यूपी में विश्वस्तरीय सड़क संपर्क विकसित करना हमारी प्राथमिकता : गडकरी
up national highway projects: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों एवं सड़क अवसंरचना से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक में ...
tu-214pu tehran deployment: क्या ईरान और अमेरिका के युद्ध में रूस की भी एंट्री हो गई है? दरअसल, पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के ...
सावन मास पर हिन्दी में बेहतरीन कविता
सावन के पावन महीने, शिव भक्ति और प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य को समेटती एक विशेष कविता जो सावन के दोनों रूपों को दर्शाती है-पहला, जब बारिश की बूंदें सूखी धरती को हरा-भरा कर देती हैं और चारों तरफ लोकगीतों की गूंज होती है; और दूसरा, जब कांवड़िए और ...
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 जुलाई को दतिया में उप-चुनाव के मद्देनजर हुंकार भरी। उन्होंने पहले वहां से बीजेपी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का नामांकन भरवाया, उसके बाद जनसभा और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा आज का यह अभियान ...
कल्याणपुरी हत्याकांड: दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल निकला 'कातिल', घरेलू विवाद में पत्नी को मारी थी गोली
पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी इलाके में एक महिला की हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मृतक महिला दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल की पत्नी थी। कथित तौर पर कांस्टेबल ने ही पत्नी की गोली मारकर हत्या की।
पश्चिम बंगाल: सुंदरबन तट के पास डूबी नाव में नौ मछुआरे मृत पाए गए, छह अभी भी लापता
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में सुंदरबन के पास बंगाल की खाड़ी से बड़ी घटना सामने आई है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि इस महीने की शुरुआत में एक मछली पकड़ने वाली लापता हुई नाव में नौ मछुआरे मृत पाए गए हैं, जबकि छह मछुआरे लापता हो गए हैं।
अयोध्या राम मंदिर में सीईओ पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और कॉर्पोरेट शैली की कार्यप्रणाली लागू की जाएगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन दिनों चलती ट्रेन में पूजा का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक पुजारी ट्रेन के अंदर भगवान की मूर्ति के सामने अभिषेक और पूजा करते नजर आ रहे हैं। इसे देखकर कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या ट्रेन में इस तरह पूजा करना ...
Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध
Shravan Month Essay in Hindi: भारतीय संस्कृति में श्रावण मास का विशेष महत्व है। सावन आते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है, नदियां और तालाब भरने लगते हैं तथा वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का ...
दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल ने पत्नी की गोली मारकर की हत्या
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल ने रविवार देर रात पूर्वी दिल्ली के विनोद नगर इलाके में पत्नी की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना पत्नी के जन्मदिन पर दोनों के बीच हुए विवाद के बाद हुई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस के अनुसार […] The post दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल ने पत्नी की गोली मारकर की हत्या appeared first on Sabguru News .
रांची। झारखंड के पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के रबदा गांव में सोमवार सुबह चाचा ने अपने ही 12 वर्षीय भतीजे की चाकू मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान रबदा गांव निवासी साधु बैठा के 12 वर्षीय पुत्र रोशन बैठा के […] The post झारखंड के पलामू जिले में अंधविश्वास की भेंट चढ़ा 12 वर्षीय मासूम, चाचा ने चाकू मारकर की भतीजे की हत्या appeared first on Sabguru News .
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल मदरसा स्टाफ की नियमतीकरण की याचिका खारिज की
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मदरसों में अपनी नियुक्ति के लिए मान्यता की मांग करने वाले 350 शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ की याचिका सोमवार को खारिज कर दी। पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम 2008 को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने असंवैधानिक करार दिया था, जिसके बाद इन सभी […] The post सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल मदरसा स्टाफ की नियमतीकरण की याचिका खारिज की appeared first on Sabguru News .
तमिलनाडु के मदुरै में दो बसों की टक्कर से 5 लोगों की मौत, 42 घायल
चेन्नई। तमिलनाडु में मदुरै जिले के कोट्टमपट्टी के पास सोमवार तड़के एक निजी बस और तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम की बस की टक्कर से पांच लोगों की मौत हो गई और 42 अन्य घायल हो गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतकों में चार पुरुष और एक महिला शामिल है। सभी घायलों को इलाज के लिए […] The post तमिलनाडु के मदुरै में दो बसों की टक्कर से 5 लोगों की मौत, 42 घायल appeared first on Sabguru News .
SEBI का सख्त फरमान: नौकरी छोड़ने के बाद 2 साल तक नहीं कर सकेंगे यह काम, कर्मचारियों के लिए बदले नियम
पूंजी बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) ने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सेबी के कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बाद एक 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' (Cooling-off Period) से गुजरना होगा। नई गाइडलाइन के तहत, कोई भी कर्मचारी इस्तीफा देने या सेवा निवृत्त होने के अगले 2 वर्षों तक बाजार से जुड़ी किसी भी ऐसी निजी संस्था या फर्म में काम नहीं कर पाएगा, जिसे सेबी ने विनियमित (Regulate) किया हो। यह कदम संस्था की पारदर्शिता बनाए रखने और हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?सेबी का मानना है कि कर्मचारियों के पास बाजार की काफी संवेदनशील और गोपनीय जानकारी होती है। अक्सर यह देखा गया है कि नियामक संस्था में काम करने वाले अधिकारी नौकरी छोड़ने के बाद तुरंत उन कंपनियों में उच्च पदों पर जुड़ जाते हैं, जिनकी वे पहले निगरानी कर रहे थे। इससे बाजार की निष्पक्षता प्रभावित होने का खतरा रहता है। अब इन दो वर्षों की अवधि के दौरान पूर्व कर्मचारी किसी भी लिस्टेड कंपनी, ब्रोकरेज हाउस, या सेबी द्वारा रेगुलेट की जाने वाली वित्तीय संस्था में किसी भी सलाहकार या कर्मचारी के रूप में कार्य नहीं कर पाएंगे।कर्मचारियों पर क्या होगा असर?इस नए नियम से सेबी के मौजूदा और भविष्य के कर्मचारियों की करियर रणनीति पर गहरा असर पड़ने वाला है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम संस्था की विश्वसनीयता को बढ़ाने वाला है। 'कूलिंग-ऑफ' के इन दो सालों में पूर्व कर्मचारी बाजार से जुड़े उन मामलों पर न तो कोई सलाह दे सकेंगे और न ही उन कंपनियों के साथ किसी तरह का व्यावसायिक संबंध रख सकेंगे, जो सेबी के दायरे में आती हैं। इस सख्त नियम से यह भी सुनिश्चित होगा कि संस्था के अंदर की कोई भी गोपनीय जानकारी बाजार की चाल बदलने में इस्तेमाल न हो।क्या हैं सेबी के अन्य निर्देश?सेबी ने केवल कूलिंग-ऑफ पीरियड ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के निजी निवेश और स्टॉक ट्रेडिंग को लेकर भी पहले से सख्त नियम बना रखे हैं। हर कर्मचारी को समय-समय पर अपने और परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों और शेयरों का ब्यौरा देना अनिवार्य है। नई गाइडलाइन के बाद, सेबी ने अपने आंतरिक निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत कर दिया है। संस्था का स्पष्ट संदेश है कि बाजार की ईमानदारी से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। जो भी कर्मचारी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर न केवल कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि उनके सेवानिवृत्ति लाभों (Retirement Benefits) पर भी गाज गिर सकती है।
पंजाब के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने राज्य में 'प्रोजेक्ट उड़ान' का आधिकारिक आगाज कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी कौशल की नितांत आवश्यकता है, और 'प्रोजेक्ट उड़ान' युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का काम करेगा।युवाओं को मिलेगा इंडस्ट्री-रेडी ट्रेनिंग का मौका'प्रोजेक्ट उड़ान' का मुख्य उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नई तकनीक और इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करना है। इस केंद्र के माध्यम से युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी। पीएचडीसीसीआई की यह पहल न केवल युवाओं के कौशल को निखारेगी, बल्कि उन्हें कॉर्पोरेट जगत और स्थानीय उद्योगों के लिए तैयार करेगी। राज्यपाल ने कहा कि यह केंद्र युवाओं के लिए रोजगार का एक सशक्त माध्यम बनेगा, जिससे पंजाब की आर्थिक उन्नति में भी मदद मिलेगी।पंजाब में रोजगार सृजन पर जोरउद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 'प्रोजेक्ट उड़ान' का मॉडल ऐसा है जो इंडस्ट्री की मांग और युवाओं की प्रतिभा के बीच के अंतर को कम करेगा। यह केंद्र विशेष रूप से उन युवाओं के लिए वरदान साबित होगा जो कम समय में कुशल बनकर अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं। राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि पंजाब के अन्य जिलों में भी इसी तरह के कौशल केंद्र खोले जाएंगे ताकि राज्य का कोई भी युवा पीछे न छूटे।कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनेगा पंजाबपीएचडीसीसीआई के प्रतिनिधियों ने बताया कि 'प्रोजेक्ट उड़ान' के तहत न केवल ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि युवाओं को प्लेसमेंट में भी सहयोग प्रदान किया जाएगा। इस केंद्र में अत्याधुनिक उपकरण और अनुभवी प्रशिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। इस पहल ने पंजाब में स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में एक नई प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा पैदा कर दी है। राज्यपाल ने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं और अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नए कौशल जरूर सीखें।
पंजाब की राजनीति में फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म में दिखाए गए दावों पर सवाल उठाते हुए फिल्म निर्माताओं को सीधे चुनौती दी है। फिल्म में 25 हजार लोगों के लापता होने का जो दावा किया गया है, उस पर कड़ा रुख अपनाते हुए बिट्टू ने मेकर्स से इसके पुख्ता सबूत और आधिकारिक रिकॉर्ड की मांग की है। इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या फिल्म में दिखाई गई सामग्री ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है या इसे जानबूझकर सनसनीखेज बनाया गया है।फिल्म के दावों पर उठे गंभीर सवालरवनीत बिट्टू का कहना है कि फिल्म में जिस तरह से 25 हजार लोगों के लापता होने का आंकड़ा पेश किया गया है, वह न केवल बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है, बल्कि इससे समाज में गलत संदेश भी जा रहा है। बिट्टू ने तर्क दिया कि यदि इतने बड़े पैमाने पर लोग लापता हुए हैं, तो उनका रिकॉर्ड कहां है? उन्होंने फिल्म निर्माताओं से सवाल किया कि वे अपनी फिल्म के दावों को साबित करने के लिए दस्तावेज पेश करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब की छवि को किसी भी फिल्म में गलत ढंग से पेश करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'सतलुज' बनाम राजनीतिइस विवाद ने अब एक राजनीतिक रंग ले लिया है। एक तरफ जहाँ फिल्म मेकर्स अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रवनीत बिट्टू जैसे नेताओं का कहना है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब यह नहीं है कि आप इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करें। बिट्टू ने चेतावनी दी है कि अगर फिल्म निर्माताओं के पास इन आंकड़ों का कोई आधार नहीं है, तो उन्हें फिल्म से ये विवादास्पद अंश हटाने चाहिए। यह टकराव अब सेंसर बोर्ड और कानूनी विशेषज्ञों की राय के बीच फंसता नजर आ रहा है, जिससे फिल्म की रिलीज को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है।क्या अब सेंसर बोर्ड करेगा हस्तक्षेप?इस चुनौती के बाद अब सबकी नजरें सेंसर बोर्ड (CBFC) पर टिकी हैं कि क्या वह इस फिल्म की दोबारा समीक्षा करेगा। स्थानीय लोग भी इस बात को लेकर दो हिस्सों में बंट गए हैं। जहाँ कुछ लोग इसे पंजाब के एक दर्दनाक अतीत की सच्चाई बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे राज्य को बदनाम करने का जरिया मान रहे हैं। रवनीत बिट्टू की इस 'डेटा चुनौती' ने फिल्म के कंटेंट पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म के निर्माता इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे वास्तव में इन लापता लोगों का कोई ठोस सबूत सार्वजनिक कर पाते हैं।
लुधियाना के निजी स्कूलों में दहशत: ई-मेल से बम से उड़ाने की धमकी, आनन-फानन में बच्चों को भेजा गया घर
लुधियाना के शिक्षा जगत में आज सुबह से ही हड़कंप मचा हुआ है। शहर के कई प्रतिष्ठित निजी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन में दहशत का माहौल है। आज तड़के स्कूलों के आधिकारिक ई-मेल आईडी पर यह धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें स्कूल परिसर में बम रखे जाने का दावा किया गया। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा के मद्देनजर स्कूलों ने तुरंत एहतियाती कदम उठाते हुए कक्षाएं बंद कर दीं और बच्चों को सुरक्षित उनके घर भेज दिया गया है।पुलिस और बम निरोधक दस्ते की छापेमारीधमकी मिलने के बाद लुधियाना पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। शहर के संदिग्ध स्कूलों के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बम डिस्पोजल स्क्वाड (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड की मदद से स्कूलों के चप्पे-चप्पे की गहन तलाशी ली जा रही है। एहतियात के तौर पर उन सभी इलाकों में नाकाबंदी बढ़ा दी गई है जहां ये निजी स्कूल स्थित हैं। पुलिस कमिश्नर ने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है।अभिभावकों में चिंता का माहौलसोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए धमकी की खबर फैलते ही स्कूलों के बाहर अभिभावकों की भारी भीड़ जमा हो गई। अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित माता-पिता स्कूलों के बाहर परेशान दिखे। हालांकि, स्कूल प्रशासन द्वारा समय रहते बच्चों को घर भेजने के फैसले पर अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और न ही इसे सोशल मीडिया पर फैलाएं, ताकि पैनिक की स्थिति पैदा न हो।ई-मेल के पीछे साइबर अपराधियों का हाथ?पुलिस की साइबर सेल (Cyber Cell) ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ई-मेल किस आईपी (IP) एड्रेस से भेजा गया है और इसके पीछे किन लोगों का हाथ हो सकता है। फिलहाल, यह धमकी किसी शरारती तत्व की हरकत है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा। लुधियाना प्रशासन ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे आने वाले दिनों में अपनी सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक सख्त करें और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाएं।
झारखंड की सड़कों पर बेलगाम रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। साल 2025 के दौरान सड़क हादसों में 527 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि इन मृतकों में सबसे बड़ी संख्या 18 से 30 वर्ष के युवाओं की है। प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट बताती है कि लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण हर दिन राज्य के किसी न किसी कोने में कोई परिवार अपना चिराग खो रहा है।युवाओं पर टूटा दुखों का पहाड़सड़क सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट के अनुसार, कुल मौतों में से करीब 60 प्रतिशत हिस्सा युवाओं का है। करियर की शुरुआत करने वाले या अपने सुनहरे भविष्य के सपने देख रहे 18 से 30 साल के युवा सड़क हादसों का मुख्य शिकार बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट के स्टंट करना, नशे में गाड़ी चलाना और सड़क नियमों की अनदेखी करना इस आयु वर्ग में मौतों का सबसे बड़ा कारण है। यह आंकड़ा न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि परिवार के पालन-पोषण में लगे युवाओं की कमी से एक बड़ा सामाजिक संकट भी पैदा हो गया है।क्यों जानलेवा साबित हो रहे हैं झारखंड के हाईवे?झारखंड के प्रमुख राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की पहचान के बावजूद हादसों में कमी नहीं आ रही है। तेज रफ्तार के अलावा, सड़कों पर आवारा पशुओं का घूमना, गड्ढे और रात के समय खराब स्ट्रीट लाइटें भी हादसों को न्योता देती हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण और उपनगरीय सड़कों पर मौत का आंकड़ा अधिक है, क्योंकि वहां चिकित्सा सुविधाएं तुरंत उपलब्ध नहीं हो पातीं। 'गोल्डन आवर' यानी हादसे के एक घंटे के भीतर इलाज न मिल पाने के कारण भी कई घायलों की जान सड़क पर ही चली जाती है।अब प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीतिमौतों का यह भयावह ग्राफ देखकर अब परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने कमर कस ली है। आगामी दिनों में राज्यभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें ओवरस्पीडिंग पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सभी जिला मुख्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे ब्लैक स्पॉट्स पर तत्काल प्रभाव से साइन बोर्ड लगाएं और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी बढ़ाएं। इसके साथ ही, युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षण संस्थानों में विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। सड़क पर अपनी जान बचाने के लिए अब नियमों का पालन करना विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है।
झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision - SIR 2026) के बीच राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अभियान की समय-सीमा को 15 अगस्त तक बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। इस प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं में चल रहे संशय को दूर करते हुए झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।नाम कटने के डर पर CEO का बड़ा बयानमतदाता सूची में नाम जुड़ने या कटने की खबरों के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य त्रुटिहीन और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, यदि कोई मतदाता 'अनमैप्ड' (Unmapped) भी रह जाता है, तो भी उसका नाम मतदाता सूची से नहीं काटा जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि ऐसे मतदाताओं को बाद में निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के नोटिस पर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।क्या है SIR 2026 अभियान?झारखंड में 30 जून 2026 से शुरू हुआ 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभियान 29 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं। इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि 1.63 करोड़ से अधिक मौजूदा मतदाताओं को किसी भी प्रकार का नया दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल BLO द्वारा उपलब्ध कराए गए प्री-फिल्ड फॉर्म पर हस्ताक्षर कर उसे जमा करना है।समय-सीमा बढ़ाने पर मंथनराज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने अभियान की गति और पहुँच को देखते हुए इसकी अवधि को 15 अगस्त तक विस्तारित करने की मांग की है। उनका तर्क है कि मानसून और दूरदराज के क्षेत्रों में आवागमन की कठिनाइयों के कारण कई मतदाता अब तक फॉर्म जमा नहीं कर पाए हैं। फिलहाल, चुनाव आयोग ने इस पर आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन BLOs को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर एक मतदाता तक पहुँच सुनिश्चित करें ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सूची से वंचित न रहे।मतदाताओं के लिए जरूरी टिप्सदस्तावेज की चिंता न करें: यदि आपका नाम पहले से सूची में है, तो आपको किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं है।BLO से संपर्क: अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी से मिलकर फॉर्म जमा करें और रसीद लें।फॉर्म 6 का उपयोग: जो नागरिक 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं।पारदर्शिता: यह प्रक्रिया पूरी तरह से सहभागी है और इसकी हर स्तर पर ऑडिटिंग की जा रही है, इसलिए किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
झारखंड के मौसम में आज बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के 14 जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। आसमान में घने काले बादल छाए रहने और गर्जना के साथ तेज बारिश की संभावना जताई गई है। राजधानी रांची से लेकर देवघर तक मौसम विभाग ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि इस दौरान वज्रपात (ठनका) गिरने का खतरा भी बना हुआ है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के तहत अलर्ट जारी किया है।इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरामौसम विभाग के अनुसार, आज रांची, देवघर, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम में भारी बारिश के आसार हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर बाद से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल सकता है। कहीं-कहीं पर तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि की भी आशंका है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खुले खेतों में जाने से बचें और अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।वज्रपात से कैसे बचें?बारिश के साथ-साथ बादलों की गर्जना और बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें। यदि आप बाहर हैं, तो किसी भी बड़े पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे शरण न लें। घर के भीतर रहें और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल कम से कम करें। वज्रपात के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग करना भी खतरनाक हो सकता है, इसलिए सतर्क रहें। स्थानीय प्रशासन ने सभी जिला मुख्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखें।क्या है मौसम विभाग का ताजा अपडेट?मॉनसून की सक्रियता के कारण राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है, लेकिन आज की बारिश पहले से अधिक प्रभावी हो सकती है। यह बारिश का दौर अगले 24 से 48 घंटों तक जारी रहने का अनुमान है। तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। यदि आप आज बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो अपने साथ रेनकोट या छाता जरूर रखें और मौसम के अपडेट्स पर नजर बनाए रखें।
हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले से एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सरकारी भर्ती परीक्षा (SIR) का फॉर्म भरने और परीक्षा संबंधित काम से आई एक युवती को हवस का शिकार बनाया गया है। आरोप है कि ऑटो चालक ने अपने साथियों के साथ मिलकर महिला को सुनसान जगह ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) की वारदात को अंजाम दिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने ऑटो चालक समेत कुल 4 आरोपियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कर लिया है और इलाके में हड़कंप मच गया है।परीक्षा की उम्मीदें और दरिंदों का जालपीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि वह परीक्षा से संबंधित जरूरी कार्य के लिए नूंह पहुंची थी। वहां से उसने गंतव्य तक जाने के लिए एक ऑटो को रोका। ऑटो चालक ने महिला को भरोसा दिलाया कि वह उसे सुरक्षित छोड़ देगा, लेकिन रास्ते में उसने गाड़ी को मुख्य मार्ग से हटाकर एक सुनसान इलाके की ओर मोड़ दिया। वहां पहले से ही उसके तीन अन्य साथी मौजूद थे। महिला के विरोध करने पर आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ बारी-बारी से दरिंदगी की।पुलिस की कार्रवाई और जांच पड़तालघटना की सूचना मिलते ही नूंह पुलिस सक्रिय हो गई है। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है और पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले से ही इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस ने ऑटो चालक की पहचान कर ली है और उसके साथियों को पकड़ने के लिए तकनीकी सर्विलांस की मदद ली जा रही है। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर भी अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।सुरक्षा पर उठे गंभीर सवालनूंह में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बाहर से परीक्षा देने आने वाली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा अब एक बड़ा मुद्दा बन गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे। इस जघन्य वारदात ने पूरे मेवात क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के आरोपों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर सोमवार को केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष […] The post राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामले में सीबीआई जांच की मांग पर केंद्र, उप्र सरकार, ट्रस्ट को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस appeared first on Sabguru News .
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मंदिर के पुजारी पर हुए दिल दहला देने वाले जानलेवा हमले के मुख्य आरोपी पंकज के खिलाफ प्रशासन ने अब सख्त एक्शन लिया है। कानून को हाथ में लेने और पुजारी को बेरहमी से प्रताड़ित करने के आरोप में आरोपी के अवैध निर्माण को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया है। इस कार्रवाई ने इलाके में साफ संदेश दे दिया है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने आरोपी की अवैध संपत्ति को चिह्नित कर आज सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्यवाही को अंजाम दिया।क्या थी वह खौफनाक वारदात?बता दें कि कुछ दिन पहले कुरुक्षेत्र में एक मंदिर के पुजारी पर जानलेवा हमला हुआ था। आरोपी पंकज और उसके साथियों ने न केवल पुजारी की टांगें तोड़ दी थीं, बल्कि उन्हें मफलर डालकर जमीन पर बेरहमी से घसीटा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था। पुजारी को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। इस अमानवीय घटना के बाद से ही स्थानीय लोग लगातार आरोपी की गिरफ्तारी और उसकी संपत्ति पर बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे थे।प्रशासन का सख्त रुख: अपराध पर 'बुलडोजर मॉडल'कुरुक्षेत्र प्रशासन ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा कि किसी भी अपराधी को सभ्य समाज में आतंक फैलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई थी, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की गई है। आरोपी पंकज पर पहले भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से इलाके के अपराधियों में दहशत का माहौल है और लोग पुलिस के इस त्वरित एक्शन की सराहना कर रहे हैं।कुरुक्षेत्र पुलिस की आगे की रणनीतिफिलहाल आरोपी पंकज न्यायिक हिरासत में है और पुलिस उसके अन्य साथियों की तलाश में जुटी है जो इस घटना में शामिल थे। पुलिस ने दावा किया है कि इस केस में आरोपियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में पैरवी की जाएगी ताकि पुजारी को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस पिकेट बढ़ा दी गई है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। कुरुक्षेत्र की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराध और अपराधियों के लिए हरियाणा में कोई जगह नहीं है।
अब इस तरह होगी अयोध्या राम मंदिर में CEO की नियुक्ति, कौन कर सकता है इस पद के लिए आवेदन
ayodhya ram mandir ceo: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए जल्द ही एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति होने जा रही है। शनिवार को दिल्ली में संपन्न हुई चयन समिति (Search Committee) की ...
कर्नाटक लोक सेवा आयोग अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस साहूकार को राज्यपाल ने किया निलंबित
बेंगलूरु। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस साहूकार को अपने संवैधानिक पद का दुरुपयोग करने के आरोप में सोमवार को निलंबित कर दिया। आयोग के अध्यक्ष पर अपनी दो बेटियों को आरक्षण का गलत लाभ लेकर सरकारी नौकरी देने का आरोप है। राज्यपाल ने आयोग अध्यक्ष पर […] The post कर्नाटक लोक सेवा आयोग अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस साहूकार को राज्यपाल ने किया निलंबित appeared first on Sabguru News .
‘जुरासिक पार्क’अभिनेता सैम नील का 78 वर्ष की उम्र में निधन
वेलिंगटन। हॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता और जुरासिक पार्क तथा द पियानो जैसी चर्चित फिल्मों में अपनी दमदार अभिनय क्षमता के लिए चर्चित सैम नील का निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। नील का सोमवार को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में निधन हो गया। उनके आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर जारी बयान में कहा गया […] The post ‘जुरासिक पार्क’ अभिनेता सैम नील का 78 वर्ष की उम्र में निधन appeared first on Sabguru News .
Male Fertility Crisis Facts: क्या दुनिया सच में एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां पुरुषों की प्रजनन क्षमता (Fertility) हमेशा के लिए गंभीर संकट में पड़ जाएगी? हाल के वर्षों में सामने आए कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस सवाल को दुनिया भर में बहस का ...
आज के दौर में बेदाग और चमकदार त्वचा पाने की होड़ में हम न जाने कितने महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और केमिकल युक्त क्रीम्स पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी खूबसूरती का असली राज आपके किचन में ही छिपा है? बाजार में मिलने वाले महंगे प्रोडक्ट्स अक्सर त्वचा को लंबे समय में नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि प्राकृतिक और देसी नुस्खे आपकी स्किन को गहराई से पोषण देते हैं। अगर आप भी ग्लोइंग स्किन की तलाश में हैं, तो आज हम आपको एक ऐसे असरदार और बेहद सस्ते देसी नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपकी त्वचा में नई जान फूंक देगा।क्यों छोड़ें महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स?बाजार में बिकने वाले अधिकांश ब्यूटी प्रोडक्ट्स में पैराबेन, सल्फेट और अन्य आर्टिफिशियल केमिकल्स होते हैं, जो शुरुआत में तो त्वचा को निखारते हैं, लेकिन धीरे-धीरे स्किन का नेचुरल ऑयल छीन लेते हैं। इसके विपरीत, देसी नुस्खे पूरी तरह से नेचुरल होते हैं और इनका कोई साइड-इफेक्ट नहीं होता। आज हम बात कर रहे हैं 'बेसन और दही' के लेप की, जो सदियों से भारतीय सुंदरता का आधार रहा है। बेसन त्वचा की डेड स्किन सेल्स को साफ करता है और दही में मौजूद लैक्टिक एसिड स्किन को नेचुरली ब्लीच कर उसे एक खूबसूरत चमक प्रदान करता है।ऐसे तैयार करें अपना जादुई फेस पैकइस चमत्कारी फेस पैक को बनाना बेहद आसान है। एक कटोरी में दो चम्मच बेसन लें और उसमें एक चम्मच ताजा दही मिलाएं। अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा ड्राई है, तो आप इसमें आधा चम्मच शहद और एक चुटकी हल्दी भी डाल सकते हैं। इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें। चेहरे को साफ पानी से धोने के बाद इस लेप को अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इसे करीब 15 से 20 मिनट तक सूखने दें। जब यह हल्का सूख जाए, तो गुनगुने पानी से धीरे-धीरे मसाज करते हुए अपना चेहरा धो लें।त्वचा पर दिखेगा शानदार असरहफ्ते में मात्र दो बार इस नुस्खे को अपनाने से आपको फर्क साफ नजर आने लगेगा। बेसन जहां आपकी त्वचा के रोमछिद्रों (pores) में जमा गंदगी को खींचकर बाहर निकालता है, वहीं दही त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइजर करता है। इससे न केवल पिंपल्स और दाग-धब्बे कम होते हैं, बल्कि चेहरे पर एक कुदरती चमक (Natural Glow) आ जाती है। यह नुस्खा सभी प्रकार की त्वचा (Skin Types) के लिए सुरक्षित है। तो देर किस बात की? आज ही महंगे ब्रांड्स को छोड़ें और अपनी रसोई से निकली इस प्राकृतिक खूबसूरती को अपनाएं, ताकि आपकी त्वचा दिखे हमेशा जवां और बेदाग।
ज्योतिष शास्त्र में अंकों (Numerology) का हमारे जीवन पर गहरा असर माना जाता है। हम अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग स्वभाव से बेहद कोमल और प्यार करने वाले होते हैं, लेकिन बावजूद इसके वे अपने प्रेम संबंधों में हमेशा ठगा हुआ महसूस करते हैं। लाख कोशिशों के बाद भी उनके नसीब में प्यार के बजाय धोखा ही आता है। अंक ज्योतिष के विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ विशेष तिथियों में जन्मे लोगों के ग्रहों की चाल उन्हें प्यार के मामले में 'अनलकी' बना देती है। अगर आप भी बार-बार रिश्तों में असफल हो रहे हैं, तो हो सकता है कि आपकी जन्मतिथि के अंक इसके पीछे का कारण हों।किन तारीखों के लोग होते हैं प्यार में 'अनलकी'?अंक ज्योतिष के अनुसार, जो लोग किसी भी महीने की 8, 17 और 26 तारीख को जन्मे होते हैं, उन पर शनि देव का विशेष प्रभाव होता है। ये लोग स्वभाव से बहुत गंभीर और वफादार होते हैं, लेकिन यही गंभीरता कभी-कभी उनके रिश्तों के लिए घातक साबित होती है। शनि के प्रभाव के कारण इन्हें अपने प्रेम जीवन में अक्सर गलतफहमियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, 4, 13 और 31 तारीख को जन्मे लोग राहु के प्रभाव में होते हैं। राहु इन्हें रिश्तों में भ्रम (Confusion) की स्थिति में रखता है, जिसके चलते ये लोग अक्सर ऐसे पार्टनर का चुनाव कर लेते हैं जो इनकी भावनाओं की कद्र नहीं करते, और अंत में इन्हें केवल विश्वासघात ही मिलता है।क्यों नसीब में लिखा होता है धोखा?इन तारीखों में जन्मे लोग आमतौर पर 'इमोशनल इंटेलिजेंस' के मामले में थोड़े कमजोर हो सकते हैं। वे अपने पार्टनर पर बहुत जल्दी और आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। इन लोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वे प्यार में पड़ने के बाद 'रियलिटी चेक' करना भूल जाते हैं। ग्रहों की स्थिति के चलते, इनके जीवन में ऐसे लोग ज्यादा आकर्षित होते हैं जो केवल अपना मतलब निकालना जानते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इनके जीवन में 'सच्चे प्यार' को मिलने में काफी समय लगता है और इन्हें अपनी भावनाओं को काबू में रखना सीखना बहुत जरूरी है।कैसे बदलें अपनी लव लाइफ की तकदीर?अगर आपकी जन्मतिथि भी इन्हीं अंकों के आसपास है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। ज्योतिष शास्त्र में इसके लिए कुछ उपाय सुझाए गए हैं। सबसे पहले, अपने पार्टनर का चयन करने में जल्दबाजी न करें। किसी भी रिश्ते की शुरुआत में थोड़ा समय लें और सामने वाले के व्यवहार को बारीकी से समझें। अपनी जन्मकुंडली के अनुसार ग्रहों के रत्नों या मंत्रों का जाप करना भी आपके रिश्तों में स्थिरता ला सकता है। प्यार में 'अनलकी' होने का मतलब यह नहीं है कि आप कभी खुश नहीं रह सकते; इसका बस यह अर्थ है कि आपको अपना जीवनसाथी चुनने में औरों के मुकाबले थोड़ी अधिक सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
कर्ज और बीमारी से हैं परेशान? ज्योतिष शास्त्र के इन अचूक उपायों से जीवन में आएगी खुशहाली और राहत
क्या आप भी कर्ज के बोझ तले दबे हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आपका पीछा नहीं छोड़ रही हैं? अक्सर जीवन में आर्थिक तंगी और बिगड़ती सेहत एक साथ दस्तक देती हैं, जो इंसान को मानसिक रूप से तोड़ देती हैं। कई लोग इसे केवल मेहनत की कमी मानते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसके पीछे ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति और नकारात्मक ऊर्जा का बड़ा हाथ हो सकता है। आज हम आपको उन सरल लेकिन प्रभावशाली ज्योतिषीय उपायों के बारे में बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप कर्ज के चक्रव्यूह और बीमारी के जाल से बाहर निकल सकते हैं।कर्ज मुक्ति के लिए अचूक ज्योतिषीय उपायज्योतिष के अनुसार, मंगलवार का दिन कर्ज मुक्ति के लिए सबसे शुभ माना जाता है। यदि आप भारी कर्ज से परेशान हैं, तो 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करें। यह उपाय न केवल आर्थिक स्थिति को सुधारता है, बल्कि आत्मविश्वास में भी वृद्धि करता है। इसके अलावा, बुधवार के दिन गणेश जी को गुड़ और चने का भोग लगाने और उसे गाय को खिलाने से रुके हुए धन की प्राप्ति होती है और कर्ज का भार कम होने लगता है। याद रखें, हमेशा कर्ज की पहली किस्त मंगलवार को चुकाने का प्रयास करें, इससे कर्ज के दोबारा न चढ़ने की मान्यता है।स्वास्थ्य में सुधार के लिए ग्रहों का संतुलनबीमारी का कारण अक्सर कुंडली में राहु या शनि का कमजोर होना होता है। यदि आप लंबे समय से बीमार हैं, तो हर शनिवार को काले तिल का दान करें और जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार महसूस होने लगता है। साथ ही, सोमवार को भगवान शिव की उपासना करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी है। स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए अपने सोने की दिशा बदलें और हमेशा सिर उत्तर की ओर रखकर सोने से बचें, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का महत्वज्योतिष केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सकारात्मक आदतों का भी विज्ञान है। कर्ज और बीमारी की स्थिति में मन का शांत रहना अनिवार्य है। घर के मुख्य द्वार पर नियमित रूप से शुद्ध जल में नमक मिलाकर पोंछा लगाने से घर की नकारात्मकता खत्म होती है, जिससे आर्थिक रास्ते खुलते हैं। अपनी दिनचर्या में थोड़ा समय ध्यान (Meditation) के लिए निकालें। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि जब आपका मन शांत होता है, तो आपके निर्णय सटीक होते हैं, जो सीधे तौर पर आपके कर्ज कम करने और स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में मददगार साबित होते हैं। इन उपायों को पूरी श्रद्धा के साथ करें, निश्चित ही आपको सुखद बदलाव देखने को मिलेंगे।
गदर के बाद फिर 'बंटवारा': सनी देओल-राजकुमार संतोषी की नई फिल्म का पोस्टर आउट, मचाएगा ऐतिहासिक तहलका
बॉलीवुड के 'एक्शन किंग' सनी देओल और दिग्गज निर्देशक राजकुमार संतोषी की जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर इतिहास दोहराने के लिए तैयार है। लंबे समय से चर्चाओं में बनी फिल्म 'बंटवारा 1947' का नया पोस्टर आज आउट हो गया है, जिसने फैंस के बीच खलबली मचा दी है। इस पोस्टर में सनी देओल का रौद्र अवतार एक बार फिर 'गदर' वाली यादों को ताजा कर रहा है। निर्देशक राजकुमार संतोषी की यह फिल्म न केवल एक भावनात्मक यात्रा होगी, बल्कि इसमें एक्शन और देशभक्ति का वह तड़का भी देखने को मिलेगा, जिसके लिए यह जोड़ी पूरे विश्व में मशहूर है।'बंटवारा 1947' का नया पोस्टर: क्या दिखा खास?फिल्म का नया पोस्टर काफी इंटेंस और रोंगटे खड़े करने वाला है। इसमें सनी देओल एक बेहद गंभीर मुद्रा में नजर आ रहे हैं, जो देश के विभाजन के दर्द और उससे उपजी आग को बखूबी दर्शाता है। पोस्टर में बैकग्राउंड का माहौल 1947 के उस दौर की याद दिलाता है, जो फिल्म की कहानी को और भी प्रभावशाली बनाता है। सोशल मीडिया पर आते ही यह पोस्टर ट्रेंड करने लगा है। फैंस का कहना है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फिर से 'गदर' मचाने की पूरी तैयारी में है।कब रिलीज होगी 'बंटवारा 1947'?फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट का ऐलान भी कर दिया है। यह फिल्म आने वाले 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के आसपास सिनेमाघरों में दस्तक देगी, जो देशभक्ति के माहौल में रिलीज के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जा रहा है। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 'घायल' और 'घातक' जैसी फिल्मों की तरह ही दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ने की पूरी क्षमता रखती है। सनी देओल का एग्रेसिव लुक और संतोषी की बेहतरीन डायरेक्शन का कॉम्बिनेशन इस साल की सबसे बड़ी हिट साबित हो सकता है।क्या इस बार भी बॉक्स ऑफिस टूटेगा?सनी देओल और राजकुमार संतोषी का इतिहास गवाह है कि जब भी ये साथ आए हैं, सिनेमाघरों में 'गदर' मचा है। 'बंटवारा 1947' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़े बजट का इमोशनल ड्रामा है। फिल्म से जुड़ी छोटी-छोटी डिटेल्स को बहुत गुप्त रखा गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक फिल्म के एक्शन सीन्स को हॉलीवुड लेवल पर फिल्माया गया है। अगर आप सनी देओल के सच्चे प्रशंसक हैं, तो यह फिल्म आपके लिए साल का सबसे बड़ा सिनेमैटिक अनुभव होने वाली है। तो तैयार हो जाइए, क्योंकि सिनेमाघरों में अब फिर से उसी पुराने 'गदर' वाले शोर की गूंज सुनाई देने वाली है।
'लॉक अप 2' (Lock Upp 2) के घर में इस समय रिश्तों की गरमाहट के साथ-साथ तीखी नोकझोंक भी बढ़ गई है। खेल के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, शिल्पा शिंदे ने हाल ही में शिवांगी जोशी को सरेआम फटकार लगाई है। शिल्पा के कड़े तेवर और सीधे सवाल सुनकर शिवांगी जोशी की आंखों में आंसू आ गए। शिल्पा ने न केवल शिवांगी की गेमिंग रणनीति पर सवाल उठाए, बल्कि उन्हें हर्षद चोपड़ा से अपनी बातचीत कम करने की सख्त हिदायत भी दे डाली। इस घटना ने शो के माहौल को पूरी तरह बदल दिया है और दर्शक भी हैरान हैं कि आखिर शिल्पा ने ऐसा कड़ा फैसला क्यों लिया।शिल्पा शिंदे का गुस्सा: क्या है असली वजह?शिल्पा शिंदे, जो अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं, ने शिवांगी को उनके खेल पर फोकस करने की नसीहत दी। शिल्पा का मानना है कि शिवांगी का ध्यान खेल के बजाय निजी बातचीत और हर्षद के साथ बॉन्डिंग में ज्यादा लग रहा है, जो उनके गेम के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। शिल्पा ने जब उनसे कहा कि तुम यहां गेम खेलने आई हो या दोस्ती निभाने?, तो शिवांगी स्तब्ध रह गईं। शिल्पा की यह खरी-खोटी वहां मौजूद बाकी कंटेस्टेंट्स के लिए भी एक चेतावनी की तरह थी, जिससे घर में शिल्पा का दबदबा और भी बढ़ गया है।शिवांगी और हर्षद का रिश्ता और घर का दबावशिवांगी और हर्षद के बीच की बढ़ती नजदीकियों पर घर के कई सदस्य पहले भी दबी जुबान में चर्चा कर चुके थे, लेकिन शिल्पा ने पहली बार इस पर खुलकर निशाना साधा है। शिल्पा ने साफ शब्दों में शिवांगी से कहा कि हर्षद के साथ बातचीत कम करो, वरना यह तुम्हारे एलिमिनेशन का कारण बन सकता है। शिल्पा की इस 'परामर्श' या 'फटकार' के बाद शिवांगी काफी परेशान दिखीं और उन्हें इमोशनल होते देखा गया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शिल्पा की इस चेतावनी का शिवांगी के खेल पर क्या असर पड़ता है।क्या अब बदलेगा लॉक अप का समीकरण?इस पूरी घटना के बाद से ही फैन्स के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ लोग शिल्पा के इस 'गुरु' जैसे व्यवहार की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ को लगता है कि शिल्पा दूसरों के निजी जीवन में ज्यादा दखल दे रही हैं। लॉक अप के इस सीजन में अब समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हर्षद के साथ शिवांगी की दोस्ती अब शिल्पा के निशाने पर है, और यह देखने वाली बात होगी कि क्या शिवांगी शिल्पा की बात मानती हैं या फिर अपने स्टैंड पर कायम रहती हैं। शो में आने वाले एपिसोड्स में इस बात की पूरी संभावना है कि यह मुद्दा एक बड़े झगड़े का रूप ले ले।
कुकिंग हमारी ताकत है': कंगना रनौत ने अपने वायरल बयान पर तोड़ी चुप्पी, महिलाओं से की खास अपील
बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपने एक बयान को लेकर खासी चर्चा में हैं। 'कुकिंग' को लेकर की गई उनकी हालिया टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी थी, जिस पर अब खुद कंगना ने मोर्चा संभालते हुए सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, बल्कि वे भारतीय संस्कृति और घरेलू जीवन में भोजन पकाने के महत्व को रेखांकित कर रही थीं। उन्होंने न केवल अपने बयान को स्पष्ट किया, बल्कि सभी महिलाओं से आत्मनिर्भर बनने और परिवार के लिए खुद खाना बनाने की प्रेरणादायी अपील भी की है।आखिर क्या था विवाद और कंगना का पक्ष?सोशल मीडिया पर कंगना के बयान के बाद यह बहस छिड़ गई थी कि क्या कुकिंग को महिलाओं की 'ताकत' के रूप में देखना आज के दौर में सही है। इस पर सफाई देते हुए कंगना ने कहा कि रसोई घर केवल काम करने की जगह नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य और प्रेम का केंद्र है। उनका मानना है कि जब हम अपने परिवार के लिए अपने हाथों से भोजन बनाते हैं, तो उसमें एक अलग ऊर्जा होती है। उन्होंने कहा कि कुकिंग एक कला है जिसे हर महिला को अपनी शक्ति के रूप में अपनाना चाहिए, क्योंकि यह न केवल पोषण देती है बल्कि परिवार के बीच के बंधन को भी मजबूत करती है।महिलाओं से की आत्मनिर्भरता की अपीलअपने संदेश में कंगना ने आधुनिक युग की महिलाओं को आत्मनिर्भर (Self-reliant) बनने का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि आज के व्यस्त जीवन में बाहर का खाना खाने के बजाय घर के बने शुद्ध और सात्विक भोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है। अभिनेत्री ने अपील की कि महिलाएं कुकिंग को एक 'बोझ' के रूप में न देखकर, इसे अपने व्यक्तित्व के एक हिस्से के रूप में देखें। उनके मुताबिक, खुद खाना बनाना न केवल सेहत के लिए अच्छा है बल्कि यह आत्म-संतोष (Inner Satisfaction) का भी एक बेहतरीन जरिया है। कंगना का यह बयान उन महिलाओं के लिए एक संदेश है जो अपने करियर और परिवार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।क्या खाना बनाना वाकई महिलाओं की ताकत है?कंगना का यह रुख भले ही कुछ वर्गों को पुराना लगे, लेकिन बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक इसे 'भारतीय मूल्यों' से जोड़कर देख रहे हैं। अभिनेत्री का मानना है कि कुकिंग का ज्ञान व्यक्ति को कहीं भी और किसी भी स्थिति में स्वतंत्र बनाता है। उनके इस नए बयान के बाद अब सोशल मीडिया पर लोग इसे 'हेल्थ कॉन्शियस' अप्रोच के रूप में भी देख रहे हैं। बहरहाल, कंगना ने अपने बयानों के जरिए यह साफ कर दिया है कि वे अपनी बातों पर कायम हैं और मानती हैं कि रसोई में खुद का समय बिताना एक सशक्त और स्वस्थ जीवनशैली की पहचान है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में दयाल सिंह कॉलेज बना छात्रों की पहली पसंद, टॉपर लिस्ट में कैसे बनाई जगह
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में प्रवेश की प्रक्रिया हर साल छात्रों के बीच एक नई जंग की तरह होती है, लेकिन इस बार 'दयाल सिंह कॉलेज' ने सभी को चौंका दिया है। एक समय बैकअप के तौर पर देखे जाने वाले इस कॉलेज ने अब कैंपस का 'क्रेज' बदल दिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय की टॉपर्स लिस्ट में दयाल सिंह कॉलेज के छात्रों का दबदबा बढ़ने के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। आखिर क्या वजह है कि अब छात्र नॉर्थ कैंपस के कुछ पुराने कॉलेजों को छोड़कर दयाल सिंह की ओर रुख कर रहे हैं?बढ़ती लोकप्रियता और एकेडमिक ग्राफदयाल सिंह कॉलेज की सफलता का सबसे बड़ा कारण उसका बदलता एकेडमिक ग्राफ और फैकल्टी की गुणवत्ता है। कॉलेज ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेसमेंट सेल को इतना मजबूत किया है कि अब यह डीयू के टॉप संस्थानों की कतार में खड़ा हो गया है। विशेष रूप से आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए यहाँ का माहौल बेहद प्रतिस्पर्धी और सीखने योग्य बनाया गया है। कॉलेज की ओर से दी जा रही विशेष गाइडेंस और टॉपर्स के लिए चलाए जा रहे मेंटरशिप प्रोग्राम ने इसे मेरिट होल्डर्स की पहली पसंद बना दिया है।कैसे बनी टॉपर लिस्ट में जगह?दयाल सिंह कॉलेज के टॉपर लिस्ट में जगह बनाने का राज कॉलेज की 'स्मार्ट स्टडी' नीति में छिपा है। यहाँ की एडमिशन कमेटी और विभाग ने इस बार ऐसे कोर्स स्ट्रक्चर पर फोकस किया है जो इंडस्ट्री की डिमांड के हिसाब से हैं। इसके अलावा, कॉलेज की लाइब्रेरी और डिजिटल रिसोर्सेज ने छात्रों को घर बैठे बेहतर पढ़ाई करने का मौका दिया है। टॉपर्स का मानना है कि कॉलेज का सपोर्ट सिस्टम उन्हें न केवल डिग्री दिलाने में, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में भी मदद करता है, जो इसे अन्य कॉलेजों से अलग खड़ा करता है।क्या आपको यहाँ एडमिशन लेना चाहिए?अगर आप डीयू में एडमिशन का प्लान बना रहे हैं, तो दयाल सिंह कॉलेज निश्चित रूप से आपकी सूची में टॉप पर होना चाहिए। साउथ कैंपस की बेहतरीन कनेक्टिविटी और कॉलेज का बढ़ता एक्सपोजर इसे एक आदर्श संस्थान बनाता है। यदि आप चाहते हैं कि आपको एक ऐसा माहौल मिले जहाँ पढ़ाई के साथ-साथ प्लेसमेंट और ऑल-राउंड डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जाए, तो दयाल सिंह कॉलेज आपके सपनों को उड़ान देने के लिए पूरी तरह तैयार है। छात्रों का बढ़ता भरोसा इस बात का सबूत है कि आने वाले दिनों में यह डीयू का नया 'पावरहाउस' बनने की राह पर है।
प्रमोशन ठुकराकर 'डिमोशन' ले रहे कर्मचारी: आखिर क्या है वर्क-लाइफ बैलेंस की यह नई कड़वी सच्चाई
कॉर्पोरेट जगत और सरकारी दफ्तरों में अक्सर प्रमोशन को कामयाबी की सीढ़ी माना जाता है। लेकिन इन दिनों एक नया ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है, जहाँ कर्मचारी प्रमोशन लेने के बजाय डिमोशन (पदोंन्नति के बजाय पदावनति) को चुन रहे हैं। यह कोई फैसला हार या असफलता का नहीं, बल्कि 'वर्क-लाइफ बैलेंस' के लिए उठाया गया एक सोची-समझी रणनीति वाला कदम है। बढ़ती जिम्मेदारियां, लगातार ट्रांसफर-पोस्टिंग का दबाव और परिवार के प्रति जवाबदेही ने पेशेवर लोगों को इस कदर मजबूर कर दिया है कि वे अपनी खुशी और मानसिक शांति के लिए बड़ी पोस्ट छोड़ने को तैयार हैं।क्यों प्रमोशन के बजाय डिमोशन बन रहा पहली पसंद?प्रमोशन के साथ बड़ी जिम्मेदारी और अक्सर अन्य शहरों में ट्रांसफर-पोस्टिंग का बोझ भी आता है। जो कर्मचारी अपने शहर या परिवार से जुड़े रहना चाहते हैं, उनके लिए प्रमोशन का मतलब अक्सर अपनों से दूर होना होता है। कई बार काम का इतना अधिक दबाव (Work Pressure) बढ़ जाता है कि व्यक्ति की व्यक्तिगत जिंदगी लगभग खत्म हो जाती है। ऐसे में, कर्मचारी कम जिम्मेदारी वाली लेकिन तनावमुक्त भूमिका (Stress-free Role) को चुनना बेहतर समझते हैं ताकि वे अपने बच्चों, बुजुर्ग माता-पिता और स्वास्थ्य को पर्याप्त समय दे सकें।ट्रांसफर-पोस्टिंग का मानसिक और सामाजिक बोझसरकारी और मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले लोगों के लिए ट्रांसफर-पोस्टिंग सबसे बड़ा सिरदर्द है। बच्चों की पढ़ाई में रुकावट और बार-बार घर बदलने का तनाव किसी भी परिवार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। जब कोई कर्मचारी किसी ऊंचे पद पर होता है, तो उसे अक्सर अपनी मर्जी के खिलाफ दूरस्थ इलाकों में भेजा जाता है। ऐसे में, डिमोशन का रास्ता अपनाकर वे एक ही जगह टिके रहने का विकल्प चुन लेते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'तनाव-रहित जीवन' की चाहत ने इस 'रिवर्स प्रमोशन' ट्रेंड को जन्म दिया है, जो आने वाले समय में वर्क कल्चर में बड़ा बदलाव ला सकता है।क्या कॉर्पोरेट जगत को अब संभलने की जरूरत है?इस ट्रेंड ने कंपनियों के एचआर (HR) विभाग के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जब कोई काबिल कर्मचारी बड़ी जिम्मेदारी लेने से इनकार करता है, तो इसका सीधा असर कंपनी की उत्पादकता (Productivity) पर पड़ता है। कंपनियां अब महसूस कर रही हैं कि केवल ऊंचा वेतन या बड़ा पद ही पर्याप्त नहीं है; कर्मचारियों को लचीलापन (Flexibility) और 'स्थायित्व' की जरूरत है। यदि संगठन अपने कर्मचारियों को एक ही स्थान पर काम करने की सुविधा और बेहतर कार्य-जीवन संतुलन प्रदान करें, तो शायद उन्हें अपने सबसे होनहार टैलेंट को खोने या डिमोशन की अर्जी देखने की नौबत न आए।
विदेशी यूनिवर्सिटी के भारतीय कैंपस या विदेश की पढ़ाई? एडमिशन लेने से पहले इन 5 बड़े अंतरों को समझें
आज के समय में जब विदेशी शिक्षण संस्थान तेजी से अपने भारतीय कैंपस खोल रहे हैं, तो छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में रहकर विदेशी डिग्री लेना बेहतर है या विदेश जाकर वहां की संस्कृति और माहौल में पढ़ाई करना? दोनों ही विकल्पों के अपने फायदे और चुनौतियां हैं। यदि आप भी अपने भविष्य को लेकर उलझन में हैं और यह तय नहीं कर पा रहे कि अपना करियर कहां से संवारें, तो यह गाइड आपके लिए ही है।फीस और आर्थिक भार का गणितसबसे पहला और महत्वपूर्ण अंतर 'लागत' का है। विदेश में पढ़ाई करने का मतलब है न केवल भारी फीस, बल्कि रहने-सहने का खर्च और हवाई यात्रा का खर्च भी उठाना। इसके विपरीत, विदेशी यूनिवर्सिटी के भारतीय कैंपस में पढ़ाई करने पर आपको लगभग उसी स्तर की गुणवत्ता वाली शिक्षा बहुत कम खर्च में मिल जाती है। हॉस्टल और अन्य खर्चों में भी आप लाखों रुपये की बचत कर सकते हैं। अगर आपका बजट सीमित है, तो भारतीय कैंपस एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरता है।पढ़ाई का अनुभव और ग्लोबल एक्सपोजरविदेश जाने का मुख्य उद्देश्य केवल डिग्री लेना नहीं, बल्कि वहां के वैश्विक माहौल, विविधता और नई कार्य-संस्कृति को समझना है। वहां आप दुनिया भर के छात्रों के साथ रहते हैं, जिससे नेटवर्किंग और पर्सनल डेवलपमेंट की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। भारतीय कैंपस में भी शिक्षा का स्तर वैसा ही होता है, लेकिन आप वहां विदेशी माहौल का अनुभव (Global Exposure) मिस कर सकते हैं। हालांकि, भारतीय कैंपस अब इंटर-कैंपस एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिए छात्रों को कुछ समय विदेश में बिताने का मौका भी दे रहे हैं।नौकरी और प्लेसमेंट के मौकेआजकल कंपनियां उन छात्रों को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge) है। विदेश में पढ़ाई करने से आपको वहां के स्थानीय जॉब मार्केट में काम करने का मौका मिल सकता है, जो भविष्य में आपके करियर के लिए एक बड़ा एसेट बनता है। भारतीय कैंपस में पढ़ाई के दौरान आप भारत के बड़े कॉर्पोरेट्स के साथ नेटवर्क बनाने में सक्षम होते हैं। अंत में, यह आपके करियर लक्ष्यों पर निर्भर करता है—अगर आप वैश्विक स्तर पर करियर बनाना चाहते हैं तो विदेश जाना बेहतर है, और यदि आप भारत में ही कॉर्पोरेट जगत में नाम कमाना चाहते हैं, तो भारतीय कैंपस एक स्मार्ट विकल्प है।एडमिशन से पहले खुद से पूछें ये सवालनिर्णय लेने से पहले खुद से पूछें कि क्या आप घर से दूर जाने के लिए तैयार हैं? क्या आप सांस्कृतिक बदलाव के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं? और सबसे जरूरी, क्या आपकी वित्तीय स्थिति विदेश के भारी खर्चों को लंबे समय तक झेल सकती है? विदेशी डिग्री की मान्यता दोनों ही स्थितियों में समान होगी, इसलिए कैंपस का चयन करते समय अपनी प्राथमिकता और भविष्य की योजनाओं को सबसे ऊपर रखें। सही चुनाव ही आपके करियर को नई दिशा दे सकता है।
भारत में फिर बढ़ने लगे कोरोना के मामले: कुमार सानू के बेटे जान अस्पताल में भर्ती
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में एक बार फिर कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती नजर आ रही है। मशहूर सिंगर कुमार सानू के बेटे जान को कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई राज्यों में कोरोना संक्रमित मिलने के बाद स्वास्थ्य ...
ग्रेटर नोएडा : डीएम कार्यालय को ई-मेल से बम की धमकी, घंटों चली सघन जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला
गौतमबुद्धनगर के जिला अधिकारी (डीएम) कार्यालय को सोमवार (13 जुलाई 2026) को ई-मेल के माध्यम से बम होने की धमकी मिलने से प्रशासनिक महकमे में कुछ समय के लिए सतर्कता बढ़ गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड), फायर ब्रिगेड, एंटी सबोटाज (ए.एस.) चेकिंग टीम तथा डॉग स्क्वाड मौके पर पहुंच गए और पूरे परिसर की गहन तलाशी शुरू कर दी गई।
सारण : खेत में काम करने गई युवती से सामूहिक दुष्कर्म, 4 आरोपी अरेस्ट
छपरा। बिहार में सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र में खेत में अकेली काम करने गयी एक युवती से दुष्कर्म करने वाले चार युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि डुमरी गांव की एक युवती अकेले अपने खेत में काम कर रही थी। इसी दौरान उसे खेत में […] The post सारण : खेत में काम करने गई युवती से सामूहिक दुष्कर्म, 4 आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, मांगी एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के मामले में केंद्र सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी कर यूपी एसआईटी से जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
बालोतरा : ट्रेलर के पीछे कार के टकराने से 5 लोगों की मौत, 3 घायल
बालोतरा। राजस्थान में बालोतरा जिले के पचपादरा थाना क्षेत्र में रविवार देर रात को ट्रेलर के पीछे स्कॉर्पियो कार के टकराने से पांच लोगों की मौत हाे गई जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गये हैं। पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया कि बीती देर रात भांडियावास के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो […] The post बालोतरा : ट्रेलर के पीछे कार के टकराने से 5 लोगों की मौत, 3 घायल appeared first on Sabguru News .
बद्रीनाथ दान प्रकरण: 32 दिन की CCTV रिकॉर्डिंग गायब, जांच में अहम सबूत मानी जा रही थी फुटेज
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा और दान राशि में कथित हेराफेरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दावा है कि जांच के लिए अहम सबूत मानी जा रही 32 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग गायब है।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध के हाई कोर्ट आदेश पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया।
वाराणसी में होटल पर पुलिस का छापा, देह व्यापार का भंडाफोड़
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सिगरा थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में रविवार शाम को पुलिस ने छापेमारी कर देह व्यापार का भंडाफोड़ करते हुए पांच युवतियों, दो ग्राहकों तथा होटल के दो संचालकों समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि अनैतिक देह व्यापार की सूचना पर […] The post वाराणसी में होटल पर पुलिस का छापा, देह व्यापार का भंडाफोड़ appeared first on Sabguru News .
बैंकॉक के बार में भीषण आग, 27 लोगों की मौत, 22 की हालत गंभीर
बैंकॉक। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के मनोरम चतुचक जिले में रविवार देर रात एक बार में भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। बैंकॉक पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 63 से अधिक घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। […] The post बैंकॉक के बार में भीषण आग, 27 लोगों की मौत, 22 की हालत गंभीर appeared first on Sabguru News .
उत्तराखंड और हिमाचल मे भारी बारिश की चेतावनी, तटीय आंध्रप्रदेश में हीटवेव की आशंका
weather update: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय बेहद अजीब और असमान व्यवहार कर रहा है। वर्तमान में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्य भारी से अत्यंत भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे हैं, जबकि देश के कुछ हिस्सों में अभी भी मानसून की भारी ...
महाराष्ट्र की सियासत में 'किंगमेकर' माने जाने वाले शरद पवार इस समय एक बेहद जटिल स्थिति का सामना कर रहे हैं। उनके सामने स्थिति 'आगे कुआं और पीछे खाई' जैसी हो गई है, जहाँ एक तरफ पार्टी का भविष्य है तो दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी के भीतर का दबाव। इसी बीच, शरद पवार ने हर बार की तरह इस बार भी अपनी चुप्पी साध ली है, जिससे सियासी कयासों का बाजार और गर्म हो गया है। मगर इस सस्पेंस के बीच बीजेपी के एक कद्दावर नेता ने एनसीपी-एसपी (NCP-SP) के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।क्या शरद पवार की चुप्पी से बढ़ रहा है सस्पेंस?शरद पवार की चुप्पी का अपना एक राजनीतिक अर्थ होता है, जिसे समझना विरोधियों के लिए भी हमेशा से कठिन रहा है। फिलहाल एनसीपी-एसपी (NCP-SP) के भीतर और बाहर जिस तरह की चर्चाएं हैं, उनसे साफ है कि पवार अपनी अगली चाल बहुत सोच-समझकर चलने के मूड में हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे न तो महाविकास अघाड़ी को पूरी तरह से छोड़ने की स्थिति में हैं और न ही अपने पुराने सहयोगियों के साथ वैचारिक टकराव मोल लेना चाहते हैं। यही वह जगह है जहाँ पवार का अनुभव और उनकी 'साइलेंस' विपक्ष को परेशान कर रही है।बीजेपी नेता के बयान ने खोली एनसीपी-एसपी की पोलबीजेपी नेता ने सस्पेंस को तब खत्म कर दिया जब उन्होंने दावा किया कि एनसीपी-एसपी के भीतर एक बड़ा वर्ग अब पवार की वर्तमान नीतियों से नाखुश है। बीजेपी नेता के मुताबिक, आने वाले समय में एनसीपी-एसपी में टूट या बदलाव की खबरें सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत हो सकती हैं। बीजेपी की ओर से किए गए इस दावे ने शरद पवार के सामने एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है। क्या यह वास्तव में एनसीपी-एसपी को तोड़ने की रणनीति का हिस्सा है या फिर महज एक मनोवैज्ञानिक दबाव, यह आने वाले कुछ ही दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।पवार के सामने विकट 'धर्मसंकट'शरद पवार के सामने एक तरफ महाविकास अघाड़ी में अपना सम्मान बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ पार्टी के उन नेताओं को संभालने की जो बीजेपी के बढ़ते प्रभाव से डरे हुए हैं। बीजेपी का यह दावा कि उन्होंने एनसीपी-एसपी के सस्पेंस को समझ लिया है, शरद पवार की रणनीति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बनाता है। पवार अगर बोलते हैं, तो गठबंधन टूटने का खतरा है और यदि चुप रहते हैं, तो पार्टी में बिखराव की आशंका बनी हुई है। राजनीति के इस महाकुंभ में शरद पवार का अगला कदम क्या होगा, यह देखना
आगामी चुनावों की आहट के बीच कांग्रेस पार्टी एक बार फिर गहरे सियासी भंवर में फंसी नजर आ रही है। हालिया घटनाक्रमों और राजनीतिक विश्लेषणों की मानें तो पार्टी के सामने तीन बड़े मुद्दे—नेतृत्व की सक्रियता, संगठन में समन्वय की कमी और जनता के बीच बढ़ती दूरी—बड़ी बाधा बनकर उभरे हैं। पार्टी के रणनीतिकार और जमीनी कार्यकर्ता इस बात से खासे परेशान हैं कि महत्वपूर्ण राजनीतिक दौरों के दौरान राहुल गांधी की विदेश यात्राओं ने पार्टी के नैरेटिव को कमजोर कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन दौरों की भारी कीमत कांग्रेस को चुनावी नतीजों और जनसमर्थन के रूप में चुकानी पड़ रही है।आखिर क्यों खाली हाथ रह गई कांग्रेस?राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब देश में महंगाई, बेरोजगारी और स्थानीय शासन जैसे बड़े मुद्दों पर विपक्ष को आक्रामक रुख अपनाकर सरकार को घेरना चाहिए था, तब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का नदारद होना कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने का काम कर रहा है। कांग्रेस के अंदरखाने भी इस बात की चर्चा है कि 'वैक्यूम' की स्थिति ने विपक्षी स्पेस को पूरी तरह खाली छोड़ दिया है, जिसे अन्य क्षेत्रीय दल भरने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस जिस तरह से इन मुद्दों को भुनाने में नाकाम रही, उसने एक बार फिर संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।नेतृत्व और सक्रियता का बड़ा संकटकिसी भी चुनाव में नेतृत्व की मौजूदगी सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय में जब जनता सड़क पर है और कई महत्वपूर्ण मसले सरकार के खिलाफ जा रहे हैं, राहुल गांधी का विदेश दौरा पार्टी की प्राथमिकता को लेकर संदेह पैदा करता है। यही कारण है कि पार्टी के सीनियर नेता और समर्थक भी असमंजस में हैं। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि पार्टी गंभीर मुद्दों पर संघर्ष करने के बजाय 'ऑप्शनल पॉलिटिक्स' कर रही है। कांग्रेस की यह विफलता अब पार्टी के लिए एक अस्तित्व का सवाल बनती जा रही है, क्योंकि लगातार चुनावी हार के बाद भी पार्टी अपनी कार्यशैली में अपेक्षित सुधार नहीं ला पाई है।क्या अब भी संभलने का है मौका?सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी इन गलतियों से सबक लेगी? यदि पार्टी को अपनी खोई हुई साख वापस लानी है, तो उसे अपनी प्राथमिकताएं फिर से तय करनी होंगी। जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करना और नेतृत्व का हरदम सक्रिय रहना ही एकमात्र रास्ता बचा है। यदि पार्टी ने इसी तरह से महत्वपूर्ण मौकों पर अपने नेतृत्व की अनुपस्थिति के कारण मुद्दों को हाथ से फिसलने दिया, तो आने वाले समय में कांग्रेस के लिए और भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में कांग्रेस अपने संगठन को फिर से चुस्त-दुरुस्त कर पाती है या फिर वह इन्ही पुराने चक्रव्यूह में फंसकर रह जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को होटल ताज लेक फ्रंट में 'एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0:जीसीसी- डेटा सेंटर एवं सेमीकंडक्टर' का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की शुरुआत में राज्य जीसीसी, डाटा सेंटर और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के विकास पर केंद्रित लघु ...
संसद के आगामी सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस बार इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए एक अचूक रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष, खासकर कांग्रेस की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए सरकार ने सदन के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर तैयारी पूरी कर ली है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कदम न केवल देश की आधी आबादी को साधने का प्रयास है, बल्कि विपक्षी दलों को पूरी तरह से मात देने का एक बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' भी है।क्या है सरकार का 'फुल प्रूफ' प्लान?इस बार सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—किसी भी सूरत में महिला आरक्षण बिल को संवैधानिक दर्जा दिलाना। सरकार ने इस बिल को व्यापक समर्थन के साथ पेश करने का प्लान बनाया है, ताकि विपक्ष के पास विरोध के लिए कोई ठोस आधार न बचे। इसके साथ ही परिसीमन (Delimitation) बिल को जोड़ना सरकार की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों विधेयकों को एक साथ लाकर सरकार न केवल जनसांख्यिकीय बदलावों को प्रतिबिंबित करना चाहती है, बल्कि सीटों के नए समीकरणों के जरिए अपनी राजनीतिक स्थिति को और अधिक मजबूत करना चाहती है।कांग्रेस के लिए खड़ी होगी बड़ी चुनौतीकांग्रेस समेत विपक्षी दल अक्सर इन बिलों पर तकनीकी पेच और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाकर गतिरोध पैदा करते रहे हैं। हालांकि, इस बार सरकार ने हर संभावित विरोध का काट तैयार कर लिया है। सरकार की रणनीति है कि बिल को इस तरह से पेश किया जाए कि विरोध करने वाला दल खुद को 'महिला विरोधी' साबित करने के जोखिम में पड़ जाए। अगर कांग्रेस या अन्य दल इस बार बाधा डालने की कोशिश करते हैं, तो सरकार इसे जनता के बीच ले जाने और विपक्ष की 'अड़ंगा नीति' को उजागर करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे कांग्रेस के लिए बैकफुट पर आना तय है।देश की राजनीति में आएंगे बड़े बदलावमहिला आरक्षण बिल का पारित होना भारतीय राजनीति के इतिहास में एक युगान्तकारी घटना होगी, जिससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी। साथ ही, परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी नक्शा बदल जाएगा, जिससे आने वाले चुनावों में नए वोट बैंक का उदय होगा। सत्ता पक्ष को उम्मीद है कि इन सुधारों से उन्हें आगामी चुनावों में भारी बढ़त मिलेगी। कुल मिलाकर, यह सरकार का वह राजनीतिक दांव है जिसे नकारा जाना विपक्ष के लिए मुश्किल होगा और जो आने वाले दशकों तक भारतीय राजनीति की दिशा तय करेगा।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अभिषेक मनु सिंघवी की दलील काम आई, 'गाय-बछड़ा' प्रतीक चिह्न पर लगी मुहर
सुप्रीम कोर्ट में चल रही एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप हो गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की प्रभावी दलीलों के बाद शीर्ष अदालत ने एक अहम आदेश जारी किया है। इस फैसले के साथ ही अब राजनीतिक गलियारों में 'गाय-बछड़ा' प्रतीक चिह्न के उपयोग का रास्ता साफ हो गया है। यह जीत न केवल कानूनी मोर्चे पर महत्वपूर्ण है, बल्कि विजय सरकार और उनसे जुड़े समर्थकों की लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी मांग को भी पूरा करती है।कोर्ट में सिंघवी की धारदार दलीलेंसुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा को उसके चुनाव चिह्न या सांस्कृतिक प्रतीक से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपनी दलीलों में कानूनी बारीकियों और ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए अदालत को समझाया कि इस प्रतीक की अनुमति न देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे को सीमित करने जैसा है। सिंघवी ने तर्क दिया कि यह प्रतीक किसी विशेष समुदाय की भावना को ठेस नहीं पहुँचाता, बल्कि यह एक राजनीतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ है। उनकी इन तर्कों ने अंततः पीठ को प्रभावित किया और कोर्ट ने इसकी अनुमति प्रदान कर दी।क्या थी विजय सरकार की मांग?विजय सरकार और उनके सहयोगियों का तर्क था कि 'गाय-बछड़ा' का प्रतीक ग्रामीण भारत और भारतीय कृषि संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। लंबे समय से वे चुनाव आयोग और अदालतों के सामने यह दलील देते आए थे कि उनकी राजनीतिक विचारधारा इस प्रतीक के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद, विजय सरकार की इस मांग को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस जीत के बाद आने वाले चुनावों में इसका असर सीधे मतदाताओं पर पड़ेगा और पार्टी इसे एक बड़े 'विक्ट्री पॉइंट' के रूप में पेश करेगी।फैसले का राजनीतिक असर क्या होगा?कोर्ट के इस फैसले ने न केवल कानूनी बहस पर विराम लगा दिया है, बल्कि इसे एक बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। अब जबकि अदालत ने इसे काटने या रोकने के बजाय इसकी वैधता पर मुहर लगा दी है, तो उम्मीद है कि आगामी अभियानों में यह प्रतीक चिह्न पूरी मजबूती के साथ दिखाई देगा। यह फैसला विपक्षी दलों के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है, क्योंकि अब विजय सरकार इसे अपनी सांस्कृतिक और वैचारिक जीत के रूप में भुनाने की तैयारी में है। देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस फैसले को किस नजरिए से लेती है और यह राजनीतिक समीकरणों में कितना बदलाव लाता है।
सुप्रीम कोर्ट से 27 लोगों को बड़ी राहत, असम में ‘विदेशी’ घोषित करने के आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने असम में ‘विदेशी’ घोषित किए गए 27 लोगों को राहत देते हुए फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट के आदेश रद्द कर मामलों की नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया है।
CBSE Class 10th Phase 2 Result 2026 Live Updates: क्या आज खत्म होगा इंतजार? सीबीएसई 10वीं के दूसरे बोर्ड रिजल्ट (Phase II) को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है और छात्र इंटरनेट पर लगातार एक ही सवाल पूछ रहे हैं— रिजल्ट कब आएगा?
सोचा था 1100 रुपए की बुढ़ापा पेंशन निकालेंगे, लेकिन जैसे ही पासबुक प्रिंट हुई, अकाउंटेंट के हाथ-पांव फूल गए... बिहार के समस्तीपुर जिले के सरायरंजन से एक ऐसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने बैंक अधिकारियों से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। ...
1000 रुपये के जुर्माने ने फूंक दी बारूद, बालेन शाह सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरा नेपाल का जेन-Z
नेपाल की राजधानी काठमांडू इन दिनों भारी तनाव की चपेट में है। सड़कों पर केवल भीड़ नहीं, बल्कि सत्ता के खिलाफ एक नया आक्रोश दिख रहा है। इसकी शुरुआत महज 1000 रुपये के एक मामूली जुर्माने से हुई, लेकिन अब यह आग पूरे नेपाल में फैल चुकी है। काठमांडू के मेयर बालेन शाह के फैसलों और उनकी कार्यशैली के खिलाफ अब नेपाल का 'जेन-Z' (युवा पीढ़ी) लामबंद हो गया है। एक प्रदर्शनकारी की दुखद मौत के बाद स्थिति और भी विस्फोटक हो गई है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।जुर्माने से शुरू हुआ विरोध, कैसे बनी बड़ी जंग?सब कुछ तब शुरू हुआ जब प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के उल्लंघन के नाम पर 1000 रुपये का भारी जुर्माना वसूलना शुरू किया। आम जनता और छोटे कारोबारियों ने इसे 'तानाशाही' करार दिया। काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जो अक्सर अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं, इस बार जनता के निशाने पर हैं। सड़कों पर चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व अब नेपाल का युवा कर रहा है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से एकजुट होकर सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर कर रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवक की मौत ने आग में घी डालने का काम किया है।सत्ता बनाम जनता: क्यों गुस्से में है जेन-Z?नेपाल के युवा वर्ग का मानना है कि मेयर बालेन शाह की नीतियां बुनियादी समस्याओं को हल करने के बजाय आम आदमी पर आर्थिक बोझ डाल रही हैं। बालेन शाह, जो पहले एक रैपर थे और युवाओं में बेहद लोकप्रिय थे, अब अपनी ही 'यूथ बेस' के विरोध का सामना कर रहे हैं। जेन-Z का कहना है कि सरकार को भ्रष्टाचार और महंगाई पर लगाम लगानी चाहिए, न कि गरीब जनता की जेब पर जुर्माना लगाकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता और जुर्माने के तुगलकी फरमान वापस नहीं लिए जाते, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।नेपाल के लिए बड़े संकट की आहटसड़कों पर बढ़ती यह भीड़ अब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। काठमांडू के मुख्य चौराहों पर सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है, लेकिन युवाओं का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने समय रहते युवाओं की मांगों पर गौर नहीं किया, तो यह विरोध नेपाल के अन्य शहरों में भी फैल सकता है। मेयर शाह की साख और बालेन सरकार की कार्यप्रणाली इस वक्त अपनी सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रही है। क्या नेपाल की सरकार युवाओं के गुस्से को शांत कर पाएगी या यह आंदोलन किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की नींव रखेगा?
ट्रंप का बड़ा दावा, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान फिर आमने-सामने
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह समुद्री मार्ग कमर्शियल जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खुला और सुरक्षित है। हालांकि, उनके इस दावे के ठीक उलट धरातल पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से हवाई हमलों का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रूट पर फिर से संकट के बादल मंडराने लगे हैं।अमेरिका के नए हमलों से बढ़ी तनातनीट्रंप के दावों के बावजूद, पेंटागन ने पुष्टि की है कि होर्मुज के पास ईरान समर्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर अमेरिकी सेना ने नए हवाई हमले किए हैं। इन हमलों का मकसद क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को सुरक्षित रखना और ईरानी आक्रामकता पर लगाम लगाना बताया गया है। वहीं, तेहरान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसे एक 'खतरनाक कदम' करार दिया है। जानकार मानते हैं कि ट्रंप का बयान घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को शांत रखने की एक कोशिश हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव गहराता जा रहा है।ग्लोबल सप्लाई चेन पर क्या होगा असर?होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह रास्ता है जहाँ से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल की आपूर्ति होती है। यदि अमेरिका और ईरान का यह संघर्ष और आगे बढ़ा, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। अमेरिका का कहना है कि वह जहाजों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ईरान की ओर से दी गई धमकियां वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं। तेल के दामों में होने वाली कोई भी बढ़ोत्तरी भारत सहित दुनिया भर के उन देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी खाड़ी मार्ग पर निर्भर हैं।निवेशकों और आम आदमी के लिए क्या है संकेत?वर्तमान में होर्मुज के आसपास की स्थिति 'हाई अलर्ट' पर है। जहां एक ओर अमेरिका सैन्य शक्ति के दम पर रास्ते को सुरक्षित करने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान की आक्रामक नीति ने पूरे इलाके को एक बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों और कमोडिटी बाजार में आने वाली हलचल पर नजर रखें। आम आदमी के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इन हवाई हमलों का असर आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आता है, क्योंकि खाड़ी के देशों में अस्थिरता का सीधा कनेक्शन आम जनता की जेब से जुड़ा होता है।
समुद्री सुरक्षा पर खतरा! भारतीय जहाज पर हमला, 11 नाविकों में से एक लापता होने से हड़कंप
अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में एक भारतीय जहाज पर हुए अचानक हमले ने वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। मिली जानकारी के अनुसार, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दौरान जहाज पर सवार 11 भारतीय नाविकों में से एक के लापता होने की खबर है, जिससे नाविकों के परिवारों और सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है। भारत सरकार ने इस घटना को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए मामले पर सख्त रुख अपनाया है।क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ हमला?समुद्री लुटेरों या अज्ञात हमलावरों द्वारा जहाज को निशाना बनाए जाने की यह घटना बेहद सुनियोजित नजर आती है। हमले के दौरान जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और अफरा-तफरी के बीच एक भारतीय नाविक लापता हो गया। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका पहले भी ऐसी घटनाओं के लिए संवेदनशील रहा है। हमले के तुरंत बाद, संबंधित शिपिंग कंपनियों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन (SAR) तेज कर दिया है, ताकि लापता नाविक का पता लगाया जा सके और बाकी 10 भारतीय सुरक्षित वापस लौट सकें।भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रियाभारत ने इस हमले को समुद्री सुरक्षा के वैश्विक नियमों का उल्लंघन बताते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय लगातार संबंधित देशों की सरकारों और दूतावासों के संपर्क में हैं ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारत का स्पष्ट संदेश है कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में भारतीय जहाजों और भारतीय नाविकों को निशाना बनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने प्रभावित नाविकों के परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।समुद्री सुरक्षा और नाविकों के लिए बड़ा सबकइस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। आए दिन समुद्री व्यापारिक मार्गों पर होते ऐसे हमले न केवल जान-माल का नुकसान करते हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को भी बाधित करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जहाजों पर सुरक्षा के आधुनिक उपकरणों और सशस्त्र गार्ड्स की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए। भारतीय नाविक जो अपनी जान जोखिम में डालकर दुनिया भर में व्यापार को गति दे रहे हैं, उनकी सुरक्षा अब शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए।
LTIMindtree Q1 Results: नतीजों के बाद शेयर में सुस्ती, क्या निवेश का यह सही मौका
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी LTIMindtree (अब LTM Limited) ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 17% की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो 1,468.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। वहीं, परिचालन से राजस्व (Revenue) भी 18% बढ़कर 11,608 करोड़ रुपये रहा है। इसके बावजूद, बाजार में आज शेयर की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशक असमंजस में हैं कि इस स्तर पर क्या रणनीति अपनाई जाए।नतीजों में क्या रहा खास?LTIMindtree के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी के मार्जिन में भी सुधार देखने को मिला है। Q1 FY27 में EBIT मार्जिन बढ़कर 15.5% हो गया है, जो पिछली तिमाही में 15.1% था। कंपनी का 'बुक-टू-बिल' अनुपात 1.4x रहा है, जो भविष्य में मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन और रेवेन्यू विजिबिलिटी की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का डिजिटल और AI-आधारित सर्विस सेगमेंट काफी तेजी से बढ़ रहा है, जो इसे मौजूदा चुनौतियों के बीच अन्य आईटी कंपनियों से अलग खड़ा करता है।ब्रोकरेज का क्या है नजरिया?नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज हाउसेस ने LTIMindtree पर अपना बुलिश रुख बरकरार रखा है। हालांकि बाजार में कुछ प्रॉफिट बुकिंग देखी जा रही है, लेकिन लंबी अवधि के जानकारों का मानना है कि स्टॉक में 53% तक का अपसाइड (Upside) संभव है। वर्तमान में, DAM Capital जैसे ब्रोकरेज ने शेयर पर 'न्यूट्रल' रेटिंग बनाए रखते हुए इसे 4,050 रुपये का टारगेट दिया है, जो इसके मौजूदा प्राइस के आसपास है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर शेयर इस स्तर पर खुद को संभाल लेता है, तो आने वाले महीनों में इसमें और तेजी देखी जा सकती है।निवेशकों के लिए क्या होनी चाहिए रणनीति?अगर आप LTIMindtree में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट घबराने के लिए नहीं बल्कि 'सही एंट्री पॉइंट' खोजने के लिए हो सकती है। आईटी सेक्टर में AI को लेकर जो बदलाव आ रहे हैं, उसका सीधा फायदा LTIMindtree को मिल रहा है। सलाह यह है कि एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करें। यदि आप पहले से ही इसमें निवेशित हैं, तो बाजार में अभी बनी अस्थिरता (Volatility) को देखते हुए धैर्य रखना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय होगा। कंपनी का कर्ज-मुक्त होना और डिजिटल पर फोकस इसे भविष्य के लिए एक मजबूत दांव बनाता है।
बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, निवेशकों की बढ़ी चिंता
शेयर बाजार में आज भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। सप्ताह के शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजार सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह से लड़खड़ा गए हैं। सेंसेक्स 100 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है, वहीं निफ्टी 24,150 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया है। बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण एशियाई बाजारों में आई बड़ी सुनामी है, विशेषकर कोरियाई इंडेक्स 'कोस्पी' (KOSPI) में आई 8% की ऐतिहासिक गिरावट ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है।क्यों गिर रहा है बाजार? जानिए बड़ी वजहबाजार के जानकारों का मानना है कि घरेलू बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से 'इफेक्ट ऑफ ग्लोबल सेंटीमेंट्स' है। कोस्पी में आई भारी बिकवाली का असर अन्य एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजारों पर भी दिख रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से हो रही बिकवाली और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के माहौल ने निवेशकों का कॉन्फिडेंस कम कर दिया है। इसके अलावा, तकनीकी स्तर पर निफ्टी के 24,150 के स्तर को होल्ड न कर पाने के कारण बाजार में और भी बिकवाली का दबाव बढ़ा है।निवेशकों के लिए क्या है सलाह?बाजार में आई इस गिरावट को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि घबराहट में आकर बिकवाली (Panic Selling) करना घाटे का सौदा हो सकता है। फिलहाल बाजार 'अति-संवेदनशील' (Hyper-sensitive) मोड में है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लंबी अवधि के निवेशक इस गिरावट को एक अवसर की तरह देखें और अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों पर नजर रखें। हालांकि, इंट्राडे ट्रेडर्स को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि अगले कुछ घंटों में बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकते हैं।अब आगे क्या होगा?भारतीय बाजार की नजरें अब अमेरिकी बाजार के संकेतों और ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों पर टिकी हैं। यदि निफ्टी 24,100 के निचले स्तर को डिफेंड कर लेता है, तो बाजार में रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो में ज्यादा रिस्क न लें और बाजार की स्थिरता का इंतजार करें। इस समय ग्लोबल मार्केट का दबाव घरेलू निवेशकों के लिए परीक्षा की घड़ी जैसा है, जहां धैर्य और सही स्टॉप-लॉस का उपयोग ही आपको बड़े नुकसान से बचा सकता है।
Gold ETF में निवेश का सही मौका: एक्सपर्ट्स से जानें सुरक्षित मुनाफा कमाने की सटीक रणनीति
सोने में निवेश करना भारतीय निवेशकों की पहली पसंद रही है, लेकिन आज के डिजिटल युग में फिजिकल गोल्ड के बजाय 'Gold ETF' (गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में निवेश करना अधिक सुरक्षित और फायदेमंद माना जा रहा है। क्या अभी Gold ETF में पैसा लगाना सही है? बाजार के जानकारों और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमतों में जारी उठा-पटक के बीच यह एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है, बशर्ते आपके पास निवेश की सही समझ और रणनीति हो।Gold ETF में निवेश क्यों है समझदारी भरा फैसला?फिजिकल गोल्ड खरीदने में सबसे बड़ी चुनौती उसकी शुद्धता और सुरक्षित रखने का खर्च होता है, लेकिन Gold ETF इन दोनों समस्याओं का समाधान है। यह पूरी तरह से डिजिटल है और स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होता है, जिसे आप अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी खरीद या बेच सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोना एक सुरक्षित 'हेवन' की तरह काम करता है। मौजूदा बाजार स्थितियों में, गोल्ड को पोर्टफोलियो में शामिल करने से रिस्क कम होता है और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना बनी रहती है।निवेश के लिए अपनाएं यह खास रणनीतिविशेषज्ञों के अनुसार, Gold ETF में एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय 'सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान' (SIP) का तरीका अपनाना सबसे बेहतर रणनीति है। इससे आप बाजार के उतार-चढ़ाव (Volatility) का फायदा उठा सकते हैं और खरीदारी की औसत लागत कम कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा ही सोने में रखें। यह आवंटन आपको बाजार की अस्थिरता के दौरान सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। साथ ही, सोने की कीमतों पर नजर रखें और हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाते रहना एक स्मार्ट अप्रोच है।कैसे करें सही समय का चुनावनिवेश का सही समय वह है जब आप अनुशासित होकर लंबे नजरिए के साथ निवेश करें। हालांकि, सोने की कीमतों में गिरावट के दौरान इसे खरीदना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। एक्सपर्ट्स निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव और डॉलर की मजबूती पर नजर बनाए रखें, क्योंकि इनका सीधा असर गोल्ड ईटीएफ की कीमतों पर पड़ता है। यदि आप लंबी अवधि (3-5 वर्ष से अधिक) का लक्ष्य लेकर चलते हैं, तो वर्तमान समय निवेश के लिए एक अच्छा प्रवेश बिंदु (Entry Point) हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आरोप लगाया कि 'मजार-ए-शुहादा' जाने से रोकने के लिए सोमवार को बारामूला जिले के कई वरिष्ठ नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने नेताओं को नजरबंद करने पर इसकी आलोचना भी की।
2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने 2012 में तत्कालीन चुनाव आयुक्त एस. वाई कुरैशी से कहा था- मैं आत्महत्या कर लूंगा। इस बात का खुलासा अब मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई कुरैशी की किताब India and I: A Hundred Memories, Not a Memoir में ...
LIVE: बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी का आरोपी गिरफ्तार
Latest News Today Live Updates in Hindi : उत्तराखंड पुलिस ने बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी को देहरादून से गिरफ्तार कर लिया। पल पल की जानकारी...
सुरमयी गीतों के साथ स्व. ओमप्रकाश शर्मा जी को दी गई भावभीनी पुष्पांजलि
इंदौर। संगीत की शाम आपके नाम ग्रुप के तत्वावधान में स्व. श्री ओमप्रकाश शर्मा जी की पावन स्मृति में एक भव्य और भावपूर्ण संगीतमयी संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों और संगीत प्रेमियों ने सुरों के माध्यम से उन्हें ...
कानपुर में सड़क किनारे खड़े ट्रक से स्कॉर्पियो की जोरदार टक्कर, दो बच्चों समेत तीन की मौत
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक दुर्घटना में स्कॉर्पियो कार सवार दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कोलकाता एयरपोर्ट परिसर स्थित 136 वर्ष पुरानी मस्जिद में प्रवेश अनिश्चितकाल के लिए रोका गया
कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की 136 वर्ष पुरानी गौरिपुर जामा मस्जिद में सुरक्षा कारणों से प्रवेश अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। प्रशासन नई व्यवस्था पर विचार कर रहा है।
मास्क पहनकर आम यात्री बने मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे न होने पर उतारा; ड्राइवर-कंडक्टर सस्पेंड
कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने मास्क पहनकर बेंगलुरु की 10 BMTC बसों में औचक निरीक्षण किया। एक बस में कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उन्हें उतरने को कहा। शिकायत सही मिलने पर संबंधित ड्राइवर और कंडक्टर को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पहली शादी समाप्त किए बिना किसी अन्य पुरुष के साथ रहने वाली महिला दूसरे पुरुष से पत्नी के रूप में भरण-पोषण नहीं मांग सकती। अदालत ने पुत्री के भरण-पोषण का अधिकार बरकरार रखा।
ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल मस्जिद विवादों में हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने मध्यस्थता के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। सभी पक्षों ने इन संवेदनशील मामलों के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया है।
टिकट न मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने दिखाई एकजुटता, शिवसेना यूबीटी के प्रस्ताव को ठुकराया
दतिया उपचुनाव में टिकट न मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए शिवसेना यूबीटी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में सक्रिय प्रचार का भी ऐलान किया।
अमेरिका ने ईरान पर फिर बड़ा हमला करते हुए 6 राज्यों में भीषण बमबारी की। अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरी दिन भी ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया। ईरान ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
Gorakhpur Panipat Expressway Route Update: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) को हरियाणा (Haryana) से जोड़ने वाले बेहद महत्वाकांक्षी गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे (Gorakhpur-Panipat Expressway) परियोजना से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है. इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत संतकबीरनगर जिले की मेंहदावल तहसील के रूट में एक बड़ा बदलाव किया गया है.भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस एक्सप्रेसवे के दायरे को बढ़ाते हुए मेंहदावल तहसील के तीन नए गांवों— सोहरवलिया, मिश्रौलिया मिश्र और मईला को भी इस महा-परियोजना में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया है. इस प्रशासनिक फैसले से पहले मेंहदावल तहसील के 29 गांव इस एक्सप्रेसवे के रूट में आ रहे थे, लेकिन अब इन 3 नए गांवों की एंट्री के बाद यहां एक्सप्रेसवे का हिस्सा बनने वाले गांवों की कुल संख्या बढ़कर 32 हो गई है.इंटर-सेक्शन बनने से 20 गांवों को मिलेगी शानदार कनेक्टिविटीइन तीन नए गांवों को एक्सप्रेसवे की जद में लाने के पीछे एनएचएआई (NHAI) की एक बड़ी रणनीतिक और व्यावहारिक सोच है:विशेष इंटर-सेक्शन का निर्माण: हाईवे अथॉरिटी ने निर्णय लिया है कि इन तीनों नए शामिल किए गए गांवों की सीमा में एक अत्याधुनिक इंटर-सेक्शन (Inter-Section) बनाया जाएगा, जो एक्सप्रेसवे पर चढ़ने और उतरने का मुख्य पॉइंट होगा.आसपास के इलाकों को फायदा: इस इंटर-सेक्शन की सुविधा शुरू होने से न केवल इन 3 गांवों के निवासियों को सीधा फायदा मिलेगा, बल्कि इनके पड़ोस में स्थित लगभग 15 से 20 अन्य ग्रामीण इलाकों के लोगों को भी एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा.स्थानीय किसानों की चमकेगी किस्मत; कृषि और व्यापार को मिलेगी रफ्तारएक्सप्रेसवे पर बनने वाले इस नए इंटर-सेक्शन का सबसे बड़ा और सीधा लाभ स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को मिलने वाला है:मंडियों तक पहुंच होगी आसान: अब तक संकरे रास्तों के कारण किसानों को अपनी फसल और हरी सब्जियां बड़ी मंडियों तक ले जाने में काफी समय और भारी किराया गंवाना पड़ता था. एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ने के बाद परिवहन की लागत (Transportation Cost) और समय दोनों में भारी कटौती होगी.फसल का मिलेगा बेहतर दाम: समय पर और सीधे तेज रफ्तार मार्ग से जुड़ने के कारण किसान अपने कृषि उत्पादों को दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की बड़ी मार्केट में बहुत कम समय में बेच सकेंगे, जिससे उन्हें अपनी उपज का सटीक और अधिक मूल्य मिल सकेगा.भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रशासनिक तैयारीमेंहदावल तहसील प्रशासन इस बड़े प्रोजेक्ट को समय पर जमीन पर उतारने के लिए तेजी से काम कर रहा है:गाटा सत्यापन का कार्य पूरा: इससे पहले शामिल किए गए 29 गांवों में राजस्व विभाग ने खेतों का चिह्नांकन (Marking), रकबे का सटीक मिलान और भूमि के मालिकाना हक (स्वामित्व) की जांच जैसी सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं.भौतिक सत्यापन और मुआवजा: प्रशासन अब इन सभी चिन्हित जमीनों का स्थलीय और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) शुरू करने की तैयारी में जुट गया है. जैसे ही यह जमीनी सर्वे पूरा होगा, प्रभावित किसानों की भूमि के अधिग्रहण और उन्हें उचित सरकारी मुआवजा वितरण की फाइल को तेजी से आगे बढ़ा दिया जाएगा.₹35,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे एक नजर मेंप्रोजेक्ट के मुख्य बिंदुआधिकारिक विवरणकुल लंबाई (Total Length)लगभग 747 किलोमीटर (ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड)अनुमानित लागत (Total Budget)₹35,000 करोड़रूट का दायराहरियाणा के पानीपत से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के 22 जिलों से गुजरेगागोरखपुर-बस्ती मंडल में लंबाईकुल प्रस्तावित लंबाई 86.24 किलोमीटरमेंहदावल तहसील में हिस्साअकेले इस तहसील से 22.5 किलोमीटर का पैच गुजरेगानिर्माण की समयावधिवर्ष 2026 में काम शुरू होने की उम्मीद, ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्यसिद्धार्थनगर से लखीमपुर तक खुलेगा औद्योगिक विकास का बंद द्वारयह एक्सप्रेसवे मेंहदावल तहसील की सीमाओं को पार करने के बाद सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे तराई के प्रमुख जिलों से होते हुए आगे बढ़ेगा. इस परियोजना का मुख्य एजेंडा पिछड़े माने जाने वाले पूर्वांचल (Eastern UP) को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के औद्योगिक कॉरिडोर के साथ एक सीधी और निर्बाध हाई-स्पीड सड़क कनेक्टिविटी देना है.ढाई साल के भीतर पूरा होने वाले इस एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक पार्क और कोल्ड स्टोरेज चेन विकसित किए जाने की योजना है, जिससे इस पूरे ग्रामीण बेल्ट में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र का आर्थिक कायाकल्प हो सकेगा.
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), राजस्थान (Rajasthan) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बीच कनेक्टिविटी को एक नई और हाई-स्पीड रफ्तार मिलने जा रही है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा आगरा और ग्वालियर के बीच 88 किलोमीटर लंबा आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे (Agra-Gwalior Expressway) तैयार किया जा रहा है.यह अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल इन तीन राज्यों के बीच व्यापारिक और पर्यटन संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि रोजाना सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों के कीमती समय और ईंधन की भी भारी बचत करेगा.2.5 घंटे का सफर मात्र 75 मिनट में होगा पूरावर्तमान में यदि कोई व्यक्ति आगरा से ग्वालियर की यात्रा करता है, तो उसे धौलपुर (राजस्थान) और मुरैना (मध्य प्रदेश) के संकरे रास्तों और भारी शहरी ट्रैफिक से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके कारण इस सफर में 2.5 से 3 घंटे का लंबा समय बर्बाद हो जाता है.120 की रफ्तार से फर्राटा: इस नए 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद, गाड़ियां बिना किसी रुकावट के 100 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी.दूरी आधी रह जाएगी: एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा से ग्वालियर के बीच की यह दूरी घटकर महज 75 से 80 मिनट (करीब सवा घंटा) में सिमट जाएगी.आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे का रूट मैप और संरचनायह एक्सप्रेसवे बेहद अनूठी संरचना और भविष्य की जरूरतों (Future Expansion) को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है:शुरुआत और अंत: यह नया हाईवे आगरा के देवरी गांव से शुरू होकर मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सुसेरा गांव (बाईपास) पर जाकर समाप्त होगा.8 लेन तक विस्तार संभव: इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि आने वाले समय में ट्रैफिक बढ़ने पर इसे आसानी से 8 लेन तक चौड़ा किया जा सकेगा.पुल और फ्लाईओवर: 88 किलोमीटर के इस पैच में यात्रा को सुगम बनाने के लिए 8 बड़े पुल, 23 छोटे पुल, 6 बड़े फ्लाईओवर और 1 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण किया जा रहा है.वन्यजीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान (Chabal Eco-System):एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा संवेदनशील चंबल क्षेत्र से गुजरता है. इसलिए, चंबल वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी (Chambal Wildlife Sanctuary) के पास पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष 'ग्रीन बेल्ट' और वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए अत्याधुनिक अंडरपास (Animal Underpasses) बनाए जाएंगे ताकि पारिस्थितिकी तंत्र को कोई नुकसान न पहुंचे.दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा रूट; जानिए बजटइस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को बनाने में लगभग ₹4,613 करोड़ की भारी लागत आने का अनुमान है.चंबल एक्सप्रेसवे से जुड़ाव: यह एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे चलकर इसे मुरैना के पास प्रस्तावित 'चंबल एक्सप्रेसवे' से भी इंटरकनेक्ट किया जाएगा.कोटा-दिल्ली-मुंबई रूट: इस जुड़ाव के कारण यात्रियों को राजस्थान के कोटा के रास्ते सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर चढ़ने की सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल जाएगी, जिससे उत्तर से पश्चिम भारत का सफर बेहद सुगम हो जाएगा.कब तक पूरा होगा काम और क्या होगा फायदा?एनएचएआई (NHAI) के ताजा अपडेट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के सिविल कंस्ट्रक्शन के लिए 93% से अधिक भूमि का अधिग्रहण (Land Acquisition) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. वर्तमान में आगरा के कुछ गिने-चुने पॉकेट्स में मुआवजे की रकम को लेकर स्थानीय किसानों के साथ प्रशासनिक स्तर पर बातचीत चल रही है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा. प्राधिकरण का लक्ष्य है कि सभी बचे हुए निर्माण कार्यों को पूरा करके वर्ष 2027-2028 तक इसे आम जनता के यातायात के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाए.टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बूस्ट: यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पर्यटन उद्योग के लिए एक गेमचेंजर साबित होने वाला है. आगरा में ताजमहल (Taj Mahal) देखने आने वाले देश-विदेश के पर्यटक अब महज सवा घंटे में ग्वालियर के ऐतिहासिक किलों, महलों और सिंधिया संग्रहालय का दीदार करने आसानी से आ-जा सकेंगे, जिससे पूरे बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को एक नई संजीवनी मिलेगी.
उत्तर प्रदेश में मानसून (Monsoon in UP) के पूरी तरह एक्टिव होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के लिए प्रदेश में मौसम का बड़ा बुलेटिन जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश, वज्रपात (Lightning) और तेज आंधी चलने की प्रबल आशंका है. विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम के इस रौद्र रूप को लेकर बेहद सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है.इन 18 जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी (Orange Alert)मौसम वैज्ञानिकों ने आज 13 जुलाई को प्रदेश के जिन प्रमुख जिलों के लिए भारी वर्षा और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है, उनकी सूची इस प्रकार है:पश्चिमी यूपी के जिले: मेरठ, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, एटा, महामाया नगर (हाथरस) और मैनपुरी.पूर्वी व मध्य यूपी के जिले: कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया.पूर्वांचल के 7 जिलों में विशेष रेड-अलर्टपूर्वी उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी बेल्ट में आने वाले 7 जिलों में मूसलाधार बारिश के चलते स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसे हालात या जनजीवन अस्त-व्यस्त होने का अनुमान है. मौसम विभाग ने देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, बलरामपुर, महाराजगंज और सिद्धार्थनगर के प्रशासन व नागरिकों को विशेष रूप से अलर्ट पर रहने को कहा है.राजधानी लखनऊ के मौसम का हाल (Lucknow Temperature)अगर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बात करें, तो यहां आज आंशिक रूप से बादलों की आवाजाही बनी रहेगी. बादलों के बीच धूप निकलने से वातावरण में उमस (Humidity) का असर काफी ज्यादा रहेगा, जिससे राहगीरों को थोड़ी परेशानी हो सकती है.अधिकतम तापमान (Max Temp): 38 डिग्री सेल्सियस तक जाने का अनुमान.न्यूनतम तापमान (Min Temp): 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना.भारी बारिश से आम जनता के लिए बढ़ सकती हैं ये 5 मुश्किलेंमौसम विभाग ने भारी बारिश के दौरान होने वाले संभावित नुकसानों को लेकर भी एक गाइडलाइन जारी की है:शहरी जलभराव: तेज बारिश के कारण निचले इलाकों, मुख्य सड़कों और रेलवे अंडरपास में भारी पानी जमा हो सकता है.ट्रैफिक जाम: सड़कों पर जलजमाव और दृश्यता (Visibility) कम होने से यातायात में भारी बाधा आ सकती है.कच्चे मकानों को खतरा: तेज आंधी और पानी के थपेड़ों से ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों या कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है.बिजली संकट: आकाशीय बिजली गिरने और पेड़ टूटने से कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने की समस्या हो सकती है.खेती को नुकसान: मौसमी नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने से बागवानी और नई बोई गई फसलों को भी आंशिक नुकसान होने की आशंका है.मौसम विभाग की जरूरी एडवाइजरी (IMD Safety Advisory)IMD ने आम जनता से अपील की है कि वे तेज आंधी-बारिश और आकाशीय बिजली (Thunderstorm) कड़कने के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर यात्रा करने से बचें. जलभराव वाले रास्तों या खुले मैदानों में खड़े होने के बजाय किसी पक्के मकान की शरण लें. किसान भाई खेतों में काम करते समय बड़े पेड़ों के नीचे बिल्कुल न छिपें. आने वाले पूरे हफ्ते प्रदेश में मानसून की सक्रियता ऐसी ही बनी रहेगी, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आने की उम्मीद है.
उत्तर प्रदेश के हापुड़ (Hapur) जिले से एक ऐसा सनसनीखेज और हाई-वोल्टेज पारिवारिक ड्रामा सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर पुलिस महकमे तक हलचल मचा दी है. कहते हैं कि इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते, लेकिन जब यह सीक्रेट अफेयर किसी शादीशुदा जिंदगी के समानांतर चल रहा हो, तो अंजाम बेहद खौफनाक और तमाशेदार होता है. हापुड़ में एक पति अपनी सरकारी अस्पताल वाली प्रेमिका (नर्स) के साथ एक होटल में रंगरेलियां मना रहा था, लेकिन उसे भनक तक नहीं थी कि उसकी असली पत्नी पूरे मायके के कुनबे के साथ उसकी जासूसी कर रही थी.होटल के कमरे में पत्नी ने मारा छापायह पूरा मामला हापुड़ के नगर कोतवाली क्षेत्र का है. आरोपी पति को पूरा भरोसा था कि सरकारी अस्पताल की नर्स के साथ उसका यह अवैध संबंध हमेशा सीक्रेट रहेगा. लेकिन पत्नी को उसके इस कारनामे की भनक लग चुकी थी. पत्नी ने बिना कोई जल्दबाजी किए अपने भाइयों और परिवार वालों को साथ लिया और सीधे उस होटल में धावा बोल दिया, जहां दोनों ठहरे हुए थे.जैसे ही होटल के कमरे का दरवाजा खुला, प्रेमिका के सामने ही पति के होश उड़ गए. होटल के अंदर ही दोनों पक्षों में जमकर तू-तू, मैं-मैं और भारी हंगामा हुआ. होटल में अपनी फजीहत होते देख और बुरी तरह घिर चुके पति ने वहां से किसी तरह भाग निकलने में ही अपनी भलाई समझी.चलती बस रुकवाकर सरेराह की धुनाईहोटल से भागकर पति सीधे बस स्टैंड पहुंचा और शहर से रफूचक्कर होने के लिए एक चलती बस में सवार हो गया. लेकिन साले साहब और पत्नी ने हार नहीं मानी. उन्होंने फिल्मी अंदाज में पीछा करके चलती बस को बीच रास्ते में रुकवा लिया. इसके बाद पत्नी और उसके परिजन बस के अंदर दाखिल हुए और सीट पर छिपकर बैठे पति को कॉलर पकड़कर सरेआम पीटना शुरू कर दिया.हंगामा यहीं शांत नहीं हुआ, परिजनों ने दोनों को बस से नीचे खींचा और सड़क पर ले आए. बीच सड़क पर हुए इस जबरदस्त ड्रामे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि हाथापाई के कारण पति की टी-शर्ट पूरी तरह तार-तार हो चुकी है. पत्नी बीच सड़क पर उंगली दिखा-दिखाकर पति से धोखे का हिसाब मांग रही है और उसकी बेवफाई पर चिल्ला रही है.कॉलर पकड़कर घसीटते हुए थाने ले गए परिजनसड़क पर तमाशा होने के बाद पत्नी के मायके वालों ने कानून को हाथ में लेने के बजाय दोनों आरोपियों को सबक सिखाने की ठानी. परिजनों ने धोखेबाज पति और उसकी नर्स प्रेमिका दोनों को कॉलर और बांहों से दबोचा और जबरन घसीटते हुए सीधे नगर कोतवाली थाने ले आए.होटल के बंद कमरे से शुरू हुई यह आशिकी, बस की लाइव धुनाई से होते हुए अब सीधे पुलिस के लॉकअप तक पहुंच चुकी है. पीड़ित पत्नी ने थाने में पति और उसकी प्रेमिका के खिलाफ लिखित तहरीर दे दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी.
उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को और मजबूत करते हुए आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है. राजधानी लखनऊ को राज्य की औद्योगिक राजधानी कानपुर से जोड़ने वाले सबसे प्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (Lucknow-Kanpur Expressway) का आज 13 जुलाई 2026, सोमवार को भव्य लोकार्पण होने जा रहा है.केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री व लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संयुक्त रूप से इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के लिए उन्नाव (Unnao) जिले में एक्सप्रेसवे के किलोमीटर-51 पाडरी स्थित झाऊ खेड़ा में एक भव्य मंच और तीन हेलीपैड तैयार किए गए हैं. उद्घाटन के बाद 14 जुलाई की सुबह 08:00 बजे से यह एक्सप्रेसवे आम जनता के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा.देश का पहला बैरियर-फ्री और स्मार्ट एक्सप्रेसवे (NE-6)म्यूचुअल फंड की तरह ही यह बुनियादी ढांचा भी समय और ईंधन की भारी बचत करने वाला 'ग्रोथ इंजन' साबित होगा. नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (NE-6) के नाम से अधिसूचित यह 63 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे भारत का पहला पूरी तरह से बैरियर-फ्री एक्सप्रेसवे (Barrier-Free Expressway) है.मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक: इस कॉरिडोर में गाड़ियों को पारंपरिक टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी. इसमें आधुनिक MLFF टोलिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे वाहन बिना रुके सीधे गुजर सकेंगे और टोल ऑटोमैटिक कट जाएगा.एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट: पूरे रूट पर 24 घंटे पैनी नजर रखने के लिए किलोमीटर 27 और 35 पर दो हाई-टेक कंट्रोल रूम बनाए गए हैं. इसके अलावा 63 से ज्यादा पीटीजेट (PTZ) कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम (VIDS) और ऑटोमैटिक स्पीड रडार लगाए गए हैं. अगर कोई तय स्पीड से तेज गाड़ी चलाएगा, तो उसका ऑनलाइन चालान तुरंत कटकर मोबाइल पर आ जाएगा.120 की रफ्तार से मात्र 35 मिनट में तय होगा सफरअभी तक लखनऊ से कानपुर के बीच पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग इस्तेमाल करने पर लोगों को भारी जाम के कारण दो से ढाई घंटे का लंबा समय लग जाता था.समय की 60% बचत: इस नए 6 लेन (जो भविष्य में 8 लेन तक बढ़ सकता है) एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच की दूरी महज 35 से 45 मिनट में सिमट जाएगी. इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तय की गई है.लागत और निर्माण: लगभग ₹4,700 करोड़ की भारी लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट की आधारशिला 5 जनवरी 2022 को रखी गई थी. एनएचएआई (NHAI) द्वारा इसे रिकॉर्ड 1648 दिनों में पूरा किया गया है. इसमें लगभग 45 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड ग्रामीण हिस्सा और अमाउसी एयरपोर्ट के पास का 18 किलोमीटर लंबा विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है.यह शानदार हाईवे उन्नाव में बन रहे आगामी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) से भी एक बड़े इंटरचेंज के जरिए कनेक्ट होगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर, बुंदेलखंड और पूर्वांचल तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा. इसके साथ ही आज लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर बनने वाले ₹108 करोड़ के नए 4-लेन फ्लाईओवर का भी शिलान्यास किया जाएगा.
रोज सुबह की शुरुआत के साथ ही आम आदमी के बजट को सीधे प्रभावित करने वाली पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी हो जाती हैं. देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां (OMCs) हर दिन सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर के आधार पर ईंधन के नए रेट तय करती हैं. आज, सोमवार 13 जुलाई 2026 को भी उत्तर प्रदेश के तमाम प्रमुख शहरों के लिए पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जारी कर दिए गए हैं.अगर आप आज गाड़ी में तेल भरवाने के लिए घर से बाहर निकलने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि आज लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी समेत यूपी के बड़े शहरों में प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल किस भाव पर मिल रहा है.उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा दामयूपी के अलग-अलग जिलों में स्थानीय टैक्स (VAT) और माल ढुलाई के खर्च के कारण कीमतों में आंशिक अंतर देखने को मिलता है. आज के आधिकारिक रेट निम्नलिखित हैं:शहरपेट्रोल (₹/लीटर)डीजल (₹/लीटर)लखनऊ (Lucknow)₹101.86₹95.36नोएडा (Noida)₹101.96₹95.44प्रयागराज (Prayagraj)₹101.96₹95.46वाराणसी (Varanasi)₹101.96₹95.53गोरखपुर (Gorakhpur)₹102.13₹95.62मेरठ (Meerut)₹101.99₹95.46आगरा (Agra)₹101.66₹95.14कानपुर शहरी (Kanpur)₹101.56₹95.06अलीगढ़ (Aligarh)₹101.18₹95.38क्यों बढ़ रही हैं ईंधन की कीमतें? (Under Recovery & Global Market)हालिया समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुए इजाफे के पीछे वैश्विक परिस्थितियां और तेल कंपनियों का वित्तीय घाटा मुख्य कारण हैं. 15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹3-₹3 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद से कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है.केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने इस बढ़ोतरी के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और 'अंडर रिकवरी' (लागत से कम कीमत पर तेल बेचना) के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना लगभग ₹1,000 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था. अनुमानों के मुताबिक, यह कुल अंडर रिकवरी लगभग ₹1.98 लाख करोड़ तक पहुंचने की आशंका है, जिसमें से केवल एक तिमाही का घाटा ही करीब ₹1 लाख करोड़ के आसपास है.पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) के दाम जो पहले 64-65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर थे, वे बढ़कर लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गए थे. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश रहा जिसने साल 2022 के बाद से एक लंबे समय तक वैश्विक संकट के बावजूद ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ने दी थीं, लेकिन वर्तमान बाजार की विसंगतियों को देखते हुए तेल कंपनियों को वित्तीय रूप से मजबूत रखने के लिए कीमतों में संशोधन करना अनिवार्य हो गया था.
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्रांति की दिशा में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है. वैश्विक स्तर पर चल रहे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार और सूबे की जनता ने मिलकर रिकॉर्ड 40 करोड़ पौधरोपण (40 Crore Tree Plantation) का महालक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है.इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के नाम एक विशेष और भावुक 'पाती' (पत्र) लिखी है. सीएम योगी ने इस 'वृक्षारोपण महायज्ञ-2026' को जनभागीदारी का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए इसे नए उत्तर प्रदेश के सामर्थ्य, जनसंकल्प और प्रगति का अनूठा प्रतीक करार दिया है.सीएम योगी की 'पाती': हमारी संस्कृति और अरण्य सभ्यता का संदेशमुख्यमंत्री ने अपने विशेष पत्र में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए लिखा कि हमारी भारतीय सभ्यता मूल रूप से 'अरण्य सभ्यता' (Forest Civilization) रही है, जहां वेदों और पुराणों के काल से ही वृक्षों को देवताओं के समान पूजनीय और संरक्षण योग्य माना गया है.सीएम ने लिखा, प्रकृति और परमात्मा के बीच संतुलन बनाए रखने में वनों का सबसे बड़ा योगदान है. उत्तर प्रदेश की जनता ने जिस तरह अपनी माताओं के सम्मान में 40 करोड़ पौधों को रोपकर धरा का श्रृंगार किया है, वह न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा की एक मजबूत नींव है. यह महाअभियान साबित करता है कि जब सरकार और जनता एक संकल्प के साथ जुड़ते हैं, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी बौना साबित हो जाता है.'वृक्षारोपण महायज्ञ-2026' की 3 सबसे बड़ी बातेंऐतिहासिक जनभागीदारी (Massive Public Participation): इस अभियान की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम बनकर नहीं रहा. प्रदेश के गांवों, कस्बों, स्कूलों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों ने अपने घरों के आसपास, खेतों की मेड़ों पर और सार्वजनिक भूमि पर बढ़-चढ़कर पौधरोपण किया.मां के प्रति सम्मान और कृतज्ञता: 'एक पेड़ मां के नाम' के भावुक संदेश ने लोगों के दिलों को सीधे छुआ, जिसके कारण लोगों ने अपनी माताओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए इस अभियान को एक पवित्र आंदोलन का रूप दे दिया.पर्यावरण और इकोसिस्टम को मजबूती: विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ 40 करोड़ नए पौधों के रोपण से उत्तर प्रदेश के ग्रीन कवर (Green Cover Area) में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे भूजल स्तर में सुधार, वायु प्रदूषण में कमी और जैव विविधता (Biodiversity) को नई संजीवनी मिलेगी.मुख्यमंत्री ने अपने पत्र के अंत में प्रदेशवासियों से केवल पौधा लगाने तक सीमित न रहने, बल्कि उन पौधों की बच्चों की तरह देखभाल करने और उन्हें एक विशाल वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी उठाने की भी भावुक अपील की है.
आंध्र प्रदेश: वाईएस जगन 14 जुलाई को लापता मछुआरों के परिवारों से मिलेंगे
वाईएसआरसीपी विशाखापत्तनम जिला अध्यक्ष केके राजू ने घोषणा की कि पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को विशाखापत्तनम तट पर हाल ही में हुई नाव दुर्घटना में लापता हुए छह मछुआरों के परिवारों को सांत्वना देने के लिए उनसे मिलेंगे।
Top News 13 July : अमेरिका और ईरान भीषण जंग जारी। कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर के करीब पहुंची। बैंकॉक के पब में आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में ईवी वाहनों पर सब्सिडी नियमों में बड़ा बदलाव। निक सिनर ने लगातार दूसरी बार विंबलडन का पुरुष ...
11x12x20 SIP Formula: करोड़पति बनने का सबसे आसान शॉर्टकट! समझें ₹11,000 की एसआईपी का यह जादुई नियम
अगर आप भी अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं, तो म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आपके लिए सबसे बेहतरीन जरिया है. अक्सर लोग सोचते हैं कि करोड़पति बनने के लिए लाखों रुपए का एकमुश्त निवेश करना पड़ता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. आज हम आपको म्यूचुअल फंड की दुनिया का एक ऐसा जादुई नियम बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप बहुत ही अनुशासित तरीके से ₹1 करोड़ से ज्यादा का फंड तैयार कर सकते हैं. इस जादुई रणनीति का नाम है— 11x12x20 SIP फॉर्मूला.यह फॉर्मूला दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी शुरुआत और कंपाउंडिंग (Compounding) की ताकत मिलकर लंबी अवधि में आपके पैसे को कई गुना बढ़ा सकती है.आखिर क्या है 11x12x20 SIP फॉर्मूला?इस फॉर्मूले के गणित को समझना बेहद आसान है. इसे तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:11 (मासिक निवेश): इसका मतलब है कि आपको हर महीने ₹11,000 की SIP से शुरुआत करनी होगी.12 (अनुमानित रिटर्न): इसका मतलब है कि आपके निवेश पर सालाना औसतन 12% का रिटर्न मिलना चाहिए (म्यूचुअल फंड में लॉन्ग टर्म के लिए 12% का रिटर्न एक बेहद व्यावहारिक और सामान्य आंकड़ा माना जाता है).20 (निवेश की अवधि): इसका मतलब है कि आपको बिना रुके लगातार 20 वर्षों तक इस निवेश को जारी रखना होगा.20 साल बाद आपके निवेश की पूरी तस्वीर (SIP Calculation)यदि आप इस 11x12x20 के फॉर्मूले पर पूरी तरह टिके रहते हैं, तो 20 साल बाद जब आपका फंड मैच्योर होगा, तो आपके निवेश का पूरा गणित कुछ इस तरह दिखाई देगा:निवेश का विवरणअनुमानित आंकड़ेमासिक एसआईपी (Monthly SIP)₹11,000निवेश की कुल अवधि (Tenure)20 वर्षआपकी जेब से लगा कुल निवेश (Total Investment)₹26,40,000 (26.40 लाख रुपए)अनुमानित वेल्थ गेन / मुनाफा (Capital Gain)₹74,78,431 (74.78 लाख रुपए)20 साल बाद मिलने वाला कुल फंड (Total Value)₹1,01,18,431 (₹1.01 करोड़ से अधिक)यानी, आपने 20 सालों में अपनी जेब से केवल ₹26.40 लाख रुपए बचाकर निवेश किए, लेकिन समय और कंपाउंडिंग की जुगलबंदी ने आपको ₹74.78 लाख का शुद्ध मुनाफा कमा कर दिया. नतीजतन, 20 साल पूरे होते ही आपके पास ₹1 करोड़ से ज्यादा का बड़ा फंड तैयार होगा.क्यों सबसे खास है म्यूचुअल फंड में SIP का जरिया?कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) का असली जादू: एसआईपी में आपको मिलने वाले रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है. निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, आपका मुनाफा उतनी ही तेजी से रॉकेट की तरह ऊपर भागेगा.शुरुआत करना बेहद आसान: एसआईपी की शुरुआत करने के लिए बहुत मोटी रकम की जरूरत नहीं होती. आप अपनी क्षमता के अनुसार महज ₹500 प्रति माह से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं.कोई ऊपरी सीमा नहीं (No Maximum Limit): एसआईपी में आप जितना चाहें उतना पैसा निवेश कर सकते हैं, इसकी कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है.फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन): एसआईपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पूरी तरह आपके नियंत्रण में होती है. यदि भविष्य में आपकी आय बढ़ती है, तो आप इसे बढ़ा (Step-up) सकते हैं. वहीं, जरूरत पड़ने पर इसकी रकम को घटाया या कुछ महीनों के लिए रोका (Pause) भी जा सकता है.
तुर्किये (Turkey) में बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के होने वाले सी-सेक्शन (सिजेरियन डिलीवरी) को लेकर सरकार की सख्ती अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है. देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 100 से अधिक प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों (ऑब्स्टेट्रिशियन-गायनेकोलॉजिस्ट) पर गाज गिराई है.अनावश्यक रूप से ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी करने के आरोपी इन डॉक्टरों पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया गया है. इतना ही नहीं, कई डॉक्टरों को क्लीनिकल ड्यूटी से अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया गया है और उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा विशेष ट्रेनिंग लेने का निर्देश दिया गया है. सरकार के इस कड़े रुख के बाद देशभर के डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है.क्यों हुई डॉक्टरों पर यह सख्त कार्रवाई?स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई इस औचक और बड़ी कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप और कारण सामने आए हैं:अनावश्यक सर्जरी की बाढ़: जिन डॉक्टरों पर एक्शन लिया गया है, उन पर आधिकारिक जांच में यह आरोप साबित हुआ है कि उन्होंने सामान्य (प्राकृतिक) प्रसव की संभावना होने के बावजूद जरूरत से ज्यादा और मनमाने ढंग से सी-सेक्शन किए.कड़ी सजा का प्रावधान: नियमों के उल्लंघन पर मंत्रालय ने केवल चेतावनी नहीं दी, बल्कि सीधे तौर पर आर्थिक दंड, क्लीनिकल प्रैक्टिस पर अस्थायी निलंबन और अनिवार्य पुनः प्रशिक्षण जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. तुर्किये के कई स्थानीय मेडिकल चैंबर्स ने भी इसकी पुष्टि की है.अप्रैल 2025 में लागू हुआ था नया नियम: 'डिकेड ऑफ द फैमिली'तुर्किये में यह विवाद रातों-रात पैदा नहीं हुआ है. दरअसल, अप्रैल 2025 में तुर्किये सरकार ने एक बड़ा कानून लागू करते हुए निजी और सरकारी अस्पतालों में बिना किसी ठोस मेडिकल इमरजेंसी के होने वाले वैकल्पिक (Elective) सी-सेक्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी थी.प्राकृतिक प्रसव को प्राथमिकता: सरकार का स्पष्ट स्टैंड है कि यदि मां या होने वाले बच्चे की जान को कोई खतरा नहीं है, तो डॉक्टरों को हर हाल में सामान्य प्रसव (वजाइनल डिलीवरी) को ही प्राथमिकता देनी होगी.राष्ट्रपति एर्दोआन की बड़ी पहल: यह सख्त कानून राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के 'डिकेड ऑफ द फैमिली' (परिवार का दशक) अभियान का हिस्सा है. इस राष्ट्रीय अभियान का मुख्य उद्देश्य देश में लगातार गिरती जन्म दर (Birth Rate) को सुधारना और महिलाओं को प्राकृतिक प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है.OECD देशों में शीर्ष पर है तुर्किये: सी-सेक्शन के चौंकाने वाले आंकड़ेआर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के 38 सदस्य देशों की सूची में तुर्किये सी-सेक्शन की दर के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर काबिज है.61.5% डिलीवरी ऑपरेशन से: उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में तुर्किये में हर 1,000 जीवित जन्मों में से लगभग 615 बच्चों का जन्म सी-सेक्शन के जरिए हुआ था. यानी देश में होने वाली कुल डिलीवरी में से करीब 61.5 प्रतिशत मामले ऑपरेशन के थे, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के लिहाज से बेहद खतरनाक और असामान्य माना गया है.क्या है तुर्किये की 'नेचुरल बर्थ पॉलिसी'? (Natural Birth Policy)तुर्किये के स्वास्थ्य मंत्रालय की इस नीति का मूल एजेंडा देश में सिजेरियन के बढ़ते ग्राफ को नीचे लाना है. इसके तहत ये मुख्य बिंदु शामिल हैं:जहां भी चिकित्सकीय रूप से 1% भी संभावना हो, वहां नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा दिया जाए.सी-सेक्शन का इस्तेमाल केवल और केवल तभी हो, जब मां या शिशु की जान पर संकट हो.गर्भवती महिलाओं को ऑपरेशन से होने वाले दूरगामी नुकसानों और नॉर्मल डिलीवरी के फायदों के प्रति जागरूक करना.अस्पतालों को डब्ल्यूएचओ (WHO) के तय वैश्विक दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रसव प्रबंधन के लिए बाध्य करना.WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) का नजरिया:डब्ल्यूएचओ का स्पष्ट मानना है कि सी-सेक्शन केवल एक जीवन रक्षक सर्जरी है. बिना जरूरत के केवल सी-सेक्शन की दरें बढ़ाने से मातृ स्वास्थ्य या नवजात शिशु के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होता, बल्कि इससे मां के शरीर पर अनावश्यक सर्जिकल जोखिम और अस्पताल का आर्थिक बोझ बढ़ जाता है.डॉक्टरों का पलटवार: यह पेशेवर स्वतंत्रता पर प्रशासनिक हमला हैइस कार्रवाई के बाद तुर्किये मेडिकल एसोसिएशन (TTB) और अंटाल्या चैंबर ऑफ फिजिशियंस सरकार के सामने आ गए हैं.सिस्टम की खामी: टीटीबी की वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. आयशे गुल्टेकिंगिल का कहना है कि सी-सेक्शन की ऊंची दर के लिए केवल डॉक्टरों को सूली पर चढ़ाना गलत है. यह एक व्यापक और स्ट्रक्चरल (ढांचागत) समस्या है.मरीज की स्थिति सर्वोपरि: डॉक्टरों का तर्क है कि किसी महिला की डिलीवरी कैसे होगी, यह कोई प्रशासनिक अधिकारी तय नहीं कर सकता. इसके पीछे अस्पतालों की कार्यप्रणाली, इमरजेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कानूनी मुकदमों का डर और खुद मरीज की शारीरिक स्थिति जैसे कई जटिल कारण होते हैं. आलोचकों का यह भी कहना है कि इस नीति से महिलाओं की अपनी बॉडी और प्रसव का तरीका चुनने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Reproductive Freedom) का हनन हो रहा है.
फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) का रोमांच इस समय अपने चरम पर है. दुनिया की चार सर्वश्रेष्ठ टीमें सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं और अब खिताबी जंग के लिए पूरी तरह तैयार हैं. फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दोनों सेमीफाइनल मुकाबले 15 जुलाई (भारतीय समयानुसार 16 जुलाई) से शुरू होने जा रहे हैं.इस महामुकाबले के बीच फुटबॉल इतिहास में आज का दिन बेहद खास है. ठीक 96 साल पहले, 13 जुलाई 1930 को उरुग्वे की धरती पर फुटबॉल विश्व कप की नींव रखी गई थी और पहला मैच खेला गया था. पहले सीजन का पूरा टूर्नामेंट रोमांच से भरा था, लेकिन 30 जुलाई 1930 को उरुग्वे और अर्जेंटीना के बीच खेले गए फाइनल मैच में एक ऐसा ऐतिहासिक विवाद हुआ, जिसने फुटबॉल इतिहास में एक अनोखा पन्ना जोड़ दिया.जब एक फाइनल मैच के लिए मैदान पर आईं 'दो फुटबॉल'साल 1930 के फाइनल मुकाबले में जब उरुग्वे और अर्जेंटीना की टीमें मैदान पर उतरीं, तो मैच शुरू होने से ठीक पहले गेंद को लेकर एक बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया. दोनों टीमें अपनी-अपनी पसंद की फुटबॉल से खेलने की जिद पर अड़ गईं:अर्जेंटीना की जिद: उनका कहना था कि मैच उनकी अपनी हल्की गेंद 'तिएंतो' (Tiento) से ही खेला जाएगा.उरुग्वे का दावा: मेजबान उरुग्वे अपनी स्वदेशी और अपेक्षाकृत थोड़ी भारी गेंद 'टी-मॉडल' (T-Model) का इस्तेमाल करना चाहता था.यह विवाद इतना बढ़ गया कि खिलाड़ी मैच खेलने को ही तैयार नहीं थे. आखिरकार फीफा (FIFA) के अधिकारियों और बेल्जियम के रेफरी जॉन लांगेनस को बीच-बचाव करना पड़ा. अंत में एक अनोखा और ऐतिहासिक समझौता हुआ कि पहले हाफ में अर्जेंटीना की पसंद की गेंद से खेला जाएगा और दूसरे हाफ में उरुग्वे अपनी पसंदीदा गेंद से खेलेगा.गेंद बदलते ही पलट गया मैच का पासाइस विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जैसे ही खेल में गेंद बदली, मैच का पूरा पासा ही पलट गया:पहला हाफ (अर्जेंटीना की गेंद): अर्जेंटीना ने अपनी पसंदीदा 'तिएंतो' गेंद से बेहतरीन खेल दिखाया और पहले हाफ की समाप्ति तक 2-1 से बढ़त बना ली.दूसरा हाफ (उरुग्वे की गेंद): दूसरे हाफ में जैसे ही उरुग्वे की भारी 'टी-मॉडल' गेंद मैदान पर आई, मेजबान उरुग्वे ने पासा पलट दिया. उरुग्वे ने ताबड़तोड़ गोल दागते हुए यह मैच 4-2 से जीत लिया और इतिहास का पहला फीफा विश्व कप अपने नाम कर लिया.1930 के पहले वर्ल्ड कप से जुड़े 3 अन्य मजेदार फैक्ट्स1. राजा ने चुनी थी पूरी फुटबॉल टीम: 1930 के पहले विश्व कप में कोई क्वालिफिकेशन मैच नहीं हुए थे. केवल 13 टीमों ने हिस्सा लिया था और सभी आमंत्रण (Invitation) पर आई थीं. इसमें रोमानिया की टीम सबसे अनोखी थी, क्योंकि उसके खिलाड़ियों का चयन किसी कोच या सिलेक्टर्स ने नहीं, बल्कि वहां के राजा 'कैरोल द्वितीय' (King Carol II) ने खुद अपनी पसंद से किया था.2. एक हाथ कटे होने के बावजूद दागा विजयी गोल: उरुग्वे के स्टार खिलाड़ी हेक्टर कास्त्रो (Hector Castro) का एक हाथ बचपन में एक इलेक्ट्रिक आरी के हादसे में कट गया था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और फाइनल मैच में उरुग्वे के लिए आखिरी व ऐतिहासिक विजयी गोल दागा.3. इतिहास का पहला गोल: फीफा विश्व कप के इतिहास का सबसे पहला गोल करने का गौरव फ्रांस के लुसिएन लॉरेंट (Lucien Laurent) को प्राप्त है, जिन्होंने मैक्सिको के खिलाफ मैच में यह उपलब्धि हासिल की थी.
West Bengal News Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही नई बीजेपी सरकार पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कई अहम और नीतिगत फैसलों को लगातार पलट रही है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने एक और बड़ा और ऐतिहासिक एलान किया है.पश्चिम बंगाल में अब टीएमसी सरकार का सबसे चर्चित और विवादित 'खेला होबे दिवस' (Khela Hobe Diwas) नहीं मनाया जाएगा. इसकी जगह अब राज्य में हर साल 16 अगस्त को 'आयुष्मान दिवस' (Ayushman Diwas) के रूप में मनाया जाएगा. सरकार का यह फैसला इसलिए भी बेहद खास और प्रतीकात्मक है क्योंकि इसी तारीख को राज्य की नई बीजेपी सरकार के कार्यकाल के 100 दिन भी पूरे हो रहे हैं.बीजेपी की बड़ी बैठक में सीएम सुवेंदु अधिकारी का एलानयह बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव रविवार को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तामलुक में आयोजित बीजेपी की एक बड़ी संगठनात्मक बैठक के बाद सामने आया. बैठक के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया कि अब राज्य के सरकारी कैलेंडरों से टीएमसी सरकार के चुनावी नारे 'खेला होबे' को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा.इसके स्थान पर, केंद्र सरकार की सबसे बड़ी और लोकप्रिय स्वास्थ्य बीमा योजना (Ayushman Bharat) के प्रति जनता को जागरूक करने और सम्मान देने के लिए 16 अगस्त की तारीख को 'आयुष्मान दिवस' के रूप में सरकारी तौर पर अधिसूचित किया जाएगा.16 अगस्त की तारीख क्यों चुनी? 'कलकत्ता किलिंग्स' का काला इतिहासमुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस बदलाव के पीछे केवल राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि बंगाल के दर्दनाक इतिहास का भी हवाला दिया. उन्होंने 16 अगस्त की तारीख का महत्व समझाते हुए कहा:ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स: 16 अगस्त का दिन पश्चिम बंगाल, विशेष रूप से कोलकाता के इतिहास का एक बेहद काला और खूनी पन्ना है. साल 1946 में इसी तारीख को मुस्लिम लीग और तत्कालीन सुहरावर्दी सरकार के नेतृत्व में 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स' (Great Calcutta Killings) यानी कलकत्ता के भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़के थे, जिसमें हजारों निर्दोष लोगों की जान गई थी.टीएमसी पर निशाना: सुवेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती ममता सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि टीएमसी इस अत्यंत दर्दनाक और काले दिन पर 'खेला होबे दिवस' मनाकर घावों को कुरेदती थी. हमारी सरकार इस दिन को लोगों की सेवा, स्वास्थ्य और जनकल्याण से जोड़कर मनाएगी ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए.100 दिन की उपलब्धियों के साथ मनेगा स्वास्थ्य का जश्नआगामी 16 अगस्त नई सरकार के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाली है. विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की सत्ता को उखाड़ फेंकने के बाद अस्तित्व में आई सुवेंदु सरकार के इस दिन 100 दिन पूरे हो जाएंगे.सरकार अपने इन शुरुआती 100 दिनों के जश्न को 'आयुष्मान दिवस' के रूप में जन-जन तक ले जाना चाहती है. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विशेष दिन पर राज्यभर में मुफ्त चिकित्सा शिविर, स्वास्थ्य जांच और केंद्र की आयुष्मान भारत योजना के कार्ड वितरित करने जैसे कई कल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसकी विस्तृत रूपरेखा और लिस्ट बहुत जल्द सार्वजनिक की जाएगी.केंद्र की योजनाओं पर फोकस: पूर्ववर्ती ममता सरकार पर लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्र की 'आयुष्मान भारत' जैसी बेहतरीन स्वास्थ्य योजनाओं को बंगाल में लागू नहीं होने दिया. अब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही केंद्र की सभी योजनाओं को बंगाल के घर-घर तक पहुंचाने की मुहिम तेज कर दी है.
Crude Oil Price 13 July 2026: पश्चिम एशिया (Middle East) में सीजफायर खत्म होने और अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा छिड़े भयंकर युद्ध का सीधा और बड़ा असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा है. हफ्ते के पहले दिन आज सोमवार 13 जुलाई 2026 को कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में जोरदार रॉकेट जैसी तेजी देखने को मिली है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 4% से ज्यादा उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं.क्रूड ऑयल में आई इस भारी तेजी की मुख्य वजह दुनिया के सबसे रणनीतिक तेल मार्ग— स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच बढ़ा सैन्य तनाव है. साइप्रस के एक कमर्शियल मर्चेंट शिप पर हुए हमले के बाद भड़के अमेरिका ने ईरान के करीब 140 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की, जिसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है.क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की कीमतों का ताजा गणितअंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में सोमवार सुबह से ही हाहाकार मचा हुआ है और कीमतें तेजी से ऊपर भाग रही हैं:ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): सितंबर में एक्सपायर होने वाले कॉन्ट्रैक्ट के लिए ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक की छलांग लगाकर $79 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर ट्रेड कर रहा है. गौरतलब है कि पिछले हफ्ते भी इसमें 5.5% की भारी बढ़त दर्ज की गई थी.WTI या US क्रूड वेरिएंट: अमेरिकी क्रूड वेरिएंट वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी तेज बढ़त के साथ $74 प्रति बैरल के निशान से ऊपर निकल गया है.यूरोपियन नेचुरल गैस फ्यूचर्स: वीकेंड ब्रेक के बाद खुले यूरोपीय बाजार में नेचुरल गैस फ्यूचर्स (Natural Gas) की कीमतों में भी 2.5% की तेजी देखी गई है.बड़ा सस्पेंस: होर्मुज स्ट्रेट खुला है या पूरी तरह बंद?ग्लोबल एनर्जी सप्लाई (वैश्विक तेल आपूर्ति) का करीब 20% हिस्सा कंट्रोल करने वाले मुख्य जलमार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को लेकर दोनों देशों के दावों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है:ईरान का दावा: ईरान की सरकार ने आधिकारिक घोषणा की है कि यह इंटरनेशनल जलमार्ग अगली सूचना तक पूरी तरह बंद रहेगा और यहां से किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं होगी.अमेरिका का खंडन: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US Central Command) ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा— होर्मुज स्ट्रेट उन सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है जो कानूनी तौर पर इस इंटरनेशनल वॉटरवे से गुज़रना चाहते हैं. अमेरिकी सेना यहां नेविगेशन की आज़ादी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है.रविवार शाम को फिर हुआ हमला: अमेरिकी सेना ने साफ किया कि स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराने और उसे सबक सिखाने के लिए रविवार शाम 5 बजे (ईस्टर्न टाइम) हमलों का एक और नया दौर शुरू किया गया है.जमीन पर क्या है हकीकत? ठप हुआ समंदर का ट्रैफिकभले ही अमेरिका दावा कर रहा हो कि मार्ग खुला है, लेकिन युद्ध के खौफ से जहाजों ने इस रूट से दूरी बना ली है. जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) के मुताबिक, रविवार को इस मुख्य चोकपॉइंट से लगभग शून्य ट्रैफिक था. पूरे दिन में सिर्फ़ दो तेल प्रोडक्ट टैंकर इस चोकपॉइंट के पास आते देखे गए. हालांकि, JMIC ने राहत की बात यह बताई कि ओमान द्वारा कोऑर्डिनेट किया जाने वाला दक्षिणी वैकल्पिक रूट (Southern Route) जहाजों के लिए अभी भी खुला हुआ है.फ्रांस G7 समिट का MoU हुआ फेल, ईरान ने दी चेतावनीपिछले महीने फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान दोनों ने एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते में युद्ध को रोकने और स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की बात शामिल थी. लेकिन हालिया हमलों ने इस शांति समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने शुक्रवार को ही चेतावनी दी थी कि अगर यह तनाव दोबारा भड़कता है, तो साल के आखिर तक वैश्विक तेल के भंडारों को फिर से बनाने (Restocking) की कोशिशों को भारी झटका लगेगा, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो सकती है.इधर, ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर और टॉप नेगोशिएटर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने वॉशिंगटन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि— अब एकतरफ़ा डील्स का ज़माना पूरी तरह खत्म हो चुका है. अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू होने से पहले वॉशिंगटन को होर्मुज़ ट्रांज़िट पर किए गए पुराने वादों को प्राथमिकता देनी होगी और ईरान से तेल एक्सपोर्ट (Oil Export) को पूरी तरह नॉर्मल करना होगा, तभी शांति संभव है.
पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा तनाव अब एक भीषण और पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है. सीजफायर (युद्धविराम) की मियाद खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ तीसरे दौर की सबसे बड़ी एयरस्ट्राइक (Third Round of Airstrikes) शुरू कर दी है.एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के भीतर घुसकर उसके प्रमुख मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स, संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठानों के करीब मौजूद ठिकानों और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है. इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमनध्य (Strait of Hormuz) के पास गश्त लगा रही ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कई सैन्य बोट्स और कमांड सेंटरों को भी निशाना बनाया गया है. बता दें कि इससे पहले बुधवार और गुरुवार को भी अमेरिका ने ईरान पर भीषण बमबारी की थी.मुजतबा खामेनेई की पहली हुंकार: पिता के खून का बदला जरूर लूंगाइस भीषण बमबारी के बीच ईरान के नवनियुक्त सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद दुनिया के नाम अपना पहला आधिकारिक संदेश जारी किया. उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों को खुली चुनौती देते हुए कहा, मैं अपने दिवंगत पिता के बेगुनाह खून की एक-एक बूंद का बदला जरूर लूंगा. यही हमारे पूरे देश की इच्छा और संकल्प है. ईरान इस अमेरिकी आक्रामकता के आगे घुटने नहीं टेकेगा.ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागे ड्रोन-मिसाइलअमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में रविवार को ईरान की सेना (IRGC) ने भी खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में चौतरफा मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमले (Drone Attacks) करने का दावा किया है, जिससे कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं:कुवैत में भारी तबाही का दावा: तेहरान (ईरान की राजधानी) का दावा है कि उसके विस्फोटक ड्रोनों ने कुवैत में तैनात अमेरिकी सेना के पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम (Patriot Air Defense System), भारी गोला-बारूद के गोदामों और अमेरिकी रडार स्टेशनों को सीधे निशाना बनाकर भारी नुकसान पहुंचाया है.बहरीन में बजे एयर रेड सायरन: बहरीन में मौजूद अमेरिकी संचार और रडार सुविधाओं पर भी ईरानी मिसाइलें गिरने का दावा किया गया है. हमले के बाद बहरीन में आपातकालीन एयर रेड सायरन गूंज उठे और नागरिकों से तुरंत बंकरों व सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई.जॉर्डन और कतर पर हमला: आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर स्थित अमेरिकी सैन्य कैंपों की ओर कई घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. दूसरी ओर, कतर की सेना ने बयान जारी कर बताया कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रही एक ईरानी मिसाइल को आसमान में ही (Intercept) मार गिराया.यूएई (UAE) में धमाके: संयुक्त अरब अमीरात ने भी पुष्टि की है कि उसका एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम ईरान की ओर से आने वाले हवाई खतरों को रोकने में मुस्तैद है, और इस दौरान आसमान में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं.समंदर में भारतीय जहाज पर हमला; 10 नाविक बचाए गए, 1 लापताइस युद्ध की आंच अब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और भारतीय नागरिकों तक भी पहुंच गई है. ओमान के तट (Oman Coast) के पास से गुजर रहे एक कमर्शियल मर्चेंट शिप 'GFS गैलेक्सी' (GFS Galaxy) पर भीषण हमला हुआ.भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस प्रभावित जहाज पर कुल 11 भारतीय नागरिक (नाविक) सवार थे. राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत 10 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन 1 भारतीय नाविक अभी भी गहरे समुद्र में लापता है, जिसकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें जुटी हुई हैं. भारत सरकार ने इस मर्चेंट शिप पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और खाड़ी क्षेत्र में अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है.
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाली वारदात सामने आई है. यहां एक कलयुगी बेटे पर अपनी ही सगे मां को कथित तौर पर जहर देकर जान से मारने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगा है.इस दिल दहला देने वाली घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है. शुरुआती जांच में जो वजह सामने आई है, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है. आरोप है कि युवक की पत्नी काफी समय से अपने मायके में रह रही थी और उसकी सास ने शर्त रखी थी कि जब तक उसकी मां की मौत नहीं हो जाती, वह अपनी बेटी को उसके साथ वापस नहीं भेजेगी.छोले की सब्जी में मिलाकर दिया जहरपुलिस में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के मुताबिक, यह खौफनाक साजिश आगरा के एक गांव में अंजाम दी गई. आरोपी रविंद्र पर आरोप है कि उसने दोपहर के खाने के वक्त जानबूझकर छोले की सब्जी में कोई जहरीला पदार्थ (Poison) मिला दिया और वह खाना अपनी बुजुर्ग मां राममूर्ति को परोस दिया.जहरीला खाना खाने के कुछ ही मिनटों बाद राममूर्ति की तबीयत बेहद गंभीर रूप से बिगड़ने लगी और वे तड़पने लगीं. आनन-फानन में परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है.रणवीर सिंह की शिकायत पर हुआ खुलासायह पूरा मामला तब खुला जब पीड़ित महिला के पति और आरोपी के पिता रणवीर सिंह ने थाने में जाकर अपने ही बेटे के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है कि जब घटना के तुरंत बाद परिवार ने रविंद्र से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने कबूल किया कि उसे यह जहर किसी और ने नहीं, बल्कि उसकी सगी सास फूलवती ने दिया था.सास ने दी थी धमकी: मां को रास्ते से हटाओ, तभी आएगी बेटी'इंडिया टुडे' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज एफआईआर में रविंद्र की सास फूलवती को भी सह-आरोपी बनाया गया है. आरोप है कि फूलवती ने ही रविंद्र को पूरी प्लानिंग के तहत जहर उपलब्ध कराया था.रणवीर सिंह की शिकायत के अनुसार, सास फूलवती ने दामाद रविंद्र को आगरा के गतपुरा गांव में स्थित अपने घर बुलाया था. वहां उसने रविंद्र के हाथ में एक सीलबंद पैकेट थमाते हुए कथित तौर पर कहा था कि जब तक तुम अपनी मां को हमेशा के लिए रास्ते से नहीं हटा देते, तब तक मेरी बेटी तुम्हारे घर कदम नहीं रखेगी और तुम्हारे साथ नहीं जाएगी. पत्नी के वियोग और सास के भड़काने में आकर रविंद्र ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला. हालांकि, पुलिस का कहना है कि इन आरोपों की अभी गहनता से जांच की जा रही है.पारिवारिक कलह और संपत्ति विवाद भी है वजह; BNS की इन धाराओं में केस दर्जइस मामले में एक नया मोड़ देते हुए आरोपी रविंद्र के भाई मुकेश ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार में पिछले काफी समय से पैतृक संपत्ति (Property Dispute) को लेकर गहरा विवाद चल रहा था. मुकेश का दावा है कि इसी पारिवारिक तनाव और रोज-रोज के झगड़ों के कारण रविंद्र की पत्नी तंग आकर अपने मायके में रहने चली गई थी, जिसका फायदा उठाकर उसकी सास ने रविंद्र को मोहरा बनाया.बढ़ते विवाद और पुख्ता प्राथमिक सबूतों के आधार पर आगरा पुलिस ने आरोपी रविंद्र और उसकी सास फूलवती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 (आपराधिक साजिश), 109 (हत्या का प्रयास) और 123 (जहर या खतरनाक पदार्थ के जरिए चोट पहुंचाना) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. रविंद्र इस समय पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल से आने वाली मां की मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक लैब की जांच के बाद मामले में आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
Numerology Rashifal 13 July 2026: अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार, आपकी जन्मतिथि (Date of Birth) सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि आपके स्वभाव, व्यक्तित्व और भविष्य के बंद कमरों को खोलने वाली जादुई चाबी है. आज 13 जुलाई 2026 का दिन सभी मूलांक वाले जातकों के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है.आज के सितारे साफ संकेत दे रहे हैं कि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी वित्तीय फैसला भारी पड़ सकता है. आज का मूलमंत्र है— बचत, सटीक बजट और भविष्य की ठोस योजना. आइए विस्तार से जानते हैं कि मूलांक 1 से लेकर 9 तक के लोगों के लिए आज का दिन धन, निवेश और करियर के मामले में कैसा भाग्य लेकर आया है:मूलांक 1 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है)आज आपका पूरा ध्यान पूरी तरह से धन प्रबंधन (Money Management) और पैसों से जुड़े गंभीर मामलों पर केंद्रित रहेगा.सितारों की सलाह: अपने भविष्य को सुरक्षित और फाइनेंशियली फ्री बनाने के लिए आज एक मजबूत योजना तैयार करें. बिना सोचे-समझे या दिखावे में आकर खर्च करने की आदत पर लगाम लगाएं. यदि आप आज अपने तय बजट की सीमा में कदम आगे बढ़ाएंगे, तो आने वाले दिनों में आपकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत और स्थिर हो जाएगी.मूलांक 2 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके लिए आमदनी और अठन्नी के बीच सही तालमेल बिठाने की परीक्षा का है.सितारों की सलाह: आज आपके लिए खर्च और बचत के बीच एक आदर्श संतुलन (Balance) बनाकर चलना बेहद जरूरी है. गैर-जरूरी विलासिता की चीजों की खरीदारी से पूरी तरह बचें. निवेश (Investment) और लॉन्ग-टर्म सेविंग्स शुरू करने के लिहाज से आज का समय काफी अनुकूल है, लेकिन कोई भी बड़ा वित्तीय कदम उठाने से पहले उसके नफा-नुकसान का आकलन ठंडे दिमाग से जरूर कर लें.मूलांक 3 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके पुराने निवेशों और वर्तमान आर्थिक नीतियों की बारीकी से समीक्षा (Review) करने का है.सितारों की सलाह: अपने निवेश, बचत और रोजमर्रा के खर्च से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात पर पैनी नजर रखें. अगर आप शेयर बाजार या किसी अन्य जोखिम भरे क्षेत्र में पूंजी लगाने का विचार कर रहे हैं, तो पहले बाजार की जमीनी हकीकत और पूरी जानकारी जरूर हासिल कर लें. समय की मांग को देखते हुए यदि आपको अपनी पुरानी योजनाओं में कुछ फेरबदल भी करना पड़े, तो उससे बिल्कुल न हिचकिचाएं.मूलांक 4 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके घरेलू बजट पर थोड़ा सा अतिरिक्त दबाव बना सकता है.सितारों की सलाह: आज आपके घर, परिवार या सुख-सुविधाओं से जुड़े खर्चों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी होने की आशंका है. इसलिए, कोई भी खरीदारी करने से पहले अपनी वास्तविक जरूरत और जेब के बजट का विशेष ध्यान रखें. भावनाओं में बहकर या किसी के दबाव में आकर मोटी रकम खर्च करने से बचें. एक पूर्व-नियोजित रूपरेखा तैयार करके चलेंगे तो मानसिक और आर्थिक तनाव काफी कम रहेगा.मूलांक 5 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है)मूलांक 5 के जातकों के लिए आज का दिन अपनी बिखरी हुई आर्थिक व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित और अनुशासित करने के लिए सबसे उत्तम है.सितारों की सलाह: फिजूलखर्ची पर पूरी तरह ताला लगा दें और आज से होने वाले हर एक खर्च का एक स्पष्ट उद्देश्य (Purpose) तय करें. बिजनेस या नौकरी में आज आपको कमाई के कुछ बेहतरीन और नए रास्ते मिल सकते हैं. अपनी सूझबूझ और पेशेवर योग्यता का सही समय पर सही इस्तेमाल करेंगे, तो अप्रत्याशित आर्थिक लाभ (Financial Gains) होने की प्रबल संभावना है.मूलांक 6 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके जीवन में आर्थिक मामलों को लेकर एक नई और सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है.सितारों की सलाह: आज से ही अपने रोजाना के खर्चों का एक सटीक लिखित हिसाब-किताब रखना शुरू कर दें. केवल उन्हीं चीजों पर पैसा लगाएं जो आपके जीवन के लिए बेहद अनिवार्य हैं. वर्तमान में आपकी आय और व्यय (Income and Expenses) के बीच बना हुआ यह बेहतरीन संतुलन ही भविष्य में आपको एक बड़ी आर्थिक मजबूती और मानसिक शांति प्रदान करेगा.मूलांक 7 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपको शॉर्ट-टर्म मुनाफे के लालच से बचकर लंबी अवधि के बड़े लक्ष्यों (Long-Term Goals) पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा दे रहा है.सितारों की सलाह: महंगी, ब्रांडेड और गैर-जरूरी चीजों पर अंधाधुंध पैसा पानी की तरह बहाने से आज आपको कड़ाई से बचना चाहिए. यदि आप रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड्स में कोई बड़ा निवेश करना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से पूरी कानूनी और तकनीकी जानकारी लेने के बाद ही कोई अंतिम फैसला करें. आज धैर्य और तसल्ली से लिया गया कोई भी निर्णय भविष्य में आपके लिए बड़ा जैकपॉट साबित हो सकता है.मूलांक 8 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है)मूलांक 8 के जातकों के लिए आज के सितारे आर्थिक मोर्चे पर बेहद सकारात्मक और सुनहरे संकेत दे रहे हैं.सितारों की सलाह: आज आपको अपने पुराने वित्तीय पोर्टफोलियो और बजट का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए. भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखकर आज आपके द्वारा लिए गए विवेकपूर्ण फैसले आगे चलकर आपको बहुत ही शानदार रिटर्न (Results) देने वाले हैं. आज के दिन समय और धन दोनों का सदुपयोग करें, भाग्य आपके साथ है.मूलांक 9 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके करियर और व्यवसाय में नए और आकर्षक आर्थिक अवसर (Financial Opportunities) लेकर आने वाला है.सितारों की सलाह: नए अवसर मिलने की खुशी में बिना सोचे-समझे जल्दबाजी या उत्साह में आकर कोई भी बड़ा एग्रीमेंट साइन न करें और न ही कोई बड़ा निवेश करें. अपनी वर्तमान बचत और भविष्य के निवेश के बीच एक सख्त संतुलन बनाए रखें. आपकी सूझबूझ, धैर्य और समझदारी से उठाया गया हर एक छोटा कदम आगे चलकर आपकी वित्तीय नींव को पत्थर की तरह मजबूत बना देगा.
Step-up SIP and SWP Calculator: हर व्यक्ति चाहता है कि रिटायरमेंट के बाद उसकी नियमित कमाई (Regular Income) बंद न हो और वह स्वाभिमान के साथ अपना जीवन जी सके. अच्छी बात यह है कि बुढ़ापे में एक बड़ा फंड तैयार करने के लिए आपकी शुरुआती सैलरी का बहुत बड़ा होना जरूरी नहीं है. अगर आप कम उम्र में एक छोटी सी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करते हैं, हर साल उसमें थोड़ी बढ़ोतरी (Step-up) करते हैं, और लंबे समय तक धैर्य के साथ निवेश जारी रखते हैं, तो कंपाउंडिंग (Compounding) की जादुई ताकत से रिटायरमेंट तक करोड़ों का फंड तैयार हो सकता है.इसके बाद, उसी जमा पूंजी को सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) में शिफ्ट करके हर महीने एक निश्चित सैलरी या पेंशन की तरह मोटी रकम हासिल की जा सकती है. आइए समझते हैं ₹1,000 की मामूली शुरुआत से ₹1.05 करोड़ का फंड बनाने और फिर हर महीने ₹1 लाख पाने का पूरा गणित.₹1,000 की SIP से ₹1.05 करोड़ का फंड कैसे बनेगा? (कंपाउंडिंग का गणित)मान लीजिए आपकी उम्र वर्तमान में 28 साल है और आपने निवेश की शुरुआत करने का फैसला किया. आप हर महीने केवल ₹1,000 की एक एसआईपी शुरू करते हैं. नौकरी में जैसे-जैसे आपकी सालाना सैलरी या इंक्रीमेंट बढ़ता है, आप अपनी एसआईपी में भी हर साल 10% का स्टेप-अप (Step-up SIP) यानी बढ़ोतरी करते जाते हैं (उदाहरण के लिए: पहले साल ₹1000 महीना, दूसरे साल ₹1100 महीना, तीसरे साल ₹1210 महीना आदि).यदि आप अपनी उम्र के 60 साल (रिटायरमेंट) तक यानी पूरे 32 वर्षों तक इस अनुशासन के साथ निवेश जारी रखते हैं और आपको म्यूचुअल फंड से औसतन 12% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपके निवेश का पूरा खाका कुछ इस तरह दिखाई देगा:निवेश की कुल अवधि: 32 साल (28 की उम्र से 60 की उम्र तक)शुरुआती मासिक निवेश: ₹1,000 (10% वार्षिक स्टेप-अप के साथ)आपकी जेब से लगा कुल निवेश: ₹24.13 लाखकंपाउंडिंग से हुआ कुल मुनाफा: ₹80.98 लाख60 वर्ष पर तैयार अनुमानित फंड: ₹1.05 करोड़स्टेप-अप (Step-Up) क्यों है गेमचेंजर?अगर आप पूरे 32 वर्षों तक बिना रकम बढ़ाए केवल ₹1,000 प्रति माह की ही एसआईपी करते रहते, तो ₹1 करोड़ के जादुई आंकड़े तक पहुंचना लगभग नामुमकिन होता. हर साल निवेश में की गई महज 10% की यह छोटी सी बढ़ोतरी लंबी अवधि में करोड़ों रुपए का बड़ा अंतर पैदा कर देती है.रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹1 लाख कैसे मिलेंगे? (SWP का फॉर्मूला)रिटायरमेंट (60 साल की उम्र) पर जब आपके पास एक बड़ा कॉर्पस तैयार हो जाता है, तो आपको पूरा पैसा एक साथ बैंक खाते में निकालकर टैक्स गंवाने या खर्च करने की जरूरत नहीं होती. यहीं पर काम आता है सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP), जो म्यूचुअल फंड का एक ऐसा टूल है जहां आपका पैसा मार्केट में निवेशित रहकर रिटर्न भी कमाता रहता है और आपको हर महीने आपकी चुनी हुई एक फिक्स रकम भी मिलती रहती है.अब मान लीजिए, विभिन्न निवेशों और एसेट एलोकेशन की मदद से रिटायरमेंट के समय आपके पास ₹1.5 करोड़ का कुल फंड जमा है. सुरक्षा के लिहाज से आप इस पूरे फंड को किसी डेट म्यूचुअल फंड (Debt Fund) या कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड (Conservative Hybrid Fund) में ट्रांसफर कर देते हैं.अगर इस सुरक्षित फंड पर आपको सालाना महज 6% का फिक्स रिटर्न भी मिलता रहे और आप हर महीने ₹1 लाख की निकासी (SWP) सेट कर देते हैं, तो इसका गणित कुछ ऐसा होगा:शुरुआती कुल निवेश (SWP में): ₹1.5 करोड़हर महीने मिलने वाली पेंशन: ₹1 लाखपेंशन/निकासी की अवधि: 12 साल12 वर्षों में कुल जमा निकासी: ₹1.44 करोड़निकासी के दौरान फंड द्वारा अर्जित अनुमानित कमाई: ₹43.13 लाखइस रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको हर महीने ₹1 लाख की नियमित इनकम भी मिलती रहेगी और आपकी मूल पूंजी (₹1.5 करोड़) भी बाजार में सुरक्षित रहकर अतिरिक्त रिटर्न कमाती रहेगी, जिससे आपका फंड अचानक से कभी शून्य नहीं होगा.निवेश यात्रा शुरू करने से पहले 3 जरूरी बातें हमेशा याद रखेंरिटायरमेंट और रिटर्न की अनिश्चितता: म्यूचुअल फंड में मिलने वाला 12% या डेट फंड का 6% रिटर्न पूरी तरह से अनुमानित है, यह फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तरह गारंटीड नहीं होता. बाजार के उतार-चढ़ाव के हिसाब से लॉन्ग टर्म में यह रिटर्न कम या ज्यादा भी हो सकता है.समय-समय पर रिव्यू (Portfolio Review): जैसे ही आप अपने रिटायरमेंट (60 वर्ष) के करीब पहुंचने लगें (लगभग 55 वर्ष की उम्र में), अपने हाई-रिस्क इक्विटी फंड्स से पैसा निकालकर धीरे-धीरे सुरक्षित डेट ऑप्शंस में शिफ्ट करना शुरू कर दें ताकि मार्केट क्रैश से आपका फंड प्रभावित न हो.महंगाई (Inflation) को न भूलें: आज के समय में ₹1 लाख की जो क्रय शक्ति (Value) है, आज से 30 या 32 साल बाद महंगाई के कारण ₹1 लाख की वैल्यू उतनी नहीं रहेगी. इसलिए जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, अपनी एसआईपी स्टेप-अप दर को 10% से बढ़ाकर 15% करने का प्रयास करें ताकि आपका फंड महंगाई को आसानी से पछाड़ सके.
जब भी हम किसी झील या नदी की कल्पना करते हैं, तो हमारे दिमाग में नीले या साफ पानी की तस्वीर उभरती है. लेकिन कुदरत के तरकश में ऐसे कई अजूबे हैं जो इंसानी सोच को हैरान कर देते हैं. दुनिया में कई ऐसी रहस्यमयी और खूबसूरत झीलें हैं, जिनका पानी नीला नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से चमकीला गुलाबी (Natural Pink Color) दिखाई देता है. पहली ही नजर में किसी काव्यात्मक पेंटिंग जैसी लगने वाली ये झीलें पूरी दुनिया के पर्यटकों और वैज्ञानिकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.आइए जानते हैं दुनिया की 6 सबसे मशहूर और खूबसूरत 'पिंक लेक्स' (Pink Lakes) के बारे में और समझते हैं इनके गुलाबी होने का दिलचस्प वैज्ञानिक कारण:दुनिया की 6 सबसे खूबसूरत और पॉपुलर गुलाबी झीलें1. लेक हिलियर (Lake Hillier) - ऑस्ट्रेलियाऑस्ट्रेलिया के मिडल आइलैंड पर स्थित 'लेक हिलियर' दुनिया की सबसे प्रसिद्ध गुलाबी झीलों में से एक है.सबसे अनोखी बात: इस झील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर आप इसके पानी को किसी कांच के बर्तन या बाल्टी में बाहर भी निकाल लें, तो भी इसका गुलाबी रंग नहीं बदलता. भारी बारिश के कारण कभी-कभी इसका रंग थोड़ा हल्का जरूर हो जाता है, लेकिन समय के साथ इसका गाढ़ा गुलाबी रंग फिर वापस लौट आता है.2. टोर्रेविजा पिंक लैगून (Torrevieja Pink Lagoon) - स्पेनस्पेन की यह झील अपने लुभावने और चमकीले गुलाबी रंग के लिए जानी जाती है.देखने का सही समय: जून से अक्टूबर के महीनों में, जब धूप सबसे तेज होती है, तब इस झील का गुलाबी रंग अपने पूरे शबाब पर होता है. यह झील स्पेन के मुख्य नमक उत्पादन (Salt Production) केंद्रों में से एक है. यहां बड़ी संख्या में खूबसूरत फ्लेमिंगो (राजहंस) पक्षी भी डेरा डालते हैं.3. डस्टी रोज़ लेक (Dusty Rose Lake) - कनाडायह झील बाकी सभी गुलाबी झीलों से बिल्कुल जुदा है. जहां दुनिया की ज्यादातर पिंक लेक्स खारे पानी की हैं, वहीं कनाडा की डस्टी रोज़ लेक मीठे पानी (Freshwater) की झील है.सफर है मुश्किल: यह झील एक बेहद दुर्गम और दूरदराज के इलाके में स्थित है, इसलिए यहां पैदल पहुंचना मुमकिन नहीं है. पर्यटक इसे देखने के लिए हेलीकॉप्टर या छोटे हवाई जहाजों का सहारा लेते हैं.4. हट्ट लैगून (Hutt Lagoon) - ऑस्ट्रेलियाऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर स्थित हट्ट लैगून लगभग 9 मील लंबी एक विशाल झील है. समुद्र और इस झील के बीच केवल रेत के टीलों की एक बेहद पतली पट्टी है. सुबह से दोपहर के वक्त इस झील का रंग सबसे ज्यादा साफ और चमकदार गुलाबी दिखता है, और इसके किनारों पर जमे सफेद नमक के क्रिस्टल इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं.5. लेक रेटबा या लैक रोज़ (Lake Retba) - सेनेगलसेनेगल की राजधानी डकार के नजदीक स्थित इस झील को स्थानीय भाषा में 'लैक रोज़' भी कहा जाता है. इस झील का पानी अत्यधिक खारा है. साल 2022 में आई भयानक बाढ़ के कारण इसका रंग कुछ समय के लिए बदल गया था, लेकिन अब यह प्राकृतिक रूप से दोबारा गुलाबी रूप अख्तियार कर रही है. इसे देखने का सबसे सही समय नवंबर से मई के बीच माना जाता है.6. महारलू झील (Maharloo Lake) - ईरानईरान के फ़ार्स प्रांत में शिराज़ शहर के पास स्थित महारलू झील चारों तरफ से ऊंचे पहाड़ों से घिरी हुई है. गर्मियों के मौसम में वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण झील का पानी काफी सूख जाता है और किनारों पर सफेद नमक की मोटी परतें जम जाती हैं. भरपूर भोजन की उपलब्धता के कारण वसंत और शुरुआती पतझड़ में हजारों प्रवासी पक्षी, खासकर फ्लेमिंगो यहां आते हैं.आखिर क्यों गुलाबी होता है इन झीलों का पानी? (वैज्ञानिक कारण)इन झीलों का गुलाबी रंग कोई जादू या इंसानी कारनामा नहीं है, बल्कि इसके पीछे शुद्ध विज्ञान और प्रकृति का तालमेल है:खारे पानी की झीलों का राज (माइक्रोऑर्गेनिज्म): लेक हिलियर, हट्ट लैगून और लैक रोज़ जैसी खारे पानी की झीलों में नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है. इस अत्यधिक खारे माहौल में 'डुनालिएला सलीना' (Dunaliella Salina) नाम के विशेष सूक्ष्म शैवाल (Algae) और 'हैलोबैक्टीरिया' जैसे सूक्ष्मजीव पनपते हैं. ये सूक्ष्मजीव तेज धूप से बचने के लिए लाल-गुलाबी रंग का पिगमेंट (कैरोटीनॉयड) छोड़ते हैं, जिससे पूरा पानी गुलाबी दिखाई देता है.मीठे पानी की झील का राज (मिनरल्स): कनाडा की 'डस्टी रोज़ लेक' के गुलाबी होने की वजह कोई बैक्टीरिया नहीं है. दरअसल, इस झील के आसपास मौजूद हिमनदीय चट्टानें (Glacial Rocks) गुलाबी और बैंगनी रंग की हैं. जब ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उन चट्टानों के बेहद महीन कण बहकर झील के पानी में मिल जाते हैं, जिससे पानी का रंग प्राकृतिक रूप से डस्टी पिंक हो जाता है.ये अनूठी झीलें इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि पानी का रंग हमेशा नीला होना जरूरी नहीं है; प्रकृति के भीतर छिपे सूक्ष्मजीव, खनिज और तत्व किसी भी नजारे को जादुई बना सकते हैं.

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