US: मिनियापोलिस में गोलीबारी, 2 पुलिस अधिकारी समेत कई जख्मी
मिनियापोलिस पुलिस ने आम लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की चेतावनी दी है. एफबीआई भी एक्शन में आ गई है और वह संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है.
NHRC ने Gujarat सरकार को दिया निर्देश, पीड़ित महिला को दें 7.5 लाख रुपये मुआवजा
अहमदाबाद, दो सितंबर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बुधवार को गुजरात सरकार को निर्देश दिया कि कथित जालसाजी के मामले में गिरफ्तारी के बाद सार्वजनिक रूप से घुमाई गई महिला को मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए 7.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। पायल गोटी को 2024 के अमरेली फर्जी पत्र मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। यह आदेश गांधीनगर में आयोग की दो दिन की खुली सुनवाई के दौरान एनएचआरसी की एक पीठ ने दिया, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन और सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी और विजया भारती सयानी शामिल थे। गोटी के वकील बृज शेठ ने कहा कि आयोग ने पाया कि उनकी गिरफ्तारी के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आयोग ने यह भी गौर किया कि पुलिस ने गोटी की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया था और बाद में सी समरी रिपोर्ट (मामला वापस लेने की मांग करते हुए) दाखिल की थी। सेठ ने कहा, राज्य सरकार को पायल-बेन को मुआवज़े के तौर पर 7.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया गया है। गोटी और तीन अन्य लोगों को दिसंबर 2024 में अमरेली तालुका पंचायत अध्यक्ष के नाम कथित तौर पर जारी किए गए फर्जी पत्र को तैयार करने और प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस पत्र के जरिये भाजपा विधायक एवं मंत्री कौशिक वेकारिया को बदनाम करने का प्रयास किया गया था। कंप्यूटर ऑपरेटर गोटी पर आरोप था कि उन्होंने दस्तावेज को टाइप करने, प्रिंट करने और पीडीएफ में बदलने में मदद की थी, जिसके बाद इसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया। आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, गलत सूचना फैलाने और मानहानि से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। महिला का आरोप है कि उसे आधी रात के आस-पास हिरासत में लिया गया था, जबकि प्राथमिकी बाद में सुबह करीब 5:30 बजे दर्ज की गई। उसने दावा किया कि उसे स्थानीय अपराध शाखा के कार्यालय में रखा गया था। गोटी ने दावा किया कि इसके अलावा, अमरेली के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने एक संवादादाता सम्मेलन में उनकी पहचान उजागर की और अगले दिन घटना के नाटकीय रुपांतरण के नाम पर उन्हें और अन्य आरोपियों को अमरेली शहर में घुमाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई। गोटी को जनवरी 2025 में जमानत मिल गई थी।
इस देश में कहर बरपा रहा इबोला, 3000 से अधिक मौतें, हजारों संक्रमित
इबोला वायरस के तेजी से फैलने का असर आम लोगों के जीवन पर भी पड़ा है. यह बीमारी हर किसी को खतरे में डाल रही है और रोजमर्रा की जिंदगी लगभग थम सी गई है.
Manoj Jarange ने सलाइन और पानी लेने पर दी सहमति, अनशन रहेगा जारी
जालना (महाराष्ट्र), दो सितंबर महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बुधवार शाम सरकार की ओर से उनसे मिलने पहुंचे भाजपा विधायक प्रसाद लाड के आग्रह के बाद पानी पीने और सलाइन चढ़वाने पर सहमति जताई। हालांकि, जरांगे ने कहा कि सभी मांगें पूरी होने तक उनका अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा। मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर जरांगे की भूख हड़ताल बुधवार को पांचवें दिन में प्रवेश कर गई। जरांगे ने 29 अगस्त को जालना जिले के अंतरवाली सराटी में अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी मांगों में मराठाओं के लिए आरक्षण और गजट रिकॉर्ड के आधार पर तुरंत कुनबी प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है। इसके अलावा भी उन्होंने कई अन्य मांगें रखी हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसे मुंबई तक ले जाया जाएगा। जरांगे ने कहा, ‘‘मैं पानी पी रहा हूं और सलाइन चढ़वा रहा हूं, लेकिन जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, मैं अनशन वापस नहीं लूंगा।’’उन्होंने बताया कि प्रसाद लाड के आग्रह पर वह इलाज कराने के लिए तैयार हुए। हालांकि, जरांगे ने भाजपा नीत राज्य सरकार की आलोचना करते हुए दावा किया कि मराठा आरक्षण का मुद्दा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच इसका श्रेय लेने की राजनीतिक खींचतान में फंस गया है। इस बीच, चिकित्सकों ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और जालना की जिलाधिकारी ने उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। जरांगे के स्वास्थ्य मानकों की जांच करने वाले एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि उनके रक्त शर्करा का स्तर गिर गया है। जालना की जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने मंगलवार रात जरांगे से प्रदर्शन स्थल पर मुलाकात की थी। यह मुलाकात उन्हें अनशन खत्म करने के लिए राजी करने की राज्य सरकार की कोशिशों के तहत हुई। बैठक के दौरान मित्तल ने मराठा आरक्षण को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। जरांगे ने हालांकि सवाल किया कि क्या वह सरकार का पक्ष रखने आई हैं। उन्होंने मित्तल से इस मामले में हस्तक्षेप न करने का आग्रह करते हुए कहा कि उनकी मांगों से जुड़े फैसले राज्य स्तर पर लिए जाने हैं। जरांगे ने मित्तल से कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने मित्तल से यह भी कहा कि आंदोलन के सिलसिले में वह दोबारा उनसे मिलने न आएं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेवजह उन्हें उनके साथ बातचीत करने के लिए भेज रही है। जरांगे ने दावा किया है कि मराठाओं और कुनबियों के बीच वंशावली संबंध स्थापित करने वाले 58 लाख रिकॉर्ड मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस संख्या को कम करने की कोशिश कर रही है। उनकी प्रमुख मांग है कि मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए और शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण का लाभ उन्हें भी दिया जाए। पिछले साल 29 अगस्त को आजाद मैदान में जरांगे के विरोध-प्रदर्शन के कारण यातायात अवरुद्ध हो गया था। राज्य सरकार द्वारा आठ में से छह मांगें मान लेने और कुनबी जाति प्रमाण-पत्र जारी करना शुरू करने के बाद दो सितंबर को यह प्रदर्शन वापस ले लिया गया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि सरकार संवैधानिक रूप से वैध और कानूनी तौर पर व्यावहारिक मांगों पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन ऐसी मांगों पर नहीं जो उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करती हों। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को कहा था कि ‘महायुति’ सरकार किसी अन्य वर्ग के साथ अन्याय किए बिना मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। शिंदे ने कहा था कि कानून के दायरे में जो भी उचित और न्यायसंगत होगा, सरकार उसे उपलब्ध कराने के लिए सकारात्मक रुख रखती है। उन्होंने जरांगे से ‘‘रचनात्मक रुख’’ अपनाने की अपील की।
एनडीए की नई टीम की आहट: मंत्रालय फेंटे जाएंगे, शिक्षा मंत्रालय हॉट सीट; 70 पार वाले निशाने पर?
एनडीए की नई टीम की आहट: मंत्रालय फेंटे जाएंगे, शिक्षा मंत्रालय हॉट सीट; 70 पार वाले निशाने पर?
बरेली में फिर से 140 दुकानों और घरों पर चलेगा बुलडोजर, जानिए क्यों
बुलडोजर एक्शन के खौफ के बीच स्थानीय लोगों को प्रशासन की तरफ से 15 दिन का समय दिया गया है. यदि घर के स्वामी खुद ही अतिक्रमण हटाते हैं तो कोई कार्रवाई नहीं होगी. यदि समय पर नहीं हटाते हैं तो फिर एक्शन लिया जाएगा.
न्यूज डायरी: वंदे भारत में एग्जीक्यूटिव क्लास से हटेंगी 180 डिग्री घूमने वाली सीटें, रेलवे ने दिया प्रस्ताव
पहाड़ से मैदान तक आफत की बारिश: अगले 4 दिन और बरसेगा पानी, 12 से अधिक राज्यों में अलर्ट; भूस्खलन से रास्ते बंद imd-weather-alert-heavy-rain-expected-over-next-4-days-more-than-12-states-landslide
लगातार छठे दिन भी सोने- चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, जानिए ताजा रेट!
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'...तो फिर ईरान पर एक और भीषण हमला होगा', ट्रंप ने दे डाली वार्निंग
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपने रडार और मिसाइल प्रणालियों को दोबारा तैयार करने की कोशिश कर रहा था. इसी वजह से अमेरिका ने उस पर अटैक किया और ईरान को जबर्दस्त चोट पहुंचाई.
'शिक्षा अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं': जनजातीय छात्रों से मुलाकात कर बोले राहुल गांधी; क्या हैं उनकी मांगें?
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में दोषी को बरी किया, जेल से तत्काल रिहाई के आदेश; अधूरी जांच पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक नाबालिग बच्चे के कथित यौन उत्पीड़न और हत्या मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया।
घूस ले रहे थे BMC के इंजीनियर और कर्मचारी, ACB ने यूं दबोचा
एसीबी अधिकारियों ने आरोपियों को फंसाने के लिए खास प्लानिंग की. जब पाटिल शिकायतकर्ता से 60 हजार रुपये घूस लेते हुए पकड़ा गया, तो एसीबी के अफसरों ने नीरव कुमार को भी कार्यालय से गिरफ्त में ले लिया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘अपार आइडी’ प्रत्येक छात्र को एक विशिष्ट और जीवनभर की डिजिटल शैक्षणिक पहचान प्रदान करेगी।
डीएमएफ घोटाला: सतपाल को कमीशन में मिले 31 करोड़, ईडी ने कमीशनखोरी के मामले में रिमांड पर लिया
छत्तीसगढ़ में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड में कथित गड़बड़ी और कमीशनखोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है।
महाराष्ट्र: मुंबई से कोंकण के लिए अब रोज ट्रेन, आज फडणवीस सीएसएमटी से सेवा का करेंगे उद्घाटन
महाराष्ट्र: मुंबई से कोंकण के लिए अब रोज ट्रेन, आज फडणवीस सीएसएमटी से सेवा का करेंगे उद्घाटन Maharashtra updates mumbai to Konkan new train Devendra Fadnavis education politics crime other news
राजस्थान के रामपुरा (कंवरपुरा) गांव में स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की बेहद जर्जर और असुरक्षित इमारत को बुधवार को प्रशासन द्वारा ढहा दिया गया।
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का आयात कोटा नहीं पूरा, फिर मंगाए नये आवेदन
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का आयात कोटा नहीं पूरा, फिर मंगाए नये आवेदन
'हिंदू अफसरों को धमकी क्यों नहीं...' कश्मीरी पंडितों पर फारूक अब्दुल्ला का बड़ा दावा
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने बुधवार को आरोप लगाया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाला प्रशासन घाटी में कश्मीरी पंडितों को धमकियां दिलवा रहा है, ताकि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने से वंचित रखा जा सके।
'कोई भी मुल्क हो, यदि ईरान के साथ कारोबार किया तो...' रुबियो ने चेताया
मार्को रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ऐसी व्यवस्था बनाने में ईरान की मदद ना करे, जिसके जरिए ईरान पैसा कमा सके. फिर उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को समर्थन देने या परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में करे.
दूर बैठा दुश्मन भी खाएगा खौफ: खगंतक-243 का सफल परीक्षण, स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम कैसे बढ़ाएगा सैन्य ताकत? iaf-successfully-tests-indigenous-long-range-glide-bomb-khagangtak-243
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देहरादून: कई वाहनों को टक्कर मारने के बाद दुकान में जा घुसी कार- VIDEO
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि कार महिला चला रही थी. अचानक उसने वाहन पर नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद कार सीधे दुकान में जा घुसी.
क्या अर्धसैनिक बलों में नेतृत्व के लिए योग्य अधिकारी नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति और बल के अपने अधिकारियों की वरिष्ठता विवाद पर केंद्र सरकार से सवाल किया।
सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की 70 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज, सीवीसी रिपोर्ट में खुलासा
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल सरकारी संस्थाओं के खिलाफ 70,500 से अधिक भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलीं।
देश के सभी राज्यों में दौड़ेगी बाइक टैक्सी? गडकरी का नया प्लान तैयार, ट्रैफिक नियम पर किया बड़ा एलान
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी सेवाओं को अनुमति देने की अपील की।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में करीब 100 से 125 साल पुराने हिन्दू मंदिर को कथित तौर पर गिराए जाने के मामले में भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल के खिलाफ “निंदनीय तोड़फोड़ की कार्रवाई” करार दिया है।
नेपाल में विनाशलीला... भारत में पहाड़ों पर कहर क्यों टूट रहा? देखें दस्तक
कैसे नेपाल में विनाशलीला के बाद, भारत में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों इलाकों में अचानक बाढ़ आ रही हैं. भारी बारिश हो रही है, भूस्खलन हो रहा है. अब सवाल ये है कि, आखिर, मौसम में अचानक से आए इस बदलाव का मतलब क्या है? जब नेपाल त्रासदी की चर्चा दुनियाभर में हो रही है. ऐसे में चर्चाओं का दौर भी शुरु हो गया है. देखें दस्तक.
Pushkar Singh Dhami ने 26 अल्पसंख्यक संस्थानों को दी मान्यता, बाजपुर में 5 मदरसे सील
देहरादून, दो सितंबर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र सौपे जबकि उधमसिंह नगर जिले के बाजपुर में बिना मान्यता के संचालित हो रहे पांच मदरसों को सील कर दिया गया। यहां आयोजित कार्यक्रम ‘‘नई पहचान, नया सम्मान-आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य’’ में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा 26 संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने को मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों और निर्णयों का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा वर्ग को निशाना बनाना नहीं है बल्कि सभी को बिना भेदभाव के समान अवसर उपलब्ध कराना है। आज मान्यता प्रमाण पत्र पाने वाले संस्थानों में देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों के मदरसों सहित अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान शामिल हैं। उधर, उधमसिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में बिना आवश्यक मान्यता एवं दस्तावेजों के संचालित हो रहे पांच मदरसों को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान संबंधित मदरसा संचालक आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सके जिसके बाद बाजपुर की एसडीएम ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल की मौजूदगी में उन्हें सील कर दिया गया। प्रशासन द्वारा सील किए गए मदरसों में बाजपुर का मदरसा जामिया हनफिया रजाउत उलूम, मदरसा जामिया फातिमा, कनोरा का मदरसा गुलशने इस्लाम, केलाखेड़ा-बाजपुर में गांधीनगर मोहल्ला में स्थित मदरसा मोइनुल उलूम तथा बाजपुर का मदरसा हुज्जतुल इस्लाम शामिल हैं। एसडीएम ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्र में मदरसों का निरीक्षण और जांच-पड़ताल की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों के पास निर्धारित मान्यता अथवा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच, राज्य में लागू नई मदरसा शिक्षा व्यवस्था और मान्यता संबंधी प्रावधानों के खिलाफ कुछ मदरसा संचालकों ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय का रूख किया है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय में दलील दी है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तथा शिक्षा बोर्ड से मान्यता की अनिवार्यता के चलते कई मदरसों के सामने संचालन संबंधी कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि जिले में मदरसों का निरीक्षण अभियान जारी है और जिन संस्थानों ने निर्धारित प्राधिकरण से मान्यता नहीं ली है या आवश्यक मानकों और नियमों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि बच्चों को उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखते हुए उन्हें आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना ही नयी व्यवस्था की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मदरसों को भी निर्धारित शैक्षणिक मानकों और नियमों का पालन करना होगा। धकाते ने कहा कि उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
अब मिग-21 नहीं गोवा की एयरलाइन के विमान उड़ाएंगे कैप्टन अभिनंदन, पाकिस्तान के छुड़ा दिए थे छक्के
भारतीय वायु सेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन और वीर चक्र से सम्मानित अभिनंदन वर्तमान गोवा की रीजनल एयरलाइन फ्लाई91 में पायलट के तौर पर शामिल हुए हैं। अब वह छोटे विमान उड़ाएंगे।
केंद्र सरकार ने भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि और फरक्का बांध को लेकर बिहार की चिंताओं का संज्ञान लिया है।
पीड़ितों की मदद के लिए राहत सामग्री लेकर पहुंचे सोनू सूद
नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद वहां के हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. ऐसे संकट के समय में हमेशा लोगों की मदद के लिए आगे रहने वाले बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता सोनू सूद एक बार फिर मसीहा बनकर सामने आए हैं. वह खुद जमीनी स्तर पर जाकर प्रभावित लोगों की सहायता कर रहे हैं. सोनू सूद पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए नेपाल के त्रिशूली इलाके में पहुंच चुके हैं. सोनू सूद ने त्रिशूली में स्थानीय लोगों और आपदा से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने उन लोगों को जरूरी खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं वितरित कीं जो इस प्राकृतिक आपदा के कारण सब कुछ खो चुके हैं. उनकी टीम भी इस राहत कार्य में सक्रियता से जुटी हुई है.इस मानवीय पहल की सोशल मीडिया और हर जगह खूब सराहना हो रही है. संकट की इस घड़ी में सोनू सूद का यह कदम सराहनीय है, जिससे नेपाल के पीड़ितों को तुरंत राहत मिल सकी है. वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके. उनके इस प्रयास ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल पर्दे पर ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी एक सच्चे नायक हैं.
‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ में देश की आर्थिक स्थिति से लेकर वोटर लिस्ट और ‘वोट चोरी’ के आरोपों तक कई अहम राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। सबसे पहले GDP ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर बहस हुई, जहां 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के 2.6 प्रतिशत के दावे पर मेहमानों ने अपनी-अपनी राय रखी।
नेपाल की सुरंगों में जिंदगी बचाने की जंग
नेपाल में इस समय एक बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. यह बचाव अभियान एक ऐसी सुरंग के भीतर हो रहा है जहां परिस्थितियां बहुत ही ज्यादा विकट हैं. सुरंग के अंदर पूरी तरह से घुप्प अंधेरा छाया हुआ है और उसमें भारी मात्रा में पानी भरा हुआ है. इस विकट स्थिति में भी नेपाल की रेस्क्यू टीम के वीर जवान अपनी जान की परवाह न करते हुए लगातार काम में जुटे हुए हैं.
मांझी और चिराग पासवान के बीच अनुसूचित जाति आरक्षण में 'कोटे के भीतर कोटा' को लेकर विवाद गहरा गया है, जो दलित राजनीति में हिस्सेदारी और नेतृत्व की नई लड़ाई को दर्शाता है।
मथुरा में कल सजेगा ‘पंचायत आजतक’ का महामंच, यूपी चुनाव पर सियासी चर्चा
3 सितंबर को मथुरा में ‘पंचायत आजतक’ का महामंच सजेगा. सीएम योगी आदित्यनाथ, मंत्री, सांसद, विपक्षी नेता, धर्मगुरु और वकील यूपी की सियासत, हिंदुत्व, मथुरा समेत चुनावी मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
जापान की रेटिंग एजेंसी जेसीआर ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को 'ट्रिपल बी प्लस' से बढ़ाकर 'ए माइनस' कर दिया है।
अलकनंदा से सतलुज तक... नदियों के नाम पर रखे जा रहे भारतीय भाषाओं की किताबों के नाम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एनसीईआरटी भारतीय भाषाओं की पाठ्यपुस्तकों का नाम देश की नदियों पर रख रही है।
नए हैरी पॉटर की हॉगवर्ट्स में एंट्री, शुरू हुआ जादुई सफर
HBO की नई हैरी पॉटर सीरीज का टीजर ट्रेलर रिलीज हो गया है, जिसमें नए कलाकारों के साथ हॉगवर्ट्स की जादुई दुनिया की झलक दिखाई गई है.
ऑपरेशन सिंदूर के हीरो कैसे बने राम मंदिर के CEO... जितेंद्र मिश्र के चुने जाने की तीन बड़ी वजह
राम मंदिर ट्रस्ट में हुए बड़े बदलाव के बीच जितेंद्र मिश्र को पहली बार बनाए गए CEO पद की जिम्मेदारी मिली है. आखिर उन्हें ही क्यों चुना गया, जानिए इसके पीछे की कहानी.
भारत ने नेपाल भेजी मदद की 5वीं खेप, बचाव दल और 5.5 टन दवाएं शामिल
तिब्बत में ग्लेशियर फटने से नेपाल में आई भीषण बाढ़ से निपटने के लिए भारत ने सहायता की पांचवीं खेप भेजी है, जिसमें बचाव दल और 5.5 टन दवाएं शामिल हैं।
बच्चे-बुजुर्ग नहीं खाते कुंदरू? अमचूर डालकर बनाएं चटपटे भरवां कुंदरू
Bharwan Kundru: अगर आप भी रोज-रोज वही दाल या आलू की सब्जी खाकर बोर हो चुके हैं तो आज हम आपको भरवां कुंदरू की बहुत टेस्टी रेसिपी बता रहे हैं. कुंदरू खाने में अक्सर बच्चे नखरे करते हैं लेकिन अगर आप इसे अलग ट्विस्ट देकर बनाएंगे तो ये बहुत टेस्टी लगते हैं.
भारतीय वायुसेना ने खगंतक-243 ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया, आत्मननिर्भरता में नया मुकाम
आईएएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि खगंतक-243 के परीक्षण ने सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह भारतीय वायुसेना और भारतीय उद्योग के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है।
अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल अटैक 18 की मौत, 108 घायल
वेस्ट एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया है. अमेरिकी सेना ने ईरान के कई इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें 18 लोगों की मौत और 108 घायल हुए हैं.
दुनिया के वस्त्र इतिहास और पारंपरिक हस्तशिल्प की जब भी बात होती है, तो कुछ ऐसी कलाएं सामने आती हैं जो सदियों का सफर तय करके आज भी अपनी चमक बनाए हुए हैं। ऐसी ही एक अनूठी और चमत्कारी छपाई की कला है 'अजरख प्रिंट', जिसका इतिहास आज का नहीं बल्कि करीब चार हजार साल पुराना है। इस प्राचीन कला के साक्ष्य और अवशेष हमें सीधे तौर पर सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातात्विक उत्खनन से जुड़े स्थलों से मिलते हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि मोहनजोदड़ो की ऐतिहासिक खुदाई के दौरान एक मूर्ति मिली थी जिसके कंधों पर जो शॉल या चादर पड़ी हुई थी, उस पर त्रिफोलियो (Trefoil) डिजाइन और ज्यामितीय पैटर्न उकेरे गए थे, जो आज के आधुनिक अजरख प्रिंट से हूबहू मेल खाते हैं। इस बात से यह साफ हो जाता है कि यह कला इंसानी सभ्यता के शुरुआती दौर से ही कपड़ा बुनाई और रंगाई की दुनिया में अपनी गहरी जड़ें जमा चुकी थी। सिंध क्षेत्र से शुरू हुआ यह सफर सदियों का रास्ता तय करते हुए सरहद पार कर भारत के कच्छ और राजस्थान के रेगिस्तानी अंचलों तक आ पहुंचा, जहाँ के कारीगरों ने इसे अपनी मेहनत और साधना से जीवित रखा।कैसे पड़ा इस अनूठी कला का नाम 'अजरख' और क्या है इसके पीछे की दिलचस्प लोककथा'अजरख' शब्द की उत्पत्ति और इसके नामकरण के पीछे भी कई दिलचस्प कहानियां और ऐतिहासिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। एक लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, अरबी भाषा में 'अज्रक' शब्द का अर्थ 'नीला' होता है, क्योंकि इस पूरी छपाई और रंगाई की प्रक्रिया में नील के रंग यानी इंडिगो की भूमिका सबसे मुख्य होती है। वहीं दूसरी स्थानीय किवंदती यह भी कहती है कि जब इस कला के एक कारीगर ने पहली बार इस जटिल और सुंदर कपड़े को तैयार करके अपने राजा या उस्ताद को दिखाया, तो उन्होंने इसे देखकर कहा था 'आज रख', जिसका मतलब होता है कि इस अद्भुत कला को संभाल कर आज ही रख लो। समय बीतने के साथ यह नाम 'अजरख' के रूप में प्रसिद्ध हो गया। यह कला केवल कपड़ों पर की जाने वाली कोई साधारण छपाई नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही एक ऐसी साधना है जिसमें रेगिस्तान की मिट्टी, पानी के रासायनिक गुण, प्राकृतिक जड़ी-बूटियां और कारीगरों की उंगलियों का हुनर आपस में इस तरह घुल-मिल जाता है कि कपड़ा देखते ही बनता है।सरहद पार कर राजस्थान के रेगिस्तान तक पहुंची कला और बाड़मेर का अजरख प्रिंटसिंधु घाटी और पाकिस्तान के सिंध प्रांत से ताल्लुक रखने वाली यह कला समय के साथ सरहद पार कर भारत के गुजरात के कच्छ और राजस्थान के पश्चिमी छोर पर बसे बाड़मेर जिले तक पहुंच गई। बाड़मेर के बलोतरा और आसपास के इलाकों में खत्री समुदाय के लोगों ने इस कला को अपने सीने से लगाकर इस तरह सहेजा कि आज यह पूरी दुनिया में 'बाड़मेर के अजरख प्रिंट' के नाम से अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। राजस्थान के इस गर्म और शुष्क रेगिस्तानी इलाके में पानी की कमी और चिलचिलाती धूप के बावजूद कारीगरों ने अपनी मेहनत से इस छपाई को जीवित रखा। चूंकि इस छपाई में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है, इसलिए यहाँ की मिट्टी और पानी की प्राकृतिक प्रकृति इन रंगों को और अधिक पक्का तथा चमकदार बना देती है। सरहद के दोनों तरफ भले ही राजनीतिक दीवारें खींच दी गई हों, लेकिन अजरख की यह प्राचीन सांस्कृतिक विरासत आज भी दोनों देशों के साझा इतिहास और कला प्रेम की एक सुंदर और जीवंत मिसाल पेश करती है।सोलह चरणों की बेहद जटिल प्रक्रिया, जिसमें प्रकृति के तत्वों का होता है अनोखा इस्तेमालअजरख प्रिंट को तैयार करना कोई आसान काम नहीं है, बल्कि यह सोलह चरणों से गुजरने वाली एक बेहद लंबी, कठिन और धैर्य की परीक्षा लेने वाली प्रक्रिया है। इस पूरी छपाई में किसी भी तरह के कृत्रिम या रासायनिक (Chemical) रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से इको-फ्रेंडली और प्राकृतिक होती है। सबसे पहले कच्चे कपड़े (कॉटन या सिल्क) को ऊंट की लीद, अरंडी के तेल और सोडा मिलाकर कई दिनों तक पानी में भिगोकर रखा जाता है ताकि कपड़े के रेशे नरम हो जाएं और रंग को अच्छी तरह सोख सकें। इसके बाद हरड़ के घोल में कपड़े की रंगाई की जाती है। डिजाइन उकेरने के लिए लकड़ी के हाथ से तराशे गए जटिल ठप्पों (Wooden Blocks) का प्रयोग किया जाता है। कपड़े पर बार-बार छपाई करके, उसे लोहे के जंग, फिटकरी, मूंठ और प्राकृतिक इंडिगो (नील) तथा लाल रंग के घोल में बार-बार डुबोया जाता है। हर एक रंग को चढ़ाने के बाद कपड़े को धूप में सुखाने और धोने की एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कई हफ्तों का समय लग जाता है।आधुनिक फैशन की दुनिया में अजरख का जलवा और इस विरासत को बचाने की चुनौतीआज के इस आधुनिक और मशीनी युग में जहाँ हर चीज कारखानों में सेकंडों में तैयार हो जाती है, वहाँ हाथ से बनने वाले अजरख प्रिंट की कीमत और उसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। देश-विदेश के बड़े-बड़े फैशन डिजाइनर और पारंपरिक वस्त्रों के पारखी आज अपने विंटर और समर कलेक्शंस में अजरख प्रिंट से बने साड़ियों, कुर्तो, दुपट्टों और शाॅलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्राकृतिक रंगों की महक और इसकी अनूठी ज्यामितीय डिजाइनिंग आधुनिक युवाओं को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है। हालांकि, इस शानदार विरासत के सामने आज भी कुछ बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। इस कला को सीखने और करने में बहुत अधिक शारीरिक श्रम, धैर्य और समय की आवश्यकता होती है, जिसके चलते नई पीढ़ी के युवा इस पारंपरिक पेशे से दूर होते जा रहे हैं। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले सस्ते सिंथेटिक और नकली 'अजरख' प्रिंट भी असली कारीगरों के व्यापार को नुकसान पहुंचाते हैं। जरूरत इस बात की है कि इस चार हजार साल पुरानी थाती को सरकारी संरक्षण मिले और सही मायनों में उन हुनरमंद कारीगरों को उनका हक और उचित दाम मिले जो रेगिस्तान की धूप में बैठकर इस कला को अपनी सांसों में संजोए हुए हैं।
सऊदी अरब में तेजी से बदलते नियम और महिला पर्यटकों के लिए ड्रेस कोड की सच्चाई
कभी दुनिया के सबसे रूढ़िवादी और सख्त कानूनों वाले देशों में गिने जाने वाले सऊदी अरब में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पर्यटकों के लिए नियमों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिले हैं। खाड़ी देशों के इस प्रमुख राष्ट्र ने अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर पर्यटन और वैश्विक निवेश की ओर तेजी से मोड़ा है, जिसके चलते विदेशी पर्यटकों के लिए कई प्रकार की पाबंदियों को आसान बनाया गया है। देश के विजन 2030 के तहत पर्यटन सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विदेशी सैलानियों का स्वागत खुले दिल से किया जा रहा है। यही वजह है कि अब दुनिया भर से लोग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को देखने के लिए सऊदी अरब का रुख कर रहे हैं। ऐसे में जो महिलाएं या कपल्स पहली बार इस देश की यात्रा करने की योजना बनाते हैं, उनके जेहन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या वहां सार्वजनिक रूप से बुर्का या पारंपरिक अबाया पहनना कानूनी रूप से अनिवार्य है या फिर पश्चिमी शैली के शालीन कपड़े भी पहने जा सकते हैं।क्या सऊदी अरब में महिलाओं के लिए बुर्का या अबाया पहनना अब भी है जरूरी?इस सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब यह है कि विदेशी महिला पर्यटकों के लिए अब सऊदी अरब में पारंपरिक काले रंग का बुर्का या अबाया पहनना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। कुछ साल पहले तक स्थानीय और विदेशी सभी महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थलों पर सिर ढककर काला अबाया पहनना पूरी तरह से बाध्यकारी था और नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाती थी। लेकिन अब नियमों में ऐतिहासिक ढील दी जा चुकी है। आज के समय में विदेशी महिला पर्यटकों को जबरन अबाया या सिर पर हिजाब ओढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है। कानूनन अब महिलाएं अपनी पसंद के ऐसे शालीन कपड़े पहनकर घूम सकती हैं जो स्थानीय संस्कृति और शालीनता के दायरे का सम्मान करते हों। हालांकि, देश की स्थानीय संस्कृति के प्रति आदरभाव दिखाने के लिए आज भी कई पर्यटक और विदेशी नागरिक स्वेच्छा से हल्के और खुले लिबास या केप-स्टाइल के गाउन पहनना पसंद करते हैं, ताकि वे स्थानीय माहौल में सहज महसूस कर सकें।शालीनता और सार्वजनिक शिष्टाचार के नए नियम, पर्यटकों को किन बातों का रखना होगा खास ध्यानभले ही सऊदी सरकार ने विदेशी महिलाओं के लिए बुर्का पहनने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया हो, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि वहां किसी भी प्रकार के आधुनिक या अमर्यादित कपड़े पहनने की पूरी छूट मिल गई है। सऊदी अरब के पब्लिक डीसेंट यानी सार्वजनिक शालीनता के नियम (Public Decency Regulations) आज भी बहुत स्पष्ट और कड़े हैं, जिनका पालन देश के भीतर रहने वाले हर नागरिक और विदेशी पर्यटक के लिए अनिवार्य होता है। इन नियमों के मुताबिक, महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही ऐसे कपड़े पहनने की हिदायत दी जाती है जो बहुत अधिक तंग (Tight), पारदर्शी (Transparent) या शरीर के अंगों को अधिक उजागर करने वाले न हों। महिला पर्यटकों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे अपने कंधे, घुटने और बांहों को ढकने वाले ढीले-ढाले कपड़े जैसे कि मैक्सी ड्रेस, वाइड-लेग पैंट, लॉन्ग स्कर्ट या फुल-स्लीव ट्यूनी का चयन करें। यदि पहनावा शालीनता के दायरे से बाहर होता है, तो स्थानीय प्रशासन या पुलिस द्वारा आपत्ति जताई जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।धार्मिक स्थलों और रूढ़िवादी क्षेत्रों में प्रवेश के दौरान किन नियमों का करना होता है पालनसऊदी अरब के सभी शहर एक जैसे आधुनिक या खुले विचारों वाले नहीं हैं, इसलिए यात्रा के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि आप देश के किस हिस्से में घूम रहे हैं। राजधानी रियाद, आधुनिक तटीय शहर जेद्दाह और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल अल-उला जैसे महानगरों में पर्यटकों को लेकर काफी खुलापन और लचीलापन देखने को मिलता है, जहां बिना अबाया के घूमने पर कोई रोक-टोक नहीं होती। इसके विपरीत, यदि आप देश के अधिक पारंपरिक, ग्रामीण या धार्मिक रूप से संवेदनशील इलाकों में जाते हैं, तो वहां स्थानीय लोग आज भी पारंपरिक वेशभूषा को ही सर्वोपरि मानते हैं। ऐसे क्षेत्रों में यदि महिला पर्यटक शालीन और ढके हुए कपड़े नहीं पहनती हैं, तो उन्हें लोगों की असहज नजरों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, मक्का और मदीना जैसे पवित्र इस्लामिक तीर्थस्थलों या देश की किसी भी मस्जिद के अंदर प्रवेश करते समय सभी महिलाओं (चाहे वे स्थानीय हों या विदेशी) के लिए सिर को स्कार्फ या हिजाब से पूरी तरह ढंकना और शरीर को पूरी तरह से कवर करने वाले कपड़े पहनना आज भी पूरी तरह से अनिवार्य है।सुरक्षित और आरामदायक यात्रा के लिए पर्यटकों को क्या अपनानी चाहिए रणनीतियदि आप आने वाले दिनों में सऊदी अरब की यात्रा पर जाने का मन बना रही हैं, तो अपनी पैकिंग करते समय वहां के सांस्कृतिक परिवेश और मौसम को ध्यान में रखना सबसे समझदारी भरा कदम होगा। रेगिस्तानी जलवायु और चिलचिलाती धूप को देखते हुए सूती (Cotton) और लीनन (Linen) जैसे हल्के और हवादार कपड़ों को अपने बैग में प्राथमिकता दें, जो दिखने में शालीन होने के साथ-साथ पहनने में भी बेहद आरामदायक होते हैं। अपने साथ एक हल्का दुपट्टा, स्टोल या पश्मीना शॉल हमेशा साथ रखें, जो अचानक किसी मस्जिद या पारंपरिक बाजार में प्रवेश करते वक्त सिर या कंधों को ढंकने के बहुत काम आता है। यदि आप बिना किसी झंझट के लोकल माहौल में घुलना-मिलना चाहती हैं, तो आप चाहें तो स्थानीय बाजारों से एक खूबसूरत और हल्के रंग का अबाया या किमेलो खरीदकर पहन सकती हैं, जो आपको धूप से बचाने के साथ-साथ एक परफेक्ट टूरिस्ट लुक भी देता है। नियमों की सही समझ और स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान आपकी इस ऐतिहासिक यात्रा को बेहद सुरक्षित, यादगार और आनंददायक बना देगा।
भारत के खूबसूरत पहाड़ी राज्यों में मानसून का मौसम अपनी एक अलग ही छटा बिखेरता है। बादलों की चादर ओढ़े पहाड़, कलकल बहती नदियां और चारों तरफ फैली हरियाली किसी भी पर्यटक का मन मोह लेने के लिए काफी होती है। यही वजह है कि साल के इस समय में बड़ी संख्या में सैलानी वीकेंड या छुट्टियों में पहाड़ों का रुख करते हैं। लेकिन शहरी भागदौड़ से दूर प्रकृति के इस आंचल में सुकून के कुछ पल बिताने जाना जितना सुखद अनुभव देता है, उतनी ही यह मौसम अपने साथ कई तरह की चुनौतियां और प्रशासनिक परेशानियां भी लेकर आता है। लगातार भारी बारिश के कारण होने वाले भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड, सड़कों पर पानी भरना, अचानक मौसम का मिजाज बदलना और रास्तों का बंद हो जाना आम बात बन जाती है। ऐसे में यदि आप बिना किसी तैयारी के या अधूरे सामान के साथ पहाड़ी सफर पर निकल पड़ते हैं, तो आपका यह सुहाना सपना एक बुरे सपने में बदल सकता है। अपनी इस यात्रा को सुरक्षित, आरामदायक और यादगार बनाने के लिए कुछ खास और जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक हो जाता है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से आसानी से निपटा जा सके।1. वाटरप्रूफ बैग और जिप लॉक बैग (Waterproof Bags and Zip Lock Pouches)मानसून के मौसम में पहाड़ की यात्रा के दौरान सबसे पहली और बड़ी समस्या सामान के भीगने की होती है। बारिश कब और किस रूप में आ जाए इसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसलिए अपने मुख्य बैग और पीठ पर लादे जाने वाले रकसैक को पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साधारण बैग पानी को आसानी से सोख लेते हैं जिसके अंदर रखे कपड़े, गैजेट्स और जरूरी कागजात पूरी तरह खराब हो सकते हैं। इसके लिए अपने बैग पर वाटरप्रूफ कवर का इस्तेमाल करें या अंदर की तरफ मजबूत पॉलीथिन और जिप लॉक पाउच का उपयोग करें। मोबाइल फोन, पैसे, पहचान पत्र और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों को सुरक्षित रखने के लिए छोटे एयरटाइट जिप लॉक बैग बहुत काम आते हैं। जब आपका कीमती सामान और कपड़े पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, तो आप बिना किसी चिंता के बारिश के इस मौसम का खुलकर आनंद उठा सकते हैं।2. सही ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज और गमबूट (Waterproof Grip Shoes and Gumboots)पहाड़ों पर बारिश के दिनों में रास्तों और पगडंडियों पर चलने के दौरान फिसलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गीली मिट्टी, काई जमी चट्टानें और कीचड़ भरे रास्ते पर्यटकों के लिए बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसलिए ट्रेवलिंग के दौरान फैशनेबल जूते या स्नीकर्स पहनने की भूल बिल्कुल न करें। अपने साथ ऐसे मजबूत ट्रेकिंग शूज रखें जिनकी ग्रिप बेहद मजबूत हो और जो पानी को जल्दी सोखने न दें। इसके अलावा, यदि आप जंगलों, झरनों या ज्यादा बारिश वाले इलाकों में ट्रेकिंग करने का प्लान बना रहे हैं, तो एक जोड़ी गमबूट यानी रबर के लंबे जूते जरूर साथ रखें। गमबूट पानी और कीचड़ के बीच चलने के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं, जिससे आपके पैर पूरी तरह सूखे और सुरक्षित रहते हैं। पैरों की सुरक्षा और सही संतुलन ही पहाड़ी सफर को आसान बनाता है।3. फर्स्ट एड किट और जरूरी दवाइयां (First Aid Kit and Essential Medicines)पहाड़ी इलाकों में सफर के दौरान मौसम के अचानक बदलने से सर्दी, जुकाम, बुखार, पेट खराब होना या सिरदर्द जैसी समस्याएं आम बात हैं। इसके अलावा ऊंचे रास्तों पर कई बार लोगों को उल्टी या चक्कर आने की भी शिकायत हो जाती है। ऐसे में स्थानीय इलाकों में तुरंत डॉक्टर या मेडिकल स्टोर मिलना हमेशा संभव नहीं होता। यात्रा पर निकलने से पहले एक अच्छी और पूरी तरह से अपडेटेड फर्स्ट एड किट अपने बैग में जरूर रखें। इस किट में दर्द निवारक दवाइयां, एंटीबायोटिक्स, एंटीसेप्टिक क्रीम, बैंडेज, कॉटन, ओआरएस के पैकेट, मोशन सिकनेस की गोलियां और व्यक्तिगत रूप से ली जाने वाली आपकी कोई नियमित दवा हो तो उसे कभी न भूलें। इसके साथ ही कुछ बेसिक पट्टियां और कीड़े-मकोड़े से बचाने वाली क्रीम भी अपने पास रखना समझदारी का काम है।4. पावर बैंक और पोर्टेबल चार्जर्स (Power Banks and Portable Chargers)पहाड़ों पर बारिश और आंधी-तूफान के समय बिजली गुल होना एक बहुत आम समस्या है। रिमोट या ग्रामीण पहाड़ी इलाकों में कई बार घंटों तक बिजली नहीं आती है, जिससे मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी डिस्चार्ज होने का खतरा बन जाता है। आज के समय में सफर के दौरान स्मार्टफोन केवल बात करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह नेविगेशन, ऑनलाइन पेमेंट, होटल बुकिंग और आपातकालीन संपर्कों का मुख्य साधन बन चुका है। इसलिए घर से निकलते वक्त एक अच्छी क्षमता का फुल चार्ज किया हुआ पावर बैंक और चार्जिंग केबल अपने साथ जरूर रखें। यदि आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं और कैमरे का इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी अतिरिक्त बैटरी भी साथ रखना न भूलें ताकि बिजली न होने पर भी आप बिना किसी रुकावट के अपने सफर का आनंद लेते रहें और अपनों के संपर्क में बने रहें।5. वाटरप्रूफ जैकेट और रेनकोट (Waterproof Jackets and Raincoats)पहाड़ों पर मानसून के दौरान मौसम किसी की नहीं सुनता; कब तेज धूप निकल आए और कब झमाझम बारिश शुरू हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं होता। हर समय छाता लेकर चलना पहाड़ों की संकरी और घुमावदार सड़कों पर काफी मुश्किल हो सकता है, खासकर जब हवाएं बहुत तेज चल रही हों। इसलिए छाते के भरोसे रहने के बजाय अपने साथ एक अच्छी क्वालिटी की वाटरप्रूफ जैकेट, पोंचो या टिकाऊ रेनकोट जरूर रखें। रेनकोट या वाटरप्रूफ जैकेट पहनने से आपके हाथ पूरी तरह स्वतंत्र रहते हैं और आप आसानी से अपना सामान संभाल सकते हैं या फोटोग्राफी कर सकते हैं। इसके साथ ही अपने साथ एक जोड़ी अतिरिक्त कपड़े हमेशा ऐसी जगह रखें जो आसानी से निकाले जा सकें, ताकि बारिश में भीगने के बाद आप तुरंत सूखे कपड़े पहनकर सर्दी और ठंडक से खुद को बचा सकें।6. ड्राई स्नैक्स और पानी की बोतल (Dry Snacks and Reusable Water Bottles)पहाड़ों पर भारी बारिश के दौरान कई बार रास्ते घंटों के लिए बंद हो जाते हैं और लैंडस्लाइड के कारण गाड़ियां बीच रास्ते में ही फंस जाती हैं। ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में खाने-पीने की दुकानों या ढाबों तक पहुंचना नामुमकिन हो जाता है। इसलिए अपने साथ हमेशा कुछ हाई-एनर्जी ड्राई स्नैक्स जैसे कि एनर्जी बार, चॉकलेट, बिस्कुट, नट्स और सूखे मेवे जरूर पैक करके रखें। इसके अलावा एक अच्छी क्वालिटी की इंसुलेटेड या सामान्य पानी की बोतल हमेशा अपने पास रखें, जिसमें साफ पानी भरा हो। मानसून के दिनों में खुले स्थानों का पानी पीने से पानी से होने वाली बीमारियां फैलने का खतरा बहुत अधिक होता है, इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए हमेशा शुद्ध पानी ही पिएं। भूखे-प्यासे रहने से यात्रा की थकान और अधिक बढ़ जाती है, जिससे मानसिक तनाव भी पैदा होता है।7. स्थानीय मौसम की जानकारी और रोड स्टेटस (Weather Updates and Road Status)किसी भी पहाड़ी यात्रा पर रवाना होने से पहले उस क्षेत्र के स्थानीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान और सड़कों की वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। कई बार जिला प्रशासन या आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा भारी बारिश और लैंडस्लाइड के रेड अलर्ट जारी किए जाते हैं, ऐसे समय में उन रास्तों पर जाना अपनी जान को जोखिम में डालने जैसा होता है। स्थानीय समाचारों, सोशल मीडिया अपडेट्स और ट्रैफिक पुलिस के हेल्पलाइन नंबरों की मदद से यह सुनिश्चित कर लें कि आप जिस रास्ते से जा रहे हैं वह सुरक्षित है या नहीं। अपनी यात्रा का शेड्यूल थोड़ा लचीला रखें ताकि यदि मौसम खराब होने के कारण आपको एक दिन रुकना भी पड़े, तो आपको किसी बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े। सावधानी और सतर्कता ही किसी भी यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने की सबसे बड़ी कुंजी होती है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे विवाद के बाद NHAI सख्त, अब स्किल ब्रिज पोर्टल से होगी इंजीनियरों की तैनाती
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों के बाद NHAI ने हाईवे निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कुशल इंजीनियरों का पूल बनाने का निर्णय लिया है।
डॉ. निर्मला यादव बनीं राम जन्मभूमि ट्रस्ट की नई ट्रस्टी
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की गई. इनमें फिरोजाबाद के शिकोहाबाद निवासी शिक्षाविद् डॉ. निर्मला यादव भी शामिल हैं. वह एमजी डिग्री कॉलेज फिरोजाबाद और बीडीएम डिग्री कॉलेज शिकोहाबाद की प्राचार्या रह चुकी हैं. शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे शिकोहाबाद और फिरोजाबाद में खुशी है.
भारतीय विकास और ग्रामीण परिवर्तन के इतिहास में कई बार कुछ ऐसी अनूठी योजनाएं और प्रयास सामने आते हैं जो न केवल स्थानीय समस्याओं का समाधान करते हैं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन जाते हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य से एक बेहद गर्व और उत्साह से भर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने देश भर के प्रशासनिक और जल प्रबंधन गलियारों में हलचल मचा दी है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनभागीदारी की तर्ज पर धरातल पर उतारे गए जल संरक्षण और संवर्द्धन मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर सबसे उत्कृष्ट और प्रभावशाली मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया है। केंद्रीय मंत्रालयों और जल शक्ति से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ के इस अभिनव प्रयोग ने तमाम बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब सरकार और जनता हाथ में हाथ डालकर किसी बड़े सामाजिक लक्ष्य के लिए आगे आते हैं, तो सफलता के नए आयाम खुद-ब-खुद सृजित होने लगते हैं।आखिर क्या है छत्तीसगढ़ का वह अनूठा 'जनभागीदारी जल संरक्षण मॉडल' और कैसे हुआ इसका क्रियान्वयनकिसी भी योजना की सफलता उसके जमीनी क्रियान्वयन और उसमें स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किए गए इस जल संरक्षण मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें केवल सरकारी मशीनरी और फाइलों पर भरोसा करने के बजाय गांवों के आम नागरिकों, किसानों, महिलाओं और स्थानीय युवाओं को सीधे तौर पर जोड़ा गया। राज्य के सुदूर ग्रामीण अंचलों और जल संकट से जूझ रहे इलाकों में पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कि तालाबों, कुओं, बावड़ियों और जोहड़ों के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया गया। मनरेगा और अन्य स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग करते हुए ग्रामीणों ने श्रमदान और सामूहिक सहभागिता के जरिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। हर गांव में जल समितियों का गठन किया गया जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखा जाए और गर्मियों के दिनों में मवेशियों तथा इंसानों के लिए पेयजल की कोई कमी न हो।भूजल स्तर में भारी सुधार और कृषि क्षेत्र में आई क्रांति, बदल गई गांवों की तस्वीरइस जनभागीदारी अभियान के धरातल पर उतरने के बाद छत्तीसगढ़ के भूजल स्तर (Groundwater Table) में जो सकारात्मक बदलाव देखने को मिले, उसने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। जिन इलाकों में कुछ साल पहले तक गर्मियों के मौसम में हैंडपंप दम तोड़ देते थे और महिलाओं को मीलों दूर पानी के लिए भटकना पड़ता था, आज उन गांवों के जल स्रोत पूरे साल लबालब भरे रहते हैं। जल स्तर सुधरने का सीधा और सकारात्मक प्रभाव राज्य के कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। किसानों को अब धान या अन्य फसलों की सिंचाई के लिए मानसून की अनिश्चितता पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता, क्योंकि बोरवेल और कुओं में भूजल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। दोहरी और तिहरी फसलें उगाने वाले किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिला है। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के मोर्चे पर भी इस मॉडल ने शानदार परिणाम दिए हैं, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological Balance) मजबूत हुआ है।राष्ट्रीय मंच पर सराहना और अन्य राज्यों के लिए क्यों बना यह मॉडल एक बड़ा सबकछत्तीसगढ़ के इस अनूठे मॉडल की गूंज अब देश की राजधानी दिल्ली से लेकर विभिन्न राज्यों के योजना आयोगों तक सुनाई दे रही है। राष्ट्रीय जल सम्मेलन और समीक्षा बैठकों के दौरान जब छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल के आंकड़ों और सफलता की कहानियों को प्रस्तुत किया गया, तो वहां मौजूद केंद्रीय अधिकारियों और अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने इसकी मुक्तकंठ से सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब पूरा देश जलवायु परिवर्तन (Climate Change), ग्लोबल वार्मिंग और गंभीर जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब छत्तीसगढ़ का यह मॉडल एक सटीक मार्गदर्शिका का काम कर सकता है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम लागत और अत्यधिक प्रभावशीलता है, जिसे देश के किसी भी भू-भाग में आसानी से लागू किया जा सकता है। प्रथम पुरस्कार मिलने के बाद से देश भर के कई अन्य राज्य भी अब इस जनभागीदारी के फॉर्मूले को अपने यहां अध्ययन करने और लागू करने की योजना बना रहे हैं।भविष्य की जल सुरक्षा और इस ऐतिहासिक उपलब्धि से राज्य को मिलने वाली नई ऊर्जाराष्ट्रीय मंच पर प्रथम स्थान हासिल करना छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक प्रशस्ति पत्र या पुरस्कार मिलने जैसा नहीं है, बल्कि यह राज्य के हर उस नागरिक की जीत है जिसने अपनी मेहनत और पसीने से इस अभियान को सफल बनाया है। राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने इस सफलता का पूरा श्रेय प्रदेश की जनता और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दिया है। आने वाले समय में सरकार इस मॉडल के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत राज्य के हर एक जिले और ब्लॉक में जल संरक्षण के नए आयाम स्थापित किए जाएंगे। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, सही दिशा में की गई प्लानिंग और जनता के अटूट विश्वास से किसी भी बड़ी से बड़ी प्राकृतिक चुनौती को मात दी जा सकती है। छत्तीसगढ़ का यह जल संरक्षण मॉडल अब न केवल देश के भीतर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सतत विकास और जल प्रबंधन का एक स्वर्णिम अध्याय बन चुका है।
पानी बचाने की मुहिम को नई धार, हर बूंद बचाने का प्लान, PM मोदी ने दिया 'जल उत्सव' का मंत्र
केंद्र और राज्यों ने मिलकर देश की जल सुरक्षा के लिए साझा रणनीति बनाई है. प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने, AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और मई 2027 तक 2 करोड़ नए जल संरक्षण ढांचे बनाने का लक्ष्य रखा है.
देश के सरकारी विभागों में जब भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो जाती हैं, तो किस स्तर पर घपले-घोटाले और अवैध उगाही का खेल चलता है, इसका एक ताजा और सबसे डरावना उदाहरण हाल ही में सामने आया है। शिक्षा विभाग जैसे पवित्र क्षेत्र में बैठकर नौनिहालों के भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी संभालने वाले एक जिला शिक्षा अधिकारी के काले कारनामों का खुलासा हुआ है। भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो और विजिलेंस विभाग की टीमों ने जब इस भ्रष्ट अधिकारी के ठिकानों पर एक साथ औचक छापेमारी की, तो वहां से जो नजारा देखने को मिला उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। सामान्य सी सैलरी पाने वाले इस अधिकारी के पास अकूत संपत्ति का ऐसा साम्राज्य खड़ा मिला, जिसकी कल्पना आम आदमी तो क्या, बड़े-बड़े उद्योगपति भी आसानी से नहीं कर सकते। कागजों पर साधारण जीवन जीने का दिखावा करने वाला यह बाबू और अधिकारी दरअसल पर्दे के पीछे से करोड़ों के साम्राज्य का मालिक बन बैठा था, जिसके कारनामों की गूंज अब पूरे प्रशासनिक गलियारों में सुनाई दे रही है।छापेमारी के दौरान खुला राज, घर से मिले 8 लाख नगद और आधा किलो सोनाविजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की टीमों द्वारा की गई इस लंबी और मैराथन छापेमारी के दौरान अधिकारी के आवास और ठिकानों से जो शुरुआती बरामदगी हुई, वह अपने आप में हैरान करने वाली थी। घर के कोने-कोने की तलाशी लेने पर अधिकारियों को बक्से और तिजोरियों से करीब आठ लाख रुपये की भारी-भरकम नगद राशि बरामद हुई। इसके साथ ही, जब लॉकरों और अलमारियों को खंगाला गया, तो वहां सोने के जेवरात और बिस्कुटों का ऐसा जखीरा मिला जिसका कुल वजन आधा किलो यानी पांच सौ ग्राम से भी अधिक आंका गया। इतनी बड़ी मात्रा में कैश और सोने की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट प्रमाण थी कि यह सब अवैध रूप से जमा की गई काली कमाई का हिस्सा है। अधिकारी और उनके परिजन इस अकूत संपत्ति के संबंध में कोई भी संतोषजनक दस्तावेज या आय का वैध स्रोत मौके पर पेश करने में पूरी तरह असमर्थ रहे, जिससे साफ हो गया कि यह सारा धन पूरी तरह से घूसखोरी और भ्रष्टाचार की काली कमाई से जुटाया गया है।40 से अधिक संपत्तियां और मकान, कागजों पर फैला रखा था बेनामी प्रॉपर्टी का जालनगद और सोने के अलावा जब जांच अधिकारियों ने इस भ्रष्ट अधिकारी के नाम दर्ज और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों की फाइलें खंगालनी शुरू कीं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। शुरुआती और दस्तावेजों की पड़ताल में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया कि इस जिला शिक्षा अधिकारी ने अकेले अपने और अपने परिवार के नाम पर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कुल 40 से अधिक बेशकीमती संपत्तियां और मकान खरीद रखे हैं। कहीं बड़े-बड़े कमर्शियल प्लॉट हैं, तो कहीं आलीशान बहुमंजिला मकान और फ्लैट्स का एक पूरा जाल बिछा हुआ है। इन संपत्तियों को खरीदने के लिए जिन पैसों का इस्तेमाल किया गया था, वे सभी सरकारी नौकरी के वेतन से कोसों दूर थे। अधिकारी ने अपनी काले धन की कमाई को छिपाने के लिए अलग-अलग रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर फर्जी बेनामी संपत्तियां बना रखी थीं, ताकि किसी को कानोकान खबर न हो सके कि शिक्षा विभाग में बैठकर किस पैमाने पर सरकारी धन और घूस का खेल खेला जा रहा है।आय से 88 गुना अधिक संपत्ति का रिकॉर्ड तोड़ मामला, जानकर सन्न रह गए जांच अधिकारीमामले की गंभीरता को देखते हुए जब विजिलेंस विभाग ने इस अधिकारी की पूरी वैध आय और उसकी कुल संपत्ति का गणितीय आकलन (Asset vs Income Calculation) किया, तो जो आंकड़ा सामने आया उसने भ्रष्टाचार के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। जांच में यह स्पष्ट रूप से साबित हो गया कि इस जिला शिक्षा अधिकारी के पास उसकी ज्ञात और वैध आय से लगभग 88 गुना अधिक अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) मौजूद है। किसी भी सरकारी सेवक के लिए अपनी नौकरी के पूरे कार्यकाल में मिलने वाले कुल वेतन और भत्तों की तुलना में 88 गुना अधिक संपत्ति जमा कर लेना यह बताता है कि उसने अपनी कुर्सी का इस्तेमाल जनता के कल्याण और शिक्षा के विकास के लिए नहीं, बल्कि अपनी तिजोरी भरने के लिए पूरी बेशर्मी से किया है। इस खुलासे के बाद से विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है और यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इतने लंबे समय तक इस अधिकारी के काले कारनामों पर पर्दा कैसे पड़ा रहा और इसके संरक्षण में कौन-कौन लोग शामिल थे।कानूनी शिकंजा और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासनिक मोर्चे पर उठ रहे सख्त कदमइस बड़े खुलासे के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। विजिलेंस की टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अकूत संपत्ति के साम्राज्य में और कौन-कौन से रिश्तेदार, बिचौलिए या विभाग के अन्य भ्रष्ट कर्मचारी शामिल हैं, जिनकी मदद से यह अवैध नेटवर्क चलाया जा रहा था। कोर्ट के आदेश पर तमाम संपत्तियों के कागजों को जब्त कर लिया गया है और बैंक खातों को सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दे दिया है कि कानून के हाथ भले ही लंबे हों, लेकिन भ्रष्टाचारियों के लिए अब बच निकलना नामुमकिन होता जा रहा है। आम जनता और ईमानदार नागरिकों का मानना है कि ऐसे दागी अधिकारियों को केवल निलंबित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनकी पूरी अवैध संपत्ति को जब्त कर उन्हें कठोरतम सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी शिक्षा के मंदिर को इस तरह कलंकित करने की हिम्मत न जुटा सके।
कमरिया टूटत, करेजवा जरत है... जब UP में साउथ इंडियन डॉक्टर ने बोली ठेठ अवधी, VIDEO वायरल
गोंडा में तैनात डॉ. अनीता मिश्रा का अवधी भाषा बोलते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. दक्षिण भारत में पली-बढ़ी डॉक्टर अनीता ने मरीजों की इस मिठास भरी भाषा की जमकर तारीफ की और अपने अनुभव साझा किए.
भारतीय समाज और पारिवारिक व्यवस्था में बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करना और उनका भरण-पोषण करना एक संतान का सबसे बड़ा कर्तव्य और नैतिक दायित्व माना जाता है। लेकिन आधुनिक समय में कई बार पारिवारिक जीवन के भीतर यह कर्तव्य पति-पत्नी के बीच विवाद और कलह की सबसे बड़ी वजह बन जाता है। इसी से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी परिणाम देने वाला फैसला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की तरफ से सामने आया है, जिसने देश भर में चल रही पारिवारिक अदालतों और कानूनी बहसों को एक नई दिशा दे दी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक स्पष्ट और कड़े फैसले में यह व्यवस्था दी है कि यदि कोई पति अपनी पत्नी की अनुचित जिद या दबाव के आगे झुककर अपने बूढ़े माता-पिता को अकेला छोड़ने से इनकार कर देता है, तो इसे कानून की नजर में किसी भी प्रकार की मानसिक क्रूरता या प्रताड़ना नहीं माना जा सकता है। अदालत ने यह भी दो टूक कहा कि एक शादीशुदा महिला द्वारा अपने पति को उसके बुजुर्ग माता-पिता से अलग रहने के लिए विवश करना और ऐसा न करने पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना अपने आप में क्रूरता की श्रेणी में आता है।क्या था पूरा मामला और क्यों कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा वैवाहिक विवाद का यह प्रकरणइस कानूनी लड़ाई की शुरुआत तब हुई जब एक दंपत्ति के वैवाहिक जीवन में खटास इतनी अधिक बढ़ गई कि मामला सुलझने के बजाय सीधे परिवार न्यायालय और फिर हाईकोर्ट तक जा पहुंचा। पत्नी का मुख्य आरोप था कि उसका पति उसके साथ ठीक से नहीं रहता और संयुक्त परिवार में माता-पिता की जिम्मेदारियों में ही उलझा रहता है, जिससे उसे पर्याप्त समय और मानसिक सुकून नहीं मिल पा रहा है। पत्नी चाहती थी कि उसका पति अपने बुजुर्ग माता-पिता और परिवार के बाकी सदस्यों से पूरी तरह से नाता तोड़कर उसके साथ किसी अलग शहर या अलग घर में स्वतंत्र रूप से रहे। लेकिन पति ने अपने वृद्ध और आश्रित माता-पिता का साथ छोड़ने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि वह अपनी इकलौती संतान होने के नाते उनकी देखभाल करने का नैतिक और सामाजिक फर्ज निभा रहा था। इसी बात को लेकर घर में लगातार झगड़े होने लगे और पत्नी ने पति तथा उसके परिवार वालों के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना व क्रूरता के आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग कर दी।निचली अदालत के फैसले को चुनौती और हाईकोर्ट में हुई लंबी कानूनी जिरहशुरुआती दौर में जब यह मामला फैमिली कोर्ट के सामने गया, तो दोनों पक्षों के बयानों और परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन किया गया। निचली अदालत ने तमाम साक्ष्यों को देखने के बाद यह पाया कि पति अपने माता-पिता की सेवा करने के अपने कर्तव्य पर पूरी तरह अडिग था, जिसे किसी भी रूप में पत्नी के प्रति अपराध या क्रूरता नहीं ठहराया जा सकता। इसके खिलाफ पत्नी पक्ष ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए तलाक और अन्य कानूनी राहतों की मांग की। हाईकोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने-अपने तर्क रखे। पत्नी के वकील का पक्ष था कि अलग रहने से पारिवारिक सामंजस्य बेहतर हो सकता था, जबकि पति के वकील ने अदालत के सामने यह स्पष्ट किया कि भारतीय सांस्कृतिक ताने-बाने में वृद्ध माता-पिता की सेवा करना किसी भी बेटे का कानूनी और नैतिक दायित्व है और इसके लिए पति पर दबाव बनाना सरासर गलत है।अदालत की अहम टिप्पणियां, संयुक्त परिवार की संस्कृति और भारतीय समाज का परिप्रेक्ष्यमामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भारतीय पारिवारिक मूल्यों और कानूनों की बहुत ही सुंदर और तार्किक व्याख्या की। अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत जैसे देश में जहां संयुक्त परिवार की एक लंबी और मजबूत परंपरा रही है, वहां विवाह के बाद भी माता-पिता के प्रति संतान के कर्तव्यों को नकारा नहीं जा सकता। यदि कोई पत्नी अपने पति से यह अपेक्षा करती है कि वह शादी के तुरंत बाद अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़कर केवल उसके साथ अलग रहे, और ऐसा न करने पर पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है, तो यह कृत्य कानून की नजर में पति और उसके परिवार के खिलाफ एक बड़ा मानसिक आघात है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि माता-पिता की देखभाल करना और उनकी सेवा में समय बिताना किसी भी सभ्य समाज में क्रूरता नहीं, बल्कि एक पुण्य और आवश्यक कर्तव्य है, और यदि इस बात को लेकर कोई जीवनसंगिनी विवाद खड़ा करती है, तो पति को मानसिक प्रताड़ना से बचाने के लिए कानूनी रूप से विवाह विच्छेद यानी तलाक का अधिकार मिलना पूरी तरह न्यायसंगत है।वैवाहिक जीवन के रिश्तों और पारिवारिक दायित्वों को लेकर समाज के लिए एक बड़ा संदेशछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह महत्वपूर्ण फैसला केवल एक मुकदमे का निपटारा नहीं है, बल्कि यह देश भर के उन लाखों परिवारों के लिए एक बड़ा संदेश है जहां आधुनिकता की दौड़ में पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्गों की उपेक्षा करने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोर्ट के इस निर्णय ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून भी उन्हीं रिश्तों और अधिकारों का समर्थन करता है जो मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं पर खरे उतरते हैं। एक तरफ जहां महिला अधिकारों की रक्षा के लिए कानून सख्त हैं, वहीं दूसरी तरफ बुजुर्ग माता-पिता के सम्मान और उनके अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए न्यायपालिका का यह संतुलित दृष्टिकोण समाज में एक सकारात्मक संतुलन स्थापित करता है। इस फैसले के आने के बाद से कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि वैवाहिक जीवन में आपसी तालमेल के साथ-साथ परिवार के अन्य आश्रित सदस्यों के प्रति जिम्मेदारी को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और शांत स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले बांग्लादेश के युवा और प्रतिभाशाली बल्लेबाज तौहीद हिरदॉय ने घरेलू क्रिकेट में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी चर्चा इस वक्त पूरी दुनिया के खेल जगत में हो रही है। हिरदॉय ने अपनी शानदार और संयम से भरी पारी के दौरान गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए एक विशालकाय तिहरा शतक अपने नाम कर लिया। लाल गेंद के इस मुकाबले में उनकी यह पारी केवल रनों का अंबार लगाने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि यह उनके असाधारण धैर्य, तकनीकी कौशल और टीम के प्रति अटूट समर्पण का भी एक बेहतरीन उदाहरण बन गई। जब मैदान पर कोई बल्लेबाज तिहरे शतक के करीब पहुंचता है, तो उसका पूरा ध्यान अपने व्यक्तिगत माइलस्टोन और बड़े रिकॉर्ड्स को कायम रखने पर होता है, लेकिन तौहीद हिरदॉय ने खेल भावना की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसने सभी क्रिकेट प्रेमियों और खेल विशेषज्ञों का दिल जीत लिया।कैसे खेली तौहीद ने यह मैराथन पारी और मैदान पर गेंदबाजों के छूटे पसीनेमुकाबले की शुरुआत से ही तौहीद हिरदॉय काफी अलग लय और आत्मविश्वास में नजर आ रहे थे। विरोधी टीम के तेज और स्पिन गेंदबाजों ने उन्हें आउट करने के लिए तमाम तरह की रणनीतियां और फील्ड प्लेसमेंट अपनाए, लेकिन इस युवा बल्लेबाज की एकाग्रता और तकनीकी महारत के आगे हर गेंदबाजी आक्रामकता बेअसर साबित हुई। क्रीज पर पैर जमाने के बाद उन्होंने मैदान के चारों ओर क्लासिकल शॉट्स की झड़ी लगा दी। खराब गेंदों को जहां उन्होंने बाउंड्री के पार पहुंचाया, वहीं अच्छी गेंदों का सम्मान करते हुए सिंगल-डबल से स्कोरबोर्ड को लगातार गतिशीलता प्रदान की। घंटे दर घंटे क्रीज पर डटे रहने के बाद जब उनका स्कोर तिहरे शतक के पार पहुंचा, तब भी उनके शरीर की भाषा और शॉट खेलने की ऊर्जा में कोई थकावट नहीं दिख रही थी। उन्होंने अपनी इस मैराथन पारी के दौरान यह साबित कर दिया कि वे सीमित ओवरों के अलावा लंबे फॉर्मेट के खेल में भी अपनी टीम की रीढ़ बनने की पूरी काबिलियत रखते हैं।टीम हित को दी सर्वोच्च प्राथमिकता, 400 रन बनाने का सुनहरा मौका खुद छोड़ाइस पूरी पारी का सबसे हैरान करने वाला और भावुक कर देने वाला पल वह था जब तौहीद हिरदॉय अपने व्यक्तिगत स्कोर पर एक ऐतिहासिक मुहाने पर खड़े थे। जब वे 300 से अधिक रन बनाकर मैदान पर खेल रहे थे और क्रिकेट इतिहास के पन्नों में और भी बड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड जैसे 400 रन के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए उनके पास पर्याप्त समय और ओवर बचे हुए थे, तब उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया। व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स और खुद के आंकड़ों की परवाह किए बिना तौहीद ने कप्तान और टीम मैनेजमेंट को संदेश भिजवाया कि टीम का स्कोर अब एक सुरक्षित और विशाल स्थिति में पहुंच चुका है, इसलिए पारी को अब घोषित कर देना चाहिए ताकि विरोधी टीम को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित कर मैच का परिणाम निकाला जा सके। अपने व्यक्तिगत माइलस्टोन के लालच में न फंसकर उन्होंने टीम की जीत और उसकी रणनीति को सर्वोपरि रखा, जिसकी प्रशंसा विरोधी खेमे के खिलाड़ी भी कर रहे हैं।खेल जगत में हो रही है इस महान खेल भावना की तारीफ, फैंस ने की जमकर सराहनाजैसे ही तौहीद हिरदॉय के इस त्याग और खेल भावना की खबर सोशल मीडिया और मुख्यधारा के खेल चैनलों के माध्यम से बाहर आई, चारों तरफ उनकी सराहना का दौर शुरू हो गया। आज के आधुनिक कमर्शियल क्रिकेट युग में जहां खिलाड़ी अपने निजी शतकों और आंकड़ों के लिए कई बार धीमी बल्लेबाजी करने से भी गुरेज नहीं करते, वहां एक युवा खिलाड़ी द्वारा 400 रन बनाने का मौका स्वेच्छा से छोड़ देना वास्तव में एक दुर्लभ घटना है। बांग्लादेशी क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों से लेकर देश-विदेश के दिग्गज क्रिकेटरों ने तौहीद के इस परिपक्व और टीम-फर्स्ट अप्रोच की खुलकर तारीफ की है। खेल प्रेमियों का मानना है कि इस तरह के खिलाड़ी ही आने वाले समय में टीम का नेतृत्व करने और देश का नाम रोशन करने की असली क्षमता रखते हैं, क्योंकि उनके लिए व्यक्तिगत रिकॉर्ड से बढ़कर टीम की जीत और देश का सम्मान मायने रखता है।भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत, टेस्ट टीम में अपनी दावेदारी को दी और मजबूतीघरेलू क्रिकेट में इस प्रकार की ऐतिहासिक और जिम्मेदारी से भरी पारी खेलने के बाद तौहीद हिरदॉय ने चयनकर्ताओं को यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वे केवल छोटे फॉर्मेट के ही नहीं, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के भी एक लंबे रेस के घोड़े हैं। राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ता और कोचिंग स्टाफ इस तरह के खिलाड़ियों पर हमेशा से भरोसा जताते आए हैं जो संकट के समय या बड़ी पारियों के दौरान टीम की नैया को पार लगाना जानते हैं। तौहीद का यह तिहरा शतक और उससे भी बढ़कर उनका निस्वार्थ त्याग उनके चरित्र और खेल के प्रति ईमानदारी को दर्शाता है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय सत्रों में जब बांग्लादेश की टीम मैदान पर उतरेगी, तो फैंस और चयनकर्ताओं की निगाहें इस शानदार बल्लेबाज पर और अधिक मजबूती के साथ टिकी होंगी, जो बल्ले से रन बरसाने के साथ-साथ दिल जीतने का हुनर भी बखूबी जानता है।
भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और गर्व से भर देने वाली खबर सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने महिला क्रिकेट के बढ़ते कदम और देश में इस खेल की लोकप्रियता को देखते हुए साल 2027 में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित महिला चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन की जिम्मेदारी भारत को सौंप दी है। खेल जगत के इस सबसे बड़े मंच पर दुनिया भर की बेहतरीन महिला क्रिकेट टीमें भारत की पिचों पर आमने-सामने होंगी और खिताब के लिए एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देंगी। हाल के वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शानदार प्रदर्शन से अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है, उसे देखते हुए देश को इस बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी मिलना भारतीय खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय के जुड़ने जैसा है। इस मेगा इवेंट के भारत में होने से न केवल घरेलू दर्शकों को अपनी पसंदीदा खिलाड़ियों को लाइव देखने का सुनहरा मौका मिलेगा, बल्कि देश में महिला क्रिकेट के बुनियादी ढांचे और लोकप्रियता को भी एक नई और जबरदस्त ऊंचाई हासिल होगी।आईसीसी द्वारा तारीखों और वेन्यू का आधिकारिक ऐलान, क्रिकेट गलियारों में उत्साह का माहौलअंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने आगामी टूर्नामेंट के रोडमैप को स्पष्ट करते हुए 2027 महिला चैंपियंस ट्रॉफी के शेड्यूल, तारीखों और संभावित वेन्यू की घोषणा कर दी है। आईसीसी के इस आधिकारिक ऐलान के साथ ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भी इस टूर्नामेंट की तैयारियों को लेकर अपनी रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। टूर्नामेंट के मुकाबले देश के चुनिंदा और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस प्रतिष्ठित क्रिकेट स्टेडियमों में खेले जाएंगे, जहां खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और दर्शकों को रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। खेल जानकारों का मानना है कि इस वैश्विक प्रतियोगिता के लिए भारतीय पिचों और मौसम के अनुकूल माहौल का पूरा फायदा हमारी टीम को मिल सकता है। आईसीसी की इस घोषणा के बाद से ही विभिन्न खेल संघों, प्रशासकों और खिलाड़ियों के बीच एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया है और हर कोई इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने की तैयारियों में जुट गया है।हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना की अगुवाई वाली टीम इंडिया से देश को है बड़ी उम्मीदेंजब घरेलू सरजमीं पर कोई इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला जाता है, तो मेजबान टीम पर दबाव के साथ-साथ शानदार प्रदर्शन करने का एक अलग ही जुनून भी सवार होता है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की मौजूदा कप्तान हरमनप्रीत कौर और उपकप्तान स्मृति मंधाना समेत टीम की तमाम युवा व अनुभवी खिलाड़ी इस मेगा इवेंट को लेकर अभी से अपनी तैयारियों में पसीना बहाना शुरू कर चुकी हैं। पिछले कुछ समय से भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ उनके ही घर में और अपनी जमीन पर जिस प्रकार का आक्रामक और अनुशासित खेल दिखाया है, उससे यह साफ हो गया है कि वे किसी भी टीम को आसानी से मात देने का माद्दा रखती हैं। वर्ष 2027 में होने वाली इस चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया खिताबी प्रबल दावेदार के रूप में उतरेगी और करोड़ों देशवासियों की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या हमारी बेटियां इस बार विश्व कप की तर्ज पर चैंपियंस ट्रॉफी की चमचमाती हुई ट्रॉफी को अपने नाम कर पाती हैं या नहीं।महिला क्रिकेट के स्वर्णिम दौर की शुरुआत और आर्थिक-व्यासायिक स्तर पर पड़ने वाले प्रभावबीते कुछ सालों में भारतीय महिला क्रिकेट ने केवल खेल के स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक और लोकप्रियता के पैमाने पर भी लंबी छलांग लगाई है। महिला प्रीमियर लीग यानी डब्ल्यूपीएल के सफल आयोजन के बाद से देश में महिला क्रिकेटरों को एक अलग पहचान और वित्तीय मजबूती मिली है। ऐसे में साल 2027 में भारत में महिला चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन होना इस क्रांति को और अधिक गति प्रदान करेगा। बड़े स्पॉन्सर्स, मीडिया राइट्स और स्टेडियमों में उमड़ने वाली भारी भीड़ यह साबित करेगी कि अब महिला क्रिकेट देश में पुरुषों के खेल के बराबर ही दीवानगी हासिल कर चुका है। इस टूर्नामेंट के जरिए देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों तक खेल का प्रसार होगा और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाली युवा बालिकाओं को अपने सपनों को पंख देने के लिए एक प्रेरणादायक मंच मिलेगा। स्थानीय व्यापार, पर्यटन और खेल से जुड़े उद्योगों को भी इस मेगा इवेंट के दौरान एक बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन मिलने की पूरी उम्मीद है।मेगा इवेंट की तैयारियों में जुटा बीसीसीआई, भव्य और सफल आयोजन का किया जाएगा प्रयासआईसीसी द्वारा मेजबानी सौंपे जाने के बाद से ही बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। स्टेडियमों के आधुनिकीकरण, अभ्यास पिचों की गुणवत्ता, खिलाड़ियों की सुरक्षा, दर्शकों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं और सुगम यातायात प्रबंधन जैसी तमाम व्यवस्थाओं पर अभी से काम करना शुरू कर दिया गया है ताकि जब दुनिया भर के मेहमान खिलाड़ी भारत आएं, तो उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। भारत ने अतीत में भी कई सफल पुरुष और महिला आईसीसी विश्व कप मुकाबलों की मेजबानी बेहद शानदार तरीके से की है, और इस बार भी देश अपनी मेहमाननवाजी और बेहतरीन खेल प्रबंधन का लोहा पूरी दुनिया को मनवाने के लिए पूरी तरह तैयार है। 2027 का यह साल भारतीय खेल प्रेमियों के लिए उत्सव का साल होने वाला है, जहां देश के मैदानों पर चौकों और छक्कों की बरसात के बीच महिला क्रिकेट का सबसे भव्य रूप देखने को मिलेगा।
मुंबई के अस्पताल में भर्ती अन्ना हजारे की कैसी है तबीयत, आया हेल्थ अपडेट
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है. उनके करीबी ने बताया है कि फिलहाल उनकी हालत में सुधार हुआ है और चिंता की कोई बात नहीं है.
प्रधानमंत्री मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति अलीयेव ने एससीओ शिखर सम्मेलन में मुलाकात कर दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का संकेत दिया है।
भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इस वक्त अगर किसी युवा खिलाड़ी के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह हैं मध्यक्रम के भरोसेमंद और स्टाइलिश बल्लेबाज तिलक वर्मा। सीमित ओवरों के क्रिकेट और आईपीएल में अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी का लोहा मनवाने वाले तिलक ने अब लाल गेंद के क्रिकेट यानी फर्स्ट क्लास फॉर्मेट में भी तहलका मचा दिया है। उन्होंने रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू मुकाबलों में अपने दमदार प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि वे केवल छोटे फॉर्मेट के खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट की लंबी और मुश्किल पिचों पर भी अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाने के पूरी तरह काबिल हैं। हाल ही में उनके बल्ले से निकले रनों के सैलाब ने चयनकर्ताओं और क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जिसके बाद से देश भर के खेल विशेषज्ञ यह कयास लगाने लगे हैं कि बहुत जल्द यह युवा सितारा भारतीय टेस्ट जर्सी पहनकर मैदान पर उतरता हुआ नजर आ सकता है।फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 56 का शानदार औसत और 24 मैचों में 8 शतकों का रिकॉर्डतिलक वर्मा के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि रेड बॉल क्रिकेट में उनकी महारत किस उच्च स्तर की है। उन्होंने अपने अब तक के फर्स्ट क्लास करियर में बेहद निरंतरता के साथ रन बनाए हैं, जिसके चलते उनका औसत प्रभावशाली रूप से 56 के आसपास बना हुआ है। केवल 24 मैचों के अपने छोटे से सफर में ही उन्होंने 8 शानदार शतक जड़कर यह दिखा दिया है कि वे बड़ी पारियां खेलने का हुनर अच्छी तरह जानते हैं। जब टीम संकट में होती है या जब पिच पर गेंदबाजों को मदद मिल रही होती है, तब तिलक का संयम और डिफेंसिव तकनीक देखने लायक होती है। घरेलू टूर्नामेंट्स में उनका यह डोमिनेंस इस बात का प्रमाण है कि वे भारतीय टेस्ट टीम के मिडिल ऑर्डर की रीढ़ बनने की पूरी क्षमता रखते हैं, खासकर तब जब सीनियर खिलाड़ियों के बाद टीम में युवा और प्रतिभाशाली खून की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।आधुनिक तकनीक और संयम का अद्भुत मेल, टेस्ट प्रारूप के लिए पूरी तरह तैयार हैं तिलकआधुनिक क्रिकेट में अक्सर यह माना जाता है कि जो खिलाड़ी टी-20 और आईपीएल में तेज गति से रन बनाता है, वह टेस्ट क्रिकेट के लंबे सत्रों और रक्षात्मक खेल में संघर्ष कर सकता है। लेकिन तिलक वर्मा ने इस मिथक को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है। क्रीज पर टिककर खेलने की उनकी क्षमता, गेंदबाजों की लाइन और लेंथ को पढ़ने का गजब का धैर्य तथा खराब गेंदों को बाउंड्री के पार भेजने की कला उन्हें एक पूर्ण बल्लेबाज बनाती है। लाल गेंद के खिलाफ खेलते हुए वे क्रीज पर पैर जमाकर खेलना पसंद करते हैं और जरूरत पड़ने पर स्ट्राइक रेट को नियंत्रित करना भी अच्छी तरह जानते हैं। घरेलू सर्किट में उन्होंने जिस तरह से स्पिन और तेज गेंदबाजों दोनों का डटकर मुकाबला किया है, उससे यह साफ हो जाता है कि वे विदेशी दौरों और चुनौतीपूर्ण पिचों पर भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी क्रम को मजबूती प्रदान करने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हैं।चयनकर्ताओं की नजरों में चढ़े तिलक वर्मा, आगामी टेस्ट सीरीज में मिल सकता है बड़ा मौकाजैसे-जैसे भारतीय टेस्ट टीम के संयोजन में बदलाव और भविष्य की पीढ़ी तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है, वैसे-वैसे तिलक वर्मा का नाम चयन समिति की बैठकों में सबसे ऊपर आता जा रहा है। राष्ट्रीय टीम के कोच और चयनकर्ता घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले युवाओं पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में तिलक का यह धमाकेदार फॉर्म उन्हें बाकी दावेदारों से काफी आगे खड़ा कर देता है। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि यदि वह इसी लय को आने वाले मुकाबलों में भी जारी रखते हैं, तो आगामी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट श्रृंखलाओं के लिए उन्हें भारतीय स्क्वॉड में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है। टीम मैनेजमेंट भी ऐसे खिलाड़ियों की तलाश में रहता है जो विदेशी पिचों की बाउंस और स्विंग को झेल सकें, और तिलक की तकनीक इन सभी पैमानों पर खरी उतरती हुई दिखाई दे रही है।भारतीय मध्यक्रम के भविष्य की नई उम्मीद और समर्थकों की जगी बड़ी उम्मीदेंभारतीय टेस्ट टीम में चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य రహाने जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के हटने के बाद से मिडिल ऑर्डर में एक खालीपन सा महसूस होने लगा था, जिसे भरने के लिए युवा बल्लेबाजों को मौके दिए जा रहे हैं। ऐसे में तिलक वर्मा का यह उभरता हुआ रूप भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी बड़ी उम्मीद से कम नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर खेल विशेषज्ञों के मंचों तक हर जगह उनकी तकनीक और रन बनाने की भूख की सराहना की जा रही है। फैंस को पूरी उम्मीद है कि जिस तरह उन्होंने कम उम्र में अपनी अलग पहचान बनाई है, उसी तरह वे टेस्ट क्रिकेट में भी लंबी पारी खेलेंगे और भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाएंगे। घरेलू मैदानों पर पसीना बहाने वाला यह युवा बल्लेबाज अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरने के लिए बिल्कुल बेकरार नजर आ रहा है, और क्रिकेट जगत की निगाहें अब इसी बात पर टिकी हैं कि चयनकर्ता उन्हें कब और किस सीरीज में पहली बार टेस्ट कैप सौंपते हैं।
घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने 'साजिश' बताया है.
बिहार के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सरकार द्वारा प्रशासनिक और सांगठनिक स्तर पर किए जा रहे नए बदलावों और नियुक्तियों की चर्चा जोरों पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने हाल ही में राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति यानी बीस सूत्री कमेटी और बिहार राज्य नागरिक परिषद में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। इन नियुक्तियों को राजनीतिक विश्लेषक केवल सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों और कोर वोटर माने जाने वाले सवर्ण वर्ग को रिझाने की एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों में एनडीए के पारंपरिक माने जाने वाले सवर्ण मतदाताओं के एक वर्ग में उपजे असंतोष को थामने के लिए सरकार ने यह डैमेज कंट्रोल प्लान तैयार किया है। इन पदों पर जिन चेहरों को नवाजा गया है और जिन्हें राज्य मंत्री या उप मंत्री का दर्जा दिया गया है, उसके पीछे की जातीय और क्षेत्रीय गणित को समझना बेहद दिलचस्प है।राज्य नागरिक परिषद में महत्वपूर्ण नियुक्तियां और डॉ. अजय कुमार सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारीसरकार द्वारा किए गए इस ताजा राजनीतिक और प्रशासनिक प्रबंधन के तहत बिहार राज्य नागरिक परिषद में रिक्त पड़े पदों पर अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सिवान क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले और प्रमुख राजनीतिक परिवार से जुड़े डॉ. अजय कुमार सिंह को राज्य नागरिक परिषद का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डॉ. अजय सिंह की पत्नी को चुनाव के दौरान टिकट न मिलने से सवर्ण और खासकर राजपूत समाज के एक वर्ग में नाराजगी पनप रही थी। इस नाराजगी को दूर करने और डैमेज कंट्रोल करने के लिए ही सरकार ने उन्हें इस पद पर बिठाकर राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री के बेहद करीबी और लंबे समय तक वफादार सुरक्षाकर्मी रहे हरेंद्र बहादुर सिंह को नागरिक परिषद का नया महासचिव बनाया गया है। हरेंद्र सिंह की यह नियुक्ति भी सियासी रूप से काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए पार्टी ने एक बार फिर अपने पुराने और भरोसेमंद कैडर को साधने का संदेश दिया है।बीस सूत्री कमेटियों में एनडीए के सहयोगियों को जगह और भूमिहार-राजपूत जातियों का संतुलनराज्य स्तरीय बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के विस्तार में भी जातीय और राजनीतिक संतुलन साधने की पूरी कोशिश साफ दिखाई दे रही है। सरकार ने एनडीए के विभिन्न घटक दलों के प्रमुख चेहरों को इस समिति में जगह देकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। रालोमो के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री अनिल कुमार और लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार उर्फ सुरेंद्र विवेक को इस राज्य स्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया गया है। इन सभी नियुक्त सदस्यों को सरकार की तरफ से उप मंत्री का दर्जा दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भूमिहार और राजपूत जातियों के इन कद्दावर नेताओं को संगठन और सत्ता में यह जगह देकर सरकार ने यह जताने का प्रयास किया है कि एनडीए गठबंधन में सवर्ण जातियों के हितों और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है, ताकि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में किसी भी तरह की नाराजगी का सामना न करना पड़े।क्या यह फैसला महज एक सियासी लॉलीपॉप है या जमीनी स्तर पर असर डालेगा यह कदमइस तरह की राजनीतिक नियुक्तियों के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक हलकों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह कदम वाकई सवर्ण समाज को सशक्त करने का प्रयास है या फिर यह सिर्फ चुनाव से पहले का एक 'लॉलीपॉप' या डैमेज कंट्रोल है? विरोधी दलों का मानना है कि जब चुनाव सिर पर होते हैं या जब किसी खास वर्ग की नाराजगी खुलकर सामने आने लगती है, तभी इस प्रकार के पदों और रेवड़ियों का वितरण किया जाता है। हालांकि, एनडीए के रणनीतिकारों का तर्क है कि इन नियुक्तियों के जरिए सरकार ने प्रशासनिक कामकाज में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को बेहतर करने का काम किया है। हालिया उप चुनावों और स्थानीय राजनीतिक उथल-पुथल के बाद जिस तरह से सवर्ण वोटों के खिसकने की चर्चाएं शुरू हुई थीं, उसे रोकने के लिए यह कदम सरकार की तरफ से एक बड़ा और व्यावहारिक दांव माना जा रहा है।आने वाले दिनों में बिहार की सियासत और जातियों के समीकरण पर क्या होगा इसका प्रभावबिहार की राजनीति हमेशा से ही जातिगत समीकरणों, सोशल इंजीनियरिंग और सत्ता की हिस्सेदारी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी इस नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी जातियों को एकजुट रखकर अपने जनाधार को बचाए रखना है। राज्य नागरिक परिषद और बीस सूत्री कमेटियों के बहाने जिन करीब आधा दर्जन से अधिक नेताओं को बड़े पदों और उप मंत्री के दर्जे से नवाजा गया है, उसके दूरगामी परिणाम आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकते हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह सियासी मलमपट्टी सवर्ण मतदाताओं के गुस्से को शांत करने में पूरी तरह कामयाब होती है या फिर विपक्ष इसे चुनावी स्टंट बताकर जनता के बीच एक नया मुद्दा बनाने में सफल रहता है। फिलहाल, इन नियुक्तियों ने बिहार के राजनीतिक तापमान को एक बार फिर गर्मा दिया है और हर कोई इसके नफा-नुकसान का हिसाब लगाने में जुट गया है।
कोचिंग दूर है, किराया नहीं है... छात्रा की गुहार पर DM ने बस PASS के साथ 1 लाख रुपये देकर की मदद
पिता के निधन के बाद मेनका आर्थिक तंगी से जूझ रही और उसकी पढ़ाई छूटने की कगार पर थी. जिसके बाद अब प्रशासन ने उसकी मदद की है.
बेटी की शादी के लिए जोड़े थे 1.20 करोड़, शख्स से 1.20 करोड़ की साइबर ठगी
झारखंड के साहिबगंज में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां ठगों ने CBI अधिकारी बनकर एक शख्स को करीब दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा. फर्जी केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उससे करीब 10 बार में 1.20 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए गए. पीड़ित ने यह रकम बेटी की शादी के लिए जमा की थी.
पोस्ट में आगे कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पास इस समस्या को ठीक करने के बेहतर तरीके थे। उनका कहना है कि कोर्ट उस अस्पष्ट गैर-कानूनी जमावड़े वाले कानून को खत्म कर सकता था जिसका पुलिस गलत इस्तेमाल करती है।
PM की फोटो हटाई तो FIR, प्लेन क्रैश पर... अजित पवार का नाम ले सुप्रिया सुले ने सरकार को घेरा
सुप्रिला सुले ने महाराष्ट्र सरकार के ऊपर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्य में पीएम मोदी की तस्वीर हटाए जाने पर अमित ठाकरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई, लेकिन वहीं अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत पर कोई एफआईआर नहीं हुई।
बिहार बॉर्डर के गांव का बेटा बना राम मंदिर ट्रस्ट का CEO, गूंजे जय श्रीराम के नारे
अयोध्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO पूर्व एयर चीफ मार्शल जितेंद्र मिश्र को बनाए जाने पर उनके पैतृक गांव भोपतपुरा में जश्न मनाया गया. लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, आतिशबाजी की और जय श्रीराम के नारे लगाए. गांव के लोग इस नियुक्ति को पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात बता रहे हैं और जितेंद्र मिश्र से ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद जता रहे हैं.
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता सैयद असीम वकार कांग्रेस में शामिल हो गए।
'तो अब होर्मुज का नाम ट्रंप स्ट्रेट कर दें...', अमेरिकी राष्ट्रपति का नया शिगूफा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक विवादित बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि अब जब यह जलडमरूमध्य अमेरिका के नियंत्रण में है, तो इसका नाम 'ट्रंप स्ट्रेट' रखा जाना चाहिए.
स्वामी गोविंद देव गिरी बने राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव, चंपत राय की लेंगे जगह
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने संगठनात्मक पुनर्गठन करते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को CEO और स्वामी गोविंद देव गिरि को महामंत्री नियुक्त किया है.
उद्धव गुट को बॉम्बे HC से झटका, विशाखा राउत की याचिका खारिज
शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व मेयर विशाखा राउत को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. पालघर जाति पड़ताल समिति द्वारा उनका ओबीसी प्रमाण पत्र अमान्य किए जाने के बाद बीएमसी की कार्रवाई के खिलाफ दायर उनकी याचिका अदालत ने खारिज कर दी है.
पति भी जान सकता है पत्नी की कमाई, कोर्ट ने कहा- सवाल पूछने का हक...
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े मामले में कहा है कि पति को भी पत्नी की आय और कमाई के सोर्स को लेकर सवाल करने का पूरा हक है. कोर्ट ने इस मामले में कहा है कि पति को जिरह का हक है.
पाकिस्तान में ढहाया गया 100 साल पुराना मंदिर, भारत ने कहा- बेहद शर्मनाक
भारत ने पाकिस्तान के नारोवाल में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और तत्काल जांच की मांग की है।
सर्जरी के लिए तारीख पर तारीख देने के आरोप; तन्वी की मौत पर AIIMS ने बनाई जांच कमेटी
एम्स दिल्ली में जन्मजात दिल की बीमारी से पीड़ित 15 साल की बच्ची तन्वी की मौत के बाद सर्जरी में देरी के आरोपों पर जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। संस्थान ने कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
'हाथ-पैर टूट जाएं तो भी RSS...', नासिक में बोले राहुल गांधी
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में कांग्रेस के 68 जिलाध्यक्षों से संगठन सृजन अभियान के तहत बैठक की. उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा पर मजबूती से टिके रहने और आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने पर जोर दिया.
दशहरा, दीपावली और आस्था के महापर्व छठ पूजा के दौरान देश के बड़े औद्योगिक व मेट्रो शहरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, सूरत, बेंगलुरु और चेन्नई) से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीटों की भारी मारामारी शुरू हो जाती है। बुकिंग विंडो खुलते ही चंद मिनटों में सीटें फुल हो जाती हैं और स्क्रीन पर 'वेटिंग लिस्ट' (Waiting List) या 'नो रूम/रिग्रेट' (Regret) दिखने लगता है। यदि आप भी त्योहारों पर अपने घर जाने की योजना बना रहे हैं और साधारण तरीके से आपको टिकट नहीं मिल पा रहा है, तो रेलवे की आधिकारिक व्यवस्थाओं और स्मार्ट ट्रिक्स का इस्तेमाल करके अपनी कन्फर्म सीट पक्की कर सकते हैं।1. IRCTC 'मास्टर लिस्ट' (Master List) से सेकंडों में पूरा करें बुकिंगत्योहारी सीजन में तत्काल या जनरल कोटा खुलते ही सबसे बड़ी चुनौती समय की होती है। फॉर्म भरते-भरते सीटें निकल जाती हैं।क्या करें: टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही अपने IRCTC ऐप या वेबसाइट में 'My Profile' > 'Master List' सेक्शन में जाएं।फायदा: यहां अपने और परिजनों के नाम, उम्र, लिंग, बर्थ प्रेफरेंस और आधार विवरण पहले से सेव कर लें।नतीजा: जब टिकट विंडो खुलेगी, तो यात्रियों की जानकारी टाइप करने के बजाय 'Add Existing' पर एक क्लिक करते ही सभी यात्रियों का डेटा तुरंत ऑटो-फिल हो जाएगा, जिससे आपके कम से कम 45 से 60 सेकंड बचेंगे और टिकट कन्फर्म होने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।2. 'विकल्प' (Vikalp Scheme) का चयन करें: दूसरी ट्रेन में मिलेगी गारंटीड सीटरेलवे द्वारा चलाई जाने वाली ऑल्टरनेट ट्रेन अकोमोडेशन स्कीम (ATAS) यानी 'विकल्प' योजना उन यात्रियों के लिए वरदान है जिनका टिकट वेटिंग में चला जाता है।कैसे काम करता है: टिकट बुक करते समय 'Vikalp' के चेकबॉक्स पर टिक करें। इसमें आप उसी रूट की 7 अन्य वैकल्पिक ट्रेनों का चयन कर सकते हैं।नियम: यदि आपकी मुख्य ट्रेन में चार्ट बनने तक टिकट वेटिंग रह जाता है, तो रेलवे का सिस्टम अपने आप आपकी चुनी गई दूसरी ट्रेनों में खाली सीट होने पर बिना किसी अतिरिक्त किराए के आपको कन्फर्म बर्थ अलॉट कर देता है। इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता।3. तत्काल बुकिंग का '2-स्टेप' पेमेंट फॉर्मूला और समय का गणितयदि जनरल कोटे में सीटें खत्म हो चुकी हैं, तो यात्रा की तारीख से ठीक एक दिन पहले तत्काल कोटे का सहारा लिया जा सकता है। (एसी क्लास के लिए सुबह 10:00 बजे और स्लीपर क्लास के लिए सुबह 11:00 बजे विंडो खुलती है)।IRCTC iMudra / e-Wallet का प्रयोग: नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर अक्सर बैंक के ओटीपी (OTP) आने में देरी हो जाती है और टिकट हाथ से निकल जाता है।फास्ट चेकआउट: IRCTC ई-वॉलेट या यूपीआई (UPI QR Code स्कैन) का इस्तेमाल करें। ई-वॉलेट में पहले से पैसे लोड करके रखने से पेमेंट पेज पर ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती और मात्र 5 सेकंड में ट्रांजैक्शन पूरा हो जाता है।4. बोर्डिंग स्टेशन ट्रिक और 'प्रीमियम तत्काल' (Premium Tatkal)अक्सर बड़े स्टेशनों से टिकट खत्म हो जाते हैं, लेकिन मध्यवर्ती या शुरुआती स्टेशनों के लिए कोटा उपलब्ध रहता है।बोर्डिंग स्टेशन तकनीक: यदि आपके गंतव्य तक की डायरेक्ट सीट उपलब्ध नहीं है, तो ट्रेन जहां से शुरू हो रही है (Originating Station) वहां से टिकट बुक करें और अपना 'Boarding Point' अपने नजदीकी स्टेशन को चुन लें। इससे रेलवे के नियमों के तहत आपकी सीट सुरक्षित रहती है और आप अपने स्टेशन से बिना किसी जुर्माने के ट्रेन पकड़ सकते हैं।प्रीमियम तत्काल: तत्काल में भी सीट न मिलने पर 'प्रीमियम तत्काल' (PT) कोटे को चेक करें। इसमें डायनामिक प्राइसिंग के तहत टिकट दरें अधिक होती हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान भी सीटें आखिरी समय तक आसानी से मिल जाती हैं।इसके अलावा, भारतीय रेलवे त्योहारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर साल सैकड़ों 'फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें' (Puja Special Trains) चलाता है। नियमित ट्रेनों के अलावा रेलवे के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल और आईआरसीटीसी पोर्टल पर स्पेशल ट्रेनों के नोटिफिकेशन पर लगातार नजर रखें, क्योंकि इनकी घोषणा होते ही पूरी ट्रेन में सीटें खाली उपलब्ध होती हैं।
देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही खतरनाक और जानलेवा बीमारियों ने एक बार फिर से अपना पैर पसारना शुरू कर दिया है, जिससे आम जनता के बीच भारी दहशत का माहौल बना हुआ है. एक तरफ जहां बिहार की राजधानी पटना में डेंगू के डंक से एक मरीज की दर्दनाक मौत होने की खबर ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रखा है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड की राजधानी रांची में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 (H1N1) वायरस के तेजी से फैलते प्रकोप ने लोगों की नींद उड़ा दी है. रांची में अचानक से स्वाइन फ्लू के तीन पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है और एहतियात के तौर पर कई कड़े कदम उठाए जाने शुरू कर दिए गए हैं. संक्रमण के इस बढ़ते खतरे को देखते हुए डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को आपस में हाथ मिलाने तक से सख्त परहेज करने की सलाह दी है ताकि इस तेजी से फैलने वाले संक्रामक वायरस की चेन को समय रहते तोड़ा जा सके. स्वाइन फ्लू और डेंगू जैसी बीमारियां हर साल मानसून और सर्दियों के बीच के संक्रमण काल में सबसे ज्यादा कहर बरपाती हैं, और यदि शुरुआती स्तर पर ही इनसे बचाव के पुख्ता उपाय न किए जाएं, तो यह महामारी का रूप ले सकती हैं. आइए इस गंभीर स्थिति की पूरी तह में जाकर सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि पटना और रांची में फैल इन दोनों खतरनाक बीमारियों का वर्तमान हाल क्या है और इससे बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्या-क्या विशेष गाइडलाइंस जारी की गई हैं.पटना में डेंगू का बढ़ता प्रकोप और एक मरीज की मौत से मचा हड़कंपबिहार की राजधानी पटना में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार डेंगू मरीजों की संख्या में तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है, जो प्रशासन के लिए चिंता का बड़ा विषय बन गया है. अस्पतालों के जनरल वार्ड से लेकर प्राइवेट क्लीनिकों तक हर जगह प्लेटलेट्स कम होने की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों का तांता लगा हुआ है. इसी कड़ी में पटना के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में इलाज के दौरान डेंगू से पीड़ित एक मरीज की मौत होने की पुष्टि के बाद से शहरभर में कोहराम मच गया है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शहर के कई इलाके जैसे कंकड़बाग, बोरिंग रोड, राजेंद्र नगर और पाटलिपुत्र कॉलोनी डेंगू के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील यानी हॉटस्पॉट बने हुए हैं. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार हो रही हल्की बारिश और जलभराव के कारण मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल रहा है, जिसकी वजह से एडीज मच्छर बेकाबू होकर डेंगू का वायरस तेजी से फैला रहे हैं. प्रशासन द्वारा हालांकि फॉगिंग और एंटी-लार्वा का छिड़काव कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अभी भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ पाई है. डेंगू के इस बढ़ते संक्रमण ने लोगों को अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और पूरी बांह के कपड़े पहनने के लिए मजबूर कर दिया है, क्योंकि लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है.रांची में स्वाइन फ्लू का भयानक हमला, तीन नए पॉजिटिव मरीजों मिलने से सहमा शहरएक तरफ जहां पटना में डेंगू अपनी जानलेवा दस्तक दे रहा है, वहीं दूसरी ओर झारखंड की राजधानी रांची में स्वाइन फ्लू के तीन नए पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद सनसनी फैल गई है. रांची के अलग-अलग अस्पतालों में जब कुछ संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर उनकी आरटी-पीसीआर (RT-PCR) जांच कराई गई, तो उनमें एच1एन1 वायरस की पुष्टि हुई, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है. स्वाइन फ्लू एक बेहद संक्रामक रेस्पिरेटरी बीमारी है जो हवा और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बहुत तेजी से फैलती है, और यही वजह है कि इसके मरीजों के सामने आते ही शहर के चिकित्सा संस्थानों ने तुरंत विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार करने शुरू कर दिए हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमित पाए गए सभी मरीजों का इलाज कड़े चिकित्सीय प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है और उनके संपर्क में आए परिजनों तथा अन्य लोगों की भी कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है. रांची में सर्दियों की आहट के साथ ही इस तरह के फ्लू के वायरस एक्टिव हो जाते हैं, जो कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को अपनी चपेट में सबसे पहले लेते हैं. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं महसूस हों, तो वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी जांच करवाएं ताकि समय रहते संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.संक्रमण को रोकने के लिए डॉक्टरों की सख्त चेतावनी, हाथ मिलाने और भीड़भाड़ से बचेंरांची में स्वाइन फ्लू के मामलों में अचानक हुई वृद्धि को देखते हुए मेडिकल एक्सपर्ट्स और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम जनता के लिए बेहद सख्त और जरूरी एडवाइजरी जारी की है. डॉक्टरों का साफ कहना है कि स्वाइन फ्लू और अन्य वायरल संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलते हैं, इसलिए जब तक इस पर काबू नहीं पाया जाता, तब तक लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए डॉक्टरों ने लोगों को आपस में हाथ मिलाने, गले मिलने या शारीरिक संपर्क बनाने से पूरी तरह बचने की सख्त सलाह दी है. हाथ मिलाने के बजाय पारंपरिक भारतीय तरीके से 'नमस्ते' करने की आदत डालने पर जोर दिया जा रहा है ताकि हाथों के जरिए वायरस एक-दूसरे तक न पहुंच सके. इसके अलावा, मॉल, सिनेमाघरों, बाजारों और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय हर हाल में फेस मास्क पहनने और हाथों को बार-बार सैनिटाइज या साबुन से धोने के निर्देश दिए गए हैं. चूंकि छींकने या खांसने के दौरान निकलने वाली सूक्ष्म बूंदें हवा में फैलकर दूसरों को संक्रमित कर सकती हैं, इसलिए मुंह और नाक को रूमाल या टिशू पेपर से ढकना अनिवार्य कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि जनता इन छोटे-छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण नियमों का सख्ती से पालन करे, तो इस फ्लू की चेन को आसानी से तोड़ा जा सकता है.डेंगू और स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए प्रशासन के पुख्ता इंतजाम और जागरूकता अभियानबिहार और झारखंड की राजधानियों में पैर पसार रही इन दोनों गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए दोनों राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने कमर कस ली है और युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. पटना में जहां नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें घर-घर जाकर कूलर, गमलों और छतों पर रखे पुराने टायरों की जांच कर रही हैं और पानी मिलने पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ लार्वा नष्ट करने वाली दवाइयां डाल रही हैं, वहीं रांची में भी अस्पतालों को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रख दिया गया है. रांची के सदर और रिम्स (RIMS) जैसे बड़े अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच किट और ओसेल्टामिफिर (Oseltamivir) जैसी जीवन रक्षक एंटीवायरल दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. इसके साथ ही, जिला प्रशासन द्वारा नुक्कड़ नाटक, लाउडस्पीकर और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का महाअभियान चलाया जा रहा है ताकि लोग अपनी सेहत को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें. डॉक्टरों का यह भी कहना है कि खानपान में पौष्टिक चीजों को शामिल करें, विटामिन सी से भरपूर फल खाएं और अपने शरीर को पूरी तरह हाइड्रेटेड रखें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी मजबूत बनी रहे और शरीर ऐसे खतरनाक वायरसों का डटकर मुकाबला कर सके.
रिटायरमेंट के बाद अपनी गाढ़ी कमाई को बिना किसी बाजार जोखिम के सुरक्षित रखना और उस पर नियमित व अधिकतम मासिक या त्रैमासिक आय प्राप्त करना हर वरिष्ठ नागरिक की पहली प्राथमिकता होती है। जहां देश के बड़े सरकारी और निजी बैंक (जैसे SBI, PNB और HDFC Bank) बुजुर्गों को 3 से 5 साल की एफडी पर 7.00% से 7.50% के आसपास ब्याज दे रहे हैं, वहीं स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है।सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday SFB), इक्विटास (Equitas SFB) और शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनिंदा अवधियों (विशेष रूप से 5 वर्ष और स्पेशल टेन्योर) पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को 8.50% तक का वार्षिक ब्याज ऑफर कर रहे हैं।किन बैंकों में मिल रहा है 8.50% तक का उच्चतम रिटर्न?वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य खाताधारकों की तुलना में 50 बेसिस प्वाइंट्स (0.50%) तक का अतिरिक्त ब्याज मिलता है। वर्तमान में शीर्ष रिटर्न देने वाले बैंकों का विवरण इस प्रकार है:बैंक का नामवरिष्ठ नागरिकों के लिए उच्चतम ब्याज दर (p.a.)प्रमुख टेन्योर (अवधि)सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday SFB)8.50%5 वर्ष की अवधिइक्विटास / एसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक8.30% - 8.50%2 से 3 वर्ष की स्पेशल बास्केटशिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक8.50%चुनिंदा रिटेल डिपॉजिट टेन्योरजना स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana SFB)8.30% - 8.50%2 वर्ष से 3 वर्ष (FD Plus)उत्कर्ष / उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक8.20% - 8.25%15 महीने से 3 वर्ष₹5 लाख जमा करने पर कितना बनेगा रिटर्न?यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 8.50% की दर पर ₹5,00,000 की राशि 5 साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करता है, तो त्रैमासिक चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) के आधार पर मिलने वाला रिटर्न:कुल मूलधन (Principal): ₹5,00,000लागू वार्षिक ब्याज दर: 8.50%5 साल में कुल अर्जित ब्याज: लगभग ₹2,61,4905 साल बाद कुल मैच्योरिटी राशि: ₹7,61,490यदि कोई बुजुर्ग हर महीने या हर 3 महीने पर पेंशन के रूप में ब्याज लेना चाहता है, तो उसे 8.50% की दर पर लगभग ₹3,540 मासिक या ₹10,625 त्रैमासिक की नियमित आय प्राप्त होगी।क्या स्मॉल फाइनेंस बैंकों में आपका पैसा 100% सुरक्षित है?कई बुजुर्गों के मन में यह संशय रहता है कि क्या छोटे बैंकों में पैसा लगाना सुरक्षित है।RBI का शेड्यूल्ड बैंक दर्जा: ये सभी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित और शेड्यूल्ड बैंक के रूप में रजिस्टर्ड हैं।DICGC की ₹5 लाख की गारंटी: आरबीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी संस्था 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) के तहत प्रत्येक जमाकर्ता के मूलधन और ब्याज को मिलाकर ₹5,00,000 तक की पूरी रकम पर 100% सुरक्षा गारंटी मिलती है।सुरक्षित रणनीति: यदि आपके पास ₹10 से ₹15 लाख की पूंजी है, तो सारा पैसा एक बैंक में लगाने के बजाय दो या तीन अलग-अलग बैंकों में ₹5-5 लाख के टुकड़ों में बांटकर (FD Laddering) जमा करें, जिससे पूरी पूंजी पर डीआईसीजीसी का सुरक्षा कवर भी बना रहे और 8.50% का उच्चतम रिटर्न भी मिले।वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स छूट के नियमधारा 80TTB का लाभ: आयकर कानून की धारा 80TTB के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को एक वित्तीय वर्ष में बैंक एफडी और बचत खातों से अर्जित ब्याज पर ₹50,000 तक की कुल छूट मिलती है। ₹50,000 तक के ब्याज पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं कटता।फॉर्म 15H जमा करना न भूलें: यदि आपकी कुल वार्षिक आय कर-योग्य सीमा से कम है, तो वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही बैंक में Form 15H जमा कर दें, ताकि बैंक आपका टीडीएस न काटे।
दौसा में 33 लाख की स्मैक के साथ पांच तस्कर अरेस्ट
दौसा। राजस्थान के दौसा में पुलिस ने करीब 33 लाख रुपए कीमत की 164.52 ग्राम अवैध मादक पदार्थ स्मैक बरामद कर पांच तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत दौसा पुलिस ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए यह सफलता हासिल की। […] The post दौसा में 33 लाख की स्मैक के साथ पांच तस्कर अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), नेट बैंकिंग और क्रेडिट/डेबिट कार्ड के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराधियों द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Cyber Fraud) के मामलों में भी भारी इजाफा हुआ है। अक्सर फिशिंग लिंक्स, फर्जी कॉल या मैलवेयर के जरिए आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई बैंक खातों से उड़ा ली जाती है।छोटे खुदरा ग्राहकों और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी के भारी नुकसान से बचाने के लिए वित्तीय तंत्र में ₹25,000 तक के अनधिकृत लेनदेन पर संस्थागत मुआवजा व सुरक्षा शील्ड प्रदान करने की व्यापक रूपरेखा पर काम किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्वरित सूचना देने पर निर्दोष खाताधारकों को अपनी पूरी जमा पूंजी से हाथ न धोना पड़े।अनधिकृत लेनदेन पर दायित्व का वर्तमान ढांचा: RBI की 'सीरो लायबिलिटी' नीतिभारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा दिशानिर्देशों (Customer Liability in Unauthorised Electronic Banking Transactions) के तहत किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी में नुकसान की भरपाई तीन मुख्य श्रेणियों पर निर्भर करती है:1. बैंक की तकनीकी खामी पर 100% शून्य देनदारी (Zero Liability):यदि फ्रॉड बैंक के सिस्टम, सर्वर में सेंध या बैंक की आंतरिक लापरवाही के कारण हुआ है, तो ग्राहक की देनदारी शून्य होती है। पूरा नुकसान बैंक को वहन करना होता है, चाहे ग्राहक ने शिकायत तुरंत की हो या नहीं।2. थर्ड पार्टी ब्रीच (Third-Party Breach - 3 दिन का नियम):यदि सिस्टम में कोई सुरक्षा चूक न तो ग्राहक की ओर से हुई और न ही बैंक की ओर से, बल्कि थर्ड पार्टी साइबर अटैक या डेटा ब्रीच के जरिए हुई:3 कार्य दिवसों के भीतर सूचना देने पर: ग्राहक की देनदारी पूरी तरह शून्य (Zero Liability) होती है और पूरा रिफंड बैंक को देना होता है।4 से 7 कार्य दिवसों के भीतर सूचना देने पर: ग्राहक की अधिकतम देनदारी लेनदेन मूल्य या ₹5,000 से ₹25,000 (खाते के प्रकार के आधार पर) के बीच सीमित (Limited Liability) कर दी जाती है।7 दिनों के बाद सूचना देने पर: देनदारी बैंक के बोर्ड द्वारा अनुमोदित आंतरिक नीति के आधार पर तय होती है।3. ग्राहक की प्रत्यक्ष लापरवाही (Customer Negligence):यदि ग्राहक ने जानबूझकर अपना ओटीपी (OTP), सीवीवी (CVV), पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा किया है, तो बैंक को सूचना देने तक का पूरा नुकसान ग्राहक का होता है। बैंक को अनधिकृत लेनदेन की सूचना मिलने के बाद होने वाले किसी भी आगे के ट्रांजैक्शन की जिम्मेदारी बैंक की होती है।प्रस्तावित ₹25,000 तक के मुआवजे का गणित: कौन देगा कितने पैसे?छोटे और मध्यम डिजिटल फ्रॉड (जो कुल साइबर अपराधों का 70% से अधिक हिस्सा हैं) के त्वरित निपटारे के लिए एक बहुस्तरीय 'सुरक्षा और इंश्योरेंस पूल' (Security & Fraud Insurance Pool) के मॉडल पर विचार किया जा रहा है:हितधारक (Entity)प्रस्तावित भूमिका और देनदारी का अनुपातकार्यप्रणालीग्राहक (Victim/Consumer)₹0 से ₹1,000 (शून्य या नाममात्र कटौती)यदि ग्राहक ने घटना के 2 से 4 घंटे के भीतर 'गोल्डन ऑवर' में रिपोर्ट किया है, तो ग्राहक पर कोई आर्थिक भार नहीं डाला जाएगा। मामूली लापरवाही के मामलों में एक न्यूनतम टोकन कटौती (Deductible) हो सकती है।बैंक और पेमेंट गेटवे (Issuing Bank & Aggregator)40% से 50% हिस्सेदारीयदि बैंक के पास फ्रॉड प्रिवेंशन सिस्टम (जैसे सस्पेक्टेड अकाउंट फ्लैगिंग या असामान्य लोकेशन लॉगिन डिटेक्शन) की विफलता पाई जाती है, तो नुकसान का बड़ा हिस्सा संबंधित बैंक या पेमेंट एग्रीगेटर के आंतरिक प्रोविजनिंग फंड से कटेगा।आरबीआई समर्थित डिपॉजिटर प्रोटेक्शन / फ्रॉड फंड30% से 40% हिस्सेदारीकेंद्रीय नियामक के तत्वावधान में बनने वाले विशेष साइबर सुरक्षा जोखिम पूल (Cyber Risk Mitigation Reserve) से सहायता प्रदान की जाएगी, जो बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों के संयुक्त अंशदान से संचालित होगा।साइबर इंश्योरेंस कवरेज (Inbuilt Insurance)शेष बची राशिबचत खातों और यूपीआई हैंडल के साथ इनबिल्ट माइक्रो-इंश्योरेंस कवरेज जोड़कर क्लेम सेटलमेंट को 10 से 15 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा।फ्रॉड होते ही 'गोल्डन ऑवर' में ये 3 काम तुरंत करेंकिसी भी प्रकार के ऑनलाइन फ्रॉड के बाद मुआवजे या रिफंड की संभावना तभी सबसे अधिक होती है जब पीड़ित त्वरित कदम उठाए:1. नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें: घटना के तुरंत बाद गृह मंत्रालय के हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें। इससे फ्रॉड ट्रांजैक्शन की वित्तीय ट्रेल ट्रैक होती है और ठग के खाते में पैसे को फ्रीज (Lien Mark) कर दिया जाता है।2. बैंक को औपचारिक सूचना दें (Service Request Number लें): तुरंत बैंक के 24x7 हेल्पलाइन, ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए संबंधित डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई आईडी को ब्लॉक कराएं और अनधिकृत लेनदेन की औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं।3. लिखित शिकायत और पावती: नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराकर उसकी पावती (Acknowledgement Copy) बैंक को ईमेल के जरिए भेजें ताकि समय-सीमा का कानूनी रिकॉर्ड बना रहे।बैंक को अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन की सूचना मिलने के बाद निर्धारित कार्य दिवसों के भीतर संबंधित राशि को ग्राहक के खाते में 'शैडो क्रेडिट' (अस्थायी जमा) के रूप में लौटाना होता है, जब तक कि आंतरिक जांच पूरी न हो जाए।
चलती बस में दरिंदगी, भागने की कोशिश की तो... दिल्ली गैंगरेप मामले में पुलिस का बड़ा खुलासा
दिल्ली पुलिस के अनुसार, ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही एक चलती बस में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक बलात्कार हुआ। पीड़िता ने बस से भागने की कोशिश की तो आरोपियों ने फिर उसे पकड़ लिया और फिर…
नया क्रेडिट कार्ड बेचते समय बैंक और वित्तीय संस्थान ग्राहकों को दिन में कई बार फोन कर लुभावने ऑफर्स देते हैं, लेकिन जब कोई ग्राहक उपयोग न होने वाले कार्ड को हमेशा के लिए बंद (Cancel/Close) कराना चाहता है, तो अक्सर उसे जटिल प्रक्रियाओं, रिटेंशन कॉल्स और कस्टमर केयर के टालमटोल का सामना करना पड़ता है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है या बैंक आपकी कैंसिलेशन रिक्वेस्ट पर हफ्तों तक कुंडली मारकर बैठा है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का एक बेहद सख्त नियम सीधे तौर पर आपके आर्थिक अधिकार की रक्षा करता है।आरबीआई के मास्टर डायरेक्शन के अनुसार, यदि तय समय-सीमा के भीतर बैंक आपका क्रेडिट कार्ड बंद करने में नाकाम रहता है, तो उसे अपनी जेब से आपको प्रतिदिन ₹500 का हर्जाना (Compensation) देना होगा।क्या है RBI का 7 दिन वाला नियम और ₹500 का दैनिक हर्जाना?भारतीय रिजर्व बैंक के 'मास्टर डायरेक्शन ऑन क्रेडिट कार्ड एंड डेबिट कार्ड (इश्यूएंस एंड कंडक्ट) डायरेक्शंस' के पैराग्राफ 8 में क्रेडिट कार्ड बंद करने की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है:7 कार्य दिवसों की डेडलाइन: कार्डधारक की ओर से औपचारिक आवेदन मिलने के बाद कार्ड जारीकर्ता बैंक या कंपनी को अधिकतम 7 वर्किंग डेज (कार्य दिवस) के भीतर कार्ड को अनिवार्य रूप से बंद करना होगा।8वें दिन से ₹500 रोज की पेनल्टी: यदि बैंक 7 कार्य दिवसों में खाता बंद करने में विफल रहता है, तो 8वें दिन से पेनल्टी मीटर शुरू हो जाता है। बैंक को तब तक ₹500 प्रति कैलेंडर दिन के हिसाब से ग्राहक के खाते में हर्जाना जमा करना होगा, जब तक कि कार्ड औपचारिक रूप से क्लोज न हो जाए।लाखों रुपये तक का मुआवजा: हाल ही में ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां बैंक द्वारा महीनों तक क्लोजर रिक्वेस्ट पेंडिंग रखने पर बैंकिंग लोकपाल ने बैंक को ग्राहक को ₹3 लाख से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया।₹500 प्रतिदिन का मुआवजा पाने के लिए ये 3 शर्तें पूरी होना जरूरीइस कानूनी अधिकार और मुआवजे का दावा आप तभी मजबूती से कर सकते हैं, जब आपने अपनी ओर से प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं सही रखी हों:1. बकाया राशि शून्य (Zero Balance) होना अनिवार्य: कार्ड बंद करने का अनुरोध भेजते समय आपके कार्ड पर कोई भी बिल, पेंडिंग ईएमआई (EMI), वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज या बिना बिल वाला खर्च बाकी नहीं होना चाहिए। यदि खाते में ₹1 का भी बकाया रह गया, तो बैंक तकनीकी आधार पर हर्जाने से इनकार कर सकता है।2. लिखित/डिजिटल रिकॉर्ड और टिकट नंबर: केवल मौखिक फोन कॉल पर भरोसा न करें। हमेशा आधिकारिक मोबाइल बैंकिंग ऐप, नेट बैंकिंग या बैंक के अधिकृत शिकायत ईमेल पते के जरिए कार्ड बंद करने का अनुरोध भेजें। आवेदन के बाद मिलने वाला सर्विस रिक्वेस्ट (SR) नंबर, पावती या ईमेल का स्क्रीनशॉट संभालकर रखें, क्योंकि यही तारीख का आधिकारिक प्रमाण होगा।3. रिवॉर्ड पॉइंट्स रिडीम करने का अधिकार: आरबीआई नियमों के तहत कार्ड जारीकर्ता को कार्ड बंद होने पर कार्ड में मौजूद वैध रिवॉर्ड पॉइंट्स को भुनाने (Redeem) के लिए कार्डधारक को कम से कम 30 दिनों का समय देना अनिवार्य है।बैंक शाखा (Branch) के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं कर सकताअक्सर बैंक शाखा प्रबंधक ग्राहकों से कहते हैं कि क्रेडिट कार्ड बंद कराने के लिए उन्हें होम ब्रांच आकर फॉर्म भरना होगा। आरबीआई ने अपनी गाइडलाइंस में साफ कर दिया है कि बैंक किसी भी ग्राहक को सिर्फ ब्रांच आने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।बैंकों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप, समर्पित हेल्पलाइन, आईवीआर (IVR) और रजिस्टर्ड ईमेल जैसे डिजिटल माध्यमों पर वन-क्लिक क्लोजर का विकल्प देना अनिवार्य है। कार्ड सफलतापूर्वक बंद होने पर बैंक को तत्काल एसएमएस और ईमेल के माध्यम से कंफर्मेशन देना होता है। इसके साथ ही 30 दिनों के भीतर क्रेडिट ब्यूरो (CIBIL, Experian) को भी अकाउंट क्लोजर की सूचना भेजना बैंक की जिम्मेदारी होती है।अगर बैंक 7 दिन बाद भी कार्ड बंद न करे और हर्जाना न दे, तो क्या करें?यदि 7 कार्य दिवस बीत चुके हैं और आपका कार्ड अब भी एक्टिव दिख रहा है, तो इस स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया का पालन करें:स्टेप 1 (प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर को ईमेल): बैंक के कस्टमर केयर के बजाय सीधे बैंक के 'प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर' (Principal Nodal Officer - PNO) को ईमेल भेजें। इसमें अपना सर्विस टिकट नंबर, आवेदन की तारीख और RBI Master Direction - Credit Card Paragraph 8 का हवाला देते हुए ₹500 प्रतिदिन के हर्जाने की मांग करें।स्टेप 2 (RBI बैंकिंग लोकपाल में ऑनलाइन शिकायत): यदि बैंक 30 दिनों के भीतर आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता या मुआवजा देने से मना करता है, तो आप बिना किसी कानूनी खर्च के सीधे आरबीआई के कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल cms.rbi.org.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।कार्रवाई: आरबीआई लोकपाल (Banking Ombudsman) दोनों पक्षों की जांच के बाद बैंक को क्लोजर की तारीख तक के पूरे दिनों का ₹500 प्रति दिन के हिसाब से मुआवजा ग्राहक के खाते में ट्रांसफर करने का आदेश देता है।
राजस्थान में 9 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित
जयपुर। राजस्थान में संचालित शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान के तहत असुरक्षित खाद्य पदार्थों पर राज्यभर में रोक लगा दी गई और नौ खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए जबकि बिना लाइसेंस कारोबार करने वाले तीन प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन निरस्त किया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट और असुरक्षित […] The post राजस्थान में 9 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित appeared first on Sabguru News .
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर अक्सर सियासी फिजाओं में गर्मी पैदा करते रहते हैं, और इस बार का यह ताजा विवाद सीधे तौर पर सुहेलवाद भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कद्दावर नेता ओमप्रकाश राजभर तथा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के बीच छिड़ गया है। राजनीति के गलियारों में कब कौन सा मुद्दा तूल पकड़ ले और किस बात पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाए, इसका अनुमान लगाना अक्सर मुश्किल होता है। हाल ही में एक ऐसा ही दिलचस्प और तीखा वाकया सामने आया है जिसके बाद सूबे की सियासत एक बार फिर से गर्मा गई है और दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पूरा मामला एक सार्वजनिक भोज और उसमें परोसी गई खानपान की चीजों से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर ओमप्रकाश राजभर ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर सीधा और तीखा तंज कसा है। राजभर ने अपने खास और बेबाक अंदाज में सवालिया लहजे में कहा है कि जब अजय राय यह अच्छी तरह से जानते थे और खुद इस बात का दावा करते हैं कि वे मछली नहीं खाते हैं, तो फिर आखिर वे उस भोज में शिरकत करने के लिए गए ही क्यों थे? राजभर के इस बयान के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है और इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस बयानबाजी के पीछे की असल पृष्ठभूमि क्या है और राजनीति के इस नए दंगल में कौन-क्या कह रहा है, आइए इस पूरे घटनाक्रम और उसके हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।क्या है पूरा मामला और क्यों छिड़ा है खानपान को लेकर यह सियासी विवादउत्तर प्रदेश की सियासत में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं, खानपान की आदतों और सार्वजनिक आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी को लेकर अक्सर बहस छिड़ जाती है, लेकिन इस बार का विवाद थोड़ा हटकर और ज्यादा दिलचस्प है। राजनीतिक कार्यक्रमों या सामाजिक भोजों में नेताओं का आना-जाना आम बात है, जहां वे तमाम लोगों से मिलते-जुलते हैं और अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। लेकिन जब किसी भोज के मेनू और उसमें परोसे जाने वाले व्यंजनों को लेकर राजनीतिक दल आमने-सामने आ जाएं, तो मामला विवादित बन जाता है। हाल ही में एक ऐसे ही भोज का आयोजन हुआ था जिसमें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई बड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया था। इसी आयोजन को लेकर जब पत्रकारों ने सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर से सवाल किया, तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखी और सीधे तौर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को अपने निशाने पर ले लिया। राजभर का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दल और सत्ता पक्ष के नेता एक-दूसरे को घेरने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं दे रहे हैं। खानपान की इस चर्चा ने अब सियासी गलियारों में एक नया मोड़ ले लिया है, जहां हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है कि आखिर इस भोज के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और इस बयान के क्या दूरगामी राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।ओमप्रकाश राजभर के तीखे तेवर और अजय राय पर किया गया करारा कटाक्षअपनी बेबाक बयानबाजी और तीखे तेवरों के लिए मशहूर ओमप्रकाश राजभर ने इस मुद्दे पर बोलते हुए किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती और सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राजनीति में कुछ लोग सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए हर जगह पहुंच जाते हैं, भले ही वहां की चीजें उनके अनुकूल हों या न हों। राजभर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जब अजय राय को यह अच्छी तरह पता था कि उस भोज में क्या परोसा जा रहा है और वे सार्वजनिक तौर पर खुद को शाकाहारी या मछली न खाने वाला बताते हैं, तो फिर ऐसी जगह जाने का औचित्य ही क्या था? उन्होंने कहा कि अगर आप किसी कार्यक्रम में सिर्फ राजनीति चमकाने या विरोध दर्ज कराने के लिए जाते हैं, तो आपकी नीयत पर सवाल उठना लाजमी है। राजभर के इस तीखे कटाक्ष ने कांग्रेस खेमे में हलचल पैदा कर दी है और उनके इस बयान को लेकर सियासी विश्लेषक भी अपने-अपने तरीके से कयास लगा रहे हैं। सुभासपा अध्यक्ष का यह अंदाज पुराना रहा है कि वे किसी भी मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखते हैं और विपक्षी नेताओं को घेरने में कभी पीछे नहीं हटते हैं। इस बार भी उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक अपनी एक अलग जगह बना ली है और कार्यकर्ता भी इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।कांग्रेस और अजय राय की तरफ से इस बयान पर क्या आ रही हैं प्रतिक्रियाएंओमप्रकाश राजभर के इस तीखे हमले के बाद कांग्रेस पार्टी और खुद अजय राय के समर्थकों की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ओमप्रकाश राजभर का यह बयान पूरी तरह से बचकाना और राजनीति से प्रेरित है, जिसका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का तर्क है कि एक सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेता का काम समाज के हर वर्ग और हर कार्यक्रम में जाकर लोगों से संवाद स्थापित करना होता है, न कि यह देखना कि थाली में क्या परोसा जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी सामाजिक या राजनीतिक भोज में शिरकत करना महज खानपान तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आपसी मेलजोल और संवाद का एक माध्यम होता है, जिसे राजभर जैसे नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए सनसनीखेज बना रहे हैं। अजय राय के करीबियों का यह भी कहना है कि राजभर जी हमेशा से ही उलटे-सीधे बयान देकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहना पसंद करते हैं, और इस बार का यह बयान भी उसी राजनीतिक रणनीति का एक हिस्सा मात्र है। इस प्रकार दोनों दलों के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में वैसे भी सियासी पारा हमेशा हाई रहता है और हर एक बयान को बहुत बारीकी से परखा जाता है।यूपी की सियासत पर इस जुबानी जंग का कितना असर पड़ेगाउत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य में इस तरह के बयान अक्सर बड़े सियासी समीकरणों की तरफ इशारा करते हैं। ओमप्रकाश राजभर वर्तमान में सत्ताधारी एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं, जबकि अजय राय विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के तहत कांग्रेस पार्टी की कमान उत्तर प्रदेश में संभाल रहे हैं। ऐसे में दोनों दिग्गजों के बीच की यह तनातनी केवल एक भोज या खानपान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं। जब भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के कद्दावर नेता आपस में इस तरह के व्यक्तिगत और तीखे कटाक्ष करते हैं, तो चुनावी माहौल और ज्यादा गर्मा जाता है। जनता के बीच भी इन बयोंनों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगती हैं कि कैसे नेता छोटे-छोटे मुद्दों को भी बड़ा राजनीतिक हथियार बना लेते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान भले ही सतही तौर पर हल्के-फुल्के या व्यक्तिगत लग सकते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने और विरोधियों की घेराबंदी करने के लिए पूरी शिद्दत से करते हैं। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अजय राय इस बयान का कोई कड़ा जवाब देते हैं या फिर यह मामला यहीं शांत हो जाता है, लेकिन फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस 'मछली भोज' वाले बयान ने सियासी तापमान को काफी बढ़ा दिया है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की आलोचना की।
जन्माष्टमी पर मथुरा, रिंगस और वाराणसी के लिए स्पेशल ट्रेन का ऐलान, देखें पूरा शेड्यूल
रेलवे ने जन्माष्टमी के मौके पर दिल्ली से मथुरा, रिंगस और वाराणसी के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है. मथुरा और रिंगस के लिए चलने वाली जन्माष्टमी स्पेशल ट्रेनों में सिर्फ अनारक्षित कोच होंगे.
चार साल बाद खत्म हुआ इंतजार: सपा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत को मिली लखनऊ की कुर्क आलीशान कोठी
उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है, जहां समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी को लगभग चार साल लंबे कानूनी संघर्ष के बाद बड़ी सफलता हासिल हुई है। राजधानी लखनऊ के अति-सुरक्षित और पॉश इलाके डालीबाग में स्थित उनकी करीब 6700 वर्ग फीट में फैली आलीशान आवासीय कोठी को आखिरकार प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सीलमुक्त कर दिया है। बता दें कि अक्टूबर 2022 के दौरान उत्तर प्रदेश शासन और जिला प्रशासन द्वारा गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए इस बहुचर्चित और आलीशान संपत्ति को कुर्क कर लिया गया था, जिसके बाद से इस पर ताला लटका हुआ था और इसकी देखरेख व प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को सौंप दिया गया था। इस कार्रवाई के खिलाफ अंसारी परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और न्याय की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि डालीबाग स्थित यह आवासीय संपत्ति किसी भी प्रकार के संगठित अपराध या अवैध गतिविधियों से अर्जित नहीं की गई है, जिसके बाद कोर्ट ने इस संपत्ति को वैध करार देते हुए इसे तुरंत अवमुक्त करने का आदेश दिया था। निचली अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के अनुपालन में आखिरकार मंगलवार को प्रशासनिक और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सील हटाने की विधिवत कार्रवाई पूरी की। इस दौरान खुद सांसद अफजाल अंसारी अपने परिजनों और स्थानीय तहसील प्रशासन के अधिकारियों के साथ मौके पर मौजूद रहे और कागजी औपचारिकताओं का पंचनामा तैयार करवाया गया। संपत्ति का वास्तविक दखल और चाबियां परिवार को सौंपे जाने की इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से इस हाई-प्रोफाइल मामले की चर्चा जोरों पर है। आइए इस पूरी कानूनी लड़ाई, कुर्की के इतिहास और सील खुलने के बाद सामने आए घटनाक्रम के हर एक पहलू को विस्तार से समझते हैं।अक्टूबर 2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई थी डालीबाग की इस कोठी की कुर्कीवर्ष 2022 का वह दौर उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक सुर्खियों में सबसे ऊपर रहा था, जब प्रदेश सरकार द्वारा माफिया और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत कई बड़ी और वीआईपी संपत्तियों को निशाना बनाया गया था। इसी कड़ी में अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह यानी 23 से 28 अक्टूबर 2022 के दौरान गाजीपुर जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी के सख्त आदेशों का पालन करते हुए गाजीपुर पुलिस की एक विशेष टीम राजधानी लखनऊ पहुंची थी। पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर डालीबाग स्थित इस आलीशान बंगले पर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 14(1) के तहत कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया था और इसे अपने कब्जे में लेते हुए पूरी तरह सील कर दिया था। उस समय इस कार्रवाई को लेकर राज्य भर में भारी सनसनी फैल गई थी क्योंकि यह संपत्ति सपा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम पर आधिकारिक रूप से दर्ज थी। कुर्की की इस कार्रवाई के बाद से ही यह भव्य इमारत पूरी तरह वीरान पड़ी थी और इसकी सुरक्षा व प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा लखनऊ नगर आयुक्त के अधीन आ गया था। परिवार के सदस्यों का कहना था कि यह संपत्ति पूरी तरह वैध और उनकी अपनी मेहनत की कमाई से अर्जित है, जिसका किसी भी आपराधिक गतिविधि से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद कानूनी पेचीदगियों के चलते यह आलीशान बंगला लंबे समय तक प्रशासनिक शिकंजे में जकड़ा रहा और अंसारी परिवार को अपने ही आशियाने से बेदखल रहना पड़ा।विशेष अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से मिली थी कानूनी राहतप्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ अफजाल अंसारी के परिवार ने हार नहीं मानी और न्याय के लिए निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक मजबूत कानूनी पैरवी की। गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने मामले के सभी दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों की गहराई से समीक्षा करने के बाद अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया कि डालीबाग स्थित यह आवासीय मकान किसी भी प्रकार के अवैध या गैंगस्टर नेटवर्क से कमाए गए धन से नहीं बनाया गया है। इसके बाद अदालत ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को यह निर्देश दिया था कि वह आदेश पारित होने के 30 दिनों के भीतर इस मकान की सील खुलवाकर इसे वैध मालकिन फरहत अंसारी को वापस सौंप दें। हालांकि, इसके बावजूद जब तय समय सीमा के भीतर प्रशासनिक स्तर पर सील हटाने की प्रक्रिया में विलंब हुआ, तो परिवार की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सी. डी. सिंह की एकल पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता ने परिवार का पक्ष मजबूती से रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए तय समय सीमा के भीतर सकारण आदेश पारित करने और अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा कि वह अदालत के आदेश का अक्षरशः पालन करे और कुर्क संपत्ति को मुक्त करे।तहसीलदार और राजस्व टीम की मौजूदगी में खुली सील, परिवार को मिला कब्जाअदालत के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए आखिरकार वह दिन आ गया जब प्रशासनिक अमला डालीबाग स्थित इस विवादित और चर्चित कोठी पर पहुंचा। गाजीपुर और लखनऊ जिला प्रशासन के संयुक्त निर्देश के बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार, राजस्व विभाग के लेखपाल और स्थानीय पुलिस बल ने कानूनी औपचारिकताएं शुरू की। इस पूरी कार्रवाई के दौरान खुद सपा सांसद अफजाल अंसारी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौके पर मौजूद रहे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में सबसे पहले संपत्ति के कागजात और सीमाओं का मिलान करने के लिए पैमाइश की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद सील खोलने से जुड़े सभी जरूरी कानूनी पंचनामे और दस्तावेज तैयार किए गए। इन तमाम प्रशासनिक और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद आखिरकार चार साल से बंद पड़े इस मुख्य द्वार के ताले खोल दिए गए और संपत्ति का वास्तविक दखल एक बार फिर से अंसारी परिवार को सौंप दिया गया। कोठी के अंदर प्रवेश करने पर परिवार के सदस्यों ने राहत की सांस ली, हालांकि इस दौरान लंबे समय से बंद पड़े होने के कारण घर के भीतर की स्थिति को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गईं। चार साल के लंबे अंतराल के बाद अपने घर की चाबी वापस मिलना अंसारी परिवार के लिए एक बड़ी कानूनी और नैतिक जीत माना जा रहा है।
नंदू गैंग के अनुराग और राजीव नयन के रिश्तेदार पुष्कर को UP STF ने दबोचा
उत्तर प्रदेश STF ने लखनऊ के विभूति खंड से दिल्ली के कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग के सदस्य अनुराग मिश्रा और पेपर लीक गैंग के सक्रिय सदस्य पुष्कर पांडे को गिरफ्तार किया है. अनुराग राजकुमार दलाल मर्डर केस में दो साल से फरार था, जबकि पुष्कर पर कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक में शामिल होने का आरोप है.
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पॉपुलर मिर्जापुर सीरीज में अनंग्शा बिस्वास ने जरीना का रोल कर नाम कमाया. शो में उनकी बोल्ड इमेज देखने को मिली थी.

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