बिहार में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 1,194 Community Kitchens शुरू, 46.88 लाख आबादी प्रभावित
बिहार के 15 ज़िलों में 46 लाख से ज़्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। शुक्रवार को भी हालात गंभीर बने रहे क्योंकि कई जगहों पर पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य भर में लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण नदियाँ और नाले उफान पर हैं। आपदा प्रबंधन विभाग (DMD) की ओर से जारी ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, 15 ज़िलों के 88 ब्लॉकों की 561 ग्राम पंचायतों में लगभग 46.88 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसे भी पढ़ें: Kharif 2026 फसल क्षति पर मिलेगी आर्थिक सहायता, Bihar में 31 अक्टूबर तक करें आवेदन प्रभावित ज़िलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िलों में भागलपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया और बक्सर शामिल हैं। बिहार मौसम विज्ञान सेवा केंद्र के अनुसार, राज्य में सितंबर में अब तक 90 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 20 प्रतिशत ज़्यादा है। अपने ताज़ा बुलेटिन में, DMD ने बताया कि शुक्रवार सुबह 6 बजे भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा नदी 36.62 मीटर के स्तर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान से 2.12 मीटर ऊपर है। पानी का बहाव कम हो रहा है। डूमरिया घाट पर गंडक, बलतारा और कुरसेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती, और दरौली व गंगपुर सिसवन में घाघरा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। इसे भी पढ़ें: Bihar Medical Education Update: बिहार में PG Doctors का Stipend बढ़ा, जानिए हर साल कितना होगा फायदा बुलेटिन में कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अलग-अलग ज़िलों में कुल 1,194 कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, 15 राहत कैंप भी चल रहे हैं, जहाँ 11,255 बाढ़ पीड़ितों के लिए रहने, खाने, मेडिकल सुविधा और दूसरी ज़रूरी सेवाओं का इंतज़ाम किया गया है। बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच अब तक लगभग 3.10 लाख पॉलीथीन शीट और 48,300 सूखे राशन के पैकेट बांटे जा चुके हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आवाजाही के लिए कुल 1,922 नावें चलाई जा रही हैं। साथ ही, अब तक 7,535 क्विंटल पशु चारा भी बांटा गया है।
'मेरे साथ सोना है तो...', एक्ट्रेस ने रखी शर्त, किया कॉम्प्रोमाइज?
एक पॉडकास्ट में खुशी मुखर्जी ने कास्टिंग काउच को लेकर बात की है. उन्होंने बताया कई सारे कास्टिंग डायरेक्टर्स को इंडस्ट्री से भगा दिया जाना चाहिए.
दिल के डॉक्टर हैं BRICS में आए ईरानी राष्ट्रपति, जानें पूरी कहानी
पेजेशकियान ने मेडिकल की पढ़ाई की, जनरल सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल की और बाद में कार्डियक सर्जरी में सब-स्पेशलाइजेशन किया. लेकिन 1994 में उनकी जिंदगी में ऐसा हादसा हुआ जिसने उनके निजी जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया. एक सड़क दुर्घटना में उनकी पत्नी और उनके एक बच्चे की मौत हो गई. जानें कैसा है उनका सफर...
खड़े हनुमान को लेकर क्या वायरल हुआ, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु लिखी मन की बात
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों ने इस प्रतिमा को देशभर में चर्चा में ला दिया है. शुक्रवार को मंदिर पहुंचने पर दिल्ली, महाराष्ट्र, उड़ीसा और बिहार से आए श्रद्धालु कतार में मिले. प्रशासन ने प्रतिमा हटाने की कोशिश के दावों को भ्रामक बताया है. वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही आगे फैसला लिया जाएगा.
65KM का माइलेज, स्पोर्टी लुक... लॉन्च हुई नई HERO बाइक
हीरो ने 125 सीसी सेगमेंट की अपनी दमदार बाइक को अपडेट कर दिया है. हम बात कर रहे हैं हीरो ग्लैमर एक्स 125 की. अब इस बाइक में सिंगल चैनल एबीएस के साथ इंटीग्रेटेड ब्रेकिंग सिस्टम मिलेगा. कंपनी की मानें, तो ग्लैमरा एक्स सेगमेंट की पहली बाइक है, जिसमें ये फीचर्स दिए गए हैं. आइए जानते हैं इस बाइक में क्या कुछ खास मिलता है.
'एयरपोर्ट की ड्यूटी-फ्री शॉप पर 9 महीने के बच्चे का पासपोर्ट स्कैन...'
Delhi Airport Duty Free Passport Scam: अमेरिका से आई महिला ने IGI एयरपोर्ट पर 1 बोतल शराब के लिए 9 महीने के बच्चे समेत पूरे परिवार का पासपोर्ट स्कैन करने का आरोप लगाया. दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी ने जांच के दिए आदेश.
वामिका को भूले फिल्म DC के मेकर्स? गिफ्ट में नहीं दी लग्जरी BMW कार
DC की थिएटर में शानदार सफलता के बाद सन पिक्चर्स के कलानिधि मारन द्वारा BMW कारें तोहफ़ में देने की खबरों के बीच, वामिका गब्बी का नाम इसमें शामिल न होने पर आलोचना हो रही है.
पुतिन को मिला तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद, जानें खासियत
PM मोदी ने भारत मंडपम में रूसी राष्ट्रपति पुतिन को तमिल संत तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया. करीब 2000 साल पुरानी इस कृति में 1,330 दोहे हैं. खास बात यह है कि तिरुक्कुरल का रूस और लियो टॉल्स्टॉय से भी कनेक्शन बताया जाता है. वीडियो में जानें इस किताब का रूसी कनेक्शन.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक के PWD मंत्री सतीश जरकीहोली और उनके परिवार से जुड़े 21 ठिकानों पर फेमा तलाशी के दौरान ₹3.3 करोड़ बेहिसाबी नकदी और करीब ₹15 लाख की विदेशी मुद्रा जब्त की है। ईडी के मुताबिक, दस्तावेजों में जरकीहोली की कांगो की गोल्ड माइनिंग कंपनी मैग्नीट्यूड स्टार एसएआरएल में करीब 40% हिस्सेदारी और परिवार के सदस्यों की अफ्रीकी माइनिंग कंपनियों में शेयरहोल्डिंग का खुलासा हुआ है।
'हम दुनिया की 50% जनसंख्या, 40% GDP को...', BRICS फोरम में क्या बोले PM मोदी?
नई दिल्ली में BRICS समिट 2026 को लेकर दुनिया की नजर इस समय भारत पर है. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, 'इस साल हम BRICS के 20 साल मना रहे हैं. 2006 में जब इस समूह की शुरुआत हुई थी तो इसमें सिर्फ 4 देश थे और आज BRICS में 21 देशों का हमारा परिवार है.' देखें पूरा Video.
क्या आपका LG TV आपकी जासूसी कर रहा है? दावे पर मचा बवाल
स्मार्टफोन को तो जासूसी के लिए काफी पहले से टूल की तरह यूज किया जाता रहा है. लेकिन हाल के कुछ सालों में ये भी पता चला है कि आपका स्मार्ट टीवी भी आपकी जासूसी कर सकता है. एलजी पर ऐसे ही आरोप लगे हैं. आइए जानते हैं क्या आरोप है और कंपनी ने क्या कुछ कहा है.
BRICS पर पी चिदंबरम के बयान का पवन खेड़ा ने किया बचाव, IMF रिपोर्ट को लेकर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने BRICS समिट पर पार्टी के साथी पी. चिदंबरम की टिप्पणी को लेकर BJP की आलोचना का जवाब दिया और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के आर्थिक डेटा पर सरकार के विरोधाभासी रुख को चुनौती दी। शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए, खेड़ा ने पार्टी के भीतर अभिव्यक्ति की आज़ादी का बचाव किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि लोगों को वैश्विक कूटनीतिक मामलों पर अपनी राय रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि हर किसी को अपनी राय रखने और उसे व्यक्त करने का अधिकार है। इसे भी पढ़ें: BRICS Business Forum में बोले PM Modi, भारत नेविगेशन की आजादी का करता है समर्थन इससे पहले, बुधवार को कांग्रेस के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने हाल के ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस फायदों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें पिछली दो-तीन बैठकों से कोई खास नतीजा नहीं दिखा। दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट 2026 के बारे में चिदंबरम ने कहा कि भारत कई मल्टीलेटरल ग्रुप्स (जैसे ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), G20 और QUAD) का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने इन ग्रुप्स में शामिल होने से मिलने वाले ठोस फायदों पर सवाल उठाया। चिदंबरम ने ANI से कहा कि मुझे नहीं पता कि कितने राष्ट्रपति और कितने प्रधानमंत्री आ रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि पिछले दो-तीन ब्रिक्स सम्मेलनों से कोई ठोस फायदा या नतीजा निकला है। उन्होंने आगे कहा कि असल में, हम ब्रिक्स, SCO, G20 और QUAD का हिस्सा हैं। हमें इनसे क्या फायदा हो रहा है? मुझे तो नहीं दिखता। पिछले दो-तीन सम्मेलनों में मुझे कोई फायदा नहीं दिखा। पहले, ब्रिक्स सम्मेलनों से कुछ ठोस फायदे होते थे। इसे भी पढ़ें: PM Modi and BRICS Leaders की 'Family Photo' ने दिया एकजुटता का संदेश, Global South के हितों पर चर्चा बीजेपी की बात करें तो खेड़ा ने सांसद रवि शंकर प्रसाद की आलोचना की। उन्होंने पार्टी पर इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की रिपोर्ट को अपनी सुविधा के हिसाब से मानने का आरोप लगाया और इसे राजनीतिक पाखंड बताया। उन्होंने कहा कि जब IMF आपके आंकड़ों का समर्थन नहीं करता, तो वह किसी तरह का एजेंट बन जाता है। जब IMF आपके काम का समर्थन करता है, तो आप IMF का जश्न मनाने लगते हैं। इसलिए रवि शंकर प्रसाद से कहिए कि वे अपना मन पक्का करें।
VIDEO: कांस्टेबल से गुंडई... गिरफ्तारी होते ही हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाया युवक
बांदा में चौराहे पर पुलिस कांस्टेबल से बदसलूकी और धक्का-मुक्की करने वाले युवक का वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. हिरासत में आते ही उसका तेवर बदल गया और वह हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा. आरोपी ने शराब के नशे में गलती होने की बात कही. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है.
इंडिया गठबंधन में क्यों हो रहा महासंग्राम, पुतिन किसके ऊपर कर रहे तंज; टॉप-5 खबरें
इंडिया गठबंधन में महासंग्राम छिड़ता नजर आ रहा है। वंदे मातरम् के पूर्ण गायन के दौरान खड़े होने पर कांग्रेस के बयान पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तगड़ा जवाब दिया है। पढ़िए आज शाम की पांच बड़ी खबरें...
हरतालिका तीज पर 4 शुभ योग, इन 3 राशियों के लोग जल्द हो सकते हैं अमीर
हरतालिका तीज इस बार 14 सितंबर को है. यह दिन सोमवार को पड़ रहा है. इस दिन गुरु कर्क राशि में रहेंगे. बुध कन्या, सूर्य सिंह और शुक्र तुला राशि में होंगे. ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की यह स्थिति शुभ मानी जा रही है. इसका असर तीन राशियों पर खास रह सकता है.
घर पर बनाइए चाइनीज स्टाइल क्रिस्पी चिली भिंडी, खाकर हो जाएंगे फैन
Crispy Chilli Bhindi Recipe: भिंडी की रोज-रोज की सब्जी से हैं बोर तो इस बार ट्राई करें क्रिस्पी चिली भिंडी. कॉर्नफ्लोर, मैदा, चटपटी सॉस और मसालों की मदद से तैयार होने वाली ये रेसिपी सिंपल भिंडी को एकदम नया स्वाद देती है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से सॉफ्ट इस भिंडी को इंडो-चाइनीज अंदाज में तैयार किया जाता है, जो शाम के स्नैक या पार्टी स्टार्टर के लिए भी बढ़िया ऑप्शन है.
पढ़ें 11 सितंबर 2026 की शाम की बड़ी खबरें और अन्य समाचार
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, रफ्तार और उम्मीदें हम सबके बीच साफ तौर पर दिखाई देती हैं. PM ने कहा कि भारत में आयोजित यह फ़ोरम अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम है.
CREST- IDFC फ्रॉड केस में CBI की चार्जशीट, 3 लोग बनाए गए आरोपी
चंडीगढ़ CREST-IDFC फ्रॉड केस में सीबीआई ने IFoS अफसर नवनीत श्रीवास्तव समेत 3 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. मामले में ₹75.4 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है. पढ़ें पूरी कहानी.
MP: भारी बारिश से दमोह में बाढ़ जैसे हालात, घर-दुकानों में घुसा पानी
Damoh Waterlogging Boat Rescue: दमोह में तेज बारिश के बाद सुभाष कॉलोनी में भीषण जलभराव. SDERF ने नाव से किया लोगों का रेस्क्यू. रहवासियों ने दी आंदोलन की चेतावनी. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
PMO अधिकारी बनकर मॉल पहुंचे रोहन, गिरफ्तारी के बाद जमानत के लिए दिया तर्क
मुंबई में PMO की संदिग्ध पहचान का इस्तेमाल कर Jio World Plaza पहुंचने के आरोप में गिरफ्तार रोहन पारिख ने जमानत अर्जी दाखिल की है. उनका कहना है कि FIR में किसी गलत मकसद या नुकसान का आरोप नहीं है. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि प्रतिबंधात्मक आदेश पर्याप्त रूप से प्रकाशित नहीं थे. मामले में 17 सितंबर को सुनवाई होगी.
एरिका फर्नांडिस की टीवी पर वापसी, '108 बेस हॉस्पिटल उरी' में बनेंगी आर्मी डॉक्टर
भारतीय टेलीविजन और मनोरंजन जगत के गलियारों में इन दिनों एक बेहद लोकप्रिय चेहरे की वापसी को लेकर जबरदस्त चर्चाएं हो रही हैं। छोटे परदे की जानी-मानी और चहेती अभिनेत्री एरिका फर्नांडिस (Erica Fernandes) लगभग पांच साल के लंबे अंतराल के बाद टेलीविजन की दुनिया में एक नए और धमाकेदार अवतार के साथ लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एरिका जल्द ही एक नए और लीक से हटकर बनाए गए शो '108 बेस हॉस्पिटल उरी' (108: Base Hospital Uri) में डॉ. मेजर नैना सान्याल की मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। कश्मीर की बेहद हसीन लेकिन चुनौतीपूर्ण वादियों की पृष्ठभूमि पर आधारित यह शो पारंपरिक सास-बहू के ड्रामे से कोसों दूर है और सीधे युद्धभूमि के पीछे बने आर्मी हॉस्पिटल की उस सच्चाई को बयां करता है, जहां सेना के डॉक्टर और मेडिकल टीम असाधारण दबाव और संघर्ष के बीच देश के घायल सैनिकों का इलाज करती है। अभिनय की दुनिया से लंबे समय तक दूर रहने की वजह, पारंपरिक टीवी धारावाहिकों से दूरी और अपनी इस नई साहसिक भूमिका को लेकर एरिका फर्नांडिस ने खुलकर कई दिलचस्प खुलासे किए हैं, जिससे उनके फैंस के बीच उत्साह का माहौल है।सास-बहू के घिसे-पिटे ड्रामों से तौबा और पांच साल के लंबे ब्रेक की असली वजहजब एरिका फर्नांडिस से यह सवाल किया गया कि उन्होंने टेलीविजन से इतने लंबे समय तक दूरी क्यों बनाए रखी, तो उन्होंने बेहद बेबाक अंदाज में जवाब दिया कि उस दौरान उनके पास जितने भी प्रोजेक्ट्स के ऑफर आ रहे थे, वे सभी पारंपरिक सास-बहू वाले ड्रामे थे, जिन्हें वह किसी भी कीमत पर दोहराना नहीं चाहती थीं। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से वह पहले ही उस शैली के तीन शो कर चुकी थीं, और अब वह खुद को एक ही तरह के सांचे में नहीं बांधना चाहती थीं। उन्होंने महसूस किया कि यदि वह लगातार पारंपरिक बहुओं वाले किरदार ही निभाती रहीं, तो दर्शक और निर्माता उन्हें केवल उसी रूप में देखने लगेंगे और उनकी अभिनय क्षमता एक सीमित दायरे में सिमट कर रह जाएगी। यही वजह है कि उन्होंने एक लंबा इंतजार करना बेहतर समझा, क्योंकि उनके लिए सही प्रोजेक्ट चुनना और कुछ नया करना बेहद जरूरी था। जब उनके पास '108 बेस हॉस्पिटल उरी' जैसी अनूठी स्क्रिप्ट आई, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के इसके लिए हां कह दिया। उन्होंने कभी यह नहीं कहा था कि वह कभी टीवी नहीं करेंगी, बल्कि उनका हमेशा से यह मानना रहा है कि यदि कुछ लीक से हटकर और गुणवत्तापूर्ण काम मिलेगा, तो वह निश्चित रूप से उसका हिस्सा बनेंगी।वास्तविक लोकेशंस पर शूटिंग और आर्मी की असली वर्दी पहनने का अनूठा अनुभवएरिका फर्नांडिस ने अपने इस नए प्रोजेक्ट की शूटिंग के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि इस शो की शूटिंग किसी कृत्रिम सेट पर नहीं, बल्कि कश्मीर समेत कई वास्तविक और बेहद कठिन लोकेशंस पर की गई है। इस शो की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें कलाकारों द्वारा पहनी गई सेना की वर्दी कोई आम कॉस्ट्यूम डिजाइनर द्वारा तैयार की गई पोशाक नहीं है, बल्कि वह बिल्कुल वास्तविक और असली सेना की वर्दी है, जिससे इस किरदार की प्रामाणिकता और अधिक बढ़ जाती है। मेडिकल क्षेत्र से उनका पुराना लगाव भी इस शो को चुनने का एक बहुत बड़ा कारण रहा है। एक सैन्य डॉक्टर की मानसिक स्थिति और उसकी कार्यशैली एक आम अस्पताल के डॉक्टर से बिल्कुल अलग होती है। युद्ध के मैदान में अपने देश के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर सैनिकों का इलाज करने वाले इन डॉक्टरों के नजरिए को पर्दे पर उतारने के लिए एरिका ने काफी मेहनत और तैयारी की है। संवाद अदायगी, आवाज में ठहराव, शारीरिक भाषा और एक फौजी डॉक्टर के दृष्टिकोण को समझने के लिए उन्होंने काफी बारीकी से काम किया है, जो उनके फैंस के लिए स्क्रीन पर देखना एक बिल्कुल नया और प्रेरणादायक अनुभव होने वाला है।टेलीविजन के पारंपरिक फॉर्मेट से अलग एक बेहतर संतुलन और ओटीटी जैसा अनुभवलगातार कई वर्षों तक दैनिक धारावाहिकों (Daily Soaps) में काम करने के बाद कलाकारों को होने वाली मानसिक और शारीरिक थकान पर बात करते हुए एरिका ने माना कि टीवी की जिंदगी बेहद कठिन होती है। दैनिक शो में काम करने के दौरान कलाकारों के पास अपनी निजी जिंदगी के लिए पर्याप्त समय नहीं बचता और वे कोई दूसरा काम भी नहीं कर पाते। यही कारण है कि लंबे समय तक काम करने के बाद थकान होना स्वाभाविक है। हालांकि, '108 बेस हॉस्पिटल उरी' का फॉर्मेट उनके लिए एक बहुत अच्छा संतुलन साबित हुआ है, क्योंकि यह एक तरफ जहां टेलीविजन पर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसकी शूटिंग का तरीका पूरी तरह से ओटीटी प्लेटफॉर्म्स जैसा है। इस शो की शूटिंग पारंपरिक टीवी की तरह हर दिन बदलने वाली स्क्रिप्ट के आधार पर नहीं हुई, बल्कि इसे पूरी तरह से एक तय फॉर्मेट और बाउंड स्क्रिप्ट के साथ पहले ही शूट कर लिया गया है। कलाकारों को पता था कि तीन महीने तक इस प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद वे अपनी मर्जी से दूसरा काम कर सकते हैं। इसके अलावा, जब उनसे उनके किरदार में प्रेम कहानी के पहलू पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही सुंदर जवाब देते हुए कहा कि उनके लिए प्यार का मतलब केवल शब्दों का होना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान और खामोशी में भी पूरी तरह सहज महसूस करना है।फिल्मों और टेलीविजन के बीच का फर्क और एरिका का बेबाक नजरियाअपने फिल्मी करियर और दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करने के अनुभवों को याद करते हुए एरिका ने यह स्पष्ट किया कि उनके लिए बॉलीवुड या किसी भी फिल्म में स्थापित होना ही जीवन की अंतिम मंजिल नहीं रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्मों से ही की थी, लेकिन उनकी सोच कभी यह नहीं रही कि उन्हें सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही चमकना है। उनके लिए सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि उन्हें जहां भी अपनी कला का प्रदर्शन करने का अच्छा और संतोषजनक मौका मिले, वह वहां पूरी ईमानदारी से काम करें। जब उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में फिल्मों से टेलीविजन की दुनिया का रुख किया था, तब भी कई लोगों ने उनसे सवाल किया था कि वह फिल्मों से छोटे पर्दे पर क्यों आ रही हैं, क्योंकि फिल्मों का स्तर अलग माना जाता है। लेकिन एरिका का हमेशा से यह मानना रहा है कि हर माध्यम की अपनी एक अलग खूबी और ताकत होती है। सच कहा जाए तो टेलीविजन ने उन्हें वह असीम प्यार, पहचान और लोकप्रियता दी है, जो शायद केवल फिल्मों के जरिए हासिल नहीं हो पाती। अब पांच साल के एक लंबे और सोचे-समझे अंतराल के बाद एरिका फर्नांडिस का एक डॉक्टर और फौजी के रूप में इस नए प्रोजेक्ट के साथ लौटना यह साबित करता है कि वह लीक से हटकर प्रयोग करने से डरती नहीं हैं, और उनकी यह वापसी उनके करियर में एक नया मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
लाल सागर में हूतियों की बड़ी बढ़त, मोखा पोर्ट पर कब्जा; बाब-अल-मंदेब के करीब पहुंचा खतरा
तेहरान। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तट पर स्थित रणनीतिक रूप से बेहद अहम मोखा (Mokha) बंदरगाह शहर पर कब्जा कर लिया है। सैन्य सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने यहां मौजूद सऊदी समर्थित सरकारी बलों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। […] The post लाल सागर में हूतियों की बड़ी बढ़त, मोखा पोर्ट पर कब्जा; बाब-अल-मंदेब के करीब पहुंचा खतरा appeared first on Sabguru News .
दो हफ्ते के अंदर कहें- 'हां या ना': चीफ जस्टिस ने जजों की ही कस दी नकेल, क्यों थमाई ऐसी डेडलाइन?
SC ने ये भी कहा था कि जिन जमानत मामलों पर सुनवाई नहीं हुई है, उन्हें अपने-आप दोबारा लिस्ट किया जाना चाहिए और जमानत पर सुरक्षित रखे गए आदेश 24 घंटे के अंदर सुनाए जाने चाहिए और अपलोड किए जाने चाहिए।
हानिया आमिर के रैप गाने में राखी सावंत का कैमियो, इंटरनेट पर मचा तहलका
मनोरंजन जगत की दुनिया में इन दिनों एक ऐसी अनूठी और हैरान कर देने वाली जुगलबंदी देखने को मिल रही है, जिसने भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सनसनी फैला दी है। पाकिस्तान की बेहद लोकप्रिय और खूबसूरत अभिनेत्री हानिया आमिर (Hania Aamir) ने अब अभिनय के मोर्चे से आगे बढ़कर गायकी की दुनिया में भी अपना कदम रख दिया है। हानिया ने हाल ही में अपना पहला आधिकारिक रैप सॉन्ग 'पाब्लो' (Pablo) यूट्यूब पर रिलीज किया है, जो रिलीज होते ही इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया है। लेकिन इस गाने के भारत में सबसे ज्यादा चर्चा में आने और सुर्खियों बटोरने की मुख्य वजह कोई और नहीं, बल्कि बॉलीवुड की ड्रामा क्वीन कही जाने वाली राखी सावंत (Rakhi Sawant) हैं। सरहदों की तमाम दूरियों और राजनीतिक तनातनी को दरकिनार करते हुए इस म्यूजिक वीडियो में राखी सावंत का एक विशेष कैमियो और उनका बेहद जोशीला ऑडियो संदेश शामिल किया गया है, जिसने देखते ही देखते इस गाने को इंटरनेट पर एक वायरल सेंसेशन बना दिया है। दोनों देशों के कलाकारों के इस अनोखे मेल को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह और उत्सुकता देखने को मिल रही है, और यह गाना हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है।हानिया आमिर का बतौर सिंगर डेब्यू और 'पाब्लो' गाने की वायरल सफलतालोकप्रिय पाकिस्तानी अभिनेत्री हानिया आमिर की फैन-फॉलोइंग केवल उनके अपने देश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत में भी उनके चाहने वालों की एक बहुत लंबी फेरिस्त है। अपने अभिनय के जलवे बिखेरने के बाद अब हानिया ने गायकी में अपनी किस्मत आजमाई है और अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपना पहला रैप सॉन्ग 'पाब्लो' शेयर किया है। इस ढाई मिनट यानी करीब 2 मिनट 30 सेकंड के गाने को न केवल खुद हानिया आमिर ने अपनी आवाज में गाया है, बल्कि इस गाने के बोल (Lyrics) और इसकी मर्मस्पर्शी धुन भी उन्होंने खुद ही तैयार की है। हानिया का यह पहला गाना रिलीज होने के महज 24 घंटे के भीतर ही इंटरनेट पर इस कदर छाया कि इसे लगभग 6 लाख के करीब व्यूज मिल चुके हैं और यह लगातार ट्रेंड कर रहा है। इस म्यूजिक वीडियो की सबसे बड़ी खूबी यह है कि हानिया ने इसे शेयर करते हुए भारत की लोकप्रिय और बेबाक कलाकार राखी सावंत का नाम सबसे ऊपर टैग किया है और इस अनूठे सहयोग के लिए उनका दिल से धन्यवाद किया है। सोशल मीडिया पर यह क्रॉस-बॉर्डर कोलाबोरेशन इस समय चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है, जहां लोग हानिया के रैप अंदाज और राखी सावंत के तीखे तथा ऊर्जावान तेवरों की जमकर सराहना कर रहे हैं।राखी सावंत का स्पेशल कैमियो और वह वायरल ऑडियो संदेशहानिया आमिर के इस पहले रैप गाने 'पाब्लो' में भारतीय मनोरंजन जगत की जानी-मानी हस्ती राखी सावंत का कैमियो किसी सरप्राइज पैकेज से कम नहीं है। गाने के बीच में राखी सावंत का एक बेहद एनर्जेटिक और प्रेरणादायक ऑडियो मैसेज शामिल किया गया है, जिसके जरिए वे पाकिस्तानी अभिनेत्री का हौसला बढ़ाती हुई नजर आ रही हैं। राखी सावंत ने उस ऑडियो संदेश में अपने चिर-परिचित और बेबाक अंदाज में हानिया से कहा, हानिया मेरी जान, टेंशन नहीं लेनी। समझी? टेंशन नहीं लेनी। अरे तुम हूर हो, तुम्हारे चेहरे पर नूर है। तुम्हारी खूबसूरती पर ये जलते हैं। तुम शेरनी हो, समझ गई हानिया? डरना नहीं है, जो डर गया, समझो मर गया। इनका डटकर सामना करो और जिंदगी में ऐसे ही आगे बढ़ती रहो। राखी का यह अंदाज और उनके ये शब्द सोशल मीडिया यूजर्स को खूब पसंद आ रहे हैं। एक तरफ जहां पाकिस्तान की एक शीर्ष अभिनेत्री अपने पहले म्यूजिक प्रोजेक्ट में बॉलीवुड के एक बड़े और चर्चित चेहरे का समर्थन ले रही है, वहीं राखी सावंत का यह बेबाक अंदाज इस बात का प्रमाण है कि कला और मनोरंजन की दुनिया सरहदों की मोहताज नहीं होती है। इस ऑडियो संदेश ने गाने में एक अलग ही ऊर्जा भर दी है, जिसे दर्शक बार-बार देखना और सुनना पसंद कर रहे हैं।भारत में हानिया आमिर की लोकप्रियता और पिछले विवादों का सफरहानिया आमिर की फैन फॉलोइंग भारत में हमेशा से ही काफी मजबूत रही है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच के राजनीतिक तनाव और कड़े नियमों के चलते उनके करियर के कुछ पहलुओं पर असर भी पड़ा है। पिछले दिनों पहलगाम में हुए एक आतंकवादी हमले के बाद भारत में कई पाकिस्तानी सेलिब्रिटीज के सोशल मीडिया अकाउंट्स और उनकी डिजिटल गतिविधियों पर पाबंदियां लगाई गई थीं, ताकि सुरक्षा और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जा सके। इसके बावजूद, भारतीय दर्शकों के दिलों में हानिया की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। इससे पहले भी हानिया का नाम भारतीय सिनेमा से जुड़ा रहा है, जब उन्होंने पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ के साथ बहुचर्चित फिल्म 'सरदार 3' में काम किया था। हालांकि, उस दौरान भी उस प्रोजेक्ट को लेकर काफी राजनीतिक और सामाजिक बवाल खड़ा हुआ था, और कड़े विरोध के चलते उस फिल्म को भारत में आधिकारिक रूप से रिलीज नहीं किया जा सका था। इन तमाम बाधाओं और कूटनीतिक सरहदों के बावजूद, हानिया आमिर ने अपनी कला के दम पर भारतीय दर्शकों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाए रखी है। अब राखी सावंत के साथ इस नए रैप सॉन्ग में उनकी यह जुगलबंदी इस बात को फिर से साबित करती है कि सोशल मीडिया और कला के मंच पर सरहदों की दीवारें अक्सर कमजोर पड़ जाती हैं, और दर्शक केवल अच्छे और मनोरंजक कंटेंट को ही तवज्जो देते हैं।इंटरनेट पर मचा तहलका और सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएंजैसे ही हानिया आमिर ने अपना यह नया रैप सॉन्ग 'पाब्लो' यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया, वैसे ही इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक तरफ जहां हानिया के फैंस उनके इस नए और आधुनिक अवतार की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राखी सावंत के इस अप्रत्याशित कैमियो ने लोगों को हैरान भी किया है और उनका मनोरंजन भी किया है। इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब के कमेंट सेक्शन में लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि आखिर एक पाकिस्तानी पॉप स्टार और एक भारतीय ड्रामा क्वीन के बीच यह दिलचस्प तालमेल कैसे बैठा। कई यूजर्स ने लिखा कि राखी सावंत का यह अंदाज वाकई में किसी भी इंसान में नया आत्मविश्वास भर सकता है, क्योंकि वे हमेशा खुलकर अपनी बात रखती हैं। वहीं कुछ लोगों ने इसे महज पब्लिसिटी स्टंट बताया, लेकिन इसके बावजूद व्यूज की रफ्तार इस बात की गवाही दे रही है कि यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा है। महज एक दिन के भीतर लाखों व्यूज बटोर चुका यह गाना यह साबित करने के लिए काफी है कि कंट्रोवर्सी और यूनीक कॉम्बिनेशन आज के डिजिटल युग में किसी भी प्रोजेक्ट को रातों-रात वायरल कराने की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं, और हानिया-राखी की यह जोड़ी आने वाले कई दिनों तक सोशल मीडिया की सुर्खियों में बनी रहने वाली है।
'बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही दुनिया', ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को धन्यवाद भी दिया
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है। कई देशों के बीच तनाव बढ़ा है और सामान बनाने व पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। उन्होंने US और इजरायल पर प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाया।
2027 चुनाव से पहले क्या मायावती ने बिगाड़ा अपना गेम?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को बसपा से पूरी तरह बाहर कर दिया है. पहले राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने के बाद अब उनकी प्राथमिक सदस्यता भी खत्म कर दी गई. मायावती ने आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ पर गंभीर आरोप लगाए और सपा-कांग्रेस पर भी हमला बोला. ऐसे में सवाल है कि यह फैसला बसपा को मजबूत करेगा या चुनावी राह मुश्किल बनाएगा.
BRICS Business Forum में बोले PM Modi, भारत नेविगेशन की आजादी का करता है समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ग्लोबल इकॉनमी में भारत की बढ़ती भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि जब दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितता का सामना कर रही है, तब भी भारत विकास कर रहा है। ब्रिक्स (BRICS) बिज़नेस फ़ोरम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया अस्थिरता के दौर से गुज़र रही है, तब भारत विकास कर रहा है। उन्होंने आगे कहा, ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच, आज भारत विकास और स्थिरता के लिए भरोसे का स्रोत बना हुआ है। बदलती ग्लोबल इकॉनमी में ब्रिक्स (BRICS) की भूमिका पर पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ग्लोबल इनोवेशन और समाधानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। उन्होंने इस समूह से और ज़्यादा सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा, आइए ब्रिक्स की महत्वाकांक्षा को कार्रवाई में और सामूहिक ताकत को ग्लोबल समाधानों में बदलें। ब्रिक्स आगे बढ़े और दुनिया को भी आगे ले जाए। ग्लोबल ट्रेड के प्रति भारत के नज़रिए पर ज़ोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज, जब दुनिया भर में व्यापार की बाधाएं बढ़ रही हैं, भारत आर्थिक पुल बना रहा है। उन्होंने मेक इन इंडिया, इनोवेट विद इंडिया, स्केल फॉर द वर्ल्ड के संदेश के साथ ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के लिए भारत के विज़न को भी सामने रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल इकॉनमी के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि ग्लोबल ट्रेड तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री रास्ते सुरक्षित हों, सप्लाई रूट खुले हों और नाविक सुरक्षित हों। इसीलिए भारत नेविगेशन की आज़ादी और नाविकों की सुरक्षा का मज़बूती से समर्थन करता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस साल ब्रिक्स (BRICS) के 20 साल पूरे हो रहे हैं और ब्रिक्स परिवार में 21 देश शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह समूह दुनिया की 50% आबादी, 40% ग्लोबल GDP और 20% ग्लोबल ट्रेड का प्रतिनिधित्व करता है।
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस ने उमर अब्दुल्ला पर सवाल उठाया तो जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी चुप नहीं रहे। उन्होंने इंडिया गठबंधन के सहयोगी को लेकर निशाना साधा है। जानिए क्या कहा…
अमेरिकी राजनीतिक गलियारों और प्रवासी समुदायों के बीच इन दिनों एक ऐसा विज्ञापन भारी भूचाल लेकर आया है, जिसने सत्ताधारी डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) की सुगबुगाहट के बीच होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट यानी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी किया गया एक विवादित विज्ञापन अमेरिकी राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस विज्ञापन में 'मिस्टर सिंह' नाम के एक सिख पात्र को आधार बनाकर बिना लाइसेंस वाले वाणिज्यिक चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा था और उसे स्वेच्छा से देश छोड़ने का संदेश दिया जा रहा था। एआई (AI) तकनीक की मदद से तैयार की गई इस तस्वीर और उसके साथ लिखे गए आपत्तिजनक कैप्शन को लेकर मानवाधिकार समूहों, सिख संगठनों और विभिन्न अमेरिकी-भारतीय समुदायों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। चौतरफा आलोचनाओं से घिरने और चुनावी मौसम में भारतीय मूल के मतदाताओं की नाराजगी का कड़ा जोखिम भांपते हुए आखिरकार ट्रंप प्रशासन को झुकना पड़ा और विवाद बढ़ने के बाद उस नस्लवादी विज्ञापन को सोशल मीडिया से तुरंत हटा लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर अमेरिकी राजनीति में प्रवासियों की भूमिका और उनके चुनावी महत्व को उजागर कर दिया है।एआई से तैयार 'मिस्टर सिंह' विज्ञापन पर मचा बवाल और मानवाधिकार संगठनों का तीखा विरोधपूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अपने 'सीबीपी होम' कार्यक्रम के व्यापक प्रचार अभियान के तहत सोशल मीडिया पर एआई जनित तस्वीरों का एक विज्ञापन साझा किया। इस विज्ञापन में एक सिख समुदाय के व्यक्ति को ट्रक चलाते हुए दर्शाया गया था, जिसके साथ अपमानजनक लहजे में लिखा गया था कि 'हमारी सड़कों से दफा हो जाओ, मिस्टर सिंह, आपको वाहन चलाना नहीं आता।' इस विज्ञापन के सामने आते ही अमेरिकी समाज के उदारवादी तबके और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने इसे खुले तौर पर नस्लवादी, भेदभावपूर्ण और अमेरिका-विरोधी करार दिया। सिख संगठनों और नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूहों का कहना था कि अमेरिका में लाखों की संख्या में सिख नागरिक निवास करते हैं, जिनके उपनाम में 'सिंह' जुड़ा होता है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'शेर' होता है। संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सिख समुदाय अपनी अनूठी पहचान, पगड़ी और संस्कृति पर गर्व करता है, और यदि देश की अपनी संघीय एजेंसियां ही एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर उनका उपहास उड़ाएंगी, तो इससे समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा मिलेगा। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि 'सिंह' केवल एक नाम नहीं है, बल्कि इस देश में रहने वाले हिंदू, सिख और तमाम अमेरिकी नागरिक गर्व से गाड़ी चलाते हैं और देश के विकास में योगदान देते हैं। फाउंडेशन ने इस मामले की उच्च स्तरीय संघीय जांच की मांग करते हुए प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की।मध्यावधि चुनावों के मुहाने पर खड़े ट्रंप प्रशासन को सता रहा भारतीय वोटर्स के खिसकने का डरअमेरिकी राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि इस विवादित विज्ञापन को आनन-फानन में हटाए जाने के पीछे विशुद्ध रूप से राजनीतिक दूरदर्शिता और आगामी मध्यावधि चुनावों का डर काम कर रहा है। अमेरिका में जल्द ही मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, और वहां की राजनीतिक पार्टियों के लिए हर एक मतदाता समूह का समर्थन बेहद कीमती है। हालिया चुनावी सर्वेक्षणों और आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका में रहने वाले एशियाई-अमेरिकी और विशेष तौर पर भारतीय मूल के मतदाताओं का पारंपरिक झुकाव काफी हद तक डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है। हाल ही में किए गए एक प्रतिष्ठित सर्वे के अनुसार, पंजीकृत एशियाई-अमेरिकी और एएपीआई (AAPI) मतदाताओं में से 90 प्रतिशत से अधिक लोगों ने इस बार मतदान प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की इच्छा जताई है। हालांकि सर्वे में यह बात भी सामने आई थी कि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही दलों ने इन मतदाताओं तक पूरी तरह से पहुंच नहीं बनाई है, लेकिन जब बात वोटिंग पैटर्न की आती है, तो भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में से लगभग 66 प्रतिशत लोगों ने यह स्पष्ट किया है कि वे प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में अपना मतदान करेंगे। ऐसे संवेदनशील समय में जब भारतीय मूल का समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीक के क्षेत्र में एक शक्तिशाली स्तंभ बन चुका है, गृह सुरक्षा विभाग द्वारा इस प्रकार का नस्लीय विज्ञापन जारी किया जाना ट्रंप सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक आत्मघाती कदम साबित हो सकता था। इसी बड़े खतरे को भांपते हुए व्हाइट हाउस ने डैमेज कंट्रोल करते हुए उस विज्ञापन को फौरन डिलीट करवा दिया।सिख संगठनों और संघों का कड़ा रुख, फेडरल एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवालइस पूरे घटनाक्रम के दौरान अमेरिका के प्रभावशाली सिख संगठनों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और प्रशासनिक मशीनरी के नस्लीय रवैये को बेनकाब किया। 'सिख कोएलिशन' ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए याद दिलाया कि ऐतिहासिक 9/11 की घटना के 25 साल बीत जाने के बाद भी आज के आधुनिक अमेरिका में सिखों को उनके विशिष्ट पहनावे, दाढ़ी और रूप-रंग के आधार पर निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इसके अलावा, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस भेदभावपूर्ण पोस्ट के खिलाफ देश भर के नागरिकों को एक साथ खड़े होने का आह्वान किया और इस मामले में देश की शीर्ष हस्तियों जैसे सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों और एफबीआई निदेशक काश पटेल को टैग करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह केवल किसी साधारण कर्मचारी की गलती नहीं है, बल्कि एक संघीय एजेंसी की ओर से की गई सोची-समझी राजनीतिक संदेशबाजी और भेदभाव का गंभीर मामला है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। गृह सुरक्षा विभाग अपने जिस 'सीबीपी होम' कार्यक्रम का प्रचार कर रहा था, उसका उद्देश्य असल में उन प्रवासियों को स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना था जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, और इसके लिए स्वैच्छिक पंजीकरण कराने वालों को यात्रा सहायता के साथ-साथ 2,600 अमेरिकी डॉलर की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी किया गया था। लेकिन उस अभियान के प्रचार के लिए जिस भद्दे और नस्लीय तरीके का इस्तेमाल किया गया, उसने पूरी योजना की नीयत पर ही पानी फेर दिया और प्रशासनिक अधिकारियों की संकीर्ण मानसिकता को उजागर कर दिया।चुनावी समीकरणों पर पड़ता असर और अमेरिका की बहुसांस्कृतिक पहचान की रक्षाराजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि अमेरिका जैसे बहुसांस्कृतिक देश में जहां दुनिया भर के विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोग एक साथ मिलकर देश के निर्माण में अपना योगदान देते हैं, वहां इस तरह की नीतियां या विज्ञापन समाज में ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं। ट्रंप प्रशासन के शुरुआती दौर से ही आव्रजन नीतियों को लेकर कड़ा रुख रहा है, और अवैध प्रवासियों पर लगाम कसना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है, लेकिन उस नीति को लागू करने के लिए किसी एक धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान को निशाना बनाना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। जब सोशल मीडिया पर इस विज्ञापन के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हुए और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाना शुरू किया, तब जाकर रिपब्लिकन नेतृत्व को अपनी गलती का अहसास हुआ। अमेरिका में प्रवासी भारतीय और एशियाई समुदाय अब केवल एक छोटा समूह नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिकी राजनीति, वित्त, स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी क्षेत्रों के सर्वोच्च पदों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वे हर चुनाव में एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि जब बात उनके सम्मान और पहचान पर आई, तो प्रशासन को तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि वैचारिक और राजनीतिक लड़ाइयों के बीच अब अमेरिकी मतदाता अपनी गरिमा और अधिकारों को लेकर बेहद जागरूक हो चुके हैं, और कोई भी सरकार जनभावनाओं की कीमत पर अपनी मनमानी नहीं चला सकती है।
कालीघाट मंदिर में BJP CM शुभेंदु अधिकारी ने खाया Fish Bhog
दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर दिए गए बाबा बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बीच पश्चिम बंगाल में मछली भोग को लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का ...
'विरोध करना अधिकार है, हम नहीं रोक सकते', जरांगे के प्रदर्शन पर HC
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल पर साफ कह दिया है कि इसमें राज्य सरकार को कदम उठाना चाहिए, कोर्ट किसी के आंदोलन को कैसे रोक सकता है.
ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली में जुटे विश्व नेता, पुतिन-पेजेशकियान-रामाफोसा पहुंचे
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर राजधानी में दुनिया के प्रमुख उभरते देशों के नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा समेत […] The post ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली में जुटे विश्व नेता, पुतिन-पेजेशकियान-रामाफोसा पहुंचे appeared first on Sabguru News .
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की दुनिया में अमेरिका अपने तकनीकी वर्चस्व और सुरक्षा मानकों का दम भरता आया है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने अमेरिकी खुफिया और तकनीकी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दुनिया की दिग्गज अमेरिकी एआई कंपनियों में शुमार 'एंथ्रोपिक' (Anthropic) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने इस बात का पर्दाफाश किया है कि यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोही अमेरिका में बने आधुनिक एआई मॉडल का इस्तेमाल खतरनाक हथियार और मिसाइलें बनाने के लिए कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों की एक गुप्त हथियार इंजीनियरिंग सेल ने एंथ्रोपिक के लोकप्रिय एआई मॉडल 'क्लाउड' (Claude) का उपयोग करके लंबी दूरी की मिसाइलों और गाइडेड रॉकेट के लिए उन्नत गाइडेंस सॉफ्टवेयर विकसित करने का काम किया है। अमेरिका के अपने ही अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल उसके कट्टर विरोधियों द्वारा हथियार निर्माण में किए जाने की इस घटना ने तकनीकी जगत में सुरक्षा और दुरुपयोग के खतरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे पूरी दुनिया में यह सवाल उठने लगा है कि क्या एआई तकनीक अब आतंकवादियों और विद्रोही संगठनों के हाथ का खिलौना बनती जा रही है।एंथ्रोपिक की रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: क्लाउड एआई से बना मिसाइल सॉफ्टवेयरप्रसिद्ध एआई कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा गुरुवार को जारी की गई अपनी एक विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि उसने चीन, रूस और यमन में चल रहे ऐसे छह बड़े ऑपरेशनों को समय रहते बाधित किया है, जहां उसके 'क्लाउड' मॉडल का गलत इस्तेमाल पारंपरिक हथियारों के विकास, खुफिया जानकारी जुटाने और सैन्य हार्डवेयर की खरीद के लिए किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के युद्धग्रस्त इलाके में सक्रिय हूतियों की एक तकनीकी सेल ने क्लाउड का इस्तेमाल मानव सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के विकल्प के रूप में किया। इस समूह ने उड़ने वाले सैन्य वाहनों और मिसाइलों के लिए गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सॉफ्टवेयर को डिजाइन करने में एआई की मदद ली। एआई का यह दुरुपयोग इस बात का प्रमाण है कि कैसे जटिल प्रोग्रामिंग और कोडिंग की जो क्षमता पहले केवल उच्च प्रशिक्षित इंजीनियरों के पास होती थी, उसे अब अत्याधुनिक एआई टूल्स की मदद से बेहद आसानी से हासिल किया जा रहा है। हूती विद्रोही, जिन्हें ईरान से हर प्रकार की सामरिक और कूटनीतिक सहायता मिलती रही है, इस तकनीक का उपयोग करके अपनी सैन्य मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने की फिराक में थे, ताकि वे लाल सागर और खाड़ी देशों में अपने रणनीतिक प्रभुत्व को और अधिक मजबूत कर सकें।2000 किलोमीटर से अधिक रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइल और हाइपरसोनिक तकनीक पर कामएंथ्रोपिक की इस चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि यमन में सक्रिय इस हूती हथियार सेल का दायरा कितना बड़ा और खतरनाक था। यह समूह केवल छोटे-मोटे हथियारों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह कई अत्यंत जटिल मिसाइल कार्यक्रमों पर एक साथ काम कर रहा था। इनमें एक मल्टी-स्टेज बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल थी, जिसकी लक्षित मारक क्षमता या रेंज 2,000 किलोमीटर से अधिक आंकी गई थी। इसके अतिरिक्त, यह समूह एक अन्य उन्नत मिसाइल प्रणाली पर भी शोध कर रहा था, जिसे 'R2000' सेट के नाम से जाना जाता है, और इसमें अत्याधुनिक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल का एक विशेष वेरिएंट भी शामिल था। हालांकि, एंथ्रोपिक ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि भले ही इस समूह ने एआई की मदद से डिजाइनिंग और कोडिंग का काम तेजी से किया हो, लेकिन कंपनी को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि इस सेल ने इन डिज़ाइनों के आधार पर सफलतापूर्वक कोई पूरी तरह से ऑपरेशनल और विनाशकारी हथियार मैदान में उतार लिया हो। इसके बावजूद, इतनी लंबी रेंज की मिसाइल प्रणालियों और हाइपरसोनिक तकनीक के विकास में एआई का यह उपयोग इस बात की ओर साफ इशारा करता है कि पारंपरिक युद्धक तकनीक अब किस तेजी से गैर-राज्य अभिनेताओं (Non-state actors) के हाथों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।एआई की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने की शातिर तकनीक और कोडिंग का अनूठा तरीकाहूती विद्रोहियों की इस तकनीकी सेल ने अमेरिकी कंपनी के एआई मॉडल से काम निकलवाने के लिए बेहद शातिर और सुनियोजित तरीके अपनाए। रिपोर्ट के अनुसार, इस समूह ने एंथ्रोपिक की सुरक्षा प्रणालियों (Safety Guardrails) और फिल्टर को बार-बार चकमा देने की कोशिश की। उन्होंने अपने खतरनाक इरादों और हथियारों के विकास के असली उद्देश्य को पूरी तरह से छिपाकर रखा। अपनी बातचीत और प्रॉम्प्ट्स को कई अलग-अलग छोटे सत्रों (Sessions) में बांटा ताकि किसी भी एक सिंगल चैट से उनके पूरे हथियार कार्यक्रम की मंशा स्पष्ट रूप से सामने न आ सके। हालांकि एंथ्रोपिक की सुरक्षा व्यवस्था ने इनमें से कई संदिग्ध अनुरोधों को बीच में ही ब्लॉक कर दिया, लेकिन इसके बावजूद वे कई सुरक्षा दीवारों को पार करने में सफल रहे। हैरानी की बात यह है कि यह समूह एक साथ 'क्लाउड' के कई अलग-अलग इंस्टेंस का इस्तेमाल कर रहा था, जिन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। उदाहरण के लिए, एक इंस्टेंस का उपयोग मुख्य कोडिंग लिखने के लिए किया जाता था, दूसरे का तकनीकी रिसर्च के लिए, और तीसरे का पहले इंस्टेंस द्वारा तैयार किए गए कोड की सटीकता की समीक्षा करने के लिए किया जाता था। इस तरह वे एआई को ही अपना वर्चुअल सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाकर अपनी कमियों को दूर कर रहे थे।गाइडेड रॉकेट का विफल परीक्षण और एंथ्रोपिक द्वारा की गई सख्त कार्रवाईजांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस हूती सेल ने एआई की मदद से तैयार किए गए साजो-सामान के आधार पर एक गाइडेड रॉकेट का प्रायोगिक परीक्षण (Test) भी किया था, हालांकि वह परीक्षण सफल होता हुआ दिखाई नहीं दिया और असफल हो गया। तकनीक और विज्ञान की दुनिया की विडंबना देखिए कि उस परीक्षण के विफल होने के कुछ ही घंटों बाद, वह समूह दोबारा एंथ्रोपिक के 'क्लाउड' मॉडल के पास पहुंचा और उससे यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर उनके द्वारा किए गए प्रयोग में तकनीकी रूप से क्या गलती रह गई थी, जिसके कारण रॉकेट फेल हो गया। जैसे ही एंथ्रोपिक को अपनी प्रणाली के इस तरह के खतरनाक और अनधिकृत इस्तेमाल की भनक लगी, कंपनी ने तुरंत त्वरित कार्रवाई करते हुए इस ऑपरेशन से जुड़े सभी यूजर अकाउंट्स को हमेशा के लिए प्रतिबंधित (Ban) कर दिया। इसके साथ ही, कंपनी ने इस पूरी घटना से जुड़ी संवेदनशील तकनीकी जानकारियां और डिजिटल सबूत तुरंत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अपने सुरक्षा साझेदारों के साथ साझा किए। कंपनी की आंतरिक जांच में यह भी पता चला कि इस समूह ने अपने पास पहले से ही एक ऐसा ऑफलाइन सिमुलेशन टूलकिट भी तैयार कर रखा था, जो क्लाउड या अन्य इंजीनियरिंग सॉफ्टवेयर जैसे कि एम MATLAB पर पूरी तरह निर्भर नहीं था, जिससे यह साबित होता है कि वे अपनी तकनीक को स्वतंत्र रूप से भी विकसित करने की क्षमता जुटा रहे थे।हथियारों के विकास से आगे जैविक अनुसंधान और भविष्य के गंभीर खतरेयह पूरा मामला केवल पारंपरिक मिसाइलों और हथियारों के विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एंथ्रोपिक ने अपनी इस व्यापक जांच के दौरान संभावित रूप से खतरनाक और संवेदनशील जैविक अनुसंधान (Biological Research) से जुड़े कई अन्य मामलों की भी गंभीर पहचान की है। कंपनी की सुरक्षा टीमों ने पाया कि इसी अवधि के दौरान बर्ड फ्लू, चिकनगुनिया, ऑर्थोपॉक्सवायरस और विभिन्न प्रकार के घातक टॉक्सिन से संबंधित गतिविधियों पर भी एआई के माध्यम से शोध करने के प्रयास किए गए थे। कंपनी ने महज 30 दिनों की एक छोटी अवधि में ऐसे करीब 35 अलग-अलग शोध प्रयासों की पहचान की, जो संभावित रूप से वैश्विक जैव-सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकते थे। हालांकि, एंथ्रोपिक ने यह स्पष्ट किया कि वह यह पूरी तरह से निश्चित नहीं कर सकी कि इन मामलों में शामिल लोगों का उद्देश्य स्पष्ट रूप से कोई जैविक नुकसान पहुंचाना था या वे किसी वैध चिकित्सा वैज्ञानिक शोध का हिस्सा थे। फिर भी, एक मामले में चिकनगुनिया वायरस की संक्रमण क्षमता और मानव इम्यून सिस्टम से बचने की उसकी ताकत पर 'गेन-ऑफ-फंक्शन' रिसर्च के लिए ग्रांट आवेदन तैयार करने में मदद ली जा रही थी, तो दूसरे मामले में यह अध्ययन किया जा रहा था कि बर्ड फ्लू वायरस स्तनधारियों के शरीर के अनुकूल कैसे ढलते हैं। इन तमाम घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अभूतपूर्व ताकत जहां एक तरफ मानवता के लिए वरदान साबित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ इसका गलत हाथों में पड़ना दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त और अचूक नियमों की बेहद सख्त जरूरत है।
सऊदी प्रिंस की ट्रंप से गुहार, हूतियों पर हमले से इनकार के बाद खाड़ी देशों में हड़कंप
मध्य-पूर्व (मिडिल-ईस्ट) के भू-राजनीतिक मानचित्र पर इस समय तनाव का पारा अपने चरम पर पहुंच चुका है, और दुनिया की निगाहें एक बार फिर लाल सागर के रणनीतिक जलमार्गों पर टिकी हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तट पर स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक और रणनीतिक शहर 'मोचा' पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जिसके बाद अब वे दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री चोकपॉइंट 'बाब अल-मंडेब स्ट्रेट' को घेरने की फिराक में हैं। यदि हूती इस सामरिक जलडमरूमध्य पर पूरी तरह कब्जा जमाने में कामयाब हो जाते हैं, तो सऊदी अरब सामरिक रूप से हूतियों के एक घातक चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस जाएगा। इस भयानक खतरे के बीच, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे मदद की गुहार लगाई है। प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान 'एक्सिओस' की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी प्रिंस ने संकट की इस घड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति को फोन पर दो बार संपर्क किया और उनसे हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले करने का कड़ा अनुरोध किया। हालांकि, इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस गुहार को पूरी तरह से ठुकरा दिया, जिससे खाड़ी देशों के कूटनीतिक गलियारों में एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है।बाब अल-मंडेब पर हूतियों का बढ़ता शिकंजा और सऊदी अरब की बढ़ती लाचारीहूती विद्रोहियों की आक्रामक गतिविधियों और उनके द्वारा लगातार किए जा रहे ड्रोन तथा मिसाइल हमलों ने सऊदी अरब की नींद उड़ा दी है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला बाब अल-मंडेब जलमार्ग वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और विशेष रूप से सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए एक जीवन रेखा की तरह है। यदि इस समुद्री मार्ग पर हूतियों का आधिपत्य स्थापित हो जाता है, तो सऊदी तेल की आपूर्ति ठप हो सकती है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इन बढ़ते खतरों के मद्देनजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अनुरोध किया था कि वे हूतियों के ठिकानों पर सीधे सैन्य हमले करें ताकि उनके बढ़ते कदमों को रोका जा सके। लेकिन इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने साफ शब्दों में मना कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी है कि वर्तमान में व्हाइट हाउस की ऐसी कोई योजना नहीं है कि वह यमन या हूतियों के खिलाफ सीधे तौर पर किसी सैन्य संघर्ष में उलझे। अमेरिका के इस दो टूक रुख ने सऊदी अरब को यह अहसास करा दिया है कि कड़े संकट के इस दौर में उसे अपने सामरिक और रणनीतिक फैसले खुद ही मजबूत करने होंगे, क्योंकि वाशिंगटन फिलहाल सीधे सैन्य हस्तक्षेप का जोखिम उठाने के मूड में बिल्कुल नहीं है।कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक बाजार में मंडराता भयंकर संकटसऊदी अरब और हूतियों के बीच छिड़ी इस जंग तथा अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सैन्य मदद से इंकार किए जाने का असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर देखने को मिला है। जिस दिन सऊदी प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति से फोन पर सैन्य हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी, ठीक उसी दिन वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आसमान छूने वाली तेजी दर्ज की गई। तेल की कीमतें उछलकर लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर जा पहुंचीं। विश्लेषकों का मानना है कि यह उछाल इस बात की गहरी चिंता को दर्शाता है कि यदि लाल सागर का यह रणनीतिक समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। ईरान पहले से ही दुनिया के एक अन्य अति-महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से होने वाली शिपिंग गतिविधियों में अड़ंगे डाल रहा है, और अब बाब अल-मंडेब पर हूतियों की बढ़ती पकड़ तेहरान को अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर अनुचित दबाव बनाने का एक और शक्तिशाली हथियार दे रही है। ईरान और उसके क्षेत्रीय प्रॉक्सी इसी रणनीतिक फॉर्मूले के तहत आगे बढ़ रहे हैं, जिससे खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं और निवेशक भी सहम गए हैं।अमेरिकी नीति का दोहरा रुख: एक तरफ सैन्य मदद से इनकार, दूसरी तरफ सेंट्रल कमांड का दौराअमेरिका की इस कूटनीति को विश्लेषक एक सोची-समझी चाल या उसकी अपनी रणनीतिक मजबूरियों के रूप में देख रहे हैं। एक तरफ जहां व्हाइट हाउस सऊदी प्रिंस के सीधे सैन्य मदद के अनुरोध को ठुकरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका गुप्त रूप से सऊदी अरब को कूटनीतिक और रक्षात्मक समर्थन बढ़ाने के संकेत भी दे रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि अमेरिका यमन की इस जटिल दलदली जमीन पर सीधे तौर पर सैनिक उतारकर एक और लंबे युद्ध में फंसने से बचना चाहता है। अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि यदि उसने सीधे सैन्य दखल दिया, तो यह संघर्ष पूरे मिडिल-ईस्ट में आग की तरह फैल जाएगा और इसकी चपेट में कई अन्य खाड़ी देश भी आ सकते हैं। इसी नाज़ुक कूटनीतिक संतुलन को साधने और क्षेत्र में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने हाल ही में सऊदी अरब का दौरा किया है। अमेरिका यह संदेश देना चाहता है कि वह कूटनीतिक रूप से रियाद के साथ खड़ा है, लेकिन हूतियों के खिलाफ सीधी बमबारी का जोखिम उठाने के लिए वह फिलहाल तैयार नहीं है, जिसके कारण सऊदी अरब और अमेरिका के बीच चल रही रणनीतिक साझेदारी में कुछ असहजता साफ महसूस की जा सकती है।सऊदी अरब के रुख में आया बदलाव और यमन संघर्ष का खतरनाक भविष्यसऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच चल रहे इस खूनी संघर्ष की जड़ें पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों में छिपी हैं। दोनों पक्षों के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया था जब रियाद ने ईरान के दिवंगत पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से लौट रहे कुछ वरिष्ठ हूती अधिकारियों को ले आ रहे एक ईरानी विमान को सना हवाई अड्डे पर उतरने से रोक दिया था। उस अपमान का बदला लेने और अपनी ताकत दिखाने के लिए हूतियों ने सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों, बुनियादी ढांचे और लाल सागर से गुजरने वाले सऊदी टैंकरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हालांकि, सऊदी सेना और उसके यमनी सहयोगियों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए हूती ठिकानों पर भारी एयरस्ट्राइक और जमीनी अभियान चलाए हैं, लेकिन इसके बावजूद हूतियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। शुरुआत में सऊदी अरब का रुख यह था कि वह अमेरिकी सैन्य मदद के बिना अकेले ही इस हूती खतरे से निपटने में सक्षम है, लेकिन जैसे-जैसे मोचा बंदरगाह पर हूतियों का कब्जा हुआ और तेल निर्यात मार्गों पर खतरे के बादल मंडराए, रियाद को अपनी इस नीति में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा और उसने अमेरिका से गुहार लगाई। अब देखना यह है कि अमेरिकी समर्थन के अभाव में सऊदी अरब इस चक्रव्यूह से कैसे बाहर निकलता है और क्या यह संघर्ष मिडिल-ईस्ट को किसी बड़े महायुद्ध की ओर धकेलता है।
पाकिस्तान ने वीजा होने के बाद भी रोके सिख श्रद्धालु, हेमकुंड साहिब यात्रा अटकी
धार्मिक आस्था, भाईचारे और शांति की सभी सीमाओं को लांघते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान की एक बेहद संकीर्ण और हताशा भरी हरकत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी फजीहत करा दी है। भारत के पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन करने के लिए अपनी गहरी धार्मिक आस्था के साथ भारत आने की तैयारी कर रहे 104 सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को पाकिस्तान के फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। इन सभी श्रद्धालुओं के पास भारत सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से जारी किए गए वैध वीजा, पासपोर्ट और यात्रा से जुड़े तमाम कानूनी दस्तावेज पूरी तरह से दुरुस्त थे, इसके बावजूद उन्हें ऐन मौके पर विमान में सवार होने से रोक दिया गया। इस अमानवीय और मनमाने फैसले के कारण सिख श्रद्धालुओं की बहुप्रतीक्षित तीर्थयात्रा न केवल अधर में लटक गई है, बल्कि उन्हें भारी-भरकम आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ा है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था अपनी ही जनता और अल्पसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के बजाय किस हद तक अनुचित अड़ंगेबाजी करने पर उतारू रहती है, जिससे पूरी दुनिया के सिख समुदाय में गहरा आक्रोश व्याप्त है।फैसलाबाद एयरपोर्ट पर एनओसी का बहाना और इमीग्रेशन अधिकारियों की मनमानीमीडिया रिपोर्ट्स से सामने आई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से भारत आने के लिए लंबे समय से अपनी यात्रा की तैयारियां कर रहे इन 104 सिख श्रद्धालुओं को उस वक्त भारी सदमा लगा, जब वे अपनी यात्रा शुरू करने के लिए फैसलाबाद एयरपोर्ट पहुंचे। नियमों के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच वर्तमान में कोई सीधी विमान सेवा उपलब्ध नहीं है, और इसके अलावा ऐतिहासिक 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से दोनों देशों के बीच का अटारी-वाघा बॉर्डर का जमीनी रास्ता भी पूरी तरह से बंद चल रहा है। इस परिस्थिति में इन श्रद्धालुओं ने तीसरे देश यानी संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते भारत आने की योजना बनाई थी, जिसके तहत उन्हें फैसलाबाद से शारजाह और वहां से नई दिल्ली की फ्लाइट पकड़नी थी। इन सभी ने एयरलाइंस के टिकट पहले ही बुक करा लिए थे और उनके पास भारत का वैध वीजा भी मौजूद था। लेकिन जैसे ही वे एयरपोर्ट के इमीग्रेशन काउंटर पर पहुंचे, पाकिस्तानी अधिकारियों ने अचानक एक नया और बेतुका पेंच फंसाते हुए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' यानी एनओसी की मांग शुरू कर दी। श्रद्धालुओं ने अधिकारियों को समझाने का बहुत प्रयास किया कि उनमें से कोई भी व्यक्ति न तो किसी सरकारी सेवा में है और न ही सरकार के किसी अंग का हिस्सा है, वे सभी विशुद्ध रूप से आम नागरिक हैं जिनके पास अपने देश का पासपोर्ट और भारत का कानूनी वीजा है, इसलिए उन्हें किसी अन्य अनापत्ति प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और उन्हें फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया।जत्थे के नेता पापिंदर सिंह का छलका दर्द, आम नागरिकों से एनओसी मांगने पर उठाए सवालइस पूरी अवांछित घटना के दौरान एयरपोर्ट पर मौजूद सिख श्रद्धालुओं और इमीग्रेशन अधिकारियों के बीच जमकर बहस भी हुई। इस जत्थे का नेतृत्व कर रहे पापिंदर सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी पीड़ा साझा की और पूरी आपबीती बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके ग्रुप के सभी यात्रियों के पास पासपोर्ट, वीजा और यात्रा से जुड़े सभी दस्तावेज बिल्कुल वैध थे। उन्हें शुक्रवार की दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर शारजाह जाने वाली उड़ान पकड़नी थी, जिसके माध्यम से उन्हें आगे दिल्ली पहुंचना था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यात्रा से पहले किसी भी स्तर पर एनओसी की कोई शर्त नहीं रखी गई थी, तो अचानक एयरपोर्ट पर पहुंचते ही इस मुद्दे को क्यों उछाला गया? फैसलाबाद एयरपोर्ट से ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक अन्य सिख श्रद्धालु बेहद आक्रोशित नजर आता है, जो यह पूछता हुआ दिखाई दे रहा है कि आखिरकार आम नागरिकों के लिए एनओसी का क्या मतलब हो सकता है? उस श्रद्धालु ने कहा कि उनके ग्रुप में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और वे सभी कानून का पालन करने वाले शांतिप्रिय लोग हैं, इसके बावजूद उनके साथ इस तरह का मानसिक उत्पीड़न किया जाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। पाकिस्तानी अधिकारियों की इस हठधर्मिता के कारण उनकी वर्षों पुरानी धार्मिक मनोकामना पर पानी फेरने का प्रयास किया गया है, जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।दो करोड़ पाकिस्तानी रुपये से अधिक का भारी-भरकम आर्थिक नुकसानइस मनमाने रवैये और ऐन मौके पर यात्रा रोके जाने के कारण इन सिख श्रद्धालुओं को न केवल मानसिक संताप झेलना पड़ा है, बल्कि उन्हें बहुत बड़ा वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ा है। फ्लाइट्स के महंगे टिकट, होटलों की बुकिंग और अन्य व्यवस्थाओं के चलते इस पूरे समूह को कुल मिलाकर दो करोड़ पाकिस्तानी रुपये से अधिक का भारी घाटा लगा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें समय पर अपनी तय उड़ानों से जाने दिया होता, तो वे तय कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार की शाम तक भारत की धरती पर होते और श्री हेमकुंड साहिब की अपनी इस पवित्र यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कर पाते। लेकिन प्रशासनिक अड़ंगों और तानाशाही के कारण उनकी सारी मेहनत और पूंजी बेकार चली गई। वर्तमान स्थिति यह है कि इन सभी 104 श्रद्धालुओं की आगे की यात्रा को लेकर गहरी अनिश्चितता और संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए पाकिस्तानी प्रशासन के समक्ष यह आग्रह भी किया है कि यदि वे हवाई मार्ग से यात्रा की अनुमति नहीं दे रहे हैं, तो कम से कम उन्हें ऐतिहासिक अटारी-वाघा सीमा के रास्ते ही भारत में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए ताकि वे अपनी धार्मिक यात्रा को पूरा कर सकें। हालांकि, यह सर्वविदित है कि सीमाई तनावों और बंद रास्तों के कारण यह विकल्प भी फिलहाल व्यावहारिक नजर नहीं आ रहा है, जिससे इन तीर्थयात्रियों की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।
पश्चिम बंगाल में कार से मवेशी चुरा ले गए चोर!
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान में घर के सामने बंधे मवेशी की चोरी का मामला सामने आया है. आसनसोल के सालानपुर इलाके में चार पहिया वाहन से पहुंचे कुछ लोग मवेशी को जबरन गाड़ी में डालकर फरार हो गए. पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने फुटेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान की जा रही है.
जेडी वेंस की रैली में हंगामा, प्रदर्शनकारी को दिया मेक्सिको जाने का ऑफर
दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीति में इन दिनों चुनावी पारा सातवें आसमान पर है। अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों को लेकर चल रही सियासी गहमागहमी के बीच एक ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक चुनावी रैली को संबोधित करने के दौरान उस वक्त गुस्से से भड़क उठे, जब भीड़ के बीच से एक प्रदर्शनकारी ने अचानक व्यवधान पैदा करना शुरू कर दिया। डलास शहर में रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली में बोलते हुए जेडी वेंस देश के भविष्य, अर्थव्यवस्था और नीतियों पर अपनी बात रख रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने मेक्सिको और फिलिस्तीन के झंडे हवा में लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित और तीखी परिस्थिति में अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने अपना आपा खोने के बजाय बेहद तंज भरे और कड़े अंदाज में उस प्रदर्शनकारी को लताड़ लगाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। इस घटना ने एक बार फिर अमेरिका में आव्रजन, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक असहिष्णुता के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा कर दिया है, जिस पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।डलास की रैली में फिलिस्तीनी और मेक्सिकन झंडों के साथ हुआ जमकर हंगामाअमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डलास में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल चुनावी सभा में रिपब्लिकन पार्टी के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) अभियान को धार देने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहुंचे थे। वह अमेरिका के आर्थिक भविष्य, मजबूत सीमाओं और राष्ट्रीय अस्मिता पर अपने विचार रख रहे थे, तभी दर्शक दीर्घा में मौजूद एक उपद्रवी प्रदर्शनकारी ने खलल डालना शुरू कर दिया। उस प्रदर्शनकारी ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते हुए चिल्लाना शुरू किया कि 'जोर से कहो, खुलकर कहो, डोनाल्ड ट्रंप का यहां स्वागत नहीं है।' इसके साथ ही उसने अपने हाथों में मेक्सिको और फिलिस्तीन के झंडे थाम रखे थे, जिन्हें वह लगातार लहरा रहा था। अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में इस तरह के प्रदर्शन अक्सर ध्रुवीकरण को बढ़ाते हैं, और इस बार भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि, मौके की नजाकत को भांपते हुए सुरक्षा बलों और पुलिस ने तुरंत तत्परता दिखाई और उस प्रदर्शनकारी को धर दबोचा। पुलिस ने उसे आयोजन स्थल से घसीटते हुए बाहर का रास्ता दिखाया, लेकिन इस पूरी कार्रवाई के दौरान जो जुबानी जंग उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उस प्रदर्शनकारी के बीच हुई, उसने वहां मौजूद हजारों समर्थकों का पूरा ध्यान खींच लिया और रैली का माहौल पूरी तरह से गरमा गया।'मेक्सिको इतना ही पसंद है, तो वहीं चले जाओ, टिकट मैं खरीद दूंगा' - जेडी वेंसजब सुरक्षाकर्मी उस प्रदर्शनकारी को बाहर निकाल रहे थे, तो मंच से माइक पर बोल रहे जेडी वेंस ने तंज कसते हुए उसे सीधे तौर पर संबोधित किया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने बेहद आक्रामक और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, मेरे दोस्त, अगर तुम्हें मेक्सिको इतना ही पसंद है, तो तुम्हें वहीं चले जाना चाहिए। मैं व्यक्तिगत रूप से तुम्हारे लिए हवाई जहाज का टिकट खरीद दूंगा। वेंस के मुंह से यह तीखा और दो टूक बयान निकलते ही डलास की उस विशाल रैली में मौजूद हजारों समर्थकों ने तालियां बजाकर और शोर मचाकर उनका जोरदार समर्थन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस का यह अंदाज अमेरिकी मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को बहुत पसंद आता है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीयता के मुद्दों पर बेहद सख्त रुख रखते हैं। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले जेडी वेंस को भविष्य में ट्रंप का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है, और उनका यह आक्रामक तेवर पार्टी के कट्टर समर्थकों में एक नया जोश भर देता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में वैचारिक मतभेद अब किस हद तक तीखे होते जा रहे हैं, जहां चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की नाटकीय घटनाएं आम बात बन गई हैं।मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की जीत के लिए अमेरिकी जनता से जोरदार अपीलविवाद और हंगामे के इस वाकया के बाद जेडी वेंस ने अपने भाषण का रुख वापस देश के गंभीर मुद्दों और आगामी मिडटर्म चुनावों की ओर मोड़ा। उन्होंने वहां मौजूद अमेरिकी नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस साल नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में भारी संख्या में बाहर निकलें और रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में मतदान करें। वेंस ने देश की महान विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पूर्वजों ने उन्हें यह देश एक विरासत के रूप में सौंपा है, और इससे पहले उनके पुरखों ने इसे सहेज कर रखा था। हमें अपनी राष्ट्रीय नागरिकता का यह अधिकार विरासत में मिला है, जिसकी रक्षा के लिए हमें एकजुट होकर लड़ना होगा। इस वैचारिक लड़ाई को जीतने और अमेरिका को आर्थिक रूप से फिर से पटरी पर लाने के लिए रिपब्लिकन पार्टी को जिताना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पूरी पार्टी की शुरुआत से ही अमेरिका की 'बर्थराइट सिटीजनशिप' यानी जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने के नियमों के खिलाफ बेहद सख्त राय रही है। रिपब्लिकन नेताओं का यह दावा रहा है कि विदेशी लोग जानबूझकर अमेरिका में आकर अपने बच्चों को जन्म देते हैं, जिससे उनके बच्चों को स्वतः ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, और इस नीति का देश की डेमोग्राफी तथा अर्थव्यवस्था पर गलत असर पड़ता है।डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव: रिपब्लिकन पार्टी की जीत पर हर वयस्क को मिलेंगे 5000 डॉलरडलास की इसी बहुचर्चित चुनावी रैली के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा आर्थिक ऐलान भी किया, जिसने अमेरिकी नागरिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ट्रंप ने वादा किया कि यदि आगामी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को पूर्ण बहुमत और जीत हासिल होती है, तो उनकी सरकार देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक को 5000 अमेरिकी डॉलर की नकद राशि प्रदान करेगी। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि उनके प्रशासन द्वारा हाल ही में लिए गए कड़े और साहसिक व्यापारिक फैसलों की बदौलत अमेरिकी खजाने और अर्थव्यवस्था को भारी मुनाफा हुआ है। इसी मुनाफे के एक हिस्से को सीधे तौर पर देश के आम नागरिकों के बीच साझा करने के लिए यह योजना बनाई गई है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह 5000 डॉलर वाला मास्टरस्ट्रोक मिडटर्म चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकता है, क्योंकि मुद्रास्फीति और आर्थिक दबाव से जूझ रहे आम अमेरिकी मतदाताओं के लिए यह एक बहुत बड़ा प्रलोभन साबित हो सकता है। एक तरफ जहां जेडी वेंस रैलियों में राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा और आव्रजन नीतियों पर कड़े प्रहार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप का यह आर्थिक पैकेज रिपब्लिकन पार्टी की जीत की संभावनाओं को और अधिक मजबूत करता दिखाई दे रहा है, जिससे अमेरिका का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म है।
भारतीय शिक्षा प्रणाली की रीढ़ कहे जाने वाले शिक्षकों के अधिकारों, उनके कल्याण और उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामला देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया है। लाखों निजी शिक्षकों के जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाने की संभावनाओं को टटोलते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए एक समान वेतनमान, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की मांग वाली याचिका पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की अवकाशकालीन या विशेष पीठ ने इस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई (NCTE) को औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने इन सभी पक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे आगामी चार सप्ताह के भीतर इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें। इस कानूनी कदम ने देश के करोड़ों छात्रों को पढ़ाने वाले और लाखों निजी शिक्षकों के परिवारों में एक नई उम्मीद की किरण जगा दी है, क्योंकि दशकों से उपेक्षित रहे इस वर्ग के लिए यह पहली बार है जब अदालत के स्तर पर नीतिगत सुधार की सुगबुगाहट इतनी जोरशोर से शुरू हुई है।क्या है पूरा मामला और सुप्रीम कोर्ट में क्यों उठाई गई यह आवाजदेश के विभिन्न मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे लाखों शिक्षकों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर यह जनहित याचिका 'ऑल-इंडिया टीचर्स फेडरेशन' की नेशनल कोऑर्डिनेटर लिगीमोल जॉर्ज की ओर से उनके विद्वान अधिवक्ता दीपक प्रकाश के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष इस बात को जोर देकर उठाया है कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में जहां एक तरफ सरकारी शिक्षकों को तमाम तरह के वित्तीय लाभ, सुनिश्चित पेंशन, समय-समय पर वेतन आयोगों का फायदा और अन्य सामाजिक सुरक्षा कवच मिलते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक अपनी योग्यता और अनुभव के बावजूद इन सभी बुनियादी अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की गई है कि वह केंद्र सरकार को यह निर्देश दे कि वह एक निश्चित समय-सीमा के भीतर देश भर के प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के कल्याण, उनके कार्य की दशाओं और रिटायरमेंट के बाद के जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति (Comprehensive National Policy) का निर्माण करे। वर्तमान परिदृश्य में स्थिति यह है कि देश के अलग-अलग राज्यों में और अलग-अलग निजी संस्थानों के अपने निजी नियम व शर्तें हैं, जिसके कारण एक समान योग्यता रखने वाले शिक्षकों को भी अलग-अलग संस्थानों में बेहद असमान और कम वेतन मिलता है, जिससे उनका जीवन स्तर प्रभावित होता है।संवैधानिक अधिकारों का हवाला और शिक्षकों की सार्वजनिक भूमिकायाचिका में भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया है कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक भी संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत देश के बच्चों को शिक्षा के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक आदेश को आगे बढ़ाने का एक बेहद जरूरी सार्वजनिक कार्य करते हैं। इसके बावजूद उनके लिए कोई एक समान और मजबूत केंद्रीय कानूनी ढांचा या राष्ट्रीय नीति मौजूद नहीं है। उनकी नौकरी की शर्तें पूरी तरह से राज्य-दर-राज्य के स्थानीय कानूनों, स्कूल प्रबंधन के स्वार्थी तौर-तरीकों और संस्थानों की मनमानी पर निर्भर करती हैं। इस विसंगति के कारण एक ही पद और योग्यता वाले शिक्षकों को अलग-अलग राज्यों और स्कूलों में जमीन-आसमान का अंतर रखने वाले लाभ मिलते हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है कि देश के संविधान के नीति निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) के अंतर्गत आने वाले अनुच्छेद 38, 39, 41, 42 और 43 के प्रावधान नागरिकों के लिए न्याय, काम की उचित दशाओं और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देते हैं, लेकिन निजी क्षेत्र के शिक्षकों के मामले में इन सिद्धांतों का पालन जमीनी स्तर पर नहीं हो पा रहा है। अदालत को बताया गया कि शिक्षकों का यह वर्ग देश की भावी पीढ़ी को गढ़ने का सबसे कठिन और पवित्र कार्य करता है, इसलिए उनके अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए सरकार की ओर से एक पुख्ता और पारदर्शी तंत्र का होना निहायत जरूरी है।चिकित्सा सहायता, बीमा सुरक्षा और बुढ़ापे की लाचारी का दर्दइस जनहित याचिका का एक सबसे मानवीय और महत्वपूर्ण पहलू प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के स्वास्थ्य और वृद्धावस्था की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। याचिका में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया है कि देश भर के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले लाखों शिक्षक बिना किसी पर्याप्त पेंशन लाभ, चिकित्सा सहायता (Medical Assistance), स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) सुरक्षा और विकलांगता सहायता के ही अपनी लंबी सेवा के बाद रिटायर हो जाते हैं। इन गंभीर कमियों के कारण अधिकांश निजी शिक्षक अपने बुढ़ापे के दिनों में या जीवन की किसी भी आपातकालीन चिकित्सीय स्थिति के दौरान भारी आर्थिक तंगी और लाचारी का सामना करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। एक तरफ जहां समाज के अन्य तमाम संगठित और कुछ विशेष असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए सरकार ने विशेष कल्याणकारी बोर्ड और योजनाएं बना रखी हैं, वहीं देश का पेट पालने वाले और बच्चों का भविष्य उज्जवल करने वाले शिक्षक इस सुरक्षा चक्र से पूरी तरह बाहर हैं। याचिका में इस बात की तुलना भी की गई है कि देश में भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों, बीड़ी श्रमिकों, सिनेमा श्रमिकों, मछुआरों, पत्रकारों और अन्य विभिन्न कमजोर वर्गों के लिए जिस प्रकार विशेष कल्याणकारी व्यवस्थाएं और सामाजिक सुरक्षा कानून बनाए गए हैं, उसी तर्ज पर निजी शिक्षकों के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग कल्याण बोर्ड या तंत्र का गठन किया जाना चाहिए ताकि उन्हें बुढ़ापे में दर-दर न भटकना पड़े।UDISE+ डेटा के आईने में निजी शिक्षा क्षेत्र का विशाल आकार और भविष्य की राहयाचिका के समर्थन में आधिकारिक सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए देश के शिक्षा ढांचे की एक बहुत बड़ी तस्वीर अदालत के सामने रखी गई है। शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक UDISE+ 2023–24 के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में पूरे भारत में लगभग 14.72 लाख स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें 98 लाख से अधिक शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं और इन स्कूलों में लगभग 24.8 करोड़ छात्र अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन विशाल आंकड़ों के बीच यदि केवल निजी क्षेत्र की बात की जाए, तो देश के मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में अकेले 37,30,047 शिक्षक कार्यरत हैं। यानी लगभग साढ़े सैंतीस लाख से अधिक शिक्षक इस समय देश की निजी शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं, जो कुल शिक्षक आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा बनाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में देश के युवाओं को शिक्षित करने वाले इस शिक्षक वर्ग की उपेक्षा करना देश की समग्र शिक्षा गुणवत्ता के लिए भी किसी झटके से कम नहीं है। जब तक शिक्षकों को आर्थिक रूप से सुरक्षित और मानसिक रूप से तनावमुक्त माहौल नहीं मिलेगा, तब तक वे पूरी क्षमता के साथ शिक्षण कार्य में अपना योगदान नहीं दे पाएंगे। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब कर लिया है, तो देश भर के निजी शिक्षकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारें अदालत में क्या हलफनामा दाखिल करती हैं और क्या वाकई इन लाखों शिक्षकों के जीवन में एक समान वेतन और पेंशन का नया सवेरा देखने को मिलेगा या नहीं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर, 2026 तक सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा सेवा संकल्प अभियान के ...
अमेरिका के जी-7 पर दिल्ली से व्लादिमीर पुतिन का तीखा तंज- ब्रिक्स के मुकाबले आधे से भी कम जीडीपी
पुतिन ने कहा किपिछले पांच सालों में दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा GDP BRICS देशों से आ चुकी है, जबकि तथाकथित G7 की हिस्सेदारी सिर्फ 29 फीसदी के करीब चल रही है. मुझे नहीं पता कि वे इसे ग्रुप ऑफ सेवन क्यों कहते हैं.
भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है, खासकर पूर्वोत्तर के राज्य असम में राजनीतिक समीकरण बहुत तेजी से बदल रहे हैं। देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने असम की बेहद अहम मानी जाने वाली नौगांव लोकसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को पार्टी द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार, हाल ही में भगवा दल का दामन थामने वाले पूर्व प्रशासनिक अधिकारी देबाशीष शर्मा को नौगांव लोकसभा उपचुनाव के लिए पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार बनाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि देबाशीष शर्मा ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने से महज चार दिन पहले ही भाजपा की सदस्यता ली थी, और इतनी जल्दी पार्टी द्वारा उन पर भरोसा जताया जाना राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा का विषय बन गया है। इस सीट पर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि यह उपचुनाव महज एक साधारण चुनाव नहीं बल्कि राज्य के राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय प्रभुत्व की एक बड़ी लड़ाई बनता जा रहा है, जिस पर देश भर के राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर टिकी हुई है।प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर 6 अक्टूबर को होगा मतदानअसम की नौगांव लोकसभा सीट का यह उपचुनाव राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस निर्वाचन क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यह सीट कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थी, जिन्होंने वर्ष 2024 के आम चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से शानदार जीत हासिल की थी। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों और समय के चक्र के साथ बदलाव का दौर जारी रहा, और बाद में प्रद्युत बोरदोलोई से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह सीट खाली हो गई, जिसके बाद अब चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव कराने का ऐलान किया है। निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार, नौगांव लोकसभा सीट पर आगामी 6 अक्टूबर को मतदान संपन्न कराया जाएगा, जबकि इसके नतीजे 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती के बाद सामने आएंगे। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही असम के इस हिस्से में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी ताकत झोंकनी शुरू कर दी है और ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक चुनावी रैलियों, बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। भाजपा ने देबाशीष शर्मा को मैदान में उतारकर यह संकेत दे दिया है कि वे इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंकने के मूड में हैं, वहीं विपक्षी दल भी इस मुकाबले को एक कांटे की टक्कर में बदलने के लिए अपनी पूरी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।कौन हैं देबाशीष शर्मा? प्रशासनिक सेवा से राजनीति के मैदान तक का सफरनौगांव सीट से भाजपा के टिकट पर चुनावी दूनिया में कदम रखने वाले देबाशीष शर्मा का परिचय केवल एक राजनेता का नहीं, बल्कि एक बेहद अनुभवी और मंजे हुए पूर्व प्रशासनिक अधिकारी का है। अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के साथ-साथ पब्लिक रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले देबाशीष शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत प्रशासनिक सेवा के माध्यम से की थी। वर्ष 1992 में वह असम सिविल सेवा (ACS) में शामिल हुए थे, और उनकी सबसे पहली पोस्टिंग बारपेटा जिले में हुई थी। अपने लंबे और बेदाग प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाला है। उन्होंने असम के तत्कालीन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एस.के. सिन्हा के विशेष अधिकारी (Special Officer) के रूप में भी बहुत करीब से काम किया था। इसके अलावा, मुंबई स्थित असम भवन के डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं, जहां उन्होंने देश की वित्तीय राजधानी में असम सरकार के हितों का प्रतिनिधित्व किया था। गुवाहाटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के कमिश्नर और मोरीगांव जिले के जिला कमिश्नर के रूप में भी उनका कार्यकाल काफी चर्चा में रहा था। प्रशासनिक महकमे में अपनी एक अलग और सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले देबाशीष शर्मा ने नौगांव के जिला कमिश्नर के पद पर रहते हुए ही अपने पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी वीआरएस (VRS) लिया था, जिसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश करने का साहसी निर्णय लिया।महज चार दिन पहले भाजपा में हुए थे शामिल, प्रदेश अध्यक्ष ने दिलाई थी सदस्यताप्रशासनिक सेवा से राजनीति के इस नए सफर की शुरुआत करते हुए देबाशीष शर्मा ने महज चार दिन पहले यानी 8 सितंबर को गुवाहाटी स्थित मुख्य भाजपा कार्यालय में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने उन्हें औपचारिक रूप से भाजपा का दुपट्टा पहनाकर और पार्टी की सदस्यता दिलाकर उनका स्वागत किया था। इस ज्वाइनिंग समारोह के दौरान असम सरकार के कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और भाजपा के तमाम दिग्गज नेता मौजूद रहे थे, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि पार्टी के भीतर उन्हें कितना महत्व दिया जा रहा है। हालांकि, राजनीति में आने के साथ ही उन्हें कुछ राजनीतिक विरोधियों के तीखे तेवरों का भी सामना करना पड़ा है। हाल ही में कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने असम के मुख्य चुनाव अधिकारी के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी इस शिकायत में उन्होंने नौगांव के जिला कमिश्नर के रूप में देबाशीष शर्मा के कार्यकाल के दौरान लिए गए विभिन्न प्रशासनिक फैसलों की गहन समीक्षा करने और उनके खिलाफ उचित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की थी। मुख्य चुनाव अधिकारी ने उस शिकायत को आवश्यक कार्रवाई और दिशा-निर्देशों के लिए सीधे चुनाव आयोग के पास भेज दिया है। इन तमाम राजनीतिक उठापटक, शिकायतों और चर्चाओं के बीच देबाशीष शर्मा का चुनावी मैदान में उतरना असम की राजनीति में एक नया रोमांच पैदा कर रहा है।सामाजिक कार्य और 'दीपशिखा' संस्था के जरिए जनसेवा का पुराना नाताराजनीति और प्रशासन के गलियारों के अलावा देबाशीष शर्मा की एक और बड़ी पहचान एक संवेदनशील सामाजिक कार्यकर्ता और परोपकारी इंसान के रूप में भी रही है। वह समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के लिए लगातार काम करते रहे हैं। विशेष तौर पर, वह कैंसर जैसी लाइलाज और भयानक बीमारी से जूझ रहे मरीजों की सहायता के लिए समर्पित प्रसिद्ध कैंसर देखभाल संस्था 'दीपशिखा' के संस्थापक चेयरमैन और मुख्य ट्रस्टी हैं। उन्होंने अपनी इस संस्था के माध्यम से न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के हजारों कैंसर रोगियों और उनके परिवारों को चिकित्सीय सहायता, मानसिक संबल और आश्रय प्रदान करने का सराहनीय कार्य किया है। एक सिविल सेवक के रूप में जनता की सेवा करने के बाद अब वह सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ राजनीतिक मंच से सीधे जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने निकल पड़े हैं। प्रशासनिक अनुभव की गहराई, सामाजिक कार्यों का लंबा अनुभव और सत्ताधारी दल भाजपा का मजबूत संगठनात्मक समर्थन—ये तमाम कारक मिलकर देबाशीष शर्मा के चुनावी भविष्य की दिशा तय करेंगे। नौगांव लोकसभा उपचुनाव के नतीजे आगामी 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे, जो यह तय करेंगे कि जनता ने पूर्व डीसी के इस नए राजनीतिक प्रयोग पर अपनी मुहर लगाई है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि इस उपचुनाव ने असम की राजनीति में एक नए और दिलचस्प अध्याय की शुरुआत कर दी है।
कौन हैं केरल के MLA? 4 चेक हुआ था बाउंस, अब जा सकती है विधायकी, HC में केस दर्ज
याचिका के अनुसार, मुंबई के बोरीवली स्थित अतिरिक्त महानगर दंडाधिकारी की अदालत ने एक सितंबर को कप्पन को चारों चेक बाउंस होने के मामलों में दोषी ठहराया और कुल साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई।
ब्रिक्स के जरिए दुनिया तक पहुंचेगा भारत, हमारा 21 देशों का परिवार आधे विश्व के बराबर: पीएम मोदी
BRICS देशों की तरक्की दोगुनी रफ्तार से हुई है... ब्रिक्स बिजनेस फोरम में बोले पीएम मोदी
आसमान में गूंजा 'हनुमान अंश' का भजन, सुनील लोधी का VIDEO वायरल
इस समय पूरे देश में जिस फिल्म की चर्चा हो रही है, उसका नाम हनुमान अंश है. फिल्म से जुड़ा हर कलाकार फेमस हो गया है. अब सिंगर सुनील लोधी का एक वीडियो वायरल हो रहा है.
अगली मुलाकात मॉस्को में... व्लादिमीर पुतिन का पीएम मोदी को न्योता, जल्द फाइनल होंगी तारीखें
18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली में अहम द्विपक्षीय बैठक हुई. दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग पर चर्चा की.
भारतीय सेना और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़े किस्से अक्सर आम नागरिकों के दिलों में विशेष कौतुक और सम्मान पैदा करते हैं। इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया गलियारों तक एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, और वह नाम है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी (Aide-de-Camp) ऋषभ सिंह संब्याल का। हाल ही में उन्होंने भारतीय सेना में 12 साल की शानदार और निष्कलंक सेवा देने के बाद समय से पहले यानी प्री-मेच्योर रिटायरमेंट लेकर हर किसी को चौंका दिया था। अपनी शानदार कार्यशैली और व्यक्तित्व के चलते सोशल मीडिया पर एक समय उन्हें 'नेशनल क्रश' तक की उपाधि मिल चुकी थी। सेना की नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने प्रसिद्ध पॉडकास्टकार राज शमानी के साथ एक बेहद दिलचस्प और खुला इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति के साथ बिताए गए अपने कार्यकाल के अनछुए पहलुओं, अंदरूनी अनुभवों और देश सेवा के लिए उठाए गए कदमों का खुलकर जिक्र किया है। इस बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात से भी पर्दा उठाया कि राष्ट्रपति भवन के अतिसंवेदनशील माहौल में देश के प्रथम नागरिक की सुरक्षा और सेवा की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा व्यक्तिगत त्याग क्या किया है।शादीशुदा न होने का क्लॉज और व्यक्तिगत जिंदगी का सबसे बड़ा त्यागपॉडकास्ट के दौरान जब ऋषभ सिंह संब्याल से यह पूछा गया कि राष्ट्रपति के एडीसी के रूप में काम करने के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत जीवन में किस प्रकार के समझौते या त्याग किए हैं, तो उन्होंने एक बहुत ही चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वह अविवाहित हैं और राष्ट्रपति का एडीसी बनने के लिए एक बहुत कड़ा नियम या क्लॉज होता है कि इस पद पर रहने वाला व्यक्ति शादीशुदा नहीं हो सकता। इस नियम के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने साझा किया कि उन्हें अपने परिवार से लंबे समय तक दूर रहना पड़ा और उनके अनुसार यही उनके जीवन का सबसे बड़ा त्याग था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रतिष्ठित और बेहद जिम्मेदारी भरे पद पर रहते हुए आपके पास आम इंसान की तरह बाहर की दुनिया में घूमने, दोस्तों के साथ वक्त बिताने या सामान्य जिंदगी का आनंद लेने की कोई आजादी नहीं होती। यही वह कीमत है जो उन्हें देश के सर्वोच्च पद की सेवा करने के लिए चुकानी पड़ी। जब वह राष्ट्रपति भवन में अपनी सेवाएं दे रहे थे, तो उनका हर एक पल देश के संविधान, सुरक्षा और प्रोटोकॉल को समर्पित था। उन्होंने बताया कि उन्हें कभी यह अंदाजा भी नहीं था कि एडीसी जैसी कोई विधा या पद भी सेना में होता है, और शुरुआती दौर में उनकी ऐसी कोई महत्वाकांक्षा भी नहीं थी कि वह कभी राष्ट्रपति भवन तक पहुंचेंगे।चयन की अनकही कहानी और सख्त कमांडिंग ऑफिसर का वह निर्देशअपनी नियुक्ति के सफर को याद करते हुए ऋषभ सिंह संब्याल ने बताया कि वह उस समय भारत में विभिन्न देशों की सैन्य टुकड़ियों के साथ एक संयुक्त सैन्य अभ्यास में व्यस्त थे। उसी दौरान उनके कमांडिंग ऑफिसर (CO) का फोन आया और उन्हें बताया गया कि इस प्रतिष्ठित भूमिका के लिए उन्हें शॉर्टलिस्ट किया गया है। सीओ ने उनसे पूछा कि वह इस बारे में क्या सोचते हैं। इस पर ऋषभ की पहली प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी, बल्कि उन्होंने कहा था कि वह इस सैन्य अभ्यास को बीच में छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहते। हालांकि, बाद में जब उन्होंने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और सहयोगियों से इस बारे में सलाह ली, तो सभी ने उन्हें समझाया कि यह अनुभव उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन के लिए बेहद सीखने वाला और अद्वितीय होगा। इसके बाद जब उन्होंने अपने सीओ से संपर्क किया और कहा कि वह इस चुनौती को आजमाना चाहते हैं, तो उनके सीओ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। सीओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आप इसे सिर्फ 'आजमाना' नहीं चाह सकते, या तो आपको पूरी प्रतिबद्धता के साथ जाना होगा या फिर इस विचार को छोड़ना होगा। सीओ ने चेतावनी दी कि यदि वह चयन प्रक्रिया में असफल हो गए, तो उनके लिए यूनिट में वापस लौटी राहें बहुत कठिन हो जाएंगी और वह उनके प्रति बहुत सख्त हो जाएंगे। इस चेतावनी के बाद ऋषभ ने बिना कोई वक्त गंवाए अपना शत-प्रतिशत झोंक दिया और इस कठिन मुकाम को हासिल कर दिखाया।एकांत का सकारात्मक इस्तेमाल और खुद को टटोलने की अनूठी शैलीदेश के सबसे सुरक्षित और अति-सुरक्षित माने जाने वाले दायरे में काम करने वाले एक सैनिक के मानसिक और भावनात्मक सफर पर बात करते हुए पॉडकास्ट में यह सवाल भी उठा कि क्या उन्हें इस कठिन और एकाकी भूमिका में कभी अकेलापन महसूस हुआ। इस पर बेहद सहजता से जवाब देते हुए ऋषभ ने स्वीकार किया कि उन्हें कभी-कभार अकेलापन जरूर महसूस होता था, लेकिन उन्होंने उस अकेलेपन को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि हमेशा उसे एक सकारात्मक ऊर्जा में बदल दिया। उन्होंने बताया कि यह अकेलापन ही उन्हें अपने जीवन के बारे में, अपने सोचने के तौर-तरीकों के बारे में और अपनी खूबियों व कमियों पर दोबारा विचार करने के लिए आवश्यक जगह और समय प्रदान करता था। उन्हें हर दिन कम से कम एक घंटे के लिए पूरी तरह अकेले रहना पसंद था, जहां उनके आसपास कोई भी मौजूद न हो। उन्हें उस एक घंटे के मानसिक स्पेस की सख्त जरूरत होती थी, जिसमें वह चाहे कुछ भी न करें, बस चुपचाप बैठे रहें, लेकिन वह खालीपन उन्हें खुद का मूल्यांकन करने और आंतरिक रूप से मजबूत होने का अवसर देता था। राष्ट्रपति भवन के कड़े अनुशासन और चौबीसों घंटे की हाई-प्रोफाइल सुरक्षा ड्यूटी के बीच खुद के लिए निकाला गया यह समय उनके मानसिक संतुलन और अनुशासन की रीढ़ बना रहा। 12 साल की बेदाग सैन्य सेवा और राष्ट्रपति के सहयोगी के रूप में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनका यह अनुभव युवाओं के लिए प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत बन गया है, जो यह सिखाता है कि देश सेवा के लिए व्यक्तिगत सुखों का त्याग किस उच्च स्तर का समर्पण मांगता है।
शुक्र ने बदला नक्षत्र, 4 राशियों को 43 दिनों तक मिलेगा लाभ
Shukra Gochar 2026: शुक्र को ज्योतिष में धन, प्रेम, सौंदर्य, कला, सुख-सुविधा और भौतिक संपन्नता का कारक माना जाता है. वहीं स्वाती नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और यह नक्षत्र तुला राशि में स्थित है, जो शुक्र की अपनी राशि है.
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद मातृका यादव ने एनडीटीवी से हुई बातचीत में कहा कि पिछले दिनों आई बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य चलाने में बालेंद्र शाह की सरकार विफल रही है.
भारतीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के क्षितिज पर एक बेहद अहम और दूरगामी परिणाम देने वाली मुलाकात ने इन दिनों पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर शुक्रवार सुबह नई दिल्ली पहुंचे। राजधानी में कदम रखते ही उनका यह दौरा कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया। भारत यात्रा के शुरुआती चरण में ही रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक उच्च स्तरीय और व्यापक द्विपक्षीय बैठक की। हैदराबाद हाउस या निर्धारित कूटनीतिक परिसरों में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह अहम बैठक करीब 45 मिनट तक चली, जिसमें वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत और रूस के पुराने, गहरे और सदाबहार संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए कई बड़े रणनीतिक फैसले लिए गए। इस बैठक का सबसे मुख्य और बड़ा आकर्षण साल 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी आंकड़े तक पहुंचाने का लक्ष्य रहा। दोनों नेताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मौजूदा आर्थिक साझेदारी को और अधिक विस्तृत, संतुलित और भविष्य की जरूरतों के अनुकूल कैसे बनाया जाए। वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए यह लक्ष्य दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा और विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसे हासिल करने के लिए ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अभी से ठोस रोडमैप तैयार किया जा रहा है।भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय और 100 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्यप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा और ऊर्जा जैसे पारंपरिक स्तंभों के अलावा भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई नए क्षेत्रों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रणनीतिक और रक्षा सहयोग के पहले से चले आ रहे मजबूत ताने-बाने को और अधिक विस्तारित करने के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने माना कि बदलती हुई वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में भारत और रूस का रक्षा सहयोग न केवल दोनों देशों की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता में भी एक संतुलनकारी शक्ति की भूमिका निभाता है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के साथ औद्योगिक सहयोग को नए आयाम देने की वकालत की। इस दिशा में रेलवे क्षेत्र के आधुनिकीकरण, आधुनिक सुरंग निर्माण तकनीक में आपसी सहयोग, स्टील वैल्यू चेन के सतत विकास और भारतीय निर्यातकों के लिए विशाल रूसी बाजार तक आसान पहुंच बनाने जैसे मुद्दों पर बेहद सकारात्मक माहौल में बात हुई। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आ रहे बदलावों के बीच भारतीय उत्पादों और सेवाओं के लिए रूस के बाजारों में अपनी पैठ मजबूत करना भारत के निर्यात-उन्मुख विकास के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। दोनों नेताओं का यह साझा दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण है कि भारत और रूस केवल खरीदार और विक्रेता के पारंपरिक रिश्ते से बहुत आगे निकलकर अब सह-उत्पादन, सह-विकास और दीर्घकालिक रणनीतिक साझीदार के रूप में एक साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को आने वाले दशकों में अभूतपूर्व लाभ मिलने की पूरी संभावना है।असैन्य परमाणु सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल और रक्षा उपकरणों पर बनी विशेष सहमतिद्विपक्षीय बैठक के दौरान रक्षा और औद्योगिक पहलों के साथ-साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के तहत ईंधन चक्र और संपूर्ण जीवन चक्र समर्थन को लेकर आपसी सहमति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। क्रेनमिल के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव द्वारा पहले ही यह स्पष्ट किया जा चुका था कि दोनों देश अपनी सामरिक क्षमताओं को और धार देने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नत और आधुनिक संस्करण के विकास पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इसके साथ ही, मॉस्को ने भारत को अपनी शेष एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति को समय पर पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है, जो भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को और अधिक अजेय बनाएगी। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित अत्याधुनिक सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति और भविष्य की वायु रक्षा आवश्यकताओं को लेकर भी तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर शुरुआती चर्चाएं आगे बढ़ी हैं। ऊर्जा कूटनीति के मोर्चे पर रूस और भारत के संबंध हमेशा से ही एक मजबूत स्तंभ रहे हैं। इसी कड़ी में दोनों पक्षों ने भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में नए और सुरक्षित असैन्य परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की भावी योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में यह सहयोग भारत को दीर्घकालिक और भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगा, जो देश के औद्योगीकरण और आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।भारतीय श्रमिकों के लिए रूसी बाजार और वैश्विक शांति की दिशा में मोदी-पुतिन संवादभविष्य के आर्थिक और तकनीकी सहयोग को गति देने के साथ-साथ इस उच्च स्तरीय बैठक में जन-से-जन संपर्कों और कार्यबल की आवाजाही पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों नेताओं के बीच रूस के विभिन्न औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं में कुशल भारतीय श्रमिकों की आमद को और अधिक बढ़ाने को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। रूस में स्किल्ड लेबर की मांग लगातार बढ़ रही है, और भारतीय कार्यबल के वहां जाने से न केवल रूस की श्रम संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति होगी, बल्कि भारत के युवाओं के लिए रोजगार के नए और lucrative अवसर भी सृजित होंगे। इसके अलावा, भविष्य की तकनीकों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण, निष्कर्षण और प्रसंस्करण में आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी मुहर लगाई गई, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के निर्माण के लिए रीढ़ की हड्डी का काम करेंगे। कूटनीतिक मोर्चे पर यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पिछले सप्ताह ही बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात हुई थी। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन संघर्ष को तुरंत समाप्त करने का खुला आह्वान किया था और रूसी नेता से आग्रह किया था कि दुनिया को अंतहीन युद्ध से बचाते हुए युद्ध के अंत की ओर बढ़ने का कूटनीतिक मार्ग चुनना चाहिए। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय माध्यमों से इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में, भारत और रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई यह व्यापक बातचीत न केवल द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को एक मजबूत नई दिशा प्रदान करती है, बल्कि यह वैश्विक शांति, स्थिरता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण की दिशा में भी एक बेहद दूरदर्शी और सकारात्मक कदम साबित होगी।
75 लाख का पैकेज छोड़ पुणे की लड़की ने शुरू किया स्टार्टअप, एक गलती से सबकुछ हो गया बर्बाद!
लाखों रुपये का पैकेज छोड़ स्टार्टअप शुरू करने वाली ख्याति ने बताया कि अधिकतर दिन आपको लगेगा कि आपने हर महीने मिलने वाली सैलरी क्यों नहीं चुनी और आप बेवकूफी महसूस करेंगे.
CM Dhami का ऐलान, सेवा संकल्प अभियान के तहत Uttarakhand में आयोजित होंगे 11 बड़े कार्यक्रम
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 'सेवा संकल्प अभियान' शुरू करने की घोषणा की। यह अभियान एक महीने तक चलेगा और 17 सितंबर से 17 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, धामी ने बताया कि इस अभियान का मकसद सेवा, जन-भागीदारी, संवाद और इनोवेशन को बढ़ावा देना है, ताकि नागरिकों को 'विकसित भारत 2047' के विज़न से जोड़ा जा सके। इसे भी पढ़ें: BRICS पर Congress में मतभेद, Shashi Tharoor ने Chidambaram पर उठाए सवाल, BJP ने घेरा मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अभियान के दौरान राज्य भर में 11 बड़े कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिनमें छात्र, युवा, महिलाएं, लाभार्थी, माता-पिता, जन-प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आम नागरिक शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों के ज़रिए राज्य सरकार के फैसलों और केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के असर को लाभार्थियों की निजी कहानियों के माध्यम से दिखाया जाएगा। इन गतिविधियों में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत सरकारी योजना केंद्रों, LPG वितरण केंद्रों, राशन की दुकानों, प्रमुख धार्मिक स्थलों और गंगा के किनारों पर सामूहिक रूप से दीप जलाने और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसी तरह के कार्यक्रम नए मेडिकल कॉलेजों, बांधों, पुलों, अमृत सरोवरों और जन औषधि केंद्रों पर भी सामाजिक संगठनों की भागीदारी के साथ आयोजित किए जाएंगे। ‘मेरे सपनों का भारत–चित्र सेवा’ पहल के तहत, ‘विकसित भारत’ के विज़न और पिछले 25 सालों की उपलब्धियों पर आधारित पेंटिंग, निबंध और भाषण प्रतियोगिताएं शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित की जाएंगी। चुनी गई पेंटिंग्स को स्कूलों में प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे माता-पिता और नागरिकों की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ के तहत देश की उपलब्धियों को उजागर करने वाले स्कूल कार्यक्रमों को दिखाया जाएगा, जबकि ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम मां और बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण पर केंद्रित होगा, जिसमें आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों, माता-पिता, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit पर सवाल उठाने पर BJP का Congress पर तीखा हमला ‘सेवा की कहानियां’ भाषणों, पेंटिंग्स और किस्सों के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से जुड़ी असल ज़िंदगी की सफलता की कहानियां पेश करेंगी। ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ में किसी प्रमुख चौराहे पर ‘विकसित भारत 2047’ कलश की स्थापना और उसके बाद साइकिल और मोटरसाइकिल रैलियां शामिल होंगी।
इन 9 जगहों पर महीनों तक नहीं डूबता सूरज, आधी रात को भी रहता है दिन!
Places Where Sun Never Sets: आमतौर पर हम दिन की शुरुआत सूरज निकलने के साथ करते हैं और शाम होते ही उसके डूबने का इंतजार करते हैं. लेकिन दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां गर्मियों में सूरज डूबता ही नहीं. आज हम आपको कुछ ऐसी ही अनोखी जगहों के बारे में बताएंगे.
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति पुतिन का संबोधन शुरू
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपना संबोधन दे रहे हैं।
IPO की तैयारी कर रही ड्रोन टेक्नोलॉजी कंपनी Garuda Aerospace की चेन्नई स्थित स्वदेशी डिफेंस ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का आर्मी डिजाइन ब्यूरो (ADB) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) मेजर जनरल गोपाल कपूर ने दौरा किया। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल ...
iPhone की कीमत से भी कम में हो जाएगी इंटरनेशनल ट्रिप, परिवार के साथ घूम आएं ये 5 खूबसूरत देश
Apple का पहला फोल्डेबल iPhone Duo भारत में करीब 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च हुआ है. iPhone Duo से कम कीमत में ही आप विदेश की शानदार ट्रिप्स प्लान कर सकते हैं.
जिला कमिश्नर का पद छोड़ा, BJP जॉइन करने के 2 दिन बाद IAS को मिला टिकट
पूर्व IAS अधिकारी देबाशीष शर्मा को अपने पद से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने के एक हफ्ते बाद ही बीजेपी से उपचुनाव का टिकट मिल गया है. रिटायरमेंट के कुछ दिनों बाद ही शर्मा ने बीजेपी का दामन थाम लिया था और अब उन्हें लोकसभा का टिकट मिला है.
भारत की राजधानी दिल्ली में सुहावने मौसम के बीच जब दो मित्र देश भारत और रूस के राष्ट्राध्यक्ष मिले तो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने, व्यापार बढ़ाने, रक्षा सौदों आदि को लेकर तो व्यापक वार्ता हुई ही साथ ही यूक्रेन युद्ध का मुद्दा भी प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समक्ष बड़ी प्रमुखता से उठाया। इसके अलावा, दोस्त भारत के लिए रूस ने जिस तरह एक से एक घातक रक्षा उपकरण और तकनीक देने के प्रस्ताव सामने रख दिये हैं उससे पूरी दुनिया में खलबली मच गयी है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भी साथ होते हैं, तो उनकी बातचीत ही नहीं, उनके हावभाव भी दुनिया को कई बड़े संदेश देते हैं, इस बार भी ऐसा ही हुआ। BRICS शिखर सम्मेलन से पहले मोदी और पुतिन की करीब 45 मिनट चली द्विपक्षीय बातचीत और उसके बाद दोनों नेताओं का एक ही कार में भारत मंडपम पहुंचना उस भरोसे का संकेत है जिसने दशकों पुराने भारत-रूस संबंधों को बदलती विश्व व्यवस्था में भी मजबूती से टिकाए रखा है। हम आपको बता दें कि इस वर्ष दोनों नेताओं की यह दूसरी बैठक है। बैठक में भारत-रूस द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसमें राजनीति, अर्थव्यवस्था, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और जन-जन संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे। दोनों नेताओं ने 9 से 11 सितंबर तक पहली बार भारत में आयोजित रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘INNOPROM India’ का भी दौरा किया और प्रतिभागियों से बातचीत की। इसके अलावा ब्रिक्स में भारत की 2026 की अध्यक्षता, पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों सहित विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता दोहराते हुए शांति प्रयासों में भारत की भूमिका की पेशकश की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। सम्मेलन की तारीख आपसी सहमति से राजनयिक माध्यमों के जरिए तय की जाएगी। इसे भी पढ़ें: Pakistan की तबियत बिगड़ी! BRICS में Modi का शक्ति प्रदर्शन देख Islamabad में जबरदस्त खलबली साथ ही दिलचस्प और बेहद महत्वपूर्ण बात यह भी है कि रक्षा और रणनीतिक सहयोग के इतने बड़े एजेंडे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज की बातचीत में भी यूक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाया और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने युद्ध खत्म करने तथा शांति की दिशा में आगे बढ़ने की भारत की स्पष्ट सोच रखी। हम आपको यह भी याद दिला दें कि करीब 11 दिन पहले यानि 31 अगस्त को भी किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी ने पुतिन से सीधे कहा था कि अब दुनिया को “अनंत युद्ध” से निकलकर “युद्ध की समाप्ति” की ओर बढ़ना चाहिए और हर दिन जारी रहने वाला युद्ध मानवता को पीछे धकेलता है। यहां मोदी की कूटनीतिक ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण दिखाई देता है। जिस समय पश्चिमी देश रूस पर दबाव, प्रतिबंध और अलगाव की नीति अपना रहे हैं, उसी समय भारत रूस के साथ अपनी रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक साझेदारी को मजबूती से जारी रखते हुए उसके सर्वोच्च नेतृत्व के सामने युद्ध समाप्त करने की बात कहने की स्थिति में है। यह ताकत किसी दबाव की राजनीति से नहीं, बल्कि भरोसे की उस असाधारण पूंजी से पैदा हुई है जिसमें भारत रूस का मित्र और रणनीतिक साझेदार है, लेकिन रूस की हर नीति का आंख मूंदकर समर्थक नहीं है। मोदी पुतिन से असहमति व्यक्त कर सकते हैं, युद्ध खत्म करने की अपील कर सकते हैं और साथ ही भारत-रूस रक्षा साझेदारी को भी आगे बढ़ा सकते हैं, यही भारत की स्वतंत्र और बहुध्रुवीय विदेश नीति की असली ताकत है। उधर, मोदी और पुतिन की आज की मुलाकात से जुड़ी सबसे बड़ी खबर यह है कि मॉस्को भारत के सामने केवल हथियार बेचने का प्रस्ताव नहीं रख रहा, बल्कि रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन और संभावित संयुक्त विकास का ऐसा पैकेज रख रहा है, जिसका सीधा असर एशिया से लेकर वैश्विक सामरिक समीकरणों तक दिखाई दे सकता है। रूस ने भारत में Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के संयुक्त उत्पादन, इंजन तकनीक साझा करने, अतिरिक्त S-400 प्रणालियों, Pantsir-S1M, आधुनिक रडार और रणनीतिक पनडुब्बियों से जुड़े प्रस्ताव सामने रखे हैं। हम आपको बता दें कि सबसे बड़ा दांव Su-57 पर है। रूस भारत को दो स्क्वाड्रन विमान सीधे देने के साथ भारत में तीन से पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रनों के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दे रहा है। इससे भी आगे बढ़कर मॉस्को Su-57 के इंजन से जुड़ी तकनीक भारत के साथ साझा करने को तैयार है, ताकि उसके महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण भारत में हो सके। हालांकि यह तकनीकी सहयोग Su-57 की खरीद से जुड़ा हुआ है। यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी स्वदेशी AMCA परियोजना के आने तक पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू क्षमता में संभावित अंतर को भरने के विकल्प तलाश रहा है। लेकिन भारत आंख बंद करके कोई फैसला करने के मूड में नहीं है। भारतीय वायुसेना की प्राथमिकता फिलहाल 114 Rafale, AMCA और यूरोपीय FCAS में भागीदारी पर बनी हुई है। Su-57 को लेकर भारतीय चिंताएं नई नहीं हैं। 2018 में भारत FGFA कार्यक्रम से बाहर निकल चुका है। उस समय बढ़ती लागत, इंजन की क्षमता, सीमित stealth, तकनीक हस्तांतरण और रूस की परियोजना के प्रति प्रतिबद्धता जैसे सवाल उठे थे। भारत ने प्रारंभिक डिजाइन चरण में 1,483 करोड़ रुपये लगाए थे और आगे 127 विमानों के लिए लगभग 35 अरब डॉलर की लागत का अनुमान सामने आया था। इसलिए इस बार रूस की पेशकश को भारत की जरूरतों और तकनीकी शर्तों की कसौटी पर ही परखा जाएगा। दूसरी बड़ी परियोजना करीब 260 Su-30MKI लड़ाकू विमानों को ‘Super Sukhoi’ में बदलने की है। 11 अरब डॉलर से अधिक की इस परियोजना में AESA radar, आधुनिक avionics, electronic warfare capabilities और नए engines शामिल किए जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात हथियार क्षमता है। अपग्रेडेड Su-30MKI को 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने वाली R-37M missile से लैस किया जायेगा। ऐसे में भारत की सबसे बड़ी fighter fleet की मारक क्षमता में भारी उछाल आ सकता है। इसके साथ पांच और S-400 regiments का प्रस्ताव भी आगे बढ़ चुका है। रक्षा मंत्रालय परियोजना को मंजूरी दे चुका है और रूस ने करीब 5 अरब डॉलर की वित्तीय बोली पेश की है। इस सौदे में Make in India component नहीं है, लेकिन भारत में MRO facility स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं रूस ने भारत को S-500 देने की पेशकश भी की है लेकिन भारत फिलहाल उसके पूरी तरह ऑपरेशनल होने और वास्तविक battlefield performance का आकलन करने के बाद ही निर्णय लेना चाहता है। Pantsir-S1M भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। यह mobile point-defence system aircraft, cruise missiles, drones और precision-guided weapons से महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, air bases और command posts की रक्षा कर सकता है। लगभग 30 किलोमीटर की reported engagement range वाला यह सिस्टम S-400 जैसी long-range air defence के साथ एक अतिरिक्त सुरक्षा परत बना सकता है। इसके अलावा long-range radars और strategic submarines पर भी रूस की तरह से प्रस्ताव दिये गये हैं। लेकिन भारत-रूस रिश्ता अब केवल मिसाइलों और लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। BRICS Summit से पहले विमानन क्षेत्र में भी दोनों देश buyer-seller मॉडल से joint manufacturing की दिशा में बढ़ रहे हैं। IL-114-300 और Sukhoi Superjet 100 के भारत में निर्माण पर बातचीत तेज हुई है, जबकि 105 regional turboprop aircraft की संभावित डिलीवरी और व्यवस्थाओं पर भी चर्चा है। Russia ने SJ-100, MC-21 और IL-114-300 को दिल्ली के Innoprom India में प्रदर्शित किया है। HAL और Russian United Aircraft Corporation के बीच पहले से मौजूद सहयोग इस औद्योगिक साझेदारी को नया आयाम दे सकता है। यही नहीं, दोनों देशों की साझेदारी helicopters, remote-area connectivity और helicopter emergency medical services तक फैल रही है। BRICS के भीतर forest fires और अन्य आपदाओं से निपटने के लिए disaster-relief mechanism के रूसी प्रस्ताव का भी भारत ने समर्थन किया है। रूस सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। देखा जाये तो सामरिक तस्वीर बिल्कुल स्पष्ट है। भारत-रूस संबंध अब पुराने हथियार सौदों की कहानी नहीं, बल्कि defence technology, aerospace manufacturing, air defence, strategic platforms और industrial cooperation के एक नए मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं। भारत के लिए इसका अर्थ है एक साथ रणनीतिक स्वायत्तता, सैन्य क्षमता और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना। वहीं दुनिया के लिए संदेश इससे भी बड़ा है। पश्चिमी दबाव, प्रतिबंधों और बदलते geopolitical equations के बीच भारत और रूस की साझेदारी अगर नई तकनीक और संयुक्त उत्पादन के स्तर तक पहुंचती है, तो यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और multi-alignment की ताकत का प्रदर्शन होगा। बहरहाल, BRICS की मेजबानी कर रहा भारत एक तरफ ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद कर रहा है, तो दूसरी तरफ मॉस्को के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी नई धार दे रहा है। मोदी-पुतिन की मुलाकात ने यही संकेत दिया है कि नई विश्व व्यवस्था में भारत किसी खेमे का पिछलग्गू नहीं, बल्कि अपने हितों के हिसाब से साझेदार चुनने वाली निर्णायक शक्ति है। -नीरज कुमार दुबे
भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान रक्षा सहयोग एक बार फिर बातचीत के केंद्र में है। रूस की ओर से भारत को Su-57E फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट की पेशकश भी चर्चा में है। रूस सिर्फ विमान बेचने की बात नहीं कर रहा, बल्कि भारत में इसके संयुक्त उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर […] यह लेख भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप? सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
होटल रूम 101 में ब्यूटीशियन की लाश, कमरे से निकला दीपक रडार पर
इंदौर के एलएक्स होटल के कमरा नंबर 101 में ब्यूटीशियन सोनिला शर्मा बेहोश मिलीं, अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम में फंदे से मौत का एंगल सामने आया है. पुलिस अब महिला के साथ होटल में मौजूद रहे दीपक खंडेलवाल की तलाश कर रही है. होटल से बाहर निकलते और महिला को अस्पताल ले जाते CCTV फुटेज भी सामने आया है.
जब 'हैवान' के इस एक्टर ने प्रियदर्शन के सामने लगाई नकली मूंछ, डायरेक्टर को पसंद नहीं आया अंदाज
मैं हर दिन कुछ ना कुछ इस फिल्म के सेट पर सीखता था. प्रियदर्शन सर की फिल्म का हिस्सा होना अपने आप बहुत गर्व की बात होती है और साथ में इतने दिग्गज कलाकारों के साथ काम करना, मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब मानता हूं.
महाराष्ट्र में हुआ भीषण एक्सीडेंट, 9 लोगों की हुई मौत
महाराष्ट्र के भंडारा में शुक्रवार तड़के जीप और ट्रक की भीषण टक्कर में छत्तीसगढ़ के नौ लोगों की मौत हो गई. मृतकों में छह महिलाएं और तीन बच्चे शामिल हैं. जीप रायपुर से मजदूरों को लेकर नागपुर जा रही थी. पिंपलगांव मुंडीपार के पास ट्रक से टक्कर के बाद जीप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. कई मजदूर घायल हैं, जिनका इलाज सरकारी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है. पुलिस हादसे की जांच कर रही है.
रोहित ने बोला झूठ! AUS संग मैच का किया जिक्र, भड़के कोहली फैंस
फैमिली फुल हाउस शो में रोहित शर्मा ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर स्टीव स्मिथ संग अपनी पुरानी लड़ाई को याद किया. उन्होंने बताया कि शिखर धवन ने उस मोमेंट पर काफी मदद की. लेकिन उनके इस किस्से को सुनकर विराट कोहली के फैंस को गुस्सा आ गया है. आखिर क्या है असली बात?
भारतीय शादियों में सात फेरों के दौरान ये गाना दुल्हन की मां और बहनें जरूर गाती हैं. इस गाने में सात वचनों की बात की गई है जो हर पति और पत्नी एक-दूसरे को देते हैं. रवींद्र जैन के बोल और हेमलता के संगीत ने इस गाने को सदाबहार बना दिया.
विराट कोहली से लंदन में मिले एकनाथ शिंदे, डिप्टी CM ने कहा- क्रिकेटर ने इच्छा जताई थी
शिंदे ने बताया कि कोहली लंदन में रहते हैं और जब उन्हें पता चला कि वह भी लंदन में हैं तो उन्होंने मिलने की इच्छा जताई। शिंदे ने कहा कि वह विराट से पहले भी मिल चुके हैं, लेकिन इस बार खुलकर बातचीत करके उन्हें काफी खुशी हुई।
ट्रंप ने फिर किया ईरान पर हमले के फैसले का बचाव, देखें दुनिया आजतक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें ईरान के खिलाफ़ युद्ध छेड़ने का कोई पछतावा नहीं है, भले ही इसका असर नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर पड़ सकता है...साथ ही ट्रंप ने दोहराया कि मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद युद्ध खत्म हो जाएगा. देखें दुनिया आजतक.
किचन की इस छोटी सी चीज में छिपा है सेहत का खजाना, जानें किन लोगों को और क्यों करना चाहिए लौंग के पानी का सेवन.
महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रालयों में काम कर रहे 500 से ज्यादा कर्मियों को हटाया
CM फडणवीस की सख्ती के चलते 550 से ज़्यादा बिना वेरिफिकेशन के मंत्री-कार्यालय के कर्मचारियों को हटाया गया. यह कार्रवाई 25 अगस्त 2026 को जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा जारी एक आदेश के तहत की गई है.
दिल्ली में चल रहे BRICS समिट ने दुनिया की नजरें दो बड़े नेताओं पर टिका दी हैं। एक तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
इंडोनेशिया से भारत तक वन्यजीव तस्करी का पूरा रूट मैप
ओडिशा में 5 युवा ओरंगुटान मिलने के बाद वन्यजीव तस्करी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चर्चा में है. बोर्नियो और सुमात्रा से मलेशिया, थाईलैंड, म्यांमार या बांग्लादेश होते हुए भारत तक जमीन, समुद्र और हवाई रास्तों से दुर्लभ जानवर पहुंचाए जाने की संभावना सामने आई है. वीडियो में जानें इस रूट मैप में क्या खास.
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। भारत अब पूरी तरह से डिजिटल और बैरियर-फ्री (बाधा-रहित) टोलिंग प्रणाली की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
महिलाओं के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की जरूरत, मुकेश अंबानी ने 'अपराजिता' के विमोचन पर कही बड़ी बात
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत की प्रगति में महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि जब भारत की महिलाएं आगे बढ़ेंगी, भारत आगे बढ़ेगा। और जब भारत की महिलाएं रुकने से इनकार करेंगी, तो भारत भी unstoppable बनेगा। ...
लड़की, माता-पिता और भाई... सब 'लुटेरी दुल्हन' गैंग के सदस्य, 7 अरेस्ट
आजमगढ़ में बरदह पुलिस ने शादी के नाम पर ठगी करने वाले अंतरजनपदीय गैंग का खुलासा किया है. गिरोह शादी नहीं होने वाले युवकों को निशाना बनाकर मंदिर में शादी कराता, फिर दुल्हन नकदी-जेवर लेकर कथित परिजनों संग फरार हो जाती थी. पुलिस ने पांच पुरुषों और दो महिलाओं समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
90s का ये सुपरहिट गाना आज भी अपने देसी अंदाज और चुलबुले बोल के लिए याद किया जाता है. इस गाने में गोविंदा के साथ नजर आईं राम्या कृष्णन को आज दर्शक ‘बाहुबली’ की राजमाता शिवगामी के रूप में ज्यादा पहचानते हैं.
चांदनी चौक-सदर बाजार को जाम से मिलेगी राहत? लोडिंग-अनलोडिंग का समय तय; लेकिन नए नियमों पर उठे सवाल
पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार और कश्मीरी गेट को लेकर पुलिस का कहना है कि दोपहर 12:30 बजे के बाद कोई भी मालवाहक वाहन बाजार में नहीं रहना चाहिए.
अमेरिका के बाहर UAE में बन रहा था सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर, ईरान हमलों के बाद प्लान में बदलाव: सूत्र
इस प्रोजेक्ट के पहले चरण - 'स्टारगेट UAE' नाम के 30 अरब डॉलर के 1-गीगावाट कंप्यूट क्लस्टर - का कंस्ट्रक्शन पिछले साल शुरू हुआ था और इसकी पहली 200 मेगावाट क्षमता इस साल चालू होने वाली है.
41 साल की उम्र में थम गई थी सुरों की धड़कन, 55 साल बाद भी अमर हैं जयकिशन के गाने
हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो पूरे दौर की आवाज बन जाते हैं. जयकिशन ऐसा ही नाम हैं. 12 सितंबर 1971 को महज 41 साल की उम्र में दुनिया छोड़ने वाले जयकिशन आज भी अपने संगीत के जरिए लोगों के बीच मौजूद हैं.
CBI ने चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी के फंड में कथित ₹75.4 करोड़ के गबन मामले में IFoS अधिकारी और CREST के तत्कालीन CEO नवनीत श्रीवास्तव, पत्नी की कंपनी विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसकी डायरेक्टर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। CBI के अनुसार, कंपनी को कथित तौर पर ₹95 लाख मिले, जिनका इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने में किया गया।
सिलेंडर फटा या घर में रखे थे बम, TMC नेता के घर धमाके ने बढ़ाया सियासी पारा
पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में TMC नेता द्विजेन मंडल के लालपोल स्थित घर में शुक्रवार को जोरदार धमाका हुआ. धमाके में मकान की ग्राउंड फ्लोर मलबे में बदल गई और आसपास के कई घर भी क्षतिग्रस्त हुए. पुलिस को शुरुआती तौर पर सिलेंडर फटने का शक है, जबकि स्थानीय लोगों ने घर में बड़ी मात्रा में बम रखे होने का आरोप लगाया है.
Virat Kohli और Eknath Shinde की लंदन में मुलाकात, जानें किन मुद्दों पर हुई खास बातचीत
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लंदन में भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली से मुलाकात की। शिंदे के मुताबिक, यह मुलाकात एक सद्भावना भेंट थी। विराट कोहली लंदन में रहते हैं और जब उन्हें पता चला कि एकनाथ शिंदे भी लंदन में हैं, तो उन्होंने उनसे मुलाकात की। विराट कोहली के सादगी भरे अंदाज से प्रभावित हुए शिंदे मुलाकात के बाद एकनाथ शिंदे ने विराट कोहली की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्रिकेटर और सबसे ज्यादा शतक बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल विराट कोहली का व्यवहार बेहद सहज और जमीन से जुड़ा हुआ है। शिंदे ने बताया कि वह पहले भी विराट से मिल चुके हैं, लेकिन इस बार दोनों के बीच काफी सीधी और अच्छी बातचीत हुई। #WATCH | Star Indian Cricketer Virat Kohli met Maharashtra Deputy Chief Minister Eknath Shinde in London. They discussed a range of issues, including sports and infrastructure. pic.twitter.com/JAxC4cuTdy — ANI (@ANI) September 11, 2026 इसे भी पढ़ें: Manoj Jarange का अनशन 12वें दिन भी जारी, 12 सितंबर तक मांगें न मानने पर Mumbai में आंदोलन की चेतावनी महाराष्ट्र के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हुई बात एकनाथ शिंदे ने बताया कि मुलाकात के दौरान महाराष्ट्र में चल रहे विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हुई। उन्होंने विराट कोहली को ‘थर्ड मुंबई’ प्रोजेक्ट, अटल सेतु, बालासाहेब ठाकरे समृद्धि महामार्ग, कोस्टल रोड और मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा स्कूल, हेल्थकेयर और महाराष्ट्र सरकार की अलग-अलग योजनाओं पर भी चर्चा हुई। शिंदे ने कहा कि उन्होंने राज्य में हो रहे बदलाव और भविष्य की योजनाओं के बारे में विराट को बताया। #WATCH | London: Maharashtra Deputy CM Eknath Shinde says, Virat Kohli lives in London, and when he learned that I am here, he met me for a goodwill visit. I was delighted that such a big Indian cricketer, the one with the most centuries, is so down-to-earth. We had met before,… https://t.co/lzNbcdWo7n pic.twitter.com/ajmA69DOiY — ANI (@ANI) September 11, 2026 इसे भी पढ़ें: Ambedkarwadi बनने का दिखावा क्यों? Mayawati का विपक्ष पर निशाना, बोलीं: दिल-दिमाग साफ करो युवाओं और खेल प्रतिभाओं को लेकर भी चर्चा मुलाकात में युवाओं को आगे बढ़ाने और उनकी प्रतिभा को निखारने के तरीकों पर भी बातचीत हुई। शिंदे के मुताबिक, विराट कोहली ने नई पीढ़ी को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने और युवा प्रतिभाओं को सही दिशा देने को लेकर कुछ अहम सुझाव दिए। एकनाथ शिंदे ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी प्रतिभा को सही मंच देना महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे देश के लिए फायदेमंद होगा। लंदन क्यों गए हैं एकनाथ शिंदे? एकनाथ शिंदे लंदन में वर्ल्ड लीडरशिप इंडो-बिज़नेस फोरम इंटरनेशनल कॉन्क्लेव 2026 में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इसी दौरान उनकी विराट कोहली से मुलाकात हुई।
Multipolar World में India: विनय सहस्रबुद्धे ने बताया संतुलन का 'मंत्र', BRICS में अहम संदेश
ऐसे समय में जब भारत ब्रिक्स समिट की मेज़बानी कर रहा है और भू-राजनीतिक तनाव तथा वैश्विक व्यवस्था को लेकर खींचतान बढ़ रही है, बीजेपी के पूर्व सांसद और विदेश नीति के जानकार विनय सहस्रबुद्धे ने सचमुच बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत की है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक प्रभुत्वशाली शक्ति की जगह दूसरी शक्ति को नहीं लेने देना चाहिए। ब्रिक्स संवाद के दौरान बोलते हुए सहस्रबुद्धे ने कहा कि वैश्विक कूटनीति में भारत का नज़रिया ऐसा होना चाहिए जो कई शक्ति केंद्रों के साथ जुड़ने की उसकी क्षमता पर आधारित हो, न कि वह किसी एक गुट के साथ पूरी तरह जुड़ जाए। इसे भी पढ़ें: Congress सरकार में विकास ठप, आर अशोक ने Karnataka के 100 दिनों को बताया फ्लॉप सहस्रबुद्धे ने कहा कि हम सब बराबर हैं। हम एक लोकतांत्रिक दुनिया में रहते हैं। फिर किसी तरह का दबदबा बनाने या एकाधिकार वाली सोच क्यों होनी चाहिए? उनकी यह बात ऐसे समय में आई है जब चीन का बढ़ता आर्थिक, कूटनीतिक और रणनीतिक असर बदलती वैश्विक व्यवस्था की एक अहम पहचान बनता जा रहा है। ब्रिक्स (BRICS) पर चर्चा करते हुए सहस्रबुद्धे ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कई समूहों में भारत की भागीदारी रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की उसकी कोशिश को दिखाती है। उन्होंने कहा कि हम ब्रिक्स के सदस्य हैं। दूसरी ओर, हम क्वाड (Quad) के भी सदस्य हैं, और यही वह संतुलन है जो आपको बनाना होता है। मेरा मतलब है, आप अपनी सारी उम्मीदें या दांव एक ही जगह नहीं लगा सकते। सहस्रबुद्धे ने तर्क दिया कि भारत को अलग-अलग जियोपॉलिटिकल ग्रुप्स के साथ संबंध बनाते रहना चाहिए। उनका मानना है कि देश की डिप्लोमैटिक ताकत इस बात में है कि वह किसी एक ताकत पर निर्भर हुए बिना अलग-अलग ताकतों के साथ काम कर सकता है। इसे भी पढ़ें: BRICS पर Congress में मतभेद, Shashi Tharoor ने Chidambaram पर उठाए सवाल, BJP ने घेरा उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि भारत को ऐसा करना चाहिए क्योंकि हम एक मल्टीपोलर दुनिया में हैं, और मेरी समझ से मल्टीपोलैरिटी ही आने वाले समय की दुनिया का मुख्य आधार होगी। उन्होंने आगे कहा कि भारत को व्यापक डिप्लोमैटिक पार्टनरशिप बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए और साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी विदेश नीति ज़्यादा से ज़्यादा देशों को स्वीकार्य हो। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
विद्वान प्रो. सोलोमन पप्पैया के निधन से शोक की लहर
चेन्नई, तमिल साहित्य जगत के दिग्गज विद्वान, मशहूर वक्ता और 'पट्टिमंड्रम' के लोकप्रिय चेहरे प्रोफेसर सोलोमन पप्पैया के निधन से पूरे तमिलनाडु में शोक की लहर है। उनके निधन की खबर आते ही साहित्य, राजनीति और फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
आज क्या बनाऊं: तुरई खाना नहीं है पसंद? तो इस नए और यूनिक तरीके से झटपट बनाएं टेस्टी ठेचा
लहसुन और हरी मिर्च के स्वाद से भरपूर है तुरई की स्पेशल सब्जी, उंगलियां चाटते रह जाएंगे खाने वाले.
राइन नदी में पानी घटा, जहाजों में माल कम... ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ा
राइन नदी में पानी घटने का असर अब यूरोप की कार्गो शिपिंग पर साफ दिख रहा है. कम पानी में जहाज कम सामान लेकर चल रहे हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है. एक हफ्ते में टैंकर ढुलाई का रेट 70% तक बढ़ गया.
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बिहार सेवा संकल्प अभियान 2026 की तैयारी कर रहा है, जिसमें 13 विभागीय घटक और निय
शोबिज में छक्के छुड़ाएंगे सहवाग, अमिताभ-सलमान को देंगे टक्कर?
रियलिटी शो राइज एंड फॉल के दूसरे सीजन की घोषणा हो चुकी है जिसमें क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग होस्ट के रूप में नजर आएंगे. सहवाग के होस्टिंग डेब्यू को लेकर दर्शकों में उत्साह है.
सोशल मीडिया पर छाया 80s का ट्रेंड, AI से तस्वीरों में लौटा 1980 का दौर
Instagram और X पर ChatGPT 80s photo trend तेजी से वायरल हो रहा है। इस ट्रेंड में AI टूल्स किसी मौजूदा फोटो को 1980 के दशक के बॉलीवुड, डिस्को या पुराने फैमिली एलबम जैसे रेट्रो पोर्ट्रेट में बदल देते हैं। पीयूष गोयल और किरेन रिजिजू जैसे नेताओं से लेकर कियारा आडवाणी, सिद्धार्थ मल्होत्रा और परिणीति चोपड़ा जैसे कलाकारों तक कई हस्तियां इस ट्रेंड में शामिल हुई हैं।
टीचर ने छात्रा की पीठ को छुआ, कमर पर भी हाथ रखे; SC बोला- POSCO के तहत यह अपराध नहीं
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच इस मामले पस सुनवाई कर रही थी। आपको बताते चलें कि शिक्षक के खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 10 के तहत FIR दर्ज की गई थी।
शादी और प्रेग्नेंसी पर नीना गुप्ता ने दिया बेबाक जवाब
नीना गुप्ता ने शादी और बॉडी-शेमिंग को लेकर पूछे जाने वाले निजी सवालों पर बेबाक अंदाज में जवाब दिया. प्रेग्नेंसी से जुड़े कमेंट्स पर उन्होंने मजाकिया पलटवार करते हुए कहा, “हां, मैं प्रेग्नेंट हूं.” एक्ट्रेस जल्द वेब सीरीज ‘चुंबक’ में नजर आएंगी. सीरीज को आतिश कपाड़िया ने लिखा और निर्देशित किया है.

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