सीआरपीएफ कमांडेंट 3000 किमी दूर अटैच: बताया खुली गिरफ्तारी, राष्ट्रपति से की डीआईजी विजिलेंस की शिकायत
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कोलकाता में भूपेन दा को 100 दिये जलाकर संगीत प्रेमियों ने दी सबसे अनूठी श्रद्धांजलि, ऐसे किया याद
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आरोपपत्र में अमेरिकी नागरिक पर यूएपीए नहीं: कांग्रेस ने घेरा, पूछा- सरकार ने अमेरिका के दबाव में लिया फैसला?
प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड के आरोपियों का एनकाउंटर, दो को लगी गोली
नरेला प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है. रोहिणी सेक्टर-24 में पुलिस की बदमाशों से मुठभेड़ हुई. एनकाउंटर में दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी है. उन्हें इलाज के लिए एडमिट कराया गया है.
सहारा ग्रुप के 20 लाख लंबित दावों का जल्द होगा निपटारा, सहकारिता मंत्रालय ने दी जानकारी
सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं के रिफंड दावों की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है, जिसमें सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल को दोबारा सक्रिय किया गया है।
बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में SC की सुनवाई आज, भारी पुलिस बल तैनात
Haldwani Banbhoolpura Railway Case High Alert: बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले हल्द्वानी में हाई अलर्ट. पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च, ड्रोन से रखी जा रही नजर. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
चंडीगढ़: नियम तोड़ने पर Uber-Rapido के लाइसेंस 6 महीने के लिए सस्पेंड
Uber और Rapido के कैब एग्रीगेटर लाइसेंस चंडीगढ़ में छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिए हैं. यह कार्रवाई मोटर व्हीकल एग्रीगेटर नियमों के उल्लंघन और ड्राइवरों के बीमा न होने के कारण की गई है. प्रशासन ने कंपनियों को कई नोटिस भेजे और जांच की, लेकिन नियमों का पालन नहीं किया गया.
सुप्रीम कोर्ट में पीयरलेस की बड़ी जीत, भगवती डेवलपर्स की अर्जी खारिज; तीन दशक पुराना विवाद खत्म
सुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भगवती डेवलपर्स की अपील खारिज कर दी है।
खुद कभी नहीं पढ़ पाईं मांगी बाई, बच्चों के भविष्य के लिए दान कर दिए 15 लाख
चित्तौड़गढ़ जिले की 80 वर्षीय मांगी बाई ने अपनी जीवनभर की पूंजी में से 15 लाख रुपए सरकारी विद्यालयों के विकास और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दान किए हैं।
Rae Bareli पहुंचे Rahul Gandhi, व्यापारियों और वकीलों से मिलकर जानी समस्याएं
रायबरेली (उप्र), आठ सितंबर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे के दौरान व्यापारियों, वकीलों, फार्मासिस्टों और अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा और उन्हें हल करने की कोशिश की जाएगी। एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने यह जानकारी दी। कांग्रेस नेता ने बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार शाम को अपने लोकसभा क्षेत्र रायबरेली पहुंचे और इस दौरान उनका बैंड-बाजे और पुष्प वर्षा के बीच भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लखनऊ में चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय विमान तल पर उतरने के बाद रायबरेली के लिए रवाना हुए। इस बार उनका काफिला लखनऊ-हैदरगढ़-लाही बॉर्डर होते हुए महराजगंज बाजार से रायबरेली के लिए निकला। महराजगंज चौराहे पर माहौल उत्साह से भर गया। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। स्थानीय कांग्रेस नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि महराजगंज में गांधी का काफिला कुछ पलों के लिए ही थमा। वह गाड़ी से नीचे नहीं उतरे और गाड़ी में बैठे-बैठे ही उन्होंने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि कोटवा मदनिया के पास गांधी का काफिला कुछ देर के लिए रुका, जहां पहले से खड़े बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने उन्हें अपनी व्यथा बताई। गांधी ने लोगों की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें संबल दिया। उन्होंने बताया कि वहां से महराजगंज होते हुए गांधी का काफिला जिला मुख्यालय पहुंचा। शहर में प्रभु टाउन में गांधी ने व्यापारियों के साथ बैठक की और उनकी समस्याओं को जाना। भुएमऊ अतिथि गृह में प्रतिनिधि मंडलों के साथ बैठक कर समस्याएं सुनीं। गांधी इस दौरान अधिवक्ताओं से भी मिले और उनकी समस्याओं के निदान के लिए भरोसा दिया। प्रभू टाउन स्थिति बच्चू त्रिवेदी के आवास पर व्यापारियों के साथ सांसद राहुल गांधी ने काफी देर तक संवाद किया। ‘सेंट्रल बार एसोसिएशन’ के अध्यक्ष सुरेश चंद यादव, महामंत्री संजय सिंह, सुनील सिंह भदौरिया समेत अन्य ने मुलाकात की। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने बताया कि रायबरेली के प्रभु टाउन में राहुल गांधी के आने पर ‘‘व्यापारियों की आवाज-राहुल गांधी जी के साथ’’ जैसे नारे लगे। गांधी ने स्थानीय व्यापारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान अमेठी से सांसद किशोरी लाल शर्मा भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के हित, सम्मान और अधिकारों के लिए राहुल गांधी सदैव प्रतिबद्ध हैं। कांग्रेस नेता ने बताया कि गांधी के बुधवार शाम लखनऊ होते हुए दिल्ली के लिए रवाना होने का कार्यक्रम है।
छह महीने की वॉर्निंग, नहीं सुधरे तो उबर, रैपिडो के लाइसेंस कैंसिल; क्यों हुआ ऐक्शन
चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के मोटर वाहन नियमों का लगातार उल्लंघन करने के चलते उबर और रैपिडो के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिए हैं। यह निलंबन 8 सितंबर से लागू हो गया।
आज विधानसभा कक्ष संख्या-77 में नेता सदन, विधान परिषद एवं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं वित्त विभाग से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सर्वदलीय बैठक आहूत की गयी जिसमें प्रदेश के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मंत्री उच्च शिक्षा योगेन्द्र उपाध्याय, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) माध्यमिक शिक्षा श्रीमती गुलाब देवी जी, विधान परिषद नेता विरोधी दल श्री लाल बिहारी यादव, माननीय विधान परिषद सदस्य श्री राजबहादुर सिंह चन्देल, डा. आकाश अग्रवाल, श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी, डा. बाबू लाल तिवारी, श्री साकेत मिश्रा, डा. मान सिंह यादव, डा. आशुतोष सिन्हा सहित अन्य माननीय सदस्य सदस्यों के साथ बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा एवं वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों तथा अन्य कार्मिकों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्यों द्वारा अपने सुझाव एवं विचार रखे गए। सदस्यों ने शिक्षकों एवं शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न वर्गों की समस्याओं, उनकी सुविधाओं तथा उनके हितों से जुड़े विषयों पर सरकार के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न वर्गों के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों की भी चर्चा हुई। विशेष रूप से शिक्षामित्रों, अनुदेशकों एवं रसोइयों के साथ-साथ एडेड एवं सेल्फ फाइनेंस संस्थानों, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा का लाभ उपलब्ध कराने के निर्णय का स्वागत किया गया।बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों एवं रसोइयों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किया जा रहा है। सरकार के इस निर्णय को शिक्षा क्षेत्र से जुड़े व्यापक वर्ग के हित में महत्वपूर्ण एवं कल्याणकारी कदम बताते हुए बैठक में उपस्थित सभी माननीय सदस्यों ने प्रदेश सरकार के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। माननीय सदस्यों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए केवल विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना ही आवश्यक नहीं है, बल्कि शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक कार्मिक के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है। इस दिशा में कैशलेस चिकित्सा सुविधा का विस्तार शिक्षकों एवं अन्य कार्मिकों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है। बैठक में शिक्षा विभागों से संबंधित विभिन्न विषयों पर सर्वदलीय विचार-विमर्श को सकारात्मक एवं रचनात्मक बताते हुए सदस्यों ने शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं सुदृढ़ बनाने के लिए आपसी संवाद एवं सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। बैठक में प्राप्त सुझावों एवं विचारों पर संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक कार्यवाही किए जाने के संबंध में भी चर्चा की गई। बैठक के दौरान उपस्थित माननीय सदस्यों एवं विभागीय अधिकारियों के बीच विभिन्न विषयों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में विस्तृत चर्चा हुई। सभी पक्षों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा शिक्षकों एवं शिक्षा से जुड़े कार्मिकों के हितों को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
Gujarat Assembly के मानसून सत्र में पेश होंगे 9 अहम Bills, 11 सितंबर तक चलेगी कार्यवाही
अहमदाबाद, आठ सितंबर गांधीनगर में नौ सितंबर से शुरू हो रहे गुजरात विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार द्वारा चर्चा और मंजूरी के लिए नौ विधेयक पेश किये जाने की उम्मीद है। राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि 11 सितंबर को समाप्त होने वाले इस सत्र के दौरान विधेयक पेश किए जाएंगे और पारित किए जाएंगे तथा सदन में सरकारी कामकाज और कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) द्वारा मंजूर अन्य विषयों पर चर्चा होगी। राज्य के कृषि मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने कहा कि संक्षिप्त सत्र के दौरान सदन में ‘‘करीब नौ विधेयक’’ पेश किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इनमें गुजरात कृषि विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, गुजरात किराया विधेयक और गुजरात पशु आहार, कुक्कुट आहार और खनिज मिश्रण (उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं गुणवत्ता नियंत्रण के विनियमन) विधेयक शामिल हैं। बुधवार को सत्र के पहले दिन हाल के महीनों में दिवंगत हुए पांच पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि देने के साथ कार्यवाही शुरू होगी। इनमें वरिष्ठ विधायक योगेश पटेल और मोहनसिंह राठवा भी शामिल हैं। सरकार ने कहा कि सत्र के दौरान बीएसी द्वारा मंजूर अन्य विषयों पर भी चर्चा होगी। बीएसी सदन में विधेयकों और अन्य विधायी कामकाज के लिए समय-सारिणी तथा समय आवंटन की सिफारिश करने वाली महत्वपूर्ण समिति है।
बेंगलुरु में अमेजन और इंस्टामार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के डार्क स्टोर्स पर छापेमारी कर 1.38 करोड़ रुपये के एक्सपायर और गलत लेबल वाले उत्पाद जब्त किए गए।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2026 के तहत 248 न्यायाधिकरण सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।
Punjab में नशा तस्करी पर सवाल उठाने वाले ग्रामीण की मौत, Harpal Cheema पर FIR की मांग
चंडीगढ़/नयी दिल्ली, आठ सितंबर पंजाब में मादक पदार्थों की समस्या मंगलवार को उस समय एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने एक ग्रामीण की कथित आत्महत्या को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को घेरा। ग्रामीण ने अपनी मौत से पहले के कथित वीडियो में कहा था कि ‘चिट्टे’ की तस्करी बेरोकटोक जारी है और उसने राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से भी इस मुद्दे पर सवाल किया था। संगरूर जिले के दिड़बा निवासी गुलजार सिंह (47) की सोमवार रात कथित तौर पर जहर खाने के बाद मौत हो गई। उसके परिवार ने कहा कि गुलजार ने छह सितंबर को दिड़बा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इलाके में मादक पदार्थों की आपूर्ति को लेकर चीमा से सवाल किया था। गुलजार सिंह का मंगलवार शाम अंतिम संस्कार कर दिया गया। गुलजार सिंह के परिवार की शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। गुलजार सिंह के आखिरी पलों का एक कथित वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह वित्त मंत्री हरपाल चीमा से अपने क्षेत्र में मादक पदार्थों की उपलब्धता को लेकर सवाल करते दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह कथित रूप से कहता है कि उसकी मौत के लिए सरपंच जिम्मेदार होगा। गुलजार ने वीडियो में यह भी स्वीकार किया कि उसका बेटा भी नशा करता है। गुलजार सिंह का भावुक वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) समेत विपक्षी दलों ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को घेरा और हरपाल चीमा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। यह मामला दिल्ली तक पहुंच गया, जहां भाजपा और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा वित्त मंत्री हरपाल चीमा के इस्तीफे की मांग की। दोनों दलों ने आरोप लगाया कि गुलजार सिंह को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया। आम आदमी पार्टी (आप) ने हालांकि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक लाभ के लिए एक मौत का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। गुलजार सिंह की मौत ही राज्य में एकमात्र मुद्दा नहीं है। नशे के मुद्दे पर ‘आप’ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने और काले झंडे दिखाने के आरोप में संगरूर के ही एक अन्य ग्रामीण के कथित हिरासत में उत्पीड़न को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा गया। भाजपा की पंजाब इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर संगरूर के एक ग्रामीण की संदिग्ध आत्महत्या मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करने की मांग की। भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में पार्टी नेताओं सुभाष शर्मा, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, परमिंदर सिंह बराड़ और विनीत जोशी ने राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने दोनों मामलों की जांच कराने की मांग की और इन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग की। पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने नयी दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आत्महत्या के लिए उकसाने के संबंध में मान और चीमा के इस्तीफे की मांग की। भाटिया ने कहा, ‘‘चीमा जब उसके गांव के दौरे पर आए थे तब गुलजार सिंह ने मादक पदार्थों की समस्या का मुद्दा उठाया था। सिंह ने चीमा को बताया कि उसका बेटा ‘चिट्टा’ लेता है और उसने मंत्री से इसकी तस्करी रोकने के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया था।’’भाजपा नेता ने कहा, ‘‘मंत्री के जाने के बाद गांव का सरपंच एवं ‘आप’ नेता गुलजार सिंह के घर गया और उससे अपनी टिप्पणी के लिए मंत्री से माफी मांगने को कहा।’’भाजपा प्रवक्ता ने संवाददाता सम्मेलन में एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि अस्पताल में मौत से पहले गुलजार सिंह ने पूरा घटनाक्रम बताया था और चीमा के सामने मादक पदार्थों का मुद्दा उठाने पर उसे धमकाने वाले लोगों के नाम भी लिए थे। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि पंजाब में सत्तारूढ़ पार्टी ‘‘गैंगस्टर पार्टी’’ बन गई है। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर, 2016 में नाभा जेल से भागने के मुख्य आरोपियों में से एक गुरप्रीत सिंह सेखों के दो दिन पहले ‘आप’ में शामिल होने की ओर इशारा किया। कांग्रेस ने भी भाजपा के सुर में सुर मिलाते हुए ‘आप’ सरकार को घेरा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि गुलजार सिंह पर सच बोलने के लिए माफी मांगने का दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि मृतक पिता ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी मौत के लिए मंत्री चीमा जिम्मेदार हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अगर आप सरकार नशा माफियाओं से नहीं मिली है तो संबंधित मंत्री की तुरंत बर्खास्तगी होनी चाहिए।’’उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सत्ता के अहंकार में आप नेता भूल गए हैं कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है। यह शर्मनाक है कि जो सरकार नशे को पूरी तरह खत्म करने के वादे के साथ आई थी, वह आज सवाल पूछने वालों की बलि ले रही है।’’रमेश ने कुछ दिन पहले पंजाब पुलिस द्वारा एक नौजवान मोहनजीत शेरों को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शेरों ने नशे के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम में विरोध किया था। कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘जनता सब देख रही है। हर जुल्म और अहंकार का हिसाब देना ही होगा।’’कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा, “उन्हें (गुलजार सिंह को) इतना अधिक परेशान किया गया और दबाव बनाया गया कि आखिरकार उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया।”कानून-व्यवस्था की कथित बिगड़ती स्थिति और नशे के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन को चंडीगढ़ पुलिस ने रोक दिया। प्रदर्शनकारी जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि गुलजार को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘दिड़बा के गुलजार सिंह ने हरपाल चीमा से मादक पदार्थ की समस्या के बारे में एक सवाल पूछा था, और आरोप है कि उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया गया।’’उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘उन्होंने एक जनसभा में हरपाल चीमा से उनके बेटे की मादक पदार्थ की लत के बारे में सवाल किया था और पूछा था कि इस समस्या को खत्म करने के लिए क्या किया जा रहा है। इसके बाद, उन्हें कथित तौर पर ऐसी हालत में पहुंचा दिया गया कि उन्हें सल्फास (कीटनाशक) खाने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’‘आप’ ने कहा कि पंजाब में विपक्षी दल बेहद असंवेदनशील तरीके से राजनीति कर रहे हैं और ये राजनीतिक दल हर घटना को सियासी मुद्दा बनाने में जुट जाते हैं। ‘आप’ की पंजाब इकाई के महासचिव बलतेज पन्नू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि पंजाब एक संवेदनशील राज्य है और किसी व्यक्ति की मौत व उसके परिवार के दुख से जुड़े मामलों में राजनीतिक दलों, खासकर विपक्ष से अधिक संवेदनशीलता की उम्मीद की जाती है। ‘आप’ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी मंत्री के पास जाकर अपनी समस्या रखता है तो यह दिखाता है कि उसे उस सरकार पर भरोसा है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, गुलजार सिंह के परिवार में मातम पसरा है। गुलजार के बेटे लखविंदर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि जब पुलिस पूछताछ के लिए उनके घर आई थी, तो आरोपियों ने उनके पिता का अपमान किया और उन पर जातिसूचक टिप्पणियां कीं। प्राथमिकी के मुताबिक, गुलजार के परिवार की शिकायत पर पांच ग्रामीणों -- बलजीत सिंह, सुखदेव सिंह, विक्की सिंह, गोना सिंह और बलजिंदर कौर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी के अनुसार, बलजीत ने सात सितंबर को पंचायत की मौजूदगी में माफी मांगने के लिए गुलजार सिंह को अपने घर बुलाया था। प्राथमिकी में बताया गया कि गुलजार अपमान सहन नहीं कर पाए और उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। लखविंदर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी और पुलिस की कार्रवाई से परिवार संतुष्ट है। गुलजार के भतीजे करणवीर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने चीमा के सामने यह मुद्दा उठाया, तो गांव के कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें कार्यक्रम स्थल से बाहर ले जाकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया, जिसके बाद उन्होंने जहर खा लिया। करणवीर ने कहा, ‘‘हमें न्याय चाहिए।’’कथित वीडियो में गुलजार सिंह को चीमा से उनके इलाके में मादक पदार्थ की उपलब्धता के बारे में सवाल करते हुए सुना जा सकता है। गुलजार को यह कहते हुए सुना गया, ‘‘मेरी मौत के लिए सरपंच जिम्मेदार होंगे। मैंने चिट्टा के बारे में सवाल किया था। मेरा बेटा इसका सेवन करता है। सब कुछ बिकता है।’’उन्होंने कहा, ‘‘चिट्टा बंद नहीं हुआ है।’’गुलजार को पहले संगरूर के सिविल अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटियाला के राजेंद्र अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें वापस संगरूर लाकर वहां के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, और फिर लुधियाना के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां सोमवार रात उनकी मौत हो गई।
पूर्व OFB कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार का ऐतिहासिक फैसला: अब क्या है नया नियम?
देशभर की 41 आयुध निर्माणियों (Ordnance Factories) में कार्यरत लगभग 70 हजार से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए रक्षा मंत्रालय के स्तर पर एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्री समूह (Empowered Group of Ministers - EGoM) ने पूर्व ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) के कर्मचारियों के सेवा नियमों और पेंशन अधिकारों को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। सरकार के ताजा आदेश के अनुसार, पूर्व ओएफबी के जो कर्मचारी नवगठित 7 डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) में शामिल या विलीन (Absorb) नहीं होना चाहते, उन्हें जबरन कंपनी कैडर में नहीं भेजा जाएगा। वे अपनी सेवानिवृत्ति (Superannuation/Retirement) की अंतिम तिथि तक डीम्ड डेपुटेशन (Deemed Deputation) पर बने रहकर अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।यह फैसला उन तमाम कर्मचारियों के लिए जीवनदान की तरह है जो 1 अक्टूबर 2021 को ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण (Corporatisation) के बाद से ही अपने भविष्य, सेवा शर्तों और सबसे बढ़कर अपनी पेंशन सुरक्षा को लेकर गहरी अनिश्चितता में जी रहे थे। अब तक सरकार कर्मचारियों के डेपुटेशन की अवधि को दो-दो साल के अंतराल पर आगे बढ़ा रही थी, जिससे कर्मचारियों के सिर पर हमेशा यह तलवार लटकी रहती थी कि समय सीमा समाप्त होने के बाद उनका क्या होगा। नए फैसले ने इस असमंजस को पूरी तरह खत्म कर दिया है।बिना DPSU विलय के भी सुरक्षित रहेगा केंद्रीय कर्मचारी का दर्जा: जानिए प्रमुख अधिकारसरकार के आधिकारिक आदेश में यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया गया है कि जो कर्मचारी डीपीएसयू में विलय का विकल्प नहीं चुनेंगे, उनकी मूल सेवा शर्तों और कानूनी दर्जे में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा। वे तकनीकी और प्रशासनिक रूप से उसी तरह केंद्र सरकार के नियमित कर्मचारी (Central Government Servants) बने रहेंगे, जैसे वे निगमीकरण से पहले थे।इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले सुरक्षा कवच इस प्रकार हैं:वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि (Pay Scale & Increments): कर्मचारियों का वेतन 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (7th CPC) के पे-मैट्रिक्स और आने वाले समय में लागू होने वाले केंद्रीय वेतन आयोगों के तहत ही निर्धारित होता रहेगा। उन्हें डीपीएसयू के औद्योगिक वेतनमान (IDA) पर जाने की कोई बाध्यता नहीं होगी, बल्कि वे केंद्र सरकार के महंगाई भत्ते (CDA) के पूर्ण हकदार रहेंगे।पदोन्नति और करियर प्रगति (Career Progression & MACP): केंद्रीय सेवा के तय नियमों के अनुसार कर्मचारियों को समयबद्ध पदोन्नति (MACP) का लाभ मिलता रहेगा। डीपीएसयू की आंतरिक कंपनी प्रमोशन पॉलिसी उन कर्मचारियों पर थोपी नहीं जाएगी जो डीम्ड डेपुटेशन पर कार्यरत हैं।चिकित्सा एवं आवास सुविधाएं: कर्मचारी केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) अथवा आयुध निर्माणी अस्पतालों की मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे में बने रहेंगे। इसके अलावा उन्हें डिफेंस पूल या फैक्ट्री एस्टेट के सरकारी क्वार्टर में रहने का वही अधिकार हासिल होगा जो अन्य रक्षा सिविलियन कर्मचारियों को प्राप्त है।छुट्टियां और सेवा शर्तें: अर्जित अवकाश (EL), हाफ पे लीव (HPL), अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मामले पूरी तरह से केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमावली यानी CCS (CCA) Rules के तहत ही संचालित होंगे।पेंशन, ग्रेच्युटी और ओपीएस (OPS) पर क्या पड़ेगा असर? समझिए पूरा कानूनी गणितऑर्डनेंस फैक्ट्री कर्मचारियों के आंदोलन और चिंताओं का सबसे संवेदनशील केंद्र बिंदु पेंशन सुरक्षा ही रहा है। नए दिशा-निर्देशों ने पेंशन से जुड़े तमाम संशयों को पूरी तरह निर्मूल कर दिया है।आधिकारिक प्रावधानों के तहत जो कर्मचारी 1 जनवरी 2004 से पहले सेवा में नियुक्त हुए थे, वे सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स के तहत पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme - OPS) के पात्र बने रहेंगे। डीम्ड डेपुटेशन पर रहते हुए सेवानिवृत्त होने पर उनकी पेंशन का भुगतान सीधे भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से रक्षा लेखा महानियंत्रक (CGDA) के माध्यम से सरकारी खजाने से किया जाएगा। इसमें डीपीएसयू के मुनाफे, घाटे या वित्तीय सक्षमता का कोई दखल नहीं होगा।इसी प्रकार, 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारी केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) अथवा हालिया एकीकृत पेंशन योजना (UPS) के केंद्रीय नियमों के तहत कवर्ड रहेंगे। सेवानिवृत्ति के समय देय ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा, डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) के नियम और पारिवारिक पेंशन (Family Pension) के सभी लाभ भी पूरी तरह केंद्र सरकार के रक्षा सिविलियन कर्मचारियों के अनुरूप ही देय होंगे।7 नई रक्षा कंपनियों में विलय का विकल्प: क्या है कॉमन एब्जॉर्प्शन पैकेज?ईजीओएम ने सभी 7 नवगठित डीपीएसयू—म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVANI), एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWE India), यंत्रा इंडिया लिमिटेड (YIL), ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (TCL), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (GIL)—के लिए एक 'कॉमन एब्जॉर्प्शन पैकेज' को भी स्वीकृति दी है।इस पैकेज के तहत प्रत्येक कर्मचारी को यह स्वतंत्र विकल्प (Option) दिया जाएगा कि वह चाहे तो डीपीएसयू में विधिवत समाहित (Absorb) हो सकता है या फिर डीम्ड डेपुटेशन पर बना रह सकता है। जो कर्मचारी स्वेच्छा से डीपीएसयू में स्थायी विलय चुनेंगे:उन्हें डीपीएसयू के औद्योगिक महंगाई भत्ते (IDA) पैटर्न वाले पे-स्केल, कैफेटेरिया अलाउंस, परफॉर्मेंस रिलेटेड पे (PRP) और कंपनी की कॉर्पोरेट प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मिलेगा।डीपीएसयू में जाने वाले कर्मचारियों की पूर्व की केंद्रीय सेवा को पेंशन गणना, ग्रेच्युटी और लीव बैलेंस के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।हालांकि, जो कर्मचारी डीपीएसयू में विलय का विकल्प नहीं भरेंगे, वे डिफ़ॉल्ट रूप से रिटायरमेंट तक डीम्ड डेपुटेशन पर केंद्र सरकार के कर्मचारी के तौर पर कार्य करते रहेंगे। सरकार ने किसी भी कर्मचारी के लिए विलय को अनिवार्य या बाध्यकारी नहीं बनाया है।कानपुर, जबलपुर, पुणे से लेकर अवादी तक: देश के रक्षा औद्योगिक केंद्रों में राहतइस नीतिगत बदलाव का सीधा और सकारात्मक प्रभाव देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण शहरों पर पड़ा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी (OEF), फील्ड गन फैक्ट्री (FGK), स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (SAF) और ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री में हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ), गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) और ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (OFK) के रक्षा कामगारों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।महाराष्ट्र के पुणे, खड़की (Ammunition Factory Khadki), देहू रोड और नागपुर की अंबाझरी फैक्ट्री; तमिलनाडु के चेन्नई स्थित अवादी हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) और तिरुचिरापल्ली; पश्चिम बंगाल के ईशापुर राइफल फैक्ट्री और दमदम; उत्तराखंड के देहरादून (ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री); तथा तेलंगाना के मेदक ऑर्डनेंस फैक्ट्री जैसे रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों के बीच फैली अनिश्चितता अब हमेशा के लिए दूर हो गई है।कर्मचारी यूनियनों का लंबा संघर्ष और ऐतिहासिक अदालती पृष्ठभूमिगौरतलब है कि वर्ष 2021 में जब केंद्र सरकार ने 220 साल पुराने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के 41 कारखानों को सात अलग-अलग सार्वजनिक उपक्रमों में विभाजित किया था, तब तीनों प्रमुख रक्षा महासंघों—ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF), भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) और इंडियन नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन (INDWF)—ने इसका तीखा विरोध किया था।कर्मचारियों का मुख्य तर्क यह था कि भर्ती के समय उनसे भारत के राष्ट्रपति के नाम पर केंद्रीय सरकारी सेवक के रूप में सेवा अनुबंध किया गया था, जिसे एकतरफा तरीके से कॉरपोरेट ढांचे में नहीं बदला जा सकता। मामला संसद से लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज तक पहुंचा था।अदालतों ने भी सरकार से कर्मचारियों की पेंशन और सेवा सुरक्षा को लेकर ठोस हलफनामा मांगा था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने इन सभी वैधानिक, विधिक और मानवीय पहलुओं की गहन समीक्षा करने के बाद आखिरकार कर्मचारियों के हित में यह स्थायी समाधान लागू किया है।कर्मचारियों के लिए आगे की राह: विकल्प पत्र भरने से पहले क्या सावधानी बरतें?रक्षा उत्पादन विभाग (DDP) जल्द ही सभी 41 निर्माणियों में औपचारिक ऑप्शन फॉर्म (Option Form) जारी करने की अंतिम रूपरेखा अधिसूचित करेगा। कर्मचारियों को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर अपने विकल्प का चयन करना होगा:यदि आपकी प्राथमिकता केंद्रीय सेवा सुरक्षा, सुनिश्चित ओपीएस पेंशन और सरकारी नियमों की निरंतरता है, तो 'डीम्ड डेपुटेशन' पर बने रहना सबसे सुरक्षित मार्ग माना जा रहा है।यदि आप अपेक्षाकृत युवा हैं, डीपीएसयू की भविष्य की वित्तीय वृद्धि, कॉर्पोरेट इंसेंटिव और पीआरपी (PRP) का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आप वित्तीय विश्लेषकों और अपने सेवा रिकॉर्ड की गणना के आधार पर एब्जॉर्प्शन पैकेज का मूल्यांकन कर सकते हैं।किसी भी विकल्प पत्र पर हस्ताक्षर करने से पूर्व अपनी अर्हक सेवा (Qualifying Service), संचित अवकाश और पेंशन नियमों की प्रमाणित जानकारी अपने प्रशासनिक कार्यालय से अवश्य सत्यापित करें।
NCW कार्यशाला में हिंदी को लेकर हंगामा, भाषा समझ न आने पर बाहर निकलीं केरलम की महिला विधायक
केरलम की महिला विधायक राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशाला से बाहर निकल गईं क्योंकि कार्यक्रम मुख्य रूप से हिंदी में था, जिसे वे समझ नहीं पा रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-हिंदी भाषी प्रतिभागियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई और उन्हें हिंदी भाषी विधायकों से विरोध का सामना करना पड़ा।
बैंक लॉकर में रखे करोड़ों के जेवर चोरी होने पर क्या सचमुच पूरा पैसा लौटाता है बैंक?
भारत के अमूमन हर शहर और कस्बे में शादी-ब्याह के पुश्तैनी गहने, सोने के सिक्के और जमीन-जायदाद के अहम दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर को सबसे अभेद्य ठिकाना माना जाता है। आम ग्राहक यह मानकर चलते हैं कि घर की अलमारी के मुकाबले बैंक की कंक्रीट की मजबूत दीवारें, लोहे के भारी दरवाजे और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी पूरी तरह सुरक्षित है। किंतु यदि किसी दिन बैंक में कोई बड़ी डकैती हो जाए, सुरंग बनाकर सेंधमारी हो जाए या बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से आपके लॉकर का ताला तोड़कर जेवर गायब कर दिए जाएं, तो क्या बैंक आपको आभूषणों की पाई-पाई लौटाएगा?अधिकांश खाताधारकों का सहज उत्तर 'हां' होता है, जबकि वास्तविक कानूनी स्थिति और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के आधिकारिक नियम इसके बिल्कुल विपरीत हैं। सीधा और सटीक उत्तर यह है कि बैंक लॉकर से ज्वेलरी चोरी होने पर बैंक आपको आपके गहनों का पूरा बाजार मूल्य कभी नहीं चुकाता। रिज़र्व बैंक के वैधानिक नियमों के तहत बैंक न तो लॉकर के अंदर रखे सामान का बीमा कराते हैं और न ही वे अज्ञात संपत्ति के 100 फीसदी नुकसान की भरपाई करने के लिए कानूनन बाध्य हैं। इस पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक का एक खास फॉर्मूला काम करता है, जिसे हर लॉकर धारक को बारीकी से समझना आवश्यक है।आरबीआई का 100 गुना मुआवजा फॉर्मूला: चोरी होने पर बैंक से कितना पैसा मिलेगा?सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्देशों के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंक लॉकर प्रबंधन को लेकर संशोधित दिशानिर्देश लागू किए थे। इन नियमों के तहत बैंकों को अपनी प्राथमिक सुरक्षा जिम्मेदारियों से बचने की छूट नहीं है। यदि बैंक परिसर के भीतर चोरी, डकैती, सेंधमारी, आग लगने, भवन ढहने या बैंक कर्मचारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी व घोर लापरवाही के कारण लॉकर में रखे सामान को क्षति पहुंचती है, तो बैंक अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकता।हालांकि, यहां बैंक की आर्थिक देनदारी असीमित नहीं होती। आरबीआई के नियमों के अनुसार, ऐसी किसी भी अप्रिय घटना में बैंक की अधिकतम देनदारी उस लॉकर के मौजूदा वार्षिक किराए के केवल 100 गुना (100 times annual locker rent) तक ही सीमित होगी।इसे एक आसान गणितीय उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए आप दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना या जयपुर की किसी स्थानीय बैंक शाखा में 2,500 रुपये सालाना किराए वाला मध्यम आकार का लॉकर इस्तेमाल करते हैं। यदि उस शाखा में भीषण चोरी हो जाती है और आपके लॉकर से 50 लाख रुपये के सोने-हीरे के जेवर गायब हो जाते हैं, तो बैंक कानूनी रूप से आपको केवल:2,500 100 = 2,50,000 रुपये (ढाई लाख रुपये)का ही मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है। बाकी बचे 47.5 लाख रुपये का सीधा नुकसान पूरी तरह से ग्राहक का अपना होगा। इसी प्रकार, यदि आपके लॉकर का वार्षिक किराया 1,500 रुपये है, तो बैंक अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही देगा, भले ही लॉकर के भीतर 5 करोड़ रुपये का सोना क्यों न रखा गया हो। 100 गुना किराए की सीमा से 1 रुपया भी अधिक देने के लिए बैंक बाध्य नहीं है।प्राकृतिक आपदा या 'एक्ट ऑफ गॉड' की स्थिति में बैंक की देनदारी शून्ययदि चोरी या नुकसान की वजह कोई प्राकृतिक विपदा हो, तो बैंक की जिम्मेदारी शून्य हो जाती है। आरबीआई की आधिकारिक नियमावली में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि 'एक्ट ऑफ गॉड' (Act of God) की श्रेणी में आने वाली आपदाओं के लिए बैंक किसी भी प्रकार का हर्जाना देने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।यदि भीषण भूकंप, बाढ़, आकाशीय बिजली गिरने, चक्रवाती तूफान, बादल फटने या किसी अप्रत्याशित सैन्य संघर्ष व दंगों के कारण बैंक की शाखा क्षतिग्रस्त हो जाती है और स्ट्रॉन्ग रूम में पानी भरने या मलबा गिरने से लॉकर नष्ट हो जाता है, तो बैंक ग्राहक को एक भी रुपया मुआवजा नहीं देगा। नियम यह स्पष्ट करता है कि यदि बैंक ने अपने परिसर की सुरक्षा के लिए सामान्य और वाजिब एहतियाती उपाय किए थे, तो प्राकृतिक व दैवीय आपदाओं से हुए नुकसान का सारा वित्तीय जोखिम स्वयं लॉकर धारक का ही माना जाएगा।बैंक और ग्राहक का कानूनी रिश्ता: क्यों बैंक नहीं जानता कि लॉकर में क्या रखा है?अक्सर ग्राहकों के मन में यह सवाल उठता है कि जब बैंक होम लोन या कार लोन देते समय संपत्ति का बीमा अनिवार्य रूप से कराते हैं, तो वे लॉकर में रखे जेवरात का बीमा खुद क्यों नहीं करते? इसके पीछे बैंकिंग विधि और ग्राहक की वित्तीय गोपनीयता का मूलभूत सिद्धांत काम करता है।कानूनी रूप से बैंक और लॉकर धारक के बीच का संबंध 'मालिक और किरायेदार' (Lessor and Lessee) जैसा होता है, न कि 'अमानतदार और अमानत रखने वाले' (Bailor and Bailee) जैसा। जब आप बैंक लॉकर में कोई सामान रखते हैं, तो बैंक के किसी भी अधिकारी को यह देखने या पूछने का कानूनी अधिकार नहीं होता कि आपने अंदर क्या रखा है। लॉकर की दो अलग-अलग चाबियां होती हैं—एक मास्टर की (Master Key) जो बैंक मैनेजर के पास होती है और दूसरी कस्टमर की (Customer Key) जो केवल ग्राहक के पास रहती है। दोनों चाबियों के एक साथ लगने पर ही लॉकर खुलता है, जिसके बाद बैंक कर्मचारी केबिन से बाहर चला जाता है।चूंकि बैंक के पास लॉकर में रखी सामग्री की कोई आधिकारिक सूची (इनवेंटरी) या प्रमाणित मूल्य दर्ज नहीं होता, इसलिए कोई भी साधारण बीमा कंपनी बिना पूर्व-सत्यापन और घोषित मूल्य के अज्ञात संपत्ति का सामूहिक बीमा नहीं कर सकती। बैंक केवल सुरक्षा कक्ष की जगह किराए पर देता है, वह अंदर रखी सामग्री का कानूनी संरक्षक नहीं बनता।अपने कीमती जेवरातों का 100% रिफंड सुनिश्चित करने के अचूक तरीकेयदि आप बैंक लॉकर में रखे अपने सोने-चांदी के गहनों को शत-प्रतिशत वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करना चाहते हैं, तो बैंक के भरोसे रहने के बजाय आपको स्वयं सक्रिय वित्तीय कदम उठाने होंगे:स्टैंडअलोन बैंक लॉकर इंश्योरेंस पॉलिसी लें: देश की अग्रणी गैर-जीवन बीमा कंपनियां (जनरल इंश्योरेंस कंपनियां) अब विशेष 'बैंक लॉकर इंश्योरेंस कवर' या होम इंश्योरेंस के तहत 'लॉकर वैल्युएबल्स ऐड-ऑन' उपलब्ध कराती हैं। इस पॉलिसी को लेते समय आपको किसी सरकारी मान्यता प्राप्त वैल्यूअर (Government Approved Valuer) से अपने आभूषणों का वैल्यूएशन सर्टिफिकेट और हॉलमार्क बिल संलग्न करना होता है। यदि आपने 40 लाख या 60 लाख रुपये का सम-इंश्योर्ड लिया है, तो किसी भी अनहोनी की स्थिति में बीमा कंपनी मूल्यांकित राशि का पूर्ण भुगतान करती है।हॉलमार्क बिल और डिजिटल फोटोग्राफ सुरक्षित रखें: जब भी आप नए जेवर खरीदें, उनके पक्के जीएसटी इनवॉइस, हॉलमार्किंग यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर और स्पष्ट रंगीन तस्वीरें अपने पास किसी सुरक्षित क्लाउड ड्राइव या पेन ड्राइव में अलग से रखें।लॉकर इनवेंटरी डायरी बनाएं: जब भी आप लॉकर में कोई नया आभूषण रखें या घर के किसी समारोह के लिए निकालें, तो अपनी निजी डायरी में तारीख, आभूषण का प्रकार और वजन अनिवार्य रूप से दर्ज करें। यह दस्तावेज किसी भी विवाद की स्थिति में पुलिस विवेचना और उपभोक्ता अदालत के समक्ष आपके दावे को पुख्ता आधार प्रदान करता है।नए आरबीआई नियमों से ग्राहकों को मिले कड़े सुरक्षा अधिकारबैंकों की मनमानी रोकने और सुरक्षा तंत्र को पारदर्शी बनाने के लिए रिज़र्व बैंक ने प्रत्येक सार्वजनिक, निजी और ग्रामीण बैंक शाखा के लिए कई अनिवार्य परिचालन मानक तय किए हैं:तात्कालिक एसएमएस और ईमेल सूचना: जब भी आपका लॉकर खोला या बंद किया जाएगा, बैंक को उसी क्षण आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल पते पर एसएमएस अलर्ट भेजना अनिवार्य है। यदि आपने लॉकर नहीं खोला है और संदेश प्राप्त होता है, तो तुरंत बैंक और पुलिस को सतर्क किया जा सकता है।180 दिनों की सीसीटीवी फुटेज अनिवार्य: बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम और लॉकर एरिया के प्रवेश व निकास द्वारों पर उच्च क्षमता वाले नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे लगे होना अनिवार्य है। बैंक प्रबंधन को इस सीसीटीवी फुटेज का बैकअप कम से कम 180 दिनों (6 महीने) तक सुरक्षित रखना ही होगा, ताकि किसी भी चोरी या छेड़छाड़ की जांच में साक्ष्य नष्ट न किए जा सकें।पारदर्शी वेटिंग लिस्ट: कोई भी बैंक शाखा किसी स्थानीय नागरिक को मनमाने ढंग से यह कहकर लॉकर देने से मना नहीं कर सकती कि लॉकर खाली नहीं हैं। प्रत्येक शाखा को लॉकर आवंटन के लिए एक पारदर्शी प्रतीक्षा सूची (Waitlist) मेंटेन करनी होती है और ग्राहक को उसका टोकन नंबर जारी करना होता है।यदि लॉकर से जेवर चोरी हो जाएं तो तुरंत क्या कानूनी कार्रवाई करें?यदि दुर्भाग्यवश आपकी बैंक शाखा में डकैती, सेंधमारी या लॉकर कटने की घटना घटती है, तो घबराने के बजाय तत्काल ठोस कानूनी प्रक्रिया अपनाएं:सर्वप्रथम शाखा प्रबंधक को तत्काल औपचारिक लिखित शिकायत सौंपें और उस पत्र पर बैंक की मुहर व हस्ताक्षर सहित रिसीविंग कॉपी अनिवार्य रूप से अपने पास रखें।संबंधित स्थानीय पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं और एफआईआर की प्रमाणित प्रति प्राप्त करें।बैंक प्रबंधन से घटना के दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, स्ट्रॉन्ग रूम लॉग-बुक और लॉकर एक्सेस रजिस्टर को सुरक्षित रखने का औपचारिक कानूनी नोटिस जारी करवाएं।यदि बैंक अपनी सुरक्षा खामी स्वीकार करने में आनाकानी करता है या 100 गुना किराया मुआवजा देने में टालमटोल करता है, तो आप 30 दिनों के भीतर आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।इसके अतिरिक्त, सेवा में घोर लापरवाही (Deficiency in Service) के आधार पर जिला या राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (Consumer Forum) में परिवाद दाखिल किया जा सकता है। भारतीय उपभोक्ता अदालतों ने कई मामलों में बैंक की सुरक्षा खामी उजागर होने पर पीड़ितों को 100 गुना की सीमा से परे जाकर वास्तविक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना का भारी हर्जाना चुकाने का ऐतिहासिक फैसला भी सुनाया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का परीक्षण अगले साल मई-जून में शुरू होगा और इसके 2-4 महीने बाद यह आम जनता के लिए उपलब्ध होगी।
नौकरीपेशा और स्वरोजगार से जुड़े हर भारतीय के मन में एक सवाल हमेशा रहता है कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने एक तय इनकम कैसे आएगी। पारंपरिक रूप से लोग बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) या सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) की तरफ रुख करते हैं। गिरती ब्याज दरों और बढ़ती महंगाई के दौर में फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला वास्तविक रिटर्न महंगाई को मात देने में नाकाम साबित हो रहा है। ऐसे में सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान यानी SWP एक आधुनिक, लचीला और टैक्स-फ्रेंडली विकल्प बनकर उभरा है।सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान म्यूचुअल फंड का एक ऐसा फीचर है जो निवेशक को अपनी जमा पूंजी से एक निश्चित अंतराल पर तय रकम निकालने की सुविधा देता है। यह रकम मासिक, तिमाही या वार्षिक आधार पर सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट होती रहती है। सबसे बड़ी खूबी यह है कि आप जितनी रकम निकालते हैं, केवल उतने यूनिट्स बेचे जाते हैं, जबकि शेष यूनिट्स बाजार में निवेशित रहकर कंपाउंडिंग का लाभ उठाते रहते हैं।₹1 करोड़ के फंड पर ₹1 लाख महीना: कैसे काम करता है 10 साल का गणित?यदि किसी निवेशक के पास रिटायरमेंट, प्रॉपर्टी बिक्री या ईपीएफ-ग्रेच्युटी से ₹1 करोड़ का एकमुश्त कॉर्पस तैयार हुआ है, तो वह हर महीने ₹1 लाख यानी सालाना ₹12 लाख की निकासी की योजना बना सकता है। आम तौर पर ₹1 करोड़ पर सालाना ₹12 लाख की निकासी 12% का विड्रॉल रेट बनाती है। पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम में 12% की निकासी का मतलब है कि मूल पूंजी कुछ ही वर्षों में समाप्त हो जाएगी, लेकिन सही एसेट एलोकेशन वाले म्यूचुअल फंड में तस्वीर अलग हो सकती है।यदि आपका ₹1 करोड़ का फंड हाइब्रिड या डायवर्सिफाइड इक्विटी ओरिएंटेड फंड में निवेशित है और वह सालाना औसतन 12% से 13% का रिटर्न देने में सक्षम रहता है, तो पोर्टफोलियो का रिटर्न आपकी निकासी की भरपाई करता रहेगा। उदाहरण के तौर पर, 12% वार्षिक अनुमानित रिटर्न की स्थिति में ₹1 करोड़ का फंड हर साल लगभग ₹12 लाख की संपत्ति उत्पन्न करेगा, जिसे आप ₹1 लाख महीने की पेंशन के रूप में निकाल लेंगे। इसके चलते 10 साल तक हर महीने ₹1 लाख (कुल ₹1.20 करोड़) निकालने के बावजूद आपका मूल ₹1 करोड़ का कॉपर्स सुरक्षित या उससे अधिक बना रह सकता है।बैंक एफडी बनाम म्यूचुअल फंड एसडब्ल्यूपी: टैक्स और वेल्थ प्रोटेक्शन का अंतरबैंक एफडी में मिलने वाला संपूर्ण ब्याज निवेशक के इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है, यानी 30% स्लैब वाले निवेशक का शुद्ध रिटर्न बेहद कम हो जाता है। इसके विपरीत, एसडब्ल्यूपी के तहत की जाने वाली प्रत्येक निकासी में मूलधन (Capital) और पूंजीगत लाभ (Capital Gain) दोनों का आनुपातिक हिस्सा शामिल होता है। टैक्स केवल लाभ वाले हिस्से पर ही लागू होता है, पूरी निकासी पर नहीं।इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स में 12 महीने से अधिक होल्डिंग पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) लागू होता है। इसमें एक वित्त वर्ष के दौरान ₹1.25 लाख तक का पूंजीगत लाभ पूरी तरह कर-मुक्त होता है और उससे अधिक के लाभ पर केवल 12.5% की रियायती दर से टैक्स लगता है। यही कारण है कि उच्च टैक्स ब्रैकेट में आने वाले निवेशकों के लिए एसडब्ल्यूपी बैंक एफडी की तुलना में इन-हैंड रिटर्न को काफी बढ़ा देता है।बाजार का उतार-चढ़ाव और 8% का सुरक्षित विड्रॉल नियमशेयर बाजार में उतार-चढ़ाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। 12% का फ्लैट विड्रॉल रेट केवल तभी आदर्श रूप से काम करता है जब बाजार में लगातार सकारात्मक रिटर्न मिले। यदि निवेश के शुरुआती 2-3 वर्षों में ही बाजार में भारी गिरावट आती है, तो इसे 'सीक्वेंस ऑफ रिटर्न्स रिस्क' कहा जाता है। मंदी के दौर में ऊंची निकासी करने से यूनिट्स तेजी से घटते हैं, जिससे पोर्टफोलियो की रिकवरी क्षमता प्रभावित हो सकती है।फाइनेंशियल प्लानर्स हमेशा यह सलाह देते हैं कि अत्यधिक आक्रामक निकासी दर रखने के बजाय कंजर्वेटिव या बैलेंस्ड विड्रॉल रेट अपनाना चाहिए। ₹1 करोड़ के कॉर्पस पर ₹65,000 से ₹75,000 (लगभग 8% से 9%) प्रति माह की निकासी दीर्घकालिक नजरिए से जोखिम-मुक्त मानी जाती है। इससे न केवल हर महीने सम्मानजनक पेंशन मिलती रहती है, बल्कि समय के साथ ₹1 करोड़ का मूल फंड बढ़कर ₹1.5 करोड़ या ₹2 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो भविष्य की महंगाई से लड़ने में मदद करता है।सुरक्षित एसडब्ल्यूपी के लिए सही फंड का चयन और निवेश रणनीति₹1 करोड़ का सुरक्षित एसडब्ल्यूपी प्लान तैयार करने के लिए पूरा पैसा कभी भी स्मॉलकैप या बहुत ज्यादा वोलेटाइल सेक्टोरल फंड में नहीं लगाना चाहिए। समझदारी भरा कदम यह है कि आप बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAF), मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड या लार्ज-कैप ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड्स का चयन करें। ये फंड्स इक्विटी, डेट और गोल्ड के बीच बाजार की वैल्यूएशन के हिसाब से ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग करते रहते हैं, जिससे डाउनसाइड रिस्क सीमित हो जाता है।एक व्यावहारिक रणनीति यह भी है कि निवेशक पहले 1 से 2 साल के खर्च के बराबर की राशि (लगभग ₹15-20 लाख) लिक्विड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म डेट फंड में रखें और बाकी ₹80-85 लाख हाइब्रिड फंड में निवेश करें। जब बाजार में तेजी हो तब हाइब्रिड फंड से लाभ बुक करें और मंदी के समय डेट बफर से निकासी करें। इस अनुशासित रणनीति के जरिए भारतीय निवेशक बिना किसी आर्थिक तनाव के अपने सुनहरे रिटायरमेंट जीवन का आनंद ले सकते हैं।
मध्यमवर्गीय परिवारों में वित्तीय जिम्मेदारियां हमेशा एक जटिल चक्रव्यूह की तरह होती हैं। जब आपके कंधों पर हर महीने कटने वाली भारी-भरकम होम लोन की ईएमआई, बच्चों के स्कूल और ट्यूशन की लगातार बढ़ती फीस तथा बुजुर्ग माता-पिता की नियमित स्वास्थ्य देखभाल का जिम्मा हो, तो जीवन की गाड़ी एक सख्त बजट पर चलती है। ऐसी स्थिति में अचानक नौकरी छूट जाने, वेतन में कटौती होने या परिवार में कोई अप्रत्याशित मेडिकल संकट आने पर पूरा घरेलू बजट चरमरा सकता है। वित्तीय सलाहकार अक्सर 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखने की सामान्य सलाह देते हैं, लेकिन जहां आश्रितों की संख्या अधिक हो और कर्ज का बोझ सिर पर हो, वहां यह पारंपरिक फॉर्मूला पूरी तरह विफल साबित होता है। ऐसे संवेदनशील पारिवारिक ढांचे में कम से कम 9 से 12 महीने के अनिवार्य खर्चों का लिक्विड फंड होना अनिवार्य है।इमरजेंसी फंड की गणना कुल वेतन पर नहीं, केवल अनिवार्य खर्चों पर करेंअक्सर लोग यह गलती करते हैं कि वे अपनी कुल इन-हैंड सैलरी को आधार मानकर इमरजेंसी फंड का साइज तय करने लगते हैं। वित्तीय योजना का मूल नियम यह है कि आपातकालीन निधि केवल उन अपरिहार्य खर्चों की सुरक्षा के लिए होती है, जिन्हें किसी भी विषम परिस्थिति में टाला या रोका नहीं जा सकता। जब किसी व्यक्ति की आय का नियमित स्रोत बंद होता है, तो सबसे पहले गैर-जरूरी खर्च जैसे बाहर खाना, वीकेंड ट्रिप्स, ओटीटी सब्सक्रिप्शन, कपड़े और गैजेट्स की खरीदारी अपने आप बंद हो जाती है। इसलिए फंड का आकार तय करते समय हमेशा अपनी बुनियादी देनदारियों की सूची बनाएं। इसमें होम लोन की मासिक किस्त, फ्लैट या मकान का मेंटेनेंस, बिजली, पानी, एलपीजी, राशन और ग्रॉसरी, बच्चों की स्कूल और ट्यूशन फीस, माता-पिता की आवश्यक दवाइयों का बिल और बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम शामिल होते हैं।सटीक गणितीय मॉडल: एक लाख रुपये मासिक खर्च पर कितना हो फंड का आकारमान लीजिए कि एक कामकाजी परिवार का कुल अनिवार्य मासिक खर्च लगभग ₹1,10,000 है। इसमें ₹40,000 की होम लोन ईएमआई, ₹30,000 का घरेलू राशन व बुनियादी बिल, ₹15,000 बच्चों की पढ़ाई का खर्च, ₹15,000 बुजुर्ग माता-पिता की दवाइयां व केयरटेकर खर्च और ₹10,000 टर्म व हेल्थ इंश्योरेंस का मासिक प्रोविजन शामिल है। यदि इस परिवार में कमाने वाला केवल एक सदस्य है और आश्रितों की संख्या तीन या उससे अधिक है, तो 6 महीने का बफर ₹6.60 लाख बनता है, जो ऐसी मंदी में बहुत जल्दी खत्म हो सकता है जब नई नौकरी पाने में 8 से 10 महीने का समय लग जाए। इसके विपरीत, 9 महीने का सुरक्षा चक्र ₹9,90,000 का होगा और 12 महीने का आदर्श सुरक्षा कवच ₹13,20,000 का तैयार होगा। यह ₹13.20 लाख का फंड परिवार को एक साल तक बिना किसी कर्ज या प्रॉपर्टी बेचे हर दबाव से सुरक्षित रखने का आत्मविश्वास देता है।पूरे पैसे को एक बचत खाते में रखने की भूल न करें: अपनाएं तीन-स्तरीय रणनीतिदस से तेरह लाख रुपये की बड़ी रकम को साधारण बैंक सेविंग्स अकाउंट में छोड़ देना वित्तीय रूप से नुकसानदेह है, क्योंकि 2.5 से 3 प्रतिशत का सामान्य ब्याज महंगाई दर का मुकाबला नहीं कर पाता। इसके लिए धन को तीन अलग-अलग बकेट में विभाजित करना सबसे व्यावहारिक माना जाता है। पहला बकेट तत्काल नकदी का होना चाहिए, जिसमें कुल फंड का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 2 से 2.5 लाख रुपये बैंक खाते और ऑटो स्वीप-इन फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे जाएं, जिसे आधी रात को भी एटीएम या यूपीआई से निकाला जा सके। दूसरा बकेट अल्पकालिक सुरक्षा का हो, जिसमें लगभग 40 प्रतिशत राशि अलग-अलग अवधि की ऐसी बैंक एफडी में रखी जाए जिसे मोबाइल बैंकिंग के जरिए बिना किसी पेनल्टी के मिनटों में तोड़ा जा सके। तीसरा बकेट शेष 40 प्रतिशत राशि का हो, जिसे डेट लिक्विड म्यूचुअल फंड या अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म फंड में पार्क किया जाए, जहां से पैसा निकालने पर एक कार्यदिवस के भीतर बैंक खाते में ट्रांसफर आ जाता है और रिटर्न भी बेहतर मिलता है।होम लोन ओवरड्राफ्ट खाता: ब्याज बचाने और लिक्विडिटी बनाए रखने का सबसे स्मार्ट तरीकायदि आपका होम लोन भारतीय स्टेट बैंक के मैक्सगेन (Maxgain) या किसी अन्य बैंक की होम लोन ओवरड्राफ्ट सुविधा के अंतर्गत चल रहा है, तो आपके लिए इमरजेंसी फंड का प्रबंधन बेहद आसान हो जाता है। आप अपने इमरजेंसी फंड का एक बड़ा हिस्सा (जैसे 5 से 7 लाख रुपये) सीधे अपने होम लोन ओवरड्राफ्ट खाते में सरप्लस बैलेंस के रूप में जमा रख सकते हैं। इसका दोहरा लाभ मिलता है। पहला, जितने दिन यह अतिरिक्त पैसा खाते में रहेगा, बैंक आपके मूलधन पर उतने हिस्से का ब्याज काटना बंद कर देगा, जिससे आपके लाखों रुपये के ब्याज की सीधी बचत होगी और लोन की अवधि तेजी से घटेगी। दूसरा, यह पूरी तरह लिक्विड फंड की तरह काम करता है, जिसे चेकबुक, नेट बैंकिंग या एटीएम कार्ड के जरिए जरूरत पड़ने पर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कभी भी तुरंत निकाला जा सकता है।बुजुर्ग माता-पिता के लिए अलग से मेडिकल बफर बनाना क्यों है सबसे जरूरी?वरिष्ठ नागरिकों के मामले में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं कभी भी अचानक बड़ी रकम की मांग कर सकती हैं। 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस या सामान्य फैमिली फ्लोटर पॉलिसियों में अक्सर को-पेमेंट क्लॉज, रूम रेंट कैपिंग और गंभीर बीमारियों पर सब-लिमिट लागू होती है। यदि अस्पताल का बिल ₹8 लाख आता है और इंश्योरेंस कंपनी केवल ₹5 लाख पास करती है, तो बाकी ₹3 लाख का भुगतान जेब से करना पड़ता है। यदि आपके पास अलग से ₹3 से ₹5 लाख का समर्पित मेडिकल बफर नहीं होगा, तो आपका पूरा गृहस्थी का इमरजेंसी फंड एक ही अस्पताल के बिल में समाप्त हो जाएगा और होम लोन की किश्तें डिफॉल्ट होने की कगार पर पहुंच जाएंगी। इसलिए माता-पिता के लिए अलग सीनियर सिटीजन हेल्थ पॉलिसी के साथ एक स्टैंडबाय हेल्थ रिजर्व जरूर तैयार रखें।पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और लोन कवर के बिना अधूरा है हर सुरक्षा चक्रइमरजेंसी फंड केवल आय रुकने की स्थिति का समाधान है, लेकिन परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य के साथ किसी अप्रिय अनहोनी की स्थिति में यह फंड लंबे समय तक सहारा नहीं दे सकता। इसलिए जब तक होम लोन चल रहा है और बच्चे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते, परिवार के कमाने वाले व्यक्ति के पास उसकी सालाना आय का कम से कम 15 से 20 गुना टर्म इंश्योरेंस कवर होना कानूनी और वित्तीय दृष्टि से अनिवार्य है। इसके साथ ही कई वित्तीय संस्थान होम लोन प्रोटेक्शन प्लान (HLPP) की पेशकश करते हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि मुख्य कर्जदार की असमय मृत्यु होने पर बीमा कंपनी सीधे बैंक का बकाया लोन चुकता कर देती है, जिससे मकान की छत परिवार के सिर पर सुरक्षित बनी रहती है और बच्चों की पढ़ाई या बुजुर्गों की परवरिश पर आंच नहीं आती।शून्य से शुरुआत करने वाले कैसे तैयार करें यह मजबूत सुरक्षा कवच?यदि आज आपके पास कोई ठोस बचत नहीं है और आप हर महीने केवल ईएमआई और खर्चों के बीच तालमेल बैठा रहे हैं, तो एक साथ 10 या 12 लाख रुपये का फंड बनाना असंभव लग सकता है। लेकिन इसे लक्ष्य-आधारित एसआईपी (SIP) की तरह छोटे हिस्सों में बांटा जा सकता है। सबसे पहले एक महीने के खर्च यानी ₹1 लाख का मिनी-फंड तैयार करने का लक्ष्य बनाएं। इसके लिए हर महीने अपनी आय में से 10 से 15 प्रतिशत की राशि किसी रिकरिंग डिपॉजिट (RD) या लिक्विड फंड में ऑटो-डेबिट कराएं। मिलने वाले वार्षिक बोनस, टैक्स रिफंड, इंसेंटिव या किसी भी अप्रत्याशित आय को सीधे इमरजेंसी फंड बकेट में डालें। जैसे ही पहले 3 महीने का खर्च सुरक्षित हो जाए, अगले चरण में 6 महीने और फिर धीरे-धीरे 24 से 36 महीनों के भीतर पूरे एक वर्ष का पूर्ण सुरक्षा फंड तैयार करें। यह अनुशासन आपके परिवार को वित्तीय स्वतंत्रता और अटूट मानसिक शांति प्रदान करता है।
Cauvery Dispute: Tamil Nadu को पानी देने के निर्देश के खिलाफ Supreme Court जाएगी कर्नाटक सरकार
बेंगलुरु, आठ सितंबर कर्नाटक सरकार कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के एक निर्देश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिसमें तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया है। कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चलुवरायस्वामी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कावेरी जल विनियमन समिति के उक्त आदेश को बेतुका बताया और इस पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में कावेरी नदी घाटी में पानी की आवक काफी कम हो गई है, जिससे कर्नाटक मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा है। कावेरी जल विनियमन समिति ने मंगलवार को सिफारिश की कि कर्नाटक 15 दिन तक तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करे। इसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इस निर्देश को मंजूरी दे दी। कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देशों के बाद और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक से पहले चलुवरायस्वामी ने पत्रकारों से कहा, हमारे अधिकारियों ने समिति की बैठक में जमीनी स्थिति के बारे में मजबूती से अपनी बात रखी। तमिलनाडु ने 17,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी। लेकिन पिछले एक सप्ताह में कावेरी बेसिन में पानी की आवक काफी कम हो गई है। ऐसी संकट की स्थिति में हमारे लिए 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ना भी संभव नहीं है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं कि बिल्कुल पानी न छोड़ा जाए। मंत्री ने दिल्ली से फैसले लेने वाली इन संस्थाओं के काम करने के तरीके की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं जमीनी स्थिति को समझने में सक्षम नहीं हैं। चलुवरायस्वामी ने कहा कि सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय जाने का फैसला करने से पहले सरकार मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। उन्होंने कहा, ...हम मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। सरकार उच्चतम न्यायालय में कल ही याचिका दायर करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अग्रणी कंपनी OpenAI ने अपने चैटबॉट ChatGPT के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है। अब ChatGPT केवल सामान्य और रोबोटिक अंदाज में उत्तर नहीं देगा, बल्कि यूजर के निजी राइटिंग स्टाइल (Personal Writing Style) को सीखकर उसी अंदाज में कंटेंट, ईमेल और मैसेज तैयार करेगा। अक्सर प्रोफेशनल्स और क्रिएटर्स को शिकायत रहती थी कि एआई द्वारा लिखे गए ड्राफ्ट बहुत किताबी या औपचारिक लगते हैं और उन्हें बार-बार अपनी टोन समझाने के लिए लंबे प्रॉम्प्ट देने पड़ते हैं। इस नए फीचर के आने से चैटबॉट आपके लिखने के अनूठे लहजे, पसंदीदा वाक्यांशों और वाक्य संरचना को पहचानकर स्वाभाविक रूप से आपके जैसा ही टेक्स्ट जनरेट करने में सक्षम हो गया है।कैसे काम करता है ChatGPT का यह पर्सनल राइटिंग स्टाइल सिस्टम?OpenAI के अनुसार, यह फीचर एडवांस्ड नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और कनेक्टेड ऐप्स इंटीग्रेशन की मदद से काम करता है। इसके तहत एआई मॉडल यूजर के कार्यस्थल या दैनिक संचार से जुड़े कनेक्टेड टूल्स जैसे Gmail, Google Drive, Slack और SharePoint के कंटेंट का विश्लेषण करता है। इस प्रक्रिया में सिस्टम यह बारीकी से समझता है कि आप बातचीत में किन शब्दों का चुनाव ज्यादा करते हैं, आपका साइन-ऑफ (Sign-off) करने का तरीका क्या है, आप वाक्यों की लंबाई कितनी रखते हैं और किस तरह का विराम-चिह्न या कैपिटलाइजेशन इस्तेमाल करते हैं। इन तमाम भाषाई पैटर्न को समझने के बाद जब भी आप कोई नया ड्राफ्ट तैयार करवाएंगे, तो चैटबॉट अपने सामान्य लेआउट को छोड़कर सीधे आपके निजी टोन को लागू कर देगा।किन यूजर्स को मिलेगा नया अपडेट और किन ऐप्स से सीखेगा AI?शुरुआती चरण में यह सुविधा ChatGPT Work और पेड सब्सक्राइबर्स के लिए वेब प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि एआई आपके उन संदेशों से नहीं सीखेगा जो आप सीधे चैट विंडो में प्रॉम्प्ट के तौर पर टाइप करते हैं, बल्कि यह केवल अधिकृत वर्कस्पेस टूल्स में मौजूद वास्तविक कामकाजी ड्राफ्ट्स से आपकी शैली का अध्ययन करेगा। कनेक्टेड ऐप्स के जरिए यह आपकी फॉर्मल और सेमी-फॉर्मल बातचीत के बीच के अंतर को भी समझ लेता है, जिससे यदि आप बॉस को ईमेल लिखवा रहे हैं या टीम के साथी को स्लैक मैसेज, तो टोन उसी संदर्भ के अनुसार बदल जाती है।नए राइटिंग स्टाइल फीचर को एक्टिवेट करने का आसान स्टेप-बाई-स्टेप प्रोसेसयदि आपके अकाउंट पर यह नया अपडेट उपलब्ध हो गया है, तो इसे चालू करने के लिए कुछ आसान स्टेप्स का पालन करना होगा:सबसे पहले अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर ब्राउज़र खोलकर ChatGPT के आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन करें। स्क्रीन के बाएं कोने में नीचे दिए गए अपने प्रोफाइल आइकन पर क्लिक करें और 'Settings' विकल्प को चुनें। इसके बाद मेन्यू में दिए गए 'Personalization' (पर्सनलाइजेशन) टैब पर जाएं। वहां आपको 'Writing Style' या स्टाइल प्रेफरेंस से जुड़ा नया विकल्प दिखाई देगा। इस विकल्प पर क्लिक करें और आवश्यक वर्कस्पेस टूल्स (जैसे Gmail या Google Drive) को कनेक्ट करने की अनुमति दें। सिस्टम कुछ ही मिनटों में आपके पिछले ड्राफ्ट्स का विश्लेषण पूरा कर लेगा। इसके बाद 'Save' या 'Enable' पर क्लिक करते ही यह फीचर एक्टिवेट हो जाएगा। एक बार वेब पर सक्रिय होने के बाद यह सेटिंग आपके लिंक्ड मोबाइल ऐप पर भी काम करेगी।कस्टम इंस्ट्रक्शंस और बेस पर्सनालिटी से यह फीचर कितना अलग है?अब तक यूजर्स अपनी शैली तय करने के लिए 'Custom Instructions' या 'Base Style and Tone' जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करते आ रहे थे। कस्टम इंस्ट्रक्शंस में यूजर को खुद लिखकर बताना पड़ता था कि उसे किस तरह की टोन चाहिए। लेकिन इस नए ऑटोमेटेड राइटिंग स्टाइल फीचर में यूजर को खुद से नियम नहीं लिखने पड़ते। सिस्टम बैकग्राउंड में मौजूद डेटा का विश्लेषण करके खुद ब खुद आपकी शैली का प्रोफाइल बना लेता है। यह पहले से उपलब्ध बेस पर्सनालिटीज (जैसे प्रोफेशनल, कैजुअल या डायरेक्ट) की तुलना में कहीं अधिक सटीक और व्यक्तिगत परिणाम देता है।प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर क्या हैं नियम?कार्यस्थल के ईमेल और डॉक्युमेंट्स को एआई से जोड़ने पर डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। OpenAI ने स्पष्ट किया है कि इस फीचर का उद्देश्य केवल भाषाई संरचना को समझना है, संवेदनशील निजी डेटा को स्टोर करना या किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा करना नहीं। इसके अतिरिक्त, यूजर्स को अपनी सेटिंग्स में जाकर किसी भी समय कनेक्टेड टूल्स को हटाने, राइटिंग स्टाइल को रिसेट करने या फीचर को पूरी तरह डिसेबल करने का पूरा अधिकार दिया गया है।प्रोफेशनल्स, कंटेंट राइटर्स और कंपनियों को क्या होगा सीधा फायदा?इस नए फीचर से रोजाना दर्जनों ईमेल भेजने वाले अधिकारियों, फ्रीलांस राइटर्स और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स का काफी समय बचेगा। पहले एआई से मिले टेक्स्ट को अपने शब्दों में ढालने के लिए मैन्युअल एडिट करना पड़ता था, ताकि सामने वाले को यह न लगे कि ईमेल बॉट ने तैयार किया है। अब यह प्रक्रिया स्वचालित हो जाएगी। आपकी शब्दावली और अभिवादन का तरीका शामिल होने से ईमेल पूरी तरह ओरिजिनल और मानवीय लगेगा, जिससे कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी।
राष्ट्रभक्ति के सुरों से गूंजा अजमेर, दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल ने जीती समूहगान प्रतियोगिता
अजमेर। देशभक्ति, संस्कृति और संगीत का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब भारत विकास परिषद् अजमेर मुख्य शाखा की ओर से आयोजित राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता-2026 में विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभागार को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया। सेंट एन्सेल्म्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सभागार में आयोजित प्रतियोगिता में दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक […] The post राष्ट्रभक्ति के सुरों से गूंजा अजमेर, दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल ने जीती समूहगान प्रतियोगिता appeared first on Sabguru News .
केशव प्रसाद मौर्य जी की अध्यक्षता में ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (UPRRDA) की साधारण सभा की बैठक आहूत की गई। बैठक में मा0 राज्य मंत्री श्रीमती विजय लक्ष्मी गौतम, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास श्री सौरभ बाबू, सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास श्री प्रमोद कुमार उपाध्याय, सचिव वित्त, सचिव लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण विकास सड़क अभिकरण, मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री शिव सहाय अवस्थी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी सहायकों भी उपस्थित रहे। श्री मौर्य जी ने वित्त विभाग से समन्वय स्थापित कर वित्तीय स्वीकृतियां तत्काल जारी करने, फुटप्रिंट एवं कार्बन क्रेडिट का सतत उपयोग सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण मार्गों के निर्माण के पूर्ण होने पर मार्गों के किनारे फलदार वृक्षों का रोपण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य तकनीकी टीम को मार्गों का परीक्षण कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण कर ही केंद्रीय सर्वेक्षण टीम को आमंत्रित करने के निर्देश दिए।उपमुख्यमंत्री जी ने विभाग द्वारा प्रेषित प्रस्तावों पर सहमति प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेज-3 के शेष मार्गों का निर्माण कार्य तत्काल पूर्ण कराया जाए तथा भारत सरकार द्वारा फेज-4 के अंतर्गत स्वीकृत 374 मार्गों का शिलान्यास जल्द से जल्द कराया जाए। उन्होंने 250 आबादी वाले गांवों को भी योजना से जोड़ने के लिए भारत सरकार से अनुमति प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत मार्गों के नवीनीकरण/उच्चीकरण के लिए फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) तकनीक को अपनाए जाने संबंधी कार्यवृत्त का अनुमोदन किया गया। इस आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल तकनीक के माध्यम से प्रदेश में अब तक 746 सड़कों की कुल 5,809.99 किलोमीटर लंबाई के निर्माण/उच्चीकरण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत मार्गों के नवीनीकरण/उच्चीकरण के लिए फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) तकनीक को अपनाए जाने संबंधी कार्यवृत्त का अनुमोदन किया गया। इस आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल तकनीक के माध्यम से प्रदेश में अब तक 746 सड़कों की कुल 5,809.99 किलोमीटर लंबाई के निर्माण/उच्चीकरण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।
'8-9 दिनों में दाखिल होगी चार्जशीट', मणिपुर के संगीतकार की हत्या मामले में बोले किरेन रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने बताया कि दिल्ली पुलिस मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह हत्याकांड में 8-9 दिनों में चार्जशीट दाखिल करेगी।
देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, HDFC Bank (एचडीएफसी बैंक) ने अपने लाखों कर्जदारों को बड़ी राहत दी है। बैंक ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट्स (MCLR) में 5 से 10 बेसिस प्वाइंट (0.05% से 0.10%) तक की कटौती का ऐलान किया है। नई संशोधित दरें प्रभावी हो चुकी हैं। त्योहारों और आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले बैंक द्वारा लोन बेंचमार्क दरों को घटाने के इस फैसले से फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वाले करोड़ों मौजूदा और नए ग्राहकों की मासिक किस्त (EMI) या लोन की अवधि कम होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, इस कटौती का फायदा हर ग्राहक को तुरंत और एक समान रूप से नहीं मिलेगा, क्योंकि यह पूरी तरह से लोन के रीसेट क्लॉज और बेंचमार्क प्रकार पर निर्भर करता है।क्या है HDFC Bank की नई MCLR दरों की पूरी सूची?एचडीएफसी बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी विवरण के अनुसार, बैंक ने विभिन्न अवधियों (Tenures) के लिए अपनी उधारी दरों में 0.05% से लेकर 0.10% तक की कमी की है। इस संशोधन के बाद बैंक की समग्र MCLR दरें अब 7.90 प्रतिशत से लेकर 8.60 प्रतिशत के दायरे में आ गई हैं, जो पहले 8.00 प्रतिशत से 8.65 प्रतिशत के बीच थीं।ओवरनाइट और 1 महीने की अवधि वाली एमसीएलआर को 10 बेसिस प्वाइंट घटाकर 8.00% से सीधे 7.90% कर दिया गया है। 3 महीने की अवधि के लिए दर 8.15% से घटकर 8.05% हो गई है। वहीं, 6 महीने की एमसीएलआर में 5 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है, जिससे यह दर 8.30% से कम होकर 8.25% पर आ गई है। रिटेल होम लोन और ऑटो लोन के लिए सबसे अहम मानी जाने वाली 1 साल की MCLR को 8.40% से घटाकर 8.35% किया गया है। 2 साल की एमसीएलआर में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती हुई है और यह 8.55% से गिरकर 8.45% हो गई है, जबकि 3 साल की दर 8.65% से घटकर 8.60% पर आ गई है।क्या तुरंत घट जाएगी आपकी होम लोन या ऑटो लोन की EMI?अधिकांश कर्जदारों के मन में यह सवाल उठता है कि बैंक द्वारा दरों में कटौती का ऐलान करते ही क्या अगले महीने से कटने वाली ईएमआई की रकम अपने आप कम हो जाएगी? इसका सीधा उत्तर है: नहीं। एमसीएलआर से जुड़े कर्जों में 'रीसेट डेट' (Reset Date) का नियम लागू होता है। जब आप किसी बैंक से फ्लोटिंग रेट पर लोन लेते हैं, तो आपके लोन एग्रीमेंट में एक रीसेट क्लॉज होता है, जो आमतौर पर एक साल, छह महीने या तीन महीने का होता है।मान लीजिए कि आपका होम लोन 1 साल की एमसीएलआर से जुड़ा है और आपकी रीसेट डेट हर साल दिसंबर महीने में आती है। ऐसी स्थिति में सितंबर में की गई इस कटौती का लाभ आपको तुरंत नहीं मिलेगा, बल्कि दिसंबर में जब आपका लोन रीसेट होगा, तब उस समय लागू एमसीएलआर के आधार पर आपकी ब्याज दर घटेगी। यदि किसी ग्राहक की रीसेट डेट सितंबर महीने में ही पड़ रही है, तो उसे नई दरों का फायदा इसी महीने से मिलना शुरू हो जाएगा।किन ग्राहकों को मिलेगा इस कटौती का सीधा लाभ?यह कटौती मुख्य रूप से उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद है जिनके लोन एमसीएलआर व्यवस्था (MCLR Regime) के तहत स्वीकृत हुए थे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2016 में एमसीएलआर व्यवस्था लागू की थी। इसलिए, जिन ग्राहकों ने 2016 से अक्टूबर 2019 के बीच लोन लिया था और उन्होंने अपने लोन को रेपो-लिंक्ड एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) में स्विच नहीं कराया है, वे सीधे तौर पर इस कटौती के दायरे में आते हैं। इसके अलावा कई कॉरपोरेट कर्जदार, एमएसएमई बिजनेस लोन धारक और पर्सनल व कमर्शियल व्हीकल लोन ग्राहक जो एमसीएलआर से जुड़े हैं, उनकी उधारी लागत में राहत देखने को मिलेगी।रेपो रेट से जुड़े लोन (EBLR) ग्राहकों पर इसका क्या असर होगा?अक्टूबर 2019 के बाद रिजर्व बैंक के नियमों के तहत सभी वाणिज्यिक बैंकों के लिए नए फ्लोटिंग रेट रिटेल लोन (जैसे होम लोन, ऑटो लोन और एमएसएमई लोन) को किसी बाहरी बेंचमार्क, खासकर आरबीआई के रेपो रेट से जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया था। यदि आपने अक्टूबर 2019 के बाद होम लोन लिया है और आपका लोन रेपो रेट लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR / EBLR) पर आधारित है, तो HDFC बैंक की इस एमसीएलआर कटौती का आपके लोन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। रेपो-लिंक्ड लोन की ब्याज दरें केवल तभी घटती या बढ़ती हैं जब भारतीय रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में आधिकारिक रेपो दर में फेरबदल करता है।ईएमआई घटेगी या लोन की अवधि कम होगी: बैंक कैसे देता है फायदा?जब भी किसी फ्लोटिंग रेट लोन पर ब्याज दरों में कटौती होती है, तो बैंक आमतौर पर दो तरह से इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। पहली व्यवस्था में बैंक आपकी मासिक ईएमआई राशि को जस का तस रखते हुए लोन के कुल टेन्योर यानी भुगतान की बची हुई अवधि (Months) को कम कर देते हैं, जिससे आपका लोन तय समय से पहले चुकता हो जाता है और ब्याज की बचत होती है। दूसरी व्यवस्था में ग्राहक बैंक शाखा में आवेदन देकर या नेट बैंकिंग के जरिए अपने लोन का टेन्योर समान रखते हुए मासिक ईएमआई की राशि घटवा सकते हैं। यदि आप अपनी मासिक बचत बढ़ाना चाहते हैं, तो आप ईएमआई घटवाने का विकल्प चुन सकते हैं।बेस रेट और फिक्स्ड डिपॉजिट दरों की वर्तमान स्थिति क्या है?बैंक ने स्पष्ट किया है कि एमसीएलआर में किया गया यह बदलाव आंतरिक लागत व्यवस्था के आधार पर है। बैंक की बेस रेट वर्तमान में 8.70 प्रतिशत और बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) 17.20 प्रतिशत प्रति वर्ष के स्तर पर बनी हुई है। इसके साथ ही, बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों के लिए यह राहत की बात है कि लेंडिंग बेंचमार्क में कटौती से जमा दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है। सामान्य नागरिकों को एफडी पर 2.75% से 6.50% और वरिष्ठ नागरिकों को 3.25% से 7.00% तक का आकर्षक ब्याज मिलना जारी रहेगा।लोन धारकों को अब क्या कदम उठाना चाहिए?यदि आपके पास HDFC बैंक का कोई भी फ्लोटिंग रेट लोन चल रहा है, तो सबसे पहले अपने लोन अकाउंट स्टेटमेंट या सैंक्शन लेटर की जांच करें। उसमें यह देखें कि आपका लोन एमसीएलआर, बेस रेट या ईबीएलआर में से किससे लिंक्ड है। यदि आपका लोन अभी भी पुराने एमसीएलआर सिस्टम में है, तो अपने बैंक रिलेशनशिप मैनेजर से संपर्क करके यह पता करें कि आपकी रीसेट तारीख कब है। साथ ही यह भी कैलकुलेट करें कि क्या आपके लोन को एक्सटर्नल रेपो-लिंक्ड बेंचमार्क में स्विच कराना अधिक किफायती रहेगा, क्योंकि वर्तमान वित्तीय परिदृश्य में पारदर्शी ब्याज ट्रांसमिशन के लिए रेपो-लिंक्ड लोन को अक्सर अधिक गतिशील माना जाता है।
भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक व्यावसायिक समझौता सामने आया है। देश के प्रमुख ईवी सुपरचार्जिंग नेटवर्क CHARGEZONE ने इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसों, हैवी कमर्शियल ट्रकों और फ्लीट कारों के लिए 1 बिलियन डॉलर यानी लगभग ₹10,500 करोड़ से अधिक मूल्य के दीर्घकालिक एनर्जी अनुबंध (Long-Term Energy Contracts) हासिल किए हैं। इस ऐतिहासिक सौदे के दम पर कंपनी भारत के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों (National Highway Corridors) पर 1,000 नए अत्याधुनिक सुपरचार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की महा-योजना पर काम शुरू कर रही है। इस रणनीतिक कदम से देश में इंटरसिटी माल ढुलाई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विद्युतीकरण को अभूतपूर्व रफ्तार मिलने की उम्मीद है।हाईवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों का सफर होगा आसान, 1000 नए सुपरचार्जिंग स्टेशन नेटवर्क में जुड़ेंगेचार्जजोन द्वारा की जाने वाली इस भारी-भरकम तैनाती का मुख्य केंद्र बिंदु देश के व्यस्ततम नेशनल हाईवे कॉरिडोर होंगे। वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक कार या बस चालकों के मन में रेंज एंग्जायटी यानी रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर सबसे बड़ी बाधा बना रहता है। कंपनी का लक्ष्य दिल्ली-मुंबई, मुंबई-अहमदाबाद, बेंगलुरु-चेन्नई, दिल्ली-अमृतसर और कोलकाता-वाराणसी जैसे प्रमुख एक्सप्रेसवे और व्यापारिक रूट्स पर हर 50 से 100 किलोमीटर के दायरे में हाई-स्पीड सुपरचार्जिंग हब तैयार करना है। नए 1,000 चार्जिंग स्टेशनों के लाइव होने के बाद हाईवे पर चलने वाली अंतरराज्यीय इलेक्ट्रिक बसों और लंबी दूरी के ट्रकों को बिना किसी देरी के त्वरित चार्जिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे शहरों के बीच लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक परिवहन का समय बचेगा।फ्लीट-आधारित मांग पर केंद्रित रणनीति: रोज 15,000 से अधिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी चार्जआमतौर पर सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद उस पर पर्याप्त ट्रैफिक आएगा या नहीं। चार्जजोन ने इस पारंपरिक मॉडल को बदलते हुए 'डिमांड-फर्स्ट' अप्रोच अपनाया है। यह ₹10,500 करोड़ का एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट कमर्शियल फ्लीट ऑपरेटरों, अंतरराज्यीय बस सेवाओं और डिलीवरी कंपनियों के साथ हुआ है, जिनके रूट्स तय हैं और दैनिक बिजली की खपत सुनिश्चित है। कंपनी का आकलन है कि इन अनुबंधित फ्लीट्स के जरिए नए स्टेशनों पर प्रतिदिन 15,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग की जाएगी। इससे स्टेशनों का औसत नेटवर्क उपयोग (Utilisation Rate) वर्तमान के 14 फीसदी से बढ़कर सीधे 30 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।नेटवर्क क्षमता में भारी उछाल: 120 मेगावाट से बढ़कर 300 मेगावाट होगी कुल पावर क्षमताइस बड़े विस्तार अभियान के पूरा होने के बाद चार्जजोन के चार्जिंग नेटवर्क की कुल क्षमता में 180 मेगावाट (MW) की भारी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही कंपनी की कुल नेटवर्क क्षमता वर्तमान के 120 मेगावाट से बढ़कर सीधे 300 मेगावाट के स्तर पर पहुंच जाएगी। पूरी तरह सक्रिय होने पर यह पूरा नेटवर्क सालाना लगभग 700 गीगावाट-घंटे (GWh) ऊर्जा वितरित करेगा और रोजाना 15,000 से अधिक चार्जिंग सेशन को आसानी से हैंडल करने में सक्षम होगा। इतनी बड़ी ऊर्जा क्षमता से देश में लाखों लीटर डीजल की खपत पर रोक लगेगी और भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।फंडिंग का पुख्ता बंदोबस्त: बैंकों से मिला ₹250 करोड़ का कर्ज, $100 मिलियन अतिरिक्त जुटाने की तैयारीइस पूंजी-सघन बुनियादी ढांचा परियोजना को वित्तीय गति देने के लिए कंपनी ने अपने फंड जुटाने के चरण को भी मजबूत कर लिया है। चार्जजोन ने भारतीय प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों से ऋण वित्तपोषण (Debt Financing) के माध्यम से ₹250 करोड़ ($25 मिलियन) की राशि सुरक्षित कर ली है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कंपनी इक्विटी और अतिरिक्त ऋण के जरिए 100 मिलियन डॉलर (लगभग ₹830 करोड़ से अधिक) की नई पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में है। यह समूची पूंजी नए सुपरचार्जिंग स्टेशनों के निर्माण, माइक्रो-ग्रिड अवसंरचना, आधुनिक ऊर्जा प्रबंधन सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर तकनीकों के विकास में निवेश की जाएगी।ग्रीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज (BESS) का अनोखा तालमेलकेवल चार्जिंग पॉइंट लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करना भी एक बड़ी तकनीकी चुनौती है। चार्जजोन अपने नए हाई-स्पीड सुपरचार्जिंग स्टेशनों पर सौर ऊर्जा (Solar Power) और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को सीधे ग्रिड से जोड़ रहा है। इसका फायदा यह होगा कि पीक ऑवर्स के दौरान जब एक साथ कई हैवी बसें और ट्रक चार्जिंग के लिए प्लग-इन करेंगे, तब स्थानीय ग्रिड पर अत्यधिक लोड नहीं पड़ेगा। दिन के समय सोलर पैनल्स द्वारा बनाई गई बिजली को इन बीईएसएस बैटरियों में स्टोर किया जाएगा और रात में भारी वाहनों की सुपरफास्ट चार्जिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे यह पूरा इकोसिस्टम पर्यावरण के अनुकूल और नेट-जीरो कार्बन लक्ष्यों के अनुरूप बनेगा।भारत के कमर्शियल लॉजिस्टिक्स और ट्रक सेक्टर में आएगा क्रांतिकारी बदलावअब तक भारत में इलेक्ट्रिक क्रांति का प्रभाव मुख्य रूप से दोपहिया, तिपहिया और इंट्रा-सिटी कारों तक सीमित था। लंबी दूरी के ट्रकों और भारी मालवाहक वाहनों को ईवी में बदलना एक दूर का सपना माना जाता था, क्योंकि उनके लिए मेगावाट स्तर के हाई-पावर चार्जर्स की दरकार होती है। ₹10,500 करोड़ के इस ऐतिहासिक कॉन्ट्रैक्ट से यह साफ हो गया है कि बड़े लॉजिस्टिक्स बेड़े अब डीजल से इलेक्ट्रिक की ओर रुख करने के लिए तैयार हैं। भारी ट्रकों के विद्युतीकरण से माल ढुलाई की परिचालन लागत में 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, जिसका सीधा सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और औद्योगिक विकास पर पड़ेगा।पीएम ई-ड्राइव और राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मिलेगा जबरदस्त संबलकेंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना और नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन के तहत सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। चार्जजोन की यह ₹10,500 करोड़ की निजी क्षेत्र की पहल सरकारी नीतियों को जमीन पर उतारने में उत्प्रेरक का काम करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी देश में राजमार्गों पर भरोसेमंद और सुपरफास्ट चार्जिंग का नेटवर्क तैयार हो जाता है, तो ऑटोमोबाइल निर्माता भी बड़े पैमाने पर भारी इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियां बाजार में उतारने के लिए प्रेरित होते हैं। चार्जजोन का यह विस्तार भारत को वैश्विक ईवी क्रांति में एक प्रमुख लीडर के रूप में स्थापित करेगा।
'अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजना', फफक पड़े अर्पित के पिता
Delhi PG Building Collapse Dewas Student Arpit Jaj: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG ढहने से देवास के अर्पित जाज की मौत. गमगीन पिता बोले- 'बच्चों को पढ़ने दिल्ली मत भेजना'. परिजनों ने किया नेत्रदान.
PM Narendra Modi के जन्मदिन पर Chhattisgarh में जलेंगे 36 लाख दीये
रायपुर, आठ सितंबर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने मंगलवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दीर्घायु, स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन के लिए 17 सितंबर को पूरे प्रदेश में 36 लाख ‘आशीर्वाद के दीये’ प्रज्वलित किए जाएंगे। इसके तहत प्रत्येक मतदान केंद्र (बूथ) पर कम-से-कम 100 दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है। शर्मा ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह अभियान मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का व्यापक जनांदोलन बनेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के संवैधानिक पद (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पद) पर रहते हुए 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘सेवा पखवाड़ा’ के कार्यक्रमों की जानकारी दी और बताया कि अभियान में हर गांव, शहर, बूथ और परिवार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक बूथ पर हर परिवार दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सेवा समर्पण के प्रति आभार प्रकट करेगा और ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प लेगा। शर्मा ने बताया कि सात अक्टूबर को जिला मुख्यालयों के प्रमुख चौराहों पर एक विशेष मशाल स्थापित की जाएगी। सात अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सरकार प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष पूरे हो रहे है, इस दिन प्रमुख चौकों पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री देश के सभी जिला केंद्रों को एक साथ संबोधित करेंगे। इस दौरान युवाओं की एक विशेष यात्रा प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर (गुजरात) से उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक निकाली जाएगी। यह यात्रा विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए छत्तीसगढ़ के कवर्धा और कोरिया समेत कई क्षेत्रों में पहुंचेगी। अभियान के तहत ‘वडनगर से वाराणसी’ (जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा) कार्यक्रम होगा। उप मुख्यमंत्री ने ‘सेवा के रंग’ रंगोली प्रतियोगिता के बारे में बताया कि सार्वजनिक स्थानों, प्रमुख संस्थानों और घरों में 25 वर्षों के विकास कार्यों और सेवा भाव पर आधारित रंगोली प्रतियोगिताएं और प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। शर्मा ने बताया कि जनसेवक महाकुंभ कार्यक्रम के तहत पंच से लेकर संसद तक के सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के सभी जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। ‘25 साल की 25 कहानियां’ कार्यक्रम के तहत विगत 25 वर्षों में देश के बड़े बदलावों, निर्णयों (जैसे धारा 370 हटाना) और बड़े निर्माण कार्यों (चिनाब ब्रिज, अटल टनल, सरदार सरोवर) को कहानियों के माध्यम से समाज और युवाओं के बीच प्रस्तुत किया जाएगा।
'राज्य में एनआरसी के लिए आधार वर्ष होगा 1951', बोले मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम
मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने घोषणा की कि राज्य में एनआरसी के लिए आधार वर्ष 1951 होगा और सरकार केंद्र के साथ इस मामले को आगे बढ़ाएगी।
Saharanpur Mosque Demolition: जमीयत उलमा का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा सहारनपुर, कानूनी विकल्पों पर मंथन
सहारनपुर (उप्र), आठ सितंबर सहारनपुर में कलेक्ट्रेट स्थित मस्जिद को प्रशासन द्वारा गिराए जाने के मामले में जमीयत उलमा-ए-हिंद का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राष्ट्रीय महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में सहारनपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मामले से जुड़े वकीलों तथा सामाजिक-राजनीतिक लोगों से मिलकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। टीम ने पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान, सांसद इमरान मसूद, स्वर्गीय याकूब खान के पौत्र फिरोज खान, शाह हारून खान समेत कई अधिवक्ताओं से बातचीत की। इस दौरान कानूनी लड़ाई, संवैधानिक पहलुओं और आगे की रणनीति पर गहन मंथन किया गया। मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि फैसला आने के बाद रात में ही कलेक्ट्रेट की मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। इसी मामले की जानकारी लेने और आगे की कानूनी रणनीति तय करने के लिए प्रतिनिधिमंडल दिल्ली से सहारनपुर आया है। उन्होंने कहा कि जमीयत इस मामले की कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ेगी और यदि स्थानीय लोग उच्च न्यायालय जाना चाहते हैं तो संगठन उनके साथ खड़ा रहेगा। फिलहाल उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। मौलाना ने कहा कि वकीलों की टीम सभी दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की जांच करेगी। किसी भी प्रभावित पक्ष को अपने बचाव और संवैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल का मौका मिलना चाहिए। अदालत का रुख करना हर नागरिक का अधिकार है। पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने कहा कि मस्जिद मामले की लड़ाई कानून के दायरे में रहकर हर स्तर पर लड़ी जाएगी। यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि मस्जिद के पुनर्निर्माण की लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि जिस आदेश के आधार पर कार्रवाई हुई, उसमें मस्जिद गिराने का आदेश नहीं, बल्कि बेदखली से संबंधित आदेश था, फिर भी प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता नौशाद अहमद ने प्रतिनिधिमंडल के समक्ष मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं, उपलब्ध तथ्यों और संभावित कानूनी कार्रवाई की जानकारी रखी।
UK: एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में खराबी से मचा हड़कंप, सैकड़ों उड़ानों पर असर
NATS के फ्लाइट प्रोसेसिंग सिस्टम में तकनीकी खराबी से ब्रिटेन के हीथ्रो, गैटविक समेत कई एयरपोर्ट्स पर सैकड़ों फ्लाइट्स प्रभावित हुईं. करीब 300 कैंसिलेशन और बड़ी संख्या में देरी हुई. NATS ने फिक्स लागू कर सिस्टम रिकवर होने की जानकारी दी, लेकिन यात्रियों को आगे भी परेशानी हो सकती है.
डोपिंग के कारण एशियाई बीच गेम्स में कबड्डी खिलाड़ी बृजेंद्र सिंह चौधरी का सिल्वर मेडल छीना
नई दिल्ली। इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (आईटीए) ने मंगलवार को बताया कि भारतीय कबड्डी खिलाड़ी बृजेंद्र सिंह चौधरी का एशियाई बीच गेम्स का सिल्वर मेडल छीन लिया गया है, क्योंकि वे प्रतिबंधित डाइयूरेटिक ‘ब्रिंज़ोलैमाइड’ के लिए पॉजिटिव पाए गए थे। चौधरी, जो सान्या में हुए छठे एशियाई बीच गेम्स में भारत की सिल्वर मेडल जीतने वाली […] The post डोपिंग के कारण एशियाई बीच गेम्स में कबड्डी खिलाड़ी बृजेंद्र सिंह चौधरी का सिल्वर मेडल छीना appeared first on Sabguru News .
कांग्रेस ने पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले गुलजार सिंह की आत्महत्या पर आप सरकार पर हमला बोला है। पार्टी ने वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा को हटाने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है, आरोप है कि गुलजार सिंह ने अपनी मौत के लिए चीमा को जिम्मेदार ठहराया था।
बारिश में सापों को बुलाती है इन चीजों की महक, तभी खिंचे चले आते हैं
बारिश में अक्सर घरों से सांप निकलने की घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं जिसकी एक वजह घर में कुछ ऐसी चीजों की मौजूदगी होती है जो सांपों को अपनी तरफ खींचती हैं. यहां हम आपको ऐसी ही कुछ चीजों की जानकारी दे रहे हैं जिनकी महक सूंघकर सांप घरों में खिंचे चले आते हैं.
न मालगाड़ी रुकेगी, न लेट होंगी पैसेंजर ट्रेनें... फ्रेट नेटवर्क से बदलेगी भारतीय रेल की तस्वीर
प्रधानमंत्री मोदी ने वडोदरा में पश्चिमी डीएफसी के अंतिम तीन सेक्शन राष्ट्र को समर्पित किए, जिससे देश को 2,843 किलोमीटर का अलग माल ढुलाई रेल नेटवर्क मिला। यह परियोजना भारत की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी, मालगाड़ियों की गति बढ़ाएगी और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगी।
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, 5.3 रिक्टर स्केल पर कांपी धरती
तिब्बत और नेपाल में बुधवार को 5.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 35 किलोमीटर दर्ज की गई. हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद आए इन झटकों से पर्वतीय क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है.
भारतीय ओलिंपिक संघ का बड़ा फैसला, NSGA के तहत संविधान में बदलाव मंजूर
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम (एनएसजीए) के अनुरूप अपने संविधान में बदलावों को मंजूरी दी है।
यह दो पक्षों के बीच का मामला...एफिल टावर विवाद पर विदेश मंत्रालय का दो टूक जवाब
विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को साफ कहा कि पेरिस के एफिल टॉवर को कुछ समय के लिए बंद करने और वहां से महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने का मामला दो पक्षों के बीच का विवाद है। सरकार इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी।
PMO के नाम पर फर्जीवाड़ा, पीएम की सुरक्षा में चूक? रोहन की कहानी के कई सवाल अभी अनसुलझे
सात सितंबर को मुंबई के जियो वर्ल्ड प्लाजा से गिरफ्तार किए गए रोहन पारेख और उसके बॉडीगार्ड को 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है. इस मामले में कई ट्विस्ट और कई सवाल हैं.
जल जीवन मिशन मामले में आरोपी विशाल सक्सेना की जमानत अर्जी खारिज
जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन में 979 करोड़ 27 लाख रुपए के टेंडर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दिए जाने से जुड़े मामले में गिरफ्तार तत्कालीन अधिशाषी अभियंता विशाल सक्सेना को अदालत से राहत नहीं मिली। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत -2 के न्यायाधीश राजेश दड़िया ने मामले को गंभीर अपराध मानते […] The post जल जीवन मिशन मामले में आरोपी विशाल सक्सेना की जमानत अर्जी खारिज appeared first on Sabguru News .
टोल माफ, जानें ‘कोंकण दर्शन’ पास कहां से मिलेगा
गणेशोत्सव 2026 पर मुंबई से कोंकण और कोल्हापुर जाने वालों को 11 से 27 सितंबर तक टोल से छूट मिलेगी. जानें किन रास्तों पर सुविधा लागू होगी और ‘गणेशोत्सव 2026 कोंकण दर्शन’ पास कहां से मिलेगा. वीडियो में जानें टोल फ्री रूट से लेकर टोल टैक्स में इस छूट को लेकर क्या नियम.
नगर निकाय चुनाव : मतगणना के लिए रिटर्निंग अधिकारी एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त
अजमेर। नगर निकाय आम चुनाव- 2026 के लिए नगर निकायों के सदस्य पदों के मतगणना के लिए रिटर्निंग अधिकारी एवं उनके सहायतार्थ सहायक रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किए गए है। जिला निर्वाचन अधिकारी (कलक्टर) लोक बंधु ने बताया कि नगरीय निकाय आम चुनाव 2026 की मतगणना 14 सितम्बर को निकाय स्तर पर की जाएगी। इसके लिए […] The post नगर निकाय चुनाव : मतगणना के लिए रिटर्निंग अधिकारी एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त appeared first on Sabguru News .
तमंचा लेकर पड़ोसी के घर पहुंचा पूर्व मंत्री हाजी याकूब का बेटा, CCTV वायरल
मेरठ में पूर्व मंत्री और मीट कारोबारी हाजी याकूब कुरैशी के बेटे फिरोज उर्फ भूरा की दबंगई का CCTV सामने आया है. आरोप है कि वह साथियों के साथ तमंचा लेकर पड़ोसी के घर पहुंचा, दरवाजा तोड़ने की कोशिश की और धमकी दी. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया. चार टीमें लगाई गईं और मुख्य आरोपी फिरोज को हिरासत में लिया गया.
रायबरेली पहुंचे राहुल गांधी, व्यापारियों से की मुलाकात
राहुल गांधी ने रायबरेली के प्रभु टाउन में स्थानीय व्यापारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान पर चर्चा की. लखनऊ एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं ने उनका स्वागत किया.
सुप्रीम कोर्ट ने थर्मल पावर प्लांट में एफजीडी सिस्टम लगाने की याचिका एनजीटी को सौंपने का निर्देश दिया है।
DK Shivakumar ने Ballari में BJP की रैली को दी अनुमति, अधिकारियों को दिए निर्देश
बेंगलुरु/बल्लारी, आठ सितंबर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह किसी को भी प्रदर्शन करने से नहीं रोकेंगे और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भाजपा को बल्लारी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज मैदान में 10 सितंबर को जनसभा आयोजित करने की अनुमति दें। विपक्षी भाजपा ने दावा किया कि सरकार ने दबाव में आकर अनुमति देने का फैसला किया है, जबकि शुरुआत में उसने प्रदर्शन को मंजूरी देने से इनकार कर पार्टी (भाजपा) को रोकने की कोशिश की थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इससे पहले कांग्रेस सरकार के कथित भ्रष्टाचार और विफलताओं के खिलाफ अपनी 10 दिवसीय पदयात्रा के समापन के अवसर पर मैदान में जनसभा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई थी। प्राधिकारियों ने 2015 के एक सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के मैदान और इमारतें निजी संगठनों या संघों को सार्वजनिक या निजी कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों, बिक्री स्टॉल, मनोरंजन कार्यक्रमों और ऐसे अन्य आयोजनों के लिए उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं। भाजपा की ‘बल्लारी चलो’ पदयात्रा एक सितंबर को रायचूर जिले के लिंगसुगुर से शुरू हुई थी और इसका समापन 10 सितंबर को बल्लारी में होना है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र के नेतृत्व में निकाली जा रही इस पदयात्रा में पार्टी के कई नेता, विधायक, विधान परिषद सदस्य, प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष और कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। शिवकुमार ने कहा, ‘‘वे (भाजपा) आपको गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने (अधिकारियों से) कहा है कि वे जिस सबसे बड़े मैदान की मांग करें, वह उन्हें दिया जाए। मैंने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सड़कों पर कोई बाधा न हो, बस इतना ही। मैं किसी को नहीं रोकूंगा।’’बेंगलुरु में संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें सौ प्रेस वार्ताएं करने दें और सौ बयान तथा आरोप लगाने दें। वे जो भी आरोप लगाएं, सब झूठ है। राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) खुद झूठ का पुलिंदा है। जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया कहा करते थे, झूठ उनका इष्ट देवता है। उन्हें जो करना है, करने दें।’’सूत्रों के अनुसार, अनुमति नहीं दिए जाने की जानकारी मिलने के बाद शिवकुमार ने बल्लारी के उपायुक्त से बात की और उन्हें मंजूरी देने का निर्देश दिया। सूत्रों ने बताया कि भाजपा ने अनुमति नहीं दिए जाने के मुद्दे को ‘‘बड़ा मुद्दा’’ बनाने का फैसला किया था और कांग्रेस सरकार को ‘‘अलोकतांत्रिक’’ तथा ‘‘असंवैधानिक’’ बताने के उद्देश्य से आंदोलन की योजना बनाई थी। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने शुरू में अधिकारियों पर अनुमति नहीं देने के लिए दबाव डाला था, लेकिन भाजपा के प्रयासों के चलते प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करके अनुमति देनी पड़ी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार के दबाव के बीच उपायुक्त असहाय नजर आ रहे थे। सरकार का कहना था कि किसी भी कीमत पर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए-उन्हें जहां करना है, करें, अगर चाहें तो शहर के बाहर करें। राज्य सरकार की ओर से उपायुक्त पर ऐसा दबाव था, इसलिए हमारे कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी गई। हमने प्रशासन के इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान भी किया था।’’विजयेंद्र ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा ने तय किया था कि यदि अनुमति नहीं दी गई तो वह उपायुक्त कार्यालय के सामने जनसभा करेगी। उन्होंने कहा, “लेकिन हमें खुशी है कि हमारे दबाव के आगे झुकते हुए प्रशासन ने अनुमति दे दी। मैं राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूं कि लोकतंत्र में इस तरह के प्रदर्शनों और आंदोलनों को दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पदयात्रा के रूप में हमारा आंदोलन वैध और शांतिपूर्ण है। हम किसी तरह की हिंसा नहीं कर रहे हैं। इसे दबाने का कोई भी प्रयास अलोकतांत्रिक है और किसी को भी ऐसा नहीं करना चाहिए।’’भाजपा ने 10 सितंबर को अपराह्न तीन बजे से रात आठ बजे तक मैदान में जनसभा आयोजित करने की अनुमति मांगी थी और प्राधिकारियों को बताया था कि इसमें 50,000 से अधिक लोगों एवं गणमान्य व्यक्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। बल्लारी जिला भाजपा अध्यक्ष अनिल कुमार मोका को सात सितंबर को भेजे गए एक पत्र में बल्लारी और विजयनगर जिलों के प्री-यूनिवर्सिटी शिक्षा विभाग के उप निदेशक ने 2015 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों के मैदानों और भवनों का ऐसे आयोजनों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देने के संबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र में कहा गया कि निर्देशों का पालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित कॉलेज के प्राचार्य को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। पत्र में कहा गया था, “उपरोक्त के मद्देनजर, बल्लारी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज मैदान में 10 सितंबर को प्रस्तावित बड़ी जनसभा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए, आपके अनुरोध पर विचार नहीं किया जा सकता।
नयी मंडी घडसाना में सोशल मीडिया में टिप्पणी को लेकर युवक की हत्या
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के नयी मंडी घडसाना थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया में टिप्पणी से उपजी रंजिश के चलते एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि चक 4-एनएम में सोमवार को करीब सात बजे अपने खेत में मूंग फसल की कटाई कर रहे राहुल […] The post नयी मंडी घडसाना में सोशल मीडिया में टिप्पणी को लेकर युवक की हत्या appeared first on Sabguru News .
घर के सामने अचानक निकल आया मगरमच्छ, बिजनौर में मचा हड़कंप
Bijnor Khirni Village Crocodile Rescue: बिजनौर के खिरनी गांव में पूर्व प्रधान के घर के बाहर आबादी के बीच निकला मगरमच्छ. वन विभाग और पुलिस ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन. देखें पूरी रिपोर्ट.
जितने वोटों के अंतर से 70 में 68 पर हुई हार-जीत, दिल्ली में उससे ज्यादा मतदाता SIR में हो गए बाहर!
रिपोर्ट में कहा गया कि सूची से बाहर किए गए मतदाताओं में 31,59,223 को स्थायी रूप से स्थानांतरित, 11,73,552 को पता नहीं चलने , 2,82,412 को मृत और 1,41,535 को पंजीकृत/दोहरे मतदाता के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
₹1020 करोड़ का भ्रष्टाचार मामला, पूर्व मंत्री केएन नेहरू समेत 13 लोगों पर FIR दर्ज
तमिलनाडु में डीवीएसी ने पूर्व मंत्री केएन नेहरू और 12 अन्य के खिलाफ ₹1,020 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज की है।
फतेहपुर में नौकरी से लेकर जमीन तक के नाम पर ठगी का आरोप, परिवार की फर्जी दिव्यांग पेंशन भी बनवाई
फतेहपुर में सुमित सिंह पर नौकरी, बहन की शादी, जमीन और एससी-एसटी केस में मदद के नाम पर लाखों रुपये ठगने के आरोप हैं. परिवार के लोगों के फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र और पेंशन बनवाने का भी आरोप है. करीब 2.40 लाख रुपये का लाभ लेने की बात सामने आई है. विभाग ने रिकवरी नोटिस जारी किया है, जबकि पुलिस पर गिरफ्तारी नहीं करने का आरोप है.
Kanker NIA Court ने 2015 के पुलिस मुठभेड़ मामले में 5 माओवादियों को सुनाई सजा
कांकेर, आठ सितंबर छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने 2015 में भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी इलाके में पुलिस दल पर हुए माओवादी हमले के मामले में माओवादी दंपती समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि माओवादी दंपती पर क्रमशः 25 लाख रुपये और आठ लाख रुपये का इनाम है। उन्होंने बताया कि कांकेर में एनआईए की विशेष न्यायाधीश विभा पांडेय की अदालत ने सोमवार को 2015 के भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी पर हुए पुलिस दल पर हमले के मामले में ‘स्पेशल जोनल कमेटी’ सदस्य प्रभाकर राव और उनकी पत्नी ‘डिविजनल कमेटी’ सदस्य राजे कांगे समेत पांच नक्सलियों को दोषी ठहराया। अधिकारियों ने बताया कि अन्य आरोपियों में श्यामनाथ उसेंडी, चिंतूराम ताम्रकार और रमेश कुमार कुमेटी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अदालत ने प्रभाकर और राजे को सात-सात वर्ष तथा अन्य नक्सलियों को पांच-पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि नक्सली प्रभाकर और राजे कांगे के खिलाफ हत्या, लूट, अपहरण सहित विभिन्न थानों में कुल 64 और 36 मामले दर्ज हैं। उनके खिलाफ कई गंभीर नक्सली वारदातों में शामिल होने, थाना प्रभारी और गोपनीय सैनिक की हत्या एवं जनअदालत में हत्या जैसे मामले में शामिल होने के आरोप हैं। अधिकारियों ने बताया कि सात सितंबर, 2015 को कांकेर जिले के कोरेर थाना से 49 पुलिस कर्मियों को गश्त में रवाना किया गया था। जब वह भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचे थे तब नक्सली प्रभाकर और राजे कांगे तथा लगभग आठ अन्य वर्दीधारी माओवादियों ने उनपर गोलीबारी कर दी। बाद में पुलिस दल ने जब जवाबी कार्रवाई की तब नक्सली वहां से फरार हो गए। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बाद में प्रभाकर, राजे कांगे तथा उन्हें सहयोग और संरक्षण देने के आरोप में श्यामनाथ उसेंडी, चिंतूराम ताम्रकार और रमेश कुमार कुमेटी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अधिकारियों ने बताया कि अदालत ने सुनवाई के बाद 29 अगस्त 2026 को मामले में निर्णय सुरक्षित रख लिया था तथा सोमवार को आरोपियों को मामले में दोषी पाते हुए निर्धारित धाराओं के तहत सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को वैज्ञानिक तथा तकनीकी तरीके से सुरक्षित रखने और अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में कांकेर पुलिस ने विशेष सावधानी बरती। अधिकारियों ने बताया कि माओवादी प्रभाकर और राजे कांगे से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज/डिजिटल साक्ष्यों को साइबर प्रकोष्ठ, पुलिस मुख्यालय के तकनीकी सहयोग से आवश्यक प्रक्रिया के तहत जुटाया और संरक्षित किया गया। इसके बाद उस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विधिवत अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया, जिसे अदालत ने साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया। इसी प्रकार, जांच के दौरान पुलिस द्वारा की गई विभिन्न कार्यवाहियों और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों को भी ई-साक्ष्य के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में संरक्षित किया गया। उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप विवेचना संबंधी कार्यवाहियों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखते हुए उन्हें अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया। अदालत द्वारा इन ई-साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक रूप से संरक्षित विवेचना संबंधी दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाना, कांकेर पुलिस की आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग, वैज्ञानिक विवेचना तथा साक्ष्य संकलन की बेहतर प्रक्रिया को दर्शाता है।
कश्मीर की वादियों में शिखर धवन की पत्नी का दिखा स्टाइलिश लुक, Photos
शिखर धवन अपनी वाइफ सोफी शाइनी के साथ इन दिनों कश्मीर की सैर कर रहे हैं, जहां से शिकारा की सवारी करते हुए सोफी ने अपनी तस्वीरें शेयर की हैं. स्टाइलिश लुक में सोफी शिकारी बोर्ट पर बैठी हुई हैं और उनका यह अंदाज हर किसी को लुभा रहा है. उनकी फोटोज इंटरनेट पर फैंस को खूब पसंद आ रही है.
मानदेय बढ़ने की घोषणा से आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं में खुशी की लहर
लखनऊ, 8 सितंबर। प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा से उनमें खुशी की लहर है। कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने इसे अपने श्रम और जिम्मेदारियों के सम्मान के साथ-साथ परिवार के लिए बड़ी राहत बताया है।मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय आठ हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का चार हजार रुपये से बढ़ाकर छह हजार रुपये करने की घोषणा की। साथ ही कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और उनके परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने का भी एलान किया। सरकार की इस घोषणा को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यकत्रियों ने खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।बच्चों व महिलाओं तक योजनाएं पहुंचाने में अहम भूमिकामीरजापुर के आंगनवाड़ी केंद्र चिल्ह तृतीय की कार्यकत्री विद्यादेवी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में कार्यकत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से लेकर महिलाओं को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने तक कार्यकत्रियां जिम्मेदारी निभाती हैं। मानदेय बढ़ने से बहुत खुशी हुई है। सरकार ने कैशलेस इलाज की सुविधा से जोड़कर उनके श्रम का सम्मान किया है।सहायिकाओं में भी बढ़ा उत्साहमीरजापुर के आंगनवाड़ी केंद्र मलाधरपुर प्रथम की सहायिका क्रांति देवी ने कहा कि मानदेय बढ़ने और कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराए जाने की घोषणा से उनके जैसी हजारों सहायिकाओं में उत्साह बढ़ा है। सरकार का यह कदम उनके परिवार के लिए भी राहत और खुशी लेकर आया है। बढ़ा हुआ मानदेय घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार होगा।आंगनवाड़ी केंद्र अमोई द्वितीय की कार्यकत्री संजीता देवी ने कहा कि मानदेय बढ़ने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने से उन्हें अपने दायित्वों को और बेहतर ढंग से निभाने की प्रेरणा मिलेगी।जिम्मेदारी निभाने का उत्साह और बढ़ामेरठ की नव नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्री राखी ने कहा कि नियुक्ति मिलना उनके लिए बेहद खुशी का पल है। इसके साथ सरकार ने मानदेय बढ़ाकर और परिवार के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा देकर बड़ी राहत दी है। इससे जिम्मेदारी निभाने का उत्साह और बढ़ा है।आंगनवाड़ी कार्यकत्री गीता ने कहा कि मानदेय में बढ़ोतरी सभी के लिए बड़ी खुशी की बात है। परिवार के लिए पांच लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलना भी बड़ी राहत है। सरकार ने उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों को समझा है।कार्यकत्री बबीता ने कहा कि सरकार ने मानदेय बढ़ाने के साथ परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा की भी चिंता की है। तीन साड़ियां मिलने से भी सुविधा होगी। इन फैसलों से सम्मान और भरोसा दोनों मिला है। मनोरमा ने कहा कि परिवार के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा से चिंता कम हुई है। राजकली ने कहा कि योगी सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की मेहनत को सम्मान दिया है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन में MCD, जर्जर इमारतें गिराने का काम शुरू, देखें
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत को गिराने का काम शुरू हो गया है. रविवार को जो इमारत गिरी थी उसके पड़ोस वाली इमारत को गिराने के आदेश मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए थे. ये इमारत लोहे के पाइपों के सहारे टिकी थी..जिसे गिराने के लिए MCD के अफसर-कर्मचारी पहुंच गए हैं. मौसमी सिंह मौके पर मौजूद हैं उनसे बात करते हैं. देखें रिपोर्ट.
गहलोत सवाल की बजाय अपने कर्मों का दें जवाब : भजनलाल शर्मा
कोटा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्हें राजनीति से प्रेरित आरोप लगाने और सवाल उठाने की बजाय अपने शासनकाल में हुए पेपर लीक, भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं पर जनता को जवाब देना चाहिए। शर्मा मंगलवार को कोटा में नगर निकाय चुनाव में भाजपा […] The post गहलोत सवाल की बजाय अपने कर्मों का दें जवाब : भजनलाल शर्मा appeared first on Sabguru News .
पहली पत्नी के रहते बिना इजाजत दूसरी शादी की तो नहीं मिलेगी अनुकंपा नौकरी, HC का फैसला
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पहली पत्नी के जीवित रहते बिना विभागीय अनुमति दूसरी शादी करने वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद दूसरी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिलेगी. कोर्ट ने पहली पत्नी और नाबालिग बेटे को रिटायरमेंट बेनिफिट्स और ग्रेच्युटी में हिस्सा देने का आदेश दिया.
170 साल पुरानी हनुमान प्रतिमा टस से मस नहीं हुई, तो...
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए 170 साल पुरानी खड़े हनुमान जी की प्रतिमा हटाने की कोशिश दो दिन बाद भी सफल नहीं हुई. अब पुरातत्व विशेषज्ञ प्रतिमा के आधार और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेंगे. वीडियो में जानें इस पूरी घटना को लेकर क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स.
UP में अब 70 साल तक सेवाएं दे सकेंगे सरकारी डॉक्टर, डिप्टी CM ब्रजेश पाठक का ऐलान
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने सेवानिवृत्ति के बाद चिकित्सकों को 70 वर्ष की आयु तक पुनर्नियुक्ति देने संबंधी आदेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इससे अस्पतालों को राहत मिलेगी.
Delhi Police ने फार्महाउस गोदाम में चोरी का किया खुलासा, चार आरोपी गिरफ्तार
नयी दिल्ली, आठ सितंबर दक्षिणी दिल्ली के एक फार्महाउस में बने गोदाम में चोरी करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और चोरी का लगभग 50 लाख रुपये मूल्य का माल बरामद हुआ है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान इरशाद (24), पिंटू (26), मिथुन कुमार (24) और अमजद (26) के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में 87 वर्षीय वजीर अहमद नाम का व्यक्ति भी शामिल है। उनके मुताबिक, सात सितंबर को एक फार्महाउस में चोरी की सूचना मिली थी, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। सूचना के बाद फतेहपुर बेरी थाने की एक टीम ने मौके का निरीक्षण किया और घटनास्थल की वैज्ञानिक तरीके से जांच की। पुलिस ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया गया, जबकि तकनीकी निगरानी की गई और स्थानीय खुफिया सूचनाएं जुटाई गईं। अधिकारी ने बताया कि संदिग्धों की पहचान की गई और उन्हें सुल्तानपुर-मंडी क्षेत्र में विभिन्न स्थानों से पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान, चोरी में उनकी कथित संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद उनके द्वारा छुपाए गए स्थानों से चोरी का सामान बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि बरामद की गई वस्तुओं में घड़ियां, बैग और बैकपैक, परफ्यूम और खुशबू से जुड़े उत्पाद, व्यक्तिगत देखभाल का सामान, योगा टॉवल, बार और कटलरी का सामान, एक ‘हनीवेल मोबाइल कंप्यूटर’, स्पीकर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान, पीतल की वस्तुएं तथा घर को सजाने-संवारने का सामान शामिल है। पुलिस ने कहा कि ‘डिलीवरी’ एजेंट के रूप में काम करने वाला मिथुन कुमार कथित तौर पर इस घटना का मास्टरमाइंड है। पुलिस ने बताया कि फतेहपुर बेरी थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि आगे की जांच जारी है।
भरतपुर : पिकअप की चपेट में आने से बाइक सवार युवक की मौत
भरतपुर। राजस्थान में भरतपुर जिले के गढ़ी बाजना थाना क्षेत्र में मंगलवार को पिकअप की चपेट में आने से मोटर साइकिल पर सवार एक युवक की मौत हो गई जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि लखन और नेत्रपाल शाम को रुदावल से अपने गांव मिर्जापुर जा […] The post भरतपुर : पिकअप की चपेट में आने से बाइक सवार युवक की मौत appeared first on Sabguru News .
पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता ने नोएडा में आत्महत्या की
दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और 1975 बैच के आईएएस अधिकारी राकेश मेहता (74) ने नोएडा में अपने किराये के फ्लैट में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली
विनय कुमार सक्सेना बने जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल, मनोज सिन्हा का क्या हुआ?
दरअसल, मनोज सिन्हा इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं. वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने अमेरिका गए हुए हैं.
कार का रंग भी है पक्षियों की बीट की वजह? सर्वे हुआ तो..
क्या कार के रंग से पक्षियों की बीट का कोई संबंध है? अलग-अलग सर्वे में भूरे, लाल और सफेद रंग की कारों पर ज्यादा बीट के निशान मिले. हालांकि, रिसर्च में इसका कोई पक्का वैज्ञानिक कारण साबित नहीं हुआ है. वीडियो में जानें अलग-अलग रिसर्च में क्या दावे किए गए हैं.
300 KM दूर से खत्म होगा दुश्मन का 'उड़ता रडार', भारत के सुखोई-30MKI को मिल रहा है नया 'ब्रह्मास्त्र'
रूस की RVV-BD मिसाइल क्या है? जो 300 KM दूर दुश्मन के विमान को भी बना सकती है निशाना, भारत अपने Su-30MKI में लगाने की कर रहा तैयारी.
NEET Protest: जंतर-मंतर पर महिलाओं से बदसलूकी मामले में Supreme Court पहुंची याचिका
नयी दिल्ली, आठ सितंबर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में एक याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय से अपील की है कि उन सुरक्षाकर्मियों की जवाबदेही तय की जाए, जिन पर आरोप है कि उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रही महिलाओं को घसीटा और उनके खिलाफ बल प्रयोग किया। दिल्ली में 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं; सुरक्षाकर्मियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया। जंतर-मंतर पर 20 जून को शुरू हुआ आंदोलन 25 जुलाई को तब खत्म कर दिया गया, जब तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और सरकार ने कॉजपा की अन्य मांगें मान लीं। न्यायालय ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की जांच के लिए, हाल ही में पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी इसके अध्यक्ष होंगे। न्यायालय ने हाल ही में, 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच देश भर में कॉजपा के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी को रद्द कर दिया, जिसके बाद इस समूह ने राष्ट्रीय राजधानी में पांच सितंबर को आयोजित अपने मार्च को रद्द करने का फैसला किया। दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में “चलो संसद” प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग का जोरदार बचाव किया। पुलिस ने न्यायालय को बताया कि प्रदर्शन को “असामाजिक तत्वों” और “हिस्ट्रीशीटर” ने अपने कब्जे में ले लिया था, जिसके कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई और 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। याचिकाकर्ताओं में से एक शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने जवाबी-हलफनामा दाखिल किया और दिल्ली पुलिस के कई दावों को चुनौती दी। हलफनामे में कहा गया, “पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों को घसीटने, शारीरिक रूप से रोकने और उनके खिलाफ बल प्रयोग करने की विशिष्ट एवं निर्विवादित घटनाएं सामने आई हैं। इनमें गीतांजलि आंगमो को बाल पकड़कर घसीटना और एक महिला प्रदर्शनकारी को अतिरिक्त डीसीपी द्वारा थप्पड़ मारना भी शामिल है। ऐसे बल प्रयोग का आदेश देने या इसकी अनुमति देने वाले सबसे वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
राजस्थान: मिल गया किडनैप सेना का जवान, परीक्षा की तैयारी के लिए छुट्टी पर आया था घर
खंडेला से अगवा किए गए सेना के जवान को पुलिस ने बरामद कर लिया है. बाइक से घर लौटते समय बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया था.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में किए गए अपने विवादित हाथ के इशारे को लेकर सफाई दी है। उनके इस इशारे पर विपक्षी दलों और राजनीतिक नेताओं ने सवाल उठाए थे। विजय ने कहा कि उनका इशारा “पूरी तरह स्वाभाविक और अचानक हुआ” था और इसके पीछे किसी ...
मेघालय हाई कोर्ट ने रद की यूपी के छात्रों की FIR, होमस्टे विवाद में सुनाया फैसला
मेघालय उच्च न्यायालय ने शिलांग के एक होमस्टे में तोड़फोड़ और धमकी देने के मामले में उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद कर दी है।
बिहार कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने विधानसभा चुनाव में हार के 10 महीने बाद भी नेतृत्व में बदलाव न होने पर चिंता जताते हुए राजेश राम और कृष्णा अल्लावरू को हटाने की मांग की।
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग से 2.5 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार, ऑफलाइन बिक्री में भी तेजी
इस त्योहारी सीजन में ऑनलाइन बिक्री 1.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे 2.6 लाख मौसमी रोजगार पैदा होंगे।
सुप्रीम कोर्ट में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू हुई, जहां अनारक्षित वर्ग ने नौकरी जाने का डर जताया।
अजमेर निगम चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबलों की दस्तक, टक्कर में आने लगे निर्दलीय प्रत्याशी
अजमेर। नगर निगम चुनाव का रण अब पूरी तरह सज चुका है। प्रचार के शोर, गली-मोहल्लों की चुनावी चौपालों और प्रत्याशियों के जनसंपर्क के बीच अजमेर के 80 वार्डों में जीत-हार के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ आमने-सामने की लड़ाई नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में […] The post अजमेर निगम चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबलों की दस्तक, टक्कर में आने लगे निर्दलीय प्रत्याशी appeared first on Sabguru News .
'गुरुजी आप पढ़ाइए, आज हम भी बैठेंगे', क्लास में पहुंचीं DM, Video
जहानाबाद में DM छिरिङ वाई भूटिया का स्कूल निरीक्षण के दौरान अलग अंदाज देखने को मिला. वह मॉडल स्कूल/कन्या मध्य विद्यालय पहुंचीं और छात्रों की तरह सबसे आखिरी बेंच पर बैठ गईं. उन्होंने शिक्षक से पढ़ाने को कहा और पूरी क्लास सुनी. छात्रों से संवाद कर विषय से जुड़े सवाल भी पूछे. हालांकि, 1200 छात्रों में सिर्फ 300 की उपस्थिति देखकर वह नाराज हुईं.
ईडी ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीना टी और दामाद पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ सीएमआरएल रिश्वत मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए राज्य के डीजीपी को पत्र लिखा है।
मार्गी होने से पहले इन 3 राशियों को सताएंगे शनि, 4 महीने रहें अलर्ट
Shani Margi 2026: 11 दिसंबर को शनिदेव मार्गी होंगे. इससे पहले शनि देव की वक्र दृष्टि यानी टेढ़ी नजर तीन राशियों को परेशान करेगी. इन राशियों को धन, करियर, कारोबार और सेहत के मोर्चे पर भयंकर नुकसान झेलने पड़ सकते हैं.
CM विजय ने जबड़े से किया कौन सा इशारा, चिढ़ गई DMK, फिर बोले- जानबूझकर नहीं किया!
TVK प्रमुख विजय ने साफ किया कि विधानसभा में उनके जिस इशारे को विपक्ष ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को 'बॉडी-शेम' करने की कोशिश बताया था, यह अनजाने में हुआ था और किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं किया गया था.
फिल्म 'हनुमान अंश' की टीम से मिले CM योगी, UP में होगी टैक्स-फ्री?
फिल्म हनुमान अंश की पूरी टीम हाल ही में लखनऊ गई, जहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई. सीएम योगी ने उनकी फिल्म देखी, और जमकर तारीफ भी की. आजतक से बातचीत में फिल्म की टीम ने अपनी मुलाकात से जुड़ी हर जानकारी साझा की.
रसोई में कड़ाही-कुकर रखने की जगह नहीं? आजमाएं ये 10 आसान तरीके
छोटी रसोई में सामान रखने में बहुत समस्या होती है, खासतौर पर कहाड़ी, पतीले और कुकर जैसे सामान रखने में यह परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है. अगर आपको भी बड़े बर्तन रखने में दिक्कत होती है तो आप इन आसान ट्रिक्स को आजमा सकते हैं, जो आपकी आधी मुश्किल का हल कर देंगे.
भिवाड़ी में विधायक महंत बालकनाथ के कथित बयान पर भड़का बवाल
खैरथल-तिजारा। राजस्थान में खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी नगर परिषद चुनाव के बीच वार्ड नंबर 14 में भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार के दौरान तिजारा विधायक महंत बालकनाथ के कथित बयान को लेकर विवाद गहरा गया है। बयान से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। […] The post भिवाड़ी में विधायक महंत बालकनाथ के कथित बयान पर भड़का बवाल appeared first on Sabguru News .
PNB करेंसी चेस्ट केस में फरार बैंककर्मी गिरफ्तार, मिली थे करोड़ों की नकली नोट
सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मामले में NIA को बड़ी सफलता मिली है. एजेंसी ने फरार चल रहे मुख्य नामजद आरोपी बैंक कर्मचारी अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है.
डियर बाबा जी- बंगाल में नॉनवेज दुर्गापूजा के दौरान भोजन नहीं भोग है
बंगाल में मां दुर्गा बेटी बनकर आती हैं और जब बेटी घर आती है, तो घर में वही खाना बनता है जो उस घर की अपनी परंपरा है.
पंजाब सरकार ने लोगों के उत्साहजनक सहयोग और 83 फीसदी से अधिक शिकायतों के निपटारे को देखते हुए 'सफाई अभियान 2.0' को 12 सितंबर तक बढ़ा दिया है.
Tamil Nadu के मुख्यमंत्री Joseph Vijay बोले- विधानसभा में जबड़े पर हाथ रखना अनजाने में हुआ
चेन्नई, आठ सितंबर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा में अपने जबड़े को छूने का उनका हाव-भाव जानबूझकर नहीं किया गया था और पूरी तरह अनजाने में हुआ। विजय ने सात सितंबर की विधानसभा की अपनी भाव-भंगिमा का जिक्र करते हुए कहा, “मेरी शारीरिक हाव-भाव की वह प्रतिक्रिया अनायास हुई थी। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि वह किसी भी तरह जानबूझकर नहीं की गई थी।”सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा, इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि इसे किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कृत्य के रूप में न देखा जाए। विजय का एक हाथ से जबड़े को पकड़ने का हावभाव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया था। कुछ लोगों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का मजाक उड़ा रहे थे, क्योंकि आपातकाल (1975-77) के दौरान हिरासत में रहने के दौरान स्टालिन के जबड़े में फ्रैक्चर हो गया था। इस मुद्दे पर माकपा के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने कहा कि आपातकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन को पुलिस ने बुरी तरह पीटा था और उनका जबड़ा टूट गया था। षणमुगम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, ‘‘बॉडी शेमिंग कोई भी करे, वह निंदनीय है। खुद मुख्यमंत्री का ऐसा करना गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है।’’माकपा नेता ने कहा कि विधानसभा को व्यक्तिगत हमलों के मंच में बदलना, जिसका जनकल्याण से कोई लेना-देना नहीं है या इसे केवल अपने नेता की प्रशंसा करने का मंच बना देना पूरी तरह अनैतिक कृत्य है। माकपा उन दलों में शामिल है जो टीवीके सरकार का समर्थन करते हैं और यह सरकार कांग्रेस, वाम दलों, आईयूएमएल और वीसीके के समर्थन पर टिकी है। विजय ने यह हाव-भाव उस समय किया था, जब वह 1970 के दशक की सरकरिया आयोग की रिपोर्ट और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर मुख्य विपक्षी दल द्रमुक पर कथित भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साध रहे थे। इस दौरान उन्होंने हाथ से अपना जबड़ा ऊपर उठाने और सिर को थोड़ा एक ओर झुकाने जैसा हाव-भाव किया था। इस पृष्ठभूमि में विजय ने स्पष्ट किया कि उनका यह हाव-भाव पूरी तरह अनजाने में हुआ था। पिछले कुछ वर्षों में अन्नाद्रमुक के कुछ नेताओं और समर्थकों ने दावा किया था कि आपातकाल के दौरान स्टालिन को मीसा (आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम) के तहत जेल नहीं भेजा गया था। हालांकि, उन्होंने स्टालिन के जेल जाने से इनकार नहीं किया था। स्टालिन ने 2019 में यह भी कहा था कि उनसे यह साबित करने के लिए कहा जाना कि उन्हें मीसा के तहत गिरफ्तार किया गया था, अपमानजनक था। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर चर्चा करना अनुचित है। अपनी आत्मकथा ‘उंगलिल ओरुवन’ (आप में से एक) में स्टालिन ने 1976 में अपनी गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए समय का उल्लेख किया है। उन्होंने संक्षेप में यह भी बताया है कि जेल को एक यातना कक्ष में बदल दिया गया था, जहां मौत की आवाजें गूंजती थीं।
यूपी में कब मिलेगा सितंबर महीने का फ्री राशन, सामने आई तारीख
सितंबर महीने में अंत्योदय कार्ड धारकों को 35 किलो ग्राम राशन जिसमें 14 किलो ग्राम गेहूं और 21 किलो ग्राम चावल दिया जाएगा. इसके साथ 18 रुपये प्रति किलो रुपये की दर से 3 किलो ग्राम चीनी भी मिलेगी.

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