क्या ईरान रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजराइली खुफिया रिपोर्ट का दावा
अमेरिका और ईरान के बीच भीषण जंग थमने का नाम ही नहीं ले रही है। अमेरिका ईरानी शहरों को निशाना बना रहा है तो ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है। इस बीच इजराइल के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी ...
LIVE: MCG स्टेडियम में पीएम मोदी, कहा- आज लास्ट अवर का दबाव नहीं
Latest News Today Live Updates in Hindi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी एल्बनीज के साथ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में शेन वॉर्न स्टैंड पहुंचे। उन्होंने कहा कि आज यहां कोई लास्ट ऑवर का दबाव नहीं है। आज यहां केवल खेल की ...
देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से देश भर में चर्चा का विषय बने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल अचानक बहुत तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों, विभिन्न यूनियनों और आयोग के सदस्यों के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है, जिसके बाद कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और भत्तों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की उम्मीदें काफी प्रबल हो गई हैं।वर्तमान में हर केंद्रीय कर्मचारी के मन में बस यही एक उत्सुकता और सवाल है कि इस बार उनके वेतन में कितना उछाल आएगा? हालांकि, इस पर केंद्र सरकार की आधिकारिक और अंतिम घोषणा होना अभी बाकी है, लेकिन कर्मचारी संगठनों द्वारा सरकार को सौंपे गए नए प्रस्तावों ने बाजार में खलबली मचा दी है।फिटमेंट फैक्टर के साथ इन 3 बड़े भत्तों का भी मिलेगा बंपर लाभजानकारों और वित्तीय विशेषज्ञों की मानें तो नए वेतनमान में कर्मचारियों की कुल इन-हैंड सैलरी में केवल फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की ही बढ़ोतरी नहीं होगी, बल्कि तीन अन्य महत्वपूर्ण भत्ते भी बड़ी भूमिका निभाएंगे:महंगाई भत्ता (DA): यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग है कि नया वेतनमान (Pay Scale) लागू करने से ठीक पहले मौजूदा महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी (मूल वेतन) में पूरी तरह मर्ज (जोड़ा) कर दिया जाए।हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में संशोधन: बढ़ते शहरीकरण और महंगे किरायों को देखते हुए HRA की मौजूदा दरों (30%, 20% और 10%) को बढ़ाकर क्रमशः 36%, 24% और 12% करने का कड़ा प्रस्ताव रखा गया है।ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA): पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन खर्चों को देखते हुए यात्रा भत्ते में भी सम्मानजनक वृद्धि की मांग की गई है।70 फीसदी से ज्यादा का उछाल: कर्मचारी संगठनों का दावा है कि यदि सरकार उनके द्वारा प्रस्तुत इन सभी तार्किक मांगों को स्वीकार कर लेती है, तो कर्मचारियों की कुल ग्रॉस सैलरी में 70 प्रतिशत से भी ज्यादा की भारी वृद्धि देखने को मिल सकती है।लेवल-1 कर्मचारियों की सैलरी का नया गणित: ₹37,080 से सीधे ₹63,500?ऑल इंडिया नेशनल पब्लिक सेक्टर एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) और अन्य प्रमुख यूनियनों ने आयोग के सामने जो सैलरी स्ट्रक्चर का खाका पेश किया है, वह निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है।नोट: यहाँ यह स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक है कि यह वर्तमान में केवल कर्मचारी यूनियनों द्वारा दिया गया एक आधिकारिक सुझाव है। अंतिम निर्णय और वास्तविक सैलरी टेबल 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही तय होगी।बैठकों का दौर जारी: भुवनेश्वर के बाद आज कोलकाता में महा-मंथन8वां वेतन आयोग देशभर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारी संगठनों से सीधे संवाद स्थापित कर रहा है और उनके जमीनी सुझावों को अपनी रिपोर्ट में शामिल कर रहा है।1.दिल्ली और लखनऊ में चर्चा:शुरुआती चरण.आयोग ने सबसे पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में केंद्रीय कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की।2.भुवनेश्वर में 6-7 जुलाई को बैठक:मध्य चरण.हाल ही में ओडिशा के भुवनेश्वर में दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जहां पूर्वी क्षेत्र के कर्मचारी संगठनों ने अपने मांग पत्र सौंपे।3.9-10 जुलाई को कोलकाता में मंथन:ताजा अपडेट.आज (10 जुलाई 2026) पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोग की बैठक का अगला दौर चल रहा है। इन सभी दौरों के सुझावों के व्यापक मंथन के बाद अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।जब यह अंतिम सिफारिश रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास वित्त मंत्रालय को भेजी जाएगी, तब जाकर देश के लाखों कर्मचारियों की सैलरी में होने वाले वास्तविक बदलाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।डिजिटल सुरक्षा अपडेट (Quick Technical Note)इसी बीच रेलवे यात्रा और अन्य केंद्रीय सेवाओं के डिजिटल अपग्रेडेशन के तहत आईआरसीटीसी ($IRCTC$) ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणालियों में सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और आवश्यक सत्यापन प्रक्रियाओं पर भी तेजी से काम कर रहा है।
गुरुग्राम में देर रात पुलिस एनकाउंटर, रंगदारी वसूलने पहुंचे दीपक नांगल गैंग के 4 शूटर ढेर
गुरुग्राम के सुशांत लोक 2 में गुरुवार रात करीब साढ़े 11 बजे पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ में गैंगस्टर दीपक नांगल गैंग के 4 बदमाश ढेर हो गए। गोलीबारी में 3 पुलिसकर्मी और 1 बदमाश घायल। बदमाश रंगदारी मांगने के लिए सुशांत लोक पहुंचे थे।
महिलाएं क्या चाहती हैं? वो 5 बेहद जरूरी बातें जो ज्यादातर पुरुष आज भी नहीं समझ पाते
महिलाएं आखिर चाहती क्या हैं?- यह एक ऐसा शाश्वत सवाल है जिस पर सदियों से बहस होती रही है, अनगिनत किताबें लिखी जा चुकी हैं और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आई रहती है। अक्सर पुरुष यह शिकायत करते हैं कि महिलाओं के मन को समझना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। लेकिन वास्तव में, महिलाओं की इच्छाएं उतनी जटिल नहीं होतीं जितना उन्हें पेश किया जाता है।ज्यादातर महिलाएं अपने पार्टनर से बहुत बड़ी या महंगी चीजों की उम्मीद नहीं करतीं, बल्कि वे कुछ बहुत ही बुनियादी और भावनात्मक रूप से गहरी बातों की चाह रखती हैं। आइए जानते हैं वो 5 मुख्य बातें जिन्हें आज के समय में भी ज्यादातर पुरुष अक्सर समझ नहीं पाते या नजरअंदाज कर देते हैं।1. फिक्सर नहीं, सिर्फ एक लिस्नर (सुनने वाला) चाहिएपुरुषों की एक स्वाभाविक आदत होती है कि जब भी उनके सामने कोई समस्या आती है, वे तुरंत उसका व्यावहारिक समाधान (Solution) ढूंढने में लग जाते हैं।महिला का नजरअंदाज पहलू: जब एक महिला अपने पूरे दिन की थकान, तनाव या किसी बात की परेशानी अपने पार्टनर से साझा करती है, तो वह हमेशा यह नहीं चाहती कि आप उसकी समस्या को ठीक करें (Fix करें)।वास्तविक चाहत: वह सिर्फ यह चाहती है कि आप उसकी बात को पूरी एकाग्रता से सुनें, समझें और उसकी भावनाओं को महसूस करें। उसे यह आश्वासन चाहिए होता है कि कोई उसके साथ खड़ा है। समाधान से ज्यादा उसे उस वक्त आपके मानसिक साथ की जरूरत होती है।2. मानसिक श्रम और घरेलू जिम्मेदारियों में बराबर की साझेदारी (Mental Load)आज के समय में महिलाएं काम काज के मोर्चे पर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, लेकिन घर और परिवार को संभालने का 'मेंटल लोड' आज भी काफी हद तक महिलाओं पर ही रहता है।मेंटल लोड क्या है? घर में राशन कब खत्म हो रहा है, बच्चों की पैरेंट-टीचर मीटिंग कब है, किस रिश्तेदार के घर कब जाना है— इन सब बातों की प्लानिंग करना और याद रखना ही मेंटल लोड है।पुरुष अक्सर कहते हैं, तुमने मुझे काम बताया क्यों नहीं, बता देती तो मैं कर देता। लेकिन महिलाएं चाहती हैं कि पुरुषों को काम बताने की जरूरत न पड़े; वे खुद घर की व्यवस्था को अपनी जिम्मेदारी समझें और उसमें बराबर के भागीदार बनें।3. सुरक्षा की भावना (Emotional & Financial Security)महिलाओं के लिए 'सुरक्षा' का मतलब सिर्फ शारीरिक सुरक्षा या किसी खतरे से बचाना नहीं होता। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है भावनात्मक सुरक्षा (Emotional Security)।इसका मतलब क्या है? एक महिला यह जानना चाहती है कि वह अपने पार्टनर के सामने अपनी कमजोरियों, अपने डरों और अपने सपनों को बिना किसी झिझक या जज होने के डर के रख सकती है।वह एक ऐसा सुरक्षित दायरा चाहती है जहां उसका पार्टनर उसके प्रति वफादार हो और हर परिस्थिति में उसका साथ निभाने का भरोसा दे।4. प्रयासों की सराहना (Appreciation for Small Efforts)रिश्ते में जब समय बीत जाता है, तो अक्सर चीजें 'टेकन फॉर ग्रांटेड' (Taken for Granted) होने लगती हैं। पुरुष अक्सर सोचते हैं कि यदि वे परिवार के लिए कमा रहे हैं, तो उनका कर्तव्य पूरा हो गया।महिलाएं चाहती हैं कि उनके द्वारा किए जाने वाले छोटे-छोटे प्रयासों की भी सराहना की जाए। चाहे वह घर को खूबसूरती से सजाना हो, आपके लिए पसंदीदा खाना बनाना हो, या बच्चों की अच्छी परवरिश करना हो— जब उनका पार्टनर उनके इन कामों को देखता है और एक छोटा-सा 'थैंक यू' या तारीफ करता है, तो उनका आत्मविश्वास और पार्टनर के प्रति प्यार कई गुना बढ़ जाता है।5. पर्सनल स्पेस और उनकी व्यक्तिगत पहचान का सम्मानशादी या रिलेशनशिप में आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि एक महिला की अपनी व्यक्तिगत पहचान खत्म हो गई है।स्पेस की जरूरत: पुरुषों की तरह ही महिलाओं को भी अपने दोस्तों से मिलने, अपने शौक (Hobbies) को पूरा करने या सिर्फ अकेले कुछ वक्त बिताने के लिए पर्सनल स्पेस (Personal Space) की आवश्यकता होती है।सपनों का सम्मान: वे चाहती हैं कि उनके करियर के फैसलों, उनके विचारों और उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को गंभीरता से लिया जाए और उनका उतना ही सम्मान किया जाए जितना एक पुरुष के फैसलों का किया जाता है।रिश्तों को मजबूत बनाने का मूल मंत्र
यदि आपको इस हफ्ते या जुलाई के महीने में बैंक ब्रांच जाकर पैसों के लेन-देन, डीडी (DD) बनवाने या लॉकर से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। आगामी 11 जुलाई को देशभर के सभी पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे।इसका कारण यह है कि इस दिन जुलाई महीने का दूसरा शनिवार (Second Saturday) पड़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, देश के सभी कमर्शियल बैंक हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को आधिकारिक तौर पर बंद रहते हैं। लगातार छुट्टियां होने से आपके कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक और व्यक्तिगत काम अटक सकते हैं, इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले बैंकों की इस छुट्टियों की पूरी लिस्ट को ध्यान से जरूर नोट कर लें।जुलाई 2026 में बैंक छुट्टियों की पूरी लिस्ट (Bank Holidays List)जुलाई के इस महीने में दूसरे व चौथे शनिवार और रविवार के साप्ताहिक अवकाश के अलावा कुछ प्रमुख धार्मिक और क्षेत्रीय त्योहारों के कारण भी अलग-अलग राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। नीचे दी गई सूची से अपने काम की प्लानिंग कर लें:महत्वपूर्ण नोट: भारत के विभिन्न राज्यों में स्थानीय संस्कृति और राजकीय त्योहारों के हिसाब से आरबीआई (RBI) की आधिकारिक हॉलिडे लिस्ट में कुछ मामूली बदलाव हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष क्षेत्रीय छुट्टी वाले दिन बैंक जाने से पहले अपनी स्थानीय बैंक शाखा या उनकी आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि जरूर कर लें।बैंक बंद होने पर भी 24 घंटे काम करेंगी ये 4 डिजिटल सेवाएंयदि बैंक की शाखाएं बंद भी हैं, तो भी आपको घबराने की जरूरत नहीं है। ग्राहकों की सुविधा के लिए सभी प्रकार की ऑनलाइन और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे चालू रहेंगी:इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग: आप घर बैठे अपने कंप्यूटर या मोबाइल ऐप के जरिए फंड ट्रांसफर (NEFT/IMPS/RTGS) कर सकते हैं और अकाउंट स्टेटमेंट चेक कर सकते हैं।UPI सेवाएं: Google Pay, PhonePe, Paytm या अन्य भीम यूपीआई ऐप्स के जरिए पैसों का लेन-देन और मर्चेंट पेमेंट्स हमेशा की तरह चलते रहेंगे।एटीएम (ATM): नकदी (Cash) निकालने या जमा करने के लिए आपके नजदीकी एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीनें सुचारू रूप से कार्य करेंगी।डिजिटल पासबुक: पासबुक प्रिंटिंग मशीनों और ऑनलाइन पासबुक के जरिए आप अपने बैलेंस की जानकारी ले सकते हैं।असेसमेंट और वित्तीय सलाह (Quick Financial Tip)चूंकि 11 और 12 जुलाई को लगातार दो दिन बैंक बंद हैं, इसलिए यदि आपको चेक क्लियरिंग या कोई बड़ा पेमेंट करना है, तो उसे आज ही प्रोसेस कर लें, अन्यथा आपका ट्रांजैक्शन सोमवार (13 जुलाई) से पहले पूरा नहीं हो पाएगा।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देश के करोड़ों नौकरीपेशा और वेतनभोगी कर्मचारियों की सहूलियत के लिए अपने नियमों में अब तक के सबसे क्रांतिकारी सुधार किए हैं। इन नए नियमों का मुख्य मकसद पीएफ से जुड़े कागजी झंझटों को हमेशा के लिए खत्म करना और कर्मचारियों के भविष्य (रिटायरमेंट फंड) को अधिक सुरक्षित व मजबूत बनाना है।हाल ही में CNBC-TV18 के एक विशेष शो में देश के जाने-माने वित्तीय मामलों के जानकारों ने ईपीएफओ द्वारा किए गए इन बड़े बदलावों को बेहद आसान शब्दों में समझाया है। आइए जानते हैं कि इन नए नियमों से आपकी जेब और बचत पर क्या असर पड़ने वाला है।EPF और EPS के 5 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव1. 13 तरह के जटिल झंझट खत्म, अब सिर्फ 3 सरल कैटेगरीपुराने नियमों के तहत पीएफ से एडवांस का पैसा निकालने के लिए 13 अलग-अलग वजहें, फॉर्म और शर्तें हुआ करती थीं, जिससे आम कर्मचारी उलझ जाता था। अब ईपीएफओ ने इन सबको समाप्त करके केवल 3 मुख्य श्रेणियां (Categories) बना दी हैं:पहली: गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी।दूसरी: बच्चों की पढ़ाई (उच्च शिक्षा) और शादी।तीसरी: घर का निर्माण/खरीद या अन्य विशेष जरूरतें।अब किसी भी एडवांस के लिए करदाताओं को दफ्तरों या अलग-अलग नियमों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।2. सिर्फ 1 साल की नौकरी पर भी मिलेगा एडवांसपहले पीएफ से एडवांस निकालने के लिए कई सालों तक लगातार नौकरी करने की सख्त शर्त हुआ करती थी। नए नियमों में इसे बेहद उदार बना दिया गया है।12 महीने का नियम: यदि आपकी नौकरी को केवल 12 महीने (1 साल) भी पूरे हुए हैं, तो आप किसी भी आपात स्थिति में अपने पीएफ फंड से एडवांस पैसा निकाल सकते हैं।लिमिट में छूट: इसके अलावा, कर्मचारियों को बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम 10 बार और परिवार में शादी-ब्याह के लिए 5 बार तक एडवांस लेने की खुली छूट दे दी गई है।3. रिटायरमेंट के लिए 25% बैलेंस हमेशा रहेगा लॉक (Lock-in)अक्सर देखा गया है कि लोग नौकरी बदलते ही या वित्तीय संकट आने पर अपना पूरा पीएफ फंड खाली कर लेते थे, जिससे बुढ़ापे में वे असुरक्षित हो जाते थे। नए नियम में इस पर कड़ा ब्रेक लगाया गया है।फाइनेंशियल एक्सपर्ट कार्तिक झावेरी के मुताबिक: अब आपके कुल पीएफ बैलेंस का 25% हिस्सा हमेशा सुरक्षित (लॉक) रहेगा। आप चाहकर भी एडवांस के तौर पर अपनी पूरी जमा राशि नहीं निकाल सकेंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि जब कोई कर्मचारी 55-60 साल की उम्र में रिटायर हो, तो उसके हाथ में एक सम्मानजनक और बड़ी रकम बची रहे।4. नौकरी छूटने पर पैसे की निकासी का नया फॉर्मूलायदि किसी कारणवश आपकी नौकरी छूट जाती है, तो ईपीएफओ ने पैसे निकालने की व्यवस्था को इस प्रकार निर्धारित किया है:5. पेंशन (EPS) निकासी पर नया पेंच; 36 महीने का इंतजारपर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट हर्ष रोहड़ा ने बताया कि एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS) के नियमों में भी सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है। पहले नियम था कि नौकरी छोड़ने के 2 महीने बाद ही पेंशन का पैसा निकाला जा सकता था। लेकिन अब पेंशन फंड से निकासी के लिए कर्मचारियों को कम से कम 36 महीने (3 साल) का अनिवार्य इंतजार करना होगा। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि लोग अपने पेंशन फंड को बीच में न तोड़ें और बुढ़ापे में मासिक पेंशन का वास्तविक लाभ उठा सकें।सुपरफास्ट डिजिटल अपग्रेड: 3 दिन में बैंक खाते में आएगा पैसातकनीकी मोर्चे पर ईपीएफओ ने अपने सिस्टम को पूरी तरह ऑटोमैटिक कर दिया है:3 दिन में सेटलमेंट: बीमारी, पढ़ाई या शादी के लिए क्लेम करने पर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के 3 दिनों के भीतर पैसा सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाएगा।₹5 लाख की लिमिट: ₹5 लाख तक के सभी क्लेम अब सॉफ्टवेयर द्वारा 'ऑटो-सेटल' किए जाएंगे।कैंसिल चेक से मुक्ति: सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब ऑनलाइन क्लेम फॉर्म भरते समय कैंसिल चेक (Cancelled Cheque) या बैंक पासबुक की स्कैन कॉपी अपलोड करने की अनिवार्य मजबूरी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है।
सनातन धर्म में एकादशी तिथि को आध्यात्मिक रूप से सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) का व्रत इस साल दो दिन यानी 10 जुलाई और 11 जुलाई 2026 को रखा जा रहा है। 10 जुलाई को गृहस्थ जन यह व्रत रख रहे हैं, जबकि 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग उपवास रखेंगे।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन केवल उपवास रखना ही काफी नहीं है, बल्कि पूजा के समय इसकी पौराणिक व्रत कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि योगिनी एकादशी की कथा सुनने मात्र से मनुष्य को अपने अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है, मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है और 88 हजार ब्राह्मणों को सामूहिक भोज कराने के बराबर महापुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण के मुख से सुनी गई यह अमर कथा।अलकापुरी नगरी और कुबेर के सेवक हेममाली की कथाइस पावन व्रत की कथा का वर्णन स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर के संशय को दूर करने के लिए किया था।पौराणिक कथा के अनुसार, धन के देवता राजा कुबेर की भव्य और स्वर्णमयी नगरी अलकापुरी थी। राजा कुबेर भगवान भोलेनाथ (शिव जी) के अनन्य और परम भक्त थे। वे रोज नियमपूर्वक महादेव की विशेष आराधना करते थे। राजा कुबेर की पूजा के लिए पवित्र मानसरोवर से रोज ताजे और अत्यंत सुंदर पुष्प (फूल) लाने की जिम्मेदारी हेममाली नाम के एक यक्ष की थी।प्रेमपाश में कर्तव्य की अनदेखीहेममाली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था, जो अप्सराओं के समान रूपवान और दिव्य सुंदरी थी। हेममाली अपनी पत्नी से अगाध और अत्यधिक प्रेम करता था। एक दिन हमेशा की तरह हेममाली सुबह-सुबह मानसरोवर से पूजा के सुंदर पुष्प तोड़कर लाया, लेकिन वह राजा के राजमहल जाने के बजाय अपनी रूपवती पत्नी के मोह में आकर सीधे अपने घर रुक गया। पत्नी के साथ आमोद-प्रमोद और हास-परिहास में व्यस्त हेममाली को समय बीतने का भान ही नहीं रहा।उधर राजमहल में राजा कुबेर भगवान शिव के सिंहासन के सामने बैठे रहे और दोपहर हो गई, लेकिन फूल नहीं पहुंचे। महादेव की पूजा का समय बीत जाने पर राजा कुबेर का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने तुरंत अपने गुप्तचरों और सेवकों को हेममाली का पता लगाने के लिए भेजा।राजा कुबेर का भयानक श्राप: सेवकों ने महल लौटकर राजा से कहा, हे राजन! हेममाली अपनी पत्नी के प्रेमपाश में पूरी तरह अंधा हो चुका है। वह कर्तव्य को भूलकर अपने घर पर पत्नी के साथ रमण कर रहा है। यह सुनते ही कुबेर क्रोध से लाल-पीले हो गए और उन्होंने हेममाली को जंजीरों में जकड़कर दरबार में पेश करने का हुक्म दिया। कांपता हुआ हेममाली जैसे ही हाजिर हुआ, कुबेर ने दहाड़ते हुए कहा, अरे पापी! तूने मेरे आराध्य देवों के देव महादेव की पूजा का घोर अनादर किया है। तू काम के वश में होकर अपने कर्तव्य से च्युत हुआ है, इसलिए मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू इसी क्षण अपनी प्रिय स्त्री के वियोग को भोगेगा और मृत्युलोक (पृथ्वी) पर जाकर एक भयानक कोढ़ी (कुष्ठ रोगी) बन जाएगा।श्राप का प्रभाव और जंगलों में भटकावराजा कुबेर के मुख से श्राप निकलते ही एक जोरदार बिजली चमकी और हेममाली उसी पल स्वर्गलोक से सीधे पृथ्वी पर आ गिरा। श्राप के भयानक प्रभाव से उसका दिव्य और सुंदर शरीर गलने लगा, उसकी त्वचा कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गई और उससे दुर्गंध आने लगी। उसकी पत्नी विशालाक्षी भी उससे हमेशा के लिए बिछड़ गई।वह भूख, प्यास और भयंकर शारीरिक वेदना से तड़पता हुआ पृथ्वी के घने जंगलों और पहाड़ों में भटकने लगा। हालांकि, पूर्व में की गई शिव पूजा के पुण्य के कारण उसकी याददाश्त (स्मृति) नष्ट नहीं हुई थी, इसलिए वह दिन-रात अपने किए गए अपराध पर पश्चाताप के आंसू रोता रहता था।ऋषि मार्कण्डेय के आश्रम में मिला मुक्ति का मार्ग1.हिमालय की गोद में पहुंचे हेममाली:आश्रम आगमन.कई वर्षों तक नरक जैसी यातना भोगते हुए भटकते-भटकते एक दिन हेममाली का भाग्य जागा और वह हिमालय पर्वत पर स्थित त्रिकालदर्शी मार्कण्डेय ऋषि के पावन आश्रम में जा पहुंचा।2.ऋषि के सामने खोला अपना दिल:सत्य की स्वीकारोक्ति.हेममाली की त्वचा को गलते हुए और उसकी दयनीय स्थिति देखकर ऋषि मार्कण्डेय का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने दयापूर्वक पूछा कि तुमने ऐसा कौन सा घोर पाप किया है जो यह दशा हुई? हेममाली ने बिना कुछ छुपाए राजा कुबेर के श्राप और अपनी कामुक भूल की पूरी कहानी सच-सच बता दी।3.ऋषि ने बताया योगिनी एकादशी का महत्व:मुक्ति का महाउपाय.ऋषि मार्कण्डेय हेममाली की सत्यवादिता से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, चूंकि तुमने मेरे सामने बिना किसी कपट के सत्य स्वीकार किया है, इसलिए मैं तुम्हें इस कष्ट से मुक्ति का अचूक मार्ग बताता हूँ। तुम आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की 'योगिनी एकादशी' का पूर्ण निष्ठा से व्रत करो।व्रत का चमत्कारी परिणाम और सुखद अंतऋषि की आज्ञा पाकर हेममाली ने आषाढ़ एकादशी के दिन पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और उपवास के साथ योगिनी एकादशी का व्रत रखा और भगवान नारायण की प्रसन्नता के लिए रात्रि में संकीर्तन और जागरण किया।इस महाव्रत के पुण्य प्रताप से हेममाली के शरीर का सारा कुष्ठ रोग जड़ से समाप्त हो गया और उसकी त्वचा दोबारा सोने जैसी चमकीली और दिव्य हो गई। वह अपने पुराने सुंदर यक्ष स्वरूप को प्राप्त कर वापस अलकापुरी नगरी लौट गया, जहाँ राजा कुबेर ने भी उसे क्षमा कर दिया और वह अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ पुनः आनंदपूर्वक रहने लगा।महा मुहूर्त और संयोग (Quick Info)इस वर्ष योगिनी एकादशी पर त्रिपुष्कर योग के साथ भरणी नक्षत्र का एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे आज के दिन किया गया दान और सुनी गई यह कथा हजार गुना अधिक फल प्रदान करेगी।
यदि आप भी भारत की पहली और महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना (Bullet Train Project) का हिस्सा बनकर देश की तरक्की में अपना योगदान देना चाहते हैं, तो आपके लिए एक बेहद शानदार करियर का मौका सामने आया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने विभिन्न तकनीकी (Technical) ट्रेड में टेक्नीशियन के पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।एनएचएसआरसीएल इस स्पेशल रिक्रूटमेंट ड्राइव के जरिए कुल 237 टेक्नीशियन पदों पर योग्य उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 5 अगस्त 2026 तक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट nhsrcl.in पर जाकर ऑनलाइन मोड में आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि चयनित होने वाले उम्मीदवारों को ₹1,10,000 (1.10 लाख रुपये) प्रति माह तक का बेहतरीन वेतन (Salary Package) दिया जाएगा।एनएचएसआरसीएल भर्ती 2026: पदों का विस्तृत विवरण (Vacancy Details)इस भर्ती अभियान का मुख्य उद्देश्य मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट के संचालन के लिए सिविल, इलेक्ट्रिकल, रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में रिक्त पदों को भरना है। पदों का विवरण इस प्रकार है:इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन: 77 पदसिग्नलिंग और टेलीकॉम टेक्नीशियन: 63 पदसिविल / ट्रैक फिटर: 18 पदसिविल / ट्रैक मैकेनिक: 16 पदरोलिंग स्टॉक इलेक्ट्रीशियन: 13 पदरोलिंग स्टॉक फिटर: 10 पदअन्य पद: शेष वैकेंसियां सिविल/ट्रैक ड्राफ्ट्समैन, सर्वेयर, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, प्लंबर, पेंटर, मशीनिस्ट, रोलिंग स्टॉक वेल्डर, और आरएसी (RAC) टेक्नीशियन के पदों के लिए आरक्षित हैं।कौन कर सकता है आवेदन? जानिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमाइस तकनीकी भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों के पास विशिष्ट योग्यता और कार्य अनुभव होना अनिवार्य है:1. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification)आवेदक के पास नीचे दी गई तीन योग्यताओं में से कोई एक होनी चाहिए:किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिकुलेशन/SSLC (10वीं) के साथ संबंधित टेक्निकल ट्रेड में ITI सर्टिफिकेट।संबंधित ट्रेड में नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट (NAC) के साथ मैट्रिकुलेशन/SSLC।संबंधित इंजीनियरिंग विषय (Discipline) में 3 साल का डिप्लोमा।2. अनिवार्य कार्य अनुभव (Work Experience)उम्मीदवारों के पास इंडियन रेलवे (Indian Railways), सरकारी रेलवे, विभिन्न मेट्रो रेल (जैसे DMRC, NMRC आदि) या रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के ऑपरेशन्स और मेंटेनेंस (O&M) डिपार्टमेंट में कम से कम 2 साल का कार्य अनुभव होना अनिवार्य है। वेरिफिकेशन के समय एक वैध एक्सपीरियंस या कॉम्पिटेंसी सर्टिफिकेट पेश करना होगा।महत्वपूर्ण तिथि: पात्रता (Eligibility) और अनुभव की गणना के लिए कट-ऑफ डेट 30 जून 2026 तय की गई है।3. आयु सीमा (Age Limit)इस भर्ती के लिए आवेदकों की अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।चयन प्रक्रिया: इन 3 चरणों को करना होगा पारएनएचएसआरसीएल में टेक्नीशियन के पद पर अंतिम रूप से चयनित होने के लिए उम्मीदवारों को एक पारदर्शी त्रिस्तरीय चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा:1.कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT):चरण 1.सभी वैध आवेदकों को सबसे पहले एक ऑनलाइन कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) देना होगा। इसमें ट्रेड और तकनीकी ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे।2.दस्तावेज सत्यापन (Document Verification):चरण 2.सीबीटी परीक्षा को पास करने वाले शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों को अपने मूल शैक्षणिक और 2 साल के रेलवे/मेट्रो कार्य अनुभव के प्रमाणपत्रों की जांच करानी होगी।3.चिकित्सा परीक्षण (Medical Examination):चरण 3.हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की सुरक्षा मानकों को देखते हुए अंत में एक कड़ा मेडिकल टेस्ट होगा, जिसे पास करना अनिवार्य है।सैलरी, पोस्टिंग और आवेदन शुल्क का गणितसैलरी पैकेज: चयनित उम्मीदवारों को NE-2 पे लेवल के अंतर्गत नियुक्त किया जाएगा, जिसमें मूल वेतन के साथ अन्य भत्ते मिलाकर ₹35,000 से ₹1,10,000 रुपये प्रति माह तक का शानदार स्केल मिलेगा।नियुक्ति का प्रकार व स्थान: यह नियुक्तियां 'एब्जॉर्प्शन बेसिस' (स्थायी समावेशन) पर की जाएंगी। चयनित टेक्नीशियनों को एनएचएसआरसीएल के किसी भी कार्यालय या मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट रूट पर कहीं भी तैनात किया जा सकता है।आवेदन शुल्क (Application Fee)टैक्स और विशेषज्ञों की सलाह: अंतिम तारीख (5 अगस्त) के दौरान वेबसाइट पर अत्यधिक ट्रैफिक लोड होने के कारण सर्वर डाउन होने की समस्या आ सकती है। अतः योग्य उम्मीदवार समय रहते आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना फॉर्म सबमिट कर दें।
सच्चाई यह है कि मानसून की पहली फुहारें पड़ते ही भारत की प्राकृतिक वादियां और पहाड़ी इलाके हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं। धुंध से ढके पहाड़, कल-कल बहते झरने और चाय के बागान किसी परियों की दुनिया जैसे नजर आते हैं। लेकिन, यही सुहावना मौसम एडवेंचर और ट्रिप के शौकीनों के लिए एक बड़ा संकट भी खड़ा कर सकता है।पहाड़ी और अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में मानसून के दौरान मूसलाधार बारिश, भयंकर भूस्खलन (Landslide), अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods), सड़कें धंसने और बादलों के फटने से आपकी हसीन ट्रिप एक डरावने अनुभव में बदल सकती है। यदि आप भी इस सावन के मौसम में पहाड़ों पर घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इन 6 संवेदनशील जगहों और जरूरी सावधानियों के बारे में विस्तार से जान लें।इन 6 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स पर जाने से पहले सौ बार सोचें1. चेरापूंजी और मौसिनराम (मेघालय)मेघालय के ये दोनों जुड़वां क्षेत्र दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज करने के लिए विख्यात हैं। मानसून में यहाँ लगातार इतनी तेज बारिश होती है कि पहाड़ों की सड़कें बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं और विजिबिलिटी (दृश्यता) शून्य के बराबर पहुंच जाती है।मुख्य आकर्षण: डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज, नोहकलिकाई फॉल्स और मावसमाई गुफाएं।विशेष सावधानी: उफनती नदियों और तेज बहाव वाले झरनों के पास बिल्कुल न जाएं। रास्तों पर चलने के लिए मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज पहनें।2. दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल)चाय के बागानों और कंचनजंगा की पहाड़ियों के लिए मशहूर दार्जिलिंग मानसून में बेहद खूबसूरत तो लगता है, लेकिन यहाँ की मिट्टी बहुत जल्दी खिसकती है। भारी बारिश के समय पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर गिरने के कारण टॉय ट्रेन रूट और नेशनल हाईवे अक्सर बंद हो जाते हैं।मुख्य आकर्षण: टाइगर हिल, बतासिया लूप, हिमालयन रेलवे (टॉय ट्रेन) और पीस पगोडा (शांति स्तूप)।विशेष सावधानी: अपना ट्रैवल प्लान हमेशा फ्लेक्सिबल (लचीला) रखें ताकि रास्ते बंद होने पर होटल में ज्यादा दिन रुकना पड़े तो परेशानी न हो। रात के समय गाड़ी चलाने से पूरी तरह बचें।3. मुन्नार और पश्चिमी घाट (केरल)केरल के पश्चिमी घाट मानसून में हरी-भरी मखमली वादियों में तब्दील हो जाते हैं। लेकिन भारी बारिश के चलते यहाँ अचानक मौसम बदलता है, जिससे सड़कों पर पानी भरने और चाय के ढलानों पर लैंडस्लाइड का जोखिम काफी बढ़ जाता है।मुख्य आकर्षण: एराविकुलम नेशनल पार्क, मट्टुपेट्टी डैम, टॉप स्टेशन और अनामुडी चोटी।विशेष सावधानी: लगातार बारिश के दौरान घने जंगलों में ट्रेकिंग करने या अनजान रास्तों पर जाने का रिस्क बिल्कुल न लें।4. केदारनाथ धाम (उत्तराखंड)हिमालय की गोद में स्थित बाबा केदारनाथ का पावन धाम एक बेहद लोकप्रिय धार्मिक स्थल है, लेकिन मानसून में यहाँ का मौसम पल-पल बदलता है। पैदल मार्ग पर मलबे और पत्थरों के गिरने से यात्रा अक्सर रोकनी पड़ती है।मुख्य आकर्षण: केदारनाथ मंदिर, भैरवनाथ मंदिर और मंदाकिनी नदी का दिव्य नजारा।विशेष सावधानी: यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग (IMD) की लाइव वेदर रिपोर्ट जरूर चेक करें। यदि मौसम खराब हो, तो यात्रा को वहीं रोक देना सबसे सुरक्षित विकल्प है।5. चार धाम हाईवे (उत्तराखंड)यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ने वाला यह ऑल-वेदर हाईवे बेहद ऊंचे और घुमावदार पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है। मानसून के दौरान पहाड़ों से भारी मलबा गिरने के कारण यहाँ मीलों लंबा ट्रैफिक जाम लगना बेहद आम बात है।विशेष सावधानी: रात के समय इन संकरे पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग करना जानलेवा हो सकता है। आपातकालीन स्थिति के लिए वाहन में अतिरिक्त राशन और जरूरी दवाएं हमेशा तैयार रखें।6. मनाली-लेह और श्रीनगर-लेह हाईवेलद्दाख की जादुई दुनिया को जोड़ने वाले ये दोनों मार्ग बाइकर्स और एडवेंचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं। लेकिन मानसून के दिनों में रोहतांग पास, जोजिला पास और कारगिल जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कें टूटने, बर्फीले तूफान आने और अचानक रास्तों के बंद होने की समस्या आम है।मुख्य आकर्षण: पैंगोंग झील, नुब्रा वैली, कारगिल वॉर मेमोरियल और रोहतांग दर्रा।विशेष सावधानी: ऊंचे अक्षांशों (High Altitude) पर ऑक्सीजन की कमी से बचने के लिए शरीर को मौसम के अनुकूल ढलने का समय दें (Acclimatization)। अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, स्नैक्स और पीने का पानी रखें।मानसून में सुरक्षित यात्रा के लिए 5 'गोल्डन रूल्स'सबसे जरूरी सलाह: पहाड़ों के स्थानीय लोगों और स्थानीय प्रशासन (Local Authorities) द्वारा दी जाने वाली चेतावनियों या लाउडस्पीकर एनाउंसमेंट को कभी भी हल्के में न लें। प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने के बजाय उसकी सुरक्षा गाइडलाइंस का सम्मान करें ताकि आपका सफर सुरक्षित और आनंददायक बना रहे।
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन जितना महत्वपूर्ण और दूरगामी माना जाता है, उतनी ही ज्यादा अहमियत उनके नक्षत्र परिवर्तन (Nakhshatra Transit) की भी होती है। ग्रहों के राजाओं में शुमार और न्याय के देवता शनि देव का नक्षत्र गोचर सभी 12 राशियों के जीवन की दिशा और दशा बदलने की ताकत रखता है।हाल ही में शनि देव ने बुध देव के स्वामित्व वाले रेवती नक्षत्र के द्वितीय पद में प्रवेश कर लिया है। 2 जुलाई 2026 को हुए इस नक्षत्र परिवर्तन के बाद शनि देव अब 9 अक्टूबर 2026 तक (लगभग 97 दिनों तक) इसी नक्षत्र में विराजमान रहकर सभी चराचर जगत को प्रभावित करेंगे। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बुध और शनि आपस में परम मित्र ग्रह माने जाते हैं, इसलिए मित्र बुध के नक्षत्र में शनि का यह संचरण बेहद शुभ और कल्याणकारी माना जा रहा है।वैश्विक और आध्यात्मिक स्तर पर क्या होगा बदलाव?कार्मिक चक्र की पूर्णता: भचक्र (Zodiac Belt) में रेवती को 27वां यानी सबसे आखिरी नक्षत्र माना जाता है। कर्म के कारक शनि देव का इस अंतिम नक्षत्र में आना वैश्विक स्तर पर पुराने अधूरे कर्मों, सालों से लटके कानूनी फैसलों और बड़े बदलावों के चक्र को समाप्त करने में मदद करेगा।आध्यात्मिक झुकाव: यह समय आम जनमानस को भौतिक सुखों की अंधी दौड़ से थोड़ा दूर ले जाकर आत्म-निरीक्षण, योग, ध्यान और मानसिक शांति की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।इन 6 भाग्यशाली राशियों की चमकेगी किस्मतबुध के नक्षत्र में शनि का यह गोचर वैसे तो सभी राशियों के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आया है, लेकिन 6 राशियां ऐसी हैं जिनके लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं साबित होने वाला है:शनि देव के अशुभ प्रभावों से बचने के 2 अचूक उपाययदि आपकी राशि ऊपर दी गई सूची में नहीं है या आप शनि की ढैय्या/साढ़ेसाती से पीड़ित हैं, तो इस गोचर के दौरान शुभ फल प्राप्त करने और मानसिक शांति के लिए ये उपाय जरूर करें:शनिवार का विशेष नियम: प्रत्येक शनिवार के दिन शाम को पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं, शनि चालीसा का पाठ करें और जरूरतमंदों को काले तिल व काली उड़द की दाल का दान करें।वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण: चूंकि यह बुध (वाणी के कारक) का नक्षत्र है, इसलिए अपनी भाषा और व्यवहार को संयमित रखें। किसी को अपशब्द न कहें और जल्दबाजी या अहंकार में आकर कोई भी बड़ा आर्थिक या पारिवारिक फैसला लेने से बचें।मून साइन और दैनिक राशिफल (Quick Connect)ज्योतिषविदों के अनुसार, सिंह राशि में शुक्र-केतु के जारी गोचर के बीच शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन शेयर बाजार, व्यापारिक घरानों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़े दूरगामी बदलाव लेकर आने वाला है।
अजय देवगन की मोस्ट अवेटेड मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म ‘धमाल 4’ (Dhamaal 4) इस हफ्ते आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। 19 साल पहले शुरू हुआ कॉमेडी का यह सफर आज भी दर्शकों के दिलों में एक खास जगह रखता है। हालांकि, इस बार बॉक्स ऑफिस (Box Office) पर फिल्म का सफर उतना आसान नजर नहीं आ रहा है, जितना मेकर्स ने उम्मीद की थी।भले ही इस कल्ट कॉमेडी फ्रेंचाइजी की पुरानी पहचान, हल्का-फुल्का मजाक, मजेदार गलतफहमियां और अजय देवगन की मजबूत स्टार पावर इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन रिलीज होते ही फिल्म को अलग-अलग जॉनर (Genre) की कई नई और बड़ी फिल्मों से जबरदस्त चुनौती मिल रही है। यही वजह है कि फिल्म की ओपनिंग और लाइफटाइम कमाई पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री और ट्रेड एनालिस्ट्स की नजरें टिकी हुई हैं। आपको बता दें कि इस फिल्म का निर्देशन अनुभवी डायरेक्टर इंद्र कुमार ने किया है, जो इसके पिछले तीनों सुपरहिट पार्ट्स बना चुके हैं।एडवांस बुकिंग में दिखा दम, पर तीन तरफ से घिरा खजानाफिल्म की कहानी इस बार भी एक नए छिपे हुए खजाने की खोज और उससे पैदा होने वाले मजेदार व कन्फ्यूजन से भरे हालातों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। इसी पारिवारिक मनोरंजन के भरोसे रिलीज से महज 41 घंटे पहले ही फिल्म की 43,907 से ज्यादा टिकटें बिक चुकी थीं, जिससे एडवांस बुकिंग में इसे शानदार रिस्पॉन्स मिला। लेकिन थिएटर्स में कदम रखते ही 'धमाल 4' के सामने 3 बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं:1. हॉरर फिल्म ‘ईविल डेड बर्न’ से रोंगटे खड़े करने वाली चुनौतीकॉमेडी के दीवानों को सबसे बड़ा झटका हॉरर (डरावनी) फिल्मों के लवर्स की तरफ से लग रहा है। दुनिया भर में मशहूर हॉरर फ्रेंचाइजी की नई फिल्म ‘ईविल डेड बर्न’ (Evil Dead Burn) भी इसी समय सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। सस्पेंस, खौफ और रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्यों से भरपूर इस हॉलीवुड फिल्म का अपना एक पक्का और वफादार ऑडियंस बेस है। ऐसे में थिएटर्स जाने वाले दर्शक पूरी तरह दो धड़ों में बंट गए हैं।2. साउथ की तेलुगु फिल्म ‘लेनिन’ का दमदार एक्शनदूसरी तरफ, दक्षिण भारतीय सिनेमा का क्रेज हिंदी बेल्ट में भी सिर चढ़कर बोल रहा है। तेलुगु एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘लेनिन’ (Lenin) बॉक्स ऑफिस पर ‘धमाल 4’ के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। अखिल अक्किनेनी और भाग्यश्री बोर्से की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म दमदार एक्शन, पारिवारिक रिश्तों और सत्ता की जंग जैसे गंभीर विषयों पर आधारित है। यदि इस फिल्म को क्रिटिक्स से अच्छे रिव्यू मिलते हैं, तो यह सीधे तौर पर 'धमाल 4' के कलेक्शन में सेंध लगाएगी।3. डिज्नी की ‘मोआना’ से बच्चों और फैमिली का मुकाबलातीसरी बड़ी चुनौती हॉलीवुड की दिग्गज कंपनी डिज्नी की तरफ से आ रही है। साल 2016 की बेहद पॉपुलर एनिमेटेड फिल्म ‘मोआना’ (Moana) का लाइव-एक्शन वर्जन भी थिएटर्स में आ चुका है। परियों जैसी जादुई दुनिया और एडवेंचर का एक्सपीरियंस देने वाली यह फिल्म छोटे बच्चों और फैमिली ऑडियंस को अपनी ओर खींचने की पूरी ताकत रखती है।पुरानी फिल्मों का दबाव: 'वेलकम 3' और 'अल्फा' का जलवा कायम'धमाल 4' के लिए मुश्किल सिर्फ नई रिलीज ही नहीं हैं, बल्कि थिएटर्स में पहले से जमी हुई बड़ी फिल्में भी हैं।वेलकम टू द जंगल: अक्षय कुमार की यह बड़ी कॉमेडी फिल्म पहले से ही सिनेमाघरों में राज कर रही है और दर्शकों को हंसा रही है।अल्फा (Alpha): आलिया भट्ट और शार्वरी वाघ की मुख्य भूमिका वाली वाईआरएफ (YRF) की यह धमाकेदार स्पाई-एक्शन थ्रिलर फिल्म काफी समय से चर्चा में है और बड़े पैमाने पर दर्शकों की पसंद बनी हुई है।बॉक्स ऑफिस विश्लेषण: 'वर्ड ऑफ माउथ' ही बचाएगा नैया
जर्मनी में गर्मी की वजह से इस साल 5,100 लोगों की मौत
जून के महीने में जर्मनी में पड़ी भारी गर्मी की वजह से करीब 5,100 लोगों की मौत हो गई। आखिर गर्मी का मौसम यूरोपीय देशों को इतना परेशान क्यों कर जाता है?
देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून ($South-West Monsoon$) अब पूरी तरह आक्रामक और सक्रिय हो चुका है, जिसके कारण कई राज्यों में तबाही और आफत का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज (10 जुलाई 2026) के लिए दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश (UP) सहित देश के 18 राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी (रेड और ऑरेंज अलर्ट) जारी की है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान कुछ प्रभावित स्थानों पर हवा की रफ्तार 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे के विनाशकारी स्तर तक पहुंच सकती है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और आईएमडी ने आम जनता से गैर-जरूरी और अनावश्यक यात्राओं से पूरी तरह बचने तथा मौसम से जुड़ी आधिकारिक गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने की भावुक अपील की है।अगले 48 घंटे उत्तर भारत के लिए भारी; जलभराव और पेड़ गिरने की आशंकामौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी हिस्सों में अगले 48 घंटे के दौरान मानसूनी बारिश का दौर और ज्यादा हिंसक व तेज हो सकता है।प्रभावित क्षेत्र: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में बिजली कड़कने के साथ मूसलाधार बारिश और अंधड़ चलने की संभावना है।शहरी इलाकों में आफत: तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर बड़े-बड़े पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इसके साथ ही प्रमुख शहरों में भारी जलभराव (Waterlogging) के कारण यातायात (Traffic) पूरी तरह बाधित हो सकता है।इन 18 राज्यों में जारी हुआ भारी बारिश और आंधी का अलर्टआईएमडी ने जिन 18 राज्यों को विशेष निगरानी और सतर्कता सूची में रखा है, वे निम्नलिखित हैं:ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली का कहर: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, बंगाल) के कई राज्यों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है। खराब मौसम के दौरान लोगों को खुले मैदानों, जलस्रोतों, ऊंचे पेड़ों और ट्रांसफार्मर से दूर रहने को कहा गया है। इसके अलावा कुछ राज्यों में बड़े आकार के ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है।पर्वतीय राज्यों में 'ऑरेंज अलर्ट' और मछुआरों के लिए सख्त मनाहीताश के पत्तों की तरह ढह रहे पहाड़: हिमालयी राज्यों (विशेषकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide), चट्टानें गिरने और नदियों-नालों के जलस्तर में अचानक अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में घूमने गए पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को पहाड़ों की तरफ न जाने की सख्त सलाह दी गई है।समुद्र में जाने पर पाबंदी: तटीय क्षेत्रों और समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों के साथ-साथ मछुआरों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। खराब मौसम और समुद्र में उठने वाली ऊंची तूफानी लहरों को देखते हुए मछुआरों को अगले आदेश तक गहरे समुद्र में नहीं जाने की हिदायत दी गई है।क्यों अचानक इतना आक्रामक हुआ मानसून? समझिए तकनीकी कारणमौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान में उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के वायुमंडल के ऊपर एक बेहद मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बना हुआ है। इसके साथ ही, मानसून की मुख्य ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इन दोनों शक्तिशाली मौसम प्रणालियों की जुगलबंदी के कारण ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी भारत के मैदानी भागों में पहुंच रही है, जो इस महा-बारिश और तेज चक्रवाती हवाओं की मुख्य वजह है।आईएमडी की राज्यवार जिला स्तर पर विशेष नजर10 जुलाई को दिल्ली की सभी सीमाओं और उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों (विशेषकर पश्चिमी और मध्य यूपी) में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है।
Top News 10 July : ईरान का दावा- अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया, खामेनेई को मशहद में दफनाया गया
Top News 10 July 2026: अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराने का दावा किया। अयातुल्ला अली खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। गुरुग्राम में दीपक नांगल गैंग के 4 शूटर मारे गए। फ्रांस फीफा वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में ...
बिहार में पेंशन क्रांति: 97.84 लाख लोगों को हर महीने ₹1,100 सीधे खाते में!
बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रत्येक माह की 10 तारीख को पेंशन राशि का भुगतान सुनिश्चित किया है।
Yogini Ekadashi Vrat Katha: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। यह पवित्र दिन सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) कहा जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखता है, उसके जीवन के सभी संचित पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और धन की देवी मां लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है। आज देश भर में श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में स्नान कर इस पावन व्रत का संकल्प लिया है।योगिनी एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समयपंचांग के अनुसार, इस वर्ष पूजा और व्रत के लिए महत्वपूर्ण समय निम्नलिखित हैं:एकादशी तिथि का प्रारंभ: 10 जुलाई को सुबह 08 बजकर 16 मिनट से।एकादशी तिथि का समापन: 11 जुलाई को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर।सर्वोत्तम पूजा मुहूर्त (चौघड़िया): 10 जुलाई को सुबह 08 बजकर 59 मिनट से लेकर 10 बजकर 42 मिनट तक। यह समय भगवान विष्णु की विशेष आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है।व्रत पारण का समय: 11 जुलाई को दोपहर 01 बजकर 50 मिनट से शाम 04 बजकर 36 मिनट तक।हरि वासर समाप्ति का समय: 11 जुलाई को सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर।विशेष नियम: शास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक कि व्रत धारक योगिनी एकादशी की पौराणिक कथा का श्रवण या पठन नहीं कर लेता।योगिनी एकादशी व्रत कथा: जब यक्ष को मिला कोढ़ी होने का श्रापमहाभारत काल में जब धर्मराज युधिष्ठिर और अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के महात्म्य के बारे में पूछा, तब लीलाधर श्रीकृष्ण ने उन्हें पुराणों में वर्णित यह कथा सुनाई:अलकापुरी नगरी और राजा कुबेर की शिव-भक्तिपौराणिक काल में अलकापुरी नाम की एक अत्यंत सुंदर और वैभवशाली नगरी थी, जहां राजा कुबेर राज करते थे। राजा कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे और नियमित रूप से महादेव की पूजा-अर्चना किया करते थे। राजा की सेवा में हेममाली नाम का एक यक्ष सेवक नियुक्त था, जिसका मुख्य कार्य प्रतिदिन मानसरोवर से भगवान शिव की पूजा के लिए ताजे पुष्प (फूल) लाना था।कर्तव्य से भटका हेममालीहेममाली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था, जो अप्सरा के समान बेहद सुंदर थी। एक दिन हेममाली रोज की तरह मानसरोवर से सुंदर पुष्प तोड़कर लाया, लेकिन घर लौटते ही वह अपनी पत्नी के सौंदर्य पर मोहित हो गया और अपनी कर्तव्य-भावना को भूलकर उसके साथ विलासिता में रम गया। उधर, राजा कुबेर महल में भगवान शिव की पूजा की थाली सजाए दोपहर (मध्याह्न) तक हेममाली की प्रतीक्षा करते रहे।राजा कुबेर का भयंकर क्रोध और श्रापजब पूजा का समय बीत गया, तो राजा कुबेर ने क्रोध में आकर अपने सेवकों को हेममाली का पता लगाने भेजा। सेवकों ने वापस आकर राजा को सच बता दिया कि हेममाली इस समय पूजा की परवाह किए बिना अपनी पत्नी के साथ आमोद-प्रमोद में व्यस्त है। यह सुनकर कुबेर के क्रोध की सीमा न रही। उन्होंने तुरंत हेममाली को दरबार में हाजिर करने का हुक्म दिया।भय से कांपता हुआ हेममाली जैसे ही राजा के सामने उपस्थित हुआ, कुबेर ने गरजते हुए कहा—अरे अधम! तूने कामवासना के वश में होकर मेरे परम पूजनीय देवों के देव महादेव का अपमान किया है। मैं तुझे श्राप देता हूँ कि तू इसी क्षण स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर गिर जाएगा, अपनी प्रिय स्त्री के वियोग में तड़पेगा और मृत्युलोक में एक कोढ़ी (कुष्ठ रोगी) का दर्दनाक जीवन व्यतीत करेगा।पृथ्वी लोक पर भयंकर कष्ट और मार्कण्डेय ऋषि से भेंटकुबेर के श्राप के प्रभाव से हेममाली उसी समय स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा और उसका पूरा शरीर भयंकर कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गया। उसकी सुंदर पत्नी भी उससे बिछड़ गई। पृथ्वी पर आकर उसने कई वर्षों तक भूख, प्यास और बीमारी के असहनीय कष्ट झेले। हालांकि, महादेव की गुप्त कृपा के कारण उसकी बुद्धि मलिन नहीं हुई और उसे अपने पूर्व जन्म के कुकर्मों का पूरा स्मरण रहा।कष्ट भोगते-भोगते एक दिन वह भटकते हुए हिमालय पर्वत पर स्थित महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम में जा पहुँचा। ऋषि मार्कण्डेय दूसरे ब्रह्मा के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहे थे। हेममाली ने बिना देर किए ऋषि के चरणों में साष्टांग प्रणाम किया।महर्षि ने बताया उद्धार का मार्गहेममाली की दयनीय स्थिति देखकर मार्कण्डेय ऋषि ने पूछा, पुत्र! तूने ऐसा कौन सा निकृष्ट या पाप कर्म किया है, जिसके कारण तेरी यह दशा हुई है? हेममाली ने बड़ी ईमानदारी से अपनी पूरी भूल और राजा कुबेर के श्राप की कहानी ऋषि के सामने कह सुनाई और रोते हुए अपने उद्धार की भीख मांगी।हेममाली की सत्यवादिता से प्रसन्न होकर महर्षि मार्कण्डेय ने मुस्कुराते हुए कहा—हेममाली! तूने मेरे सामने सत्य वचन कहे हैं, इसलिए मैं तुझे इस कष्ट से मुक्ति का मार्ग बताता हूँ। तू आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का पूरे विधि-विधान और निष्ठा के साथ व्रत कर। इस व्रत के प्रभाव से तेरे सभी पाप भस्म हो जाएंगे।व्रत का प्रभाव और पुनर्मिलनमहर्षि के वचनों को सुनकर हेममाली के हर्ष का ठिकाना न रहा। उसने आषाढ़ एकादशी के दिन पूरी श्रद्धा के साथ योगिनी एकादशी का उपवास रखा और भगवान विष्णु की पूजा की। इस महाव्रत के दिव्य प्रभाव से उसका कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो गया, वह पुनः अपने दिव्य यक्ष स्वरूप में लौट आया और स्वर्ग लोक जाकर अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ सुखपूर्वक रहने लगा।योगिनी एकादशी व्रत का फल और महत्वभगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कथा के अंत में बताया कि इस योगिनी एकादशी के व्रत का फल 88 हजार (अट्ठ्यासी सहस्र) ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराने के समान पुण्य प्रदान करता है। जो भी मनुष्य इस पावन कथा को सुनता है या पढ़ता है, वह इस लोक में सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष प्राप्त करता है और स्वर्ग का अधिकारी बनता है।
कल्पना कीजिए कि आप अपने स्मार्टफोन के AI असिस्टेंट से कहते हैं, अगले मंगलवार के लिए मुंबई से दिल्ली की सबसे सस्ती फ्लाइट बुक कर दो। आपका AI असिस्टेंट सिर्फ आपको फ्लाइट्स के ऑप्शन नहीं दिखाता, बल्कि खुद सबसे बेस्ट और किफायती ऑप्शन चुनता है, आपकी पैसेंजर डिटेल्स भरता है और आपके बैंक अकाउंट से पेमेंट भी कर देता है। आपको न तो कोई फॉर्म भरना पड़ा, न क्यूआर कोड स्कैन करना पड़ा और न ही अपना गोपनीय यूपीआई पिन (UPI PIN) डालना पड़ा।यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में आने वाला बेहद क्रांतिकारी बदलाव है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट ऑनलाइन शॉपिंग या फ्लाइट बुकिंग के लिए ऑप्शंस खोज सकते हैं, लेकिन जब यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) के जरिए फाइनल पेमेंट की बात आती है, तो यह प्रोसेस रुक जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सुरक्षा नियमों के मुताबिक सिर्फ यूजर और रजिस्टर्ड पेमेंट ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay) ही UPI ट्रांजेक्शन कर सकते हैं, कोई AI एजेंट नहीं।लेकिन बहुत जल्द यह रुकावट दूर होने वाली है। भारत में UPI का संचालन करने वाली संस्था नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक अभूतपूर्व सिस्टम पर काम कर रही है, जिसका नाम है यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल (Unified Agent Protocol - UAP)। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करेगी और इसके क्या मायने हैं।वर्तमान में AI सीधे पेमेंट क्यों नहीं कर सकता?UPI इकोसिस्टम में वर्तमान में 'ऑटो-पे' (AutoPay) और 'रिजर्व पे' (Reserve Pay) जैसे शानदार फीचर्स मौजूद हैं। इनकी मदद से यूजर एक निश्चित खर्च की सीमा तय करके और एक बार अपने UPI पिन से ऑथेंटिकेट (सत्यापित) करके बार-बार होने वाले पेमेंट (जैसे नेटफ्लिक्स, ओटीटी सब्सक्रिप्शन या बिजली का बिल) को ऑटोमैटिक मोड पर डाल देते हैं।लेकिन यह व्यवस्था किसी AI एजेंट को स्वतंत्र रूप से बाजार में खरीदारी के फैसले लेने और यूजर की अनुपस्थिति में उसकी ओर से नया पेमेंट करने की आजादी नहीं देती। इसी तकनीकी और कानूनी अंतर को पाटने के लिए NPCI द्वारा 'यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल' (UAP) को विकसित किया जा रहा है। यह UPI नेटवर्क के भीतर AI एजेंट्स को सुरक्षित रूप से वेरिफाई और ऑथराइज्ड करने का एक प्रस्तावित डिजिटल ढांचा (Framework) है।UAP से कैसा आएगा बदलाव? मौजूदा UPI का क्या होगा?'बिजनेस स्टैंडर्ड' ($Business Standard$) की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, UAP को एक बेहद भरोसेमंद, सामान्य और इंटरऑपरेबल इंफ़्रास्ट्रक्चर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है।वेरिफिकेशन लेयर: UAP मौजूदा UPI सिस्टम को रिप्लेस (बदल) नहीं करेगा। इसके बजाय, यह वर्तमान सिस्टम के ऊपर एक सुरक्षा और वेरिफिकेशन लेयर (Layer) के तौर पर जुड़ जाएगा।इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं: इसके आने से भारत के मौजूदा पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना पड़ेगा। यह पेमेंट इकोसिस्टम को एक ऐसा टूल देगा, जिससे ट्रांजेक्शन प्रोसेस होने से ठीक पहले यह 100% वेरिफाई किया जा सके कि संबंधित AI एजेंट यूजर की वास्तविक सहमति और तय सीमाओं के भीतर ही काम कर रहा है।आसान भाषा में समझें: यह पूरा सिस्टम कैसे काम करेगा?हालांकि इस तकनीक के पूर्ण विवरण अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार इसकी कार्यप्रणाली का प्रवाह ($Flow$) कुछ इस तरह हो सकता है:[यूजर का निर्देश] ➔ [AI असिस्टेंट द्वारा बेस्ट ऑप्शन का चुनाव] ➔ [पेमेंट रिक्वेस्ट जनरेशन] ⬇ [पेमेंट का स्वतः निष्पादन] ⬅ [UPI नेटवर्क पर ट्रांजैक्शन] ⬅ [UAP द्वारा AI क्रेडेंशियल्स का वेरिफिकेशन]कमांड: यूजर अपने एआई असिस्टेंट को कोई काम (जैसे ग्रोसरी या टिकट बुकिंग) सौंपेगा।प्रोसेस: AI असिस्टेंट इंटरनेट पर ऑप्शंस को कंपेयर करके सबसे बेस्ट डील चुनेगा और एक डिजिटल पेमेंट रिक्वेस्ट जेनरेट करेगा।वेरिफिकेशन: इस चरण में UAP लेयर एक्टिव होगी। यह तुरंत चेक करेगी कि रिक्वेस्ट भेजने वाला AI एजेंट रजिस्टर्ड, भरोसेमंद और यूजर द्वारा ऑथराइज्ड है या नहीं।फाइनल पेमेंट: वेरिफिकेशन सफल होने पर रिक्वेस्ट UPI के पास जाएगी। नियमों के आधार पर, या तो यूजर के स्क्रीन पर 'एक टैप अप्रूवल' का पॉप-अप आएगा, या फिर पहले से मंजूर (Pre-approved) की गई छोटी लिमिट वाले पेमेंट्स के मामले में ट्रांजैक्शन बिना किसी पिन या मानवीय हस्तक्षेप के अपने-आप पूरा हो जाएगा।क्या AI को मिल जाएगा आपके बैंक अकाउंट का पूरा एक्सेस?इस तकनीक का नाम सुनते ही सबसे पहला डर यह सताता है कि क्या AI हमारे पूरे बैंक खाते को खाली कर सकता है? तो इसका जवाब है— बिल्कुल नहीं।हालांकि फाइनल फ्रेमवर्क की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन आरबीआई (RBI) के कड़े सुरक्षा मानकों को देखते हुए यह सिस्टम मौजूदा ऑटोपे की तरह ही काम करेगा।खर्च की सीमा (Spending Limit): यूजर अपने बैंक अकाउंट का अनलिमिटेड एक्सेस देने के बजाय, अपने AI एजेंट के लिए एक दैनिक या प्रति-ट्रांजैक्शन खर्च की सीमा (जैसे अधिकतम ₹2,000) पहले से तय (Pre-approve) कर सकेंगे।जवाबदेही और सुरक्षा: प्रस्तावित प्रोटोकॉल में यह प्रावधान होगा कि यदि कोई AI एजेंट अपनी तय सीमाओं का उल्लंघन करता है, तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक हो जाएगा और उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। ध्यान रहे कि UAP को भारत में लाइव करने से पहले NPCI को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अंतिम सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।सुरक्षा की नई चुनौतियाँ और साइबर फ्रॉड का खतराजिस तरह तकनीक इंसानों के काम को आसान बनाती है, उसी तरह साइबर अपराधी और हैकर्स भी उसका दुरुपयोग करने के रास्ते तलाश लेते हैं।एजेंट हाइजैकिंग: यदि किसी यूजर का AI असिस्टेंट किसी मैलवेयर या बग की चपेट में आ जाता है, तो फ्रॉड करने वाले यूजर की जानकारी के बिना उसके नाम पर अवैध खरीदारी कर सकते हैं।शुरुआती जोखिम: चूंकि यह तकनीक अभी वैश्विक स्तर पर अपने बिल्कुल शुरुआती (एजेंटिक एआई) दौर में है, इसलिए कंज्यूमर प्रोटेक्शन (उपभोक्ता संरक्षण) और डेटा प्राइवेसी को लेकर वित्तीय जगत में अभी कई नई बहसें और आशंकाएं बनी हुई हैं।भारत के लिए यह तकनीक क्यों है एक ऐतिहासिक कदम?यदि NPCI का यह यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल (UAP) सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन सकता है जिसके पास 'एजेंटिक पेमेंट्स' (Agentic Payments) के लिए एक आधिकारिक और राष्ट्रीय स्तर का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। यह भारत के गौरवशाली UPI को एक ऐसे सिस्टम से बदलकर, जिसे आज हम और आप मैन्युअल रूप से उंगलियों से चलाते हैं, एक ऐसे नेक्स्ट-जेनरेशन सिस्टम में तब्दील कर देगा जहाँ हमारे भरोसेमंद AI रोबोट्स हमारे लिए वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित रूप से अंजाम दे सकेंगे।
ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई को गुरुवार (9 जुलाई) की देर शाम उनके जन्मस्थान मशहद स्थित पवित्र इमाम रज़ा दरगाह परिसर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इसके साथ ही ईरान के इतिहास के एक बड़े अध्याय का औपचारिक अंत हो गया है। 6 दिनों तक चले देशव्यापी राष्ट्रीय शोक और ईरान के अलग-अलग प्रमुख शहरों में आयोजित विशाल श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के बाद यह अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। मशहद की सड़कों पर उमड़े लाखों काले लिबास पहने श्रद्धालुओं के सैलाब ने इस अंतिम विदाई को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सार्वजनिक अंत्येष्टि में बदल दिया।लाल झंडे और प्रतिशोध के नारे: गम और गुस्से में डूबा ईरानखामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान मशहद की सड़कें जनसैलाब से पटी नजर आईं। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के ऐसे कड़े इंतजाम थे कि पूरे शहर को एक अभेद्य सुरक्षा घेरे (Fortress) में तब्दील कर दिया गया था। अंतिम यात्रा में शामिल लाखों लोग न केवल गमगीन थे, बल्कि उनके हाथों में लहराते ईरानी झंडे और लाल रंग के बैनर साफ तौर पर उनके गुस्से को बयां कर रहे थे, जिन्हें शिया परंपरा में 'प्रतिशोध और न्याय' का प्रतीक माना जाता है। भीड़ में हर तरफ खामेनेई की तस्वीरें और अमेरिका विरोधी नारे गूंज रहे थे।28 फरवरी के तेहरान हमले में हुई थी मौत; मोजतबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडरगौरतलब है कि अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को तेहरान स्थित उनके आधिकारिक आवास पर हुए एक भीषण और आत्मघाती हमले में हुई थी। इस हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें खामेनेई के परिवार के कई अन्य सदस्य भी मारे गए थे।खामेनेई के निधन के बाद देश की कमान उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को सौंपी गई है और उन्हें ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया है। हालांकि, अपनी नियुक्ति के बाद से मोजतबा अब तक एक बार भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। कूटनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि 28 फरवरी के उस घातक हमले में मोजतबा को भी गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण वे अभी स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।इराक के नजफ-करबला से होते हुए मशहद पहुंचा पार्थिव शरीरअंतिम संस्कार की रस्मों से पहले अयातुल्ला खामेनेई और उनके मारे गए परिजनों के पार्थिव शरीरों को विशेष विमान से पड़ोसी देश इराक ले जाया गया था। वहां शिया समुदाय के सबसे पवित्र स्थलों— नजफ और करबला में लाखों की भीड़ ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद, शवों को वापस ईरान के मशहद लाया गया। गुरुवार की ढलती शाम के साथ उनका ताबूत ऐतिहासिक इमाम रज़ा दरगाह के गर्भगृह में पहुंचा, जहां सर्वोच्च धार्मिक विद्वानों की मौजूदगी में अंतिम रस्में पूरी कर उन्हें दफन किया गया।अंतिम संस्कार के बीच अमेरिका और ईरान में छिड़ा सीधा सैन्य युद्धखामेनेई को दी जा रही इस अंतिम विदाई के समानांतर, खाड़ी क्षेत्र में महाशक्तियों के बीच बारूद सुलग उठा है। ईरान की संभ्रांत सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अमेरिका पर एक बेहद गंभीर और सीधा आरोप लगाया है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी वायुसेना ने तेहरान से मशहद जाने वाली मुख्य रेलवे लाइन के दो रणनीतिक पुलों पर बमबारी की, ताकि खामेनेई के अंतिम संस्कार में बाधा पहुंचाई जा सके और देश में अराजकता फैलाई जा सके।दूसरी तरफ, वाशिंगटन में अमेरिकी प्रशासन ने इन हवाई हमलों की पुष्टि करते हुए सफाई दी है। पेंटागन का कहना है कि उसकी इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य अंतिम संस्कार को रोकना नहीं, बल्कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रही ईरान की आक्रामक सैन्य क्षमताओं और मिसाइल ठिकानों को कमजोर करना था।अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवारअमेरिका के इस कदम के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने मध्य पूर्व (Middle East) के तीन देशों— कुवैत, बहरीन और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों (US Military Bases) पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इस सीधे टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ सप्ताह पहले ही दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम (Ceasefire) और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए एक प्रारंभिक सहमति बनी थी, लेकिन इस हालिया सैन्य गोलाबारी ने उस कूटनीतिक समझौते को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है।डोनाल्ड ट्रंप की खुली धमकी: अब कोई समझौता मान्य नहींइस भीषण सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच पहले हुआ कोई भी प्रारंभिक समझौता अब प्रभावी या मान्य नहीं माना जा सकता। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि यदि दोनों देशों के बीच यह सैन्य टकराव तुरंत नहीं थमा, तो भविष्य में किसी भी कूटनीतिक या शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।ईरान के लिए खामेनेई का यह अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक विदाई नहीं थी, बल्कि यह पूरी दुनिया के सामने देश की राजनीतिक एकजुटता और सैन्य शक्ति प्रदर्शन का मंच बन गया है। अब देखना यह होगा कि खामेनेई के बाद मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान इस नए और आसन्न युद्ध संकट से खुद को कैसे बाहर निकालता है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था एक बार फिर अनिश्चितताओं और गंभीर चुनौतियों के चक्रव्यूह में फंसी नजर आ रही है। इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund - IMF) ने बुधवार (8 जुलाई 2026) को अपनी ताजा रिपोर्ट में इस साल के लिए वैश्विक विकास दर (Global Growth Rate) के अनुमान को घटा दिया है।आईएमएफ ने इस साल की ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान को 3.1 फीसदी से घटाकर अब 3 फीसदी कर दिया है। वहीं, साल 2027 के लिए यह अनुमान 3.4 फीसदी लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह रफ्तार साल 2024-25 में देखी गई 3.5% की औसत वृद्धि दर से काफी कम है।हालांकि, इस चौतरफा निराशा के बीच भारत के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर है। वैश्विक दबावों के चलते आईएमएफ ने भारत के ग्रोथ रेट का अनुमान मामूली रूप से 6.5% से घटाकर 6.4% जरूर किया है, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था (Fastest Growing Major Economy) का अपना तमगा बरकरार रखेगा। इतना ही नहीं, आईएमएफ ने भारत की आंतरिक मजबूती को देखते हुए साल 2027 के लिए देश की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है।आइए आसान भाषा में समझते हैं आईएमएफ की इस रिपोर्ट के मायने और जानते हैं कि जब पूरी दुनिया की रफ्तार थम रही है, तो भारत कैसे दहाड़ रहा है।'युद्ध और टेक्नोलॉजी' के विरोधाभासी जाल में फंसी दुनिया: IMFआईएमएफ द्वारा जुलाई के लिए जारी की गई ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट’ (World Economic Outlook Update) रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था को ‘युद्ध और टेक्नोलॉजी के विरोधाभासी हालात’ में फंसा हुआ बताया गया है।एक तरफ युद्ध का साया: मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ता सैन्य संघर्ष और यूक्रेन युद्ध वैश्विक सप्लाई चेन को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। मिडिल ईस्ट दुनिया के एनर्जी मार्केट का केंद्र है, इसलिए वहां तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) और नेचुरल गैस की सप्लाई पर पड़ता है। तेल महंगा होने से माल ढुलाई और उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जिससे महंगाई (Inflation) लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।दूसरी तरफ AI की उम्मीद: इस निराशाजनक माहौल के बीच राहत की एकमात्र बात यह है कि दुनिया भर के उद्योगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बहुत तेजी से अपनाया जा रहा है। एआई में बढ़ते भारी निवेश ने वैश्विक उत्पादकता (Productivity) को बूस्ट किया है, जिससे मंदी का असर कुछ हद तक कम हुआ है। हालांकि, आईएमएफ ने यह चेतावनी भी दी है कि एआई सेक्टर में जरूरत से ज्यादा ओवर-वैल्यूएशन या सट्टा निवेश भविष्य में आर्थिक गुब्बारा (Bubble) फटने का कारण भी बन सकता है।जब दुनिया हो रही है धीमी, तो भारत की रफ्तार क्यों है तेज?आईएमएफ और आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की इस मजबूत आर्थिक चाल के पीछे 5 मुख्य स्तंभ काम कर रहे हैं:1. मजबूत घरेलू मांग (Robust Domestic Demand)दुनिया की अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाएं (जैसे चीन, जर्मनी, जापान) मुख्य रूप से अपने निर्यात (Exports) पर निर्भर हैं, जिससे वैश्विक मंदी आते ही उनकी कमर टूट जाती है। इसके विपरीत, भारत की अर्थव्यवस्था का असली इंजन हमारी घरेलू मांग है। देश में बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, तीव्र शहरीकरण, मध्यम वर्ग (Middle Class) का अभूतपूर्व विस्तार और लगातार बढ़ता उपभोग (Consumption) हमारे बाजारों को मंदी के झटकों से पूरी तरह सुरक्षित रखता है।2. इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का रिकॉर्ड निवेशभारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से देश के बुनियादी ढांचे यानी सड़कों, नेशनल हाईवेज, रेलवे नेटवर्क, आधुनिक बंदरगाहों (Ports) और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर पर बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) कर रही है। इस भारी-भरकम सार्वजनिक निवेश से न केवल देश में लाखों नए रोजगार पैदा हो रहे हैं, बल्कि निजी क्षेत्र (Private Investment) भी निवेश के लिए आकर्षित हो रहा है।3. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 'मेक इन इंडिया' का दम'मेक इन इंडिया' अभियान और उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) जैसी रणनीतिक योजनाओं ने इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल और डिफेंस प्रोडक्शन (रक्षा उत्पादन) जैसे कोर सेक्टर्स में घरेलू और विदेशी निवेश की बाढ़ ला दी है। वैश्विक कंपनियां इस समय 'चीन प्लस वन' ($China +1$) की रणनीति के तहत चीन के विकल्प के रूप में भारत को अपना नया मैन्युफैक्चरिंग हब बना रही हैं।4. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की क्रांतिभारत का डिजिटल इकोसिस्टम आज वैश्विक मंच पर एक मिसाल बन चुका है। यूपीआई (UPI), डिजिटल पहचान प्रणालियों, डिजिटल पेमेंट्स और सरकारी योजनाओं के सीधे डिजिटलाइजेशन (DBT) ने देश की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति दी है। इसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से फॉर्मल (औपचारिक) हुई है, जिससे सरकार का टैक्स कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और व्यापार में पारदर्शिता बढ़ी है।5. सर्विस सेक्टर की अटूट बादशाहतआईटी सर्विसेज ($IT Services$), फिनटेक, फाइनेंशियल सर्विसेज और भारत में तेजी से खुल रहे विदेशी कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) देश की अर्थव्यवस्था को एक मजबूत रीढ़ प्रदान कर रहे हैं। दुनिया की शीर्ष फॉर्च्यून 500 कंपनियां भारत के टैलेंट पूल से अपनी कोर टेक्नोलॉजी और बैक-ऑफिस सेवाएं संचालित कर रही हैं, जिससे देश में लगातार विदेशी मुद्रा का प्रवाह बना हुआ है।भारत का अनुमान 0.1% क्यों घटा और 2027 के लिए उम्मीदें क्यों बढ़ीं?आईएमएफ ने भारत के चालू वित्त वर्ष के अनुमान में जो 0.1% की बहुत मामूली कटौती की है, उसका कारण भारत की कोई आंतरिक कमजोरी नहीं है। यह पूरी तरह से बाहरी वैश्विक कारकों (External Factors) की वजह से है। दुनिया की रफ्तार धीमी होने से भारतीय एक्सपोर्ट्स पर थोड़ा असर पड़ सकता है, और मिडिल ईस्ट के तनाव से भारत का तेल आयात बिल (Import Bill) बढ़ सकता है।लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आईएमएफ ने साल 2027 के लिए भारत की विकास दर को बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक संस्था को भारत के आर्थिक सुधारों, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्पादन क्षमता पर पूरा भरोसा है। यदि आने वाले समय में वैश्विक भू-राजनीतिक हालात सामान्य होते हैं, तो भारत की विकास यात्रा नए आयाम स्थापित करेगी।
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून ($South-West Monsoon$) पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और इसने पूरे देश को अपनी आगोश में ले लिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 10 जुलाई 2026 को उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का 'हाई अलर्ट' जारी किया है।आईएमडी के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के मुताबिक, हालांकि जुलाई के पूरे महीने में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) से थोड़ी कम यानी लगभग 94% रहने की उम्मीद है, लेकिन स्थानीय स्तर पर (Local Level) होने वाली मूसलाधार बारिश शहरों में जलभराव (Waterlogging), बाढ़ और खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं देश भर का विस्तृत राज्यवार मौसम बुलेटिन।दिल्ली-एनसीआर: अगले 48 घंटे कैसा रहेगा मौसम?दिल्ली और इसके आस-पास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है।क्या कहते हैं वैज्ञानिक: आईएमडी दिल्ली के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. नरेश यादव के अनुसार, एक्टिव मानसून ट्रफ के चलते दिल्ली में आने वाले दिनों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहेगा।शुक्रवार का अलर्ट: शुक्रवार (10 जुलाई) को दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के आसार हैं, जिसके लिए विभाग ने 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी किया है। इस दौरान आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और अधिकतम तापमान 34C से 36C के बीच रहने का अनुमान है।शनिवार का पूर्वानुमान: शनिवार को भी हल्की बारिश जारी रह सकती है, हालांकि इसके लिए कोई विशेष चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया गया है।उत्तराखंड में 'रेड' और 'ऑरेंज' अलर्ट; पहाड़ों पर सफर न करने की सलाहपहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मौसम विभाग ने अगले 2 से 3 दिनों तक अत्यंत भीषण बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी दी है। कई संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में कम समय में अत्यधिक वर्षा (Cloud Burst जैसी स्थिति) होने की संभावना है।10 जुलाई का रेड अलर्ट: कुमाऊं के मैदानी क्षेत्रों समेत उधम सिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जिलों में आज 'रेड अलर्ट' (Red Alert) प्रभावी रहेगा। इन जिलों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।ऑरेंज अलर्ट: राज्य के बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल और राजधानी देहरादून समेत कई मध्य पर्वतीय जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया गया है। भूस्खलन (Landslide) के खतरे को देखते हुए पर्यटकों को पहाड़ों की यात्रा टालने की हिदायत दी गई है।आगे का हाल: 10 से 13 जुलाई तक राज्य के शेष अन्य जिलों में 'येलो अलर्ट' रहेगा। अगले 5 से 6 दिनों तक पूरे सूबे में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है।राज्यवार देश के मौसम का विस्तृत हाल1. उत्तरी भारतउत्तराखंड के अलावा पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में भी मानसून पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। 10 जुलाई को इन सभी राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश (UP) के इलाकों में मूसलाधार बारिश के चलते नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है।2. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारतबिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मानसून के पैर पूरी तरह जम चुके हैं।बिजली गिरने का खतरा: पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और बिहार के कई जिलों में शुक्रवार को बहुत भारी बारिश के साथ वज्रपात (आकाशीय बिजली) का तांडव देखने को मिल सकता है।तेज हवाएं: हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में मूसलाधार बारिश जारी रहेगी। इस दौरान 30 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से चक्रवाती हवाएं चल सकती हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और नागालैंड) में भी भारी बारिश की चेतावनी है।3. पश्चिमी भारतराजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में मानसून की मिश्रित स्थिति बनी हुई है।भारी बारिश: पूर्वी राजस्थान, गुजरात के तटीय इलाकों और कोंकण-गोवा क्षेत्र में भारी बारिश (Heavy Rainfall) की संभावना है। मुंबई और मायानगरी के आसपास के इलाकों में भी मानसून सक्रिय है।सूखे जैसी स्थिति: पश्चिमी राजस्थान और गुजरात के कुछ आंतरिक हिस्सों में बारिश काफी कम देखी जा रही है, जिससे वहां तापमान सामान्य से ऊंचा बना रहेगा।4. मध्य भारतमध्य प्रदेश (MP) और छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है। विशेषकर पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में अगले 24 घंटों के भीतर भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे निचले इलाकों में पानी भर सकता है।5. दक्षिणी भारतदक्षिण के राज्यों केरल, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में मानसून का प्रदर्शन शानदार बना हुआ है। कर्नाटक और केरल के तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी बौछारें पड़ने की उम्मीद है। चेन्नई जैसे बड़े महानगरों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों को देखते हुए तटीय इलाकों के मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी दी गई है।
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वर्चुअल माध्यम से ‘डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए देश-विदेश के उद्योग जगत से त्रिपुरा की विकास यात्रा का सहभागी बनने और राज्य में निवेश करने का आह्वान किया।
उत्तर प्रदेश में मानसून की आक्रामक एंट्री के साथ ही हाहाकार मचा हुआ है। पश्चिमी और मध्य यूपी में मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए भारी बारिश के अलर्ट के बीच बदायूं जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भयंकर जलभराव को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बदायूं के जिलाधिकारी (DM) ने कक्षा 8वीं तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को आगामी दो दिनों के लिए पूरी तरह से बंद रखने का आपातकालीन आदेश जारी कर दिया है। लगातार हो रही इस मानसूनी आफत ने पूरे जिले की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।10 और 11 जुलाई को स्कूलों में पूर्ण अवकाश: नियम तोड़ा तो स्कूल प्रबंधन पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाईबदायूं के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) नवीन कुमार ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि जिलाधिकारी के विशेष निर्देश पर मौसम की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए 10 जुलाई शुक्रवार और 11 जुलाई शनिवार को कक्षा एक से आठ तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। शिक्षा विभाग ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि सभी बोर्डों के विद्यालय इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। यदि किसी भी शिक्षण संस्थान ने नियमों का उल्लंघन कर बच्चों को स्कूल बुलाया, तो उनके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत तुरंत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।12 जुलाई को रविवार के बावजूद खुलेंगे स्कूल: 'हरितमा ऐप' पर जियोटैगिंग के साथ मनेगा पौधरोपण उत्सवहालांकि, इस मानसूनी छुट्टी के बीच एक विशेष प्रशासनिक व्यवस्था भी की गई है। बीएसए नवीन कुमार ने स्पष्ट किया कि 12 जुलाई रविवार को प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी 'वृहद पौधरोपण अभियान' को सफल बनाने के लिए सभी स्कूल अनिवार्य रूप से खोले जाएंगे। इस दिन सभी शिक्षक, छात्र और उनके अभिभावक एक साथ मिलकर विद्यालय परिसरों में सघन पौधरोपण करेंगे। रोपे गए इन पौधों की लाइव प्रगति और प्रामाणिकता दर्ज करने के लिए सरकार के आधिकारिक 'हरितमा ऐप' (Haritma App) पर जियोटैगिंग (Geotagging) कर उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया और विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप्स पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।बदायूं में 9 दिन में रिकॉर्ड 197.75 MM मूसलाधार बारिश: उफने नाले, 2 फीट तक डूबी शहर की गलियांमौसम के आंकड़ों की बात करें तो जुलाई के शुरुआती नौ दिनों के भीतर ही बदायूं में रिकॉर्ड 197.75 मिलीमीटर (MM) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि इस महीने की औसत वर्षा (268.50 MM) के बेहद करीब है। गुरुवार सुबह तक ही जिले में 46.75 एमएम और बदायूं शहर में अकेले 57 एमएम झमाझम बारिश दर्ज की गई। इस मूसलाधार बरसात से जहां एक तरफ लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। चौक नाले उफनकर मुख्य मार्गों पर आ गए हैं, जिससे गांधी ग्राउंड समेत शहर की प्रमुख गलियों में दो-दो फीट तक पानी भर गया है और ग्रामीण इलाकों में लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।वीआईपी कॉलोनियों और मुख्य बाजारों में घुसा पानी: फसलों को भारी नुकसान, सब्जियों के दाम आसमान परजल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यह मानसूनी बारिश आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। शहर की पॉश कॉलोनियों से लेकर प्रमुख व्यावसायिक बाजारों तक में पानी जमा हो गया है, जिससे सैकड़ों दुकानों और घरों के अंदर पानी घुसने से व्यापारियों और आम लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कृषि क्षेत्र की बात करें तो इस बारिश से धान की रोपाई के काम में तो तेजी आई है, लेकिन मक्के की खड़ी फसल, हरी सब्जियों और टमाटर के खेतों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बर्बादी का सीधा असर स्थानीय मंडियों पर पड़ा है, जिससे बाजार में हरी सब्जियों की कीमतों में अचानक भारी उछाल आ गया है।कानपुर देहात में भी आज कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित: बीएसए ने जारी किया आदेशबदायूं के साथ-साथ मध्य उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में भी मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी का बड़ा असर देखा जा रहा है। कानपुर देहात के बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पांडेय ने 10 जुलाई को मूसलाधार बारिश की प्रबल संभावना को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर कक्षा 1 से 8वीं तक के सभी बोर्डों (UP Board, CBSE, ICSE) के स्कूलों में आज एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि मौसम की पल-पल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और छात्रों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
भारी बारिश और जलभराव के चलते मेरठ-हापुड़ समेत 9 जिलों में आज स्कूल बंद, डीएम का सख्त एक्शन
उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने अब एक बेहद गंभीर और आक्रामक रूप ले लिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अगले 24 घंटों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का 'रेड अलर्ट' (Red Alert) जारी किए जाने के बाद, शासन और प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पश्चिमी यूपी के मेरठ, हापुड़ और बागपत समेत नौ प्रमुख जिलों के जिलाधिकारियों (DM) ने आज, 10 जुलाई 2026 शुक्रवार को कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को पूरी तरह से बंद रखने का एक आपातकालीन आदेश जारी कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इन क्षेत्रों के जनजीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा है।इन 9 जिलों में कक्षा 12वीं तक पूर्ण अवकाश घोषित: आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर होगी एफआईआरप्रशासनिक सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जिन नौ प्रमुख जिलों में आज स्कूल बंद रखने का सख्त फैसला लिया गया है, उनमें मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, हापुड़ और कासगंज शामिल हैं, जहां 12वीं तक के सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) ने सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रबंधकों को निर्देश जारी किया है कि वे जिलाधिकारी के इस आदेश का कड़ाई से और बिना किसी लापरवाही के अनुपालन सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल या कॉलेज इस आपातकालीन आदेश का उल्लंघन करता हुआ पाया गया या बच्चों को स्कूल बुलाता है, तो उस शिक्षण संस्थान के खिलाफ महामारी और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत तत्काल कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।बदायूं में 2 दिनों के लिए कक्षा 8 तक के स्कूल बंद: 12 जुलाई को हरितमा ऐप पर जियोटैगिंग के साथ खुलेंगे संस्थानइसी बीच, बदायूं जिले से एक और बड़ी प्रशासनिक अपडेट सामने आई है। बदायूं के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार ने सूचित किया है कि डीएम के विशेष आदेश पर मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के सभी विद्यालयों में शुक्रवार 10 जुलाई और शनिवार 11 जुलाई को दो दिनों का पूर्ण अवकाश घोषित किया गया है। हालांकि, रविवार 12 जुलाई को एक विशेष राजकीय व्यवस्था के तहत सभी स्कूल खोले जाएंगे। इस दिन प्रदेश सरकार के वृहद पौधरोपण अभियान को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षक, छात्र और उनके अभिभावक मिलकर स्कूल परिसरों में पौधे लगाएंगे। इन पौधों की लाइव जियोटैगिंग (Geotagging) करने के लिए सरकार के आधिकारिक 'हरितमा ऐप' (Haritma App) पर तस्वीरें अपलोड की जाएंगी और उन्हें सोशल मीडिया व विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप्स पर अनिवार्य रूप से साझा करना होगा।मौसम विभाग की खौफनाक चेतावनी: 11 जुलाई तक पूरे यूपी में मूसलाधार आफत, गिरेगा पाराआईएमडी लखनऊ (IMD Lucknow) के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, संभल और बदायूं समेत कई जिलों में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है, जहां अत्यधिक भारी वर्षा की आशंका जताई गई है। मौसम कार्यालय ने पूरे प्रदेश के लिए बुलेटिन जारी करते हुए कहा है कि 11 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे अगले दो से तीन दिनों के भीतर तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। राजधानी लखनऊ में भी बृहस्पतिवार को रिकॉर्ड 27.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे वहां की सापेक्ष आर्द्रता 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों में अगले 24 घंटों में कड़कड़ाती बिजली और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।बुलंदशहर में दीवार गिरने से बड़ा हादसा, गाजियाबाद-नोएडा में जलभराव से धंसी सड़केंइस मानसूनी बारिश ने उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तबाही की कहानियां भी लिखनी शुरू कर दी हैं। बुलंदशहर के पुलिस क्षेत्राधिकारी शोभित कुमार ने बताया कि जिले के मुंडाखेड़ा गांव में शाम करीब पांच बजे मूसलाधार बारिश के दबाव के कारण एक विशाल दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। इस मलबे के नीचे एक खाली भूखंड के बगल में अस्थायी तंबू लगाकर रह रहे छह मजदूर बुरी तरह दब गए। स्थानीय पुलिस और रेस्क्यू टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर सभी को बाहर निकाला, लेकिन दुर्भाग्यवश इस दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली से सटे गाजियाबाद और नोएडा में भी भारी बारिश से सड़कें समंदर में तब्दील हो गई हैं, जिससे घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहा। गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर-13 इलाके में तो पानी के भारी दबाव के चलते एक मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा गहरे गड्ढे में तब्दील होकर धंस गया, जिससे प्रशासन ने उस रूट को तुरंत सील कर दिया है।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक संदेश दिया है। कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के 41वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राज्यपाल ने साफ कहा कि युवतियों को प्रशासनिक सेवा (IAS) या शिक्षक जैसे बड़े पदों पर जाने की इच्छा रखने से पहले एक 'विशेषज्ञ मां' (Expert Mom) बनने का गुण सीखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यावसायिक सफलता कभी भी पारिवारिक जिम्मेदारियों और संस्कारों की कीमत पर नहीं मिलनी चाहिए। बेटियों को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनने के साथ-साथ अपनी मां से वे मूल्य भी सीखने चाहिए जिससे वे शादी के बाद अपने नए परिवार को सुचारू रूप से संभाल सकें।सास हलुआ बनाने को कहे तो मोबाइल न निकालें बेटियां: राज्यपाल ने दिया घरेलू कला का व्यावहारिक उदाहरणअपने संबोधन के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज की आधुनिक जीवनशैली पर चुटकी लेते हुए एक बेहद व्यावहारिक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कतई नहीं होना चाहिए कि शादी के बाद जब सास घर में हलुआ बनाने को बोले, तो बहू तुरंत अपना मोबाइल फोन निकालकर यूट्यूब पर रेसिपी देखने लगे और अधपका खाना तैयार कर दे। उन्होंने बेटियों को सीख दी कि घर के कामकाज और खाना बनाने की बुनियादी कला हर किसी को आनी चाहिए। राज्यपाल ने भारतीय पारिवारिक व्यवस्था की वकालत करते हुए कहा कि बहुएं अपनी सास की जितनी सेवा करेंगी, घर में उतनी ही सुख-शांति रहेगी। इससे नौकरी करने में आने वाली बाधाएं और छोटी-मोटी पारिवारिक समस्याएं अपने आप ही खत्म हो जाएंगी।सभी यूनिवर्सिटी तैयार करें 'गर्भसंस्कार' का सिलेबस: देश में बढ़ती दिव्यांगता पर जताई गहरी चिंतादीक्षांत समारोह के मंच से राज्यपाल ने समाज के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ी के चरित्र निर्माण को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक निर्देश जारी किया। उन्होंने सीएसजेएमयू सहित उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम में 'गर्भसंस्कार' (Garbh Sanskar) से जुड़ा एक विशेष सिलेबस शामिल करने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस पाठ्यक्रम में हर गर्भवती महिला को शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए। देश में दिव्यांगता की दर 3 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी होने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शहरों से लेकर गांवों तक की हर गर्भवती महिला को समय पर अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए और डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। कई बार गर्भ में शिशु के अंगों का विकास सही से नहीं हो पाता, ऐसे में चिकित्सकीय परामर्श पर सख्ती से अमल करना अनिवार्य है।शादी के बाद भी जारी रखें शिक्षा और करियर: मेडल जीतने में बेटियों ने रचा 82% का स्वर्णिम इतिहासछात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए आनंदीबेन पटेल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि युवतियों को शादी के बंधन में बंधने के बाद अपनी शिक्षा और करियर को बीच में बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखें और अपने अर्जित ज्ञान व कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण (Nation Building) के लिए करें। इस भव्य दीक्षांत समारोह में कुल 1,07,713 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिसमें सबसे गौरवशाली बात यह रही कि कुल पदकों (Medals) में से लगभग 82 प्रतिशत मेडल बेटियों ने अपने नाम किए। राज्यपाल ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छात्राओं की जमकर सराहना की और उन्हें समाज का असली मार्गदर्शक बताया।माता-पिता की निगरानी में थोड़ी सी चूक भी बर्बाद कर सकती है भविष्य: गिरते नैतिक मूल्यों पर कड़ा प्रहारअभिभावकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए राज्यपाल ने आगाह किया कि बच्चों का स्कूल या कॉलेज में एडमिशन करवा देने मात्र से माता-पिता का कर्तव्य पूरा नहीं हो जाता। उन्होंने कहा, अभिभावकों को हर पल यह पता होना चाहिए कि उनके बच्चे शैक्षणिक संस्थानों में जाने के बाद क्या कर रहे हैं। आपकी निगरानी में हुई एक छोटी सी चूक भी उनके पूरे भविष्य को अंधकार में धकेल सकती है। समाज में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और घरेलू हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने एक बेहद दुखद घटना का भी संदर्भ दिया जहां एक बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने कहा कि यदि देश में डिग्रियां बढ़ रही हैं लेकिन नैतिक मूल्य गिर रहे हैं और महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध जारी हैं, तो यह हमारी शिक्षा प्रणाली की वास्तविक और चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर चरित्र निर्माण का माध्यम बनाना होगा।
ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड पर खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम की वापसी की तमाम उम्मीदें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। एक बार फिर भारतीय बल्लेबाजी क्रम के बेहद निराशाजनक और फ्लॉप प्रदर्शन के चलते मेहमान टीम को 9 विकेट की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। इस एकतरफा जीत के साथ ही इंग्लैंड ने पांच मैचों की इस हाई-प्रोफाइल टी20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा झटका यह है कि पिछले 7 सालों के क्रिकेट इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब टीम इंडिया ने लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवाई हैं, जिसने टीम के मौजूदा टी20 फॉर्मेट और रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।श्रेयस अय्यर की 80 रनों की जुझारू पारी भी गई बेकार, बाकी बल्लेबाजों ने किया सरेंडरलगातार मिल रही हार के बाद इस करो या मरो वाले मुकाबले में भारतीय टॉप ऑर्डर से एक दमदार और एकजुट प्रदर्शन की उम्मीद थी। इसके विपरीत, पूरी बैटिंग यूनिट इंग्लिश गेंदबाजों के सामने पूरी तरह लाचार नजर आई। इस पूरे खराब दौर में सिर्फ कार्यवाहक कप्तान श्रेयस अय्यर ही अकेले फाइटर की तरह क्रीज पर डटे रहे। अय्यर ने मुश्किल परिस्थितियों में सूझबूझ का परिचय देते हुए 49 गेंदों में नाबाद 80 रनों की एक बेहद शानदार और जुझारू पारी खेली, जिसने टीम को एक बेहद शर्मनाक स्कोर पर सिमटने से बचा लिया। हालांकि, दूसरे छोर से किसी भी बल्लेबाज का साथ न मिलने के कारण भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवरों में केवल 158 रनों का मामूली स्कोर ही खड़ा कर सकी, जो ब्रिस्टल की इस खूबसूरत बैटिंग पिच पर बहुत कम था।हैरी ब्रूक और फिल सॉल्ट का तूफान: 37 गेंद पहले इंग्लैंड ने एकतरफा अंदाज में जीता मैच159 रनों के इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लिश टीम के लिए राह बिल्कुल आसान रही। ओपनर फिल सॉल्ट और कप्तान हैरी ब्रूक ने मैदान के चारों तरफ आकर्षक और आक्रामक स्ट्रोक्स लगाते हुए भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं। दोनों ने शुरू से ही रन चेज को पूरी तरह से एकतरफा बना दिया और भारतीय गेंदबाजों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। कप्तान हैरी ब्रूक ने नाबाद 79 और फिल सॉल्ट ने नाबाद 59 रनों की आतिशी पारियां खेलकर अपनी टीम को 37 गेंद शेष रहते ही एक ऐतिहासिक और नौ विकेट की विशाल जीत दिला दी। यह हार साफ दर्शाती है कि खेल के सबसे छोटे प्रारूप में भारतीय टीम इस समय इंग्लैंड के मुकाबले कितनी पीछे छूट गई है।'हम रणनीति को मैदान पर लागू करने में पूरी तरह फेल रहे'—हार के बाद बोले कप्तान श्रेयस अय्यरमैच के बाद हुई पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में कप्तान श्रेयस अय्यर ने अपनी निराशा छुपाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि 158 रन का स्कोर बोर्ड पर बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं था। श्रेयस ने गेंदबाजों के बचाव और अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा, यह नतीजा हमारे लिए बेहद निराशाजनक है। जब हम गेंदबाजी करने उतरे, तो मैंने गेंदबाजों से साफ कहा था कि वे अपनी लाइन और लेंथ को लगातार रिपीट करें, क्योंकि मिडिल और लेग स्टंप के टॉप पर रन बनाना इस पिच पर आसान नहीं था। लेकिन हमारे गेंदबाज उस प्लान को मैदान पर एक्जीक्यूट करने में बुरी तरह विफल रहे, जिसका नतीजा यह हुआ कि विपक्षी टीम ने इतनी आसानी और तेजी से इस लक्ष्य को हासिल कर लिया।संजू सैमसन की होगी वापसी? 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के फ्लॉप शो के बाद प्लेइंग इलेवन पर उठे सवालअब भारतीय टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती साउथैम्पटन में होने वाले पांचवें और अंतिम टी20 मैच में अपनी साख बचाने की होगी। सीरीज हारने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारतीय प्लेइंग इलेवन (Playing XI) में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है या नहीं। युवा सनसनी के रूप में टीम में शामिल किए गए 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को मौका देने का दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया है। हालांकि इस युवा खिलाड़ी ने प्रतिभा की झलक जरूर दिखाई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव उनके लिए फिलहाल काफी मुश्किल साबित हो रहा है। ऐसे में क्रिकेट फैंस और विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अगले मैच में अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन (Sanju Samson) को अंतिम एकादश में मौका देकर बल्लेबाजी को मजबूती दी जाएगी।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के नॉकआउट चरण में इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी मोरक्कन फुटबॉल टीम को एक बहुत बड़ा और तगड़ा झटका लगा है। फ्रांस के खिलाफ होने वाले हाई-प्रोफाइल क्वार्टर फाइनल मुकाबले से ठीक पहले टीम के सबसे इन-फॉर्म और खतरनाक अटैकर इस्माइल सैबारी (Ismael Saibari) आधिकारिक तौर पर टीम से बाहर हो गए हैं। मैसाचुसेट्स के खेल मैदान पर होने वाले इस ऐतिहासिक मैच में मोरक्को को अपने इस स्टार खिलाड़ी की कमी बेहद खलने वाली है। चिकित्सा टीम और कोच द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सैबारी की हैमस्ट्रिंग इंजरी (Hamstring Injury) इतनी गंभीर है कि वे इस महत्वपूर्ण मैच के लिए मैदान पर उतरने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं।कनाडा के खिलाफ मैच में लगी थी चोट: सिर्फ 22 मिनट में छोड़ना पड़ा था मैदानइस 25 वर्षीय होनहार फॉरवर्ड खिलाड़ी के चोटिल होने का यह पूरा वाकया कनाडा के खिलाफ राउंड ऑफ 16 के बेहद कड़े मुकाबले के दौरान हुआ था। मैच में अभी केवल 22 मिनट का ही खेल पूरा हुआ था कि एक तेज अटैकिंग रन लेते समय इस्माइल सैबारी अचानक मैदान पर ही रुक गए और उन्होंने दर्द से कराहते हुए अपने पैर को पकड़ लिया। उन्होंने तुरंत टीम के मेडिकल स्टाफ को इशारा किया कि वे अब आगे खेल जारी नहीं रख पाएंगे, जिसके बाद उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया। तभी से मोरक्को के फुटबॉल प्रेमियों और खेल विश्लेषकों के बीच इस बात की चिंता चरम पर थी कि क्या वे फ्रांस जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच के लिए समय पर फिट हो पाएंगे या नहीं।मुख्य कोच मोहम्मद ओउआबी ने की पुष्टि: वर्ल्ड कप कैंपेन खत्म होने का मंडराया खतरामुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मोरक्को के मुख्य कोच मोहम्मद ओउआबी (Mohamed Ouabi) ने खेल जगत की इन आशंकाओं पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी। कोच ने बेहद निराश मन से पुष्टि की कि दो मैचों के बीच का समय बहुत कम होने के कारण सैबारी की रिकवरी समय पर पूरी नहीं हो सकी है, जिसके चलते 'लेस ब्लेस' (फ्रांसीसी टीम) के खिलाफ उनका खेलना पूरी तरह नामुमकिन हो चुका है। हालांकि, कोच ओउआबी ने एक उम्मीद की किरण जगाते हुए कहा कि वे प्रार्थना कर रहे हैं कि सैबारी की यह चोट उनके पूरे वर्ल्ड कप कैंपेन को यहीं खत्म न करे और यदि मोरक्को आगे क्वालीफाई करता है तो वे वापसी कर सकें। टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज में लगातार गोल दागकर मोरक्को को शीर्ष पर पहुंचाने वाले खिलाड़ी का बाहर होना एटलस लायंस के लिए एक अपूरणीय क्षति है।सौफियाने रहीमी संभालेंगे सैबारी का मोर्चा: कप्तान अचरफ हकीमी के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारीइस्माइल सैबारी की अनुपस्थिति ने मोरक्कन टीम के कॉम्बिनेशन और सिलेक्शन के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, विशेष रूप से तब जब सामने डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस जैसी दुनिया की सबसे आक्रामक टीम खड़ी हो। इस शून्य को भरने के लिए मुख्य कोच ने स्टार खिलाड़ी सौफियान रहीमी (Soufiane Rahimi) को फ्रंटलाइन पर भेजने का फैसला किया है। रहीमी से अब अटैकिंग थर्ड में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद की जा रही है ताकि टीम अपनी उसी आक्रामक रफ्तार और सीधे अप्रोच को बरकरार रख सके जिसने उन्हें क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाया है। 2022 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल के इस रीमैच में, जहां फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 से हराया था, कप्तान अचरफ हकीमी (Achraf Hakimi) की लीडरशिप वाली इस टीम के पास खुद को साबित करने और पुरानी हार का बदला लेने की बहुत बड़ी चुनौती होगी।
फ्रांस ने 2-0 से जीतकर FIFA वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में किया क्वालीफाई, एमबाप्पे ने रचा इतिहास
मैसाचुसेट्स: फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के एक बेहद रोमांचक और हाई-वोल्टेज क्वार्टर फाइनल मुकाबले में गत चैंपियन फ्रांस ने मोरक्को की मजबूत चुनौती को 2-0 से ध्वस्त करते हुए सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया है। मैसाचुसेट्स के खचाखच भरे स्टेडियम में खेले गए इस नॉकआउट मैच में दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को विश्व स्तरीय खेल देखने को मिला। डिडिएर डेसचैम्प्स की रणनीतिक कप्तानी वाली फ्रांसीसी टीम ने मैच की शुरुआत से ही मोरक्को पर अपना दबदबा बनाए रखा। हालांकि मोरक्को के अभेद्य डिफेंस और गोलकीपर यासीन बौनू ने एक घंटे तक फ्रांस को गोल करने से रोके रखा, लेकिन अंततः दूसरे हाफ में फ्रांस के आक्रामक हमलों के सामने मोरक्को की दीवार ढह गई।पहले हाफ में बौनू ने रोका एमबाप्पे का पेनल्टी शॉट, मोरक्को ने दिखाई गजब की हिम्मतमैच की पहली सीटी बजने के साथ ही फ्रांस ने गेंद पर अपना शत-प्रतिशत नियंत्रण (Possession) स्थापित कर लिया और पहले हाफ में लगातार कई खतरनाक मौके बनाए। रियल मैड्रिड के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे ने शुरुआती मिनटों में ही मोरक्को के गोलकीपर यासीन बौनू की परीक्षा ली। इसके बाद डेयोट उपामेकानो और डिज़ायर डूए के शक्तिशाली शॉट्स को भी मोरक्को के डिफेंस ने बड़ी मुस्तैदी से नाकाम किया। मैच में असली ट्विस्ट तब आया जब आधे घंटे के खेल के बाद नौसेर मज़राउई द्वारा बॉक्स के अंदर फाउल किए जाने पर फ्रांस को एक महत्वपूर्ण पेनल्टी मिली। पेनल्टी लेने आए कप्तान एमबाप्पे ने एक हल्का स्पॉट किक लगाया, जिसका मोरक्को के गोलकीपर बौनू ने सही अंदाजा लगाकर शानदार बचाव कर लिया। इस पेनल्टी सेव ने मैच में डेडलॉक बनाए रखा और मोरक्को के खेमे में एक नया आत्मविश्वास भर दिया।छह मिनट का वो जादुई स्पेल: एमबाप्पे ने दागा 20वां वर्ल्ड कप गोल, डेम्बेले ने पक्की की जीतपेनल्टी मिस करने के बाद भी फ्रांस ने अपना आपा नहीं खोया और मोरक्को को उनके ही हाफ में डिफेंस करने पर मजबूर कर दिया। वालिद रेग्रागुई की मोरक्कन टीम कभी-कभार होने वाले काउंटरअटैक के अलावा कोई सार्थक हमला करने में पूरी तरह विफल रही। आखिरकार मैच के 60वें मिनट में फ्रांस का इंतजार खत्म हुआ। एमबाप्पे ने पेनल्टी एरिया के ठीक बाहर गेंद पर नियंत्रण पाया, उसे अपने पसंदीदा दाहिने पैर पर सेट किया और टॉप कॉर्नर में एक ऐसा रॉकेट शॉट दागा जिसे रोकने का दुनिया के किसी गोलकीपर के पास कोई मौका नहीं था। यह एमबाप्पे का ऐतिहासिक 20वां वर्ल्ड कप गोल था। इस झटके से अभी मोरक्को उबर भी नहीं पाया था कि ठीक 6 मिनट बाद ओसमान डेम्बेले ने बॉक्स के किनारे से एक बेहतरीन लो-शॉट मारकर स्कोर 2-0 कर दिया और मैच पूरी तरह फ्रांस की मुट्ठी में आ गया।एमबाप्पे की चोट ने बढ़ाई फ्रांस की टेंशन; अब स्पेन या बेल्जियम से होगा सेमीफाइनल का महा-मुकाबलामैच के आखिरी पलों में मोरक्को ने अपनी बेंच स्ट्रेंथ का इस्तेमाल कर नए खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा, लेकिन वे फ्रांस के मजबूत डिफेंस को भेदने में नाकाम रहे। फ्रांस के गोलकीपर माइक मेगनन को पूरे मैच में सिर्फ एक बार अज़ेदीन ऊनाही के लॉन्ग-रेंज शॉट को रोकने के लिए गंभीर एक्शन में आना पड़ा। स्टॉपेज टाइम में यासीन बौनू ने एक बार फिर बेहतरीन खेल दिखाते हुए सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी जीन-फिलिप माटेटा के गोल को रोककर हार के अंतर को बढ़ने से रोका। हालांकि, जीत के जश्न के बीच फ्रांस के लिए थोड़ी चिंता की बात तब सामने आई जब मैच के अंतिम मिनटों में एमबाप्पे को मैदान से बाहर बुला लिया गया और उनके दाहिने पैर पर आइस पैक बंधा देखा गया। राहत की बात यह रही कि कप्तान बिना किसी सहारे के खुद चलकर डगआउट की तरफ गए। अब सेमीफाइनल में फ्रांस का सामना स्पेन बनाम बेल्जियम (Spain vs Belgium) के बीच होने वाले क्वार्टर फाइनल मैच के विजेता से होगा।
DA बढ़ोतरी के बाद अब मिलेगा 11 साल का बकाया DR एरियर, ममता सरकार ने जारी किया बंपर फंड
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के लाखों बुजुर्ग सरकारी पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनर्स (Family Pensioners) को एक साथ दोहरा बड़ा तोहफा देते हुए वित्तीय गलियारों में हलचल मचा दी है। हाल ही में महंगाई भत्ते (DA) में शानदार बढ़ोतरी करने के बाद अब राज्य प्रशासन ने एक और ऐतिहासिक कल्याणकारी कदम उठाया है। सरकार ने आधिकारिक घोषणा की है कि कोलकाता नगर निगम (KMC) क्षेत्र में बैंकों के माध्यम से पेंशन प्राप्त करने वाले सभी पात्र लाभार्थियों को पिछले 11 वर्षों से अटके हुए डीयरनेस रिलीफ (DR) एरियर का 50 फीसदी हिस्सा अंतरिम राहत (Interim Relief) के रूप में तुरंत प्रदान किया जाएगा। सरकार के इस बड़े फैसले से उन वरिष्ठ नागरिकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है जो सालों से प्रशासनिक फाइलों में फंसी अपनी गाढ़ी कमाई का इंतजार कर रहे थे।रिकॉर्ड्स वेरिफिकेशन का झंझट खत्म, सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर होगी 50 फीसदी अंतरिम राशिराज्य सरकार के इस क्रांतिकारी फैसले के पीछे एक बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक सोच काम कर रही है। दरअसल, कई संबंधित व्यावसायिक बैंकों के पास पुराने पेंशन भुगतान रिकॉर्ड पूरी तरह से प्रमाणित (Certified) नहीं हो पाए थे, जिसकी वजह से पिछले कई वर्षों से बुजुर्गों के एरियर का भुगतान तकनीकी तौर पर अटका हुआ था। सरकारी प्रबंधकों ने यह साफ कर दिया है कि केवल तकनीकी खामियों और रिकॉर्ड सत्यापन में लगने वाले लंबे समय की वजह से राज्य के वरिष्ठ नागरिकों को उनकी वित्तीय राहत से वंचित नहीं रखा जा सकता। इसलिए राज्य के वित्त विभाग ने एक बीच का रास्ता निकालते हुए अंतरिम व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत कुल अनुमानित एरियर की आधी रकम बिना किसी देरी के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में क्रेडिट कर दी जाएगी और बाकी की 50 फीसदी राशि का भुगतान रिकॉर्ड्स के पूर्ण सत्यापन के बाद चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।वर्ष 2008 से 2019 तक का मिलेगा मोटा पैसा, ROPA और AICPI फॉर्मूले से होगा सटीक कैलकुलेशनवित्त विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से जारी की गई नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, इस बंपर वित्तीय पैकेज का भुगतान 1 अप्रैल 2008 से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक की एक लंबी अवधि के संचित बकाया (Estimated DR Arrears) के आधार पर किया जाएगा। इस भारी-भरकम एरियर राशि की सटीक गणना करने के लिए अकाउंटेंट जनरल (AG), पश्चिम बंगाल के पास उपलब्ध प्रामाणिक दस्तावेजों, तत्कालीन ROPA 2009 के तहत घोषित की गई आधिकारिक डीआर दरों और ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) से जुड़े स्थापित फॉर्मूले को आधार बनाया गया है। इस पारदर्शी वित्तीय गणना के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर एक पेंशनभोगी को उनकी पात्रता के अनुसार बिल्कुल सटीक और न्यायसंगत राशि का भुगतान मिल सके।WBiFMS के तहत लॉन्च हुआ बैंक पेंशन मैनेजमेंट पोर्टल, बैंकों को युद्धस्तर पर डेटा अपडेट करने के निर्देशइस पूरी जटिल भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने आधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया है। सरकार ने 'वेस्ट बंगाल इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम' (WBiFMS) के अंतर्गत एक विशेष 'बैंक पेंशन मैनेजमेंट पोर्टल' (Bank Pension Management Portal) को लाइव कर दिया है। राज्य सरकार ने सभी संबंधित सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बैंकों को सख्त कूटनीतिक निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने बैंक में पंजीकृत पेंशनर्स का संपूर्ण डेटा इस केंद्रीय पोर्टल पर तत्काल सत्यापित करें। बैंकों को पुरानी पेंशन भुगतानों की हिस्ट्री को युद्धस्तर पर अपडेट करने को कहा गया है ताकि जैसे ही डेटा वेरिफिकेशन का काम आगे बढ़े, बकाया वित्तीय राहत की शेष राशि की समयसीमा और भुगतान प्रक्रिया की अलग से घोषणा की जा सके।20% DA बढ़ोतरी के बाद पेंशनर्स के लिए दूसरी बड़ी राहत, छठे वेतन आयोग के बीच मिला सहारागौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में अपने राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 1 अक्टूबर से महंगाई भत्ते (DA) में 20 प्रतिशत की एकमुश्त भारी बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जिससे राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के डीए का फासला काफी हद तक सिमट गया है। हालांकि, जहां एक तरफ केंद्र सरकार में आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लागू करने की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है, वहीं पश्चिम बंगाल के कर्मचारी वर्तमान में 5वें और 6ठे वेतन आयोग के ढांचे के तहत वेतन और भत्ते प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में 11 साल की लंबी अवधि के डीआर एरियर के 50 प्रतिशत हिस्से का यह त्वरित भुगतान राज्य के बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए इस महंगाई के दौर में एक बेहद संजीवनी और बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
धमाल 4 की रिलीज के बीच जानें पिछले तीन पार्ट्स का बजट और कमाई का पूरा लेखा-जोखा
बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी में से एक 'धमाल' का चौथा इंस्टॉलमेंट यानी 'धमाल 4' (Dhamaal 4) आज 10 जुलाई 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुका है। अजय देवगन और रितेश देशमुख की मुख्य भूमिकाओं से सजी इस एक्शन-एडवेंचर कॉमेडी फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस फ्रेंचाइजी की हर फिल्म ने दर्शकों को हंसने पर मजबूर किया है, जिसके कारण 'धमाल 4' से भी बॉक्स ऑफिस पर बंपर ओपनिंग की उम्मीदें लगाई जा रही हैं। फिल्म की ग्रैंड रिलीज के इस खास मौके पर आइए विस्तार से जानते हैं कि धमाल सीरीज के पिछले तीनों सीक्वल्स का बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन रहा था और किस फिल्म ने कितने करोड़ का कारोबार किया था।साल 2007 में शुरू हुआ था सफर: जानें सिर्फ 19 करोड़ के बजट में बनी 'धमाल' की कुल कमाईइस सुपरहिट कॉमेडी फ्रेंचाइजी की शुरुआत साल 2007 में हुई थी, जब निर्देशक इंद्र कुमार के मार्गदर्शन में पहली फिल्म 'धमाल' (Dhamaal) 7 सितंबर 2007 को बड़े पर्दे पर उतारी गई थी। संजय दत्त, अरशद वारसी, रितेश देशमुख, आशीष चौधरी और जावेद जाफरी की प्रतिष्ठित चौकड़ी से सजी इस फिल्म का निर्माण महज 19 करोड़ रुपये के सीमित बजट में किया गया था। बॉक्स ऑफिस इंडिया के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने भारतीय बाजार में शानदार प्रदर्शन करते हुए 45.63 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया था। अपने बेहतरीन वन-लाइनर्स और गुदगुदाने वाली कहानी के दम पर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 'सेमी-हिट' प्रमाणित हुई थी और इसने कल्ट कॉमेडी फिल्मों की सूची में अपनी जगह बनाई।'डबल धमाल' का एवरेज प्रदर्शन: कंगना रनौत और मल्लिका शेरावत की एंट्री के बाद का कलेक्शनफ्रेंचाइजी की भारी सफलता को देखते हुए साल 2011 में इसका दूसरा पार्ट 'डबल धमाल' (Double Dhamaal) रिलीज किया गया। इस बार निर्देशक इंद्र कुमार ने फिल्म के बजट को बढ़ाकर 29 करोड़ रुपये कर दिया था और स्टार कास्ट में कंगना रनौत, मल्लिका शेरावत और सतीश कौशिक जैसे कलाकारों को भी शामिल किया गया। 'डबल धमाल' ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर कुल 61.23 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। हालांकि फिल्म अपनी लागत निकालने में पूरी तरह सफल रही, लेकिन समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया और दर्शकों के औसत रुझान के चलते इसे बॉक्स ऑफिस पर केवल एक 'एवरेज' फिल्म का टैग मिल सका।180 करोड़ कमाकर 'टोटल धमाल' ने तोड़े थे रिकॉर्ड: अजय देवगन और माधुरी दीक्षित का धमाकाइसके बाद 22 फरवरी 2019 को इस फ्रेंचाइजी का तीसरा और सबसे भव्य सीक्वल 'टोटल धमाल' (Total Dhamaal) सिनेमाघरों में रिलीज हुआ। 113 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ तैयार की गई इस फिल्म में सुपरस्टार अजय देवगन, अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित और बोमन ईरानी जैसे दिग्गज कलाकारों की एंट्री हुई। इस मल्टी-स्टारर फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाते हुए भारत में लगभग 180.68 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कलेक्शन किया। दर्शकों द्वारा फिल्म के क्रेजी स्टंट्स और कॉमेडी टाइमिंग को बेहद पसंद किया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक ब्लॉकबस्टर 'हिट' साबित हुई।धुरंधर से क्लैश टलने के बाद आज रिलीज हुई 'धमाल 4': शूटिंग टाइमलाइन और सेंसर सर्टिफिकेटअब बात करते हैं आज रिलीज हुई 'धमाल 4' की, जिसके निर्देशन की कमान एक बार फिर अनुभवी डायरेक्टर इंद्र कुमार ने संभाली है। इस बार फिल्म में अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी के साथ-साथ रवि किशन, संजय मिश्रा, संजीदा शेख, अंजलि आनंद और विजय पाटकर जैसे टैलेंटेड एक्टर्स स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। इस फिल्म की घोषणा निर्देशक ने साल 2024 में की थी और इसका आखिरी शेड्यूल 6 सितंबर 2025 को पूरा हुआ था। यह फिल्म पहले मार्च 2026 में रिलीज होने वाली थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्म 'धुरंधर' के साथ होने वाले महा-क्लैश से बचने के लिए मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट को टालकर 10 जुलाई तय किया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने धमाल 4 को U/A 13+ सर्टिफिकेट के साथ पास किया है, जो इसे एक परफेक्ट फैमिली एंटरटेनर बनाता है।
चीन में हाहाकार! चीन के जिनजियांग में जूतों की फैक्ट्री में लगी भीषण आग
पूर्वी चीन के फुजियान प्रांत के जिनजियांग शहर से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को दोपहर के समय यहां स्थित एक विशाल बहुमंजिला जूतों की फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। इस विनाशकारी अग्निकांड में कम से कम 28 लोगों की जिंदा झुलसने से दर्दनाक मौत हो गई। चीन के आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने हालात की गंभीरता को देखते हुए फौरन रेस्क्यू टीमों और एक उच्च स्तरीय संयुक्त कार्य दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया है। फैक्ट्री से उठती आग की गगनचुंबी लपटों और घने काले धुएं के वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है, जिसे देखकर हर कोई दहल उठा है।दोपहर 12 बजे फूटा मौत का तांडव: धुएं के गुबार के बीच छत पर जिंदगी की भीख मांगते रहे मजदूरसरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' (Xinhua) और स्टेट ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी (CCTV) से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह भीषण आग दोपहर करीब 12 बजे लगी, जब फैक्ट्री के भीतर सैकड़ों मजदूर काम कर रहे थे। आग जिनजियांग शहर में स्थित 'हुईटेंग शू कंपनी' (Huiteng Shoe Company) की एक बड़ी निर्माण इकाई में लगी। देखते ही देखते आग ने कई मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि मजदूरों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला और दर्जनों लोग जान बचाने के लिए इमारत की छत पर भाग खड़े हुए, जहां वे लंबे समय तक फंसे रहे। वीडियो फुटेज में पूरी इमारत जली हुई, काली और धुएं के विशाल गुबार से घिरी नजर आ रही है।राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सख्त फरमान: तलाश अभियान में झोंकी ताकत, जवाबदेही तय करने के कड़े निर्देशइस जघन्य हादसे की खबर मिलते ही बीजिंग में हड़कंप मच गया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने इस राष्ट्रीय त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को बेहद सख्त लहजे में निर्देश जारी किए हैं। जिनपिंग ने आदेश दिया है कि मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए तलाश और बचाव (Search and Rescue) अभियानों में पूरी ताकत झोंक दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि हादसे के असली कारणों का तुरंत पता लगाया जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व प्रबंधन की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ ऐसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए जो मिसाल बने।फैक्ट्री मालिक और मैनेजर सलाखों के पीछे, कंपनी के सभी बैंक अकाउंट्स पर लगा तालाचीन के कड़े सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित एक्शन लिया है। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हुईटेंग शू कंपनी के मालिक और कारखाने के मुख्य प्रभारियों (Incharges) को पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही भविष्य में कानूनी मुआवजे और जांच को प्रभावित होने से रोकने के लिए कंपनी के सभी कॉर्पोरेट बैंक खातों (Bank Accounts) को तत्काल प्रभाव से सील यानी फ्रीज कर दिया गया है। शहर के फायर डिपार्टमेंट ने बताया कि जिनजियांग को चीन में 'जूतों की राजधानी' कहा जाता है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की बातें सामने आती रही हैं। फिलहाल आग लगने के सटीक तकनीकी कारणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, और यह भी पता लगाया जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती घायलों की वास्तविक स्थिति क्या है।
धर्मांतरण विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन! जबरन इस्लाम कबूल कराने के आरोपी को मिली अंतरिम राहत
मध्य प्रदेश के एक बेहद संवेदनशील और पेचीदा जबरन धर्म परिवर्तन मामले में देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाने पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिस पर एक पूरे परिवार को डरा-धमकाकर इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप लगा है। इस पूरे कानूनी विवाद में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब मुख्य आरोपी ने खुद को कट्टर सनातनी और हिंदू धर्म का अनुयायी बताते हुए अदालत के सामने अपनी बेगुनाही के पुख्ता सबूत पेश किए।सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ का कड़ा रुख: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौतीजस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की विशेष खंडपीठ ने इस मामले की गहन सुनवाई करने के बाद याचिकाकर्ता हरमन टेलर के पक्ष में यह अंतरिम आदेश जारी किया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) के उस पुराने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया है, जिसमें हाई कोर्ट ने 'मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम' (MP Freedom of Religion Act) की धारा 3 और 5 के तहत दर्ज एफआईआर (FIR) को निरस्त करने से साफ इनकार कर दिया था। सर्वोच्च अदालत में आरोपी के वकील ने दलील दी कि यह पूरी कानूनी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है क्योंकि यह एफआईआर शिकायतकर्ता के पति द्वारा इस्लाम अपनाने के करीब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद दर्ज की गई है।खुद के हिंदू होने का दावा: क्या है 8 साल पुराने इस धर्मांतरण विवाद की इनसाइड स्टोरी?यह पूरा विवाद एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत से शुरू हुआ था, जिसके पति ने कथित तौर पर हरमन टेलर के प्रभाव में आकर सालों पहले अपना मूल धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। आरोपी टेलर के कानूनी सलाहकारों ने अदालत के पटल पर आधिकारिक दस्तावेज रखते हुए स्पष्ट किया कि टेलर और उनका पूरा परिवार पीढ़ियों से हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करता आ रहा है, ऐसे में उनके द्वारा किसी को इस्लामिक धर्मांतरण के लिए उकसाने का आरोप पूरी तरह निराधार और तर्कहीन प्रतीत होता है। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपी के प्रभाव में आने के बाद उस व्यक्ति ने अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे पर भी मुस्लिम बनने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी।हाई कोर्ट ने ट्रायल को बताया था जरूरी, बयानों के आधार पर याचिका की थी खारिजसुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले याचिकाकर्ता हरमन टेलर ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में आपराधिक कार्यवाही को रद्द (Quash) करने की गुहार लगाई थी। उस समय टेलर ने दलील दी थी कि केस डायरी में ऐसा कोई भी प्रत्यक्ष या वैज्ञानिक सबूत मौजूद नहीं है जो यह साबित कर सके कि उन्होंने कभी भी शिकायतकर्ता महिला या उसके मासूम बेटे का जबरन मजहब बदलने का प्रयास किया था। हालांकि, तत्कालीन हाई कोर्ट बेंच ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा था कि आरोपी पर लगे आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और महिला व उसके नाबालिग बेटे के बयानों में याचिकाकर्ता की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है। हाई कोर्ट ने इसे ट्रायल कोर्ट का विषय बताते हुए राहत देने से मना कर दिया था, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
'गोली कांड' पर कपिल देव का बड़ा धमाका! योगराज सिंह के पिस्तौल वाले विवाद पर पहली बार तोड़ी चुप्पी
भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महान ऑलराउंडर और 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव ने आखिरकार युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह द्वारा दिए गए बेहद सनसनीखेज और विवादित 'गोली कांड' वाले बयान पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दे दी है। लंबे समय से इस मामले पर मौन साधे रहे 'हरियाणा हरिकेन' ने साफ लफ्जों में कहा कि वे योगराज को आज भी अपना एक पुराना और अच्छा दोस्त मानते हैं, लेकिन वे अपनी खूबसूरत जिंदगी में कड़वाहट और नकारात्मकता को कोई जगह देने के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं हैं। कपिल देव के इस परिपक्व और संतुलित बयान ने सोशल मीडिया से लेकर पूरे क्रिकेट गलियारे में एक नई बहस छेड़ दी है।क्या था योगराज सिंह का पिस्तौल वाला 'गोली कांड' विवाद, जिसने मचाया था तहलका?दरअसल, टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज योगराज सिंह हमेशा से ही अपने बेबाक और कई बार बेहद विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। कुछ समय पहले उन्होंने एक इंटरव्यू में बेहद चौंकाने वाला दावा किया था। योगराज का आरोप था कि कपिल देव के नॉर्थ जोन, हरियाणा और फिर भारतीय टीम का कप्तान बनने के बाद उन्हें बिना किसी ठोस वजह के जानबूझकर टीम से ड्रॉप कर दिया गया था। इसी खुन्नस और गुस्से में आकर योगराज ने दावा किया था कि वे एक बार पिस्तौल (पिस्तौल कांड) लेकर चंडीगढ़ के सेक्टर-9 स्थित कपिल देव के घर पहुंच गए थे और वहां उन्होंने जमकर गालियां दी थीं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारी बवाल मच गया था और उनके बेटे युवराज सिंह को इस पर बेहद शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी।'मुझे कड़वे लोगों से मिलना पसंद नहीं'—कपिल देव ने पॉडकास्ट में खोलकर रख दिया अपना दिलहाल ही में स्पोर्ट्स तक (Sports Tak) के एक विशेष पॉडकास्ट में जब शो के एंकर ने कपिल देव से योगराज के इस डरावने और विवादित दावे पर सवाल पूछा, तो दिग्गज क्रिकेटर ने बेहद सहजता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया। कपिल देव ने कहा कि मुझे नहीं पता कि वह असल में क्या कहना चाह रहे हैं, लेकिन मेरी तरफ से आज भी दोस्ती का हाथ बढ़ा हुआ है। उन्होंने आगे एक बेहद गहरी बात कही कि मुझे अपनी जिंदगी में कड़वे और नकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ वक्त बिताना कतई पसंद नहीं है। मैं हमेशा खुश रहने वाले और सकारात्मक लोगों के आसपास रहना चाहता हूं। जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन इंसान को पुरानी बातें भूलकर हमेशा आगे बढ़ना चाहिए।युवराज सिंह की सफलता का जिक्र कर दी खास सलाह: कड़वे इंसान के लिए दुनिया में जगह नहींकपिल देव ने बिना किसी लाग-लपेट के योगराज सिंह को अपने बेटे युवराज सिंह की महानता और सफलता की याद दिलाते हुए एक पितातुल्य सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि योगराज के बेटे (युवराज सिंह) ने भारतीय क्रिकेट के लिए जो किया है, वह बेहद अद्भुत है। योगराज को एक बेहद खुश और संतुष्ट इंसान होना चाहिए। इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति को सबकुछ नहीं मिलता—कभी आपको सफलता मिलती है, तो कभी आपके परिवार या बच्चों को। आखिर में आपकी खुशी मायने रखती है, आपका कड़वापन नहीं। इस पूरी दुनिया में एक कड़वे और ईर्ष्यालु इंसान के लिए कोई अच्छी जगह नहीं है। किसी भी परिस्थिति पर आपका रिएक्शन ही यह तय करता है कि आप अंदर से कैसे इंसान हैं।बचपन की दोस्ती और तलाक का उदाहरण देकर पुरानी यादों को किया ताजाइंटरव्यू के आखिरी हिस्से में कपिल देव थोड़े भावुक भी नजर आए। उन्होंने अपने और योगराज के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि हम दोनों बचपन के दोस्त हैं, हम एक साथ चंडीगढ़ की गलियों में क्रिकेट खेलकर बड़े हुए और हमने एक साथ बेहद खूबसूरत वक्त बिताया है। बाद में हमारे रास्ते अलग हो गए। कपिल ने एक अनोखा उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे शादी के बाद अगर किसी का तलाक हो जाता है, तो भी इंसान को उस शादी के अच्छे और खूबसूरत पलों को नहीं भूलना चाहिए। ठीक उसी तरह, मैं भी योगराज के साथ बिताए सिर्फ अच्छे दिनों को याद रखना चाहता हूं। अगर योगराज कभी सामने आकर मुझे गले लगाना चाहेंगे, तो मुझे उसमें कोई आपत्ति नहीं होगी।
केंद्र में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से ही देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने की दिशा में मोदी सरकार अपने सबसे महत्वाकांक्षी एजेंडे 'महिला आरक्षण विधेयक' (Women's Reservation Bill) को अमलीजामा पहनाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है। बीते संसदीय सत्र में इस ऐतिहासिक विधेयक के साथ-साथ परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण सरकार को रणनीतिक रूप से कदम पीछे खींचने पड़े थे। इस विधायी झटके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिपहसालारों ने बेहद गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी मॉनसून सत्र में इस बिल को हर हाल में पारित कराकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए एनडीए (NDA) के फ्लोर मैनेजरों ने पर्दे के पीछे से एक अभूतपूर्व और अचूक चक्रव्यूह तैयार कर लिया है।द्रमुक की कांग्रेस से टूटी कसम: तमिलनाडु का सियासी भूचाल अब दिल्ली में लाएगा बड़ा बदलावइस पूरे सियासी अंकगणित में सबसे दिलचस्प और गेम-चेंजर मोड़ दक्षिण भारत की राजनीति से आ रहा है। तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रमुक (DMK) का पुराना गठबंधन आधिकारिक तौर पर टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार द्रमुक नेतृत्व के साथ अनौपचारिक संवाद बनाए हुए है। लोकसभा में 22 सांसदों की भारी-भरकम ताकत रखने वाली द्रमुक ने बीते सत्र में इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया था, लेकिन अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच द्रमुक कांग्रेस को कड़ा संदेश देने के लिए संसद के पटल पर सरकार की परोक्ष मदद कर सकती है। द्रमुक के रणनीतिकारों ने संकेत दिए हैं कि वे सत्र के दौरान अपनी अंतिम रणनीति का खुलासा करेंगे, जो विपक्षी खेमे की एकजुटता को बड़ा झटका दे सकता है।यूपी चुनाव 2027 पर टिकी सपा की नजर: 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' की शर्तों से गरमाई सियासतदूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया भी इस बहती गंगा में हाथ धोने की फिराक में हैं। वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सपा ने महिला वोट बैंक को साधने के लिए सरकार के सामने अपनी शर्तें रखनी शुरू कर दी हैं। सपा की मांग है कि इस आरक्षण को आगामी 2027 के यूपी चुनाव से ही लागू किया जाए, इसे राज्यसभा में भी विस्तार मिले और सबसे महत्वपूर्ण रूप से इसमें 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' (कोटा भीतर कोटा) की व्यवस्था हो। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा का तात्कालिक लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को बचाना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में खुद की सरकार बनाने के लिए जमीन मजबूत करना है।शिंदे के कक्ष में शरद पवार की गुप्त दस्तक: महाराष्ट्र से दिल्ली तक नए गठबंधन की सुगबुगाहटसंसदीय अंकगणित को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए एनडीए ने महाराष्ट्र के सबसे अनुभवी राजनेता और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को भी साधना शुरू कर दिया है। हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में शरद पवार का अपने विधायकों के साथ उप मुख्यमंत्री व शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के आधिकारिक कक्ष में पहुंचना महज एक इत्तेफाक नहीं था। इस गुप्त बैठक के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में यह कयास तेज हो गए हैं कि शरद पवार के 8 सांसद लोकसभा में मतदान के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला रुख अख्तियार कर सकते हैं, जिससे सरकार का पलड़ा पूरी तरह भारी हो जाएगा।लोकसभा का जादुई आंकड़ा: वोटिंग से दूरी और पाला बदलने वाले सांसदों का पूरा गणित समझिए543 सदस्यों वाली लोकसभा में इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 के जादुई आंकड़े की आवश्यकता है। बीते सत्र में सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, यानी बहुमत से 62 सीटें कम थीं। हालांकि, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 और शिवसेना यूबीटी (Shiv Sena UBT) के 6 सांसदों के पाला बदलकर सरकार के पाले में आ जाने से एनडीए का बेस आंकड़ा बढ़कर 324 तक पहुंच चुका है। यदि द्रमुक के 22 सांसद साथ आते हैं तो यह संख्या 346 हो जाएगी। इसके अलावा, केंद्रीय प्रबंधकों की नजर शरद पवार की एनसीपी (8 सांसद), झारखंड मुक्ति मोर्चा (3 सांसद) और आम आदमी पार्टी (3 सांसद) पर भी है। यदि इन 14 सांसदों का मौन या प्रत्यक्ष समर्थन मिल जाता है, तो समाजवादी पार्टी के बिना भी सरकार आसानी से 360 का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रच देगी।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में हुए जघन्य स्कूली छात्रा बलात्कार और हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल के पुलिस एनकाउंटर मामले ने एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है। मंगलवार आधी रात को सुर्जापुर के दलदली इलाके में हुए इस कथित एनकाउंटर की कमान अब राज्य की शीर्ष जांच एजेंसी सीआईडी (CID) को सौंप दी गई है। मानवाधिकार गाइडलाइंस और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इस मामले में न्यायिक जांच पहले ही शुरू की जा चुकी है। अब सीआईडी की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर फॉरेंसिक मैपिंग और बैलिस्टिक साक्ष्यों के जरिए इस पूरे एनकाउंटर की प्रामाणिकता की कड़ाई से पड़ताल करने में जुट गई है।पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सनसनीखेज खुलासा: पीठ की तरफ से बेहद करीब से मारी गईं दोनों गोलियांपुलिस और फॉरेंसिक सूत्रों से मिली प्रभाष मंडल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मुठभेड़ की पूरी तस्वीर को साफ कर दिया है। डॉक्टरों के शुरुआती निष्कर्षों के अनुसार, भागने की कोशिश के दौरान प्रभाष को बहुत ही नजदीक से दो गोलियां मारी गई थीं। ये दोनों गोलियां उसकी पीठ की तरफ से शरीर के भीतर प्रवेश कर गईं और सामने के हिस्से से आर-पार निकल गईं। डॉक्टरों को आरोपी के शरीर के भीतर किसी भी गोली या धातु का टुकड़ा फंसा हुआ नहीं मिला है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, एक गोली प्रभाष के दाहिने फेफड़े को पूरी तरह से चीरती हुई बाहर निकल गई, जबकि दूसरी गोली ने उसकी दाहिनी किडनी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त करते हुए शरीर को पार कर दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।आधी रात को क्यों हुआ क्राइम सीन रीक्रिएशन? पुलिस अधिकारियों ने सीआईडी के सामने दी ये दलीलविपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा रात के समय आरोपी को घटना स्थल पर ले जाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर बारुईपुर पुलिस प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे दिन के उजाले में प्रभाष को सुर्जापुर के उस संवेदनशील इलाके में ले जाने का जोखिम नहीं उठा सकते थे। वहां की स्थानीय जनता में 12 साल की मासूम बच्ची की हत्या को लेकर भारी आक्रोश था और कानून-व्यवस्था बिगड़ने या उग्र भीड़ द्वारा आरोपी की मॉब लिंचिंग (पीट-पीटकर हत्या) करने का भारी खतरा मंडरा रहा था। चूंकि यह जघन्य अपराध भी रात के घने अंधेरे में ही अंजाम दिया गया था, इसलिए जांच टीम आरोपी की वास्तविक गतिविधियों और भागने के रास्तों को बिल्कुल सटीक ढंग से समझने के लिए उसे रात करीब 12:45 बजे वहां लेकर गई थी।सर्विस रिवॉल्वर छीनकर चलाई थी गोली; आत्मरक्षा के दावों की कसौटी पर छह पुलिसकर्मियों के बयानघटनाक्रम के अनुसार, कैनिंग पुलिस सर्कल के प्रभारी रोनी सरकार जब वारदात वाली जगह पर आरोपी के बिल्कुल नजदीक खड़े थे, तभी प्रभाष ने बिजली की तेजी से उनकी कमर में लगी सर्विस रिवॉल्वर छीन ली और फायरिंग करते हुए दलदली रास्ते की तरफ भागने लगा। उसने पुलिस टीम पर एक राउंड फायर भी किया। इसके बाद अपनी और साथी पुलिसकर्मियों की जान बचाने के लिए बारुईपुर थाने के पीसी इनचार्ज सब-इंस्पेक्टर अर्घ्य मंडल ने अपनी रिवॉल्वर से जवाबी फायरिंग की। सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य यह स्थापित करना है कि क्या पुलिस की यह जवाबी कार्रवाई वास्तव में आत्मरक्षा के दायरे में अनिवार्य थी। इस ऑपरेशन में शामिल सभी छह पुलिसकर्मियों को सीआईडी टीम के सामने पेश होकर अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराना होगा, हालांकि अभी किसी भी पुलिसकर्मी को सस्पेंड नहीं किया गया है।बैलिस्टिक जांच शुरू और चौथा आरोपी कबीर मोल्ला 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड परसीआईडी की फॉरेंसिक और डिटेक्टिव विंग ने गुरुवार सुबह ही सुर्जापुर में एनकाउंटर वाले दलदली मैदान का दौरा कर पूरे दृश्य की थ्री-डी मैपिंग पूरी कर ली है। घटनास्थल से बरामद किए गए खाली खोखे, पुलिसकर्मियों के सर्विस वेपन और बैलिस्टिक साक्ष्यों को जांच प्रयोगशाला में भेज दिया गया है। दूसरी ओर, इस जघन्य सामूहिक बलात्कार कांड के चौथे वांछित आरोपी कबीर मोल्ला को पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बारुईपुर की स्थानीय अदालत में पेश किया। विशेष लोक अभियोजक बिभास चटर्जी ने कोर्ट में अकाट्य दलीलें पेश करते हुए साबित किया कि कबीर मोल्ला भी आनंद सरदार और दिवाकर सरदार की तरह ही इस घिनौने कृत्य में बराबर का भागीदार था। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कबीर मोल्ला को 20 जुलाई 2026 तक के लिए पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में चीन की लगातार बढ़ती दादागीरी और आक्रामक विस्तारवादी नीतियों को नेस्तनाबूद करने के लिए भारत ने एक बेहद आक्रामक और अभूतपूर्व दोहरी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। नई दिल्ली में बैठे रणनीतिकारों ने साफ कर दिया है कि चीन को उसकी औकात दिखाने के लिए भारत अब सिर्फ बहुपक्षीय मंचों पर निर्भर नहीं रहेगा। भारत एक तरफ जहां क्वाड (Quad) और आसियान (ASEAN) जैसे शक्तिशाली वैश्विक समूहों के जरिए बीजिंग की अंतरराष्ट्रीय घेराबंदी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हिंद महासागर के प्रमुख द्वीपीय और तटीय देशों के साथ अपने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को इतनी तेजी से मजबूत कर रहा है कि ड्रैगन के लिए संभलना मुश्किल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विमानों की तैनाती, संयुक्त रक्षा अनुसंधान, नवाचार और अत्याधुनिक रक्षा उपक्रमों को लेकर हुए समझौतों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का पूरा समीकरण ही बदल कर रख दिया है।अमेरिका के बदलते रुख के बीच सिर्फ क्वाड पर निर्भरता खत्म, भारत की नई स्वतंत्र नीतिअंतरराष्ट्रीय मामलों के सैन्य विशेषज्ञों और वरिष्ठ राजनयिकों का मानना है कि भारत का यह नया रुख भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत दूरदर्शी है। हाल के दिनों में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के आंतरिक राजनीतिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं में आए बड़े बदलावों के कारण क्वाड संगठन जमीनी स्तर पर उतना आक्रामक या सक्रिय नजर नहीं आया है जितना उसे होना चाहिए था। ऐसे नाजुक मोड़ पर भारत ने साफ कर दिया कि वह चीन की चुनौती से निपटने के लिए किसी बाहरी महाशक्ति के भरोसे हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेगा। भारत की 'एक तीर से दो शिकार' करने की यह नई नीति न केवल हिंद महासागर में अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को अचूक बना रही है, बल्कि बीजिंग के कर्ज जाल और सैन्य धौंस से डरे हुए देशों को एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय विकल्प भी प्रदान कर रही है।कर्ज जाल में फंसे देशों को भारत का सहारा, रक्षा सौदों से चीन के पाले में जाने का रास्ता बंदभारत इस नई रक्षा कूटनीति के तहत विशेष रूप से उन महासगरीय देशों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है जो या तो चीनी घुसपैठ से बेहद परेशान हैं या फिर उसकी विस्तारवादी नीतियों का शिकार होकर भारी आर्थिक नुकसान उठा चुके हैं। इस कड़ी में सबसे बड़ा उदाहरण श्रीलंका का है, जहां भारत ने हाल ही में एक रणनीतिक रक्षा उत्पादन कारखाने का पूर्ण अधिग्रहण करके बीजिंग के सामरिक मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इसके साथ ही, भारत ने इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग को एक नए शिखर पर पहुंचाते हुए वहां के रणनीतिक सबांग पोर्ट (Sabang Port) के विकास की कमान संभाल ली है, जिससे मलक्का जलडमरूमध्य पर भारत की सीधी नजर रहेगी। इसके अलावा, इंडोनेशिया को भारत की स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र मिसाइल देने का सैद्धांतिक फैसला चीन के नौसैनिक आधिपत्य के दावों के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।सिंगापुर से सेशेल्स तक मजबूत हुआ भारत का सैन्य कवच, वैश्विक बाजार में बढ़ा स्वदेशी हथियारों का दबदबाभारत की यह आक्रामक रक्षा नीति केवल बड़े देशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर के हर उस कोने तक पहुंच रही है जहां चीन अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ाना चाहता था। सिंगापुर के साथ भारत ने न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि रक्षा औद्योगिक क्षेत्र के बीच भी सहयोग को नए आयाम दिए हैं। वहीं रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय देश सेशेल्स (Seychelles) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार भारतीय रक्षा सलाहकारों की तत्काल नियुक्ति का ऐलान कर चीन के समुद्री सिल्क रूट प्रोजेक्ट की रीढ़ तोड़ दी है। इस पूरी रणनीति के जरिए भारत न केवल अपनी समुद्री सीमाओं को अभेद्य बना रहा है, बल्कि इन सभी देशों को अपने अत्याधुनिक मेक-इन-इंडिया रक्षा साजो-सामान और हथियार बेचकर खुद को एक बड़े वैश्विक डिफेंस एक्सपोर्टर के रूप में भी स्थापित कर रहा है, जो चीन के व्यापारिक एकाधिकार को सीधी चुनौती है
विपक्ष का मकसद हर मुद्दे को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत कर जनता के बीच असंतोष पैदा करना : भाजपा
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया बयानों को लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी
ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय छात्रों को दिया भरोसा, वीजा नियम सख्त लेकिन अवसर रहेंगे खुले : विक्रम मिस्री
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेताओं के साथ हुई बातचीत में भारतीय छात्रों की वीजा प्रक्रिया में हुए बदलाव और आवेदन निपटाने में हो रही देरी को लेकर चिंताओं पर भी चर्चा हुई।
US-Iran war : ईरान का सनसनीखेज दावा- अमेरिका ने बुशेहर परमाणु संयंत्र पर किया हमला
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर ताजा सैन्य हमले किए जाने के बाद ईरान ने दावा किया है कि गुरुवार को अमेरिकी सेना ने बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Bushehr Nuclear Power Plant) को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिका ने अभी ...
जब भी भारत में महंगे और प्रीमियम मोबाइल फोन्स की बात आती है, तो अमूमन लोगों के दिमाग में Apple iPhone 17, iPhone 17 Pro या Samsung Galaxy S26 Ultra जैसे फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स के नाम ही आते हैं। लेकिन इन दिनों पूरे देश में सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के एक ऐसे नए फोन की चर्चा हो रही है, जिसकी कीमत इन सभी प्रीमियम स्मार्टफोन्स से भी कहीं ज्यादा है।इस फोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे काम करने के लिए किसी मोबाइल टावर या सिम नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। आइए जानते हैं BSNL के इस अनोखे फोन की कीमत, इसके गजब के फीचर्स और इसे खरीदने के कड़े सरकारी नियमों के बारे में सबकुछ।क्या है BSNL के इस फोन की कीमत?यदि आप सोच रहे हैं कि यह कोई आम टच-स्क्रीन स्मार्टफोन है, तो आप बिल्कुल गलत हैं। यह एक सैटेलाइट फोन (Satellite Phone) है, जिसकी आधिकारिक जानकारी बीएसएनएल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'X' (पहले ट्विटर) पर शेयर की है।कुल कीमत: सभी प्रकार के टैक्स और सरकारी ड्यूटी मिलाकर इस सैटेलाइट फोन की कीमत ₹1,34,166 तय की गई है। यही वजह है कि इसकी कीमत की तुलना दुनिया के सबसे महंगे और लग्जरी फोन्स से की जा रही है।क्या आम जनता खरीद सकती है यह सैटेलाइट फोन?₹1.34 लाख की कीमत सुनकर कई टेक लवर्स के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि क्या वे इसे अपने शौक के लिए खरीद सकते हैं? तो इसका सीधा जवाब है— नहीं।यह एक कमर्शियल सैटेलाइट फोन है, जिसे भारत की आम जनता बिना अनुमति के नहीं खरीद सकती। दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications - DoT) के सख्त सुरक्षा नियमों के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट फोन का मालिकाना हक रखने या उसका इस्तेमाल करने के लिए विशेष सरकारी मंजूरी, गृह मंत्रालय की क्लियरेंस और आधिकारिक लाइसेंस की आवश्यकता होती है। कोई भी सामान्य नागरिक कानूनन इसे बिना इजाजत के पास नहीं रख सकता।किन लोगों के लिए वरदान है यह फोन?BSNL के मुताबिक, इस फोन को आम शहरी जिंदगी के लिए नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण और खतरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले चुनिंदा क्षेत्रों और लोगों के लिए डिजाइन किया गया है:डिफेंस और सुरक्षा बल: दुर्गम सीमाओं और जंगलों में तैनात भारतीय सेना और अर्धसैनिक बल।समुद्री कार्य (Maritime): गहरे समंदर में महीनों रहने वाले मर्चेंट नेवी के क्रू और मछुआरे।आपदा प्रबंधन (NDRF): भूकंप, बाढ़ या चक्रवात जैसी आपदाओं के समय संचार व्यवस्था ठप होने पर काम करने वाली टीमें।माइनिंग और माउंटेनियरिंग: जमीन के सैकड़ों फीट नीचे खदानों में काम करने वाले लोग या ऊंचे पहाड़ों (जैसे हिमालय) पर ट्रैकिंग करने वाले एडवेंचरर्स।दूर-दराज के तीर्थयात्री: अमरनाथ या कैलाश मानसरोवर जैसी बेहद कठिन और नो-नेटवर्क जोन वाली यात्राओं पर जाने वाले विशेष दल।आखिर क्यों इतनी खास और अलग होती है सैटेलाइट फोन की तकनीक?जहां हमारे सामान्य एंड्रॉयड या आईफोन जमीन पर लगे मोबाइल टावरों के सिग्नल (4G/5G) पर निर्भर करते हैं, वहीं यह सैटेलाइट फोन सीधे अंतरिक्ष (Space) में पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काट रहे सैटेलाइट्स से कनेक्ट होता है। इसकी मुख्य खूबियां इस प्रकार हैं:'नो-नेटवर्क जोन' में भी कॉलिंग: घने अमेज़न जैसे जंगलों, गहरे महासागरों, बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ों या विशाल रेगिस्तानों में, जहाँ दुनिया का कोई भी मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता, वहाँ भी इससे क्रिस्टल क्लियर वॉयस कॉलिंग और मैसेजिंग की जा सकती है।इमरजेंसी में जीवन रक्षक: किसी भी युद्ध, बड़े आतंकी हमले या प्राकृतिक आपदा में जब सारे मोबाइल टावर गिर जाते हैं, तब यह सैटेलाइट फोन ही एकमात्र सहारा होता है जो प्रशासन और रेस्क्यू टीमों को आपस में जोड़े रखता है।महीनों चलने वाली बैटरी लाइफ: इस फोन में अत्यधिक टिकाऊ और दमदार बैटरी बैकअप दिया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि बिजली और चार्जर की अनुपलब्धता के बावजूद यह कई दिनों या हफ्तों तक स्टैंडबाय पर काम कर सके।रफ-एंड-टफ मिलिट्री ग्रेड बॉडी: यह फोन बेहद मजबूत और कठोर मटेरियल से बनाया जाता है। इस पर भयंकर पानी (Waterproof), धूल-मिट्टी (Dustproof) और ऊंचाई से गिरने या बर्फ जमने का भी कोई असर नहीं होता। यह हर मौसम में काम करने के लिए तैयार रहता है।अधिक जानकारी और संपर्क का माध्यमअगर आप किसी आधिकारिक संस्था, माइनिंग कंपनी या सुरक्षा एजेंसी से जुड़े हैं और इसके कमर्शियल इस्तेमाल, तकनीकी स्पेसिफिकेशन या लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को विस्तार से जानना चाहते हैं, तो आप अपने नजदीकी BSNL मुख्य कार्यालय (Head Office) में विजिट कर सकते हैं। इसके अलावा, बीएसएनएल द्वारा इस सेवा के लिए जारी किए गए आधिकारिक नंबर 9768866652 पर कॉल करके भी जरूरी मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।
मानसून ने गुरुवार (9 जुलाई 2026) को आधिकारिक तौर पर पूरे देश को अपनी आगोश में ले लिया है। इसके साथ ही देश के लगभग सभी राज्यों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव, अंडमान-निकोबार, लद्दाख और तमिलनाडु में सामान्य से काफी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा सिक्किम, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी मानसून मेहरबान रहा है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों (मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड) और बिहार में शुरुआती चरण में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है।इस बीच, आईएमडी (IMD) ने अगले 48 घंटों के लिए वेदर बुलेटिन जारी करते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 18 राज्यों में भारी बारिश, वज्रपात (आकाशीय बिजली) और तीव्र आंधी का अलर्ट जारी किया है। आइए जानते हैं शुक्रवार को आपके शहर में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज।आखिर क्यों हो रही है इतनी भारी बारिश?मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय देश में दो बड़ी मौसमी प्रणालियां (Weather Systems) एक साथ सक्रिय हैं:निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area): उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक बेहद स्पष्ट लो-प्रेशर एरिया बना हुआ है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भारी नमी खींच रहा है।मानसून ट्रफ (Monsoon Trough): मानसून की अक्षीय रेखा (Trough Line) इस समय उत्तरी राजस्थान से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक फैली हुई है, जिससे मध्य और उत्तर भारत में बादलों का भारी जमावड़ा है।इन 18 राज्यों में 85 KM की रफ्तार से आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनीमौसम विभाग ने शुक्रवार (10 जुलाई) को देश के 18 राज्यों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, महाराष्ट्र और केरल शामिल हैं।तूफान की रफ्तार: इन राज्यों में बारिश के दौरान 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी चल सकती है।ओले गिरने का अलर्ट: आईएमडी ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ ओले (Hailstorm) भी गिर सकते हैं। पूर्वी भारत में आकाशीय बिजली गिरने का भी भारी खतरा है।प्रमुख राज्यों और महानगरों के मौसम का विस्तृत हाल1. दिल्ली-एनसीआर (Delhi Weather)राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को 95% बारिश का पूर्वानुमान है। आईएमडी ने दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तूफान का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इस दौरान 70 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।तापमान: शुक्रवार को अधिकतम तापमान 33C और न्यूनतम तापमान 27C रहने की उम्मीद है।कहाँ हुई कितनी बारिश: पिछले 24 घंटों में दिल्ली के तुखमीरपुर (उत्तर-पूर्वी दिल्ली) में सबसे ज्यादा 6.3 इंच (160 मिमी) बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा मयूर विहार में 103 मिमी, दिल्ली यूनिवर्सिटी में 90 मिमी, महरौली में 86 मिमी और सफदरजंग में 72.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है।2. उत्तर प्रदेश (UP Weather)यूपी के अधिकांश हिस्सों में चक्रवाती हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट है। मेरठ, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, कानपुर, बांदा, बिजनौर, पीलीभीत, मुरादाबाद, बरेली, बहराइच, सीतापुर, बलरामपुर, कुशीनगर, हरदोई, अयोध्या, उन्नाव, सुल्तानपुर, अमेठी और आजमगढ़ में 80 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी और भारी बारिश की चेतावनी है।विशेष नोट (लखनऊ): राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को मौसम इसके विपरीत रहेगा। लखनऊ में आसमान साफ रहने की उम्मीद है, जहां अधिकतम तापमान 33C और न्यूनतम तापमान 28C तक रह सकता है।3. बिहार (Bihar Weather)बिहार के लिए 10 और 11 जुलाई को आकाशीय बिजली (Lightening) का तांडव देखने को मिल सकता है। गया, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, पटना, सारण, बक्सर, भोजपुर, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, भागलपुर, कटिहार और किशनगंज में भारी बारिश का अलर्ट है।तापमान: पटना में बारिश के चलते उमस से राहत मिलेगी। यहां अधिकतम तापमान 31C और न्यूनतम तापमान 28C के आसपास रहेगा।4. झारखंड (Jharkhand Weather)झारखंड के हजारीबाग, रामगढ़, जामताड़ा, बोकारो, रांची, सिमडेगा, गिरिडीह, सरायकेला, दुमका, गुमला, खूंटी, धनबाद, देवघर और जमशेदपुर में 60 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। रांची में अधिकतम तापमान 28C और न्यूनतम तापमान 24C तक गिरेगा।5. पश्चिम बंगाल (West Bengal Weather)झाड़ग्राम, बांकुड़ा, पुरुलिया, अलीपुरद्वार, नादिया, मालदा, हुगली, कूचबिहार और कालिम्पोंग में शुक्रवार और शनिवार को गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। कोलकाता में अधिकतम तापमान 32C और न्यूनतम तापमान 28C रहने का अनुमान है।6. उत्तराखंड (Uttarakhand Weather)पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के हरिद्वार, नैनीताल, ऋषिकेश, अल्मोड़ा, चंपावत, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, बागेश्वर और टिहरी गढ़वाल में भूस्खलन (Landslide) और भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राजधानी देहरादून में मौसम ठंडा रहेगा, जहाँ अधिकतम तापमान 26C और न्यूनतम तापमान 23C तक रहने की उम्मीद है।
फीफा विश्वकप (FIFA World Cup) 2026 अब सिर्फ फुटबॉल का एक टूर्नामेंट नहीं रह गया है, बल्कि यह खेल, वैश्विक संगीत और दुनिया भर के फैंस की भावनाओं का एक महा-उत्सव बन चुका है। स्टेडियम में खिलाड़ियों के मैदान पर उतरने से लेकर, गोल होने के जश्न और मैच खत्म होने तक गूंजने वाले गानों का मकसद सिर्फ मनोरंजन करना नहीं होता। इनका असली काम खिलाड़ियों में जोश भरना और दर्शकों के बीच एक अटूट जुड़ाव बनाना है। यही वजह है कि फीफा ने इस बार हर टीम के लिए एक अलग स्टेडियम साउंडट्रैक तैयार किया है।स्टेडियम में कौन तय करता है कि कौन-सा गाना बजेगा?विश्वकप के दौरान बजने वाले गानों का फैसला फीफा (FIFA) अकेले बंद कमरों में नहीं करता। इसके लिए एक बेहद लोकतांत्रिक और संगठित प्रक्रिया अपनाई जाती है:संयुक्त टीम वर्क: फीफा की स्टेडियम एंटरटेनमेंट टीम, टूर्नामेंट में भाग ले रहे सभी 48 देशों की फुटबॉल एसोसिएशन, खुद खिलाड़ी और स्थानीय आयोजन समिति मिलकर गानों का चयन करती है।सांस्कृतिक पहचान: हर देश की फुटबॉल एसोसिएशन अपनी संस्कृति, इतिहास और फुटबॉल पहचान को दर्शाने वाले गानों की एक आधिकारिक सूची फीफा को भेजती है।खिलाड़ियों की पसंद: वार्म-अप (Warm-up), गोल सेलिब्रेशन (Goal Celebration) और मैच जीतने के बाद बजने वाले कुछ खास गानों को खुद खिलाड़ी अपनी पसंद के आधार पर चुनते हैं। यदि किसी गाने पर फैंस का रिस्पॉन्स शानदार रहता है, तो उसे आगामी मैचों की प्लेलिस्ट में भी जगह मिलती है।750 से ज्यादा गानों का म्यूजिक बैंक कैसे हुआ तैयार?रॉयटर्स (Reuters) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के विश्वकप के लिए 750 से ज्यादा गानों का एक विशाल म्यूजिक कलेक्शन तैयार किया गया है। फीफा इस महा-प्लेलिस्ट को तैयार करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाता है:घरेलू लीग की स्टडी: फीफा सबसे पहले भाग लेने वाले देशों की घरेलू फुटबॉल लीग (जैसे इंग्लिश प्रीमियर लीग, ला लीगा आदि) में बजने वाले गानों और चैंट्स (नारों) की गहराई से स्टडी करता है।फैंस का जुड़ाव: यह देखा जाता है कि कौन-से गानों को गाते समय फैंस सबसे ज्यादा झूमते हैं और किन धुनों से खिलाड़ियों का मोटिवेशन बढ़ता है।सिचुएशनल प्लेलिस्ट: इसके बाद मैच के अलग-अलग चरणों जैसे— टीम लाइन-अप, वार्म-अप, गोल होने के तुरंत बाद और मैच खत्म होने (Full-time) के लिए अलग-अलग सब-प्लेलिस्ट बनाई जाती है।हर टीम का क्यों होता है अपना अलग 'सिग्नेचर म्यूजिक'?दुनिया के हर देश की अपनी अनूठी संस्कृति, भाषा और फुटबॉल की अलग परंपराएं हैं। फीफा हर टीम के लिए अलग स्टेडियम साउंडट्रैक इसलिए तैयार करता है ताकि खिलाड़ियों को सात समंदर पार भी अपने घर (Homeland) जैसा माहौल मिल सके।इसके अलावा, जिन देशों में फुटबॉल संस्कृति अभी नई है या तेजी से विकसित हो रही है, वे इन खास गानों और धुनों के जरिए अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी एक नई पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। यह संगीत समय के साथ उस देश की अपनी फुटबॉल विरासत का एक अहम हिस्सा बन जाता है।मनोवैज्ञानिक स्तर पर खिलाड़ियों और फैंस को बूस्ट करता है संगीतखेल विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर सही बीट्स का बजना खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के मनोविज्ञान पर गहरा और सकारात्मक असर डालता है।खिलाड़ियों के लिए: मैच से पहले वार्म-अप के दौरान बजने वाले हाई-रैपिड (तेज रफ्तार) गाने खिलाड़ियों के एड्रेनालाईन रश ($Adrenaline Rush$) को बढ़ाते हैं और उन्हें मानसिक रूप से मुकाबले के लिए तैयार करते हैं।फैंस के लिए: गोल होने के बाद जब पूरा स्टेडियम एक ही धुन पर एक साथ गाता है, तो दर्शकों का जुड़ाव और जोश चरम पर पहुंच जाता है, जो मैच डे के अनुभव को ताउम्र के लिए यादगार बना देता है।'वाका वाका' से लेकर के-पॉप और टेक्नो तक: बदल गया वर्ल्ड कप का संगीतएक दौर था जब शुरुआती वर्ल्ड कप मैचों में केवल कुछ पारंपरिक नारे या चुनिंदा धुनें ही सुनाई देती थीं। साल 2010 में शकीरा के 'वाका वाका' ($Waka Waka$) और के'नान के 'वेविंग फ्लैग' ($Wavin' Flag$) जैसे गानों ने वर्ल्ड कप संगीत की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल दिया।आज 2026 के विश्वकप की आधिकारिक प्लेलिस्ट में रॉक, पॉप, कोरियन के-पॉप (K-Pop), लातिनो रेगेटन, टेक्नो और पारंपरिक लोक संगीत (Folk Music) का एक अद्भुत फ्यूजन देखने को मिल रहा है। यह विविधता फीफा विश्वकप को सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वैश्विक संस्कृतियों और कला का सबसे बड़ा मंच बनाती है।
यदि आपकी तिजोरी, घर के किसी कोने या गुल्लक में अब भी ₹2000 के नोट पड़े हैं, तो आपके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अक्सर लोगों के मन में यह डर रहता है कि क्या उनके ये नोट अब पूरी तरह रद्दी हो चुके हैं? तो इसका जवाब है— नहीं।आरबीआई (RBI) ने साफ किया है कि ₹2000 के नोट अभी भी लीगल टेंडर (Legal Tender) यानी कानूनी रूप से मान्य हैं। हालांकि, बैंकों में इन्हें बदलने की समय-सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है, लेकिन रिजर्व बैंक ने आम जनता की सुविधा के लिए नोट बदलने और अकाउंट में जमा करने का विकल्प अभी भी खुला रखा है। आइए जानते हैं आरबीआई के इस ताजा फैसले से जुड़ी अपने मतलब की हर बात।98% से ज्यादा नोट बैंकिंग सिस्टम में लौटेकेंद्रीय बैंक द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 में जब ₹2000 के नोटों को सर्कुलेशन (चलन) से वापस लेने का ऐतिहासिक फैसला किया गया था, तब से लेकर अब तक 98% से अधिक नोट बैंकिंग सिस्टम में सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। वर्तमान में बाजार में बहुत ही कम मात्रा में ₹2000 के नोट बचे हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए आरबीआई लगातार प्रयास कर रहा है।अब बैंकों में नहीं, इन 19 जगहों पर बदले जाएंगे नोटआम कमर्शियल बैंकों (जैसे SBI, PNB, HDFC) में ₹2000 के नोट जमा करने या बदलने की आखिरी तारीख 7 अक्टूबर 2023 को ही समाप्त हो चुकी है। इसलिए अब आप इन्हें सीधे किसी सामान्य बैंक शाखा में जाकर नहीं बदल सकते। इसके लिए आरबीआई ने देश भर में अपने 19 इश्यू ऑफिस (Issue Offices) निर्धारित किए हैं। आप इन 19 कार्यालयों में जाकर अपने नोट बदलवा सकते हैं, जहां नोट की कुल वैल्यू सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट (जमा) कर दी जाएगी।देश के इन 19 शहरों में हैं RBI के इश्यू ऑफिस:अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम।ऑफिस का समय: आप इन कार्यालयों में वर्किंग डेज के दौरान सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच जा सकते हैं। ध्यान रखें कि महीने के दूसरे व चौथे शनिवार, सभी रविवार और सरकारी अवकाश के दिनों में ये कार्यालय बंद रहते हैं।घर बैठे डाक (Post Office) से भी भेज सकते हैं नोटयदि आप ऊपर दिए गए 19 शहरों में नहीं रहते हैं या आरबीआई के दफ्तर जाने में असमर्थ हैं, तो आपके लिए इंडिया पोस्ट (India Post) का विकल्प मौजूद है। आप देश के किसी भी डाकघर में जाकर बीमाकृत डाक (Insured Post) के जरिए अपने ₹2000 के नोटों को सीधे आरबीआई के इश्यू ऑफिस भेज सकते हैं। डाक के जरिए नोट जैसे ही आरबीआई कार्यालय पहुंचेंगे, उनके मूल्य के बराबर की राशि सीधे आपके निर्दिष्ट बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।क्या नोट बदलने के लिए किसी आईडी प्रूफ (ID Proof) की जरूरत है?आरबीआई की आधिकारिक गाइडलाइन के मुताबिक, इश्यू ऑफिस में जाकर नोट एक्सचेंज कराने के लिए किसी भी प्रकार के दस्तावेज या पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड, वोटर आईडी आदि) की कोई आवश्यकता नहीं है। आप बिना किसी कागजी कार्रवाई के बेहद आसान प्रक्रिया के तहत अपने नोट बदलवा सकते हैं।एक बार की तय सीमा (Limit): आप एक बार में अधिकतम ₹20,000 की सीमा तक ही ₹2000 के नोटों को काउंटर पर सीधे दूसरे डिनॉमिनेशन (जैसे ₹500, ₹200, ₹100 के नोटों) में एक्सचेंज करवा सकते हैं।क्यों बंद किए गए थे ₹2000 के नोट?इतिहास: 8 नवंबर 2016 को हुई ऐतिहासिक नोटबंदी के बाद जब पुराने ₹500 और ₹1000 के नोट बंद हुए, तब बाजार में नकदी की भारी कमी को तुरंत पूरा करने के लिए ₹2000 का यह बड़ा नोट पेश किया गया था।छपाई कब बंद हुई: जब बाजार में ₹500 और अन्य छोटे नोट पर्याप्त मात्रा में आ गए, तब आरबीआई ने साल 2018-19 से ही ₹2000 के नोटों की छपाई पूरी तरह बंद कर दी थी।नकली नोटों का खतरा: इस बड़े नोट को बंद करने की एक मुख्य वजह जाली नोटों (Fake Currency) का बढ़ता नेटवर्क भी था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नोटबंदी के शुरुआती दो वर्षों में देश में जितने भी नकली नोट पकड़े गए, उनमें से करीब 56% हिस्सेदारी अकेले ₹2000 के जाली नोटों की थी।
10 जुलाई 2026, शुक्रवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे हिंदू धर्म में योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह पावन व्रत समस्त पापों का नाश कर जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति लाने वाला माना गया है। शुक्रवार के दिन इस एकादशी का आना एक बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग बना रहा है, जिससे धन की देवी मां लक्ष्मी और सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की संयुक्त महा-कृपा भक्तों पर बरसने वाली है।ज्योतिषीय गणना और ग्रहों के गोचर के अनुसार, कल का दिन विशेष रूप से मेष, वृषभ, कन्या और धनु राशि के जातकों के लिए तरक्की के नए द्वार खोलने वाला है। इन राशियों का सितारा बुलंदियों पर रहेगा और करियर से लेकर बिजनेस तक में बड़े लाभ के योग बनेंगे। आइए जानते हैं कल सभी 12 राशियों का विस्तृत और सटीक भविष्यफल।12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल (Horoscope Today)मेष राशि (Aries)कल योगिनी एकादशी पर आपके सितारे बुलंदियों को छुएंगे। मां लक्ष्मी की विशेष कृपा से आपकी आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। यदि आप कोई नया बिजनेस, स्टार्टअप या नया प्रोजेक्ट शुरू करने का विचार कर रहे हैं, तो कल का दिन सबसे उत्तम है। लंबे समय से रुके हुए आपके सभी काम अब तेजी से गति पकड़ेंगे।वृषभ राशि (Taurus)कल का दिन आपके लिए करियर और तरक्की के नए रास्ते खोलने वाला साबित होगा। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल (Workspace) पर अपनी छिपी हुई प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिलेगा, जिससे आपके सीनियर और बॉस आपसे बेहद प्रभावित होंगे। प्रमोशन की बात आगे बढ़ सकती है और परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा।मिथुन राशि (Gemini)कल आपके लिए करियर के कुछ नए और अनोखे विकल्प सामने आ सकते हैं। कला, लेखन, मीडिया, क्रिएटिव डिजाइनिंग या डिजिटल फील्ड से जुड़े लोगों को कल कोई बड़ा और बेहद फायदेमंद अवसर मिल सकता है। दोस्तों या पुराने सहकर्मियों के साथ मिलकर आप भविष्य की किसी नई योजना पर काम शुरू कर सकते हैं।कर्क राशि (Cancer)कर्क राशि के जातकों को कल पैसों के लेन-देन और निवेश (Investment) के मामलों में बहुत ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। कल किसी को भी बड़ा कर्ज या उधार देने की गलती न करें, अन्यथा वह पैसा लंबे समय के लिए फंस सकता है। कोई भी वित्तीय फैसला जल्दबाजी या भावुकता में आकर न लें।सिंह राशि (Leo)कल आपको कार्यस्थल पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा। नौकरी में सैलरी बढ़ने या पदोन्नति (Promotion) की बात अंतिम चरण में पहुंच सकती है। समाज और इंडस्ट्री में आपके संपर्क मजबूत होंगे, जिसका फायदा आपको भविष्य में बड़े मुनाफे के रूप में मिलेगा।कन्या राशि (Virgo)कल भाग्य का पूरा साथ आपको मिलने वाला है। बिजनेस में नए ऑर्डर्स या कोई बड़ी डील फाइनल होने से आपका मुनाफा सीधे दोगुना हो सकता है। विद्यार्थियों के लिए दिन बेहद अनुकूल है; यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा (Competitive Exam) के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, तो कोई शुभ समाचार मिल सकता है।तुला राशि (Libra)तुला राशि वालों को कल अपनी वाणी, व्यवहार और गुस्से पर कड़ा नियंत्रण रखना होगा। ऑफिस में किसी कलीग या सीनियर के साथ बिना बात के तीखी बहस होने की आशंका है, जिससे आपकी सालों की बनाई हुई इमेज खराब हो सकती है। शांत रहकर दिन बिताएं और ऑफिस गॉसिप से पूरी तरह दूर रहें।वृश्चिक राशि (Scorpio)कल प्रॉपर्टी, जमीन-जायदाद या कोर्ट-कचहरी से जुड़े पुराने विवादित मामलों में आपको बड़ी सफलता मिल सकती है। आपके विरोधी या गुप्त शत्रु चाहकर भी आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे। नौकरी में बदलाव या स्विच करने का विचार कर रहे लोगों के लिए कल का दिन नए ऑफर लेकर आ सकता है।धनु राशि (Sagittarius)व्यापारिक दृष्टिकोण से कल का दिन आपके लिए बेहद भाग्यशाली रहेगा। बिजनेस के सिलसिले में की गई देश या विदेश की यात्राएं कल पूरी तरह सफल और लाभदायक सिद्ध होंगी। योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर जीवनसाथी (Partner) की कोई खास सलाह आपके करियर को एक नई और सही दिशा देगी।मकर राशि (Capricorn)कल आपकी रचनात्मक और सोचने की क्षमता में जबरदस्त वृद्धि होगी, जिससे कार्यक्षेत्र में आपको नए और इनोवेटिव आइडियाज आएंगे जो कंपनी को फायदा पहुंचाएंगे। संतान पक्ष से शिक्षा या करियर के क्षेत्र में कोई बेहद सुखद समाचार मिलने की संभावना है, जिससे घर में उत्सव का माहौल रहेगा।कुंभ राशि (Aquarius)कल आपका मन भौतिक चीजों से हटकर धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में अधिक लगेगा। योगिनी एकादशी के शुभ अवसर पर आप परिवार के साथ किसी मंदिर या धार्मिक स्थल की यात्रा का प्लान बना सकते हैं। व्यापारिक मामलों में दिन सामान्य रहेगा, लेकिन काम के दबाव के बीच अपने स्वास्थ्य और खानपान का ध्यान रखें।मीन राशि (Pisces)मीन राशि के जातकों को कल वाहन चलाते समय या सड़क पर चलते समय बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि दुर्घटना के अशुभ योग बन रहे हैं। इसके अलावा, कल अपनी जेब पर नियंत्रण रखें और सुख-सुविधाओं की चीजों पर फिजूलखर्ची करने से बचें, अन्यथा आपका पूरे महीने का बजट डगमगा सकता है।
खाने के तुरंत बाद की गई ये 4 गलतियां बिगाड़ सकती हैं आपका डाइजेशन, जानें वॉक और सोने का सही समय
खाना सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं है, बल्कि हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए ऊर्जा (Energy) और जरूरी पोषक तत्व देने का भी मुख्य स्रोत है। इसलिए जितना जरूरी एक संतुलित और पौष्टिक भोजन करना है, उतना ही जरूरी भोजन करने के बाद सही आदतों को अपनाना भी माना जाता है।अक्सर लोग अनजाने में खाना खाने के तुरंत बाद कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका सीधा और नकारात्मक असर उनकी पाचन प्रक्रिया (Digestion) पर पड़ता है। दरअसल, भोजन करने के बाद हमारा शरीर उसे पचाने और उसमें मौजूद विटामिंस व मिनरल्स को एब्जॉर्ब (सोखने) करने के काम में जुट जाता है, जिससे पेट और आंतों की तरफ ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ गलत एक्टिविटीज इस प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकती हैं। आइए जानते हैं कि भोजन के तुरंत बाद किन 4 गलतियों से बचना चाहिए और सेहतमंद रहने के सही नियम क्या हैं।खाना खाने के तुरंत बाद भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां1. भारी या तेज एक्सरसाइज (Heavy Workout) करनाप्रसिद्ध हेल्थ वेबसाइट Healthline के अनुसार, खाना खाने के तुरंत बाद हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज (जैसे रनिंग, जिम या भारी वजन उठाना) करने से पेट में भयंकर ऐंठन, मतली (जी मिचलाना), उल्टी और अपच की समस्या हो सकती है। इसका कारण यह है कि इस समय शरीर का पूरा ध्यान भोजन पचाने पर होता है, और एक्सरसाइज करने से ब्लड फ्लो पेट के बजाय मांसपेशियों की तरफ डाइवर्ट हो जाता है।2. बहुत तेज चाल से वॉक (Brisk Walking) करनाकई लोग खाना पचाने के चक्कर में भोजन के तुरंत बाद बहुत तेजी से दौड़ने या तेज कदमों से चलने लगते हैं। Healthline के मुताबिक, भोजन के तुरंत बाद तेज गति से चलना पाचन तंत्र में असहजता और दर्द पैदा कर सकता है। अगर आपको वॉक करनी ही है, तो हमेशा बेहद हल्की, धीमी और आरामदायक गति से ही करें।3. रात का खाना खाकर तुरंत बिस्तर पर लेट जानाCleveland Clinic की एक रिपोर्ट बताती है कि रात में भोजन करने के तुरंत बाद सीधे बिस्तर पर लेट जाने या सो जाने से एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) और हार्टबर्न (सीने में जलन) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जब आप सीधे लेट जाते हैं, तो पेट का पाचक एसिड वापस भोजन नली (Esophagus) की तरफ आने लगता है।4. जरूरत से ज्यादा भोजन (Overeating) करनाCleveland Clinic के अनुसार, स्वाद के चक्कर में या भूख से ज्यादा खाना खाने से पेट पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे पेट का भारी लगना, गंभीर गैस, खट्टी डकारें, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। इसलिए हमेशा अपनी भूख से थोड़ा कम और संतुलित मात्रा में ही भोजन करना सबसे बेहतर माना जाता है।खाना खाने के कितनी देर बाद वॉक, एक्सरसाइज और सोना है सही?अगर आप अपनी लाइफस्टाइल को सेहतमंद बनाना चाहते हैं, तो भोजन और अपनी रूटीन एक्टिविटीज के बीच समय का यह सही अनुपात ($Ratio$) जरूर याद रखें:वर्कआउट/भारी एक्सरसाइज के लिए: यदि आप कोई भारी वर्कआउट या योग करना चाहते हैं, तो भारी भोजन (Heavy Meal) करने के बाद कम से कम 1 से 2 घंटे का अंतर अवश्य रखें।सोने या लेटने के लिए: रात का भोजन करने और सोने के समय के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का गैप होना चाहिए। इससे सोते समय आपके पेट का खाना काफी हद तक पच चुका होता है और नींद भी गहरी आती है।हल्की वॉक के लिए: भोजन के तुरंत बाद केवल 10 से 15 मिनट की बेहद धीमी वॉक (जैसे शतपदी या वज्रासन में बैठना) की जा सकती है, जो पाचन में मददगार होती है।बेहतर स्वास्थ्य के लिए इन बातों का भी रखें खास ख्यालचबाकर खाएं: भोजन हमेशा शांत दिमाग से, आराम से और अच्छी तरह चबाकर खाएं ताकि पेट को उसे पचाने में ज्यादा मेहनत न करनी पड़े।पानी पीने का नियम: भोजन के तुरंत बाद गट-गट करके बहुत अधिक मात्रा में पानी पीने से बचें, क्योंकि यह पाचक रसों (Digestive Enzymes) को पतला कर देता है। खाने के आधे घंटे बाद पानी पीना सबसे बेस्ट है।नशे से दूरी: खाने के तुरंत बाद धूम्रपान (स्मोकिंग) या शराब का सेवन शरीर को सामान्य से दोगुना ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।डॉक्टरी सलाह: यदि भोजन के बाद आपको रोजाना सीने में तेज जलन, पेट फूलना, कब्ज या अपच की लगातार समस्या बनी रहती है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी अच्छे गैस्ट्रोलॉजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) से सलाह लें।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक को 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना ...
रिलायंस जियो (Reliance Jio) के ग्राहकों के लिए एक बेहद शानदार और फायदेमंद खबर है। अगर आप अपने मोबाइल के लिए एक नया और वैल्यू-फॉर-मनी रिचार्ज प्लान तलाश रहे हैं, तो जियो के कुछ चुनिंदा प्रीपेड प्लान्स पर चल रहे धमाकेदार ऑफर्स को जरूर जान लें। जियो अपने यूजर्स को कुछ खास प्रीपेड पैक्स के साथ बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के 5 GB से लेकर 20 GB तक एक्स्ट्रा डेटा (Free Data) दे रहा है।इन प्लान्स की कीमत ₹459 से शुरू होकर ₹899 तक जाती है। सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात यह है कि डेटा के साथ इन प्लान्स में प्रीमियम ओटीटी (OTT) सब्सक्रिप्शन और ₹35,100 की भारी-भरकम कीमत वाला गूगल जेमिनी प्रो (Google Gemini Pro) का एक्सेस भी पूरी तरह मुफ्त दिया जा रहा है। आइए जानते हैं इन चारों बंपर प्लान्स की पूरी डिटेल:1. जियो का ₹459 वाला प्लान (Jio ₹459 Plan)यह प्लान उन यूजर्स के लिए सबसे बेस्ट है जो कम दिनों की वैलिडिटी में ज्यादा से ज्यादा डेटा और वीआईपी बेनिफिट्स चाहते हैं।वैधता (Validity): 28 दिननियमित डेटा: 2 GB प्रति दिनएक्स्ट्रा डेटा: 5 GB अतिरिक्त डेटा पूरी तरह मुफ्तअन्य बेनिफिट्स: अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और डेली 100 SMS।प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: ₹35,100 की कीमत वाला गूगल जेमिनी प्रो का फ्री एक्सेस, 5000 GB (5 TB) विशाल क्लाउड स्टोरेज और जियो हॉटस्टार मोबाइल का फ्री सब्सक्रिप्शन।रोजाना का खर्च: इस प्लान का डेली खर्च लगभग ₹16.39 आता है।2. जियो का ₹495 वाला प्लान (Jio ₹495 Plan)यदि आप गेमिंग और लाइव स्पोर्ट्स (खेल) देखने के बेहद शौकीन हैं, तो यह प्लान आपके लिए ही डिजाइन किया गया है।वैधता (Validity): 28 दिननियमित डेटा: 1.5 GB प्रति दिनएक्स्ट्रा डेटा: 5 GB अतिरिक्त डेटा बिल्कुल मुफ्तअन्य बेनिफिट्स: अनलिमिटेड कॉलिंग और हर दिन 100 SMS।प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: 28 दिनों के लिए FanCode और JioGames Cloud का मुफ्त एक्सेस (500 से ज्यादा प्रीमियम वीडियो गेम्स) और साथ में गूगल जेमिनी प्रो का फ्री सब्सक्रिप्शन।रोजाना का खर्च: इस प्लान का दैनिक खर्च लगभग ₹17.68 बैठता है।3. जियो का ₹749 वाला प्लान (Jio ₹749 Plan)यह प्लान लंबी वैलिडिटी और भारी-भरकम इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए एकदम सटीक है।वैधता (Validity): 72 दिननियमित डेटा: 2 GB प्रति दिनएक्स्ट्रा डेटा: 20 GB एक्स्ट्रा डेटा का बंपर ऑफरअन्य बेनिफिट्स: अनलिमिटेड कॉलिंग और रोजाना 100 SMS।प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: पूरे 3 महीने (90 दिन) के लिए जियो हॉटस्टार मोबाइल का मुफ्त सब्सक्रिप्शन, 50 GB जियो क्लाउड स्टोरेज और गूगल जेमिनी प्रो का बिल्कुल फ्री एक्सेस।रोजाना का खर्च: लंबी अवधि के कारण इसका रोजाना का खर्च घटकर मात्र ₹10.40 रह जाता है।4. जियो का ₹899 वाला प्लान (Jio ₹899 Plan)यह जियो का सबसे शानदार और पैसा वसूल (Value for Money) प्लान है, जिसमें रोजाना का खर्च सबसे कम और फायदे सबसे ज्यादा मिलते हैं।वैधता (Validity): 90 दिन (पूरे 3 महीने)नियमित डेटा: 2 GB प्रति दिनएक्स्ट्रा डेटा: 20 GB एक्स्ट्रा डेटा पूरी तरह फ्रीअन्य बेनिफिट्स: अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और डेली 100 SMS।प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: 3 महीने के लिए जियो हॉटस्टार मोबाइल, 50 GB जियो क्लाउड स्टोरेज और गूगल जेमिनी प्रो का मुफ्त प्रीमियम एक्सेस।रोजाना का खर्च: इस जबरदस्त प्लान का रोजाना का खर्च सबसे कम यानी लगभग ₹9.99 आता है।
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन अपने चरम पर है। ऐसे में विदेश में रहने वाले भारतीयों (NRIs) और विदेशी संपत्ति (Foreign Assets) रखने वाले करदाताओं के मन में अक्सर एक बड़ा असमंजस रहता है कि क्या उन्हें भी अपने टैक्स रिटर्न में विदेशी संपत्तियों का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है? टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका सीधा और साफ जवाब ‘नहीं’ है। केवल एनआरआई (NRI) होने की वजह से आपको 'Schedule FA' (Foreign Assets) भरना जरूरी नहीं होता। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित वित्त वर्ष (Financial Year) में आयकर कानून के तहत आपका रेजिडेंशियल स्टेटस (Residential Status) क्या रहा है।किसे भरना होगा Schedule FA? रेजिडेंशियल स्टेटस से समझेंभारतीय आयकर कानून के अनुसार, विदेशी संपत्तियों का खुलासा करने का नियम आपकी नागरिकता पर नहीं, बल्कि आपकी टैक्स रेजिडेंसी पर तय होता है:Resident and Ordinarily Resident (ROR): यदि कोई करदाता इस श्रेणी (यानी भारत का सामान्य निवासी) में आता है, तो उसके लिए ITR में Schedule FA भरना 100% अनिवार्य है। चाहे आपकी संपत्ति दुनिया के किसी भी कोने में हो, आपको उसका विवरण देना ही होगा।NRI (Non-Resident Indian) या RNOR (Resident but Not Ordinarily Resident): यदि आप आयकर नियमों के तहत एनआरआई या आरएनओआर की श्रेणी में आते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में आपको Schedule FA भरने की कोई आवश्यकता नहीं होती।इसलिए, कोई भी विदेशी संपत्ति रखने वाले व्यक्ति को अपना रिटर्न दाखिल करने से ठीक पहले अपना सटीक रेजिडेंशियल स्टेटस जरूर कैलकुलेट कर लेना चाहिए।Schedule FA में विदेशी संपत्ति की कौन-कौन सी जानकारियां देनी होती हैं?जिन करदाताओं (ROR श्रेणी वाले) पर यह नियम लागू होता है, उन्हें अपनी निम्नलिखित विदेशी परिसंपत्तियों का पूरा और पारदर्शी विवरण देना पड़ता है:विदेश में स्थित सभी बैंक खाते (Savings and Current Accounts)कस्टडी या डिपॉजिटरी अकाउंट और वित्तीय कंपनियों में जमा पूंजीविदेशी कंपनियों के शेयर (Stocks), म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) और बॉन्ड्सविदेश में खरीदी गई कोई भी अचल संपत्ति (जैसे मकान, दुकान या जमीन)किसी विदेशी ट्रस्ट में हिस्सेदारी या अन्य कोई वित्तीय हित (Financial Interest)महत्वपूर्ण बिंदु: इस शेड्यूल में न केवल संपत्ति का विवरण, बल्कि संबंधित वित्त वर्ष के दौरान उस खाते का अधिकतम बैलेंस (Peak Balance) और निवेश का कुल मूल्य भी बताना पड़ता है। इसके अलावा, यदि उस विदेशी संपत्ति से कोई कमाई या ब्याज (Income) हुआ है, तो उसे भी ITR में दिखाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।गलत जानकारी देने या छुपाने पर 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत ऐक्शनटैक्स एक्सपर्ट्स सचेत करते हुए कहते हैं कि विदेशी संपत्ति की जानकारी को छिपाना, छुपाने का प्रयास करना या गलत विवरण देना एक बेहद गंभीर आर्थिक अपराध माना जाता है।ऐसा करने पर आयकर विभाग द्वारा ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) और कर अधिरोपण कानून, 2015 (Black Money Act) के तहत सख्त जांच बैठाई जा सकती है। इसके अंतर्गत करदाता पर भारी-भरकम जुर्माना (Penalty), टैक्स और गंभीर परिस्थितियों में जेल (अभियोजन) जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।सही ITR फॉर्म का चुनाव करना है सबसे आवश्यकयदि आप पर Schedule FA का नियम लागू होता है और आप अपनी विदेशी संपत्ति का ब्योरा दे रहे हैं, तो फॉर्म चुनते समय विशेष सावधानी बरतें:ऐसे करदाता ITR-1 (सहज) या ITR-4 (सुगम) फॉर्म का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकते, क्योंकि इन फॉर्म्स में विदेशी संपत्तियों का विवरण दर्ज करने के लिए 'Schedule FA' का विकल्प ही मौजूद नहीं होता।विदेशी संपत्ति धारकों को अनिवार्य रूप से ITR-2 या व्यावसायिक आय होने पर संबंधित अन्य विस्तृत ITR फॉर्म (जैसे ITR-3) ही भरना पड़ता है।टैक्स एक्सपर्ट्स की अंतिम सलाह: अपना आईटीआर (ITR) फाइनल सबमिट करने से पहले अपने रेजिडेंशियल स्टेटस, विदेशी आय के स्रोतों और विदेशी संपत्तियों के बैंक स्टेटमेंट की बारीकी से जांच कर लें। इससे आपका रिटर्न त्रुटिहीन दाखिल होगा और भविष्य में आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से किसी भी प्रकार के स्क्रूटनी नोटिस या कानूनी पचड़े की आशंका न के बराबर हो जाएगी।
बिहार के जहानाबाद जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और फिल्मी मोड़ सा दिखने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पश्चिम बंगाल का रहने वाला एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को 'सरप्राइज' देने और उससे गुपचुप तरीके से मिलने के लिए काले रंग का बुर्का पहनकर उसके मोहल्ले में पहुंच गया। हालांकि, उसकी यह चालाकी धरी की धरी रह गई। मोहल्ले के लोगों को उसकी चाल-ढाल संदिग्ध लगी, जिसके बाद उन्होंने उसे रोक लिया। जब उसका नकाब हटाया गया, तो बुर्के के अंदर लड़की नहीं बल्कि एक पुरुष को देखकर लोग दंग रह गए। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने कानून हाथ में लेते हुए युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। गनीमत रही कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और युवक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर थाने ले गई।जहानाबाद में टाइल्स लगाने के दौरान हुआ था प्यारयह पूरी घटना जहानाबाद के नगर थाना क्षेत्र के फिदा हुसैन रोड की है। पुलिस द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ के बाद पकड़े गए युवक की पहचान पश्चिम बंगाल के रहने वाले किशोर राठौर के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, किशोर कुछ समय पहले जहानाबाद आया था और यहाँ रहकर घरों में टाइल्स लगाने का काम करता था। इसी काम के दौरान उसकी पहचान फिदा हुसैन रोड की रहने वाली एक मुस्लिम युवती से हुई। धीरे-धीरे दोनों की यह जान-पहचान प्यार में बदल गई। जहानाबाद से काम खत्म करके वापस बंगाल लौट जाने के बाद भी दोनों लंबे समय से फोन और सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे।चाल-ढाल ने खोल दी पोल; घबराहट देख लोगों ने हटाया नकाबगुरुवार को किशोर अपनी प्रेमिका से मिलने और उसे अचानक चौंकाने के इरादे से बिना बताए जहानाबाद पहुंच गया। युवती के रूढ़िवादी मोहल्ले और स्थानीय लोगों की नजरों से बचने के लिए उसने अपनी पहचान छिपाने का एक अनोखा रास्ता चुना और काले रंग का बुर्का पहन लिया।किशोर बुर्का पहनकर गली में दाखिल तो हो गया, लेकिन एक पुरुष होने के नाते वह बुर्के में महिलाओं जैसी चाल-ढाल (Body Language) कॉपी नहीं कर पाया। मोहल्ले के कुछ युवकों को उसकी अजीब चाल और हाव-भाव देखकर गहरा शक हुआ। युवकों ने जब उसे रोककर सामान्य पूछताछ शुरू की, तो वह बुरी तरह घबरा गया। उसकी घबराहट देख लोगों का संदेह पक्का हो गया और उन्होंने जबरन उसका नकाब हटा दिया।भीड़ ने लात-घूंसों से किया स्वागत, डायल 112 ने बचाई जानबुर्के के अंदर से एक गैर-समुदाय के युवक को निकलते देख वहां मौजूद कुछ लोग बुरी तरह उग्र हो गए। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने युवक को चोर या कोई संदिग्ध मानकर लात-घूंसों व डंडों से पीटना शुरू कर दिया।मामले को हिंसक रूप लेता देख मोहल्ले के ही कुछ समझदार नागरिकों ने तुरंत आपातकालीन पुलिस सेवा डायल 112 को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही नगर थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और लहूलुहान हो रहे युवक को उग्र भीड़ के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला और हिरासत में लेकर थाने ले आई।पुलिस कर रही है असली मंशा की जांचनगर थाना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि युवक किशोर राठौर को हिरासत में रखकर लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या युवक सिर्फ अपनी प्रेमिका से मिलने के उद्देश्य से बुर्का पहनकर आया था या इसके पीछे उसकी कोई अन्य संदिग्ध मंशा थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, युवती और उसके परिवार के बयान और सभी तथ्यों का पूरी तरह सत्यापन (Verification) करने के बाद ही आगे की उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, बुर्के वाले इस आशिक की पिटाई का यह वीडियो और घटना पूरे इलाके में सनसनी और चर्चा का विषय बनी हुई है।
पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य (आर्किटेक्चरल) विरासत को उसके मूल गौरव के साथ पुनर्जीवित करने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने पुरानी दिल्ली के संरक्षण और कायाकल्प के उद्देश्य से गठित 'शाहजहानाबाद री-डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' (SRDC) का नाम बदलकर अब इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम (Indraprastha Heritage Redevelopment Corporation - IVPN) कर दिया है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस निगम के माध्यम से पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक और पारंपरिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए उसे विश्वस्तरीय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बनाने की एक व्यापक और गंभीर पहल शुरू हो चुकी है।मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई सालाना बैठक; लिए गए कई बड़े फैसलेइंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम (IVPN) की चेयरपर्सन व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में निगम की एक हाई-लेवल सालाना बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शहरी विकास मंत्री और निगम के उपाध्यक्ष आशीष सूद, मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप कुमार सहित तमाम संबंधित विभागों के सीनियर अधिकारी शामिल हुए। बैठक में पुरानी दिल्ली के ओवरऑल पुनर्विकास, हेरिटेज कंजर्वेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और पर्यटन (Tourism) को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण रोडमैप तैयार किए गए, जिसमें ऐतिहासिक चांदनी चौक के पुनर्विकास को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा गया है।चांदनी चौक का गौरव लौटेगा: व्यापारियों और पर्यटकों के हितों का समन्वयमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि चांदनी चौक बाजार का डिजाइन इस तरह से रि-डेवलप किया जाए, जिससे उसका 350 साल पुराना ऐतिहासिक स्वरूप और सांस्कृतिक गरिमा स्पष्ट रूप से दिखाई दे।नागरिक सुविधाएं: चांदनी चौक में प्रतिदिन आने वाले लाखों खरीदारों और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक और साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालय (टॉयलेट ब्लॉक्स) विकसित किए जाएंगे।व्यापारिक संतुलन: बैठक में स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों के हितों का पूरा ध्यान रखने पर जोर दिया गया। सीएम ने कहा कि चांदनी चौक का वजूद यहाँ के बाजारों से ही है, इसलिए हेरिटेज संरक्षण और व्यापारिक गतिविधियों के बीच एक सटीक संतुलन स्थापित किया जाएगा।पर्यटक कंट्रोल रूम व पार्किंग: देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के मार्गदर्शन और सुरक्षा के लिए बाजार में एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। साथ ही, इलाके को जाम-मुक्त करने के लिए व्यवस्थित पार्किंग सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया।टाउन हॉल, जामा मस्जिद और हनुमान मंदिर का होगा सुंदरीकरणपुरानी दिल्ली के पुनर्विकास का दायरा केवल चांदनी चौक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कई अन्य ऐतिहासिक केंद्रों को भी जोड़ा गया है:टाउन हॉल (Town Hall): ऐतिहासिक टाउन हॉल के पुनर्विकास की समीक्षा करते हुए सीएम ने निर्देश दिया कि इसका एक मुख्य प्रवेश और निकास (Entry/Exit) द्वार सीधे चांदनी चौक की ओर खोला जाए, ताकि यह इमारत एक प्रमुख विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सके।यमुना बाजार हनुमान मंदिर: परियोजना के तहत यमुना बाजार स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर और उसके पीछे के पूरे क्षेत्र के विकास का एक विस्तृत ब्लू प्रिंट (Detailed Project Report) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।जामा मस्जिद व ओल्ड दिल्ली रेलवे स्टेशन: जामा मस्जिद क्षेत्र और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग (SPM Marg) के सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास की नई कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए हैं।7.12 वर्ग किलोमीटर में फैला है इतिहास का खजानाबैठक में अधिकारियों ने दिल्ली के ऐतिहासिक महत्व के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पुरानी दिल्ली लगभग 7.12 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है। 350 साल से भी अधिक पुराने इस जीवंत शहर के अंदर:1 विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site - लाल किला)10 राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक (National Protected Monuments)10 राज्य संरक्षित स्मारक (State Protected Monuments)700 से अधिक स्थानीय स्तर पर अधिसूचित विरासत स्थल मौजूद हैं।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अंत में कहा कि दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत सिर्फ हमारी सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर भी है। विकास कार्य इस तरह किए जा रहे हैं जिससे पुरानी दिल्ली एक विश्वस्तरीय हेरिटेज हब के रूप में अपनी नई वैश्विक पहचान बना सके।
भारतीय संस्कृति और सनातन सभ्यता में पर्यावरण संरक्षण को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति को कभी सिर्फ उपभोग की वस्तु नहीं माना, बल्कि उससे श्रद्धा और सहभागिता का रिश्ता जोड़ा। मत्स्य पुराण का एक बेहद प्रसिद्ध श्लोक इस बात का सबसे बड़ा लिखित प्रमाण है:दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः।दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥अर्थात: दस कुओं के बराबर एक बावड़ी (जल संचयन केंद्र) होती है, दस बावड़ियों के बराबर एक विशाल तालाब होता है, दस तालाबों के बराबर एक योग्य पुत्र होता है और दस पुत्रों के बराबर एक अकेला वृक्ष (पेड़) होता है।इस श्लोक में वृक्ष की महत्ता को पुत्र से भी अधिक इसलिए आंका गया है क्योंकि एक पुत्र केवल एक परिवार का आधार बनता है, जबकि एक वृक्ष आने वाली कई पीढ़ियों का आधार बनता है। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जिस व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चला रहा है, वह वास्तव में इसी प्राचीन भारतीय ऋषि परंपरा का आधुनिक और प्रशासनिक विस्तार है।एक दशक पहले की विडंबना और 2017 का संकटउत्तर प्रदेश भले ही ऋषि-मुनियों की पावन तपोभूमि रहा हो, लेकिन पिछले दशकों में यहाँ पर्यावरण चेतना का घोर अभाव देखा गया। अंधाधुंध शहरीकरण के कारण वन भूमि सिकुड़ती गई, तालाबों को पाटकर अवैध निर्माण किए गए और भूजल का बेरहमी से दोहन हुआ। पूर्ववर्ती सरकारों की इस प्रशासनिक उदासीनता का सबसे बड़ा और चिंताजनक प्रमाण यह था कि साल 2017 में जब योगी सरकार ने राज्य की कमान संभाली, तब पूरे वन विभाग की सरकारी नर्सरियों में सिर्फ 5 लाख पौधे उपलब्ध थे। यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेलने जैसी थी।242 करोड़ पौधों का ऐतिहासिक कीर्तिमान और 35 करोड़ का महालक्ष्यमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण के इस बड़े संकट को भांपते हुए इसे एक सरकारी कार्यक्रम के बजाय जन-आंदोलन का रूप दिया। इसके तहत समाज के हर वर्ग की भागीदारी तय की गई।2017 से अब तक का सफर: उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों में रिकॉर्ड 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे जा चुके हैं।विश्व पर्यावरण दिवस का रिकॉर्ड: इसी वर्ष पर्यावरण दिवस के मौके पर रिकॉर्ड एक दिन में 5 करोड़ पौधे लगाए गए।12 जुलाई का महालक्ष्य: आगामी 12 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे रोपने का एक नया वैश्विक कीर्तिमान बनाने जा रही है।भविष्य की तैयारी: इस हरित क्रांति को निरंतर बनाए रखने के लिए यूपी वन विभाग की नर्सरियों में वर्तमान में 57 करोड़ से अधिक पौधे पूरी तरह तैयार हैं।रोपण के साथ 'रक्षण' पर जोर; बदल रहा है यूपी का भूगोलसुनील चौधरी (प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष, वन विभाग, यूपी) के अनुसार, आजादी के बाद से देश और प्रदेश में कई वन महोत्सव मनाए गए और कागजी घोषणाएं हुईं, लेकिन वे सब इसलिए बेअसर रहीं क्योंकि रोपण के बाद पौधों की सुरक्षा का कोई मजबूत सिस्टम नहीं था।आज योगी सरकार सिर्फ पौधे लगा नहीं रही है, बल्कि जिओ-टैगिंग और सुरक्षा तंत्र के जरिए उनके वृक्ष बनने तक की निगरानी कर रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगाए गए 242 करोड़ पौधों में से लगभग दो-तिहाई (Two-Thirds) पौधे सुरक्षित रहकर विशाल वृक्ष का रूप ले रहे हैं, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के भूगोल और पर्यावरण की दिशा बदल देंगे।'एक पेड़ माँ के नाम': पर्यावरण चेतना को मिला भावनात्मक संबलइस महाअभियान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान ने संजीवनी का काम किया है। आम तौर पर लोग जानते हैं कि पेड़ लगाना पर्यावरण के लिए अच्छा है, लेकिन लापरवाही वश वे ऐसा नहीं करते। जब देश के प्रधानमंत्री ने इस अभियान को प्रत्येक नागरिक की मां की ममता से जोड़ दिया, तो यह एक सामाजिक और पारिवारिक दायित्व बन गया। भारतीय समाज में मां के प्रति जो अगाध श्रद्धा है, उसे इस अभियान ने पर्यावरण चेतना का जरिया बना दिया।बदलते मौसम चक्र से जूझते किसानों के लिए वरदानपिछले 25 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो ग्लोबल वार्मिंग और वनों की कटाई के कारण उत्तर प्रदेश के मौसम चक्र में करीब डेढ़ महीने का विचलन (Shift) आ चुका है। मानसून का देरी से आना, सर्दियों का समय से पहले खत्म होना और अचानक ओलावृष्टि होना— ये सब पर्यावरण असंतुलन के विनाशकारी लक्षण हैं।उत्तर प्रदेश के उस छोटे किसान के लिए जिसके पास महज दो बीघा खेत है, यह डेढ़ महीने का मौसम परिवर्तन उसकी पूरी आजीविका को बर्बाद कर देता है। व्यापक स्तर पर हो रहा यह वृक्षारोपण और खेतों की मेड़ों पर पेड़ लगाने की नीति, इस पर्यावरणीय संकट का सबसे सटीक और सुलभ समाधान है।सनातन ज्ञान: सरकारी योजना नहीं, सामाजिक मूल्य बने जल और वनहमारे पूर्वजों ने पीपल, बरगद और नीम जैसे पेड़ों को धार्मिक रूप से पवित्र और पूजनीय इसलिए बनाया था क्योंकि वे वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाले और पर्यावरण के अनुकूल वृक्ष हैं। पुराने समय में कुआं या तालाब खुदवाने को महापुण्य का काम माना जाता था, ताकि जल प्रबंधन समाज की रगों में एक संस्कार की तरह बहे, न कि किसी सरकारी योजना के भरोसे रहे।उत्तर प्रदेश सरकार आज उसी प्राचीन ऋषि ज्ञान को आधुनिक प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ धरातल पर उतार रही है। आज यूपी पूरी दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि 'नेट जीरो' (Net Zero) का लक्ष्य केवल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों या कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर पेड़ लगाकर हासिल किया जा सकता है।
राजस्थान में 10 से 23 जुलाई तक प्रदेशव्यापी ओबीसी परिवारों का होगा सर्वेक्षण
जयपुर। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग 10 से 23 जुलाई तक राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) परिवारों का राज्यव्यापी डिजिटल सर्वेक्षण का आयोजन करेगा। ओबीसी आयोग राजस्थान के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट याचिका सुरेश महाजन बनाम मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य में पारित निर्णयों एवं […] The post राजस्थान में 10 से 23 जुलाई तक प्रदेशव्यापी ओबीसी परिवारों का होगा सर्वेक्षण appeared first on Sabguru News .
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को देश में पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने अंतरराष्ट्रीय बाजार (Global Market) के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए हैं, तो देश की आम जनता को इसका सीधा फायदा क्यों नहीं मिल रहा है? उन्होंने दावा किया कि सही कैलकुलेशन की जाए तो देश में इस समय पेट्रोल की कीमत काफी कम होनी चाहिए।अंतरराष्ट्रीय बाजार में $115 से गिरकर $70 पर आया क्रूड ऑयलएक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल से भारी गिरावट के साथ अब 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुकी है। जब कच्चे तेल की कीमत इतनी कम हो गई है, तो हमारे देश में भी तेल के दाम तुरंत घटने चाहिए।”उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश में पेट्रोल की कीमत ₹102 प्रति लीटर तक कर दी गई है। उन्होंने आम जनता को राहत देने का एक नया गणित पेश करते हुए कहा:सामान्य कैलकुलेशन के हिसाब से: देश में पेट्रोल की कीमत ₹82 प्रति लीटर होनी चाहिए।E20 (20% एथनॉल मिश्रित) के हिसाब से: अगर सरकार एथनॉल ब्लेंडेड फ्यूल दे रही है, तो पेट्रोल की कीमत घटकर ₹70 प्रति लीटर हो जानी चाहिए।केजरीवाल ने कहा कि यही नियम डीजल पर भी लागू होना चाहिए। अगर डीजल के दाम घटेंगे, तो माल ढुलाई सस्ती होगी और इससे देश में हर चीज की महंगाई अपने आप कम हो जाएगी।बंपर मुनाफे से नुकसान की भरपाई क्यों नहीं करती सरकार?सरकार और तेल कंपनियों द्वारा पुराने नुकसान की भरपाई करने के तर्कों पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने कहा, “जब-जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बेहद सस्ता हुआ, केंद्र सरकार ने देश में कीमतें कम नहीं कीं। उस दौरान तेल कंपनियों को जो बंपर प्रॉफिट (भारी मुनाफा) हुआ, क्या उससे युद्ध या अन्य संकटों के समय हुए नुकसान को सेट-ऑफ (भरपाई) नहीं किया जा सकता? जनता से जो अभी ₹102 वसूले जा रहे हैं, उसे तुरंत कम किया जाना चाहिए।”E20 ईंधन को लेकर 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को अल्टीमेटमपेट्रोल की कीमतों के अलावा अरविंद केजरीवाल ने एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) के इस्तेमाल से गाड़ियों को होने वाले नुकसान और माइलेज की चिंताओं को लेकर भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बुधवार को देश की 29 बड़ी ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों को आधिकारिक पत्र लिखकर गाड़ी के माइलेज और इंजन की सुरक्षा पर E20 ईंधन के पड़ने वाले असर पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। केजरीवाल ने सभी कंपनियों को 7 दिनों के भीतर अपना जवाब सौंपने का अल्टीमेटम दिया है।उन्होंने बताया कि मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki), टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (Toyota Kirloskar) और हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) को विशिष्ट तकनीकी बिंदुओं पर अलग से पत्र भेजे गए हैं। जबकि बाकी 26 वाहन निर्माताओं को एक सामान्य पत्र भेजकर E20 ईंधन के इस्तेमाल और उपभोक्ताओं के मन में बैठी चिंताओं पर उनकी राय और डेटा मांगा गया है।दिल्ली में मानसून की बदहाली पर भी बरसे केजरीवालदिल्ली में मानसून की पहली बारिश के बाद हुए भीषण जलभराव और चरमराए इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर केजरीवाल ने वर्तमान प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा:“मुझे हंसी आती है कि मीडिया और विपक्षी लोग बार-बार केवल मिंटो ब्रिज की तस्वीर दिखाते हैं, जबकि मिंटो ब्रिज पर जलभराव की समस्या को हमारी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान ही पूरी तरह ठीक कर दिया था। आज दिल्ली की स्थिति देखिए, जगह-जगह पानी भरा हुआ है, सड़कों पर कूड़े के ढेर हैं और सड़कें बुरी तरह टूट रही हैं। महज एक साल के अंदर इन्होंने दिल्ली का वो हाल कर दिया है जो यहाँ के लोगों ने पहले कभी नहीं देखा था।”
देशभर में मानसून की मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरस रही है। उत्तर से लेकर पश्चिम तक, भारत के कई राज्य इस समय भीषण जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन (Landslide) की चपेट में हैं। मैदानों में गलियां दलदल और सड़कें समंदर बन चुकी हैं, तो पहाड़ों में दरकते ग्लेशियर और मलबे इंसानी जिंदगी को लील रहे हैं। बड़े-बड़े महानगरों को पेरिस और लंदन बनाने के दावे करने वाले प्रशासन की पोल महज कुछ घंटों की बारिश ने खोल दी है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर मुंबई और गुजरात के सूरत तक करोड़ों लोगों की जिंदगी बेतरतीब बहते पानी के भरोसे छूट गई है।दिल्ली-एनसीआर का बुरा हाल: 4 मंजिला इमारत गिरी, बालकनी ढहीदेश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा-गाजियाबाद में आसमानी आफत ने जनजीवन थाम दिया है।गाजियाबाद (वसुंधरा व इंदिरापुरम): वसुंधरा इलाके में भारी बारिश के चलते सड़क धंसने से एक कार अचानक 'पाताल लोक' की तरह जमीन के अंदर समा गई, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। इंदिरापुरम की सड़कें स्विमिंग पूल बन चुकी हैं, जहाँ NH-24 पर पैदल चलने वाले लोग कमर तक पानी में डूबकर जाने को मजबूर हैं।दिल्ली की लाचारी: जहांगीरपुरी में डीटीसी बसों के अंदर तक पानी भर गया, वहीं संगम विहार की सड़कें नदियों में तब्दील हो गईं। रोहिणी सेक्टर-16 में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां भारी बारिश के चलते एक 4 मंजिला निर्माणाधीन इमारत भरभराकर ढह गई। मलबे में दबने से 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद हालात का जायजा लेने जमीनी निरीक्षण पर उतरीं।गुरुग्राम का हादसा: साइबर सिटी गुरुग्राम में सड़कों पर जलभराव के बीच एक हाईराइज सोसाइटी की पूरी बालकनी अचानक नीचे गिर गई। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था।पश्चिमी और उत्तर प्रदेश: अस्पतालों और मंदिरों में घुसा पानीदिल्ली से आगे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, मेरठ और मथुरा में भी मानसून ने हाहाकार मचाया है। मेरठ के एक नामी अस्पताल के वार्डों में पानी घुस गया, जहां कर्मचारी वाइपर से पानी साफ करते नजर आए। वहीं, मथुरा-वृंदावन में विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के मुख्य रास्तों और बाजारों में कई फीट गंदा पानी भर गया, जिससे देश-विदेश से आए श्रद्धालु बेहद दयनीय स्थिति में दर्शन करने को मजबूर हैं। सहारनपुर में उफनती नदी के तेज बहाव में बहे दो बाइक सवारों को स्थानीय लोगों ने देवदूत बनकर बचाया।महाराष्ट्र: पातालगंगा नदी उफनी, बह गए 3000 एलपीजी सिलेंडरमहाराष्ट्र के रायगढ़ जिले की पनवेल तहसील से एक बेहद हैरान करने वाला और खतरनाक मंजर सामने आया है। भारी बारिश के कारण यहाँ की पातालगंगा नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ का पानी सीधे HPCL पातालगंगा एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के अंदर घुस गया। बाढ़ के तेज बहाव के कारण प्लांट में रखे करीब 3,000 कमर्शियल और डोमेस्टिक गैस सिलेंडर नदी में बह गए।नदी में तैरते हजारों सिलेंडरों को देखने के लिए किनारे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। कई लोग जान जोखिम में डालकर बहते सिलेंडरों को लूटने के लिए पानी में कूद पड़े। प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि इन सिलेंडरों में अत्यधिक ज्वलनशील गैस हो सकती है, इसलिए इन्हें छूने या घर ले जाने का प्रयास बिल्कुल न करें, यह जानलेवा साबित हो सकता है।गुजरात: सूरत में 400 mm बारिश, 100 टेक्सटाइल मार्केट डूबेडायमंड और कपड़ा नगरी सूरत की सूरत इस बारिश ने पूरी तरह बिगाड़ दी है। शहर में पिछले 48 घंटों के भीतर 400 मिलीमीटर (mm) से ज्यादा की मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। रिहायशी इलाकों से लेकर पेट्रोल पंप और बीआरटीएस बस स्टैंड पानी में समा चुके हैं। हालात से निपटने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और फायर ब्रिगेड की टीमों को बोट (नाव) लेकर सड़कों पर उतरना पड़ा है, जिन्होंने अब तक 300 से अधिक लोगों का सफल रेस्क्यू किया है।इस आपदा का सबसे बड़ा आर्थिक झटका सूरत के कपड़ा उद्योग को लगा है। शहर के करीब 100 टेक्सटाइल मार्केट के बेसमेंट पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। इसके चलते व्यापारियों की बेसमेंट में रखीं करोड़ों रुपये की कीमती साड़ियां, लहंगे और ड्रेस मटेरियल पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, व्यापारियों को हजारों करोड़ रुपये का व्यापारिक नुकसान हुआ है।पहाड़ों में तबाही: पांगी और टिहरी में लैंडस्लाइड, वैष्णो देवी मार्ग प्रभावितमैदानों की यह लाचारी पहाड़ों पर पहुंचकर और अधिक खौफनाक रूप अख्तियार कर रही है:हिमाचल प्रदेश: पांगी इलाके में एक विशालकाय पहाड़ का हिस्सा ताश के पत्तों की तरह टूटकर मुख्य हाईवे पर आ गिरा। समय रहते ट्रैफिक रुका होने के कारण कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई।उत्तराखंड (टिहरी): टिहरी में भीषण लैंडस्लाइड के चलते पहाड़ से भारी मलबा नीचे गिरा, जिसकी चपेट में आकर एक पुरानी खाली इमारत जमींदोज हो गई। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए पहले ही आसपास की दुकानें खाली करा ली थीं।जम्मू-कश्मीर (वैष्णो देवी): माता वैष्णो देवी भवन के मुख्य मार्ग पर भी भूस्खलन हुआ है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर चलने वाले बैटरी चालित ऑटो पर फिलहाल पूरी तरह रोक लगा दी है, हालांकि पैदल यात्रियों को सावधानी के साथ जाने की अनुमति दी जा रही है।मौसम वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में यह पानी और रुलाएगा। मानसून की यह भयावह रफ्तार भारत के अनियोजित ड्रेनेज सिस्टम और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है।
केंद्रीय भंडार निगम ने मदन दिलावर को सौंपा 44 लाख रुपए का चेक
कोटा। केन्द्रीय भंडार निगम ने राजस्थान में कोटा जिले में रामगंजमंडी क्षेत्र के राजकीय चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगभग 44 लाख रुपए मूल्य के आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रिंस कुमार ने गुरुवार को शिक्षा एवं पंचायती राज […] The post केंद्रीय भंडार निगम ने मदन दिलावर को सौंपा 44 लाख रुपए का चेक appeared first on Sabguru News .
कृषि शिक्षा में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को मिलेगी प्रोत्साहन राशि
राज किसान साथी पोर्टल पर होंगे ऑनलाइन आवेदन अजमेर। कृषि विभाग की राज्य योजना के अंतर्गत कृषि शिक्षा में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारम्भ हो गई है। पात्र छात्राएं राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से आगामी 31 जनवरी 2027 तक आवेदन कर सकती हैं। कृषि विभाग […] The post कृषि शिक्षा में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को मिलेगी प्रोत्साहन राशि appeared first on Sabguru News .
शहरी सेवा शिविरों में विशेष योग्यजनों के सर्वे हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त
पात्र दिव्यांगजन योजनाओं के लाभ से नहीं रहेंगे वंचित अजमेर। जिले में संचालित शहरी सेवा शिविरों के माध्यम से विशेष योग्यजनों को राज्य एवं केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने सभी नगरीय निकायों में नोडल अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। इन अधिकारियों की […] The post शहरी सेवा शिविरों में विशेष योग्यजनों के सर्वे हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त appeared first on Sabguru News .
भोपाल में मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग से गैंगरेप, भाई को भेजा वीडियो
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। आरोपियों ने वारदात का वीडियो बनाकर पीड़िता के भाई के मोबाइल पर भेजा, जिसके बाद परिजन ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस सूत्रों के अनुसार पीड़िता ने स्कूल जाना […] The post भोपाल में मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग से गैंगरेप, भाई को भेजा वीडियो appeared first on Sabguru News .
देश के ईवी बाजार में 18% हुई UP की हिस्सेदारी, 30 फीसदी तक पहुंचने का लक्ष्य
Uttar Pradesh EV market: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 में पिछले वर्ष ...
उदयपुर में नर्सिंग छात्र की चाकू मारकर हत्या
उदयपुर। राजस्थान में उदयपुर के सवीना थाना क्षेत्र में एक नर्सिंग छात्र की चाकू मार कर हत्या करने का मामला सामने आया है। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि हिरण मगरी सेक्टर-14 स्थित श्रीराम अपार्टमेंट के पास रहने वाला दिनेश कुमार बुधवार शाम को मोटरसाइकिल ठीक करवाने के लिए घर से निकला था। रात […] The post उदयपुर में नर्सिंग छात्र की चाकू मारकर हत्या appeared first on Sabguru News .
35 करोड़ रुपए की कर चोरी की आशंका पर फर्म के ठिकानों पर सर्च
जयपुर/पाली। राजस्थान में राज्य जीएसटी वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा कर चोरी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुख्यालय की प्रवर्तन शाखा-तृतीय जयपुर द्वारा मेसर्स प्रेम ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड एवं उससे संबंधित चार अन्य फर्मों के कई ठिकानों पर सर्च कार्यवाही की गई। समूह की फर्मों द्वारा मेहन्दी पाउडर, मेहन्दी कोन, हेयर कलर […] The post 35 करोड़ रुपए की कर चोरी की आशंका पर फर्म के ठिकानों पर सर्च appeared first on Sabguru News .
निःशुल्क नेत्र जांच शिविर में उमड़ी मरीजों की भीड़, विशेषज्ञों ने दिए आंखों की देखभाल के टिप्स
अजमेर। भारत विकास परिषद महाराणा प्रताप शाखा एवं शंकर आयुर्वेद सिविल लाइंस अजमेर के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में दिल्ली के वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक एवं रेटिना व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा ने मरीजों की आंखों की जांच कर आवश्यक परामर्श दिया। परिषद सचिव दीपक चोपड़ा […] The post निःशुल्क नेत्र जांच शिविर में उमड़ी मरीजों की भीड़, विशेषज्ञों ने दिए आंखों की देखभाल के टिप्स appeared first on Sabguru News .
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का नाराजगी भरा वीडियो सामने आया है। जिसमें वे कहते दिखाई दे रहे हैं कि वे भूख हड़ताल पर बैठे हैं और लोग यहां ठूंस-ठूंसकर खा रहे हैं। कहीं उनका इशारा 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत ...
वीरांगना रानी अवंतीबाई ने देश की रक्षा व आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर किया : योगी आदित्यनाथ
Chief Minister Yogi Adityanath : वीरांगना रानी अवंती बाई ने भारत की आन-बान-शान की रक्षा और देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान और त्याग आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ...
अमरनाथ गुफा केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्रकृति का अद्भुत चमत्कार भी है। प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिम शिवलिंग (बाबा बर्फानी) श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है, लेकिन इस साल प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग लगभग पूरी तरह ...
अप्रैल का महीना था। मौसम पूरी तरह से नए पौधे लगाने के अनुकूल नहीं था, फिर भी घूमने के दौरान एक सुंदर सा पौधा मन को इतना भा गया कि उसे अपने साथ घर ले आए। घर पहुँचते ही उसे एक बड़े गमले में सावधानी से लगा दिया। यह जानते हुए भी कि समय शायद सही नहीं है, ...
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कालापीपल को दी 30.86 करोड़ की सौगात, दोहराया UCC को लागू करने का संकल्प
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को शाजापुर जिले के कालापीपल को 30.86 करोड़ लागत के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने यहां कई कामों के लोकार्पण और भूमिपूजन किए। उन्होंने यहां आयोजित किसान समृद्धि संकल्प सम्मेलन एवं ...
जेवर हादसे में 3 मजदूरों की मौत, जल्द गिरफ्तार होगा वाहन चालक: एडीसीपी संतोष कुमार
ग्रेटर नोएडा के जेवर में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। इस हादसे में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की चपेट में आने से सड़क किनारे पैदल जा रहे तीन युवकों की मौत हो गई। हादसा बुधवार देर रात जेवर-खुर्जा मार्ग पर नीमका गांव के सामने हुआ। ग्रेटर नोएडा के एडिशनल डीसीपी संतोष कुमार ने बताया कि पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई है।
ईरान के सरकारी मीडिया ने गुरुवार को पहली बार वह वीडियो जारी किया है, जिसमें पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर के अंदर हुई भारी तबाही दिखाई गई है। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब एक सप्ताह तक चले अंतिम संस्कार के बाद ...
फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) का रोमांच इस समय पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है और टूर्नामेंट अब अपने सबसे दिलचस्प मोड़ यानी क्वार्टर फाइनल की तरफ बढ़ चुका है। इस महाकुंभ में मेसी, रोनाल्डो और एम्बापे जैसे दिग्गज खिलाड़ी जिस फुटबॉल से मैदान पर जादू बिखेर रहे हैं, वह कोई साधारण गेंद नहीं है। 'ट्रियोन्डा' (Trionda) नाम की इस आधिकारिक फुटबॉल के भीतर अत्याधुनिक सेंसर और बैटरी की हाई-टेक तकनीक छिपी हुई है, जिसका सीधा कनेक्शन हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान के सियालकोट (Sialkot) शहर से है। आइए समझते हैं इस स्मार्ट फुटबॉल के पीछे का पूरा विज्ञान और इसकी हैरान करने वाली खासियतें।सियालकोट: दुनिया की फुटबॉल राजधानी में बनी सबसे एडवांस्ड गेंदपाकिस्तान के सियालकोट को दुनिया की 'फुटबॉल राजधानी' कहा जाता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल होने वाली दो-तिहाई से ज्यादा फुटबॉल इसी शहर में मैनुफैक्चर की जाती हैं। ट्रियोन्डा फुटबॉल को जर्मनी में डिजाइन किया गया है, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन सियालकोट में हुआ है। एडिडास (Adidas) की यह अब तक की सबसे एडवांस्ड गेंद है, जो पूरी तरह से डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम करती है।500 हर्ट्ज का मोशन सेंसर: हर सेकंड 500 बार रिकॉर्ड होती है मूवमेंटइस फुटबॉल के बिल्कुल सेंटर में एक बेहद शक्तिशाली 500 हर्ट्ज (Hz) का सस्पेंडेड मोशन सेंसर लगाया गया है।लाइव डेटा ट्रैकिंग: यह सेंसर हर एक सेकंड में 500 बार गेंद की हर एक मूवमेंट, उसकी स्पिन (घूमना), स्पीड, खिलाड़ियों का टच और शॉट की पावर को रिकॉर्ड करता है।रेफरी को सटीक मदद: गेंद से मिलने वाला यह सारा डेटा रियल-टाइम में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) रूम और कनेक्टेड एआई सिस्टम को भेजा जाता है। इसकी मदद से ऑफसाइड (Offside) और गोल-लाइन जैसे विवादित फैसलों को रेफरी पलक झपकते ही बिल्कुल सटीक तरीके से सुलझा लेते हैं।मैच से पहले चार्ज होती है फुटबॉल, जीरो ग्रेविटी में हुआ है टेस्टचूँकि गेंद के अंदर इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और ट्रांसमीटर लगे हैं, इसलिए इन्हें पावर देने के लिए एक छोटी रीचार्जबल बैटरी भी फिट की गई है। यही वजह है कि हर वर्ल्ड कप मैच से ठीक पहले इन फुटबॉल को किसी स्मार्टफोन की तरह बाकायदा चार्जिंग पॉइंट पर लगाकर चार्ज किया जाता है।गेंद का संतुलन (Balance) इतना परफेक्ट है कि इसे अंतरिक्ष में, जीरो ग्रेविटी (Zero Gravity) के माहौल में भी टेस्ट किया जा चुका है, जहाँ इसकी फ्लाइट और बैलेंस 100% सटीक पाए गए। भारतीय मुद्रा में इस एक ऑफिशियल मैच बॉल की कीमत लगभग 14,000 से 15,000 रुपये के बीच है।कम पैनल्स और गजब का एयर कंट्रोलडिजाइन की बात करें तो ट्रियोन्डा को बेहद कम पैनल्स को आपस में जोड़कर (थर्मल बॉन्डिंग तकनीक से) बनाया गया है। कम जोड़ होने की वजह से हवा में इस गेंद की रफ्तार (Flight) बेहद स्मूद और प्रेडिक्टेबल यानी अनुमान लगाने योग्य होती है। यह अनोखा डिजाइन खिलाड़ियों को मैदान पर गजब का ग्रिप, स्विंग और शॉट पर बेहतरीन कंट्रोल देता है। जहाँ एक तरफ इस फुटबॉल की बदौलत खेल की दुनिया में पाकिस्तान की तकनीक का डंका बज रहा है, वहीं दूसरी तरफ क्रिकेट जैसे पारंपरिक खेलों में पाकिस्तान का ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा है।
झारखंड के पलामू जिले में पारिवारिक विवाद के बाद एक महिला ने अपनी दो मासूम बेटियों के साथ कुएं में छलांग लगा दी। इस घटना में दोनों बच्चियों की मौत हो गई, जबकि महिला को ग्रामीणों ने जीवित निकाल लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अमरीकी हमलों की दूसरी रात के बाद ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप को चेताया, हमला करोगे तो जवाब मिलेगा
तेहरान। अमरीका और ईरान के बीच लगातार दूसरी रात हमलों के आदान-प्रदान के बाद ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य अभियान का दायरा होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे बढ़ाते हुए ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर चाबहार तक कर दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड […] The post अमरीकी हमलों की दूसरी रात के बाद ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप को चेताया, हमला करोगे तो जवाब मिलेगा appeared first on Sabguru News .
भारतीय कॉर्पोरेट जगत (Corporate Sector) में इन दिनों एक नया और चौंकाने वाला वर्क कल्चर तेजी से पैर पसार रहा है। अब कर्मचारी दफ्तर आते हैं, अपनी डेस्क संभालते हैं, सिर्फ उतना ही काम करते हैं जितना उनके कॉन्ट्रैक्ट या जॉब डिस्क्रिप्शन (JD) में लिखा है, और समय होते ही लॉग-ऑफ कर देते हैं—न एक मिनट कम, न एक मिनट ज्यादा। मैनेजमेंट और एचआर की भाषा में इस नए ट्रेंड को 'एफर्ट रिसेशन' (Effort Recession यानी प्रयासों में मंदी) का नाम दिया गया है, जिसने देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के कप्तानों की नींद उड़ा दी है।क्या होता है 'डिस्क्रीशनरी एफर्ट' जो अब गायब हो रहा है?किसी भी नौकरी में एक ऐसा हिस्सा होता है, जिसे कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों से जबरन या नियम कानून के दम पर नहीं करवा सकती। जैसे—बिना कहे देर रात तक रुकना, अपनी जिम्मेदारी से बाहर जाकर किसी कलीग की मदद करना, या किसी प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए अपनी क्षमता से बढ़कर योगदान देना। इसे मैनेजमेंट विज्ञान में 'डिस्क्रीशनरी एफर्ट' (Discretionary Effort - स्वैच्छिक प्रयास) कहा जाता है। यही वो एक्स्ट्रा पुश होता है जो किसी साधारण कर्मचारी को लीडर बनाता है और कंपनियों को आगे बढ़ाता है, लेकिन अब भारतीय वर्कफोर्स से यह स्वैच्छिक प्रयास पूरी तरह गायब होता दिख रहा है।'ग्रेट प्लेस टू वर्क' की रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा'ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया' (Great Place to Work India) की साल 2026 की एक हालिया स्टडी ने इस ट्रेंड पर मुहर लगाई है।10 में से 6 कंपनियां परेशान: सर्वे में शामिल देश की लगभग 63% कंपनियों (380 में से 240 संगठनों) ने स्वीकार किया है कि पिछले एक साल में उनके कर्मचारियों के 'स्वैच्छिक प्रयास' में औसतन 5% की भारी गिरावट आई है।रिटेल और आईटी पर सबसे ज्यादा मार: इस मंदी का सबसे बुरा असर रिटेल सेक्टर (88%) में देखा गया है। इसके बाद आईटी (IT) और प्रोफेशनल सर्विसेज (77%) तथा कंस्ट्रक्शन व रियल एस्टेट (71%) का नंबर आता है। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस मामले में सबसे मजबूत रहा, जहाँ सिर्फ 44% कंपनियों ने ही इस गिरावट को महसूस किया।'मूड वैसा, काम जैसा' — मैनेजर के व्यवहार पर टिका है एक्स्ट्रा एफर्टरिपोर्ट के निष्कर्ष साफ इशारा करते हैं कि कर्मचारी अब 'अंधभक्ति' के मूड में नहीं हैं। उनका एक्स्ट्रा काम पूरी तरह से कंपनी के लीडरशिप और भरोसे पर टिका है:केयरिंग मैनेजर = 99% एफर्ट: जिन कर्मचारियों को लगता है कि उनका मैनेजर सच में उनकी परवाह करता है और उन्हें काम के बदले सही पैसे व सम्मान मिलेगा, उनका अतिरिक्त प्रयास का स्तर 99 फीसदी तक देखा गया।भरोसे की कमी = सिर्फ 29% काम: जहाँ कर्मचारियों और मैनेजमेंट के बीच भरोसे की कमी है, वहाँ यह स्वैच्छिक योगदान गिरकर महज 29 फीसदी पर सिमट जाता है। इसी तरह, प्रेरणादायक लीडरशिप मिलने पर एक्स्ट्रा एफर्ट 98% रहता है, अन्यथा केवल 32% रह जाता है।Gen Z और AI के दौर में एचआर (HR) के सामने नई चुनौतीभारतीय कार्यबल (Workforce) में अब जेन-जी (Gen Z) यानी नई पीढ़ी के कर्मचारियों की हिस्सेदारी बढ़कर 26% हो चुकी है। इसके साथ ही कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बड़े बदलावों से गुजर रही हैं।लगभग 58% चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर्स (CHROs) का मानना है कि उन्हें एक तरफ एआई (AI) को अपनाना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी की उम्मीदों के हिसाब से ऑफिस का माहौल बदलना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 50% एचआर प्रमुखों ने माना कि वे आज भी जेन-जी कर्मचारियों की प्राथमिकताओं (वर्क-लाइफ बैलेंस, मेंटल पीस) को पूरी तरह समझने में नाकाम रहे हैं। कर्मचारी अब 'क्वाइट क्विटिंग' (Quiet Quitting) को अपना रहे हैं, जो सीधे तौर पर कॉर्पोरेट जगत के लिए 'एफर्ट रिसेशन' बन चुका है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 की प्रोविजनल आंसर की (Provisional Answer Key) और रिस्पॉन्स शीट आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी है। जो उम्मीदवार 2 से 4 जुलाई 2026 के बीच आयोजित हुई इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब ऑनलाइन माध्यम से अपनी उत्तर कुंजी चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही आयोग ने प्रश्नों या उत्तरों पर आपत्ति (Objection) दर्ज करने की तारीखों का भी ऐलान कर दिया है।14 जुलाई है आपत्ति दर्ज करने की लास्ट डेट, प्रति प्रश्न लगेंगे ₹500अगर किसी उम्मीदवार को आयोग द्वारा जारी किए गए किसी प्रश्न या उसके उत्तर पर कोई आपत्ति है, तो वह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना चैलेंज सबमिट कर सकता है। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई 2026 को रात 11:59 बजे तक तय की गई है। उम्मीदवारों को ध्यान रखना होगा कि प्रत्येक आपत्ति के लिए ₹500 की फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी। इसके साथ ही साक्ष्य के रूप में एनसीईआरटी (NCERT) या एससीईआरटी (SCERT) जैसी प्रामाणिक किताबों के स्कैन दस्तावेज अपलोड करने होंगे। यदि उम्मीदवार की आपत्ति सही पाई जाती है, तो यह फीस उनके खाते में वापस (Refund) कर दी जाएगी।OMR Sheet से कैसे कैलकुलेट करें अपना संभावित स्कोर?UPTET एक ऑफलाइन पेन-पेपर आधारित परीक्षा है, जिसमें उत्तरों का मूल्यांकन कंप्यूटर आधारित ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन (OMR) स्कैनर द्वारा किया जाता है। परीक्षा के बाद आपको मिली ओएमआर शीट की 'स्टूडेंट कार्बन कॉपी' और आधिकारिक आंसर की की मदद से आप घर बैठे अपना सटीक स्कोर जान सकते हैं।इस परीक्षा की मार्किंग स्कीम बेहद सरल है क्योंकि इसमें कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है। परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे गए थे, जो 150 अंकों के थे। हर सही उत्तर के लिए आपको +1 अंक जोड़ना है, जबकि गलत या बिना हल किए गए प्रश्नों के लिए 0 अंक मिलेंगे (यानी कोई नंबर नहीं काटा जाएगा)। अपनी ओएमआर शीट के गोलों का आधिकारिक मास्टर आंसर की से मिलान करें और जितने विकल्प सही मिल रहे हैं, उन्हें जोड़कर अपना स्कोर निकाल लें। सामान्य वर्ग के लिए क्वालीफाइंग मार्क्स 90 (60%) और आरक्षित वर्ग (OBC/SC/ST) के लिए 82 (55%) तय हैं।UPTET Answer Key 2026 कैसे डाउनलोड करें?आंसर की डाउनलोड करने और आपत्ति दर्ज करने के लिए उम्मीदवार इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:सबसे पहले उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाएं।होमपेज पर फ्लैश हो रहे लिंक 'शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) -: प्रश्न आपत्ति (Qs. Objection)' पर क्लिक करें।अब आपके सामने एक नया लॉगिन पेज खुलेगा, जहाँ आपको अपना रोल नंबर (या रजिस्ट्रेशन नंबर) और जन्मतिथि (DOB) दर्ज करनी होगी।डिटेल्स सबमिट करते ही आपका डैशबोर्ड खुल जाएगा, जहाँ से आप पेपर-1 और पेपर-2 की प्रोविजनल आंसर की पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।यदि ऑब्जेक्शन करना हो, तो ड्रॉप-डाउन मेनू से प्रश्न संख्या चुनकर, अपना दावा दर्ज करें और प्रमाण पत्र अटैच करके ऑनलाइन फीस का भुगतान करें।
पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल बड़ी टेक कंपनियों या दफ्तरों तक सीमित रहने वाली तकनीक नहीं रह गया है, बल्कि यह चुपचाप हमारे घरों का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। पैसों के लेनदेन और रास्तों की खोज से आगे बढ़कर AI अब हमारे लिविंग रूम, किचन और बाथरूम तक पहुंच चुका है। हालिया ग्लोबल रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दशक के अंत तक वैश्विक एआई बाजार 1.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का होने की उम्मीद है। यह तकनीक अब सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और एक बेहतर, तनावमुक्त जीवनशैली को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे 'स्मार्ट होम इकोसिस्टम' (Smart Home Ecosystem) की नींव बन चुकी है।बीमारी आने के बाद नहीं, बीमारी से पहले ही मिलेगा समाधानदशकों से भारतीयों की यह आदत रही है कि जब सेहत खराब होती है, हम तभी डॉक्टर या समाधान की तरफ भागते हैं। जैसे- खांसी या सांस की तकलीफ बढ़ने पर एयर प्यूरीफायर का ख्याल आता है या पेट खराब होने पर पानी के टीडीएस (TDS) की चिंता होती है। लेकिन एआई और ऑटोमेशन (Automation) ने अब इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।भविष्यवाणी करने वाली तकनीक: आधुनिक स्मार्ट होम अब अपने आसपास के माहौल को खुद समझते हैं, यूजर की आदतों से सीखते हैं और संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का पहले से अनुमान लगाकर समय रहते जरूरी कदम उठा लेते हैं।बाजार में रिकॉर्ड तेजी: यही वजह है कि साल 2024 में जो वैश्विक स्मार्ट होम मार्केट लगभग 128 अरब अमेरिकी डॉलर का था, वह 2030 तक तेजी से बढ़कर 537 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।कोविड-19 के बाद बदली सोच: हेल्थ और हाइजीन बनी पहली प्राथमिकताइस तकनीकी क्रांति के पीछे सबसे बड़ी वजह कोविड-19 (COVID-19) महामारी के बाद लोगों की बदली हुई मानसिकता है। अब लोग अपनी इम्युनिटी और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर बेहद गंभीर हो चुके हैं। भारत के बड़े महानगरों से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी सस्ता इंटरनेट, स्मार्टफोन की पहुंच और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित गैजेट्स ने स्मार्ट लिविंग को हर घर तक पहुंचा दिया है।AI एयर प्यूरीफायर और स्मार्ट वॉटर फिल्टर: सांस और पानी पर कड़ा पहराबढ़ते प्रदूषण के इस दौर में घर के अंदर की हवा को शुद्ध रखना अब विलासिता नहीं बल्कि मजबूरी बन चुका है।स्मार्ट एयर प्यूरीफिकेशन: पारंपरिक फिल्टरों के उलट, एआई-आधारित एयर प्यूरीफायर हवा में मौजूद धूल के सूक्ष्म कणों (PM 2.5), नमी, बैक्टीरिया और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों पर लाइव नजर रखते हैं। अगर बाहर अचानक प्रदूषण बढ़ता है, तो ये सिस्टम खुद-ब-खुद अपनी क्लीनिंग स्पीड बढ़ा देते हैं और कमरा खाली होने पर बिजली बचाने के लिए स्लीप मोड में चले जाते हैं।खुद डॉक्टर बनने वाले वॉटर प्यूरीफायर: पानी को शुद्ध करने के लिए अब एआई वॉटर प्यूरीफायर आ चुके हैं, जो पानी के टीडीएस (TDS) के स्तर की लगातार जांच करते रहते हैं। ये फिल्टर की लाइफ पर खुद नजर रखते हैं और स्थानीय पानी की गुणवत्ता के आधार पर मोबाइल ऐप के जरिए पहले ही यूजर को अलर्ट कर देते हैं कि सर्विसिंग की जरूरत कब पड़ने वाली है। आजकल 2.5 साल तक चलने वाले लॉन्ग-लाइफ फिल्टर और सब्सक्रिप्शन आधारित मेंटेनेंस मॉडल ने इसे और आसान बना दिया है।स्मार्ट किचन और चिमनी: वॉइस कमांड पर बदल जाती है सेटिंगयह एआई बदलाव केवल हवा और पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि अब आपके किचन को भी हाइटेक बना रहा है। आधुनिक स्मार्ट किचन (Smart Kitchen) घर के सदस्यों की खानपान की आदतों, कैलोरी की जरूरत और पसंद के आधार पर खुद ब खुद हेल्दी रेसिपीज के विकल्प सुझाने लगे हैं। वहीं, किचन में लगने वाली एआई चिमनी अब वॉइस कमांड (Voice Command), गेस्चर कंट्रोल, IoT कनेक्टिविटी और सीधे मोबाइल ऐप के जरिए धुएं के स्तर को भांपकर अपनी सक्शन पावर और सेटिंग्स को ऑटो-एडजस्ट कर लेती हैं।रोज-रोज के छोटे फैसलों और मानसिक थकान से मिलेगी मुक्तिइन एडवांस होम ऑटोमेशन तकनीकों का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ गैजेट्स का दिखावा करना नहीं है, बल्कि इंसानी दिमाग से रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसलों का मानसिक बोझ (Decision Fatigue) कम करना है। 'क्या पानी पीने के लिए सुरक्षित है?', 'क्या कमरे की हवा साफ हो चुकी है?', या 'क्या खाना ठीक से पक गया है?'— इन तमाम चिंताओं पर अब एआई खुद चौबीसों घंटे निगरानी रखता है। ये सिस्टम बैकग्राउंड में चुपचाप काम करते हैं और केवल तभी यूजर को नोटिफिकेशन भेजते हैं जब वास्तव में किसी इंसानी एक्शन या फिल्टर बदलने की जरूरत होती है। इससे हमारा घर मानसिक तनाव की वजह बनने के बजाय हमें मानसिक सुकून देने वाला एक सुरक्षित स्पेस बन जाता है।भारत की जरूरत के हिसाब से बदलने होंगे विदेशी मॉडलभले ही ये तकनीकें डेटा और यूजर्स की आदतों को ट्रैक करके चलती हैं, इसलिए कंपनियों के लिए डेटा प्राइवेसी, कंज्यूमर ट्रस्ट और पारदर्शिता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। भारत में जिस तरह से पर्यावरण और शहरी जीवन की चुनौतियां बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए भारत को केवल पश्चिमी देशों के स्मार्ट होम मॉडल को कॉपी-पेस्ट करने से बचना होगा। हमें भारतीय घरों की बनावट, बिजली-पानी की उपलब्धता और यहां के परिवारों की खास आदतों को ध्यान में रखकर इस तकनीक को कस्टमाइज करना होगा। भविष्य ऐसी दुनिया का है जहां तकनीक दीवारों पर लगी स्क्रीन्स में चिल्लाएगी नहीं, बल्कि बैकग्राउंड में चुपचाप रहकर हमारी जिंदगी को सुरक्षित, टिकाऊ और सेहतमंद बनाएगी।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज के इस 5G और AI के दौर में कोई ऐसा भी फोन हो सकता है, जिसकी कीमत ₹1.34 लाख से अधिक हो, लेकिन उसमें न तो कोई चमचमाता हुआ एमोलेड डिस्प्ले हो और न ही कोई हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा? भारत की सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) एक ऐसा ही अनोखा फोन लेकर आई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस फोन को चालू रखने या बात करने के लिए न तो किसी सिम कार्ड की जरूरत है और न ही किसी मोबाइल टावर की। इस डिवाइस का नेटवर्क सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट होता है, जिसे विशेष रूप से इमरजेंसी और क्रिटिकल कम्यूनिकेशन के लिए डिजाइन किया गया है।₹1.34 लाख की भारी-भरकम कीमत और इनमारसैट तकनीकयह कोई आम स्मार्टफोन नहीं है जिसे कोई भी राह चलता व्यक्ति खरीद ले। टैक्स (GST) को मिलाकर इस स्पेशल हैंडसेट की कीमत ₹1,34,166 तय की गई है। यह एक 'Inmarsat' (इनमारसैट) सैटेलाइट फोन है। इसे उन कठिन परिस्थितियों और दुर्गम इलाकों के लिए बनाया गया है, जहाँ मोबाइल के पारंपरिक जमीनी नेटवर्क (Terrestrial Networks) का नामोनिशान नहीं होता। इस फोन के जरिए देश के सबसे पिछड़े, घने जंगलों, गहरे समुद्र या ऊंचे पहाड़ी इलाकों से भी सीधे और स्पष्ट वॉयस कॉलिंग की जा सकती है।इन सेक्टर्स और वीआईपी ऑपरेशंस के लिए बनी है यह डिवाइसBSNL ने अपनी आधिकारिक घोषणा में साफ किया है कि यह फोन आम जनता के रेगुलर इस्तेमाल के लिए नहीं है। इस डिवाइस का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाएगा:डिफेंस और सुरक्षा एजेंसियां: सेना और सीमा सुरक्षा बल के जवान।समुद्री ऑपरेशंस (Maritime): गहरे समुद्र में तैनात मर्चेंट नेवी और जहाजों के क्रू मेंबर्स।आपदा प्रबंधन (Disaster Response): बाढ़, भूकंप या चक्रवात के समय जब मोबाइल टावर गिर जाते हैं, तब राहत कार्यों के लिए।माइनिंग और इंडस्ट्रियल साइट्स: जमीन के काफी नीचे या सुदूर रिमोट लोकेशंस पर काम करने वाले इंजीनियर्स।एडवेंचर ट्रैवलर्स और पर्वतारोही: हाई-एल्टीट्यूड ट्रैकिंग और रिस्क जोन में जाने वाले लोग।कठिन हालातों के लिए खास फीचर्स और मजबूत बनावटमहंगा होने के साथ-साथ यह फोन बेहद टिकाऊ और रग्ड (Rugged) फिनिशिंग के साथ आता है:डायरेक्ट सैटेलाइट वॉयस कॉलिंग: बिना किसी सेलुलर नेटवर्क के सीधे आसमान से सिग्नल लेकर बात करने की सुविधा।डेडिकेटेड SOS इमरजेंसी सपोर्ट: किसी भी बड़े संकट या आपातकालीन स्थिति में फंसे होने पर तुरंत मदद बुलाने के लिए इसमें एक खास SOS बटन दिया गया है।बेहद मजबूत बॉडी: इसे अत्यधिक गर्म, बर्फीले या रेतीले और कठिन मौसम में भी बिना खराब हुए काम करने के लिए तैयार किया गया है।दमदार बैटरी बैकअप: बिजली की अनुपलब्धता वाले क्षेत्रों में कई दिनों तक स्टैंडबाय पर रहने के लिए इसमें लंबी चलने वाली बैटरी दी गई है।क्या आम आदमी खरीद सकता है यह फोन? जानिए कानूनी नियमअगर आप सोच रहे हैं कि इसे किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट या मोबाइल शॉप से खरीदा जा सकता है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। भारत में सैटेलाइट फोन रखना या बिना अनुमति इसका इस्तेमाल करना पूरी तरह से गैरकानूनी है और ऐसा करने पर गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसे खरीदने के लिए ग्राहकों को सबसे पहले दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications - DoT) से बकायदा लिखित में परमिशन और ऑथराइजेशन लेटर लेना होगा। इसके बाद ही ग्राहक अपने नजदीकी BSNL ऑफिस से संपर्क कर, वाजिब कारण बताकर इस फोन को ₹1,34,166 में आधिकारिक तौर पर खरीद सकते हैं।
निसान ने दुनिया के लिए पेश की भारत में बनी नई टेकटॉन, कीमत 10.49 लाख रुपए से शुरू
नई दिल्ली। जापानी कार निर्माता कंपनी निसान मोटर की भारतीय इकाई निसान मोटर इंडिया ने गुरुवार को भारत में आयोजित विश्व प्रीमियर के दौरान नयी निसान टेकटॉन बाजार में पेश की। इस साल भारत में पेश किया गया यह निसान का दूसरा नया मॉडल है। यह दो इंजन विकल्पों टर्बो टी160 औ टर्बो टी280 में […] The post निसान ने दुनिया के लिए पेश की भारत में बनी नई टेकटॉन, कीमत 10.49 लाख रुपए से शुरू appeared first on Sabguru News .
बॉलीवुड के 'सिंघम' यानी अजय देवगन एक बार फिर दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट करने के लिए सिनेमाघरों में दस्तक दे रहे हैं। कई बार टलने के बाद आखिरकार उनकी मोस्ट अवेटेड कॉमेडी फिल्म 'धमाल 4' रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है। जुलाई की शुरुआत में रिलीज हुई बड़े बजट की फिल्में 'ऐल्फा' और 'बेबी डू एंड डाई' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं, जिसके बाद अब पूरी फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमाप्रेमियों की उम्मीदें 'धमाल 4' पर टिकी हैं। फिल्म के शुरुआती एडवांस बुकिंग के आंकड़े सामने आ चुके हैं, जो इशारा कर रहे हैं कि थिएटर्स में एक बार फिर दर्शकों का मेला लगने वाला है।एडवांस बुकिंग में 'धमाल 4' की शानदार रफ्तार, बिके 50 हजार से ज्यादा टिकटट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 'धमाल 4' की एडवांस बुकिंग को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने बिना ब्लॉक सीट्स के ऑल इंडिया लेवल पर 1.45 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है, वहीं ब्लॉक सीट्स को शामिल करने पर यह आंकड़ा 5 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। अब तक पहले दिन के लिए फिल्म के 57,000 से ज्यादा टिकट धड़ाधड़ बिक चुके हैं। फिल्म की इस रफ्तार को देखकर ट्रेड एक्सपर्ट्स अनुमान लगा रहे हैं कि यह ओपनिंग डे पर 13 से 16 करोड़ रुपये का दमदार बिजनेस कर सकती है।दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में सबसे ज्यादा क्रेज'धमाल' फ्रेंचाइजी की तगड़ी फैन फॉलोइंग का फायदा फिल्म को प्री-बुकिंग में साफ मिल रहा है। देशभर में फिल्म के लिए करीब 7,894 शोज अलॉट किए जा चुके हैं। अगर शहरों के हिसाब से बात करें तो सबसे ज्यादा दीवानगी दिल्ली-एनसीआर में देखी जा रही है, जहां से फिल्म ने करीब 60 लाख रुपये का बिजनेस कर लिया है। इसके बाद मुंबई सर्किट से 40 लाख रुपये, हैदराबाद से 19 लाख रुपये, बेंगलुरु से 11 लाख रुपये और पुणे-अहमदाबाद जैसे शहरों से 9-9 लाख रुपये की कमाई हो चुकी है।पुरानी पलटन के साथ रवि किशन और ईशा गुप्ता का डबल डोजइस बार की कहानी में वही पुराना पागलपन और बड़ा खजाना ढूंढने का एडवेंचर देखने को मिलने वाला है। फिल्म का निर्देशन दिग्गज डायरेक्टर इंद्र कुमार ने किया है। स्टार कास्ट की बात करें तो अजय देवगन के साथ रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और संजय मिश्रा जैसे फ्रेंचाइजी के परमानेंट चेहरों की वापसी हुई है। कॉमेडी के इस डोज को और मजेदार बनाने के लिए इस बार भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद की भी एंट्री हुई है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को 'UA 13+' सर्टिफिकेट दिया है।क्या 'टोटल धमाल' का रिकॉर्ड तोड़ पाएगी चौथी किस्त?'धमाल' सीरीज का इतिहास बॉक्स ऑफिस पर हमेशा शानदार रहा है। साल 2007 में आई पहली 'धमाल' ब्लॉकबस्टर रही थी, जिसके बाद 2011 में 'डबल धमाल' और 2019 में आई 'टोटल धमाल' ने भी बंपर कमाई की थी। 'टोटल धमाल' ने अपने पहले दिन 16.50 करोड़ रुपये की ओपनिंग ली थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या अजय देवगन की यह नई फिल्म 'ऐल्फा' की सुस्त रफ्तार का फायदा उठाकर अपने ही पिछले पार्ट का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं।
भारत के पेंशन रेगुलेटर पीएफआरडीए (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को और अधिक मजबूत और मुनाफेदार बनाने के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। पीएफआरडीए ने दुनियाभर के दिग्गज और लंबी अवधि वाले विदेशी पेंशन फंड्स की अरबों डॉलर की पूंजी को भारतीय बाजार में आकर्षित करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। इस बड़ी पहल का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ एनपीएस के मौजूदा खाताधारकों को बेहतर रिटर्न के रूप में मिलने की उम्मीद है।क्या है पीएफआरडीए की नई 'ASCEND' समिति?विदेशी पूंजी को भारत के पेंशन सेक्टर में खींचने के लिए बनाई गई इस स्पेशल कमेटी का नाम 'असेंड' (ASCEND - Accelerated Scaling of Global Capital Ecosystem and NPS Development) रखा गया है। इस कमेटी में फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गज दिग्गजों का एक मजबूत पैनल शामिल है। यह पैनल ऐसे रास्ते और नियम सुझाएगा जिससे भारतीय पेंशन फंड, दुनिया के बड़े को-इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स और रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnerships) के जरिए विदेशी फंडों के साथ हाथ मिला सकें।दिनेश खारा के हाथों में होगी 'असेंड' कमेटी की कमानइस बेहद महत्वपूर्ण 'ASCEND' कमेटी का चेयरमैन एनपीएस ट्रस्ट के मुखिया और एसबीआई के पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा को बनाया गया है। दिनेश खारा के अलावा इस हाई-लेवल पैनल में देश की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हैं, जिनमें:टीमलीज सर्विसेज के चेयरमैन नारायण रामचंद्रनसेबी (SEBI) के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायणअश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेखएनपीएस ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अरविंद गुप्ताएनपीएस ट्रस्ट की सीईओ (CEO) सुपर्णा टंडन को सदस्य बनाया गया है।एनपीएस खाताधारकों (NPS Customers) को कैसे होगा तगड़ा फायदा?ग्लोबल पेंशन फंड्स और भारतीय एनपीएस फंड के बीच होने वाले इस तालमेल से देश के आम पेंशन खाताधारकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।शानदार लॉन्ग-टर्म रिटर्न: विदेशी फंडों के आने से देश के पेंशन सिस्टम में लंबे समय तक टिकने वाला 'धैर्यवान पैसा' (Patient Money) आएगा।निवेश में विविधता (Diversification): एनपीएस सब्सक्राइबर्स के निवेश पोर्टफोलियो में विविधता आएगी, जिससे जोखिम (Risk) काफी कम हो जाएगा।बेहतर फंड मैनेजमेंट: ग्राहकों को भविष्य में अपने बुढ़ापे की पूंजी पर बेहतरीन रिस्क-समायोजित लंबी अवधि का रिटर्न (Risk-Adjusted Returns) मिल सकेगा।क्या होते हैं ग्लोबल पेंशन फंड्स और कितनी मजबूत है NPS?ग्लोबल पेंशन फंड्स दरअसल दुनिया भर के नौकरीपेशा लोगों के रिटायरमेंट की बचत को संभालते हैं। इनके पास दुनिया का सबसे बड़ा निवेश फंड होता है, जो भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए सबसे सटीक माना जाता है। अगर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की बात करें, तो वर्तमान में पीएफआरडीए के तहत लगभग 185 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 17.50 लाख करोड़ रुपये) का फंड मैनेज किया जा रहा है, जो भारत की कुल जीडीपी (GDP) का लगभग 5 फीसदी हिस्सा है।
चीन की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले हस्तियों की संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने या मौत होने की लिस्ट में अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। चीन की अर्थव्यवस्था और कैपिटल मार्केट पर बेहद बेबाक व स्वतंत्र राय रखने वाले 55 वर्षीय दिग्गज मैक्रो-इकोनॉमिस्ट गाओ शानवेन (Gao Shanwen) का निधन हो गया है। चीनी सरकारी मीडिया 'शंघाई सिक्योरिटीज न्यूज' के मुताबिक, उनकी मौत एक गंभीर बीमारी (कैंसर) के चलते हुई है। हालांकि, चीन में सरकार विरोधी सुर अलापने वालों के इतिहास को देखते हुए इस मौत को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।चीनी सरकार के 5% GDP के दावों की निकाल दी थी हवागाओ शानवेन चीन के सबसे प्रभावशाली और प्रसिद्ध संस्थागत अर्थशास्त्रियों में से एक थे। वह सरकारी नियंत्रण वाले इन्वेस्टमेंट ग्रुप 'SDIC सिक्योरिटीज' के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में कार्यरत थे। गाओ सबसे पहले साल 2024 के आखिर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने वाशिंगटन में 'पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स' के एक मंच पर बीजिंग को सीधे चुनौती दे डाली थी। उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि साल 2021 से 2023 के बीच चीन की वास्तविक औसतन GDP ग्रोथ सिर्फ 2 फीसदी के आसपास रही होगी, जबकि चीनी सरकार इसे बढ़ा-चढ़ाकर 5 फीसदी (लगभग 10% संचयी अंतर) बताती रही है।युवाओं की बेरोजगारी पर खोला था मोर्चा, कहा- 'युवा बेजान हैं'अपने दावों को साबित करने के लिए गाओ ने चीन के रोजगार, घरेलू खपत और गहरे रियल एस्टेट संकट के आंकड़ों में भारी हेरफेर का पर्दाफाश किया था। उन्होंने देश में युवाओं की रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी पर गहरी चिंता जताते हुए एक विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि आज के चीन में बुजुर्ग ऊर्जा से भरे हैं और सार्वजनिक जगहों पर नाच रहे हैं, जबकि देश का युवा बेजान हो चुका है और अपनी कमाई घटने के कारण अंधेरे में बैठकर नूडल्स खाने को मजबूर है। उनके इस बयान ने शी जिनपिंग सरकार के उस नैरेटिव की धज्जियां उड़ा दी थीं, जिसमें दावा किया जा रहा था कि युवाओं की खपत से चीन की अर्थव्यवस्था महामारी के बाद तेजी से सुधर रही है।बयान के बाद लगा बैन, नौकरी से भी धोना पड़ा था हाथबीजिंग के आधिकारिक आर्थिक डेटा को इस तरह सरेआम चुनौती देना चीन की सरकार को बिल्कुल रास नहीं आया। इस बयान के ठीक बाद चीनी प्रशासन ने उन पर सख्त कार्रवाई की। गाओ शानवेन के पब्लिक स्पीकिंग और मीडिया इंटरव्यूज पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स, ब्लॉग्स, वीडियो और आर्टिकल्स को चीनी इंटरनेट से पूरी तरह सेंसर या डिलीट कर दिया गया। 'सिक्योरिटीज एसोसिएशन ऑफ चाइना' ने उन्हें सरकार की नीतियों का केवल सकारात्मक प्रचार करने की सख्त हिदायत दी। इसके बाद साल 2025 के अंत में उन्हें उनकी नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया और उनका हांगकांग इन्वेस्टमेंट एडवाइजर लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया।सच बोलने वाले एक और चीनी चेहरे का अंतचीन में लियू शियाओबो (Liu Xiaobo) और ली वांगयांग (Li Wangyang) जैसे कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विचारकों की मौत पहले भी रहस्यमयी हालात में हो चुकी है। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'वीबो' (Weibo) और 'श्याओहोंगशू' पर लोग गाओ शानवेन को नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। चीन के कड़े सेंसरशिप के बावजूद एक यूजर ने लिखा, चीन में सच बोलने वाला आखिरी अर्थशास्त्री भी चला गया, अब यहाँ सिर्फ सरकार की झूठी तारीफ करने वाले 'आशावादी' चाटुकार ही बचे हैं।
झुंझुनूं में पुत्र ने चाकू से वार करके मां को मार डाला
झुंझुनूं। राजस्थान में झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ थाना क्षेत्र में बुधवार को एक व्यक्ति ने मां की चाकुओं के वार से हत्या कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग में बाबू के पद पर पदस्थ राजवीर (28) ने अपनी मां प्रभाती देवी (59) पर चाकुओं के कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर […] The post झुंझुनूं में पुत्र ने चाकू से वार करके मां को मार डाला appeared first on Sabguru News .
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शानदार सफलता के बाद अब केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर को देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का सबसे बड़ा जंक्शन बनाने जा रही है। इस महायोजना के तहत दिल्ली से देश के अलग-अलग कोनों को जोड़ने वाले चार नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का खाका तैयार किया गया है। केंद्रीय बजट में सात प्रमुख हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है, जिस पर सरकार लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने की तैयारी में है।दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी रूट: यूपी के इन शहरों की चमकेगी किस्मतप्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर के जरिए उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, राजनीतिक और औद्योगिक शहरों को आपस में कनेक्ट किया जाएगा। यह आधुनिक रूट दिल्ली से शुरू होकर नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और न्यू भदोही होते हुए सीधे वाराणसी पहुंचेगी। इतना ही नहीं, लखनऊ को सीधे रामनगरी अयोध्या से जोड़ने के लिए भी 124 से 135 किलोमीटर लंबा एक अलग हाई-स्पीड लिंक बनाने का शानदार प्लान है।देश का सबसे लंबा बुलेट ट्रेन रूट: दिल्ली से सिलीगुड़ी सिर्फ 6 घंटे मेंयह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भारत का सबसे लंबा हाई-स्पीड रेल रूट बनने जा रहा है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इसके सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। पहले से तय दिल्ली-वाराणसी लाइन को अब आगे बढ़ाकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक ले जाया जाएगा। लगभग 1705 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली, यूपी के बाद बिहार के बक्सर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी (सिलीगुड़ी) से होकर गुजरेगा। इस रूट पर ट्रेनें 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी, जिससे दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर महज 6 घंटे में पूरा हो जाएगा, जबकि दिल्ली से लखनऊ सिर्फ 2 घंटे 10 मिनट और वाराणसी 3 घंटे 50 मिनट की दूरी पर रह जाएगा।दिल्ली से मुंबई का सफर भी होगा आसानदूसरा बड़ा कॉरिडोर दिल्ली को राजस्थान और गुजरात के रास्ते सीधे आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ेगा। इस रूट पर सफर करने वाले यात्री बिना किसी रुकावट के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का आनंद ले सकेंगे। इसके तहत द्वारका, बिजवासन, गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, बहरोड़ (नीमराना), शाहपुरा, जयपुर, किशनगढ़ (अजमेर), बिजयनगर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, डूंगरपुर, हिम्मतनगर और साबरमती (अहमदाबाद) जैसे स्टेशनों को शामिल करने का प्रस्ताव है।दिल्ली से कटरा: माता वैष्णो देवी के दर्शन होंगे बेहद आसानधार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली-अमृतसर कॉरिडोर का भी प्लान तैयार है। यह रूट रोहतक, जींद, कैथल, चंडीगढ़, मोहाली, लुधियाना और जालंधर होते हुए अमृतसर पहुंचेगा। भविष्य में इसे जालंधर से पठानकोट होते हुए सीधे जम्मू और कटरा तक विस्तार दिया जाएगा, जिससे वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी और दिल्ली से अमृतसर की दूरी घटकर महज दो घंटे रह जाएगी।
नवाबों के शहर और बॉलीवुड के गलियारों में पटौदी पैलेस की भव्यता के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन इस आलीशान महल के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी भी छिपी है। जहाँ एक तरफ इस विशाल महल के मालिक बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान हैं, वहीं उनकी छोटी बहन सोहा अली खान इस शाही प्रॉपर्टी के उस हिस्से की मालकिन हैं जो कभी जनरेटर रूम हुआ करता था। जी हाँ, सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन आज यह जनरेटर रूम किसी लग्जरी फ्लैट से कम नहीं है।जनरेटर रूम से 2BHK अपार्टमेंट बनने का दिलचस्प किस्सासोहा अली खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्हें यह अनोखा हिस्सा विरासत में कैसे मिला। दरअसल, साल 2005 से 2014 के बीच जब पटौदी पैलेस को 'नीमराना होटल्स' चेन को लीज पर दिया गया था, तब सोहा के माता-पिता यानी मंसूर अली खान पटौदी और शर्मिला टैगोर को पैलेस में रहने के लिए एक निजी जगह की जरूरत थी। उस समय पैलेस के पुराने जनरेटर रूम को मॉडिफाई करके एक बेहद खूबसूरत और आरामदायक 2BHK अपार्टमेंट में बदल दिया गया। सोहा कहती हैं, होटल के समय मेरे माता-पिता इसी जगह शिफ्ट हो गए थे और आज यह खूबसूरत प्रॉपर्टी मेरी है, जिसके रखरखाव का पूरा खर्च मैं खुद उठाती हूँ।शाही महल में पेंट नहीं, आज भी होती है सफेदी; जानिए क्यों?भारत के सबसे महंगे और मशहूर शाही घरों में शुमार होने के बावजूद, पटौदी परिवार दिखावे से ज्यादा व्यावहारिकता पर भरोसा करता है। सोहा ने बताया कि उनकी माँ शर्मिला टैगोर आज भी खुद पटौदी पैलेस का पाई-पाई का हिसाब रखती हैं। बजट को कंट्रोल में रखने के लिए इस महल की दीवारों पर महंगा पेंट कराने के बजाय आज भी पारंपरिक सफेदी (चुना) कराई जाती है, क्योंकि यह काफी सस्ती पड़ती है। सालों से यहाँ कोई फिजूलखर्ची या नई चीजें नहीं खरीदी गईं, बल्कि इसकी पुरानी ऐतिहासिक बनावट को ही सहेज कर रखा गया है।सैफ अली खान ने भारी रकम चुकाकर वापस पाया अपना हकमंसूर अली खान पटौदी के निधन के बाद सैफ अली खान ने होटल चेन से लीज को खत्म करवाया और करोड़ों रुपये की डील के बाद इस पैलेस को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। सैफ अली खान के मुताबिक, उनकी दादी हमेशा कहती थीं कि इस ऐतिहासिक धरोहर को कभी कमर्शियल होटल नहीं बनने देना चाहिए, क्योंकि इसका अपना एक गौरवशाली इतिहास है।इसी जमीन में दफन है पटौदी खानदान का इतिहाससैफ और सोहा के लिए यह पैलेस महज एक आलीशान बंगला नहीं बल्कि भावनाओं का समंदर है। इसी पैलेस के परिसर में सैफ-सोहा के दादा-दादी और उनके पिता मंसूर अली खान पटौदी की कब्रें मौजूद हैं। आज यह महल पटौदी परिवार का प्राइवेट हॉलिडे होम है, जिसे कभी-कभी चुनिंदा बॉलीवुड फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए किराए पर दिया जाता है।
देश के कई राज्यों में मानसून की भारी बारिश ने आफत खड़ी कर दी है। मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी मूसलाधार बारिश के अलर्ट को देखते हुए कई राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में छुट्टी का ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर पूरे देश में स्कूल बंद होने की खबरें तैर रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यह आदेश केवल भारी जलभराव और रेड/ऑरेंज अलर्ट वाले प्रभावित जिलों में ही लागू है।गाजियाबाद और पश्चिमी यूपी में स्कूल बंदउत्तर प्रदेश के गाजियाबाद समेत कई पश्चिमी और पूर्वी जिलों में बादलों का डेरा है। गाजियाबाद जिला प्रशासन ने मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों को बंद रखने का सख्त आदेश जारी किया है। प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस गाइडलाइन का पालन करें।उत्तराखंड और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरापहाड़ी राज्य उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश आफत बन कर बरस रही है। देहरादून, नैनीताल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन (Landslide) और रास्ते बंद होने की आशंका को देखते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है।दिल्ली-एनसीआर और कर्नाटक में ऑरेंज अलर्टदिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में झमाझम बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बन गई है। दिल्ली और एनसीआर के कुछ प्रभावित इलाकों में ऐहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं, जहां प्रशासन ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर लोगों को बिना वजह घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। वहीं दक्षिण भारत के कर्नाटक में भी शिवमोग्गा समेत भारी बारिश वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्कूल बंद कर दिए गए हैं।मुंबई और गुजरात में रेड अलर्टमहाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और गुजरात के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण रेड अलर्ट जारी है। इन राज्यों के प्रभावित जिलों में भी सुरक्षा के मद्देनजर स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का निर्देश दिया गया है। अभिभावकों और छात्रों से अनुरोध है कि वे किसी भी सोशल मीडिया अफवाह पर भरोसा न करें और केवल अपने स्थानीय शिक्षा विभाग या स्कूल प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना को ही सही मानें।
झारखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मौसम विभाग ने राज्य के 18 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें रांची और धनबाद जैसे प्रमुख शहर भी शामिल हैं। अगले कुछ घंटों में इन इलाकों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं चलने और वज्रपात (बिजली गिरने) की भी चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण लेने से बचें।किन जिलों पर है सबसे ज्यादा असर?मौसम विभाग के अनुसार, रांची, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, रामगढ़, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, जामताड़ा, देवघर, दुमका और पाकुड़ जिलों में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। इन क्षेत्रों में मेघ गर्जन के साथ आंधी-तूफान की आशंका बनी हुई है। कृषि कार्य में लगे किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। खेत में काम करते समय यदि बादल गरजते दिखें, तो तुरंत पक्के मकान या सुरक्षित स्थान की ओर चले जाना ही समझदारी है।सावधानी ही बचाव: विभाग की एडवाइजरीलगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होने की आशंका है। मौसम केंद्र ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें। बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए मोबाइल फोन का उपयोग करते समय भी सावधानी बरतें और खुले मैदान में जाने से परहेज करें। विभाग द्वारा जारी यह अलर्ट अगले 24 से 48 घंटों तक प्रभावी रहने की उम्मीद है, जिसके बाद स्थिति का आकलन कर आगे की जानकारी दी जाएगी।तापमान में गिरावट से मिली राहतमानसून की इस सक्रियता के कारण लंबे समय से भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे झारखंडवासियों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई है। हालांकि, यह बारिश न केवल तापमान को नियंत्रित करने में सहायक है, बल्कि आने वाले खरीफ सीजन की फसलों के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जा रही है। किसान मानसून के इस दौर को फसलों के लिए 'जीवनदान' मान रहे हैं, बशर्ते वज्रपात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव रहे।
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य के भविष्य को तकनीक की नई ऊंचाई देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बदलाव लाने के लिए ₹1150 करोड़ के एक महत्वाकांक्षी मेगा प्लान को मंजूरी दी गई है। इस पहल का सीधा लक्ष्य न केवल प्रशासनिक और औद्योगिक कार्यों को आधुनिक बनाना है, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलना भी है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार अगले कुछ वर्षों में 1 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जो झारखंड को एक नई पहचान दिलाएगा।क्या है हेमंत सरकार का 'AI विजन'?राज्य सरकार का यह मेगा प्लान मुख्य रूप से 'स्किल इंडिया' और 'डिजिटल झारखंड' के विजन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के लागू होने से झारखंड देश के प्रमुख 'टेक हब' की दौड़ में शामिल हो जाएगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि तकनीक केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका लाभ युवाओं तक पहुंचे, जिससे पलायन की समस्या पर भी लगाम लग सके।1 लाख युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा मौकाइस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसमें शामिल 'रोजगार सृजन' का पहलू है। ₹1150 करोड़ की इस परियोजना से डेटा एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग और AI आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे राज्य के युवाओं को अपने ही गृह राज्य में बेहतर वेतन वाली नौकरियां मिल सकेंगी। सरकार युवाओं को AI और अत्याधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करने के लिए विशेष सेंटर भी खोलने की तैयारी में है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर तकनीकी प्रतिभाओं का विकास होगा, बल्कि झारखंड के युवाओं के लिए वैश्विक स्तर के अवसर भी पैदा होंगे।झारखंड के भविष्य के लिए एक 'गेम चेंजर'झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य में यह पहल एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य अब तकनीक और नवाचार की ओर कदम बढ़ा रहा है। इस मेगा प्लान से न केवल राज्य का जीडीपी (GDP) बढ़ेगा, बल्कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और तेजी भी आएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना का लाभ आगामी वर्षों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री की इस बड़ी पहल ने प्रदेश के युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार किया है और वे अब तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर संवारने के लिए उत्साहित हैं।
जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी Honda ने यूरोप में अपनी पहली फुल-साइज इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल WN7 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह बाइक अब यूरोप के डीलरशिप पर उपलब्ध है और इसके साथ ही कंपनी ने प्रीमियम इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में कदम रख दिया है।
Avatar Meher Baba: अवतार मेहेर बाबा कौन थे, कब और क्यों मनाया जाता है मौन पर्व?
10 July Silence Day: अवतार मेहेर बाबा भारत के एक महान रहस्यवादी, आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता को निस्वार्थ प्रेम, करुणा और सेवा का संदेश देने में समर्पित कर दिया। उनके अनुयायी उन्हें इस युग का 'पूर्ण अवतार' मानते ...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर, भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध, विकसित भारत, टॉप-3 अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान पर विस्तार से बात की। जानिए उनके भाषण की प्रमुख ...
उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनावों में मिले झटकों के बाद भाजपा अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए 'एक्शन मोड' में है। वहीं, विपक्षी खेमे में 'PDA' की राजनीति और कांग्रेस के नए तेवर सत्ताधारी दल के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। आखिर 2027 का रण किसके लिए कितना मुश्किल और आसान है? आइए इसे 4-4 प्रमुख बिंदुओं में समझते हैं।भाजपा की सबसे बड़ी 'ताकत' (Strength)संगठनात्मक ढांचा: भाजपा का बूथ-स्तर तक फैला नेटवर्क देश में सबसे मजबूत माना जाता है। शक्ति केंद्र संयोजकों और सक्रिय कार्यकर्ताओं की फौज पार्टी के लिए सबसे बड़ी बैकबोन है।नेतृत्व और चेहरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्माई नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'लॉ एंड ऑर्डर' मॉडल आज भी ग्रामीण और शहरी इलाकों में पार्टी की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है।कल्याणकारी योजनाएं: केंद्र और राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ आम जनता तक पहुँचाना पार्टी की चुनावी तैयारी का मुख्य आधार है, जो वोट बैंक को साधे रखने में मदद करता है।NDA का एकजुट मोर्चा: निषाद पार्टी, अपना दल (एस), आरएलडी (RLD) और सुभासपा जैसे सहयोगियों के साथ भाजपा अपने सामाजिक समीकरणों को और अधिक समावेशी बनाने की कोशिश कर रही है।भाजपा के सामने 'खतरे' और चुनौतियां (Challenges)बेरोजगारी और पेपर लीक: भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधली और बेरोजगारी का मुद्दा युवाओं के बीच भाजपा के खिलाफ एक बड़ा असंतोष पैदा कर रहा है, जो चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है।महंगाई और सत्ता-विरोधी लहर: 10 साल के शासन के बाद स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) का सामना करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे कम करना आसान नहीं होगा।जातिगत समीकरण और PDA: अखिलेश यादव का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला जातियों की एकजुटता को तोड़ रहा है, जिससे बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक छिटकने का खतरा बना हुआ है।विपक्ष की '3 नंबर' की चुनौती: विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) की बढ़ती आक्रामकता, खासकर कांग्रेस का नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरना और सीटों के बंटवारे पर 'सम्मानजनक' रुख, बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।चुनावी भविष्य का विश्लेषणराजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि 'नैरेटिव' की लड़ाई है। बीजेपी जहाँ अपनी पुरानी जीत के रिकॉर्ड को तोड़कर 'उत्तम प्रदेश' का संकल्प दोहरा रही है, वहीं विपक्ष संविधान और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर जमीन पर मजबूत तैयारी कर रहा है। '3 नंबर' यानी विपक्ष का एकजुट होकर लड़ना बीजेपी के लिए वह खतरे की घंटी है जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रहा। पार्टी के नए संगठन प्रमुख नितिन नबिन के दौरे और बैठकों से यह स्पष्ट है कि भाजपा अब किसी भी स्तर पर चूक नहीं करना चाहती।

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