100 साल पुराना रहस्य सुलझाने वाले वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री का नोबेल
2026 का रसायन नोबेल हेनरी कागन और केंसो सोआई को मिला. उन्होंने बताया कि अणुओं का एक तरफा रूप कैसे बनता है. इससे दवा बनाने में मदद मिलेगी. जीवन की रसायन का पुराना रहस्य सुलझा.
'मुस्कुराइए, सरपंच साहब ने सेंचुरी बना दी...' खुशी से झूमीं श्रेष्ठा
श्रेयस अय्यर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज का आगाज बल्ले से धमाकेदार अंदाज में किया. लखनऊ में खेले गए पहले मुकाबले में उन्होंने टीम के लिए मैच विनिंग पारी खेली. टी20 में अपना पहला शतक ज़ड़ने के साथ ही उन्होंने कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए.
पति का गला घोंटकर बिस्तर पर छोड़ा था सांप, पत्नी और प्रेमी दोषी करार
मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र में चर्चित अमित हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुना दिया है. अपर सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर की कोर्ट ने अमित की पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को हत्या और साजिश रचने का दोषी ठहराया है. दोषियों की सजा पर फैसला 16 तारीख को सुनाया जाएगा.
रेपो रेट बढ़ा... अब ज्यादा EMIs या लंबे समय तक भरें लोन? जानिए
रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद होम लोन लेने वाले ज्यादातर लोग कंफ्यूज हैं कि उन्हें अपने लोन का टेन्योर बढ़ाना चाहिए या फिर लोन की ईएमआई बढ़ानी चाहिए. यहां पूरी डिटेल में समझाने की कोशिश की गई है.
‘सोते-जागते PDA ही PDA...’, यूपी सीएम पर अखिलेश यादव ने साधा निशाना
लखनऊ के जीपीओ स्थित पटेल पार्क में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने परोक्ष रूप से समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा था. इसी भाषण का वीडियो क्लिप शेयर करते हुए अखिलेश यादव ने पलटवार किया है.
भारत के विश्वगुरु बनने की महत्वाकांक्षा को शोध की चुनौती
हम विश्वगुरु बनने की बात करते हैं, लेकिन ज्ञान पैदा करने की हमारी क्षमता अभी उस महत्वाकांक्षा के अनुरूप नहीं है. विश्वगुरु केवल प्राचीन ज्ञान का संदर्भ देकर नहीं बना जाता. आधुनिक दुनिया में विश्वगुरु वह है जो नए ज्ञान की रचना करता है, नई तकनीक विकसित करता है और मानवता के सामने मौजूद कठिन समस्याओं के समाधान खोजता है.
'रामायण' की रिलीज से एक दिन पहले देख सकेंगे फिल्म?
रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फिल्म 'रामायण पार्ट 1' को लेकर नई अपडेट सामने आई है. फिल्म रिलीज से पहले रणबीर कपूर, साई पल्लवी ने फैन्स को बड़ा तोहफा दिया है. जानते हैं कि नई अपडेट क्या है.
Live: लंच के बाद विपक्षी सांसदों के साथ जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, बोले- अब वहीं देंगे धरना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह और विपक्षी सांसद प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जा रहे हैं. इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बुलावे पर INDIA ब्लॉक के सांसद दिल्ली के जनपथ स्थित सागर रत्न रेस्टोरेंट में जुटे थे.
मौत के बाद दफनाया शव, मुर्दे की फोटो ने खोल दिया राज... पत्नी पर FIR
मेरठ में तालिब की संदिग्ध मौत के मामले में उसकी पत्नी इल्मा और अमन पर हत्या का केस दर्ज हुआ है. परिवार ने गर्दन पर गला घोंटने के निशान मिलने का दावा किया है. पुलिस शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराएगी. पढ़ें पूरी कहानी.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अर्ज़ी पर विचार करने के लिए सहमति जताई। इस अर्ज़ी में 23 सितंबर के उस बंटे हुए फ़ैसले को वापस लेने की मांग की गई थी, जिसमें यह तय होना था कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। इससे पहले का फ़ैसला तब आया था जब सरकार ने 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ (Constitution Bench) के पास भेजने का अनुरोध किया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की दो जजों की बेंच ने इस बात पर अलग-अलग राय दी थी कि क्या ऐसा मामला बड़ी बेंच को भेजना ज़रूरी है या नहीं। जस्टिस दत्ता का मानना था कि इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने की ज़रूरत नहीं है, जबकि जस्टिस शर्मा चाहते थे कि पाँच जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच इस पर विचार करे। विचारों में अंतर को देखते हुए, बेंच ने निर्देश दिया कि मामले को एडमिनिस्ट्रेटिव साइड से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के सामने रखा जाए ताकि सही संख्या वाली बेंच का गठन किया जा सके। इसे भी पढ़ें: CEC नियुक्ति में PM, LoP के साथ CJI भी हों शामिल, Owaisi ने मौजूदा चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल इसी बंटे हुए फ़ैसले के बाद, बुधवार को CJI सूर्य कांत के सामने फ़ैसले को वापस लेने (रिकॉल) की अर्ज़ी का ज़िक्र किया गया। सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने CJI और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना के सामने यह अर्ज़ी रखी और बेंच को बताया कि इस याचिका में 23 सितंबर के फ़ैसले को वापस लेने की मांग की गई है। संकरनारायणन ने कहा मुख्य चुनाव आयुक्त के मामले में बंटा हुआ फ़ैसला आया है। हमने फ़ैसले को वापस लेने के लिए एक अर्ज़ी दी है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस अर्ज़ी पर फ़ैसला लेने से पहले उसकी जांच करेगी। उन्होंने कहा हम जांच करेंगे और फिर कोई फ़ैसला लेंगे। शंकरनारायणन ने साफ़ किया कि यह एप्लीकेशन एक इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) थी, जिसमें जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा के 23 सितंबर के फ़ैसले को वापस लेने की मांग की गई थी। ध्यान दें कि IA एक औपचारिक एप्लीकेशन होती है जो किसी केस के चलने के दौरान कोर्ट से कोई खास आदेश या निर्देश पाने के लिए दायर की जाती है। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi के 'फॉर्म 6' वाले आरोप का Election Commission ने किया खंडन, दावे को बताया 'गुमराह करने वाला' लाइव-लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह रिकॉल एप्लीकेशन जस्टिस शर्मा के पक्षपाती होने की वाजिब आशंका के आधार पर दायर की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एप्लीकेशन में इस बात की ओर इशारा किया गया है कि जस्टिस शर्मा के बेटे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भारत के चुनाव आयोग के लिए स्टैंडिंग काउंसिल हैं। यह आरोप एप्लीकेशन में बताई गई एक वजह है और इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह मान लिया है कि जस्टिस शर्मा पक्षपाती थे। शंकरनारायणन ने बेंच को यह भी बताया कि एक और पार्टी ने बंटे हुए फ़ैसले के ख़िलाफ़ क्यूरेटिव पिटीशन दायर की है। उन्होंने कहा एक क्यूरेटिव पिटीशन दायर की गई है। मुझे लगता है कि उसे अपने तरीके से आगे बढ़ना होगा। मुझे नहीं पता कि वह सुनवाई के लायक है या नहीं। हमारी एप्लीकेशन फ़ैसले को वापस लेने की मांग करने वाली IA है। क्यूरेटिव पिटीशन के लिए अक्सर रिव्यू की ज़रूरत होती है।
पहली नजर में कालीन, गौर से देखेंगे तो दिखेगा बच्चन परिवार
यूपी के भदोही में इन दिनों कालीनों की दुनिया सजी हुई है. चार दिनों के इंडिया कारपेट एक्सपो में देश-विदेश से आए खरीदार अलग-अलग डिजाइन और पैटर्न वाले कालीन देख रहे हैं. एक कालीन ऐसी है, जिस पर एक-एक करके तीन चेहरे उभरते हैं. पहले महान कवि हरिवंश राय बच्चन, फिर अमिताभ बच्चन और फिर अभिषेक बच्चन. भदोही के बुनकरों ने इसे तैयार किया है.
Jadavpur University ने वामपंथी छात्र सम्मेलन विवाद के बाद कार्यक्रम मंजूरी समिति भंग की
कोलकाता, सात अक्टूबर यादवपुर विश्वविद्यालय ने परिसर में वाम समर्थित छात्र संगठनों द्वारा आयोजित एक सम्मेलन और उसमें आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की मौजूदगी को लेकर हुए विवाद के बाद कार्यक्रमों को मंजूरी देने वाली एक समिति को भंग कर दिया है और कुलसचिव को ऐसे मामलों की जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया है। सोमवार को आयोजित ‘जेन जी मूवमेंट: यूनिटी ऑफ जेनरेशन एंड रेजिस्टेंस’ नामक सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को खत्म करने समेत विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, इसमें मतदाता सूचियों के विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) और प्रस्तावित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) विधेयक का भी विरोध किया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय के बाहर की राजनीतिक हस्तियों की कथित मौजूदगी का विरोध किया और सवाल उठाया कि क्या कार्यक्रम को प्रशासनिक अनुमति मिली थी। आयोजकों ने पलटकर कहा कि आरएसएस से संबद्ध छात्र संगठन को “बाहरी लोगों” के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि अगस्त में अशांति के दौरान उसके कई नेता, जिनका विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं था, जबरन परिसर में घुस आए थे। विवाद के बाद, विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि ‘कार्यक्रमों के अनुमोदन और निगरानी’ समिति को भंग कर दिया गया है और कुलसचिव देबजीत दत्ता अगले आदेश तक मामलों की देखरेख करेंगे। अधिसूचना में हालांकि निर्णय का कारण निर्दिष्ट नहीं किया गया था, दत्ता ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि कार्यक्रम को अनुमति देने में “प्रक्रियात्मक चूक” के कारण समिति को भंग कर दिया गया और जल्द ही एक नयी समिति गठित की जाएगी। कुलसचिव ने कहा, “हमने कार्यक्रमों के अनुमोदन और निगरानी समिति के अध्यक्ष और डीन को भी ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है तथा इस चूक के लिए स्पष्टीकरण मांगा है।”दत्ता ने कहा कि यादवपुर विश्वविद्यालय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने के अधिकार के पक्ष में है। उन्होंने कहा, लेकिन “राजनीतिक कार्यक्रम” को मंजूरी देने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कुलसचिव ने सोमवार को कहा था कि कार्यक्रम के लिए अनुमति लेने के वास्ते उनसे संपर्क नहीं किया गया था और उनके कार्यालय ने इसके लिए मंजूरी नहीं दी थी। उन्होंने पहले चेतावनी दी थी कि यदि आवश्यक मंजूरी के बिना कार्यक्रम आयोजित किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संकाय के एक वरिष्ठ सदस्य ने, हालांकि कहा कि कार्यक्रम के आयोजकों को संबंधित समिति से मंजूरी मिल गई थी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के नियमों के तहत, समिति की सिफारिश कुलसचिव तक पहुंचनी चाहिए, लेकिन कथित तौर पर ऐसा नहीं हुआ। आरएसएस से संबद्ध शिक्षक संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) के प्रमुख भास्कर सरदार ने कहा कि कार्यक्रम को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अनुमति दी गई।
भारतीय वायुसेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कमान संभालेंगे। करीब चार दशक के लंबे सैन्य अनुभव, हजारों घंटे की उड़ान और लड़ाकू विमानों से लेकर रणनीतिक कमान तक के अनुभव के साथ दीक्षित ऐसे समय में वायुसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब भारत की हवाई ताकत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की बड़ी चुनौती सामने है। हम आपको बता दें कि आशुतोष दीक्षित की सबसे बड़ी विशेषता उनका लंबा और विविध युद्धक अनुभव है। वर्ष 1986 में लड़ाकू विमान धारा में शामिल हुए दीक्षित को लगभग चार दशक की सेवा का अनुभव है। वह तीन हजार पांच सौ घंटे से अधिक उड़ान भर चुके हैं और मिराज-2000, मिग श्रेणी के विमानों, जगुआर और तेजस सहित अनेक विमानों को उड़ा चुके हैं। वह प्रायोगिक परीक्षण पायलट और प्रशिक्षित उड़ान प्रशिक्षक भी रहे हैं। यानी उनके सामने युद्धक विमान केवल हथियार नहीं, बल्कि युद्ध की पूरी रणनीति का हिस्सा हैं। उनकी सेवा यात्रा का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है मैदान से लेकर रणनीतिक स्तर तक उनका अनुभव। उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में अग्रिम लड़ाकू अड्डे की कमान संभाली, दक्षिणी क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रशिक्षण अड्डे का नेतृत्व किया, दक्षिणी वायु कमान में वायु रक्षा की जिम्मेदारी निभाई और बाद में केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ रहे। वह एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख के रूप में भी काम कर चुके हैं। सरकार के अनुसार इस भूमिका में उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। यही अनुभव उनके नेतृत्व की दिशा का संकेत देता है। आने वाला युद्ध केवल लड़ाकू विमानों की संख्या से नहीं जीता जाएगा। रडार, उपग्रह, मानवरहित विमान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, लंबी दूरी के हथियार, हवाई चेतावनी प्रणाली और जमीन आधारित वायु रक्षा, इन सबको एक ही युद्धक तंत्र में जोड़ना होगा। आशुतोष दीक्षित का परीक्षण पायलट का अनुभव और एकीकृत रक्षा व्यवस्था में काम करने का अनुभव इस चुनौती के लिहाज से महत्वपूर्ण है। लेकिन उनके सामने सबसे कठिन सवाल वायुसेना की लड़ाकू क्षमता का है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार भारतीय वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या स्वीकृत संख्या से काफी नीचे है और तेजस के नए संस्करण की आपूर्ति में देरी ने इस कमी को और गंभीर बनाया है। प्रस्तावित बहु-भूमिका लड़ाकू विमान सौदे और भविष्य के स्वदेशी लड़ाकू विमानों की योजनाएं भी इसी बड़े अंतर को भरने की कोशिश हैं। यहीं से नये वायुसेना प्रमुख की असली परीक्षा शुरू होगी। उन्हें एक तरफ तत्काल युद्धक क्षमता बनाए रखनी होगी और दूसरी तरफ भविष्य की वायुसेना तैयार करनी होगी। तेजस, भविष्य का उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान, लंबी दूरी के हथियार, आधुनिक रडार, हवाई चेतावनी प्रणाली और मानवरहित प्रणालियों को एक साथ गति देना आसान काम नहीं है। फिर भी तस्वीर का दूसरा पहलू बेहद महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 में भारतीय वायुसेना लगातार ऐसे अभ्यास कर रही है जिनसे स्पष्ट है कि युद्ध की तैयारी केवल कागज पर नहीं हो रही। ‘तरंग शक्ति’ में भारत के साथ अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों की वायु सेनाएं शामिल हैं। इस अभ्यास में विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हवा में ईंधन भरने वाले विमान शामिल हैं। उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में संयुक्त अभियान की क्षमता बढ़ाना है। इसके अलावा, जापान के साथ ‘वीर गार्जियन’ में तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल ने जापानी एफ-2 विमानों के साथ उन्नत हवाई अभियानों का अभ्यास किया। इससे भारतीय वायुयोद्धाओं को अलग-अलग युद्धक सिद्धांतों और परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलता है। इससे भी आगे की तैयारी पोखरण में आयोजित ‘ड्रोनाथॉन’ में दिखाई देती है। यहां निगरानी, स्वायत्त संचालन, झुंड तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का परीक्षण किया गया। वायुसेना ने मानवरहित प्रणालियों के लिए अपनी भविष्य की जरूरतों का खाका भी जारी किया। संदेश साफ है कि भविष्य के युद्ध में केवल पायलट वाला विमान नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में बुद्धिमान मानवरहित प्रणालियां भी निर्णायक भूमिका निभाएंगी। हम आपको यह भी बता दें कि ‘वायु शक्ति-26’ ने भी भारतीय वायुसेना की तस्वीर स्पष्ट की। दिन और रात दोनों समय बड़े पैमाने पर अभियान, हवाई हमले, वायु रक्षा, विशेष बलों की कार्रवाई और परिवहन अभियानों को एक साथ संचालित किया गया। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों के साथ आकाश और स्पाइडर जैसी वायु रक्षा प्रणालियों का समन्वय दिखाया गया। इसमें कोई दो राय नहीं कि भविष्य की सबसे बड़ी ताकत केवल विमानों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी आंख और दिमाग होंगे। स्वदेशी ‘नेत्र’ हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली को अंतिम परिचालन मंजूरी मिलना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए हवा में मौजूद खतरों की निगरानी, परिस्थितिजन्य जानकारी और युद्धक्षेत्र का नियंत्रण मजबूत होता है। इसके अगले संस्करण की दिशा में भी काम चल रहा है। देखा जाये तो आशुतोष दीक्षित के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारतीय वायुसेना को ऐसी ताकत बनाने की होगी, जो सिर्फ सीमा की रक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन की हवाई रणनीति, संचार व्यवस्था, निगरानी तंत्र और सैन्य ठिकानों पर भी जबरदस्त दबाव बना कर उसे कुछ घंटों में ही घुटने टेकने पर मजबूर कर दे। आने वाले वर्षों में अगर लड़ाकू विमानों की कमी दूर होती है, स्वदेशी हथियार और तकनीक समय पर वायुसेना तक पहुंचती है और लड़ाकू विमानों के साथ ड्रोन, हवाई चेतावनी प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और लंबी दूरी के हथियारों का बेहतर तालमेल बनाया जाता है, तो भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ सकती है। देखा जाये तो असली ताकत सिर्फ ज्यादा विमान रखने में नहीं, बल्कि दुश्मन से पहले खतरे को पहचानने और उससे कहीं तेजी से जवाब देने में होगी। बहरहाल, आधुनिक हवाई युद्ध का नियम बिल्कुल साफ है। जिसके पास बेहतर जानकारी, ज्यादा सटीक हथियार और तेज फैसला लेने की क्षमता होगी, उसे बढ़त मिलेगी। अब आशुतोष दीक्षित के सामने यही चुनौती है कि भारतीय वायुसेना को इस नई युद्ध तकनीक और रणनीति के मामले में और आगे कैसे ले जाया जाए। -नीरज कुमार दुबे
ये ‘लायन’ नहीं, बेहद दुर्लभ बंदर है... इन्हें पहली बार लगा टीका
एक छोटी सी आबादी, सीमित जंगल और ऊपर से जानलेवा बीमारी का खतरा... ब्लैक-फेस्ड लायन टैमरिन कई चुनौतियों से जूझ रहा है. अब वैज्ञानिकों ने येलो फीवर से इसकी रक्षा के लिए जंगल में ही वैक्सीन देने की शुरुआत की है.
14,454 पदों पर नियुक्ति, 50 हजार रुपये की मदद, लेकिन लागू होगी एक शर्त
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से कई तरह की योजनाएं चलाई जाती हैं. यूपी में भी इस तरह की योजना चलाई जाती है लेकिन अब पश्चिम बंगाल की सुवेंदु सरकार ने एक अनोखा स्कीम शुरू करने का ऐलान किया है.
शुक्र की टेढ़ी चाल, 14 नवंबर तक 5 राशियों को रहना होगा सतर्क
Shukra Vakri 2026: शुक्र वक्री चाल में हैं. 14 नवंबर 2026 तक इन 5 राशियों को धन, करियर, सेहत और रिश्तों के मामले में सावधानी बरतने की जरूरत है. जानें कौन-सी हैं ये राशियां और क्या असर पड़ेगा.
एक शरीर में दो दिमाग... गुजरात में पहली बार मिला दो सिर वाला सांप
सामने एक सांप हो और उसके दो सिर हों. गुजरात के दाहोद में इन दिनों लोगों की नजर ऐसे ही एक दुर्लभ सांप पर पड़ी है. दावा है कि गुजरात में दो सिर वाले सांप का यह पहला मामला है. आखिर एक ही शरीर को दो दिमाग कैसे संभालते हैं और ऐसा सांप बनता कैसे है? इसकी कहानी प्रकृति के एक बेहद दुर्लभ बदलाव से जुड़ी है.
घर को बना देगा सिनेमाघर! लॉन्च हुआ नया होम थिएटर, इतनी है कीमत
Blaupunkt ने भारत में नया होम थिएटर साउंड सिस्टम लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम SBW 600 Klassic है. कंपनी ने बताया है कि यह 8.1 चैनल स्पीकर है, जो एक दूसरे से वायरलेस कनेक्ट होते हैं. साथ ही कंपनी ने बताया है कि इसमें यूजर्स को कमाल का साउंड एक्सपीरियंस मिलेगा.
Tamil Nadu के सरकारी अस्पतालों में Hindi में छपे दवा कवर के वितरण पर रोक, DMK ने जताया विरोध
कोयंबटूर, सात अक्टूबर तमिलनाडु की नीति को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कोयंबटूर और करूर के सरकारी अस्पतालों ने हिंदी समेत तीन भाषाओं में छपे दवाओं के कवर का वितरण रोक दिया है। राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली दवा की पैकेजिंग पर खुराक संबंधी निर्देश तमिल, अंग्रेजी और हिंदी में छपे होने के बाद नेताओं ने इसकी तीखी आलोचना की। विवाद उस समय और बढ़ गया जब द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता टी. आर. बी. राजा ने करूर के अस्पताल में वितरित दवाओं के कवर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में तीन-नीति को गुपचुप तरीके से लागू किया जा रहा है। पूर्व मंत्री ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “ऐसा लगता है कि तमिलनाडु के अस्पतालों में भी तीन-नीति लागू की जा रही है! पहले करूर... अब कोयंबटूर में भी यही स्थिति है...।”अस्पताल अधिकारियों ने कहा कि विवादित पैकेजिंग न तो नयी है और न ही यह दवा हाल में खरीदी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चिंतामणि सहकारी समिति के माध्यम से प्रायोजित ये कवर पिछले 18 महीनों से लगातार इस्तेमाल किए जा रहे हैं और इनमें से कुछ का इस्तेमाल पिछली सरकार के कार्यकाल में भी हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि तीन भाषाओं में छपे कवर के वितरण की जानकारी सामने आने के बाद इनके आगे के वितरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए। तमिलनाडु शिक्षा और सरकारी प्रशासन में केवल तमिल और अंग्रेजी के इस्तेमाल वाली अपनी दो-नीति का सख्ती से पालन करता है। राज्य सरकार केंद्र की तीन-नीति का लगातार विरोध करती रही है।
छात्र देश-विरोधी नहीं, भरोसा जीते सरकार, पुणे प्रोटेस्ट पर Bombay HC की बड़ी टिप्पणी
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई गड़बड़ी है, तो प्रदर्शनकारियों को विरोध करने का अधिकार है और सरकार को उनका भरोसा फिर से जीतना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की शिकायतें गंभीर हैं, साथ ही उसने छात्रों से क्लास में लौटने को भी कहा। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह तीन हफ़्ते के अंदर एक हलफ़नामा दाखिल करे, जिसमें लगभग 70,000 खाली पदों का विभाग और आरक्षण के हिसाब से ब्योरा दिया गया हो। चीफ़ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि वे छात्र हैं, देश-विरोधी नहीं। इसे भी पढ़ें: उम्मीद है आपने सबक सीखा होगा, SC ने राजपाल यादव को दी कड़ी चेतावनी, 13 अक्टूबर तक ₹2 करोड़ जमा करने का निर्देश यह बेंच पुणे के रहने वाले अमित सुपेकर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के लिए तय जगह उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी। सुपेकर ने एक साथ हो रहे गैर-कानूनी सार्वजनिक प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी। पुणे में हज़ारों नौकरी के उम्मीदवार पुलिस की इजाज़त न मिलने के बावजूद तीन जगहों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रदर्शन ऐसे आंदोलनों की कड़ी में सबसे ताज़ा हैं। जुलाई में, परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के कारण तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था। नौकरी के उम्मीदवारों और छात्र संगठनों ने, जो लगभग एक महीने से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे थे, झारखंड सरकार द्वारा उनकी लगभग सभी मुख्य मांगें मान लिए जाने के बाद अपना धरना स्थगित करने की घोषणा की। इसे भी पढ़ें: Delhi Police और RAF के लिए Body Camera अनिवार्य नहीं, Delhi High Court का PIL पर आदेश बेंच ने कहा कि पुणे एक एजुकेशन हब है। साथ ही, वहाँ के ज़्यादातर छात्र पढ़ाई में सचमुच दिलचस्पी रखते हैं। वे सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करने में दिलचस्पी नहीं रखते... अगर वे विरोध कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि उनकी शिकायतें गंभीर हैं। ये छात्र कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, और अगर उन्हें परीक्षा की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नज़र आती है, तो उन्हें विरोध करने का पूरा अधिकार है।
Virat की टीम का ₹5 करोड़ के दावें पर आया ये ऑफिशियल बयान
विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम में पांच करोड़ रुपये देकर बुलाए जाने के दावे पर विवाद खड़ा हो गया है. कोहली के प्रवक्ता ने फालाहारी महाराज दिनेश शर्मा के इस दावे को पूरी तरह झूठा, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है. प्रवक्ता ने कहा कि विराट और अनुष्का प्रेमानंद महाराज से गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण मिलते हैं. मीडिया से भी बिना सत्यापन ऐसे दावों को आगे न बढ़ाने की अपील की गई है.
14 विकेट लेकर इस युवा खिलाड़ी ने काटा गदर, AUS को 10 विकेट से रौंदा
भारत U-19 ने ऑस्ट्रेलिया U-19 को दूसरे यूथ टेस्ट में 10 विकेट से हराकर दो मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली. इस जीत के हीरो रहे तन्मय बलोदा, जिन्होंने मैच में कुल 14 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की कमर तोड़ दी.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में ₹2 करोड़ का आंशिक भुगतान करने के निर्देश का पालन करने के लिए मंगलवार तक का समय दे दिया। यादव ने ₹1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा किया था और बाकी रकम चुकाने के लिए और समय मांगा था। इसे भी पढ़ें: Black Sea में मालवाहक जहाज पर हमले के बाद सुरक्षित निकाले गए 3 भारतीय नागरिक सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव से क्या कहा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कोर्ट में मौजूद एक्टर से कहा कि वे बाकी बचे ₹85 लाख मंगलवार (13 अक्टूबर) तक जमा करें। इसके बाद, कोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई सज़ा और दोषी ठहराए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करेगा। सीजेआई सहित जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना वाली बेंच ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि आप ₹85 लाख जमा करने के हमारे आदेश का पालन करें और बाकी रकम के लिए हम एक शेड्यूल तय करेंगे। असल में, आपके क्लाइंट को जेल में होना चाहिए। आपका व्यवहार अभी भी हमें संतुष्ट नहीं करता है, लेकिन चूंकि आप ₹1.15 करोड़ लेकर आए हैं, इसलिए हम आपको कुछ मोहलत देने को तैयार हैं। एक्टर ने कहा कि बाकी पैसे का इंतज़ाम इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि जिस प्रॉपर्टी को वह बेचना चाहते थे, उसकी बिक्री तय समय में पूरी नहीं हो सकी। ऐसा ‘श्राद्ध’ के समय की वजह से हुआ, जिसे ऐसे लेन-देन के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। कोर्ट में उनके साथ उनकी ज़मीन खरीदने वाले व्यक्ति भी मौजूद थे, जो डिमांड ड्राफ्ट के ज़रिए ₹85 लाख देने को तैयार हो गए। इसे भी पढ़ें: UPESSC में Assistant Professor के 1936 पदों पर आवेदन की अंतिम तारीख आज कोर्ट ने एक्टर को चेतावनी दी,आपकी अपील पर, यह हमारी मर्ज़ी है कि हम नोटिस जारी करें और आपकी सज़ा बढ़ाकर दो साल की जेल कर दें। एक्टर की तरफ़ से पेश हुए वकील विक्रांत यादव ने कोर्ट को बताया कि एक्टर के लिए हालात बेहतर हो रहे हैं क्योंकि उन्हें अब एक्टिंग और डायरेक्शन के लिए फ़िल्में मिल रही हैं। कोर्ट ने राजपाल यादव से बातचीत की और पूछा आप आजकल क्या कर रहे हैं? क्या आपको कोई सीरियल मिल रहा है या आप बिना काम के हैं?
'सामान बांध लें, लंबी लड़ाई होगी': CEC के खिलाफ CJP का 10 अक्टूबर को Mega Protest का ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने बुधवार को दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को होने वाले प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और भारत निर्वाचन आयोग में सुधार की मांग को लेकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है और उन्होंने दिल्ली पुलिस को इसकी जानकारी दे दी है। साथ ही, उन्होंने प्रेशर ग्रुप के दिल्ली चलो आह्वान को दोहराया। इसे भी पढ़ें: 2 महीने, 3 सरप्राइज एलीमेंट: बीजेपी हैरान, पुलिस परेशान, क्या है राहुल गांधी की 'धप्पा' पॉलिटिक्स! मीडिया से बात करते हुए दास ने कहा कि हम पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और उन्हें एक औपचारिक पत्र सौंपा। हमने उन्हें बताया कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' और देश भर के युवा - यानी ये सभी 'कॉकरोच' - 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने वाले हैं। हमने उनसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सहयोग करने और ज़रूरी ट्रैफिक इंतज़ाम करने को कहा। हमने यह औपचारिक सूचना दे दी है। उन्होंने कहा कि हमने औपचारिक सूचना सौंप दी है और दिल्ली पुलिस से इसकी पावती भी प्राप्त कर ली है। हमारी बातचीत के आधार पर, उन्होंने हमसे एक वचन-पत्र (undertaking) भी लिया और हमने इसके लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। हमें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस सहयोग करेगी। दास ने लोगों से अपना सामान बांधने और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की, और कहा कि यह एक लंबी लड़ाई होगी। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा भी दे देते हैं, तो भी वे झुकेंगे नहीं और भारत के चुनाव आयोग में सुधार की अपनी मांग पर डटे रहेंगे। यह विरोध प्रदर्शन का आह्वान चुनाव आयोग के फैसलों, खासकर 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (विशेष गहन समीक्षा) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मचे हंगामे के बीच किया गया है। इसे भी पढ़ें: CEC विरोध पर CM Devendra Fadnavis बोले, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की है साजिश उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा भी दे दें, तब भी हम झुकेंगे नहीं। हम चुनाव आयोग में सही सुधार चाहते हैं। वरना, ECI कभी निष्पक्ष नहीं होगा... हमें यह पक्का करना होगा कि कुमार इस्तीफ़ा दें और उन्हें गिरफ़्तार किया जाए। हम सिस्टम में सुधार चाहते हैं, SIR को रोकना चाहते हैं और SIR के दौरान लिए गए ग़ैर-कानूनी फ़ैसलों की जाँच चाहते हैं। सरकार को यह पक्का करना चाहिए कि कुमार जैसे लोग ऐसे पदों पर न बैठें। वरना हम वापस नहीं आएँगे। मैं चाहता हूँ कि सब लोग आएँ। अपना सामान बाँध लें। यह एक लंबी लड़ाई होगी।
सूट-बूट पहने राजपाल ने लगाई गुहार, CJI बोले- अच्छी फिल्में बनाओ
राजपाल यादव ने चेक बाउंस केस में सुप्रीम कोर्ट में अपनी आर्थिक स्थिति और डूबे पैसों पर चर्चा की. कोर्ट की सुनवाई के दौरान राजपाल इमोशनल हुए.
Hyderabad में कैंपस खोलेगा US का CU Denver, UGC से मिला आशय पत्र
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर कोलोराडो डेनवर विश्वविद्यालय (सीयू डेनवर) ने कहा है कि उसे भारत के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से हैदराबाद में विश्वविद्यालय एक नया परिसर स्थापित करने के लिए एक आशय पत्र मिला है। इसके साथ ही यह भारत में डिग्री प्रदान करने के लिए परिसर स्थापित करने की अनुमति पाने वाला पहला सरकारी अमेरिकी विश्वविद्यालय बन गया है। पिछले साल, शिकागो में स्थित ‘इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ भारत में अपना परिसर स्थापित करने वाला पहला अमेरिकी विश्वविद्यालय बना था। यह एक निजी विश्वविद्यालय है, जिसने मुंबई में अपना परिसर स्थापित किया है और सितंबर में छात्रों के अपने पहले बैच का स्वागत किया। सीयू डेनवर का भारत में परिसर तेलंगाना का पहला विदेशी विश्वविद्यालय परिसर भी होगा। सीयू डेनवर के कुलाधिपति केनेथ टी. क्रिस्टेंसन के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक अधिक से अधिक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना लंबे समय से विश्वविद्यालय का लक्ष्य रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हैदराबाद में हमारी योजनाएं इसी प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। साथ ही, भारत के उन छात्रों के साथ हमारे लंबे समय से जारी संबंध भी इसका आधार हैं, जो दशकों से सीयू डेनवर से जुड़े रहे हैं।’’विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक बयान में उन्होंने कहा, ‘‘अब हमारे पास इस संबंध को और आगे बढ़ाने तथा भारत के छात्रों तक अपने विशिष्ट अनुभव पहुंचाने का मौका है। इसमें उच्च शैक्षणिक मानकों वाली पढ़ाई और करियर के अनुरूप शिक्षा का अनुभव शामिल होगा, जो छात्रों को सार्थक करियर बनाने और अपने समुदायों में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार करेगा।’’वैश्विक शिक्षा कंपनी एमेरिटस भारत में विश्वविद्यालय की रणनीतिक संयुक्त उद्यम साझेदार है और यह विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम कर रही है।
कम उम्र में क्यों हो रही हार्ट की बीमारियां? ऐसे चलेगा पता
भारत में हार्ट की बीमारियां कम उम्र में तेजी से बढ़ रही हैं. लेकिन इसका सटीक कारण अभी तक पता नहीं चला है. हालांकि अब वैज्ञानिकों ने लैंसेट रीजनल हेल्थ जर्नल में एक नए कार्डियोथोरेसिक बायोबैंक मॉडल का प्रस्ताव दिया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये मॉडल भारत में हार्ट की बीमारियों के कारण का पता लगाने में मदद करेगा.
ऐसे हिंदू संगठन को भी FCRA रजिस्ट्रेशन नहीं दे सकते, HC ने मुस्लिम धर्म पर भी कही बड़ी बात
मद्रास हाईकोर्ट ने Zen मेडिटेशन सेंटर चलाने वाले ट्रस्ट का FCRA रजिस्ट्रेशन खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने हिंदू धर्म को समावेशी और अब्राहमिक धर्मों को विशिष्ट बताते हुए धार्मिक गतिविधियों और विदेशी फंडिंग पर अहम टिप्पणियां कीं।
Political Drama के बाद फिर BSP में वापस कैसे लौटे Akash Anand? क्या है Mayawati का 2027 वाला प्लान?
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष मायावती ने सोमवार (5 अक्टूबर, 2026) को आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक फिर से नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला पार्टी और आंदोलन के हित में लिया गया है। मायावती ने 'X' पर लिखा कि काफ़ी सोच-विचार के बाद, पार्टी और आंदोलन के हित में यह फ़ैसला लिया गया है कि आकाश आनंद को एक बार फिर BSP का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया जाए और उन्हें पार्टी में दोबारा काम करने का मौका दिया जाए। ज़्यादा सक्रिय होने की उम्मीद जैसे-जैसे BSP 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है, पर्दे के पीछे आनंद के उत्तर प्रदेश की राजनीति में और ज़्यादा सक्रिय होने की उम्मीद है। उनकी नई भूमिका का पहला इम्तिहान 9 अक्टूबर को लखनऊ में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती पर होने वाली BSP की बड़ी रैली में हो सकता है। उम्मीद है कि आनंद इस कार्यक्रम में मंच साझा नहीं करेंगे, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि वह लखनऊ में संगठन से जुड़े इंतज़ामों और पर्दे के पीछे की रणनीति बनाने में शामिल हो सकते हैं। आने वाले हफ़्तों में उनकी राजनीतिक गतिविधियां भी ज़्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देने की उम्मीद है। 1 नवंबर को आनंद के अयोध्या के एक विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करने की संभावना है, जहां BSP जितेंद्र सिंह बबलू को अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है। कैसे हुई वापसी आनंद की यह वापसी तीसरी बार है जब उन्हें BSP से हटाए जाने के बाद अहम भूमिका में वापस लाया गया है। मायावती ने सोमवार को उन्हें फिर से बहाल कर दिया; इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी थी और उनके नेतृत्व में काम करने का एक और मौका मांगा था। मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक के पद पर बहाल करते हुए कहा कि यह फ़ैसला पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में लिया गया है। BSP के अंदर की गतिविधियों की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, इस सुलह के पीछे लखनऊ में मायावती के घर पर उनके और आनंद के बीच हुई एक लंबी बैठक थी। यह बैठक आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर हफ़्तों तक बनी अनिश्चितता के बाद हुई। ससुर अशोक सिद्धार्थ की रिटायरमेंट इस पारिवारिक राजनीतिक ड्रामे में उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ भी शामिल हो गए थे, जो BSP के पूर्व राज्यसभा सदस्य और पार्टी के सीनियर पदाधिकारी थे। मायावती ने आकाश की पार्टी में संभावित वापसी के लिए सिद्धार्थ के राजनीति से रिटायरमेंट को एक शर्त बनाया था। इसके बाद सिद्धार्थ ने रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया, लेकिन फिर भी मायावती ने 10 सितंबर को आकाश को पार्टी से निकाल दिया। उस समय उन्होंने कहा था कि आकाश का व्यवहार और उनके पारिवारिक संबंध चिंता का विषय बन गए थे। बाद में आनंद ने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु और बुआ माँ बताया और कहा कि BSP उनके लिए सिर्फ़ एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि उनका परिवार है। उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई और पार्टी की सेवा करने का एक और मौका मांगा। उत्तर प्रदेश चुनाव में भूमिका वापसी के बाद लखनऊ में हुई बैठक में, आनंद का स्वागत BSP के वरिष्ठ नेताओं ने किया, जिनमें सतीश चंद्र मिश्रा और उत्तर प्रदेश यूनिट के प्रमुख विश्वनाथ पाल शामिल थे; उन्होंने पार्टी की नीली टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया। मायावती ने आकाश आनंद को संगठन में एक अहम पद पर वापस ला दिया है और संकेत दिया है कि उनके अलग होने की संभावना कम है। ऐसे में आने वाले हफ़्तों में यह साफ़ हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए BSP की तैयारियों में आकाश आनंद की क्या भूमिका रहती है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव पहला ऐसा मौका होगा जब बीएसपी प्रमुख मायावती अपने भतीजों आकाश आनंद और ईशान आनंद के साथ मिलकर पार्टी के चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगी। परिवार ने पहले कभी किसी चुनाव में एक साथ प्रचार नहीं किया है। आकाश आनंद को 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीएसपी के स्टार प्रचारकों में से एक के तौर पर उतारा गया था, लेकिन राज्य में वोटिंग के तीसरे चरण के बाद, 7 मई को मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। इसके साथ ही उनका चुनाव प्रचार भी खत्म हो गया। यवाओं पर होगा जोर मायावती ने देश और यूपी में Gen-Z और Gen-Alpha के हालिया विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया है और युवाओं को अपनी पार्टी से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में, पार्टी के युवा संपर्क अभियानों में 'आनंद-ब्रदर्स' अहम भूमिका निभा सकते हैं। आकाश ने 10 अगस्त को हाथरस से यूपी चुनावों के लिए अपना अभियान शुरू किया था और 25 अगस्त को गौतम बुद्ध नगर के जेवर में एक और बैठक को संबोधित किया था, लेकिन 10 सितंबर को उन्हें अचानक पार्टी से हटा दिया गया था। अब, जब मायावती ने उन्हें पार्टी में उनकी अहम भूमिका पर फिर से नियुक्त किया है, तो राज्य में जनसभाओं के लिए उनका नया कार्यक्रम तैयार हो सकता है।
पश्चिम बंगाल का बदला जाएगा नाम! BJP अध्यक्ष ने बताया नया नाम होगा- पश्चिम बंग
समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि 'बांग्ला', 'वेस्ट बंगाल' या अन्य वैकल्पिक नामों के भ्रम को खत्म कर दिया जाएगा और बहुत जल्द इस संबंध में विधानसभा में एक विधेयक पेश किया जाएगा।
लातूर में गहराया सूखा, पानी आपूर्ति के लिए प्रशासन ने बनाया ऐसा प्लान
महाराष्ट्र के लातूर जिले में सूखे की गंभीर स्थिति के कारण जिला प्रशासन ने चार प्रमुख क्षेत्रों पेयजल, पशु चारा, रोजगार और जल स्रोत पुनर्जीवन पर केंद्रित एक व्यापक योजना बनाई है.
Airtel Postpaid Plans: 50 रुपये तक महंगे हुए प्लान, हर साल फ्री मिलेगा इंटरनेशनल रोमिंग पैक
Airtel के नए पोस्टपेड प्लान में केवल रोमिंग सुविधा पर जोर नहीं दिया गया है। ग्राहकों को 5G पर फास्ट लेन टेक्नोलॉजी के साथ स्पैम और फ्रॉड प्रोटेक्शन भी मिलेगा। कंपनी अलग-अलग एंटरटेनमेंट सब्सक्रिप्शन के अलावा Airtel Postpaid Advantage Club के जरिए अतिरिक्त अनुभव आधारित फायदे भी दे रही है।
पुलिस-RAF के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य करने की मांग, HC ने सरकार पर छोड़ा फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस और RAF के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा अनिवार्य करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने PIL को सरकार के सामने प्रतिनिधित्व के तौर पर लेने और छह महीने में फैसला करने को कहा है. इस बीच दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली इलाके में फ्रंटलाइन कर्मियों को बॉडीकैम देना शुरू कर दिया है.
J&K में UCC लागू करने से इंकार करते हुए Omar Abdullah ने मोदी सरकार को दे डाली बड़ी चुनौती
देश की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एक तरफ भाजपा और उसके नेतृत्व वाले राजग शासित राज्यों में यूसीसी को आगे बढ़ाने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं, वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने प्रदेश में इसे लागू करने से साफ इंकार कर दिया है। उमर ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि यूसीसी लागू करना है तो सरकार को संसद में विधेयक लाकर उस पर खुली बहस करनी चाहिए। उमर अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूसीसी को लेकर भाजपा शासित राज्यों में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां यूसीसी 27 जनवरी 2025 से प्रभावी हो चुका है। इसके बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश ने भी यूसीसी से जुड़े कानून विधानसभा से पारित किए हैं। हालांकि इन राज्यों में कानून की वास्तविक प्रभावी तारीख और नियमों की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है। गुजरात का मामला अब सबसे आगे बढ़ चुका है। राज्य विधानसभा द्वारा पारित यूसीसी विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल चुकी है और राज्य सरकार अब इसके नियमों को अधिसूचित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं असम और मध्य प्रदेश में भी भाजपा सरकारों ने कानून पारित कर दिए हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा ने जुलाई में यूसीसी विधेयक पारित किया था, जबकि असम में मई में विधेयक पारित हुआ। इन दोनों राज्यों में भी आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके अलावा भाजपा और राजग के दूसरे राज्यों में भी यूसीसी की तैयारी शुरू हो चुकी है। महाराष्ट्र में सरकार ने उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में मसौदा तैयार करने के लिए समिति बनाई है। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने अगले छह महीने में यूसीसी लागू करने का ऐलान किया है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सितंबर में बड़ा लक्ष्य सामने रखते हुए कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा-राजग द्वारा शासित सभी 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यूसीसी लागू किया जाएगा। यानी एक तरफ यूसीसी का दायरा राज्यों में धीरे-धीरे बढ़ाने की भाजपा की रणनीति दिखाई दे रही है, तो दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर से उमर अब्दुल्ला ने इसके खिलाफ स्पष्ट राजनीतिक रेखा खींच दी है। उमर का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में यूसीसी लागू नहीं किया जाएगा। उनका तर्क है कि यदि यह वास्तव में समान नागरिक संहिता है तो इसे पूरे देश के लिए संसद के माध्यम से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र से कहा है कि वह संसद में विधेयक लाए और वहां इस पर बहस कराए। देखा जाये तो पूरे घटनाक्रम ने यूसीसी को महज कानूनी मुद्दे से आगे बढ़ाकर केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार, संसद की भूमिका और अलग-अलग राज्यों में कानून लागू करने की प्रक्रिया का बड़ा राजनीतिक सवाल बना दिया है। आने वाले समय में यह टकराव कितना बढ़ता है, इसकी दिशा अब संसद, राज्यों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों को दोपहर के भोज पर आमंत्रित किया है। माना जा रहा है कि इस दौरान विपक्षी दलों के नेता मंगलवार को हुए प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं।
बारापुला फ्लाईओवर पर लगने वाले जाम को लेकर मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस और विशेषज्ञों के साथ बैठक में कई तात्कालिक उपायों पर सहमति बनी है. मंत्री ने 10 से 15 दिनों में राहत मिलने की उम्मीद जताई है.
जिस धुन पर ऋतिक रोशन ने ऐसा डांस किया कि गाना सुपरहिट हो गया, उसका कनेक्शन बॉलीवुड से नहीं बल्कि तुर्की के पुराने मिलिट्री म्यूजिक से बताया जाता है.
हेलीकॉप्टर हादसे का बीमा दावा खारिज करने पर Oriental Insurance तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट
रायपुर, सात अक्टूबर छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से जुड़े बीमा दावे को चार साल से अधिक समय तक लटकाए रखने के बाद खारिज किए जाने के मामले में ओरिएण्टल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड (ओआईसीएल) को तीन साल के लिए काली सूची में डाल दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार के विमानन निदेशालय ने सरकारी स्वामित्व वाले अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर से जुड़ी दुर्घटना के बीमा दावे के संबंध में यह कार्रवाई की है। हेलीकॉप्टर मई 2022 में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और हादसे में दो पायलटों की मौत हो गई थी। इस संबंध में एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि चार साल से अधिक समय तक लटकाए रखने के बाद बीमा कंपनी ने अगस्त 2026 में दावा खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद विमानन निदेशालय ने मामले की जांच की और कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। अधिकारी के मुताबिक, ओआईसीएल ने नोटिस के जवाब में अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत किया। उपलब्ध रिकॉर्ड और कंपनी के जवाब की पड़ताल के बाद विमानन निदेशालय ने आदेश पारित करते हुए कंपनी को तीन साल के लिए काली सूची में डालने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि 12 मई 2022 की रात रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर अभ्यास उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें वरिष्ठ पायलट कैप्टन गोपाल कृष्ण पांडा और दिल्ली से आए डीजीसीए परीक्षक कैप्टन ए. पी. श्रीवास्तव की मौत हो गई थी। हेलीकॉप्टर का बीमा ओआईसीएल के पास था और बीमा प्रीमियम का पूरा भुगतान किया जा चुका था। दुर्घटना के बाद बीमा दावा दायर किया गया, लेकिन यह लंबे समय तक लंबित रहा और अंततः अगस्त 2026 में इसे खारिज कर दिया गया। सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘यह सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा मामला है। बीमा प्रीमियम का भुगतान किए जाने के बाद दावे के निपटारे में लगा समय सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय था। सरकारी संस्थानों के साथ काम करने वाली सेवा प्रदाता कंपनियों से समय पर और जवाबदेही के साथ काम करने की उम्मीद की जाती है।’’उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े मामलों में देरी से सरकार पर वित्तीय असर पड़ सकता है और लागू नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि कंपनी को काली सूची में डाले जाने से बीमा दावे का मामला अपने आप समाप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लागू नियमों के तहत उपलब्ध प्रशासनिक और कानूनी उपायों के जरिए मामले को आगे बढ़ाएगी तथा राज्य के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा जांच पर हाईकोर्ट ने मांगा कानूनी जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा है कि राजधानी की सार्वजनिक इमारतों में स्ट्रक्चरल ऑडिट मौजूदा कानून के तहत अनिवार्य है या नहीं. सत्य निकेतन हादसे पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि सुरक्षा, फायर सेफ्टी और जवाबदेही पर कानूनी स्थिति अब स्पष्ट होनी चाहिए.
China Wakhan Corridor: अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में स्थित ऐतिहासिक वाखान कॉरिडोर (Wakhan Corridor) में 121 किलोमीटर लंबी ऑल-वेदर सड़क का निर्माण पूरा कर उसका उद्घाटन कर दिया गया है। लगभग 55 लाख डॉलर ($5.5 Million) की लागत से तैयार ...
RAC टिकट है तो ट्रेन में सीट मिलेगी या पूरी बर्थ? जान लें रेलवे का नियम
आरएसी टिकट पर यात्री ट्रेन में सफर कर सकता है, लेकिन शुरुआत में पूरी बर्थ की जगह शेयरिंग सीट मिल सकती है. खाली बर्थ मिलने पर टिकट कन्फर्म हो सकती है.
अमेरिका की स्लीपर ट्रेन में इंडियन यूट्यूबर ने किया सफर, बोला- ये अनुभव नहीं भूलूंगा
भारतीय यूट्यूबर रौनक साहनी के लिए अमेरिका की दूसरी सबसे लंबी दूरी वाली ट्रेन में सफर करने का अनुभव यादगार बन गया. 51 घंटे के एक ही ट्रेन के सफर में आप रेगिस्तान, मैदान और पहाड़, सब देखते हैं. उनके पास हर समय भारतीय ट्रेनों की बुराई करने वालों के लिए एक मैसेज भी है.
ऑनलाइन सामान जिस थैली में आता है, वो अंदर से काली क्यों होती है?
आपने कभी गौर किया है कि जिन प्लास्टिक बैग में ऑनलाइन सामान घर आता है, उनमें अधिकतर बैग अंदर से काले क्यों होते हैं?
'की-होल' बता कर दी हार्ट की सर्जरी, ऑपरेशन टेबल पर ही महिला की हो गई मौत
कन्नूर के परियाराम मेडिकल कॉलेज में हार्ट सर्जरी के दौरान 47 वर्षीय फातिमा की मौत हो गई. परिवार ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. परिजनों का दावा है कि उन्हें पहले 'की-होल' सर्जरी की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में ऑपरेशन को बाईपास सर्जरी में बदल दिया गया.
‘सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं’ अटल टनल को राष्ट्रपति ने बताया भारत की ताकत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अटल टनल को भारत की तकनीकी ताकत और अडिग इरादों का प्रतीक बताया है. यह 9.02 किलोमीटर लंबी सुरंग हिमालय की सबसे ऊंची चोटियों के बीच से गुजरती है और मनाली को लेह से जोड़ती है.
केदारनाथ में मौसम की मार, एयर एम्बुलेंस बनी 'संजीवनी', 50 से ज्यादा श्रद्धालु एयरलिफ्ट
केदारनाथ धाम की यात्रा के दौरान मौसम में बदलाव और ऊंचाई के कारण श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ रही है. पुलिस और एसडीआरएफ के जवान तुरंत मदद के लिए पहुंचते हैं और जरूरतमंदों को हेलीपैड तक सुरक्षित पहुंचाते हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत का 3 पॉइंट फॉर्मूला, जानिए क्या है प्रस्ताव
रूस और यूक्रेन युद्ध कब खत्म होगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन प्रयास जारी है। भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के तुरंत खतरे कम करने के लिए तीन हिस्सों वाला युद्धविराम प्रस्ताव रखा है। आइये जानते हैं प्रस्ताव में क्या-क्या है...
पैसा आता है लेकिन रुकता नहीं है? एस्ट्रोलॉजर ने बताया अचूक उपाय, इसे करने से बढ़ने लगेगी सेविंग्स
एस्ट्रोलॉजर साक्षी सिंघल ने एक बेहद आसान उपाय बताया है. साक्षी कहती हैं, ये उपाय आपके घर और बैंक में पैसों को रोकने और सेविंग्स को बढ़ाने में असर दिखा सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
शाम के नाश्ते में गुजराती खींचू-गट्टे, चाय का स्वाद हो जाएगा दोगुना
शाम की हल्की भूख या सुबह के नाश्ते के लिए चावल के आटे से बना गट्टे स्टाइल गुजराती खींचू एक बेहतरीन, स्वादिष्ट और हेल्दी ऑप्शन है. बिना डीप फ्राई किए भाप में पकने वाला यह स्नैक बेहद कम तेल में आसानी से तैयार हो जाता है, इसे गरमा-गरम चाय या चटनी के साथ सर्व करें. आइए आपको इसे बनाने का तरीका बताते हैं.
लद्दाख में डीआरडीओ की एडवांस पैराशूट जंप
लेह। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अधिक ऊंचाई वाले ड्रॉप ज़ोन में से एक पूर्वी लद्दाख के न्योमा (मुध) ड
चुनाव आयोग का जवाब आ गया, SIR में 13 करोड़ वोट काटने के विपक्ष के आरोप पर कही ये बात
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 13.39 करोड़ वोटरों के नाम एक प्रक्रिया के तहत ASDD यानी एब्सेंट, परमानेंट शिफ्ट, डेड, डुप्लीकेट कैटगेरी में डाने हैं, न कि गैर-कानूनी ढंग से डिलीट किए गए हैं।
भावनगर में भीषण हादसे ने कैसे ले ली 7 जिंदगियां? देखें गुजरात आजतक
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के तमाम बड़े नेता दिल्ली के आकाशवाणी परिसर में धरने पर बैठे. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा के 25 साल पूरे होने पर राजकोट के रेसकोर्स मैदान में 1500 छात्रों ने मिलकर 40 हजार वर्ग फीट क्षेत्र के भारत के नक्शे के आकार की मानव श्रृखंला बनाई. भावनगर में घटे एक भीषण सड़क हादसे में 7 लोगों की जान चली गई.
फ्रांस पर कब्जा कर रहे मुसलमान? छात्र आंदोलन को ट्रंप क्यों बता रहे 'इस्लामी टेकओवर'
फ्रांस में स्कूलों में स्टाफ की कमी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब बड़ा रूप ले चुका है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे प्रवासन और इस्लाम से जोड़ रहे हैं. आखिर फ्रांस में जमीन पर क्या हो रहा है और ट्रंप के दावे में कितना सच है?
Sitamarhi और Vaishali में मुठभेड़ व हमले के बाद छह बदमाश गिरफ्तार
सीतामढ़ी/हाजीपुर, सात अक्टूबर बिहार में दो अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सीतामढ़ी में पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान तीन कथित अपराधी गोली लगने से घायल हो गए, जबकि वैशाली में एसटीएफ की एक टीम पर हमला करने के आरोप में तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पहली घटना सीतामढ़ी के रीगा इलाके की है, जहां मंगलवार रात करीब 11 बजे रीगा-परसौनी मार्ग पर पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान हत्या के एक आरोपी समेत तीन लोग घायल हो गए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी सुनील कुशवाहा, मणि कुमार और इंदल कुमार मोटरसाइकिल से यात्रा कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें रेवासी-भगवानपुर सीमा के पास रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर भागने के दौरान पुलिस दल पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। सीतामढ़ी पुलिस की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, तीनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) तथा जिला पुलिस के जवानों ने उन्हें काबू कर लिया। पुलिस ने बताया कि तीनों कथित अपराधियों को निकटतम सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज हो रहा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से तीन अर्द्ध-स्वचालित पिस्तौल और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया है, जिसमें 800 कारतूस शामिल हैं। दूसरी घटना वैशाली की है, जहां मंगलवार शाम विदुपुर थाना क्षेत्र के भैरवपुर चौक के पास छापेमारी के दौरान एसटीएफ की एक टीम पर हमला करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने एसटीएफ कर्मियों के साथ कथित तौर पर मारपीट की, जिसमें चार जवान घायल हो गए। घटना के दौरान पिस्तौल से एक गोली चलाए जाने की भी सूचना है। घायल एसटीएफ कर्मियों की पहचान कांस्टेबल नरेंद्र कुमार, मुकेश कुमार, लक्ष्मी कुमार और अमर कुमार के रूप में हुई है। सभी घायल जवानों को निकटतम अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में 25,000 रुपये के इनामी कुख्यात अपराधी कुणाल कुमार और उसके दो सहयोगी शामिल हैं। दोनों घटनाओं के संबंध में मामले दर्ज कर लिए गए हैं और आगे की जांच जारी है।
कौन कहता है OTT पर नहीं चलता रीजनल कंटेंट, टॉप ट्रेंडिंग में नंबर वन पर काबिज हुई 'बिजली का लट्टू'
कौन कहता है कि OTT पर रीजनल कंटेंट की पूछ नहीं है. अब आप बिजली का लट्टू को ही लीजिए. इसने ओटीटी की टॉप 10 ट्रेंडिंग की लिस्ट में नंबर वन पर कब्जा जमा लिया है.
घास काटने वाली मशीन के नीचे मिला तहखाना, अफसर भी रह गए हैरान
बिहार के बेतिया में शराब तस्करी की चौंकाने वाली कहानी सामने आई है. यहां रतनपुरा गांव में एक व्यक्ति ने घास काटने वाली मशीन के नीचे सीक्रेट तहखाना बना रखा था. इस तहखाने से 151 शराब की बोतलें बरामद की हैं. जब अफसरों ने ये पूरी कहानी देखी तो वे भी हैरान रह गए. पुलिस ने इस मामले में कारोबारी को पकड़ा है.
उत्तराखंड की राजधानी में महज 300 रुपये की मजदूरी के विवाद ने एक प्लंबर ने दंपती समेत तीन को मौत के घाट उतार दिया।
होश उड़ा देगी नई जगुआर... 3 सेकंड में पकड़ लेती है रफ्तार
जगुआर ने अपनी फ्लैगशिप इलेक्ट्रिक कार टाइप-01 को पेश कर दिया है. ये कार दमदार फीचर्स के साथ आएगी. कंपनी का दावा है कि कार 720 किलोमीटर तक की क्लेम्ड रेंज ऑफर करेगी. इसे सिर्फ 13 मिनट चार्ज करके 321 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है. कार के इंटीरियर को काफी सिंपल रखा गया है. आइए जानते हैं इस कार की खास बातें.
72वीं BPSC PT परीक्षा स्थगित, 25 अक्टूबर को भी नहीं होगा एग्जाम
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 72वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को दूसरी बार स्थगित कर दिया है. परीक्षा 25 अक्टूबर को होने वाली थी, लेकिन अब इसकी नई तिथि घोषित नहीं की गई है. लाखों अभ्यर्थी परीक्षा की नई तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. आयोग जल्द ही आधिकारिक सूचना जारी करेगा.
चेक बाउंस से जुड़े एक दशक से भी पुराने मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उन्हें 13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपये का भुगतान करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।
श्रेयस अय्यर बने टी20 के नए सुपरस्टार, कोहली को हो गया बड़ा नुकसान
श्रेयस अय्यर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 मैच में शतक जड़कर टीम को धमाकेदार जीत दिलाई. इस जीत के साथ ही अय्यर ने आईसीसी रैंकिंग में लंबी छलांग लगा ली है. आईसीसी टी20 रैंकिंग के टॉप-10 में अब भारत के चार बल्लेबाज आ गए हैं.
राजपाल यादव ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान अपने 16 साल के संघर्ष की कहानी सुनाई और कोर्ट मे बताया कि वह अपनी लाइफ पर एक फिल्म बनाना जा रहे हैं. उन्होंने इस फिल्म का नाम भी तय कर लिया है.
LIVE: कश्मीरी गेट EC दफ्तर पर AAP-कांग्रेस का हल्ला बोल, बैरिकेड पर चढ़े कार्यकर्ता
INDIA ब्लॉक के दल दिल्ली में आज चुनाव आयोग के कश्मीरी गेट दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे है. विपक्षी दल SIR को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस, CPI, CPI(M), RJD, NCP और RSP समेत कई दल प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं.
लखनऊ में 10 से ज्यादा फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोड का निर्माण हो रहा है. इससे उत्तर प्रदेश की राजधानी में ट्रैफिक में सुधार के साथ शहरवासियों को हाईस्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी. गोमती नगर, चौक, डालीगंज, लखनऊ यूनिवर्सिटी, केजीएमयू, दुबग्गा समेत पुराने और नए लखनऊ के बीच यातायात बेहतर होगा.
बीजेपी ने अभी से शुरू कर दी पंजाब चुनाव की तैयारी, सीबीआई ने मेरे कैंप ऑफिस पर मारी रेड
पंजाब की सियासत में इन दिनों केंद्रीय जांच एजेंसियों की एंट्री के बाद से एक नया और बेहद हाई-वोल्टेज राजनीतिक भूचाल आ गया है, जिसने राज्य की सत्ता और केंद्र के रिश्तों को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बेहद आक्रामक और तीखा हमला बोलते हुए यह सनसनीखेज आरोप लगाया है कि बीजेपी ने अभी से आगामी विधानसभा चुनावों की हार के डर से अपनी गंदी राजनीतिक साजिशें शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीमों ने उनके अपने कैंप ऑफिस और बेहद करीबी ठिकानों पर अचानक छापेमारी (CBI Raids) की है। आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से बदले की भावना से की गई राजनीतिक बदले की कार्रवाई (Political Vendetta) करार दिया है। इस बड़ी घटना के बाद से दिल्ली से लेकर पंजाब तक का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और दोनों तरफ से तीखे बयानों का दौर शुरू हो चुका है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस बड़े खुलासे के पीछे की असल राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है और इसके क्या दूरगामी मायने हैं।क्या है पूरा मामला और क्यों अचानक सीएम कैंप ऑफिस पर पड़ी सीबीआई की रेड?मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के अधिकारियों की टीम अचानक पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ चुनिंदा परिसरों और कैंप ऑफिस पर जांच के सिलसिले में पहुंच गई। जैसे ही यह खबर मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फैली, आम आदमी पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर उनकी सरकार को डराने और दबाने की एक सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि चूंकि पंजाब में आप सरकार लगातार जनता के हित में बड़े फैसले ले रही है और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठा रही है, इसलिए केंद्र सरकार विपक्षी दलों की आवाज को दबाने के लिए सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। हालांकि जांच एजेंसियों की तरफ से इस छापेमारी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक खेमों में इसे लेकर घमासान मचा हुआ है।'बीजेपी को पता है कि वह चुनाव नहीं जीत सकती, इसलिए कर रही ऐसी हरकतें'मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी को यह अच्छी तरह समझ आ चुका है कि वे पंजाब की जनता का विश्वास कभी नहीं जीत सकते, इसलिए वे पिछले दरवाजे से लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन बीजेपी ने अभी से पंजाब को अपने कब्जे में लेने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को आगे कर दिया है। भगवंत मान ने तंज कसते हुए कहा कि वे इन धमकियों और छापों से डरने वाले नहीं हैं क्योंकि वे पंजाब की साढ़े तीन करोड़ जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे। 'आप' नेताओं का यह भी आरोप है कि देश भर में जहां-जहां गैर-बीजेपी शासित राज्य हैं, वहां-वहां राज्यपालों और जांच एजेंसियों के जरिए सरकार को अस्थिर करने का एक नया ट्रेंड चलाया जा रहा है, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।विपक्ष और बीजेपी का पलटवार: 'भ्रष्टाचार छिपाने के लिए विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं भगवंत मान'दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने का नाटक करार दिया है। बीजेपी के प्रदेश नेताओं का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और कानून अपना काम कर रहा है। यदि 'आप' सरकार और उनके मंत्री पूरी तरह से ईमानदार हैं, तो उन्हें सीबीआई की जांच से डरने की क्या जरूरत है? बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी आम आदमी पार्टी के किसी नेता या घोटाले पर जांच की आंच पहुंचती है, तो वे तुरंत केंद्र सरकार पर ठीकरा फोड़कर 'विक्टिम कार्ड' (Victim Card) खेलना शुरू कर देते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में आने वाले दिनों में यह केंद्रीय जांच बनाम राज्य सरकार का यह टकराव और अधिक गहरा सकता है, जिससे चुनावी सरगर्मी अभी से चरम पर पहुंच जाएगी।पंजाब की राजनीति पर क्या पड़ेगा इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का असर?इन तमाम राजनीतिक उठापटक के बीच पंजाब की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में इन छापों से कोई ठोस सबूत सामने आता है या फिर यह सिर्फ बयानों की राजनीति बनकर रह जाती है। आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि केंद्र सरकार पंजाब के स्वाभिमान को कुचलने का प्रयास कर रही है, जो पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सहानुभूति जुटाने का जरिया बन सकता है। बहरहाल, सीबीआई की इस रेड और मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस आक्रामक बयान ने पंजाब के सियासी तापमान को इतना बढ़ा दिया है कि आने वाले हफ्तों में राज्य की राजनीति में एक बड़ा और उथल-पुथल भरा दौर देखने को मिल सकता है।
UP में 20 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, कई जिलों के कप्तान बदले
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है. शासन ने एडीजी से लेकर एसपी स्तर तक 20 IPS अधिकारियों के तबादले किए हैं. कई जिलों के पुलिस कप्तान बदले गए हैं.
Royal Enfield का झटका! महंगी कर दी चहेती बाइक, Classic 350 खरीदने से पहले देखें नई रेट लिस्ट
Royal Enfield Classic 350 की कीमतें भारत में बढ़ा दी गई हैं. Redditch Red से लेकर Signature White तक, सभी 9 वेरिएंट्स की नई एक्स-शोरूम कीमतों में इजाफा देखने को मिला है.
पंजाब में 'आप' के बड़े नेता के साथ बड़ा वेडिंग फ्रॉड: PCS अफसर बताकर रचाई शादी
पंजाब की राजनीति और हाई-प्रोफाइल शादियों के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के एक बड़े पदाधिकारी और स्थानीय नेता के साथ शादी के नाम पर ऐसा भयंकर धोखा हुआ है, जिसकी कल्पना शायद उन्होंने कभी सपने में भी नहीं की होगी। फतेहगढ़ साहिब से आम आदमी पार्टी के संयुक्त सचिव, जिला परिषद सदस्य और सिरहिंद मार्केट कमेटी के चेयरमैन अमरिंदर सिंह मंदोफाल (Amarinder Singh Mandofal) के साथ एक महिला ने खुद को पंजाब सिविल सर्विसेज (PCS) की तेज-तर्रार अधिकारी बताकर धूमधाम से शादी रचाई। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों के भीतर उस तथाकथित दुल्हन की असलियत ऐसी खुली कि नेताजी के पैरों तले जमीन खिसक गई। महिला न केवल फर्जी अधिकारी निकली, बल्कि वह अपने साथ घर में रखे लाखों के जेवरात और नकदी समेटकर फरार हो गई। इस हाई-प्रोफाइल धोखाधड़ी के सामने आने के बाद से पंजाब के राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है और पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है। आइए इस विशेष रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि इस शातिर ठगी की पूरी दास्तान क्या है और कैसे इस जालसाजी को अंजाम दिया गया।भव्य तरीके से हुई थी शादी, जिसमें शामिल हुए थे राज्य के कई दिग्गज मंत्री और नेताइस पूरी ठगी की पटकथा कितने शातिर तरीके से लिखी गई थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी साल फरवरी के महीने में अमरिंदर सिंह मंदोफाल और उस महिला का विवाह बेहद धूमधाम और शाही अंदाज में संपन्न हुआ था। इस हाई-प्रोफाइल शादी समारोह में आम आदमी पार्टी के कई दिग्गज नेता, पंजाब विधानसभा के माननीय स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध सहित कई बड़े सियासी चेहरे वर-वधू को आशीर्वाद देने पहुंचे थे। उस समय किसी को यह दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि जिस महिला को प्रशासनिक अधिकारी समझकर इतनी शान से अपनाया जा रहा है, वह असल में एक बड़ी ठग है। शादी के कुछ हफ्तों तक सब कुछ सामान्य चलता रहा, लेकिन धीरे-धीरे महिला के हाव-भाव और उसकी बातों में विरोधाभास दिखने लगा, जिससे आप नेता के मन में शक की सुई घूमने लगी।पीसीएस अफसर का फर्जी रुतबा, छिपाई गई पहली शादी और उम्र का बड़ा खेलजब पीड़ित आप नेता अमरिंदर सिंह ने अपनी पत्नी की पृष्ठभूमि और उसकी सरकारी नौकरी की पड़ताल करनी शुरू की, तो एक के बाद एक चौंकाने वाले राज बाहर आने लगे। जांच में पता चला कि महिला न तो कोई पीसीएस अधिकारी है और न ही उसका प्रशासनिक महकमे से दूर-दूर तक कोई वास्ता है। इसके अलावा, उसने अपनी पहली शादी की बात को पूरी तरह से छिपाया था। असलियत यह सामने आई कि महिला न केवल पहले से तलाकशुदा थी, बल्कि उसका लगभग 18 साल का एक बेटा भी है। अपनी असली उम्र और पहचान को छुपाने के लिए उसने अपने 10वीं के सर्टिफिकेट, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में फर्जी तरीके से फेरबदल करवाया था, ताकि वह खुद को काफी कम उम्र की और कुंवारी साबित कर सके। जब पति ने इस भारी धोखाधड़ी पर सवाल उठाए और दस्तावेजों की मांग की, तो मामला और ज्यादा बिगड़ गया।14 तोले सोना और 1 लाख नकद लेकर रातों-रात हुई चंपत, परिवार पर FIR दर्जपीड़ित आप नेता ने पुलिस को दी गई अपनी आधिकारिक शिकायत में यह आरोप लगाया है कि जब उसे इस सारे फरेब की भनक लगी और उसने कड़ा रुख अपनाया, तो वह महिला गत 27 अगस्त को अपने ससुराल से रहस्यमय तरीके से निकल गई। जाते-जाते वह अपने साथ घर में रखे करीब 14 तोले सोने के कीमती गहने, 1 लाख रुपये नकद और अन्य बहुमूल्य सामान चुराकर ले गई। इतना ही नहीं, इसके बाद आरोपी पक्ष की तरफ से झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां भी मिलने लगीं। इन तमाम गंभीर शिकायतों के आधार पर फतेहगढ़ साहिब पुलिस थाने में मुख्य आरोपी महिला मनविंदर कौर सहित उसके भाई, मां, भाभी और एक पूर्व सरपंच समेत कुल छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस पूरे रैकेट और फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने वाले अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है।राजनीति और समाज के लिए एक बड़ा सबक बना यह हैरान करने वाला मामलायह घटना इस बात का एक बड़ा उदाहरण है कि कैसे आज के समय में लोग अपनी पहचान छिपाकर और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर शातिर तरीके से बड़े-बड़े लोगों को भी अपने जाल में फंसा लेते हैं। एक सत्ताधारी दल के जिम्मेदार पद पर बैठे नेता के साथ इस तरह की ठगी होना यह बताता है कि वैवाहिक रिश्तों में अब कितनी सतर्कता बरतने की जरूरत है। पुलिस और कानून के हाथ कितने लंबे हैं, यह तो जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगा, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल वेडिंग फ्रॉड ने पंजाब की राजनीति में चर्चा का एक नया बाजार जरूर गर्म कर दिया है। आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अब बस इसी बात की चर्चा है कि कैसे एक शातिर महिला ने प्रशासनिक ओहदे का झूठा रौब दिखाकर महीनों तक सबको चकमा दिए रखा।
कप्तान अय्यर ने तोड़ा Virat Kohli का बड़ा रिकॉर्ड
लखनऊ में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में श्रेयस अय्यर ने नाबाद 102 रन की तूफानी पारी खेलकर इतिहास रच दिया. 43 गेंदों में शतक लगाने वाले अय्यर ने लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय कप्तान के तौर पर विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ दिया. कोहली ने 2019 में 94 रन बनाए थे. अय्यर अब टी20 अंतरराष्ट्रीय में शतक लगाने वाले भारत के तीसरे कप्तान भी बन गए हैं.
डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह को अमृतसर कोर्ट से मिली बड़ी राहत
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत असम की अति-सुरक्षित डिब्रूगढ़ जेल में बंद वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख और खालिस्तानी समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) को पंजाब के अमृतसर की एक अदालत से एक बड़ी और मानवीय राहत दी गई है। अदालत ने अमृतपाल सिंह को अपनी बेहद बीमार और बुजुर्ग दादी से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत करने की अनुमति प्रदान कर दी है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, अमृतपाल सिंह जेल के भीतर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या निर्धारित तकनीकी माध्यम से अपनी दादी से केवल 10 मिनट तक बात कर सकेगा। इस कानूनी अनुमति के सामने आने के बाद से एक बार फिर से अमृतपाल सिंह और उसके परिवार का मामला चर्चा का केंद्र बन गया है, जिस पर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि इस पूरे कानूनी घटनाक्रम के पीछे की असल वजह क्या है और कोर्ट ने अपने आदेश में क्या-क्या शर्तें रखी हैं।क्या है पूरा मामला और क्यों लगानी पड़ी थी अमृतसर कोर्ट में गुहार?अमृतपाल सिंह पिछले कुछ समय से असम की डिब्रूगढ़ जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच बंद है, जहां उससे मिलने या संपर्क करने पर कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी पाबंदियां लागू हैं। कुछ दिन पहले अमृतपाल सिंह के परिवार की तरफ से यह जानकारी सामने आई थी कि उसकी दादी की तबीयत अत्यधिक खराब चल रही है और वे अंतिम समय में अपने पोते से मिलना चाहती हैं। परिवार ने जेल प्रशासन और अदालत के समक्ष यह गुहार लगाई थी कि मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अमृतपाल को अपनी बीमार बुजुर्ग दादी से कम से कम टेलीफोनिक या वीडियो संवाद करने की अनुमति दी जाए। इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करते हुए अमृतसर की अदालत ने कानून और सुरक्षा व्यवस्था के तमाम पहलुओं का बारीकी से आकलन किया और अंततः मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए वीडियो कॉल के जरिए बातचीत करने की हरी झंडी दिखा दी।10 मिनट की बातचीत और डिब्रूगढ़ जेल प्रशासन के लिए जारी निर्देशअमृतसर कोर्ट के इस आदेश के बाद अब डिब्रूगढ़ जेल प्रशासन और पंजाब पुलिस के अधिकारियों के सामने यह जिम्मेदारी आ गई है कि वे तय समय और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत इस वीडियो कॉल की प्रक्रिया को पूरा करवाएं। अदालत के स्पष्ट निर्देश के अनुसार, बातचीत की कुल अवधि केवल 10 मिनट की होगी, जिसके दौरान जेल के जिम्मेदार अधिकारी और सुरक्षाकर्मी मौके पर मौजूद रहेंगे ताकि बातचीत के दौरान किसी भी प्रकार के सुरक्षा नियमों का उल्लंघन न हो सके। हालांकि कुछ ही मिनटों की यह बातचीत है, लेकिन परिवार और अमृतपाल सिंह दोनों के लिए यह एक बड़ी भावनात्मक राहत के रूप में देखी जा रही है। जेल मैनुअल और एनसा (NSA) के तहत बंद कैदियों के लिए इस तरह की राहत मिलना आम तौर पर काफी जटिल प्रक्रिया होती है, लेकिन अदालत की विशेष अनुमति ने इस अड़चन को दूर कर दिया है।कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना कोर्ट का यह मानवीय फैसलाअदालत के इस फैसले के सामने आने के बाद से कानूनी जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि कैसे न्यायपालिका ने एक तरफ कठोर सुरक्षा कानूनों और दूसरी तरफ मानवीय संवेदनाओं के बीच एक संतुलन स्थापित किया है। हालांकि अमृतपाल सिंह पर देश विरोधी गतिविधियों और एनसा के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं और उसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन अदालत ने यह साबित कर दिया है कि पारिवारिक रिश्तों और मानवीय मूल्यों का सम्मान कानून की नजर में सर्वोपरि होता है। इस बीच, पंजाब के राजनीतिक हलकों में भी इस बात पर नजर रखी जा रही है कि इस वर्चुअल मुलाकात के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह से चाक-चौबंद रखा जाता है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।आने वाले दिनों में अमृतपाल सिंह के मामलों पर टिकी हैं सबकी निगाहेंडिब्रूगढ़ जेल में बंद रहने के दौरान अमृतपाल सिंह द्वारा विभिन्न कानूनी और पारिवारिक मामलों को लेकर समय-समय पर याचिकाएं दायर की जाती रही हैं। हाल ही में उसके सांसद बनने के बाद से उसके शपथ ग्रहण और क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर भी कई बार चर्चाएं गर्म रही हैं। दादी की बीमारी के बहाने मिली इस छोटी सी राहत ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित किया है कि कानूनी लड़ाइयों के बीच भी पारिवारिक संवेदनाएं किस प्रकार अपनी जगह बना लेती हैं। परिवार के सदस्य इस आदेश से संतुष्ट नजर आ रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि निर्धारित समय पर यह वीडियो कॉल बिना किसी तकनीकी बाधा के सफलतापूर्वक पूरी हो जाएगी।
IND vs WI T20: रांची के इन रास्तों पर 9 अक्टूबर को गाड़ियों की नो-एंट्री
क्रिकेट के महासमर और भारत-वेस्टइंडीज के बीच होने वाले रोमांचक मुकाबलों को देखने के लिए दीवानों की दीवानगी किसी से छिपी नहीं है। झारखंड की खेल नगरी रांची स्थित जेएससीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम (JSCA International Cricket Stadium) एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबले की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI T20 Match) के बीच 9 अक्टूबर 2026 को होने वाले इस हाई-वोल्टेज मैच को देखने के लिए देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में क्रिकेट प्रेमियों के पहुंचने की उम्मीद है। स्टेडियम के सभी टिकट पहले ही बिक चुके हैं और शहर में जश्न का माहौल है। लेकिन इतनी भारी भीड़ और दर्शकों के रेला को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यातायात व्यवस्था बाधित न हो और खेल प्रेमियों को स्टेडियम तक पहुंचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए रांची ट्रैफिक पुलिस ने एक व्यापक और सख्त ट्रैफिक एवं पार्किंग प्लान जारी किया है। यदि आप भी इस मैच का लुत्फ उठाने के लिए स्टेडियम जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो घर से बाहर निकलने से पहले ट्रैफिक एसपी द्वारा जारी किए गए इन नए नियमों और नो-एंट्री जोन के बारे में जरूर जान लें।शालीमार चौक से नॉर्थ गेट तक आम गाड़ियों की नो-एंट्री और भारी वाहनों पर प्रतिबंधमैच के दिन यानी 9 अक्टूबर को सुबह से ही शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात के नियमों में कड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के मुताबिक, मैच के दिन सुबह 6 बजे से लेकर रात के 11 बजे तक शहर के मुख्य मार्गों पर भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक रहेगी। ऐसे भारी वाहनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए रिंग रोड का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बदलाव धुर्वा इलाके में किया गया है, जहां शालीमार चौक से लेकर जेएससीए स्टेडियम के नॉर्थ गेट तक सामान्य वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इस रूट पर केवल अधिकृत वाहनों, सुरक्षा बलों और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी एंबुलेंस को ही आने जाने की अनुमति दी जाएगी। पुलिस ने आम नागरिकों और स्थानीय वाहन चालकों से अपील की है कि वे मैच के दौरान इस रूट पर अपने निजी चारपहिया वाहनों को लेकर निकलने से बचें ताकि अनावश्यक जाम की स्थिति से बचा जा सके।टिकट के अनुसार तय किए गए हैं पार्किंग स्थल, वाहन खड़ा कर पैदल चलना होगाक्रिकेट प्रेमियों को यह बात विशेष रूप से ध्यान रखनी होगी कि इस बार पार्किंग की व्यवस्था स्टेडियम से कुछ दूरी पर अलग-अलग जगहों पर की गई है, यानी आप सीधे अपनी गाड़ी लेकर स्टेडियम के गेट तक नहीं पहुंच सकते। साउथ और साउथ-ईस्ट गेट के टिकट वाले दर्शकों के लिए धुर्वा गोलचक्कर, जवाहर स्टेडियम, मियां मार्केट और प्रभात तारा मैदान के पास पार्किंग की व्यवस्था बनाई गई है, जहां गाड़ियां खड़ी करने के बाद दर्शकों को पैदल स्टेडियम पहुंचना होगा। इसी तरह वेस्ट गेट के टिकट धारकों को सखुआ मैदान, धुर्वा बस स्टैंड और सैंबो कैंप मोड़ के रास्ते जाकर निर्धारित पार्किंग स्थलों पर अपने वाहन पार्क करने होंगे। नया सराय और रिंग रोड की तरफ से आने वाले दर्शकों के लिए हाईकोर्ट के सामने स्थित हेलिपैड मैदान में गाड़ी पार्क करने की जगह तय की गई है। सुरक्षा कारणों और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि तय पार्किंग स्थलों के अलावा कहीं भी सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।VIP और VVIP वाहनों के लिए अलग रूट और प्रवेश द्वार की व्यवस्थासाधारण दर्शकों से अलग जो लोग वीआईपी (VIP) या वीवीआईपी (VVIP) पास के साथ आ रहे हैं, उनके लिए प्रशासन ने आवाजाही का एक अलग और सुरक्षित मार्ग निर्धारित किया है। ऐसे विशिष्ट मेहमानों और पासधारकों के वाहन शालीमार बाजार, प्रभात तारा मैदान और पारस अस्पताल के रास्ते होते हुए सीधे स्टेडियम के नॉर्थ गेट के पास स्थित विशेष वीआईपी प्रवेश मार्ग तक पहुंच सकेंगे। इन वाहनों के लिए नॉर्थ गेट के आसपास ही अलग से पार्किंग की सुरक्षित व्यवस्था की गई है ताकि उन्हें किसी प्रकार की भीड़ का सामना न करना पड़े। इसके अलावा खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों की बसों के लिए एयरपोर्ट, होटल और स्टेडियम के बीच एक ग्रीन कॉरिडोर जैसी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई है, जिससे उनकी आवाजाही के दौरान आम ट्रैफिक बाधित न हो।मैच देखने जाने से पहले इन जरूरी बातों का रखें खास ख्यालयदि आप 9 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के इस रोमांचक मुकाबले को देखने के लिए अपने परिवार या दोस्तों के साथ जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का गांठ बांध लें। सबसे पहले अपने टिकट पर दिए गए गेट के नंबर को ध्यान से देख लें और उसी के अनुसार अपनी गाड़ी के लिए सही पार्किंग रूट का चयन करें। स्टेडियम के आसपास भारी भीड़ को देखते हुए घर से कम से कम दो-तीन घंटे पहले निकलें ताकि पार्किंग ढूंढने और वहां से पैदल स्टेडियम तक पहुंचने में जल्दबाजी न करनी पड़े। ट्रैफिक पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहेंगे और उनके द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें। थोड़ा सा संयम और प्रशासनिक नियमों का पालन न केवल आपकी यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि आप बिना किसी तनाव के इस ऐतिहासिक मैच के हर एक चौके-छक्के का भरपूर आनंद उठा सकेंगे।
झारखंड में मौसम ने फिर मारी पलटी: रांची, गुमला समेत 13 जिलों में आज झूमकर बरसेंगे बादल
झारखंड के मौसम ने एक बार फिर से करवट ली है और राज्य के तमाम हिस्सों में मानसून की विदाई के बाद भी बादलों की आवाजाही और मौसमी हलचल तेज हो गई है। मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा और बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी के अनुसार, राजधानी रांची समेत राज्य के लगभग 13 प्रमुख जिलों में आज झूमकर बादल बरसने की पूरी संभावना है, जिसके साथ ही तेज हवाएं चलने और कई जगहों पर वज्रपात (Thunderstorm and Lightning) होने का भारी अलर्ट भी जारी किया गया है। पिछले कुछ दिनों से बढ़ रही उमस और गर्मी से परेशान आम जनता को इस बारिश से जहां एक तरफ राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ किसानों और आम नागरिकों के लिए यह मौसम चिंता का विषय भी बन गया है क्योंकि अचानक होने वाली इस मानसूनी या चक्रवाती बारिश से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। इस विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि झारखंड के किन-किन जिलों में आज बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा और मौसम विभाग ने क्या-क्या एहतियाती निर्देश जारी किए हैं।रांची, गुमला और खूंटी समेत इन 13 जिलों में आज छाए रहेंगे काले बादलमौसम केंद्र रांची से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसमी सिस्टम और उत्तर भारत से आ रही हवाओं के प्रभाव के कारण झारखंड के दक्षिणी और मध्य भागों में बादलों का डेरा जम चुका है। जिन 13 जिलों में आज भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात का सबसे अधिक रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, उनमें राजधानी रांची, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद और चतरा शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में सुबह से ही आसमान में काले बादलों के घिरने का सिलसिला शुरू हो चुका है और दोपहर या शाम होते-होते झमाझम बारिश होने के पूरे आसार जताए गए हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दौरान हवा की रफ्तार भी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है, जिससे तापमान में अचानक भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।वज्रपात और आंधी का खतरा: प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी और किसानों को चेतावनीझारखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बारिश के मौसम में आकाशीय बिजली यानी वज्रपात की चपेट में आने से कई अनमोल जानें चली गई हैं, जिसे देखते हुए इस बार आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विज्ञान केंद्र बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। प्रशासन की ओर से लगातार यह अपील की जा रही है कि जब भी मौसम खराब हो और गरज-चमक के साथ बादल बरस रहे हों, तो आम लोग और विशेषकर किसान अपने खेतों, पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में बिल्कुल न खड़े हों। खेतों में काम कर रहे किसानों को मोबाइल फोनों के इस्तेमाल से बचने और सुरक्षित पक्के मकानों या आश्रयों में शरण लेने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन ने सभी थाना क्षेत्रों और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके और लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।कृषि और फसलों पर असर: धान की पकी फसलों को लेकर किसानों की बढ़ी चिंताराज्य के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में इस समय धान की फसलें अपने अंतिम और पकने वाले चरण में हैं, और ऐसे समय में अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश, तेज आंधी तथा ओलावृष्टि की आशंका ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेज हवाओं के साथ लगातार बारिश होती है, तो खेतों में खड़ी धान की फसलें जमीन पर बिछ सकती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, कुछ इलाकों के लिए यह बारिश सब्जियों और दलहनी फसलों के लिहाज से फायदेमंद भी बताई जा रही है, लेकिन अत्यधिक पानी भरने से जलभराव की समस्या उत्पन्न होने का खतरा भी बना हुआ है। किसान अपनी फसलों को सुरक्षित बचाने के लिए आखिरी वक्त में एहतियाती उपाय करने में जुटे हुए हैं।आने वाले दिनों में कैसा रहेगा झारखंड का मौसम? तापमान में आएगी और गिरावटमौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि आज और कल इन 13 जिलों में बारिश का दौर चलने के बाद धीरे-धीरे मौसम साफ होना शुरू हो जाएगा, जिसके बाद राज्य में ठंड की असली दस्तक यानी गुलाबी ठंड की शुरुआत हो जाएगी। इस बारिश के बाद वातावरण से उमस पूरी तरह से गायब हो जाएगी और सुबह-शाम ठंडी हवाओं का अहसास होने लगेगा। पर्यटकों और पहाड़ों तथा जंगलों की सैर करने वाले सैलानियों के लिए भी यह सुहाना मौसम एक अलग आनंद लेकर आया है। बहरहाल, आज के इस खराब मौसम और वज्रपात की चेतावनी को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि लोग बिना किसी खास काम के अपने घरों से बाहर न निकलें और मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पूरी कड़ाई से पालन करें ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
केवल मेहनत नहीं... काम दिखाना भी है जरूरी! अंकुर वारिकू ने दी सलाह
ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों को हमेशा कंपनी के प्रति लॉयल रहने की सलाह दी जाती है लेकिन कई बार एक भरोसेमंद कर्मचारी बनना भी कई बार आपकी ग्रोथ के लिए नुकसान साबित हो सकता है. अंकुर वारिकू का कहना है कि उनपर बिना तरक्की के जिम्मेदारी आ जाती है.
'टूटे हुए घर से आती हूं', पेरेंट्स के तलाक पर बोलीं रीति तिवारी
मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी का बिग बॉस 20 से सफर खत्म हो चुका है. शो से बाहर आने के बाद रीति ने अपने पेरेंट्स के तलाक और उन पर लगे आरोपों पर खुलकर बात की.
झारखंड में राजनीतिक संग्राम तेज: बीजेपी मांग रही 2019 से अब तक का हिसाब
झारखंड की राजनीति इन दिनों एक ऐसे कुरुक्षेत्र में तब्दील हो चुकी है जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग का स्तर लगातार नया आयाम छू रहा है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हेमंत सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए साल 2019 से लेकर अब तक के शासनकाल का पूरा हिसाब मांगना शुरू कर दिया है। बीजेपी का सीधा आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के भीतर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था की बदहाली और अवैध खनन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दूसरी तरफ, सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और उसके सहयोगी दलों ने इस राजनीतिक हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। जेएमएम ने पलटवार करते हुए एक बार फिर से 'घुसपैठियों' और स्थानीय डेमोग्राफी में बदलाव के तीखे मुद्दों को उछालकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सवाल यह है कि आखिर मौजूदा वक्त में जब चुनाव संपन्न हो चुके हैं, तब भी यह पुरानी और धारदार फाइट इतनी तेजी से क्यों दोबारा शुरू हो गई है और इसके पीछे की असली राजनीतिक मजबूरियां क्या हैं? आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि झारखंड के इस गरमाते सियासी घटनाक्रम की अंदरूनी सच्चाई क्या है।बीजेपी का बड़ा हमला: 2019 से अब तक के कार्यकाल का मांगा जा रहा श्वेत पत्र और हिसाबभारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश के नवनियुक्त प्रभारियों ने राज्य सरकार को घेरने के लिए एक सुनियोजित रणनीति तैयार की है। बीजेपी नेताओं का यह कहना है कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने साल 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से जितने भी बड़े-बड़े वादे किए थे—चाहे वह पांच लाख नौकरियां देने का मामला हो, महिलाओं को वित्तीय सहायता देने की बात हो या फिर भ्रष्टाचार पर लगाम कसने का दावा हो—वे सभी कागजों तक ही सिमट कर रह गए हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पिछले कुछ सालों में राज्य के खनिज संपदाओं को बेदर्दी से लूटा गया है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। इसी को लेकर विपक्षी दल अब सरकार से एक-एक पाई और वादे का हिसाब मांग रहा है, ताकि जनता के बीच जाकर मौजूदा सत्ता की विफलताओं को पूरी मुखरता के साथ उजागर किया जा सके। बीजेपी का यह आक्रामक तेवर इस बात का संकेत है कि पार्टी आने वाले दिनों में किसी भी मोर्चे पर सरकार को चैन से बैठने नहीं देने वाली है।जेएमएम का पलटवार: घुसपैठ और अस्मिता के दांव से सियासत को दे रहे हैं नई धारविपक्ष के इन तीखे हमलों और हिसाब मांगने की रणनीति का जवाब देने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी अपने तरकस से सबसे पुराने और धारदार तीरों को बाहर निकाल लिया है। जेएमएम और उसके सहयोगियों का यह आरोप है कि बीजेपी के पास राज्य के विकास को लेकर कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं बचा है, इसलिए वे लगातार धार्मिक ध्रुवीकरण, बाहरी बनाम स्थानीय और तथाकथित 'घुसपैठियों' के मुद्दों को हवा देकर समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। सत्ता पक्ष का तर्क है कि केंद्र सरकार और विपक्षी दल मिलकर झारखंड की चुनी हुई लोकप्रिय आदिवासी सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं, जिसे राज्य की जागरूक जनता कभी कामयाब नहीं होने देगी। जेएमएम ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के बकाए रॉयल्टी और खनन से जुड़े पैसों का भुगतान न करके राज्य के विकास में लगातार बाधाएं पैदा की जा रही हैं, जो यहां की जनता के साथ सीधा-सीधा अन्याय है।क्यों हो रही है पुरानी फाइट की पुनरावृत्ति? समझिए इसके पीछे का सियासी गणितराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड की राजनीति में मुद्दों की यह तकरार असल में आगामी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की एक लंबी कवायद है। साल 2019 के बाद से लेकर अब तक राज्य ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, जिनमें नेतृत्व परिवर्तन से लेकर बड़े कानूनी और प्रशासनिक फेरबदल तक शामिल हैं। बीजेपी यह अच्छी तरह जानती है कि यदि उसे अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाना है, तो उसे सरकार के खिलाफ जनता के मन में मौजूद असंतोष को लगातार जिंदा रखना होगा। यही वजह है कि वे हर मोर्चे पर पुराने आंकड़ों और वादों की याद दिलाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, जेएमएम अपनी आदिवासी अस्मिता, स्थानीय संस्कृति और कल्याणकारी योजनाओं के दम पर उन तमाम हमलों को बेअसर करने की जुगत में जुटी है, जिससे यह लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है।झारखंड की जनता और आने वाले दिनों की राजनीतिक दिशा पर असरसत्ता और विपक्ष के बीच चल रही इस खींचतान का सीधा असर राज्य की आम जनता और प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां नेता बयानबाजी के जरिए अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी विकास, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याएं कई जगहों पर जस की तस बनी हुई हैं। जनता अब यह भली-भांति समझने लगी है कि राजनीतिक दलों के इन बयानी तीरों के बीच असली मुद्दे अक्सर पीछे छूट जाते हैं। बहरहाल, झारखंड के राजनीतिक क्षितिज पर यह गर्माहट अभी और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है, क्योंकि दोनों ही दल अपनी-अपनी राजनीतिक वफादारियों और वर्चस्व की लड़ाई को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ने देना चाहते हैं।
'वे मेरे को-स्टार, पड़ोसी और दोस्त थे', विनोद खन्ना को याद कर सिमी गरेवाल ने शेयर की पुरानी मेमोरी
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना की 80वीं जयंती पर फैंस ने सोशल मीडिया पर उनके पुराने फिल्मों के सीन और गाने शेयर कर उन्हें याद किया। इसी बीच एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स यूजर ने विनोद खन्ना और अभिनेत्री सिमी गरेवाल की फिल्म 'हाथ की सफाई' के लोकप्रिय गाने 'वादा कर ले सजना' की एक क्लिप शेयर की। इस वीडियो में दोनों कलाकार साथ नजर आ रहे हैं।
धर्मेंद्र कश्यप का सपा में जाना तय, कौशल किशोर नाराज, पासी-कश्यप वोटबैंक BJP से छिटकेगा?
यूपी में राज्यसभा चुनाव के बाद बीजेपी के भीतर असंतोष गहराता दिख रहा है. पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने के संकेतों और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार की खुलकर जताई नाराजगी ने बीजेपी के पासी और कश्यप वोटबैंक समीकरण पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.
Silchar Municipal Corporation चुनाव में BJP गठबंधन को प्रचंड बहुमत, 34 सीटें जीतीं
सिलचर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पहले सिविक चुनाव में BJP के नेतृत्व वाले NDA ने 42 में से 34 सीटें जीतकर शानदार जीत हासिल की, जिसके बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। सिलचर सिविक चुनाव बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके कराए गए थे, जो विपक्षी पार्टियों की लंबे समय से चली आ रही मांग थी। सिलचर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में NDA की शानदार जीत पर असम के मुख्यमंत्री ने कहा, अब कांग्रेस बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी हार गई है। असम के दूसरे सबसे बड़े शहर सिलचर के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों में BJP और NDA की ज़बरदस्त जीत हुई है। उन्होंने आगे कहा कि सिलचर की जनता ने बैलेट पेपर से हुए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में हमें भारी बहुमत दिया है। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और 'विकसित भारत' के लिए शहरी प्रशासन के उनके विज़न में लोगों के भरोसे को फिर से पक्का करती है। इस शानदार जनादेश के लिए मैं सिलचर की जनता के सामने सिर झुकाता हूँ और सिलचर को असम के प्रमुख शहरों में से एक बनाने के अपने वादे को दोहराता हूँ। इसे भी पढ़ें: 2036 Olympic Games: भारत 'Rising Together' विजन के साथ IOC के सामने पेश करेगा पहली प्रस्तुति असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि सिलचर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि कांग्रेस बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी जनता का समर्थन हासिल करने में नाकाम रही। सैकिया ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस हमेशा EVM में गड़बड़ी की शिकायत करती है, लेकिन यह चुनाव बैलेट पेपर से हुआ था और वे कहीं नहीं दिखे। इस नतीजे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विकास एजेंडे की बड़ी जीत बताते हुए सैकिया ने कहा कि ये नतीजे इन दोनों नेताओं में लोगों के भरोसे को दिखाते हैं। इसे भी पढ़ें: Uttarakhand: Kainchi Dham आने वाले पर्यटकों की संख्या होगी तय, 25 हजार की लग सकती है लिमिट BJP के नेतृत्व वाले NDA ने सिलचर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में बड़ी जीत हासिल की असम में सत्ताधारी BJP के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) ने सिलचर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पहले चुनाव में शानदार जीत हासिल की। गठबंधन ने 42 में से 34 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को दो और निर्दलीय उम्मीदवारों को छह सीटें मिलीं। BJP के जीतने वाले कुछ उम्मीदवार हैं: सौरव कांति नाथ (वार्ड 2), शिबानी रानी दास (वार्ड 4), मोहितोष चंद्र मंडल (वार्ड 8), रानू दास (वार्ड 12), जॉय दास (वार्ड 18), सुमोना दास (वार्ड 21), चंद्रिमा देब (वार्ड 23), कुलदीप चौधरी (वार्ड 31), मृणालिनी सिन्हा (वार्ड 32), सुष्मिता पुरकायस्थ (वार्ड 36), उत्तम कुमार गोआला (वार्ड 39) और पंथादीप रॉय (वार्ड 40)। BJP ने 32 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) ने दो सीटें (वार्ड 16 और 26) हासिल कीं। कांग्रेस ने दो सीटें (वार्ड 30 और 41) जीतीं, जबकि छह वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। कुल वोटिंग प्रतिशत 70.22% रहा और कॉर्पोरेशन के 42 में से 40 वार्डों में वोटिंग हुई। 42 में से 40 वार्डों में 3 अक्टूबर को वोटिंग हुई, जबकि BJP उम्मीदवार बिजेंद्र प्रसाद सिंह और भक्ति सेन तालुकदार क्रमशः वार्ड 9 और 20 से निर्विरोध चुने गए। सिलचर म्युनिसिपल बोर्ड को 2022 में 42 वार्डों वाले कॉर्पोरेशन में अपग्रेड किया गया था, जो जून 2025 में काम करने लगा। बराक घाटी का यह मुख्य शहर छह साल तक बिना किसी सिविक बॉडी (नगर निकाय) के रहा था।
प्रशासनिक अधिकारी का जिक्र कर नरेश मीणा का छलका दर्द, बोले- 'मैं अकेला लड़ता रहूंगा
राजस्थान की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में अपनी आक्रामक कार्यशैली, बयानों और अनूठे तेवरों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले निर्दलीय विधायक और युवा नेता नरेश मीणा (Naresh Meena) ने एक बार फिर से सूबे की नौकरशाही और राजनीतिक व्यवस्था पर एक बड़ा तथा सनसनीखेज बयान देकर खलबली मचा दी है। अपनी मुखर शैली के लिए पहचाने जाने वाले नरेश मीणा ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से बात करते हुए अपनी ही सरकार, व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। अपने इस संबोधन के दौरान उन्होंने देश की चर्चित आईएएस अधिकारी और कलेक्टर टीना डाबी (Tina Dabi) का विशेष रूप से जिक्र करते हुए एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया है। नरेश मीणा ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि जब वे जनहित के मुद्दों को लेकर अधिकारियों के सामने जाते हैं और व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हैं, तो उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए यह सवाल भी उठाया कि आखिर वे अकेले कब तक और कितने मोर्चों पर इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ अकेले लड़ते रहेंगे। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि नरेश मीणा के इस बयान के पीछे की पूरी असल कहानी क्या है और उन्होंने आईएएस अधिकारी टीना डाबी का जिक्र करते हुए क्या-क्या खुलासे किए हैं।क्या था पूरा वाकया और क्यों अचानक चर्चा में आया टीना डाबी का नाम?राजस्थान की राजनीति में जब भी जनता के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही की बात आती है, तो नरेश मीणा का नाम हमेशा सबसे आगे लिया जाता है। हाल ही में एक जनसभा या मीडिया संवाद के दौरान जब वे स्थानीय विकास कार्यों, जनता की समस्याओं और अधिकारियों की उदासीनता पर बोल रहे थे, तो उन्होंने प्रशासनिक महकमे के कामकाज के तौर-तरीकों पर खुलकर अपनी बात रखी। इसी बातचीत के सिलसिले में उन्होंने देश की एक बेहद लोकप्रिय और चर्चित आईएएस अधिकारी टीना डाबी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कड़े प्रशासनिक निर्णय लेने की बात आती है, तो अधिकारियों के अपने तरीके होते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनता के बीच जब जनप्रतिनिधि अकेला पड़ जाता है, तो उसे व्यवस्था की जटिलताओं और अधिकारियों के रवैये का अकेले सामना करना पड़ता है। टीना डाबी का जिक्र आते ही वहां मौजूद लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों के कान खड़े हो गए, क्योंकि एक तरफ जहां आईएएस अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर अक्सर तारीफें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनेताओं द्वारा इस तरह खुलेआम प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाना एक अलग ही सियासी बहस को जन्म दे देता है।'मैं अकेला कब तक लड़ता रहूंगा': राजनेताओं और नौकरशाही के बीच की खींचताननरेश मीणा के इस बयान का सबसे संवेदनशील और भावुक पहलू उनका वह दर्द था जिसमें उन्होंने कहा कि वे आम जनता और गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए अकेले ही मैदान में डटे रहते हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का हर वर्ग और अन्य जनप्रतिनिधि भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए आगे नहीं आएंगे, तब तक अकेले किसी एक व्यक्ति के लिए भ्रष्टाचार या प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ जंग जीतना बेहद मुश्किल हो जाता है। राजनेताओं और नौकरशाही (Bureaucracy) के बीच की यह तनातनी कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब कोई विधायक इस तरह मंच से सार्वजनिक रूप से अपनी ही व्यवस्था के भीतर खुद को अकेला महसूस करने की बात कहता है, तो वह शासन प्रणाली पर एक बड़ा नैतिक प्रश्नचिह्न लगा देता है। ग्रामीण इलाकों और स्थानीय स्तर पर जनता की समस्याओं के समाधान में आने वाली बाधाओं को लेकर नरेश मीणा का यह दर्द साफ झलक रहा था कि प्रशासनिक अमला कई बार जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं लेता है।राजनीतिक गलियारों में इस बयान के मायने और विपक्ष व सत्ता पक्ष की प्रतिक्रियाएंजैसे ही नरेश मीणा का यह बयान सोशल मीडिया और मुख्यधारा की खबरों में आया, वैसे ही राजस्थान की राजनीति में इस पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। उनके समर्थकों का मानना है कि नरेश मीणा हमेशा से आम जनता की आवाज बुलंद करते आए हैं और वे बिना किसी डर के सच को बयां कर रहे हैं, इसलिए उन्हें जनसमर्थन मिल रहा है। दूसरी तरफ, राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस प्रकार के बयान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय को और अधिक बिगाड़ सकते हैं, जिससे अंततः विकास कार्यों पर असर पड़ता है। सत्ताधारी दल के नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है और किसी को भी व्यक्तिगत रूप से अकेला नहीं छोड़ा गया है, बशर्ते काम नियमों के अनुसार किया जाए। बहरहाल, इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से यह बहस छेड़ दी है कि क्या जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच का तालमेल जनता के विकास में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है।आने वाले दिनों में क्या होगा इस सियासी बयान का असर?नरेश मीणा का यह तीखा और भावुक बयान आने वाले समय में राजस्थान की क्षेत्रीय राजनीति में एक नए समीकरण की सुगबुगाहट पैदा कर सकता है। जिस प्रकार से वे लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, उससे यह साफ है कि वे अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए व्यवस्था के खिलाफ अपनी इस मुखरता को छोड़ने वाले नहीं हैं। प्रशासनिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि इस तरह के बयानों से अधिकारियों और नेताओं के आपसी रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। जनता और उनके मतदाताओं की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में नरेश मीणा अपने इस संघर्ष को किस नई दिशा में लेकर जाते हैं और क्या प्रशासन उनकी इन चिंताओं पर कोई सकारात्मक कदम उठाता है या नहीं।
मृत्यु के बाद नाक में क्यों लगाते हैं रुई? गरुड़ पुराण से जानें रहस्य
Garud Puran: हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव की नाक, कान और खुले अंगों में रुई रखने की परंपरा है. गरुड़ पुराण और आयुर्वेद में इसके पीछे ऊर्जा के संरक्षण, स्वच्छता और वैज्ञानिक कारणों को विस्तार से समझाया गया है.
राहुल-प्रियंका पर एफआईआर के बाद कांग्रेस का हमला, बोली- ‘मोदी-शाह की जोड़ी घबराई और हताश’
आकाशवाणी भवन में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश के मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। कांग्रेस ने मोदी-शाह पर निशाना साधा और SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में प्लास्टिक बोतल मिली तो लगेगा 1000 रुपये जुर्माना
देश भर के वन्यजीव प्रेमियों, पर्यटकों और प्रकृति की गोद में समय बिताना पसंद करने वाले सैलानियों के लिए राजस्थान की खूबसूरत राजधानी जयपुर से एक बेहद सख्त, अनुकरणीय और कड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। जयपुर के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क (Nahargarh Biological Park) प्रबंधन ने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए पार्क परिसर के भीतर प्लास्टिक की बोतलों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यदि अब कोई भी पर्यटक पार्क के अंदर प्लास्टिक की पानी की बोतल या अन्य प्लास्टिक सामग्री ले जाता हुआ पकड़ा जाता है, तो उसे भारी-भरकम 1000 रुपये का जुर्माना (Fine) भरना पड़ेगा। पर्यटकों को प्यास बुझाने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए पार्क प्रशासन ने एक अनूठा विकल्प निकाला है जिसके तहत अब मात्र 50 रुपये की रिफंडेबल कीमत पर कांच की बोतलें (Glass Bottles) उपलब्ध कराई जाएंगी। इस ऐतिहासिक पहल के बाद से पर्यटन और पर्यावरण गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कैसे कड़े नियमों के जरिए प्रकृति को पॉलीथिन के जहर से बचाया जा सकता है। आइए इस विशेष रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि नाहरगढ़ पार्क प्रशासन के इस नए नियम के पीछे की पूरी कहानी क्या है और इसके क्या दूरगामी सकारात्मक असर पड़ने वाले हैं।क्यों उठाया गया यह कड़ा कदम? वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए जी का जंजाल बन रहा प्लास्टिकआधुनिक समय में पर्यटन स्थलों पर घूमने जाने वाले लोगों के लिए प्लास्टिक की पानी की बोतलें और कैरी बैग एक आम बात बन गई है, लेकिन यही सुविधाएं धीरे-धीरे पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए एक अभिशाप बनती जा रही हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में, जहां खुले में शेर, तेंदुए, बाघ और भालू जैसे तमाम दुर्लभ वन्यजीव विचरण करते हैं, वहां पर्यटकों द्वारा फेंका गया प्लास्टिक कचरा इन बेजुबान जानवरों के पेट में चला जाता है। कई बार भोजन की तलाश में ये जानवर प्लास्टिक को निगल लेते हैं, जिससे उनकी आंतें ब्लॉक हो जाती हैं और उनकी दर्दनाक मौत तक हो जाती है। इसके अलावा, जंगलों की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता (Biodiversity) भी प्लास्टिक के इस कचरे के कारण लगातार नष्ट हो रही थी। इन्हीं गंभीर खतरों को भांपते हुए वन विभाग और नाहरगढ़ पार्क प्रबंधन ने यह फैसला लिया है कि अब इस खूबसूरत प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए सख्ती बरतना अनिवार्य हो चुका है।कैसे काम करेगा यह नया नियम? पर्यटकों को मिलेगी कांच की बोतल और 50 रुपये का प्रावधानपर्यटकों की सुविधा और पानी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए पार्क प्रशासन ने जुर्माने के साथ-साथ एक बेहद व्यावहारिक और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प भी तैयार किया है। पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही पर्यटकों के लिए कांच की बोतलों (Glass Bottles) का काउंटर बनाया गया है। कोई भी पर्यटक मात्र 50 रुपये की मामूली कीमत देकर कांच की बोतल खरीद सकता है, जिसमें पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि यह एक रिफंडेबल व्यवस्था है; यानी जब पर्यटक पार्क की सैर पूरी करके बाहर लौटेंगे और उस कांच की बोतल को वापस जमा कराएंगे, तो उनके पूरे 50 रुपये उन्हें वापस लौटा दिए जाएंगे। इस शानदार व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति पार्क के भीतर कांच की बोतल को भी कचरे के रूप में न फेंके, बल्कि उसे सुरक्षित रूप से वापस काउंटर पर ही सौंप दे।चेकिंग और सख्त निगरानी: 1000 रुपये के जुर्माने से पर्यटकों में मचा हड़कंपनियम लागू होने के बाद से नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के गेट पर सुरक्षा कर्मियों और वन विभाग के कर्मचारियों ने चेकिंग अभियान को बेहद कड़ा कर दिया है। पार्क के अंदर प्रवेश करने वाले हर एक पर्यटक के बैग, वाहनों और सामान की बारीकी से तलाशी ली जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति चुपचाप प्लास्टिक की बोतल या पॉलीथिन अंदर न ले जा सके। यदि कोई नियमों की अनदेखी करते हुए पकड़ा जाता है, तो उससे तुरंत 1000 रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। शुरुआती दिनों में कुछ पर्यटकों ने इस सख्ती पर थोड़ी नाराजगी जरूर जताई, लेकिन जब उन्हें इसके पीछे के नेक मकसद और वन्यजीवों की सुरक्षा का हवाला दिया गया, तो उन्होंने भी इस नियम का स्वागत किया। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने भी सरकार और वन विभाग के इस कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और इसे देश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों तथा अभ्यारण्यों में भी लागू किए जाने की मांग की है।देश भर के अन्य पर्यटन स्थलों के लिए एक बेहतरीन मिसाल बना नाहरगढ़ पार्कपर्यावरण प्रदूषण आज के समय में पूरी दुनिया के सामने एक विकराल समस्या बनकर खड़ा है, और हमारे देश के पर्यटक स्थल भी इससे अछूते नहीं हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क द्वारा उठाया गया यह कदम इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासन और नागरिक दोनों मिलकर ठान लें, तो पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सकता है। आने वाले दिनों में जयपुर आने वाले सैलानियों को इस बात की आदत डालनी होगी कि वे जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों में प्रकृति के नियमों का पूरी तरह से पालन करें। यह पहल न केवल नाहरगढ़ के वन्यजीवों को एक सुरक्षित जीवन देने में मददगार साबित होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण का संदेश छोड़ेगी। प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने आने वाले हर पर्यटक की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे इस नियम का पालन करें और इस खूबसूरत धरती को बचाने में अपना योगदान दें।
Airtel ने महंगे किए प्लान्स, यूजर्स की जेब पर असर, अब देने होंगे इतने
Airtel ने अपने प्लान्स महंगे कर दिए हैं. इसके बदले कंपनी ने इंटरनेशनल रोमिंग का फायदा भी दिया है. लेकिन जाहिर है, यूजर्स की जेब पर असर पड़ेगा. आइए जानते हैं कितने महंगे हुए प्लान्स और क्या मिल रहा है फ्री.
Haryana Weather Today 7 October 2026: हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम फिर बदल गया है। पंचकूला और यमुनानगर में बारिश की खबर है, जबकि पंचकूला में ओलावृष्टि भी देखने को मिली। News18 की रिपोर्ट में पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत 9 जिलों में Yellow Alert बताया गया है। IMD की 7 अक्टूबर की ताजा चेतावनी में Haryana-Chandigarh-Delhi के लिए thunderstorm, lightning और squall का खतरा बताया गया है।
LIVE: जंतर-मंतर से 100 मीटर दूर INDIA ब्लॉक के सांसदों का लंच, सुरक्षा तैनात
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA ब्लॉक के सांसदों को दिल्ली के जनपथ स्थित सागर रत्न रेस्टोरेंट में लंच के लिए आमंत्रित किया है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के कई कांग्रेस सांसद शामिल हो रहे हैं.
दीपोत्सव-2026 में दमकेगी रामनगरी, प्रमुख मार्गों से घाट तक दिखेगी आस्था की भव्य तस्वीर
लखनऊ/ अयोध्या, 7 अक्टूबर: दीपों की रोशनी से निखरने वाली रामनगरी इस बार कलात्मक सजावट और रचनात्मक आकृतियों से भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। दीपोत्सव-2026 में अयोध्या के प्रमुख चौराहों से लेकर प्रवेश मार्ग, रामकथा पार्क, राम की पैड़ी और सरयू तट तक रामायण की थीम पर भव्य सज्जा नजर आएगी। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इसके लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। रामनगरी में सजावटी द्वार, वे-फाइंडर, सेल्फी प्वाइंट और मंच के साथ राम रथ व पुष्पक विमान की झलक भी दिखाई देगी। वहीं, सरयू की लहरों पर आकर्षक फ्लोटर्स दीपोत्सव की भव्यता में चार चांद लगाएंगे।दीपोत्सव-2026 के तहत अयोध्या में छह से आठ नवंबर तक विभिन्न आयोजन होंगे। 7 नवंबर को दीपोत्सव का मुख्य आयोजन होगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए करीब 10 प्रमुख स्थानों पर थीम आधारित वे-फाइंडर लगाए जाएंगे। ये प्रमुख प्रवेश मार्गों, चौराहों और आयोजन स्थलों के आसपास होंगे।राम कथा पार्क और राम की पैड़ी पर 10-10 सेल्फी पॉइंटदीपोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए राम कथा पार्क और राम की पैड़ी पर 10-10 आकर्षक सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे। हर इंस्टॉलेशन की थीम, डिजाइन और निर्माण शैली अलग होगी। इनमें अयोध्या और दीपोत्सव की झलक कलात्मक अंदाज में नजर आएगी। त्रि-आयामी कलाकृतियां आयोजन स्थलों की खूबसूरती बढ़ाने के साथ आगंतुकों के अनुभव को भी खास बनाएंगी। इन्हें इस तरह तैयार किया जाएगा कि ये दीपोत्सव-2026 की सजावट का हिस्सा बनने के साथ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनें। इसी कड़ी में लता मंगेशकर चौक से राम की पैड़ी मार्ग तक कलात्मक स्थापनाएं (आर्ट इंस्टालेशन) तैयार की जाएंगी।नए कलेवर में नजर आएगा राम कथा मंच'दीयों के उत्सव' के सांस्कृतिक आयोजनों के लिए रामकथा पार्क का स्थायी मंच नए कलेवर में नजर आएगा। यहां ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था के साथ एलईडी स्क्रीन, थीम आधारित रंगीन कपड़े आदि का इस्तेमाल होगा। दोनों ओर सीढ़ियां, पुष्प सज्जा, रंगोली, पर्दे और मंच पर बैठने की व्यवस्था भी होगी। मौजूदा ढांचे के अनुरूप ही डिजाइन तैयार किया जाएगा। वहीं, राम कथा पार्क के प्रवेश और निकास को आकर्षक बनाने के लिए सजावटी गेट का निर्माण होगा। प्रत्येक द्वार का डिजाइन भारतीय संस्कृति, पारंपरिक प्रतीकों और रामायण के प्रसंगों पर आधारित होगा।अयोध्या के प्रमुख मार्गों की सजावटदीपोत्सव-2026 में अयोध्या के प्रवेश मार्गों की तस्वीर इस बार नए रंग-रूप में नजर आएगी। शहर के प्रमुख हाईवे और 'धर्म पथ' पर रामायण की थीम से सजे 10 भव्य द्वार तैयार किए जाएंगे। लखनऊ, सुल्तानपुर और रायबरेली की ओर से अयोध्या आने वाले मार्गों के साथ धर्म पथ पर बनने वाले इन द्वारों की सजावट में हर गेट की अलग पहचान होगी। आकर्षक डिजाइन, थीम आधारित सज्जा और रोशनी से सजे ये प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचते ही दीपोत्सव की भव्यता का एहसास कराएंगे।पुष्पक विमान, खींचेगा ध्यानराम की पैड़ी के निकट पुष्पक विमान थीम पर रोडसाइड इंस्टॉलेशन आकर्षण का केंद्र बनेगा। वहीं रामायण की कथा को जीवंत करते हुए राम रथ और झांकी तैयार की जाएगी। राम की पैड़ी के पास राम दरबार की भव्य प्रस्तुति होगी, जबकि रामकथा पार्क के समीप हेलीपैड क्षेत्र में भरत मिलाप मंच और पाथवे विकसित किए जाएंगे। प्रमुख मार्गों पर फ्लैग पोल लगाकर आयोजन की भव्यता बढ़ाई जाएगी। वहीं सरयू और राम की पैड़ी पर आकर्षक फ्लोटर्स भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचेंगे। इनके अतिरिक्त राम रथ, राम दरबार, भरत मिलाप मंच विशेष के आकर्षण होंगे। अयोध्या की आभा होगी अविस्मरणीयपर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव-2026 में अयोध्या की भव्यता के साथ उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी नए रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। रामायण की थीम पर होने वाली सजावट, कलात्मक स्थापनाएं और प्रकाश व्यवस्था श्रद्धालुओं व पर्यटकों को रामनगरी के दिव्य और भव्य स्वरूप का नया अनुभव कराएंगी। हमारा प्रयास है कि दीपोत्सव की आभा अयोध्या आने वाले हर व्यक्ति के मन में अविस्मरणीय छाप छोड़े।
कोटा में रेल हादसे की खौफनाक मॉक ड्रिल देख सहमे लोग, उड़ गए सबके होश
भारतीय रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े और व्यस्त रेल नेटवर्क्स में शुमार है, जहां प्रतिदिन लाखों यात्री सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। लेकिन आधुनिक तकनीक और तमाम सुरक्षा दावों के बावजूद कभी-कभी होने वाली अप्रत्याशित दुर्घटनाएं पूरे देश को झकझोर कर रख देती हैं। इसी कड़ी में राजस्थान के कोटा रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले गुड़ला रेलवे स्टेशन (Gudla Railway Station) पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई और लोगों की सांसें थम गईं जब अचानक एक तेज धमाके के साथ पटरी पर दो ट्रेनें आपस में टकरा गईं और बोगियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गईं। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय प्रशासन तुरंत राहत बचाव कार्य में जुट गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि यह कोई वास्तविक रेल दुर्घटना नहीं थी, बल्कि रेलवे सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तंत्र की मुस्तैदी को परखने के लिए आयोजित की गई एक बेहद खौफनाक और वास्तविक लगने वाली 'मॉक ड्रिल' (Mock Drill) थी। इस लाइव अभ्यास को देखकर वहां मौजूद आम लोगों और यात्रियों के एक पल के लिए होश उड़ गए थे। आइए इस विशेष रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि कोटा रेल मंडल द्वारा आयोजित इस बड़े सुरक्षा अभ्यास के पीछे का उद्देश्य क्या था और इस दौरान क्या-क्या नजारे देखने को मिले।क्या था पूरा वाकया और कैसे शुरू हुई गुड़ला स्टेशन पर यह खौफनाक मॉक ड्रिल?राजस्थान के कोटा रेलवे डिवीजन में सुरक्षा मानकों और किसी भी आकस्मिक आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए समय-समय पर विभिन्न अभ्यास किए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत मंगलवार को गुड़ला रेलवे स्टेशन के पास एक सुनियोजित लेकिन बेहद खौफनाक रेल दुर्घटना की मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। जैसे ही सायरन बजा, वैसे ही अचानक एक तेज धमाका हुआ और पटरियों पर खड़े पुराने और खाली डिब्बों को इस तरह से आपस में टकराया गया कि उनकी बोगियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गईं। दूर से देखने वाले आम नागरिकों को यह बिल्कुल एक वास्तविक भीषण ट्रेन एक्सीडेंट लगा, जिससे इलाके में भारी हड़कंप मच गया। लोग अपनी जगह पर सहम गए और यह समझ नहीं पा रहे थे कि पलभर में यह क्या हो गया। लेकिन कुछ ही पतों में जब रेलवे के अधिकारियों और लाउडस्पीकर के जरिए यह घोषणा की गई कि यह केवल एक आपातकालीन मॉक ड्रिल है, तब जाकर लोगों ने चैन की सांस ली।एनडीआरएफ, मेडिकल टीम और प्रशासन की तत्परता का हुआ कड़ा इम्तिहानइस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि यदि वास्तव में कभी कोई बड़ा रेल हादसा हो जाता है, तो रेलवे प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और चिकित्सा दल कितनी तेजी से हरकत में आते हैं। जैसे ही दुर्घटना का सिग्नल मिला, निर्धारित समय के भीतर ही सभी राहत और बचाव दल सायरन बजाते हुए अत्याधुनिक उपकरणों, गैस कटर, स्ट्रेचर और एम्बुलेंस के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए। गैस कटर की मदद से बोगियों को काटने, घायलों (डमी मरीजों) को सुरक्षित बाहर निकालने और तुरंत प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाने के पूरे अभियान को इतनी पेशेवर और तेज गति से अंजाम दिया गया कि देखने वाले दंग रह गए। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की और हर एक सेकंड के रिस्पांस टाइम का बारीकी से हिसाब लगाया ताकि वास्तविक आपदा के समय किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश न बचे।रेल सुरक्षा और यात्रियों की संरक्षा को लेकर रेलवे का बड़ा संदेशभारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा के मोर्चे पर 'कवच' (Kavach) तकनीक और आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम को अपनाने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है, ताकि पटरियों पर होने वाली किसी भी टक्कर या दुर्घटना की गुंजाइश को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके। इसके बावजूद, किसी भी अप्रत्याशित मानवीय भूल या प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर प्रशासनिक तैयारी का पुख्ता होना बेहद जरूरी होता है। कोटा मंडल के इस गुड़ला स्टेशन पर की गई मॉक ड्रिल ने यह साबित कर दिया है कि रेलवे के सभी विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे पूरी तरह से सतर्क और तैयार हैं। इस प्रकार के अभ्यासों से न केवल कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ती है, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल भी बेहतर होता है, जो भविष्य में किसी भी वास्तविक दुर्घटना के दौरान अनगिनत जिंदगियां बचाने में मददगार साबित हो सकता है।मॉक ड्रिल के बाद स्थानीय लोगों ने ली राहत की सांस, प्रशासनिक तैयारियों की सराहनाजब यह पूरा हाई-वोल्टेज और खौफनाक ड्रामा समाप्त हुआ और लोगों को यह समझ आया कि यह केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया एक पूर्वाभ्यास था, तो स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने प्रशासन की जमकर सराहना की। हालांकि कुछ पलों के लिए इस घटना ने लोगों के दिलों में जो दहशत पैदा की थी, वह इस बात का अहसास कराने के लिए काफी थी कि रेल दुर्घटनाएं कितनी भयानक हो सकती हैं। रेलवे प्रशासन ने भी इस सफल मॉक ड्रिल के बाद सभी टीमों की पीठ थपथपाई और भविष्य में भी इस तरह के सुरक्षा मानकों को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने का संकल्प लिया। गुड़ला रेलवे स्टेशन की यह घटना भले ही एक अभ्यास मात्र थी, लेकिन इसने एक बार फिर से रेलवे सुरक्षा के प्रति देश भर में एक बड़ा और सकारात्मक संदेश जरूर दे दिया है।
खेत में जा छिपे 26 लोग... बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेशियों की कहानी
सुबह के करीब 5 बजे थे. दक्षिण दिनाजपुर में 26 लोगों का एक ग्रुप एक जगह खड़ा था. स्थानीय लोगों को शक हुआ तो पहचान पूछने की कोशिश की गई. ग्रुप के लोग भागने लगे और धान के खेत में घुस गए. ग्रामीणों ने पीछा कर उन्हें घेर लिया और प्रशासन को खबर दी. शुरुआती पूछताछ में 25 लोगों ने खुद को बांग्लादेश का रहने वाला बताया, जबकि एक शख्स पश्चिम बंगाल का निकला.
PM Modi का 25 साल बाद ये बड़ा संकल्प!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर लगातार 25 साल पूरे होने के मौके पर विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प दोहराया. उन्होंने कहा कि 2047 तक देश को विकसित बनाना है. अपने 25 साल के सफर को जनता के आशीर्वाद का परिणाम बताते हुए पीएम ने लोकतंत्र और संविधान को नमन किया. उन्होंने मंदिर में देशवासियों के लिए प्रार्थना कर आगे और ज्यादा ऊर्जा से सेवा करने का संकल्प लिया.
2001 में भाजपा के भीतर क्या हुआ था, जो मोदी को सीएम बनाना पड़ा?
आज भारतीय राजनीति में अजेय माने जाने वाले नरेंद्र मोदी की सत्ता यात्रा की शुरुआत 2001 में बेहद अप्रत्याशित और अस्थायी रूप में हुई थी. भुज भूकंप के बाद उपजे जन-आक्रोश, उपचुनावों में करारी हार और पार्टी की अंदरूनी कलह ने भाजपा आलाकमान को चेहरा बदलने पर मजबूर किया, जिसने संगठन के एक रणनीतिकार को सीधे गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया.

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