सबसे ज्यादा कांग्रेस राज में हुए पेपर लीक : अरुण चतुर्वेदी
अलवर। राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा है कि विपक्ष वास्तव में पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर गंभीर है तो संसद में बहस से भागने के बजाय चर्चा करे। चतुर्वेदी ने सोमवार को अलवर में कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा […] The post सबसे ज्यादा कांग्रेस राज में हुए पेपर लीक : अरुण चतुर्वेदी appeared first on Sabguru News .
दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के विमान में आग की चेतावनी, आपात स्थिति में राजकोट में लैंडिंग
राजकोट। दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के एक विमान को आग की चेतावनी के बाद राजकोट में आपात स्थिति में उतारा गया। विमान की राजकोट में सुरक्षित लैंडिंग हुई। इस उड़ान में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को मिलाकर कुल 194 लोग सवार थे। राजकोट हवाई अड्डे से प्राप्त जानकारी के अनुसार इंडिगो […] The post दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के विमान में आग की चेतावनी, आपात स्थिति में राजकोट में लैंडिंग appeared first on Sabguru News .
भोपाल में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से रेप
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पीड़िता पेशे से मेकअप आर्टिस्ट है। उसकी करीब एक माह पहले सोशल मीडिया […] The post भोपाल में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से रेप appeared first on Sabguru News .
संगरूर भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला, पुलिस जांच में जुटी
संगरूर। पंजाब में संगरूर स्थित भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय पर रविवार देर रात कथित तौर पर पेट्रोल बम से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार अज्ञात हमलावरों ने कथित रूप से बीयर की बोतल में पेट्रोल भरकर उसे पेट्रोल बम के रूप में तैयार किया और भाजपा कार्यालय […] The post संगरूर भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला, पुलिस जांच में जुटी appeared first on Sabguru News .
श्रीगंगानगर : नशे में मामूली पर विवाद के चलते युवक की हत्या
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के भागसर गांव में रविवार देर रात एक मजदूर युवक ने झगड़ा हो जाने पर दूसरे युवक की गर्दन काट कर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों ने सोमवार का बताया कि मृतक की पहचान रमेश सोनी (37) निवासी भागसर के रूप में हुई है। आरोपी युवक को हिरासत में ले […] The post श्रीगंगानगर : नशे में मामूली पर विवाद के चलते युवक की हत्या appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा एसपी से महिला से अभद्र व्यवहार करने वाले युवक की शिकायत
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के गांधीनगर थाना क्षेत्र में एक महिला से कथित अभद्र व्यवहार काे लेकर पुलिस कार्रवाई में देरी से नाराज कई महिलाएं रविवार देर रात करीब 12 बजे पुलिस अधीक्षक आवास पहुंचीं और आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की। प्राप्त जानकारी के अनुसार कनक विहार कॉलोनी निवासी एक महिला […] The post भीलवाड़ा एसपी से महिला से अभद्र व्यवहार करने वाले युवक की शिकायत appeared first on Sabguru News .
बनेवड़ा में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर 5 अगस्त से जन आंदोलन
बनेवड़ा। सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2022 में साइकिल यात्रा निकालकर जन-जागरूकता की मिसाल कायम करने वाला बनेवड़ा गांव एक बार फिर आंदोलन की राह पर है। इस बार ग्रामीणों ने सड़क नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। विद्यालय में शिक्षकों की कमी और […] The post बनेवड़ा में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर 5 अगस्त से जन आंदोलन appeared first on Sabguru News .
रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर मिडिल ईस्ट के संघर्षों तक, आधुनिक युद्ध क्षेत्र में ड्रोन्स और लॉइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन्स) ने जंग का पूरा तरीका बदल दिया है। भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भी यह साबित किया था कि भविष्य की जंगों में मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) की भूमिका कितनी निर्णायक होगी। दुश्मन के इन्हीं हवाई खतरों और ड्रोन्स के झुंड (Swarm Drones) को समय रहते हवा में ही पूरी तरह तबाह करने के लिए भारत ने एक बड़ा और स्वदेशी मील का पत्थर हासिल कर लिया है। इस नई स्वदेशी तकनीक का नाम है—भार्गवास्त्र (Bhargavastra)।भारतीय सेना के सामने नागपुर फैसिलिटी में हुआ प्रदर्शनभारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने 24 जुलाई को नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) की फैसिलिटी में भार्गवास्त्र का सफलता पूर्वक प्रदर्शन किया गया। मेक-II (Make-II) कार्यक्रम के तहत विकसित यह एक वीकल-माउंटेड (गाड़ियों पर तैनात होने वाला) लेयर्ड हार्ड-किल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है। इस प्रदर्शन के दौरान सिस्टम ने दुश्मन के ड्रोन्स के झुंड को सफलतापूर्वक डिटेक्ट किया, रियल-टाइम एयर पिक्चर जनरेट की और बिना किसी इंसानी चूक के टारगेट सेट कर लिया।10 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के ड्रोन्स की पहचानभार्गवास्त्र एक बेहद एडवांस्ड C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) आर्किटेक्चर पर काम करता है। इसमें त्रिस्तरीय (3-Tier) सेंसर तकनीक लगाई गई है:डिटेक्शन क्षमता: यह 10 किलोमीटर की दूरी से ही बड़े UAVs और कम दूरी पर छोटे ड्रोन्स का पता लगा लेता है।सेंसर तकनीक: इसमें दिन और रात दोनों समय सटीक ट्रैकिंग के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर दिए गए हैं।पैसिव RF सेंसर: यह बिना अपनी लोकेशन जाहिर किए दुश्मन के रेडियो-फ्रीक्वेंसी सिग्नल को ट्रैक कर लेता है।इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से आगे 'हार्ड-किल' तकनीकपारंपरिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या सिग्नल ब्लॉक करने पर निर्भर रहते हैं, लेकिन आधुनिक ऑटोनॉमस ड्रोन्स पर जैमिंग का असर नहीं होता। भार्गवास्त्र को विशेष रूप से 'हार्ड-किल' तकनीक से लैस किया गया है। इसका मतलब यह है कि यह अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स और बेहद सटीक गाइडेड माइक्रो-मिसाइलों के कॉम्बिनेशन से दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही सीधे हमला करके भौतिक रूप से नष्ट (Destroy) कर देता है।रेगिस्तान से लेकर 5,000 मीटर ऊंचे पहाड़ों पर तैनातीभार्गवास्त्र को भारत के हर तरह के दुर्गम इलाकों के हिसाब से तैयार किया गया है। इसे तपते रेगिस्तान, मैदानी इलाकों से लेकर 5,000 मीटर (करीब 16,000 फीट) से ज्यादा ऊंची बर्फीली चोटियों पर भी आसानी से तैनात किया जा सकता है। यह भारतीय सेना के मौजूदा कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क के साथ तुरंत जुड़ जाता है, जिससे भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध में काफी बढ़त मिलेगी।सस्ते रॉकेट्स से करोड़ों की बचतअक्सर देखा जाता है कि दुश्मन के कुछ लाख रुपये के सस्ते ड्रोन्स को गिराने के लिए सेनाओं को करोड़ों रुपये की सरफेस-टू-एयर मिसाइलें (SAMs) दागनी पड़ती हैं, जो आर्थिक रूप से काफी नुकसानदेह होता है। भार्गवास्त्र का सबसे बड़ा फायदा इसकी कम लागत है। यह सस्ते माइक्रो-रॉकेट्स का उपयोग करके दुश्मन के ड्रोन्स को नष्ट करता है, जिससे भारतीय सेना का रक्षा खर्च काफी कम हो जाएगा।ग्लोबल ड्रोन हब बनने की ओर भारत का कदमरक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विजन के अनुसार, भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण और एंटी-ड्रोन तकनीक में दुनिया का ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भार्गवास्त्र का यह सफल प्रदर्शन साबित करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के दम पर भारत अब अपनी सीमाओं की सुरक्षा पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर करने के लिए तैयार है।
हिंदू धर्म में सावन के महीने को बेहद पवित्र और भगवान शिव का सबसे प्रिय मास माना जाता है। इस पूरे महीने में करोड़ों शिवभक्त महादेव की भक्ति में लीन रहते हैं, व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान शिव का रूप अन्य सभी देवी-देवताओं से काफी अलग और निराला है। उनके शरीर पर विभूति, गले में सांप, सिर पर आधा चांद और जटाओं में गंगा विराजमान हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव के ये सभी प्रतीक सिर्फ उनके रूप का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनमें ज्ञान, धैर्य, साहस और संतुलन जैसे जीवन के सबसे बड़े सबक छिपे हैं?आइए जानते हैं भगवान शिव से जुड़े 11 प्रमुख प्रतीकों का असली आध्यात्मिक अर्थ:1. त्रिशूल: भूत, वर्तमान और भविष्य का संतुलनभगवान शिव का अस्त्र 'त्रिशूल' तीन कांटों से मिलकर बना है। यह सृष्टि के निर्माण, संरक्षण और विनाश को दर्शाता है। इसके अलावा यह काल के तीन रूपों—भूत, वर्तमान और भविष्य का प्रतीक है, जो हमें याद दिलाता है कि महादेव समय के चक्र से भी परे हैं।2. डमरू: ब्रह्मांड की पहली ध्वनि और निरंतरतामाना जाता है कि डमरू की ध्वनि से ही इस पूरी सृष्टि की शुरुआत हुई थी। डमरू का संगीत जीवन के लगातार चलने वाले चक्र और बदलाव को दर्शाता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में परिवर्तन ही एक स्वाभाविक नियम है।3. तीसरा नेत्र: अज्ञानता और नकारात्मकता का अंतमहादेव की तीसरी आंख ज्ञान, अंतर्दृष्टि और उच्च चेतना का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शिव अपनी तीसरी आंख खोलते हैं, तो अज्ञानता, अहंकार और सभी नकारात्मक शक्तियों का विनाश हो जाता है।4. आधा चांद: मन की शांति और भावनात्मक संतुलनशिव के मस्तक पर सुशोभित आधा चांद (चंद्रमा) समय और मन के संतुलन का प्रतीक है। जिस तरह चंद्रमा घटता-बढ़ता रहता है, उसी तरह जीवन में सुख-दुख आते रहते हैं। यह प्रतीक हमें हर स्थिति में शांत रहने की सीख देता है।5. जटाओं में गंगा नदी: दया और अनियंत्रित शक्ति पर नियंत्रणशिव की जटाओं से निकलने वाली मां गंगा पवित्रता और करुणा का प्रतीक हैं। जब गंगा का वेग पृथ्वी के लिए विनाशकारी हो सकता था, तब शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समेटकर उनका वेग शांत किया था। यह हमें अपनी शक्ति और ऊर्जा को सही दिशा में नियंत्रित करने का पाठ पढ़ाता है।6. गले में सांप (वासुकि): निडरता और इच्छाओं पर काबूमहादेव के गले में लिपटा जहरीला कोबरा नाग यह दिखाता है कि एक साधक को अपने डर और बेकाबू इच्छाओं पर पूरी तरह से नियंत्रण रखना चाहिए। यह विपरीत परिस्थितियों में भी शांत और सजग रहने का संदेश देता है।7. नीलकंठ: त्याग, साहस और दूसरों की रक्षासमुद्र मंथन के दौरान जब संपूर्ण ब्रह्मांड को बचाने के लिए शिव ने हलाहल विष पिया था, तब उनका कंठ नीला पड़ गया था। शिव का 'नीलकंठ' स्वरूप आत्म-बलिदान, साहस और समाज के कल्याण के लिए विष पीने (बुराइयों को सहने) की प्रेरणा देता है।8. शरीर पर विभूति (भस्म): नश्वरता और वैराग्यभगवान शिव अपने शरीर पर श्मशान की पवित्र राख लगाते हैं। यह भस्म हमें याद दिलाती है कि यह भौतिक संसार और शरीर नश्वर है। इसलिए इंसान को घमंड छोड़कर विनम्रता, वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान देना चाहिए।9. बाघ की खाल: अहंकार और वासना पर जीतशिवजी का बाघ की खाल पर विराजमान होना यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने अहंकार, घमंड और हिंसक इच्छाओं पर पूरी तरह से विजय प्राप्त कर ली है। यह आत्म-नियंत्रण से मिलने वाली आंतरिक शक्ति का प्रतीक है।10. रुद्राक्ष की माला: शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक जागृतिपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। रुद्राक्ष की माला मन को शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है। शिवभक्त इसे अपनी साधना और जप के लिए धारण करते हैं।11. नंदी और शिवलिंग: अनन्य भक्ति और अनंत ऊर्जानंदी: शिवजी का वाहन नंदी धैर्य, विश्वास और वफादारी का प्रतीक है। मंदिरों में नंदी का मुख हमेशा शिवलिंग की ओर होता है, जो ईश्वर के प्रति अटूट ध्यान को दर्शाता है।शिवलिंग: शिवलिंग भगवान शिव के निराकार और अनंत स्वरूप का प्रतीक है। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) और सृष्टि के मूल आधार को प्रदर्शित करता है।
हम सब अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में जींस पहनते हैं और लगभग हर नीली जींस की दाईं जेब के अंदर एक छोटी सी जेब बनी होती है। आजकल लोग इसमें सिक्के, चाबियां, पेनड्राइव या वायरलेस ईयरबड्स जैसी छोटी चीजें रख लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब पहली बार जींस डिजाइन की गई थी, तब यह छोटी जेब किसलिए बनाई गई थी? अगर आपको लगता है कि यह सिक्के रखने के लिए बनी है, तो आप गलत हैं। दरअसल, इस छोटी पॉकेट का इतिहास 19वीं सदी के आखिर से जुड़ा है और इसे काम के दौरान पॉकेट वॉच (Pocket Watch या जेब में रखने वाली घड़ी) को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया था।1873 में लेवी स्ट्रॉस ने क्यों बनाई थी यह खास जेब?इस छोटी जेब की शुरुआत साल 1873 में हुई थी, जब लेवी स्ट्रॉस (Levi Strauss) और दर्जी जैकब डेविस ने मिलकर दुनिया की पहली मजबूत डेनिम वर्क पैंट का पेटेंट कराया था। उस दौर में इसे वेस्ट ओवरऑल कहा जाता था, जिसे खदानों में काम करने वाले मजदूरों, काउबॉय, बढ़ई और रेलवे कर्मचारियों के लिए बनाया गया था।19वीं सदी में लोग कलाई घड़ी नहीं, बल्कि चेन वाली पॉकेट वॉच का इस्तेमाल करते थे। खदानों और निर्माण स्थलों पर काम करते समय अगर इस घड़ी को पैंट की सामान्य जेब में रखा जाता, तो औजारों, कीलों और पत्थरों से टकराकर उसका शीशा टूटने या उस पर खरोंच आने का डर रहता था। इसी समस्या का हल निकालते हुए लेवीज़ (Levi's) ने सामने वाली दाईं जेब के अंदर एक छोटी और टाइट पॉकेट बनाई, ताकि घड़ी एक जगह स्थिर रहे, बाहर न गिरे और काम करते वक्त सुरक्षित रहे। मजदूर आसानी से चेन खींचकर घड़ी बाहर निकालते और समय देख लेते थे।द्वितीय विश्व युद्ध और स्टील की कमी का असर20वीं सदी के मध्य तक दौर बदला और लोगों ने पॉकेट वॉच की जगह कलाई पर घड़ी पहनना शुरू कर दिया। इसके साथ ही इस छोटी जेब का असल मकसद तो खत्म हो गया, लेकिन यह जींस के क्लासिक डिजाइन का हिस्सा बनी रही। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब अमेरिका में स्टील की भारी कमी हुई, तब लेवीज़ ने सेना के लिए धातु बचाने के मकसद से कुछ समय के लिए इस छोटी जेब पर लगे रिवेट्स (धातु के मजबूत जोड़) हटा दिए थे। युद्ध खत्म होने के बाद इन्हें दोबारा जोड़ा गया।आज 150 साल बाद भी बनी हुई है जींस की पहचानहालांकि आज पॉकेट वॉच का दौर बीत चुका है और लोग इस जेब में छोटी-मोटी चीजें रखते हैं, फिर भी जींस बनाने वाली ब्रांड्स ने 150 साल पुराने इस ओरिजिनल डिजाइन को नहीं बदला। जो जेब कभी खदानों के मजदूरों की घड़ी बचाने के लिए बनाई गई थी, वह आज मॉडर्न जींस और फैशन की एक प्रतिष्ठित पहचान बन चुकी है।
कॉकरोच जनता पार्टी (cjp) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं लेने और विभिन्न राज्यों में कथित पुलिस कार्रवाई जारी रहने का आरोप लगाते हुए दोबारा बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। इस बीच, किसी भी संभावित विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली ...
दतिया उपचुनाव में भले ही आशुतोष तिवारी प्रत्याशी हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौर में हम सभी प्रत्याशी हैं। यहां लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच है। कांग्रेस 5 पीढ़ियों में केवल एक ही परिवार में सिमट गई। कभी किसी को मौका नहीं दिया। दतिया में भी ...
गुरु पूर्णिमा पर शिष्य और गुरु, दोनों भूमिका में दिखेंगे सीएम योगी
सनातन विचार दर्शन एवं संस्कृति में गुरु-शिष्य के रिश्ते को प्रतिष्ठित करने वाले पावन पर्व गुरु पूर्णिमा गोरक्षपीठ के लिए विशेष होती है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव वह अवसर होता है जब गोरक्षपीठाधीश्वर, शिवावतार एवं नाथपंथ के आदिगुरु महायोगी गोरखनाथ सहित ...
श्रावण की आस्था, शिवभक्तों का उत्साह… कांवड़ यात्रा-2026 के स्वागत को मेरठ पूरी तरह तैयार
Meerut Kanwar Yatra: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र काल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष का पान करने के बाद भगवान शिव के शरीर की तपन शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर पवित्र नदियों का जल ...
पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक और उन्नत सुविधाओं से युक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस आदर्श पशु चिकित्सालय स्थापित किए जाएंगे, जहां पशुओं को ...
CJP ने सरकार पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद
Ram Mandir online donation: अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हालिया मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राम भक्तों के लिए ऑनलाइन ...
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, आरोपों से मुक्ति के लिए चंपत राय की कठोर साधना!
Champat Rai Chaturmas: राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवादों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आध्यात्मिक साधना का मार्ग चुन लिया है। अपने ऊपर लगे आरोपों से मुक्ति और आत्मिक शांति के लिए 80 वर्षीय चंपत राय ने ...
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल और सदन में लगातार बनाए गए संवाद का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर गतिरोध समाप्त हो गया है और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मंगलवार से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा शुरू करने पर सहमति व्यक्त की है।
यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) पर छिड़ी एक अंतहीन बहस बन गया है। देश की साहित्यिक और लेखक बिरादरी इस मुद्दे पर दो स्पष्ट और विपरीत ध्रुवों पर बंट गई है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने बच्चों और बेटियों के भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए एक छोटी बच्ची से हुई मुलाकात का जिक्र किया।
भारत सरकार ने ब्लैक सी (Black Sea) में वाणिज्यिक जहाज MV OMORFI पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद यूक्रेन के भारत स्थित राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक (Oleksandr Polishchuk) को सोमवार को तलब किया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना पर गहरी ...
अगर गालियों से समाज का पतन होता है तो इसकी शुरुआत आपके बेडरूम से हो चुकी है
ओटीटी, स्टैंडअप्स और पॉडकास्ट में गालियों को 'कूल' और 'रॉ' बताकर जिस तरह से आप और हम कूल बनते हैं तो यह भी बता दें कि इस जनरेशन को अपनी गालियों के साथ कौनसे श्लोक और मंत्र शामिल करने चाहिए थे, जिससे ये गालियां इतनी अश्लील और भद्दी न हो?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी। पार्टी का आरोप है कि देशव्यापी प्रदर्शन वापस लेने के बाद केंद्र के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया ...
श्रावण मास में शाक खाना क्यों है वर्जित?
Why leafy vegetables are avoided in Shravan: श्रावण मास/ सावन में हरे पत्तेदार साग या शाक न खाने का नियम केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी है। इसे धार्मिक ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान दोनों ...
फर्जी Air Suvidha 2.0 वेबसाइटों से रहें सावधान, सरकार ने यात्रियों के लिए जारी की चेतावनी
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने शनिवार को हवाई यात्रियों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी करते हुए फर्जी Air Suvidha 2.0 वेबसाइटों और पोर्टलों से सतर्क रहने की अपील की है। मंत्रालय ने कहा है कि कुछ अनधिकृत वेबसाइटें खुद को Air ...
श्रेयस अय्यर थे तो बच गए... वरना रोहित-विराट के सामने इस हरकत पर ईशान किशन की खटिया खड़ी होना तय
भारतीय क्रिकेट टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल और मैदान पर खिलाड़ियों के बीच की आपसी मस्ती अक्सर कैमरे में कैद हो जाती है, जो फैंस के बीच चर्चा का बड़ा केंद्र बनती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन (Ishan Kishan) से जुड़ा एक मजेदार और दिलचस्प वाकया तेजी से वायरल हो रहा है। मैदान पर खेल के दौरान ईशान द्वारा की गई एक अनूठी हरकत को देखकर क्रिकेट प्रेमियों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि गनीमत रही कि उस समय क्रीज पर समझदार और शांत स्वभाव के श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) मौजूद थे। अगर उनकी जगह कप्तान रोहित शर्मा या दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली होते, तो मैदान पर ही ईशान की क्लास लग जाती और उनकी खटिया खड़ी होना पूरी तरह तय था।मैदान पर क्या थी वह हरकत जिसने खींचा सबका ध्यान?भारतीय खिलाड़ी अपनी आक्रामक ऊर्जा और मैदान पर हाई-वोल्टेज मनोरंजन के लिए जाने जाते हैं। मैच के दौरान जब माहौल थोड़ा तनावपूर्ण या रोमांचक होता है, तो खिलाड़ी आपस में हल्का-फुल्का मजाक करके दबाव को कम करने की कोशिश करते हैं। ईशान किशन अक्सर अपनी जिंदादिल और नटखट शैली के लिए जाने जाते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने मैदान पर कुछ ऐसा कर दिया जिसे देखकर वहां मौजूद साथी खिलाड़ी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। हालांकि, इस तरह की गैर-गंभीर हरकतें कई बार सीनियर खिलाड़ियों को रास नहीं आती हैं, और यही वजह है कि इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद से ही फैंस इस पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।श्रेयस अय्यर के शांत स्वभाव ने कैसे बचा लिया मामला?घटना के वक्त मैदान पर मौजूद श्रेयस अय्यर ने जिस तरह से परिपक्वता दिखाते हुए इस पूरी स्थिति को संभाला, उसकी सराहना की जानी चाहिए। श्रेयस अपने शांत और कूल अंदाज के लिए जाने जाते हैं, जो दबाव के क्षणों में भी अपना आपा नहीं खोते हैं। उन्होंने ईशान की इस हरकत को बड़े ही दोस्ताना अंदाज में टाल दिया और खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। यदि श्रेयस की जगह टीम के सीनियर और सख्त अनुशासन वाले कप्तान रोहित शर्मा या रन मशीन विराट कोहली होते, तो खेल की गरिमा को ध्यान में रखते हुए वे मैदान पर ही अपनी नाराजगी जाहिर करने से बिल्कुल नहीं चूकते।सीनियर खिलाड़ियों का अनुशासन और युवा खिलाड़ियों की मस्तीभारतीय टीम में अनुशासन और मैदान पर आक्रामकता का एक लंबा इतिहास रहा है। जहां एक तरफ टीम के युवा खिलाड़ी अपनी ऊर्जा और मस्ती भरे अंदाज से ड्रेसिंग रूम का माहौल हल्का रखते हैं, वहीं रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी हर गेंद पर सौ प्रतिशत एकाग्रता और अनुशासित रवैये की वकालत करते हैं। यही कारण है कि क्रिकेट प्रेमी इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि युवा खिलाड़ियों को सीनियरों के सामने हमेशा अपनी हरकतों पर थोड़ा नियंत्रण रखना पड़ता है, जबकि श्रेयस अय्यर जैसे दोस्तों के साथ उन्हें थोड़ी छूट मिल जाती है।
क्या विपक्ष के नेता पद से बर्खास्त होंगे राहुल गांधी, निशिकांत दुबे ने उठाए सवाल
Nishikant Dubey Attacks Rahul Gandhi : भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरों पर सवाल उठाते हुए उन्हें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पद से बर्खास्त करने की मांग की है।
भारतीय क्रिकेट टीम के भीतर इन दिनों मैदान के बाहर चल रही रणनीतिक चर्चाएं और बयानों के तीर सुर्खियों में छाए हुए हैं। इसी कड़ी में विस्फोटक बल्लेबाज श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) का एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने क्रिकेट गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां उन्होंने नेशनल क्रिकेट एकेडमी के प्रमुख और समय-समय पर टीम के साथ जुड़ने वाले वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) की शांत और सपोर्टिव कार्यशैली की जमकर तारीफ की है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के कोचिंग कल्चर और मौजूदा सेटअप पर उनके इस बयान को एक बड़ा कटाक्ष या निशाना माना जा रहा है। कप्तान और खिलाड़ियों के साथ तालमेल को लेकर दिए गए इस इंटरव्यू ने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।वीवीएस लक्ष्मण की शांत कमान और 'टेंपरेरी कोच' वाले अंदाज के मु मुरीद हुए श्रेयसजब भी टीम इंडिया के साथ वीवीएस लक्ष्मण बतौर कार्यवाहक या अंतरिम कोच (Temporary Coach) जुड़े हैं, खिलाड़ियों के साथ उनका तालमेल हमेशा से बेहद सौहार्दपूर्ण रहा है। श्रेयस अय्यर ने खुलकर बात करते हुए बताया कि कैसे लक्ष्मण दबाव के क्षणों में खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत करते हैं और ड्रेसिंग रूम का माहौल एकदम तनावमुक्त रखते हैं। खिलाड़ियों पर बिना किसी अतिरिक्त दबाव के खुलकर अपना स्वाभाविक खेल खेलने की छूट देने का उनका यह अंदाज युवाओं और सीनियर खिलाड़ियों दोनों को बेहद पसंद आता है। श्रेयस के इन शब्दों को लक्ष्मण के प्रति गहरे सम्मान और उनकी कोचिंग शैली की सराहना के रूप में देखा जा रहा है।क्या गौतम गंभीर की आक्रामक कार्यशैली पर साधा गया है निशाना?गौतम गंभीर अपनी सख्त अनुशासनप्रियता, स्पष्टवादी रवैये और आक्रामक क्रिकेट शैली के लिए जाने जाते हैं। मुख्य कोच के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद से ही टीम के भीतर और बाहर लगातार समीकरण बदलते रहे हैं। ऐसे में श्रेयस अय्यर द्वारा 'टेंपरेरी कोच' मॉडल और शांत स्वभाव वाले नेतृत्व की इतनी खुलकर तारीफ करना कई राजनीतिक और क्रिकेट पंडितों के कान खड़े कर रहा है। इसे गंभीर के कड़े तेवरों और मैनेजमेंट के साथ खिलाड़ियों के बीच चल रही वैचारिक असहजता के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे यह साफ होता है कि ड्रेसिंग रूम के अंदर विचारों के कई स्तर पर अलग-अलग आयाम मौजूद हैं।कप्तान की प्राथमिकताओं और टीम के भविष्य पर पड़ेगा इसका असरभारतीय क्रिकेट टीम इस समय भविष्य के कई बड़े दौरों और आईसीसी प्रतियोगिताओं की तैयारियों में जुटी हुई है। ऐसे समय में खिलाड़ियों के इस तरह के बयान टीम के भीतर चल रही आंतरिक स्थिति की एक झलक पेश करते हैं। मैनेजमेंट और खिलाड़ियों के बीच का यह संवाद आगामी दौरों में चयन और रणनीतिक फैसलों पर कितना असर डालेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इस बयानबाजी ने फिलहाल क्रिकेट फैंस के बीच चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म कर दिया है।
Honda ने हाल ही में अपना नया फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर Honda QC3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह स्कूटर लंबी रेंज और बेहतर प्रैक्टिकलिटी के साथ आता है। वहीं, भारत में पहले से मौजूद Honda Activa e स्वैपेबल बैटरी टेक्नोलॉजी के साथ उपलब्ध है। आइए ...
छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचल से समाज सुधार की एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठी खबर सामने आ रही है। भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 'विशेष पिछड़ी जनजाति' (PVTG) के रूप में गोद लिए गए और 'राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र' के नाम से पहचाने जाने वाले बैगा समाज (Baiga Samaj) ने एक बहुत बड़ा और साहसिक फैसला लिया है। समाज ने अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शादियों और अन्य आयोजनों में डीजे (DJ) के शोर-शराबे और शराब के सेवन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से न केवल स्थानीय प्रशासनिक हलकों में बल्कि पूरे राज्य में बैगा समाज की इस अनुकरणीय पहल की सराहना की जा रही है।फिजूलखर्ची और आधुनिक कुरीतियों पर लगाम कसने का फैसलापारंपरिक रूप से प्रकृति प्रेमी और अपनी समृद्ध संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले बैगा समाज के बुजुर्गों और युवाओं ने मिलकर यह महसूस किया कि पिछले कुछ वर्षों में आधुनिकता की अंधी दौड़ के चलते शादियों में होने वाला बेहिसाब खर्च गरीब परिवारों की कमर तोड़ रहा है। विवाह समारोहों में भारी-भरकम रकम खर्च करके डीजे बजाने और शराब परोसने की संस्कृति तेजी से पैर पसार रही थी, जिससे कई परिवार कर्ज के जाल में फंसते जा रहे थे। इसी गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए समाज की पंचायत ने एकूमत होकर यह कड़ा निर्णय लिया है कि अब किसी भी वैवाहिक कार्यक्रम में इन दोनों चीजों का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित रहेगा।नियम तोड़ने वालों पर लगेगा कड़ा सामाजिक दंडबैगा समाज की हुई इस महापंचायत में सर्वसम्मति से यह भी तय किया गया है कि यदि समाज का कोई भी व्यक्ति इस नियम की अवहेलना करता पाया गया, तो उस पर कड़ा सामाजिक दंड (Social Penalty) लगाया जाएगा। पंचायत के इस कड़े रुख से साफ है कि समाज अपनी खोई हुई सादगी और पारिवारिक ताने-बाने को बचाने के लिए बेहद गंभीर है। बुजुर्गों का मानना है कि डीजे के कर्कश शोर से जहां एक तरफ पर्यावरण और बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है, वहीं शराब के कारण आपसी विवाद और आर्थिक तंगी बढ़ती है। इस प्रतिबंध के लागू होने से अब शादियां फिर से शांत, सांस्कृतिक और पारंपरिक तरीके से संपन्न हो सकेंगी।जनजातीय अंचल में सुधर रही है सामाजिक और आर्थिक स्थितिछत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में फैले बैगा समाज के इस कदम को एक बड़े सामाजिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अन्य आदिवासी समुदायों के लिए भी यह पहल एक प्रेरणा बन रही है कि कैसे वे अपनी परंपराओं को आधुनिक कुरीतियों से बचा सकते हैं। स्थानीय प्रशासनिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे न केवल शादियों में होने वाली अनैतिक गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सादगी से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का तांडव! मौसम विभाग ने प्रदेश के इन 7 जिलों में जारी किया येलो अलर्ट
मॉनसून के रफ्तार पकड़ने के साथ ही छत्तीसगढ़ (CG Weather Update) के मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई संभागों में आगामी दिनों में मूसलाधार बारिश की संभावना जताते हुए बड़ा अपडेट जारी किया है। खासकर प्रदेश के सात चुनिंदा जिलों में बादलों के आक्रामक तेवर को देखते हुए मौसम विभाग (IMD) ने 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) घोषित किया है। पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी से बेहाल आम जनता को बारिश से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लगातार बरस रहे पानी के कारण निचले इलाकों में जलभराव और आवागमन बाधित होने की पूरी आशंका बनी हुई है।इन 7 जिलों में झमाझम बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग की कड़ी चेतावनीमौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, छत्तीसगढ़ के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के सात जिलों में भारी बारिश (Heavy Rain Warning) का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। इन जिलों में लगातार हो रही मानसूनी गतिविधियों के चलते मेघगर्जन, तेज हवाओं के साथ झमाझम पानी गिरने की उम्मीद है। प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर इन सभी इलाकों के स्थानीय प्रशासनिक अमले को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपदा या जलभराव की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि एक्टिव वेदर सिस्टम के कारण बादलों का डेरा इन क्षेत्रों में अगले कुछ घंटों तक और अधिक गहरा सकता है।नदियों का बढ़ा जलस्तर और निचले इलाकों में बढ़ी मुश्किलेंभौगोलिक दृष्टि से वनों और पहाड़ों से घिरे छत्तीसगढ़ में लगातार भारी बारिश होने से कई स्थानीय नदियों, नालों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से ऊपर उठने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों की निचली बस्तियों में पानी भरने की समस्याएं सामने आने लगी हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की है कि वे खेतों में पानी के उचित निकास का प्रबंध रखें और वज्रपात (Thunderstorm) की चेतावनी के दौरान पेड़ों या खुले मैदानों में शरण लेने से बचें।सफर करने से पहले एक बार जरूर चेक कर लें मौसम का हालयदि आप छत्तीसगढ़ के इन सात जिलों या आसपास के रूटों पर यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर ले लें। सड़कों पर जलभराव और खराब विजिबिलिटी के कारण ट्रैफिक धीमी गति से चल सकता है, जिससे समय अधिक लग सकता है। आपदा प्रबंधन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि बहुत जरूरी होने पर ही खराब मौसम के दौरान अपने घरों से बाहर निकलें और पूरी सावधानी बरतें।
बंद पड़े जीएसटी नंबरों से चल रहा था करोड़ों का फर्जी कारोबार! विभाग ने की 3 हजार नंबरों की पहचान
देशभर में टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ चल रहे देशव्यापी अभियानों के बीच कर विभाग (GST Department) की तरफ से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा खुलासा सामने आया है। टैक्स इंटेलिजेंस और डेटा एनालिसिस के जरिए विभाग ने ऐसे करीब तीन हजार जीएसटी (GST) नंबरों की पहचान की है जो आधिकारिक तौर पर काफी पहले बंद या रद्द (Cancelled) किए जा चुके थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कागजों और सिस्टम में बंद होने के बावजूद इन नंबरों के जरिए धड़ल्ले से करोड़ों रुपये का कारोबार (Turnover) किया जा रहा था। इस भारी-भरकम फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद से व्यापारिक और औद्योगिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने इन सभी संदिग्ध जीएसटी नंबर धारकों को कड़े नोटिस जारी कर दिए हैं और चेतावनी दी है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो बिना किसी देरी के सीधी एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।कैसे चल रहा था बंद जीएसटी नंबरों से करोड़ों के लेनदेन का खेल?जीएसटी विंग के शुरुआती तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि शातिर ठगों और फर्जी फर्मों ने उन कारोबारियों के पैन या जीएसटी पंजीकरण को निशाना बनाया जिन्होंने अपने व्यवसाय बंद कर दिए थे या जिनके रजिस्ट्रेशन कैंसल हो चुके थे। इन बंद नंबरों का इस्तेमाल करके बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही (Goods Movement) के केवल फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जा रहे थे। इसके जरिए करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करके सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई जा रही थी। इस तरह के सुनियोजित सिंडिकेट यह उम्मीद कर रहे थे कि बंद हो चुके नंबरों पर विभाग की पैनी नजर नहीं जाएगी, लेकिन एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स और एआई-बेस्ड टूल्स ने इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया।विभाग की दो टूक: नोटिस का जवाब नहीं दिया तो होगी सीधी कानूनी कार्रवाईकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जिन लगभग तीन हजार संदिग्ध जीएसटी नंबरों की सूची तैयार की गई है, उनके संचालकों और फर्म मालिकों को तुरंत प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) भेज दिए गए हैं। विभाग ने इन सभी मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने वित्तीय लेनदेन और कारोबार का वैध प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई भी व्यक्ति या फर्म नोटिस का जवाब देने में असफल रहती है या फर्जीवाड़ा सही पाया जाता है, तो उनके खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा और स्थानीय थानों में तुरंत एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।भौगोलिक और व्यापारिक स्तर पर बढ़ाई गई निगरानीइस बड़े खुलासे के बाद से देश के विभिन्न वाणिज्यिक केंद्रों और औद्योगिक जिलों में टैक्स अधिकारियों की टीमें पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई हैं। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि इस फर्जी नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से बड़े मास्टरमाइंड और सीए (Chartered Accountants) या सिंडिकेट सक्रिय हैं। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और बोगस बिलिंग के इस नासूर को जड़ से खत्म करने के लिए आने वाले दिनों में इस तरह की औचक जांच और सख्त चेकिंग का अभियान और अधिक तीव्र किया जाएगा।
मॉनसून की सक्रियता के बीच बिहार (Bihar Weather Update) के मौसम का मिजाज एक बार फिर से पूरी तरह बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने राज्य के कई जिलों में आगामी 28 जुलाई को मूसलाधार बारिश की संभावना जताते हुए 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी किया है। पिछले कुछ दिनों से उमसभरी गर्मी और तीखी धूप से परेशान लोगों को बारिश से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लगातार हो रही बरसात के चलते जनजीवन प्रभावित होने की पूरी आशंका है। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद हो गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।इन जिलों में झमाझम बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग की कड़ी चेतावनीमौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर बिहार और तराई वाले क्षेत्रों के साथ-साथ दक्षिण-मध्य बिहार के कई जिलों में बादलों का डेरा रहेगा। राजधानी पटना सहित मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जैसे जिलों में भारी बारिश और वज्रपात (Thunderstorm) की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में मेघगर्जन के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं और कुछ स्थानों पर झमाझम पानी बरसने से सड़कें पानी से लबालब हो सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून ट्रफ लाइन के गुजरने के कारण बादलों का यह नया दौर शुरू हुआ है, जो अगले कुछ दिनों तक राज्य के मौसम को प्रभावित करता रहेगा।नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में मंडराया खतराभौगोलिक और जल संसाधनों से समृद्ध बिहार में लगातार भारी बारिश होने से प्रमुख नदियों और सहायक धाराओं का जलस्तर तेजी से ऊपर चढ़ने लगा है। कई ग्रामीण और शहरी निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) की समस्या उत्पन्न होने लगी है, जिससे आवागमन करने वाले राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने किसानों को भी सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंध रखें और वज्रपात की चेतावनी के दौरान खुले खेतों या पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें।सफर करने से पहले चेक करें अपने जिले का मौसम हालयदि आप 28 जुलाई यानी कल कहीं बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो अपने स्थानीय मौसम के मिजाज की जानकारी जरूर ले लें। सड़कों पर जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति से बचने के लिए समय से पहले घर से निकलें। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ई 20 नीति को लेकर एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के युवाओं से एकजुट होकर इस मुद्दे पर अपनी राय रखने और आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की है।
बिहार की हॉट सीट माने जाने वाली बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bankipur Assembly By-Election) का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच चुका है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, राज्य का सियासी समीकरण बहुत तेजी से बदलता हुआ नजर आ रहा है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर मुख्य विपक्षी दल आरजेडी (RJD) के नेता तेजस्वी यादव की आक्रामक एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। तेजस्वी के मैदान में उतरने के बाद से जहाँ पारंपरिक विरोधी दल एक्टिव मोड में आ गए हैं, वहीं चुनावी रणनीतिकार से राजनीतिक खिलाड़ी बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी के लिए यहाँ वजूद बचाने और तीसरे नंबर पर फिसलने का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। इसके उलट, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राह बेहद सुरक्षित और आसान दिख रही है।तेजस्वी यादव की एंट्री से कैसे बदला बांकीपुर का सियासी समीकरण?बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से शहरी और पारंपरिक रूप से एक खास राजनीतिक मिजाज वाला इलाका माना जाता रहा है, जहाँ बीजेपी का मजबूत कैडर बेस रहा है। हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव की ओर से धुआंधार रैलियों और जनसंपर्क अभियानों ने इस सीट पर समीकरणों को पूरी तरह हिला दिया है। तेजस्वी के मैदान में आने से आरजेडी का कोर वोटर और युवा वर्ग पूरी एकजुटता के साथ पार्टी के पक्ष में लामबंद होता दिख रहा है। उनकी आक्रामक भाषण शैली और जमीनी मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने की रणनीति ने अन्य विपक्षी दलों की नींद उड़ा दी है, जिससे इस चुनावी मुकाबले में सीधा संघर्ष और अधिक पेचीदा हो गया है।प्रशांत किशोर (PK) के लिए क्यों बढ़ गया तीसरे नंबर पर खिसकने का जोखिम?अपनी चुनावी रणनीतियों के दम पर बड़े-बड़े दलों को मात देने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी के लिए बांकीपुर की यह लड़ाई अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे ही इस सीट पर मुकाबला दो ध्रुवीय (Bipolar) यानी बीजेपी बनाम आरजेडी की तर्ज पर सिमटने लगा है, वैसे ही तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही पीके की पार्टी हाशिए पर जाती दिख रही है। यदि शहरी मतदाताओं का ध्रुवीकरण पारंपरिक दलों के पक्ष में मजबूती से हो जाता है, तो प्रशांत किशोर समर्थित प्रत्याशी के लिए वोटों के समीकरण साधना बेहद मुश्किल हो जाएगा और उनका तीसरे स्थान पर खिसक जाना तय माना जा रहा है।बीजेपी की राह बांकीपुर में क्यों दिखाई दे रही है बेहद आसान?भौगोलिक और सामाजिक रूप से शहरी मतदाताओं के बहुल्य वाले बांकीपुर क्षेत्र में बीजेपी की पकड़ पारंपरिक रूप से काफी मजबूत रही है। विपक्षी खेमे में वोटों के बिखराव और तेजस्वी यादव की एंट्री से गैर-आरजेडी वोटों के और अधिक एकजुट होने की संभावना बढ़ गई है, जिसका सीधा फायदा भगवा पार्टी को मिलता दिख रहा है। डबल इंजन सरकार की नीतियों, स्थानीय विकास कार्यों और मजबूत सांगठनिक ढांचे के दम पर बीजेपी इस सीट पर अपनी बादशाहत बरकरार रखने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। यही वजह है कि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस उठापटक के बीच बांकीपुर में बीजेपी की जीत की राह काफी हद तक सुगम होती जा रही है।
बिहार की राजनीति के लिहाज से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में आगामी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bankipur Assembly Election) की सरगर्मियों के बीच विपक्षी दलों और नए सियासी रणनीतिकारों को एक के बाद एक करारे झटके लग रहे हैं। राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव और राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी को बड़ा झटका देते हुए कई नामचीन दिग्गज नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों ने अपने पुराने दलों का साथ छोड़ दिया है। इन सभी ने राजधानी पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में एक भव्य मिलन समारोह के दौरान आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली है, जिससे सियासी गलियारों में भारी हलचल मच गई है।बांकीपुर उपचुनाव से पहले सियासी समीकरणों में बड़ा बदलावकिसी भी चुनाव से ठीक पहले इस तरह का दलबदल विरोधी खेमे की रणनीति को कमजोर करने के लिए काफी माना जाता है। बांकीपुर सीट को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और वीआईपी सीट माना जाता है, जहाँ हर दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। ऐसे में चुनाव की तारीखों के नजदीक आते ही तेजस्वी यादव के पाले से कई प्रभावशाली नेताओं का छिटक जाना और प्रशांत किशोर के संगठन से जुड़े चेहरों का बीजेपी का दामन थामना, विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा मानसिक और रणनीतिक झटका साबित हो रहा है।बीजेपी मुख्यालय में हुआ दिग्गजों का स्वागत, पार्टी का कुनबा हुआ मजबूतपार्टी में शामिल होने वाले इन दिग्गज नेताओं का स्वागत करने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ प्रदेश पदाधिकारी और स्थानीय विधायक मौके पर मौजूद रहे। बीजेपी नेताओं ने नए शामिल हुए सदस्यों को पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर विधिवत स्वागत किया और विश्वास जताया कि उनके आने से बांकीपुर समेत आसपास के शहरी क्षेत्रों में पार्टी का जनाधार और अधिक मजबूत होगा। शामिल होने वाले नेताओं का कहना था कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी नीतियों, डबल इंजन सरकार के कार्यों और राज्य के चहुंमुखी विकास से प्रभावित होकर बीजेपी परिवार का हिस्सा बने हैं।चुनावी मैदान में असर और आगे की राजनीतिक रणनीतियाँभौगोलिक और सामाजिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में इस राजनीतिक उठापटक का सीधा असर आगामी मतदान पर देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि इन नेताओं के अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छे खासे व्यक्तिगत प्रभाव और कैडर बेस होने के कारण, विपक्षी दलों के वोटों में सेंध लग सकती है। चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बिहार की राजनीति में जोड़-तोड़ और रणनीतिक बदलाव का दौर और अधिक तेज होने की पूरी संभावना है।
परिवहन और यात्रा के लिहाज से राजस्थान के आम नागरिकों के लिए एक बेहद राहतभरी और अच्छी खबर सामने आई है। लंबे समय से पुरानी बसों के खस्ताहाल होने और फ्लीट में गाड़ियों की भारी कमी से जूझ रहे राजस्थान रोडवेज (Rajasthan Roadways) का बेड़ा अब आखिरकार मजबूत होने लगा है। राज्य सरकार और रोडवेज प्रबंधन की ओर से शुरू किए गए आधुनिकीकरण और फ्लीट विस्तार अभियान के तहत नई बसों का संचालन शुरू कर दिया गया है। इस सौगात के तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों को बसें आवंटित की गई हैं, जिसमें यात्रियों के भारी दबाव और भौगोलिक महत्व को देखते हुए कोटा संभाग (Kota) को सबसे अधिक 19 नई बसें तोहफे में दी गई हैं, जिससे इस क्षेत्र के यात्रियों को आवागमन में जबरदस्त सहूलियत मिलेगी।बसों की भारी किल्लत से जूझ रहा था रोडवेज, अब मिली राहतपिछले कुछ वर्षों में राजस्थान रोडवेज के पास संचालित होने वाली बसों की संख्या में लगातार कमी आ रही थी, जिसके चलते ग्रामीण और शहरी रूटों पर चलने वाली कई बसें बंद करनी पड़ी थीं या फिर यात्रियों को ठसाठस भरी पुरानी बसों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने रोडवेज के बेड़े को अपग्रेड करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए। नई और आधुनिक सुविधाओं से लैस इन बसों के आने से न सिर्फ रोडवेज की वित्तीय सेहत सुधरेगी, बल्कि समय पर बसों के संचालन से यात्रियों का सफर भी सुगम और सुरक्षित हो सकेगा।कोटा को मिली सबसे ज्यादा 19 बसें, डिपो में खुशी का माहौलरोडवेज प्रशासन द्वारा जारी आवंटन सूची के अनुसार, विभिन्न संभागों और डिपो में नई बसों का वितरण किया गया है, जिसमें कोटा जिले और आसपास के क्षेत्रों की मांग को सर्वोपरि रखते हुए सबसे अधिक 19 नई बसें कोटा डिपो को सौंपी गई हैं। कोटा से जयपुर, दिल्ली, उदयपुर और अन्य प्रमुख मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। इन आधुनिक बसों के बेड़े में शामिल होने से फेरों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों को लंबी कतारों या टिकट की मारामारी से राहत मिलेगी। डिपो के अधिकारियों का कहना है कि इन नई बसों को तुरंत प्रभाव से विभिन्न रूटों पर यात्रियों की सुविधा के लिए उतार दिया गया है।ग्रामीण और अंतर-राज्यीय मार्गों पर भी सुधरेगी कनेक्टिविटीभौगोलिक दृष्टि से फैले हुए राजस्थान राज्य में बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी हमेशा से एक बड़ी प्राथमिकता रही है। रोडवेज के इस नए बेड़े के जुड़ने से न केवल मुख्य मार्गों बल्कि ग्रामीण अंचल को जोड़ने वाले लिंक रूट्स पर भी बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन नई बसों में पुश-बैक सीटें, बेहतर लाइटिंग, सुरक्षा के लिहाज से जीपीएस और पैनिक बटन जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों का सफर बेहद सुरक्षित हो सके।
हरियाणा से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करने वाली सनसनीखेज खबर सामने आई है। राज्य की एक जिला जेल में बंद विचाराधीन कैदी (हवालाती) की अचानक तबियत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हवालाती को सीने में तेज दर्द (Chest Pain) उठा था, जिसके बाद जेल अधिकारियों ने आनन-फानन में उसे इलाज के लिए नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। हालाँकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकेगी और उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक की गिरफ्तारी महज तीन दिन पहले ही हुई थी और इतनी जल्दी जेल के भीतर हुई इस घटना ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।महज तीन दिन पहले हुई थी गिरफ्तारी, अचानक बिगड़ी तबियतपुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक को किसी मामले में गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने के बाद तीन दिन पहले ही न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेजा गया था। जेल के अंदर आने के शुरुआती दिनों में ही अचानक उसके सीने में असहनीय दर्द और घबराहट की शिकायत शुरू हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेल मेडिकल स्टाफ ने तुरंत उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी और उसे आपातकालीन स्थिति में जेल से अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज शुरू कर दिया, लेकिन कार्डियक अरेस्ट या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।न्यायिक जांच के घेरे में जेल प्रशासन, परिवार ने उठाए गंभीर सवालइस अचानक हुई मौत के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों ने जेल प्रशासन की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। परिवार वालों का आरोप है कि गिरफ्तारी के समय युवक पूरी तरह स्वस्थ था, ऐसे में महज तीन दिन के भीतर जेल के अंदर उसकी ऐसी हालत कैसे हो गई। इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं। नियमानुसार न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, ताकि मौत के असली कारणों का खुलासा हो सके।स्थानीय कानून व्यवस्था और जेल सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवालभौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो हरियाणा की जेलों में कैदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के दावों की इस घटना ने पोल खोलकर रख दी है। जेल के भीतर बंदियों की लगातार हो रही इस तरह की मौतों ने मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नागरिकों को भी चिंतित कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर जेल मैनुअल और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है।
चंडीगढ़ से एक बेहद हैरान करने वाली, दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर और शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक 32 साल की महिला टीचर अपने ही स्कूल के एक छात्र के इश्क में इस कदर अंधी हो गई कि उसने अपने परिवार, समाज और वैवाहिक जीवन की तमाम मर्यादाओं को ताक पर रख दिया। टीचर की इस जिद और धोखे से बुरी तरह आहत होकर उसके पति ने आखिरकार अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मरने से पहले पति ने जो दर्द बयां किया, उसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन के पास पहुंचा यह हाई-प्रोफाइल मामला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ लोग एक शादीशुदा महिला शिक्षिका के इस गैर-कानूनी और अनैतिक कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।टीचर-स्टूडेंट का अवैध रिश्ता और पत्नी की जिद ने उजाड़ा घरप्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला टीचर का नाम कोमल है, जो चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाती थी। शिक्षण कार्य के दौरान उसका संपर्क एक छात्र (सनी) के साथ जरूरत से ज्यादा गहरा हो गया। देखते ही देखते यह मेल-जोल एक गहरे और अवैध प्रेम प्रसंग में तब्दील हो गया। जब कोमल के पति को अपनी पत्नी और छात्र के इस रिश्ते के बारे में भनक लगी, तो घर में कोहराम मच गया। पति ने अपनी पत्नी को समझाने और परिवार को बचाने की लाख कोशिश की, लेकिन कोमल अपने इस पागलपन में इस कदर आगे निकल चुकी थी कि उसने साफ कह दिया कि वह अब अपने पति के साथ नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ सनी के साथ ही अपनी पूरी जिंदगी बिताएगी।पत्नी के धोखे और धमकियों से टूट चुका था पतिकोमल के इस बेतुके और क्रूर रवैये ने उसके पति को अंदर से पूरी तरह तोड़ कर रख दिया था। एक तरफ समाज का डर और दूसरी तरफ अपनी ही पत्नी द्वारा दिए गए धोखे का गहरा सदमा, पति सहन नहीं कर सका। महिला का अपनी जिद पर अड़े रहना और लगातार छात्र के समर्थन में खड़े होने से आजिज आकर पति ने अंततः मौत को गले लगाने का खौफनाक रास्ता चुन लिया। आत्महत्या करने से पहले उसने अपने सुसाइड नोट और परिजनों के सामने अपनी पत्नी के इस अवैध रिश्ते का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया, जिससे यह साबित हो गया कि किस तरह एक शिक्षक और छात्र के रिश्ते की आड़ में इस घर को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया।पुलिस जांच और समाज के लिए एक गंभीर सबकइस दर्दनाक घटना के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है और महिला शिक्षिका तथा उस छात्र से जुड़े तमाम पहलुओं को खंगाला जा रहा है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में यदि कोई नाबालिग संलिप्त है, तो इसमें कानूनी पेंच और भी ज्यादा गंभीर हो जाते हैं। यह घटना आज के आधुनिक समाज, नैतिक मूल्यों के पतन और रिश्तों में आ रही दरार पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है, जहाँ एक पल की सनक और गलत अफेयर ने हंसते-खेलते परिवार को मातम में बदल दिया।
उत्तर प्रदेश के दो सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त शहरों के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी और शानदार खबर सामने आ रही है। बहुत जल्द बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (Lucknow Kanpur Expressway) पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की हाई-स्पीड रोडवेज बसें फर्राटा भरती हुई नजर आएंगी। इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों औद्योगिक और शैक्षणिक राजधानियों के बीच की दूरी सिमट जाएगी, जिससे यात्रियों का कीमती समय बचेगा। खास बात यह है कि इस सुपरफास्ट सफर के लिए यात्रियों को अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि बसों का किराया बेहद किफायती रखा गया है, जिससे आम जनता आसानी से इसका लाभ उठा सकेगी।महज 1 घंटे 45 मिनट में तय होगा लखनऊ से कानपुर का सफरपारंपरिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम और भारी वाहनों की भीड़भाड़ से परेशान होने वाले यात्रियों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा। परिवहन विभाग की योजना के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से कानपुर या कानपुर से लखनऊ की पूरी दूरी मात्र 1 घंटे 45 मिनट में आसानी से पूरी कर ली जाएगी। तेज रफ्तार और सिग्नल-फ्री सफर होने के कारण बसों की औसत गति बेहतरीन रहेगी, जिससे यात्रियों को रोजाना के आने-जाने (Daily Commute) में भारी सहूलियत मिलेगी। नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और छात्रों के लिए यह सेवा आवागमन का सबसे सुगम माध्यम बन जाएगी।किफायती किराया और यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएंआम यात्रियों के बजट को ध्यान में रखते हुए रोडवेज बसों का किराया बेहद कम और सुलभ तय किया गया है, ताकि हर वर्ग के लोग इस आधुनिक सड़क मार्ग का फायदा उठा सकें। साधारण रोडवेज बसों के साथ-साथ इस रूट पर एसी (AC) बसों का संचालन भी किया जाएगा, जिससे यात्री आरामदायक सफर का आनंद ले सकेंगे। एक्सप्रेसवे पर बसों के संचालन से न केवल सड़क यात्रा सुरक्षित होगी, बल्कि समय की भी भारी बचत होगी। स्थानीय प्रशासनिक और परिवहन अधिकारियों द्वारा इस रूट के टोल प्लाजा और बस स्टॉप्स के निर्धारण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि सेवा शुरू होते ही यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और लोकल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावाभौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश के विकास में लखनऊ और कानपुर का यह नया एक्सप्रेसवे मील का पत्थर साबित हो रहा है। इसके शुरू होने से दोनों शहरों के बीच व्यापारिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और पर्यटन को एक नया पंख मिलेगा। एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर भविष्य में होने वाले विकास कार्यों से लोकल रोजगार और आर्थिकी को भी बढ़ावा मिलेगा। यदि आप भी अक्सर लखनऊ से कानपुर की यात्रा करते हैं, तो आने वाले दिनों में इस एक्सप्रेसवे पर रोडवेज बस का सफर आपके लिए बेहद आरामदायक, तेज और किफायती होने वाला है।
अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण और उससे जुड़े धन संग्रह अभियान को लेकर समय-समय पर कई तरह के विवाद सामने आते रहे हैं। इसी कड़ी में राम मंदिर चंदा चोरी और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े संवेदनशील मामले की जांच को गति देने के लिए एक नई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाए गए हैं। नई एसआईटी में शामिल तेज-तर्रार और अनुभवी पुलिस अधिकारियों ने मामलों की फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया है। इन अधिकारियों ने अभी तक अपनी जांच में क्या-क्या अहम सबूत जुटाए हैं और आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, इसकी एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की जाएगी।नई एसआईटी में शामिल किए गए हैं उत्तर प्रदेश के अनुभवी और तेज-तर्रार अफसरराम मंदिर चंदा चोरी और धोखाधड़ी के मामलों की तह तक जाने के लिए बनाई गई इस नई एसआईटी में उत्तर प्रदेश पुलिस के चुनिंदा और बेदाग छवि वाले अधिकारियों को जगह दी गई है। स्थानीय भौगोलिक और कानूनी पेचीदों को बारीकी से समझने वाले इन अधिकारियों को विशेष तौर पर इसलिए जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके। एसआईटी के गठन के बाद से ही जांच टीम ने अपनी कार्यप्रणाली तेज कर दी है और उन सभी शिकायतों की दोबारा समीक्षा की जा रही है, जिनमें चंदे के नाम पर हेराफेरी या फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगाए गए थे।अफसरों ने अब तक क्या-क्या एक्शन लिया? सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्टजांच अधिकारियों ने पिछले कुछ हफ्तों में कई संदिग्ध ठिकानों पर दस्तावेजों की छानबीन की है और इस घोटाले से जुड़े प्रमुख गवाहों व पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं। बैंक खातों के ट्रांजैक्शन, डिजिटल मनी ट्रेल और चंदा जुटाने वाली संस्थाओं के रिकॉर्ड्स को खंगालकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े इस पवित्र धन का दुरुपयोग कहाँ और कैसे हुआ। एसआईटी के इन तमाम अब तक के प्रयासों और बरामद किए गए सबूतों का पूरा कच्चा-चिट्ठा तैयार कर लिया गया है, जिसे आने वाले दिनों में सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपा जाएगा।देश भर के राम भक्तों की टिकी निगाहें, आगे क्या होगी कार्रवाई?इस बहुचर्चित मामले पर देश भर के करोड़ों राम भक्तों और कानूनी जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है। कोर्ट की निगरानी में चल रही इस जांच के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा तथा इस प्रकार के संवेदनशील मामलों में फर्जीवाड़ा करने वाले दोषियों को कानून के शिकंजे में कसकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। एसआईटी की यह रिपोर्ट आने वाले दिनों में इस पूरे कानूनी प्रकरण का रुख तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली है।
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भले ही अभी विधानसभा चुनाव (UP Chunav 2027) में वक्त हो, लेकिन सूबे की राजनीति का तापमान अभी से सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) के बीच जुबानी जंग और तंज कसने का दौर रोज नए आयाम छू रहा है। प्रदेश की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के बीच सोशल मीडिया से लेकर चुनावी मंचों तक एक अलग ही राजनीतिक 'मल्लयुद्ध' छिड़ा हुआ है। दोनों दिग्गज नेता एक-दूसरे के बयानों पर तीखा पलटवार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्माया हुआ है।सीएम योगी की आक्रामक कार्यशैली और तीखे बयानों के वारमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी आक्रामक भाषण शैली और प्रशासनिक फैसलों के दम पर विपक्ष पर लगातार कड़े प्रहार कर रहे हैं। कानून व्यवस्था, विकास कार्यों और तुष्टिकरण के मुद्दों पर सीएम योगी का अंदाज हमेशा से आक्रामक रहा है, जिससे वे विपक्ष को डिफेंसिव होने पर मजबूर कर देते हैं। उनके बयानों में राज्य की सुरक्षा और पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवाल उठाए जाते हैं, जो बीजेपी के काडर और कोर वोटर के बीच जोश भरने का काम करते हैं। जनता के बीच उनकी छवि एक सख्त प्रशासक के रूप में है, जो विपक्षी दलों के हर हमले का जवाब आंकड़ों और जमीनी विकास के जरिए देते हैं।अखिलेश यादव का सोशल मीडिया वार और पीडीए (PDA) का दांवदूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस चुनावी मुकाबले में पूरी तरह से आक्रामक रुख अपना लिया है। वे हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पीडीए (PDA - पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और बेरोजगारी-महंगाई जैसे मुद्दों को आधार बनाकर अखिलेश लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके चुटीले तंज और व्यंग्यात्मक अंदाज वाले बयान अक्सर इंटरनेट पर तेजी से वायरल होते हैं, जो युवाओं और ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं का ध्यान खींचने में सफल साबित हो रहे हैं।जनता के दरबार में कौन पड़ रहा है भारी? सियासी जानकारों की रायभौगोलिक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में यह मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। स्थानीय जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां एक तरफ सीएम योगी की मजबूत लीडरशिप और प्रशासनिक पकड़ उन्हें प्रशासनिक मोर्चे पर बढ़त दिलाती है, वहीं अखिलेश यादव का आक्रामक विपक्ष का तेवर और जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति उन्हें कड़ी टक्कर दे रही है। 2027 के इस सियासी रण में कौन किस पर भारी पड़ेगा, इसका फैसला तो आने वाला वक्त ही करेगा, लेकिन फिलहाल इन दोनों नेताओं की जुबानी जंग ने यूपी की राजनीति को बेहद रोमांचक बना दिया है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर गोरखपुर से नेपाल बॉर्डर से सटे सोनौली तक का सफर करने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए एक बहुत ही रोमांचक और खूबसूरत अपडेट सामने आ रही है। गोरखपुर से सोनौली हाईवे (Gorakhpur to Sonauli Route) पर सफर करना अब केवल एक आम यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का अहसास कराने वाला एक बेहतरीन अनुभव बन गया है। इस नेशनल हाईवे पर सफर के दौरान रास्ते में मिलने वाले 4 ऐसे मंत्रमुग्ध कर देने वाले और रमणीय नजारे देखने को मिलते हैं, जिन्हें देखते ही पर्यटकों का दिल बाग-बाग हो जाता है। अगर आप भी इस रूट से गुजरने का प्लान बना रहे हैं, तो रास्ते के इन खास आकर्षणों के बारे में जरूर जान लें।1. घने जंगलों और हरियाली से गुजरती सड़क का सुहाना अहसासगोरखपुर से सोनौली मार्ग पर आगे बढ़ते ही तराई क्षेत्र के जंगलों और प्रकृति की गोद का अद्भुत नजारा शुरू हो जाता है। सड़क के दोनों ओर फैली लंबी और हरी-भरी पेड़-पौधों की कतारें इस सफर को बेहद शांत और मनमोहक बना देती हैं। खासकर मानसून और सर्दियों के मौसम में इस रास्ते की हरियाली और ठंडी हवाएं यात्रियों की सारी थकान पल भर में दूर कर देती हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह हरा-भरा रास्ता किसी जन्नत से कम नहीं है, जहां वाहन से गुजरते हुए कुदरत के बेहद करीब होने का अहसास होता है।2. स्थानीय संस्कृति और जीवंत ग्रामीण बस्तियों की झलकइस हाईवे के सफर की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यहाँ के पारंपरिक तराई वाले गांव और स्थानीय जीवनशैली है। सड़क मार्ग के दोनों तरफ सजे छोटे-छोटे बाजार, मिट्टी के खूबसूरत घर और पारंपरिक रहन-सहन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की गहरी छाप छोड़ते हैं। यहाँ की स्थानीय जीवनशैली को देखना और ग्रामीण भारत की सादगी को महसूस करना पर्यटकों के लिए एक अलग ही अनुभव होता है, जो शहरी कोलाहल से कोसों दूर मानसिक शांति प्रदान करता है।3. रास्तों में बहने वाली शांत नदियाँ और जल स्रोतों के खूबसूरत घाटगोरखपुर-सोनौली रूट पर सफर के दौरान कई छोटी-छोटी नदियाँ और जल स्रोत रास्ते में पड़ते हैं, जिन पर बने पुलों से गुजरते वक्त पानी का कल-कल करता बहाव बहुत ही आकर्षक लगता है। पानी के इन प्राकृतिक स्रोतों के आसपास का शांत वातावरण और डूबते सूरज का नजारा इस यात्रा में चार चांद लगा देता है। स्थानीय भौगोलिक और प्राकृतिक बनावट के कारण यहाँ का मौसम हमेशा सुहाना बना रहता है, जो यात्रियों को कुछ पल ठहरकर प्रकृति का आनंद लेने के लिए मजबूर कर देता है।4. भारत-नेपाल सीमा के पास पहुँचते ही बदलता सांस्कृतिक परिदृश्यजैसे-जैसे वाहन सोनौली बॉर्डर के करीब पहुंचते हैं, वैसे-वैसे यहाँ की संस्कृति और माहौल में एक नया रोमांच घुलने लगता है। नेपाल सीमा से सटा यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, संस्कृति और मेल-जोल का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहाँ का चहल-पहल भरा माहौल और भारत-नेपाल के बीच की सांस्कृतिक साझ को देखना इस पूरी रोड ट्रिप का सबसे शानदार क्लाइमैक्स साबित होता है। यदि आप भी वीकेंड पर किसी सड़क मार्ग की रोमांचक यात्रा पर निकलने की सोच रहे हैं, तो गोरखपुर से सोनौली का यह मार्ग आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
राजस्थान की खूबसूरती और शाही संस्कृति की जब भी बात आती है, तो झीलों की नगरी 'उदयपुर' का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। अरावली की पहाड़ियों की गोद में और पिछोला झील के तट पर स्थित उदयपुर का 'सिटी पैलेस' (Udaipur City Palace) राजस्थान की सबसे भव्य, विशाल और ऐतिहासिक धरोहरों में शुमार है। इस शानदार महल की वास्तुकला और इसका इतिहास इतना समृद्ध है कि यहाँ आने वाला हर देसी-विदेशी पर्यटक इसकी भव्यता को देखकर हैरान रह जाता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस विशाल महल का निर्माण किसी एक राजा ने नहीं, बल्कि मेवाड़ के सात अलग-अलग महाराणाओं के शासनकाल में क्रमिक रूप से पूरा किया गया था, जो इसकी अनूठी निर्माण शैली को दर्शाता है।महाराणा उदय सिंह द्वितीय से शुरू हुआ था इस भव्य महल का सफरइतिहास के पन्नों के अनुसार, उदयपुर शहर की स्थापना करने वाले महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने साल 1559 में इस भव्य पैलेस की नींव रखी थी। उनके बाद मेवाड़ के सिंहासन पर बैठने वाले अन्य प्रतापी महाराणाओं ने अपनी सूझबूझ और कलाप्रेम के चलते इस महल में अपनी पसंद के अनुसार नए महलों, कक्षों, बालकनियों और मीनारों का निर्माण करवाया। लगभग चार सौ वर्षों से अधिक समय तक चले इस निर्माण कार्य में कुल सात महाराणाओं का योगदान रहा है। यही वजह है कि सिटी पैलेस के भीतर राजस्थानी, मुगल, यूरोपीय और चीनी वास्तुकला (Architecture) का एक अद्भुत और बेजोड़ संगम देखने को मिलता है, जो देश-विदेश के इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।सिटी पैलेस के अंदर छिपे हैं इतिहास के अनगिनत हैरान करने वाले राजपिछोला झील के पानी के ठीक ऊपर खड़े इस विशाल संगमरमर और ग्रेनाइट के महल के भीतर प्रवेश करते ही राजा-महाराजाओं के वैभवशाली जीवन की झलक मिलने लगती है। यहाँ स्थित 'मोर चौक' (Mor Chowk), 'शीश महल' और 'दिलकुश महल' अपनी नायाब कांच की कारीगरी और मोजेक टाइल्स के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। इसके अलावा, पैलेस का 'जनाना महल' और 'मर्दानी महल' उस दौर की शाही जीवनशैली, कला और युद्ध कौशल की कहानियों को बयां करते हैं। यहाँ का 'म्यूज़ियम' (Amar Vilas & Museum) पुरानी तलवारें, शाही पोशाकें, कलाकृतियां और मेवाड़ के शूरवीरों के इतिहास को संजोकर रखता है, जिसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है।पर्यटन और स्थानीय संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्रभौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देखा जाए, तो उदयपुर का यह सिटी पैलेस राजस्थान के पर्यटन उद्योग का सबसे बड़ा मुकुट मणि है। हर साल लाखों की संख्या में सैलानी इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने के लिए राजस्थान के इस खूबसूरत शहर का रुख करते हैं। शाम के समय पैलेस पर होने वाली लाइटिंग और यहाँ से झील का नज़ारा पर्यटकों के दिलों पर एक कभी न मिटने वाली छाप छोड़ता है। यदि आपने अभी तक इस ऐतिहासिक और जादुई धरोहर का दीदार नहीं किया है, तो अपनी अगली वेकेशन लिस्ट में उदयपुर के इस भव्य सिटी पैलेस को जरूर शामिल करें।
झारखंड की औद्योगिक नगरी और स्टील सिटी के रूप में मशहूर जमशेदपुर (Jamshedpur) अपनी आधुनिक जीवनशैली के बीच प्राकृतिक सुंदरता का एक अनूठा संगम समेटे हुए है। अगर आप शहर की भागदौड़, भारी ट्रैफिक और शोर-शराबे से दूर किसी ऐसी शांत जगह की तलाश में हैं जहां मानसिक शांति और प्रकृति का असली अहसास मिल सके, तो आपको ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है। जमशेदपुर शहर से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक बेहद खूबसूरत और रमणीय पर्यटक स्थल इन दिनों ट्रेवलर्स और नेचर लवर्स के बीच सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वीकेंड की छुट्टियों या शाम के वक्त सुकून के कुछ पल बिताने के लिए यह जगह पर्यटकों की पहली पसंद बन चुकी है।प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है यह डेस्टिनेशनझारखंड के इस खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट की खासियत यह है कि यह चारों तरफ से हरी-भरी पहाड़ियों, कलकल बहती धाराओं और शांत वातावरण से घिरा हुआ है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को शहर की चकाचौंध से दूर एक अलग ही दुनिया का अनुभव होता है। मानसून या सर्दियों के मौसम में इस जगह की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, जब चारों तरफ हरियाली और बादलों का नजारा देखने लायक होता है। फोटोग्राफी के शौकीनों और बर्ड वॉचर्स के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है, जहां प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में नजर आती है।स्थानीय संस्कृति और घूमने के लिए खास आकर्षणस्थानीय भौगोलिक और सांस्कृतिक परिवेश से जुड़ा यह पर्यटक स्थल परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए एक आइडियल स्पॉट माना जाता है। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और खान-पान का भी अनुभव करते हैं। शहर के करीब होने के कारण यहाँ पहुँचना बेहद आसान है, जिससे पर्यटकों को लंबी यात्रा की थकान नहीं झेलनी पड़ती। वीकेंड के दिनों में यहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी बड़ी संख्या में सैलानी घूमने के लिए पहुंचते हैं।कैसे पहुंचे और घूमने का सबसे सही समय क्या है?यदि आप भी इस खूबसूरत और शांत जगह की सैर करना चाहते हैं, तो जमशेदपुर शहर से आसानी से कैब, ऑटो या निजी वाहन के जरिए मात्र आधे घंटे में यहाँ पहुँच सकते हैं। साल के किसी भी समय यहाँ जाया जा सकता है, लेकिन अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे सुहावना माना जाता है। अगर आप भी इस वीकेंड कुछ नया और शांत तलाश रहे हैं, तो अपने परिवार और दोस्तों के साथ इस अद्भुत पर्यटक स्थल की यात्रा का प्लान जरूर बनाएं।
आज के दौर में जैसे-जैसे लोगों की उम्र 40 साल के पार पहुंचती है, उन्हें शारीरिक थकान, कमजोरी और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं आम लगने लगती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उम्र के इस पड़ाव पर हमारे शरीर की मांसपेशियां (Muscles) इतनी तेजी से कमजोर क्यों होने लगती हैं? मेडिकल एक्सपर्ट्स और हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में पिछले कुछ सालों में 40 की उम्र के बाद 'सारकोपेनिया' यानी मसल्स लॉस (Muscle Loss) की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। खान-पान में प्रोटीन की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव और बदलती जीवनशैली इस गंभीर समस्या के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह उम्र के साथ शरीर को अंदर से खोखला कर सकती है।40 की उम्र के बाद क्यों शुरू हो जाता है तेजी से मसल्स लॉस?चिकित्सकीय भाषा में उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के घनत्व और ताकत में होने वाली प्राकृतिक गिरावट को सारकोपेनिया कहा जाता है। आमतौर पर 30 की उम्र के बाद हर दशक में शरीर की मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से घटने लगती हैं, लेकिन 40 साल के बाद यह प्रक्रिया रफ्तार पकड़ लेती है। शहरी जीवनशैली में लगातार घंटों डेस्क जॉब करना, फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज बिल्कुल न करना और सैर-सपाटे से दूरी बनाना इसके बड़े कारण हैं। इसके अलावा हमारे खान-पान में मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, खासकर उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन (Protein) की भारी कमी होना इस समस्या को और ज्यादा विकराल बना देता है।मसल्स लॉस के शुरुआती लक्षण और शरीर पर इसके गंभीर प्रभावजब शरीर में मसल्स लॉस होने लगता है, तो व्यक्ति को रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम जैसे सीढ़ियां चढ़ना, भारी सामान उठाना या कुर्सी से उठना भी थकाऊ और मुश्किल लगने लगता है। मांसपेशियों के कमजोर होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने और फैट जमा होने की समस्या शुरू हो जाती है। इसके साथ ही हड्डियों का घनत्व (Bone Density) भी घटने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय स्तर पर खान-पान में जंक फूड और अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन इस स्थिति को और अधिक गंभीर बना देता है।मसल्स लॉस से बचने और मांसपेशियों को मजबूत रखने के आसान उपायहेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि थोड़ी सी सतर्कता और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है। अपनी डेली डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं, जिसमें दालें, पनीर, सोयाबीन, अंडे, और लीन मीट शामिल हों। इसके अलावा हफ्ते में कम से कम 3 से 4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) या हल्की रेसिस्टेंस एक्सरसाइज जरूर करें, जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, विटामिन डी और कैल्शियम से भरपूर आहार लें ताकि उम्र के हर पड़ाव पर आपका शरीर फिट, एक्टिव और ऊर्जावान बना रहे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भाजपा सांसद की बेटी की पोस्ट से विवाद, ओडिशा भाजपा में बढ़ी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के कार्यालय की ओर से संपर्क किए जाने के बाद सांसद अपराजिता सारंगी ने अपनी बेटी से संबंधित पोस्ट हटाने के लिए कहा था। हालांकि, आरोप है कि अर्चिता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। फिलहाल, हाईकोर्ट ने गडकरी की याचिका को मंजूर किया है और अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई तय की है।
Foreign media on CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने न सिर्फ भारत की राजनीति में हलचल मचा दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी खींच लिया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार के झुकने को लेकर विदेशी अखबारों और चैनलों ने ...
मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक, बोले- अब राजघाट जाकर गांधीजी को दूंगा श्रद्धांजलि
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में वह अस्पताल के कमरे में कुर्सी पर बैठे दिखाई देते हैं और मुस्कुराते हुए अपनी सेहत में सुधार की जानकारी देते हैं।
दिल्ली की राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई का पक्ष रखने के लिए एक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति का निर्देश दिया है। इसी बीच, कोर्ट ने आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी। अब इस मामले में सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
लखनऊ, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें छात्रों को सच और झूठ में अंतर पता करना, सोशल मीडिया के दुष्प्रचार से बचने का तरीका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों का ...
केजरीवाल का E20 पेट्रोल के खिलाफ नेशनल टाउनहॉल, कहा- माइलेज घटा, इंजन खराब
Arvind Kejriwal National Townhall: नीट विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया है। देश के युवाओं की ताकत के आगे सरकार के झुकने का दावा करते ...
उनकी किडनियां और लिवर इंदौर में ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं, जबकि आंखें आई बैंक को दान की गई है। दिल अहमदाबाद के मरीज को लगाया जाएगा। बता दें कि गौरव ब्रेन डेड हो गए थे। जिसके बाद उनके परिवार ने यह फैसला लिया। अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए इंदौर में ...
केसरिया और भगवा कपड़ों से समाजवादी पार्टी की जन्मजात दुश्मनी: मुख्यमंत्री योगी
लखनऊ, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी कहती थी, कांवड़ यात्रा में शिव भक्त आएंगे तो दंगा हो जाएगा। सपा शंख व घंटा भी नहीं बजाने देती थी। समाजवादी पार्टी की केसरिया और भगवा कपड़ों से मानो जन्मजात दुश्मनी थी। हालांकि अब ...
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' के बीच चल रहे विवाद मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और यूट्यूब पर मौजूद फिल्म से जुड़े लिंक हटाने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, अदालत ने फिल्म के निर्माता अमित जानी के रवैये पर भी नाराजगी जताई और उन्हें कड़ी फटकार लगाई।
मुलायम सिंह यादव का सपना था सैफई ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान, भाजपा ने पूरा किया : मुख्यमंत्री योगी
इटावा, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सैफई मेडिकल संस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने सैफई ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अखिलेश यादव उसे आगे ...
देश की राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े धरना स्थल जंतर-मंतर पर जारी एक बड़े विरोध प्रदर्शन के मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ी और ऐतिहासिक टिप्पणी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक नई और बेहद स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींच दी है। अदालत ने दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि सिर्फ इसलिए कि कहीं कोई आंदोलन या विरोध प्रदर्शन चल रहा है, सुरक्षा बल नागरिकों पर सीधे लाठीचार्ज या बल प्रयोग नहीं कर सकते।लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवालसुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए एक प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान सीजेआई (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि भारत के संविधान में हर नागरिक को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने व विरोध जताने का मौलिक अधिकार मिला हुआ है। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करने में लिप्त न हों, तब तक पुलिस बल को बेहद संयम बरतने की जरूरत है।कानून व्यवस्था और पुलिस बल के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी व्याख्यामुख्य न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के लिए गाइडलाइंस की ओर इशारा करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए लाठीचार्ज या आंसू गैस के गोलों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जाए। अदालत ने साफ किया कि प्रशासन को किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बल प्रयोग की बजाय बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस टिप्पणी को भविष्य में होने वाले तमाम जन आंदोलनों और पुलिसिया एक्शन के लिहाज से एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है।दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कानून के मोर्चे पर बड़ा बदलावभौगोलिक और स्थानीय सुरक्षा के नजरिए से देखें तो जंतर-मंतर, लुटियंस दिल्ली और संसद भवन के आसपास का पूरा इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हर छोटे-बड़े आंदोलन पर पूरे देश की नजर रहती है। सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद अब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को अपनी रणनीतियों में बड़ा बदलाव करना होगा। आने वाले दिनों में नई दिल्ली जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक और अहिंसक तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि देश की राजधानी से सुरक्षा के मोर्चे पर कोई भी नकारात्मक संदेश न जाए।
सोने-चांदी की कीमतों में लगी आग! सोना ₹757 महंगा, चांदी ₹2266 उछली; क्रूड ऑयल की नरमी का बड़ा असर
घरेलू सर्राफा बाजार में आज एक बार फिर रौनक लौट आई है, जिससे सोना और चांदी खरीदने वालों को बड़ा झटका लगा है। लगातार कुछ दिनों की सुस्ती के बाद हफ्ते के शुरुआती कारोबारी दिन ही कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने का भाव 757 रुपये प्रति 10 ग्राम तक चढ़ गया है, वहीं चांदी में भी 2,266 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी तेजी देखी जा रही है। इस बड़ी रिकवरी के बाद सर्राफा बाजार के व्यापारियों और निवेशकों की धड़कनें बढ़ गई हैं।कच्चे तेल की सुस्ती ने सोने और चांदी को दिया तगड़ा बूस्टरबाजार के जानकारों का कहना है कि आज सोने और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई नरमी है। दरअसल, वैश्विक स्तर पर क्रूड की कीमतों में गिरावट आने से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर दबाव देखा जा रहा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर कमजोर पड़ता है या कच्चे तेल के दाम घटते हैं, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की तरफ रुख करते हैं। इसी का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार में देखने को मिल रहा है।आपके शहर में क्या है आज 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड का रेट?इस ताजा उछाल के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत देश के तमाम बड़े शहरों के रिटेल接收 बाजार में भी सोने के दाम बदल गए हैं। 24 कैरेट (शुद्ध सोने) का भाव एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर की तरफ बढ़ता दिख रहा है, जबकि 22 कैरेट (ज्वेलरी गोल्ड) की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार से मिले मजबूत संकेतों के कारण चांदी की चमक भी काफी बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है या डॉलर में कमजोरी जारी रहती है, तो सोने-चांदी की कीमतों में और तेजी आ सकती है।फेस्टिव सीजन से पहले खरीदारी या निवेश का सही मौका?भारत में फेस्टिव और शादियों का सीजन शुरू होने से पहले सोने-चांदी के दामों में आ रहे इस उतार-चढ़ाव ने आम उपभोक्ताओं को सोच में डाल दिया है। जेम एंड ज्वेलरी काउंसिल से जुड़े जानकारों का मानना है कि जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह डिजिटल गोल्ड या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए निवेश का एक बेहतरीन मौका हो सकता है। हालांकि, रिटेल बाजार में गहने खरीदने वालों को सलाह दी जाती है कि वे हॉलमार्क (HUID) देखकर ही शुद्धता की पूरी जांच करने के बाद खरीदारी का फैसला लें।
वेदांता की इस दिग्गज कंपनी ने खोला ₹25,000 करोड़ का पिटारा, बाजार में मचेगी हलचल
भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए वेदांता समूह की ओर से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप की प्रमुख सहयोगी कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc) ने देश के माइनिंग और मेटल सेक्टर में एक नया इतिहास रचने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए अगले 3 से 5 सालों में 25,000 करोड़ रुपये के विशालकाय निवेश (Mega Investment Plan) की घोषणा की है। इस भारी-भरकम निवेश की खबर के बाद से ही बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच हलचल काफी तेज हो गई है।क्या है हिंदुस्तान जिंक का यह 25 हजार करोड़ का मेगा प्लान?हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना करना है। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से राजस्थान के उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद जिलों में स्थित अपनी प्रमुख खदानों (Mines) और स्मेल्टिंग प्लांट्स के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए करेगी। कंपनी का लक्ष्य अपने मौजूदा मेटल प्रोडक्शन को 1.2 मिलियन टन से बढ़ाकर सीधे 2 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंचाना है। इस विस्तार योजना में पर्यावरण अनुकूल और सस्टेनेबल माइनिंग तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।वेदांता ग्रुप और शेयर बाजार के निवेशकों पर क्या होगा असर?हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड का यह कदम मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वेदांता समूह इस समय अपने कर्ज को कम करने और विभिन्न सेक्टरों में डिमर्जर (Dimerger) की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। ऐसे में हिंदुस्तान जिंक से मिलने वाला मजबूत कैश फ्लो और भविष्य की ग्रोथ वेदांता के बैलेंस शीट को भारी सपोर्ट देगी। इस बड़े निवेश की खबर से आने वाले दिनों में वेदांता और हिंदुस्तान जिंक दोनों के शेयरों में निवेशकों की तगड़ी खरीदारी देखने को मिल सकती है, जिससे शेयर बाजार के सूचकांकों को भी बूस्ट मिलेगा।स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा जबरदस्त बूस्टर डोजभौगोलिक और स्थानीय स्तर पर देखें तो इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा राजस्थान को मिलने वाला है। 25,000 करोड़ रुपये के निवेश से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खदानों के आस-पास के ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा और लोकल वेंडर्स व एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बड़े पैमाने पर बिजनेस मिलेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार को रॉयल्टी और टैक्स के रूप में भारी राजस्व (Revenue) मिलने की उम्मीद है, जिससे पूरे प्रदेश की आर्थिक तस्वीर में एक सकारात्मक बदलाव आएगा।
शेयर बाजार में बंपर तेजी! सेंसेक्स 600 अंक उछला, निफ्टी 23,950 पार, CarTrade Tech के शेयर रॉकेट बने
घरेलू शेयर बाजार में लगातार जारी उतार-चढ़ाव के बीच आज निवेशकों के लिए बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत जबरदस्त तेजी और हरियाली के साथ हुई है। शुरुआती कारोबार में ही बम्बई स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) 600 से अधिक अंकों की छलांग लगाकर मजबूत स्थिति में ट्रेड कर रहा है। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty 50) भी 180 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज करते हुए 23,950 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। बाजार में आए इस बूम से दलाल स्ट्रीट में रौनक लौट आई है।वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेत और घरेलू खरीदारी का बूस्टर डोजबाजार के विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि आज की इस बड़ी तेजी के पीछे अमेरिकी बाजारों (Nasdaq और S&P 500) से मिले सकारात्मक संकेत और एशियाई बाजारों में लौटी मजबूती सबसे बड़ी वजह है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली का दबाव कम होने और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) द्वारा बैंकिंग, ऑटो और आईटी सेक्टर्स में की जा रही चौतरफा खरीदारी ने बाजार को तगड़ा सपोर्ट दिया है। अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स आज हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं, जिससे रिटेल निवेशकों का सेंटिमेंट भी काफी मजबूत हुआ है।कारट्रेड टेक (CarTrade Tech) के शेयरों में 11% का जोरदार ब्लास्टआज के शुरुआती सत्र में सबसे ज्यादा सुर्खियां ऑनलाइन ऑटो क्लासिफाइड प्लेटफॉर्म कारट्रेड टेक (CarTrade Tech) के शेयर बटोर रहे हैं। कंपनी के शेयरों में शुरुआती ट्रेड में ही 11% से ज्यादा का तूफानी उछाल दर्ज किया गया है, जिसके बाद यह शेयर अपने नए शॉर्ट-टर्म हाई पर पहुंच गया है। हाल ही में आए मजबूत तिमाही नतीजों (Quarterly Results) और कंपनी द्वारा भविष्य की विकास योजनाओं को लेकर किए गए बड़े बदलावों के चलते निवेशकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। वॉल्यूम में भारी बढ़ोतरी के साथ इस शेयर में जमकर खरीदारी हो रही है।आज के टॉप गेनर्स और किन सेक्टर्स में दिख रही है चमक?कारट्रेड टेक के अलावा आज बाजार को ऊपर ले जाने में टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनियों का बड़ा योगदान है। निफ्टी के टॉप गेनर्स में ऑटो और आईटी स्टॉक्स सबसे आगे चल रहे हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1.5% तक की तेजी दर्ज की जा रही है, जो यह दर्शाती है कि बाजार में ब्रॉडर लेवल पर रिकवरी हो रही है। जानकारों के मुताबिक, अगर निफ्टी 23,950 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहता है, तो बहुत जल्द यह 24,000 के ऐतिहासिक स्तर को दोबारा छू सकता है।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनयिक खबर सामने आ रही है। वैश्विक महाशक्तियों के बीच जारी शह-मात के खेल में ईरान ने एक ऐसा बड़ा दांव चल दिया है, जिसने इजरायल और अमेरिका दोनों की रणनीतिक चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के साथ पूरी ताकत से खड़े होने का आधिकारिक एलान कर दिया है। इसके साथ ही तेहरान ने नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के सामने बातचीत को लेकर एक नई और बेहद सख्त शर्त रख दी है, जिसके बाद इस पूरे क्षेत्र में युद्ध के समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं।अयातुल्ला खामेनेई का खुला एलान और हिजबुल्लाह को संजीवनीईरान की राजधानी तेहरान से जारी एक कड़े और सीधे संदेश में अयातुल्ला अली खामेनेई ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह को कमजोर या अलग-अलग समझने की भूल न की जाए। ईरान अपनी पूरी सैन्य, वित्तीय और कूटनीतिक ताकत के साथ लेबनानी प्रतिरोध के पीछे मुस्तैदी से खड़ा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई के इस कड़े रुख से इजरायल के उत्तरी मोर्चे पर तनाव और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है। ईरान का यह कदम सीधे तौर पर तेल अवीव को यह चेतावनी है कि हिजबुल्लाह के कमांड स्ट्रक्चर पर किए जा रहे हमलों का जवाब अब और अधिक संगठित तरीके से दिया जाएगा, जिससे इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) पर दबाव काफी बढ़ गया है।डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान की नई शर्त ने वाशिंगटन में मचाई हलचलइस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ईरानी प्रशासन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित बातचीत या समझौतों को लेकर एक नई शर्त मेज पर रख दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है, जब वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में इजरायल की सैन्य आक्रामकता पर पूरी तरह से लगाम लगाए और ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। ट्रंप प्रशासन के लिए यह शर्त एक बड़ी राजनयिक चुनौती बन गई है, क्योंकि ट्रंप एक तरफ इजरायल के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं और दूसरी तरफ वे क्षेत्र में नए युद्धों को टालने का वादा भी कर चुके हैं।रणनीतिक चक्रव्यूह में फंसा इजरायल, अब क्या होंगे आगे के रास्ते?ईरान और हिजबुल्लाह की इस जुगलबंदी और अमेरिका के सामने रखी गई नई शर्त ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने एक नई सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है। इजरायल इस समय गाजा से लेकर लेबनान तक कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान की शर्तों के दबाव में आकर अपनी नीतियों में थोड़ा भी बदलाव करता है, तो इजरायल खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पा सकता है। लोकल और ग्लोबल इंटेलिजेंस एजेंसियों की मानें तो आने वाले कुछ दिन बेहद संवेदनशील होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप प्रशासन का अगला कदम ही यह तय करेगा कि यह क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आग में झुलस जाएगा।
जोहरान ममदानी की खुली धमकी पर बेंजामिन नेतन्याहू का पलटवार, बोले- 'न्यूयॉर्क आकर ही रहूंगा
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और न्यूयॉर्क के चर्चित असेंबली मेंबर जोहरान ममदानी के बीच जारी जुबानी जंग ने वैश्विक स्तर पर तूल पकड़ लिया है। दरअसल, भारतीय मूल के अमेरिकी राजनेता और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट जोहरान ममदानी ने नेतन्याहू के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें न्यूयॉर्क आने पर गिरफ्तार करने और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की खुली चेतावनी दी थी। अब इस धमकी पर इजरायली पीएमओ ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि नेतन्याहू किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और वे अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक न्यूयॉर्क का दौरा जरूर करेंगे।अंतरराष्ट्रीय वारंट और जोहरान ममदानी की तीखी घेराबंदीइस पूरे विवाद की जड़ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी किए गए अरेस्ट वारंट से जुड़ी हुई है। गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत के इस फैसले के बाद, न्यूयॉर्क से विधायक जोहरान ममदानी ने अमेरिकी प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से मांग की थी कि अगर इजरायली प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क की धरती पर कदम रखते हैं, तो उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए। ममदानी ने साफ किया था कि मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपी किसी भी नेता का न्यूयॉर्क में स्वागत नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान ने अमेरिका में मौजूद इजरायल समर्थकों और विरोधियों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया था।नेतन्याहू का दोटूक जवाब और संयुक्त राष्ट्र में आने का पक्का इरादाजोहरान ममदानी और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों की ओर से मिल रही धमकियों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। यरूशलेम से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने कहा है कि लोकतांत्रिक देशों के नेताओं को इस तरह की धमकियों से डराया नहीं जा सकता। वे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में हिस्सा लेने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजरायल का पक्ष मजबूती से रखने के लिए न्यूयॉर्क की यात्रा पर अडिग हैं। इजरायली सुरक्षा एजेंसियों ने इस दौरे को देखते हुए अपनी तैयारियां और पुख्ता कर दी हैं, ताकि अमेरिकी धरती पर सुरक्षा में कोई चूक न हो सके।न्यूयॉर्क की सड़कों पर भारी तनाव की आशंका और सुरक्षा के कड़े इंतजामबेंजामिन नेतन्याहू के इस कड़े रुख के बाद न्यूयॉर्क सिटी पुलिस डिपार्टमेंट (NYPD) और अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के सामने एक बहुत बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई है। जोहरान ममदानी के नेतृत्व में कई फिलिस्तीन समर्थक और वामपंथी संगठन मैनहट्टन और संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति बना रहे हैं। स्थानीय खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, नेतन्याहू के आगमन के दौरान न्यूयॉर्क की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन और रैलियां देखने को मिल सकती हैं। स्थानीय प्रशासन संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और सुरक्षा घेरा मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है।
पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इस समय कुदरत की भारी मार झेल रहा है। हालांकि, रविवार (26 जुलाई) को जारी आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक असम में बाढ़ की स्थिति में आंशिक सुधार देखा गया है, लेकिन इसके बावजूद दो और मासूमों की जान चली गई। इसके साथ ही इस मानसून सीज़न में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 68 तक पहुंच गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य के 5 जिलों में 5.24 लाख (5,24,700) से ज्यादा लोग अब भी बाढ़ के गंदे पानी के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।चराइदेव जिले में सबसे ज्यादा तबाही, 2 लोगों की डूबने से मौतASDMA द्वारा देर रात जारी बुलेटिन के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान चराइदेव जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से दो लोगों की मौत हो गई। इस त्रासदी में सबसे ज्यादा प्रभावित भी चराइदेव जिला ही हुआ है, जहां करीब 1.9 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इसके बाद शिवसागर जिले का नंबर आता है, जहां 1.5 लाख से अधिक लोग और जोरहाट में लगभग 1.4 लाख लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। इनके अलावा गोलाघाट और नागांव जिलों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि शनिवार के मुकाबले (जब 6 जिलों में 6.55 लाख लोग प्रभावित थे) कुल प्रभावितों की संख्या में कुछ कमी आई है।राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर 37 हजार से अधिक लोगबाढ़ के तांडव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। चार सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में प्रशासन की ओर से 354 राहत शिविर (Relief Camps) और राहत वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों में वर्तमान में 37,724 विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं, जिन्हें भोजन, साफ पानी और दवाइयां मुहैया कराई जा रही हैं।सेना और NDRF का मोर्चा, 763 गांव पानी में डूबेऊपरी असम के संवेदनशील और दूर-दराज के इलाकों में भारतीय सेना (Indian Army), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और असम पुलिस की संयुक्त टीमें राहत और बचाव अभियानों में जुटी हुई हैं। ASDMA के अनुसार, वर्तमान में राज्य के 763 गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं, जबकि 48,742 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि में लगी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।धनसिरी नदी खतरे के निशान के पार, इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसानबाढ़ के प्रचंड वेग के कारण राज्य के कई जिलों में तटबंध (Embankments), सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी (Dhansiri River) अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जो आसपास के इलाकों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। इंसानों के साथ-साथ इस प्राकृतिक आपदा की गाज बेजुबानों पर भी गिरी है—असम भर में 88,240 से अधिक पालतू मवेशी और मुर्गियां भी इस भयावह बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
राजधानी दिल्ली में रविवार (26 जुलाई) को मौसम सामान्य से अधिक गर्म और उमस भरा रहा, जिससे दिल्लीवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज (सोमवार, 27 जुलाई) के लिए राहत भरी खबर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली-एनसीआर में दिनभर बादल छाए रहेंगे और कई इलाकों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान जताया गया है।रविवार को 36.6C तक पहुंचा तापमान, उमस से छूटे पसीनेIMD की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.7 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम के समय हवा में नमी का स्तर (सापेक्ष आर्द्रता) 63 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिससे वास्तविक तापमान के मुकाबले काफी ज्यादा चिपचिपी गर्मी महसूस हुई। हालांकि, उमस के बावजूद दिल्ली की हवा साफ बनी रही और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 83 के साथ 'संतोषजनक' श्रेणी में दर्ज किया गया।सोमवार को कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?मौसम विभाग ने सोमवार को सुबह से लेकर दोपहर के बीच राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है, जबकि रात के समय हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है।तापमान: दिन का अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।हवा की रफ्तार: सुबह के समय दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 15 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो दोपहर और शाम तक बढ़कर 15 से 20 किमी/घंटा हो सकती हैं।अगले 3 दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौरदिल्लीवासियों को मंगलवार से गर्मी और उमस से और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है। IMD के अनुसार:मंगलवार और बुधवार: राजधानी में मौसम की गतिविधियां तेज होंगी और ज्यादातर इलाकों में मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा सकती है।सप्ताह का तापमान: बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और पूरे हफ्ते अधिकतम पारा 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा।यात्रियों के लिए सावधानी की सलाहभले ही बारिश से तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन IMD ने निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) और सड़कों पर धीमी रफ्तार वाले ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) की चेतावनी दी है। ऐसे में दफ्तर या काम पर निकलने वाले लोगों को थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
वलसाड बाढ़ में रक्षक बनी गुजरात पुलिस, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने वीडियो शेयर कर की तारीफ
गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ के बीच राहत और बचाव अभियान तेजी से चल रहा है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने वलसाड में लोगों की जान बचाने वाले पुलिसकर्मियों के साहस की खुलकर सराहना की है।
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर नए दल-बदल विरोधी कानून की आवश्यकता पर चर्चा कराने की मांग की। उनका कहना है कि अवसरवाद से प्रेरित बड़े पैमाने पर राजनीतिक दल-बदल पर रोक लगाने के साथ-साथ वास्तविक वैचारिक असहमति की भी रक्षा की जानी चाहिए।
दिल्ली के जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल की जांच तेज हो गई है। RAF जवान की पहचान कर ली गई है और CRPF की जांच रिपोर्ट अगले सप्ताह आने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को समय सीमा के भीतर कराने की मांग को लेकर दायर एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। याचिका में अदालत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पंचायत चुनाव तय समय पर ही आयोजित किए जाएं, ताकि ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य प्रभावित न हों।क्या है पूरा मामला और याचिकाकर्ता का पक्षयह याचिका अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन और उनके सहयोगियों की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि प्रदेश में पंचायत चुनावों की संवैधानिक समय सीमा नजदीक आ रही है, इसलिए राज्य सरकार और पंचायती राज विभाग को बिना किसी विलंब के चुनावी तैयारियां पूरी करनी चाहिए। याचिका में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि चुनाव टालने या देरी करने से आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होता है, इसलिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति देकर समय पर मतदान कराया जाना चाहिए।राज्य निर्वाचन आयोग और कोर्ट का रुखइस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि वह तय समय पर चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है। हालांकि, पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी प्रशासनिक व संवैधानिक औपचारिकताओं की समीक्षा की थी। अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) और पंचायती राज विभाग से जवाब तलब किया था, ताकि चुनावों से पहले सीटों के आरक्षण और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में कोई कमी न रहे। हाईकोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चुनाव की घोषणा के बाद कोई कानूनी अड़चन पैदा न हो।क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है आज का दिनआज होने वाली सुनवाई पर पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों और राजनीतिक गलियारों की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं और राज्य निर्वाचन आयोग के पक्ष को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देश जारी करती है, तो प्रदेश में पंचायत चुनाव की तिथियों को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। इससे पंचायती राज विभाग और जिला प्रशासन को चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने का स्पष्ट रास्ता मिल जाएगा।
भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। दुनिया भर में तहलका मचाने वाली ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल के बाद अब भारत का स्वदेशी 'पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम' (MBRS) रक्षा निर्यात का अगला बड़ा ब्रह्मास्त्र बनने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में करीब 12 देश भारत के इस अत्याधुनिक और बेहद अचूक हथियार को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत तैयार हुए इस रॉकेट सिस्टम को लेकर भारत जल्द ही अपने मित्र देशों के साथ निर्यात के बड़े सौदे फाइनल कर सकता है, जिससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र को एक नई और मजबूत उड़ान मिलेगी।मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड हैं सबसे आगेअंतरराष्ट्रीय बाजार में पिनाका सिस्टम की बढ़ती मांग को देखते हुए कई एशियाई देश इसे अपनी सेना में शामिल करने को बेताब हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड इसे खरीदने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। भारत के रक्षा निर्यात का ग्राफ बीते कुछ सालों में काफी तेजी से ऊपर गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि भारत ने हाल ही में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल बेचने पर सहमति जताई है, जबकि फिलीपींस पहले ही भारत से ब्रह्मोस मिसाइल की सफल खेप प्राप्त कर चुका है।स्वदेशी तकनीक और पिनाका की अचूक मारक क्षमतापिनाका रॉकेट लॉन्चर पूरी तरह से भारतीय तकनीक का शानदार नमूना है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है, जबकि इसका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों द्वारा किया जाता है। भारतीय सेना में पहले से ही इसे ऑपरेशनल तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।पिनाका की ताकत की बात करें तो यह सिस्टम अपनी मारक क्षमता के लिए जाना जाता है:रफ्तार: यह सिस्टम मात्र 44 सेकंड के भीतर एक साथ 12 खतरनाक रॉकेट दागने में पूरी तरह सक्षम है।सटीक निशाना: बेस वर्जन के साथ यह 40 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन पर जीपीएस (GPS) और आईएनएस (INS) गाइडेंस तकनीक की मदद से बेहद सटीकता के साथ हमला कर सकता है।बचाव प्रणाली: यह 'शूट एंड स्कूट' क्षमता से लैस है, यानी फायर करने के तुरंत बाद लॉन्चिंग वाहन अपनी जगह तेजी से बदल लेता है, ताकि दुश्मन के जवाबी हमले से बचा जा सके।तबाही: इसे दुश्मन के बंकरों, भारी हथियारों के डिपो और जमीनी सैन्य ठिकानों को पल भर में राख करने के लिए ही डिजाइन किया गया है।ब्रह्मोस के मुरीद हुए दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देशपिनाका के साथ-साथ ब्रह्मोस मिसाइल के विदेशी खरीदारों की सूची भी लगातार लंबी होती जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया के कई बड़े मुस्लिम देश भारत से ब्रह्मोस खरीदने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। फिलीपींस और वियतनाम के बाद अब दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल का तीसरा सबसे बड़ा वैश्विक ग्राहक बनने जा रहा है। इसके साथ ही खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इस खतरनाक मिसाइल को अपने बेड़े में शामिल करने की इच्छा जताई है। कुल मिलाकर लगभग आधा दर्जन देश ब्रह्मोस खरीदने की कतार में खड़े हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती सैन्य कूटनीति का साफ संकेत है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भारी विरोध प्रदर्शनों और सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच आज, 27 जुलाई से विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग शुरू हो गई है। पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने क्षेत्र में जारी जनाक्रोश और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए इस बार तीन चरणों में मतदान कराने का फैसला किया है। पहले चरण में आज मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जबकि दूसरे चरण में 2 अगस्त और तीसरे चरण में 10 अगस्त को वोटिंग होगी। कुल 53 सीटों पर होने वाले इस चुनाव पर न केवल पाकिस्तान, बल्कि भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी पैनी नजर बनी हुई है।3 चरणों में चुनाव और 12 शरणार्थी सीटों पर खड़ा हुआ बड़ा विवादचुनाव आयोग के शेड्यूल के अनुसार 2 अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों के साथ-साथ शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे। वहीं 10 अगस्त को अंतिम चरण में पुंछ की 11 सीटों पर मतदान संपन्न होगा। इस पूरे चुनाव में सबसे बड़ा विवाद इन 12 शरणार्थी सीटों को लेकर ही है। स्थानीय संगठनों और 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) का गंभीर आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन सीटों की आड़ में अपने पसंदीदा दल को फायदा पहुंचाने और चुनाव नतीजों में धांधली करने का काम करती है, जिससे स्थानीय लोगों का वास्तविक प्रतिनिधित्व कमजोर पड़ता है।कैसे चलता है PoK का प्रशासन और किस पार्टी के बीच है मुख्य मुकाबलाव्यावहारिक रूप से PoK की पूरी व्यवस्था पाकिस्तान के कड़े नियंत्रण में काम करती है। कहने को तो यहां चुने गए विधायक क्षेत्र के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं, लेकिन प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर असल फैसले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली 'कश्मीर काउंसिल' और वहां की सेना ही लेती है। इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबला पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि केंद्र में एक साथ सरकार चलाने वाले ये दोनों दल PoK में सत्ता के लिए आमने-सामने हैं। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद में रैली कर खुद PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताकर सियासत गरमा दी है।महंगाई से भड़का जनआंदोलन और भारत का कड़ा संदेशबीते कई महीनों से PoK के लोग भारी महंगाई, बिजली के बेतहाशा बिलों और पाकिस्तानी नीतियों के खिलाफ लगातार सड़कों पर उतरे हुए हैं। यह आंदोलन अब पाकिस्तान सरकार और सेना की मौजूदगी के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। दूसरी ओर, भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। नई दिल्ली का साफ कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न व अविभाज्य अंग है। भारत इस गैर-कानूनी चुनाव प्रक्रिया को सिरे से खारिज करता है और PoK से जुड़े हर मुद्दे को अपना पूर्ण आंतरिक विषय मानता है।
7 दिन में ध्वस्त हुए सचिन के 7 ऐतिहासिक रिकॉर्ड: रोहित, विराट और नए नवेले वैभव ने किया बड़ा कमाल
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड्स को एक समय अजेय माना जाता था। लेकिन मॉडर्न क्रिकेट में अब उनका युग बदलता दिख रहा है। महज एक हफ्ते के अंदर रोहित शर्मा, विराट कोहली और युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी ने सचिन के 7 बड़े और ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़कर क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया है। आइए जानते हैं कि कौन से रिकॉर्ड टूटे हैं।वैभव सूर्यवंशी ने छीने सचिन के तीन युवा रिकॉर्डभारतीय क्रिकेट का भविष्य बेहद सुरक्षित हाथों में है, यह युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने साबित कर दिया है। इंग्लैंड दौरे पर डेब्यू करने के बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए वैभव ने सचिन को पछाड़कर तीन बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए:सबसे युवा डेब्यू: वैभव भारत के लिए सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं।सबसे युवा अर्धशतक: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 रन (हाफ-सेंचुरी) बनाने वाले सबसे युवा भारतीय भी अब वैभव ही हैं।सबसे युवा प्लेयर ऑफ द मैच: जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच जिताऊ प्रदर्शन कर उन्होंने सबसे कम उम्र में यह अवॉर्ड जीतने का सचिन का बरसों पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।'हिटमैन' रोहित शर्मा ने तोड़े तीन कीर्तिमानभारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी वनडे में बेहतरीन शतक जड़कर इतिहास रच दिया। इस दमदार पारी के साथ हिटमैन ने मास्टर ब्लास्टर के तीन रिकॉर्ड ध्वस्त किए:बतौर ओपनर सबसे ज्यादा शतक: रोहित भारत के लिए ओपनिंग करते हुए सबसे ज्यादा इंटरनेशनल शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।विदेशी धरती पर दबदबा: रोहित ने भारत के बाहर (विदेश में) जाकर सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने का सचिन का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है।सबसे उम्रदराज शतकवीर: रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट में भारत की तरफ से शतक जड़ने वाले सबसे अधिक उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं।विराट कोहली ने भी किया एक रिकॉर्ड अपने नामइस रिकॉर्ड तोड़ हफ्ते में विराट कोहली भी पीछे नहीं रहे। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार 50 से अधिक का स्कोर (50+ स्कोर) बनाने के मामले में विराट ने सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया है और एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। आज लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक पेश किया जाएगा, जबकि विपक्ष ने छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा।
थिएटर में रुलाने के बाद अब OTT पर आ रही है इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा', जानें रिलीज डेट
अगर आप सिनेमाघरों में इम्तियाज अली की जादूगरी देखने से चूक गए हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन खबर है। 12 जून को बड़े पर्दे पर रिलीज हुई और दर्शकों की आंखों में आंसू ला देने वाली फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' अब ओटीटी पर आ रही है। थिएटर्स में शानदार कमाई और लोगों का बेशुमार प्यार बटोरने के बाद यह फिल्म अब सीधे आपके घरों तक पहुंचने वाली है।कब और कहां देख सकेंगे फिल्म?अगर आप इस इमोशनल सफर का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो बता दें कि 7 अगस्त से यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर स्ट्रीम होने जा रही है।सरहद पार के प्यार और वादे की कहानी'मैं वापस आऊंगा' की कहानी भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दर्द और उस दौरान बिछड़ गए दो प्रेमियों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक पोता (दिलजीत दोसांझ) अपने बुजुर्ग दादा जी (नसीरुद्दीन शाह) को उनके प्यार से किए गए एक पुराने वादे को पूरा कराने के लिए बॉर्डर के उस पार ले जाता है। कहानी में जज्बात हैं, पुरानी यादें हैं और सरहदों को पार कर जाने वाली मोहब्बत है।शानदार है फिल्म की स्टार कास्टफिल्म में एक्टिंग का जबरदस्त डोज देखने को मिलेगा। दादा के किरदार में दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने जान डाल दी है, वहीं उनके पोते के रूप में दिलजीत दोसांझ का काम लोगों को खूब पसंद आया है। जवानी के दिनों वाले नसीरुद्दीन शाह का रोल वेदांग रैना ने निभाया है, जबकि उनकी प्रेमिका के किरदार में शरवरी वाघ नजर आई हैं।इम्तियाज अली का चिर-परिचित अंदाजइम्तियाज अली को स्क्रीन पर प्यार और जिंदगी के फलसफे को बेहद खूबसूरती से उकेरने के लिए जाना जाता है। चाहे बात 2009 की 'लव आज कल' की हो, 'रॉकस्टार' के जुनून की हो या फिर 'तमाशा' की, उन्होंने हमेशा दर्शकों को रोमांस का एक अलग ही नजरिया दिया है। 'मैं वापस आऊंगा' में भी उनके इसी खूबसूरत डायरेक्शन और बेहतरीन गानों ने एक बार फिर से दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया है।
छत्तीसगढ़ में मानसूनी हवाएं एक बार फिर पूरी तरह से मेहरबान हो गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रायपुर केंद्र के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी मध्य भारत से होकर गुजर रहा है। इन दोनों मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश में तेजी से नमी आ रही है, जिसके चलते आगामी 31 जुलाई और 1 अगस्त तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम और कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट, उमस से मिलेगी राहतलगातार हो रही बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण अगले 24 घंटों के भीतर छत्तीसगढ़ के अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके बाद तापमान में ज्यादा बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। अचानक आए इस मौसमी बदलाव से लोगों को पिछले कुछ दिनों से सता रही भीषण उमस और गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने बारिश के साथ-साथ तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) की आशंका जताते हुए लोगों को सतर्क रहने को कहा है।ऑरेंज और येलो अलर्ट वाले प्रमुख जिलेमौसम विभाग ने भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी देते हुए कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बेमेतरा और मुंगेली सहित कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं रायपुर, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कोरबा, जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर जैसे जिलों में येलो अलर्ट रहेगा, जहां 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। प्रशासन ने बारिश और तूफान के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
आजकल हर कोई नए स्टार्टअप और इनोवेटिव बिजनेस आइडिया की बात कर रहा है। कोई एआई से पैसे बना रहा है तो कोई कबाड़ से करोड़ों का कारोबार खड़ा कर रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस देश में कुएं, तालाब और नदियों का पानी बिल्कुल मुफ्त मिलता हो, वहां कोई पानी बेचकर अरबपति बन सकता है? साल 1969 में जब जयंतीलाल चौहान ने यह आइडिया दुनिया के सामने रखा, तो लोगों ने उन्हें पागल समझकर उनका खूब मजाक उड़ाया। लेकिन उनकी उसी दूरदर्शी सोच और जिद ने आज बिसलेरी को 7000 करोड़ रुपये की विशाल कंपनी बना दिया है।इटली की दवा कंपनी से भारत का नंबर वन ब्रांड बनने का सफरबिसलेरी का इतिहास काफी दिलचस्प है। यह मूल रूप से इटली की एक फार्मा कंपनी थी जो मलेरिया की दवाएं बेचा करती थी। इसके असली मालिक फेलिस बिसलेरी थे। भारतीय बाजार की क्षमता को देखते हुए बाद में पारले ग्रुप ने इसे सिर्फ चार लाख रुपये में खरीद लिया। 1969 में रमेश चौहान ने बिसलेरी की कमान अपने हाथों में ली। उनका शुरुआती मकसद इसे एक सोडा ब्रांड के रूप में स्थापित करना था, लेकिन उन्होंने बोतलबंद पानी बेचना भी जारी रखा। साठ के दशक में कांच की बोतलों में पानी बेचना एक बेवकूफी माना जाता था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों को सुरक्षित और शुद्ध पानी की अहमियत समझ आने लगी और यह ब्रांड हर भारतीय की जरूरत बन गया।टाटा से डील की अफवाहों पर लगा विराम, बेटी ने संभाली कमानकुछ समय पहले बाजार में यह खबर जोरों पर थी कि 82 वर्षीय रमेश चौहान अपनी बढ़ती उम्र के कारण कंपनी बेचना चाहते हैं। टाटा और रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनियों के इस रेस में शामिल होने की खबरें भी आईं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि उनकी इकलौती बेटी जयंती चौहान की इस बिजनेस में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। हालांकि, बाद में ये सारी बातें महज अफवाह साबित हुईं। आज जयंती चौहान ही पूरी मजबूती के साथ बिसलेरी का यह विशाल कारोबार संभाल रही हैं। वर्तमान में कंपनी के पास 122 से ज्यादा ऑपरेशनल प्लांट, 5000 ट्रकों का बेड़ा और 4500 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर्स का एक बेहद मजबूत नेटवर्क मौजूद है।भारत में तेजी से बढ़ता बोतलबंद पानी का बाजारभारत में बोतलबंद पानी का बिजनेस अब एक बहुत बड़ा उद्योग बन चुका है। मौजूदा समय में भारत दुनिया के उन टॉप दस देशों में शामिल है जहां पैक्ड वाटर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक यह बाजार 9.14 अरब डॉलर का हो चुका है और 2031 तक इसके 14.9 अरब डॉलर के आंकड़े को छूने की पूरी संभावना है। इस विशाल बाजार में किनले और एक्वाफिना जैसे बड़े प्रतिद्वंदियों के बावजूद, करीब 40 फीसदी की भारी-भरकम हिस्सेदारी के साथ बिसलेरी आज भी नंबर वन की कुर्सी पर काबिज है।
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में केंद्र सरकार 'पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' पेश करने जा रही है। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानून को और सख्त बनाना है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने इस प्रस्तावित संशोधन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल कानून कड़ा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
NEET पेपर लीक प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की सभी याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई का फैसला किया है। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय स्तर की गाइडलाइन तैयार की जाएगी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मंत्री केशव महंता की बेटी के पीएम मोदी पर दिए बयान से उन्हें दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा हर वयस्क व्यक्ति अपनी अलग राजनीतिक सोच रख सकता है। बच्चों के विचारों के लिए माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया ...
पुण्यतिथि विशेष: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन परिचय और महत्वपूर्ण कार्य
APJ Abdul Kalam Death Anniversary Special: हर वर्ष 27 जुलाई को भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध रहे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि मनाई जाती है। उन्होंने भारत के रक्षा एवं अंतरिक्ष ...
LIVE: लोकसभा में पेश होगा पेपर लीक संशोधन बिल, पेलेट गन पर हंगामे के आसार
Latest News Today Live Updates in Hindi : मोदी सरकार आज दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेपर लीक संशोधन बिल पेश करेगी। संसद में विपक्ष आज युवाओं पर पेलेट गन चलाने हंगामा कर सकता है। पल पल की जानकारी...
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को सुरक्षा देने की मांग तेज हो गई है। महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने परिवार से मुलाकात कर मुख्यमंत्री से सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कही। टाइफाइड के कारण दीपके अब तक घर नहीं लौटे हैं।
असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है तो गुजरात में भारी ...
पीएम मोदी पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस सख्त, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भेजा नोटिस
दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजा है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी बढ़ा दी गई है।
मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार जीता गोल्ड
राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारत ने ग्लास्को में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 48 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ भारत के लिए गोल्ड मेडल का खाता खोला बल्कि एक नया इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ ही उन्होंने ...
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कलाम जी के उच्च आदर्श, सादगी और प्रगतिशील विचारधारा देशवासियों ...
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने पीएचडी दाखिला नियमों में बहुत बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू किए गए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (NHEQF) को अपनाते हुए डीयू ने पीएचडी अध्यादेश में संशोधन किया है। इस नए नियम के तहत अब चार साल का ग्रेजुएशन पूरा करने वाले मेधावी छात्र बिना पोस्ट-ग्रेजुएशन (मास्टर डिग्री) के सीधे पीएचडी में दाखिला पा सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य प्रतिभाशाली युवाओं का समय बचाना और उन्हें कम उम्र में ही रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के शानदार अवसर प्रदान करना है।मास्टर डिग्री की अनिवार्यता हुई खत्म, बचेगा छात्रों का समयपारंपरिक अकादमिक व्यवस्था के अनुसार, किसी भी छात्र को पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए पहले 3 साल की स्नातक डिग्री और उसके बाद 2 साल की मास्टर डिग्री (जैसे एमए, एमएससी या एमकॉम) पास करना अनिवार्य होता था। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। लेकिन अब नए नियमों के लागू होने के बाद, जिन विद्यार्थियों ने 8-सेमेस्टर यानी 4 साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स पूरा कर लिया है, वे बिना किसी मास्टर डिग्री के सीधे पीएचडी रिसर्च के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। इससे छात्रों का एक से दो साल का कीमती समय बचेगा और वे सीधे शोध की दुनिया में कदम रख सकेंगे।सीधे पीएचडी एडमिशन के लिए 75% अंकों की कड़ी शर्तचार साल के ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में दाखिला पाना हालांकि आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कड़े पात्रता मानदंड तय किए हैं। इस श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के 4-वर्षीय स्नातक कोर्स में कम से कम 75% अंक या इसके समकक्ष सीजीपीए (CGPA) होना अनिवार्य किया गया है।इसके साथ ही, आरक्षित वर्गों के छात्रों को राहत दी गई है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL), दिव्यांगजन (PwBD) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंकों की सीमा में 5% की छूट का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब यह है कि इन आरक्षित श्रेणियों के छात्रों के लिए 4-वर्षीय स्नातक में कम से कम 70% अंक होना आवश्यक होगा।3-वर्षीय ग्रेजुएशन और पारंपरिक पोस्ट-ग्रेजुएशन वालों के लिए क्या हैं नियम?डीयू ने स्पष्ट किया है कि पुरानी शिक्षा प्रणाली के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जो इस प्रकार हैं:1-वर्षीय मास्टर डिग्री: जिन छात्रों ने 4-वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद 1 साल की मास्टर डिग्री की है, उन्हें पीजी स्तर पर कम से कम 55% अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 50%) प्राप्त करने होंगे।2-वर्षीय मास्टर डिग्री: पारंपरिक 3-वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद 2 साल की मास्टर डिग्री पूरी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी न्यूनतम 55% अंकों की पात्रता पूर्ववत लागू रहेगी।एम.फिल (M.Phil) धारक: जिन विद्यार्थियों ने कम से कम 55% अंकों के साथ एम.फिल कोर्स पूरा किया है, वे भी पीएचडी में प्रवेश के लिए पूरी तरह योग्य माने जाएंगे।प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा अंतिम चयनचार साल के ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में दाखिला चाहने वाले सभी अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके तहत उम्मीदवारों को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा (जैसे यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट या डीयू की प्रवेश परीक्षा) पास करनी होगी। परीक्षा में सफल होने के बाद संबंधित विभाग के इंटरव्यू (साक्षात्कार) के आधार पर अंतिम रूप से छात्रों का चयन किया जाएगा। डीयू के इस दूरदर्शी कदम से यूनिवर्सिटी में रिसर्च का स्तर और अधिक उन्नत होगा तथा युवा शोधकर्ता कम उम्र में ही देश के विकास में अपना वैज्ञानिक व शैक्षणिक योगदान दे सकेंगे।
सोमवार, 27 जुलाई 2026 के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 के हरे निशान के साथ मजबूत शुरुआत करने की पूरी उम्मीद है। पिछले सत्र में गिरावट का सामना करने वाले दलाल स्ट्रीट के लिए आज का दिन राहत भरा साबित हो सकता है। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे सकारात्मक संकेतों, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव घटने और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते आज शेयर बाजार में जोरदार उड़ान देखने को मिल सकती है। निवेशकों की धारणा को मजबूत करने वाले ऐसे ही 7 प्रमुख संकेतों और बाजार के लेटेस्ट अपडेट पर आइए एक नजर डालते हैं।1. गिफ्ट निफ्टी दे रहा है शानदार गैप-अप की शुरुआत का संकेतभारतीय शेयर बाजार के लिए प्री-ओपनिंग में ही अच्छी खबर सामने आ रही है। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) आज 23,934 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से करीब 127.5 अंकों का मजबूत प्रीमियम है। यह साफ तौर पर इस बात का संकेत दे रहा है कि आज घरेलू बाजार की शुरुआत एक शानदार गैप-अप के साथ हो सकती है।2. कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में 5% की बड़ी गिरावटबाजार के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर क्रूड ऑयल के मोर्चे से आई है। ईरान द्वारा हमलों को रोकने की घोषणा करने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिसलकर करीब 92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड भी गिरकर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। तेल सस्ता होने से भारत जैसे आयातक देशों को बड़ा आर्थिक फायदा मिलता है।3. एशियाई बाजारों में चौतरफा जोरदार तेजीवैश्विक मोर्चे पर एशियाई बाजारों की शुरुआत भी आज जबरदस्त बढ़त के साथ हुई है। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.24% और टॉपिक्स 0.60% मजबूत हुआ है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.44% और स्मॉल-कैप कोस्डैक 1.49% की छलांग के साथ कारोबार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क S&P/ASX 200 भी 0.97% की तेजी के साथ हरे निशान में है, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा।4. अमरीकी बाजार वॉल स्ट्रीट से मिले मजबूत संकेतसप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद वॉल स्ट्रीट के फ्यूचर्स में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में रविवार रात जोरदार उछाल दर्ज हुआ। डॉऊ जोन्स फ्यूचर्स में 244 अंक (0.5%) की बढ़त आई, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.6% चढ़ा, जबकि टेक शेयरों की अगुवाई वाले नैस्डैक 100 फ्यूचर्स ने 1.2% की शानदार तेजी के साथ मार्केट का नेतृत्व किया।5. अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी और युद्ध के माहौल पर ब्रेकईरान पर पिछले 13 दिनों से लगातार चल रहे हमलों के बाद शुक्रवार देर रात से अमेरिका ने फिलहाल नए हमलों से परहेज किया है। इससे भू-राजनीतिक तनाव में काफी कमी आई है। वहीं, ईरान की सेना ने भी यह बयान दिया है कि तेहरान ने अपनी जवाबी सैन्य प्रतिक्रियाओं को फिलहाल रोक दिया है। हालांकि यमन के हूती विद्रोहियों की कुछ छिटपुट हरकतों के बावजूद ग्लोबल लेवल पर युद्ध का डर कम हुआ है, जिससे शेयर बाजारों ने राहत की सांस ली है।6. आज आने वाले हैं दिग्गज कंपनियों के Q1 नतीजेकॉर्पोरेट जगत के लिहाज से भी आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। आज देश भर की करीब 68 प्रमुख कंपनियां अपनी अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय परिणाम घोषित करने वाली हैं। इनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), कोल इंडिया, इंडस टावर्स, कोफोर्ज, केनरा बैंक और टाटा पावर जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों के आधार पर आज चुनिंदा शेयरों में जबरदस्त एक्शन देखने को मिल सकता है।7. सोने की कीमतों में एक फीसदी से अधिक की तेजीकमोडिटी मार्केट की बात करें तो आज सोने के भावों में फिर से उछाल आया है। वैश्विक मांग और निवेश के कारण सोने की कीमतें सोमवार को 1% से ज्यादा चढ़ गईं। स्पॉट गोल्ड बढ़कर 4,103.99 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.9 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,106.10 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।
Gold Price Fall 2026: अपने पीक से 37,000 रुपये धड़ाम हुआ सोना! जानें क्या यह है निवेश का सही समय
साल 2026 की शुरुआत में आसमान छूने वाली सोने की कीमतों (Gold Price Today) में अब भारी गिरावट देखने को मिल रही है। जनवरी 2026 में भारत में सोना 1 लाख 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था, जो अब घटकर करीब 1.43 लाख रुपये पर आ गया है। यानी सोना अपने उच्चतम स्तर से सीधा 37,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। वैश्विक स्तर पर भी सोने की चमक फीकी पड़ी है और जनवरी के 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से करीब 28 फीसदी टूटकर यह अब 4,040 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लगातार गिरते बाजार में अब सोना खरीदना चाहिए या अभी कीमतों में और गिरावट आने का इंतजार करना चाहिए?सोने की कीमतों में भारी गिरावट के प्रमुख कारणआर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों पर दबाव के पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं: पहला, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की सख्त मौद्रिक नीति और दूसरा, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव। फेड के चेयरमैन केविन वॉर्श ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता सिर्फ महंगाई पर काबू पाना है। बाजार को उम्मीद नहीं है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कोई कटौती होगी, बल्कि सितंबर की बैठक में दरें और बढ़ने की आशंका है। जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो निवेशक सोने के बजाय बेहतर रिटर्न देने वाले अन्य विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे गोल्ड पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा ईरान युद्ध, सैन्य कार्रवाई और कच्चे तेल की कीमतों में जारी अनिश्चितता का भी सोने के ग्लोबल मार्केट पर गहरा असर पड़ा है।क्या अब सोना खरीदना फायदे का सौदा है? ( ऐतिहासिक आंकड़े)अगर आप सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इसके ऐतिहासिक ट्रेंड को समझना बेहद जरूरी है। भले ही शॉर्ट टर्म में सोने में भयंकर उतार-चढ़ाव देखा जा रहा हो, लेकिन लॉन्ग टर्म में गोल्ड हमेशा मुनाफे का सौदा रहा है। पिछले 30 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने ने निवेशकों को करीब 950 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है। वहीं, पिछले 5 सालों में भी इसकी सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) 19 फीसदी के आसपास रही है। हालांकि, बाजार का इतिहास यह भी गवाह है कि जब भी सोना रिकॉर्ड हाई बनाता है, तो उसके बाद उसमें 40% तक का तगड़ा करेक्शन (गिरावट) भी देखने को मिलता है।निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?बाजार के जानकारों और वेल्थ मैनेजर्स का मानना है कि ग्लोबल टेंशन और फेड रेट्स के कारण शॉर्ट टर्म में सोने की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसलिए, अगर आप लंबी अवधि के नजरिए से अपने पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी गोल्ड रखना चाहते हैं, तो एक साथ सारा पैसा लगाने से बचें। इसके बजाय, गिरावट वाले इस बाजार में अलग-अलग समय पर धीरे-धीरे (SIP की तर्ज पर) सोने में खरीदारी करना एक समझदारी भरी और सुरक्षित रणनीति साबित हो सकती है।

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