राफेल के डर से PAK ने छुपा ली थी पूरी F-16 की फ्लीट, बड़ा खुलासा
ऑपरेशन सिंदूर में रिटायर्ड पीएएफ अधिकारी खालिद चिश्ती ने माना कि पाकिस्तान ने F-16 फ्लीट जमीन पर रखी क्योंकि राफेल की मेटियोर मिसाइल, AMRAAM से लंबी रेंज वाली थी. रेंज और फर्स्ट-शॉट एडवांटेज ने हवाई लड़ाई तय की.
अगर आप नैनीताल की भारी भीड़, ट्रैफिक और शोर-शराबे से तंग आ चुके हैं, तो अब आपको अपनी अगली छुट्टियों के लिए अपनी डेस्टिनेशन बदलने की जरूरत है। उत्तराखंड के भीमताल के पास बसा 'चाफी' (Chaffi) गांव इन दिनों पर्यटकों के लिए किसी छुपा हुआ खजाना (Hidden Gem) साबित हो रहा है। यहां न तो पर्यटकों का हुजूम है और न ही पहाड़ों पर शोर, बस पक्षियों की चहचहाहट, कलकल करती नदी और दूर तक फैले हरे-भरे खेत। अगर आप सच में सुकून और प्रकृति की गोद में कुछ दिन बिताना चाहते हैं, तो चाफी आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है।क्यों खास है चाफी गांव और पर्यटकों की पहली पसंद क्यों बन रहा है?चाफी गांव मुख्य रूप से अपनी शांति और अनछुई खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यह गांव नैनीताल से महज थोड़ी दूरी पर स्थित होने के बावजूद भीड़भाड़ वाले मुख्य पर्यटन केंद्रों से बिल्कुल अलग है। यहां का वातावरण इतना शुद्ध और शांत है कि आपको शहर की भागदौड़ का अहसास तक नहीं होगा। गांव के बीचों-बीच बहती हुई नदी और उसके किनारे बने छोटे-छोटे होमस्टे इस जगह को बेहद आकर्षक बनाते हैं। जो लोग फोटोग्राफी के शौकीन हैं या जिन्हें किताबों के साथ घंटों पहाड़ों को देखना पसंद है, उनके लिए चाफी से बेहतर जगह शायद ही कोई हो।चाफी में करने के लिए बेहतरीन चीजें: एडवेंचर और सुकून का मेलचाफी केवल आराम करने की जगह ही नहीं है, बल्कि यहां एडवेंचर और एक्सप्लोरेशन के लिए भी भरपूर मौके हैं। आप नदी के किनारे बैठकर घंटों बिता सकते हैं या फिर पास के जंगलों में नेचर वॉक (Nature Walk) का आनंद ले सकते हैं। गांव के पास के खेतों में घूमते हुए स्थानीय कुमाऊंनी संस्कृति को करीब से देखना एक अलग ही अनुभव है। अगर आप थोड़े बहुत एडवेंचर के शौकीन हैं, तो आप आसपास की पहाड़ियों पर छोटी ट्रेकिंग भी कर सकते हैं। रात के समय यहां का आकाश इतना साफ होता है कि आप बिना किसी दूरबीन के तारों को टिमटिमाते हुए देख सकते हैं, जो किसी भी बड़े शहर में मुमकिन नहीं है।कैसे पहुंचें चाफी गांव?चाफी पहुंचना काफी आसान है। अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं, तो काठगोदाम (Kathgodam) सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। काठगोदाम से चाफी की दूरी लगभग 30-35 किलोमीटर है, जिसे आप टैक्सी या स्थानीय कैब के जरिए आसानी से कवर कर सकते हैं। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले पर्यटक नैनीताल या भीमताल के रास्ते होते हुए यहां पहुंच सकते हैं। रास्ते में पड़ने वाले घुमावदार पहाड़ और जंगलों का नजारा यात्रा को और भी खूबसूरत बना देता है।कहां रुकें और कब जाएं?चाफी में ठहरने के लिए बड़े आलीशान होटल तो नहीं हैं, लेकिन यहां कई खूबसूरत 'होमस्टे' (Homestay) मौजूद हैं, जहां आपको घर जैसा खाना और आत्मीयता मिलेगी। स्थानीय लोगों के साथ रहना और उनके हाथ का बना कुमाऊंनी भोजन करना इस ट्रिप का सबसे यादगार हिस्सा होगा। चाफी जाने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून तक और फिर सितंबर से नवंबर तक माना जाता है, जब मौसम सुहावना रहता है। मानसून के दौरान यहां की हरियाली अपनी चरम पर होती है, जो इसे और भी खूबसूरत बनाती है। तो अगली बार जब आप पहाड़ जाने का मन बनाएं, तो नैनीताल की भीड़ को भूलकर चाफी की ओर रुख करें।
भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित ‘धीमी घुसपैठ’ के दावों को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया है और सभी पोस्ट भारतीय नियंत्रण में हैं। सेना के सूत्रों के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में चीन की ओर से किसी ‘स्लो एन्क्रोचमेंट’ की बात सही नहीं है और सेना तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) सीमा पर चीनी गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें रोकने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। चीन को यह संदेश बिल्कुल स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और यहां घुसपैठ, दबाव या जमीन पर तथाकथित ‘धीरे-धीरे कब्जा जमाने’ की कोई कोशिश भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। ऐसी किसी भी हरकत का जवाब भारतीय सुरक्षा बल अपनी पूरी ताकत से देंगे। हम आपको बता दें कि यह स्पष्ट स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के तक्सिंग सेक्टर को लेकर पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने गंभीर दावे किए हैं। चार सदस्यीय समिति ने 10 जुलाई 2026 को तक्सिंग का दौरा किया था और स्थानीय नेताओं, बुजुर्गों, बुद्धिजीवियों के साथ-साथ वहां तैनात वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और जवानों से बातचीत की। समिति की अध्यक्षता पूर्व मंत्री और PPA के मुख्य सलाहकार कहफा बेंगिया ने की थी। इसे भी पढ़ें: Nepal ने खो दिये Sugauli Treaty के Original Document ! अब भारत के साथ कैसे सुलझायेगा सीमा विवाद? समिति का दावा है कि PLA ने भारत के कुछ निर्धारित पेट्रोलिंग प्वाइंट तक भारतीय जवानों की पहुंच को प्रभावी रूप से रोक दिया है और पारंपरिक भारतीय चराई तथा शिकार क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है। सबसे गंभीर आरोप शेरा-5 पेट्रोलिंग प्वाइंट को लेकर है। PPA के मुताबिक, 2023 में इस स्थान पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद भारतीय बल पीछे हटे और कथित तौर पर दोबारा वहां नहीं लौटे। समिति का दावा है कि PLA ने वहां मौजूद भारतीय निशान और प्रतीकात्मक ढांचे हटा दिए तथा भारतीय गश्त को रोकना शुरू कर दिया। यही वह बिंदु है जहां चीन की सीमा रणनीति पर गंभीर सवाल उठते हैं। PPA ने इसे चीन की उस कथित रणनीति से जोड़ा है जिसमें पहले किसी इलाके में पहुंच सीमित की जाती है, फिर अस्थायी रोक को जमीन पर स्थायी वास्तविकता में बदलने की कोशिश होती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये PPA समिति के निष्कर्ष हैं, भारतीय सेना का आधिकारिक आकलन नहीं। सेना ने इसके उलट कहा है कि भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया और सभी पोस्ट नियंत्रण में हैं। मामला केवल एक पेट्रोलिंग प्वाइंट तक सीमित नहीं है। PPA समिति ने तक्सिंग, माजा और गालमो के इलाकों में मौसमी सैन्य उपस्थिति को एक बड़ी चुनौती बताया है। उसके अनुसार, भारी बर्फबारी और कठिन मौसम के कारण नियमित भारतीय पेट्रोलिंग मुख्यतः अप्रैल से अक्टूबर तक सीमित रहती है, जबकि PLA की गतिविधियां पूरे वर्ष जारी रहती हैं। सर्दियों में स्थानीय पोर्टरों की सेवाएं भी काफी हद तक बंद हो जाती हैं, जिससे अग्रिम क्षेत्रों में भारतीय मौजूदगी घटने का खतरा पैदा होता है। समिति ने इसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील LAC पर ‘सीजनल वैक्यूम’ बताया है। इसका सीधा असर स्थानीय लोगों पर भी पड़ता है। नांगा पहाड़ जैसे क्षेत्र पारंपरिक रूप से नाह और मारा समुदायों के शिकार तथा याक पालन के इलाके रहे हैं, लेकिन PPA के अनुसार अब स्थानीय लोगों की वहां पहुंच प्रतिबंधित है। समिति का दावा है कि इस तरह के प्रतिबंध PLA को आगे बढ़ने के लिए अधिक गुंजाइश दे सकते हैं। सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ सुरक्षा का प्रश्न नहीं, बल्कि उनकी सदियों पुरानी आवाजाही, चराई और पारंपरिक अधिकारों का सवाल भी है। यही कारण है कि अरुणाचल की सीमा नीति में सड़क, संचार और सैन्य ढांचे को हथियार से कम महत्वपूर्ण नहीं माना जा सकता। PPA ने Nacho-Taksing BRO सड़क को युद्धस्तर पर पूरा करने, 68 किलोमीटर लंबी Galemo-Pokorla सड़क को प्राथमिकता देने और Taksing-Pokorla मार्ग को Yaja तथा Huri होते हुए समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की है। समिति ने Sipi-2 में हेलीपैड तथा Sipi-4 और Sipi-6 में स्थायी सेना बेस बनाने, अग्रिम इलाकों में विश्वसनीय बिजली और Maza-Galemo में बेहतर टेलीफोन व नेटवर्क कनेक्टिविटी की भी मांग की है। देखा जाये तो सामरिक दृष्टि से यह पूरा क्षेत्र इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अपर सुबनसिरी का यह इलाका भारत-चीन सीमा के उन कठिन और दुर्गम हिस्सों में आता है जहां भौगोलिक परिस्थितियां ही सैन्य चुनौती बन जाती हैं। चीन ने पिछले वर्षों में सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत कर अपनी निगरानी और पेट्रोलिंग क्षमताओं को बढ़ाया है। भारतीय पक्ष भी इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमा प्रभुत्व पर लगातार जोर दे रहा है। सेना के अनुसार, अनिर्धारित सीमा के कारण पेट्रोलिंग के दौरान दोनों पक्षों के सैनिकों का आमना-सामना हो सकता है और ऐसे मामलों को स्थापित प्रोटोकॉल के जरिए संभाला जाता है। बीजिंग ने भी फिलहाल स्थिति को ‘सामान्यतः स्थिर’ बताया है और कहा है कि दोनों देश सैन्य तथा कूटनीतिक माध्यमों से संवाद बनाए हुए हैं। लेकिन चीन की भाषा चाहे जितनी संयमित हो, भारत के लिए असली कसौटी जमीन पर वास्तविक स्थिति है। इतिहास भी भारत को सतर्क रहने की वजह देता है। 1959 में चीन ने Longju में Assam Rifles की चौकी पर हमला कर उसे कब्जे में लिया था और यह क्षेत्र लंबे समय से चीन की गतिविधियों तथा बुनियादी ढांचा निर्माण के कारण चर्चा में रहा है। 1962 के युद्ध में भी Kameng, Subansiri, Siyom, Siang और Lohit घाटियों में बड़े चीनी सैन्य अभियान हुए थे। युद्धविराम के बाद PLA LAC के उत्तर में लौट गया था। इसलिए आज की चुनौती केवल यह साबित करने की नहीं है कि किसी खास बिंदु पर जमीन गई या नहीं। असली चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि सीमा पर भारत की मौजूदगी कभी कमजोर न पड़े। चीन यदि दबाव, बुनियादी ढांचे, स्थानीय आवाजाही पर प्रतिबंध या लगातार पेट्रोलिंग के जरिए जमीन पर नई ‘वास्तविकताएं’ बनाने की कोशिश करता है, तो भारत को हर मोर्चे पर उससे आगे रहना होगा। बहरहाल, अरुणाचल पर भारत का रुख दोटूक है न जमीन छोड़ी जाएगी, न भारतीय संप्रभुता पर कोई सवाल स्वीकार किया जाएगा। सेना का यह स्पष्ट संदेश कि भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया और सभी पोस्ट नियंत्रण में हैं, चीन के लिए पर्याप्त चेतावनी है। अब जरूरत इस चेतावनी को सड़क, सुरंग, हेलीपैड, संचार, स्थायी सैन्य ठिकानों और सालभर सक्रिय सीमा निगरानी की ताकत में बदलने की है। अरुणाचल की बर्फीली चोटियों पर भारत की मौजूदगी जितनी मजबूत होगी, चीन की ‘धीरे-धीरे दबाव बनाने’ की कोई भी रणनीति उतनी ही पहले चरण में नाकाम होगी। -नीरज कुमार दुबे
62 के गोविंदा को 37 की कोमल रानी से हुआ प्यार? लाइफ में नई एंट्री या PR स्टंट, जानिए क्या है सच्चाई
बॉलीवुड के लीजेंड्री अभिनेता गोविंदा (Govinda) इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर एक बार फिर से सोशल मीडिया और गॉसिप के गलियारों में छाए हुए हैं। नब्बे के दशक के 'हीरो नंबर वन' कहे जाने वाले गोविंदा की जिंदगी में अचानक आई खबरों ने तहलका मचा दिया है, जहां उनका नाम एक नई और उभरती हुई अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार (Komal Rani Swarnkar) के साथ जोड़ा जा रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही इन खबरों ने फैंस को हैरान कर दिया है कि क्या 62 साल के गोविंदा को उत्तर प्रदेश की रहने वाली 37 साल (या कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग उस उम्र के आसपास) की अभिनेत्री कोमल रानी से प्यार हो गया है या फिर यह उनकी आगामी फिल्मों के प्रमोशन का कोई पब्लिसिटी स्टंट मात्र है। इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म इंडस्ट्री से लेकर उनके पारिवारिक जीवन तक हलचल पैदा कर दी है।कौन हैं कोमल रानी स्वर्णकार और कैसे शुरू हुईं अफेयर की चर्चाएंकोमल रानी स्वर्णकार भारतीय सिनेमा जगत का एक ऐसा नाम हैं, जो इन दिनों अचानक सुर्खियों के केंद्र में आ गई हैं। गोविंदा के साथ नाम जुड़ने से पहले मुख्यधारा के सिनेमाई दर्शकों के बीच उनकी कोई खास पहचान नहीं थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोमल मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं और वह जल्द ही गोविंदा की बहुप्रतीक्षित कमबैक फिल्म 'रूपा' और 'दुनियादारी' में उनके साथ मुख्य भूमिका निभाती नजर आने वाली हैं। इन दोनों कलाकारों के बीच नजदीकियां तब जगजाहिर हुईं जब मुंबई एयरपोर्ट पर दोनों को एक साथ स्पॉट किया गया। एयरपोर्ट से सामने आए इन वीडियो और तस्वीरों के वायरल होने के बाद इंटरनेट पर यह कयास लगाए जाने लगे कि दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स और रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावा किया जा रहा है कि दोनों पिछले कुछ समय से एक-दूसरे के संपर्क में हैं, जिसके बाद से बॉलीवुड के गलियारों में इन चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।सुनीता आहूजा की तीखी प्रतिक्रिया और 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' वाला बयानगोविंदा और कोमल रानी के इन कथित लिंक्ड-अप और अफेयर की खबरों पर जब अभिनेता की पत्नी सुनीता आहूजा (Sunita Ahuja) की प्रतिक्रिया सामने आई, तोमामला और अधिक गरमा गया। गोविंदा और सुनीता की शादी साल 1987 में हुई थी और दोनों के दो बच्चे टीना और यशवर्धन हैं। मीडिया द्वारा जब सुनीता आहूजा से गोविंदा और इस नवोदित अभिनेत्री के एक साथ सार्वजनिक रूप से दिखने और चल रही गॉसिप्स के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही बेबाक और कड़ा अंदाज अपनाया। सुनीता ने मशहूर मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि 'विनाश काले विपरीत बुद्धि', और यह भी जोड़ा कि उन्हें अपने स्टैंडर्ड का ध्यान रखना चाहिए। सुनीता आहूजा का यह तीखा बयान इस बात की गवाही देता है कि वह अपने पति के इर्द-गिर्द उड़ रही इन अफवाहों और कमबैक कास्टिंग से बेहद असहज और नाखुश हैं। इससे पहले भी सुनीता कई इंटरव्यू में गोविंदा के जीवन से जुड़े ऐसे मुद्दों पर खुलकर बोल चुकी हैं, जिससे साफ पता चलता है कि वह अपनी पारिवारिक प्रतिष्ठा को लेकर कितनी सतर्क रहती हैं।फिल्मों की वापसी या महज एक पब्लिसिटी स्टंट?बॉलीवुड गलियारों में इस बात पर भी लंबी बहस छिड़ गई है कि क्या गोविंदा और कोमल रानी के बीच का यह रिश्ता वाकई प्यार का है या यह आने वाली फिल्म 'रूपा' के लिए कोई सोचा-समझा पब्लिसिटी या पीआर स्टंट (PR Stunt) है। आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि जब भी किसी वरिष्ठ अभिनेता की लंबे समय बाद पर्दे पर वापसी होती है, तो इस तरह की चर्चाएं अनजाने में या जानबूझकर माहौल बनाने का काम करती हैं। हालांकि, न तो गोविंदा और न ही कोमल रानी की तरफ से इन अफेयर की खबरों पर कोई आधिकारिक मुहर लगाई गई है और ये पूरी तरह से मीडिया रिपोर्ट्स और कयासबाजियों पर आधारित हैं। गोविंदा के फैंस असमंजस में हैं कि उनके चहेते 'हीरो नंबर वन' की निजी जिंदगी में आखिर चल क्या रहा है। सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन इस समय यह गॉसिप इंटरनेट पर सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग टॉपिक्स में से एक बन चुकी है और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस कहानी में आगे क्या नया मोड़ आने वाला है।
यदि आप भी भीड़भाड़ और रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर किसी ऐसी शांत और खूबसूरत जगह की तलाश में हैं, जहां कम बजट में प्रकृति के सबसे बेहतरीन रूपों का आनंद लिया जा सके, तो यह खबर खास आपके लिए है। रेगिस्तानी राज्य राजस्थान के इकलौते और बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन माउंट आबू (Mount Abu) का मौसम इस वक्त अपने सबसे सुहाने और जादुई दौर से गुजर रहा है। मानसून के इस मौसम में बादलों का पहाड़ों से लुकाछिपी खेलना, चारों तरफ फैली हरियाली और कलकल बहते झरने इस जगह को किसी जन्नत से कम नहीं बनाते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि कम खर्च में और बिना किसी भारी-भरकम बजट के आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ यहां एक यादगार ट्रिप प्लान कर सकते हैं। आइए जानते हैं मानसून में माउंट आबू घूमने के बेहतरीन ठिकाने, वहां पहुंचने के रास्ते और ट्रिप को पॉकेट-फ्रेंडली बनाने के आसान तरीके।क्यों मानसून के दिनों में खास हो जाता है माउंट आबू का सफर?राजस्थान का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में तेज धूप, धोरों और रेतीले रेगिस्तान की तस्वीर उभरती है, लेकिन अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा माउंट आबू इस धारणा को पूरी तरह बदल देता है। मानसून के आगमन के साथ ही यहां की पहाड़ियां हरी-भरी चादर ओढ़ लेती हैं और तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। बादलों के टुकड़े सीधे आपके इर्द-गिर्द तैरते हुए नजर आते हैं, जिन्हें देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे आप बादलों के ऊपर सैर कर रहे हैं। इस मौसम में यहां के प्राकृतिक झरने जीवंत हो उठते हैं और कलकल करते पानी की आवाज मन को एक अलग ही शांति और सुकून देती है। फोटोग्राफी और नेचर लवर्स के लिए यह समय माउंट आबू जाने का सबसे सुनहरा अवसर होता है।माउंट आबू में घूमने के लिए प्रमुख और खूबसूरत पर्यटन स्थलजब आप माउंट आबू पहुंचें, तो यहां घूमने के लिए कई ऐसी शानदार जगहें हैं जो आपकी यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बना देंगी। सबसे पहले बात करते हैं 'नक्की झील' (Nakki Lake) की, जो इस हिल स्टेशन का दिल मानी जाती है। इसके चारों ओर फैली पहाड़ियों और शाम के समय ठंडी हवाओं के बीच बोटिंग करने का मजा ही कुछ और है। इसके अलावा, गुरु शिखर (Guru Shikhar) जो अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी है, वहां से बादलों के बीच से पूरे शहर का नजारा बेहद मनमोहक दिखता है। दिलवाड़ा जैन मंदिर (Dilwara Jain Temples) अपनी बेजोड़ वास्तुकला और संगमरमर की नक्काशी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। मानसून के दौरान ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए ट्रेवर टैंक (Trevor's Tank) और अचलगढ़ का किला भी देखने लायक मुख्य आकर्षण हैं।कैसे बनाएं माउंट आबू की यात्रा को पूरी तरह पॉकेट-फ्रेंडली?कम बजट में किसी ट्रिप को प्लान करना कोई मुश्किल काम नहीं है, बशर्ते आपके पास सही प्लानिंग हो। माउंट आबू घूमने के लिए आप ट्रेन या बस का चुनाव कर सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन आबू रोड (Abu Road) है, जो देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आबू रोड स्टेशन से माउंट आबू की दूरी मात्र 28 किलोमीटर है, जहां पहुंचने के लिए आपको आसानी से सस्ती शेयरिंग टैक्सी या राज्य परिवहन की बसें मिल जाएंगी। रहने के लिए होटल की बुकिंग पहले से ऑनलाइन करने पर भारी डिस्काउंट मिल जाता है, या फिर आप शहर के मुख्य बाजार से थोड़ा हटकर होमस्टे और बजट फ्रेंडली गेस्ट हाउस चुन सकते हैं। स्ट्रीट फूड और स्थानीय भोजनालयों में पारंपरिक राजस्थानी भोजन का आनंद लेकर आप खाने के खर्च को भी काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।मानसून ट्रिप के दौरान किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान?मानसून के मौसम में हिल स्टेशन की यात्रा करना जितना रोमांचक होता है, उतना ही मौसम के अचानक बदलाव को लेकर सतर्क रहना भी जरूरी है। पहाड़ों पर भारी बारिश के कारण कई बार रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं, इसलिए गाड़ी चलाते समय या पैदल चलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। अपने साथ रेनकोट, छाता, पर्याप्त गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां रखना बिल्कुल न भूलें। यदि आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं तो अपने गैजेट्स को नमी और पानी से बचाने के लिए वाटरप्रूफ बैग का इस्तेमाल करें। स्थानीय नियमों का पालन करते हुए और प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना इस खूबसूरत ट्रिप का आनंद लें। यह यात्रा न केवल आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ेगी, बल्कि आपको तरोताजा भी कर देगी।
भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपनी तेज गेंदबाजी का लोहा मनवाने वाले बिहार के लाल आकाशदीप (Akash Deep) और मुकेश कुमार (Mukesh Kumar) इस वक्त एक बेहद दिलचस्प और मुश्किल दोराहे पर खड़े नजर आ रहे हैं। खेल के मैदान पर शानदार प्रदर्शन के दम पर देश का नाम रोशन करने वाले इन दोनों तेज गेंदबाजों को कुछ समय पहले बिहार सरकार की तरफ से पुलिस विभाग में डीएसपी (DSP) के पद पर सम्मानित करने की घोषणा की गई थी। लेकिन अब राज्य सरकार की तरफ से इन दोनों स्टार क्रिकेटर्स के सामने एक ऐसी बड़ी और सख्त शर्त रख दी गई है, जिसके चलते उनकी यह डीएसपी की नौकरी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। इस नए राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ के सामने आने के बाद से खेल जगत और बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो गया है। आइए जानते हैं क्या है पूरी खबर और सरकार ने कौन सी शर्त रखी है।क्या है बिहार सरकार का वह आदेश, जिससे मची हलचल?भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के माध्यम से इंटरनेशनल क्रिकेट और आईपीएल में अपनी शानदार गेंदबाजी का परचम लहराने वाले आकाशदीप और मुकेश कुमार मूल रूप से बिहार के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखते हैं। जब इन दोनों खिलाड़ियों ने टीम इंडिया के लिए खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन उपलब्धियां हासिल कीं, तो बिहार सरकार ने इनकी इस सफलता से प्रेरित होकर उन्हें राज्य में प्रशासनिक और पुलिस सेवा के सर्वोच्च पदों में से एक यानी डीएसपी (Deputy Superintendent of Police) पद पर नियुक्त करने का बड़ा फैसला लिया था। इस घोषणा के बाद राज्य के युवाओं और इन खिलाड़ियों के परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई थी कि अब खेल के साथ-साथ प्रशासनिक सेवा में भी उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा।सरकार की वह बड़ी शर्त, जिसने बढ़ा दी है खिलाड़ियों की मुश्किलेंअब बिहार सरकार के प्रशासनिक महकमे और गृह विभाग की तरफ से इन नियुक्तियों को लेकर एक बहुत ही कड़ा नियम और शर्त सामने रख दी गई है। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि आकाशदीप और मुकेश कुमार को बिहार पुलिस में डीएसपी के रूप में स्थायी तौर पर ज्वाइन करना है और सरकारी वेतन-भत्तों का लाभ उठाना है, तो उन्हें अपने मौजूदा क्रिकेट करियर को छोड़कर पूरी तरह से प्रशासनिक ड्यूटी संभालनी होगी या फिर सरकार द्वारा तय किए गए सेवा नियमों के तहत नियमित रूप से थाने और पुलिस मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। चूंकि दोनों खिलाड़ी इस वक्त भारतीय क्रिकेट टीम, रणजी ट्रॉफी और आईपीएल के व्यस्त शेड्यूल में सालभर देश-विदेश में व्यस्त रहते हैं, इसलिए उनके लिए एक साथ फुल-टाइम पुलिस की नौकरी करना व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव नजर आ रहा है।क्या बीसीसीआई और खेल नियमों के बीच फंस गए हैं ये खिलाड़ी?खेल विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि एक पेशेवर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में खेलना और साथ ही साथ एक सक्रिय पुलिस अधिकारी यानी डीएसपी की नौकरी करना दोनों एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत जिम्मेदारियां हैं। बीसीसीआई के अनुबंध और फिटनेस तथा मैच प्रैक्टिस के कड़े नियमों के तहत कोई भी सक्रिय खिलाड़ी किसी अन्य सरकारी विभाग में फुल-टाइम नौकरी नहीं कर सकता, जब तक कि उसे विशेष खेल कोटे के तहत प्रशासनिक छूट न दी जाए। इससे पहले भी देश के कई अन्य राज्यों में खिलाड़ियों को मानद (Honorary) पद या डीएसपी जैसी उपाधियां दी गई हैं, जहां उन्हें रोजाना ड्यूटी करने की अनिवार्यता से छूट मिलती है। लेकिन बिहार सरकार के इस नए नियम और शर्त ने इन दोनों तेज गेंदबाजों के सामने एक अजीब असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।आगे क्या हो सकता है इन स्टार खिलाड़ियों का अगला कदम?फिलहाल आकाशदीप और मुकेश कुमार की तरफ से इस पूरी शर्त पर आधिकारिक रूप से कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे इस मामले को लेकर बिहार सरकार और खेल विभाग के उच्च अधिकारियों से बातचीत कर सकते हैं। खिलाड़ी और उनके परिवार चाहते हैं कि सरकार इस मामले में थोड़ी नरमी बरते और उन्हें मानद रूप से डीएसपी का पद प्रदान करे ताकि वे देश के लिए क्रिकेट खेलते रहें और राज्य का सम्मान भी बढ़ता रहे। यदि सरकार अपने रुख पर अड़ी रहती है, तो इन दोनों खिलाड़ियों को अपनी इस प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है, जो बिहार के खेल प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा।
नशे में Pilot! Air India Phuket-Delhi उड़ान के कैप्टन का डोप टेस्ट पॉजिटिव, बढ़ा दबाव
सूत्रों ने 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' को बताया कि पिछले मंगलवार को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट उड़ाने वाले पायलट-इन-कमांड (PIC) का कन्फर्मेटरी डोप टेस्ट भी पॉज़िटिव आया है। यह नतीजा तब आया जब पायलट के पहुंचने पर किए गए पहले स्क्रीनिंग टेस्ट की रिपोर्ट नॉन-नेगेटिव आई और फिर प्रक्रिया के अनुसार अधिकारियों ने कन्फर्मेटरी टेस्ट किया, जिसकी रिपोर्ट मंगलवार को आई। TOI के हवाले से सूत्रों ने बताया कि 'पायलट का मारिजुआना (जिसे आम तौर पर 'वीड' कहा जाता है) टेस्ट पॉजिटिव आया है'। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) अब डोप टेस्ट के नियमों को और सख़्त बनाने पर काम कर रहा है ताकि इसे एक असरदार रोक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके। इसे भी पढ़ें: Air India Phuket-Delhi Flight: ऑटोपायलट से पहले 3 Hydraulic अलर्ट, क्यों झूले 300 फीट नीचे यात्री? यह रिपोर्ट तब आई है जब भारत के एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा ने एयर इंडिया के निवर्तमान CEO कैंपबेल विल्सन को एक मीटिंग के लिए बुलाया था, जिसमें DGCA और AAIB के अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने टाटा ग्रुप की एयरलाइन से कहा कि वे हर तरह से ऑपरेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करें और पूछा कि एयरलाइन इसके लिए क्या कदम उठा रही है। इससे पहले रविवार को, एविएशन मिनिस्ट्री ने बताया कि एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट के पायलटों का - जिनकी फ़्लाइट क्रूज़ के दौरान अचानक लगभग 300 फ़ीट नीचे आ गई थी - मंज़िल पर पहुँचने पर साइकोएक्टिव सब्सटेंस (डोप) स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया। कैप्टन की स्क्रीनिंग टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव नहीं थी और फिर उसे कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजा गया। TOI के अनुसार, DGCA के नियमों में कहा गया है कि अगर (साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए) स्क्रीनिंग टेस्ट का नतीजा 'नॉन-नेगेटिव' आता है, तो कन्फर्मेशन रिपोर्ट मिलने तक कर्मचारी को तुरंत सुरक्षा से जुड़े काम से हटा दिया जाएगा। अगर पहली बार कन्फर्मेशन टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो संबंधित कर्मचारी को नशा-मुक्ति के लिए भेजा जाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना पर बारीकी से नज़र रख रही है और आगे की कार्रवाई पर फ़ैसला लेने से पहले एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की रिपोर्ट का इंतज़ार करेगी। इसे भी पढ़ें: हत्या की साजिश के खतरे के बीच Donald Trump ने चुपके से बदला Air Force One विमान रिपोर्टरों से बात करते हुए नायडू ने कहा कि मंत्रालय ने विल्सन के साथ एक शुरुआती बैठक की थी। इसका मकसद यह समझना था कि एयरलाइन ने इस घटना को कैसे संभाला और यह जांचना था कि क्या सुरक्षा नियमों में कोई कमी थी, जिसमें पायलट के नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े नियम भी शामिल हैं। मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि एविएशन सेफ़्टी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और एयरलाइंस, रेगुलेटर या दूसरे स्टेकहोल्डर्स की ओर से इसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय ने DGCA से पायलटों द्वारा नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों के बारे में जानकारी मांगी है और अगर मौजूदा नियम नाकाफ़ी पाए जाते हैं, तो बदलावों पर विचार किया जाएगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
बांग्लादेशी पेसर हसन महमूद का कहर! सिर्फ 198 रन पर सिमटी ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी, झटके 6 विकेट
क्रिकेट जगत से इस वक्त एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश (Australia vs Bangladesh) के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट मुकाबले के पहले ही दिन बांग्लादेशी गेंदबाजों ने अपनी घातक गेंदबाजी से तहलका मचा दिया है। मेजबान ऑस्ट्रेलियाई टीम बांग्लादेश के तेज गेंदबाजों के सामने घुटने टेकते हुए नजर आई और उसकी पहली पारी महज 198 रनों के स्कोर पर ही सिमट गई। बांग्लादेश के युवा तेज गेंदबाज हसन महमूद (Hasan Mahmud) ने अपनी कातिलाना गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए कंगारू टीम के बल्लेबाजों की धज्जियां उड़ा दी और अकेले 6 बड़े विकेट अपने नाम किए। इस शानदार प्रदर्शन के बाद से ही क्रिकेट गलियारों में हसन महमूद की गेंदबाजी की चर्चा हर तरफ हो रही है।टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम पर बरपा कहरडार्विन के मारारा क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे इस रोमांचक टेस्ट मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने टॉस जीतकर पहले खुद बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। शुरुआत में पिच और परिस्थितियों को देखकर ऐसा लग रहा था कि कंगारू बल्लेबाज बड़ा स्कोर खड़ा करने में कामयाब होंगे, लेकिन बांग्लादेशी पेसर्स ने अपनी अनुशासित लाइन और लेंथ से इस अनुमान को पूरी तरह गलत साबित कर दिया। मैच के शुरुआती सत्र से ही गेंदबाजों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया था और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को क्रीज पर टिकने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ा। देखते ही देखते पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम निर्धारित ओवरों से पहले ही 198 के स्कोर पर पवेलियन लौट गई।हसन महमूद की घातक गेंदबाजी, अकेले झटके 6 विकेटइस ऐतिहासिक और मैच पलटने वाले प्रदर्शन के नायक 26 वर्षीय तेज गेंदबाज हसन महमूद रहे। उन्होंने अपनी तेज और स्विंग होती गेंदों से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। हसन ने अपने स्पेल में बेहद किफायती गेंदबाजी करते हुए मात्र 55 रन देकर 6 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। उन्होंने ट्रेविस हेड, स्टीव स्मिथ जैसे दिग्गजों को अपना शिकार बनाया और कंगारू बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ तोड़ दी। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किसी भी बांग्लादेशी गेंदबाज का यह एक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसने विदेशी धरती पर इतिहास रच दिया है।स्टीव स्मिथ के अर्धशतक के अलावा सभी बल्लेबाज रहे फ्लॉपएक तरफ जहां लगातार गिरते विकेटों के कारण ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम दबाव में नजर आ रही थी, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ (Steve Smith) ने एक छोर को संभालते हुए संघर्षपूर्ण पारी खेली। स्मिथ ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 71 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली और टीम के स्कोर को 200 के करीब पहुंचाया। उनके अलावा ऑस्ट्रेलिया का कोई भी अन्य बल्लेबाज क्रीज पर टिककर 30 रन का आंकड़ा तक पार नहीं कर सका। निचले क्रम के बल्लेबाज भी बांग्लादेशी आक्रमण के आगे ज्यादा देर टिक नहीं सके और पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक दिन, मैच पर मजबूत पकड़ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर टेस्ट मैच खेल रही बांग्लादेशी टीम के लिए यह दिन बेहद खास और ऐतिहासिक बन गया है। गेंदबाजों के उम्दा प्रदर्शन के दम पर मेहमान टीम ने मैच पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। पहली पारी के आधार पर मिले इस मनोवैज्ञानिक लाभ के बाद अब बांग्लादेशी बल्लेबाजों पर भी शानदार शुरुआत करने की जिम्मेदारी आ गई है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बांग्लादेशी बल्लेबाज इस पहली पारी में अनुशासित खेल दिखाते हैं, तो वे इस मुकाबले में एक नया इतिहास रच सकते हैं।
बिहार के युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खबर सामने आ रही है। राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं को आधुनिक युग की हाई-टेक डिमांड के अनुरूप पूरी तरह सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। अब बिहार के नौजवानों को पारंपरिक कोर्सों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और डिजिटल मार्केटिंग जैसे आधुनिक और भविष्योन्मुखी विषयों पर पेशेवर ट्रेनिंग दी जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के टैलेंटेड युवाओं को ग्लोबल मार्केट और कॉरपोरेट जगत की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है ताकि वे देश-विदेश में बेहतर करियर के अवसर हासिल कर सकें। सरकार के इस दूरदर्शी कदम से राज्य के छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। आइए जानते हैं इस हाई-टेक ट्रेनिंग प्रोग्राम से जुड़ी सभी खास और महत्वपूर्ण बातें।क्यों पड़ी आधुनिक तकनीकी ट्रेनिंग की जरूरत?आज का दौर पूरी तरह से डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर बन चुका है। सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमेशन और एआई के इस युग में पारंपरिक डिग्रियां अकेले रोजगार दिलाने के लिए नाकाफी साबित हो रही हैं। बिहार के युवाओं में प्रतिभा और बौद्धिक क्षमता की कोई कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक और महंगे तकनीकी संस्थानों तक पहुंच न होने के कारण कई बार वे पिछड़ जाते थे। मुख्यमंत्री की इस नई पहल का उद्देश्य इसी खाई को पाटना है। सरकार का मानना है कि यदि राज्य के युवाओं को समय रहते अत्याधुनिक तकनीकों जैसे मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, ड्रोन संचालन और डिजिटल मार्केटिंग में प्रशिक्षित कर दिया जाए, तो वे न केवल देश के बड़े महानगरों बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी एक मजबूत पहचान बना सकेंगे।किन-किन विषयों और कोर्सों की दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग?इस नई और व्यापक कौशल विकास योजना के तहत युवाओं को कई आधुनिक क्षेत्रों में निपुण बनाया जाएगा। सबसे पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कोडिंग के बुनियादी तथा उन्नत पहलुओं पर जोर दिया जाएगा ताकि छात्र भविष्य की सॉफ्टवेयर जरूरतों को समझ सकें। इसके अलावा कृषि, मैपिंग, वीडियोग्राफी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही मांग को देखते हुए 'ड्रोन टेक्नोलॉजी' (Drone Technology) की व्यावहारिक और तकनीकी ट्रेनिंग का विशेष मॉड्यूल तैयार किया गया है। साथ ही, आज के समय में हर छोटे-बड़े बिजनेस की जरूरत बन चुके 'डिजिटल मार्केटिंग' और ई-कॉमर्स मैनेजमेंट का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे युवा खुद का स्टार्टअप शुरू करने या फ्रीलांसिंग के जरिए अच्छी खासी कमाई कर सकें।कैसे ले सकेंगे इस योजना का लाभ और क्या होगी प्रक्रिया?बिहार सरकार के संबंधित कौशल विकास और उद्योग विभाग द्वारा इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है। राज्यभर के जिला मुख्यालयों और तकनीकी संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां योग्य प्रशिक्षकों द्वारा छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। इस योजना का लाभ उठाने के लिए युवाओं को एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जहां शैक्षणिक योग्यता और उम्र के मानदंडों के आधार पर चयन किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को प्रतिष्ठित कंपनियों में इंटर्नशिप और प्लेसमेंट दिलाने में भी सरकार की तरफ से पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा ताकि उनके करियर की राह आसान हो सके।युवाओं के भविष्य के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी पहलराजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार सरकार का यह कदम राज्य से होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जब राज्य का युवा तकनीक के मामले में पूरी तरह दक्ष और आत्मविश्वासी होगा, तो वह नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने वाला (Job Creator) बन सकेगा। मुख्यमंत्री के इस विजनरी ऐलान ने बिहार के आम युवाओं के दिलों में एक नई उम्मीद जगा दी है और आने वाले दिनों में यह ट्रेनिंग प्रोग्राम राज्य की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने में अहम भूमिका निभाएगा।
बिहार की राजधानी पटना की सबसे हाई-प्रोफाइल और प्रतिष्ठित मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे ने पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पिछले तीन दशकों यानी करीब 30 सालों से इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एकछत्र राज रहा था, लेकिन इस बार के उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने बाजी पलटते हुए बीजेपी को करारी शिकस्त दी है। इस ऐतिहासिक उलटफेर के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के मन में यह सवाल सबसे ऊपर है कि आखिर बीजेपी जैसी मजबूत पार्टी को उसके अपने सबसे सुरक्षित गढ़ में इतनी बड़ी हार का सामना क्यों करना पड़ा? खुद प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू और सार्वजनिक मंचों पर इस हार की सबसे बड़ी और अंदरूनी वजहों से पर्दा उठाया है।बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक और कार्यकर्ताओं की नाराजगीचुनावी नतीजों और जमीनी समीकरणों का विश्लेषण करने पर यह साफ पता चलता है कि बांकीपुर में बीजेपी की हार की सबसे बड़ी वजह उनके अपने कोर वोटर्स और कार्यकर्ताओं के भीतर पनप रही गहरी नाराजगी थी। पिछले तीन दशकों से लगातार एक ही सीट पर कब्जा जमाने के कारण पार्टी संगठन और स्थानीय नेतृत्व में एक प्रकार का अंहकार या 'टेकेन फॉर ग्रांटेड' वाला रवैया घर कर गया था। जानकारों का मानना है कि पार्टी ने चुनाव के दौरान स्थानीय मुद्दों और जनता की जमीनी समस्याओं से ज्यादा अपनी पुरानी साख पर भरोसा किया, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। इसके अलावा टिकट वितरण को लेकर भी पार्टी के भीतर स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में असंतोष की स्थिति बनी हुई थी, जिसका सीधा फायदा नए विकल्प के रूप में मैदान में उतरे प्रशांत किशोर को मिला।स्थानीय मुद्दे और शहरी समस्याओं पर प्रशांत किशोर की पैनी नजरबांकीपुर एक बेहद शिक्षित, शहरी और संभ्रांत मतदाताओं वाला क्षेत्र माना जाता है, जहां के मुद्दे ग्रामीण इलाकों से काफी अलग होते हैं। इस उपचुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने पारंपरिक जातिगत समीकरणों या ध्रुवीकरण की राजनीति से हटकर पूरी तरह से स्थानीय और बुनियादी विकास के मुद्दों पर अपना फोकस रखा। उन्होंने क्षेत्र में जलभराव (ड्रेनेज), ट्रैफिक जाम, शिक्षा की गुणवत्ता, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों और बुनियादी नागरिक सुविधाओं की कमी को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया। शहरी और पढ़े-लिखे मतदाताओं को यह महसूस हुआ कि सालों से सांसद और विधायक रहने के बावजूद उनकी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। पीके (Prashant Kishor) की इस सटीक रणनीति और आक्रामक जनसंपर्क अभियान ने शहरी वोटर्स के बीच एक मजबूत वैचारिक विकल्प पेश किया।युवा मतदाताओं का झुकाव और व्यवस्था परिवर्तन की चाहवर्तमान समय में युवा पीढ़ी और विशेषकर Gen-Z वर्ग पारम्परिक राजनीति और खोखले वादों से ऊब चुका है। देश और राज्यभर में चल रहे छात्र आंदोलनों, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और बेरोजगारी के मुद्दों ने युवाओं के भीतर एक सुलगता हुआ गुस्सा पैदा कर दिया था। बांकीपुर के उपचुनाव में भी युवा मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बदलाव के पक्ष में मतदान किया। प्रशांत किशोर ने युवाओं के इसी दर्द और आकांक्षाओं को अपनी कैंपेनिंग का मुख्य आधार बनाया, जिससे राजधानी के युवा वर्ग को यह उम्मीद जगी कि कोई तो ऐसा नेता है जो सिस्टम के भीतर सुधार लाने की बात कर रहा है। इस जन-आकांक्षा और बदलाव की बयार ने बीजेपी के पारंपरिक किले को अंदर से कमजोर कर दिया।नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर जनता का बदलता रुखराजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा जोरों पर है कि जनता अब केवल पार्टी के नाम पर वोट देने के बजाय उम्मीदवारों की कार्यशैली, सक्रियता और उनकी जवाबदेही को प्राथमिकता देने लगी है। प्रशांत किशोर ने लगातार डोर-टू-डोर कैंपेन, नुक्कड़ सभाओं और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर यह संदेश दिया कि वे चुनाव जीतने के बाद भी क्षेत्र में जनता के बीच मौजूद रहेंगे। इसके विपरीत, सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं और मशीनरी पर जनता का भरोसा उस स्तर पर काम नहीं आ सका। बहरहाल, बांकीपुर का यह चुनावी परिणाम भारतीय राजनीति के लिहाज से एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो रहा है, जिसने स्थापित राजनीतिक दलों को आत्ममंथन करने के लिए मजबूर कर दिया है।
आरजी कर केस में बड़ा एक्शन, पूर्व TMC विधायक गिरफ्तार
टीएमसी के पूर्व विधायक निर्मल घोष को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. दो दिन पहले ही आरजी कर पीड़िता की मौत के मामले में गड़बड़ी के लिए उनके ख़िलाफ FIR दर्ज की गई थी.
डीजल की वापसी... Skoda लॉन्च करेगा जबरदस्त माइलेज वाली कार
भारतीय बाजार में स्कोडा नई कार लेकर आ रही है. ये कार डीजल इंजन वाली होगी. कंपनी के पोर्टफोलियो में फिलहाल कोई डीजल कार नहीं है. बीएस-6 नियमों के लागू होने के बाद कंपनी ने डीजल कारों को बेचना बंद कर दिया था, लेकिन अब कंपनी ने एक गैप खोज लिया है. इस गैप को भरने के लिए ब्रांड प्रीमियम डीजल सेडान ला रही है.
बिहार के लाखों बीएड और डीएलएड पास युवाओं के लिए शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया (Teacher Recruitment Examination) को लेकर इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। लंबे समय से चौथे चरण की शिक्षक बहाली यानी TRE 4 का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की तरफ से नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। शिक्षा मंत्री ने एक आधिकारिक घोषणा करते हुए यह साफ कर दिया है कि चौथे चरण की इस बड़ी शिक्षक भर्ती परीक्षा का विज्ञापन जारी होने से पहले माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी एसटीईटी (STET) का परिणाम घोषित किया जाएगा। सरकार के इस बड़े फैसले का मतलब यह है कि जो अभ्यर्थी एसटीईटी परीक्षा में सफल होंगे, केवल वही TRE 4 की मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए पात्र माने जाएंगे। इस घोषणा के बाद से राज्य के लाखों प्रतियोगियों की धड़कनें तेज हो गई हैं और वे अपनी तैयारियों में पूरी शिद्दत से जुट गए हैं। आइए जानते हैं शिक्षा विभाग के इस नए फैसले और पूरी चयन प्रक्रिया का पूरा गणित।क्या है TRE 4 और क्यों हो रहा है इसका बेसब्री से इंतजार?बिहार में पिछले कुछ वर्षों से चल रहे बड़े पैमाने पर शिक्षक भर्ती अभियानों (BPSC Teacher Exam) के तहत पहले, दूसरे और तीसरे चरण की परीक्षाएं सफलताaपूर्वक संपन्न कराई जा चुकी हैं, जिसके जरिए लाखों युवाओं को सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का अवसर मिला है। अब निगाहें पूरी तरह से चौथे चरण यानी TRE 4 पर टिकी हुई हैं। राज्य के सरकारी विद्यालयों में खाली पड़े हजारों पदों को भरने के लिए इस नई भर्ती का ऐलान काफी पहले किया जा चुका था। लेकिन एसटीईटी (STET) और अन्य शैक्षणिक योग्यताओं के पेंच के कारण परीक्षा के नोटिफिकेशन में लगातार देरी हो रही थी। लाखों युवा अभ्यर्थी जो अपनी डिग्री पूरी कर चुके हैं, वे लगातार सरकार से यह मांग कर रहे थे कि जल्द से जल्द TRE 4 का विज्ञापन जारी किया जाए ताकि उन्हें भी शिक्षक बनने का मौका मिल सके।शिक्षा मंत्री का स्पष्ट निर्देश: पहले क्लियर होगा STET रिजल्टछात्रों के इन सवालों और असमंजस पर विराम लगाते हुए शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में यह ऐलान किया है कि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी योग्य छात्र का नुकसान न हो। नियम के मुताबिक माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं के लिए पात्रता साबित करने हेतु STET पास होना अनिवार्य होता है। यही वजह है कि सरकार ने यह तय किया है कि TRE 4 की आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से ठीक पहले लंबित या हाल ही में संपन्न हुए एसटीईटी का रिजल्ट जारी किया जाएगा। जब परिणाम घोषित हो जाएंगे और नए सफल अभ्यर्थियों की सूची तैयार हो जाएगी, उसके बाद ही चौथे चरण की मुख्य शिक्षक नियुक्ति परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ेगा सीधा असरशिक्षा विभाग के इस रणनीतिक फैसले से राज्य के उन तमाम बीएड और स्नातकोत्तर पास युवाओं को बहुत बड़ी राहत मिलेगी जो एसटीईटी की परीक्षा में शामिल हुए थे और अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे। यदि सरकार बिना एसटीईटी रिजल्ट के TRE 4 निकाल देती, तो ये नए छात्र परीक्षा से बाहर हो जाते और उन्हें अगले चरण का लंबा इंतजार करना पड़ता। अब रिजल्ट पहले आने से प्रतिस्पर्धा का दायरा और अधिक व्यापक हो जाएगा तथा अधिक से अधिक योग्य युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त होगा। हालांकि, इसके साथ ही परीक्षा में कंपटीशन का स्तर भी काफी ऊंचा होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।कब तक आ सकता है नोटिफिकेशन और क्या है आगे की प्रक्रिया?शिक्षा मंत्री के इस ताजा ऐलान के बाद अब पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) बहुत जल्द एसटीईटी के परिणामों की घोषणा कर देगी। परिणामों के प्रकाशन के तुरंत बाद बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) या संबंधित चयन बोर्ड द्वारा TRE 4 का विस्तृत विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसमें रिक्तियों की कुल संख्या, विषयवार सीटों का आरक्षण और आवेदन करने की महत्वपूर्ण तिथियां साझा की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अभ्यर्थियों को अब बिना एक भी पल गंवाए अपनी किताबों से नाता जोड़ लेना चाहिए क्योंकि एक बार रिजल्ट आते ही आवेदन और परीक्षा के बीच का समय बहुत कम मिलने वाला है।
राजस्थान में एक बार फिर मानसून अपने सबसे खतरनाक और उग्र रूप में लौट आया है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से हो रही झमाझम और मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बरस रहे बादलों के कारण राज्य के कई बड़े बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे प्रसिद्ध चंबल नदी (Chambal River) डरावने उफान पर बह रही है। पानी के लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर समेत कई जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। आइए जानते हैं राजस्थान के इस भीषण मानसूनी कोहराम और मौसम के ताजा हालातों की पूरी रिपोर्ट।राजस्थान के किन-किन जिलों में बरस रही है आफत की बारिश?मौसम विभाग (IMD) द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के जिलों में बादलों ने अपना डेरा पूरी तरह जमा लिया है। राजधानी जयपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, बूंदी, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ और टोंक में झमाझम बारिश का दौर लगातार जारी है। कई इलाकों में तो पिछले 24 घंटों के भीतर ही रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे सड़कों पर सैलाब जैसे हालात पैदा हो गए हैं। लगातार हो रही इस बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है और कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है। मौसम विज्ञान केंद्र का अनुमान है कि अभी आगामी कुछ दिनों तक बादलों का यह सिलसिला इसी तरह बना रहेगा।खतरे के निशान के ऊपर बह रही उफनती चंबल नदीइस भारी मानसूनी बारिश का सबसे ज्यादा असर हाड़ौती और उसके आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां उफान पर चल रही चंबल नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। कोटा बैराज और राणा प्रताप सागर बांध से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है या कई जगहों पर उसे पार कर चुका है। नदी के किनारे बसे गांवों में पानी घुसने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। स्थानीय प्रशासन ने नदी के आसपास के इलाकों में धारा 144 जैसे प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ लोगों को पानी के तेज बहाव से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।बांधों के गेट खोले गए, निचले इलाकों में प्रशासन की पैनी नजरझमाझम बारिश के चलते राजस्थान के दर्जनों छोटे-बड़े बांध ओवरफ्लो होने की स्थिति में आ गए हैं। राज्य के प्रसिद्ध राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर, कोटा बैराज और बीसलपुर बांध में पानी की आवक लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर बांधों के गेट एक-एक करके खोले जा रहे हैं, जिससे downstream (निचले इलाकों) में पानी का बहाव बहुत तेज हो गया है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर और अधिकारी 24 घंटे बांधों के वाटर लेवल पर सैटेलाइट और मैनुअल माध्यमों से कड़ी नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।एसडीआरएफ (SDRF) और सिविल डिफेंस की टीमें पूरी तरह मुस्तैदइस भारी बरसात और बाढ़ जैसे हालात से निपटने के लिए राजस्थान सरकार ने आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है। प्रभावित जिलों में स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और सिविल डिफेंस की टीमों को तैनात कर दिया गया है। संवेदनशील और बाढ़ संभावित इलाकों में लगातार गश्त की जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत रेस्क्यू किया जा सके। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें, खासकर पुराने और जर्जर मकानों तथा नदी-नालों के पुलों के पास जाने से पूरी तरह बचें।
Monsoon Session: Kiren Rijiju बोले- 12 बिल पास, पर Debate न होने से दुखी
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि संसद का हाल ही में खत्म हुआ मॉनसून सत्र विधायी नज़रिए से सफल रहा, जिसमें 12 बिल पास हुए, लेकिन उन्होंने माना कि बहस और चर्चा के मामले में यह सत्र उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। सत्र खत्म होने के बाद मीडिया से बात करते हुए रिजिजू ने कहा कि सरकार ने इस सत्र का आकलन दो अलग-अलग नज़रियों से किया। जहाँ विधायी कामकाज योजना के मुताबिक आगे बढ़ा, वहीं दोनों सदनों में हुए हंगामे ने कुल कामकाज पर असर डाला। इसे भी पढ़ें: खड़गे की रैली के बाद 'शुद्धिकरण' पर बवाल: Priyanka Gandhi ने पूछा - यह कैसी Politics? रिजिजू ने कहा कि कुल 12 बिल पास हुए, लेकिन हम चर्चा की क्वालिटी से खुश नहीं हैं क्योंकि विपक्ष ने ठीक से बहस नहीं होने दी, खासकर लोकसभा में। मैंने पहली बार देखा है कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है। विपक्ष सरकार से जवाब मांगता है और सरकार जवाब देने के लिए बाध्य है। फिर भी, संसद के अंदर हमने देखा कि सरकार खुद चर्चा चाहती थी, जबकि विपक्ष उससे बचने के लिए बहाने बना रहा था। यह संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने ऐलान किया कि वे न तो चर्चा सुनेंगे और न ही मंत्री का जवाब। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मैंने एक और बात देखी है कि कांग्रेस सांसदों को लगता है कि उनका मुख्य काम सिर्फ़ नारे लगाना और प्लेकार्ड व बैनर लेकर हंगामा करना है। उन्होंने यही सोच अपना ली है... वे सुबह उठते हैं, तकिया उठाते हैं, संसद परिसर जाते हैं और नारेबाज़ी व अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उनका काम बस इतना ही रह गया है; उन्होंने यही स्थिति बना दी है। संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर, मुझे कांग्रेस सांसदों, खासकर नए सांसदों के लिए सचमुच दुख होता है। मैं बहुत संवेदनशील व्यक्ति हूँ और कांग्रेस सांसदों का दर्द समझ सकता हूँ। अगर बहस या चर्चा ही नहीं होगी तो वे कैसे सीखेंगे? मैं वरिष्ठ सदस्यों से तो ज़्यादा कुछ नहीं कह सकता, लेकिन नए सांसदों को सार्थक बहस और चर्चा का मौका नहीं मिला। गलती कांग्रेस पार्टी की है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि जब हम शीतकालीन सत्र के लिए फिर से मिलेंगे, तो सोच-समझकर किए गए चिंतन से बेहतर बदलाव आएगा। इसे भी पढ़ें: CJP Meeting रद्द होने पर Dipke का फूटा गुस्सा, BJP पर Hall मालिकों को धमकाने का लगाया आरोप रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में 11 बिल बिना चर्चा के पास हुए, जबकि एक पर चर्चा हुई। राज्यसभा में बिल पर पूरी चर्चा हुई। सिर्फ़ मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और कुछ अन्य दलों ने वॉकआउट किया, जबकि बाकी विपक्षी पार्टियाँ चर्चा में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि हंगामा करते हुए भी मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। पहले विपक्ष बातचीत में शामिल होता था, जबकि ये लोग विपक्ष में होते हुए भी चर्चा से भागते हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
15 अगस्त तक Delhi में बदला ट्रैफिक रूट!
स्वतंत्रता दिवस से पहले 13 अगस्त को लाल किले पर फुल ड्रेस रिहर्सल के चलते दिल्ली में बड़े यातायात प्रतिबंध लागू हैं. सुबह 4 बजे से प्रमुख सड़कों पर आम वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहेगी. इसका असर गाजियाबाद और एनसीआर से दिल्ली आने वालों पर भी पड़ रहा है. कई सीमाओं पर बैरिकेडिंग और जांच के कारण जाम की स्थिति बनी है. पुलिस ने लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है.
श्रीदेवी की बायोग्राफी 'एम्प्रेस' जल्द होगी रिलीज, प्रियंका चोपड़ा ने शेयर किया कवर
श्रीदेवी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका नाम आते ही हिंदी सिनेमा की कई यादगार फिल्में और किरदार आंखों के सामने आ जाते हैं। अपनी खूबसूरती, शानदार अभिनय और चुलबुले अंदाज से श्रीदेवी ने न सिर्फ दर्शकों के दिलों पर राज किया, बल्कि भारतीय सिनेमा में अपनी एक अलग जगह बनाई।
कैसे होता है गर्भवती महिला का दाह संस्कार? क्या कहता है गरुड़ पुराण
Garud Puran: हिंदू धर्म और गरुड़ पुराण में व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार और दाह संस्कार को लेकर विशेष नियम बताए गए हैं. हालांकि, किसी गर्भवती महिला या छोटे बच्चों की मृत्यु होने पर अंतिम क्रिया की विधि सामान्य वयस्कों से काफी अलग मानी जाती है.
रेमो ने किया फोर्स, शक्ति ने हीरो संग मजबूरी में किया रोमांस
शक्ति मोहन ने बड़ा खुलासा किया. एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि शो में जबरन राघव को KISS करने को कहा गया. जबकि वो सहज नहीं थीं.
हरियाली तीज पर दिखना है सबसे सुंदर? अपनाएं ये 5 आसान तरीके
हर महिला हरियाली तीज पर सबसे अलग और सुंदर लगना चाहती है और इसके लिए वो महंगे फेशियल भी करवाती हैं. ऐसे में आज यहां हम आपको कुछ ऐसे घरेलू स्किन केयर टिप्स बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आपकी चेहरे की खोई हुई चमक वापस आ जाएगी.
बांग्लादेश ऐसा करेगा! ऑस्ट्रेलिया ने सोचा ना होगा, बना शर्मनाक रिकॉर्ड
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में बांग्लादेश ने पहली बार उसे 200 रन से पहले ऑलआउट कर दिया. डार्विन टेस्ट के पहले दिन (13 ) ऑस्ट्रेलिया 53 ओवर में 198 रन पर सिमट गया. हसन महमूद ने छह विकेट लेकर इतिहास रचा. स्टीव स्मिथ ने 71 रन बनाकर अकेले संघर्ष किया, लेकिन दूसरी तरफ लगातार विकेट गिरते रहे और ऑस्ट्रेलियाई पारी ढह गई.
सांप काटने से 3 मौतें, फिर भी चटाई पर सो रहे आदिवासी बच्चे?
Ground Report: साल का 99 करोड़ खर्च हो रहा लेकिन बदहाली ऐसी कि कोई भी सहम जाए. चंद्रपुर में चार हजार से ज्यादा आदिवासी बच्चों का हाल जानने पहुंची aajtak.in की टीम को वहां जो नजारे देखने को मिले, हम आपको यहां बता रहे हैं. पढ़िए- पूरी रिपोर्ट.
हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट की मास्टरमाइंड लोला का काला चिठ्ठा!
लखनऊ में एफआरआरओ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उज्बेकिस्तान की लोला क्यूमोवा गिरफ्तार हुई. वह फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के सहारे 1 साल से अवैध रूप से रहकर हाई-प्रोफाइल देह व्यापार का नेटवर्क चला रही थी. फर्जी पहचान पत्र लगाने पर क्लिनिक से पकड़ी गई आरोपी को जेल भेज दिया गया है.
खड़गे की रैली के बाद 'शुद्धिकरण' पर बवाल: Priyanka Gandhi ने पूछा - यह कैसी Politics?
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 13 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद BJP और RSS द्वारा किए गए 'शुद्धिकरण' हवन की आलोचना की। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस कार्यक्रम की निंदा करने और माफ़ी मांगने की मांग की। खरगे ने 8 अगस्त को उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के तहत कांग्रेस की रैली में भाषण दिया। इस घटना पर टिप्पणी करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि यह सोच साफ तौर पर बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा को दिखाती है। इसे खारिज किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री को इसकी निंदा करनी चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: Youth Congress नेता वैशाख गिरफ्तार, Kerala BJP पूर्व नेता को उकसाने का आरोप कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने भी BJP और RSS की आलोचना की और सत्ताधारी पार्टी पर ऐसी विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया जो समानता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि BJP-RSS सरकार और उनकी विचारधारा के लिए यह शर्म की बात है कि एक तरफ तो वे 'तिरंगा यात्रा' निकालने और ऐसी पब्लिसिटी करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे नेता और विपक्ष के नेता के मामले में समानता के उस सिद्धांत का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, जिसकी गारंटी हमारे संविधान ने दी है और जिसे देश और दुनिया मानती है। शैलजा ने इस घटना पर कोई कार्रवाई न करने के लिए उत्तराखंड राज्य सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देखिए, यह बीजेपी शासित राज्य है जहाँ वे बड़े-बड़े दावे करते हैं; ज़रा उस जगह के बारे में सोचिए जहाँ खड़गे जी और हम सबने रैली की थी; वे वहाँ 'शुद्धिकरण' कर रहे हैं। यह किस तरह का 'शुद्धिकरण' है? असल में उत्तराखंड को शुद्धिकरण की ज़रूरत है - ऐसी विचारधारा, ऐसी सोच और ऐसी घटिया मानसिकता से शुद्धिकरण। उत्तराखंड को इस बात से मुक्त करने की ज़रूरत है कि ऐसे लोग सत्ता में हैं, फिर भी ऐसी घटनाओं पर कोई कार्रवाई नहीं करते। इसे भी पढ़ें: Parliament में विपक्ष का हंगामा 'चर्चा से भागने' की साजिश, Nitin Nabin बोले- जनता जानती है कौन दोषी इस बीच, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कथित घटना की निंदा की और कहा कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
'BJP ने मंच का शुद्धिकरण करके मेरा अपमान किया', सदन में भड़के खड़गे
गुरुवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ. राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में अपनी रैली के मंच के 'शुद्धिकरण' की बात उठाई. उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनकी रैली के मंच का बीजेपी के लोगों ने शुद्धिकरण किया. देखें वीडियो.
संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हो गया। किरेन रिजिजू के मुताबिक राज्यसभा की उत्पादकता 39% और लोकसभा की 19% रही। लोकसभा में 11 विधेयक पारित हुए।
'जल्दी आओ सदन के अंदर', हाथों में बंदर-टेडी लेकर विपक्ष ने की नारेबाजी
संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में खिलौना बंदर और टेडी लेकर प्रदर्शन किया. कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा की अगुवाई में सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार पर छात्रों के मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया. प्रदर्शन के दौरान '56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर' का नारा लगाया गया.
पंजाब में एक और भर्ती प्रक्रिया पर HC की रोक, पेपर लीक विवाद के बीच मान सरकार को दूसरा झटका
पंजाब की भगवंत मान सरकार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से दो दिनों में दूसरा बड़ा झटका लगा है. फार्मासिस्ट भर्ती के बाद अब 'पंजाब स्टेट रूरल लाइवलीहुड्स मिशन' (PSRLM) के तहत 85 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं पाए जाने के बाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर तक रोक लगा दी है.
प्लेन से आना-जाना, IRCTC के एयर टूर पैकेज में घूमिए ये शानदार प्लेस
IRCTC की ओर से इस पैकेज में यात्रियों को उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर, चिंतामन गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, मंगलनाथ मंदिर का दर्शन कराया जाएगा.
‘बचोगे तो पिटोगे’... वैभव के खिलाफ भज्जी का 'खतरनाक गेमप्लान'
हरभजन सिंह ने वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए कहा कि इस किशोर बल्लेबाज के खिलाफ बचाव की रणनीति काम नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि वैभव को रोकने का सबसे बेहतर तरीका है उस पर आक्रमण करना और हर गेंद पर विकेट लेने की कोशिश करना.
मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ा, Lok Sabha और Rajya Sabha अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
गुरुवार 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही मॉनसून सत्र समाप्त हो गया, जिसमें कामकाज बहुत कम हुआ। सत्र के दौरान कोई प्रश्नकाल नहीं हुआ और कई बिल बिना बहस के ही पास कर दिए गए। विपक्ष ने NEET पेपर 'लीक', राम मंदिर चंदे की 'चोरी' और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान जैसे मुद्दों पर बार-बार हंगामा किया। इसे भी पढ़ें: Youth Congress नेता वैशाख गिरफ्तार, Kerala BJP पूर्व नेता को उकसाने का आरोप आखिरी दिन की शुरुआत में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' बजने के कुछ ही देर बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों मौजूद थे। वहीं, राज्यसभा ने चर्चा के बाद 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' पास कर दिया। उच्च सदन की कार्यवाही कुल 37 घंटे 49 मिनट तक चली और 12 बिलों पर पास करने या लौटाने के लिए विचार किया गया। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने समापन भाषण में इस सत्र के दौरान लगातार हंगामे पर अफसोस जताया। बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले राज्यसभा में भी राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ बजाया गया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoP) मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई कथित 'शुद्धिकरण' की घटना का मुद्दा उठाया। यह घटना 8 अगस्त, 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष की रैली के बाद हुई थी। खड़गे ने कहा कि छुआछूत की इस हरकत के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। यही मेरी मांग है। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में बीजेपी का हाथ था। इस पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती है। घटना की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इस मामले को गंभीरता से लेंगे। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने को कहा। इसे भी पढ़ें: Parliament में विपक्ष का हंगामा 'चर्चा से भागने' की साजिश, Nitin Nabin बोले- जनता जानती है कौन दोषी सभापति राधाकृष्णन ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पार्टी या विचारधारा से परे हम सभी इसकी निंदा करते हैं। हम सभी पवित्र हैं और हमें शुद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह इस मामले की जांच कराए और दोषियों को सजा दे। इसमें कोई दो राय नहीं है। मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर में मकर द्वार पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच विरोध-प्रदर्शन को लेकर आमना-सामना हुआ। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कोच में डबल बेड, बाथरूम में बाथटब... ऐसी ट्रेन का किराया कितना?
भारत की हेरिटेज पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन में सफर करना किसी चलते-फिरते शाही होटल में रहने जैसा अनुभव है. ट्रेन के Presidential Suite में किंग-साइज बेड, प्राइवेट बाथरूम और बाथटब जैसी सुविधाएं मिलती हैं. 2026-27 के पीक सीजन में इस सुइट का किराया करीब 3.02 लाख रुपये प्रति रात है.
बांग्लादेश को अब भारत ही बचा सकता है! क्या हुआ जो 8 बजे लाइटें बंद करने की नौबत आई
भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में ऊर्जा संकट पैर पसारता नजर आ रहा है। खबर है कि सरकार भी अलर्ट मोड पर है और पाबंदियां लागू कर रही है। हाल ही में बांग्लादेश ने भारत से मदद मांगी थी। हालांकि, अब तक साफ नहीं है कि भारत का क्या प्लान है।
संसद चलाने में हर मिनट कितना खर्च? मॉनसून सत्र में तो पश्नकाल की भी चढ़ गई बलि
हंगामे के पीछे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का एक पुराना पैटर्न है। सत्तापक्ष का आरोप रहता है कि विपक्ष सिर्फ हंगामा करके करदाताओं के पैसे की बर्बादी कर रहा है और चर्चा से भाग रहा है।
मल्लिकार्जुन खरगे के मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर संसद में हंगामा, नड्डा बोले- ‘दुखद है, जांच करेंगे’
हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान के कथित शुद्धिकरण का मुद्दा राज्यसभा में उठा। जेपी नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए जांच का भरोसा दिया।
बच्चों ने कांवड़ लेकर मांगी फीस माफी की मन्नत, DM ने बदली चारों की जिंदगी
मथुरा के कोसीकलां में चार बच्चों ने कांवड़ लेकर भगवान भोलेनाथ से स्कूल फीस माफ होने की मन्नत मांगी थी. बच्चों की यह बात सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद DM शैलेन्द्र कुमार सिंह ने संज्ञान लिया. चारों बच्चों को कलेक्ट्रेट बुलाकर स्कूल फीस माफ कराई गई. उन्हें ड्रेस, बैग, किताबें, जूते-मोजे समेत जरूरी सामान भी दिया गया. SDM छाता ने चारों बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी ली है.
Assam-Arunachal Border: असम-अरुणाचल सीमा पर क्यों हुआ टकराव? पुलिस ने की हवाई फायरिंग; CM ने की शांति की अपील
राजकुमारी मत बनो... लाइव मैच में कंगारू बल्लेबाज हुआ ट्रोल
डार्विन टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली पारी में 198 रन ही बना सकी. मुकाबले के पहले दिन जहां मेजबान टीम के बाकी बल्लेबाज बांग्लादेशी पेस अटैक के सामने टिक नहीं सके, वहीं स्टीव स्मिथ ने संयम दिखाते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम को पूरी तरह ढहने से बचाया.
संसद का मानसून सत्र समाप्त: 'लोकसभा में 12 विधेयक पारित हुए, 39 फीसदी हुआ कामकाज', रिजिजू ने क्या-क्या बताया?
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने गुरुवार को रांची के सदर अस्पताल में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से मुलाकात की। महतो पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के बाद वहां इलाज करा रहे हैं। महतो झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में 11 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। 10 अगस्त को पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किए जाने के बाद महतो का अभी इलाज चल रहा है। उन्होंने सिविल सर्जन को एक औपचारिक आवेदन देकर बताया कि अपने साथी प्रदर्शनकारियों से अलग होने से उन्हें शारीरिक चोटों की तुलना में ज़्यादा तकलीफ़ हुई है। इसे भी पढ़ें: Youth Congress नेता वैशाख गिरफ्तार, Kerala BJP पूर्व नेता को उकसाने का आरोप उन्होंने पहले अस्पताल प्रशासन से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे विरोध-प्रदर्शन की जगह पर लौटने की इजाज़त मांगी थी। महतो ने लिखा कि मेरा शरीर अस्पताल के बिस्तर पर इलाज करवा रहा है, लेकिन मेरी आत्मा और मेरा संकल्प उस सत्याग्रह स्थल पर है, जहां छात्र और युवा अपने भविष्य के लिए एक जायज़ संघर्ष कर रहे हैं। सदर अस्पताल में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का 11वां दिन है। मेडिकल अधिकारियों को लिखे एक हाथ से लिखे पत्र में, महतो ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ़ विरोध कर रहे हज़ारों छात्रों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर की। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को 20वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में विरोध प्रदर्शन कर रहा है। उनकी मांग है कि भर्ती परीक्षाओं में ज़्यादा पारदर्शिता हो, कई परीक्षाएं रद्द की जाएं और CBI या झारखंड के बाहर के रिटायर्ड जजों के पैनल से मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। इसे भी पढ़ें: Parliament में विपक्ष का हंगामा 'चर्चा से भागने' की साजिश, Nitin Nabin बोले- जनता जानती है कौन दोषी पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने बुधवार को चेतावनी दी कि अगर एक हफ़्ते के अंदर CBI जांच की मांग पूरी नहीं हुई, तो वे भूख हड़ताल करेंगे। उन्होंने 2024 में एक्साइज़ कॉन्स्टेबल की शारीरिक परीक्षा के दौरान जान गंवाने वाले 19 लोगों में से हर एक के परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवज़े की भी मांग की। ABVP ने इस मुद्दे पर 1,200 से ज़्यादा यूनिवर्सिटीज़ में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है, जबकि इसके नेताओं ने राज्य सरकार की बनाई SIT की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं और इसके गठन में बार-बार किए गए बदलावों का ज़िक्र किया है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Ghaziabad रेलवे स्टेशन पर मोबाइल ब्लास्ट से मची भगदड़!
गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर ग्रेटर नोएडा के 26 वर्षीय युवक की जेब में रखा मोबाइल अचानक गर्म होकर फट गया. धमाके में उसके दोनों हाथ झुलस गए और शरीर के निचले हिस्से समेत निजी अंग तक जल गए. युवक को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई. परिवार का कहना है कि फोन करीब एक महीने पहले खरीदा गया था और अब तकनीकी जांच की मांग की गई है.
'12 बिल पास, सिर्फ एक पर चर्चा', रिजिजू ने बताई हंगामेदार मॉनसून सत्र की कहानी
संसद का मॉनसून सत्र इस बार भी बेहद हंगामेदार रहा. लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार विपक्ष और सत्ता पक्ष के हंगामे की वजह से स्थगित करनी पड़ी. मॉनसून सत्र में सिर्फ 12 बिल ही पास हो सके हैं.
संसद का मानसून सत्र खत्म; वंदे मातरम के बाद लोकसभा स्थगित; घंटे भर चली राज्यसभा में एक बिल पास
संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राष्ट्रगीत वंदे मातरम बजने के तत्काल बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। घंटे भर चली राज्यसभा में एक बिल पास हुआ।
प्रदर्शनकारियों के फेस रिकग्निशन का मामला, SC सुनवाई के लिए हुआ तैयार
पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई पर सहमति जताई है. यह मामला सुरक्षा और नागरिकों की निजता के बीच संतुलन से जुड़ा है.
सिर्फ 15 घंटे चली लोकसभा: एंटी-पेपर लीक से 'केरलम' तक, बिना चर्चा के धड़ाधड़ पास हुए कई अहम बिल
भारतीय संसद के कामकाज और उसकी कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में समाप्त हुए संसद के सत्र के दौरान लोकसभा का हाल ऐसा रहा कि महज 18 दिनों की कुल अवधि में सदन की कार्यवाही कुल मिलाकर सिर्फ 15 घंटे ही चल पाई। इस भारी हंगामे और गतिरोध के बीच देश से जुड़े कई बेहद संवेदनशील और बड़े विधेयकों (Bills) को बिना किसी सार्थक चर्चा या डिबेट के ही जबरन पास करा लिया गया। इसमें एंटी-पेपर लीक कानून से लेकर राज्य के नाम बदलने से जुड़े 'केरलम' जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव और बिल भी शामिल रहे, जिन पर देश की जनता की निगाहें टिकी हुई थीं।हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का सत्र, 18 दिनों में सिर्फ 15 घंटे कामकाजसंसदीय लोकतंत्र में संसद को देश की सबसे बड़ी पंचायत माना जाता है, जहां जनता के मुद्दों पर खुलकर बहस होनी चाहिए और कानूनों की समीक्षा की जानी चाहिए। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक हालात और सत्तापक्ष-विपक्ष के बीच तीखे टकराव के चलते इस सत्र का अधिकांश समय नारेबाजी और हंगामे की भेंट चढ़ गया। हालात यह रहे कि करीब 18 दिनों तक चले इस सत्र में दोनों पक्षों के बीच सहमति न बन पाने के कारण लोकसभा की कुल कामकाज की अवधि सिमटकर मात्र 15 घंटे के आसपास ही रह गई। इस न्यूनतम समय में सदन चलाना सरकार और पीठासीन अधिकारियों के सामने भी एक बड़ी चुनौती साबित हुआ।बिना बहस के पास हुए देश को प्रभावित करने वाले बड़े बिलजब सदन में चर्चा का समय ही नहीं बचा, तो सरकार के पास विधायी कार्यों को पूरा करने के लिए बिना बहस के बिल पारित कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। इस दौरान देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े 'एंटी-पेपर लीक' (Anti-Paper Leak) जैसे कड़े और जरूरी कानूनों को बिना व्यापक चर्चा के मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा केरल राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने से जुड़ा प्रस्ताव और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक विधिवत बिल भी बिना किसी व्यापक संशोधन या मंथन के सदन में ध्वनिमत से पास कर दिए गए। जानकारों का मानना है कि महत्वपूर्ण विधेयकों का इस तरह जल्दबाजी में पास होना लोकतंत्र की सेहत के लिए चिंता का विषय है।लोकतंत्र के लिए चिंता का बड़ा सबबसंसद में चर्चा के बिना कानून बनने की यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है, जो राजनीतिक विश्लेषकों और संविधानविदों के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई है। जब जनप्रतिनिधि ही सदन के पटल पर अपनी बात नहीं रख पाते और बिना बहस के कानून देश पर लागू होने लगते हैं, तो उससे जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होता है। इस सत्र के दौरान महज 15 घंटे की कार्यप्रणाली ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे राजनेता देश के जरूरी मुद्दों पर गंभीर संवाद करने से कतराने लगे हैं।
दही नहीं जमेगा पतला! जामन में मिला दें ये चीज, जमेगा गाढ़ा-मलाईदार
How To Make Thick Curd: क्या आपकी घर में जमाया गया दही पतला या पानीदार बनता है? अगर हां, तो परेशान ना हों. आज हम आपको घर पर थक्केदार, गाढ़ा और मलाईदार जमाने की एक खास ट्रिक बताएंगे. इस ट्रिक से बिना किसी झंझट घर पर ही हलवाई जैसा थक्केदार और मलाईदार गाढ़ा दही जमेगा.
AI turbulence incident: Answers to 20 questions to reveal truth; investigation team may questions passengers - एअर इंडिया टर्बुलेंस हादसा: 20 सवालों के जवाब से खुलेगा राज, यात्रियों से भी पूछताछ कर सकती है जांच टीम
जेल में बंद आजम खान से मिले शिवपाल यादव, कहा- सपा सरकार बनी तो उन्हें बनाएंगे गृहमंत्री
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने बुधवार को कहा कि अगर 2027 में राज्य में SP की सरकार बनती है, तो जेल में बंद पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आज़म खान को गृह मंत्री बनाया जाएगा। साथ ही, उन्होंने सरकार पर आज़म खान के साथ अन्याय करने का आरोप भी लगाया। यादव ने रामपुर ज़िला जेल में खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म से मुलाक़ात के बाद ये बातें कहीं; वहाँ उन्होंने उनके साथ लगभग एक घंटा बिताया। इसे भी पढ़ें: Youth Congress नेता वैशाख गिरफ्तार, Kerala BJP पूर्व नेता को उकसाने का आरोप बैठक के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि अगर SP सत्ता में आती है, तो वह कथित अन्याय के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि खान ने जेल से एक संदेश भेजा है जिसमें SP नेताओं से पूरे उत्तर प्रदेश का दौरा करने और 2027 में सरकार बनाने की दिशा में काम करने को कहा गया है। यादव ने कहा कि आज़म खान के साथ बहुत अन्याय हुआ है। जब हमारी सरकार बनेगी, तो हम उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे जिन्होंने यह अन्याय किया है। हम आज़म खान के साथ हुए अन्याय का बदला लेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर 2027 में SP की सरकार बनती है, तो खान को गृह मंत्री बनाया जाएगा। यादव ने दावा किया कि खान जेल में बहुत मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और आरोप लगाया कि उन्हें ज़मीन पर सोने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उन्हें दवाइयाँ और कपड़े भी नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजम खान ने जेल से संदेश भेजा है कि हमें पूरे उत्तर प्रदेश का दौरा करना चाहिए और 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनानी चाहिए। हमें दौरे करने चाहिए और अखिलेश यादव से भी पूरे राज्य का दौरा करने के लिए कहना चाहिए। सरकार बनाना ही मुख्य मकसद है। इसे भी पढ़ें: Parliament में विपक्ष का हंगामा 'चर्चा से भागने' की साजिश, Nitin Nabin बोले- जनता जानती है कौन दोषी यादव की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और शिवपाल यादव दिन में सपने देख रहे हैं। सिंह ने कहा कि सबसे पहले, आज़म खान को अपने खिलाफ दर्ज बड़ी संख्या में मामलों और कानूनी लड़ाई का सामना करना होगा। उसके बाद ही वे किसी और मुद्दे के बारे में सोच सकते हैं। खान अभी कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में हैं। मई 2026 में, एक MP-MLA कोर्ट ने अलग-अलग जन्म तारीख वाले दो पैन कार्ड से जुड़ी कथित आपराधिक साज़िश के मामले में उनकी सज़ा सात साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी और जुर्माना भी बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
एफसीआरए बिल को लेकर सरकार और विपक्ष पर भड़कीं मायावती
एफसीआरए बिल को लेकर सरकार और विपक्ष पर भड़कीं मायावती
शेख रशीद ने खुद को बताया हाफिज सईद का गुलाम,भारत को भी दी धमकी
पाकिस्तान में सत्ता और आतंकवाद का गठजोड़ कितना गहरा है, ये एक बार फिर बेनकाब हो गया है। दरअसल पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के करीबी रहे और उनकी सरकार के मंत्री रहे शेख रशीद ने अब खुद को खूंखार आतंकी हाफिज सईद का नौकर बता दिया है।
अल-नीनो का असर, नदी का पानी घटा तो निकला हिटलर का युद्धपोत
डानुबे नदी का पानी घटने से 1944 में डूबा जर्मन युद्धपोत फिर दिखाई देने लगा है. सर्बिया में सामने आया यह मलबा यूरोप में बढ़ती गर्मी और सूखे के बीच नदियों के घटते जलस्तर की तस्वीर दिखाता है.
दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंधे से दागी जाने वाली खतरनाक मिसाइल (Shoulder-fired missile) के गंभीर खतरे के बाद उन्हें आनन-फानन में अपना आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' छोड़ना पड़ा था। तुर्किये (Turkey) दौरे से लौटते वक्त अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के बाद एक ऐसा सीक्रेट ऑपरेशन चलाया गया, जिसने हॉलीवुड फिल्मों की कहानी को भी पीछे छोड़ दिया है।क्या था पूरा मामला और क्यों मिला था मिसाइल का खतरा?मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महीने जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्किये की राजधानी अंकारा गए थे, तब वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण था। अमेरिकी और स्थानीय खुफिया एजेंसियों को इस बात के पुख्ता इनपुट मिले थे कि ईरान समर्थित या अन्य हमलावर संगठन राष्ट्रपति के विमान को निशाना बनाने की फिराक में हैं। यह खतरा किसी सामान्य हमले का नहीं, बल्कि शोल्डर-फायर मिसाइल (मैनपैड्स) का था, जो कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहे विमानों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखती है। इस आसन्न खतरे को भांपते हुए सीक्रेट सर्विस (Secret Service) ने तुरंत एक्शन लेने का फैसला किया।कैटरिंग ट्रक के जरिए निकाला गया सीक्रेट प्लानयह पूरा ऑपरेशन किसी जासूसी थ्रिलर फिल्म की तरह अंजाम दिया गया। योजना के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने सामान्य रूप से मीडिया और अधिकारियों के सामने बड़े विमान यानी 'एयर फोर्स वन' में बोर्ड किया। इसके तुरंत बाद, एक बेहद गोपनीय और चालाकी भरा कदम उठाते हुए ट्रंप और उनके कुछ चुनिंदा करीबी सहयोगियों को एयरपोर्ट के एक कैटरिंग ट्रक (Catering Truck) के कंटेनर के जरिए चुपचाप उस बड़े विमान से बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें एक छोटे और कम पहचाने जाने वाले सैन्य विमान C-32A (बोइंग 757 का मॉडिफाइड रूप) में शिफ्ट किया गया, जो उन्हें लेकर ब्रिटेन के सैन्य बेस के लिए रवाना हुआ।बड़े विमान को बनाया गया 'डिकॉय' (Decoy)सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी चालाकी से मूल 'एयर फोर्स वन' विमान को एक 'डिकॉय' (झुकलावा) के रूप में इस्तेमाल किया। राष्ट्रपति के बिना ही बड़ा विमान अंकारा से रवाना हुआ, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट, व्हाइट हाउस के कर्मचारी और चुनिंदा मीडियाकर्मी सवार थे। ऐसा इसलिए किया गया ताकि यदि हमलावरों की नजर विमान पर हो, तो उनका ध्यान भटकाया जा सके। बाद में खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में पुष्टि की कि उन्होंने सैन्य अधिकारियों और सीक्रेट सर्विस के निर्देशों का पालन करते हुए दूसरा विमान चुना था, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती थीं।
Cauvery, Mekedatu प्रोजेक्ट्स पर Karnataka में आज बंद, संगठनों ने दिया नैतिक समर्थन
कन्नड़ समर्थक संगठन 'कन्नड़ ओक्कूटा' ने तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़े जाने और सिंचाई से जुड़ी अन्य परियोजनाओं के विरोध में बुधवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। इस बीच, प्रवीण शेट्टी और टी.ए. नारायण गौड़ा के नेतृत्व वाले 'कर्नाटक रक्षण वेदिके' समेत कई संगठनों और संघों ने इस बंद को केवल नैतिक समर्थन दिया है। 'कन्नड़ ओक्कूटा' के अध्यक्ष वताल नागराज ने कहा कि कावेरी मुद्दे और लंबे समय से लंबित मेकेदातु, महादायी और कलसा-बंदूरी प्रोजेक्ट्स पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर पूरे राज्य में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बंद रखा जाएगा। इसे भी पढ़ें: Youth Congress नेता वैशाख गिरफ्तार, Kerala BJP पूर्व नेता को उकसाने का आरोप अस्पताल, मेडिकल की दुकानें, सरकारी दफ़्तर और स्कूल खुले रहेंगे। ओला-ऊबर ड्राइवर और मालिक संघ, कर्नाटक राज्य ऑटो और टैक्सी फ़ेडरेशन, आदर्श ऑटो यूनियन, रोड ट्रांसपोर्टेशन कॉर्पोरेशन की यूनियन और होटल एसोसिएशन ने भी इस बंद को नैतिक समर्थन दिया है। कर्नाटक एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ़ स्कूल्स ने, जिसने पहले बंद का समर्थन किया था, अब सिर्फ़ नैतिक समर्थन देने का फ़ैसला किया है। इसकी वजह यह है कि शिक्षकों को SIR के काम में लगाए जाने के कारण पढ़ाई-लिखाई के काम में रुकावट आ रही है। कई संगठनों के सदस्यों और अध्यक्षों ने कहा कि वे बंद में शामिल नहीं होंगे। कुछ लोगों ने लगातार हो रही बारिश का ज़िक्र किया। कुछ ने कन्नड़ संगठनों के बीच एकता की कमी पर भी चिंता जताई। बेंगलुरु सिटी पुलिस ने बंद से पहले राज्य की राजधानी में सुरक्षा के इंतज़ाम किए हैं और नागरिकों से बिना किसी डर के अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियाँ जारी रखने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि स्कूल-कॉलेज, दफ़्तर, दुकानें, कमर्शियल प्रतिष्ठान और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के सामान्य रूप से चलने की उम्मीद है। इसे भी पढ़ें: Parliament में विपक्ष का हंगामा 'चर्चा से भागने' की साजिश, Nitin Nabin बोले- जनता जानती है कौन दोषी पुलिस ने संगठनों और आम लोगों से अपील की है कि वे सुनिश्चित करें कि बंद शांतिपूर्ण रहे। साथ ही, पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी को भी बंद में शामिल होने के लिए मजबूर न किया जाए, न ही दुकानें या प्रतिष्ठान जबरन बंद कराए जाएं, सड़कें रोकी जाएं या ज़रूरी सेवाओं में बाधा डाली जाए। पुलिस ने कहा कि हिंसा, धमकी, संपत्ति को नुकसान और ट्रैफिक में रुकावट डालने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, गश्त और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। इस बीच, कुछ किसान संगठनों ने भी बंद को अपना समर्थन दिया है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
पाकिस्तान के नेताओं का भारत विरोधी चेहरा और आतंकवादियों के प्रति उनका प्रेम एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है। कभी भारत को एटम बम की गीदड़भभकियां देने वाले पाकिस्तान के पूर्व मंत्री और कट्टरपंथी नेता शेख रशीद अहमद का एक ऐसा कबूलनामा सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। एक समय भारत को खुलेआम परमाणु हमले की धमकी देने वाले इस पाकिस्तानी नेता ने अब सार्वजनिक तौर पर कुबूल किया है कि वह खूंखार आतंकवादी और मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का गुलाम है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद एक बार फिर यह साबित हो गया है कि पाकिस्तान के हुक्मरान और आतंकी संगठनों के बीच किस स्तर की गहरी सांठगांठ है।शेख रशीद का शर्मनाक कबूलनामा: आतंकवादियों के प्रति खुली वफादारीपाकिस्तान की सियासत में हमेशा अपनी विवादित बयानबाजी के लिए मशहूर रहे शेख रशीद का यह बयान उनकी वैचारिक दिवालियापन को साफ दिखाता है। जिस देश की जनता खुद महंगाई, भुखमरी और कंगाली से जूझ रही है, वहां के नेता देशहित की बात करने के बजाय वैश्विक आतंकवादियों के चरणों में अपनी निष्ठा समर्पित कर रहे हैं। यूएन द्वारा घोषित ग्लोबल आतंकी और भारत के सबसे बड़े दुश्मन हाफिज सईद को अपना आंका मानना यह उजागर करता है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथ और आतंकवाद किस हद तक राजनीति की मुख्यधारा में रचे-बसे हैं।कभी भारत को दी थी परमाणु हमले की धमकी, अब खुद ही बेनकाबयह वही शेख रशीद अहमद हैं जो मंत्री पद पर रहते हुए भारत के खिलाफ लगातार जहर उगलते थे और कई बार टीवी चैनलों पर बैठकर भारत पर एटम बम गिराने की गीदड़भभकियां दिया करते थे। भारत की मजबूत कूटनीति और वैश्विक मंचों पर लगातार हो रही किरकिरी के बाद पाकिस्तान के इन पाखंडी नेताओं का असली चरित्र अब खुद-ब-खुद दुनिया के सामने आ रहा है। भारत विरोधी एजेंडा चलाने वाले ऐसे नेता आज अपने ही देश में आतंकवाद के गुलाम साबित हो रहे हैं, जो उनकी राजनीतिक लाचारी और वैचारिक दिवालियापन का जीता-जागता सबूत है।वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की पोल खुलीशेख रशीद के इस बयान से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह बात स्पष्ट हो गई है कि पाकिस्तान कभी भी आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में गंभीर नहीं रहा है। पाकिस्तान की सरकारें और राजनेता भले ही दुनिया को यह दिखाने की कोशिश करें कि वे आतंकवाद के खिलाफ हैं, लेकिन अंदरखाने उनके तार लश्कर-ए-तैइबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार आतंकी संगठनों के आसरपस्तों से जुड़े हुए हैं। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान का आतंकवाद समर्थक चेहरा एक बार फिर वैश्विक स्तर पर उजागर हो गया है।
स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा गोचर, 4 राशियों के जीवन में आएगा पैसा और शोहरत
Budh Ashlesha Nakshatra Gochar 2026: 15 अगस्त को बुध अपने ही नक्षत्र आश्लेषा में प्रवेश करेंगे. जानिए किन 4 भाग्यशाली राशियों को मिलेगा बंपर लाभ और छप्परफाड़ कमाई के अवसर.
वैश्विक राजनीति में एक ऐसा बड़ा भूचाल आया है जिसकी गूंज वाशिंगटन से लेकर नई दिल्ली तक सुनाई दे रही है। मॉस्को से लेकर दिल्ली तक रेल नेटवर्क के जरिए सीधे जुड़ने की बड़ी चर्चाओं के बीच, अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने भारत के लिए बड़ा और सुरक्षित गलियारा मुहैया कराने का समर्थन कर दिया है। रूस की ओर से इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर विचार किए जाने और तालिबान के इस रुख के बाद से यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में रूस और भारत के बीच जमीनी ट्रेन मार्ग का सपना सच हो पाएगा?रूस का नया दांव: समुद्री मार्गों पर निर्भरता खत्म करने की योजनारूस ने दुनिया भर में अपने ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों की रणनीतिक घेराबंदी से पार पाने के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित ट्रांजिट रूट पर काम करना शुरू कर दिया है। रूस के नेतृत्व का मानना है कि पारंपरिक समुद्री रास्तों और संवेदनशील जलडमरूमध्य (जैसे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) पर निर्भरता कम करने के लिए जमीन आधारित रेल नेटवर्क सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसी कड़ी में रूस से मध्य एशिया, ईरान और अफगानिस्तान के रास्ते दक्षिण एशिया यानी भारत तक माल ढुलाई के लिए रेल कॉरिडोर बिछाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से मंथन चल रहा है।तालिबान का बड़ा कदम: भारत और रूस के लिए समर्थनइस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौकाने वाला पहलू तालिबान का आधिकारिक बयान रहा है। तालिबान सरकार के प्रतिनिधियों ने साफ तौर पर कहा है कि वे मॉस्को और नई दिल्ली को जोड़ने वाले इस प्रोजेक्ट का पूरा समर्थन करते हैं। अफगानिस्तान के जरिए गुजरने वाले इस रूट को सबसे छोटा और किफायती व्यापारिक मार्ग माना जा रहा है। तालिबान का मानना है कि इस परियोजना से न केवल उनके देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर उसे एक नई पहचान और आर्थिक मजबूती भी मिलेगी।भारत के लिए क्या हैं इसके मायने और चुनौतियां?भारत और रूस के बीच यदि रेल मार्ग के जरिए सीधी कनेक्टिविटी स्थापित होती है, तो इससे व्यापार की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। वर्तमान समय में रूस से भारत आने वाले माल को समुद्री रास्तों से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें काफी समय और खर्च लगता है। इस नए भू-राजनीतिक समीकरण से भारत को मध्य एशिया के बाजारों तक सीधी और आसान पहुंच मिल सकती है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट के रास्ते में सुरक्षा के लिहाज से आतंकवाद, चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाके और क्षेत्रीय देशों के बीच कूटनीतिक सहमति जैसी बड़ी व्यावहारिक चुनौतियां भी खड़ी हैं। बावजूद इसके, इस सुगबुगाहट ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल जरूर पैदा कर दी है।
Bijnor में गुलदार का खौफनाक आतंक! ग्रामीणों में भारी दहशत
बिजनौर के करणपुर गांव में रात के समय बाइक सवार के पीछे गुलदार दौड़ता दिखाई दिया. राहगीरों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है. गुलदार की बढ़ती गतिविधियों से ग्रामीणों में डर का माहौल है. लोगों का कहना है कि खेतों और गांवों के आसपास लगातार गुलदार दिख रहे हैं. ग्रामीणों ने वन विभाग से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ने की मांग की है.
दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इस अहम जलमार्ग पर अमेरिका का पूरी तरह से नियंत्रण है। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए चेतावनी दी है कि तेहरान की अनुमति के बिना इस रास्ते का खुलना असंभव है। इस टकराव ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है।ट्रंप का बड़ा दावा: हॉर्मुज पर अमेरिकी नौसेना का सख्त पहराअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण स्थापित है। उन्होंने अमेरिकी सेना की मौजूदगी को एक ऐसी सुरक्षा दीवार बताया है जिसे पार करना ईरान के लिए मुमकिन नहीं है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन लगातार बनी हुई है और वैश्विक महाशक्तियां इस समुद्री मार्ग पर अपना वर्चस्व साबित करने में जुटी हैं।ईरान का पलटवार: हमारी शर्तों के बिना नहीं खुलेगा रास्तादूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के नियंत्रण वाले दावे पर तीखा पलटवार किया है। ईरानी नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक तेहरान की सुरक्षा और आर्थिक शर्तों को नहीं माना जाता, तब तक इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी रहेगी। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता और इस मार्ग से सुरक्षित व्यापार के लिए उनकी सहमति अनिवार्य है, और अमेरिका के एकतरफा दावों से जमीनी हकीकत नहीं बदलने वाली।वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर असरस्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट्स में से एक है, जहां से ग्लोबल क्रूड ऑयल का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच इस तनातनी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। दुनिया भर के निवेशकों और एनर्जी मार्केट की पैनी नजर इस बात पर है कि क्या यह विवाद किसी बड़े सैन्य संघर्ष में बदलेगा या कूटनीतिक स्तर पर इसका कोई समाधान निकाला जाएगा।
71 की उम्र में भी अनुपम खेर का फिटनेस जोश बरकरार, बोले-मेरे लिए वर्कआउट मेडिटेशन जैसा
उम्र सिर्फ एक नंबर है और अनुपम खेर इस बात को बार-बार साबित करते नजर आते हैं। 71 साल की उम्र में वह रोजाना जिम जाते हैं, जमकर पसीना बहाते हैं और अपने वर्कआउट की फोटो फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं। अब एक बार फिर अनुपम खेर ने अपना नया जिम का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।
'इंतहा हो गई इंतजार की...', मोदी कैबिनेट फेरबदल में देरी, देखें सो सॉरी
मोदी 3.O के पहले कैबिनेट विस्तार को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. काफी समय से पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल और बीजेपी संगठन में भी बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं. लेकिन अभी तक इन दोनों पर ही अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है. इसी बढ़ते इंतजार पर देखें सो सॉरी का ये मजेदार एपिसोड.
रांची के छात्र आंदोलन पर पुलिसिया एक्शन, 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज
रांची में छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान हुई उग्र झड़प को लेकर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है. पुलिस ने कुल 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिनमें 100 नामजद और 500 अज्ञात छात्र व अन्य प्रदर्शनकारी शामिल हैं.
Air India Phuket-Delhi Flight: ऑटोपायलट से पहले 3 Hydraulic अलर्ट, क्यों झूले 300 फीट नीचे यात्री?
एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट के 'सेंट्रलाइज़्ड फ़ॉल्ट डिस्प्ले सिस्टम' के पोस्ट-फ़्लाइट लॉग से कई चेतावनियों का पता चला है। यह फ़्लाइट अचानक ऊंचाई से 300 फ़ीट नीचे गिर गई थी, जिससे 24 लोग घायल हो गए थे। ये चेतावनियां विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम, फ़्लाइट कंट्रोल और ऑटोपायलट से जुड़ी थीं। इंडिया टुडे के मुताबिक जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि 4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट में टर्बुलेंस (हवा के झटकों) की घटना की जांच का दायरा बढ़ गया है। फ़्लाइट के बाद की मेंटेनेंस रिपोर्ट में दो-तीन मिनट के अंदर 11 सिस्टम अलर्ट दर्ज किए गए, जिनमें तीन हाइड्रोलिक लो-प्रेशर वॉर्निंग और उसके बाद ऑटोपायलट का डिस्कनेक्ट होना शामिल है। इसे भी पढ़ें: Youth Congress नेता वैशाख गिरफ्तार, Kerala BJP पूर्व नेता को उकसाने का आरोप यह मेंटेनेंस रिपोर्ट एयरबस A320 एयरक्राफ्ट VT-EXO से जुड़ी है, जिसने फुकेत से दिल्ली के लिए एयर इंडिया की फ़्लाइट AI2379 ऑपरेट की थी। रिपोर्ट से पता चलता है कि एयरक्राफ्ट में लगभग एक मिनट के भीतर तीन हाइड्रोलिक लो-प्रेशर अलर्ट दर्ज किए गए, जो इसके ग्रीन, येलो और ब्लू हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़े थे। इसके बाद रिकॉर्ड में यह बात सामने आई कि तीन हाइड्रोलिक अलर्ट मिलने के कुछ ही समय बाद ऑटोपायलट बंद हो गया था। सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ता अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या हाइड्रोलिक चेतावनियों का ऑटोपायलट के बंद होने और बाद में विमान में टर्बुलेंस की वजह से ऊंचाई में आए बदलाव से कोई संबंध था। रिपोर्ट में उसी दौरान विमान के इमरजेंसी एग्जिट दरवाजों और दूसरे सिस्टम से जुड़ी चेतावनियों का भी ज़िक्र किया गया है। दिल्ली में विमान के उतरने से पहले, मेंटेनेंस रिकॉर्ड में 5:22 GMT पर 'ऑटोपायलट-ऑफ' की दूसरी एंट्री दिखाई देती है। सूत्रों के अनुसार, इस एंट्री से पता चलता है कि उड़ान के दौरान ऑटोपायलट के शुरुआती तौर पर बंद होने के बाद उसे किसी समय फिर से चालू या री-एंगेज किया गया था और बाद में लैंडिंग से पहले उसे फिर से बंद कर दिया गया था। इसे भी पढ़ें: Parliament में विपक्ष का हंगामा 'चर्चा से भागने' की साजिश, Nitin Nabin बोले- जनता जानती है कौन दोषी कई अलर्ट मिलने के बावजूद, शुरुआती हाइड्रोलिक वॉर्निंग के बाद भी विमान लगभग 1 घंटे 20 मिनट तक हवा में रहा और फिर सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतरा। सूत्रों ने बताया कि उड़ान के बाद की मेंटेनेंस रिपोर्ट डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) और एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को सौंप दी गई है, जो इस घटना की जांच कर रहे हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कमजोर बाजार में PSU डिफेंस स्टॉक खरीदने का मौका, ब्रोकरेज भी बुलिश, दिया 20% अपसाइड का टारगेट
भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और कमजोरी के माहौल के बीच निवेशकों के लिए कमाई का एक शानदार अवसर सामने आया है। अगर आप भी किसी ऐसे शेयर की तलाश में हैं जो मजबूत फंडामेंटल्स के साथ तगड़ा रिटर्न दे सके, तो सरकारी रक्षा क्षेत्र यानी पीएसयू डिफेंस स्टॉक (PSU Defense Stock) आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। शेयर बाजार के जानकारों और दिग्गज ब्रोकरेज हाउस ने इस शेयर पर बड़ा दांव लगाया है और इसमें मौजूदा स्तर से करीब 20 फीसदी तक की जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है।क्यों खास बन रहा है यह डिफेंस स्टॉक?मौजूदा समय में ग्लोबल और घरेलू बाजार के दबाव के कारण कई चुनिंदा क्वालिटी शेयर सस्ते दामों पर मिल रहे हैं। डिफेंस सेक्टर की कंपनियों के पास सरकार की ओर से लगातार बड़े ऑर्डर आ रहे हैं, जिससे इनका बिजनेस आउटलुक बेहद मजबूत बना हुआ है। ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि डिफेंस थीम लंबी अवधि में निवेशकों को मालामाल करने का दम रखती है। कमजोर बाजार में जब क्वालिटी स्टॉक्स करेक्शन पर मिलते हैं, तो लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए खरीदारी का यह सबसे सही समय माना जाता है। ऐसे में यह पीएसयू डिफेंस शेयर अपने निवेशकों के पोर्टफोलियो को मजबूती दे सकता है।ब्रोकरेज फर्म्स की राय और अपसाइड टारगेटप्रमुख ब्रोकरेज हाउस ने इस डिफेंस स्टॉक पर अपनी पॉजिटिव रेटिंग बरकरार रखते हुए बड़ा टारगेट प्राइस तय किया है। जानकारों का कहना है कि कंपनी के शानदार वित्तीय प्रदर्शन और मजबूत ऑर्डर बुक के दम पर यह शेयर आने वाले दिनों में बेहतरीन मुनाफा दे सकता है। ब्रोकरेज ने इस स्टॉक पर लगभग 20% तक के अपसाइड टारगेट का अनुमान जताया है। इसका मतलब है कि मौजूदा बाजार भाव से यह शेयर निवेशकों को कम समय में ही तगड़ा रिटर्न कमाने का मौका दे रहा है।निवेशकों के लिए क्या है सलाह?शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी कमजोर या वोलाटाइल बाजार में एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय 'स्टैगर्ड मैनर' यानी किस्तों में खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। यदि आप इस पीएसयू डिफेंस स्टॉक में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो अपने वित्तीय सलाहकार की मदद से अपने जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन जरूर कर लें। लंबी अवधि के नजरिए से डिफेंस शेयरों में किया गया निवेश निवेशकों के लिए हमेशा से फायदेमंद साबित हुआ है।
टाटा ग्रुप के शेयरों में भूचाल, एक झटके में डूबे 44,000 करोड़ रुपये, टीसीएस को सबसे बड़ा फटका
भारतीय शेयर बाजार में टाटा ग्रुप (Tata Group) के निवेशकों के लिए बुधवार का दिन भारी उथल-पुथल भरा रहा। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) द्वारा अपने पद पर दोबारा पुनर्नियुक्ति नहीं चाहने के फैसले के बाद बाजार में बिकवाली हावी हो गई। इस बड़ी खबर का असर टाटा ग्रुप की कंपनियों पर तुरंत देखने को मिला और कारोबार के दौरान निवेशकों की तगड़ी वेल्थ स्वाहा हो गई।कारोबारी सत्र के दौरान टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) करीब 44,000 करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इस अचानक आई गिरावट से निवेशकों में चिंता का माहौल है और बाजार के जानकार इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।TCS को हुआ सबसे ज्यादा नुकसानटाटा ग्रुप की इस भारी-भरकम गिरावट में देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस (TCS) को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। कुल नुकसान का सबसे बड़ा हिस्सा अकेले टीसीएस का रहा है, जिसके शेयरों में करीब 4 प्रतिशत से ज्यादा की जोरदार गिरावट दर्ज की गई।टीसीएस के अलावा टाटा मोटर्स, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और तेजस नेटवर्क्स जैसे दिग्गज शेयर भी लाल निशान के साथ बंद हुए। ग्रुप के लगभग सभी प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखा गया।क्यों गिरे टाटा ग्रुप के शेयर?बाजार जानकारों के अनुसार, एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद पर आगे बने रहने को लेकर स्पष्टता की कमी और उनके आगामी उत्तराधिकार को लेकर असमंजस की स्थिति ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। कारोबारी जगत में इस तरह के बड़े नेतृत्व संबंधी घटनाक्रमों का असर अक्सर शॉर्ट-टर्म में शेयरों की चाल पर देखने को मिलता है।मार्केट कैप में बड़ी गिरावट: दो सत्रों के भीतर टाटा समूह की कंपनियों को 44,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगा है।निवेशकों की प्रतिक्रिया: अनिश्चितता के माहौल के चलते शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली या बिकवाली करना बेहतर समझा।आगे क्या रह सकती है बाजार की चाल?हालांकि यह गिरावट मुख्य रूप से एक कारोबारी निर्णय और नेतृत्व से जुड़ी खबरों के कारण आई है, लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए टाटा ग्रुप के फंडामेंटल्स अब भी मजबूत माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने के बाद शेयर बाजार अपनी चाल मौलिक आधार पर तय करेगा, तब तक निवेशकों को पैनिक बिकवाली से बचना चाहिए।
ग्लोबल इंडेक्स प्रदाता MSCI (Morgan Stanley Capital International) ने अपने इंडिया इंडेक्स में बड़ा फेरबदल (Rebalancing) कर दिया है। इस ताजा बदलाव के तहत भारतीय शेयर बाजार के कई उभरते और मजबूत दिग्गजों को इंडेक्स में जगह मिली है, जबकि 19 शेयरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।इस रीजिग के बाद भारतीय बाजार में भारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के इनफ्लो और आउटफ्लो की संभावना जताई जा रही है। पैसिव फंड्स अब इन नए शामिल शेयरों में करोड़ों डॉलर का निवेश करेंगे।इन दिग्गजों की हुई MSCI इंडेक्स में एंट्रीMSCI के इस पुनर्गठन में अडाणी समूह की प्रमुख कंपनी Adani Energy Solutions, तेजी से उभरते फिनटेक प्लेटफॉर्म Groww (Billionbrains Garage Ventures) और आईवियर ब्रांड Lenskart ने बाजी मारी है। इन कंपनियों का मार्केट कैप और फ्री-फ्लोट लिक्विडिटी मजबूत होने की वजह से इन्हें MSCI इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल किया गया है।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन शेयरों को इंडेक्स में शामिल किए जाने से वैश्विक पैसिव ट्रैकर्स (ETF) द्वारा बड़े पैमाने पर खरीदारी देखने को मिलेगी। इससे इन कंपनियों के शेयरों में निकट भविष्य में शानदार तेजी आ सकती है।19 शेयर हुए बाहर: इन कंपनियों पर दिखेगा बिकवाली का दबावजहाँ एक तरफ नए शेयरों की एंट्री से जश्न का माहौल है, वहीं 19 कंपनियों को MSCI इंडेक्स से बाहर कर दिया गया है। इंडेक्स से हटने के कारण विदेशी फंड्स इन शेयरों से अपनी पूंजी निकालेंगे, जिससे इनमें अल्पकालिक रूप से बिकवाली का दबाव (Selling Pressure) बन सकता है।जिन शेयरों को बाहर किया गया है, उनमें मुख्य रूप से वे कंपनियां शामिल हैं जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन निर्धारित मापदंडों से नीचे चला गया था या जिनकी लिक्विडिटी में कमी आई थी। इन 19 शेयरों से विदेशी निवेशकों का फंड आउटफ्लो होना तय माना जा रहा है।भारतीय बाजार और निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने?MSCI इंडेक्स में होने वाला रीबैलेंसिंग भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी अहम होता है। जब भी कोई भारतीय शेयर MSCI Global Standard Index का हिस्सा बनता है, तो दुनिया भर के ग्लोबल पैसिव फंड्स (जो MSCI इंडेक्स को ट्रैक करते हैं) को उन शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में मजबूरीवश शामिल करना पड़ता है।FII Inflow: अडाणी एनर्जी, ग्रोव और लेंसकार्ट जैसी कंपनियों में भारी मात्रा में विदेशी निवेश (FIIs Inflow) आएगा, जिससे बाजार की लिक्विडिटी बढ़ेगी।रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए संदेश: केवल MSCI में शामिल होने के आधार पर खरीदारी करने से बचें। अल्पकालिक फंड फ्लो के बाद शेयरों का दीर्घकालिक प्रदर्शन उनके फंडामेंटल्स और तिमाही नतीजों पर ही निर्भर करेगा।यह बदलाव तय प्रभावी तिथि से लागू कर दिया जाएगा, जिसके बाद ग्लोबल फंड्स अपने पोर्टफोलियो में आवश्यक तालमेल (Adjustments) पूरा करेंगे।
शराब घोटाले में केजरीवाल-सिसोदिया ने दिल्ली HC में दायर की याचिका
दिल्ली शराब घोटाला में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट मे याचिका दाखिल की है. उन्होंने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर एक्साइज पॉलिसी केस में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ CBI की रिवीजन पिटीशन खारिज करने की मांग की.
सुभाष चंद्र बोस का कैसा मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया वकील? CJI सूर्यकांत से पड़ी तगड़ी डांट
वकील ने कोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अलुल करते हुए कहा था कि राज्यसभा सांसद ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। हालांकि SC ने इससे साफ इनकार कर दिया।
कौन हैं हसन महमूद? जिन्होंने 6 विकेट लेकर कंगारुओं को रेल डाला
इस समय बांग्लादेश की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर है, दोनों देशों के बीच 2 टेस्ट मैचों की सीरीज हो रही है. पहला टेस्ट डार्विन में शुरू हुआ, जहां बांग्लादेशी गेंदबाज हसन महमूद ने 6 विकेट झटकर ऑस्ट्रेलिया की हवा निकाल दी.
कपड़े उतारो और पैसे कमाओ... युवक ने ऐप बनाकर शुरू किया धंधा
एक शहर... एक फ्लैट... कुछ कैमरे... और स्क्रीन के उस पार बैठे ग्राहक. वडोदरा में 11 अगस्त की रात पुलिस ने एक रिहायशी फ्लैट का दरवाजा खुलवाया. इस फ्लैट में अंदर ऑनलाइन वीडियो कॉल, कॉइन्स और पैसों का धंधा चल रहा था. यहां युवतियों को कैमरे के सामने आपत्तिजनक हरकतें करने के लिए बुलाया जाता था और कमाई का हिस्सा बांटा जाता था. यह पूरा खेल 10वीं पास युवक का था. उसने करीब 11 लाख रुपये में फ्लैट खरीदा था.
गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई, जिससे मॉनसून सत्र समाप्त हो गया। यह सत्र विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों पर विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच संपन्न हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रगीत के सभी छह पद बजाए गए, जिसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया। जब सदन की संक्षिप्त बैठक हुई, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वहां मौजूद थे। इसे भी पढ़ें: Youth Congress नेता वैशाख गिरफ्तार, Kerala BJP पूर्व नेता को उकसाने का आरोप स्पीकर ने सत्र के दौरान सदन के कामकाज और उत्पादकता पर पारंपरिक समापन भाषण नहीं दिया। बिरला ने विपक्ष के सदस्यों से सत्र के दौरान बहस में भाग लेने की बार-बार अपील की थी। हालांकि, विरोध और नारेबाजी जारी रही, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। गुरुवार को भी, सदन स्थगित होने से पहले विपक्ष के सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मॉनसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और इसमें NEET पेपर लीक मामले तथा अयोध्या में राम मंदिर के लिए चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसे भी पढ़ें: CJP Meeting रद्द होने पर Dipke का फूटा गुस्सा, BJP पर Hall मालिकों को धमकाने का लगाया आरोप बाद में विपक्ष ने 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। छात्र NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग कर रहे थे। बुधवार को शाह ने कहा कि वह छात्रों के मुद्दे पर बहस में हिस्सा लेने और विपक्ष के सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने स्पीकर से विपक्ष के साथ बातचीत करके चर्चा के लिए समय तय करने का भी आग्रह किया था। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग मौजूद थे। उस समय मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार से ...
कोलकाता में टीएमसी नेता कुणाल घोष के आवास और दफ्तर पर हमला, ममता बनर्जी के पोस्टर फाड़े
कुणाल घोष ने आरोप लगाया है कि यह हमला पूरी तरह से पूर्व नियोजित था. उपद्रवी पहले उनके घर पहुंचे थे और जब वह वहां नहीं मिले, तो उन्होंने उनके दफ्तर पर धावा बोल दिया.
एसएलवी सिनेमाज के बैनर तले बनी ‘द पैराडाइज’ 21 अगस्त 2026 को बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली है. फिल्म हिंदी, तेलुगु, तमिल, अंग्रेजी, स्पेनिश, बंगाली, कन्नड़ और मलयालम समेत 8 भाषाओं में रिलीज होगी.
डिजिटल अरेस्ट हुए रिटायर्ड जज, पुलिस से डरे और गंवा दिए 1.90 करोड़
डिजिटल अरेस्ट का एक हैरान करने वाला केस सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड जज को ही डिजिटल अरेस्ट कर लिया. इसके बाद उनके साथ 1.90 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
panditwala village pakistan story: पाकिस्तान के एक छोटे से गांव का नाम आज भी 'पंडितवाला' क्यों है? जानिए 1947 के बंटवारे की आग में पीछे छूटी उस आलीशान हवेली की दास्तां, जिसमें खत्री जमीदार बड़ा दरवाजा लगाकर रखता था.
‘दो मुल्कों को एक साथ...’, जब नवाज-अटल का हाथ पकड़ बोले थे देव आनंद
ऑपरेशन सफेद सागर में नवाज शरीफ का किरदार विनय पाठक ने निभाया है. एक सीन में वह देव आनंद से अपनी मुलाकात और उनके प्रति अपने लगाव की बात करते नजर आते हैं. पर्दे पर दिखाई गई यह घटना केवल कल्पना नहीं थी. असल जिंदगी में भी नवाज शरीफ, देव आनंद के बहुत बड़े प्रशंसक थे.
कर्नाटक विधानसभा में Food Safety Raid, थाली में मिले Cockroaches, मंत्रियों की सेहत से खिलवाड़
बेंगलुरु में कर्नाटक विधानसभा के अंदर चल रही एक कैंटीन, जहाँ मंत्रियों और कई IAS अधिकारियों के दफ्तर हैं, स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में साफ-सफाई से जुड़ी कमियाँ (जैसे खाने की प्लेटों पर कॉकरोच मिलना) पाए जाने के बाद जांच के दायरे में आ गई है। विभाग ने विधान सौधा (कर्नाटक विधानसभा) परिसर में मौजूद विकास सौधा की कैंटीनों में भी छापेमारी की। जांच के दौरान खाने की प्लेटों पर कॉकरोच दिखे, जिससे कैंटीन में साफ-सफाई के मानकों को लेकर चिंता पैदा हो गई है। इस परिसर में कई होटल हैं जहाँ विधायक ठहरते हैं, खासकर वे जो बेंगलुरु के बाहर से आते हैं। इमारत की ऊपरी मंजिलों पर विधायकों के लिए कमरे हैं। इसे भी पढ़ें: कर्नाटक में Gutkha-Paan Masala पर एक साल का प्रतिबंध, सरकार का कड़ा फैसला स्वास्थ्य विभाग को 'लेजिस्लेटर्स हाउस' में जांचे गए एक प्रतिष्ठान में घटिया गुणवत्ता वाला खाना और खराब साफ-सफाई मिली थी। जांच से पता चला है कि विभाग ने सरकारी इमारतों में चल रहे खाने-पीने के ठिकानों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। इनमें मंत्रियों, IAS अधिकारियों और विधायकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली जगहें भी शामिल हैं। यह कदम स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपने ही मुख्यालय 'आरोग्य सौधा' (जहाँ राज्य स्वास्थ्य विभाग का मुख्यालय है) में चल रही कैंटीन में नियमों के उल्लंघन का पता चलने के एक दिन बाद उठाया गया है। इसे भी पढ़ें: Delhi HC ने FSSAI के 100 प्रतिशत दावा बैन आदेश पर लगाई रोक, Dabur को राहत अधिकारियों ने पाया कि आरोग्य सौधा की कैंटीन में साफ़-सफ़ाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा था और कुछ खाने-पीने की चीज़ें एक्सपायरी डेट (इस्तेमाल की आखिरी तारीख) पार कर चुकी थीं। जांच के नतीजों के मुताबिक, एक्सपायर हो चुकी चीज़ों में इडली रवा और नारियल का पाउडर शामिल था।जांच टीम ने यह भी पाया कि खाने-पीने की चीज़ों को 'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया' (FSSAI) के नियमों के मुताबिक स्टोर नहीं किया जा रहा था। टीम ने यह भी पाया कि कीड़ों से बचाव के ज़रूरी उपाय नहीं किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को फ़ूड सेफ़्टी अधिकारियों ने बेंगलुरु में तीन इंदिरा कैंटीनों का निरीक्षण किया और नियमों के उल्लंघन के मामले पाए, जिनमें लेबलिंग में गड़बड़ी, गलत ब्रांडिंग और साफ़-सफ़ाई की कमी के साथ खाना संभालने के हालात शामिल थे। इसके बाद, गोट्टीगेरे स्थित इंदिरा कैंटीन की सेंट्रल किचन को साफ़-सफ़ाई की कमी और खाने को गलत तरीके से संभालने और स्टोर करने के कारण सील कर दिया गया।
एथलीट डैनी लियोन ने सोशल मीडिया पर इक्लिप्स मोड जंप की क्लिप शेयर करते हुए इसे अपने करियर का सबसे यादगार पल बताया है.
आतंकवादियों के साथ मंच साझा कर पाकिस्तान के पूर्व मंत्री शेख रशीद ने भारत को दी धमकी
पूर्व पाकिस्तानी गृह मंत्री शेख रशीद का कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें वह हाफिज सईद की तारीफ करते और भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देते नजर आ रहे हैं।
नागपुर में हाई स्पीड EV कार की ट्रक से भीषण टक्कर, दो की मौत
नागपुर में तेज रफ्तार कार की सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से भीषण टक्कर की जानकारी सामने आई है. इस घटना में दो युवकों की जान चली गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है.
महाजंग की आग भड़का रहे पुतिन? पहली बार जापान के दावे वाले आईलैंड पहुंचे
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जापान के दावे वाले कुरील द्वीप समूह के इतुरुप आईलैंड पहुंचे हैं. यह दौरा ऐसे वक्त हुआ है जब रूस ने सुदूर पूर्वी इलाके में बड़े नौसैनिक अभ्यास किए. उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. इस बीच जापान ने पुतिन के दौरे पर कड़ा विरोध जताया है.
Confused! रागी को डाइट में कैसे शामिल करें? ये रहीं रागी से बनने वाली Healthy और Quick रेसिपीज़
कई बार समझ नहीं आता कि रागी से क्या बनाएं. नीचे बताए गए ऑप्शन आपके अगले पसंदीदा ब्रेकफास्ट ऑप्शन बन सकते हैं.
सावन में बनाकर खाएं कुट्टू का थेपला, आलू की सब्जी संग लगेगा मजेदार
अगर आप भी व्रत में कुछ हेल्दी और पेट भरने वाला खाना चाहते हैं तो यहां हम आपको कुट्टू का थेपला बनाना सिखा रहे हैं. ये खाने में टेस्टी होता है और दिन भर एनर्जी भी देता है.
लगभग 73% छात्र 12वीं क्लास से पहले ही छोड़ देते हैं पढ़ाई, देखें चौंकाने वाले आंकड़े
देश में हायर सेकेंडरी लेवलका ‘ड्रॉप-आउट’ रेट सबसे ज्यादा है. आंकड़ों के अनुसार लगभग 73 प्रतिशत बच्चे हायर सेकेंडरी लेवलतक पहुंचने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं.
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में 15 वर्षीय मोनी उर्फ प्रिया निषाद ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. परिजनों के अनुसार वह लंबे समय से बाल झड़ने की समस्या से परेशान थी और उपचार के बावजूद कोई सुधार नहीं हो रहा था.
भारत में हुई बंद, विदेश में बजा डंका, 3.37 लाख बाइक हुईं सेल
भारतीय टू-व्हीलर कंपनियां ना सिर्फ अपने देश में बल्कि विदेशों में भी काफी ज्यादा पॉपुलर हैं. खासकर बजाज और टीवीएस, जिनका अफ्रीकी मार्केट एक बड़ा खरीदार है. बजाज की बॉक्सर देश से सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट होने वाली बाइक है. हां ये वही बॉक्सर है, जिसे बजाज ने साल 2015 में भारत में डिस्कंटीन्यू कर दिया था. आइए जानते हैं इसकी खास बातें.
सलमान खान ने बचाया सुपरस्टार के बेटे का फिल्मी करियर, 5 फ्लॉप फिल्मों के बाद बनना चाहते थे पायलट
सलमान खान बॉलीवुड के सुपरस्टार हैं. जहां वह ब्लॉकबस्टर फिल्में देते रहे हैं तो वहीं उनके कई एक्टर्स को सपोर्ट करने के लिए भी जाना जाता है. लेकिन क्या उस एक्टर के बारे में जानते हैं, जिनकी मां बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में शुमार थीं.
JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने में सरकार के हाथ क्यों कांप रहे हैं?
झारखंड सरकार 14वीं JPSC रद्द करने पर तो मान गई, लेकिन JSSC-CGL पर ब्रेक लगा दिया है. सरकार का तर्क है कि CGL परीक्षा हाई कोर्ट की निगरानी में हुई है और सेलेक्टेड कैंडिडेट्स की जॉइनिंग हो चुकी है, ऐसे में इसे एकतरफा रद्द करना मुमकिन नहीं. वहीं, छात्र CBI जांच और 'TDPL' एजेंसी के सिंडिकेट पर सवाल उठाकर सीधौ-सीधी जंग के मूड में हैं! समझिए पूरा मामला...
Bhagwant Mann ने Beant Singh हत्याकांड के दोषी हवारा की पैरोल पर राज्यपाल से की मुलाकात
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा को पैरोल प्रदान किए जाने को लेकर हस्तक्षेप का अनुरोध किया। उम्रकैद की सजा काट रहे हवारा ने अपनी बीमार मां से मिलने का हवाला देते हुए पैरोल की गुहार लगाई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भी मानवीय आधार पर पैरोल की याचिका का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हवारा की बुजुर्ग और बीमार मां को उनके बेटे के कृत्यों की सजा नहीं मिलनी चाहिए। रवनीत सिंह बिट्टू, बेअंत सिंह के पोते हैं। मान ने मानवीय आधार पर हवारा की पैरोल का समर्थन करते हुए कहा कि 31 साल बाद, उनकी बीमार मां को अपने बेटे से मिलने की ‘नयी उम्मीद’ जगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को केंद्रीय गृह सचिव के समक्ष उठाएंगे। मुख्यमंत्री की राज्यपाल के साथ यह बैठक कटारिया को लिखे उस पत्र के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें उन्होंने मानवीय आधार पर हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की वकालत की थी। मान ने कहा, ‘‘मैं उसी सिलसिले में उनसे (राज्यपाल) मिला था। राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं। वह सिर्फ सिफारिश करेंगे और उसके बाद गृह मंत्रालय फैसला लेगा।’’मान ने कहा, ‘‘हमने 10 दिन की पैरोल के लिए पत्र लिखा था। लेकिन यह केंद्र सरकार तय करेगी कि कितने दिनों की पैरोल देनी है।’’मुख्यमंत्री ने कहा कि हवारा की मां अपने बेटे से मिलना चाहती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब भी उनके सामने हवारा का नाम लिया जाता है, तो वह प्रतिक्रिया देती हैं। वह अपने बेटे से मिलना चाहती हैं।’’मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी ज़िम्मेदारी उनकी सरकार की है। उन्होंने कहा,‘‘जगतार सिंह हवारा के घर आने के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार लेगी। उनके समर्थकों और परिवार के सदस्यों ने भी इस मामले में राज्य सरकार को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया है।’’मान ने कहा,‘‘राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पंजाब में बड़ी मुश्किल से हासिल हुई शांति की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस नेक काम के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मैंने राज्यपाल को यह भी भरोसा दिलाया है कि केंद्र के साथ इस मामले को आगे बढ़ाने में राज्य सरकार का पूरा समर्थन और सहयोग मिलेगा।’’मान ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि भाई जगतार सिंह हवारा जी जल्द ही अपनी मां के पास बैठे होंगे।’’पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पिछले महीने दिल्ली की मंडोली जेल (जहां हवारा बंद है) के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे चंडीगढ़ प्रशासन की सिफारिशें लेने के बाद हवारा की पैरोल अर्जी पर एक तय समय-सीमा के भीतर फ़ैसला लें। हवारा को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। वह 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट से संबंधित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस हमले में बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे।

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