फिल्मी स्टाइल में पंजाब रोडवेज की बस चोरी, बोलेरो से आए चोर और उड़ा ले गए
लुधियाना में चोरों ने पंजाब रोडवेज (PRTC) की हाईटेक बस को फिल्मी अंदाज में चोरी कर लिया. 28 अगस्त की रात 7-8 आरोपी बोलेरो से पहुंचे और करीब दो घंटे रेकी के बाद बस को पार्किंग से निकाल ले गए. जगराओं पुल के पास ऑटो और स्कूटी से बस को एस्कॉर्ट किया गया. करीब 21 किलोमीटर दूर बस के टायर और बैटरियां निकालकर उसे ईंटों पर खड़ा कर दिया गया.
'मिर्जापुर द मूवी': थिएटर में भिड़े फैंस, लात-घूसों-चप्पलों से की मारपीट
'मिर्जापुर द मूवी' को फैंस का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म अच्छी कमाई कर रही है. फिल्म के भौकाल के बीच थिएटर से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है.
बंगाल में खुलेंगे एक हजार संघ के स्कूल विद्या भारती, सीएम सुवेंदु ने फिक्स कर दिया टारगेट
पश्चिम बंगाल में एक साल के अंदर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शिक्षा विंग, 'विद्या भारती' से जुड़े कम से कम 1,000 स्कूल खोलने का लक्ष्य रखा गया है. राज्य में इस समय विद्या भारती के कुल 313 स्कूल चल रहे है.
पंजाब में किसान आंदोलन तेज, SSP ऑफिस तक पहुंचे प्रदर्शनकारी
पंजाब में किसानों का आंदोलन एक बार फिर से तेज होता जा रहा है और विभिन्न हिस्सों से विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं. संगरूर और मोगा में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर उग्र प्रदर्शन किया है. संगरूर में किसान आंदोलन के सातवें दिन प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स तोड़ दिए और एसएसपी कार्यालय का घेराव करने मुख्य गेट तक पहुंच गए. इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच जमकर धक्का-मुक्की भी हुई. किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह आंदोलन और संघर्ष जारी रहेगा.
एक बार पहनो और फेंक दो! चीन में तेजी से बढ़ा ‘डिस्पोजेबल फैशन’ ट्रेंड
चीन में घूमने जाने वाले कुछ पर्यटकों के बीच ‘डिस्पोजेबल फैशन’ का चलन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. लोग यात्रा के दौरान फोटो और सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सस्ते नए कपड़े खरीदते हैं और कई बार उन्हें सिर्फ एक बार पहनने के बाद फेंक देते हैं.
सागर में जहरीली शराब से मौतों के मामले सीएम डॉ. मोहन यादव सख्त, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों की घटना को अत्यंत दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैंने प्रभारी मंत्री एवं अधिकारियों को तत्काल जांच कर दोषियों के विरुद्ध ...
चमगादड़ को भगाने के लिए क्या करना चाहिए? चमगादड़ किस गंध से नफरत करते हैं
चमगादड़ किस गंध से नफरत करते हैं? जो पेड़ या घर पर डाल दें तो वह कभी भी नहीं आएंगे. आइए जानते हैं क्या है वह चीज.
वैभव से भिड़े तिलक, बात 'पंच' तक पहुंची, अंपायर ने किया बीच-बचाव
ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच दलीप ट्रॉफी फाइनल में मैदान पर माहौल गरमा गया. वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा के बीच स्लेजिंग से शुरू हुआ मामला उस वक्त गंभीर हो गया, जब तिलक ने मुक्का मारने का इशारा किया. विवाद बढ़ता देख अंपायरों को बीच में आकर दोनों खिलाड़ियों को शांत कराना पड़ा.
ISRO के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में चिंता, 9 संघों ने सरकार से मांगा जवाब
भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों की बढ़ती भागीदारी को लेकर इसरो के कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्च से जुड़े कामों को निजी कंपनियों को दिए जाने की चर्चाओं के बीच संगठन के हजारों कर्मचारियों में अपने भविष्य को लेकर असमंजस पैदा हो गया है। केंद्र सरकार की ओर से करीब छह साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोले जाने के बाद अब इसरो के नौ कर्मचारी संघ एक साथ सामने आए हैं। इन संगठनों ने इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को पत्र लिखकर सरकार की नीति और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है। इसरो कर्मचारियों ने 4 सितंबर को भेजा पत्र नौ कर्मचारी संघों ने 4 सितंबर 2026 को वी. नारायणन को संयुक्त पत्र भेजा। इसमें उन्होंने पूछा है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका के बीच इसरो की आगे क्या जिम्मेदारी होगी और मौजूदा कर्मचारियों के भविष्य पर इसका क्या असर पड़ेगा। कर्मचारी संगठनों ने आने वाली भर्तियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर इसरो के मौजूदा काम धीरे-धीरे निजी कंपनियों को दिए गए तो संगठन में नई भर्तियों और कर्मचारियों के प्रमोशन के अवसरों पर भी असर पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: आसमान में भारत की 'आंख' तैनात! GSLV-F17 मिशन हुआ सफल, ISRO चीफ बोले- इस साल 6 और धाकड़ मिशन होंगे लॉन्च! IN-SPACe अध्यक्ष के बयान से क्यों बढ़ी चिंता? कर्मचारी संघों की चिंता की बड़ी वजह IN-SPACe के अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका का हालिया बयान बताया जा रहा है। गोयनका ने कहा था कि भविष्य में इसरो खुद लॉन्च व्हीकल यानी रॉकेट का निर्माण नहीं करेगा। यह काम निजी कंपनियों या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) के जरिए किया जाएगा। इसके बाद कर्मचारी संघों ने सवाल उठाया है कि क्या इसरो धीरे-धीरे रॉकेट निर्माण और लॉन्च ऑपरेशन से बाहर होने जा रहा है। SSLV के बाद PSLV और LVM3 को लेकर सवाल संघों का कहना है कि SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) के मामले में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। अब उन्हें आशंका है कि PSLV और LVM3 जैसे महत्वपूर्ण रॉकेटों के निर्माण और संचालन में भी निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा कुलशेखरपट्टनम में बन रहे नए स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स समेत दूसरी अंतरिक्ष सुविधाओं को निजी ऑपरेटरों के लिए खोले जाने और इसरो की करीब 120 तकनीकों को निजी क्षेत्र में ट्रांसफर किए जाने की खबरों ने भी कर्मचारियों की चिंता बढ़ाई है। कर्मचारी संघों ने मांगी लिखित नीति कर्मचारी संगठनों का कहना है कि निजी भागीदारी को लेकर कई बयान सामने आए हैं, लेकिन अंतरिक्ष विभाग की ओर से कर्मचारियों को कोई स्पष्ट लिखित नीति नहीं बताई गई है। संघों ने सीधे सवाल किया है कि क्या पवन गोयनका का बयान केंद्र सरकार, अंतरिक्ष आयोग या अंतरिक्ष विभाग की आधिकारिक मंजूरी वाली नीति है? इसरो की असली भूमिका क्या रहेगी? कर्मचारी संघों ने यह भी पूछा है कि भविष्य में PSLV, LVM3, SSLV और दूसरे रॉकेटों का डिजाइन, विकास, निर्माण, टेस्टिंग और लॉन्च इसरो के काम का हिस्सा रहेगा या नहीं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि देश के टैक्सपेयर्स के पैसे और इसरो के वैज्ञानिकों की कई दशकों की मेहनत से तैयार की गई तकनीक, टेस्टिंग सुविधाओं और लॉन्च पैड को निजी कंपनियों को देने की प्रक्रिया किस नियम और व्यवस्था के तहत होगी। इसके साथ ही संघों ने NewSpace India Ltd (NSIL) और IN-SPACe की भूमिका को लेकर भी स्पष्ट जानकारी मांगी है। इसे भी पढ़ें: ISRO का धमाका, स्पेस में तैनात होगी भारत की तीसरी आंख EOS-05, कांपे चीन-पाकिस्तान कर्मचारियों को नौकरी और प्रमोशन की चिंता कर्मचारी संघों का कहना है कि रॉकेट की डिजाइनिंग, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और लॉन्चिंग सिर्फ कोई सामान्य मैन्युफैक्चरिंग कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। ये इसरो की मुख्य विशेषज्ञता और कई दशकों से विकसित अनुभव का हिस्सा हैं। उनका डर है कि अगर इसरो रॉकेट और सैटेलाइट निर्माण से पीछे हटता है तो संगठन के अंदर काम कम हो सकता है। इससे स्वीकृत पदों पर भर्तियां रुक सकती हैं और तकनीकी, वैज्ञानिक, प्रशासनिक, खरीद, स्टोर और सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के प्रमोशन के अवसर भी कम हो सकते हैं। क्या इसरो में भर्तियां भी कम होंगी? कर्मचारी संगठनों ने आशंका जताई है कि अगर मौजूदा काम निजी कंपनियों को सौंपे गए तो इसरो में कुछ कर्मचारी सरप्लस हो सकते हैं या उनके पास पहले की तुलना में कम काम रह सकता है। इसके अलावा ग्रुप A, B और C पदों पर नियमित भर्तियां कम होने की स्थिति में देश के युवाओं के लिए इसरो में सरकारी नौकरी के अवसर भी घट सकते हैं। निजी कंपनियों के खिलाफ नहीं हैं कर्मचारी कर्मचारी संघों ने साफ किया है कि वे प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि NSIL के जरिए सीमित दायरे में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर उन्हें आपत्ति नहीं है। उनकी मुख्य मांग सिर्फ इतनी है कि सरकार एक स्पष्ट और आधिकारिक नीति दस्तावेज जारी करे। इसमें यह साफ होना चाहिए कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका कितनी होगी और इसरो की अपनी तकनीकी एवं निर्माण क्षमता को किस हद तक बरकरार रखा जाएगा। इसरो और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति निष्ठा कर्मचारी संघों ने कहा है कि उन्होंने यह पत्र विरोध के बजाय रचनात्मक और लोकतांत्रिक भावना से लिखा है। उन्होंने इसरो को GSLV-F17/EOS-05 मिशन की सफलता के लिए बधाई भी दी। संघों का कहना है कि उनकी निष्ठा इसरो और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति पूरी तरह बनी हुई है। हालांकि, उनका मानना है कि मौजूदा अनिश्चितता आगे चलकर स्थायी नीति का रूप ले, उससे पहले सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
पालघर के अस्पताल में बिल को लेकर बवाल, शिवसेना पदाधिकारियों का हंगामा, डॉक्टर-कर्मचारियों से मारपीट
अस्पताल कर्मचारी की शिकायत के आधार पर पालघर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मेडिकल सर्विसेज प्रोटेक्शन एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.
डेटिंग ऐप, रात का वक्त और बेंगलुरु में पार्टी... वायरल कपल की कहानी
बेंगलुरु के इंदिरानगर इलाके में डेटिंग ऐप के जरिए मिले एक युवक और युवती के बीच कथित विवाद का वीडियो वायरल हो रहा है. कैब ड्राइवर का कहना है कि दोनों पार्टी के लिए बेंगलुरु आए थे और इंदिरानगर मेट्रो स्टेशन के पास से कैब बुक की थी. कैब में बैठने के बाद दोनों के बीच बहस शुरू हुई, जो मारपीट तक पहुंच गई. स्थिति बिगड़ने पर ड्राइवर ने पुलिस हेल्पलाइन 112 पर कॉल किया.
बिग बॉस 20 मेकर्स ने फैंस ने सीजन के शानदार सेट-अप की एक झलक दिखाई है. उन्होंने घर को पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत और दिलचस्प बनाने के लिए कई नई चीजें ऐड की हैं.
23 हजार नौकरियां, ऑनलाइन परीक्षा के बाद सिलेक्शन, 1लाख से ज्यादा सैलरी
इस हफ्ते देश के अलग-अलग विभागों में 23 हजार से अधिक पदों पर आवेदन मांगे गए हैं. अगर आप भी इन पदों के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, तो आपके वेट अब खत्म हो चुका है. इच्छुक उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
दही हांडी सेलिब्रेशन में गोविंदा का छलका दर्द, कहा- मैं माई से प्रार्थना करता हूं
गोविंदा इन दिनों अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं. हालांकि वह अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट्स को पूरा करते हुए नजर आ रहे हैं. इसी बीच उनकी मुंबई से जन्माष्टमी के अवसर पर एक दही हांडी से एक वीडियो वायरल हो रहा है
सागर में जहरीली शराब सप्लाई में सक्रिय था यूपी का रैकेट, ललितपुर से होती थी नकली शराब सप्लाई
मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पूरे मामले की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि सागर जिले के उत्तरप्रदेश के ललितपुर जिले से सटे गांवों में यूपी के शराब माफियाओं का रैकेट ...
दिल्ली-NCR में छाए काले बादल, मूसलाधार बारिश का अलर्ट, नोएडा, गुरुग्राम में जमकर बरसेंगे बदरा
Delhi-NCR Rain Alert Today: दिल्ली-एनसीआर में रविवार को मौसम सुहाना हो गया है. दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद में झमाझम बारिश का अलर्ट जारी किया है. बारिश की वजह से तापमान में गिरावट होने से यहां मौसम ठंडा हो गया है.
अब एक वर्ष में मिलेगी ग्रेच्युटी, जानिए नए लेबर कोड का वह पेंच, जो अटका सकता है फंड
नए लेबर कोड (New Labor Code) लागू होने के बाद कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के लिए अब 5 साल का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि 1 साल की सेवा पर भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा.
मां के पास से मासूम को जबड़े में दबाकर ले गया था तेंदुआ, वन विभाग के पिंजरे में हुआ कैद
सवाई माधोपुर में 3 साल के बच्चे को मां के सामने से उठाकर मार डालने वाले तेंदुए को वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर लिया है. घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश और आगजनी हुई थी.
गैस, अपच और ब्लोटिंग से राहत दिला सकता है अजवाइन-काला नमक वाला पानी, जानें कैसे
क्या आपको भी खाना खाने के बाद पेट में भारीपन लगता है, तो किचन में मौजूद अजवाइन और काले नमक का इस तरह से करें सेवन.
निशु आजाद के घर रात में पथराव, स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर निशु आजाद ने घर पर पथराव और धमकी का आरोप लगाया है। उन्होंने परिवार की सुरक्षा की मांग की।
मथुरा में गाड़ी टकराने के मामूली विवाद में JE पर चढ़ाई कार
मथुरा में गाड़ी टकराने को लेकर हुए विवाद में कार चालक ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता विक्रांत भारती को कार से टक्कर मार दी। घटना में उनकी जान बच गई। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने प्रशासन की कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए इसे संविधान और कानून के खिलाफ बताया है। सांसद ने कहा कि इस मामले को ...
पारंदूर के बाद चेन्नई एयरपोर्ट के लिए 2 नए ठिकाने, विजय सरकार ने क्यों चुनीं ये साइट?
राज्य सरकार ने मनेल्लूर और चेय्यूर को नए एयरपोर्ट के संभावित ठिकानों के रूप में चिन्हित किया है। इन दोनों जगहों की सिफारिश एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को स्टडी और सर्वे के लिए भेज दी गई है।
'बाप पर मत जाना...' बिग बॉस 20 में बेटी रीति को साथ लेकर पहुंचे मनोज तिवारी, सलमान खान ने दी नसीहत
सलमान खान का 'बिग बॉस' का सीजन 20 एक बार फिर दर्शकों के बीच हलचल मचाने को तैयार है. शो के नए सीजन यानी 'बिग बॉस 20' को लेकर फैंस की एक्साइटमेंट लगातार बढ़ रही है.
साल में 57 लाख रुपये! US में मेहंदी आर्टिस्ट कितना कमा लेते हैं?
अमेरिका में रहने वाली भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और मेहंदी आर्टिस्ट प्रियंका जैन ने बताया है कि अमेरिका में हेन्ना आर्टिस्ट के तौर पर कितनी कमाई हो सकती है. इंस्टा पर शेयर किए वीडियो में उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया
PM जनधन योजना के हर चौथे खाते पर लगा ताला! UP में सबसे ज्यादा जीरो बैलेंस वाले
प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत हर चौथा खाता इनऑपरेटिव है, जबकि करीब 5.72 करोड़ खातों में कोई बैलेंस नहीं है. RTI के जवाब के मुताबिक 12 अगस्त 2026 तक देश में 59.03 करोड़ से ज्यादा PMJDY खाते थे, जिनमें 3.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा थे. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 95.92 लाख जीरो-बैलेंस और 3.23 करोड़ निष्क्रिय खाते पाए गए.
अब 10 साल के बाद भी चलेंगे डीजल वाहन? IIT दिल्ली की बनाई मशीन को हरी झंडी; कितनी होगी कीमत
पुरानी डीजल गाड़ियों को लेकर पब्लिक को बड़ी राहत मिल सकती है। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आईआईटी दिल्ली द्वारा विकसित मशीन को हरी झंडी दे दी है। यह डीजल गाड़ियों का प्रदूषण 90 फीसदी तक कम कर सकती है।
ओजी, फ्लेक्स… PM मोदी की स्पीच में जेन-जी वाली भाषा सुनकर क्या बोले SRCC के स्टूडेंट?
SRCC में पीएम मोदी के भाषण पर सर्वेश्वर नाम के स्टूडेंट ने कहा कि युवाओं से कनेक्ट करने के लिए पीएम ने उनकी बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया, यह देख कर अच्छा लगा.
मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब का कहर, 4 गांवों में 10 लोगों की मौत; कई अस्पताल में भर्ती
मध्य प्रदेश के सागर जिले में कथित जहरीली शराब से 10 लोगों की मौत की सूचना है। प्रशासन ने छह दुकानें सील कर स्क्रीनिंग और जांच अभियान शुरू किया है।
अभी तो खुला भी नहीं... GMP 200 के पार, ये IPO कराएगा कमाई!
IPO Alert: 8 सितंबर को खुलने वाला इलेक्ट्रिकल कंपनी का आईपीओ ओपनिंग से पहले ही निवेशकों को जोरदार कमाई कराने का सिग्नल दे रहा है. ग्रे-मार्केट में इसका GMP अभी से 200 रुपये के पार निकल चुका है.
मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब का कहर: 9 लोगों की मौत, 35 गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से नौ लोगों की मौत हो गई जबकि 35 अन्य लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
एसआरसीसी में 'दिमागी नक्सल' पर घमासान: CJP बोली- युवाओं को उम्मीद दें, ऐसे लेबल नहीं; पीएम मोदी पर साधा निशाना---PM Modi Dimagi Naxal Remark at SRCC Sparks Controversy, CJP Criticises Statement
Bank Holidays 2026: 7 से 13 सितंबर के बीच कब और कहां बंद रहेंगे बैंक? ये रही छुट्टियों की पूरी लिस्ट
Upcoming Bank Holidays this Month: कल से शुरू हो रहे नए हफ्ते में बैंक जाने की सोच रहे हैं? घर से निकलने से पहले जान लें 7 से 13 सितंबर के बीच आपके शहर में बैंक खुले हैं या बंद. वरना लटक सकते हैं चेक और पैसों से जुड़े जरूरी काम.
Nashik में सड़कों पर क्यों उतरे आदिवासी छात्र? Rahul Gandhi के समर्थन से गरमाया मामला
महाराष्ट्र के नासिक में आदिवासी छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। सरकारी सहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों की खराब स्थिति, छात्रों की सुरक्षा और मौतों के मुद्दे को लेकर 100 से ज्यादा छात्र नासिक के ईदगाह मैदान में आंदोलन कर रहे हैं। इनमें कई छात्र अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। छात्रों का आरोप है कि आदिवासी आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी ठीक नहीं है। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जरूरी कदम उठाए। राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में क्या कहा? कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में हजारों छात्र शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह मामला सिर्फ किसी एक परीक्षा या भर्ती से जुड़ा नहीं है, बल्कि छात्रों का व्यवस्था पर भरोसा टूटने से जुड़ा है। उन्होंने पेपर लीक, रुकी हुई भर्तियों, महंगी शिक्षा, छात्रावासों की खराब स्थिति और अन्य समस्याओं का जिक्र करते हुए सरकार से छात्रों की आवाज सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपने बेहतर और उज्ज्वल भविष्य के लिए छात्रों की मांगें जायज हैं और सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि अगर छात्रों की बात नहीं सुनी गई तो उनका आंदोलन और तेज हो सकता है। महाराष्ट्र में हजारों छात्र सड़कों पर हैं, शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलनरत हैं - इसकी वजह सिर्फ एक परीक्षा या भर्ती नहीं, पूरे सिस्टम से टूट चुका भरोसा है। चाहे वो केंद्र की हो या राज्य की, BJP सरकार से हर छात्र त्रस्त है। पेपर लीक, रुकी हुई भर्तियां, शिक्षा की असहनीय लागत, हॉस्टल… — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 6, 2026 इसे भी पढ़ें: Congress-TVK Meeting: Manickam Tagore का बड़ा बयान, 2029 में Rahul Gandhi होंगे PM पद के उम्मीदवार नासिक में क्यों आंदोलन कर रहे हैं आदिवासी छात्र? नासिक में चल रहे इस प्रदर्शन में आदिवासी रेजीडेंट यानी आश्रम स्कूलों के छात्र शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि सरकारी सहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों में लंबे समय से कई तरह की समस्याएं हैं। प्रदर्शनकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था और छात्रों की मौत के मामलों में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को सिर्फ आश्वासन देने के बजाय जमीन पर व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। इसे भी पढ़ें: '2029 में राहुल गांधी ही बनेंगे PM', TVK के 'विजय फॉर PM' के दावे पर बोली तमिलनाडु कांग्रेस, गठबंधन टूटने के आसार आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन छात्रों के इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अलावा शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे और कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। फिलहाल प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों पर सरकार की ओर से तत्काल कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। आंदोलन के चलते महाराष्ट्र सरकार पर छात्रों की समस्याओं को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है।
मेट्रो में सफर: पीएम मोदी के कान में बच्चे ने क्या कहा? जो प्रधानमंत्री मुस्कुराए और मिलाया हाथ, देखें वीडियो
सबसे शर्मनाक... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सली' तंज पर फिर भड़की कॉकरोच जनता पार्टी
पीएम मोदी द्वारा दिल्ली के SRCC में एक बाद फिर से दिमागी नक्सल शब्द का प्रयोग किए जाने पर कॉकरोच जनता पार्टी ने उनकी आलोचना की है। सीजेपी की तरफ से कहा गया कि पीएम को ऐसे मौके का प्रयोग छात्रों के हितों की बात को करने के लिए करना चाहिए था।
CM योगी ने बाढ़ प्रभावित चित्रकूट दौरे से पहले सेल्फी वीडियो जारी कर दिया बाढ़ राहत का संदेश
लखनऊ, 6 सितंबर। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। सीएम योगी ने रविवार को चित्रकूट के दौरे से पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक सेल्फी वीडियो शेयर कर बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी।सीएम योगी ने कहा कि ज्यादा बारिश के कारण प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सरकार पूरी तेजी के साथ लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी है। वह खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर हालात देख रहे हैं और राहत-बचाव के कामों का जायजा ले रहे हैं।मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार के मंत्री भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं और राहत सामग्री बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए भी सरकार काम कर रही है।सीएम योगी ने बताया कि वह बलिया, फर्रुखाबाद और वाराणसी का दौरा कर चुके हैं और आज चित्रकूट जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए लोगों की सेवा सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उनके सुख-दुख में साथ खड़े रहना भी है। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से कहा कि संकट की इस घड़ी में वे खुद को अकेला न समझें, सरकार पूरी तरह उनके साथ है।सीएम योगी ने कहा कि हर व्यक्ति की जान की सुरक्षा, हर प्रभावित परिवार तक राहत पहुंचाना और जरूरतमंदों की मदद करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
'राजनीतिक दलों ने हाइजैक किया Gen-Z आंदोलन', युवाओं के प्रदर्शन पर बोलीं मायावती
मायावती ने CJP के Gen-Z आंदोलन को लेकर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक दल युवाओं और बेरोजगारों के मुद्दों से जुड़े आंदोलनों को हाइजैक कर रहे हैं. उन्होंने BSP कार्यकर्ताओं से प्रदर्शनों से दूर रहने और चुनावों के लिए ऊर्जा बचाने को कहा. जंतर-मंतर मारपीट मामले में सख्त कार्रवाई की मांग भी की.
दुनिया देख पाएगा 'हनुमान अंश' सिंगर! MP सीएम कराएंगे इलाज
नीम करोली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश ने 2 करोड़ की लागत में 111 करोड़ रुपये की कमाई की है. बुंदेली गायक सुनील लोधी के गाए भजन 'मैंने तेरे ही भरोसे' ने दर्शकों का दिल जीता है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सुनील से मुलाकात कर उनकी आंखों के इलाज का वादा किया.
Delhi-NCR में फिर बरसे बादल, कई इलाकों में भारी बारिश का रेड अलर्ट
दिल्ली, नोएडा और आसपास के एनसीआर इलाकों में रविवार को भी बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, कुछ इलाकों में मध्यम बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट दिया गया है। बारिश के कारण मौसम सुहावना हो गया है और लोगों को उमस व गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, कई जगहों पर सड़कों पर पानी भरने और बारिश के चलते वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। रविवार की छुट्टी होने के कारण नौकरीपेशा लोगों को सामान्य दिनों की तरह ट्रैफिक जाम का ज्यादा सामना नहीं करना पड़ा। इन इलाकों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक, शाहदरा, सेंट्रल दिल्ली, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली और नॉर्थ दिल्ली के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इसे भी पढ़ें: PM Modi का SRCC शताब्दी समारोह में संबोधन: आपके छात्र OGs हैं, हर क्षेत्र में मचाई धूम! शनिवार को भी हुई थी तेज बारिश इससे पहले शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में तेज बारिश हुई थी। लगातार हुई बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की समस्या देखने को मिली थी। कुछ जगहों पर सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात भी प्रभावित हुआ। दिल्ली एयरपोर्ट पर 200 से ज्यादा उड़ानें लेट शनिवार को खराब मौसम का असर दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर भी देखने को मिला। बारिश और खराब मौसम के कारण 200 से ज्यादा उड़ानें अपने निर्धारित समय से देरी से चलीं। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली एयरपोर्ट पर आने वाली उड़ानों में औसतन करीब 70 मिनट की देरी हुई, जबकि यहां से रवाना होने वाली उड़ानों में करीब 130 मिनट तक की देरी दर्ज की गई। इसे भी पढ़ें: आम आदमी की तरह PM Modi का Delhi Metro में सफर, लोगों से की बातचीत । Video दिल्ली-एनसीआर के लिए आज कैसा रहेगा मौसम? फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में बारिश का दौर जारी है और कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में अगर आप घर से बाहर निकल रहे हैं तो मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं और जलभराव वाले रास्तों से बचने की कोशिश करें।
गलत नंबर पर हो गया रिचार्ज? ऐसे मिलेगा पूरा रिफंड
गलत मोबाइल नंबर पर रिचार्ज होने के बाद अगर आपको लगता है कि पैसे वापस नहीं मिलेंगे, तो ऐसा जरूरी नहीं है. कुछ मामलों में रिचार्ज कैंसिल कर पैसे वापस लिए जा सकते हैं. जानिए रिफंड पाने का आसान तरीका और किन बातों का रखना है ध्यान.
वैभव ने सिराज को बनाया निशाना, 1 ओवर में कूटे इतने रन, VIDEO
15 साल के वैभव सूर्यवंशी पहले ही दलीप ट्रॉफी में अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित कर चुके हैं. सेमीफाइनल में उन्होंने 92 और 40 रनों की पारियां खेलकर ईस्ट जोन को फाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. अब फाइनल में सिराज जैसे अनुभवी गेंदबाज को उन्होंने नहीं बख्शा.
बिच्छू और सांप के काटने में क्या है फर्क? बरसात में क्यों बढ़ जाते हैं स्नैकबाइट के केस
बरसात के सीजन में सांप और बिच्छू के काटने के मामले काफी ज्यादा बढ़ने लगते हैं. क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां आइए समझते हैं विस्तार से-
Madhya Pradesh: सागर के बंडा में रात का जाम बना मौत का कारण? 6 की गई जान, 5 अस्पताल में
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा में शनिवार रात एक दर्दनाक घटना सामने आई। यहां संदिग्ध जहरीली शराब पीने के बाद करीब दर्जनभर लोगों की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से छह लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि पांच लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर मरीजों को सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। हालांकि, अभी यह साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि सभी मौतें जहरीली शराब पीने की वजह से हुई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी। रात में बिगड़ी लोगों की तबीयत जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात अचानक कई लोगों की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उन्हें बंडा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान छह लोगों ने दम तोड़ दिया। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम बंडा अस्पताल में कराया जा रहा है। वहीं, पांच मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए बीएमसी सागर भेजा गया है। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। इसे भी पढ़ें: Madhya Pradesh में 30 करोड़ के विवाह सहायता घोटाले में पूर्व CEO Shobhit Tripathi गिरफ्तार मौके पर पहुंचा प्रशासन घटना की जानकारी मिलते ही सागर की कलेक्टर प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया समेत प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बंडा पहुंचे। अधिकारियों ने अस्पताल जाकर पूरे मामले की जानकारी ली और घटना की जांच शुरू कराई। बंडा में किसी तरह की अप्रिय स्थिति न हो, इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। इन लोगों की हुई मौत पुलिस के मुताबिक, मृतकों में गोलू उर्फ चमन लोधी (45), दिग्विजय लोधी (28), करतार सिंह लोधी (30), उजियार सिंह लोधी (56), रोशन लोधी (30) और राजेंद्र लोधी (32) शामिल हैं। ये सभी सागर जिले के अलग-अलग गांवों के रहने वाले थे। पुलिस के अनुसार, गोलू उर्फ चमन को पहले से कैंसर की शिकायत होने की जानकारी भी सामने आई है। पांच मरीजों की हालत गंभीर गंभीर हालत में बीएमसी सागर भेजे गए मरीजों में हरनाम राय (42), उत्तम नत्थू नायक (42), मंगल रजक (40), परम आदिवासी और धनसिंह आदिवासी (30) शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: MP के PWD Engineer के तीन ठिकानों पर EOW की रेड, 11 करोड़ की संपत्ति मिली जहरीली शराब एंगल से भी जांच प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। फिलहाल जहरीली शराब पीने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही यह पता चलेगा कि छह लोगों की मौत की असली वजह क्या थी।
देश के 8 राज्यों में हाई कोर्ट को मिले नए चीफ जस्टिस, जानें किसे कहां मिली नियुक्ति?
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को इसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है.
पश्चिमी ईरान में भीषण सड़क हादसा: हमदान-सानंदाज हाईवे पर तेल टैंकर में जोरदार धमाका, 11 लोगों की मौत
पश्चिमी ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत में शनिवार को एक अत्यंत दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जहां हाईवे पर दौड़ रहे एक विशाल ईंधन (तेल) टैंकर में भीषण टक्कर के बाद जबर्दस्त विस्फोट हो गया। सरकारी समाचार एजेंसी IRIB और स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस भयावह दुर्घटना में कम से कम 11 लोगों की मौके पर ही झुलसकर मौत हो गई, जबकि 7 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह दुर्घटना कुर्दिस्तान प्रांत की राजधानी सानंदाज को हमदान प्रांत से जोड़ने वाले व्यस्त हमदान-सानंदाज अंतरराज्यीय राजमार्ग पर घटित हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट की आवाज इतनी प्रचंड थी कि उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और आसमान में काले धुएं का विशाल गुबार और आग की लपटें सैकड़ों फीट ऊपर तक उठती देखी गईं। तेल टैंकर से रिसते ज्वलनशील ईंधन ने राजमार्ग पर बहकर आग का ऐसा विकराल दरिया बना दिया कि आसपास चल रहे अन्य वाहन चालकों को संभलने या भागने का कोई मौका तक नहीं मिल सका।आग के गोले में तब्दील हुआ तेल टैंकर: ब्रेक फेल होने से बेकाबू हुआ वाहन, कई गाड़ियां चपेट में आईंसानंदाज के प्रांतीय गवर्नर और स्थानीय परिवहन पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक तकनीकी जांच में हादसे के मुख्य कारण का खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, तेल टैंकर हमदान से मारीवान शहर की ओर भारी मात्रा में पेट्रोलियम ईंधन लेकर जा रहा था। हाईवे के एक तीव्र ढलान और मोड़ पर अचानक टैंकर के ब्रेकिंग सिस्टम (Braking System) में गंभीर तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण भारी-भरकम वाहन से चालक का नियंत्रण पूरी तरह छूट गया। बेकाबू होकर तेज रफ्तार से भागता हुआ टैंकर आगे चल रहे वाहनों से टकराते हुए सड़क पर पलट गया। पलटते ही टैंकर का विशाल कंपार्टमेंट फट गया और उसमें भरे हजारों लीटर पेट्रोल/डीजल ने घर्षण से निकली चिंगारी के संपर्क में आते ही भयानक रूप से आग पकड़ ली।कुर्दिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के आपातकालीन चिकित्सा सेवा (EMS) प्रमुख बाबेक होदाई ने बताया कि टैंकर के फटने से निकली आग की लपटों ने हाईवे पर आसपास से गुजर रही कई निजी कारों और वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। कई वाहनों में सवार मुसाफिरों को दरवाजे खोलने का समय भी नहीं मिल पाया और वे वाहन के भीतर ही जिंदा फंस गए। देखते ही देखते कई चारपहिया वाहन पूरी तरह जलकर लोहे के कंकाल में तब्दील हो गए।राहत और बचाव अभियान: रेड क्रीसेंट और फायर ब्रिगेड की टीमों ने मलबे से निकाले शवदुर्घटना की सूचना मिलते ही ईरानी रेड क्रीसेंट सोसाइटी (Red Crescent), अग्निशमन विभाग और सानंदाज मेडिकल कॉलेज की दर्जनों आपातकालीन रेस्क्यू टीमें एंबुलेंस और फायर टेंडर्स के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं। आग की तीव्रता और रसायन के जलने से उठती जहरीली गैसों के चलते बचाव कर्मियों को शुरुआत में मलबे के करीब पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा। अग्निशामक दलों ने फोम और भारी पानी की बौछारों के जरिए कई घंटों के कड़े संघर्ष के बाद विकराल लपटों पर पूरी तरह काबू पाया।बचाव कर्मियों ने आग बुझने के बाद जली हुई गाड़ियों की कटी हुई धातु के बीच से 11 शवों को बाहर निकाला। अधिकांश शव बुरी तरह जल चुके थे, जिसके कारण उनकी शिनाख्त के लिए फॉरेंसिक डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है। गंभीर रूप से झुलसे सभी 7 घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत सानंदाज के मुख्य ट्रॉमा एवं बर्न स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां 3 घायलों की हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। बचाव अभियान और मलबे को हटाने के चलते हमदान-सानंदाज हाईवे पर घंटों तक वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं, जिसे बाद में क्रेन की मदद से रास्ता साफ कर सुचारु कराया गया।सानंदाज-हमदान रूट पर पुराना खूनी इतिहास: 2018 के बस हादसे की ताजा हुईं खौफनाक यादेंइस ताजा हृदयविदारक हादसे ने स्थानीय नागरिकों और ईरान के लोगों के जेहन में वर्ष 2018 के उस खौफनाक मंजर की यादें फिर से ताजा कर दी हैं, जब इसी मार्ग पर एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला हादसा हुआ था। वर्ष 2018 में सानंदाज के इसी हाईवे पर एक अनियंत्रित फ्यूल टैंकर ने यात्रियों से भरी एक बस को जोरदार टक्कर मार दी थी, जिसके बाद हुए धमाके और आगजनी में कम से कम 13 निर्दोष यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी।कुर्दिस्तान प्रांत का यह पहाड़ी और घुमावदार राजमार्ग भारी पेट्रोलियम और वाणिज्यिक ट्रकों की आवाजाही के लिए एक प्रमुख कॉरिडोर माना जाता है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने बार-बार इस रूट पर खतरनाक मोड़, भारी ढलान और भारी वाहनों के लिए विशेष सुरक्षा लेन के अभाव का मुद्दा उठाया है। इस ताजा हादसे के बाद स्थानीय जनता में राजमार्ग के बुनियादी ढांचे और भारी वाहनों की नियमित फिटनेस जांच में बरती जाने वाली प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों पर सवाल: नेशनल ऑयल कंपनी ने गठित की जांच समितिहादसे की गंभीरता को देखते हुए 'ईरान की नेशनल ऑयल प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी' (NIOPDC) ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा कि यद्यपि प्रारंभिक रिपोर्ट में ब्रेक फेल होने को दुर्घटना की वजह बताया जा रहा है, लेकिन इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। टैंकर के स्वामित्व, उसके रखरखाव के रिकॉर्ड, परिवहन परमिट और हादसे के समय चालक की गति सीमा की गहन पड़ताल के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ तकनीकी समिति गठित कर दी गई है।ईरान में सड़क हादसों की दर अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में काफी ऊंची रही है, जिसके पीछे पुराने वाहन बेड़े, पहाड़ों पर घटिया सड़क डिजाइन और तकनीकी खामियों को मुख्य कारण माना जाता है। इस हादसे के बाद पश्चिमी प्रांतों के यातायात पुलिस मुख्यालय ने सभी भारी पेट्रोलियम और गैस टैंकरों के लिए सख्त गति सीमा, अनिवार्य ब्रेक इंस्पेक्शन और रात के समय खतरनाक घाटियों में विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश लागू करने की घोषणा की है।
Saharanpur Masjid Demolished:सहारनपुर में मलबे के नीचे मिला कुआं, 20 फीट गहराई देख चौंके लोग UP News
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वाराणसी के विद्या विहार इण्टर कॉलेज में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाढ़ प्रभावितों के राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आज से 10 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे और दर्जनों जनपदों में ...
बिहार की राजधानी पटना से ठीक सामने और वैशाली जिले के प्रशासनिक दायरे में आने वाला ऐतिहासिक 'राघोपुर दियारा' इस समय गंगा नदी के भयानक उफान के चलते जल-समाधि ले चुका है। गंगा नदी के दोनों किनारों से घिरे इस विशाल द्वीप प्रखंड की सभी 20 पंचायतों के कुल 74 गांव पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर लगातार खतरे के निशान से 1.5 से 2 मीटर ऊपर बह रहा है, जिसके चलते नदी की तेज धाराएं तटबंधों और सुरक्षा बांधों को लांघकर सीधे बस्तियों में प्रवेश कर गई हैं। राघोपुर पूर्वी, राघोपुर पश्चिमी, जहांगीरपुर, जुड़ावनपुर बरारी, जुड़ावनपुर करारी, फतेहपुर, चकसिंगार, रामपुर श्यामचंद, बिदुलिया, रुस्तमपुर, शिवनगर, पहाड़पुर, बहरामपुर और तेरसिया सहित सभी पंचायतों के रिहायशी इलाकों में 5 से 8 फीट तक पानी भर चुका है। इस समय पूरा राघोपुर किसी विशाल समुद्र जैसा नजर आ रहा है, जहां जहां तक नजर जाती है, केवल पानी की लहरें और घरों की डूबती छतें ही दिखाई दे रही हैं। जमीनी स्तर पर आवागमन के सभी रास्ते, संपर्क सड़कें, पुलिया और संपर्क मार्ग जलमग्न होकर पूरी तरह कट चुके हैं, जिससे लगभग 3 लाख से अधिक की आबादी मुख्य भूमि से अलग-थलग पड़कर अपने ही घरों में बंधक बन गई है।छतों, मचानों और ऊंचे स्थानों पर कट रही रातें: नावों की घोर किल्लत, जान जोखिम में डालकर पलायनराघोपुर में बाढ़ की विभीषिका इतनी भयानक है कि लोगों के घरों के पहले तल (ग्राउंड फ्लोर) पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। बक्से, अनाज की कोठियां, बिस्तर, गैस सिलेंडर और चूल्हे सब कुछ जलमग्न हो चुका है। जान बचाने के लिए ग्रामीण अपने छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को लेकर पक्के मकानों की छतों पर तिरपाल तानकर दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। जिनके पास केवल कच्चे या झोपड़ीनुमा मकान थे, वे अपने घरों के भीतर बांस-बल्ली का ऊंचा मचान बनाकर उस पर बैठे हैं या फिर जान जोखिम में डालकर गांव के ऊंचे टीलों और मंदिरों के चबूतरों पर शरण लिए हुए हैं। क्षेत्र में सबसे बड़ा संकट सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का है। लाखों की आबादी पर प्रशासन द्वारा चलाई जा रही चंद सरकारी नावें 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रही हैं। निजी नाव चालक एक-एक व्यक्ति को पटना के गायघाट या हाजिरपुर के तटीय घाटों तक पहुंचाने के लिए मनमाना किराया वसूल रहे हैं। गरीब और लाचार ग्रामीण, जो पैसे देने में असमर्थ हैं, वे केले के थंब (डोंगा), थर्माकोल और लकड़ी के तख्तों का सहारा लेकर उफनती गंगा की लहरों के बीच से जान हथेली पर रखकर सुरक्षित ठिकानों की ओर निकलने का खतरनाक प्रयास कर रहे हैं।पशुओं के चारे और शुद्ध पेयजल का हाहाकार: नल-जल योजना ठप, हैंडपंप डूबे, संक्रामक रोगों का सायाबाढ़ के इस तांडव के बीच ग्रामीणों के सामने सबसे विकट चुनौती पेट की भूख और गले की प्यास बुझाने की खड़ी हो गई है। गांवों में लगे लगभग सभी सरकारी व निजी चापाकल (हैंडपंप) बाढ़ के गंदे पानी में डूब चुके हैं, जिसके कारण नलों से बदबूदार और दूषित पानी निकल रहा है। मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना (हर घर नल का जल) की पाइपलाइनें और मोटर पंप पानी में डूबकर बंद हो चुके हैं। मजबूरी में लोग उसी बाढ़ के मटमैले और दूषित पानी को फिटकरी या कपड़े से छानकर पीने को विवश हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में उल्टी, दस्त, पेचिश और पेट दर्द जैसी जलजनित बीमारियों का प्रकोप तेजी से फैलने लगा है।इंसानों के साथ-साथ मूक पशुओं की स्थिति और भी ज्यादा हृदयविदारक हो चुकी है। राघोपुर के किसानों की आजीविका का मुख्य आधार दुधारू पशु हैं। सैकड़ों एकड़ में लगी हरी घास, चरी और भूसे के भंडार पानी में सड़ चुके हैं। मवेशियों को रखने के लिए सूखी जमीन का एक टुकड़ा तक नहीं बचा है। ग्रामीण अपनी गायों और भैंसों को छतों के सहारे या गले तक पानी में बांधकर रखने को मजबूर हैं। चारे और भोजन के अभाव में कई मवेशी भूखे-प्यासे दम तोड़ रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और महामारी फैलने का गंभीर अंदेशा पैदा हो गया है।स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त: पीएचसी में भरा पानी, अंधेरे में डूबा दियाराजल-प्रलय ने राघोपुर के संपूर्ण प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे को पंगु बना दिया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), अतिरिक्त स्वास्थ्य उप-केंद्र, पंचायत भवन और सभी प्राथमिक व मध्य विद्यालय 4 से 6 फीट पानी में डूब चुके हैं। अस्पतालों में पानी भर जाने से दवाएं और चिकित्सा उपकरण खराब हो चुके हैं, जिससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का बैठना नामुमकिन हो गया है। यदि किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होती है या किसी बीमार बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ती है, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए कोई स्ट्रेचर या एम्बुलेंस नाव उपलब्ध नहीं है।इसके साथ ही, बाढ़ का पानी बिजली के सब-स्टेशनों और ट्रांसफार्मरों तक पहुंच जाने के कारण विद्युत आपूर्ति विभाग ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे राघोपुर प्रखंड की बिजली काट दी है। पिछले कई दिनों से पूरा दियारा क्षेत्र शाम ढलते ही घने अंधेरे के आगोश में समा जाता है। मोबाइल टावरों का बैकअप खत्म होने से नेटवर्क पूरी तरह गायब हो चुका है, जिससे छतों पर फंसे लोग अपने बाहर रहने वाले परिजनों को अपनी कुशलता तक नहीं बता पा रहे हैं। अंधेरे में बाढ़ के पानी के साथ घरों में घुस रहे जहरीले सांपों, बिच्छुओं और जहरीले कीड़ों के काटने (Snake Bites) की घटनाओं ने ग्रामीणों की दहशत को कई गुना बढ़ा दिया है।राहत सामग्री और कम्युनिटी किचन के इंतजार में ग्रामीण: प्रशासनिक दावों पर फूटा जनता का गुस्साराघोपुर के बाढ़ पीड़ितों में स्थानीय प्रशासन और सरकार के प्रति भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है। कागजों पर भले ही आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा व्यापक राहत और बचाव के दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर अधिकांश पंचायतों में अब तक सूखा राशन (चूड़ा, गुड़, सत्तू, माचिस, मोमबत्ती) या पॉलीथिन शीट्स का वितरण नहीं पहुंच सका है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ आने पर उन्हें इसी तरह उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इस क्षेत्र से चुनकर आने वाले बड़े राजनीतिक चेहरों और जन प्रतिनिधियों की गैर-मौजूदगी को लेकर भी लोगों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जब वोट मांगना होता है तो नेता नावों पर बैठकर आते हैं, लेकिन जब पूरा इलाका डूब रहा है और बच्चे दाने-दाने के लिए रो रहे हैं, तो कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं है। पीड़ितों ने मांग की है कि सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की बड़ी मोटरबोट्स को तुरंत सभी 20 पंचायतों में भेजा जाए, ऊंचे स्थानों पर सरकारी कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) शुरू किए जाएं और मेडिकल टीमों को नावों के जरिए घर-घर भेजकर ओआरएस, क्लोरीन की गोलियां और एंटी-वेनम इंजेक्शन वितरित किए जाएं।भारी कृषि नुकसान और विस्थापन: मुआवजे और स्थायी समाधान की गुहारइस तबाही ने राघोपुर के किसानों की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है। दियारा क्षेत्र अपनी उपजाऊ मिट्टी, बड़े पैमाने पर होने वाली सब्जी की खेती, परवल, मक्का, केला और धान की फसलों के लिए जाना जाता है। हजारों एकड़ में लहलहाती फसलें अब पानी के नीचे सड़ चुकी हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और लाखों रुपये का कर्ज पानी में बह गया है। खेतों के डूबने से कृषि मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट पैदा हो गया है।बाढ़ का पानी यदि अगले कुछ दिनों तक इसी तरह बना रहा, तो पानी उतरने के बाद सिल्ट (गाद) और कटाव के कारण जमीन के बंजर होने का खतरा भी मंडरा रहा है। राघोपुर की जनता अब केवल तात्कालिक राहत ही नहीं, बल्कि इस सालाना त्रासदी से मुक्ति के लिए स्थायी पक्के बांध, रिंग बांध की मरम्मत और गंगा नदी पर बन रहे पुल के निर्माण को जल्द पूरा करने की मांग कर रही है। जब तक गंगा का जलस्तर शांत नहीं होता और प्रशासनिक मदद जमीन पर नहीं उतरती, तब तक राघोपुर के 74 गांवों के लाखों बाशिंदों के लिए हर गुजरता पल जिंदगी और मौत के बीच की जंग बना हुआ है।
दिवाली से पहले 5 राशियों की पलटेगी किस्मत, ग्रहों का गोचर देगा फायदा!
Grah Gochar: दिवाली से पहले ग्रहों के बड़े गोचर से इन 5 राशियों की किस्मत चमक सकती है. जानें किन राशियों को नौकरी, कारोबार, धन और करियर में शुभ परिणाम मिलने के योग हैं.
बिहार में बाढ़ का विकराल रूप: गंगा-गंडक और पुनपुन के उफान से 10 लाख से अधिक आबादी प्रभावित
बिहार में मानसूनी बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी के चलते राज्य के 18 से अधिक जिलों में बाढ़ का संकट अत्यधिक गंभीर रूप ले चुका है। गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, सोन और पुनपुन नदियां एक साथ उफान पर हैं और दर्जनों स्थानों पर लाल निशान (खतरे के निशान) से 1 से 2.5 मीटर ऊपर बह रही हैं। राजधानी पटना, वैशाली (हाजीपुर), समस्तीपुर, बेगूसराय, भोजपुर, बक्सर, सारण और भागलपुर के ग्रामीण तथा तटीय इलाके पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।आपदा प्रबंधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस अभूतपूर्व जल-प्रलय से राज्य की 10 लाख से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। सैकड़ों गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरकर टापू बन चुके हैं। खेत-खलिहान, सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र पानी में समा गए हैं, जिसके चलते लाखों लोग अपने मवेशियों और जरूरी गृहस्थी के सामान के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों (NH), ऊंचे बांधों और रेलवे पटरियों के किनारे तिरपाल तानकर खुले आसमान के नीचे शरण लेने को विवश हो गए हैं।पटना में 2016 की बाढ़ का टूटा रिकॉर्ड: गांधी घाट और दीघा में हाहाकार, पुनपुन ने बढ़ाई धड़कनेंराजधानी पटना और इसके ग्रामीण अनुमंडलों में बाढ़ की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर के पार पहुंच गया है, जिसने वर्ष 2016 की विनाशकारी बाढ़ के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। दीघा घाट, हाथीदह और मनेर में भी गंगा नदी लाल निशान से काफी ऊपर स्थिर बनी हुई है। दानापुर और मनेर के दियारा इलाकों की 50 से अधिक पंचायतों का जमीनी संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।गंगा के साथ-साथ पटना के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाली पुनपुन और दरधा नदियों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान (50.60 मीटर) से 2.56 मीटर ऊपर 53.16 मीटर के खतरनाक स्तर पर बह रही है। पुनपुन के बाएं तटबंध और रिंग बांध पर पानी का भारी दबाव बना हुआ है। यदि यह तटबंध क्षतिग्रस्त होता है, तो बाढ़ का पानी सीधे पटना शहर के कंकड़बाग, बाईपास और संपतचक के रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर सकता है। लखना, चंदासी और फतेहपुर गांवों में पानी घुसने के बाद जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीमें 24 घंटे बालू की बोरियों (सैंडबैग्स) से रिंग बांध को बचाने में जुटी हुई हैं।हाजीपुर में गंडक और गंगा का दोहरा वार: कौनहारा घाट डूबा, तेरसिया दियारा में हजारों बेघरवैशाली जिले के हाजीपुर में गंगा और गंडक नदियों के संगम ने तबाही मचा रखी है। हाजीपुर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाला मोक्ष धाम 'कौनहारा घाट' पूरी तरह जलमग्न हो चुका है और शवदाह गृह तक पानी भर गया है। बाढ़ का पानी कौनहारा बाईपास रोड और रामचौरा मंदिर जाने वाली मुख्य सड़क पर 2 से 3 फीट तक बह रहा है, जिससे शहरी आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। डीआरसीसी (DRCC) जाने वाली सड़क पर भी पानी चढ़ चुका है।गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सबसे खौफनाक असर राघोपुर और हाजीपुर के तेरसिया दियारा इलाके में देखा जा रहा है। तेरसिया में सैकड़ों पक्के और कच्चे मकान पहली मंजिल तक डूब चुके हैं, जिसके कारण हजारों लोग बेघर हो गए हैं। स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए गंगाब्रिज थाना के पास ऊंचे स्थानों और महात्मा गांधी सेतु के संपर्क मार्ग के किनारे डेरा डाले हुए हैं। दियारा क्षेत्र में नावों की भारी किल्लत के चलते ग्रामीण किसी तरह बांस-बल्ले के चाचरी पुल और केले के थंब की नाव बनाकर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं।समस्तीपुर और बेगूसराय में त्राहिमाम: ताजपुर-बख्तियारपुर फोरलेन डूबा, बांधों पर कट रही रातेंसमस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर, पटोरी और विद्यापतिनगर प्रखंडों में गंगा नदी का रौद्र रूप जारी है। जल संसाधन विभाग दलसिंहसराय के अनुसार, सरारी कैंप पर गंगा का जलस्तर 47.75 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (45.50 मीटर) से 2.25 मीटर ऊपर है। पानी का बहाव इतना तेज है कि निर्माणाधीन ताजपुर-बख्तियारपुर फोरलेन के एक बड़े हिस्से पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है, जिससे निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया है और संपर्क टूट गया है।प्रखंड के दक्षिणी डुमरी, बघरा, बरियारपुर, राजपुर जौनापुर, मटिऔर और विशनपुर बेरी पंचायतों के हजारों ग्रामीणों ने हाजीपुर-बछवाड़ा वाटरवेज बांध पर अपने पूरे परिवार और मवेशियों के साथ शरण ले रखी है।उधर, पड़ोसी जिले बेगूसराय के मटिहानी, बछवाड़ा, शाम्हो और तेघड़ा प्रखंडों के दियारा क्षेत्र में भी गंगा का पानी घरों में घुस चुका है। शाम्हो प्रखंड का जिला मुख्यालय से संपर्क लगभग कट चुका है। किसानों की सैकड़ों एकड़ में लगी मक्का, केला, धान और हरी सब्जियों की फसलें पूरी तरह गलकर नष्ट हो गई हैं, जिससे अन्नदाताओं के सामने सालभर के राशन और मवेशियों के चारे का विकट संकट खड़ा हो गया है।प्रशासन और राहत-बचाव दल अलर्ट पर: NDRF-SDRF की टीमें तैनात, कम्युनिटी किचन शुरूबाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है और सभी प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को राहत शिविर युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं।धरातल पर चल रहे राहत कार्यों का विवरण इस प्रकार है:रेस्क्यू ऑपरेशंस: बाढ़ प्रभावित इलाकों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 8 से अधिक टीमें और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टुकड़ियां मोटरबोट्स के साथ लगातार फंसे हुए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।सरकारी नावें: आवागमन को सुचारु रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 690 से अधिक सरकारी और निजी पंजीकृत नावों का परिचालन शुरू किया गया है।सामुदायिक रसोई (Community Kitchens): विस्थापित परिवारों के लिए राहत शिविरों और बांधों पर दर्जनों कम्युनिटी किचन शुरू किए गए हैं, जहां शुद्ध पेयजल और दो वक्त के गर्म भोजन की व्यवस्था की जा रही है।तटबंधों की 24 घंटे पहरेदारी: संवेदनशील तटबंधों की सुरक्षा के लिए हर 3 किलोमीटर पर जल संसाधन विभाग के सहायक व कनिष्ठ अभियंताओं को तैनात किया गया है। तटबंधों पर रात के समय हाई-मास्ट लाइटें लगाकर लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है ताकि किसी भी रिसाव (सीपेज) को तुरंत रोका जा सके।राहत सामग्री: विस्थापितों के बीच अब तक हजारों पॉलीथिन शीट्स, सूखा राशन (चूड़ा, गुड़, सत्तू, माचिस) और क्लोरीन की गोलियों का वितरण किया गया है।स्वास्थ्य संकट और संक्रामक बीमारियों की आशंका: स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें रवानाबाढ़ का पानी रुकने और सड़कों पर सड़न शुरू होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों (Water-borne diseases) का खतरा कई गुना बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित पंचायतों में मेडिकल मोबाइल वैन और डॉक्टरों की विशेष टीमें तैनात की हैं। पीड़ितों में डायरिया, हैजा, बुखार और त्वचा संक्रमण के मामले सामने आने लगे हैं। इसके अलावा बाढ़ग्रस्त इलाकों में जहरीले सांपों और कीड़े-मकोड़ों के काटने (Snake Bites) की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-वेनम इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे पीने के पानी को हमेशा उबालकर पिएं, बच्चों को उफनती नदियों और घाटों से दूर रखें और किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता के लिए जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत संपर्क करें। मौसम विभाग के अगले दो दिनों के बारिश के पूर्वानुमान ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की नदियों में जलस्तर अभी कुछ दिन और उफान पर रहेगा, जिससे संकट से उबरने में अभी समय लग सकता है।
कंगना रनौत ने अधिकारियों की जमकर लगाई क्लास, क्यों हुई नाराज?
हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद कंगना रनौत इन दिनों पूरे एक्शन में नजर आ रही हैं. हाल ही में मंडी में आयोजित दिशा कमेटी की बैठक में सांसद कंगना रनौत ने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई. विकास कार्यों में देरी और विभागीय लापरवाही को लेकर कंगना अधिकारियों पर बेहद नाराज दिखीं. बैठक के दौरान कंगना ने सख्त लहजे में कहा कि विकास कार्यों को लेकर मुझे फालतू के बहाने या जुमले मत दीजिए. उन्होंने चेतावनी दी कि मंडी संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों पर पूरे देश की नजर है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
बिहार के मौसम में एक बार फिर बड़ा और व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना (IMD Patna) और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य भर में अगले 72 घंटों (अगले 3 दिनों) के लिए मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली (वज्रपात/ठनका) की गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर बिहार से होकर गुजर रही सक्रिय मानसूनी ट्रफ लाइन के चलते वातावरण में नमी का भारी जमावड़ा हुआ है। इसके साथ ही नेपाल की तराई और पूर्वी हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली नमी युक्त ठंडी हवाओं का बिहार के मैदानी इलाकों में टकराव हो रहा है, जिससे घने क्यूम्युलोनिम्बस बादलों का निर्माण हुआ है। इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से 6 सितंबर से 8 सितंबर 2026 के दौरान उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि आज विशेष रूप से उत्तर बिहार के जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं (Gusty Winds) चलेंगी और आकाशीय बिजली गिरने का सबसे अधिक खतरा बना रहेगा।उत्तर बिहार के इन जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट: चंपारण से पूर्णिया तक तेज आंधी और झमाझम बारिशमौसम विज्ञान केंद्र पटना द्वारा जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार, उत्तर बिहार के तराई और सीमावर्ती जनपदों में बारिश और आंधी का सबसे प्रचंड रूप देखने को मिलेगा। विभाग ने पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सीवान और सारण (छपरा) जिलों के लिए बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर बादलों की भयंकर गर्जना के साथ 115 मिमी से अधिक की अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। वहीं सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया और कटिहार जनपदों में मध्यम से भारी दर्जे की वर्षा का 'येलो अलर्ट' प्रभावी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन इलाकों में गरज-चमक के साथ अचानक चलने वाली 50 किमी प्रति घंटे तक की तूफानी हवाएं कच्चे मकानों, टीन शेड, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। लगातार बारिश के चलते सीमांचल और मिथिलांचल के कई निचले शहरी व ग्रामीण इलाकों में जलभराव की स्थिति विकराल हो सकती है।आकाशीय बिजली (ठनका) का जानलेवा साया: किसानों और ग्रामीणों के लिए विशेष रेड वार्निंगबिहार में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली (वज्रपात/ठनका) सबसे जानलेवा प्राकृतिक आपदा साबित होती रही है। मौसम विभाग ने आज उत्तर बिहार के किसानों और खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। वायुमंडल में नमी का स्तर 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच जाने और दोपहर के समय तापमान में मामूली वृद्धि होने से स्थानीय स्तर पर अत्यधिक भारी गरज वाले बादलों का निर्माण हो रहा है, जो चंद मिनटों में भीषण वज्रपात का कारण बनते हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर चेतावनी प्रसारित कराएं। किसानों से साफ कहा गया है कि जब तक आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट शांत न हो, तब तक वे धान के खेतों में पानी निकालने, मवेशी चराने या कृषि कार्यों के लिए बाहर न निकलें। आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि वज्रपात के समय किसी भी हाल में अकेले खड़े बड़े पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे शरण न लें, क्योंकि सबसे ज्यादा मौतें पेड़ों के नीचे खड़े होने के कारण ही दर्ज की जाती हैं।उफान पर कोसी, गंडक और बागमती: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश से बाढ़ का खतरा गहरायाउत्तर बिहार के लिए यह बारिश केवल जलभराव ही नहीं, बल्कि बाढ़ का दोहरा संकट लेकर आई है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों और जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते बिहार की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, बागमती, कमला बलान, अधवारा समूह और महानंदा नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के करीब या उसके पार बह रही हैं। वाल्मीकिनगर बराज और कोसी बराज (बीरपुर) से लाखों क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सुपौल, सहरसा और खगड़िया के तटीय इलाकों और दियारा क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। जल संसाधन विभाग ने सभी तटबंधों पर 24 घंटे पेट्रोलिंग और सतत निगरानी के आदेश दिए हैं। बाढ़ नियंत्रण प्रभाग के इंजीनियरों को संवेदनशील बांधों पर फ्लड फाइटिंग सामग्री (बालू की बोरियां, बोल्डर) तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।दक्षिण बिहार और राजधानी पटना का हाल: गंगा के जलस्तर पर नजर, उमस से मिलेगी राहतउत्तर बिहार में जहां आंधी और भारी बारिश का तांडव रहेगा, वहीं दक्षिण बिहार के जिलों—राजधानी पटना, गया, नालंदा, नवादा, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर, मुंगेर, जमुई और बांका में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। राजधानी पटना में आज दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और दोपहर से शाम के बीच तेज गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश के कई स्पेल देखने को मिल सकते हैं। बारिश के चलते पटना में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जाएगा, जिससे पिछले कई दिनों से पड़ रही चिपचिपी उमस भरी गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, बक्सर से लेकर पटना, मोकामा और भागलपुर तक गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंगा के तटीय घाटों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और लोगों को गहरे पानी में स्नान करने से रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम केंद्र की सुरक्षा एडवाइजरी: क्या करें और क्या न करें?आगामी 3 दिनों के खराब मौसम को देखते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:दामिनी ऐप का उपयोग करें: ग्रामीण और शहरी नागरिक अपने मोबाइल फोन में भारत सरकार का 'दामिनी' (DAMINI) ऐप या 'मौसम' ऐप डाउनलोड करें, जो आपके इलाके में आकाशीय बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले ऑडियो और टेक्स्ट चेतावनी देता है।पक्के मकान में ही शरण लें: तेज मेघगर्जन के समय यदि आप सड़क या खेत में हैं, तो तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर में चले जाएं। टिन शेड, कच्ची झोपड़ी या लोहे की रेलिंग से दूर रहें।इलेक्ट्रिक गैजेट्स से दूरी: घर के भीतर रहने पर भी बिजली के भारी उपकरणों (टीवी, कंप्यूटर, फ्रिज) के स्विच बंद कर दें। तार वाले टेलीफोन या चार्जिंग पर लगे मोबाइल का उपयोग बिल्कुल न करें।सड़क यात्रा में सावधानी: भारी बारिश के कारण दृश्यता कम होने और सड़कों पर जलभराव के चलते गड्ढे न दिखने का जोखिम रहता है। दोपहिया वाहन चालक धीमी गति से चलें और उफनते कॉजवे या पुलियों को पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें।किसानों के लिए जरूरी सलाह: आगामी 72 घंटों तक खेतों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव न करें। फसलों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था सुचारु रखें ताकि पानी जमा न हो पाए।
पश्चिमी से पूर्वी यूपी तक मानसून का तांडव: 22 से अधिक जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश के समूचे भूभाग पर मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ और उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी संयुक्त वेदर बुलेटिन के अनुसार, प्रदेश में पश्चिमी यूपी के सहारनपुर और मेरठ से लेकर पूर्वांचल के बलिया और सोनभद्र तक बारिश का जोरदार सिलसिला शुरू हो चुका है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के मध्य भाग से होकर गुजर रही सक्रिय मानसूनी ट्रफ लाइन के प्रभाव से वातावरण में नमी का भारी संचय हुआ है। इसके साथ ही अरब सागर से आ रही दक्षिणी-पश्चिमी हवाओं और बंगाल की खाड़ी की पूर्वी पुरवैया हवाओं के टकराव के चलते प्रदेश के ऊपर सघन बादलों का एक विशाल घेरा बन गया है। इस मौसमी तंत्र के चलते मौसम विभाग ने राज्य के 22 से अधिक जनपदों में मूसलाधार वर्षा, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) की गंभीर चेतावनी जारी करते हुए येलो और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है।पूर्वांचल और तराई में बादलों की भयंकर गर्जना: प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर समेत इन जिलों में वज्रपात का सायापूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा से सटे तराई इलाकों में मानसूनी बादल सबसे अधिक आक्रामक रुख दिखा रहे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ ने पूर्वांचल के कई जिलों में बादलों की तीव्र गर्जना के साथ भारी से अति-भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है।प्रयागराज, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, संत रविदास नगर (भदोही), जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर और महराजगंज में लगातार रुक-रुक कर झमाझम वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है। इन जिलों में आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) का सबसे अधिक खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने खुले खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों को अत्यधिक सतर्क रहने को कहा है।तराई के बहराइच, लखीमपुर खीरी, बलरामपुर और श्रावस्ती जिलों में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश के चलते नदियों के जलस्तर में तेज वृद्धि की आशंका जताई गई है।बुंदेलखंड और मध्य यूपी में मूसलाधार बारिश: कानपुर, लखनऊ, बांदा और झांसी में बाढ़ जैसे हालातमध्य उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के जिलों में भी मानसूनी सिस्टम का गहरा असर दिखाई दे रहा है। बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, फतेहपुर, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर में भारी से बहुत भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। चित्रकूट और कर्वी क्षेत्र में पहले से ही जलभराव और पहाड़ी नालों के उफान के चलते राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।वहीं मध्य यूपी के प्रमुख जनपदों—राजधानी लखनऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी, सुलतानपुर, बाराबंकी और अयोध्या में गरज-चमक के साथ मूसलाधार फुहारों का अलर्ट है।लगातार हो रही वर्षा के कारण लखनऊ और कानपुर के कई शहरी इलाकों, प्रमुख चौराहों और कॉलोनियों में जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंधी और बारिश का पहरा: आगरा, मेरठ, मुरादाबाद और बरेली में तेज हवाओं का अलर्टपश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में बंगाल की खाड़ी के सिस्टम के साथ-साथ उत्तर-पश्चिम से आ रही नम हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस, एटा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, इटावा और औरैया में तेज मेघगर्जन के साथ भारी बारिश की संभावना जताई है।रुहेलखंड और पश्चिमी छोर के जनपदों—बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और मध्यम से भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। मुरादाबाद, रामपुर और बिजनौर में पहले ही रिकॉर्ड बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे निचली बस्तियों में पानी भर गया है।राहत आयुक्त कार्यालय अलर्ट मोड पर: नदियां उफान पर, किसानों और आम जनता के लिए विशेष सुरक्षा एडवाइजरीमौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय ने सभी संबंधित 22 से अधिक जिलाधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। गंगा, यमुना, सरयू (घाघरा), गोमती, बेतवा और केन नदियों के बढ़ते जलस्तर की निगरानी के लिए केंद्रीय जल आयोग (CWC) और सिंचाई विभाग की टीमों को तटबंधों पर तैनात किया गया है।आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम वैज्ञानिकों ने आम नागरिकों व किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:वज्रपात से बचाव: बादल गरजने या बिजली चमकने के दौरान पक्के मकान में ही शरण लें। किसी भी परिस्थिति में अकेले बड़े पेड़, बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर या धातु के ढांचे के नीचे न खड़े हों।दामिनी ऐप का उपयोग: ग्रामीण क्षेत्रों में आकाशीय बिजली की सटीक और पूर्व चेतावनी पाने के लिए भारत सरकार के 'दामिनी' मोबाइल ऐप का उपयोग करने की सलाह दी गई है।किसानों के लिए कृषि परामर्श: कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों में जल निकासी (Drainage) के रास्तों को तुरंत खोलने की सलाह दी है। धान के खेतों में अत्यधिक जलभराव, गन्ने की जड़ों में सड़न और तिलहन/दलहन (अरहर, उड़द) की फसलों में उकठा रोग से बचाव के लिए आगामी 48 घंटों तक किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशक का छिड़काव न करने की हिदायत दी गई है।यातायात सावधानी: भारी बारिश के दौरान सड़कों पर दृश्यता कम होने और जलभराव के चलते गड्ढों के न दिखने के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को धीमी गति से चलने और उफनते रपटों या पुलियों को पार न करने की अपील की गई है।
भारत-चीन के रिश्तों पर टिका एशिया का भविष्य, बोले पूर्व CDS अनिल चौहान
भारत के पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत-चीन संबंधों को केवल सीमा विवाद के नजरिए से नहीं देखना चाहिए और दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहनी चाहिए।
प्रोफेसर की घिनौनी करतूत, छात्राओं ने दर्ज की यौन उत्पीड़न की शिकायत
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यूनिवर्सिटी की करीब 10 छात्राओं के एक समूह ने एक प्रोफेसर कर खिलाफ शिकायत की है. उन्होंने प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. इसके बाद से मामले की जांच चल रही है.
Surat Fit India Sunday on Cycle: सूरत शहर में रविवार को फिटनेस, स्वास्थ्य जागरूकता और नशामुक्त समाज का संदेश देने वाली भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया। ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ अभियान के 89वें संस्करण के तहत आयोजित इस रैली में केंद्रीय खेल ...
महाराष्ट्र में छात्रों का आंदोलन क्यों बढ़ा?: सड़कों पर उतरे हजारों युवा; राहुल गांधी ने सरकार को दी चेतावनी
पंजाब में बेटे को मरा हुआ मान दाह संस्कार कर चुका था परिवार, 15 दिन बाद फोन आया- वो जिंदा है
परिवार को यह चौंकाने वाली कॉल तब आई, जब वे अपने लापता बेटे रवि कुमार का शव समझकर उसका अंतिम संस्कार कर चुके थे. जिसके बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
सहारनपुर में ढहाई गई मस्जिद के नीचे से निकला 20 फीट गहरा कुआं, अब ASI की टीम करेगी जांच
एसडीएम ने बताया कि ये ईंटों से बना हुआ कुंआ है और उसी से बनी संरचना है. प्रथम दृष्टया ये कुंआ ही नजर आता है.
हिज्बुल्लाह ने इजरायली सैनिकों पर दागे ड्रोन, IDF ने भी किया पलटवार
हिज्बुल्लाह ने दक्षिण लेबनान में इजरायली सैनिकों को निशाना बनाकर हमला कर दिया. इसके बाद इजरायली सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक ड्रोन को मार गिराया. इस हमले को इजरायली सेना ने सीजफायर और समझौतों का उल्लंघन बताया है.
Walking vs Running : वेट लॉस के लिए दोनों में से कौन सा है बेहतर?
वजन कम करने के लेकर अक्सर लोग परेशान रहते हैं. उन्हें समझ नहीं आता रहता है कि आखिर वे अपना वजन कैसे कम करें. कई लोग वजन कम करने के लिए रनिंग और कुछ लोग वॉकिंग का सहारा लेते हैं. यहां जानते हैं दोनों में से कौन सा बेहतर है?
पर्दे पर देवर भाभी की जोड़ी की बात आती है तो श्रीदेवी और अनिल कपूर का नाम सबसे पहले आता है, जिन्होंने कई फिल्मों में काम किया. लेकिन आज हम उनकी एक 39 साल पुरानी सुपरहिट फिल्म के बारे में बताने वाले हैं
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कथित जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत के बाद हड़कंप मच गया. घटना के बीच 'बाम्बे व्हिस्की' नाम से कथित नकली शराब की शिकायत पर आबकारी विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है. पुलिस और प्रशासन मामले की जांच में जुटे हैं.
झारखंड की सियासत में दुखद संयोग, साढ़े 3 साल में राज्य ने खोए 3 शिक्षा मंत्री
Jharkhand Minister Sudivya Sonu: झारखंड में पिछले साढ़े तीन सालों में 3 मंत्रियों के असमय निधन से राज्य के शिक्षा विभाग में एक दुखद संयोग बना है. क्योंकि यह तीनों मंत्री शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
कुछ लोग 'नाराज फूफा', SRCC से पीएम मोदी का विपक्ष पर हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में छात्रों को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला है. लगभग उन्होंने लाल किले की प्राचीर से दिए गए अपने 'दिमागी नक्सल' वाले बयान का भी जिक्र किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जैसे होम्योपैथी की छोटी सी गोली शुरू में बीमारी को थोड़ा उभारती है और फिर उसका जड़ से इलाज करती है, वैसे ही लाल किले से दी गई उनकी होम्योपैथी की गोली का असर दिख रहा है. इस बयान के बाद सारे दिमागी नक्सल एक-एक करके बाहर आ रहे हैं और जनता के सामने उनका असली चेहरा उजागर हो रहा है.
हिंदी सिनेमा में प्यार और मेहंदी का रिश्ता पुराना है. हाथों में मेहंदी रचने के साथ उसमें अपने प्रिय का नाम छिपाने की परंपरा और उससे जुड़ी शरारतों को हिंदी फिल्मों और गानों में भी कई बार खूबसूरती से पेश किया गया है.
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डीयूएसयू) के चुनाव 18 सितंबर को होंगे और मतों की गिनती अगले दिन होगी. डीयू प्रशासन ने चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, नॉर्थ और साउथ कैंपस और ढाका छात्रावास में करीब 600 नए सीसीटीवी लगाए गए हैं.
300 यूनिट फ्री बिजली, इस स्कीम से 19 लाख घरों का बिजली बिल 'Zero'
PM Surya Ghar Muft Bijli Yojna: सरकार की इस योजना के तहत अपने घरों पर सोलर पैनल इंस्टॉल कराने वालों को 300 यूनिट फ्री बिजली का लाभ को मिलता ही है, बल्कि आने वाले खर्च में 78,000 रुपये तक की सब्सिडी भी सरकार देती है.
'टीम 55 पर ढेर हो गई...', शेफाली को सेंडऑफ देकर घिरीं फातिमा
भारतीय टीम पहले ही विमेंस एशिया कप के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी थी. भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ लगातार पांचवां विमेंस टी20 इंटरनेशनल मुकाबला जीता है. दूसरी ओर, पाकिस्तानी टीम के लिए सेमीफाइनल की राह अब उसके आखिरी ग्रुप मैच पर निर्भर है.
पीडियाट्रिशियन बताती हैं, अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) के मुताबिक, एक साल से छोटे बच्चे को सुलाते समय हमेशा पीठ के बल यानी बैक पर लिटाना चाहिए. आइए जानते हैं बच्चे को करवट लेकर सुलाना चाहिए या नहीं-
गद्दे के नीचे भूलकर भी न रखें 5 चीजें, घेर लेगी गरीबी!
Vastu Tips: गद्दे के नीचे कुछ चीजें रखना वास्तु के अनुसार शुभ नहीं माना जाता. जानें वे 5 चीजें कौन-सी हैं, जिन्हें बेड के नीचे रखने से बचना चाहिए.
Indore-Hyderabad Expressway: इंदौर से हैदराबाद का सफर अब 10 घंटे में पूरा हो जाएगा. क्योंकि मध्य प्रदेश की महाराष्ट्र और तेलंगाना तक अब सीधी मजबूत कनेक्टिविटी होने वाली है.
धधका और समंदर में डूबा टैंकर, US ने उड़ाया ईरान का मजाक-VIDEO
अमेरिकी हमले के बाद ओमान की खाड़ी में डूबे ईरानी तेल टैंकर का वीडियो CENTCOM ने जारी किया है. वहीं, ईरान ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बताया है.
Kerala: Suprabhaatham ने की Kanthapuram की तरफदारी, VD Satheesan पर उठाए सवाल
तिरुवनंतपुरम, छह सितंबर समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के ईके सुन्नी गुट के मुखपत्र ‘सुप्रभातम’ ने एपी सुन्नी गुट के प्रमुख एवं इस्लामी विद्वान कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार के खिलाफ दिए गए मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के बयानों की कड़ी आलोचना की है। सुप्रभातम ने अपने संपादकीय में कहा कि सतीशन ने महिलाओं को लेकर कंथापुरम की विवादित टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया कुछ मुस्लिम लोगों द्वारा उन्हें सुनाई गई ‘‘अंधों और हाथी’’ वाली कहानी के अनुभव के आधार पर तैयार की थी। संपादकीय में कहा गया है, ‘‘वे पैगंबर को भी सही तरीके से समझने में विफल रहे, जो ऐसे दौर से मुक्ति दिलाने वाले के रूप में आए थे, जब महिलाओं के साथ गुलामों जैसा व्यवहार किया जाता था और बच्चियों के जन्म लेते ही उन्हें जिंदा दफन कर दिया जाता था।’’उल्लेखनीय है कि सतीशन ने कंथापुरम की उस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘‘बहुत बड़ा विनाश’’ होगा। हालांकि, ‘सुप्रभातम’ के संपादकीय में कहा गया कि कंथापुरम को अपने धार्मिक केंद्र में इस तरह के विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है, ठीक उसी तरह जैसे सतीशन को उनकी आलोचना करने की स्वतंत्रता है। कंथापुरम के लिए समर्थन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह एपी सुन्नी गुट के प्रमुख हैं, जिसके समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष जिफरी मुथुकोया थंगल के नेतृत्व वाले ईके सुन्नी गुट से मतभेद हैं। संपादकीय में सतीशन पर व्यापक राजनीतिक हमला भी किया गया है और कई मुद्दों पर उनके रिकॉर्ड एवं रुख पर सवाल उठाए गए। इसमें सतीशन द्वारा शबरिमला में युवतियों के प्रवेश का विरोध किए जाने का उल्लेख किया गया और इसकी तुलना महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर उनके मौजूदा रुख से की गई। साथ ही मुनंबम वक्फ भूमि विवाद और पीएम श्री योजना को लेकर सतीशन के रुख की भी आलोचना की गई। संपादकीय में कहा गया है कि सतीशन करीब 25 वर्षों से विधायक रहे हैं, लेकिन इस दौरान कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की सरकार के 10 वर्ष तक सत्ता में रहने के बावजूद वह कभी मंत्री नहीं बन पाए। संपादकीय में सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के बीच तुलना भी दिखाई दी। इसमें कहा गया कि सतीशन रोजाना 75 पन्ने पढ़ते हैं, लेकिन उन्होंने कभी कोई उपन्यास नहीं लिखा। इसके विपरीत, मुख्यमंत्री पद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले चेन्निथला ने ‘नियोगम’ (यानी नियति) नाम से एक उपन्यास लिखा है। संपादकीय में कहा गया है, ‘‘रमेश चेन्निथला ने यह नहीं बताया है कि वह रोज कितने पन्ने पढ़ते हैं लेकिन उन्होंने ‘नियोगम’ नाम का एक उपन्यास जरूर लिखा है।’’‘नियोगम’ उपन्यास का जिक्र केवल साहित्यिक संदर्भ नहीं था, बल्कि इसके जरिए संपादकीय ने संभवतः रमेश चेन्निथला की मुख्यमंत्री पद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की ओर भी इशारा किया।
जीप से बंधे एक शख्स की पुलिस ने ताबड़तोड़ पिटाई की. पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. मामला गुजरात के भावनगर का है. पुलिस ने ऐसी सजा क्यों दी, समझें पूरी कहानी.
बिहारी स्टाइल में बनाएं बैंगन बड़ी की चटपटी सब्जी, रेसिपी है आसान
Bihari Style Baingan Badi Sabji Recipe: अगर आप रोज-रोज एक जैसी सब्जी खाकर हो गए हैं बोर तो और कुछ अलग खाना चाहते हैं तो इस बार ट्राई करें बिहारी स्टाइल बैंगन बड़ी की चटपटी सब्जी. बैंगन और उड़द दाल की बड़ी से बनने वाली यह सब्जी सरसों के तेल और मसालों की वजह से स्वाद में बेहद खास लगती है.
यूपी में बारिश-बाढ़ का कहर, सिस्टम की लापरवाही ने बढ़ाई मुसीबत
बारिश... बाढ़... और बदइंतजामी! उत्तर प्रदेश में कुदरत के कहर के साथ सिस्टम की लापरवाही ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कहीं पानी में डूबकर मासूमों की मौत हो रही है, कहीं बाढ़ घरों में घुस चुकी है... तो कहीं घाट तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है. देखिए यूपी में बारिश और बाढ़ की ये तस्वीरें.
देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों को 24वीं किस्त की प्रतीक्षा: जानिए कब ट्रांसफर होंगे ₹2,000
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) देश के अन्नदाताओं को प्रत्यक्ष वित्तीय संबल प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और सफल जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता ₹2,000 की तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है। योजना की 23वीं किस्त का सफल वितरण जून 2026 में किया गया था, जिसके तहत 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग ₹18,880 करोड़ की धनराशि भेजी गई थी। अब देश भर के करोड़ों लाभार्थी किसान अगस्त-नवंबर 2026 की चार-मासिक अवधि के लिए 24वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, आगामी त्योहारी सीजन (दशहरा और दिवाली) से पूर्व अक्टूबर माह के दौरान 24वीं किस्त की राशि किसानों के खातों में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर किए जाने की पूरी संभावना है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि यह राशि केवल उन्हीं किसानों को प्राप्त होगी जिनके दस्तावेजों का शत-प्रतिशत सत्यापन पूरा हो चुका है। यदि किसी किसान के खाते में आधार सीडिंग या ई-केवाईसी लंबित है, तो उसका नाम लाभार्थी सूची से बाहर किया जा सकता है।e-KYC क्यों है सबसे अनिवार्य? अधूरी प्रक्रिया वाले खातों में रोक दी जाएगी किस्तपीएम किसान योजना की शुरुआत के समय कई अपात्र और गैर-कृषक व्यक्तियों द्वारा गलत तरीके से लाभ उठाने के मामले सामने आए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, बिचौलिया-मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया था। मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन किसानों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, उनका भुगतान बैंक स्तर पर ही तकनीकी रूप से रोक (Hold) दिया जाएगा।किसान भाई अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित तीन सरल माध्यमों से अपनी ई-केवाईसी पूरी कर सकते हैं:ओटीपी आधारित ऑनलाइन ई-केवाईसी (घर बैठे): सबसे पहले पीएम किसान के आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर जाएं। होमपेज पर 'Farmers Corner' में जाकर 'e-KYC' विकल्प पर क्लिक करें। अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करें और 'Search' पर क्लिक करें। आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर 6 अंकों का ओटीपी (OTP) आएगा, जिसे स्क्रीन पर दर्ज कर सबमिट करते ही आपकी ई-केवाईसी तुरंत पूर्ण हो जाएगी।बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (CSC केंद्र): यदि आपके आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक नहीं है या अंगूठे का निशान काम नहीं कर रहा है, तो आप नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC / सहज जन सेवा केंद्र) पर जाकर बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर के जरिए अपनी ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए संचालक को मात्र ₹15 का सरकारी शुल्क देय होता है।चेहरे से सत्यापन (Face Authentication via PM-KISAN App): जिन बुजुर्ग किसानों के फिंगरप्रिंट मिट चुके हैं या मोबाइल ओटीपी नहीं आ पा रहा है, उनके लिए सरकार ने आधिकारिक PM KISAN GoI मोबाइल ऐप पर 'फेस ऑथेंटिकेशन' की अत्याधुनिक सुविधा दी है। ऐप में लॉगिन कर किसान अपने स्मार्टफोन के कैमरे से अपना चेहरा स्कैन करके बिना किसी ओटीपी या बायोमेट्रिक डिवाइस के अपनी ई-केवाईसी पूरी कर सकते हैं।'नो' (NO) हुआ तो नहीं आएंगे पैसे: लैंड सीडिंग और NPCI बैंक आधार मैपिंग की अनिवार्य शर्तेंकेवल ई-केवाईसी कराने से ही किस्त की गारंटी नहीं मिलती। पीएम किसान पोर्टल पर तकनीकी कारणों से लाखों किसानों की किस्तें इसलिए अटक जाती हैं क्योंकि उनके प्रोफाइल स्टेटस में दो अन्य महत्वपूर्ण शर्तें पूरी नहीं होतीं। यदि आप चाहते हैं कि 24वीं किस्त बिना किसी रुकावट के आपके खाते में आए, तो इन दो बिंदुओं की जांच तुरंत करें:भूलेख अंकन (Land Seeding): आपकी कृषि भूमि के स्वामित्व का रिकॉर्ड राज्य के राजस्व रिकॉर्ड और पीएम किसान डेटाबेस से लिंक होना अनिवार्य है। यदि आपके स्टेटस में 'Land Seeding: No' दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि राजस्व विभाग में आपकी खतौनी या जमीन का सत्यापन अटका हुआ है। इसके लिए आपको अपनी जमीन की अद्यतन खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति अपने तहसील के लेखपाल (पटवारी) या उप-कृषि निदेशक कार्यालय में जमा कराकर पोर्टल पर 'Yes' अपडेट कराना होगा।बैंक खाता आधार सीडिंग और NPCI मैपिंग: कई किसान यह समझते हैं कि उनके बैंक खाते में आधार कार्ड लगा है, तो काम पूरा हो गया। लेकिन सरकारी सब्सिडी और डीबीटी का पैसा केवल उन्हीं बैंक खातों में पहुंचता है जो नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के सर्वर पर 'Aadhaar Payment Bridge System' (APBS) से मैप होते हैं। यदि आपका बैंक खाता एनपीसीआई से सक्रिय रूप से लिंक नहीं है, तो 'Payment Failed' का एरर आ जाएगा। इसके लिए अपनी बैंक शाखा में जाकर 'DBT Aadhaar Mandate Form' भरें या इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) में नया डीबीटी सक्षम खाता खुलवाएं।मोबाइल से 2 मिनट में कैसे चेक करें अपना बेनिफिशियरी स्टेटस?पीएम किसान योजना के तहत अपनी पात्रता और पिछली किस्तों का पूरा रिकॉर्ड देखने के लिए आपको किसी दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं है। आप अपने स्मार्टफोन से ही 2 मिनट के भीतर अपना लाइव स्टेटस चेक कर सकते हैं:सबसे पहले अपने ब्राउज़र में आधिकारिक पोर्टल https://pmkisan.gov.in खोलें।होमपेज पर दाईं ओर दिए गए 'Farmers Corner' सेक्शन में जाएं और 'Know Your Status' (अपना स्टेटस जानें) विकल्प पर क्लिक करें।अब निर्धारित बॉक्स में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर (Registration Number) और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड दर्ज करें।यदि आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर याद नहीं है, तो ऊपर दिए गए 'Know Your Registration Number' लिंक पर क्लिक करें। वहां अपना आधार नंबर या मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी सत्यापित करें, जिससे आपका रजिस्ट्रेशन नंबर स्क्रीन पर आ जाएगा।रजिस्ट्रेशन नंबर डालने के बाद 'Get Data' बटन पर क्लिक करें।आपकी स्क्रीन पर आपका संपूर्ण विवरण खुल जाएगा। यहां मुख्य रूप से 'Eligibility Status' टैब को खोलकर देखें:Land Seeding: YES होना चाहिएe-KYC Status: YES होना चाहिएAadhaar Bank Account Seeding Status: YES होना चाहिएयदि इन तीनों कॉलम के आगे हरे रंग का 'YES' लिखा हुआ है, तो आपको निश्चिंत रहने की जरूरत है; 24वीं किस्त जारी होते ही ₹2,000 सीधे आपके खाते में क्रेडिट हो जाएंगे।अपने गांव की नई 'लाभार्थी सूची' (Beneficiary List) में ऐसे देखें अपना नामकई बार तकनीकी जांच के दौरान अपात्र पाए जाने पर नाम सूची से हटा दिए जाते हैं। अपने ग्राम पंचायत के सभी वैध लाभार्थियों की सूची देखने की प्रक्रिया इस प्रकार है:पीएम किसान पोर्टल के 'Farmers Corner' में जाकर 'Beneficiary List' पर क्लिक करें।ड्रॉप-डाउन मेन्यू से अपने राज्य (State), जिला (District), उप-जिला / तहसील (Sub-District), ब्लॉक (Block) और गांव (Village) का चयन करें।इसके बाद 'Get Report' पर क्लिक करें।आपके गांव के सभी पात्र किसानों की वर्णमाला (Alphabetical) क्रम में पूरी सूची स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी। यदि इस सूची में आपका नाम मौजूद है, तो आपकी किस्त सुरक्षित है। यदि नाम गायब है, तो तुरंत अपने ब्लॉक कृषि अधिकारी से संपर्क कर त्रुटि सुधार के लिए आवेदन करें।किस्त अटकने पर घबराएं नहीं: समाधान, किसान ई-मित्र और हेल्पलाइन नंबर्सयदि पिछली कोई किस्त नहीं आई है या स्टेटस में कोई त्रुटि दिखाई दे रही है, तो किसान भाई केंद्र सरकार के आधिकारिक सहायता तंत्र का उपयोग कर सकते हैं:टोल-फ्री हेल्पलाइन: किसी भी तकनीकी या भुगतान संबंधी समस्या के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 155261 अथवा 1800-11-5526 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त केंद्रीय हेल्पडेस्क का टेलीफोन नंबर 011-24300606 भी कार्यशील है।एआई चैटबॉट 'किसान ई-मित्र' (Kisan e-Mitra): पोर्टल पर उपलब्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट 'किसान ई-मित्र' से किसान अपनी स्थानीय भाषा (हिंदी, बांग्ला, तमिल, मराठी आदि) में बोलकर या लिखकर अपनी किस्त और आवेदन की ताजा स्थिति तुरंत जान सकते हैं।ऑनलाइन ग्रीवेंस (Grievance Redressal): पोर्टल पर 'Helpdesk' विकल्प के माध्यम से किसान अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं, जिसका निस्तारण जिला कृषि विभाग द्वारा निर्धारित समयसीमा में किया जाता है।
आशुतोष ब्रह्मचारी को बड़ा झटका, पॉक्सो कोर्ट ने दिया FIR का दायरा बढ़ाने का आदेश
आशुतोष ब्रह्मचारी पर पहले से दर्ज FIR 58/2026 का दायरा बढ़ाते हुए व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं. कोर्ट ने मुकुंदानंद गिरि को सभी दस्तावेजी, डिजिटल और ऑडियो-विजुअल साक्ष्य पुलिस को देने को कहा है. मामला जनवरी 2026 में नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़ा है.
भारत को दुनिया भर में केवल सांस्कृतिक या भाषाई विविधताओं के लिए ही नहीं, बल्कि एक 'उपमहाद्वीप' (Subcontinent) का दर्जा इसीलिए दिया जाता है क्योंकि इसका भूगोल किसी एक देश जैसा नहीं, बल्कि पूरे महाद्वीप जैसा है। अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि जब कश्मीर के गुलमर्ग, सोनमर्ग या पहलगाम की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी के चलते पारा शून्य के करीब पहुंच जाता है, ठीक उसी समय देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाके बादलों की गड़गड़ाहट और मूसलाधार बारिश से तरबतर हो रहे होते हैं। वहीं चंद सौ किलोमीटर पूर्व की ओर बढ़ें, तो बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के मैदान उफनती नदियों की बाढ़, 40 डिग्री जैसी चुभने वाली गर्मी और 85 से 90 प्रतिशत की दमघोंटू उमस (Humidity) से जूझ रहे होते हैं। पहली नजर में यह विरोधाभास किसी कुदरती करिश्मे जैसा लगता है, लेकिन मौसम विज्ञान और भौतिक भूगोल (Physical Geography) के चश्मे से देखें तो यह भारत की विशिष्ट भू-आकृति, वायुमंडलीय दबाव और मानसूनी पवन तंत्र का एक पूरी तरह सुनियोजित वैज्ञानिक संतुलन है।अक्षांशीय विस्तार और समुद्र से दूरी: उष्णकटिबंध से शीतोष्ण कटिबंध का सफरभारत के मौसम में इस भारी अंतर की पहली बुनियादी वजह इसका विशाल अक्षांशीय फैलाव (Latitudinal Extent) है। भारत दक्षिण में 84' उत्तरी अक्षांश (कन्याकुमारी) से शुरू होकर उत्तर में 376' उत्तरी अक्षांश (कश्मीर और लद्दाख) तक लगभग 3,214 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। कर्क रेखा (Tropic of Cancer) देश के ठीक बीचों-बीच से होकर गुजरती है, जो भारत को दो अलग-अलग जलवायु कटिबंधों में बांट देती है। देश का दक्षिणी और मध्य हिस्सा उष्णकटिबंधीय (Tropical Zone) है, जहां सालभर तेज सौर ऊर्जा और भारी तापमान रहता है, जबकि उत्तरी भाग उपोष्ण और शीतोष्ण (Sub-Tropical and Temperate Zone) क्षेत्र में आता है। इसके अलावा, समुद्र से दूरी (Continentality) का प्रभाव भी मौसम को बदलता है। समुद्र के करीब स्थित तटीय इलाकों में समुद्री हवाओं के कारण तापमान का उतार-चढ़ाव संतुलित रहता है, जबकि देश के भीतरी मैदानी और पर्वतीय हिस्से समुद्र से हजारों किलोमीटर दूर होने के कारण महाद्वीपीय जलवायु का सामना करते हैं, जहां मौसमी चरम सीमाएं (Extreme Weather Events) देखने को मिलती हैं।ऊंचाई का नियम (Lapse Rate): कश्मीर की वादियों में क्यों जमती है बर्फ?कश्मीर और लद्दाख में समय से पहले होने वाली बर्फबारी या कड़ाके की ठंड का सबसे बड़ा कारण भूभौतिकी का 'नॉर्मल लैप्स रेट' (Normal Lapse Rate) है। विज्ञान का यह सीधा नियम कहता है कि समुद्र तल से जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, वायुमंडलीय दबाव कम होता जाता है और प्रति 1,000 मीटर (1 किलोमीटर) की चढ़ाई पर तापमान औसतन 6.5 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। दिल्ली और पटना जहां समुद्र तल से मात्र 150 से 210 मीटर की ऊंचाई पर मैदानी बेसिन में स्थित हैं, वहीं कश्मीर घाटी की औसत ऊंचाई 1,600 से 2,200 मीटर है, जबकि इसके आसपास की पीर पंजाल और जांस्कर पर्वत श्रृंखलाएं 3,500 से 5,000 मीटर से भी अधिक ऊंची हैं। जब भूमध्य सागर से उठने वाला कोई पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) या मानसूनी नमी की ठंडी धाराएं इन ऊंची पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो वहां मौजूद अत्यंत कम तापमान के कारण जलवाष्प पानी की बूंदों के बजाय सीधे हिम कणों (Snow Crystals) में संघनित (Condense) हो जाती है, जिसे पर्वतीय वर्षा या स्नोफॉल कहा जाता है।मानसूनी ट्रफ की धुरी: दिल्ली-एनसीआर में कैसे होती है मूसलाधार बारिश?राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में होने वाली जोरदार बारिश के पीछे मानसूनी ट्रफ (Monsoon Trough) का सीधा हाथ होता है। मानसूनी ट्रफ वास्तव में कम हवा के दबाव (Low Pressure) की एक लंबी अदृश्य पट्टी होती है, जो पाकिस्तान के थार रेगिस्तान से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली होती है। यह ट्रफ हमेशा स्थिर नहीं रहती, बल्कि उत्तर और दक्षिण की ओर दोलन (Oscillate) करती रहती है। जब भी बंगाल की खाड़ी या मध्य भारत से कोई डिप्रेशन (निम्न दबाव का चक्रवात) उत्तर भारत की ओर बढ़ता है, तो यह मानसूनी ट्रफ को खींचकर दिल्ली-हरियाणा के ठीक ऊपर ला खड़ा करता है। इस स्थिति में अरब सागर से आने वाली नमी भरी पश्चिमी हवाएं और बंगाल की खाड़ी से आने वाली पूर्वी पुरवैया हवाएं दिल्ली के आकाश पर आपस में टकराती हैं। हवाओं के इस शक्तिशाली अभिसरण (Convergence) के चलते घने क्यूम्युलोनिम्बस (Cumulonimbus) बादल बनते हैं, जो कुछ ही घंटों में दिल्ली-एनसीआर की सड़कों को जलमग्न कर देने वाली तेज बौछारें बरसाते हैं।नेपाल की पहाड़ियां और बंगाल की खाड़ी का प्रभाव: बिहार में बाढ़ और उमस का दोहरा वारबिहार की स्थिति देश के अन्य राज्यों से पूरी तरह अलग और भौगोलिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। बिहार एक कटोरेनुमा मैदानी क्षेत्र है, जिसके उत्तर में नेपाल का विशाल हिमालयी जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) मौजूद है। जब मानसून सक्रिय होता है, तो बंगाल की खाड़ी से चलने वाली नम हवाएं सबसे पहले बिना किसी बड़ी रुकावट के गंगा के मैदानों से होते हुए बिहार और नेपाल की तलहटी (तराई) से टकराती हैं। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में जब भीषण बारिश होती है, तो वहां की ढलानों से लाखों क्यूसेक पानी तेज गति से बहते हुए कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों के जरिए सीधे उत्तरी बिहार के मैदानी इलाकों में प्रवेश कर जाता है। मैदानी ढलान बहुत कम होने के कारण यह पानी तेजी से आगे नहीं निकल पाता और विशाल बाढ़ का रूप ले लेता है। वहीं दूसरी ओर, बिहार में बाढ़ के पानी और नदी बेसिन से उठने वाली लगातार नमी जब 35 से 38 डिग्री की धूप के संपर्क में आती है, तो हवा में सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) 85 से 95 प्रतिशत के पार पहुंच जाती है। यही कारण है कि वहां हवा का चलना रुकते ही शरीर से पसीना सूखना बंद हो जाता है और असहनीय, चिपचिपी उमस का माहौल बन जाता है।वायुमंडलीय प्रणालियों का महा-टकराव: भारत की विविधता ही उसकी पहचान हैभारत का मौसम विज्ञान इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे तीन अलग-अलग वायुमंडलीय प्रणालियां एक ही समय में एक ही भूभाग पर सक्रिय रह सकती हैं। उत्तर में हिमालय एक विशाल प्राकृतिक दीवार की तरह खड़ा है, जो साइबेरिया से आने वाली बर्फीली हवाओं को रोककर उत्तर भारत के मैदानों को अत्यधिक जमने से बचाता है और साथ ही मानसूनी बादलों को देश से बाहर जाने से रोककर भरपूर पानी बरसाने पर मजबूर करता है। वहीं, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली दोहरी समुद्री शाखाएं देश के पूर्वी और पश्चिमी छोरों को अलग-अलग समय पर नमी देती हैं। यही जटिल भौगोलिक ताना-बाना तय करता है कि एक ही दिन भारत का एक नागरिक कश्मीर में गर्म फेरन और कांगड़ी का सहारा ले रहा होता है, दिल्ली का मुसाफिर छाता और रेनकोट संभाल रहा होता है, और बिहार का किसान अपनी नाव पर बैठकर उमस भरे बादलों से थोड़ी राहत की उम्मीद कर रहा होता है। यह विविधता किसी मौसम की विसंगति नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा भारत के नक्शे पर खींचा गया एक अनूठा और संतुलित चक्र है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्लेन क्रैश, 2 लोगों की हुई मौत, कैसे हुआ हादसा?
California Plane Crash:
कभी पता ही नहीं था क्या होती है सांसद निधि, अब अफसरों पर भड़कीं कंगना रनौत; चुनाव कनेक्शन
कंगना रनौत ने सांसद निधि खर्च ना करने को लेकर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। अगले साल यानी 2027 में हिमाचल प्रदेश मेंभी चुनाव होने हैं। ऐसे में सांसदों पर काम को लेकर भी प्रेशर है।
दिवाली और छठ पर घर जाने की होड़: रेलवे में 60 दिन के नियम से शुरू हुई टिकटों की मारामारी
देश के सबसे बड़े त्योहारों—धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के पावन अवसर पर अपने पैतृक घर जाने वाले करोड़ों प्रवासियों के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railways) में टिकट बुकिंग का महासंग्राम शुरू हो चुका है। दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों में रोजी-रोटी कमाने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के नागरिकों के लिए त्योहारों पर घर पहुंचना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता।रेलवे द्वारा लागू किए गए 60 दिन के अग्रिम आरक्षण अवधि (Advance Reservation Period - ARP) नियम के तहत दिवाली सप्ताह की सामान्य टिकट बुकिंग विंडो आधिकारिक रूप से खुल चुकी है। सुबह 8:00 बजते ही आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर लाखों यूजर्स एक साथ लॉगिन कर रहे हैं, जिसके चलते दिल्ली-पटना, मुंबई-गोरखपुर, दिल्ली-दरभंगा, सूरत-वाराणसी और हावड़ा-गया जैसे अत्यधिक व्यस्त रेल मार्गों की प्रमुख ट्रेनों (जैसे संपूर्ण क्रांति, वैशाली एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति, पूर्वा एक्सप्रेस और महाबोधि एक्सप्रेस) में महज 2 से 3 मिनट के भीतर स्लीपर और एसी श्रेणियों की सभी सीटें फुल हो रही हैं और वेटिंग लिस्ट 200 के पार पहुंच रही है।दिवाली 2026 का पूरा बुकिंग कैलेंडर: धनतेरस से भाई दूज तक कब खुलेंगे टिकट?इस वर्ष दिवाली का पांच दिवसीय दीपोत्सव 6 नवंबर 2026 (धनतेरस) से शुरू होकर 10 नवंबर 2026 (भाई दूज) तक मनाया जाएगा। भारतीय रेलवे के 60 दिवसीय आरक्षण नियम के अनुसार, जिस दिन ट्रेन अपने प्रारंभिक स्टेशन (Origin Station) से चलती है, उससे ठीक 60 दिन पहले सुबह 8:00 बजे सामान्य कोटे की बुकिंग शुरू होती है।दिवाली के प्रमुख दिनों के लिए टिकट बुकिंग की तिथियां इस प्रकार निर्धारित हैं:5 नवंबर 2026 की यात्रा (दिवाली से पूर्व प्रस्थान): इस तारीख की यात्रा के लिए बुकिंग विंडो आज 6 सितंबर 2026 को सुबह 8:00 बजे से खुल चुकी है।6 नवंबर 2026 की यात्रा (धनतेरस): धनतेरस के दिन यात्रा करने के लिए टिकट बुकिंग कल यानी 7 सितंबर 2026 की सुबह 8:00 बजे शुरू होगी।7 नवंबर 2026 की यात्रा (छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी): इस दिन की यात्रा के टिकट 8 सितंबर 2026 की सुबह 8:00 बजे से बुक किए जा सकेंगे।8 नवंबर 2026 की यात्रा (बड़ी दिवाली / लक्ष्मी पूजन): मुख्य दिवाली के दिन ट्रेन पकड़ने के लिए बुकिंग विंडो 9 सितंबर 2026 को सुबह 8:00 बजे खुलेगी।9 नवंबर 2026 की यात्रा (गोवर्धन पूजा / अन्नकूट): इस तारीख के टिकट 10 सितंबर 2026 को बुक होंगे।10 नवंबर 2026 की यात्रा (भाई दूज / यम द्वितीया): भाई दूज पर घर पहुंचने के लिए बुकिंग 11 सितंबर 2026 की सुबह 8:00 बजे सक्रिय होगी।छठ पूजा 2026 की बुकिंग विंडो कब खुलेगी? नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक का सटीक टाइम-टेबलपूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के सबसे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक महापर्व 'छठ पूजा' पर ट्रेनों में यात्रियों की सबसे भीषण भीड़ उमड़ती है। चार दिनों तक चलने वाला यह पावन अनुष्ठान इस वर्ष 13 नवंबर 2026 से 16 नवंबर 2026 तक संपन्न होगा। छठ व्रतियों और उनके परिजनों को समय पर घर पहुंचाने के लिए 60 दिन पहले की बुकिंग तिथियां बेहद महत्वपूर्ण हैं:13 नवंबर 2026 (पहला दिन - नहाय-खाय): छठ पूजा के पहले दिन घर पहुंचने के लिए टिकटों की बुकिंग 14 सितंबर 2026 की सुबह 8:00 बजे खुलेगी।14 नवंबर 2026 (दूसरा दिन - खरना / लोहंडा): खरना के दिन की यात्रा के लिए आरक्षण विंडो 15 सितंबर 2026 को सुबह 8:00 बजे खुलेगी।15 नवंबर 2026 (तीसरा दिन - संध्या अर्घ्य / मुख्य पूजा): डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के दिन यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बुकिंग 16 सितंबर 2026 की सुबह 8:00 बजे शुरू होगी।16 नवंबर 2026 (चौथा दिन - उषा अर्घ्य / पारण): उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत के समापन दिवस के लिए बुकिंग 17 सितंबर 2026 को खुलेगी।छठ पूजा समाप्त होने के बाद 17 नवंबर से 21 नवंबर 2026 के बीच काम पर लौटने (Return Journey) का भारी दबाव रहेगा। वापसी यात्रा के लिए 60 दिन पहले का आरक्षण 18 सितंबर से 22 सितंबर 2026 के बीच सुबह 8:00 बजे से खुलेगा।IRCTC पर 100% कंफर्म टिकट पाने के 5 अचूक तरीके: सेकंड्स की देरी भी पड़ेगी भारीत्योहारी सीजन में आईआरसीटीसी पर एक-एक सेकंड की कीमत होती है। बुकिंग विंडो खुलने के 60 से 90 सेकंड के भीतर हजारों सीटें गायब हो जाती हैं। यदि आप भी कंफर्म टिकट पाना चाहते हैं, तो इन 5 तकनीकी हैक्स को अनिवार्य रूप से अपनाएं:1. IRCTC 'Master List' फीचर का पहले से इस्तेमाल: टिकट बुकिंग के समय नाम, उम्र, जेंडर और बर्थ प्रेफरेंस टाइप करने में कम से कम 30 से 40 सेकंड का समय बर्बाद होता है। इससे बचने के लिए बुकिंग खुलने से एक दिन पहले ही आईआरसीटीसी प्रोफाइल में जाकर 'My Profile > Master List' में सभी यात्रियों का विवरण पहले से सुरक्षित (Pre-Save) कर लें। बुकिंग के समय केवल 'Add Existing' पर क्लिक करते ही एक सेकंड में सारे यात्रियों का नाम फॉर्म में भर जाएगा।2. IRCTC e-Wallet से करें पेमेंट: पेमेंट गेटवे के धीमे सर्वर और बैंक से ओटीपी (OTP) आने में होने वाली देरी ही अक्सर टिकट को कंफर्म से वेटिंग में धकेल देती है। इससे बचने के लिए अपने आईआरसीटीसी ई-वॉलेट (IRCTC e-Wallet) में पहले से पैसे लोड करके रखें। ई-वॉलेट से पेमेंट करने पर किसी बैंक गेटवे पर रीडायरेक्ट नहीं होना पड़ता और सीधे प्रोफाइल पासवर्ड/ट्रांजैक्शन पिन डालकर मात्र 5 सेकंड में भुगतान पूरा हो जाता है। इसके अलावा यूपीआई क्यूआर कोड (Auto-scan UPI) भी कार्ड पेमेंट की तुलना में काफी तेज काम करता है।3. 7:55 AM पर लॉगिन करें और हाई-स्पीड इंटरनेट रखें: ठीक सुबह 8:00 बजे लॉगिन करने की गलती न करें, क्योंकि उस समय सर्वर पर भारी ट्रैफिक के चलते कैप्चा लोड नहीं होता या टाइम-आउट एरर आ जाता है। हमेशा सुबह 7:55 से 7:57 के बीच लॉगिन कर लें और ट्रेन लिस्ट खोलकर बैठ जाएं। ठीक 8:00:01 बजे सीट रिफ्रेश करके सीधे 'Book Now' पर क्लिक करें।4. 'VIKALP' (विकल्प) स्कीम का चयन अवश्य करें: टिकट बुक करते समय फॉर्म में नीचे दिए गए 'Vikalp' (Alternate Train Accommodation Scheme) विकल्प पर टिक करें। यदि आपकी मुख्य ट्रेन में टिकट वेटिंग में चला जाता है, तो रेलवे का ऑटोमेटेड सिस्टम उसी रूट पर जाने वाली किसी अन्य स्पेशल या रेगुलर ट्रेन में खाली बची बर्थ पर आपको बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कंफर्म सीट अलॉट कर देता है।5. रूट ट्विकिंग और बोर्डिंग स्टेशन का बदलाव: यदि आपके मुख्य स्टेशन से टिकट उपलब्ध नहीं है, तो ट्रेन के ओरिजिन (प्रारंभिक स्टेशन) या उससे एक स्टेशन पहले से टिकट बुक करने का प्रयास करें और अपना बोर्डिंग पॉइंट (Boarding Point) अपने नजदीकी स्टेशन पर सेट कर लें। रेलवे नियमों के अनुसार बोर्डिंग स्टेशन बदलने से टिकट की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता, जबकि लंबी दूरी के कोटे में कंफर्म सीट मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।तत्काल और प्रीमियम तत्काल का बैकअप प्लान: जब सामान्य कोटे में न मिले सीटयदि किसी कारणवश 60 दिन पहले की सामान्य बुकिंग में आपकी सीट कंफर्म नहीं हो पाती है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। यात्रियों के पास यात्रा से ठीक 1 दिन पहले खुलने वाले 'तत्काल' (Tatkal) और 'प्रीमियम तत्काल' (Premium Tatkal) कोटे का मजबूत विकल्प मौजूद रहता है:एसी क्लास तत्काल: यात्रा की तारीख से एक दिन पहले सुबह 10:00 बजे एसी (1A, 2A, 3A, 3E, CC) का तत्काल कोटा खुलता है।नॉन-एसी / स्लीपर तत्काल: यात्रा से एक दिन पहले सुबह 11:00 बजे स्लीपर और सेकंड सिटिंग का तत्काल कोटा खुलता है।प्रीमियम तत्काल की सुविधा: प्रीमियम तत्काल कोटे में डायनामिक फेयर (Dynamic Pricing) लागू होता है, जहां मांग के अनुसार किराया बढ़ता है, लेकिन इस कोटे में टिकट मिलने की संभावना सामान्य तत्काल की तुलना में काफी अधिक रहती है क्योंकि दलाल और एजेंट्स इस कोटे को तुरंत बुक नहीं कर पाते।करंट बुकिंग (Current Availability): ट्रेन का पहला चार्ट बनने के बाद (प्रस्थान से 4 घंटे पहले) जो सीटें कैंसिल होती हैं या खाली रह जाती हैं, उन्हें 'करंट बुकिंग' विंडो में 10 से 20 प्रतिशत तक की छूट पर बुक किया जा सकता है।रेलवे चलाएगा सैकड़ों 'फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें': छठ के लिए अतिरिक्त कोच और क्लोन रेक का मास्टरप्लानभारतीय रेलवे बोर्ड ने त्योहारी सीजन में यात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नियमित ट्रेनों में बढ़ती प्रतीक्षा सूची की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लेकर नवंबर के मध्य तक देश भर से 1,000 से अधिक फेरों वाली 'दिवाली और छठ पूजा स्पेशल ट्रेनें' (Festival Special Trains) चलाई जाएंगी। इन स्पेशल ट्रेनों में अधिकांश संख्या गरीब रथ, गति शक्ति और जनसाधारण (अनारक्षित) ट्रेनों की होगी, ताकि सामान्य आय वर्ग के लोग भी सुगमता से यात्रा कर सकें। इसके अतिरिक्त, प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों में 2 से 3 अतिरिक्त स्लीपर व जनरल कोच जोड़े जाएंगे और लंबी दूरी के मुख्य रूटों पर 'क्लोन ट्रेन्स' (Clone Trains) की व्यवस्था भी की जाएगी। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित ट्रेनों में सीट न मिलने की स्थिति में रेलवे द्वारा घोषित की जाने वाली विशेष ट्रेनों के नोटिफिकेशन पर पैनी नजर रखें।
कंगना रनौत की जन्माष्टमी भोग तैयारी में लोगों ने निकाली गलती, एक्ट्रेस बोलीं- खाने पर ध्यान दो
एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत ने उन लोगों को खरी-खोटी सुनाई, जिन्होंने जन्माष्टमी के भोग की तैयारी में गलती बताई थी.
दुनिया के सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप (WhatsApp) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाने की तैयारी पूरी कर ली है। अब तक व्हाट्सएप पर यूजर्स केवल अपनी मूल कंपनी मेटा के इन-हाउस एआई असिस्टेंट 'Meta AI' से ही सवाल-जवाब या तस्वीरें जनरेट करवा सकते थे। लेकिन अब मेटा ने अपनी इस बंद दीवार को गिराने और व्हाट्सएप को एक ओपन एआई इकोसिस्टम में बदलने का फैसला किया है। व्हाट्सएप के आगामी फीचर्स को ट्रैक करने वाली मशहूर टेक वेबसाइट WABetaInfo की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सएप एंड्रॉइड बीटा वर्जन 2.26.35.3 में एक नया 'थर्ड-पार्टी एआई एजेंट्स' (Third-Party AI Agents) सपोर्ट फीचर टेस्ट कर रहा है। इस फीचर के लागू होते ही करोड़ों यूजर्स को गूगल के जेमिनी (Google Gemini), ओपनएआई के चैटजीपीटी (OpenAI ChatGPT) या स्वतंत्र डेवलपर्स द्वारा तैयार किए गए कस्टमाइज्ड एआई एजेंट्स से सीधे व्हाट्सएप चैट में बात करने की आजादी मिल जाएगी। इसका मतलब यह है कि अब अलग-अलग एआई मॉडल्स का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को किसी बाहरी ऐप या वेबसाइट पर स्विच करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि उनका पसंदीदा एआई टूल एक सामान्य व्हाट्सएप चैट की तरह ही उपलब्ध रहेगा।कैसे काम करेगा नया 'एजेंट्स' फीचर? 5 अलग-अलग AI बॉट्स को लिंक करने की मिलेगी आजादीव्हाट्सएप द्वारा तैयार किए जा रहे इस नए आर्किटेक्चर को पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली और व्यवस्थित बनाया गया है। लीक्स और बीटा टेस्टिंग से सामने आई जानकारियों के अनुसार, व्हाट्सएप के मुख्य 'Settings' मेन्यू के भीतर एक नया समर्पित Agents (एजेंट्स) सेक्शन जोड़ा जा रहा है। इस सेक्शन में जाकर यूजर्स अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से बाहरी एआई बॉट्स को अपने व्हाट्सएप अकाउंट से जोड़ सकेंगे। व्हाट्सएप ने शुरुआत में प्रत्येक अकाउंट के लिए अधिकतम 5 थर्ड-पार्टी एआई एजेंट्स को एक साथ लिंक करने की सीमा तय की है। इन पांचों एजेंट्स की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि ये किसी कन्फ्यूजिंग मेन्यू के अंदर छिपे नहीं होंगे, बल्कि जैसे ही आप किसी एजेंट को कनेक्ट करेंगे, आपकी मुख्य चैट लिस्ट में उस एजेंट के नाम से एक बिल्कुल अलग और स्वतंत्र चैट विंडो तैयार हो जाएगी। यूजर अपनी सुविधानुसार प्रत्येक एजेंट को अपनी पसंद का नाम और कस्टम प्रोफाइल फोटो (DP) भी असाइन कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, आप कोडिंग और टेक्निकल मदद के लिए ओपनएआई के एजेंट को अलग चैट में रख सकते हैं, जबकि रियल-टाइम सर्च, ट्रेवल प्लानिंग और फैक्ट-चेकिंग के लिए गूगल के एजेंट को अलग चैट में कस्टमाइज कर सकते हैं।API Key से होगा आसान सेटअप: बिना ऐप बदले मिलेंगी कई AI टूल्स की सुपरपावर्सइस नए फीचर को कनेक्ट करने की तकनीकी प्रक्रिया भी काफी पारदर्शी और सुरक्षित बनाई गई है। व्हाट्सएप सीधे तौर पर किसी थर्ड-पार्टी कंपनी को आपका फोन नंबर देने के बजाय एपीआई की (API Key) आधारित ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करेगा।सबसे पहले यूजर को व्हाट्सएप सेटिंग्स के 'Agents' सेक्शन में जाना होगा और वहां 'Add New Agent' पर क्लिक करना होगा।इसके बाद व्हाट्सएप एक यूनीक सिक्योरिटी एपीआई की जनरेट करेगा।यूजर को उस संबंधित बाहरी सर्विस (जैसे गूगल क्लाउड, ओपनएआई डेवलपर कंसोल या किसी थर्ड-पार्टी एआई प्लेटफॉर्म) के डैशबोर्ड में जाकर यह की दर्ज करनी होगी।जैसे ही कनेक्शन वेरिफाई होगा, वह एआई एजेंट तुरंत आपके व्हाट्सएप के साथ सिंक हो जाएगा और एक्टिवेट हो जाएगा।यदि कभी यूजर को लगता है कि कनेक्शन में कोई समस्या है या वह सुरक्षा कारणों से एक्सेस रीसेट करना चाहता है, तो वह एक क्लिक में पुरानी एपीआई की को रिवोक करके नई की जनरेट कर सकेगा।अगर आप किसी एजेंट को हटाना (Remove) चाहते हैं, तो उसे सेटिंग्स से डिलीट किया जा सकता है; डिलीट करने पर एजेंट डिस्कनेक्ट हो जाएगा, लेकिन आपकी पिछली चैट हिस्ट्री आपके फोन में सुरक्षित बनी रहेगी।प्राइवेसी और सुरक्षा का बड़ा सवाल: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और पर्सनल डेटा पर क्या होगा असर?जब भी किसी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर बाहरी ऐप्स और बॉट्स की एंट्री होती है, तो सबसे पहला सवाल डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी का खड़ा होता है। व्हाट्सएप के आधिकारिक हेल्प सेंटर और बीटा डॉक्यूमेंट्स ने इस संबंध में नियमों को पूरी तरह शीशे की तरह साफ कर दिया है।नो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (No E2EE for AI Chats): व्हाट्सएप ने स्पष्ट किया है कि थर्ड-पार्टी एआई एजेंट्स के साथ की जाने वाली बातचीत पर व्हाट्सएप का पारंपरिक एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (End-to-End Encryption) लागू नहीं होगा। इसका कारण यह है कि आपके द्वारा पूछे गए प्रॉम्प्ट्स और सवालों को प्रोसेस करने के लिए डेटा को थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर (जैसे गूगल या ओपनएआई) के सर्वर पर भेजना अनिवार्य होता है। ये मैसेज मेटा के सुरक्षित रूटिंग सर्वर से होकर डेवलपर तक पहुंचते हैं।पर्सनल चैट्स और कॉल्स पूरी तरह सुरक्षित: यूजर्स को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि यह नियम केवल एआई एजेंट की निजी चैट विंडो तक सीमित रहेगा। आपके दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों के साथ होने वाली सभी सामान्य व्यक्तिगत चैट्स, कॉल्स, फोटोज और वीडियोज पहले की तरह 100% एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड ही रहेंगी।जीरो डेटा एक्सेस पॉलिसी (No Chat/Media Access): जोड़े गए थर्ड-पार्टी एजेंट्स को आपके फोन के अन्य चैट्स, कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो गैलरी या माइक्रोफोन का कोई बैकग्राउंड एक्सेस नहीं मिलेगा। एजेंट केवल उसी डेटा को पढ़ और समझ सकेगा जो आपने खुद उस खास चैट विंडो में टाइप करके भेजा है।ग्रुप चैट्स में नहीं मिलेगी एंट्री: स्पैम और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए बनाए कड़े नियमव्हाट्सएप ने इस नए फीचर को लेकर कुछ कड़े सुरक्षा प्रतिबंध भी तय किए हैं ताकि प्लेटफॉर्म पर स्पैमिंग, ऑटोमेटेड बॉम्बिंग और ग्रुप प्राइवेसी में सेंधमारी को रोका जा सके। कंपनी ने साफ किया है कि थर्ड-पार्टी एआई एजेंट्स को किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप (Group Chats) या कम्युनिटी (Communities) में जोड़ने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। अक्सर ग्रुप्स में कई लोग संवेदनशील पारिवारिक या आधिकारिक बातें साझा करते हैं। यदि ग्रुप में किसी थर्ड-पार्टी बॉट को आने की अनुमति दी जाती, तो अनजाने में अन्य सदस्यों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती थी। इसलिए व्हाट्सएप ने तय किया है कि बाहरी एआई एजेंट्स केवल 'वन-ऑन-वन' (One-on-One) प्राइवेट चैट में ही काम करेंगे। इसके अलावा, एआई एजेंट्स को बिना यूजर की अनुमति के खुद से पहल करके मैसेज भेजने (Unsolicited Messaging) की इजाजत नहीं होगी; जब यूजर चैट में कोई सवाल या प्रॉम्प्ट भेजेगा, एजेंट केवल उसी का जवाब दे सकेगा।कब तक आम यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा यह फीचर? बीटा टेस्टिंग का दायरा और भविष्य का प्लानवर्तमान में यह अत्याधुनिक थर्ड-पार्टी एआई एजेंट फीचर केवल चुनिंदा देशों में व्हाट्सएप एंड्रॉइड बीटा टेस्टर्स के एक बहुत छोटे और सीमित समूह के लिए रोलआउट किया गया है। मेटा इस समय इसके एपीआई फ्रेमवर्क की स्थिरता, सर्वर लोड, डेटा लेटेंसी और यूजर एक्सपीरियंस का गहन तकनीकी परीक्षण कर रही है। टेक विश्लेषकों का मानना है कि बीटा टेस्टिंग के विभिन्न चरणों और फीडबैक के आधार पर सुधार करने के बाद कंपनी आगामी कुछ महीनों के भीतर इसे दुनिया भर के सभी सामान्य एंड्रॉइड और आईओएस (iOS) यूजर्स के लिए आधिकारिक तौर पर जारी कर सकती है। इस फीचर का आना यह साबित करता है कि व्हाट्सएप अब केवल एक साधारण चैटिंग ऐप नहीं रह गया है, बल्कि वह खुद को दुनिया के सबसे बड़े एआई-संचालित सुपर ऐप (Super App) के रूप में स्थापित कर रहा है, जहां एक ही छत के नीचे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी कंपनियों की बुद्धिमत्ता आपकी उंगलियों पर मौजूद होगी।
दिल्ली के मयूर विहार में 40 साल के शख्स की पीट-पीटकर हत्या, CCTV खंगाल रही पुलिस
Delhi Crime News: दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 में एक व्यक्ति का शव मिला है. बताया जा रहा है कि 40 साल के युवक को पीट-पीटकर मार दिया गया. घटना सुबह 4 से 5 बजे के बीच की बताई जा रही है.
5G नेटवर्क स्लाइसिंग और TRAI का नया नियम: टेलीकॉम सेक्टर में क्यों छिड़ा महासंग्राम?
भारत में 5G रोलआउट के विस्तार के साथ ही टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) और देश की दिग्गज निजी टेलीकॉम कंपनियों—रिलायंस जियो (Reliance Jio), भारती एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन आइडिया (Vi)—के बीच एक नया और तीखा तकनीकी विवाद खड़ा हो गया है। विवाद का मुख्य केंद्र ट्राई द्वारा 5G नेटवर्क स्लाइसिंग (5G Network Slicing) और सेवा की गुणवत्ता (Quality of Service - QoS) को लेकर जारी किए गए नए मसौदा नियम हैं।नियामक ने अपने नए प्रस्ताव में यह अनिवार्य शर्त रखी है कि यदि किसी 5G मोबाइल सेल (टावर) पर रेडियो रिसोर्स का इस्तेमाल 80 प्रतिशत से अधिक होता है, तो कंपनियों को उस इलाके में अपनी प्रीमियम 'फास्ट-लेन' 5G स्लाइसिंग सेवा को बंद करना पड़ सकता है।ट्राई का कहना है कि यह कड़ा कदम आम स्मार्टफोन यूजर्स के इंटरनेट की स्पीड और गुणवत्ता को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है, ताकि टेलीकॉम कंपनियां अमीर या कॉर्पोरेट ग्राहकों को प्राथमिकता देने के चक्कर में सामान्य जनता का डेटा धीमा न कर दें। हालांकि, जियो, एयरटेल और वीआई तीनों ने एकजुट होकर इस 80% की तय सीमा को तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण, अव्यावहारिक और स्पेक्ट्रम नीलामी की मूल शर्तों के खिलाफ बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।क्या है 5G नेटवर्क स्लाइसिंग और TRAI का '80% PRB यूटिलाइजेशन' फॉर्मूला?इस पूरे विवाद को समझने के लिए 5G की बुनियादी तकनीक को समझना जरूरी है। 5G नेटवर्क की सबसे आधुनिक खूबियों में से एक 'नेटवर्क स्लाइसिंग' है। इसके जरिए टेलीकॉम कंपनियां एक ही भौतिक नेटवर्क और टावर से अलग-अलग वर्चुअल 'लेन' (Slices) तैयार कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, एक स्लाइस सामान्य मोबाइल यूजर्स के लिए हो सकती है, जबकि दूसरी प्रीमियम स्लाइस उन खास सेवाओं (जैसे ऑनलाइन गेमिंग, वीआईपी ग्राहक, अस्पताल या ऑटोमेटेड गाड़ियां) के लिए आरक्षित की जा सकती है जहां बिना किसी रुकावट के अल्ट्रा-लो लेटेंसी और गारंटीड सुपरफास्ट स्पीड की जरूरत होती है।ट्राई ने इसी तकनीक पर नियंत्रण लगाने के लिए फिजिकल रिसोर्स ब्लॉक (PRB) यूटिलाइजेशन का पैमाना तय किया है:पीआरबी (PRB) मोबाइल टावर और यूजर के डिवाइस के बीच डेटा ले जाने वाली रेडियो क्षमता की सबसे बुनियादी इकाई है।ट्राई के प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि किसी 5G सेल में महीने के किन्हीं भी 5 दिनों में पीक आवर्स (सर्वाधिक ट्रैफिक वाले समय) के दौरान पीआरबी का इस्तेमाल 80 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया जाता है, तो ऑपरेटर को तुरंत वहां क्षमता विस्तार के कदम उठाने होंगे।पूरे सर्विस एरिया (LSA) में ऐसी अत्यधिक लोड वाली सेल्स की संख्या 1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।सबसे विवादित शर्त यह है कि यदि ऑपरेटर 30 दिनों के भीतर उस सेल से कंजेशन (भीड़भाड़) को दूर नहीं कर पाता है, तो उसे उस टावर पर चल रही प्रीमियम या प्रायोरिटी 5G स्लाइस को तब तक पूरी तरह बंद (Shut Down) करना होगा, जब तक कि बुनियादी ढांचे को अपग्रेड न कर दिया जाए।Jio, Airtel और Vi क्यों भड़के? कंपनियों ने नियामक के सामने रखीं ये 4 बड़ी आपत्तियांतीनों टेलीकॉम ऑपरेटरों ने सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) के मंच से और व्यक्तिगत रूप से ट्राई को भेजे अपने जवाब में इस 80% की सीमा को खारिज कर दिया है:एयरटेल का रुख (स्पेक्ट्रम का अनुचित दोहन और बेवजह खर्च): भारती एयरटेल ने कहा कि 80% से ज्यादा नेटवर्क यूटिलाइजेशन का मतलब कतई यह नहीं होता कि ग्राहकों को खराब सेवा मिल रही है। आधुनिक 5G तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह 90% से अधिक लोड पर भी उपभोक्ताओं को शानदार डाउनलोड और अपलोड स्पीड देने में सक्षम है। एयरटेल का तर्क है कि 80% की कृत्रिम सीलिंग लगाने से कंपनियों को उन इलाकों में भी जबरन अरबों रुपये फूंककर नए टावर लगाने पड़ेंगे जहां ग्राहक पहले से ही मिल रही सेवा से पूरी तरह संतुष्ट हैं।रिलायंस जियो का रुख (ऑपरेशनल तौर पर असंभव और नियमों से टकराव): जियो ने 80% की सीमा पर नेटवर्क स्लाइसिंग बंद करने के नियम को 'हास्यास्पद और जमीनी तौर पर नामुमकिन' करार दिया है। जियो का कहना है कि किसी टावर पर ट्रैफिक पल-पल बदलता रहता है। ऐसे में बीच कॉल या डेटा सेशन के दौरान स्लाइसिंग को बंद करने से नेटवर्क का संचालन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगा। जियो ने यह भी याद दिलाया कि अरबों डॉलर खर्च करके खरीदे गए स्पेक्ट्रम पर ऐसी पाबंदियां लगाना सरकार की 'टेक्नोलॉजी न्यूट्रैलिटी' (प्रौद्योगिकी तटस्थता) नीति का उल्लंघन है।वोडाफोन-आइडिया का रुख (तकनीकी समझ पर सवाल): वीआई (Vi) ने तर्क दिया कि नेटवर्क स्लाइसिंग बनाई ही इसलिए गई है ताकि व्यस्त और भीड़भाड़ वाले समय में ट्रैफिक को वैज्ञानिक तरीके से मैनेज किया जा सके। जब नेटवर्क पर लोड कम होता है, तब तो हर यूजर को स्वाभाविक रूप से पूरी स्पीड मिलती ही है। ऐसे में स्लाइसिंग पर 80% की बंदिश लगाना इस तकनीक के मूल उद्देश्य की ही हत्या करने जैसा है।अंतरराष्ट्रीय मानकों का अभाव: कंपनियों का कहना है कि दुनिया के किसी भी विकसित देश में टेलीकॉम रेगुलेटर ने नेटवर्क यूटिलाइजेशन पर इस तरह की कठोर अनिवार्य सीलिंग नहीं लगाई है; इसे हमेशा कंपनियों के आंतरिक नेटवर्क प्लानिंग का हिस्सा माना जाता है।TRAI का पक्ष: क्या खतरे में पड़ जाती आम यूजर्स की इंटरनेट स्पीड और 'नेट न्यूट्रैलिटी'?टेलीकॉम कंपनियों के कड़े विरोध के बावजूद ट्राई और पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक्स (जैसे 'द डायलॉग') इस नियम के समर्थन में मजबूती से खड़े हैं। नियामक की सबसे बड़ी चिंता नेट न्यूट्रैलिटी (Net Neutrality) और सामान्य मोबाइल ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करना है।हाल ही में एयरटेल द्वारा पोस्टपेड ग्राहकों के लिए शुरू की गई 'फास्टलेन' (Fastlane) सेवा और कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट्स के साथ की जा रही 5G स्लाइसिंग पार्टनरशिप्स के बाद यह आशंका पैदा हो गई थी कि कंपनियां अपने स्पेक्ट्रम का बड़ा हिस्सा उन लोगों को बेच देंगी जो ज्यादा पैसे चुका सकते हैं। यदि किसी टावर की 70-80% क्षमता केवल प्रीमियम स्लाइस के लिए आरक्षित कर दी जाएगी, तो उसी टावर से जुड़े आम प्रीपेड या सामान्य 5G यूजर्स की स्पीड 4G से भी बदतर हो जाएगी।ट्राई का मानना है कि 20 प्रतिशत का 'बफर' (खाली स्पेस) छोड़ना इसलिए अनिवार्य है ताकि आपातकालीन कॉल्स, आम इंटरनेट ब्राउजिंग और सामान्य उपभोक्ताओं का डेटा फ्लो किसी भी स्थिति में बाधित न हो। समर्थकों का तर्क है कि कंपनियां भीड़भाड़ (कंजेशन) को दूर करने के बजाय उस कंजेशन का मुद्रीकरण (Monetizing Congestion) करने की कोशिश कर रही हैं, जिसे रोकने के लिए यह 80% की सुरक्षा दीवार बेहद जरूरी है।21 दिन पहले जानकारी देने की शर्त पर गोपनीयता का संकट: कंपनियों ने जताई बिजनेस सीक्रेसी पर चिंताविवाद केवल 80 प्रतिशत की सीमा तक ही सीमित नहीं है। ट्राई ने अपनी मसौदा नीति में यह भी प्रस्तावित किया है कि कोई भी टेलीकॉम ऑपरेटर यदि बाजार में कोई नई 5G नेटवर्क स्लाइस या प्रायोरिटी सर्विस लॉन्च करना चाहता है, तो उसे लॉन्चिंग से कम से कम 21 दिन पहले नियामक के पास अपनी नेटवर्क क्षमता और तकनीकी मानकों का पूरा ब्योरा जमा करना होगा।जियो, एयरटेल और वीआई ने इस शर्त को अपने व्यावसायिक हितों पर सीधा हमला बताया है। कंपनियों का कहना है कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धी भारतीय टेलीकॉम बाजार में किसी भी नए और इनोवेटिव प्रोडक्ट की तकनीकी जानकारी हफ्तों पहले उजागर करने से उनकी व्यापारिक गोपनीयता (Commercial Confidentiality) खत्म हो जाएगी। इससे कंपनियों की बाजार में बढ़त हासिल करने की क्षमता प्रभावित होगी और कोई भी नया फीचर पेश करने से पहले लालफीताशाही का सामना करना पड़ेगा।भारी कैपेक्स और टैरिफ बढ़ोतरी का खतरा: क्या आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा बोझ?टेलीकॉम इंडस्ट्री के जानकारों का आकलन है कि यदि ट्राई ने अपने रुख में नरमी नहीं बरती और 80% के कड़े नियम को ज्यों का त्यों लागू कर दिया, तो इसका सीधा असर टेलीकॉम कंपनियों की वित्तीय सेहत और अंततः आम उपभोक्ताओं के मोबाइल बिलों पर पड़ेगा:अतिरिक्त पूंजीगत व्यय (Capex) का दबाव: भारत में डेटा की खपत दुनिया में सबसे अधिक है। 80% की सीमा के भीतर रहने के लिए कंपनियों को लाखों नए 5G स्मॉल सेल्स, अतिरिक्त फाइबर बैकहॉल और नए टावर्स लगाने होंगे। इसके लिए कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करना पड़ेगा।मोबाइल टैरिफ में फिर बढ़ोतरी की आशंका: पहले ही स्पेक्ट्रम शुल्क और एजीआर के बोझ तले दबी टेलीकॉम कंपनियां इस अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की लागत की भरपाई के लिए भविष्य में 5G डेटा प्लान्स के दाम और बढ़ा सकती हैं।प्रीमियम 5G का धीमा विस्तार: कड़े नियमों के चलते भारत में ऑटोमेशन, स्मार्ट सिटीज और इंडस्ट्रियल 5G जैसी उच्च तकनीक वाली सेवाओं के विस्तार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।फिलहाल ट्राई द्वारा हितधारकों (Stakeholders) से मिले फीडबैक और आपत्तियों की समीक्षा की जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नियामक टेलीकॉम कंपनियों की दलीलों को मानते हुए 80% की इस सीमा में कोई ढील देता है, या फिर आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा के नाम पर इन कड़े नियमों को कानून का रूप दे दिया जाता है।
मुलेठी का काढ़ा कैसे बनाएं? नोट कर लें रेसिपी
बदलते मौसम में अगर आप सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी से जूझ रहे हैं, तो मुलेठी का काढ़ा आपके लिए बेस्ट हो सकता है. यहां जानते हैं इसकी आसान सी रेसिपी-
Tamil Nadu में पुलिसकर्मियों का कार्यभार घटाने और Welfare Schemes को सरकार देगी प्राथमिकता
चेन्नई, छह सितंबर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने रविवार को ‘पुलिस दिवस’ के अवसर पर पुलिस बल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सरकार पुलिसकर्मियों का कार्यभार कम करने, आधुनिक प्रौद्योगिकी को पुलिस के कामकाज में शामिल करने और पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देगी। मुख्यमंत्री ने समाज में शांति बनाए रखने और कानून का शासन सुनिश्चित करने के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाले पुलिस बल के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे राज्य के पुलिसकर्मियों का साहस और त्याग सदैव सराहनीय रहा है। वे न केवल अपराधों की रोकथाम और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम करते हैं, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों के जीवन, संपत्ति और अधिकारों की रक्षा के लिए भी अग्रिम पंक्ति में बहादुरी से डटे रहते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार पुलिसकर्मियों के कार्यभार को कम करने, आधुनिक प्रौद्योगिकी सुविधाओं के माध्यम से उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने तथा पुलिस अधिकारियों एवं उनके परिवारों के लिए आवश्यक कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देगी।’’विजय ने शांतिपूर्ण और सुरक्षित तमिलनाडु के निर्माण के लिए जनता से पुलिस के साथ विश्वास और सद्भाव के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

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