Supreme Court का अहम फैसला, कस्टडी में लेते ही शुरू होगी 24 घंटे की मियाद
नयी दिल्ली, पांच नवंबर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी गिरफ्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की संवैधानिक समयसीमा उसे हिरासत में लिए जाने के क्षण से शुरू होती है, न कि पुलिस द्वारा औपचारिक रूप से गिरफ्तार किए जाने के समय से। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(2) के उद्देश्य से गिरफ्तारी और हिरासत के बीच कृत्रिम अंतर नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा कि ऐसी कोई भी व्याख्या संवैधानिक आदेश के विपरीत होगी, जिसके तहत पुलिस को औपचारिक गिरफ्तारी से पहले हिरासत में बिताई गई अवधि को 24 घंटे की समयसीमा से बाहर रखने की अनुमति मिले। पीठ ने कहा, ‘‘यह विचार कि 24 घंटे की अवधि केवल औपचारिक गिरफ्तारी से शुरू होती है, संविधान के अनुच्छेद 22(2) और भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 56 के संवैधानिक आदेश के विपरीत है। फैसले में कहा गया है कि 24 घंटे की समयसीमा की गणना करते समय केवल गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचने में यथोचित रूप से लगने वाले समय को ही इसमें शामिल नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा कि औपचारिक गिरफ्तारी से पहले पूछताछ, जांच, तलाशी या जब्ती में लगा समय इस अवधि से बाहर नहीं रखा जा सकता। संविधान का अनुच्छेद 22(2) कहता है कि गिरफ्तार और हिरासत में रखे गए प्रत्येक व्यक्ति को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए। इसमें गिरफ्तारी के स्थान से अदालत तक पहुंचने में लगने वाला आवश्यक समय शामिल नहीं होता। शीर्ष न्यायालय ने ओडिशा उच्च न्यायालय के आर्यमन पटनायक मामले, मद्रास उच्च न्यायालय के कन्नन मामले और केरल उच्च न्यायालय के अरुण के. थॉमस मामले में दिए गए विचारों को खारिज कर दिया। इन मामलों में औपचारिक गिरफ्तारी से पहले हिरासत में बिताई गई अवधि को 24 घंटे की समयसीमा की गणना से बाहर रखने की अनुमति दी गई थी। पीठ ने कहा कि समयसीमा की गणना करते समय गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचने में लगने वाले आवश्यक समय के अलावा किसी अन्य अवधि को बाहर नहीं रखा जा सकता। पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अनुमेय 24 घंटे की अवधि से अधिक समय तक हिरासत में रखा जाता है और उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया जाता, तो उसे तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि संवैधानिक रूप से निर्धारित 24 घंटे की सीमा के भीतर भी किसी व्यक्ति को उचित अवधि से अधिक समय तक हिरासत में न रखा जाए। फैसले में कहा गया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को हिरासत में लिए जाने की वास्तविक तारीख और समय दर्ज करना होगा और संवैधानिक समयसीमा का पालन हुआ है या नहीं, इसकी स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी। पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट को यह भी देखना होगा कि परिस्थितियों के अनुसार हिरासत की अवधि उचित है या नहीं। यदि हिरासत की अवधि जरूरत से ज्यादा है, तो वे रिमांड देने से इनकार कर सकते हैं। इस संबंध में विस्तृत फैसला आना अभी बाकी है।
'बस कर बहन कितना गले लगेगी', लव गिल पर काम्या पंजाबी ने कसा तंज
रियालिटी शो 'बिग बॉस 20' (Bigg Boss 20) में कंटेस्टेंट्स के बीच के रिश्ते, समीकरण और विवाद हर दिन एक नया मोड़ ले रहे हैं। शो के भीतर पंजाबी एक्ट्रेस लव गिल (Love Gill) और मशहूर ई-स्पोर्ट्स गेमर स्काउट ओपी (Scout OP) की इक्वेशन शुरुआत से ही दर्शकों और टीवी सितारों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। अब दिवाली और फैमिली वीक के स्पेशल एपिसोड के दौरान दोनों के बीच दिखी एक बार फिर की नजदीकियों पर टीवी इंडस्ट्री की सीनियर एक्ट्रेस और पूर्व बिग बॉस कंटेस्टेंट काम्या पंजाबी (Kamya Punjabi) ने सोशल मीडिया पर जोरदार तंज कसा है। काम्या ने बिना नाम लिए लव गिल के बिहेवियर पर ऐसा तंज कसा कि देखते ही देखते उनका पोस्ट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया।#1 फैमिली वीक में मां का मैसेज सुनकर इमोशनल हुईं लव गिल और बार-बार स्काउट को लगाया गलेबिग बॉस 20 के हालिया एपिसोड में मेकर्स ने दिवाली और फैमिली वीक के मौके पर सभी घर वालों को उनके परिवार के सदस्यों के वीडियो और ऑडियो मैसेज सुनाए। इस दौरान लव गिल को भी उनकी मां का एक प्यार भरा इमोशनल मैसेज मिला, जिसे सुनकर वह काफी भावुक हो गईं और खुशी से झूम उठीं। हालांकि, इस खुशी के पल में लव अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाईं और बार-बार स्काउट ओपी को गले लगाती दिखीं। स्टेज से नीचे उतरते ही लव गिल ने सबसे पहले स्काउट को कसकर हग किया, जिसके बाद रूम के अंदर और लिविंग एरिया में भी कई बार वे स्काउट से लिपटती नजर आईं। दोनों की इन तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स ने सोशल मीडिया पर फैंस का ध्यान खींचा।#1 'बस कर बहन कितना गले लगाएगी...' काम्या पंजाबी का तीखा पोस्ट हुआ वायरलकाम्या पंजाबी, जो बिग बॉस के हर सीजन पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक क्रिप्टिक लेकिन तीखा पोस्ट शेयर किया। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिखा, लेकिन उनका निशाना साफ तौर पर लव गिल और स्काउट ओपी के इस बिहेवियर पर ही था।काम्या ने तंज कसते हुए अपने पोस्ट में लिखा:बस कर बहन कितना गले लगाएगी। वैसे किस-किस को लगा कि वो सारे गले इमोशनल कम और रिवेंज वाले ज्यादा थे? अब भाई-बहन के रिश्ते में कौन किसे पहले टेक्स्ट करेगा, ये तनाव भी तो था ना बहन को।काम्या के इस पोस्ट के आते ही बिग बॉस के फैंस दो गुटों में बंट गए और पोस्ट पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने काम्या के इस तंज पर सहमति जताते हुए लव के बिहेवियर को गेम और फुटेज के लिए 'अति' करार दिया।#1 सलमान खान और रोहित शेट्टी की क्लास के बाद भी नहीं सुधरे समीकरणउल्लेखनीय है कि लव गिल और स्काउट ओपी के इस 'भाई-बहन' वाले बॉन्ड और शारीरिक नजदीकियों (Physical Proximity) पर इससे पहले 'वीकेंड का वार' में खुद होस्ट सलमान खान और बाद में शो में आए रोहित शेट्टी भी सवाल उठा चुके थे। यहां तक कि स्काउट की गर्लफ्रेंड काश्वी हिरनंदानी के शो में आकर सीमा तय करने की बात कहने के बाद दोनों के बीच कुछ समय के लिए दूरी आ गई थी। हालांकि, दिवाली वीक में एक बार फिर दोनों की इस तरह की नजदीकियों ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। काम्या पंजाबी ने इससे पहले भी लव और स्काउट को रिश्ते में 'बाउंड्रीज' तय करने की सलाह दी थी। अब देखना यह होगा कि काम्या के इस नए तंज पर वीकेंड का वार में सलमान खान क्या रिएक्शन देते हैं।
'रामायणम्' के पोस्ट क्रेडिट सीन में दिखा सनी देओल का हनुमान अवतार
निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित अमर महागाथा 'रामायणम्: पार्ट 1' (Ramayana: Part 1) सिनेमाघरों में आधिकारिक तौर पर रिलीज हो चुकी है। जहां एक तरफ रणबीर कपूर के राम रूप, साई पल्लवी की सौम्यता और यश के रावण अवतार ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ फिल्म का अंत होते ही एक ऐसा सरप्राइज सामने आया जिसने पूरे थिएटर में हलचल मचा दी। फिल्म खत्म होने के बाद स्क्रीन पर आए 'पोस्ट-क्रेडिट सीन' (Post-Credit Scene) में बॉलीवुड के एक्शन किंग सनी देओल की भगवान हनुमान के रूप में पहली झलक पेश की गई है। इस दृश्य के सामने आते ही सिनेमाघरों में मौजूद दर्शक खुशी से झूम उठे और पूरा हॉल 'जय श्री राम' तथा 'जय बजरंगबली' के नारों से गुंजायमान हो उठा।#1 पोस्ट-क्रेडिट सीन में सनी पाजी का महा-अवतार और गूंजता बैकग्राउंड स्कोरफिल्म के मुख्य भाग के समापन के तुरंत बाद शुरू हुए पोस्ट-क्रेडिट सीक्वेंस में वानर सेना का एक भव्य विजुअल दिखाया गया है, जिसके ठीक बाद भगवान हनुमान के रूप में सनी देओल की स्क्रीन पर एन्ट्री होती है। मेकर्स ने दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखने के लिए सनी पाजी के चेहरे के फ्रंट लुक को पूरी तरह से रिवील न करते हुए उनके बैक-पोज, गदाधारी कंधों और विशालकाय शारीरिक सौष्ठव को बेहद भव्य अंदाज में पेश किया है। जैसे ही बैकग्राउंड में ए.आर. रहमान और हंस जिमर द्वारा रचित हनुमान चालीसा का ओजस्वी म्यूजिक बजता है और सनी देओल की बुलंद आवाज में जय श्री राम का उद्घोष होता है, दर्शक अपनी सीटों से खड़े होकर चीखने-चिल्लाने लगे।#1 सोशल मीडिया पर लीक हुआ क्लिप और फैंस के बीच बढ़ा जबरदस्त उत्साहसिनेमाघरों में पहले ही शो से बाहर आए दर्शकों ने इस पोस्ट-क्रेडिट दृश्य की क्लिप्स रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू कर दिया, जो देखते ही देखते इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया है। इंटरनेट यूजर्स का कहना है कि सनी देओल का यह एंट्री सीन भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे दमदार और रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्यों में से एक है। पूरी फिल्म के प्रचार के दौरान मेकर्स ने सनी देओल के लुक और सीन को पूरी तरह से गुप्त रखा था, जिससे थिएटर्स में मिले इस सरप्राइज का असर कई गुना बढ़ गया।#1 रामायणम् पार्ट-2 में दिखेगा हनुमान जी का पराक्रम और लंका दहन का युद्धफिल्म का यह पोस्ट-क्रेडिट सीन आगामी 'रामायणम्: पार्ट 2' (Ramayana Part 2) की ठोस नींव रखता है। दूसरे भाग में मुख्य रूप से श्री राम और सुग्रीव की मित्रता, माता सीता की खोज में हनुमान जी का समुद्र लांघकर लंका पहुंचना और वहां लंका दहन जैसे ऐतिहासिक प्रसंगों को दिखाया जाएगा। स्पेशल इफेक्ट्स टीम के अनुसार, सनी देओल का लंका दहन और युद्ध वाला फायर सीक्वेंस भारतीय सिनेमा का अब तक का सबसे महंगा और जटिल हाई-टेक एक्शन ब्लॉक होने वाला है जिसे शूट करने में दो महीने का समय लगा था।#1 निष्कर्ष: पार्ट-2 के लिए दर्शकों का उत्साह चरम परनितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा की इस महागाथा ने अपने पहले ही भाग से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली है। लेकिन सनी देओल के इस अविश्वसनीय पोस्ट-क्रेडिट सीन ने दूसरे भाग को लेकर दर्शकों की उत्सुकता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। यदि आपने अभी तक 'रामायणम्' का पहला पार्ट नहीं देखा है, तो फिल्म के अंत में रोल होने वाले क्रेडिट्स के खत्म होने तक अपनी सीट पर बने रहें ताकि आप इस ऐतिहासिक विजुअल ट्रीट से न चूकें।
रामायण महागाथा का बड़े पर्दे पर अद्भुत रूप, छा गए यश, रणबीर और साई पल्लवी
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी महाकाव्यों को बड़े पर्दे पर उतारने की बात होती है, तो दर्शकों की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच जाती हैं। निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायणम्: पार्ट 1' (Ramayana: Part 1) आखिरकार वैश्विक स्तर पर सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। ऑस्कर विजेता VFX स्टूडियो DNEG के साथ मिलकर बनाई गई यह फिल्म न केवल भारतीय पौराणिक आस्था का एक महाकाव्यीय प्रस्तुतीकरण है, बल्कि यह विजुअल इफेक्ट्स (CGI) और सिनेमाई भव्यता का एक ऐसा बेजोड़ संगम है जिसने भारतीय सिनेमा के मानक को पूरी दुनिया में कई पायदान ऊपर उठा दिया है। बड़े पर्दे पर जब यह कहानी सामने आती है, तो दर्शकों को आधुनिक तकनीक और भावुक सनातन संस्कृति का एक जादुई संगम महसूस होता है।#1 नितेश तिवारी का कुशल निर्देशन और भव्य वर्ल्ड बिल्डिंगरामायण की मूल कथा से देश-दुनिया का हर व्यक्ति भली-भांति वाकिफ है। ऐसे में नितेश तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वे इस अमर कहानी को इस तरह पेश करें कि दर्शक स्क्रीन से एक पल के लिए भी अपनी नजरें न हटा सकें। नितेश तिवारी ने इस चुनौती को बखूबी निभाया है। अयोध्या के राजसी वैभव से लेकर दण्डकारण्य के बीहड़ जंगलों और लंका की सोने की दीवारों तक, हर एक फ्रेम में उनका दूरदर्शी दृष्टिकोण और लगन साफ झलकी है। उन्होंने प्राचीन भारतीय मर्यादा और अत्याधुनिक इंटरनेशनल तकनीक (जैसे 3D और IMAX विजुअल्स) के बीच एक आदर्श संतुलन कायम किया है। फिल्म का स्क्रीनप्ले कसा हुआ है और हर दृश्य में भक्ति, त्याग तथा शौर्य का रस समाहित है।#1 अभिनय के मोर्चे पर रणबीर का तेज, यश का रौद्र रूप और साई पल्लवी की सौम्यताअभिनय के दृष्टिकोण से यह फिल्म एक मास्टरक्लास साबित होती है:रणबीर कपूर (प्रभु श्री राम): मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में रणबीर कपूर का अभिनय शांत, भव्य और बेहद प्रभावशाली है। उनकी आंखों का दिव्य तेज और भावुक संवाद अदायगी सीधे दर्शकों के दिलों को छू जाती है।यश (लंकपति रावण): 'केजीएफ' फेम यश ने रावण के किरदार में स्क्रीन पर आते ही तूफान ला दिया है। उनका प्रचंड रौद्र रूप, विशालकाय पर्सनालिटी और दबदबा फिल्म का सबसे बड़ा 'हाइलाइट' (Highlight) है। रावण के रूप में उनका स्क्रीन प्रेजेंस हॉलीवुड स्तर का लगता है।साई पल्लवी (माता सीता): माता सीता के पावन और गरिमामय रूप में साई पल्लवी की मासूमियत और आंखों की अभिव्यक्ति दिल जीत लेती है। वे चरित्र में स्वाभिमान और भक्ति दोनों का सुंदर समन्वय पेश करती हैं।रवि दुबे और अन्य सहयोगी कलाकार: लक्ष्मण के चंचल लेकिन समर्पित और उग्र रूप में रवि दुबे ने बेहतरीन डेब्यू किया है। इसके अलावा राजा दशरथ के रूप में अरुण गोविल, कैकेयी के किरदार में लारा दत्ता, शूर्पणखा के रोल में रकुल प्रीत सिंह और जटायु की वाइस-ओवर/परफॉर्मिंग भूमिका में अनुपम खेर ने पूरी कहानी में जान फूंक दी है।#1 जटायु-रावण युद्ध और हॉलीवुड स्तर के VFX ने रचा इतिहासफिल्म का तकनीकी पक्ष और विजुअल इफेक्ट्स इतने शानदार हैं कि इनकी तुलना 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' (The Lord of the Rings) जैसी विश्वप्रसिद्ध फिल्मों से की जा रही है। फिल्म का सबसे बड़ा क्लाइमेक्स और एक्शन ब्लॉक—'रावण बनाम जटायु' (Jatayu vs Ravana War) युद्ध दृश्य—भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे सांघातिक और आंखें नम कर देने वाला दृश्य बनकर उभरा है। आकाश में होने वाली यह जंग इतने यथार्थवादी ढंग से दिखाई गई है कि दर्शक थिएटर में तालियां बजाने पर मजबूर हो जाते हैं। हंस जिमर (Hans Zimmer) और ए.आर. रहमान (A.R. Rahman) का बैकग्राउंड स्कोर और संगीत हर दृश्य के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। अंत में क्रेडिट्स के साथ बजने वाली दलीप सिंह डोज़ांज (दिलजीत दोसांझ) की हनुमान चालीसा हॉल में रोंगटे खड़े कर देती है।#1 अंतिम निर्णय: बड़े पर्दे का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चमत्कारकुल मिलाकर, 'रामायणम्: पार्ट 1' केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय और वैश्विक दर्शक के लिए बड़े पर्दे पर देखा जाने वाला एक जादुई अनुभव (Visual Spectacle) है। कुछ छोटे-मोटे पेसिंग इश्यू को छोड़ दिया जाए, तो फिल्म अपनी छाप छोड़ने में 100% सफल रहती है। अगर आप भारतीय इतिहास, पौराणिक गाथाओं और आधुनिक विश्वस्तरीय सिनेमा के गवाह बनना चाहते हैं, तो इसे IMAX या अपने नजदीकी 3D सिनेमाघर में देखना बिल्कुल न भूलें।
दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों पर CAIT ने राहुल गांधी से पूछे 5 सवाल
देश की राजधानी नई दिल्ली में हाल के दिनों में हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के कारण व्यापार ठप होने और करोड़ों रुपये के नुकसान पर देश के सबसे बड़े व्यापारी संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने तीखा रुख अपनाया है। CAIT के राष्ट्रीय महासचिव और पदाधिकारियों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर सीधे और कड़े सवाल दागे हैं। संगठन ने पूछा है कि क्या लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध जताने का अधिकार आम नागरिक और व्यापारियों के व्यापार करने तथा रोजी-रोटी कमाने के मौलिक अधिकार से भी बड़ा हो गया है? व्यापारी संगठन ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक रैलियों और लंबे समय तक सड़कों को जाम करने के कारण दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की पहुंच खत्म हो जाती है, जिससे त्योहारों और व्यावसायिक सीजन के दौरान व्यापारियों को भारी वित्तीय क्षति उठानी पड़ती है। इसके साथ ही कैट ने दिवाली के बाद राष्ट्रीय बैठक बुलाकर पूरे देश में 'धिक्कार दिवस' मनाने का बड़ा ऐलान भी किया है।राजनीतिक रैलियों से दिल्ली का व्यापार प्रभावित और दोहरे रुख पर सवालCAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि दिल्ली में बार-बार आयोजित होने वाली विशाल राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों के कारण कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, करोल बाग, और सदर बाजार जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों की गतिविधियां पूरी तरह थम जाती हैं। CAIT ने विशेष रूप से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी इंडिया गठबंधन द्वारा आयोजित की गई विशाल रैली और अन्य प्रदर्शनों पर आपत्ति जताई। संगठन ने राहुल गांधी के उस रुख पर तीखा सवाल उठाया जिसमें वे एक तरफ जनता से स्थानीय बाजारों (Local Markets) से सामान खरीदने की अपील करते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे बड़े विरोध प्रदर्शनों और रैलियों का आयोजन या समर्थन करते हैं, जिनसे सड़कें बंद हो जाती हैं और ग्राहक उन स्थानीय बाजारों तक पहुंच ही नहीं पाते। CAIT ने इसे एक बड़ा राजनीतिक विरोधाभास बताया है।CAIT द्वारा राहुल गांधी और कांग्रेस से पूछे गए 5 सीधे सवालव्यापारी संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए राहुल गांधी से निम्नलिखित 5 मुख्य सवाल पूछे हैं:विरोध बनाम आजीविका: क्या संविधान के तहत विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार व्यापारियों के व्यापार करने और आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(g)) से अधिक महत्वपूर्ण है?आर्थिक बंधक और नुकसान की भरपाई: क्या देश की राजधानी की व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के लिए बंधक बनाना राजनीतिक और नैतिक रूप से उचित है? रैलियों के कारण व्यापारियों को हुए करोड़ों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?दोहरा रवैया: एक तरफ स्थानीय बाजारों से खरीदारी की अपील करना और दूसरी तरफ ऐसे प्रदर्शनों का समर्थन करना जिससे ग्राहक बाजारों तक न पहुंच सकें, क्या यह व्यापारियों की रोजी-रोटी पर हमला नहीं है?जवाबदेही और जिम्मेदारी: क्या कांग्रेस पार्टी और उसके राजनीतिक सहयोगी दल उन प्रदर्शनों से पैदा हुई भारी आर्थिक बदहाली की सीधी नैतिक और आर्थिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं?व्यक्तिगत कसौटी: अगर इसी तरह लंबे समय तक राजनीतिक प्रदर्शनों या बंदी के कारण खुद राहुल गांधी के अपने कारोबार, परिवार की आजीविका या दैनिक कमाई पर असर पड़ता, तो क्या वे इसे स्वीकार करते?संविधान के अनुच्छेद 19 और 'धिक्कार दिवस' का ऐलानCAIT ने अपने पत्र में कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को शांतिपूर्वक अभिव्यक्ति और विरोध का अधिकार देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(1)(g) हर नागरिक को स्वतंत्रता से अपना व्यापार और आजीविका चलाने का अधिकार भी प्रदान करता है। किसी एक अधिकार का इस्तेमाल दूसरे नागरिक के मौलिक अधिकार को छीनने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। CAIT ने कहा है कि व्यापारी किसी भी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें 'पंचिंग बैग' नहीं बनाया जा सकता। संगठन ने चेतावनी दी है कि वे राहुल गांधी के आधिकारिक जवाब का इंतजार करेंगे। दिवाली के तुरंत बाद दिल्ली में देशभर के प्रमुख व्यापारी नेताओं की आपात बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें विरोध प्रदर्शनों से होने वाले व्यापारिक नुकसान के खिलाफ देशभर में 'धिक्कार दिवस' मनाने की तारीख की घोषणा होगी।क्या निकलेगा इस विवाद का समाधान?व्यापारी संघों के इस कड़े रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज हो गई है कि लोकतंत्र में विरोध के अधिकार और आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। राजधानी दिल्ली के लाखों छोटे-बड़े दुकानदारों का मानना है कि रैलियों के लिए जंतर-मंतर या रामलीला मैदान जैसे स्थानों के विकल्प तय होने चाहिए और मुख्य रास्तों तथा व्यावसायिक इलाकों को ब्लॉक करने से परहेज किया जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी CAIT के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देते हैं।
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत भारत के लिए क्यों खास
अन्तरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतिक गलियारों में अमेरिका के मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections 2026) के चौंकाने वाले नतीजों ने एक नया भूचाल ला दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में बहुमत हासिल कर लिया है और संसद की कमान अपने हाथों में ले ली है। इस चुनावी हार के साथ ही वाशिंगटन में अब 'विभाजित सरकार' (Divided Government) की स्थिति बन गई है, जहां व्हाइट हाउस पर तो ट्रंप का कब्जा है, लेकिन कानून बनाने, बजट पारित करने और प्रशासनिक फैसलों पर नजर रखने की चाबी डेमोक्रेट्स के पास आ गई है। इस राजनीतिक उलटफेर का सबसे बड़ा प्रभाव अब अमेरिका की विदेश नीतियों पर पड़ेगा, जिसे भारत के नजरिए से बेहद राहत भरा और कूटनीतिक रूप से बेहद खास माना जा रहा है।अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स का कब्जा: ट्रंप के आक्रामक एजेंडे पर कसेगी लगामडेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा संसद की कमान संभालते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन एकतरफा और आक्रामक फैसलों पर ब्रेक लगना तय है, जो वे अपने 'अमेरिका फर्स्ट' (MAGA) एजेंडे के तहत लागू कर रहे थे। संसद पर नियंत्रण मिलने के बाद डेमोक्रेट्स अब ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों, टैरिफ (शुल्क) दरों, अप्रवासन कानूनों और रक्षा बजट की कड़ी विधायी जांच (Congressional Scrutiny) कर सकेंगे। अमेरिकी संविधान के तहत कोई भी बड़ा टैक्स संशोधन या बजटीय आवंटन बिना प्रतिनिधि सभा की मंजूरी के पास नहीं हो सकता। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप को अब अपनी मनचाही नीतियां पास कराने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ कूटनीतिक समझौता करने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल कम होगा और नीतिगत स्थिरता आएगी।भारतीय आईटी प्रोफेश्नल्स और H-1B वीजा धारकों के लिए राहत के संकेतभारत और भारतीय पेशेवरों के लिए इस चुनावी नतीजे की सबसे बड़ी और सीधी खुशखबरी अप्रवासन (Immigration) के मोर्चे पर देखने को मिल सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पद संभालते ही H-1B वीजा आवेदनों पर भारी भरकम 1 लाख डॉलर की फीस लगाने और आव्रजन नियमों को कड़ा करने जैसे सख्त कदम उठाए थे। अब संसद में बहुमत हासिल कर चुके डेमोक्रेट्स ट्रंप के इन आक्रामक फैसलों पर न्यायिक और संसदीय जवाबदेही तय करेंगे। चूंकि अमेरिकी टेक कंपनियां (जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल) भारतीय आईटी टैलेंट पर अत्यधिक निर्भर हैं, इसलिए डेमोक्रेट्स का रुख भारतीय पेशेवरों और भारतीय आईटी कंपनियों के पक्ष में रहने की उम्मीद है, जिससे लाखों भारतीय युवाओं के अमेरिकी सपनों को नई जीवनशैली और सुरक्षा मिलेगी।टैरिफ वॉर और वैश्विक व्यापार में नरमी: भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदाव्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर डोनाल्ड ट्रंप की अचानक टैरिफ बढ़ाने और दंडात्मक शुल्क लगाने की आदत ने भारतीय निर्यातकों की चिंताएं बढ़ा दी थीं। ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत तक के पारस्परिक टैरिफ लगाने के प्रस्तावों से व्यापार वार्ताएं लगभग ठप पड़ी हुई थीं। अब डेमोक्रेट्स के संसद पर काबिज होने के बाद ट्रंप के लिए मनमाने ढंग से टैरिफ थोपना आसान नहीं रहेगा। अमेरिकी संसद द्वारा व्यापारिक नियमों की होने वाली निष्पक्ष समीक्षा से भारत के कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो पार्ट्स और आईटी सेवाओं जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को एक पूर्व-अनुमानित और स्थिर माहौल मिलेगा, जिससे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को नया बल प्राप्त होगा।रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद पर भारत पर कम होगा अमेरिकी दबाववैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीति के मोर्चे पर भारत लंबे समय से रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल का आयात कर रहा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर रूसी तेल न खरीदने और प्रतिबंधों का पालन करने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि, मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत और कच्चे तेल के दामों में आई ताजा अंतरराष्ट्रीय गिरावट के बाद भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक स्वायत्तता और कूटनीतिक स्पेस मिलेगा। डेमोक्रेट्स का मुख्य ध्यान घरेलू स्तर पर महंगाई और रहने की लागत (Cost of Living) को नियंत्रित करने पर रहेगा, जिसके चलते भारत पर रूसी तेल को लेकर आक्रामक कूटनीतिक हमले काफी हद तक कम हो जाएंगे।रक्षा साझेदारी में निरंतरता और चीन के खिलाफ रणनीतिक मजबूतीयद्यपि व्यापार और आव्रजन पर डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन भारत के साथ सामरिक और रक्षा संबंधों (Strategic & Defence Partnership) को लेकर वाशिंगटन में दोनों दलों की एक राय रही है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को संतुलित करने के लिए क्वाड (QUAD) और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (iCET) जैसे महत्वपूर्ण रक्षा मंचों पर अमेरिका भारत का साथ निभाता रहेगा। कुल मिलाकर, अमेरिका में ट्रंप के एकाधिकार को चुनौती मिलने से भारत के लिए द्विपक्षीय वार्ताओं का पलड़ा मजबूत हुआ है, जिससे भारत एक संतुलित और आत्मविश्वास से भरी कूटनीति के साथ अपनी अर्थव्यवस्था और सामरिक हितों को आगे बढ़ा सकेगा।
लोकसभा और विधानसभा में SC-ST आरक्षित सीटों का रोटेशन नहीं होगा
देश के संसदीय और राजनीतिक इतिहास में चुनाव प्रक्रियाओं से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर देश की शीर्ष अदालत का बड़ा फैसला सामने आया है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों का हर चुनाव में रोटेशन (चक्रीय बदलाव) अनिवार्य करने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट रूप से रुख अपनाते हुए कहा कि आरक्षित सीटों में रोटेशन लागू करना या परिसीमन कानून में बदलाव करना पूरी तरह से विधायिका (संसद) का अधिकार क्षेत्र (Legislative Domain) है, न कि न्यायपालिका का। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट संसद का 'तीसरा सदन' नहीं बन सकता और याचिकाकर्ता को इस नीतिगत बदलाव के लिए जनप्रतिनिधियों और संसद का रुख करना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश: सीटों का रोटेशन संसद का अधिकार क्षेत्र, अदालत का नहींसर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और पीठ के समक्ष जब इस याचिका पर बहस शुरू हुई, तो अदालत ने संवैधानिक शक्ति संतुलन (Separation of Powers) का हवाला देते हुए हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि भारत के संविधान के तहत चुनाव क्षेत्रों के आरक्षण का स्वरूप, परिसीमन (Delimitation) और सीटों का रोटेशन एक नीतिगत विषय है जो डीलिमिटेशन एक्ट के धारा 9(1)(c) और संसद के अधीन आता है। अदालत कानून को रद्द कर सकती है या उसकी व्याख्या कर सकती है, लेकिन अपनी ओर से नई नीतियां नहीं बना सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता को लगता है कि दशकों तक एक ही सीट आरक्षित रहने से अन्य वर्गों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, तो इसके लिए संसद में जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर कानून में संशोधन कराना चाहिए।याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें: दशकों से एक ही सीट आरक्षित रहने से सीमित हो रहा विकल्पयाचिका में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया था कि वर्ष 1972 और उसके बाद से देश के कई विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों को लगातार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रखा गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि रोटेशन व्यवस्था न होने के कारण एक ही निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य वर्ग या अन्य समुदायों के मतदाताओं का चुनाव लड़ने का अधिकार सालों तक बाधित रहता है। साथ ही यह भी दावा किया गया था कि बिना रोटेशन के एक ही सीट पर तीन या चार राजनीतिक परिवारों का एकाधिकार स्थापित हो जाता है, जिससे लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा और मतदाताओं के सामने विकल्पों की कमी हो जाती है। उन्होंने 2008 के परिसीमन आयोग की सिफारिशों का हवाला देकर कहा कि पंचायत और नगर निकायों की तर्ज पर विधानसभा और लोकसभा में भी रोटेशन नीति लागू होनी चाहिए।सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: 'अदालत संसद का तीसरा सदन नहीं बन सकती'अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों का जवाब देते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम संसद का तीसरा सदन नहीं बन सकते। संविधान के तहत कानून बनाने का काम जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का है। पीठ ने समझाया कि स्थानीय निकाय (पंचायत और नगरपालिका) चुनावों में रोटेशन प्रणाली के नियम अलग राज्य स्तरीय कानूनों से संचालित होते हैं, जबकि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव परिसीमन अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों से नियंत्रित होते हैं। लिहाजा दोनों की तुलना नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही किसी आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का दायरा सीमित हो, लेकिन वहां के प्रत्येक नागरिक का 'वोट देने का मौलिक अधिकार' पूरी तरह सुरक्षित रहता है।भारतीय राजनीति और भविष्य के चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असरशीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया है कि जब तक केंद्र सरकार और संसद परिसीमन कानून या संविधान में संशोधन नहीं लातीं, तब तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी-एसटी आरक्षित सीटों का मौजूदा ढांचा यथावत बना रहेगा। इस निर्णय से उन कयासों और आशंकाओं पर पूर्णविराम लग गया है जो चुनावी राज्यों में सीटों के समीकरण बदलने को लेकर लगाई जा रही थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से चुनावी प्रक्रियाओं में स्थिरता बनी रहेगी, हालांकि अब संसद के भीतर आरक्षित सीटों के समय-समय पर चक्रीय बदलाव (Rotation) को लेकर बहस और तेज हो सकती है।
रामलीला मैदान रैली में अनुपस्थिति पड़ी भारी: इंडियन यूथ कांग्रेस का बड़ा एक्शन
नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी एकजुटता और 'वोट बचाओ, देश बचाओ' आंदोलन के तहत आयोजित विशाल जनसभा में न पहुंचना भारतीय युवा कांग्रेस (Indian Youth Congress) के नेताओं को बेहद महंगा पड़ गया है। संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए 7 प्रमुख राज्यों के 200 से भी अधिक राज्य स्तरीय पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पद से निलंबित कर दिया है। युवा कांग्रेस द्वारा की गई इस ऐतिहासिक और अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई से पार्टी के आंतरिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। संगठन का स्पष्ट संदेश है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिए गए राष्ट्रीय कार्यक्रमों एवं निर्देशों की अनदेखी या संगठनात्मक उदासीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।डिजिटल ऐप अटेंडेंस से खुली पोल और 7 राज्यों में गिरी गाजयुवा कांग्रेस नेतृत्व ने रामलीला मैदान की इस महारैली के लिए विशेष रूप से अत्याधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी प्रणाली तैयार की थी। रैली स्थल और दिल्ली के मिंटो रोड जैसे प्रमुख प्रवेश द्वारों पर क्यूआर बारकोड स्कैनिंग काउंटर लगाए गए थे, जहां हर पदाधिकारी को युवा कांग्रेस के आधिकारिक ऐप 'With IYC' पर लॉगिन कर अपनी और अपने समर्थकों की उपस्थिति दर्ज करानी थी। रैली संपन्न होने के तुरंत बाद शीर्ष नेतृत्व ने जब डिजिटल डेटा की गहन समीक्षा की, तो पाया गया कि बड़ी संख्या में प्रदेश उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और जिलाध्यक्ष स्तर के पदाधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के गायब थे। अनुपस्थित नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर निलंबन पत्र जारी कर दिया गया। कार्रवाई की जद में सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश के 60 पदाधिकारी आए हैं। इसके अलावा गुजरात के 49, झारखंड के 32, पश्चिम बंगाल के 26, तेलंगाना के 14, उत्तर प्रदेश (मध्य क्षेत्र) के 11 और हरियाणा के 10 वरिष्ठ पदाधिकारी निलंबित किए गए हैं।इंटरनेट की गति या जानबूझकर अनदेखी? निलंबन पर बंटी रायसंगठन द्वारा की गई इस त्वरित और सख्त कार्रवाई के बाद निलंबित नेताओं के गुट में भारी खलबली मची हुई है। कुछ प्रभावित पदाधिकारियों ने दबी जुबान में अपनी बात रखते हुए दावा किया है कि कनॉट प्लेस और रामलीला मैदान के आसपास भारी भीड़ की वजह से मोबाइल इंटरनेट नेटवर्क पूरी तरह से ठप था। इसके कारण वे शारीरिक रूप से रैली में मौजूद रहने के बावजूद ऐप पर डिजिटल उपस्थिति (QR Check-in) दर्ज कराने में असफल रहे। हालांकि, भारतीय युवा कांग्रेस के केंद्रीय अनुशासन पैनल ने इस दलील को खारिज कर दिया है। संगठन के सूत्रों का कहना है कि जो नेता वास्तव में अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली पहुंचे थे, उनकी मौजूदगी का रिकॉर्ड ग्राउंड टीमों द्वारा भी दर्ज किया गया है। जो लोग दिल्ली आए ही नहीं, उन्होंने केवल इंटरनेट का बहाना बनाने की कोशिश की, जिसे जांच में पकड़ लिया गया।राजनीतिक बयानबाजी तेज: बीजेपी ने साधा निशाना तो यूथ कांग्रेस ने दिया करारा जवाबयुवा कांग्रेस के भीतर हुए इस बड़े अंदरूनी फेरबदल और थोक के भाव निलंबन के बाद देश की सियासत भी गरमा गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी के प्रवक्ताओं ने चुटकी लेते हुए कहा कि जिस नेता की बात सुनने और समर्थन करने के लिए खुद उनकी पार्टी के युवा कार्यकर्ता और पदाधिकारी तक दिल्ली आने को तैयार नहीं हैं, उनकी बातों पर देश का युवा कैसे भरोसा करेगा? बीजेपी ने इस कार्रवाई को कांग्रेस की आपसी फूट और जनाधार में आ रही गिरावट का नतीजा बताया। दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि अनुशासन ही किसी भी कैडर आधारित संगठन की असली रीढ़ होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश इस समय बदलाव के मुहाने पर खड़ा है और संगठन में निष्क्रिय या केवल पद लेकर बैठने वाले लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। जो काम करेगा वही पद पर रहेगा, अन्यथा नए और ऊर्जावान युवाओं को आगे का रास्ता दिखाया जाएगा।भावी रणनीतिक कमान और संगठन में बड़े बदलाव के संकेतरामलीला मैदान की रैली के बाद हुए इस बड़े एक्शन से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि कांग्रेस अपने अग्रिम संगठनों को चुनावी मोड में चुस्त-दुरुस्त करना चाहती है। आने वाले महीनों में होने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए नेतृत्व किसी भी स्तर पर ढिलाई के मूड में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, अभी यह कार्रवाई का पहला चरण है और जांच का दायरा आगे भी बढ़ाया जा सकता है। कुछ अन्य राज्यों के समीक्षा आंकड़े जुटाए जा रहे हैं और निष्कासन या निलंबन की संख्या 500 तक भी पहुंच सकती है। रिक्त हुए इन 200 से अधिक पदों पर अब जमीनी स्तर पर निष्ठा से काम करने वाले और रैलियों में भीड़ जुटाने वाले कर्मठ कार्यकर्ताओं की जल्द ही पदोन्नति की जाएगी, जिससे संगठन को नई गति और धार मिलेगी।
नातिन की बर्थडे पार्टी में पहुंचे थे नाना, होटल में टूट पड़ा जर्मन शेफर्ड
उत्तर प्रदेश के संभल में नातिन की बर्थडे पार्टी में शामिल होने पहुंचे शख्स पर होटल के जर्मन शेफर्ड कुत्ते ने हमला कर दिया. पीड़ित का कहना है कि कुत्ते ने उनके शरीर पर दो दर्जन से ज्यादा जगह काटा. उन्हें अस्पताल में इलाज भर्ती होना पड़ा. शिकायत के बाद पुलिस ने होटल प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है.
'रामायण' में तपस्या से लेकर तीनों लोकों के राजा तक, रावण के हर रूप में छाए सुपरस्टार यश
फिल्म 'रामायण' को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। फिल्म में रावण जैसे कई परतों वाले किरदार को पर्दे पर उतारते हुए अभिनेता यश ने गहरी छाप छोड़ी है।
सरकारी एजेंसी की बड़ी वॉर्निंग... TATA कार पर हैकिंग का खतरा
टाटा की गाड़ियों को लेकर सरकार एजेंसी इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) एक वॉर्निंग जारी की है. एजेंसी ने बताया है कि टाटा के कनेक्टेड व्हीकल ऐप iRA 2.0 और iRA.ev में खामी है, जिसका फायदा हैकर्स उठा सकते हैं.
दीवाली से पहले दिल्ली-NCR में गैस चैंबर जैसे हालात
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की सांसें मुश्किल कर दी हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 400 के पार पहुंचकर गंभीर श्रेणी में दर्ज हुआ है. जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग और आईआईटी दिल्ली सबसे प्रभावित इलाकों में शामिल हैं. नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में भी हवा बेहद खराब है. दिवाली से पहले हालात और बिगड़ने की आशंका है.
पिता ने पहले बच्चों को पार्किंग से फेंका, फिर खुद भी कूदा... तीनों की मौत
अमेरिका में एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसमें एक शख्स ने पहले अपने बच्चों को पार्किंग से फेंका और फिर भी खुदकर अपने जान दे दी.
घर का कोई सदस्य जब परिवार से बिछड़ जाता है, तो बेचैनी होना स्वाभाविक है। लेकिन गुजरात के वडोदरा में रहने वाले पारिख परिवार के लिए उनका पालतू तोता 'लड्डू' किसी इंसान से कम नहीं था। वडोदरा के सेवासी रोड स्थित इस्कॉन हाइट्स में रहने वाले इस परिवार का ...
22 साल स्पेस में खोज करने वाला NASA का Swift टेलीस्कोप जमीन पर गिरा
नासा का स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप 22 साल बाद पृथ्वी पर गिर गया. बचाव मिशन फेल होने के बाद यह सुमात्रा के ऊपर वायुमंडल में जल गया. इसका गामा-रे बर्स्ट की स्टडी में महान योगदान रहा.
Kerala में Operation Toofan बना जनआंदोलन, 30 लाख से अधिक लोग नशा विरोधी अभियान से जुड़े
पलक्कड़ (केरलम), पांच नवंबर केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य के मादक पदार्थ रोधी अभियान में 30 लाख से अधिक लोग ‘तूफान वॉरियर्स’ के रूप में शामिल हुए हैं। सरकार जनभागीदारी, रोकथाम एवं पुनर्वास के माध्यम से मादक पदार्थों के खिलाफ अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाने का प्रयास कर रही है। पलक्कड़ में मादक पदार्थ रोधी जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने ‘ऑपरेशन तूफान’ को यूडीएफ सरकार का प्रमुख कार्यक्रम बताया और कहा कि इस अभियान को आम जनता से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। चेन्निथला ने ये बातें एक जनसमूह द्वारा आयोजित ‘तूफान जागरण’ रैली का नेतृत्व करने के बाद कहीं। इस रैली में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल लोगों को मादक पदार्थों के खिलाफ शपथ दिलाई और उन्हें ‘तूफान वॉरियर्स’ घोषित किया। उन्होंने याद दिलाया कि सुपरस्टार मोहनलाल को सबसे पहले ‘तूफान वॉरियर’ नामित किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन तूफान केरलम सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है। हमारे अनुमान के मुताबिक, राज्यभर में अब तक 30 लाख से अधिक लोग शपथ लेकर ‘तूफान वॉरियर्स’ बन चुके हैं।’’मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह अभियान केवल गिरफ्तारियों और कानून लागू करने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन को रोकना और इससे प्रभावित लोगों को फिर से सामान्य जीवन जीने में मदद करना भी है। चेन्निथला ने बुधवार को नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य के गृह विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की थी। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि शाह ने ‘ऑपरेशन तूफान’ की प्रगति की सराहना की और केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान के तहत आगे भी सहयोग देने का संकेत दिया।
पत्नी के प्यार में रिक्शा चलाया, साड़ी बेची… घुटनों पर आए मनोज तिवारी!
मनोज तिवारी ने पत्नी सुरभि को खुश करने के लिए बनारस में रिक्शा चलाया, साड़ी बेची और पैसे कमाए. फिर घुटनों पर बैठकर प्रपोज किया और कहा- I LOVE YOU. उनका रोमांटिक वीडियो देख सोनाली बेंद्रे समेत शो के कंटेस्टेंट भावुक हो गए.
दिवाली-छठ पर घर जाने की टेंशन खत्म, बिना रिजर्वेशन वाली ट्रेनों का ऐलान; पूरी डिटेल
दिवाली और छठ पूजा पर घर जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत दी है। दिल्ली से बिहार, सरहिंद से सहरसा और श्रीनगर से कटरा के बीच स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। जानें ट्रेन नंबर, तारीख, रूट, टाइमिंग और रेलवे की 18 हजार त्योहार स्पेशल ट्रेनों से जुड़ी पूरी जानकारी।
सोशल मीडिया पर कोई यूजर आपत्तिजनक पोस्ट करता है, फर्जी खबर फैलाता है या किसी की छवि खराब करने वाला कंटेंट डालता है, तो क्या इसके लिए सिर्फ पोस्ट करने वाला व्यक्ति जिम्मेदार होगा या फेसबुक, इंस्टाग्राम और X जैसी कंपनियों को भी जवाब देना पड़ेगा? भारत सरकार सोशल मीडिया की जवाबदेही तय करने के […] यह लेख सोशल मीडिया पर यूजर की पोस्ट के लिए फेसबुक-X भी होंगे जिम्मेदार? सरकार सेफ हार्बर खत्म करने की तैयारी में सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
जब भारत में अंग्रेजों ने रेलवे ट्रैक बनाए तो इसका ठेका किसे मिला था?
भारत में जब रेलवे का जाल बिछ रहा था. तब माहौल आज जैसा नहीं था. उस वक्त रेलवे पर पूरी तरह से सरकार का कंट्रोल नहीं था. प्राइवेट कंपनियां न सिर्फ ट्रैक बिछाने और स्टेशन बनाने का काम करती थी, बल्कि ट्रेनों के ऑपरेशन का काम भी इनके हाथ में ही था. तब रेलवे को चलाने का कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट दिया जाता था.
क्या अब 'मिस्टर वीटो' बनेंगे Donald Trump?
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. अब वे ट्रंप प्रशासन, ईरान युद्ध और उनके कारोबारी हितों की जांच कर सकते हैं. महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें और टैरिफ नीति भी रिपब्लिकन पार्टी की हार की बड़ी वजह बने. इस नतीजे का असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव तक दिखाई दे सकता है.
IIT मद्रास के राहुल को Microsoft में मौका, लेकिन चुना अलग रास्ता
मैनेजमेंट और फाइनेंस से लेकर डेटा साइंस तक, राहुल कुमावत ने एक अलग करियर का रास्ता चुना है. CFA लेवल 1 पास करने और IIT मद्रास से BS करने के बाद, उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट में बिजनेस स्ट्रेटेजी एनालिस्ट के तौर पर एक साल की अप्रेंटिसशिप हासिल की है.
साक्षी धोनी का रीयूनियन, 20 साल पुराने दोस्तों संग मचाया धमाल, PHOTOS
एमएस धोनी की पत्नी साक्षी धोनी ने देहरादून पहुंचकर अपने कुछ फोटोज शेयर किए हैं , जहां उन्होंने वेलहम गर्ल्स स्कूल (Welham Girls’ School) के पुराने दोस्तों के साथ वक्त बिताया. साक्षी ने इंस्टाग्राम पर तस्वीर शेयर करते हुए '20 years after' लिखा. #welhamfounders2026 के साथ उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
5 ट्रिलियन डॉलर का हुआ भारतीय शेयर बाजार, 6 दिन से मार्केट में दिवाली
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी आई है, जिस कारण भारतीय बाजार में सेंसेक्स करीब 79000 लेवल के करीब पहुंच गया है, जबकि निफ्टी 24400 से ऊपर पहुंच गया है.
'हिंदुत्व नफरत फैलाता है', दिग्विजय सिंह ने फिर दिया विवादित बयान
पूर्व MP सीएम दिग्विजय सिंह ने अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दौरान सनातन धर्म और हिंदुत्व को अलग-अलग बताया. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को हिंदुत्व की तरह पेश किया जा रहा है और इससे लोगों के मन में नफरत बढ़ रही है.
बैकलेस चोली में रवीना की बेटी का जलवा, नीले लहंगे में छाईं; PHOTOS
रमेश तौरानी की दिवाली पार्टी में रवीना टंडन की बेटी राशा थदानी अपने रॉयल ब्लू लहंगे में छा गईं. गोल्डन जरी वर्क, बैकलेस कुर्ता स्टाइल चोली, ऑर्गेंजा दुपट्टे और गजरे वाले बन ने उनके लुक को बेहद खास बनाया. देखिए राशा के आउटफिट से लेकर मेकअप और जूलरी तक की पूरी डिटेल्स.
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर भारत में अशांति फैलाने के लिए विदेशी एनजीओ और भारत विरोधी नेटवर्कों से अवैध फंडिंग लेने का आरोप लगाया है।
होर्मुज की खाड़ी में भारत को मिली विशेष छूट तो भड़का पाकिस्तान
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य और राजनयिक तनाव के बीच रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से जुड़ी एक बड़ी और दूरगामी खबर सामने आई है। ईरान सरकार ने घोषणा की है कि वह होर्मुज की खाड़ी के इस संकरे समुद्री मार्ग में भारतीय व्यावसायिक जहाजों पर आवाजाही की कोई पाबंदी लागू नहीं करेगा। हालांकि, इस ऐतिहासिक फैसले के आते ही पड़ोसी देश पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। इस्लामाबाद जो खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ (Mediator) के रूप में पेश करने की कोशिशों में जुटा था, उसे ईरान के इस रुख से भारी कूटनीतिक झटका लगा है। पाकिस्तानी हुक्मरान और वहां का मीडिया इस बात पर बुरी तरह बौखलाया हुआ है कि इस्लामाबाद की लगातार जारी बातचीत और कथित मध्यस्थता प्रयासों को किनारे रखते हुए तेहरान ने नई दिल्ली को प्राथमिकता दी और पाकिस्तान को किसी भी प्रकार का विशेष संरक्षण या छूट देने से साफ इनकार कर दिया।होर्मुज की खाड़ी का रणनीतिक महत्व और ईरान द्वारा भारत को दी गई खास रियायतहोर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और रणनीतिक ऊर्जा गलियारा माना जाता है, जहां से वैश्विक समुद्री कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। हालिया वैश्विक और क्षेत्रीय तनावों के बीच ईरान ने अमेरिकी और पश्चिमी मित्र देशों के जहाजों की आवाजाही को कड़ाई से सीमित कर दिया था। इसी बीच, तेहरान के आधिकारिक सूत्रों ने साफ कर दिया कि भारत, चीन, कतर और इराक जैसे देशों के जहाजों को इस जलडमरूमध्य में पूर्ण छूट और सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जाएगा। भारत के साथ अपने ऐतिहासिक व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए ईरान ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा और दवा आवश्यकताएं निर्बाध रूप से जारी रहेंगी। इस छूट के बाद भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को फारस की खाड़ी में किसी भी तरह की अनिश्चितता या नौसैनिक हमले का खतरा नहीं रहेगा, जो भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है।मध्यस्थता का राग अलापने वाले पाकिस्तान की खुली पोल और इस्लामाबाद में नाराजगीदूसरी तरफ, पाकिस्तान जो अमेरिका-ईरान तनाव के बीच खुद को एक वैश्विक शांतिदूत और मध्यस्थ के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहा था, इस घटनाक्रम से बुरी तरह बिलबिला उठा है। पाकिस्तान का दावा था कि वह तेहरान और वाशिंगटन के बीच गुप्त वार्ता और तनाव कम करने की कोशिशों में अहम भूमिका निभा रहा है। लेकिन जब तेहरान ने व्यावहारिक और ठोस रियायतों की घोषणा की, तो उसमें पाकिस्तान का नाम तक शामिल नहीं था। पाकिस्तानी मीडिया और रक्षा विश्लेषकों का गुस्सा इस बात पर फूट पड़ा है कि संकट की घड़ी में पाकिस्तान के जहाजों को ईरान की ओर से कोई खास रियायत या गारंटी नहीं दी गई, जबकि भारत जिसने किसी भी सैन्य गुटबाजी का हिस्सा न बनते हुए केवल स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष कूटनीति अपनाई, उसे सबसे बड़ा कूटनीतिक फायदा मिल गया।पाकिस्तान की बौखलाहट के पीछे की असली वजह और आर्थिक झटके का डरइस्लामाबाद की बौखलाहट सिर्फ कूटनीतिक उपेक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आर्थिक और रणनीतिक कारण भी हैं। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों और कच्चे तेल के आयात के लिए पूरी तरह से इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है। यदि होर्मुज की खाड़ी में पाकिस्तानी जहाजों या उससे जुड़े कार्गो को किसी भी तरह का जोखिम उठाना पड़ता है, तो वहां ईंधन का संकट खड़ा हो जाएगा और पहले से बदहाल पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को संभालना नामुमकिन हो जाएगा। इसके अलावा, पाकिस्तान को यह डर भी सता रहा है कि ईरान और भारत का बढ़ता आपसी तालमेल अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के रणनीतिक प्रभाव को और अधिक मजबूत करेगा, जिससे इस पूरे समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तान का कूटनीतिक महत्व और भी कम हो जाएगा।भारत की संतुलित विदेश नीति और ग्लोबल साउथ में बढ़ता कूटनीतिक कदईरान के इस कदम को भारत की स्वतंत्र, संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति का एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। नई दिल्ली ने पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद हमेशा तेहरान के साथ अपने संवाद के रास्ते खुले रखे हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना से लेकर ऊर्जा व्यापार तक भारत और ईरान के संबंध हमेशा स्थिर रहे हैं। यही वजह है कि जब खाड़ी के इस मुहाने पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, तब भी ईरान ने भारत के हितों की रक्षा करने का भरोसा दिया है। भारत की इस रणनीतिक सफलता ने न केवल घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता को खत्म किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि बहुध्रुवीय दुनिया में भारत की आवाज को नकारा नहीं जा सकता।
कनाडा ने मारी बाजी, यूएस को नहीं मिली जगह; जानिए पूरी रैंकिंग
दुनियाभर में सुरक्षित यात्रा, शांति, कम अपराध दर और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक नई और बेहद दिलचस्प ग्लोबल सेफ्टी रैंकिंग सामने आई है। बर्कशायर हाथवे ट्रेवल प्रोटेक्शन (BHTP) द्वारा जारी की गई दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों की इस नई सूची ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस ताजा वार्षिक सूची में उत्तरी अमेरिकी देश कनाडा ने तमाम दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए पहला यानी शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं दूसरी ओर, दुनिया की महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका (US) को इस बार टॉप-10 सूची में जगह नहीं मिल पाई है, जिससे भू-राजनीतिक और यात्रा विश्लेषकों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। यह रिपोर्ट यात्रियों के अनुभव, हिंसक अपराधों से सुरक्षा, आतंकवाद मुक्त माहौल, परिवहन सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी पैमानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।कनाडा ने मारी बाजी और वैश्विक पायदान पर छलांगकनाडा ने इस नई रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सीधे पहला स्थान हासिल किया है। पिछले कुछ संस्करणों की तुलना में कनाडा ने अपनी स्थिति में जबरदस्त सुधार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और एलजीबीटीक्यू+ यात्रियों के लिए सुरक्षा के मामले में कनाडा को सर्वोच्च अंक मिले हैं। इसके अलावा, यहां violent crime (हिंसक अपराध) की कम दर और स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता ने इसे दुनिया भर के पर्यटकों और प्रवासियों के लिए सबसे भरोसेमंद देश बना दिया है। कनाडा का शीर्ष पर पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि कड़े कानूनों और सामाजिक सद्भाव वाले देश पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं।टॉप-10 देशों की सूची में कौन-कौन है शामिल?इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में कनाडा के बाद दुनिया के अन्य सबसे सुरक्षित देशों ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। सूची में न्यूजीलैंड दूसरे स्थान पर काबिज है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ शांतिप्रिय माहौल के लिए जाना जाता है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया तीसरे और आइसलैंड चौथे स्थान पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। एशियाई देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए जापान ने पांचवां स्थान हासिल किया है, जो अपनी अनुशासित जीवनशैली और कम अपराध दर के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसके बाद यूरोपीय देशों का दबदबा देखने को मिलता है, जिसमें ऑस्ट्रिया छठे, आयरलैंड सातवें, नीदरलैंड्स आठवें और डेनमार्न नौवें पायदान पर रहे। पुर्तगाल ने इस सूची के दसवें स्थान पर रहकर अपना सफर पूरा किया है।अमेरिका को टॉप-10 से बाहर क्यों होना पड़ा?दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति और आर्थिक रूप से संपन्न देश होने के बावजूद अमेरिका का इस प्रतिष्ठित सूची के शीर्ष दस देशों में शामिल न होना एक बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के भीतर गन वायलेंस (बंदूक हिंसा), सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी कुछ चिंताएं और बड़े शहरों में बढ़ते अपराध के आंकड़ों ने इसकी रैंकिंग को प्रभावित किया है। हालांकि अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत यात्रा के तय मानकों पर यह कई यूरोपीय और एशियाई देशों से पिछड़ गया है, जिसके चलते यह सूची में शीर्ष स्थान पाने से चूक गया।स्वास्थ्य और परिवहन सुरक्षा जैसे पैमानों पर कसौटीकिसी भी देश को सुरक्षित घोषित करने से पहले उसकी आंतरिक सुरक्षा के कई कड़े पैमानों का बारीकी से मूल्यांकन किया जाता है। इस इंडेक्स को तैयार करने में ग्लोबल पीस इंडेक्स, न्युम्बेओ डेटा, जियोश्योर ग्लोबल और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों को आधार बनाया गया है। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि देश में आतंकवाद का जोखिम कितना कम है, वहां की परिवहन व्यवस्था (Transportation Safety) कितनी आधुनिक और सुरक्षित है, तथा आपातकालीन स्थितियों में स्वास्थ्य सेवाएं कितनी तेजी से मिलती हैं। इन सभी कड़े मानकों पर खरा उतरने के बाद ही देशों की यह अंतिम सूची तैयार की जाती है।
ममदानी, अब्दुल, ट्रंप के दो सबसे बड़े सियासी दुश्मन
अमेरिकी राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिणपंथी प्राथमिकताओं और सख्त नीतियों के बीच दो प्रमुख मुस्लिम नेताओं—ज़ोहराम ममदानी और अब्दुल मलिक (तथा अमेरिकी स्थानीय राजनीति में असर रखने वाले अन्य मुस्लिम प्रतिनिधि)—की भूमिका बेहद अहम बनकर उभरी है। न्यूयॉर्क शहर की राजनीति में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले ज़ोहराम ममदानी और समुदाय को संगठित करने वाले मुस्लिम नेता अब्दुल अमेरिकी प्रशासन के लिए एक बड़ी सियासी चुनौती पेश कर रहे हैं। इन नेताओं ने न केवल कामकाजी वर्ग, प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को मजबूती से उठाया है, बल्कि ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) एजेंडे के सामने एक मजबूत और संगठित प्रगतिशील विकल्प भी खड़ा कर दिया है।अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व का उभार और ट्रंप प्रशासन की चिंताएंअमेरिका में लंबे समय से रूढ़िवादी और रिपब्लिकन राजनीति का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जनसांख्यिकीय और सामाजिक बदलावों ने बड़े शहरों की राजनीति का पासा पलट दिया है। ज़ोहराम ममदानी, जिन्होंने न्यूयॉर्क शहर की मेयर/स्थानीय चुनाव में अपनी नीतियों के दम पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की, वे प्रगतिशील और लोकतांत्रिक समाजवादियों का एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। ममदानी की राजनीति का मुख्य केंद्र अफोर्डेबिलिटी यानी आम लोगों के लिए रहने की लागत को कम करना, मुफ्त सार्वजनिक परिवहन देना और कामकाजी वर्ग के अधिकारों की रक्षा करना रहा है। वहीं, इमाम अब्दुल मलिक मुजाहिद जैसे प्रभावशाली सामुदायिक नेता मुस्लिम समुदाय को नागरिक अधिकारों, मीडिया सहभागिता और राजनीतिक सक्रियता के प्रति एकजुट कर रहे हैं। इन दोनों नेताओं का यह उभार ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी वैचारिक और जमीनी चुनौती बन गया है।आर्थिक असमानता और अफोर्डेबिलिटी पर ट्रंप के एजेंडे को सीधी चुनौतीडोनाल्ड ट्रंप का राजनीतिक आधार हमेशा से कामकाजी वर्ग के उन लोगों पर टिका रहा है जो आर्थिक तंगी और महंगाई से परेशान थे। लेकिन ज़ोहराम ममदानी ने ट्रंप के इसी वोट बैंक की नस पकड़कर राजनीति की दिशा बदल दी। ममदानी का मानना है कि ट्रंप के मतदाता केवल आर्थिक कारणों से उनकी ओर झुके थे, और यदि उन्हें सस्ती आवास सुविधा, उचित मजदूरी और बेहतर जनसुविधाएं दी जाएं तो वे प्रगतिशील राजनीति के साथ आ सकते हैं। ममदानी ने न्यूयॉर्क में टैक्स ढांचे को सुदृढ़ करने और अमीरों पर अधिक कर लगाकर आम जनता को राहत देने की नीति की वकालत की है। यह मॉडल सीधे तौर पर ट्रंप की कॉर्पोरेट-समर्थक और कर-कटौती वाली नीतियों पर प्रहार करता है, जिससे रिपब्लिकन खेमे में खलबली मच गई है।अप्रवासन, मुस्लिम अधिकारों और मानवाधिकारों के मोर्चे पर घेराबंदीट्रंप प्रशासन की सख्त अप्रवासन नीतियों, बॉडर सीलिंग और 'मुस्लिम बैन' जैसे पूर्व फैसलों के खिलाफ ये नेता एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े हुए हैं। इमाम अब्दुल और साउंड विज़न जैसे संगठनों के माध्यम से अमेरिकी मुस्लिम समुदाय में कानूनी जागरूकता और नागरिक सहभागिता बढ़ाई जा रही है। जब भी वाशिंगटन से प्रवासियों या मुस्लिम समुदाय को लक्षित करने वाली कोई नीति सामने आती है, तो ये नेता स्थानीय स्तर पर अदालती लड़ाइयों, विरोध प्रदर्शनों और मीडिया अभियानों के जरिए सरकार को बैकफुट पर धकेल देते हैं। ममदानी ने भी न्यूयॉर्क में आव्रजन प्रवर्तन की सख्त नीतियों के खिलाफ खड़े होकर प्रवासियों को शरण देने और उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम किया है, जिससे ट्रंप की केंद्रीय नीतियों को स्थानीय स्तर पर लागू करना मुश्किल हो रहा है।जमीनी गठबंधन और युवा-अल्पसंख्यक वोट बैंक की गोलबंदीइन नेताओं की सबसे बड़ी ताकत इनका जमीनी नेटवर्क है। ये केवल भाषणबाज़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्होंने अश्वेत, हिस्पैनिक, एशियाई और युवा मतदाताओं का एक बहुसांस्कृतिक गठबंधन तैयार किया है। 18 से 29 वर्ष के युवा मतदाताओं और कामकाजी प्रवासियों के बीच इनकी बढ़ती लोकप्रियता ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका का भविष्य अधिक विविधतापूर्ण और प्रगतिशील नीतियों पर आधारित होने वाला है। जब स्थानीय स्तर पर इस तरह का मजबूत गठबंधन बनता है, तो राष्ट्रपति पद की केंद्रीय ताकतें भी पंगु महसूस करने लगती हैं, क्योंकि शहरों और राज्यों के प्रशासन को चलाए बिना केंद्रीय नीतियां सफल नहीं हो सकतीं।क्या वाशिंगटन की नीतियों को बदलने पर मजबूर कर देंगे ये नेता?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममदानी और अब्दुल जैसे नेताओं की बढ़ती पैठ से अमेरिकी कांग्रेस और राष्ट्रपति भवन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। यद्यपि ट्रंप प्रशासन केंद्रीय स्तर पर अपनी नीतियां लागू करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन न्यूयॉर्क और शिकागो जैसे प्रमुख आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों में इन नेताओं का बढ़ता प्रभाव ट्रंप की प्राथमिकताओं में सीधी सेंध लगा रहा है। यदि यह गति बनी रहती है, तो आगामी मध्यावधि और राष्ट्रीय चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
10.70 लाख कीमत... नए अवतार में आ रही 6 एयरबैग वाली धांसू कार
फॉक्सवैगन अपनी नई कार को लॉन्च करने वाली है जिसका टीजर कंपनी ने जारी कर दिया है. हम बात कर रहे फॉक्सवैगन वर्टस की जो भारत में ब्रांड की एक मात्र सेडान कार है. फेसलिफ्ट अवतार में कार नए कलर ऑप्शन और दमदार फीचर्स के साथ आएगी. कार में दो इंजन ऑप्शन मिलेगा. आइए जानते हैं नई वर्टस में क्या होगा खास.
AK-47 बनाने वाली कंपनी अब भारत में बनाएगी एंटी-ड्रोन शॉटगन
रूस की कलाश्निकोव कंपनी ने भारत में MP-155 शॉटगन के निर्माण के लिए लाइसेंसिंग समझौता किया है. शिकार के लिए बनी यह सेमी-ऑटोमैटिक गन अब ड्रोन से लड़ने में भी कारगर साबित हो रही है.
Delhi Police Crime Branch के दफ्तर पहुंचे CJP नेता सौरव दास, Jantar Mantar मामले में पूछताछ
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका गुरुवार को राजौरी गार्डन स्थित दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे। उन्हें अक्टूबर में जंतर-मंतर (जिसे अब प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है) पर हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर, जहाँ से विरोध प्रदर्शन हटा लिया गया था, वहाँ पहुँचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद इन दो नेताओं को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। पुलिस के अनुसार, ऐसा करके उन्होंने 11 अक्टूबर को हस्ताक्षरित 'शांति बांड' (पीस बॉन्ड) का भी उल्लंघन किया था। 21 अक्टूबर को, 50,000-50,000 रुपये के निजी और ज़मानती बॉन्ड भरने के बाद उन्हें तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। बाद में CJP नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले क्राइम ब्रांच को सौंप दिए गए। क्राइम ब्रांच ने दास और रंका को अक्टूबर के अंत से पहले पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने और समय की मांग की। इसे भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार साथ होते तो...ट्रंप की पार्टी को मिडटर्म इलेक्शन में मिली शिकस्त पर CJP ने लिए मजे ये मामले 14 अक्टूबर की एक घटना से जुड़े हैं, जिसमें दास, रंका और CJP नेता अजिंक्य शिंदे समेत 11 अन्य लोगों ने कथित तौर पर जंतर-मंतर में प्रवेश किया था। जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है। यह समूह मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा था और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे भी लगाए। इन सभी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। शिंदे को शांति बनाए रखने के एक मुचलके (पीस बॉन्ड) पर हस्ताक्षर करने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया, जबकि दास और रंका लगभग एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे। इसे भी पढ़ें: Mamata Banerjee से मुलाकात के बाद भी Cockroach Janata Party ने विपक्ष की Ramlila Maidan Rally से क्यों बनाई दूरी? जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में चल रही जांच पूरी होने तक, स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ऋतु राज ने दोनों कार्यकर्ताओं को 50,000-50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड भरने के बाद रिहा करने का आदेश दिया। पुलिस ने बताया कि दास और रंका ने लिखित रूप में यह वचन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे। साथ ही, उन्होंने न्यायपालिका और उसकी सभी इकाइयों (जिसमें SEM कोर्ट भी शामिल है) पर पूरा भरोसा जताया।
यूपी में प्रियंका का कमबैक! सपा से संतुलन और कांग्रेस का दबदबा बढ़ाने का प्लान
उत्तर प्रदेश में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के आक्रामक तेवरों और 100 से ज्यादा सीटों की कांग्रेसी मांग के बीच प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक बार फिर राज्य के चुनावी अभियान की कमान संभाल ली है. सीट शेयरिंग के पेंच को सुलझाने और पार्टी को सम्मानजनक हिस्सेदारी दिलाने के लिए प्रियंका गांधी ही अब सपा नेतृत्व के साथ बातचीत की अंतिम डोर संभालेंगी.
सुप्रीम कोर्ट ने आजम खां की ईडी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दी है। 16 नवंबर को डिवीजन बेंच सुनवाई करेगी और अंतरिम राहत पर विचार करेगी।
Agnipath Scheme में बदलाव से कुशल जवानों को बनाए रखने में मदद मिलेगी, बोले कारगिल नायक खुशाल ठाकुर
नयी दिल्ली, पांच नवंबर सरकार द्वारा अग्निपथ योजना में बड़े बदलाव की घोषणा के बाद कारगिल युद्ध के नायक ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) खुशाल ठाकुर ने कहा कि यह फैसला उन लोगों की आवाज सुने जाने का संकेत है, जो लंबे समय से इस योजना की समीक्षा की मांग कर रहे थे। सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि चार साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेना से बाहर होने वाले अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार दिया जाएगा। इसके बाद निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में भर्ती किया जाएगा। वर्ष 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान टाइगर हिल की लड़ाई लड़ने वाले 18 ग्रेनेडियर्स की कमान संभाल चुके ब्रिगेडियर ठाकुर ने बुधवार को कहा कि सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए चार साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत के बजाय 75 प्रतिशत अग्निवीरों को बरकरार रखा जाना चाहिए। सेना के कुछ अन्य पूर्व अधिकारियों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह ने इसे अग्निवीर योजना का ‘बेहतर स्वरूप’ बताया। सैन्य भर्ती योजना में बड़े बदलाव के तहत सरकार ने घोषणा की है कि चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार दिया जाएगा। इसके बाद निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में भर्ती किया जाएगा। रक्षा प्रमुख (सीडीएस) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने यह घोषणा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा तीनों सेनाओं की विस्तृत समीक्षा के बाद की गई सिफारिशों को मंजूरी दिए जाने के तुरंत बाद की। जून 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सैनिकों की भर्ती चार साल के कार्यकाल के लिए की जाती थी। इसमें अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान था। योजना में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब करीब 18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें 31 दिसंबर तक सशस्त्र बलों से बाहर होना था। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, दो साल की एक और सेवा अवधि शुरू करने और उसके बाद सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में शामिल करने के प्रावधान से मंत्रिमंडल ने सभी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में समाहित करने का रास्ता तैयार किया है। वर्ष 2010 में सेवानिवृत्त हुए ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा कि इस नए कदम से पिछले चार वर्षों में प्रशिक्षित कुशल और विशेषज्ञ मानव संसाधन को सेना में बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने देहरादून से फोन पर पीटीआई-भाषा को बताया, विशेष रूप से उन युवाओं को बनाए रखने से फायदा होगा, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर देखा है। इससे निरंतरता बनी रहेगी और सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। हमारी दोनों सीमाओं पर मौजूदा चुनौतीपूर्ण सुरक्षा परिस्थितियों और सीमा पार आतंकवाद की समस्या को देखते हुए यह स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि यह भी जरूरी है कि समग्र भर्ती प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जाए। ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा, शुरुआत से ही मेरा सुझाव रहा है कि नियमित सेवा में बनाए रखे जाने वाले अग्निवीरों का प्रतिशत 25 से बढ़ाकर 75 किया जाना चाहिए। सरकार को मेरा सुझाव आज भी यही है। अग्निपथ योजना शुरू होने के बाद से ही विभिन्न वर्गों की ओर से इसकी आलोचना होती रही है। विपक्षी कांग्रेस ने जहां योजना को वापस लेने की मांग की है, वहीं पूर्व सैनिकों के समुदाय के कई सदस्यों ने भी इसमें बदलाव की जरूरत बताई है। पिछले चार वर्षों में योजना की समीक्षा की मांग लगातार उठती रही है। जून 2022 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने भी केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार से अग्निपथ योजना की समीक्षा करने का आग्रह किया था। उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं को आश्वस्त किया था कि सशस्त्र बलों की नई भर्ती नीति से उनका भविष्य प्रभावित नहीं होगा। ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा कि सरकार की बुधवार की घोषणा से स्पष्ट है कि योजना की समीक्षा की मांग करने वालों की आवाज सुनी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संभव है कि दो साल बाद सरकार योजना की एक और समीक्षा करे। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि नई व्यवस्था के तहत सशस्त्र बलों में तीन तरह के जवान होंगे- नियमित सैनिक, चार साल की सेवा वाले अग्निवीर और छह साल की सेवा वाले विस्तारित अग्निवीर। उन्होंने कहा कि इन तीनों वर्गों के बीच अंतर से सावधानीपूर्वक निपटना होगा। रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, संगठन की जरूरतों और परिचालन दक्षता के आधार पर किए गए निष्पक्ष आकलन में कौशल, प्रेरणा के स्तर, शारीरिक फिटनेस और तकनीकी दक्षता के मामले में अग्निवीरों का प्रदर्शन उत्कृष्ट पाया गया है। पहले की योजना के अनुरूप योग्यता के आधार पर 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में नियमित रोजगार दिया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की सिफारिश पर दो साल की अतिरिक्त सेवा अवधि को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। बयान के मुताबिक, इस दो साल की अतिरिक्त अवधि पूरी होने के बाद सभी अग्निवीरों को उनकी इच्छा और चयन मानदंडों को पूरा करने की शर्त पर नियमित सैनिक के रूप में भर्ती होने का अवसर दिया जाएगा। कारगिल युद्ध के नायक ठाकुर ने कहा कि सरकार को नियमित सेवा में शामिल किए जाने के लिए निर्धारित किए जाने वाले सटीक मानदंडों को स्पष्ट करना चाहिए। एक अन्य पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) दुष्यंत सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से घोषित नई नीति एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा है, क्योंकि पिछली नीति में भी योजना की समय-समय पर समीक्षा किए जाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, यह अग्निवीर (अग्निपथ) योजना का बेहतर स्वरूप है। अग्निवीर योजना पहले भी अच्छी थी, लेकिन अब इसे और अधिक प्रभावी बनाया गया है। मुझे लगता है कि अब यह एक पूर्ण योजना बन गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य तैयारियों के लिहाज से यह बड़ा कदम है। अग्निवीरों के अपने विकास और प्रगति के नजरिये से भी यह अच्छा फैसला है।
गंगोत्री हाईवे पर बड़ा हादसा: नदी में गिरी इनोवा कार, 4 लोगों की मौत
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में गंगनानी के पास गंगोत्री हाईवे पर इनोवा कार नदी में गिर गई. इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक शख्स घायल है और दो लोग लापता हैं. मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. पढ़ें पूरी कहानी.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि किसी गिरफ्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की संवैधानिक समय-सीमा, उसे हिरासत में लिए जाने के उस पल से शुरू होती है, जब उसकी स्वतंत्रता सीमित हो जाती है।
सस्पेंड दारोगा की मौत, फंदे से लटका था शव, पिता बोले- तनाव में था बेटा
यूपी के अलीगढ़ में 27 साल के सब इंस्पेक्टर सुंदरम तिवारी की मौत हो गई. पांच दिन पहले कचहरी परिसर का उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था. पिता का दावा है कि इसके बाद से बेटा तनाव में था. पुलिस फिलहाल मौत की वजह की जांच कर रही है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट' (FTSC) के लिए केंद्र प्रायोजित योजना को पांच साल और बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य बलात्कार के मामलों और 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण' (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज अपराधों में त्वरित सुनवाई और समय पर न्याय सुनिश्चित करना है। यह योजना अगले पांच वर्षों तक लागू रहेगी और इसके तहत देश भर में मौजूदा 779 सक्रिय अदालतों के नेटवर्क का विस्तार करके इनकी संख्या 850 कर दी जाएगी। उम्मीद है कि इस फैसले से महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के लंबित मामलों को निपटाने में न्यायिक प्रणाली की क्षमता मजबूत होगी। इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस योजना के जारी रहने से न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को एक्स पर लिखा, कम देरी, जल्दी न्याय! इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Agnipath Scheme में हुए बदलाव का Uttar Pradesh, Punjab, Uttarakhand Assembly Elections पर क्या असर पड़ेगा? फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों के लिए 3,788 करोड़ रुपये आवंटित इस योजना को कुल 3,788.04 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई है। इसमें से केंद्र सरकार 2,353.15 करोड़ रुपये देगी, जबकि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मिलकर 1,434.89 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। केंद्र सरकार का हिस्सा 'निर्भया फंड' से दिया जाएगा। स्वीकृत फंडिंग व्यवस्था के तहत, इन अदालतों के संचालन खर्च को पूरा करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दी जाती रहेगी। इसे भी पढ़ें: PM Modi संग बहस की चुनौती पर बोले Rahul Gandhi, पांच मिनट में साबित कर दूंगा आरोप देश भर में 850 अदालतें काम करेंगी इस विस्तारित योजना के तहत, सरकार फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या को मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 करने की योजना बना रही है। यह विस्तार इस बात पर निर्भर करेगा कि किस जिले में बलात्कार और POCSO (पोक्सो) से जुड़े कितने मामले लंबित हैं। हर अदालत में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) और छह सहायक कर्मचारी होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन संवेदनशील मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाए और इनकी सुनवाई व फैसला जल्द से जल्द हो सके। इन अदालतों को 'वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर' (संवेदनशील गवाहों के बयान दर्ज करने के केंद्र) और विशेष रूप से तैयार की गई कोर्टरूम सुविधाओं का भी सहयोग मिलेगा। इन इंतजामों का मकसद पीड़ितों और गवाहों को न्यायिक कार्यवाही के दौरान एक सुरक्षित, अधिक आरामदायक और बच्चों के अनुकूल माहौल प्रदान करना है। इस विस्तारित योजना से बलात्कार और POCSO मामलों के पीड़ितों को क्या लाभ होगा? योजना को जारी रखने से बलात्कार और POCSO मामलों के बड़े बैकलॉग (लंबित मामलों) को निपटाने में मदद मिलेगी, जिससे पीड़ितों को कम समय में न्याय मिल सकेगा। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देकर, यह पहल समाज के कमजोर वर्गों के लिए न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने का प्रयास करती है। विशेष रूप से तैयार की गई अदालती सुविधाएं और समर्पित कर्मचारी, न्यायिक प्रक्रिया को पीड़ितों खासकर बच्चों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएंगे। इसे भी पढ़ें: Energy Storage के लिए 14,500 करोड़ रुपये की योजना, PM Modi ने की सराहना सरकार फास्ट ट्रैक अदालतों के कामकाज की निगरानी करेगी न्याय विभाग, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर इस विस्तारित योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। अदालतों के कामकाज पर नज़र रखने के लिए FTSC डैशबोर्ड, समय-समय पर आने वाली प्रगति रिपोर्ट और खर्च के विवरण का उपयोग किया जाएगा। केंद्र सरकार, योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने के लिए उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के साथ नियमित परामर्श भी करेगी। इस नेटवर्क का विस्तार अलग-अलग जिलों में लंबित बलात्कार और POCSO मामलों की संख्या पर निर्भर करेगा, ताकि जिन जगहों पर सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां अतिरिक्त अदालतें स्थापित की जा सकें।
'रामायण' के लक्ष्मण को नहीं भाए रवि दुबे? छलका दर्द
सुनील लहरी ने नई रामायण में रवि दुबे की कास्टिंग पर रिएक्ट किया है. उन्होंने बताया कि रामानंद सागर के शो के वक्त कोई संदर्भ और तकनीक नहीं थी. लेकिन आज मामला बदल गया है.
'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ!' गाजियाबाद में पदयात्रा करेंगे सीएम योगी
सीएम योगी ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनादेश के सम्मान के प्रति जागरूकता जरूरी है. इसी उद्देश्य से आयोजित पदयात्रा के जरिए लोगों तक लोकतंत्र की मजबूती का संदेश पहुंचाया जाएगा.
दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में CJP नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे। पुलिस ने दोनों को पूछताछ के लिए समन जारी किया था।
Samruddhi Expressway पर कार सवार से हथियार के बल पर लूट, Thane पुलिस ने पकड़े पांच आरोपी
ठाणे, पांच नवंबर महाराष्ट्र के ठाणे जिले में समृद्धि एक्सप्रेसवे पर कार सवार एक व्यक्ति और उसके चालक से नकदी व कीमती सामान लूटने के आरोप में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने चाकू और बंदूक दिखाकर वारदात को अंजाम दिया था। ठाणे ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनमोल मित्तल ने बुधवार शाम संवाददाता सम्मेलन में बताया कि घटना दो नवंबर को कल्याण तालुका में एक्सप्रेसवे की नागपुर से मुंबई जाने वाली लेन पर हुई। पुणे निवासी 55 वर्षीय खान अब्दुल फरीद अब्दुल हामिद अपने चालक के साथ कार से छत्रपति संभाजीनगर से ठाणे के कलवा जा रहे थे। इसी दौरान पांच आरोपियों ने अपनी कार उनके वाहन के सामने लगाकर रास्ता रोक दिया। आरोपियों ने चाकू और बंदूक दिखाकर हामिद और उनके चालक को धमकाया। इसके बाद उनसे 30 हजार रुपये नकद और दोनों के मोबाइल फोन लूट लिए। आरोपियों ने चालक को कुछ समय तक कार में बंधक भी बनाए रखा। हामिद की शिकायत पर कल्याण तालुका पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनमोल मित्तल ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की निगरानी की। पुलिस को घटनास्थल से कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इसके बाद तकनीकी निगरानी और सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की गई। जांच में पता चला कि सभी आरोपी अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर भाग गए हैं। इसके बाद पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और मंगलवार को पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आकाश बाबूलाल शेवाले (21), आकाश मर्दनसिंह उसारे (23), गोपाल कमलाल बामनावत (24), दुर्गेश ताराचंद फटपुरे (21) और लहू जयसिंह बरवाल (18) के रूप में हुई है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
इजरायल में कौन बनेगा अगला PM? नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच सत्ता की जंग
इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए आम चुनाव के अंतिम नतीजों को केंद्रीय चुनाव समिति ने मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को नतीजे सौंपे जाने के बाद सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें और गादी आइजेनकोट के विपक्षी गुट के खाते में 48 सीटें आई हैं. दोनों ही गठबंधन के पास सरकार बनाने की चुनौती है.
Vande Bharat Sleeper Complaint:
ममदानी ने डेमोक्रेट्स की जीत को बताया Blue Wave, कर दी ट्रंप को चुभने वाली बात
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स की ऐतिहासिक जीत पर न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने इसे 'ब्लू वेव' बताया है. ममदानी ने राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आम जनता अब अमीरों के पक्ष में काम करने वाले राजनेताओं को दो साल का वक्त भी देने को तैयार नहीं है.
यूपी चुनाव को लेकर एक्टिव हुईं प्रियंका गांधी, सीट बंटवारे से प्रचार तक संभालेंगी कांग्रेस की कमान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रियंका गांधी सक्रिय हो गई हैं। सपा के साथ सीट बंटवारे, चुनावी समितियों और प्रचार की रणनीति पर उनकी सीधी नजर रहेगी।
सूर्या की फिर चमकी किस्मत! मिली T20 कप्तानी, अब दो ट्रॉफी पर नजर
टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव अब घरेलू क्रिकेट में मुंबई की कमान संभालेंगे. उन्हें सैयद मुश्ताक अली और विजय हजारे ट्रॉफी के लिए कप्तान बनाया गया है. पिछले महीने रणजी टीम से बाहर रहे सूर्या अब सफेद गेंद के क्रिकेट में कप्तानी का दम दिखाएंगे.
आजम खां को सुप्रीम कोर्ट से झटका: ईडी गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर; अगली सुनवाई कब?---Supreme Court Transfers Azam Khan Plea Against ED Arrest to Allahabad High Court, Hearing on November 16
किराए के घर में टूट-फूट हुई तो कौन भरेगा बिल, मकान मालिक या किराएदार?
किराएदार के घर छोड़ने पर अगर दीवारों का पेंट उखड़ा हो, प्लास्टर टूटा हो या दीवारों में छेद हों, तो मरम्मत का खर्च कौन देगा? जानिए किन हालात में मकान मालिक को पैसे देने होंगे और कब किराएदार की सिक्योरिटी डिपॉजिट से कटौती की जा सकती है.
लव मैरिज कर पति कमाने चला गया, लौटा ताे पत्नी को जिंदा जला दिया
कन्नौज में गुरुवार सुबह दिल दहला देने वाली वारदात हुई. आरोप है कि पत्नी के चरित्र पर शक करने वाले पति सुखवीर सिंह ने उसे कुर्सी से बांधकर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी. घटना में महिला की मौत हो गई. छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र की इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल टीम मौके पर पहुंची. एसपी विनोद कुमार ने आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि की है.
रामायण देखने पहुंचे कुमार विश्वास, सूट पहन बेटियों ने लूटी महफिल
फिल्म 'रामायण' की स्पेशल स्क्रीनिंग में गीतकार कुमार विश्वास अपने परिवार के साथ पहुंचे. इस दौरान भगवान राम की तस्वीर वाले सफेद कुर्ते में उनका अंदाज खास रहा. वहीं, बड़ी बेटी अग्रता शर्मा लाल अनारकली सूट में बेहद खूबसूरत दिखीं. पूरे परिवार के ट्रेडिशनल लुक ने सबका ध्यान खींचा.
गोकुल डेयरी चुनाव: Rohit Pawar ने सरकार पर लगाया जनादेश की अनदेखी का आरोप
पुणे, पांच नवंबर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार ने बृहस्पतिवार को ‘‘लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी लोगों’’ से अपील की कि वे कोल्हापुर की गोकुल डेयरी के अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान वहां घेराव करें। पवार ने यह अपील डेयरी के अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान निदेशक मंडल में सरकार द्वारा नामित सदस्यों की नियुक्ति को लेकर जारी विवाद के बीच जनता के जनादेश की ताकत दिखाने के लिए की है। पवार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि सरकार की ओर से नामित सदस्यों की नियुक्ति का कदम गोकुल डेयरी पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश है जबकि कांग्रेस नेता के समर्थन वाले पैनल को 5.5 लाख मतदाताओं का समर्थन मिला था। इस सहकारी संस्था के अध्यक्ष पद का चुनाव 10 नवंबर को होना है। महाराष्ट्र कैबिनेट ने बुधवार को उन सहकारी संस्थाओं की प्रबंध समितियों में सरकार द्वारा नामित पांच सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दी, जिनका सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शामिल नहीं हैं। इनमें से चार सदस्यों को निदेशक मंडल में मतदान का अधिकार होगा। कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को ‘गोकुल डेयरी’ के नाम से जाना जाता है। डेयरी के हालिया चुनावों में कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सतेज पाटिल समर्थित ‘राजर्षि शाहू शेतकरी समाविचारी आघाडी’ ने 25 में से 13 सीट पर जीत दर्ज की। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली ‘महायुति’ समर्थित पैनल को 12 सीट मिलीं। अध्यक्ष का पद अभी खाली है क्योंकि चुनाव के लिए बुलाई गई बैठकों में 14 निदेशकों का जरूरी कोरम (न्यूनतम उपस्थिति) पूरा नहीं हो सका। मंत्रिमंडल का यह फैसला बोर्ड में सत्ता के संतुलन और अध्यक्ष पद के चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। पवार ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पवार ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा नामित सदस्यों को नियुक्त करने का कदम गोकुल डेयरी पर नियंत्रण पाने की एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि ऐसा करके सरकार ने उन 5.5 लाख सदस्यों के जनादेश की अनदेखी की है, जिन्होंने इस चुनाव में वोट डाला था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘5.5 लाख सदस्यों के जनादेश को दरकिनार कर गोकुल पर नियंत्रण हासिल करने के लिए सरकार की ओर से सदस्यों को नामित करना केवल ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि’ ही कहा जा सकता है।’’उन्होंने लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों से अध्यक्ष पद के चुनाव के दिन गोकुल डेयरी के बाहर जुटने की अपील की ताकि जनता के जनादेश की ताकत का संदेश ‘‘मुंबई से दिल्ली तक’’ पहुंचे। उन्होंने गोकुल के सदस्यों और सतेज पाटिल के प्रति अपना समर्थन भी जताया। सतेज पाटिल की पार्टी विपक्षी दलों के ‘महा विकास आघाडी’ (एमवीए) गठबंधन में राकांपा (शप) की सहयोगी है। उन्होंने कहा कि पूरा महाराष्ट्र उनके साथ खड़ा है। भाजपा पर परोक्ष निशाना साधते हुए पवार ने कहा कि यह कदम उन लोगों के ‘‘चोटिल अहंकार’’ का नतीजा है, जो चुनाव नतीजों के दिन कोल्हापुर में जुलूस निकालकर अपनी जीत का जश्न नहीं मना सके थे। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘क्या इसका मतलब यह है कि सरकार अब नामित सदस्यों की नियुक्ति करके जनता के जनादेश में हेरफेर करने की कोशिश करेगी? यह फैसला अराजकता पैदा करने जैसा है।’’
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स: टीएमसी के बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज, हाईकोर्ट जाने की सलाह
राहुल गांधी को ‘पगलू’ कहने पर ओवैसी का मजेदार जवाब, बोले- मैं तो बीवी पगलू हूं…
राहुल गांधी को बीजेपी की ओर से ‘एंटी इंडिया पगलू’ कहे जाने पर असदुद्दीन ओवैसी ने अपने अंदाज में जवाब दिया। बोले- मैं बीवी पगलू हूं। आखिर ओवैसी ने पत्नी और बच्चों का जिक्र करते हुए क्या कहा? जानिए उनके इस बयान के पीछे की पूरी कहानी।
अभी और गिरेगा... ये इंतजार पड़ा महंगा, सोना-चांदी की कीमतों का गदर
Gold-Silver Rate Today: सोना-चांदी की कीमतों में अक्टूबर महीने में तगड़ा क्रैश आया था, लेकिन नवंबर महीने में अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. गुरुवार को वायदा चांदी 1.90 लाख रुपये पर कारोबार कर रही है.
हापुड़ में 16 क्विंटल मिलावटी खोया बरामद, JCB से गड्ढे में दबाया
हापुड़ के लालपुर गांव में FSDA की टीम ने 16 क्विंटल खोया बरामद किया. SMP से तैयार खोये के चार सैंपल लिए गए और 3.20 लाख रुपये का पूरा स्टॉक गड्ढे में दबवाया गया. पढ़ें इस कार्रवाई की पूरी कहानी.
होटल रूम, युवक-युवतियां और आपत्तिजनक हालत... 6 होटलों पर पड़ा छापा
बिहार के जहानाबाद में पुलिस ने एक साथ छह होटलों में छापेमारी की. इस दौरान दो दर्जन से ज्यादा युवक-युवतियों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया. पुलिस को इन जगहों पर कथित तौर पर गलत गतिविधियों की खबर मिली थी. SDPO ने कहा है कि जांच में सबूत नहीं मिलने पर लोगों को परिजनों को बुलाकर पीआर बॉन्ड पर छोड़ा जा सकता है.
Kerala High Court ने नशे में गाड़ी चलाने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का दिया सख्त निर्देश
कोच्चि, पांच नवंबर केरल उच्च न्यायालय ने नशे में गाड़ी चलाते पाए जाने वाले लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू करने में मोटर वाहन विभाग (एमवीडी) की अनिच्छा पर चिंता जताई है। अदालत ने राज्य में लगातार हो रही जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर ऐसे मामलों में मोटर वाहन विभाग को अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ ने कहा कि अधिकारियों की ऐसी अनिच्छा कानूनी प्रावधानों के उस असर को भी कम कर देती है जिसका मकसद लोगों को गलत काम करने से रोकना है। अदालत ने कहा, ‘‘कानूनी प्रावधानों और अदालती निर्देशों के बावजूद ऐसा लगता है कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत ड्राइविंग लाइसेंस अयोग्य घोषित करने या रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है। अधिकारियों की यह अनिच्छा इस प्रावधान के पीछे विधायिका की मंशा को कमजोर करती है और इसके निवारक प्रभाव को कम करती है।’’अदालत ने कहा, ‘‘शराब पीकर वाहन चलाने की घटनाओं के कारण लगातार लोगों की जान जा रही है और परिवार तबाह हो रहे हैं, ऐसे समय में यह बहुत जरूरी है कि अधिकारी मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल उतनी ही गंभीरता से करें, जितनी कि इस स्थिति में जरूरत है।’’अदालत ने कहा कि इस प्रावधान को सख्ती से लागू करने से न केवल जवाबदेही तय होगी बल्कि यह सार्वजनिक सड़कों पर गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक व्यवहार करने वालों के खिलाफ एक कड़े निवारक के रूप में भी काम करेगा। अदालत ने परिवहन आयुक्त को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि नशे की हालत में गाड़ी चलाने से जुड़े मामलों में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जाए।
ECI का बड़ा U-टर्न, फॉर्म 6 से हटाया SIR का कॉलम, 2 चुनाव आयुक्तों ने इस पर सवाल उठाए थे
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उन राज्यों में, जहाँ 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की प्रक्रिया अभी चल रही है, ऑनलाइन फॉर्म 6 से 'SIR घोषणा' को पूरी तरह से अलग कर दिया है। यह कदम पहले किए गए उस बदलाव का विस्तार है, जिसके तहत उन राज्यों में फॉर्म 6 से इस घोषणा को पहले ही अलग कर दिया गया था, जहाँ SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस नए बदलाव के बाद, अब किसी भी राज्य में ऑनलाइन फॉर्म 6 आवेदन के हिस्से के रूप में 'SIR घोषणा' शामिल नहीं होगी। आवेदकों को अब इसे अलग से जमा करना होगा, न कि मतदाता सूची में शामिल होने के लिए भरे जाने वाले आवेदन फॉर्म के हिस्से के रूप में। यह निर्णय तब लिया गया है जब दो चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म 6 के साथ SIR घोषणा को जोड़ने को लेकर चिंता जताई थी। आयोग ने अब इस अलगाव (separation) को सभी राज्यों तक बढ़ा दिया है, जिनमें वे राज्य भी शामिल हैं जहाँ मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (intensive revision) का काम चल रहा है। इसे भी पढ़ें: Cabinet ने Fast Track Special Courts योजना 5 साल बढ़ाई, PM Modi बोले- त्वरित न्याय मिलेगा यह कदम चुनाव आयोग के भीतर किए जा रहे व्यापक प्रशासनिक बदलावों का हिस्सा है। इन नए आदेशों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और आयोग के कामकाज को सुव्यवस्थित करना है। ये बदलाव ऐसे समय में हुए हैं जब विपक्षी दल, मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अनियमितताओं का आरोप लगाया है और मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई है। राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेताओं ने दिल्ली में CEC के खिलाफ प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है, जबकि ये विरोध-प्रदर्शन देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों की सटीकता सुनिश्चित करना है। इसे भी पढ़ें: Election Commission का फैसला: SIR मसौदे से छूटे दिल्ली के वोटर बिना कानूनी कार्रवाई के भरें Form 6 ECI ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली में बदलाव किए हैं फॉर्म 6 में किए गए बदलावों के अलावा, चुनाव आयोग ने अपनी आंतरिक बैठकें आयोजित करने की प्रक्रिया में भी संशोधन किया है। अब बैठकों के एजेंडे पहले ही जारी कर दिए जाते हैं, और बैठकों के बाद उनके मिनट्स (कार्यवृत्त) औपचारिक रूप से जारी किए जाते हैं। पहले ऐसा नहीं किया जाता था। इन बदलावों का उद्देश्य आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाना है, और यह सुनिश्चित करना है कि बैठकों के दौरान हुई चर्चाओं और लिए गए निर्णयों का औपचारिक रिकॉर्ड रखा जाए। एक और बदलाव ECI के साथ काम करने वाले अधिकारियों की विदेश यात्राओं से संबंधित है। संशोधित प्रक्रिया के तहत, अब अधिकारियों को विदेश यात्रा पर जाने से पहले आयोग से मंजूरी लेनी होगी। पहले की व्यवस्था में ऐसी पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी। नए IT मॉड्यूल की जांच अब एक समिति करेगी नए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मॉड्यूल को विकसित करने और मंजूरी देने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। नए मॉड्यूल के प्रस्तावों को आयोग के सामने विचार के लिए रखने से पहले, एक समिति के पास भेजा जाएगा। इससे पहले, मंजूरी की यह प्रक्रिया चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के बीच विवाद का विषय रही थी। नई व्यवस्था के तहत, प्रस्तावों के आयोग तक पहुंचने से पहले एक समिति स्तर पर उनकी समीक्षा की जाएगी।
इंटरनेट डेस्क। बेंगलुरु के येलाहंका में एक बड़ी घटना सामने आई है। यहां मंगलवार को केरल के एक 22 वर्षीय युवक की उसके मालिक के घर पर कथित मारपीट के बाद मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में 45 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का केस दर्ज किया है। खबरों की माने तो मृतक लड़के की पहचान किरण के रूप में हुई है। वह केरल के पालक्काड़ जिले के तिरुवेगापुरा का रहने वाला था। वहीं आरोपी एक 45 साल का शख्स है, जो मूल रूप से तमिलनाडु का रहने वाला है और उत्तरी बेंगलुरु में स्वीट कॉर्न बनाने वाली मशीनें और गाड़ियां बनाने का काम करता है। क्या था कारण मीडिया रिपोटर्स की माने तो किरण अपने भाई के साथ बीते कुछ सालों से आरोपी के यहां काम करता था। लेकिन हालही में आरोपी को इस बात की भनक लग गई थी कि उसकी 19 साल की बेटी के साथ, किरण का अफेयर है। उसकी बेटी पास के एक शहर में पढ़ाई करती है और छुट्टियों में घर आई हुई थी। मंगलवार सुबह, आरोपी और उसकी पत्नी अपनी बेटी को यह बताकर घर से निकल गए कि वे दिन भर बाहर रहेंगे। पुलिस के मुताबिक, कुछ घंटों बाद जब वे वापस लौटे, तो उन्होंने किरण को येलाहंका स्थित अपने घर के एक कमरे में पाया। पुलिस ने बताया कि इसके बाद बेटी को चिक्काबल्लापुर में एक रिश्तेदार के घर भेज दिया गया, जबकि किरण घर पर ही रह गया। लगे ये आरोप पुलिस के अनुसार लड़की के पिता ने किरण के साथ मारपीट की, जिससे उसे कई चोटें आईं और वह बेहोश हो गया। उसे तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को इस घटना की सूचना दी। शुरुआती जांच से पता चला है कि आरोपी ने किरण की हत्या करने की योजना बनाई थी। हत्या को अंजाम देने से पहले आरोपी ने किरण के भाई को भी एक सप्ताह के लिए काम के सिलसिले में बेंगलुरु से बाहर भेज दिया था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या अपराध के समय वहां कोई और भी मौजूद था। येलहंका पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। pc-thehansindia.com
कैसे तय होगा कि अग्निवीरों को मिलेगी स्थायी सेवा या 2 साल का एक्सटेंशन?
अग्निवीरों के लिए 2 साल की अतिरिक्त सेवा विस्तार का रास्ता साफ हो गया है. कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए बताया कि नियमित सेवा में शामिल न हो पाने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों को 2 साल तक और सेवा देने का मौका दिया है लेकिन ये फायदा किन लोगों को मिलेगी, चलिए जानते हैं.
भारतीय राजनीति में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनका महत्व उनके प्रत्यक्ष घटनाक्रम से कहीं ज्यादा होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता शरद पवार के बीच हुई फोन पर बातचीत भी कुछ ऐसी ही है। प्रधानमंत्री मोदी ने शरद पवार से कहा कि आप अपनी सेहत का ध्यान रखिए, सुप्रिया सुले तैयार हैं, देश की चिंता हम दोनों कर लेंगे। सुनने में यह एक आत्मीय संवाद है, लेकिन इसके भीतर छिपे राजनीतिक संकेतों को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के एक होने की चर्चाएं तेज हैं। एक तरफ सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी गुट है, जो पहले से ही भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा है। दूसरी तरफ शरद पवार की एनसीपी (एसपी) है, जो विपक्षी गठबंधन INDIA के साथ खड़ी रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री का शरद पवार से संवाद और उसमें सुप्रिया सुले का विशेष उल्लेख राजनीतिक गलियारों में नई संभावनाओं के दरवाजे खोल रहा है। क्या एनडीए में आएंगे शरद पवार? देखा जाये तो शरद पवार भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने सत्ता के गलियारों में कई दशक बिताए हैं। उनकी राजनीतिक समझ, महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र पर प्रभाव और मराठा राजनीति में उनकी पकड़ आज भी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी भी कई मौकों पर शरद पवार के राजनीतिक अनुभव और क्षमताओं की सराहना कर चुके हैं। अब सवाल यह है कि क्या मोदी की इस पहल के पीछे महाराष्ट्र में एनडीए को और मजबूत करने की कोई बड़ी रणनीति है? माना जा रहा है कि यदि शरद पवार अपनी पार्टी के साथ एनडीए में आते हैं तो यह केवल एक राजनीतिक दल का गठबंधन बदलना नहीं होगा, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक अध्याय का अंत और नए अध्याय की शुरुआत होगी। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Agnipath Scheme में हुए बदलाव का Uttar Pradesh, Punjab, Uttarakhand Assembly Elections पर क्या असर पड़ेगा? सुनेत्रा पवार और शरद पवार के गुट साथ आए तो क्या होगा? फिलहाल सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी गुट एनडीए के साथ है। यदि शरद पवार का एनसीपी (एसपी) भी इस गठबंधन में शामिल होता है तो महाराष्ट्र में एनसीपी की दोनों राजनीतिक धाराएं एक ही सत्ता पक्ष के साथ आ जाएंगी। इसका सबसे बड़ा फायदा एनडीए को होगा। उसे महाराष्ट्र में मराठा समाज और ग्रामीण राजनीति के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलेगा। शरद पवार का राजनीतिक अनुभव और सुप्रिया सुले की संसदीय सक्रियता एनडीए के लिए अतिरिक्त राजनीतिक ताकत बन सकती है। लेकिन इस एकीकरण की राह आसान नहीं होगी। सबसे बड़ा सवाल नेतृत्व और राजनीतिक वर्चस्व का होगा। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले गुट की अपनी संगठनात्मक पहचान है, जबकि शरद पवार का गुट अपने संस्थापक नेता की राजनीतिक विरासत और कार्यकर्ताओं के आधार पर खड़ा है। दोनों को एक साथ लाने के लिए सत्ता, संगठन, चुनावी टिकट और नेतृत्व में संतुलन बनाना होगा। INDIA गठबंधन को लगेगा बड़ा राजनीतिक झटका! साथ ही यदि शरद पवार एनडीए के साथ आते हैं तो विपक्षी गठबंधन INDIA के लिए यह महाराष्ट्र में बड़ा झटका होगा। शरद पवार केवल एक क्षेत्रीय नेता नहीं हैं, बल्कि विपक्षी एकजुटता की कोशिशों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सुप्रिया सुले भी विपक्षी गठबंधन की प्रमुख संसदीय आवाजों में शामिल रही हैं। ऐसे में यदि पवार परिवार का राजनीतिक आधार एनडीए के साथ चला जाता है तो कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के सामने महाराष्ट्र में नई चुनौती खड़ी हो सकती है। विपक्षी गठबंधन का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक स्तंभ कमजोर होगा और इसका संदेश राष्ट्रीय स्तर पर भी जाएगा। इसे भी पढ़ें: PM Modi संग बहस की चुनौती पर बोले Rahul Gandhi, पांच मिनट में साबित कर दूंगा आरोप मोदी की रणनीति का बड़ा संदेश देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद शरद पवार के साथ संवाद का रास्ता खुला रखा है। यह भाजपा की उस राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें विरोधी खेमे के प्रभावशाली नेताओं के साथ संवाद और नए राजनीतिक समीकरणों की संभावनाओं को महत्व दिया जाता है। हालांकि, अभी न तो शरद पवार ने एनडीए में शामिल होने की घोषणा की है और न ही दोनों एनसीपी गुटों के विलय पर कोई अंतिम मुहर लगी है। बहरहाल, इतना तय है कि मोदी और पवार के बीच हुई इस बातचीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलों को नई हवा दे दी है। यदि आने वाले दिनों में दोनों एनसीपी गुट एक साथ आते हैं और शरद पवार भी एनडीए का हिस्सा बनते हैं, तो महाराष्ट्र में भाजपा की राजनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। आने वाला वक्त बतायेगा कि क्या मोदी महाराष्ट्र में पवार परिवार की पूरी राजनीतिक ताकत को एक मंच पर लाकर विपक्ष के सामने एक ऐसी चुनौती खड़ी करने जा रहे हैं, जिसका असर 2029 के लोकसभा चुनाव तक दिखाई दे सकता है?
पहाड़ी राज्य-दक्षिण भारत में हवा साफ, दिल्ली क्यों जूझ रही प्रदूषण से?
दिल्ली का औसत AQI 367-480 के बीच बहुत खराब से गंभीर कैटेगरी में है. जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग सबसे खराब जबकि कुछ दक्षिणी इलाके अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं. पहाड़ी राज्यों और दक्षिण भारत में हवा साफ है.
टीम इंडिया का क्रिकेटर पत्नी संग रोमांटिक, गोद में बैठाकर शेयर की फोटो
बॉलीवुड एक्ट्रेस अथिया शेट्टी 5 नवंबर को अपना जन्मदिन मना रही हैं. इस मौके पर उनके पति और टीम इंडिया के क्रिकेटर केएल राहुल ने खास अंदाज में विश किया. राहुल ने अथिया को गोद में बैठाए हुए रोमांटिक तस्वीर शेयर की. वहीं, पिता सुनील शेट्टी ने भी बेटी के लिए भावुक पोस्ट लिखा. रीतिका सजदेह ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई दी.
गुरुवार सुबह पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढह गई। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई है और मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका है। यह घटना सुबह करीब 9:50 बजे चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास 'गली सितारा' में हुई। घटनास्थल पर दमकल विभाग की कम से कम छह गाड़ियां (जिनमें पानी के टैंकर और बचाव वाहन शामिल हैं) भेजी गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारी बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Delhi में प्रदूषण पर सख्ती: MCD बुधवार से 400 पार्किंग स्थलों पर दोगुना कर सकती है शुल्क 160 साल पुराने MCD टाउन हॉल का एक हिस्सा ढहा MCD के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि चांदनी चौक स्थित 160 साल से अधिक पुराने MCD टाउन हॉल का एक हिस्सा ढह गया है। इस इमारत को पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था और चारों ओर से घेर (बैरिकेडिंग कर) दिया गया था। पिछले हफ्ते लगातार दो दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण इसका एक हिस्सा गिर गया, जिससे प्रवेश द्वार (पोर्च) की छत और दो भारी बीम नीचे आ गिरे। इस घटना से इस ऐतिहासिक इमारत के आसपास के हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा है। अधिकारी ने बताया कि इस हादसे में इमारत का सामने का हिस्सा, पहली मंजिल का कुछ भाग और मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं। प्रवेश द्वार के ऊपर लगी घड़ी भी प्रभावित हुई है, और पास की एक दीवार में दरारें आ गई हैं। MCD के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रभावित हिस्से को पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। एहतियात के तौर पर लोगों को सलाह दी गई थी कि वे इस इलाके में न जाएं और न ही इसके अंदर प्रवेश करें। इसे भी पढ़ें: Delhi Fire Service नियमों में होगा बदलाव, प्राइवेट ऑडिटर करेंगे सुरक्षा जांच: आशीष सूद अधिकारी ने बताया मुख्य प्रवेश द्वार के पास वाले हिस्से को पहले ही असुरक्षित मान लिया गया था। एहतियात के तौर पर लोगों को सलाह दी गई थी कि वे उस हिस्से में न जाएं और न ही वहां प्रवेश करें। आगंतुकों द्वारा इस जगह का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था, और इसकी संरचनात्मक स्थिति को देखते हुए वहां जाने पर रोक लगा दी गई थी। टाउन हॉल के बारे में टाउन हॉल, जिसका निर्माण 1863 में पूरा हुआ था, उस जगह पर स्थित है जहाँ कभी मुगल बादशाह शाहजहाँ की बेटी जहाँआरा बेगम द्वारा बनवाई गई एक सराय (कारवां-सराय) हुआ करती थी। इसके बगल वाले बगीचे को 'बेगम का बाग' कहा जाता था। 1857 में दिल्ली पर अंग्रेजों का कब्ज़ा होने के बाद, उस सराय को गिरा दिया गया और बगीचे का नाम बदलकर 'कंपनी बाग' रख दिया गया। बाद में इसी जगह पर वर्तमान इमारत बनी, जिसमें शुरुआत में 'दिल्ली इंस्टीट्यूट' (जिसे 'लॉरेंस इंस्टीट्यूट' के नाम से भी जाना जाता था) स्थित था। आगे चलकर, यह परिसर शहर के नगर प्रशासन का केंद्र बन गया और लगभग 145 वर्षों तक नगर पालिका (म्युनिसिपैलिटी) के मुख्यालय के रूप में काम करता रहा। बाद में, MCD ने अपना कामकाज नए 'सिविक सेंटर' में स्थानांतरित कर दिया। समय के साथ, इस इमारत में कई बदलाव किए गए और इसमें कुछ नए हिस्से भी जोड़े गए। यहाँ मौजूद 'दरबार हॉल' का इस्तेमाल औपचारिक स्वागत समारोहों, आधिकारिक आयोजनों और महत्वपूर्ण बैठकों के लिए किया जाता था। इस परिसर में एक और मीटिंग हॉल था, जिसका उद्घाटन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 10 अगस्त 1947 को—यानी आज़ादी से पाँच दिन पहले—किया था।
परिवार से छिपकर होटल क्यों जा रहीं चीन की महिलाएं? वजह कर देगी हैरान
चीन में घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारी से परेशान कामकाजी महिलाएं कुछ घंटे सुकून से बिताने के लिए अकेले होटल में कमरे बुक कर रही हैं. कोई वहां सोती है तो कोई टीवी देखती है और अपनी पसंद का खाना खाती है. जानिए महिलाओं के बीच क्यों बढ़ रहा है यह अनोखा ट्रेंड.
भुवन बाम की 'ढिंढोरा 2' का इंतजार खत्म, 20 नवंबर को नेटफ्लिक्स पर होगा प्रीमियर
अभिनेता और कंटेंट क्रिएटर भुवन बाम अपने लोकप्रिय शो 'ढिंढोरा' के दूसरे सीजन के साथ वापसी करने जा रहे हैं। 'ढिंढोरा सीजन 2' का प्रीमियर 20 नवंबर को नेटफ्लिक्स पर होगा।
VISTAR योजना से डेटा तंत्र होगा मजबूत, Pramod Sawant ने किया स्वागत
पणजी, पांच नवंबर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से ‘विस्तार’ योजना को मंजूरी दिए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अधिक सटीक और समय पर आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी, जिससे साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश की आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली को आधुनिक बनाने और उसमें सुधार के लिए ‘विकसित भारत सांख्यिकीय परिवर्तन, विश्लेषण और अनुसंधान पहल’ (विस्तार) योजना को मंजूरी दी। इस योजना पर 4,371.1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह पांच साल की योजना है, जो 2030-31 तक लागू रहेगी। यह केंद्र सरकार की क्षेत्रीय योजना होगी। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, विकसित भारत 2047 के केंद्रीय लक्ष्य के अनुरूप इस योजना को एक गतिशील, वास्तविक समय पर काम करने वाला और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार आधिकारिक सांख्यिकीय ढांचा स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य आंकड़े समय पर उपलब्ध कराना, अधिक विस्तृत स्तर पर आंकड़े जुटाना तथा सामंजस्यपूर्ण और कृत्रिम मेधा (एआई) के अनुकूल आंकड़ों के साथ विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है। सावंत ने बुधवार देर रात सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मंजूर की गई यह पहल ‘‘रियल टाइम डेटा, डिजिटल बदलाव, कृत्रिम मेधा (एआई) और मशीन लर्निंग के माध्यम से भारत के आधिकारिक सांख्यिकी तंत्र को आधुनिक बनाएगी।’’उन्होंने कहा कि इस पहल से अधिक सटीक और समय पर आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी, जिससे साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लक्षित करने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना राज्य स्तर पर सांख्यिकीय क्षमताओं को भी मजबूत करेगी और अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देगी। इससे नीति निर्माताओं को विकास कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध होंगे।
दुर्गा पूजा टिकट घोटाला: पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की मुश्किलें बढ़ीं, दो विभागों के 150 टेंडर की होगी जांच Durga Puja ticket scam Former minister Indranil Sen mounting trouble 150 tenders two departments investigated
पुरानी पोस्ट, पुराने कमेंट्स... अपने डिजिटल पास्ट को लेकर क्यों टेंशन में है Gen Z?
सोशल मीडिया पर सालों पहले की गई पोस्ट भी फ्यूचर में परेशानी का कारण बन सकती है. इसे डिजिटल फुटप्रिंट कहा जाता है. नौकरी से लेकर प्रोफेशनल पहचान तक, इसका असर पड़ सकता है. ऐसे में जेन जी अपनी पुरानी पोस्ट डिलीट करने, अकाउंट प्राइवेट रखने और ऑनलाइन एक्टिविटी को लेकर सतर्क हो रही है. जानिए क्या है डिजिटल फुटप्रिंट और इसे कैसे सुरक्षित रखें.
दिल्ली के चावड़ी बाजार में बड़ा हादसा: तीन मंजिला इमारत ढही, मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका
दिल्ली के चावड़ी बाजार में एक तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने से बड़ा हादसा, मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका। दमकल विभाग और राहत कार्य जारी।
अमित कश्यप हत्याकांड में फांसी की सजा पाए रविता और अमरदीप की अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है. मेरठ की सत्र अदालत ने दोनों को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' श्रेणी का मामला मानते हुए मृत्युदंड सुनाया था.
अभिनेत्री कशिका कपूर सॉन्ग 'बेवफा से' में नील नितिन मुकेश के साथ नजर आ रही हैं। उनके साथ काम करने के अनुभव को शेयर करते हुए कशिका ने बताया कि वह कभी आपको यह एहसास नहीं होने देते कि आप किसी सीनियर अभिनेता के साथ काम कर रहे हैं।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव वाले दिन से जब से फ्रांसीसी कलाकार ने यह आर्टवर्क दुनिया को दिखाया है, तब से इसने ऑनलाइन और ट्रंप टावर के आसपास मौजूद सबका ध्यान खींच लिया है. कई लोग रुककर इसकी तस्वीरें खींच रहे हैं.
चावड़ी बाजार में हादसा, बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से दो की मौत, 6-7 लोग फंसे होने की आशंका
दिल्ली के चांदनी चौक में चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत का हिस्सा गिरने के बाद जगह बंद कर दी गई और छह दमकल गाड़ियां भेजी गईं. इस हादसे में बताया जा रहा है कि कम से कम 6-7 लोग फंसे हुए हैं.
दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में तीन मंजिला इमारत गिरी, 2 लोगों की मौत, कई फंसे
Delhi Chawri Bazar Building Collapse: दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में तीन मंजिला इमारत गिर गई है. इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई है. कई लोगों के इमारत के मलबे में दबे होने की आशंका है. राहत और बचाव कार्य जारी.
पाकिस्तानी लड़के की बात पर भारतीय मुस्लिम शायर दुबई में बोला- शुक्र है भारत में पैदा हुआ
मशहूर शायर महशर अफरीदी ने दुबई एयरपोर्ट का एक वाकया साझा किया है, जहां सिम न होने पर एक अनजान पाकिस्तानी युवक ने सिर्फ भारतीय होने के नाते उन्हें कॉल करने के लिए अपना फोन दे दिया.
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर गंगनानी धर्मकुंड के समीप गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसे में इनोवा कार सीधे नदी में जा गिरी। हादसे की सूचना मिलते ही क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन में सात लोग सवार थे। दुर्घटना के बाद नदी किनारे से चार लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि अन्य संभावित यात्रियों की तलाश के लिए नदी के तेज बहाव में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और आपातकालीन सेवाएं तत्काल सक्रिय हो गईं।
अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार ने अग्निवीरों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अग्निवीरों की चार साल की सेवा अवधि के बाद दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल देने का निर्णय किया है। इतना ही नहीं, इसके बाद उन्हें नियमित सैनिक बनने का अवसर भी मिलेगा। इस फैसले को अग्निपथ योजना को लेकर उठ रहे सवालों और चार साल बाद युवाओं के भविष्य की चिंता के संदर्भ में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में, जहां सेना में भर्ती होना हजारों युवाओं का सपना और गांव-गांव की सैन्य परंपरा का हिस्सा है, वहां सरकार के इस फैसले का असर केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इस फैसले की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से ही चार साल की सेवा और उसके बाद भविष्य की अनिश्चितता को लेकर सवाल उठते रहे थे। सरकार ने अब उसी चिंता का समाधान निकाला है। हम आपको बता दें कि पहले चार साल बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रावधान था, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से बाहर होना पड़ता। अब इन 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर मिलेगा। इसके बाद उनकी इच्छा और निर्धारित चयन मानकों पर खरा उतरने के आधार पर नियमित सैनिक बनने का रास्ता भी खुलेगा। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस दूसरे कार्यकाल में अधिक वेतन, बेहतर सेवा निधि और वरिष्ठता से जुड़े लाभ भी दिए जाएंगे। मोदी सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ये तीनों राज्य सेना में युवाओं की भागीदारी और सैन्य परंपरा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अग्निवीरों को लेकर लिया गया यह निर्णय राजनीतिक रूप से भी भाजपा और एनडीए के लिए बड़ा संदेश बन सकता है। उत्तर प्रदेश: सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश गांवों और सैन्य परिवारों तक उत्तर प्रदेश की बात करें तो आपको बता दें कि आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा यह राज्य मोदी सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा राजनीतिक लाभार्थी बन सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल और अवध तक सेना में जाने की परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। गांवों में सेना की नौकरी केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की आर्थिक सुरक्षा का माध्यम भी रही है। यही वजह है कि अग्निपथ योजना को लेकर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चार साल बाद सेवा समाप्त होने का सवाल राजनीतिक बहस का विषय बना था। खासकर उन परिवारों में, जहां पिता या दादा सेना में रह चुके हैं और अगली पीढ़ी भी वर्दी पहनने का सपना देखती है। अब मोदी सरकार के फैसले से ऐसे परिवारों को यह संदेश दिया जा सकता है कि उनके बच्चों का सेना से जुड़ाव केवल चार साल तक सीमित नहीं रहेगा। दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल और उसके बाद नियमित सैनिक बनने का अवसर युवाओं के सामने सेना में कॅरियर को आगे बढ़ाने की नई संभावना लेकर आया है। भाजपा के लिए इसका राजनीतिक महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं। यहां युवाओं, ग्रामीण मतदाताओं और सैन्य परिवारों के बीच इस फैसले को लेकर सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा सकती है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जहां सेना में भर्ती की परंपरा मजबूत रही है, वहां यह मुद्दा चुनावी विमर्श में जगह बना सकता है। उत्तराखंड: सैन्य परंपरा वाले राज्य में सीधा असर उत्तराखंड की बात करें तो यहां सेना और सैनिक परिवारों का रिश्ता सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। पहाड़ के अनेक गांवों में शायद ही कोई ऐसा परिवार मिले, जिसका सेना से किसी न किसी रूप में संबंध न रहा हो। गढ़वाल और कुमाऊं की सैन्य परंपरा देशभर में पहचानी जाती है। ऐसे राज्य में अग्निवीरों के लिए दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है। इसका सीधा संबंध उन परिवारों की उम्मीदों से है, जिनके लिए सेना में नौकरी पीढ़ियों से आजीविका और सम्मान का बड़ा आधार रही है। उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने अगले विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने की चुनौती होगी। ऐसे में केंद्र का यह फैसला राज्य सरकार के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। सैन्य परिवारों के बीच यह संदेश पहुंचाना आसान होगा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया और अग्निवीरों के लिए सेना में आगे बढ़ने का रास्ता खोला है। पंजाब: जहां फौज में जाना युवाओं का सपना है साथ ही पंजाब में अग्निवीरों को लेकर सरकार का फैसला और भी महत्वपूर्ण राजनीतिक अर्थ रखता है। पंजाब के अनेक गांवों में सेना में भर्ती होना युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ गौरव का विषय रहा है। मालवा, माझा और दोआबा के इलाकों में सैन्य सेवा की मजबूत परंपरा रही है। यहां अग्निपथ योजना को लेकर चार साल की सेवा के बाद भविष्य का सवाल स्वाभाविक रूप से राजनीतिक मुद्दा बन सकता था। अब दो साल के विस्तार और नियमित सेवा में शामिल होने के अवसर से उस सवाल का नया जवाब सरकार के पास है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और 117 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में 2027 का चुनाव भाजपा के लिए भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अवसर होगा। भाजपा इस फैसले को केंद्र सरकार की युवा और सैनिक परिवारों के प्रति प्रतिबद्धता के तौर पर पेश कर सकती है। खासकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां सेना में भर्ती होने की इच्छा रखने वाले युवाओं और उनके परिवारों की संख्या बड़ी है। राष्ट्रीय स्तर पर अग्निवीरों के लिए नया रास्ता इसके अलावा, इस फैसले का असर केवल इन तीन चुनावी राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा। देशभर में सेना में भर्ती होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। हम आपको याद दिला दें कि अग्निपथ योजना 14 जून 2022 को शुरू हुई थी। इसके तहत चार साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल करने का प्रावधान था। शेष 75 प्रतिशत को सेवा निधि पैकेज के साथ वापस लौटना था। उनके लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में आरक्षण तथा रोजगार के अवसर भी घोषित किए गए थे। लेकिन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल रोजगार के वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराना नहीं थी। चुनौती उस मानसिकता और सामाजिक अपेक्षा से जुड़ी थी, जिसमें सेना की नौकरी को जीवनभर की स्थायी सेवा और आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जाता है। देखा जाये तो ग्रामीण भारत में एक युवा जब सेना में भर्ती होता है तो उसके पीछे पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। परिवार चाहता है कि बेटा सेना में जाए, नियमित वेतन पाए, लंबे समय तक सेवा करे और सेवानिवृत्ति के बाद भी आर्थिक सुरक्षा हासिल करे। चार साल की अवधि इस पारंपरिक सोच से मेल नहीं खाती थी। मोदी सरकार ने दूसरे रोजगार के रास्ते खोले, लेकिन स्थायी सैन्य सेवा की चाह पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अब इसी मोर्चे पर सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पहले चार साल में चयनित 25 प्रतिशत अग्निवीर नियमित सेवा में शामिल होंगे। बाकी 75 प्रतिशत को दो साल का दूसरा सेवा कार्यकाल दिया जाएगा। इस दौरान बेहतर वेतन, बढ़ी हुई सेवा निधि और वरिष्ठता से जुड़े लाभ मिलेंगे। इसके बाद इच्छुक अग्निवीरों को निर्धारित चयन मानकों के आधार पर नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। हम आपको बता दें कि पहली अग्निवीर भर्ती के लगभग 18,300 जवानों के दिसंबर 2026 तक चार साल पूरे होने वाले थे। ऐसे समय में आया यह फैसला उन युवाओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जिनके सामने कुछ ही सप्ताह में सेवा समाप्त होने की स्थिति आने वाली थी। चुनावी राजनीति में मोदी सरकार का बड़ा दांव साथ ही इस पूरे फैसले का राजनीतिक पहलू समझना जरूरी है। फरवरी-मार्च 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। निर्वाचन आयोग ने अभी चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है, लेकिन इन राज्यों में चुनावी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में अग्निवीर योजना में बदलाव भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हथियार बन सकता है। विपक्ष ने अग्निपथ योजना को लेकर लगातार सवाल उठाए थे। चार साल बाद 75 प्रतिशत युवाओं के सेना से बाहर होने की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की थी। अब सरकार के पास उन सवालों का जवाब देने के लिए एक नया फैसला है। भाजपा इस बदलाव को इस रूप में पेश कर सकती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने युवाओं की आकांक्षाओं और सेना के अनुभवों के आधार पर योजना में बदलाव किया। सरकार ने अग्निपथ योजना को खत्म नहीं किया, बल्कि उसके भीतर ही ऐसा रास्ता तैयार किया है, जिससे ज्यादा अग्निवीरों को लंबे समय तक सेना से जुड़े रहने और नियमित सैनिक बनने का अवसर मिल सके। साथ ही इसका सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश उन गांवों तक पहुंच सकता है, जहां सेना में भर्ती होना आज भी युवाओं का सबसे बड़ा सपना है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाकों से लेकर उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों और पंजाब के सैन्य परंपरा वाले क्षेत्रों तक इस फैसले को भाजपा अपनी युवा-केंद्रित और सैनिक परिवारों के हित में उठाए गए कदम के तौर पर प्रचारित कर सकती है। बहरहाल, अग्निवीरों को दो साल का एक्सटेंशन देकर मोदी सरकार ने केवल सेवा अवधि नहीं बढ़ाई है, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले एक ऐसे वर्ग की चिंता को संबोधित किया है, जिसकी नाराजगी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती थी। अब भाजपा के सामने इस फैसले को गांव-गांव, युवा-युवा और सैन्य परिवारों तक पहुंचाने का अवसर है। जिस अग्निपथ योजना को विपक्ष ने राजनीतिक घेराबंदी का मुद्दा बनाया था, उसी योजना में बदलाव करके सरकार ने चुनावी बहस की दिशा बदलने की कोशिश की है।
जालौन: मां ने की डेढ़ साल के मासूम बेटे को गला रेतकर मार डाला
जालौन के कोटरा थाना क्षेत्र के सिकरी व्यास गांव में मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला पारो ने अपने डेढ़ साल के सबसे छोटे बेटे की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी. घटना से परिजनों में कोहराम मच गया. सूचना पर पहुंची पुलिस व फोरेंसिक टीम ने आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस अब मनमाने समय तक नहीं रख सकेगी हिरासत में, शीर्ष अदालत ने तय की समयसीमा--Supreme Court Ruling on Arrest and Detention: 24-Hour Deadline Starts from Actual Detention
'आज POTUS कल LOTUS', अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में जुबानी जंग
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने भारत की राजनीति में हलचल मचा दी है, जहां विपक्षी दलों ने इसे बीजेपी के भविष्य से जोड़ा है।
बिमोल अकोइजाम को राहत: कांग्रेस सांसद की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने लगाई रोक, पुलिस को सात दिन पहले देना होगा नोटिस Relief for Bimol Akoijam: Court stays arrest of Congress MP; police must provide seven days' prior notice.
किसकी कमी से बाल पतले होते हैं? एक्सपर्ट ने बताया बालों को घना करने के लिए क्या करें
अमेरिका के मशहूर डॉक्टर एरिक बर्ग ने बालों के पतला होने का एक अहम कारण बताया है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
रामायण' में कैकेयी बनकर इमोशनल हुईं लारा दत्ता, पिता को किया याद, बोलीं- काश वो यहां होते
महाकाव्य 'रामायण' गुरुवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में अभिनेत्री लारा दत्ता माता कैकेयी के रोल में नजर आ रही हैं। अभिनेत्री का कहना है कि इस मौके पर अगर उनके पिता जी होते तो उन पर गर्व करते।
बीजेपी उत्तराखंड में तीसरी बार जीत के लिए गुटबाजी खत्म कर संगठन मजबूत कर रही है. मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में ही अगला चुनाव लड़ा जाएगा. इधर, कांग्रेस भू कानून, महंगाई, बेरोजगारी और पलायन को मुद्दा बनाकर बीजेपी को घेर रही है.
अमरेली में 2 युवक गाड़ी में क्यों जला दिए गए जिंदा, देखें गुजरात आजतक
गुजरात आजतक के इस बुलेटिन में देखें क्या अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप में की हार से बदलेगा वर्ल्ड ऑर्डर, पीएम मोदी को राहुल गांधी क्यों दे रहे हैं ओपन चैलेंज और अमरेली में कैसे दो लड़कों को गाड़ी के साथ जिंदा जला दिया गया. देखें सूबे से जुड़ी कुछ अहम खबरें, लेकिन शुरुआत हेडलांइस के साथ.
लद्दाख-कारगिल बॉर्डर पर देश की सुरक्षा कर रहा एक जवान अपने ही शहर में इंसाफ के लिए भटक रहा है. पांच साल पहले खरीदे गए प्लॉट का कब्जा नहीं मिलने और कार्रवाई न होने से परेशान सैनिक ने चेतावनी दी है कि न्याय नहीं मिला तो वह दूसरा पान सिंह तोमर बनने को मजबूर हो जाएगा.

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