अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक खोज: सामने आया दैत्याकार 'ब्लैक होल स्टार'
खगोल भौतिकी (Astrophysics) और अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक ऐसा क्रांतिकारी अध्याय जुड़ गया है जिसने वैज्ञानिकों की पुरानी धारणाओं को झकझोर कर रख दिया है। सुदूर और प्राचीन ब्रह्मांड के रहस्यों की पड़ताल में जुटे वैज्ञानिकों ने एक ऐसे असाधारण और प्रलयंकारी खगोलीय पिंड (Celestial Object) के मजबूत संकेत दर्ज किए हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'ब्लैक होल स्टार' या 'क्वासी-स्टार' (Quasi-Star) कहा जाता है।प्राप्त वैज्ञानिक डेटा और सिमुलेशन मॉडल्स के अनुसार, यह विशालकाय तारा हमारे सौरमंडल के सूर्य से लगभग 1,00,000 (एक लाख) गुना अधिक भारी है और इसकी ऊर्जा उत्पादन क्षमता सामान्य तारों की तुलना में लगभग 100 अरब गुना अधिक शक्तिशाली आंकी गई है। ब्रह्मांड के जन्म यानी बिग बैंग के कुछ ही सौ मिलियन वर्ष बाद (कॉस्मिक डॉन के युग में) मौजूद रहे इस खगोलीय दैत्य की खोज ने समूचे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय को चकित कर दिया है। यह खोज इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण बन सकती है कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में तारों और ब्लैक होल्स के बनने का नियम आज के आधुनिक ब्रह्मांड से बिल्कुल भिन्न था।क्वासी-स्टार क्या है? जहां परमाणु संलयन नहीं, ब्लैक होल चलाता है तारे का इंजनहमारी आकाशगंगा में मौजूद सूर्य और अन्य सभी सामान्य तारे अपने केंद्र में होने वाले परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) की बदौलत चमकते हैं, जहां अत्यधिक दबाव और तापमान में हाइड्रोजन गैस हीलियम में बदलती है और भारी मात्रा में प्रकाश व ऊष्मा उत्सर्जित होती है। लेकिन एक 'ब्लैक होल स्टार' का आंतरिक तंत्र इस सामान्य भौतिकी के बिल्कुल विपरीत काम करता है।क्वासी-स्टार की अवधारणा के अनुसार, इस तारे के केंद्र में कोई सामान्य स्टेलर कोर नहीं होता, बल्कि इसके गर्भ में एक नवजात 'इंटरमीडिएट ब्लैक होल' समाया होता है। तारे की बाहरी परतें अत्यधिक सघन, गर्म और विशाल हाइड्रोजन व हीलियम गैस के विशालकाय खोल (हाइड्रोजन एनवेलप) से बनी होती हैं। जब केंद्र में मौजूद ब्लैक होल अपने ही चारों ओर मौजूद तारे की भीतरी गैस को निगलना (Accretion) शुरू करता है, तो इस प्रक्रिया में अत्यधिक शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण घर्षण पैदा होता है। इस प्रचंड घर्षण से निकलने वाली विकिरण ऊर्जा (रेडिएशन प्रेशर) तारे के बाहरी गैस के खोल को बाहर की तरफ धकेलती है, जिससे तारा अपने ही विशाल गुरुत्वाकर्षण के कारण तुरंत ढहने से बच जाता है और लाखों वर्षों तक एक स्थिर लेकिन अत्यंत चमकदार 'ब्लैक होल पावर्ड स्टार' के रूप में अस्तित्व में रहता है।1 लाख सूर्यों जितना द्रव्यमान और 100 अरब गुना चमक: आंकड़ों की जुबानी समझिए इसका आकारइस ब्लैक होल स्टार के भौतिक आयाम इतने विशाल हैं कि सामान्य मानव मस्तिष्क के लिए उनकी कल्पना करना भी लगभग असंभव है:अकल्पनीय द्रव्यमान (Mass): सामान्य तारों का अधिकतम द्रव्यमान आमतौर पर 100 से 150 सौर द्रव्यमान (Solar Masses) तक सीमित होता है, क्योंकि उससे अधिक भारी होने पर विकिरण का दबाव तारे को फाड़ देता है। लेकिन यह क्वासी-स्टार करीब 1,00,000 सौर द्रव्यमान का है, यानी इसमें एक लाख सूर्य समा सकते हैं।करोड़ों किलोमीटर में फैला आकार: यदि इस ब्लैक होल स्टार को हमारे सौरमंडल के केंद्र में सूर्य की जगह रख दिया जाए, तो इसका बाहरी गैसीय वायुमंडल बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल और संभवतः बृहस्पति ग्रह की कक्षा से भी आगे तक फैल जाएगा।100 अरब गुना प्रकाश उत्सर्जन: इस पिंड से निकलने वाली रोशनी और ऊर्जा पूरे ब्रह्मांड की एक छोटी-मोटी आकाशगंगा (जिसमें अरबों तारे होते हैं) के कुल प्रकाश से भी कई गुना अधिक है। यह अपनी चमक के मामले में भौतिकी के 'एडिंगटन लिमिट' (Eddington Limit) के उच्चतम स्तर पर काम करता है।ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य का समाधान: कैसे बने शुरुआती सुपरमैसिव ब्लैक होल?पिछले कई वर्षों से खगोलविदों के सामने सबसे बड़ी पहेली यह रही है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति के केवल 500 से 700 मिलियन वर्ष बाद ही अरबों सूर्यों के बराबर विशालकाय 'सुपरमैसिव ब्लैक होल' (Supermassive Black Holes) कैसे बन गए? पारंपरिक सिद्धांत कहते हैं कि जब कोई सामान्य तारा मरता है, तो उससे एक छोटा स्टेलर ब्लैक होल बनता है (लगभग 10 से 50 सौर द्रव्यमान)। यदि यह छोटा ब्लैक होल धीरे-धीरे गैस खाकर बढ़ता, तो उसे अरबों गुना बड़ा होने के लिए अरबों वर्षों का समय चाहिए था, जबकि वे ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में ही विशाल रूप में मौजूद थे।इस 'ब्लैक होल स्टार' की खोज ने इस रहस्य पर से पर्दा हटा दिया है। वैज्ञानिक 'डायरेक्ट कोलैप्स ब्लैक होल' (DCBH) मॉडल का समर्थन करते हैं। इसके अनुसार, प्राचीन ब्रह्मांड में जब बिना किसी धातु (Heavy Elements) वाले विशाल गैस के बादल सीधे ढहे, तो उन्होंने छोटे तारों के बजाय सीधे 1 लाख सौर द्रव्यमान वाले क्वासी-स्टार्स को जन्म दिया। इन क्वासी-स्टार्स के मरने के बाद जो ब्लैक होल बचे, वे 'बीज' (Seed Black Holes) के रूप में पहले से ही इतने विशाल थे कि उन्होंने बहुत कम समय में विकसित होकर आकाशगंगाओं के केंद्र में स्थित आज के दैत्य सुपरमैसिव ब्लैक होल्स का रूप ले लिया।जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) और अत्याधुनिक सिमुलेशन का कमालनासा (NASA), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के संयुक्त जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने अंतरिक्ष के सुदूर छोर से आने वाले इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी डेटा के माध्यम से ब्रह्मांड के शुरुआती दौर की अभूतपूर्व तस्वीरें जुटाई हैं।गहन कॉस्मिक रेडशिफ्ट (z>10) के विश्लेषण और सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से वैज्ञानिकों ने पाया कि शुरुआती ब्रह्मांड में बनने वाले 'पॉपुलेशन III' तारों के गैस के बादलों में जब मॉलिक्यूलर हाइड्रोजन को खत्म करने वाले अल्ट्रावायलेट रेडिएशन का असर हुआ, तो गैस ठंडी होकर छोटे-छोटे टुकड़ों में नहीं बंटी, बल्कि एक ही विशालकाय महा-पिंड के रूप में सिमट गई। इसी दुर्लभ प्रक्रिया ने इस 1 लाख सौर द्रव्यमान वाले ब्लैक होल स्टार को जन्म दिया, जिसके स्पेक्ट्रल सिग्नेचर अब उन्नत वेधशालाओं द्वारा डीकोड किए जा रहे हैं।एक क्वासी-स्टार का जीवन चक्र और इसका प्रलयंकारी अंतभले ही यह ब्लैक होल स्टार देखने में ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली तारा लगता हो, लेकिन एक तारे के पैमाने पर इसका जीवनकाल बहुत छोटा होता है। जहां हमारा सूर्य करीब 10 अरब वर्षों तक जीवित रहेगा, वहीं एक क्वासी-स्टार का जीवन केवल 10 लाख से 20 लाख (1 to 2 Million) वर्षों का ही होता है।जैसे-जैसे केंद्र में मौजूद ब्लैक होल तारे के अंदरूनी हिस्से को लगातार निगलता जाता है, ब्लैक होल का आकार बढ़ता जाता है और बाहरी गैसीय आवरण धीरे-धीरे ठंडा और पतला होता जाता है। एक समय ऐसा आता है जब बाहरी खोल ब्लैक होल के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण और रेडिएशन के संतुलन को संभाल नहीं पाता। इसके बाद पूरा बाहरी गैस का आवरण या तो अंतरिक्ष में उड़ जाता है या फिर कुछ ही समय में सीधे ब्लैक होल में समा जाता है। अंत में, तारा पूरी तरह गायब हो जाता है और उस स्थान पर केवल एक विशालकाय इंटरमीडिएट-मास ब्लैक होल शेष बचता है, जो आसपास की आकाशगंगाओं को निगलने के लिए तैयार रहता है।ब्रह्मांड की समझ में एक नया युग: आगे की संभावनाएंइस खोज ने सैद्धांतिक भौतिकी और प्रेक्षणीय खगोल विज्ञान (Observational Astronomy) के बीच की खाई को पाट दिया है। दुनिया भर की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां अब जेम्स वेब टेलीस्कोप, आने वाले 'नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप' और चिली में बन रहे 'एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप' (ELT) के जरिए ऐसे और अधिक प्रारंभिक खगोलीय पिंडों की मैपिंग करने में जुट गई हैं।यह खोज न केवल हमें यह बताती है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दिनों में प्रकृति ने कैसे-कैसे चरम और अविश्वसनीय खगोलीय पिंडों का निर्माण किया था, बल्कि यह हमारी अपनी आकाशगंगा 'मिल्की वे' के केंद्र में स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल 'सैजिटेरियस ए*' (Sagittarius A*) के जन्म और विकास की कहानी को समझने में भी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है। मानव इतिहास में पहली बार हम उस कॉस्मिक भोर को समझने के इतने करीब पहुंचे हैं, जिसने आधुनिक ब्रह्मांड की रचना की थी।
भारतीय बाजार में उतरी नई Continental GT 650: कैफे रेसर सेगमेंट में नया धमाका
प्रीमियम और रेट्रो-मॉडर्न मोटरसाइकिल सेगमेंट की दिग्गज दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) ने भारत में अपनी सबसे लोकप्रिय फ्लैगशिप कैफे रेसर बाइक 'कॉन्टिनेंटल जीटी 650' (Continental GT 650) के नए अपडेटेड मॉडल को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। देश भर की डीलरशिप्स पर उपलब्ध इस नई बाइक की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹3,58,427 तय की गई है।1950 और 60 के दशक की पारंपरिक ब्रिटिश कैफे रेसर संस्कृति से प्रेरित इस मोटरसाइकिल को कंपनी ने आधुनिक राइडर्स की जरूरतों और स्टाइल को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण कॉस्मेटिक और व्यावहारिक फीचर्स से लैस किया है। रॉयल एनफील्ड की 650 ट्विन्स सीरीज ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले ही एक मजबूत पहचान बनाई है, और इस नए अपडेट के साथ कंपनी ने 500cc से 800cc मिडिलवेट मोटरसाइकिल सेगमेंट में अपनी बादशाहत को और मजबूत करने का सीधा संदेश दिया है।क्या हुए हैं नए बदलाव? ब्लैक काउल, LED इंडिकेटर्स और टाइप-सी फास्ट चार्जिंग पोर्टनई रॉयल एनफील्ड कॉन्टिनेंटल जीटी 650 में किए गए अपडेट्स मुख्य रूप से इसके विजुअल अपीयरेंस और राइडर की दैनिक उपयोगिता को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं:ब्लैक-पेंटेड इंस्ट्रूमेंट पॉड काउल: बाइक के फ्रंट लुक को अधिक आक्रामक और क्लीन बनाने के लिए इसमें एक नया ब्लैक-आउट वाइजर/काउल दिया गया है, जो इसके रेट्रो ट्विन-पॉड एनालॉग कंसोल के साथ परफेक्ट बैठता है और कैफे रेसर स्टांस को और निखारता है।ऑल-न्यू LED टर्न इंडिकेटर्स: पुराने हैलोजन ब्लिंकर्स की जगह अब कंपनी ने आधुनिक और स्लीक डिजाइन वाले ऑल-एलईडी ट्रैफिकैटर्स (LED Indicators) दिए हैं। इससे न केवल रात और कोहरे में विजिबिलिटी कई गुना बेहतर होगी, बल्कि बाइक का प्रीमियम लुक भी बढ़ेगा।फास्ट USB Type-C चार्जिंग पोर्ट: लंबी दूरी की यात्रा और दैनिक राइडिंग के दौरान स्मार्टफोन, एक्शन कैमरा या जीपीएस नेविगेशन डिवाइस को चार्ज करने के लिए हैंडलबर के पास नया फास्ट यूएसबी टाइप-सी पोर्ट स्टैंडर्ड फीचर के रूप में शामिल किया गया है।रॉकर रेड में ब्लैक-आउट ट्रीटमेंट: अलॉय व्हील्स और डार्क थीम का नया स्वैगइस नए लॉन्च का सबसे बड़ा कॉस्मेटिक आकर्षण इसका 'रॉकर रेड' (Rocker Red) कलरवे है। इससे पहले कंपनी का सिग्नेचर डार्क-थीम और ब्लैक-आउट ट्रीटमेंट केवल 'एपेक्स ग्रे' (Apex Grey) ट्रिम तक सीमित था। अब कंपनी ने राइडर्स की भारी मांग को देखते हुए रॉकर रेड वेरिएंट में भी ब्लैक-आउट इंजन क्रैंककेस, मैट ब्लैक एग्जॉस्ट पाइप्स (साइलेंसर) और कास्ट अलॉय व्हील्स (Alloy Wheels) का विकल्प जोड़ दिया है।अलॉय व्हील्स मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब इस वेरिएंट में ट्यूबलेस टायर्स का सपोर्ट मिलता है, जिससे लंबी दूरी के सफर में अचानक पंचर होने का खतरा और उसे ठीक करने का झंझट पूरी तरह खत्म हो जाता है। वहीं, पारंपरिक रेट्रो लुक पसंद करने वाले शौकीनों के लिए स्पोक व्हील्स का विकल्प भी लाइनअप में बरकरार रखा गया है।कलर ऑप्शंस और वेरिएंट-वाइज कीमतें: ₹3.58 लाख से ₹3.88 लाख तक का पूरा रेट कार्डनई कॉन्टिनेंटल जीटी 650 को कुल चार प्रीमियम रंगों और अलग-अलग व्हील सेटअप्स के साथ बाजार में उतारा गया है। कंपनी ने इसके पुराने 'स्लिपस्ट्रीम ब्लू' शेड को लाइनअप से हटा दिया है। सभी वेरिएंट्स की एक्स-शोरूम कीमतें इस प्रकार हैं:Rocker Red (ब्लैक-आउट इंजन और कास्ट अलॉय व्हील्स): ₹3,58,427 (एक्स-शोरूम)British Racing Green (क्लासिक क्रोम इंजन और पारंपरिक स्पोक व्हील्स): ₹3,58,427 (एक्स-शोरूम)Apex Grey (ब्लैक-आउट मैकेनिकल थीम और कास्ट अलॉय व्हील्स): ₹3,80,921 (एक्स-शोरूम)Mr Clean (टॉप-स्पेक फुल क्रोम फिनिश टैंक और स्पोक व्हील्स): ₹3,87,667 (एक्स-शोरूम)नए फीचर्स के जुड़ने के बावजूद कंपनी ने कीमतों में बहुत मामूली बढ़ोतरी की है, जिससे यह अपने 650cc सेगमेंट में अब भी भारत की सबसे वैल्यू-फॉर-मनी मल्टी-सिलेंडर परफॉर्मेंस बाइक बनी हुई है।इंजन और परफॉर्मेंस: 648cc पैरेलल-ट्विन मोटर की बेजोड़ ताकतमैकेनिकल मोर्चे पर रॉयल एनफील्ड ने अपनी आजमाई हुई और बेहद रिफाइंड पावरट्रेन में कोई छेड़छाड़ नहीं की है। बाइक में वही प्रसिद्ध 648cc, 4-स्ट्रोक, एयर/ऑयल-कूल्ड, पैरेलल-ट्विन SOHC इंजन दिया गया है।यह इंजन 7,150 आरपीएम पर 47 बीएचपी (47.4 PS) की अधिकतम पावर और 5,250 आरपीएम पर 52.3 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। 270-डिग्री फायरिंग ऑर्डर वाला यह इंजन लो-एंड और मिड-रेंज में शानदार ग्रंट और थ्रॉटल रिस्पॉन्स प्रदान करता है। इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है, जिसमें स्लिप-एंड-असिस्ट क्लच दिया गया है। यह तकनीक तेज डाउनशिफ्टिंग के दौरान रियर व्हील को लॉक होने से बचाती है और क्लच लीवर को बेहद हल्का व स्मूथ बनाए रखती है।चेसिस, सस्पेंशन और सेफ्टी: हैरिस परफॉर्मेंस फ्रेम के साथ डुअल चैनल ABSबाइक की हैंडलिंग और स्थिरता को बेहतरीन बनाने के लिए इसमें यूके की विख्यात 'हैरिस परफॉर्मेंस' (Harris Performance) द्वारा डिजाइन किया गया स्टील ट्यूबलर डबल-क्रेडल चेसिस दिया गया है। क्लिप-ऑन हैंडलबार्स, रियर-सेट फुटपेग्स और स्कल्प्टेड फ्यूल टैंक राइडर को एक कमिटेड, लीन-फॉरवर्ड और एग्रेसिव कैफे रेसर राइडिंग पोस्चर देते हैं।सस्पेंशन सेटअप: फ्रंट में 41 मिमी के पारंपरिक टेलिस्कोपिक फोर्क्स (110 मिमी ट्रैवल) और रियर में प्रीलोड-एडजस्टेबल ट्विन गैस-चार्ज्ड शॉक एब्जॉर्बर्स (88 मिमी ट्रैवल) दिए गए हैं, जो तेज मोड़ों और हाईवे क्रूजिंग में बेहतरीन स्थिरता देते हैं।ब्रेकिंग और सेफ्टी: ब्रेकिंग ड्यूटी के लिए फ्रंट में 320 मिमी का बड़ा फ्लोटिंग हाइड्रोलिक डिस्क ब्रेक और रियर में 240 मिमी का डिस्क ब्रेक दिया गया है। बाइक में बॉश (Bosch) का डुअल-चैनल एबीएस (ABS) स्टैंडर्ड मिलता है, जो अचानक ब्रेक लगाने पर सुरक्षित स्टॉपिंग पावर सुनिश्चित करता है।डाइमेंशन्स: बाइक में 12.5 लीटर का फ्यूल टैंक, 804 मिमी की सीट हाइट और 174 मिमी का ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है।भारतीय युवाओं और बाइक लवर्स के लिए क्या हैं इसके मायने?रॉयल एनफील्ड कॉन्टिनेंटल जीटी 650 भारतीय युवाओं के बीच केवल एक बाइक नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल स्टेटमेंट मानी जाती है। वीकेंड कैफे राइड्स, हाईवे टूरिंग और कस्टमाइजेशन के शौकीन राइडर्स के लिए जीटी 650 हमेशा से पहली पसंद रही है।नए एलईडी इंडिकेटर्स, यूएसबी चार्जिंग पोर्ट और रॉकर रेड में अलॉय व्हील्स के आने से ग्राहकों की वे तमाम शिकायतें दूर हो गई हैं, जिनके लिए उन्हें पहले आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज पर निर्भर रहना पड़ता था। ₹4 लाख से कम बजट में ट्विन-सिलेंडर एग्जॉस्ट नोट, क्लासिक कैफे रेसर लुक और आधुनिक विश्वसनीयता का ऐसा अनूठा संगम भारतीय बाजार में किसी अन्य मोटरसाइकिल में देखने को नहीं मिलता। नए अपडेट्स के साथ शोरूम्स में पहुंची यह बाइक आगामी त्योहारी सीजन में बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
‘वंदे मातरम’ पर घमासान: बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी से की माफी की मांग; बोले- यह लाखों शहीदों का अपमान- BJP Mla and Bankim Chandra descendant demands apology from Sonia Gandhi for Vande Mataram insult
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की बड़ी डील: समुद्री नक्शे पर बनी ऐतिहासिक सहमति
मध्य पूर्व में महीनों से जारी भारी सैन्य तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक व रणनीतिक सफलता सामने आई है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री चोकपॉइंट 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर दोनों तटीय देशों—ईरान और ओमान—ने जहाजों की आवाजाही के लिए एक नए 'शिपिंग रूट मैप' पर आधिकारिक समझौता कर लिया है। इस ऐतिहासिक समझौते की पुष्टि ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने की है।यह समझौता हफ्तों तक चली गहन तकनीकी और कूटनीतिक वार्ताओं के बाद संभव हुआ है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस रणनीतिक जलमार्ग से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित पारगमन (Safe Navigation) के लिए एक औपचारिक रूपरेखा तैयार करना है। ईरान और ओमान के बीच 18 जून को हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत शुरू हुई इस प्रक्रिया में दोनों देशों के रक्षा, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण विशेषज्ञों ने मिलकर काम किया है। हालांकि, दोनों तटीय राज्यों के बीच रूट मैप पर सहमति बनने के बावजूद इस बात पर बड़ा सस्पेंस बना हुआ है कि यह जलमार्ग दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों के लिए पूर्ण रूप से कब और कैसे खुलेगा।क्या है ईरान और ओमान के बीच हुआ शिपिंग रूट समझौता?ईरान और ओमान के बीच हुए इस द्विपक्षीय समझौते का मूल आधार दोनों तटीय देशों की संप्रभुता की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनाना है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकरा समुद्री चैनल है, जिसका उत्तरी हिस्सा ईरानी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में और दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसैंडम प्रायद्वीप के अधिकार क्षेत्र में आता है।इस नए समझौते के तहत तय किए गए प्रमुख तकनीकी बिंदु:ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (TSS) का पुनर्गठन: संघर्ष और बारूदी सुरंगों के खतरों को देखते हुए खाड़ी के भीतर प्रवेश करने वाले और बाहर निकलने वाले जहाजों के लिए अलग-अलग नेविगेशनल चैनल निर्धारित किए जा रहे हैं।नेविगेशन और निगरानी का बंटवारा: समझौते के अनुसार, फारस की खाड़ी के बाहर से होर्मुज में प्रवेश करने वाले जहाजों की निगरानी और तकनीकी क्लीयरेंस में ईरानी सुरक्षा तंत्र की भूमिका होगी, जबकि खाड़ी से बाहर ओमान की खाड़ी और अरब सागर की ओर जाने वाले जहाजों के नेविगेशन का समन्वय ओमानी तटीय प्राधिकरण संभालेगा।पर्यावरणीय और समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल: क्षतिग्रस्त जहाजों, तेल रिसाव और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक संयुक्त त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी है।ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह दोनों तटीय मुल्कों का स्वतंत्र फैसला है, जिसका मकसद टकराव के जोखिम को कम करना है।जलमार्ग पूरी तरह खोलने के लिए ईरान की शर्तें: अमेरिका के सामने तेहरान का कड़ा रुखयद्यपि ओमान के साथ रूट मैप फाइनल हो चुका है, लेकिन ईरानी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट को पूर्ण रूप से खोलने और सामान्य वाणिज्यिक यातायात बहाल करने की चाबी पूरी तरह से वाशिंगटन के रुख पर निर्भर करती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दोहराया है कि जब तक अमेरिका अपनी आक्रामक नीतियों को वापस नहीं लेता, तब तक सुरक्षा की पूर्ण बहाली संभव नहीं है।तेहरान ने जलमार्ग के पूर्ण संचालन के लिए अमेरिका के समक्ष चार प्रमुख शर्तें रखी हैं:अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की पूर्ण समाप्ति: अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों और क्षेत्रीय जलक्षेत्र के आसपास बनाए गए नौसैनिक घेराव और सैन्य खतरों को तत्काल खत्म किया जाए।सैन्य हमलों और प्रतिबंधों का अंत: ईरान के बुनियादी ढांचे, तेल प्रतिष्ठानों और परमाणु स्थलों पर हमलों की धमकियों पर पूरी तरह रोक लगे।प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन का हर्जाना (Compensation): तेहरान का आरोप है कि अमेरिका ने अंतरिम समझौतों का उल्लंघन किया है, जिसकी भरपाई वाशिंगटन को करनी होगी।संप्रभुता का सम्मान: अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग को अंतरराष्ट्रीय सैन्य शक्ति के बल पर नियंत्रित करने की अपनी जिद छोड़े।ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह वर्तमान में अमेरिका के साथ किसी भी सीधी वार्ता में शामिल नहीं है और केवल मध्यस्थों के माध्यम से ही संदेशों का आदान-प्रदान किया जा रहा है।अमेरिका की क्या होगी भूमिका? डोनाल्ड ट्रंप के बयान और वॉशिंगटन की कूटनीतिक उलझनईरान-ओमान समझौते के बाद अब पूरी दुनिया की निगाहें व्हाइट हाउस और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर टिक गई हैं। अमेरिका वर्तमान में इस पूरे संकट में सबसे बड़ा और निर्णायक पक्षकार है। यदि अमेरिका इस समझौते को मान्यता देकर तनाव कम करने की दिशा में कदम नहीं उठाता, तो यह नया शिपिंग मैप केवल कागजों तक ही सीमित रह सकता है।वॉशिंगटन के सामने वर्तमान में तीन बड़े रणनीतिक विकल्प हैं:तनाव कम करना और डी-एस्केलेशन: यदि ट्रंप प्रशासन अपने नौसैनिक एस्कॉर्ट मिशन ('ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम') के दायरे को सीमित करते हुए ईरान के साथ परोक्ष कूटनीति के जरिए युद्धविराम और सुरक्षा गारंटी पर राजी होता है, तो होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही तेजी से सामान्य हो सकती है।आक्रामक रुख और टकराव: हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रैलियों में होर्मुज पर अमेरिकी दबदबे की बात कही है और इसे अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र के रूप में स्थापित करने के संकेत दिए हैं। यदि अमेरिका इस नए ईरान-ओमान समझौते को दरकिनार कर एकतरफा सैन्य गश्त बढ़ाता है, तो समुद्र में सीधे सैन्य टकराव और जहाजों पर नए हमलों का खतरा फिर भड़क सकता है।आर्थिक व कूटनीतिक रियायतें: अमेरिकी ऊर्जा बाजार में पेट्रोल की कीमतें 29 प्रतिशत तक उछल चुकी हैं। ऐसे में घरेलू मुद्रास्फीति और मध्यावधि चुनावों के राजनीतिक दबाव के चलते ट्रंप प्रशासन ओमान और कतर की मध्यस्थता से कुछ प्रतिबंधों में ढील देकर एक व्यावहारिक समाधान तलाशने पर मजबूर हो सकता है।ओमान की मध्यस्थता का कूटनीतिक महत्व: मस्कट कैसे बना संकटमोचक?इस पूरे घटनाक्रम में खाड़ी देश ओमान की भूमिका एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में मील का पत्थर साबित हुई है। ओमान लंबे समय से पश्चिमी देशों और ईरान के बीच एक तटस्थ और भरोसेमंद सेतु का काम करता रहा है।ओमान के सुल्तान और वहां के विदेश मंत्रालय ने दोनों पक्षों को इस बात पर सहमत किया कि समुद्री पर्यावरण और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सैन्य टकराव से अलग रखा जाना चाहिए। ओमान की भौगोलिक स्थिति होर्मुज के मुहाने पर होने के कारण उसकी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा भी इस जलमार्ग के शांत रहने से सीधे जुड़ी हुई है। मस्कट ने पर्दे के पीछे से तेहरान और वाशिंगटन के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी को जीवित रखा है, जिसके दम पर तकनीकी स्तर पर यह रूट मैप तैयार किया जा सका।वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर असर: क्या दुनिया को मिलेगी महंगाई से राहत?होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन कहा जाता है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत और एलएनजी (LNG) का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। फरवरी 2026 में संघर्ष शुरू होने के बाद से इस मार्ग से जहाजों का आवागमन नगण्य हो गया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।ईरान और ओमान के बीच समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में सकारात्मक हलचल देखी गई है। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस रूट मैप के तहत सीमित संख्या में भी टैंकरों का सुरक्षित पारगमन शुरू होता है, तो तेल आपूर्ति में आंशिक सुधार होगा और कच्चे तेल की कीमतों में 5 से 8 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आ सकती है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों के लिए यह खबर सबसे बड़ी राहत लेकर आ सकती है, क्योंकि इन देशों का 70 से 80 प्रतिशत तेल आयात सीधे इसी संकरे समुद्री गलियारे से होकर गुजरता है।आगे क्या होगा? क्या खुलेगा दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल मार्ग?ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता होर्मुज संकट के समाधान की दिशा में पहला ठोस तकनीकी कदम जरूर है, लेकिन अंतिम मंजिल अभी दूर है। आने वाले दिनों में मस्कट और तेहरान एक संयुक्त आधिकारिक बयान जारी करने की तैयारी में हैं।असली परीक्षा इस बात की होगी कि क्या अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और इंश्योरेंस कंपनियां केवल इस क्षेत्रीय समझौते के भरोसे अपने अरबों डॉलर के जहाजों और नाविकों को इस जलमार्ग में भेजने का जोखिम उठाएंगी। जब तक संयुक्त राष्ट्र (UN), अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और अमेरिकी नौसेना की तरफ से सुरक्षा को लेकर पूर्ण सहमति और गारंटी नहीं मिलती, तब तक जहाजों का व्यापक परिचालन चुनौतीपूर्ण रहेगा।आने वाले 48 से 72 घंटे बेहद अहम हैं, जहां यह तय होगा कि व्हाइट हाउस इस समझौते को क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक अवसर के रूप में स्वीकार करता है या फिर होर्मुज में शक्ति प्रदर्शन का यह खतरनाक खेल और लंबा खिंचेगा।
भारतीय घरेलू सर्राफा बाजार में पीली धातु यानी सोने की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी देखने को मिली है। बीते एक सप्ताह के कारोबारी सत्रों के दौरान 24 कैरेट शुद्ध सोने के भाव में लगभग ₹3,490 प्रति 10 ग्राम की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तूफानी तेजी के साथ देश के खुदरा बाजारों में 24 कैरेट 10 ग्राम सोने का भाव ₹1,53,000 से ₹1,55,000 के ऐतिहासिक दायरे में कारोबार कर रहा है।सोने की कीमतों में आई इस तेज बढ़त ने जहां निवेशकों और गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) धारकों के चेहरे पर खुशी ला दी है, वहीं आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन के लिए आभूषण (ज्वेलरी) खरीदने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा असर डाला है। केवल 24 कैरेट ही नहीं, बल्कि आभूषण बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव में भी उसी अनुपात में भारी उछाल दर्ज किया गया है। ऑल इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा बाजारों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में खरीदारी का मजबूत समर्थन देखने को मिला है।वैश्विक बाजारों में 0.9% की तेजी: कॉमैक्स (COMEX) से लेकर हाजिर बाजार तक क्यों उछले भाव?घरेलू बाजार में आई इस तेजी की मुख्य डोर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों से जुड़ी हुई है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी वायदा बाजार कॉमैक्स (COMEX) और लंदन बुलियन मार्केट में हाजिर सोना (Spot Gold) बीते कारोबारी सत्रों में लगभग 0.9 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव $2,480 से $2,520 प्रति औंस (Ounce) के बेहद मजबूत और रिकॉर्ड रेजिस्टेंस लेवल के करीब पहुंच चुके हैं।वैश्विक बाजार में आई इस 0.9% की तेजी के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट, डॉलर इंडेक्स (DXY) का कमजोर होना और अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' (US Fed) द्वारा ब्याज दरों में आगामी कटौती के मजबूत संकेत मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। जब भी अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आती है या ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प (Safe-Haven Asset) के रूप में सोने की तरफ तेजी से रुख करते हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे प्रमुख आयातक देश की कीमतों पर पड़ता है।प्रमुख महानगरों में आज का ताजा भाव: दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और चेन्नई का रेट कार्डभारत के अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय वैट (VAT), चुंगी कर और माल ढुलाई लागत (Transportation Cost) के आधार पर सोने के खुदरा दामों में मामूली अंतर पाया जाता है। देश के प्रमुख महानगरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के ताजा भाव इस प्रकार दर्ज किए गए हैं:दिल्ली (Delhi): राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोना ₹1,53,030 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट जेवराती सोना ₹1,40,290 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।मुंबई (Mumbai): देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना ₹1,52,880 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,40,140 प्रति 10 ग्राम पर स्थिर बना हुआ है।लखनऊ (Lucknow): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 24 कैरेट सोना ₹1,53,030 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट आभूषण वाला सोना ₹1,40,290 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा है।चेन्नई (Chennai): दक्षिण भारत के प्रमुख आभूषण बाजार चेन्नई में स्थानीय मांग के चलते 24 कैरेट सोना ₹1,53,030 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,40,290 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है।कोलकाता (Kolkata): पश्चिम बंगाल के महानगर कोलकाता में 24 कैरेट सोना ₹1,52,880 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,40,140 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।सोने में अचानक तेजी के 5 प्रमुख कारण: भू-राजनीति, डॉलर और सेंट्रल बैंकों की खरीदारीकमोडिटी और वित्तीय बाजार विश्लेषकों ने इस हफ्ते सोने में आई रिकॉर्ड ₹3,490 की उछाल के पीछे 5 प्रमुख भू-राजनीतिक और आर्थिक कारकों को रेखांकित किया है:मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में बढ़ते कूटनीतिक व सैन्य गतिरोध के चलते वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे संकट के समय वैश्विक निवेशक इक्विटी और जोखिम भरे एसेट्स से पूंजी निकालकर सुरक्षित सोने में निवेश कर रहे हैं।अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर कटौती के संकेत: अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों और मुद्रास्फीति के नियंत्रण में आने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है। ब्याज दरें घटने पर गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियां जैसे सोना अधिक आकर्षक हो जाती हैं।दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी गोल्ड रिजर्व Accumulation: पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और तुर्की समेत कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार रिकॉर्ड मात्रा में भौतिक सोना खरीद रहे हैं।भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) की विनिमय दर में होने वाली नरमी के कारण भारत के लिए सोने का आयात महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू हाजिर बाजार में प्रति 10 ग्राम की दरें स्वतः बढ़ जाती हैं।आगामी फेस्टिव व वेडिंग डिमांड: भारत में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव और आगामी विवाह सीजन की तैयारियों के मद्देनजर स्थानीय ज्वैलर्स और खुदरा व्यापारियों द्वारा थोक इन्वेंट्री तैयार करने के लिए की जा रही खरीदारी ने भी कीमतों को ऊपर खींचा है।चांदी में भी जोरदार चमक: ₹1.75 लाख प्रति किलो के करीब पहुंचे भावसोने की इस तूफानी रैली का सीधा असर चांदी (Silver) की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। चांदी के औद्योगिक उपयोग में लगातार आ रही तेजी, विशेष रूप से सोलर पैनल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और सेमीकंडक्टर चिप्स निर्माण में बढ़ती मांग के चलते चांदी के भाव में भी साप्ताहिक आधार पर ₹2,500 से ₹3,000 प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है।घरेलू बाजार में शुद्ध चांदी की कीमत ₹1,70,000 से ₹1,74,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच चुकी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के सक्रिय वायदा अनुबंधों में भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक औद्योगिक उत्पादन की गति बनी रहती है, तो चांदी में आने वाले महीनों में सोने से भी अधिक प्रतिशत रिटर्न देने की क्षमता है।खरीदारों और निवेशकों के लिए जरूरी गाइड: हॉलमार्क (HUID) और शुद्धता की पहचानयदि आप इस बढ़े हुए भाव के दौर में सोने के आभूषण या सिक्के खरीदने जा रहे हैं, तो अपने पैसे की पूरी सुरक्षा और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें:6-अंकों का HUID हॉलमार्क अनिवार्य: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमानुसार बिना 6-डिजिट वाले अल्फान्यूमेरिक HUID (Hallmark Unique Identification) कोड के सोना खरीदना या बेचना गैरकानूनी है। गहना खरीदते समय उस पर बीआईएस लोगो, कैरेट की शुद्धता (जैसे 22K916 या 18K750) और 6 अंकों का विशिष्ट कोड मैग्निफाइंग ग्लास से जरूर जांचें।'BIS Care' ऐप पर खुद करें वेरिफिकेशन: अपने स्मार्टफोन में सरकारी 'BIS Care' ऐप डाउनलोड करके आप आभूषण पर लिखे HUID नंबर को डालकर उसकी शुद्धता, निर्माण की तारीख और ज्वैलर के रजिस्ट्रेशन का सत्यापन सेकंडों में कर सकते हैं।कच्चे बिल से बचें और जीएसटी बिल लें: हमेशा 3% वस्तु एवं सेवा कर (GST) के साथ पक्का बिल प्राप्त करें, जिसमें सोने का सटीक वजन, मेकिंग चार्ज और प्रति ग्राम भाव अलग-अलग स्पष्ट लिखा हो।डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF का विकल्प: यदि आपका उद्देश्य केवल निवेश करके मुनाफा कमाना है, तो आभूषण खरीदने के बजाय सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB), गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) या म्यूचुअल फंड्स के गोल्ड फंड में निवेश करें। इनमें 10 से 20 प्रतिशत तक लगने वाले मेकिंग चार्ज और शुद्धता की कटौती का कोई नुकसान नहीं होता।बाजार का आगे का आउटलुक: क्या ₹1.60 लाख के पार जाएगा 10 ग्राम सोना?सर्राफा विशेषज्ञों और तकनीकी चार्ट विश्लेषकों के अनुसार, सोने की मध्यम से लंबी अवधि की संरचना बेहद मजबूत (Bullish) बनी हुई है। एमसीएक्स (MCX) पर ₹1,50,000 का स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में स्थापित हो चुका है।यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व अनुमान के अनुसार दरों में कटौती शुरू करता है, तो घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोना चालू वर्ष के अंत तक ₹1,60,000 से ₹1,65,000 प्रति 10 ग्राम के नए ऑल-टाइम हाई को छू सकता है। हालांकि, विश्लेषक यह भी सलाह देते हैं कि अत्यधिक तेजी के बाद बाजार में छोटे-मोटे तकनीकी सुधार (Correction) देखने को मिल सकते हैं, जो लंबी अवधि के नए निवेशकों के लिए गिरावट पर खरीदारी (Buy on Dips) करने का बेहतरीन मौका साबित होंगे।
अटल जी की पुण्यतिथि पर ये वीडियो वायरल, पीएम मोदी ने ऐसे किया याद
अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। दिल्ली के ‘सदैव अटल’ स्मृति स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
महुआ के समर्थन में उतरे थरूर, सर्किट हाउस विवाद पर सरकार को घेरा
नादिया जिला प्रशासन द्वारा तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर सर्किट हाउस से आधी रात को हटाने की कथित कोशिश पर विवाद गहरा गया है. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने महुआ का समर्थन करते हुए कहा कि भीड़ के निशाने पर होने पर सरकार का काम सांसद को सुरक्षा देना है, कमरा खाली कराना नहीं.
त्योहारों के महीने अगस्त का आधा सफर पूरा हो चुका है, लेकिन यदि आपके बैंक से जुड़े जरूरी काम जैसे चेक क्लीयरेंस, ड्राफ्ट बनवाना, केवाईसी अपडेट या भारी नकदी का लेनदेन अभी बाकी है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आधिकारिक बैंक हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, अगस्त के बचे हुए 15 दिनों में देश के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न त्योहारों और साप्ताहिक अवकाशों को मिलाकर कुल 7 दिन बैंक शाखाओं में ताला लटका रहेगा।अगस्त के दूसरे हिस्से में रक्षाबंधन, ईद-ए-मिलाद / बारावफात, ओणम, पारसी नववर्ष और क्षेत्रीय महापुरुषों की जयंतियों के साथ-साथ महीने का चौथा शनिवार और नियमित रविवार की छुट्टियां एक साथ पड़ रही हैं। ऐसे में कई राज्यों में लगातार दो से तीन दिनों तक बैंक बंद रहने से 'लॉन्ग वीकेंड' जैसी स्थिति बन रही है। अगर आप बिना हॉलिडे लिस्ट देखे सीधे ब्रांच चले जाते हैं, तो आपको वहां बंद गेट का सामना करना पड़ सकता है और आपका कीमती समय बर्बाद हो सकता है।RBI की हॉलिडे लिस्ट का वर्गीकरण: कैसे तय होती हैं बैंकों की छुट्टियां?भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश भर के सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (सार्वजनिक, निजी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंक) के लिए छुट्टियों को तीन प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत छुट्टियां (Holiday under Negotiable Instruments Act): इसके अंतर्गत राष्ट्रीय अवकाश और प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक त्योहार आते हैं, जिन पर अधिकांश राज्यों में बैंकिंग परिचालन बंद रहता है।रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) हॉलिडे: इस दौरान केंद्रीय स्तर पर बड़े फंड ट्रांसफर और सेटलमेंट की प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं।बैंकों द्वारा खातों को बंद करना (Banks’ Closing of Accounts): यह आमतौर पर वित्तीय वर्ष के अंत में लागू होता है।इसके अतिरिक्त, पूरे देश में सभी बैंक हर महीने के दूसरे व चौथे शनिवार और सभी रविवार को अनिवार्य रूप से बंद रहते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई त्योहार क्षेत्रीय स्तर पर मनाए जाते हैं, इसलिए किसी एक राज्य में बैंक बंद होने का मतलब यह कतई नहीं है कि पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे।अगस्त के आखिरी 15 दिनों का पूरा हॉलिडे कैलेंडर: जानिए कब और कहां बंद रहेंगे बैंकआरबीआई की आधिकारिक अधिसूचना और राज्य सरकारों के गजट के अनुसार अगस्त के शेष दिनों में बैंक बंदी का तारीखवार और राज्यवार विवरण इस प्रकार है:16 अगस्त (रविवार) - साप्ताहिक अवकाश व पारसी नववर्ष (शहंशाही): पूरे देश में रविवार के चलते सभी सार्वजनिक व निजी बैंक बंद रहेंगे। इसके साथ ही गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पारसी नववर्ष (नवरोज) का उत्सव भी रहेगा।19 अगस्त (बुधवार) - महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर जयंती: त्रिपुरा राज्य में इस अवसर पर सभी बैंक शाखाओं में सार्वजनिक अवकाश रहेगा।22 अगस्त (शनिवार) - चौथा शनिवार (Fourth Saturday): पूरे भारत में सभी बैंक (SBI, PNB, HDFC, ICICI समेत सभी) चौथे शनिवार के नियम के तहत बंद रहेंगे।23 अगस्त (रविवार) - साप्ताहिक अवकाश: देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैंकों का नियमित साप्ताहिक अवकाश रहेगा।25 अगस्त (मंगलवार) - पहला ओणम / मिलाद-ए-शरीफ: केरल और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओणम और मिलाद-उन-नबी के उपलक्ष्य में बैंकों में अवकाश रहेगा।26 अगस्त (बुधवार) - ईद-ए-मिलाद (बारावफात) / थिरुवोनम: पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन (ईद-ए-मिलाद) और केरल के प्रमुख पर्व थिरुवोनम के अवसर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ और केरल सहित अधिकांश राज्यों में बैंक बंद रहेंगे।28 अगस्त (शुक्रवार) - रक्षाबंधन / श्री नारायण गुरु जयंती: भाई-बहन के अटूट प्रेम के पावन पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में बैंकों का पूर्ण अवकाश रहेगा।30 अगस्त (रविवार) - साप्ताहिक अवकाश: महीने के अंतिम रविवार के कारण पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं शाखा स्तर पर बंद रहेंगी।राज्यों का क्षेत्रीय गणित: उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक अलग-अलग दिन रहेगा अवकाशत्योहारों की प्रकृति के आधार पर छुट्टियों का असर अलग-अलग राज्यों में अलग तरह से दिखाई देगा:उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार और मध्य प्रदेश: इन राज्यों में 22 अगस्त (चौथा शनिवार), 23 अगस्त (रविवार), 26 अगस्त (ईद-ए-मिलाद), 28 अगस्त (रक्षाबंधन) और 30 अगस्त (रविवार) को बैंक बंद रहेंगे।केरल और दक्षिणी राज्य: केरल में ओणम उत्सव की धूम के कारण 25 और 26 अगस्त को लगातार बैंक बंद रहेंगे, जिससे वहां के निवासियों को अपने वित्तीय लेन-देन पहले से प्लान करने होंगे।गुजरात और पश्चिमी भारत: गुजरात और राजस्थान में रक्षाबंधन (28 अगस्त) पर बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे, जिससे 28 अगस्त (शुक्रवार), 29 अगस्त (शनिवार - खुला) और 30 अगस्त (रविवार - बंद) का मिलाजुला हफ्ता रहेगा।शाखाएं बंद रहने पर भी नहीं रुकेंगे काम: 24 घंटे चालू रहेंगी डिजिटल बैंकिंग सेवाएंभले ही बैंक शाखाओं के मुख्य द्वार बंद रहेंगे, लेकिन आम नागरिकों और व्यापारियों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आधुनिक डिजिटल बैंकिंग के युग में अधिकांश आवश्यक वित्तीय सेवाएं चौबीसों घंटे निर्बाध रूप से चालू रहेंगी:एटीएम (ATM) और कैश डिपॉजिट मशीनें (CDM): नकदी निकालने और खाते में नकद जमा करने के लिए एटीएम और रीसाइक्लर मशीनें हमेशा की तरह 24x7 काम करती रहेंगी।यूपीआई (UPI) और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन: गूगल पे, फोनपे, पेटीएम और भीम यूपीआई जैसी पेमेंट सेवाएं पूरी तरह सुचारू रहेंगी। आप किसी भी समय मर्चेंट पेमेंट और फंड ट्रांसफर कर सकेंगे।इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग: आईएमपीएस (IMPS), एनईएफटी (NEFT) और आरटीजीएस (RTGS) के जरिए ऑनलाइन मनी ट्रांसफर की सुविधा चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।क्रेडिट और डेबिट कार्ड स्वाइप: पीओएस (POS) मशीनों और ऑनलाइन ई-कॉमर्स शॉपिंग पर कार्ड से लेनदेन सामान्य रूप से होता रहेगा।चेक क्लीयरेंस और सरकारी कार्यों पर पड़ेगा असर: रखें इन बातों का ध्यानडिजिटल ट्रांसफर चालू रहने के बावजूद कुछ ऐसे बैंकिंग कार्य हैं जो शाखाएं बंद रहने पर सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। यदि आप कोई बड़ा लेनदेन करने जा रहे हैं, तो इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें:चेक क्लीयरेंस में देरी: यदि आप किसी छुट्टी वाले दिन या उससे ठीक पहले बैंक में चेक ड्रॉप बॉक्स में डालते हैं, तो उसका क्लीयरेंस अगले कार्य दिवस (वर्किंग डे) को ही संभव होगा। नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH) और चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) छुट्टी के दिनों में प्रोसेस नहीं होते, जिससे ईएमआई (EMI) या म्यूचुअल फंड एसआईपी बाउंस होने का खतरा हो सकता है। अपने खाते में पर्याप्त बैलेंस पहले से मेंटेन रखें।लोन डिस्बर्सल और डॉक्यूमेंटेशन: बैंक से नए लोन की मंजूरी, प्रॉपर्टी मॉर्गेज या लॉकर एक्सेस से जुड़े काम केवल बैंक खुलने के दिन ही संभव होंगे।डिमांड ड्राफ्ट (DD) और फॉरेक्स सेवाएं: विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय या डीडी बनवाने का काम छुट्टियों के दौरान रुक जाएगा।शाखा जाने से पहले अपनाएं ये 4 स्मार्ट टिप्स: ताकि न हो कोई परेशानीअगस्त के इस फेस्टिव सीजन में किसी भी असुविधा से बचने के लिए इन व्यावहारिक सुझावों का पालन करें:आरबीआई और बैंक ऐप पर स्टेटस चेक करें: अपनी बैंक शाखा जाने से पहले संबंधित बैंक (जैसे SBI YONO, HDFC MyCards, iMobile) की ऐप या आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने राज्य की छुट्टियों की सूची अवश्य देख लें।जरूरी नकदी पहले से निकाल कर रखें: त्योहारों के दौरान एटीएम में नकदी की भारी मांग होती है और लंबी छुट्टियों के चलते कभी-कभी नजदीकी एटीएम में कैश खत्म होने की समस्या आ सकती है। इसलिए जरूरी खर्चों के लिए पहले से कुछ कैश निकाल लें।महत्वपूर्ण बिल और ईएमआई की अग्रिम व्यवस्था: यदि 22 से 28 अगस्त के बीच आपकी किसी लोन की किस्त, क्रेडिट कार्ड बिल या बीमा प्रीमियम की अंतिम तिथि है, तो उसका भुगतान छुट्टियों से 1-2 दिन पहले ही ऑनलाइन माध्यम से पूरा कर लें।बैंक मित्र और सीएसपी (CSP) केंद्रों का उपयोग: ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में छोटे कैश लेनदेन और मिनी स्टेटमेंट के लिए ग्राहक सेवा केंद्रों (CSP/Banking Correspondents) की मदद ली जा सकती है, जो स्थानीय स्तर पर काम करते हैं।अगस्त के आखिरी 15 दिनों में छुट्टियों का यह सिलसिला त्योहारों के उल्लास को बढ़ाने वाला है, लेकिन थोड़ी सी सतर्कता और डिजिटल टूल्स का सही इस्तेमाल करके आप अपने वित्तीय कार्यों को बिना किसी रुकावट के समय पर पूरा कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और आदर्श ...
नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों के मन में रिटायरमेंट को लेकर हमेशा एक चिंता बनी रहती है कि नौकरी छूटने या 60 की उम्र के बाद नियमित आमदनी का जरिया क्या होगा। पारंपरिक बचत योजनाओं, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और पीपीएफ (PPF) में घटती ब्याज दरों और लगातार बढ़ती महंगाई (Inflation) के इस दौर में अब सिर्फ बचत करना काफी नहीं है। आज के वित्तीय दौर में जरूरत है 'स्मार्ट और अनुशासित निवेश' की।म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) एक ऐसा साधन बनकर उभरा है, जिसने आम आदमी के लिए करोड़पति बनने की राह आसान कर दी है। यदि आप शुरुआती उम्र में हर महीने केवल ₹6,000 की एक छोटी सी रकम से निवेश शुरू करते हैं, तो अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा 'दुनिया का आठवां अजूबा' कही गई कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) की शक्ति से रिटायरमेंट के समय आपके बैंक खाते में ₹9 करोड़ से ज्यादा का विशाल फंड तैयार हो सकता है। इतना ही नहीं, इस फंड से आप जीवन भर हर महीने ₹6 लाख की नियमित मासिक पेंशन भी हासिल कर सकते हैं।स्टेप-अप SIP का गेमचेंजर फॉर्मूला: 10% की वार्षिक बढ़ोतरी से कैसे बनता है ₹9 करोड़ का फंड?अक्सर लोग सोचते हैं कि केवल ₹6,000 प्रति माह जमा करने से ₹9 करोड़ का फंड कैसे बन सकता है? इसका सीधा और व्यावहारिक उत्तर है—'स्टेप-अप SIP' (Step-Up SIP) या टॉप-अप एसआईपी। जब आपकी आमदनी हर साल बढ़ती है, तो आपका निवेश भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए।मान लीजिए कि आपकी उम्र 25 वर्ष है और आप 60 वर्ष की आयु में रिटायर होने का लक्ष्य रखते हैं, यानी आपके पास निवेश के लिए पूरे 35 वर्षों का एक लंबा समय है:शुरुआती मासिक निवेश: ₹6,000 प्रति माहसालाना स्टेप-अप (Top-Up): 10% (यानी हर साल आपको अपनी मासिक एसआईपी में केवल 10% की बढ़ोतरी करनी है। पहले साल ₹6,000/माह, दूसरे साल ₹6,600/माह, तीसरे साल ₹7,260/माह आदि)अनुमानित वार्षिक रिटर्न (CAGR): 12% (भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का ऐतिहासिक औसत 12% से 15% के बीच रहा है)निवेश की कुल अवधि: 35 वर्ष (उम्र 25 से 60 वर्ष)कैलकुलेशन का पूरा गणित: 35 वर्षों के दौरान इस स्टेप-अप फॉर्मूले के तहत आपकी जेब से कुल लगभग ₹1.95 करोड़ का निवेश होगा। 12% की चक्रवृद्धि दर से इस निवेश पर आपको लगभग ₹7.22 करोड़ का अनुमानित ब्याज/रिटर्न मिलेगा। इस प्रकार, 60 वर्ष की आयु में आपका कुल मैच्योरिटी फंड लगभग ₹9.17 करोड़ (लगभग ₹9,17,00,000) हो जाएगा। यदि आपका पोर्टफोलियो 13% या 14% का रिटर्न दे देता है, तो यह आंकड़ा ₹12 से ₹15 करोड़ के पार भी जा सकता है।₹9 करोड़ के फंड से ₹6 लाख महीने की पेंशन: समझिए SWP का जादुई ब्लूप्रिंटजब 60 साल की उम्र में आपके पास ₹9 करोड़ का रिटायरमेंट फंड इकट्ठा हो जाता है, तो आपको इस पूरी रकम को एक साथ निकालकर बैंक में रखने की जरूरत नहीं होती। यहीं पर काम आता है म्यूचुअल फंड का सबसे लोकप्रिय टूल—सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP - Systematic Withdrawal Plan)।एसडब्ल्यूपी के तहत आप अपने ₹9 करोड़ के कॉर्पस को किसी सुरक्षित हाइब्रिड फंड, बैलेंस्ड एडवांटेज फंड या मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड में ट्रांसफर कर देते हैं, जहां यह फंड औसतन 8% का वार्षिक सुरक्षित रिटर्न जनरेट करता रहता है।कुल रिटायरमेंट फंड: ₹9,00,00,000 (₹9 करोड़)मासिक पेंशन (SWP विड्रॉल): ₹6,00,000 प्रति माह (सालाना ₹72 लाख)सालाना निकासी दर (Withdrawal Rate): 8% (₹72 लाख ₹9 करोड़ = 8%)यदि आपका शेष फंड केवल 8% की साधारण वार्षिक दर से भी बढ़ता रहता है, तो आप हर महीने बिना किसी रुकावट के ₹6 लाख की पेंशन निकालते रहेंगे और आपका मूल ₹9 करोड़ का कॉर्पस कभी घटेगा नहीं, बल्कि स्थिर रहेगा। इसका मतलब यह हुआ कि आप शान से अपनी रिटायरमेंट लाइफ जिएंगे और आपके बाद आपके नॉमिनी या बच्चों के लिए ₹9 करोड़ की पूरी संपत्ति विरासत के रूप में सुरक्षित बची रहेगी।सही म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो का चयन: लार्ज, फ्लेक्सी और मिडकैप का संतुलित फॉर्मूला35 वर्षों के लंबे सफर में बेहतर और स्थिर रिटर्न पाने के लिए अपने ₹6,000 के मासिक निवेश को किसी एक फंड में लगाने के बजाय एक डाइवर्सिफाइड (विविध) पोर्टफोलियो में बांटना समझदारी है:लार्ज कैप / इंडेक्स फंड (40% - ₹2,400): निफ्टी 50 या सेंसेक्स इंडेक्स फंड में निवेश करें। यह देश की शीर्ष 50 ब्लूचिप कंपनियों में पैसा लगाता है, जो आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता और कम जोखिम प्रदान करता है।फ्लेक्सी कैप फंड (30% - ₹1,800): फ्लेक्सी कैप फंड्स फंड मैनेजर को बाजार के हालात के अनुसार लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में पैसा लगाने की आजादी देते हैं, जिससे जोखिम और रिटर्न का संतुलन बना रहता है।मिड कैप / स्मॉल कैप फंड (30% - ₹1,800): लंबी अवधि में मिड और स्मॉल कैप फंड्स में सबसे अधिक ग्रोथ पोटेंशियल होता है। 30-35 साल के नजरिए में ये फंड्स आपके समग्र पोर्टफोलियो के रिटर्न को 12% से बढ़ाकर 14-15% तक ले जाने का दम रखते हैं।महंगाई और टैक्स की मार से कैसे निपटें? लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) का नियमफाइनेंशियल प्लानिंग करते समय टैक्स और महंगाई को ध्यान में रखना जरूरी है। भारत में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर 1.25 लाख रुपये से अधिक के सालाना मुनाफे पर 12.5% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लगता है।लेकिन SWP की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी टैक्स-एफिशिएंसी है। जब आप फिक्स्ड डिपॉजिट से ब्याज निकालते हैं, तो वह आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार (30% तक) टैक्स होता है। वहीं SWP में हर महीने निकलने वाले ₹6 लाख में केवल मुनाफे वाले हिस्से पर ही 12.5% का मामूली टैक्स लगता है, मूलधन पर कोई टैक्स नहीं होता। इसके चलते एफडी या एन्युइटी (Annuity) पेंशन प्लान्स की तुलना में एसडब्ल्यूपी से हाथ में आने वाला पोस्ट-टैक्स रिटर्न काफी ज्यादा होता है।SIP शुरू करते समय इन 4 सबसे आम गलतियों से बचेंअक्सर निवेशक लंबी अवधि के निवेश में कुछ बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनका वेल्थ क्रिएशन का सपना अधूरा रह जाता है:बाजार की गिरावट में SIP बंद करना: जब शेयर बाजार में गिरावट आती है (Bear Market), तो घबराकर एसआईपी बंद न करें। मंदी के दौर में आपको उसी ₹6,000 में फंड की अधिक यूनिट्स (Units) सस्ती दरों पर मिलती हैं, जो बाजार सुधरते ही भारी मुनाफा देती हैं।शुरुआत करने में देरी करना: कंपाउंडिंग का सबसे बड़ा दोस्त 'समय' है। यदि आप 25 की जगह 35 की उम्र में निवेश शुरू करेंगे, तो आपको ₹9 करोड़ का फंड बनाने के लिए ₹6,000 की जगह ₹25,000 से अधिक की मासिक एसआईपी करनी पड़ेगी।बिना स्टेप-अप के चलना: अगर आप हर साल अपनी एसआईपी में 10% की बढ़ोतरी नहीं करेंगे और 35 साल तक सिर्फ ₹6,000 ही जमा करते रहेंगे, तो 12% रिटर्न पर आपका कुल फंड केवल ₹3.89 करोड़ ही बन पाएगा। ₹9 करोड़ के लक्ष्य के लिए 10% स्टेप-अप अनिवार्य है।इमरजेंसी में रिटायरमेंट फंड निकालना: अपने इस एसआईपी पोर्टफोलियो को केवल अपने बुढ़ापे और पेंशन के लिए आरक्षित रखें। मेडिकल या अन्य तात्कालिक जरूरतों के लिए अलग से 6 महीने के खर्च का एक इमरजेंसी फंड (लिक्विड फंड या एफडी में) बनाकर रखें।वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Freedom) किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि समय पर लिए गए सही फैसले और निरंतर अनुशासन से हासिल होती है। आज बचाया गया आपका ₹6,000 का मामूली खर्च कल आपके बुढ़ापे का सबसे मजबूत सहारा बन सकता है। किसी भी रजिस्टर्ड सेबी (SEBI) म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर या सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) से सलाह लेकर अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें और बिना देर किए अपनी पहली एसआईपी शुरू करें।
शाहरुख- अजय और टाइगर की बढ़ी मुसीबतें, FDA ने भेजा नोटिस
महाराष्ट्र एफडीए ने बॉलीवुड एक्टर्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. 'विमल इलायची' के विज्ञापन के जरिए बैन पान मसाले का सरोगेट प्रचार करने के आरोप में तीनों स्टार्स को नोटिस भेजा गया है.
सिक्किम में भारी बारिश के बीच आया लैंडस्लाइड, कई इलाके प्रभावित
पश्चिम सिक्किम में भारी बारिश के बीच लैंडस्लाइड की तस्वीरें सामने आई हैं. रिंबी और सिंगलिताम इलाके में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ है... पहाड़ी से भारी मलबा सड़क पर आ गया, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई है... फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित इलाकों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है.
शेयरहोल्डर्स का 97.72% भारी समर्थन: एथर एनर्जी के ₹1,200 करोड़ के फंडरेजिंग प्लान को मिली हरी झंडी
भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (EV) सेक्टर की अग्रणी कंपनी एथर एनर्जी (Ather Energy Ltd) ने अपनी विस्तार योजनाओं को गति देने के लिए पूंजी जुटाने की दिशा में एक बड़ी मील का पत्थर हासिल कर लिया है। कंपनी द्वारा आयोजित एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में शेयरधारकों ने ₹1,200 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू (वरीयता निर्गम) के प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। नियामक फाइलिंग के अनुसार, प्रस्ताव के पक्ष में कुल पड़े वोटों में से 97.72 प्रतिशत वोट दर्ज किए गए, जो कंपनी के विजन और भविष्य की विकास रणनीति पर निवेशकों के अटूट विश्वास को दर्शाता है।यह रणनीतिक पूंजी जुटाने का कदम ऐसे समय में आया है जब भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है और मुख्यधारा की ऑटोमोबाइल कंपनियों के बीच बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की होड़ मची हुई है। शेयरहोल्डर्स से मिली इस मंजूरी के बाद बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर आगामी कारोबारी सत्रों में कंपनी के वैल्यूएशन और स्टॉक सेंटिमेंट पर देखने को मिल सकता है।हीरो मोटोकॉर्प, फाउंडर्स और इंडिया-जापान फंड का बड़ा दांव: किसे कितने मिले शेयर्स और वारंट्स?इस ₹1,200 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू की सबसे खास बात यह है कि इसमें एथर एनर्जी के मौजूदा प्रमोटर्स, रणनीतिक पार्टनर्स और संस्थागत निवेशकों ने भारी भरोसा जताया है:हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp): देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी और एथर में सबसे बड़ी हिस्सेदार हीरो मोटोकॉर्प इस राउंड में अकेले लगभग ₹960 करोड़ का भारी-भरकम निवेश कर रही है। हीरो मोटोकॉर्प को ₹1,260 प्रति वारंट की दर से 76.19 लाख कन्वर्टिबल वारंट्स जारी किए जा रहे हैं, जो फ्लोर प्राइस ₹1,175.74 से 7.2 प्रतिशत प्रीमियम पर हैं।इंडिया-जापान फंड (India-Japan Fund): नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) द्वारा प्रबंधित भारत सरकार और जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) का यह द्विपक्षीय फंड लगभग ₹200 करोड़ मूल्य के 16.26 लाख इक्विटी शेयर खरीदेगा। यह आवंटन ₹1,230 प्रति शेयर के भाव पर हो रहा है, जो फ्लोर प्राइस पर 4.6 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है।कंपनी फाउंडर्स (Tarun Mehta & Swapnil Jain): एथर एनर्जी के सह-संस्थापक तरुण मेहता और स्वप्निल जैन ने भी व्यक्तिगत रूप से अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए ₹20-₹20 करोड़ (कुल ₹40 करोड़) के कन्वर्टिबल वारंट्स सब्सक्राइब किए हैं। प्रमोटर्स द्वारा स्वयं पूंजी लगाना यह साफ संदेश देता है कि कंपनी का शीर्ष नेतृत्व इसके लॉन्ग-टर्म भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।कुल ₹2,500 करोड़ का महा-फंडरेज: QIP और प्रेफरेंशियल इश्यू से बैलेंस शीट बनेगी फौलादीएथर एनर्जी का यह ₹1,200 करोड़ का प्रेफरेंशियल आवंटन उसके बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए कुल ₹2,500 करोड़ के व्यापक कैपिटल रेजिंग प्रोग्राम का एक अभिन्न हिस्सा है। इससे पहले कंपनी ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹1,300 करोड़ सफलतापूर्वक जुटाए थे।कंपनी के क्यूआईपी इश्यू को घरेलू और वैश्विक संस्थागत निवेशकों से अभूतपूर्व रिस्पॉन्स मिला था, जहां ₹10,000 करोड़ से अधिक की बोलियां (Bids) प्राप्त हुई थीं। अब ₹1,300 करोड़ के क्यूआईपी और ₹1,200 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू के पूरा होने से कंपनी के पास लगभग ₹2,500 करोड़ की नई लिक्विडिटी उपलब्ध हो गई है। इस विशाल पूंजी का उपयोग कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स विकसित करने, रिटेल आउटलेट्स का विस्तार करने और कर्ज-मुक्त मजबूत बैलेंस शीट तैयार करने में करेगी।छत्रपति संभाजीनगर में 5 लाख यूनिट्स क्षमता वाला नया प्लांट: मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा उछालजुटाई गई पूंजी का एक बड़ा हिस्सा कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दोगुना करने में लगाया जा रहा है। एथर एनर्जी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्थित ऑरिक (AURIC - Aurangabad Industrial City) में उसका नया मेगा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तेजी से तैयार हो रहा है।यह अत्याधुनिक प्लांट चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में पूरी तरह चालू (कमीशन) होने की राह पर है। इस नए संयंत्र के शुरू होने से कंपनी की वार्षिक उत्पादन क्षमता में सीधे तौर पर 5 लाख (5,00,000) यूनिट्स का इजाफा होगा। वर्तमान में तमिलनाडु के होसुर स्थित प्लांट्स के साथ मिलकर यह नई फैसिलिटी देश के पश्चिमी और उत्तरी राज्यों में बढ़ती मांग को तेजी से पूरा करने और लॉजिस्टिक्स लागत को घटाने में गेमचेंजर साबित होगी।29 अगस्त को 'Ather Konarc' की धमाकेदार एंट्री: नए EL प्लेटफॉर्म से बदलेगा बाजार का मिजाजएथर एनर्जी केवल अपनी फैक्ट्रियों का विस्तार ही नहीं कर रही, बल्कि अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में भी बड़ा क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रही है। कंपनी अपने बहुप्रतीक्षित नए 'EL प्लेटफॉर्म' पर आधारित वाहनों की नई सीरीज पेश करने की तैयारी में है।इस नए प्लेटफॉर्म पर बना पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर 'Ather Konarc' (एथर कोनार्क) आगामी 29 अगस्त को वार्षिक 'एथर कम्युनिटी डे' (Ather Community Day) के मौके पर आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि 450 सीरीज और फैमिली-ओरिएंटेड 'रिज्टा' (Ather Rizta) की अपार सफलता के बाद 'कोनार्क' अधिक रेंज, एडवांस्ड सॉफ्टवेयर फीचर्स और प्रतिस्पर्धी कीमत के साथ व्यापक मास-मार्केट सेगमेंट को टारगेट करेगा, जिससे कंपनी की बिक्री में कई गुना की छलांग लगने की उम्मीद है।वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार: जून तिमाही में कंपनी हुई EBITDA पॉजिटिवनिवेशकों के लिए सबसे उत्साहजनक खबर यह है कि एथर एनर्जी ने परिचालन स्तर पर लाभप्रदता (Operational Profitability) हासिल करने में बड़ी सफलता पाई है। कंपनी ने वित्त वर्ष की जून तिमाही में एबिटा पॉजिटिव (EBITDA Positive) दर्ज किया है।ईवी स्टार्टअप्स के लिए शुरुआती दौर में घाटे से निकलकर एबिटा पॉजिटिव होना एक ऐतिहासिक पड़ाव माना जाता है। भारत सरकार के 'वाहन' (Vahan) पोर्टल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एथर एनर्जी देश की तीसरी सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता बनी हुई है और लगभग 16.2 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी पर काबिज है। पिछले एक साल में कंपनी ने अपने रिटेल टचपॉइंट्स की संख्या को 350 से बढ़ाकर 700 से अधिक कर दिया है, जिससे टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में इसके स्कूटरों की पहुंच अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है।ओला इलेक्ट्रिक, टीवीएस और बजाज से मुकाबला: क्या शेयर में देखने को मिलेगी बड़ी तेजी?भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में इस समय मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। एक तरफ ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric), टीवीएस मोटर (TVS iQube) और बजाज ऑटो (Bajaj Chetak) जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं, वहीं एथर एनर्जी ने मजबूत इंजीनियरिंग, विश्वसनीय हार्डवेयर, इन-हाउस बैटरी पैक और देशव्यापी 'Ather Grid' फास्ट चार्जिंग नेटवर्क के दम पर अपनी एक प्रीमियम व भरोसेमंद पहचान बनाई है।स्टॉक मार्केट एनालिस्ट्स और ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि ₹2,500 करोड़ के विशाल फंड इन्फ्यूजन, हीरो मोटोकॉर्प की मजबूत पैरेंटेज जैसी बैकिंग, नई फैक्ट्री का चालू होना और आगामी नए मॉडल्स की लॉन्चिंग कंपनी के वैल्यूएशन को नई ऊंचाई दे सकती है। प्रीमियम वैल्यूएशन पर शेयरहोल्डर्स द्वारा फंडरेज को मंजूरी देना यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में एथर से जुड़े शेयरों और साझेदार कंपनियों के स्टॉक्स में निवेशकों की जोरदार खरीदारी देखने को मिल सकती है। स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत एथर एनर्जी का यह कदम भारतीय मोबिलिटी सेक्टर में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
हर फील्ड में कामयाबी दिलाएगा बुध का गोचर, 4 राशियां भाग्यशाली
Budh Gochar 2026: 22 अगस्त से बुध देव सिंह राशि में प्रवेश कर रहे हैं. जानिए किन 4 राशियों के लिए यह गोचर करियर में सफलता और आर्थिक लाभ लेकर आ रहा है.
'मेरी मौत का जिम्मेदार...' ममता के करीबी आशीष बनर्जी ने अपने सुसाइट नोट में क्या लिखा?
पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी के शव के पास से कथित तौर पर एक सुसाइड नोट भी मिला है. इस सुसाइड नोट में उन्होंने अपने बच्चों को राजनीति में न आने की नसीहद दी है.
Atal Bihari Vajpayee को CM Yogi ने दी श्रद्धांजलि, कहा- उनका जीवन राष्ट्र प्रथम का उदाहरण
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ खाते पर एक पोस्ट में कहा, “राष्ट्रनिष्ठा, लोकतांत्रिक मूल्यों और आदर्श राजनीति के शिखर पुरुष, पूर्व प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।” उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने ओजस्वी चिंतन, मर्यादित आचरण और कर्मनिष्ठ जीवन से भारतीय लोकतंत्र में शुचिता, राजनीति में नैतिकता और राष्ट्रसेवा के उच्च आदर्श स्थापित किए। उन्होंने कहा कि वाजपेयी का संपूर्ण जीवन ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का जीवंत उदाहरण है। योगी ने कहा कि राष्ट्रोन्नति के प्रति वाजपेयी का अटूट संकल्प आज भी प्रत्येक देशवासी को ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए निरंतर प्रेरित करता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने ‘एक्स’ पर वाजपेयी की कविता की पंक्तियां—“हार नहीं मानूंगा, रार नयी ठानूंगा…काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं...” साझा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने अपने ओजस्वी विचारों और दूरदर्शी नेतृत्व से भारतीय राजनीति को नयी ऊंचाई दी और उनका राष्ट्रसेवा को समर्पित जीवन सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। इसे भी पढ़ें: Yogi Adityanath ने Nana Patekar की सराहना की, महाराष्ट्र के किसान परिवारों की मदद को किया याद उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने वाजपेयी को भारतीय राजनीति का अजातशत्रु, ओजस्वी कवि और पूर्व प्रधानमंत्री बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि विचारों में अडिगता, व्यवहार में विनम्रता और निर्णयों में राष्ट्रहित उनके सार्वजनिक जीवन की विशिष्ट पहचान थी। उन्होंने अपने आचरण से सिद्ध किया कि सिद्धांतों की मजबूती और लोकतांत्रिक सहमति के साथ भी देश को प्रभावी नेतृत्व दिया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: Shankar Mahadevan ने UP Police के गीत खाकी का सितारा को अपनी सबसे बड़ी कमाई बताया मौर्य ने कहा कि पोखरण के ऐतिहासिक निर्णय से भारत को सामरिक सामर्थ्य देने से लेकर आधुनिक अवसंरचना की मजबूत नींव रखने तक वाजपेयी का योगदान अविस्मरणीय है और उनकी दूरदृष्टि, कर्मनिष्ठा तथा देश के प्रति अटूट समर्पण सदैव पथ आलोकित करते रहेंगे। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी वाजपेयी को भारतीय राजनीति का युगपुरुष, असंख्य कार्यकर्ताओं का पथप्रदर्शक और प्रेरणास्रोत बताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वाजपेयी की पुण्यतिथि पर पाठक की देखरेख में लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में ‘अटल स्मृति संध्या’ का आयोजन किया गया है। इसके मुख्य अतिथि योगी आदित्यनाथ होंगे। कार्यक्रम में पद्मश्री अशोक चक्रधर एकल काव्यपाठ करेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को 93 वर्ष की उम्र में हुआ था। इसे भी पढ़ें: Yogi Adityanath ने शिवपाल के बयान पर कसा तंज, कहा- SP आजम खान के जरिये दंगा भड़काना चाहती है उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में तीन बार देश का नेतृत्व किया। वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था।
Ashish Banerjee का शव बीरभूम के TMC कार्यालय में फंदे से लटका मिला, सुसाइड नोट बरामद
पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में रविवार सुबह फंदे से लटका मिला। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि रामपुरहाट के हताताला पाड़ा इलाके में बनर्जी के आवास के पास स्थित पार्टी कार्यालय से एक कथित ‘सुसाइड नोट’ भी बरामद हुआ है। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। सूत्रों ने बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि बनर्जी की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस कथित ‘सुसाइड नोट’ में लिखी बातों की जांच कर रही है। इसे भी पढ़ें: Vidya Vahini Yojana से छात्राएं होंगी आत्मनिर्भर, CM Rekha Gupta ने बांटी Cycle, आसान हुई School की राह तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बनर्जी ने 2001 से 2026 तक राज्य विधानसभा में रामपुरहाट निर्वाचन क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व किया था। वह विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार में स्कूली शिक्षा एवं कृषि समेत विभिन्न विभागों के मंत्री भी रहे। उन्होंने 2026 का विधानसभा चुनाव रामपुरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ध्रुव साहा से 24,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गए थे। इसे भी पढ़ें: World U20 Championships में भारत ने जीते कुल तीन पदक, पूजा सिंह सातवें स्थान पर रहीं पार्टी सूत्रों ने बताया कि चुनाव में हार के बाद बनर्जी राजनीति में खास सक्रिय नहीं थे। तृणमूल कांग्रेस के नेता अनुब्रत मंडल के पार्टी का जिलाध्यक्ष रहने के दौरान बनर्जी बीरभूम में पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब इस साल हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार और उसके 15 वर्ष के शासन का अंत होने के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व विधायक और नेता भ्रष्टाचार से संबंधित जांच का सामना कर रहे हैं। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या बनर्जी ने आत्महत्या की और यदि ऐसा है तो उन्हें किस वजह से यह कदम उठाना पड़ा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कथित ‘सुसाइड नोट’ की सामग्री से उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में और जानकारी मिलने की संभावना है।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा के सपोर्ट में उतरे शशि थरूर, बोले- भीड़ उन पर हमला करने को उतारू
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सभी लोकतंत्र के समर्थकों को मोइत्रा के सपोर्ट में आना चाहिए। किसी महिला सांसद पर भीड़ हमला करने को उतारू है, तो यह सरकार का फर्ज है कि उसे सुरक्षा दी जाए।
'बुलडोजर पसंद है न', छत्तीसगढ़ से आए कलाकार से बोले CM योगी
सीएम योगी कलाकारों से मिल रहे थे, इस दौरान छत्तीसगढ़ से आए कलाकार ने कहा कि आप तो बाबा बुलडोजर हैं. इसपर सीएम योगी ने दिलचस्प जवाब दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि गलत लोगों पर बुलडोजर चलाना पड़ता है.
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता निलंजन दास ने बनर्जी का हाथों से से लिखा यह सुसाइड नोट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया।
महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा (Food Safety) के क्षेत्र में यह वाक्य इन दिनों नियमों का उल्लंघन करने वालों और मिलावटखोरों के लिए सबसे बड़ा खौफ बन चुका है।अपनी निडर, सख्त और बेबाक प्रशासनिक शैली के लिए पहचाने जाने वाले IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ...
Eknath Shinde का दावा: India को महाशक्ति बनाएगा महाराष्ट्र, ठाणे में गिनाए प्रोजेक्ट्स
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को कहा कि भारत के वैश्विक महाशक्ति बनने की यात्रा में महाराष्ट्र अग्रणी भूमिका निभाएगा। इसी के साथ उन्होंने रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल क्षेत्रों में देश की तेजी से हो रही तरक्की का जिक्र किया। ठाणे के जिलाधिकारी कार्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने तकनीक की अच्छी समझ रखने वाले जेन जी को भारत की असली महाशक्ति बताया और उन्हें स्टार्टअप, एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) समाधानों तथा हरित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। शिंदे ने किसानों, युवाओं, महिलाओं और आधुनिक प्रौद्योगिकी से संचालित विकास रणनीति पर जोर देते हुए रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल क्षेत्रों में देश की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की यात्रा में महाराष्ट्र देश का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि अपने गृह क्षेत्र ठाणे को एक आधुनिक केंद्र में बदलने के लिए कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है। शिंदे ने ठाणे आंतरिक मेट्रो गलियारा, ठाणे-बोरीवली दोहरी सुरंग वाली सड़क परियोजना और शहर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त 6,059 सुरक्षा कैमरे लगाने की परियोजना पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।
Assam Flood: असम में बाढ़ की स्थिति में सुधार, 5 जिलों में 62 हजार प्रभावित
असम में शनिवार को बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ और प्रभावित लोगों की संख्या घटकर लगभग 62,000 रह गई। इसके साथ ही बाढ़ से प्रभावित जिलों की संख्या भी कम होकर पांच पर आ गई है। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। इसे भी पढ़ें: Odisha Flood: 95 हजार से अधिक लोग सुरक्षित निकाले गए, 6 जिलों में स्थिति गंभीर असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के बुलेटिन के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में बाढ़ के कारण किसी भी व्यक्ति की मौत की खबर नहीं है, जिससे इस वर्ष बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों की कुल संख्या 104 पर स्थिर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गोलाघाट, होजाई, नगांव, शिवसागर और जोरहाट जिलों के 16 राजस्व मंडल और 235 गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। वर्तमान में कुल 62,443 लोग बाढ़ की चपेट में हैं, जिनमें सबसे अधिक 33,332 प्रभावित लोग नगांव जिले में हैं। इसके बाद गोलाघाट में 12,641 और जोरहाट में 8,523 लोग प्रभावित हैं। इससे पहले शुक्रवार को राज्य के सात जिले बाढ़ की चपेट में थे और प्रभावितों की संख्या 78,000 से अधिक थी। प्रशासन द्वारा विस्थापित लोगों के लिए 28 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 4800 से अधिक लोगों ने शरण ली हुई है। इसे भी पढ़ें: Assam में 1.5 लाख करोड़ रुपये का होगा बुनियादी ढांचा निवेश: Himanta Biswa Sarma इसके अलावा, नौ राहत सामग्री वितरण केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। बुलेटिन के अनुसार, राज्य में 4,954.43 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें अब भी पानी में डूबी हुई हैं।
Ayodhya के Ram Mandir में पुजारियों का नया परिधान लागू, रेशमी धोती और तिलक अनिवार्य
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में शनिवार से पुजारियों के लिए नया परिधान लागू कर दिया गया। अब मंदिर के सभी पुजारी एक समान पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। मंदिर के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मंदिर न्यास की धार्मिक समिति की सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया कि यह परिधान रामानंदी परंपरा के अनुरूप निर्धारित किया गया है। इसके तहत पुजारी हल्के पीले रंग की रेशमी धोती और उसी रंग का रेशमी उत्तरीय धारण करेंगे। उन्होंने बताया कि हल्का पीला रंग भगवान राम को प्रिय माना जाता है, इसलिए इस रंग को परिधान के लिए चुना गया है। इसे भी पढ़ें: शिखा है, जनेऊ पहनते हैं? PM ने राम के मर्म को अयोध्या में समझाया, वो क्या इंटरव्यूअर्स को समझ नहीं आया, मंदिर का नया CEO ब्राह्मण ही बनेगा? नए नियमों के तहत पुजारियों के लिए साज-सज्जा से जुड़े मानक भी तय किए गए हैं। पुजारी या तो ‘पंचकेश’ परंपरा का पालन करेंगे या पूरी तरह से मुंडित रहेंगे। आंशिक रूप से बढ़े हुए बाल या दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं होगी। इसे भी पढ़ें: Lakhimpur Kheri में Bus पलटने से 1 श्रद्धालु की मौत, बेतिया से अयोध्या जा रहे 30 अन्य घायल इसके साथ ही रामानंदी परंपरा के तिलक को धारण करना भी अनिवार्य किया गया है। धार्मिक समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास ने बताया कि वस्त्रों की पवित्रता और शुद्धता को ध्यान में रखते हुए रेशमी परिधान का चयन किया गया है। समिति ने कहा कि एक समान वेशभूषा से भगवान रामलला की पूजा-अर्चना और सेवा व्यवस्था में अनुशासन, एकरूपता और धार्मिक गरिमा बढ़ेगी। मंदिर में यह नया परिधान नियम 15 अगस्त से प्रभावी हो गया है।
Vrindavan में Hariyali Teej पर स्वर्ण हिंडोले में विराजे बांके बिहारी, उमड़ी भारी भीड़
हरियाली तीज के अवसर पर शनिवार को वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री बांके बिहारी जी महाराज स्वर्ण हिंडोले पर विराजकर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देते हैं। श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने बताया कि स्वर्ण हिंडोले की यह परंपरा देश की आजादी के समय से चली आ रही है। वर्तमान स्थान पर इस हिंडोले को स्थापित हुए करीब 80 वर्ष हो चुके हैं। इतिहासकार प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार, 1920 के दशक में मंदिर के खजाने में हुई लूट के बाद बचे सोने से हिंडोला तैयार कराने का निर्णय लिया गया था। वाराणसी के दो स्वर्णकारों ने वृंदावन में एक लाख तोला चांदी और 10 हजार तोला सोने से इस हिंडोले का निर्माण किया था। इसे भी पढ़ें: Mehndi Trends 2026: जाल वर्क से लेकर फ्लोरल शेडिंग तक, Hariyali Teej के लिए बेस्ट हैं ये Pakistani Designs इसे बनवाने की जिम्मेदारी भक्त हरगू लाल जी ने ली थी और उन्होंने अपनी ओर से भी सोना उपलब्ध कराया था। उन्होंने बताया कि इस बार होली के रंगों से हिंडोले के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा था, जिसकी मरम्मत कराई गई है। हरियाली तीज के अवसर पर पूरे मंदिर को हरे रंग से सजाया जाता है और ठाकुर जी को भी हरे वस्त्र धारण कराए जाते हैं। हिंडोले के दोनों ओर दो-दो गोपियां चंवर और पान का प्रसाद लेकर खड़ी रहती हैं। हिंडोले के पीछे सेज-सज्जा की जाती है, जिसमें शीशा और सोलह श्रृंगार की सामग्री रखी जाती है। ऐसी मान्यता है कि हिंडोले पर झूलने से राधा रानी का श्रृंगार बिगड़ जाता है, इसलिए उनके लिए यह विशेष व्यवस्था की जाती है। ज्योतिषाचार्य केशव आचार्य ने बताया कि हरियाली तीज बदलते मौसम के लिए भगवान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन देवी पार्वती की कठोर तपस्या पूर्ण हुई थी और उन्होंने केवल बेलपत्र का सेवन किया था। इस अवसर पर अधिकांश मंदिरों में प्रसाद के रूप में घेवर और फेनी अर्पित की जाती है। इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026 पर पहली बार रख रही हैं व्रत? जानिए Puja Vidhi और Rituals का धार्मिक महत्व श्री राधा-रमण मंदिर के सेवायत दिनेश चंद्र गोस्वामी ने बताया कि वृंदावन के सप्त देवालयों में झूलन उत्सव 15 दिनों तक मनाया जाता है, जिसका समापन रक्षाबंधन के दिन होगा। शुरुआती तीन दिनों तक शाम के समय ठाकुर जी सोने और चांदी के झूले में दर्शन देंगे। इसके बाद अलग-अलग प्रकार के झूले सजाए जाएंगे। मदन मोहन मंदिर के सेवायत विजय किशोर गोस्वामी ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज का आयोजन एक दिन का होता है, जबकि सप्त देवालयों में 15 दिनों तक सोने-चांदी के झूले सजाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि चैतन्य महाप्रभु के शिष्यों की रचनाओं और ‘हरि भक्ति विलास’ में भी सावन में झूलन लीला का वर्णन मिलता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन ने भी विशेष इंतजाम किए हैं। इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026: अखंड सौभाग्य के लिए किया जाता है हरियाली तीज का पर्व, जानिए पूजन विधि और महत्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार ने बताया कि पूरे क्षेत्र को चार सुपर जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए विशेष योजना बनाई गई है। उत्सव के दिन वृंदावन में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
BJP ने Vande Mataram अनादर पर Congress से मांगी माफी, सोनिया-राहुल पर साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान ‘‘घोर अनादर’’ दिखाया। भाजपा ने उनसे माफी की मांग की। सत्तारूढ़ दल के कई नेताओं ने सोनिया गांधी पर कार्यक्रम में वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताने का भी आरोप लगाया। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। पार्टी ने कहा कि सोनिया गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी को लेकर कह रही थीं, क्योंकि वह काफी समय से खड़े थे। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘‘यह देखा गया कि जब राष्ट्रगीत गाया जा रहा था, तब उनकी शीर्ष नेता सोनिया गांधी, प्रमुख नेता राहुल गांधी और वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ध्यान नहीं दे रहे थे।’’ भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इसके बजाय वे आपस में बातचीत कर रहे थे...यह राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के प्रति उनके घोर अनादर को दर्शाता है। यह एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय में एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य देखने को मिला।’’ उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि कांग्रेस ने अब तक वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को स्वीकार नहीं किया है। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘हम कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के इस निंदनीय कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं।’’ त्रिवेदी ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व से ‘‘माफी और स्पष्टीकरण’’ की मांग करते हुए कहा कि उनके ‘‘आपत्तिजनक और निंदनीय कृत्य’’ से देश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो संविधान के प्रति उनकी आस्था और निष्ठा, राष्ट्र के प्रति समर्पण तथा स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनके सम्मान पर सवाल उठेंगे।’’ भाजपा के संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष ने कांग्रेस के कार्यक्रम की वीडियो फुटेज साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मां, बेटा और राष्ट्रीय अध्यक्ष (कांग्रेस के) को संपूर्ण वंदे मातरम् के गायन से ही आपत्ति है…कुछ सोच 1947 से पहले जैसी थी, वैसी ही 1947 के बाद भी बनी हुई है।’’ भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता दिवस के दिन आज जो दृश्य सामने आया, वह बेहद शर्मनाक है। इसे भी पढ़ें: Mohan Yadav ने Sonia Gandhi और राहुल गांधी पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगाया भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी की आपत्ति और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से यह पूछना कि इसे क्यों बजाया जा रहा है, कांग्रेस पार्टी की सोच को उजागर करता है।’’ अग्रवाल ने आरोप लगाया कि ‘वंदे मातरम्’ के प्रति कांग्रेस का रवैया लोगों को पार्टी की ‘‘आपातकाल वाली सोच’’ की याद दिलाता है। उन्होंने कहा, ‘‘देश की जनता इस सोच को नकार चुकी है और आगे भी इसे नकारती रहेगी।’’ इस विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी राजगोपालाचारी की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी। इसमें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर यह फैसला लिया गया था कि कांग्रेस के अधिवेशनों में वंदे मातरम् के शुरुआती छंद का गायन किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि टैगोर ने नेहरू और बोस को सलाह दी थी कि ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती कुछ छंद का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। रमेश ने कहा, ‘‘तब से हम हर अधिवेशन में उन्हीं पंक्तियों का गायन करते आ रहे हैं। हमारा सेवा दल इसे गाता है, हमारे कार्यकर्ता इसे गाते हैं। इसको लेकर कोई विवाद नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि शनिवार को राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण का गायन किया गया। इसे भी पढ़ें: BJP ने Sonia Gandhi पर Vande Mataram रोकने का लगाया आरोप, कांग्रेस ने किया खंडन कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर संसद में 16 घंटे तक चर्चा हुई थी। हमने अपनी बात रखी थी। मैंने इससे जुड़ा पूरा इतिहास बताया था, जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को नहीं थी। मैंने सांसदों को उस संदर्भ के बारे में बताया था, जिसमें वंदे मातरम् को लेकर फैसला लिया गया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आज इंदिरा भवन में इसका पूर्ण संस्करण गाया गया। इसे लेकर किसी विवाद का कोई सवाल ही नहीं है।’’ भाजपा नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने इनकार किया कि गीत के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का कोई प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष काफी देर से खड़े थे, सोनिया जी उनके लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं।’’ भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति के लिए ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का प्रयास किया। भंडारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कांग्रेस ‘दिमागी नक्सल सोच’ से ग्रस्त है।’’ भंडारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लालकिले पर आयोजित आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होने पर भी आलोचना करते हुए कहा कि यह भारत के संविधान और ‘‘देशभक्ति से जुड़ी हर चीज के प्रति उनकी गहरी नफरत’’ को दर्शाता है। भाजपा प्रवक्ता ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘इसीलिए कांग्रेस वंदे मातरम् का विरोध करती है। देश के लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस अब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नहीं रह गई है। इसे भी पढ़ें: Red Fort पर 80वें Independence Day पर गूंजा वंदे मातरम्, PM Modi ने 75 मिनट का भाषण दिया आज कांग्रेस ‘दिमागी नक्सल कांग्रेस’ बन गई है।’’ सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता आर पी सिंह ने कहा, ‘‘एंटोनियो माइनो जी वंदे मातरम् से इतनी नफरत क्यों करती हैं? जब वंदे मातरम् गाया जा रहा था, तो कथित तौर पर एंटोनियो माइनो जी इतनी नाराज हो गईं कि उन्होंने कथित रूप से आपत्ति जताई और अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से इसे रोकने को कहा। वंदे मातरम् के प्रति इतनी नफरत क्यों?’’ पिछले महीने संसद ने एक विधेयक पारित किया, जिसमें राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाया गया है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को 30 जुलाई को लोकसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया था। इससे एक दिन पहले इसे राज्यसभा की मंजूरी मिली थी। इस कानून में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर का दर्जा दिया गया है।
300 यूनिट फ्री बिजली स्कीम, 5 किलोवाट के पैनल पर कितनी सब्सिडी?
PM Surya Ghar Muft Bijli Yojna Subsidy: 2024 में लॉन्च हुई प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र सरकार 300 यूनिट फ्री बिजली के साथ सोलर पैनल लगवाने पर आने वाले खर्च पर तगड़ी सब्सिडी भी दे रही है. आप योजना के तहत 1 से 3 किलोवाट या इससे भी अधिक क्षमता का पैनल लगवा सकते हैं.
'जहां से पानी टनल में घुसा, वहां पहले भी टपकता था...', चमोली हादसे पर बड़ा दावा
उत्तराखंड के चमोली जिले में टनल हादसे के बाद अब कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं. टनल में काम करने वाले एक युवक ने दावा किया है कि जिस जगह से पानी टनल के अंदर घुसा, वहां पहले भी पानी टपकता था. यह आम बात हो गई थी.
बेटे के बर्थडे पर ₹16 का ऑफर देना पड़ा भारी, दुकान बंद कर भागा मालिक
कानपुर के अनवरगंज इलाके में 16 रुपये में कपड़े देने के ऑफर ने दुकानदार के लिए मुश्किल खड़ी कर दी. 15 अगस्त की आधी रात सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑफर के बाद दुकान पर तीन से चार हजार लोगों की भीड़ जुट गई. धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति में कई लोग गिरकर घायल हो गए.
'सालों तक BJP के मुख्यालयों पर...', अखिलेश का BJP-RSS पर तीखा हमला
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेस यादव बीजेपी और आरएसस पर हमला किया है.. उन्होंने कहा कि जिनका योगदान आजादी में शून्य है.. जिन्होंने अपने मुख्यालयों पर सालों साल तिरंगा नहीं फहराया वो राष्ट्रवादी बने टहल रहे हैं.. पहले बीजेपी आरएसएस वाले जनता के बीच साबित करें कि वो तिरंगे का सम्मान करते हैं.
डीप डिप्रेशन का तांडव: उत्तरी छत्तीसगढ़ में बादलों का विस्फोट, कुसमी में रिकॉर्ड बारिश
बंगाल की खाड़ी से उठे शक्तिशाली 'डीप डिप्रेशन' (अत्यधिक गहरे अवदाब) के सक्रिय होने से छत्तीसगढ़ के मौसम ने विकराल रूप ले लिया है। विशेष रूप से राज्य का उत्तरी भूभाग यानी आदिवासी बहुल सरगुजा संभाग इस समय प्रकृति के भीषण प्रकोप की चपेट में है। आसमान से लगातार बरस रही आफत ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।बलरामपुर-रामानुजगंज जिले का सीमावर्ती विकासखंड कुसमी इस मौसमी प्रणाली का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बनकर उभरा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कुसमी में बीते 24 से 48 घंटों के दौरान रिकॉर्ड तोड़ मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है, जिससे पूरा इलाका जलमग्न हो चुका है। कुसमी के रिहायशी इलाकों, हाट-बाजारों और संपर्क मार्गों पर कई फीट पानी बह रहा है। झमाझम बारिश के चलते पहाड़ी नालों में आए अचानक उफान (फ्लैश फ्लड) ने दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्यालय से काट दिया है।India Meteorological Department+ 1मौसम विभाग (IMD रायपुर) की चेतावनी: सरगुजा संभाग के जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्टभारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंचलिक मौसम केंद्र, रायपुर ने उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिलों के लिए अगले 48 घंटों तक अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस पूरे क्षेत्र में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर जोखिम बना हुआ है।मौसम केंद्र द्वारा चिन्हित किए गए सर्वाधिक संवेदनशील जिले:बलरामपुर-रामानुजगंज: जिले के कुसमी, शंकरगढ़, राजपुर, रामानुजगंज और वाड्रफनगर में 200 मिमी से अधिक अति भारी वर्षा का पूर्वानुमान।India Meteorological Departmentसरगुजा (अंबिकापुर): जिला मुख्यालय अंबिकापुर समेत सीतापुर, लुंड्रा और मैनपाट के पठारी इलाकों में लगातार तेज बारिश और विजिबिलिटी कम होने का अलर्ट।India Meteorological Departmentजशपुर: मनोरा, दुलदुला, पत्थलगांव और बगीचा के घाट क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और नालों के उफान का खतरा।India Meteorological Department+ 1सूरजपुर और कोरिया: प्रतापपुर, ओड़गी, बैकुंठपुर और सोनहत में मूसलाधार बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति।मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) व गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: मध्य प्रदेश सीमा से लगे इन पहाड़ी जनपदों में तेज बौछारों के साथ आंधी-तूफान का अलर्ट।डीप डिप्रेशन का विज्ञान: आखिर क्यों इतनी आक्रामक हुई मानसूनी प्रणाली?मौसम विज्ञानियों के अनुसार, जब बंगाल की खाड़ी के गर्म समुद्री जल के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है और वह अधिक वायुमंडलीय दबाव, घूर्णन और नमी के चलते तीव्र होकर डिप्रेशन और फिर 'डीप डिप्रेशन' में तब्दील होता है, तो हवा की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच जाती है।यह मौसमी तंत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ते हुए ओडिशा और झारखंड के रास्ते उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर केंद्रित हो गया है। इस प्रणाली को एक तरफ बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी युक्त पूर्वी हवाएं मिल रही हैं, तो दूसरी तरफ अरब सागर से आ रही मानसूनी हवाएं भी इसमें समाहित हो रही हैं। जब यह विशाल चक्रवातीय परिसंचरण छोटानागपुर के पठार और विंध्य-सतपुड़ा की पर्वत शृंखलाओं से टकराता है, तो ओरोग्राफिक लिफ्टिंग (पहाड़ों से टकराकर बादलों का ऊपर उठना) के कारण 'क्लाउडबर्स्ट' जैसी अत्यधिक सघन बारिश होती है, जैसा वर्तमान में कुसमी और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।India Meteorological Departmentउफान पर नदियां और जलमग्न रपटे: कन्हार, रिहंद और ईब नदियों ने दिखाया रौद्र रूपउत्तरी छत्तीसगढ़ की भौगोलिक बनावट पहाड़ी और पठारी होने के कारण यहां की नदियां बारिश का पानी मिलते ही तेजी से उफनती हैं। बलरामपुर जिले से होकर बहने वाली कन्हार, गलफुला और चनान नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई प्रमुख रपटों और पुलियाओं के ऊपर 3 से 5 फीट तक पानी बह रहा है, जिससे कुसमी-अंबिकापुर मार्ग, रामानुजगंज-झारखंड मार्ग और बगीचा-जशपुर मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।India Meteorological Departmentसूरजपुर और सरगुजा में रिहंद, मांड और महान नदियां भी उफान पर हैं। रिहंद जलाशय में तेजी से बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग ने अलर्ट जारी किया है। नदी किनारे बसे दर्जनों तटीय गांवों में पानी घुसने का खतरा पैदा हो गया है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने मुनादी करवाकर ग्रामीणों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की हिदायत दी है।India Meteorological Departmentकिसानों के लिए दोहरी स्थिति: धान की फसलों को सहारा या खेतों में जलभराव का संकट?छत्तीसगढ़ को 'धान का कटोरा' कहा जाता है, और इस मानसूनी बारिश के कृषि क्षेत्र पर मिले-जुले प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। सूखे की मार झेल रहे और रोपाई में देरी का सामना कर रहे सरगुजा संभाग के किसानों के लिए शुरुआती बारिश किसी संजीवनी की तरह आई थी, जिससे खेतों में पानी का संचयन हुआ और धान के पौधों की बढ़वार में मदद मिली।लेकिन कुसमी, शंकरगढ़ और राजपुर जैसे इलाकों में लगातार हो रही अतिवृष्टि अब किसानों की चिंता का कारण बन गई है। निचले खेतों में पानी का अत्यधिक भराव होने से हाल ही में रोपे गए धान के पौधे डूबने लगे हैं। यदि 48 घंटे से अधिक समय तक खेतों से पानी की निकासी नहीं हुई, तो पौधों के गलने और कीट-रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम साफ होते ही खेतों की मेड़ों को काटकर अतिरिक्त पानी की तत्काल निकासी सुनिश्चित करें।प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद: SDRF की टीमें तैनात, 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रियहालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर और सूरजपुर के जिला कलेक्टरों ने सभी सरकारी कर्मचारियों और राजस्व अधिकारियों की छुट्टियां रद्द करते हुए उन्हें फील्ड में तैनात रहने का आदेश दिया है।राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और नगर सेना (होमगार्ड) के आपदा दलों को बोट्स, लाइफ जैकेट और कटिंग उपकरणों के साथ तैनात कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर चिन्हित कर लिए गए हैं, जहां भोजन, शुद्ध पेयजल और आपातकालीन चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में ग्रामीण तुरंत संपर्क साध सकें।आकाशीय बिजली (ठनका) और बारिश से बचाव: नागरिकों के लिए सेफ्टी गाइडलाइंसIndia Meteorological Departmentछत्तीसगढ़ के पठारी और वनांचल क्षेत्रों में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने से जनहानि का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग ने आम नागरिकों से निम्नलिखित सावधानियां बरतने की अपील की है:उफनते नालों और रपटों को पार करने की भूल न करें: पुल या रपटे के ऊपर से पानी बहने की स्थिति में वाहन निकालने या पैदल पार करने की कतई कोशिश न करें; पानी का तेज बहाव वाहनों को आसानी से बहा ले जाता है।India Meteorological Departmentपेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें: बारिश या आंधी के समय बड़े, घने या अकेले खड़े पेड़ों के नीचे कतई शरण न लें, क्योंकि वे आकाशीय बिजली को सबसे तेजी से आकर्षित करते हैं।कच्ची दीवारों और पुराने ढांचों से दूरी: लगातार सीलन और बारिश के कारण कच्चे मकानों और जर्जर दीवारों के ढहने का खतरा रहता है, इसलिए सुरक्षित पक्के भवनों में ही रहें।India Meteorological Departmentइलेक्ट्रिक पोल्स और ट्रांसफार्मर से रहें दूर: सड़कों और गलियों में जलभराव होने पर बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मर से दूर रहें ताकि करंट लगने के खतरे से बचा जा सके।India Meteorological Departmentदामिनी ऐप का उपयोग करें: अपने मोबाइल फोन में भारत सरकार का 'दामिनी ऐप' चालू रखें, जो आकाशीय बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले चेतावनी नोटिफिकेशन देता है।आगामी दो दिनों तक उत्तर छत्तीसगढ़ के निवासियों को अनावश्यक यात्रा टालने, मौसम के आधिकारिक बुलेटिन पर नजर बनाए रखने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है।
900 कर्मचारियों को एक झटके में निकाला, अब खुद मांग रहा नौकरी
भारतीय मूल के कारोबारी विशाल गर्ग एक बार फिर चर्चा में हैं. 2021 में उन्होंने Zoom कॉल के जरिए करीब 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था, जिसके बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी. अब करीब पांच साल बाद उन्हें खुद CEO पद से हटा दिया गया है.
बिहार में बदला मौसम का मिजाज: चंपारण समेत 12 जिलों में बारिश और ठनका का हाई अलर्ट
बिहार में उमस भरी चिपचिपी गर्मी और मॉनसून की बेरुखी झेल रहे लोगों के लिए मौसम विभाग ने बड़ा अपडेट जारी किया है। राज्य में मॉनसूनी हवाएं एक बार फिर से सक्रिय हो गई हैं, जिससे उत्तर और उत्तर-पश्चिमी बिहार के जिलों में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने राज्य के 12 जिलों में तेज आंधी, मेघगर्जन, मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली यानी ठनका गिरने की गंभीर चेतावनी जारी की है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वातावरण में नमी और बादलों के तीव्र जमावड़े के चलते कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंके वाली हवाएं चल सकती हैं। नेपाल के तराई क्षेत्रों से सटे जिलों और गंडक बेसिन के मैदानी इलाकों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान मौसम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और आम नागरिकों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों में न जाने की सख्त सलाह दी है।ऑरेंज और येलो अलर्ट का गणित: जानिए आपके जिले में कैसा रहेगा मौसम का हालमौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने परिस्थितियों की गंभीरता के आधार पर प्रभावित 12 जिलों को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:5 जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट' (तैयार रहें): उत्तर-पश्चिमी बिहार के पांच प्रमुख जिलों—पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), पश्चिम चंपारण (बेतिया), गोपालगंज, सीवान और सारण (छपरा)—में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों के कई प्रखंडों में मध्यम से भारी दर्जे की वर्षा होने, तेज आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने का अत्यधिक खतरा बना हुआ है।7 जिलों में 'येलो अलर्ट' (सतर्क रहें): उत्तर-मध्य बिहार के सात जिलों—दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, शिवहर, सीतामढ़ी और मधुबनी—में येलो अलर्ट प्रभावी किया गया है। इन जनपदों में रुक-रुक कर गरज-चमक के साथ बारिश की बौछारें पड़ने और कहीं-कहीं बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।तराई और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी वर्षा के चलते निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण संपर्क मार्गों के बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।ठनका (वज्रपात) का कहर: क्यों बिहार में आकाशीय बिजली बन जाती है जानलेवा आफत?बिहार में मानसूनी सीजन के दौरान बारिश से ज्यादा खौफनाक रूप आकाशीय बिजली यानी 'ठनका' का देखने को मिलता है। हर साल राज्य में वज्रपात की चपेट में आने से सैकड़ों लोगों और मवेशियों की जान चली जाती है।भू-वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जहां बंगाल की खाड़ी से आने वाली अत्यधिक नम हवाएं उत्तर में हिमालय की तलहटी से टकराकर ऊपर उठती हैं। इस प्रक्रिया में वातावरण में भारी तापमान अंतर के कारण तेजी से वर्टिकल 'क्यूमुलोनिम्बस' (Cumulonimbus) बादल बनते हैं। इन बादलों के ऊपरी हिस्से में बर्फ के कण (पॉजिटिव चार्ज) और निचले हिस्से में पानी की बूंदें (नेगेटिव चार्ज) जमा हो जाती हैं। जब दोनों विपरीत चार्ज के बीच अत्यधिक विद्युत विभवांतर (इलेक्ट्रिक पोटेंशियल) पैदा होता है, तो लाखों वोल्ट की बिजली सीधे जमीन की ओर आकर्षित होती है। बिहार के खुले खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर इस प्राकृतिक डिस्चार्ज का सबसे आसान शिकार बन जाते हैं।मौसम प्रणाली का विज्ञान: आखिर क्यों सक्रिय हुआ उत्तर बिहार में मॉनसून?मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, वर्तमान मौसमी बदलाव के पीछे कई वायुमंडलीय कारक एक साथ काम कर रहे हैं। मॉनसून की ट्रफ रेखा अपनी सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है और उसका एक सिरा उत्तर बिहार और तराई क्षेत्र के करीब से गुजर रहा है। इसके साथ ही, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के वायुमंडल में चक्रवातीय परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) सक्रिय बना हुआ है।बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नम पुरवैया हवाएं इस मौसमी प्रणाली को लगातार ऊर्जा और नमी दे रही हैं। जब यह नमी युक्त हवा उत्तर बिहार के गर्म सतही तापमान से टकराती है, तो स्थानीय स्तर पर कन्वेक्टिव एक्टिविटी (संवहनीय हलचल) शुरू हो जाती है, जिससे अचानक घने काले बादल छा जाते हैं और तेज हवाओं के साथ बिजली कड़कने लगती है।राजधानी पटना और दक्षिण बिहार का हाल: उमस भरी गर्मी और बादलों की आवाजाहीउत्तर बिहार में जहां आंधी-बारिश का दौर शुरू होने वाला है, वहीं राजधानी पटना और दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में मॉनसून अपेक्षाकृत कमजोर रहने के आसार हैं। पटना, गया, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, औरंगाबाद, रोहतास, भोजपुर और बक्सर में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे।पटना में दिन के समय तेज धूप और हवा में अत्यधिक नमी के कारण उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। हालांकि, दोपहर बाद या शाम के समय स्थानीय बादलों के बनने से राजधानी के कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी या गरज के साथ छिटपुट बारिश दर्ज की जा सकती है। पटना में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।किसानों के लिए जरूरी एडवाइजरी: धान की फसल के लिए संजीवनी या आफत?उत्तर बिहार के कृषि प्रधान जिलों के लिए यह बारिश एक तरफ जहां धान की खड़ी फसल के लिए वरदान साबित होगी, वहीं ठनका का खतरा किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। मॉनसून में लंबी खामोशी के बाद सूख रहे धान के खेतों को इस बारिश से नई जान मिलेगी, जिससे सिंचाई का डीजल खर्च बचेगा और फसल की ग्रोथ बेहतर होगी।हालांकि, कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने किसानों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है:जब तक आसमान में बादल गरज रहे हों और बिजली चमक रही हो, तब तक खेतों में पटवन (सिंचाई), खाद डालने या निराई-गुड़ाई का काम पूरी तरह रोक दें।अपने मवेशियों को खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे बांधने के बजाय पक्के दलान या शेड के भीतर रखें।कटी हुई फसलों और कृषि उपकरणों को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें।वज्रपात से बचने के लाइफ-सेविंग उपाय: 'इंद्रवज्र' और 'दामिनी' ऐप से रहें अपडेटबिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) ने आम जनता से अपील की है कि वे मौसम खराब होने पर घबराने के बजाय सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें:पेड़ों के नीचे आश्रय न लें: बारिश शुरू होते ही कभी भी ऊंचे, अकेले या घने पेड़ों के नीचे शरण न लें। पेड़ बिजली के सबसे बड़े संवाहक (कंडक्टर) होते हैं।सुरक्षित पक्के भवनों में जाएं: यदि आप खुले में हैं, तो तुरंत किसी पक्के मकान या पक्की छत के नीचे चले जाएं। टीन शेड या कच्चे झोपड़े बिजली से पूर्ण सुरक्षा नहीं देते।उकड़ूं बैठने की मुद्रा (क्रॉच पोजीशन): यदि खुले खेत या मैदान में फंस जाएं और आसपास कोई आश्रय न हो, तो दोनों पैरों को सटाकर, घुटनों पर हाथ रखकर सिर नीचे झुकाते हुए उकड़ूं बैठ जाएं। जमीन पर कभी भी सीधे न लेटें।बिजली के खंभों और धातुओं से दूरी: लोहे की बाड़, ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभे और पानी भरे गड्ढों से तुरंत दूर हो जाएं।मोबाइल ऐप्स की मदद लें: बिहार सरकार के विशेष 'इंद्रवज्र ऐप' (Indravajra App) और केंद्रीय 'दामिनी ऐप' (Damini App) को अपने फोन में चालू रखें। यह ऐप आपके इलाके में आकाशीय बिजली गिरने से 30 से 40 मिनट पहले सायरन और नोटिफिकेशन के जरिए चेतावनी देता है, जिससे समय रहते जान बचाई जा सकती है।चंपारण, गोपालगंज और मिथिलांचल के नागरिकों को अगले 24 घंटे मौसम की पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखने और जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की हिदायत दी गई है।
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की आठवीं पुण्यतिथि पर देश का नमन
आठवीं पुण्यतिथि पर पूर्व पीएम और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को देश नमन कर रहा है. दिल्ली में अटलजी के समाधि स्थल सदैव अटल पर पहुंच कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी ने श्रद्धांजलि दी. इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत दूसरे बड़े नेता भी अटल जी के समाधि स्थल पर पहुंच कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
रेलवे में 3993 पदों पर शुरू हुई भर्ती, लेकिन पहले करना होगा ये कोर्स
RRB JE भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. इसके तहतजूनियर इंजीनियर और डिपो मैटेरियल सुपरिंटेंडेंट के पद पर भर्ती की जाएगी. यह पद सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, कंप्यूटर और अन्य संबंधित इंजीनियरिंग स्ट्रीम से जुड़े हैं.
यूपी में मानसून की तूफानी वापसी: अगले 96 घंटे भारी बारिश और वज्रपात का संकट
उत्तर प्रदेश में उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए मौसम विभाग ने राहत के साथ-साथ एक गंभीर चेतावनी जारी की है। राज्य में सुस्त पड़ा मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंचलिक मौसम केंद्र, लखनऊ ने अगले चार दिनों (96 घंटों) के दौरान राज्य के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का गंभीर अलर्ट जारी किया है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वातावरण में सक्रिय चक्रवातीय परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने के कारण पूरे प्रदेश में घने मानसूनी बादलों का जमावड़ा शुरू हो चुका है। विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संवेदनशील 12 जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी कर स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है, जबकि 19 अन्य जिलों में 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) प्रभावी किया गया है। 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंके वाली हवाएं चलने और निचले इलाकों में जलभराव की भी प्रबल संभावना है।12 जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट': बादलों के फटने जैसी मूसलाधार बारिश की आशंकामौसम विभाग ने जिन 12 जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है, वहां 24 घंटे के भीतर 115 मिमी से लेकर 200 मिमी तक अत्यधिक भारी वर्षा होने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ तीव्र वज्रपात (बादल गरजने और बिजली गिरने) का सबसे अधिक खतरा बना हुआ है।ऑरेंज अलर्ट की जद में आने वाले प्रमुख जिले:तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश: लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया और गोरखपुर।पूर्वांचल व मध्य क्षेत्र: बस्ती, संत कबीर नगर और गोंडा।इन जिलों में नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने, ग्रामीण सड़कों के कटने और शहरी इलाकों में जलजमाव की पूरी आशंका है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्रों के प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश का अतिरिक्त पानी मैदानी नदियों जैसे घाघरा, राप्ती, रोहिणी और शारदा में उफान ला सकता है।19 जिलों में 'येलो अलर्ट': गरज-चमक के साथ तेज बौछारों का दौरऑरेंज अलर्ट वाले जिलों के अलावा, मौसम केंद्र ने राज्य के 19 अन्य जनपदों में मध्यम से भारी बारिश का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। इन जिलों में रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।येलो अलर्ट से प्रभावित प्रमुख जिले:अवध और मध्य यूपी: राजधानी लखनऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर और हरदोई।पूर्वी और दक्षिणी यूपी: अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ और बलिया।इन जिलों के नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें और मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर ही शरण लें। खुले आसमान के नीचे या कमजोर ढांचों के पास रुकना जोखिम भरा हो सकता है।मौसम प्रणाली का विज्ञान: आखिर क्यों अचानक सक्रिय हुआ मानसून?मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान मौसमी हलचल के पीछे दो बड़ी वायुमंडलीय प्रणालियों का एक साथ सक्रिय होना है। पहला, बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ा है, जिससे पूर्वी और मध्य भारत में भारी मात्रा में नमी वाली मानसूनी हवाएं दाखिल हो रही हैं।दूसरा, मानसून ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) अपनी सामान्य स्थिति से ऊपर उठकर वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मध्य से होकर गुजर रही है। इसके साथ ही, दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवातीय दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। जब बंगाल की खाड़ी से आ रही आर्द्र पूर्वी हवाएं और अरब सागर की पश्चिमी हवाएं मध्य व पूर्वी उत्तर प्रदेश के आसमान में टकरा रही हैं, तो इससे घने गरज-चमक वाले क्यूमुलोनिम्बस (Cumulonimbus) बादल बन रहे हैं, जो अचानक तेज बारिश और बिजली गिरने का कारण बनते हैं।कृषि और शहरी जीवन पर असर: किसानों के लिए संजीवनी, शहरों के लिए जलभराव की आफतइस मूसलाधार बारिश के दो अलग-अलग पहलू सामने आ रहे हैं। ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्रों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं है। विशेष रूप से धान (चावल), गन्ना, मक्का और खरीफ की दलहनी फसलों के लिए खेतों में पानी की सख्त जरूरत थी। लंबे समय से बारिश के इंतजार में सूख रहे धान के पौधों को इस बारिश से नया जीवन मिलेगा, जिससे किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर है। हालांकि, तेज हवाओं के कारण गन्ने और केले की फसलों को कुछ नुकसान की चिंता भी बनी हुई है।वहीं दूसरी ओर, शहरी इलाकों में यह बारिश आफत बन सकती है। लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे घनी आबादी वाले शहरों में ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली के कारण सड़कों पर 2 से 3 फीट पानी भरने, ट्रैफिक जाम और अंडरपासों में गाड़ियां डूबने की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा, बिजली के खंभे गिरने और ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट की वजह से कई मोहल्लों में बिजली आपूर्ति बाधित होने का जोखिम भी बढ़ गया है।राहत एवं आपदा प्रबंधन तंत्र मुस्तैद: SDRF और हेल्पलाइन सक्रियआगामी 4 दिनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों (DM), पुलिस अधीक्षकों (SP) और नगर निगम आयुक्तों को 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को संवेदनशील जिलों में अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और तराई क्षेत्रों में नावों व राहत सामग्रियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। जिला प्रशासन ने 24 घंटे काम करने वाले इमरजेंसी कंट्रोल रूम नंबर जारी किए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना या जलभराव की स्थिति में तुरंत राहत दल मौके पर पहुंच सके।आकाशीय बिजली (वज्रपात) से बचाव के लिए लाइफ-सेविंग सेफ्टी टिप्सउत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली जनहानि एक गंभीर चिंता का विषय है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम नागरिकों और किसानों के लिए निम्नलिखित सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं:पेड़ों के नीचे कभी शरण न लें: जब भी आसमान में बिजली कड़के या तेज गड़गड़ाहट सुनाई दे, तो किसी भी बड़े या अकेले खड़े पेड़ के नीचे कभी न खड़े हों। पेड़ प्राकृतिक रूप से बिजली के सबसे बड़े संवाहक होते हैं।खुले खेतों में काम कर रहे किसान तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएं: खेत में काम कर रहे किसान मौसम खराब होते ही तुरंत पक्के मकान या शेड के नीचे जाएं। यदि कोई आश्रय न मिले, तो दोनों पैरों को आपस में सटाकर, घुटनों पर सिर रखकर उकड़ूं (क्रॉचिंग पोजीशन) बैठ जाएं। जमीन पर कभी सीधा न लेटें।इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल बंद करें: घर के भीतर रहने पर टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर आदि के प्लग दीवार के सॉकेट से निकाल दें। वायर्ड फोन का इस्तेमाल न करें और खिड़कियों व दरवाजों से दूर रहें।धातु की चीजों और जलस्रोतों से दूरी: लोहे के खंभों, तारों की बाड़, हैंडपंप और तालाबों या पोखरों से तुरंत दूर हट जाएं क्योंकि पानी और धातु बिजली को तेजी से आकर्षित करते हैं।'दामिनी ऐप' (Damini App) का उपयोग करें: भारत सरकार द्वारा विकसित 'दामिनी ऐप' अपने मोबाइल में डाउनलोड करें। यह ऐप आकाशीय बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले सटीक लोकेशन के साथ अलर्ट जारी करता है, जिससे जान बचाना संभव होता है।अगले चार दिनों तक प्रदेशवासियों को मौसम के हर अपडेट पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन द्वारा दी जा रही सावधानियों का पूरी तरह पालन करने की अपील की गई है।
2 साल तक बाहर बैठा रहा... गॉल के शतकवीर पडिक्कल का छलका दर्द
गॉल से देवदत्त पडिक्कल की अच्छी यादें पहले से जुड़ी रही हैं. उन्होंने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक भी इसी मैदान पर जड़ा. करीब दो साल तक मौके का इंतजार करने वाले पडिक्कल के लिए गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम अब सबसे खास वेन्यू में शामिल हो गया है.
राष्ट्रीय स्तर पर तेल विपणन कंपनियों (OMCs) जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने आज सुबह 6:00 बजे पेट्रोल और डीजल की नई दरें जारी कर दी हैं। उत्तर प्रदेश के अधिकांश प्रमुख शहरों में आज तेल की कीमतों में स्थिरता देखने को मिली है, जबकि कुछ जिलों में स्थानीय स्तर पर परिवहन लागत (फ्रेट चार्ज) और टैक्स एडजस्टमेंट के कारण मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर औद्योगिक केंद्र कानपुर और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे नोएडा-गाजियाबाद तक दैनिक वाहन चालकों, ट्रांसपोर्टरों और आम जनता के लिए अपनी दैनिक यात्रा शुरू करने से पहले तेल के ताजा भाव जानना बेहद अहम हो जाता है। यदि आप आज अपनी कार या बाइक की टंकी फुल कराने जा रहे हैं, तो अपने जिले का सटीक रेट कार्ड जरूर देख लें।प्रमुख शहरों में 1 लीटर तेल का भाव: नोएडा, लखनऊ से लेकर वाराणसी तक का रेट कार्डउत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले वैट (VAT) और डिपो से दूरी के अनुसार कीमतों में कुछ पैसों का अंतर पाया जाता है। प्रदेश के बड़े शहरों में आज की खुदरा कीमतें इस प्रकार दर्ज की गई हैं:लखनऊ (Lucknow): राजधानी लखनऊ में आज पेट्रोल का भाव लगभग ₹94.65 से ₹94.75 प्रति लीटर और डीजल का भाव ₹87.75 से ₹87.85 प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है।नोएडा / ग्रेटर नोएडा (Noida/Greater Noida): एनसीआर के अंतर्गत आने वाले गौतमबुद्ध नगर जिले में पेट्रोल ₹94.66 प्रति लीटर और डीजल ₹87.76 प्रति लीटर पर उपलब्ध है।गाजियाबाद (Ghaziabad): गाजियाबाद में आज पेट्रोल की कीमत ₹94.58 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹87.67 प्रति लीटर दर्ज की गई है।कानपुर (Kanpur): कानपुर नगर में 1 लीटर पेट्रोल ₹94.50 से ₹94.60 और डीजल ₹87.60 से ₹87.70 के बीच बिक रहा है।वाराणसी (Varanasi): धर्मनगरी वाराणसी में डिपो परिवहन के चलते पेट्रोल ₹95.10 प्रति लीटर और डीजल ₹88.25 प्रति लीटर के स्तर पर है।आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा में पेट्रोल का दाम ₹94.45 प्रति लीटर और डीजल का दाम ₹87.55 प्रति लीटर है।प्रयागराज (Prayagraj): संगम नगरी प्रयागराज में पेट्रोल ₹95.20 प्रति लीटर और डीजल ₹88.35 प्रति लीटर पर स्थिर है।गोरखपुर (Gorakhpur): पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर गोरखपुर में पेट्रोल ₹94.85 प्रति लीटर और डीजल ₹87.95 प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है।मेरठ (Meerut): मेरठ में पेट्रोल की कीमत ₹94.55 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹87.65 प्रति लीटर दर्ज की गई है।बरेली (Bareilly): बरेली में आज पेट्रोल ₹94.70 प्रति लीटर और डीजल ₹87.80 प्रति लीटर बिक रहा है।यूपी के अलग-अलग जिलों में कीमतों में अंतर क्यों? वैट और माल ढुलाई का गणितअक्सर उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि एक ही राज्य और एक ही तेल कंपनी होने के बावजूद नोएडा और वाराणसी या लखनऊ और प्रयागराज के तेल के दामों में अंतर क्यों होता है। इसके पीछे दो मुख्य कारक काम करते हैं—पहला स्थानीय स्तर पर नगर निगम या क्षेत्रीय उपकर और दूसरा तेल रिफाइनरी या डिपो से पेट्रोल पंप तक की माल ढुलाई लागत (Freight Charges)।जो शहर तेल पाइपलाइन या प्रमुख डिपो के नजदीक स्थित होते हैं, वहां ट्रांसपोर्टेशन खर्च कम आता है, जिससे वहां प्रति लीटर दरें कुछ पैसे सस्ती होती हैं। वहीं सुदूर या पहाड़ी सीमा से लगे जिलों में तेल टैंकरों के जरिए पहुंचाने की लागत अधिक होती है, जिसके कारण खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) थोड़ा बढ़ जाता है। हालांकि, पूरे उत्तर प्रदेश में राज्य स्तर पर वैट की मूल दर समान लागू होती है।पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत कैसे तय होती है? बेस प्राइस से लेकर टैक्स का ब्रेकअपजब आप पेट्रोल पंप पर 1 लीटर पेट्रोल या डीजल के लिए भुगतान करते हैं, तो उस कुल राशि में कई तरह के घटक जुड़े होते हैं:कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय लागत (Base Price): अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की प्रति बैरल कीमत और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर के आधार पर रिफाइनरी का बेस प्राइस तय होता है।केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty): केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक लीटर ईंधन पर एक निश्चित उत्पाद शुल्क लगाया जाता है।डीलर कमीशन (Dealer Commission): पेट्रोल पंप मालिकों को उनके संचालन, स्टाफ और लाभ के लिए प्रति लीटर तय कमीशन दिया जाता है।राज्य मूल्य वर्धित कर (State VAT): उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स, जो पेट्रोल और डीजल के अंतिम खुदरा मूल्य को तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है।इन सभी करों और शुल्कों के जुड़ने के बाद जो अंतिम मूल्य बनता है, उसे 'रिटेल सेलिंग प्राइस' (RSP) कहा जाता है, जिसका भुगतान उपभोक्ता पेट्रोल पंप पर करता है।घर बैठे सिर्फ 1 SMS से कैसे जानें अपने शहर का ताजा भाव?यदि आप पेट्रोल पंप जाने से पहले अपने शहर की सटीक कीमत जानना चाहते हैं, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा दी गई एसएमएस (SMS) सेवा का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए इंटरनेट की भी आवश्यकता नहीं होती:Indian Oil (IOCL) उपभोक्ता: अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में लिखें RSP पेट्रोल पंप का डीलर कोड और इसे 9224992249 पर भेज दें।Bharat Petroleum (BPCL) उपभोक्ता: मैसेज में लिखें RSP डीलर कोड और इसे 9223112222 पर भेजें।Hindustan Petroleum (HPCL) उपभोक्ता: मैसेज में लिखें HPPRICE डीलर कोड और इसे 9222201122 पर भेज दें।एसएमएस भेजते ही कुछ ही सेकंडों में आपके फोन पर आपके नजदीकी पंप की ताजा पेट्रोल और डीजल की दरों का विवरण आ जाएगा। इसके अलावा संबंधित कंपनियों की आधिकारिक मोबाइल ऐप्स (जैसे IndianOil ONE, Fuel@IOC) पर भी रियल-टाइम लोकेशन के आधार पर ताजा दरें जांची जा सकती हैं।वैश्विक ऊर्जा बाजार और आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों का रुझानअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली हलचल भारत के घरेलू ईंधन बाजार को सीधे प्रभावित करती है। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव, ओपेक प्लस (OPEC+) देशों की उत्पादन नीतियां और वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव क्रूड ऑयल की चाल तय करते हैं। वर्तमान में तेल कंपनियों ने देश में दैनिक मूल्य संशोधन प्रणाली (Dynamic Fuel Pricing) के तहत कीमतों को नियंत्रित दायरे में रखा है, जिससे उपभोक्ताओं को अचानक होने वाले बड़े झटकों से राहत मिली हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल स्थिर रहता है, तो आगामी दिनों में भी उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें इसी तरह संतुलित बनी रहेंगी।
मानसून आते ही क्यों बिगड़ने लगती है पेट की सेहत? अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की कतार
गर्मी की तपिश और चिलचिलाती धूप से राहत दिलाने वाली मानसूनी फुहारें अपने साथ सुहावना मौसम तो लाती हैं, लेकिन साथ ही कई संक्रामक बीमारियों का सैलाब भी ले आती हैं। बारिश का मौसम शुरू होते ही अस्पतालों और क्लीनिकों की ओपीडी में पेट दर्द, उल्टी, दस्त, अपच और फूड पॉइजनिंग के मरीजों की तादाद अचानक दोगुनी-तिगुनी हो जाती है। चिकित्सा जगत में इस स्थिति को एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस या स्टमक फ्लू कहा जाता है।जरा सी असावधानी और खान-पान में लापरवाही इस मौसम में सीधे आंतों पर हमला बोलती है। अक्सर लोग उल्टी-दस्त को सामान्य मौसमी समस्या मानकर घरेलू नुस्खों के भरोसे टालते रहते हैं, लेकिन यह लापरवाही कई बार गंभीर डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की वजह बनकर जानलेवा साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के महीनों में पेट का संक्रमण फैलने की रफ्तार साल के अन्य महीनों के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज होती है।दूषित पानी और नमी का कॉकटेल: बैक्टीरिया और वायरस के लिए 'स्वर्ग' बनता है मौसममानसून के दौरान उल्टी और दस्त के मामले अचानक बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण वातावरण की उच्च आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) और जलस्रोतों का दूषित होना है। भारी बारिश और जलभराव के चलते सीवरेज का गंदा पानी अक्सर भूमिगत पेयजल पाइपलाइनों, हैंडपंपों और कुओं के पानी में रिसकर मिल जाता है। यह दूषित पानी देखने में भले ही साफ लगे, लेकिन इसमें ई-कोलाई (E. coli), साल्मोनेला (Salmonella), शिगेला (Shigella) और विब्रियो कोलेरी जैसे खतरनाक बैक्टीरिया के साथ-साथ नोरोवायरस और रोटावायरस छिपे होते हैं।इसके अलावा, वातावरण में अत्यधिक नमी होने के कारण कीटाणुओं की प्रजनन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। पके हुए भोजन और खुले खाद्य पदार्थों पर बैक्टीरिया सामान्य दिनों की तुलना में बहुत तेजी से पनपते हैं। मक्खियां और मच्छर, जो गंदे नालों और कचरे के ढेरों पर बैठते हैं, खाने-पीने की चीजों पर बैठकर इन सूक्ष्म जीवाणुओं को सीधे हमारी थाली तक पहुंचा देते हैं, जिससे व्यक्ति फूड पॉइजनिंग और डायरिया का शिकार हो जाता है।कमजोर पाचन अग्नि और आंतों का धीमा मेटाबॉलिज्मआधुनिक चिकित्सा और प्राचीन आयुर्वेद दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि मानसून के दौरान मानव शरीर का मेटाबॉलिज्म स्वाभाविक रूप से धीमा पड़ जाता है। आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, वर्षा ऋतु में शरीर की 'जठराग्नि' (पाचन शक्ति) मंद हो जाती है, जिससे भारी, तला-भुना और चिकनाई युक्त भोजन पचाना आंतों के लिए बेहद कठिन हो जाता है।वातावरण में ठंडक और नमी के उतार-चढ़ाव के कारण हमारी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (गट माइक्रोबायोम) का संतुलन भी प्रभावित होता है। जब पाचन तंत्र पहले से ही कमजोर हो और उस पर दूषित पानी या संक्रमित भोजन का हमला हो जाए, तो पेट उसे स्वीकार नहीं कर पाता। शरीर अपनी सुरक्षा प्रणाली के तहत उस विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन) को उल्टी और पतले दस्त के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे मरीज तेजी से निढाल होने लगता है।इन 5 गंभीर लक्षणों को कभी न समझें मामूली: कब बजती है खतरे की घंटी?मानसून में पेट की गड़बड़ी को शुरुआत में ही पहचानना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षण नजर आएं, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए:लगातार पतले दस्त और बार-बार उल्टी: दिन में 4 से 5 बार से अधिक पानी जैसे पतले दस्त होना और कुछ भी खाते-पीते ही तुरंत उल्टी आ जाना।गंभीर डिहाइड्रेशन के संकेत: मुंह और जीभ का पूरी तरह सूखना, पेशाब का रंग गहरा पीला होना या पेशाब की मात्रा बेहद कम हो जाना, चक्कर आना और आंखों का अंदर धंस जाना।पेट में असहनीय मरोड़ और ऐंठन: पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, भारी गैस बनना और मरोड़ के साथ शौच की इच्छा होना।तेज बुखार और कंपकंपी: उल्टी-दस्त के साथ शरीर का तापमान 101 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर जाना इस बात का संकेत है कि शरीर में गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन फैल चुका है।मल में खून या म्यूकस आना: दस्त के साथ चिपचिपा बलगम या खून आना पेचिश (डिसेंट्री) का लक्षण है, जिसे तत्काल एंटीबायोटिक और मेडिकल देखरेख की आवश्यकता होती है।स्ट्रीट फूड और कटे फल: मानसून की 4 सबसे आम गलतियां जो बनाती हैं बीमारबरसात के मौसम में ज्यादातर लोग अपनी स्वाद ग्रंथियों पर काबू नहीं रख पाते और यही भूल उन्हें अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा देती है:ठेले और सड़क किनारे के गोलगप्पे व चाट: मानसून में सड़क किनारे बिकने वाले पानी-पूरी का तीखा पानी अक्सर बिना उबले या दूषित पानी से बनाया जाता है। इसके अलावा खुले में रखी बर्फ कई स्रोतों के गंदे पानी से तैयार की जाती है।कटे हुए फल और कच्चा सलाद: बाजार में खुले में काटकर रखे गए तरबूज, पपीता, खीरा और सलाद नमी के संपर्क में आकर बैक्टीरिया के सबसे बड़े वाहक बन जाते हैं।हरी पत्तेदार सब्जियों की अधूरी सफाई: पालक, पत्तागोभी और मेथी जैसी पत्तेदार सब्जियों में बारिश के कीड़े और उनके अंडे छिपे रहते हैं। यदि इन्हें गर्म पानी और नमक से अच्छी तरह धोकर न पकाया जाए, तो ये पेट में गंभीर इंफेक्शन पैदा करते हैं।बासी और दोबारा गर्म किया गया भोजन: फ्रिज में रखे खाने को बार-बार बाहर निकालकर गर्म करने और फिर फ्रिज में रखने से उसमें बैक्टीरिया टॉक्सिन छोड़ देते हैं, जो गर्म करने के बाद भी नष्ट नहीं होते।उल्टी-दस्त शुरू होने पर क्या करें? फर्स्ट-एड और जरूरी घरेलू उपाययदि अचानक पेट खराब हो जाए और उल्टी-दस्त शुरू हो जाएं, तो सबसे पहला और मुख्य लक्ष्य शरीर में पानी और नमक के स्तर को बनाए रखना होना चाहिए:ओआरएस (ORS) का नियमित सेवन: ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट्स का घोल जीवनरक्षक की तरह काम करता है। एक लीटर उबले और ठंडे पानी में डब्ल्यूएचओ प्रमाणित ओआरएस का पूरा पैकेट घोलें और हर दस्त या उल्टी के बाद घूंट-घूंट करके पिएं। यदि ओआरएस उपलब्ध न हो, तो 1 लीटर पानी में 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाकर तुरंत घर पर घोल तैयार करें।प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट पेय: नारियल पानी, पतली छाछ (हल्का भुना जीरा और काला नमक मिलाकर), नींबू पानी और चावल का मांड शरीर को तुरंत ऊर्जा और आवश्यक खनिज प्रदान करते हैं।हल्का और सुपाच्य आहार (BRAT डाइट): तला-भुना पूरी तरह बंद कर दें। केवल मूंग दाल की पतली खिचड़ी, उबला आलू, केला, सादा टोस्ट और ताजा दही का सेवन करें। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के खराब बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं।बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें: कई लोग दस्त रुकने वाली गोलियां (जैसे लोपेरामाइड) तुरंत खा लेते हैं। यह खतरनाक हो सकता है क्योंकि दस्त को जबरन रोकने से बैक्टीरिया आंतों के भीतर ही फंस जाते हैं और संक्रमण रक्त में फैल सकता है।मानसून में पेट को फौलादी बनाए रखने के 5 सुरक्षा नियमबारिश के पूरे मौसम में खुद को और अपने परिवार को पेट की बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए दैनिक जीवन में इन सरल नियमों का पालन करें:पानी हमेशा उबालकर पिएं: सामान्य वॉटर प्यूरीफायर (RO) भी कभी-कभी सूक्ष्म वायरस को नहीं रोक पाते। इसलिए पीने के पानी को कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह उबालें और ठंडा करके ढककर रखें।हाथों की स्वच्छता (हैंड हाइजीन): खाना बनाने, परोसने और खाने से पहले हाथों को साबुन से 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं। बाहर से आने के बाद और टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद हाथ धोना कभी न भूलें।ताजा और गर्म खाना ही खाएं: हमेशा ताजा पका हुआ गर्म भोजन करें। भोजन पकाने के 2 घंटे के भीतर उसका उपभोग कर लें।किचन और बर्तनों की सूखी सफाई: बर्तनों को धोने के बाद उन्हें गीला न छोड़ें, क्योंकि नमी में कीटाणु तेजी से बढ़ते हैं। चॉपिंग बोर्ड और रसोई के कपड़ों को रोजाना गर्म पानी से साफ करें।बाहर के खाने और सी-फूड से परहेज: मानसून के दौरान स्ट्रीट फूड, कच्चे अंडे और समुद्री भोजन (सी-फूड) से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें क्योंकि इस मौसम में इनके दूषित होने की आशंका सबसे अधिक होती है।डॉक्टर के पास जाने में न करें देरी: समय पर इलाज ही बचाव हैउल्टी-दस्त को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, विशेषकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के मामले में। बच्चों में शरीर का वजन कम होने के कारण कुछ ही घंटों के भीतर डिहाइड्रेशन खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। यदि मरीज कुछ भी निगलने में असमर्थ हो, लगातार उल्टी कर रहा हो, सुस्त या बेहोश होने लगे, तो बिना एक पल गंवाए उसे नजदीकी अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाएं, जहां इंट्रावेनस (IV) ड्रिप के माध्यम से शरीर में तरल पदार्थों की तुरंत भरपाई की जा सके। थोड़ी सी सजगता, खान-पान में सादगी और स्वच्छ जीवनशैली अपनाकर आप मानसून के पूरे मौसम का आनंद बिना किसी बीमारी के ले सकते हैं।
दुनिया भर में खूबसूरत समुद्री तटों की कमी नहीं है, जहां सुनहरी रेत, लहराते नारियल के पेड़ और नीला पानी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन यूरोपीय देश ग्रीस (यूनान) के एजियन सागर में एक ऐसा तटीय इलाका मौजूद है, जो पारंपरिक समुद्री बीचों की पूरी परिभाषा ही बदल देता है। इस जगह पर कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो आप पृथ्वी को छोड़कर सीधे चांद या किसी अज्ञात अंतरिक्ष ग्रह की सतह पर पहुंच गए हों। हम बात कर रहे हैं ग्रीस के साइक्लेड्स द्वीप समूह में स्थित मिलोस द्वीप (Milos Island) के विश्वप्रसिद्ध 'सराकिनिको बीच' (Sarakiniko Beach) की।सराकिनिको बीच अपनी हड्डियों जैसी दूधिया सफेद चट्टानों, अजीबोगरीब घुमावदार संरचनाओं और कांच जैसे पारदर्शी गहरे नीले पानी के जादुई संगम के लिए दुनिया भर में अद्वितीय माना जाता है। यहां न तो दूर-दूर तक कोई पेड़-पौधा नजर आता है और न ही सामान्य समुद्री तटों की तरह रेत की चादर मिलती है। इसके बजाय, मीलों तक फैली चिकनी, ढलवां और सफेद रंग की चट्टानें फैली हुई हैं, जो तेज धूप में चांदी की तरह चमकती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन जगत में इसे 'मून बीच' (Lunar Beach) या 'एलियन लैंडस्केप' के नाम से भी जाना जाता है।प्रकृति की अनूठी वास्तुकला: कैसे बनीं ये दूधिया सफेद ज्वालामुखीय चट्टानें?सराकिनिको बीच के इस अकल्पनीय और अवास्तविक दिखने वाले भूगोल के पीछे लाखों वर्षों की भूगर्भीय हलचलें जिम्मेदार हैं। मिलोस द्वीप ऐतिहासिक रूप से एक अत्यधिक सक्रिय ज्वालामुखीय द्वीप रहा है। वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, लाखों साल पहले समुद्र के भीतर हुए भीषण ज्वालामुखीय विस्फोटों के दौरान भारी मात्रा में लावा, राख और प्यूमिस (झांवा पत्थर) बाहर निकले थे।समय बीतने के साथ, ज्वालामुखीय राख और चूना पत्थर की परतें अत्यधिक दबाव में जमकर कठोर तलछटी चट्टानों (टफ और प्यूमिस स्टोन) में तब्दील हो गईं। इसके बाद प्रकृति ने अपनी नक्काशी का काम शुरू किया। एजियन सागर की ताकतवर समुद्री लहरों और उत्तर दिशा से चलने वाली तेज 'मेल्टेमी' हवाओं ने लाखों वर्षों तक इन चट्टानों का क्षरण (इरोशन) किया। हवा और पानी के निरंतर घर्षण ने इन सफेद पत्थरों को बेहद चिकना, लहरदार और गुफानुमा संरचनाओं में ढाल दिया। आज ये चट्टानें प्राकृतिक पुलों, मेहराबों, सुरंगों और विशाल गड्ढों के रूप में दिखाई देती हैं, जो हूबहू चंद्रमा के क्रेटर्स जैसी नजर आती हैं।समुद्री डाकुओं का खूंखार अड्डा: 'सराकिनिको' नाम के पीछे का रहस्यमयी इतिहाससराकिनिको बीच केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने दिलचस्प और रहस्यमयी इतिहास के लिए भी जाना जाता है। इस बीच का नाम 'सराकिनिको' मध्यकाल के खूंखार 'सरासेन समुद्री डाकुओं' (Saracen Pirates) के नाम पर पड़ा है।मध्ययुगीन काल में जब एजियन सागर अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मुख्य समुद्री मार्ग हुआ करता था, तब अरब और उत्तरी अफ्रीकी मूल के सरासेन समुद्री लुटेरे व्यापारी जहाजों को लूटने के लिए इस क्षेत्र में सक्रिय रहते थे। सराकिनिको की सफेद चट्टानों के बीच बनी गहरी प्राकृतिक गुफाएं और संकरे समुद्री इनलेट्स (जलमार्ग) इन डाकुओं के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना हुआ करते थे। डाकू अपने जहाजों को इन सफेद चट्टानों की आड़ में छिपाकर रखते थे ताकि खुले समुद्र से गुजरने वाले जहाजों को उनकी भनक न लगे। आज भी पर्यटक जब इस बीच पर जाते हैं, तो उन्हें चट्टानों में कटे हुए प्राचीन मूरिंग पॉइंट्स और वे गुफाएं देखने को मिलती हैं, जिनका उपयोग सदियों पहले लुटेरे अपने ठहरने और खजाना छिपाने के लिए करते थे।क्रिस्टल क्लियर फिरोजी पानी और एडवेंचर का रोमांच: क्लिफ जंपिंग से स्नोर्केलिंग तकसराकिनिको बीच केवल देखने में ही अद्भुत नहीं है, बल्कि यह साहसिक गतिविधियों और जलीय खेलों के शौकीनों के लिए भी एक बेहतरीन स्वर्ग है। यहां का पानी इतना साफ और पारदर्शी है कि सतह से कई मीटर गहराई तक तैरती मछलियां और चट्टानी तलहटी साफ दिखाई देती है। सफेद चट्टानों की पृष्ठभूमि के कारण पानी का रंग पन्ना हरा (एमराल्ड ग्रीन), फिरोजी (टरक्वॉयज) और गहरा कोबाल्ट नीला दिखाई देता है।रोमांचक क्लिफ जंपिंग: सराकिनिको के ऊंचे-नीचे सफेद टीले क्लिफ जंपर्स के लिए पसंदीदा जगह हैं। 3 मीटर से लेकर 10 मीटर तक की ऊंचाई वाली सुरक्षित सफेद चट्टानों से सीधे गहरे नीले समंदर में छलांग लगाना एक बेहद लोकप्रिय रोमांच है।स्नोर्केलिंग और स्कूबा डाइविंग: पानी के भीतर मौजूद प्राकृतिक समुद्री मेहराबें, जलमग्न गुफाएं और समृद्ध समुद्री जीवन स्नोर्केलिंग के लिए आदर्श माहौल तैयार करते हैं। चट्टानों के नीचे तैरते हुए पानी के भीतर के अद्भुत नजारों को देखना किसी सपने जैसा लगता है।शिपव्रेक का रहस्य: सराकिनिको की चट्टानों से कुछ ही दूरी पर 2003 में डूबे एक मालवाहक जहाज 'एमवी अफ्रीका' का मलबा आज भी उथले पानी में मौजूद है। यह शिपव्रेक दुनिया भर के गोताखोरों और ड्रोन फोटोग्राफरों के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र है।प्राकृतिक कैन्यन वॉक: चट्टानों के बीच से बहकर आने वाले पानी ने एक संकरा प्राकृतिक कैन्यन (खड्ड) बना दिया है, जो एक छोटे से सुरक्षित प्राकृतिक स्विमिंग पूल की तरह काम करता है, जहां लहरों का डर नहीं होता।फोटोग्राफी का स्वर्ग: पूर्णिमा की रात में जाग उठता है असली जादूसोशल मीडिया और आधुनिक फोटोग्राफी के दौर में सराकिनिको बीच दुनिया के सबसे ज्यादा इंस्टाग्राम किए जाने वाले पर्यटन स्थलों में शुमार हो चुका है। दिन के अलग-अलग समय पर सूरज की रोशनी इन सफेद चट्टानों पर अलग-अलग रंग बिखेरती है।सुबह के समय जब पहली किरणें इन पत्थरों पर पड़ती हैं, तो पूरा इलाका हल्के गुलाबी और सुनहरे रंग में नहा जाता है। दोपहर में भूमध्यसागरीय धूप के सीधे पड़ने से चट्टानें इतनी तीव्र सफेद चमक पैदा करती हैं कि बिना धूप के चश्मे (सनग्लासेस) के देखना भी मुश्किल हो जाता है। सूर्यास्त के समय एजियन सागर का क्षितिज नारंगी, बैंगनी और सिंदूरी रंगों में बदल जाता है, जिसका प्रतिबिंब सफेद पत्थरों पर एक जादुई छटा बिखेरता है।सराकिनिको का सबसे अलौकिक दृश्य पूर्णिमा (फुल मून) की रातों में देखने को मिलता है। जब आसमान में पूरा चांद चमकता है, तो उसकी चांदी जैसी रोशनी इन सफेद ज्वालामुखीय चट्टानों से टकराकर वापस परावर्तित होती है। रात के अंधेरे में चट्टानें नीले-सफेद रंग में चमकती हैं और पानी शांत होकर समंदर में चांद का अक्स दिखाता है। उस समय यहां टहलने वाले हर इंसान को ऐसा महसूस होता है मानो वह वाकई में पृथ्वी से करोड़ों किलोमीटर दूर चंद्रमा की धरती पर कदम रख चुका हो।सराकिनिको और मिलोस द्वीप कैसे पहुंचें? पर्यटकों के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्सयदि आप भी दुनिया के इस सबसे अनोखे बीच की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इसके लिए यात्रा मार्ग और स्थानीय व्यवस्थाओं को समझना बेहद आवश्यक है:ग्रीस कैसे पहुंचें और मिलोस का सफर: भारत या दुनिया के किसी भी हिस्से से सबसे पहले ग्रीस की राजधानी एथेंस (Athens) पहुंचना होता है। एथेंस के पिराउस (Piraeus) बंदरगाह से मिलोस द्वीप के लिए रोजाना हाई-स्पीड फेरी और सामान्य नौकाएं चलती हैं, जो 3 से 5 घंटे में मिलोस के मुख्य बंदरगाह 'अदामास' (Adamas) पहुंचा देती हैं। इसके अलावा एथेंस एयरपोर्ट से मिलोस के लिए छोटी घरेलू उड़ानें भी उपलब्ध हैं।लोकल ट्रांसपोर्ट: अदामास बंदरगाह या मुख्य शहर प्लाका (Plaka) से सराकिनिको बीच की दूरी केवल 4 से 5 किलोमीटर है। पर्यटक यहां तक पहुंचने के लिए एटीवी (क्वाड बाइक), स्कूटर, रेंटल कार या स्थानीय बसों का उपयोग करते हैं।यात्रा का सबसे अच्छा समय: सराकिनिको घूमने के लिए मई से अक्टूबर का समय सबसे मुफीद माना जाता है। जून और सितंबर के महीने सबसे बेहतरीन होते हैं क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और जुलाई-अगस्त की भीषण भीड़ से भी बचा जा सकता है।जरूरी सावधानियां: सराकिनिको एक पूरी तरह से कच्चा और प्राकृतिक समुद्र तट है। यहां कोई रेस्टोरेंट, लाउंज बार या छतरियां नहीं हैं। इसलिए यहां जाते समय पर्याप्त पीने का पानी, सनस्क्रीन, टोपी, धूप का चश्मा और चट्टानों पर चलने के लिए मजबूत ग्रिप वाले जूते जरूर साथ रखें। साथ ही, इस संवेदनशील प्राकृतिक धरोहर को साफ-सुथरा रखना और पत्थरों को नुकसान न पहुंचाना हर पर्यटक की नैतिक जिम्मेदारी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव: अमेरिका में गैसोलीन 29% महंगी, आम जनता पर पड़ा सीधा असर
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य और कूटनीतिक टकराव का सीधा असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों की आवाजाही ठप होने के चलते अमेरिकी ईंधन बाजार में बड़ा भूचाल आ गया है।अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की औसत खुदरा कीमत बढ़कर 4.08 डॉलर प्रति गैलन पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि (3.16 डॉलर प्रति गैलन) की तुलना में सीधे तौर पर 29 प्रतिशत अधिक है। कई अमेरिकी राज्यों में कीमतें 5 डॉलर प्रति गैलन के आंकड़े को छू रही हैं, जिससे आम नागरिकों के घरेलू बजट पर भारी दबाव बन गया है और मुद्रास्फीति (महंगाई) के नए सिरे से भड़कने का खतरा पैदा हो गया है।डोनाल्ड ट्रंप की जनता से अपील: 'एक दुष्ट देश को रोकने के लिए थोड़ा महंगा तेल सहना होगा'बढ़ती तेल कीमतों और मतदाताओं की नाराजगी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने फैसले का पुरजोर बचाव किया है। न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में आयोजित एक विशाल राजनीतिक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे देशहित और वैश्विक सुरक्षा के लिए पेट्रोल के बढ़े हुए दामों को सहन करें।ट्रंप ने रैली में कहा कि पेट्रोल के लिए थोड़ा अतिरिक्त भुगतान करना उस व्यापक रणनीति का एक छोटा सा हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एक बेहद खतरनाक देश को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में दोहराया कि होर्मुज जलमार्ग पर अमेरिकी नौसेना का पूरा दबदबा है और संघर्ष समाप्त होने के बाद अमेरिका इस पूरे क्षेत्र को 'अमेरिकी क्षेत्र' घोषित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। हालांकि, चुनावी वादों में ऊर्जा की कीमतें कम करने का दावा करने वाले ट्रंप प्रशासन के लिए 29 फीसदी की यह मूल्य वृद्धि घरेलू राजनीति में एक बड़ी चुनौती बन गई है।ईरान का करारा पलटवार: 'ट्वीट या युद्धपोत से नहीं खुलेगा होर्मुज', बातचीत से साफ इनकारट्रंप के बयानों और सैन्य नाकेबंदी के दावों पर तेहरान ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पलटवार करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना या बंद करना केवल ईरान के अधिकार क्षेत्र में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रणनीतिक मार्ग किसी चुनावी भाषण, सोशल मीडिया पोस्ट या विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) की तैनाती से नहीं खुलने वाला है।वहीं, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि ईरान ने अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत फिर से शुरू करने का कोई फैसला नहीं किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका युद्ध, सैन्य नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त नहीं करता और जब्त की गई संपत्तियों को बहाल नहीं करता, तब तक इस जलमार्ग से जहाजों का सुरक्षित आवागमन संभव नहीं होगा। कतर और पाकिस्तान जैसे देशों द्वारा की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रणनीतिक ताकत: क्यों थमी है दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन?होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री चैनल है, जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की 'गले की नस' (जुगुलर वेन) माना जाता है। सामान्य दिनों में दुनिया के कुल पेट्रोलियम उपभोग और समुद्री कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख तेल व एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) निर्यातक देश अपने ऊर्जा निर्यात के लिए पूरी तरह इसी चैनल पर निर्भर हैं।यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) और जहाजरानी ट्रैकिंग फर्मों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों का ट्रैफिक अपने सामान्य स्तर के मुकाबले गिरकर 15 से 17 प्रतिशत पर सिमट गया है। अधिकांश अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल टैंकर ऑपरेटरों ने मिसाइल, ड्रोन हमलों और समुद्री बारूदी सुरंगों के डर से अपने जहाजों को खाड़ी देशों में भेजने से रोक दिया है। जहाजों के बीमा प्रीमियम (वॉर रिस्क इंश्योरेंस) में अभूतपूर्व उछाल आया है, जिससे समुद्री माल ढुलाई की लागत आसमान छू रही है।कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में आग: ब्रेंट और WTI में भारी साप्ताहिक उछालहोर्मुज के अवरुद्ध होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी अनिश्चितता और घबराहट का माहौल है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। ताजा कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड में साप्ताहिक आधार पर लगभग 6 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई में 5.4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि होर्मुज जलमार्ग पर यह गतिरोध अगले कुछ हफ्तों तक और जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकती हैं। आपूर्ति शृंखला टूटने का सीधा असर रिफाइनरियों पर पड़ रहा है, जिससे न केवल पेट्रोल और डीजल बल्कि विमान ईंधन (एटीएफ) और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं।अमेरिका में आर्थिक व राजनीतिक उथल-पुथल: महंगाई और मध्यावधि चुनाव का दबावअमेरिका में पेट्रोल की कीमतों का 29 फीसदी तक बढ़ जाना केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा भी है। अमेरिकी संस्कृति में ईंधन की कीमतें सीधे उपभोक्ता भावना (कंज्यूमर सेंटीमेंट) और दैनिक जीवन यापन की लागत को प्रभावित करती हैं। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से ग्रोसरी, पैकेज्ड फूड, लॉजिस्टिक्स और आवश्यक सेवाओं की कीमतें बढ़ रही हैं।विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी इस मुद्दे को लेकर ट्रंप प्रशासन पर हमलावर हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि विदेशी युद्धों में उलझने और आक्रामक सैन्य नीतियों के कारण आम अमेरिकी परिवारों पर महंगाई का असहनीय बोझ लादा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान भी इस संघर्ष की भारी आर्थिक कीमत चुका रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्वीकार किया है कि बंदरगाहों की नाकेबंदी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण देश में रिकॉर्ड मुद्रास्फीति दर्ज की जा रही है।भारत और एशियाई देशों पर क्या होगा असर? आयात बिल और मुद्रास्फीति की चिंताहोर्मुज संकट का प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे भारी तेल आयातक एशियाई देश इसके सबसे बड़े शिकार हो सकते हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से होर्मुज मार्ग के रास्ते ही आता है।यदि तेल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर यह उछाल बना रहता है, तो भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर सीधा दबाव पड़ेगा, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है और आयातित मुद्रास्फीति (इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन) का खतरा बढ़ जाएगा। यद्यपि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूस और अन्य गैर-खाड़ी देशों से तेल खरीद बढ़ाकर अपने स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कुल कमी सभी देशों के लिए ईंधन और लॉजिस्टिक्स को महंगा कर देगी।आगे क्या होगा? कूटनीतिक गतिरोध और अनिश्चितता का लंबा दौरवर्तमान में वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई प्रत्यक्ष शांति वार्ता नहीं हो रही है, जिससे इस संकट के जल्द समाप्त होने के आसार बेहद कम दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय जहां ईरान पर नए और सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है, वहीं ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है।भूराजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि सैन्य शक्ति के बल पर होर्मुज जैसे संकरे और संवेदनशील जलमार्ग को लंबे समय तक सुरक्षित रखना व्यावहारिक रूप से असंभव है। जब तक दोनों पक्ष कूटनीतिक बातचीत की मेज पर लौटकर युद्धविराम और सुरक्षा गारंटी पर सहमति नहीं बनाते, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, महंगे पेट्रोल का संकट और आर्थिक मंदी का साया इसी तरह मंडराता रहेगा।
देशभर में 10 मिनट के भीतर ग्रोसरी और खाने-पीने का सामान घर पहुंचाने का दावा करने वाली क्विक कॉमर्स कंपनियों पर खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एक बड़े राज्यव्यापी औचक निरीक्षण अभियान के बाद ब्लिंकिट (Blinkit), जेप्टो (Zepto) और स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) से जुड़े 14 वेयरहाउस व डार्क स्टोर्स के फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिए हैं।नियामक की इस सख्त कार्रवाई ने ऑनलाइन राशन और पैक्ड फूड मंगाने वाले लाखों उपभोक्ताओं को हिलाकर रख दिया है। एफडीए की अलग-अलग टीमों ने मुंबई, ठाणे, पुणे और सातारा सहित महाराष्ट्र के कई प्रमुख शहरों में फैले 86 ऑनलाइन डिलीवरी प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान 60 प्रतिष्ठानों को गंभीर सुधार नोटिस (इम्प्रूवमेंट नोटिस) थमाए गए, जबकि एक यूनिट को तुरंत कामकाज पूरी तरह बंद करने का फरमान जारी किया गया। जिन 14 प्रतिष्ठानों के परमिट सस्पेंड किए गए हैं, उनमें पांच ब्लिंकिट, पांच जेप्टो, दो स्विगी इंस्टामार्ट और दो उनके एसोसिएट वेंडर शामिल हैं।एक्सपायर्ड चिकन, कॉकरोच और चूहों की मौजूदगी: जांच में सामने आईं चौंकाने वाली खामियांएफडीए अधिकारियों द्वारा तैयार की गई निरीक्षण रिपोर्ट किसी भी आम उपभोक्ता के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। अंधेरी, बांद्रा, मलाड, मुलुंड और घाटकोपर जैसे पॉश इलाकों के डार्क स्टोर्स में भारी गंदगी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। बांद्रा स्थित इंस्टामार्ट के वेयरहाउस में खाद्य सामग्रियों के पैकेटों के ठीक पास चूहों की लीद (रोडेंट ड्रॉपिंग्स), छिपकलियां और कॉकरोचों का झुंड रेंगता हुआ मिला।अंधेरी वेस्ट की एक फैसिलिटी में तो एक्सपायर्ड करी-कट चिकन खुलेआम रखा हुआ था, जिसे अधिकारियों ने मौके पर ही नष्ट करवाया। कई डार्क स्टोर्स में कच्ची सब्जियां और फल सड़ रहे थे, जिन पर कीड़े पनप रहे थे। इसके अलावा, दाल, आटा, ब्रेड और दूध जैसे रोजाना इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के पैकेट बिना किसी पैलेट या स्टैंड के सीधे गंदे और टूटे हुए फर्श पर रखे हुए मिले। स्टोरेज रैक पूरी तरह जंग खाए हुए थे और दीवारों पर जाले लगे थे।कोल्ड-चेन फेलियर और FIFO-FEFO नियमों की खुली अनदेखीखाद्य सुरक्षा में सबसे संवेदनशील पहलू 'कोल्ड-चेन मेंटेनेंस' का होता है। फ्रोजन फूड, डेयरी उत्पाद, पनीर, मक्खन और नॉन-वेज आइटम्स को निर्धारित माइनस डिग्री या न्यूनतम तापमान पर रखा जाना अनिवार्य होता है ताकि उनमें बैक्टीरिया न पनपें। एफडीए की जांच में मलाड के ब्लिंकिट स्टोर और पुणे के जेप्टो वेयरहाउस में चिलर रूम और डीप फ्रीजर का तापमान मानकों से कहीं ज्यादा गर्म पाया गया। फ्रोजन आइटम्स के लिए जरूरी एंटी-रूम तक मौजूद नहीं थे।इसके साथ ही, वेयरहाउस इन्वेंट्री के सबसे बुनियादी नियम FIFO (First In, First Out) और FEFO (First Expired, First Out) की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। पुणे के लोहगांव स्थित जेप्टो आउटलेट में 'यूज बाई' (Use By) डेट पार कर चुके खाद्य उत्पाद अलमारियों में सजे हुए मिले। एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुके उत्पादों को आगे रखने के बजाय नए और पुराने सामान को बिना किसी छंटनी के एक साथ ठूंस दिया गया था।डिलीवरी राइडर्स और स्टाफ की मेडिकल फिटनेस पर भी उठे गंभीर सवालजांच का दायरा सिर्फ गोदामों की दीवारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामान को पैक करने वाले कर्मचारियों और ग्राहकों तक पहुंचाने वाले डिलीवरी राइडर्स के स्वास्थ्य मानकों की भी पड़ताल की गई। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत खाद्य पदार्थों को संभालने वाले (फूड हैंडलर्स) कर्मचारियों का नियमित मेडिकल चेकअप और फिटनेस सर्टिफिकेट होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।मलाड के ब्लिंकिट डार्क स्टोर में लगभग 40 कर्मचारी बिना किसी मेडिकल जांच रिकॉर्ड के काम करते पाए गए। कर्मचारी बिना ग्लव्स (दस्ताने), एप्रन और हेयर कैप के खुले खाद्य पदार्थों को संभाल रहे थे। वहीं सातारा के कराड में जब एफडीए ने ब्लिंकिट के 125 टू-व्हीलर डिलीवरी पार्टनर्स की औचक जांच की, तो किसी के पास भी जरूरी मेडिकल फिटनेस रिकॉर्ड या पहचान पत्र नहीं मिला। इतना ही नहीं, डिलीवरी बैग्स और राइडर बॉक्सेज पर अनिवार्य एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस नंबर तक प्रदर्शित नहीं किया गया था, जिसके बाद कंपनी की दोपहिया डिलीवरी सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी गई।10 मिनट की अंधी दौड़ और फूड सेफ्टी का संकट: क्विक कॉमर्स का कमजोर पहलूभारत में क्विक कॉमर्स का बाजार पिछले दो सालों में अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। जहां पारंपरिक ई-कॉमर्स कंपनियां 24 से 48 घंटे में डिलीवरी करती थीं, वहीं ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट जैसी कंपनियों ने 10 से 15 मिनट में डिलीवरी देकर उपभोक्ताओं की आदतें बदल दी हैं। लेकिन इस सुपरफास्ट डिलीवरी मॉडल की रीढ़ कहे जाने वाले 'डार्क स्टोर्स' (शहर के भीतर छोटे-छोटे बंद गोदाम) अब सुरक्षा और गुणवत्ता के मोर्चे पर गंभीर सवालों के घेरे में हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि डिलीवरी की स्पीड बढ़ाने और कम जगह में हजारों प्रोडक्ट्स ठूंसने के चक्कर में डार्क स्टोर्स में वेंटिलेशन, हाइजीन, वेस्ट डिस्पोजल और पेस्ट कंट्रोल (कीटनाशक नियंत्रण) की उपेक्षा हो रही है। 10 मिनट में पैकेट पिक और पैक करने के दबाव में वेयरहाउस कर्मचारी गुणवत्ता की जांच किए बिना एक्सपायर्ड या डैमेज पैकेट ग्राहकों को भेज देते हैं। एफडीए के इस व्यापक एक्शन ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक रफ्तार किसी भी हाल में नागरिकों के स्वास्थ्य से ऊपर नहीं हो सकती।उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी: ऑनलाइन खाद्य सामग्री मंगाते समय इन 5 बातों का रखें ध्यानयदि आप भी रोजाना दूध, ब्रेड, पनीर, सब्जियां या अन्य पैक्ड फूड क्विक कॉमर्स ऐप्स से ऑर्डर करते हैं, तो अपनी सुरक्षा के लिए इन जरूरी बातों का सख्ती से पालन करें:डिलीवरी लेते ही 'Use By' और 'Expiry Date' चेक करें: पैकेट पर छपी अंतिम तिथि को तुरंत देखें। यदि तारीख मिटाई गई हो, ओवरराइटिंग हो या एक्सपायरी पास हो, तो सामान तुरंत रिटर्न करें।पैकेजिंग और सील की जांच: फ्रोजन फूड या डेयरी उत्पाद लेते समय यह सुनिश्चित करें कि पैकेट फूला हुआ (पफ्ड), फटा हुआ या गीला न हो। अगर आइसक्रीम या फ्रोजन मटर पिघली हुई अवस्था में मिले, तो उसका सेवन न करें क्योंकि वह कोल्ड-चेन टूटने का संकेत है।फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोएं: डार्क स्टोर्स में पेस्ट कंट्रोल की कमी के चलते फल-सब्जियों पर कीटाणु या केमिकल हो सकते हैं। इन्हें पकाने या खाने से पहले गुनगुने पानी और नमक/सिरके से अच्छी तरह साफ करें।संदिग्ध गुणवत्ता पर शिकायत दर्ज करें: यदि आपको किसी ऐप से खराब, सड़ा हुआ या एक्सपायर्ड सामान मिलता है, तो ऐप पर रिफंड लेने के साथ-साथ राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) और FSSAI के 'FoSCoS' पोर्टल पर सबूत (तस्वीर/बिल) के साथ शिकायत जरूर दर्ज करें।महाराष्ट्र एफडीए की इस कड़ी कार्रवाई के बाद अब अन्य राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभाग भी अपने-अपने शहरों में मौजूद डार्क स्टोर्स का ऑडिट करने की तैयारी में हैं, जिससे आने वाले दिनों में क्विक कॉमर्स कंपनियों के कामकाज में कड़े नीतिगत और ढांचागत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
देशभर के पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही वाहन चालकों के बीच माइलेज को लेकर एक नई बहस छिड़ गई थी। सोशल मीडिया से लेकर ऑटोमोबाइल फोरम तक यह दावा किया जा रहा था कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज 15 से 20 प्रतिशत तक गिर गया है। इन दावों और उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंताओं के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने तकनीकी साक्ष्यों के साथ स्थिति स्पष्ट कर दी है।सरकार की ओर से जारी तकनीकी विश्लेषण और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के अध्ययनों में यह साफ किया गया है कि E20 पेट्रोल अकेले किसी भी वाहन के माइलेज में भारी गिरावट के लिए जिम्मेदार नहीं है। वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों में माइलेज गिरने के पीछे कई अन्य यांत्रिक, पर्यावरणीय और मानवीय कारक मुख्य रूप से काम करते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।क्या है E20 पेट्रोल और इससे माइलेज पर कितना असर पड़ता है?E20 ईंधन में 80 प्रतिशत पारंपरिक गैसोलीन (पेट्रोल) और 20 प्रतिशत जैव-एथेनॉल (बायो-एथेनॉल) का मिश्रण होता है। एथेनॉल एक नवीकरणीय ईंधन है जिसे गन्ने, मक्का और अतिरिक्त खाद्यान्नों से तैयार किया जाता है। भारत सरकार द्वारा इस नीति को तेजी से लागू करने का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कटौती करना, विदेशी मुद्रा बचाना और वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करके पर्यावरण को स्वच्छ बनाना है।ऊर्जा घनत्व (Energy Density) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो शुद्ध एथेनॉल का ऊर्जा घनत्व सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग एक-तिहाई कम होता है। जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है, तो समग्र मिश्रण के ऊर्जा घनत्व में केवल 3 से 6 प्रतिशत की मामूली कमी आती है। ऑटोमोबाइल परीक्षणों से प्रमाणित हुआ है कि यदि कोई वाहन विशेष रूप से E20 के लिए कैलिब्रेटेड नहीं भी है, तब भी उसके माइलेज में अधिकतम 2 से 5 प्रतिशत का ही अंतर आ सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई कार 20 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो E20 के कारण यह घटकर 19 या 19.2 किमी ही हो सकता है, न कि 14 या 15 किमी। ऐसे में माइलेज में 20 से 30 प्रतिशत की भारी गिरावट के पीछे अन्य प्रमुख कारण होते हैं।सिर्फ ईंधन नहीं, इन 5 बड़ी वजहों से अचानक गिरता है गाड़ियों का माइलेजवाहन का माइलेज केवल टैंक में डाले जाने वाले तेल पर निर्भर नहीं करता, बल्कि वाहन के रख-रखाव और उसे चलाने के तरीके से सीधे जुड़ा होता है। विशेषज्ञों ने उन 5 मुख्य वजहों को रेखांकित किया है जो माइलेज को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं:आक्रामक ड्राइविंग और गलत गियर शिफ्टिंग: बार-बार अचानक एक्सीलेटर दबाना (हार्ड एक्सीलरेशन), तेज गति में अचानक ब्रेक लगाना और गलत गियर में गाड़ी खींचना माइलेज गिरने का सबसे बड़ा कारण है। कम स्पीड में ऊंचा गियर या तेज रफ्तार में निचला गियर इस्तेमाल करने से इंजन पर अत्यधिक लोड पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।टायरों में कम हवा का दबाव (Under-inflated Tyres): यदि टायरों में अनुशंसित पीएसआई (PSI) से केवल 2 से 3 पाउंड हवा कम हो, तो सड़क और टायर के बीच रोलिंग रेजिस्टेंस (घर्षण) बढ़ जाता है। इसके चलते इंजन को पहियों को घुमाने के लिए दोगुनी ताकत लगानी पड़ती है, जिससे सीधे तौर पर 5 से 10 प्रतिशत माइलेज कम हो जाता है।बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक और अत्यधिक आइडलिंग: बड़े शहरों में भारी ट्रैफिक जाम के दौरान गाड़ी का लगातार स्टार्ट रहना (आइडलिंग) और बार-बार पहले-दूसरे गियर में चलना भारी मात्रा में पेट्रोल फूंकता है। ट्रैफिक सिग्नल पर या जाम में 1 मिनट से अधिक समय तक बिना गाड़ी बंद किए एसी चालू रखने से प्रति घंटे लगभग 0.8 से 1.2 लीटर पेट्रोल व्यर्थ जलता है।खराब मेंटेनेंस और गंदे स्पार्क प्लग या एयर फिल्टर: इंजन का एयर फिल्टर धूल और गंदगी से जाम होने पर इंजन को दहन (कम्बशन) के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके कारण इंजन 'रिच फ्यूल मिक्स' पर काम करने लगता है, यानी हवा कम और पेट्रोल ज्यादा जलता है। इसके अलावा पुराने इंजन ऑयल और खराब स्पार्क प्लग के कारण कम्बशन साइकिल अधूरी रह जाती है, जिससे माइलेज में सीधी गिरावट आती है।गाड़ी पर अतिरिक्त वजन और एसी का अत्यधिक इस्तेमाल: गाड़ी की डिग्गी में लगातार भारी गैर-जरूरी सामान लेकर चलने और रूफ रैक लगाने से एयरोडायनामिक ड्रैग बढ़ता है। साथ ही, भीषण गर्मी में एयर कंडीशनर को लगातार न्यूनतम तापमान पर चलाने से इंजन कंप्रेसर पर अत्यधिक लोड डालता है, जिससे माइलेज 10 से 15 प्रतिशत तक कम हो सकता है।पुराने वाहनों (BS4 और शुरुआती BS6) पर E20 का प्रभावउपभोक्ताओं के मन में यह भी सवाल था कि क्या E20 पेट्रोल उनके पुराने वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है। ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स के अनुसार, अप्रैल 2023 के बाद निर्मित सभी नए वाहन (BS6 Phase 2 / RDE नॉर्म्स) पूरी तरह से E20 मैटेरियल-कम्पैटिबल हैं।पुराने वाहनों (BS4 या उससे पहले के मॉडल) में रबर होज, फ्यूल लाइन्स और गास्केट पारंपरिक पेट्रोल के अनुसार डिजाइन किए गए थे। एथेनॉल में नमी सोखने (Hygroscopic nature) की प्रवृत्ति होती है, जो पुराने वाहनों के कुछ रबर पार्ट्स को लंबे समय में प्रभावित कर सकती है। हालांकि, आधुनिक ऑटोमोबाइल उद्योग ने स्पष्ट किया है कि नियमित रूप से गाड़ी चलाने और समय पर फ्यूल फिल्टर व पाइप्स की जांच करवाते रहने से पुराने वाहनों में भी किसी गंभीर खराबी का खतरा नगण्य हो जाता है।गाड़ी का माइलेज 20 से 25% तक बढ़ाने के 4 आसान प्रैक्टिकल टिप्सयदि आप अपने वाहन से अधिकतम ईंधन दक्षता (फ्यूल इकोनॉमी) हासिल करना चाहते हैं, तो इन आसान और प्रभावी ड्राइविंग आदतों को अपना सकते हैं:इकोनोमी स्पीड (45 से 60 किमी/घंटा) मेंटेन करें: हाईवे और शहर की खुली सड़कों पर गाड़ी को स्थिर गति में चलाएं। क्रूज कंट्रोल का समझदारी से उपयोग करें और गैर-जरूरी ओवरटेकिंग से बचें।सप्ताह में एक बार टायर प्रेशर की जांच: हमेशा ठंडे टायरों में (गाड़ी चलने से पहले) कंपनी द्वारा सुझाए गए मानक के अनुसार हवा भरवाएं। नाइट्रोजन का उपयोग टायर प्रेशर को स्थिर रखने में मददगार होता है।समय पर सर्विसिंग और सही ग्रेड का इंजन ऑयल: इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर और एयर फिल्टर को निर्माता द्वारा तय की गई समय-सीमा पर जरूर बदलें। सही विस्कोसिटी ग्रेड का सिंथेटिक ऑयल घर्षण कम करके माइलेज बढ़ाता है।ट्रैफिक में स्मार्ट ड्राइविंग: लाल बत्ती पर यदि 30 सेकंड से ज्यादा का इंतजार हो, तो इंजन बंद कर दें। ऑटो स्टार्ट-स्टॉप तकनीक वाले वाहनों में इस फीचर को हमेशा ऑन रखें।हरित भविष्य और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदमएथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम केवल एक वैकल्पिक ईंधन रणनीति नहीं है, बल्कि यह देश के कृषि क्षेत्र को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ने वाला एक क्रांतिकारी कदम है। एथेनॉल खरीद से देश के लाखों गन्ना और अनाज उत्पादक किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है।सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि उपभोक्ता E20 पेट्रोल को लेकर किसी भी प्रकार के भ्रम या भ्रामक प्रचार में न आएं। वाहन की सही देखभाल, संतुलित ड्राइविंग व्यवहार और नियमित तकनीकी जांच अपनाकर E20 ईंधन के साथ भी बेहतरीन माइलेज और स्मूथ ड्राइविंग अनुभव हासिल किया जा सकता है।
पूर्वी तटीय राज्य ओडिशा में मानसूनी बारिश और उफनती नदियों ने भयंकर तबाही मचा दी है। राज्य के छह प्रमुख जिलों में बाढ़ के हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि 500 से अधिक गांव पूरी तरह से टापू में तब्दील हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों और जमीनी रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 2.7 लाख (दो लाख सत्तर हजार) से अधिक लोगों का जनजीवन इस प्राकृतिक आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। कई गांवों का जिला मुख्यालयों और मुख्य सड़कों से संपर्क पूरी तरह कट चुका है।बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों, प्राथमिक विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और हजारों एकड़ में लहलहाती फसलों में घुस चुका है। घरों की छतों और ऊंचे तटबंधों पर शरण लिए लोग भोजन, शुद्ध पेयजल और दवाओं की बाट जोह रहे हैं। अचानक बढ़े जलस्तर के कारण लोगों को अपने घरों से जरूरी सामान और मवेशियों को निकालने तक का वक्त नहीं मिला, जिससे लाखों परिवारों के सामने आजीविका और अस्तित्व का गहरा संकट खड़ा हो गया है।नदियों के उफान और बांधों से पानी छोड़े जाने से बिगड़े हालात: क्या हैं बाढ़ के मुख्य कारण?ओडिशा में आई इस विनाशकारी बाढ़ के पीछे मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) के कारण हुई भारी बारिश और पड़ोसी राज्यों के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों (अपर कैचमेंट एरिया) से आने वाला भारी पानी है। महानदी, ब्राह्मणी, बैतरणी, सुवर्णरेखा और बुढ़ाबलंग जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर या उसके करीब बह रही हैं।महानदी बेसिन के ऊपरी इलाकों, विशेषकर छत्तीसगढ़ और पश्चिमी ओडिशा में लगातार हुई अतिवृष्टि के चलते संबलपुर स्थित ऐतिहासिक हीराकुंड बांध का जलस्तर अपने अधिकतम स्तर के करीब पहुंच गया। जलाशय की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को कई स्लुइस गेट खोलने पड़े, जिससे निचले इलाकों में लाखों क्यूसेक पानी का बहाव तेजी से बढ़ा। इसके साथ ही, तटीय इलाकों में समुद्र में हाई टाइड (उच्च ज्वार) आने के कारण नदियों का पानी तेजी से समुद्र में नहीं समा पा रहा है, जिससे बैकवाटर का दबाव गांवों और बस्तियों में फैल गया है।प्रभावित जिलों का जमीनी हाल: कटक, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर में थमी जिंदगीबाढ़ का सबसे घातक प्रभाव ओडिशा के तटीय और डेल्टा क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, पुरी, भद्रक और बालेश्वर जिले इस जलप्रलय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर के निचले इलाकों में कई नदियां तटबंध तोड़कर रिहायशी इलाकों में बहने लगी हैं।सैकड़ों कच्चे मकान ढह गए हैं, जबकि पक्के मकानों के भूतल पानी में समा चुके हैं। संचार नेटवर्क और बिजली के खंभे गिरने से कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति है। इसके अलावा, हजारों मवेशी चारे की कमी और पानी में बह जाने से संकट में हैं। किसानों की धान की फसलें पानी में डूबकर सड़ने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा है। स्थानीय बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत होने लगी है, जिससे आम जनता की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान: NDRF, ODRAF और नौकाओं का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशनहालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (OSDMA) ने पूरे तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) और अग्निशमन सेवा की दर्जनों टीमें मोटरबोट्स के साथ सुदूर गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हुई हैं।बाढ़ में घिरे बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर एयरलिफ्ट और नावों के जरिए सुरक्षित शिविरों (फ्लड शेल्टर्स) में पहुंचाया जा रहा है। सरकार द्वारा संचालित इन राहत शिविरों में गर्म पका हुआ भोजन, सूखा राशन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिन इलाकों में नावों का पहुंचना भी मुश्किल है, वहां हेलीकॉप्टरों की मदद से सूखे खाने के पैकेट, पीने के पानी की बोतलें और जरूरी दवाइयां एयर-ड्रॉप की जा रही हैं। जिलाधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने और तटबंधों पर गश्त बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।महामारी और जलभराव का दोहरा संकट: स्वास्थ्य विभाग के सामने नई चुनौतियांबाढ़ का पानी उतरने के साथ ही बीमारियों का खतरा सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाता है। रुके हुए और दूषित पानी की वजह से डायरिया, हैजा, टाइफाइड और त्वचा संबंधी संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, जलभराव वाले क्षेत्रों में जहरीले सांपों और कीड़े-मकौड़ों के निकलने से लोगों में भारी दहशत है।ओडिशा स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल हेल्थ यूनिट्स (भ्रमणशील चिकित्सा दल) तैनात कर दिए हैं। आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के जरिए बाढ़ पीड़ितों को हैलोजन टैबलेट (पानी शुद्ध करने की गोलियां), ओआरएस के पैकेट, एंटी-वेनम इंजेक्शन और आवश्यक एंटीबायोटिक्स बांटी जा रही हैं। पीने के पानी के स्रोतों जैसे ट्यूबवेल और कुओं के विसंक्रमण (क्लोरीनेशन) का काम भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जा रहा है ताकि जलजनित महामारियों को फैलने से रोका जा सके।दीर्घकालिक समाधान और आपदा प्रबंधन की परीक्षा: आगे की राहओडिशा देश का वह राज्य है जिसने बीते दशकों में चक्रवातों और आपदा प्रबंधन में दुनिया भर में अपनी मिसाल पेश की है, लेकिन बाढ़ की बारंबारता आज भी एक जटिल चुनौती बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण मानसूनी बारिश के पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव आया है—कम समय में अत्यधिक वर्षा (क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थिति) से जल निकासी प्रणाली पूरी तरह चरमरा जाती है।बाढ़ की इस त्रासदी से निपटने के लिए तात्कालिक राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक नीतिगत कदमों की जरूरत है। इनमें नदी तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, डेल्टा क्षेत्र में वैज्ञानिक जल निकासी तंत्र का निर्माण, गाद (सिल्ट) की सफाई और पड़ोसी राज्यों के साथ वास्तविक समय पर जल प्रवाह डेटा का समन्वय शामिल है। वर्तमान में प्रशासन की पहली प्राथमिकता 2.7 लाख प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित रखना और सामान्य जीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लौटाना है।
Bhopal-Gwalior Expressway: भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेसवे के बनने से दिल्ली तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी. भोपाल से दिल्ली का सफर महज 8 से 9 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. जबकि राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी.
बॉलीवुड की जानी मानी सिंगर्स में से एक हेमलता बाली अपने अनूठे गीतों से कानों में रस घोल देती हैं. उनके गानों की लिस्ट में 'अंखियों के झरोखों से' को काफी पसंद किया जाता है.
पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए गोलीकांड के आरोपी, व्यापारी पर की थी फायरिंग, जानकारी देतीं एसपी सिटी प्रीति सिंह
मैसूरु के होटलों में मिला एक्सपायर्ड मीट, KFC आउटलेट पर भी रेड
कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने सार्वजनिक खाद्य केंद्रों पर साफ-सफाई और गुणवत्ता से जुड़ी गंभीर खामियां पाई हैं. बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य पदार्थ जब्त किए गए हैं.
'बासी और बदबूदार चिकन', कस्टमर की शिकायत पर कर्नाटक FDA का एक्शन; KFC आउटलेट किया सील
मंगलुरु में केएफसी आउटलेट को बदबूदार चिकन की शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने सील कर दिया। यह कार्रवाई कर्नाटक में चल रहे व्यापक खाद्य सुरक्षा अभियान का हिस्सा है।
जांचा, परखा... तैयार! माइलेज के लिए E20 नहीं जिम्मेदार, फिर बोली सरकार
E20 petrol Controversy: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि, किसी गाड़ी के माइलेज में गिरावट के लिए केवल E20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. हालांकि, सरकार पहले ही संसद में स्वीकार कर चुकी है कि, इस फ्यूल से माइलेज में कमी और पार्ट्स डैमेज हो सकते हैं.
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल देर रात अमेरिका के लिए रवाना हुए हैं। वर्ष 2002 के बाद सरकारी कामकाज के सिलसिले में अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले वे गुजरात के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। आगामी Vibrant Gujarat Global Summit 2027 को ...
'98.5% फंड खर्च ही नहीं हुआ...', PM इंटर्नशिप स्कीम पर कांग्रेस का वार
कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण और जमीनी हकीकत में अंतर का आरोप लगाते हुए PM इंटर्नशिप स्कीम पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने दावा किया कि 2024-25 में आवंटित ₹2,000 करोड़ में से सिर्फ ₹29.29 करोड़ खर्च हुए.
'भारत-इजरायल की दोस्ती जगमगा रही...', तिरंगे के रंगों में जगमगाया यरूशलेम का 'कॉर्ड्स ब्रिज'
भारतीय दूतावास ने कहा, भारत-इजरायल की दोस्ती जगमगा रही है. यरूशलेम का मशहूर 'कॉर्ड्स ब्रिज' भारतीय तिरंगे के रंगों से जगमगा उठा.
मुंबई और सूरत में बुलेट ट्रेन के स्टेशनों का काम अंतिम चरण में पहुंचा, सामने आए वीडियो
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला चरण 2027 में शुरू होने का लक्ष्य है, जिसमें बीकेसी और सूरत स्टेशनों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
श्रद्धालुओं से भरा कैंटर हाईवोल्टेज तार से टकराया, 20 से ज्यादा झुलसे
हरियाणा के करनाल में देर रात श्रद्धालुओं से भरे कैंटर के हाईवोल्टेज बिजली की तारों की चपेट में आ गया. घरौंडा के मिनी बायपास के पास हुए इस हादसे में कैंटर में सवार 20 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हो गए. हादसे के बाद कैंटर में भी आग लग गई. घायलों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं. कई लोगों की हालत गंभीर बताई गई है.
मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने सनी देओल से पूछा, सनी जी, हमने सुना है कि आप एक रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे? फॉर्मूला 1 वगैरह सनी देओल ने अपने पैशन का खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें ड्राइविंग का काफी शौक हुआ करता था,
'जंग आपने शुरू की, कीमत हम चुका रहे...' ट्रंप से खफा हुए गल्फ के दोस्त
यूरेशिया ग्रुप में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका मामलों के निदेशक फिरास मक्सद का कहना है कि फारस की खाड़ी में अमेरिकी सहयोगियों को लगता है कि उन्हें एक ऐसे युद्ध में बेवजह उलझाया गया जिसे सुलझाने के लिए ट्रंप अब संघर्ष कर रहे हैं.
आज ही के दिन, 2020 में छह साल पहले, 15 अगस्त 2020 को महेंद्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट में अपने शानदार इंटरनेशनल करियर को अलविदा कहा.
4 साल पहले जिस बॉस ने एक जूम कॉल पर 900 कर्मियों की नौकरी छीन ली थी, उसे आज कंपनी के बोर्ड ने ही नौकरी से निकाल दिया है. भारतीय मूल के CEO विशाल गर्ग अब खुद जॉबलेस हैं. 7 दिन के घटनाक्रम में उनके साथ ये खेल हो गया. मामला बड़ा दिलचस्प है.
बची हुई रोटियों से झटपट बनाएं टेस्टी अप्पे रोटी, रेसिपी है आसान
Appe Roti Recipe: आज हम आपको बची हुई रोटियों से टेस्टी और हेल्दी अप्पे रोटी बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे. बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम यह डिश नाश्ते या शाम के स्नैक के लिए बेहतरीन ऑप्शन है.
शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ पर आई मुसीबत, एड को लेकर FDA ने भेजा 'कारण बताओ नोटिस'
शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ पर मुसीबत आ गई है. दरअसल, महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने बॉलीवुड एक्टर्स अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को 'शो-कॉज नोटिस' यानी कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं.
इलाज के पैसे खत्म हुए तो पिता ने खोदी 2 साल की बेटी की कब्र, सालों बाद उसी जगह खिले सूरजमुखी के फूल
सोशल मीडिया पर इन दिनों इमोशनल कर देने वाला मामला सामने आया है. पैसों की तंगी होने पर एक बेबस पिता ने अपनी बीमार 2 साल की बेटी को मौत के डर से निकालने के लिए कब्र खोदी थी, रोज वो उसे वहां ले जाते थे. इस घटना पर लोगों ने सवाल उठाने के साथ-साथ मदद भी की.
बिना शर्त माफी मांगो; राहुल गांधी के खिलाफ वीडियो पर कांग्रेस ने BJP नेता को भेजा नोटिस
राहुल गांधी के खिलाफ एक वीडियो शेयर करने पर कांग्रेस पार्टी ने भाजपा नेता अमित मालवीय को नोटिस भेजा है। उन्होंने वीडियो को डिलीट करने और तुरंत बिना शर्त माफी मांगने के लिए कहा है। यह वीडियो में भाजपा ने राहुल गांधी पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया था।
संसदीय समिति को बस ऑपरेटरों ने बताया कि बसों में लगे आपातकालीन अलर्ट बटन बेकार पड़े हैं क्योंकि उन्हें जवाब देने के लिए कोई समर्पित केंद्र नहीं है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झामुमो के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय रामदास सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए रामदास सोरेन के संघर्ष और झारखंड आंदोलन में उनके ...
हां... ट्रेन में शराब ले जा सकते हैं! जानिए कब ऐसा कर सकते हैं
ट्रेन में शराब लेकर सफर करने को लेकर अक्सर लोगों में कन्फ्यूजन रहता है. क्या सीलबंद बोतल ले जा सकते हैं, कितनी मात्रा की अनुमति है और दूसरे राज्य में जाने पर क्या नियम बदल जाते हैं? जानिए भारतीय रेलवे और अलग-अलग राज्यों के शराब कानून से जुड़े जरूरी नियम.
Narendra Modi ने Atal Bihari Vajpayee को पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, बताया असाधारण राजनेता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर रविवार को उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे एक असाधारण राजनेता थे, जिनकी दूरदृष्टि अद्वितीय थी तथा उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ था और उन्होंने 16 अगस्त 2018 को नयी दिल्ली में अंतिम सांस ली। वह प्रधानमंत्री बनने वाले भारतीय जनता पार्टी के पहले नेता थे। मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अटल जी को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहा हूं। वह एक असाधारण राजनेता थे, जिनकी दूरदृष्टि अद्भुत थी। उन्होंने अपना जीवन हमारे राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।”प्रधानमंत्री ने कहा कि वाजपेयी के शब्दों और प्रयासों ने पीढ़ियों को प्रेरित किया तथा उनके नेतृत्व ने देश को मजबूत किया। उन्होंने कहा, “सुशासन और जनकल्याण पर उनका जोर हमेशा हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा।
TMC दफ्तर में मिली पूर्व डिप्टी स्पीकर का शव: ममता सरकार में संभाल चुके थे अहम विभाग; पांच बार जीता था चुनाव- Ex Bengal Deputy Speaker Ashish Banerjee found Dead at TMC office he won elections from Rampurhat five times
LIVE: गॉल टेस्ट का आज दूसरा दिन, बड़े स्कोर की ओर टीम इंडिया
IND vs SL 1st Test, Day 2 Live Score: भारत और श्रीलंका की टीम्स गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में आमने-सामने हैं. इस टेस्ट मैच के पहले दिन भारतीय बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया था. देवदत्त पडिक्कल ने तो अपनी पहली टेस्ट सेंचुरी जमा दी थी. अब दूसरे दिन का खेल दोनों टीमों के लिए काफी अहम है.
'कहीं फूड ट्रक में छिपने की नौबत न आए...', होर्मुज पर ट्रंप को ईरान की दो टूक
डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण के दावे पर ईरान ने पलटवार किया है. ईरानी नेता इब्राहिम अजीजी ने तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप को अपनी सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए, कहीं फूड ट्रक में छिपने की नौबत न आ जाए.
पगड़ी, मटके और तलवारें... जयपुर की तीज सवारी में दिखा पूरा राजस्थान
जयपुर की शाम शनिवार को सिर्फ हरियाली तीज के उत्सव में नहीं डूबी थी, बल्कि पूरा शहर जैसे राजस्थान की खुली किताब बन गया था. कहीं ढोल-नगाड़ों की गूंज थी, कहीं लोक कलाकार कदम थिरका रहे थे, तो कहीं तलवारें हवा में लहराती नजर आईं. त्रिपोलिया गेट से जब तीज माता की शाही सवारी निकली, तो सड़क के दोनों तरफ उमड़ी हजारों की भीड़ ने इस राजसी परंपरा को अपनी आंखों में कैद कर लिया.
फंदे से लटका मिला ममता के करीबी और बंगाल असेंबली के पूर्व डिप्टी स्पीकर का शव
पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) से 5 बार विधायक रह चुके आशीष बनर्जी बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित अपने आवास के पास पार्टी कार्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटके पाए गए.
छोटी बीमारियों से परेशान होने का कारण क्या है? जानें भाग्य चक्र में
आजतक के कार्यक्रम भाग्य चक्र में शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि हमें छोटी-छोटी बीमारियों से परेशान होने के पीछे कारण क्या है और उसका निवारण क्या है. साथ ही कार्यक्रम में आगे उन्होनें 12 राशियों के दैनिक राशिफल के बारे में चर्चा की.
राशिफल 16 अगस्त: मेष से मीन तक जानें आज किस राशि के लिए कैसा रहेगा दिन
कुछ लोगों को कामकाज में अपनी गति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ सकता है, जबकि कुछ जातकों के लिए कारोबार, नौकरी और आर्थिक मामलों में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। पारिवारिक और प्रेम संबंधों में भी आज व्यवहार और संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।....
जिम्बाब्वे में नाव हादसे का बढ़ा मौत का आंकड़ा, 26 और शव बरामद, मृतकों की संख्या 72 पहुंची
जिम्बाब्वे की करीबा झील से 26 और शव बरामद किए गए हैं, जिससे नौका हादसे में मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 72 हो गई है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि मृतकों में 18 बच्चे शामिल हैं। उसने बताया कि तेज लहरों के कारण मंगलवार को नौका ...
LIVE: पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर PM मोदी, अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि
LIVE: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज पुण्यतिथि है. रांची में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन जारी है. छात्रों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी दी है.
UGC NET 2026 Answer key : आज जारी होगी UGC NET प्रोविजनल आंसर की, इस लिंक पर जाकर करें चेक
UGC NET June 2026 Answer Key: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की वेबसाइट पर जाकर UGC NET 2026 की प्रोविजनल आंसर की डाउनलोड की जा सकती है. जून सेशन का एग्जाम देने वाले छात्र लॉगिन डिटेल्स की मदद से इसे डाउनलोड कर सकते हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, राष्ट्रनिष्ठा, लोकतांत्रिक मूल्यों और आदर्श राजनीति के शिखर पुरुष, पूर्व प्रधानमंत्री, 'भारत रत्न' श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि.
'सरकार नहीं सुन रही, अब जेल भरो आंदोलन...', रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों की हुंकार
झारखंड में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन रविवार को भी जारी है. इस बीच प्रदर्शनकारी छात्र प्रेम नायक का कहना है कि मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के बजाय 'जेल भरो आंदोलन' बेहतर विचार रहेगा.
ईरान ने भारत संग रिश्ते मजबूत करने की जताई इच्छा
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी। उन्होंने भारत-ईरान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने की इच्छा जताते हुए कहा कि तेहरान आपसी विश्वास, सम्मान और साझा हितों के आधार पर द्विपक्षीय रिश्तों को और आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
ओणम का पर्व अपनी खास परंपराओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, फूलों की सजावट और स्पेशल पारंपरिक भोज के लिए जाना जाता है. ऐसे में आज इस पर्व की शुरुआत पर आप कुछ खास संदेशों के जरिए अपनों को शुभकामनाएं दे सकते हैं.
'दिमागी नक्सल' कौन? PM मोदी के बयान पर क्यों छिड़ा सियासी घमासान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैचारिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, सुरक्षा बलों ने जंगलों में जारी बंदूकधारी माओवादी उग्रवाद को लगभग ध्वस्त कर दिया है।
'हर साल महिलाओं को देंगे 40 हजार रुपये', चुनाव से पहले अखिलेश का ऐलान
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने समाजवादी पेंशन योजना को दोबारा शुरू करने का बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने घोषणा की कि सपा सरकार बनने पर माताओं-बहनों को सालाना 40 हजार रुपये दिए जाएंगे.
CJI सूर्यकांत की फटकार के बाद BCI चेयरमैन ने NALSAR छात्रों से मांगी माफी, बोले- 'मुझे खेद है'
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की ओर से बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के नामांकन विवाद में दखल देने को लेकर कड़ी फटकार लगाए जाने के एक दिन बाद BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कानून के छात्रों से माफी मांगी है। ...
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि आज: 'उनके काम ने पीढ़ियों को प्रेरित किया'; PM मोदी ने क्या कहा?
सपना है विदेश घूमने का पर बजट है कम? भारत की ये 7 जगहे रहेगी बेस्ट
Best Travel Destinations in India: यूरोप घूमने का सपना है लेकिन बजट और वीजा की चिंता सता रही है? तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. भारत में ऐसी कई खूबसूरत जगहें है, जहां आप कम खर्च में फ्रांस, स्विट्जरलैंड और दूसरे यूरोपीय देशों जैसा शानदार ट्रैवल एक्सपीरियंस ले सकते हैं.
दमोह झरने पर अचानक बढ़ा पानी का बहाव, 100 युवक फंसे... ऐसे हुआ रेस्क्यू
राजस्थान के धौलपुर जिले के सरमथुरा में तेज बारिश के चलते दमोह झरना घूमने आए करीब 100 युवक पानी के तेज बहाव के बीच फंस गए. वहीं, दो युवक खार नदी में भी फंस गए. सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची. ग्रामीणों की मदद से रस्से और ट्रैक्टर की सहायता से सभी युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि आज, PM मोदी ने किया नमन
आज भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने X पर पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की रणनीतिक सोच का पहली बार विस्तार से खुलासा किया, जो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 88 घंटे का सैन्य अभियान था।
VIDEO: 3BHK फ्लैट और 2.53 लाख का खर्च! बेंगलुरु शिफ्टिंग पर इस कपल का बिल देखकर उड़ जाएंगे होश
बेंगलुरु में 3BHK किराए पर लेना कोई आसान काम नहीं है. सोशल मीडिया पर इन दिनों इसी से जुड़ा एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें एक कपल ने शिफ्टिंग का पूरा बजट शेयर कर इंटरनेट पर सनसनी मचा दी है.

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