इमरान खान को पुलिस ने किया डिटेन, क्यों CJP प्रोटेस्ट में हुए थे शामिल?
इमरान खान को मुंबई पुलिस ने डिटेन कर लिया है क्योंकि वो अगस्त क्रांति मैदान में CJP आंदोलन का हिस्सा बनने पहुंचे थे. लेकिन एक्टर ने इस आंदोलन में आने का फैसला क्यों लिया था? इसके बारे में भी उन्होंने बताया.
कूड़ा फेंककर जाने लगा शख्स, कैमरे से आई आवाज- अभी उठाओ! देखें VIDEO
UP News: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-1 में खुले में कूड़ा फेंकने वाले व्यक्ति को CCTV कैमरे से पब्लिक अनाउंसमेंट कर चेतावनी दी गई. इसके बाद वह कूड़ा उठाकर घर ले गया. वीडियो वायरल है.
Akhilesh Yadav की चुनौती पर CM Yogi का तीखा पलटवार
उत्तर प्रदेश में अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. बलरामपुर की सभा में योगी ने अखिलेश को भी अयोध्या से नामांकन करने की चुनौती दी. उन्होंने राम मंदिर, माफिया राज और विपक्ष की भाषा पर भी निशाना साधा. वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भागवत कथा में शामिल होने के बावजूद रामलला के दर्शन नहीं करने पर अखिलेश से सवाल किए.
धड़ाम हुए प्याज के दाम... नासिक और अलवर से आ रहा बंपर स्टॉक, जानिए मंडी में अब कितनी हो गई कीमत?
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से नई फसल आने के कारण प्याज के थोक भावों में 20% तक की गिरावट आई है, जिससे मंडियों में कीमतें कम हुई हैं। हालांकि, खुदरा बाजार में अभी भी प्याज महंगा है।
'मोदी और मीर जाफर की लड़ाई', स्टारलिंक के मुद्दे को लेकर BJP का राहुल गांधी पर हमला
एलन मस्क के स्टारलिंक को लेकर किए गए ट्वीट पर राहुल गांधी के रिपोस्ट ने सरगर्मी बढ़ा दी है। भाजपा की तरफ से इस पर जबरदस्त हमला बोला गया है। संबित पात्रा ने कहा कि यह मोदी बनाम मीर जाफर की लड़ाई है
बाइक में लगा दिया जेट इंजन, फिर इतनी रफ्तार से दौड़ी हार्ले
क्या हो अगर किसी बाइक में छोटा रॉकेट इंजन लगा दिया जाए. ऐसा ही कुछ एक यूट्यूबर ने किया है. बाइक्स एंड बियर्ड्स ने इस प्रोजेक्ट के लिए हार्ले डेविडसन बाइक को चुना. इस बाइक का इंजन खराब हो चुका था, जिसे रिपेयर नहीं किया जा सकता था. इस स्पेशल प्रोजेक्टर में बाइक के इंजन की जगह दो छोटे जेट टर्बाइन्स का इस्तेमाल किया गया है.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मतदाताओं के विशेष सारांश संशोधन का बचाव करते हुए पारदर्शिता पर जोर द
नवरात्रि के किस दिन पहने कौन से रंग के कपड़े? देखें पूरी लिस्ट
Shardiya Navratri 2026 Colors Day Wise List: शारदीय नवरात्रि 2026, 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक मनाई जाएगी. नवरात्रि के नौ दिनों में अलग-अलग रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. जानें किस दिन कौन सा रंग पहनें और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का महत्व.
ये 5 कंडीशन... जब बैंक आपको देंगे हर दिन ₹5000 तक का जुर्माना!
भारतीय रिजर्व बैंक के नियम के अनुसार, अगर बैंक कुछ शर्तों के तहत आपका काम समय पर पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ सकता है. यह जुर्माना हर दिन के हिसाब से दिया जाता है.
'सिस्टम पर शक है या चुनावी नतीजों पर...', देशवासियों के नाम पूर्व IAS-IFS की चिट्ठी
देशवासियों के नाम खुली चिट्ठी में अफसरों ने कहा कि हमने अपनी पूरी जिंदगी भारत के चुनाव करवाए हैं या उनकी स्टडी की है. हमने रोल तैयार किए, पोलिंग पार्टियों को ट्रेन किया, स्ट्रॉन्ग रूम सील किए और गिनती की निगरानी की. हम इसलिए लिखते हैं क्योंकि एक शब्द 'रिग्ड' अब बिना सबूत के हमारे चुनावों पर फेंका जाता है.
15 अक्टूबर से UPI पर लगेगा चार्ज, CTI की मांग- रोल बैक करे सरकार
UPI Payment MDR के विरोध में व्यापारियों के संगठन सीटीआई ने वित्त मंत्री को पत्र लिखा है और उनसे इस चार्ज को टालने की डिमांड की है. CTI चेयरमैन के मुताबिक, इसे लेकर देशभर के व्यापारियों में आक्रोश है.
कोई टॉयलेट में छिपा, कोई गुरुद्वारे में... CJP प्रोटेस्ट में दिनभर चला लुका-छिपी का खेल
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की दादी के निधन के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए महाराष्ट्र स्थित अपने गृह नगर जाने में मदद की पेशकश की. दीपके को CJP के दो अन्य नेताओं के साथ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था.
'अरे गांधी जी, कहां भाग रहे हैं?' CJP प्रोटेस्ट का वायरल VIDEO
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें गांधी जी का हुलिया बनाए एक शख्स दौड़ता नजर आ रहा है, जबकि उसके पीछे दिल्ली पुलिस के जवान भी भाग रहे हैं.आइये जानते हैं फिर क्या हुआ.
कल सुबह जल्दी शुरू होगा कलश स्थापना का मुहूर्त, तुरंत नोट करें टाइमिंग
शारदीय नवरात्र की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ होती है. इस बार घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 11 अक्टूबर को सुबह 6:19 बजे से लेकर सुबह 10:12 बजे तक रहेगी. जो लोग इस शुभ घड़ी में घटस्थापना न कर पाएं वो अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:44 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक भी घटस्थापना कर सकते हैं.
CJP प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस से 150 प्रदर्शनकारी हिरासत में
दिल्ली के कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर क्षेत्र में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है. राजधानी में प्रदर्शनकारियों की हलचल तेज होते ही दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कनॉट प्लेस में इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने और बैनर पोस्टर दिखाने की कोशिश कर रहे लोगों को तुरंत डिटेन कर बसों से ले जाया गया है. आने वाले समय में हिरासत में लिए गए लोगों का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.
भारत IN, पाकिस्तान OUT! वर्ल्ड कप को लेकर हो गई बड़ी भविष्यवाणी
साल 2027 के वनडे वर्ल्ड कप को लेकर चर्चाओं का माहौल अभी से तेज है. इस बार वर्ल्ड कप के दौरान सेमीफाइनल में नंबर-1 टीम का मुकाबला नंबर-4 से और नंबर-2 टीम का मुकाबला नंबर-3 से होगा. लेकिन ये सवाल सभी के मन में है कि आखिर सेमीफाइनल में कौन सी चार टीमें पहुंचेगी?
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान अरविंद केजरीवाल समेत कई नेता हिरासत में लिए गए
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा बलों के कड़े इंतजाम के बावजूद प्रदर्शनकारी बाहर निकले. हालांकि, पुलिस और सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को तुरंत हिरासत में ले लिया. इस दौरान मुंबई से दिल्ली पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों सौरभ दास और आशुतोष रांका को फ्लाइट उतरते ही प्लेन के भीतर से ही हिरासत में ले लिया गया.
दिल्ली में कथित चुनावी धांधली और SIR के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शनों पर बीजेपी ने इसे जनता की जीत बताया है। रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा कि भारत कोई 'बनाना रिपब्लिक' नहीं है।
कानून तोड़ने वाले बच्चों के नाम Internet पर सार्वजनिक न हों: प्रधान न्यायाधीश
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि ‘कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों’ के नाम समाचारों एवं इंटरनेट पर सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि यह वाक्यांश उसकी परिस्थिति को दर्शाता है, न कि उसकी पहचान को। प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय की किशोर न्याय समिति द्वारा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सहयोग से आयोजित ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के 10 वर्ष: प्रगति, चुनौतियां और अगले दशक की प्राथमिकताएं’ विषय पर राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद कहा कि किसी कानून के लिए 10 वर्ष का समय कम होता है लेकिन यह किसी बच्चे के बचपन के आधे से भी अधिक समय के बराबर है। उन्होंने कहा कि 2015 का यह अधिनियम इस सोच पर आधारित है कि किसी बच्चे पर अपराधी का ठप्पा लगाने के बजाय उसे दूसरा मौका दिया जाए तो उसके समाज का एक उपयोगी सदस्य बनने की संभावना कहीं अधिक होती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह यात्रा वास्तव में तभी पूरी होती है, जब अतीत की छाया भविष्य पर पड़नी बंद हो जाए। इसके लिए हमें पुराने रिकॉर्ड समय पर नष्ट करने होंगे और कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों के नाम समाचारों और इंटरनेट पर सार्वजनिक होने से रोकने होंगे, क्योंकि एक बार इंटरनेट पर आने के बाद ये नाम वर्षों तक वहां बने रह सकते हैं।’’प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जनवरी 2016 में जब यह अधिनियम लागू हुआ था, तब किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किए गए 15 वर्षीय बच्चे की उम्र आज लगभग 25 वर्ष होगी और इस अधिनियम ने उस बच्चे से जो पहला वादा किया था, वह इसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों में ही निहित है। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘कानून का उल्लंघन करने वाला बच्चा’ वाक्यांश उस बच्चे की परिस्थिति को दर्शाता है, न कि उसकी पहचान को।’’प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे बच्चों की परिस्थितियां आमतौर पर कठिन होती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कहानियों में अक्सर पढ़ाई बीच में छूटने, परिवारों के मुश्किल हालात से गुजरने और गरीबी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी बच्चे से बातचीत करने और उसकी ओर से बोलने वाला कोई नहीं है, तो उसे अपनी बात रखने का अधिकार देने का कोई विशेष मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि इसी कारण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की 2024 की बाल-अनुकूल विधिक सेवा योजना में पुलिस थानों में बच्चों के लिए वकील और प्रत्येक किशोर न्याय बोर्ड में विधिक सेवा क्लिनिक की व्यवस्था की गई है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इसके बावजूद कई बोर्ड में अब भी ऐसे क्लिनिक नहीं हैं। इनके अभाव में बच्चे की देखभाल और कल्याण से जुड़े शुरुआती फैसले उचित कानूनी प्रतिनिधित्व के बिना लिए जाने की संभावना है।’’उन्होंने विधिक सेवा संस्थानों से बच्चों के लिए प्रशिक्षित बचाव पक्ष के वकीलों का एक अलग प्रकोष्ठ बनाने पर भी विचार करने का आग्रह किया, ताकि प्रत्येक बच्चे को शुरुआत से ही एक समर्पित वकील मिल सके। प्रधान न्यायाधीश ने नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि निजता का उचित ध्यान रखते हुए यह पता लगाया जा सके कि कितने बच्चे दोबारा विद्यालय गए, कितनों को रोजगार मिला और कितनों को फिर कभी किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश नहीं होना पड़ा। उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह परामर्श कार्यक्रम इस महत्वपूर्ण कानून की समीक्षा करने और यह समझने का अवसर है कि पिछले 10 वर्ष में इस कानून का उन बच्चों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है, जिनके लिए इसे बनाया गया था। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय बोर्ड का उद्देश्य किसी ‘‘छोटी आपराधिक अदालत’’ की तरह काम करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इसकी भूमिका एक अलग सोच पर आधारित है, जो यह स्वीकार करती है कि बच्चों में विकास करने और बदलने की क्षमता होती है तथा न्याय व्यवस्था को उनके विकास से जुड़ी इस वास्तविकता को गंभीरता से लेना चाहिए। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यह अधिनियम अंततः भविष्य से जुड़ा कानून है। उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई बच्चा कानून तोड़ता है, तो कानून को उस बच्चे को नहीं तोड़ना चाहिए।
नोबेल पुरस्कार जीतने से क्यों बढ़ जाता है 'नोबेलाइटिस' होने का खतरा? जानिए इसके लक्षण
नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद कुछ विजेता वास्तविकता से दूर होने लगते हैं. वे अचानक ऐसी बातें कहने लगते हैं, जिनका विज्ञान से कोई लेना-देना नहीं होता. कुछ लोग इस स्थिति को “नोबेलाइटिस” कहते हैं.
होल्कर स्टेडियम में लगेगा रनों का अंबार, टॉस और पिच पर दोनों कप्तानों की नजर
INDvsWI भारत और वेस्टइंडीज के बीच रविवार को होने वाले तीसरे टी-20 मैच में दोनों टीमों की नजरें यह मुकाबला जीतकर सीरीज में बढ़त बनाने पर होगी। सीरीज अभी 1-1 से बराबरी पर है, इसलिए दोनों टीमें बढ़त बनाने और 2-1 से आगे निकलने का प्रयास करेंगी, ताकि वे ...
संयुक्त आयुक्त से नीचे के अधिकारी नहीं कर सकेंगे माल की जांच, नियमों में हुआ बड़ा बदलाव
जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद माल ढुलाई नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब संयुक्त आयुक्त से नीचे के अधिकारी मालवाहक गाड़ियों की जांच नहीं कर सकेंगे।
'अराजकता फैलाना किसी का अधिकार नहीं', जागरण साहित्य सृजन सम्मान में बोले राजनाथ सिंह
दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की जयंती परबुद्धिनाथ मिश्र को दैनिक जागरण साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित किया गया है।
124 पूर्व IAS-IFS अधिकारियों के एक समूह ने भारत के चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का बचाव किया है।
प्रदर्शनकारियों से झड़प में महिला पुलिसकर्मी की उंगली टूटी
सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प के बीच महिला और पुरुष पुलिसकर्मी घायल हो गए. एक महिला हेड कॉन्सटेबल की उंगली फ्रैक्चर हो गई तो खींचतान में एक पुरुष पुलिसकर्मी की नेम प्लेट भी फट गई. कई को हल्की चोट आई.
Sajjala Ramakrishna Reddy ने दिए निर्देश, जिला स्तर पर Legal War Room बनाएगी YSRCP
युवाजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने शनिवार को पार्टी की लीगल सेल से कहा कि वह आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के लिए सुरक्षा कवच के तौर पर काम करे और नामांकन से लेकर वोटों की गिनती तक कानूनी सहायता प्रदान करे। ताडेपल्ली में YSRCP के केंद्रीय कार्यालय में लीगल सेल की बैठक को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए सज्जाला ने कहा कि जिला-स्तर पर लीगल वॉर रूम, निर्वाचन क्षेत्र-स्तर पर टास्क फोर्स और राज्य-स्तर पर समन्वय तंत्र तुरंत स्थापित किए जाने चाहिए। बैठक में YSRCP के महासचिव पोन्नावोलु सुधाकर रेड्डी, लेल्ला अप्पीरेड्डी, चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी और पुडी श्रीहरि, लीगल सेल के राज्य अध्यक्ष मालासानी मनोहर रेड्डी, कार्यकारी अध्यक्ष सुदर्शन रेड्डी, राज्य समिति के सदस्य, जिला अध्यक्ष और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के अध्यक्ष शामिल हुए। इसे भी पढ़ें: Jagan Mohan Reddy सरकार के कामों का क्रेडिट ले रहे Chandrababu, YSRCP ने दी बहस की चुनौती सज्जाला ने SIR प्रक्रिया पूरी होने और फ़ाइनल वोटर लिस्ट जारी होने से पहले ही लोकल चुनाव कराने की सरकार की जल्दबाज़ी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, नए योग्य वोटरों को शामिल किए बिना चुनाव कराने से उनके वोट देने के संवैधानिक अधिकार पर असर पड़ेगा। एक प्रेस रिलीज़ के अनुसार, उन्होंने यह भी मांग की कि BC रिज़र्वेशन कमीशन की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और रिज़र्वेशन का प्रतिशत तय करने का आधार भी बताया जाए। उन्होंने कहा कि असली चुनावी लड़ाई नॉमिनेशन के चरण से शुरू होती है। उम्मीदवारों और वैकल्पिक उम्मीदवारों को जाति प्रमाण पत्र, NOC और अन्य दस्तावेज़ पहले से तैयार रखने चाहिए। संवेदनशील इलाकों, नॉमिनेशन सेंटरों, पोलिंग स्टेशनों और स्ट्रॉन्ग रूम की पहचान करके उन पर कड़ी नज़र रखी जानी चाहिए। इसे भी पढ़ें: Gorantla Madhav का TDP पर वार, बोले- Tenali मामले में दिखा पुलिसिंग पर राजनीतिक दखल अधिकारियों, पुलिस या किसी और की तरफ़ से होने वाले हर उल्लंघन को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाना चाहिए और कानूनी, मीडिया और चुनाव आयोग की कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए। पोन्नावोलु सुधाकर रेड्डी ने कहा कि लीगल सेल उन पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहा है जिन्हें मुकदमों, गिरफ़्तारी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी ने कहा कि वकीलों को यह पक्का करना चाहिए कि तकनीकी आधार पर किसी का नॉमिनेशन रद्द न हो और जहाँ भी ज़रूरत हो, तुरंत कानूनी मदद दी जाए।
अयोध्या से लड़ने वाले योगी आदित्यनाथ के चैलेंज पर अखिलेश यादव ने दिया जवाब
अयोध्या से लड़ने वाले योगी आदित्यनाथ के चैलेंज पर अखिलेश यादव ने दिया जवाब
Delhi में हिरासत में लिए गए CPIM नेताओं ने की पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेताओं ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। वहीं, केरलमम में पार्टी के नेताओं ने भी उन्हें हिरासत में लिए जाने की निंदा की। हिरासत में लिए जाने के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए केरलमम विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी को ‘‘खुली जेल’’ में तब्दील कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार सशस्त्र पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात करके विरोध प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश कर रही है। माकपा नेता पी राजीव ने भी हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें ले जा रहे पुलिस वाहन से एक वीडियो बनाया। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारियों के बावजूद भारत में लोकतंत्र को बचाने के लिए प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘माकपा के सभी केंद्रीय नेताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्हें गिरफ्तार करके जेल जैसी गाड़ी में ले जाया गया है। हम पिछले एक घंटे से इस गाड़ी में हैं।’’इस बीच, माकपा नेता पी ए मोहम्मद रियास ने फेसबुक पर एक पोस्ट में पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे ‘‘अलोकतांत्रिक’’ बताया। बेयपोर से विधायक और विजयन के दामाद रियास ने कहा कि अधिकारियों को यह नहीं मानना चाहिए कि पार्टी नेताओं को गिरफ्तार करके वे विरोध प्रदर्शनों को दबा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतंत्र का बुनियादी अधिकार है और पार्टी लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना संघर्ष और तेज करेगी। माकपा के वरिष्ठ नेता वी शिवनकुट्टी ने ‘‘हम लेके रहेंगे’’ नारे वाली एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की। वहीं, माकपा की केरलमम इकाई ने दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन करने का आह्वान किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ Delhi में प्रदर्शन, Saurabh Bharadwaj ने उठाए भारी फोर्स पर सवाल
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शनिवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान युवाओं को अपनी आवाज़ उठाने से रोक रही है। भारद्वाज ने कहा कि देश भर से युवा अपने अधिकारों की मांग करने के लिए दिल्ली में इकट्ठा हुए थे। उन्होंने कहा आज देश के हर कोने से युवा अपने अधिकारों की मांग करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी आए हैं। अंग्रेज़ों ने भी ऐसा व्यवहार नहीं किया था। जब गांधीजी ने अंग्रेज़ों से अधिकार मांगने के लिए दांडी मार्च किया था, तो उन्हें मार्च करने की अनुमति दी गई थी। अंग्रेज़ों ने भी अपनी आवाज़ उठाने के अधिकार को माना था। फिर भी, मौजूदा सरकार कहती है कि आप अपनी आवाज़ भी नहीं उठा सकते; आप बोल भी नहीं सकते। इसे भी पढ़ें: Shivraj Singh Chouhan को थमाई झूठी स्क्रिप्ट, YSRCP ने Proddatur कार्यक्रम पर TDP को घेरा भारद्वाज ने कहा कि अगर आप इस देश में आवाज़ उठाने की इजाज़त नहीं देते हैं, तो असल में आप अराजकता के बीज बो रहे हैं। सरकार ही इतनी बड़ी संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री फ़ोर्स तैनात करके यह स्थिति पैदा कर रही है। क्या पाकिस्तान ने हमला किया है? या बांग्लादेश ने? या चीन ने? उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बारे में सरकार और उसकी एजेंसियों के आरोपों का भी ज़िक्र किया और सवाल उठाया कि इतनी बड़ी सुरक्षा मौजूदगी की ज़रूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा आपकी सरकार, आपके मंत्री और आपकी इंटेलिजेंस एजेंसियां दावा करती थीं कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समर्थक पाकिस्तानी या बांग्लादेशी हैं। खैर, अगर वे सच में पाकिस्तानी, बांग्लादेशी या विदेशी हैं, तो उनसे इतना डर क्यों है? वे अपने देश में हैं; वे यहाँ नहीं आ सकते। वे देश में कहीं और नहीं जा रहे हैं। भारद्वाज ने कहा कि प्रदर्शनकारी सुबह से ही गिरफ़्तारी दे रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे, साथ ही उन्होंने कहा कि AAP को हिरासत में लिए जाने से डर नहीं लगता। उन्होंने कहा वे सुबह से ही गिरफ़्तारी दे रहे हैं, और मुझे लगता है कि यह दिन भर चलता रहेगा। हमें गिरफ़्तार होने से डर नहीं लगता।
'आप पर गर्व है' CJP का नाम लिए बिना सपोर्ट में आए राहुल गांधी, BJP को चेतावनी- जो करना है कर लो…
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिना नाम लिए कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन दिया है। उन्होंने चेन्नई से एक वीडियो जारी करके कहा कि हिन्दुस्तान के युवाओं हमें आप पर गर्व है। अपना विरोध जारी रखिए। हम आपके साथ हैं।
'अखिलेश अयोध्या से चुनाव लड़ें या माफी मांगें', BJP बोली- अब फंसी सपा
UP Politics: योगी आदित्यनाथ के अयोध्या से चुनाव लड़ने के ऑफर पर बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव को चुनौती दी. जानें बलरामपुर की जनसभा में सीएम योगी ने क्या कहा.
9 या 10 दिन, जानें इस बार कितने दिन के होंगे शारदीय नवरात्र
Shardiya Navratri Dates 2026: नवरात्र कितने दिन का होगा, 9 या 10? जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, अष्टमी-नवमी की तारीख और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का पूरा कैलेंडर.
गोवा के 7 खूबसूरत गांव, अक्टूबर में दोस्तों संग बनाएं घूमने का प्लान
गोवा को अगर आपने अब तक सिर्फ बीच, पार्टी और नाइटलाइफ के लिए जाना है, तो इसका शांत और खूबसूरत रूप भी देखिए. अक्टूबर में दिवर आइलैंड, एल्डोना, लुटोलिम, कुर्डी, चांदोर, रिवोना और क्वेपेम जैसे गांवों में प्रकृति, इतिहास और स्थानीय संस्कृति को जान सकते हैं. गोवा की असली खूबसूरत को अक्सर लोग देखना मिस कर देते हैं, लेकिन आप इन जगहों की सैर कर सकते हैं.
CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग, सुरिंदर चौधरी ने दिल्ली में पाबंदियों पर उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉजपा के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बीच दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों का जिक्र करते हुए शनिवार को सवाल उठाया कि क्या आज के हालात आपातकाल के समय से कम गंभीर हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) नेताओं को हिरासत में लिए जाने को ‘‘गलत’’ बताते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने और संस्थाओं की आजादी बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कुमार के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच कराने की भी मांग करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने यहां एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा, ‘‘कॉजपा नेताओं को हिरासत में लेना गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रदर्शन करना उनका अधिकार है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और ये आरोप किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि उनके दो सहयोगियों ने लगाए हैं। इसलिए इस मामले की जांच होनी चाहिए।’’उन्होंने कॉजपा के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने तथा दिल्ली में लोगों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने की कोशिशों से जुड़े सवाल के जवाब में यह बात कही। चौधरी ने राष्ट्रीय राजधानी में लगाई गई पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे कदम लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता पैदा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज देश में जो कुछ हो रहा है, वह कई मायनों में गलत है। आप (भाजपा) बार-बार आपातकाल की बात करते हैं... क्या आज की स्थिति आपातकाल के समय से कम गंभीर है? जब आपने दिल्ली को पूरी तरह ठप कर दिया है और राजधानी को पंगु बना दिया है, तो इसका क्या मतलब है?’’पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया और मजबूत लोकतंत्र की जरूरत पर जोर देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम लोकतंत्र को जीवंत और मजबूत बनाए रखना चाहते हैं और अपने मतों की गिनती में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
आज जब भी देश की राजधानी या किसी बड़े शहर में कोई जन-आंदोलन करवट लेता है। चाहे वह नागरिक अधिकारों को लेकर उठा विरोध हो, किसान आंदोलन हो या सीजेपी जैसे मानवाधिकार मंचों से जुड़े प्रदर्शन तो सत्ता का पहला कदम क्या होता है? मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद कर दिए जाते हैं, ट्रेनों के रूट डायवर्ट होते हैं, इंटरनेट की रफ्तार थाम दी जाती है और धारा 144 की दीवारें खड़ी कर दी जाती हैं। मकसद साफ होता है भीड़ को सड़क तक पहुंचने से रोकना। इसके असर को सीमित कर देना। शनिवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के दौरान अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनाराई विजयन, नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। शाम 5:40 बजे तक राजधानी में लगभग 4,000 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था। जंतर-मंतर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए गए थे और शाम तक कोई भी प्रदर्शनकारी उस जगह तक नहीं पहुँच पाया था। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस हिरासत की निंदा की और चेतावनी दी कि अगर हिरासत में लिए गए लोगों को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वे फिर से अनशन करेंगे। CJP और NCP (SP) द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने राजधानी में की गई सख़्त कार्रवाई के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया। इसे भी पढ़ें: CEC के खिलाफ Jantar Mantar पर प्रदर्शन की कोशिश, 3000 लोग दिल्ली पुलिस की हिरासत में सत्ता और जनआक्रोश का यह टकराव कोई नया नहीं है। जब सरकारें साधन रोकती हैं, तो इतिहास अक्सर यह याद दिलाता है कि जनसैलाब साधनों का मोहताज नहीं होता। इसका सबसे दिलचस्प और ऐतिहासिक उदाहरण 1977 का वह वाकया है, जब सत्ता ने रास्ते रोकने के लिए कोई पुलिस लाठी नहीं, बल्कि सिनेमाई आकर्षण का सहारा लिया था। जनता पार्टी के गठन के ठीक 10 दिन बाद बाबू जगजीवन राम ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया। देश में आपातकाल के बाद की सियासी हवा बदल रही थी। बाबूजी ने 6 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने का ऐलान किया। उस दौर की कांग्रेस सरकार इस सभा के असर से वाकिफ थी। सभा को बेअसर करने और मैदान को खाली रखने के लिए सरकार ने एक बेहद चालाक रणनीति अपनाई। इसे भी पढ़ें: CEC Gyanesh Kumar पर Akhilesh Yadav हमलावर, कहा- जनता को रोकना BJP की बड़ी भूल होगी जब बाबूजी बॉबी से जीत गए जनता पार्टी के गठन के 10 दिन बाद बाबू जगजीवन राम ने भी केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया। बाबू जगजीवन राम ने दिल्ली में 6 मार्च को विशाल जनसभा को संबोधित करने का ऐलान किया। उनकी जनसभा को कमजोर करने के लिए कांग्रेस ने एक दिलचस्प चाल चली।’ रामचंद्र गुहा ‘इंडिया आफ्टर गांधी’ में लिखते हैं कि बाबू जगजीवन राम की जनसभा से भीड़ को दूर रखने के लिए कांग्रेस ने ठीक जनसभा के वक्त उस दौर की मशहूर रोमांटिक फिल्म ‘बॉबी’ का दूरदर्शन पर प्रसारण करवाना तय किया। 1977 में देश में सिर्फ दूरदर्शन ही हुआ करता था और उसका नियंत्रण पूरी तरह से सरकार के हाथों में ही था। आम दिनों में यदि बॉबी फिल्म टीवी पर दिखाई जा रही होती तो दिल्ली की लगभग आधी आबादी टीवी स्क्रीनों के इर्द-गिर्द ही सिमटी रहती। लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ। करीब 10 हजार लोगों ने दिल्ली में बाबूजी और जयप्रकाश नारायण को सुना। उस दौर के एक अखबार ने अगले दिन हैडलाइन बनाई कि आज बाबूजी बॉबी से जीत गए! इसे भी पढ़ें: MK Stalin बोले, असहमति अपराध नहीं, Delhi में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई बंद करे केंद्र हालांकि यह सच है कि आज का दौर 1977 का आपातकाल नहीं है, न ही आज उस कद के नेता मंचों पर खड़े हैं। लेकिन 1977 की वह शाम और आज के बंद मेट्रो स्टेशन एक बात समान रूप से साबित करते हैं। सत्ता के पास रोकने के तरीके हमेशा तकनीकी और प्रशासनिक होते हैं चाहे वह 'बॉबी' का प्रसारण हो या मेट्रो के बंद फाटक। अब मेट्रो स्टेशन सुरक्षा कारणों से बंद कर दिए जाते हैं, बसें सीमा पर रोक दी जाती हैं और इंटरनेट बंद कर दिया जाता है। लेकिन 1977 की वह शाम आज भी यही सिखाती है कि जब जनता के भीतर अपनी बात कहने और सुनने की बेचैनी हद से बढ़ जाती है, तो न टीवी स्क्रीन पर चमकती 'बॉबी' उसे बांध पाती है, और न ही बंद पड़े मेट्रो स्टेशनों के ताले उसे रोक पाते हैं।
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फ्लाईदुबई की विमान में हुई घटना की जांच अब एनआईए करेगी। देखा जाये तो दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हुआ जानलेवा हमला अब अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के साथ-साथ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर जांच का विषय बन गया है। हम आपको बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 30 सितंबर 2026 को हुई इस सनसनीखेज घटना की जांच के लिए 9 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों के मुताबिक, मामला एंटी-हाइजैकिंग एक्ट, 2016 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, 1967 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। अब जांच का दायरा इस सवाल तक पहुंचेगा कि यह हमला केवल एक आरोपी की कथित हरकत थी या इसके पीछे कोई व्यापक साजिश भी थी। हम आपको याद दिला दें कि घटना फ्लाइट FZ1073 की है, जो दुबई से तेल अवीव जा रही थी। विमान के ओमानी सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन मच्छार पर धारदार उपकरण से हमला किया था। संयुक्त अरब अमीरात के अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी का कथित इरादा विमान को इजराइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त करना था। हालांकि, इस हमले के सभी पहलुओं की जांच जारी है। इसे भी पढ़ें: Flydubai Flight को हाईजैक होने से बचाने वाले भारतीय Captain Smit Machchhar को किया जाएगा इज़राइल के प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड से सम्मानित हम आपको यह भी बता दें कि हमले में गंभीर रूप से घायल कैप्टन मच्छार को पहले ताबुक में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में बेहतर चिकित्सा के लिए अबू धाबी स्थानांतरित किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7–8 अक्टूबर को बताया था कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है और वह इलाज पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। भारतीय दूतावास उनके परिवार, चिकित्सकों और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। 10 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कोई नई, विस्तृत आधिकारिक चिकित्सकीय जानकारी सामने नहीं आई है। उधर, कैप्टन मच्छार की बहादुरी की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने कैप्टन मच्छार को Presidential Award for Civilian Heroism से सम्मानित किए जाने की घोषणा की है। यह सम्मान विमान में यात्रियों की जान बचाने में उनकी भूमिका के लिए दिया जायेगा। दूसरी ओर, NIA की जांच अब इस घटना को केवल विमान के भीतर हुई हिंसा तक सीमित नहीं रखेगी। विमान के कॉकपिट तक पहुंच, सह-पायलट की पृष्ठभूमि, सुरक्षा जांच की प्रभावशीलता और संभावित वैचारिक या अन्य संपर्कों की पड़ताल अहम होगी। यह भी स्पष्ट करना होगा कि क्या किसी स्तर पर पहले से चेतावनी के संकेत मौजूद थे और क्या उन्हें नजरअंदाज किया गया। देखा जाये तो इस घटना का रणनीतिक महत्व इसलिए भी बड़ा है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में एक व्यक्ति की कार्रवाई कई देशों की सुरक्षा को एक साथ प्रभावित कर सकती है। भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इजराइल के बीच जांच संबंधी सहयोग तथा खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण होगा। NIA की जांच यह समझने में मदद कर सकती है कि विमानन सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए किन उपायों की जरूरत है।
CEC के खिलाफ Jantar Mantar पर प्रदर्शन की कोशिश, 3000 लोग दिल्ली पुलिस की हिरासत में
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे लगभग 3000 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने शनिवार को हिरासत में ले लिया। सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को नयी दिल्ली इलाके और अन्य जिलों से हिरासत में लिया गया। पुलिस प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है। प्रदर्शनकारियों को रीगल सिनेमा के पास, मिंटो ब्रिज और आकाशवाणी भवन के पास सहित कई स्थानों से हिरासत में लिया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जंतर मंतर पर कॉजपा के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले एहतियाती उपायों के तहत राष्ट्रीय राजधानी के सभी जिलों से आपराधिक रिकॉर्ड वाले 600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। सूत्रों ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न पैदा करें। सूत्रों के अनुसार, पुलिस कुछ ऐसे लोगों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रख रही है, जो प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लोगों को जुटा सकते हैं या उन्हें इसमें शामिल होने के लिए प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा उपायों के तहत ऐसे लोगों के घरों के बाहर निगरानी भी बढ़ा दी गई है। विशेष पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) देवेश श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने आज सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं और पड़ोसी राज्यों से सटे इलाकों में पड़ोसी पुलिस बलों के समन्वय से ‘पिकेट’ स्थापित किए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को जमीनी स्तर पर तैनात किया गया है। इसके साथ ही हमें नागरिकों का सहयोग मिल रहा है और अमन कमेटी जैसी हमारी ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ टीम काम कर रही हैं।’’उन्होंने बताया कि पुलिस ने नागरिकों से इस प्रदर्शन में हिस्सा न लेने की अपील की है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है, क्योंकि हम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ऐसे किसी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है।’’किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए राष्ट्रीय राजधानी भर में, विशेषकर जंतर-मंतर की ओर जाने वाले मार्गों और अन्य संवेदनशील इलाकों में रणनीतिक स्थानों पर पुलिसबल को तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कड़ी निगरानी रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने के संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने कहा कि नयी दिल्ली क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू है और लोगों से पाबंदियों का पालन करने की अपील की गई है। कॉजपा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आड़ में मतदाता सूचियों में गड़बड़ी करने और नए मतदाता के पंजीकरण के वास्ते इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म 6’ में बदलाव के लिए दो सहयोगी निर्वाचन आयुक्तों की आपत्ति को दरकिनार करने के आरोप लगा रही है। इस मुद्दे को लेकर कॉजपा ने विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है।
IPS आदित्य कुमार सिंह ने भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया है. गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र कैडर के 2023 बैच के आईपीएस आदित्य कुमार सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. उनका कैडर पिछले वर्ष ओडिशा से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया गया था.
ओडिशा के नबरंगपुर जिले में एक बच्चे की मौत के बाद शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया। यहां अस्पताल की तरफ से शव वाहन की व्यवस्था नहीं की गई। इसके बाद परिजनों को राशन कार्ड गिरवी रखकर पैसे मिले और फिर उससे खुद शव वाहन की व्यवस्था की।
शरजील इमाम की अंतरिम जमानत रद्द, कोर्ट की शर्तों का किया था उल्लंघन
शरजील इमाम की 7 दिन की अंतरिम जमानत रद्द हो गई है. कोर्ट ने भाई के इंटरव्यू के दौरान कमरे में उनकी मौजूदगी को जमानत की शर्तों का उल्लंघन माना.
चेन्नई में राहुल गांधी और विजय की कैफे कूटनीति, कैपेचीनो-तिरामिसू पर हुई सियासी चर्चा
राहुल गांधी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने चेन्नई में मुलाकात की, जहां उन्होंने अनौपचारिक माहौल में राजनीतिक चर्चा की।
रूस ने यूक्रेन पर मारे खतरनाक ग्लाइड बम, 15 लोगों की मौत
अमेरिका को डीजल बेचने का डील करते ही रूस ने यूक्रेन के जेपोरिजिया इलाके में भीषण हमला किया है, इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई. इस हमले में कम से कम 16 लोग घायल हो गए.
थलपति विजय से मिले राहुल गांधी, कैफे जाकर पी कॉफी, कुकीज भी खाईं
राहुल गांधी करीब एक घंटे तक विजय के साथ रहे और उन्होंने कई पॉलिटिकल मुद्दों पर बात की। बाद में, वे पास के एक कैफे में गए और खबर है कि उन्होंने कॉफी ड्रिंक (कैपिचीनो), तिरामिसू पी और कुकीज खाए।
नवरात्रि की गरबा नाइट्स में कुछ गानों का क्रेज सालों बाद भी कम नहीं हुआ है. मलाइका अरोड़ा और अरबाज खान पर फिल्माया गया 27 साल पुराना यह गीत आज भी अपनी जोशीली धुन और शुभा मुद्गल की दमदार आवाज से लोगों को थिरकने पर मजबूर कर देता है.
CJP प्रोटेस्ट: दिल्ली की सड़कों से उठाए जा रहे 'कॉकरोच' कहां ले जाए जा रहे, सामने आया VIDEO
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में डिटेन किया है। इन डिटेन कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ले जाकर छत्रसाल स्टेडियम में बंद कर रही है, जिससे यह मैदान एक अस्थायी कंटेनमेंट जोन में बदल गया है।
'मैं तैयार, आप भी अयोध्या से लड़िए चुनाव', सीएम योगी को अखिलेश यादव का चैलेंज स्वीकार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बलरामपुर में विकास परियोजनाओं के बहाने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा कि वह भी वहां से चुनाव लड़कर अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 से पहले प्रदेश के इस क्षेत्र में पहचान का संकट, तस्करी और अपराधियों की अराजकता थी, जबकि अब विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
Delhi Riots मामले में पूर्व आप पार्षद Tahir Hussain दंगा भड़काने के दोषी करार
दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर इलाके के एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने के लिए उकसाने का शनिवार को दोषी ठहराया, जबकि 12 अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने हुसैन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 (दंगा करने के लिए सजा) के साथ धारा 109 (उकसाना) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, अदालत ने उसे अन्य आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने हुसैन की सजा पर दलीलें सुनने के लिए मामले की सुनवाई 16 नवंबर को तय की है। विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है। इस मामले में कुल 13 आरोपी थे। इनमें हुसैन के अलावा मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और महक सिंह शामिल थे। इन सभी पर दंगा करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आग से नुकसान पहुंचाने और आपराधिक साजिश रचने समेत कई अपराधों के आरोप लगाए गए थे। अदालत ने हुसैन के 12 सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया, जबकि पूर्व पार्षद को दो आरोपों में दोषी ठहराया और बाकी आरोपों से बरी कर दिया। जुलाई में दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े एक मामले में हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया था। यह मामला अंकित शर्मा के पिता रवींद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर पुलिस थाने में दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित है। इस मामले में नाम सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने हुसैन को निलंबित कर दिया था। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे और संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा था।
रात का खाना छोड़ने से वजन तेजी से घटता है? एक्सपर्ट से जानिए वजन घटाने का सही तरीका
कई लोगों को लगता है कि वह रात में या फिर खाना-पीने छोड़ देंगे तो वजन कम हो जाएगा. यहां जानिए क्या रात का खाना छोड़ने से वजन कम होता है?
'सिविल सेवा की तर्ज पर हो NEET-UG की परीक्षा', संसदीय समिति ने दिया सुझाव
संसदीय समिति ने नीट पेपर लीक के बाद एनटीए को नीट-यूजी परीक्षा को सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर दो चरणों में कराने का सुझाव दिया है।
रात की ड्यूटी, बंद बैंक और पत्नी का साथ... VIDEO देख दिल खुश हो जाएगा
रात की ड्यूटी के बीच HDFC Bank के एक सिक्योरिटी गार्ड के पास उसकी पत्नी घर का बना खाना लेकर पहुंची. बंद बैंक के बाहर दोनों को साथ बैठकर खाना खाते देख सोशल मीडिया यूजर्स भावुक हो गए. X पर शेयर किए गए इस वीडियो में रिश्ते की अहमियत और छोटी-छोटी कोशिशों से प्यार जताने की झलक दिखाई देती है.
124 पूर्व IAS, IFS और संबद्ध सेवाओं के अधिकारियों ने खुले पत्र के जरिए चुनाव आयोग और SIR का समर्थन किया है. उन्होंने वोट धांधली के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि मतदाता सूची की सफाई तथा चुनावी पारदर्शिता के लिए SIR जैसी प्रक्रिया आवश्यक है.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने एक मानवीय कदम उठाते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को महाराष्ट्र में उनकी दादी के निधन की दुखद सूचना दी और उन्हें उनके गृहनगर जाने के लिए हरसंभव मदद की पेशकश की है। शनिवार को दिल्ली पुलिस की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी गई। दीपके के परिवार के मुताबिक, महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संटुक पिंपरी गांव में सावित्रीबाई शंकरराव दीपके का लंबी बीमारी के बाद शनिवार पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे निधन हो गया। वह 85 वर्ष की थीं। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह 10 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचने पर, दीपके को कॉजपा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ दिल्ली पुलिस ने हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया। दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा, ‘‘जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से विरोध प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया। दिन में, अभिजीत दीपके की दादी के निधन की दुखद खबर मिली।’’ बयान के अनुसार, ‘‘उन्हें पूरी संवेदनशीलता के साथ तुरंत जानकारी दी गई और (उनकी दादी के) अंतिम संस्कार के समय के बारे में बताया गया। मानवीय आधार पर, उन्हें अपने गृहनगर जाने के लिए हरसंभव मदद की पेशकश भी की गई।’’ कॉजपा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में विमान के उतरने के तुरंत बाद तीनों नेताओं को उसके अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। दीपके के एक चचेरे भाई ने बताया कि परिवार शुरुआत में उनसे संपर्क नहीं कर पाया क्योंकि उन्हें दिल्ली में हिरासत में ले लिया गया था। उन्होंने बताया कि दीपके के माता-पिता को इसकी जानकारी दे दी गई है और वे गांव के लिए निकल चुके हैं। परिवार के सूत्रों के मुताबिक, दीपके अपनी दादी से 15 अगस्त को मिले थे, जब उन्होंने हिंगोली जिले में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की थी, और उसके बाद वह उनसे एक बार और मिले थे। उन्होंने बताया कि पिछले 20-25 दिन से वह उनसे नहीं मिल पाए थे। इस बीच, शनिवार को पुलिस ने लगभग 3,000 लोगों को हिरासत में ले लिया, क्योंकि प्रदर्शनकारी नयी दिल्ली जिले में भारी संख्या में सुरक्षाबलों तैनाती के बावजूद जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। प्रदर्शन का आह्वान सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए किया गया, लेकिन पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी और इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी।
भूकंप से दहल उठा पनामा, कई इमारतें तबाह, देखें दुनिया आजतक
शुक्रवार को 7.7 तीव्रता वाले भूकंप से दक्षिणी पनामा दहल उठा...भूकंप में कई इमारतें तबाह हो गईं और हजारों लोग सड़कों पर आ गए.. हालांकि गनीमत रही की भीषण भूकंप के बावजूद पनामा में बड़े पैमाने पर ना तो तबाही और ना ही मौत की खबर है...यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक भूकंप का केंद्र 12.6 किलोमीटर गहराई में था...भूकंप का केंद्र पनामा की राजधानी से 200 किलोमीटर दूर कम आबादी वाले इलाके में था और वहां कुछ लोगों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है.
IPL 2027 से पहले CSK का बड़ा फैसला, एक और धुरंधर हुआ टीम से बाहर
माइक हसी को स्टीफन फ्लेमिंग के हेड कोच वाली कोचिंग स्टाफ का मजबूत स्तंभ समझा जाता था. लेकिन फ्लेमिंग के जाने के बाद अब इस दिग्गज की नौकरी भी चली गई है. अगले सीजन चेन्नई की टीम आईपीएल में बिल्कुल अगल और नए अंदाज के साथ नजर आने वाली है.
सोनम वांगचुक ने दी फिर अनशन की चेतावनी, बोले- CJP के लोग कल तक रिहा नहीं हुए तो मेरा अनशन
सोनम वांगचुक अब तक इस बार के प्रदर्शन से खुद को दूर रख रहे थे. लेकिन शनिवार शाम को उनके तेवर बदले नजर आए.
Delhi Riots Case में पूर्व AAP पार्षद Tahir Hussain दोषी, कोर्ट ने 12 आरोपियों को बरी किया
दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को 2020 के दंगों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में आगजनी से जुड़े एक मामले में दंगे भड़काने का दोषी ठहराया। कोर्ट ने 12 अन्य सह-आरोपियों को बाकी सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह आदेश कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने दिया। LiveLaw के अनुसार, FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 147, 148 और 149 (दंगा), 427 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली शरारत), 436 (आग से शरारत) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज की गई थी। यह ताहिर हुसैन की दूसरी सज़ा है। इससे पहले उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था, जिनकी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान हत्या कर दी गई थी। उस मामले में हुसैन को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी। इसे भी पढ़ें: India Laser experiment: भारत ने लेजर से भेजा संदेश, देश को मिला बहुत बड़ा सीक्रेट अदालत ने माना कि भले ही अपराध बहुत क्रूर था और पीड़ित की हत्या एक हिंसक भीड़ ने की थी, लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि दोषी सुधर नहीं सकते या सज़ा पूरी होने के बाद उनकी रिहाई से समाज को कोई खतरा होगा। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मधुकर पांडे ने दलील दी कि शर्मा का अपहरण किया गया और बेरहमी से पीटा गया, जिससे उन्हें 51 चोटें आईं; इनमें से 18 चोटें धारदार हथियारों से पहुंचाई गई थीं। उन्होंने कहा कि अंकित शर्मा का अपहरण किया गया और उन्हें बेदर्दी से पीटा गया। पीड़ित को कुल 51 चोटें आईं और इनमें से 18 चोटें धारदार हथियारों से लगी थीं। यह ऐसा मामला नहीं है जहां किसी को एक या तीन बार चाकू मारा गया हो। उन्होंने आगे कहा कि आरोपी ने शर्मा की मौत के बाद भी उन पर हमला जारी रखा। इसे भी पढ़ें: AAP का केंद्र पर हमला, जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले हिरासत पर लगाया काला आपातकाल का आरोप प्रॉसिक्यूटर ने आगे कहा आरोपी इंसान नहीं, जानवर थे। उन्हें मरे हुए व्यक्ति के प्रति कोई सम्मान नहीं था, इसलिए उन्हें जेल में रखा जाना चाहिए और मौत की सज़ा दी जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों को डिटेन करने पर भड़के बॉलीवुड सेलेब्स, बोला हमला
नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के कारण भारी पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा तैनाती की गई, प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
हवाई सफर के बाद जब आप अपनी मंजिल पर पहुंचते हैं और बैगेज रिक्लेम एरिया में कन्वेयर बेल्ट के पास खड़े होकर घंटों अपने सूटकेस का इंतजार करते हैं, लेकिन बेल्ट खाली हो जाती है और आपका बैग नजर नहीं आता, तो यह किसी बुरे सपने जैसा लगता है। अक्सर यात्री घबराहट में एयरपोर्ट से बाहर निकल आते हैं और बाद में कस्टमर केयर पर फोन घुमाते रहते हैं। लेकिन यह सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। विमानन नियमों के अनुसार, यदि आपका चेक-इन बैगेज मिसप्लेस या खो गया है, तो एयरपोर्ट परिसर से बाहर कदम रखने से पहले आपको कुछ अनिवार्य कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने होते हैं। यदि आपने एयरपोर्ट छोड़ने से पहले आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई, तो एयरलाइन बाद में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकती है और आपको मिलने वाला कानूनी मुआवजा भी अटक सकता है।कन्वेयर बेल्ट खाली दिखने पर सबसे पहला कदम: बैगेज सर्विस काउंटर खोजेंजैसे ही आपको यह पक्का हो जाए कि आपकी फ्लाइट का पूरा सामान आ चुका है और आपका बैग बेल्ट पर नहीं है, सबसे पहले अराइवल हॉल में स्थित अपनी संबंधित एयरलाइन के बैगेज हेल्पडेस्क (Baggage Service Desk) या 'लॉस्ट एंड फाउंड' काउंटर पर जाएं। एयरपोर्ट के एग्जिट गेट से बाहर बिल्कुल न निकलें, क्योंकि एक बार सिक्योरिटी गेट से बाहर चले जाने के बाद दोबारा बैगेज क्लेम एरिया में प्रवेश करना सुरक्षा कारणों से बेहद मुश्किल हो जाता है। काउंटर पर मौजूद एयरलाइन एग्जीक्यूटिव को तुरंत सूचित करें कि आपका चेक-इन लगेज प्राप्त नहीं हुआ है।बोर्डिंग पास और बैगेज टैग को रखें सुरक्षित: यही है आपके सामान का असली सबूतबैगेज गुम होने की स्थिति में आपका सबसे बड़ा और प्राथमिक कानूनी साक्ष्य वह छोटा सा बारकोड स्टीकर होता है, जिसे चेक-इन के समय आपके बोर्डिंग पास के पीछे चिपकाया गया था या अलग से थमाया गया था। इसे बैगेज क्लेम टैग (Baggage Claim Tag) कहा जाता है। एयरलाइन का ग्राउंड स्टाफ इस टैग के बारकोड नंबर को अपने ग्लोबल बैगेज ट्रैकिंग सिस्टम (WorldTracer) में स्कैन करता है। इससे यह तुरंत पता चल जाता है कि आपका बैग डिपार्चर एयरपोर्ट पर ही छूट गया है, किसी कनेक्टिंग फ्लाइट में गलत रूट पर लोड हो गया है या फिर प्लेन से उतरकर टर्मिनल में ही कहीं मिसप्लेस हुआ है। इसलिए इस रसीद को तब तक संभाल कर रखें जब तक आपका बैग सुरक्षित आपके हाथ में न आ जाए।पीआईआर (Property Irregularity Report) जरूर दर्ज कराएं और कॉपी लेंएयरपोर्ट छोड़ने से पहले जो सबसे महत्वपूर्ण आधिकारिक काम आपको करना है, वह है PIR (प्रॉपर्टी इररेग्युलैरिटी रिपोर्ट) फॉर्म भरना। यह एयरलाइन द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि यात्रा के अंत में आपका सामान गायब था।इस फॉर्म में अपने बैग का सटीक हुलिया, रंग, ब्रांड (जैसे American Tourister, Samsonite आदि), साइज, कोई खास पहचान चिह्न (जैसे रिबन या स्टिकर) और बैग के अंदर रखी प्रमुख वस्तुओं का विवरण दर्ज करें।अपना चालू मोबाइल नंबर और वह स्थानीय पता (होटल या घर का पता) सही-सही भरें, जहां एयरलाइन को बैग मिलने के बाद उसे डिलीवर करना होगा।फॉर्म सबमिट करने के बाद एयरलाइन से PIR संदर्भ संख्या (PIR Reference Number) और उस रसीद की हस्ताक्षरित भौतिक या डिजिटल कॉपी अवश्य लें। इसी नंबर के जरिए आप ऑनलाइन अपने बैग का स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे।डीजीसीए (DGCA) और मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत मुआवजा और अंतरिम खर्च के नियमहवाई यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं:घरेलू उड़ानों के लिए (DGCA नियम): नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के पैसेंजर चार्टर के अनुसार, यदि घरेलू उड़ान में बैग खो जाता है, क्षतिग्रस्त होता है या उसमें देरी होती है, तो एयरलाइन प्रति किलोग्राम के हिसाब से या अधिकतम ₹20,000 तक का मुआवजा देने के लिए बाध्य है।अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए (Montreal Convention): अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान यदि सामान गायब होता है, तो मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत यात्री लगभग 1,288 एसडीआर (स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स - लगभग ₹1.4 लाख से ₹1.5 लाख तक) के अधिकतम मुआवजे के हकदार होते हैं।डेली अलाउंस (Out-of-Pocket Expenses): यदि आप अपने गृह नगर से दूर किसी दूसरे शहर या देश में हैं और बैग में आपके कपड़े व जरूरी सामान थे, तो एयरलाइन से दैनिक जरूरी चीजें (कपड़े, टूथब्रश आदि) खरीदने के लिए 'इमरजेंसी या इंटरिम रिलीफ फंड' की मांग करें। कई एयरलाइंस प्रतिदिन के हिसाब से एक निश्चित राशि की प्रतिपूर्ति करती हैं, बशर्ते आप खरीदे गए सामान के पक्के बिल सुरक्षित रखें।एयरलाइन को कितने दिन का समय मिलता है और आगे क्या करना चाहिए?नियमों के मुताबिक, एयरलाइन को गायब बैग खोजने के लिए सामान्यतः 7 से 21 दिनों का समय दिया जाता है। यदि 21 दिनों के भीतर एयरलाइन आपका बैग ढूंढकर आपके पते पर पहुंचाने में पूरी तरह विफल रहती है, तो आधिकारिक तौर पर उस बैग को 'लॉस्ट' (स्थायी रूप से खोया हुआ) घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद आपको बैग में रखे सामान की अनुमानित कीमत की सूची और खरीद के बिलों के साथ औपचारिक बीमा या क्षतिपूर्ति दावा (Baggage Loss Claim) एयरलाइन के नोडल अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। यदि एयरलाइन उचित सहयोग न करे, तो आप एयर सेवा पोर्टल (AirSewa Portal) या उपभोक्ता फोरम में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कार, बाइक या किसी भी व्यावसायिक वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में आपका चालू मोबाइल नंबर दर्ज होना आज के दौर में बेहद जरूरी हो चुका है। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कटने वाले ई-चालान (e-Challan) के एसएमएस, गाड़ी की फिटनेस, इंश्योरेंस रिन्यूअल, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट की एक्सपायरी डेट और नेशनल परमिट से जुड़े तमाम अलर्ट सीधे रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही भेजे जाते हैं। यदि आपका पुराना नंबर बंद हो चुका है या आपने नया नंबर ले लिया है और वह आरसी में लिंक नहीं है, तो समय पर चालान की सूचना न मिलने से मामला सीधे वर्चुअल कोर्ट या लोक अदालत तक पहुंच सकता है। कई लोग यह मानते हैं कि आरसी में मोबाइल नंबर बदलवाने के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ेगा या दलालों को पैसे देने होंगे, लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और फेसलेस कर दिया है।आरसी में मोबाइल नंबर अपडेट होना क्यों है बेहद अनिवार्य?डिजिटल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था के तहत परिवहन विभाग का पूरा सिस्टम अब वाहन के मालिक के रजिस्टर्ड फोन नंबर से जुड़ा हुआ है। यदि आरसी में आपका वर्तमान मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है, तो आपको निम्नलिखित गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:बिना जानकारी के भारी चालान: चौराहों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों से कटने वाले चालानों का मैसेज तुरंत नहीं मिलेगा, जिससे समय सीमा बीतने पर चालान कोर्ट में ट्रांसफर हो सकता है।गाड़ी बेचने या ट्रांसफर में रुकावट: वाहन बेचते समय एनओसी (NOC) लेने या ओनरशिप ट्रांसफर (Transfer of Ownership) के लिए आधार आधारित ओटीपी उसी नंबर पर जाता है जो आरसी में दर्ज होता है।दस्तावेजों का नवीनीकरण: इंश्योरेंस और पीयूसी की वैधता समाप्त होने की अग्रिम चेतावनी नहीं मिल पाएगी, जिससे वाहन चेकिंग के दौरान भारी जुर्माना लग सकता है।चोरी या अनधिकृत गतिविधि पर अलर्ट: किसी भी डुप्लीकेट आरसी के आवेदन या डेटा बदलाव की स्थिति में मालिक को सुरक्षा अलर्ट नहीं मिल सकेगा।जरूरी दस्तावेज: प्रक्रिया शुरू करने से पहले क्या-क्या चाहिए?ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको किसी भी कागजी दस्तावेज को स्कैन करके अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होती, केवल अपने वाहन की आरसी की मूल कॉपी अपने पास रखें जिसमें ये विवरण मौजूद हों:वाहन की रजिस्ट्रेशन संख्या (Vehicle Registration Number)चेसिस नंबर (Chassis Number) के अंतिम 5 अंक या पूरा नंबरइंजन नंबर (Engine Number) के अंतिम 5 अंकआरसी की रजिस्ट्रेशन तारीख और फिटनेस वैधता (कुछ राज्यों के लिए आवश्यक)नया सक्रिय मोबाइल नंबर (जिस पर ओटीपी आ सके)वाहन मालिक का पहचान प्रमाण पत्रपरिवहन सेवा पोर्टल पर स्टेप-बाय-स्टेप मोबाइल नंबर बदलने का तरीकासड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल parivahan.gov.in के माध्यम से आप केवल 5 मिनट में अपना नंबर अपडेट कर सकते हैं:आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले अपने फोन या कंप्यूटर ब्राउज़र में परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट parivahan.gov.in खोलें।ऑनलाइन सर्विसेज चुनें: मुख्य पेज पर नेविगेशन मेन्यू में दिए गए 'Online Services' टैब पर क्लिक करें और ड्रॉप-डाउन लिस्ट में से 'Vehicle Related Services' का विकल्प चुनें।राज्य का चयन करें: अगले पेज पर अपने राज्य (जैसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र आदि) का नाम चुनें।वाहन संख्या दर्ज करें: अब अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डालें और संबंधित आरटीओ का चयन करके 'Proceed' बटन पर क्लिक करें।मोबाइल नंबर अपडेट सर्विस पर क्लिक करें: स्क्रीन पर उपलब्ध सेवाओं की सूची दिखेगी। यहां 'Services' मेन्यू के अंतर्गत 'Additional Services' या सीधे डैशबोर्ड पर दिखने वाले 'Update Mobile Number' वाले विकल्प पर क्लिक करें।वाहन विवरण का सत्यापन: अब स्क्रीन पर एक फॉर्म खुलेगा जिसमें आपको अपना वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर, पूरा चेसिस नंबर (Full Chassis Number), इंजन नंबर और रजिस्ट्रेशन व फिटनेस की तारीख दर्ज करनी होगी। इसके बाद 'Show Details' पर क्लिक करें।मालिक की जानकारी का मिलान: स्क्रीन पर वाहन मालिक का नाम, पिता का नाम और वर्तमान में दर्ज पुराना मोबाइल नंबर प्रदर्शित होगा।नया मोबाइल नंबर दर्ज करें: 'Mobile Number' के बॉक्स में अपना नया 10 अंकों का फोन नंबर टाइप करें और 'Generate OTP' पर क्लिक करें।ओटीपी से पुष्टि करें: आपके नए मोबाइल नंबर पर प्राप्त 6 अंकों का ओटीपी दर्ज करें और 'Save Details' या 'Update' पर क्लिक करें।जैसे ही आप सबमिट करेंगे, स्क्रीन पर 'Mobile Number has been updated successfully' का संदेश आ जाएगा और परिवहन विभाग के डेटाबेस में आपका नया नंबर तुरंत प्रभावी हो जाएगा।mParivahan मोबाइल ऐप के जरिए भी संभव है यह प्रक्रियायदि आप कंप्यूटर के बजाय स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, तो केंद्र सरकार के आधिकारिक mParivahan (NextGen mParivahan) ऐप के जरिए भी यह काम आसानी से कर सकते हैं। ऐप में लॉगिन करने के बाद 'Vehicle Services' सेक्शन में जाएं, अपने वाहन को 'Virtual RC' के रूप में जोड़ें और प्रोफाइल सेटिंग्स या व्हीकल डिटेल्स में जाकर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट करने के विकल्प को चुनें। वहां भी चेसिस और इंजन नंबर के सत्यापन के बाद ओटीपी दर्ज कर नया नंबर लिंक किया जा सकता है।किन बातों का रखें विशेष ध्यान?आधार लिंकिंग की सुविधा: कई राज्यों (जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश आदि) में यह सेवा पूरी तरह आधार बेस्ड ई-केवाईसी (Aadhaar based e-KYC) से जुड़ी है। ऐसे में सुनिश्चित करें कि आपका नया मोबाइल नंबर आपके पहचान प्रमाण पत्र से भी सही तरीके से जुड़ा हो ताकि भविष्य में ऑनलाइन सेवाओं में कोई रुकावट न आए।फर्जी वेबसाइटों से रहें सावधान: इंटरनेट पर कई निजी पोर्टल और दलाल परिवहन सेवा जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाकर पैसे वसूलने की कोशिश करते हैं। ध्यान रहे कि सरकारी पोर्टल पर यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है और इसके लिए हमेशा केवल .gov.in डोमेन वाली आधिकारिक साइट का ही उपयोग करें।
अखिलेश के चैलेंज पर योगी का पलटवार, बोले- अयोध्या आइए, मैं भी वहीं से किस्मत आजमाऊंगा
अखिलेश यादव द्वारा अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जवाब देते हुए कहा कि अखिलेश भी अयोध्या से नामांकन दाखिल करें, वह भी वहीं से अपनी किस्मत आजमाएंगे.
रिहा नहीं किया गया तो... नेताओं की गिरफ्तारी को देख अब सोनम वांगचुक ने दी चेतावनी
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आज जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में लगभग 3000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में हिरासत में लिए गए लोगों में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, TMC की ममता बनर्जी और AISA की नेहा बोरा शामिल हैं। जंतर-मंतर के आसपास पत्रकारों को भी हिरासत में लिए जाने की खबरें मिली हैं। सोशल मीडिया पर आए पोस्ट और वीडियो में हिरासत में लिए गए पत्रकार बसों से अपने प्रेस कार्ड दिखाते हुए नज़र आए। CEC ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद, पुलिस की बड़ी कार्रवाई में ममता बनर्जी, AAP के अरविंद केजरीवाल और AISA की नेहा बोरा समेत कई और नेताओं को भी हिरासत में लिया गया है। इसे भी पढ़ें: CJP के बाद अब INDIA गठबंधन की बारी, दिल्ली में 12 अक्टूबर को बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने चेतावनी दी है कि अगर दिल्ली में CJP विरोध प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए नेताओं को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वे भूख हड़ताल या पदयात्रा कर सकते हैं। भारत में हालात को अघोषित इमरजेंसी बताते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन से पहले एकता और शांति की अपील की थी, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इस आंदोलन से जुड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिरासत में लिए गए नेताओं को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि अगर वे हिरासत में ही रहे, तो उन्हें अनशन (भूख हड़ताल) या पदयात्रा करने पर विचार करना पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: अराजकता से नहीं Parliament से चलेगा देश, दिल्ली में CJP प्रदर्शन पर भड़की BJP AAP का आरोप- दिल्ली पुलिस केजरीवाल और अन्य लोगों को बस में आधे घंटे तक घुमा रही है आम आदमी पार्टी के मीडिया इंचार्ज अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि पार्टी नेताओं को आधे घंटे तक बस में घुमाया जा रहा था। ढांडा ने एक्स पर लिखा, पिछले डेढ़ घंटे से दिल्ली पुलिस केजरीवाल जी और हम सभी को बस में घुमा रही है। क्या उन्हें यह भी नहीं पता कि कहाँ जाना है, या वे केजरीवाल जी को दिल्ली के किसी भी पुलिस स्टेशन ले जाने से डर रहे हैं? शनिवार दोपहर 'दिल्ली चलो' संदेश के बाद केजरीवाल को हिरासत में ले लिया गया था।
आलू का रस स्किन को ठंडक, ताजगी और मुलायम फील करवाता है. आलू में मौजूद स्टार्च स्किन पर लाइट लेयर बनाता है, जिससे कुछ समय के लिए स्किन की ड्राईनेस कम हो जाती है. आइए जानते हैं लगाने का सही तरीका...
ड्रोन हमले का शिकार हुआ तेल टैंकर, जहाज में मौजूद सभी भारतीय सुरक्षित
शारजाह एंकरेज के पास कच्चे तेल ले जा रहे एक टैंकर पर ड्रोन हमला होने की गंभीर घटना सामने आई है. यह हमला 9 अक्टूबर को हुआ था, जिससे समुद्री रास्ते पर जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. राहत की बात यह है कि इस तेल टैंकर जहाज पर मौजूद सभी 22 भारतीय चालक दल के सदस्य पूरी तरह से सुरक्षित हैं. हमले के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्यों को ध्यान में रखते हुए जहाज की स्थिति का जायजा लिया गया.
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को सफेद चीजों का भोग चढ़ाया जाता है. आप गाय के दूध से बनी खीर चढ़ा सकते हैं.
कस्टडी में रहेंगे या जाएंगे घर अभिजीत दिपके? दादी के निधन पर पुलिस बोली
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की 85 वर्षीय दादी सावित्रीबाई शंकरराव दीपके का महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में निधन हो गया. दिल्ली पुलिस ने उन्हें इसकी जानकारी दी और मानवीय आधार पर उनके गृह नगर जाने में मदद की पेशकश की.
34KM माइलेज, 4.98 लाख दाम, 18 हजार से ज्यादा ने खरीदी ये कार
मारुति सुजुकी भारतीय बाजार में सबसे ज्यादा कारें बेची है. सितंबर 2026 में मारुति सुजुकी ने 2,36,013 यूनिट्स को बेचा है. घरेलू मार्केट में मारुति ने 1,91,794 यूनिट्स को बेचा है. वहीं कंपनी ने 44,219 यूनिट्स को एक्सपोर्ट किया है. मारुति सुजुकी ने 91 हजार से ज्यादा छोटी कारों को बेचा है. आइए जानते हैं मारुति वैगनआर की सेल्स और दूसरी डिटेल्स.
Lucknow के अदिति अपार्टमेंट में 1 BHK फ्लैट के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू; जानें आवेदन की पूरी डिटेल्स
यूपी की राजधानी लखनऊ में अपना आशियाना खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत अदिति अपार्टमेंट में 1 BHK फ्लैट के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुकी है. जानिए ऑनलाइन आवेदन करने का तरीका.
यूट्यूबर संजय यदुवंशी पर शिकंजा, डॉ. आंबेडकर की तस्वीर फाड़ने का आरोप
डिजिटल मीडिया पर सामने आई बड़ी खबर के अनुसार यूट्यूबर संजय यदुवंशी पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है. उन पर आरोप है कि एक शक्ति प्रदर्शन के दौरान उनके और उनके समर्थकों द्वारा भारी अराजकता फैलाई गई. इस प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया गया. इसके साथ ही संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के चित्र को फाड़ने का भी बेहद संवेदनशील और गंभीर आरोप लगा है.
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जंतर-मंतर पर सुरक्षा सख्त
दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है. दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर उतरते ही कई प्रमुख चेहरों को अपनी हिरासत में ले लिया है. इसके साथ ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है. हनुमान मंदिर और जंतर-मंतर के पास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए थे, जिन्हें हटाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला किया। उन्होंने उन पर कायरता का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा। X पर एक पोस्ट में गांधी ने कहा कि वह एक दशक से ज़्यादा समय से मोदी और RSS से लड़ रहे हैं और दावा किया कि सत्ताधारी खेमा लगातार दबाव में आ रहा है। इसे भी पढ़ें: JP Nadda ने कार्यकर्ताओं से 2027 चुनाव की तैयारी में जुटने को कहा राहुल ने लिखा कि मैं नरेंद्र मोदी, RSS और इनसे जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ एक दशक से भी ज़्यादा समय से लड़ रहा हूँ। मैं अपने विरोधियों को उतनी अच्छी तरह समझता हूँ, जितना कोई भी अपने प्रतिद्वंद्वी को समझता है। मैं इन्हें अंदर तक जानता हूँ, इनकी हर चाल से वाक़िफ़ हूँ। इन लोगों की सबसे बड़ी पहचान है - कायरता। नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत, ज्ञानेश कुमार, अजीत डोभाल - इस कहानी के खलनायक - अब धीरे-धीरे घिरते जा रहे हैं। इनके चारों तरफ़ से दायरा सिमट रहा है। जो करना है, कर लीजिए। जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए - 10 हज़ार, 20 हज़ार, 50 हज़ार, जितनी चाहें बुला लीजिए। राहुल ने आगे कहा कि सारे नेताओं को गिरफ़्तार कर लीजिए। सारे युवाओं को गिरफ़्तार कर लीजिए। हम सबको गिरफ़्तार कर लीजिए। घबराइये मत - हम आपको चारों तरफ़ से घेर रहे हैं, और हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। मेरी बात याद रखिए - हमें जो जानकारी चाहिए, वह हमारे पास पहले से है। हम अपने संविधान की रक्षा करेंगे। हम हिंदुस्तान की जनता की आवाज़ की हिफ़ाज़त करेंगे। और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पिछले 10-15 सालों में हिंदुस्तान के साथ जो हुआ है, वह दोबारा कभी, किसी भी सूरत में न हो। इसे भी पढ़ें: CEC Gyanesh Kumar पर Akhilesh Yadav हमलावर, कहा- जनता को रोकना BJP की बड़ी भूल होगी उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के युवाओं, मुझे आप पर गर्व है। अपना विरोध जारी रखिए। हम आपके साथ खड़े हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस सरकार और हमारे संविधान पर हमला करने वालों को शिकस्त मिले। ये टिप्पणियां विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास को लेकर बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच आई हैं।
EPF vs NPS: हर महीने ₹10,000 की बचत पर 30 साल बाद कहां बनेगा सबसे बड़ा फंड? समझें पूरा गणित और नियम
नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले हर व्यक्ति के मन में रिटायरमेंट को लेकर यह सवाल जरूर उठता है कि सुरक्षित भविष्य के लिए कौन सा रास्ता चुना जाए। जब बात लंबी अवधि यानी 30 साल के निवेश की आती है, तो कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) सबसे लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरते हैं। यदि आप 25 या 30 वर्ष की उम्र से हर महीने ₹10,000 की बचत शुरू करते हैं, तो 30 साल में आपकी जेब से कुल ₹36,00,000 (36 लाख रुपये) जमा होंगे। लेकिन कंपाउंडिंग और ब्याज के बाद 60 की उम्र में आपके हाथ में कितना फंड आएगा, यह दोनों स्कीमों के निवेश मॉडल पर निर्भर करता है। शुद्ध रिटर्न के नजरिए से एनपीएस में इक्विटी एक्सपोजर के चलते ईपीएफ की तुलना में दोगुने से भी अधिक वेल्थ बनने की संभावना रहती है, जबकि ईपीएफ बिना किसी जोखिम के 100% सुरक्षित रिटर्न की गारंटी देता है।30 साल बाद रिटर्न का सटीक गणित: कहां बनेगा कितना कॉर्पस?कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में ब्याज दर सरकार द्वारा सालाना तय की जाती है, जो वर्तमान में लगभग 8.25% प्रति वर्ष के आसपास स्थिर है। यह पूरी तरह डेट (Fixed Income) आधारित निवेश है। दूसरी ओर, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेशक को एक्टिव या ऑटो चॉइस के तहत इक्विटी (E), कॉरपोरेट बॉन्ड्स (C) और सरकारी प्रतिभूतियों (G) में निवेश का विकल्प मिलता है। ऐतिहासिक रूप से 50% से 75% इक्विटी आवंटन वाले एनपीएस पोर्टफोलियो ने लंबी अवधि में औसतन 10% से 12% तक का सालाना सीएजीआर (CAGR) रिटर्न दिया है।यदि आप हर महीने ₹10,000 का नियमित निवेश 30 वर्षों तक जारी रखते हैं, तो दोनों विकल्पों में फंड की स्थिति इस प्रकार होगी:कुल जमा पूंजी (30 वर्ष): ₹10,000 12 30 = ₹36,00,000 (36 लाख रुपये)EPF (8.25% निश्चित ब्याज दर): 30 साल बाद आपका कुल कॉर्पस लगभग ₹1.50 करोड़ बनेगा, जिसमें ब्याज का हिस्सा करीब ₹1.14 करोड़ होगा।NPS संतुलित पोर्टफोलियो (10% औसत रिटर्न): 30 साल बाद आपका कुल फंड लगभग ₹2.28 करोड़ तक पहुंच जाएगा, जिसमें करीब ₹1.92 करोड़ की शुद्ध वेल्थ ग्रोथ होगी।NPS आक्रामक इक्विटी पोर्टफोलियो (12% औसत रिटर्न): 30 साल बाद आपका कुल फंड लगभग ₹3.53 करोड़ का विशाल रूप ले लेगा, जिसमें केवल रिटर्न का हिस्सा ₹3.17 करोड़ होगा।साफ तौर पर 30 साल की लंबी अवधि में 3% से 4% का अतिरिक्त रिटर्न कंपाउंडिंग के दम पर फंड के आकार को ₹1.50 करोड़ से सीधे ₹3.53 करोड़ तक पहुंचा देता है।निकासी के नियम और लिक्विडिटी: एकमुश्त रकम बनाम अनिवार्य पेंशनफंड का आकार बड़ा होना एक पहलू है, लेकिन रिटायरमेंट पर वह पैसा आपके हाथ में कैसे आएगा, यह समझना बेहद जरूरी है:EPF में 100% एकमुश्त निकासी: ईपीएफ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि 58 वर्ष की आयु पूरी होने या सेवानिवृत्ति के समय आप अपने पूरे फंड (मूलधन + ब्याज) को एकमुश्त (Lump Sum) निकाल सकते हैं। आप पर कोई अनिवार्य पेंशन प्लान या एन्युइटी खरीदने का दबाव नहीं होता।NPS में 60:40 का फॉर्मूला: एनपीएस में 60 वर्ष की आयु पर कुल जमा फंड का अधिकतम 60% हिस्सा ही टैक्स-फ्री एकमुश्त निकाला जा सकता है। शेष कम से कम 40% हिस्से से जीवन बीमा कंपनी से एन्युइटी (Annuity) खरीदना अनिवार्य होता है। इस 40% हिस्से से आपको जीवनभर मासिक पेंशन मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि आपका फंड ₹2.5 करोड़ बनता है, तो ₹1.5 करोड़ आपको नकद मिलेंगे और ₹1 करोड़ पेंशन प्लान में चले जाएंगे, जिससे आपको हर महीने लगभग ₹55,000 से ₹65,000 की नियमित पेंशन मिलेगी।टैक्स छूट के मोर्चे पर कौन सा विकल्प मारता है बाजी?टैक्स प्लानिंग के लिहाज से दोनों ही योजनाएं बेहतरीन लाभ प्रदान करती हैं, लेकिन उनके प्रावधानों में बारीक अंतर है:EPF (EEE मॉडल): ईपीएफ 'एग्जम्प्ट-एग्जम्प्ट-एग्जम्प्ट' श्रेणी में आता है। धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है, मिलने वाला ब्याज टैक्स-फ्री रहता है और मैच्योरिटी पर पूरी निकासी भी कर-मुक्त होती है (बशर्ते सालाना कर्मचारी अंशदान ₹2.5 लाख से अधिक न हो)।NPS में ₹50,000 की अतिरिक्त छूट: एनपीएस में धारा 80CCD(1) के तहत 80C की सामान्य ₹1.5 लाख की सीमा में छूट तो मिलती ही है, साथ ही धारा 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट का विशेष प्रावधान है, जो पुरानी टैक्स रिजीम वालों के लिए काफी फायदेमंद है। इसके अलावा 60% एकमुश्त निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री है, लेकिन 40% एन्युइटी से मिलने वाली मासिक पेंशन आपकी आय में जुड़ती है और उस पर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार कर लगता है।जोखिम क्षमता और उम्र के हिसाब से क्या चुनना चाहिए?यदि आपकी उम्र 20 से 35 वर्ष के बीच है और आप अपने करियर के शुरुआती या मध्य दौर में हैं, तो आपके पास बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलने के लिए लंबा समय है। ऐसे में NPS आपके लिए कहीं अधिक शक्तिशाली वेल्थ क्रिएटर साबित होगा क्योंकि लंबी अवधि में इक्विटी का जादू मुद्रास्फीति (महंगाई) को आसानी से मात दे देता है।दूसरी तरफ, यदि आप पूरी तरह रूढ़िवादी निवेशक हैं और शेयर बाजार के किसी भी जोखिम से दूर रहकर 100% गारंटीड सरकारी सुरक्षा चाहते हैं, तो EPF आपका सबसे भरोसेमंद साथी है।वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार सबसे समझदारी भरा कदम यह है कि आप ईपीएफ में अपने वेतन से कटने वाले अनिवार्य अंशदान को सुरक्षित आधार (Safety Net) की तरह जारी रखें, और हर महीने की अतिरिक्त ₹5,000 से ₹10,000 की बचत को एनपीएस में निवेश करें। इससे आपको रिटायरमेंट पर एकमुश्त पूंजी की सुरक्षा और मोटी पेंशन दोनों का संतुलित लाभ मिलेगा।
CJP प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, फॉर्म 7 के नए नियम जारी
बीजेपी के भारी विरोध और प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने फॉर्म 7 को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में संशोधन और नामों को हटाने से संबंधित फॉर्म 7 के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इन नए नियमों के तहत अब कोई भी मतदाता अधिकतम 10 आवेदन ही दाखिल कर सकेगा. इसके साथ ही हर महीने के लिए केवल 5 आवेदन जमा करने की सीमा तय कर दी गई.
मुंबई में महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी हिरासत में लिए गए
मुंबई से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. तुषार गांधी ने दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में दोपहर साढ़े तीन बजे एक जनसभा आयोजित करने का ऐलान किया था. हालांकि, सभा से पहले ही मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. तुषार गांधी ने बताया कि पुलिस उन्हें बांद्रा या सांताक्रूज पुलिस स्टेशन ले जाने के बजाय सीधे डीएन नगर पुलिस स्टेशन ले गई.
पुलिस की बस के आगे डट गई छात्रा, दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान दिखा रिया अहीर जैसा नजारा
दिल्ली में छात्र संगठनों के मार्च के दौरान एक छात्रा ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को ले जा रही पुलिस बस को रोकने की कोशिश की.
फ्लाईदुबई मामले में NIA ने दर्ज की FIR, एंटी हाइजैकिंग और UAPA एक्ट की धाराएं भी लगाई
फ्लाईदुबई मामले में NIA ने एफआईआर दर्ज कर ली है. NIA ने इस मामले में एंटी-हाइजैकिंग एक्ट और UAPA की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है.
परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद शोकाकुल परिवार को कई प्रशासनिक और कानूनी जिम्मेदारियों से गुजरना पड़ता है। इनमें से एक सबसे अहम दस्तावेज होता है मृतक का आधार कार्ड। देश में पहचान और वित्तीय लेन-देन के लिए आधार सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है, इसलिए मृत्यु के बाद इसके दुरुपयोग (मिसयूज), पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) या फर्जी लोन व बैंक खातों जैसी धोखाधड़ी की संभावना बनी रहती है। कई लोग यह सोचते हैं कि मृत्यु के बाद आधार कार्ड को नष्ट कर देना चाहिए या इसे सीधे यूआईडीएआई को लौटाना होता है। हालांकि, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) और भारत सरकार के नियमों के तहत इसके निस्तारण और रिपोर्टिंग की एक स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है।क्या मृत्यु के बाद आधार कार्ड को पूरी तरह 'डिलीट' या सरेंडर किया जा सकता है?यूआईडीएआई के मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति का 12 अंकों का आधार नंबर किसी अन्य व्यक्ति को कभी आवंटित नहीं किया जाता और न ही डेटाबेस से डेटा को तकनीकी रूप से स्थायी डिलीट किया जाता है। हालांकि, इसे निष्क्रिय (Deactivate) या मृत्यु चिन्हित (Marked Deceased) किया जाता है, ताकि उस नंबर के जरिए कोई भी नया प्रमाणीकरण (Authentication), ई-केवाईसी या वित्तीय लेन-देन न किया जा सके। इसलिए परिवार को कभी भी कार्ड को जलाना या फेंकना नहीं चाहिए, बल्कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने तक इसके रिकॉर्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र को सुरक्षित रखना चाहिए।सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) और UIDAI का ऑटोमेटेड इंटीग्रेशनभारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) और UIDAI के बीच एकीकृत व्यवस्था के तहत अब मृतक का आधार डीएक्टिवेशन काफी हद तक स्वचालित रूप से होता है:मृत्यु पंजीकरण के समय आधार का विवरण: जब परिवार नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत में मृत्यु दर्ज कराने के लिए फॉर्म भरता है, तो वहां मृतक का आधार विवरण और परिवार के मुख्य सदस्य का पहचान पत्र मांगा जाता है।CRS पोर्टल से डेटा सिंक: सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पर जैसे ही आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) जारी होता है, डेटाबेस से यह सूचना यूआईडीएआई को भेजी जाती है।ऑटो-डीएक्टिवेशन: सत्यापन के बाद यूआईडीएआई केंद्रीय डेटाबेस में उस आधार नंबर को ब्लॉक/डीएक्टिवेट कर देता है, जिससे किसी भी तरह की बायोमेट्रिक या ओटीपी आधारित क्लोनिंग की गुंजाइश खत्म हो जाती है।परिवार को तत्काल क्या कदम उठाने चाहिए? दुरुपयोग रोकने का सुरक्षा चक्रयदि किसी कारणवश स्वतः लिंकिंग में समय लग रहा हो, तो परिवार को तुरंत निम्नलिखित सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए:mAadhaar ऐप से बायोमेट्रिक्स तुरंत लॉक करें: यदि परिवार के पास मृतक के आधार से जुड़ा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर सक्रिय है, तो वे यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट या mAadhaar ऐप पर लॉगिन करके मृतक के बायोमेट्रिक्स (फिंगरप्रिंट और आईरिस) को हमेशा के लिए लॉक कर दें। इससे कोई भी व्यक्ति क्लोन फिंगरप्रिंट से पैसे निकालने या सिम कार्ड जारी कराने में सफल नहीं हो सकेगा।वर्चुअल आईडी (VID) का प्रयोग रोकें: पोर्टल पर जाकर ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री की जांच करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मृत्यु के बाद कोई अनधिकृत गतिविधि तो नहीं हुई।निकटतम आधार सेवा केंद्र (ASK) में सूचना: परिवार का कोई सदस्य मूल मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक का आधार कार्ड और अपना स्वयं का पहचान पत्र लेकर नजदीकी आधार केंद्र या स्थानीय रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर मृत्यु की प्रविष्टि को मैन्युअली सत्यापित करवा सकता है।बैंक, पेंशन और अन्य संस्थानों में आधार का उपयोग और निपटानमृत्यु के बाद आधार का उपयोग तुरंत बंद करने से पहले परिवार को कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं:बैंक खाते और नॉमिनी क्लेम: मृतक के बैंक खातों में जमा राशि निकालने, एफडी तुड़वाने या क्लेम सेटलमेंट के लिए बैंक मृतक के आधार और मृत्यु प्रमाण पत्र की स्व-प्रमाणित प्रति मांगते हैं।बीमा (Insurance) और ईपीएफओ (EPFO): जीवन बीमा, पीएफ और ग्रेच्युटी क्लेम के दौरान केवाईसी मिलान के लिए मृतक के आधार रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है।पैन कार्ड और आईटीआर (ITR): आयकर विभाग में अंतिम रिटर्न (लीगल हायर के रूप में) दाखिल करने के लिए भी आधार विवरण की जरूरत पड़ती है। एक बार सभी वित्तीय निपटान पूरे हो जाएं, तो संबंधित विभागों में भी मृत्यु की सूचना दर्ज हो जाती है।मृतक के आधार दस्तावेजों का अंतिम सुरक्षित रखरखावसभी कानूनी, बैंक और बीमा क्लेम पूरे हो जाने के बाद मृतक के आधार कार्ड, पैन कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र की 5-10 सत्यापित कॉपियों को परिवार के मुख्य सदस्य को अपनी सुरक्षित फाइल में सहेज कर रखना चाहिए। भविष्य में पैतृक संपत्ति के बंटवारे, वसीयत के क्रियान्वयन या जमीन-जायदाद के नामांतरण (दाखिल-खारिज) के दौरान पुराने रिकॉर्ड के मिलान के लिए इस दस्तावेज की आवश्यकता पड़ सकती है। किसी भी अज्ञात व्यक्ति या गैर-सरकारी संस्था को मृतक का पहचान पत्र सौंपने से बचें।
वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती आक्रामकता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की सुरक्षा और स्थिरता के लिए अपना सबसे मारक हथियार निकाल लिया है। भारतीय मुद्रा (INR) पर बढ़ते दबाव और डॉलर की तेज मांग को नियंत्रित करने के उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs)—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL)—के लिए एक 'स्पेशल डॉलर विंडो' खोलने का औपचारिक ऐलान किया है। 12 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाली यह विशेष सुविधा सीधे स्पॉट फॉरेक्स मार्केट से तेल कंपनियों की भारी-भरकम डॉलर मांग को बाहर कर देगी, जिससे हाजिर बाजार में मचने वाली अफरा-तफरी पर लगाम लगेगी और रुपये को मजबूत सहारा मिलेगा।क्या है आरबीआई की स्पेशल डॉलर विंडो और यह कैसे काम करेगी?भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इन आयातों का भुगतान करने के लिए देश की सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना अंतरराष्ट्रीय बाजार में अरबों अमेरिकी डॉलर चुकाने पड़ते हैं। सामान्य दिनों में ये कंपनियां विदेशी मुद्रा विनिमय के खुले बाजार (Spot Forex Market) से डॉलर खरीदती हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें चढ़ती हैं या विदेशी निवेशक घरेलू शेयर बाजार से पैसा निकालते हैं, तो डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है और आपूर्ति सीमित होने के कारण भारतीय रुपया तेजी से कमजोर होने लगता है।आरबीआई द्वारा घोषित इस नए तंत्र के तहत, तेल कंपनियों को अब खुले बाजार में जाकर डॉलर खरीदने और बिड लगाने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय, भारतीय रिजर्व बैंक अपने खुद के विदेशी मुद्रा भंडार से सीधे नामित बैंकों (Designated Banks) के माध्यम से इन तीनों कंपनियों की पूरी दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करेगा। यह बिल्कुल वैसा ही रणनीतिक कदम है जैसा आरबीआई ने साल 2013 के 'टेपर टैंट्रम' संकट के दौरान आजमाया था, जिसने बाजार में डॉलर की कमी को तुरंत नियंत्रित कर लिया था।खुले बाजार से हटेगा 90% तेल आयात बिल का दबाव: क्यों खास हैं ये 3 कंपनियां?देश के घरेलू ईंधन और पेट्रोलियम उत्पाद बाजार में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की सामूहिक हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है कि भारत के कुल कच्चे तेल आयात के लिए आवश्यक कुल डॉलर का 90 फीसदी हिस्सा केवल इन तीन कंपनियों द्वारा ही खरीदा जाता है। जब इतना बड़ा खरीदार खुले विदेशी मुद्रा बाजार से बाहर हो जाएगा, तो इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में डॉलर की दैनिक मांग में रातों-रात भारी गिरावट आएगी। जब मांग कम होगी और आपूर्ति स्थिर रहेगी, तो हाजिर बाजार में डॉलर की कृत्रिम किल्लत खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएगी।भारतीय रुपये पर क्या होगा इसका तात्कालिक और दीर्घकालिक असर?आरबीआई के इस रणनीतिक कदम का विदेशी मुद्रा बाजार और रुपये की चाल पर चौतरफा सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है:अस्थिरता (Volatility) पर तुरंत रोक: रुपये में होने वाले अचानक और तेज उतार-चढ़ाव पर तुरंत ब्रेक लगेगा, जिससे मुद्रा व्यापारियों और सटोरियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।रुपये में मजबूती की उम्मीद: खुले बाजार से तेल कंपनियों की डॉलर डिमांड हटते ही हाजिर बाजार में रुपये को तात्कालिक सपोर्ट मिलेगा और यह हालिया निचले स्तरों से उबरकर मजबूत स्थिति में आ सकता है।आयातकों और उद्योगों को राहत: इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और मशीनरी जैसे अन्य जरूरी सामान आयात करने वाले भारतीय उद्योगों को डॉलर की अत्यधिक महंगाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत घटेगी।विदेशी मुद्रा भंडार पर असर: हालांकि इस व्यवस्था से आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार में तात्कालिक कमी दर्ज की जा सकती है क्योंकि डॉलर का प्रवाह सीधे रिज़र्व से होगा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास पर्याप्त फॉरेक्स रिजर्व मौजूद है, जो इस तरह के अल्पकालिक झटकों को आसानी से झेलने में सक्षम है।सट्टेबाजी पर भी कड़ा चाबुक: डेरिवेटिव और हेजिंग नियमों में किए बड़े बदलावसिर्फ तेल कंपनियों के लिए विशेष विंडो खोलना ही नहीं, बल्कि आरबीआई ने मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर नकेल कसने के लिए एक व्यापक दोहरी रणनीति लागू की है। केंद्रीय बैंक ने एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स (ETCD) में बिना अंतर्निहित जोखिम (Underlying Exposure) साबित किए ट्रेड करने की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर सीधे 5 मिलियन डॉलर कर दिया है। इसके अलावा, रद्द किए गए विदेशी मुद्रा अनुबंधों की बार-बार रीबुकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और 2 मिलियन डॉलर से अधिक के चुनिंदा डेरिवेटिव सौदों पर 20 प्रतिशत फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) बनाए रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इन कड़े नियमों का सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक आयातक और निर्यातक ही बाजार में लेन-देन करें और गैर-जरूरी सट्टा ट्रेडिंग के जरिए रुपये को नीचे गिराने की साजिशें नाकाम हों।आम जनता और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं इसके मायने?यदि रुपया संभलता है, तो इसका सीधा फायदा देश की आम जनता की जेब पर पड़ता है। रुपये के टूटने से देश में आयातित महंगाई (Imported Inflation) बढ़ती है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, विदेशी शिक्षा और खाद्य तेलों के भाव पर पड़ता है। रिजर्व बैंक के इस साहसिक और समयबद्ध फैसले से न केवल महंगाई के दबाव को सीमित करने में मदद मिलेगी, बल्कि घरेलू शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता को लेकर एक मजबूत और सकारात्मक संदेश जाएगा।
2 लाख से ज्यादा की कमाई... फिर महिला बोली अच्छा नहीं गया यह महीना
आजकल नौकरी छोड़ने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें महिला ने बताया कि जोमैटो में नौकरी छोड़ने के बाद करीब पांच महीने बाद 2.28 लाख रुपये की कमाई की. लेकिन कैसे चलिए जानते हैं.
नवरात्र वाला सप्ताह, अगले हफ्ते कुंभ सहित 4 राशियों को होगा धन लाभ
Weekly Rashifal (12-18 Oct 2026): अक्टूबर माह का नया सप्ताह 18 से लेकर 17 अक्टूबर तक रहने वाला है. इस सप्ताह शारदीय नवरात्र भी रहने वाले हैं. आइए ज्योतिषविदों के नजरिए से समझते हैं कि यह नया सप्ताह किन राशियों के लिए शुभ रहने वाला है.
त्योहारी सीजन की दहलीज पर खड़े देश की राजधानी दिल्ली के खुदरा और थोक व्यापारियों को शनिवार को उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, जब दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस (CP) समेत मध्य दिल्ली के प्रमुख बाजारों के शटर पूरे दिन गिरे रहे। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) और संयुक्त मंचों द्वारा जंतर-मंतर पर बुलाए गए व्यापक विरोध प्रदर्शन ('जंतर-मंतर 2.0') के कारण पूरी नई दिल्ली छावनी में तब्दील हो गई। सुरक्षा चिंताओं, कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास बंद होने, भारी बैरिकेडिंग और संभावित उपद्रव के डर से व्यापारियों ने अपनी दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रखने का फैसला किया। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) और चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, वीकेंड के इस एकलौते दिन कारोबार ठप होने से दिल्ली के व्यापारियों को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का सीधा व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ा है।वीकेंड और त्योहारी सीजन की शुरुआत पर पड़ा सबसे बड़ा आघातआमतौर पर शनिवार और रविवार के दिन कनॉट प्लेस, खान मार्केट, जनपथ और पालिका बाजार जैसे इलाकों में दिल्ली-एनसीआर के अलावा पड़ोसी राज्यों से लाखों लोग खरीदारी और खान-पान के लिए उमड़ते हैं। नवरात्रि और आगामी दिवाली के त्योहारों के चलते व्यापारियों ने दुकानों में नए स्टॉक भर रखे थे और बिक्री की भारी उम्मीद लगाए बैठे थे। हालांकि, सुबह से ही प्रदर्शनकारियों के जमावड़े, जगह-जगह पुलिस की नाकेबंदी और धारा 144 लागू होने के चलते खरीदार घरों से बाहर नहीं निकल सके। व्यापारियों का कहना है कि जहां सामान्य दिनों में इस समय बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं होती थी, वहीं आज सड़कों और गलियारों में केवल पुलिस के जवान, अर्धसैनिक बल और सन्नाटा ही पसरा दिखाई दिया।दिल्ली भर में 70 फीसदी तक गिरा व्यापार, 15 लाख व्यापारियों के रोजगार पर असरचैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल के अनुसार, जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास के तनाव का असर केवल कनॉट प्लेस तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा पूरी दिल्ली के व्यापार तंत्र तक फैल गया। चांदनी चौक, सदर बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार और करोल बाग जैसे एशिया के सबसे बड़े थोक बाजारों में भी ग्राहकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित रही। सीटीआई के आंकड़ों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों और यातायात प्रतिबंधों के कारण दिल्ली का कुल व्यापार सामान्य स्तर से घटकर महज 30 प्रतिशत पर आ गया, यानी कारोबार में 70 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस व्यवधान से दिल्ली के करीब 15 लाख छोटे-बड़े व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और दैनिक वेतनभोगियों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।मेट्रो स्टेशन बंद होने और इंटरनेट पाबंदियों से ग्राहक बाजारों तक पहुंचे ही नहींव्यापारियों के नुकसान की एक प्रमुख वजह दिल्ली मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ठप होना रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस की सलाह पर डीएमआरसी ने राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, उद्योग भवन और जनपथ समेत कई अहम मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद कर दिए थे। इसके अतिरिक्त मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के अस्थायी निलंबन के कारण डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बिलिंग और कैब सेवाएं भी बुरी तरह लड़खड़ा गईं। बाहर के शहरों (जैसे नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद) से दिल्ली आकर थोक खरीदारी करने वाले व्यापारी रास्ते में ही जाम और पाबंदियों के कारण लौट गए, जिससे दुकानों में रखा सामान धरा का धरा रह गया।होटल, रेस्तरां और सर्विस सेक्टर को भी बड़ा झटका, बुकिंग्स हुईं कैंसिलकनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में स्थित सैकड़ों रेस्तरां, बार, कैफे, सिनेमा हॉल और सैलून को भी इस बंद की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। वीकेंड पर इन जगहों पर सामान्य दिनों की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक फुटफॉल होता है, लेकिन उपद्रव और सुरक्षा के खतरे को देखते हुए ग्राहकों ने पहले से की गई टेबल और मूवी टिकट बुकिंग्स सामूहिक रूप से कैंसिल कर दीं। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि खान मार्केट जैसे प्रीमियम बाजार में एक दिन दुकान बंद रहने से प्रति कारोबारी लाखों का नुकसान होता है, और रेस्तरां में रखी खराब होने वाली खाद्य सामग्रियां बेकार हो जाने से क्षति दोगुनी हो जाती है।व्यापारी संगठनों की सरकार और प्रदर्शनकारियों से तीखी अपीलन्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) और अन्य व्यापारिक संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। व्यापारी प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और संगठन को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार आम नागरिकों की सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं को ठप करने और व्यापारियों को अरबों रुपये के नुकसान की कीमत पर इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। व्यापारियों ने केंद्र सरकार और उपराज्यपाल से मांग की है कि जंतर-मंतर या कनॉट प्लेस जैसे व्यस्ततम वाणिज्यिक और रिहायशी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के बड़े धरने-प्रदर्शनों पर स्थायी रोक लगाई जाए और विरोध स्थलों को शहर से दूर किसी खुले मैदान या तय पेरिफेरल इलाकों में शिफ्ट किया जाए, ताकि त्योहारी सीजन में देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले व्यापारियों को ऐसे संकट से बचाया जा सके।
बॉलीवुड की चर्चित और खूबसूरत जोड़ियों में शुमार सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल शादी के बाद अपने निजी जीवन के साथ-साथ प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स को लेकर भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। दोनों जल्द ही एक खूबसूरत रोमांटिक-ड्रामा फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ में बड़े पर्दे पर एक साथ रोमांस करते नजर आने वाले हैं। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसके टाइटल ने दर्शकों और सिनेप्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। नब्बे के दशक के मशहूर गाने की याद दिलाने वाले इस रोमांटिक शीर्षक को लेकर फैंस काफी उत्सुक थे कि आखिर यह नाम किसके दिमाग की उपज है। अब खुद सोनाक्षी सिन्हा ने एक बातचीत के दौरान इस दिलचस्प राज से पर्दा उठा दिया है और बताया है कि इस टाइटल को फाइनल करने के पीछे की असली कहानी क्या है।कैसे तय हुआ फिल्म का नाम: सोनाक्षी ने बताया टाइटल चुनने का मजेदार किस्सासोनाक्षी सिन्हा ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में फिल्म के नामकरण की प्रक्रिया पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि जब फिल्म की स्क्रिप्टिंग चल रही थी, तब पूरी टीम एक ऐसे शीर्षक की तलाश में थी जो कहानी की आत्मा, मासूमियत और दोनों किरदारों के बीच के गहरे जुड़ाव को सहज रूप से बयां कर सके। कई आधुनिक और ट्रेंडी नामों पर विचार-विमर्श हुआ, लेकिन कोई भी नाम कहानी के इमोशनल टोन से मेल नहीं खा रहा था। सोनाक्षी ने खुलासा किया कि यह आइडिया किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं, बल्कि फिल्म के निर्देशक और राइटिंग टीम का सामूहिक विचार था, जिसे सबसे पहले जहीर और उन्होंने सुनते ही एक झटके में पसंद कर लिया था। सोनाक्षी के मुताबिक, टीम चाहती थी कि नाम में एक पुरानी दुनिया का रोमांस और अपनापन झलके, जो आज के दौर की भागदौड़ भरी प्रेम कहानियों में अक्सर गायब रहता है।शाहरुख खान के आइकॉनिक गाने से कनेक्शन: नॉस्टैल्जिया और नयापन का मेलशीर्षक ‘तू है मेरी किरण’ सुनते ही 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘डर’ के कल्ट गाने ‘जादू तेरी नजर, खुशबू तेरा बदन... तू हां कर या ना कर, तू है मेरी किरण’ की यादें ताजा हो जाती हैं। हालांकि, सोनाक्षी ने यह स्पष्ट किया कि इस फिल्म का उस सस्पेंस थ्रिलर से कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरी तरह से एक हल्की-फुल्की, दिल को छू लेने वाली और आज के दौर के रिश्तों की उलझनों को सुलझाती रोमांटिक कहानी है। फिल्म के मुख्य किरदार की जिंदगी में उम्मीद और रोशनी की किरण का जो महत्व है, उसी रूपक को ध्यान में रखकर यह नाम फाइनल किया गया। सोनाक्षी ने कहा कि नब्बे के दशक का वह दौर हिंदी सिनेमा में मधुर संगीत और सच्चे रोमांस का स्वर्णिम काल था, और यह शीर्षक दर्शकों के दिलों में उसी प्यारे नॉस्टैल्जिया को जगाता है।शादी के बाद पर्दे पर पहली बार दिखेगी रियल लाइफ कपल की केमिस्ट्रीसोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की जोड़ी को ऑफ-स्क्रीन तो फैंस का बेपनाह प्यार मिलता ही रहा है, लेकिन शादी के बंधन में बंधने के बाद बड़े पर्दे पर उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री देखना दर्शकों के लिए बेहद खास अनुभव होने वाला है। इससे पहले दोनों फिल्म ‘डबल एक्सएल’ और म्यूजिक वीडियो ‘ब्लॉकबस्टर’ में साथ काम कर चुके हैं, जहां उनकी बॉन्डिंग को काफी सराहा गया था। सोनाक्षी का कहना है कि एक वास्तविक जीवन के साथी के साथ काम करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि सेट पर कम्फर्ट लेवल और अंडरस्टैंडिंग बहुत स्वाभाविक होती है। किसी भी सीन को जीवंत बनाने के लिए अलग से प्रयास नहीं करना पड़ता, क्योंकि दोनों एक-दूसरे की टाइमिंग और एक्सप्रेशंस को बखूबी समझते हैं।दर्शकों को एक फ्रेश और दिलकश रोमांटिक कहानी का इंतजारआज के दौर में जहां बॉक्स ऑफिस पर हाई-ऑक्टेन एक्शन, मारधाड़ और पैन-इंडिया स्पेक्टेकल्स की भरमार है, ऐसे में शुद्ध रोमांटिक जॉनर की फिल्मों की दर्शकों को काफी कमी खल रही है। ‘तू है मेरी किरण’ इसी खालीपन को भरने की कोशिश करती नजर आ रही है। फिल्म के मेकर्स का दावा है कि यह फिल्म युवाओं से लेकर पारिवारिक दर्शकों तक सभी को अपनी ओर आकर्षित करेगी। सोनाक्षी द्वारा फिल्म के नाम के पीछे की कहानी साझा किए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर फैंस का उत्साह और बढ़ गया है, और सभी को अब फिल्म के फर्स्ट लुक, टीजर और सुरीले गानों के आधिकारिक रिलीज का बेसब्री से इंतजार है।
'जेलर 2' में तमन्ना भाटिया का डांस नंबर चाहते थे रजनीकांत: फिर क्यों नहीं बनी बात? सामने आई असली वजह
सुपरस्टार रजनीकांत की साल 2023 में रिलीज हुई मेगा-ब्लॉकबस्टर फिल्म 'जेलर' ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। इस फिल्म की सफलता में जितना बड़ा योगदान 'थलाइवा' के स्वैग और नेल्सन दिलीपकुमार के सस्पेंस भरे निर्देशन का था, उतनी ही बड़ी दीवानगी तमन्ना भाटिया के सुपरहिट डांस नंबर 'कावाला' (Kaavaalaa) को लेकर देखने को मिली थी। इंटरनेट पर महीनों तक ट्रेंड करने वाले इस गाने ने पूरे देश को थिरकने पर मजबूर कर दिया था। अब जब इस फ्रेंचाइजी के अगले भाग यानी 'जेलर 2' पर तेजी से काम चल रहा है, तो हर सिनेप्रेमी के मन में एक ही सवाल था कि क्या सीक्वल में भी तमन्ना का वही कातिलाना डांस देखने को मिलेगा। हालिया रिपोर्ट्स में यह दिलचस्प खुलासा हुआ है कि खुद रजनीकांत चाहते थे कि सीक्वल में भी तमन्ना का एक धमाकेदार डांस नंबर शामिल किया जाए, लेकिन इसके बावजूद बात नहीं बन सकी।खुद रजनीकांत ने की थी पैरवी: 'कावाला' जैसे जादू को दोबारा दोहराने की थी योजनाइंडस्ट्री के गलियारों से सामने आई खबरों के मुताबिक, सुपरस्टार रजनीकांत फिल्म 'जेलर 2' की स्क्रिप्टिंग और म्यूजिकल एलिमेंट्स को लेकर बेहद उत्साहित हैं। पहले पार्ट में तमन्ना भाटिया के गाने 'कावाला' ने फिल्म को रिलीज से पहले ही एक विशाल मास-अपील और हाइप प्रदान की थी। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक दर्शकों ने इस गाने पर लाखों रील्स बनाए थे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए रजनीकांत ने निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार और म्यूजिक डायरेक्टर अनिरुद्ध रविचंदर के साथ शुरुआती चर्चाओं में यह विचार रखा था कि क्या सीक्वल में भी तमन्ना भाटिया के साथ उसी तरह का एक एनर्जेटिक पेप्पी ट्रैक प्लान किया जा सकता है। निर्माताओं को भी लगा था कि यह फॉर्मूला फिल्म की प्री-रिलीज मार्केटिंग के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।स्क्रिप्ट और नैरेटिव की मांग: निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार क्यों नहीं हुए राजी?तमन्ना भाटिया के डांस नंबर की जबरदस्त मांग होने के बावजूद अंततः इसे 'जेलर 2' की कहानी में शामिल न करने का फैसला लिया गया। इसके पीछे की सबसे मुख्य वजह फिल्म की कहानी का मिजाज और स्क्रिप्ट का फ्लो है। निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार अपनी फिल्मों में जबरन गाने या बेवजह के कमर्शियल एलिमेंट ठूंसने के लिए नहीं जाने जाते। रिपोर्ट्स के अनुसार, 'जेलर 2' का प्लॉट पहले भाग की तुलना में कहीं अधिक डार्क, इंटेंस और बदले की भावना से प्रेरित है। सीक्वल की कहानी 'मुथुवेल पांडियन' (रजनीकांत का किरदार) के अतीत के अनसुलझे रहस्यों और नए शक्तिशाली खलनायकों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। निर्देशक का मानना था कि इतनी गंभीर और तेज रफ्तार कहानी के बीच अचानक किसी ग्लैमरस डांस नंबर को डालना दर्शकों के ध्यान को भटका सकता है और फिल्म की गति को धीमा कर सकता है। लंबी रचनात्मक चर्चा के बाद सुपरस्टार रजनीकांत ने भी निर्देशक के विजन का सम्मान करते हुए इस बात पर सहमति जताई।कहानी के साथ कोई समझौता नहीं: अनिरुद्ध और नेल्सन बना रहे हैं नया मास्टरप्लानसन पिक्चर्स और निर्देशक नेल्सन इस बार पहले पार्ट से भी बड़ा कैनवास तैयार कर रहे हैं। टीम का पूरा ध्यान इस बात पर है कि सीक्वल में किसी भी चीज को दोहराया हुआ न महसूस कराया जाए। पहले भाग में तमन्ना का किरदार और गाना एक खास सीक्वेंस (शूटिंग सेट और अपहरण का सीन) के तहत स्वाभाविक रूप से फिट बैठता था, लेकिन दूसरे भाग में उस तरह की परिस्थितियां कहानी में नहीं बन रही थीं। संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर अब एक अलग तरह के थीम सॉन्ग और मास-बीट्स पर काम कर रहे हैं, जो सीधे रजनीकांत के एक्शन और बैकस्टोरी से जुड़े होंगे, न कि किसी अलग से जोड़े गए आइटम या कैमियो डांस से।फैंस को अब किस सरप्राइज का इंतजार: क्या किसी और रूप में दिखेंगी तमन्ना?भले ही डांस नंबर को लेकर बात न बनी हो, लेकिन मेकर्स 'जेलर 2' को अखिल भारतीय स्तर पर एक नया बेंचमार्क बनाने के लिए कई अन्य बड़े कलाकारों के कैमियो पर काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर फैंस का एक वर्ग तमन्ना के गाने की गैरमौजूदगी से थोड़ा निराश जरूर है, लेकिन सिनेमा के जानकारों का मानना है कि कहानी को प्राथमिकता देना किसी भी सीक्वल के लिए सबसे सही कदम होता है। बहरहाल, 'जेलर 2' के सेट से आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है, और दर्शक यह देखने के लिए बेताब हैं कि बिना 'कावाला' के इस बार अनिरुद्ध और नेल्सन सिनेमाघरों में कौन सा नया धमाका करते हैं।
Abhijeet Dipke और सहयोगियों की हिरासत पर बढ़ा विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी का दावा है कि तीनों को हिरासत में लेकर अज्ञात जगहों पर रखा गया है. सीजेपी के मुताबिक, उनके परिवारों को न तो हिरासत की जानकारी दी गई और न ही ठिकाने का पता है. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि तीनों को वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं मिल रही. इसी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सीजेपी ने पूछा कि आपातकाल घोषित ही क्यों नहीं कर दिया जाता.
मणिकर्णिका घाट पर दबंगों की गुंडागर्दी, 16 सेकंड का खौफनाक वीडियो
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान विवाद के बाद एक युवक की बेरहमी से पिटाई का वीडियो सामने आया है. आरोप है कि डोम परिवार के कई युवकों ने उसे घेरकर पीटा और लकड़ी के बड़े लट्ठे से सिर पर वार किया.
उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बिंदु एक बार फिर भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या बन गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दिए जाने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। अखिलेश के इस दांव पर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जोरदार पलटवार किया है। सीएम योगी ने चुनौती को सीधे स्वीकार करते हुए सपा प्रमुख को उल्टा घेर लिया और साफ लहजे में कहा कि अगर उन्हें अपनी ताकत और सर्वे पर इतना ही भरोसा है, तो वे सैफई, मैनपुरी या कन्नौज की सुरक्षित जमीन छोड़कर खुद अयोध्या आएं और आमने-सामने किस्मत आजमा लें। इस जुबानी जंग के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है।अखिलेश यादव का दांव: 'अगर आश्वस्त हैं तो खुद अयोध्या से लड़कर दिखाएं सीएम'इस सियासी घमासान की शुरुआत तब हुई जब अखिलेश यादव अयोध्या में सपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री पवन पांडेय के आवास पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहां मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि सपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से भाजपा के सभी आंतरिक सर्वे फेल हो रहे हैं और सत्ताधारी दल को अयोध्या में कोई मजबूत प्रत्याशी तक नहीं मिल पा रहा है। अखिलेश ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि बड़े-बड़े वादे और दूध का दूध, पानी का पानी करने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री अगर जनता के समर्थन को लेकर इतने ही आश्वस्त हैं, तो वे किसी अन्य सीट के बजाय खुद अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़कर देख लें, अयोध्या की जनता सच सामने ला देगी।सीएम योगी और भाजपा का तीखा पलटवार: 'सैफई का दायरा छोड़ें और सीधे अयोध्या आएं अखिलेश'अखिलेश यादव के इस बयान के बाद भाजपा खेमे ने बिना देर किए मोर्चा संभाल लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से दिए गए जवाब में साफ संदेश दिया गया कि भाजपा का कोई भी कार्यकर्ता अयोध्या की पावन धरा पर सपा के किसी भी बड़े नेता को हराने का माद्दा रखता है। सीएम योगी ने पलटवार करते हुए कहा कि वे तो जनता के सेवक हैं और प्रदेश के किसी भी कोने से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या खुद अखिलेश यादव कभी पारिवारिक गढ़ों जैसे सैफई, इटावा, मैनपुरी या आजमगढ़ से बाहर निकलकर किसी सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटा पाए हैं? भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव दूसरों को नसीहत देने के बजाय खुद अयोध्या से चुनावी मैदान में ताल ठोकें, ताकि जनता तय कर सके कि आस्था और विकास का साथ देना है या परिवारवाद का।अयोध्या दौरे पर रामलला के दर्शन न करने पर भी छिड़ा बड़ा सियासी संग्रामइस चुनावी चुनौती के साथ-साथ अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सपा प्रमुख अयोध्या तो पहुंचे और भागवत कथा में भी शामिल हुए, लेकिन उन्होंने नवनिर्मित भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में जाकर रामलला के दर्शन नहीं किए। भाजपा के मंत्रियों और नेताओं ने इसे आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव केवल राजनीतिक लाभ के लिए अयोध्या की बात करते हैं, लेकिन तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के डर से वे राम मंदिर जाने से कतराते हैं। इस पर सपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रभु श्री राम कण-कण में बसे हैं और आस्था किसी पार्टी के प्रमाण पत्र की मोहताज नहीं है।2027 के महामुकाबले से पहले अयोध्या बनी प्रतिष्ठा की सबसे बड़ी जंगअयोध्या लोकसभा सीट के चुनावी नतीजों के बाद से ही समाजवादी पार्टी लगातार इस क्षेत्र में भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। सपा का आरोप है कि अयोध्या में विकास के नाम पर स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों और किसानों की जमीनें और दुकानें बिना उचित मुआवजे के छीनी गईं। वहीं दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार का दावा है कि अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित किया गया है, जिसका लाभ पूरे प्रदेश को मिल रहा है। अब दोनों शीर्ष नेताओं के बीच अयोध्या सीट को लेकर सीधी चुनौती के बाद यह तय हो गया है कि आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति का सबसे बड़ा दंगल रामनगरी की सियासी पिच पर ही लड़ा जाएगा।
हर साल 10 अक्टूबर को दुनिया भर में 'विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस' (World Mental Health Day) मनाया जाता है, जिसका मूल उद्देश्य मानसिक तंदुरुस्ती और मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना है। आज के डिजिटल युग में जिस वर्ग पर मानसिक विकारों का सबसे खामोश और गहरा असर पड़ रहा है, वह है हमारे घरों के मासूम बच्चे। धूल-मिट्टी के खेल, शाम की भागदौड़ और दोस्तों के ठहाकों की जगह अब 6 इंच की चमकदार मोबाइल स्क्रीन, टैबलेट और हाई-स्पीड इंटरनेट ने ले ली है। वीडियो गेम्स की वर्चुअल दुनिया में बंधे बच्चों का दिमाग एक ऐसे अदृश्य चक्रव्यूह में फंसता जा रहा है, जहां से निकलना उनके लिए नामुमकिन सा हो गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ई-गेमिंग की यह लत केवल एक आदत भर नहीं रह गई है, बल्कि यह बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता, भावनात्मक स्थिरता और समग्र मानसिक विकास पर सीधा प्रहार कर रही है।दिमाग में डोपामाइन का खतरनाक खेल: कैसे आदत बनती है जानलेवा लतई-गेमिंग की लत को न्यूरोलॉजिकल स्तर पर समझना बेहद जरूरी है। आधुनिक ऑनलाइन गेम्स—चाहे वे बैटल रॉयल गेम्स हों, शूटिंग गेम्स हों या मल्टीप्लेयर सर्वाइवल गेम्स—इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि वे मानव मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम (पुरस्कार प्रणाली) को सीधे ट्रिगर करते हैं। गेम में एक लेवल पार करना, वर्चुअल रिवॉर्ड मिलना या किसी प्रतिद्वंद्वी को हराना दिमाग में तुरंत डोपामाइन (फील-गुड हार्मोन) का भारी स्राव करता है। बच्चे का अविकसित मस्तिष्क इस क्षणिक उत्साह का आदी हो जाता है। जब खेल खत्म होता है या माता-पिता फोन छीनते हैं, तो डोपामाइन का स्तर अचानक गिर जाता है, जिससे बच्चा तेज गुस्सा, झुंझलाहट और आक्रामकता दिखाने लगता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसी मनोवैज्ञानिक निर्भरता को देखते हुए 'गेमिंग डिसऑर्डर' (Gaming Disorder) को आधिकारिक तौर पर एक मानसिक स्वास्थ्य बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया है।अनिद्रा, डिप्रेशन और सामाजिक अलगाव: स्क्रीन के पीछे घुटती मासूमियतलगातार कई घंटों तक स्क्रीन से चिपके रहने का सबसे पहला और घातक असर बच्चों के स्लीप पैटर्न (नींद के चक्र) पर पड़ता है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) शरीर में नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन को पूरी तरह दबा देती है। देर रात तक जागकर गेम खेलने वाले बच्चों में अनिद्रा, सिरदर्द और आंखों का सूखापन आम बात हो चुकी है। नींद की कमी सीधे उनके मूड और मानसिक संतुलन को बिगाड़ती है। ऐसे बच्चे धीरे-धीरे वास्तविक दुनिया से कटने लगते हैं; वे परिवार के साथ बैठने, दोस्तों से बात करने या स्कूल की गतिविधियों में भाग लेने से कतराने लगते हैं। इस सामाजिक अलगाव (Social Isolation) के कारण उनमें अवसाद (Depression), एकाग्रता की कमी (ADHD के लक्षण) और आत्म-संदेह की भावना घर करने लगती है।वर्चुअल जीत और वास्तविक हार: बच्चों के व्यवहार में दिखने वाले खतरे के संकेतयदि आपके घर में भी बच्चे लंबे समय तक डिजिटल उपकरणों पर समय बिताते हैं, तो माता-पिता को उनके दैनिक व्यवहार में आने वाले सूक्ष्म बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जब गेमिंग किसी शौक से बढ़कर लत का रूप ले लेती है, तो उसके स्पष्ट लक्षण दिखने लगते हैं:अत्यधिक आक्रामकता: मोबाइल या वाई-फाई बंद करने पर बच्चे का हिंसक हो जाना, सामान फेंकना या गाली-गलौज करना।पढ़ाई और व्यक्तिगत स्वच्छता में गिरावट: स्कूल के होमवर्क, प्रोजेक्ट्स और यहां तक कि नहाने-खाने तक की परवाह न करना।वर्चुअल पैसे खर्च करने की जिद: इन-गेम परचेज या डिजिटल स्किन खरीदने के लिए माता-पिता के क्रेडिट कार्ड का गुपचुप इस्तेमाल करना या पैसे चुराना।शारीरिक लक्षण: लगातार थकान, गर्दन और पीठ में दर्द, आंखों के नीचे काले घेरे और वजन का तेजी से बढ़ना या घटना।सच्चाई छिपाना: यह झूठ बोलना कि वे गेम नहीं खेल रहे थे, या रात में चादर के अंदर छिपकर फोन चलाना।अभिभावकों के लिए डिजिटल डिटॉक्स और समाधान का रोडमैपइस गंभीर मानसिक संकट से बच्चों को बाहर निकालने के लिए डांट-फटकार या मारपीट काम नहीं करती, बल्कि इसके लिए सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण और वैज्ञानिक रणनीति की आवश्यकता होती है:स्क्रीन-फ्री जोन बनाएं: बेडरूम और डाइनिंग टेबल को पूरी तरह 'नो-स्क्रीन जोन' घोषित करें। रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी गैजेट्स बाहर रखवाएं।आउटडोर खेलों को दिनचर्या में जोड़ें: बच्चों के अतिरिक्त समय को फुटबॉल, बैडमिंटन, तैराकी, संगीत या पेंटिंग जैसी वास्तविक दुनिया की गतिविधियों में लगाएं, जिससे उन्हें प्राकृतिक रूप से डोपामाइन और खुशी मिले।खुद मिसाल पेश करें: यदि माता-पिता खुद घर में हर समय फोन पर स्क्रॉल करते रहेंगे, तो बच्चे पर किसी नसीहत का असर नहीं होगा। बच्चों के साथ बातचीत और बोर्ड गेम्स के लिए समय निकालें।स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें: गैजेट्स में पैरेंटल कंट्रोल टूल्स का इस्तेमाल करें और दिन में मनोरंजन के लिए 45 मिनट से 1 घंटे से ज्यादा का समय न दें।काउंसलर की मदद लें: यदि बच्चा व्यवहार पर नियंत्रण पूरी तरह खो चुका है, तो झिझक छोड़कर तुरंत किसी योग्य चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या साइकियाट्रिस्ट से परामर्श लें। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही अनमोल है।
'जितनी पुलिस बुलानी है बुला लीजिए, हम पीछे नहीं हटेंगे...' राहुल गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और केंद्र सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए एक वीडियो में राहुल गांधी ने दावा किया कि वे अपने विरोधियों को अच्छी तरह जानते ...

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