सिंधु जल संधि पर PAK की भारत को चेतावनी, बोला-पानी रोका गया तो क्षेत्रीय शांति पर पड़ेगा असर
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने भारत को चेतावनी दी है. विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि अगर संधि के तहत मिलने वाले पानी को रोकने की कोशिश की गई तो इसका क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि यह मामला केवल भारत-पाकिस्तान का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और समझौतों का भी है.
बारिश ज्यादा, तापमान भी ऊंचा... दिल्ली में अगस्त का औसत AQI तीन साल में सबसे खराब
दिल्ली में इस साल अगस्त में बारिश ने सामान्य से 29 प्रतिशत ज्यादा रिकॉर्ड बनाया. अगस्त के पहले हफ्ते में 15 साल की सबसे ज्यादा बारिश हुई और 25 अगस्त को एक दिन में सबसे भारी बारिश दर्ज हुई. इतनी बारिश के बावजूद दिन और रात दोनों समय तापमान ऊंचा बना रहा. साथ ही हवा की गुणवत्ता भी तीन साल में सबसे खराब औसत स्तर पर पहुंच गई.
अंबाला के थाने में SHO की मौत, सीने में गोली और पास पड़ी थी सर्विस गन
हरियाणा के अंबाला में नग्गल थाने के SHO कर्मवीर सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. उनका शव पुलिस स्टेशन के अंदर मिला, जबकि सीने में गोली लगी थी और पास में सर्विस हथियार पड़ा था. पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है, लेकिन अन्य पहलुओं से भी जांच जारी है. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.
'मुस्लिमों को बाहर करना हिंदुत्व नहीं', न्यूयॉर्क में बोले मोहन भागवत, Video
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में ONE WORLD ONE HUMANITY कार्यक्रम को संबोधित किया. भगवत ने कहा, भले ही धर्म अलग-अलग हों, लेकिन इंसानियत और मानवता एक ही है. सत्य एक है और इंसानियत उसी सत्य का परिणाम है. संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदुत्व ये नहीं है कि मुसलमानों को भारत से बाहर करो और अगर कोई हिंदू ये सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वो हिंदू नहीं. देखें वीडियो.
बिजनौर के दारोगा और 4 सिपाही सस्पेंड, SP केके बिश्नोई का सख्त एक्शन
Bijnor News: बिजनौर के नवागत पुलिस कप्तान केके बिश्नोई ने बिना सूचना हरियाणा के गुरुग्राम में दबिश देने वाले नांगल थाने के दरोगा समेत 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया.
Yogi Adityanath ने Gorakhpur में विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- विकास विरोधी बांट रहे समाज
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर जाति, क्षेत्र और के नाम पर लोगों को बांटने का आरोप लगाया। गोरखपुर में एक कार्यक्रम में योगी ने कहा, ‘‘बीआरडी मेडिकल कॉलेज (गोरखपुर में) को उच्चीकृत किया गया है और अब यह सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाएं प्रदान करता है। एक क्षेत्रीय वायरोलॉजी केंद्र की स्थापना की गई है। गोरखपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान चालू हो गया है। इसके अलावा, देवरिया,कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच और गोंडा में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं और लोग इसका लाभ उठा रहे हैं।’’योगी ने कहा,‘‘एक अच्छी सरकार आती है और अच्छा प्रदर्शन करती है। इसलिए मैं कहता हूं कि यह काम इसलिए संभव हो सका क्योंकि यह राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रथम पर आधारित है, जहां राष्ट्र सर्वोपरि है। इसी भावना से प्रेरित होकर और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘डबल इंजन’ सरकार ने अपना काम शुरू किया।’’उन्होंने कहा, “जो लोग इस विकास को नापसंद करते हैं, जो इन ‘कल्याण मंडपों’ (सामुदायिक हॉल), इन चौड़ी सड़कों, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों और इस उत्सव के माहौल को नापसंद करते हैं- वे एक बार फिर काम कर रहे हैं। लोगों को जाति, क्षेत्र और के आधार पर विभाजित करने में लगे हुए हैं।”योगी ने कहा, ‘‘हमें उनसे सावधान रहने की जरूरत है। हमें उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। वे वास्तव में डकैतों का एक गिरोह हैं। जब भी उन्हें मौका मिलता है, वे लूटपाट करते हैं। उन्होंने राज्य और देश को लूटा और अराजकता फैलाई।’’मुख्यमंत्री 130 करोड़ रुपये से अधिक की 170 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के लिए गोरखपुर में थे। उन्होंने कहा,‘‘वे गरीबों और व्यापारियों की जमीन को जब्त करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते थे। हालांकि, यह ‘डबल इंजन’ भाजपा सरकार गरीबों पर अत्याचार नहीं होने देगी, न ही दलितों या हाशिए पर रहने वालों का शोषण होने देगी। यह किसी को भी किसी बेटी या किसी व्यापारी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देगी, और जो कोई भी ऐसा करने का प्रयास करेगा उससे इस ‘डबल इंजन’ सरकार द्वारा कानून के दायरे में सख्ती से निपटा जाएगा।’’योगी ने कहा कि पिछले करीब एक दशक में उत्तर प्रदेश में माफिया का सफाया हुआ है और मच्छर जनित बीमारी ‘इंसेफेलाइटिस’ की समस्या का समाधान किया गया है। उन्होंने कहा, “2017 से पहले ‘इंसेफेलाइटिस’ के कारण गोरखपुर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश में दहशत का माहौल था। यह बीमारी 1977 से क्षेत्र की बड़ी समस्या बनी हुई थी, लेकिन पिछली सरकारों ने इसके समाधान पर ध्यान नहीं दिया।”योगी ने कहा कि सांसद रहते हुए उन्होंने इस मुद्दे को संसद के अंदर और बाहर उठाया तथा मुख्यमंत्री बनने के बाद इस संकट के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए। उन्होंने कहा कि अब इस बीमारी से बच्चों की मौत नहीं होती। योगी ने बताया कि राज्य सरकार ने अब तक 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं और अगले एक साल में एक लाख और युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए हर जिले में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार और कौशल क्षेत्र’ स्थापित किए जा रहे हैं, जो कौशल विकास से रोजगार तक का मार्ग तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बेटियों के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने अगले दो महीनों में स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार छात्राओं को स्कूटर दिए जाने की घोषणा की। योगी ने 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं अयोध्या, काशी, प्रयाग, विंध्याचल और देवीपाटन जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा आसानी से कर सकती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा बंधन पर 60 लाख से अधिक महिलाओं ने मुफ्त बस यात्रा का लाभ लिया और ऐसी योजनाएं मजबूत वित्तीय व्यवस्था व अच्छी सरकार से ही संभव होती हैं।
Allahabad High Court: Noida कामगार प्रदर्शन केस में Himanshu Thakur को मिली जमानत
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा में इस साल अप्रैल में कामगारों के विरोध प्रदर्शन को लेकर दर्ज दो प्राथमिकियों के संबंध में कर्मचारी यूनियन ‘‘मजदूर बिगुल दस्ता’’ के सदस्य हिमांशु ठाकुर को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना और न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने अलग-अलग इन मामलों में आदेश जारी किया। अदालत ने पाया कि भीड़ की कथित हिंसा में ठाकुर की कोई स्पष्ट या विशेष भूमिका नहीं थी। गौतम बुद्ध नगर के फेज-2 थाने में दर्ज इन दोनों मामलों में हिमांशु ठाकुर को 17 अप्रैल, 2026 को गिरफ्तार किया गया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि कामगारों की बड़ी संख्या में भीड़ नोएडा के औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर एकत्र हुई और प्रदर्शनकारियों ने पथराव कर कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तथा कर्मचारियों एवं पुलिसकर्मियों पर हमला किया। इस मामले में ठाकुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने अपराध संख्या 164 में जमानत देते हुए कहा कि समान अधिकार क्षेत्र वाली एक पीठ पहले ही सह-आरोपी रवि कुमार राठौर को जमानत दे चुकी है। न्यायमूर्ति पहल ने सात अगस्त को जमानत देते हुए कहा कि ठाकुर का आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है। अदालत ने उन्हें एक निजी मुचलका और दो जमानतदार पेश करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके करीब दो सप्ताह बाद 20 अगस्त को न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने अपराध संख्या 165 में ठाकुर को जमानत प्रदान की। राज्य सरकार के वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि ठाकुर की सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे राज्य में हिंसा फैलाने में भूमिका थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि 400-500 लोगों की भीड़ में ठाकुर की कोई विशेष भूमिका सामने नहीं आई है। ठाकुर के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के पास से कोई हथियार, विस्फोटक या आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री बरामद नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि न तो प्राथमिकी में और न ही गवाहों के बयानों में यह उल्लेख है कि ठाकुर पथराव, गेट तोड़ने या वाहनों में आग लगाने की घटनाओं के दौरान मौके पर मौजूद थे।
सांप को मदहोश करती है घर से आ रही ये गंध! तभी खिंचे चले आते हैं
Snake Safety Tips: अक्सर लोग सोचते हैं कि सांप केवल जंगलों और झाड़ियों में ही रहते हैं और वो घरों तक नहीं आ सकते. जबकि अक्सर लोगों के घरों और यहां तक कि ऊंचे फ्लैट्स में भी सांप मिलने की खबरें सुनने को मिलती हैं. यहां हम आपको बता रहे हैं कि कुछ घरों में ऐसी चीज होती हैं जिनकी महक सांप को खींचती हैं.
DK Shivakumar ने CEC को लिखा पत्र, कर्नाटक SIR में मतदाता सत्यापन के लिए मांगा और समय
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आग्रह किया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं को सत्यापन के लिए पर्याप्त समय देने के साथ निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाए। शिवकुमार ने सीईसी से दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ाने, सत्यापन का सामना कर रहे मतदाताओं को पर्याप्त समय देने तथा कर्नाटक में एसआईआर के लिए निर्धारित प्रक्रिया को पूरी तरह लागू करने का आग्रह भी किया है। उन्होंने मतदाताओं को सत्यापन के लिए अधिक समय देने का अनुरोध किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर शिवकुमार का पत्र साझा करते हुए कहा, ‘‘कर्नाटक के मुख्यमंत्री का सीईसी को लिखा पत्र है, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची से नामों को बड़े पैमाने पर और अनुचित तरीके से काटे जाने का मुद्दा उठाया गया है।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि सीईसी मुख्यमंत्री द्वारा उठाई गई चिंताओं पर शीघ्र कार्रवाई करेंगे।’’ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में एसआईआर के दौरान सामने आए आंकड़े गंभीरता से ध्यान देने योग्य हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कर्नाटक में 5.54 करोड़ मतदाताओं में से करीब 1.08 करोड़ (लगभग हर पांच में से एक) को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहराव वाले और अन्य (एएसडीडीओ) श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा, 24 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद करीब 43.8 लाख मतदाताओं को ‘तार्किक विसंगतियों’ या 2002 की मतदाता सूची से लिंक नहीं होने के कारण सत्यापन नोटिस जारी किए जाने की संभावना है।’’मुख्यमंत्री ने कहा कि अकेले बेंगलुरु में 46.88 लाख मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया है। उनका कहना था कि इस हिसाब से कर्नाटक में करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है, जब तक कि वे अपना नाम बनाए रखने या नए सिरे से शामिल किए जाने के लिए दावे दाखिल नहीं करते। शिवकुमार ने कहा कि ‘‘अनुपस्थित’’ की श्रेणी में रखे गए लोगों में बड़ी संख्या ऐसे वास्तविक मतदाताओं की हो सकती है, जो काम, स्वास्थ्य या अन्य वैध कारणों से उस समय घर पर मौजूद नहीं थे जब बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) उनके यहां गए और वे गणना प्रपत्र जमा नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि इसी तरह, जो मतदाता किसी अन्य मतदान केंद्र के क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए, उन्हें अपने नए पते पर प्रपत्र जमा करने का अवसर नहीं मिला और उनके नाम पुराने पते से हटा दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु और अन्य शहरों में सड़क के दूसरी ओर भी घर बदलने पर मतदान केंद्र बदल सकता है और ‘‘अनुपस्थित तथा स्थानांतरित’’ श्रेणियों के तहत लाखों वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है। ऐसे मतदाताओं को अब नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 दाखिल करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि जीवंत समाज में लोग और परिवार काम, विवाह तथा अन्य कारणों से नियमित रूप से मोहल्लों, शहरों, कस्बों और गांवों के बीच स्थानांतरित होते रहते हैं। स्थानांतरण का मतलब मताधिकार से वंचित किया जाना नहीं होना चाहिए।’’शिवकुमार ने कहा कि यह चिंता गरीब और वंचित नागरिकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो आजीविका के लिए बार-बार स्थानांतरित हो सकते हैं और अपनी पात्रता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज आसानी से हासिल या उपलब्ध नहीं कर पाते। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए एसआईआर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मतदाता सूची की सटीकता और अखंडता बनाए रखने के साथ-साथ हर पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा हो।’’कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग की दोहरी जिम्मेदारी है कि सटीक मतदाता सूची तैयार हो और कोई वास्तविक और पात्र मतदाता सूची से बाहर न हो। उन्होंने कहा कि ये दोनों उद्देश्य परस्पर विरोधी नहीं हैं और पर्याप्त समय तथा उचित प्रक्रियाओं के जरिए दोनों को हासिल किया जा सकता है।
‘भारत में कोई मुस्लिम न रहे, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता’: न्यूयॉर्क में बोले मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा, 'धर्मों को बड़े पैमाने पर उनके कर्मकांडों के आधार पर परिभाषित किया जाता है। किसी धार्मिक अनुशासन में शामिल होने और उस मार्ग के जरिए ईश्वरत्व की ओर बढ़ने के लिए कर्मकांडों से जुड़ा अनुशासन जरूरी है।'
'गालियां देना टैलेंट है', अर्चना पूरन सिंह ने समय रैना को क्यों दिया ऐसा जवाब?
कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट सीजन-2' में बिहारियों और कश्मीरी पंडितों पर की गई टिप्पणियों से विवाद खड़ा हो गया है।
इश्क में पति की हत्या! पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर दबाया गला, फिर शव को...
सोनभद्र में NCL के सीनियर ओवरमैन रमाशंकर मिश्रा की संदिग्ध मौत का राज पुलिस ने 24 घंटे में खोल दिया. 23 अगस्त को सड़क किनारे मिले शव को पहले हादसा माना गया था. जांच में पत्नी प्रियंका और उसके प्रेमी विकास चौहान पर हत्या का आरोप सामने आया. पुलिस ने दोनों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है.
मुंबई: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 61 लोग लापता
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकला 61 सदस्यीय दल नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बाद से लापता है. 26 अगस्त के बाद दल से संपर्क नहीं हो पाया है और परिजन उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं.
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर जो लोग एक निश्चित, सुरक्षित और सरकार द्वारा गारंटीड रिटर्न की तलाश में हैं, उनके लिए डाकघर (India Post) की स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स हमेशा से सबसे पहली पसंद रही हैं। डाकघर की 'राष्ट्रीय बचत आवर्ती जमा खाता' यानी 5-ईयर पोस्ट ऑफिस रेकरिंग डिपॉजिट (Post Office RD Scheme) एक ऐसा वित्तीय साधन है जो आम नागरिकों, किसानों, नौकरीपेशा और छोटे व्यापारियों को नियमित बचत की आदत डालने का अवसर देता है।यदि आप हर महीने सिर्फ ₹3,000 (यानी सालाना ₹36,000) की बचत करते हैं, तो डाकघर की इस योजना में चक्रवृद्धित होकर यह रकम मैच्योरिटी पर ₹5,47,500 से अधिक का बड़ा सुरक्षित फंड बन जाती है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जमा पूंजी पर भारत सरकार की सॉवरेन गारंटी (Sovereign Guarantee) मिलती है, जिससे निवेशकों का एक-एक रुपया 100% सुरक्षित रहता है और बाजार के किसी भी संकट का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।₹36,000 सालाना (₹3,000 महीना) से ₹5.47 लाख बनने का पूरा गणितडाकघर की 5 वर्षीय आरडी स्कीम में ब्याज की गणना तिमाही आधार पर चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) नियम से की जाती है, जिससे निवेशक को सामान्य सिंपल इंटरेस्ट की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा मिलता है। इस योजना का मूल कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, जिसे आवेदन देकर अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है।मासिक बचत राशि: ₹3,000 प्रति माहवार्षिक कुल निवेश: ₹36,000 प्रति वर्षलागू ब्याज दर: 6.7% वार्षिक (तिमाही चक्रवृद्धि आधार पर)पहले 5 साल का परिदृश्य:5 वर्षों में आपकी कुल जमा राशि: ₹1,80,0005 वर्ष पूरे होने पर अर्जित अनुमानित ब्याज: ₹34,0975 वर्ष बाद कुल मैच्योरिटी राशि: ₹2,14,097खाते को 10 वर्ष तक एक्सटेंड करने पर: यदि आप 5 साल बाद पैसा निकालने के बजाय इस खाते को अगले 5 साल (कुल 10 वर्ष) के लिए आगे बढ़ा देते हैं:10 वर्षों में आपकी कुल जमा राशि: ₹3,60,000 (₹3,000 120 महीने)10 वर्षों में अर्जित कुल चक्रवृद्धि ब्याज: ₹1,87,500 से अधिक10 साल पूरे होने पर मिलने वाला कुल मैच्योरिटी फंड: ₹5,47,500 (लगभग साढ़े पांच लाख रुपये)कंपाउंडिंग की ताकत का सबसे बड़ा असर आखिरी 5 वर्षों में दिखाई देता है, जहां आपका अर्जित ब्याज मूलधन की गति से भी तेजी से बढ़कर फंड को बड़ा आकार देता है।पोस्ट ऑफिस आरडी स्कीम की प्रमुख विशेषताएं और पात्रता के नियमडाकघर आवर्ती जमा खाता देश के किसी भी नागरिक के लिए बेहद आसान और लचीली शर्तों के साथ उपलब्ध है:कौन खोल सकता है खाता: भारत का कोई भी 18 वर्ष से अधिक आयु का नागरिक व्यक्तिगत (Single) खाता खोल सकता है। तीन वयस्क मिलकर संयुक्त (Joint A या Joint B) खाता भी खोल सकते हैं।बच्चों के नाम पर निवेश: 10 वर्ष से अधिक उम्र के नाबालिग के नाम पर वह स्वयं खाता संचालित कर सकता है, जबकि 10 वर्ष से छोटे बच्चों के लिए अभिभावक (माता/पिता) खाता खुलवा सकते हैं।न्यूनतम व अधिकतम सीमा: इस खाते को न्यूनतम ₹100 प्रति माह से शुरू किया जा सकता है। अधिकतम निवेश की कोई ऊपरी सीमा (No Upper Limit) नहीं है; आप अपनी क्षमतानुसार 100 के गुणक में कितनी भी रकम जमा कर सकते हैं।खातों की संख्या: एक व्यक्ति डाकघर में जितने चाहे उतने अलग-अलग आरडी खाते खोल सकता है।नामांकन सुविधा (Nomination): खाता खोलते समय या बाद में कभी भी नॉमिनी का नाम दर्ज कराने की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है।5 साल के बाद खाते को अगले 5 साल के लिए एक्सटेंड करने का नियमडाकघर आरडी मूल रूप से 5 साल की अवधि के लिए खोली जाती है। लेकिन अगर आप ₹5.47 लाख का बड़ा कॉर्पस पाना चाहते हैं, तो आप विभागीय नियमों के तहत इसे 10 साल तक जारी रख सकते हैं:एक्सटेंशन की प्रक्रिया: 5 वर्ष पूरे होने से पहले खाताधारक को संबंधित डाकघर में एक साधारण आवेदन पत्र (Extension Form) जमा करना होता है।ब्याज दर की सुरक्षा: जिस ब्याज दर पर खाता खोला गया था या एक्सटेंशन के समय जो दर लागू होगी, उसी निर्धारित दर पर खाता अगले 5 साल तक लगातार चलता रहेगा।बिना नई जमा के जारी रखने का विकल्प: यदि 5 साल बाद आप हर महीने ₹3,000 जमा नहीं करना चाहते, तब भी आप जमा किए गए ₹2.14 लाख को अगले 5 साल के लिए खाते में छोड़ सकते हैं। उस पर भी तिमाही आधार पर ब्याज जुड़ता रहेगा।लोन, प्री-मैच्योर क्लोजर और पेनल्टी से जुड़े जरूरी नियमआपातकालीन वित्तीय जरूरतों के समय डाकघर आरडी खाताधारकों को कई सहूलियतें प्रदान करता है:50% लोन की सुविधा: खाता लगातार 1 वर्ष (12 किस्तें) तक सक्रिय रहने के बाद जमा राशि का 50% तक हिस्सा लोन के रूप में लिया जा सकता है। इस लोन पर आरडी की ब्याज दर से मात्र 2% अधिक ब्याज लगता है, जिसे एकमुश्त या मासिक किस्तों में चुकाया जा सकता है।प्री-मैच्योर विड्रॉल (समय पूर्व बंदी): विशेष परिस्थितियों में खाता खोलने की तिथि से 3 वर्ष पूरे होने के बाद इसे समय से पहले बंद कराया जा सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में डाकघर बचत खाते (Post Office Savings Account) की 4% साधारण ब्याज दर के अनुसार ही भुगतान किया जाता है।किस्त जमा करने की तिथि व पेनल्टी: यदि खाता महीने की 1 से 15 तारीख के बीच खुला है, तो हर महीने 15 तारीख तक किस्त जमा करनी होती है। यदि खाता 16 तारीख के बाद खुला है, तो महीने के अंतिम कार्यदिवस तक किस्त देनी होगी। समय पर किस्त न देने पर प्रति ₹100 पर ₹1 की मामूली डिफॉल्ट फीस (पेनाल्टी) लगती है।डाकघर में आरडी खाता कैसे खुलवाएं: ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रियाइस योजना से जुड़ने के लिए डाक विभाग ने डिजिटल और पारंपरिक दोनों माध्यमों को बेहद सरल बना दिया है:ऑफलाइन माध्यम: अपने नजदीकी डाकघर (प्रधान डाकघर या उप डाकघर) में जाएं। आरडी खाता खोलने का फॉर्म (Form-1) भरें। साथ में दो पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड और मूल निवास प्रमाण पत्र की स्वप्रमाणित प्रतियां संलग्न करें और पहली किस्त नकद या चेक से जमा करें।ऑनलाइन माध्यम (IPPB मोबाइल बैंकिंग): यदि आपका इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) में डिजिटल खाता है, तो आप IPPB मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे 'DOP Services' में जाकर सीधे अपने बैंक खाते से पोस्ट ऑफिस आरडी खोल सकते हैं और हर महीने ऑटो-डेबिट (Auto-Debit) सेट कर सकते हैं।बैंक आरडी बनाम पोस्ट ऑफिस आरडी: कौन सा विकल्प है ज्यादा फायदेमंद?व्यावसायिक बैंकों (Commercial Banks) की तुलना में डाकघर की आरडी कई मायनों में आम निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक और विश्वसनीय मानी जाती है। अधिकांश बैंक 1 से 3 साल की आरडी पर अधिक ध्यान देते हैं और 5 से 10 साल की लंबी अवधि के लिए उनकी ब्याज दरें अक्सर कम हो जाती हैं। वहीं, डाकघर 5 साल की लंबी अवधि के लिए 6.7% की स्थिर तिमाही चक्रवृद्धि ब्याज दर प्रदान करता है।इसके अतिरिक्त, बैंकों में ₹5 लाख तक का डिपॉजिट ही डीआईसीजीसी (DICGC) के तहत बीमित होता है, जबकि डाकघर में जमा पूरा पैसा सीधे भारत सरकार के संप्रभु कोष (Sovereign Backing) द्वारा सुरक्षित रहता है। कर नियमों की बात करें तो आरडी से मिलने वाला ब्याज आयकर स्लैब के अनुसार कर योग्य होता है, लेकिन 10 साल के नजरिए से नियमित अनुशासित बचत का यह सबसे प्रभावी माध्यम है।यदि आप हर महीने सिर्फ ₹3,000 की अनुशासित बचत का संकल्प लेते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की यह 5 वर्षीय आवर्ती जमा योजना अगले 10 वर्षों में आपको बिना किसी जोखिम के ₹5,47,500 का एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान कर सकती है।
जीवन में कई बार अचानक मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की स्कूल-कॉलेज फीस, घर की मरम्मत या किसी अप्रत्याशित वित्तीय संकट के चलते तुरंत पैसों की आवश्यकता पड़ जाती है। ऐसे समय में ज्यादातर लोग अपनी सुरक्षित बचत यानी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का रुख करते हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ा असमंजस यह होता है कि क्या सालों की मेहनत से बनाई गई एफडी को बीच में ही तोड़ दिया जाए या फिर उसी एफडी को गिरवी रखकर बैंक से लोन या ओवरड्राफ्ट (Overdraft Facility) ले लिया जाए?वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, बिना सोचे-समझे एफडी तोड़ना आपको दोहरा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। बैंक न केवल समय से पहले निकासी पर पेनाल्टी वसूलते हैं, बल्कि आपको मिलने वाले चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding Interest) का चक्र भी हमेशा के लिए टूट जाता है। वहीं दूसरी ओर, एफडी के बदले लोन लेने का विकल्प आपको अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखते हुए नकदी की कमी दूर करने की आजादी देता है। दोनों विकल्पों का सही चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आपको कितनी रकम की जरूरत है और आप उसे कितने समय में वापस चुका सकते हैं।एफडी प्री-मैच्योर विड्रॉल (Premature Withdrawal): पेनाल्टी और ब्याज का गणितजब आप किसी फिक्स्ड डिपॉजिट को उसकी तय मैच्योरिटी अवधि (Tenure) पूरी होने से पहले बंद करते हैं, तो बैंक इसे 'प्री-मैच्योर विड्रॉल' कहते हैं। इसमें आपको मिलने वाला रिटर्न कई पैमानों पर घट जाता है:पेनाल्टी की कटौती: देश के प्रमुख बैंक (जैसे SBI, HDFC, ICICI, PNB) एफडी को समय से पहले तोड़ने पर 0.50% से लेकर 1% तक का जुर्माना (Penalty) काटते हैं।लागू ब्याज दर का नियम: मान लीजिए आपने 5 साल के लिए 7.5% की दर पर ₹5 लाख की एफडी कराई थी। यदि आप इसे 2 साल बाद ही तोड़ देते हैं, तो बैंक आपको 5 साल वाला 7.5% ब्याज नहीं देगा। बैंक उस दर पर ब्याज देगा जो एफडी खुलवाते समय 2 साल की अवधि के लिए लागू थी (मान लेते हैं 6.5%), और उसमें से भी 1% पेनाल्टी घटाकर आपको केवल 5.5% की दर से ही भुगतान करेगा।कंपाउंडिंग का बड़ा नुकसान: एफडी में लंबी अवधि में मिलने वाला सबसे बड़ा फायदा ब्याज पर मिलने वाले ब्याज यानी कंपाउंडिंग से होता है। बीच में एफडी तोड़ने से भविष्य के वर्षों की वेल्थ क्रिएशन प्रक्रिया पूरी तरह रुक जाती है।लोन अगेंस्ट एफडी (Loan Against FD): यह सुविधा कैसे काम करती है?फिक्स्ड डिपॉजिट के एवज में लोन लेना सुरक्षित ऋण (Secured Loan) की श्रेणी में आता है। इसमें आपकी एफडी बैंक के पास कोलैटरल (जमानत) के रूप में सुरक्षित रहती है:लोन की सीमा: बैंक आपकी एफडी की कुल जमा राशि और उस पर अर्जित ब्याज का 85% से 95% तक हिस्सा लोन या ओवरड्राफ्ट के रूप में तुरंत स्वीकृत कर देते हैं।ब्याज दर का फॉर्मूला: एफडी पर लोन की ब्याज दर बहुत सामान्य होती है। बैंक आमतौर पर आपकी एफडी पर मिलने वाली मूल ब्याज दर से केवल 1% से 2% अधिक ब्याज वसूलते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपकी एफडी पर 7% ब्याज मिल रहा है, तो लोन पर 8% से 8.5% का ब्याज लगेगा।पूरी एफडी पर ब्याज जारी रहता है: लोन लेने के बावजूद आपकी पूरी ₹5 लाख की एफडी पर बैंक द्वारा तय किया गया 7% ब्याज लगातार बनता रहता है।फ्लेक्सिबल रीपेमेंट (Overdraft Facility): इस सुविधा में आपको एक क्रेडिट लिमिट मिलती है। आप जितना पैसा निकालते हैं और जितने दिनों के लिए इस्तेमाल करते हैं, आपको केवल उतने ही पैसे और दिनों पर ब्याज देना होता है।₹5 लाख की एफडी पर वास्तविक कैलकुलेशन: समझिए किसमें है ज्यादा फायदामान लेते हैं कि आपने ₹5,00,000 की एफडी 5 साल की अवधि के लिए 7.00% वार्षिक ब्याज पर कराई है। 3 साल पूरे होने पर आपको अचानक 6 महीने के लिए ₹2,00,000 की जरूरत पड़ती है। आइए दोनों स्थितियों का वास्तविक वित्तीय विश्लेषण देखें:विकल्प 1: एफडी समय से पहले तोड़ना3 साल का वास्तविक कार्ड रेट 6.25% था, जिसमें से 0.75% पेनाल्टी कटने के बाद प्रभावी दर 5.50% रह गई।आपको 3 साल का ब्याज कम दर पर मिलेगा और बाकी बचे 2 साल का कंपाउंडिंग लाभ पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।₹5 लाख की पूरी एफडी टूट जाएगी, जबकि आपको जरूरत केवल ₹2 लाख की थी। बाकी बचे ₹3 लाख पर भी भविष्य का 7% ब्याज रुक जाएगा।विकल्प 2: एफडी पर ₹2 लाख का ओवरड्राफ्ट/लोन लेनाआपकी ₹5 लाख की पूरी एफडी 7% की दर से लगातार बढ़ती रहेगी और 5 साल बाद अपनी पूरी मैच्योरिटी वैल्यू देगी।आपको ₹2 लाख के लोन पर 8% (7% + 1%) की दर से 6 महीने का ब्याज देना होगा, जो लगभग ₹8,000 के आसपास बैठेगा।6 महीने बाद जैसे ही आप ₹2 लाख और ₹8,000 का ब्याज चुका देते हैं, आपका लोन खाता बंद हो जाएगा और आपकी मूल एफडी बिना किसी नुकसान के जस की तस सुरक्षित रहेगी।इस तुलना से साफ है कि अल्पकालिक जरूरतों के लिए लोन अगेंस्ट एफडी चुनना हजारों रुपये के संभावित नुकसान से बचाता है।कब एफडी तोड़ना समझदारी है और कब लोन लेना बेहतर?दोनों विकल्पों में से सही रास्ते का चुनाव आपकी जरूरत की समय-सीमा और पुनर्भुगतान की क्षमता पर निर्भर करता है:लोन अगेंस्ट एफडी कब चुनें:जब आपको पैसों की आवश्यकता बहुत कम समय (1 महीने से 12 महीने) के लिए हो।जब आपको उम्मीद हो कि आने वाले कुछ महीनों में सैलरी, बोनस या अन्य स्रोतों से पैसा वापस आ जाएगा।जब आपकी एफडी अपनी मैच्योरिटी के काफी करीब हो (जैसे 5 साल की एफडी में से 4 साल बीत चुके हों)।जब आपको एफडी की कुल रकम के 20% से 50% हिस्से की ही जरूरत हो।एफडी तोड़ना (Premature Closure) कब सही है:जब आपको एफडी की पूरी या 90% से अधिक राशि की जरूरत हो और आप उसे अगले 2-3 वर्षों तक चुकाने की स्थिति में न हों।यदि लोन की अवधि लंबी खिंचती है, तो 1% से 2% का अतिरिक्त ब्याज समय के साथ बड़ा बोझ बन सकता है।जब आपको किसी ऐसी जगह निवेश करने का अवसर मिल रहा हो जहां रिटर्न एफडी की दर और पेनाल्टी के नुकसान से कहीं अधिक (जैसे आकर्षक रियल एस्टेट या हाई-ग्रोथ एसेट) हो।सिबिल स्कोर, प्रोसेसिंग फीस और टैक्स नियमक्रेडिट स्कोर पर असर: एफडी के बदले लोन लेने के लिए किसी सिबिल (CIBIL) स्कोर की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि बैंक के पास आपकी एफडी पहले से सुरक्षित होती है। यदि आपका क्रेडिट स्कोर खराब भी है, तब भी यह लोन बिना किसी रुकावट के मिल जाता है। समय पर इसका भुगतान करने से आपका सिबिल स्कोर और मजबूत होता है।शून्य प्रोसेसिंग फीस: अधिकांश बैंक एफडी पर लोन या ओवरड्राफ्ट के लिए कोई प्रोसेसिंग फीस या प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं लेते हैं। आप जब चाहें बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के लोन बंद कर सकते हैं।टैक्स में कोई रुकावट नहीं: यदि आपने 5 साल की टैक्स सेवर एफडी (Section 80C) कराई है, तो नियम के अनुसार उस पर 5 साल का लॉक-इन होता है; उसे तोड़ा नहीं जा सकता और न ही उस पर लोन मिलता है। सामान्य एफडी पर मिलने वाला ब्याज 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेस' में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार कर योग्य होता है।डिजिटल माध्यम से 2 मिनट में पाएं लोनआजकल बैंक शाखा जाने की भी जरूरत नहीं है। यदि आपके पास इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप (जैसे SBI YONO, HDFC MyCards, ICICI iMobile) है, तो आप 'Loans/Overdraft against FD' सेक्शन में जाकर कुछ ही क्लिक में अपनी एफडी के बदले तुरंत अपने बचत खाते में लोन की रकम ट्रांसफर करवा सकते हैं।यदि जरूरत छोटी अवधि की है तो एफडी तोड़ने के बजाय उस पर लोन या ओवरड्राफ्ट लेना वित्तीय रूप से सबसे स्मार्ट और किफायती फैसला साबित होता है।
Ankit Baliyan Murder Case: Shamli प्रशासन ने परिवार से मिलकर दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा
उत्तर प्रदेश के शामली के जिलाधिकारी आलोक यादव और पुलिस अधीक्षक एनपी सिंह ने शनिवार को बंतीखेड़ा गांव पहुंचकर हरियाणवी गायक एवं यूट्यूबर अंकित बालियान के परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की। पुलिस की ओर से जारी बयान के अनुसार, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मृतक के पिता सतवीर सिंह समेत परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। इससे एक दिन पहले परिवार ने पुलिस जांच पर असंतोष जताया था। मृतक की पत्नी सीमा ने चेतावनी दी थी कि अगर पुलिस चार दिन के भीतर उसके पति के हत्यारों को गिरफ्तार नहीं करती है तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह कर लेंगी। इस बीच समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद इकरा हसन, विधायक पंकज मलिक, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल कुमार समेत कई राजनेताओं ने बंतीखेड़ा गांव पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और घटना की निंदा की। पुलिस के अनुसार, अंकित बालियान की बुधवार शाम करीब 6:45 बजे शामली कोतवाली क्षेत्र में एक जिम से निकलते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गंभीर रूप से घायल बालियान को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें बालियान को जिम से निकलते और अपनी कार की ओर जाते देखा जा सकता है। वीडियो में चार हमलावर दो मोटरसाइकिलों से आते हैं और गोली चलाने के बाद मौके से फरार हो जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि बालियान को पांच गोलियां लगी थीं, जिनमें से दो सिर में लगी थीं। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया था कि उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और पुलिस की अन्य टीमें सीसीटीवी फुटेज की मदद से चारों हमलावरों की पहचान करने में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि जांच में हमलावरों के हरियाणा की ओर भागने के रास्ते का भी पता लगाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि शामली, गाजियाबाद के लोनी, दिल्ली और सोनीपत के कई स्थानों के सीसीटीवी फुटेज में चार लोगों को दो मोटरसाइकिलों पर भागते हुए देखा गया है। पुलिस ने हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश एसटीएफ और शामली, बागपत तथा मेरठ जिलों की पुलिस टीमें जांच के सिलसिले में हरियाणा में मौजूद हैं। इस बीच, खुद को गोगी गिरोह का सदस्य बताने वाले एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कथित तौर पर बालियान की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। पुलिस इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है। बालियान के पिता सतवीर सिंह की शिकायत पर चार अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) भानु भास्कर ने कहा था कि पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं लेकिन जांच प्रभावित होने के कारण उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा था, ‘‘हमें कई सुराग मिले हैं, लेकिन उन्हें सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। इसका खुलासा बहुत जल्द किया जाएगा।’’शामली के बंतीखेड़ा गांव के रहने वाले बालियान ने चोट लगने के बाद राज्य स्तरीय कबड्डी खिलाड़ी के रूप में अपना करियर खत्म होने के बाद हरियाणवी संगीत जगत में पहचान बनाई थी। उन्होंने गायक, गीतकार और संगीतकार के रूप में 50 से अधिक गानों पर काम किया था। उनकी हत्या के बाद शामली में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। परिवार और स्थानीय लोगों ने हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। बालियान का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को उनके पैतृक गांव में किया गया। इस हत्या को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मांग की थी कि मामले की जांच संभावित राजनीतिक दुश्मनी के पहलू से भी की जानी चाहिए। भीम आर्मी के संस्थापक और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी बृहस्पतिवार रात हत्या की निंदा करते हुए कहा था कि हरियाणवी गायक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करना ‘‘बेहद दुखद और चिंताजनक’’ है।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समर्थित 'एसबीआई म्यूचुअल फंड' (SBI Mutual Fund) देश के सबसे भरोसेमंद और बड़े एसेट मैनेजमेंट फंड हाउस में से एक है। अक्सर लोग यह सोचते हैं कि करोड़ों या लाखों का फंड बनाने के लिए हर महीने भारी रकम निवेश करनी पड़ती है, जबकि हकीकत यह है कि सही समय पर किया गया एक छोटा सा एकमुश्त (Lumpsum) निवेश भी चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding) की बदौलत भविष्य में विशाल धनराशि का रूप ले सकता है।यदि आप अपनी किसी बचत या बोनस में से केवल ₹50,000 की राशि को एक बार में किसी अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड में डालकर छोड़ देते हैं, तो लंबी अवधि में यह मामूली सी रकम बढ़कर ₹19 लाख से अधिक का बड़ा कॉर्पस बन सकती है। यह योजना उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है जो बार-बार किस्त भरने के झंझट से दूर रहकर अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, उनके विवाह या अपने रिटायरमेंट के लिए एक सुरक्षित वित्तीय बैकअप तैयार करना चाहते हैं।₹50,000 से ₹19 लाख बनने का पूरा गणित और कंपाउंडिंग चार्टम्यूचुअल फंड में रिटर्न की गणना अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा कहे गए दुनिया के 'आठवें अजूबे' यानी कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि विकास) पर निर्भर करती है। जब आप पैसा निवेश करते हैं, तो आपको मूलधन पर मिलने वाले लाभ पर भी दोबारा रिटर्न मिलता है।मान लीजिए कि आप एसबीआई के किसी डायवर्सिफाइड इक्विटी या स्मॉल/मिडकैप फंड में ₹50,000 का एकमुश्त निवेश करते हैं और उस फंड से औसतन 15% का वार्षिक चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) प्राप्त होता है:5 साल बाद: आपकी ₹50,000 की रकम लगभग ₹1,00,568 हो जाएगी (पैसा दोगुना)।10 साल बाद: यही राशि बढ़कर लगभग ₹2,02,278 तक पहुंच जाएगी।15 साल बाद: 15% सालाना की दर से कुल फंड लगभग ₹4,06,853 बन जाएगा।20 साल बाद: आपका निवेश बढ़कर लगभग ₹8,18,327 हो जाएगा।25 साल बाद: कंपाउंडिंग की रफ्तार तेज होने से यह रकम लगभग ₹16,45,947 हो जाएगी।26 साल बाद: 26वें वर्ष में आपकी ₹50,000 की प्रारंभिक लागत बढ़कर ₹18,92,840 (लगभग ₹19 लाख) का विशाल फंड बन जाएगी।यदि फंड का वार्षिक प्रदर्शन 15.5% या 16% तक पहुंचता है, तो यह ₹19 लाख का आंकड़ा 24 से 25 साल में ही आसानी से पार हो जाता है।ऐतिहासिक रूप से शानदार रिटर्न देने वाले SBI के प्रमुख इक्विटी फंड्सलंबी अवधि में 14% से 18% तक का सीएजीआर (CAGR) रिटर्न देने वाले एसबीआई के कुछ चुनिंदा म्यूचुअल फंड्स ने निवेशकों को मालामाल किया है:SBI Small Cap Fund: इस फंड ने अपनी शुरुआत से लेकर अब तक लंबी अवधि में 18% से अधिक का शानदार औसत रिटर्न दिया है। यह तेजी से बढ़ती छोटी कंपनियों में निवेश करता है।SBI Magnum Midcap Fund: मिडकैप कैटेगरी का यह एक स्थापित फंड है, जिसने पिछले 10 से 15 वर्षों में 16% से अधिक का वार्षिक सीएजीआर दर्ज किया है।SBI Contra Fund: यह फंड 'कंट्रारियन' स्ट्रैटेजी पर काम करता है, यानी उन सेक्टर्स में पैसा लगाता है जो फिलहाल सस्ते वैल्यूएशन पर हैं लेकिन भविष्य में भारी मुनाफा दे सकते हैं। इसने 15% से 17% तक का लगातार रिटर्न दिया है।SBI Large & Midcap Fund: यह फंड स्थिरता और ग्रोथ दोनों का संतुलन बनाता है, जिसमें टॉप 100 बड़ी कंपनियों के साथ-साथ उभरती मिडकैप कंपनियों का पोर्टफोलियो शामिल होता है।SBI Long Term Equity Fund (ELSS): यह एक टैक्स-सेविंग फंड है, जिसने ऐतिहासिक रूप से वेल्थ क्रिएशन में 15% के आसपास मजबूत प्रदर्शन दिखाया है।लंपसम (Lumpsum) बनाम एसआईपी (SIP): आपके लिए क्या बेहतर है?निवेशकों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि उन्हें हर महीने एसआईपी करनी चाहिए या एकमुश्त पैसा लगाना चाहिए:लंपसम (एकमुश्त निवेश): जब आपके पास कोईमुश्त रकम (जैसे बोनस, एफडी मैच्योरिटी, संपत्ति की बिक्री या उपहार में मिला पैसा) उपलब्ध हो, तो उसे एक साथ निवेश करना लंपसम कहलाता है। यदि बाजार में गिरावट या सुधार (Correction) आया हुआ है, तो लंपसम निवेश सबसे ज्यादा यूनिट्स सस्ते दाम पर खरीदने का बेहतरीन मौका देता है।सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP): नियमित मासिक आय वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए एसआईपी उपयुक्त है, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव की कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee Cost Averaging) हो जाती है।स्मार्ट तरीका (STP रूट): यदि आप बाजार के उच्चतम स्तर पर एक साथ ₹50,000 लगाने से डरते हैं, तो आप इस पैसे को पहले 'एसबीआई लिक्विड फंड' में रख सकते हैं और वहां से सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए हर महीने इक्विटी फंड में ट्रांसफर कर सकते हैं।एसबीआई म्यूचुअल फंड में ऑनलाइन निवेश की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियाडिजिटल युग में एसबीआई के किसी भी फंड में एकमुश्त निवेश करना बेहद सरल और पेपरलेस है:एसबीआई योनो ऐप (SBI YONO): यदि आपका खाता भारतीय स्टेट बैंक में है, तो YONO ऐप में लॉग-इन करें। 'Investments' सेक्शन में जाएं, 'Mutual Funds' चुनें और अपनी पसंद का SBI फंड सिलेक्ट करके ₹50,000 का लंपसम पेमेंट सीधे बैंक खाते से कर दें।आधिकारिक पोर्टल (sbimf.com): एसबीआई म्यूचुअल फंड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। 'Invest Now' पर क्लिक करके अपना पैन कार्ड (PAN) और मोबाइल नंबर दर्ज करें। ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद योजना का चुनाव करें और नेट बैंकिंग या यूपीआई से भुगतान पूरा करें।म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म्स: आप CAMS, KFintech, Groww, Zerodha Coin या Angel One जैसे रजिस्टर्ड फिनटेक प्लेटफॉर्म के जरिए भी डायरेक्ट प्लान (Direct Plan - Growth) चुनकर कमीशन बचा सकते हैं।जोखिम प्रबंधन और टैक्स नियम: इन बातों का रखें विशेष ध्यानम्यूचुअल फंड बाजार के जोखिमों के अधीन होते हैं, इसलिए निवेशकों को यथार्थवादी समझ के साथ आगे बढ़ना चाहिए:बाजार का उतार-चढ़ाव: इक्विटी बाजार में अल्पकालिक (Short Term) उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। 2 से 3 वर्षों में फंड निगेटिव रिटर्न भी दिखा सकता है, लेकिन 15 से 25 साल के नजरिए में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण यह जोखिम काफी कम हो जाता है।लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स: 1 वर्ष से अधिक समय तक होल्ड किए गए इक्विटी म्यूचुअल फंड पर रिडेम्पशन के समय सालाना ₹1.25 लाख तक का मुनाफा पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। इससे अधिक के मुनाफे पर 12.5% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है।डायरेक्ट बनाम रेगुलर प्लान: हमेशा 'Direct Plan - Growth' विकल्प चुनें। इसमें एजेंट का कोई कमीशन नहीं कटता, जिससे लंबी अवधि में आपका कुल कॉर्पस 1% से 1.5% अतिरिक्त बढ़ता है।छोटी बचत की सही दिशा में निरंतरता ही आर्थिक स्वतंत्रता की कुंजी है। ₹50,000 का यह छोटा सा बीज सही समय और धैर्य के साथ आने वाले दशकों में एक मजबूत वटवृक्ष बन सकता है।
पर्यावरण संरक्षण, वन भूमि की सुरक्षा और सुनियोजित शहरी विकास को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने संरक्षित वन क्षेत्रों, हरित पट्टियों और सरकारी भूमि पर वर्षों से बसी 86 अवैध कॉलोनियों को तत्काल प्रभाव से खाली कराने और वहां किए गए अनधिकृत निर्माणों को ध्वस्त करने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है।अदालत की विशेष पीठ ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संतुलन और सार्वजनिक सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार, संबंधित नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों और जिला प्रशासन को एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर समूची जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराकर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करने का आदेश दिया है। इस आदेश के सामने आते ही संबंधित इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों के सामने अपने आशियाने को बचाने का गहरा संकट खड़ा हो गया है।क्यों लिया गया यह सख्त फैसला? पर्यावरण और मास्टर प्लान का उल्लंघनअदालत के इस कड़े आदेश की पृष्ठभूमि में लंबे समय से चल रही जनहित याचिकाएं (PIL) और पर्यावरणविदों द्वारा दायर की गई कानूनी अपीलें शामिल हैं। जांच रिपोर्टों और सेटेलाइट मैपिंग के जरिए यह तथ्य कोर्ट के सामने आया कि चिन्हित की गई 86 कॉलोनियां प्राकृतिक जल निकासी चैनलों, इको-सेंसिटिव जोन, रिज या आरक्षित वन भूमि पर अवैध रूप से बसाई गई हैं।भू-माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों ने कृषि व वन भूमि के फर्जी दस्तावेज तैयार करके गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ते दामों में प्लॉट बेच दिए। समय बीतने के साथ वहां पक्के मकान, बहुमंजिला इमारतें और व्यावसायिक दुकानें तक खड़ी हो गईं। कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी में कहा कि अवैध निर्माणों को संरक्षण देना भविष्य में बाढ़, भूस्खलन, जलभराव और गंभीर पर्यावरणीय आपदाओं को निमंत्रण देने जैसा है। इसलिए प्राकृतिक जलस्रोतों और वन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।हजारों परिवारों पर बेघर होने का साया: कॉलोनियों में दहशत और आक्रोश का माहौलसुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद प्रभावित 86 कॉलोनियों में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। इन इलाकों में रहने वाले अधिकांश लोग निम्न और मध्यम आय वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, जिन्होंने अपने जीवन भर की जमा-पूंजी लगाकर ईंट-ईंट जोड़कर मकान बनाए थे।स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले 15 से 25 वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं। उनके पास बिजली के वैध कनेक्शन, पानी के बिल, नगर पालिका के हाउस टैक्स की रसीदें, आधार कार्ड, वोटर आईडी और रजिस्ट्री तक के दस्तावेज मौजूद हैं। लोगों का तर्क है कि जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इसे क्यों नहीं रोका। अब अचानक बिना किसी ठोस व्यवस्था के छतों को गिराने के फैसले ने बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों के भविष्य को अधर में लटका दिया है।प्रशासन की डिमोलिशन और बेदखली कार्ययोजना: भारी पुलिस बल होगा तैनातशीर्ष अदालत की अवमानना से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों ने एक संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक कर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली है:सार्वजनिक नोटिस और मुनादी: प्रशासन सबसे पहले चिन्हित कॉलोनियों में धारा-144 के तहत सार्वजनिक घोषणाएं करा रहा है और प्रत्येक मकान पर बेदखली के नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं, ताकि लोग अपना घरेलू सामान सुरक्षित निकाल सकें।जोनल मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति: बड़े पैमाने पर होने वाली इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करने के लिए पूरे क्षेत्र को अलग-अलग सेक्टरों और जोनों में बांटकर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की विशेष ड्यूटी लगाई जा रही है।ड्रोन सर्विलांस और वीडियोग्राफी: डिमोलिशन अभियान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना, उपद्रव या कानून व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए ड्रोन कैमरों से पूरे इलाके की निगरानी की जाएगी और समूची प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी।बिजली-पानी के कनेक्शन काटने का निर्देश: आधिकारिक समय-सीमा समाप्त होते ही संबंधित डिस्कॉम और जल संस्थान को अवैध ढांचों के बिजली व पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जारी किए जा चुके हैं।पुनर्वास नीति (Rehabilitation): क्या बेघर परिवारों को मिलेगा वैकल्पिक मकान?सुप्रीम कोर्ट ने जहां अवैध निर्माण को हटाने पर कोई ढिलाई न बरतने की बात कही है, वहीं वास्तविक और पात्र नागरिकों के मानवीय अधिकारों को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास के लिए भी दिशा-निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं परिवारों को पुनर्वास योजना का लाभ मिलेगा जो पात्रता के सख्त मानकों को पूरा करेंगे:कट-ऑफ डेट का निर्धारण: केवल वही परिवार पुनर्वास के हकदार माने जाएंगे जो सरकार द्वारा तय की गई कट-ऑफ तारीख (Cut-off Date) से पहले से वहां निवास कर रहे हों और जिनके पास इसका पुख्ता कानूनी प्रमाण हो।प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) से लिंक: बेघर होने वाले पात्र और निर्धन परिवारों को सरकार की किफायती आवास योजनाओं (Affordable Housing Schemes) के तहत न्यूनतम किस्तों या लीज आधार पर फ्लैट्स आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।पहचान व स्क्रूटनी प्रक्रिया: जिला समाज कल्याण विभाग और राजस्व टीम प्रभावित लोगों के राशन कार्ड, वोटर लिस्ट में नाम और वार्षिक पारिवारिक आय प्रमाण पत्र की जांच करेगी, ताकि किसी अपात्र या किराएदार द्वारा योजना का दुरुपयोग न किया जा सके।कानूनी विकल्प: क्या प्रभावित लोगों के पास अब भी कोई राहत का रास्ता है?सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद कानूनी विकल्प काफी सीमित हो जाते हैं, लेकिन भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत प्रभावित पक्ष अभी भी कुछ संवैधानिक रास्तों का उपयोग कर सकते हैं:पुनर्विचार याचिका (Review Petition): प्रभावित नागरिक या उनकी संयुक्त कल्याण समितियां (RWA) आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर सकती हैं, जिसमें मानवीय आधार और पुनर्वास प्रक्रिया पूरी होने तक डिमोलिशन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की जा सकती है।सुधारात्मक याचिका (Curative Petition): यदि पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो जाती है, तो अंतिम कानूनी उपाय के रूप में क्यूरेटिव पिटीशन का सहारा लिया जा सकता है, हालांकि इसमें राहत मिलने की दर बेहद सीमित होती है।राज्य सरकार से गुहार: स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के जरिए राज्य सरकार से यह मांग की जा रही है कि वह कैबिनेट स्तर पर नीतिगत निर्णय लेकर प्रभावित आबादी के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज या सैटेलाइट टाउनशिप में भूमि का प्रबंध करे।यह पूरा घटनाक्रम शहरी नियोजन, पर्यावरण संतुलन और नागरिकों के आशियाने के बीच एक जटिल टकराव को दर्शाता है। आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई और सरकार के पुनर्वास कदम पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।
एल्गार परिषद मामले में NIA को झटका, चार आरोपियों की जमानत रद्द करने की अर्जी खारिज
एल्गार परिषद मामले में चार आरोपियों की जमानत रद्द करने की NIA की मांग को विशेष NIA अदालत ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की मौजूदगी से जमानत शर्तों के उल्लंघन का प्रमाण नहीं मिलता. कोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करने के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं. केवल मौजूदगी को आधार नहीं बनाया जा सकता.
राज्य सड़क परिवहन निगम में महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश भर के विभिन्न रीजनल डिपो और रूटों पर चलने वाली रोडवेज बसों में महिला परिचालकों (कंडक्टर) की नियुक्ति के लिए विशेष भर्ती अभियान शुरू किया गया है। अब सरकारी बसों में टिकट काटने से लेकर यात्रियों की सुरक्षा और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने की कमान महिलाएं संभालती नजर आएंगी।इस भर्ती का मुख्य उद्देश्य परिवहन सेवा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और महिला यात्रियों को सुरक्षित व सहज यात्रा का अनुभव देना है। परिवहन निगम द्वारा संविदा (Contractual) आधार पर यह भर्तियां निकाली जा रही हैं, जिसमें पारदर्शी प्रक्रिया के तहत बिना किसी लिखित परीक्षा या इंटरव्यू के सीधे मेरिट और सेवायोजन पोर्टल के नियमों के आधार पर चयन किया जाएगा। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की पात्र युवतियां इस अवसर का लाभ उठाकर सरकारी तंत्र से जुड़ सकती हैं।किन-किन रीजनल डिपो में होगी तैनाती और पदों का विवरणपरिवहन निगम की इस योजना के तहत राज्य के प्रमुख संभागों और जिलों के डिपो में महिला परिचालकों को तैनात किया जाएगा। इनमें लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, गाजियाबाद, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर और अयोध्या जैसे बड़े रीजन शामिल हैं।स्थानीय डिपो पर तैनात होने से महिला अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले या आसपास के क्षेत्रों में ही ड्यूटी करने की सुविधा मिलेगी। लंबी दूरी की इंटरसिटी बसों के साथ-साथ लोकल और ग्रामीण रूटों की साधारण व जनरथ बसों में महिला कंडक्टरों की रोस्टर आधारित ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके अलावा, महिला यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए विशेष पिंक बसों में प्राथमिकता के आधार पर महिला स्टाफ को ही जिम्मेदारी दी जा रही है।शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और पात्रता की शर्तेंरोडवेज में परिचालक पद के लिए आवेदन करने वाली महिला अभ्यर्थियों के पास आवश्यक शैक्षणिक और तकनीकी योग्यताएं होना अनिवार्य है:शैक्षणिक योग्यता: अभ्यर्थी का किसी भी मान्यता प्राप्त राज्य या केंद्रीय शिक्षा बोर्ड से न्यूनतम 12वीं (इंटरमीडिएट) कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।कंप्यूटर योग्यता: राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT / DOEACC) द्वारा जारी 'CCC' (Course on Computer Concepts) प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। बिना CCC सर्टिफिकेट के आवेदन मान्य नहीं होगा।विशेष अधिमान्यता (अतिरिक्त अंक): एनसीसी (NCC 'B' या 'C' सर्टिफिकेट), भारत स्काउट्स एवं गाइड्स में राज्य पुरस्कार प्राप्त अथवा किसी मान्यता प्राप्त खेलकूद प्रतियोगिता में पदक विजेता अभ्यर्थियों को चयन मेरिट में नियमानुसार वरीयता (वेटेज) दी जाएगी।आयु सीमा: आवेदन के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग) की महिला अभ्यर्थियों को राज्य सरकार के नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी।चयन प्रक्रिया: कैसे बनेगी अंतिम मेरिट सूची?परिवहन निगम में परिचालक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और बिचौलियों से मुक्त रखा गया है:मेरिट आधारित चयन: इस भर्ती में किसी प्रकार की लिखित परीक्षा या व्यक्तिगत साक्षात्कार नहीं लिया जाएगा। अभ्यर्थियों का चयन 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के प्रतिशत और नियमों के तहत मिलने वाले वेटेज के आधार पर तैयार की जाने वाली मेरिट सूची से होगा।दस्तावेज सत्यापन (Document Verification): सेवायोजन पोर्टल पर शॉर्टलिस्ट की गई महिला अभ्यर्थियों को संबंधित क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) कार्यालय में अपने मूल दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा।प्रारंभिक प्रशिक्षण: चयन के उपरांत सभी नवनियुक्त महिला कंडक्टरों को इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ETM) चलाने, यात्रियों से संवाद, कैश मैनेजमेंट और आपातकालीन सुरक्षा उपायों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।मानदेय, किलोमीटर भत्ता और मिलने वाली सुविधाएंसंविदा परिचालकों को राज्य सड़क परिवहन निगम के मानकों के अनुसार पारिश्रमिक और प्रोत्साहन राशि दी जाती है:किलोमीटर आधारित भुगतान: परिचालकों को प्रति किलोमीटर बस संचालन के आधार पर निर्धारित दर (लगभग ₹1.89 से ₹2.10 प्रति किमी) से भुगतान किया जाता है।मासिक फिक्स इंसेंटिव: यदि कोई महिला परिचालक महीने में 22 दिन की न्यूनतम ड्यूटी पूरी करती है और निर्धारित मानक (लगभग 5,000 किलोमीटर) का संचालन करती है, तो उसे ₹3,000 तक का अतिरिक्त प्रदर्शन प्रोत्साहन (Incentive) भत्ता प्रदान किया जाता है।औसत मासिक आय: नियमानुसार नियमित कार्य करने पर महिला कंडक्टर प्रतिमाह लगभग ₹16,000 से ₹22,000 तक का मानदेय आसानी से प्राप्त कर सकती हैं।अन्य लाभ: ड्यूटी के दौरान ईपीएफ (EPF) कटौती, दुर्घटना बीमा सुरक्षा, निशुल्क यात्रा पास और मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाएं भी नियमानुसार देय होती हैं।सेवायोजन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियाइस भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन मोड में राज्य रोजगार संगम/सेवायोजन पोर्टल (sewayojan.up.nic.in) के माध्यम से स्वीकार किए जा रहे हैं:पोर्टल पर पंजीकरण: सबसे पहले सेवायोजन पोर्टल पर जाएं और 'जॉब सीकर' (Job Seeker) के रूप में अपना नया रजिस्ट्रेशन करें।प्रोफाइल पूरा करें: अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण (10वीं, 12वीं), CCC कंप्यूटर सर्टिफिकेट का रोल नंबर व जारी दिनांक, जाति प्रमाण पत्र और फोटो अपलोड करके प्रोफाइल को 100% पूरा करें।नौकरी खोजें: पोर्टल के डैशबोर्ड में 'आउटसोर्सिंग/संविदा नौकरियां' विकल्प पर क्लिक करें। वहां पद का नाम 'कंडक्टर' या विभाग 'उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम' चुनकर सर्च करें।आवेदन सबमिट करें: संबंधित जिले या रीजन की रिक्तियों के सामने दिए गए 'आवेदन करें' (Apply) बटन पर क्लिक करें। सफल आवेदन के बाद पावती रसीद (Acknowledgement Slip) का प्रिंट आउट निकाल कर सुरक्षित रख लें।आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार रखेंदस्तावेज सत्यापन के समय किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए उम्मीदवारों को नीचे दिए गए सभी प्रमाण पत्रों की मूल और स्वप्रमाणित प्रतियां तैयार रखनी चाहिए:हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) की मूल अंकतालिका व प्रमाण पत्रNIELIT द्वारा जारी मूल CCC कंप्यूटर प्रमाण पत्रआधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्रजाति प्रमाण पत्र (आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थियों के लिए)एनसीसी, एनएसएस या स्काउट-गाइड प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकृत प्रोफाइल का विवरण व आवेदन पर्ची4 नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ और बैंक खाता पासबुक की प्रतिपरिवहन विभाग के इस कदम से सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा का दायरा तो बढ़ेगा ही, साथ ही हजारों शिक्षित युवतियों को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक आजीविका हासिल करने का एक मजबूत जरिया मिलेगा। इच्छुक अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे सेवायोजन पोर्टल पर समय रहते अपनी प्रोफाइल अपडेट कर लें ताकि आवेदन विंडो खुलते ही तुरंत प्रक्रिया पूरी की जा सके।
भारत में सदियों से नीम, बबूल और मिसवाक की दातून का उपयोग मुंह की सफाई के लिए किया जाता रहा है। आज के मॉडर्न दौर में जब बाजार केमिकल युक्त टूथपेस्ट और महंगे टीथ व्हाइटनिंग प्रोडक्ट्स से भरा पड़ा है, तब भी कई लोग प्राकृतिक चमक के लिए पारंपरिक दातून का रुख करते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ नीम की दातून घिसने से सालों का पीलापन दूर होकर दांत मोतियों जैसे सफेद हो सकते हैं?डेंटल सर्जनों और ओरल हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, नीम की दातून दांतों और मसूड़ों के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसके व्हाइटनिंग प्रभाव को लेकर सही वैज्ञानिक समझ होना जरूरी है। दांतों का पीलापन दो प्रकार का होता है: पहला बाहरी दाग (Extrinsic Stains), जो चाय, कॉफी, तंबाकू या खाने-पीने की चीजों से दांत की ऊपरी परत यानी इनेमल पर जमते हैं। दूसरा आंतरिक पीलापन (Intrinsic Stains), जो उम्र बढ़ने, दवाओं के असर या जेनेटिक कारणों से दांतों की अंदरूनी परत यानी डेंटिन के दिखने से होता है।क्या सच में दांत सफेद करती है दातून? डेंटल एक्सपर्ट की रायडेंटल विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि नीम की दातून कोई रासायनिक ब्लीचिंग एजेंट नहीं है जो दांतों के प्राकृतिक रंग को कृत्रिम रूप से पूरी तरह बदल दे। हालांकि, यह दांतों की सतह पर जमे प्लाक, टार्टर और खाने के कणों को हटाने में बेहद कारगर है।जब आप सही तरीके से नीम की दातून चबाकर ब्रश की तरह इस्तेमाल करते हैं, तो इसके रेशे दांतों की ऊपरी सतह पर जमी मैल और चाय-कॉफी के हल्के दागों को धीरे-धीरे साफ कर देते हैं। इससे दांत अपने वास्तविक प्राकृतिक रंग में नजर आने लगते हैं, जिससे वे पहले की तुलना में अधिक साफ और चमकदार दिखते हैं। वास्तविक रूप से स्वस्थ दांतों का प्राकृतिक रंग हल्का ऑफ-व्हाइट या हल्का पीलापन लिए हुए होता है, क्योंकि इनेमल के नीचे मौजूद डेंटिन का रंग स्वाभाविक रूप से पीला ही होता है।नीम दातून के अद्भुत औषधीय गुण: ओरल हेल्थ के लिए वरदानभले ही दातून आपके दांतों को रातों-रात ब्लीच की तरह सफेद न करे, लेकिन यह आपके पूरे मुंह के स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। नीम की छाल और रस में कई सक्रिय तत्व पाए जाते हैं:एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण: नीम में मौजूद निम्बिन और एजाडिराक्टिन जैसे तत्व मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया (Streptococcus mutans) को नष्ट करते हैं, जिससे कैविटी और सड़न का खतरा न्यूनतम हो जाता है।मसूड़ों की मजबूती: नीम का कसैला रस मसूड़ों की सूजन (Gingivitis) और पायरिया जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है तथा मसूड़ों से खून आना बंद करता है।मुंह की दुर्गंध से छुटकारा: यह लार (Saliva) के उत्पादन को बढ़ाता है और मुंह के पीएच स्तर (pH Level) को संतुलित रखता है, जिससे सांसों की बदबू पूरी तरह खत्म होती है।प्लाक का खात्मा: दातून के प्राकृतिक रेशे दांतों के बीच फंसी गंदगी को बिना केमिकल नुकसान के साफ करते हैं।दातून करने का सही तरीका: अगर ये गलती की तो घिस सकता है इनेमलडेंटल सर्जन चेतावनी देते हैं कि नीम की दातून का गलत इस्तेमाल दांतों को फायदा पहुंचाने के बजाय भारी नुकसान पहुंचा सकता है। अक्सर लोग सख्त दातून को सीधे दांतों पर रगड़ने लगते हैं, जिससे दांतों की सुरक्षात्मक परत (Enamel) घिस जाती है और सेंसिटिविटी की समस्या शुरू हो जाती है।नरम ब्रश बनाएं: सबसे पहले नीम की ताजी और पतली टहनी के ऊपरी हिस्से को दांतों से तब तक धीरे-धीरे चबाएं जब तक कि वह एक मुलायम ब्रश (Bristles) का रूप न ले ले।हल्के हाथों से सफाई: बने हुए प्राकृतिक ब्रिसल्स से दांतों पर हल्के हाथों से ऊपर से नीचे की दिशा में मसाज करें। जोर से रगड़ने से बचें।मसूड़ों पर दबाव न डालें: दातून को मसूड़ों पर जोर से न दबाएं, केवल दांतों की सतह और पिछले हिस्से को साफ करें।कुल्ला और जीभ की सफाई: दातून करने के बाद हल्के गुनगुने पानी से अच्छी तरह कुल्ला करें और दातून को बीच से चीरकर उससे जीभ की सफाई (Tongue Cleaning) भी करें।डेंटल सर्जन द्वारा सुझाए गए सुरक्षित और असरदार नेचुरल नुस्खेयदि आप बिना दांतों को नुकसान पहुंचाए उनके पीलेपन को कम करना चाहते हैं और नेचुरल ब्राइटनेस पाना चाहते हैं, तो डेंटल एक्सपर्ट्स इन सुरक्षित घरेलू तरीकों की सलाह देते हैं:ऑयल पुलिंग (Oil Pulling): सुबह खाली पेट एक चम्मच वर्जिन नारियल तेल या तिल का तेल मुंह में लेकर 5 से 10 मिनट तक चारों तरफ घुमाएं और फिर थूक दें। यह प्रक्रिया मुंह से टॉक्सिन्स बाहर निकालती है और प्लाक को हटाकर दांतों की चमक लौटाती है।हल्का बेकिंग सोडा और पानी: महीने में सिर्फ एक या दो बार चुटकी भर बेकिंग सोडा को पानी में मिलाकर उंगली से दांतों पर हल्का सा लगा सकते हैं। इसे नियमित रूप से इस्तेमाल न करें क्योंकि इसका अधिक प्रयोग इनेमल को पतला कर सकता है।क्रंची फल और सब्जियों का सेवन: सेब, गाजर, खीरा और अमरूद जैसी कच्ची और रेशेदार चीजें चबाने से लार का स्राव बढ़ता है और दांतों की नेचुरल स्क्रबिंग होती रहती है।स्ट्रॉ का उपयोग व तुरंत कुल्ला: चाय, कॉफी, हल्दी वाले पेय या कोल्ड ड्रिंक्स पीने के तुरंत बाद सादे पानी से कुल्ला जरूर करें। यदि संभव हो तो गहरे रंग के तरल पदार्थों के लिए स्ट्रॉ का इस्तेमाल करें ताकि वे सीधे दांतों के संपर्क में न आएं।दांतों की सुरक्षा और नियमित देखभालदांतों को चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने के लिए दिन में दो बार ब्रश करना, नियमित फ्लॉसिंग करना और हर 6 महीने में डेंटिस्ट से स्केलिंग (प्रोफेशनल क्लीनिंग) करवाना सबसे सुरक्षित तरीका है। कई लोगों में यह भ्रम होता है कि डेंटिस्ट से सफाई करवाने पर दांत कमजोर होते हैं, जबकि वैज्ञानिक रूप से स्केलिंग केवल जमे हुए जिद्दी टार्टर को हटाती है। नीम की दातून को आप अपने दैनिक जीवन में एक बेहतरीन सहायक और प्राकृतिक ओरल केयर साधन के रूप में जरूर अपना सकते हैं।
योगी सरकार की नई पहल: गरीब परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने का जिम्मा उठाएगी सरकार
उत्तर प्रदेश के लाखों जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बेटियों की शादी के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का फैसला लिया है। प्रदेश में अब पात्र परिवारों की कन्याओं के विवाह के लिए ₹1 लाख तक की आर्थिक सहायता 'कन्यादान' के रूप में प्रदान की जा रही है।इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों पर शादी के दौरान पड़ने वाले आर्थिक बोझ को समाप्त करना है। अक्सर देखा जाता है कि धन के अभाव में निर्धन परिवार बेटियों के विवाह के लिए कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल से न केवल बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगेगी, बल्कि बेटियों का भविष्य भी सुरक्षित और सम्मानजनक बनेगा।योजना के तहत ₹1 लाख की धनराशि का विवरण और वितरणइस सहायता राशि को पारदर्शी तरीके से सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार किया गया है। योजना के तहत मिलने वाली पूरी राशि को तीन प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया है, ताकि नवविवाहित जोड़े को गृहस्थी बसाने में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े:₹70,000 की नकद राशि: यह पैसा सीधे दुल्हन (कन्या) के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजा जाएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म होगी।₹20,000 की वैवाहिक सामग्री: वर और वधू के लिए जरूरी कपड़े, बर्तन, चांदी की पायल, बिछिया और दैनिक उपयोग का घरेलू सामान उपलब्ध कराया जाएगा।₹10,000 आयोजन खर्च: सामूहिक विवाह समारोह के आयोजन, पंडाल, भोजन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं।कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ? (पात्रता की शर्तें)उत्तर प्रदेश समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए कुछ स्पष्ट नियम व पात्रता मानदंड तय किए गए हैं:मूल निवासी: आवेदक परिवार का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।पारिवारिक आय सीमा: ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए परिवार की वार्षिक आय ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) से अधिक नहीं होनी चाहिए। बीपीएल (BPL) कार्ड धारक परिवारों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी।आयु सीमा: शादी के समय दुल्हन की आयु न्यूनतम 18 वर्ष और दूल्हे की आयु न्यूनतम 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए।जाति वर्ग: यह योजना अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) सभी वर्गों के लिए खुली है।विशेष प्राथमिकता: निराश्रित महिलाओं (विधवाओं), दिव्यांगजनों और परित्यक्ता महिलाओं की पुत्रियों के विवाह को चयन प्रक्रिया में पहली वरीयता दी जाएगी।आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूचीयोजना का लाभ लेने के इच्छुक आवेदकों को अपने सभी कानूनी और पहचान दस्तावेज पहले से तैयार रखने होंगे:कन्या और वर का आधार कार्डकन्या और वर दोनों का आयु प्रमाण पत्र (जन्म प्रमाण पत्र, हाईस्कूल अंकपत्र या मेडिकल बोर्ड सर्टिफिकेट)परिवार का अद्यतन आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate)जाति प्रमाण पत्र (सामान्य वर्ग को छोड़कर अन्य सभी वर्गों के लिए)कन्या के नाम का एकल बैंक खाता पासबुक (जो आधार और NPCI से लिंक हो)वर और वधू की संयुक्त एवं अलग-अलग पासपोर्ट साइज फोटोशादी का निमंत्रण पत्र या विवाह का कानूनी पंजीकरणऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन की आसान प्रक्रियाउत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना की आवेदन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और सुगम बना दिया है ताकि दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोग भी आसानी से इसका लाभ ले सकें।ऑनलाइन माध्यम: आवेदक उत्तर प्रदेश समाज कल्याण विभाग के आधिकारिक पोर्टल (shadianudan.upsdc.gov.in या cmsvy.upsdc.gov.in) पर जाकर 'नया पंजीकरण' विकल्प चुन सकते हैं। यहां सभी आवश्यक विवरण भरने के बाद मांगे गए दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करना होगा।जन सुविधा केंद्र (CSC): ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर मामूली शुल्क पर अपना ऑनलाइन फॉर्म भरवा सकते हैं।ऑफलाइन प्रक्रिया: ब्लॉक स्तर पर खंड विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय या शहरी क्षेत्र में नगर निगम/नगर पालिका के समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में जाकर भी भौतिक फॉर्म जमा किया जा सकता है।आवेदन जमा होने के बाद संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी (SDM) या खंड विकास अधिकारी द्वारा पात्रता की जांच की जाएगी। जांच पूरी होते ही निर्धारित तिथि पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम में नवदंपति को आशीर्वाद और योजना का पूर्ण लाभ प्रदान किया जाएगा।उत्तर प्रदेश के हर जिले में व्यापक स्तर पर लागूयह योजना राजधानी लखनऊ से लेकर पूर्वांचल के गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ व सहारनपुर तक पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में समान रूप से लागू की जा रही है। जिला स्तर पर जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पात्र लाभार्थियों के आवेदनों को बिना किसी देरी के समयबद्ध सीमा के भीतर स्वीकृत करें। इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल मिलेगा और बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।
त्रासदी से नेपाल को कितना नुकसान, फिर से बसाने में 2015 में आए भूकंप के मुकाबले कितना होगा खर्च?
इस आपदा के आने से पहले से ही नेपाल की अर्थव्यवस्था दबाव में थी. जेन जी प्रदर्शनों के बाद सत्ता में आई प्रधानमंत्री बालेन शाहकी सरकार सीमित संसाधनों के साथ काम कर रही है. ऐसे में इस आपदा ने अर्थव्यवस्था पर कई गुना बोझ बढ़ा दिया है.
विदेश यात्रा, उच्च शिक्षा या रोजगार के लिए जाने के इच्छुक भारतीय नागरिकों के लिए पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सरल, पारदर्शी और तेज हो चुकी है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs - MEA) के 'पासपोर्ट सेवा' डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब लंबी कतारों और दलालों के चक्कर से पूरी तरह मुक्ति मिल चुकी है। नागरिक अपने मोबाइल या लैपटॉप से केवल 5 मिनट में आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं।सामान्य (Normal) स्कीम के तहत लगभग 15 से 30 दिनों में और तत्काल (Tatkaal) स्कीम के तहत मात्र 3 से 7 दिनों के भीतर पुलिस वेरिफिकेशन पूरा होकर पासपोर्ट डाक द्वारा सीधे घर के पते पर डिलीवर हो जाता है।पासपोर्ट आवेदन के लिए आवश्यक प्रमुख दस्तावेज (Documents Required)पासपोर्ट बनवाने के लिए अब बहुत अधिक कागजी औपचारिकताओं की जरूरत नहीं होती। मुख्य रूप से तीन प्रकार के दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:जन्मतिथि का प्रमाण (Proof of Date of Birth): नगर निगम या ग्राम पंचायत द्वारा जारी मूल जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate), 10वीं का पासिंग सर्टिफिकेट/मार्कशीट, पैन कार्ड (PAN Card) या ड्राइविंग लाइसेंस।निवास का प्रमाण (Proof of Address): बिजली बिल, पानी बिल, टेलीफोन बिल, बैंक पासबुक (राष्ट्रीयकृत बैंक), वोटर आईडी कार्ड, रेंट एग्रीमेंट या गैस कनेक्शन बिल।पहचान का प्रमाण (Proof of Identity): वोटर पहचान पत्र, पैन कार्ड या अन्य अधिकृत सरकारी पहचान दस्तावेज।गैर-ईसीआर (Non-ECR) श्रेणी के लिए: यदि आवेदक ने 10वीं कक्षा या उससे अधिक की पढ़ाई की है, तो 10वीं की मार्कशीट जमा करने पर पासपोर्ट 'Non-ECR' श्रेणी में जारी होता है, जिससे विदेश में काम के लिए इमिग्रेशन क्लीयरेंस की आवश्यकता नहीं होती।स्टेप-बाय-स्टेप: पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?स्टेप 1: आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशनसबसे पहले विदेश मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल passportindia.gov.in पर जाएं (सावधान रहें और किसी फर्जी या मिलती-जुलती डोमेन वाली वेबसाइट से बचें)।होमपेज पर 'New User Registration' विकल्प पर क्लिक करें।अपने नजदीकी पासपोर्ट कार्यालय (RPO) का चयन करें, नाम, जन्मतिथि, ईमेल आईडी और पासवर्ड दर्ज करके रजिस्ट्रेशन पूरा करें।ईमेल पर आए एक्टिवेशन लिंक पर क्लिक करके अपना अकाउंट एक्टिवेट करें।स्टेप 2: लॉगिन और फॉर्म का चयनअपनी यूजर आईडी और पासवर्ड से पोर्टल पर 'Existing User Login' करें।स्क्रीन पर 'Apply for Fresh Passport / Re-issue of Passport' लिंक पर क्लिक करें।आवेदन भरने के लिए 'Click here to fill the application form online' का विकल्प चुनें।स्टेप 3: व्यक्तिगत और पते का विवरण भरेंफॉर्म में अपना नाम, माता-पिता का नाम, वैवाहिक स्थिति, जन्म स्थान, वर्तमान और स्थायी पता तथा दो पड़ोसियों/रेफरेंस के नाम व संपर्क नंबर सही-सही भरें।सभी जानकारियों को ध्यानपूर्वक जांचने के बाद फॉर्म को 'Submit' करें।स्टेप 4: शुल्क भुगतान और अपॉइंटमेंट स्लॉट बुक करनाफॉर्म सबमिट करने के बाद 'Pay and Schedule Appointment' विकल्प पर जाएं।ऑनलाइन पेमेंट (SBI इंटरनेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या यूपीआई) का माध्यम चुनें।अपने नजदीकी पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) या पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) का चयन करें।कैलेंडर में उपलब्ध हरी तारीखों में से अपनी सुविधानुसार दिन और समय (Time Slot) चुनकर अपॉइंटमेंट लॉक करें।स्टेप 5: रसीद डाउनलोड करेंभुगतान पूरा होते ही 'Print Application Receipt' पर क्लिक करके एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर (ARN) वाली रसीद डाउनलोड कर लें।पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) में विजिट और आगे का प्रोसेसनिर्धारित तिथि पर पहुंचना: तय तारीख और समय पर मूल दस्तावेजों (Original Documents) और उनकी एक-एक सेल्फ-अटेस्टेड फोटोकॉपी के साथ पासपोर्ट सेवा केंद्र पहुंचें।बायोमेट्रिक्स और वेरिफिकेशन: केंद्र के अंदर तीन काउंटरों (A, B और C) पर दस्तावेज सत्यापन, डिजिटल फोटो कैप्चरिंग और फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक्स दर्ज किए जाते हैं।पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification): केंद्र से आवेदन स्वीकृत होने के बाद डेटा स्थानीय पुलिस थाने को भेजा जाता है। पुलिसकर्मी घर आकर या थाने बुलाकर दस्तावेजों की भौतिक जांच करते हैं।स्पीड पोस्ट डिलीवरी: पुलिस क्लीयरेंस रिपोर्ट (PVR) अपलोड होते ही पासपोर्ट प्रिंट होकर स्पीड पोस्ट के जरिए सीधे आपके पते पर भेज दिया जाता है।पासपोर्ट की सरकारी फीस और वैलिडिटीसामान्य पासपोर्ट (36 पेज, 10 साल की वैधता): ₹1,500सामान्य पासपोर्ट (60 पेज - जंबो बुकलेट): ₹2,000तत्काल पासपोर्ट (Tatkaal Scheme): सामान्य शुल्क + ₹2,000 अतिरिक्त (कुल ₹3,500)नाबालिगों (Minors) के लिए (5 साल की वैधता): ₹1,000फर्जी वेबसाइटों से रहें सावधानइंटरनेट पर पासपोर्ट सेवा के नाम से मिलती-जुलती कई फर्जी और अनधिकृत वेबसाइटें सक्रिय हैं जो भारी फीस वसूलती हैं। ध्यान रखें कि पासपोर्ट आवेदन की एकमात्र आधिकारिक सरकारी वेबसाइट passportindia.gov.in है। आधिकारिक मोबाइल ऐप का नाम 'mPassport Seva' है।
CM शुभेंदु का नया मास्टरस्ट्रोक, जेन-जी खुश पर TMC को गम; 33000 लोगों से ठगी का करेंगे हिसाब-किताब
मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ महीने के बजट में स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में टेबल टेनिस, बैडमिंटन और जिम वाले मॉडर्न मिनी इनडोर स्टेडियम बनाए जाएंगे।
गन्ना किसानों की एक ही किस्म पर निर्भरता पड़ रही भारी, लाल सड़न रोग से घटी पैदावार
गन्ने की सीओ-0238 किस्म पर अत्यधिक निर्भरता किसानों के लिए रेड राट रोग का कारण बन रही है, जिससे चीनी उत्पादन में संकट गहरा रहा है।
दरभंगा में 200 करोड़ से बनेगा हाईटेक क्रिकेट स्टेडियम, मिलेंगी ये सुविधाएं
दरभंगा में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी है. पुराने नेहरू स्टेडियम की जगह बनने वाले परिसर में डे-नाइट IPL मैचों के लिए आधुनिक सुविधाएं होंगी. साथ ही स्विमिंग पूल, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, जूडो-रेसलिंग, मेडिकल सुविधाएं, हॉस्टल और मल्टी लेवल पार्किंग भी प्रस्तावित है.
Nepal Flood में फंसे कुशीनगर के करन शर्मा, त्रिशूली प्रोजेक्ट से 76 कर्मी लापता
नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही में कुशीनगर निवासी करन शर्मा भी लापता हो गये हैं और परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। शर्मा के परिवार से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि कप्तानगंज तहसील के मलूकही गांव निवासी शर्मा(34) नेपाल के रसुवा जिले के त्रिशूली क्षेत्र में स्थित 216 मेगावाट के अपर त्रिशूली-1 जल विद्युत परियोजना में ‘इलेक्ट्रिशियन फोरमैन’ के पद पर कार्यरत थे। आपदा के बाद से उनका परिवार से संपर्क टूट गया है और उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से रसुवा जिले का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। कई जल विद्युत परियोजनाओं,सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा है। जल विद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों की बड़ी संख्या है जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 216 मेगावाट अपर त्रिशूली-1 परियोजना से जुड़े 76 कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। परिजनों के अनुसार करन शर्मा से घटना की रात 26 अगस्त को घर वालों की बातचीत हुई थी। उस समय तक परिवार को किसी बड़े खतरे की जानकारी नहीं थी। इसके बाद नेपाल में अचानक आई बाढ़ और तबाही के बीच करन से संपर्क टूट गया। परिवार के लोग लगातार फोन पर संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनसे बात नहीं हो पा रही है। परिजन लगातार नेपाल में परियोजना से जुड़े अधिकारियों और संबंधित हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। परिवार की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब जल विद्युत परियोजना की ओर से आपदा के बाद लापता कर्मचारियों की सूची जारी की गई। परिजनों के अनुसार करन शर्मा का नाम भी लापता लोगों की सूची में शामिल है। इसके बाद परिवार ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई है। नेपाल के स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संघ के अनुसार रसुवा क्षेत्र की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारी बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर हैं। अपर त्रिशूली-1 परियोजना में काम करने वाली एंड्रिट्ज हाइड्रो से जुड़े 76 कर्मचारियों का संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई है। परियोजना से जुड़े अन्य कर्मचारियों के भी लापता होने की सूचना है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी आकांक्षा मिश्रा ने बताया कि देवकली के ग्राम प्रधान ने बीती रात सूचना दी थी। यह सूचना गोरखपुर आयुक्त को लिखित रूप में भेजी जा चुकी है। परिजनों के मुताबिक करन लंबे समय से नेपाल में जल विद्युत परियोजना में काम कर रहे थे। नौकरी के सिलसिले में वह नेपाल के रसुवा जिले के त्रिशूली क्षेत्र में रह रहे थे। परिवार को अब भी उनके सकुशल होने की खबर मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल से सटे पड़ोसी महाराजगंज जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और बचाव एवं राहत दलों को तैनात किया गया है। चौबीसों घंटे काम करने वाला नियंत्रण कक्ष भी चालू कर दिया गया है। जिले की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, जबकि तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी के लिए टीमें तैनात की गई थीं। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि सभी तटबंध सुरक्षित हैं और सोहगीबरवा के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 99,800 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना मिली है और इसमें बढ़ोतरी का रुझान दिख रहा है। शनिवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 626 हो गई है जबकि लगभग 2,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बुधवार को पानी, कीचड़ और मलबे के सैलाब ने कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसके बाद से नेपाल हालात को संभालने की कोशिश कर रहा है। बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में दिन-रात काम कर रहे हैं, वे कहीं बारिश का सामना कर रहे हैं तो कहीं सूख चुके कीचड़ को खोदकर लोगों को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। रात में नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने अपर त्रिशूली 3ए जल विद्युत परियोजना स्थल पर खुदाई करने वाली मशीनों से मिट्टी हटाए जाने के काम की निगरानी की। यहां विनाशकारी बाढ़ के बाद सौ से अधिक लोग एक सुरंग में फंस गए थे। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने रसुवा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ की तेज धारा और मलबे ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। राहत और बचाव अभियान भी दुर्गम पहाड़ी इलाकों तथा क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
मैथ्स में AI अच्छा या बुरा? ऑनलाइन पोस्ट वायरल होने के बाद सबसे बेहतरीन गणितज्ञों का आया जवाब
AI से कोई प्रूफ तैयार करने में भले ही कुछ घंटे लगें, लेकिन नए नतीजों को इंसानी ज्ञान का हिस्सा बनने में सालों लग सकते हैं. इस लिहाज से, बड़ा खतरा यह नहीं है कि AI गणितज्ञों की जगह ले लेगा, बल्कि यह है कि यूनिवर्सिटीज इंसानी मेहनत को सपोर्ट करना बंद कर देंगी.
गीले बालों को कसकर बांधा तो फंस जाओगे! टूटेंगे बाल, बढ़ेगा डैंड्रफ!
मानसून में गीले बाल बांधने से बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं. हवा न मिलने से स्कैल्प में फंगल इंफेक्शन, डैंड्रफ और बदबू की समस्या बढ़ जाती है. जानिए गीले बाल बांधने के 4 बड़े नुकसान और बारिश के मौसम में बालों को मजबूत, साफ और स्वस्थ रखने के आसान हेयर केयर टिप्स.
वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध के बढ़ते दौर में पैन कार्ड (Permanent Account Number) का दुरुपयोग एक गंभीर चिंता बन चुका है। फिनटेक प्लेटफॉर्म्स और इंस्टेंट लोन ऐप्स के जरिए पैन कार्ड की फोटोकॉपी या नंबर का इस्तेमाल कर किसी अनजान व्यक्ति के नाम पर पर्सनल लोन या कंज्यूमर लोन ले लिया जाता है। पीड़ित व्यक्ति को इस फर्जीवाड़े की भनक तब तक नहीं लगती, जब तक कि रिकवरी एजेंट्स के कॉल नहीं आने लगते या किसी नए लोन के लिए आवेदन करने पर सिबिल (CIBIL) स्कोर खराब नहीं पाया जाता। समय-समय पर अपने पैन से जुड़े एक्टिव लोन्स की जांच करना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी अनधिकृत वित्तीय देनदारी से बचा जा सके।अपने पैन पर एक्टिव लोन चेक करने के 3 आसान और आधिकारिक तरीकेभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अधिकृत क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां (CIC) आपके पैन कार्ड से जुड़े हर प्रकार के लोन और क्रेडिट कार्ड का पूरा रिकॉर्ड रखती हैं:1. आधिकारिक क्रेडिट ब्यूरो (CIBIL / Experian / CRIF High Mark / Equifax):सिबिल की आधिकारिक वेबसाइट cibil.com या एक्सपेरियन (experian.in) पर जाएं।अपना नाम, जन्मतिथि, पैन नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करके फ्री एनुअल क्रेडिट रिपोर्ट जेनरेट करें।रिपोर्ट के 'Accounts' या 'Credit Facilities' सेक्शन में जाएं। वहां आपके पैन पर सक्रिय (Active) और बंद (Closed) सभी प्रकार के पर्सनल लोन, होम लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड की सूची दिख जाएगी।2. फाइनेंशियल ऐप्स और बैंकिंग पोर्टल्स:गूगल पे (Google Pay), पेटीएम (Paytm), पैसाबाजार या अपने बैंक के नेटबैंकिंग ऐप में मौजूद 'Free Credit Score' फीचर का उपयोग करके तुरंत लोन अकाउंट्स का विवरण देखें।3. इनकम टैक्स एआईएस (Annual Information Statement - AIS):इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर लॉगिन करें।'Services' टैब में जाकर AIS (Annual Information Statement) और TIS डाउनलोड करें।इसमें आपके पैन से जुड़े सभी उच्च-मूल्य वित्तीय लेन-देन और लोन डिस्बर्सल की आधिकारिक एंट्री दिखाई देती है।अगर पैन पर कोई अनजान या फर्जी लोन दिखे तो क्या करें?यदि क्रेडिट रिपोर्ट जांचते समय आपको कोई ऐसा लोन खाता दिखता है जिसके लिए आपने कभी आवेदन नहीं किया था, तो तुरंत ये कदम उठाएं:संबंधित लेंडर (बैंक/एनबीएफसी) को रिपोर्ट: उस बैंक या लोन ऐप के कस्टमर सपोर्ट और नोडल ग्रीवेंस ऑफिसर को लिखित में ईमेल भेजकर सूचित करें कि यह लोन अनधिकृत है और धोखाधड़ी से जारी किया गया है।क्रेडिट ब्यूरो पर डिस्प्यूट (Dispute) दर्ज करें: CIBIL या संबंधित क्रेडिट ब्यूरो पोर्टल पर उस विशिष्ट लोन अकाउंट नंबर के खिलाफ ऑनलाइन 'Raise a Dispute' टिकट दर्ज करें।साइबर क्राइम पोर्टल पर एफआईआर: राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) या 1930 हेल्पलाइन पर पहचान की चोरी (Identity Theft / Financial Fraud) की शिकायत दर्ज कराएं और पावती सुरक्षित रखें।आरबीआई ओम्बड्समैन (RBI Ombudsman): यदि 30 दिनों के भीतर बैंक आपकी समस्या का समाधान नहीं करता है, तो आरबीआई के सीएमएस पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर शिकायत दर्ज करें।पैन कार्ड को साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रखने के 4 जरूरी टिप्सबिना जरूरत पैन साझा न करें: किसी भी गैर-भरोसेमंद ऐप या अनजान व्यक्ति को अपने पैन कार्ड की फोटोकॉपी या तस्वीर भेजने से बचें।मास्क्ड या वाटरमार्क कॉपी दें: जहां भी पैन कार्ड की फोटोकॉपी देना जरूरी हो, उस पर स्पष्ट रूप से तारीख और उद्देश्य (Purpose) लिखकर क्रॉस सिग्नेचर करें (जैसे: 'Only for Bank Account Opening - Not for Loan').नियमित क्रेडिट मॉनिटरिंग: हर 3 से 6 महीने में कम से कम एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट और सिबिल स्कोर की जांच करते रहें।
नेपाल बाढ़ में चारों ओर तबाही, लेकिन सैलाब के बीच मजबूती से खड़ा रहा ये घर; वीडियो वायरल
नेपाल में भारी बारिश और भूस्खलन से आई विनाशकारी बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों प्रभावित हुए, लेकिन एक हरा दोमंजिला मकान सैलाब के बीच सुरक्षित खड़ा रहने से चर्चा में है.
नौकरीपेशा कर्मचारियों, बैंक कर्मियों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए नया साल 2026 छुट्टियों और त्योहारों के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा जारी अवकाश तालिकाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में कुल 17 अनिवार्य राजपत्रित (Gazetted) अवकाश और 30 से अधिक प्रतिबंधित (Restricted / Optional) छुट्टियां शामिल हैं। इसके साथ ही अगर शनिवार और रविवार के साप्ताहिक अवकाशों तथा लॉन्ग वीकेंड्स को जोड़ लिया जाए, तो साल भर में लोगों को 50 से अधिक दिनों तक काम से ब्रेक और वेकेशन का शानदार मौका मिलने वाला है।साल 2026 के प्रमुख राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holidays List)सरकारी कार्यालयों, बैंकों और शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य रूप से मिलने वाली प्रमुख राष्ट्रीय और धार्मिक छुट्टियों का कैलेंडर इस प्रकार है:गणतंत्र दिवस (Republic Day): 26 जनवरी 2026 (सोमवार)होली (Holi / Dhulivandan): 3-4 मार्च 2026 (मंगलवार/बुधवार)ईद-उल-फितर (Id-ul-Fitr): 21 मार्च 2026 (शनिवार)रामनवमी (Ram Navami): 26 मार्च 2026 (गुरुवार)महावीर जयंती (Mahavir Jayanti): 31 मार्च 2026 (मंगलवार)गुड फ्राइडे (Good Friday): 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार)बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima): 1 मई 2026 (शुक्रवार)बकरीद / ईद-उल-जुहा (Id-ul-Zuha): 27-28 मई 2026 (बुधवार/गुरुवार)मुहर्रम (Muharram): 26 जून 2026 (शुक्रवार)स्वतंत्रता दिवस (Independence Day): 15 अगस्त 2026 (शनिवार)ईद-ए-मिलाद (Milad-un-Nabi): 26 अगस्त 2026 (बुधवार)श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami): 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार)महात्मा गांधी जयंती (Gandhi Jayanti): 2 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार)दशहरा / विजयदशमी (Dussehra): 20-21 अक्टूबर 2026 (मंगलवार/बुधवार)दिवाली / दीपावली (Diwali / Deepawali): 8-10 नवंबर 2026 (रविवार से मंगलवार)गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti): 24 नवंबर 2026 (मंगलवार)क्रिसमस (Christmas): 25 दिसंबर 2026 (शुक्रवार)2026 में मिलेंगे कई 'लॉन्ग वीकेंड्स' (Long Weekends): पहले से करें टूर प्लानवर्ष 2026 में कई ऐसे राष्ट्रीय और धार्मिक पर्व शुक्रवार या सोमवार को पड़ रहे हैं, जिससे शनिवार और रविवार मिलाकर 3 से 4 दिनों का लगातार अवकाश (Long Weekend) स्वतः मिल रहा है:जनवरी लॉन्ग वीकेंड: 24 जनवरी (शनिवार), 25 जनवरी (रविवार) और 26 जनवरी (सोमवार - गणतंत्र दिवस)।अप्रैल लॉन्ग वीकेंड: 3 अप्रैल (शुक्रवार - गुड फ्राइडे), 4 अप्रैल (शनिवार) और 5 अप्रैल (रविवार - ईस्टर)।मई दिवस वीकेंड: 1 मई (शुक्रवार - बुद्ध पूर्णिमा/मजदूर दिवस), 2 मई (शनिवार) और 3 मई (रविवार)।जून वीकेंड: 26 जून (शुक्रवार - मुहर्रम), 27 जून (शनिवार) और 28 जून (रविवार)।सितंबर जन्माष्टमी वीकेंड: 4 सितंबर (शुक्रवार - जन्माष्टमी), 5 सितंबर (शनिवार) और 6 सितंबर (रविवार)।अक्टूबर गांधी जयंती वीकेंड: 2 अक्टूबर (शुक्रवार - गांधी जयंती), 3 अक्टूबर (शनिवार) और 4 अक्टूबर (रविवार)।दिसंबर क्रिसमस वीकेंड: 25 दिसंबर (शुक्रवार - क्रिसमस), 26 दिसंबर (शनिवार) और 27 दिसंबर (रविवार)।प्रमुख वैकल्पिक एवं प्रतिबंधित अवकाश (Restricted Holidays)कर्मचारियों को अपनी पसंद के अनुसार वर्ष भर में 2 से 3 वैकल्पिक अवकाश (RH) चुनने का अधिकार होता है:नववर्ष दिवस (New Year's Day): 1 जनवरी 2026 (गुरुवार)मकर संक्रांति / पोंगल (Makar Sankranti / Pongal): 14-15 जनवरी 2026बसंत पंचमी (Basant Panchami): 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार)महाशिवरात्रि (Maha Shivratri): 15 फरवरी 2026 (रविवार)होलिका दहन (Holika Dahan): 2-3 मार्च 2026गुड़ी पड़वा / उगादी (Gudi Padwa / Ugadi): 19 मार्च 2026 (गुरुवार)रक्षाबंधन (Raksha Bandhan): 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi): 14 सितंबर 2026 (सोमवार)करवा चौथ (Karwa Chauth): 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)गोवर्धन पूजा एवं भाई दूज: 9-11 नवंबर 2026छठ पूजा (Chhath Puja): 15 नवंबर 2026 (रविवार)यात्रा और पारिवारिक आयोजनों की योजना बनाने का सही समययदि आप नए साल में परिवार के साथ लंबी यात्रा, धार्मिक तीर्थाटन या वेकेशन पर जाने की सोच रहे हैं, तो अभी से इन तिथियों को ध्यान में रखकर ट्रेन और फ्लाइट टिकट तथा होटलों की बुकिंग कर सकते हैं। बीच के किसी एक कार्यदिवस (जैसे गुरुवार या मंगलवार के आसपास) पर आकस्मिक अवकाश (CL) लेकर आप 4 से 5 दिनों की लंबी छुट्टी का आनंद आसानी से उठा सकते हैं।
Nepal Floods: महाराष्ट्र के 37 पर्यटक सुरक्षित Mumbai पहुंचे, जताया आभार
(फोटो के साथ)मुंबई, 29 अगस्त नेपाल में इस सप्ताह की शुरुआत में आई भीषण बाढ़ में फंसने वाले महाराष्ट्र के पर्यटकों ने शनिवार को मुंबई पहुंचकर राहत की सांस ली। कई लोगों ने कहा कि उन्हें लगा कि भगवान ने उन्हें बचा लिया। उन्होंने सुरक्षित घर लौटने में मदद करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार का आभार भी जताया। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ ने कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। इस घटना में मध्य नेपाल में महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान पहुंचा और जलविद्युत केंद्र बह गए। इस आकस्मिक बाढ़ से मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर 669 हो गई, जबकि अब भी 2,000 से अधिक लोग लापता हैं। नेपाल से कुल 37 पर्यटक शनिवार शाम मुंबई लौटे। मुंबई हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद एक पर्यटक ने कहा, हम खुश हैं कि सुरक्षित वापस आ गए हैं। हमें लगता है कि भगवान ने हमें बचा लिया। केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने घर लौटने में हमारी मदद की, इसके लिए हम उनके आभारी हैं। कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए एक अन्य पर्यटक ने उस समय को याद किया, जब उन्हें अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही का पता चला। उन्होंने कहा, भगवान की कृपा से हम सुरक्षित लौट आए। हम 26 अगस्त को सागा (तिब्बत) पहुंच गए थे और उसके बाद हमें पता चला कि अचानक आई बाढ़ ने कितनी तबाही मचाई है। पर्यटक ने बताया कि समूह अपने तय कार्यक्रम से एक दिन देरी से पहुंचा, लेकिन वापसी यात्रा के दौरान उन्हें किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा, मुश्किल हालात में चीन और नेपाल सरकारों के बीच तालमेल भी अच्छा रहा। एक अन्य महिला पर्यटक ने सुरक्षित वापसी को भगवान का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा, भगवान का पूरा आशीर्वाद हमारे साथ था, इसलिए हम कैलास पर्वत की यात्रा सुरक्षित पूरी कर सके।
कुदरत के कहर और पहाड़ों से बही गगनचुंबी तबाही ने पशुपतिनाथ की पवित्र भूमि नेपाल को पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार, पसरा हुआ सन्नाटा और अपनों को ढूंढती बेबस निगाहें हैं। इस भयानक मंजर ने किसी मां की गोद सूनी कर ...
'रास्ते सीधे हों या टेढ़े-मेढ़े, सभी ईश्वर की ओर ही जाते हैं', न्यूयॉर्क से मोहन भागवत का संदेश
अमेरिका के न्यूयॉर्क में 'एक दुनिया, एक मानवता' कार्यक्रम को मोहन भागवत को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने बताया कि पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, पर अंतिम सत्य और मानवता ही है.
ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर न्यू मदर के लिए नवजात बच्चे को बेबी फीड यानी उसे मां का दूध पिलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके लिए रेलवे ने नई सुविधा शुरू की है.
GIVA ने खुलकर किया कृति सेनन का सपोर्ट, राखी एड हटाने की बताई असली वजह
ज्वेलरी ब्रांड के फाउंडर इशेंद्र अग्रवाल ने कहा कि कुछ स्टोर के आसपास तनाव के कारण स्टाफ की सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा होने पर ब्रांड ने रक्षाबंधन का विज्ञापन हटा लिया.
देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक 'भारतीय स्टेट बैंक' (State Bank of India - SBI) में सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। एसबीआई के सेंट्रल रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन डिपार्टमेंट (CRPD) ने विभिन्न संवर्गों (Cadres) के तहत 3000 से अधिक रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए आधिकारिक भर्ती अधिसूचना जारी कर दी है। बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता, आकर्षक वेतनमान, सामाजिक प्रतिष्ठा और बेहतरीन करियर ग्रोथ के चलते हर साल लाखों युवा एसबीआई की भर्तियों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस बार बैंक द्वारा जूनियर एसोसिएट्स, स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स और अन्य तकनीकी व प्रबंधन पदों के लिए यह महा-भर्ती अभियान शुरू किया गया है।पद विवरण और रिक्तियों का विस्तृत ब्यौराएसबीआई द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों और सर्किलों के लिए रिक्तियों का विभाजन किया गया है:क्लर्क / जूनियर एसोसिएट (Customer Support & Sales): देश भर के विभिन्न राज्यों और सर्किलों में ग्राहक सेवा, कैश हैंडलिंग और बैंकिंग ऑपरेशंस के लिए बड़े पैमाने पर पदों को भरा जा रहा है।स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर (SCO): आईटी, साइबर सिक्योरिटी, सिस्टम्स, क्रेडिट एनालिस्ट, रिस्क मैनेजमेंट, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मार्केटिंग जैसे तकनीकी और प्रबंधन क्षेत्रों के लिए अनुभवी प्रोफेशनल्स की भर्ती।सर्किल बेस्ड ऑफिसर (CBO) व अन्य पद: विभिन्न क्षेत्रीय सर्किलों में ऑपरेशंस को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पदों पर नियुक्तियां प्रस्तावित हैं।आरक्षण के नियम: कुल रिक्तियों में केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और दिव्यांग (PwBD) उम्मीदवारों के लिए श्रेणीवार आरक्षण का पूरा प्रावधान किया गया है।शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के कड़े मानकएसबीआई में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को पद के अनुसार निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य है:शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification):क्लेरिकल / जूनियर एसोसिएट पदों के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री अनिवार्य है।स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर्स (SCO) के लिए संबंधित क्षेत्र में बीई/बीटेक (BE/B.Tech), एमसीए (MCA), एमबीए (MBA), सीए (CA) या पोस्ट ग्रेजुएशन की विशिष्ट डिग्री और न्यूनतम कार्यानुभव मांगा गया है।अभ्यर्थियों को उस संबंधित राज्य की स्थानीय भाषा (Local Language) का पढ़ना, लिखना और बोलना आना अनिवार्य है, जहां से वे आवेदन कर रहे हैं।आयु सीमा (Age Limit):सामान्य वर्ग (General/EWS) के लिए न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष (पदों के अनुसार 30 से 35 वर्ष तक) तय की गई है।आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी—ओबीसी वर्ग को 3 वर्ष, एससी/एसटी को 5 वर्ष और दिव्यांग वर्ग (PwBD) को 10 से 15 वर्ष तक की छूट का प्रावधान है।चयन प्रक्रिया (Selection Process) और परीक्षा का प्रारूपएसबीआई में उम्मीदवारों का चयन एक पारदर्शी और बहु-स्तरीय प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है:चरण 1: प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam): 100 अंकों की ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), जिसमें इंग्लिश लैंग्वेज (30 प्रश्न), क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड (35 प्रश्न) और रीजनिंग एबिलिटी (35 प्रश्न) के कुल 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। समय सीमा 1 घंटा होती है।चरण 2: मुख्य परीक्षा (Main Exam): प्रीलिम्स में सफल उम्मीदवारों को मेन्स परीक्षा में शामिल होना होता है। इसमें जनरल/फाइनेंशियल अवेयरनेस, जनरल इंग्लिश, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और रीजनिंग व कंप्यूटर एप्टीट्यूड से जुड़े 200 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं।चरण 3: स्थानीय भाषा टेस्ट (Language Proficiency Test - LPT): मेन्स परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों के लिए संबंधित राज्य की स्थानीय भाषा का टेस्ट लिया जाता है (जिन्होंने 10वीं या 12वीं में वह भाषा पढ़ी है, उन्हें छूट मिलती है)।चरण 4: साक्षात्कार / इंटरव्यू (SCO पदों के लिए): स्पेशलिस्ट ऑफिसर और उच्च पदों के लिए शॉर्टलिस्टिंग के बाद सीधे व्यक्तिगत साक्षात्कार और ग्रुप डिस्कशन के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होती है।नेगेटिव मार्किंग: वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-चौथाई (0.25) अंक की कटौती की जाएगी।ऑनलाइन आवेदन करने का पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेसइच्छुक और योग्य उम्मीदवार नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करके अपना ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं:स्टेप 1: आधिकारिक पोर्टल पर जाएंसबसे पहले भारतीय स्टेट बैंक के आधिकारिक करियर पोर्टल sbi.co.in/careers या sbi.bank.in/web/careers पर जाएं।स्टेप 2: 'Current Openings' सेक्शन खोलेंहोमपेज पर जाकर 'Join SBI' मेन्यू के अंदर 'Current Openings' विकल्प पर क्लिक करें।स्टेप 3: संबंधित भर्ती नोटिफिकेशन और 'Apply Online' का चयन करेंसंबंधित भर्ती विज्ञापन पर क्लिक करें और 'Apply Online' लिंक को खोलें।स्टेप 4: नया रजिस्ट्रेशन (New Registration) करें'Click here for New Registration' पर क्लिक करके अपना नाम, एक्टिव मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करें। इसके बाद आपके मोबाइल और ईमेल पर प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड प्राप्त होगा।स्टेप 5: व्यक्तिगत और शैक्षणिक विवरण भरेंलॉगिन करके अपना पूरा फॉर्म भरें, जिसमें पता, शैक्षणिक योग्यता, वर्ग और परीक्षा केंद्र की प्राथमिकता का सही चुनाव करें।स्टेप 6: फोटो, हस्ताक्षर और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करेंनिर्धारित साइज और फॉर्मेट में अपनी नवीनतम पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो, हस्ताक्षर, बाएं हाथ के अंगूठे का निशान और हस्तलिखित घोषणा पत्र (Handwritten Declaration) स्कैन करके अपलोड करें।स्टेप 7: आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान और प्रिंटआउटसामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित आवेदन शुल्क (लगभग ₹750) का भुगतान नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से करें (एससी/एसटी/दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए शुल्क देय नहीं होता)। भुगतान सफल होने के बाद भरे हुए फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।आवेदन करते समय इन जरूरी बातों का रखें विशेष ध्यानअंतिम तिथि से पहले आवेदन: बैंक सर्वर पर अंतिम दिनों में भारी ट्रैफिक के कारण तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, इसलिए उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय पर रजिस्ट्रेशन पूरा करें।दस्तावेजों की प्रामाणिकता: फॉर्म में भरी गई सभी जानकारियां (नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम) 10वीं के प्रमाण पत्र और आधार कार्ड से बिल्कुल मेल खानी चाहिए।सिर्फ एक सर्किल/राज्य से आवेदन: उम्मीदवार किसी एक ही राज्य या सर्किल के लिए आवेदन कर सकते हैं, कई राज्यों से अलग-अलग फॉर्म भरने पर उम्मीदवारी निरस्त की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर कांग्रेस को चौतरफा घेर रही भाजपा की नई आईटी टीम, निशाने पर राहुल गांधी
भाजपा की नई आईटी सेल, दीपक म्हस्के के नेतृत्व में, सोशल मीडिया पर कांग्रेस और राहुल गांधी को मीम्स व व्यंग्य के जरिए आक्रामक रूप से घेर रही है।
सर्दियों का मौसम आते ही अधिकांश घरों में गीजर और वॉटर हीटर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है, जिसके चलते महीने का बिजली बिल अचानक दो से तीन गुना तक उछल जाता है। वहीं दूसरी तरफ, एलपीजी (LPG) गैस गीजर के इस्तेमाल में सिलेंडर जल्दी खत्म होने का आर्थिक बोझ और बाथरूम में वेंटिलेशन न होने पर गैस लीकेज का सुरक्षा जोखिम बना रहता है। इन दोनों समस्याओं का सबसे सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल समाधान है—सोलर वॉटर हीटर (Solar Water Heating System)। अपनी छत पर एक बार सोलर वॉटर हीटर लगवाकर आप न केवल साल भर बिना किसी बिजली या गैस के खर्च के 24 घंटे खौलता हुआ गर्म पानी पा सकते हैं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली आकर्षक सब्सिडी व रिबेट का सीधा फायदा भी उठा सकते हैं।सोलर वॉटर हीटर कैसे काम करता है और यह क्यों है सुपर-इफेक्टिव?सोलर वॉटर हीटर सूरज की सौर तापीय ऊर्जा (Solar Thermal Energy) का उपयोग करके पानी को सीधे गर्म करता है। इसमें फोटोवोल्टिक (PV) बिजली उत्पादन की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह 'थर्मोसाइफन सिद्धांत' (Thermosyphon Principle) पर काम करता है:सोलर कलेक्टर्स (Tubes/Panels): छत पर लगी विशेष कांच की ट्यूब्स या कॉपर पैनल्स सूर्य की किरणों को सोखकर ऊष्मा (हीट) में बदलते हैं और उनके अंदर बहने वाले पानी को 60C से 85C तक गर्म कर देते हैं।इंसुलेटेड स्टोरेज टैंक (Insulated Tank): गर्म पानी ऊपर उठकर एक अत्यधिक इंसुलेटेड स्टेनलेस स्टील (SS) या इनर-ग्लास लाइन्ड टैंक में जमा हो जाता है। इस टैंक में पफ (PUF) इंसुलेशन होने के कारण पानी रात भर और अगले दिन भी लगातार 24 से 48 घंटे तक गर्म बना रहता है।बादल वाले दिनों के लिए बैकअप: घने कोहरे या लगातार बारिश वाले दिनों के लिए इसमें एक वैकल्पिक इलेक्ट्रिक बैकअप हीटिंग एलिमेंट (1.5 kW से 2 kW) लगा होता है, जिसे जरूरत पड़ने पर ही ऑन किया जाता है।ETC बनाम FPC: कौन सा सोलर हीटर आपके घर के लिए है बेस्ट?बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार की तकनीकों वाले सोलर वॉटर हीटर उपलब्ध हैं:1. इवैक्युएटेड ट्यूब कलेक्टर (ETC System):खासियत: यह कांच की डबल-लेयर वैक्यूम ट्यूब्स पर आधारित होता है। यह कम धूप और ठंडे मौसम में भी तेजी से पानी गर्म करता है।लागत: यह तुलनात्मक रूप से सस्ता और मेंटेनेंस में आसान होता है।किसके लिए उपयुक्त: सामान्य बोरवेल या कम टीडीएस (TDS) वाले पानी और घरेलू उपयोग के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्प।2. फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPC System):खासियत: इसमें मेटैलिक कॉपर एब्सॉर्बर प्लेट और टफन्ड ग्लास का इस्तेमाल होता है। यह बेहद मजबूत, लंबे समय तक चलने वाला (20+ साल लाइफ) और वेदर-रेसिस्टेंट होता है।लागत: ईटीसी की तुलना में यह थोड़ा अधिक महंगा होता है।किसके लिए उपयुक्त: भारी दबाव वाले प्रेशर पंप (Hydro-pneumatic systems), अत्यधिक खारे पानी और होटलों/अस्पतालों जैसे व्यावसायिक परिसरों के लिए बेस्ट।सोलर वॉटर हीटर पर सरकारी सब्सिडी और बिजली बिल में विशेष रिबेटनवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) और विभिन्न राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसियों (जैसे HAREDA, MEDA, UPNEDA आदि) द्वारा सोलर वॉटर हीटर को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं:राज्य स्तरीय पूंजीगत सब्सिडी: कई राज्यों में घरेलू उपभोक्ताओं को 100 लीटर से लेकर 500 लीटर क्षमता के सिस्टम पर क्षमता अनुसार ₹4,000 से लेकर ₹10,000 तक की एकमुश्त सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जाती है।बिजली बिल में मासिक रिबेट (Rebate on Electricity Bill): कई राज्यों के बिजली वितरण निगम (DISCOMs) सोलर वॉटर हीटर लगाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को उनके मासिक बिजली बिल पर प्रति 100 लीटर क्षमता पर ₹100 से ₹300 तक की मासिक छूट (Rebate) प्रदान करते हैं। यह छूट सिस्टम की पूरी लाइफ तक बिजली बिल में मिलती रहती है।प्रॉपर्टी टैक्स में छूट: कुछ नगर निगम सोलर वॉटर हीटर लगे मकानों के हाउस टैक्स / प्रॉपर्टी टैक्स में 5% से 10% की अतिरिक्त वार्षिक छूट भी देते हैं।परिवार के हिसाब से सही कैपेसिटी का चुनाव कैसे करें?3 से 4 सदस्यों का छोटा परिवार: 100 से 150 लीटर प्रति दिन (LPD) क्षमता का सिस्टम पर्याप्त होता है।5 से 7 सदस्यों का मध्यम परिवार: 200 से 250 लीटर प्रति दिन (LPD) क्षमता का सोलर हीटर उपयुक्त है।बड़ा संयुक्त परिवार / विला: 300 से 500 LPD क्षमता की आवश्यकता होती है।लागत, बचत और निवेश की रिकवरी (ROI) का पूरा गणितऔसत शुरुआती लागत: 100 से 200 लीटर के ईटीसी सोलर वॉटर हीटर की अनुमानित कीमत सभी फिटिंग्स और टैक्स मिलाकर लगभग ₹22,000 से ₹38,000 के बीच होती है।वार्षिक बिजली की बचत: एक सामान्य 2 kW का इलेक्ट्रिक गीजर सर्दियों में रोजाना 3 से 4 घंटे चलने पर महीने में 150 से 200 यूनिट बिजली की खपत करता है। सोलर हीटर लगाने से आप सालाना लगभग ₹8,000 से ₹15,000 की शुद्ध बिजली बचाते हैं।पैसा वसूल (Payback Period): बिजली और एलपीजी में होने वाली बचत को मिलाकर मात्र 2 से 3 वर्षों के भीतर सोलर हीटर की पूरी लागत वसूल हो जाती है, जिसके बाद अगले 15 से 18 साल तक बिल्कुल मुफ्त गर्म पानी मिलता रहता है।सोलर वॉटर हीटर लगवाते समय इन बातों का रखें ध्यानधूप की उपलब्धता: छत पर ऐसी खुली जगह चुनें जहां दिन भर में कम से कम 5 से 6 घंटे सीधी धूप आती हो और किसी पेड़ या ऊंची दीवार की छाया न पड़ती हो।पानी की टंकी की ऊंचाई: ओवरहेड कोल्ड वॉटर टैंक का लेवल सोलर हीटर के स्टोरेज टैंक से कम से कम 4 से 6 फीट ऊपर होना चाहिए ताकि ग्रेविटी के जरिए पानी का प्राकृतिक दबाव बना रहे।विश्वसनीय ब्रांड और वारंटी: हमेशा बीआईएस (BIS / MNRE) प्रमाणित कंपनियों से ही उत्पाद खरीदें और कम से कम 5 से 7 साल की टैंक वारंटी जरूर सुनिश्चित करें।
भारत में रहने वाले लगभग हर नागरिक के लिए 12 अंकों का विशिष्ट पहचान पत्र यानी आधार कार्ड दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। बैंक खाता खुलवाने, सिम कार्ड लेने, सरकारी योजनाओं की सब्सिडी प्राप्त करने से लेकर यात्रा के दौरान पहचान दर्ज कराने तक हर जगह आधार का उपयोग किया जाता है। लेकिन आम जनता के बीच लंबे समय से यह गलत धारणा रही है कि आधार कार्ड भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) और जन्मतिथि (Date of Birth) का भी अंतिम और पुख्ता कानूनी प्रमाण है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI), केंद्रीय मंत्रालयों और विभिन्न उच्च न्यायालयों व सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी सर्कुलर और आदेशों में यह बात पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है कि आधार कार्ड केवल और केवल 'पहचान का प्रमाण' (Proof of Identity) और 'पते का प्रमाण' (Proof of Address) है, यह किसी भी सूरत में नागरिकता या जन्मतिथि का निर्णायक प्रमाण पत्र नहीं है।यूआईडीएआई के सर्कुलर में क्या लिखा है?यूआईडीएआई द्वारा समय-समय पर जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों और संशोधित सर्कुलर में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि आधार अधिनियम (Aadhaar Act, 2016) की धारा 9 के तहत आधार धारक को आधार संख्या जारी होना उसकी नागरिकता या अधिवास (Domicile) का प्रमाण नहीं है। आधार कार्ड के नए डिजिटल और भौतिक प्रारूपों में भी अब स्पष्ट रूप से यह वैधानिक चेतावनी (Disclaimer) मुद्रित की जा रही है: आधार पहचान का प्रमाण है, नागरिकता या जन्मतिथि का नहीं।प्राधिकरण ने सभी सरकारी विभागों, बैंकों, पासपोर्ट सेवा केंद्रों, शिक्षण संस्थानों और भर्ती बोर्डों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता या सटीक जन्मतिथि के सत्यापन के लिए केवल आधार पर निर्भर न रहा जाए, बल्कि इसके लिए अन्य वैधानिक दस्तावेजों की मांग की जाए।आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं हो सकता?आधार कार्ड को नागरिकता का दस्तावेज न मानने के पीछे कई ठोस वैधानिक और तकनीकी कारण हैं:निवासी स्थिति पर आधारित (Resident-based Document): आधार कार्ड भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को जारी किया जा सकता है, जो आवेदन की तारीख से ठीक पहले के 12 महीनों में कम से कम 182 दिन भारत में रहा हो। इसका मतलब है कि भारत में वैध वीजा या वर्क परमिट पर रहने वाले विदेशी नागरिक भी आधार कार्ड बनवाने के पात्र होते हैं।नागरिकता अधिनियम 1955: भारतीय नागरिकता केवल नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों (जन्म से, वंश से, पंजीकरण से या देशीयकरण द्वारा) के तहत ही तय होती है। चूंकि आधार जारी करते समय विदेशी नागरिकों के नागरिकता दावों की गहन जांच नहीं होती, इसलिए इसे नागरिकता का कानूनी सबूत नहीं माना जा सकता।पासपोर्ट और वोटर आईडी का महत्व: भारत में नागरिकता के प्राथमिक दस्तावेजों के रूप में भारतीय पासपोर्ट (Indian Passport), मतदाता पहचान पत्र (Voter ID / EPIC) और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नागरिकता प्रमाण पत्र ही मान्य होते हैं।जन्मतिथि (DOB Proof) के रूप में आधार की मान्यता पर क्यों लगी रोक?स्कूल एडमिशन, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेंशन दावों और भविष्य निधि (EPFO) निकासी के दौरान पहले जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड का व्यापक इस्तेमाल होता था। हालांकि, ईपीएफओ (EPFO), बॉम्बे हाईकोर्ट और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के निर्देशों के बाद जन्मतिथि के सत्यापन के लिए आधार के उपयोग को सीमित कर दिया गया है।घोषित जन्मतिथि (Declared DOB): आधार नामांकन के शुरुआती वर्षों में कई लोगों ने बिना किसी आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र के केवल स्व-घोषणा (Self-declaration) या अनुमान के आधार पर उम्र दर्ज करा दी थी। कई आधार कार्डों में केवल जन्म का वर्ष लिखा होता था, सटीक तारीख और महीना नहीं।दस्तावेजी सत्यापन की कमी: कई मामलों में आधार कार्ड पर दर्ज जन्मतिथि और स्कूल प्रमाण पत्र की जन्मतिथि में बड़ा अंतर पाया गया, जिससे कानूनी विवाद खड़े हुए। इसी कारण न्यायिक आदेशों में यह तय किया गया कि जन्मतिथि के कानूनी विवाद में आधार कार्ड को अकाट्य साक्ष्य (Conclusive Proof) नहीं माना जाएगा।अब जन्मतिथि और नागरिकता साबित करने के लिए कौन-से दस्तावेज मान्य हैं?सरकारी कामकाज, पासपोर्ट बनवाने, ईपीएफओ क्लेम और नौकरियों में जन्मतिथि व नागरिकता प्रमाणित करने के लिए अब निम्नलिखित अधिकृत दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जाती है:जन्मतिथि (DOB) के लिए वैध दस्तावेज:नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत द्वारा जारी मूल जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)।मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी 10वीं कक्षा (मैट्रिकुलेशन) की मार्कशीट या पासिंग सर्टिफिकेट।सरकारी अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज समरी / जन्म रिकॉर्ड।पासपोर्ट और पैन कार्ड (सत्यापित रिकॉर्ड के साथ)।नागरिकता (Citizenship) के लिए वैध दस्तावेज:भारत सरकार द्वारा जारी वैध भारतीय पासपोर्ट।भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वोटर आईडी कार्ड।गृह मंत्रालय द्वारा जारी नागरिकता पंजीकरण प्रमाण पत्र (Registration / Naturalisation Certificate)।आधार कार्ड का सही और सुरक्षित उपयोग कहां-कहां जारी रहेगा?भले ही आधार कार्ड नागरिकता या जन्मतिथि का निर्णायक प्रमाण न हो, लेकिन देश के डिजिटल और वित्तीय बुनियादी ढांचे में इसका महत्व पहले की तरह बरकरार है:बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Biometric Authentication): किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान (Proof of Identity) साबित करने के लिए फिंगरप्रिंट, आईरिस या फेस-आरडी प्रमाणीकरण का सबसे सटीक माध्यम आधार ही है।प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT Services): पीएम किसान, एलपीजी सब्सिडी, राशन कार्ड वितरण और सरकारी छात्रवृत्तियों का पैसा सीधे बैंक खाते में प्राप्त करने के लिए आधार सीडिंग अनिवार्य है।सिम कार्ड और बैंक खाता ई-केवाईसी: पेपरलेस डिजिटल केवाईसी के जरिए तुरंत नया बैंक खाता खोलने या नया मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए आधार सबसे तेज माध्यम बना रहेगा।पते का प्रमाण (Address Proof): निवास स्थान के सत्यापन के लिए आधार कार्ड को सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता रहेगा।आम नागरिकों के लिए जरूरी सुझावयदि आपके आधार कार्ड, 10वीं के सर्टिफिकेट और जन्म प्रमाण पत्र में नाम, जन्मतिथि या माता-पिता के नाम की स्पेलिंग में कोई अंतर है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। जन्मतिथि के लिए अपने नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाकर वैध जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) या 10वीं की मार्कशीट की मूल प्रति अपलोड करके अपनी जन्मतिथि को 'वेरिफाइड' (Verified Status) में अपडेट कराएं ताकि भविष्य में किसी भी सरकारी या कानूनी प्रक्रिया में रुकावट न आए।
शोक में डूबे नेपाल को फिलहाल राहत, चीन बॉर्डर के पास बनी झील फटने का खतरा टला
चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील के अचानक फटने का खतरा फिलहाल कम हो गया है. दरअसल, झील का पानी धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है. इसका आकार घट रहा है. अधिकारी रडार और ड्रोन के जरिए झील पर नजर रख रहे हैं. दूसरी बड़ी झील की भी पहचान हुई है, जिस पर भी नजर रखी जा रही है.
Gorakhpur में बोले Yogi Adityanath, विकास विरोधी लोग जनता को जाति और क्षेत्र में बांट रहे
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर जाति, क्षेत्र और के नाम पर लोगों को बांटने का आरोप लगाया। गोरखपुर में एक कार्यक्रम में आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘बीआरडी मेडिकल कॉलेज (गोरखपुर में) को उच्चीकृत किया गया है और अब यह सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाएं प्रदान करता है। एक क्षेत्रीय वायरोलॉजी केंद्र की स्थापना की गई है। गोरखपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान चालू हो गया है। इसके अलावा, देवरिया,कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच और गोंडा में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं और लोग इसका लाभ उठा रहे हैं।’’आदित्यनाथ ने कहा,‘‘एक अच्छी सरकार आती है और अच्छा प्रदर्शन करती है। इसलिए मैं कहता हूं कि यह काम इसलिए संभव हो सका क्योंकि यह राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रथम पर आधारित है, जहां राष्ट्र सर्वोपरि है। इसी भावना से प्रेरित होकर और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘डबल इंजन’ सरकार ने अपना काम शुरू किया। जो लोग इस विकास को नापसंद करते हैं, जो इन ‘कल्याण मंडपों’ (सामुदायिक हॉल), इन चौड़ी सड़कों, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों और इस उत्सव के माहौल को नापसंद करते हैं- वे एक बार फिर काम कर रहे हैं। लोगों को जाति, क्षेत्र और के आधार पर विभाजित करने में लगे हुए हैं।’’आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘हमें उनसे सावधान रहने की जरूरत है। हमें उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। वे वास्तव में डकैतों का एक गिरोह हैं। जब भी उन्हें मौका मिलता है, वे लूटपाट करते हैं। उन्होंने राज्य और देश को लूटा और अराजकता फैलाई।’’मुख्यमंत्री 130 करोड़ रुपये से अधिक की 170 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के लिए गोरखपुर में थे। उन्होंने कहा,‘‘वे गरीबों और व्यापारियों की जमीन को जब्त करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते थे। हालांकि, यह ‘डबल इंजन’ भाजपा सरकार गरीबों पर अत्याचार नहीं होने देगी, न ही दलितों या हाशिए पर रहने वालों का शोषण होने देगी। यह किसी को भी किसी बेटी या किसी व्यापारी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देगी, और जो कोई भी ऐसा करने का प्रयास करेगा उससे इस ‘डबल इंजन’ सरकार द्वारा कानून के दायरे में सख्ती से निपटा जाएगा।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या अपनी निजी जिंदगी को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। नताशा स्टेनकोविक से अलग होने के बाद हार्दिक पांड्या का नाम फैशन मॉडल और एक्ट्रेस माहिका शर्मा (Mahieka Sharma) के साथ जुड़ा है। दोनों को कई मौकों पर साथ देखा गया और सोशल मीडिया पर साथ में तस्वीरें साझा करने के बाद फैंस और मीडिया के बीच इस नई जोड़ी को लेकर काफी दिलचस्पी बढ़ गई है।कौन हैं माहिका शर्मा?माहिका शर्मा भारतीय फैशन और ग्लैमर जगत का एक जाना-माना और तेजी से उभरता हुआ नाम हैं:शिक्षा और बैकग्राउंड: दिल्ली की रहने वाली माहिका ने पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और फाइनेंस में ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने कम्युनिटी साइकोलॉजी में भी कोर्स किया है और वह एक सर्टिफाइड योग इंस्ट्रक्टर भी हैं।मॉडलिंग और फैशन करियर: माहिका सब्यसाची मुखर्जी, मनीष मल्होत्रा, तरुण तहिलियानी और अनीता डोंगरे जैसे देश के शीर्ष फैशन डिजाइनरों के लिए रैंप वॉक कर चुकी हैं। वह तनिष्क, वीवो और यूनीक्लो जैसे बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों में भी नजर आ चुकी हैं।अवॉर्ड्स और पहचान: उन्हें भारतीय फैशन जगत में 'मॉडल ऑफ द ईयर (न्यू एज)' के खिताब से भी नवाजा जा चुका है और वह एले (Elle) व ग्राज़िया (Grazia) जैसी प्रमुख लाइफस्टाइल मैगजीन्स के कवर्स पर दिखाई दे चुकी हैं।दोनों की उम्र में कितना है अंतर (Age Gap)?हार्दिक पांड्या और माहिका शर्मा की उम्र में लगभग 7 से 8 साल का अंतर है:हार्दिक पांड्या की उम्र: हार्दिक पांड्या का जन्म 11 अक्टूबर 1993 को हुआ था, यानी वह करीब 32 वर्ष के हैं।माहिका शर्मा की उम्र: माहिका शर्मा का जन्म 19 फरवरी 2001 को हुआ था और उनकी उम्र लगभग 24-25 वर्ष है।पहले भी चर्चाओं में रही है हार्दिक की पर्सनल लाइफहार्दिक पांड्या ने साल 2020 में मॉडल और एक्ट्रेस नताशा स्टेनकोविक से शादी की थी। दोनों का एक बेटा अगस्त्य भी है। शादी के चार साल बाद 2024 में दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने की घोषणा की थी। इसके बाद अब हार्दिक और माहिका शर्मा की बॉन्डिंग को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बज बना हुआ है।
नोएडा में माफिया का खेल! चोरी की बिजली से हर महीने वसूल रहे थे 1.30 करोड़
नोएडा के छिजारसी डूब क्षेत्र में करीब 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शनों का मामला सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है. आरोप है कि निजी सिंडिकेट प्राइवेट मीटर और नेटवर्क के जरिए बिजली पहुंचा रहा था. न्यूनतम 1 हजार रुपये प्रति कनेक्शन के हिसाब से हर महीने करीब 1.30 करोड़ रुपये की वसूली का अनुमान है.
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पहले पूर्वजों के समय का 50 से 100 साल पुराना केवाला (Deed Document), खतियान या रजिस्टर्ड डीड की प्रमाणित प्रति निकलवाने के लिए लोगों को जिला निबंधन कार्यालय (Registry Office) या अंचल कार्यालय के महीनों चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सरकार ने पुरानी और नई सभी रजिस्टर्ड डीड्स का डिजिटल रिकॉर्ड 'भूमि जानकारी' (Bhumijankari) पोर्टल पर लाइव कर दिया है। इसके जरिए राज्य का कोई भी नागरिक घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से पुरानी जमीन का केवाला, खाता-खेसरा विवरण और डीड की कॉपी आसानी से देख और पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकता है।पुराना केवाला ऑनलाइन सर्च करने के लिए जरूरी जानकारियांडिजिटल पोर्टल पर दस्तावेज खोजने के लिए आपके पास नीचे दी गई जानकारियों में से कुछ बुनियादी विवरण होने चाहिए:संबंधित जिले (District) का नामनिबंधन कार्यालय (Registration Office / SRO) का नामअंचल (Circle) और मौजा (Village/Mauza) का नामजमीन का खाता नंबर (Khata No.) या खसरा/प्लॉट नंबर (Khesra/Plot No.)डीड नंबर (Deed No.) या निबंधन का वर्ष (Registration Year - यदि याद हो)जमीन के क्रेता (Buyer) या विक्रेता (Seller) का नामस्टेप-बाय-स्टेप: 'भूमि जानकारी' पोर्टल से ऐसे डाउनलोड करें पुराना दस्तावेजस्टेप 1: आधिकारिक निबंधन पोर्टल पर जाएं सबसे पहले अपने वेब ब्राउज़र में बिहार सरकार के निबंधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट bhumijankari.bihar.gov.in खोलें।स्टेप 2: 'View Registered Document' का विकल्प चुनें होमपेज पर उपलब्ध सेवाओं की सूची में से 'View Registered Document' या 'Search Document' वाले विकल्प पर क्लिक करें।स्टेप 3: समय सीमा (Year Phase) का सही चुनाव करें स्क्रीन पर रिकॉर्ड सर्च करने के तीन अलग-अलग विकल्प दिखाई देंगे:Online Registration (2016 To Till Date): 2016 के बाद के नए दस्तावेजों के लिए।Post Computerisation (2006 To 2015): 2006 से 2015 के बीच के दस्तावेजों के लिए।Pre-Computerisation (Before 2006): 2006 से पहले के पुराने और पुश्तैनी दस्तावेजों के लिए। अपने रिकॉर्ड के हिसाब से संबंधित रेडियो बटन को चुनें।स्टेप 4: लोकेशन और जमीन का विवरण दर्ज करें फॉर्म में अपना रजिस्ट्रेशन ऑफिस (Registration Office), अंचल, थाना कोड और मौजा का चयन करें। इसके बाद नीचे दिए गए सर्च विकल्पों में से खाता नंबर, प्लॉट नंबर या पार्टी का नाम भरें।स्टेप 5: 'Search' पर क्लिक करें और रिजल्ट देखें विवरण भरने के बाद 'Search' बटन पर क्लिक करें। नीचे उस मौजा और खाते से जुड़े सभी रजिस्टर्ड दस्तावेजों की सूची आ जाएगी। इसमें डीड नंबर, रजिस्ट्री की तारीख, क्रेता-विक्रेता का नाम और कुल रकबा दिखाई देगा।स्टेप 6: 'Click Here to View Details' और PDF डाउनलोड संबंधित दस्तावेज के सामने दिए गए 'View Details' या 'View Deed' विकल्प पर क्लिक करें। स्क्रीन पर आपके जमीन के पुराने केवाले की डिजिटल कॉपी खुल जाएगी, जिसे आप 'Print/Download' करके सुरक्षित रख सकते हैं।पुराना खतियान और जमाबंदी निकालने का तरीका (बिहार भूमि पोर्टल)यदि आपको जमीन का पुराना खतियान या वर्तमान जमाबंदी रजिस्टर (रजिस्टर-2) देखना है:राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आधिकारिक पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in पर जाएं।'अपना खाता देखें' विकल्प पर क्लिक करके बिहार के नक्शे में अपने जिले और अंचल को चुनें।अपने मौजा का चयन करके खाता नंबर, खेसरा नंबर या खातेदार के नाम से सर्च करें।स्क्रीन पर पूरे खतियान का अधिकार अभिलेख प्रदर्शित हो जाएगा, जिसे सीधे प्रिंट किया जा सकता है।यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड न मिले तो 'नकल' (Certified Copy) कैसे प्राप्त करें?यदि आपका दस्तावेज बहुत अधिक पुराना है और अभी तक स्कैन होकर पोर्टल पर अपलोड नहीं हुआ है:नकलखाना (Record Room) में आवेदन: अपने संबंधित जिला रजिस्ट्री ऑफिस (SRO) के रिकॉर्ड रूम में जाकर 'फॉर्म-1' भरकर प्रमाणित प्रति (Certified Copy) के लिए आवेदन दें।सर्च फीस का भुगतान: निर्धारित सरकारी खोज शुल्क (Search Fee) और स्टाम्प शुल्क जमा करने के बाद रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड रूम से मूल बही-खाते (Volumed Register) से ढूंढकर अधिकृत मुहर लगी प्रमाणित प्रतिलिपि जारी कर दी जाती है।
देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल हेल्थकेयर और ई-फार्मेसी (E-Pharmacy) सेक्टर पर सरकार, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और स्वास्थ्य मंत्रालय का कड़ा रुख देखने को मिल रहा है। लंबे समय से बिना वैधानिक नियमों और वैध ऑनलाइन लाइसेंसिंग व्यवस्था के संचालित हो रहे ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर कड़े प्रतिबंध और नोटिस की कार्रवाई की गई है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और रूल्स 1945 के तहत वर्तमान में ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए कोई अलग से वैधानिक व संहिताबद्ध कानून अधिसूचित नहीं है। इसके चलते कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा शेड्यूल्ड दवाओं (Schedule H, H1 और X) की बिक्री, भारी छूट के विज्ञापन और डॉक्टर के वैध पर्चे (Prescription) के बिना दवाओं की होम डिलीवरी को लेकर गंभीर कानूनी व सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताएं खड़ी हो गई हैं।8 लाख से अधिक ऑफलाइन केमिस्टों का विरोध और कानूनी विवादभारत में पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स और दवा विक्रेताओं के सबसे बड़े संगठन 'ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' (AIOCD) द्वारा ई-फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है।अनियंत्रित डिस्काउंट और बाजार पर असर: ऑफलाइन केमिस्टों का आरोप है कि बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियां विदेशी निवेश के दम पर 20% से लेकर 70% तक की भारी छूट (Predatory Pricing) देकर स्थानीय दवा दुकानों के कारोबार को खत्म कर रही हैं।दवाओं के दुरुपयोग का खतरा: ऑनलाइन माध्यम से नारकोटिक्स, एंटीबायोटिक्स और डिप्रेशन की हैबिट-फॉर्मिंग दवाओं (Habit-forming drugs) को बिना सख्त सत्यापन के मंगाए जाने का खतरा बना रहता है।अदालतों के अंतरिम आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट और अन्य उच्च न्यायालयों में दायर जनहित याचिकाओं में दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने और सख्त ई-फार्मेसी नियम (E-Pharmacy Rules) लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।ई-फार्मेसी कंपनियों का पक्ष: मध्यस्थ मॉडल और मरीजों की सुविधादूसरी तरफ, देश की प्रमुख ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों का कहना है कि वे केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म या 'इंटरमीडियरी' (Intermediary) के रूप में कार्य करती हैं।लाइसेंस्ड रिटेलर्स से सप्लाई: कंपनियों का दावा है कि उनके जरिए बेची जाने वाली 100% दवाएं राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (State FDA) द्वारा लाइसेंस प्राप्त स्थानीय मेडिकल स्टोर्स से ही डिस्पैच होती हैं और पंजीकृत फार्मासिस्ट की देखरेख में ही बिल बनती हैं।रिमोट एरियाज में लाइफ-सेविंग सपोर्ट: ऑनलाइन दवाओं की होम डिलीवरी से बुजुर्गों, गंभीर रूप से बीमार मरीजों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घर बैठे किफायती व प्रामाणिक दवाएं प्राप्त करने में बड़ी मदद मिलती है।सरकार के नए ड्राफ्ट रूल्स: क्या होंगी प्रमुख शर्तें?स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्तावित नियामक ढांचे के तहत ऑनलाइन दवा बिक्री को पूरी तरह बंद करने के बजाय कड़े नियमों के दायरे में लाने की तैयारी है:केंद्रीय पंजीकरण अनिवार्य: केवल वही ई-पोर्टल दवाएं बेच सकेंगे, जो ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के पास पंजीकृत होंगे।शेड्यूल X और नशीली दवाओं पर पूर्ण बैन: किसी भी प्रकार की नशीली, ट्रांक्विलाइजर और गंभीर साइकोट्रोपिक दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।कड़ा प्रिस्क्रिप्शन वेरिफिकेशन: हर ऑर्डर के साथ रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (RMP) का सत्यापित डिजिटल पर्चा अपलोड करना और रिकॉर्ड मेंटेन करना अनिवार्य होगा।भ्रामक विज्ञापनों पर रोक: दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर भ्रामक छूट और विज्ञापन देने पर सख्त जुर्माने का प्रावधान होगा।करोड़ों के ई-हेल्थकेयर स्टार्टअप और निवेश पर असरनियामक अनिश्चितता और कानूनी सख्ती के चलते ऑनलाइन हेल्थकेयर और मेडिसिन डिलीवरी सेक्टर में काम कर रहे स्टार्टअप्स के वैल्यूएशन और पूंजी प्रवाह पर सीधा असर पड़ा है। कई कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करते हुए हाइब्रिड मॉडल (ऑनलाइन + ऑफलाइन स्टोर्स) अपनाना पड़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सरकार आधिकारिक ई-फार्मेसी नीति को अंतिम रूप देकर अधिसूचित नहीं कर देती, तब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई जारी रहेगी।
दांतों को चमकदार, स्वस्थ और सांसों को ताजा बनाए रखने के लिए रोजाना सुबह और रात को ब्रश करना बुनियादी ओरल हाइजीन का हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस टूथब्रश से आप अपने मुंह की सफाई करते हैं, वह खुद कितना साफ और सुरक्षित है? डेंटिस्ट्स और माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के कई वैश्विक अध्ययनों में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गलत जगह पर रखा हुआ और महीनों पुराना टूथब्रश लाखों खतरनाक बैक्टीरिया, फंगस और वायरस का अड्डा बन सकता है। साफ करने के बजाय ऐसा टूथब्रश आपके मुंह में गंभीर संक्रमण, मसूड़ों की बीमारी और दांतों के क्षरण (Tooth Decay) का मुख्य कारण बन सकता है।बाथरूम में रखा टूथब्रश और टॉयलेट फ्लश का 'एरोसोल इफेक्ट'अधिकांश घरों में वाशबेसिन और टॉयलेट सीट एक ही बाथरूम में अगल-बगल होते हैं। जब टॉयलेट पॉट को बिना ढक्कन (Lid) बंद किए फ्लश किया जाता है, तो पानी के तेज दबाव से हवा में सूक्ष्म जलकण (Airborne Aerosol Droplets) फैलते हैं, जिन्हें 'टॉयलेट प्लम' (Toilet Plume) कहा जाता है। ये कण 6 से 8 फीट की दूरी तक हवा में तैरते हैं और सीधे वाशबेसिन पर खुले रखे टूथब्रश के ब्रिसल्स (Bristles) पर चिपक जाते हैं। इन कणों में ई. कोलाई (E. coli), स्टैफिलोकोकस और स्ट्रेप्टोकोकस जैसे संक्रामक बैक्टीरिया होते हैं, जो अगली सुबह ब्रश करते समय सीधे आपके मुंह के अंदर पहुंच जाते हैं।पुराना और सख्त टूथब्रश: मसूड़ों और इनेमल का सबसे बड़ा दुश्मनबहुत से लोग जब तक टूथब्रश के ब्रिसल्स पूरी तरह टेढ़े या चपटे नहीं हो जाते, तब तक नया ब्रश नहीं खरीदते। लंबे समय तक एक ही ब्रश इस्तेमाल करने से दांतों को भारी नुकसान पहुंचता है:दांतों के इनेमल (Enamel) का घिसना: पुराने और सख्त ब्रिसल्स दांतों की बाहरी सुरक्षात्मक परत (इनेमल) को रगड़कर घिस देते हैं। इससे दांतों में ठंडा-गर्म पानी लगने यानी तेज सेंसिटिविटी (Tooth Sensitivity) की समस्या शुरू हो जाती है।मसूड़ों का पीछे हटना (Gum Recession): कड़े ब्रिसल्स से लगातार जोर लगाकर ब्रश करने से मसूड़ों में घाव, सूजन और खून बहने की दिक्कत (Gingivitis) हो जाती है। समय के साथ मसूड़े अपनी जगह छोड़ देते हैं, जिससे दांतों की जड़ें कमजोर होकर हिलने लगती हैं।प्लाक हटाने में अक्षमता: घिसे हुए और मुड़े हुए ब्रिसल्स दांतों के कोनों और पिछले हिस्से (Molars) तक नहीं पहुंच पाते, जिससे दांतों के बीच बैक्टीरिया और पीला प्लाक जमा होता रहता है।टूथब्रश पर बैक्टीरिया पनपने की 4 आम गलतियांगीले ब्रश को प्लास्टिक कैप में बंद करके रखना: कई लोग सफाई के नाम पर गीले टूथब्रश पर तुरंत कैप चढ़ा देते हैं। नमी और अंधेरा फंगस व बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल बनाते हैं।सभी सदस्यों के टूथब्रश एक ही होल्डर में सटाकर रखना: परिवार के सभी टूथब्रशों के हेड जब आपस में छूते हैं, तो एक व्यक्ति के मुंह के बैक्टीरिया और फ्लू वायरस दूसरे व्यक्ति के ब्रश में आसानी से ट्रांसफर हो जाते हैं।बीमारी (सर्दी-जुकाम, वायरल या गले में इंफेक्शन) के बाद ब्रश न बदलना: फ्लू या वायरल फीवर से ठीक होने के बाद भी पुराने ब्रश का इस्तेमाल करने से री-इंफेक्शन (दोबारा संक्रमण) का खतरा रहता है।सख्त (Hard) ब्रिसल्स वाले ब्रश का चुनाव: अधिकांश लोग सोचते हैं कि सख्त ब्रश से दांत ज्यादा साफ होते हैं, जबकि यह दांतों की जड़ों को पूरी तरह नुकसान पहुंचाता है।टूथब्रश को 100% सुरक्षित और स्वच्छ रखने के आसान नियमडेंटिस्ट्स और ओरल हेल्थ एक्सपर्ट्स आपके टूथब्रश को सुरक्षित रखने के लिए इन जरूरी बातों का पालन करने की सलाह देते हैं:हर 3 महीने में बदलें ब्रश: अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन (ADA) के अनुसार, टूथब्रश को हर 90 दिन (3 महीने) में या ब्रिसल्स के फैलते ही तुरंत बदल देना चाहिए।हमेशा 'अल्ट्रा-सॉफ्ट' या 'सॉफ्ट' ब्रिसल्स चुनें: दांतों और मसूड़ों की सुरक्षा के लिए हमेशा सॉफ्ट ब्रिसल्स वाले ब्रश का ही उपयोग करें और हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में 2 मिनट तक ब्रश करें।धूप और हवादार जगह पर रखें: इस्तेमाल के बाद ब्रश को बहते साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और उसे हमेशा सीधा (Upright Position) खुली हवा में सूखने दें।टॉयलेट फ्लश करते समय ढक्कन बंद करें: बाथरूम में फ्लश का बटन दबाने से पहले हमेशा कमोड का ढक्कन जरूर बंद करें और टूथब्रश को कमोड से कम से कम 6 फीट दूर रखें।गर्म पानी या माउथवॉश से सैनिटाइजेशन: हफ्ते में एक बार अपने टूथब्रश के हेड को 30 सेकंड के लिए एंटी-बैक्टीरियल माउथवॉश या हल्के गुनगुने पानी में डुबोकर रखें।
कुमार विश्वास की बेटियों का जलवा, राखी पर ग्लैमरस लुक में दिखीं कुहू
कुमार विश्वास की बेटियां हर बार अपने स्टाइल से लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच ही लेती हैं, रक्षाबंधन पर भी उनका देसी अंदाज लोगों को बहुत पसंद आ रहा है. दोनों बहनों ने अपने पापा को राखी बांधी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं और खासतौर पर छोटी बेटी के ग्लैमरस अवतार लोगों की नजरें ठहर गई हैं.
Gujarat University में पूर्व VC Neerja Gupta पर जांच शुरू, पूर्व जज करेंगे पड़ताल
गुजरात विश्वविद्यालय ने पूर्व कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता के कार्यकाल के दौरान वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डी. एम. व्यास की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच समिति का शनिवार को गठन किया। कार्यवाहक कुलपति जगदीश जोशी ने कहा कि समिति अनियमित नियुक्तियों, वित्तीय अनियमितताओं, धन के गबन और परिचितों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारों के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी। जोशी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि न्यायमूर्ति व्यास के साथ चर्चा की गई है और जांच प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले अक्सर अंत में उच्च न्यायालय पहुंच जाते हैं, इसलिए विश्वविद्यालय ने सभी पहलुओं को शामिल करने और जांच को निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने के लिए पहले ही एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त करने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) समेत छात्र संगठनों की ओर से लगाए गए आरोपों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। इन संगठनों ने डॉ. गुप्ता पर वित्तीय अनियमितताओं, केंद्रीय अनुदान के दुरुपयोग और बहुत अधिक वेतन पर अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति कर विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया मंचों पर आरोपियों की ओर से दिए गए सार्वजनिक स्पष्टीकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए जोशी ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय को उनकी ओर से या उनके प्रतिनिधियों की ओर से कोई औपचारिक लिखित सूचना नहीं मिली है। इस महीने की शुरुआत में, विश्वविद्यालय ने तीन सदस्यीय तथ्यान्वेषण समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद गुजरात यूनिवर्सिटी स्टार्टअप एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड रिसर्च फाउंडेशन (आईडीएसआरएफ) के सीईओ समेत 10 अस्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि गुप्ता ने इन लोगों की नियुक्ति की और उन्हें अत्यधिक अधिक वेतन दिया, जिससे विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान हुआ।
सुभाष घई से भिड़े थे सलमान-दी गालियां, हाथापाई तक पहुंची बात
सुभाष घई ने सलमान संग अपनी पहली फिल्म युवराज का वक्त याद किया, जब उन दोनों की लड़ाई हो गई थी. डायरेक्टर का कहना है कि सलमान संग उनकी हाथापाई हुई थी, जिसके बाद सलीम खान ने सुपरस्टार को फटकार लगाई थी.
नेपाल में त्रासदी के बीच अपनों की तलाश जारी, ग्राउंड जीरो से देखें विशेष
नेपाल में.रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहे हैं. अपनों की तलाश में लोग भटक रहे हैं. नुवाकोट का मानों नक्शा ही बदल गया है. सड़क-दुकान-मकान सब बराबर हो गए हैं. जिन घरों में कभी खुशियां चहकती थीं, आज उन्हीं घरों के बाहर बेबस और लाचार लोगों का दर्द नजर आ रहा है. विशेष में देखें ग्राउंड जीरो से तबाही के निशान.
Bombay High Court की सख्ती: FDA ने Cipla और MCA पर दिए सख्त आदेश वापस लिए
बंबई उच्च न्यायालय ने शनिवार को महराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को दोहरा झटका दिया। अदालत ने “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों” के खिलाफ काम करने और “व्यावहारिक नजरिये के बजाय किताबी या संकीर्ण नजरिया” अपनाने के लिए एफडीए को फटकार लगाई, जिसके बाद नियामक एजेंसी को दो बड़े कदम वापस खींचने पड़े। मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) के परिसर में खाने-पीने की जगहों के मामले में कानून का विश्लेषण किए बिना आदेश जारी करने में “बेवजह जल्दबाजी” दिखाने पर उच्च न्यायालय ने एफडीए को फटकार लगाते हुए पूछा: “क्या आपको लगता है कि आप कोई भगवान हैं और कुछ भी कर सकते हैं?”पहले मामले में एफडीए ने सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की पुणे स्थित कैरी एंड फॉरवर्डिंग इकाई का दवा बिक्री लाइसेंस निरस्त करने का आदेश शनिवार को वापस ले लिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने नियामक एजेंसी को “हद से ज्यादा” आगे बढ़ने और “मनमाना” व्यवहार करने के लिए फटकार लगाई। एजेंसी को एक और झटका उस वक्त लगा, जब एफडीए ने अदालत को बताया कि वह बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित एमसीए परिसर में पांच रेस्त्रां का संचालन निलंबित करने का आदेश भी वापस ले लेगा। अदालत ने अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश देने की चेतावनी दी थी। अदालत ने यह भी कहा कि नये निरीक्षण में पाया गया कि ये खानपान प्रतिष्ठान खाद्य सुरक्षा नियमों का 88 प्रतिशत तक पालन कर रहे थे। हालांकि, इन खानपान प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित ही रहे, क्योंकि उनका संचालन एक अन्य संस्था मेसर्स शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा किया जा रहा था, जबकि लाइसेंस एमसीए के नाम पर जारी किए गए थे। अदालत ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो इसे रोकता हो। अदालत ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई में उसने एफडीए अधिकारियों से खासतौर पर इस मामले पर सोच-विचार करने और स्थिति को व्यावहारिक नजरिये से देखने के लिए कहा था। अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, ‘‘इतना स्पष्ट निर्देश देने के बावजूद एफडीए ने हमारे आदेश की अवहेलना की और व्यावहारिक रुख अपनाने के बजाय नियमों की पेचीदगियों पर ही जोर दिया। हम हर बार विभाग और अधिकारियों को फटकारते-फटकारते थक चुके हैं। अब कड़े आदेश पारित करने का समय आ गया है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। या तो वे हमें संतुष्ट करें या फिर जेल जाने के लिए तैयार रहें।”जब अदालत की अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी गई, तो एफडीए ने कहा कि वह एमसीए को एक नया नोटिस जारी करेगा और एसोसिएशन तथा शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच हुए अनुबंध के मामले में उन्हें सुनवाई का मौका देगा और फिर ठोस कारणों के साथ आदेश जारी करेगा। अदालत ने इसे मान लिया और कहा कि चूंकि ये खाने-पीने की जगहें अब नियमों का पालन कर रही हैं, इसलिए उनके लाइसेंस निलंबित करने का आदेश रद्द किया जाता है और वे अपनी सेवा फिर से शुरू कर सकती हैं। पीठ ने सवाल किया कि एफडीए “हर बार इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाता है” और कानून के प्रावधानों का ठीक से विश्लेषण किए बिना आदेश क्यों जारी कर देता है। अदालत ने कहा, “विभाग हतोत्साहित महसूस न करे, इसके लिए हम कितनी बार समझाने और हितों में संतुलन बनाने की कोशिश करें? हम यह क्यों कहते हैं कि मच्छर को मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए? क्या आप खुद को सर्वेसर्वा समझते हैं और कुछ भी कर सकते हैं?”सिप्ला मामले में, उच्च न्यायालय ने एफडीए के उस ईमेल पर सवाल उठाए जिसमें कंपनी के प्रतिनिधि को राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश के दिन सुनवाई के लिए बुलाया गया था। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘आप (एफडीए) सराहनीय और प्रशंसनीय काम कर रहे हैं, लेकिन अब आप हद से आगे जा रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। आपसे गलती हुई है और अब आपको इस मुद्दे का समाधान करना होगा।’’अदालत ने कहा कि एफडीए ने “मनमाना” रवैया अपनाया, गलत प्रक्रिया का पालन किया और लाइसेंस रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा, “यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
RSS को समझने के लिए जोहरान ममदानी को 10 हजार जन्म लेने पड़ेंगे, BJP नेता क्यों भड़के
भाजपा नेता राम कदम ने आरोप लगाया कि भारतीय मूल के होने के बावजूद ममदानी हिंदू विरोधी हैं और उनके बयानों से यह साफ दिखाई देता है। कदम ने कहा कि आखिर ममदानी को कार्यक्रम में बुलाना भी कौन चाहता है।
Uzbekistan पहुंचे PM Modi, Delhi में CNG के दाम बढ़े; पढ़ें दिनभर के मुख्य समाचार
‘भाषा’ की विभिन्न फाइल से शनिवार को रात नौ बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार हैं:वि33 मोदी उज्बेकिस्तान लीड आगमनप्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय दौरे पर उज्बेकिस्तान पहुंचेताशकंद: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान पहुंचे। अपने दौरे के दौरान वह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। दि26 राहुल खरगे दूसरी लीड शुद्धिकरण‘शुद्धिकरण’ मामले में एससी-एसटी कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दें प्रधानमंत्री: राहुलनयी दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सभा स्थल के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देना चाहिए। वि24 नेपाल बाढ़ लीड मृतकनेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 669 हुईकाठमांडू: मध्य नेपाल में और शव बरामद होने के बाद अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 669 हो गई है, जबकि आपदा के बाद लगभग 2,000 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। दि45 भाजपा कांग्रेस दलितकांग्रेस हल्द्वानी रैली स्थल पर ‘शुद्धिकरण’ को लेकर झूठ बोल रही है: भाजपानयी दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को कांग्रेस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। राहुल गांधी द्वारा इस महीने की शुरुआत में उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष की रैली स्थल पर किए गए “शुद्धिकरण” कार्यक्रम को लेकर भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधने के बाद पार्टी ने यह प्रतिक्रिया दी। भाजपा ने कहा कि मोदी सरकार ने दलितों को सर्वोच्च सम्मान दिया है। अर्थ5 सीएनजी कीमतवैश्विक एलएनजी लागत में उछाल से दिल्ली में सीएनजी के दाम 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ेनयी दिल्ली: इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने शनिवार को दिल्ली में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमत में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की। कंपनी ने इसके पीछे नए सिरे से उपजे पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य से गैस कार्गो की आवाजाही में आए व्यवधानों के चलते एलएनजी कीमतों में आई भारी तेजी का हवाला दिया। प्रादे120 उप्र नेपाल बाढ़ राजनाथनेपाल में बाढ़ संकट से भारत चिंतित: राजनाथलखनऊ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि नेपाल में बाढ़ संकट से भारत चिंतित है और बाढ़ प्रभावित पड़ोसी देश में नयी दिल्ली की तरफ से राहत सामग्री भेजी जा रही है। दि39 भाजपा सांसद लीड सज्जनभाजपा अध्यक्ष ने दिल्ली के तीन सांसदों के सज्जन कुमार के घर जाने पर नाराजगी जताईनयी दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को दिल्ली के पार्टी सांसदों-कमलजीत सहरावत, रामवीर सिंह बिधूड़ी और योगेंद्र चंदोलिया को तलब किया और पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके घर जाकर शोक जताने पर नाराजगी जताई। दि27 नेपाल बाढ़ लीड खरगेनेपाल बाढ़ : खरगे का मोदी और शाह को पत्र, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी का आग्रहनयी दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पड़ोसी देश को तत्काल मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने तथा वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित और जल्द वापसी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। प्रादे112 उप्र आदित्यनाथ लीड सपासपा का मतलब लूट-खसोट, डकैतों का गिरोह: योगी आदित्यनाथदेवरिया (उप्र): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को समाजवादी पार्टी पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया, ‘‘सपा का मतलब है लूट-खसोट, सपा का मतलब है डकैतों का एक गिरोह।’’ प्रादे50 केरलम कांग्रेस नेता तीसरी लीड गिरफ्तारीकेरलम के मुख्यमंत्री का काफिला रोकने के आरोप में कांग्रेस नेता गिरफ्तार, पार्टी से निकाला गयातिरुवनंतपुरम: केरलम के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन का काफिला रोकने के आरोप में कांग्रेस के एक नेता को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। अर्थ1 सीतारमण अमेरिका गोलमेजभारत में विनिर्माण कीजिए, दुनिया के लिए बनाइए: सीतारमणवाशिंगटन: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक निवेशकों को भारत में विनिर्माण आधार तथा प्रौद्योगिकी तथा नवाचार केंद्र स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। वित्त मंत्री ने उनसे भारत की प्रतिभा और अवसरों का लाभ उठाकर दुनिया के लिए विनिर्माण करने का आग्रह किया। खेल14 खेल एथलेटिक्स एशियाड लीड चोपड़ानीरज चोपड़ा चोटिल होने के कारण एशियाई खेलों से बाहरनयी दिल्ली: भारत के एशियाई खेलों में एथलेटिक्स के अभियान को करारा झटका लगा है क्योंकि दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने शनिवार को घोषणा की कि अभ्यास के दौरान उनके टखने के ‘लिगामेंट’ में चोट लगने के कारण वह 2026 के बाकी सत्र में नहीं खेल पाएंगे। खेल6 खेल स्क्वाश भारतवेलावन सेंथिलकुमार ने बुडापेस्ट ओपन स्क्वाश जीताबुडापेस्ट: भारत के वेलावन सेंथिलकुमार ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए फाइनल में बालाज़ फ़रकास को हराकर हंगरी की राजधानी में खेले गए बुडापेस्ट ओपन स्क्वाश के रूप में अपना पहला पीएसए कॉपर-लेवल का खिताब जीता।
जम्मू-कश्मीर का लक्ष्य: 2035 तक 10,969 मेगावाट जलविद्युत क्षमता
रियाज़ वानी श्रीनगर, 28 अगस्त: जम्मू-कश्मीर ने दिसंबर 2035 तक अपनी परिचालन जलविद्युत उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 10,969.65 मेगावाट करने का लक्ष्य रखा है, जो इसकी वर्तमान स्थापित क्षमता 3,540.15 मेगावाट से तीन गुना से भी अधिक है। यह रोडमैप शुक्रवार को मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में समीक्षा […]
बोड़ाकी रेलवे स्टेशन से परीचौक-कासना तक ई-बस सेवा का ट्रायल शुरू
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सबसे तेजी से विकसित होते औद्योगिक और शैक्षणिक हब ग्रेटर नोएडा से कनेक्टिविटी को लेकर एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। दिल्ली-एनसीआर आने-जाने वाले यात्रियों, स्थानीय नागरिकों, नौकरीपेशा युवाओं और दूर-दराज से पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए आवागमन को बेहद सुगम और किफायती बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रेटर नोएडा के उभरते हुए महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र बोड़ाकी रेलवे स्टेशन (Bodaki Railway Station) से लेकर व्यस्त व्यावसायिक और शैक्षणिक क्षेत्र परीचौक होते हुए कासना (Kasna) तक आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों (E-Buses) के संचालन के लिए शनिवार को आधिकारिक तौर पर ट्रायल की शुरुआत कर दी गई है। इस बहुप्रतीक्षित बस सेवा के शुरू होने से न केवल ग्रेटर नोएडा के आंतरिक परिवहन तंत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि यात्रियों को महंगे ऑटो और प्राइवेट वाहनों के झंझट से भी स्थायी रूप से मुक्ति मिल जाएगी।लंबे समय से की जा रही थी बोड़ाकी से कासना तक बस सेवा की मांगग्रेटर नोएडा और दादरी क्षेत्र के बीच स्थित बोड़ाकी रेलवे स्टेशन को आने वाले समय में एक बड़े ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस स्टेशन पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री ट्रेन पकड़ने या उतरने के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों, मल्टीनेशनल कंपनियों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में नौकरी करने व पढ़ाई करने के लिए देश के कोने-कोने से युवा रोजाना बोड़ाकी रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं। स्टेशन से बाहर निकलने के बाद उन्हें ग्रेटर नोएडा के प्रमुख हिस्सों जैसे परीचौक, सूरजपुर या कासना तक पहुंचने के लिए भारी-भरकम किराए पर ऑटो या अन्य निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता था। कई बार तो यात्रियों को मनमाना किराया चुकाने के बाद भी समय पर वाहन नहीं मिल पाते थे, जिससे उनकी ट्रेन छूटने या ऑफिस-कॉलेज लेट होने की चिंता बनी रहती थी। स्थानीय निवासियों, ग्रामीणों और यात्रियों द्वारा पिछले काफी समय से इस रूट पर नियमित सार्वजनिक बस सेवा शुरू करने की जोरदार मांग उठाई जा रही थी, जिसे अब धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।शनिवार को सफलतापूर्वक शुरू हुआ ई-बसों का रूट ट्रायल, ग्रामीणों में खुशी की लहरजनता की इसी गंभीर समस्या और यातायात की मांग को संज्ञान में लेते हुए शनिवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और परिवहन विभाग के सहयोग से बोड़ाकी रेलवे स्टेशन से परीचौक और कासना के रास्ते पर ई-बसों का सफल ट्रायल रन (Trial Run) शुरू किया गया। जैसे ही इस रूट पर इलेक्ट्रिक बसों के पहिए घूमे, वैसे ही स्थानीय ग्रामीणों, यात्रियों और आसपास के इलाकों के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। ट्रायल के सफल होने के बाद ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के प्रबंधन का तहे दिल से आभार जताया है। लोगों का कहना है कि यह पहल क्षेत्र के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी क्योंकि इससे न केवल प्रदूषण मुक्त परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आम जनता की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा।नौकरीपेशा लोगों, छात्र-छात्राओं और दैनिक यात्रियों को मिलेगी भारी राहतग्रेटर नोएडा में औद्योगिक विकास के साथ-साथ आवासीय बस्तियां भी तेजी से फैली हैं। ग्रेटर नोएडा के विभिन्न सेक्टरों और सोसाइटियों में रहने वाले तमाम लोग भी अक्सर ट्रेन यात्रा के लिए बोड़ाकी रेलवे स्टेशन का रुख करते हैं। ऐसे में स्टेशन से घर वापसी या घर से स्टेशन जाने के लिए एक सुलभ और सुरक्षित परिवहन माध्यम की सख्त आवश्यकता थी। इस नई ई-बस सेवा के शुरू होने से सबसे बड़ा लाभ नौकरीपेशा वर्ग और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाला है। अब छात्र और कर्मचारी बिना किसी तनाव के किफायती किराए पर समयबद्ध तरीके से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं परशुराम और संजय चौधरी ने इस ट्रायल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बस सेवा के नियमित रूप से संचालित होने से न केवल दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के आसपास के ग्रामीण इलाकों की मुख्य शहर से कनेक्टिविटी भी बेहद मजबूत हो जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आवागमन के अवसर और अधिक सुगम हो जाएंगे।पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों से सजी होगी ग्रेटर नोएडा की नई परिवहन व्यवस्थाआज के समय में जब पूरा देश और दुनिया प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, ऐसे में सार्वजनिक परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (E-Buses) का इस्तेमाल करना एक दूरदर्शी और पर्यावरण-अनुकूल कदम है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा शुरू की जा रही इन ई-बसों में आधुनिक यात्रियों के लिए आरामदायक सीटें, सुरक्षित सफर और प्रदूषण रहित तकनीक का पूरा ध्यान रखा गया है। यह बसें कम शोर करती हैं और कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह से शून्य रखती हैं। बोड़ाकी से कासना के बीच चलने वाली इन बसों के रूट और टाइम टेबल को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, ताकि आने वाले कुछ ही दिनों में इसे आम जनता के लिए पूरी तरह से समर्पित किया जा सके। ग्रेटर नोएडा के इस आधुनिक परिवहन विकास से न केवल स्थानीय नागरिकों का जीवन आसान होगा, बल्कि यह शहर देश के अन्य स्मार्ट शहरों के लिए भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है।
'सामने दिख रही थी मौत, फिर हमने...', नेपाल बाढ़ में भारतीय-अमेरिकी जोड़े की ऐसे बची जान
भारतीय मूल के जोड़े अंजना राजा और पट्टाबिरामन वेंकटेसन नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ में बाल बाल बच गए. तिब्बत यात्रा के दौरान उनकी बस के पास पानी की विशाल दीवार आ गई, जिसे देखकर दोनों ने कूदकर 500 सीढ़ियां चढ़ीं और अपनी जान बचाई. रास्ते में उन्होंने पुलिस चौकी और घरों को बहते देखा. दोनों ने रात एक बकरी के बाड़े में गुजारी और अगले दिन हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाले गए.
उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिए पोष्टिक और स्वादिष्ट मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) तैयार करने वाले लाखों रसोइयों के लिए इस समय की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने प्रशासनिक फैसलों से एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर काम करने वाले मेहनतकश और जरूरतमंद वर्ग के हितों का ध्यान रखना सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। प्रधानमंत्री पोषण योजना (Pradhan Mantri Poshan Yojana) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के विभिन्न परिषदीय और सरकारी विद्यालयों में पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे रसोइयों के मानदेय में की गई बढ़ोतरी को अब धरातल पर उतारने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है। राज्य सरकार के इन ताजा और महत्वपूर्ण निर्देशों के मुताबिक, रसोइयों को उनके बढ़े हुए वेतन का यह बड़ा लाभ आगामी सितंबर महीने के वेतन (जिसका भुगतान अक्टूबर के शुरुआती दिनों में किया जाएगा) के साथ ही मिलना शुरू हो जाएगा। इस सौगात से प्रदेश भर के हजारों रसोइयों के परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा और कैबिनेट की मुहर के बाद निर्देश जारीकुछ समय पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के विद्यालयों में रसोई का जिम्मा संभालने वाली रसोइयों के आर्थिक हालातों को सुधारने और उनके परिश्रम का उचित मूल्य देने के उद्देश्य से उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद राज्य मंत्रिमंडल (Cabinet) की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई थी, जिसके बाद से ही रसोइया संघ और संबंधित कर्मचारी इस आदेश के औपचारिक रूप से लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शासन स्तर से मध्याह्न भोजन प्राधिकरण (Mid-Day Meal Authority) को इस संबंध में विस्तृत और स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शासन के इन सख्त और त्वरित निर्देशों में यह कहा गया है कि बिना किसी विलंब के इस बढ़ी हुई मानदेय राशि को लागू किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर सेवा दे रहे इन कर्मठ कामगारों को इसका सीधा आर्थिक लाभ जल्द से जल्द मिल सके।अब रसोइयों को मिलेंगे हर महीने 3000 रुपये, जानिए पहले कितना मिलता था मानदेयप्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत स्कूली बच्चों के लिए प्रतिदिन भोजन तैयार करने वाले रसोइयों को अब तक वित्तीय रूप से बेहद सीमित मानदेय प्राप्त होता था। अब तक शासन की व्यवस्था के अनुसार इन रसोइयों को प्रति माह केवल 2000 रुपये का मानदेय दिया जाता था, जो बढ़ती हुई महंगाई के इस दौर में उनके और उनके परिवारों के भरण-पोषण के लिए नाकाफी साबित हो रहा था। रसोइयों की इस आर्थिक कठिनाई और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग को गंभीरता से लेते हुए योगी सरकार ने उनके मानदेय में सीधे तौर पर एक हजार रुपये प्रति माह (1000 Rupees per month) की भारी-भरकम बढ़ोतरी करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब रसोइयों का मासिक मानदेय 2000 रुपये से बढ़कर सीधे 3000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।सालाना आधार पर रसोइयों को मिलेंगे 30 हजार रुपये, 10 महीने के लिए तय है मानदेयशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि रसोइयों को दिया जाने वाला यह मानदेय वर्ष में कुल 10 महीनों के लिए देय होता है। इस हिसाब से गणित लगाएं तो अब बढ़ी हुई दर यानी 3,000 रुपये प्रति माह के लिहाज से इन रसोइयों को सालाना कुल 30,000 रुपये (तीस हजार रुपये) का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। पहले जहां उन्हें सालाना 20,000 रुपये के आसपास राशि मिलती थी, वहीं अब इस वृद्धि से उनकी वार्षिक आय में सीधा इजाफा हुआ है। सरकार का यह कदम ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में काम करने वाली महिलाओं और अन्य कामगारों के लिए एक बड़ी आर्थिक संबल साबित होगा, जो पूरी ईमानदारी से बच्चों के लिए रसोइया का कार्य संभालती हैं।सितंबर के वेतन से लागू होगा बढ़ा हुआ मानदेय, अक्टूबर में खाते में आएगी राशिशासन की ओर से मध्याह्न भोजन प्राधिकरण और जिला स्तर के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जो निर्देश भेजे गए हैं, उनमें इस बात के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि इस नई बढ़ी हुई व्यवस्था का अनुपालन पूरी तत्परता के साथ सुनिश्चित किया जाए। निर्देशों के अनुसार, रसोइयों के मानदेय में एक हजार रुपये प्रति माह की यह वृद्धि इसी साल सितंबर महीने से लागू मानी जाएगी। चूंकि सरकारी कर्मचारियों और योजना के तहत काम करने वाले मानदेय कर्मियों का वेतन अमूमन अगले महीने की शुरुआत में बनता है, इसलिए सितंबर माह का यह संशोधित और बढ़ा हुआ वेतन जब अक्टूबर महीने में प्रोसेस होकर आएगा, तब रसोइयों के बैंक खातों में तीन हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से धनराशि क्रेडिट कर दी जाएगी। सरकार ने यह भी हिदायत दी है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही न बरती जाए और समयबद्ध तरीके से भुगतान सुनिश्चित किया जाए।राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में रसोइयों की अहम भूमिका और सरकार की संवेदनाउत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चल रही प्रधानमंत्री पोषण योजना केवल भोजन परोसने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने और उन्हें कुपोषण से मुक्ति दिलाने का सबसे बड़ा राष्ट्रीय अभियान है। इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी यदि कोई हैं, तो वे हमारी ये रसोइयां हैं जो सुबह सवेरे स्कूल पहुंचकर पूरी साफ-सफाई और समर्पण के साथ बच्चों के लिए ताज़ा और गर्म भोजन तैयार करती हैं। ग्रामीण अंचल से आने वाली ये महिलाएं मानदेय कम होने के बावजूद बरसों से इस कार्य को सेवा भाव से करती आ रही हैं। योगी सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उन्हें समाज में एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करेगा। शिक्षा विभाग के इस फैसले से पूरे प्रदेश के रसोइया वर्ग में बेहद उत्साह का माहौल है और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है। सरकार के इस जनहितैषी निर्णय से यह साफ जाहिर होता है कि राज्य का प्रशासन अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
ब्लू क्रैब क्या है? इटली में मचाई ऐसी तबाही, उतारनी पड़ी ‘ऑक्टोपस सेना’
Blue Crab Italy:
मणिपुर में ZUF के दो गुटों में हुई गोलीबारी, दो की मौत और छह घायल
जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (ZUF) के दो गुटों के बीच नोनी जिले में विवाद हो गया. दोनों गुटों के बीच गोलीबारी हुई. हादसे में दो लोगों की मौत हो गई है. वहीं 6 लोग घायल हो गए है. शांति समझौते के बाद भी दोनों गुटों में संघर्ष जारी है.
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर जानिए क्यों 29 अगस्त को मनाया जाता है नेशनल स्पोर्ट्स डे
भारत ने पिछले कुछ दशकों में वैश्विक खेल मानचित्र पर अपनी एक बेहद मजबूत, सशक्त और नई पहचान स्थापित की है। चाहे ओलंपिक खेलों का महाकुंभ हो, क्रिकेट का मैदान हो, कॉमनवेल्थ गेम्स हों या फिर एशियाई खेल, भारतीय खिलाड़ियों ने हर मोर्चे पर अपने शानदार प्रदर्शन से तिरंगे का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है। खेल जगत में भारत की यह लगातार बढ़ती प्रगति इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि देश में शारीरिक सौष्ठव, एथलेटिक्स और खेलों को अब सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाने लगी है। इसी खेल भावना और उपलब्धियों को समर्पित करते हुए हर साल 29 अगस्त का दिन 'राष्ट्रीय खेल दिवस' (National Sports Day) के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि आखिर खेल दिवस मनाने के लिए साल की इसी 29 अगस्त की तारीख को ही क्यों चुना गया है? इस एक सवाल के पीछे भारतीय खेल इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय छिपा है जिसने दुनिया भर में भारत का डंका बजाया था। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि 29 अगस्त के इस ऐतिहासिक दिन का क्या महत्व है और यह महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन से कैसे जुड़ा हुआ है।हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म और उनका अतुलनीय खेल योगदानभारत में हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाए जाने के पीछे सबसे मुख्य और एकमात्र वजह महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद हैं। जिन्हें दुनिया भर में 'हॉकी के जादूगर' के रूप में जाना जाता है, वे वही असाधारण खिलाड़ी थे जिन्होंने अपनी जादुई स्टिक और खेल कौशल से पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। मेजर ध्यानचंद वही महान शख्सियत थे जो उस भारतीय हॉकी टीम का अभिन्न और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहे जिसने ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक (Gold Medal) की पहली ऐतिहासिक हैट्रिक लगाने का कारनामा किया था। उनका जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) शहर में हुआ था। उनकी खेल प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वे मैदान पर हॉकी स्टिक लेकर उतरते थे, तो गेंद उनकी स्टिक से ऐसे चिपक जाती थी मानो कोई चुंबक हो। विपक्षी टीमें उनके खेल कौशल के सामने पूरी तरह लाचार नजर आती थीं। उनके इसी अद्वितीय योगदान और भारतीय हॉकी को वैश्विक ऊंचाइयों पर पहुंचाने के सम्मान में उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में चुना गया।साल 2012 में हुई थी राष्ट्रीय खेल दिवस की औपचारिक शुरुआत और इसका उद्देश्यमेजर ध्यानचंद भारतीय खेल इतिहास के उन चमकते सितारों में से हैं जिनकी गिनती दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में की जाती है। उनके खेल के प्रति समर्पण और देश के लिए किए गए अमूल्य योगदान को देखते हुए खेल प्रेमियों और जानकारों द्वारा लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा जाए। हालांकि, उनके जन्मदिवस को हमेशा के लिए देश के सभी खिलाड़ियों और खेल संस्कृति को समर्पित करने के लिए आधिकारिक तौर पर साल 2012 में 'नेशनल स्पोर्ट्स डे' (National Sports Day) मनाए जाने का ऐलान किया गया। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी को खेलों के प्रति जागरूक करना, खेलकूद को जीवन का अहम हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना और देश के बेहतरीन एथलीटों के योगदान को सम्मानित करना है। राष्ट्रीय खेल दिवस के इस अवसर पर भारत के राष्ट्रपति भवन में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाता है, जहां देश के राष्ट्रपति पिछले एक वर्ष के दौरान खेल के मैदान पर असाधारण और ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले धुरंधर खिलाड़ियों, कोचों और खेल संगठनों को विभिन्न प्रतिष्ठित श्रेणियों में राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से सम्मानित करते हैं। इनमें अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार और ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड शामिल हैं। इसके अलावा, देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान, जिसे पहले राजीव गांधी खेल रत्न कहा जाता था, अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के नाम से ही जाना जाता है, जो इस महान खिलाड़ी को सच्ची श्रद्धांजलि है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई 'फिट इंडिया मूवमेंट' की ऐतिहासिक शुरुआतराष्ट्रीय खेल दिवस के इस पावन और ऐतिहासिक दिन का दायरा केवल पुरस्कार वितरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने देश के नागरिकों की जीवनशैली को भी बदलने का काम किया है। इसी दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए साल 2019 में ठीक इसी दिन यानी 29 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर बहुप्रतीक्षित 'फिट इंडिया मूवमेंट' (Fit India Movement) की आधिकारिक शुरुआत की थी। इस राष्ट्रीय अभियान का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने में नागरिकों को शारीरिक फिटनेस, स्वास्थ्य, खान-पान और खेलकूद के प्रति जागरूक करना तथा दैनिक जीवन में शारीरिक गतिविधियों को शामिल करने के लिए प्रेरित करना था। आज भी इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के तमाम बड़े राजनेताओं और खेल हस्तियों ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर देशवासियों को राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में मेजर ध्यानचंद को याद करते हुए लिखा कि खेलों को प्रेम करने वाले हर भारतीय को आपके खेल के प्रति जुनून और आपकी प्रतिबद्धता पर गर्व है, और मेजर ध्यानचंद के शानदार खेल ने पीढ़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में खेलों की अपरिहार्य भूमिकाआज के इस आधुनिक दौर में जब लोगों की जीवनशैली तेजी से sedentary (निष्क्रिय) होती जा रही है, तब राष्ट्रीय खेल दिवस का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि खेल केवल मनोरंजन या मेडल जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह अनुशासन, टीम वर्क, मानसिक दृढ़ता और शारीरिक स्वास्थ्य की नींव हैं। जिस प्रकार मेजर ध्यानचंद ने विपरीत परिस्थितियों में भी देश के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया, वह आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है। सरकार द्वारा खेलो इंडिया जैसी पहलों के जरिए जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने का जो काम किया जा रहा है, वह भारत को भविष्य में एक महाशक्ति बनाने की ओर अग्रसर है। 29 अगस्त का यह दिन हर भारतीय को यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि वे अपने जीवन में खेल और फिटनेस को अपनाएंगे तथा देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का हमेशा सम्मान करेंगे।
कूड़े में न फेंके आलू के छिलके, इकट्ठा कर ऐसे करें इस्तेमाल
Potato Peel Uses: आलू एक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल लगभग हर तरह की सब्जी बनाने में किया जाता है. लेकिन अक्सर आलू छीलते वक्त हम उसके छिलकों को बेकार समझ कचरे में फेंक देते हैं. लेकिन ये कचरा नहीं बल्कि खजाना है. आप इन्हें इकट्ठा कर घर के कई कामों में यूज कर सकती हैं.
यूएस ओपन में रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम पर जोकोविक की नजर, ज्वेरेव और अलकराज बड़ी चुनौती
साल के आखिरी और चौथे प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट यूएस ओपन (US Open) का रोमांच रविवार से फ्लशिंग मीडोज में शुरू होने जा रहा है। इस बार के टूर्नामेंट की पृष्ठभूमि बेहद दिलचस्प और रोमांचक हो गई है क्योंकि खेल जगत की कई बड़ी हस्तियों की गैरमौजूदगी और वापसी ने खिताबी मुकाबले के समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है। दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी जानिक सिनर घुटने की गंभीर चोट के कारण इस साल के अंतिम ग्रैंड स्लैम से बाहर हो चुके हैं, जबकि दूसरी वरीयता प्राप्त स्पेनिश स्टार कार्लोस अलकराज कलाई की समस्या के चलते चार महीने से अधिक समय तक कोर्ट से दूर रहने के बाद इस टूर्नामेंट के जरिए अपनी वापसी कर रहे हैं। इन तमाम परिस्थितियों के बीच टेनिस जगत के महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविक के लिए एक बार फिर से इतिहास रचने का स्वर्णिम अवसर बनता हुआ दिखाई दे रहा है। सर्बियाई दिग्गज जोकोविक की निगाहें अपने करियर के ऐतिहासिक और रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम खिताब पर टिकी हुई हैं, जिसे हासिल करने के लिए उन्हें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों की कड़ी चुनौतियों से पार पाना होगा।जोकोविक के सामने इतिहास रचने का मौका, ज्वेरेव और अलकराज से कड़ी टक्करवर्ष 2023 में फ्लशिंग मीडोज के इस प्रतिष्ठित कोर्ट पर शानदार खिताबी जीत दर्ज करने के बाद से ही नोवाक जोकोविक हर ग्रैंड स्लैम में एक मजबूत और प्रबल दावेदार के रूप में उतरते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कार्लोस अलकराज और जानिक सिनर ने पुरुष टेनिस पर अपना कड़ा दबदबा कायम किया है और पिछले 11 में से 10 ग्रैंड स्लैम खिताब आपस में ही बांटे हैं। इतिहास के पन्नों में सर्वाधिक ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के मामले में मार्गरेट कोर्ट से आगे निकलने की जोकोविक की हर कोशिश को बार-बार इन युवा खिलाड़ियों ने चुनौती दी है। पिछले छह ग्रैंड स्लैम मुकाबलों में से पांच में जोकोविक को इनके खिलाफ हार का सामना करना पड़ा है। इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में कार्लोस अलकराज के हाथों मिली हार के बाद जोकोविक के हाथ से एक बड़ा मौका निकल गया था। इसके बावजूद, 39 वर्षीय अनुभवी सर्बियाई खिलाड़ी का हौसला और आत्मविश्वास जरा भी कम नहीं हुआ है। सीमित तैयारी और लगातार बनी हुई शारीरिक फिटनेस की समस्याओं के बावजूद वह अपने करियर का पांचवां यूएस ओपन खिताब अपने नाम करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं।कार्लोस अलकराज की वापसी और अन्य शीर्ष दावेदारों का प्रदर्शनइस साल के यूएस ओपन में एक सबसे बड़ा बदलाव यह देखने को मिला है कि प्रतियोगिता की परिस्थितियां काफी हद तक जोकोविक के अनुकूल होती दिख रही हैं। एक तरफ जहां जानिक सिनर चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ कार्लोस अलकराज लंबे ब्रेक के बाद वापसी कर रहे हैं। हालांकि लंबे समय तक कोर्ट से बाहर रहने के कारण अलकराज की फॉर्म को लेकर भले ही कुछ सवाल उठ रहे हों, लेकिन यह सर्वविदित है कि यह गत चैंपियन बड़े मंचों पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए जाना जाता है। इसलिए उनकी वापसी को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसके अलावा, जर्मन स्टार अलेक्जेंडर ज्वेरेव भी शानदार फॉर्म में हैं और वे जोकोविक के रास्ते में सबसे बड़ी और मजबूत बाधा साबित हो सकते हैं। टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर का भी यह मानना है कि तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद नोवाक जोकोविक की काबिलियत को कभी भी खारिज नहीं किया जा सकता। ड्रॉ में मौजूद अन्य धुरंधर भी इस बार खिताब की दौड़ को बेहद रोमांचक बना रहे हैं।युवा खिलाड़ियों का उभार और अमेरिकी चुनौती की कमानमुख्य दावेदारों के अलावा इस बार के यूएस ओपन में युवा प्रतिभाओं का जलवा देखने को मिलने की पूरी उम्मीद है। डियन ओपन के विजेता बेन शेल्टन और सिनसिनाटी के उपविजेता फ्रांसेस टियाफो इस बार अमेरिकी चुनौती की अगली कमान संभाल रहे हैं। इसके अलावा 2024 के फाइनलिस्ट टेलर फ्रिट्ज भी पिछले 23 वर्षों से चले आ रहे घरेलू पुरुष चैंपियन के सूखे को इस बार खत्म करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। विंबलडन के शुरुआती दौर से बाहर होने के बाद इस महीने की शुरुआत में मांट्रियल का खिताब जीतकर बेन शेल्टन ने खुद को एक वास्तविक और खतरनाक दावेदार के रूप में स्थापित कर लिया है। हालांकि, बड़े टूर्नामेंट के दौरान अपने प्रदर्शन के स्तर को लगातार बनाए रखने की उनकी क्षमता को लेकर खेल विशेषज्ञों की अपनी राय है। इनके अलावा आर्थर फिल्स और राफेल जोदार जैसे युवा सितारे भी न्यूयॉर्क के इस कड़े कोर्ट पर अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिए बेताब हैं, जबकि पिछले साल के सेमीफाइनलिस्ट फेलिक्स आगर-अलियासिमे अपने पुराने शानदार प्रदर्शन को एक कदम और आगे ले जाने की पुरजोर कोशिश करेंगे।महिला वर्ग में एरिना सबालेंका की नजरें ऐतिहासिक हैटट्रिक परपुरुष वर्ग के साथ-साथ महिला सिंगल्स वर्ग का मुकाबला भी इस बार बेहद रोमांचक होने जा रहा है। विश्व की नंबर एक खिलाड़ी और दो बार की गत चैंपियन एरिना सबालेंका ने पिछले दो वर्षों से यूएस ओपन के महिला वर्ग में अपना एकतरफा दबदबा कायम रखा है। अब उनके पास न्यूयॉर्क के इस ऐतिहासिक कोर्ट पर अपनी खिताबी हैटट्रिक पूरी करने का सुनहरा मौका है। यदि सबालेंका इस बार भी खिताब जीतने में सफल रहती हैं, तो वह वर्ष 2012 से 2014 के बीच दिग्गज सेरेना विलियम्स के बाद लगातार तीन यूएस ओपन खिताब जीतने वाली आधुनिक युग की पहली महिला टेनिस खिलाड़ी बन जाएंगी। लगातार तीसरा खिताब अपने नाम करते ही उनका नाम सेरेना विलियम्स, क्रिस एवर्ट, रोजर फेडरर, इवान लेंडल और जान मैकेनरो जैसे खेल जगत के उन अमर दिग्गजों की सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने इतिहास में लगातार तीन बार इस टूर्नामेंट की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था। महिला वर्ग में उनके अलावा एलिना रयबाकिना, जेसिका पेगुला, कोको गौफ और युवा सनसनी मीरा एंड्रीवा जैसी बेहतरीन खिलाड़ी भी खिताब के लिए कड़ी टक्कर देने को तैयार हैं।टूर्नामेंट के मुख्य खिलाड़ी और पिछले साल के विजेता आंकड़ेइस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दोनों वर्गों के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। पुरुष वर्ग में नोवाक जोकोविक, अलेक्जेंडर ज्वेरेव, कार्लोस अलकराज, फेलिक्स आगर-अलियासिमे और फ्लेवियो कोबोली जैसे नाम शामिल हैं, जो हर मैच में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करेंगे। वहीं महिला वर्ग में एरिना सबालेंका, एलिना रयबाकिना, जेसिका पेगुला, कोको गौफ और मीरा एंड्रीवा अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए कोर्ट पर उतरेंगी। यदि पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वर्ष 2025 के यूएस ओपन के पुरुष सिंगल्स के रोमांचक खिताबी मुकाबले में कार्लोस अलकराज ने जानिक सिनर को मात देकर ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाया था। वहीं दूसरी ओर, 2025 के महिला सिंगल्स के फाइनल मुकाबले में एरिना सबालेंका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अमांडा अनिसिमोवा को सीधे सेटों में करारी शिकस्त दी थी। इस बार भी न्यूयॉर्क की इस लाल बजरी और हार्ड कोर्ट पर टेनिस प्रेमियों को एक से बढ़कर एक बेहतरीन और सांस रोक देने वाले मुकाबले देखने को मिलेंगे, जिन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
चिली के अटाकामा रेगिस्तान में यूरोपीय सदर्न आब्जर्वेटरी दुनिया का सबसे बड़ा ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड टेलीस्कोप, एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (ईएलटी) बना रही है।
H1N1 स्वाइन फ्लू का प्रकोप: हल्के लक्षण और गंभीर स्थिति के पीछे की वजह
देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में इन दिनों मौसमी बीमारियों के साथ-साथ स्वाइन फ्लू (H1N1 वायरस) के मामलों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। इस खतरनाक संक्रमण से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, इस वायरस के संदर्भ में एक बेहद हैरान करने वाली और गौर करने योग्य बात यह है कि एक ही वायरस से संक्रमित होने के बावजूद लोगों पर इसका असर बिल्कुल अलग-अलग तरीके से होता है। समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस वायरस की चपेट में आने के बाद घर पर सामान्य देखरेख और आराम से पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं, जबकि इसके विपरीत कुछ मरीजों की हालत इतनी ज्यादा बिगड़ जाती है कि उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है और कई बार नौबत आईसीयू (ICU) तक आ जाती है। आखिर ऐसा क्यों होता है कि एक ही प्रकार का यह वायरस किसी के लिए महज मामूली सर्दी-जुकाम साबित होता है, तो किसी के लिए जानलेवा बन जाता है? आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं इस वैज्ञानिक रहस्य और इसके पीछे के तमाम अहम कारणों के बारे में।शरीर की अंदरूनी सेहत और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) की भूमिकाकिसी भी व्यक्ति पर H1N1 वायरस का प्रभाव कितना घातक या हल्का होगा, यह पूरी तरह से उस व्यक्ति के शरीर की अंदरूनी सेहत, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) और पुरानी मेडिकल हिस्ट्री पर निर्भर करता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, वे लोग जिनकी उम्र बहुत अधिक हो चुकी है, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, या ऐसे लोग जो पहले से ही किसी गंभीर पुरानी बीमारी जैसे क्रोनिक अस्थमा, सांस से जुड़ी समस्याएं, डायबिटीज (मधुमेह), हृदय रोग या किडनी की बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनका शरीर इस आक्रामक वायरस के खिलाफ उतनी तेजी से और प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर पाता है। ऐसे कमजोर या संवेदनशील शरीर वाले लोगों में वायरस आसानी से अपनी पकड़ मजबूत कर लेता है, जिससे साधारण फ्लू भी देखते ही देखते एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल में बदल जाता है। इसके विपरीत, मजबूत इम्युनिटी वाले स्वस्थ युवाओं का शरीर इस वायरस से खुद ही शुरुआती स्तर पर लड़ लेता है, जिससे उन्हें केवल हल्के लक्षण महसूस होते हैं।फेफड़ों में गहराई तक संक्रमण और खतरनाक 'साइटोकाइन स्टॉर्म' की स्थितिसामान्य परिस्थितियों में मौसमी फ्लू या सर्दी-जुकाम का असर केवल नाक, गले और ऊपरी श्वसन तंत्र तक ही सीमित रहता है, और कुछ दिनों की दवा से मरीज ठीक हो जाता है। लेकिन H1N1 वायरस की प्रवृत्ति थोड़ी अलग और खतरनाक होती है। यह वायरस कई बार ऊपरी श्वसन नली को पार करते हुए फेफड़ों में बहुत गहराई तक प्रवेश कर जाता है। जब यह वायरस फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम अत्यधिक प्रतिक्रिया देने लगता है, जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में 'साइटोकाइन स्टॉर्म' (Cytokine Storm) कहा जाता है। इस अति-सक्रिय प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण फेफड़ों की सूक्ष्म थैलियों में पानी और तरल पदार्थ भरने लगता है, जिससे गंभीर निमोनिया की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और शरीर के रक्त में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने लगता है। यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से मरीज को सांस लेने में भारी कठिनाई होती है और उसे तुरंत वेंटिलेटर या आईसीयू सपोर्ट की आवश्यकता पड़ जाती है।सेकेंडरी बैक्टीरियल इन्फेक्शन: H1N1 के बाद बैक्टीरिया का खतरनाक हमलाH1N1 वायरस के संक्रमण से पीड़ित होने पर शरीर की आंतरिक रक्षा प्रणाली पहले से ही काफी हद तक कमजोर और व्यस्त हो चुकी होती है। ऐसे नाजुक समय में शरीर पर 'स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया' (Streptococcus pneumoniae) जैसे खतरनाक बैक्टीरिया हमला करने का अवसर ढूंढ लेते हैं। जब वायरस के साथ-साथ यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी शरीर को जकड़ लेता है, तो मरीज की शारीरिक स्थिति और अधिक जटिल और गंभीर हो जाती है। इस दोहरे हमले के कारण फेफड़ों को हुआ नुकसान कई गुना बढ़ जाता है, जिससे बीमारी को नियंत्रित करना डॉक्टरों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है। यही कारण है कि डॉक्टरों का यह सुझाव रहता है कि स्वाइन फ्लू के शुरुआती दौर में ही सतर्कता बरतनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के सेकेंडरी इन्फेक्शन से बचा जा सके।इलाज में जरा सी भी देरी साबित हो सकती है जानलेवा, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाजस्वाइन फ्लू के संक्रमण में सबसे बड़ी और भारी भूल यह की जाती है कि लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और समय पर डॉक्टर की सलाह नहीं लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि H1N1 के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली एंटीवायरल दवाएं यदि लक्षण दिखने के शुरुआती 48 घंटों (दो दिनों) के भीतर ले ली जाएं, तो इस वायरस को शरीर में फैलने से सफलताપૂર્વक रोका जा सकता है। लेकिन यदि इलाज शुरू करने में देरी हो जाए, तो फेफड़ों को पहुंच चुके नुकसान की भरपाई करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यदि किसी भी व्यक्ति में निम्नलिखित चेतावनी संकेत दिखाई दें, तो उसे बिना एक पल गंवाए तुरंत अस्पताल का रुख करना चाहिए:सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ या लगातार घबराहट होना।सीने में तेज दर्द या लगातार दबाव महसूस होना।अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना या मानसिक भ्रम (कन्फ्यूजन) की स्थिति।शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण होंठों और चेहरे का नीला पड़ना।लगातार उल्टी होना या पेशाब की मात्रा में अचानक भारी कमी आना।स्वस्थ और तंदुरुस्त लोगों को भी रखनी चाहिए पूरी सावधानीएक आम गलतफहमी यह है कि स्वाइन फ्लू केवल बीमार या बुजुर्ग लोगों को ही गंभीर रूप से प्रभावित करता है। वास्तविकता यह है कि H1N1 वायरस पूरी तरह से स्वस्थ और फिट दिखने वाले युवाओं को भी अपनी चपेट में लेकर गंभीर रूप से बीमार कर सकता है, इसलिए किसी को भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस संक्रमण से बचने के लिए सबसे असरदार और सुरक्षित तरीका समय पर स्वाइन फ्लू का टीका (Vaccination) लगवाना है। इसके अलावा, भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना और खांसते या छींकते समय मुंह को ढकना इस वायरस के प्रसार को रोकने में मदद करता है। शरीर में किसी भी प्रकार के फ्लू जैसे लक्षण नजर आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना इस संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोकने की दिशा में सबसे समझदारी भरा कदम है।
जल्द सस्ते होंगे iPhone 16 या iPhone 17? कौन सा रहेगा बेस्ट
Apple iPhone 18 Pro की लॉन्च डेट का ऐलान कर दिया है. अब आने वाले दिनों में पुराने आईफोन को सस्ता कर दिया जाएगा. बहुत से लोगों के बीच में कंफ्यूजन है कि कौन सा iPhone खरीदना चाहिए. यहां अगर आप भी iPhone 17 और iPhone 16 को लेकर कंफ्यूज हैं तो इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
आरक्षण पर भिड़े केंद्र के दो मंत्री, चिराग ने मांगा इस्तीफा तो अब मांझी ने भी किया पलटवार
मांझी ने कहा कि आरक्षण के लाभ का न्यायसंगत वितरण हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) का पुराना सिद्धांत रहा है. पार्टी लंबे समय से इस मुद्दे पर अपनी राय रखती आई है और आगे भी इसी नीति पर कायम रहेगी.
10 साल पहले रणबीर कपूर और अनुष्का शर्मा की चुलबुली केमिस्ट्री के साथ रिलीज हुआ 'क्यूटीपाई' आज भी शादी, मेहंदी और हल्दी की रौनक को उसी ताजगी के साथ जिंदा कर देता है.
कल का मौसम: यूपी में 30 अगस्त को फिर बदलेगा मौसम, अलर्ट जारी
Kal Ka Mausam: क्या 30 अगस्त को उत्तर प्रदेश फिर से बारिश के घने घेरे में आने वाला है? हां, और इस बार सबसे ज्यादा नजर पूर्वी यूपी पर रहेगी. लखनऊ से लेकर तराई और पूर्वांचल तक मौसम का मिजाज तेज रहने की चेतावनी सामने आई है.
करीब 30 साल पुराना यह गाना आज भी लोगों के दिलों को छू जाता है, जिसकी दर्द भरी धुन और इमोशनल कहानी ने इसे 90 के दशक के सबसे यादगार गानों में शामिल कर दिया.
एवरेस्ट के हींग पर बैन, लैब टेस्ट में घटिया क्वालिटी के मिले सैंपल; FSSAI ने दी चेतावनी
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स और लालजी गोधू को हींग पाउडर बेचने से रोक दिया है
भाजपा ने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद शुद्धिकरण को अनुसूचित जाति के अपमान से जोड़ने पर कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया है।
छत्तीसगढ़ के कोरबा में भारी बारिश के बीच लैंडस्लाइड! सड़क पर आया मलबा, यात्री बस और कार फंसीं
छत्तीसगढ़ के कोरबा में भारी बारिश के बीच सर्वमंगला-कांबेरी मुख्य मार्ग पर लैंडस्लाइड जैसे हालात बन गए. अचानक सड़क पर मिट्टी और पत्थरों का भारी मलबा आने से यात्री बस और कार फंस गईं. कुछ समय के लिए आवागमन बाधित रहा.
प्रेमिका ने भाई के साथ मिलकर की प्रेमी की हत्या, मोनिका का एक साल से चल रहा था प्रेम-प्रसंग
प्रेमी शादीशुदा था और उसके दो बच्चे भी हैं. इसके बाद भी उसका दूसरी महिला से प्रेम प्रसंग था. दोनों शराब के आदी भी थे.
'राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलने से मालिकाना हक नहीं होता खत्म', जमीन विवाद पर SC की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलने से किसी का मालिकाना हक खत्म नहीं होता, क्योंकि नामांतरण मुख्य रूप से राजस्व उद्देश्यों के लिए होता है।
बाथरूम के बहाने भागा, पुलिस एनकाउंटर में घायल हुआ था कुख्यात बदमाश
Ghazipur News: गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती 35 मुकदमों का आरोपी हिस्ट्रीशीटर सुधीर पासी ऑपरेशन से पहले पुलिस को चकमा देकर फरार. गहमर पुलिस समेत कई टीमें तलाश में जुटीं.
खड़गे की सभा के 'शुद्धिकरण' पर BJP और कांग्रेस में वार-पलटवार, देखें 7 तक
राहुल गांधी ने शनिवार को दलितों के मुद्दे पर बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा. इतना ही नहीं राहुल गांधी ने हल्द्वानी में हुए शुद्धिकरण को भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान से जोड़ा और मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की. देखें 7 तक में बड़ी खबरें.
कोरा हल्दी DIY मास्क क्या है? जानिए इसके फायदे, बनाने की रेसिपी और इस्तेमाल का तरीका
इन दिनों सोशल मीडिया पर भुनी हुई हल्दी, शहद और गुलाब जल से बनाया जाने वाला एक DIY फेस मास्क काफी वायरल हो रहा है. इसे चेहरे पर लगभग 15 मिनट तक लगाकर फिर पानी से धोने की सलाह दी जाती है. जानिए क्या सही में यह देसी फेस मास्क चेहरे पर ग्लो लाने के लिए अच्चा है.
VIDEO: फर्राटेदार हिंदी बोल रहे उज्बेकिस्तान के बच्चे, PM मोदी की जमकर तारीफ
पीएम मोदी ने जो वीडियो साझा किया है, उसमें उज्बेकिस्तान के पांच स्कूली बच्चे उनके स्वागत में हिंदी में संदेश दे रहे हैं. इस वीडियो में भारत और उज्बेकिस्तान के सांस्कृतिक रिश्तों की बात हो रही है.
पश्चिम चंपारण के साठी थाना क्षेत्र में तीन माह का मासूम अपनी मां के पास सोते हुए रहस्यमय ढंग से गायब हो गया.
मैं ईश्वर की शुक्रगुजार हूं... नौकरी के 10 साल पूरे होने पर IAS सलोनी राय की दिल छूने वाली पोस्ट
IAS सलोनी राय नॉर्थ दिल्ली की जिला कलेक्टर ने प्रशासनिक सेवा के 10 साल पूरे कर लिए हैं. लगातार 3 बार UPSC क्रैक की. साल 2015 में AIR-22 हासिल की थी.
बॉबी देओल की फिल्म 'बंदर' ने OTT पर मचाया तहलका, मर्दों के दर्द पर छेड़ी नई बहस
भारतीय सिनेमा के गलियारों में और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों अगर किसी एक फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह है बॉलीवुड के 'लॉर्ड बॉबी' यानी अभिनेता बॉबी देओल की नवीनतम रिलीज फिल्म 'बंदर' (Bandar)। जब सिनेमाघरों में यह फिल्म रिलीज हुई थी, तब इसने बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों का ध्यान खींचा था, लेकिन अब जैसे ही यह ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई है, इसने सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ एक नई बहस छेड़ दी है। फिल्म की कहानी, इसके संवेदनशील विषय और बॉबी देओल के बेजोड़ अभिनय ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया है। अपने करियर के इस दूसरे चरण में बॉबी देओल जिस तरह के चुनौतीपूर्ण और लीक से हटकर किरदार चुन रहे हैं, उसने उन्हें एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में ला दिया है। आइए जानते हैं कि इस फिल्म की कहानी क्या है, निर्देशक अनुराग कश्यप ने इसमें किस दर्द को परदे पर उतारा है और जागरण फिल्म फेस्टिवल में बॉबी देओल ने इस प्रोजेक्ट को लेकर क्या बड़े खुलासे किए हैं।OTT प्लेटफॉर्म पर आते ही क्यों चर्चा का विषय बन गई बॉबी देओल की 'बंदर'फिल्म 'बंदर' (जिसे कई जगह 'बंदर: मंकी इन ए केज' के नाम से भी जाना जाता है) के ओटीटी रिलीज होने के बाद से ही यह इंटरनेट पर ट्रेंड करने लगी है। पिछले कुछ वर्षों में बॉबी देओल ने अपने अभिनय के दायरे को बेहद व्यापक किया है और नकारात्मक से लेकर जटिल किरदारों को पर्दे पर जीवंत किया है। यह फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में आई थी और 28 अगस्त को इसे प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज कर दिया गया। फिल्म के रिलीज होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों और फिल्म समीक्षकों के बीच एक तीखी बहस छिड़ गई है। फिल्म के निर्देशक अनुराग कश्यप हैं, जो अपनी बेबाक और यथार्थवादी कहानियों के लिए जाने जाते हैं। इस फिल्म की पटकथा इतनी गहरी और झकझोर देने वाली है कि यह केवल एक क्राइम थ्रिलर बनकर नहीं रह जाती, बल्कि यह समाज के कई सुलगते हुए सवालों को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करती है।'बंदर' की कहानी: एक असफल स्टार, झूठे आरोपों का जाल और मर्दों का दर्दफिल्म की कहानी 50 वर्षीय एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है जिसका नाम समर (बॉबी देओल) है। समर एक समय टीवी सीरियल की दुनिया का एक जाना-माना और लोकप्रिय चेहरा हुआ करता था, लेकिन समय के साथ उसका स्टारडम फीका पड़ जाता है और जीविकोपार्जन के लिए उसे शादियों में गाना गाने जैसे छोटे काम करने पर मजबूर होना पड़ता है। समर अपनी जिंदगी की इस उधेड़बुन में व्यस्त है कि तभी एक दिन उसके जीवन में भूचाल आ जाता है। जब वह अपने घर पर सामान्य रूप से मौजूद होता है, तो अचानक पुलिस उसके घर पहुंचती है और उसे गिरफ्तार कर लेती है। पूरी तरह से हैरान-परेशान समर को जब यह पता चलता है कि उसकी गर्लफ्रेंड ने उस पर बलात्कार (Rape) जैसे गंभीर और जघन्य आरोप लगाए हैं, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है।समर और उसकी उस प्रेमिका की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। आपसी मतभेदों और ब्रेकअप के गम में डूबी प्रेमिका गायत्री इस बात से आहत है, और दूसरी तरफ समर का अपने रिश्तों को लेकर थोड़ा उदासीन रवैया रहा है, जिसके कारण उसे कुछ भी साफ-साफ याद नहीं है कि ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं। समर की बहन सुhani मेहरा (सान्या मल्होत्रा) इस मुश्किल घड़ी में उसका साथ देती है और एक वकील का प्रबंध करती है ताकि उसके भाई को इस झूठे जाल से बचाया जा सके। हालांकि, कानूनी लड़ाई से ज्यादा कठिन सफर जेल के भीतर का होता है। सलाखों के पीछे समर को न केवल शारीरिक और मानसिक यंत्रणा झेलनी पड़ती है, बल्कि जेल के भीतर कैदियों के बीच चलने वाली गुटबाजी और खौफनाक माहौल का भी सामना करना पड़ता है। फिल्म का मुख्य कथानक इसी बात पर केंद्रित है कि कैसे समर इस अदृश्य और जटिल चक्रव्यूह से बाहर निकलने की जद्दोजहद करता है।Jagran Film Festival 2026 में Bobby Deol ने अपने किरदार को लेकर क्या कहा?हाल ही में आयोजित प्रतिष्ठित 'जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026' (Jagran Film Festival) के दौरान जब अभिनेता बॉबी देओल से यह सवाल किया गया कि उनकी फिल्म 'बंदर' को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की तरफ से किस तरह की प्रतिक्रिया मिल रही है, तो उन्होंने बेहद खुलकर और दिल से अपनी बात रखी। एक खास बातचीत के दौरान बॉबी देओल ने कहा, इस तरह के अवसर बहुत दुर्लभ होते हैं, और ऐसे जटिल और अनोखे किरदार बहुत ही कम अभिनेताओं के हिस्से आते हैं। इसलिए एक कलाकार के रूप में, जब से मैंने ओटीटी पर अपने इस नए करियर की शुरुआत की है, तब से मेरी हमेशा से यही चाहत रही है कि मुझे ऐसे किरदार मिलें जिनमें मैं अपनी एक्टिंग के अलग-अलग शेड्स और परतों को दुनिया के सामने दिखा सकूं।बॉबी देओल ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे 'बंदर' जैसी अनूठी फिल्म में काम करने का मौका मिला। एक ऐसा किरदार निभाना जिसकी किसी ने कल्पना भी न की हो, और विशेषकर जब आपको उसमें थोड़ी सफलता मिलती है, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और इंडस्ट्री में आपके लिए इस तरह के और भी बेहतरीन दरवाजे खुलते चले जाते हैं। फिल्म में उनके द्वारा निभाए गए समर के किरदार की बेबसी और उसकी आंखों का दर्द दर्शकों के दिलों को चीरकर रख देता है, जिसकी सराहना हर तरफ हो रही है।MeToo, झूठे आरोप और भारतीय जेलों की दयनीय दशा पर आधारित है फिल्म की पटकथाफिल्म 'बंदर' केवल एक सस्पेंस थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह मौजूदा दौर के कई संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को गहराई से छूती है। यह फिल्म #MeToo आंदोलन के उस पहलू पर रोशनी डालती है जहाँ झूठे या निराधार आरोपों की संभावनाओं पर भी बहस छिड़ती है, और साथ ही यह भी दिखाती है कि कैसे वास्तविक पीड़ितों को न्याय दिलाना और कानून की सही प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। इसके अलावा, फिल्म में भारतीय जेलों के अंदर की अमानवीय और दयनीय स्थितियों का बेहद डरावना और यथार्थवादी चित्रण किया गया है। कैदियों के बीच होने वाली गुटबाजी, भ्रष्टाचार और मानसिक टॉर्चर को निर्देशक अनुराग कश्यप ने बिना किसी बनावट के परदे पर उतारा है। यही कारण है कि यह फिल्म देखने के बाद दर्शक आसानी से सिनेमा हॉल या अपनी स्क्रीन से उठ नहीं पाते, बल्कि वे गहराई से सोचने पर मजबूर हो जाते हैं।निष्कर्ष: अगर सस्पेंस और यथार्थवादी सिनेमा के हैं शौकीन, तो मिस न करें यह फिल्मकुल मिलाकर देखा जाए तो 'बंदर' एक ऐसी सिनेमाई पेशकश है जो आपको हिलाकर रख देगी। यदि आपने इस फिल्म को सिनेमाघरों में मिस कर दिया था, तो अब आपके पास ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर इसे देखने का सुनहरा मौका है। फिल्म की कसी हुई पटकथा, अनुराग कश्यप का बेबाक निर्देशन, सान्या मल्होत्रा का प्रभावशाली अभिनय और विशेष तौर पर बॉबी देओल की मझा हुआ और परिपक्व अभिनय इसे इस साल की सबसे चर्चित फिल्मों में शुमार करता है। यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ आपको सोचने पर मजबूर करती है कि न्याय, सच्चाई और मानवीय रिश्तों की असल परिभाषा क्या होती है।
क्या है हाइड्रो टेस्ट और कंप्लायंस प्लेट? Expire हुई तो नहीं मिलेगी CNG
अगर हाइड्रो टेस्ट और कंप्लायंस प्लेट एक्सपायर हो गया है तो CNG नहीं भरी जाएगी. ऐसे में आपको CNG भरवाने से पहले हाइट्रो टेस्ट और कंप्लायंस प्लेट एक्सपायर की जांच करनी चाहिए.
पॉल वॉकर की याद में सिर्फ 10 मिनट में बने कल्ट गाने 'सी यू अगेन' की दर्दभरी कहानी
संगीत की दुनिया में कुछ धुनें ऐसी होती हैं जो केवल कानों को सुकून देने के लिए नहीं, बल्कि रूह के गहरे जख्मों पर मरहम लगाने के लिए जन्म लेती हैं। जब भी सिनेमा के इतिहास में सच्ची दोस्ती, बिछड़ने के असहनीय दर्द और अमर यादों का जिक्र होता है, तो हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी 'फास्ट एंड फ्यूरियस' (Fast & Furious) के अभिनेता पॉल वॉकर और उनकी स्मृति में रचे गए गीत 'सी यू अगेन' (See You Again) की दास्तान अनायास ही जुबां पर आ जाती है। यह महज कोई व्यावसायिक साउंडट्रैक नहीं था, बल्कि एक भाई के लिए दूसरे भाई का रोता हुआ दिल था। इस गीत की रचना के पीछे की कहानी इतनी मर्मस्पर्शी और गहरी है कि जब इसे पहली बार स्टूडियो में बजाया गया था, तो बड़े पर्दे पर चट्टान की तरह दिखने वाले अभिनेता विन डीजल बच्चों की तरह फफक कर रो पड़े थे।10 मिनट का जादुई संगीत: चार्ली पुथ के दिल से निकले वो भावुक बोलसाल 2013 में जब फिल्म 'फ्यूरियस 7' (Furious 7) की शूटिंग जोरों पर चल रही थी, तभी 30 नवंबर की मनहूस दोपहर को एक बेहद दर्दनाक कार दुर्घटना में 40 वर्षीय अभिनेता पॉल वॉकर की असामयिक मृत्यु हो गई। इस भयानक हादसे ने न केवल उनके परिवार और प्रशंसकों को झकझोर कर रख दिया, बल्कि पूरी फिल्म यूनिट सदमे में डूब गई। फिल्म के मेकर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वे अपने प्रिय साथी को बड़े पर्दे पर एक ऐसी विदाई दें जो इतिहास में अमर हो जाए। इसके लिए दुनिया भर के कई दिग्गज संगीतकारों से संपर्क किया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। यह जिम्मेदारी उस वक्त के उभरते हुए गायक और संगीतकार चार्ली पुथ के हिस्से आई।चार्ली पुथ के लिए यह सिर्फ एक असाइनमेंट नहीं था, बल्कि उनका अपना व्यक्तिगत दर्द भी था। चार्ली ने भी कुछ समय पहले अपने एक बेहद करीबी दोस्त को एक भीषण सड़क दुर्घटना में खो दिया था। जब वे लॉस एंजिल्स के स्टूडियो में पियानो पर बैठे, तो उनके जेहन में अपने दिवंगत दोस्त का चेहरा और पॉल वॉकर के जाने का गम एक साथ उमड़ पड़ा। उन्होंने पियानो की कुंजियों पर उंगलियां फेरीं और देखते ही देखते महज 10 मिनट के भीतर उस अमर हुक लाइन की रचना कर दी—'इट्स बीन अ लॉन्ग डे विदाउट यू, माई फ्रेंड, एंड आई विल टेल यू ऑल अबाउट इट व्हेन आई सी यू अगेन' (It's been a long day without you, my friend, and I'll tell you all about it when I see you again)। उन दस मिनटों में उपजा दर्द इतना सच्चा और स्वाभाविक था कि उसने स्टूडियो में मौजूद हर शख्स को स्तब्ध कर दिया।विन डीजल और पॉल वॉकर का अटूट रिश्ता: कैमरे के आगे और पीछे का भाईचारा'फास्ट एंड फ्यूरियस' सीरीज में डोमिनिक टोरेटो और ब्रायन ओ'कॉनर की जोड़ी केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं थी। असल जिंदगी में भी विन डीजल और पॉल वॉकर के बीच सगे भाइयों से बढ़कर आत्मीयता थी। विन डीजल हमेशा पॉल को प्यार से 'पाब्लो' कहकर पुकारते थे। जब पॉल का निधन हुआ, तो विन डीजल पूरी तरह से टूट चुके थे और फिल्म की अधूरी शूटिंग को पूरा करना उनके लिए मानसिक रूप से सबसे कठिन दौर था।जब चार्ली पुथ द्वारा कंपोज किया गया यह गीत बनकर तैयार हुआ और पहली बार विन डीजल को सुनाया गया, तो वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। गाने का एक-एक शब्द और उसकी रूह कंपा देने वाली धुन सीधे विन डीजल के दिल पर लगी। विन डीजल ने बाद में कई साक्षात्कारों में यह स्वीकार किया कि इस गीत ने उन्हें पॉल के जाने के असहनीय दर्द से जूझने और अपनी भावनाओं को बाहर निकालने की ताकत दी। यह धुन उस अधूरेपन की आवाज बन गई थी जिसे शब्द बयां करने में नाकाम साबित हो रहे थे।विज खलीफा का दमदार रैप और 'फ्यूरियस 7' का वो आइकॉनिक विदाई दृश्यचार्ली पुथ की भावुक आवाज और पियानो की मद्धम तानों को जब प्रसिद्ध रैपर विज खलीफा (Wiz Khalifa) के संवेदनशील रैप वर्सेज के साथ जोड़ा गया, तो यह गीत संपूर्णता के चरम पर पहुंच गया। विज खलीफा के लिखे शब्दों ने दोस्ती, साथ बिताए पलों, संघर्षों और उम्मीद की एक ऐसी गाथा बुनी जिसने हर सुनने वाले की आंखों को नम कर दिया।फिल्म 'फ्यूरियस 7' के क्लाइमेक्स दृश्य में इस गाने का इस्तेमाल दुनिया के सबसे बेहतरीन सिनेमैटिक मोमेंट्स में गिना जाता है। उस दृश्य में जब डोमिनिक टोरेटो (विन डीजल) और ब्रायन ओ'कॉनर (पॉल वॉकर) की कारें एक दोराहे पर आकर समानांतर रुकती हैं, दोनों एक-दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराते हैं और फिर ब्रायन की सफेद टोयोटा सुप्रा बाईं ओर मुड़कर ढलते सूरज की सुनहरी किरणों में ओझल हो जाती है, बैकग्राउंड में बजता यह गाना सिनेमाघरों में बैठे करोड़ों दर्शकों के सीने में हूक उठा देता है। उस दृश्य को देखकर दुनिया भर के थिएटर्स में सन्नाटा छा गया था और हर आंख से आंसू बह रहे थे।कल्ट क्लासिक का दर्जा और दुनिया भर के दिलों में अमर 'सी यू अगेन'रिलीज होते ही 'सी यू अगेन' ने संगीत जगत के तमाम पुराने रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया। यह गीत बिलबोर्ड हॉट 100 चार्ट पर हफ्तों तक शीर्ष पर काबिज रहा और यूट्यूब पर अरबों व्यूज हासिल करने वाले शुरुआती वैश्विक गीतों की फेहरिस्त में शामिल हुआ। लेकिन इस गाने की असली उपलब्धि इसके आंकड़े या व्यावसायिक सफलता नहीं थी, बल्कि इसका वह वैश्विक प्रभाव था जिसने इसे पूरी दुनिया के लिए 'शोक और श्रद्धांजलि का सार्वभौमिक गान' बना दिया।आज भी जब दुनिया के किसी कोने में कोई इंसान अपने किसी अजीज दोस्त, भाई या रिश्तेदार को हमेशा के लिए खो देता है, तो 'सी यू अगेन' की धुनें उसके टूटे हुए दिल को सहारा देती हैं। महज दस मिनट के भीतर सच्चे आंसुओं और रूहानी दर्द से निकला यह गीत यह साबित करता है कि जब भावनाएं सच्ची हों, तो कला समय और सीमाओं के पार जाकर इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो जाती है। पॉल वॉकर आज भले ही इस दुनिया में न हों, लेकिन इस गीत के जरिए उनकी मुस्कान और उनकी यादें हमेशा हर सिनेप्रेमी के दिल में जिंदा रहेंगी।
नेपाल में जहां से सबसे ज्यादा मची तबाही, वहां सबसे पहले पहुंचा NDTV, देखें ग्राउंड रिपोर्ट
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही के केंद्र बने रसुवा जिले तक NDTV की टीम पहुंची. ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय पत्रकार ने उस भयावह दिन की पूरी कहानी बताई, जब अचानक बादल फटने और ग्लेशियर से आए मलबे ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया.
भारत के खिलाफ ऑपरेशन गलवान का आदेश देने वाले चीनी जनरल को शी जिनपिंग ने पद से हटाया
चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था ने 26 अगस्त को झाओ को CPPCC की 14वीं राष्ट्रीय समिति की स्थायी समिति से हटाने के लिए वोट किया. उन्हें जातीय और धार्मिक मामलों की समिति के उप-निदेशक पद से भी हटा दिया गया.
Nepal Flood Rescue: सुरंगों में फंसे श्रमिकों को बचाने पहुंचा 11 सदस्यीय भारतीय दल
(शिरीष बी प्रधान)काठमांडू, 29 अगस्त विनाशकारी बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे या लापता हुए श्रमिकों को बचाने के लिए जारी अभियान में विशेष तकनीकी सहायता देने के लिए चिकित्साकर्मियों और बचाव विशेषज्ञों का 11 सदस्यीय भारतीय दल शनिवार को नेपाल पहुंचा। नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजा गया यह दल चिलीमे और लांगटांग क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद त्रिशूली क्षेत्र पहुंचा। नेपाल के अधिकारियों ने बताया कि टीम ने बचाव अभियान के लिए स्थिति का आकलन शुरू कर दिया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने और मलबा हटाने के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 82 सदस्यीय संयुक्त सुरक्षा दल ने शुक्रवार रात अभियान शुरू किया। सुरंग के प्रवेश द्वार पर जमा मिट्टी व मलबे और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल सेना के अनुसार, नेपाली सुरक्षा बलों ने अब तक विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के कारण 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा जलविद्युत बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 ‘बेली ब्रिज’ बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल ऐसे होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।
बुरे वक्त में नेपाल की एक पुकार, मदद को साथ आ गए भारत और चीन
नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़ में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है और 2400 से ज्यादा लोग लापता हैं. विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत, चीन समेत कई देशों की मदद के लिए आभार जताया और नेपाल द्वारा विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को गलत बताया. भारत से 57 टन राहत सामग्री और तकनीकी टीम पहुंच चुकी है, वहीं चीन से भी सुरंग बचाव विशेषज्ञ भी पहुंच गए हैं.

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