उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनावों में मिले झटकों के बाद भाजपा अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए 'एक्शन मोड' में है। वहीं, विपक्षी खेमे में 'PDA' की राजनीति और कांग्रेस के नए तेवर सत्ताधारी दल के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। आखिर 2027 का रण किसके लिए कितना मुश्किल और आसान है? आइए इसे 4-4 प्रमुख बिंदुओं में समझते हैं।भाजपा की सबसे बड़ी 'ताकत' (Strength)संगठनात्मक ढांचा: भाजपा का बूथ-स्तर तक फैला नेटवर्क देश में सबसे मजबूत माना जाता है। शक्ति केंद्र संयोजकों और सक्रिय कार्यकर्ताओं की फौज पार्टी के लिए सबसे बड़ी बैकबोन है।नेतृत्व और चेहरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्माई नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'लॉ एंड ऑर्डर' मॉडल आज भी ग्रामीण और शहरी इलाकों में पार्टी की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है।कल्याणकारी योजनाएं: केंद्र और राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ आम जनता तक पहुँचाना पार्टी की चुनावी तैयारी का मुख्य आधार है, जो वोट बैंक को साधे रखने में मदद करता है।NDA का एकजुट मोर्चा: निषाद पार्टी, अपना दल (एस), आरएलडी (RLD) और सुभासपा जैसे सहयोगियों के साथ भाजपा अपने सामाजिक समीकरणों को और अधिक समावेशी बनाने की कोशिश कर रही है।भाजपा के सामने 'खतरे' और चुनौतियां (Challenges)बेरोजगारी और पेपर लीक: भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधली और बेरोजगारी का मुद्दा युवाओं के बीच भाजपा के खिलाफ एक बड़ा असंतोष पैदा कर रहा है, जो चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है।महंगाई और सत्ता-विरोधी लहर: 10 साल के शासन के बाद स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) का सामना करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे कम करना आसान नहीं होगा।जातिगत समीकरण और PDA: अखिलेश यादव का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला जातियों की एकजुटता को तोड़ रहा है, जिससे बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक छिटकने का खतरा बना हुआ है।विपक्ष की '3 नंबर' की चुनौती: विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) की बढ़ती आक्रामकता, खासकर कांग्रेस का नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरना और सीटों के बंटवारे पर 'सम्मानजनक' रुख, बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।चुनावी भविष्य का विश्लेषणराजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि 'नैरेटिव' की लड़ाई है। बीजेपी जहाँ अपनी पुरानी जीत के रिकॉर्ड को तोड़कर 'उत्तम प्रदेश' का संकल्प दोहरा रही है, वहीं विपक्ष संविधान और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर जमीन पर मजबूत तैयारी कर रहा है। '3 नंबर' यानी विपक्ष का एकजुट होकर लड़ना बीजेपी के लिए वह खतरे की घंटी है जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रहा। पार्टी के नए संगठन प्रमुख नितिन नबिन के दौरे और बैठकों से यह स्पष्ट है कि भाजपा अब किसी भी स्तर पर चूक नहीं करना चाहती।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक नाम ने अचानक सुर्खियां बटोर ली हैं। राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में चर्चा है कि मशहूर लेखक और विचारक यतींद्र मोहन मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इस चर्चा ने तब और जोर पकड़ लिया जब अयोध्या के कई प्रमुख संतों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने उनके नाम का समर्थन करते हुए राम मंदिर आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। आखिर कौन हैं यतींद्र मोहन मिश्रा और उनकी दावेदारी को लेकर क्यों हो रही है इतनी चर्चा, आइए विस्तार से जानते हैं।कौन हैं यतींद्र मोहन मिश्रा?यतींद्र मोहन मिश्रा एक प्रसिद्ध हिंदी कवि, लेखक, संपादक और कला समीक्षक हैं। अयोध्या में पले-बढ़े यतींद्र मोहन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत, कला और संस्कृति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं। 'अमर उजाला' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे और साहित्य के क्षेत्र में 'भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार' जैसे सम्मान पा चुके यतींद्र मोहन का अयोध्या के सांस्कृतिक और बौद्धिक विमर्श में एक बड़ा नाम है। अयोध्या की परंपराओं, वहां के इतिहास और राम कथा के मर्म को समझने वाले विद्वानों में उनकी गिनती होती है।राम मंदिर आंदोलन और यतींद्र मोहन का योगदानअयोध्या के संतों का कहना है कि यतींद्र मोहन मिश्रा केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि उस लंबी वैचारिक लड़ाई के सिपाही रहे हैं, जिसने राम मंदिर के लिए आधार तैयार किया। संतों के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन के दौरान जब यह मुद्दा केवल सड़कों का संघर्ष नहीं, बल्कि बौद्धिक और कानूनी लड़ाई भी था, तब यतींद्र मोहन ने अपनी लेखनी और विचारों के माध्यम से इसे तार्किक रूप से स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके इसी बौद्धिक योगदान के कारण अब उन्हें ट्रस्ट में शामिल करने की मांग उठ रही है ताकि मंदिर की व्यवस्था और उसकी सांस्कृतिक भव्यता को और बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।ट्रस्ट में शामिल होने के क्या हैं मायने?यदि यतींद्र मोहन मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा बनते हैं, तो यह ट्रस्ट के लिए एक बड़ा बदलाव माना जाएगा। अभी तक ट्रस्ट में अधिकतर प्रशासनिक और धार्मिक हस्तियां शामिल हैं। यतींद्र मोहन के आने से ट्रस्ट में साहित्य, कला और सांस्कृतिक चेतना का एक नया आयाम जुड़ेगा। राम मंदिर न केवल एक पूजा स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति का केंद्र भी है, और यतींद्र मोहन का अनुभव मंदिर के भविष्य की योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रबंधन में मील का पत्थर साबित हो सकता है। फिलहाल, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन अयोध्या की हवाओं में यह नाम चर्चा का विषय बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग अब अपने चरम पर पहुंच गई है। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे से ठीक पहले विपक्ष पर बड़ा सियासी हमला बोला है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए 'राम मंदिर चंदा चोरी' के गंभीर आरोपों पर पलटवार करते हुए सीएम योगी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया है। उन्होंने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस को प्रदेश का विकास नहीं, बल्कि 'कब्रिस्तान' पसंद है। सीएम के इस एक बयान ने यूपी की राजनीति में चुनावी एजेंडा पूरी तरह से सेट कर दिया है।अयोध्या दौरे से पहले सेट किया हिंदुत्व का एजेंडाराम नगरी अयोध्या के अपने अहम दौरे से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों और चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, सीएम योगी ने अपने इस पलटवार से स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनावों में बीजेपी का मुख्य फोकस राम मंदिर, सुशासन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर ही रहने वाला है। अयोध्या में चल रहे ऐतिहासिक विकास कार्यों का जायजा लेने से पहले विपक्ष पर उनका यह प्रहार, सीधे तौर पर सपा और कांग्रेस की पुरानी नीतियों को घेरने की एक बड़ी कोशिश है।अखिलेश के 'चंदा चोरी' वाले बयान का करारा जवाबदरअसल, इस पूरी सियासी खींचतान की शुरुआत तब हुई जब पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित धांधली और चोरी का आरोप लगाया था। इसी का जवाब देते हुए सीएम योगी ने अखिलेश यादव और कांग्रेस को एक ही कटघरे में खड़ा कर दिया। 'कब्रिस्तान' शब्द का इस्तेमाल कर सीएम योगी ने सीधे तौर पर विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है, और जनता को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि पिछली सरकारों के दौरान किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाती थी।यूपी चुनाव: तुष्टिकरण बनाम विकास के मुद्दे पर आर-पार की जंगउत्तर प्रदेश की सियासत में तुष्टिकरण और ध्रुवीकरण का मुद्दा हमेशा से हावी रहा है। आधुनिक जनरेटिव एआई (AI) सर्च और डिजिटल मीडिया के इस दौर में नेताओं के बयान मिनटों में वायरल होकर जनता का मूड सेट करते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम योगी का यह बयान यूपी चुनाव में नैरेटिव को पूरी तरह बदल देगा। एक तरफ विपक्ष राम मंदिर के नाम पर बीजेपी को घेरने की जुगत में है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल ने विपक्ष को उनके पुराने कार्यकाल के 'कब्रिस्तान और श्मशान' वाले विवादों में घसीट कर अपना चुनावी एजेंडा साफ कर दिया है।
कभी हरी तो कभी गुलाबी: भारत की रहस्यमयी झील का विज्ञान, जिसने वैज्ञानिकों को भी कर दिया है हैरान
भारत की प्राकृतिक संपदाओं में कई ऐसी जगहें हैं जो आज भी किसी अजूबे से कम नहीं हैं। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित 'लोनार झील' दुनिया भर में अपनी अनूठी विशेषताओं के लिए जानी जाती है। यह न केवल एक प्राचीन उल्कापिंड के गिरने से बनी झील है, बल्कि इसका पानी समय-समय पर अपना रंग बदलकर गुलाबी या हरा हो जाता है। लोग इसे अक्सर किसी चमत्कार या धार्मिक मान्यता से जोड़ते हैं, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आखिर यह झील अपना रंग क्यों बदलती है, तो यह लेख आपके लिए है।आखिर क्यों बदलता है झील का रंग?वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, लोनार झील के रंग बदलने के पीछे मुख्य कारण इसमें मौजूद 'हेलोआर्चिया' (Haloarchaea) नामक सूक्ष्म जीव और खारापन है। जब झील के पानी का तापमान बढ़ता है और पानी का स्तर कम होता है, तो खारेपन की मात्रा काफी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में, पानी में मौजूद सूक्ष्म जीव और शैवाल (Algae) तेजी से पनपने लगते हैं और वे लाल या गुलाबी रंग का पिगमेंट छोड़ते हैं। यही वजह है कि अचानक से झील का नीला-हरा पानी गुलाबी या लाल नजर आने लगता है।उल्कापिंड से जुड़ा है इतिहासलोनार झील का निर्माण लगभग 52,000 साल पहले एक विशाल उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था। यह दुनिया की सबसे पुरानी बेसाल्टिक चट्टानों में बनी उल्कापिंडीय झील है। वैज्ञानिकों ने जब इस पानी का परीक्षण किया, तो पाया कि इसका क्षारीय (Alkaline) स्तर बहुत अधिक है। यह झील न केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी रहती है, क्योंकि यह पृथ्वी के प्रारंभिक पर्यावरण और अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी के दुर्लभ प्रमाण देती है।पर्यटन और शोध का केंद्रलोनार झील अब एक प्रमुख भू-वैज्ञानिक विरासत स्थल (Geo-heritage site) के रूप में विकसित हो चुकी है। हर साल दुनिया भर से भूगोल प्रेमी और पर्यटक यहाँ की अनूठी पारिस्थितिकी को देखने आते हैं। यहाँ की जैव विविधता इतनी समृद्ध है कि आसपास के क्षेत्र में कई दुर्लभ पक्षी और वनस्पतियां भी पाई जाती हैं। हालांकि, झील के संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों ने समय-समय पर चेतावनी दी है ताकि इसका इकोसिस्टम बना रहे। यदि आप महाराष्ट्र की यात्रा कर रहे हैं, तो बुलढाणा जिले का यह रहस्यमयी स्थल आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए।
बारिश में स्वर्ग जैसा अहसास: अलवर की सिलीसेढ़ झील, जहाँ बोटिंग और हरियाली बना देगी आपकी ट्रिप यादगार
राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सिलीसेढ़ झील मानसून के दौरान किसी जन्नत से कम नहीं लगती। अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसी यह झील बारिश में अपनी खूबसूरती के नए रंग बिखेरती है। चारों तरफ फैली हरियाली, बादलों से घिरी हुई पहाड़ियाँ और झील के शांत पानी में बोटिंग का अनुभव इस जगह को राजस्थान के सबसे पसंदीदा मानसून टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक बनाता है। अगर आप प्रकृति की शांति और सुकून भरी ट्रिप की तलाश में हैं, तो सिलीसेढ़ झील इस वीकेंड के लिए आपके लिए बेस्ट स्पॉट है।मानसून में जादुई हो जाती है सिलीसेढ़ की खूबसूरतीबारिश के मौसम में यहाँ का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। झील के चारों ओर अरावली की चोटियों पर छाई धुंध और पहाड़ों से गिरते छोटे-छोटे झरने किसी पेंटिंग की तरह दिखते हैं। पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही इसका किनारा और भी अधिक मनमोहक हो जाता है। यहाँ का वातावरण इतना ठंडा और ताजी हवाओं से भरा होता है कि यहाँ पहुँचते ही शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी का तनाव पल भर में छूमंतर हो जाता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मानसून में यह जगह किसी वरदान से कम नहीं है।बोटिंग और शानदार व्यू का आनंदसिलीसेढ़ झील की असली पहचान यहाँ की बोटिंग है। झील के नीले पानी के बीच बोट की सवारी करना एक अद्भुत अनुभव है। मानसून में जब चारों ओर हरियाली और ठंडी हवाएं चलती हैं, तो बोटिंग का मज़ा दोगुना हो जाता है। झील के किनारे बना 'लेक पैलेस' होटल इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगाता है। आप यहाँ बैठकर चाय और पकौड़ों के साथ बारिश का लुत्फ उठा सकते हैं। परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए इससे बेहतर जगह अलवर के पास और कोई नहीं है।कैसे पहुँचें और यात्रा के टिप्सअलवर शहर से सिलीसेढ़ झील की दूरी महज 15-20 किलोमीटर है, जहाँ आप अपनी कार या टैक्सी से आसानी से पहुँच सकते हैं। दिल्ली या जयपुर से आने वाले पर्यटकों के लिए अलवर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी पॉइंट है। मानसून में यहाँ भीड़ थोड़ी ज्यादा हो सकती है, इसलिए बेहतर होगा कि आप सुबह जल्दी पहुँचें। झील परिसर के पास खाने-पीने के अच्छे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन साथ में कुछ जरूरी सामान और छाता जरूर रखें ताकि बारिश में आपकी ट्रिप में कोई बाधा न आए। यह जगह वीकेंड गेटअवे के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
कूड़े के ढेर से बना 'ग्रीन पैराडाइज': नोएडा का यह अनूठा पार्क जल संरक्षण और खूबसूरती की बनी नई मिसाल
क्या आपने कभी सोचा है कि कचरे से पटे एक बदबूदार इलाके को शहर का सबसे खूबसूरत 'ईको-पार्क' बनाया जा सकता है? नोएडा के सेक्टर-91 स्थित यह पार्क आज शहर की एक ऐसी पहचान बन चुका है, जो न केवल हरियाली का स्वर्ग है, बल्कि जल संरक्षण की एक अद्भुत मिसाल भी पेश कर रहा है। कभी कूड़े के ढेरों से घिरी यह जगह आज हजारों पेड़-पौधों और वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है, जिसे देखकर शहर के अन्य इलाकों के लिए भी प्रेरणा की एक नई किरण जगी है।कचरे से कंचन: कूड़े के पहाड़ का कायाकल्पएक समय था जब इस क्षेत्र में सिर्फ गंदगी और कूड़े के ढेर नजर आते थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों की मेहनत ने इसे पूरी तरह से बदल दिया है। यहाँ कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निपटाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को वापस लौटाया गया। आज यहाँ सघन वृक्षारोपण के कारण एक छोटा सा जंगल विकसित हो चुका है, जो शहर के बढ़ते प्रदूषण के बीच शुद्ध ऑक्सीजन का केंद्र बना हुआ है। लोग यहाँ सुबह-शाम टहलने के लिए आते हैं और पर्यावरण की शुद्धता का अहसास करते हैं।जल संरक्षण की अनूठी तकनीकइस पार्क की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका 'वाटर हार्वेस्टिंग' सिस्टम है। यहाँ बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पार्क के चारों ओर बने तालाब और जल निकासी की व्यवस्था इस तरह से की गई है कि पानी जमीन के अंदर जाकर भूजल स्तर को रिचार्ज करता है। यह न केवल आसपास के इलाकों में पानी की कमी को दूर करने में मदद कर रहा है, बल्कि भीषण गर्मी में भी पौधों को जीवित रखने में सहायक सिद्ध हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए यह मॉडल पूरे देश के लिए एक केस स्टडी बन सकता है।खरगोशों की अठखेलियां और पर्यटन का केंद्रइस पार्क में हरियाली और जल संरक्षण के अलावा एक और खास आकर्षण है, जो बच्चों और बड़ों का मन मोह लेता है—यहाँ की खरगोश कॉलोनी! पार्क के विशेष क्षेत्रों में खरगोशों को स्वच्छंद रूप से घूमते और अठखेलियां करते देखना किसी एडवेंचर से कम नहीं है। प्राकृतिक वातावरण में इन नन्हें जीवों का बसेरा यह साबित करता है कि अगर हम प्रकृति को सहेजें, तो वह हमें दोगुना लौटाती है। यह पार्क अब न केवल एक पिकनिक स्पॉट है, बल्कि नोएडा का प्रमुख ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन भी बन चुका है।
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखी यह चौपाई केवल धर्म का उपदेश नहीं, बल्कि सत्ता, समाज और व्यवस्था—तीनों के लिए मर्यादा का संदेश भी है। परहित सबसे बड़ा धर्म है और किसी की आस्था को पीड़ा देना सबसे बड़ा अधर्म। आज अयोध्या की गलियों में यही भाव ...
बरसात का मौसम आते ही बाजारों में बैगनी रंग के रसीले जामुन दिखने लगते हैं। स्वाद में खट्टे-मीठे और सेहत के गुणों से भरपूर जामुन को आयुर्वेद में मानसून का सबसे बेहतरीन 'सुपरफूड' माना जाता है। न केवल इसका स्वाद लाजवाब है, बल्कि यह शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है। हालांकि, इतने फायदों के बावजूद हर किसी के लिए जामुन खाना सही नहीं होता। चलिए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है और मानसून में किन लोगों को इसे खाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।इम्यूनिटी बूस्टर और हृदय का रक्षकजामुन विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स का पावरहाउस है। मानसून के दौरान जब वायरस और बैक्टीरिया का खतरा बढ़ जाता है, तब जामुन का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें मौजूद पोटेशियम और मैग्नीशियम हृदय को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने और धमनियों को सुचारू रखने में सहायक होते हैं। इसका नियमित सेवन शरीर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ ही ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखता है।शुगर कंट्रोल और पाचन में जादुई प्रभावमधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए जामुन किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें मौजूद 'जामुनलीन' नामक तत्व ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा, जामुन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। बरसात में अक्सर होने वाली पेट संबंधी समस्याओं, जैसे अपच या दस्त में भी जामुन का सीमित सेवन राहत पहुँचा सकता है। इसमें मौजूद आयरन की प्रचुर मात्रा एनीमिया के रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होती है।सावधान! इन लोगों के लिए मुसीबत बन सकते हैं जामुनजामुन के फायदों के बाद यह जानना भी जरूरी है कि कुछ लोगों को इससे परहेज क्यों करना चाहिए। खाली पेट जामुन का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इससे पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा, जिन लोगों को हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल कम होना) की समस्या है, उन्हें जामुन खाने से बचना चाहिए क्योंकि यह शुगर को और कम कर सकता है। साथ ही, बहुत अधिक मात्रा में जामुन खाने से जोड़ों में दर्द या गले में खराश जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। हमेशा याद रखें कि जामुन को दूध के साथ या दूध पीने के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए।
बारामूला में यूएपीए मामले में जांच के तहत छापेमारी, पुलिस ने डिजिटल उपकरण किए सीज
जम्मू-कश्मीर की बारामूला पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए ) से जुड़े एक मामले की जांच के तहत जिले में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। मौके से कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं।
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कार्यक्षमता और हृदय की धमनियों में बदलाव आना स्वाभाविक है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, 40 की उम्र का पड़ाव वह समय होता है जब आपके हृदय की कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव और खान-पान में अनियमितता के कारण आजकल कम उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि यदि आप 40 के बाद अपनी जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर लें, तो दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं वे 7 जरूरी आदतें जो आपके दिल को लंबे समय तक जवान और स्वस्थ रखेंगी।रोजाना 30 मिनट का व्यायाम और सक्रियतादिल को स्वस्थ रखने का सबसे पहला मंत्र है शारीरिक सक्रियता। रोजाना कम से कम 30 मिनट का तेज चलना (ब्रिस्क वॉकिंग), योग, या कोई भी एरोबिक एक्सरसाइज हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। यह न केवल रक्तचाप को नियंत्रित रखता है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। यदि आप जिम नहीं जा सकते, तो सीढ़ियां चढ़ना या घर के काम में सक्रिय रहना भी हृदय गति के लिए फायदेमंद हो सकता है।खान-पान में सात्विक और पोषक तत्वों का संतुलनदिल की सेहत सीधे आपकी थाली से जुड़ी है। 40 के बाद अपने आहार से अत्यधिक नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट (जैसे तली-भुनी चीजें) को बाहर का रास्ता दिखाएं। अपनी डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और फलों को शामिल करें। अधिक फाइबर वाला भोजन धमनियों में ब्लॉकेज होने से रोकता है और हृदय तक रक्त का प्रवाह सुचारू बनाए रखता है।तनाव मुक्त जीवन के लिए योग और मेडिटेशनआज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण बन गया है। मानसिक तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो हृदय की धमनियों पर दबाव डालता है। दिन में कम से कम 10 से 15 मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) या डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। यह आपके नर्वस सिस्टम को शांत करता है और ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने में मदद करता है।नियमित हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंगअक्सर हृदय संबंधी समस्याएं शुरुआती दौर में कोई लक्षण नहीं दिखातीं। 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार फुल बॉडी चेकअप जरूर करवाएं। लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित मॉनिटरिंग आपको किसी भी संभावित खतरे के प्रति पहले से सचेत कर सकती है। समय पर पहचान ही हार्ट अटैक जैसी आपातकालीन स्थिति से बचने का सबसे प्रभावी रास्ता है।धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरीतंबाकू, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन हृदय की धमनियों को अंदर से सख्त और कमजोर बना देता है। यह धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए इन व्यसनों का पूरी तरह से त्याग करना ही एकमात्र विकल्प है।पर्याप्त नींद है अनिवार्यनींद की कमी का सीधा असर आपके हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है। जो लोग रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद नहीं ले पाते, उनमें उच्च रक्तचाप और हृदय रोग होने की संभावना अधिक होती है। सोते समय शरीर खुद की मरम्मत करता है और हृदय को आराम मिलता है। इसलिए, रात में जल्दी सोने और सुबह समय पर उठने की आदत डालें।वजन पर नियंत्रण और बॉडी मास इंडेक्स (BMI)बढ़ता हुआ वजन, विशेषकर पेट के आसपास की चर्बी, मेटाबॉलिक सिंड्रोम का संकेत है जो सीधे हृदय पर दबाव डालता है। अपना बीएमआई (BMI) चेक करते रहें और इसे एक स्वस्थ सीमा के भीतर बनाए रखें। वजन नियंत्रित रहने से हृदय को शरीर में रक्त पंप करने के लिए अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती, जिससे इसकी उम्र बढ़ती है।
आयुर्वेद में 'वन तुलसी' को साक्षात औषधि का भंडार माना गया है। सामान्य तुलसी से भिन्न, यह दुर्लभ जड़ी-बूटी जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पनपती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो वन तुलसी न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में सक्षम है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ भी एक सुरक्षा कवच का काम करती है। यदि आप भी प्राकृतिक उपचार में रुचि रखते हैं, तो वन तुलसी के ये औषधीय गुण आपके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।सर्दी, खांसी और सांस संबंधी रोगों में असरदारबदलते मौसम के साथ होने वाली सर्दी, जुकाम और सूखी खांसी में वन तुलसी का सेवन बेहद राहत प्रदान करता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल तत्व श्वसन नली में जमा कफ को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसके पत्तों का काढ़ा या चाय पीने से गले की खराश दूर होती है और फेफड़ों को मजबूती मिलती है। अस्थमा और सांस से जुड़ी अन्य परेशानियों में भी इसके अर्क का नियमित सेवन जादुई असर दिखाता है।त्वचा रोगों और संक्रमण से बचाववन तुलसी के पत्तों में एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि यह त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे दाद, खाज, खुजली और एक्जिमा में अत्यंत कारगर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाने से संक्रमण फैलने से रुकता है और त्वचा जल्दी ठीक होने लगती है। यह त्वचा को गहराई से डिटॉक्स करने का भी कार्य करती है, जिससे प्राकृतिक चमक बनी रहती है।ब्लैक फंगस जैसी समस्याओं में सुरक्षा कवचहाल के वर्षों में चर्चा में रही 'ब्लैक फंगस' जैसी फंगल इन्फेक्शन की समस्याओं के दौरान भी वन तुलसी के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। इसके बायो-एक्टिव कंपाउंड्स शरीर में हानिकारक सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, गंभीर बीमारियों में इसे केवल एक सहायक उपचार के रूप में देखा जाना चाहिए और चिकित्सक के परामर्श का पालन करना सर्वोपरि है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इसकी पत्तियों का सेवन या इसका पानी पीना शरीर के आंतरिक सिस्टम को फंगल हमलों से बचाने में सहायक हो सकता है।
मंदिर जाने का सही समय: सुबह, दोपहर या शाम? जानें कब दर्शन करने से मिलता है सबसे ज्यादा पुण्य
सनातन धर्म में मंदिर जाना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा को सकारात्मक बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि ईश्वर के दर्शन के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा है? शास्त्रों और वास्तु विज्ञान के अनुसार, मंदिर जाने का सही समय न केवल हमारे मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि पूजा का फल भी कई गुना बढ़ा देता है। यदि आप भी अपने इष्टदेव के दर्शन के लिए जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन नियमों और समय चक्र को जरूर समझें ताकि आपकी प्रार्थना सीधे परमात्मा तक पहुँचे।सुबह का समय: ऊर्जा और सकारात्मकता की शुरुआतधार्मिक दृष्टिकोण से मंदिर जाने का सबसे उत्तम समय 'ब्रह्ममुहूर्त' या सुबह का समय माना जाता है। सूर्योदय के समय जब मंदिर के कपाट खुलते हैं, उस समय वातावरण में सात्विक ऊर्जा का संचार सबसे अधिक होता है। इस समय मंदिर में जाकर की गई प्रार्थना और ध्यान मन को पूरे दिन के लिए शांत और केंद्रित रखता है। सुबह के समय शंखनाद और मंत्रोच्चार सुनने से मस्तिष्क में सकारात्मक तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक होती हैं।दोपहर और शाम: कब जाएँ और क्या है महत्वदोपहर का समय अक्सर मंदिरों में विश्राम या भोग का समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान दर्शन करने से बचना चाहिए। वहीं, शाम का समय यानी 'संध्याकाल' दीपक जलाने और आरती के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सूर्यास्त के बाद का समय देवी-देवताओं की पूजा और आत्म-चिंतन के लिए उत्तम है। इस समय मंदिर की घंटियों की ध्वनि और जलते हुए दीपों की रोशनी मन में छिपे अंधकार और नकारात्मक विचारों को दूर करने का कार्य करती है।मंदिर दर्शन के जरूरी नियममंदिर जाते समय केवल समय ही नहीं, बल्कि आचरण का भी ध्यान रखना अनिवार्य है। सदैव स्नान कर और स्वच्छ वस्त्र धारण करके ही मंदिर में प्रवेश करें। मंदिर जाते समय खाली हाथ न जाएं, श्रद्धा के साथ फूल या भोग लेकर जाना श्रेष्ठ माना जाता है। गर्भगृह में प्रवेश करते समय मन में पूर्ण समर्पण का भाव रखें और दर्शन के बाद शांति से कुछ देर मंदिर परिसर में बैठें। याद रखें, मंदिर का अर्थ ही 'मन का स्थिर होना' है, इसलिए वहां जाकर मोबाइल या बातचीत में समय बिताने के बजाय अपनी आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का प्रयास करें।
आध्यात्मिक ऊर्जा और तंत्र साधना के लिए सबसे विशेष माने जाने वाले गुप्त नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 15 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने वाली यह गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। हिंदू धर्म में वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्रि होती हैं, जो विशेष रूप से गुप्त सिद्धियों, मनोकामनाओं की पूर्ति और नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए समर्पित होती हैं।गुप्त नवरात्रि 2026: तिथि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्तइस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 को हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना के लिए 15 जुलाई को सुबह 05:45 से 07:22 बजे तक का समय सबसे शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो कि दोपहर 11:58 से 12:53 बजे तक रहेगा। यह समय साधना और पूजा-पाठ की शुरुआत के लिए अत्यंत फलदायी है।गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि और नियमगुप्त नवरात्रि का अर्थ ही है अपनी साधना को गुप्त रखना, इसलिए इस दौरान पूजा की प्रक्रिया को जितना संभव हो सके गोपनीय रखा जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजा स्थान पर कलश स्थापित करें। कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के नौ स्वरूपों और विशेष रूप से दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और मां के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा के दौरान पूरी तरह से सात्विक आहार का पालन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। अपनी साधना को किसी से साझा न करें, क्योंकि गुप्त नवरात्रि की शक्ति गोपनीयता में ही निहित होती है।आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्वआषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पर्व मुख्य रूप से तांत्रिकों, अघोरियों और उन भक्तों के लिए विशेष है जो जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करना चाहते हैं। इस दौरान मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी यानी दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। माना जाता है कि जो भक्त पूरे मन और श्रद्धा के साथ इन नौ दिनों में गुप्त रूप से मां की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह समय जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला माना गया है।
अशोक सिंह ने कांग्रेस छोड़ी, अनुशासन समिति के नोटिस से नाराज होकर दिया इस्तीफा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी सदस्य अशोक सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है। इस्तीफे में उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर नाराजगी जताते हुए इसे अपने फैसले की प्रमुख […] The post अशोक सिंह ने कांग्रेस छोड़ी, अनुशासन समिति के नोटिस से नाराज होकर दिया इस्तीफा appeared first on Sabguru News .
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का अनुभव ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। सोशल मीडिया और अपने ब्लॉग के जरिए फैंस के साथ लगातार जुड़े रहने वाले 'बिग बी' ने हाल ही में जीवन में सफलता पाने का एक अनमोल मंत्र साझा किया है। उन्होंने अपने करोड़ों चाहने वालों को सलाह दी है कि वे अपनी गलतियों से डरें नहीं, बल्कि उन्हें सीखने का जरिया बनाएं। अमिताभ के अनुसार, सफलता की राह आसान नहीं होती और उस सफर में ठोकरें खाना स्वाभाविक है, लेकिन जो अपनी गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ता है, वही अंत में विजेता बनता है। महानायक की यह सीख आज के युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है, जो अक्सर छोटी-छोटी असफलताओं से घबराकर अपना रास्ता बदल लेते हैं।क्यों जरूरी है गलतियों को अपनाना?अमिताभ बच्चन ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि हम अक्सर परफेक्ट बनने की कोशिश में नई चीजों को आज़माने से कतराते हैं। उन्होंने कहा कि 'सफलता के लिए यह बहुत जरूरी है कि आप गिरने से न डरें।' बिग बी का मानना है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर, चाहे वह करियर हो या व्यक्तिगत जीवन, गलतियां बहुत कुछ सिखाती हैं। वे आगे कहते हैं कि अगर आप कभी फेल नहीं हुए, तो इसका मतलब है कि आपने कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं की। उनके यह विचार आज के दौर में उस 'परफेक्शन' के दबाव को कम करने में मदद करते हैं, जिससे आज की युवा पीढ़ी गुजर रही है।सफलता का असली आधार और बिग बी का नजरियाअमिताभ बच्चन के इस 'लाइफ लेसन' को उनके फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। वे मानते हैं कि सफलता सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि उस रास्ते में आने वाली बाधाओं को पार करना और उनसे सीखना है। महानायक की यह सलाह न केवल करियर में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है, बल्कि यह मानसिक मजबूती भी प्रदान करती है। उन्होंने संकेत दिया है कि बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लगातार प्रयास और उन प्रयासों के दौरान होने वाली चूक को सुधारते रहना ही एकमात्र रास्ता है। जो लोग अमिताभ बच्चन की इस सलाह को जीवन में उतारते हैं, उनके लिए असफलता एक अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत बन जाती है।
'सतलुज' फिल्म पर अब आर-पार की लड़ाई: बैन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे दिलजीत दोसांझ
पंजाबी सुपरस्टार और ग्लोबल आइकन दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिल्म की रिलीज पर लगे बैन को चुनौती देते हुए अब मामला सीधे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। फिल्म के बैन के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें रिलीज पर लगी रोक को असंवैधानिक बताया गया है। दिलजीत दोसांझ के फैंस और फिल्म से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप कर फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचने का रास्ता साफ करेगी। वहीं, दूसरी तरफ फिल्म के कंटेंट को लेकर विरोध करने वाले पक्ष भी अपनी दलीलों के साथ तैयार हैं, जिससे यह मामला अब एक लंबी कानूनी जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है।क्यों हो रहा है विरोध और क्या है PIL का आधार?'सतलुज' फिल्म की कहानी और उसके संवेदनशील विषयों को लेकर कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस पर रोक लगा दी थी। हालांकि, याचिकाकर्ता का तर्क है कि सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद फिल्म को रोकना अभिव्यक्ति की आजादी का सीधा उल्लंघन है। PIL में इस बात पर जोर दिया गया है कि फिल्म को बिना देखे या केवल अनुमानों के आधार पर बैन करना गलत है। अदालत में अब यह बहस का मुख्य मुद्दा होगा कि क्या किसी फिल्म के कंटेंट से उपजे विरोध के कारण उसकी पूरी रिलीज को रोकना उचित है। यह सुनवाई न केवल दिलजीत दोसांझ की इस फिल्म के भविष्य को तय करेगी, बल्कि भविष्य में बनने वाली ऐसी फिल्मों के लिए भी एक नजीर (Precedent) साबित हो सकती है।पंजाब की राजनीति और दिलजीत के फैंस की निगाहेंपंजाब के साथ-साथ दिल्ली और अन्य राज्यों में भी दिलजीत दोसांझ के प्रशंसकों के बीच इस फिल्म को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है। सोशल मीडिया पर #ReleaseSatluj जैसे ट्रेंड्स के जरिए फैंस लगातार अपना समर्थन दिखा रहे हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का रुख इस मामले में बहुत कुछ स्पष्ट कर देगा। यदि अदालत याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो जाएगा, लेकिन यदि प्रशासन की दलीलें मजबूत रहीं, तो फिल्म का विवाद और गहरा सकता है। मामला अब पूरी तरह से न्यायपालिका के पाले में है और हर किसी की नजरें आने वाली सुनवाई की तारीख पर टिकी हैं कि आखिर कब 'सतलुज' पर्दे पर दस्तक देगी।
बॉलीवुड में अक्सर ऐसी फिल्में आती हैं जिनमें मुख्य स्टार का जादू चलता है, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसा कलाकार दस्तक देता है जो पर्दे पर अपनी मौजूदगी से बड़े से बड़े दिग्गज की चमक को भी चुनौती दे देता है। कुछ ऐसा ही हुआ एक फिल्म के सेकंड हाफ में, जहाँ एक नौसिखिया एक्टर की एंट्री ने पूरी कहानी का रुख मोड़ दिया। महज़ 40 मिनट के अपने किरदार के साथ इस कलाकार ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि स्क्रीन पर दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर जैसे मंजे हुए कलाकार की मौजूदगी को भी जबरदस्त टक्कर दे दी। इस अचानक आई एंट्री ने फिल्म की पूरी रेटिंग को बदल दिया और आज यह फिल्म अपनी दमदार परफॉर्मेंस के कारण IMDb पर शानदार रेटिंग के साथ दर्शकों की पसंदीदा बनी हुई है।सेकंड हाफ का मास्टरस्ट्रोक: जब एंट्री ने बदल दी फिल्म की किस्मतफिल्म की कहानी जब अपने चरम पर होती है, तब एक नए चेहरे का आना किसी भी फिल्म के लिए जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन इस फिल्म में उस नए कलाकार की एंट्री ने फिल्म में नई जान फूंक दी। नौसिखिया होने के बावजूद, उसने जिस सहजता के साथ अपने किरदार को निभाया, उसने आलोचकों को भी हैरान कर दिया। ऋषि कपूर जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ स्क्रीन शेयर करना कोई छोटी बात नहीं है, लेकिन इस एक्टर ने अपनी अदाकारी से साबित कर दिया कि स्टारडम से ऊपर भी कुछ है, और वह है 'प्योर टैलेंट'। दर्शकों को इस कलाकार का काम इतना पसंद आया कि आज भी सोशल मीडिया पर उस 40 मिनट के रोल की चर्चा कम नहीं होती।IMDb रेटिंग और दर्शकों का क्रेज: आखिर क्या है इस परफॉर्मेंस में खास?इस परफॉर्मेंस की सबसे बड़ी खूबी उसका 'नैचुरल' होना है। फिल्म का सेकंड हाफ जिस तरह से इस एक्टर ने संभाला, उसने न केवल फिल्म को एक इमोशनल गहराई दी बल्कि इसे एक क्लासिक का दर्जा भी दिला दिया। IMDb पर इस फिल्म को मिली बेहतरीन रेटिंग के पीछे सबसे बड़ा कारण इसी कलाकार का वह छोटा लेकिन प्रभावकारी रोल है। फिल्म की पूरी टीम का मानना है कि उस एक फैसले—यानी इस एक्टर को कास्ट करने का—ने फिल्म को औसत दर्जे से उठाकर ब्लॉकबस्टर कैटेगरी में खड़ा कर दिया। यदि आप आज भी उस फिल्म को देखेंगे, तो पाएंगे कि वह एक्टर महज़ 40 मिनट के लिए नहीं, बल्कि पूरी फिल्म की यादों पर छा जाने के लिए आया था।
कर्नाटक में एमयूवी और लॉरी की टक्कर में 7 लोगों की मौत, दो गंभीर घायल
कारवार। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में गुरुवार तड़के एक बहु उपयोगी वाहन (एमयूवी) की लॉरी से आमने-सामने की टक्कर में 7 लोगों की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा रात करीब 1.30 बजे येल्लापुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर अराबैल घाट […] The post कर्नाटक में एमयूवी और लॉरी की टक्कर में 7 लोगों की मौत, दो गंभीर घायल appeared first on Sabguru News .
सिर्फ 6 महीने की मेहनत और 80 लाख का पैकेज! 10 नौकरियों पर सिर्फ एक दावेदार
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद शानदार और रोमांचक खबर सामने आई है। बाजार में एक ऐसा क्षेत्र उभरकर सामने आया है जहाँ प्रतिभाओं की भारी कमी है, जिसके कारण यहां 10 नौकरियों के लिए बमुश्किल एक ही दावेदार मिल पा रहा है। इसका सीधा सा मतलब है कि यदि आपके पास सही कौशल है, तो नौकरी मिलना तय है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में स्किल्ड प्रोफेशनल्स को 80 लाख रुपये सालाना तक का भारी-भरकम पैकेज मिल रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सालों का इंतजार नहीं करना है, बल्कि मात्र 6 महीने की सही दिशा में की गई मेहनत आपको करियर के शिखर पर पहुंचा सकती है।क्यों है इस सेक्टर में भारी डिमांड और कम सप्लाई?इस सेक्टर में डिमांड और सप्लाई का अंतर इसलिए है क्योंकि तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है और बहुत कम लोग नए दौर की इन स्किल्स को सीख पा रहे हैं। कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो न केवल थ्योरी जानते हों, बल्कि रियल-टाइम प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव रखते हों। चाहे वह डेटा एनालिटिक्स हो, एडवांस्ड एआई इंटीग्रेशन हो या फिर स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग, जिन लोगों ने इन 6 महीनों में खुद को इंडस्ट्री-रेडी बना लिया है, उनके लिए सैलरी का पैमाना आसमान छू रहा है। यह उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो अपने करियर में एक बड़ा जंप लेना चाहते हैं और जिन्होंने अब तक अपनी मेहनत को सही दिशा नहीं दी थी।6 महीने में कैसे पाएं कामयाबी?इस सुनहरे मौके को भुनाने के लिए आपको किसी लंबी डिग्री के बजाय 'इंटेंसिव स्किल-बेस्ड' लर्निंग पर ध्यान केंद्रित करना होगा। पिछले कुछ समय में देखे गए ट्रेंड्स बताते हैं कि जो उम्मीदवार केवल रटने के बजाय व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge) पर काम करते हैं, उन्हें कंपनियां हाथों-हाथ ले रही हैं। यदि आप अगले 6 महीने पूरी लगन के साथ उन तकनीकों को सीख लेते हैं जिनकी बाजार में भारी कमी है, तो आप न केवल एक सुरक्षित करियर पाएंगे बल्कि आर्थिक रूप से भी एक बड़ा उछाल हासिल करेंगे। यह समय अपनी स्किल्स को अपडेट करने का है, क्योंकि बाजार में मंदी के बावजूद इन खास क्षेत्रों में टैलेंट की कमी बनी हुई है और कंपनियों का बजट भारी पैकेज देने के लिए तैयार है।
दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ChatGPT की क्रांति के बीच खड़ी है। हर तरफ यह चर्चा है कि क्या AI हमारी नौकरियों को खत्म कर देगा या फिर यह करियर बनाने का एक नया स्वर्ण युग लेकर आया है? आज के समय में मशीन लर्निंग (Machine Learning) और AI के क्षेत्र में स्किल्स की मांग आसमान छू रही है। जो युवा इन तकनीकों को समझ रहे हैं, वे न केवल लाखों का पैकेज पा रहे हैं, बल्कि भविष्य की बड़ी कंपनियों का आधार भी बन रहे हैं। क्या आप भी इस डिजिटल बदलाव का हिस्सा बनने को तैयार हैं? अगर आप अपने करियर को AI के साथ सुरक्षित करना चाहते हैं, तो यह सही समय है यह समझने का कि आखिर कौन सी स्किल आपको बाजार में सबसे आगे खड़ा करेगी।मशीन लर्निंग बनाम AI: किसे चुनें और कहाँ है पैसा?मशीन लर्निंग (ML) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वह हिस्सा है जहाँ कंप्यूटर डेटा से खुद सीखते हैं, जबकि AI एक बड़ा अंब्रेला टर्म है जिसमें मशीन लर्निंग के साथ-साथ न्यूरल नेटवर्क्स और डेटा प्रोसेसिंग भी शामिल है। अगर आप एक टेक्निकल करियर बनाना चाहते हैं, तो मशीन लर्निंग में कोडिंग और एल्गोरिदम की गहराई आपको किसी भी मल्टीनेशनल कंपनी में ऊंची सैलरी दिलाने की गारंटी दे सकती है। दूसरी तरफ, अगर आप जनरेटिव AI (जैसे ChatGPT के मॉडल) के साथ जुड़ते हैं, तो यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो क्रिएटिविटी और प्रॉब्लम सॉल्विंग में माहिर हैं। कंपनियां आज ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो न केवल AI मॉडल बनाना जानते हों, बल्कि उनके जरिए बिजनेस की समस्याओं को सुलझाना भी जानते हों।करियर में सफलता के लिए अपनाएं 'AI-First' दृष्टिकोणChatGPT के आने के बाद अब सिर्फ कोडिंग जानना ही काफी नहीं है, बल्कि अब 'प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग' और 'AI टूल इंटीग्रेशन' जैसी नई स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ी है। भविष्य उन लोगों का है जो AI को एक दुश्मन के रूप में नहीं बल्कि एक 'को-पायलट' के रूप में देखते हैं। यदि आप डेटा साइंस, पाइथन प्रोग्रामिंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) में महारत हासिल करते हैं, तो आप उन चुनिंदा लोगों में होंगे जिनकी डिमांड अगले दशक में सबसे ज्यादा होगी। यह केवल एक नौकरी पाने की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसा कौशल विकसित करने की है जो आपको ऑटोमेशन के दौर में अपरिहार्य बना दे। सफलता की कुंजी इसी में है कि आप आज ही इन उभरती हुई तकनीकों को सीखना शुरू करें।
आजकल युवाओं में टैटू बनवाने का क्रेज काफी बढ़ गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर पर बना एक छोटा सा टैटू आपके सरकारी नौकरी के सपने को तोड़ सकता है? अक्सर उम्मीदवार इस असमंजस में रहते हैं कि टैटू के साथ वे किन विभागों में आवेदन कर सकते हैं और कहाँ उन्हें रिजेक्शन का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय सेना (Indian Army), पुलिस बल और UPSC जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में टैटू को लेकर बेहद स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश हैं। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले इन नियमों को समझना बहुत जरूरी है, ताकि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन या मेडिकल टेस्ट के दौरान आपको किसी निराशा का सामना न करना पड़े।सेना और पुलिस भर्ती में टैटू के कड़े नियमभारतीय सेना और पुलिस सेवाओं में शारीरिक फिटनेस और अनुशासन को सर्वोपरि माना जाता है। सेना के नियमों के अनुसार, टैटू केवल शरीर के कुछ विशिष्ट हिस्सों पर ही मान्य हैं। उदाहरण के तौर पर, कोहनी से नीचे के अंदरूनी हिस्से या हथेली के पिछले हिस्से पर धार्मिक या छोटे टैटू की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते वे आपत्तिजनक न हों। यदि टैटू चेहरा, गर्दन या हाथ के बाहर के हिस्से पर है, तो इसे अक्सर अयोग्य माना जाता है। वहीं, राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों (CAPF) में भी टैटू को लेकर कड़ाई बरती जाती है। टैटू का आकार, उसकी स्थिति और उसका संदेश (जैसे किसी का नाम या कोई चिन्ह) मेडिकल बोर्ड द्वारा जांचा जाता है। यदि टैटू भड़काऊ है या उससे पहचान छिपने का अंदेशा है, तो उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।UPSC और सिविल सेवा में क्या है टैटू की नीति?UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षाओं (IAS, IPS, IFS) के नियम सेना की तुलना में थोड़े अलग हैं। प्रशासनिक सेवाओं में आपकी बुद्धिमत्ता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए एक छोटा या सामान्य टैटू आमतौर पर आपकी उम्मीदवारी को प्रभावित नहीं करता है। हालांकि, यदि आप IPS (इंडियन पुलिस सर्विस) के लिए चयनित होते हैं, तो आपको पुलिस नियमों के तहत कड़े मेडिकल मानकों से गुजरना होगा। यहाँ भी टैटू का शरीर के किस हिस्से पर होना और उसकी प्रकृति क्या है, यह मायने रखता है। यदि टैटू शालीन है और कोई गलत संदेश नहीं देता, तो यह आपकी नौकरी में बाधा नहीं बनता है। फिर भी, किसी भी सरकारी पद के लिए आवेदन करते समय टैटू को लेकर विभाग के आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिए गए 'Medical Standards' को ध्यान से पढ़ना ही सबसे सही रास्ता है।
आधुनिक दौर की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण दिल की बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। आज के समय में युवा भी तेजी से गंभीर हार्ट से जुड़ी परेशानियों और कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में अपने दिल की सेहत का ख्याल रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। अच्छी बात यह है कि दिल को अभेद्य और मजबूत बनाने के लिए आपको अपनी जिंदगी में कोई बहुत बड़े या कठिन बदलाव करने की जरूरत नहीं है।देश के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) डॉ. संजय भोजराज ने हाल ही में उन 6 बेहद आसान और असरदार नियमों का खुलासा किया है, जिन्हें वे अपने दिल को 100% फिट रखने के लिए खुद भी हर दिन बिना चूके फॉलो करते हैं।रात के भोजन के बाद 10 मिनट की वॉक और सुबह की जादुई धूप है जरूरीडॉ. संजय भोजराज के अनुसार, रात का भारी या हल्का भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने की गलती कभी न करें। डिनर के बाद कम से कम दस मिनट तक सामान्य गति से पैदल जरूर टहलें। यह छोटी सी आदत आपके भोजन को आसानी से पचाने में मदद करती है और रात के समय अचानक बढ़ने वाले ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को नियंत्रित रखती है।इसके साथ ही, सुबह सोकर उठने के बाद बेड-टी या कॉफी का कप थामने से पहले कुछ देर प्राकृतिक धूप में बिताने की आदत डालें। सुबह की ताजी धूप हमारे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) को संतुलित करती है, जिससे तनाव कम होता है और दिनभर के लिए भरपूर एनर्जी मिलती है।सिर्फ वजन ही नहीं, कमर के बढ़ते साइज पर रखें पैनी नजरअक्सर लोग वजन तोलने वाली मशीन पर अपना वजन देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन डॉक्टर का मानना है कि यह पैमाना अधूरा है। अगर आपके वजन के मुकाबले आपकी कमर के आसपास (Visceral Fat) चर्बी बढ़ रही है, तो यह सीधे तौर पर दिल की बीमारी के आने का अलार्म है। इसलिए केवल वजन कम करने के बजाय पेट और कमर की चर्बी को नियंत्रित करने और शरीर के समग्र स्वास्थ्य (Overall Fitness) को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।पौष्टिक भोजन में करें निवेश, भविष्य में दवाओं का खर्च होगा साफडॉ. भोजराज का एक बेहद सटीक सिद्धांत है— आज अच्छा भोजन चुनेंगे, तो भविष्य में महंगी दवाओं और डॉक्टरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे अच्छे और शुद्ध खानपान को शरीर के लिए सबसे बड़ा और सुरक्षित निवेश मानते हैं। अपनी दैनिक डाइट में पैकेटबंद और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह से बंद करके ताजे मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और ओमेगा-3 से भरपूर संतुलित भोजन को शामिल करें।साइलेंट किलर है मानसिक तनाव, मन खुश तो दिल भी रहेगा तंदुरुस्तआजकल की कॉपोरेट लाइफस्टाइल में तनाव (Stress) को एक सामान्य बात मान लिया जाता है, लेकिन यह दिल के लिए सबसे बड़ा साइलेंट किलर है। जब आप लगातार मानसिक तनाव या डिप्रेशन में रहते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ता है जो सीधे आपकी धमनियों पर दबाव डालता है। दिल की लंबी उम्र के लिए सिर्फ शरीर का ही नहीं, बल्कि मन का शांत और खुश रहना भी बेहद अनिवार्य है। इसके लिए मेडिटेशन या अपनी पसंद के शौक को समय दें।ऐसी वर्कआउट रूटीन चुनें, जिसे आप अगले 10 साल तक निभा सकेंफिटनेस के जोश में आकर अचानक जिम में जाकर भारी वजन उठाना या बेहद कठिन व्यायाम शुरू कर देना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। डॉक्टर की सलाह है कि हमेशा ऐसी शारीरिक गतिविधि या आदत चुनें, जिसे आप बिना थके सालों-साल मजे से जारी रख सकें। जिम की भारी कसरत के बजाय रोज 30 मिनट तेज गति से चलना, साइकिल चलाना, स्विमिंग या हल्का योग करना भी आपके हार्ट रेट को दुरुस्त रखने और दिल को हमेशा युवा बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।लक्षणों का इंतजार न करें, समय पर करवाएं प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअपहृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय भोजराज चेतावनी देते हुए कहते हैं कि दिल की अधिकांश बीमारियां शरीर के भीतर कई साल पहले ही पनपना शुरू हो जाती हैं, लेकिन उनके गंभीर लक्षण (जैसे सीने में दर्द या सांस फूलना) काफी बाद में दिखाई देते हैं। इसलिए किसी अनहोनी या लक्षण का इंतजार करने के बजाय 30 की उम्र के बाद नियमित रूप से अपना लिपिड प्रोफाइल, ब्लड प्रेशर और प्रिवेंटिव हार्ट चेकअप करवाते रहना ही सबसे समझदारी भरा और सुरक्षित कदम है।
भारत में क्रिप्टो करेंसी का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है और मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 3.9 करोड़ निवेशक डिजिटल एसेट्स के बाजार में सक्रिय हैं। निवेश के इस बढ़ते चलन के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर निवेशकों को आगाह किया है। केंद्रीय बैंक की यह नई चेतावनी उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो क्रिप्टो में अपना पैसा लगा रहे हैं। RBI ने बार-बार स्पष्ट किया है कि क्रिप्टो करेंसी का कोई वास्तविक अंतर्निहित मूल्य नहीं होता है और ये पूरी तरह से बाजार के जोखिमों के अधीन हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इस तरह के निवेश में पारदर्शिता की कमी और अत्यधिक अस्थिरता आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।क्यों चिंतित है RBI और क्या है बड़ा रिस्क?भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट और गाइडलाइंस के माध्यम से कई बार यह दोहराया है कि क्रिप्टो करेंसी न तो कानूनी टेंडर है और न ही इसे भारत में मुद्रा के रूप में मान्यता प्राप्त है। RBI के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि क्रिप्टो बाजार में होने वाली अचानक गिरावट किसी भी निवेशक का पोर्टफोलियो चंद मिनटों में शून्य कर सकती है। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी चिंताएं भी केंद्रीय बैंक की प्राथमिकताओं में हैं। भारत के करोड़ों निवेशकों को चेतावनी देते हुए RBI ने यह भी कहा है कि इस डिजिटल एसेट क्लास में निवेश करने से पहले निवेशक को पूरी तरह से इसके तकनीकी और आर्थिक जोखिमों को समझ लेना चाहिए। यदि आप क्रिप्टो में निवेश कर रहे हैं, तो किसी भी प्रकार की 'FOMO' (छूट जाने का डर) में आकर निर्णय लेने के बजाय पूरी सावधानी बरतें।डिजिटल एसेट निवेशकों के लिए जरूरी सुझावबाजार विशेषज्ञों और वित्तीय सलाहकारों का भी यही मानना है कि RBI की यह चेतावनी निवेशकों को सुरक्षित रखने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते भारत में, क्रिप्टो के साथ-साथ सरकार समर्थित डिजिटल रुपया (e-Rupee) पर ध्यान केंद्रित करना अधिक सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। यदि आप क्रिप्टो में निवेश जारी रखना चाहते हैं, तो हमेशा केवल अधिकृत और सुरक्षित प्लेटफार्मों का ही उपयोग करें। किसी भी अनजान स्कीम या लुभावने वादों वाले क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स से दूर रहें, क्योंकि इनमें फ्रॉड की संभावना सबसे अधिक होती है। याद रखें कि निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, और क्रिप्टो के मामले में यह जोखिम कहीं अधिक है।
आज भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में आज सुबह से ही खरीदारी का माहौल बना हुआ है, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स आज 500 अंकों की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। बाजार के इस सकारात्मक रुख के पीछे वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता को मुख्य कारण माना जा रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में आ रही इस तेजी ने निवेशकों के बीच विश्वास पैदा किया है, जिससे चुनिंदा मिडकैप और लार्जकैप शेयरों में भी रौनक देखी जा रही है।बाजार में तेजी का कारण और निफ्टी का नया पड़ावबाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी का 24,000 के ऊपर टिके रहना एक मजबूत संकेत है। यदि बाजार इसी गति को बनाए रखता है, तो आने वाले दिनों में नए उच्चतम स्तर देखने को मिल सकते हैं। सेंसेक्स में 500 अंकों की उछाल के पीछे बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर का बड़ा योगदान रहा है। बाजार की इस तेजी के दौरान चुनिंदा स्टॉक्स में मुनाफावसूली का दौर भी चल रहा है, लेकिन कुल मिलाकर मार्केट का सेंटीमेंट 'बुलिश' बना हुआ है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार में किसी भी बड़ी हलचल के दौरान सतर्क रहें और अपने पोर्टफोलियो को सावधानी से मैनेज करें।Dr. Reddy’s में बड़ी गिरावट, निवेशकों की चिंता बढ़ीजहाँ एक ओर बाजार में हरियाली है, वहीं दूसरी ओर दिग्गज फार्मा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (Dr. Reddy’s Laboratories) के शेयरों में आज भारी दबाव देखने को मिल रहा है। कंपनी के शेयर आज के कारोबारी सत्र में करीब 6 फीसदी तक टूट गए हैं। इस गिरावट के पीछे बाजार में चल रही नकारात्मक खबरों और तिमाही नतीजों से जुड़ी उम्मीदों को मुख्य वजह बताया जा रहा है। अचानक आई इस गिरावट से फार्मा सेक्टर के निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और तकनीकी चार्ट को जरूर देखें।
बाढ़ या भूकंप में घर तबाह होने पर किरायेदार को नहीं देना होगा रेंट? जानिए क्या कहता है भारतीय कानून
देश के कई हिस्सों में अचानक आने वाली बाढ़, भूकंप, तूफान या आगजनी जैसी प्राकृतिक आपदाएं न केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि किराये पर रहने वाले लोगों के लिए भी बड़ा संकट खड़ी कर देती हैं। ऐसी आपातकालीन स्थिति में अक्सर किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच विवाद शुरू हो जाता है। सबसे बड़े सवाल यह उठते हैं कि क्या घर टूटने या बाढ़ का पानी भरने के बाद भी किराया देना होगा? सिक्योरिटी डिपॉजिट का क्या होगा और मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी? भारतीय कानून में इन सभी परिस्थितियों को लेकर बेहद स्पष्ट और कड़े नियम बनाए गए हैं, जो किरायेदारों को बड़ी राहत देते हैं।भारत में इस तरह के विवादों और अधिकारों को तय करने के लिए मुख्य रूप से दो कानूनी व्यवस्थाएं काम करती हैं— पहला 'ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट, 1882' और दूसरा आधुनिक समय का 'आदर्श किराया अधिनियम, 2021' (Model Tenancy Act)।ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट: क्या आपदा आते ही रेंट एग्रीमेंट खुद खत्म हो जाता है?यह केंद्रीय कानून पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू होता है, बशर्ते किसी राज्य का अपना विशिष्ट रेंट कंट्रोल कानून इससे अलग न हो। इस अधिनियम की धारा 108(B)(e) के तहत यह प्रावधान है कि यदि कोई किराये की संपत्ति बाढ़, आग, भूकंप या किसी अन्य प्राकृतिक या मानवीय आपदा (जैसे दंगा या हिंसा) के कारण आंशिक या पूरी तरह से नष्ट हो जाती है और वह रहने के योग्य नहीं रह जाती, तो किरायेदार के पास यह अधिकार होता है कि वह उस लीज एग्रीमेंट को तत्काल प्रभाव से रद्द (शून्य) मान ले।हालांकि, इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि आपदा आने पर रेंट एग्रीमेंट अपने आप या स्वतः समाप्त नहीं होता। यह पूरी तरह से किरायेदार की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह घर छोड़ना चाहता है या नहीं। अगर किरायेदार उसी क्षतिग्रस्त मकान में रुकने का फैसला करता है, तो उसे नियमित किराया देना होगा। यह नियम केवल तभी लागू होता है जब नुकसान बहुत बड़ा और स्थायी हो; छोटी-मोटी मरम्मत के आधार पर एग्रीमेंट रद्द नहीं किया जा सकता।मॉडल टेनेंसी ऐक्ट: उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु समेत इन राज्यों में किरायेदारों को मिली बड़ी सुरक्षावक्त के साथ रेंट नियमों को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मॉडल टेनेंसी ऐक्ट, 2021 तैयार किया था, जिसे अब उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और असम जैसे कई बड़े राज्यों ने अपने यहां लागू कर दिया है। इस नए कानून की धारा 15(6) किरायेदारों को बहुत बड़ी आर्थिक सुरक्षा देती है।इस कानून के मुताबिक, अगर प्राकृतिक आपदा की वजह से घर रहने लायक नहीं रह जाता है, तो मकान मालिक किरायेदार पर किराया देने का दबाव नहीं बना सकता। मकान मालिक को सबसे पहले उस संपत्ति की पूरी मरम्मत करानी होगी और उसे दोबारा रहने योग्य बनाना होगा। जब तक घर पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक की अवधि का किराया पूरी तरह माफ रहेगा।15 दिनों में लौटाना होगा सिक्योरिटी डिपॉजिट और इमरजेंसी में बिना नोटिस एंट्री के नियमअगर आपदा के कारण मकान पूरी तरह रहने योग्य नहीं बचा है या मकान मालिक उसकी मरम्मत कराने की स्थिति में नहीं है, तो किरायेदार घर खाली कर सकता है। ऐसी स्थिति में नोटिस की अवधि समाप्त होने के ठीक 15 दिनों के भीतर मकान मालिक को किरायेदार का पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट और एडवांस में लिया गया किराया वापस करना अनिवार्य है। यदि किरायेदार का कोई पिछला बकाया है, तो मकान मालिक उसे काट कर बाकी रकम लौटाएगा।इसके अलावा, इस कानून की धारा 5(3) कहती है कि अगर किसी किरायेदार का तय समय वाला (Fixed-term) रेंट एग्रीमेंट आपदा के दौरान ही खत्म हो रहा है, तो किरायेदार की गुजारिश पर मकान मालिक को उसे आपदा की स्थिति संभलने के बाद भी अगले एक महीने तक उसी पुरानी शर्तों पर घर में रहने की अनुमति देनी होगी।आमतौर पर मकान मालिक को किराये के घर में आने के लिए 24 घंटे पहले नोटिस देना होता है, लेकिन बाढ़ या भूकंप जैसी इमरजेंसी स्थिति में यह नियम लागू नहीं होता। ऐसी आपातकालीन स्थिति में मकान मालिक बिना किसी पूर्व नोटिस के भी सीधे परिसर में दाखिल हो सकता है।
क्रिकेट की हरी पिच हो या फिर क्रिकेट प्रशासन का हाई-प्रोफाइल बोर्ड रूम, 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' यानी सौरव गांगुली का नाम हमेशा सुर्खियों के केंद्र में रहता है। भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे आक्रामक और सफल कप्तानों में शुमार 'दादा' ने अपने 54वें जन्मदिन पर एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है, जिसने हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। जय शाह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने सौरव गांगुली को प्रतिष्ठित 'आईसीसी हॉल ऑफ फेम' में शामिल कर क्रिकेट जगत का सबसे बड़ा सम्मान दिया है। आईसीसी का यह फैसला न सिर्फ एक महान खिलाड़ी की विरासत को सलाम करता है, बल्कि उन आलोचकों को भी करारा जवाब है जो गांगुली और जय शाह के बीच कड़वाहट की मनगढ़ंत कहानियां बुन रहे थे।दिग्गजों के एलीट क्लब में शामिल हुए सौरव गांगुलीइस ऐतिहासिक सम्मान के साथ ही सौरव गांगुली अब भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा कालजयी खिलाड़ियों की विशेष कतार में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने विश्व पटल पर भारत की धाक जमाई थी। 'हॉल ऑफ फेम' का हिस्सा बनते ही दादा ने आधिकारिक रूप से सुनील गावस्कर, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर जैसे लेजेंड्स के एलीट क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली है। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले 'लॉर्ड्स' की बालकनी में टी-शर्ट लहराकर गोरे हुक्मरानों को उनकी औकात याद दिलाने से लेकर टीम इंडिया को विदेशों में जीत का हुनर सिखाने तक, गांगुली का यह सफर अब क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो चुका है।खेल भावना के आगे राजनीति ढेर, अफवाहों पर लगा पूर्णविरामजब सौरव गांगुली की बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष पद से विदाई हुई थी, तब सोशल मीडिया और गलियारों में कई तरह के राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिश की गई थी। कई विश्लेषकों ने इसे जय शाह और गांगुली के बीच की तथाकथित आपसी खींचतान का नतीजा करार दिया था। लेकिन आज जब जय शाह आईसीसी के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, तब उनके कार्यकाल में गांगुली को यह सर्वोच्च सम्मान मिलना खेल की शुद्धता को दर्शाता है। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि खेल के मैदान पर की गई तपस्या और बेजोड़ टैलेंट के आगे हर तरह के राजनीतिक दांव-पेंच और मनगढ़ंत अफवाहें घुटने टेक देती हैं।मैच फिक्सिंग के अंधेरे से निकालकर टीम इंडिया को निडर बनानाआईसीसी हॉल ऑफ फेम में गांगुली की यह शानदार एंट्री सिर्फ उनके बल्ले से निकले 18,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रनों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस बेखौफ 'लीडरशिप' का सम्मान है जिसने भारतीय क्रिकेट को सबसे कठिन दौर से बाहर निकाला था। साल 2000 में जब मैच फिक्सिंग के काले साए ने भारतीय क्रिकेट की साख को हिलाकर रख दिया था, तब दादा ने ही टीम की कमान संभाली और खिलाड़ियों में आंखों में आंखें डालकर लड़ने का जज्बा भरा। वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, जहीर खान और खुद महेंद्र सिंह धोनी जैसे मैच-विनर्स गांगुली की पारखी नजरों की ही देन हैं। साल 2003 वर्ल्ड कप का फाइनल हो या नेटवेस्ट सीरीज की ऐतिहासिक जीत, गांगुली ने हमेशा भारतीय टीम को फ्रंट से लीड किया।'हॉल ऑफ फेम' का गौरव पाने वाले 12वें भारतीय बने दादाइस अभूतपूर्व उपलब्धि को हासिल करने के साथ ही सौरव गांगुली 'आईसीसी हॉल ऑफ फेम' की प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाने वाले भारत के 12वें महान खिलाड़ी बन गए हैं। आईसीसी के इस सर्वोच्च मंच पर अब तक सम्मान पाने वाले भारतीय दिग्गजों की पूरी सूची इस प्रकार है:बिशन सिंह बेदी (2009)सुनील गावस्कर (2009)कपिल देव (2010)अनिल कुंबले (2015)राहुल द्रविड़ (2018)सचिन तेंदुलकर (2019)वीनू मांकड़ (2021)डायना एडुल्जी (2022)वीरेंद्र सहवाग (2023)नीतू डेविड (2024)एमएस धोनी (2025)सौरव गांगुली (2026)राजनीति में एंट्री को लेकर उड़ने वाली तमाम अफवाहों और अटकलों पर खुद सौरव गांगुली ने हमेशा के लिए विराम लगा दिया है। दादा ने स्पष्ट लहजे में कहा कि वे अपने जीवन में कभी भी किसी राजनीतिक मामले या दल का हिस्सा नहीं रहे हैं और उनका एकमात्र प्यार और ध्यान हमेशा क्रिकेट पर ही केंद्रित रहा है।
दिल्ली के रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत गिरने से तीन लोगों की मौत
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के रोहिणी सेक्टर-16 में एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत के ढ़हने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर को बचा लिया गया। बचाव अभियान बुधवार की शाम से अभी तक जारी है। मलबे से तीन शव बरामद किये गये और मृतकों की पहचान स्थानीय निवासी […] The post दिल्ली के रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत गिरने से तीन लोगों की मौत appeared first on Sabguru News .
भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतिक और लड़ाकू क्षमता का लोहा मनवाया है। रक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठित संस्था 'वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट' (WDMMA) द्वारा जारी ताजा 'ग्लोबल एयर पावर्स रैंकिंग' में भारतीय वायुसेना को दुनिया की छठी सबसे शक्तिशाली हवाई ताकत घोषित किया गया है। इस रैंकिंग का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि भारत ने अपने पड़ोसी और धुर विरोधी देश चीन को हवाई मारक क्षमता और आधुनिकता के मामले में पीछे छोड़ दिया है। वहीं, इस लिस्ट में पाकिस्तान की हालत बेहद पतली नजर आ रही है।दुनिया की टॉप एविएशन फोर्सेज में किसका है दबदबा और नंबर वन कौन?वैश्विक स्तर पर हवाई ताकत के मामले में महाशक्ति अमेरिका का एकतरफा दबदबा कायम है। दुनिया की टॉप-5 सबसे मजबूत एविएशन फोर्सेज में से चार अकेले अमेरिका की ही अलग-अलग विंग्स हैं। इस सूची में पहले स्थान पर यूनाइटेड स्टेट्स एयरफोर्स (USAF) है, जो 242.9 के सर्वोच्च 'ट्रू-वैल्यू रेटिंग' (TvR) स्कोर और 5,004 लड़ाकू व सहायक विमानों के साथ शीर्ष पर है।इसके बाद दूसरे नंबर पर अमेरिकी नेवी, तीसरे पर रूसी एयरफोर्स, चौथे पर अमेरिकी आर्मी और पांचवें स्थान पर अमेरिकी मरीन कॉर्प्स का कब्जा है। हालांकि, अगर सेनाओं की आंतरिक एविएशन विंग्स को हटाकर विशुद्ध रूप से केवल देशों की मुख्य वायुसेनाओं के बीच तुलना की जाए, तो अमेरिका और रूस के ठीक बाद भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी और शक्तिशाली वायुसेना के रूप में उभरता है।कम एयरक्राफ्ट होने के बाद भी ड्रैगन से आगे कैसे निकला भारत?आंकड़ों के लिहाज से यह मुकाबला बेहद दिलचस्प है। ओवरऑल रैंकिंग में भारतीय वायुसेना 69.4 TvR स्कोर के साथ छठे पायदान पर है, जबकि चीनी वायुसेना (PLAAF) 63.8 TvR स्कोर के साथ सातवें स्थान पर खिसक गई है। अगर सिर्फ विमानों की संख्या को देखें, तो चीन के पास 3,733 सक्रिय लड़ाकू विमान हैं, जो भारत के 1,716 विमानों के बेड़े से दोगुने से भी कहीं ज्यादा हैं। इसके बावजूद भारत ने चीन को तकनीकी रूप से मात दे दी है।इसकी मुख्य वजह WDMMA का मूल्यांकन करने का अनोखा फॉर्मूला है। यह संस्था केवल विमानों की गिनती नहीं करती, बल्कि 'ट्रू-वैल्यू रेटिंग' (TvR) के आधार पर सेना की वास्तविक मारक क्षमता को मापती है। इस फॉर्मूले में बेड़े का आधुनिकरण, लॉजिस्टिकल सपोर्ट, कठिन परिस्थितियों में ट्रेनिंग, हमला और रक्षा करने की रणनीतिक क्षमता के साथ-साथ फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर्स के सटीक संतुलन को परखा जाता है। भारतीय वायुसेना के पास 4.5 जनरेशन के सुखोई (Su-30MKI), फ्रांस निर्मित राफेल और स्वदेशी तेजस का ऐसा घातक और संतुलित मिश्रण है, जो युद्ध की स्थिति में चीन पर गुणात्मक रूप से भारी पड़ता है।टॉप-15 से भी बाहर हुआ पाकिस्तान, जानिए कहां ठहरती है पाक वायुसेनास्वयं को भारत के समकक्ष दिखाने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान की हवा इस ग्लोबल लिस्ट में पूरी तरह निकल चुकी है। पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) वैश्विक स्तर पर टॉप-10 या टॉप-15 में भी अपनी जगह सुरक्षित करने में नाकाम रही है। पूरी सूची में पाकिस्तान 879 सक्रिय एयरक्राफ्ट और महज 46.3 के कमजोर TvR स्कोर के साथ 18वें पायदान पर संघर्ष करता नजर आ रहा है, जो भारत की ताकत के सामने बेहद बौना है।भारतीय नौसेना और थल सेना की एविएशन विंग ने भी गाड़े झंडेWDMMA की इस विस्तृत रिपोर्ट में भारत की अन्य दो सेनाओं की हवाई ताकत की भी सराहना की गई है। भारतीय नौसेना (Indian Navy) की एविएशन विंग 232 विमानों और 41.2 TvR स्कोर के साथ दुनिया में 27वें स्थान पर है। वहीं, भारतीय थल सेना (Indian Army) की एविएशन यूनिट 540 विमानों और 30.0 TvR स्कोर के साथ 36वें स्थान पर मजबूती से टिकी है।तुलना की बात करें तो चीन की नेवी इस सूची में जरूर 15वें स्थान पर है, लेकिन 107 सैन्य इकाइयों वाली इस वैश्विक फिफ्टी-लिस्ट में पाकिस्तान की नेवी या आर्मी की एविएशन विंग अपनी जगह तक नहीं बना पाई हैं। यह ताजा रिपोर्ट साफ संदेश देती है कि आधुनिक दौर के आसमान में जंग केवल विमानों की 'संख्या' से नहीं, बल्कि 'सटीकता, गुणवत्ता और लड़ाकू अनुभव' से जीती जाती है।
पश्चिम बंगाल की सियासत और कानूनी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को एक बहुत बड़ी अंतरिम राहत दी है। अदालत ने पार्टी को अपने रोजमर्रा के खर्चों और कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए उन तीन बैंक खातों को इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है, जिन्हें हाल ही में डेबिट-फ्रीज कर दिया गया था। हालांकि, कोर्ट ने इस राहत के साथ एक बड़ी शर्त भी जोड़ी है। अब इन खातों का संचालन पूरी तरह से अदालत द्वारा नियुक्त एक विशेष अधिकारी की कड़ी निगरानी में किया जाएगा। हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने यह अहम फैसला सुनाते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।पूर्व जज की निगरानी में 30 सितंबर तक होगा खातों का कामकाजकलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत के पूर्व न्यायाधीश, जस्टिस सुब्रत तालुकदार को इन खातों के संचालन के लिए 'स्पेशल ऑफिसर' नियुक्त किया है। यह विशेष निगरानी व्यवस्था 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस केवल अपने बेहद जरूरी दैनिक खर्चों और दफ्तर के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए ही सीमित धनराशि निकाल सकेगी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इन खातों से किसी भी प्रकार के बड़े या संदेहास्पद वित्तीय लेन-देन की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी। इस काम के लिए स्पेशल ऑफिसर को 1.25 लाख रुपये का मानदेय दिया जाएगा, जिसका वहन कालीघाट स्थित ममता बनर्जी गुट वाली तृणमूल कांग्रेस को करना होगा।एफआईआर के तुरंत बाद एक्शन? पुलिस की 'जल्दबाजी' पर कोर्ट नाराजसुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बिधाननगर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की टाइमिंग और उसकी रफ्तार पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस बात को समझने में पूरी तरह असमर्थ है कि आखिर एफआईआर दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर पुलिस ने इतनी जल्दबाजी दिखाकर पार्टी के खातों को फ्रीज क्यों कर दिया। कोर्ट को पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई के पीछे कोई ठोस और न्यायसंगत आधार नजर नहीं आया, जिसके बाद ममता बनर्जी गुट को यह अंतरिम राहत प्रदान की गई।अभिषेक मनु सिंघवी की दलील: लोकतंत्र में 'समान अवसर' को खत्म करने की कोशिशअदालत में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की तरफ से देश के दिग्गज और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। सिंघवी ने दलील दी कि एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/क्षेत्रीय राजनीतिक दल के बैंक खातों को अचानक इस तरह पूरी तरह ठप कर देना सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(d) का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि ऐसी कार्रवाई से लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यानी 'समान अवसर' (Level Playing Field) पूरी तरह समाप्त हो जाता है। सिंघवी ने विरोधियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को पूरी तरह धुंधला और राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि दो दिन के भीतर बैंक खाते सील करना केवल दुर्भावनापूर्ण कदम है।क्या है 440 करोड़ रुपये का यह पूरा विवाद और ED का एंगल?यह पूरा मामला तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही भीषण अंदरूनी गुटबाजी और केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में पार्टी दो स्पष्ट धड़ों में बंटी नजर आ रही है, जिसमें एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि बागी धड़े की कमान विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के हाथों में है। विवाद एचडीएफसी बैंक की शाखाओं में मौजूद पार्टी के 3 खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये के फंड को लेकर है।रितब्रत बनर्जी के समर्थक 10 बागी विधायकों और पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने पुलिस में शिकायत की थी कि इस भारी-भरकम फंड का स्रोत अवैध वसूली और हालिया घोटाले हो सकते हैं। इसी शिकायत के आधार पर बिधाननगर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए खातों को फ्रीज किया था। इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत समानांतर जांच कर रहा है। ईडी का आरोप है कि टीएमसी के खातों से 'केयरवेल एविएशन' नाम की एक प्राइवेट कंपनी को चार्टर्ड फ्लाइट्स और वीआईपी हेलीकॉप्टर के लिए 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।असली TMC कौन? फिलहाल चुनाव आयोग के पाले में गेंदकलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में यह बेहद स्पष्ट कर दिया है कि ममता बनर्जी गुट को खातों से पैसे निकालने की अनुमति देने का मतलब यह बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि कोर्ट ने उन्हें असली तृणमूल कांग्रेस मान लिया है। अदालत ने कहा कि असली पार्टी और सिंबल का मालिकाना हक किसका है, इसका अंतिम फैसला भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष लंबित है और वही इस पर निर्णय लेगा। हाई कोर्ट ने यह भी साफ निर्देश दिया है कि जब तक चुनाव आयोग का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक बागी रितब्रत बनर्जी का गुट इस वित्तीय संचालन के मामले में स्पेशल ऑफिसर से किसी भी प्रकार का संपर्क या हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा।
Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम
Trip To London: जानकर अजीब-सा लगता है ना? लेकिन यह हकीकत है। ऐसा नहीं है कि ऐसा मैंने नहीं देखा, बल्कि वास्तविकता में भी है। होते हैं, लेकिन पूर्व सूचना के आधार पर, निर्धारित जगह पर, निश्चित समय पर। चारों तरफ पुलिस घेरे रहेगी, हेलिकॉप्टर से निगरानी ...
राजनीति और धर्म का मूल जीवन का अध्यात्म हैं!
डॉक्टर राममनोहर लोहिया ने कहा था राजनीति अल्पकालीन धर्म है और धर्म दीर्घकालीन राजनीति। राजनीति और धर्म ने काल के प्रवाह में जीवन को गहराई से सजाया संवारा और सतत मानव जीवन के समक्ष प्रस्तुत चुनौतियां का समाधान निकाला है। राजनीति और धर्म ने कमजोर से ...
भीलवाड़ा में ठगी और ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के शंभूगढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस ने नाता विवाह के नाम पर लाखों रुपए की ठगी और ब्लैकमेलिंग करने वाले एक कथित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी शादी के बाद नकदी और सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो जाते थे और […] The post भीलवाड़ा में ठगी और ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश appeared first on Sabguru News .
सरदार सरोवर परियोजना को लेकर गुजरात को किए जाने वाले भुगतान को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गर्मा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरदार सरोवर बांध से जुड़े मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के हितों की अनदेखी की जा रही ...
अमरीका का ईरान पर फिर हमला, चाबहार में बिजली अवसंरचना, अस्पताल प्रभावित
तेहरान। अमरीका ने ईरान के खिलाफ नये सैन्य हमले किए हैं, जिनमें दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार की बिजली अवसंरचना, बंदरगाह सुविधाओं और एक अस्पताल को नुकसान पहुंचा है। देश के अन्य दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में भी हमलों और विस्फोटों की सूचना मिली है। ईरानी मीडिया के अनुसार बुधवार को हुए हमलों में चाबहार की […] The post अमरीका का ईरान पर फिर हमला, चाबहार में बिजली अवसंरचना, अस्पताल प्रभावित appeared first on Sabguru News .
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना का 75 से 80 प्रतिशत कार्य हो चुका है पूरा : नितिन गडकरी
कोटा। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना में लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपए की लागत से 75 से 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा शेष कार्य भी तेजी से प्रगति पर है। गडकरी बुधवार देर शाम कोटा के गोपालपुरा मण्डाना में आमसभा को संबोधित […] The post दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना का 75 से 80 प्रतिशत कार्य हो चुका है पूरा : नितिन गडकरी appeared first on Sabguru News .
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और भारतमाला परियोजनाएं राजस्थान के विकास को देगी नई गति : भजनलाल शर्मा
कोटा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा विकसित की जा रही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे एवं भारतमाला जैसी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाएं राजस्थान के विकास को नई गति प्रदान करेंगी। शर्मा बुधवार देर शाम कोटा के गोपालपुरा मण्डाना में आमसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं […] The post दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और भारतमाला परियोजनाएं राजस्थान के विकास को देगी नई गति : भजनलाल शर्मा appeared first on Sabguru News .
गया : सड़क हादसे में कार में लगी आग, 2 लोग जिंदा जले
गया जी। बिहार के गया जिले में डोभी-पटना फोरलेन पर बीती देर रात एक सड़क हादसे में कार सवार दो लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि चालक गंभीर रूप से झुलस गया। यह हादसा बोधगया थाना क्षेत्र के सिजुआ गांव के पास बीती रात करीब 1:30 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खाद से […] The post गया : सड़क हादसे में कार में लगी आग, 2 लोग जिंदा जले appeared first on Sabguru News .
बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई, क्रिप्टो और चिटफंड निवेश मामलों में कई ठिकानों पर छापेमारी
पश्चिम बंगाल में ईडी ने क्रिप्टो निवेश, चिटफंड और फर्जी शेयर बाजार योजनाओं से जुड़े मामलों में दुर्गापुर, हावड़ा और नदिया सहित कई स्थानों पर छापेमारी की।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुए। नेताओं ने उनके सादगीपूर्ण जीवन, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा को याद किया।
चाबहार पोर्ट समेत ईरान के 90 ठिकानों पर अमेरिका की बमबारी, 3 लोग मरे; ईरान ने किया पलटवार
अमेरिका-ईरान सीजफायर खत्म! ट्रंप के आदेश पर चाबहार पोर्ट सहित ईरान के 90 ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी। जवाब में ईरान ने कुवैत-बहरीन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया। कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी।
Nitin Gadkari on Ethenol : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को इथेनॉलमिश्रित पेट्रोल (ई-20) नीति का जोरदार बचाव करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल नीति से उन्हें कोई व्यक्तिगत ...
दिल्ली से केरल तक भारी बारिश का कहर, रेल, सड़क और हवाई सेवाएं प्रभावित, राहत-बचाव अभियान तेज
देश के कई राज्यों में भारी मानसूनी बारिश से बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सड़क और रेल सेवाएं प्रभावित हैं तथा राहत-बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।
ई-20 पेट्रोल विवाद पर बोले गडकरी, कहा- एथनॉल नीति से मुझे कोई निजी लाभ नहीं
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ई-20 एथनॉल नीति से उन्हें कोई निजी लाभ नहीं होता। उन्होंने एथनॉल मिश्रण को किसानों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में आधी रात कांपी धरती, चार बार महसूस हुए भूकंप के झटके
महाराष्ट्र के हिंगोली, नांदेड़ और परभणी जिलों में तड़के चार बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। सबसे तेज झटके की तीव्रता 4.6 रही, जबकि किसी नुकसान की सूचना नहीं है।
ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) क्षेत्र में इस समय चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान एक अनोखा प्रशासनिक और सामाजिक विवाद सामने आया है। वोटर लिस्ट फॉर्म पर चिपकाई जाने वाली पासपोर्ट साइज तस्वीरों को लेकर मुस्लिम महिला मतदाताओं के बीच भारी असमंजस और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से हिजाब, बुर्का या सिर पर पारंपरिक स्कार्फ पहनने वाली महिलाओं में इस बात को लेकर गहरा सस्पेंस है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड और वोटर आईडी कार्ड के लिए दी जाने वाली तस्वीर में उनके कान दिखाई देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह मुद्दा तब और गंभीर हो गया जब अलग-अलग मतदान केंद्रों पर तैनात बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने महिलाओं को विरोधाभासी निर्देश देने शुरू कर दिए, जिससे पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता की मांग तेज हो गई है।बीएलओ के अलग-अलग बयानों से फैला भ्रम: ज़मीनी स्तर पर नियमों में एकरूपता की भारी कमीहैदराबाद के विभिन्न मुस्लिम बहुल इलाकों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों को खुद इस नियम की स्पष्ट जानकारी नहीं है। कुछ बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने महिलाओं को सख्त हिदायत दी है कि वे ऐसी तस्वीरें जमा करें जिसमें उनका सिर तो ढका हो लेकिन दोनों कान पूरी तरह साफ नजर आ रहे हों। इसके उलट, कई अन्य बीएलओ इस बात को लेकर पूरी तरह अनिश्चित दिखे और उन्होंने किसी भी तरह की फोटो स्वीकार करना शुरू कर दिया।मणिकोंडा की रहने वाली एक मुस्लिम महिला मतदाता आयशा फातिमा ने इस प्रशासनिक भ्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि पासपोर्ट, आधार या किसी भी अन्य मुख्य आधिकारिक दस्तावेज के लिए महिला आवेदक के कान साफ दिखने चाहिए। इसी सामाजिक धारणा और अधिकारियों के अलग-अलग बयानों के कारण महिलाओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके धार्मिक पहनावे के साथ सरकारी पहचान पत्र की फोटो का कोई टकराव है।बहादुरपुरा में सोशल मीडिया की अफवाहों ने बढ़ाई चिंता: बिना स्कार्फ और स्कार्फ वाली फोटो का घालमेलइस असमंजस का सबसे ज्यादा असर बहादुरपुरा विधानसभा क्षेत्र में देखा जा रहा है। वहां कार्यरत एक बीएलओ ने बताया कि सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक पोस्ट चल रहे थे, जिसके बाद से उनके पास महिलाओं के सवालों की बाढ़ आ गई है।वर्तमान स्थिति यह है कि महिलाएं पूरी तरह असमंजस में होने के कारण तीन अलग-अलग श्रेणियों की तस्वीरें जमा कर रही हैं—कुछ महिलाएं बिना स्कार्फ के सामान्य फोटो दे रही हैं, कुछ स्कार्फ के साथ कान दिखने वाली फोटो जमा कर रही हैं, तो कुछ ऐसी तस्वीरें भी दे रही हैं जिनमें सिर और कान दोनों पूरी तरह से ढके हुए हैं। बीएलओ फिलहाल केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि फोटो धुंधली न हो, लेकिन वे किसी को ठोस नियम बताने की स्थिति में नहीं हैं।चुनाव पंजीकरण अधिकारियों में भी मतभेद: वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्टीकरण का इंतजारयह भ्रम केवल आम जनता या बीएलओ तक सीमित नहीं है, बल्कि शीर्ष चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के स्तर पर भी दिशानिर्देशों को लेकर एकरूपता का भारी अभाव दिखा। जब प्रशासनिक स्तर पर इस नियम की पड़ताल की गई, तो तीन अलग-अलग अधिकारियों ने तीन अलग-अलग दलीलें दीं।एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से हिजाब में कान दिखने की अनिवार्यता को लेकर कोई विशेष या अलग से गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। वहीं, दूसरे अधिकारी ने कहा कि अगर फोटो में कान साफ दिखाई दे रहे हैं, तो वे उसे बिना किसी आपत्ति के तुरंत स्वीकार कर लेंगे। इसके विपरीत, तीसरे अधिकारी ने किसी भी तरह के विवाद से बचते हुए कहा कि वे इस संवेदनशील विषय पर अपने शीर्ष अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण लेने के बाद ही कोई आधिकारिक जवाब देंगे।जिला चुनाव अधिकारी आरवी कर्नन ने खत्म किया सस्पेंस: चेहरा साफ दिखना ही एकमात्र शर्ततस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों में चल रही सभी अटकलों और भ्रम पर विराम लगाते हुए आखिरकार जिला चुनाव अधिकारी (DEO) और जीएचएमसी कमिश्नर आरवी कर्नन ने पूरी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ और कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे में किसी भी नागरिक के धार्मिक पहनावे से निर्वाचन प्रक्रिया को कोई आपत्ति नहीं है।जिला चुनाव अधिकारी आरवी कर्नन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि मतदाता पहचान पत्र या नए पंजीकरण फॉर्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी बात यह है कि सभी तस्वीरें बिल्कुल साफ और उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। जब तक फोटो में संबंधित महिला मतदाता का चेहरा पूरी तरह से सामने से स्पष्ट, पहचानने योग्य और विजिबल दिख रहा है, तब तक कान दिखने या न दिखने से तस्वीरों की प्रामाणिकता पर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए और ऐसी सभी तस्वीरों को बिना किसी भेदभाव के तुरंत स्वीकार किया जाएगा।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या घटी, अयोध्या की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
Ram Mandir Theft Impact: विश्व में हिंदू आस्था का सर्वोच्च प्रतीक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, जिसे 550 वर्षों के लंबे संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद प्राप्त किया गया, आज एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम का सामना कर रहा है। श्रीराम लला की मंदिर व्यवस्था ...
नाश्ते में शामिल करें बेसन की ये 5 आसान और पौष्टिक रेसिपी, दिनभर शरीर में बनी रहेगी भरपूर एनर्जी
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग हमेशा ऐसे नाश्ते की तलाश में रहते हैं, जो स्वादिष्ट और पौष्टिक होने के साथ-साथ बेहद कम समय में झटपट तैयार हो जाए। इस मामले में बेसन एक बेहतरीन और सदाबहार विकल्प माना जाता है। शुद्ध चने की दाल से तैयार होने वाला बेसन भारतीय रसोइयों का एक मुख्य हिस्सा है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और कई जरूरी विटामिन व मिनरल्स पाए जाते हैं। सुबह के वक्त बेसन से बनी चीजों का सेवन करने से न केवल लंबे समय तक पेट भरा रहता है, बल्कि यह पाचन क्रिया को दुरुस्त कर शरीर को दिनभर के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। आइए जानते हैं बेसन से बनने वाले 5 सुपर-हेल्दी ब्रेकफास्ट ऑप्शंस और उन्हें बनाने का सही तरीका।1. बेसन चीला (Besan Chilla)यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर एक बेहद लोकप्रिय नाश्ता है। इसे बनाने के लिए बेसन में पानी, बारीक कटी प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया और स्वादानुसार हल्के मसाले मिलाकर एक पतला घोल तैयार कर लें। अब नॉन-स्टिक तवे पर बेहद कम तेल या घी का इस्तेमाल कर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक अच्छी तरह सेंक लें। यह वजन कंट्रोल करने वालों के लिए बेस्ट डाइट है।2. बेसन टोस्ट (Besan Toast)अगर आप सुबह ब्रेड खाना पसंद करते हैं, तो यह पारंपरिक ब्रेड-ऑमलेट का एक बेहतरीन शाकाहारी विकल्प है। बेसन में पानी, हल्दी, नमक, कटी हुई सब्जियां और मसाले मिलाकर एक बैटर बनाएं। अब मल्टिग्रेन या ब्राउन ब्रेड के स्लाइस को इस बैटर में अच्छे से डुबोकर तवे पर हल्के तेल के साथ दोनों तरफ से क्रिस्पी होने तक सेंक लें। इसमें आपको प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और सब्जियों का पोषण एक साथ मिल जाता है।3. बेसन ढोकला (Besan Dhokla)यह एक बेहद हल्का, नरम और आसानी से पचने वाला गुजराती नाश्ता है। इसे तैयार करने के लिए बेसन में थोड़ा सा दही, पानी और फर्मेंटेशन के लिए ईनो (फ्रूट सॉल्ट) मिलाकर एक स्मूथ घोल तैयार करें। अब इसे ढोकला मेकर या किसी सांचे में डालकर 15-20 मिनट के लिए भाप (Steam) में पकाएं। पकने के बाद इसके ऊपर राई, हरी मिर्च और करी पत्ते का हल्का तड़का लगाएं। बिना तेल का होने के कारण यह पेट के लिए बहुत फायदेमंद है।4. बेसन उत्तपम (Besan Uttapam)बेसन उत्तपम स्वाद और सेहत का एक शानदार फ्यूजन है। बेसन में पानी मिलाकर थोड़ा गाढ़ा घोल तैयार करें और उसमें भरपूर मात्रा में बारीक कटी प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च, कद्दूकस की हुई गाजर और हरा धनिया मिला दें। तवे पर इस मिश्रण को थोड़ा मोटा फैलाकर धीमी आंच पर दोनों तरफ से अच्छे से पकाएं। यह रंग-बिरंगी सब्जियों से भरपूर होने के कारण शरीर को जरूरी विटामिंस और मिनरल्स प्रदान करता है।5. बेसन पैनकेक (Besan Pancake)बच्चों के टिफिन या सुबह के नाश्ते के लिए बेसन पैनकेक एक स्वादिष्ट और हेल्दी डिश है। इसके बैटर को और पौष्टिक बनाने के लिए बेसन में पानी या दही के साथ कद्दूकस की हुई गाजर, बारीक कटी पालक, धनिया और चुटकी भर मसाले मिलाएं। तवे पर हल्के तेल के साथ छोटे-छोटे पैनकेक की तरह पकाएं। पालक और गाजर के मिलने से इसमें आयरन और विटामिन ए की मात्रा काफी बढ़ जाती है।बेसन को और ज्यादा न्यूट्रिशियस (पौष्टिक) कैसे बनाएं?यदि आप अपने बेसन के नाश्ते को एक सुपरफूड में बदलना चाहते हैं, तो इसमें कुछ अन्य हेल्दी चीजें भी मिला सकते हैं:सब्जियों का मेल: बेसन के साथ पालक, मेथी, गाजर, शिमला मिर्च और टमाटर जैसी ताजी सब्जियां मिलाने से फाइबर की मात्रा दोगुनी हो जाती है।प्रोटीन बूस्टर: बैटर के अंदर कद्दूकस किया हुआ पनीर, गाढ़ा दही या उबली हुई अंकुरित दालें (Sprouts) मिलाने से प्रोटीन कंटेंट काफी बढ़ जाता है।सुपर सीड्स: स्वाद और न्यूट्रिशन बढ़ाने के लिए आप चीले या उत्तपम के ऊपर तिल (Sesame), अलसी (Flaxseeds) या चिया सीड्स छिड़क सकते हैं, जो शरीर को हेल्दी फैट्स (ओमेगा-3) प्रदान करते हैं।बेसन का नाश्ता बनाते समय इन जरूरी बातों का रखें ध्यानबेसन की कोई भी डिश बनाते समय हमेशा कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि उसका पूरा फायदा शरीर को मिल सके। बेसन का घोल हमेशा ताजा ही बनाएं और उसे बहुत ज्यादा देर तक फ्रिज में रखने से बचें। डिश को तवे पर सेकते समय अत्यधिक तेल, बटर या घी का इस्तेमाल करने से परहेज करें, क्योंकि इससे नाश्ते की कैलोरी बढ़ जाती है और उसकी पौष्टिकता कम हो जाती है। इसके अलावा, स्वाद के चक्कर में ज्यादा नमक या तीखे मसालों का प्रयोग न करें। बेसन का सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में ही करें। यदि आपको चने, दालों या बेसन से किसी भी प्रकार की फूड एलर्जी है या कोई विशेष मेडिकल कंडीशन है, तो इसे अपनी रेगुलर डाइट में शामिल करने से पहले किसी डॉक्टर या सर्टिफाइड डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
प्याज भारतीय रसोई का एक बेहद अहम हिस्सा है। चाहे ग्रेवी वाली मसालेदार सब्जी हो, दाल का तड़का हो या फिर खाने के साथ कंचा सलाद— प्याज के बिना भारतीय व्यंजनों का स्वाद अधूरा सा लगता है। स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ प्याज हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, विटामिन बी6, फोलेट, पोटैशियम और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर इसे संतुलित डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। लेकिन, इस गुणकारी प्याज को काटना किसी जंग से कम नहीं होता, क्योंकि चाकू चलते ही आंखों से आंसुओं का सैलाब बहने लगता है। आइए जानते हैं कि आखिर प्याज काटने पर आंसू क्यों आते हैं और इससे बचने के आसान उपाय क्या हैं।आखिर प्याज काटते समय क्यों रोती हैं आंखें? जानिए विज्ञानप्याज काटने पर आंखों में होने वाली जलन और आंसुओं के पीछे एक पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रक्रिया काम करती है। असल में, जब हम चाकू से प्याज को काटते हैं, तो उसके अंदर मौजूद सूक्ष्म सेल्स (कोशिकाएं) टूट जाती हैं। सेल्स के टूटने से रासायनिक प्रतिक्रिया होती है और सिन-प्रोपैनेथियल-एस-ऑक्साइड ($Syn-propanethial-E-oxide$) नाम की एक खास सल्फर गैस हवा में रिलीज होती है।जब यह गैस उड़कर हमारी आंखों तक पहुंचती है, तो आंखों की सतह पर मौजूद प्राकृतिक नमी (पानी) के संपर्क में आते ही यह हल्का सा एसिड (सल्फ्यूरिक एसिड) बना देती है। इसी एसिड के कारण आंखों में तेज खुजली और जलन होने लगती है। इस जलन से खुद को बचाने और एसिड को धोने के लिए हमारा नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है और लैक्रिमल ग्लैंड्स (आंसू ग्रंथियों) को तेजी से पानी बनाने का आदेश देता है। यही वजह है कि हमारी आंखों से फटाफट आंसू निकलने लगते हैं।प्याज काटते समय आंसुओं से बचने के 5 आसान और घरेलू उपायअगर प्याज काटते समय आपकी आंखों से भी ज्यादा आंसू आते हैं, तो शेफ और वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए इन आसान किचन हैक्स को अपनाकर आप इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं:प्याज को फ्रिज में रखें (चिलिंग इफेक्ट): प्याज को काटने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले फ्रिज या ठंडे पानी में रख दें। तापमान कम होने के कारण प्याज के अंदर होने वाली रासायनिक प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे गैस बहुत कम मात्रा में निकलती है।हमेशा तेज धार वाले चाकू का इस्तेमाल करें: कम धार या कुंद चाकू से काटने पर प्याज के सेल्स बेरहमी से कुचल जाते हैं, जिससे ज्यादा मात्रा में गैस हवा में फैलती है। इसके विपरीत, एक बहुत तेज धार वाला चाकू स्मूथ कटिंग करता है और गैस को रिलीज होने से रोकता है।हवादार जगह या एग्जॉस्ट फैन के पास काटें: प्याज को हमेशा खुली और अच्छी वेंटिलेशन वाली जगह पर काटें। आप चाहें तो किचन की चिमनी या एग्जॉस्ट फैन को ऑन कर सकते हैं, जिससे निकलने वाली गैस आंखों तक पहुंचने से पहले ही बाहर खिंच जाएगी।जड़ वाले हिस्से (Root) को आखिर में काटें: प्याज के सबसे निचले यानी जड़ वाले हिस्से में सल्फर और गैस बनाने वाले एंजाइम्स की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसलिए प्याज को ऊपर से काटना शुरू करें और जड़ वाले हिस्से को सबसे अंत में काटकर अलग कर दें।प्रोटेक्टिव चश्मे का इस्तेमाल: अगर आपकी आंखें बहुत ज्यादा सेंसिटिव हैं, तो प्याज काटते समय आप साधारण पारदर्शी चश्मा या किचन गॉगल्स पहन सकते हैं। यह चश्मा गैस को सीधे आंखों के संपर्क में आने से रोकने के लिए एक दीवार का काम करता है।भूलकर भी न करें ये गलतियां; बढ़ सकती है परेशानीप्याज काटते समय कुछ आम गलतियों से बचना बेहद जरूरी है, वरना आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। कभी भी बंद या बिना वेंटिलेशन वाले कमरे में ढेर सारे प्याज एक साथ न काटें। सबसे जरूरी बात, प्याज काटते समय जब आंखों में जलन हो, तो अपने हाथों से आंखों को बार-बार रगड़ने की भूल बिल्कुल न करें; क्योंकि आपके हाथों और नाखूनों में प्याज का तीखा रस लगा होता है, जो जलन को कई गुना बढ़ा सकता है। आंखों को छूने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धो लें। अगर प्याज काटने के काफी देर बाद भी आंखों में तेज दर्द, लगातार पानी आना या लालिमा (Redness) बनी रहे, तो इसे सामान्य न समझें और तुरंत किसी आई स्पेशलिस्ट (डॉक्टर) से संपर्क करें।
देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने अपने ग्राहकों को एंटरटेनमेंट का बड़ा तोहफा देते हुए एक बेहद सस्ता और नया JioTV Pro Pack लॉन्च कर दिया है। मात्र 55 रुपये की कीमत वाले इस नए पैक के जरिए यूजर्स 'JioTV' मोबाइल ऐप पर 1000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स का आनंद ले सकते हैं। कंपनी ने इस प्लान को विशेष रूप से उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया है जो कम कीमत में सिर्फ और सिर्फ प्योर एंटरटेनमेंट का ऑप्शन तलाश रहे हैं। इस प्लान के साथ यूजर्स को पूरे 30 दिनों की वैलिडिटी (वैधता) मिलती है।जरूरी बात: इस प्लान को लेने से पहले ग्राहकों को यह ध्यान रखना होगा कि ₹55 वाले इस प्रो पैक में आपको डेटा (Data), कॉलिंग (Calling) या एसएमएस (SMS) जैसी कोई भी टेलीकॉम सुविधाएं नहीं मिलेंगी। यह पैक पूरी तरह से केवल लाइव टेलीविजन स्ट्रीमिंग पर फोकस करता है।16 भाषाओं में 150 से ज्यादा प्रीमियम चैनल्स का एक्सेसरिलायंस जियो के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस छोटे पैक में यूजर्स को 16 से ज्यादा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में 1000 से अधिक लाइव टीवी चैनल्स देखने को मिलेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस लिस्ट में 150 से ज्यादा प्रीमियम चैनल्स भी शामिल हैं। इसके तहत ग्राहक एंटरटेनमेंट, सुपरहिट फिल्में, देश-दुनिया की खबरें, बच्चों के कार्टून प्रोग्राम, लाइफस्टाइल और बेहतरीन रीजनल कंटेंट देख सकेंगे। इस पैक के जरिए यूजर्स JioStar, Sony Entertainment, Sun TV Network, Warner Bros. Discovery और ETV जैसे बड़े ब्रॉडकास्टर्स के चैनल्स का लुत्फ उठा सकेंगे। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बजट प्लान में JioStar और Sony के स्पोर्ट्स (खेल) चैनल्स को शामिल नहीं किया गया है।कैसे करें एक्टिवेट? प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों के लिए उपलब्धइस सर्विस को शुरू करने की प्रक्रिया बेहद आसान और झंझट मुक्त है:₹55 वाले प्लान से अपना रिचार्ज सफल होने के बाद, यूजर्स को अपने स्मार्टफोन में सिर्फ 'JioTV' ऐप ओपन करना होगा।ऐप में अपने रजिस्टर्ड जियो मोबाइल नंबर को दर्ज कर ओटीपी (OTP) के जरिए लॉग इन करना होगा।इसके लिए किसी अलग या जटिल एक्टिवेशन प्रोसेस की जरूरत नहीं है, रिचार्ज होते ही सारे एलिजिबल प्रीमियम चैनल्स तुरंत अनलॉक हो जाते हैं।ये सब्सक्रिप्शन फिलहाल एक समय में एक मोबाइल डिवाइस (Single Screen) पर काम करेगा और जियो के प्रीपेड व पोस्टपेड, दोनों तरह के ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।आखिर किन यूजर्स के लिए सबसे बेस्ट है ये प्लान?यह नया प्रो पैक उन मोबाइल यूजर्स के लिए एकदम सटीक विकल्प है जो मुख्य रूप से अपने स्मार्टफोन पर ही टीवी सीरियल्स और लाइव शोज देखना पसंद करते हैं और जिन्हें अतिरिक्त डेटा या कॉलिंग रीचार्ज की जरूरत नहीं होती। चूंकि यह सिर्फ एक एड-ऑन एंटरटेनमेंट पैक है, इसलिए इस सर्विस का लाभ उठाने के लिए सब्सक्राइबर्स के पास पहले से ही कोई भी एक एक्टिव जियो प्रीपेड या पोस्टपेड बेस प्लान होना अनिवार्य है।
पिछले छह महीने वैश्विक और भारतीय निवेशकों के लिए बेहद उथल-पुथल भरे रहे हैं। पहले घरेलू इक्विटी मार्केट में मंदी आई और फिर अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते ग्लोबल स्टॉक मार्केट्स औंधे मुंह गिर गए। आमतौर पर जब शेयर बाजार गिरता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने-चांदी की तरफ भागते हैं क्योंकि इन दोनों एसेट क्लास में उल्टा संबंध (Inverse Relationship) होता है। लेकिन इस बार इतिहास ने खुद को नहीं दोहराया। मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरें न घटाने के कड़े संकेतों के चलते पिछले 6 महीनों में सोने की कीमतों में करीब 20% और चांदी में 43% की भारी गिरावट आई है। वहीं दूसरी ओर, युद्ध के दबाव से सेंसेक्स 11% और निफ्टी 8.6% तक टूट चुके हैं। जब कमाई के ये दोनों मुख्य रास्ते बंद हो गए, तब म्यूचुअल फंड की एक खास कैटेगरी 'मल्टी एसेट एलोकेशन फंड' (Multi-Asset Allocation Fund) निवेशकों के लिए संकटमोचक बनकर उभरी और तगड़ा मुनाफा कराया।सेबी के नियम और निवेश का पूरा गणितमार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के कड़े नियमों के अनुसार, मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के लिए यह अनिवार्य है कि वे कम से कम तीन अलग-अलग एसेट क्लास में से प्रत्येक में न्यूनतम 10% का निवेश (Allocation) बनाए रखें। ये तीन मुख्य साधन होते हैं:इक्विटी (Equity): शेयर बाजार में निवेश।डेट (Debt): फिक्स्ड इनकम और सरकारी सिक्योरिटीज।कमोडिटी (Commodity): सोना, चांदी या रियल एस्टेट (REITs)।चूंकि अलग-अलग समय पर हर एसेट क्लास का प्रदर्शन अलग होता है, इसलिए यह फंड ऑटोमैटिक तरीके से आपके रिस्क और रिटर्न को बैलेंस कर देता है।इन टॉप फंड्स ने पिछले 3 साल में दिया 20% तक का सालाना रिटर्नइस कैटेगरी में सबसे बड़ी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) संभालने वाले फंड्स ने इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को भी मात दे दी है। पिछले 3 सालों के प्रदर्शन की तालिका नीचे दी गई है:म्यूचुअल फंड का नामपिछले 3 साल का सालाना रिटर्न (CAGR)निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड19.92%एसबीआई (SBI) मल्टी एसेट एलोकेशन फंड17.50%आदित्य बिड़ला सन लाइफ मल्टी एसेट फंड17.40%मोतीलाल ओसवाल मल्टी एसेट फंड13.90%बार-बार पोर्टफोलियो बदलने के झंझट से मुक्तिमल्टी एसेट फंड का सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा यह है कि इसमें खुद निवेशकों को बाजार की चाल देखकर बार-बार अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस (बदलना) नहीं करना पड़ता। फंड मैनेजर बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए खुद ही पैसे को सही जगह शिफ्ट कर देते हैं। इससे निवेशकों का पैसा केवल उन एसेट्स में फंसने से बच जाता है जो पहले अच्छा कर रहे थे पर अब मंदी में हैं। यह फंड उन एसेट्स में भी सही समय पर एंट्री दिलाता है जिन्हें वर्तमान में बाजार पसंद नहीं कर रहा, लेकिन भविष्य में वे बंपर रिटर्न दे सकते हैं।बाजार के दिग्गजों की राय: पोर्टफोलियो डाइवर्सिफ़िकेशन के लिए यही है बेस्ट टाइमफाइनेंशियल एक्सपर्ट्स और बाजार के जानकारों का साफ मानना है कि यदि आप मौजूदा वैश्विक मंदी और युद्ध के हालातों में अपने निवेश को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) लाने का यह सबसे सही और सटीक समय है। मल्टी-एसेट फंड्स जोखिम को बहुत कम कर देते हैं क्योंकि जब इक्विटी और कमोडिटी दोनों नीचे जा रहे हों, तब डेट (Fixed Income) वाला हिस्सा आपके पोर्टफोलियो को भारी गिरावट से बचाए रखता है। नए और सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे लोगों के लिए यह हाइब्रिड मॉडल सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक नए और कड़े फैसले से देश के बड़े बैंकों को वित्तीय रूप से तगड़ा झटका लगने वाला है। बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ग्राहकों को भेजे जाने वाले कुछ विशेष SMS अलर्ट पर शुल्क वसूलने (SMS Charges) पर रोक लगने से बड़े बैंकों की सालाना फीस आय (Fee Income) में करीब 300 करोड़ रुपये तक की भारी कमी आ सकती है। हालांकि, केंद्रीय बैंक के इस कदम से देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें अपनी जेब से इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा।नियमों के पालन, जागरूकता और प्रचार वाले SMS अब मुफ्तRBI द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के मुताबिक, बैंक अब नियमों के पालन (Compliance), वित्तीय जागरूकता (Awareness) और प्रचार-प्रसार (Promotional) से जुड़े SMS अलर्ट के लिए ग्राहकों से किसी भी प्रकार का चार्ज नहीं वसूल सकते हैं। अब तक देश के अधिकांश सरकारी और निजी बैंक इन रूटीन संदेशों की लागत निकालने के नाम पर ग्राहकों के खातों से हर तिमाही (Quarterly) 15 से 18 रुपये तक का SMS शुल्क गुपचुप तरीके से काट लेते थे, जिस पर अब पूरी तरह ब्रेक लग गया है।₹500 तक के छोटे ट्रांजैक्शन पर SMS भेजना अब जरूरी नहींरिजर्व बैंक ने बैंकों को परिचालन लागत कम करने के लिए एक बड़ी छूट भी दी है। नए नियम के तहत, 500 रुपये या उससे कम के छोटे लेनदेन (Small Value Transactions) पर ग्राहकों को SMS अलर्ट भेजना अब कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं रहेगा। बैंक चाहें तो लागत बचाने के लिए इन छोटे ट्रांजैक्शन की सूचना SMS के बजाय अन्य डिजिटल माध्यमों से दे सकते हैं।हालांकि, ग्राहकों की सुरक्षा और बेहतर बैंकिंग अनुभव को ध्यान में रखते हुए HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े प्राइवेट बैंक फिलहाल इस सुविधा को पहले की तरह ही जारी रख सकते हैं। इन बैंकों का मानना है कि रीयल-टाइम SMS अलर्ट से बैंकिंग फ्रॉड (धोखाधड़ी) की आशंका काफी कम हो जाती है।एक बैंक को सालाना ₹360 करोड़ तक के नुकसान का अनुमानविशेषज्ञों का कहना है कि इस रोक के बाद बैंक SMS भेजने का पूरा खर्च सीधे ग्राहकों की जेब से नहीं निकाल पाएंगे। अनुमान के मुताबिक, यदि किसी बड़े बैंक के पास करीब 5 करोड़ एक्टिव और शुल्क देने वाले ग्राहक हैं, तो SMS चार्ज बंद होने से उस अकेले बैंक को सालाना लगभग 360 करोड़ रुपये की शुद्ध आय का नुकसान उठाना पड़ेगा। इस घाटे की भरपाई करने के लिए आने वाले दिनों में बैंक अकाउंट मेंटेनेंस चार्ज (AMC), मिनिमम बैलेंस पेनल्टी या अन्य हिडन शुल्कों को थोड़ा बढ़ा सकते हैं।टेलीकॉम कंपनियों का भी बिगड़ेगा गणित; WhatsApp और Google RCS बनेंगे विकल्पRBI के इस फैसले की आंच टेलीकॉम सेक्टर (दूरसंचार कंपनियों) तक भी पहुंचने वाली है। भारत में वर्तमान में हर महीने लगभग 60 से 80 अरब कमर्शियल (A2P) SMS भेजे जाते हैं, जिनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा बैंकों के छोटे मूल्य वाले ट्रांजैक्शन का होता है। यदि बैंकों ने 500 रुपये तक के लेनदेन पर SMS भेजना बंद या कम कर दिया, तो टेलीकॉम कंपनियों के SMS बिजनेस रेवेन्यू में भारी गिरावट आएगी।केंद्रीय बैंक ने इसके विकल्प के तौर पर बैंकों को Google RCS (रिच कम्युनिकेशन सर्विसेज), WhatsApp Business, इन-ऐप अलर्ट और मोबाइल पुश नोटिफिकेशन जैसे आधुनिक और सस्ते डिजिटल विकल्पों को आधिकारिक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की हरी झंडी दे दी है।
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी है। महंगाई के मोर्चे पर राहत देते हुए सरकार जल्द ही महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3 फीसदी का इजाफा करने जा रही है। नवीनतम औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आधिकारिक आंकड़ों ने इस बढ़ोतरी पर अपनी मुहर लगा दी है। इस नए संशोधन के बाद, जनवरी 2026 में मिलने वाले 60 फीसदी डीए के मुकाबले अब नया महंगाई भत्ता बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगा, जिससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और पेंशनभोगियों के खाते में आने वाली रकम में तगड़ी बढ़ोतरी होगी।कैसे तय होता है आपके डीए का पूरा गणित? जानिए फॉर्मूलासरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते का कैलकुलेशन किसी अनुमान पर नहीं, बल्कि श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा जारी होने वाले कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित एक विशेष गणितीय फॉर्मूले के तहत किया जाता है:$$DA\% = frac{ ext{12 महीने का औसत AICPI-IW (2001 बेस)} - 261.42}{261.42} imes 100$$चूंकि वर्तमान AICPI-IW का बेस ईयर (आधार वर्ष) 2016 है, इसलिए सटीक कैलकुलेशन के लिए पहले प्राप्त इंडेक्स को 2.88 से गुणा करके 2001 के बेस ईयर में बदला जाता है। इसी आधार पर कर्मचारियों का अंतिम महंगाई भत्ता तय होता है।मई के आंकड़ों से समझिए डीए का लाइव कैलकुलेशनश्रम ब्यूरो के नए आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में औद्योगिक श्रमिकों के लिए इंडेक्स बढ़कर 150.8 के स्तर पर पहुंच गया है। मई तक के पिछले 12 महीनों का औसत AICPI-IW निकाला जाए, तो यह 148.075 बैठता है।स्टेप 1 (2001 बेस में बदलाव): $148.075 imes 2.88 = 426.456$स्टेप 2 (फॉर्मूले में वैल्यू रखना): $frac{426.456 - 261.42}{261.42} imes 100$स्टेप 3 (घटाने पर वैल्यू): $frac{165.036}{261.42} imes 100$स्टेप 4 (भाग देने पर अंतिम परिणाम): $0.6313 imes 100 = 63.13\%$सरकारी नियमानुसार, महंगाई भत्ते को कभी भी दशमलव (Decimal) में नहीं, बल्कि निकटतम पूर्णांक (Nearest Round Figure) में घोषित किया जाता है। इसलिए मौजूदा आंकड़ों के आधार पर आपका डीए 63% तय हो चुका है, जो जनवरी के 60% से पूरे 3% अधिक है।8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर आई बड़ी टाइमलाइनमहंगाई भत्ते में इस बढ़ोतरी के साथ-साथ केंद्रीय कर्मचारियों की नजरें 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी समय-सीमा पर भी टिकी हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि नए पे-स्केल की आधिकारिक सिफारिशें अगले साल के अंत तक सामने आ सकती हैं। हालांकि, वेतन में होने वाली वास्तविक वृद्धि को जनवरी 2026 से ही प्रभावी (Retroactive) माना जाएगा।ऐसे में जब भी नया वेतन आयोग पूरी तरह से धरातल पर उतरेगा, तो कर्मचारियों को 18 से 24 महीने का एकमुश्त बंपर एरियर (Arrears) मिलने की प्रबल संभावना है। फिलहाल जुलाई का डीए संशोधन 7वें वेतन आयोग के तहत ही होगा, लेकिन भविष्य में 8वां वेतन आयोग लागू होने पर जुलाई से बनने वाले वित्तीय अंतर की भरपाई एरियर के जरिए कर दी जाएगी।दिवाली पर होगी आधिकारिक घोषणा, एरियर के साथ आएगी सैलरीकेंद्र सरकार नियमानुसार साल में दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई) महंगाई भत्ते को संशोधित करती है। हालांकि, केंद्रीय कैबिनेट से इसकी औपचारिक मंजूरी मिलने में अक्सर कुछ महीनों का वक्त लग जाता है। लेकिन कर्मचारियों को इससे कोई नुकसान नहीं होता, क्योंकि बढ़ी हुई दरें हमेशा 1 जुलाई से ही प्रभावी मानी जाती हैं।उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई के इस डीए संशोधन का आधिकारिक एलान सरकार द्वारा इस साल अक्टूबर में दिवाली के त्योहारी सीजन के आसपास किया जाएगा। त्योहारी मौसम में होने वाले इस एलान से कर्मचारियों के खातों में पिछले महीनों के एरियर के साथ-साथ बढ़ी हुई सैलरी का भुगतान एक साथ होगा, जो बाजारों में भी रौनक लाएगा।
अगर आप भी समाज सेवा या धार्मिक संस्थाओं में दान देकर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में धारा 80G के तहत टैक्स छूट (Tax Deduction) का दावा करते हैं, तो इस बार आपको पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहना होगा। आकलन वर्ष 2026-27 (AY 2026-27) के लिए जारी नए ITR फॉर्म में आयकर विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। अब 80G के तहत मिलने वाली छूट के लिए करदाताओं को अतिरिक्त और बेहद सटीक वित्तीय जानकारियां देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कड़े कदम का मुख्य मकसद दान के दावों का डिजिटल तरीके से सत्यापन (Cross-Verification) करना और फर्जी क्लेम के जरिए होने वाली टैक्स चोरी पर पूरी तरह रोक लगाना है।अब सिर्फ रसीद काफी नहीं; देना होगा IFSC कोड और ट्रांजैक्शन नंबरनए नियमों के मुताबिक, अब ITR फॉर्म में केवल यह लिख देना काफी नहीं होगा कि आपने किस संस्था को कितनी राशि दान में दी है। यदि आपने UPI, नेट बैंकिंग (NEFT/RTGS/IMPS) या चेक के जरिए डिजिटल माध्यम से कोई दान दिया है, तो आपको ITR दाखिल करते समय उस भुगतान का ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर (Transaction Reference Number) और जिस बैंक खाते से पैसा कटा है, उस बैंक का IFSC कोड भी दर्ज करना पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि आयकर विभाग अब आपके बैंक स्टेटमेंट के साथ दान की गई राशि के पूरे डिजिटल ट्रेल की सीधे जांच कर सकेगा।ITR-1 से लेकर ITR-4 तक के फॉर्म्स में हुआ बदलावआयकर विभाग ने यह नया खुलासा (Disclosure Clause) उन सभी प्रमुख ITR फॉर्म में जोड़ दिया है, जिनके जरिए टैक्सपेयर्स धारा 80G का क्लेम करते हैं। इनमें नौकरीपेशा लोगों के लिए ITR-1, कैपिटल गेन और अन्य आय वालों के लिए ITR-2, बिजनेस व प्रोफेशनल्स के लिए ITR-3 और प्रिजम्प्टिव इनकम वालों के लिए ITR-4 शामिल हैं। अलग-अलग फॉर्म के लेआउट के हिसाब से इसका प्रारूप थोड़ा बहुत अलग हो सकता है, लेकिन मांगी जाने वाली मुख्य जानकारियां सभी में बिल्कुल एक समान रहेंगी।आखिर क्यों सरकार को उठाना पड़ा यह सख्त कदम?टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर विभाग अब रिटर्न की स्क्रूटनी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस डेटा एनालिटिक्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। विभाग के पास आपके बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले डेटा का पूरा बैकअप होता है। ऐसे में यदि कोई टैक्सपेयर ITR में गलत, अधूरी या फर्जी जानकारी भरता है, तो एआई सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेगा। इससे न केवल आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग रुक जाएगी, बल्कि आपका टैक्स छूट का दावा भी सीधे खारिज कर दिया जाएगा और पेनल्टी का नोटिस घर आ सकता है।ITR फाइल करने से पहले ये 5 दस्तावेज रख लें पासअगर आप बिना किसी अड़चन के 80G का पूरा रिफंड और लाभ उठाना चाहते हैं, तो ऑनलाइन फॉर्म भरने से पहले ये दस्तावेज अपने पास जरूर रख लें:संबंधित संस्था द्वारा जारी की गई आधिकारिक दान की रसीद (Donation Receipt)।संबंधित वित्तीय वर्ष का बैंक स्टेटमेंट या पासबुक।डिजिटल पेमेंट का ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर।अपने बैंक का सही IFSC कोड।संस्था का PAN नंबर और यह जांच लें कि वह संस्था धारा 80G के तहत आयकर विभाग से मान्यता प्राप्त (Registered) है या नहीं।भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना फंस जाएगा रिफंडटैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि जरा सी लापरवाही आपके लिए भारी पड़ सकती है। ITR भरते समय कभी भी अनुमान या अंदाजे के आधार पर आंकड़े न लिखें। गलत ट्रांजैक्शन नंबर दर्ज करना, दान की तारीख या राशि में हेरफेर करना, या किसी ऐसी संस्था के नाम पर क्लेम करना जो 80G के लिए पात्र नहीं है, आपको मुश्किल में डाल सकता है। डिजिटल सत्यापन के इस नए दौर में सही और सटीक जानकारी देना ही आयकर विभाग के नोटिस और अतिरिक्त पूछताछ से बचने का एकमात्र तरीका है।
अगर आपने कभी सड़कों पर दौड़ती अलग-अलग गाड़ियों को ध्यान से देखा हो, तो एक बात जरूर आपके दिमाग में आई होगी। ज्यादातर हैचबैक (Hatchback) और एसयूवी (SUV) कारों के पीछे वाले शीशे (Windscreen) पर वाइपर लगा होता है, लेकिन लग्जरी और प्रीमियम दिखने वाली सेडान (Sedan) कारों में यह फीचर गायब रहता है। ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि शायद कंपनियां पैसे बचाने या लागत कम करने के लिए सेडान में रियर वाइपर नहीं देतीं। लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है। इसके पीछे ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का एक बहुत बड़ा तकनीकी और वैज्ञानिक कारण छिपा है। आइए इसे बेहद आसान भाषा में समझते हैं।1. एयरोडायनामिक्स (Aerodynamics) और कार का डिजाइनसेडान कारों में रियर वाइपर न होने की सबसे मुख्य वजह उसका एयरोडायनामिक डिजाइन है। सेडान कारों की बनावट 'थ्री-बॉक्स' (Three-Box) स्टाइल में होती है, जिसमें इंजन, पैसेंजर केबिन और बूट स्पेस (डिक्की) अलग-अलग झुकाव में होते हैं। इन कारों का पिछला शीशा एक सुचारू ढलान (Sloping Roofline) की तरह नीचे की ओर जाता है।जब कार तेज रफ्तार में सड़क पर दौड़ती है, तो सामने से आने वाली हवा गाड़ी की छत से होती हुई पिछले शीशे के ऊपर से बेहद तेजी और सीधे प्रवाह में निकल जाती है। हवा का यह तेज बहाव अपने साथ शीशे पर पड़ने वाली हल्की धूल, मिट्टी और बारिश की बूंदों को खुद-ब-खुद उड़ा ले जाता है। यानी कुदरती हवा ही सेडान के पिछले शीशे को साफ रखने का काम कर देती है।2. SUV और हैचबैक में क्यों जरूरी है रियर वाइपर?एसयूवी और हैचबैक कारों का पिछला हिस्सा (रियर प्रोफाइल) बिल्कुल सीधा या फ्लैट (Flat Vertical Back) होता है। जब ये गाड़ियां तेज रफ्तार में चलती हैं, तो इनके सीधे डिजाइन के कारण गाड़ी के ठीक पीछे हवा का दबाव अचानक बहुत कम हो जाता है, जिससे वहां एक लो-प्रेशर वैक्यूम जोन (Low-Pressure Vacuum Zone) बन जाता है।इस वैक्यूम के कारण कार के नीचे और पहियों से उड़ने वाली धूल, कीचड़, गंदगी और बारिश का पानी पीछे की तरफ गोल घूमते हुए सीधे रियर शीशे पर जाकर चिपक जाता है। इसके चलते ड्राइवर को रियर व्यू मिरर (IRVM) से पीछे का ट्रैफिक दिखना बंद हो जाता है। इसी गंदगी को साफ करने के लिए हैचबैक और एसयूवी में रियर वाइपर और वॉशर देना तकनीकी रूप से अनिवार्य हो जाता है।3. बूट स्पेस (डिक्की) और वाइपर मोटर की जगहएक व्यावहारिक कारण यह भी है कि सेडान कारों की डिक्की (Boot Space) पिछले शीशे के ठीक नीचे से शुरू होती है। रियर वाइपर को चलाने के लिए एक भारी-भरकम इलेक्ट्रिकल मोटर लगानी पड़ती है। हैचबैक और एसयूवी में इस मोटर को पिछले दरवाजे (Tailgate) के अंदर आसानी से फिट कर दिया जाता है। लेकिन सेडान में शीशे के ठीक नीचे डिक्की का ढक्कन होने के कारण वाइपर मैकेनिज्म और मोटर को इंस्टॉल करने के लिए पर्याप्त और सही जगह नहीं मिल पाती है।क्या पैसे बचाना है कंपनियों का मकसद?यह पूरी तरह एक मिथक (अफ़वाह) है कि कंपनियां पैसे बचाने के लिए ऐसा करती हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां गाड़ियों को डिजाइन करते समय एयरोडायनामिक्स, वजन संतुलन और ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) को प्राथमिकता देती हैं। जब कार का डिजाइन खुद ही शीशे को साफ रखने में सक्षम है, तो वहां बिना वजह रियर वाइपर लगाना कार की लागत, वजन और तकनीकी जटिलता को बढ़ाना होगा। यही वजह है कि लाखों रुपये की लग्जरी सेडान कारों में भी रियर वाइपर नहीं दिया जाता।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल (Ethanol-Blended Petrol) की आलोचना करने वालों को खुले मंच से चुनौती देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। एक सम्मेलन के दौरान गडकरी ने विरोधियों पर तीखा हमला बोला और पेट्रोल में 20% एथनॉल (E20) के मिश्रण से गाड़ियों को नुकसान पहुंचने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि ज्यादा एथनॉल मिश्रण को लेकर बाजार में जानबूझकर गलत जानकारी और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिसके पीछे कुछ खास हितों वाले लोगों का हाथ है।मक्के की कीमत 1200 से बढ़कर 2800 रुपये हुईनितिन गडकरी ने एथनॉल नीति से किसानों को हुए आर्थिक फायदों के आंकड़े पेश करते हुए कहा, “जब हमारी सरकार ने मक्के से एथनॉल बनाने का ऐतिहासिक फैसला किया था, तब बाजार में मक्के की कीमत महज ₹1,200 प्रति क्विंटल थी, जबकि उसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹1,800 प्रति क्विंटल था। लेकिन इस नीति के लागू होने के बाद, आज मक्के की बाजार कीमत बढ़कर ₹2,800 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।” केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि मक्के और गन्ने से एथनॉल उत्पादन के कारण अकेले उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में ₹45,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा पहुंचा है।₹22 लाख करोड़ के आयात बोझ से मिलेगी मुक्ति‘विकसित भारत’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि कोयला, डीजल और पेट्रोल जैसे जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) पर भारत की अत्यधिक निर्भरता देश के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है। भारत को अपनी ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए सालाना ₹22 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आयात (Import) पर खर्च करनी पड़ती है, जो सीधे तौर पर विदेशी हाथों में जाती है। इसके साथ ही इससे पर्यावरण को भी गंभीर खतरा होता है। ऐसे में आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वच्छ व स्वदेशी ऊर्जा को अपनाना बेहद जरूरी है।कारों में खराबी के दावों को दी खुली चुनौतीE20 ईंधन से इंजन खराब होने की अफवाहों पर कड़ा रुख अपनाते हुए गडकरी ने कहा, “देशभर में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के कारण किसी भी कार या दोपहिया वाहन में समस्या आने का एक भी सिंगल मामला सामने नहीं आया है। क्या पूरे देश में कोई एक भी ऐसी कार है जिसे इस पेट्रोल से दिक्कत हुई हो? अगर है, तो बस एक गाड़ी का नाम बताइए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने तय समय से पहले ही पेट्रोल में 20% एथनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिससे न केवल कच्चे तेल का आयात घटा है बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आई है।अब E85, E100 और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की तैयारीसड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में ग्रीन फ्यूल का दायरा बढ़ाने के लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 (CMVR) में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मुख्य मकसद सभी कैटेगरी की गाड़ियों के लिए 'फ्लेक्स-फ्यूल' (Flex-Fuel) और पूरी तरह से बायोफ्यूल पर चलने वाले इंजनों का रास्ता साफ करना है। सरकार का फोकस अब पेट्रोल में 85% एथनॉल मिश्रण वाले E85 ईंधन और लगभग 100% शुद्ध एथनॉल पर चलने वाली गाड़ियों के लिए E100 ईंधन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही पर्यावरण को बचाने के लिए B100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-CNG (H-CNG) मिश्रण के इस्तेमाल पर भी तेजी से काम चल रहा है।ब्राजील की तर्ज पर पेट्रोल पंपों पर मिलेंगे विकल्पएथनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्के, खराब चावल और बायोमास स्रोतों से किया जाता है। वर्तमान में भारत के पेट्रोल पंपों पर गाड़ी मालिकों के पास अलग-अलग तरह के ईंधन चुनने का विकल्प नहीं होता है, लेकिन सरकार अब ब्राजील की तर्ज पर नई व्यवस्था लाने पर विचार कर रही है। ब्राजील के कानून में ग्राहकों को पेट्रोल पंप पर अलग-अलग कीमतों और मिश्रण वाले फ्यूल चुनने की आजादी होती है, जहां ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन पर सरकार की तरफ से भारी टैक्स छूट और कम कीमत का फायदा मिलता है।परिवार पर लगे आरोपों पर गडकरी का करारा जवाबकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर अक्सर विरोधी यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनके परिवार के सदस्य चीनी मिलों और एथनॉल उत्पादन से जुड़े हैं, इसलिए वे इसे इतना बढ़ावा दे रहे हैं। इस आरोप पर स्थिति साफ करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही उनके परिवार के सदस्यों के पास चीनी मिलें हैं, लेकिन उनकी कंपनियां वित्तीय रूप से एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे यह काम अपने फायदे के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों किसानों को समृद्ध बनाने और भारत का पैसा भारत में रखने के लिए कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर की पवित्र अमरनाथ गुफा से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने देशभर के श्रद्धालुओं को मायूस कर दिया है। 57 दिनों तक चलने वाली इस पावन अमरनाथ यात्रा को शुरू हुए अभी महज कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग (हिमलिंग) लगभग पूरी तरह पिघल चुका है। 3 जुलाई से शुरू हुई इस यात्रा के शुरुआती 4 दिनों में ही 80 हजार से अधिक भक्तों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे, लेकिन 6 जुलाई को सामने आई तस्वीरों के मुताबिक हिमलिंग करीब 90 फीसदी तक गायब हो चुका है। इस घटना के बाद अब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।शिवलिंग का पिघलना इंसानी नियंत्रण से बाहर: सीएम उमर अब्दुल्लाहिमलिंग के समय से पहले पिघलने और बिना रजिस्ट्रेशन के पहुंच रहे श्रद्धालुओं के मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को अपनी बात रखी। सीएम उमर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, जहां तक शिवलिंग का सवाल है, यह कुदरत और भगवान का बनाया हुआ है। न तो आप और न ही मैं यह तय कर सकते हैं कि यह कितने समय तक रहेगा। इस बार यह पूर्ण आकार में छह दिन तक रहा, जो इंसानी नियंत्रण से परे है।बिना पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) यात्रा करने की कोशिश करने वाले लोगों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीर्थयात्रियों की संख्या पर पहले से ही एक सीमा (Cap) तय की है। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) इस नियम को लागू करने के लिए पूरी तरह बाध्य है और यह पूरी तरह से श्राइन बोर्ड का आंतरिक मामला है।इल्तिजा मुफ्ती ने उठाए सवाल: रोप-वे और अंधाधुंध भीड़ को बताया जिम्मेदारदूसरी तरफ, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने बाबा बर्फानी के समय से पहले अंतर्ध्यान होने पर गंभीर चिंता जताते हुए श्राइन बोर्ड के प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। इल्तिजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि अमरनाथ गुफा ग्लेशियरों और बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बेहद संवेदनशील (Eco-sensitive Zone) इलाके में स्थित है। हिंदुओं के लिए 12वीं सदी से अस्तित्व में रहे इस बेहद पवित्र स्थल के आसपास किए जा रहे गैर-जरूरी निर्माण कार्य, यात्रियों की भारी भीड़ और बड़ा रोप-वे प्रोजेक्ट पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।इल्तिजा मुफ्ती ने आगे कहा, अमरनाथ यात्रा हमारी साझा 'कश्मीरियत' की भावना से गहराई से जुड़ी है और श्रद्धालुओं का कश्मीर में हमेशा दिल से स्वागत है। लेकिन इस पवित्र परंपरा को लंबे समय तक अक्षुण्ण रखने के लिए श्राइन बोर्ड को अधिक सावधानी और समझदारी बरतनी होगी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक दौर ऐसा भी था जब यात्रा खत्म होने के बाद भी हिमलिंग काफी समय तक अपने प्राकृतिक स्वरूप में बना रहता था।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसी शख्सियतें हुई हैं, जिन्होंने सिर्फ फिल्में नहीं बनाईं, बल्कि पर्दे पर जज्बातों की जीवंत कविता लिखी है। एक ऐसा ही कालजयी नाम है— गुरु दत्त। ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’ और ‘साहब बीबी और गुलाम’ जैसी क्लासिक फिल्में देने वाले महान फिल्ममेकर गुरु दत्त की आज 9 जुलाई 2026 को बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर सिनेमाप्रेमी उनकी जिंदगी से जुड़े अनसुने पन्नों को पलट रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस 'गुरु दत्त' के नाम पर आज दुनिया फिदा है, वह उनका असली नाम था ही नहीं? उन्होंने एक शहर के प्रति अपनी बेपनाह मोहब्बत के चलते अपना नाम हमेशा के लिए बदल लिया था।'वसंत कुमार' से 'गुरु दत्त' बनने की बेहद दिलचस्प कहानीबहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि गुरु दत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। उनका जन्म बेंगलुरु (बेंगलोर) में हुआ था, लेकिन उनकी किस्मत का रुख किसी और ही शहर में बदलने वाला था। दरअसल, पिता की नौकरी के सिलसिले में उनका पूरा परिवार कोलकाता (तब कलकत्ता) शिफ्ट हो गया था। गुरु दत्त का बचपन और जवानी के शुरुआती दिन इसी सांस्कृतिक शहर की गलियों में बीते।कोलकाता की हवा में घुले साहित्य, कला और संगीत ने युवा वसंत कुमार के दिल-ओ-दिमाग पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि उन्हें बंगाली संस्कृति और भाषा से बेइंतहा मोहब्बत हो गई। इस शहर के प्रति अपने इसी गहरे जुड़ाव और सम्मान की खातिर उन्होंने अपना मूल नाम 'वसंत कुमार' त्याग दिया और अपना नया नाम 'गुरु दत्त' रख लिया, जो सुनने में पूरी तरह से एक बंगाली नाम प्रतीत होता है।कोलकाता की तंगहाली में सीखीं कोरियोग्राफी की बारीकियांकोलकाता का प्रभाव सिर्फ उनके नाम बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके भीतर छिपे संवेदनशील डायरेक्टर को तराशने में भी इस शहर का बड़ा योगदान था। आर्थिक तंगहाली के दौर में भी उन्होंने कला से अपना नाता नहीं तोड़ा। उन्होंने कोलकाता में रहते हुए मशहूर डांसर उदय शंकर की डांस एकेडमी में दाखिला लिया और कोरियोग्राफी की बारीकियां सीखीं। बंगाली समाज और वहां के सिनेमा के इसी गहरे प्रभाव ने आगे चलकर गुरु दत्त को एक ऐसा फिल्ममेकर बनाया, जो इंसानी दर्द और तन्हाई को पर्दे पर जीवंत कर देता था।मुंबई आगमन और ‘प्यासा’ से रचा नया इतिहासजब गुरु दत्त ने मायानगरी मुंबई का रुख किया, तो शुरुआत में उन्होंने बतौर कोरियोग्राफर और एक्टर संघर्ष किया। लेकिन उनका असली हुनर कैमरे के पीछे यानी निर्देशन में था। उन्होंने ‘बाजी’ और ‘आर पार’ जैसी कमर्शियल फिल्में बनाकर इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। लेकिन उन्हें असली वैश्विक पहचान तब मिली जब उन्होंने ‘प्यासा’ और ‘कागज के फूल’ जैसी बेहतरीन कल्ट फिल्में बनाईं। इन फिल्मों में दिखाया गया समाज का खोखलापन और प्यार की तड़प आज भी दुनिया भर के फिल्म स्कूलों में एक मिसाल की तरह पढ़ाई जाती है।अधूरा रह गया जिंदगी का सफर, तन्हाई में बीती रातेंगुरु दत्त पर्दे पर जितने कामयाब थे, उनकी निजी जिंदगी उतनी ही उलझी हुई और अकेलेपन से भरी रही। मशहूर प्लेबैक सिंगर गीता दत्त से शादी के बाद भी उनकी जिंदगी में सुकून नहीं लौट सका। काम के प्रति उनका पागलपन और पर्सनल लाइफ के तनाव ने उन्हें अंदर से खोखला कर दिया था। आखिरकार, साल 1964 में महज 39 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले गुरु दत्त ने अपनी जिंदगी का सफर भले ही बहुत जल्दी खत्म कर लिया हो, लेकिन सिनेमा के इतिहास में एक शहर की मोहब्बत में बदला गया उनका यह नाम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गया।
बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की मोस्ट अवेटेड स्पाई-थ्रिलर फिल्म ‘ऐल्फा’ (Alpha) के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को देखकर मंगलवार को लगा था कि शायद फिल्म की मुश्किलें अब कम हो रही हैं, लेकिन बुधवार के नतीजों ने मेकर्स की चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। फिल्म की रिलीज को 6 दिन पूरे हो चुके हैं और छठे दिन 'ऐल्फा' की कमाई अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। रिलीज के पहले वीकेंड में जिस तरह फिल्म ने रफ्तार पकड़ी थी, उसे देखकर लग रहा था कि यह अपने 100 करोड़ रुपये के बजट को आसानी से पार कर लेगी। लेकिन अब बजट निकालना ही फिल्म के लिए सबसे बड़ा टास्क बन गया है। अगर फिल्म बजट वसूलने में नाकाम रहती है, तो यह आलिया भट्ट के लिए बहुत बड़ा झटका होगा, क्योंकि उनकी पिछली फिल्म ‘जिगरा’ भी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई थी।छठे दिन औंधे मुंह गिरी कमाई, ऑक्यूपेंसी सिर्फ 10%फिल्म बॉक्स ऑफिस ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार (छठे दिन) ‘ऐल्फा’ के बिजनेस में मंगलवार के मुकाबले 32.9% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। फिल्म ने बुधवार को भारतीय बॉक्स ऑफिस पर महज 2.85 करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जबकि एक दिन पहले मंगलवार को इसका कलेक्शन 4.25 करोड़ रुपये था। देशभर में फिल्म के पास कुल 7,321 शोज हैं, लेकिन इसके बावजूद सिनेमाघरों में ऑक्यूपेंसी रेट (थिएटर भरने की रफ्तार) गिरकर सिर्फ 10 परसेंट रह गई है।6 दिनों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (कमाई का पूरा ब्यौरा)फिल्म की अब तक की कमाई पर नजर डालें तो पहले वीकेंड के बाद से इसके ग्राफ में लगातार गिरावट देखी जा रही है:पहला दिन (शुक्रवार): ₹9.25 करोड़दूसरा दिन (शनिवार): ₹11.50 करोड़तीसरा दिन (रविवार): ₹13.25 करोड़चौथा दिन (सोमवार): ₹3.85 करोड़पांचवां दिन (मंगलवार): ₹4.25 करोड़छठा दिन (बुधवार): ₹2.85 करोड़इस गिरावट के साथ ही 'ऐल्फा' का कुल नेट भारतीय बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 44.95 करोड़ रुपये हो चुका है। वहीं, अगर भारत में ग्रॉस कलेक्शन की बात करें तो यह आंकड़ा 53.59 करोड़ रुपये है। वर्ल्डवाइड (दुनियाभर से) कलेक्शन के मामले में फिल्म ने अब तक कुल 74.89 करोड़ रुपये की कमाई की है।क्या 'वार 2' की तरह फ्लॉप होने की राह पर है 'ऐल्फा'?यशराज फिल्म्स (YRF) के स्पाई यूनिवर्स के लिए यह समय काफी मुश्किलों भरा नजर आ रहा है। इससे पहले 450 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनी ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर स्टारर 'वार 2' (War 2) बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई थी, जिससे मेकर्स को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा था। अब आलिया भट्ट की 'ऐल्फा' भी उसी कगार पर खड़ी दिख रही है। अगर इस फिल्म को फ्लॉप के टैग से बचना है, तो इसे घरेलू बाजार में कम से कम अपना बजट (100 करोड़ रुपये) निकालना होगा ताकि यह कम से कम 'एवरेज' फिल्मों की कैटेगरी में शामिल हो सके। इससे पहले आई सलमान खान की 'टाइगर 3' फ्लॉप तो नहीं थी, लेकिन उसने भी उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं की थी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि फिल्म आने वाले वीकेंड में कितनी वापसी कर पाती है।
छोटे पर्दे पर अपनी शातिर निगाहों, टेढ़ी मुस्कान और बैकग्राउंड में बजने वाले खास ट्यून से घर-घर में 'कोमोलिका' के रूप में मशहूर हुईं एक्ट्रेस उर्वशी ढोलकिया आज 9 जुलाई 2026 को अपना 47वां जन्मदिन मना रही हैं। टीवी स्क्रीन पर भले ही उर्वशी ने वैम्प (खलनायिका) बनकर लोगों के दिलों में खौफ पैदा किया हो, लेकिन उनकी असल जिंदगी की कहानी किसी सुपरहिट इमोशनल फिल्म की हिरोइन जैसी है। आज उनके जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन का वह पन्ना, जब बेहद कम उम्र में उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।17 की उम्र में बनीं मां, 18 से पहले उजड़ गया संसारउर्वशी ढोलकिया की निजी जिंदगी शुरुआत से ही कड़े संघर्षों के बीच गुजरी है। जिस नादान उम्र में लड़कियां अपने करियर और पढ़ाई के सपने बुनती हैं, यानी महज 16 साल की उम्र में उर्वशी की शादी कर दी गई थी। शादी के तुरंत बाद वह प्रेग्नेंट हो गईं और जब वह सिर्फ 17 साल की थीं, तब उन्होंने दो जुड़वा बेटों— क्षितिज और सागर को जन्म दिया। लेकिन किस्मत का क्रूर खेल देखिए, बच्चों के जन्म के महज डेढ़ साल के भीतर ही पति से उनका रिश्ता हमेशा के लिए टूट गया। 18 साल की होने से पहले ही उर्वशी के कंधों पर बिना किसी सहारे के दो नन्हें बच्चों को अकेले पालने की भारी जिम्मेदारी आ गई थी।समाज के तानों और आर्थिक तंगी से लड़ीं अकेले जंगउस दौर में एक सिंगल मदर के लिए समाज में अकेले दो बच्चों की परवरिश करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लोगों के तीखे ताने, अकेलेपन का खौफ और पैसों की भारी किल्लत जैसी तमाम मुश्किलें उनके सामने दीवार बनकर खड़ी थीं। लेकिन उर्वशी ने कभी हार नहीं मानी और न ही अपनी किस्मत पर आंसू बहाए। अपने परिवार के सहयोग से उन्होंने टीवी इंडस्ट्री का रुख किया और छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत कर दिन-रात एक कर दिया। उन्होंने मेहनत के दम पर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि अपने दोनों बच्चों को एक शानदार परवरिश और बेहतरीन जिंदगी भी दी।जो बच्चे कभी थे जिम्मेदारी, आज वही हैं उनकी सबसे बड़ी ढालउर्वशी ढोलकिया का वही दर्दनाक और कठिन अतीत आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। उनके दोनों बेटे— क्षितिज और सागर अब बड़े हो चुके हैं और अपनी मां की ढाल बनकर हर मोड़ पर खड़े रहते हैं। अक्सर दोनों बेटे अपनी मां उर्वशी के साथ सोशल मीडिया पर फनी और प्यारे वीडियोज (Reels) शेयर करते रहते हैं, जिन्हें फैंस का भरपूर प्यार मिलता है। जो बच्चे कभी उनकी गोद में थे, आज वही उनके जीवन के सबसे मजबूत पिलर हैं।'कोमोलिका' से 'बिग बॉस' विनर बनने तक का सफरउर्वशी के करियर की बात करें तो एकता कपूर के कल्ट शो ‘कसौटी जिंदगी की’ में 'कोमोलिका' का आइकॉनिक किरदार निभाकर उन्होंने इतिहास रच दिया था। उनके इस किरदार की बराबरी आज तक कोई विलेन नहीं कर पाई है। इसके बाद उन्होंने 'बिग बॉस सीजन 6' में अपनी बेबाक और मजबूत पर्सनैलिटी से दर्शकों का दिल जीता और शो की विनर बनीं। आज उर्वशी ढोलकिया एक बेहद खुशहाल, आत्मनिर्भर और गर्व से भरी जिंदगी जी रही हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आ गया है। अगर आप समय पर और सही तरीके से अपना टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको इनकम टैक्स नोटिस, रिफंड में देरी, अतिरिक्त ब्याज और भारी जुर्माने जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आज के डिजिटल दौर में आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस डेटा एनालिटिक्स की मदद से हर एक टैक्सपेयर के डेटा की बारीक जांच कर रहा है। ऐसे में अनजाने में की गई एक छोटी सी गलती भी आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। आइए जानते हैं ITR भरते समय किन 15 मुख्य गलतियों से आपको हर हाल में बचना चाहिए।1. गलत कटौती (Deduction) या छूट (Exemption) का दावा करनाइन दिनों इनकम टैक्स विभाग ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा सख्त है। गलत सेक्शन में टैक्स कटौती दिखाना, बिना किसी पुख्ता सबूत या रसीद के हाउस रेंट अलाउंस (HRA) या अन्य छूट का दावा करना सीधे तौर पर टैक्स चोरी की श्रेणी में आता है, जिससे विभाग से तुरंत नोटिस आ सकता है।2. गलत ITR फॉर्म का चुनाव करनाटैक्सपेयर्स के लिए अपनी आय के स्रोत के अनुसार सही फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है:ITR-1 (सहज): यह फॉर्म उन नौकरीपेशा (Salaried) लोगों के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और उन्हें कोई कैपिटल गेन नहीं हुआ है।ITR-3: यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी आय का जरिया कोई बिजनेस या प्रोफेशन है।गलत फॉर्म चुनने पर आयकर विभाग आपके रिटर्न को अमान्य घोषित कर 'डिफेक्टिव नोटिस' जारी कर सकता है।3. गलत असेसमेंट ईयर (AY) भरनावित्तीय वर्ष (Financial Year) और असेसमेंट ईयर (Assessment Year) के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सही असेसमेंट ईयर 2026-27 होगा। गलत AY चुनने पर आपका टैक्स कैलकुलेशन बिगड़ जाएगा और आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है।4. व्यक्तिगत और बैंक जानकारी गलत दर्ज करनाITR फॉर्म में आपका नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्मतिथि और पैन (PAN) नंबर हमेशा आपके आधिकारिक पैन रिकॉर्ड के अनुसार ही होना चाहिए। इसके अलावा, यदि आपका कोई टैक्स रिफंड बनता है, तो अपना बैंक खाता नंबर और IFSC कोड बिल्कुल सही और वैलिडेटेड दर्ज करें, अन्यथा आपका रिफंड अधर में लटक सकता है।5. आय के सभी स्रोतों को छिपानाकई लोग सोचते हैं कि केवल सैलरी की जानकारी देना ही काफी है, जो कि बिल्कुल गलत है। आपको अपनी हर छोटी-बड़ी कमाई का ब्यौरा देना अनिवार्य है, जैसे—सेविंग अकाउंट और फिक्स डिपॉजिट (FD) से मिलने वाला ब्याजमकान या दुकान से आने वाली किराए की आय (Rental Income)शेयरों या म्यूचुअल फंड से मिला डिविडेंड और कैपिटल गेनयाद रखें, भले ही कोई आय टैक्स-फ्री (Tax-Free) दायरे में आती हो, फिर भी उसे रिटर्न में दिखाना जरूरी है।6. जानकारी को गलत फॉर्मेट में भरनाITR दाखिल करते समय तारीख जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को हमेशा तय फॉर्मेट यानी DD/MM/YYYY में ही भरें। गलत फॉर्मेट का उपयोग करने से सिस्टम सॉफ्टवेयर आपके रिटर्न में एरर (त्रुटि) दिखा देगा।7. Form 26AS से मिलान न करनारिटर्न सबमिट करने से पहले अपने Form 26AS और Form 16 का मिलान जरूर कर लें। अगर आपकी कंपनी या बैंक द्वारा काटा गया टीडीएस (TDS) आपके Form 26AS में रिफ्लेक्ट नहीं हो रहा है, तो आपको उस कटे हुए टैक्स का क्रेडिट (लाभ) नहीं मिल पाएगा।8. AIS और TIS की जांच न करनाआयकर विभाग के पास आपके हर बड़े वित्तीय लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड होता है, जो आपके Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) में दिखाई देता है। ITR भरने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी घोषित आय इन दोनों स्टेटमेंट से पूरी तरह मैच कर रही हो।9. दो कंपनियों के Form 16 का सही इस्तेमाल न करनायदि आपने संबंधित वित्तीय वर्ष के दौरान अपनी नौकरी बदली है और आपको दो अलग-अलग नियोक्ताओं (Companies) से Form 16 मिला है, तो आपको दोनों कंपनियों से मिली कुल सैलरी को जोड़कर ITR में दिखाना होगा। ऐसा न करने पर टैक्स देनदारी कम दिखती है, जिससे विभाग नोटिस भेजता है।10. एम्प्लॉयर के पास HRA का दावा न कर पानाअगर आप अपनी कंपनी में समय पर किराए की रसीद (Rent Receipts) जमा नहीं कर पाए थे और फॉर्म-16 में एचआरए छूट नहीं मिली है, तो घबराएं नहीं। आप सीधे ITR दाखिल करते समय भी HRA छूट का क्लेम कर सकते हैं, हालांकि इसके लिए मकान मालिक का पैन कार्ड नंबर देना आवश्यक हो सकता है।11. उपलब्ध टैक्स कटौतियों का फायदा न उठानाजागरूकता की कमी के कारण कई लोग आयकर कानून के तहत मिलने वाली विभिन्न वैध कटौतियों (जैसे हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस, आदि) का लाभ उठाना भूल जाते हैं। ITR फाइल करने से पहले सभी वैध कटौतियों को अच्छे से समझ लें ताकि कानूनी रूप से टैक्स बचाया जा सके।12. एडवांस टैक्स न भरना या देरी से भरनायदि आपकी कुल अनुमानित टैक्स देनदारी (TDS कटने के बाद) 10,000 रुपये से अधिक बनती है, तो आपको तिमाही आधार पर एडवांस टैक्स जमा करना होता है। इसमें देरी करने या कम भुगतान करने पर आयकर अधिनियम के तहत 1% प्रति माह की दर से दंडात्मक ब्याज देना पड़ता है।13. समय पर ITR का ई-वेरिफिकेशन न करनाITR फॉर्म को ऑनलाइन सबमिट करना ही प्रक्रिया का अंत नहीं है। रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना अनिवार्य है। आप इसे नेट बैंकिंग, बैंक खाता नंबर, ओटीपी या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के जरिए आसानी से कर सकते हैं। ऐसा न करने पर आपका भरा हुआ ITR अमान्य (Invalid) माना जाएगा।14. Schedule AL की जानकारी न देनायदि आपकी वार्षिक कुल आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है, तो आपके लिए ITR में 'Schedule AL' भरना अनिवार्य हो जाता है। इस शेड्यूल में आपको देश-विदेश में मौजूद अपनी सभी चल-अचल संपत्तियों (Assets) और उनसे जुड़ी देनदारियों (Liabilities) का पूरा ब्यौरा देना होता है।15. विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों की जानकारी छिपानायदि आप भारत के निवासी (Resident and Ordinarily Resident) हैं और आपके पास विदेश में कोई बैंक खाता है, विदेशी कंपनियों के शेयर्स, म्यूचुअल फंड, या ESOP जैसी कोई भी संपत्ति है, तो उसकी जानकारी Schedule FA में देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। भले ही उस विदेशी संपत्ति पर भारत में कोई टैक्स न लगता हो, इसे छिपाने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।
सनातन धर्म में तिथियों की तरह ही सप्ताह के हर दिन का एक विशेष और गहरा धार्मिक महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता और नवग्रहों को समर्पित है, जिसके आधार पर ही दैनिक पूजा-पाठ, खान-पान और रहन-सहन के नियम तय किए जाते हैं। आज गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन है, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार को अत्यंत पवित्र माना गया है, लेकिन इस दिन रसोई को लेकर कुछ बेहद कड़े नियम बताए गए हैं, जिनमें से एक है— गुरुवार को खिचड़ी बनाने और खाने पर पूर्ण पाबंदी।कुंडली में कमजोर होता है गुरु ग्रह, मंडराता है कंगाली का खतरासुनने में भले ही यह बात थोड़ी हैरान करने वाली लगे, लेकिन ज्योतिषीय और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार के दिन घर में खिचड़ी बनाना और उसे खाना पूरी तरह वर्जित (अशुभ) माना गया है।काली दाल की खिचड़ी: गुरुवार के दिन खिचड़ी में उड़द या काली दाल डालकर बनाना और खाना महा-अशुभ माना जाता है, क्योंकि काली दाल का संबंध मुख्य रूप से शनिदेव से है।पीली दाल की खिचड़ी: कई लोग सोचते हैं कि पीली दाल (जैसे मूंग या अरहर) की खिचड़ी तो गुरुवार को खाई जा सकती है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र इसके लिए भी मना करता है। मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को पीली खिचड़ी खाने से इंसान की जन्म कुंडली में देवगुरु बृहस्पति कमजोर पड़ जाते हैं।धन की हानि और दरिद्रता को देता है आमंत्रणकुंडली में गुरु ग्रह के कमजोर होने का सीधा और घातक असर व्यक्ति के ज्ञान, भाग्य और उसकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। गुरु के निर्बल होने से घर में रखा धन पानी की तरह बहने लगता है, व्यापार और नौकरी में मंदी आ जाती है और जमा पूंजी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। शास्त्रों का मानना है कि इस दिन खिचड़ी खाने से घर में दरिद्रता (कंगाली) का वास हो सकता है, इसलिए आज भी कई सनातन परिवारों में इस नियम का बड़ी कड़ाई से पालन किया जाता है।भगवान सत्यनारायण और गुरु आराधना के लिए सर्वोत्तम है आज का दिनगुरुवार का दिन आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान और करियर में अपार सफलता पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन लोग अपने आध्यात्मिक गुरुओं का स्मरण करते हैं और भगवान सत्यनारायण की विशेष कथा व पूजा का आयोजन करते हैं। जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति के लिए गुरुवार के दिन व्रत रखने, पीले वस्त्र धारण करने, चने की दाल और गुड़ से भगवान विष्णु व केले के वृक्ष की पूजा करने का विधान है।
अमेरिकी हमलों से दहले ईरान के 8 शहर, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के पास धमाके
US Iran War : राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सीजफायर खत्म करने के एलान के बाद अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन भी ईरान के 8 शहरों में बड़ा हमला किया। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की उस क्षमता को कमजोर करने के लिए की जा रही है, जिससे वह होर्मुज ...
Top News 9 July: ईरान में फिर अमेरिकी हमला, 23 राज्यों में बारिश का अलर्ट, ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी
Top News 9 July : अमेरिका ईरान में जंग तेज हुई, देशभर में मानसून का कहर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है। भारत और इंग्लैंड के बीच चौथा टी 20 मैच आज ब्रिस्टल में खेला जाएगा। 9 जुलाई की बड़ी खबरें :
कोलकाता में विरोध मार्च के दौरान ममता बनर्जी ने खोया आपा, पार्टी कार्यकर्ता को जड़ा थप्पड़
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना आपा खो दिया और बारुईपुर में एक नाबालिग के कथित रेप और हत्या के विरोध में कोलकाता में अपनी पार्टी के विरोध जुलूस के दौरान मचे हंगामे के बीच एक पार्टी कार्यकर्ता को थप्पड़ जड़ दिया।
'वीबी-जी राम जी' हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है: सीएम सुक्खू
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' को लागू करना राज्य के हित में नहीं है।
मुझे नेता प्रतिपक्ष से उम्मीद है, वो देश की सुरक्षा के मुद्दे को उठाएंगे : प्रकाश आंबेडकर
वंचित बहुजन अघाड़ी पार्टी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने देश की सुरक्षा का जिक्र करके केंद्र सरकार को घेरा। साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे नेता प्रतिपक्ष से उम्मीद है कि वो इस मुद्दे को उठाने का काम करेंगे।
भक्तों पर गोली चलाने का आदेश देने वालों को रातोंरात राम याद आने लगे : अनुराग ठाकुर
अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद में कांग्रेस नेताओं के बयान पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने पलटवार किया
त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026 में शामिल होंगे सिंधिया, निवेश और औद्योगिक विकास पर रहेगा फोकस
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 9 जुलाई को एक दिवसीय दौरे पर त्रिपुरा जाएंगे। इस दौरान वह अगरतला के हापानिया स्थित अंतरराष्ट्रीय मेला मैदान में आयोजित त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
'नरसिम्हा राव ने कांग्रेस को बचाया, कांग्रेस ने उन्हें मिटा दिया', पोते एन.वी. सुभाष का बड़ा आरोप
कांग्रेस पार्टी के मौजूदा नेतृत्व की कड़ी आलोचना करते हुए, पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते एन.वी. सुभाष ने कहा कि 'गांधी युग खत्म हो चुका है
रांची में हाईवे पर महिलाओं की गाड़ी पर हमला कानून-व्यवस्था की विफलता: बाबूलाल मरांडी
झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रांची के दशम फॉल क्षेत्र और राष्ट्रीय राजमार्ग पर महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी एवं हमले की घटना को राज्य की कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता करार दिया है
प्रयागराज स्थित सर्किट हाउस में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में जनसामान्य से भेंट कर उनकी समस्याओं को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना। कार्यक्रम में जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में शिकायतकर्ता अपनी समस्याओं एवं मांगों को लेकर पहुंचे। कार्यक्रम में भाजपा महानगर अध्यक्ष श्री संजय गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री राजेश शुक्ल एवं श्रीमती निर्मला पासवान, सांसद श्री प्रवीण पटेल, विधायक श्री गुरु प्रसाद मौर्य एवं श्री दीपक पटेल, महापौर श्री गणेश केसरवानी, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वी. के. सिंह, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सुरेश मौर्य, सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं अनेक प्रतिष्ठित नागरिक गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे।श्री मौर्य ने अधिकारियों से कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनहित के कार्य पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान ही सुशासन की पहचान है और सभी अधिकारी इस दिशा में पूरी निष्ठा से कार्य करें। इसके उपरांत उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने संगठनात्मक बैठक भी की। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव एवं वार्ड-वार्ड तक पहुंचकर केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएं तथा पात्र लाभार्थियों को इन योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठन की मजबूती का आधार जनता के बीच निरंतर संवाद एवं सेवा भाव है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों एवं जनहितकारी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से पहुंचाकर आमजन को उनके लाभों से अवगत कराएं, ताकि प्रत्येक पात्र व्यक्ति शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सके।
महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी तथा विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण, केशव प्रसाद मौर्य
आज प्रयागराज मेंउप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने परिश्रम, कौशल और आत्मनिर्भरता के माध्यम से समाज एवं प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने प्रदर्शनी में शामिल महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उत्पादों की गुणवत्ता और नवाचार की प्रशंसा की तथा उन्हें भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के प्रयासों की सराहना की। प्रदर्शनी में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प सामग्री, खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उत्पाद तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया, जिन्हें उप मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि के साथ देखा।श्री मौर्य ने प्रदर्शनी में सहभागी महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उनके परिश्रम, समर्पण और उद्यमशीलता से प्रदेश के ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अधिकाधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी तथा विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।
उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कैशलेस चिकित्सा योजना के शुभारम्भ पर लाभार्थियों को प्रतीकात्मक डमी कार्ड वितरित करते हुए सभी शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना प्रदेश के लाखों शिक्षक परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी तथा उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।श्री मौर्य जी ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा योजना के दायरे का विस्तार करते हुए अब प्रधानाचार्यों, शिक्षकों के साथ-साथ रसोइयों को भी इस योजना में सम्मिलित किया गया है। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों एवं उनके परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना शिक्षा विभाग से जुड़े लाखों परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं जनकल्याणकारी कदम है।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
West Asia Crisis : अमेरिका-ईरान में बढ़ते तनाव के बीच भारत का पहला रिएक्शन, जानिए क्या कहा
भारत ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत सरकार ने अमेरिका और ईरान से संयम बरतने, तनाव कम करने और बातचीत के जरिए विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। साथ ही ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय ...
चुनाव आयोग का हर काम भारत के संविधान और पारदर्शी तरीके से होता है: ज्ञानेश कुमार
भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को मीडिया और कम्युनिकेशन अधिकारियों के लिए एक दिन का सम्मेलन आयोजित किया।
ओप्पो इंडिया ने अपने स्मार्टफोन की रेनो 1616 सीरीज लॉन्च की
जयपुर। ओप्पो इंडिया ने बुधवार को अपनी रेनो 1616 सीरीज (स्मार्टफोन) लॉन्च की। इस सीरीज में भारत के पहले होलोवर्स थ्री डी डिजाइन, 50 एमपी के मेन और 3.5एक्स टेलीफोटो लेंस वाले एआई पोर्ट्रेट कैमरा, नैचुरल टोन इमेजिंग और ऑल-फोकल-लेंथ के साथ दो स्मार्टफोन रेनो 1616 और रेनो 1616 सी पेश किए गए हैं। इस […] The post ओप्पो इंडिया ने अपने स्मार्टफोन की रेनो 1616 सीरीज लॉन्च की appeared first on Sabguru News .
नंदीग्राम एक्सप्रेस में सजाई सुहागरात की सेज, टीटीई निलंबित
नई दिल्ली। रेलवे ने महाराष्ट्र में बल्हारशाह से दादर (मुंबई) के बीच चलने वाली नंदीग्राम एक्सप्रेस के एक प्रथम श्रेणी वातानुकूलित कूपे को सुहागरात की सेज के रूप में सजाने के मामले को गंभीरता से लिया है और इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में ट्रेन टिकट निरीक्षक (टीटीई) को निलंबित कर विस्तृत विभागीय […] The post नंदीग्राम एक्सप्रेस में सजाई सुहागरात की सेज, टीटीई निलंबित appeared first on Sabguru News .
कालीघाट में भारी हंगामा, ममता बनर्जी ने खोया आपा, भाजपा पर बरसीं
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की से कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के विरोध में तृणमूल कांग्रेस की छात्र-युवा इकाई की बुधवार को रैली के दौरान जबरदस्त हंगामा और राजनीतिक हिंसा भड़क उठी। रैली पर भाजपा समर्थकों के कथित हमले और दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद स्थिति इतनी […] The post कालीघाट में भारी हंगामा, ममता बनर्जी ने खोया आपा, भाजपा पर बरसीं appeared first on Sabguru News .
ग्वालियर : शादी का झांसा देकर युवती से रेप, प्रेगनेंट होने पर दिया धोखा
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जिम में हुई दोस्ती के बाद शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म करने तथा गर्भवती होने पर विवाह से इनकार करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार गोला का मंदिर थाना क्षेत्र निवासी […] The post ग्वालियर : शादी का झांसा देकर युवती से रेप, प्रेगनेंट होने पर दिया धोखा appeared first on Sabguru News .
दिल्ली समाचार:दिल्ली में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब गंभीर यातायात नियम तोड़ने वालों को सिर्फ चालान भरने या ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित होने की सजा ही नहीं मिलेगी। इसके साथ ही, लाइसेंस बहाल कराने के लिए उन्हें अनिवार्य रूप से दो दिन का प्रशिक्षण और परामर्श भी पूरा करना होगा। दिल्ली परिवहन विभाग ने इस नई व्यवस्था की लगभग सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अंतिम मंजूरी के बाद इसे अधिकृत प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से लागू किया जाएगा।क्या बात क्या बात?परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले यातायात नियमों के उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जाता था, लेकिन बाद में इस अवधि को बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया। इसके बावजूद, कई चालकों के व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। विभाग के रिकॉर्ड से ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जहां एक ही चालक ने कई बार नियमों का उल्लंघन किया, जुर्माना भरा और लाइसेंस निलंबित होने के बाद भी वही गलती दोहराई।सुधार पर भी जोर देने का निर्णय लिया गयाइस स्थिति को देखते हुए, विभाग ने अब दंड के साथ-साथ सुधार पर भी जोर देने का निर्णय लिया है। नई प्रणाली के तहत, ड्राइवरों को अपना लाइसेंस बहाल करवाने से पहले दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेना अनिवार्य होगा। इस कार्यक्रम के दौरान, विशेषज्ञ सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों, सुरक्षित ड्राइविंग तकनीकों, दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों और एक जिम्मेदार चालक की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। लापरवाही से गाड़ी चलाने के संभावित खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए परामर्श भी दिया जाएगा।सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण?दिल्ली में प्रतिदिन औसतन 25 से 30 ड्राइविंग लाइसेंस गंभीर यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए निलंबित किए जाते हैं। इनमें तेज गति से वाहन चलाना, शराब पीकर वाहन चलाना, गलत साइड पर वाहन चलाना और खतरनाक मोड़ लेना शामिल हैं। विशेष रूप से, गलत दिशा में वाहन चलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसे सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण माना जाता है।सिफारिशें लगातार प्राप्त हो रही हैंदिल्ली परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों के उल्लंघन का यह चलन केवल राजधानी तक ही सीमित नहीं है। दिल्ली के लाइसेंस धारकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अन्य राज्यों से भी सिफारिशें प्राप्त हो रही हैं। उदाहरण के लिए, पुलिस रिपोर्टों और अदालती आदेशों के आधार पर राजस्थान से औसतन 6 से 7 मामले प्रतिदिन दिल्ली भेजे जाते हैं, और विभाग उन पर आगे की कार्रवाई करता है।यातायात प्रशिक्षण केंद्र शुरू कर दिए गए हैं।इस बीच, यातायात पुलिस जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान भी चला रही है। एक महीने तक चलने वाले जन जागरूकता अभियान के तहत, शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक स्कूल शुरू किए गए हैं। चालकों को यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा और ज़िम्मेदार ड्राइविंग के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। पुलिस का लक्ष्य केवल कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि नियमों के बारे में जनता में जागरूकता बढ़ाकर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करना है।यातायात दुर्घटनाएं लापरवाही के कारण होती हैं।परिवहन विभाग का मानना है कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएँ मानवीय लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं। विशेष रूप से, सड़क के गलत साइड पर गाड़ी चलाना और तेज़ गति से वाहन चलाना जैसी गलतियाँ अक्सर जानलेवा साबित हो सकती हैं। नई प्रशिक्षण और परामर्श प्रणाली से चालकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और राजधानी की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।
ऑस्ट्रेलिया वीजा शुल्क में बढ़ोतरी:ऑस्ट्रेलिया सरकार ने वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों को बड़ा झटका दिया है। अब ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करना उनके लिए और भी महंगा हो जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ने विदेशी छात्रों और पढ़ाई के बाद काम करने के लिए आवेदन करने वालों के लिए वीजा शुल्क में काफी वृद्धि की है। इसका सीधा असर उन भारतीय छात्रों पर पड़ेगा जो यहां पढ़ रहे हैं या ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने आ रहे हैं।यहां के विश्वविद्यालयों और शिक्षा से संबंधित संस्थानों ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस कदम से शिक्षा के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया का महत्व कम हो जाएगा और वह अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगा। गृह मंत्रालय द्वारा घोषित नई फीस 1 जुलाई, 2026 से लागू हो गई है, बिना अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र से कोई पूर्व परामर्श किए।ऑस्ट्रेलिया में वीजा शुल्क में कितनी वृद्धि हुई है?उच्च शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा (VET) के छात्रों के लिए छात्र वीजा (सबक्लास 500) का आवेदन शुल्क 2,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.32 लाख रुपये) से बढ़कर 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.65 लाख रुपये) हो गया है। ICEF मॉनिटर की रिपोर्ट के अनुसार, आसियान देशों के छात्रों के लिए शुल्क 2,050 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ही रहेगा। चूंकि भारत आसियान का हिस्सा नहीं है, इसलिए भारतीयों को अब वीजा शुल्क के रूप में 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का भुगतान करना होगा।अंग्रेजी भाषा (ELICOS) के छात्रों के लिए शुल्क भी बढ़कर 2,050 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.35 लाख रुपये) हो गया है।अध्ययन के बाद काम करने की अनुमति देने वाले अस्थायी स्नातक वीजा (उपश्रेणी 485) के लिए शुल्क 4,600 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 3 लाख रुपये) से बढ़कर 5,750 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 3.79 लाख रुपये) हो गया है।पार्टनर वीजा की फीस भी A$9,365 (लगभग ₹6 लाख) से बढ़कर A$11,710 (लगभग ₹7.73 लाख) हो गई है।नियोक्ता द्वारा प्रायोजित कौशल वीज़ा के लिए आवश्यक वेतन सीमा भी बढ़ा दी गई है। यह वीज़ा अब तभी दिया जाएगा जब वेतन 79,499 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 5.24 लाख रुपये) हो। पहले यह सीमा 76,515 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर थी।ऑस्ट्रेलिया पढ़ाई के लिए सबसे महंगे देशों में से एक बन गया है।हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद, ऑस्ट्रेलियाई छात्र वीजा आवेदन शुल्क अब अन्य प्रमुख देशों की तुलना में काफी अधिक हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में छात्र वीजा की लागत अब लगभग 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है, जबकि ब्रिटेन में लगभग 935 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, न्यूजीलैंड में 790 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, अमेरिका में 775 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कनाडा में 240 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है।ऑस्ट्रेलिया में छात्र वीजा शुल्क 2022 से 285% बढ़ गया है, जबकि अध्ययन के बाद कार्य वीजा शुल्क में 148% की वृद्धि हुई है। वहीं, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों ने अपने छात्र वीजा शुल्क को लगभग अपरिवर्तित रखा है, जबकि ब्रिटेन में यह वृद्धि काफी कम रही है।
बालों की देखभाल के टिप्स:जब केमिकल शैम्पू या कंडीशनर का चलन नहीं था, तब भी उनके बाल बेहद चमकदार थे। उनकी खूबसूरती का राज पूरी तरह से आयुर्वेदिक और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर आधारित था। बिना किसी दुष्प्रभाव के अपने बालों को पोषण देने का उनका तरीका यहाँ बताया गया है:चम्पी और प्राकृतिक तेलों का जादू:प्राचीन काल में, तेल मालिश, या चम्पी, रानियों की बाल देखभाल दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। वे अपने बालों को मजबूत और रूसी मुक्त रखने के लिए नीम के तेल और नारियल तेल के मिश्रण का उपयोग करती थीं। नारियल तेल बालों को अंदर से नमी और पोषण देता था, जबकि नीम का तेल अपने जीवाणुरोधी गुणों से खोपड़ी को संक्रमण से बचाता था। चम्पी उपचार खोपड़ी में रक्त संचार बढ़ाता है, जिससे बाल जड़ों से मजबूत होते हैं।आंवला, शिकाकाई और मेहंदी का उपयोग:रानियां अपने बालों को प्राकृतिक रूप से धोने और कंडीशनिंग करने के लिए आंवला, रीठा और शिकाकाई पाउडर का मिश्रण तैयार करती थीं। यह एक प्राकृतिक शैम्पू की तरह काम करता था, गंदगी को हटाता था और बालों की प्राकृतिक चमक बनाए रखता था। आंवले में मौजूद विटामिन सी और फैटी एसिड बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकते हैं। इसके साथ ही, मेहंदी का उपयोग बालों को सुंदर रंग और मजबूती देने के लिए किया जाता था।मोरिंगा पेस्ट और लोबान की खुशबू का चमत्कार:रानियों के लंबे बालों का एक और राज मोरिंगा (नग्गे) की पत्तियां थीं। प्रोटीन और विटामिन से भरपूर मोरिंगा पेस्ट को बालों पर मास्क की तरह लगाया जाता था। इसके अलावा, बाल धोने के बाद उन्हें सुखाने और खुशबू देने के लिए लोबान की खुशबू का इस्तेमाल किया जाता था। गीले बालों को लोबान के धुएं में सुखाने से न केवल बाल सुगंधित होते थे, बल्कि सिर की त्वचा पर नमी के कारण होने वाले फंगल संक्रमण का खतरा भी पूरी तरह खत्म हो जाता था।आजकल हम जिन रासायनिक उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं, वे भले ही अस्थायी चमक देते हों, लेकिन लंबे समय में बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन अगर हम आंवला, शिकाकाई, नीम, नारियल तेल और मोरिंगा जैसे अपने स्थानीय आयुर्वेदिक तरीकों का पालन करें, तो हम बिना किसी दुष्प्रभाव के घने और स्वस्थ बाल पा सकते हैं।
वायनाड में प्रकृति का प्रकोप फिर देखने को मिला! भूस्खलन में कई लोगों की मौत, 7 लापता!
वायनाड भूस्खलन:केरल के वायनाड जिले में पिछले साल हुए विनाशकारी भूस्खलन की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि एक और प्राकृतिक आपदा ने दहशत फैला दी है। वायनाड के कल्लाडी-मेप्पडी इलाके में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है। सात लोग लापता हैं और कई अन्य घायल हो गए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), दमकल विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है क्योंकि आशंका है कि कुछ और लोग मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।यह भूस्खलनमेप्पड़ीके पास मीनाक्षी पुल के नजदीक हुआ , जहां मलम्पुरम-वायनाडु को जोड़ने वाली अनाक्कम्पोइल-मेप्पड़ी सुरंग सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। सुरंग निर्माण स्थल पर मिट्टी और चट्टानों के अचानक खिसकने से श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है। स्थानीय निवासियों ने शुरुआती चरण में कुछ लोगों को बचाया, जिसके बाद बचाव दल ने अभियान तेज कर दिया।केरल सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान ने बचाव अभियान की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की है। उन्होंने कहा कि लापता लोगों का जल्द से जल्द पता लगाने के लिए सभी विभाग समन्वय से काम कर रहे हैं। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है और उनका इलाज चल रहा है।इस घटना के संबंध में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि जिला कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों ने पहले सुरंग निर्माण क्षेत्र में जमा हुई भारी मात्रा में मिट्टी को हटाने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि, आरोप है कि ठेकेदारों ने उन निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया। आशंका है कि मिट्टी न हटाने की वजह से ही भूस्खलन इतना भीषण हुआ होगा, और इस मामले की जांच होने की संभावना है।लगातार बारिश और कीचड़ भरे हालातों के कारण बचाव अभियान में बाधा आ रही है। हालांकि, भारी मशीनों, खोज उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों की मदद से कीचड़ में फंसे लोगों की तलाश जारी है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे अनावश्यक रूप से जोखिम भरे क्षेत्रों में न जाएं।वायनाड भूस्खलन के खतरे के लिए पहले से ही जाना जाता है। पिछले साल एक भीषण भूस्खलन में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। उस आपदा के बाद भी, इस क्षेत्र में मानसून सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचागत कार्यों को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। अब, इस ताजा घटना ने पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सुरक्षा मानकों पर एक नई बहस छेड़ दी है।दूसरी ओर, मौसम विभाग ने केरल के कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान लगाया है और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने का अनुरोध किया गया है।लापता लोगों और मृतकों की सही संख्याबचाव अभियान पूरा होने के बाद ही पता चल पाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति ...
आज के दौर में पेट लवर्स के बीच बिल्ली पालने का क्रेज काफी तेजी से बढ़ रहा है। अपनी क्यूटनेस और चुलबुली हरकतों से बिल्लियां किसी का भी दिल जीत लेती हैं। लेकिन अगर आप भी एक कैट ओनर हैं या घर में बिल्ली लाने की सोच रहे हैं, तो हाल ही में आई एक मेडिकल रिसर्च आपको हैरान कर सकती है। ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा है कि बिल्लियों के संपर्क में रहने से गंभीर मानसिक विकार (मेंटल डिसऑर्डर) का खतरा दोगुना हो सकता है।क्वींसलैंड विश्वविद्यालय की स्टडी में सिजोफ्रेनिया का दावाऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित क्वींसलैंड विश्वविद्यालय (University of Queensland) द्वारा किए गए एक व्यापक विश्लेषण में बिल्ली पालने और मानसिक बीमारी 'सिजोफ्रेनिया' (Schizophrenia) के बीच एक गहरा संबंध पाया गया है। शोधकर्ताओं ने पिछले 44 सालों में दुनिया के 11 अलग-अलग देशों में हुई 17 बड़ी स्टडीज के डेटा का बारीकी से अध्ययन किया। इस कंबाइंड रिसर्च के नतीजों में सामने आया कि जो लोग बचपन में या वयस्क होने पर बिल्लियों के ज्यादा करीब रहे हैं, उनमें सिजोफ्रेनिया विकसित होने की संभावना आम लोगों की तुलना में दोगुनी पाई गई।बिल्ली के मल में छिपा है 'टोक्सोप्लाज्मा गोंडी' परजीवीआखिर एक प्यारी सी बिल्ली मानसिक बीमारी की वजह कैसे बन सकती है? डॉक्टरों के मुताबिक, इसका असली विलेन बिल्ली के मल (पूप) में पाया जाने वाला एक बेहद सूक्ष्म परजीवी (पैरॉसाइट) है, जिसका नाम टोक्सोप्लाज्मा गोंडी ($Toxoplasma gondii$) है। जब कोई इंसान अनजाने में इस परजीवी के संपर्क में आता है, तो यह शरीर के अंदर पहुंचकर सीधे ब्रेन हेल्थ (दिमागी स्वास्थ्य) पर हमला करता है। यह हमारे दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर (विशेषकर डोपामिन केमिकल) को असंतुलित कर देता है और मस्तिष्क में सूजन (इन्फ्लेमेशन) पैदा कर सकता है, जिससे भ्रम और गंभीर मानसिक रोगों का रिस्क बढ़ जाता है।क्या हैं सिजोफ्रेनिया के अन्य मुख्य कारण?विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बिल्ली पालना ही सिजोफ्रेनिया का एकमात्र कारण नहीं है। यह एक जटिल दिमागी बीमारी है जो कई अन्य वजहों से भी ट्रिगर हो सकती है:आनुवंशिक कारण (Genetics): अगर परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही हो।अत्यधिक मानसिक तनाव (Severe Stress): लंबे समय तक डिप्रेशन या ट्रॉमा में रहना।केमिकल इम्बैलेंस: दिमाग में न्यूरोकेमिकल्स का संतुलन बिगड़ जाना।कैट लवर्स संक्रमण से बचने के लिए जरूर बरतें ये सावधानियांअगर आपके घर में पहले से ही बिल्ली मौजूद है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप कुछ बेहद आसान हाइजीन टिप्स अपनाकर इस जानलेवा परजीवी के संक्रमण से खुद को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं:बिल्ली के लिटर बॉक्स (मलमूत्र की जगह) को साफ करते समय हमेशा डिस्पोजेबल ग्लव्स (दस्ताने) पहनें।सफाई करने के तुरंत बाद अपने हाथों को एंटीसेप्टिक साबुन या हैंडवॉश से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं।अपनी पालतू बिल्ली के समय-समय पर वैक्सीनेशन (टीकाकरण) और रेगुलर वेटरनरी चेकअप का पूरा ध्यान रखें।घर के फर्श और बिल्ली के बैठने की जगहों को डिसइंफेक्टेंट से साफ करते रहें।
बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' आमिर खान एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में आ गए हैं। रीना दत्ता और किरण राव के बाद, 61 वर्षीय आमिर खान ने 6 जुलाई को अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट (Gauri Spratt) के साथ रजिस्टर्ड मैरिज कर ली है। मुंबई के बांद्रा स्थित पाली हिल वाले घर पर बेहद सादगी के साथ इस शादी को अंजाम दिया गया, जिसमें सिर्फ परिवार के कुछ बेहद करीबी लोग और दोनों के बच्चे ही शामिल हुए।25 साल पुरानी दोस्ती बदली प्यार में, जानें कौन हैं गौरी स्प्रैटगौरी स्प्रैट लंबे समय से फैशन और ब्यूटी इंडस्ट्री का एक जाना-माना नाम रही हैं। वह 'आमिर खान प्रोडक्शन्स' के साथ भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुकी हैं। बताया जा रहा है कि आमिर और गौरी एक-दूसरे को पिछले 25 सालों से जानते हैं, लेकिन इनके बीच प्यार की शुरुआत कुछ समय पहले ही हुई थी। लंबे समय तक अपने रिश्ते को दुनिया की नजरों से छिपाकर रखने के बाद आखिरकार इस मैच्योर कपल ने शादी के बंधन में बंधने का फैसला कर लिया।मेडागास्कर का दुर्लभ रूबी: 131 कारीगरों ने 256 घंटे में बनाई अनोखी रिंगशादी के बाद इस समय सबसे ज्यादा चर्चा आमिर खान द्वारा गौरी को पहनाई गई वेडिंग रिंग की हो रही है। इस अंगूठी के बीचों-बीच मेडागास्कर से मंगाया गया एक बेहद दुर्लभ नेचुरल रूबी (लाल माणिक) जड़ा गया है, जिसे कैबोशॉन कट में तराशा गया है। इस खास रूबी को खोजने में आमिर की टीम को करीब 3 महीने का वक्त लगा, क्योंकि दुनिया भर के रूबी पत्थरों में से सिर्फ 0.1% ही इस नायाब क्वालिटी के होते हैं। इसे सोने के मुकुट जैसी डिजाइन पर रखकर चारों तरफ 40 असली हीरों से सजाया गया है। 131 कुशल कारीगरों ने मिलकर पूरे 256 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद इस नायाब रिंग को तैयार किया है।ज्वेलरी गिफ्ट करने के शौकीन हैं आमिर खानयह पहली बार नहीं है जब आमिर ने गौरी के लिए इतना कीमती तोहफा चुना हो। इसी साल की शुरुआत में गौरी के हाथ में ब्राजील से मंगाए गए रेयर 'एक्वामरीन' पत्थर वाली रिंग देखी गई थी, जिसके चारों तरफ 40 नेचुरल हीरे जड़े थे। वह अंगूठी भी आमिर खान ने ही गौरी को खास तौर पर कस्टमाइज करवाकर गिफ्ट की थी। फैंस अब इस न्यूली वेडेड कपल की पहली पब्लिक अपीयरेंस और ऑफिशियल वेडिंग तस्वीरों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रामगढ़वा थाना क्षेत्र के पचभीड़िया गांव में बीती 23 मई को हुई अर्जुन पंडित की निर्मम हत्या की गुत्थी को स्थानीय पुलिस ने सुलझा लिया है। रक्सौल डीएसपी मनीष आनंद के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वैज्ञानिक अनुसंधान की मदद से इस 'ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री' का महज 15 दिनों के भीतर सनसनीखेज खुलासा किया है।कड़ाही वाले 'फाइटर' से अर्जुन पर किया था ताबड़तोड़ हमलापुलिस की जांच में जो सच सामने आया, उसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। कत्ल की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने 'फाइटर' यानी हाथ में पहने जाने वाले लोहे के घातक हथियार का इस्तेमाल किया था। मुख्य आरोपी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर अर्जुन को अकेले में घेरा और उसके चेहरे व सिर पर फाइटर से ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया।पत्नी से नाजायज ताल्लुकात बने कत्ल की वजहरक्सौल डीएसपी मनीष आनंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि इस मर्डर का मुख्य कारण अवैध संबंध था। पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी धनेश महतो (30 वर्ष) की पत्नी के साथ मृतक अर्जुन पंडित का प्रेम प्रसंग चल रहा था। धनेश को जब अपनी पत्नी और अर्जुन के अवैध संबंधों की भनक लगी, तो वह अंदर ही अंदर सुलगने लगा। इसके बाद धनेश ने अपने दो दोस्तों—रूपेश कुमार (21 वर्ष) और राजेश यादव (35 वर्ष) के साथ मिलकर अर्जुन को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।रक्सौल डीएसपी की टीम ने 3 हत्यारों को दबोचाइस अंधे कत्लकांड का पर्दाफाश करने के लिए रामगढ़वा थानाध्यक्ष राजीव कुमार साह, अपर थानाध्यक्ष सुमित कुमार और महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) प्रिया कुमारी की एक विशेष टीम बनाई गई थी। पुलिस टीम ने मोबाइल लोकेशन और स्थानीय इनपुट के आधार पर पचभीड़िया गांव में छापेमारी कर तीनों शातिर आरोपियों को दबोच लिया। आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। महज दो हफ्ते में हत्याकांड का खुलासा करने पर मोतिहारी के स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन की जमकर सराहना की है।
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा एलान किया है। अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) समिट के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता (सीजफायर) अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए संकेत दिए कि अमेरिकी सेना आज रात ही ईरान पर दोबारा विनाशकारी हवाई हमले कर सकती है।अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य टकरावदरअसल, यह विवाद तब और गहरा गया जब ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में मौजूद करीब 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के 80 से ज्यादा रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। अमेरिकी हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइट्स और आईआरजीसी की कई सैन्य नावें तबाह हो गईं।सरकार बदलना मकसद नहीं, परमाणु हथियार पर रोक जारीट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और नाटो महासचिव मार्क रुटे की मौजूदगी में कहा कि वे ईरानियों के इस बर्ताव से बेहद खफा हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन तेहरान में सत्ता परिवर्तन (गवर्नमेंट चेंज) नहीं चाहता, लेकिन वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने नहीं देगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान के नेता धोखेबाज हैं और बातचीत करना सिर्फ समय की बर्बादी है।पावर प्लांट और बुनियादी ढांचों को तबाह करने की चेतावनीअमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अभी तक अमेरिका ने ईरान पर अपने सबसे घातक स्तर (हाईएस्ट लेवल) से हमला नहीं किया है। उन्होंने कहा, अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो हम उनके बिजली घर (पावर प्लांट) और पानी साफ करने वाले प्लांट जैसे बुनियादी ढांचों को पूरी तरह नष्ट कर देंगे। मैं ऐसा करना नहीं चाहता, लेकिन जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना पीछे नहीं हटेगी।भाषण के दौरान बड़ी चूक: ईरान को बोल गए 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान'इस बेहद गंभीर नाटो समिट के दौरान डोनाल्ड ट्रंप एक मजाकिया विवाद में भी घिर गए। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (USS अब्राहम लिंकन) पर हुए मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने ईरान की जगह 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान' बोल दिया। ट्रंप ने कहा, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान ने हम पर 111 मिसाइलें दागीं, जिन्हें हमारे पैट्रियट सिस्टम ने मार गिराया। ट्रंप की इस बड़ी जुबान फिसलने (Gaffe) का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग उनकी बढ़ती उम्र और याददाश्त पर सवाल उठा रहे हैं।
पाकिस्तान का अशांत प्रांत बलूचिस्तान एक बार फिर भीषण आतंकी हमलों से दहल उठा है। इस हफ्ते की शुरुआत में हुए अलग-अलग घात लगाकर किए गए हमलों में 11 सैनिकों और 18 पुलिसकर्मियों सहित कुल 29 सुरक्षाकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। इस खूनी खेल के बाद पूरे इलाके में तनाव है और सेना ने बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।जियारत में पुलिस चौकी पर हमला और अपहरणपाकिस्तानी सेना के अनुसार, बलूचिस्तान के जियारत जिले में आतंकियों ने एक पुलिस चौकी को निशाना बनाया था। हमले के दौरान आतंकियों ने नौ पुलिसकर्मियों की मौके पर ही हत्या कर दी, जबकि 18 अन्य जवानों को अगवा कर लिया गया था, जिनके शव बाद में बरामद हुए। दूसरी तरफ, बलूचिस्तान के ही एक मुख्य राजमार्ग पर सेना के काफिले को निशाना बनाया गया, जिसमें 11 सैनिकों की मौत हो गई।सेना की जवाबी कार्रवाई में 54 विद्रोही ढेरपाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया कि सोमवार से अब तक बलूचिस्तान में तीन बड़े आतंकी हमले हुए हैं, जिनमें कई बेकसूर लोगों ने भी जान गंवाई है। हमलों के बाद सेना ने आक्रामक जवाबी कार्रवाई की। सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इस ऑपरेशन में अब तक 54 विद्रोहियों को मार गिराया गया है। पाकिस्तान ने इन हमलों के तार अफगानिस्तान से जुड़े होने का दावा किया है, हालांकि तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।खुले टैंपो में शव ले जाने पर सोशल मीडिया पर फूटा गुस्साइस दर्दनाक घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद बवाल मच गया है। वीडियो में दिख रहा है कि बलूचिस्तान सरकार शहीद पुलिसकर्मियों के शवों को सम्मानजनक एम्बुलेंस के बजाय एक खुले टैंपो में लादकर ले जा रही है। ताबूतों को इस तरह गाड़ी में भरे देख लोग पाकिस्तानी हुक्मरानों और सेना के रवैये पर तीखे सवाल उठा रहे हैं। बता दें कि बलूचिस्तान में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और अनदेखी को लेकर लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है।
भारत के डिजिटल मार्केट में इस समय एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कभी सिर्फ एक बाइक टैक्सी के रूप में पहचानी जाने वाली कंपनी रैपिडो (Rapido) अब देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर इंटरनेट ऐप बन चुकी है। डिजिटल इंटेलिजेंस फर्म 'सेंसर टावर' (Sensor Tower) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच रैपिडो के मंथली एक्टिव यूजर्स (MAU) का आंकड़ा 8.2 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 67% ज्यादा है।दिग्गज कंपनियों को पछाड़ारैपिडो ने इस शानदार ग्रोथ के साथ न सिर्फ राइड-हेलिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों उबर (Uber) और ओला (Ola) को मात दी है, बल्कि क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी की बड़ी कंपनियों जैसे स्विगी (Swiggy), जोमैटो (Zomato), ब्लिंकिट (Blinkit) और जेप्टो (Zepto) को भी यूजर बेस के मामले में काफी पीछे छोड़ दिया है।मंथली एक्टिव यूजर्स (MAU) के आंकड़ेRapido: 8.2 करोड़Blinkit: 7.9 करोड़Swiggy: 6.7 करोड़Zomato: 6.3 करोड़Zepto: 5.8 करोड़Uber: 3.9 करोड़Ola: 2.7 करोड़लेन-देन करने वाले यूजर्स में भी सबसे आगेसिर्फ ऐप खोलने या देखने के मामले में ही नहीं, बल्कि एक्टिव ट्रांजैक्शन करने वाले ग्राहकों (MTU) की सूची में भी रैपिडो टॉप पर है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के दौरान रैपिडो के मंथली ट्रांसैक्टिंग यूजर्स लगभग 3.6 करोड़ रहे। इसके मुकाबले ब्लिंकिट के पास 2.7 करोड़, जोमैटो और स्विगी दोनों के पास 2.5-2.5 करोड़ यूजर्स दर्ज किए गए। वहीं ओला और उबर ने अपनी ट्रांजैक्शन संख्या को सार्वजनिक नहीं किया है।हर दिन 65 लाख राइड्स का रिकॉर्डमार्केट में अपनी मजबूत पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मार्च 2026 में रैपिडो ने हर दिन औसतन 65 लाख राइड्स पूरी कीं। इस मामले में भी यह बाकी कंपनियों से बहुत आगे है, जहां उबर पर रोजाना 37 लाख और ओला पर करीब 15 लाख राइड्स ही बुक हो रही हैं।ड्राइवर्स को पसंद आ रहा बिजनेस मॉडलरैपिडो की इस तेज रफ्तार सफलता के पीछे उसकी एक खास रणनीति है। पारंपरिक कंपनियां जैसे ओला और उबर अपने ड्राइवरों से हर राइड पर 20% से 30% तक का मोटा कमीशन लेती हैं। इसके विपरीत, रैपिडो ने एक नया सब्सक्रिप्शन मॉडल पेश किया है। इसमें ड्राइवरों को केवल एक तय मंथली या डेली फीस देनी होती है, जिसके बाद वे अपनी पूरी कमाई खुद रख सकते हैं। इस पारदर्शी नीति के कारण देश भर के ड्राइवर्स तेजी से इस ऐप से जुड़ रहे हैं।सिर्फ बाइक नहीं, अब हर सर्विस उपलब्धसाल 2015 में एक छोटे से बाइक टैक्सी स्टार्टअप से शुरू हुई रैपिडो अब एक 'सुपर ऐप' बनने की राह पर है। कंपनी ने समय के साथ ऑटो, कैब सर्विस, ई-रिक्शा, पार्सल डिलीवरी, फूड डिलीवरी, फाइनेंशियल सर्विसेज और कार-पूलिंग जैसे कई क्षेत्रों में कदम रख दिया है। इसी मल्टी-सर्विस अप्रोच की वजह से आज यह देश के हर वर्ग की जरूरत बन चुकी है।

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