राजस्थान के आसमान में इन दिनों बादलों और सूरज के बीच आंख मिचौली का एक अनोखा खेल चल रहा है, जिसने रक्षाबंधन के इस पवित्र और पावन पर्व पर लोगों की उत्सुकता को और अधिक बढ़ा दिया है। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के प्रतीक इस त्योहार पर जहां एक तरफ बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए लंबी यात्राएं कर रही हैं, वहीं मौसम का मिजाज भी पूरे प्रदेश में अलग-अलग रंग बिखेर रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों के अनुसार, इस साल राखी के दिन राजस्थान का मौसम पूरी तरह से एक जैसा नहीं रहने वाला है, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के दो बिल्कुल जुदा रूप देखने को मिलेंगे। कहीं बादलों की छांव और रिमझिम फुहारों के बीच ठंडी हवाएं लोगों के मन को प्रफुल्लित कर रही हैं, तो कहीं तेज धूप और उमस भरी गर्मी लोगों के पसीने छुड़ा रही है। सुहाने मौसम की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर उनके शहर या इलाके में आज बारिश होगी या फिर तीखी धूप का सामना करना पड़ेगा। रेगिस्तानी इलाकों से लेकर मैदानी और पर्वतीय अंचलों तक मौसम की यह लुकाछिपी खेती-किसानी और त्योहार की तैयारियों दोनों को ही प्रभावित कर रही है। पिछले कुछ दिनों से मानसून की सक्रियता में आए उतार-चढ़ाव के कारण बादलों की चाल लगातार बदल रही है, जिसके चलते मौसम विज्ञान केंद्र ने भी नागरिकों को पहले से ही सचेत रहने की सलाह दी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि राजस्थान के किस संभाग और जिले में आज राखी के दिन मौसम कैसा रहने वाला है और क्या कहती है मौसम विभाग की लेटेस्ट रिपोर्ट।जयपुर और शेखावाटी क्षेत्र में उमस के बीच बादलों की आवाजाहीप्रदेश की राजधानी जयपुर और इसके आसपास के शेखावाटी अंचल यानी सीकर, झुंझुनू और चूरू जिलों में आज राखी के दिन मौसम मिला-जुला रूप दिखा रहा है। सुबह के वक्त हल्की धूप निकलने के साथ ही दिन चढ़ने के साथ बादलों और सूरज के बीच लुकाछिपी का दौर शुरू हो चुका है। जयपुर शहर में पिछले दो-तीन दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे लोगों को अभी भारी बारिश के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, हालांकि बीच-बीच में बादलों की छांव राहत जरूर दे रही है। शहर के कुछ चुनिंदा इलाकों में हल्की बूंदाबांदी या बादलों के गरजने की हल्की संभावना जरूर जताई गई है, लेकिन अधिकांश समय उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर जब बहनें अपने भाइयों के घर जाने के लिए तैयार हो रही हैं, तो तापमान में हल्की बढ़ोतरी और नमी के कारण पसीने वाली स्थिति बनी हुई है। शेखावाटी के इलाकों में भी कुछ ऐसा ही हाल है, जहां सुबह की ठंडी हवाओं के बाद दोपहर के वक्त तीखी धूप अपना असर दिखा रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में मानसून की ट्रफ लाइन की स्थिति फिलहाल थोड़ी उत्तर की ओर खिसकी हुई है, जिसके कारण बारिश का जोर थोड़ा कम हुआ है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बनने वाले बादलों के पैटर्न्स के कारण शाम के वक्त मौसम में अचानक बदलाव आने की पूरी उम्मीद है, जिससे त्योहारी बाजारों में खरीदारी के लिए निकलने वाले लोगों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है।पूर्वी राजस्थान और कोटा संभाग में बारिश का दौर जारी रहने की संभावनाराजस्थान के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों की बात करें तो यहां मौसम का मिजाज काफी सुहाना और बारिश वाला बना हुआ है। कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, और उदयपुर संभाग के कई जिलों में आज रक्षाबंधन के दिन हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने के आसार जताए गए हैं। पिछले कुछ दिनों से इन इलाकों में हो रही मानसूनी बारिश ने खेतों की प्यास बुझाने के साथ-साथ आम जनजीवन को भी ठंडक का अहसास कराया है। राखी के दिन जब परिवार के लोग एक साथ मिलकर जश्न मना रहे हैं, ऐसे में आसमान से गिरती बारिश की बूंदें और सोंधी-सोंधी खुशबू त्योहार के आनंद को कई गुना बढ़ा रही है। भरतपुर, धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर के कुछ क्षेत्रों में भी बादलों की घनी चादर छाई हुई है, और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। पूर्वी राजस्थान के किसानों के लिए यह मौसम बेहद अनुकूल माना जा रहा है क्योंकि खरीफ की फसलों को इस वक्त पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है। नदियों और जलाशयों में भी पानी की आवक बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में खुशी का माहौल है। मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान के इन जिलों में येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे गरज-चमक और आकाशीय बिजली के दौरान पेड़ों या खुले स्थानों के नीचे खड़े होने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें ताकि त्योहारी दिन में किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।पश्चिमी राजस्थान और जोधपुर-बीकानेर संभाग में तीखी धूप का प्रकोपदूसरी तरफ, राज्य के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों यानी थार मरुस्थल से जुड़े जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और गंगानगर जैसे जिलों में आज मौसम बिल्कुल विपरीत नजर आ रहा है। इन इलाकों में मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर पड़ी हुई है, जिसके चलते आज राखी के दिन तीखी धूप और गर्म हवाओं का प्रभाव देखने को मिल रहा है। सुबह से ही सूरज के तल्ख तेवर ने लोगों को गर्मी का अहसास कराना शुरू कर दिया था, और दोपहर के समय तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। रक्षाबंधन के इस पर्व पर जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए घरों से बाहर निकल रही हैं, तो पश्चिमी राजस्थान की इस गर्मी में उन्हें छातों और ठंडे पेय पदार्थों का सहारा लेना पड़ रहा है। जैसलमेर और बाड़मेर के कुछ दूर-दराज के इलाकों में तो गर्मी और उमस ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है, क्योंकि यहां बारिश की कोई खास गतिविधि फिलहाल दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, मौसम विभाग का यह भी कहना है कि पश्चिमी अंचल के कुछ हिस्सों में शाम ढलने के बाद जब ठंडी हवाएं चलेंगी, तो तापमान में कुछ गिरावट जरूर दर्ज की जाएगी, जिससे लोगों को राहत मिलेगी। तापमान में इस तरह का अंतर राजस्थान की भौगोलिक विविधता को साफ तौर पर दर्शाता है, जहां एक ही दिन में राज्य के एक कोने में लोग बारिश का आनंद ले रहे हैं, तो दूसरे कोने में तीखी धूप का सामना कर रहे हैं।मौसम विभाग की चेतावनी और आने वाले दिनों में मानसून का नया अपडेटराजस्थान में मौसम के इस बदलते मिजाज के बीच मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने आने वाले दिनों के लिए एक नया अपडेट जारी किया है। विभाग के अनुसार, वर्तमान में मानसून की अक्षीय रेखा अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर चल रही है, जिसके कारण राज्य के कुछ संभागों में बारिश की गतिविधियों में थोड़ी कमी आई है। हालांकि, सितंबर के पहले हफ्ते में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले संभावित कम दबाव के क्षेत्र के कारण राज्य में एक बार फिर से नया मानसूनी तंत्र सक्रिय हो सकता है, जिससे झमाझम बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। आज रक्षाबंधन के दिन जिन जिलों में तीखी धूप खिली हुई है, वहां के लोगों को निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आने वाले दिनों में मौसम फिर से करवट ले सकता है। मौसम विभाग ने पर्व के दिन यात्रा करने वाले सभी नागरिकों से अपील की है कि वे बदलते मौसम को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं। खासकर ग्रामीण और हाइवे पर सफर करने वाले लोग मौसम की पल-पल की अपडेट पर नजर रखें ताकि किसी भी अचानक होने वाली बारिश या आंधी के समय सुरक्षित रह सकें। कुल मिलाकर, राजस्थान में आज राखी का यह त्योहार कहीं बादलों की छांव और रिमझिम फुहारों के बीच तो कहीं खिलती हुई तीखी धूप के साये में बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है, और मौसम का यह विविधतापूर्ण रूप प्रदेश की खूबसूरती को और अधिक बढ़ा रहा है।
राजस्थान में बजने वाली चुनावी रणभेरी के साथ ही सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश के कुल 309 नगरीय निकायों के लिए चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा किए जाने के बाद से ही शहरी इलाकों में राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच हलचल तेज हो गई है। इस बार के चुनाव प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इसमें नगर निगमों से लेकर नगर परिषदों और पालिकाओं की तकदीर तय होनी है। चुनाव आयोग ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कमर कस ली है। जैसे-जैसे तारीखें नजदीक आ रही हैं, प्रत्याशियों ने भी अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। गली-मोहल्लों से लेकर बड़े चौराहों तक हर तरफ चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। इस बार के चुनाव में कई तरह के नए बदलाव और निर्देश भी देखने को मिल रहे हैं, जिनकी जानकारी हर एक मतदाता के लिए होना बेहद जरूरी है ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। आइए जानते हैं कि आपके अपने क्षेत्र में मतदान कब है और इस पूरे चुनाव शेड्यूल में क्या कुछ खास बदलाव किए गए हैं।राजस्थान निकाय चुनाव 2026 का पूरा शेड्यूल और चरणों की जानकारीराज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव इस बार दो मुख्य चरणों में संपन्न कराए जा रहे हैं। प्रशासनिक सुविधा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मतदान की तारीखों का जो नया शेड्यूल तय किया गया है, उसके तहत प्रथम चरण का मतदान 9 सितंबर को होगा, जबकि दूसरे चरण के तहत 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव प्रक्रिया में कुल 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि कुछ चुनिंदा बड़े नगर निगमों और नगर परिषदों के मतदान की तिथियों में स्थानीय और प्रशासनिक समीकरणों को देखते हुए विशेष ध्यान रखा गया है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही संबंधित शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता पूरी तरह से प्रभावी हो चुकी है, जिसके बाद से किसी भी प्रकार की नई घोषणाओं या राजनीतिक फायदों पर रोक लग गई है। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि कामगार और आम नागरिक भी बिना किसी परेशानी के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। इसके बाद सभी चरणों के मतों की गिनती एक साथ 14 सितंबर को की जाएगी, जिसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस शहर की सरकार पर किस दल का कब्जा होने जा रहा है। निकाय प्रमुखों और उपप्रमुखों के चुनाव के लिए भी तिथियां तय कर दी गई हैं, जिससे सितंबर के अंत तक पूरी प्रशासनिक तस्वीर साफ हो जाएगी।नामांकन प्रक्रिया, नाम वापसी और चुनाव चिन्हों का पूरा गणितशहरी निकाय चुनावों की इस सरगर्मी के बीच प्रत्याशियों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रत्याशियों को अपने-अपने वार्डों से पर्चा भरने का मौका दिया गया है। हालांकि, बीच में कुछ छुट्टियां होने के कारण नामांकन के दिनों को लेकर विशेष ध्यान रखना पड़ा है। सभी संबंधित कलेक्ट्रेट कार्यालयों और स्थानीय निकायों के दफ्तरों में नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए विशेष काउंटर बनाए गए हैं, जहां सुबह से ही उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। नामांकन पत्र दाखिल होने के बाद अगले दिन उनकी बारीकी से जांच की जाएगी, ताकि किसी भी अपात्र या त्रुटिपूर्ण आवेदन को समय रहते बाहर किया जा सके। इसके बाद उम्मीदवारों के पास अपने नाम वापस लेने का एक निश्चित समय होगा, जो कि चुनावी समीकरणों को पलटने में अहम भूमिका निभाता है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के ठीक बाद मैदान में डटे अंतिम प्रत्याशियों को चुनाव आयोग की तरफ से उनके अधिकारिक चुनाव चिन्ह यानी सिंबल आवंटित किए जाएंगे। चुनाव चिन्ह मिलते ही चुनावी प्रचार अपने चरम पर पहुंच जाएगा, क्योंकि प्रत्याशियों के पास अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए बहुत कम और सीमित समय बचेगा। राजनीतिक दलों के अलावा इस बार कई निर्दलीय और नए चेहरे भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिससे मुकाबला काफी रोमांचक हो गया है।मतदान के लिए वोटर लिस्ट और पहचान पत्र से जुड़े जरूरी निर्देशकिसी भी चुनाव में वोट डालने के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त यह होती है कि मतदाता का नाम संबंधित क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज हो। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन युवाओं की उम्र 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष पूरी हो चुकी है और यदि उनका नाम किसी कारणवश मतदाता सूची में नहीं जुड़ पाया था, तो उन्हें अपनी औपचारिकताएं पूरी करने का अंतिम अवसर दिया गया था। इसके बाद 31 अगस्त को फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है, जो इस चुनाव के लिए मुख्य आधार बनेगी। मतदान केंद्र पर वोट डालने जाने वाले नागरिकों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य किया गया है। यदि किसी मतदाता के पास मुख्य मतदाता पहचान पत्र यानी एपिक कार्ड उपलब्ध नहीं है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने इसके विकल्प के तौर पर 11 अन्य फोटोयुक्त वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता दी है। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड, स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड या केंद्र-राज्य सरकार द्वारा जारी कर्मचारियों के आधिकारिक पहचान पत्र शामिल हैं। मतदाता इनमें से कोई भी एक मूल दस्तावेज दिखाकर आसानी से अपना वोट डाल सकेंगे। प्रशासन की ओर से सभी मतदाताओं से यह अपील की गई है कि वे किसी भी प्रलोभन या अफवाह से दूर रहकर अपने विवेक का इस्तेमाल करें और बढ़-चढ़कर इस लोकतांत्रिक पर्व में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करें।आचार संहिता, ड्राई डे और सुरक्षा के कड़े प्रशासनिक इंतजामस्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए हैं। आचार संहिता लागू होने के बाद से ही सार्वजनिक संपत्तियों पर पोस्टर-बैनर लगाने और दीवारों पर नारे लिखने जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अलावा चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अशांति को रोकने के लिए निषेधाज्ञा लागू की गई है, जिसके तहत बिना अनुमति के जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने या हथियार लेकर चलने पर सख्त पाबंदी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, एक्स, व्हाट्सएप और यूट्यूब पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि कोई असामाजिक तत्व धार्मिक उन्माद या जातिगत द्वेष फैलाने वाला संदेश न फैला सके। आबकारी नियमों और चुनाव आचार संहिता के तहत मतदान के चरणों को ध्यान में रखते हुए विशेष 'ड्राई डे' (शुष्क दिवस) की घोषणा की गई है। प्रत्येक चरण के मतदान समाप्त होने से ठीक 48 घंटे पहले से लेकर मतदान संपन्न होने तक और मतगणना के दिन पूरे क्षेत्र में शराब की बिक्री, भंडारण और परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस दौरान होटल, बार, पब और देशी-अंग्रेजी शराब के ठेके पूरी तरह बंद रहेंगे। यदि कोई भी व्यक्ति या दुकानदार इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आबकारी अधिनियम के तहत भारी जुर्माने और जेल की सजा जैसी कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून तोड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा ताकि आम जनता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का उपयोग कर सके।
Nepal Flood के बाद Gujarat के 26 लोग लापता, केंद्र से मदद जुटा रही सरकार
नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद गुजरात के लापता लोगों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है। इनमें राज्य के कई प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भी शामिल हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने फंसे लोगों का पता लगाने और उन्हें सहायता पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार तथा विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय तेज कर दिया है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) की ओर से जारी अद्यतन सूची में पहले लापता बताए गए 17 लोगों के अलावा नौ और नाम जोड़े गए हैं। इनमें से कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग या नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास यात्रा कर रहे थे। एसईओसी के अनुसार, लापता लोगों में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में रहने वाले एनआरआई भी शामिल हैं। इन लोगों का संबंध अहमदाबाद, आनंद, राजकोट, वलसाड, सूरत, खेड़ा, अमरेली, गांधीनगर और वडोदरा से है। सूची के मुताबिक, अहमदाबाद से पांच लोग लापता हैं, जिनमें तीन अमेरिकी और दो कनाडाई नागरिक हैं। आनंद से पांच लोग हैं, जिनमें तीन अमेरिकी और दो कनाडाई नागरिक हैं। सूरत से तीन लोग हैं, जिनमें दो अमेरिकी नागरिक और मुंबई का एक निवासी शामिल है। खेड़ा से तीन लोग लापता हैं, जिनमें एक अमेरिकी और दो कनाडाई नागरिक हैं। राजकोट और वलसाड से एक-एक व्यक्ति लापता है। गांधीनगर से चार लोग लापता हैं, जिनमें तीन अमेरिकी और एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है। अमरेली से दो लोग लापता हैं, जिनमें एक अमेरिकी नागरिक है। वडोदरा से दो लोग लापता हैं और दोनों न्यूजीलैंड के नागरिक हैं। बयान के अनुसार, लापता पर्यटकों में से कई नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा कर रहे थे। कुछ अन्य लोगों के बारे में आखिरी जानकारी फ्रेंडशिप ब्रिज तथा रसुवागढ़ी-केरुंग सीमा क्षेत्र या बागमती क्षेत्र के आसपास होने की मिली थी। गुजरात के मंत्री जीतू वाघाणी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि राज्य सरकार बाढ़ से प्रभावित गुजरातियों और अन्य भारतीय नागरिकों की मदद के लिए केंद्र सरकार तथा विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर रही है। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य प्रशासन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं और लापता लोगों से संबंधित सभी जानकारी संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है। वाघाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शाह नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं तथा गुजरात सरकार राज्य के लोगों और उनके परिवारों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभिन्न जिलों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। परेशानी का सामना कर रहे या अपने परिजनों के बारे में जानकारी चाहने वाले लोग राज्य नियंत्रण कक्ष या संबंधित जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं।
पंजाब की फिजा में इन दिनों रोजगार और उम्मीद की एक नई बयार बह रही है। राज्य के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के दरवाजे जिस तेजी से खुले हैं, उसने पिछले कई दशकों का सूखा एक झटके में खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान सूबे के युवाओं को रोजगार के मोर्चे पर एक ऐतिहासिक सौगात दी है। इसी कड़ी में हाल ही में एक और बड़ा मील का पत्थर हासिल करते हुए पंजाब पुलिस के बेड़े में 1,746 नए और ऊर्जावान जवानों को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से इन युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे, जिसके बाद से पूरे राज्य में जश्न का माहौल है। यह कोई आम भर्ती समारोह नहीं था, बल्कि उन हजारों परिवारों की आंखों के आंसू पोंछने का जरिया था जो लंबे समय से अपने बच्चों के भविष्य को लेकर फिक्रमंद थे। इन नियुक्तियों के साथ ही पंजाब सरकार ने अपने उस बड़े चुनावी वादे को भी धरातल पर उतार कर दिखा दिया है, जिसके तहत युवाओं को काबिलियत के दम पर पारदर्शी तरीके से नौकरियां देने का संकल्प लिया गया था। पिछले कुछ सालों में पंजाब से लगातार युवाओं के पलायन की खबरें आ रही थीं, लेकिन रोजगार की इस बहार ने उस चिंताजनक ट्रेंड पर एक मजबूत विराम लगा दिया है। अब युवा विदेशों की ओर देखने के बजाय अपने ही राज्य में रहकर देश और समाज की सेवा करने के साथ-साथ अपने सपनों को नई उड़ान दे रहे हैं।30 लाख रोजगार का आंकड़ा और बदलती हुई पंजाब की तस्वीरपंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अक्सर यह दावा करते रहे हैं कि उनकी सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के हर नौजवान को आत्मनिर्भर बनाना है। आंकड़े खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पिछले कुछ समय में सरकारी और गैर-सरकारी सेक्टर को मिलाकर लगभग 30 लाख रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं। यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में आए भारी बदलाव की कहानी कहता है, जो कभी आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे थे। जब एक घर में सरकारी नौकरी आती है, तो सिर्फ एक व्यक्ति को रोजगार नहीं मिलता, बल्कि पूरी पीढ़ी की गरीबी की रेखा पीछे छूट जाती है। पंजाब में उद्योग, कृषि, आईटी, और विशेष तौर पर कानून व्यवस्था से जुड़े विभागों में बंपर भर्तियां की गई हैं। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले सिस्टम को पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया है। अब सिफारिश और घूसखोरी का दौर खत्म हो चुका है और सिर्फ और सिर्फ योग्यता ही तरक्की का पैमाना बन चुकी है। 30 लाख रोजगार के इस विराट आंकड़े ने पंजाब के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का काम किया है। राज्य के गांवों से लेकर शहरों तक हर तरफ एक सकारात्मक ऊर्जा दिखाई दे रही है। छोटे-छोटे व्यवसायों को भी इससे बढ़ावा मिला है क्योंकि जब युवाओं की जेब में पैसा आता है, तो बाजार की रफ्तार भी खुद-ब-खुद तेज हो जाती है। पंजाब की यह बदलती हुई तस्वीर आज पूरे देश के लिए एक नजीर बन चुकी है और दूसरे राज्य भी इस मॉडल को अपने यहां लागू करने पर विचार कर रहे हैं।पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से लौटा युवाओं का सिस्टम पर विश्वासकिसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी तंत्र पर जनता का भरोसा तभी कायम रहता है जब चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष हो। पंजाब सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से बिना किसी सिफारिश और पर्ची-खर्ची के लाखों नौकरियां दी हैं, उसने युवाओं का खोया हुआ विश्वास वापस लौटा दिया है। पहले के दौर में युवाओं को यह डर सताता रहता था कि बिना राजनीतिक पहुंच या पैसों के सरकारी नौकरी मिलना असंभव है। लेकिन भगवंत मान सरकार ने इस पुरानी और सड़ी-गली व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकने का काम किया है। आज पंजाब में क्लर्क से लेकर कांस्टेबल और पीसीएस अधिकारियों तक की भर्तियां पूरी तरह से डिजिटल और मेरिट के आधार पर हो रही हैं। जब 1,746 नए पुलिस जवानों को नियुक्ति पत्र सौंपे जा रहे थे, तो उनके चेहरों की चमक और आंखों में चमकता आत्मविश्वास इस बात का साफ प्रमाण था कि उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। इस पारदर्शी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब गरीब से गरीब किसान और मजदूर का बेटा भी यह सपना देख सकता है कि वह राज्य के सबसे बड़े पदों पर पहुंच सकता है। पंजाब पुलिस में इन नए जवानों के शामिल होने से जहां एक तरफ विभाग की कार्यक्षमता और ताकत कई गुना बढ़ गई है, वहीं दूसरी तरफ कानून व्यवस्था को भी एक नया संबल मिला है। पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में एक मजबूत और अनुशासित पुलिस बल होना देश की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम है। इन युवाओं के कंधे पर अब न सिर्फ अपने परिवार की जिम्मेदारी है, बल्कि पूरे सूबे की सुरक्षा का जिम्मा भी है।पंजाब में विकास की नई रफ्तार और युवाओं का स्वर्णिम भविष्यरोजगार सृजन के मोर्चे पर पंजाब सरकार द्वारा उठाए गए इन ऐतिहासिक कदमों ने राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान की है। जब युवाओं के पास रोजगार होगा, तो राज्य में अपराध दर में अपने आप गिरावट आएगी और सामाजिक सौहार्द मजबूत होगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल नौकरियां देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्टार्टअप्स और आधुनिक उद्योगों के लिए पंजाब में ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे देश-विदेश की बड़ी कंपनियां राज्य में निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं। इससे रोजगार के नए और अनछुए अवसर पैदा हो रहे हैं। पंजाब का युवा आज पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, डेयरी फार्मिंग, फूड प्रोसेसिंग और डिजिटल सेक्टर में भी अपनी धाक जमा रहा है। सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता और आसान ऋण योजनाओं ने नौजवानों को उद्यमी बनने की राह दिखाई है। 30 लाख रोजगार का यह सफर यहीं रुकने वाला नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में इसके दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की पूरी योजना तैयार कर ली गई है। पंजाब के हर कोने में आज एक ही चर्चा है कि बदलाव की यह बयार अब रुकने वाली नहीं है। जिस प्रकार से सरकार ने युवाओं को प्राथमिकता दी है, उससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य पूरी तरह से सुरक्षित और सुनहरा नजर आ रहा है। पंजाब की यह पावन धरती एक बार फिर से अपनी पुरानी शान और शौकत को वापस पाने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है, जहां हर चेहरे पर मुस्कान और हर हाथ में काम है।
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, दोनों दलों के बीच पुरानी दूरियां मिटाने और साथ आने की कोशिशों के बीच एक बहुत बड़ा सियासी पेच फंस गया है。 सामने आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी आलाकमान और राज्य के नेता सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री पद का चेहरा (CM Candidate) मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं, जिसके कारण दोनों दलों के बीच चल रही अंदरूनी बातचीत में एक नई बाधा खड़ी हो गई है।गठबंधन की चर्चाओं के बीच नेतृत्व का विवादपंजाब की सियासत में पिछले कुछ महीनों से इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि क्या अकाली दल और बीजेपी एक बार फिर साल 2020 से पहले वाले पुराने रिश्तों को बहाल करेंगे। कृषि कानूनों के विरोध और किसान आंदोलन के चलते दोनों पार्टियों की ढाई दशक पुरानी पुरानी दोस्ती टूट गई थी, जिसके बाद से दोनों दलों ने अपने-अपने बलबूते पर ही चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई थी। लेकिन बदले हुए राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए एक बार फिर से दोनों दलों के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट शुरू हुई है। दिल्ली में हाल ही में हुई कुछ उच्च-स्तरीय बैठकों के बाद से इन अटकलों को और हवा मिली है, परंतु जैसे ही सीटों और नेतृत्व के बंटवारे पर बात पहुंची, मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।सीटों के बंटवारे और बड़े भाई की भूमिका पर रस्साकशीइस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में केवल मुख्यमंत्री के चेहरे का विवाद ही नहीं, बल्कि विधानसभा सीटों के बंटवारे का फार्मूला भी एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। अकाली दल के नेताओं का यह स्पष्ट तर्क रहा है कि पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उनकी पार्टी को गठबंधन के भीतर 'बड़े भाई' की भूमिका मिलनी चाहिए। अकाली खेमे का मानना है कि पंथिक पार्टी होने के नाते और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पुरानी मजबूत पकड़ के आधार पर उन्हें ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए। दूसरी ओर, बीजेपी का अंदरूनी धड़ा इस पुरानी फॉर्मूले पर राजी होने के लिए तैयार नहीं है। भगवा पार्टी का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों में पंजाब के अंदर उसका सांगठनिक आधार काफी मजबूत हुआ है और शहरी के साथ-साथ कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी उसकी स्थिति पहले से बेहतर हुई है। ऐसे में बीजेपी कम सीटों पर समझौता करने के मूड में नहीं है और वह बराबरी या अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में ज्यादा हिस्सेदारी चाहती है।बीजेपी का स्टैंड और सामूहिक नेतृत्व का विकल्पभारतीय जनता पार्टी के भीतर एक मजबूत धड़ा यह मान रहा है कि गठबंधन की स्थिति में भी चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का कोई चेहरा घोषित नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी का रुख यह है कि पहले राजनीतिक और चुनावी प्रदर्शन पर पूरी तरह फोकस किया जाना चाहिए तथा चुनाव के परिणाम आने के बाद ही आम सहमति से विधायक दल के नेता या नेतृत्व पर कोई अंतिम फैसला लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, सरकार बनने की स्थिति में उपमुख्यमंत्री पद के फार्मूले को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं चल रही हैं, ताकि दोनों दलों के बीच सत्ता संतुलन को साधा जा सके। हालांकि, सुखबीर सिंह बादल को सीधे तौर पर सीएम उम्मीदवार के रूप में स्वीकार न करने का बीजेपी का यह कड़ा रुख अकाली दल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अकाली पार्टी अपने शीर्ष नेतृत्व को ही प्रोजेक्ट कर मैदान में उतरना चाहती है।राजनीतिक भविष्य और आगे की राहपंजाब की सियासत में आम आदमी पार्टी (आप) की मजबूत मौजूदगी और कांग्रेस की सक्रियता के बीच यदि अकाली दल और बीजेपी आपस में हाथ मिलाते हैं, तो यह मुकाबला निश्चित रूप से काफी दिलचस्प हो जाएगा। लेकिन गठबंधन की यह गाड़ी पटरी पर तभी उतरेगी जब दोनों दल अपनी-अपनी सियासी महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर किसी व्यावहारिक समझौते पर पहुंचेंगे। एक तरफ जहां अकाली दल अपने अस्तित्व और खोए हुए जनाधार को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं बीजेपी भी पंजाब में अपने पैर जमाने के लिए एक बड़े क्षेत्रीय सहयोगी की तलाश में है। ऐसे में देखना यह होगा कि क्या शीर्ष स्तर पर हो रही इन बैठकों में सीएम चेहरे के इस पेच को सुलझाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकल पाता है या फिर दोनों दल एक बार फिर अकेले ही अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने का जोखिम उठाते हैं।
भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक परंपराओं में जब भी कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर मुखर होते हैं, तो सरकार और यूनियनों के बीच खींचतान होना एक आम बात बन जाती है। पंजाब राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ऐसा ही बेहद गरमाया हुआ मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विभिन्न सरकारी विभागों और सेवाओं से जुड़े कर्मचारी संगठनों को बेहद दो-ूक और स्पष्ट संदेश दिया है। अपनी मांगों को मनवाने के लिए अक्सर अनिश्चितकालीन हड़तालों, धरने-प्रदर्शनों और कामकाज ठप करने की संस्कृति पर करारा प्रहार करते हुए सीएम भगवंत मान ने दो-ूक शब्दों में यह साफ कर दिया है कि एक तरफ बातचीत का मेज सजा होना और दूसरी तरफ जनता को ताले लटकाकर हड़ताल करना एक साथ कभी नहीं चल सकता। मुख्यमंत्री के इस सख्त और अडिग रुख के बाद से राज्य की राजनीति और कर्मचारी यूनियनों के भीतर एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है, क्योंकि सरकार ने अब यह तय कर लिया है कि लोकहित और प्रशासनिक अनुशासन को किसी भी कीमत पर दांव पर नहीं लगने दिया जाएगा।कर्मचारी यूनियनों की हड़ताल संस्कृति और जनता की मुश्किलेंकिसी भी लोकतांत्रिक राज्य में अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठाना हर नागरिक और कर्मचारी का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जब यह अधिकार आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो उस पर सवाल उठना लाजिमी हो जाता है। पंजाब में पिछले कुछ समय से देखा जा रहा था कि छोटी-छोटी प्रशासनिक मांगों या नीतिगत बदलावों को लेकर विभिन्न विभागों के कर्मचारी आए दिन हड़ताल पर चले जाते थे, जिससे सरकारी अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, परिवहन सेवाओं और राजस्व कार्यालयों में आने वाले आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जनता के टैक्स के पैसों से वेतन पाने वाले कर्मचारी जब अपनी जिद के चलते दफ्तरों में ताले लगा देते हैं, तो सबसे ज्यादा पिसता आम गरीब इंसान है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसी जमीनी और संवेदनशील मुद्दे पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कर्मचारी संगठनों की इस कार्यशैली को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया है और उन्हें यह अहसास कराया है कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है, न कि किसी खास यूनियन की मनमानी के प्रति।मुख्यमंत्री भगवंत मान का दो-ूक संदेश और स्पष्ट चेतावनीजब कर्मचारी संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा और साथ ही अपनी हड़ताल जारी रखने की जिद पर अड़ा रहा, तब सीएम भगवंत मान ने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में दो-ूक शब्दों में उन्हें खरी-खरी सुना दी। मुख्यमंत्री ने दो टूक लहजे में कहा कि सरकार हर उस जायज मांग पर विचार करने और उसका समाधान निकालने के लिए चौबीस घंटे तैयार है जो जनहित में हो, लेकिन बातचीत की मेज पर बैठने के साथ-साथ जनता के काम का बहिष्कार करना और हड़ताल का डंडा चलाना सरकार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि या तो कर्मचारी यूनियनों को बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता चुनना होगा या फिर प्रशासनिक नियमों के तहत सख्त कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री के इस कड़े और निर्णायक रुख ने यह साबित कर दिया कि वे राज्य में कानून के राज और प्रशासनिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं।प्रशासन और यूनियनों के बीच बढ़ रहा गतिरोधमुख्यमंत्री के इस तीखे बयान के बाद से पंजाब के प्रशासनिक हलकों और विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के बीच गतिरोध काफी बढ़ गया है। कई प्रमुख कर्मचारी नेताओं ने सरकार के इस रुख को तानाशाही करार देते हुए यह चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे। हालांकि, सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस बात को लेकर पूरी तरह से स्पष्ट है कि अब राज्य की व्यवस्था को ब्लैकमेलिंग या अनावश्यक दबाव की राजनीति से मुक्त कराया जाना बेहद जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में पंजाब सरकार ने जिस प्रकार से प्रशासनिक सुधारों और जनता को मिलने वाली सेवाओं को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है, उसमें इस तरह की बार-बार होने वाली हड़तालें सबसे बड़ा रोड़ा बन रही थीं। यही वजह है कि सरकार अब यूनियनों के सामने झुकने के बजाय दो-ूक संवाद और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण की नीति पर आगे बढ़ रही है।लोकतंत्र में संवाद और जनता के अधिकारों का संतुलनलोकतांत्रिक व्यवस्था की असली खूबसूरती संवाद (Dialogue) और आपसी सहमति में निहित होती है, न कि टकराव और हड़तालों की राह पर चलने में। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा उठाया गया यह कदम भले ही इस समय कर्मचारी संगठनों के बीच नाराजगी का कारण बना हो, लेकिन आम जनता और राज्य के प्रबुद्ध वर्ग द्वारा इसकी सराहना की जा रही है। एक कल्याणकारी राज्य में सरकार का यह कर्तव्य होता है कि वह अपने कर्मचारियों के हितों की रक्षा करे, लेकिन उससे भी बड़ा कर्तव्य यह सुनिश्चित करना होता है कि राज्य के करोड़ों आम नागरिकों को समय पर बुनियादी सेवाएं मिलती रहें। यदि कर्मचारी और सरकार दोनों मिलकर संवाद के रास्ते को प्राथमिकता दें, तो बिना जनता को परेशान किए हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार के इस कड़े संदेश के बाद कर्मचारी संगठन अपने आंदोलन की रणनीति में किस प्रकार के बदलाव करते हैं।
झारखंड की राजधानी रांची से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है, जहां चिकित्सा जगत में दहशत का पर्याय बन चुके एक बड़े और सनसनीखेज रंगदारी मामले के मुख्य आरोपी को पुलिस ने आखिरकार धर दबोचा है। रांची के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर से अपनी जान बचाने के एवज में पांच करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती की मांग की गई थी, और जब डॉक्टर ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो आरोपी ने उन्हें एक-दो बार नहीं बल्कि कुल 42 बार फोन करके लगातार हत्या की धमकियां दी थीं। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने न केवल झारखंड के मेडिकल एसोसिएशन बल्कि पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया था, क्योंकि अपराधियों के इस तरह के दुस्साहस से शहर के डॉक्टर और व्यापारी वर्ग काफी डरे हुए थे। रांची पुलिस और एंटी-एक्सटॉर्शन सेल की संयुक्त कार्रवाई के बाद आखिरकार इस शातिर अपराधी तक पहुंचने में सफलता हासिल हुई, जिसके बाद से पूरे इलाके में चर्चा का बाजार गर्म है और पुलिस की इस कार्रवाई की चहुंओर प्रशंसा की जा रही है।रांची में डॉक्टरों की सुरक्षा और बढ़ते रंगदारी के मामलों की खौफनाक हकीकतझारखंड की राजधानी रांची पिछले कुछ समय से अपराधियों और कुख्यात गैंगस्टरों के निशाने पर रही है, जहां अक्सर व्यवसायियों और डॉक्टरों को निशाना बनाकर करोड़ों की रंगदारी मांगी जाती है। इस ताजा मामले में जब एक नामी डॉक्टर को अज्ञात नंबरों से लगातार धमकियां मिलने लगीं, तो उनका पूरा परिवार और अस्पताल प्रबंधन गहरे मानसिक तनाव में आ गया था। अपराधियों का दुस्साहस इस हद तक बढ़ चुका था कि वे डॉक्टर के क्लिनिक और घर की रेकी करने के साथ-साथ उन्हें लगातार यह अहसास करा रहे थे कि वे हर वक्त उनके रडार पर हैं। डॉक्टरों जैसे बुद्धिजीवी वर्ग के खिलाफ इस तरह के अपराध न केवल समाज की कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि किस प्रकार शातिर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल करके पुलिस को चकमा देने की कोशिश करते हैं। रांची पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ा और अपराधियों की इस पूरी चेन को तोड़ने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।42 बार फोन कॉल और जान से मारने की खौफनाक धमकियांजांच के दौरान पुलिस के हाथ जो तकनीकी साक्ष्य लगे, उन्होंने खुद पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। मुख्य आरोपी ने डॉक्टर पर दबाव बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी और उसने महज कुछ ही दिनों के भीतर अलग-अलग वर्चुअल नंबरों और इंटरनेट कॉल्स के जरिए कुल 42 बार डॉक्टर को फोन किया था। हर कॉल में पांच करोड़ रुपये की फिरौती की मांग दोहराई जाती थी और यह चेतावनी दी जाती थी कि अगर पुलिस को सूचना दी गई या पैसे नहीं पहुंचाए गए, तो डॉक्टर और उनके परिवार के सदस्यों को दुनिया से मिटा दिया जाएगा। इस तरह के मानसिक प्रताड़ना और खौफ के माहौल के बीच डॉक्टर ने हिम्मत दिखाते हुए तुरंत रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और स्थानीय थाने से संपर्क किया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और तकनीकी सर्विलांस सेल की मदद से कॉल्स की लोकेशन ट्रेस करना शुरू कर दिया, जो अंततः सफलता तक पहुंच गई।पुलिस की विशेष टीम द्वारा मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी का पूरा ऑपरेशनरांची पुलिस और साइबर सेल की तकनीकी टीम ने दिन-रात एक करके उन डिजिटल सुरागों का पीछा किया जिनका इस्तेमाल रंगदारी मांगने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने झारखंड के विभिन्न ठिकानों के अलावा पड़ोसी राज्यों में भी अपनी खुफिया इकाइयों को सक्रिय किया, ताकि मुख्य सरगना को दबोचा जा सके। आखिरकार पुलिस को पुख्ता सुराग हाथ लग गए और एक गुप्त सूचना के आधार पर रांची के एक संदिग्ध इलाके में दबिश देकर मुख्य आरोपी को धर दबोचा गया। पुलिस पूछताछ में आरोपी के पास से वे मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद कर लिए गए हैं जिनका इस्तेमाल डॉक्टर को धमकी देने के लिए किया गया था। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और यह भी खुलासा किया है कि इस साजिश में उसके कुछ अन्य स्थानीय सहयोगी भी शामिल थे, जिनकी तलाश में अब पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।डॉक्टरों और व्यापारियों में राहत की सांस, पुलिस महकमे की सराहनामुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही रांची के डॉक्टरों, नर्सिंग होम संचालकों और व्यापारिक संगठनों ने चैन की सांस ली है। इस गिरफ्तारी से अपराधियों को एक कड़ा संदेश गया है कि कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड चैप्टर और स्थानीय डॉक्टरों ने पुलिस प्रशासन की इस त्वरित और सराहनीय कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त किया है, साथ ही यह मांग भी की है कि शहर के सभी प्रमुख चिकित्सकों और व्यवसायियों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता किया जाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में शामिल किसी भी अन्य अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और बहुत जल्द सभी को अदालत के कटघरे में खड़ा करके कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की वारदातों को दोहराने की कोई हिम्मत न कर सके।
बिजली परियोजना में काम करने काठमांडू गए थे, सदमे में डूबा परिवार; वतन वापसी और मदद के लिए लगाई गुहार
कुदरत का कहर जब अपने विकराल रूप में सामने आता है, तो इंसान की बसाई हुई दुनिया पलभर में खंडहर में तब्दील हो जाती है। पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण और खौफनाक बाढ़ और लैंडस्लाइड (Landslide) की प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें सैकड़ों लोगों के हताहत होने और हजारों के बेघर होने की दर्दनाक खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच झारखंड की राजधानी रांची से एक बेहद मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली खबर प्रकाश में आई है, जिसने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है। रांची के रहने वाले रामप्रसाद नामक एक आम श्रमिक, जो अपनी आजीविका चलाने और परिवार का पेट भरने के लिए काठमांडू के पास किसी पनबिजली परियोजना (Hydroelectric Project) में मजदूरी करने गए थे, इस भयंकर बाढ़ की चपेट में आने के बाद से पूरी तरह लापता बताए जा रहे हैं। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो उनके घर-परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो चुका है और उन्होंने झारखंड सरकार तथा भारत सरकार से अपने बेटे को सुरक्षित वापस लाने या उसकी तलाश के लिए तुरंत मदद की गुहार लगाई है।रामप्रसाद का नेपाल जाने का सफर और रोजी-रोटी की मजबूरीकिसी भी साधारण परिवार के मुखिया या युवा के लिए अपने घर-परिवार से दूर दूसरे देश या राज्य में कमाने के लिए जाना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं होता, लेकिन पेट की आग इंसान से सब कुछ करवा देती है। रांची के एक छोटे से ग्रामीण या शहरी परिवार से ताल्लुक रखने वाले रामप्रसाद भी अपने घर की आर्थिक तंगी और बदहाली को दूर करने की उम्मीद में कुछ महीने पहले ही नेपाल गए थे। काठमांडू के समीप चल रही एक बड़ी बिजली परियोजना (हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट) में उन्हें मजदूरी का काम मिला था, जिसके जरिए वे नियमित रूप से अपने परिवार का खर्च चला रहे थे। उनके परिजनों का कहना है कि रामप्रसाद बेहद मेहनती और सीधे स्वभाव के व्यक्ति थे, जो हर हफ्ते अपने घर फोन करके परिवार का हालचाल लिया करते थे। लेकिन नेपाल में अचानक बदले मौसम और आसमान से बरसी आफत के बाद से उनका फोन अचानक बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह से टूट गया, जिससे घर वालों की रातों की नींद उड़ गई।नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही का खौफनाक मंजरपड़ोसी देश नेपाल में हाल ही के दिनों में मानसून की बेरुखी और लगातार हुई भारी मूसलाधार बारिश के चलते नदियां अपने उफान पर आ गई थीं, जिससे कई इलाकों में भयंकर बाढ़ आ गई और बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ। पर्वतीय इलाकों में पहाड़ों के दरकने और पानी के तेज बहाव ने बड़े-बड़े पुलों, सड़कों और निर्माणाधीन परियोजनाओं को अपनी आगोश में ले लिया। काठमांडू और उसके आसपास के क्षेत्रों में हालात इतने बदतर हो गए थे कि प्रशासन के लिए भी राहत और बचाव कार्य चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। रामप्रसाद जिस बिजली परियोजना स्थल पर काम कर रहे थे, वह इलाका भी इस तबाही के केंद्र के बिल्कुल नजदीक बताया जा रहा है। स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जलप्रलय में कई मजदूर और कर्मचारी या तो पानी के तेज बहाव में बह गए या फिर मलबे के नीचे दब गए, जिससे वहां काम कर रहे अन्य प्रवासी मजदूरों के परिवारों में भी भारी दहशत फैल गई है।परिजनों का दर्द और शासन-प्रशासन से लगाई गई मदद की गुहारजैसे ही रांची में रह रहे रामप्रसाद के परिजनों को नेपाल की इस भीषण आपदा और उसमें उनके बेटे के लापता होने की खबर मिली, पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, और हर आने जाने वाले शख्स से वे यहीि गुहार लगा रहे हैं कि किसी तरह उनके घर का चिराग सुरक्षित वापस लौट आए। परिवार वालों ने झारखंड सरकार के जिला प्रशासन, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा देश के विदेश मंत्रालय (MEA) को पत्र लिखकर यह अपील की है कि नेपाल सरकार और वहां की स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर रामप्रसाद की खोजबीन जल्द से जल्द शुरू की जाए। परिजनों का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है कि रामप्रसाद उस वक्त सुरक्षित स्थान पर जा पाए थे या फिर इस प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गए, और यह अनिश्चितता उनके दिल को अंदर से खोखला कर रही है।विदेश मंत्रालय और दूतावास की भूमिका की उम्मीदइस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय आपदाओं में जब देश का कोई नागरिक विदेश में लापता हो जाता है, तो केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास (Indian Embassy in Nepal) की जिम्मेदारी सबसे अहम हो जाती है। झारखंड के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय से यह मांग की है कि नेपाल में फंसे या लापता हुए भारतीय श्रमिकों की सूची को सार्वजनिक किया जाए और राहत कार्यों में तेजी लाई जाए। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास लगातार नेपाल प्रशासन के संपर्क में है और आपदा प्रभावित क्षेत्रों से लापता लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहा है। रांची के इस परिवार की निगाहें हर वक्त टेलीविजन स्क्रीन और फोन पर टिकी हुई हैं कि कब कोई अधिकारी उन्हें यह शुभ समाचार दे कि रामप्रसाद बिल्कुल सुरक्षित हैं और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला यह हादसारामप्रसाद के लापता होने की यह घटना केवल एक परिवार का व्यक्तिगत दुख नहीं है, बल्कि यह उन लाखों प्रवासी मजदूरों की कठोर वास्तविकता को भी बयां करती है जो अपने दो वक्त की रोटी के लिए देश-विदेश की कठिन परिस्थितियों में काम करने को विवश हैं। जब भी कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आती है, तो सबसे ज्यादा मार इन्हीं गरीबों और कामगारों पर पड़ती है जिनके पास सुरक्षा के पर्याप्त साधन नहीं होते। रांची के इस पीड़ित परिवार के आंसू और उनकी उम्मीदें इस बात की गवाही दे रही हैं कि इंसान के लिए अपनों की सलामती से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। पूरा झारखंड इस समय रामप्रसाद की सुरक्षित वापसी के लिए दुआएं मांग रहा है, और हर किसी की यही प्रार्थना है कि यह परिवार एक बार फिर से अपनी खुशियों को वापस पा सके।
क्या फिर तिब्बत से आने वाला है एक और जल-सैलाब? इस बांध ने बढ़ाई टेंशन
नेपाल में आए फ्लैश फ्लड के बाद एक और जल-प्रलय का संकट बन गया है. रिपोर्ट्स में सामने आया है कि अब एक ऐसी प्राकृतिक झील बन गई है, जो खतरे का कारण बन सकती है.
Abhishek Banerjee समेत 3 TMC नेताओं पर Kolkata में FIR दर्ज, 13 गिरफ्तार
कोलकाता में कामाक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में झड़प को लेकर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी और दो अन्य नेताओं के खिलाफ तीन प्राथमिकी दर्ज की गईं और 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बनर्जी के कार्यालय के निजी सुरक्षा गार्ड, उनके समर्थकों और पार्टी के कुछ नेताओं की बृहस्पतिवार को पुलिस और कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के साथ झड़प हो गई थी। वे अधिकारियों को कामाक स्ट्रीट स्थित इमारत में घुसने और एक ‘‘अवैध’’ होर्डिंग को हटाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारी ने बताया कि कोलकाता पुलिस के कर्मचारियों और कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के अधिकारियों के काम में बाधा डालने और धमकी देने के आरोपों पर ये मामले दर्ज किए गए हैं। कोलकाता पुलिस के अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन और हुमायूं कबीर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एक प्राथमिकी केएमसी के विज्ञापन विभाग के अधिकारी की शिकायत पर दर्ज की गई जबकि दूसरी प्राथमिकी नगर निकाय के अनुरोध पर दर्ज की गई।’’उन्होंने बताया कि तीसरी प्राथमिकी एक पुलिस सार्जेंट की शिकायत पर दर्ज की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि अज्ञात लोगों ने कर्मचारियों के काम में बाधा डाली और सरकार द्वारा उन्हें दिया गया वॉकी-टॉकी छीन लिया। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है।’’गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है।
सीआईएसएफ हवलदार से मांगी थी रिश्वत, गृह मंत्रालय से जुड़े 3 अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार; महकमे में हड़कंप
झारखंड के दो सबसे प्रमुख और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों रांची और धनबाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन ब्रांच ने आधी रात को एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई इस कार्रवाई में सीबीआई की टीम ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक हवलदार से रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय (MHA) से जुड़े तीन उच्च पदस्थ अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इस अचानक हुई छापेमारी से न केवल स्थानीय प्रशासनिक महकमे में बल्कि सुरक्षा बलों और गृह मंत्रालय के संबंधित विभागों में भी भारी हड़कंप मच गया है। सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने रांची और धनबाद के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर रिश्वत की राशि बरामद की और आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।सीबीआई की आधी रात की कार्रवाई और घटना का पूरा सचझारखंड में सरकारी तंत्र और सुरक्षा प्रतिष्ठानों में जारी भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए सीबीआई की यह कार्रवाई एक बड़ी मिसाल मानी जा रही है। धनबाद और रांची में सीबीआई की धनबाद स्थित एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) को काफी समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निचले स्तर के कर्मचारियों और जवानों का शोषण कर रहे हैं। इसी कड़ी में सीआईएसएफ के एक पीड़ित हवलदार ने सीबीआई से लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि गृह मंत्रालय और सीआईएसएफ के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े तीन अधिकारी उनके विभागीय मामले, सेवा पुस्तिका के निस्तारण और अनुकूल पोस्टिंग/सत्यापन के नाम पर भारी-भरकम रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत की शुरुआती गोपनीय जांच में सीबीआई ने पाया कि आरोप पूरी तरह से सत्य और गंभीर प्रकृति के हैं, जिसके बाद सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया।सीआईएसएफ हवलदार से रिश्वतखोरी का मामला: कैसे बिछाया गया जालपीड़ित हवलदार की शिकायत के आधार पर सीबीआई की टीम ने आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक बेहद शातिर और अचूक जाल बिछाया। तय रणनीति के मुताबिक पीड़ित हवलदार को केमिकलयुक्त भारतीय मुद्रा (फिनोलफ्थलीन पाउडर लगे नोट) देकर आरोपियों द्वारा बताए गए ठिकाने पर भेजा गया। जैसे ही सीआईएसएफ हवलदार ने रांची और धनबाद के सीमावर्ती इलाके या तय स्थान पर पहुंचकर रिश्वत की रकम अधिकारियों को सौंपी, पहले से ही सादे कपड़ों में मुस्तैद सीबीआई की टीम ने तुरंत धावा बोल दिया। सीबीआई के अधिकारियों ने मौके पर ही तीनों अफसरों को रंगे हाथों पकड़ लिया और उनके हाथों को केमिकल घोल में धुलवाकर रिश्वत लेने के अकाट्य साक्ष्य जुटाए। घोल का रंग गुलाबी होते ही यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो गया कि रिश्वत की रकम इन्हीं अधिकारियों द्वारा स्वीकार की गई थी।रांची और धनबाद में ताबड़तोड़ छापेमारी और दस्तावेजों की जब्तीगिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की कई टीमों ने एक साथ रांची और धनबाद स्थित आरोपियों के सरकारी कार्यालयों, निजी आवासों और संभावित छिपने के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। यह छापेमारी देर रात से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक चलती रही। छापेमारी के दौरान सीबीआई के हाथों कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील दस्तावेज लगे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपियों के ठिकानों से बेनामी संपत्तियों के कागजात, बैंक खातों की पासबुक, कई डिजिटल उपकरण (लैपटॉप और मोबाइल) तथा भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई है। सीबीआई अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि क्या इन अधिकारियों ने इससे पहले भी अन्य सीआईएसएफ कर्मियों या आम नागरिकों से इसी प्रकार डरा-धमकाकर या काम अटकाकर रिश्वत की वसूली की थी।गृह मंत्रालय और सुरक्षा तंत्र में हड़कंप: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंससीआईएसएफ जैसे अनुशासित अर्धसैनिक बल और गृह मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का नाम रिश्वतखोरी के इस संगीन मामले में सामने आने से प्रशासनिक हलकों में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीआईएसएफ देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों और कोयला खदानों की सुरक्षा में तैनात रहता है, ऐसे में इसके आंतरिक प्रशासनिक तंत्र में इस प्रकार के भ्रष्टाचार का उजागर होना सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक चिंता का विषय है। हालांकि, सीबीआई की इस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली या उच्च पद पर क्यों न बैठा हो, वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता। गृह मंत्रालय ने भी इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।कानून के शिकंजे में आरोपी: अदालत में पेशी और रिमांड की तैयारीरंगे हाथों पकड़े गए तीनों अधिकारियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की टीम ने धनबाद और रांची स्थित दफ्तरों में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया है। इसके बाद सीबीआई इन्हें धनबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत (Special CBI Court) में पेश करने जा रही है। सीबीआई के वकीलों का कहना है कि वे अदालत से आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग करेंगे ताकि इस रिश्वतखोरी के सिंडिकेट से जुड़े अन्य तारों, बिचौलियों और उच्च अधिकारियों की संलिप्तता का पूरा सच सामने लाया जा सके। इस मामले की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इसमें और भी कई बड़े नामों के सामने आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
'तेरा कुत्ता टॉमी?' रिवीलिंग ड्रेस में कंगना, कुनिका ने कसा तंज
कंगना रनौत पर अब कुनिका सदानंद ने निशाना साधा है. कंगना अपने एक पुराने रक्षाबंधन एड में वन ऑफ शोल्डर ड्रेस पहने नजर आईं. राखी के एड में कंगना के इस तरह की ड्रेस पहनने पर कुनिका सदानंद ने उनपर तंज कसा है, क्योंकि कुछ दिन पहले कंगना ने कृति की ड्रेस पर सवाल उठाए थे.
घर नहीं बची मिठाई? 1 कटोरी बेसन से बनाएं टेस्टी दानेदार बेसन बर्फी
Besan Burfi Recipe: अगर आपके घर में भी रक्षाबंधन की हड़बड़ में मिठाई खत्म हो गई या फिर आप कुछ अलग खाना चाह रहे हैं तो यहां हम आपको घर में पड़े बेसन से टेस्टी बेसन बर्फी बनाने की रेसिपी बता रहे हैं.
'सुंदर एंजेल जैसी दिखती हो' कहकर IIM अहमदाबाद में छात्रा से छेड़छाड़
IIM अहमदाबाद कैंपस में MBA छात्रा ने फ़ूड डिलीवरी बॉय पर अश्लील हरकत और अभद्र इशारे करने का आरोप लगाया है. शिकायत के कुछ घंटों बाद वस्त्रापुर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. पढ़ें पूरी कहानी.
सिंह राशि वालों को मिलेगा शुभ समाचार, आपके लिए कल कैसा रहेगा दिन?
Kal Ka Rashifal 29 August 2026: सिंह राशि वाले कल विवेक के साथ आगे बढ़ें. प्रियजनों का साथ परिस्थितियों को अनुकूल बनाएगा. जरूरी कामों में तेजी आएगी और जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाने का प्रयास रहेगा. कामकाज को बेहतर बनाने के साथ सेहत का भी ध्यान रखें.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित प्रतिष्ठित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय संस्थान (JPNIC) को लेकर सूबे की राजनीति में एक बार फिर सेवानियों और जुबानी जंग का एक नया दौर शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और राज्य सरकार के उस कदम पर बेहद तीखा और आक्रामक हमला बोला है, जिसमें जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने या लीज पर देने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने सरकार की इस नीति पर सीधा तंज कसते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने केवल सरकारी संपत्तियों को ही नहीं, बल्कि समाजवादी आंदोलन के महान नायक लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम और उनके सम्मान को भी बाजार में बेच दिया है। जेपीएनआईसी का यह पूरा प्रोजेक्ट हमेशा से समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक खींचतान का केंद्र रहा है, क्योंकि सपा सरकार के कार्यकाल में बने इस भव्य भवन को लेकर दोनों दलों के अपने-अपने दावे और आरोप-प्रत्यारोप रहे हैं। हालिया घटनाक्रम के बाद से एक बार फिर यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है और विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह से आक्रामक हो चुके हैं।जेपीएनआईसी परियोजना का इतिहास और राजनीतिक महत्वलखनऊ के गोमती नगर विस्तार क्षेत्र में स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) की परिकल्पना जब साल 2013-14 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए की गई थी, तो इसका उद्देश्य इसे देश और दुनिया का एक अत्याधुनिक सांस्कृतिक और कन्वेंशन सेंटर बनाना था। इस विशाल परिसर में आधुनिक ऑडिटोरियम, स्विमिंग पूल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और लोकनायक जेपी को समर्पित एक भव्य संग्रहालय (Museum) का निर्माण किया जाना था, ताकि देश की युवा पीढ़ी उनके आदर्शों और आपातकाल के खिलाफ उनके संघर्ष से प्रेरणा ले सके। लेकिन जैसे ही उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और साल 2017 में बीजेपी की सरकार आई, इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम लगभग ठप सा पड़ गया। सत्ता पक्ष का हमेशा से यह तर्क रहा है कि इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है, जबकि समाजवादी पार्टी का यह स्पष्ट आरोप है कि बीजेपी सरकार ने केवल राजनीतिक द्वेष और पूर्वाग्रह के चलते इस ऐतिहासिक धरोहर को खंडहर में तब्दील होने के लिए छोड़ दिया है।लीज पर देने के प्रस्ताव पर क्यों भड़के अखिलेश यादवहाल ही में जब शासन स्तर पर यह चर्चा तेज हुई कि जेपीएनआईसी के रखरखाव और संचालन के लिए इसे किसी निजी कंपनी या पीपीपी (Public-Private Partnership) मॉडल के तहत लीज पर दिया जा सकता है, तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि जो सरकार अपने दम पर एक भव्य और ऐतिहासिक स्मारक को संभाल नहीं सकती, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। अखिलेश ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण वह शख्सियत थे जिन्होंने देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था, और आज उन्हीं के नाम पर बने संस्थान को व्यावसायिक लाभ के लिए बेचा जा रहा है। समाजवादी पार्टी का मानना है कि जेपीएनआईसी कोई आम कमर्शियल प्रॉपर्टी नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के वैचारिक इतिहास का एक अहम हिस्सा है, जिसे किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।बीजेपी सरकार का पक्ष और प्रशासनिक तर्कदूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और प्रशासनिक अधिकारियों का इस पूरे मामले पर अपना एक अलग और तकनीकी दृष्टिकोण है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जेपीएनआईसी का निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है और यदि इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया, तो वहां लगी करोड़ों रुपए की मशीनरी और ढांचा पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। सरकार का तर्क है कि इसे पीपीपी मॉडल या लीज पर देने से न केवल इस परिसर का बेहतर रखरखाव और आधुनिकीकरण संभव हो पाएगा, बल्कि राज्य सरकार के खजाने पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ भी कम होगा। प्रशासनिक अमले का यह भी दावा है कि निजी क्षेत्र के आने से इस कन्वेंशन सेंटर का व्यावसायिक उपयोग बेहतर तरीके से हो सकेगा, जिससे लखनऊ के पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, राजनीतिक दबाव और समाजवादी पार्टी के विरोध के चलते सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और इस पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।लखनऊ की राजनीति पर इस विवाद का दूरगामी असरउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित जेपीएनआईसी को लेकर छिड़ा यह ताजा विवाद आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर राजनीतिक अस्मिता और वैचारिक प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है और उनका कहना है कि वे सरकार के इस जनविरोधी और विरासत बेचने वाले फैसले का सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर विरोध करेंगे। दूसरी तरफ, बीजेपी सरकार विकास और पारदर्शी संचालन के अपने दावों के साथ आगे बढ़ रही है। इस खींचतान के बीच एक बात तो बिल्कुल साफ है कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण का नाम एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की चुनावी और वैचारिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है, और जनता इस बात पर पैनी नजर रखे हुए है कि इतिहास की इन महान धरोहरों का भविष्य आखिरकार किस दिशा में आगे बढ़ता है।
यूपी बोर्ड: अब APAAR ID बनेगी छात्रों की डिजिटल पहचान
अब छात्रों का स्कूली रिकॉर्ड फाइलों से निकलकर उनकी डिजिटल ID से जुड़ेगा. यूपी बोर्ड की इस नई पहल से मार्कशीट और जरूरी दस्तावेज संभालना आसान होगा. जानिए छात्रों को क्या मिलेगा फायदा.
पहाड़ हो या मैदान... पाकिस्तान के टैंक पर कहीं से भी होगा अटैक, भारत खरीदेगा ये खतरनाक वेपन
भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी में है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसकी पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के रक्षा सहयोग में बड़ा कदम बताया है.
शहजाद पूनावाला ने पैसों के कारण छोड़ी भाजपा, पहले कौन सी जॉब करते थे
टीवी डिबेट में लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी का पक्ष रखते नजर आने वाले शहजाद पूनावाला अब अपनी राहें अलग कर चुके हैं। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि अब वह राजनीति से दूर होकर जॉब करने जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अब तक नहीं साफ किया है कि अगली पारी कौन सी होगी।
Bulandshahr Road Accident: डंपर से टकराई बस, बच्ची समेत 2 की मौत और 24 घायल
बुलंदशहर जिले के थाना खुर्जा नगर क्षेत्र में शुक्रवार तड़के सड़क हादसे में एक बच्ची और एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब साढ़े चार बजे दिल्ली से कानपुर जा रही रोडवेज बस शिकारपुर कट के पास आगे चल रहे डंपर से टकरा गई। हादसे में राधिका (9) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बबली (32) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे की सूचना पर जिलाधिकारी कुमार हर्ष और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दुर्घटना के कारणों की जानकारी ली। इसके बाद अधिकारियों ने कैलाश अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और चिकित्सकों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि हादसे में 24 लोग घायल हुए हैं। कुछ को सरकारी और कुछ को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गंभीर रूप से घायल चार लोगों को अलीगढ़ रेफर किया गया है। सभी घायलों का इलाज चल रहा है।
E20 की जगह नहीं आएगा E10 पेट्रोल, BPCL को क्यों देनी पड़ी सफाई
पिछले दिनों कई जगहों पर चर्चा हो रही थी कि देश में ई20 पेट्रोल की जगह ई10 पेट्रोल आ सकता है. इन अटकलों को खारिज कर दिया गया है. BPCL ने साफ किया है कि मौजूदा E20 पेट्रोल को E10 से बदलने की कोई प्लानिंग नहीं है. इस पूरी चर्चा की शुरुआत एक बयान के बाद हुई थी. आइए जानते हैं ई10 और ई20 फ्यूल का ये मामला क्या है.
9वीं की छात्रा ने दी जान, महंगे फोन को लेकर दिहाड़ी मजदूर मां से हुआ था विवाद
विशाखापट्टनम के कांचरापालम इलाके में एक 15 साल की छात्रा ने महंगा स्मार्टफोन न मिलने पर मां से बहस के बाद अपनी जान दे दी. लड़की पिछले कई दिनों से महंगा फोन मांग रही थी, लेकिन मजदूरी करने वाली उसकी मां आर्थिक तंगी के चलते फोन नहीं दिला पाईं.
16 की उम्र... 12वीं में पढ़ते हैं, अपने पिता को देते हैं 2 लाख की सैलरी
केरला के 16 साल की उम्र के अजू आज एक एआई कंपनी के मालिक हैं और अपने पिता को एक कर्मचारी के तौर पर 2 लाख रुपये की सैलरी देते हैं. साथ ही वे 12वीं क्लास में भी पढ़ाई करते हैं.
35 रुपये किलो मिलेगा प्याज, दिल्ली में 40 लोकेशन पर मोबाइल वैन
दिल्ली में लगातार बढ़ रही प्याज की कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. नासिक से 456 मीट्रिक टन प्याज लेकर विशेष 'कांदा एक्सप्रेस' दिल्ली पहुंची है. प्याज को 9 केंद्रीय भंडारों में भेजा जाएगा. इसके बाद 40 जगहों पर मोबाइल वैन के जरिए इसे 35 रुपये किलो में बेचा जाएगा.
मुस्कान हत्याकांड: आरोपी इमरान का एनकाउंटर, पुलिस ने क्यों मारी गोली?
पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में 21 वर्षीय छात्रा और मॉडल मुस्कान की चाकू मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी इमरान को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन पुलिस और इमरान के बीच क्या हुआ
नेपाल में कुदरत की मार के बीच इंसानियत शर्मसार
नेपाल में भीषण बाढ़ के बीच एक महिला के शव से सोने की बालियां चोरी करने का 41 सेकंड का वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में दो लोग शव से बालियां निकालते दिखे। सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद नेपाल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
नेपाल के पावर प्लांट में काम करने गया शख्स लापता, परिजनों में कोहराम
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच झारखंड के पलामू जिले का एक शख्स कई दिनों से लापता है. हैदरनगर प्रखंड के बडंडा बरवाडीह गांव के रहने वाले 50 वर्षीय महेंद्र विश्वकर्मा नेपाल के बाणेश्वर स्थित एक हाइड्रो पावर प्लांट में फैब्रिकेटर का काम करते थे. अचानक उनसे संपर्क टूटने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई है.
83 लाख रुपये की Google की जॉब छोड़ दी... फिर पंजाब लौटकर क्या किया?
गूगल की करीब 83 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर पंजाब लौटे मंतज सिंह सिद्धू की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है. उन्होंने अपने चचेरे भाई के साथ ऑर्गेनिक खेती का ऐसा मॉडल शुरू किया, जिसमें शहरों में रहने वाले परिवारों को खेत का एक हिस्सा अलॉट कर उनके लिए सब्जियां उगाई जाती हैं.
Sultanpur में दुर्घटनावश गोली चलने से सपा के पूर्व MLA Santosh Pandey का गार्ड घायल
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर में दुर्घटनावश गोली चल जाने के कारण समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक संतोष पांडेय का निजी सुरक्षा गार्ड घायल हो गया। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि घटना कोतवाली नगर क्षेत्र के गोला घाट इलाके में हुई। पुलिस के मुताबिक घटना बृहस्पतिवार रात की है जब अवधेंद्र मिश्रा (34) के पैर में गोली लग गयी। उन्हें सुलतानपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भेज दिया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पूर्व विधायक रक्षाबंधन मनाने अपनी बुआ के घर गए थे। इस दौरान सीढ़ियां चढ़ते समय मिश्रा का गोलियों से भरा असलहा सीढ़ी से टकरा गया, जिससे अचानक गोली चल गई और सुरक्षा गार्ड के पैर में लग गई। नगर के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) राघवेंद्र सिंह ने बताया कि घायल का बयान दर्ज कर लिया गया है और घटना के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
सिर्फ 2 साल की राजनीति और PM पद की रेस में विजय की एंट्री, सर्वे ने बढ़ाई राहुल गांधी की चिंता!
अभिनेता से राजनेता बने विजय को राजनीति में आए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन एक नए सर्वे ने उन्हें देश के संभावित प्रधानमंत्री चेहरों की चर्चा में ला दिया है। सर्वे में विजय को 9.2 प्रतिशत लोगों ने अगला प्रधानमंत्री देखने की इच्छा जताई। उनसे आगे नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी रहे
सस्ते में बना लें 250 वाला ऑरिगेनो, पास्ता-पिज्जा का बढ़ेगा स्वाद
How to Make Oregano: पिज्जा, पास्ता, गार्लिक ब्रेड या सैंडविच का असली इटैलियन स्वाद उसके ऊपर छिड़के जाने वाले ऑरिगेनो की वजह से आता है. लेकिन बाजार इसकी छोटी सी कांच की शीशी 150 से 250 रुपये में मिलती है. ऐसे में यहां हम आपको घर में कम पैसे में महंगा ऑरिगेनो बनाने का तरीका बता रहे हैं.
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद एक बार फिर खतरे की घंटी बज गई है। शुक्रवार को नेपाल में बाढ़ को लेकर नया अलर्ट जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि तिब्बत की तरफ एक और झील टूट गई है, जिसके बाद पानी का बहाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। अधिकारियों ने ...
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ FIR, होर्डिंग हटाने को लेकर हुई थी पुलिस से झड़प; 13 लोग गिरफ्तार
आपको बता दें कि होर्डिंग हटाने के दौरान कार्यालय के भीतर पुलिस, निगम अधिकारियों और तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और जमकर हंगामा हुआ।
Dehradun के थानी गांव में महिलाओं ने Drugs के खिलाफ लाठी थामकर रातभर पहरा दिया
ध्रुव मिश्रादेहरादून, 28 अगस्त देहरादून के ओल्ड मसूरी रोड पर बसे थानी गांव में शाम ढलते ही एक असामान्य तस्वीर दिखाई देती है। जिन हाथों में दिनभर घर की जिम्मेदारियां होती हैं, उन्हीं हाथों में रात होते-होते लाठियां आ जाती हैं। कोई महिला खाना बनाकर निकली है, तो कोई बच्चों को सुलाकर और कोई नौकरी से लौटने के बाद लाठियां थामे सड़क पर आ गई है। इनका मकसद एक है - अपने गांव की गलियों को नशे के कारोबार से बचाना। गांव में शाम के बाद किसी भी अनजान व्यक्ति को रोककर वे कुछ आसान सवाल पूछती हैं, जैसे - आप कहां जा रहे हैं, आप किससे मिलने आए हैं और आप यहां क्यों आए हैं। इतना ही नहीं संदेह होने पर उन्हें आगे जाने से रोक दिया जाता है। पहाड़ियों के बीच बसा थानी गांव पहली नजर में शांत और खूबसूरत इलाका लगता है। चारों ओर हरियाली, ठंडी हवा और शांत गलियां हैं। लेकिन इसी खूबसूरती के बीच लगा एक पोस्टर यहां की दूसरी कहानी सुनाता है। इस पोस्ट पर लिखा है, ‘‘भांग-गांजा प्रतिबंधित है। बेचने और खरीदने वालों पर कार्रवाई हो सकती है।’’इसी पोस्टर के आसपास कई बार महिलाएं लाठी-डंडे लेकर पहरा देती दिखाई देती हैं। उन्हें जो भी संदिग्ध लगता है, उसे रोककर पूछताछ करती हैं और जिनके बारे में लगता है कि वे मादक पदार्थ के लिए गांव की ओर जा रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया जाता है। यह किसी सरकारी अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं द्वारा ‘नारी जागृति संगठन’ के बैनर तले शुरू की गई निगरानी व्यवस्था है। स्थानीय निवासी सुधा बधानी बताती हैं कि एक समय स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित होने लगा था। उन्होंने कहा, ‘‘सड़क पर आना मुश्किल हो गया था। हम टहलने तक नहीं निकल पाते थे। बच्चे दुकानों तक नहीं जा सकते थे। बाहर निकलने में डर लगता था।’’महिलाओं का दावा है कि पास की एक बस्ती में लंबे समय से नशीले पदार्थ बिकने की शिकायतें रही हैं और इन्हें खरीदने आने वाले लोग थानी गांव की सड़क का इस्तेमाल रास्ते के रूप में करते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान समस्या और बढ़ी। शुरुआत में महिलाओं ने कार्रवाई के लिए पुलिस और प्रशासन से संपर्क किया। शिकायतें की गईं और आवेदन दिए गए। हालांकि, सुधा बताती हैं कि जब हालात नहीं सुधरे तो महिलाओं ने खुद पहरा देने का फैसला किया। वह कहती हैं, ‘‘पहले लगा कि यह हमारा काम नहीं बल्कि पुलिस-प्रशासन का है। लेकिन जब पानी सिर के ऊपर चला गया तो हमें खुद निकलना पड़ा।’’करीब दो महीने पहले शुरू हुआ यह अभियान अब गांव की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। महिलाओं की अलग-अलग टोलियां निगरानी करती हैं। किसी संदिग्ध व्यक्ति के दिखते ही महिलाओं के व्हाट्सएप समूह में संदेश जाता है, ‘‘सब पहुंचो।’’इसके बाद जो महिला जहां होती है, अपना काम छोड़कर निकल पड़ती है। इस मुहिम में करीब 20 साल की युवतियों से लेकर 60-70 साल की महिलाएं तक शामिल हैं। दिन में घर संभालने वाली महिलाएं शाम की जिम्मेदारी लेती हैं, जबकि नौकरीपेशा महिलाएं रात में पहरा देती हैं। कभी यह निगरानी आधी रात तक चलती है और कभी उससे भी आगे। स्थानीय निवासी ललित धीमान बताते हैं कि इसके लिए लगभग पाली जैसी व्यवस्था बन गई है। उनका दावा है कि अभियान के शुरुआती दिनों में एक दिन में 100 तक लोगों को इलाके में जाने से रोका गया, हालांकि अब संख्या काफी कम हो गई है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों को लेकर है। अनसुइया रौतेला कहती हैं, ‘‘हम सब मां हैं। हम नहीं चाहते कि किसी दूसरी मां के बच्चे की जिंदगी भी नशे की वजह से खराब हो।’’उनका कहना है कि कई बार महिलाओं को अपशब्द सुनने पड़ते हैं, धमकियां मिलती हैं और झगड़े का खतरा भी रहता है, लेकिन वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रौतेला ने कहा, ‘‘एक साल लगे या दो साल, हम इसे पूरी तरह खत्म होने तक जारी रखेंगे।’’‘नारी जागृति संगठन’ की अध्यक्ष सुनीता शर्मा कहती हैं कि स्थिति तब गंभीर हो गई जब बच्चों और बुजुर्गों का सड़क पर निकलना मुश्किल होने लगा। उनका आरोप है कि कुछ लोग घरों तक पहुंचकर नशे के बारे में पूछने लगे थे। इसके बाद महिलाओं ने बैठक कर संगठन बनाया और निगरानी शुरू की। गांव की निवासी रीता का कहना है कि विरोध के कारण महिलाओं को गालियां और धमकियां भी मिलती हैं और उनके बीच विवाद पैदा करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि अगर हम आपस में टूट गए तो यह मुहिम भी टूट जाएगी।’’महिलाएं यह भी स्पष्ट करती हैं कि वे पुलिस की जगह लेने नहीं निकली हैं। पुलिस की गश्त और कार्रवाई होती रही है और कुछ संदिग्ध लोगों को पुलिस के हवाले भी किया गया है। फिर भी सवाल बना हुआ है कि किसी गांव की महिलाओं को अपने बच्चों, घरों और गलियों को सुरक्षित महसूस कराने के लिए आधी रात तक पहरा क्यों देना पड़ रहा है? थानी की महिलाएं मानती हैं कि सिर्फ नशीले पदार्थ बेचने वालों पर कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक नशे की मांग रहेगी, कोई न कोई नया रास्ता तलाश लिया जाएगा। इसलिए उनकी निगरानी खरीदने और बेचने वाले दोनों पर है।
ISI के लिए जासूसी करते थे पति-पत्नी, दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने ISI नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा किया है. ISI के लिए जासूसी के आरोप में दिल्ली पुलिस ने पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है. साहिल और समीरा नाम के ये दोनों जासूस सैन्य ठिकानों की तस्वीरें पाकिस्तान भेज रहे थे. हैडलर्स दोनों को जानकारी के बदले पैसे देते थे.
Amit Thackeray की कैब ड्राइवरों को चेतावनी, कहा- मराठी नहीं बोली तो होगी पिटाई
मराठी भाषा के नियम को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे ने चेतावनी दी है कि जो ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर सिर्फ़ हिंदी में बात करने की ज़िद करेंगे, उनकी पिटाई की जाएगी। MNS नेता का यह बयान तब आया जब महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों को काम-काज लायक मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ड्राइवर संगठनों के प्रतिनिधियों ने और समय की मांग की थी, क्योंकि इस सेक्टर में अलग-अलग उम्र और शिक्षा-दीक्षा वाले लोग काम करते हैं। MNS प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने कहा कि अगर ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों के हिंदी में बात करने या यात्रियों के साथ बदतमीज़ी से पेश आने की शिकायतें मिलीं, तो उनकी पार्टी कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा अगर हमें पता चला कि कोई ऑटो-रिक्शा ड्राइवर हिंदी में बात कर रहा है या बदतमीज़ी से पेश आ रहा है, तो हम उसकी पिटाई करेंगे। अगर आप लोगों को परेशान करेंगे, तो आपकी पिटाई होगी। लोगों से यह मत कहिए कि उन्हें UP की भाषा या हिंदी बोलनी होगी। हम मराठी में बात करेंगे। इतना तो आप समझते ही होंगे। इसे भी पढ़ें: मराठी अस्मिताबोध की नई अभिव्यक्ति ठाकरे ने कामकाज के लायक मराठी सीखने के लिए एक साल का समय और देने के फ़ैसले को लेकर भी फडणवीस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठी भाषा के बजाय उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से जुड़ी राजनीतिक बातों को ज़्यादा अहमियत दी जा रही है। उन्हें 10 साल का एक्सटेंशन दें। उन्हें 15 साल का एक्सटेंशन दें। हम समझ गए हैं कि आपको मराठी भाषा और हमारे राज्य से कितना लगाव है। ठाकरे ने आगे कहा आप गुजरात, पंजाब या दक्षिण भारत में जाएं - हर जगह लोग अपनी भाषा से जुड़े होते हैं। अब, क्योंकि यूपी में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए आप एक साल का एक्सटेंशन दे रहे हैं। इसे भी पढ़ें: अब Mumbai के Taxi-Auto Drivers को मराठी सीखने के लिए पूरे 365 दिन, Fadnavis का फैसला यह एक साल का एक्सटेंशन ऐसे समय में दिया गया है जब राज्य सरकार के ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के नियम को कानूनी चुनौती दी गई है। चार कैब ड्राइवरों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी है। महाराष्ट्र सरकार ने 12 अगस्त से कमर्शियल पैसेंजर गाड़ियों के ड्राइवरों - जिनमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवर शामिल हैं - के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया था।
Gen-Z पर रार, रक्षाबंधन पर प्यार; बाबा रामदेव को बड़ा भाई बताने के पीछे कंगना का पॉलिटिकल प्रेम?
रक्षाबंधन के मौके पर कंगना रनौत ने बाबा रामदेव को अपना बड़ा भाई बताया है। उन्होंने कहा कि इस त्योहार पर पुरानी बातों को भूल जाना चाहिए। कंगना ने कहा, उन्हें रामदेव की मिठाई और प्रेम दोनों स्वीकार है।
‘अगली बार वोट मांगने आऊंगा तो पानी नहीं भरेगा’, अमित शाह का वादा
गांधीनगर सांसद अमित शाह ने बोपल, घुमा, आंबली और शेला इलाकों में जुलाई की बारिश से हुए जलभराव पर लोगों से मुलाकात की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगली बार वोट मांगने से पहले यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी और 30 इंच बारिश में भी पानी नहीं भरेगा.
भारतीय राजनीति के फलक पर जब भी देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों, वैचारिक पुरुषों और राष्ट्र निर्माताओं की बात आती है, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम सबसे शीर्ष पर लिया जाता है। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बेहद महत्वपूर्ण और वैचारिक कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी के जीवन दर्शन, उनके विचारों और देश के प्रति उनके अगाध प्रेम को याद करते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। गृह मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि महात्मा गांधी केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के ही पैरोकार नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, उसकी मूल आत्मा और नैतिक मूल्यों के भी सबसे बड़े रक्षक थे। बापू के जीवन के एक बेहद गहरे और अनछुए पहलू को सामने रखते हुए अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में स्पष्ट रूप से यह माना था कि जबरन या प्रलोभन देकर किया जाने वाला धर्म परिवर्तन समाज के लिए एक गंभीर पाप और नैतिक पतन के समान है। गृह मंत्री के इस ओजस्वी और विचारोत्तेजक भाषण के बाद से देश भर के वैचारिक गलियारों और राजनीतिक मंचों पर महात्मा गांधी के उन विचारों पर एक बार फिर से गंभीर चर्चा शुरू हो गई है, जिन्हें आज की आधुनिक और बदलती हुई दुनिया में प्रासंगिक माना जा रहा है।महात्मा गांधी का वैचारिक फलसफा और धर्म की परिभाषामहात्मा गांधी के विचारों का दायरा केवल अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन या अहिंसा के सत्याग्रह तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका समाज सुधार का दृष्टिकोण बहुत ही व्यापक और गहरा था। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान बापू के उन संस्मरणों को याद किया जिसमें उन्होंने धर्म और अध्यात्म को लेकर अपनी बेहद स्पष्ट और खरी राय रखी थी। बापू का हमेशा से यह मानना था कि हर व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और अपने मार्ग पर चलने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन किसी भी प्रकार का लालच देकर, धोखे से या वैचारिक दबाव बनाकर किसी का धर्म परिवर्तन कराना न केवल मानवीय मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि यह देश की सामाजिक समरसता को तोड़ने का भी एक कुत्सित प्रयास है। महात्मा गांधी ने अपने दौर में भी इस बात की पुरजोर वकालत की थी कि असली धर्म इंसानियत, सत्य और प्रेम सिखाता है, न कि जबरन थोपे गए वैचारिक बदलाव। गृह मंत्री ने आज की पीढ़ी को यह याद दिलाया कि हमें बापू के इन मूल सिद्धांतों को समझकर समाज में आपसी भाईचारा और सांस्कृतिक सुरक्षा को बनाए रखना चाहिए।सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता पर गृह मंत्री का जोरआज के समय में जब देश और दुनिया विभिन्न प्रकार के वैचारिक संघर्षों और सांस्कृतिक पहचान की बहसों से गुजर रही है, तब देश के गृह मंत्री द्वारा महात्मा गांधी के विचारों को इस रूप में सामने लाना बहुत बड़ा संदेश देता है। अमित शाह ने अपने भाषण में विस्तार से बताया कि कैसे महात्मा गांधी ने हमेशा देश के हर वर्ग, हर जाति और हर संप्रदाय के लोगों को एक सूत्र में पिरोकर रखने का ऐतिहासिक कार्य किया था। उन्होंने देश की विविधता को उसकी सबसे बड़ी ताकत माना और कभी भी ऐसी ताकतों को बर्दाश्त नहीं किया जो समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना चाहती हों। गृह मंत्री ने कहा कि बापू का सपना एक ऐसे भारत का निर्माण करना था जहां हर नागरिक बिना किसी डर और प्रलोभन के अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ गर्व से जी सके। उनके द्वारा धर्म परिवर्तन को लेकर कही गई बातें इस बात का प्रमाण हैं कि वे भारतीय संस्कृति की जड़ों से कितनी गहराई से जुड़े हुए थे और वे देश की आत्मा को किसी भी बाहरी या आंतरिक दबाव के आगे झुकने देना नहीं चाहते थे।राजनीतिक परिदृश्य और बयानों के गहरे निहितार्थअमित शाह द्वारा महात्मा गांधी के इन विचारों का सार्वजनिक मंच से जिक्र किए जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके विचार परिवार ने हमेशा से देश के उन महापुरुषों और नायकों को आगे बढ़ाने का काम किया है जिन्होंने राष्ट्रवादी सोच और भारतीय मूल्यों की रक्षा की है। ऐसे में गृह मंत्री द्वारा बापू के विचारों को इस स्पष्टता के साथ रखना यह साबित करता है कि राष्ट्रपिता के विचार किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं हैं, बल्कि वे पूरे देश की साझा विरासत हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के बयानों से देश की युवा पीढ़ी को यह समझने में आसानी होती है कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का असली दृष्टिकोण क्या था और उन्होंने किस प्रकार के स्वतंत्र, स्वाभिमानी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत का सपना देखा था। यह बयान वर्तमान समय में चल रही तमाम सामाजिक और धार्मिक बहसों के बीच एक वैचारिक दिशा देने का कार्य कर रहा है।देश की युवा पीढ़ी के लिए बापू के संदेश की प्रासंगिकताआज की आधुनिक और रफ्तार भरी दुनिया में जहाँ युवा सोशल मीडिया और पश्चिमी प्रभावों के बीच अपनी पहचान तलाश रहे हैं, वहाँ महात्मा गांधी के जीवन के ये नैतिक और वैचारिक मूल्य एक मजबूत मार्गदर्शक का काम करते हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने इस संबोधन के अंत में देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे बापू के जीवन से सत्य, अहिंसा, नैतिक साहस और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को अपने जीवन में उतारें। जब तक देश का युवा अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा और समाज विरोधी ताकतों के बहकावे में नहीं आएगा, तब तक भारत विश्व गुरु बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। महात्मा गांधी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वे आजादी के आंदोलन के समय थे, और गृह मंत्री द्वारा उन्हें याद किया जाना इस बात की याद दिलाता है कि हमें एक मजबूत, संगठित और नैतिक रूप से सशक्त भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
ट्रेन में कब नहीं मिलता खाना? IRCTC ने बताए पेंट्री के नियम
क्या आप जानते हैं भारतीय रेलवे की ओर से किस समय तक खाना दिया जाता है और कब खाने की सर्विस बंद कर दी जाती है. तो जानते हैं इससे जुड़े क्या नियम हैं?
बनिहाल में कश्मीरी बहनों ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी
जब देशभर में रक्षाबंधन मनाया जा रहा था, तब सीमा पर तैनात जवान हजारों किलोमीटर दूर अपने परिवारों से दूर ड्यूटी निभा रहे थे. इसी बीच जम्मू-कश्मीर के बनिहाल से आई कुछ तस्वीरों ने इस त्योहार के रिश्ते को एक अलग ही भावनात्मक रंग दे दिया.
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती रणनीतिक ताकत का एक और बड़ा और शानदार अध्याय जुड़ने जा रहा है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने वाली है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। इस उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेता आपसी रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और वैश्विक व्यापारिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसके साथ ही, भारत द्वारा आगामी महीनों में आयोजित होने वाली एक बड़ी बहुपक्षीय कूटनीतिक मेजबानी से पहले प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी होने की पूरी संभावना है, जो एशिया और दुनिया की भू-राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल लाने का माद्दा रखती है। भारत की यह संतुलित और मजूबत विदेश नीति इस बात का प्रमाण है कि नई दिल्ली आज वैश्विक पटल पर हर बड़ी महाशक्ति के साथ स्वतंत्र और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर बात करने की कुवत रखती है।SCO शिखर सम्मेलन का महत्व और भारत की कूटनीतिक स्थितिशंघाई सहयोग संगठन (SCO) यूरेशियाई क्षेत्र का एक बहुत ही प्रभावशाली राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसमें भारत की भूमिका लगातार केंद्रीय होती जा रही है। वर्तमान भू-राजनीतिक हालात में जब दुनिया दो ध्रुवों में बंटती हुई नजर आ रही है, तब भारत की कूटनीति का यह सबसे बड़ा कौशल है कि वह पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को मजबूत रखते हुए रूस और अन्य यूरेशियाई देशों के साथ भी अपने पारंपरिक और अटूट संबंधों को पूरी गर्मजोशी से निभा रहा है। आगामी एससीओ समिट के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से वैश्विक शांति, बहुपक्षीय सुरक्षा और आतंकवाद के खात्मे के लिए भारत का कड़ा और स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रखेंगे। इस सम्मेलन के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकें इस बात को सुनिश्चित करती हैं कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता में एक मुख्य मध्यस्थ और शांति के पैरोकार की भूमिका निभा रहा है।पुतिन और मोदी की द्विपक्षीय वार्ता से क्या हैं उम्मीदें?भारत और रूस के रिश्ते दशकों से कसौटी पर खरे उतरते आए हैं और दुनिया की तमाम बड़ी उथल-पुथल के बावजूद दोनों देशों की दोस्ती पर कभी कोई आंच नहीं आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली यह आमने-सामने की द्विपक्षीय बातचीत दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयां देने का काम करेगी। अमेरिका और पश्चिमी देशों के भारी-भरकम प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, जिस पर इस बैठक में आगे की रणनीतिक रूपरेखा तय की जाएगी। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। पुतिन और मोदी की यह मुलाकात यह साबित करने के लिए काफी है कि भारत और रूस का रिश्ता किसी भी बाहरी दबाव या अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों से परे एक मजबूत नींव पर टिका हुआ है।भारत की बड़ी मेजबानी से पहले शी जिनपिंग से मुलाकात के मायनेइस पूरी कूटनीतिक यात्रा का सबसे रोमांचक और रणनीतिक रूप से संवेदनशील हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली संभावित मुलाकात है। भारत जल्द ही एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, और उससे ठीक पहले दुनिया के इन दो सबसे बड़े एशियाई देशों के शीर्ष नेतृत्व का आमने-सामने आना क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पिछले कुछ वर्षों से चले आ रहे तनाव के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करने की दिशा में यह बैठक एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि चीन के साथ व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध तभी सामान्य हो सकते हैं जब सीमा पर पूरी तरह से अमन-चैन और संप्रभुता का सम्मान हो। शी जिनपिंग के साथ होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापारिक बाधाओं को दूर करने पर गंभीर मंथन होने की पूरी उम्मीद है।वैश्विक मंच पर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का डंकाआज की तारीख में भारत की विदेश नीति पूरी तरह से रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के सिद्धांतों पर आधारित है, जहां नई दिल्ली किसी के दबाव में काम करने के बजाय अपने 140 करोड़ देशवासियों के हितों को सर्वोपरि रखती है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी रूस के साथ अपनी पुरानी और भरोसेमंद दोस्ती को और मजबूत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ वे चीन और अन्य एशियाई देशों के साथ कूटनीतिक संवाद के जरिए हर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान खोजने का रास्ता भी खुला रख रहे हैं। दुनिया के तमाम बड़े देश आज इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि बिना भारत की सहमति और सहयोग के दक्षिण एशिया या यूरेशिया में किसी भी बड़े भू-राजनीतिक फैसले को अमली जामा नहीं पहनाया जा सकता। एससीओ समिट के दौरान होने वाली ये तमाम बैठकें एक बार फिर से यह साबित कर देंगी कि भारत वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ चुका है और देश का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर रहा है।
Nepal Floods: फंसे नागरिकों की मदद के लिए Sikkim ने Task Force गठित किया
सिक्किम सरकार ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित राज्य के उन लोगों को राहत और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक कार्य बल का गठन किया है, जो वहां फंसे या लापता हो सकते हैं। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक प्रभाकर राय की अध्यक्षता वाला कार्य बल केंद्र सरकार, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर आपदा से प्रभावित राज्य के लोगों के बारे में जानकारी जुटाएगा। अधिकारी ने बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना के हवाले से कहा, ‘‘यह कार्य बल घटना में लापता, फंसे, घायल, मृत या किसी अन्य रूप से प्रभावित बताए गए लोगों के बारे में जानकारी एकत्र, संकलित और सत्यापित करेगा।’’उन्होंने कहा कि कार्य बल प्रभावित सिक्किम निवासियों के परिवारों के साथ संपर्क स्थापित करेगा और उनकी स्थिति तथा ठिकाने के बारे में सत्यापित जानकारी के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करेगा। मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई। अधिकारियों ने और शव बरामद किए हैं। अब तक प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों से 1,545 घायल और फंसे लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें से 84 का काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। नेपाल पुलिस के एक बयान के अनुसार, त्रासदी के तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है, जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं। बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से हिमस्खलन हुआ, जिससे पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव मध्य नेपाल के इलाकों में फैल गया। इससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई तथा मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।
पहाड़ टूटने से नदी के प्रलय बनने तक... नेपाल का ये ग्लेशियर अभी और डरा रहा!
पहाड़ का हिस्सा टूटा, नदी का रास्ता रुका और फिर हजारों टन पानी-मलबे ने सबकुछ बहा दिया. नेपाल की इस तबाही के पीछे आखिर क्या हुआ? क्या तेजी से पिघलते ग्लेशियर और गर्म होता हिमालय ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ा रहे हैं?
खजराना गणेश को अर्पित की 40 इंच की राखी, 24 साल से निभा रहे परंपरा
इंदौर का खजराना गणेश मंदिर... जहां भगवान गणेश के भक्त हर दिन अपनी अलग-अलग मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. लेकिन रक्षाबंधन का दिन यहां कुछ खास रहा. इस बार भगवान गणेश को ऐसी राखी अर्पित की गई, जिसे देखकर हर किसी की नजर उस पर टिक गई. रक्षाबंधन पर 4040 इंच की राखी तैयार कर भगवान खजराना गणेश को विधि-विधान के साथ अर्पित की गई.
सऊदी के बाद कुवैत से मिलाया हाथ, पाकिस्तान खाड़ी में चल रहा कौन सी नई चाल; भारत के लिए टेंशन?
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका-ईरान युद्ध लगातार खिंचता जा रहा है। कुवैत को ईरान के हमले से तगड़ा नुकसान हुआ है। ईरानी हमले में उसके बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं।
सोनिया गांधी की आत्मकथा छापने से पेंगुइन इंडिया का इनकार, सामने आई ये वजह
पेंगुइन इंडिया के प्रोजेक्ट से अलग होने के बाद अब कई भारतीय प्रकाशकों की नजर इस चर्चित किताब के भारतीय अधिकारों पर है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हार्पर कॉलिन्स इंडिया किताब के प्रकाशन और वितरण को लेकर समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है।
रक्षाबंधन पर इजरायली दूतावास के अधिकारियों ने बंधवाई राखी; जानिए क्या मिला खास रिटर्न गिफ्ट
भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक, सामरिक और तकनीकी साझेदारियों की चर्चा तो दुनिया भर में अक्सर होती रहती है, लेकिन इन सबके इतर जब सांस्कृतिक और मानवीय रिश्तों की बात आती है, तो दोनों देशों की दोस्ती एक अलग ही मुकाम पर नजर आती है। इस बार देश भर में मनाए जाने वाले भाई-बहन के पवित्र पावन पर्व रक्षाबंधन के मौके पर नई दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास में कुछ ऐसा अनूठा और मनमोहक नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हुए इजरायली दूतावास के शीर्ष अधिकारियों और राजनयिकों ने भारतीय महिलाओं और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं से कलाई पर रेशम की डोर यानी राखी बंधवाई। इस भव्य और आत्मीय कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी सांस्कृतिक और पारिवारिक आत्मीयता साफ तौर पर झलक रही थी, जहां दूतावास के कमरों से लेकर कार्यालय परिसरों तक भारत के इस पारंपरिक त्योहार की गूंज सुनाई दी। इस अनूठी पहल ने सोशल मीडिया पर भी तहलका मचा दिया है और लोग दोनों देशों की इस अटूट दोस्ती को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के रूप में सराहा रहे हैं।इजरायली दूतावास में सजा रक्षाबंधन का विशेष दरबारनई दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास में इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व किसी राजकीय उत्सव की तरह बहुत ही धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। दूतावास के अधिकारियों ने पहले से ही इस भारतीय पर्व को अपने कार्यस्थल पर मनाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में सजी महिलाओं ने इजरायली राजनयिकों और कर्मचारियों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, उनका तिलक किया और मुंह मीठा कराया। इस दौरान इजरायली अधिकारियों के चेहरे पर जो खुशी और उत्साह देखने को मिल रहा था, वह यह साबित कर रहा था कि वे भारतीय संस्कृति और उसकी परंपराओं को कितनी गहराई से आत्मसात कर चुके हैं। दूतावास के अधिकारियों ने न केवल इस अनुष्ठान में पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया, बल्कि उन्होंने खुद आगे बढ़कर इस बात पर खुशी जताई कि उन्हें दुनिया के सबसे खूबसूरत और पवित्र त्योहार का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है।रक्षा सूत्र बंधवाने के बाद मिला खास रिटर्न गिफ्टभारतीय परंपरा के अनुसार, जब भाई की कलाई पर बहन राखी बांधती है, तो भाई उसे सुरक्षा और उपहार का वचन देता है, और इस बार इजरायली दूतावास में भी इस परंपरा का बहुत ही अनूठे तरीके से पालन किया गया। राखी बंधवाने के बाद इजरायली अधिकारियों ने अपनी बहनों को बेहद खास और तकनीक से जुड़े रिटर्न गिफ्ट्स भेंट किए, जो इजरायल की नवाचार और आधुनिकता की पहचान को दर्शाते हैं। इसके साथ ही इजरायली दूतावास की तरफ से सभी महिलाओं को पारंपरिक मिष्ठान और मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) की प्रसिद्ध खास सौगातें उपहार स्वरूप दी गईं। अधिकारियों ने अपनी बहनों को यह वचन दिया कि जिस तरह इजरायल और भारत हर मुश्किल घड़ी में एक-दूसरे के सच्चे और पक्के दोस्त बनकर खड़े रहते हैं, उसी तरह वे भी इस रिश्ते की मर्यादा को हमेशा निभाएंगे। यह आदान-प्रदान केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच आपसी सम्मान और स्नेह का एक बहुत ही जीवंत और मार्मिक उदाहरण बन गया।भारत और इजरायल की दोस्ती के गहरे भू-राजनीतिक मायनेकूटनीति के जानकारों का मानना है कि भारत और इजरायल के बीच के रिश्ते केवल रक्षा सौदों, कृषि तकनीकी सहयोग या खुफिया साझेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दिलों का रिश्ता है जो समय के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है। जब किसी देश के राजनयिक विदेशी धरती पर मेजबान देश के सबसे सांस्कृतिक और पारिवारिक त्योहारों को इस अपनापन के साथ मनाते हैं, तो इससे दोनों देशों की जनता के बीच की दूरियां हमेशा के लिए मिट जाती हैं। भारत में इजरायली राजदूत और अन्य अधिकारियों ने कई बार यह बात कही है कि दोनों देशों की आत्मा एक जैसी है क्योंकि दोनों ही प्राचीन संस्कृतियों के वाहक हैं और आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर रहे हैं। रक्षाबंधन के इस कार्यक्रम ने एक बार फिर से इस बात पर मुहर लगा दी है कि भारत और इजरायल की दोस्ती अब कूटनीतिक दायरे से निकलकर सीधे आम नागरिकों और पारिवारिक भावनाओं तक पहुंच चुकी है, जो भविष्य में इस रिश्ते को और अधिक अमर बनाएगी।सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें और जनता का जबरदस्त रिएक्शनइजरायली दूतावास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर की गई रक्षाबंधन की इन खूबसूरत तस्वीरों और वीडियो ने इंटरनेट पर आते ही तहलका मचा दिया है। भारत के आम नागरिकों से लेकर बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों ने इन तस्वीरों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इजरायली अधिकारियों की इस पहल की भूरी-भरी प्रशंसा की है। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि यह दुनिया की सबसे बेहतरीन और मजबूत कूटनीति है, जहां सरकारें तो हाथ मिलाती ही हैं, साथ ही दिल भी आपस में जुड़ जाते हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि 'भाई-बहन जैसे भारत-इजरायल के रिश्ते' अब इस धरती पर अटूट विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुके हैं। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन दोनों देशों के बीच आपसी पर्यटन, छात्र आदान-प्रदान और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने में एक उत्प्रेरक का काम करते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस अनोखी दोस्ती को हमेशा याद रखेंगी।
एशियाई भू-राजनीति और हिमालयी पर्यावरण से इस समय एक बहुत ही बड़ी और डराने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने भारत, नेपाल और चीन की सीमाओं पर बसे इलाकों में सनसनी फैला दी है। तिब्बत के भीतर नेपाल की सीमा से लगे बेहद संवेदनशील और ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में एक बार फिर से हिमस्खलन और दबाव के चलते प्राकृतिक झील (Glacial Lake) के फटने की भयंकर घटना घटी है। इस अप्रत्याशित जल प्रलय के बाद से नेपाल के उत्तरी इलाकों में बहने वाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की सांसें अटक गई हैं। नेपाल के काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन शाह (बालेन सरकार और स्थानीय प्रशासन) ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत एक हाई अलर्ट जारी कर दिया है और नदी के किनारे बसे गांवों तथा बस्तियों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इस गंभीर प्राकृतिक आपदा के बीच चीन के रवैये ने क्षेत्रीय सहयोग पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है, क्योंकि चीनी प्रशासन ने इस सीमावर्ती क्षेत्र में किसी भी प्रकार के संयुक्त राहत और बचाव कार्य या बाहरी मदद को पूरी तरह से रोक दिया है, जिससे स्थिति और अधिक पेचीदा हो गई है।तिब्बत की पहाड़ी झीलों का बढ़ता खतरा और पर्यावरण संकटहिमालयी श्रृंखलाओं में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का असर अब बेहद खतरनाक रूपों में सामने आने लगा है। तिब्बत का यह पूरा इलाका बड़े-बड़े ग्लेशियरों और ऊंची झीलों से घिरा हुआ है, जो लगातार पिघल रहे हैं। जब अत्यधिक मात्रा में पिघला हुआ बर्फ का पानी इन प्राकृतिक झीलों में जमा हो जाता है और भौगोलिक दबाव सहन करने की क्षमता समाप्त हो जाती है, तो ये झीलें किसी बड़े बांध की तरह अचानक फट जाती हैं। इस बार भी तिब्बत के भीतर कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसके कारण हजारों क्यूसेक पानी अचानक नेपाल की तरफ बहने वाली नदियों में आ गिरा। पर्यावरणविदों और भूगर्भ वैज्ञानिकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि तिब्बत और हिमालयी बेल्ट में बुनियादी ढांचे के विकास और बढ़ते तापमान के कारण ऐसी 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) की घटनाएं भविष्य में और ज्यादा भयानक रूप ले सकती हैं, और आज की यह घटना उसी आसन्न खतरे का एक जीवंत और डरावना प्रमाण है।बालेन सरकार और नेपाल प्रशासन की त्वरित चेतावनीझील फटने की इस सूचना के मिलते ही नेपाल के स्थानीय और केंद्रीय प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। काठमांडू के लोकप्रिय और कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए जाने जाने वाले मेयर बालेन शाह ने इस आपदा से निपटने के लिए तुरंत आपातकालीन कदम उठाते हुए सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से जनता के लिए चेतावनी जारी की। प्रशासन ने विशेष तौर पर सिंधुपालचौक, रसुवा और भोटेकोशी नदी बेसिन के आसपास रहने वाले नागरिकों को आगाह किया है कि वे तुरंत नदियों के किनारों को खाली कर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाएं। नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और स्थानीय आपदा प्रबंधन समितियों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मोर्चा संभाला जा सके। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पानी के अचानक बहाव से किसी भी प्रकार की जनहानि न हो, क्योंकि साल के इस समय में नदी घाटियों के पास पशुओं को चराने और स्थानीय गतिविधियों में लोग शामिल रहते हैं।चीन का असहयोग और बचाव कार्यों पर रोकइस पूरी आपदा के दौरान सबसे बड़ा कूटनीतिक और मानवतावादी विवाद चीन के अड़ियल रवैये को लेकर खड़ा हो गया है। चूंकि झील के फटने की मूल घटना चीनी सीमा के भीतर तिब्बत के भूभाग पर हुई है, इसलिए तकनीकी रूप से राहत कार्यों, सेंसर लगाने और शुरुआती चेतावनी प्रणाली का नियंत्रण बीजिंग के पास है। लेकिन हमेशा की तरह चीनी प्रशासन ने इस मामले में न केवल पारदर्शिता बरतने से इंकार कर दिया है, बल्कि नेपाल की तरफ से आने वाली राहत और तकनीकी टीमों को भी घटनास्थल के करीब जाने से रोक दिया है। चीन ने सुरक्षा और सामरिक गोपनीयता का हवाला देते हुए बचाव कार्यों पर पाबंदी लगा दी है, जिससे नेपाल के अधिकारियों को यह अनुमान लगाने में भारी कठिनाई हो रही है कि आगे जलप्रलय का कितना बड़ा खतरा और आ सकता है। चीन का यह संदेहास्पद और मनमाना रुख सीमावर्ती देशों के बीच आपसी सहयोग और आपदा प्रबंधन के समझौतों की पोल खोल रहा है।भारत और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पर असरतिब्बत और नेपाल की सीमा पर घटी इस घटना का सीधा प्रभाव भारत के भी कई हिस्सों पर पड़ सकता है, क्योंकि नेपाल से बहने वाली कई नदियां आगे चलकर बिहार और उत्तर प्रदेश की नदियों में मिलती हैं। कोसी, गंडक और घाघरा जैसी प्रमुख नदियां यदि उफान पर आती हैं, तो भारत के उत्तरी मैदानी इलाकों में भी बाढ़ का खतरा अचानक कई गुना बढ़ जाता है। भारतीय जल संसाधन मंत्रालय और आपदा प्रबंधन एजेंसियां नेपाल के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और उपग्रहों (Satellites) के जरिए पानी के बहाव पर पैनी नजर रख रही हैं। सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि यदि जलस्तर अचानक बढ़ता है, तो समय रहते निचले गांवों में बचाव दल को तैनात किया जा सके। भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय रूप से यह घटना यह साबित करती है कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप की साझा जिम्मेदारी है।भविष्य की चुनौतियां और स्थायी समाधान की जरूरतहिमालयी क्षेत्र में बार-बार हो रही इन प्राकृतिक आपदाओं ने सरकारों और नीति निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब तक क्षेत्रीय देश आपस में मिलकर कोई स्थायी वैज्ञानिक समाधान नहीं निकालेंगे, तब तक करोड़ों लोगों की जान जोखिम में बनी रहेगी। तिब्बत की इन ऊंचाई वाली झीलों के पास आधुनिक अर्ली-वार्निंग सिस्टम (Early Warning Systems) लगाए जाने की सख्त जरूरत है, जो पानी का स्तर बढ़ते ही तुरंत सायरन या डिजिटल सिग्नल के जरिए नीचे बसे गांवों को आगाह कर सकें। इसके अलावा, चीन को भी अपनी संकीर्ण कूटनीति छोड़कर मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा और पड़ोसी देशों के साथ पर्यावरण डेटा साझा करना होगा। फिलहाल, नेपाल और भारत के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और आने वाले कुछ घंटे राहत एवं बचाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, जिस पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं।
यहूदी और इतालवी समुदायों के बाद अब न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के निशाने पर आए मोहन भागवत
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैचारिक गलियारों से इस समय एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने अमेरिका के सबसे बड़े महानगर न्यूयॉर्क से लेकर भारतीय राजनीतिक हलकों तक में हलचल मचा दी है। न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी एक बार फिर अपने बयानों और तीखे राजनीतिक रुख के चलते वैश्विक सुर्खियों के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उनके तीखे निशाने पर कोई स्थानीय अमेरिकी राजनेता या पश्चिमी हस्ती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की हालिया अमेरिका यात्रा और वहां होने वाले कार्यक्रम हैं। अपने कड़े तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले जोहरान ममदानी इससे पहले यहूदी और इतालवी समुदायों से जुड़े मुद्दों और हस्तियों पर अपनी मुखर टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं, और अब उन्होंने सीधे तौर पर हिंदू संगठनों और आरएसएस प्रमुख के दौरे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रवासी भारतीयों, स्थानीय अमेरिकी राजनीतिक समूहों और वैचारिक संगठनों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिससे यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि इस तीखे विरोध के पीछे की गहरी राजनीतिक और सामाजिक वजहें क्या हैं।जोहरान ममदानी का राजनीतिक रुख और पिछला इतिहासन्यूजीलैंड में जन्मे और अपने वामपंथी तथा प्रगतिशील वैचारिक झुकाव के लिए जाने जाने वाले जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली और मुखर चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने अपने छोटे से राजनीतिक सफर में कई ऐसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है, जो अक्सर स्थापित व्यवस्था या विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर देते हैं। इससे पहले उन्होंने स्थानीय नीतियों और बयानों के जरिए यहूदी समुदायों की नुमाइंदगी करने वाले संगठनों तथा इतालवी मूल के समूहों के साथ तीखे वैचारिक मतभेद मोल लिए थे। उनकी राजनीतिक शैली मुख्य रूप से पहचान की राजनीति (Identity Politics) और वैचारिक ध्रुवीकरण पर आधारित मानी जाती है, जिसके तहत वे अक्सर ऐसे विषयों को चुनते हैं जो मीडिया की सुर्खियों में आसानी से आ जाएं। अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की यात्रा पर उनके द्वारा उठाई गई आपत्तियां भी इसी सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का एक हिस्सा मानी जा रही हैं, जिसका उद्देश्य प्रवासी समुदायों के एक वर्ग विशेष को प्रभावित करना है।मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा और संघ का वैचारिक विस्तारराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की इस महत्वपूर्ण विदेश यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में बसे लाखों प्रवासियों, हिंदू स्वयंसेवकों और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ना तथा भारतीय संस्कृति, मूल्यों और दर्शन का प्रचार-प्रसार करना है। संघ लंबे समय से दुनिया भर में फैले भारतीय प्रवासियों के बीच सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने के लिए कार्य करता रहा है। अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में जहां विभिन्न नस्लों और संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं, वहां भारतीय डायस्पोरा अपनी पहचान को बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों का आयोजन करता है। मोहन भागवत का यह दौरा संघ के वैचारिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर रखने और विदेशों में रहने वाले युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिसे दुनिया भर में रह रहे भारतीय समुदाय का भारी समर्थन भी मिल रहा है।मेयर के विरोध के पीछे के छिपे हुए राजनीतिक मायनेसवाल यह उठता है कि आखिर एक अमेरिकी शहर के मेयर को भारत के एक सांस्कृतिक संगठन के प्रमुख की यात्रा से क्या आपत्ति हो सकती है और इसके क्या निहितार्थ हैं? जानकारों का मानना है कि पश्चिमी देशों के कुछ खास राजनीतिक हलकों में दक्षिणपंथी विचारधारा या भारतीय सांस्कृतिक संगठनों के प्रति एक पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण काम करता है, जिसका फायदा स्थानीय नेता अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उठाते हैं। जोहरान ममदानी जैसे नेता अपने खास वोट बैंक को साधे रखने और वैचारिक रूप से ध्रुवीकृत बयानों के जरिए लाइमलाइट में बने रहने के लिए ऐसे मुद्दों को हवा देते हैं। वे मोहन भागवत की यात्रा को एक सांस्कृतिक संवाद के रूप में देखने के बजाय इसे राजनीतिक चश्मे से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि न्यूयॉर्क के स्थानीय चुनावों और नस्लीय समीकरणों में उन्हें इसका राजनीतिक लाभ मिल सके।प्रवासी भारतीयों की प्रतिक्रिया और स्थानीय समुदाय का रुखजोहरान ममदानी के इस बयान और विरोध के बाद न्यूयॉर्क और अमेरिका के अन्य हिस्सों में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय में भारी नाराजगी और रोष देखने को मिल रहा है। भारतीय मूल के लोगों का कहना है कि इस प्रकार के बयान न केवल सांस्कृतिक सहिष्णुता के खिलाफ हैं, बल्कि यह अमेरिका में रहने वाले शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाले हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत करने का एक प्रयास हैं। स्थानीय हिंदू संगठनों और मंदिरों से जुड़े प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि मोहन भागवत की यात्रा पूरी तरह से सांस्कृतिक और वैचारिक संवाद के लिए है, जिसका किसी भी स्थानीय अमेरिकी नीति से कोई लेना-देना नहीं है। प्रवासी समुदाय अब संगठित होकर ऐसे बयानों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहा है और यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि अमेरिका की धरती पर किसी भी समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत या राजनीति न फैलाई जा सके।भविष्य की राजनीति और वैश्विक कूटनीति पर इसका असरयह पूरा विवाद इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे स्थानीय अमेरिकी राजनीति अब केवल घरेलू मुद्दों तक सीमित न रहकर वैश्विक घटनाओं और विचारों से भी तेजी से प्रभावित हो रही है। जब भी भारत से जुड़े किसी बड़े धार्मिक या वैचारिक व्यक्तित्व का दौरा पश्चिमी देशों में होता है, तो वहां की स्थानीय राजनीति में अपने समीकरण साधने वाले नेता तुरंत उस पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर देते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जोहरान ममदानी के इस रुख का न्यूयॉर्क की स्थानीय राजनीति पर क्या असर पड़ता है और क्या प्रवासी भारतीय एकजुट होकर इस वैचारिक चुनौती का राजनीतिक रूप से जवाब देते हैं या नहीं। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम एक बार फिर यह साबित करता है कि वैचारिक सरहदें अब मिट चुकी हैं और दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली घटना वैश्विक मंच पर एक बड़ी बहस का मुद्दा बन सकती है।
खुशखबरी: लद्दाख में अब हाई कोर्ट की बेंच, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी; लोगों को न्याय मिलना होगा आसान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लद्दाख में हाई कोर्ट की पीठ स्थापित करने के लिए एक विनियमन जारी किया है। इससे लद्दाख के लोगों को न्याय तक पहुंच आसान होगी। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत उठाया गया है।
PoK का स्टेटस बदलने की तैयारी में ड्रैगन और शहबाज सरकार, अचानक क्यों तेज हुई यह भू-राजनीतिक हलचल
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर से कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को लेकर सरगर्मी बेहद तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों से इस्लामाबाद के गलियारों में ऐसी सुगबुगाहट तेज है कि पाकिस्तानी हुक्मरान भारत के ऐतिहासिक 'आर्टिकल 370' के तर्ज पर PoK के प्रशासनिक और संवैधानिक ढांचे में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव करने की गहरी साजिश रच रहे हैं। जिस तरह से भारत सरकार ने साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर उसे देश की मुख्यधारा के साथ पूरी तरह से एकीकृत कर दिया था, ठीक उसी तर्ज पर अब पाकिस्तान अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए PoK के स्टेटस को पूरी तरह बदलकर उसे अपने किसी अन्य प्रांत की तरह विलय करने का कुचक्र रच रहा है। इस अचानक मची भू-राजनीतिक हलचल के पीछे न केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक मजबूरियां हैं, बल्कि इसके पीछे चीन के नापाक आर्थिक और सामरिक दबाव का भी बहुत बड़ा हाथ बताया जा रहा है, जो सीपैक (CPEC) प्रोजेक्ट को कानूनी सुरक्षा कवच देने के लिए ऐसा करने को मजबूर कर रहा है।PoK के दर्जे को बदलने की सुगबुगाहट क्यों तेज हुई?पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK को लेकर पिछले दशकों में हमेशा एक दिखावटी विशेष प्रशासनिक ढांचा बनाए रखा गया है, जिसे पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर 'आजाद कश्मीर' कहता है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण हमेशा रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय और इस्लामाबाद के प्रधानमंत्री कार्यालय से ही होता है। अब अचानक ऐसी क्या आफत आ गई है कि शहबाज शरीफ सरकार और वहां की ताकतवर फौज इस क्षेत्र के मौजूदा कानूनी और संवैधानिक स्वरूप को पूरी तरह से पलटने की तैयारी कर रही है? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि स्थानीय कश्मीरी जनता पाकिस्तान के दमनकारी शासन, भारी टैक्स, बिजली कटौती और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ पिछले कई महीनों से सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन कर रही है। जनता के भारी विद्रोह और पाकिस्तान विरोधी नारों से घबराए हुक्मरान अब इस क्षेत्र पर अपनी सीधी और लोहे की पकड़ मजबूत करने के लिए कोई नया संवैधानिक दांवपेंच आजमाने की जुगत में लगे हैं, ताकि विरोध की हर आवाज को हमेशा के लिए कुचला जा सके।चीन का CPEC प्रोजेक्ट और सामरिक मजबूरीइस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में ड्रैगन यानी चीन की विस्तारवादी नीतियां और उसका महत्वाकांक्षी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) सबसे अहम भूमिका निभा रहा है। CPEC का मुख्य मार्ग इसी विवादित PoK के गिलगित-बल्तिस्तान और अन्य इलाकों से होकर गुजरता है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत लगातार अपनी सख्त आपत्ति जताते रहे हैं। चूंकि यह क्षेत्र कानूनी रूप से एक विवादित क्षेत्र माना जाता है, इसलिए विदेशी निवेशकों और खुद चीन को भी इस बात का हमेशा डर रहता है कि भविष्य में भू-राजनीतिक समीकरण बदलने पर उनके अरबों डॉलर के निवेश का क्या होगा। चीन अपने इस सामरिक और आर्थिक निवेश को कानूनी सुरक्षा देने के लिए पाकिस्तान पर लगातार दबाव बना रहा है कि वह इस इलाके के संविधान में बदलाव कर इसे अपना आधिकारिक प्रांत घोषित कर दे। यही वजह है कि बीजिंग के इशारे पर इस्लामाबाद में PoK के स्टेटस को बदलने का नापाक खाका तेजी से तैयार किया जा रहा है।भारत का कड़ा रुख और रणनीतिक निगरानीपाकिस्तान की इस किसी भी हरकत पर भारत की खुफिया एजेंसियों और विदेश मंत्रालय की पैनी और सख्त नजर बनी हुई है। भारत अपने इस रुख पर पूरी तरह अडिग और स्पष्ट है कि पूरा का पूरा पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। भारत के आंतरिक मामलों या PoK के भू-राजनीतिक स्वरूप में पाकिस्तान द्वारा किया जाने वाला कोई भी एकतरफा बदलाव पूरी तरह से अवैध और अंतरराष्ट्रीय संधियों के खिलाफ माना जाएगा। नई दिल्ली में बैठे रणनीतिकार इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि पाकिस्तान अपनी जनता का ध्यान देश के भीतर चल रहे भयंकर आर्थिक संकट, महंगाई, भुखमरी और राजनीतिक अस्थिरता से हटाने के लिए ऐसी खतरनाक चालें चल रहा है। भारतीय सामरिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पाकिस्तान ने PoK की डेमोग्राफी या उसके कानूनी दर्जे को बदलने की कोई भी हिमाकत की, तो इसका उसे कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बहुत भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर असरपाकिस्तान के इस तथाकथित 'आर्टिकल 370' जैसे दांव से दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा एक बार फिर से खतरे में पड़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर पहले से ही कश्मीर मुद्दे को लेकर मुंह की खाने वाला पाकिस्तान यदि PoK को हड़पने या उसका जबरन विलय करने की कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। पश्चिमी देश और मानवाधिकार संगठन पहले से ही बलूचिस्तान और PoK में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों पर नजर रखे हुए हैं। इस प्रकार की बलपूर्वक प्रशासनिक फेरबदल से स्थानीय स्तर पर गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं क्योंकि वहां के स्थानीय लोग पाकिस्तान के शासन से तंग आ चुके हैं और वे भारत के साथ अपने ऐतिहासिक जुड़ाव को अंदरखाने महसूस करते हैं। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बहुत बड़ा केंद्र बनने वाला है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
नेपाल बाढ़ से बाल-बाल बचे आंध्र प्रदेश के 10 श्रद्धालु, ड्राइवर की सूझबूझ और वीजा में देरी बनी वरदान
आंध्र प्रदेश के भीमिली और विशाखापट्टनम के 10 श्रद्धालु नेपाल की यात्रा पर थे. जिस दिन भीषण बाढ़ आई, उस दिन ये लोग रसुवा में ही होने वाले थे, लेकिन वीजा में देरी और ड्राइवर की सूझबूझ से ये लोग बाल-बाल बच गए.
ड्रैगन यानी चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित सिचुआन प्रांत में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिला है, जहां धरती अचानक तेज धमाके के साथ डोल उठी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.1 मापी गई है, जिसके बाद से स्थानीय नागरिकों में भारी दहशत का माहौल है और लोग अपने घरों तथा दफ्तरों से निकलकर सुरक्षित खुले मैदानों की तरफ भागने लगे। चीन के भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग और अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर एक निश्चित गहराई पर स्थित था, जिसके कारण इसके झटके काफी दूर तक महसूस किए गए। सिचुआन प्रांत अपनी भूवैज्ञानिक संरचना के चलते दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में शुमार किया जाता है, जहां अक्सर धरती के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने से ऐसी आपदाएं आती रहती हैं। इस अचानक आई प्राकृतिक आपदा के बाद से पूरे इलाके में प्रशासन और राहत बचाव दल पूरी तरह से सतर्क हो गए हैं, ताकि किसी भी अनहोनी स्थिति या बड़े नुकसान से तुरंत निपटा जा सके।सिचुआन में भूकंप के झटके और जमीनी हालातचीन का सिचुआन प्रांत अपनी खूबसूरत वादियों के साथ-साथ खतरनाक फॉल्ट लाइन्स के लिए भी जाना जाता है, जहां इतिहास में कई बार विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। आज आए 5.1 तीव्रता के इस मध्यम से तेज झटके ने एक बार फिर वहां के निवासियों को पुरानी डरावनी यादों की तरफ धकेल दिया है। जैसे ही धरती हिली, लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंची इमारतों से बाहर सड़कों पर आ गए। हालांकि स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक किसी बड़े जानमाल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अंदरूनी इलाकों और ग्रामीण बस्तियों से नुकसान की खबरों को जुटाने के लिए सर्वे टीमें रवाना कर दी गई हैं। सिचुआन बेसिन के चारों ओर फैले पहाड़ी इलाकों में छोटे-छोटे झटके लगातार महसूस किए जा रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बना हुआ है और लोग अपने घरों के अंदर जाने से कतरा रहे हैं।क्या नेपाल और हिमालयी बेल्ट से जुड़ा है भूकंप का तार?जब भी एशिया के इस हिस्से में जमीन कांपती है, तो भारत, नेपाल और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्रों के लोग भी सहम जाते हैं, क्योंकि वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पूरा क्षेत्र एक ही सिस्मिक जोन (Seismic Zone) के अंतर्गत आता है। भारतीय उपमहाद्वीप की टेक्टोनिक प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ रही है और यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, जिसकी वजह से नेपाल से लेकर चीन के सिचुआन तक के भूभाग में अत्यधिक दबाव बना रहता है। हालांकि इस बार आए 5.1 तीव्रता के भूकंप का केंद्र पूरी तरह से चीनी सीमा के भीतर था, लेकिन भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि यूरेशियन और इंडियन प्लेट्स की आपसी हलचल का असर आसपास के हिमालयी क्षेत्रों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। नेपाल और भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्सों के पास इस प्रकार की टेक्टोनिक गतिविधियां लगातार भूवैज्ञानिकों की रडार पर रहती हैं, क्योंकि जमीन के भीतर ऊर्जा का यह संचय कभी भी बड़े खतरे का संकेत बन सकता है।प्रशासन और राहत बचाव एजेंसियों की त्वरित कार्रवाईभूकंप के तुरंत बाद चीन के आपदा प्रबंधन तंत्र ने तत्परता दिखाते हुए सिचुआन प्रांत में इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर दिए। प्रभावित इलाकों में दमकल विभाग, पुलिस बल और मेडिकल टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी मलबे में फंसे व्यक्ति को तुरंत निकाला जा सके। हाई-स्पीड रेलवे और मेट्रो नेटवर्क को सुरक्षा की दृष्टि से कुछ समय के लिए रोक दिया गया ताकि पटरियों या पुलों को हुए किसी संभावित नुकसान का जायजा लिया जा सके। स्थानीय सरकार लाउडस्पीकर और डिजिटल अलर्ट सिस्टम के जरिए लोगों से अपील कर रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। इमारतों की तकनीकी जांच के लिए इंजीनियरों की विशेष टीमों को भी मैदान में उतार दिया गया है ताकि कमजोर हो चुकी संरचनाओं की पहचान की जा सके।भविष्य की आशंका और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरतसिचुआन प्रांत में बार-बार आ रहे ऐसे भूकंप इस बात की गवाही देते हैं कि पृथ्वी के भीतर लगातार भूगर्भीय परिवर्तन हो रहे हैं, जिन्हें रोका तो नहीं जा सकता लेकिन सटीक पूर्व-चेतावनी प्रणालियों से नुकसान को अवश्य कम किया जा सकता है। चीनी वैज्ञानिक आधुनिक सेंसर और सैटेलाइट डेटा की मदद से टेक्टोनिक प्लेटों के तनाव का अध्ययन कर रहे हैं ताकि आने वाले समय में बड़े खतरों से पहले ही जनता को आगाह किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मध्यम तीव्रता वाले भूकंप असल में जमीन के भीतर फंसे हुए अत्यधिक दबाव को बाहर निकालते हैं, जो बड़े भूकंप की आशंका को कुछ हद तक कम करते हैं, फिर भी नागरिकों को हमेशा आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक और तैयार रहना चाहिए। घर बनाते समय भूकंप-रोधी (Earthquake-resistant) तकनीकों का इस्तेमाल करना ही इस क्षेत्र के लोगों के लिए एकमात्र सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय साबित हो सकता है।
Sabarimala विवाद: Sunny M Kapikkad पर केस दर्ज, Kerala गृह मंत्री ने दी जानकारी
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को कहा कि शबरिमला के भगवान अयप्पा और देवी मलिकप्पुरथम्मा के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में दलित कार्यकर्ता सनी एम. कपिक्कड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कपिक्कड़ के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं किए जाने संबंधी सवाल पर चेन्निथला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है।’’कपिक्कड़ ने हाल में एक शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवान अयप्पा और देवी मलिकप्पुरथम्मा का जिक्र करते हुए कथित तौर पर आपत्तिजनक का इस्तेमाल किया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं, शबरिमला से जुड़े स्वयंसेवी संगठनों और कार्यकर्ता राहुल ईश्वर ने बृहस्पतिवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कर कपिक्कड़ के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री से कथित टिप्पणी के पूरे वीडियो और उसके संदर्भ की जांच करने तथा कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी आग्रह किया था।
Mirzapur The Movie Advance Booking: मिर्जापुर मूवी की रिलीज को सात दिन बाकी हैं और रक्षा बंधन के मौके पर फिल्म की एडवांस बुकिंग का ऐलान कर दिया गया है.
नेपाल से आई बड़ी खुशखबरी! त्रिशूली हाइड्रो प्रोजेक्ट साइट से 350 मजदूरों का रेस्क्यू
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बीच नेपाली सेना ने त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसे 350 मजदूरों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है. इनमें कई भारतीय भी शामिल हैं. सेना ने रसुवा के अलग-अलग इलाकों से कुल 883 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है.
भारतीय सर्राफा बाजार में इस बार रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सोने और चांदी की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। त्योहारी सीजन और बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव के बीच देश भर के सर्राफा बाजारों में कीमती धातुओं के दामों में जबरदस्त नरमी दर्ज की गई है। लंबे समय से लगातार आसमान छू रहे सोने के दामों में आई इस अचानक गिरावट से आम आदमी और महिलाओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। रक्षाबंधन के खास मौके पर सोने की कीमतों में करीब 1,000 रुपये तक की कमी आई है, वहीं चांदी के तेवर भी ढीले पड़ गए हैं। अगर आप भी इस त्योहारी मौके पर अपने परिवार या बहनों के लिए सोने-चांदी के गहने या सिक्के खरीदने का मन बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए बेहद किफायती साबित हो सकता है। आइए जानते हैं देश के प्रमुख महानगरों और आपके अपने शहर में आज सोने और चांदी का ताजा खुदरा भाव क्या चल रहा है।रक्षाबंधन पर सोने की कीमतों में बड़ी राहतत्योहारी सीजन के दौरान बाजार में सोने की कीमतों का घटना एक सुखद आश्चर्य माना जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार तेजी का रुख दिखा रहा सोना अब घटकर काफी निचले स्तर पर आ गया है। वैश्विक बुलियन बाजारों में आई सुस्ती और घरेलू स्तर पर मुनाफावसूली के चलते कीमतों पर दबाव देखा गया है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख के कारण निवेशकों ने सोने में सतर्क रुख अपनाया है, जिसका सीधा फायदा भारतीय खुदरा खरीदार को मिल रहा है। रक्षाबंधन के दिन बाजारों में जेवर खरीदने पहुंचे ग्राहकों ने इस गिरावट का पूरा फायदा उठाया है और स्थानीय सर्राफा दुकानों पर अच्छी खासी चहल-पहल नजर आई है।चांदी के दामों में भी आई भारी कमजोरीसोने के साथ-साथ सफेद धातु यानी चांदी के दीवानों के लिए भी बाजार से शानदार खबर आई है। चांदी की कीमतों में पिछले कुछ सत्रों से लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजारों (Commodity Markets) में बिकवाली के दबाव के कारण चांदी के तेवर ठंडे पड़ गए हैं। पिछले सप्ताह के मुकाबले चांदी के भाव में बड़ी फिसलन दर्ज की गई है, जिससे यह निवेशकों और आभूषण निर्माताओं दोनों के लिए मुफ़्त भाव जैसी लग रही है। हालांकि, पिछले एक साल के लंबे अंतराल को देखें तो चांदी ने अपने निवेशकों को बंपर रिटर्न दिया है, लेकिन वर्तमान में आई यह साप्ताहिक गिरावट शॉर्ट-टरम खरीदारों के लिए राहत भरी है।प्रमुख महानगरों में आज क्या है सोने का भावदेश के अलग-अलग शहरों में वैट, लोकल टैक्स और मेकिंग चार्ज के हिसाब से सोने के दामों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने का भाव गिरकर लगभग 1,59,040 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,45,787 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,59,320 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,46,043 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। इसके अलावा चेन्नई जैसे दक्षिण भारतीय बाजारों में 24 कैरेट सोना 1,59,780 रुपये प्रति 10 ग्राम और कोलकाता तथा बेंगलुरु में भी इसी के आस-पास मजबूत कारोबार देखा जा रहा है।चांदी का ताजा रेट और लोकल मार्केट का हालमेट्रो शहरों में चांदी की चमक भी फीकी पड़ी है और यह निवेशकों के बजट में फिट बैठ रही है। देश की राजधानी दिल्ली में 999 फाइन चांदी का हाजिर भाव गिरकर करीब 2,40,950 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। वहीं मुंबई और कोलकाता में चांदी 2,41,000 से 2,41,370 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में बिक रही है। चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में चांदी का भाव थोड़ा ऊपर यानी लगभग 2,42,070 रुपये प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया गया है। स्थानीय सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि रक्षाबंधन के पावन पर्व पर निचले दामों के मिलने से बाजार में रौनक लौट आई है और लोग सोने के सिक्के, हल्के गहने तथा चांदी के उपहार बड़े पैमाने पर खरीद रहे हैं।निवेश से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यानयदि आप रक्षाबंधन या आने वाले दिनों में किसी भी प्रकार का निवेश करने की सोच रहे हैं, तो केवल कीमत देखकर फैसला न करें। हमेशा आभूषण खरीदते समय उसकी शुद्धता की परख हॉलमार्क (Hallmark) के निशान से जरूर करें। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध होता है लेकिन उसके गहने नहीं बनते, इसलिए जेवर हमेशा 22 कैरेट या उससे कम शुद्धता में ही खरीदे जाते हैं। इसके अलावा ज्वेलर से मेकिंग चार्ज (Making Charges) पर मोलभाव करना और जीएसटी का पक्का बिल लेना बिल्कुल न भूलें, ताकि भविष्य में जब आप इसे बेचने जाएं तो आपको आपकी संपत्ति का पूरा और सही मूल्यांकन मिल सके।
नेपाल बाढ़ त्रासदी: नेपाल से बह कर यूपी पहुंचे शव, गंडक नदी से निकाला गया
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद अब उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुएमहराजगंज और कुशीनगर में हाई अलर्टघोषित किया गया है.
Operation Sindoor Pakistan pulled out all stops to locate the S-400; what did the former Air Marshal reveal? ऑपरेशन सिंदूर: एस-400 की लोकेशन के लिए PAK ने लगाया था एड़ी-चोटी का जोर, पूर्व एयर मार्शल ने क्या किया खुलासा?
स्कूल से लौटीं मायावती ने साहस किया और नन्हे भाई को गोद में लेकर पैदल ही अस्पताल की ओर चल पड़ीं. खुद बच्ची थीं और रास्ता लंबा था.
तिब्बत में एक और झील टूटी, नेपाल में आ सकती है तबाही की दूसरी लहर, खाली कराया जा रहा इलाका
Nepal Flood News: नेपाल में बाढ़ को लेकर नया अलर्ट जारी किया गया है. जिसमें तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की खबर है. ऐसे में लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है.
अहमदाबाद में मलाला की किताब पर बवाल! बजरंग दल का हंगामा, रीडिंग कर रहे लोगों के साथ मारपीट
अहमदाबाद के वस्त्रपुर AUDA गार्डन में मलाला यूसुफजई की किताब पढ़ने के लिए जुटे सिविल सोसाइटी और कांग्रेस नेताओं पर बजरंग दल ने हमला किया.
पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने कोलकाता के कैमक स्ट्रीट पर पार्टी के 'अनधिकृत' (बिना इजाज़त लगाए गए) बिलबोर्ड के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और उनके काम में बाधा डाली। शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई। गुरुवार को कोलकाता नगर निगम (KMC) की एक टीम पुलिस के साथ 9, कैमक स्ट्रीट पर लगे एक अनधिकृत होर्डिंग को हटाने पहुंची थी। नगर निकाय ने पुलिस से उस होर्डिंग को हटाने में मदद मांगी थी, जिस पर TMC का साइन लगा हुआ था। इसे भी पढ़ें: Kolkata Police और KMC की कार्रवाई पर भड़के Abhishek Banerjee, गैर-कानूनी एंट्री को लेकर जाएंगे कोर्ट हालांकि, टीम के पहुंचने पर बनर्जी, ओ'ब्रायन, बैसानोर चट्टोपाध्याय और अन्य सहित कई TMC नेताओं ने एक 'गैर-कानूनी भीड़' बनाई और पुलिसकर्मियों तथा KMC अधिकारियों को उनके काम करने से रोकने के लिए उनसे भिड़ गए। पुलिस ने बताया कि TMC नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 191(2), 191(3), 190, 121(1), 74, 3(5) और 351(2) के तहत शेक्सपियर सरणी में मामला दर्ज किया गया। इसे भी पढ़ें: Abhishek Banerjee के Kolkata ऑफिस से हटा TMC होर्डिंग, पुलिस से झड़प TMC ने पुलिस और सिविक बॉडी की कार्रवाई की आलोचना की TMC ने सिविक बॉडी और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक बदले की भावना बताया है। पार्टी, जिसने 2026 के पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों सत्ता गंवा दी थी, ने कहा है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी TMC से 'डरे हुए' हैं। अभिषेक ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल में संवैधानिक शासन का लगातार पतन हो रहा है और राज्य तेज़ी से पुलिस राज की ओर बढ़ रहा है। जब राज्य की सत्ता बिना किसी संवैधानिक रोक-टोक के काम करती है, तो न्यायपालिका ही बचाव की आखिरी उम्मीद होती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर मौलिक अधिकारों के हनन के समय न्यायपालिका दखल नहीं देती है, तो दांव पर सिर्फ़ लोगों की आज़ादी नहीं होती, बल्कि लोकतंत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है। वहीं, ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि शुक्रवार को TMC के छात्रों की एक सालाना रैली होने वाली थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिविक बॉडी की टीम ज़रूरी जानकारी देने में नाकाम रही और उनका दस्तावेज़ बिना हस्ताक्षर वाला और अधूरा था।
जिन्हें खुद श्रीलंका ने नहीं माना भरोसेमंद, उन्होंने भारतीय स्पिनरों की खोल दी पोल!
सीरीज जीतने के बावजूद कोलंबो टेस्ट का पांचवां दिन भारत के लिए कई सवाल छोड़ गया. स्पिन के अनुकूल पिच पर श्रीलंका के निचले क्रम को करीब दो दिन तक आउट न कर पाना भारतीय गेंदबाजी की धार और 'किलिंग इंस्टिंक्ट' पर सवाल खड़े करता है. श्रीलंका की जुझारू बल्लेबाजी काबिल-ए-तारीफ रही, लेकिन भारत के लिए संदेश साफ है- टेलेंडर्स को जल्दी समेटने की पुरानी कमजोरी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
देहरादून के इस गांव में बहनें नहीं बांध पाएंगी राखी; NDTV को सुनाई अपनी दर्दभरी कहानी
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व माना जाता है, लेकिन देहरादून जिले की सहसपुर विधानसभा के बटोली गांव में इस बार यह त्योहार मायूसी के बीच गुजर रहा है. यहां की कई बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांध पाएंगी.
इतनी बड़ी हुई सुष्मिता सेन की छोटी बेटी, दिखा ग्लैमरस अंदाज
सुष्मिता सेन आज अपनी छोटी बेटी अलिसा सेन का 17वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रही हैं. इस मौके पर उन्होंने उन्हें बर्थडे विश करते हुए कुछ प्यार भरी पोस्ट शेयर की हैं.
पहलवानों से हुई भिड़ंत... आ रहा Ather का सबसे सस्ता स्कूटर
देसी कंपनी एथर एनर्जी भारतीय बाजार में एक नया स्कूटर लाने वाली है. 29 अगस्त को लॉन्च होने वाला ये स्कूटर दमदार फीचर्स के साथ आएगा. एथर कोणार्क कंपनी का सबसे सस्ता स्कूटर होने वाला है. ब्रांड ने इसका एक नया वीडियो शेयर किया है, जिसमें स्कूटर की ड्यूरेबिलिटी को दिखाया गया है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.
रक्षाबंधन पर इस दिशा में भाई को बांधें राखी
देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है. भारतीय परंपराओं में इस पर्व का विशेष महत्व है. वास्तु के अनुसार, राखी बांधते समय दिशाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है. रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए पहली महत्वपूर्ण दिशा पूर्व-उत्तर-पूर्व है.
उपासना सिंह ने लगाए CINTAA पर गंभीर आरोप, कहा- सिर्फ पूनम ढिल्लो-पद्मिनी को दिखाया जाता है
उपासना सिंह, जो सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की पूर्व महासचिव रही हैं. उन्होंने संगठन के मौजूदा नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
रक्षाबंधन पर बाबा रामदेव ने कंगना रनौत को भेजे तोहफे और मिठाई, कहा- शिकवे भुलाकर आगे बढ़ें
बीते दिनों योग गुरु बाबा रामदेव और भाजपा सांसद कंगना रनौत के बीच विवाद कंगना के 'जेन-जी' प्रदर्शनकारियों को गटरछाप कहने वाले बयान से शुरू हुआ था. लेकिन अब बाबा रामदेव ने कंगना को मिठाई और गिफ्ट भेजा है.
नेपाल के लिए अगला 90 मिनट डरावना... जिस लेक के फटने का डर था, अब वहां से आ रही तबाही!
चीन-नेपाल सीमा पर ग्लेशियर धंसने से मलबे की बनी झील से पानी ओवरफ्लो होने लगा, जिसके बाद राहत और बचाव अभियान फिलहाल रोक दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, इसलिए नेपाल के लिए अगला 90 मिनट बेहद अहम माना जा रहा है.
जलप्रलय के बाद नेपाल के इस कस्बे को पहचानना हुआ मुश्किल, देखें
नेपाल में भारी तबाही के बीच आजतक की टीम मौके पर मौजूद है, वहां की हर तस्वीर हम आपतक पहुंचा रहे हैं. रसुआ, नुवाकोट और त्रिशूली वो इलाके हैं, जहां सबसे अधिक तबाही हुई है. आजतक संवादादाता श्वेता सिंह की रिपोर्ट देखिए.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। इस मामले में दिल्ली में रहने वाले एक पति-पत्नी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों साल 2024 से पाकिस्तान में बैठे कथित खुफिया ऑपरेटिव्स के संपर्क में थे और भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने में उनकी मदद कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साहिल (25) और उसकी पत्नी समीरा (21) के रूप में हुई है। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सुराग मिले हैं, जिनके तार दिल्ली से निकलकर पाकिस्तान के कराची और इस्लामाबाद तक जुड़ते हैं। पुलिस का आरोप है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स इस दंपति को पैसे भेजते थे और बदले में उनसे अलग-अलग तरह की मदद ली जाती थी। पुलिस के मुताबिक, साहिल और समीरा ने 2024 से 2025 के बीच आठ भारतीय सिम कार्ड हासिल किए और उन्हें दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा। इन सिम कार्ड के बदले कथित तौर पर दंपति को करीब 30 हजार रुपये दिए गए। जांच एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान पहुंचने के बाद इन नंबरों से WhatsApp अकाउंट एक्टिव किए गए। कथित पाकिस्तानी ऑपरेटिव्स ने इन अकाउंट्स का इस्तेमाल भारत में लोगों से संपर्क करने और संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए किया। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ WhatsApp अकाउंट्स के जरिए भारतीय WhatsApp ग्रुप्स में शामिल होने की कोशिश की गई। पुलिस को शक है कि इन ग्रुप्स के माध्यम से भी भारत से जुड़ी जानकारियां जुटाने का प्रयास किया जा रहा था। इसे भी पढ़ें: Chandra Grahan 2026: Raksha Bandhan 2026 और Chandra Grahan का संयोग, क्या भारत में दिखेगा आंशिक ग्रहण स्पेशल सेल के मुताबिक, मामले में साहिल की भूमिका केवल ऑनलाइन संपर्क या लॉजिस्टिक मदद तक सीमित नहीं थी। उस पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में कैंटोनमेंट और सैन्य इलाकों की रेकी करने का काम सौंपे जाने का आरोप है। पुलिस का यह भी कहना है कि साहिल से सेना के ऐसे जवानों से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई, जिनके खिलाफ सैन्य न्यायिक कार्रवाई यानी कोर्ट मार्शल की कार्यवाही चल रही थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इन सुरागों से संकेत मिलता है कि कथित नेटवर्क का मकसद सिर्फ सामान्य सूचनाएं इकट्ठा करना नहीं था। इसकी नजर भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों पर भी थी। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई। साहिल कथित तौर पर 2024 में Instagram के जरिए एक पाकिस्तानी एजेंट के संपर्क में आया था। पुलिस का आरोप है कि इस संपर्क को उसकी पत्नी समीरा ने आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। साहिल और समीरा एक-दूसरे को 2022 से जानते थे और बाद में दोनों ने शादी कर ली। जांच के मुताबिक, Instagram पर संपर्क में आए पाकिस्तानी एजेंट ने बाद में इस दंपति को एक पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव से मिलवाया। कथित तौर पर इसी ऑपरेटिव ने दोनों को पैसे का लालच देकर नेटवर्क के लिए काम करने के लिए तैयार किया। इसके बाद उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ती गईं। पुलिस का कहना है कि दंपति को दिल्ली में नेटवर्क के लिए लॉजिस्टिक मदद उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए लोगों को जासूसी और फील्ड ऑपरेशन से जोड़ने का काम भी दिया गया था। इसे भी पढ़ें: Shubman Gill ने श्रीलंका के खिलाफ फॉलोऑन देने के फैसले का बचाव किया स्पेशल सेल ने सबसे पहले साहिल को दिल्ली के सराय काले खां इलाके में स्थित चांद बीबी कैंप से गिरफ्तार किया। वह मोहम्मद अशफाक का बेटा है। साहिल के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पाकिस्तानी एजेंट्स के साथ हुई बातचीत मिली। इन्हीं चैट्स के आधार पर जांच आगे बढ़ी और अधिकारियों को समीरा की कथित भूमिका के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने समीरा को भी गिरफ्तार कर लिया। उसके मोबाइल फोन से भी WhatsApp चैट और बातचीत मिलने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन बातचीत में साहिल के अलावा पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर्स से संपर्क के संकेत मिले। दंपति के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इन उपकरणों में पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव्स के साथ बातचीत के अलावा भारत में नेटवर्क से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों से संबंधित जानकारी भी मौजूद थी। जांच में कथित नेटवर्क की तस्वीर यहीं तक सीमित नहीं रही। पुलिस का कहना है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स भारत में मौजूद कुछ लोगों से सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क कर रहे थे। इनमें कथित तौर पर कुछ ओवरग्राउंड वर्कर्स और स्लीपर सेल्स से जुड़े लोग भी शामिल थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भारत में इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था और गिरफ्तार दंपति के अलावा इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat के अमेरिकी इवेंट आयोजक का X Account निलंबित, Akhilesh ने साधा निशाना पुलिस के मुताबिक, साल 2001 में जन्मे साहिल ने दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से BA की पढ़ाई की है। वह एक वकील के साथ काम कर चुका था और आगे LLB करने की योजना बना रहा था। जून 2025 में उसने अपनी नौकरी छोड़ दी थी और उसके बाद से वह बेरोजगार था। वहीं, 2005 में जन्मी समीरा ने केशवपुरम के कन्या विद्यालय से 12वीं तक पढ़ाई की और बाद में पत्राचार के जरिए BA किया। गिरफ्तारी से पहले वह नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम कर रही थी। स्पेशल सेल के मुताबिक, इस पूरे मामले की जांच उस वक्त शुरू हुई जब अधिकारियों को आतंकवादी संगठनों, उनके कथित ओवरग्राउंड वर्कर्स और स्लीपर सेल्स को लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराए जाने की जानकारी मिली। जांच आगे बढ़ने के साथ अधिकारियों को ऐसे स्थानीय लोगों के बारे में सुराग मिले, जो कथित तौर पर भारतीय सिम कार्ड हासिल करने और पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तथा भारत में मौजूद संपर्कों के बीच संचार स्थापित कराने में मदद कर रहे थे। अब साहिल और समीरा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। स्पेशल सेल का कहना है कि दोनों से पूछताछ और उनके मोबाइल उपकरणों से मिले डेटा ने पाकिस्तान स्थित कथित खुफिया नेटवर्क और भारत में उसके संपर्कों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग दिए हैं। फिलहाल जांच का बड़ा सवाल यही है कि यह नेटवर्क दिल्ली और कुछ दूसरे इलाकों में कितनी दूर तक फैला हुआ था और इसके जरिए किस स्तर की संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी।
मोबाइल को खत्म कर देगा SIM वाला इयरफोन? मिलेंगे AI फीचर्स भी
Plaud One नाम का TWS लॉन्च हुआ है, जिसके अंदर कई कमाल के फीचर्स और सिम कार्ड का सपोर्ट दिया है. इसमें सिम कार्ड की मदद से बिना फोन और कंप्यूटर के भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसमें AI का सपोर्ट दिया है, जो वॉयस कमांड पर काम करेगा. साथ ही कॉल रिकॉर्डिंग में मदद करेगा. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने आईएसआई समर्थित जासूसी मॉड्यूल से जुड़े दंपति साहिल और समीरा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों पर 8 भारतीय सिम पाकिस्तान भेजने और संवेदनशील जानकारी जुटाने में मदद का आरोप है।
Amaravati में खुलेगा देश का पहला Quantum और AI विश्वविद्यालय, CM चंद्रबाबू नायडू ने दी मंजूरी
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) द्वारा अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और कृत्रिम मेधा (एआई) विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राजधानी क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण की बैठक में लिया गया। एनआईईएलआईटी विश्वविद्यालय का संचालन भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है। बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में नायडू ने कहा, ‘‘हमने भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एनआईईएलआईटी की ओर से अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और एआई विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की मंजूरी दी है।’’यह परिसर 8.5 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा, जिसमें पांच वर्षों में 730.7 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इस राशि को इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार के सहायता अनुदान द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित करने का प्रस्ताव है। यह संस्थान क्वांटम प्रौद्योगिकियों, एआई, सेमीकंडक्टर और अन्य उभरते हुए प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता का समावेश होगा। अमरावती में स्थायी परिसर का निर्माण पूरा होने तक शैक्षणिक और उन्नत प्रौद्योगिकी कौशल विकास कार्यक्रम सितंबर 2026 से गुंटूर स्थित आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय के एक अस्थायी परिसर में शुरू होंगे। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस परियोजना के माध्यम से पांच वर्षों में लगभग 8,250 शिक्षार्थियों को प्रशिक्षित होने का अनुमान है जिनमें 1,650 औपचारिक डिग्री कार्यक्रमों के माध्यम से और 6,600 कौशल तथा प्रमाणनकार्यक्रमों के माध्यम से शामिल होंगे। पांचवें वर्ष तक वार्षिक प्रवेश क्षमता लगभग 3,913 शिक्षार्थियों तक पहुंचने अनुमान है।
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