बिरयानी में नहीं आया स्वाद तो होटल कर्मचारी को मारा चाकू
दिल्ली की कबूतर मार्केट में बिरयानी के स्वाद को लेकर हुए विवाद में दो नाबालिगों ने 25 साल के होटल कर्मचारी एहसान पर किचन के चाकू से हमला कर दिया. हालांकि बाद में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पढ़ें इस सनसनीखेज वारदात की पूरी कहानी.
'गोवा में हमारी सरकार बनी तो 5 दिन में बैन होगा इथेनॉल मिक्स पेट्रोल', केजरीवाल का बड़ा ऐलान
अरविंद केजरीवाल ने गोवा में E20 पेट्रोल के खिलाफ टाउनहॉल के दौरान कहा कि अगर 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी हारती है और उनकी सरकार बनती है, तो 10 मार्च के नतीजों के बाद पांच दिनों के अंदर गोवा में E20 पेट्रोल की बिक्री पर रोक लगा दी जाएगी.
ताइवान में बारिश के बाद बाढ़-लैंडस्लाइड ने मचाई तबाही... PHOTOS
ताइवान में भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में बाढ़ और लैंडस्लाइड से सड़कें डूब गईं और रास्ते बंद हो गए. 4263 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया, जबकि 4 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.
जब धड़धड़ाते हुए कानपुर RTO ऑफिस में घुसे 50+ पुलिसकर्मी, फिर...
कानपुर आरटीओ में दलाली और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद एसओजी और जिला प्रशासन ने संयुक्त छापेमारी की. 50 से अधिक पुलिसकर्मियों ने ड्रोन निगरानी के साथ परिसर को घेरा. दो बाबुओं के पास गड़बड़ी मिलने और 8-10 संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने से हड़कंप मचा हुआ है.
डिलीवरी बॉय ने गणेश जुलूस पर फेंके अंडे... इस बात से था नाराज
मुंबई के मझगांव इलाके में गणपति की प्रतिमा के स्वागत जुलूस पर अंडे फेंकने के मामले में 22 वर्षीय दानिश शेर खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी ऑनलाइन अंडे सप्लाई का काम करता है.
Xiaomi के सब ब्रांड Mijia ने भारत में लॉन्च किए सस्ते एयर प्यूरिफायर
चीनी कंपनी शाओमी का सब ब्रांड Mijia भारत में आ चुका है. शुरुआत में कंपनी ने दो एयर प्योरिफायर लॉन्च किए हैं. ये दोनों अलग अलग साइज में आते हैं. कीमत की शुरुआत 7,999 रुपये से होगी.
बार-बार नहीं मांगना पड़ेगा फ्री का धनिया, डंठल से घर पर खुद उगाएं
क्या आप भी बार-बार सब्जी वाले भइया से धनिया मांगते हैं? अगर हां, तो आपको अब ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. घर में इस्तेमाल किए गए धनिए की ताजी डंठल को फेंकने के बजाय उससे नया हरा-भरा पौधा उगाया जा सकता है. जानें पानी और मिट्टी, दोनों में धनिया उगाने का आसान तरीका और पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए जरूरी देखभाल टिप्स.
अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में क्यों बदलना चाहते हैं SP की पुरानी छवि
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जो SP उभरकर सामने आई, उसे अब भी काफी हद तक उसके पारंपरिक सामाजिक आधार के नज़रिए से ही देखा जाता था. आज की SP कुछ ज़्यादा व्यापक बात कहने की कोशिश कर रही है.
दिल्ली में स्वाइन फ्लू का खतरा! स्कूलों के लिए अलर्ट जारी
गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स या अन्य दवाएं बिल्कुल न लें. छात्रों को पर्याप्त पानी पीने, पौष्टिक भोजन लेने और भरपूर आराम करने की सलाह दी गई है. यदि बच्चे में लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें स्कूल न भेजकर घर पर आराम करने दें.
120 बच्चों के सिर पर मंडरा रहा था खतरा, जर्जर कमरे की छत भरभराकर गिरी
डूंगरपुर के दोवड़ा ब्लॉक के सत्तु देवकी स्थित अपर प्राइमरी स्कूल में सोमवार सुबह जर्जर और बंद कमरे की छत भरभराकर गिर गई. उस समय स्कूल में करीब 120 बच्चे पढ़ रहे थे. राहत रही कि कमरा एक साल से बंद था. स्कूल के दो कमरे जर्जर घोषित हैं. मरम्मत और नई छत के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं.
'नासिक कुंभ का 0.1% भी मिलता तो 100 स्कूल बंद नहीं होते', SC के जज की टिप्पणी
महाराष्ट्र के धुले दौरे पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्न बी. वराले ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए राज्य सरकार को नसीहत दी है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्न बी. वराले ने कहा कि नासिक कुंभ मेले के लिए लगभग 32 हजार से 34 हजार करोड़ रुपये का बजट बताया जा रहा है. अगर इसका सिर्फ 0.1 प्रतिशत यानी करीब 32 करोड़ रुपये भी स्कूलों पर खर्च किए जाते, तो राज्य के 100 से ज्यादा मराठी माध्यम स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था.
5 Family Members Dead Bodies Srisailam News:
बेटी के लिए दुनिया से भिड़ेगी मां, तापसी पन्नू की 'गांधारी' का धांसू ट्रेलर
तापसी पन्नू की फिल्म गांधारी का ट्रेलर रिलीज हो गया है. फिल्म में वह अपनी अगवा बेटी को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाती मां के किरदार में हैं. जानिए फिल्म की कहानी, स्टारकास्ट और रिलीज डेट.
दिल्ली में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, सरकार ने शुरू की ये तैयारियां
अब बात स्वाइन फ्लू के बढ़ते संकट की. राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू को मामले में से इजाफा हो रहा है. हालात को देखते हुए सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है. मरीजों के इलाज के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं. साथ ही लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की जा रही है.
थिएटर, बैंक की जॉब, मुंबई में संघर्ष, कैसे डबिंग स्टाक बना ये शख्स
यह OTT का दौर है. अब पॉकेट फ्रेंडली गैजेट्स में जेन-जी की पूरी दुनिया समाई है. हर पल बदलते कोलॉज के बीच एक ऐसी आवाज बनना जो दिल को छुए, काफी मुश्किल हो गया है. लेकिन डबिंग आर्टिस्ट अमित देओंडी ने इस दुनिया में बहुत करीब से दखल दिया है. आवाज के इस जादूगर से aajtak.in ने उनके पूरे सफर के बारे में जाना. साथ ही ये भी कि इस फील्ड में करियर बनाना कितना आसान है?
पीएम मोदी ने एक साथ कई देशों में भेजे अपने मंत्री
भारत के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार अजित डोभाल बीजिंग में हैं. विदेश मंत्री जयशंकर रूस में हैं.. पीएम मोदी ने एक साथ कई मोर्चे खोल दिए हैं.. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अमेरिका और कनाडा जाने की चर्चा है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 200 बिजनेस डेलीगेशन की बड़ी टीम के साथ जापान में हैं.
VC के ऑफिस में उड़ाए 500 के नकली नोट, 40 करोड़ के घोटाले का आरोप
गुजरात यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता पर NSUI और कांग्रेस ने 40 रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत मिली ग्रांट में से 9.84 लाख रुपये अपने बेटे के विदेशी खाते में ट्रांसफर किए. NSUI और कांग्रेस ने नीरजा गुप्ता पर FIR दर्ज करने और भ्रष्टाचार की रकम वसूलने की मांग की है.
'भारत में आप गायब नहीं हो जाएंगे', जापान के निवेशकों को जैक मा याद दिला गए गोयल!
पीयूष गोयल ने निवेश के लिए भारत को सबसे भरोसेमंद जगह बताते हुए चीन का नाम लिए बिना निशाना साधा. केंद्रीय मंत्री ने अलीबाबा के फाउंडर जैक मा का उदाहरण देते हुए जापानी निवेशकों को बताया कि उन्हें भारत को क्यों चुनना चाहिए.
जायसवाल-फर्नांडो के बीच झगड़े का नया VIDEO आया सामने
यशस्वी जायसवाल पर आईसीसी की तरफ से मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया गया है. लेकिन कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि जायसवाल पर और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी.
बहन का हाल जानने अस्पताल पहुंची महिला, सिर पर गिरा पंखा, आए 12+ टांके
जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ENT वार्ड में बहन का हाल जानने पहुंची रेणु के सिर पर अचानक छत का पंखा गिर गया. हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गई और ट्रॉमा सेंटर में उसके सिर पर 12 से ज्यादा टांके लगाए गए. इसके बाद भी उसे भर्ती के लिए भटकना पड़ा. आखिरकार उसे उसी वार्ड में बहन के पास शिफ्ट किया गया.
Latur में CA गिरफ्तार: 16 फर्जी कंपनियों से विदेश भेजे सैकड़ों करोड़ रुपये
महाराष्ट्र के लातूर जिले में 16 ‘शेल’ (फर्जी) कंपनियों के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये विदेश भेजने में मदद करने के आरोपी एक चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। शेल कंपनियां वे होती हैं, जो केवल दस्तावेजों पर मौजूद रहती हैं और वहीं से संचालित की जाती हैं। वास्तव में इनका कोई भौतिक कार्यालय, कर्मचारी या व्यावसायिक गतिविधि नहीं होती। इन कंपनियों का गठन मुख्य रूप से वित्तीय लेन-देन दिखाकर अवैध धन को छिपाने, कर की चोरी करने और पैसों की हेराफेरी कर उसे आसानी से विदेश भेजने के लिए किया जाता है। उदगीर शहर के पुलिस निरीक्षक भुसनूर ने बताया कि आरोपी की पहचान श्याम कालानी के रूप में हुई है। उदगीर की एक अदालत ने आरोपी को सोमवार को नौ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। यह मामला आयकर विभाग द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में सामने आए तथ्यों के आधार पर 21 अगस्त को दर्ज की गई प्राथमिकी के बाद सामने आया। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, कालानी ने बिना जरूरी दस्तावेजों की जांच किए, धन विदेश भेजने के लिए आयकर नियमों के तहत फॉर्म 15सीबी में 1,810 प्रमाण पत्र जारी कर दिए थे। फॉर्म 15सीबी सीए द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक पत्र होता है, जो यह प्रमाणित करता है कि विदेश भेजे जा रहे धन पर उचित कर चुका दिया गया है और इसमें किसी कर की चोरी नहीं हुई है। पुलिस का आरोप है कि इन प्रमाण पत्रों के जरिए एक अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2026 के बीच 16 ऐसी कंपनियों के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये विदेश भेजे गए, जिनका असल में कोई अस्तित्व ही नहीं था। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 234, 229 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच लातूर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दी गई है।
किस लकड़ी के बनवाएं गेट? बारिश में भी नहीं फूलती हैं इसकी प्लाई
बारिश में लड़की से बने खिड़की - दरवाजे का फूल जाना एक आम समस्या है. मानसून आते ही लकड़ी के दरवाजे खोलने और बंद करने में समस्या आने लगती है. ऐसी समस्या न हो, इससे बचने के लिए आखिर किस लकड़ी से घरों के फर्नीचर, खिड़की और गेट बनाया जाए.
'दान का एक-एक पैसा मंदिर के खाते में ही जाए...', बांके बिहारी चढ़ावे पर SC सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर में दान की पूरी रकम सीधे मंदिर के आधिकारिक खजाने और खाते में जमा करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने गड़बड़ी रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और मंदिर के धन से जमीन या संपत्ति खरीदने से पहले अदालत की मंजूरी लेने को कहा है.
दिल्ली में एच1एन1 के 2300 से ज्यादा मामले, सीएम रेखा गुप्ता ने बुलाई आपात बैठक
दिल्ली में H1N1 के 2,308 मामलों समेत करीब 3,000 इन्फ्लूएंजा केस सामने आए हैं। CM रेखा गुप्ता ने आपात बैठक बुलाई। स्वास्थ्य मंत्री ने स्थिति नियंत्रण में बताई।
'नौटंकी मत कर, FIR ठोक दूंगा', TI ने BJP नेता को थाने के गेट से उठाया
Rewa Police Station Viral Video: रीवा के सिविल लाइन थाने में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब एनडीपीएस कार्रवाई के विरोध में साहू समाज और स्थानीय व्यापारी थाने पहुंच गए. बीजेपी नेता बंसीलाल साहू जब थाने के मुख्य गेट पर बैठ गए, तो टीआई विजय सिंह ने उन्हें हाथ पकड़कर उठाया और तीखी बहस शुरू हो गई.
Delhi: BJP नेता Vijay Goel का अपनी सरकार पर ही निशाना: MP-MLA गिड़गिड़ाते हैं, अफसर काम नहीं करते
पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिल्ली बीजेपी नेता विजय गोयल ने मंगलवार को MCD और सरकारी अधिकारियों के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को बुनियादी नागरिक काम करवाने के लिए अधिकारियों के पीछे भागने पर मजबूर किया जा रहा है। गोयल ने एक्स पर लिखा कि क्या विडम्बना है एमसीडी और सरकार के अफसर काम नहीं कर रहे और सांसद, एमएलए और कॉरपोरेटर उनसे काम करने के लिए गलियों सड़कों के धक्के खा रहे हैं। कहीं से कूड़ा उठवा देते हैं, तो लगता है बहुत बड़ा काम करवा लिया। ये नहीं देखते इन अफसरों के होते हुए कूड़ा होना ही क्यों था। इसे भी पढ़ें: Gen Z पर BJP-RSS में मतभेद? दिपके बोले- मोहन भागवत आपके मेंटर हैं, उनकी बात सुनें गोयल ने आगे लिखा कि नाली, खड़ंजा, सड़क, सीवर, बिजली, पानी की समस्याओं पर चुने हुए प्रतिनिधि इन अफसरों से गिड़गिड़ाते हैं। फिर भी काम नहीं होते। फिर जनता को कौन पूछ रहा है। गोयल की यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब दिल्ली सरकार और नगर निकाय, दोनों पर ही बीजेपी का नियंत्रण है। बीजेपी 2025 में दिल्ली की सत्ता में आई और उसने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP के लगभग 13 साल के शासन को खत्म किया। फरवरी 2025 के चुनावों में 70 में से 48 विधानसभा सीटें जीतकर BJP 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी और आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया। रेखा गुप्ता अभी दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं। MCD में भी BJP की सरकार है। अप्रैल 2026 में 156 वोट पाकर BJP पार्षद प्रवेश वाही दिल्ली के मेयर चुने गए, जबकि BJP की ही मोनिका पंत डिप्टी मेयर चुनी गईं। अभी इस सिविक बॉडी के प्रमुख वाही हैं। इसे भी पढ़ें: सही नेता से उज्ज्वल भविष्य: Sambit Patra बोले- BJP फैलाएगी PM Modi की Saptadhara गोयल की यह आलोचना दिल्ली के सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर सफाई, जलभराव और ड्रेनेज सिस्टम की फिर से हो रही जांच-पड़ताल के बीच आई है। सोमवार को AAP पार्षदों ने कचरा जमा होने और जलभराव को लेकर MCD हेडक्वार्टर पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने BJP के नेतृत्व वाली सिविक बॉडी पर मॉनसून के दौरान शहर की समस्याओं को हल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। क्या विडम्बना है एमसीडी और सरकार के अफसर काम नहीं कर रहे और सांसद, एमएलए और कॉरपोरेटर उनसे काम करने के लिए गलियों सड़कों के धक्के खा रहे हैं। कहीं से कूड़ा उठवा देते हैं, तो लगता है बहुत बड़ा काम करवा लिया। ये नहीं देखते इन अफसरों के होते हुए कूड़ा होना ही क्यों था। नाली खड़ंजा… — Vijay Goel (@VijayGoelBJP) August 25, 2026
कॉकरोच जनता पार्टी कैसे बनी? अभिजीत दीपके बोले- मैं तो PS5 पर FIFA खेल रहा था
दीपके ने गूगल फॉर्म बनाया और AI की मदद से कुछ फोटो तैयार किए। उन्हें उम्मीद थी कि करीब 100-200 लोग रजिस्ट्रेशन करेंगे, लेकिन एक घंटे में संख्या तेजी से बढ़ने लगी। दो घंटे में करीब 5,000 लोगों ने खुद को रजिस्टर्ड किया।
Abhijeet Dipke:
गोवा डिजिटल अरेस्ट केस में दोनों आरोपी 5 दिन की ED कस्टडी में, ₹30 करोड़ से ज्यादा खाते फ्रीज
गोवा के डिजिटल अरेस्ट मामले में विशेष पीएमएलए अदालत ने दोनों आरोपियों को 29 अगस्त तक पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी ने कथित सिंडिकेट से जुड़े ₹30 करोड़ से अधिक शेष राशि वाले बैंक खाते फ्रीज किए हैं और 163 एफआईआर में एक ही नेटवर्क के फिंगरप्रिंट मिलने का दावा किया है।
दिल्ली में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, सरकार ने बढाई सतर्कता, किए ये इंतजाम
अब बात स्वाइन फ्लू के बढ़ते संकट की. राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू को मामले में से इजाफा हो रहा है. हालात को देखते हुए सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है. मरीजों के इलाज के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं. साथ ही लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की जा रही है. देखें...
किस पॉकेट में रखना चाहिए स्मार्टफोन? कपड़े भी कर देगा राख
स्मार्टफोन ब्लास्ट की वजह से कुछ लोगों को भारी नुकसान तक उठाना पड़ता है. क्या आप जानते हैं कि स्मार्टफोन को किस पॉकेट में रखना चाहिए और किस पॉकेट में नहीं रखना चाहिए. फोन को गलत पॉकेट में रखने की वजह से उसमें ब्लास्ट हो सकता है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
भारत में हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में, Gen Z ने बढ़ाई कंपनियों की टेंशन: रिपोर्ट
भारत में हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में है, जबकि 75% कर्मचारी अगले 12 महीनों में कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं. 1.1 लाख कर्मचारियों और 130 से ज्यादा संगठनों पर आधारित ग्रेट प्लेस टू वर्क की रिपोर्ट में Gen Z की बढ़ती हिस्सेदारी और कंपनियों के सामने बढ़ती रिटेंशन चुनौती का खुलासा हुआ है.
UPSC 2025 Selection: OBC Creamy Layer नियमों पर Supreme Court में Special Bench के गठन की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को इस बात पर विचार करने के लिए सहमत हो गया कि क्या OBC क्रीमी-लेयर क्राइटेरिया पर 11 मार्च के उसके फैसले को सिविल सेवा परीक्षा 2025 के ज़रिए चुने गए उम्मीदवारों पर लागू किया जाना चाहिए। डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा रिकमेंड किए गए 958 उम्मीदवारों को सेवाएँ आवंटित करने की अनुमति मांगी है। यह आवंटन फैसले से पहले लागू क्रीमी-लेयर नियमों के तहत किया जाना है। केंद्र ने तर्क दिया कि 2025 की पूरी हो चुकी चयन प्रक्रिया पर इस फैसले को लागू करने से एक जैसी स्थिति वाले उम्मीदवारों के साथ असमान व्यवहार हो सकता है और उनकी ट्रेनिंग व कैडर आवंटन में देरी हो सकती है। दिन की कार्यवाही की शुरुआत में, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने यह मामला उठाया। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। इसे भी पढ़ें: अखिलेश यादव के वार पर जयंत चौधरी का संयमित पलटवार, पश्चिमी यूपी की राजनीति में नया उबाल मेहता ने कहा कि सरकार ने एक निपट चुके मामले में अर्ज़ी दाखिल की है और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच से तत्काल सुनवाई की मांग की है। एक पक्षकार की ओर से पेश हुए सीनियर वकील संजय हेगड़े ने बताया कि 11 मार्च का फ़ैसला जस्टिस नरसिम्हा और आर महादेवन ने सुनाया था, जो अब अलग-अलग बेंच में बैठते हैं। चीफ़ जस्टिस ने कहा हमें एक स्पेशल बेंच बनानी होगी, और साथ ही कहा कि वह जजों से सलाह-मशविरा करेंगे। 11 मार्च के फ़ैसले में क्या कहा गया था सरकार की यह अर्ज़ी 'यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम रोहित नाथन' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि 14 अक्टूबर 2004 को जारी किया गया स्पष्टीकरण वाला पत्र, OBC क्रीमी लेयर की पहचान तय करने वाले 8 सितंबर 1993 के ऑफ़िस मेमोरेंडम (कार्यालय ज्ञापन) से ऊपर नहीं हो सकता। कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि पब्लिक सेक्टर की कंपनी या प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले माता-पिता की सैलरी या आय के आधार पर अकेले यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आता है या नहीं। 1993 के मेमोरेंडम में बताई गई आय और संपत्ति की शर्तों के साथ-साथ माता-पिता के पद और नौकरी की श्रेणी की भी जाँच की जानी चाहिए। इसे भी पढ़ें: जाति जनगणना को लेकर खड़गे-राहुल ने PM Modi को लिखा पत्र, बिहार, तेलंगाना मॉडल अपनाने की मांग की केंद्र सरकार छूट क्यों चाहती है? सिविल सेवा परीक्षा 2025 का नोटिफिकेशन 22 जनवरी, 2025 को जारी किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा 25 मई को हुई थी, जबकि मुख्य परीक्षा 22 से 31 अगस्त के बीच आयोजित की गई थी। UPSC ने 6 मार्च, 2026 को अंतिम परिणाम घोषित किए और IAS, IFS, IPS तथा अन्य केंद्रीय सेवाओं में नियुक्ति के लिए 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की। इसके पांच दिन बाद, 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने रोहित नाथन मामले में फैसला सुनाया। केंद्र सरकार का कहना है कि उम्मीदवारों ने फैसले से पहले लागू प्रशासनिक व्याख्या के आधार पर आवेदन किया था और परीक्षा में भाग लिया था।
मटर पनीर छोड़िए, रक्षाबंधन पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा टेस्टी मटर मशरूम
रक्षाबंधन के दिन लंच में हर बार मटर-पनीर बनाते हैं तो इस बार मेहमानों को मटर मशरूम खिलाएं. मटर मशरूम की सब्जी बिल्कुल होटल और रेस्टोरेंट जैसी आप घर पर बना सकते है, आइए आपको इस आसान डिश की रेसिपी बताते हैं. इसे खाने के बाद सब आपसे इसकी रेसिपी पूछेंगे.
देश के युवा राजनयिकों से मिले प्रधानमंत्री
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारतीय विदेश सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने कल सेवातीर्थ में मु
‘अभी बच्चा है, टेस्ट के लिए वक्त दो’, वैभव पर द्रविड़ की दो टूक
राहुल द्रविड़ ने 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वैभव को टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार होने का समय देना होगा और कम से कम दो सीजन रेड-बॉल क्रिकेट खेलना उनके लिए फायदेमंद रहेगा.
भूल जाएंगे रॉयल एनफील्ड और Jawa, होंडा की धांसू बाइक लॉन्च
भारतीय बाजार में होंडा ने अपनी दमदार बॉबर स्टाइल क्रूजर बाइक को लॉन्च कर दिया है. ये बाइक पावरफुल इंजन और मॉडर्न एज फीचर्स के साथ आती है. हम बात कर रहे हैं रॉयल एनफील्ड रिबेल 300 की, जिसमें कई कमाल के फीचर्स मिलते हैं. आइए जानते हैं इस बाइक की कीमत और दूसरी खास बातें.
Eid Milad-un-Nabi 2026: भारत में 26 अगस्त को मनाई जाएगी ईद मिलाद-उन-नबी, जानें इस दिन का इतिहास
कल यानी 26 अगस्त को देशभर में ईद मिलाद-उन-नबी का त्योहार मनाया जाएगा. यह दिन इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी उल अव्वल की 12वीं तारीख को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्म की याद में मनाया जाता है.
डिफेंस सेक्टर में आएगी बड़ी क्रांति! DRDO की घातक मिसाइल तकनीक से अब निजी कंपनियां बनाएंगी हथियार
क्या भारत का डिफेंस सेक्टर अब पूरी तरह बदलने वाला है? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की घातक मिसाइल तकनीकों को भारतीय निजी रक्षा कंपनियों को भी देने की मंजूरी दे दी है.
इस दिग्गज एक्टर ने गांव में बिताया बचपन, चाचा ने सिखाया तैरना, नंगे पैर चलना है पसंद
Delhi: गांव की नदी में हम तैरने के लिए जाते थे. मेरे जो छोटे चाचा थे, उन्होंने मुझे नदी में तैरना सिखाया था. वह मुझे कंधे पर बिठाकर ले जाते थे और सीधे पानी में छोड़ देते थे. मैं नंगे पैर गांव में चलता था.
काले चश्मे पर छिड़ा था विवाद, मेडिकल वजहों से अब संसद में भी पहन सकेंगे नेपाल के PM बालेन शाह
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर संसद के भीतर भी अपना ट्रेडमार्क काला चश्मा पहनने की अनुमति दे दी गई है. स्पीकर ने पहले इस पर आपत्ति जताई थी, लेकिन स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए संसद सचिवालय ने उन्हें छूट दे दी.
रक्षाबंधन की खरीदारी से देशभर के बाज़ारों में रौनक देखने को मिल रही है. ‘विकसित भारत’, ‘मोदी गारंटी’ और ‘ब्रह्मोस’ राखियां लोगों की पहली पसंद बन चुकी हैं.
'त्योहारों की खूबसूरती कपड़ों में नहीं', कंगना पर कृति का पलटवार
कृति सेनन ने अपने विवादित रक्षाबंधन वाले एड पर रिएक्ट किया है. उनका कहना है कि त्योहार या कल्चर को पहनावे से नहीं जोड़ना चाहिए. एक महिला होने के नाते, उन्हें क्या पहनना चाहिए ये उन्हें नहीं बताया जाए.
ऐ दिल है मुश्किल जीना यहाँ, ज़रा हटके ज़रा बचके ये है मुंबई मेरी जान... मायानगरी का यह मशहूर तराना आज मुंबईकरों के लिए कड़वी हकीकत बन चुका है। भाषा विवाद, हड़ताल और सड़कों से गायब ऑटो-टैक्सी के बीच मुंबईवासी अपने ही शहर में विदेशी पर्यटकों की तरह लुटने को मजबूर हैं, जहाँ महज 10 किलोमीटर के सफर के लिए 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। एक तरफ हड़ताल और कमर्शियल ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का नया विवाद, तो दूसरी तरफ सड़कों से गायब गाड़ियां। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि जो ऑटो और कैब वाले कभी सिर्फ पर्यटकों या विदेशियों से मनमाना किराया वसूलने के लिए बदनाम थे, वो अब मजबूरी का फायदा उठाकर स्थानीय यात्रियों से दोगुना, यानी 100 फीसदी तक ज्यादा किराया वसूल रहे हैं। कुछ इलाकों में तो यह लूट इससे भी कहीं ज्यादा है। घंटों का लंबा इंतजार और ऊपर से जेब पर दोहरा डाका, आखिर कब थमेगा मुंबई की सड़कों पर सफर का यह सियासी और मौसमी संकट? इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने Devendra Fadnavis को लिखा पत्र, आदिवासी छात्रों की मांग उठाई ज़्यादा किराया एक और समस्या बन गया ओला, उबर और रैपिडो जैसे राइड-हेलिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने वालों के लिए, भारत के सबसे महंगे शहर में ज़्यादा किराया एक और समस्या बन गया है। मंगलवार को सुबह के पीक आवर्स (सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच) में इन राइड-हेलिंग प्लेटफ़ॉर्म पर किराया तेज़ी से बढ़ा। यात्रियों ने बताया कि उन्हें लगभग 10 किलोमीटर की ऑटो राइड के लिए 450 रुपये से ज़्यादा चुकाने पड़े। आम तौर पर, हफ़्ते के दिनों में पीक आवर्स के दौरान इन ऐप्स पर 10 किलोमीटर की ऑटो-रिक्शा राइड का किराया 250-300 रुपये के बीच होता है। कुछ मामलों में तो किराया 100% तक बढ़ गया है। हालाँकि, सरकार द्वारा तय मीटर रेट के हिसाब से, ऑटो-रिक्शा के लिए 10 किलोमीटर का किराया 172 रुपये होना चाहिए। मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर ऑटो और कैब ड्राइवरों की मौजूदा हड़ताल के बीच, 10 किलोमीटर की सवारी के लिए किराया सामान्य दर से 2.5 गुना बढ़ गया है। आम रास्तों के लिए कितना किराया दे रहे मुंबई के लोग राइड-हेलिंग ऐप पर किराया डिमांड, गाड़ी की उपलब्धता और बुकिंग के समय पर निर्भर करता है। लेकिन कमी का मतलब है कि पीक आवर्स में यात्रा करने वालों को सामान्य से काफी ज़्यादा किराया देना पड़ सकता है। यह डिमांड और सप्लाई का बुनियादी गणित है। Uber, Ola या Rapido पर बुक की गई 10 किलोमीटर की ऑटो-रिक्शा राइड का किराया बढ़कर लगभग 250-300 रुपये हो गया। सर्ज प्राइसिंग के कारण, वही यात्रा काफी महंगी हो सकती है। उदाहरण के लिए, पवई से वर्सोवा की यात्रा लगभग 15 किलोमीटर की है। इस रास्ते पर ऑटो-रिक्शा का किराया, जो पहले लगभग 350 रुपये हुआ करता था, मंगलवार सुबह (सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच) 589 रुपये तक पहुँच गया। इसी तरह, जुहू से बांद्रा के रणवार विलेज तक की यात्रा छोटी है, लगभग 7.5 किलोमीटर। मंगलवार को सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच, ज़्यादातर ऐप्स पर इस रास्ते का किराया 350 रुपये से 430 रुपये के बीच था। शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक की लंबी यात्राओं में इसका असर और भी साफ़ दिखता है। इन ऐप्स पर किराया तय नहीं होता और यह मांग के हिसाब से बदलता रहता है, इसलिए यात्रियों को अलग-अलग समय पर अलग-अलग कीमतें दिख सकती हैं। इसे भी पढ़ें: महिला आरक्षण पर BJP किसे बना रही मूर्ख? Sanjay Raut ने Fadnavis को घेरा हाल की हड़ताल से पहले ऑटो-टैक्सी के किराए बढ़ाए गए थे हाल की कमी से पहले ही, मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में यात्रियों को किराया बढ़ने का सामना करना पड़ा था। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (MMRTA) ने 20 अगस्त को नए बेस किराए को मंज़ूरी दी, जिससे पहले 1.5 किलोमीटर के लिए ऑटो-रिक्शा का न्यूनतम किराया 27 रुपये और टैक्सी का किराया 33 रुपये हो गया। ऑटो का किराया 1 रुपये बढ़ा है, जबकि काली-पीली टैक्सी का किराया 2 रुपये बढ़ा है। MMRTA ने इस फ़ैसले के पीछे ईंधन और ऑपरेशन की ज़्यादा लागत का हवाला दिया। बैठक की अध्यक्षता MMRTA के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय सेठी ने की और इसमें परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। तो कुल मिलाकर, मुंबई में यात्रियों को अब एक साथ दो तरह के दबाव का सामना करना पड़ रहा है: ज़्यादा सरकारी किराया और कमी की वजह से ऐप-बेस्ड सेवाओं के बहुत ज़्यादा बढ़े हुए दाम। भाषा की बुनियादी जानकारी हो हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने इस कदम का बचाव किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार हिंदी बोलने वाले ड्राइवरों से मराठी में माहिर होने के लिए नहीं कह रही है, बल्कि चाहती है कि उन्हें भाषा की बुनियादी जानकारी हो। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा है कि यह ज़रूरत यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए भी है। भले ही सरकार कुछ भी कहे, लेकिन इस हड़ताल और इसके नतीजों से कई मुंबईवासियों को अपने ही शहर में पर्यटकों जैसा महसूस हो सकता है।
जादवपुर विश्वविद्यालय: बंगाल के आखिरी वामपंथी गढ़ की लड़ाई
जयंत घोषाल की कलम से एक समय था जब तीन राज्यों—पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और केरल—में वाम मोर्चे की सरकारें थीं। हम कहा करते थे कि इन तीन राज्यों में अभी भी कम्युनिज्म जीवित है। यह भी कहा जाता था कि आधा प्रांत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में और आधा जादवपुर विश्वविद्यालय में बसता है। लेकिन दशकों […]
Patna में BPSC छात्रों का उग्र प्रदर्शन, CM आवास घेराव पर पुलिस से झड़प, वॉटर कैनन चला
मंगलवार को पटना में विवादित 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन पुलिस के साथ टकराव में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश में बैरिकेड्स तोड़ दिए और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से मार्च कर रहे थे, तभी डाक बंगला चौराहे पर उन्हें भारी बैरिकेडिंग का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से रोकने की कोशिश की और इलाके में 200 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इसे भी पढ़ें: Gen Z पर BJP-RSS में मतभेद? दिपके बोले- मोहन भागवत आपके मेंटर हैं, उनकी बात सुनें बिहार में यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब दिल्ली और झारखंड में परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्र लामबंद हो रहे हैं। पटना का यह ताज़ा आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और छात्र विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के तरीकों पर चल रही व्यापक राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है। दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम से बने नए संगठन के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई और पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी, लेकिन आखिरकार तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन कुछ दिन पहले तब और तेज़ हो गए, जब प्रदर्शनकारियों ने राज्य विधानसभा की ओर मार्च किया और पुलिस ने आंसू गैस, लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। राज्य सरकार ने कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फ़ैसला किया था, लेकिन झारखंड हाईकोर्ट ने इन फ़ैसलों पर रोक लगा दी है, जिससे दोनों पक्षों के बीच टकराव का एक और दौर शुरू होने की स्थिति बन गई है। इसे भी पढ़ें: सही नेता से उज्ज्वल भविष्य: Sambit Patra बोले- BJP फैलाएगी PM Modi की Saptadhara यह विवाद 13 दिसंबर, 2024 को हुई प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा है। विवाद की शुरुआत पटना के बापू परीक्षा परिसर परीक्षा केंद्र से हुई, जहाँ उम्मीदवारों ने गड़बड़ियों का आरोप लगाया था; इनमें प्रश्न-पत्रों के वितरण और रखरखाव से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं। इसके बाद BPSC ने उस केंद्र पर हुई परीक्षा रद्द कर दी और प्रभावित उम्मीदवारों के लिए 4 जनवरी, 2025 को दोबारा परीक्षा आयोजित की। हालाँकि, आयोग ने पूरे बिहार में परीक्षा रद्द करने की माँगों को खारिज कर दिया। आयोग का कहना था कि समस्याएँ केवल प्रभावित केंद्र तक ही सीमित थीं और सैकड़ों अन्य केंद्रों पर आयोजित परीक्षा को रद्द करने का कोई उचित कारण नहीं था। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
7 दिन में 187 भूकंप, धरती के 'रिंग ऑफ फायर' में क्यों बढ़ी हलचल?
पिछले 7 दिनों में 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता के 187 भूकंप दर्ज हुए. इनमें कई झटके पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में आए. जापान, इंडोनेशिया, अलास्का और अमेरिका में हुई इस हलचल ने फिर भूकंपों पर ध्यान खींचा है.
बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-एक-एक पैसा मंदिर की तिजोरी में पहुंचे
बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ। अदालत ने श्रद्धालुओं की पूरी राशि दानपेटी या ऑनलाइन मंदिर कोष में जमा कराने का निर्देश दिया।
मणिपुर CRPF का बड़ा सर्च ऑपरेशन, CoBRA कमांडो ने घर-घर ली तलाशी
मणिपुर के सेनापति जिले के ताफौ इलाके में सोमवार को अलग-अलग समुदायों के घरों में आग लगने और गोलीबारी के बाद तनाव बढ़ गया. मंगलवार को CRPF की CoBRA इकाई ने इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया.
'5 साल में 65 सुसाइड' कॉकरोचों ने अब IIT दिल्ली के खिलाफ खोला मोर्चा!
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस प्रदर्शन का समर्थन करते हुए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सिर्फ एक डिमांड पूरी, फिर इतनी बढ़ेगी कर्मचारियों की सैलरी
8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 करने की डिमांड आई है और ऐसा होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल देखने को मिलेगा.
चीनी और प्याज की कमी और कीमतों में तेज उछाल ने मोदी सरकार के सामने नई मुश्किल खड़ी कर दी है। हालांकि सरकार अपने स्तर पर समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है और जल्द राहत मिलने की संभावना जता रही है, लेकिन विपक्ष ने आगामी त्योहारी मौसम में चीनी और प्याज की कमी को लेकर सरकार पर निशाना साध दिया है और उस पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाया है। आम उपभोक्ता के लिए परेशानी यह है कि रसोई की दो अहम चीजें यानि चीनी और प्याज लगातार महंगी हो रही हैं, जबकि सरकार का दावा है कि वास्तविक कमी नहीं, बल्कि आपूर्ति व्यवस्था, जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसे कारक कीमतों को असामान्य रूप से ऊपर ले जा रहे हैं। प्याज के मोर्चे पर स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक हो गई है। 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह 27.37 रुपये थी। औसत थोक कीमत भी 68 प्रतिशत उछलकर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गई। बड़े शहरों में स्थिति और भी तीखी है। चेन्नई में प्याज 60 रुपये, दिल्ली में 55 रुपये और कोलकाता में 53 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसे भी पढ़ें: मत हो उदास, त्यौहारों में बरकरार रखेगी मिठास, ISMA का बड़ा बयान- देश में चीनी की कोई कमी नहीं, जल्द कीमतें कम होंगी जम्मू में तो खुदरा कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबर है, जबकि नरवाल मंडी में थोक भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो रहा। व्यापारियों का कहना है कि बारिश से फसल को नुकसान और ईरान, अफगानिस्तान तथा मिस्र से आपूर्ति में कमी ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। उनका अनुमान है कि कीमतें अगले तीन महीने तक ऊंची रह सकती हैं, हालांकि नई घरेलू फसल आने के बाद दीपावली तक कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। कीमतों की इस आग को बुझाने के लिए केंद्र सरकार ने अब अपने बफर स्टॉक का सहारा लिया है। महाराष्ट्र के नासिक से बड़े उपभोक्ता केंद्रों तक विशेष रेलवे रेक के जरिए भारी मात्रा में प्याज भेजा जा रहा है। इस पहल को 'कांदा एक्सप्रेस' नाम दिया गया है। शुरुआती चरण में चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी को प्याज की आपूर्ति की जाएगी। बाजार की जरूरत के आधार पर बाद में अन्य शहरों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। केंद्र सरकार ने यह भी तय किया है कि NCCF और NAFED जैसी एजेंसियों के जरिए प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर में NCCF अपने रिटेल आउटलेट्स और भारत ब्रांड स्टोर्स के माध्यम से इस दर पर बिक्री शुरू करने की तैयारी में है। उम्मीद है कि नासिक से विशेष रेलगाड़ियों के पहुंचते ही सब्सिडी वाले प्याज की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। इस बीच, कंज्यूमर अफेयर्स सेक्रेटरी निधि खरे ने कीमतों के असामान्य व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नासिक में मंडी भाव का दिल्ली से अधिक होना सामान्य स्थिति नहीं है। इससे कार्टेलाइजेशन और सट्टेबाजी की आशंका पैदा होती है। सरकार के पास चालू वर्ष के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है और उसका दावा है कि जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप के लिए यह पर्याप्त है। साथ ही सरकार उत्पादन के मोर्चे पर भी राहत की तस्वीर पेश कर रही है। 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है। यानी उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं दिख रही। यही वजह है कि सरकार का मानना है कि बफर स्टॉक और सक्रिय बाजार हस्तक्षेप के जरिए मौसमी महंगाई पर काबू पाया जा सकता है। 'कांदा एक्सप्रेस' का विस्तार भी सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। 2024-25 में जहां 14 रेलवे रेक के जरिए करीब 12,000 टन प्याज पांच शहरों तक भेजा गया था, वहीं 2025-26 में यह व्यवस्था बढ़कर 86 रेक और करीब 88,000 टन तक पहुंच गई है। अब देश के 16 प्रमुख शहरों तक प्याज पहुंचाने की तैयारी है। उधर, चीनी के मामले में भी तस्वीर कम चिंताजनक नहीं है। देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत एक महीने में करीब 29 प्रतिशत बढ़कर 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि एक महीने पहले यह 48.7 रुपये प्रति किलो थी। लेकिन चीनी उद्योग की शीर्ष संस्था इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का दावा है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है और कीमतों में तेजी प्राकृतिक नहीं, बल्कि जमाखोरी तथा सट्टेबाजी से पैदा हुई है। ISMA के अनुसार, कुछ व्यापारियों ने बाजार में कमी का माहौल बनाया, जिसके बाद सामान्यतः जरूरत के हिसाब से खरीद करने वाले बड़े उपभोक्ताओं ने डेढ़ से दो महीने का अतिरिक्त स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया। इससे चीनी बाजार से निकलकर गोदामों में पहुंच गई और कृत्रिम तंगी पैदा हो गई। हालांकि कम उत्पादन, मौसम की प्रतिकूलता और फसल पर कीटों के असर जैसे कारकों ने भी कीमतों पर दबाव डाला है। चीनी को एथेनॉल उत्पादन में मोड़े जाने को लेकर उठ रहे सवालों को भी उद्योग ने खारिज किया है। उसका कहना है कि अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में कुल 1,200 करोड़ लीटर एथेनॉल में से केवल 290 करोड़ लीटर ही चीनी से तैयार हुआ। घरेलू जरूरत और पर्याप्त शुरुआती स्टॉक सुनिश्चित करने के बाद ही एथेनॉल के लिए चीनी के उपयोग का फैसला किया जाता है। चीनी उद्योग को सितंबर के अंत तक करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक रहने की उम्मीद है, जिसे सामान्य घरेलू मांग के लिए स्वस्थ बफर माना जा रहा है। सरकार की ड्यूटी-फ्री आयात व्यवस्था, स्टॉक रखने की सीमा सख्त करने, विशेष क्रशिंग और नए सीजन की जल्दी शुरुआत जैसे कदमों से भी आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर अंकुश लगने की उम्मीद है। लेकिन सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उत्पादन संतोषजनक है, बफर स्टॉक पर्याप्त है और वास्तविक कमी नहीं है, तो आम उपभोक्ता को 60-70 रुपये किलो प्याज और 63 रुपये किलो चीनी क्यों खरीदनी पड़ रही है? विपक्ष ने इसी सवाल को हथियार बनाते हुए सरकार पर त्योहारी मौसम से पहले महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। अब सरकार के सामने सिर्फ स्टॉक जारी करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि यह साबित करना भी है कि 'कृत्रिम कमी' पैदा करने वालों पर कार्रवाई होगी और राहत का फायदा वास्तव में आम रसोई तक पहुंचेगा। आने वाले दिनों में कांदा एक्सप्रेस और चीनी बाजार में सरकारी हस्तक्षेप की सफलता ही तय करेगी कि त्योहारी मौसम में महंगाई की मार कितनी कम होती है।
CTET September 2026 परीक्षा को CBSE ने स्थगित कर दिया है। 6 सितंबर को होने वाली परीक्षा की नई तारीख बाद में घोषित होगी।
भारतीय संस्कृति में त्योहारों का मौसम हमेशा से जीवन में नई उमंग, उत्साह और खुशियां लेकर आता है, और जब बात हो राखी और जन्माष्टमी जैसे पावन पर्वों की, तो छुट्टियों का आनंद दोगुना हो जाता है। इस बार अगस्त के महीने में पड़ने वाले इन प्रमुख त्योहारों के आसपास एक बेहतरीन और सुनहरा लॉन्ग वीकेंड (Long Weekend) बन रहा है, जिसका नाम सुनते ही यात्रा प्रेमियों के मन में रोमांच की लहर दौड़ जाती है। यदि आप भी इस लंबी छुट्टी का पूरा फायदा उठाकर अपनी रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा सुकून भरा वक्त बिताना चाहते हैं और प्रकृति के बीच कुछ खूबसूरत पल बिताना चाहते हैं, तो यह मौका आपके लिए एकदम सही है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको इस वेकेशन के लिए बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे 5 बेहतरीन और बजट-फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स के बारे में जहां आप कम खर्च में आसानी से घूमकर आ सकते हैं। परिवार के सदस्यों या अपने खास दोस्तों के साथ इन जगहों पर यात्रा करने से न केवल आपके सारे तनाव दूर हो जाएंगे, बल्कि इन त्योहारों के दिनों में आपका यह सफर जिंदगी भर के लिए एक हसीन याद बनकर आपके जेहन में बस जाएगा।पॉकेट-फ्रेंडली यात्रा के लिए क्यों खास है यह लॉन्ग वीकेंड का मौका?जब भी कोई लंबा वीकेंड आता है, तो अक्सर लोगों के मन में यह चिंता सताने लगती है कि होटलों के किराए और ट्रैवल खर्च आसमान छू रहे होंगे और बजट बिगड़ जाएगा। लेकिन यदि आप थोड़ी सी समझदारी और सही योजना के साथ अपनी ट्रिप प्लान करें, तो आप बेहद कम खर्च में एक शानदार वेकेशन का लुत्फ उठा सकते हैं। राखी और जन्माष्टमी के इस त्योहारी माहौल में देश के कई खूबसूरत पर्यटन स्थलों पर मौसम बेहद सुहाना और रूमानी हो जाता है। मानसून की फुहारों के बीच पहाड़ों की हरियाली, नदियों का कल-कल बहता पानी और ऐतिहासिक किलों की खूबसूरती इस समय अपने चरम पर होती है। ऐसे में बिना अपनी जेब पर ज्यादा भारी पड़े, आप देश की कुछ ऐसी छिपी हुई और शानदार जगहों की सैर कर सकते हैं जो आपके बजट में भी फिट बैठती हैं और जहां पहुंचने के लिए आपको लंबी यात्रा भी नहीं करनी पड़ती। आइए जानते हैं उन 5 चुनिंदा और बजट-फ्रेंडली जगहों के बारे में जो इस लॉन्ग वीकेंड पर घूमने के लिए आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं।1. ऋषिकेश और मुनििकीरेती: आध्यात्म और रोमांच का अद्भुत संगमयदि आप दिल्ली या उत्तर भारत के किसी नजदीکی इलाके से ताल्लुक रखते हैं और कम बजट में शांति और एडवेंचर दोनों का एक साथ आनंद लेना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का ऋषिकेश आपके लिए सबसे बेहतरीन जगह है। गंगा नदी के तट पर बसा यह शहर अपनी पवित्रता, योग संस्कृति और रिवर राफ्टिंग जैसे रोमांचक खेलों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस लॉन्ग वीकेंड पर आप अपने दोस्तों या परिवार के साथ यहां आकर गंगा आरती का अलौकिक अनुभव ले सकते हैं। यहां ठहरने के लिए सस्ते हॉस्टल, बजट होटल और कैंपिंग की शानदार सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं, जिससे आपकी जेब पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और आपका यह सफर बेहद किफायती और यादगार बन जाता है।2. मचलती पहाड़ियों और बादलों की रानी: कसोल और तोशहिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी में स्थित कसोल और उसके आसपास के छोटे-छोटे गांव बैकपैकर्स और बजट यात्रियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं। यदि आपको पहाड़ों की गोद में ट्रैकिंग करना, पाइन के ऊंचे जंगलों के बीच समय बिताना और ठंडी हवाओं का लुत्फ उठाना पसंद है, तो इस लॉन्ग वीकेंड पर कसोल की यात्रा करना आपके लिए सबसे सही फैसला होगा। यहां होमस्टे और लोकल ढाबों पर मिलने वाला खाना बहुत ही सस्ते दामों पर उपलब्ध हो जाता है। कम बजट में प्रकृति की असली खूबसूरती को करीब से देखने और शहर के प्रदूषण से दूर कुछ दिन सुकून के बिताने के लिए यह जगह एकदम परफेक्ट मानी जाती है।3. गुलाबी नगरी जयपुर: इतिहास और संस्कृति की कम खर्च में शाही सैरअगर आप पहाड़ों के बजाय शाही महलों, किलों और राजस्थानी संस्कृति का अनुभव करना चाहते हैं, तो राजस्थान की राजधानी जयपुर इस लॉन्ग वीकेंड पर घूमने के लिए सबसे शानदार और सुलभ विकल्प है। जयपुर में आमेर का किला, हवा महल, सिटी पैलेस और जयपुर के पारंपरिक बाजार पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। यहां घूमने के लिए आपको बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां कई ऐसे बजट गेस्ट हाउस और हेरिटेज होटल मिल जाते हैं जो किफायती दरों पर बेहतरीन सुविधाएं प्रदान करते हैं। इसके अलावा यहां की प्रसिद्ध राजस्थानी कचौरी, दाल-बाटी चूरमा और स्थानीय खान-पान का स्वाद भी बहुत कम बजट में मिल जाता है।4. किलों और झरनों का शहर: उदयपुर या लोनावला-खंडालामहाराष्ट्र के पश्चिमी घाटों में स्थित लोनावला और खंडाला मानसून के दिनों में घूमने के लिए सबसे जादुई जगह माने जाते हैं। मुंबई और पुणे के नजदीकी लोगों के लिए यह लॉन्ग वीकेंड ट्रिप का सबसे पसंदीदा ठिकाना है। बादलों से ढके पहाड़, कल-कल करते झरने और हर तरफ फैली हरियाली पर्यटकों का मन मोह लेती है। कम बजट में ट्रेन या बस के जरिए आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। यहां के खूबसूरत व्यूपॉइंट्स और ऐतिहासिक किले बिना किसी बड़े खर्च के आपकी यात्रा को रोमांचक बना देते हैं, जहां आप अपने परिवार के साथ खुशनुमा पल बिता सकते हैं।5. शांत और खूबसूरत बीच का मजा: गोवा या महाबलीपुरम के पास तटीय इलाकेअगर आपको समुद्र की लहरों की आवाज सुनना और रेत पर नंगे पैर चलना पसंद है, तो आप अपने बजट के अनुसार किसी शांत तटीय इलाके की योजना बना सकते हैं। लंबी छुट्टियों के दौरान ट्रेन की एडवांस बुकिंग करके या बजट फ्रेंडली फ्लाइट्स के जरिए आप कम खर्च में एक बेहतरीन बीच वेकेशन एन्जॉय कर सकते हैं। समुद्र के किनारे बैठकर सूर्यास्त का नजारा देखना और सी-फूड का आनंद लेना इस लॉन्ग वीकेंड को और भी ज्यादा खास बना देगा।बजट ट्रिप प्लान करने के लिए कुछ जरूरी और आसान टिप्सकिसी भी ट्रिप पर जाने से पहले यदि आप कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख लें, तो आपकी यात्रा और भी ज्यादा आरामदायक और सस्ती हो सकती है। सबसे पहले अपनी यात्रा के लिए ट्रेनों या बसों की बुकिंग समय रहते कर लें ताकि अंतिम समय में महंगे किराए से बचा जा सके। महंगे होटलों के बजाय होमस्टे या डॉरमेट्री का विकल्प चुनें जो कि काफी किफायती होते हैं। स्थानीय खान-पान का लुत्फ उठाएं और बेवजह की खरीदारी से बचें। इस रक्षाबंधन और जन्माष्टमी के लॉन्ग वीकेंड का पूरा फायदा उठाएं और अपने बजट में इन खूबसूरत जगहों की यात्रा करके जीवन की एक नई और हसीन शुरुआत करें।
26 अगस्त को मनाया जाएगा मिलाद-उन-नबी का पवित्र पर्व, राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक मस्जिद
इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण महीनों में से एक रबी-উল-अव्वल के मुबारक मौके पर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के रूप में मनाया जाने वाला पर्व 'मिलाद-उन-नबी' (Milad-un-Nabi 2026) इस वर्ष 26 अगस्त को पूरे देश में बेहद अकीदत और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस मुबारक दिन को लेकर देश की राजधानी दिल्ली समेत तमाम राज्यों में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश के इस जश्न को ईद-ए-मिलादुन्नबी के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें दुनियाभर के मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं, उनके बताए नेकी के रास्तों को याद करते हैं और मस्जिदों में विशेष रूप से दुआएं मांगते हैं। चूंकि 26 अगस्त को यह पावन पर्व है, इसलिए दिल्ली के विभिन्न इलाकों में स्थित ऐतिहासिक मस्जिदों, दरगाहों और ईदगाहों में नमाज अदा करने और जलसों में शामिल होने के लिए भारी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है। यदि आप भी इस मुबारक दिन पर दिल्ली में रहकर विशेष नमाज अदा करना चाहते हैं और यह तलाश रहे हैं कि शहर की किन प्रमुख मस्जिदों में जाकर आप सुकून के साथ इबादत कर सकते हैं, तो हम आपके लिए राजधानी के उन सभी प्रमुख और ऐतिहासिक नमाज स्थलों की पूरी सूची लेकर आए हैं जहां इस दिन का माहौल बेहद रूहानी और खूबसूरत होता है।जामा मस्जिद: पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक शान और मिलाद का मुख्य केंद्रदिल्ली में जब भी किसी बड़े इस्लामिक पर्व या विशेष नमाज की बात आती है, तो सबसे पहला नाम देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जामा मस्जिद (Jama Masjid Delhi) का आता है। पुरानी दिल्ली के दिल में स्थित इस मुगलकालीन भव्य मस्जिद में मिलाद-उन-नबी के मौके पर सबसे बड़ा मजमा लगता है। 26 अगस्त को इस मुबारक दिन पर सुबह से ही यहां हजारों की संख्या में नमाजी इकट्ठा होना शुरू हो जाएंगे। जामा मस्जिद की विशाल सहन और मुख्य इबादत हॉल में नमाज अदा करने का अनुभव अपने आप में बेहद अलौकिक होता है। मिलाद-उन-नबी के इस खास अवसर पर मस्जिद परिसर को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया जाता है और मदरसों के बच्चों द्वारा नात-ए-पाक तथा दुरूद सलाम पढ़े जाते हैं। यदि आप इस पवित्र दिन पर राजधानी के सबसे बड़े और पारंपरिक धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो पुरानी दिल्ली की जामा मस्जिद आपके लिए सबसे उत्तम स्थान साबित होगी, जहां पहुंचकर आप पैगंबर साहब की शान में होने वाली दुआओं में शामिल हो सकते हैं।हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह और अन्य ऐतिहासिक दरगाहेंजामा मस्जिद के अलावा, राजधानी दिल्ली में स्थित सूफी संतों की मजारें और दरगाहें भी मिलाद-उन-नबी के जश्न का एक बहुत बड़ा केंद्र बिंदु होती हैं। दक्षिण दिल्ली में स्थित विश्व प्रसिद्ध हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर 26 अगस्त को विशेष कार्यक्रमों और मिलाद की महफिलों का आयोजन किया जाएगा। इस दिन यहां देश-विदेश से आने वाले जायरीन और स्थानीय लोग चादरपोशी करते हैं और रातभर चलने वाली महफिले-मिलाद में शिरकत करते हैं। इसके अलावा महरौली स्थित हजरत ख्वाजा कुख्तियार काकी की दरगाह और तुर्कमान गेट के आसपास की पुरानी मस्जिदें भी इस पर्व पर रोशनी से जगमगा उठती हैं। इन पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करने के साथ-साथ पैगंबर साहब की जीवनियों पर आधारित विशेष तकरीरें (धार्मिक व्याख्यान) भी आयोजित की जाती हैं, जिन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।मिलाद-उन-नबी के जुलूस, सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाममिलाद-उन-नबी के मुबारक मौके पर केवल मस्जिदों में नमाज ही अदा नहीं की जाती, बल्कि दिल्ली के कई इलाकों में पारंपरिक और शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस-ए-मोहम्मदी भी निकाले जाते हैं। इन जुलूसों में लोग हाथों में झंडे लेकर और दरूद शरीफ का ورد करते हुए पूरे अनुशासन के साथ चलते हैं। किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक विभाग द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जिन-जिन मार्गों से मुख्य जुलूस गुजरने वाले हैं, वहां यातायात को कुछ समय के लिए डायवर्ट किया जा सकता है ताकि आम जनता और नमाजियों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। स्थानीय प्रशासन और कमेटियों ने सभी से यह अपील की है कि वे इस पवित्र पर्व को पूरी आपसी भाईचारे, सौहार्द और शांति के साथ मनाएं तथा एक-दूसरे को गले मिलकर इस मुबारक दिन की मुबारकबाद दें।राजधानी में मिलाद-उन-नबी का संदेश: अमन, भाईचारे और नेकी की राहयह पर्व केवल एक जश्न का दिन नहीं है, बल्कि यह इस बात को याद करने का दिन है कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने पूरी मानवता को इंसानियत, दया, करुणा, क्षमा और आपसी भाईचारे का जो संदेश दिया था, उसे अपने जीवन में उतारा जाए। 26 अगस्त 2026 को जब पूरा देश मिलाद-उन-नबी के रंग में रंगा होगा, तो दिल्ली की हर गली और हर मस्जिद से अमन और शांति की दुआएं बुलंद होंगी। राजधानी के इन तमाम धार्मिक स्थलों पर जाकर आप भी इस पाक दिन की बरकतों को हासिल कर सकते हैं और अपने परिवार तथा देश के लिए खुशहाली की दुआ मांग सकते हैं।
बिहार में CM Samrat Choudhary ने शुरू किए 'स्टूडेंट सपोर्ट कैंप', शिकायतों का होगा तुरंत समाधान
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्रों की शिकायतों, समस्याओं और सुझावों का तेज़ी से समाधान करने के लिए एक नई पहल, स्टूडेंट सपोर्ट कैंप शुरू करने की घोषणा की। ये कैंप हर महीने के चौथे मंगलवार को शिक्षण संस्थानों में लगाए जाएंगे, ताकि छात्रों को सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने सीधे अपनी बात रखने का मंच मिल सके। X पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने बताया कि छात्र स्टूडेंट सपोर्ट पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1100 के ज़रिए ऑनलाइन शिकायतें भी दर्ज करा सकेंगे और अपनी शिकायतों पर हुई कार्रवाई की स्थिति भी जान सकेंगे। उन्होंने कहा कि हर छात्र की बात सुनी जाए, हर समस्या का समाधान हो – यही संकल्प है, यही प्रयास है। इसे भी पढ़ें: Gen Z पर BJP-RSS में मतभेद? दिपके बोले- मोहन भागवत आपके मेंटर हैं, उनकी बात सुनें इस पहल का मकसद यह पक्का करना है कि छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान हो। इसके लिए हर महीने लगने वाले कैंप, ऑनलाइन पोर्टल और हेल्पलाइन के ज़रिए सीधे बातचीत की सुविधा दी जाएगी। इससे पहले, चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए राज्य भर के 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों के लिए 24 घंटे चलने वाला, आमने-सामने बातचीत करने वाला प्लेटफॉर्म बिहार विद्या साथी लॉन्च किया था। एक प्रेस रिलीज़ के अनुसार, मुख्यमंत्री ने इसे छात्रों को अच्छी शिक्षा और मार्गदर्शन देने की दिशा में एक अहम कदम बताया। चौधरी ने कहा कि बिहार विद्या साथी के ज़रिए छात्र अपनी पढ़ाई से जुड़े सवालों के जवाब कभी भी और कहीं से भी पा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफ़ॉर्म से 38 ज़िलों के 9वीं से 12वीं कक्षा के लगभग 3,00,000 छात्रों को सीधे फ़ायदा होगा। इससे छात्र 75,000 शिक्षकों से सीधे जुड़ सकेंगे और अपनी पसंद के शिक्षक चुनकर उनसे व्यक्तिगत रूप से पढ़ाई में मदद ले सकेंगे। इसे भी पढ़ें: CM Yogi का बड़ा ऐलान: UP में अगले 6 माह में 1 लाख युवाओं को मिलेगी Sarkari Naukri 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए सभी विषयों का डिजिटल स्टडी मटीरियल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा, 11वीं और 12वीं कक्षा के साइंस स्ट्रीम के छात्रों के लिए लाइव ट्यूटर सपोर्ट के साथ-साथ बिहार बोर्ड और JEE व NEET की तैयारी के लिए डिजिटल मटीरियल भी उपलब्ध होगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
भारत-पाक बॉर्डर पर बसा देश का आखिरी गांव, अपनी रोमांचक यात्रा से हर किसी को कर रहा है आकर्षित
भारत और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित सीमावर्ती इलाकों का नाम सुनते ही अक्सर मन में कंटीले तारों, सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और भारी तनाव की एक गंभीर तस्वीर उभर कर सामने आती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के इन संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। देश की सीमाओं के पास बसे कई ऐसे ऐतिहासिक और सुंदर गांव अब पर्यटन मानचित्र पर एक चमकते हुए सितारे के रूप में उभर चुके हैं, जिन्हें देखने के लिए देश-कोने से सैलानी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। भारत-पाकिस्तान की अंतिम सीमा रेखा के ठीक करीब बसा हुआ एक ऐसा ही आखिरी गांव इन दिनों पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेस बन चुका है। अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, देशभक्ति के जज्बे से ओत-प्रोत माहौल और सरहद के उस पार की दुनिया को करीब से देखने की उत्सुकता ने इस अनूठे गांव को ट्रैवल प्रेमियों की बकेट लिस्ट में सबसे ऊपर ला दिया है। जो जगह कभी केवल सुरक्षा बलों की गश्त और पाबंदियों के लिए जानी जाती थी, आज वहां पर्यटकों की चहल-पहल और स्थानीय संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है। इस गांव की यात्रा करना न केवल एक सामान्य छुट्टियों का सफर है, बल्कि यह देश के हर नागरिक के दिल में अटूट राष्ट्रप्रेम और गर्व की भावना जगाने वाला एक बेहद रोमांचक अनुभव साबित होता है।सीमाओं की खामोशी के बीच छिपा पर्यटन का अपार रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्यभारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल नजदीक बसे इस आखिरी गांव की भौगोलिक स्थिति और यहां का परिवेश पर्यटकों को पहली नजर में ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। दूर-दूर तक फैले हरे-भरा मैदान, रेत के टीले या ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों की गोद में बसा यह गांव अपनी सादगी और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। जब पर्यटक इस सीमावर्ती गांव में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें देश के मुख्य शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर एक अद्भुत शांति और सुकून का अहसास होता है। यहां के स्थानीय लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, आतिथ्य सत्कार और अपनी अनूठी संस्कृति के लिए पहचाने जाते हैं। गांव की गलियों में घूमते हुए सैलानी स्थानीय जीवनशैली को बहुत करीब से देख सकते हैं और वहां के बुजुर्गों से सीमावर्ती इतिहास से जुड़ी कई रोमांचक कहानियां सुन सकते हैं। आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के विकास के बाद से अब यहां आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय होमस्टे, पारंपरिक खान-पान और गाइड की भी बेहतरीन व्यवस्था होने लगी है, जिससे उनकी यात्रा और अधिक आरामदायक और यादगार बन जाती है।देशभक्ति का अनूठा अहसास और बीएसएफ जवानों का प्रेरणादायक सानिध्यइस आखिरी गांव की यात्रा का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण वहां तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों के साथ संवाद करना और उनके प्रेरणादायक जीवन को नजदीक से देखना है। पर्यटक जब भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के अंतिम छोर पर पहुंचते हैं, तो वहां तिरंगे को शान से लहराते हुए देखना हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देता है। शाम के समय सीमा पर होने वाली रिट्रीट सेरेमनी और देशभक्ति के नारों की गूंज पर्यटकों के भीतर एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह भर देती है। यहां आने वाले लोग देश की सुरक्षा में चौबीसों घंटे तैनात रहने वाले हमारे वीर जवानों की बहादुरी और उनके बलिदान को बहुत करीब से महसूस करते हैं। यह टूरिस्ट डेस्टिनेशन केवल घूमने-फिरने की जगह नहीं है, बल्कि यह हर देशवासी के लिए एक ऐसी तीर्थस्थली की तरह है जहां जाकर देश के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना और अधिक प्रगाढ़ हो जाती है।कैसे पहुंचे इस आखिरी बॉर्डर विलेज तक? जानें यात्रा का पूरा और सुगम मार्गयदि आप भी अपनी आगामी छुट्टियों में इस ऐतिहासिक और प्रसिद्ध भारत-पाक बॉर्डर के आखिरी गांव की रोमांचक यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं, तो आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि वहां तक कैसे पहुंचा जाए। इस सीमावर्ती टूरिस्ट प्लेस तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे बेहतरीन और सुलभ माध्यम माना जाता है। देश के प्रमुख महानगरों और नजदीकी बड़े शहरों से नियमित रूप से ट्रेन, बस और कैब सेवाएं उपलब्ध हैं, जो आपको उस क्षेत्र के जिला मुख्यालय तक पहुंचाती हैं। जिला मुख्यालय से आगे का सफर तय करने के लिए आपको स्थानीय टैक्सी या टूरिस्ट वाहनों की मदद लेनी पड़ती है, जो अच्छी तरह से पक्के और सुरक्षित राजमार्गों के जरिए आपको सीधे उस आखिरी गांव तक ले जाते हैं। चूंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद संवेदनशील दायरे में आता है, इसलिए यात्रा करने से पहले स्थानीय प्रशासन या पुलिस विभाग से जरूरी परमिट (Permit) और औपचारिकताएं पूरी करना अनिवार्य होता है, जिसकी जानकारी आपको आसानी से मिल जाती है।यादगार सफर और यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातेंभारत-पाक बॉर्डर पर बसे इस आखिरी टूरिस्ट विलेज की यात्रा करना हर घुमक्कड़ के लिए जीवन भर का एक अनमोल अनुभव होता है, लेकिन यहां जाने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। चूंकि यह सीमावर्ती क्षेत्र है, इसलिए सुरक्षा बलों द्वारा जारी किए गए सभी नियमों और दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना हर पर्यटक की नैतिक जिम्मेदारी है। फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी से जुड़े प्रतिबंधों वाले क्षेत्रों में कैमरों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और स्थानीय संस्कृति का पूरा सम्मान करना चाहिए। अपनी इस अनोखी यात्रा के दौरान आप न केवल फोटोग्राफी के बेहतरीन शॉट्स ले सकते हैं, बल्कि सरहद के किनारे बिताए गए वे अनमोल पल आपके दिल और दिमाग में हमेशा के लिए अमिट छाप छोड़ जाएंगे।
IIT दिल्ली सुसाइड केस में नया मोड़, प्रशासन के जवाब से खुश नहीं छात्र
IIT दिल्ली में 31 वर्षीय एमएससी फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है. 1 करोड़ का मुआवजा, बाहरी समिति की जांच और डीन के इस्तीफे की मांग लगातार बनी हुई है लेकिन छात्रों ने प्रशासन के जवाब को “अपर्याप्त और टालमटोल वाला” बताते हुए मांगों के पूरा न होने तक प्रदर्शन जारी रखना की बात कही है.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर अनुशासन और खेल भावना को हमेशा से खेल का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन जब कोई खिलाड़ी अपनी हरकतों से इस मर्यादा को तार-तार करता है, तो क्रिकेट जगत के दिग्गजों का गुस्सा फूटना स्वाभाविक हो जाता है। हाल ही में इंग्लैंड क्रिकेट टीम से जुड़े एक नए और गंभीर विवाद ने खेल गलियारों में भूचाल ला दिया है, जिस पर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर माइकल वॉन (Michael Vaughan) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ब्रायडन कार्स विवाद (Brydon Carse Controversy) के तूल पकड़ने के बाद माइकल वॉन ने क्रिकेट बोर्ड और अनुशासन समिति को आड़े हाथों लेते हुए यह मांग की है कि इस मामले में इतनी कड़ी और मिसाल कायम करने वाली सजा दी जानी चाहिए, जिससे सिर्फ संबंधित खिलाड़ी ही नहीं बल्कि पूरी इंग्लैंड क्रिकेट टीम को एक कड़ा सबक मिल सके। वॉन के इस तीखे बयान के बाद से ब्रिटिश मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सर्किट तक में खलबली मच गई है और यह बहस छिड़ गई है कि क्या आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों पर लगाम कसने के लिए और अधिक सख्त नियमों की आवश्यकता है।क्या है पूरा ब्रायडन कार्स विवाद और क्यों गरमाया माहौल?ब्रायडन कार्स से जुड़ा यह हालिया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब इंग्लैंड की टीम अपनी आगामी सीरीज और रणनीतिक तैयारियों को लेकर व्यस्त चल रही है। हालांकि आधिकारिक जांच और अनुशासनात्मक बयानों के आने से पहले ही इस मामले ने सोशल मीडिया और खेल समाचारों की सुर्खियों में जगह बना ली है। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि मैदान के अंदर या बाहर खिलाड़ियों का अनुचित आचरण न केवल उनकी अपनी व्यक्तिगत छवि को धूमिल करता है, बल्कि पूरे देश के क्रिकेट बोर्ड और खेल प्रेमियों की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाता है। ब्रायडन कार्स पर लगे आरोपों और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर जब खेल जगत में सुगबुगाहट शुरू हुई, तो इस पर सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वालों में माइकल वॉन का नाम सबसे आगे रहा। वॉन ने दो टूक शब्दों में यह कहा कि टीम के भीतर इस तरह की अनुशासनहीनता को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे आने वाली युवा पीढ़ी और पूरी टीम की संस्कृति पर बुरा असर पड़ता है।माइकल वॉन की दो टूक: सजा ऐसी हो जो भविष्य के लिए बने मिसालअपने कड़े बयानों के लिए पहचाने जाने वाले माइकल वॉन ने एक प्रमुख साक्षात्कार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अपनी राय रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) को इस मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक खिलाड़ियों को उनकी गलतियों के लिए गंभीर परिणामों का सामना नहीं करना पड़ेगा, तब तक इस तरह की घटनाएं बार-बार दोहराई जाती रहेंगी। वॉन ने मांग की कि ब्रायडन कार्स पर सख्त प्रतिबंध या आर्थिक जुर्माना लगाया जाना चाहिए ताकि बाकी खिलाड़ियों को यह स्पष्ट संदेश मिल सके कि देश की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरने वाले हर खिलाड़ी से सर्वोच्च स्तर के अनुशासन और पेशेवर आचरण की उम्मीद की जाती है। उनके इस बयान ने क्रिकेट बोर्ड पर भी दबाव बढ़ा दिया है कि वे जल्द से जल्द इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करें और निष्पक्ष जांच के बाद कड़े कदम उठाएं।इंग्लैंड टीम के भीतर अनुशासन और संस्कृति पर उठ रहे गंभीर सवालपिछले कुछ वर्षों में इंग्लैंड क्रिकेट टीम के भीतर खिलाड़ियों के निजी आचरण और अनुशासनात्मक मुद्दों को लेकर कई बार सवाल खड़े होते रहे हैं। माइकल वॉन का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि टीम प्रबंधन को ड्रेसिंग रूम की संस्कृति में सुधार लाने के लिए अब कड़े फैसले लेने ही होंगे। जब एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी मैदान के नियमों या आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो इसका सीधा असर टीम के प्रदर्शन और उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर पड़ता है। क्रिकेट प्रेमियों और जानकारों का भी यही मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अनुशासनहीनता टीम के भीतर एक बीमारी की तरह फैल सकती है, जिससे पूरी टीम का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।क्रिकेट जगत और प्रशंसकों की प्रतिक्रिया, आगे क्या होगी बोर्ड की कार्रवाई?माइकल वॉन के इस आक्रामक रुख के बाद से क्रिकेट प्रशंसकों के बीच भी दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां अधिकांश लोग वॉन के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं और यह कह रहे हैं कि खेल में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि पूरी सच्चाई सामने आने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। सबकी निगाहें अब इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे ब्रायडन कार्स विवाद पर किस प्रकार की जांच बिठाते हैं और क्या वाकई माइकल वॉन की मांग के अनुसार कोई बड़ी और अनुकरणीय सजा सुनाई जाती है या नहीं।
IAS दुर्गा शक्ति नागपाल Vs जज शबीना खान: विवाद की इनसाइड स्टोरी
देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल पर गोंडा की सिविल जज शबीना खान पर फोन करके दबाव बनाने और अनुचित टिप्पणी के गंभीर आरोप लगे हैं. मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इसे प्रथम दृष्टया 'आपराधिक अवमानना' का मामला माना है.
चीनी पूरी तरह छोड़ना कितना सही? आंतों पर हो सकता है असर
चीनी खाना छोड़ना एक ट्रेंड बन गया है. चीनी अधिक खाने से नुकसान तो होता है, लेकिन क्या इसको पूरी तरह से छोड़ना सेहत के लिए ठीक है? इसके बारे में एक नई रिसर्च में बताया गया है.
यूपी-बिहार सहित इन राज्यों में अगले तीन दिन मूसलाधार बारिश का अनुमान, दो वेदर सिस्टम एक्टिव
आईएमडी ने यूपी, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों में अगले तीन दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। दो सक्रिय वेदर सिस्टम से मौसम बदला है।
नितिन गडकरी राजनीति अभी नहीं छोड़ रहे, 'नई पीढ़ी को मौका' वाले बयान पर आई सफाई
नितिन गडकरी के कार्यालय की ओर से कहा गया कि मंत्री की टिप्पणी ट्रस्ट के कामकाज और उसके भविष्य के नेतृत्व से जुड़ी थी। आरोप लगाया गया कि कुछ टेलीविजन चैनलों ने उनके बयान को राजनीतिक टिप्पणी के रूप में पेश किया।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर कई बार ऐसे रोमांचक और दिल दहला देने वाले मुकाबले देखने को मिलते हैं जो सदियों तक क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में जिंदा रहते हैं। भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए एक बेहद रोमांचक मुकाबले में मैदान पर कुछ ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिला, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि क्यों टेस्ट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को खेल का सबसे शुद्ध और कठिन प्रारूप माना जाता है। इस मुकाबले में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के युवा और प्रतिभाशाली बल्लेबाज सूरियाबंदारा अपने करियर का शुरुआती दौर खेल रहे थे और अपने शुरुआती मैचों में ही उन्होंने अपने असाधारण बल्लेबाजी कौशल से दुनिया भर के दिग्गजों को हैरान कर दिया था। अपने डेब्यू मैच में शानदार प्रदर्शन करने के बाद जब वह अपने दूसरे यानी अगले ही मैच में मैदान पर उतरे, तो उनका और उनके देश का सपना अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दूसरे ही मुकाबले में ऐतिहासिक शतक जड़ने का था। श्रीलंकाई बल्लेबाज ने अपनी तकनीक और सूझबूझ भरी बल्लेबाजी से शतकीय पारी की तरफ बहुत तेजी से कदम बढ़ाए भी थे, लेकिन टीम इंडिया के अनुभवी और दिग्गज ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा के तरकश में कुछ और ही तीर छिपे हुए थे। अपने जादुई स्पिन आक्रमण और गजब की फील्डिंग से मैच का रुख पलटने में माहिर रविंद्र जडेजा ने अपनी एक बेहतरीन और चालाक गेंद से उस युवा श्रीलंकाई बल्लेबाज के अरमानों पर पानी फेर दिया और उन्हें शतक से चंद कदम पहले ही मैदान से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस घटना के बाद से क्रिकेट गलियारों में रविंद्र जडेजा के इस अनुभवी प्रहार और श्रीलंकाई बल्लेबाज के टूटे हुए सपने की चर्चा जोरों पर है।शानदार फॉर्म में चल रहे सूरियाबंदारा का ऐतिहासिक पारी खेलने का था इरादाश्रीलंकाई युवा बल्लेबाज सूरियाबंदारा जब इस मैच में बल्लेबाजी करने उतरे, तो उनके खेलने के अंदाज में एक गजब का आत्मविश्वास और परिपक्वता दिखाई दे रही थी। जिस तरह से उन्होंने भारतीय तेज गेंदबाजों और स्पिनरों का डटकर सामना किया, उससे यह साफ जाहिर हो रहा था कि वह लंबी पारी खेलने के पूरे इरादे के साथ क्रीज पर टिके हुए थे। अपने डेब्यू मैच के बाद से ही इस युवा खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सर्किट में अपनी एक अलग पहचान बनानी शुरू कर दी थी और खेल विशेषज्ञों का मानना था कि वह आने वाले समय में श्रीलंका क्रिकेट की रीढ़ बनने वाले हैं। मैदान के चारों तरफ बेहतरीन स्ट्रोक खेलते हुए उन्होंने अपने स्कोर को शतक के बेहद करीब पहुंचा दिया था। स्टेडियम में मौजूद श्रीलंकाई प्रशंसक और ड्रेसिंग रूम में बैठे उनके साथी खिलाड़ी अपनी सांसें रोककर उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का इंतजार कर रहे थे। हर कोई यह मान चुका था कि आज यह युवा बल्लेबाज अपने करियर का पहला अंतरराष्ट्रीय शतक जड़कर एक नया इतिहास रच देगा, लेकिन क्रिकेट के खेल में अनिश्चितताएं ही इसका असली रोमांच होती हैं, और मैदान पर एक ऐसा खिलाड़ी मौजूद था जो इस स्क्रिप्ट को पूरी तरह बदलने का हुनर रखता था।रविंद्र जडेजा का जादुई टर्न और अनुभव आया कामजब विपक्षी बल्लेबाज शतकों के करीब पहुंचने लगता है और क्रीज पर पूरी तरह सेट हो जाता है, तब कप्तान अपनी टीम के सबसे भरोसेमंद हथियार यानी मुख्य गेंदबाज की तरफ देखते हैं। भारतीय टीम के कप्तान ने ऐसे ही नाजुक मौके पर गेंद देश के सबसे अनुभवी ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा के हाथों में थमाई। जडेजा ने अपनी फिरकी और अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए बल्लेबाज की मानसिकता को भांप लिया। उन्होंने लगातार कुछ ऐसी गेंदे फेंकी जो टर्न होकर तेजी से बाहर की तरफ निकल रही थीं, जिससे बल्लेबाज को अपने शॉट्स खेलने में कठिनाई होने लगी। रविंद्र जडेजा ने अपनी चतुराई का परिचय देते हुए एक ऐसी सटीक लेंथ पर गेंद फेंकी जिस पर बल्लेबाज चूक गया और गेंद सीधे बल्ले का बाहरी किनारा या पैड को भेदती हुई निकल गई। भारतीय टीम की जोरदार अपील पर अंपायर ने तुरंत अपनी उंगली उठा दी और इस तरह रविंद्र जडेजा ने अपनी फिरकी के जाल में फंसाकर सूरियाबंदारा के शतक के सपने को चकनाचूर कर दिया। जैसे ही गिल्लियां बिखरीं, भारतीय खेमे में जश्न का माहौल बन गया और श्रीलंकाई बल्लेबाज का सिर निराशा से झुक गया।शतक से चूकने का मलाल, लेकिन खेल भावना ने जीता सबका दिलअपने डेब्यू के ठीक अगले ही मैच में शतक से चूक जाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए एक बहुत बड़ा मानसिक झटका होता है, और सूरियाबंदारा के चेहरे पर वह निराशा साफ तौर पर देखी जा सकती थी जब वे पवेलियन की तरफ लौट रहे थे। हालांकि, क्रिकेट के खेल में हार और जीत तथा सफलता और असफलता सिक्के के दो पहलुओं की तरह होते हैं। जब वह मैदान से बाहर जा रहे थे, तो भारतीय खिलाड़ियों ने भी उनकी इस जुझारू और शानदार पारी की सराहना की। अनुभवी रविंद्र जडेजा की बेहतरीन गेंदबाजी के आगे भले ही उनका शतक का सपना अधूरा रह गया हो, लेकिन उन्होंने जिस प्रकार दबाव की स्थिति में अपनी टीम के लिए बहुमूल्य रन जोड़े, उसने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में वे एक लंबे रेस के घोड़े साबित होने वाले हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया कि मैदान पर चाहे कितनी भी कड़ी प्रतिस्पर्धा क्यों न हो, एक अनुभवी खिलाड़ी का दिमाग और उसकी रणनीति हमेशा युवा जोश पर भारी पड़ सकती है।भारतीय गेंदबाजी आक्रमण और जडेजा की उपयोगिता पर एक बार फिर मुहरइस महत्वपूर्ण मुकाबले में रविंद्र जडेजा द्वारा महत्वपूर्ण समय पर विकेट चटकाए जाने से एक बार फिर यह साबित हो गया कि वे केवल निचले क्रम के एक बेहतरीन बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे खतरनाक और चतुर गेंदबाजों में से एक हैं। जब भी भारतीय टीम को साझेदारी तोड़ने या मैच का पासा पलटने की आवश्यकता होती है, कप्तान आंख मूंदकर जडेजा पर भरोसा जताते हैं, और वे हर बार टीम की उम्मीदों पर खरे उतरते हैं। सूरियाबंदारा जैसे उभरते हुए खिलाड़ी को शतक से महरूम करना इस बात का प्रमाण है कि जडेजा की फिरकी का जादू आज भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पूरी तरह से बरकरार है। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह मुकाबला हमेशा एक ऐसी यादगार भिड़ंत के रूप में याद किया जाएगा जहां एक युवा के संघर्ष और एक अनुभवी के जादू का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कोलंबो में तीसरे खिलाड़ी पर गिरी ICC की गाज, इस क्रिकेटर पर एक्शन
भारत के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में श्रीलंकाई स्पिनर प्रभात जयसूर्या पर ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. आउट होने के बाद गुस्से में बाउंड्री कुशन पर बल्ला मारने के लिए उन्हें आधिकारिक फटकार मिली और एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ा गया. इस मैच में यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के बाद कार्रवाई झेलने वाले वह तीसरे खिलाड़ी हैं.
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रसन्न वराले के एक बयान के बाद देश में एक नई बहस शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में मराठी माध्यम के स्कूलों की खराब होती स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने नासिक कुंभ मेले के लिए प्रस्तावित बजट के एक छोटे से हिस्से का उदाहरण दिया, जिसके बाद इस मुद्दे पर अलग-अलग तर्क सामने आने लगे। उनके बयान के समर्थक इसे राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा पर उठाया गया जरूरी सवाल बता रहे हैं, जबकि विरोधियों का तर्क है कि स्कूलों और कुंभ जैसे विशाल आयोजन को एक-दूसरे के मुकाबले खड़ा करना ही गलत है, क्योंकि सरकार की जिम्मेदारी दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करना है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है, जिसने सिर्फ कुंभ और स्कूलों के खर्च का सवाल ही नहीं उठाया, बल्कि यह बड़ा प्रश्न भी खड़ा कर दिया है कि क्या विकास, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और सदियों पुरानी सांस्कृतिक-धार्मिक परंपराओं को वास्तव में एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी मानना चाहिए, या फिर भारत जैसे देश को विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर चलने की नीति अपनानी चाहिए। वैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रसन्न वराले द्वारा महाराष्ट्र में मराठी माध्यम के स्कूलों की बदहाल स्थिति पर जताई गई चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि महज लगभग 32 करोड़ रुपये की कमी के कारण 100 से 150 स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच रहे हैं, तो यह निश्चित रूप से राज्य सरकार की शिक्षा नीति और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल है। लेकिन इस चिंता के साथ नासिक कुंभ मेले के विशाल बजट की तुलना कर यह कहना कि उसके मात्र 0.1 प्रतिशत खर्च से स्कूलों को बचाया जा सकता था, बहस को एक ऐसे द्वंद्व में बदल देता है, जहां सवाल राज्य सरकार की विफलता से हटकर स्कूल बनाम कुंभ बन जाता है। इसे भी पढ़ें: Maharashtra Govt का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: irregular Deputation नियुक्तियां रद्द, 10 सितंबर तक वापसी का Order जबकि असल सवाल यह है कि आखिर महाराष्ट्र सरकार को स्कूलों और कुंभ में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर क्यों माना जाए? सवाल यह भी उठता है कि क्या लाखों करोड़ रुपये के बजट वाला राज्य इतनी क्षमता नहीं रखता कि वह एक ओर मराठी माध्यम के स्कूलों को बचाए और दूसरी ओर करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ वाले विशाल आयोजन के लिए सड़क, पानी, स्वच्छता, चिकित्सा और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं भी करे? समस्या कुंभ पर खर्च नहीं है; समस्या यह है कि यदि 32 करोड़ रुपये के अभाव में स्कूल बंद हो रहे हैं, तो राज्य सरकार से पूछा जाना चाहिए कि उसने शिक्षा व्यवस्था को उस स्थिति तक पहुंचने ही क्यों दिया। यहां सवाल यह भी उठता है कि महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए सामान्य मराठी ज्ञान अनिवार्य करने पर तुली महाराष्ट्र सरकार को क्या राज्य में मराठी स्कूलों की बदहाल स्थिति नजर नहीं आ रही? देखा जाये तो नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ के लिए प्रस्तावित हजारों करोड़ रुपये की योजना को केवल “धार्मिक खर्च” कह देना पूरी तस्वीर को नजरअंदाज करना है। कुंभ जैसे विशाल आयोजन के लिए सड़कें, परिवहन, पेयजल, शौचालय, अस्पताल, आपातकालीन सेवाएं, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास करना पड़ता है। इनमें से कई सुविधाएं केवल आयोजन के दिनों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि बाद में भी उस क्षेत्र और वहां रहने वाले स्थानीय लोगों के काम आती हैं। बेहतर सड़कें, परिवहन व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाएं क्षेत्र के समग्र विकास को गति देती हैं और स्थानीय व्यापार व रोजगार को भी लाभ पहुंचाती हैं। इसलिए ऐसे खर्च को केवल धार्मिक आयोजन पर खर्च किया गया पैसा मानना सही नहीं होगा; यह बड़े जनसमूह की व्यवस्था के साथ-साथ उस पूरे क्षेत्र के बुनियादी विकास में निवेश भी है। देखा जाये तो कुंभ जैसे आयोजन को केवल एक धार्मिक मेले के रूप में देखना भारत की उस जीवंत सांस्कृतिक परंपरा को बहुत सीमित कर देना होगा, जो सदियों से आस्था, ज्ञान, सामाजिक मेल-मिलाप और सामूहिक स्मृति को एक साथ जोड़ती आई है। यूनेस्को ने भी 2017 में कुंभ मेले को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल करते हुए इसे आध्यात्मिकता, खगोलीय परंपराओं, अनुष्ठानों, सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों और गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ी अत्यंत समृद्ध विरासत माना है। नासिक-त्र्यंबकेश्वर का सिंहस्थ कुंभ इस परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यह पवित्र गोदावरी के तट पर आयोजित होता है। साथ ही त्र्यंबकेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और गोदावरी नदी के उद्गम क्षेत्र के रूप में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यहां कुंभ की अपनी विशिष्ट परंपरा भी है, जिसमें वैष्णव अखाड़े नासिक में और शैव-संन्यासी तथा उदासीन अखाड़े त्र्यंबकेश्वर में स्नान करते हैं। विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रहे भारत के लिए ऐसी सदियों पुरानी परंपराओं को जीवित रखना केवल आस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक स्मृति को सुरक्षित रखने का दायित्व भी है। आधुनिक सड़कें, अस्पताल, स्कूल और तकनीक जितने जरूरी हैं, उतना ही जरूरी यह भी है कि विकास की दौड़ में समाज अपनी उन परंपराओं से कट न जाए जिन्होंने पीढ़ियों को जोड़े रखा है। आखिर एक आत्मविश्वासी और विकसित राष्ट्र वह नहीं होता जो आधुनिकता के नाम पर अपनी विरासत को बोझ समझने लगे, बल्कि वह होता है जो विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की क्षमता रखता हो। हालांकि यह बात भी सही है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में खर्च की समीक्षा आवश्यक है। कुंभ के नाम पर यदि कोई परियोजना अनावश्यक रूप से महंगी बनाई जा रही है, भ्रष्टाचार हो रहा है, काम में देरी है या जनता के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, तो उस पर कठोर सवाल उठने चाहिए। लेकिन यदि स्कूलों को उपेक्षित किया जाता है, तो इसका समाधान कुंभ को खलनायक बनाना नहीं हो सकता। वैसे विडंबना यह भी है कि ऐसी बहसों में अक्सर हिंदू धार्मिक आयोजनों को ही अस्पताल, स्कूल और कल्याणकारी योजनाओं के सामने खड़ा कर दिया जाता है। इसलिए सवाल यह भी उठता है कि क्या इसी तरह की तीखी तुलना किसी दूसरे धर्म के आयोजन या उससे जुड़े बड़े सार्वजनिक खर्च के समय भी की जाती है? यदि सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठाना है, तो उसका पैमाना सभी पर समान होना चाहिए। किसी एक परंपरा को लगातार “अनुत्पादक खर्च” और बाकी को स्वतः सामाजिक रूप से स्वीकार्य मान लेना संतुलित सार्वजनिक नीति नहीं, बल्कि चयनात्मक दृष्टिकोण है। साथ ही कुंभ को केवल धार्मिक चश्मे से देखना भी अधूरा दृष्टिकोण है। यह विशाल सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनता है। इसका प्रभाव केवल घाटों और पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहता। होटल, परिवहन, छोटे दुकानदार, खाद्य विक्रेता, हस्तशिल्प, अस्थायी रोजगार और स्थानीय व्यापार, सभी इससे प्रभावित होते हैं। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 को ही उदाहरण स्वरूप लें तो इससे उत्तर प्रदेश को लाखों करोड़ रुपए का लाभ हुआ। इसलिए बहस को “कुंभ पर खर्च क्यों” तक सीमित करने की बजाय एक अधिक रचनात्मक प्रश्न पूछा जा सकता है कि कुंभ और ऐसे विशाल आयोजनों से उत्पन्न आर्थिक गतिविधि और सरकारी आय का एक निश्चित हिस्सा शिक्षा, स्कूलों के आधुनिकीकरण या किसी विशेष सामाजिक क्षेत्र में क्यों न लगाया जाए? यदि किसी आयोजन से पर्यटन, व्यापार, कर और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है, तो उसकी आय का सुनियोजित उपयोग शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए किया जा सकता है। यह “कुंभ हटाओ, स्कूल बचाओ” जैसी नकारात्मक राजनीति से कहीं अधिक व्यावहारिक और दूरदर्शी सोच होगी। बहरहाल, वास्तव में भारत को मंदिर भी चाहिए, अस्पताल भी; कुंभ की परंपरा भी चाहिए और आधुनिक स्कूल भी। किसी समाज को अपनी सभ्यता और अपनी सार्वजनिक संस्थाओं में से एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह तर्क कि हर धार्मिक आयोजन के सामने एक अस्पताल या स्कूल खड़ा कर दिया जाए, अपने आप में गलत द्वंद्व पैदा करता है। इसलिए बहस का निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट है कि शिक्षा पर खर्च बढ़ना चाहिए, स्कूल बचने चाहिए, अनावश्यक खर्च पर लगाम लगनी चाहिए और कुंभ जैसे विशाल आयोजनों में पारदर्शिता तथा दक्षता सुनिश्चित होनी चाहिए। लेकिन हिंदू आस्था, परंपरा और सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों को हर बार विकास के विरोधी खेमे में खड़ा कर देना न तो निष्पक्ष सार्वजनिक विमर्श है और न ही समाधान। -नीरज कुमार दुबे
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को परखने के लिए राज्य स्तरीय दल का गठन
भारतीय शिक्षा प्रणाली और सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न राज्यों में कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जाते रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ से इस वक्त शिक्षा जगत को झकझोर देने वाली एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपस्थिति और पठन-पाठन के वास्तविक स्तर की जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक विशेष राज्य स्तरीय उच्चाधिकारी दल (State Level Inspection Team) का गठन कर दिया है। शिक्षा के स्तर में सुधार की इस बड़ी कवायद के तहत फिलहाल राज्य के पांच महत्वपूर्ण जिलों को चिन्हित किया गया है, जिसमें औद्योगिक और शैक्षणिक रूप से अग्रणी माने जाने वाले दुर्ग जिले को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह राज्य स्तरीय दल बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगा और कक्षाओं में जाकर बच्चों की पठन-पाठन की योग्यताओं, गणित-विज्ञान के ज्ञान तथा शिक्षकों की शिक्षण शैली का बारीकी से मूल्यांकन करेगा। इस औचक निरीक्षण अभियान के फरमान के जारी होते ही चयनित जिलों के शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों के बीच भारी खलबली मच गई है, क्योंकि पिछले कुछ समय से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार अब किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है।दुर्ग समेत पांच जिलों में अचानक निरीक्षण की क्यों पड़ी जरूरत?छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के पीछे मुख्य वजह लंबे समय से सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों और बुनियादी साक्षरता को लेकर मिल रही नकारात्मक फीडबैक रिपोर्ट है। राज्य सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि कागजों पर भले ही स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन और बेहतरीन बुनियादी सुविधाओं के दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर कई जगहों पर शिक्षा का स्तर अभी भी चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है। इसी सत्यता को परखने के लिए दुर्ग सहित पांच प्रमुख जिलों का चयन किया गया है, जहां विभिन्न क्षेत्रों के ग्रामीण और शहरी स्कूलों की मॉनिटरिंग की जाएगी। इस राज्य स्तरीय दल में शिक्षा विशेषज्ञों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जो सीधे तौर पर छात्रों से बातचीत करके यह जानेंगे कि उन्हें निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा मिल रही है या नहीं। अचानक होने वाले इन छापों से लापरवाह शिक्षकों और व्यवस्थाओं की पोल खुलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।शिक्षकों की कार्यप्रणाली और कक्षाओं में पठन-पाठन का होगा सूक्ष्म मूल्यांकनराज्य स्तरीय निरीक्षण दल जब स्कूलों में पहुंचेगा, तो उनका मुख्य फोकस केवल बुनियादी दस्तावेजों या रजिस्टरों की जांच करना नहीं होगा, बल्कि वे सीधे क्लासरूम के भीतर जाकर शिक्षण कार्य का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे। दल के सदस्य बच्चों से किताबें पढ़वाकर, गणित के बुनियादी सवाल पूछकर और विज्ञान के प्रयोगों की जानकारी लेकर यह परखेंगे कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपनी कक्षाओं के स्तर के अनुरूप कितना ज्ञान अर्जित कर पा रहे हैं। इसके साथ ही, स्कूलों में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता, साफ-सफाई, पीने के पानी की व्यवस्था और खेलकूद के संसाधनों का भी जायजा लिया जाएगा। यदि निरीक्षण के दौरान कोई शिक्षक अनुपस्थित पाया जाता है या पढ़ाने में गंभीर लापरवाही बरतता पाया जाता है, तो उस पर तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।शिक्षा विभाग के इस बड़े अभियान से सुस्त पड़ी व्यवस्था में आएगी तेजीछत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अकादमिक सुधार के लिए इस तरह के राज्य स्तरीय अभियानों का एक दूरगामी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। जब शासन स्तर से सीधे टीमें मैदान में उतरती हैं, तो जिला और ब्लॉक स्तर के शिक्षा अधिकारियों पर भी काम का दबाव बढ़ जाता है और वे स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। दुर्ग और अन्य चार चयनित जिलों के स्कूलों में इस औचक निरीक्षण की सुगबुगाहट से ही शिक्षकों में सतर्कता का माहौल बन गया है। जो शिक्षक अपनी कक्षाओं में समय पर नहीं पहुंचते थे या बिना तैयारी के बच्चों को पढ़ाते थे, वे अब अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने लगे हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि इस प्रकार के औचक निरीक्षण की यह प्रक्रिया पूरे साल नियमित रूप से जारी रखी जाए, तो सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल सकता है।बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कसेगा शिकंजाराज्य सरकार का यह सख्त संदेश साफ है कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार के साथ किसी भी स्तर पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले कुछ दिनों में यह राज्य स्तरीय दल अचानक किसी भी स्कूल का दरवाजा खटखटा सकता है, जिससे प्रशासनिक अमले में पूरी तरह से सतर्कता बरती जा रही है। इस पूरी कवायद का अंतिम उद्देश्य यही सुनिश्चित करना है कि छत्तीसगढ़ के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक के हर एक छात्र को गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा मिल सके, ताकि वे भविष्य में देश और राज्य का नाम रोशन कर सकें।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत के पड़ोस में मिसाइल क्षमताओं को बड़े सर्विलांस, कम्युनिकेशन और प्रिसिजन-स्ट्राइक नेटवर्क के साथ तेज़ी से जोड़ा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana) के आंकड़ों को लेकर एक बार फिर से सियासी घमासान छिड़ गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला है। रायपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए भूपेश बघेल ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान ही 18 लाख 45 हजार आवासों की स्वीकृति मिल चुकी थी। उन्होंने सरकार के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे लिखित झूठ करार दिया है और चुनौती दी है कि अगर सरकार में दम है तो वह इस मुद्दे पर उनके साथ सार्वजनिक रूप से खुली बहस कर ले। इस बयान के सामने आने के बाद से छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और दोनों दलों के बीच बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं।आंकड़ों को लेकर छिड़ी जंग: मुख्यमंत्री और लोकसभा के बयानों में अंतर का उठाया मुद्दापूर्व सीएम भूपेश बघेल ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के आंकड़ों के बीच विरोधाभास पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि एक तरफ जहां राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्री यह दावा कर रहे हैं कि इतने बड़े पैमाने पर नए आवास मंजूर किए गए हैं, वहीं लोकसभा में पेश किए गए आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। बघेल ने सवाल किया कि आखिर कौन सा आंकड़ा सही है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के नेता और मंत्री जनता के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उनके अपने कार्यकाल में ही अधिकांश आवासों की स्वीकृति और उनकी पहली किस्त जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई थी।पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के कार्यों को गिनाते हुए रखा अपना पक्षअपने ऊपर लग रहे आरोपों का जवाब देते हुए भूपेश बघेल ने विस्तार से बताया कि उनके कार्यकाल में किस प्रकार आवास योजनाओं को गति दी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल स्वीकृत 18 लाख 45 हजार आवासों में विभिन्न चरणों के तहत गरीबों को लाभान्वित करने की योजना बनाई गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका था। कांग्रेस पार्टी का यह तर्क रहा है कि उनकी पिछली सरकार ने ग्रामीण और शहरी इलाकों के आवासहीनों को छत मुहैया कराने के लिए पारदर्शिता के साथ काम किया था, लेकिन मौजूदा सरकार बिना पूरी सच्चाई जाने केवल राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ में जुटी हुई है।बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया और जुबानी जंग हुई तेजभूपेश बघेल के इस खुलासे और खुली बहस की चुनौती के बाद सत्ताधारी दल के नेताओं की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने पिछले दिनों आवास निर्माण से जुड़े आंकड़े पेश करते हुए दावा किया था कि वर्तमान सरकार के दौरान ही रिकॉर्ड संख्या में आवासों का निर्माण पूरा किया गया है और बाकी तेजी से निर्माणाधीन हैं। बीजेपी नेताओं का यह भी कहना है कि कांग्रेस पार्टी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए अब आधारहीन बयानबाजी कर रही है और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।जनता के बीच चर्चा का विषय बना आवास निर्माण का यह सियासी मुद्दाछत्तीसगढ़ में गरीबों के पक्के मकान का सपना अब पूरी तरह से राजनीतिक दलों के बीच वादों, दावों और आंकड़ों की बाजीगरी का मुख्य केंद्र बन चुका है। एक तरफ जहां सरकार अपनी उपलब्धियों का ढोल पीट रही है, वहीं विपक्ष के नेता हर मोर्चे पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या भूपेश बघेल की इस खुली बहस की चुनौती को सत्ता पक्ष स्वीकार करता है या यह विवाद यूं ही राजनीतिक बयानों की भेंट चढ़ जाता है।
भारतीय न्याय व्यवस्था में न्यायपालिका की भूमिका हमेशा से यह सुनिश्चित करने की रही है कि प्रशासनिक अमले की किसी भी प्रकार की लापरवाही या मनमानी के कारण किसी भी आम नागरिक या सरकारी कर्मचारी के अधिकारों का हनन न हो। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) से एक ऐसा महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सामने आया है जिसने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ में एक अजीबोगरीब प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया था, जहां शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने एक पदोन्नत और अनुभवी प्रधानाध्यापक (Headmaster) को निचले पद यानी 'सहायक शिक्षक' के रूप में मानकर उनका मनमाना और त्रुटिपूर्ण ट्रांसफर आदेश जारी कर दिया था। इस अजीबोगरीब प्रशासनिक भूल से आहत होकर जब शिक्षक ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, तो हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए न केवल उस ट्रांसफर आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी फटकार भी लगाई। अदालत के इस फैसले से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और यह मामला सरकारी विभागों में होने वाली कागजी और तथ्यात्मक गलतियों के खिलाफ एक बड़ा कानूनी नजीर बन गया है।क्या था पूरा मामला और कैसे हुई प्रशासनिक स्तर पर यह बड़ी भूल?पूरा मामला छत्तीसगढ़ के एक सरकारी स्कूल से जुड़ा है जहां याचिकाकर्ता एक लंबे समय से प्रधानाध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा था और उसकी पदोन्नति पूरी तरह से नियमों के दायरे में हुई थी। लेकिन राज्य के शिक्षा विभाग और जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना किसी ठोस रिकॉर्ड के और बिना सेवा पुस्तिका (Service Book) की सही तरीके से जांच किए, एक सामान्य ट्रांसफर लिस्ट जारी कर दी। इस सूची में उस अनुभवी प्रधानाध्यापक को उनके मूल पद के बजाय 'सहायक शिक्षक' के रूप में दर्शाया गया और उनका स्थानांतरण किसी अन्य दूरदराज के स्कूल में कर दिया गया। एक जिम्मेदार और उच्च पद पर कार्यरत शिक्षक को अचानक इस तरह से डिग्रैड करके ट्रांसफर किए जाने से उनका मानसिक उत्पीड़न तो हुआ ही, साथ ही उनकी वरिष्ठता और साख पर भी अनुचित सवालिया निशान लग गया। जब विभाग के अधिकारियों ने उनकी आपत्तियों पर कोई ध्यान नहीं दिया, तो शिक्षक ने न्याय की उम्मीद में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां और प्रशासनिक लापरवाही पर प्रहारमामلے की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने जब प्रशासनिक दस्तावेजों और सर्विस रिकॉर्ड का बारीकी से अवलोकन किया, तो वे भी हैरान रह गए कि किस प्रकार बिना सोचे-समझे और बिना तथ्यों की पुष्टि किए एक वरिष्ठ शिक्षक के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। अदालत ने कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि एक छोटी सी कागजी गलती किसी भी कर्मचारी के पूरे जीवन की मेहनत और सम्मान को दांव पर लगा सकती है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब कोई कर्मचारी नियमानुसार प्रधानाध्यापक के पद पर कार्य कर रहा है, तो उसे अपनी मनमर्जी से सहायक शिक्षक मानकर उसका डिमोशन या गलत ट्रांसफर करना पूरी तरह से कानून के खिलाफ और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया को प्रशासनिक उदासीनता का एक जीवंत उदाहरण करार दिया।ट्रांसफर आदेश रद्द होने से शिक्षक को मिली बड़ी राहतहाईकोर्ट के इस त्वरित और न्यायसंगत फैसले से याचिकाकर्ता प्रधानाध्यापक को बहुत बड़ी राहत मिली है। अदालत ने विभाग के उस त्रुटिपूर्ण आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जिसके तहत उनका स्थानांतरण किया गया था। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित शिक्षक को उनके मूल पद और विद्यालय में ही यथाशीघ्र पुनः स्थापित किया जाए तथा उनकी वरिष्ठता से जुड़े सभी लाभ सुरक्षित रखे जाएं। इस फैसले के आने के बाद से शिक्षा विभाग के उन अधिकारियों की नींद उड़ गई है जिन्होंने बिना दस्तावेजों की जांच किए इस तरह के आदेशों को पास करने में अपनी सहमति दी थी। जानकारों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से प्रशासनिक अमले को भविष्य में अधिक सतर्क और जिम्मेदार रहने की प्रेरणा मिलेगी।सरकारी विभागों में कार्यप्रणाली सुधारने की सख्त आवश्यकताछत्तीसगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को उजागर कर दिया है कि देश के कई सरकारी विभागों में फाइलों के निस्तारण और कर्मचारियों के रिकॉर्ड को संभालने में किस स्तर पर लापरवाही बरती जाती है। जब तक अधिकारी पूरी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ अपनी फाइलों की जांच नहीं करेंगे, तब तक कर्मचारियों को इस तरह की अदालती लड़ाइयों का सामना करना पड़ता रहेगा। राज्य सरकार और शिक्षा निदेशालय को भी इस मामले से सीख लेते हुए एक ऐसा आंतरिक मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करना चाहिए जिससे भविष्य में किसी भी शिक्षक या कर्मचारी के पद और प्रतिष्ठा के साथ इस तरह की प्रशासनिक चूक दोबारा न हो सके।
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दान की रकम की कथित हेराफेरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही जमा हो और मंदिर की आय-व्यय व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता रखी जाए।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में H1N1 की स्थिति नियंत्रण में है और पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध हैं। दिल्ली में H1N1 के लगभग 3,000 मामले सामने आने के बाद, CM रेखा गुप्ता ने इस पर एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंह ने कहा कि राजधानी के अस्पतालों में H1N1 आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं और चेतावनी दी कि अगर मरीज़ों को बेड देने से मना किया गया तो कार्रवाई की जाएगी। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस हेल्थ डिपार्टमेंट, MCD, NDMC और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के सीनियर अधिकारियों के साथ हुई रिव्यू मीटिंग के बाद हुई। सिंह ने कहा कि स्थिति कंट्रोल में है और पर्याप्त डॉक्टर और दवाइयां मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि इस साल दिल्ली में इन्फ्लूएंज़ा के लगभग 3,000 मामले सामने आए हैं, जिनमें 2,308 मामले H1N1 संक्रमण के हैं। इसे भी पढ़ें: Chandipura Virus रोकेगा केंद्रीय एक्सपर्ट दल, गुजरात और राजस्थान में तैनाती हाल के सालों में इन आंकड़ों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल (NCDC) के डेटा के अनुसार, भारत में 2021 में H1N1 के 778 मामले और 12 मौतें दर्ज की गईं। 2022 में ये आंकड़े बढ़कर 13,202 मामले और 410 मौतें हो गए। 2023 में 8,125 मामले और 129 मौतें हुईं। जून 2024 तक, भारत में 7,215 मामले और 150 मौतें दर्ज की गईं, और साल के आखिर तक ये आंकड़े बढ़ते रहे। 2025 की NCDC रिपोर्ट से भी कई राज्यों में H1N1 के लगातार फैलने का पता चला। इसे भी पढ़ें: Delhi में H1N1 का बढ़ता खतरा! स्वास्थ्य मंत्री JP Nadda आज करेंगे समीक्षा बैठक NCDC क्या है? नेशनल सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल (NCDC) पूरे देश में इन्फ्लूएंजा की निगरानी का नेटवर्क चलाता है और H1N1 की रोकथाम और इलाज से जुड़ा राज्य-स्तरीय डेटा और गाइडेंस देता है। यह फैल रहे इन्फ्लूएंजा स्ट्रेन में होने वाले बदलावों पर भी नज़र रखता है और WHO की गाइडलाइंस के अनुसार मौसमी इन्फ्लूएंजा के टीके लगवाने की सलाह देता है। 2025-26 सीज़न में भारत में फैल रहे H1N1 वायरस का संबंधित वैक्सीन घटक (vaccine component) से अच्छा मेल पाया गया, जिससे पता चलता है कि टीकाकरण अभी भी असरदार था। मौसमी इन्फ्लूएंजा के टीके H1N1, H3N2 और B/Victoria सहित मुख्य रूप से फैलने वाले इन्फ्लूएंजा स्ट्रेन से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
जन्मदिन पर फैंस से मिले प्यार पर आशा नेगी ने जताया आभार, बोलीं- 'मैं बहुत भाग्यशाली हूं'
टीवी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री आशा नेगी ने अपने जन्मदिन के मौके पर मिले फैंस, दोस्तों और करीबियों के प्यार के लिए खास अंदाज में शुक्रिया कहा।
45 की उम्र-2 बच्चों की मां, ब्रालेट में श्वेता का बोल्ड अवतार
श्वेता तिवारी इन दिनों 'द ट्रेटर्स' में नजर आ रही हैं. शो में वो अपनी खूबसूरती और फिटनेस से कई यंग हसीनाओं पर भारी पड़ रही हैं.
CTET सितंबर 2026 परीक्षा स्थगित, आवेदन का फिर मिला मौका; 1 सितंबर तक कर सकेंगे अप्लाई
CTET सितंबर 2026 परीक्षा स्थगित कर दी गई है। CBSE ने आवेदन विंडो फिर खोली है। पात्र उम्मीदवार 1 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि नई परीक्षा तिथि बाद में घोषित होगी।
दिल्ली में Swine Flu के 2300+ मामले, Influenza B और Covid की भी दस्तक: सरकार की एडवाइजरी
भारत में स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइज़री जारी की है और निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य अधिकारी देश भर में फैल रहे वायरस पर नज़र रख रहे हैं। दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 2,308 मामले सामने आए हैं; यह संख्या पिछले सालों के औसत से लगभग आठ गुना ज़्यादा बताई जा रही है। मामलों में इस बढ़ोतरी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने लोगों के लिए एक एडवाइज़री जारी की है, जिसमें उन्हें सावधानी बरतने, खासकर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर एहतियात रखने की सलाह दी गई है। इसे भी पढ़ें: Delhi में प्याज की कीमतों से बड़ी राहत! अब 35 रुपये/किलो में मिलेगा, Kanda Express रवाना ICMR के डायरेक्टर राजीव बहल ने मंगलवार को बताया कि फ्लू के लगभग 650 मामले भी दर्ज किए गए हैं। दिल्ली का स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नज़र रख रहा है और सरकार का कहना है कि वह इस बीमारी से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है। सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं, साथ ही लोगों से स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय करने की अपील की गई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय सतर्क रहें। जनता के लिए जारी सलाह में लोगों से भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने और सांस से जुड़ी स्वच्छता के बुनियादी नियमों का पालन करने को कहा गया है। राजीव बहल ने बताया कि कोविड महामारी के बाद से भारत का सर्विलांस सिस्टम मज़बूत हुआ है, जिससे अधिकारी देश में फैल रहे वायरस की पहचान रियल-टाइम में कर पाते हैं। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit 2026: हंसो, बना रखी है क्यूं ये सूरत रोनी? एक जगह अगर जमा होंगे तीनों- मोदी-जिनपिंग और पुतिन बहल ने कहा कि सबसे पहली बात यह है कि हमें कैसे पता चले कि कौन सा वायरस फैल रहा है। कोविड के बाद हमने भारत में हो रही गतिविधियों का रियल-टाइम में पता लगाने की अपनी क्षमता को काफ़ी बेहतर किया है। उन्होंने बताया कि सर्विलांस कई स्तरों पर होता है, जिसमें राज्यों से बार-बार होने वाले संक्रमण और लैबोरेटरी की रिपोर्ट मिलती हैं। बहल के अनुसार, पूरे भारत में 73 लैबोरेटरी इस सर्विलांस सिस्टम का हिस्सा हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
'एमसीडी और अफसर नहीं कर रहे काम...', बीजेपी नेता ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल
बीजेपी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद विजय गोयल ने दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सफाई, सीवर, बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याओं के निवारण में सरकार की नाकामी पर नाराजगी जताई है.
हिमांशी खुराना और आसिम रियाज का भले ही ब्रेकअप हो चुका है, लेकिन दोनों के बीच की पुरानी बातें एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।
‘कप्तान-जज के पास जाना है, जाओ, कायदे से मारूंगा', सिपाही ने दी धमकी, VIDEO
बाराबंकी में मेयो पुलिस चौकी पर तैनात सिपाही कपिल तिवारी का कार चालक विशाल यादव से धमकी भरे अंदाज में बात करने का वीडियो वायरल हुआ है. वीडियो में सिपाही युवक को दिनदहाड़े मारने की बात कहता सुनाई दे रहा है. पुलिस के मुताबिक घटना 21 और 22 अगस्त की रात की है. एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने जांच के आदेश दिए हैं.
भारतीय समाज और संस्कृति सदियों से अपनी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और संस्कारों के लिए जानी जाती है, लेकिन आधुनिकता और विज्ञान के इस दौर में भी देश के कई हिस्सों में अंधविश्वास, जादू-टोना और पाखंड का काला साया आज भी मजबूती के साथ पैर पसारे हुए है। खासकर राजस्थान जैसे विशाल और सांस्कृतिक राज्य से एक ऐसी चौंकाने वाली और आंखें खोल देने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक और न्यायिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राजस्थान में अंधविश्वास और तांत्रिकों का यह नेटवर्क इस कदर फल-फूल रहा है कि आम और भोले-भाले लोग आसानी से इनके चंगुल में फंसकर अपनी संपत्ति, इज्जत और कई बार अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। हाल ही में सामने आए अपराध आंकड़ों और कानूनी समीक्षा से यह बात स्पष्ट हुई है कि अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र से जुड़े मामलों में पुलिस और अदालतों तक पहुंचे कुल 51 बड़े मामलों में से महज 6 मामलों में ही दोषियों को सजा मिल पाई है। न्याय मिलने की यह बेहद धीमी और कमजोर रफ्तार इस बात का प्रमाण है कि इस अवैध और खतरनाक कारोबार से जुड़े लोग किस प्रकार कानून की खामियों का फायदा उठाकर आसानी से बच निकलते हैं।तांत्रिकों का बढ़ता जाल और भोले-भाले लोगों की मजबूरीराजस्थान के विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों में सक्रिय ये तथाकथित तांत्रिक और ओझा अक्सर लोगों की मानसिक कमजोरी, पारिवारिक कलह, बीमारी या आर्थिक तंगी का फायदा उठाते हैं। समाज के एक बड़े वर्ग में आज भी यह अंधविश्वास गहराई तक समाया हुआ है कि किसी भी बीमारी, भूत-प्रेत की बाधा या दुर्भाग्य से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर या अस्पताल जाने के बजाय किसी बाबा या तांत्रिक के पास जाना ज्यादा असरदार होता है। तांत्रिक लोग तरह-तरह के डरावने अनुष्ठान, हवन और अमानवीय टोटके करके लोगों को अपनी जाल में फंसाते हैं और उनसे मुंहमांगी रकम वसूलते हैं। जब पीड़ित परिवारों को यह अहसास होता है कि उनके साथ बड़ा धोखा हुआ है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और वे सर्वस्व गंवा चुके होते हैं। इस प्रकार का अंधविश्वास न केवल समाज को मानसिक रूप से कमजोर कर रहा है, बल्कि यह एक संगठित अपराध का रूप लेता जा रहा है जिस पर लगाम लगाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।अदालती आंकड़ों की कड़वी सच्चाई: 51 में से सिर्फ 6 को सजा क्यों?राजस्थान में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर होने वाले जुल्मों के खिलाफ जब कानून का शिकंजा कसने की कोशिश की जाती है, तो सिस्टम की सुस्त रफ्तार और साक्ष्यों की कमी के कारण आरोपियों के हौसले बुलंद बने रहते हैं। हालिया आंकड़ों के विश्लेषण से यह पता चला है कि इस तरह के कुल 51 मामलों में पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की, लेकिन मजबूत पैरवी और पुख्ता सबूतों के अभाव के चलते अदालतों में केवल 6 मामलों में ही सजा मुकर्रर हो पाई। बाकी के ज्यादातर मामले या तो गवाहों के मुकर जाने के कारण खारिज हो गए या फिर आपसी समझौते के नाम पर रफा-दफा कर दिए गए। कानूनी जानकारों का यह मानना है कि जब तक समाज में अंधविश्वास के खिलाफ कोई कड़ा और विशेष कानून पूरी सख्ती से लागू नहीं किया जाता और त्वरित अदालती सुनवाई नहीं होती, तब तक इन ठगों और पाखंडियों के मन से कानून का डर खत्म नहीं हो सकता।नरबल, अंधविश्वास और महिलाओं तथा बच्चों पर बढ़ता अत्याचारतांत्रिकों के इस काले और डरावने नेटवर्क का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि कई बार यह पाखंड नरबलि और अमानवीय प्रताड़ना जैसी जघन्य वारदातों तक पहुंच जाता है। आए दिन ऐसी खबरें सुनने को मिलती हैं जहां तांत्रिकों के बहकावे में आकर लोगों ने अपने ही परिवार के मासूम बच्चों या महिलाओं को बलि देने की कोशिश की या उन्हें डायन बताकर प्रताड़ित किया। अंधविश्वास की इन अंधी गलियों में सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं और बच्चे बनते हैं, जिनकी आवाज को ये शातिर तांत्रिक दबा देते हैं। इस प्रकार की घटनाएं केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय हैं, जिन्हें रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को मिलकर एक बड़ी वैचारिक क्रांति लानी होगी।सामाजिक जागरूकता और शिक्षा ही है इस कुप्रथा का एकमात्र इलाजइस लाइलाज बीमारी जैसी अंधविश्वास की समस्या का समाधान केवल पुलिस की डंडे या अदालती फैसलों से पूरी तरह संभव नहीं है, जब तक कि समाज की सोच में बुनियादी बदलाव न लाया जाए। गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक शिक्षा का प्रसार करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) को बढ़ावा देना और लोगों को इन पाखंडियों के झांसे से बचाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है। मीडिया, विद्यालयों, गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय प्रशासन को मिलकर एक ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार करना होगा जो लोगों को यह समझा सके कि जीवन की हर समस्या का समाधान अंधविश्वास या तांत्रिक क्रियाओं में नहीं, बल्कि मेहनत, विज्ञान और सही चिकित्सा उपचार में निहित है। राजस्थान के इस कड़वे सच को बदलने के लिए हर जागरूक नागरिक को आगे आना होगा ताकि किसी और मासूम की जिंदगी इस काले जाल में न उलझ सके।
167 रन, 4 विकेट... दलीप ट्रॉफी में छाया वैभव का टीममेट, काटा गदर
दलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को पारी और 210 रन से हरा दिया. शाहबाज अहमद ने 167 रन की करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलने के बाद कुल 4 विकेट भी झटके. सुदीप कुमार घरामी ने 146 रन बनाए. अनुकूल रॉय और अभिजीत सरकार ने 5-5 विकेट लिए, जबकि वैभव सूर्यवंशी ने 2 विकेट चटकाए.
असम में IVF तकनीक से लखिमि नस्ल की दुनिया की पहली बछिया का जन्म, पशुपालन में बड़ी उपलब्धि
असम में स्वदेशी लखिमि नस्ल की दुनिया की पहली IVF बछिया का जन्म हुआ है। यह उपलब्धि असम के वेटरनरी एंड फिशरी विश्वविद्यालय की ART लैब में हासिल की गई, जिसे राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत सहयोग मिला।
Delhi में प्याज की कीमतों से बड़ी राहत! अब 35 रुपये/किलो में मिलेगा, Kanda Express रवाना
सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए अपने बफर स्टॉक से प्याज जारी करने और रेल के ज़रिए इसे बड़े खपत वाले केंद्रों तक पहुँचाने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं। ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम की इस पहल के तहत शुरुआत में दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी में प्याज की सप्लाई की जाएगी। सरकारी एजेंसियां NAFED और NCCF ग्राहकों को राहत देने के लिए खुदरा बाज़ारों में 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर प्याज बेचेंगी। इसे भी पढ़ें: Gen Z पर BJP-RSS में मतभेद? दिपके बोले- मोहन भागवत आपके मेंटर हैं, उनकी बात सुनें उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को भारत में प्याज की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। पिछले साल इसी अवधि में औसत कीमत 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी। औसत थोक कीमत भी 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एक साल पहले यह 21.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी। कई बड़े शहरों में कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को चेन्नई में प्याज लगभग 60 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था, जबकि पिछले साल यह 33 रुपये प्रति किलोग्राम था। दिल्ली में खुदरा कीमत 55 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि एक साल पहले यह 35 रुपये थी; वहीं कोलकाता में कीमत लगभग 53 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नासिक से बड़े खपत वाले केंद्रों तक रेलवे रेक के ज़रिए बड़ी मात्रा में प्याज़ पहुँचाना शुरू कर दिया है। 'कांदा एक्सप्रेस' सिस्टम के तहत, सरकार के बफ़र स्टॉक से प्याज़ उन शहरों में भेजा जा रहा है जहाँ कीमतें और माँग ज़्यादा बनी हुई हैं। इसे भी पढ़ें: Kejriwal का BJP को चैलेंज: Punjab के 1000 Schools बनाम Gujarat के 1000 Schools, आओ करें तुलना खरे ने कहा कि रेलवे रेक में लदा प्याज़ बुधवार तक तय केंद्रों पर पहुँचने की उम्मीद है। पहली खेप चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी भेजी जाएगी। बाज़ार की माँग और कीमतों के हालात के आधार पर बाद में और शहरों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। सरकार नासिक में जमा प्याज़ को बड़ी मात्रा में मुख्य खपत वाले केंद्रों तक पहुँचाएगी। इसके बाद इस स्टॉक की सप्लाई थोक और खुदरा बाज़ारों में की जाएगी। NAFED और NCCF चुने हुए खुदरा आउटलेट्स के ज़रिए ग्राहकों को सीधे 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर प्याज़ बेचेंगे। इस कदम का मकसद उन इलाकों में प्याज़ की उपलब्धता बढ़ाना है जहाँ कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं और कीमतों में और बढ़ोतरी को रोकना है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
रणथंभौर में दिखा खौफनाक मंजर: मादा भालू का आक्रामक रूप देख रील और सेल्फी लेने वालों की उड़ी हवाइयां
राजस्थान का विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) अपनी समृद्ध जैव विविधता, खूबसूरत जंगलों और बाघों की रोमांचक सफारी के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। यहां आने वाले सैलानी अक्सर प्राकृतिक नजारों और वन्यजीवों की एक झलक पाने के लिए बेताब रहते हैं, लेकिन कई बार यह दीदार इतना खतरनाक साबित हो जाता है कि देखने वालों की सांसे अटक जाती हैं। हाल ही में रणथंभौर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर भी हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वायरल रील बनाने के चक्कर में कुछ लोगों ने अपनी जान को किस हद तक जोखिम में डाल दिया, इसकी बानगी सवाई माधोपुर में देखने को मिली। रणथंभौर रोड स्थित गणेश धाम के नजदीक जब एक मादा भालू अपने छोटे से बच्चे के साथ जंगल की सुरक्षा दीवार लांघकर सड़क पर आ गई, तो वहां मौजूद लोगों ने सावधानी बरतने के बजाय तमाशा शुरू कर दिया। लोग वन्यजीव की सुरक्षा और अपनी हिफाजत भूलकर उसके बिल्कुल करीब पहुंच गए और मोबाइल निकालकर वीडियो व सेल्फी लेने लगे। लेकिन वन्यजीवों के स्वभाव से अनजान इन लोगों को तब अपनी गलती का अहसास हुआ जब शांत दिखने वाली मादा भालू अचानक आक्रामक हो गई और हमला करने के लिए उन पर झपटी। इस अप्रत्याशित आक्रामकता को देख सेल्फी लेने वालों की सिट्टी-पिट्टी गुल हो गई और उनके हाथ-पांव फूल गए।जब सुरक्षा दीवार लांघकर सड़क पर आ पहुंचा भालू का परिवारप्राप्त जानकारी के अनुसार, रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बफर जोन और आसपास के इलाकों से अक्सर जंगली जानवरों के बाहर आने की खबरें सामने आती रहती हैं। इस बार एक मादा भालू अपने दुग्धमुंहे और छोटे बच्चे के साथ भोजन या पानी की तलाश में या सामान्य आवाजाही के दौरान पार्क की सुरक्षा दीवार के पास आ गई। वह करीब 15 से 20 मिनट तक सड़क के किनारे अपने बच्चे के साथ शांति से बैठी रही। यदि उस दौरान लोग समझदारी दिखाते और वन विभाग के नियमों का पालन करते, तो यह एक सामान्य वन्यजीव दर्शन का पल हो सकता था। लेकिन इंसानी जिज्ञासा और सोशल मीडिया पर लाइक्स बटोरने की अंधी दौड़ ने इस साधारण सी घटना को एक बड़े खतरे में बदल दिया। सड़क के किनारे भालू को बैठा देख वहां से गुजरने वाले और आसपास के स्थानीय लोग इकट्ठा होने लगे। भीड़ को बढ़ता देख और अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर आशंकित हुई मादा भालू का रवैया धीरे-धीरे बदलने लगा, जिसे वहां मौजूद नासमझ लोग भांप नहीं पाए।रील और सेल्फी का खतरनाक जुनून: जब भारी पड़ी लापरवाहीआज के दौर में सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए रील्स बनाने का जो पागलपन युवाओं और आम लोगों में सवार है, वह कई बार जानलेवा साबित हो जाता है। रणथंभौर की इस घटना में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जब लोगों ने देखा कि मादा भालू अपने बच्चे के साथ है, तो वे सोशल मीडिया के लिए बेहतरीन वीडियो और सेल्फी कैप्चर करने की होड़ में सभी सुरक्षा सीमाओं को लांघकर उसके बिल्कुल नजदीक चले गए। भालू जैसे जंगली जानवर, जो अपने बच्चों (कब्स) के साथ होने पर बेहद संवेदनशील और खतरनाक माने जाते हैं, उनके इतने करीब जाना सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा था। जैसे ही लोग मोबाइल के कैमरे ऑन करके भालू के और अधिक पास पहुंचे, मादा भालू ने खतरे को भांप लिया और वह पूरी तरह से आक्रामक हो गई। वह अपने पिछले पैरों पर खड़ी हो गई और हमला करने के अंदाज में आगे बढ़ी। भालू के इस तेवर को देखकर वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए और वे चीखते-पुकारते हुए पीछे की ओर भागे।टल गया बड़ा हादसा, वन विभाग ने दी कड़ी चेतावनीगनीमत यह रही कि इस हाई-वोल्टेज और डरावने ड्रामे के दौरान कोई बड़ा जनहानि या हादसा नहीं हुआ, वरना यह लापरवाही किसी की जान भी ले सकती थी। कुछ पलों के इस तनावपूर्ण माहौल के बाद मादा भालू समझदारी दिखाते हुए अपने बच्चे को साथ लेकर पास के ही एक पेड़ के सहारे सुरक्षा दीवार लांघकर वापस रणथंभौर के सुरक्षित जंगलों की तरफ लौट गई। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों ने एक बार फिर कड़ी चेतावनी जारी की है कि टाइगर रिजर्व या जंगलों के आसपास वन्यजीवों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ या उनके करीब जाने की कोशिश बिल्कुल न करें। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सुस्त दिखने वाले भालू खतरे के समय बेहद तेज और आक्रामक हो सकते हैं, और खासकर जब उनके साथ उनके बच्चे हों, तो वे किसी भी शिकारी जानवर से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं।वन्यजीव पर्यटन और पर्यटकों की जिम्मेदारीरणथंभौर जैसे नेशनल पार्कों में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को यह समझना होगा कि प्रकृति और वन्यजीवों का सम्मान करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। मनोरंजन या सोशल मीडिया की एक रील के लिए अपनी जान जोखिम में डालना और बेजुबान जानवरों को परेशान करना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है। वन विभाग लगातार पर्यटकों और सफारी जिप्सी चालकों को यह निर्देश देता रहता है कि वे जानवरों से एक निश्चित सुरक्षित दूरी बनाकर रखें और किसी भी स्थिति में शोरगुल न मचाएं। इस ताज़ा घटना ने एक बार फिर से यह आईना दिखा दिया है कि यदि इंसानों ने अपनी हरकतों पर काबू नहीं पाया, तो प्रकृति का यह गुस्सा किसी दिन भारी तबाही का कारण बन सकता है।
कौन हैं नेतन्याहू के वो बेटे याइर? जिसका हत्या करना चाहता है ईरान, नेतन्याहू का आरोप
Netanyahu Iran Son Claim:
सितंबर में 135 किमी की पदयात्रा से थमेगी अंदरूनी कलह? एक मंच पर नजर आएंगे चरणजीत चन्नी और अमरिंदर
भारतीय राजनीति में जब भी चुनावी राज्यों की बात आती है, तो आपसी गुटबाजी और नेताओं के बीच की खींचतान को खत्म करना किसी भी राष्ट्रीय दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। खासकर पंजाब कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी कलह और बयानबाजी किसी से छिपी नहीं है। इसी राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने और पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी एक बार फिर पंजाब के दौरे पर आने वाले हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, सितंबर महीने में राहुल गांधी पंजाब में करीब 135 किलोमीटर लंबी एक विशेष यात्रा की शुरुआत करेंगे, जिसके माध्यम से वे पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगे और राज्य के राजनीतिक समीकरणों को साधने का प्रयास करेंगे। इस महत्वपूर्ण यात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि इसमें पंजाब कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी तथा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत तमाम बड़े चेहरे एक ही मंच पर कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलते हुए नजर आएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से न केवल पार्टी के भीतर चल रही आपसी कलह पर विराम लगेगा, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए एक मजबूत संदेश भी जनता के बीच जाएगा।पंजाब कांग्रेस में आपसी मतभेद और गुटबाजी को खत्म करने की बड़ी कोशिशपंजाब की राजनीति में कांग्रेस पार्टी हमेशा से एक ताकतवर विकल्प रही है, लेकिन समय-समय पर नेताओं के बीच आपसी खींचतान और वैचारिक मतभेदों ने पार्टी को नुकसान भी पहुंचाया है। चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग जैसे बड़े नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर अक्सर वैचारिक दूरियां देखने को मिलती रही हैं, जिसका असर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं पर भी पड़ता है। हाईकमान का यह साफ मानना है कि जब तक पार्टी के सभी प्रमुख चेहरे मिलकर एक मंच पर काम नहीं करेंगे, तब तक चुनावी मैदान में विरोधियों का मुकाबला करना मुश्किल होगा। राहुल गांधी की यह आगामी 135 किलोमीटर लंबी पदयात्रा इसी आंतरिक कलह को खत्म करने और सभी नेताओं को एक सूत्र में पिरोने के लिए एक अचूक राजनीतिक औषधि के रूप में देखी जा रही है। जब सभी वरिष्ठ नेता एक साथ जनता के बीच पहुंचेंगे, तो इससे आपसी गिले-शिकवे दूर होंगे और कैडर में यह संदेश जाएगा कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट होकर आगे बढ़ रही है।135 किलोमीटर की इस पदयात्रा का पूरा खाका और रणनीतिक महत्वसितंबर महीने में प्रस्तावित यह 135 किलोमीटर लंबी यात्रा पंजाब के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरेगी। इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी न केवल पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों और दिग्गजों के साथ बैठकें करेंगे, बल्कि आम जनता, युवाओं, किसानों और व्यापारियों से सीधे संवाद भी स्थापित करेंगे। यात्रा का यह रूट इस तरह से तैयार किया गया है कि इसमें हर वर्ग की समस्याओं और क्षेत्रीय मुद्दों को छुआ जा सके। कांग्रेस पार्टी की रणनीति यह है कि इस पदयात्रा के जरिए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए जाएं और साथ ही संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए। इस लंबी यात्रा के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी, राजा वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेता हर कदम पर राहुल गांधी के साथ मौजूद रहेंगे, जिससे उनकी संयुक्त ताकत का प्रदर्शन मीडिया और जनता के सामने स्पष्ट रूप से हो सकेगी।जनता के बीच एकजुटता दिखाने की चुनौती और सियासी मायनेराजनीति में केवल योजनाएं बनाना काफी नहीं होता, बल्कि उनका जमीनी क्रियान्वयन और जनता के बीच उसका प्रभाव बहुत मायने रखता है। पंजाब की जनता जागरूक है और वह नेताओं के आपसी व्यवहार और उनकी कार्यशैली पर पैनी नजर रखती है। जब चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग जैसे नेता एक साथ जनता के सामने हाथ उठाकर एकता का परिचय देंगे, तो इसका सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव मतदाताओं पर पड़ेगा। विपक्षी दल अक्सर कांग्रेस की अंदरूनी फूट को लेकर उसे घेरते आए हैं, लेकिन इस यात्रा के माध्यम से कांग्रेस यह साबित करना चाहती है कि उसके सभी नेता पार्टी हित सर्वोपरि रखते हुए एक साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह एकता आने वाले समय में राजनीतिक हवा का रुख मोड़ने में कितनी कारगर साबित होगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन शुरुआती सुगबुगाहट ने राज्य की सियासत का पारा जरूर बढ़ा दिया है।आगामी चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोकपंजाब का राजनीतिक परिदृश्य काफी तेजी से बदल रहा है और हर दल अपनी जमीन मजबूत करने में जुटा हुआ है। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा और 135 किलोमीटर की यह मैराथन यात्रा कांग्रेस पार्टी के लिए एक बूस्टर डोज का काम कर सकती है। यदि यह यात्रा अपने उद्देश्यों में सफल रहती है और पार्टी के सभी असंतुष्ट धड़े एकजुट हो जाते हैं, तो इससे कांग्रेस को चुनावी मैदान में एक नई ताकत मिलेगी। पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार होगा और वे पूरी शिद्दत के साथ जनता के बीच जा सकेंगे। इस प्रकार सितंबर की यह राजनीतिक हलचल पंजाब की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है, जिस पर देश भर के राजनीतिक विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हुई हैं।
कई राज्यों में होगी भारी बारिश, ट्रैवल से पहले जानें IMD अलर्ट
Rain forecast Delhi-NCR: अगर आप इस हफ्ते कहीं घूमने जा रहे हैं तो निकलने से पहले मौसम का हाल जरूर चेक कर लें. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है.
'लंदन में इमरान से मिली थी, उनका जुनून...', मुलाकात याद दिलाकर महबूबा ने क्या इशारा किया
जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने इमरान की तारीफ तो की है, लेकिन उनकी सियासत की कमजोरियां भी बताई हैं. और कहा है कि पीएम बनने के बावजूद वे बदले की राजनीति से बाहर नहीं आ पाए थे.
किस्सा 3,400 किस वाले 'Kissing Car' का! जानें क्यों हुई कार्रवाई
Kissing Car: व्हाइट कलर की मारुति स्विफ्ट पर 3,400 से ज्यादा किस के निशान और तेज रफ्तार सड़क पर भागती कार का वीडियो तेजी से वायरल हुआ. जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कार को जब्त कर लिया. मामला थाने पहुंचा और कार मालिक को थाने में ही कार पर बने लिप्स्टिक के निशान छुड़ाने पड़े.
प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्षों से अध्यापन कार्य करा रहे 3.28 लाख शिक्षकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण न होने के कारण सेवा निरंतरता और पद पर मंडरा रहे खतरे के बीच शिक्षा विभाग ने निर्णायक पहल की है। शिक्षा मंत्री ने इस व्यापक वर्ग को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों में स्थायी छूट (Permanent Exemption) प्रदान करने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर उच्च स्तर पर प्रस्तुत कर दिया है। इस कदम से लंबे समय से मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों में एक नई उम्मीद जगी है।टीईटी अनिवार्यता की पृष्ठभूमि और कानूनी जटिलताएंनिशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के तहत विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य योग्यता घोषित किया गया था। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद उन शिक्षकों के सामने विधिक संकट खड़ा हो गया जिनकी नियुक्तियां पूर्व के नियमों, विशेष प्रावधानों या नियोजन प्रक्रियाओं के तहत बिना टीईटी के हुई थीं।समय-समय पर विभिन्न न्यायालयों में यह मामला पहुंचा, जहां कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम शैक्षणिक और व्यावसायिक अर्हता पूरी करना अनिवार्य है। इसके बाद विभिन्न राज्यों में ऐसे शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए अतिरिक्त अवसर दिए गए, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षक आयु सीमा, सेवाकाल की अवधि या अन्य व्यावहारिक कारणों से इस परीक्षा को उत्तीर्ण नहीं कर सके। नतीजतन, विभागीय स्तर पर उनकी सेवा समाप्ति या वेतन वृद्धि रोकने जैसे प्रशासनिक कदमों की तलवार लटकने लगी थी।3.28 लाख परिवारों की आजीविका और जमीनी हकीकतबिना टीईटी वाले इन 3.28 लाख शिक्षकों में से अधिकांश वे हैं जो पिछले 10 से 20 वर्षों से दूरदराज के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई शिक्षकों का सेवाकाल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। शिक्षक संघों का तर्क रहा है कि जब इन शिक्षकों की भर्ती हुई थी, तब संबंधित सेवा नियमावली में टीईटी की अनिवार्यता शामिल नहीं थी। बाद में बनाए गए नियमों को पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू कर शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा करना न्यायसंगत नहीं है।शिक्षकों के कार्य अनुभव, वरिष्ठता और विद्यालयों के संचालन में उनके योगदान को देखते हुए यदि इन्हें सेवा से बाहर किया जाता है, तो इससे न केवल लाखों परिवार प्रभावित होंगे, बल्कि प्राथमिक शिक्षा का बुनियादी ढांचा भी चरमरा जाएगा। कई ग्रामीण विद्यालय ऐसे हैं जो पूरी तरह इन्हीं अनुभवी शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं।शिक्षा मंत्री का प्रस्ताव: स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदमगंभीर होते जमीनी हालात और शिक्षक संगठनों के लगातार बढ़ते दबाव के बीच शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों और विधि विशेषज्ञों के साथ गहन समीक्षा बैठक की। इसके बाद एक संतुलित प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:सेवा अनुभव को मान्यता: वर्षों से नियमित अध्यापन करा रहे शिक्षकों के व्यावहारिक शिक्षण अनुभव को टीईटी के समकक्ष महत्व देने का सुझाव दिया गया है।विभागीय आंतरिक मूल्यांकन: पारंपरिक टीईटी परीक्षा के स्थान पर शिक्षकों के लिए इन-सर्विस ट्रेनिंग या विभागीय दक्षता प्रमाणीकरण की व्यवस्था बनाई जाए।वेतन और पदोन्नति सुरक्षा: स्थायी छूट मिलने पर शिक्षकों के नियमित वेतनमान, ग्रेच्युटी और पेंशन लाभ पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।विशेष श्रेणी का दर्जा: पूर्व नियमावली के तहत नियुक्त शिक्षकों को एक मुश्त विशेष छूट श्रेणी (One-Time Exemption Category) में रखकर सेवा सुरक्षित की जाएगी।शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य गुणवत्ता से समझौता किए बिना उन शिक्षकों के हितों की रक्षा करना है, जिन्होंने दशकों तक व्यवस्था को संभाला है। इस प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में अंतिम अनुमोदन के लिए रखा जा रहा है।शिक्षक संगठनों का रुख और प्रशासनिक चुनौतियांशिक्षा विभाग की इस पहल का प्राथमिक शिक्षक संघ और संयुक्त शिक्षक मंच ने स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग दोहराई है। शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि पूर्व में भी कई बार आश्वासनों के बावजूद विधिक अड़चनों के कारण अधिसूचनाएं अटक जाती रही हैं। इसलिए सरकार को इस प्रस्ताव को मजबूत कानूनी आधार देना होगा ताकि न्यायालय में किसी भी संभावित चुनौती के समय यह टिक सके।प्रशासनिक स्तर पर मुख्य चुनौती एनसीटीई के राष्ट्रीय मानकों और राज्य के विशेष अधिकारों के बीच सामंजस्य बिठाने की है। संविधान के तहत शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, जिससे राज्यों को अपने स्थानीय संदर्भों में नियम बनाने की शक्तियां प्राप्त हैं। इसी संवैधानिक प्रावधान का उपयोग करते हुए राज्य सरकार यह छूट देने की योजना बना रही है।शिक्षा व्यवस्था और छात्रों पर संभावित प्रभावयदि 3.28 लाख शिक्षकों को स्थायी छूट देकर उनकी सेवाएं नियमित रखी जाती हैं, तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव विद्यालयों की दैनिक कार्यप्रणाली पर पड़ेगा। वर्तमान में शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन बिना किसी व्यवधान के जारी रह सकेगा। इसके साथ ही, लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक असमंजस की स्थिति समाप्त होने से शिक्षक पूर्ण मनोयोग से अध्यापन कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन शिक्षकों को सेवा से हटाने के बजाय उनके लिए आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल शिक्षा से संबंधित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे कक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता में और सुधार लाया जा सके।आगे की राह और आगामी प्रक्रियाकैबिनेट से प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद विधि विभाग के परामर्श से संबंधित शिक्षक सेवा नियमावली में औपचारिक संशोधन किया जाएगा। इसके उपरांत राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Gazette Notification) में इसकी अधिसूचना जारी होगी। इसके साथ ही शिक्षा विभाग केंद्र सरकार और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को भी राज्य की विशेष परिस्थितियों से अवगत कराते हुए औपचारिक पत्र प्रेषित करेगा।प्रदेश के लाखों शिक्षकों की नजरें अब आगामी कैबिनेट बैठक और सरकार की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो उनके सुरक्षित भविष्य और आजीविका की दिशा तय करेगी।

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