मैं बॉस बोल रहा हूं...., फिर अकाउंट हो गया खाली, अजीबोगरीब स्कैम
साइबर ठगों के बैंक खाते में सेंधमारी करने का एक नया तरीका खोज निकाला है, जिसका नाम बॉस स्कैम है. इस तरह के स्कैम में विक्टिम को मैसेज किया जाता है, जिसके बाद किसी इमरजेंसी का झांसा दिया जाता है. इसके बाद एक रकम मांगी जाती है, बॉस का नाम सुनकर कई लोग रुपये आसानी से दे देते हैं.
लखनऊ हत्याकांड: कमरे में गूंज रही थी हनुमान चालीसा, जमीन पर पड़ी थीं लाशें
लखनऊ के गोमतीनगर में गुरुवार को SBI कर्मचारी मानस बाजपेई ने ICICI बैंक के बाहर अपनी पत्नी दिव्या की गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद उसने घर जाकर अपनी बीमार बहन को मारा और फिर खुदकुशी कर ली. पड़ोसियों ने जब दरवाजा तोड़ा तो अंदर हनुमान चालीसा चल रही थी.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को अपनी मां सोनिया गांधी को भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 1991 में अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत के बाद से उन्होंने अपनी मां को ज़िंदगी की हर मुश्किल का सामना कभी न खत्म होने वाले साहस और गरिमा के साथ करते देखा है। 56 साल के राहुल गांधी ने राजीव गांधी की 82वीं जयंती पर यह श्रद्धांजलि लिखी। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी मां की यादों पर आधारित किताब बिऑन्गिंग: अ जर्नी ऑफ़ लव' को जल्द ही लाखों लोग पढ़ेंगे जो उन्हें प्यार करते हैं। एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने अपनी 79 साल की माँ को मामा कहकर संबोधित किया और उस आखिरी पल को याद किया जब उन्होंने अपने माता-पिता को एक साथ देखा था। 35 साल से भी ज़्यादा समय पहले। इसे भी पढ़ें: 1984 दंगा केस में उम्रकैद काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार की मौत, दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में तोड़ा दम उन्होंने कहा जिस दिन पापा हमें छोड़कर गए, उस दिन से मैंने आपको ज़िंदगी की हर मुश्किल का सामना अटूट हिम्मत और गरिमा के साथ करते देखा है। सिर्फ़ प्रियंका और मैं ही असल में जानते हैं कि आपने किन हालात का सामना किया और पापा के जाने के बाद आपकी ज़िंदगी कितनी मुश्किल थी। उन्होंने कहा कि वह बहुत खुश और गर्व महसूस कर रहे हैं कि सोनिया गांधी की कहानी को आखिरकार लाखों लोग पढ़ेंगे जो उन्हें पसंद करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह जानते हैं कि अपनी माँ जैसी निजी ज़िंदगी जीने वाली महिला के लिए दुनिया को अपनी कहानी बताना कितना मुश्किल था। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा आज, उनके जन्मदिन पर, मैं पापा को मुस्कुराते हुए और अपनी प्यारी सोनिया को गर्व से देखते हुए महसूस कर सकता हूँ। 1984 से 1989 तक प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त, 1944 को हुआ था। 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में LTTE के एक आत्मघाती हमलावर ने उनकी हत्या कर दी थी, उस समय राहुल गांधी 20 साल के थे। इसे भी पढ़ें: जिस 'वंदे मातरम' को गाकर शहीदों ने चूमा था फांसी का फंदा, वोट बैंक के लिए कांग्रेस कर रही उसी का अपमान हुआ! अमित शाह का तीखा हमला प्रियंका गांधी ने क्या कहा? राहुल गांधी की बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी राजीव गांधी की जयंती पर सोनिया गांधी को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता को अपनी पत्नी पर गर्व होता कि उन्होंने इतने दिल और ईमानदारी से अपनी कहानी लिखी है। एक्स पर एक पोस्ट में 54 वर्षीय प्रियंका गांधी ने अपने माता-पिता के रिश्ते को हमारे समय की सबसे बेहतरीन प्रेम कहानियों में से एक बताया और कहा कि उन्हें इस रिश्ते को करीब से देखने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की यादों की किताब से पाठक उन्हें उनकी सार्वजनिक ज़िंदगी से हटकर एक “बहादुर, वफ़ादार और दयालु महिला” के तौर पर जान पाएंगे, जो “बहुत मज़बूत इरादों वाली” थीं और “जब चाहें तो बहुत मज़ेदार भी हो सकती थीं। उन्होंने अपनी पोस्ट के आखिर में लिखा, “आपसे बहुत प्यार करती हूँ, माँ और आप पर बहुत-बहुत गर्व है। Mama, I last saw you and Papa together more than 35 years ago. Since the day Papa left, I have watched you face everything life threw at you with never-ending courage and dignity. Only Priyanka and I really know what you have been through, and how difficult your life after Papa… pic.twitter.com/OYumcZ2hnC — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 20, 2026
ADAS Technology Explained in Hindi: एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) कैसे काम करता है, इसके सभी 0 से 5 सुरक्षा लेवल और एडाप्टिव क्रूज़ कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट एवं ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग जैसे प्रमुख फीचर्स की विस्तृत जानकारी।
AI में सिर्फ 6 साल का करियर और खरीद लिया 670 करोड़ का बंगला!
वू की लोकप्रियता तब और बढ़ गई जब वे 2025 में Grok 3 के लाइवस्ट्रीम लॉन्च के दौरान सीधे एलन मस्क के साथ मंच साझा करते नजर आए थे.
MF, EPF, NPS या PPF... जरूरत में किससे जल्दी निकलेगा पैसा? जानें
इंवेस्टमेंट करते समय रिटर्न और इंटरेस्ट रेट के साथ यह जानना भी जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर पैसा कितनी जल्दी निकलेगा. म्यूचुअल फंड, EPF, NPS और PPF में फंड विड्रॉल के नियम और प्रोसेसिंग टाइम अलग-अलग हैं. लिक्विड और ओवरनाइट फंड में पैसा जल्दी मिल सकता है, जबकि NPS और PPF में कई शर्तें लागू होती हैं. EPF में ऑनलाइन प्रोसेस से क्लेम तेज हुए हैं. मेडिकल इमरजेंसी या नौकरी जाने जैसी स्थिति में यह अंतर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है.
ट्रंप ने कनाडा को टैरिफ को लेकर दी 3 दिन की राहत, देखें US टॉप-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को टैरिफ को लेकर 3 दिन की राहत दी है. वहीं, बंद हो चुकी कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन को फिर से शुरू करने का संकेत दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज का नया नक्शा साझा कर ईरान से तनाव को फिर से हवा दे दी है. यूएस टॉप 10 में देखें ऐसी ही टॉप 10 खबरें.
18 साल नौकरी की, भरोसा जीता... फिर सोना और कैश लेकर गायब!
अजमेर में 18 साल से काम कर रहा नौकर ही कथित तौर पर लाखों का माल लेकर फरार हो गया. दुकान मालिक के मुताबिक, तिजोरी से करीब 750 ग्राम सोना और 15 लाख रुपये नकद गायब मिले हैं. आरोपी नौकर दिलीप चौरसिया का फोन स्विच ऑफ है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है.
'बच्चा पैदा करो' शादी में बोल्ड हसीना को मिला धोखा, हुआ पछतावा
वो कहती हैं कि मैं जो कर रही हूं, अपने बेटे के लिए कर रही हूं. उसकी वजह से मैंने ब्रांड शुरू किया. मैंने जो ब्रांड शुरू किया. मैंने सोचा है कि मैं जरुरतमंद बच्चों की मदद करूंगी.
'तुम्हारी गोलियों से नहीं डरते...', मुनीर आर्मी के खिलाफ PoK में फिर हुंकार
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी PoK में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ एक बार फिर प्रदर्शन हुआ. पलांदरी में हुए प्रदर्शन में जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमान कश्मीरी ने पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि प्रदर्शनकारी गोलियों से डरने वाले नहीं हैं.
तमिलनाडु में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्रियों ने कई अहम मुद्दे उठाए। इनमें परिसीमन, दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा, NEET परीक्षा, कावेरी जल बंटवारा और ज़्यादा वित्तीय स्वायत्तता जैसे मुद्दे शामिल थे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिण की संसदीय ताकत को सुरक्षित रखने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव की मांग की, वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के बाद इस क्षेत्र की राजनीतिक आवाज़ में किसी भी तरह की कमी को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों पर ज़ोर दिया। इसे भी पढ़ें: TN CM C Joseph Vijay ने 3 तमिलों की हत्या की निंदा की, निष्पक्ष जांच की मांग की पानी का मुद्दा भी चर्चा का एक अहम विषय रहा कर्नाटक ने मेकेदातु प्रोजेक्ट पर सहयोग मांगा, जबकि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी-कावेरी इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट के ज़रिए 500 TMC से ज़्यादा पानी को दूसरी तरफ़ मोड़ने का प्रस्ताव रखा। केरल ने भी पेशकश की कि अगर तमिलनाडु प्रस्तावित नए मुल्लापेरियार बांध वाले प्रोजेक्ट के लिए सहमत हो जाता है, तो उसे वहां से पानी मिलना सुनिश्चित किया जाएगा; साथ ही, केरल ने बंदरगाहों, रेल कनेक्टिविटी, तटीय सुरक्षा और अंतर-राज्यीय सुरक्षा के मामलों में ज़्यादा क्षेत्रीय सहयोग की भी मांग की। इसे भी पढ़ें: Karnataka मुठभेड़ में 3 संदिग्ध शिकारी ढेर, CM ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दक्षिण को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने काउंसिल के सामने परिसीमन और NEET से जुड़ी चिंताएं ज़ोर-शोर से रखीं। उन्होंने तर्क दिया कि जिन राज्यों ने आबादी को स्थिर करने की नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया है, उन्हें इसके नतीज़े के तौर पर अपना राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं खोना चाहिए। विजय ने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक खत्म होने वाली है। उन्होंने चिंता जताई कि आबादी के आधार पर परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की सामूहिक संसदीय आवाज़ कमज़ोर हो सकती है। उन्होंने केंद्र से स्पष्ट कानूनी आश्वासन मांगा कि आबादी को स्थिर करने में सफलता के कारण किसी भी राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में कमी नहीं आएगी। विजय ने कहा दक्षिणी राज्य आबादी को स्थिर करने, मानव विकास और आर्थिक विकास में सबसे आगे रहे हैं। ये उपलब्धियां राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के सफल कार्यान्वयन को दर्शाती हैं और इनके कारण हमारे प्रतिनिधित्व में कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा सार्वजनिक नीति के तहत राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने वाले राज्यों को अनजाने में दंडित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने ऐसे सुरक्षा उपायों की भी मांग की जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि परिसीमन से दक्षिण के राजनीतिक प्रभाव पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
अब लोहे वाले TMT सरिए की जगह GFRP सरिया क्यों लगवा रहे लोग?
आजकल घर और बड़े- बड़े बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में स्टील की टीएमटी सरिया की जगह GFRP सरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है. आखिर यह किस तरह का सरिया है? चलिए समझते हैं ये है क्या चीज?
पकड़ा गया अभिजीत दीपके का झूठ! CJP ले रही सरकारी काम का झूठा क्रेडिट? कैसे खुली पोल?
राजस्थान के सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया दावा चर्चा में है। CJP के संस्थापक अभिजीत द
डैंड्रफ खत्म करने के लिए कैसे शैंपू यूज करें, डॉक्टर से जानें
डैंड्रफ को हल्की समस्या समझकर नजरअंदाज करना गलत है, शैंपू को बालों पर लगाने के बजाय स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाना और जरूरी है. लेकिन कुछ लक्षणों के दिखने पर डॉक्टर से इलाज कराना जरूरी है.
थलपति विजय की मुश्किल हल कर देंगे शिवकुमार, मेकेदातु डैम पर किया बड़ा वादा, सुलझेगा कावेरी जल विवाद?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कावेरी नदी पर बनने वाले मेकेदातु डैम परियोजना को लेकर बड़ा वादा किया है। उन्होंने कहा कि इस बांध का लाभ केवल कर्नाटक को ही नहीं बल्कि तमिलनाडु और पुडुचेरी को भी होगा।
एनकाउंटर की जांच में परखी जाएगी SHO की निशानेबाजी! HC ने दिए निर्देश
यूपी पुलिस की हाफ एनकाउंटर थ्योरी पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं. श्रावस्ती में हुए हॉफ एनकाउंटर पर सीबीआई जांच के आदेश दिए गए हैं. कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई अपनी जांच के दौरान तत्कालीन एसएचओ अश्विनी कुमार दुबे की निशानेबाजी और शूटिंग क्षमता का भी जांच करे. रात के अंधेरे में 15 मीटर की दूरी से सिर्फ असलहा लोड करने की आवाज से कैसे गोली चलाते हैं.
मलाई से ऐसे बनाएं दानेदार घी, साथ में निकलेगा ताजा पनीर!
Desi Ghee Easy Trick: अगर आप मलाई मथने और मक्खन निकालने के लंबे झंझट से बचना चाहते हैं, तो ये आसान किचन ट्रिक आपके बहुत काम आ सकती है. आज हम आपको मलाई से घी निकालने की ऐसी ट्रिक बताने वाले हैं, जिसकी मदद से आप बिना मक्खन निकाले आसानी से घी निकाल सकते हैं. इसके साथ ही आपको खूब सारा पनीर भी मिलेगा.
अमित शाह की बैठक में जुटे दक्षिण के दिग्गज नेता, विजय, डीके शिवकुमार और चंद्रबाबू नायडू एक मंच पर
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में अमित शाह के साथ तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के प्रमुख नेता एक मंच पर नजर आए। बैठक में केंद्र-राज्य समन्वय पर चर्चा हुई।
लॉर्ड्स में 24 साल बाद फिर दिखा गांगुली वाला सेलिब्रेशन, VIDEO
भारतीय मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड को हराकर लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर शानदार जीत दर्ज की. जीत के बाद खिलाड़ियों ने सौरव गांगुली के 2002 के मशहूर जश्न की याद ताजा करते हुए जर्सी लहराकर सेलिब्रेशन किया. टीम का यह खास अंदाज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
लद्दाख में हंगामा करने वाली Gen Z युवती को सेना का ‘सबक’
लद्दाख के मिनमार्ग चेकपॉइंट पर Gen Z युवती का हंगामा वायरल हुआ. टैक्स और जेन-जेड का नाम लेकर सुरक्षाकर्मियों से भिड़ी. लेकिन आर्मी के दिग्गजों ने गुस्से की जगह उसे समझाइश दी. भ्रम तोड़ा, सबक सिखाया और माफ भी कर दिया. युवती भूल गई थी कि यहीं से कारगिल जंग का इलाका शुरू होता है, जहां सैकड़ों सैनिक शहीद हुए थे.
'मैंने पत्नी को मार दिया, वो मुझे चीट कर रही थी'... मानस का मोबाइल स्टेटस
लखनऊ के गोमतीनगर में मानस ने बैंक के बाहर पत्नी दिव्या मिश्रा की गोली मारकर हत्या की. इसके बाद बहन सीमा को गोली मारने के बाद खुदकुशी कर ली. मानस ने अपने मोबाइल स्टेटस में पत्नी पर धोखा देने का आरोप लगाया है. पढ़ें पूरी कहानी.
सोशल मीडिया की दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सबसे ऊपर हैं, लेकिन उनके मंत्रिमंडल में भी कुछ चेहरे ऐसे हैं जिनकी डिजिटल मौजूदगी ने प्रधानमंत्री का ध्यान खींचा है। अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव और सीआर पाटिल सोशल मीडिया प्रदर्शन में शीर्ष नेताओं में शामिल रहे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सोशल मीडिया पकड़ का भी उदाहरण मोदी सरकार के मंत्रियों के सामने रखा गया है। हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ संदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर सिर्फ सरकारी फैसलों की पोस्ट या रीपोस्ट से काम नहीं चलेगा। मंत्रियों को लोगों से संवाद बढ़ाना होगा, कंटेंट को अधिक प्रभावी और आकर्षक बनाना होगा और खासकर नई पीढ़ी तक अपनी सीधी पहुंच बनानी होगी। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सभी मंत्रियों की सोशल मीडिया परफॉर्मेंस और रैंकिंग साझा की गई। यह आकलन 1 मई से 15 अगस्त के बीच Instagram, X, Facebook और LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों, पोस्ट, एंगेजमेंट, लाइक्स और फॉलोअर्स के आधार पर किया गया। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी खुद शीर्ष पर रहे। इसे भी पढ़ें: Modi Cabinet Meeting: इधर विपक्ष बेवजह के मुद्दों पर राजनीति करता रहा, उधर मोदी मंत्रिमंडल ने बड़े फैसले कर सबको हैरान कर दिया बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को दो अहम निर्देश दिए। पहला, “वन डे, वन यूनिवर्सिटी” के तहत मंत्रियों को विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों के साथ एक दिन बिताने और सीधा संवाद करने को कहा गया। दूसरा, उन्हें अपने संसदीय क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों का दौरा कर बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और मिड-डे मील की गुणवत्ता का जायजा लेने का निर्देश दिया गया। प्रधानमंत्री का यह नया फोकस सीधे Gen Z और Gen Alpha पर है। खासकर 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों तक पहुंच बनाने और सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत जानने पर जोर दिया गया है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब छात्र आंदोलनों के बाद युवाओं तक पहुंच को लेकर सरकार की सक्रियता बढ़ी है। वहीं, सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों और बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रियों से यह भी कहा गया है कि वे अपने स्थानीय प्रतिनिधियों को नियमित रूप से सरकारी स्कूलों में भेजकर वहां की व्यवस्था की निगरानी कराएं। बैठक में केवल भाजपा और केंद्रीय मंत्रियों की डिजिटल सक्रियता ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं के सोशल मीडिया प्रदर्शन का भी हवाला दिया गया। मकसद साफ था कि मंत्री यह समझें कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केवल मौजूद रहना काफी नहीं, बल्कि जनता के साथ लगातार और प्रभावी संवाद ही राजनीतिक पहुंच को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों से युवाओं के लिए AI स्किल ट्रेनिंग के अवसरों का भी आकलन करने को कहा है। यह स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किए गए ऐलानों की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है। साथ ही मंत्रियों को प्रधानमंत्री की ओर से बताए गए “सप्तधारा” के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट है कि सरकार का नया मंत्र अब सिर्फ “पोस्ट करो” नहीं, बल्कि “कनेक्ट करो” है। सोशल मीडिया से लेकर विश्वविद्यालयों और सरकारी स्कूलों तक, मोदी सरकार अब नई पीढ़ी के बीच सीधी पहुंच और जमीनी फीडबैक की नई रणनीति पर काम करती दिख रही है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: बारिश में खोखली हुई सड़क की साइड
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद बारिश में एक्सप्रेसवे के किनारे मिट्टी का कटाव हो रहा है. कई जगह साइड में लगे डिवाइडर हवा में लटके नजर आए हैं.
मंदिर निर्माण कैसे हुआ, फैसले कौन लेता था... क्लीन चिट के बाद चंपत राय ने लिखी 9 पेज की चिट्ठी
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को एसआईटी से क्लीन चिट मिलने की खबरों के बीच सचिव पद से हटाए गए चंपत राय ने 9 पेज की चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने मंदिर की व्यवस्था, आर्थिक पारदर्शिता, निर्माण प्रक्रिया और फैसले लेने की पूरी व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी है.
खाते समय मोबाइल देखना सही या गलत? प्रेमानंद महाराज ने दिया जवाब
Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज के मुताबिक, भोजन के समय अच्छा सुनना, अच्छा देखना और अच्छा सोचना चाहिए. यही अच्छे संस्कार की पहचान होती है. जब हम भोजन को श्रद्धा और भक्ति के साथ खाते हैं, तब वह हमारे शरीर, मन और जीवन तीनों को सकारात्मक बनाता है.
Sajjan Kumar Dies: 1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ जेल में काट रहे थे आजावीन सजा
साल 1984 के दंगों में नाम आने के बाद उनका राजनीतिक करियर विवादों में घिर गया। साल 2018 आते-आते दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
अभिजीत दीपके ने अब इस शिक्षा मंत्री का मांगा इस्तीफा, बोले- इसके लिए वोट देते हैं क्या?
महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर कॉजपा संयोजक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की। बोले- मंत्रियों के कुत्तों को भी बच्चों से बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।
यूक्रेन में क्यों उठी आम चुनाव कराए जाने की मांग, देखें दुनिया आजतक
युद्ध के संकट से गुजर रहे यूक्रेन में आंतरिक राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है. एक तरफ रूस यूक्रेन पर भीषण हमले कर रहा है. दूसरी तरफ यूक्रेन में आम चुनाव कराए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है. जो यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के लिए फिक्र की बात है. दुनिया की ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
दुर्ग में ईडी की बड़ी दबिश: रियल एस्टेट कारोबारी विश्वास गुप्ता और सजल जैन के ठिकानों पर कार्रवाई
छत्तीसगढ़ के दुर्ग और भिलाई इलाके में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए हड़कंप मचा दिया है। केंद्रीय एजेंसी की टीमों ने शहर के जाने-माने रियल एस्टेट कारोबारियों विश्वास गुप्ता और सजल जैन के ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी है। सुबह-सुबह हुई इस अचानक कार्रवाई से स्थानीय व्यावसायिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं, टैक्स चोरी और भूमि सौदों में गड़बड़ी की शिकायतों के आधार पर यह छापेमारी की जा रही है, जिसमें दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की बारीकी से जांच की जा रही है।सुबह तड़के शुरू हुई छापेमारी और सुरक्षा के कड़े इंतज़ामप्राप्त जानकारी के मुताबिक, ईडी के अधिकारी और कर्मचारी भारी पुलिस बल के साथ दुर्ग और भिलाई क्षेत्र में स्थित विश्वास गुप्ता और सजल जैन के आवास, दफ्तरों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पहुंचे। कार्रवाई की गोपनीयता बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस के बजाय केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को तैनात किया गया है। किसी भी बाहरी व्यक्ति या मीडियाकर्मी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। टीम के सदस्यों द्वारा संबंधित ठिकानों पर मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है और बैंक खातों, लॉकरों तथा संपूरक दस्तावेजों की फाइलें खंगाली जा रही हैं।रियल एस्टेट कारोबार और वित्तीय लेनदेन पर जांच की सुईछत्तीसगढ़ में पिछले कुछ समय से रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े पैमाने पर हो रहे निवेश और वित्तीय लेन-देन को लेकर केंद्रीय एजेंसियों की नजर लगातार बनी हुई है। विश्वास गुप्ता और सजल जैन का नाम क्षेत्र के बड़े बिल्डर्स और कारोबारियों में शुमार है। आरोप है कि संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और बड़े प्रोजेक्ट्स के विकास में नियमों को ताक पर रखकर अघोषित आय का निवेश किया गया है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कारोबार के पीछे कौन-कौन से वित्तीय नेटवर्क जुड़े हुए हैं और क्या इसमें किसी प्रकार की मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) को अंजाम दिया गया है।दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रियाछापेमारी के दौरान ईडी की तकनीकी विंग भी सक्रिय नजर आ रही है, जो कारोबारियों के कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और सर्वर से डेटा रिकवर करने और वित्तीय लेन-देन के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करने में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। इसके अलावा, संपत्तियों के मूल्यांकन और पिछले कुछ वर्षों के इनकम टैक्स रिटर्न की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है ताकि वास्तविक आय और खर्च के बीच के अंतर को स्पष्ट किया जा सके।स्थानीय व्यवसायियों में मचा हड़कंप और आगे की कार्रवाईदुर्ग-भिलाई में रियल एस्टेट दिग्गजों पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद से शहर के अन्य कारोबारियों में भी डर का माहौल देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि इस रेड के बाद आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। ईडी की यह कार्रवाई देर शाम तक या अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है, जिसके पूरा होने के बाद ही एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रेस नोट जारी किया जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस छापेमारी में एजेंसी को क्या कुछ हाथ लगता है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की न्यायिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। हत्या और अन्य जघन्य अपराधों से जुड़े 97 लंबित मामलों की फाइलें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत से वापस लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में मंगाई गई हैं। यह कार्रवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीरेंद्र कुमार सिंह के आदेश पर की गई है। अदालत के आदेश के अनुसार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में लंबित मामलों को वापस जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में भेजा गया है, जहां उनका निस्तारण कानून के अनुसार किया जाएगा। हम आपको बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब जज रवि कुमार दिवाकर के फैसलों को लेकर न्यायिक हलकों में चर्चा तेज है। मुजफ्फरनगर में बीते लगभग चार महीनों के दौरान उन्होंने 10 मामलों में 22 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। उनके न्यायिक कॅरियर में अब तक सुनाई गई मौत की सजाओं की कुल संख्या 35 हो चुकी है। इनमें से 13 मौत की सजाएं उनके बरेली में कार्यकाल के दौरान सुनाई गई थीं। हालांकि, कानून के तहत किसी भी मृत्युदंड को तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक उसे हाईकोर्ट से पुष्टि नहीं मिल जाती। इसे भी पढ़ें: तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा, रेप केस में 10 साल की सजा मिली थी मुजफ्फरनगर में मृत्युदंड के फैसलों की शुरुआत 6 अप्रैल को हुई, जब अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद 28 अप्रैल को एक महिला और उसके तीन बेटों सहित परिवार के चार सदस्यों को हत्या के एक अन्य मामले में मृत्युदंड दिया गया। इसके बाद भी मौत की सजा के फैसलों का सिलसिला जारी रहा। 30 मई को एक दोषी को मृत्युदंड, 20 जून को दो दोषियों को फांसी, 2 जुलाई को एक दोषी को मृत्युदंड, 6 जुलाई को दो दोषियों को फांसी, 17 जुलाई को चार दोषियों को मृत्युदंड, 12 अगस्त को एक दोषी को फांसी और 13 अगस्त को चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया। इन फैसलों ने रवि कुमार दिवाकर को देश के उन न्यायिक अधिकारियों में चर्चा का विषय बना दिया, जिनके कार्यकाल में कम समय के भीतर बड़ी संख्या में गंभीर मामलों में मृत्युदंड के फैसले आए हैं। हम आपको याद दिला दें कि 46 वर्षीय रवि कुमार दिवाकर वर्ष 2022 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आए थे, जब वाराणसी में सिविल जज के पद पर रहते हुए उन्होंने ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश दिया था। सर्वे में वजूखाने का क्षेत्र भी शामिल था, जहां एक संरचना को लेकर हिंदू पक्ष ने शिवलिंग होने का दावा किया था, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस दावे का विरोध किया था। बाद में उस क्षेत्र को सील कर दिया गया और सुप्रीम कोर्ट ने मामले की कार्यवाही वाराणसी के जिला न्यायाधीश को स्थानांतरित कर दी थी। उल्लेखनीय है कि रवि कुमार दिवाकर ने 17 दिसंबर को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में मुंसिफ/सिविल जज जूनियर डिवीजन के रूप में प्रवेश किया था। उनकी तैनाती आजमगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी, बरेली और चित्रकूट समेत कई जिलों में रही। वह 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में तैनात हुए थे। बहरहाल, अब जघन्य अपराधों से जुड़े 97 लंबित मामलों की फाइलें उनकी अदालत से वापस बुलाए जाने के बाद यह घटनाक्रम न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, आदेश में इन मामलों को वापस लेने का आधार लंबित प्रकरणों को कानून के अनुसार निस्तारित करने के लिए बताया गया है। लेकिन जज दिवाकर द्वारा लगातार सुनाए गए मृत्युदंड के फैसलों और इसके कुछ ही समय बाद बड़ी संख्या में केस फाइलें वापस लिए जाने से यह मामला खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शाकाहारी या मांसाहारी? कांग्रेस के आरोपों के बीच सामने आया नितिन नवीन के खानपान का पूरा सच
भारतीय राजनीति में इन दिनों बयानों के तीखे तीरों के साथ-साथ खानपान की संस्कृति को लेकर भी जबरदस्त सियासी घमासान मचा हुआ है। हाल ही में विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल्स और नेताओं द्वारा बीजेपी के बड़े नेताओं के भोजन को लेकर कुछ ऐसे आरोप लगाए गए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों के खाने-पीने की शैली पर निशाना साधते हुए इसे लेकर तीखे सवाल खड़े किए। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी और उनके समर्थकों ने इन तमाम सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की राजनीतिक बौखलाहट और नकारात्मक एजेंडा करार दिया है। इस पूरे विवाद के बाद देश भर में यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर राजनीति के इन गलियारों में परोसे जाने वाले भोजन और संस्कृति का सच क्या है।क्या है पूरा मामला और क्यों गरमाई सियासत?यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राजनीतिक कार्यक्रमों और दौरों के दौरान नेताओं के खानपान से जुड़ी कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। कांग्रेस पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं ने इन तस्वीरों को आधार बनाते हुए यह दावा करना शुरू कर दिया कि एक तरफ तो देश भर में सावन या विशेष त्योहारों के दौरान आम जनता पर खानपान को लेकर कई तरह की पाबंदियां थोपी जाती हैं और धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर मीट-मछली की दुकानें बंद कराई जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़े नेता अपनी थाली में किस तरह का भोजन ले रहे हैं, इसको लेकर दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इन दावों के बाद पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया और देखते ही देखते यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर की बहस बन गया।खानपान पर सियासत: विपक्ष के आरोप और बीजेपी का पलटवारविपक्ष का मुख्य रूप से यह कहना है कि राजनीति में धर्म और संस्कृति के नाम पर लोगों की थाली तय करने की जो प्रवृत्ति इन दिनों बढ़ रही है, वह बेहद अनुचित है। कांग्रेस का आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए समाज में एक खास वर्ग को निशाना बनाया जाता है, जबकि नेताओं के अपने आचरण में विरोधाभास साफ देखा जा सकता है। इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं और समर्थकों ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह की ओछी बयानबाजी और व्यक्तिगत हमला करने पर उतर आए हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी व्यक्ति की निजी पसंद या खानपान को राजनीतिक हथियार बनाना और इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाना विपक्ष की वैचारिक दिवालियापन को दर्शाता है।जनता की नजर में भोजन और राजनीति का यह गठजोड़भारतीय समाज में भोजन, आस्था और संस्कृति सदियों से एक संवेदनशील और व्यक्तिगत विषय रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जब-जब राजनीति में वैचारिक मुद्दों की कमी होती है, तब-तब इस तरह के सांस्कृतिक और व्यक्तिगत मुद्दों को तूल देकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जाता है। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर एक वीडियो और तस्वीर को तोड़-मरोड़कर पेश करना एक राजनीतिक ट्रेंड बन चुका है। हालांकि, आम जनता अब इन सियासी ड्रामे और आरोपों-प्रत्यारोपों को बहुत ही परिपक्वता के साथ देख रही है। वे अच्छी तरह समझती है कि देश के असली मुद्दों जैसे विकास, महंगाई और बेरोजगारी से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया जा रहा है।निष्कर्ष: आरोपों और बहसों के बीच सच्चाईकुल मिलाकर देखा जाए तो 'नितिन नवीन के खानपान' और उससे जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय राजनीति में किस तरह हर छोटी बात को बड़ा तूल दिया जा सकता है। जहाँ एक तरफ कांग्रेस इसे एक बड़ा नैतिक और राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटी है, वहीं बीजेपी इसे पूरी तरह से खारिज करते हुए विरोधियों की साजिश बता रही है। बहरहाल, इस तरह के विवाद राजनीति की पिच पर भले ही कुछ दिनों की हलचल पैदा कर दें, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता की कसौटी पर कौन खरा उतरता है, यह आने वाले समय में चुनावी परिणाम ही तय करेंगे।
'पत्नी को मार डाला, अब खुद को मारूंगा...' लखनऊ कांड में पति का स्टेटस
लखनऊ के गोमतीनगर में ICICI बैंक की रिलेशनशिप मैनेजर दिव्या मिश्रा की उनके पति मानस ने बैंक के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद आरोपी ने अपनी बहन को गोली मारकर खुद भी खुदकुशी कर ली. आरोपी ने व्हाट्सएप स्टेटस डालकर जुर्म को अंजाम दिया.
तिहाड़ में बंद कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार का हुआ निधन
कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में निधन हो गया. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक उन्हें मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था. 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे. स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बीच उनके निधन की खबर सामने आई.
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में चोरी के मामले में वांछित एक आरोपी सर्राफा व्यापारी की तलाश में दबिश देने पहुंची लखनऊ पुलिस और स्थानीय पुलिस पर उसे मकान की छत से नीचे फेंकने का आरोप लगा है। इस घटना में आरोपी उमेश गुप्ता (62) की मौत हो गई। मृतक की पत्नी की तहरीर पर […] The post शाहजहांपुर : पुलिस दबिश के दौरान सर्राफा कारोबारी की मौत मामले में 6 पुलिस कर्मियों पर हत्या का केस दर्ज appeared first on Sabguru News .
छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों और एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के लंबे संघर्ष और आंदोलन आखिरकार रंग लाए हैं। राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में भारी बढ़ोतरी करने की मंजूरी दे दी है। अब तक सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे इन भावी डॉक्टरों को हर महीने केवल 15,900 रुपये स्टाइपेंड के रूप में मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब सीधा 25,000 रुपये कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से छत्तीसगढ़ के तमाम मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि वे पिछले काफी समय से देश के अन्य राज्यों के मुकाबले कम मानदेय मिलने का विरोध कर रहे थे।लंबे समय से चल रही थी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांगछत्तीसगढ़ के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों के छात्र और इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपने स्टाइपेंड में संशोधन की मांग को लेकर आवाज उठा रहे थे। उनका तर्क था कि मौजूदा महंगाई के दौर में 15,900 रुपये की राशि बहुत कम है, खासकर तब जब वे दिन-रात अस्पतालों की इमरजेंसी, वार्ड और ओपीडी में अपनी जान जोखिम में डालकर लंबी शिफ्टों में काम करते हैं। पड़ोसी राज्यों और केंद्रीय संस्थानों में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाले भत्तों की तुलना में छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों का मानदेय काफी पीछे छूट गया था। छात्र संगठनों ने कई बार ज्ञापन सौंपने के साथ-साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किए थे, जिसके बाद आखिरकार सरकार ने उनकी जायज मांगों पर मुहर लगा दी है।स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक आदेश और वित्तीय लाभछत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नए आदेश के अनुसार, बढ़ी हुई स्टाइपेंड की यह राशि तय नियमों के तहत पात्र सभी एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इस वित्तीय बढ़ोतरी से राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों (जैसे रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर और कोरबा आदि) से इंटर्नशिप पूरी कर रहे सैकड़ों छात्र-छात्राओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकार के इस कदम से मेडिकल छात्रों का मनोबल बढ़ेगा और वे पूरी निष्ठा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में अपना योगदान दे सकेंगे।डॉक्टरों की कमी से जूझ रही स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा संबलछत्तीसगढ़ जैसे राज्य के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ ये इंटर्न डॉक्टर और जूनियर रेजिडेंट्स ही होते हैं। जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों की देखभाल में इनकी भूमिका बेहद अहम होती है। कम मानदेय मिलने के कारण कई बार छात्रों में निराशा का भाव रहता था, जिससे वे बाहरी राज्यों की ओर रुख करने पर मजबूर होते थे। स्टाइपेंड में की गई इस बंपर बढ़ोतरी से न केवल छात्रों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि राज्य में डॉक्टरों के पलायन को रोकने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को मजबूत करने में भी काफी मदद मिलेगी।मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट एसोसिएशन की प्रतिक्रियाराज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और छात्र प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला लंबे संघर्ष का परिणाम है और इससे मेडिकल बिरादरी को एक नई ऊर्जा मिली है। छात्रों का कहना है कि वे इस प्रोत्साहन के बाद और अधिक जिम्मेदारी और लगन के साथ मरीजों की सेवा करेंगे। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है, जिसकी सराहना हर तरफ हो रही है।
जब भी हम खूबसूरत आइलैंड और समुद्र के बीच बसे द्वीपों की कल्पना करते हैं, तो हमारे जेहन में प्राकृतिक रूप से बने समुद्र तटों और चट्टानों की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंसानों ने अपनी अद्भुत इंजीनियरिंग और कला के दम पर समंदर के बीच ऐसे मनमोहक कृत्रिम द्वीप (Man-Made Islands) तैयार किए हैं, जो कुदरती नजारों को भी मात देते हैं? आज दुनिया के कई देशों में रेत और पत्थरों को समंदर के सीने पर इस तरह सजाया गया है कि वहाँ पहुँचकर टूरिस्ट्स की आँखें खुली की खुली रह जाती हैं। अंतरिक्ष से भी साफ दिखने वाले इन मानव-निर्मित अजूबों की खूबसूरती देखने के लिए हर साल लाखों सैलानी सात समंदर पार करके इन देशों का रुख करते हैं। आइए जानते हैं दुनिया के उन चुनिंदा देशों के बारे में जहाँ इंसानों ने अपने दम पर खूबसूरत और आलीशान कृत्रिम द्वीपों का साम्राज्य खड़ा कर दिया है।1. संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) का पाम जुमेराह - इंजीनियरिंग का बेजोड़ करिश्मामानव-निर्मित द्वीपों की बात हो और दुबई के 'पाम जुमेराह' (Palm Jumeirah) का नाम सबसे पहले न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। अरब सागर के नीले पानी के बीच खजूर के पेड़ के आकार में फैला यह द्वीप दुनिया भर में अपनी वास्तुकला और लग्जरी के लिए मशहूर है। इसे बनाने के लिए समंदर के अंदर अरबों टन रेत और पत्थरों को करीने से डाला गया है, जिस पर आज दुनिया के सबसे महंगे और आलीशान रिसॉर्ट्स, विला और होटल बने हुए हैं। अंतरिक्ष से भी साफ दिखने वाले इस कृत्रिम द्वीप पर घूमना और यहाँ के पानी के बीच बने अंटार्कटिका जैसे एक्वेरियम व होटलों का लुत्फ उठाना हर टूरिस्ट का सपना होता है।2. द वर्ल्ड आइलैंड्स (दुबई) - एक ही जगह पर पूरी दुनिया की सैरदुबई की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल 'द वर्ल्ड' (The World Islands) भी समंदर के बीच इंसानों द्वारा बसाई गई एक अनोखी दुनिया है। फारस की खाड़ी में स्थित इन छोटे-छोटे कृत्रिम द्वीपों के समूह को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ऊपर से देखने पर ये पूरी दुनिया के नक्शे (World Map) जैसे नजर आते हैं। हर एक द्वीप अलग देश या महाद्वीप का प्रतिनिधित्व करता है। यहाँ कई निजी निवेशकों और शाही घरानों ने अपने प्राइवेट रिसॉर्ट्स और लग्जरी ठिकाने बनाए हैं। समंदर के बीच फैली इस कृत्रिम दुनिया को देखने और इसके पानी के रास्तों से बोटिंग करने का रोमांच सैलानियों को अपनी ओर खींच लाता है।3. नीदरलैंड्स का फ्लेవోलैंड (Flevoland) - पानी को चीरकर बसाई गई इंसानी बस्तीसमुद्र तल से नीचे बसे देशों में शुमार नीदरलैंड्स (हॉलैंड) ने इंजीनियरिंग का एक ऐसा नायाब उदाहरण पेश किया है, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। यहाँ के 'फ्लेవోलैंड' (Flevoland) को दुनिया के सबसे बड़े कृत्रिम द्वीपों और भूमि सुधार (Land Reclamation) परियोजनाओं में गिना जाता है। कभी जहाँ केवल समंदर का पानी और दलदल हुआ करता था, वहाँ आज इंसानों ने dykes (बंधों) की मदद से पानी को पीछे धकेलकर एक पूरा का पूरा हरा-भरा शहर और प्रांत बसा दिया है। यहाँ खूबसूरत आधुनिक शहर, खेत और सड़कें बनी हुई हैं, जिन्हें देखने के लिए दुनिया भर से भूगोल और वास्तुकला के छात्र और पर्यटक आते हैं।4. बहरीन का अमवाज आइलैंड्स (Amwaj Islands) - फारस की खाड़ी का आधुनिक स्वर्गमध्य पूर्व के देश बहरीन ने भी कृत्रिम द्वीपों के निर्माण में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। फारस की खाड़ी के नीले पानी के बीच स्थित 'अमवाज आइलैंड्स' (Amwaj Islands) इंसानों द्वारा बनाए गए उन खूबसूरत रिहायशी इलाकों में आते हैं जो अपनी आधुनिक सुख-सुविधाओं और शांति के लिए जाने जाते हैं। यहाँ समंदर के बीचों-बीच मरीना, वॉटरफ्रंट अपार्टमेंट्स, होटल और डाइनिंग के शानदार ठिकाने बनाए गए हैं। समंदर की लहरों के करीब बने इन कृत्रिम घरों और चौड़ी सड़कों पर शाम के वक्त टहलना पर्यटकों के लिए एक बेहद सुकून भरा और लग्जरी अनुभव होता है।5. जापान का कंसाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ओडाएबा - तकनीक का बेजोड़ नमूनाजापान अपनी आधुनिक तकनीक और सीमित जमीन के बेहतर इस्तेमाल के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। जापान ने ओसाका खाड़ी के पानी के बीच 'कंसाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट' (Kansai International Airport) के रूप में एक पूरा का पूरा कृत्रिम द्वीप ही तैयार कर दिया है, जिस पर दुनिया के सबसे व्यस्त विमान उतरते हैं। इसके अलावा टोक्यो बे में बना 'ओडाएबा' (Odaiba) एक बेहद लोकप्रिय कृत्रिम द्वीप है जो शॉपिंग मॉल्स, विशाल फेरिस व्हील, साइंस म्यूजियम और मनोरंजन के आधुनिक साधनों के लिए जाना जाता है। समंदर के बीच बसी इन जगहों की चमक-धमक और futuristic डिजाइन पर्यटकों को पूरी तरह से अचंभित कर देती है।
'अखबार में लिखते, टीवी पर बोलते हो, फिर...', अपने ही नेताओं पर भड़के खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में हुए कथित 'शुद्धीकरण' को लेकर अपनी ही पार्टी के नेताओं को जमकर फटकार लगाई है. सूत्रों के मुताबिक, CWC की बैठक में खड़गे ने कहा कि जो नेता अखबारों में लिखते हैं और टीवी पर बोलते हैं, उन्हें ऐसे मुद्दों पर खुलकर आवाज उठानी चाहिए.
आसमान से बातें करतीं दुनिया की 5 सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़कें, रोमांच ऐसा कि उड़ जाएंगे होश
रोमांच और सफर के शौकीन लोगों के लिए सड़क मार्ग से यात्रा करना हमेशा से एक अलग ही अनुभव रहा है। यदि आपको ऊंची-ऊंची पहाड़ियों, बादलों के बीच से गुजरने वाले रास्तों और खतरनाक घुमावदार मोड़ों पर गाड़ी चलाने का शौक है, तो दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़कों (Highest Motorable Roads) के बारे में जानना आपके रोंगटे खड़े कर देगा। भारत समेत दुनिया के कुछ चुनिंदा हिस्सों में ऐसी अद्भुत सड़कें मौजूद हैं जो बादलों से भी ऊपर बादलों के बीच से गुजरती हैं। इन जगहों पर जब गाड़ियां दौड़ती हैं, तो नीचे गहरी घाटियां और चारों तरफ बर्फ से ढकी चोटियां देखकर किसी की भी सांसें थम सकती हैं। आइए जानते हैं दुनिया की उन पांच सबसे ऊंची और रोमांचक सड़कों के बारे में जहां सफर करना किसी एडवेंचर फिल्म से कम नहीं है।1. मिग ला पास (Mig La Pass) - आधुनिक इंजीनियरिंग का करिश्माहाल ही में लद्दाख क्षेत्र में बनाई गई मिग ला पास की सड़क ने दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क होने का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। समुद्र तल से लगभग 19,400 फीट (5,913 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित यह सड़क भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) की एक अभूतपूर्व इंजीनियरिंग का नमूना है। यह मार्ग अपनी अत्यधिक ऊंचाई और दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण बेहद खास माना जाता है। हालांकि यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यहाँ सैन्य प्राथमिकता अधिक होती है, लेकिन यहाँ की भौगोलिक बनावट और रोमांचक चढ़ाई ड्राइवरों और पर्यटकों के लिए बड़े रोमांच का केंद्र है।2. उमलिंग ला पास (Umling La Pass) - बादलों के बीच बसा पर्यटकों का स्वर्गलद्दाख के चांगथांग इलाके में स्थित उमलिंग ला पास पर्यटकों के लिए खुली दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़कों में गिनी जाती है। समुद्र तल से 19,024 फीट (5,799 मीटर) की ऊंचाई पर बनी इस सड़क पर गाड़ी चलाना अपने आप में एक बहुत बड़ा कीर्तिमान माना जाता है। चिसुम्ले और देमचोक गांवों को जोड़ने वाली इस सड़क के चारों तरफ केवल दूर-दूर तक फैली बंजर पहाड़ियाँ और नीला आसमान नजर आता है। यहाँ ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक ठंड के बावजूद बाइकर्स और एडवेंचर लवर्स का तांता लगा रहता है, जो यहाँ आकर अपनी गाड़ी चलाने के सपने को पूरा करते हैं।3. उतुनचू वोल्कानो रोड (Uturuncu Volcano Road) - बोलीविया की रहस्यमयी सड़कदक्षिण अमेरिका के बोलीविया देश में स्थित उतुनचू ज्वालामुखी के रास्ते पर बनी यह सड़क दुनिया की सबसे ऊंची गैर-हिमालयी मोटर योग्य सड़कों में शामिल है। समुद्र तल से लगभग 18,953 फीट (5,777 मीटर) की ऊंचाई तक जाने वाली इस सड़क का निर्माण एक निष्क्रिय ज्वालामुखी के आस-पास किया गया है। यहाँ का इलाका पूरी तरह से रेतीला, पथरीला और रहस्यों से भरा हुआ है। जो लोग दुनिया के अलग-अलग कोनों में जाकर экстреमल ड्राइविंग का शौक रखते हैं, उनके लिए बोलीविया की यह ऊंची सड़क एक बेहतरीन और रोमांचक चुनौती पेश करती है।4. माना पास या डुंगरी ला (Mana Pass / Dungri La) - भारत का ऐतिहासिक मार्गउत्तराखंड के चमोली जिले में भारत और तिब्बत की सीमा के पास स्थित माना पास, जिसे डुंगरी ला भी कहा जाता है, दुनिया की सबसे ऊंची सड़कों में एक विशेष स्थान रखता है। समुद्र तल से 18,406 फीट (5,610 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित यह मार्ग बद्रीनाथ के पास स्थित भारत के आखिरी गांव 'माना' से होकर गुजरता है। प्राचीन काल से व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे इस रास्ते पर गाड़ी चलाना आसान नहीं है। यहाँ के तीखे मोड़, चट्टानी रास्ते और बर्फीली हवाएं यात्रियों की परीक्षा लेती हैं, लेकिन यहाँ से दिखने वाले प्राकृतिक नजारे सभी थकान को पल भर में दूर कर देते हैं।5. मार्सिमिक ला (Marsimik La) - रोमांच और खतरे का दूसरा नामलद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग झील के नजदीक स्थित मार्सिमिक ला दुनिया की एक बेहद कठिन और ऊंची मोटर योग्य सड़क है, जो करीब 18,313 फीट (5,582 मीटर) की ऊंचाई पर मौजूद है। यहाँ की सड़क की बनावट बेहद पथरीली और खड़ी चढ़ाई वाली है, जो केवल अनुभवी ड्राइवरों और शक्तिशाली एसयूवी या 4x4 वाहनों के लिए ही मु मुमकिन मानी जाती है। इस पास से नीचे देखने पर पैंगोंग त्सो झील का नीला पानी और चांगथांग पठार का अद्भुत नजारा दिखाई देता है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।
वनडे त्रिकोणीय सीरीज से लेकर टेस्ट और टी-20 श्रृंखलाओं तक, पाकिस्तान का व्यस्त और धमाकेदार शेड्यूल
क्रिकेट के गलियारों में इस समय सबसे बड़ी चर्चा का विषय पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का वह मेगा शेड्यूल है, जिसके तहत उन्हें रुकने का नाम नहीं मिल रहा है। खिलाड़ी मैदान पर लगातार अलग-अलग फॉर्मेट में उतर रहे हैं। एक तरफ जहां टेस्ट सीरीज के रोमांचक मुकाबले जारी हैं, वहीं आने वाले महीनों में वनडे त्रिकोणीय श्रृंखला (Tri-Series) और टी-20 मुकाबलों की पूरी कतार लगी हुई है। प्रशंसकों के लिए यह दौर किसी क्रिकेट महाकुंभ से कम नहीं है, जहां नॉन-स्टॉप एक्शन देखने को मिल रहा है।लाल गेंद के खेल से लेकर सफेद गेंद के रोमांच तकपाकिस्तानी टीम का विदेशी दौरों और घरेलू सरजमीं पर खेलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। टेस्ट फॉर्मेट में पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों और मजबूत टीमों के खिलाफ लंबी श्रृंखलाएं खेलने के बाद, अब खिलाड़ियों का पूरा ध्यान सीमित ओवरों के क्रिकेट पर टिक गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लगातार क्रिकेट खेलने से खिलाड़ियों की फिटनेस और मानसिक सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा होती है। चयनकर्ताओं के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है कि वे लगातार बदलते फॉर्मेट के हिसाब से सही कॉम्बिनेशन तैयार रखें।त्रिकोणीय सीरीज और टी-20 मुकाबलों का क्रेजआने वाले दिनों में होने वाली त्रिकोणीय सीरीज (Tri-Series) को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में गजब का उत्साह देखा जा रहा है। वनडे फॉर्मेट में तीन टीमों के बीच होने वाली यह टक्कर हमेशा से रोमांचक रही है, क्योंकि इसमें हर मैच का परिणाम फाइनल की राह तय करता है। इसके अलावा, टी-20 श्रृंखलाओं की तेज-तर्रार बैटिंग और पावर-हिटिंग का मजा लेने के लिए फैंस स्टेडियमों का रुख कर रहे हैं। लगातार बैक-टू-बैक मुकाबले होने के कारण खिलाड़ियों को रिकवरी का बहुत कम समय मिल रहा है, जिससे युवा प्रतिभाओं को अपनी क्षमता साबित करने का भरपूर मौका मिल रहा है।आगामी सीरीज और मुख्य आकर्षणइस नॉन-स्टॉप क्रिकेट कैलेंडर में पाकिस्तान का मुकाबला दुनिया की अन्य शीर्ष टीमों से होना है। टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ इस बात पर जोर दे रहा है कि खिलाड़ियों का रोटेशन सही तरीके से किया जाए ताकि वर्कलोड को मैनेज किया जा सके। चाहे वह लंबे स्पेल डालने वाले तेज गेंदबाज हों या फिर पारी संभालने वाले बल्लेबाज, हर किसी को अपनी भूमिका जिम्मेदारी से निभानी होगी। क्रिकेट बोर्ड की योजना भी यही है कि इस व्यस्त सत्र का भरपूर फायदा उठाकर टीम को आगामी बड़े टूर्नामेंट्स के लिए पूरी तरह तैयार किया जाए।
अमित शाह की बैठक में दिखा साउथ का 'पावर शो', एक मंच पर थलपति विजय, शिवकुमार और चंद्रबाबू नायडू
Amit Shah News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गुरुवार को तमिलनाडु में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक हुई। इस बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सहित दक्षिणी राज्यों के प्रमुख नेता एक साथ नजर आए।
NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की ...
भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम को 165 रनों के बड़े अंतर से हरा दिया। इस शानदार जीत के बावजूद भारतीय क्रिकेट गलियारों में एक अलग ही बहस छिड़ गई है और टीम के सबसे बड़े मैच विनर माने जाने वाले चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव का भविष्य फिलहाल खतरे में नजर आ रहा है। गॉल टेस्ट की दोनों पारियों में कुल 150 गेंदें फेंकने के बावजूद कुलदीप के हाथ केवल 1 ही सफलता लगी, जिसके बाद से उनकी प्लेइंग इलेवन में जगह को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।गॉल टेस्ट में कुलदीप यादव का फीका प्रदर्शनश्रीलंका के खिलाफ गॉल के मैदान पर जब टीम उतरी तो पिच स्पिन गेंदबाजों के अनुकूल मानी जा रही थी। कप्तान और टीम मैनेजमेंट ने रविंद्र जडेजा और युवा मानव सुतार के साथ-साथ कुलदीप यादव को मैदान पर उतारा। मैच में जहां एक तरफ मानव सुतार और अनुभवी जडेजा ने अपनी फिरकी का जादू बिखेरते हुए श्रीलंकाई बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, वहीं कुलदीप यादव अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते नजर आए। उन्होंने मैच के दौरान करीब 25 ओवर गेंदबाजी की और 103 से ज्यादा रन खर्च करके केवल एक ही विकेट अपने नाम किया। उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के कारण अब उन्हें अगले मैच की प्लेइंग इलेवन से बाहर किए जाने की चर्चा जोरों पर है।क्या तीसरे स्पिनर के रूप में फिट नहीं बैठ पा रहे कुलदीप?भारतीय टेस्ट इतिहास में जब भी उपमहाद्वीप की धीमी पिचों पर मैच खेले जाते हैं, तो स्पिनर्स की भूमिका अहम हो जाती है। पूर्व क्रिकेटरों और दिग्गजों का मानना है कि कुलदीप यादव अमूमन टीम में तीसरे स्पिनर के विकल्प के तौर पर खेलते हैं। आर अश्विन जैसे दिग्गज खिलाड़ी ने भी हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा है कि तीसरे स्पिनर की भूमिका निभाना और छोटे-छोटे स्पेल में गेंदबाजी करना किसी भी गेंदबाज के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। पुरानी गेंद से तेज गति से गेंदबाजी करने वाले गेंदबाजों को पिच पर ज्यादा मदद मिलती है, जबकि कुलदीप की गेंदबाजी शैली थोड़ी अलग है। ऐसे में कप्तान शुभमन गिल और कोच गौतम गंभीर की प्लानिंग में उनकी प्राथमिकता पर अब संशय के बादल मंडराने लगे हैं।घरेलू क्रिकेट के दमदार प्रदर्शन के बाद भी दबावयह बात किसी से छिपी नहीं है कि कुलदीप यादव ने जब-जब सीमित ओवरों और टेस्ट क्रिकेट में मौके पाए हैं, उन्होंने अपनी गेंदबाजी से मैच का पासा पलटा है। इसके बावजूद उन्हें लगातार लंबे समय तक प्लेइंग इलेवन में प्लेइंग टाइम न मिलना उनके करियर के आड़े आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और क्रिकेट पंडितों का मानना है कि यदि कुलदीप इसी तरह संघर्ष करते रहे, तो आगामी दौरों पर टीम का कॉम्बिनेशन उन्हें बाहर बैठने पर मजबूर कर सकता है। सोशल मीडिया और खेल प्रेमियों के बीच भी इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या एक खराब मैच के बाद इतने बड़े टैलेंटेड गेंदबाज को नजरअंदाज करना सही फैसला होगा।आगामी कोलंबो टेस्ट और प्लेइंग इलेवन पर टिकी निगाहेंभारत और श्रीलंका के बीच अब श्रृंखला का दूसरा और निर्णायक टेस्ट मुकाबला आगामी 23 अगस्त से कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब मैदान पर खेला जाना है। इस महत्वपूर्ण मुकाबले से पहले कप्तान [शुभमन गिल](cite: 1.1.7) और टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द यह तय करना होगा कि क्या वे कुलदीप यादव पर एक बार फिर भरोसा जताते हैं या फिर घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रहे किसी अन्य विकल्प या तेज गेंदबाज को मौका देते हैं। बहरहाल, कुलदीप यादव के लिए यह समय अपने करियर के सबसे बड़े चौराहे पर खड़ा है, जहां उन्हें अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए जबरदस्त वापसी करनी होगी।
क्रिकेट के मैदान पर रोमांच, तनाव और खिलाड़ियों के बीच तीखी नोकझोंक होना बहुत आम बात है, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसी अनोखी और हैरान कर देने वाली घटनाएं घट जाती हैं, जिन पर यकीन करनामुश्किल हो जाता है। इंग्लैंड और पाकिस्तान (ENG vs PAK) के बीच खेले गए एक रोमांचक मुकाबले के दौरान कुछ ऐसा ही अकल्पनीय नजारा देखने को मिला, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया के क्रिकेट गलियारों में हो रही है। मैच के दौरान पाकिस्तानी टीम की मैदान पर जिस तरह से धज्जियां उड़ीं, उसने तो दर्शकों का मनोरंजन किया ही, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सबको सकते में डाल दिया। हार से बौखलाए और गुस्से से लाल एक जुनूनी प्रशंसक ने या फिर मैच से जुड़े किसी वाकये के तहत गेंद के ही दो टुकड़े कर डाले और उसे अपने साथ घर ले गया। क्रिकेट के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा अनूठा वाकया पहले कभी देखा गया हो, जिसने सोशल मीडिया पर भी तहलका मचा रखा है।मैदान पर पाकिस्तान की शर्मनाक हार और खेल का हालजब भी इंग्लैंड और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होती हैं, तो मुकाबला हमेशा कांटे का और बेहद रोमांचक होने की उम्मीद की जाती है। इस हाई-वोल्टेज मैच में भी दोनों टीमों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही थी, लेकिन खेल के आगे बढ़ने के साथ ही पाकिस्तानी टीम का प्रदर्शन लगातार गिरता चला गया। इंग्लिश बल्लेबाजों और गेंदबाजों ने अपनी बेहतरीन रणनीति और आक्रामक खेल के दम पर पाकिस्तानी टीम को हर मोर्चे पर पछाड़ दिया। हालात यह हो गए कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों का डिफेंस और अटैक दोनों ही पूरी तरह फेल साबित हुए और मैदान पर उनकी जमकर किरकिरी हुई। इस एकतरफा प्रदर्शन को देखकर स्टेडियम में बैठे दर्शक भी हैरान रह गए कि आखिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली टीम इतना खराब प्रदर्शन कैसे कर सकती है।गुस्से की इंतेहा: बॉल के दो टुकड़े करने वाला वाकयामैदान पर जब पाकिस्तानी टीम की धज्जियां उड़ रही थीं, तब खेल का माहौल और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो चुका था। मैच के दौरान एक ऐसा अजीबोगरीब वाकया घटा जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। खेल के दौरान इस्तेमाल होने वाली चमचमाती गेंद अचानक चर्चा का केंद्र बन गई, जब मैच के माहौल और हार के गुस्से से प्रेरित होकर किसी ने उस बॉल को दो हिस्सों में चीर दिया। गेंद के दो टुकड़े होने की इस घटना ने मैदान पर मौजूद अंपायरों और खिलाड़ियों को भी अवाक कर दिया। क्रिकेट के नियमों के अनुसार गेंद से छेड़छाड़ या उसे नुकसान पहुंचाना एक बहुत बड़ा अपराध माना जाता है, लेकिन इस अनोखी घटना ने खेल प्रेमियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर खेल के प्रति लोगों की दीवानगी या निराशा किस हद तक जा सकती है।सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनोखा वीडियो और मीम्सजैसे ही यह खबर और इससे जुड़ा वीडियो इंटरनेट पर आया, इसने आग की तरह सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर तहलका मचा दिया। एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #ENGvsPAK ट्रेंड करने लगा और लोग इस घटना पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे। कोई इसे पाकिस्तानी टीम के खराब प्रदर्शन का नतीजा बता रहा था, तो कोई इस अजीबोगरीब हरकत पर चुटकी लेते हुए मजेदार मीम्स शेयर कर रहा था। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं खेल की गंभीरता को भले ही ठेस पहुंचाती हैं, लेकिन ये इंटरनेट की दुनिया में लोगों के मनोरंजन का एक बड़ा साधन जरूर बन जाती हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्रिकेट केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह भावनाओं का ऐसा ज्वार है जो कभी भी किसी को भी हैरान कर सकता है।खेल भावना और भविष्य के मुकाबलों पर असरइस पूरी घटना के बाद क्रिकेट बोर्ड और आईसीसी के नियमों के तहत मैदान की सुरक्षा और उपकरणों की देखरेख पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस तरह की अजीबो-गरीब घटनाएं खेल की गरिमा को प्रभावित करती हैं और खिलाड़ियों के साथ-साथ दर्शकों के अनुशासन पर भी उंगलियां उठाती हैं। आने वाले समय में जब भी इंग्लैंड और पाकिस्तान की टीमें दोबारा आमने-सामने होंगी, तो इस मैच की खट्टी-मीठी यादें और गेंद के दो टुकड़े करने वाला यह किस्सा जरूर याद किया जाएगा। फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य के मुकाबलों में इस तरह की अराजकता के बजाय केवल बेहतरीन खेल और खेल भावना देखने को मिलेगी, ताकि क्रिकेट का असली रोमांच बरकरार रह सके।
बिहार की राजनीति में इन दिनों कानून-व्यवस्था और पुलिस हिरासत में मौतों के मामलों को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है। नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव पटना से मधुबनी के लिए रवाना होने से ठीक पहले एक बार फिर आक्रामक नजर आए। उन्होंने रोशन यादव की संदिग्ध मौत के मामले में सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि मृतक को थाने में अवैध रूप से बंद कर अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया गया और उसे करंट तक लगाया गया। तेजस्वी के इस तीखे बयान के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भूचाल आ गया है, क्योंकि विपक्ष लगातार सरकार पर पुलिसिया राज कायम करने का गंभीर आरोप लगा रहा है।रोशन यादव मौत मामले पर तेजस्वी का बड़ा हमलामधुबनी रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और राज्य की वर्तमान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में जिस तरह से लगातार आपराधिक घटनाएं और पुलिस हिरासत में मौतें हो रही हैं, वह बेहद चिंताजनक है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी तानाशाही चलाई और युवक को इस हद तक प्रताड़ित किया कि उसकी जान चली गई। उन्होंने कहा कि वे खुद पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे हैं और हरसंभव न्याय की लड़ाई लड़ेंगे ताकि दोषियों को बख्शा न जा सके।पीड़ित परिवार के आरोप और पुलिस प्रशासन की थ्योरीइस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन और पीड़ित परिवार के बयानों में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिल रहा है। परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस ने युवक को बिना किसी पुख्ता कारण के उठाया था और थाने के अंदर उसे बुरी तरह पीटा गया। परिवार के दावों के अनुसार, हिरासत के दौरान यातनाएं देने के कारण ही उसकी स्थिति बिगड़ी थी। वहीं दूसरी ओर, पुलिस और जेल प्रशासन का यह दावा है कि युवक की मौत आत्महत्या के कारण हुई है। इस विरोधाभास के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों का मधुबनी पहुंचकर परिजनों से मिलने का सिलसिला लगातार जारी है।राजनीतिक दलों की सक्रियता और जनसुराज का रुखरोशन यादव की मौत के मामले ने केवल राजद ही नहीं बल्कि अन्य राजनीतिक दलों और संगठनों को भी झकझोर कर रख दिया है। हाल ही में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी थी और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। विपक्षी दलों का साफ कहना है कि यदि इस मामले में पुलिस अधिकारियों और लिप्त कर्मियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच अब हर किसी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।
दुबई से लौटी महिला की गला घोंटकर हत्या, सास और 4 अन्य अरेस्ट
मुंबई। मुंबई पुलिस ने छुट्टी मनाने दुबई से लौटी महिला की कथित हत्या के मामले में सास समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि मृतक महिला की पहचान सपना प्रमोद गंजी (35) के रूप में हुई है। आरोप है कि 16 अगस्त को घाटकोपर स्थित घर पर उसकी […] The post दुबई से लौटी महिला की गला घोंटकर हत्या, सास और 4 अन्य अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
राजस्थान की राजनीति में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और शिक्षा विभाग के नए फरमान को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। राज्य विधानसभा के सत्र के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक सचिन पायलट ने सरकार के उस विवादास्पद निर्देश पर कड़ा ऐतराज़ जताया है, जिसके तहत सरकारी विद्यालयों में अनधिकृत प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। पायलट ने इसे तानाशाही रवैया करार देते हुए तीखा हमला बोला और कहा कि सरकार अपनी नाकामियों और स्कूलों की बदहाल तस्वीर को छिपाने के लिए ऐसे दमनकारी नियम बना रही है, जबकि जरूरत इस बात की थी कि बदहाल बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किया जाए।स्कूलों में मीडिया और फोटोग्राफी पर प्रतिबंध क्योंहाल ही में राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए एक नए आदेश के अनुसार, अब बिना पूर्व अनुमति के कोई भी बाहरी व्यक्ति, पत्रकार या आम नागरिक सरकारी स्कूलों के परिसरों में प्रवेश नहीं कर सकेगा और न ही वहां की तस्वीरें या वीडियो बना सकेगा। इस निर्देश के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार स्कूलों की खस्ताहाली, टूटी-फूट इमारतों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को जनता और मीडिया की नजरों से छिपाना चाहती है। सचिन पायलट ने मीडिया से मुखातिब होते हुए सवाल उठाया कि यदि स्कूलों में सब कुछ ठीक है, तो फिर सच दिखाने या कैमरे से रिकॉर्ड करने पर प्रतिबंध लगाने की क्या आवश्यकता है।विधानसभा के बाहर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शनशिक्षा विभाग के इस आदेश के विरोध में कांग्रेस पार्टी के विधायकों और नेताओं ने [राजस्थान विधानसभा](cite: 1.1.1) के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जब नेताओं ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की। सचिन पायलट और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठकर सरकार की नीतियों के खिलाफ हल्ला बोला। उनका साफ कहना था कि चुनी हुई सरकारों को पारदर्शी होना चाहिए, न कि जनता के सवालों से भागने के लिए इस तरह के तुगलकी फरमान जारी करने चाहिए।राज्य के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकतसचिन पायलट ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी हैं। कई जगहों पर सुरक्षा के अभाव और लचर व्यवस्था के कारण बच्चों की जान पर बन आई है, लेकिन प्रशासन सुधार कार्य करने के बजाय पाबंदियां लगाने में व्यस्त है। उन्होंने झालावाड़ और अन्य जिलों की पूर्व की दर्दनाक घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, न कि उन लोगों की आवाज दबाने पर जो इन कमियों को उजागर कर रहे हैं।विपक्ष की मांग और आगे का राजनीतिक रुखकांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस जनविरोधी आदेश को वापस लेने के लिए सरकार पर लगातार दबाव बनाएंगे। विधानसभा सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला, जहां विपक्षी सदस्यों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और इस आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा यह ताजा विवाद आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है, जिससे सत्ता पक्ष की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर के स्कूलों में विभिन्न श्रेणियों के कुल 76,791 पद रिक्त पड़े हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा था। इस अकादमिक सत्र में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सरकार ने 'विद्यार्थी मित्र' या गेस्ट फैकल्टी के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति करने का फैसला किया है। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे जल्द ही स्कूलों में खाली पड़े पदों पर अस्थाई शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ हो गया है।सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों का संकटराजस्थान के ग्रामीण और शहरी इलाकों के सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों की भारी कमी किसी से छिपी नहीं है। चाहे प्राथमिक स्तर के स्कूल हों या फिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, विषय अध्यापकों और व्याख्याताओं के हजारों पद खाली होने के कारण नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था। अभिभावकों और छात्र संगठनों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि समय रहते इन पदों को भरा जाए ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। सरकार द्वारा कराई गई हालिया समीक्षा में यह बात सामने आई कि राज्य में कुल 76,791 पद खाली हैं, जिन्हें तुरंत भरने के लिए नियमित भर्तियों के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्था करना अनिवार्य हो गया था।गेस्ट फैकल्टी योजना और नए दिशा-निर्देशइस गंभीर समस्या का तात्कालिक समाधान निकालते हुए भजनलाल सरकार ने राजस्थान के स्कूलों में विद्या संबल योजना या गेस्ट फैकल्टी के माध्यम से शिक्षकों को आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर योग्य और अनुभवी युवाओं या सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय के आधार पर पढ़ाया जाएगा। इसके लिए पूरी पारदर्शी प्रक्रिया तय की गई है ताकि केवल मेधावी और पात्रता पूरी करने वाले उम्मीदवारों को ही स्कूलों में पढ़ाने का मौका मिले। स्कूल प्रबंधन समितियों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।विद्यार्थियों की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षाओं पर असरशिक्षकों के अभाव का सबसे बुरा असर नौनिहालों और बोर्ड कक्षाओं (10वीं और 12वीं) के विद्यार्थियों पर पड़ रहा था। कई स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक ही नहीं थे, जिससे बच्चों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा था। अब गेस्ट फैकल्टी के रूप में शिक्षकों के आने से कक्षाओं का संचालन नियमित रूप से हो सकेगा। शिक्षाविदों का मानना है कि इस कदम से न केवल पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा, बल्कि ग्रामीण आंचल के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। सरकार के इस निर्णय से छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों ने बड़ी राहत की सांस ली है।आगे की प्रशासनिक तैयारियां और मॉनिटरिंगराज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गेस्ट फैकल्टी के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों में खाली पदों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर समय पर शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग इस पूरी प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग भी करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विद्यार्थियों को इसका पूरा और शत-प्रतिशत लाभ मिल सके।
एशिया कप में ट्रॉफी पर बवाल तय? अब हरमनप्रीत निकालेंगी नकवी की हेकड़ी
महिला एशिया कप में भारत के सामने एक बार फिर ट्रॉफी प्रेजेंटेशन को लेकर असहज स्थिति बन सकती है. ACC अध्यक्ष और PCB चीफ मोहसिन नकवी के टूर्नामेंट में मौजूद रहने की संभावना है. पिछले साल भारतीय पुरुष टीम ने नकवी से एशिया कप ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था. अब सवाल है कि अगर हरमनप्रीत कौर की टीम जीती तो क्या होगा?
भ्रामक वीडियो मामले में प्राथमिकी के बाद नेहा सिंह राठौर ने गीत के जरिए साधा निशाना
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कथित भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद लोकगायिका एवं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर ने गीत के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फेसबुक पर भोजपुरी अंदाज में गीत गाते हुए एक वीडियो साझा किया है, जिसमें प्राथमिकी और कार्रवाई को लेकर सरकार तथा भारतीय […] The post भ्रामक वीडियो मामले में प्राथमिकी के बाद नेहा सिंह राठौर ने गीत के जरिए साधा निशाना appeared first on Sabguru News .
राजस्थान एसआई भर्ती का अंतिम परिणाम जारी, 221 अभ्यर्थियों का हुआ चयन, देखें पूरी मेरिट लिस्ट
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी जारी की है। आयोग ने बहुप्रतीक्षित सब-इंस्पेक्टर (SI) टेलीकॉम 2024 परीक्षा का अंतिम परिणाम (Final Result) आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए विभिन्न चरणों की कड़ी परीक्षाओं को पार करने वाले कुल 221 योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। सफल होने वाले सभी उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट और कट-ऑफ मार्क्स RPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं, जिससे राज्य के युवाओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।लंबे इंतजार के बाद खत्म हुआ अभ्यर्थियों का इंतज़ारराजस्थान में पुलिस विभाग के अंतर्गत तकनीकी सेवाओं में जाने का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए यह परिणाम किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है। RPSC SI Telecom 2024 की इस पूरी भर्ती प्रक्रिया के तहत लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और अंत में साक्षात्कार के चरण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद यह अंतिम चयन सूची तैयार की गई है। आयोग द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ मेरिट सूची जारी किए जाने से उन अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है, जो पिछले कई महीनों से अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।कैसे चेक करें RPSC SI Telecom 2024 का रिजल्ट और मेरिट लिस्टजिन अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया था, वे अपना परिणाम आसानी से देख सकते हैं। परिणाम देखने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो किया जा सकता है:सबसे पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर जाएं।होमपेज पर दिए गए 'Candidate Information' या 'News and Events' सेक्शन में जाएं।वहां आपको 'RPSC SI Telecom 2024 Final Result and Merit List' का लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।लिंक पर क्लिक करते ही पीडीएफ फॉर्मेट में चयनित अभ्यर्थियों की सूची खुल जाएगी।इस सूची में अपना रोल नंबर और नाम देखने के लिए Ctrl+F का उपयोग करें और भविष्य के लिए इसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।चयनित 221 अभ्यर्थियों के भविष्य की नई शुरुआतइस प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा में कुल 221 उम्मीदवारों ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर अंतिम रूप से सफलता हासिल की है। अब इन सभी सफल अभ्यर्थियों को राजस्थान पुलिस विभाग में उप-inspector (दूरसंचार) के पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। तकनीकी और पुलिस बल के इस महत्वपूर्ण समन्वय वाले क्षेत्र में इन नए अधिकारियों के आने से विभाग की तकनीकी क्षमता और अधिक मजबूत होगी। सफल उम्मीदवारों के परिवारों और उनके गृह क्षेत्रों में जश्न का माहौल है, क्योंकि सरकारी सेवा में चयन होना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।आगे की प्रक्रिया और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशनपरिणाम जारी होने के बाद अब RPSC और पुलिस मुख्यालय द्वारा चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेजों के सत्यापन (Document Verification) और मेडिकल जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सफल अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सभी मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां तैयार रखें। विभाग द्वारा जल्द ही आधिकारिक सूचना जारी कर बताया जाएगा कि अभ्यर्थियों को किस तिथि और स्थान पर अपने दस्तावेजों की जांच के लिए उपस्थित होना होगा।
कैंसर थेरेपी और वैक्सीन में क्या है अंतर, डॉक्टर से समझें
मॉर्डना और मर्क कंपनी ने एक पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर वैक्सीन थेरेपी विकसित की है, जो स्किन कैंसर के मरीजों के लिए फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में सफल साबित हुई है. यह थेरेपी मरीज के कैंसर म्यूटेशन के आधार पर तैयार की गई है.
कल 5 राशियों को धन लाभ, कारोबार में शुभ संकेत, पढ़ें पूरा राशिफल
Kal Ka Rashifal 17 August 2026:अनुभवी लोगों से सीख और सलाह लेते रहें. अध्ययन-अध्यापन में आगे रहेंगे. कामकाज में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और कारोबारी अवसरों का लाभ उठाएंगे. कार्यक्षमता में वृद्धि होगी .
1984 सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद काट रहे पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन
1984 सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। जानें उनके राजनीतिक और कानूनी सफर की पूरी कहानी।
सत्येंद्र जैन अरेस्ट, BJP पर बरसी AAP और मान सरकार, देखें पंजाब आजतक
पंजाब आजतक में आज आपको दिखाएंगे कैसे आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र कुमार जैन की गिरफ्तारी पर पंजाब में सियासत गर्मा गई है. दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच ने बुधवार को पूर्व जल मंत्री और सत्येंद्र कुमार जैन को गिरफ्तार कर लिया है. ये कार्रवाई दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर घोटाले में की गई है.
संभल में हाईवे पर दौड़ाकर पकड़ा गया रिश्वतखोर लेखपाल
संभल में एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल अमन कुमार को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया. किसान महिपाल सिंह ने पट्टे की जमीन की पैमाइश के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायत की थी. आरोप है कि लेखपाल ने पहले 50 हजार रुपये मांगे, बाद में 20 हजार में सौदा तय हुआ. पहली किस्त लेते ही टीम ने पीछा कर हाईवे पर उसे पकड़ लिया.
न टूटेगा, न फटेगा, आलू भरकर बनाएं राजगिरा का फूला-फूला पराठा
Rajgira Paratha: अगर आप भी राजगिरा जिसे अमरंथ और चौलाई कहते हैं, उसे अपना डाइट का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो यहां हम आपको राजगिरा के पराठे की रेसिपी बता रहे हैं जिसे कुछ समय पहले शेफ हरपाल सिंह ने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर की थी.
189 रुपये वाले बल्ब के सामने इन्वर्टर भी फेल! 4 घंटे का बैकअप
189 रुपये का ये इमरजेंसी LED बल्ब बिजली कटते ही अपने आप जल जाता है। इसमें इन्वर्टर फीचर मिलता है और ये कई घंटे तक बैकअप देता है. जानिए कैसे करता है काम और कितना है इसका दाम.
Lucknow Bank Employee Murder Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली वारदात से सनसनी फैल गई। यहां एक सिरफिरे पति ने अपनी बैंक कर्मचारी पत्नी की दिनदहाड़े बैंक के बाहर गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात को अंजाम ...
अछनेरा में दो बाल अपचारियों ने डीग के युवक की गोली मारकर हत्या की
भरतपुर/डीग। उत्तर प्रदेश में अछनेरा थाना क्षेत्र के ताजपुर नगरिया गांव में बुधवार देर रात राजस्थान के एक व्यक्ति की गोली मार कर हत्या कर दी है। पुलिस के अनुसार मृतक राजस्थान में डीग जिले के कुम्हेर थाना क्षेत्र का रहने वाला था और वह उत्तर प्रदेश में अपने रिश्तेदार के यहां रहता था। उत्तरप्रदेश […] The post अछनेरा में दो बाल अपचारियों ने डीग के युवक की गोली मारकर हत्या की appeared first on Sabguru News .
क्या SC बच्चों की मोबाइल हैबिट पर सख्त नियम बनाने वाली है?
देश की सबसे बड़ी अदालत ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल लत पर गहरी चिंता जताई है. खेल को मौलिक अधिकार बनाने और स्कूलों में रोजाना 90 मिनट का स्पोर्ट्स पीरियड अनिवार्य करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है. जानिए क्या अब बच्चों को स्क्रीन से दूर करने के लिए बनेगा नया कानून!
महीने के 15 हजार कमाने वाले दर्जी को 975 करोड़ का टैक्स नोटिस!
अजमेर के गोविंदगढ़ में 62 साल के एक दर्जी के घर इनकम टैक्स विभाग का ऐसा नोटिस पहुंचा कि परिवार के होश उड़ गए. महीने के करीब 15 हजार रुपये कमाने वाले रेखराज ठाड़ा पर 974.97 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी बताई गई है. नोटिस में उन्हें सूरत की एक डायमंड कंपनी का डायरेक्टर बताया गया है.
लखनऊ: ICICI की रिलेशनशिप मैनेजर पत्नी की गोली मारकर हत्या, बहन को गोली मार पति ने भी जान दी
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आईसीआईसीआई बैंक के बाहर दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज वारदात में बैंक अधिकारी दिव्या मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
वंदे मातरम् पर कैसे छिड़ गई 2 और 6 छंदों की लड़ाई? इतिहास क्या कहता है
वंदे मातरम् पर बीजेपी और कांग्रेस आमने- सामने हैं. कांग्रेस का कहना है कि वह सिर्फ इस गीत के 2 छंद को गा सकती है. वहीं बीजेपी ने राष्ट्रीय गीत को आधा- अधूरा गाने को इसका अपमान बताया है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर राष्ट्रीय गीत के 2 और 6 छंद की लड़ाई क्या है?
Dada Bhuse का इस्तीफा मांगा: Abhijit Dipke ने लातूर में सरकारी स्कूलों की बदहाली पर सवाल उठाए
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के संयोजक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग करते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि सरकारी विद्यालयों की हालत दयनीय है और छात्रों की तुलना में ‘‘मंत्रियों के कुत्तों को भी बेहतर सुविधाएं’’ मिलती हैं। कॉजपा ने पिछले सप्ताह ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया था। दीपके ने लातूर की औसा तहसील के उजनी गांव स्थित एक जिला परिषद स्कूल का दौरा करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि विद्यालयों की स्थिति के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों और मंत्रियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई विद्यालयों में अब भी अच्छी कक्षाओं, बेंच, शौचालय और उन तक पहुंचने के सुरक्षित मार्ग जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विद्यालयों में छात्रों के लिए ‘‘जानवरों से भी बदतर’’ हालात हैं। दीपके ने कहा, ‘‘यह छात्रों की जिंदगी का सवाल है। जब नेता छात्रों के लिए कुछ नहीं कर रहे तो लोग उन्हें वोट क्यों दें? क्या लोग उन्हें केवल हेलीकॉप्टर में घूमने के लिए वोट देते हैं? लोगों को देखना चाहिए कि उनके बच्चे किन हालात में पढ़ रहे हैं। इन मंत्रियों के कुत्तों को भी इससे बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।’’उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि वे राजनीतिक दलों के नेताओं पर पहले शिक्षा के लिए काम करने और उसके बाद वोट मांगने का दबाव बनाएं। दीपके ने कहा, ‘‘लोगों को अपने गांव आने वाले हर राजनीतिक दल के नेताओं से कहना चाहिए कि वे शिक्षा के लिए काम करें। उनसे कहें कि जब तक वे शिक्षा के लिए काम नहीं करते, तब तक वे वोट मांगने हमारे दरवाजे पर न आएं। राजनीति के लिए हम जाति और समुदाय के झंडे लेकर घरों से निकलते हैं। इसी तरह हमें अपने बच्चों के विद्यालयों के लिए भी बाहर निकलना चाहिए।’’उन्होंने कहा, ‘‘ये लोग कहते रहते हैं कि धर्म खतरे में है। इतने वर्षों में धर्म खत्म नहीं हुआ और क्या यह आपके कार्यकाल में ही खत्म हो जाएगा? धर्म कहीं नहीं जाने वाला लेकिन बच्चों का भविष्य जरूर प्रभावित हो सकता है।’’दीपके ने कहा कि मंत्रियों और विधायकों को अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में भेजना चाहिए ताकि वे वहां छात्रों को होने वाली परेशानियों को समझ सकें। यह पूछे जाने पर कि क्या दादा भुसे को स्कूली शिक्षा मंत्री के पद पर बने रहना चाहिए, दीपके ने कहा, ‘‘विद्यालयों की हालत देखकर मुझे लगता है कि शिक्षा मंत्री को पद पर नहीं बने रहना चाहिए। अगर सरकार सरकारी विद्यालयों में सुधार की जरूरत की गंभीरता समझना चाहती है तो मंत्रियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने बच्चों को इन्हीं विद्यालयों में पढ़ने के लिए भेजना चाहिए।’’दीपके ने आरोप लगाया कि कई वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सत्तारूढ़ पक्ष सरकारी विद्यालयों की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं ला पाया। उन्होंने कहा, ‘‘छात्र अब भी ऐसे विद्यालयों में पढ़ रहे हैं जिनमें टीन की छतों से पानी टपकता है और पर्याप्त बेंच नहीं हैं। अगर 10 साल में ये बुनियादी समस्याएं दूर नहीं की जा सकीं तो सरकार को बताना चाहिए कि उसने आखिर हासिल क्या किया है।’’उन्होंने कहा कि कॉजपा एवं स्थानीय लोग विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं को लेकर मिलकर आवाज उठाएंगे और कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का सरकार पर दबाव बनाएंगे। विद्यालयों में कथित रूप से सांप के काटने से बच्चों की मौत की खबरों का उल्लेख करते हुए दीपके ने कहा कि ऐसी घटनाएं बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा उपलब्ध कराने में अधिकारियों की विफलता को उजागर करती हैं। उन्होंने उस स्कूल में गंदगी को लेकर भी चिंता जताई जिसका कॉजपा की टीम ने पहले निरीक्षण किया था। दीपके ने आरोप लगाया कि स्कूल परिसर के पीछे जमा कबाड़ और कचरे के कारण वहां सांपों के रहने के अनुकूल स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि कॉजपा के निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने विद्यालयों में कुछ काम शुरू भी कर दिए हैं। दीपके ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जनता की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों ने फिर से अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी है। लोकतंत्र में और संगठन एवं आंदोलन सामने आने चाहिए। जितने अधिक लोग आगे आकर बोलेंगे, हमारा लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा।’’‘जेन जी’ से जुड़े मुद्दों पर दीपके ने कहा कि 2029 के चुनाव तक युवा एक बड़ी चुनावी ताकत बन जाएंगे और राजनीतिक दलों को उनके मुद्दों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने आगाह किया कि यदि युवाओं की चिंताओं की अनदेखी की गई तो युवा मतदाता सरकारों से जवाब मांगेंगे। दीपके ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर सरकार सरकारी विद्यालयों की हालत सुधारने में नाकाम रही तो गांवों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। इस बीच, दीपके ने लातूर में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक मामले की सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) जांच को लेकर आरोप लगाया कि जांच निचले स्तर के आरोपियों पर केंद्रित दिखाई दे रही है, जबकि उच्च स्तर पर आसीन लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
UP Police ने Pakistan ISI समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क पर की कार्रवाई, 52 गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कथित तौर पर कट्टरपंथ की ओर धकेलने, धार्मिक एवं संवेदनशील स्थानों पर हमला करने और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने की साजिश में शामिल शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ 12 मुकदमे दर्ज कर 52 लोगों को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से बृहस्पतिवार को यहां जारी बयान के अनुसार, यह गिरोह कथित रूप से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई एवं पाकिस्तानी बदमाश शहजाद भट्टी के निर्देश पर काम करता था। आरोप है कि नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को भर्ती करता था और बाद में उन्हें कट्टरपंथी बनाया जाता था। बयान के मुताबिक, आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इस वर्ष 26 मई को अभियान चलाया। इस दौरान नेटवर्क से जुड़े करीब 175 संदिग्ध लोगों की जांच की गई। पुलिस ने बताया कि जांच के बाद 12 मुकदमे दर्ज किए गए और 52 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से पिस्तौल, कारतूस, चाकू, ज्वलनशील पदार्थ एवं आपत्तिजनक पोस्टर बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, शासकीय गुप्त बात अधिनियम और सूचना-प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत लखनऊ के एटीएस थाने के अलावा हापुड़, गाजियाबाद और बिजनौर के विभिन्न थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर शहजाद भट्टी नेटवर्क और उसके सदस्यों को आतंकवादी घोषित करने की मांग की थी। बयान के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस से पहले 12 अगस्त को पूरे राज्य में चलाए गए एक संयुक्त अभियान के दौरान शहजाद भट्टी और उसके नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े तथा देश विरोधी एवं आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह वाले करीब 62 लोगों को चिह्नित कर उनसे पूछताछ की गई।
तेलंगाना में कुएं में कार गिरने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत
सिद्दिपेट। तेलंगाना में बुधवार देर रात एक तेज रफ्तार कार के अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक कुएं में गिर जाने से दो छोटे बच्चों सहित एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गयी। पुलिस के अनुसार यह सड़क दुर्घटना राज्य के दुब्बाक मंडल के अप्पनापल्ली में हुई। मृतकों की पहचान बलवंतपुर गांव के […] The post तेलंगाना में कुएं में कार गिरने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत appeared first on Sabguru News .
पंजाब में मौसम का मिजाज बदला: जालंधर समेत कई जिलों में तेज हवाओं और बरसात का अलर्ट, पारे में गिरावट
पंजाब में मानसूनी हवाओं के एक बार फिर से सक्रिय होने के बाद मौसम ने करवट ले ली है, जिससे भीषण उमस और गर्मी से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आज राज्य के कई जिलों में तेज गर्जना, बादलों की आवाजाही और हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी है। खासकर जालंधर और उसके आसपास के इलाकों में तेज ठंडी हवाओं के चलने और हल्की बूंदाबांदी होने से तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। इस सुहाने मौसम ने आम जनजीवन को राहत तो दी है, साथ ही धान की फसलों के लिए भी इसे फायदेमंद माना जा रहा है।जालंधर में बदला मौसम का मिजाज और तापमान की स्थितिपंजाब के प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक शहर जालंधर में आज सुबह से ही आसमान में घने बादलों ने डेरा डाल रखा है। ठंडी हवाओं के झोंकों के साथ हुई हल्की बूंदाबांदी ने यहां के तापमान में उल्लेखनीय कमी ला दी है। मौसम वैज्ञानिकों के आंकड़ों के मुताबिक, पारे में 0.7 डिग्री की गिरावट आने से मौसम काफी सुहावना हो गया है। दफ्तर जाने वाले लोगों, स्कूली बच्चों और सुबह सैर करने वालों ने इस खुशनुमा मौसम का भरपूर आनंद लिया। पिछले कई दिनों से चिपचिपी गर्मी से परेशान शहरवासियों के चेहरों पर अब राहत साफ तौर पर देखी जा सकती है।IMD का येलो अलर्ट और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावनाभारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पंजाब के कई जिलों के लिए आज विशेष मौसम चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ घंटों के दौरान जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, पटियाला और कपूरथला समेत कई क्षेत्रों में तेज हवाओं (30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार) के साथ झमाझम बारिश हो सकती है। इसे लेकर येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि अचानक होने वाली इस बारिश और खराब मौसम के दौरान यात्रा करते समय पूरी सतर्कता बरतें और सुरक्षित स्थानों का चयन करें।किसानों के चेहरों पर खुशी और कृषि पर मानसूनी असरयह मानसूनी बरसात पंजाब के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस समय राज्य में धान की फसल अपनी बढ़वार के दौर में है, जिसे पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लगातार पड़ रही धूप और सूखे जैसे माहौल के बीच हुई इस बारिश से खेतों को पर्याप्त नमी मिल रही है, जिससे किसानों की सिंचाई लागत में भी कमी आएगी। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जिन निचले खेतों में ज्यादा जलभराव की आशंका है, वहां किसान भाई उचित जल निकासी का प्रबंध रखें ताकि फसलों को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।आने वाले दिनों में कैसा रहेगा पंजाब का मौसममौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, पंजाब में अगले दो से तीन दिनों तक मानसून की यह सक्रियता बनी रह सकती है। रुक-रुक कर होने वाली बारिश से तापमान में और अधिक गिरावट दर्ज किए जाने की उम्मीद है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में भी सुधार देखा जा रहा है क्योंकि बारिश की वजह से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के कण नीचे बैठ गए हैं। कुल मिलाकर, पंजाब के लोगों के लिए यह हफ्ता राहत भरा रहने वाला है, जहां उन्हें गर्मी से मुक्ति और सुहाने मौसम का लुत्फ उठाने का मौका मिल रहा है।
भारत-जापान मिलकर बनाएंगे नेवी शिप, चीन की बढ़ेगी टेंशन
भारत-जापान ने समुद्री सुरक्षा समझौता साइन किया है. दोनों मिलकर नेवी शिप बनाएंगे. थिएटर कमांड्स में सहयोग मिलेगा. जापानी फाइटर्स भारत आएंगे. चीन की टेंशन बढ़ेगी.
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और बयानों को लेकर घमासान छिड़ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हालिया खुलासों और दस्तावेजों के सामने आने के बाद राज्य की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा इन तमाम छापों और खुलासों को केवल राजनीतिक प्रतिशोध करार दिए जाने पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने तीखा पलटवार किया है। बिट्टू ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मुख्यमंत्री हर गंभीर मुद्दे को 'राजनीतिक' बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते और उन्हें जनता के सामने एक-एक सवाल का स्पष्ट जवाब देना होगा।ईडी के खुलासों और प्रशासनिक कामकाज पर उठे सवालइस पूरे विवाद की जड़ में वह दस्तावेज और रिपोर्ट है जिसे केंद्रीय जांच एजेंसी ने अपने इनपुट में साझा किया है। केंद्रीय नेताओं का दावा है कि इन दस्तावेजों में प्रशासनिक फैसलों, तबादलों और नियुक्तियों के अलावा कई गोपनीय मामलों में कथित हस्तक्षेप के गंभीर संकेत मिलते हैं। विपक्ष का आरोप है कि पंजाब सरकार के भीतर व्यवस्था का एक समांतर ढांचा चल रहा था, जिससे सरकारी महकमों की निष्पक्षता पर बड़े सवालिया निशान खड़े होते हैं। इन कड़े दावों के बाद से राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है और विपक्षी दल लगातार इसे लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।सत्ता पक्ष का पलटवार और राजनीतिक बदले की भावना का आरोपदूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी (AAP) और राज्य सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED, CBI, Income Tax) के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावों को देखते हुए बीजेपी राजनीतिक द्वेष के तहत राज्य के नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। आप नेताओं का दावा है कि जनता इन राजनीतिक हथकंडों को अच्छी तरह समझती है और लोकतांत्रिक रूप से इसका करारा जवाब दिया जाएगा।भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता पर तीखी बहसइस ताजा राजनीतिक टकराव ने एक बार फिर पंजाब में गवर्नेंस, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार समर्थित नेता प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं राज्य का नेतृत्व इसे संघीय ढांचे पर हमला बता रहा है। बहरहाल, इस गरमागरम बहस के बीच आम जनता के बीच भी यह चर्चा का बड़ा विषय बन गया है कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
पंजाब की सियासत में संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी के मौके पर आयोजित कार्यक्रमों ने एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। शिरोमणि अकाली दल और उसके विरोधी गुटों द्वारा अलग-अलग मंचों से शक्ति प्रदर्शन के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री के इन कार्यक्रमों से दूर रहने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। इस राजनीतिक दूरी को लेकर विभिन्न प्रकार के कयास लगाए जा रहे हैं, क्योंकि पंजाब और हरियाणा के बीच के संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों और पंथिक कार्यक्रमों में शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी हमेशा से अहम मानी जाती है। हालांकि, इस तरह के आयोजनों से दूरी बनाए रखने के पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तताओं के साथ-साथ क्षेत्रीय संवेदनशीलता को भी मुख्य कारण माना जा रहा है।संत लोंगोवाल के इतिहास और राजनीतिक महत्वसंत हरचंद सिंह लोंगोवाल भारतीय राजनीति और पंजाब के इतिहास में एक बेहद प्रभावशाली और सम्मानित नाम रहे हैं। वर्ष 1985 में राजीव-लोंगोवाल समझौते (राजीव-लोंगोवाल अकॉर्ड़) पर हस्ताक्षर करने के बाद वे पंजाब में शांति और समझौते के प्रतीक के रूप में उभरे थे। उनकी बरसी के मौके पर हर साल पंजाब के संगरूर जिले में विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक समागम आयोजित किए जाते हैं। इन मंचों का उपयोग अक्सर पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति, सिख पंथ के मुद्दों और अकाली दल के आंतरिक समीकरणों को साधने के लिए किया जाता है। ऐसे ऐतिहासिक और संवेदनशील मंचों पर बाहरी राज्यों के मुख्यमंत्रियों या बड़े नेताओं की अनुपस्थिति अक्सर कई तरह के राजनीतिक संदेश देती है।अकाली दल के भीतर आंतरिक कलह और अलग-अलग मंचवर्तमान समय में शिरोमणि अकाली दल (SAD) और उसके बागी या विरोधी गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। पार्टी के भीतर नेतृत्व और नीतियों को लेकर चल रहे मतभेदों के कारण इस बार बरसी के कार्यक्रमों में भी दो अलग-अलग धाराएं देखने को मिलीं। एक तरफ जहां मुख्य अकाली दल नेतृत्व ने अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया, वहीं दूसरे गुटों ने भी पंथिक मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के अंतर्विरोधों और गुटबाजी से भरे आयोजनों में अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों का शामिल होना असहज स्थिति पैदा कर सकता है, शायद यही वजह रही कि हरियाणा के सीएम ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखना ही उचित समझा।क्षेत्रीय संतुलन और प्रशासनिक व्यस्तताएंहरियाणा और पंजाब के बीच सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर, राजधानी चंडीगढ़ के स्वामित्व और पानी के बंटवारे जैसे कई पुराने और संवेदनशील मुद्दे लंबे समय से उलझे हुए हैं। ऐसे में हरियाणा के किसी शीर्ष नेता का पंजाब की आंतरिक पंथिक राजनीति से जुड़े मंच पर जाना कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा, प्रशासनिक कार्य और राज्य स्तर पर चल रहे विकास कार्यों की व्यस्तताओं को भी इस दूरी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पड़ोसी राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखते हुए भी नेता अक्सर ऐसे आयोजनों में जाने से बचते हैं ताकि अनावश्यक विवादों या बयानों से बचा जा सके।भविष्य की राजनीति पर पड़ने वाले प्रभावइस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति में संत लोंगोवाल की विरासत और उससे जुड़े कार्यक्रम आज भी दलों के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। भले ही इस बार के आयोजनों में कुछ प्रमुख हस्तियों ने शिरकत न की हो, लेकिन इन मंचों से दिए गए संदेश आने वाले समय में पंजाब की चुनावी और वैचारिक दिशा को जरूर प्रभावित करेंगे। कि कैसे अकाली दलों के विरोधी गुटों के बीच इन आयोजनों को लेकर खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है, जो आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक उथल-पुथल का संकेत देती है।
झारखंड में एक बार फिर से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है और मानसून अपने उफान पर है। राजधानी रांची से लेकर गुमला और राज्य के अन्य हिस्सों में बादलों की आवाजाही के बीच मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए तेज गर्जना, वज्रपात (आसानी बिजली गिरने) और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का येलो और ओरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही इस बारिश से जहां एक ओर लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर निचले इलाकों और सड़कों पर जलभराव की स्थिति ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।रांची और गुमला में मौसम का हाल और तापमान में गिरावटमौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, रांची और [गुमला](cite: 1.1.2) समेत आसपास के कई जिलों में आसमान में घने बादल छाए हुए हैं। पिछले कुछ घंटों के दौरान इन इलाकों में झमाझम बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है। रांची में न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है, जबकि अधिकतम तापमान में भी गिरावट आई है। मौसम केंद्र का पूर्वानुमान है कि अगले कुछ दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में इसी तरह का मौसम बना रहेगा और एक-दो दौर की तेज बारिश या बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है।वज्रपात और तेज हवाओं को लेकर विशेष चेतावनीIMD ने अपनी चेतावनी में स्पष्ट किया है कि बारिश के दौरान बादलों की तेज गर्जना के साथ वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने की बहुत अधिक संभावना है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। इसके अलावा, 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं कच्चे मकानों, होर्डिंग्स और यातायात को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे प्रशासन पूरी तरह से सतर्क मोड पर आ गया है।किसानों के लिए सलाह और फसलों पर असरराज्य के कृषि विशेषज्ञों और मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मानसूनी बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद है, लेकिन अत्यधिक जलभराव और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। जिन इलाकों में धान की रोपाई हो चुकी है, वहां जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। किसानों से आग्रह किया गया है कि वे खराब मौसम के दौरान खेतों में खुले आसमान के नीचे काम करने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।यातायात और आम जनजीवन पर प्रभावझारखंड के विभिन्न जिलों में हो रही इस झमाझम बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्याएं सामने आने लगी हैं। रांची के मुख्य मार्गों और निचली बस्तियों में पानी भरने से वाहन चालकों और दफ्तर जाने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। [भारत मौसम विज्ञान विभाग](cite: 1.1.7) और जिला प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने और सफर के दौरान पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी है। लगातार सक्रिय मानसून गतिविधियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
देश में सरकारी नौकरियों का क्रेज और इसके साथ जुड़े सामाजिक स्टेटस का एक अलग ही रुतबा है, जिसके चलते कई बार शादियां और रिश्ते भी सिर्फ इस बात पर तय होते हैं कि लड़का या लड़की सरकारी पद पर कार्यरत है या नहीं। हाल ही में एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली और समाज की कड़वी सच्चाई को बयां करने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। एक प्रतियोगी परीक्षा रद्द होने के बाद जैसे ही एक युवक के हाथ से उसकी संभावित सरकारी नौकरी फिसली, वैसे ही उसकी तयशुदा सगाई भी टूट गई। इतना ही नहीं, होने वाली दुल्हन और उसके परिवार ने उस युवक से सारे रिश्ते नाते तोड़ते हुए उसे हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फोन पर ब्लॉक कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आज के दौर में रिश्ते प्यार और इंसानियत की बुनियाद पर टिके हैं या फिर सिर्फ कागजी और आर्थिक स्टेटस पर?सगाई के बाद सरकारी नौकरी का सपना और खुशियों पर ग्रहणइस पूरी घटना के केंद्र में एक ऐसा युवा है जो पिछले कई सालों से दिन-रात एक करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा हुआ था। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और उसने एक प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय परीक्षा के सभी चरण सफलतापूर्वक पार कर लिए। उसके चयन की खबर आते ही उसके परिवार में जश्न का माहौल बन गया। इस सफलता के तुरंत बाद ही एक अच्छे परिवार से उसका रिश्ता तय हो गया और धूमधाम से सगाई की रस्में भी पूरी हो गई थीं। हर कोई यही मान रहा था कि अब इस युवा का भविष्य सुरक्षित है और उसका वैवाहिक जीवन भी खुशहाली से शुरू होने वाला है। लेकिन कुदरत और प्रशासनिक व्यवस्था को कुछ और ही मंजूर था, और चंद दिनों के भीतर ही एक प्रशासनिक फैसले ने उसकी पूरी दुनिया उलट-पलट दी।पेपर में धांधली और परीक्षा रद्द होने का आघातयुवक के जीवन में उस समय भूचाल आ गया जब शासन स्तर पर अचानक प्रशासनिक गड़बड़ियों और कथित पेपर लीक के चलते उस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का आदेश जारी कर दिया गया। जिस चयन सूची में इस युवा का नाम स्वर्ण अक्षरों की तरह चमक रहा था, वह एक ही झटके में शून्य हो गई। उसके हाथ से वह प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी निकल गई जिसके बल पर उसका पूरा भविष्य और नया रिश्ता टिका हुआ था। परीक्षा रद्द होने की इस खबर ने न केवल उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया, बल्कि उसके परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसे यह अंदाजा भी नहीं था कि एक प्रतियोगी परीक्षा का रद्द होना उसकी निजी जिंदगी में इतना बड़ा भूचाल ले आएगा और उसे इस तरह के सामाजिक तिरस्कार का सामना करना पड़ेगा।नौकरी जाते ही होने वाली दुल्हन का बदला रुखजैसे ही यह खबर लड़की पक्ष तक पहुँची कि उनके होने वाले पति की सरकारी नौकरी अब हाथ से निकल चुकी है और परीक्षा रद्द हो चुकी है, उनका रवैया पूरी तरह से बदल गया। जिस परिवार ने कुछ दिन पहले तक बड़े ही गर्व से इस रिश्ते को स्वीकार किया था, उन्होंने बिना किसी संकोच के संबंध तोड़ने का फैसला कर लिया। सबसे ज्यादा आहत करने वाली बात यह रही कि उस लड़की ने, जिससे इस युवक के सपने जुड़े हुए थे, उसे बिना कोई बात किए फोन पर और हर सोशल मीडिया ऐप से पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। किसी भी प्रकार की बातचीत या सफाई का मौका दिए बिना अचानक हुए इस बर्ताव ने उस युवा को अंदर से झकझोर कर रख दिया और उसका भरोसा मानवता से उठ गया।रिश्तों में भौतिकता और स्टेटस का बढ़ता प्रभावयह मार्मिक घटना आज के आधुनिक समाज और उस मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है जहाँ रिश्तों की नींव भावनाओं पर नहीं बल्कि भौतिक सुख-सुविधाओं और सरकारी नौकरी जैसे पदों पर टिकी होती है। आज के समय में विवाह जैसे पवित्र बंधन भी कई बार केवल आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा का सौदा बनकर रह गए हैं। जब तक व्यक्ति के पास कोई उच्च पद या सरकारी नौकरी है, तब तक उसके तमाम रिश्ते मजबूत रहते हैं, लेकिन जैसे ही वह उस पद से हटता है या उसकी नौकरी छिन जाती है, तथाकथित अपने भी मुंह मोड़ लेते हैं। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी एक बड़ी बहस छेड़ दी है जहाँ लोग उस युवा के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं और समाज की इस स्वार्थी प्रकृति की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
नेपोटिज्म...VVIP कनेक्शन और 186 पद! लखनऊ की इस कंपनी पर क्यों गरमाई झारखंड की सियासत
झारखंड की राजनीतिक गलियारों में इस समय भर्ती परीक्षाओं और उससे जुड़ी एजेंसियों को लेकर भूचाल आया हुआ है। हाल ही में झारखंड में सरकारी चयन परीक्षाओं को रद्द करने के प्रशासनिक फैसलों के बाद उपजे विवाद के केंद्र में उत्तर प्रदेश के लखनऊ की एक निजी कंपनी टीडीपीएल (TDPL) आ गई है। इस पूरे प्रकरण ने विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी को तेज कर दिया है, जिसमें भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म), वीवीआईपी कनेक्शन और पूर्व की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लग रहे हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद सड़कों पर उतरे युवाओं और अभ्यर्थियों के प्रदर्शन ने इस मुद्दे को राज्य का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक प्रसंग बना दिया है।लखनऊ की कंपनी टीडीपीएल पर क्यों केंद्रित हुई जांच की आंचभर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही झारखंड पुलिस की सीआईडी टीम ने जब गहराई सेड़ताल की, तो इसकी सुई उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक जा पहुंची। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह वही कंपनी है जिसका पुराना रिकॉर्ड प्रशासनिक परीक्षाओं और भर्तियों के संचालन में संदिग्ध रहा है। कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश में विधानसभा और विधान परिषद सचिवालयों में प्रशासनिक पदों की 186 रिक्तियों के लिए परीक्षा आयोजित करने में भी इस फर्म की भूमिका सामने आई थी। झारखंड में जब प्रतियोगी परीक्षाओं की सूचियों और पारदर्शिता पर सवाल उठे, तो इस बाहरी एजेंसी की संलिप्तता ने राजनीतिक दलों को सरकार को घेरने का पूरा मौका दे दिया है।वीवीआईपी कनेक्शन और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोपराजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कैसे रसूखदार लोगों के करीबी और वीवीआईपी कनेक्शन वाले लोग ऐसी कंपनियों को टूल बनाकर टेंडर हासिल करते हैं। झारखंड की सियासत में आरोप लगाए जा रहे हैं कि किस प्रकार से पारदर्शिता को ताक पर रखकर चहेती एजेंसियों को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की खुली छूट दी जाती है। कंपनी के संस्थापकों और प्रमुख लोगों के पुराने मामलों का हवाला देते हुए विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। उनका कहना है कि जिन कंपनियों की साख पहले से ही सवालों के घेरे में रही हो, उन्हें संवेदनशील परीक्षाओं का जिम्मा सौंपना सीधे तौर पर युवाओं के साथ कुठाराघात है।186 पदों के विवाद से लेकर झारखंड तक फैला नेटवर्कयह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब उत्तर प्रदेश के पिछले घोटालों और कार्यप्रणालियों के तार झारखंड की चयन प्रक्रियाओं से जुड़ते नजर आए। जानकारों का मानना है कि वर्ष 2021-22 के दौरान विधान परिषद और विधानसभा की 186 सीटों के लिए हुई परीक्षाओं में जिस तरह की अपारदर्शिता की शिकायतें उठी थीं, वैसी ही सुगबुगाहट झारखंड के परीक्षा तंत्र में भी देखने को मिली। जब झारखंड पुलिस की टीम ने लखनऊ स्थित इस कंपनी के कार्यालय पर छापा मारा और उसे सील किया, तब जाकर इस पूरे सिंडिकेट का दायरा आम जनता और मीडिया के सामने खुलकर आया।युवाओं का दर्द और सड़कों पर उबालइस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा नुकसान राज्य के उन लाखों मेधावी युवाओं का हो रहा है जो सालों-साल कड़ी मेहनत कर परीक्षा पास करते हैं और बाद में पेपर लीक या धांधली के कारण परीक्षा रद्द होने का दर्द झेलते हैं। झारखंड सचिवालय के बाहर और राजधानी रांची की सड़कों पर अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा इस बात की गवाही देता है कि युवा अब व्यवस्था की इस लचर प्रणाली से तंग आ चुके हैं। राजनीतिक दलों के लिए यह मुद्दा चुनावी और नैतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन चुका है, क्योंकि आने वाले दिनों में यह युवाओं की नाराजगी का बड़ा कारण साबित हो सकता है।
क्या आप भी खाते हैं दर्द या ब्लीडिंग रोकने की दवा? नागालैंड सरकार ने इन 3 दवाओं पर जारी की चेतावनी
Ibuprofen, Aceclofenac और Tranexamic Acid को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है. यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रखर गर्ग से जानिए इन दवाओं के संभावित साइड इफेक्ट्स और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
'सिर्फ प्रियंका और मैं ही जानते हैं', पापा को याद कर राहुल का भावुक पोस्ट
राहुल गांधी ने कहा है कि आज पापा के जन्मदिन पर मैं उन्हें मुस्कुराते हुए और उनकी खूबसूरत सोनिया को गर्व से देखते हुए महसूस कर सकता हूं. सोनिया गांधी की ये आत्मकथा 10 नवंबर 2026 को लॉन्च होगी.
परिवारवाद या सरेंडर का दौर? सपा के भीतर सीक्रेट रिपोर्ट पर बढ़ी हलचल, क्या संभल पाएगा कुनबा
उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों समाजवादी पार्टी के भीतर अंदरखाने चल रही रणनीतिक चर्चाओं ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। पार्टी के भीतर हाल ही में आई एक गोपनीय समीक्षा रिपोर्ट और नेताओं की बदलती बयानबाजी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाजवादी पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने पारंपरिक परिवारवादी ढांचे पर टिकी रहेगी या फिर उसे बड़े सियासी बदलावों के आगे आत्मसमर्पण करना पड़ेगा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि पार्टी के भीतर बदलते समीकरण और रणनीतिक फैसले आने वाले चुनावों की दिशा तय करेंगे, जिससे कार्यकर्ताओं से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक की नींद उड़ी हुई है।गोपनीय रिपोर्ट और अंदरूनी खींचतान के मायनेराजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी दल के लिए जमीनी हकीकत का आकलन करने वाली रिपोर्टें उसकी दिशा तय करती हैं। समाजवादी पार्टी के भीतर तैयार की गई इस सीक्रेट रिपोर्ट में संगठन की कमियों, बूथ स्तर की कमजोरियों और विपक्षी दलों की रणनीतियों का बारीकी से विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि केवल पारंपरिक समीकरणों के सहारे चुनावी मैदान में उतरना अब पर्याप्त नहीं होगा। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी मंथन चल रहा है कि टिकट बंटवारे और संगठनात्मक नियुक्तियों में परिवारवाद के आरोपों से कैसे बचा जाए, क्योंकि यह मुद्दा विरोधियों को हमेशा से हमला करने का मौका देता रहा है।समीकरणों को साधने की दोतरफा रणनीतिएक तरफ जहां पार्टी अपने पुराने वोटबैंक को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ नए और तटस्थ मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए लगातार मंथन जारी है। आज तक की रिपोर्ट्स के अनुसार पार्टी के वरिष्ठ नेता जमीनी स्तर पर जाकर विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की नाराजगी को समय रहते दूर किया जा सके। पार्टी नेतृत्व यह भली-भांति समझ रहा है कि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में सफलता हासिल करने के लिए केवल एक वर्ग के भरोसे रहना मुमकिन नहीं है, बल्कि सभी जातियों और वर्गों को साथ लेकर चलने वाला व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा।परिवारवाद के आरोपों और राजनीतिक दबाव का सामनाविपक्षी दल अक्सर समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद और आंतरिक लोकतंत्र की कमी का ठप्पा लगाते रहे हैं। इस सीक्रेट रिपोर्ट में भी इस बात के संकेत दिए गए हैं कि यदि पार्टी को जनता के बीच अपनी साख को और मजबूत करना है, तो उसे पारदर्शी और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना होगा। पार्टी के भीतर यह असमंजस की स्थिति है कि क्या वे अपने पारंपरिक पारिवारिक नियंत्रण वाले स्वरूप पर कायम रहें या फिर व्यापक जनहित और आधुनिक राजनीतिक डिमांड के अनुसार खुद को पूरी तरह बदल लें। यही वह मुख्य दुविधा है जो इस समय सपा के रणनीतिकारों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बनी हुई है।भविष्य की राजनीतिक राह और कार्यकर्ताओं की भूमिकाआने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति किस करवट बैठेगी, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि समाजवादी पार्टी इन अंदरूनी रिपोर्ट्स और चेतावनियों पर कितना गंभीर अमल करती है। पार्टी के सामने अपनी एकजुटता बनाए रखने के साथ-साथ जनता के बीच विश्वास पैदा करने की बड़ी जिम्मेदारी है।
किचन और बाथरूम के नल पर जमे जिद्दी दाग, एल्युमिनियम फॉयल से मिनटों में लौटाएं नई जैसी चमक
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हाल ही में टीवी एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक मजेदार वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे बारिश के मौसम में चाय, पकोड़े, वड़ा पाव और समोसों का लुत्फ उठाती नजर आईं.
Hair Cut कराने से पहले जान लें ये बात, चेहरे पर आएगा ज्यादा अच्छा लुक, बाद में नहीं पड़ेगा पछताना
अगर आप जल्द ही हेयरकट कराने का सोच रहे हैं, तो इमेज कोच और पर्सनल स्टाइलिस्ट शिफा ने कुछ खास टिप्स शेयर की हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-
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पहले प्यार में कम परवाह दिखाना कूल लगता था, लेकिन अब महिलाएं ऐसा साथी चाहती हैं जो अपनी फीलिंग्स छिपाए नहीं और खुलकर प्यार जताए.
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यूपी संस्कृत बोर्ड 2026 के 12वीं टॉपर रजनीश यादव की डिग्रियां फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों के कारण रद्द कर दी गई हैं. नाम और जन्मतिथि बदलकर परीक्षा देने पर पुलिस ने उस पर केस दर्ज किया है. सरकार अब उसे मिले एक लाख रुपये, टैबलेट और मेडल वापस वसूल करेगी.
विधायक जय देवी ने आरोप लगाया कि पूजा के दौरान उनके साथ जातिगत भेदभाव किया गया. विधायक ने आरोप लगाया कि उन्हें मंदिर में अगरबत्ती तक नहीं जलाने दी गई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें नारियल फोड़ने की अनुमति नहीं दी गई.
'इकोनॉमिक टेररिज्म', ट्रंप ने धमकाया तो अराघची ने दिया दो टूक जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान करते हुए उन देशों को भी गंभीर आर्थिक खामियाजा भुगतने की चेतावनी दी है, जो ईरान को आर्थिक मदद या राहत देंगे. ट्रंप ने इसे 'Economic D-Day' बताया. अब ईरान ने इसका जवाब दिया है.
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मुंबई के घाटकोपर में 35 वर्षीय सपना घांजी की मौत को हादसा बताने की कोशिश की गई, लेकिन चोटों, CCTV और कॉल रिकॉर्ड से हत्या का शक गहराया। पुलिस ने सास समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया।
Tata की कारों पर ऑफर की बरसात, Tiago से Punch तक पर डिस्काउंट, 3.5 लाख तक का फायदा
Tata Motors की अगस्त 2026 कारों पर 3.5 लाख रुपये से ज्यादा तक का फायदा मिल रहा है. Curvv EV, Harrier EV, Nexon और Altroz के ऑफर जानें.
IAS ने पहले पढ़ाया, फिर खेला क्रिकेट, DM का ये अंदाज जीत लेगा दिल
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कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजस्थान सरकार के एक फैसले के लिए अपनी टीम को शाबाशी दी, लेकिन यह घोषणा राज्य सरकार ने पिछले महीने ही कर दी थी। तब सीजेपी ने नहीं की थी मुहिम की घोषणा।
UP पुलिस के एनकाउंटर्स की क्या है हकीकत, देखें 'बिहाइंड द सीन्स'
आज के वारदात कार्यक्रम में हम जो फिल्म आपको दिखाने जा रहा हैं, उसे देखने के बाद आप भी इनके लाइट, कैमरा, एक्शन और डायलॉग के फैन हो जाएंगे. तो चलिए चलते हैं यूपी पुलिस की इस सबसे ताजातरीन फिल्म की शूटिंग लोकेशन पर. आफ्टर मुठभेड़ एनकाउंटर स्पॉट का ये सीन इसलिए शूट किया गया ताकि आप सब इसे देख सकें.
1984 के सिख-विरोधी दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 साल की उम्र में निधन हो गया। दंगों से जुड़े मामलों में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सज़ा काट रहे कुमार को सफदरजंग अस्पताल में मृत घोषित किया गया।तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सज़ा काट रहे कुमार को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता को 1 और 2 नवंबर, 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पालम कॉलोनी इलाके में हुई हिंसा के दौरान पाँच लोगों की मौत का ज़िम्मेदार ठहराया था। कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2018 को उन्हें उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। इसे भी पढ़ें: जिस 'वंदे मातरम' को गाकर शहीदों ने चूमा था फांसी का फंदा, वोट बैंक के लिए कांग्रेस कर रही उसी का अपमान हुआ! अमित शाह का तीखा हमला इस सज़ा को चुनौती देने वाली उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। जनवरी में दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दौरान राजधानी के जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हिंसा भड़काने से जुड़े दो मामलों में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था।

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