग्राम की भौगोलिक बनावट और यहां के लचर ड्रेनेज सिस्टम के कारण थोड़ी सी मूसलाधार बारिश भी शहर को कुछ ही मिनटों में तालाब में बदलने की पूरी क्षमता रखती है। दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे, हीरो होंडा चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर, सुशांत लोक और साइबर सिटी जैसे प्रमुख व्यावसायिक और आवागमन के मार्ग जलभराव के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। पिछले वर्षों में इन इलाकों में पानी इस कदर भर चुका है कि बड़ी-बड़ी गाड़ियां और बसें पानी में आधी डूब जाती हैं, जिससे यात्रियों को घंटों तक भयंकर जाम में भूखे-प्यासे फंसे रहना पड़ता है। नगर निगम के तमाम दावों के बावजूद जब भी कुछ घंटों की लगातार बारिश होती है, तो सीवर ओवरफ्लो होने लगते हैं और सड़कों पर पानी की नदियां बहने लगती हैं। मौसम विभाग के ताजा अलर्ट के बाद इन सभी खतरनाक पॉइंट्स पर विशेष नजर रखी जा रही है और पानी को तुरंत बाहर निकालने के लिए भारी-भरकम पंपिंग सेट तथा कर्मचारियों की फौज को पहले से ही तैनात कर दिया गया है ताकि ट्रैफिक की रफ्तार पूरी तरह से थमने न पाए।स्थानीय नागरिकों, ड्राइवरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए प्रशासन ने कौन-से विशेष सुरक्षा उपाय सुझाए हैं?भारी बारिश के इस दौर में सफर करने वाले वाहन चालकों, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और कार चालकों को प्रशासन ने अत्यधिक सावधानी बरतने के कड़े निर्देश दिए हैं। बारिश के दौरान दृश्यता (Visibility) कम हो जाती है और सड़कों पर गड्ढे पानी में छिप जाते हैं, जिसके कारण तेज रफ्तार गाड़ियां दुर्घटना का शिकार हो सकती हैं। चालकों को सलाह दी गई है कि वे जलभराव वाले अंडरपास या गहरे पानी के रास्तों से अपनी गाड़ियों को बिल्कुल न गुजारें, क्योंकि पानी में इंजन बंद होने से गाड़ियां बीच रास्ते में ही फंस जाती हैं। इसके अलावा, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर और खुले तारों से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी या करंट फैलने की घटना से बचा जा सके। यदि किसी नागरिक को आपातकालीन स्थिति में मदद की जरूरत पड़े, तो वे जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत संपर्क कर सकते हैं, जहां 24 घंटे आपातकालीन दल सहायता के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार बैठा है।इस प्रकार की मौसमी आपात स्थितियों से निपटने के लिए गुरुग्राम के बुनियादी ढांचे में स्थायी सुधार की कितनी जरूरत है?गुरुग्राम जैसे अत्याधुनिक और वैश्विक पहचान वाले स्मार्ट सिटी में हर मानसून या भारी बारिश के दौरान जलभराव का यह दृश्य शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगाता है। शहरी विकास विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का मानना है कि जब तक शहर के नेचुरल ड्रेनेज चैनल्स, प्राकृतिक जल स्रोतों और बड़े पैमाने पर वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को वैज्ञानिक तरीके से दुरुस्त नहीं किया जाएगा, तब तक हर साल लोगों को इसी तरह की आपदाओं का सामना करना पड़ेगा। सरकार और स्थानीय निकायों को अल्पकालिक राहत उपायों के साथ-साथ एक दीर्घकालिक और मजबूत मास्टर प्लान तैयार करना होगा, जिसमें कंक्रीट के जंगलों के बीच पानी के प्राकृतिक निकास के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी जा सके। फिलहाल, अगले दो-तीन घंटों का यह रेड अलर्ट शहर के हर नागरिक के लिए परीक्षा की घड़ी है, जहाँ सावधानी और समझदारी दिखाते हुए प्रशासन का सहयोग करना ही सबसे बड़ा बचाव है ताकि किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान को पूरी तरह से रोका जा सके।
मुंबई में दही हांडी का आगाज, लड़कियों की टोली ने दिखाया दम
मुंबई में दही हांडी उत्सव का रंग चढ़ चुका है और दादर से इसकी शानदार शुरुआत हो गई है. दादर में लड़कियों की गोविंदा टोली ने मुंबई की पहली दही हांडी फोड़कर उत्सव का आगाज किया. इसके बाद दूसरी गोविंदा टोली ने भी मानव पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ दी. हांडी फोड़ने के दौरान लड़कियों का जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था. दादर की गलियों में ढोल-ताशों और जश्न के बीच दही हांडी उत्सव पूरे रंग में नजर आ रहा है.
कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर सीआरपीएफ कमांडेंट के अद्भुत शौर्य और साहस की गूंज से क्यों भर आई आँखें
भारतीय टेलीविजन के सबसे प्रतिष्ठित और ज्ञानवर्धक रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC 18) के इस सीजन में देश के सामने एक ऐसा एपिसोड आया जिसने हर दर्शक के रोंगटे खड़े कर दिए और देशप्रेम की भावना को सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा दिया। शो की हॉट सीट पर इस बार देश की आंतरिक सुरक्षा के पहरेदार और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक जांबाज कमांडेंट ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिन्होंने अपने अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और गेम की शानदार स्किल से न केवल करोड़ों दर्शकों का दिल जीता बल्कि खेल के इतिहास में एक नया अध्याय भी लिख दिया। जब इस वर्दीधारी वीर ने शो के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने अपनी और अपनी पूरी बटालियन की जिंदगी के उन अनकहे पन्नों को पलटना शुरू किया, तो सेट पर मौजूद हर शख्स की सांसें थम गईं। आम जनता अक्सर यह सोचती है कि सुरक्षा बलों के जवान केवल सीमा पर या बंकरों में बंदूक लेकर खड़े रहते हैं, लेकिन इस मंच पर आकर उस जांबाज अधिकारी ने जिस तरह से देश के दुश्मनों से मुकाबला करने और विकट परिस्थितियों में जीने की असल कहानी बयां की, उसने हर भारतीय के सीने को गर्व से चौड़ा कर दिया। इस ऐतिहासिक एपिसोड ने साबित कर दिया कि केबीसी केवल ज्ञान और पैसों का खेल नहीं है, बल्कि यह देश के असली हीरोज के बलिदान और संघर्ष को दुनिया के सामने लाने का सबसे बड़ा और पावन मंच भी है।सीआरपीएफ की बेहद कठोर और खतरनाक कमांडेंट ट्रेनिंग के दौरान जंगल में किन भयानक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है?जब अमिताभ बच्चन ने सीआरपीएफ कमांडेंट से उनकी शुरुआती ट्रेनिंग और उस कठिन दौर के बारे में पूछा जिसे पार करके वे इस मुकाम पर पहुंचे हैं, तो कमांडेंट ने जो खुलासे किए वे किसी फिल्मी कहानी से भी ज्यादा रोमांचक और डरावने थे। देश के सबसे खूंखार नक्सलियों और आतंकवादियों से लोहा लेने वाले इन कमांडोज को तैयार करने के लिए जंगलों के बीच एक ऐसी विशेष और कठोर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है, जिसकी कल्पना आम इंसान सपने में भी नहीं कर सकता है। कमांडेंट ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान कई बार ऐसी विषम और जानलेवा परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं जहां खाने के लिए राशन या अन्न का एक दाना भी मौजूद नहीं होता है, और ऐसे में जिंदा रहने के लिए उन्हें गहरे जंगलों के बीच जहरीले सांपों, कीड़े-मकोड़ों और जंगली जीवों को खाकर अपनी भूख मिटानी पड़ती है। बिना पानी के दिनों तक रेगिस्तान और घने जंगलों में भटकना, दुश्मन की नजरों से बचकर जमीन के अंदर छिपना और अपनी सहनशक्ति को अंतिम सीमा तक परीक्षण करने वाले ये अभ्यास आम आदमियों के लिए असंभव प्रतीत होते हैं। इस प्रकार की जानलेवा और पसीने ला देने वाली ट्रेनिंग से गुजरने के बाद ही एक आम इंसान देश की सुरक्षा करने वाला फौलादी और अजेय 'सीआरपीएफ कमांडेंट' बनकर देश की रक्षा के लिए तैयार होता है।केबीसी 18 के इस रोमांचक मुकाबले में एक करोड़ के बेहद कठिन सवाल का जवाब देकर कैसे रचा गया नया इतिहास?अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता और गजब की मानसिक शांति का परिचय देते हुए इस सीआरपीएफ कमांडेंट ने खेल के हर पड़ाव को बहुत ही सूझबूझ के साथ पार किया और आखिरकार 1 करोड़ रुपये के बेहद चुनौतीपूर्ण सवाल तक सफलतापूर्वक पहुंच गए। खेल का माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण और सांसें रोक देने वाला था, क्योंकि एक छोटी सी गलती उन्हें भारी नुकसान पहुंचा सकती थी, लेकिन फौजी अनुशासन में पले-बढ़े इस जांबाज ने बिना अपना मानसिक संतुलन खोए सही विकल्प का चयन किया। जैसे ही अमिताभ बच्चन ने घोषणा की कि उनका जवाब सौ फीसदी सही है और वे 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जीत चुके हैं, पूरा स्टूडियो तालियों की गड़गड़ाहट और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। महानायक अमिताभ बच्चन ने भी अपनी सीट से खड़े होकर इस वीर कमांडेंट को सैल्यूट किया और उनके संघर्ष तथा उनकी देशभक्ति की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यह जीत केवल एक व्यक्ति की वित्तीय सफलता नहीं थी, बल्कि यह उस हर एक वर्दीधारी सैनिक की जीत थी जो देश के कोने-कोने में अपनी जान की बाजी लगाकर हमारी और हमारी आने वाली पीढ़ियों की रक्षा दिन-रात कर रहे हैं।जीती गई इस भारी पुरस्कार राशि का एक बड़ा और नेक हिस्सा देश के वीर जवानों के परिवारों को समर्पित करने का फैसलाकरोड़ों रुपये की बड़ी धनराशि जीतने के बाद जब अमिताभ बच्चन ने उनसे पूछा कि वे इस पैसे का क्या उपयोग करेंगे, तो उस कमांडेंट के जवाब ने वहां मौजूद सभी लोगों की आंखों को नम कर दिया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि इस इनामी राशि का एक बहुत बड़ा हिस्सा वे उन शहीद वीर जवानों के परिवारों और उनके बच्चों की शिक्षा के कल्याण के लिए समर्पित करेंगे जिन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी है। एक फौजी का दिल किस तरह से अपने साथियों के प्रति संवेदना और देश के प्रति समर्पण से ओत-प्रोत होता है, इस बात का इससे बड़ा और जीवंत उदाहरण दूसरा कोई नहीं हो सकता है। उनकी इस महान सोच और दरियादिली को देखकर महानायक अमिताभ बच्चन भी भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि इस मंच पर आने वाले कई लोग पैसे जीत कर जाते हैं, लेकिन आज इस मंच की गरिमा इस महान फौजी के आने से कई गुना बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी इस एपिसोड के टेलीकास्ट होने के बाद से ही इस सीआरपीएफ कमांडेंट की जमकर तारीफ हो रही है और लोग उनके इस जज्बे को बार-बार सलाम कर रहे हैं।इस प्रेरणादायक एपिसोड ने देश के युवाओं को अनुशासन, संघर्ष और देशभक्ति का क्या अनमोल संदेश दिया है?केबीसी 18 का यह विशेष एपिसोड केवल एक टेलीविजन गेम शो बनकर नहीं रह गया, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं के लिए देशभक्ति, अनुशासन और कभी हार न मानने वाले जज्बे का एक जीवंत पाठ्यक्रम बन गया है। आज के समय में जहां युवा छोटी-छोटी असफलताओं से निराश होकर जल्दी हार मान लेते हैं, वहीं इन फौजी भाइयों की जीवन कहानियां यह सिखाती हैं कि असली सफलता केवल संघर्ष, पसीने और अटूट दृढ़ संकल्प के बल पर ही हासिल की जा सकती है। जंगल में सांप खाकर जिंदा रहने से लेकर देश की रक्षा की कसम खाने तक का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि इंसान की इच्छाशक्ति के आगे दुनिया की कोई भी बड़ी बाधा टिक नहीं सकती है। यह एपिसोड आने वाली कई पीढ़ियों तक लोगों को यह याद दिलाता रहेगा कि जब हमारे देश के जवान सरहद पर और जंगलों में इतना कड़ा संघर्ष कर रहे हैं, तब जाकर हम अपने घरों में चैन की नींद सो पा रहे हैं। इस प्रकार के सार्थक और प्रेरणास्पद मीडिया कंटेंट आज के समाज की सबसे बड़ी जरूरत हैं जो मनोरंजन के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का पाठ भी बहुत ही खूबसूरती से पढ़ा जाते हैं।
तेलंगाना में सड़कों पर क्यों उतरे जेन-जी?: दी विधानसभा घेरने की चेतावनी, बीआरएस ने छात्रों को दिया समर्थन
भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत और कला प्रेमियों के बीच अपने बेहतरीन ساز और उम्दा सितार वादन के लिए जाने जाने वाले प्रसिद्ध कलाकार भागीरथ भट्ट इन दिनों मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियों में अचानक से छाए हुए हैं। हाल ही में टेलीविज़न के सबसे विवादित और लोकप्रिय रियलिटी शो 'बिग बॉस 20' के संभावित कंटेस्टेंट्स की एक लिस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही थी, जिसमें दावा किया जा रहा था कि इस बार शास्त्रीय संगीत की दुनिया से एक बड़ा नाम इस घर का हिस्सा बनने जा रहा है। इस वायरल लिस्ट और तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए खुद सितार वादक भागीरथ भट्ट ने आगे आकर इन सभी खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका इस शो से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। उन्होंने बड़े ही साफगोई अंदाज में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे इस प्रकार के किसी भी रियलिटी शो का हिस्सा बनने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं, क्योंकि उनकी पूरी दुनिया संगीत, रियाज और अपनी कला के प्रति समर्पण में ही सीमित है। इस तरह के सनसनीखेज दावों के अचानक सामने आने से न केवल उनके फैंस हैरान रह गए थे, बल्कि शास्त्रीय संगीत जगत से जुड़े लोगों ने भी इस खबर को बेबुनियाद बताया था।भागीरथ भट्ट ने क्यों कहा कि 'मैं ऐसे शो के लिए नहीं बना हूँ', शास्त्रीय कलाकारों की जीवनशैली और सोच क्या कहती है?जब भागीरथ भट्ट से यह पूछा गया कि क्या वे भविष्य में कभी इस तरह के कमर्शियल या कंट्रोवर्शियल शो का हिस्सा बनना पसंद करेंगे, तो उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि उनकी परवरिश, संस्कार और उनका संगीत उन्हें इस प्रकार के मंचों पर जाने की इजाजत बिल्कुल नहीं देते हैं। शास्त्रीय संगीत साधकों का जीवन अनुशासन, शांति, साधना और एकाग्रता के इर्द-गिर्द घूमता है, जबकि 'बिग बॉस' जैसे रियलिटी शो का पूरा प्रारूप ड्रामेबाजी, तीखी बहस, आपसी झगड़ों और 24 घंटे कैमरों की निगरानी में रहने वाली हाई-वोल्टेज कंट्रोवर्सी पर आधारित होता है। एक कलाकार के रूप में भागीरथ भट्ट का यह मानना है कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि एक साधना है, जिसे वे अपनी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं, न कि किसी टीआरपी बटोरने वाले शो में जाकर अपनी कला की गरिमा को दांव पर लगाना चाहते हैं। उनके इस स्पष्ट बयान के बाद संगीत प्रेमियों और उनके प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ की है और कहा है कि सच्चे कलाकारों की जगह ऐसे रियलिटी शो में नहीं बल्कि मंचों और संगीत की महफिलों में होती है, जहाँ वे अपनी कला से लोगों के दिलों पर राज करते हैं।'बिग बॉस 20' के मेकर्स द्वारा हर साल फैलाई जाने वाली संभावित कंटेस्टेंट्स की इन लिस्टों का सच क्या होता है?टेलीविजन जगत के सबसे बड़े रियलिटी शो 'बिग बॉस' के नए सीजन के शुरू होने से पहले हर साल इस तरह की दर्जनों फर्जी और अनुमानित लिस्ट सोशल मीडिया के गलियारों में तैरने लगती हैं, जिनमें तमाम सेलिब्रिटीज के नाम जोड़े जाते हैं। शो के मेकर्स और क्रिएटिव टीम की यह एक सोची-समझी रणनीति या पीआर पब्लिसिटी स्टंट का हिस्सा माना जाता है ताकि शो के ऑन-एयर होने से पहले ही जनता के बीच जबरदस्त हाइप और सस्पेंस बना रहे। इन सूचियों में कभी देश के जाने-माने संगीतकारों, कभी विवादित राजनेताओं, तो कभी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स के नाम बिना उनकी सहमति के ही उछाल दिए जाते हैं ताकि दर्शक यह कयास लगाते रहें कि इस बार कौन-कौन घर के अंदर जाने वाला है। कई बार जब कोई प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित हस्ती जैसे कि भागीरथ भट्ट जैसे शास्त्रीय कलाकार इन अफवाहों की चपेट में आते हैं, तो वे तुरंत खंडन करके अपनी स्थिति साफ कर देते हैं, लेकिन तब तक वह खबर ट्रेंडिंग टॉपिक बन चुकी होती है। दर्शकों और मीडिया को भी यह समझना होगा कि जब तक किसी कलाकार या आधिकारिक चैनल की तरफ से पुख्ता मुहर न लगे, तब तक इस तरह की वायरल सूचियों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इनमें से अधिकांश दावे केवल टीआरपी बटोरने का एक जरिया मात्र होते हैं।आधुनिक मनोरंजन के दौर में शास्त्रीय संगीत और कंट्रोवर्शियल रियलिटी शो के बीच की इस खाई को कैसे समझा जाए?आज के समय में जब डिजिटल मीडिया और फास्ट एंटरटेनमेंट का बोलबाला है, जहाँ लोग कुछ ही मिनटों के ड्रामे और विवादों को देखना ज्यादा पसंद करते हैं, ऐसे में शास्त्रीय संगीत जैसी पारंपरिक विधाएं अपनी एक अलग और पवित्र पहचान बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। 'बिग बॉस' जैसे शो समाज के उस हिस्से को दर्शाते हैं जहाँ मानवीय भावनाओं के सबसे आक्रामक और नाटकीय रूप कैमरे के सामने खुलकर सामने आते हैं, जो युवाओं को तात्कालिक रूप से बहुत आकर्षित करते हैं। इसके विपरीत, भागीरथ भट्ट जैसे कलाकार उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं जो धैर्य, संयम और आत्मिक शांति का संदेश देती है, और यही कारण है कि इन दोनों संस्कृतियों के बीच जमीन आसमान का फर्क साफ नजर आता है। जब एक शास्त्रीय कलाकार यह कहता है कि वह इस प्रकार के शो के लिए नहीं बना है, तो वह केवल अपने व्यक्तिगत नजरिए को नहीं रखता, बल्कि वह कला जगत की उस गरिमा और मर्यादा की भी वकालत करता है जिसे पैसो और टीआरपी की दौड़ में अक्सर भुला दिया जाता है। आने वाली पीढ़ी के लिए यह सोचना बेहद जरूरी है कि हम किस तरह के मनोरंजन को बढ़ावा दे रहे हैं और क्या हम अपनी महान सांस्कृतिक जड़ों को बचाए रखने में सफल हो पा रहे हैं या नहीं।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद को गिरा दिया गया है। प्रशासन ने इस ढांचे को अवैध घोषित किया था और अदालत ने प्रशासन के इस फैसले को सही ठहराया था। ANI से बात करते हुए सहारनपुर के DIG अभिषेक सिंह ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पाया कि यह मस्जिद सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी। वहीं, इसको लेकर सियासत भी तेज हो गई है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने दावा किया कि उन्हें कैराना में ही नज़रबंद कर दिया गया, ताकि उन्हें तोड़-फोड़ की कार्रवाई के बीच सहारनपुर जाने से रोका जा सके। इसे भी पढ़ें: Rajasthan में निकाय चुनाव को लेकर BL Santhosh ने BJP कार्यकर्ताओं को दिए जीत के मंत्र बाद में प्रेस वार्ता करते हुए SP सांसद इकरा हसन ने कहा कि निचली सिविल कोर्ट का आदेश आने के बाद पूरी मस्जिद को सील कर दिया गया और आसपास बैरिकेडिंग लगा दी गई; इस बीच, लोग अधिकारियों से बात करके इस मामले में कुछ समय की गुज़ारिश करना चाहते थे। लोग हाई कोर्ट जाना चाहते थे, लेकिन समय नहीं दिया गया। सहारनपुर ज़िले के हम सभी प्रमुख लोगों को घरों में ही रोक दिया गया और फिर सुबह-सुबह मस्जिद को गिरा दिया गया; यह वाकई शर्मनाक है। यह इतना बड़ा गुनाह है कि उन्हें इसका अंजाम ज़रूर भुगतना होगा; इससे बचा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हम इस मामले को कोर्ट में ले जाएंगे। यह हमारा अधिकार है। लेकिन जिस तरह से यह कार्रवाई की गई, वह दिखाता है कि लोकतंत्र की हत्या कैसे हुई है... 'जल्द न्याय' को ही मानक तरीका माना जा रहा है... अगर हर फ़ैसला सिर्फ़ सरकारी आदेशों के आधार पर ही लिया जाना है, तो फिर कानूनी व्यवस्था की कोई ज़रूरत ही नहीं है... यह घटना पूरी तरह से निंदनीय है। आपको बता दें कि सहारनपुर जिले में प्रशासनिक कार्रवाई के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय परिसर के भीतर बनी एक मस्जिद को रात भर चले ऑपरेशन में गिरा दिया गया। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान बॉर्डर के पास 40,000 फीट की ऊंचाई पर भारत का 'शक्ति प्रदर्शन'! भारतीय वायु सेना के NOTAM जारी करते ही इस्लामाबाद में हड़कंप सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई, जिसमें मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण करार दिया गया था। इसके साथ ही मस्जिद कमेटी पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है।समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने बाद में दावा किया कि उन्हें कैराना स्थित उनके घर पर नज़रबंद कर दिया गया था। मस्जिद गिराने की कार्रवाई बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय समन्वयक विकास त्यागी की शिकायत के बाद की गई। उन्होंने आरोप लगाया था कि सहारनपुर में DM ऑफिस कॉम्प्लेक्स के अंदर मस्जिद का अवैध निर्माण किया गया था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि इस जगह का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए किया जा रहा था, जिसमें पोस्ट ऑफिस और बाहरी लोगों को किराए पर दिए गए कमरे शामिल थे, और मस्जिद कमेटी किराया वसूल रही थी। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर
Delhi-NCR Weather Update: Baarish का Red Alert जारी, Traffic-जलभराव की दिक्कत | Heavy Rain | Toofan
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भारतीय टेलीविजन जगत के सबसे विवादित और सबसे ज्यादा देखे जाने वाले रियलिटी शो 'बिग बॉस' के आगामी सीजन यानी 'बिग बॉस 20' को लेकर इन दिनों फैंस के बीच उत्साह अपने चरम पर है। शो के शुरू होने से पहले ही इसके होस्ट और बॉलीवुड के दबंग खान यानी सलमान खान ने सोशल मीडिया पर अपनी चार बेहद स्टाइलिश और आकर्षक तस्वीरें शेयर कर इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। इन तस्वीरों में सलमान खान का हमेशा की तरह एक अलग ही स्वैग और फिटनेस भरा अंदाज देखने को मिल रहा है, जिसे उनके चाहنے वाले खूब पसंद कर रहे हैं और पलक झपकते ही ये तस्वीरें सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गईं। हर साल की तरह इस बार भी बिग बॉस के घर की थीम, सेट का डिजाइन और सलमान खान का होस्टिंग स्टाइल कैसा होने वाला है, इसको लेकर दर्शकों के मन में भारी उत्सुकता बनी हुई है। सलमान द्वारा खुद अपने ऑफिशियल अकाउंट से तस्वीरें साझा करने का यह मतलब साफ है कि इस बार का सीजन पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है और मेकर्स दर्शकों को एंटरटेन करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।शूटिंग सेट के दौरान पैपराजी की दखलअंदाजी पर क्यों भड़के सलमान खान, क्या था उनका तीखा रिएक्शन?अपनी फिल्मों और रियलिटी शो के प्रमोशन के दौरान मीडिया और पैपराजी के साथ हमेशा दोस्ताना रिश्ता रखने वाले सलमान खान इस बार शूटिंग सेट पर कुछ ऐसा देख कर अपना आपा खो बैठे और उनका गुस्सा फूट पड़ा। सामने आई खबरों के मुताबिक, बिग बॉस 20 के सेट पर जब पैपराजी ने बिना अनुमति के कुछ अंदरूनी तस्वीरें और वीडियो शूट करने की कोशिश की, तो सलमान खान ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर की। उन्होंने पैपराजी को खरी-खोटी सुनाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि 'यह मेरा काम नहीं है' और लगातार इस तरह की ताक-झांक करना उनकी प्राइवेसी और शो के सस्पेंस को पूरी तरह से खराब कर देता है। सलमान का यह कड़ा रवैया इस बात को साफ करता है कि वे अपने काम के प्रति कितने अनुशासित और गंभीर हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि शो के ऑन-एयर होने से पहले ही घर के अंदर की कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी या उनका नया लुक बाहर लीक हो जाए। हालांकि, पैपराजी और मीडिया के बीच सलमान खान की यह नाराजगी कोई नई बात नहीं है, क्योंकि वे कई मौकों पर अपनी पर्सनल स्पेस का उल्लंघन होने पर अपनी खुलकर राय रख चुके हैं।बिग बॉस 20 के नए सीजन में क्या होने वाला है खास, दर्शकों को क्या-क्या नया देखने को मिलेगा?टेलीविजन के इतिहास में अपने 20वें सफल सीजन में प्रवेश कर रहा 'बिग बॉस' इस बार दर्शकों के लिए मनोरंजन का एक बहुत बड़ा और अनोखा डोज लेकर आ रहा है, जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस बार के घर का इंटीरियर, थीम और कंटेस्टेंट्स के चयन को लेकर मेकर्स ने बेहद चौंकाने वाले और आधुनिक बदलाव किए हैं ताकि शो की टीआरपी हमेशा की तरह सबसे ऊपर बनी रहे। इंडस्ट्री के गलियारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस सीजन में देश के जाने-माने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स, डिजिटल क्रिएटर्स और कुछ बेहद चर्चित हस्तियों को बतौर कंटेस्टेंट लॉक इन किया जा सकता है, जो शो में जबरदस्त ड्रामा पैदा करेंगे। सलमान खान का वीकेंड का वार इस बार और भी ज्यादा धमाकेदार और तीखा होने वाला है, क्योंकि वे गलतियां करने वाले कंटेस्टेंट्स की क्लास लगाने में कभी पीछे नहीं हटते हैं। जैसे-जैसे शो की प्रीमियर डेट नजदीक आ रही है, फैंस का उत्साह दोगुना होता जा रहा है और वे यह जानने के लिए बेताब हैं कि इस बार घर के अंदर कौन-कौन से विवाद और खुलासे देखने को मिलेंगे।बॉलीवुड के दबंग खान की फिटनेस, स्टारडम और बढ़ती उम्र के साथ उनका कभी न कम होने वाला क्रेज क्या है?फिल्मी दुनिया में दशकों से अपनी बादशाहत कायम रखने वाले सलमान खान आज भी बॉलीवुड के सबसे बड़े बॉक्स ऑफिस किंग और चहेते स्टार माने जाते हैं, जिनकी एक झलक पाने के लिए फैंस बेताब रहते हैं। इस उम्र में भी उनकी जबरदस्त फिटनेस, गजब का स्क्रीन प्रेजेंस और युवाओं जैसी ऊर्जा इस बात का प्रमाण है कि वे खुद को मेंटेन रखने के लिए कितनी कड़ी मेहनत करते हैं। बिग बॉस के सेट से सामने आई उनकी ताजा तस्वीरें इस बात को साबित करती हैं कि सलमान आज भी अपने लुक्स और स्टाइल के मामले में नए अभिनेताओं को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। उनके फैंस केवल उनकी फिल्मों का ही नहीं बल्कि हर साल आने वाले बिग बॉस के महीनों का इंतजार करते हैं ताकि वे टीवी पर अपने पसंदीदा स्टार की होस्टिंग का आनंद ले सकें। पैपराजी पर उनका गुस्सा होना या उनका बेबाक अंदाज उनके इसी दबंग मिजाज का हिस्सा है, जिसे उनके चाहने वाले दिल से पसंद करते हैं और यही वजह है कि सलमान खान का स्टारडम समय के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है।
भारतीय राजनीतिक गलियारों में इन दिनों बयानों के तीर और तीखी राजनीतिक बयानबाजी का दौर लगातार जारी है, जिसमें हर दिन नए और दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में निशु आजाद से जुड़े एक संवेदनशील और गर्माए हुए मामले पर देश के जाने-माने और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने एक बेहद चुटीला और आक्रामक बयान दिया है जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। नकवी ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) जैसे संगठनों पर करारा कटाक्ष करते हुए कहा है कि इन दिनों इन लोगों के बीच असली मुद्दों से ध्यान भटकाने और 'काल्पनिक क्रांतिकारी' (Fictional Revolutionary) बनने की एक अजीबोगरीब प्रतियोगिता छिड़ी हुई है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न मंचों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, वैचारिक संघर्ष और कानूनी दांवपेच को लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने खड़े हैं। जब भी समाज में कोई ऐसा संवेदनशील मामला तूल पकड़ता है, तो राजनीतिक दल और मानवाधिकार संगठन तुरंत अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए मैदान में कूद जाते हैं, और नकवी ने इसी दोहरे चरित्र पर सवाल उठाते हुए तीखा तंज कसा है।'काल्पनिक क्रांतिकारी' बनने की इस अंधी दौड़ के पीछे कांग्रेस और सीजेपी की छिपी हुई राजनीतिक रणनीति क्या है?मुख्तार अब्बास नकवी द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द 'काल्पनिक क्रांतिकारी' असल में उन राजनीतिक दलों और वैचारिक संगठनों पर एक करारा तंज है जो जमीन पर किसी वास्तविक जनहित के संघर्ष से कटे हुए हैं, लेकिन सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए खुद को बहुत बड़ा क्रांतिकारी दिखाने की होड़ में लगे रहते हैं। कांग्रेस पार्टी और सीजेपी (CJP) जैसी संस्थाओं पर निशाना साधते हुए नकवी ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि ये लोग केवल उन मुद्दों को हवा देते हैं जिनसे उनकी राजनीतिक या वैचारिक दुकानें चमकती रहें, जबकि आम जनता की वास्तविक परेशानियों से इनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है। जब भी देश में कानून का शासन अपना काम करता है या कोई न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो ये संगठन तुरंत निष्पक्ष जांच पर सवाल उठाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास करने लगते हैं। इस प्रकार की छद्म क्रांतिकारी राजनीति का मुख्य उद्देश्य केवल अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को बचाए रखना और समाज के एक खास वर्ग को भड़काकर अपना उल्लू सीधा करना होता है, जिसे आज की जागरूक जनता भली-भांति समझने लगी है।निशु आजाद से जुड़े विवाद और कानूनी प्रक्रिया पर मुख्तार अब्बास नकवी के बयानों के क्या हैं गहरे मायने?निशु आजाद से जुड़ा यह पूरा मामला पिछले कुछ दिनों से लगातार मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है, जिसमें अभिव्यक्ति के दायरे और सामाजिक सौहार्द को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ जहां इस मामले से जुड़े विभिन्न पक्ष अपने-अपने तरीके से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दल इसमें अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे हुए हैं। मुख्तार अब्बास नकवी ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोग कानून और संविधान के दायरे में रहकर काम करने के बजाय सनसनीखेज बयानबाजी करके समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी न्यायपालिका और कानून व्यवस्था पूरी तरह से स्वतंत्र और सक्षम है, जो हर मामले में निष्पक्षता के साथ उचित निर्णय लेती है, इसलिए किसी को भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए न्याय प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। नकवी का यह बयान इस बात की याद दिलाता है कि लोकतंत्र में विरोध जताने और अपने विचार रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन उसके नाम पर देश की शांति और कानूनी व्यवस्था को ताक पर रखना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।देश की राजनीति में वैचारिक ध्रुवीकरण, बयानबाजी की संस्कृति और जनता की असली उम्मीदों का भविष्य क्या है?आज के समय में भारतीय राजनीति जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, उसमें गंभीर मुद्दों पर बहस होने के बजाय केवल आरोप-प्रत्यारोप और शब्दों के बाण चलाने की संस्कृति हावी होती जा रही है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा सरकार को घेरने के लिए उठाए जाने वाले कदम हों या फिर भाजपा नेताओं द्वारा उन पर किया जाने वाला पलटवार, इन सबके बीच आम आदमी के असली मुद्दे जैसे महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य पीछे छूट जाते हैं। मुख्तार अब्बास नकवी जैसे अनुभवी नेता जब 'काल्पनिक क्रांतिकारी' जैसे कटाक्ष करते हैं, तो वे एक तरह से जनता का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं कि राजनीतिक दल अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए कैसे-कैसे नए नाटक रचते हैं। देश के नागरिकों को अब यह तय करना होगा कि वे इन सतही और नाटकीय बहसों में उलझकर रहना चाहते हैं या फिर विकास, पारदर्शिता और सुशासन के वास्तविक एजेंडे को चुनना चाहते हैं। जब तक राजनीतिक दल जनता को केवल भावनाओं और नारों के सहारे उलझाए रखेंगे, तब तक देश की असली प्रगति में बाधाएं आती रहेंगी, और यही कारण है कि इस तरह के तीखे बयानों का राजनीति में हमेशा एक अलग और गहरा संदेश होता है।
स्वतंत्र भारद्वाज यूजीसी वाले मामले को लेकर खासा चर्चा में आया. सोशल मीडिया पर बीजेपी के कई नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें वायरल हो रही है. जिसमें मनोज तिवारी, सम्राट चौधरी, चिराग पासवान, कपिल मिश्रा सहित अन्य शामिल हैं.
भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के गलियारों में इन दिनों केंद्रीय जांच एजेंसियों—विशेषकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED)—की शक्तियों और उनके बेजा इस्तेमाल को लेकर बहस अपने चरम पर है। देश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने एक बार फिर से जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बेहद तीखा और चर्चित बयान दिया है। उन्होंने अपने हालिया बयान में सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2013 में सीबीआई के लिए इस्तेमाल की गई ऐतिहासिक टिप्पणी 'पिंजरे में बंद तोता' को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि अब यह तोता केवल पिंजरे में बंद नहीं रहा, बल्कि समय के साथ यह एक खतरनाक और आक्रामक 'पिटबुल' कुत्ते का रूप ले चुका है जिसे सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को नोंचने के लिए छोड़ देती है। चिदंबरम का यह बयान देश के राजनीतिक हलकों में आग की तरह फैल गया है और इस पर पक्ष तथा विपक्ष के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। जब देश के सबसे अनुभवी राजनेताओं में से एक इस प्रकार की भाषा का उपयोग करते हैं, तो यह सीधे तौर पर हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं, स्वतंत्र जांच और न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर एक बहुत बड़ा और गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है, जिस पर देश भर में गहन चिंतन किया जा रहा है।सीबीआई और ईडी को और अधिक ताकतवर बनाने के सरकारी प्रयासों पर क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल?पिछले कुछ वर्षों से भारत में मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों से निपटने के नाम पर केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI, ED और IT) के दायरे और उनकी गिरफ्तारी तथा संपत्ति कुर्क करने की शक्तियों में भारी विस्तार किया गया है। सरकार का हमेशा से यह तर्क रहा है कि देश से भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने और आर्थिक अपराधियों को शिकंजे में कसने के लिए इन एजेंसियों के पास कड़े कानूनी हथियार होना बेहद जरूरी है ताकि कोई भी अपराधी कानून की गिरफ्त से बच न सके। हालांकि, इसके विपरीत विपक्ष और कानूनी विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग यह आरोप लगाता रहा है कि इन एजेंसियों को अत्यधिक और अनियंत्रित शक्तियां सौंप देने से लोकतंत्र की मूल भावना ही आहत हो रही है। पी. चिदंबरम और अन्य विपक्षी नेताओं का साफ तौर पर यह कहना है कि जब जांच एजेंसियों के हाथ में असीमित अधिकार आ जाते हैं, तो वे निष्पक्ष जांच करने के बजाय सत्ताधारी दल के राजनीतिक हितों को साधने का एक खुला साधन बन जाती हैं। इस प्रकार की व्यवस्था में न्याय और निष्पक्षता पीछे छूट जाती है और केवल प्रतिशोध की राजनीति का बोलबाला होने लगता है, जो किसी भी स्वस्थ और जीवंत लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत माना जाता है।'पिंजरे के तोते' से लेकर 'पिटबुल' तक के सफर के पीछे एजेंसियों की राजनीतिक स्वतंत्रता पर क्या असर पड़ा है?साल 2013 में देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए उसे 'पिंजरे में बंद तोता' की संज्ञा दी थी, जिसका सीधा मतलब यह था कि वह तोता तो है लेकिन पिंजरे यानी सरकार के इशारों पर ही बोलता है। अब सालों बाद पी. चिदंबरम ने उस रूपक को अपग्रेड करते हुए इसे 'पिटबुल' की संज्ञा दी है, जिसका अर्थ है कि अब यह एजेंसी केवल इशारों पर बोलने वाली नहीं रही, बल्कि अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर किसी पर भी झपटने और उसे लहूलुहान करने की पूरी ताकत रखती है। विपक्षी नेताओं के खिलाफ लगातार हो रही छापेमारी, गिरफ्तारियों और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के बिना जेलों में महीनों तक सड़ने की घटनाओं ने इस बयान को एक प्रकार से सच्चाई का रूप दे दिया है। देश के कई नामी गिरामी वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस बात की वकालत की है कि जब तक जांच एजेंसियों को किसी भी प्रकार के राजनीतिक नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त करके एक स्वतंत्र स्वायत्त आयोग (Independent Commission) के अधीन नहीं लाया जाता, तब तक आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठना लाजमी है। लोकतंत्र में पुलिस और जांच एजेंसियों का काम अपराध की निष्पक्ष जांच करना होना चाहिए, न कि किसी खास राजनीतिक दल के वैचारिक या चुनावी दुश्मनों को ठिकाने लगाने का हथियार बनना।देश के आर्थिक विकास, विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई और लोकतंत्र की साख के बीच संतुलन कैसे बनेगा?एक तरफ जहां सरकार यह दावा करती है कि देश की अर्थव्यवस्था को पारदर्शी बनाने और काले धन पर नकेल कसने के लिए कड़े वित्तीय कानूनों और शक्तिशाली एजेंसियों का होना अनिवार्य है, वहीं दूसरी तरफ इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इन शक्तियों का दुरुपयोग लोकतांत्रिक मूल्यों को दीमक की तरह चाट रहा है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतांत्रिक देश में दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी रहती हैं कि यहां कानून का राज (Rule of Law) किस प्रकार से काम कर रहा है। यदि उद्योगपति, व्यापारी और आम नागरिक यह महसूस करने लगें कि केंद्रीय एजेंसियां किसी निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया के तहत काम करने के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध के तहत छापे मार रही हैं, तो इससे देश के कारोबारी माहौल और अंतरराष्ट्रीय छवि को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। पी. चिदंबरम का यह विरोध केवल एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह इस बात की गंभीर चेतावनी है कि यदि समय रहते इन संवैधानिक और जांच संस्थाओं की गरिमा और उनकी स्वतंत्रता को बचाने के लिए कड़े नियम नहीं बनाए गए, तो आने वाले समय में लोकतंत्र की रूपरेखा पूरी तरह से बिगड़ जाएगी। देश के नागरिकों, बुद्धिजीवियों और न्यायपालिका को मिलकर इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन के बीच एक स्वस्थ संतुलन कैसे स्थापित किया जाए ताकि कानून का शिकंजा अपराधियों पर कसे, न कि निर्दोषों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर।
कम नंबर का ठीकरा टीचर्स पर! मंच पर बुलाकर कराया अपमान, तस्वीरें हुईं वायरल
चीन में छात्रों के खराब परीक्षा परिणाम आने पर कई शिक्षकों को सार्वजनिक रूप से मंच पर खड़ा करके शर्मिंदा किया गया. शिक्षकों के पीछे स्क्रीन पर उनके छात्रों के कम नंबर दिखाए गए और अपमानजनक शब्द भी लिखे गए, घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने शिक्षा विभाग की जमकर आलोचना की.
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर इन दिनों एक ऐसा हैरान करने वाला और खतरनाक भू-राजनीतिक भूचाल आया है जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया खुलासों के अनुसार, पश्चिमी देशों विशेषकर अमेरिका की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शह पर यूक्रेन अब यूरोपीय सीमाओं से निकलकर सीधे एशिया के म्यांमार में एक गुप्त प्रॉक्सी वॉर (परोक्ष युद्ध) को हवा दे रहा है। म्यांमार वर्तमान में एक बेहद गंभीर आंतरिक गृहयुद्ध और राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है, जहाँ देश की सैन्य सरकार (जुंटा) के खिलाफ कई विद्रोही संगठन armed struggle चला रहे हैं। विश्लेषकों का दावा है कि यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों और सैन्य सलाहकारों ने गुप्त रूप से म्यांमार के कुछ विद्रोही गुटों को आधुनिक ड्रोन तकनीक, सैन्य प्रशिक्षण और सामरिक हथियार उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है ताकि वहां की सरकार को अस्थिर किया जा सके। इस परोक्ष युद्ध का मुख्य भू-राजनीतिक उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन और उसके करीबी सहयोगियों की रणनीतिक बढ़त को कमजोर करना है, क्योंकि म्यांमार इस क्षेत्र में बीजिंग के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील गलियारा माना जाता है। जब यूरोप में खुद रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहा यूक्रेन एशिया के इस संघर्ष में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करता है, तो यह पूरी दुनिया को एक तीसरे विश्व युद्ध या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की खतरनाक आग में झोंकने की पूरी क्षमता रखता है।म्यांमार के आंतरिक गृहयुद्ध में विदेशी ताकतों और यूक्रेन की इस खतरनाक दखलंदाजी के पीछे असली भू-राजनीतिक मकसद क्या है?म्यांमार लंबे समय से लोकतांत्रिक संकट, जातीय संघर्षों और सैन्य शासन के कुचक्र में फंसा हुआ है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इसके रणनीतिक चरित्र को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। पश्चिमी महाशक्तियों और विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की यह सोची-समझी रणनीति रही है कि वे दुनिया के उन सभी अहम भू-भागों पर अपना दबाव बनाए रखें जहाँ उनके विरोधी यानी चीन और रूस का प्रभाव ज्यादा है। म्यांमार बंगाल की खाड़ी के मुहाने पर स्थित एक ऐसा सामरिक देश है जहाँ से चीन अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और भारत-मियांमार-थैailand राजमार्ग जैसी परियोजनाओं को संचालित कर रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देश सीधे तौर पर चीन से टकराने से बचते हुए यूक्रेन जैसे मोहरों के जरिए ऐसे देशों में आंतरिक अशांति और प्रॉक्सी वॉर को हवा दे रहे हैं ताकि चीनी हितों को गहरी चोट पहुंचाई जा सके। यूक्रेन जो खुद हथियारों, पैसों और पश्चिमी मदद के लिए तरस रहा है, उसका म्यांमार के विद्रोहियों को सैन्य सहायता देना इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह खेल पर्दे के पीछे बैठे किसी बहुत बड़े वैश्विक खिलाड़ी के इशारे पर खेला जा रहा है। इस तरह के छद्म युद्धों से न केवल म्यांमार की संप्रभुता खतरे में पड़ रही है, बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया का पूरा सुरक्षा ढांचा भी भारी अस्थिरता और अराजकता की ओर धकेला जा रहा है।इस म्यांमार-यूक्रेन प्रॉक्सी संघर्ष की आंच से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्तर-पूर्व राज्यों पर क्या गंभीर असर पड़ सकता है?दिल्ली में बैठे हमारे देश के रक्षा रणनीतिकारों और नीति निर्माताओं के लिए म्यांमार के घटनाक्रम में यूक्रेन की यह घुसपैठ गहरी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि भारत की सीमाएं म्यांमार के साथ सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। भारत के पूर्वोत्तर राज्य—जैसे मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश—अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण म्यांमार के घटनाक्रम से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। यदि म्यांमार में विदेशी ताकतों के इशारे पर प्रॉक्सी वॉर और गृहयुद्ध की आग और अधिक भड़कती है, तो वहाँ के उग्रवादी संगठन और विद्रोही गुट इस अराजकता का फायदा उठाकर भारतीय सीमा के भीतर हथियारों की तस्करी, ड्रग्स की अवैध सप्लाई और शरणार्थियों की घुसपैठ को बहुत ज्यादा बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, भारत की कई महत्वपूर्ण सामरिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं जैसे 'कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट' म्यांमार के ही रास्ते म्यांमार के सितवे बंदरगाह को भारत से जोड़ती हैं, जो हमारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) की रीढ़ हैं। यदि म्यांमार पूरी तरह से विदेशी शक्तियों का अखाड़ा बन जाता है, तो भारत के लिए अपनी सीमाओं की सुरक्षा और इन सामरिक परियोजनाओं को बचाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगा, जिसके चलते भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद पैनी नजर रखनी पड़ रही है।इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका-चीन के इस परोक्ष संघर्ष के बीच भारत को क्यों रहना होगा अत्यधिक सतर्क?वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दुनिया की महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, और म्यांमार इस महान खेल का एक प्रमुख प्यादा बनता जा रहा है। अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी हर हाल में यह चाहते हैं कि म्यांमार और बंगाल की खाड़ी के इलाके में चीन और रूस का प्रभाव कम हो, जबकि चीन इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। इस महाशक्तिशाली संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति हमेशा से 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की रही है, जिसके तहत भारत किसी भी गुट में शामिल हुए बिना अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है। हालांकि, जब यूक्रेन जैसे यूरोपीय देश प्रॉक्सी वॉर के जरिए हमारे पड़ोसी देश की जमीन पर अपनी चालें चलने लगते हैं, तो भारत के लिए तटस्थ रहना और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि भारत को अपनी खुफिया एजेंसियों (RAW और IB) को और अधिक सक्रिय करना होगा ताकि म्यांमार के भीतर चल रही इन गुप्त विदेशी साजिशों की हर गतिविधि की समय रहते सटीक जानकारी मिल सके। यदि भारत इस खतरनाक भू-राजनीतिक चाल से सतर्क नहीं रहता है, तो यह आग हमारे अपने घर की दहलीज तक पहुंच सकती है, जिससे हमारी आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभुत्व को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।
बिना चावल और फर्मेंटेशन के बनाएं 20 ग्राम प्रोटीन वाला उत्तपम, स्वाद ऐसा कि बार-बार खाने का मन करेगा
चावल और फर्मेंटेशन के बिना झटपट बनाएं प्रोटीन से भरपूर उत्तपम. जिम जाने वाले और वजन घटाने वालों के लिए है परफेक्ट.
शादी या रील के लिए उड़ा रहे हैं ड्रोन? भूलकर भी न करें ये गलती, सीधे जा सकते हैं जेल!
शादी या रील्स के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले जरूर जान लें नए नियम. Green, Yellow और Red जोन का समझ लें फर्क, वरना हो सकती है जेल और जुर्माना.
दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश के बाद मौसम का मिजाज बदला और शहरभर में जलभराव से कैसे हालात पैदा हुए
राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों (एनसीआर) में मौसम ने एक बार फिर से ऐसा कड़ा तेवर दिखाया है कि आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। बीती रात से शुरू हुई झमाझम और मूसलाधार बारिश ने कुछ ही घंटों में दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों को पानी-पानी कर दिया, जिससे सड़कों पर समंदर जैसा नजारा देखने को मिल रहा है। ऑफिस जाने वाले कामकाजी लोगों, स्कूली बच्चों और आम नागरिकों को घर से बाहर निकलते ही भयंकर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस मानसून के इस दौर में अचानक से हुई इस भारी बारिश के कारण शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पोल एक बार फिर से खुल गई है, क्योंकि थोड़ी ही देर की बारिश में शहर के मुख्य मार्ग तालाब में तब्दील हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम के तमाम दावों के बावजूद हर साल बारिश के मौसम में यही हाल देखने को मिलता है, जिससे शहर की रफ्तार मानों थम सी जाती है।दिल्ली के प्रमुख मार्गों, चौराहों और अन्डरपास में जलभराव के कारण ट्रैफिक व्यवस्था क्यों पूरी तरह चरमरा गई है?भारी बारिश के चलते दिल्ली-एनसीआर के कई व्यस्त चौराहों, मुख्य सड़कों और अंडरपास में दो से तीन फीट तक पानी भर जाने के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। धौला कुआं, आईटीओ, मिंटो ब्रिज, एम्स गोल चक्कर, आरके पुरम, और गुरुग्राम के एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख हिस्सों पर पानी भर जाने से गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं और वाहन रेंग-रेंगकर चलने को मजबूर हैं। कई जगहों पर बीच सड़क पर गाड़ियां खराब होने के कारण ट्रैफिक का पहिया पूरी तरह से जाम हो चुका है, जिससे लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों का अतिरिक्त समय लग रहा है। ट्रैफिक पुलिस लगातार सोशल मीडिया और रेडियो के माध्यम से लोगों को जलभराव वाले रास्तों से बचने और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दे रही है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण शहर का शायद ही कोई कोना ऐसा बचा हो जो पानी की मार से अछूता रहा हो। इस भयंकर जाम के बीच दोपहिया चालकों और पैदल चलने वालों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें पानी के बीच से गुजरने में भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है।इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट और विमान सेवाओं पर इस मूसलाधार बारिश का क्या गंभीर असर पड़ा है?राजधानी की सड़कों के अलावा देश के सबसे बड़े और व्यस्ततम इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट के परिसर और आसपास के इलाकों में भी भारी बारिश के कारण पानी भर जाने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। एयरपोर्ट के कुछ हिस्सों में जलभराव होने और आसमान में घने बादलों तथा कम विजिबिलिटी (दृश्यता) के कारण विमानों के उड़ानों और लैंडिंग के समय में भारी फेरबदल करना पड़ा है। एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए आग्रह किया है कि वे एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक कर लें ताकि उन्हें किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। कई आने-जाने वाली उड़ानों को खराब मौसम के कारण कुछ समय के लिए होल्ड पर रखना पड़ा या अन्य शहरों की ओर डायवर्ट किया गया, जिससे यात्रियों को घंटों तक एयरपोर्ट के लाउंज में इंतजार करना पड़ा। विमानन सुरक्षा और समय सारणी पर पड़े इस असर ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि चरम मौसम की स्थिति से निपटने के लिए हमारे एविएशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूत और उन्नत बनाने की कितनी सख्त जरूरत है।लोकल प्रशासन, नगर निगम और मौसम विभाग (IMD) की तरफ से आगे के लिए क्या चेतावनी और राहत उपाय जारी किए गए हैं?दिल्ली-एनसीआर में बिगड़े हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गए हैं और जल निकासी के लिए युद्ध स्तर पर पंपों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले कुछ घंटों के लिए भी दिल्ली और आसपास के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है, जिसके चलते ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि बहुत जरूरी न हो तो वे अपने घरों से बाहर निकलने से बचें ताकि सड़कों पर अनावश्यक ट्रैफिक दबाव और भीड़भाड़ से बचा जा सके। नगर निगम के हेल्पलाइन नंबरों पर जलभराव और पेड़ों के गिरने की दर्जनों शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं, जिनका त्वरित समाधान करने के लिए फील्ड कर्मचारियों की विशेष टीमों को तैनात किया गया है। आपदा प्रबंधन दल भी संभावित आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं ताकि किसी भी अनहोनी या दुर्घटना को समय रहते टाला जा सके।इस तरह की मौसमी आपदाओं से निपटने के लिए शहरी योजनाकारों और नागरिकों को भविष्य में क्या सबक सीखने चाहिए?हर साल मानसून या मौसमी बदलाव के दौरान दिल्ली-एनसीआर में होने वाली जलभराव की यह समस्या अब एक गंभीर और स्थाई बीमारी का रूप लेती जा रही है, जिस पर स्थायी विचार करने की जरूरत है। शहरी योजनाकारों (Urban Planners) का मानना है कि जब तक कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके इन महानगरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और आधुनिक ड्रेनेज नेटवर्क को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक हर बारिश शहर की पोल खोलती रहेगी। केवल प्रशासन या सरकार को कोसने के बजाय नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और प्लास्टिक कचरे को नालियों में फेंकने से बचना होगा जो जल निकासी में सबसे बड़ी बाधा बनता है। जब सरकार, स्थानीय निकाय और जागरूक नागरिक मिलकर एक सुनियोजित और पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाएंगे, तभी इस प्रकार की समस्याओं से स्थायी रूप से निजात मिल सकती है और बारिश का सुहाना मौसम लोगों के लिए आफत के बजाय राहत बनकर आ सकता है।
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चॉपिंग बोर्ड पर चाकू के निशानों में गंदगी और नमी जमा हो सकती है. इसलिए इसे सिर्फ पानी से धोना काफी नहीं है. साबुन, गर्म पानी, बेकिंग सोडा और नींबू से इसकी सही सफाई करें, सुखाकर रखें और गहरे कट या दरारें पड़ने पर इसे समय रहते जरूर बदलें.
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इंस्टाग्राम से एक महीने में 20 लाख रुपये कमाने का दावा करने वाली कंटेंट क्रिएटर ने वीडियो में अपना दर्द साझा किया है. साथ ही उसने रील और रियल लाइफ की दुनिया को लेकर भी बात की.
Sergio Gor: भारत-अमेरिका रिश्तों पर बोले सर्जियो गोर, ‘ट्रंप की प्राथमिकता में पीएम मोदी’
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों से कई अन्य देश असहज या ईर्ष्यालु हैं।
एक कार में चलेगा पूरा परिवार, खर्च होगा कम, KIA लाई जबरदस्त कार
भारतीय बाजार में किआ ने अपनी प्रीमियम एसयूवी सोरेंटो को लॉन्च कर दिया है. इसके साथ ही कंपनी ने अपनी प्रीमियम एसयूवी किआ कार्निवल का हाइब्रिड वर्जन भी पेश किया है. ये कार दमदार फीचर्स के साथ आती है. फिलहाल कंपनी इसे डीजल इंजन के साथ बेच रही है. फेस्टिव सीजन से पहले कंपनी हाइब्रिड वर्जन की कीमत का ऐलान कर सकती है.
स्वतंत्र भारद्वाज की हिरासत का विरोध, जुटे हिंदूवादी संगठन के लोग
अब बात जंतर-मंतर पर पिटाई विवाद पर छिड़े संग्राम की. मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने का विरोध शुरू हो गया है. हिंदूवादी संगठन के लोग पार्लियामेंट थाने पर जुट रहे हैं. हिंदूवादी सगंठन का आरोप है कि इस केस में SC/ST एक्ट का दुरुपयोग किया गया है.
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4 सितंबर की शाम रांची-रामगढ़ मार्ग की चुटूपालू घाटी में एक ट्रेलर का अचानक ब्रेक फेल होने से भीषण हादसा हो गया। बेकाबू ट्रेलर ने तीन कारों और एक ट्रक को टक्कर मारी, जबकि एक बाइक भी चपेट में आ गई।
ससुराल वाले मांग रहे थे गोल्ड और पैसे! 3 बच्चों संग किले से कूद कर पूर्व पहलवान ने दी जान
पुलिस और पूर्व पहलवान सह अंतरराष्ट्रीय रेफरी दिनेश गुंड के अनुसार, अश्विनी मराठवाड़ा की एक होनहार पहलवान थीं। उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताओं में 5 गोल्ड और 6 सिल्वर मेडल जीतकर इलाके का नाम रोशन किया था।
धर्मेंद्र के जाने के बाद पहली बार नाचीं हेमा मालिनी, बनीं राधा
बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने इस जन्माष्टमी पर अपने प्रसिद्ध डांस बैले 'राधा रास बिहारी' का प्रदर्शन किया, जो धर्मेंद्र के निधन के बाद उनका पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन था. उन्होंने पारंपरिक पोशाक में शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया और सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लाखों फैंस का दिल जीता.
Unpaid Work Report: रिपोर्ट के मुताबिक, मुफ्त काम करने के मामले में भारतीय सबसे आगे हैं. भारत के 24% कर्मचारी हर हफ्ते 16 घंटे से ज्यादा 'अनपेड वर्क' कर रहे हैं.जानिए स्ट्रेस, वर्क-लाइफ बैलेंस और जॉब चेंज पर इसका क्या असर पड़ रहा है.
वैभव के टीममेट ने रचा इतिहास, अफगानी क्रिकेटर का रिकॉर्ड ध्वस्त
15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट जगत में अपनी बल्लेबाजी से तहलका मचा रखा है. वहीं वैभव सूर्यवंशी के आईपीएल टीममेट लुआन-ड्रे प्रिटोरियस भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रिटोरियस ने नामीबिया के खिलाफ धमाकेदार शतक जड़ा.
बच्चों के जीवन में करना होगा प्रवेश, PM ने टीचरों से किया अपील
शिक्षक दिवस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से कहा कि वे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें बल्कि बच्चों के जीवन को भी समझें. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को हर बच्चे की खूबियों को पहचानना चाहिए, बच्चों का स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना कम करना चाहिए और समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए.
PM Modi का Teachers को संदेश: बच्चों का Screen Time घटाकर Creative बनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस समारोह के तहत अपने आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर उन शिक्षकों से बातचीत की जिन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। प्रधानमंत्री ने समाज में शिक्षकों की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया और पूर्व राष्ट्रपति व शिक्षाविद डॉ. एस. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी, जिनकी जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने अपने X हैंडल पर शिक्षकों के साथ हुई बातचीत का एक वीडियो भी शेयर किया और कहा कि शिक्षक दिवस हमारे समाज में शिक्षकों के अहम योगदान की सराहना करने का दिन है। यह डॉ. एस. राधाकृष्णन को सम्मान देने का दिन भी है। कल जब नेशनल टीचर्स अवॉर्ड जीतने वालों को 7, LKM बुलाया गया, तो क्या हुआ, यह देखिए। इसे भी पढ़ें: Rajasthan में निकाय चुनाव को लेकर BL Santhosh ने BJP कार्यकर्ताओं को दिए जीत के मंत्र अवार्ड जीतने वाले एक टीचर से बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने बच्चों में स्क्रीन के ज़्यादा इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंता के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि स्क्रीन टाइम अब एक तरह की लत बन गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि खेलों में ज़्यादा हिस्सा लेने से बच्चे धीरे-धीरे स्क्रीन के ज़्यादा इस्तेमाल से दूर हो सकते हैं। पीएम मोदी ने साफ़ किया कि खेल से उनका मतलब मैदान पर खेले जाने वाले असली खेलों से है, न कि वीडियो गेम से। उन्होंने बच्चों को क्रिएटिव गतिविधियों में शामिल करने और ऐसे कार्यक्रमों को उनके जीवन का नियमित हिस्सा बनाने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हम बच्चों को जितना ज़्यादा क्रिएटिव कामों में शामिल करेंगे, हमें ऐसे कार्यक्रम बनाने की आदत भी उतनी ही ज़्यादा डालनी चाहिए जो इसे बढ़ावा दें। बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि वे पाठ्यपुस्तकों और एकेडमिक सिलेबस से आगे बढ़कर अपने छात्रों के जीवन से ज़्यादा गहराई से जुड़ें। उन्होंने कहा कि हमें किताबों से बाहर निकलना होगा, हमें सिलेबस से बाहर निकलना होगा, हमें बच्चों के जीवन में शामिल होना होगा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बचपन की क्रिएटिविटी और मासूमियत को बनाए रखने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि बचपन को खत्म नहीं होने देना चाहिए। और बचपन को बनाए रखने का सबसे बड़ा काम शिक्षक ही कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान बॉर्डर के पास 40,000 फीट की ऊंचाई पर भारत का 'शक्ति प्रदर्शन'! भारतीय वायु सेना के NOTAM जारी करते ही इस्लामाबाद में हड़कंप अवार्ड जीतने वाले शिक्षकों ने PM मोदी के साथ अपने अनुभव साझा किए और पढ़ाई को ज़्यादा दिलचस्प बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नए तरीकों के बारे में बताया। एक शिक्षक ने बताया कि कैसे छात्रों को रोज़मर्रा के मुद्दों, जैसे कि खाना, फ़ैसले लेना और घर का बजट, पर अपने माता-पिता का इंटरव्यू लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस गतिविधि से छात्रों में रिपोर्टिंग और सवाल पूछने में दिलचस्पी पैदा करने में मदद मिली है। एक और शिक्षक ने छात्रों का आत्मविश्वास और पब्लिक-स्पीकिंग स्किल बढ़ाने में मदद करने के बारे में बात की। PM मोदी ने शिक्षक से एक अच्छा पब्लिक स्पीकर बनने के लिए टिप्स मांगे, जिस पर शिक्षक ने कहा कि आत्मविश्वास और नियमित अभ्यास ज़रूरी हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

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