कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार में बाढ़ से हुए जानमाल के नुकसान पर मंगलवार को दुख जताया तथा पार्टी के कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाने अपील की। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, बिहार में बाढ़ से हुई जनहानि अत्यंत पीड़ादायक है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने कहा कि 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और हजारों गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। खरगे ने इस बात पर जोर दिया कि संकट की इस घड़ी में सरकार की प्राथमिकता हर प्रभावित परिवार तक राहत और सहायता पहुंचाने की होनी चाहिए। उन्होंने कहा, सरकार और प्रशासन राहत, बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्यों में कोई कसर न छोड़ें तथा प्रभावित परिवारों तक सहायता अविलंब पहुंचाएं। खरगे ने कहा, कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं से अपील है कि वे प्रभावित क्षेत्रों में आगे बढ़कर लोगों की हर संभव मदद करें। पूरा देश इस कठिन समय में बिहार के साथ खड़ा है। राहुल गांधी ने सरकार तथा प्रशासन से राहत एवं बचाव अभियान पूरी तत्परता से चलाकर प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता जल्द पहुंचाने का आग्रह भी किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई जनहानि अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।’’उन्होंने कहा, ‘‘इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों के साथ मेरी सहानुभूति है।’’कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील है कि वो आगे बढ़कर प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद करें।’’उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन से अपेक्षा है कि वो राहत एवं बचाव कार्यों को पूरी तत्परता के साथ चलाकर प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता जल्द से जल्द पहुंचाए। बिहार और पड़ोसी देश नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में पिछले चार-पांच दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, कई नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग (डीएमडी) ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों के 49.36 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर, सोशल मीडिया पर लिखी ये बात
उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का इस्तीफा केंद्र सरकार ने मंजूर कर लिया है. उन्होंने निजी कारणों और जीवन के नए लक्ष्यों के चलते 30 अगस्त को यह फैसला लिया था. लंदन की नौकरी छोड़ आईएएस बनीं दिव्या के इस्तीफे पर विपक्षी दलों ने राजनीति भी शुरू कर दी थी.
VIDEO: मुंबई में दिनभर भीख मांगते रहे 5 हजार करोड़ की दौलत वाले विधायक
करोड़ों की संपत्ति, राजनीतिक रसूख और सुरक्षा घेरा छोड़कर मुंबई के घाटकोपर पूर्व से विधायक पराग शाह ने दिनभर सड़कों पर लोगों से भीख मांगी. सड़क किनारे खड़े होकर उन्होंने राहगीरों से मदद मांगी. कुछ ने नजरअंदाज किया तो कुछ ने अपनी क्षमता के मुताबिक पैसे या खाने की चीजें दीं. यह अनुभव उनके आध्यात्मिक गुरु राष्ट्रसंत नम्रमुनि महाराज की सीख का हिस्सा था. दिनभर आम लोगों के बीच रहने के बाद उन्होंने मदद करने वालों से दोबारा मिलकर उनका आभार जताया.
पाकिस्तान की 14 चौकियों पर BLA ने किया कब्जे का दावा, हथियार भी लूटे
पाकिस्तान की 14 से ज्यादा चौकियों पर कब्जे का BLA का दावा, हथियार भी लूटे
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सलमान खान ने भाई सोहेल के घर किए गणपति बप्पा के दर्शन
सोहेल खान के घर गणपति दर्शन के लिए सलमान खान समेत कई सितारे पहुंचे। सलमान ने सिर पर कपड़ा बांधकर बप्पा के दर्शन किए। सीमा सजदेह, इयूलिया वंतूर, करण जौहर, ओरी, किम शर्मा, पूजा हेगड़े, नीलम और जेनेलिया डिसूजा भी परिवार के साथ नजर आईं।
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर सुरक्षा और इमिग्रेशन प्रक्रिया में एक बेहद गंभीर चूक का मामला सामने आया है। इटली के तीन नागरिक बिना अनिवार्य इमिग्रेशन जांच पूरी किए ही दिल्ली से म्यूनिख (जर्मनी) जाने वाली कनेक्टिंग इंटरनेशनल फ्लाइट में सवार हो गए। इस बड़ी लापरवाही के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) ने एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन को 'शो-कॉज़ नोटिस' (Show-Cause Notice) जारी कर जवाब तलब किया है।इसे भी पढ़ें: Gurugram Hit and Run | गुरुग्राम हिट-एंड-रन केस की पीड़ित महिला बाइकर सिया का पलटवार, कहा- 'सहानुभूति का नाटक न करे आरोपी' न्यूज़ एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यह घटना इस महीने की शुरुआत में हुई थी। तीनों यात्रियों ने 4 सितंबर को अमृतसर से दिल्ली की यात्रा की थी और बाद में म्यूनिख जाने वाली लुफ्थांसा फ़्लाइट में सवार हुए थे। एजेंसी ने आगे बताया कि इंटरनेशनल फ़्लाइट लेने से पहले दिल्ली में इन यात्रियों का इमिग्रेशन नहीं हुआ था। इस घटना के बाद होम मिनिस्ट्री ने मंगलवार को अहम स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलाई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यात्री इमिग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी किए बिना इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया तक कैसे पहुँच गए। एयर इंडिया ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।इसे भी पढ़ें: BRICS में भारत की शानदार कूटनीतिक सफलता ने 'Brand Modi' को और मजबूत कर दिया है सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने एयर इंडिया के CEO से स्पष्टीकरण मांगा सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन को 'शो-कॉज़ नोटिस' जारी कर प्रोसेस में हुई कथित चूक पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह मामला होम मिनिस्ट्री तक भी पहुँच गया है, जो घटना से जुड़े हालात की समीक्षा करेगी। उम्मीद है कि होम सेक्रेटरी गोविंद मोहन मंगलवार को बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में विभिन्न एजेंसियों और संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। बैठक में शामिल होने वालों में सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी और एडिशनल सेक्रेटरी, इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर, होम मिनिस्ट्री में केंद्र शासित प्रदेशों और विदेशियों के मामलों के प्रभारी एडिशनल सेक्रेटरी, ब्यूरो ऑफ़ इमिग्रेशन के कमिश्नर, एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन और दिल्ली एयरपोर्ट के CEO शामिल हो सकते हैं। बैठक में इस बात पर फोकस किए जाने की उम्मीद है कि दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों की प्रोसेसिंग कैसे हुई और आगे की इंटरनेशनल फ़्लाइट में सवार होने से पहले ज़रूरी इमिग्रेशन जांच क्यों पूरी नहीं की गई। इटली के उन तीन यात्रियों के साथ क्या हुआ? तीनों यात्रियों ने 4 सितंबर को एयर इंडिया की फ़्लाइट से अमृतसर से दिल्ली की यात्रा की थी। इसके बाद उन्हें लुफ्थांसा की फ़्लाइट से म्यूनिख की अपनी यात्रा जारी रखनी थी। उनकी यात्रा पर लागू सामान्य प्रक्रिया के तहत, इंटरनेशनल डिपार्चर के लिए आगे बढ़ने से पहले यात्रियों को दिल्ली में इमिग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी करनी थीं। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पहुँचने के बाद यात्रियों को इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया में ले जाया गया। नतीजतन, वे इमिग्रेशन काउंटर तक नहीं पहुँचे और ज़रूरी इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा किए बिना ही म्यूनिख जाने वाली लुफ्थांसा फ़्लाइट में सवार हो गए। इस घटना की एक अहम बात यह है कि अमृतसर-दिल्ली और दिल्ली-म्यूनिख फ़्लाइट्स, एयर इंडिया के 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल (जिससे आसानी से इंटरनेशनल कनेक्शन मिल सके) के दायरे में नहीं आती थीं। 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल क्यों ज़रूरी है? एयर इंडिया ने इंटरनेशनल कनेक्शन को आसान बनाने के लिए अमृतसर समेत कुछ चुनिंदा एयरपोर्ट्स पर 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल शुरू किया है। इस सिस्टम के तहत, जो यात्री 'स्पोक' एयरपोर्ट से 'हब' एयरपोर्ट होते हुए किसी इंटरनेशनल डेस्टिनेशन (मंज़िल) तक जाते हैं, वे अपनी इमिग्रेशन की प्रक्रिया शुरुआती एयरपोर्ट पर ही पूरी कर सकते हैं। हब पर पहुँचने के बाद, उन्हें आम तौर पर अपनी इंटरनेशनल फ़्लाइट में जाने से पहले सिक्योरिटी चेक से गुज़रना पड़ता है। अगर कोई यात्री अमृतसर से दिल्ली और फिर वहाँ से किसी इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के लिए यात्रा करता है, तो अमृतसर 'स्पोक' का काम करता है और दिल्ली 'हब' का। हालाँकि, इटली के वे तीनों यात्री एयर इंडिया के ऐसे किसी योग्य कनेक्शन के तहत यात्रा नहीं कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें अमृतसर में ही दिल्ली सेक्टर और म्यूनिख जाने वाली लुफ़्थान्सा फ़्लाइट, दोनों के लिए बोर्डिंग पास जारी कर दिए गए थे। चूँकि ये दोनों फ़्लाइट्स 'हब-एंड-स्पोक' सिस्टम के दायरे में नहीं आती थीं, इसलिए यात्रियों को दिल्ली में अराइवल एरिया से बाहर निकलना पड़ा और इंटरनेशनल फ़्लाइट के लिए आगे बढ़ने से पहले इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। यात्री इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया तक कैसे पहुँचे? सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में उतरने के बाद यात्रियों को रेगुलर अराइवल प्रोसेस (जहाँ इमिग्रेशन होता है) से ले जाने के बजाय सीधे इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया ले जाया गया। इसका मतलब था कि वे इमिग्रेशन काउंटर तक नहीं पहुँचे और ज़रूरी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए बिना ही म्यूनिख जाने वाली लुफ्थांसा फ़्लाइट में सवार हो गए। इस घटना ने अलग-अलग एयरलाइंस की कनेक्टिंग फ़्लाइट से यात्रा करने वाले यात्रियों को संभालने के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब ऐसे यात्री किसी तय 'सीमलेस-ट्रांसफर' व्यवस्था के दायरे में नहीं आते हों। एयर इंडिया और लुफ्थांसा के बीच इंटरलाइन पार्टनरशिप है। ऐसी व्यवस्थाओं से आम तौर पर यात्री एक ही यात्रा कार्यक्रम (इटिनररी) के तहत अलग-अलग एयरलाइंस की कनेक्टिंग यात्राएँ बुक कर पाते हैं, जिसमें एयरलाइंस ट्रांसफर प्रक्रिया के कुछ पहलुओं का तालमेल बिठाती हैं। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
CM योगी प्रदेशवासियों से अपील, ‘वोकल फॉर लोकल’ को बनाएं व्यवहार का हिस्सा
Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘योगी की पाती’ लिखकर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी और 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गणेश चतुर्थी को सामाजिक एकता एवं राष्ट्र के प्रति संकल्प को सुदृढ़ करने ...
राजस्थान निकाय चुनाव में BSP की 'बड़ी' जीत, मायावती बोलीं- धांधली न होती तो...
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में बहुजन समाज पार्टी ने 19 सीटों पर जीत हासिल की है. ऐसे में मायावती ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए उनकी तारीफ की है. इसके साथ ही मायावती ने चुनाव परिणामों में धांधली का भी आरोप लगाया है और दावा किया कि कई सीटों पर बसपा प्रत्याशियों को साजिश के तहत हराया गया.
गुजरात पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल: 7 PI का ट्रांसफर, 6 अधिकारी ATS में तैनात
गुजरात में कानून-व्यवस्था की स्थिति को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गुजरात पुलिस महकमे में एक बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) जी. एस. मलिक द्वारा बिन-हथियारी (Non-Armed) शाखा के कुल सात पुलिस निरीक्षकों (PI) के आंतरिक तबादले ...
राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भाजपा की जीत पर बोले PM Modi- यह झूठ के शोर पर सच की जीत का प्रमाण है
इंटरनेट डेस्क। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव में भाजपा को मिली जीत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। पीएम मोदी ने इसके लिए प्रदेश की जनता को धन्यवाद दिया है। उन्होंने एक्स के माध्यम से कहा कि नगर निकाय चुनावों में बीजेपी को शानदार जीत दिलाने के लिए राजस्थान की जनता का हार्दिक धन्यवाद। यह झूठ के शोर पर सच की जीत का प्रमाण है। इसके लिए सीएम भजनलाल शर्मा ने पीएम मोदी आधार जताया है। उन्होंने एक्स के माध्यम से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आपके प्रेरक एवं आत्मीय बधाई संदेश तथा स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए हृदयतल से आभार। राजस्थान की जनता-जनार्दन का यह आशीर्वाद और भाजपा कार्यकर्ताओं का अथक परिश्रम, आपके कुशल मार्गदर्शन से मिली ऊर्जा का ही परिणाम है। आपके ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ कदम से कदम मिलाकर डबल इंजन सरकार ‘विकसित राजस्थान, सुशासन और जनसेवा के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य करती रहेगी। इससे पहले सीएम भजनलाल ने कहा कि राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी पर अपना अटूट विश्वास प्रकट करने के लिए प्रदेश की देवतुल्य जनता का कोटिशः आभार। जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से मिली यह विजय ‘विकसित राजस्थान’ के हमारे साझा संकल्प पर जनता की विजय मुहर है। यह जीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में डबल इंजन सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों, सुशासन और जनकल्याण के प्रयासों तथा प्रत्येक शहर को आधुनिक, सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के हमारे संकल्प में जनता के अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति है। इस जनादेश के लिए हमारे समर्पित कार्यकर्ताओं को साधुवाद: भजनलाल भजनलाल ने कहा कि इस जनादेश के लिए हमारे समर्पित कार्यकर्ताओं को साधुवाद। उनका अथक परिश्रम और जनता का अटूट भरोसा हमें जनसेवा के प्रति और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। प्रदेश के प्रत्येक शहर और कस्बे को स्वच्छ, सुरक्षित, समृद्ध और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बनाने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर कार्य करती रहेगी। PC:moneycontrol अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
'दिशा सालियान से न मैं कभी मिला... न जानता हूं', सूरज पंचोली ने तोड़ी चुप्पी
दिशा सालियान केस में नाम सामने आने के बाद सूरज पंचोली ने चुप्पी तोड़ी है. एक्टर ने दिशा सालियान और आदित्य ठाकरे से कभी मुलाकात न करने की बात कही.
रामायण के 5 बड़े रहस्य, जो आज भी बने हुए हैं अनसुलझी पहेली!
Ramayan Facts: रामायण की मुख्य कथा से तो हम सभी परिचित हैं, लेकिन इस महाकाव्य में कई ऐसे अलौकिक रहस्य भी छिपे हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं. आइए जानते हैं उन सभी रहस्यों के बारे में.
बिहार बाढ़ पीड़ितों को मिलेंगे 7-7 हजार रुपये, इतने लाख परिवारों को मिलेगा लाभ
बिहार में बाढ़ से प्रभावित लाखों परिवारों के लिए आज राहत की रकम जारी की जाएगी. सरकार 8.27 लाख से ज्यादा परिवारों के बैंक खातों में आर्थिक मदद भेजेगी.
हमने अंतरिक्ष में तैनात किए हैं हथियार... अमेरिका का बड़ा दावा
अमेरिकी स्पेस फोर्स ने पहली बार खुलेआम पुष्टि की है कि ऑर्बिट में हथियार तैनात हैं. वायुसेना सचिव ट्रोय मेंक ने कहा कि ये दुश्मन के हमलों से बचाव के लिए हैं. दो नए ड्रोन विमानों के नाम बताए गए.
भारतीय रेलवे के उपनगरीय और गैर-उपनगरीय रूटों पर प्रतिदिन सफर करने वाले करोड़ों दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा कर्मचारियों, व्यापारियों और छात्र-छात्राओं के लिए रेल मंत्रालय ने डिजिटल टिकटिंग के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर, गाजियाबाद-दिल्ली, प्रयागराज-वाराणसी और मेरठ-दिल्ली जैसे व्यस्त रेल गलियारों से लेकर मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के विशाल लोकल नेटवर्क पर रोज सफर करने वाले यात्रियों को हर महीने रेलवे काउंटरों पर सीजन टिकट (MST/QST) बनवाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। पूर्व में रेलवे के टिकटिंग ऐप्स पर यह पाबंदी थी कि कोई भी व्यक्ति केवल अपने व्यक्तिगत प्रोफाइल से खुद का ही सीजन टिकट बुक कर सकता था। परिवार के अन्य सदस्यों या बुजुर्ग माता-पिता के लिए पास बनवाने के लिए उन्हें अलग-अलग स्मार्टफोन और खातों की आवश्यकता होती थी। भारतीय रेलवे ने दैनिक मुसाफिरों की इस पुरानी और जायज परेशानी को हमेशा के लिए समाप्त करते हुए अपने आधुनिक सुपर ऐप 'रेलवन' (RailOne) पर सीजन टिकट बुकिंग के नियमों में युगांतकारी संशोधन कर दिया है। अब एक ही रजिस्टर्ड यूजर अपने ऐप से परिवार के अन्य लोगों और सह-यात्रियों का भी सीजन टिकट आसानी से बुक और रिन्यू करा सकेगा।1 यूजर और 5 अतिरिक्त टिकट: जानिए RailOne ऐप का नया 'शेयर्ड सीजन टिकट' फॉर्मूलारेलवे बोर्ड द्वारा अनुमोदित यह नई और सुविधाजनक व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू हो चुकी है। नए प्रावधानों के तहत, RailOne ऐप पर पंजीकृत कोई भी वैध उपयोगकर्ता अपने व्यक्तिगत सीजन टिकट के अतिरिक्त अधिकतम 5 अन्य यात्रियों के लिए भी सीजन टिकट (Shared Season Ticket) बुक कर सकता है। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि परिवार का कोई एक डिजिटल-फ्रेंडली सदस्य अपने एक ही स्मार्टफोन से परिवार के कुल 6 लोगों (स्वयं + 5 अन्य) के लिए मासिक, त्रैमासिक या छमाही सीजन पास जनरेट कर सकता है। इससे उन बुजुर्गों, ग्रामीण महिलाओं या छोटे स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी, जिनके पास या तो स्मार्टफोन नहीं है या जो ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और जटिल डिजिटल प्रक्रियाओं को समझने में सहज नहीं हैं। अब घर का मुखिया या बड़ा सदस्य दफ्तर या घर में बैठकर ही कुछ ही सेकंडों में सभी आश्रितों के लिए वैध रेलवे पास बनवा सकता है।उम्र सीमा और वैधता की शर्तें: खुद के लिए आज से और दूसरों के लिए कल से लागू होगा पासरेलवे प्रशासन ने इस सुविधा में पारदर्शिता बनाए रखने और टिकट चेकिंग व्यवस्था में किसी भी संभावित फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कुछ कड़े दिशा-निर्देश और पात्रता मानक भी तय किए हैं। सीनियर डीसीएम कोटा, सौरभ जैन के अनुसार, उम्र और वैधता की समयसीमा को लेकर दो स्पष्ट विभाजन किए गए हैं। यदि कोई यूजर स्वयं के लिए सीजन टिकट बुक कर रहा है, तो उसकी न्यूनतम आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी अनिवार्य है। खुद के लिए बुक किया गया टिकट जियो-फेंसिंग और भौगोलिक सत्यापन (Geographical Verification) पूरा होते ही उसी दिन (Same Day) से यात्रा के लिए वैध माना जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, यदि यूजर परिवार के किसी अन्य सदस्य या साथी यात्री के लिए सीजन टिकट बुक करता है, तो उस सह-यात्री की न्यूनतम आयु कम से कम 5 वर्ष होनी चाहिए। इसके साथ ही, दूसरों के लिए बुक किया गया यह टिकट बुकिंग के दिन मान्य नहीं होगा, बल्कि बुकिंग के अगले दिन (Following Day) से ही यात्रा के लिए प्रभावी होगा। यह 24 घंटे का नियम इसलिए बनाया गया है ताकि कोई व्यक्ति ट्रेन में टीटीई को देखकर ऑन-द-स्पॉट आनन-फानन में दूसरों के नाम पर पास बनाकर जुर्माने से बचने का प्रयास न कर सके।डिजिटल वेरिफिकेशन और क्यूआर कोड: टीटीई कैसे जांचेंगे टिकट? जानिए फोटो और पीडीएफ के नियमडिजिटल रूप से जारी किए गए इस शेयर्ड सीजन टिकट की जांच को लेकर यात्रियों के मन में यह संशय था कि बिना ओरिजिनल यूजर के फोन के दूसरा यात्री ट्रेन में टिकट कैसे दिखाएगा। रेलवे ने इसके लिए अत्याधुनिक क्यूआर कोड और फोटो सत्यापन प्रणाली विकसित की है। जब आप किसी अन्य व्यक्ति के लिए सीजन टिकट बुक करेंगे, तो उस पास पर संबंधित यात्री का नाम, उम्र, पहचान और उसकी स्पष्ट पासपोर्ट साइज फोटो के साथ एक यूनिक और एन्क्रिप्टेड क्यूआर कोड (QR Code) छपा होगा। यात्रा के दौरान यात्री अपने मोबाइल फोन में इस टिकट की डिजिटल पीडीएफ (PDF) फाइल दिखा सकता है या फिर इसका साफ प्रिंटआउट (हार्ड कॉपी) अपने साथ रख सकता है। ट्रेन में या स्टेशन परिसर में तैनात टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) अपने आधुनिक हैंडहेल्ड टर्मिनल (HHT) डिवाइस से टिकट पर बने क्यूआर कोड को तुरंत स्कैन करके उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकेंगे। रेलवे ने यात्रियों को सख्त चेतावनी दी है कि केवल बुकिंग का एसएमएस (SMS) या पेमेंट की इनवॉइस रसीद दिखाना यात्रा का वैध दस्तावेज नहीं माना जाएगा। यात्री के पास फोटो और स्पष्ट क्यूआर कोड वाला मूल सीजन टिकट होना अनिवार्य है; यदि क्यूआर कोड क्षतिग्रस्त या पढ़ने योग्य नहीं होगा तो रेलवे नियमों के तहत बिना टिकट यात्रा का जुर्माना लगाया जा सकता है।150 किलोमीटर तक का सफर: सेकंड क्लास में असीमित फेरे, किन ट्रेनों में नहीं मिलेगी अनुमति?भारतीय रेलवे के बुनियादी नियमों के तहत सीजन टिकट उपनगरीय (Suburban) और गैर-उपनगरीय दोनों रेल खंडों पर दो निर्धारित स्टेशनों के बीच अधिकतम 150 किलोमीटर तक की यात्रा दूरी के लिए ही जारी किए जाते हैं। यह टिकट सेकंड क्लास (अनारक्षित साधारण डिब्बों) में असीमित यात्रा की सुविधा प्रदान करता है, जिससे यात्री अपनी वैधता अवधि के दौरान प्रतिदिन कितनी भी बार आ-जा सकते हैं। यह सुविधा आम कामकाजी मुसाफिरों और रियायती दरों पर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं दोनों के लिए समान रूप से उपलब्ध है। हालांकि, सीजन टिकट धारकों को किसी भी परिस्थिति में मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, राजधानी, शताब्दी या वंदे भारत जैसी ट्रेनों के आरक्षित कोचों (Reserved Coaches) में यात्रा करने की बिल्कुल अनुमति नहीं होती। इसके अलावा, जिन प्रीमियम ट्रेनों में दूरी-आधारित प्रतिबंध (Distance Restrictions) या विशेष किराया लागू होता है, वहां भी यह पास अमान्य रहता है। यदि कोई सीजन टिकट धारक गलती से भी स्लीपर या एसी कोच में पाया जाता है, तो उसे बिना टिकट माना जाएगा और रेलवे एक्ट के तहत कठोर आर्थिक दंड भुगतना पड़ेगा।RailOne सुपर ऐप क्या है? एक ही प्लेटफॉर्म पर यूटीएस, आईआरसीटीसी और रेल मदद की सभी सेवाएंभारतीय रेलवे के तकनीकी विंग सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) द्वारा विकसित 'रेलवन' (RailOne) ऐप को भारतीय रेल का आधिकारिक सुपर ऐप माना जा रहा है। अब तक रेल यात्रियों को अलग-अलग सेवाओं के लिए फोन में 4 से 5 अलग-अलग ऐप्स रखने पड़ते थे—जैसे आरक्षित टिकट के लिए IRCTC Rail Connect, जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट के लिए UTS on Mobile, ट्रेनों की लाइव रनिंग स्थिति और प्लेटफॉर्म नंबर जानने के लिए NTES, शिकायतों के लिए Rail Madad और ट्रेन में गरमा-गरम खाना मंगाने के लिए IRCTC Food on Track। RailOne ऐप ने इन सभी अलग-थलग सेवाओं को एक ही सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समाहित कर दिया है। इसमें एक एकीकृत वॉलेट और यूपीआई (UPI) पेमेंट सिस्टम दिया गया है, जिससे चंद सेकंडों में आरक्षित, अनारक्षित, प्लेटफॉर्म और अब शेयर्ड सीजन टिकट की बुकिंग की जा सकती है। इस सिंगल ऐप से फोन की स्टोरेज भी बचती है और बार-बार अलग-अलग पोर्टलों पर लॉगिन करने का झंझट भी पूरी तरह खत्म हो जाता है।RailOne ऐप से दूसरों के लिए सीजन टिकट कैसे बनाएं? जानिए स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन प्रक्रियायदि आप अपने परिवार के किसी सदस्य या परिचित के लिए RailOne ऐप से सीजन टिकट बनाना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया बेहद सरल और यूजर-फ्रेंडली है:ऐप इंस्टॉल और लॉगिन: सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से आधिकारिक RailOne ऐप डाउनलोड करें और अपने 10 अंकों के मोबाइल नंबर से लॉगिन या साइन-अप करें।सीजन टिकट मेनू का चयन: ऐप के मुख्य डैशबोर्ड पर जाएं और 'Unreserved Ticketing' सेक्शन के भीतर 'Season Ticket' विकल्प पर टैप करें।'बुक फॉर अदर्स' चुनें: स्क्रीन पर आपको दो विकल्प मिलेंगे—'Issue Ticket for Self' और 'Issue Ticket for Others'। दूसरों के लिए पास बनवाने हेतु 'Issue Ticket for Others' पर क्लिक करें।सह-यात्री का विवरण दर्ज करें: जिस व्यक्ति के लिए टिकट बन रहा है, उसका पूरा नाम, सही उम्र (न्यूनतम 5 वर्ष), लिंग और पहचान पत्र का नंबर भरें। इसके साथ ही उस यात्री की एक स्पष्ट और सीधी पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करें।स्टेशनों और अवधि का चुनाव: यात्रा का प्रस्थान स्टेशन (Source) और गंतव्य स्टेशन (Destination) चुनें (ध्यान रहे कि दूरी 150 किमी के दायरे में हो)। इसके बाद पास की अवधि—मासिक (Monthly), त्रैमासिक (Quarterly), छमाही या वार्षिक—का चयन करें।डिजिटल भुगतान और टिकट डाउनलोड: स्क्रीन पर रियायती किराए की कुल राशि दिखेगी। भुगतान के लिए यूपीआई, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या रेलवे वॉलेट का इस्तेमाल करें। पेमेंट पूरा होते ही स्क्रीन पर फोटो और बारकोड/क्यूआर कोड वाला डिजिटल सीजन टिकट आ जाएगा। इसे तुरंत पीडीएफ के रूप में डाउनलोड करके यात्री के वॉट्सऐप या ईमेल पर शेयर कर दें।दैनिक यात्रियों और छात्रों को लंबी कतारों से मुक्ति: देश भर के डेली पैसेंजर्स को बड़ा फायदारेलवे का यह प्रगतिशील फैसला उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के लाखों नियमित यात्रियों के लिए वरदान साबित होने जा रहा है। विशेष रूप से लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, गाजियाबाद, खुर्जा, अलीगढ़ और पानीपत जैसे रूटों पर हर सुबह हजारों छात्र-छात्राएं कोचिंग और कॉलेजों के लिए निकलते हैं, जबकि लाखों कर्मचारी दफ्तरों का रुख करते हैं। महीने की पहली तारीखों पर टिकट काउंटरों पर लगने वाली भीषण मारामारी, समय की बर्बादी और कई बार ट्रेन छूट जाने की नौबत अब इतिहास बन जाएगी। रेलवे के इस डिजिटल कदम से न केवल पेपरलेस टिकटिंग को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि स्टेशन परिसरों में टिकट खिड़कियों पर भीड़ का दबाव भी उल्लेखनीय रूप से घटेगा। दैनिक यात्रियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत कराने वाला यह बदलाव डिजिटल रेलवे के सफर में एक बेहद अहम मील का पत्थर साबित हो रहा है।
कांग्रेस के आधे सचिवों की होगी छुट्टी? राहुल-प्रियंका ने 130 नेताओं से पूछा- आपने क्या किया?
कांग्रेस में बड़े फेरबदल की तैयारी तेज हो गई है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने करीब 130 नेताओं का इंटरव्यू लिया है। इस कवायद के बाद पार्टी संगठन में कई नेताओं की भूमिका बदलने और नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं।
नौकरी और व्यवसाय की लंबी जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद जब व्यक्ति 60 की उम्र पार करता है, तो उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने जीवन भर की जमा-पूंजी को सुरक्षित रखना और हर महीने या तिमाही पर एक निश्चित नियमित आय हासिल करना होती है। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पेंशन की अनुपलब्धता और गिरती ब्याज दरों के दौर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्तीय सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन जाती है। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स में मिलने वाला आकर्षक रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम से बंधा होता है, जिसे रिटायरमेंट के बाद उठाना हर बुजुर्ग के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अधीन काम करने वाला इंडिया पोस्ट यानी डाकघर (Post Office) बुजुर्गों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। डाकघर की 'सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम' (SCSS) देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे भरोसेमंद और सर्वाधिक ब्याज देने वाली लघु बचत योजना है। केंद्र सरकार की संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) से लैस होने के कारण इसमें एक भी रुपया डूबने का कोई जोखिम नहीं होता। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर से लेकर दिल्ली-एनसीआर, जयपुर और पटना जैसे शहरों में रहने वाले रिटायर्ड दंपती इस स्कीम के जरिए बिना किसी आर्थिक चिंता के अपना बुढ़ापा सम्मानपूर्वक गुजार रहे हैं।₹57,400 की तिमाही इनकम का पूरा गणित: ₹28 लाख निवेश पर कैसे बनता है यह रिटर्न?डाकघर की वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका शानदार ब्याज और त्रैमासिक भुगतान (Quarterly Payout) की पारदर्शी व्यवस्था है। वर्तमान में सरकार इस योजना पर 8.2 प्रतिशत प्रति वर्ष की आकर्षक ब्याज दर दे रही है। यदि कोई पति-पत्नी अपनी सेवानिवृत्ति के फंड से मिलकर इस योजना में 28 लाख रुपये की एकमुश्त राशि जमा करते हैं (उदाहरण के तौर पर दोनों ₹14-₹14 लाख का निवेश करते हैं), तो उनके घर में हर तीन महीने पर आने वाली ब्याज आय का हिसाब बेहद सुकून देने वाला होता है:कुल संयुक्त निवेश राशि: ₹28,00,000 (28 लाख रुपये)लागू वार्षिक ब्याज दर: 8.2% प्रति वर्षएक साल में मिलने वाला कुल ब्याज: ₹28,00,000 8.2% = ₹2,29,600हर 3 महीने (तिमाही) में मिलने वाला ब्याज: ₹2,29,600 4 = ₹57,400औसत मासिक आमदनी: लगभग ₹19,133 प्रति माहइस योजना का प्राथमिक कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। इन 5 वर्षों (20 तिमाहियों) के दौरान इस दंपती को कुल मिलाकर 11 लाख 48 हजार रुपये (₹57,400 20) केवल ब्याज के रूप में प्राप्त हो जाते हैं। यदि वे 5 साल बाद इस योजना को 3 वर्ष के लिए और आगे बढ़ा देते हैं, तो 8 साल में कुल ब्याज की कमाई लगभग 18 लाख 36 हजार 800 रुपये (₹18.37 लाख) तक पहुंच जाती है। सबसे खास बात यह है कि ब्याज की यह पूरी रकम खर्च करने के बावजूद मैच्योरिटी पर उनका मूलधन यानी पूरा 28 लाख रुपये पूरी तरह सुरक्षित वापस मिल जाता है।पति-पत्नी मिलकर कैसे उठा सकते हैं दोहरा लाभ? ₹60 लाख तक की संयुक्त निवेश सीमाकेंद्र सरकार ने बजट में वरिष्ठ नागरिकों को ऐतिहासिक राहत देते हुए एससीएसएस में व्यक्तिगत निवेश की अधिकतम सीमा को 15 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 30 लाख रुपये कर दिया था। इस नियम के तहत एक वरिष्ठ नागरिक अपने नाम पर अधिकतम 30 लाख रुपये तक जमा कर सकता है। यदि पति और पत्नी दोनों की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है, तो वे दोनों अलग-अलग व्यक्तिगत खाता खोलकर या एक-दूसरे के साथ संयुक्त (Joint Account) खाता खोलकर कुल 60 लाख रुपये (₹30 लाख + ₹30 लाख) तक का निवेश कर सकते हैं। डाकघर के नियमों के अनुसार, एससीएसएस में केवल पति या पत्नी (Spouse) के साथ ही जॉइंट खाता खोला जा सकता है। संयुक्त खाते में जमा की गई पूरी रकम पहले खाताधारक (First Holder) की निवेश सीमा में गिनी जाती है, इसलिए दोनों जीवनसाथी यदि अलग-अलग खाते खोलते हैं, तो दोनों अपनी पूरी 30-30 लाख की सीमा का उपयोग कर सकते हैं। यदि कोई दंपती अधिकतम 60 लाख रुपये का निवेश करता है, तो 8.2% की दर से उन्हें सालाना 4 लाख 92 हजार रुपये यानी हर तीन महीने पर 1 लाख 23 हजार रुपये (लगभग ₹41,000 प्रति माह) की सुनिश्चित पेंशन-जैसी आय प्राप्त होगी।पात्रता और उम्र के कड़े नियम: 60 वर्ष के अलावा किन्हें मिलता है 55 और 50 की उम्र में मौका?सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम केवल भारतीय नागरिकों के लिए है; अनिवासी भारतीय (NRI) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इसमें निवेश के पात्र नहीं हैं। योजना में शामिल होने के लिए पात्रता के स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं। सामान्य नागरिकों के लिए न्यूनतम प्रवेश आयु 60 वर्ष है। लेकिन सरकार ने समय से पहले सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया है। नागरिक सेवाओं, सार्वजनिक उपक्रमों या निजी कंपनियों से वीआरएस (VRS) अथवा सुपरएनुएशन के तहत 55 से 60 वर्ष की आयु के बीच रिटायर होने वाले कर्मचारी भी इस योजना में खाता खोल सकते हैं, बशर्ते वे अपने रिटायरमेंट लाभ प्राप्त होने के 1 महीने के भीतर आवेदन करें। इसके अतिरिक्त, देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले भारतीय सशस्त्र बलों (आर्मी, नेवी, एयरफोर्स) के पूर्व सैनिकों के लिए उम्र सीमा में और अधिक ढील दी गई है; रक्षा क्षेत्र से सेवानिवृत्त कर्मी 50 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद ही इस उच्च ब्याज वाली योजना का लाभ ले सकते हैं।हर 3 महीने में तय तारीखों पर भुगतान: अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी का क्रेडिट कैलेंडरअन्य बचत योजनाओं की तरह एससीएसएस में ब्याज का चक्रवृद्धिकरण (Compounding) नहीं होता, बल्कि यह एक विशुद्ध कैश-फ्लो इनकम स्कीम है। इसमें ब्याज की गणना साधारण ब्याज के रूप में की जाती है और सरकार द्वारा तय कैलेंडर के अनुसार हर वित्तीय तिमाही के पहले कार्यदिवस पर सीधे खाताधारक के बैंक या डाकघर बचत खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाता है। वर्ष की चार तिमाहियों का भुगतान 1 अप्रैल, 1 जुलाई, 1 अक्टूबर और 1 जनवरी को सुनिश्चित रूप से किया जाता है। खाताधारक अपने इस ब्याज को डाकघर के बचत खाते में ऑटो-क्रेडिट करवा सकते हैं या ईसीएस (ECS) व एनएसीएच (NACH) मैंडेट के जरिए किसी भी राष्ट्रीयकृत या निजी कमर्शियल बैंक के खाते में सीधे मंगा सकते हैं। हर तीसरे महीने आने वाली यह ₹57,400 की बंधी-बंधाई रकम बुजुर्ग दंपती के दवाइयों के खर्च, नियमित मेडिकल चेकअप, घरेलू बिलों, किराने के सामान और सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में आत्मनिर्भर बनाती है।टैक्स छूट और टीडीएस (TDS) का गणित: 80C और 80TTB से कितनी होगी वास्तविक बचत?इस योजना में निवेश करते समय आयकर नियमों की पूरी जानकारी होना आवश्यक है। जब आप एससीएसएस में पैसा जमा करते हैं, तो पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत आयकर अधिनियम की धारा 80C में 1.5 लाख रुपये तक की कर कटौती (Tax Deduction) का लाभ मिलता है। हालांकि, मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर योग्य (Taxable) होता है और इसे निवेशक की 'अन्य स्रोतों से आय' में जोड़ा जाता है। वरिष्ठ नागरिकों को राहत देने के लिए धारा 80TTB के तहत किसी भी वित्तीय वर्ष में बैंक और डाकघर जमा से मिलने वाले ब्याज पर 50,000 रुपये तक की सीधी टैक्स छूट मिलती है। यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की कुल वार्षिक ब्याज आय तय सीमा से अधिक होती है, तो डाकघर द्वारा 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस (TDS) काटा जाता है। लेकिन यदि किसी बुजुर्ग दंपती की कुल वार्षिक आय टैक्स स्लैब की न्यूनतम सीमा से कम है, तो वे प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में डाकघर में फॉर्म 15H (Form 15H) जमा करके टीडीएस कटौती से पूरी तरह छूट प्राप्त कर सकते हैं।5 साल की मैच्योरिटी, प्री-मैच्योर विड्रॉल और खाता खोलने की आसान प्रक्रियासीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम का खाता देश के किसी भी प्रधान डाकघर (Head Post Office), उप-डाकघर या अधिकृत बैंकों (जैसे SBI, PNB, Bank of Baroda, ICICI, HDFC आदि) में खोला जा सकता है। इसके लिए आवेदन फॉर्म (Form 1), दो पासपोर्ट साइज फोटो, पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड), आयु प्रमाण पत्र और पते का प्रमाण पत्र जमा करना होता है। 1 लाख रुपये तक की राशि नकद और उससे अधिक की राशि चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए जमा की जाती है। योजना की परिपक्वता अवधि 5 वर्ष है, जिसे मैच्योरिटी के 1 वर्ष के भीतर फॉर्म भरकर 3 वर्ष के ब्लॉक के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि किसी आपात स्थिति में 5 साल से पहले पैसा निकालना पड़े, तो 1 साल बाद खाता बंद करने पर मूलधन से 1.5% और 2 साल बाद बंद करने पर 1% की मामूली पेनाल्टी काटकर शेष राशि लौटा दी जाती है। सुरक्षित निवेश, सॉवरेन गारंटी और हर तिमाही पर सम्मानजनक ब्याज आमदनी के कारण यह योजना हर रिटायर्ड दंपती के वित्तीय पोर्टफोलियो की सबसे मजबूत रीढ़ है।
LIVE: इंडियन बास्केट में कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब
Latest News Today Live Updates in Hindi : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की वजह से मंगलवार को इंडियन बास्केट में कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। पल पल की जानकारी...
Rajasthan Civic Polls: जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत के कई बूथों पर EVM खराबी के बाद पुनर्मतदान
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के तहत जयपुर, जोधपुर, कोटा एवं सुकेत में कुछ मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान होगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इसके अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के तहत जयपुर, जोधपुर, कोटा एवं सुकेत के कुछ केंद्रों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण पुनर्मतदान कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग के अनुसार नगर निगम जयपुर के वार्ड संख्या नौ के बूथ संख्या 111, वार्ड संख्या 18 के बूथ संख्या 235, वार्ड संख्या 25 के बूथ संख्या 343, वार्ड संख्या 34 के बूथ संख्या 477 एवं 484, नगर निगम जोधपुर के वार्ड संख्या 50 के बूथ संख्या 338, नगर निगम कोटा के वार्ड संख्या 87 के बूथ संख्या 99, वार्ड संख्या 44 के बूथ संख्या 448, वार्ड संख्या 11 के बूथ संख्या 576 तथा नगरपालिका सुकेत के वार्ड संख्या चार के बूथ संख्या 05 पर पुनर्मतदान कराया जाएगा। आयोग को इन मतदान केंद्रों पर मतगणना के दौरान ईवीएम में तकनीकी खराबी की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं रिटर्निंग अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों की जांच के बाद आयोग ने पाया कि इन मतदान केंद्रों पर तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित मतों की संख्या निकटतम प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के बीच मतों के अंतर से अधिक है। इसे देखते हुए आयोग ने पुनर्मतदान कराने का निर्णय लिया है। आयोग के निर्देशानुसार इन मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक पुनर्मतदान कराया जाएगा। पुनर्मतदान की मतगणना 17 सितंबर को सुबह आठ बजे से निर्धारित स्थान पर की जाएगी। इस बीच आयोग ने जयपुर, जोधपुर, कोटा नगर निगम और सुकेत नगर पालिका को छोड़कर राज्य के बाकी सभी 305 नगरीय निकायों के अध्यक्ष पद के चुनाव की सार्वजनिक सूचना मंगलवार सुबह जारी कर दी। ये चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 21 और 22 सितंबर को होंगे।
कॉर्पोरेट में 90 दिन के नोटिस पीरियड का जाल: नौकरीपेशा युवाओं का सबसे बड़ा मानसिक तनाव
आज के आधुनिक कॉर्पोरेट और आईटी सेक्टर में नौकरी बदलने की प्रक्रिया किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गई है। भारत के प्रमुख टेक और कमर्शियल हब्स—जैसे नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ—में काम करने वाले लाखों प्रोफेशनल्स के सामने सबसे बड़ी अड़चन '3 महीने यानी 90 दिनों का लंबा नोटिस पीरियड' बनकर सामने आ रही है। स्थिति यह हो जाती है कि जब कोई कर्मचारी अपने करियर ग्रोथ, बेहतर पैकेज या व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा देता है, तो नई कंपनी उसे तुरंत (30 दिनों के भीतर) जॉइन करने का दबाव बनाती है, जबकि पुरानी कंपनी उसे 90 दिन पूरे किए बिना छोड़ने को तैयार नहीं होती। इतना ही नहीं, कई कंपनियां नोटिस पे (Notice Buyout) का विकल्प देने के बावजूद कर्मचारी को जबरदस्ती रोकने की कोशिश करती हैं और ऐसा न करने पर 'रिलीविंग लेटर' (Relieving Letter), 'अनुभव प्रमाण पत्र' (Experience Certificate) और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (F&F) रोकने या कानूनी नोटिस भेजने की खुली धमकियां देने लगती हैं। ऐसे में हर वेतनभोगी कर्मचारी के मन में यह सवाल उठता है कि क्या देश का कानून किसी कंपनी को यह अधिकार देता है कि वह किसी कर्मचारी को उसकी मर्जी के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर कर सके?भारतीय संविधान और कानून की नजर में: क्या कोई कंपनी जबरन काम करा सकती है?इस सवाल का सीधा और स्पष्ट कानूनी उत्तर है—'बिल्कुल नहीं।' भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां किसी भी नागरिक से उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन काम कराना गैर-कानूनी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 23 (Article 23) किसी भी प्रकार के 'बलात् श्रम' (Forced Labour) यानी जबरन काम कराने को पूर्णतः प्रतिबंधित करता है। यदि कोई कर्मचारी किसी संस्थान में काम नहीं करना चाहता और वह विधिवत इस्तीफा सौंप चुका है, तो कंपनी का प्रबंधन उसे कुर्सी पर बैठकर काम करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से विवश नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त, स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट, 1963 (Specific Relief Act) की धारा 14(b) स्पष्ट करती है कि व्यक्तिगत सेवा के अनुबंधों (Contracts of Personal Service) को अदालतों या किसी भी प्राधिकारी द्वारा जबरन लागू नहीं कराया जा सकता। देश की विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने कई ऐतिहासिक फैसलों में यह दोहराया है कि एम्प्लॉयमेंट बॉन्ड या नोटिस पीरियड का क्लॉज किसी कर्मचारी को 'गुलाम या बंधुआ मजदूर' (Bonded Labour) बनाने का लाइसेंस नहीं है। कंपनी किसी भी स्थिति में किसी कर्मचारी को अपनी मर्जी के खिलाफ नौकरी करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।नोटिस बायआउट (Notice Buyout) का अधिकार: क्या कंपनी पैसे लेकर छोड़ने से मना कर सकती है?अधिकांश कंपनियों के ऑफर लेटर और अपॉइंटमेंट लेटर में एक मानक शर्त होती है: 'रोजगार को दोनों पक्षों द्वारा X महीने का नोटिस देकर या उसके बदले नोटिस पे (मूल वेतन के बराबर राशि) देकर समाप्त किया जा सकता है।' लेकिन विवाद तब पैदा होता है जब कर्मचारी अपनी जेब से या नई कंपनी के जरिए नोटिस पे (Buyout) देने की पेशकश करता है, लेकिन एचआर (HR) यह कहकर इनकार कर देता है कि 'बायआउट प्रबंधन के विवेकाधिकार (Discretion of Management) पर निर्भर करता है।' कानूनी रूप से, भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 (Indian Contract Act) की धारा 73 और 74 के तहत नोटिस पीरियड का उद्देश्य कंपनी को अचानक होने वाले नुकसान से बचाना और काम का उचित हैंडओवर (Knowledge Transfer - KT) सुनिश्चित करना होता है। यदि कर्मचारी ने अपने सभी प्रोजेक्ट्स और जिम्मेदारियों का उचित हैंडओवर कर दिया है और वह शेष दिनों के नोटिस वेतन की भरपाई करने को तैयार है, तो कंपनी द्वारा बिना किसी ठोस व्यावसायिक नुकसान के बायआउट को अनुचित तरीके से अस्वीकार करना श्रम कानूनों के तहत अनुचित श्रम व्यवहार (Unfair Labour Practice) की श्रेणी में आ सकता है।नए लेबर कोड और शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट में क्या है नोटिस का मानक नियम?बहुत कम कर्मचारियों को इस बात की जानकारी होती है कि भारत में अधिकांश राज्य स्तरीय 'दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम' (Shops and Establishments Act)—जिसके तहत सभी प्राइवेट आईटी, बीपीओ, बैंक और कॉर्पोरेट कंपनियां पंजीकृत होती हैं—सामान्यतः केवल '30 दिन (1 माह)' के नोटिस पीरियड का प्रावधान करते हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली या कर्नाटक के शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट में स्पष्ट है कि किसी भी कर्मचारी को सेवा समाप्ति के लिए 30 दिन का नोटिस या उसके बदले वेतन देना पर्याप्त होता है। भारत सरकार द्वारा अधिसूचित किए जा रहे 4 नए लेबर कोड्स (विशेषकर 'इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड' और 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड') भी कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों और कार्यस्थल की स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हैं। कंपनियों द्वारा अपने आंतरिक नियमों (Company Policies) में लिखे गए 90 दिन के मनमाने क्लॉज किसी भी राज्य या केंद्रीय कानून से बड़े नहीं हो सकते। यदि किसी कंपनी की आंतरिक नीति देश के श्रम कानूनों के खिलाफ जाती है, तो अदालत में श्रम कानून की वैधानिक धाराएं ही मान्य होंगी, न कि कंपनी का ऑफर लेटर।क्या कंपनी अनुभव प्रमाण पत्र और PF का पैसा रोक सकती है?कर्मचारियों को डराने के लिए एचआर विभाग का सबसे बड़ा हथियार होता है रिलीविंग लेटर, एक्सपीरियंस लेटर और पीएफ (PF) का पैसा रोकना। इस पर श्रम कानूनों और अदालतों का रुख बेहद सख्त है। कर्मचारी का अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) इस बात का तथ्यात्मक दस्तावेज है कि उसने उस संस्थान में कितने समय तक अपनी सेवाएं दी हैं। किसी भी विवाद के चलते कंपनी कर्मचारी के अतीत में किए गए कार्य के सच को नकार नहीं सकती। यदि कोई कर्मचारी नोटिस पीरियड के दौरान कंपनी छोड़ता है और बकाया राशि का समायोजन (Adjustment) करने को तैयार है, तो कंपनी उसका अनुभव प्रमाण पत्र अवैध रूप से नहीं रोक सकती। जहां तक पीएफ (EPF) और ग्रेच्युटी (Gratuity) का सवाल है, यह कर्मचारी की गाढ़ी कमाई का वैधानिक पैसा है, जिसे ईपीएफओ (EPFO) और ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षण प्राप्त है। कंपनी अपने आंतरिक नोटिस विवाद के कारण कर्मचारी के पीएफ ट्रांसफर या निकासी को रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रखती। यदि कंपनी ऐसा करती है, तो कर्मचारी सीधे श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) या ईपीएफओ के शिकायत पोर्टल पर नियोक्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की अर्जी दे सकता है।नोटिस पीरियड में एचआर की मनमानी से कैसे निपटें? कर्मचारियों के लिए सही रणनीतियदि आपकी कंपनी नोटिस पीरियड घटाने (Short Notice) या बायआउट देने से इनकार कर रही है और आपको नई नौकरी खोने का डर सता रहा है, तो बिना घबराए कानूनी और कूटनीतिक रास्ता अपनाएं:लिखित संवाद और ईमेल का प्रमाण: कभी भी फोन कॉल या मौखिक चर्चा पर निर्भर न रहें। अपने आधिकारिक और व्यक्तिगत ईमेल से प्रबंधन को स्पष्ट इस्तीफा भेजें, जिसमें आपके छोड़ने की अंतिम तिथि, इस्तीफे का उचित कारण (जैसे पारिवारिक आपातकाल, स्वास्थ्य समस्या या उच्च शिक्षा) और नोटिस बायआउट देने की स्पष्ट इच्छा दर्ज हो।नॉलेज ट्रांसफर (KT) का दस्तावेज बनाएं: अपने काम का विस्तृत हैंडओवर डॉक्यूमेंट तैयार करें और अपने टीम लीडर व सहकर्मियों को ईमेल पर भेजें। यह साबित करेगा कि आपने कंपनी के प्रोजेक्ट को किसी भी नुकसान में नहीं छोड़ा है।मेडिकल या आपातकालीन आधार: यदि अत्यधिक मानसिक तनाव, डिप्रेशन या गंभीर स्वास्थ्य कारणों से आप नोटिस पूरा करने में असमर्थ हैं, तो किसी पंजीकृत चिकित्सक (Registered Medical Practitioner) का मेडिकल सर्टिफिकेट संलग्न करके तत्काल कार्यमुक्त करने का अनुरोध करें। स्वास्थ्य कारणों से दिए गए इस्तीफे में कोई भी अदालत या कंपनी जबरदस्ती नहीं कर सकती।श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) से शिकायत: यदि कंपनी पैसे काटने के बाद भी रिलीविंग लेटर नहीं दे रही है या सैलरी रोक रही है, तो अपने जिले के सहायक श्रम आयुक्त (ALC) कार्यालय में 'कॉन्सिलेशन' (सुलह) के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करें। श्रम विभाग का एक नोटिस पहुंचते ही अधिकांश कंपनियां कानूनी पचड़े से बचने के लिए तुरंत दस्तावेज जारी कर देती हैं।लीगल नोटिस का सहारा: किसी श्रम कानून विशेषज्ञ वकील के माध्यम से कंपनी को एक लीगल नोटिस भेजें, जिसमें आर्टिकल 23 और स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट का हवाला देते हुए अवैध रूप से दस्तावेज रोकने पर हर्जाने और कानूनी मुकदमे की चेतावनी दी जाए।एब्सकॉन्डिंग (Absconding) बनने से बचें: पेशेवर अनुशासन ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षाकानूनी अधिकार अपनी जगह हैं, लेकिन कर्मचारियों को यह भी समझना चाहिए कि बिना किसी लिखित सूचना के ऑफिस छोड़ देना या अचानक गायब हो जाना (Absconding) सबसे आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। यदि आप बिना इस्तीफा दिए या बिना संवाद के कंपनी छोड़ देते हैं, तो कंपनी के पास यह अधिकार होता है कि वह आपके आधिकारिक रिकॉर्ड में 'एब्सकॉन्डिंग' दर्ज कर दे। इसका खामियाजा आपको भविष्य में बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (BGV) के दौरान भुगतना पड़ सकता है, जिससे नई कंपनी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। इसलिए हमेशा शालीनता और पेशेवर मर्यादा बनाए रखते हुए इस्तीफा दें, नोटिस पे की पेशकश करें और सभी औपचारिकताओं का लिखित रिकॉर्ड अपने पास सुरक्षित रखें। सही कानूनी समझ और संयमित संवाद ही आपको कॉरपोरेट के इस नोटिस पीरियड के चक्रव्यूह से सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से बाहर निकाल सकता है।
गोल्फ कोर्स रोड पर हुई खौफनाक हिट-एंड-रन घटना ने एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा और बढ़ते 'रोड रेज' पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार सुबह एक राइड के दौरान तेज रफ्तार सेडान कार द्वारा सुपरबाइक को जोरदार टक्कर मारे जाने की घटना में पीड़ित महिला बाइकर सिया ने अब अपनी चुप्पी तोड़ी है। आरोपी कल्याण बैंसला द्वारा टीवी इंटरव्यू में खुद को निर्दोष बताने और घटना पर अफसोस जताने के बाद, सिया ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो बयान जारी कर उसके तमाम दावों को खारिज किया और तीखा पलटवार किया है। आरोपी कल्याण बैंसला ने इंडिया टुडे टीवी को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया कि उसने जान-बूझकर उनकी बाइक को टक्कर नहीं मारी और उसे सिया के लिए बुरा भी लग रहा है। एक वीडियो बयान में सिया ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर उसके दावे सच होते, तो वह मौके से भागने के बजाय रुकता और उनकी मदद करता। सिया ने इंस्टाग्राम पर वीडियो में कहा, हमदर्दी पाने की ऐसी कोशिश उसे (आरोपी को) बिल्कुल शोभा नहीं देती। बैंसला ने आरोप लगाया कि वहां 20 से ज़्यादा बाइकर्स थे, जिनमें वह महिला भी शामिल थी, और वे बार-बार अपनी स्पीड बदल रहे थे और बीच-बीच में धीमे हो रहे थे। उसने यह भी दावा किया कि बाइकर्स ने उसे परेशान किया और उसे पता नहीं था कि बाइक एक महिला चला रही है। इस पर सिया ने कहा कि भले ही आरोपी को लगा हो कि बाइकर्स लगातार अपनी स्पीड बदल रहे थे, लेकिन इससे उसे सड़क पर उनका पीछा करने का हक नहीं मिल जाता। उन्होंने बैंसला के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उसे पता नहीं था कि बाइकर एक महिला थी। यह बिल्कुल झूठ है। उसने पीछे से मेरी चोटी देखी थी। उसने वह देखा, मेरा पीछा किया, मुझे गाड़ी रोकने के लिए कहा और फिर उसी हिसाब से हरकत की। अपने इंटरव्यू में बैंसला ने CCTV फुटेज पर भी सवाल उठाए और कहा कि वायरल वीडियो में जो क्रम दिखाया गया है, वह पूरी तस्वीर पेश नहीं करता। उसने सिर्फ़ दो वीडियो जारी किए जाने पर भी सवाल उठाए और पीड़ित महिला के दोस्त का नाम बताने की मांग की। उसकी बात का जवाब देते हुए सिया ने कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि उसने कितनी बेरहमी से अपनी कार से उन्हें टक्कर मारी। हिट-एंड-रन के मामले में दो वीडियो काफी क्यों नहीं हैं? एक वीडियो में साफ दिख रहा है कि ड्राइवर पहली लेन से तीसरी लेन में जा रहा है, मुझे टक्कर मार रहा है और भाग रहा है। सामने से लिए गए एक और वीडियो में भी उसे लेन बदलते, मेरी बाइक को टक्कर मारते और भागते हुए देखा जा सकता है। मैं गिर गई थी और उसकी कार के नीचे घसीटी गई थी। क्या सबूत के तौर पर ये दो वीडियो काफी नहीं हैं? उन्होंने इंस्टाग्राम वीडियो में पूछा। उन्होंने कहा कि अगर दो-तीन सेकंड की भी देरी होती, तो उन्हें और भी गंभीर चोटें आ सकती थीं, जिसमें कई हड्डियां टूटना भी शामिल है। मैं मौके पर ही मर सकती थी। सिया ने अपने वीडियो बयान में कहा, अगर ड्राइवर को मेरी इतनी ही चिंता थी, तो उसकी ज़िम्मेदारी थी कि वह रुकता, अपनी कार से बाहर निकलता और देखता कि कहीं कोई चोट तो नहीं आई है... सहानुभूति पाने की ऐसी कोशिश उसे बिल्कुल शोभा नहीं देती। सभी वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि उसने मेरी बाइक को टक्कर मारी और बिना एक पल भी रुके मौके से भाग गया, यह देखे बिना कि मैं ज़िंदा हूँ या मर गई हूँ। मुझे ऐसे लोगों पर शर्म आती है... उन्हें यह एहसास नहीं होता कि उनके परिवारों में भी महिलाएँ हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं से महिलाओं को गुरुग्राम और दिल्ली की सड़कों पर असुरक्षित महसूस होता है। यह घटना रविवार सुबह गुरुग्राम के गोल्फ़ कोर्स रोड पर हुई, जब सिया अपने साथी बाइकर्स के साथ बाइक चला रही थीं। सफ़ेद सेडान कार चला रहे बैंसला ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे वह घायल हो गईं। पुलिस इस मामले को 'हिट-एंड-रन' का संदिग्ध मामला मान रही है। टक्कर की घटना उनकी सुपरबाइक पर लगे एक्शन कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और बाद में इसका फ़ुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। गुरुग्राम पुलिस ने घटना का स्वतः संज्ञान लिया और एक अज्ञात व्यक्ति के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की।
खून वाली EMI: मोबाइल की किस्त नहीं चुका पाया तो निकलवाया खून
लखनऊ में मोबाइल की EMI न चुकाने पर युवक को बंधक बनाकर ब्लड बैंक ले जाने और जबरन खून निकलवाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि युवक से कई दिनों तक मजदूरी भी कराई गई और परिवार से किस्त के नाम पर पैसे भी वसूले गए. शिकायत के बाद डीसीपी दक्षिणी ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं.
जंगलों की 'आयरन लेडी' अब CoBRA की बॉस, संजुक्ता पराशर को मिली बड़ी जिम्मेदारी
CRPF की विशेष कमांडो यूनिट CoBRA के नए Inspector General के रूप में संजुक्ता पराशर की नियुक्ति हुई है. उनका करियर उग्रवाद विरोधी अभियानों और मुश्किल ऑपरेशनों के लिए जाना जाता है. असम की 'आयरन लेडी' के नाम से जानी जाने वाली संजुक्ता पराशर ने नक्सल प्रभावित इलाकों में फील्ड ऑपरेशन का शानदार अनुभव हासिल किया है.
SIP का 7-5-3-1 फॉर्मूला: क्या है यह नियम जो आम नौकरीपेशा को बनाता है करोड़पति
भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान वित्तीय साक्षरता और डिजिटल बैंकिंग के प्रसार ने आम नागरिकों के पैसे बचाने और निवेश करने के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में हर महीने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला निवेश 20,000 करोड़ रुपये से लेकर 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, नोएडा और प्रयागराज जैसे शहरों से लेकर देश भर के टियर-2 और टियर-3 कस्बों में रहने वाले युवा, निजी कंपनियों के कर्मचारी और छोटे व्यापारी अब बैंक एफडी या पारंपरिक बीमा योजनाओं के मुकाबले म्यूचुअल फंड एसआईपी को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, सच्चाई यह भी है कि लाखों लोग एसआईपी शुरू तो कर देते हैं, लेकिन जैसे ही शेयर बाजार में गिरावट आती है या रिटर्न कुछ महीनों के लिए नकारात्मक दिखता है, वे घबराकर अपनी एसआईपी बंद कर देते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि वेल्थ क्रिएशन का खेल सिर्फ पैसा लगाने का नहीं, बल्कि सही नियम और अनुशासन का है। अगर आप भी म्यूचुअल फंड से वास्तविक वित्तीय आजादी और कई करोड़ रुपये का वेल्थ तैयार करना चाहते हैं, तो वेल्थ मैनेजमेंट का सबसे लोकप्रिय '7-5-3-1' नियम आपके लिए सबसे अचूक रोडमैप साबित हो सकता है।'7' का सिद्धांत: कम से कम 7 साल का निवेश नजरिया और निगेटिव रिटर्न का शून्य जोखिमएसआईपी के '7-5-3-1' फॉर्मूले का पहला और सबसे बुनियादी अंक '7' है, जिसका सीधा अर्थ है—इक्विटी म्यूचुअल फंड में कम से कम 7 वर्ष का निवेश क्षितिज (Investment Horizon)। अक्सर नए निवेशक शेयर बाजार को 'गेट रिच क्विक' यानी रातों-रात अमीर बनने की योजना समझ लेते हैं और एक या दो साल में 20-30 प्रतिशत रिटर्न की उम्मीद पाल लेते हैं। लेकिन इक्विटी बाजार का चक्र हमेशा एक सीधी रेखा में नहीं चलता। भारतीय शेयर बाजार (निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स) के पिछले 25 से 30 वर्षों के ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण करें तो एक अद्भुत तथ्य सामने आता है। यदि किसी निवेशक ने इक्विटी म्यूचुअल फंड में केवल 1 साल के लिए निवेश किया, तो नुकसान (Negative Return) होने की संभावना लगभग 25 से 30 प्रतिशत रहती है। 3 साल की अवधि में नुकसान का जोखिम घटकर 10 प्रतिशत के आसपास रह जाता है। लेकिन जैसे ही निवेश की अवधि 7 वर्ष या उससे अधिक हो जाती है, ऐतिहासिक रूप से नुकसान की संभावना लगभग शून्य (0%) हो जाती है। 7 साल के चक्र में बाजार मंदी (Bear Market) और तेजी (Bull Market) दोनों को पचा लेता है और औसतन 12 से 15 प्रतिशत का वार्षिक चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) देने में सक्षम होता है। इसलिए इस नियम का पहला सबक यह है कि जब भी इक्विटी एसआईपी शुरू करें, तो अपना मानसिक टाइमफ्रेम न्यूनतम 7 साल तय करें।'5' उंगलियों जैसा पोर्टफोलियो: 5 अलग-अलग फंड कैटेगरी में पैसे का सही संतुलनफॉर्मूले का दूसरा महत्वपूर्ण अंक '5' है, जो आपके निवेश को एक ही टोकरी में रखने की गलती से बचाता है। जैसे हाथ की पांचों उंगलियां मिलकर एक मजबूत मुट्ठी बनाती हैं, ठीक उसी तरह एक सफल निवेशक का पोर्टफोलियो कम से कम 5 अलग-अलग श्रेणियों में बंटा होना चाहिए। बहुत से नए निवेशक पिछले 1 साल का पिछला रिटर्न देखकर अपना सारा पैसा सिर्फ स्मॉल-कैप (Small Cap) या किसी एक थीमैटिक/सेक्टोरल फंड में झोंक देते हैं, जो बाजार गिरने पर भारी नुकसान का कारण बनता है। 5 फंडों के आदर्श पोर्टफोलियो में सबसे पहला हिस्सा लार्ज-कैप या निफ्टी 50 इंडेक्स फंड का होना चाहिए, जो आपके पैसे को देश की शीर्ष 50 ब्लूचिप कंपनियों में लगाकर स्थिरता (Stability) प्रदान करता है। दूसरा हिस्सा मिड-कैप फंड का होना चाहिए, जिसमें तेजी से बढ़ने वाली मझोली कंपनियां होती हैं और वे लंबी अवधि में बेहतरीन ग्रोथ इंजन का काम करती हैं। तीसरा हिस्सा स्मॉल-कैप फंड का होना चाहिए, जो पोर्टफोलियो को अतिरिक्त अल्फा (Alpha) और हाई-रिटर्न की क्षमता देता है। चौथा हिस्सा फ्लेक्सी-कैप या मल्टी-कैप फंड का होना चाहिए, जहां फंड मैनेजर को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार किसी भी सेक्टर में पैसा लगाने की पूरी आजादी होती है। वहीं पांचवां और अंतिम हिस्सा हाइब्रिड फंड, डेट फंड या मल्टी-एसेट एलोकेशन (जिसमें गोल्ड और चांदी भी शामिल हो) का होना चाहिए, जो भारी बाजार गिरावट के समय एक शॉक-एब्जॉर्बर यानी सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।'3' मानसिक पड़ाव: निराशा, खींच और खुशी के 3 चक्रों को समझना क्यों है जरूरी?अंक '3' बाजार के उस मनोवैज्ञानिक सफर को दर्शाता है, जिससे हर एसआईपी निवेशक को अनिवार्य रूप से गुजरना पड़ता है। कई निवेशक इस तीसरे नियम को न समझने के कारण बीच रास्ते में ही मैदान छोड़ देते हैं। पहला पड़ाव होता है 'निराशा का दौर' (Disappointment Phase)। जब आप एसआईपी शुरू करते हैं और अगले 1 से 2 साल में बाजार गिर जाता है, तो आपका पोर्टफोलियो लाल निशान में दिखने लगता है। आपको लगता है कि आपका निर्णय गलत था और पैसा डूब रहा है। लेकिन समझदार निवेशक जानते हैं कि यही वह समय होता है जब गिरते बाजार में सबसे सस्ती एनएवी (NAV) पर सबसे ज्यादा यूनिट्स जमा होती हैं। दूसरा पड़ाव होता है 'खींच या चिड़चिड़ाहट का दौर' (Irritation Phase)। यह दौर सामान्यतः 3 से 5 साल के बीच आता है, जब बाजार लंबे समय तक एक ही दायरे में फंसा रहता है (Sideways Market)। इस दौरान आपका रिटर्न बैंक बचत खाते या एफडी जितना (6-7%) ही दिखता है। निवेशक सोचने लगता है कि इतने जोखिम के बाद भी कुछ खास नहीं मिला। इसके बाद आता है तीसरा और सबसे जादुई पड़ाव—'उल्लास और भारी मुनाफे का दौर' (Elation/Joy Phase)। 5 से 7 साल पूरे होने के बाद जब कंपाउंडिंग (Compounding) का जादू चलना शुरू होता है, तो पहले जुटाए गए सस्ते यूनिट्स पर भारी मुनाफा दर्ज होता है। इस तीसरे चरण में आपका रिटर्न अचानक रॉकेट की तरह ऊपर जाता है और हर साल का ब्याज आपके मूलधन से भी बड़ा होने लगता है।'1' सबसे जरूरी काम: हर साल 10% स्टेप-अप एसआईपी और करोड़ों का फंड7-5-3-1 नियम का अंतिम और सबसे शक्तिशाली अंक '1' है। यह 1 छोटा काम है—अपनी एसआईपी में हर साल कम से कम 10% का 'स्टेप-अप' (Step-Up SIP) करना। अधिकांश नौकरीपेशा लोग एक तय रकम (जैसे 5,000 या 10,000 रुपये) की एसआईपी शुरू करके उसे 15-20 साल तक जस का तस छोड़ देते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि हर साल उनकी सैलरी में अप्रेजल होता है, व्यापार का मुनाफा बढ़ता है और साथ ही महंगाई भी बढ़ती है। अगर आप हर साल अपने वेतन वृद्धि के साथ अपनी एसआईपी में केवल 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर देते हैं, तो इसका परिणाम आपके अंतिम कॉर्पस को दोगुना या तीन गुना तक बढ़ा सकता है।आइए इस 1 छोटे काम के वित्तीय जादू को एक सीधे गणित से समझते हैं: मान लीजिए आप 10,000 रुपये प्रति माह की एक सामान्य फ्लैट एसआईपी 20 साल के लिए 12% के औसत अनुमानित रिटर्न पर चलाते हैं। इन 20 वर्षों में आपकी जेब से कुल 24 लाख रुपये जमा होंगे और 12% की दर से आपका कुल फंड लगभग 99.91 लाख रुपये (लगभग 1 करोड़) बनेगा।अब इसके मुकाबले 10% स्टेप-अप का कमाल देखिए: यदि आप 10,000 रुपये प्रति माह से शुरुआत करते हैं और हर साल एसआईपी राशि में 10% जोड़ते हैं (यानी दूसरे साल 11,000 रुपये, तीसरे साल 12,100 रुपये प्रति माह), तो 20 वर्षों में आपका कुल निवेश लगभग 68.75 लाख रुपये होगा, लेकिन आपका मैच्योरिटी फंड बढ़कर लगभग 2.36 करोड़ रुपये हो जाएगा। यानी सिर्फ 1 छोटे अनुशासन से आपका अंतिम फंड 1 करोड़ से सीधे सवा दो करोड़ के पार पहुंच जाता है।टैक्स के नए नियम और एग्जिट स्ट्रैटेजी: मुनाफा निकालते समय न करें ये भूलकरोड़ों का वेल्थ बनाने के साथ-साथ निवेशकों को आयकर नियमों और पैसे निकालने की सही रणनीति (Exit Strategy) की जानकारी होना भी जरूरी है। केंद्रीय बजट में किए गए संशोधनों के अनुसार, इक्विटी म्यूचुअल फंड में 1 साल से अधिक समय तक होल्ड किए गए यूनिट्स पर होने वाले मुनाफे को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) माना जाता है। अब प्रति वित्तीय वर्ष 1.25 लाख रुपये तक का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पूरी तरह टैक्स-फ्री है, जबकि 1.25 लाख रुपये से ऊपर के अतिरिक्त मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत की दर से एलटीसीजी टैक्स लगता है। वहीं, 1 साल से पहले यूनिट्स बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स 20 प्रतिशत की दर से चुकाना पड़ता है। इसके अलावा, जब आप अपने 7 या 10 साल के वित्तीय लक्ष्य के करीब पहुंच जाएं—जैसे बच्चे की उच्च शिक्षा या रिटायरमेंट—तो लक्ष्य से 2 से 3 साल पहले पूरे पैसे को एक झटके में निकालने के बजाय 'सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान' (STP) का उपयोग करना चाहिए। इसके तहत इक्विटी फंड से पैसा धीरे-धीरे सुरक्षित लिक्विड फंड, आर्बिट्राज फंड या अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म डेट फंड में शिफ्ट कर देना चाहिए, ताकि लक्ष्य के अंतिम वर्ष में यदि शेयर बाजार में कोई बड़ा क्रैश आ भी जाए, तो आपकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई सुरक्षित रहे और आप बिना किसी तनाव के अपने सपनों को पूरा कर सकें।
Savings Account Interest Rates: सेविंग अकाउंट में रखे पैसे पर कैसे तय होता है बैंक का मुनाफा
भारत में शायद ही कोई ऐसा कामकाजी या मध्यमवर्गीय परिवार हो जिसके पास किसी न किसी बैंक का बचत खाता (Savings Account) न हो। मासिक वेतन प्राप्त करना हो, रोजमर्रा के यूपीआई भुगतान करने हों या फिर आपातकालीन खर्चों के लिए नकदी सुरक्षित रखनी हो, सेविंग अकाउंट हर नागरिक की पहली वित्तीय जरूरत है। हालांकि, अधिकांश खाताधारक अपने बचत खाते में जमा रकम पर मिलने वाले ब्याज को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं देते और इसे केवल पैसे सुरक्षित रखने की एक सुरक्षित जगह मान लेते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों के विनियमन को मुक्त किए जाने के बाद से देश के अलग-अलग बैंक अपनी बैलेंस शीट, नकदी की उपलब्धता और ग्राहकों को आकर्षित करने के आधार पर भिन्न-भिन्न ब्याज दरें ऑफर करते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी से लेकर देश भर के मेट्रो शहरों में बैंक ग्राहकों के बीच यह सवाल अक्सर उठता है कि यदि वे अपने सेविंग अकाउंट में ₹1 लाख, ₹5 लाख या ₹10 लाख जैसी मोटी रकम रखते हैं, तो उन्हें साल के अंत में बैंक की तरफ से कितना रिटर्न हासिल होगा।₹1 लाख, ₹5 लाख और ₹10 लाख पर कितना मिलेगा ब्याज? समझें पूरा सालाना गणितसेविंग अकाउंट में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपका खाता किस बैंक में है और उस बैंक की वर्तमान ब्याज दर क्या है। देश के प्रमुख सरकारी बैंक (जैसे SBI, PNB, Bank of Baroda) आमतौर पर 2.70% से 3.00% प्रति वर्ष का ब्याज देते हैं। वहीं, बड़े निजी बैंक (जैसे HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank) 3.00% से 3.50% का ब्याज ऑफर करते हैं। इसके विपरीत, स्मॉल फाइनेंस बैंक (जैसे AU Small Finance Bank, Equitas, Ujjivan) और कुछ नए निजी बैंक (जैसे IDFC FIRST Bank, IndusInd Bank) ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग बैलेंस स्लैब पर 4.00% से लेकर 7.00% या उससे भी अधिक का सालाना ब्याज देते हैं।आइए अलग-अलग ब्याज दरों के आधार पर ₹1 लाख, ₹5 लाख और ₹10 लाख की जमा पर मिलने वाले वार्षिक और मासिक रिटर्न का सीधा हिसाब समझते हैं:जमा राशि2.70% (प्रमुख सरकारी बैंक)3.00% (बड़े निजी बैंक)5.00% (मिड-साइज/प्राइवेट बैंक)7.00% (स्मॉल फाइनेंस बैंक)₹1,00,000 (1 लाख)₹2,700/साल (लगभग ₹225/माह)₹3,000/साल (लगभग ₹250/माह)₹5,000/साल (लगभग ₹416/माह)₹7,000/साल (लगभग ₹583/माह)₹5,00,000 (5 लाख)₹13,500/साल (लगभग ₹1,125/माह)₹15,000/साल (लगभग ₹1,250/माह)₹25,000/साल (लगभग ₹2,083/माह)₹35,000/साल (लगभग ₹2,916/माह)₹10,00,000 (10 लाख)₹27,000/साल (लगभग ₹2,250/माह)₹30,000/साल (लगभग ₹2,500/माह)₹50,000/साल (लगभग ₹4,166/माह)₹70,000/साल (लगभग ₹5,833/माह)इस तुलना से साफ जाहिर होता है कि यदि आप ₹10 लाख की रकम किसी पारंपरिक सरकारी बैंक के सामान्य बचत खाते में 2.70% पर रखते हैं, तो आपको साल में केवल ₹27,000 मिलेंगे। वहीं, यदि यही रकम किसी उच्च ब्याज दर वाले बैंक (7%) में रखी जाए, तो सालाना ब्याज ₹70,000 तक पहुंच जाता है, यानी सीधे ₹43,000 का बड़ा अंतर देखने को मिलता है।सरकारी बनाम प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंक: कहां मिलता है 7% तक सबसे ज्यादा ब्याजब्याज दरों का यह भारी अंतर बैंकों के बिजनेस मॉडल और उनकी फंड जुटाने की लागत पर आधारित होता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) जैसे दिग्गज बैंकों के पास शाखाओं का एक विशाल नेटवर्क और करोड़ों ग्राहकों का मजबूत करंट अकाउंट-सेविंग्स अकाउंट (CASA) बेस मौजूद है। इसलिए उन्हें फंड की कमी नहीं होती और वे कम ब्याज दरें रखकर भी भारी डिपॉजिट बनाए रखते हैं। इसके विपरीत, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और नए निजी बैंकों को अपना डिपॉजिट बेस बढ़ाने और लोन बांटने के लिए लिक्विडिटी जुटाने की सख्त जरूरत होती है। यही वजह है कि वे उच्च ब्याज दरों का दांव चलते हैं।हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंकों में पैसा रखने से पहले यह समझना जरूरी है कि अधिकांश बैंक 'टियर्ड इंटरेस्ट रेट' (Tiered Interest Rate) मॉडल अपनाते हैं। इसका मतलब यह है कि पूरे ₹10 लाख पर एक समान 7% की दर लागू नहीं होती। उदाहरण के लिए, कई बैंक पहले ₹1 लाख पर 3.5%, ₹1 लाख से ₹5 लाख तक के हिस्से पर 5% और ₹5 लाख से ऊपर की अतिरिक्त राशि पर 7% या 7.25% का ब्याज देते हैं। जहां तक सुरक्षा का सवाल है, भारतीय रिजर्व बैंक के डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) नियम के तहत देश के हर शेड्यूल कमर्शियल बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक में प्रत्येक ग्राहक का ₹5 लाख तक का मूलधन और उस पर बना ब्याज पूरी तरह से सरकार द्वारा बीमित व सुरक्षित होता है।आरबीआई का दैनिक बैलेंस नियम: जानिए आपके खाते में ब्याज कैसे कैलकुलेट होता हैकई खाताधारकों में यह पुरानी भ्रांति आज भी बनी हुई है कि बैंक महीने की 10 तारीख से 30 तारीख के बीच खाते में बचे न्यूनतम बैलेंस पर ब्याज देते हैं। रिजर्व बैंक ने वर्षों पहले इस नियम को पूरी तरह समाप्त कर दिया था। वर्तमान व्यवस्था के तहत सभी बैंकों के लिए 'डेली एंड-ऑफ-डे बैलेंस' (Daily Closing Balance) के आधार पर ब्याज की गणना करना अनिवार्य है।गणना का आधिकारिक फॉर्मूला इस प्रकार है:दैनिक ब्याज = (उस दिन का क्लोजिंग बैलेंस वार्षिक ब्याज दर) / (365 या 366 दिन)बैंक का कंप्यूटर सिस्टम रोजाना रात को 12 बजे आपके खाते में बचे कुल बैलेंस को रिकॉर्ड करता है और उस पर दिन का ब्याज जोड़ता है। महीने भर के इन दैनिक ब्याजों को जोड़कर एक त्रैमासिक (Quarterly) आंकड़ा तैयार किया जाता है। अधिकांश बैंक हर तीन महीने के अंत में (मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर) यह ब्याज आपके खाते में क्रेडिट करते हैं। वहीं, कुछ आधुनिक बैंक अब अपने ग्राहकों को मासिक आधार पर (Monthly Payout) भी ब्याज सीधे खाते में जमा कर रहे हैं, जिससे ग्राहकों को चक्रवृद्धित लाभ (Compounding Effect) थोड़ा तेजी से मिलता है।सेविंग अकाउंट के ब्याज पर टैक्स के नियम: 80TTA, 80TTB और टीडीएस की हकीकतसेविंग अकाउंट में पैसा रखते समय आयकर नियमों की अनदेखी करना बाद में टैक्स नोटिस की वजह बन सकता है। बहुत से लोग यह मानते हैं कि बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, जबकि ऐसा नहीं है। आयकर अधिनियम की धारा 80TTA के तहत 60 वर्ष से कम आयु के सामान्य व्यक्तिगत करदाताओं को एक वित्तीय वर्ष में बचत खातों से मिलने वाले कुल ब्याज पर ₹10,000 तक की सीधी टैक्स कटौती (Exemption) मिलती है।यदि आपके सभी सेविंग खातों का कुल ब्याज मिलाकर ₹10,000 से अधिक हो जाता है, तो उस अतिरिक्त राशि को आपकी कुल कर योग्य आय (Income from Other Sources) में जोड़ दिया जाता है और आपको अपने लागू टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स भरना पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि आपने ₹10 लाख पर ₹30,000 का ब्याज कमाया, तो ₹10,000 टैक्स-फ्री रहेंगे और शेष ₹20,000 पर आपकी टैक्स स्लैब (जैसे 20% या 30%) के अनुसार टैक्स लगेगा। वहीं, 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए धारा 80TTB के तहत ₹50,000 तक का ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, जिसमें बचत खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट दोनों का ब्याज शामिल है। राहत की बात यह है कि बैंक बचत खाते के ब्याज पर टीडीएस (TDS) नहीं काटते हैं, लेकिन आईटीआर दाखिल करते समय इसे घोषित करना अनिवार्य होता है।ऑटो-स्वीप फैसिलिटी (Auto-Sweep): सेविंग खाते में एफडी जैसा ब्याज पाने का स्मार्ट तरीकायदि आप अपने बचत खाते में ₹5 लाख या ₹10 लाख जैसी बड़ी रकम रखते हैं और कम ब्याज मिलने से निराश हैं, तो 'ऑटो-स्वीप' (Auto-Sweep / Sweep-in Facility) आपके लिए सबसे कारगर वित्तीय हथियार बन सकती है। देश के लगभग सभी प्रमुख बैंक यह सुविधा निशुल्क प्रदान करते हैं। इस व्यवस्था में आप अपने सेविंग अकाउंट में एक न्यूनतम सीमा तय कर देते हैं—जैसे ₹25,000 या ₹50,000। जैसे ही आपके खाते में इस तय सीमा से अधिक बैलेंस होता है, वह अतिरिक्त पैसा अपने आप 1 से 2 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में तब्दील हो जाता है, जिस पर 6.5% से 7.5% तक का तगड़ा एफडी ब्याज मिलने लगता है।इस सुविधा की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि आपकी नकदी तरलता (Liquidity) कभी बाधित नहीं होती। यदि आपको अचानक किसी बड़े खर्चे, चेक पेमेंट या यूपीआई से ₹2 लाख की जरूरत पड़ती है, तो बैंक सिस्टम बिना किसी पेनल्टी के एफडी के उतने ही हिस्से को तुरंत तोड़कर सेविंग में रिवर्स-स्वीप कर देता है। यानी आपको सेविंग अकाउंट की आजादी के साथ फिक्स्ड डिपॉजिट का ऊंचा ब्याज एक साथ मिल जाता है।क्या सेविंग अकाउंट में ज्यादा कैश रखना समझदारी है? महंगाई और वैकल्पिक निवेश के रास्तेवित्तीय विशेषज्ञों और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर्स के अनुसार, बचत खाते में 3 से 6 महीने के पारिवारिक खर्च और इमरजेंसी फंड के अलावा ज्यादा नकदी रखना एक तरह से 'आर्थिक नुकसान' है। इसका सीधा कारण 'मुद्रास्फीति' यानी महंगाई की दर है। यदि देश में खुदरा महंगाई की दर 5 से 5.5 प्रतिशत के आसपास चल रही है और आपका बैंक आपको 2.70% या 3% का ब्याज दे रहा है, तो वास्तव में आपके पैसे की क्रय शक्ति (Purchasing Power) हर साल 2% से ज्यादा घट रही है।इसलिए जो पैसा आपको अगले 1 से 3 साल तक इस्तेमाल नहीं करना है, उसे निष्क्रिय बचत खाते में रखने के बजाय लिक्विड म्यूचुअल फंड्स (Liquid Funds), अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म फंड्स, आर्बिट्राज फंड्स या 1 साल की शॉर्ट-टर्म बैंक एफडी में पार्क करना चाहिए। इन विकल्पों में 6.5% से 7.5% तक का रिटर्न मिल जाता है और जरूरत पड़ने पर पैसा एक से दो दिनों के भीतर आपके बैंक खाते में वापस भी आ जाता है। समझदारी इसी में है कि आपातकालीन फंड को सेविंग और ऑटो-स्वीप में रखें और बाकी अतिरिक्त सरप्लस को बेहतर रिटर्न देने वाले साधनों में निवेश करें।
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के आए आंकड़ों ने राज्य का सियासी माहौल गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार
Income Tax Department X Post Alert: 15 सितंबर की अंतिम तारीख और टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी चेतावनी
आयकर विभाग (Income Tax Department) ने देश भर के करोड़ों करदाताओं के लिए एक अत्यंत जरूरी और समय-संवेदनशील अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए स्पष्ट शब्दों में लिखा है—'बस एक दिन बाकी है!' (Only 1 Day Left)। यह तात्कालिक चेतावनी किसी साधारण आयकर रिटर्न (ITR) की नहीं, बल्कि चालू वित्त वर्ष के लिए 'एडवांस टैक्स' (Advance Tax) की दूसरी किस्त जमा करने की अंतिम तारीख यानी 15 सितंबर को लेकर है। यदि आपने समय रहते अपनी टैक्स देनदारी का आकलन करके यह भुगतान नहीं किया, तो विभाग नियमों के अनुसार भारी ब्याज और दंडात्मक शुल्क वसूल करेगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी से लेकर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में कारोबार करने वाले व्यापारियों, फ्रीलांसरों और अतिरिक्त आय वाले वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह समय बेहद सतर्क रहने का है। आज की रात 11:59 बजे से पहले यह काम निपटाना कानूनी और वित्तीय दोनों लिहाज से अनिवार्य है।एडवांस टैक्स (Advance Tax) क्या है और किन करदाताओं के लिए भरना है अनिवार्य?साधारण भाषा में समझें तो एडवांस टैक्स का सिद्धांत 'जैसे कमाओ, वैसे चुकाओ' (Pay as you earn) की अवधारणा पर काम करता है। आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति या व्यावसायिक संस्था की किसी वित्तीय वर्ष में कुल अनुमानित शुद्ध कर देनदारी (TDS/TCS और अन्य टैक्स छूट घटाने के बाद) 10,000 रुपये या उससे अधिक बनती है, तो उसे पूरे साल के अंत का इंतजार किए बिना सरकार को किस्तों में टैक्स का अग्रिम भुगतान करना होता है। यह नियम केवल बड़े कॉर्पोरेट्स या कंपनियों के लिए ही नहीं है। इसके दायरे में प्रोप्राइटरशिप फर्म, साझेदारी फर्में, एलएलपी, डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंसल्टेंट्स, यूट्यूबर्स, डिजिटल क्रिएटर्स, रियल एस्टेट कारोबारी और वे सभी नौकरीपेशा लोग आते हैं जिनकी वेतन के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से उल्लेखनीय कमाई होती है। बहुत से लोग यह सोचते हैं कि कंपनी उनकी सैलरी से टीडीएस काट रही है तो उन्हें एडवांस टैक्स से कोई मतलब नहीं, जबकि यही गलतफहमी बाद में आयकर विभाग के नोटिस का कारण बन जाती है।15 सितंबर को 45% भुगतान का नियम: जानिए पूरा गणित और किस्तों का टाइमटेबलआयकर विभाग द्वारा निर्धारित एडवांस टैक्स कैलेंडर के अनुसार, पूरे वर्ष की कर देनदारी को चार निश्चित तिमाहियों में विभाजित किया गया है। मानक करदाताओं के लिए पहला पड़ाव 15 जून था, जब कुल टैक्स का कम से कम 15 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य था। अब 15 सितंबर वह ऐतिहासिक तारीख है, जिस दिन तक करदाता को अपनी पूरे साल की अनुमानित कर देनदारी का संचयी (Cumulative) 45 प्रतिशत हिस्सा सरकारी खजाने में जमा करा देना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी करदाता की पूरे वित्त वर्ष की शुद्ध टैक्स देनदारी 1,00,000 रुपये बैठती है, तो 15 सितंबर तक उसके खाते से कुल 45,000 रुपये का एडवांस टैक्स जमा हो जाना चाहिए। यदि उसने 15 जून को 15,000 रुपये जमा कर दिए थे, तो इस दूसरी किस्त में उसे शेष 30,000 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके बाद तीसरा पड़ाव 15 दिसंबर होगा (जिसमें 75% तक भुगतान जरूरी है) और अंतिम व चौथा पड़ाव 15 मार्च होगा (जिसमें 100% टैक्स देनदारी का चुकता करना अनिवार्य होता है)।चूक गए तो लगेगा भारी जुर्माना: सेक्शन 234C और 234B के तहत ब्याज का फटकायदि कोई करदाता 15 सितंबर की इस महत्वपूर्ण समयसीमा को नजरअंदाज करता है या निर्धारित 45 प्रतिशत से कम राशि जमा करता है, तो आयकर अधिनियम की धारा 234C के तहत दंडात्मक ब्याज लागू हो जाता है। धारा 234C के अंतर्गत बकाया या कम जमा की गई राशि पर 1 प्रतिशत प्रति माह (यानी तीन महीने की तिमाही के लिए सीधे 3 प्रतिशत) की दर से ब्याज वसूला जाता है। कानून में हालांकि एक छोटी सी राहत यह दी गई है कि यदि करदाता ने 15 सितंबर तक अपनी कुल देनदारी का कम से कम 36 प्रतिशत हिस्सा जमा कर दिया है, तो उस विशेष तिमाही के लिए 234C का ब्याज माफ हो सकता है; लेकिन 36% से कम होते ही पूरे 45% के अंतर पर ब्याज का मीटर चालू हो जाता है। इसके अलावा, यदि पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान कुल देय कर का 90 प्रतिशत हिस्सा एडवांस टैक्स के रूप में जमा नहीं कराया गया, तो अगले साल 1 अप्रैल से धारा 234B के तहत 1 फीसदी मासिक का अतिरिक्त ब्याज भी जुड़ने लगता है, जिससे आपकी मेहनत की कमाई बेवजह जुर्माने में कट जाती है।सैलरीड क्लास भी न रहें बेपरवाह: एफडी ब्याज, शेयर बाजार और रेंटल इनकम पर लागू नियमनौकरीपेशा (Salaried) कर्मचारियों के बीच यह सबसे बड़ा मिथक है कि उनका नियोक्ता फॉर्म-16 के अनुसार टीडीएस काट ही रहा है, इसलिए उन्हें एडवांस टैक्स की चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन मौजूदा समय में अधिकांश मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों की आय केवल सैलरी तक सीमित नहीं है। यदि आपने बैंकों या पोस्ट ऑफिस में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करा रखी है और उससे मोटा ब्याज मिल रहा है, या आपको घर-दुकान से किराया (Rental Income) प्राप्त हो रहा है, तो उस पर विचार करना जरूरी है। इसके अलावा, शेयर बाजार (Stock Market), म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाला डिविडेंड, शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (Capital Gains), या साइड बिजनेस व फ्रीलांसिंग से होने वाली अतिरिक्त कमाई पर आपकी कंपनी टीडीएस नहीं काटती। जब इन सभी आय स्रोतों को मिलाया जाता है और टीडीएस कटने के बाद भी सरकार को देने वाला टैक्स 10,000 रुपये से ऊपर निकलता है, तो वेतनभोगी कर्मचारियों को भी आज 15 सितंबर तक 45 फीसदी एडवांस टैक्स जमा करना अनिवार्य हो जाता है।सीनियर सिटीजंस को छूट और पेनल्टी से बचने के लिए सीए एक्सपर्ट्स के जरूरी टिप्सइस कड़े कानून में वरिष्ठ नागरिकों को एक बहुत बड़ी और मानवीय राहत दी गई है। आयकर अधिनियम की धारा 207 के तहत, ऐसे भारतीय निवासी सीनियर सिटीजन जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है और जिनके पास किसी व्यवसाय या पेशे (Business or Profession) से कोई आय नहीं है, उन्हें एडवांस टैक्स भरने की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। चाहे उनकी पेंशन, बैंक ब्याज या किराये से कितनी भी आय क्यों न हो, वे अपना पूरा टैक्स साल के अंत में नियमित आईटीआर दाखिल करते समय बिना किसी पेनल्टी के जमा कर सकते हैं। वहीं छोटे व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए, जो धारा 44AD या 44ADA के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन (Presumptive Taxation) स्कीम चुनते हैं, उन्हें साल में चार बार किस्तें देने की जरूरत नहीं होती; वे सीधे 15 मार्च को एकमुश्त 100 प्रतिशत एडवांस टैक्स जमा कर सकते हैं। टैक्स विशेषज्ञों की सलाह है कि आज ही अपने फॉर्म 26AS, एआईएस (AIS) और टीआईएस (TIS) की जांच करें, अपनी अनुमानित आय का मोटा हिसाब लगाएं और बिना किसी देरी के चालान जनरेट करें।घर बैठे 5 मिनट में ऐसे करें ऑनलाइन भुगतान: ई-फाइलिंग पोर्टल से स्टेप-बाय-स्टेप गाइडडिजिटल इंडिया के तहत अब एडवांस टैक्स का भुगतान करना बेहद आसान और त्वरित हो गया है। इसके लिए आपको किसी बैंक की शाखा में जाने या लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं है।सबसे पहले आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल incometax.gov.in पर जाएं।होमपेज पर क्विक लिंक्स (Quick Links) सेक्शन में दिए गए 'e-Pay Tax' विकल्प पर क्लिक करें।अपना पैन (PAN) नंबर दो बार दर्ज करें और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी (OTP) के जरिए सत्यापन पूरा करें।सत्यापन के बाद स्क्रीन पर दिख रहे 'Income Tax' वाले बॉक्स के नीचे 'Proceed' बटन पर क्लिक करें।अगले पेज पर असेसमेंट ईयर (Assessment Year) का सही चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है; चालू वित्तीय वर्ष के लिए सही असेसमेंट ईयर चुनें।इसके बाद 'Type of Payment (Minor Head)' में ड्रॉपडाउन मेनू से 'Advance Tax (100)' का विकल्प चुनें।स्क्रीन पर टैक्स के अलग-अलग कॉलम (टैक्स, सेस, सरचार्ज) खुलेंगे; वहां अपने गणना किए गए टैक्स की राशि दर्ज करें और 'Continue' पर क्लिक करें।भुगतान के लिए अपनी सुविधानुसार नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, आरटीजीएस/एनईएफटी या यूपीआई (UPI) का विकल्प चुनें।पेमेंट सफल होते ही स्क्रीन पर 'Challan Receipt' (चालान रसीद) आ जाएगी, जिसमें बीएसआर कोड और चालान नंबर दर्ज होगा। इस रसीद की पीडीएफ कॉपी भविष्य के संदर्भ और आईटीआर फाइलिंग के लिए सुरक्षित डाउनलोड कर लें।
EPFO EDLI Scheme: बिना 1 रुपया प्रीमियम दिए कर्मचारियों को 7 लाख का मुफ्त लाइफ कवर
निजी और संगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों की सैलरी स्लिप में हर महीने प्रोविडेंट फंड (PF) की कटौती दर्ज होती है। अधिकांश नौकरीपेशा लोग पीएफ को केवल एक बचत योजना या रिटायरमेंट फंड के रूप में ही देखते हैं, जहां 8 फीसदी से अधिक का वार्षिक ब्याज मिलता है। लेकिन बहुत कम कर्मचारियों और उनके परिवारों को यह जानकारी होती है कि पीएफ खाता खुलते ही कर्मचारी को केंद्र सरकार की तरफ से 7 लाख रुपये तक का मुफ्त जीवन बीमा (Life Insurance Cover) अपने आप मिल जाता है। इस जीवन रक्षक योजना का नाम 'इंप्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम' (EDLI Scheme 1976) है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा संचालित यह योजना संगठित क्षेत्र के हर उस कर्मचारी पर लागू होती है, जिसका ईपीएफ (EPF) अंशदान कटता है। देश भर के औद्योगिक केंद्रों—चाहे वह दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम हो या उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद जैसे शहर—लाखों कर्मचारी इस योजना के दायरे में आते हैं। यदि सेवाकाल के दौरान किसी भी कारणवश कर्मचारी की असमय मृत्यु हो जाती है, तो उसके नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को यह बीमा राशि सीधे उनके बैंक खाते में एकमुश्त दी जाती है।शून्य प्रीमियम और 100% सुरक्षा: कर्मचारी की जेब से क्यों नहीं कटता एक भी पैसा?आम तौर पर जब कोई व्यक्ति बाजार से 5 से 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस या लाइफ कवर खरीदता है, तो उसे हर महीने या सालाना हजारों रुपये का भारी-भरकम प्रीमियम चुकाना पड़ता है। लेकिन ईडीएलआई (EDLI) योजना की सबसे अनूठी और कल्याणकारी विशेषता यह है कि इसके लिए कर्मचारी के वेतन से एक भी पैसा नहीं काटा जाता। इसका पूरा खर्च नियोक्ता यानी कंपनी द्वारा वहन किया जाता है। नियमों के मुताबिक, कर्मचारी के मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ते (DA) का 12 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ खाते में जमा होता है। नियोक्ता भी कर्मचारी के बराबर यानी 12 प्रतिशत का ही अंशदान देता है। हालांकि, नियोक्ता के 12 फीसदी अंशदान का विभाजन अलग-अलग फंड्स में होता है। इसमें से 8.33 फीसदी हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है और 3.67 फीसदी हिस्सा ईपीएफ में जमा होता है। इसके अलावा, कंपनी अपनी जेब से कर्मचारी के मूल वेतन का 0.50 प्रतिशत (अधिकतम 75 रुपये प्रति माह) अतिरिक्त अंशदान ईडीएलआई फंड में जमा करती है। इस प्रकार, यह बीमा पूरी तरह से कैशलेस और कर्मचारी के लिए शत-प्रतिशत मुफ्त होता है।2.5 लाख से 7 लाख तक की रकम: जानिए कैसे तय होता है क्लेम का पूरा गणितईडीएलआई योजना के तहत मिलने वाली क्लेम राशि कोई मनमाना आंकड़ा नहीं होती, बल्कि इसके लिए ईपीएफओ ने एक पारदर्शी और वैज्ञानिक फॉर्मूला तय किया हुआ है। इस स्कीम के तहत न्यूनतम बीमा राशि 2.5 लाख रुपये और अधिकतम बीमा राशि 7 लाख रुपये निर्धारित है। क्लेम की गणना कर्मचारी के पिछले 12 महीनों के औसत मूल वेतन (Basic + DA) और उसके पीएफ खाते के औसत बैलेंस के आधार पर की जाती है। वर्तमान नियमों के तहत वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रति माह मानी जाती है।गणना का फॉर्मूला इस प्रकार है: बीमा राशि = (कर्मचारी का पिछले 12 महीने का औसत मासिक वेतन 35) + (पिछले 12 महीनों के पीएफ बैलेंस का 50%, अधिकतम 1.75 लाख रुपये)उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का औसत मूल वेतन 15,000 रुपये है, तो पहले हिस्से के तहत 15,000 35 = 5,25,000 रुपये बनेंगे। इसके बाद यदि कर्मचारी के पीएफ खाते में पर्याप्त बैलेंस है, तो 50 फीसदी बोनस राशि के रूप में अधिकतम 1,75,000 रुपये और जुड़ जाएंगे। इन दोनों राशियों को जोड़ने पर कुल क्लेम राशि 7,00,000 रुपये (5,25,000 + 1,75,000) बन जाती है। यदि किसी कर्मचारी का वेतन कम भी है, तब भी उसके आश्रितों को न्यूनतम 2.5 लाख रुपये का सुनिश्चित भुगतान जरूर किया जाता है।12 महीने की निरंतर सेवा और ऑन-ड्यूटी होने की बाध्यता नहीं: क्या हैं पात्रता के नियम?ईडीएलआई क्लेम को लेकर कर्मचारियों और उनके आश्रितों के बीच कई तरह की भ्रांतियां फैली रहती हैं। सबसे आम गलतफहमी यह है कि क्या बीमा का पैसा केवल कार्यस्थल (ऑन-ड्यूटी) पर दुर्घटना होने पर ही मिलता है? ईपीएफओ के नियम इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट और मानवीय हैं। कर्मचारी की मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई हो, घर पर हुई हो, किसी प्राकृतिक बीमारी से हुई हो, दुर्घटना में हुई हो या इलाज के दौरान अस्पताल में हुई हो—हर परिस्थिति में यह बीमा कवर पूरी तरह मान्य होता है। केवल एक बुनियादी शर्त यह है कि मृत्यु के समय कर्मचारी किसी ईपीएफ-पंजीकृत संस्थान में सक्रिय सेवा में होना चाहिए। दूसरी अहम शर्त सेवा अवधि से जुड़ी है। कर्मचारी ने मृत्यु से पहले लगातार कम से कम 12 महीने (1 वर्ष) की सेवा पूरी की हो। इसमें सबसे बड़ी राहत यह है कि यह 12 महीने की सेवा एक ही कंपनी में होना अनिवार्य नहीं है। यदि कर्मचारी ने पिछले 12 महीनों के दौरान एक या दो कंपनियां बदली हैं, लेकिन उसका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) वही रहा है और पीएफ सर्विस में कोई लंबा ब्रेक नहीं आया है, तब भी वह इस पूरे 7 लाख रुपये के कवर का पूर्ण हकदार माना जाता है।क्लेम करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया: फॉर्म 5 IF और जरूरी दस्तावेजों की लिस्टकर्मचारी की असामयिक मृत्यु के बाद उसके परिजनों को आर्थिक संबल देने के लिए क्लेम प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है। क्लेम करने के लिए नॉमिनी को ईपीएफओ का 'फॉर्म 5 IF' (Form 5 IF) भरना होता है। इस फॉर्म को ऑफलाइन या ऑनलाइन दोनों तरीकों से प्रोसेस किया जा सकता है। परिजनों को यह फॉर्म भरकर उस कंपनी या नियोक्ता के पास जमा करना होता है जहां कर्मचारी अंतिम समय में कार्यरत था। कंपनी का अधिकृत अधिकारी उस पर हस्ताक्षर और मुहर लगाकर संबंधित क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालय को अग्रेषित करता है। यदि किसी कारणवश कंपनी बंद हो गई हो या नियोक्ता सहयोग न कर रहा हो, तो फॉर्म को बैंक मैनेजर, राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer), ग्राम प्रधान या नगर निगम पार्षद से सत्यापित करवाकर भी सीधे पीएफ कार्यालय में जमा किया जा सकता है।क्लेम के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची:कर्मचारी का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)क्लेम फॉर्म 5 IF (ईडीएलआई बीमा के लिए)फॉर्म 20 (पीएफ खाते का पैसा निकालने के लिए)फॉर्म 10D या 10C (पेंशन लाभ प्राप्त करने के लिए)नॉमिनी या आश्रित का आधार कार्ड और पैन कार्डनॉमिनी के बैंक खाते का कैंसिल्ड चेक या बैंक पासबुक की प्रमाणित प्रति (जिसमें नाम, आईएफएससी कोड और खाता संख्या साफ दिखे)यदि कोई नॉमिनी दर्ज न हो, तो सक्षम न्यायालय द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate)ई-नॉमिनेशन क्यों है जीवनरक्षक: बिना नॉमिनी के कैसे फंस जाता है परिजनों का पैसा?ईपीएफओ बार-बार अपने सभी सदस्यों को 'ई-नॉमिनेशन' (E-Nomination) पूरा करने की हिदायत देता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यदि पीएफ खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज है, तो कर्मचारी की मृत्यु के बाद पूरा पैसा सीधे उस व्यक्ति को बिना किसी कानूनी अड़चन के मिल जाता है। यदि ई-नॉमिनेशन नहीं किया गया है, तो परिवार के सदस्यों को यह साबित करने के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं कि वे ही वैध उत्तराधिकारी हैं। उत्तराधिकार प्रमाण पत्र बनवाने में महीनों का समय और हजारों रुपये वकीलों की फीस में बर्बाद हो जाते हैं। ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया घर बैठे मात्र 5 मिनट में पूरी की जा सकती है। इसके लिए कर्मचारी को ईपीएफओ के मेंबर सेवा पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) पर अपने यूएएन और पासवर्ड से लॉगिन करना होता है। 'Manage' टैब में जाकर 'E-Nomination' के विकल्प पर क्लिक करें, अपने परिवार के सदस्यों (पत्नी, बच्चे या माता-पिता) का आधार नंबर, बैंक विवरण और फोटो अपलोड करें तथा आधार ओटीपी के जरिए ई-साइन (e-Sign) कर दें। नॉमिनेशन दर्ज होते ही आपका परिवार भविष्य के सभी वित्तीय संकटों से सुरक्षित हो जाता है।30 दिनों के भीतर क्लेम सेटलमेंट की कानूनी गारंटी और ब्याज का नियमईपीएफओ के नागरिक चार्टर (Citizen Charter) के अनुसार, सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा होने के 30 दिनों के भीतर बीमा क्लेम का निपटारा करना अनिवार्य है। यदि पीएफ कार्यालय बिना किसी ठोस कानूनी कारण के 30 दिनों से अधिक समय तक क्लेम अटका कर रखता है, तो 30वें दिन के बाद की अवधि के लिए नॉमिनी को 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज सहित भुगतान करने का सख्त नियम है। आमतौर पर डिजिटल सिस्टम और आधार लिंक होने के कारण यह क्लेम 7 से 15 कार्यदिवसों के भीतर ही सीधे नॉमिनी के खाते में एनईएफटी (NEFT) के जरिए भेज दिया जाता है। क्लेम की स्थिति को ईपीएफओ के आधिकारिक पोर्टल पर 'Track Claim Status' विकल्प के जरिए रियल-टाइम में देखा जा सकता है। किसी भी प्रकार की देरी या परेशानी होने पर ईपीएफओ के ग्रीवेंस पोर्टल (EPFiGMS) या टोल-फ्री नंबर 14470 पर सीधी शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है।
कार खरीदना हर मध्यमवर्गीय और कामकाजी परिवार का एक बड़ा सपना होता है। गाड़ी को सड़क पर उतारने से पहले हम हजारों रुपये खर्च करके कॉम्प्रिहेंसिव या बंपर-टू-बंपर कार इंश्योरेंस (Car Insurance) इसलिए लेते हैं ताकि किसी भी अप्रत्याशित हादसे, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना के समय जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। लेकिन भारतीय सड़कों की हकीकत यह है कि दुर्घटना होने के बाद जब वाहन मालिक बीमा क्लेम के लिए आवेदन करते हैं, तो लगभग 20 से 25 प्रतिशत मामलों में बीमा कंपनियां क्लेम को सीधे खारिज (Reject) कर देती हैं या उसमें भारी कटौती कर देती हैं। लखनऊ के शहीद पथ और गोमती नगर से लेकर दिल्ली-एनसीआर के एक्सप्रेसवे और मुंबई की सड़कों तक, हर रोज ऐसे सैकड़ों मामले सामने आते हैं जहां गाड़ी चालक की सीधी गलती न होने के बावजूद इंश्योरेंस कंपनी नियमों की बारीक शर्तों का हवाला देकर क्लेम देने से साफ मना कर देती है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के स्पष्ट नियमों के बावजूद पॉलिसीधारक की छोटी-छोटी लापरवाहियां क्लेम रिजेक्शन का सबसे बड़ा आधार बन जाती हैं। अगर आप भी चारपहिया वाहन चलाते हैं, तो उन 10 घातक गलतियों को जान लेना बेहद जरूरी है जो आपकी जेब पर लाखों का फटका लगा सकती हैं।बारिश के पानी में बंद गाड़ी को स्टार्ट करना और क्लेम की सूचना में देरीबरसात के मौसम में लखनऊ के चारबाग, आलमबाग या देश के किसी भी निचले शहरी इलाके में जलभराव होना आम बात है। पहली और सबसे आम गलती है 'हाइड्रोस्टेटिक लॉक' (Hydrostatic Lock)। यदि आपकी कार पानी भरे रास्ते में फंसकर अचानक बंद हो जाती है, तो उसे दोबारा सेल्फ़ मारकर स्टार्ट करने की भूल कभी न करें। जब पानी में डूबी गाड़ी को स्टार्ट किया जाता है, तो एग्जॉस्ट या एयर इनटेक के जरिए पानी सीधे इंजन सिलेंडर में घुस जाता है, जिससे इंजन सीज हो जाता है। बीमा कंपनियां इसे दुर्घटना नहीं, बल्कि चालक द्वारा की गई 'लापरवाही से हुआ परिणामी नुकसान' (Consequential Damage) मानती हैं और पूरा क्लेम खारिज कर देती हैं। इससे बचने का एकमात्र तरीका है कि गाड़ी को वहीं छोड़ दें, टो-क्रेन बुलाएं और अगर आपके पास 'इंजन प्रोटेक्ट कवर' (Engine Protect Add-on) है तभी इंजन क्लेम मिलेगा। दूसरी बड़ी गलती है हादसे की सूचना देने में बेवजह देरी करना। बीमा नियमों के अनुसार दुर्घटना या चोरी होने के 24 से 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर क्लेम रजिस्टर कराना अनिवार्य होता है। हफ्ते भर बाद सूचना देने पर बीमा कंपनी यह मान लेती है कि नुकसान के वास्तविक कारणों को छुपाया जा रहा है।बिना बताए सीएनजी किट लगाना और गलत नो क्लेम बोनस (NCB) का लालचतीसरी गंभीर गलती है गाड़ी में बाहर से सीएनजी (CNG) किट या महंगे आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज लगवाना और बीमा कंपनी को इसकी सूचना न देना। लोग पेट्रोल कार खरीदकर बाद में बाहर से सीएनजी किट तो फिट करवा लेते हैं, लेकिन आरसी (RC) और इंश्योरेंस पॉलिसी में इसका एंडोर्समेंट (Endorsement) नहीं कराते। यदि ऐसी गाड़ी में आग लग जाए या एक्सीडेंट हो जाए, तो बीमा कंपनी अवैध मॉडिफिकेशन का हवाला देकर क्लेम तुरंत निरस्त कर देती है। चौथी सबसे बड़ी गलती प्रीमियम कम कराने के चक्कर में 'नो क्लेम बोनस' (NCB) की गलत जानकारी देना है। यदि आपने पिछली पॉलिसी में कोई क्लेम ले रखा था, लेकिन नई पॉलिसी लेते समय 20% या 50% एनसीबी का डिस्काउंट ले लिया, तो बीमा कंपनी इसे 'गलत तथ्य प्रस्तुत करना' (Misrepresentation of Facts) मानती है। ऐसे मामलों में जब आप बड़ा एक्सीडेंट क्लेम करते हैं, तो सर्वेक्षक पुरानी हिस्ट्री निकालकर पूरे क्लेम को जीरो कर देता है और पॉलिसी तक रद्द हो सकती है।निजी कार का व्यावसायिक इस्तेमाल, एक्सपायर्ड ड्राइविंग लाइसेंस और नशे में गाड़ी चलानापांचवीं गलती निजी (प्राइवेट नंबर प्लेट) वाहन को व्यावसायिक गतिविधियों में लगाना है। यदि आपकी सफेद नंबर प्लेट वाली गाड़ी किसी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म, डिलीवरी ऐप या किराए पर सवारी ढोने में इस्तेमाल हो रही है और उस दौरान दुर्घटना हो जाती है, तो बीमा कंपनी एक भी रुपया नहीं देगी। कमर्शियल उपयोग के लिए अलग इंश्योरेंस और परमिट की आवश्यकता होती है। छठी गलती है बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस (DL) के गाड़ी चलाना या किसी ऐसे व्यक्ति को गाड़ी सौंपना जिसका लाइसेंस एक्सपायर हो चुका हो या जिसके पास केवल लर्निंग लाइसेंस हो और बगल में परमानेंट लाइसेंस वाला व्यक्ति न बैठा हो। वैध लाइसेंस न होने पर कानूनन बीमा सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाती है। सातवीं और सबसे अक्षम्य गलती है शराब या किसी भी नशीले पदार्थ के प्रभाव में ड्राइविंग (Drunk Driving)। यदि दुर्घटना के समय मेडिकल जांच या पुलिस रिपोर्ट में ड्राइवर के रक्त में तय सीमा से अधिक अल्कोहल की पुष्टि हो जाती है, तो कोई भी बीमा कंपनी चाहे आपकी पॉलिसी कितनी भी महंगी क्यों न हो, एक पैसे का हर्जाना नहीं देती।सर्वेक्षक की जांच से पहले रिपेयरिंग और स्पॉट एविडेंस का अभावआठवीं बड़ी चूक यह होती है कि एक्सीडेंट होते ही लोग घबराहट में गाड़ी को सीधे अपने नजदीकी लोकल गैरेज में ले जाते हैं और मरम्मत का काम शुरू करवा देते हैं। नियम यह है कि जब तक इंश्योरेंस कंपनी का अधिकृत सर्वेक्षक (Surveyor) दुर्घटनाग्रस्त वाहन का भौतिक निरीक्षण नहीं कर लेता और उसकी फोटो व वीडियो नहीं बना लेता, तब तक गाड़ी का एक भी नट-बोल्ट नहीं खोला जाना चाहिए। यदि आपने सर्वे से पहले बंपर बदलवा दिया या डेंटिंग-पेंटिंग करवा ली, तो सर्वेक्षक उस नुकसान को दुर्घटना का हिस्सा मानने से इनकार कर देगा। नौवीं गलती है दुर्घटनास्थल के साक्ष्यों को नजरअंदाज करना। जब भी कोई हादसा हो, गाड़ी को तुरंत हटाने से पहले चारों तरफ से उसकी तस्वीरें, दूसरी गाड़ी का नंबर, सड़क की स्थिति और यदि संभव हो तो वीडियो जरूर बना लें। आधुनिक समय में डैशकैम (Dashcam) फुटेज सबसे मजबूत प्रमाण बनता है, जिससे यह साबित होता है कि गलती आपकी नहीं थी और क्लेम बिना किसी विवाद के स्वीकृत हो जाता है।पॉलिसी लैप्स होने पर गाड़ी चलाना और सही ऐड-ऑन कवर्स की कमीदसवीं और सबसे बुनियादी भूल है पॉलिसी रिन्यूअल की तारीख भूल जाना। यदि आपकी पॉलिसी की मियाद 12 बजे रात को खत्म हो गई और अगली सुबह हादसा हो गया, तो ग्रेस पीरियड का कोई लाभ नहीं मिलता; लैप्स पॉलिसी पर कोई क्लेम मान्य नहीं होता। इसके अलावा, सामान्य कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में प्लास्टिक, रबर, ग्लास और फाइबर पार्ट्स पर भारी डिप्रिसिएशन (मूल्यह्रास) कटता है, जिससे 50 हजार के नुकसान पर हाथ में केवल 20-25 हजार ही आते हैं। इसलिए हमेशा 'जीरो डेप्रिसिएशन' (Zero Dep / Bumper to Bumper), 'इंजन प्रोटेक्शन', 'कंज्यूमेबल्स कवर' और 'रोडसाइड असिस्टेंस' (RSA) जैसे जरूरी ऐड-ऑन राइडर्स लेने चाहिए ताकि क्लेम के समय अपनी जेब से फूटी कौड़ी न देनी पड़े।क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए क्या करें? एक्सपर्ट्स की गोल्डन गाइडलाइनसड़क पर किसी भी अप्रिय घटना के समय शांत रहना और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना ही आपके क्लेम को सुरक्षित बनाता है। किसी भी बड़े एक्सीडेंट में तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें और एफआईआर (FIR) या जनरल डायरी (GD) एंट्री अवश्य करवाएं, विशेषकर जब मामला किसी तीसरे पक्ष (Third Party) के नुकसान या शारीरिक चोट से जुड़ा हो। इसके बाद तुरंत अपनी बीमा कंपनी के नेटवर्क कैशलेस गैरेज (Cashless Garage) में गाड़ी टो करवाएं। क्लेम फॉर्म भरते समय दुर्घटना की तारीख, समय और घटनाक्रम का बिल्कुल सच्चा विवरण दर्ज करें; मनगढ़ंत कहानियां बनाने पर अक्सर बयानों में विरोधाभास आ जाता है जिससे सर्वेक्षक को शक होता है। अपनी आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस, पॉलिसी कॉपी और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) हमेशा डिजिलॉकर या एम-परिवहन ऐप में अपडेट रखें। जब आप नियमों का ईमानदारी से पालन करते हैं, तो कोई भी बीमा कंपनी आपके जायज क्लेम को खारिज करने का दुस्साहस नहीं कर सकती।
Defence Ministry Annual Report: LAC पर चीन ने 2025 में घटाई सैनिकों की तैनाती
रक्षा मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 2025 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों की तैनाती में कटौती की है। मंत्रालय ने 2025-26 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘वर्ष 2025 में उत्तरी सीमाओं के सामने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों की तैनाती में काफी कटौती देखी गई। एलएसी से लगे क्षेत्रों और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में 10-10 संयुक्त सशस्त्र ब्रिगेड आकार की सैन्य टुकड़ियां तैनात थीं।’’रिपोर्ट में कहा गया है कि एलएसी के सभी क्षेत्रों में भारतीय सेना की तैनाती ‘‘मजबूत है और वह पूरी तरह मुस्तैद है तथा किसी भी अकस्मात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।’’गलवान घाटी में 2020 में हुई जानलेवा झड़पों के बाद भारत और चीन के रिश्ते अत्यधिक तनावपूर्ण हो गए थे। दोनों देशों के संबंध चार साल से अधिक समय तक खराब रहे। अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों ने रिश्तों को दुरूस्त करना शुरू किया था। पिछले साल 31 अगस्त को चीन के शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी के बीच कई मुद्दों पर वार्ता हुई थी। पिछले कुछ महीनों में, दोनों पक्षों ने अपने रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। शनिवार को नयी दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की एक और बैठक हुई। बैठक में प्रधानमंत्री ने चीनी राष्ट्रपति से कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए ‘‘आवश्यक’’ है। साथ ही दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में ‘‘हो रही प्रगति’’ का भी स्वागत किया। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया गया है और कहा गया कि यह न सिर्फ एक अभियानगत सफलता थी, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी था।
NHAI 1033 Helpline Upgrade: हाईवे पर संकट में फंसे मुसाफिरों के लिए गेमचेंजर बनेगा नया सिस्टम
देश के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर सफर करने वाले करोड़ों मुसाफिरों, भारी वाहन चालकों और दैनिक यात्रियों के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सुरक्षा व त्वरित सहायता का एक नया अध्याय शुरू किया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपनी प्रतिष्ठित 24x7 इमरजेंसी हेल्पलाइन '1033' को पूरी तरह आधुनिक और हाई-टेक बनाने का औपचारिक ऐलान किया है। 2018 में शुरू की गई 1033 हेल्पलाइन वर्तमान में देश भर के लगभग 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों को कवर करती है और इस पर रोजाना औसतन 15,000 से अधिक आपातकालीन व पूछताछ से जुड़ी कॉल आती हैं। हालांकि, हाईवे पर किसी अप्रिय सड़क दुर्घटना, मेडिकल इमरजेंसी, टायर फटने या गाड़ी के अचानक बंद होने की स्थिति में पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती थी कि वे घबराहट में अपनी सटीक लोकेशन नहीं समझा पाते थे। आस-पास किसी माइलस्टोन या ढाबे का नाम ढूंढने में कीमती समय बर्बाद होता था। इसी गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एनएचएआई ने अब अपनी सहायक कंपनी 'इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड' (IHMCL) के माध्यम से 1033 हेल्पलाइन में कटिंग-एज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रियल-टाइम जीपीएस लोकेशन ट्रैकिंग और अत्याधुनिक इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को जोड़ने की व्यापक योजना शुरू कर दी है।AI और रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग: अब मील का पत्थर या लैंडमार्क बताने का झंझट खत्मनए तकनीकी ढांचे के लागू होने के बाद हाईवे पर सफर करने वाले किसी भी व्यक्ति को मदद मांगने के लिए यह याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि वह किस टोल प्लाजा से कितने किलोमीटर आगे या पीछे है। जैसे ही कोई यात्री अपने मोबाइल फोन से 1033 डायल करेगा, सिस्टम की एकीकृत कॉलर लोकेशन ट्रैकिंग तकनीक टेलीकॉम नेटवर्क और जीपीएस के जरिए कॉलर की भौगोलिक स्थिति (Latitude and Longitude) को रियल-टाइम में कैप्चर कर लेगी। इसके साथ ही, भारत जैसे बहुभाषी देश में भाषा की बाधा को दूर करने के लिए नेक्स्ट-जेनरेशन प्लेटफॉर्म में 'वॉयस एआई' (Voice AI) और उन्नत भारतीय भाषा वाक्-पहचान (Speech Recognition) तकनीक को शामिल किया जा रहा है। अगर कोई व्यक्ति हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी या भोजपुरी जैसी किसी भी स्थानीय भाषा या बोली में घबराई हुई आवाज में बात करेगा, तो सिस्टम का एआई इंजन तुरंत शब्दों और टोन को प्रोसेस कर समझ जाएगा कि घटना किस तरह की है। इससे यह तुरंत तय हो जाएगा कि कॉलर को मेडिकल सहायता (Ambulance), टोइंग क्रेन (Hydraulic Crane), फायर ब्रिगेड या केवल पेट्रोलिंग वाहन की आवश्यकता है।गोल्डन ऑवर में तेज रिस्पॉन्स: एम्बुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वैन की कंप्यूटर-एडेड डिस्पैचिंगसड़क सुरक्षा और ट्रामा केयर में किसी भी गंभीर दुर्घटना के बाद के पहले 60 मिनट को 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) कहा जाता है। इस अवधि में घायल को समय पर चिकित्सा सहायता मिलना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है। आधुनिक बनाई जा रही 1033 प्रणाली में 'कंप्यूटर-एडेड डिस्पैच' (CAD) मॉड्यूल को शामिल किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि जैसे ही कॉलर की लोकेशन और समस्या दर्ज होगी, स्क्रीन पर ऑपरेटर को सोचने में समय गंवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी; सिस्टम स्वयं निकटतम हाईवे पेट्रोलिंग टीम, सबसे पास तैनात एनएचएआई एम्बुलेंस और टो-क्रेन के रूट को ट्रैक करेगा। सॉफ्टवेयर एक क्लिक पर सबसे नजदीकी रेस्क्यू वैन के टैबलेट या नेविगेशन डिवाइस पर घायल या पीड़ित की सटीक लोकेशन भेज देगा। इससे कॉल रिसीव होने और हाईवे पर सहायता वैन के रवाना होने के बीच का 'टर्नअराउंड टाइम' (TAT) मिनटों से घटकर सेकंडों में आ जाएगा, जिससे अनगिनत जिंदगियों को समय रहते बचाया जा सकेगा।कैसे काम करेगा नेक्स्ट-जेनरेशन कॉल सेंटर? AI ऑटोमेशन और ह्यूमन ऑपरेटर्स का हाईब्रिड मॉडलअक्सर तकनीक के अत्यधिक इस्तेमाल से यह डर पैदा होता है कि मशीनी जवाब मानवीय संवेदनशीलता की जगह नहीं ले सकते। एनएचएआई ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि नया सिस्टम पूरी तरह मशीन-निर्भर नहीं होगा, बल्कि यह 'एआई और ह्यूमन एक्सपर्टीज' का एक हाइब्रिड मॉडल होगा। नए कॉल सेंटर का आर्किटेक्चर इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि कॉल आते ही एआई प्राथमिक डेटा जैसे फोन नंबर, लोकेशन, तात्कालिक संकट की श्रेणी और भाषा की पहचान कर बैकएंड स्क्रीन पर तैयार रखेगा। इसके बाद कॉल तुरंत एक प्रशिक्षित मानवीय ऑपरेटर को ट्रांसफर होगी। ऑपरेटर कॉलर से बेहद संवेदनशील लहजे में बात करेगा, घबराए हुए परिवार को ढांढस बंधाएगा और ऑन-ग्राउंड परिस्थितियों का मानवीय विवेक से आकलन करेगा। इसके साथ ही, हाईवे पर लगने वाले लंबे जाम, अचानक हुए लैंडस्लाइड, खराब मौसम, घने कोहरे या किसी पुल पर मरम्मत कार्य की जानकारी भी इसी सिस्टम के माध्यम से यात्रियों को रियल-टाइम एसएमएस या ऑडियो अलर्ट के जरिए दी जाएगी ताकि वे आगे के सफर के लिए वैकल्पिक मार्ग चुन सकें।IHMCL ने जारी किया एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI): मोबिलिटी और टेक कंपनियों को न्योताइस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए एनएचएआई की प्रमोटेड कंपनी आईएचएमसीएल (IHMCL) ने वैश्विक व राष्ट्रीय स्तर पर एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित कर दिया है। इस ईओआई के तहत सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डिजिटल क्लाउड प्लेटफॉर्म्स, 24x7 कॉल सेंटर ऑपरेशंस और आपातकालीन रिस्पॉन्स सेवाओं में महारत रखने वाली कंसोर्टिया और टेक कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। एनएचएआई ने विशेष रूप से मोबिलिटी, राइड-हेलिंग (कैब एग्रीगेटर्स), क्विक कॉमर्स, पब्लिक सेफ्टी और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में काम करने वाले आधुनिक टेक दिग्गजों को इस टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। सरकार का विजन हाईवे इमरजेंसी सर्विसेज को किसी बड़े क्विक-डिलीवरी या आधुनिक कैब नेटवर्क की तरह सटीक और अल्ट्रा-फास्ट बनाना है, जहां जीपीएस स्क्रीन पर हर एम्बुलेंस और पेट्रोल वाहन की रीयल-टाइम मूवमेंट लाइव ट्रैक होती रहे।लखनऊ-कानपुर से दिल्ली-एनसीआर तक: यूपी और देश भर के मुसाफिरों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?उत्तर प्रदेश देश के सबसे विशाल एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे नेटवर्क का केंद्र बन चुका है। राजधानी लखनऊ से कानपुर के बीच बन रहे नए 6-लेन एक्सप्रेसवे, लखनऊ-अयोध्या-गोरखपुर हाईवे (NH-27), दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ हाईवे और प्रयागराज-वाराणसी रूट पर रोजाना लाखों वाहन रफ्तार भरते हैं। रात के समय या घने कोहरे के दौरान जब किसी सुनसान हाईवे पर गाड़ी का एक्सल टूट जाता है, पेट्रोल खत्म हो जाता है या एक्सीडेंट की स्थिति बनती है, तो उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के यात्रियों के लिए यह हाई-टेक 1033 हेल्पलाइन एक जीवन रक्षक वरदान साबित होगी। इसके अतिरिक्त, फास्टैग (FASTag) से जुड़ी शिकायतों, टोल प्लाजा पर अवैध वसूली, बैरियर न खुलने या गलत टोल कटने जैसी समस्याओं का निवारण भी इस एकीकृत 1033 हेल्पलाइन के जरिए चुटकियों में किया जा सकेगा। जैसे ही नया सिस्टम पूरी तरह लाइव होगा, देश के हाईवे न केवल गति में बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर भी विश्वस्तरीय बन जाएंगे।
क्या वाकई रोकी जा सकती है एआई के विकास की रफ्तार?
एंथ्रोपिक के सुरक्षा शोधकर्ता जेकब कॉक्सन ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देकर पूरी दुनिया का ध्यान इस तकनीक के खतरनाक पहलू की ओर खींच लिया है। लेकिन कई जानकार अचानक आए इन बयानों पर संदेह जता रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी एआई कंपनी का एक ...
उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई की उलटी गिनती शुरू होने के बीच मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और चिपचिपी उमस से बेहाल लोगों को लग रहा था कि मानसून पूरी तरह शांत हो चुका है, लेकिन मौसम विज्ञानियों के अनुसार यह मानसून का 'फाइनल राउंड' है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ ने ताजा बुलेटिन जारी करते हुए प्रदेश के 44 जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंके वाली हवाएं चलने की गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह दौर भले ही लगातार मूसलाधार बारिश का न हो, लेकिन संवहनीय बादलों (Convective Clouds) के बनने से स्थानीय स्तर पर अचानक तेज बौछारें पड़ने और बिजली कड़कने की घटनाएं सामान्य से ज्यादा होंगी। लखनऊ से लेकर पूर्वांचल के सुदूर जिलों और तराई के इलाकों में अगले 48 से 72 घंटों के दौरान मौसम का यह बदला हुआ मिजाज दिन के तापमान को नीचे लाएगा, लेकिन उमस और आकाशीय बिजली के खतरे को भी बढ़ाएगा।चक्रवाती परिसंचरण और मानसूनी ट्रफ: क्यों अचानक सक्रिय हुआ मानसून का अंतिम दौर?इस समय अचानक सक्रिय हुए मानसूनी तंत्र के पीछे की वैज्ञानिक परिस्थितियों को समझाते हुए आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दक्षिण-पूर्व राजस्थान और उत्तरी गुजरात के ऊपर एक सुस्पष्ट चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है। इसके साथ ही, मानसून की मुख्य अक्षीय रेखा यानी मानसूनी ट्रफ (Monsoon Trough) एक बार फिर अपनी सामान्य स्थिति से थोड़ा उत्तर की ओर, यानी हिमालय की तलहटी और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों की ओर खिसक रही है। जब भी मानसूनी ट्रफ उत्तर की तरफ शिफ्ट होती है, तो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ से आने वाली नम हवाएं उत्तर प्रदेश के वायुमंडल में टकराने लगती हैं। इस टकराव के चलते स्थानीय स्तर पर निम्न वायुदाब के छोटे-छोटे पॉकेट्स बन रहे हैं। यही वजह है कि राज्य के किसी भी हिस्से में बाढ़ जैसी व्यापक भारी बारिश की चेतावनी भले न हो, लेकिन तराई, मध्यांचल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में अगले दो से तीन दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश और कई स्थानों पर तेज वज्रपात की स्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।पूर्वांचल से लेकर तराई और बुंदेलखंड तक: किन 44 जिलों में गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी?मौसम विभाग द्वारा जारी की गई विस्तृत सूची के अनुसार, प्रदेश के 44 जिलों को येलो अलर्ट की श्रेणी में रखा गया है। पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक और औद्योगिक केंद्रों में शामिल वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर और महाराजगंज में 20 सितंबर तक रुक-रुक कर बादलों की आवाजाही और गर्जना के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं। विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, झांसी, जालौन और ललितपुर में भी बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। दूसरी तरफ, नेपाल सीमा से सटे तराई बेल्ट के जिलों जैसे सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और सीतापुर में मानसूनी ट्रफ की नजदीकी के कारण गरज-चमक के साथ कई दौर की मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। मध्य यूपी के लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, अमेठी और अयोध्या में भी दोपहर बाद अचानक घने काले बादल घिरने और बिजली कड़कने के साथ तेज बौछारों का अनुमान है।19 सितंबर से बदलेगा हवा का रुख: पश्चिमी यूपी से शुरू होगी मानसून की विदाई और मौसम होगा शुष्कउत्तर प्रदेश के मौसम में असली और बड़ा मोड़ 19 सितंबर से आने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और बुलंदशहर में 18 सितंबर तक ही हल्की से मध्यम बारिश और बूंदाबांदी के सीमित आसार हैं। 19 सितंबर से पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हवा का रुख पूरी तरह बदल जाएगा। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली पुरवाई (पूर्वी नम हवाएं) कमजोर पड़ने लगेंगी और उनकी जगह उत्तर-पश्चिम से आने वाली शुष्क पछुआ हवाएं (Northwesterly Winds) ले लेंगी। पछुआ हवाओं के सक्रिय होते ही वातावरण में नमी का स्तर तेजी से गिरेगा, जिससे आसमान पूरी तरह साफ हो जाएगा और मौसम शुष्क होने लगेगा। यह बदलाव दरअसल दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी (Monsoon Withdrawal) की शुरुआत का संकेत होगा। पश्चिमी यूपी से शुरू होने वाला यह शुष्क दौर धीरे-धीरे 22 से 25 सितंबर के बीच पूरे मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को भी अपनी आगोश में ले लेगा, जिसके बाद दिन में धूप तेज होगी लेकिन रात के तापमान में हल्की ठंडक यानी 'गुलाबी सर्दी' की पहली आहट महसूस होने लगेगी।किसानों के लिए एडवाइजरी: धान की फसल और कटाई की तैयारी पर मौसम के इस 'फाइनल राउंड' का असरमानसून के इस अंतिम चरण की गतिविधियों को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विभाग ने राज्य के किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श जारी किया है। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के खेतों में खरीफ की मुख्य फसल धान (Paddy) बालियां निकलने और दाना भरने के अत्यंत संवेदनशील चरण में है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक तरफ हल्की से मध्यम बारिश धान की फसल के लिए अमृत का काम करेगी और भूजल स्तर को रिचार्ज रखेगी, वहीं दूसरी तरफ आंधी और तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश से पकी या बालियों से लदी फसल के खेतों में गिरने (Lodging) का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन जिलों में गरज-चमक और वज्रपात का अलर्ट है, वहां अगले दो-तीन दिनों तक खेतों में यूरिया या किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव रोक दें। खेतों में अधिक जलभराव न होने दें और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें। इसके अलावा, जिन किसानों ने मक्का, तिल, उड़द या मूंग की अगेती फसलों की कटाई कर ली है, वे अपनी कटी हुई उपज को खुले खलिहानों में रखने के बजाय सुरक्षित गोदामों या तिरपाल से ढके स्थानों पर रखें ताकि अचानक होने वाली बारिश से दाना खराब न हो।वज्रपात से कैसे करें बचाव? दामिनी ऐप और आपदा प्रबंधन विभाग के जरूरी दिशा-निर्देशमानसून के विदाई दौर में सबसे बड़ा जानलेवा खतरा आकाशीय बिजली गिरने का होता है, क्योंकि गर्म और ठंडी हवाओं के अचानक मिलने से बनने वाले कपासी-वर्षी बादल (Cumulonimbus Clouds) भारी मात्रा में स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी पैदा करते हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। आंधी चलने और बिजली कड़कने के दौरान खेतों में काम कर रहे किसान और मजदूर तुरंत पक्के मकानों में शरण लें। किसी भी परिस्थिति में अकेले खड़े ऊंचे पेड़ों, टीन शेड, पानी से भरे तालाबों या बिजली के खंभों व ट्रांसफार्मर के नीचे खड़े न हों। जब तक गड़गड़ाहट बंद न हो जाए, दोपहिया वाहन चलाने और मोबाइल फोन को खुले में चार्जिंग पर लगाकर बात करने से बचें। नागरिकों को अपने स्मार्टफोन में भारत सरकार के 'दामिनी' (Damini App) और 'मौसम' ऐप को डाउनलोड करने की सलाह दी गई है, जो जीपीएस लोकेशन के आधार पर आकाशीय बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले ऑडियो और मैसेज के जरिए चेतावनी अलर्ट जारी कर देते हैं। इस 'फाइनल राउंड' में सावधानी और मौसम की चेतावनियों पर निरंतर नजर रखना ही सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।
मेरी मौत भी हो सकती थी, गुरुग्राम हिट ऐंड रन केस की पीड़िता बोली- सिंपैथी गेम खेल रहा आरोपी
गुरुग्राम हिट ऐंड रन केस की पीड़िता बाइकर ने कहा है कि आरोपी सिंपैथी गेम खेल रहा है। उन्होंने कहा कि टक्कर मारने के बाद जब मैं गिर गई तो वह रुका तक नहीं। इस घटना में मेरी मौत भी हो सकती थी।
राजस्थान निकाय चुनाव: बीजेपी-कांग्रेस दोनों के लिए चिंता
राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव 2026 में भाजपा चार हजार से अधिक वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन दस नगर निगमों के मिले-जुले परिणामों ने सत्तारूढ़ दल को आत्ममंथन का संदेश दिया है. कांग्रेस ने बीकानेर में बहुमत हासिल किया तथा अजमेर और पाली में बढ़त बनाई, जबकि जोधपुर में दोनों दल बराबरी पर रहे.
गोरखपुर में थ्री स्टार होटल का सपना दिखाकर सवा करोड़ की जालसाजी: जानिए क्या है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में विकास और तेजी से बढ़ते पर्यटन उद्योग के बीच रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी और सनसनीखेज धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ है। रामगढ़ताल के कायाकल्प, एम्स, फर्टिलाइजर और कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की नजदीकी के चलते पिछले कुछ वर्षों में गोरखपुर पूर्वांचल का सबसे बड़ा हॉस्पिटैलिटी और कमर्शियल हब बनकर उभरा है। इसी सुनहरे कारोबारी माहौल में एक प्रतिष्ठित स्थानीय व्यवसायी को थ्री स्टार होटल का मालिक बनाने का सब्जबाग दिखाकर लखनऊ की एक कंस्ट्रक्शन फर्म से जुड़े शातिर ठेकेदारों ने 1 करोड़ 18 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम हड़प ली। जालसाजी की पराकाष्ठा यह रही कि करोड़ों रुपये ऐंठने के बावजूद निर्माण स्थल पर नींव के नाम पर सिर्फ एक गड्ढा खोदा गया और उसके बाद काम पूरी तरह बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं, जब पीड़ित व्यवसायी ने अपने पैसे का हिसाब मांगा, तो आरोपियों ने फर्जी इकरारनामा बनाकर 50 लाख रुपये की अतिरिक्त रंगदारी मांगी और रकम न देने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी तक दे डाली। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) गोरखनाथ के हस्तक्षेप के बाद शाहपुर थाने में आरोपियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।लखनऊ की कंस्ट्रक्शन कंपनी और 2021 का वह अनुबंध: 85 लाख ऑनलाइन और 32 लाख कैश का खेलयह पूरा मामला गोरखपुर महानगर के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत धर्मपुर स्थित प्रगति विहार कॉलोनी के निवासी और मेसर्स सिंघल वेंचर्स के पार्टनर राम अवतार सिंह से जुड़ा हुआ है। राम अवतार सिंह की बशारतपुर इलाके में बेशकीमती जमीन स्थित है, जिस पर वे एक आधुनिक सुविधाओं से लैस थ्री स्टार होटल का निर्माण कराना चाहते थे। होटल के निर्माण कार्य के लिए उन्होंने राजधानी लखनऊ के आदिल नगर, टेढ़ी पुलिया स्थित एक रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन कंपनी से संपर्क साधा था। कंपनी के प्रतिनिधि और ठेकेदार मोहम्मद फरीद किदवई, फैकुल्लाह खान और नसीम अहमद ने खुद को बड़े प्रोजेक्ट्स का अनुभवी बिल्डर बताते हुए राम अवतार सिंह का विश्वास जीत लिया। इसके बाद 23 अगस्त 2021 को दोनों पक्षों के बीच होटल निर्माण का एक औपचारिक अनुबंध (Contract Agreement) निष्पादित किया गया। अनुबंध के तहत निर्माण की अलग-अलग चरणों की समयसीमा तय की गई थी। इसके बाद तीनों ठेकेदारों ने काम शुरू करने और सामग्री जुटाने के नाम पर पीड़ित के बैंक खातों से विभिन्न तिथियों में कुल 85 लाख 27 हजार रुपये आरटीजीएस और ऑनलाइन माध्यम से ट्रांसफर करवा लिए। इसके अतिरिक्त, साइट पर लेबर खर्च और तात्कालिक खरीदारी का हवाला देकर 32 लाख 73 हजार रुपये नकद भी हासिल कर लिए। इस प्रकार ठेकेदारों ने कुल मिलाकर 1 करोड़ 18 लाख रुपये अपने कब्जे में ले लिए।जमीन पर केवल खोदा गड्ढा और थमाते रहे फर्जी बिल: 10 लाख रुपये पाटने में अलग से गंवाएकरोड़ों रुपये का भुगतान हासिल करने के बाद ठेकेदारों की असल नीयत सामने आने लगी। बशारतपुर स्थित निर्माण स्थल पर भारी मशीनरी लाकर होटल का भव्य ढांचा खड़ा करने के बजाय ठेकेदारों ने केवल जमीन पर एक बड़ा गड्ढा खुदवाया। जब व्यवसायी ने काम की धीमी गति पर सवाल उठाए, तो आरोपी ठेकेदार सीमेंट, स्टील, सरिया और निर्माण सामग्री की खरीद के नाम पर फर्जी बिल और बोगस रसीदें दिखाकर उन्हें गुमराह करते रहे। लंबे समय तक निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा रहा और ठेकेदार गोरखपुर आने से कतराने लगे। समय बीतने के साथ खोदे गए विशाल गड्ढे में बारिश का पानी भरने लगा, जिससे आसपास की बस्तियों और जमीन की सुरक्षा पर संकट खड़ा हो गया। अंततः पीड़ित व्यवसायी को उस गड्ढे को सुरक्षित रूप से मिट्टी से पटवाने के लिए अपनी ही जेब से करीब 10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ी। व्यवसायी को तब जाकर अहसास हुआ कि उनके साथ निर्माण के नाम पर एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है।इकरारनामे में फर्जीवाड़ा और 50 लाख की रंगदारी: परिवार समेत जान से मारने की धमकीमामला केवल गबन और धोखाधड़ी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि जालसाजों ने पीड़ित को पूरी तरह कानूनी शिकंजे में फंसाने और ब्लैकमेल करने की एक खतरनाक साजिश रची। 9 अप्रैल को आरोपियों ने लखनऊ के एक अधिवक्ता के माध्यम से पीड़ित व्यवसायी को एक कानूनी नोटिस भिजवाया। इस नोटिस के साथ जो अनुबंध पत्र (इकरारनामा) संलग्न किया गया था, उसे देखकर पीड़ित के होश उड़ गए। मूल अनुबंध पत्र के पैरा संख्या 18 को दोनों पक्षों की सहमति से काटकर उस पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन नोटिस में भेजी गई कथित प्रति में उसी पैरा 18 में जालसाजी करते हुए एक फर्जी शर्त जोड़ दी गई थी। इस कूटरचित शर्त के आधार पर ठेकेदारों ने पीड़ित पर 50 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग थोप दी। जब व्यवसायी ने इस फर्जीवाड़े का कड़ा विरोध किया और कानूनी कार्रवाई की बात कही, तो आरोपियों ने फोन पर गाली-गलौज करते हुए साफ धमकी दी कि यदि 50 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया, तो उन्हें और उनके पूरे परिवार को जान से खत्म कर दिया जाएगा।सीओ गोरखनाथ के निर्देश पर शाहपुर थाने में FIR: तीनों ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी शिकंजालगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों और करोड़ों की ठगी से आहत व्यवसायी राम अवतार सिंह ने न्याय के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों की चौखट खटखटाई। उन्होंने सभी बैंक ट्रांजैक्शन की रसीदें, मूल अनुबंध पत्र, फर्जी बिलों के साक्ष्य और आरोपियों द्वारा भेजी गई नोटिस की प्रति के साथ पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) गोरखनाथ रवि सिंह को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपा। मामले की गंभीरता और वित्तीय गबन के ठोस साक्ष्यों को देखते हुए सीओ गोरखनाथ ने तुरंत शाहपुर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। शाहपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लखनऊ के आदिल नगर, टेढ़ी पुलिया स्थित कंस्ट्रक्शन फर्म से जुड़े तीनों मुख्य आरोपियों—मोहम्मद फरीद किदवई, फैकुल्लाह खान और नसीम अहमद के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, कूटरचना (फर्जी दस्तावेज तैयार करना) और आपराधिक साजिश समेत संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। विवेचना अधिकारी के अनुसार, पुलिस की एक टीम आरोपियों के बैंक खातों के लेन-देन और लखनऊ स्थित उनके ठिकानों की पड़ताल कर रही है और जल्द ही गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जाएगी।रियल एस्टेट और होटल प्रोजेक्ट्स में ऐसे धोखाधड़ी से कैसे बचें? कानूनी व तकनीकी सबकगोरखपुर का यह मामला उन सभी निवेशकों और भूस्वामियों के लिए एक बड़ा सबक है जो अपनी संपत्तियों पर होटल, रिजॉर्ट या बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स विकसित करने की योजना बना रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों और अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के अनुसार, किसी भी बड़े निर्माण अनुबंध में केवल कागजी वादों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि भुगतान हमेशा 'माइलस्टोन-बेस्ड' (Milestone-based) होना चाहिए, अर्थात जब तक साइट पर वास्तविक काम जमीन पर न दिखे, तब तक बड़ा फंड रिलीज नहीं करना चाहिए। निर्माण के मूल्यांकन के लिए किसी स्वतंत्र चार्टर्ड इंजीनियर या आर्किटेक्ट से प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होना चाहिए। दूसरा, किसी भी अनुबंध पत्र के प्रत्येक पृष्ठ पर दोनों पक्षों के पूर्ण हस्ताक्षर होने चाहिए और किसी भी कटे हुए या संशोधित बिंदु पर नोटरी व गवाहों की पुष्टि दर्ज होनी चाहिए। इसके अलावा, ठेकेदार या कंस्ट्रक्शन कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड, रेरा (RERA) पंजीकरण और कॉर्पोरेट पहचान संख्या (CIN) की गहन जांच जिला स्तर पर करा लेना भविष्य के बड़े वित्तीय हादसों से सुरक्षित रख सकता है।
उत्तर प्रदेश के लाखों वाहन चालकों, दैनिक यात्रियों, किसानों और माल ढुलाई से जुड़े कारोबारियों के लिए हर सुबह पेट्रोल और डीजल की कीमतें जानना दिनचर्या का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की हलचलों के बीच देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)—ने आज सुबह ठीक 6 बजे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए पेट्रोल और डीजल की नई खुदरा दरें जारी कर दी हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आज तेल की कीमतों में आंशिक फेरबदल देखने को मिला है। कहीं स्थानीय परिवहन लागत और डीलर कमीशन के समायोजन से चंद पैसों की मामूली राहत मिली है, तो कहीं ढुलाई खर्च के कारण दामों में कुछ पैसों की बढ़त दर्ज की गई है। राजधानी लखनऊ से लेकर औद्योगिक हब कानपुर, धर्मनगरी वाराणसी और एनसीआर के हाई-टेक शहर नोएडा तक नई दरों के लागू होते ही पेट्रोल पंपों की मशीनों पर नए भाव दिखने लगे हैं।लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज: मध्य व पूर्वी यूपी के प्रमुख शहरों में आज का भावउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज सुबह पेट्रोल 101.86 रुपये से 102.68 रुपये प्रति लीटर के दायरे में स्थिर बना हुआ है, जबकि डीजल की कीमत 95.14 रुपये से 96.10 रुपये प्रति लीटर के बीच दर्ज की गई है। लखनऊ के शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्थापित पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही गाड़ियां ईंधन भरवाने के लिए कतारों में नजर आ रही हैं। वहीं, औद्योगिक नगरी कानपुर (शहरी और देहात) में पेट्रोल की दर लगभग 101.90 रुपये से 102.15 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 95.27 रुपये से 95.47 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है। गंगा-यमुना के संगम शहर प्रयागराज (इलाहाबाद) में ढुलाई खर्च के चलते डीजल 95.33 रुपये से 95.79 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल करीब 102.20 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बिक रहा है। इसके अलावा, बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में पेट्रोल 102.23 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.50 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। रामनगरी अयोध्या और गोरखपुर में भी ईंधन के दामों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है और वहां भाव क्रमशः 102.10 रुपये और 102.35 रुपये प्रति लीटर के आसपास बने हुए हैं।नोएडा, गाजियाबाद और पश्चिमी यूपी: एनसीआर में क्या घटे या बढ़े दाम?राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में दिल्ली से तुलनात्मक रूप से ईंधन के दामों में थोड़ा अंतर रहता है। गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आज पेट्रोल की कीमत 101.96 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.10 रुपये प्रति लीटर के आसपास दर्ज की गई है। पड़ोसी जिले गाजियाबाद में पेट्रोल 101.88 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.05 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। ताजनगरी आगरा में पेट्रोल का भाव 101.66 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.02 रुपये से 95.14 रुपये प्रति लीटर के बीच बना हुआ है। कान्हा की नगरी मथुरा में रिफाइनरी का नजदीकी डिपो होने के कारण पेट्रोल और डीजल प्रदेश के कई अन्य जिलों की तुलना में अपेक्षाकृत थोड़ा सस्ता रहता है, जहां डीजल 94.79 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर उपलब्ध है। मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और बरेली जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी पेट्रोल के दाम 101.70 रुपये से 102.30 रुपये प्रति लीटर के बीच बने हुए हैं।यूपी के 75 जिलों में क्यों अलग-अलग होते हैं दाम? जानिए वैट और माल ढुलाई का गणितअक्सर आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि जब पूरा उत्तर प्रदेश एक ही राज्य है और राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) एक समान है, तो फिर लखनऊ, नोएडा, बलिया और सोनभद्र में पेट्रोल-डीजल के भाव एक जैसे क्यों नहीं होते? इसका सबसे बड़ा कारण 'लोकल फ्रेट' (माल ढुलाई खर्च) और डिपो से पेट्रोल पंप की भौगोलिक दूरी है। तेल कंपनियां अपनी मुख्य तेल रिफाइनरियों या बल्क स्टोरेज डिपो से जब टैंकरों के माध्यम से सुदूर जिलों में पेट्रोल-डीजल भेजती हैं, तो रास्ते का ट्रांसपोर्टेशन चार्ज ईंधन की मूल लागत में जुड़ जाता है। उदाहरण के लिए, मथुरा रिफाइनरी के नजदीक स्थित आगरा या मथुरा जिले में ढुलाई का खर्च बेहद कम आता है, इसलिए वहां तेल थोड़ा सस्ता रहता है। इसके विपरीत, बिहार सीमा से सटे बलिया, गाजीपुर, देवरिया या विंध्य क्षेत्र के सोनभद्र और मिर्जापुर जैसे दूरदराज के जिलों तक तेल पहुंचाने में लंबी दूरी का डीजल खर्च होता है, जिसके चलते वहां की खुदरा कीमतों में 50 पैसे से 1 रुपये तक का अंतर आ जाता है। इसके साथ ही हर जिले में पेट्रोल पंप डीलरों का स्थानीय कमीशन और म्युनिसिपल सेस भी कीमतों को थोड़ा बहुत प्रभावित करता है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का रुख और घरेलू कीमतों पर असरभारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी घरेलू ईंधन मांग का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशी बाजारों से खरीदता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब भी ब्रेंट क्रूड या अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में भारी उतार-चढ़ाव आता है, तो उसका सीधा दबाव भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर पड़ता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से भारतीय रिफाइनरियों और केंद्र सरकार के रणनीतिक कदमों के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में होने वाले दैनिक झटकों को घरेलू स्तर पर सीधे ग्राहकों पर नहीं थोपा जा रहा है। रूस से रियायती दर पर मिलने वाले कच्चे तेल और खाड़ी देशों के साथ हुए दीर्घकालिक अनुबंधों ने देश के भीतर ईंधन की कीमतों को एक स्थिर दायरे में बांधे रखा है। फिर भी, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर (Exchange Rate) और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों पर तेल विपणन कंपनियों की पैनी नजर बनी रहती है।घर बैठे अपने मोबाइल से 1 मिनट में ऐसे चेक करें अपने जिले का ताजा रेटअगर आप पेट्रोल पंप पर जाने से पहले अपने शहर का बिल्कुल सटीक और ताजा भाव जानना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको किसी लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। आप अपने सामान्य मोबाइल फोन से मात्र एक साधारण एसएमएस (SMS) भेजकर अपने नजदीकी पंप का नया रेट जान सकते हैं।यदि आप इंडियन ऑयल (IOCL) के ग्राहक हैं, तो अपने मैसेज बॉक्स में टाइप करें RSP और स्पेस देकर अपने शहर का डीलर कोड लिखें (जैसे लखनऊ के लिए निर्धारित कोड) और इसे 9224992249 पर भेज दें। चंद सेकंडों में आपको फोन पर ताजा भाव मिल जाएगा।यदि आप भारत पेट्रोलियम (BPCL) का रेट जानना चाहते हैं, तो मैसेज बॉक्स में लिखें RSP और अपना डीलर कोड लिखकर 9223112222 पर सेंड करें।यदि आप हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के उपभोक्ता हैं, तो HPPRICE लिखकर स्पेस दें और डीलर कोड दर्ज कर 9222201122 पर एसएमएस भेज दें। इसके अलावा, इंडियन ऑयल का इंडियनऑयल वन (IndianOil ONE) और एचपीसीएल का एचपी पे (HP Pay) मोबाइल ऐप डाउनलोड करके भी जीपीएस लोकेशन के आधार पर किसी भी पंप की रीयल-टाइम कीमत देखी जा सकती है।किसानों, ट्रांसपोर्ट और आम जनता की जेब पर तेल के दामों का सीधा प्रभावउत्तर प्रदेश जैसे विशाल कृषि प्रधान और व्यापारिक राज्य में पेट्रोल और विशेषकर डीजल की कीमतों का सीधा संबंध आम आदमी की रसोई के बजट और बाजार की महंगाई से होता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक के किसान खेतों की जुताई, बुवाई और नलकूपों (ट्यूबवेल) से सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर डीजल इंजनों पर निर्भर करते हैं। यदि डीजल की कीमतों में थोड़ी भी वृद्धि होती है, तो फसलों की उत्पादन लागत सीधे बढ़ जाती है। इसी तरह, ट्रकों, डंपरों और पिकअप वाहनों के जरिए फल, सब्जियां, दूध, अनाज और दवाएं एक शहर से दूसरे शहर पहुंचती हैं। डीजल के दाम स्थिर रहने से माल भाड़ा नियंत्रित रहता है, जिससे लखनऊ की दुबग्गा मंडी, कानपुर की चकरपुर मंडी या वाराणसी की पहड़िया मंडी में रोजमर्रा की हरी सब्जियों और किराना सामानों के दाम बेकाबू नहीं होते। वहीं, निजी दोपहिया और चारपहिया वाहन चलाने वाले मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों के लिए भी ईंधन की कीमतों में स्थिरता मासिक घरेलू बजट को संतुलित रखने में सबसे बड़ी मदद करती है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर आज आयोजित होने वाली राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक रणनीतियों और प्रदेश में प्रशासनिक व सामाजिक विकास की गति को तेज करने के उद्देश्य से इस बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री की अगुवाई में होने वाली इस कैबिनेट बैठक में सुरक्षा तंत्र, बुनियादी ढांचे, स्कूली शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कर्मचारी कल्याण से जुड़े लगभग 18 से अधिक अहम प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है। सरकार का मुख्य फोकस जहां एक तरफ रामनगरी अयोध्या की सामरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने पर है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर सेवा देने वाले प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों, राशन वितरण करने वाले कोटेदारों और बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों नौनिहालों के भविष्य को संवारने के लिए बड़े नीतिगत बदलाव किए जाने की तैयारी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बैठक का आधिकारिक एजेंडा तैयार हो चुका है और मुख्य सचिव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इन योजनाओं को विधिवत हरी झंडी दी जाएगी।अयोध्या में बनेगा देश का नया सुरक्षा कवच: 65 एकड़ में NSG का रीजनल हबइस कैबिनेट बैठक का सबसे बड़ा और संवेदनशील एजेंडा रामनगरी अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और अति-विशिष्ट (वीआईपी) हस्तियों की आवाजाही कई गुना बढ़ गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़े इस महत्व को देखते हुए योगी सरकार अयोध्या को केवल एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत का सबसे मजबूत आतंकवाद-रोधी सुरक्षा केंद्र बनाने जा रही है। कैबिनेट के समक्ष अयोध्या जिले के मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र स्थित लालखां गांव में लगभग 65 एकड़ ग्रामसभा की बंजर भूमि केंद्रीय गृह मंत्रालय को औपचारिक रूप से हस्तांतरित करने का प्रस्ताव रखा जा रहा है। इस भूमि पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) का एक पूर्ण सुसज्जित क्षेत्रीय हब (Regional Hub) स्थापित किया जाएगा। इस हब के निर्माण से उत्तर भारत में किसी भी आकस्मिक आतंकी खतरे, बंधक संकट या हाई-रिस्क ऑपरेशन से निपटने के लिए 'ब्लैक कैट' कमांडो की त्वरित तैनाती संभव हो सकेगी। इसके अलावा, यह केंद्र एनएसजी कमांडो के कठोर सामरिक प्रशिक्षण के लिए भी एक प्रमुख बेस के रूप में काम करेगा, जिससे पूरे मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सुरक्षा का दायरा कई गुना मजबूत हो जाएगा।बेसिक शिक्षा में बड़ा बदलाव: सरकारी स्कूलों में आधुनिक स्मार्ट क्लास की सौगातप्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाने का फैसला किया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे और जर्जर भवनों को लेकर उठे सवालों के बीच बेसिक शिक्षा विभाग ने आधुनिक तकनीक को ग्रामीण स्कूलों तक पहुंचाने का खाका तैयार किया है। कैबिनेट के एजेंडे में बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 'स्मार्ट क्लास' स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रत्येक चयनित विद्यालय को आधुनिक डिजिटल बोर्ड, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल शिक्षण सामग्री से लैस किया जाएगा। इसके लिए सरकार प्रति विद्यालय आवश्यक बजट आवंटन को मंजूरी दे सकती है। इसका सीधा उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंटरैक्टिव तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में आत्मविश्वास के साथ खड़े हो सकें।40 हजार PRD जवानों को तोहफा: मानदेय में बढ़ोतरी और कैशलेस इलाज की गारंटीप्रदेश में पुलिस प्रशासन के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात प्रबंधन, मेलों, त्योहारों और सरकारी आयोजनों में दिन-रात मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाने वाले प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों के लिए आज का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आ सकता है। योगी सरकार पीआरडी जवानों के मानदेय में लगातार चौथी बार ऐतिहासिक वृद्धि करने जा रही है। कैबिनेट में रखे जा रहे प्रस्ताव के अनुसार, वर्तमान में मिलने वाले 500 रुपये प्रतिदिन के दैनिक ड्यूटी भत्ते को बढ़ाकर अब 600 रुपये प्रतिदिन किया जाएगा। यानी हर जवान की मासिक आय में 3,000 रुपये तक की सीधी बढ़ोतरी होगी। इससे पहले 2019 में मानदेय 250 से 375 रुपये, 2022 में 395 रुपये और अप्रैल 2025 में 500 रुपये किया गया था। मानदेय बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश के लगभग 40 हजार पीआरडी जवानों और उनके परिजनों को सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए कैशलेस चिकित्सा बीमा सुविधा का लाभ देने की योजना पर भी मुहर लगने जा रही है। इससे ड्यूटी के दौरान किसी भी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में जवानों को सरकारी व सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में बिना किसी आर्थिक संकट के मुफ्त और बेहतर इलाज मिल सकेगा।78 हजार राशन कोटेदारों की बढ़ी कमाई: 25 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त कमीशनसार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत प्रदेश के अंतिम पायदान पर खड़े करोड़ों लाभार्थियों तक मुफ्त खाद्यान्न पहुंचाने वाले राशन कोटेदारों के लिए भी योगी कैबिनेट अपनी झोली खोलने जा रही है। खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से उचित दर की दुकानों के दुकानदारों (कोटेदारों) की मार्जिन मनी बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। लंबे समय से कोटेदार संगठन अपने लाभांश में वृद्धि की मांग कर रहे थे, जिस पर विचार करते हुए सरकार कोटेदारों को खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले कमीशन में 25 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त वृद्धि करने जा रही है। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के 78 हजार से अधिक राशन डीलरों को सीधा लाभ पहुंचेगा। अधिकारियों के आकलन के अनुसार, कमीशन बढ़ने से प्रत्येक कोटेदार की मासिक आय में औसतन 2,000 से 2,500 रुपये तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी। इससे न केवल राशन डीलरों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, बल्कि राशन वितरण की पारदर्शी ई-पॉस (e-PoS) व्यवस्था को और अधिक सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी।औद्योगिक विकास और कनेक्टिविटी: टॉय मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी से चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे तकउत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को साधने के लिए आज की कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और ढांचागत नीतियों को भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में स्वदेशी खिलौना उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए 'उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति' (UP Toy Manufacturing Promotion Policy 2026) को हरी झंडी दी जा सकती है। इस नीति के तहत नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गोरखपुर जैसे औद्योगिक गलियारों में खिलौना निर्माण इकाइयों को सब्सिडी, आसान भूमि आवंटन और बिजली दरों में छूट दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, बुंदेलखंड क्षेत्र की कनेक्टिविटी को गति देने के लिए 'चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे' के विस्तार और संशोधित निर्माण प्रारूप को कैबिनेट पटल पर रखा जाएगा। यह लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को चित्रकूट के पावन तीर्थ स्थलों और आगामी डिफेंस कॉरिडोर नोड्स से सीधे जोड़ेगा, जिससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और भारी उद्योगों की स्थापना को नई रफ्तार मिलेगी। सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए वाहनों की फिटनेस और तकनीकी जांच के लिए 'नई राज्य नीति-2026' को भी लागू करने का प्रस्ताव एजेंडे का अहम हिस्सा है।परिवहन, उच्च शिक्षा और पट्टा पंजीकरण: हरदोई-सिद्धार्थनगर में बस स्टैंड और स्टांप छूटनागरिक सुविधाओं के विस्तार के क्रम में परिवहन विभाग को मजबूत करने के लिए भी कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़-बढ़नी और मध्य उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के सवायजपुर कस्बे में नए अत्याधुनिक बस स्टैंडों के निर्माण के लिए सरकारी भूमि परिवहन निगम को निशुल्क हस्तांतरित करने का प्रस्ताव शामिल है। इससे तराई और ग्रामीण इलाकों में अंतरराज्यीय व जिला स्तरीय सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क बेहद सुलभ हो जाएगा। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से अलीगढ़ में 'साईं ग्लोबल विश्वविद्यालय' की स्थापना हेतु प्रायोजक संस्था को औपचारिक आशय पत्र (Letter of Intent - LOI) जारी करने पर सहमति बन सकती है। इसके साथ ही, रियल एस्टेट और लीज बाजार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार 10 वर्ष से अधिक अवधि के दीर्घकालिक किरायेदारी पट्टों (Tenancy Leases) के पंजीकरण पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी में बड़ी छूट देने की तैयारी में है। वित्त, मत्स्य पालन और नगर विकास से जुड़े अन्य नीतिगत संशोधनों के पारित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज दोपहर बाद इन सभी ऐतिहासिक निर्णयों की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को लेकर दुनिया के देशों को चेताया
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा पर अमेरिका के भारी खर्च की भरपाई दुनिया के उन देशों से मांगने की बात कही, जो इस तेल मार्ग का लाभ उठाते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी निभा रहा है। वहीं, ईरान के होर्मुज पर नियंत्रण के दावे को अमेरिका ने खारिज किया।
आजकल शहरीकरण के दौर में, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में, घरों का आकार सीमित होता जा रहा है। ऐसे में लोग हर खाली जगह का इस्तेमाल करना चाहते हैं और अक्सर सीढ़ियों के नीचे की जगह (Space under the stairs) का उपयोग इंडोर प्लांट्स या गमले रखने के लिए कर लेते हैं। हरियाली और प्रकृति से जुड़ाव मानसिक शांति के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन भारतीय वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, घर में रखे जाने वाले पौधों की दिशा और स्थान का हमारे जीवन, आर्थिक स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा और गहरा असर पड़ता है। विशेष रूप से सनातन धर्म में परम पवित्र माने जाने वाले तुलसी (Tulsi) और शमी (Shami) के पौधों को लेकर वास्तु में बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं। अगर आपने अनजाने में या जगह की कमी के चलते इन पूजनीय पौधों को सीढ़ियों के नीचे रख दिया है, तो यह अनजाने में ही आपके घर में बड़े वास्तु दोष (Vastu Dosha) का निर्माण कर रहा है। आज के इस आधुनिक एआई-संचालित सर्च के दौर में हम आपको विस्तार से बता रहे हैं कि आखिर इन पौधों को सीढ़ियों के नीचे रखना विनाशकारी क्यों माना जाता है और किन अन्य पौधों को घर में लगाने से भयंकर पारिवारिक तनाव व कलह पैदा होती है।सीढ़ियों के नीचे तुलसी का पौधा रखना क्यों है विनाशकारी और अशुभ?हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को साक्षात मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और इसे घर के सबसे पवित्र स्थान यानी आंगन के बीच या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में रखने का विधान है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की सीढ़ियां हमेशा भारी होती हैं और वे वजन व दबाव का प्रतिनिधित्व करती हैं। जब आप तुलसी जैसे अत्यंत ऊर्जावान और पवित्र पौधे को सीढ़ियों के नीचे रखते हैं, तो वास्तु के नजरिए से आप मां लक्ष्मी के ऊपर सीढ़ियों का भारी बोझ डाल रहे होते हैं। इसके अलावा, सीढ़ियों के ऊपर से दिन भर परिवार के सदस्यों का आना-जाना लगा रहता है, जिसके चलते अनजाने में पवित्र पौधे के ऊपर से पैरों की धूल और नकारात्मक ऊर्जा गुजरती है। इसे तुलसी माता का घोर अपमान माना जाता है। सीढ़ियों के नीचे अक्सर अंधेरा रहता है और वहां सूर्य की पर्याप्त रोशनी तथा ताजी हवा नहीं पहुंच पाती, जिससे तुलसी का पौधा मुरझाने लगता है। तुलसी के मुरझाने का सीधा अर्थ है घर में दरिद्रता, आर्थिक संकट और भयंकर धन हानि का आना। जो लोग तुलसी को सीढ़ियों के नीचे रखते हैं, उनके घर में कभी भी बरकत नहीं होती और परिवार के मुखिया को हमेशा भारी मानसिक तनाव और कर्ज का सामना करना पड़ता है।शमी के पौधे का सीढ़ियों के नीचे होना कैसे बढ़ाता है भयंकर शनि दोष?तुलसी के बाद शमी का पौधा हिंदू धर्म में अत्यंत चमत्कारी और पूजनीय माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में शमी के पौधे का सीधा संबंध न्याय के देवता भगवान शनिदेव (Lord Shani) और महादेव शिव से है। मान्यता है कि शमी का पौधा घर में सही दिशा में लगाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट कम होते हैं। लेकिन इसे सीढ़ियों के नीचे रखना सीधे तौर पर शनिदेव को क्रोधित करने के समान है। वास्तु विज्ञान के अनुसार, सीढ़ियों के नीचे का हिस्सा राहु (Rahu) का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, जो अंधकार, ठहराव और नकारात्मकता का प्रतीक है। जब शनि के पवित्र पौधे को राहु के प्रभाव वाले अंधेरे और दबे हुए स्थान पर रखा जाता है, तो घर में शनि दोष उत्पन्न होता है। इसके परिणामस्वरूप परिवार के सदस्यों की तरक्की रुक जाती है, बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं और घर में हमेशा एक उदासी व निराशा का माहौल छाया रहता है। शमी के पौधे को हमेशा घर के मुख्य द्वार के पास या छत पर खुले आसमान के नीचे दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए, जहां से उस पर पर्याप्त धूप पड़े और शनिदेव की सकारात्मक ऊर्जा पूरे घर को सुरक्षित रख सके।वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ियों के नीचे की जगह का क्या है असली महत्व?वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) की तकनीकी बारीकियों को समझें तो घर की सीढ़ियां आरोहण (ऊपर उठने) का मार्ग होती हैं, लेकिन उनके ठीक नीचे की जगह 'डेड जोन' (Dead Zone) या रुकी हुई ऊर्जा का केंद्र बन जाती है। इस स्थान पर हवा का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है और यहां भारी मात्रा में धूल, जाले और नकारात्मक ऊर्जा एकत्रित होने लगती है। यही कारण है कि वास्तु विशेषज्ञ सीढ़ियों के नीचे पूजा घर, रसोई, सोने का कमरा या किसी भी प्रकार के शुभ पौधों को रखने की सख्त मनाही करते हैं। इस जगह को हमेशा साफ-सुथरा और खाली रखना चाहिए। बहुत आवश्यकता हो तो यहां केवल गैर-जरूरी सामान रखने के लिए बंद अलमारी बनाई जा सकती है, लेकिन वहां भी कबाड़ इकट्ठा नहीं होना चाहिए। सीढ़ियों के नीचे पवित्र पौधों को रखने से घर का 'ब्रह्म स्थान' और 'प्राण ऊर्जा' दूषित हो जाती है, जिसका सीधा असर घर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और आपसी रिश्तों की मधुरता पर पड़ता है।घर में कलह और तनाव बढ़ाने वाले अशुभ पौधे, जिन्हें तुरंत हटा देना चाहिएतुलसी और शमी के गलत स्थान के अलावा, वास्तु और फेंगशुई में कुछ ऐसे पौधों का भी जिक्र है, जिन्हें घर के अंदर या बाउंड्री वॉल के भीतर लगाना पूरी तरह वर्जित है। इन पौधों की ऊर्जा इतनी नकारात्मक होती है कि ये हंसते-खेलते परिवार में क्लेश और तनाव पैदा कर देते हैं। सबसे पहले आते हैं कांटेदार पौधे, जैसे कैक्टस (Cactus)। गुलाब को छोड़कर घर में कोई भी कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि कांटों को नकारात्मकता, चुभन और आपसी विवाद का प्रतीक माना जाता है; ये परिवार के सदस्यों के बीच दूरियां और गुस्सा बढ़ाते हैं। दूसरा है बोनसाई (Bonsai) के पौधे, जिन्हें आजकल सजावट के लिए बहुत पसंद किया जाता है। बोनसाई दरअसल पेड़ों के विकास को कृत्रिम तरीके से रोककर उन्हें छोटा रखने की कला है। वास्तु के अनुसार, रुका हुआ विकास घर के सदस्यों की आर्थिक और करियर ग्रोथ को भी रोक देता है। इसके अलावा बबूल, इमली और कपास (Cotton Plant) के पौधे भी घर में कभी नहीं लगाने चाहिए। इमली के पौधे को लेकर मान्यता है कि इस पर नकारात्मक शक्तियों का वास होता है और इसे घर में लगाने से परिवार के लोगों का स्वास्थ्य लगातार खराब रहता है। सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी घर में मृत्यु तुल्य ऊर्जा फैलाते हैं, इसलिए अगर कोई पौधा सूख जाए तो उसे तुरंत घर से बाहर निकालकर किसी नदी या खाली जमीन में विसर्जित कर देना चाहिए।सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए क्या है पौधों की सही दिशा?यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं और अपने घर को पौधों से सजाना चाहते हैं, तो वास्तु के दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद लाभदायक सिद्ध होता है। घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करने के लिए मनी प्लांट (Money Plant), क्रासुला, स्नेक प्लांट, बैंबू प्लांट (Bamboo Plant) और एरेका पाम जैसे पौधे बेहतरीन माने गए हैं। मनी प्लांट को हमेशा घर की दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) में लगाना चाहिए, क्योंकि यह दिशा भगवान गणेश और शुक्र ग्रह की मानी जाती है, जो धन और ऐश्वर्य बढ़ाते हैं। तुलसी माता के लिए हमेशा उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा का चुनाव करें। यह ध्यान रखें कि तुलसी के आस-पास कभी भी गंदगी, जूते-चप्पल या कूड़ेदान नहीं होना चाहिए। पौधों को हमेशा ताजे पानी से सींचें और उनके सूखे पत्तों को नियमित रूप से छांटते रहें। हरे-भरे, स्वस्थ और सही दिशा में रखे गए पौधे न केवल घर के वातावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि वे आपके जीवन में खुशहाली, तनावमुक्ति और अपार आर्थिक सफलता को भी आकर्षित करते हैं।
रोचक हुआ नगांव उपचुनाव: असम में पूर्व बीडीओ देंगी पूर्व डीसी को चुनौती, कांग्रेस ने सिबामोनी बोरा को उतारा
गर्लफ्रेंड की हत्या कर बोरी में भरा शव, बाइक पर ले जा रहा था, पुलिस ने ऐसे धर दबोचा
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक बेखौफ लड़का अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या कर उसकी लाश को खुलेआम बाइक पर लिए चला जा रहा था. लेकिन चेकिंग के दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया.अरिंदम गिरि की रिपोर्ट...
वैश्विक टेक जगत में पिछले कुछ महीनों से छाई मंदी और रिस्ट्रक्चरिंग की काली छाया एक बार फिर गहरा गई है। डेटाबेस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार ओरेकल (Oracle) में अचानक बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने पूरी आईटी इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया है। सामान्य दिनों की तरह जब कर्मचारी सुबह सोकर उठे और अपनी वर्क शिफ्ट शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनके निजी और आधिकारिक इनबॉक्स में कंपनी लीडरशिप का एक ऐसा संदेश आया जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। बिना किसी पूर्व सूचना, परफॉर्मेंस वार्निंग या विदाई मीटिंग के सीधे कर्मचारियों को यह फरमान सुना दिया गया कि आज उनका कंपनी में आखिरी कार्यदिवस है। इस अचानक हुए फैसले से न केवल अमेरिका में मौजूद कॉरपोरेट ऑफिसों में अफरा-तफरी मच गई, बल्कि भारत के बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम जैसे बड़े आईटी हब्स में काम कर रहे हजारों टेक प्रोफेशनल्स की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। हर कोई अब इस बात को लेकर सहमा हुआ है कि क्या यह छंटनी का सिलसिला अब भारतीय दफ्तरों तक भी फैलने वाला है।भोर में 4 बजे लॉगइन बंद, 5:30 बजे स्लैक गायब और फिर आया 6 बजे का खौफनाक संदेशइस छंटनी का तरीका इतना नाटकीय और अप्रत्याशित था कि कर्मचारियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई कर्मचारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स लिंक्डइन, रेडिट के r/employeesOfOracle फोरम और प्रोफेशनल कम्युनिटी ऐप 'ब्लाइंड' पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि घटनाक्रम की शुरुआत तड़के ही हो चुकी थी। सुबह करीब 4 बजे से ही कर्मचारियों के कॉरपोरेट लॉगइन और वीपीएन (VPN) कनेक्शन अपने आप फेल होने लगे। इसके ठीक एक घंटे बाद, यानी सुबह 5 से 5:30 बजे के बीच, टीम कम्युनिकेशन ऐप स्लैक (Slack) से सैकड़ों कर्मचारियों के अकाउंट्स अपने आप डिस्कनेक्ट होने लगे। जो कर्मचारी ऑफिस पहुंच चुके थे, उनके इलेक्ट्रॉनिक एंट्री बैज ने ऑफिस के मुख्य द्वार पर काम करना बंद कर दिया। इसके बाद सुबह ठीक 6 बजे 'ओरेकल लीडरशिप' की ओर से वह बहुचर्चित ईमेल भेजा गया, जिसमें बेहद ठंडे शब्दों में लिखा था—'हम आपकी वर्तमान स्थिति को लेकर कुछ कठिन फैसले साझा कर रहे हैं। कंपनी की व्यापक संगठनात्मक पुनर्संरचना और व्यावसायिक आवश्यकताओं को देखते हुए आपकी भूमिका को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। परिणामस्वरूप, आज ही आपका आखिरी कार्यदिवस है।'परफॉर्मेंस रेटिंग भी नहीं आई काम: 24 साल पुराने सीनियर्स और टॉप परफॉर्मर्स भी बाहरअक्सर कॉरपोरेट जगत में यह माना जाता है कि छंटनी की गाज खराब प्रदर्शन (Low Performance) वाले कर्मचारियों पर गिरती है, लेकिन ओरेकल के इस ताजा फैसले ने इस धारणा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। सोशल मीडिया पर सामने आए बयानों के अनुसार, निकाले गए लोगों में ऐसे प्रोफेशनल्स शामिल हैं जिन्हें हाल ही में शानदार परफॉर्मेंस रेटिंग मिली थी। एचआर टेक्नोलॉजी डिवीजन के एक सीनियर आईसी-4 लेवल कर्मचारी, जिन्हें लगातार उत्कृष्ट रेटिंग मिल रही थी, उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं, ओरेकल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर (OCI) में पिछले चार सालों से काम कर रहे और कभी भी औसत से कम रेटिंग न पाने वाले डेवलपर्स को भी नहीं बख्शा गया। सबसे चौंकाने वाला मामला 24 साल से कंपनी को अपनी सेवाएं दे रहे एक वरिष्ठ क्वालिटी एश्योरेंस (QA) इंजीनियर का सामने आया, जिन्हें बिना किसी फेयरवेल के एक साधारण ईमेल के जरिए कंपनी से रुखसत कर दिया गया। इसके अलावा, टेक्सास के अबिलीन में स्थित स्टारगेट प्रोजेक्ट में कुछ ही महीने पहले जुड़े नए इंजीनियर्स भी इस छंटनी की चपेट में आ गए हैं।क्लाउड, सिक्योरिटी और हेल्थ टेक जैसे कोर डिपार्टमेंट्स पर सबसे बड़ा प्रहारकर्मचारियों द्वारा साझा की गई आंतरिक रिपोर्टों के मुताबिक, इस छंटनी से ओरेकल के लगभग सभी प्रमुख विभाग प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा असर ओसीआई सिक्योरिटी, सीआई/सीडी (CI/CD) पाइपलाइन, एंटरप्राइज इंजीनियरिंग, ऑब्जर्वेबिलिटी, एक्जीक्यूटिव एस्केलेशन और फ्यूजन ईआरपी टीमों पर देखा गया है। इसके अलावा, नेटसुइट सेल्स, कस्टमर सक्सेस सर्विसेज, ओरेकल हेल्थ (पूर्व में सेर्नर), ईपीएम और एचआर टेक्नोलॉजी से भी सैकड़ों कर्मचारियों की आईडी एक झटके में डिएक्टिवेट कर दी गईं। रेडिट पर हुई चर्चाओं में दावा किया गया कि सुबह के चंद घंटों के भीतर कंपनी के आंतरिक स्लैक नेटवर्क से करीब 3,000 से 4,000 एक्टिव यूजर्स की संख्या कम हो गई। हालांकि, ओरेकल प्रबंधन ने इस संबंध में अब तक कोई सार्वजनिक प्रेस रिलीज जारी नहीं की है और न ही निकाले गए कर्मचारियों की सटीक कुल संख्या का खुलासा किया है, जिससे अंदरूनी अनिश्चितता और भी अधिक बढ़ गई है।एआई पर अरबों डॉलर का अंधाधुंध खर्च बनाम कर्मचारियों की कुर्बानियांओरेकल में हो रही इस लगातार छंटनी के पीछे का सबसे बड़ा कारण कंपनी का तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ शिफ्ट होना माना जा रहा है। कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो एक बड़ा विरोधाभास सामने आता है। ओरेकल ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में अपने नेटवर्क विस्तार और डेटा सेंटर्स पर 28.5 अरब डॉलर (करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम पूंजीगत खर्च (CapEx) किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में खर्च किए गए 8.5 अरब डॉलर की तुलना में तीन गुना से भी अधिक है। पूरे वित्त वर्ष के लिए कंपनी का अनुमानित पूंजीगत खर्च 90 से 95 अरब डॉलर के बीच है। यही नहीं, कंपनी को 30 अरब डॉलर से ज्यादा के नए एआई क्लाउड कॉन्ट्रैक्ट्स मिले हैं और उसका फ्यूचर रेवेन्यू बैकलॉग बढ़कर 664 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन इस अंधाधुंध पूंजीगत विस्तार के चलते कंपनी का फ्री कैश फ्लो 5.4 अरब डॉलर नेगेटिव हो गया है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी एआई मॉडल्स और एनवीडिया जीपीयू चिप्स वाले विशालकाय डेटा सेंटर बनाने पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, और इस भारी वित्तीय बोझ व घाटे की भरपाई करने के लिए हजारों कर्मचारियों की नौकरियों की बलि चढ़ाई जा रही है।भारत के आईटी सेक्टर में खौफ: क्या बेंगलुरु और हैदराबाद के सेंटर्स पर गिरेगी अगली गाज?अमेरिकी ऑपरेशंस में छंटनी की यह लहर पूरी होने के बाद अब अगला बड़ा खतरा भारत में काम करने वाले कर्मचारियों पर मंडरा रहा है। टेक विशेषज्ञों और पूर्व के छंटनी पैटर्न्स के अनुसार, जब भी अमेरिकी मुख्यालय में पुनर्गठन होता है, उसके ठीक बाद भारत और ईएमईए (EMEA) रीजन में कटौती का दौर शुरू होता है। ओरेकल के 'इंडिया डेवलपमेंट सेंटर' (IDC) जो कि मुख्य रूप से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और चेन्नई में फैले हैं, वहां के कर्मचारी इस समय भारी असमंजस और डर के साए में हैं। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, भारत में करीब 3,000 से 4,000 कर्मचारियों और कस्टमर सपोर्ट टीमों के लगभग 30 प्रतिशत कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक रही है। मार्च के पिछले राउंड में भी भारतीय कर्मचारियों को इसी तरह के फॉर्मूले के तहत बाहर किया गया था। भारत में पहले से ही फ्रेशर्स और मिड-लेवल इंजीनियर्स के लिए हायरिंग का बाजार धीमा चल रहा है, ऐसे में अगर ओरेकल जैसे बड़े ब्रांड ने भारतीय दफ्तरों से बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला, तो इसका सीधा असर देश के घरेलू टेक रोजगार परिदृश्य पर पड़ेगा।सेवरेंस पैकेज पर सस्पेंस और पर्सनल ईमेल का इंतजार करते बेबस इंजीनियर्सनौकरी से निकाले जाने के बाद कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह खड़ी हो गई है कि उनके आधिकारिक लैपटॉप, ईमेल और कंपनी डेटाबेस का एक्सेस तुरंत काट दिया गया। कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में सख्त हिदायत दी गई थी कि वे कंपनी के किसी भी गोपनीय डेटा को कॉपी, फॉरवर्ड या डाउनलोड न करें। इसके साथ ही उनसे तुरंत एक व्यक्तिगत ईमेल आईडी सबमिट करने को कहा गया, जिस पर डॉक्यूमेंट्स और डॉक्यूमेंट साइनिंग (DocuSign) के लिंक्स भेजे जा सकें। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें विस्तृत सेवरेंस पैकेज (Severance Package) की शर्तें जानने से पहले ही सिस्टम से लॉकआउट कर दिया गया। हालांकि, शुरुआती जानकारियों के अनुसार, डेटाबेस ऑर्गनाइजेशन के चार साल पुराने कर्मचारी को लगभग 7 हफ्तों का सेवरेंस पैकेज ऑफर किया गया है, जबकि भारत में पूर्व में 'N+2' (सेवा के वर्षों के अनुसार तय मुआवजा) का फॉर्मूला लागू किया गया था। इसके बावजूद, अनवेस्टेड स्टॉक ऑप्शंस (RSUs) का रद्द होना और गिरते जॉब मार्केट में नई नौकरी तलाशने का तनाव प्रभावित परिवारों के लिए एक असहनीय मानसिक और आर्थिक आघात बन गया है।
नकली सिक्कों को ऐसे देते थे असली का लुक, रोज 12 हजार की सप्लाई
सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने वाले इंटरस्टेट गैंग का खुलासा होने के बाद पुलिस ने इसके पूरे नेटवर्क और सिक्के तैयार करने का तरीका बताया है. आरोपी लोहे-जस्ता प्लेट से सिक्के का बेस तैयार कर उस पर पीतल की कोटिंग करते थे. इसके बाद डाई और मशीनों से डिजाइन और निशान बनाए जाते थे. पुलिस ने 6400 नकली सिक्के और मशीनें बरामद की हैं.
सिल्क साड़ी...कंधों तक सजा हार, गणेश उत्सव में नीता अंबानी छाईं
Nita Ambani Royal Look For Ganesh Utsav:मुंबई में अंबानी परिवार के घर एंटीलिया में 'गणपति बाप्पा' का भव्य स्वागत हुआ. इस खास मौके पर नीता अंबानी ऑरेंज-मजेंटा शेड की सिल्क साड़ी, कंधों तक फैले रॉयल बिब-नेकलेस और ट्रेडिशनल हेयरस्टाइल में नजर आईं. हाथ जोड़कर 'जय गणेश' के जयकारों के साथ मेहमानों का स्वागत करते हुए उनका ये शाही लुक सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.
दिल्ली से ऋषिकेश, हरिद्वार ही नहीं गढ़वाल के जिलों तक अब तेज रफ्तार से ट्रेनें चलने वाली हैं. ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना इसमें गेमचेंजर साबित होगी. वहीं मेरठ-ऋषिकेश-हरिद्वार नमो भारत ट्रेन भी चलेगी.
अब चाय से लेकर किराना तक... 2,000 रुपए तक के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, सरकार का बड़ा ऐलान
केंद्र सरकार ने कहा कि 2,000 रुपए तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर बैंक किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगा सकेंगे। इसी तरह, रुपे डेबिट कार्ड के जरिए 2,000 रुपए तक किए गए भुगतान पर भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस फैसले से छोटे छोटे ...
हिंदी सिनेमा के मशहूर संगीतकार राजकमल ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार धुनें दीं. “कथा”, “चश्मे बद्दूर” और “सावन को आने दो” जैसी फिल्मों का संगीत आज भी श्रोताओं के बीच अपनी खास जगह रखता है.
योगी कैबिनेट की बैठक आज, किसानों और PRD जवानों को मिल सकता है तोहफा
लखनऊ में मंगलवार को योगी कैबिनेट की अहम बैठक होगी. इस दौरान 18 प्रस्तावों पर फैसला संभव है. बैठक में किसानों, PRD जवानों समेत कई वर्गों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.
गणेशोत्सव: सलमान ने लिया बाप्पा का आशीर्वाद, छाईं नीता अंबानी
अंबानी परिवार के भव्य गणेशोत्सव में बॉलीवुड सितारों का तांता लगा. सलमान खान ने बाप्पा का आशीर्वाद लिया और विक्की-कटरीना ने साथ मिलकर माथा टेका.
बच्चों के लिए घर पर Clay कैसे बनाएं? खेलने में आएगा मजा और रसोई में ही मिल जाएगा सारा सामान
आप चाहें तो अपने बच्चे के लिए घर पर ही क्ले बना सकते हैं. अच्छी बात यह है कि इसे बनाने का सारा सामान आपको अपनी किचन में ही मिल जाएगा. आइए जानते हैं घर पर क्ले बनाने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका-
Rajasthan Nikay Chunav Results: राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों ने इस बार चौंकाया भी है. क्योंकि कई दिग्गज अपने वार्डों में पार्टी की जीत नहीं दिला पाए. अशोक गहलोत के वार्ड में कांग्रेस हार गई, जबकि गजेंद्र सिंह शिखावत के वार्ड में कमल नहीं खिला.
रोजगार: किन शहरों में तेजी से बढ़ रही श्रमिक गतिविधियां, कहां महिलाओं का दबदबा?
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दिवाली से पहले 6 राशियों पर होगी धन की बौछार! बनेगा दुर्लभ संयोग
Grah Gochar 2026: दिवाली 2026 से ठीक पहले ग्रहों के सेनापति मंगल, धन के दाता शुक्र और बुद्धि के कारक बुध मिलकर एक दुर्लभ त्रिग्रही गोचर रचने जा रहे हैं. ज्योतिषियों की मानें तो, इस दुर्लभ संयोग से कुछ राशियों का गोल्डन टाइम शुरू होगा.
सऊदी अरब में मिला यूरेनियम का भंडार! क्या इससे बन जाएगा परमाणु बम?
सऊदी अरब के मदीना में जबल सय्यद प्रोजेक्ट में 110 मिलियन टन यूरेनियम वाले अयस्क और रेयर अर्थ खनिज मिले हैं. ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज ने इसका ऐलान किया है.
बगैर कागज दिखाए दिल्ली से निकले 3 विदेशी, मचा हड़कंप; सरकार ने मीटिंग बुलाई
4 सितंबर की इस घटना ने सरकार और अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, मामले की जांच की जा रही है और एयर इंडिया कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। तीनों यात्री इटली से थे और लुफ्थांसा की फ्लाइट से म्यूनिख रवाना हुए हैं।
अंग्रेजों के देश में विजय थलपति ने कर ली महाडील! 9000 नौकरियां मिलने की उम्मीद
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने ब्रिटेन में कम से कम चार निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें सबसे बड़ा समझौता 11,000 करोड़ रुपये का है, जिससे करीब 7,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पीर पंजाल क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी तंत्र के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाते हुए प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े 'ओवरग्राउंड वर्कर्स' (OGWs) के एक सक्रिय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जो क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देने और रसद सहायता प्रदान करने में लगे हुए थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और पुलिस कार्रवाई पुलिस के एक प्रवक्ता के अनुसार, राजौरी के कोटचरवाल टेरयाथ निवासी जाकिर हुसैन और मोहम्मद आजम तथा जिले के उधन गांव के निवासी मोहम्मद मुश्ताक को क्षेत्र में सक्रिय एक आतंकवादी मॉड्यूल की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी आतंकवादियों को रसद संबंधी सहायता, सुरक्षित आवागमन और जमीनी स्तर पर अन्य मदद मुहैया कराने में शामिल थे। प्रवक्ता ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर मार्गदर्शक के रूप में काम किया और कश्मीर घाटी की ओर आतंकवादी समूहों की आवाजाही में मदद की। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों में से एक की निशानदेही पर एक आईईडी बरामद किया गया है। पीर पंजाल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त राजौरी और पुंछ समेत पूरे पीर पंजाल क्षेत्र में हाल के दिनों में आतंकवादी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में लश्कर-ए-तैयबा के इस नेटवर्क का ध्वस्त होना सुरक्षा बलों की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। पुलिस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की कानूनी और तकनीकी जांच जारी है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन से स्थानीय लोग जुड़े हुए थे तथा इन्हें पाकिस्तान में बैठे आकाओं से किस तरह के निर्देश मिल रहे थे। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन और चौकसी बढ़ा दी है।
अलर्ट: भारत में बिना अनुमति भारी धातु वाली क्रीम बेच रहा पाकिस्ताान, जहरीले रसायन के इस्तेमाल से कैसे बचें?
संजय दत्त ने टिफनी ट्रम्प से इस खास मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की. इसके बाद लोग इस तस्वीर पर खूब कमेंट्स कर रहे हैं.
नेपाल को 18 घंटे बिजली सप्लाई करेगा भारत, फ्लड डैमेज के बाद फैसला
नेपाल में बाढ़ से बिजली उत्पादन प्रभावित होने के बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है. विद्युत मंत्रालय ने 31 दिसंबर तक रोज 18 घंटे नेपाल को बिजली निर्यात करने की मंजूरी दी है.
सऊदी अरब पर फिर हूती विद्रोहियों का हमला! आभा से ताइफ तक दागीं मिसाइलें और ड्रोन
सऊदी अरब की एक अहम तेल पाइपलाइन पर पिछले हफ्ते हमला हुआ था. उसकी मरम्मत में तीन से पांच हफ्ते लग सकते हैं, जिससे वह ज्यादातर समय बंद रहेगी. तेल के दाम पहले ही 2 प्रतिशत बढ़ गए हैं और जैसे-जैसे सऊदी पर संकट बढ़ेगा, तेल बाजार में संकट गहराता जाएगा.
विदाई से पहले मॉनसून का यूटर्न, दिल्ली-यूपी से बिहार-झारखंड तक बारिश; बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम
मॉनसून की विदाई शुरू होने के बावजूद बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव से दिल्ली-यूपी, बिहार, झारखंड और बंगाल समेत कई राज्यों में सितंबर के आखिरी 15 दिनों में बारिश होगी।
आसिफ के कैरेक्टर पर उदिति ने उठाए सवाल! बिग बॉस ने दी सजा
बिग बॉस 20 के दूसरे हफ्ते की शुरुआत काजी तौकीर के वर्कआउट और कॉमेडी से हुई. आसिफ खान और उदिति के बीच छूने को लेकर तीखी बहस छिड़ गई. 3 खिलाड़ियों पर एलिमिनेशन की तलवार लटक रही है.
राशिफल: धन, करियर और प्रेम के मामले में कैसा रहेगा आज का दिन, जानें मेष से मीन तक का हाल
अति उत्साह या आक्रामक रवैया तत्काल लाभ दे सकता है, लेकिन बाद में परेशानी भी खड़ी कर सकता है....
बारिश का कहर: आदि कैलाश यात्रा ठप, हिमाचल में 55 सड़कें बंद; गुजरात में कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी
'AI से दुनिया को खतरा- नया ढोंग है, पर्दाफाश मैं करूंगा', ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मानवता को तबाह करने की आशंकाओं को बेबुनियाद डर बताया है. उन्होंने इसे 'गंदी साजिश' बताया जिसका खुलासा वो खुद करेंगे. ट्रंप का कहना है कि AI और डाटा सेंटर इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक इंजन बन सकते हैं और इन पर प्रतिबंध लगाने से सिर्फ चीन को फायदा होगा.
IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर, आज से प्रशासनिक सेवा से पूरी तरह मुक्त
2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल का इस्तीफा केंद्र सरकार ने मंजूर कर लिया है। 15 सितंबर 2026 से वह प्रशासनिक सेवा से पूरी तरह मुक्त हो गई हैं।
भाजपा से दूरी बनाएंगे टीएमसी के बागी मुस्लिम सांसद, यूसुफ पठान समेत बागी गुट ने साफ किया रुख
पश्चिम बंगाल में 17 बागी सांसदों के BJP में शामिल होने के दावे से सियासत गरमा गई है। यूसुफ पठान और खलीलुर रहमान ने BJP-NDA में शामिल होने से इनकार किया है।
ट्रंप का फिर वसूली वाला फरमान- होर्मुज में सुरक्षा देने के लिए सभी देश मुझे पैसा दें
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में बढ़ती महंगाई की जिम्मेदारी अपनी सरकार से हटाने की कोशिश की. उन्होंने इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को जिम्मेदार बताया है.
राम मंदिर CEO नियुक्ति विवाद पर सामने आया ट्रस्ट का जवाब; तथ्यों के साथ बताया कैसे फाइनल हुआ नाम
अयोध्या राम मंदिर के CEO पद पर एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों के बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने आधिकारिक बयान जारी किया है. ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी और अंतिम चयन से पहले उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया था.
गर्मी खत्म होते ही घर से निकाल दें ये चीजें, वरना बढ़ता रहेगा कबाड़
मौसम बदलते ही सिर्फ अलमारी के कपड़े नहीं, बल्कि घर का कबाड़ भी साफ करना जरूरी है. जानिए कौन-सी वे 6 चीजें हैं जिन्हें गर्मियों के खत्म होते ही फेंक देना या डोनेट कर देना चाहिए ताकि आपका घर साफ-सुथरा और ऑर्गनाइज्ड रहे.
हरभजन सिंह पर बैन लगाकर मचाया बवाल, कौन थे माइक प्रॉक्टर?
15 सितंबर 1946 को दक्षिण अफ्रीका के महान ऑलराउंडर माइक प्रॉक्टर का जन्म हुआ था. सिर्फ 7 टेस्ट खेलने के बावजूद उन्होंने अपनी तेज गेंदबाजी और शानदार बल्लेबाजी से क्रिकेट इतिहास में खास जगह बनाई. प्रॉक्टर ने ही 2007-08 में हरभजन सिंह पर बैन भी लगाया था. जानिए उनके करियर से जुड़ी खास बातें.
अंबानी परिवार में गणेश पूजा, छाईं सचिन की बेटी-बहू, Photos
इस स्टार-स्टडेड शाम में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अपने पूरे परिवार के साथ नजर आए, जहां उनकी बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया चंदोक ने अपनी खूबसूरत पारंपरिक लुक से सभी का ध्यान खींचा.
सानिया बनीं सबसे कम उम्र की पार्षद, भतीजे ने चाचा को हराया
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर नगर पालिका चुनाव में कई बड़े सियासी उलटफेर देखने को मिले. वार्ड 16 में लगातार 8 बार जीत दर्ज कर चुके दिग्गज नजीर सरवरी को नए चेहरे रईश केजीएन ने हरा दिया. वार्ड 17 में कांग्रेस के मोहम्मद मुजम्मिल शेर ने अपने चाचा और पूर्व पार्षद नसीब दाद पठान को 263 वोटों से शिकस्त दी.
बाढ़ से तबाह नेपाल की मदद को आगे आया भारत, रोज 18 घंटे देगा बिजली
नेपाल में भीषण बाढ़ से बिजली परियोजनाओं को नुकसान के बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत 13 सितंबर से 31 दिसंबर तक नेपाल को रोज करीब 18 घंटे बिजली देगा।
UCC पर भाजपा का कितना साथ देंगे NDA के सहयोगी? 3 साथियों ने बढ़ाई टेंशन, क्या कह दिया
UCC पर अमित शाह के 2029 से पहले 21 BJP-NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के दावे के बाद TDP, JDU और चिराग पासवान ने सावधानी भरा रुख अपनाया। जानें सहयोगी दलों ने UCC पर क्या कहा।
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: 200 से अधिक उपयोगी मामलों की हुई पहचान, किन क्षेत्रों में आएगा बदलाव?
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: 200 से अधिक उपयोगी मामलों की हुई पहचान, किन क्षेत्रों में आएगा बदलाव?
यमन के हूतियों ने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशैत स्थित सैन्य एयरबेस पर हमला कर दिया है. हूतियों ने इस कार्रवाई को यमन में हाल में हुए सऊदी हवाई हमलों का जवाब बताया है. हूतियों के हमले के बाद सऊदी ने खमीस मुशैत, आभा और ताइफ सहित कई दक्षिणी शहरों में इमरजेंसी अलर्ट जारी किया. इस हमले में 13 नागरिकों के घायल होने की खबर है,
Gujarat के Kutch और Banaskantha में सड़क विकास के लिए 692 करोड़ रुपये मंजूर
गुजरात सरकार ने औद्योगिक और कृषि उत्पादों के लिए ग्रामीण इलाकों में सम्पर्क बेहतर बनाने के उद्देश्य से सोमवार को कच्छ और बनासकांठा जिलों में ‘हाई-स्पीड कॉरिडोर’ पहल के तहत 692 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी। एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कच्छ में तीन सड़कों को सात मीटर से 10 मीटर तक चौड़ा और उन्नयन करने के लिए 363 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इन सड़कों में पांध्रो-नारायण सरोवर रोड, लखपत-नारायण सरोवर रोड और दयापर-सुभाषपर-पांध्रो रोड शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि सड़कों को बेहतर बनाने से नारायण सरोवर और कोटेश्वर जैसे तीर्थ स्थलों और आस-पास के पर्यटन स्थलों तक की यात्रा सुगम होने की उम्मीद है, जिससे इस इलाके में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, बनासकांठा में सिहोरी-पाटन सड़क के लिए 229 करोड़ रुपये और आवंटित किए गए हैं। इस सड़क को भी चौड़ा करके 10 मीटर का किया जाएगा और इसे चार लेन वाली सड़क के रूप में उन्नयन किया जाएगा। विज्ञप्ति के अनुसार, इससे ग्रामीणों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पास के औद्योगिक और वाणिज्यिक इलाकों में जाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही सुरक्षित और तेज गति से होगी।
पड़ोसी देश में बिजली के लिए हाहाकार; भारत बना मसीहा; हर दिन 18 घंटे देगा सप्लाई
26 अगस्त को नेपाल में आई बाढ़ से सात बड़ी हाइड्रोपावर परियोजनाओं और पांच सौर संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है। इससे कुल मिलाकर लगभग 275 मेगावाट बिजली आपूर्ति में रुकावट आ गई है। अब भारत संकट की घड़ी में सामने आया है।
'जितेंद्र मिश्र ने दिया था इंटरव्यू...', ट्रस्ट ने CEO चयन प्रक्रिया पर दी सफाई
राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने CEO चयन प्रक्रिया को लेकर चल रहे दावों को गलत बताया है. ट्रस्ट के मुताबिक 5,585 आवेदनों में से 16 उम्मीदवार अंतिम दौर में पहुंचे थे, जिनमें जितेंद्र मिश्रा भी शामिल थे.
शहरी विकास: क्या इसरो की मदद से बनेगा शहरों का बेहतर मास्टर प्लान; कैसे बदलेगा पूरा नक्शा?
शहरी विकास: क्या इसरो की मदद से बनेगा शहरों का बेहतर मास्टर प्लान; कैसे बदलेगा पूरा नक्शा?
Oracle छंटनी: सुबह आंख खुली और चली गई नौकरी, लोगों का छलका दर्द
Oracle ने एक बार फिर से अपनी कंपनी में छंटनी कर दी है. इससे पहले कंपनी ने 21,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था और अब फिर कंपनी ने नए दौर की छंटनी शुरू कर दी है. सोमवार को सुबह-सुबह आंख खोलते ही कई लोगों को नौकरी जाने का ईमेल रिसीव हुआ.
EPFO की नई सुविधा, WhatsApp पर पाएं PF खाते की जानकारी
EPFO ने सदस्यों और पेंशनर्स के लिए आधिकारिक WhatsApp चैनल शुरू किया है. इसके जरिए PF और EPFO से जुड़े जरूरी अपडेट और सेवाओं की जानकारी मिल सकेगी. सदस्य QR कोड या आधिकारिक लिंक से चैनल से जुड़ सकते हैं. वीडियो में जानें इस WhatsApp चैनल पर क्या सेवाएं मिलेंगी.
जापानी छात्रों से मिले CM Vishnu Deo Sai, कहा- भारत-जापान के रिश्ते आध्यात्मिक विरासत से जुड़े
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारत और जापान की मित्रता की जड़ें दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मुख्यमंत्री साय से रविवार देर रात जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी से आए 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। भारत-जापान छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर छत्तीसगढ़ पहुंचे विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री साय ने संवाद किया। इस दौरान भारत और जापान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों, बौद्ध विरासत, शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप तथा दोनों देशों के युवाओं के बीच बढ़ते संवाद सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। साय ने जापानी छात्र-छात्राओं का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान की मित्रता की जड़ें दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। समय के साथ यह संबंध संस्कृति और आध्यात्मिकता से आगे बढ़कर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक सहयोग के अनेक क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ है। साय ने कहा कि भारत और जापान आज परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय के साथ विश्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सम्मान की मजबूत नींव है। युवाओं तथा विद्यार्थियों के बीच इस प्रकार के शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से यह संबंध आने वाली पीढ़ियों में और अधिक मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है। भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और मानव कल्याण के संदेश ने दुनिया के अनेक देशों को प्रभावित किया और जापान की संस्कृति में भी बौद्ध दर्शन की गहरी छाप दिखाई देती है। यही साझा आध्यात्मिक विरासत भारत और जापान को एक विशिष्ट सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ती है। उन्होंने जापानी विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक विरासत की जानकारी देते हुए सिरपुर, मैनपाट और भोंगापाल जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी के तट पर स्थित सिरपुर छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता, कला, स्थापत्य और बौद्ध विरासत का अद्भुत केंद्र है। यहां प्राप्त पुरातात्विक अवशेष प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और विभिन्न संस्कृतियों के समन्वय की कहानी बताते हैं। साय ने कहा, ‘‘राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया में नयी पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सिरपुर को विश्वस्तरीय ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाले विद्यार्थी, शोधार्थी और पर्यटक छत्तीसगढ़ आएं, यहां की विरासत को जानें और प्रदेश के साथ ज्ञान एवं संस्कृति का एक स्थायी संबंध स्थापित करें।’’अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री साय ने अपनी जापान यात्रा से जुड़े अनुभव भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने जापान की अनुशासित कार्यसंस्कृति, तकनीकी प्रगति और अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान ने आधुनिक विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को जिस प्रकार सहेजकर रखा है, वह प्रेरणादायी है। इस दौरान जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव भी साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि यहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों के सहज एवं आत्मीय व्यवहार ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। विद्यार्थियों ने भारतीय खान-पान की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान उन्हें गणेश उत्सव की परंपराओं और उसके सांस्कृतिक महत्व को करीब से जानने का अवसर मिला। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल ने एनआईटी रायपुर के विभिन्न रिसर्च सेंटर और इन्क्यूबेशन सेंटर का भी भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने वहां संचालित स्टार्टअप की गतिविधियों, अनुसंधान परियोजनाओं और विकसित की जा रही नई तकनीकों की जानकारी ली।
पुष्य नक्षत्र में मंगल करेंगे धमाल, 5 राशियां जीएंगी राजा की जिंदगी!
Mangal Nakshatra Parivartan 2026: 24 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक साहस और ऊर्जा के कारक मंगल ग्रह 'नक्षत्रों के राजा' पुष्य में विराजमान रहेंगे. इस दौरान कई राशियों का अच्छा टाइम शुरू होगा.
दिल्ली, यूपी, बिहार समेत 22 राज्यों में होगी भारी बारिश, IMD ने जारी किया हाई अलर्ट!
दिल्ली, यूपी, बिहार समेत 22 राज्यों में होगी भारी बारिश, IMD ने जारी किया हाई अलर्ट!
ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस भी नहीं, बुरे वक्त में दिया झटका; फोन मिलाती रह गईं
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद नंदीग्राम में उपचुनाव हो रहे हैं। यहां से ममता बनर्जी ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है। खबरें हैं कि ममता बनर्जी ने उपचुनाव के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन का प्रस्ताव दिया था।

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