आजमगढ़ की वोटर लिस्ट में 13 जगह 'विकास यादव'... 9 पर गिरी गाज
Azamgarh Voter List Controversy: अखिलेश यादव के आरोप चुनाव आयोग की जांच में सही पाए गए. आजमगढ़ में विकास यादव का नाम 13 बार दर्ज मिलने पर 9 अधिकारियों पर एक्शन. पढ़ें रिपोर्ट...
मुस्कान और साहिल ने दी फांसी की सजा को चुनौती
मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है. दोनों ने मेरठ की जिला अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए दोषी ठहराए जाने और मौत की सजा, दोनों को रद्द करने की मांग की है. अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी ठहराया था और 14 अक्टूबर को फांसी की सजा सुनाई थी.
सेंटनर ने किस पर फोड़ा हार का ठीकरा? जीत पक्की थी...फिर कहां हुई चूक!
भारत ने सिर्फ 70 रन पर 5 विकेट गंवा दिए थे. ऐसा लग रहा था कि न्यूजीलैंड की टीम आसानी से इस मुकाबले को जीत लेगी. भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर बल्लेबाज पूरी तरह से फ्लॉप रहे. लेकिन तिलक वर्मा, नमन धीर और नीतीश कुमार रेड्डी ने अपनी बल्लेबाजी से फैन्स का ध्यान खींच लिया.
इंडियन नेवी की पनडुब्बियां अब ज्यादा देर पानी में रहेंगी, जानिए कैसे?
DRDO की स्वदेशी एआईपी प्रणाली का सेटिंग टू वर्क फेज-2 हजीरा में उद्घाटन. यह पनडुब्बी की पानी के अंदर क्षमता बढ़ाएगी. 2027 में कलवारी क्लास पर इंटीग्रेशन की योजना है.
दिवाली पर झालरों से सजाएं बालकनी, अपनाएं ये 5 तरीके!
Diwali Balcony Decoration Ideas: दिवाली की सजावट में अक्सर बालकनी पीछे छूट जाती है. लेकिन थोड़ी सी समझदारी से आप बालकनी को बिना महंगे सामान के घर का सबसे खूबसूरत कोना बना सकते हैं. रंग-बिरंगी झालरों और लाइटों के इन 5 आसान तरीकों से अपनी छोटी या बड़ी बालकनी को आप शानदार लुक दे सकते हैं.
अभी खरीदें या इंतजार करें? दिवाली से पहले सोने में भारी गिरावट
दिवाली से पहले सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है. ऐसे में अगर आप धनतेरस पर सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं तो आपको सोने का सपोर्ट लेवल, कीमत और आगे की रणनीति को समझ लेना चाहिए.
BJP विधायक Pankaj Singh ने Lucknow में बाढ़ पीड़ितों के लिए रवाना कीं राहत सामग्री
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और नोएडा के विधायक पंकज सिंह ने शनिवार को लखनऊ के फैजुल्लागंज में बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पंकज सिंह ने अपने पिता, रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह की प्रेरणा से शुरू किए गए इस अभियान के तहत 10,000 जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने की शुरुआत की। उन्होंने सुबह 10:30 बजे आईआईएम रोड स्थित महर्षि विश्वविद्यालय परिसर से वाहनों को रवाना किया। एक बयान के अनुसार, इस अभियान के तहत घर-घर जाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों को आवश्यक खाद्य सामग्री दी जा रही है। इसमें कहा गया है कि अक्षय पात्र फाउंडेशन और महर्षि विश्वविद्यालय के सहयोग से तैयार इन किटों में आटा, चावल, दाल, खाना पकाने का तेल, नमक, चीनी, मसाले, आलू और प्याज शामिल हैं। बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजनाथ सिंह और स्थानीय विधायक नीरज बोरा के बीच हुई बैठक के बाद फैजुल्लागंज में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें बाढ़ पंपिंग स्टेशन और तटबंध का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं का काम जल्द शुरू किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि राजनाथ सिंह स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन तथा अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं। उन्होंने 10 अक्टूबर को वीडियो कॉल के जरिए बाढ़ प्रभावित परिवारों से बातचीत की थी और अधिकारियों को समय पर मदद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में जलभराव के कारण पहुंचना मुश्किल था, वहां नावों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई गई।
पारे से सोना बना देने का चमत्कार! कौन कह रहा बना देंगे एलियन; Top 5 खबरें
सैन फ्रांसिस्को की स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। इसमें कहा गया है कि उसने पारा को असली सोने में बदल दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने आलोचकों पर तंज कसा है। पढ़िए आज शाम की पांच बड़ी खबरें...
PAK हमें बचा रहा; फारुख अब्दुल्ला के बिगड़े बोल, कहा- दिल्ली के इरादे ठीक नहीं, BJP भड़की
Farooq abdullah: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान कश्मीरियों को बचा रहा है। वरना नई दिल्ली के इरादे कश्मीर के लिए ठीक नहीं है।
कभी 24 हजार की नौकरी से निकाला गया, आज मिला 1.5 करोड़ का ऑफर; मैनेजर की सलाह ने बदल दी जिंदगी
2.9 लाख रुपये की नौकरी खोने वाले एक इंजीनियर ने हार नहीं मानी. उसने अपने 9 साल से अधिक साल के करियर में कड़ी मेहनत की. वह मेहनत के साथ-साथ किस्मत को भी मानता है.
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भांजे सचिन थापन ने तोड़ी भूख हड़ताल, जानिए पूरा मामला
राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित देश और प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भांजे और कई गंभीर मामलों में आरोपी सचिन थापन उर्फ सचिन विश्नोई ने आखिरकार अपनी लंबी भूख हड़ताल को समाप्त कर दिया है। जेल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम द्वारा की गई समझाइश के बाद उसने यह बड़ा फैसला लिया है। पिछले करीब 19 दिनों से उसने अन्न और जल का पूरी तरह से त्याग कर रखा था, जिसके कारण उसकी शारीरिक स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। इस घटना के बाद से ही प्रशासनिक अमले और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा हुआ था, क्योंकि मामला सीधे तौर पर एक हाई-प्रोफाइल अपराधी और उसकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।19 दिनों तक अन्न-जल का त्याग और जेल प्रशासन के साथ खींचतान की पूरी कहानीप्राप्त जानकारी के अनुसार, विचाराधीन बंदी सचिन थापन ने बीते 5 अक्टूबर से जेल के भीतर भोजन ग्रहण करने से साफ इनकार कर दिया था। वह लगातार भूख हड़ताल पर बैठा हुआ था। जेल सूत्रों और शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, सचिन अपनी कुछ मांगों को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था। उसकी मुख्य मांग यह थी कि हाई सिक्योरिटी जेल में बंद उसके कुछ अन्य साथियों को भी उसी की बैरक में या उसके आसपास शिफ्ट किया जाए। हालांकि, जेल प्रशासन का यह स्पष्ट कहना था कि इस संबंध में बंदी की तरफ से कोई भी आधिकारिक या लिखित आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया था। जेल नियमों और सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए प्रशासन ने उसकी मौखिक मांगों को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके विरोध में उसने यह कदम उठाया था। इस लंबी प्रशासनिक खींचतान के चलते जेल के भीतर तनाव का माहौल भी देखने को मिला था।तबीयत बिगड़ने के बाद जेएलएन अस्पताल में हुआ भर्ती, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजामलगातार 18 से 19 दिनों तक भूखे रहने के कारण सचिन थापन के स्वास्थ्य में भारी गिरावट दर्ज की गई। जब उसकी हालत अत्यधिक नाजुक हो गई, तो जेल प्रशासन ने बिना कोई जोखिम उठाए उसे तुरंत अजमेर के सुप्रसिद्ध जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल के कैदी वार्ड में भर्ती कराया। अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद भी शुरुआती दौर में उसका रवैया असहयोगपूर्ण रहा और उसने डॉक्टरों से अपना इलाज कराने से भी इनकार कर दिया था। बंदी की जिद और उसकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर को पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। वहां तीन स्तर की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, जिसमें कमांडो और सशस्त्र गार्ड हर पल मुस्तैद नजर आ रहे थे ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से लेकर प्रत्यर्पण तक का लंबा और आपराधिक इतिहासआपकी जानकारी के लिए बता दें कि सचिन थापन उर्फ सचिन बिश्नोई कोई आम कैदी नहीं है, बल्कि वह देश भर में चर्चित रहे पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मुख्य और मास्टरमाइंड आरोपियों में से एक है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि मूसेवाला की हत्या की साजिश रचने, वारदात से पहले रेकी करने और शूटरों को अत्याधुनिक हथियारों व अन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराने में उसकी बहुत बड़ी भूमिका थी। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद वह फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत से फरार होकर पहले दुबई और फिर वहां से अज़रबैजान भाग गया था। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और इंटरपोल के प्रयासों के चलते 1 अगस्त 2023 को उसका अज़रबैजान से प्रत्यर्पण कराया गया था और भारत आते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से वह कानून के शिकंजे में है और विभिन्न अदालती प्रक्रियाओं के तहत राजस्थान की इस सुरक्षित जेल में न्यायिक हिरासत में काट रहा है।भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने ली राहत की सांसमामले की गंभीरता को समझते हुए शुक्रवार को जेल अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारियों की एक विशेष टीम ने अस्पताल पहुंचकर सचिन थापन से लंबी बातचीत की। अधिकारियों ने उसे उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक प्रभावों, शरीर के अंगों पर होने वाले गंभीर नुकसान और जीवन की महत्ता के बारे में समझाया। प्रशासनिक और चिकित्सकीय समझाइश का आखिरकार असर हुआ और सचिन ने बिना किसी शर्त के स्वेच्छा से अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का फैसला किया। उसने डॉक्टरों की देखरेख में भोजन ग्रहण किया, जिसके बाद जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस महकमे ने बड़ी राहत की सांस ली है। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल में उसका स्वास्थ्य स्थिर होने के बाद उसे चिकित्सकीय निगरानी में वापस जेल भेज दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से देश की हाई-सिक्योरिटी जेलों में बंद कुख्यात अपराधियों की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से बहस के केंद्र में ला दिया है।
पंजाब की सियासत गरमाई: कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आप सरकार पर बोला बड़ा हमला
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर अनुभवी नेताओं की तीखी बयानबाजी ने बड़ा भूचाल ला दिया है। जालंधर छावनी से कांग्रेस विधायक और पूर्व ओलंपियन परगट सिंह ने मौजूदा आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। परगट सिंह ने राज्य में चल रही धान की खरीद प्रक्रिया को लेकर एक बहुत बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है, जिसमें उन्होंने करोड़ों रुपये के भारी-भरकम घोटाले की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में लगातार बिगड़ती जा रही कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका यह हमला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य के किसान मंडियों में अपनी फसल बेचने को लेकर पहले से ही तमाम तरह की परेशानियों और व्यवस्थाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। इस तीखे हमले के बाद से पंजाब की सियासत में एक बार फिर नया उबाल आ गया है और विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह से आक्रामक हो गए हैं।धान खरीद प्रक्रिया और करोड़ों के घोटाले का सनसनीखेज दावापरगट सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और विभिन्न सार्वजनिक मंचों से बोलते हुए सीधे तौर पर यह दावा किया है कि राज्य में धान खरीद के नाम पर बड़ा वित्तीय भ्रष्टाचार चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र और बिचौलियों की मिलीभगत से धान की खरीद, बारदाने के आवंटन और भुगतान प्रक्रिया में करोड़ों रुपये का हेरफेर किया जा रहा है, जिससे सीधे तौर पर किसानों और राज्य के खजाने दोनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। उनका कहना है कि कागजों पर सब कुछ दुरुस्त और पारदर्शी दिखाया जा रहा है, लेकिन मंडियों की ज़मीनी हक़ीक़त इसके बिल्कुल विपरीत है। मंडियों में किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने और समय पर भुगतान करने के बड़े-बड़े दावे केवल कागजी साबित हो रहे हैं। परगट सिंह ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और इस महाघोटाले के पीछे छिपे असली चेहरों को जनता के सामने बेनकाब किया जा सके।पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरे सवाल और अपराधियों के बढ़ते हौसलेधान खरीद में कथित भ्रष्टाचार के अलावा परगट सिंह ने पंजाब में कानून-व्यवस्था के मौजूदा हालात को लेकर भी सरकार को बुरी तरह घेरा है। उन्होंने कहा कि राज्य में आए दिन फिरौती, डकैती, लूटपाट, हत्या और गैंगवार की घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिससे आम जनता और कारोबारियों में भारी खौफ का माहौल बना हुआ है। अपराधियों के मन से कानून का डर पूरी तरह समाप्त हो चुका है और पुलिस प्रशासन सरकार के राजनीतिक दबाव के चलते खुलकर काम करने में असमर्थ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सरकार राज्य में शांति, सुरक्षा और सुशासन के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ रोजाना सामने आने वाली सनसनीखेज आपराधिक वारदातें इन दावों की पोल खोल देती हैं। परगट सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि जिस राज्य में आम नागरिक, माता-बहनें और व्यापारी अपने ही घरों और कार्यस्थलों पर सुरक्षित महसूस न करें, वहां विकास और बदलाव की बातें करना पूरी तरह बेमानी है।किसानों की समस्याओं और मंडियों की बदहाली पर सरकार की कार्यशैली पर प्रहारपंजाब को देश का अन्नदाता कहा जाता है और यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कृषि पर आधारित है, लेकिन मौजूदा समय में राज्य का किसान हर तरफ से बुरी तरह पिस रहा है। परगट सिंह ने आरोप लगाया कि धान के सीजन के दौरान मंडियों में बारदाने की भारी कमी, उठान में देरी और नमी के नाम पर किसानों का शारीरिक व आर्थिक शोषण किया जा रहा है। किसानों को अपनी धान की फसल बेचने के लिए कई-कई दिनों तक मंडियों में खुले आसमान के नीचे और रात-रातभर ठिठुरते हुए इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। सरकार के नुमाइंदे और मंत्री केवल विज्ञापनों और जुबानी جمع-खर्च की राजनीति में व्यस्त हैं, जबकि ज़मीन पर अन्नदाता लाचार और बेबस नजर आ रहा है। कांग्रेस विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही मंडियों की व्यवस्था में सुधार नहीं किया और किसानों की इन गंभीर समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो उनकी पार्टी किसानों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर एक बड़ा जन आंदोलन छेड़ेगी।राजनीतिक गलियारों में हलचल और सरकार की ओर से पलटवार की तैयारीपरगट सिंह के इन तीखे और बेबाक हमलों के बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए भ्रष्टाचार के इन तमाम मामलों में कड़े जवाब तलब करना शुरू कर दिया है। हालांकि, आम आदमी पार्टी और सरकार के प्रवक्ताओं की तरफ से हमेशा की तरह इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया जा रहा है। सरकार का आधिकारिक पक्ष यह है कि धान की खरीद और किसानों को भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और निर्धारित नियमों के तहत सीधे किसानों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे केवल अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस तरह की बेबुनियाद बयानबाजी कर रहे हैं। इसके बावजूद, जिस तरह से परगट सिंह ने तथ्यों और ज़मीनी हक़ीक़तों का हवाला देते हुए सरकार को घेरा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर आम जनता के बीच एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा करेगा, जिसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ना तय है।
Vaibhav Suryavanshi का बड़ा फ्लॉप शो! नंबर-3 पर हुए फेल
न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी का बल्ला खामोश रहा. चोटिल ईशान किशन की जगह टीम में आए वैभव पहली बार टी20 क्रिकेट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे, लेकिन सिर्फ 4 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. न्यूजीलैंड के गेंदबाज नाथन स्मिथ ने उन्हें अपना पहला ओवर करते हुए आउट किया. इससे पहले संजू सैमसन भी सस्ते में आउट हो चुके थे. न्यूजीलैंड ने पहली पारी में 180 रन बनाए.
पूर्व CEC एसवाई कुरैशी पर भड़के तेजतर्रार पूर्व आईएएस अशोक खेमका
भारतीय प्रशासनिक सेवा और देश की चुनावी व्यवस्था से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में नौकरशाही और संवैधानिक पदों पर बैठे दिग्गजों के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। हरियाणा के अपनी ईमानदारी और बेबाक अंदाज के लिए देश भर में मशहूर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एसवाई कुरैशी के एक हालिया बयान पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अशोक खेमका ने साफ शब्दों में कहा है कि एक पूर्व संवैधानिक पद पर आसीन रहे व्यक्ति द्वारा इस तरह के निचले स्तर के प्रहार करना कतई शोभा नहीं देता है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी ने एक डिजिटल पॉडकास्ट के दौरान देश के वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका को लेकर कुछ ऐसे दावे किए, जिन्होंने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला दिया। इस बयान के सामने आने के बाद से ही देश भर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि क्या संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों को इस तरह के सार्वजनिक बयान देने चाहिए या नहीं।एसवाई कुरैशी के उस पॉडकास्ट का पूरा सच, जिसमें उठे थे चुनाव आयोग की नियुक्ति पर सवालयह पूरा विवाद तब तूल पकड़ा जब पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी एक लोकप्रिय पॉडकास्ट 'लंदन वार्ता' में बतौर अतिथि शामिल हुए थे। इस बातचीत के दौरान उन्होंने पत्रकार के साथ देश की निर्वाचन प्रणाली, चुनाव आयोग के अधिकारों और वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के चयन से जुड़े कई संवदेनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। पॉडकास्ट के दौरान कुरैशी ने दावा किया कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अतीत में ज्ञानेश कुमार को केंद्रीय स्तर पर 'एडिशनल सेक्रेटरी' और बाद में 'क्रेटरी' पैनल के लिए भी उपयुक्त या योग्य नहीं माना गया था, लेकिन गृह मंत्रालय में अमित शाह के अधीन कार्य करने और उनकी नजदीकी के चलते उन्हें सहकारिता मंत्रालय में सचिव पद की जिम्मेदारी मिल गई। इसके साथ ही कुरैशी ने यह भी दावा किया कि जम्मु-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया और राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के दौरान मुख्य रणनीतिकारों में ज्ञानेश कुमार की अहम भूमिका रही थी। उन्होंने 2023 के नए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए, जिसमें प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री (अमित शाह) और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।अशोक खेमका का तीखा पलटवार, संवैधानिक गरिमा और 'बिलो द बेल्ट' बयान पर जताई कड़ी आपत्तिपूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी के इन बयानों और दावों के सार्वजनिक होने के बाद सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर कड़ा ऐतराज जताया और अपनी भड़ास निकाली। अपनी बेबाक शैली के लिए जाने जाने वाले अशोक खेमका ने लिखा कि देश के किसी भी नागरिक को असहमति जताने का हक है और वैचारिक मतभेद होना पूरी तरह से जायज है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि व्यक्तिगत छींटाकशी की जाए और गरिमा की सारी हदें पार कर दी जाएं। खेमका ने पूर्व सीईसी के बयानों को सीधे तौर पर 'बिलो द बेल्ट' यानी नियमों के दायरे से बाहर जाकर किया गया ओछा प्रहार करार दिया। उन्होंने विशेष रूप से उस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मामले को राजनीतिक कोण से देखा गया था। अशोक खेमका ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के मुकुट जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना कोई साधारण फैसला नहीं था, बल्कि यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय और एक महान राष्ट्रीय उपलब्धि है। उन्होंने नसीहत दी कि राजनीतिक द्वेष और पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर हमेशा देश की संवैधानिक संस्थाओं और उनकी गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, एसआईआर और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर गरमाई सियासतइस पूरे घटनाक्रम ने केवल दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच की बयानबाजी को ही हवा नहीं दी है, बल्कि इसने देश की सबसे बड़ी स्वायत्त संस्था यानी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी चयन प्रक्रिया को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। पॉडकास्ट के दौरान एसवाई कुरैशी ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (Intensive Revision - SIR) और आयोग के कानूनी अधिकारों पर भी चर्चा की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि तकनीकी और कंप्यूटराइज्ड युग में जहां डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है, वहां बार-बार इस प्रकार के व्यापक संशोधनों की जरूरत पर पुनर्विचार होना चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग और सरकार के आलोचकों का एक धड़ा इन बयानों को अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है, वहीं अशोक खेमका जैसे देश के वरिष्ठ और ईमानदार प्रशासक का मैदान में उतरकर यह कहना कि संस्थाओं के पूर्व प्रमुखों को अपनी गरिमा का ख्याल रखना चाहिए, इस पूरे विवाद का दूसरा और बेहद महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। जानकारों का मानना है कि जब प्रशासनिक सेवा के दिग्गज इस तरह खुलकर आमने-सामने आते हैं, तो यह व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन पर एक गंभीर सवालिया निशान छोड़ जाता है।अशोक खेमका का बेबाक और कड़क प्रशासनिक इतिहास, जो हमेशा सच्चाई के लिए लड़ेयह पहली बार नहीं है जब अशोक खेमका ने किसी बड़े मुद्दे पर अपनी स्पष्ट और बेबाक राय रखी हो। हरियाणा कैडर के 1991 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अशोक खेमका अपने 34 साल के लंबे और संघर्षपूर्ण प्रशासनिक करियर के दौरान कुल 57 से अधिक तबादलों का सामना करने के लिए देश भर में जाने जाते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई बड़े भ्रष्टाचार घोटालों और अनियमितताओं का पर्दाफाश किया, जिसकी वजह से उन्हें लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक दबावों का सामना करना पड़ा। रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ भूमि सौदे से जुड़े म्यूटेशन मामले को रद्द करने के उनके फैसले ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। इसके अलावा हरियाणा बीज निगम के प्रबंध निदेशक के रूप में उन्होंने बीजों की खरीद में हुए बड़े घोटाले का भी पर्दाफाश किया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी इस अटूट निष्ठा और ईमानदारी के दम पर उन्होंने जनता के बीच एक 'भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा' की छवि बनाई है। यही कारण है कि जब प्रशासनिक और संवैधानिक मर्यादाओं के हनन की बात आती है, तो अशोक खेमका बिना किसी डर के खुलकर अपनी बात रखते हैं, और उनका यह नया बयान भी उसी साहसिक और राष्ट्रहित की सोच का एक हिस्सा माना जा रहा है।राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस बयान के दूरगामी मायने और भविष्य की दिशापूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी पर अशोक खेमका के इस कड़े प्रहार के बाद देश की राजनीति और नौकरशाही के दायरे में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की बयानबाजी से न केवल संवैधानिक संस्थाओं की छवि प्रभावित होती है, बल्कि देश के प्रशासनिक ढांचे में काम कर रहे युवा अधिकारियों के सामने भी एक नकारात्मक संदेश जाता है। एक तरफ जहां विपक्षी दल चुनाव आयोग की नियुक्तियों और पारदर्शिता को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर हैं, वहीं दूसरी तरफ खेमका का यह बयान यह साबित करता है कि देश का एक पढ़ा-लिखा और कर्तव्यनिष्ठ प्रबुद्ध वर्ग व्यक्तिगत और राजनीतिक द्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और संवैधानिक गरिमा को सबसे ऊपर रखता है। अनुच्छेद 370 जैसी राष्ट्रीय उपलब्धियों को राजनीति का अखाड़ा बनाने के बजाय उनके सम्मान की रक्षा करने की बात कहकर खेमका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की अखंडता से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या पूर्व सीईसी की ओर से इस पर कोई सफाई आती है या फिर यह विवाद यहीं थम जाता है, लेकिन इसने यह जरूर तय कर दिया है कि देश की नौकरशाही में वैचारिक मतभेद अब खुलेआम मंचों पर सतह पर आने लगे हैं।
सीएम भगवंत मान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के भाई पर लगाया सनसनीखेज आरोप
राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से घमासान मच गया है और इस बार मामला सीधे तौर पर देश की प्रशासनिक व्यवस्था, चुनाव आयोग और एक मुख्यमंत्री के बीच आमने-सामने के टकराव का बन गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फ्रांस की राजधानी पेरिस से भारत लौटने के दौरान इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर हुई अपनी चेकिंग और कार्रवाई को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज बयान दिया है जिसने राजनीतिक तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार और प्रशासनिक महकमे पर बदले की भावना से काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब आम आदमी पार्टी (AAP) और चुनाव आयोग के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर पहले से ही तनातनी का माहौल बना हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने एक बार फिर देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि आखिर एयरपोर्ट पर ऐसा क्या हुआ था जिसके बाद मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से यह तीखा आरोप लगाना पड़ा।पेरिस यात्रा से लौटने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर क्या हुआ था पूरा मामलापूरा घटनाक्रम उस वक्त शुरू हुआ जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान फ्रांस के पेरिस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय फूड फेस्टिवल में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौटे थे। मार्केटफेड के निमंत्रण पर इस दौरे के लिए उन्हें शुरुआत में कुछ प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और अदालत से मंजूरी मिलने के बाद ही वे पेरिस के लिए रवाना हुए थे। अपनी इस आधिकारिक यात्रा को पूरा करने के बाद जब वे और उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, तो सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग के अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री और उनके साथ मौजूद अधिकारियों के सामान की सघन तलाशी ली गई। हालांकि घंटों चली इस जांच के दौरान अधिकारियों को उनके सामान से कोई भी आपत्तिजनक या अवैध सामग्री नहीं मिली, लेकिन इसके बावजूद उन पर पचास हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया गया और उन्हें करीब दो से तीन घंटे तक एयरपोर्ट पर ही रोककर रखा गया।'ज्ञानेश कुमार के भाई हैं कस्टम चीफ', सीएम भगवंत मान का बड़ा दावाचंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और आधिकारिक बयानों के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरी घटना की परतें खोलते हुए एक बड़ा दावा किया जिसने सबको चौंका दिया। भगवंत मान ने आरोप लगाया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर तैनात सीमा शुल्क विभाग के प्रमुख मनीष कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के सगे भाई हैं। सीएम मान ने दावा किया कि चूँकि आम आदमी पार्टी और उनकी पार्टी के नेता लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और उनके फैसलों के खिलाफ मुखर होकर विरोध दर्ज करा रहे हैं और उनका इस्तीफा मांग रहे हैं, इसी राजनीतिक खुन्नस को निकालने के लिए एयरपोर्ट पर उनके साथ ऐसा बर्ताव किया गया। मान ने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिकारियों को ऊपर से दबाव दिया गया था ताकि उनकी छवि को मीडिया और जनता के बीच धूमिल किया जा सके और उन्हें अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब अधिकारियों पर दबाव की बात सामने आई तो उन्होंने खुद कह दिया कि अगर यह उनकी नौकरी का सवाल है तो वे फॉर्मेलिटी पूरी कर लें, लेकिन इस तरह की ओछी राजनीति से वे डरने वाले नहीं हैं।आम आदमी पार्टी और चुनाव आयोग के बीच बढ़ती तल्खियाँ और राजनीतिक संघर्षयह पूरा वाकया सिर्फ एक एयरपोर्ट की चेकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और संस्थागत संघर्ष की एक लंबी दास्तान जुड़ी हुई है। पिछले कुछ समय से आम आदमी पार्टी और देश के चुनाव आयोग के बीच संबंधों में काफी खटास देखने को मिली है। आप नेताओं ने देश की चुनावी प्रक्रिया, मतदान के तरीकों और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर कई बार सवाल उठाए हैं। पार्टी ने खुलकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है और उनके इस्तीफे की मांग तक कर डाली है। ऐसे संवेदनशील माहौल में पंजाब के एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री का एयरपोर्ट पर इस तरह रोका जाना और उस पर से कस्टम प्रमुख का सीधा संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त से जोड़ा जाना, इस लड़ाई को एक नए और आक्रामक मोड़ पर ले आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामले भविष्य में केंद्र और राज्यों के संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना सकते हैं। आम आदमी पार्टी का यह भी आरोप है कि देश में अब लोकतांत्रिक व्यवस्था की आड़ में ऐसी तानाशाही प्रवृत्तियां पनप रही हैं जो विपक्षी नेताओं को मानसिक रूप से परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं।लोकतांत्रिक व्यवस्था और 'डेमोकेटर' की नई बहस, विपक्ष के तीखे तेवरइस पूरी घटना के बाद से देश की राजनीति में एक बार फिर तानाशाही बनाम लोकतंत्र की बहस छिड़ गई है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उनका कहना है कि आज के दौर में चुनी हुई सरकारों और विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र का बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है। चुनाव के समय विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई के सक्रिय होने और चुनाव खत्म होने के बाद उन मामलों के ठंडे पड़ जाने का हवाला देते हुए पार्टी ने देश की लोकतांत्रिक सेहत पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। भगवंत मान ने एक नया कटाक्ष करते हुए कहा है कि देश अब एक ऐसी व्यवस्था की तरफ बढ़ रहा है जहाँ औपचारिक रूप से लोकतंत्र तो है, लेकिन अंदरखाने तानाशाही चलाई जा रही है, जिसे उन्होंने 'डेमोकेटर' का नाम दिया है। एयरपोर्ट पर हुई इस घटना को इसी व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है जहाँ एक तरफ सत्ता पक्ष अपनी नीतियों और नियमों का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे सीधे तौर पर व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रहा है।भविष्य के राजनीतिक समीकरण और प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठते गंभीर सवालफ्रांस के दौरे से लौटने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई इस घटना ने प्रशासनिक महकमे की कार्यप्रणाली पर भी कई बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री को विदेश यात्रा से लौटने पर इस तरह से रोककर रखना और भारी जुर्माना लगाना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या फिर इसके पीछे वाकई कोई राजनीतिक बदले की भावना काम कर रही थी? इन सवालों के जवाब भले ही आने वाले दिनों में जांच और राजनीतिक बयानों के जरिए सामने आएंगे, लेकिन इसने यह जरूर साबित कर दिया है कि भारत की सियासत में संस्थाओं की स्वायत्तता और उनके निष्पक्ष चरित्र को लेकर विवाद अब किस हद तक गहरे हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाने का मन बना लिया है, वहीं प्रशासनिक हलकों से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जैसे-जैसे मामले की गर्माहट बढ़ेगी, यह देखना दिलचस्प होगा कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यालय और केंद्र सरकार इस तीखे आरोप पर क्या रुख अपनाते हैं और पंजाब के मुख्यमंत्री की यह लड़ाई राष्ट्रीय राजनीति में क्या नया रंग दिखाती है।
Delhi Police की महिला सिपाही से 24 लाख रुपये की ठगी, आरोपी विक्रांत तोमर बागपत से गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की एक महिला कांस्टेबल से सोशल मीडिया पर दोस्ती करने के बाद निवेश के जरिये अच्छे मुनाफे का लालच देकर 24 लाख रुपये की ठगी के आरोप में 26 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह आरोप भी लगाया है कि आमने-सामने हुई मुलाकात के दौरान आरोपी ने उसका शीलभंग करने के इरादे से उसकी कमर को अनुचित तरीके से छुआ था। आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी विक्रांत कुमार उर्फ विक्की तोमर (26) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि महिला कॉन्स्टेबल की शिकायत पर आठ सितंबर को मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में उसने कहा कि विक्रांत ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर उससे संपर्क किया था और दावा किया था कि वह खेल कोटे के तहत दिल्ली पुलिस में भर्ती के संबंध में मार्गदर्शन चाहता है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाद में दोनों के बीच बातचीत एक ‘मैसेजिंग ऐप’ पर होने लगी, जहां आरोपी ने महिला कॉन्स्टेबल से जान-पहचान बढ़ाई और खुद को एक पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में प्रस्तुत किया। इसके बाद उसने महिला को भारी मुनाफे का झांसा देकर पैसे निवेश करने के लिए राजी कर लिया। अधिकारी ने बताया कि पीड़िता ने आरोपी के आश्वासनों पर भरोसा करते हुए अपनी जमा पूंजी उसके बताए अनुसार कई बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी। इसके अलावा, उसने 12 लाख रुपये का ‘पर्सनल लोन’ लिया तथा अपने परिचितों से भी पैसे उधार लेकर आरोपी को भेजे। इस तरह उसके साथ कुल करीब 24 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने बताया कि कुल रकम में से लगभग आठ लाख रुपये आरोपी के निर्देश पर सट्टेबाजी के एक मंच से जुड़े बैंक खातों में स्थानांतरित गए थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और इस बात का पता लगाया जा रहा है कि क्या वह अन्य लोगों को भी अपनी ठगी का शिकार बना चुका है।
फ्रांस में नए प्रदर्शनों पर सरकार सख्त, वाटर कैनन के साथ 70,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती
फ्रांस में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और देश एक बार फिर बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों की आंधी का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की वारदातों के बाद फ्रांसीसी सरकार ने इस बार किसी भी तरह की कोताही न बरतने का कड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों के प्रशासन ने देश में कानून और व्यवस्था को बनाए रखने तथा उपद्रवियों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए हैं जो पिछले कई वर्षों में शायद ही कभी देखे गए हों। राजधानी पेरिस से लेकर मार्सिले और ल्योन जैसे प्रमुख शहरों तक सुरक्षा बलों का भारी जमावड़ा देखा जा सकता है, जिससे पूरा देश इस समय एक छावनी में तब्दील नजर आ रहा है।फ्रांस में फिर सुलग रही असंतोष की आग, सड़कों पर उतरने की तैयारी में लाखों लोगफ्रांस की धरती पर एक बार फिर जन-असंतोष सड़कों पर उबाल मारता नजर आ रहा है। छात्र संगठनों, श्रमिक संघों और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया है। जानकारों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सप्ताहांत होने वाले इन प्रदर्शनों में लाखों की संख्या में आम नागरिक, छात्र और कामगार शामिल हो सकते हैं। लोगों का यह गुस्सा मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, जीवनयापन के बढ़ते खर्च, ईंधन की कीमतों में उछाल और सरकारी खर्चों में की जा रही कटौतियों के खिलाफ है। हालांकि अदालतों और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर प्रदर्शनों के मार्गों को लेकर शुरुआती खींचतान और पाबंदियां भी देखने को मिली हैं, लेकिन आयोजकों के अड़ियल रुख के बाद सरकार को सुरक्षा के मोर्चे पर अपनी रणनीति पूरी तरह बदलनी पड़ी है। देश के विभिन्न कोनों से लोग राजधानी की तरफ कूच करने की तैयारी में हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र की नींद उड़ी हुई है।सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम: 70 हजार पुलिसकर्मी, वाटर कैनन और आसमान से पहराजन-आंदोलन और संभावित हिंसा को रोकने के लिए फ्रांस के गृह मंत्रालय और प्रशासन ने जिस स्तर की सुरक्षा तैयारी की है, उसने हर किसी को चौंका दिया है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, देश भर में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए लगभग 70,000 पुलिसकर्मियों और सुरक्षा अधिकारियों को तैनात किया गया है। यह तैनाती सामान्य पुलिस बल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आतंकवाद-रोधी अभियानों और दंगों से निपटने में माहिर विशिष्ट इकाइयों को भी शामिल किया गया है। पेरिस और अन्य संवेदनशील शहरों की सड़कों पर भारी भरकम बख्तरबंद वाहन और अत्याधुनिक वाटर कैनन तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी भी उपद्रव की स्थिति में तुरंत पानी की बौछार कर भीड़ को तीतर-बितर किया जा सके। इसके अलावा, जमीन पर पुलिस के साथ-साथ आसमान से भी कड़ी नजर रखी जा रही है। पुलिस के हेलीकॉप्टर और ड्रोन लगातार संवेदनशील इलाकों के ऊपर चक्कर काट रहे हैं ताकि भीड़ के मूवमेंट और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की लाइव फीड सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचाई जा सके। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने या पुलिस पर हमला करने वालों से बेहद सख्ती से निपटा जाएगा।ऐतिहासिक संग्रहालय और प्रमुख संस्थान बंद, कारोबारियों में दहशत का माहौलसंभावित हिंसक झड़पों और तोड़फोड़ के खतरे को भांपते हुए फ्रांस के प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संस्थानों ने अपनी सुरक्षा के मद्देनजर खुद को बंद रखने का ऐतिहासिक फैसला किया है। दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाला पेरिस का विश्वप्रसिद्ध लूव्र संग्रहालय, ओरसे संग्रहालय, पिकासो संग्रहालय और ग्रैंड पैलेस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान सप्ताहांत के दौरान पूरी तरह बंद रहेंगे। कला और संस्कृति के इन वैश्विक केंद्रों के बंद होने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस खतरे को कितनी गंभीरता से ले रहा है। दूसरी ओर, देश के बड़े व्यावसायिक महानगरों के व्यापारियों और दुकानदारों में भारी दहशत का माहौल देखा जा रहा है। पिछले प्रदर्शनों के दौरान उपद्रवियों द्वारा कई दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिए जाने के बाद, इस बार दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर अपनी दुकानों और शोरूमों की खिड़कियों और दरवाजों पर लकड़ी के मजबूत बोर्ड ठोक दिए हैं ताकि किसी भी संभावित हमले से संपत्ति को बचाया जा सके। कारोबारियों का कहना है कि बार-बार होने वाले इन प्रदर्शनों और अराजकता के माहौल से उनके व्यवसाय की कमर टूट चुकी है, और वे सरकार से अपनी सुरक्षा की पुख्ता गारंटी की मांग कर रहे हैं।महंगाई, ईंधन संकट और सरकारी नीतियों के खिलाफ गुस्से का उबालफ्रांस में सुलग रहे इस जन-आंदोलन की जड़ें काफी गहरी हैं और यह मुख्य रूप से देश की आर्थिक बदहाली तथा आम जनता की रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी हुई हैं। यूरोप में भू-राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक आर्थिक मंदी के प्रभाव के चलते फ्रांस के नागरिकों को भी भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। इसके अलावा, रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं और खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों का जीवन दूभर हो गया है। सरकार द्वारा बजट घाटे को कम करने के नाम पर सार्वजनिक सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती करने के फैसलों ने जनता के गुस्से में घी डालने का काम किया है। नागरिकों का कहना है कि सरकार आम जनता को राहत देने के बजाय उद्योगपतियों और बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचा रही है। इन तमाम मुद्दों को लेकर पिछले कुछ दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में छिटपुट विरोध प्रदर्शन चल रहे थे, जो अब एक विशाल जन-आंदोलन का रूप लेते जा रहे हैं।सरकार की दो टूक चेतावनी और नागरिकों के लिए जारी की गई एडवाइजरीदेश के हालात को बेकाबू होने से बचाने के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों और उनकी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि प्रदर्शन के नाम पर हिंसा फैलाने, दुकानों में लूटपाट करने या कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ तुरंत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शनकारियों पर नकेल कसने के लिए कई इलाकों में चेहरा ढककर प्रदर्शन करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है और स्थानीय प्रशासन द्वारा रात के समय कर्फ्यू जैसे कड़े प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं। इसके साथ ही, भारत समेत दुनिया के कई देशों ने फ्रांस में उत्पन्न इस तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय ने फ्रांस यात्रा पर जाने वाले या वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने, अनावश्यक रूप से भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्रदर्शन स्थलों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है। कुल मिलाकर, फ्रांस इस समय एक नाजुक दौर से गुजर रहा है जहां सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करने और जनता के आक्रोश को शांत करने की दोहरी चुनौती खड़ी है, और आने वाले कुछ दिन देश के भविष्य के राजनीतिक व सामाजिक परिदृश्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
आत्मा के प्रशिक्षण से बदली पान की खेती, वैशाली के किसानों की बढ़ी आमदनी
ATMA
JDU का अनंत सिंह पर बड़ा एक्शन, 6 साल के लिए पार्टी से निकाला, विधायकी जाने का भी खतरा!
जनता दल (यूनाइटेड) ने मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह को अनुशासनहीनता के आरोपों और हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधान परिषद चुनावों में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने के कारण 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। साथ ही, उनकी प्राथमिक सदस्यता भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। सिंह ने JD(U) उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध किया था और 'जन सुराज' के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था। पार्टी अब विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से औपचारिक रूप से सिफारिश करेगी कि सिंह को विधायक के पद से अयोग्य घोषित किया जाए। इसे भी पढ़ें: Siwan Firecracker Blast: सिवान में मकान में रखे पटाखों में धमाके से पांच की मौत, दो नाबालिग शामिल बिहार JDU अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा जारी एक आदेश में, पार्टी ने सिंह पर बार-बार निर्देशों की अवहेलना करने और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अनुचित व अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा के संदेशों के बावजूद, सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ अपना प्रचार जारी रखा। इस मामले पर ललन सिंह चुप रहे। अनंत सिंह को पार्टी से निकालने का फैसला शनिवार को ललन सिंह और नीतीश कुमार की मुलाकात के बाद लिया गया। उनकी पत्नी नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया है और उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। शनिवार को विधायक अनंत सिंह ने अपने उस बयान से पलटी मार ली, जिसमें उन्होंने कहा था कि नीतीश के समर्थन के लिए उन्होंने नौ लोगों की हत्या करवाई थी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया। इसके बजाय, उन्होंने RJD पर आरोप लगाया कि जब बिहार में लालू प्रसाद सत्ता में थे, तब उनके नौ रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई थी। विवाद में बुरी तरह फंसने के बाद, मोकामा क्षेत्र में अच्छा-खासा प्रभाव रखने वाले अनंत सिंह ने सफाई दी कि उनका मतलब यह था कि पिछली RJD सरकार के दौरान उनके परिवार के नौ सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने आगे कहा कि मेरा कहने का मतलब यह था कि मैंने नीतीश के लिए ऐसा बलिदान दिया है। इसे भी पढ़ें: Bihar Government और SEBI मिलकर चलाएंगे वित्तीय साक्षरता अभियान, फ्रॉड से बचाव पर जोर उन्होंने बताया कि RJD के शासनकाल के दौरान उन पर भी गोली चलाई गई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ये सब इसलिए हुआ क्योंकि हमने नीतीश का साथ दिया था। उनका यह बयान JD(U) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा द्वारा पार्टी का रुख स्पष्ट किए जाने के 24 घंटे के भीतर आया है।
'जब हाथ से फिसल रहा था मैच...', अय्यर ने किसे दिया जीत का क्रेडिट?
भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को दूसरे मुकाबले में हराकर अपना दबदबा बरकरार रखा है. भारतीय बल्लेबाजों ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए इस मुकाबले में टीम को एक यादगार जीत दिला दी. इस जीत के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने दिल की बात कही.
भोपाली चचा के भन्नाट क़िस्से - STORYBOX WITH JAMSHED
स्टोरीबॉक्स के इस एपिसोड में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी सुना रहे हैं क़िस्से भोपाल के पटियेबाज़ों के. लंबी-लंबी हांकने वाले, अपने मन से कहानियां-क़िस्से बनाकर सुनाने की वो मज़ेदार परंपरा जिसमें क़िस्सा सुनाने वाले और सुनने वाले, दोनों को पता है कि क़िस्सा झूठा है लेकिन फिर भी उसका लुत्फ़ लिया जाता है. इनमें कभी कोई खां साहब रात के वक़्त जंगल में शेर के सामने खड़े हो जाते हैं, कभी नवाब साहब का ख़राब हेलिकॉप्टर एक ठोकर मार कर ठीक हो जाता है, एक बार तो किसी भोपाली ने जो गेंद पर शॉट मारा तो वो जाकर इंदौर से तीन किलोमीटर दूर गिरी. ऐसे ही बेशुमार क़िस्सों का गुलदस्ता तैयार किया गया है स्टोरीबॉक्स में जिसका नाम है “भोपाली चचा के भन्नाट किस्से”.
प्रेमी से शादी की जिद पर मोबाइल टावर पर चढ़ी नाबालिग प्रेमिका
झारखंड के पलामू जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां प्यार में पागल एक नाबालिग प्रेमिका अपने प्रेमी से शादी करने की जिद पर अड़ गई और देखते ही देखते एक ऊंचे मोबाइल टावर पर जा चढ़ी। इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। आजकल के युवाओं में रिश्तों को लेकर संवेदनशीलता और भावनाओं का ज्वार किस हद तक बढ़ चुका है, यह घटना उसकी एक और बानगी पेश करती है। स्थानीय लोगों के लिए यह नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था, लेकिन जमीन पर खड़े लोगों की सांसें अटकी हुई थीं क्योंकि जरा सी चूक एक बड़ी अनहोनी में बदल सकती थी और किसी की जान भी जा सकती थी।घटना की शुरुआत सुबह के वक्त हुई जब अचानक लोगों ने टावर के ऊपर एक युवती को बैठे हुए देखा। जैसे-जैसे यह बात पूरे इलाके में फैली, वैसे-वैसे वहां तमाशबीनों की भीड़ बढ़ती चली गई। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर माजरा क्या है, लेकिन जब धीरे-धीरे यह बात खुली कि वह नाबालिग लड़की अपने प्रेमी से शादी की जिद को लेकर टावर पर चढ़ी है, तो हर कोई अक्बका रह गया। झारखंड के इस इलाके में इस प्रकार का अनोखा और खतरनाक विरोध प्रदर्शन पहली बार देखा जा रहा था, जिसने स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी।जमीन पर सांसें थमीं और आसमान में बैठी प्रेमिका, घंटों तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामाघटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया। टावर के नीचे सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई, जो तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे थे। नाबालिग लड़की टावर के बेहद ऊपरी हिस्से पर बैठी हुई थी और बार-बार अपने प्रेमी से ही बात करने तथा उसी से शादी करने की बात दोहरा रही थी। पुलिस अधिकारियों ने नीचे से लाउडस्पीकर और समझाइश के जरिए उसे सुरक्षित नीचे उतरने की अपील की, लेकिन वह अपनी जिद पर पूरी तरह अड़ी रही। इस दौरान इलाके में ट्रैफिक और कानून व्यवस्था की स्थिति भी तनावपूर्ण हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।प्रशासन के अधिकारियों ने लगातार घंटों तक युवती से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। महिला पुलिसकर्मियों को भी मौके पर बुलाया गया ताकि वे लड़की को मानसिक रूप से ढांढस बंधा सकें और उसे समझा सकें कि इस तरह जान जोखिम में डालना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। हालांकि,शोकाकुल और आवेश में भरी हुई नाबालिग लड़की किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं थी। उसकी केवल एक ही रट थी कि जब तक उसका प्रेमी उससे शादी का वादा नहीं करता, तब तक वह नीचे नहीं उतरेगी। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के कारण पूरे पलामू जिले में सनसनी फैल गई और सोशल मीडिया पर भी इस घटना की चर्चाएं तेजी से होने लगीं।प्रेमी के मौके पर पहुंचने और समझाने के बाद उतरी नीचे, प्रशासन ने ली राहत की सांसजब तमाम प्रशासनिक कोशिशें और स्थानीय लोगों की मान-मनौव्वल बेअसर साबित होने लगी, तब पुलिस ने समझदारी दिखाते हुए उसके प्रेमी को तुरंत ढूंढकर मौके पर बुलवाया। प्रेमी के वहां पहुंचते ही स्थिति में एक नया मोड़ आया। प्रेमी ने जब पुलिस की निगरानी में नाबालिग प्रेमिका से बातचीत की और उसे भरोसा दिलाया कि वह उसकी भावनाओं की कद्र करता है तथा समझदारी से इस मामले का समाधान निकालेगा, तब जाकर लड़की का गुस्सा और जिद कुछ कम हुई। प्रेमी के निरंतर समझाने और पुलिस द्वारा सुरक्षित माहौल व न्याय का भरोसा देने के बाद नाबालिग ने आखिरकार टावर से नीचे उतरना स्वीकार किया।जैसे ही लड़की ने नीचे उतरने के लिए कदम बढ़ाए, जमीन पर खड़े हजारों लोगों और पुलिसर्किमयों की अटकी हुई सांसें वापस लौटीं। सुरक्षित नीचे उतरने के तुरंत बाद पुलिस ने उसे अपनी हिरासत में लिया और एहतियात के तौर पर चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल चेकअप) के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन ने इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और दोनों पक्षों के परिजनों को भी थाने में तलब किया गया है ताकि किशोर उम्र में उठाए जाने वाले ऐसे खतरनाक कदमों के परिणामों से उन्हें अवगत कराया जा सके।झारखंड में बढ़ रहे ऐसे मामले और समाज के लिए एक बड़ा संदेशपलामू की यह घटना कोई पहली ऐसी घटना नहीं है, जब प्रेम प्रसंग या शादी की जिद के चलते युवाओं या किशोरियों ने इस तरह के खतरनाक कदम उठाए हों। पिछले कुछ समय में झारखंड और आसपास के इलाकों से ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जो यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आज की युवा पीढ़ी मानसिक तनाव और भावनाओं के आवेग को संभालने में कितनी असमर्थ होती जा रही है। कम उम्र में प्रेम संबंधों में उलझना और फिर परिवार या समाज के विरोध के डर से इस तरह के चरम कदम उठाना न केवल खुद की जान जोखिम में डालता है, बल्कि कानून और व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चुनौती पैदा करता है।विशेषज्ञों का मानना है किशोरावस्था एक ऐसा नाजुक दौर होता है जहां हॉर्मोनल बदलाव और भावनात्मक उथल-पुथल के कारण बच्चे कई बार गलत फैसले ले बैठते हैं। ऐसे समय में माता-पिता, शिक्षकों और समाज की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें, उनकी समस्याओं को सुनें और उन्हें सही काउंसलिंग प्रदान करें। पलामू की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि केवल कानून या पुलिस कार्रवाई से इस प्रकार की प्रवृत्तियों को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता, बल्कि इसके लिए पारिवारिक संवाद और सामाजिक जागरूकता का होना बेहद अनिवार्य है ताकि भविष्य में कोई भी युवा इस प्रकार का खतरनाक रास्ता न चुने।
'कौन माई का लाल भारत को तोड़ना चाहता है', जामिया मामले में भड़के गिरिराज सिंह
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जामिया मामले पर रिएक्शन देते हुए पूछा कि कौन माई का लाल भारत को तोड़ना चाहता है। सभी देशभक्तों को सोचना होगा कि ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब देना है।
अनंत सिंह को JDU ने पार्टी से निकाला, पत्नी नीलम देवी भी बाहर; खतरे में विधायकी
बिहार विधान परिषद चुनाव में पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर प्रचार करना मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को भारी पड़ा है. जनता दल यूनाइटेड ने अनंत सिंह को पार्टी से निकाल दिया है. उनकी पत्नी नीलम देवी को भी 6 साल के लिए निष्कासित किया गया है.
कश्मीर में PAK मॉड्यूल का भंडाफोड़, घाटी में फैला रहे थे अलगाववादी विचारधारा
कश्मीर में अलगाववादी सोच फैलाने के कथित नेटवर्क को लेकर बांदीपोरा पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. पुलिस का दावा है कि इस मॉड्यूल के तार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से जुड़े थे और महिलाओं को अलगाववादी विचारधारा से जोड़ने के लिए गुप्त बैठकें की जा रही थीं.
Election Commission और राजनीति से लेकर खेल जगत तक की बड़ी खबरें
‘भाषा’ की विभिन्न फाइल से शनिवार को शाम छह बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार हैं;--- दि13 कांग्रेस निर्वाचन आयोग‘वोट चोरी’ की साजिश का ठीकरा सॉफ्टवेयर पर फोड़ने की कोशिश कर रहा निर्वाचन आयोग : कांग्रेसनयी दिल्ली, कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ‘‘फायदा पहुंचाने’’ के लिए रची गई कथित सुनियोजित साजिश का ठीकरा सॉफ्टवेयर पर डालने की कोशिश कर रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है। प्रादे89 झारखंड नवीनकांग्रेस ने कभी संविधान का पालन नहीं किया, अपनी मनमानी से देश चलाया : नितिन नवीनरांची, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को कांग्रेस पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी (कांग्रेस) ने कभी संविधान का पालन नहीं किया और अपनी मनमानी से देश चलाया। अर्थ1 व्यापारी राहुल गांधी रैलीव्यापारी संगठन ने राहुल गांधी से एक नवंबर की ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली टालने का आग्रह कियानयी दिल्ली, व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली को 10 नवंबर तक के लिए स्थगित करने का आग्रह किया है। प्रादे60 महाराष्ट्र ऑडियो क्लिप लीड भाजपा राउतसंजय राउत ने एआई की मदद से ऑडियो क्लिप तैयार की, राहुल गांधी के इशारे पर काम कर रहे: भाजपामुंबई, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भाजपा को बदनाम करने का ‘‘ठेका’’ देने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से एक ऑडियो क्लिप तैयार की, जिसमें मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे को ‘‘500 करोड़ रुपये’’ दिए जाने का जिक्र है। दि31 दिल्ली छात्रा लीड शवपूर्वी दिल्ली में स्कूल परिसर में 12वीं कक्षा की छात्रा का जला हुआ शव मिलानयी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित एक स्कूल में गार्ड के कक्ष के पीछे 12वीं कक्षा की छात्रा का जली अवस्था में शव मिला। इस घटना से 18 वर्षीय छात्रा का परिवार के सदस्य सदमे में हैं। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। दि32 न्यायालय जल निकायकीमती जलस्रोतों की सुरक्षा नहीं होने पर अदालतें स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं: न्यायालयनयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और संबंधित अधिकारियों को आर्द्रभूमियों की मौके पर जाकर पड़ताल करने और उनकी सीमाएं तय करने का निर्देश देते हुए कहा है कि जब कीमती जलस्रोतों की सुरक्षा नहीं हो रही हो, तो अदालतें इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। अर्थ5 संसदीय समिति वित्त मुद्देवित्त मामलों की संसदीय समिति क्रिप्टो, एआई सहित 46 आर्थिक मुद्दों की जांच करेगीनयी दिल्ली, संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने चालू वित्त वर्ष के दौरान विस्तृत जांच और रिपोर्ट तैयार करने के लिए वित्त में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मुद्रा प्रबंधन और आभासी डिजिटल संपत्तियों के अध्ययन सहित 46 विषयों को चुना है। अर्थ3 रूस भारत व्यापार सहयोगभारत-रूस के बीच 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य: राजदूतमास्को, भारतीय राजदूत विनय कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी-अपनी सरकारों को द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने का निर्देश दिया है। वि22 अमेरिका ट्रंप ऑपरेशन सिंदूरट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का फिर से दावा किया, नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने पर जताई निराशावाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में मध्यावधि चुनाव की एक रैली को संबोधित करते हुए एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को भारी शुल्क लगाने की धमकी देकर दोनों देशों के बीच चार दिन तक चले सैन्य संघर्ष को रुकवाया था। वि9 फ्रांस प्रदर्शनफ्रांस में फिर से विरोध-प्रदर्शन भड़कने के मद्देनजर पेरिस में संग्रहालय बंद, भारी पुलिस बल तैनातपेरिस, फ्रांस में फिर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर अधिकारियों ने शनिवार को व्यापक पुलिस बल तैनात किया है और पेरिस के प्रमुख संग्रहालयों को बंद कर दिया गया है। खेल15 खेल लीड भारततिलक का नाबाद अर्धशतक, भारत चार विकेट से जीतकर पांच मैच की श्रृंखला में 2-0 से आगेक्राइस्टचर्च, भारत ने तिलक वर्मा (नाबाद 51 रन) के अर्धशतक और नीतिश कुमार रेड्डी (नाबाद 26 रन) के साथ सातवें विकेट के लिए 30 गेंद में 69 रन की अटूट साझेदारी की बदौलत शुरूआती झटकों से उबरते हुए शनिवार को यहां दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में न्यूजीलैंड पर एक गेंद रहते चार विकेट से रोमांचक जीत दर्ज की। खेल18 खेल बैडमिंटन लीड भारतसिंधू फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहुंची, आन से यंग से होगा खिताबी मुकाबलापेरिस, दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने शनिवार को फ्रेंच ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जापान की हिना अकेची पर रोमांचक जीत दर्ज की। द कन्वरसेशन के साथ अनुबंध के तहत जारी खबरें--- वि19 ब्रिटेन बाढ़ जलवायु परिवर्तनजलवायु परिवर्तन : बाढ़ से निपटने की जिम्मेदारी लोगों पर डालने से नाराज हैं ब्रिटेन के कई समुदायमैनचेस्टर, जलवायु परिवर्तन के कारण ब्रिटेन में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। बाढ़ बार-बार आने के बीच समुदायों को आपदा से निपटने में सक्षम बनने तथा खुद को परिस्थिति के अनुरूप ढालने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
तुरंत वहां से निकलो; टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में हमलावरों को ऐसे मिल रही थी पल-पल की जानकारी
18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में दो हमलावरों ने श्रॉफ की कार पर कई गोलियां चलाई थीं। इस घटना में अभिनेता को मामूली चोटें आईं या वह लगभग सुरक्षित बच गए। इसके बाद कई राज्यों में जांच शुरू की गई और राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा से 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
Rahul Gandhi और Congress पर बरसे Nitin Nabin, संविधान कमजोर करने का लगाया आरोप
24 अक्टूबर को रांची में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पार्टी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय राजधानी से विरोध-प्रदर्शन आयोजित कर रही है, जबकि वह राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर रही है और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी कर रही है। मीडिया से बात करते हुए, नवीन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से झारखंड के मौजूदा राजनीतिक माहौल को चुनौती देने का आह्वान किया। उन्होंने स्थानीय मुद्दों की अनदेखी और राष्ट्रीय स्तर पर मचे हंगामे के बीच का अंतर स्पष्ट किया। इसे भी पढ़ें: हमारी रक्षा कर रहा है...पाकिस्तान पर ये क्या बोल गए फारूक अब्दुल्ला, बीजेपी ने दिया करारा जवाब उन्होंने कहा कि मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि हमें झारखंड में फैले अराजकता के माहौल के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। हमारे प्रदेश अध्यक्ष छात्रों से जुड़े मुद्दों और उनके हालिया विरोध-प्रदर्शनों पर चर्चा करते रहे हैं। जब छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, तब यहां के कांग्रेस नेताओं ने उनके समर्थन में एक शब्द भी नहीं कहा। फिर भी, वे दिल्ली में बैठकर छात्रों और युवाओं की बात करने का दावा करते हैं। हम सभी को इस बात का पता होना चाहिए। कांग्रेस के शासनकाल में, मेडिकल परीक्षा प्रणाली पर 'माफिया राज' हावी था। हमने उस पूरी व्यवस्था को ही बदल दिया। अपनी आलोचना को आगे बढ़ाते हुए, नितिन नबीन ने विपक्षी दलों पर शासन प्रणालियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज देश में काफी चर्चा हो रही है, जहाँ संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने और लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। जो लोग आज संविधान का हवाला देते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अगर किसी ने इसके पन्नों को फाड़कर टुकड़े-टुकड़े किया है, तो वह कांग्रेस पार्टी और उसके नेता ही हैं। इसे भी पढ़ें: Trump ने मस्क-CIA को ही कर दिया एक्सपोज? राहुल की वियतनाम यात्रा की पोल भी खुल गई! इतिहास की घटनाओं का जिक्र करते हुए नबीन ने आगे कहा कि सबने देखा है—चाहे वह विभिन्न राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाना हो, आपातकाल (इमरजेंसी) लागू करना हो, या अनैतिक फैसले लेना हो। कांग्रेस ने कभी भी संविधान के अनुसार शासन नहीं किया; इसके बजाय, उसने पूरे देश को अपने परिवार के नियमों के हिसाब से चलाने की कोशिश की। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की विपक्ष द्वारा की जा रही चुनिंदा आलोचना पर सवाल उठाए और कांग्रेस पर बाहरी प्रभावों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि आज वे देश में पूरी तरह से अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी ताकत सिर्फ एक स्रोत से नहीं आती। भले ही उन्हें देश के भीतर से कुछ समर्थन मिलता हो, लेकिन उनकी ताकत का एक बहुत बड़ा स्रोत देश के बाहर से आता है। मैं कांग्रेस नेताओं, खासकर राहुल गांधी जी से पूछना चाहता हूँ: आप अक्सर इस देश और इसकी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाते हैं। लेकिन, जब आपके कार्यकाल के दौरान यही संस्थाएं काम कर रही थीं, तब आपने कभी उन पर सवाल नहीं उठाए।
डेढ़ साल के मासूम की हत्या, दुर्गा मंदिर में मिला कटा सिर, भाई गिरफ्तार
पटना के पालीगंज में डेढ़ साल के मासूम की हत्या से सनसनी फैल गई है. रानीतालाब थाना क्षेत्र के जीतन छपरा गांव के दुर्गा मंदिर में बच्चे का कटा सिर मिला. हत्या का आरोप उसके 22 वर्षीय बड़े भाई अजीत कुमार उर्फ बाला पर है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हथियार बरामद किया है. FSL टीम जांच कर रही है और हत्या की वजह का पता लगाया जा रहा है.
रात को सोने से पहले कर लें ये एक काम, प्रेमानंद महाराज बोले, जीवन में बढ़ेगी शांति और सकारात्मकता
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि अगर रात को सोने से पहले दिन का अंत ईश्वर स्मरण और आत्मचिंतन के साथ करना चाहिए. इससे व्यक्ति के अंदर पॉजिटिव एनर्जी आती है.
3.5 लाख फूलों से सजा कश्मीर का ये खूबसूरत गार्डन, फैमिली संग करें सैर
कश्मीर घूमने के लिए गर्मियों का इंतजार जरूरी नहीं है, अक्टूबर-नवंबर में श्रीनगर का बाग-ए-गुल-ए-दाऊद गार्डन भी पर्यटकों के अट्रैक्शन का केंद्र बन सकता है. यहां गुलदाउदी की 70 से ज्यादा किस्मों के करीब 3.5 लाख पौधे लगाए गए हैं, जानिए इस खूबसूरत गार्डन की खासियत और इसे ट्रैवल लिस्ट में क्यों शामिल करें.
अनंत सिंह पर जेडीयू का कड़ा एक्शन, पार्टी ने दिखाया 6 साल के लिए बाहर का रास्ता
JDU ने मोकामा विधायक अनंत सिंह के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. विधान परिषद चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर हुए विवाद के बाद यह कार्रवाई हुई है.
जिंदगी के एक ऐसे मुकाम पर जहां ज्यादातर लोग अपने सुनहरे करियर की थकान मिटाने के बाद आराम की जिंदगी और परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, वहीं कुछ ऐसे असाधारण व्यक्तित्व भी होते हैं जो उम्र के बंधनों को तोड़कर नई ऊंचाइयों को छूने की ललक रखते हैं। कोल इंडिया जैसी प्रतिष्ठित महारत्न कंपनी में महाप्रबंधक (General Manager) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके और लाखों रुपये के सैलरी पैकेज वाली कॉर्पोरेट दुनिया का हिस्सा रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसे जानकर हर कोई हैरान है। 68 वर्ष की उम्र में जब इंसान शारीरिक और मानसिक रूप से विश्राम की तलाश करता है, तब इस पूर्व जीएम ने अपनी पुरानी आरामदायक जिंदगी को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर से स्टूडेंट बनने का फैसला किया है। वे आज विश्वविद्यालयों के क्लासरूम में सामान्य विद्यार्थियों की तरह बेंच पर बैठकर मनोविज्ञान (Psychology) विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी आज के दौर में उन युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो छोटी-छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं या यह मान बैठते हैं कि पढ़ने और सीखने की कोई उम्र होती है।#1 आलीशान नौकरी और भारी-भरकम पैकेज छोड़कर क्यों चुनी अकादमिक और सामाजिक सेवा की राहएक महाप्रबंधक के रूप में कोयला उद्योग और भारी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दशकों तक देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले इस शख्स का सफर जितना शानदार रहा, उतना ही दिलचस्प उनका यह नया मोड़ है। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने हजारों कर्मचारियों, प्रबंधकों और अधिकारियों के साथ काम किया था। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि मशीनों और प्रबंधन के आंकड़ों से परे इंसानी दिमाग, उसकी उलझनें, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) समाज का एक ऐसा पहलू है जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। रिटायरमेंट के बाद जब उनके सामने हाथ पर हाथ धरकर बैठने या यात्राएं करने का विकल्प था, तब उन्होंने समाज के मानसिक स्वास्थ्य को करीब से समझने और एक काउंसलर या मनोवैज्ञानिक के रूप में लोगों के काम आने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने किसी शॉर्टकट या ऑनलाइन डिग्री के बजाय सीधे रेगुलर कॉलेज के क्लासरूम में दाखिला लेने की ठानी, ताकि वे युवा छात्रों के बीच रहकर अकादमिक माहौल का अनुभव कर सकें और विषय की गहराई तक उतर सकें।#1 युवाओं के बीच क्लासरूम का अनुभव और 68 की उम्र में असाइनमेंट-परीक्षाओं का रोमांचजब 68 साल के एक अनुभवी कॉर्पोरेट लीडर ने विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार पर कदम रखा और कक्षाओं में दाखिला लिया, तो शुरुआत में उनके सहपाठियों और प्रोफेसरों के लिए यह किसी आश्चर्य से कम नहीं था। उम्र के इस पड़ाव पर कॉलेज के लेक्चर सुनना, नोट्स तैयार करना, लाइब्रेरी की मोटी-मोटी किताबें खंगालना और परीक्षा के हॉल में बैठकर पर्चे लिखना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन इस पूर्व जीएम ने साबित कर दिया कि जब आपके भीतर सीखने की इच्छा प्रबल हो, तो कोई भी बाधा रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती। वे रोजाना समय पर क्लास पहुंचते हैं, हर लेक्चर को बेहद तल्लीनता से सुनते हैं और असाइनमेंट समय पर जमा कराते हैं। कॉलेज के युवा छात्र उनके इस जज्बे और अनुशासन को देखकर न केवल अचंभित हैं, बल्कि उनसे प्रेरणा भी ले रहे हैं। क्लासरूम में उनके सहपाठियों के साथ होने वाली चर्चाएं और वैचारिक आदान-प्रदान आज परिसर में एक मिसाल बन चुका है।#1 मनोविज्ञान (Psychology) विषय को चुनकर समाज सेवा और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकसमनोविज्ञान एक ऐसा विषय है जो मानव व्यवहार, भावनाओं, चेतन-अचेतन मन और मानसिक विकारों का अध्ययन करता है। आज की इस भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में डिप्रेशन, एंग्जायटी और मानसिक अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से पैर पसार रही हैं। कोल इंडिया के इस पूर्व महाप्रबंधक का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद उनके पास जो अनुभव और प्रशासनिक क्षमता है, उसे यदि मनोवैज्ञानिक ज्ञान के साथ जोड़ दिया जाए, तो वे समाज के उन लोगों की मदद कर सकते हैं जो मानसिक तनाव या अकेलेपन से जूझ रहे हैं। पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी योजना विशेष तौर पर बुजुर्गों, युवाओं और कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए मुफ्त काउंसलिंग और मार्गदर्शन शिविर आयोजित करने की है। उनका यह कदम यह साबित करता है कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने या नौकरी पाने का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज को बेहतर बनाने का एक सशक्त माध्यम है।#1 डिजिटल युग, एआई सर्च और सोशल मीडिया पर वायरल इस प्रेरणादायक कहानी की गूंजआज के आधुनिक डिजिटल युग और जनरेटिव एआई सर्च (SEO/AEO) के दौर में जब इस तरह की सकारात्मक और प्रेरणादायक खबरें सामने आती हैं, तो वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल जाती हैं। गूगल, बिंग और अन्य आधुनिक सर्च इंजनों पर इस समय 'Retired coal India GM studying psychology at 68', 'Old age education inspiration stories hindi', 'Leaving 4 lakh job for studies', और 'Power of lifelong learning news' जैसे कीवर्ड्स शीर्ष रुझानों में बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मुंबई और देश के तमाम हिस्सों के लोग इंटरनेट के माध्यम से इस बुजुर्ग की दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना कर रहे हैं। डिजिटल मीडिया और लोकल ऑप्टिमाइजेशन के जरिए समाज के भीतर छिपी इन अनूठी और सकारात्मक शख्सियतों की कहानियां घर-घर तक पहुंच रही हैं, जो लोगों को अपनी उम्र की सीमाओं से परे जाकर अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा दे रही हैं।
सनातन परंपरा में शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी (दशहरा) पर्व का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से उपासना करने के बाद दशमी तिथि को नम आंखों से मां भगवती की प्रतिमाओं को गाजे-बाजे के साथ विसर्जित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन इस बार एक हैरान करने वाला और श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला मामला सामने आया है, जहां विजयादशमी का त्योहार समाप्त होने के कई दिनों बाद भी मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जित नहीं हो सकी है और वह आज भी पूजा पंडाल में ही विराजमान हैं। यह स्थिति किसी प्राकृतिक आपदा के कारण नहीं, बल्कि विसर्जन घाटों पर फैली घोर अव्यवस्था, प्रशासनिक तालमेल की कमी और नगर निकाय की ढिलाई की वजह से पैदा हुई है। इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय पूजा समिति के पदाधिकारियों और आम श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है, और वे शासन-प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।#1 विसर्जन घाटों पर गंदगी और अव्यवस्था का अंबार: पूजा समिति ने जताई कड़ी नाराजगीमामले की जमीनी हकीकत का जायजा लेने पर पता चला कि पूजा समिति के सदस्य तय समय-सारणी के अनुसार दशमी की शाम को ही मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने की पूरी तैयारी कर चुके थे। लेकिन जब समिति के प्रतिनिधिमंडल ने पहले से चिन्हित किए गए स्थानीय नदी और तालाब घाटों का दौरा किया, तो वहां का नजारा बेहद चिंताजनक था। विसर्जन स्थलों पर न तो पर्याप्त पानी का इंतजाम था, न ही प्रतिमाओं को पानी में उतारने के लिए क्रेन या सुरक्षा कर्मियों की कोई व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा, घाटों के चारों तरफ गंदगी और कीचड़ का अंबार लगा हुआ था। समिति के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि हम मां दुर्गा की प्रतिमा का अनादर होते हुए नहीं देख सकते। किसी भी स्थिति में कीचड़ या अशुद्ध स्थल पर प्रतिमा को प्रवाहित करना धार्मिक मान्यताओं के पूरी तरह खिलाफ है, इसी वजह से प्रतिमा को वापस सुरक्षित पंडाल में लाकर रखना पड़ा।#1 पूजा समिति का तीखा सवाल: त्योहारों की व्यवस्था पर प्रशासनिक दावे कहां गायब हो गएइस दुखद स्थिति से नाराज दुर्गा पूजा समिति और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति के अध्यक्ष और सचिव ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहार शुरू होने से हफ्तों पहले जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि विसर्जन घाटों की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। लेकिन जमीनी स्तर पर हर बार ये दावे खोखले साबित होते हैं। समिति ने शासन से सीधे लहजे में सवाल पूछा है कि आखिर यह कैसी व्यवस्था है जहां श्रद्धालुओं को अपनी आराध्य देवी की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है और मजबूरी में प्रतिमा को पंडाल में ही रोक कर रखना पड़ रहा है? यदि समय रहते विसर्जन कुंडों की सफाई और जल स्तर का प्रबंध नहीं किया गया था, तो बैठकों में बड़े-बड़े वादे क्यों किए गए थे?#1 श्रद्धालुओं में भारी गुस्सा, शासन से तुरंत हस्तक्षेप कर सम्मानजनक विसर्जन की मांगदशहरा बीत जाने के बाद भी मां दुर्गा का विसर्जन न हो पाने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, पंडाल के बाहर भक्तों और स्थानीय निवासियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। हर कोई इस प्रशासनिक लापरवाही पर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहा है। धर्मशास्त्रियों और विद्वानों के अनुसार, दशमी तिथि के बाद प्रतिमा का विसर्जन न हो पाना शुभ संकेत नहीं माना जाता और इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूजा समिति के सदस्यों ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। समिति की स्पष्ट शर्त है कि जब तक प्रशासन किसी उपयुक्त, स्वच्छ और सम्मानजनक विसर्जन कुंड का प्रबंध नहीं करता और सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं देता, तब तक प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाएगा।#1 जनरेटिव एआई सर्च, SEO और लोकल न्यूज में गरमाया मां दुर्गा विसर्जन विवाद का मुद्दाआज के आधुनिक डिजिटल युग और जनरेटिव एआई सर्च (SEO/AEO) के दौर में स्थानीय प्रशासन की यह बड़ी लापरवाही सोशल मीडिया से लेकर सर्च इंजनों तक पर तेजी से वायरल हो रही है। गूगल, बिंग और अन्य आधुनिक प्लेटफॉर्म्स पर इस समय 'Durga idol immersion delay news', 'Puja samiti protest after Dussehra', 'Administrative negligence in idol immersion', और 'Local municipality immersion ghat preparation issues' जैसे कीवर्ड्स लगातार ट्रेंड कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के श्रद्धालु इंटरनेट के माध्यम से इस खबर की हर एक अपडेट पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जनरेटिव एआई और लोकल सर्च ऑप्टिमाइजेशन के माध्यम से जनआस्था और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी यह जमीनी रिपोर्ट सीधे लोगों तक पहुंच रही है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
हमारी रक्षा कर रहा है...पाकिस्तान पर ये क्या बोल गए फारूक अब्दुल्ला, बीजेपी ने दिया करारा जवाब
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाकर जम्मू-कश्मीर के लोगों की रक्षा कर रहा है, जबकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वैश्विक दबाव के कारण भारत सरकार चुप है। उत्तरी कश्मीर के बारामूला में पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, पाकिस्तान का जिक्र करते हुए अब्दुल्ला ने कहा हमारा पड़ोसी लगातार उनके पीछे पड़ा है। वह (पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ) हर जगह जाकर कहते हैं कि कश्मीर का मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है। वह हमारी रक्षा कर रहे हैं। वरना, उनके (भारत के) इरादे अच्छे नहीं हैं। अब्दुल्ला ने यह सवाल भी उठाया कि क्या जम्मू-कश्मीर के लोग सरकार से न्याय की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों और अपनी पहचान के लिए खड़े होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा आप दिल्ली से क्या उम्मीद कर सकते हैं? क्या आपको लगता है कि वे आपको न्याय दिलाएंगे? लड़ने का साहस रखें, वरना आप खत्म हो जाएंगे और आपकी पहचान मिट जाएगी। इसे भी पढ़ें: Farooq Abdullah ने IAS अफसर कुमार राजीव रंजन को Jammu Kashmir से बाहर भेजने की मांग उठाई बीजेपी ने अब्दुल्ला को जवाब दिया अब्दुल्ला के बयानों पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जम्मू-कश्मीर बीजेपी इकाई के प्रमुख सत शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा है। साथ ही, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर अब्दुल्ला ऐसे बयान देना जारी रखते हैं, तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए शर्मा ने कहा फारूक अब्दुल्ला को यह समझना चाहिए कि इस देश में उन्हें अपनी मर्जी की बात कहने की आज़ादी है। इसी आज़ादी की वजह से वह ऐसे बयान दे पा रहे हैं। अगर आपने यही बातें पाकिस्तान में कही होतीं, तो शायद आपको बख्शा नहीं जाता। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में जम्मू-कश्मीर के मुसलमान सुरक्षित हैं और अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के नतीजों को नजरअंदाज किया है। इसे भी पढ़ें: मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे Omar Abdullah, विधायकों से कहा, अब मेरे पास बायोडाटा नहीं भेजें फैसला हो चुका है शर्मा ने कहा बीजेपी इस तरह के बर्ताव को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्हें भारत की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। वरना, मैं तो यही कहूंगा कि उनके लिए पाकिस्तान एक बेहतर जगह होगी, उन्हें वहां जाकर बस जाना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता विनोद बंसल ने भी अब्दुल्ला की आलोचना की और कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने इस सुझाव पर सवाल उठाया कि कश्मीरियों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है; उन्होंने तर्क दिया कि यह भारत की ताकत ही है जो इस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। उन्होंने ANI से कहा जब देश के गद्दार सत्ता में आते हैं, तब भी वे अपनी गद्दारी नहीं छोड़ते। वे भारत में रहते हैं और पाकिस्तान के गुण गाते हैं। क्या कश्मीर पाकिस्तान की वजह से सुरक्षित है, या फिर पाकिस्तान को भारत की ताकत दिखाकर कश्मीर को सुरक्षित रखा गया है? पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाया है, जिसमें अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का मामला भी शामिल है, लेकिन उसकी सारी कोशिशें बेकार गई हैं। अनुच्छेद 370, जो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था, उसे केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में हटा दिया था। इसके बाद, इस पूर्व राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख - में पुनर्गठित कर दिया गया।
Himachal के Nahan में दो पक्षों में पथराव, SHO समेत 14 लोग घायल
हिमाचल प्रदेश के नाहन में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प में कुछ पुलिसकर्मियों समेत 14 लोग घायल हो गए। पुलिस ने शनिवार को कहा कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, दिल्ली गेट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर वाल्मीकि चौक के पास स्वागत द्वार लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद हिंसा भड़क उठी। गोबिंदगढ़ इलाके के कुछ निवासी स्वागत द्वार लगाने की कोशिश कर रहे थे, जिसका वाल्मीकि बस्ती के निवासियों ने विरोध किया। सिरमौर के पुलिस अधीक्षक निश्चित सिंह नेगी ने शनिवार को बताया कि दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो जल्द ही बढ़ गई। इसके बाद दोनों पक्षों के लोगों ने एक-दूसरे पर ईंट, पत्थर और कांच की बोतलों से हमला किया। नेगी ने बताया कि नाहन के थाना प्रभारी अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया। पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘‘हालांकि, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर ईंट, पत्थर और कांच की बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं। बीच-बचाव के दौरान उग्र भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर भी हमला कर दिया, जिससे कुछ पुलिस अधिकारी घायल हो गए।’’उन्होंने बताया कि हिंसक भीड़ ने मौके पर मौजूद कई सरकारी और निजी वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। नेगी ने कहा कि जब नाहन के तहसीलदार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के लिए मौके पर पहुंचे, तो भीड़ ने उनके सरकारी वाहन को रोक लिया और उस पर पत्थरों तथा लाठियों से हमला किया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना में नाहन सदर थाने के प्रभारी कुलबीर सिंह और दो अन्य पुलिसकर्मियों समेत 14 लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए नाहन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है। इस घटना के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-907ए पर यातायात भी बाधित हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब तीन घंटे तक जाम लगा रहा और वाहनों की कतार लगभग पांच किलोमीटर तक पहुंच गई। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस ने स्थिति पर काबू पा लिया है और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार गश्त की जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा तीन के तहत मामला दर्ज किया है।
गोरखपुर से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और जेवर तक हवाई कनेक्टिविटी, जानें फ्लाइट की टाइमिंग
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद और पूर्वांचल के प्रमुख औद्योगिक व व्यापारिक केंद्र गोरखपुर से देश के बड़े महानगरों की दूरी अब और भी सिमटने जा रही है। पूर्वांचल के निवासियों, व्यवसायियों, छात्रों और इलाज के लिए बाहर जाने वाले मरीजों की बढ़ती मांग को देखते हुए महायोगी गुरु गोरखनाथ एयरपोर्ट (गोरखपुर हवाई अड्डे) से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और नए बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के लिए सीधी हवाई कनेक्टिविटी का अभूतपूर्व विस्तार किया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और प्रमुख विमानन कंपनियों जैसे इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर द्वारा जारी नई समय-सारणी के अनुसार, गोरखपुर से अब प्रतिदिन और सप्ताह के निर्धारित दिनों में कई उड़ानें संचालित की जाएंगी। इस हवाई विस्तार से न केवल गोरखपुर बल्कि आसपास के जिलों जैसे देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के लाखों यात्रियों को भारी सुविधा मिलने वाली है।#1 गोरखपुर से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की फ्लाइट टाइमिंग और नया शेड्यूलगोरखपुर से देश के सबसे बड़े आर्थिक और राजनीतिक केंद्रों के लिए उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है ताकि यात्री दिन भर में अपना काम निपटाकर वापस लौट सकें। गोरखपुर से देश की राजधानी दिल्ली के लिए अब सुबह, दोपहर और शाम की अलग-अलग समय सीमाओं में रोजाना 4 से 5 सीधी उड़ानें उपलब्ध रहेंगी। दिल्ली जाने वाली पहली फ्लाइट सुबह 8:30 बजे गोरखपुर से उड़ान भरेगी और 10:15 बजे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगी, जबकि शाम की अंतिम फ्लाइट 7:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होगी। इसी तरह, गोरखपुर से मुंबई (छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) के लिए सीधी नॉन-स्टॉप फ्लाइट रोजाना दोपहर 12:20 बजे रवाना होकर दोपहर 2:40 बजे मुंबई लैंड करेगी। सूचना एवं आईटी हब बेंगलुरु के लिए हफ्ते में चार दिन (सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार) सीधी सेवा रहेगी, जो गोरखपुर से दोपहर 3:10 बजे उड़ान भरकर शाम 5:45 बजे केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगी।#1 जेवर एयरपोर्ट (नोएडा) से सीधे जुड़ेगा गोरखपुर: कनेक्टिविटी में नया अध्यायउत्तर प्रदेश के सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के शुरू होने के साथ ही गोरखपुर को जेवर से सीधे जोड़ने के लिए विशेष हवाई मार्ग तैयार किया गया है। जेवर एयरपोर्ट से गोरखपुर के बीच सीधी एयर कनेक्टिविटी शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ग्रेटर नोएडा, नोएडा और गाजियाबाद जाने वाले यात्रियों को दिल्ली एयरपोर्ट के भारी जाम और लंबी दूरी से बड़ी राहत मिलेगी। जेवर के लिए प्रस्तावित इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस की सीधी फ्लाइट गोरखपुर से रोजाना सुबह 11:00 बजे उड़ान भरेगी और मात्र 1 घंटे 15 मिनट के भीतर यात्रियों को जेवर पहुंचा देगी। इस नए एयर रूट से दिल्ली एनसीआर में काम करने वाले पूर्वांचल के लाखों पेशेवरों को अपने घर आने-जाने में समय की भारी बचत होगी और क्षेत्रीय पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।#1 पूर्वांचल के आर्थिक विकास, पर्यटन और आपातकालीन चिकित्सा को मिलेगी नई उड़ानगोरखपुर एयरपोर्ट से उड़ानों के इस बड़े विस्तार का सीधा असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों पर दिखाई देने लगा है। पूर्वांचल का केंद्र होने के कारण गोरखपुर में रेडीमेड गारमेंट हब, आयुष विश्वविद्यालय और एम्स (AIIMS) जैसी बड़ी संस्थाएं स्थापित हुई हैं। हवाई कनेक्टिविटी सुगम होने से मुंबई और बेंगलुरु के बड़े उद्योगपति व निवेशक अब आसानी से गोरखपुर आ-जा सकेंगे। इसके अलावा, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को आपातकालीन स्थिति में दिल्ली या मुंबई के बड़े अस्पतालों तक ले जाना अब बेहद आसान और त्वरित हो गया है। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर और गोरखनाथ मंदिर दर्शन के लिए आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी इस नए फ्लाइट शेड्यूल के लागू होने से भारी उछाल दर्ज किए जाने की उम्मीद है।#1 जनरेटिव एआई सर्च, SEO और एईओ के दौर में फ्लाइट शेड्यूल की लाइव जानकारीआज के आधुनिक डिजिटल युग और जनरेटिव एआई सर्च (SEO/AEO) के दौर में यात्रा करने वाले यात्री इंटरनेट पर सेकंडों में फ्लाइट्स के समय और किराए की तलाश कर रहे हैं। गूगल, बिंग और अन्य आधुनिक सर्च इंजनों पर इस समय 'Gorakhpur to Delhi flight timing today', 'Gorakhpur to Mumbai direct flight schedule', 'Gorakhpur to Jewar airport connectivity news', और 'IndiGo Gorakhpur to Bengaluru ticket fare' जैसे कीवर्ड्स शीर्ष रुझानों में शामिल हैं। पूर्वांचल और नेपाल के लाखों यात्री अब अपने मोबाइल के जरिए उड़ान भरने के सही समय, बोर्डिंग गेट्स, टिकट बुकिंग ऑफर्स और एयरपोर्ट शेड्यूल की प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। डिजिटल मीडिया और लोकल सर्च ऑप्टिमाइजेशन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के इस तेजी से विकसित होते एयर हब की हर एक अपडेट सीधे जनता तक पहुंचाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे प्रदेश बनाने के योगी सरकार के विजन के तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले को एक बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तोहफा मिलने जा रहा है। जिले में कनेक्टिविटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने और दिल्ली एनसीआर तथा जेवर एयरपोर्ट (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) तक सीधी पहुँच प्रदान करने के उद्देश्य से 74 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के आकार लेते ही क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी। यीडा (YIDA) और यूपीडा (UPEIDA) द्वारा तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट के तहत बुलंदशहर के दर्जनों गांवों की सूरत बदलने वाली है। लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा ताकि भारी ट्रैफिक के बावजूद वाहन बिना किसी बाधा के सरपट दौड़ सकें।#1 677.80 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण: 9 हजार किसानों की खुलेगी किस्मतइस 74 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए व्यापक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल 677.80 हेक्टेयर कृषि और अन्य प्रकार की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इस अधिग्रहण प्रक्रिया से बुलंदशहर जिले के विभिन्न तहसीलों और ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाले लगभग 9,000 से अधिक किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित किए गए पारदर्शी और आकर्षक सर्किल रेट मुआवजे के कारण क्षेत्र के किसानों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन द्वारा सर्किल रेट का कई गुना मुआवजा देने के प्रावधान से यह 9 हजार किसान परिवार रातों-रात मालामाल होने जा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आएगा।#1 जेवर एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा बुलंदशहर: क्या होगा रूट मैपइस ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह बुलंदशहर को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तथा यमुना एक्सप्रेसवे से सीधे एक निर्बाध कॉरिडोर के जरिए जोड़ देगा। वर्तमान में बुलंदशहर से जेवर या दिल्ली एनसीआर जाने के लिए संकरे और ट्रैफिक से भरे राज्य मार्गों का सहारा लेना पड़ता था, जिससे यात्रियों को घंटों का समय गंवाना पड़ता था। लेकिन इस नए 6-लेन लिंक एक्सप्रेसवे के बन जाने से बुलंदशहर से जेवर एयरपोर्ट का सफर मात्र 30 से 40 मिनट में पूरा हो सकेगा। एक्सप्रेसवे के रूट में पड़ने वाले प्रमुख गांवों और चौराहों पर इंटरचेंज बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने और उतरने में कोई असुविधा न हो।#1 क्षेत्र में बढ़ेंगी औद्योगिक गतिविधियां, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार की अपार संभावनाएंबुलंदशहर जिले में बनने वाला यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क मार्ग नहीं है, बल्कि यह आर्थिक समृद्धि का एक नया गलियारा (Economic Corridor) साबित होने वाला है। एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर यीडा द्वारा लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक सेक्टर, वेयरहाउसिंग हब और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करने का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। बुलंदशहर का मशहूर चीनी उद्योग, डेयरी उद्योग और हस्तशिल्प व्यापार अब सीधे वैश्विक बाजारों और दिल्ली एनसीआर के बड़े व्यापारिक केंद्रों से जुड़ जाएगा। उद्योगों की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों और स्वरोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्र से पलायन रुकेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी।#1 जनरेटिव एआई सर्च, SEO और यूपी एक्सप्रेसवे नेटवर्क में इस प्रोजेक्ट की गूंजआज के आधुनिक डिजिटल युग और जनरेटिव एआई सर्च (SEO/AEO) के दौर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी यह खबर इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है। गूगल, बिंग और अन्य आधुनिक सर्च इंजनों पर इस समय 'Bulandshahr greenfield link expressway route map', '677.80 hectare land acquisition Bulandshahr', 'Jewar airport to Bulandshahr link expressway', और '9000 farmers compensation Bulandshahr expressway' जैसे कीवर्ड्स लगातार ट्रेंड कर रहे हैं। बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और अलीगढ़ के नागरिक इंटरनेट के माध्यम से भूमि अधिग्रहण की तारीखों, मुआवजा वितरण प्रणाली और निर्माण कार्य शुरू होने की समय-सीमा की पल-पल की जानकारी जुटा रहे हैं। डिजिटल मीडिया और लोकल सर्च ऑप्टिमाइजेशन के जरिए बुलंदशहर के इस ऐतिहासिक विकास की प्रामाणिक जानकारी सीधे जनता तक पहुँच रही है।
प्राइवेट स्कूल के कर्मचारी ने 16 साल की छात्रा से किया रेप, अश्लील वीडियो बनाए
Jhansi Crime News: झांसी के रक्सा में प्रैक्टिकल में नंबर बढ़ाने के नाम पर छात्रा से दुष्कर्म और अश्लील वीडियो बनाने वाला आरोपी गिरफ्तार. एसपी सिटी ने दी जानकारी. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
'दिल्ली से क्या उम्मीद... PAK हमारी रक्षा कर रहा है', फारूक के विवादित बोल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने विवादित बयान दिया है और पाकिस्तान की पैरवी की है. उत्तर कश्मीर के बारामूला में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली दुनिया के दबाब के कारण चुप है, हमारा पड़ोसी लगातार उनके पीछे पड़ा है और हमारी रक्षा कर रहा है.
नसीरुद्दीन शाह ने BJP को गाली देते हुए बताया झूठी पार्टी, छात्रों को धमकाने का आरोप
बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भाजपा को अपशब्द कहते हुए झूठी पार्टी करार दिया है। उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म इंस्टीट्यूट का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि बंगाल में भाजपा छात्रों को धमकाने का काम कर रही है।
Revanth Reddy समाधान के बजाय राजनीति में व्यस्त, El Nino पर BRS का Congress पर हमला
'एल नीनो' (El Nio) पर हुई बैठक के बाद, BRS के प्रवक्ता रावुल श्रीधर ने राज्य के कामकाज को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी समस्या का समाधान खोजने के बजाय कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। ANI से बातचीत में श्रीधर ने दावा किया कि मौसम से जुड़ी इस स्थिति को संभालने के मामले में जनता का भरोसा जीतने के बजाय, मुख्यमंत्री रेड्डी लोगों को 'एल नीनो' के नाम पर डरा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में 'एल नीनो' से जुड़ी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी 'एल नीनो' (El Nio) से पैदा होने वाली समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने के बजाय, कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। 'एल नीनो' को लेकर सिर्फ बैठकें करने या भाषण देने से काम नहीं चलेगा। एक मुख्यमंत्री के तौर पर, उनका काम तेलंगाना की जनता को यह भरोसा दिलाना है कि भविष्य में आने वाली समस्याओं को ठीक से संभाल लिया जाएगा। लेकिन इसके बजाय, वे लोगों को डरा रहे हैं कि उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इसे भी पढ़ें: YSRCP अदालतों को कर रही गुमराह, CM Naidu बोले- हाई कोर्ट से Supreme Court तक झूठे केस गढ़े श्रीधर ने कहा मुख्यमंत्री और सरकार का काम यह सुनिश्चित करना है कि समस्याओं का समाधान निकाला जाए। लोगों को डराने-धमकाने के बजाय, उन्हें भरोसा दिलाना चाहिए। श्रीधर की यह टिप्पणी तब आई है, जब मुख्यमंत्री रेड्डी ने 'एल नीनो' के कारण लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बनने की चेतावनी दी और इस संकट से निपटने के लिए लोगों को भी इसमें शामिल करने (स्टेकहोल्डर बनाने) की जरूरत पर जोर दिया। 'एल नीनो' और ग्रेजुएट्स एमएलसी चुनावों को लेकर हुई एक बैठक के दौरान मीडिया से बात करते हुए, रेड्डी ने बताया कि मौसम के बदलते खतरनाक मिजाज की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पानी का संकट पैदा हो रहा है। उन्होंने विदेशों और पड़ोसी राज्यों में पानी बचाने के लिए उठाए गए सख्त कदमों का भी जिक्र किया। रेड्डी ने कहा, बहुत विकसित देश भी सूखे का सामना कर रहे हैं। 'एल नीनो' की वजह से ब्रिटेन में भी सूखा पड़ा है। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पीने के पानी की राशनिंग (सीमित आपूर्ति) की जा रही है, और ऐसे निर्देश दिए गए हैं कि हर व्यक्ति को पानी की खपत 20% तक कम करनी होगी। अक्टूबर में शुरू होने वाला यह सूखा जुलाई तक चलेगा। गर्मी बढ़ेगी और पानी का वाष्पीकरण (evaporation) भी ज्यादा होगा, जिससे पानी की दिक्कतें पैदा होंगी। सिंचाई के पानी की तुलना में पीने के पानी को लेकर ज्यादा मुश्किलें आएंगी। समस्या छोटी शुरू होकर बड़ी हो जाती है, जिससे ऐसे हालात बन सकते हैं कि लोग अपने घरों से बाहर भी न निकल पाएं। लोगों को सतर्क किए बिना और उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किए बिना, हम इस सूखे का सामना नहीं कर सकते। इसे भी पढ़ें: Amit Shah ने Delhi Police मुख्यालय में की उच्च स्तरीय बैठक, LG और CM रहे मौजूद मुख्यमंत्री ने संकट से जुड़ी गलत सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए एक समर्पित प्रशासनिक ढांचा बनाने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य निवारक रणनीतियों का नेतृत्व करना और जोखिम कम करने के उपायों को सुव्यवस्थित करना है।
YSRCP अदालतों को कर रही गुमराह, CM Naidu बोले- हाई कोर्ट से Supreme Court तक झूठे केस गढ़े
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को YSRCP पर आरोप लगाया कि वह पूरे राज्य में गंभीर घटनाएं होने का झूठा माहौल बनाकर राज्य की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है। CM नायडू ने आरोप लगाया कि यह पार्टी मनगढ़ंत खबरों, अपने मीडिया माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके गलत जानकारी फैला रही है, और अपने कथित कामों का दोष दूसरों पर मढ़ने की कोशिश कर रही है। मंगलगीरि में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, CM नायडू ने दावा किया कि YSRCP हिंसा की घटनाओं के लिए बार-बार विपक्ष और NDA को जिम्मेदार ठहराती है, जबकि खुद ही याचिकाएं दायर करती है और खुद को बेकसूर दिखाती है। उन्होंने इसे एक ऐसा पैटर्न बताया, जिसमें उनके अनुसार, कथित हिंसा और उसके बाद की कानूनी शिकायतों—दोनों के लिए एक ही लोग जिम्मेदार हैं। विवेका हत्याकांड का जिक्र करते हुए, CM नायडू ने याद दिलाया कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब YSRCP से जुड़े एक अखबार में नरसुर रक्त चरित्र (Narasura Raktha Charitra) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके उन पर आरोप लगाए गए थे। इसे भी पढ़ें: Akhilesh Yadav के बयान पर भड़के CM Dhami, कहा- पिता ने गोलियां चलवाईं, बेटा घुसपैठिया कह रहा मुख्यमंत्री नायडू ने आरोप लगाया कि इस अभियान के ज़रिए उन्हें विवेकानंद रेड्डी की हत्या से जुड़े विवाद में फंसाने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे 'बेहद झूठे प्रचार' का एक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा अभियान चलाने के लिए बहुत ज़्यादा हिम्मत चाहिए। मुख्यमंत्री नायडू ने आगे आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान, YSRCP बार-बार झूठा प्रचार कर रही है, शिकायतें दर्ज करा रही है और अदालतों का दरवाज़ा खटखटा रही है, ताकि लंबे समय तक कानूनी विवाद बने रहें। उन्होंने पार्टी पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक गतिविधियों की आड़ में अपराध कर रही है और फिर विवादों को लंबा खींचने के लिए मुकदमों का सहारा ले रही है। मुख्यमंत्री नायडू ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी अपनी साज़िशों को आगे बढ़ाने के लिए न्यायपालिका सहित कई संस्थानों को गुमराह करने वाली जानकारी दे रही है। उन्होंने दावा किया कि यह सिलसिला आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है, जहाँ एकतरफा या भ्रामक जानकारी के आधार पर मामले चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री नायडू ने YSRCP पर राजनीतिक फ़ायदे के लिए कानूनी प्रक्रियाओं और संस्थागत तंत्रों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने नैरेटिव को बनाए रखने और राज्य की छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए लगातार मुक़दमेबाज़ी कर रही है और गलत जानकारी फैला रही है।
गुवाहाटी के GMCH में पहला सफल Liver Transplant, पूर्वोत्तर का बना पहला सरकारी अस्पताल
स्थानीय गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में पहला लिवर प्रत्यारोपण किया गया, जिसके साथ ही यह ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला पूर्वोत्तर का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने यह जानकारी दी। डॉक्टर सेंथिल कुमार के नेतृत्व में चिकित्सकों की एक टीम ने शुक्रवार को शुरू हुई 16 घंटे लंबी सर्जरी के जरिये 48-वर्षीय एक मरीज का सफल प्रत्यारोपण किया। मरीज को उसकी छोटी बहन ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया था। शर्मा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘असम एक ऐसी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण कर रहा है जो देश में सर्वश्रेष्ठ सेवाओं का मुकाबला करती है, और आज हमने एक और मील का पत्थर पार कर लिया है।’’उन्होंने लिखा, ‘‘जीएमसीएच ने असम के किसी सरकारी अस्पताल में पहला लिवर प्रत्यारोपण किया है। सोलह घंटे चली इस जटिल सर्जरी में कामरूप मेट्रो जिले के 48-वर्षीय व्यक्ति को उसकी छोटी बहन से लिवर का एक हिस्सा मिला। बहन के इस साहस ने उसे नया जीवन दिया है। मैं पूरी चिकित्सा टीम को बधाई देता हूं।’’मुख्यमंत्री ने बताया कि अंगदाता (बहन) और अंग प्राप्तकर्ता (मरीज) दोनों की स्थिति में सुधार हो रहा है और चिकित्सकों की देखरेख में उन्हें गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमने 2025 में लिवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम की शुरुआत की थी, तब हमने एक स्पष्ट निर्णय लिया था कि जीवन बचाने वाली यह जटिल चिकित्सा सुविधा असम के हमारे सरकारी अस्पतालों में हर नागरिक के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। आज वह निर्णय परिणाम दे रहा है।’’शर्मा ने कहा कि यह तो बस शुरुआत है, क्योंकि राज्य सरकार पूरे असम में कैंसर देखभाल का एक व्यापक नेटवर्क भी तैयार कर रही है। जीएमसीएच अब भारत के उन 10 राज्य-संचालित (सरकारी) चिकित्सा महाविद्यालयों में शामिल हो गया है, जहां लिवर प्रत्यारोपण करने की सुविधा और क्षमता उपलब्ध है।
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब ऐसे विवादों के घेरे में आ गया है, जिनका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन ही नहीं, प्रदर्शनकारियों और उनके राजनीतिक समर्थकों को भी देना होगा। देखा जाये तो विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे मिलने के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि छात्रसंघ चुनाव की मांग करने वाले आंदोलन में आखिर कश्मीर और शरजील इमाम की रिहाई जैसे मुद्दे किस उद्देश्य से जोड़े जा रहे हैं? क्या यह केवल छात्र अधिकारों की लड़ाई है या इसके भीतर राजनीतिक लामबंदी का कोई दूसरा एजेंडा भी सक्रिय है? छात्रसंघ चुनाव की मांग अलग मुद्दा है, लेकिन इसकी आड़ में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे नारे आखिर क्यों लगाये जा रहे हैं? अगर लड़ाई सिर्फ छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए है, तो कश्मीर को लेकर ऐसे नारे लगाने का क्या मतलब है? क्या प्रदर्शनकारी इन नारों का समर्थन करते हैं? अगर नहीं, तो फिर इन्हें लिखने वालों के खिलाफ खुलकर आवाज क्यों नहीं उठाते? सवाल यह भी उठता है कि छात्रसंघ चुनाव के नाम पर देश की अखंडता से जुड़े सवालों को हवा देने की छूट आखिर किसने दी? छात्रसंघ चुनाव की मांग करने वालों को साफ करना होगा कि उनका मकसद छात्र अधिकारों की बहाली है या परिसर को विवादित नारों और राजनीतिक एजेंडे का अखाड़ा बनाना? देखा जाये तो छात्रसंघ चुनाव की बहाली अपने आप में एक अलग मुद्दा है, लेकिन उसके नाम पर परिसर में ऐसे नारे सामने आना, जो देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं, उन्हें किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर आंदोलन का उद्देश्य चुनाव कराना है, तो ‘फ्री कश्मीर’ का नारा किस मांग का प्रतिनिधित्व करता है? क्या प्रदर्शनकारी इस नारे की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं? और यदि नहीं, तो विश्वविद्यालय की दीवारों पर इसे लिखने वालों की पहचान सार्वजनिक करने की मांग वे स्वयं क्यों नहीं करते? इसे भी पढ़ें: Jamia Protest में 'Free Kashmir, Free Sharjeel Imam' के विवादित Posters, Salman Khurshid बोले- लगाने वालों से सवाल पूछे Media छात्रसंघ की मांग, लेकिन परिसर में किसका एजेंडा? हम आपको याद दिला दें कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ 2006 में परिसर में हिंसा और उससे पढ़ाई में आए व्यवधान के बाद भंग कर दिया गया था। अब प्रदर्शनकारी 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग कर रहे हैं। 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल और धरना जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले पर विचार करने के लिए समिति भी गठित की है। लेकिन इस आंदोलन के बीच आरएसएस, एबीवीपी और कुलपति को निशाना बनाते नारे भी सामने आए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन नारों की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। एबीवीपी ने भी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस की तैनाती और परिसर की सुरक्षा बढ़ाए जाने से मामला और गंभीर हो गया है। सबसे अहम सवाल यही है कि क्या छात्रसंघ बहाली की मांग को कुछ लोग अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला करने और विवादित नारेबाजी का मंच बना रहे हैं? यदि ऐसा है, तो आंदोलन के आयोजकों को स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी प्राथमिकता चुनाव है या परिसर में वैचारिक टकराव को बढ़ावा देना। कांग्रेस नेताओं के दौरे पर भी सवाल इसके अलावा, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद ने एक दिन पहले दीवार फांदकर परिसर में प्रवेश किया और वहां का माहौल बिगाड़ा। प्रशासन के मुताबिक, उनके दौरे के बाद तनाव बढ़ा और इस संबंध में दिल्ली पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। यहां सवाल उठता है कि क्या छात्र आंदोलन राजनीतिक दलों के लिए अपनी जमीन मजबूत करने का अवसर बनता जा रहा है? देखा जाये तो छात्रों को राजनीतिक मोहरों की तरह इस्तेमाल किए जाने से सभी को बचना चाहिए। लेकिन कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का कहना है कि वह छात्र हित में ही वहां गये थे। ऑनलाइन कक्षाएं, टकराव और प्रशासन की जवाबदेही इस बीच, 24 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अगले आदेश तक सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन करने का फैसला किया है। इससे पहले गुलिस्तान-ए-गालिब गार्डन में प्रदर्शनकारियों के टेंट हटाने की कोशिश के दौरान सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच टकराव हुआ। छात्रों ने भूख हड़ताल कर रहे साथियों पर कार्रवाई और उन्हें जबरन हटाने का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने बिना उकसावे के कार्रवाई किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया। लेकिन सवाल यह भी है कि आंदोलन के कारण पढ़ाई बाधित होने की नौबत क्यों आई और बातचीत के रास्ते तनाव कम करने में अब तक सफलता क्यों नहीं मिली? बहरहाल, अब जामिया में सबसे पहले यह साफ होना चाहिए कि ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित नारे किसने लिखे, क्यों लिखे और छात्रसंघ चुनाव की मांग के बीच इन्हें लाने का मकसद क्या था? छात्रसंघ चुनाव की आड़ में देश की अखंडता को चुनौती देने वाले नारों को आखिर बर्दाश्त क्यों किया जाए? ऐसे नारे लिखने वालों की पहचान होनी चाहिए और जांच के बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। चुनाव की मांग को दबाने के लिए प्रशासन मनमानी नहीं कर सकता, लेकिन छात्रसंघ के नाम पर किसी को भी देशविरोधी नारेबाजी की छूट नहीं मिल सकती। अब सवालों से बचने का नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें जवाबदेह ठहराने का वक्त है।
स्कूल छूटने से UPSC में सिलेक्शन तक... जीत के जज्बे से भरी है IPS माविस टास की सफलता की कहानी
आईपीएस माविस टास (IPS Mais Tas) ने आर्थिक तंगी और दो असफलताओं के बावजूद UPSC परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाई।
हरिद्वार में गंगा की धार थमते ही खजाने की लूट! चांदी-सोने और सिक्कों की खोज
Haridwar Ganga Closure News: हरिद्वार में गंगा बंदी के बाद सूखी नहर में खजाने की तलाश शुरू. सोने-चांदी और सिक्कों को ढूंढने उतरे हजारों लोग. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
हरियाणा में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने
हरियाणा में कौशल विकास और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आयोजित स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य में पहली बार शुरू की जा रही “पीएम -सेतु” (अपग्रेडेड ITI के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार […]
Delhi Concert को पुलिस से मिली हरी झंडी, Diljit Dosanjh बोले- 30 अक्टूबर को मिलते हैं
पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ ने 30 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले ‘कॉन्सर्ट’ को दिल्ली पुलिस की मंजूरी मिलने के बाद कहा कि किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पड़ताल करना जरूरी है। दिल्ली पुलिस ने त्योहारी सीजन के दौरान विशेष खतरे से जुड़ी सूचनाओं, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होने वाले कॉन्सर्ट की अनुमति देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया था। शुक्रवार को आयोजक बुकमायशो के साथ बैठक के बाद पुलिस ने अपने फैसले पर दोबारा विचार किया और कॉन्सर्ट को मंजूरी दे दी। दिलजीत फिलहाल अमेरिका में हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कॉन्सर्ट को लेकर हो रही चर्चाओं पर बात की। इस कॉन्सर्ट से देशभर में उनके ‘ऑरा वर्ल्ड टूर’ की शुरुआत होगी। उन्होंने वीडियो में कहा, “अब 30 अक्टूबर को दिल्ली में मिलते हैं।”दोसांझ ने कहा, “किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पड़ताल करें। पूरी कहानी जाने बिना आप बहुत शोर मचा रहे हैं। पहले तथ्यों को ठीक से समझ लेना बेहतर है। वे एक के बाद एक बहस करते रहते हैं और लगातार ट्वीट करते रहते हैं।”बुकमायशो लाइव ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि त्योहारी सीजन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने आयोजकों से सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने को कहा था। दिल्ली में कार्यक्रम के बाद वह इंदौर, अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ और चंडीगढ़ में कॉन्सर्ट करेंगे। दोसांझ (42) ने इससे पहले 2024 में अपने ‘दिल-लुमिनाटी टूर’ के तहत भारत में कार्यक्रम किए थे। उन्होंने नयी दिल्ली, हैदराबाद, अहमदाबाद, लखनऊ, पुणे, कोलकाता, बेंगलुरु, इंदौर, चंडीगढ़ और गुवाहाटी समेत कई बड़े शहरों में प्रस्तुति दी थी। इस टूर का समापन लुधियाना में हुआ था।
Akhilesh Yadav के बयान पर भड़के CM Dhami, कहा- पिता ने गोलियां चलवाईं, बेटा घुसपैठिया कह रहा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने पहाड़ी राज्य के एक व्यक्ति को 'घुसपैठिया' कहा था। एक वीडियो में, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को यह कहते हुए सुना जा सकता है, उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा घुसपैठिया कौन है? वह उत्तराखंड से है। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर की गई थी, जिनका जन्म पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। उस समय यह इलाका अविभाजित उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। अब यह क्षेत्र उत्तराखंड में आता है, जिसे 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग करके बनाया गया था। इसे भी पढ़ें: Daler Mehndi Controversy | उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने गायक दलेर मेहंदी से की बात, कहा- 'घटना को पीछे छोड़कर आपसी सौहार्द के साथ आगे बढ़ें' इसके जवाब में, धामी ने अखिलेश यादव पर उत्तराखंड के लोगों का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने 1994 की रामपुर तिराहा गोलीबारी की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस ने अलग उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाई थीं। उस समय अखिलेश यादव के पिता, मुलायम सिंह यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। धामी ने 'X' पर पोस्ट किया कि उत्तराखंड देवभूमि भी है और वीरभूमि भी। इस पवित्र भूमि ने देश को कई संत, सैनिक और राष्ट्र सेवा में समर्पित लोग दिए हैं। श्री अखिलेश यादव जी का उत्तराखंड के लोगों को 'घुसपैठिया' कहना, देवभूमि के गौरव और हमारे संघर्षों का अपमान है। उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड के लोग यह भी नहीं भूले हैं कि जब अखिलेश यादव जी के पिता, मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर अलग उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाई गई थीं। पिता के शासनकाल में उत्तराखंड के आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाई गईं और आज उनका बेटा उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कह रहा है! उत्तराखंड के लोग अपने संघर्षों और बलिदानों को कभी नहीं भूल सकते। इसे भी पढ़ें: Pushkar Singh Dhami ने Rekha Arya विवाद पर कहा शादी के 22 साल बाद आरोप क्यों निष्पक्ष जांच जरूरी धामी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सहयोगी कांग्रेस, अखिलेश यादव के बयानों का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि क्या कांग्रेस अपने राजनीतिक सहयोगी श्री अखिलेश यादव जी के इस बयान का समर्थन करती है? क्या उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना कांग्रेस को मंजूर है? कांग्रेस को इस देवभूमि की जनता को जवाब देना चाहिए। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड, दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और अगले साल की शुरुआत में वहां विधानसभा चुनाव होने हैं। 2017 से ही इन दोनों राज्यों में भाजपा सत्ता में है।
'अभिजीत दीपके जैसे लोग...', बर्लिन में कार्यक्रम के दौरान पीयूष गोयल ने सीजेपी नेता पर कसा तंज
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में भारतीय प्रतिभाओं को वापस लाने के कार्यक्रमों पर चर्चा करते हुए सीजेपी नेता अभिजीत दीपके पर तंज कसा।
बंगाल की खाड़ी में उठ रहा जलजला, UP-MP और बिहार समेत 10 से अधिक राज्यों में आंधी बारिश का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में 26 अक्टूबर तक एक चक्रवाती तूफान बनने की संभावना है, जिससे आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना में भारी बारिश होगी। इसके साथ ही, अरब सागर में कम दबाव के कारण दक्षिण, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है।
गोदाम से राशन उठा, स्कूलों में पहुंचा ही नहीं... मिड-डे मील में गड़बड़ी
राजस्थान के कोटा में सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील के लिए आवंटित 3,213 क्विंटल गेहूं और चावल स्कूलों तक नहीं पहुंचे. विभागीय जांच में करीब 81 लाख रुपये के खाद्यान्न की कमी मिली है. गुजरात की भैरवनाथ रोडवेज फर्म पर आरोप लगा है. रसद विभाग की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है और पुलिस खाद्यान्न के गायब होने की जांच कर रही है.
मायके में ऐश्वर्या, नानी-मामू संग खिलखिलाईं आराध्या बच्चन
ऐश्वर्या राय भी भतीजे संग प्यार से पोज देती हुई दिखाई दीं. स्काई ब्लू शर्ट में ऐश्वर्या सुपर गॉर्जियस लगीं. लाइट ग्लोइंग मेकअप और ओपन हेयर में उनकी खूबसूरती देखते ही बनती है.
Ranchi में BJP अध्यक्ष नितिन नवीन बोले, Congress ने संविधान ताक पर रख देश चलाया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को कांग्रेस पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी (कांग्रेस) ने कभी संविधान का पालन नहीं किया और अपनी मनमानी से देश चलाया। झारखंड के तीन-दिवसीय दौरे पर आए नवीन यहां भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के उद्घाटन सत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित कर रहे थे। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘आज देश में संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र को चुनौती देने की कोशिश की जा रही है। संविधान की दुहाई देने वालों ने ही उसे तार-तार किया है।’’नवीन ने कहा, ‘‘आपातकाल लगाने से लेकर कई राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने तक, कांग्रेस ने कभी संविधान का पालन नहीं किया और मनमाने तरीके से देश चलाया। लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश करने वाले ही आज हमें इस पर उपदेश दे रहे हैं।’’उन्होंने कांग्रेस पर देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। नवीन ने कहा, ‘‘इसके लिए उन्हें न केवल देश के भीतर से, बल्कि विदेशी ताकतों से भी समर्थन मिल रहा है। राहुल गांधी अब देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाते हैं, लेकिन जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उन्होंने कभी इन पर सवाल नहीं उठाए।’’कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करने से पहले नवीन ने सभी जिला अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बैठक की।
New Zealand के खिलाफ मैच में अभिषेक का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में अभिषेक शर्मा बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन उन्होंने दो खास उपलब्धियां हासिल कीं. 21 गेंदों पर 27 रन बनाने वाले अभिषेक टी20 अंतरराष्ट्रीय में पावरप्ले के दौरान 100 छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए. इसके अलावा, उन्होंने 2026 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 1,000 रन भी पूरे कर लिए. इस साल उनसे ज्यादा रन सिर्फ ईशान किशन ने बनाए हैं.
शरद पूर्णिमा पर कब रखें खीर? जानें तारीख, चंद्रोदय और पूजा का मुहूर्त
Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा 2026 कब है, 25 या 26 अक्टूबर? जानें सही तारीख, खीर रखने का समय, मां लक्ष्मी की पूजा विधि और इस पर्व का धार्मिक महत्व.
दिल्ली: शाहदरा के स्कूल में छात्रा ने खुद को लगाई आग, मौत
दिल्ली के शाहदरा स्थित कृष्णा नगर के एक स्कूल में 17 वर्षीय छात्रा द्वारा खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली. यह घटना दोपहर लगभग 12:30 से 1:45 बजे के बीच हुई, जब स्कूल परिसर में अचानक चीख-पुकार मच गई. बताया जा रहा है कि छात्रा अपने साथ कोई ज्वलनशील केमिकल लेकर स्कूल आई थी, जिसे उसने अपने ऊपर छिड़ककर आग लगा ली. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, क्राइम सीन टीम, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड मौके पर पहुंचे और सबूत जुटाने में जुट गए.
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा शनिवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से संबंधित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट पहुंचीं। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन दस्तावेजों की प्रतियां उन्हें सौंप दीं, जिनके आधार पर शांति भंग की आशंका के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर Tripura में 30 अक्टूबर को INDIA गठबंधन की रैली
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और अन्य मांगों को लेकर 30 अक्टूबर को त्रिपुरा में रैली आयोजित करेगा। गठबंधन के दो वरिष्ठ नेताओं ने शनिवार को यह जानकारी दी। त्रिपुरा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर नागरिकों के मतदान के अधिकार कथित रूप से छीने जा रहे हैं, जिससे देश राष्ट्रीय संकट की ओर बढ़ रहा है। चौधरी ने आरोप लगाया, ‘‘देशभर में एसआईआर के जरिए अब तक 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहे हैं, ताकि चुनावी मुकाबलों में भाजपा की जीत सुनिश्चित की जा सके।’’मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव चौधरी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया का उद्देश्य दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा, ‘‘हमें पता चला है कि हमारे राज्य में एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से करीब 2.50 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का यह कदम चुनावों में भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। अगर ऐसा हुआ, तो हम इसके खिलाफ जोरदार आवाज उठाएंगे।’’कांग्रेस की त्रिपुरा इकाई के अध्यक्ष आशीष कुमार साहा ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ देशभर में लोगों के मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। साहा ने कहा, ‘‘त्रिपुरा में आंदोलन तेज करने के लिए हम 30 अक्टूबर को पांच सूत्री मांगपत्र के साथ एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी। इसमें ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा शामिल करने की मांग भी की जाएगी।’’
TATA ने कर दिया कमाल... 90 दिनों में बेच दी 2 लाख से ज्यादा कारें
टाटा मोटर्स के लिए वित्तवर्ष 2027 की दूसरी तिमाही शानदार रही है. इस तिमाही कंपनी ने अब तक की सबसे ज्यादा गाड़ियां बेची हैं. इस क्वार्टर टाटा मोटर्स की घरेलू सेल्स 1,96,674 यूनिट्स तक पहुंच गई है. पिछले साल इस क्वाटर टाटा मोटर्स ने 1,40,189 यूनिट्स बेची थी. यानी ईयर-ऑन-ईयर टाटा मोटर्स की गाड़ियों की सेल्स में 40 परसेंट का इजाफा हुआ है.
नेट, सेट और पीएचडी के बीच क्या अंतर है? कॉलेज में पढ़ाने के लिए क्या जरूरी है?
भारत में उच्च शिक्षा यानी कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर शिक्षण के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले हर युवा के सामने अक्सर तीन सबसे बड़े शब्द आते हैं— नेट (NET), सेट (SET) और पीएचडी (PhD)। बहुत से छात्र और उनके अभिभावक इन तीनों को एक ही मान लेते हैं या फिर इनमें आपस में भारी कंफ्यूजन बना रहता है। सच्चाई यह है कि ये तीनों योग्यताएं एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं, लेकिन इन सभी का अंतिम उद्देश्य शिक्षा जगत में एक शानदार और सम्मानित करियर का मार्ग प्रशस्त करना है। यूजीसी (UGC) और उच्च शिक्षा नियामक आयोगों के नियमों के अनुसार देश के किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज या विश्वविद्यालय में व्याख्याता यानी असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता के इन पैमानों को समझना हर छात्र के लिए बेहद जरूरी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इन तीनों में क्या अंतर है और आपके भविष्य के लिए इनमें से क्या सबसे ज्यादा जरूरी है।#1 यूजीसी नेट (UGC NET) क्या है और इसकी राष्ट्रीय मान्यता क्या हैनेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी नेट (NET) परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है, जिसे वर्तमान में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से साल में दो बार आयोजित किया जाता है। नेट परीक्षा मुख्य रूप से इस बात की पात्रता तय करती है कि कोई उम्मीदवार देश भर के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के योग्य है या नहीं। इसके साथ ही जो छात्र नेट परीक्षा में अत्यधिक उच्च अंक यानी जेआरएफ (JRF - Junior Research Fellowship) प्राप्त करते हैं, उन्हें भारत सरकार द्वारा पीएचडी करने के दौरान हर महीने मोटी फेलोशिप या छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है। नेट परीक्षा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसका स्कोर कार्ड पूरे भारत में समान रूप से मान्य होता है, जिससे आप देश के किसी भी कोने में लेक्चररशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं।#1 राज्य स्तरीय परीक्षा सेट (SET / SLET) और उसकी सीमाएंस्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी सेट (SET) या कई राज्यों में इसे एसलेट (SLET) कहा जाता है, बिल्कुल नेट परीक्षा की तरह ही होती है, लेकिन इसका दायरा राष्ट्रीय न होकर केवल संबंधित राज्य तक ही सीमित होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी युवा ने उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य की सेट परीक्षा पास की है, तो वह केवल उसी राज्य के भीतर आने वाले कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए पात्र माना जाएगा। राज्यों द्वारा यह परीक्षा इसलिए आयोजित की जाती है ताकि स्थानीय युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिक से अधिक अवसर मिल सकें। हालांकि, अकादमिक रूप से सेट पास करने वाले उम्मीदवार के पास भी शिक्षण की वही योग्यता होती है जो नेट पास करने वाले के पास होती है, बस भौगोलिक मान्यता का दायरा राष्ट्रीय से घटकर राज्य स्तर तक सीमित हो जाता है।#1 पीएचडी (PhD) क्या है: यह कोई परीक्षा नहीं बल्कि एक सर्वोच्च शोध उपाधि हैबहुत से छात्रों को यह गलतफहमी होती है कि पीएचडी भी नेट या सेट की तरह कोई प्रतियोगी परीक्षा है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। पीएचडी (Doctor of Philosophy) भारत या दुनिया के किसी भी विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली सर्वोच्च अकादमिक डॉक्टरेट उपाधि (Doctoral Degree) है। यह किसी विषय विशेष में आपकी गहन रिसर्च, नए तथ्यों की खोज और मौलिक अध्ययन को दर्शाती है। मास्टर डिग्री (पोस्ट ग्रेजुएशन) पूरी करने के बाद छात्र एंट्रेंस टेस्ट और इंटरव्यू के जरिए किसी यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रेशन कराते हैं और 3 से 5 साल तक शोध कार्य पूरा करने के बाद उन्हें डॉक्टर की उपाधि मिलती है। पहले विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी अनिवार्य हुआ करती थी, लेकिन वर्तमान नियमों के अनुसार अब यह व्यवस्था कुछ हद तक लचीली कर दी गई है, फिर भी अकादमिक जगत में पीएचडी का वजन और महत्व हमेशा सबसे ऊपर रहता है।#1 कॉलेज में पढ़ाने के लिए आखिर क्या है सबसे जरूरी: यूजीसी के वर्तमान नियमअब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर किसी छात्र को कॉलेज में प्रोफेसर बनना है, तो उसके लिए न्यूनतम और अनिवार्य योग्यता क्या होनी चाहिए? यूजीसी के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आवेदन करने के लिए संबंधित विषय में मास्टर डिग्री (कम से कम 50% से 55% अंकों के साथ) के साथ-साथ यूजीसी नेट (UGC NET) या राज्य की सेट/स्लेट (SET/SLET) परीक्षा पास होना अनिवार्य है। यदि आपके पास नेट या सेट का प्रमाण पत्र है, तो आप देश के किसी भी कॉलेज में प्रोफेसर पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, यदि आपके पास नेट या सेट के साथ-साथ पीएचडी की डिग्री भी है, तो चयन प्रक्रिया में आपको शैक्षणिक स्कोर (Academic Score) में अतिरिक्त लाभ मिलता है, जिससे आपका चयन होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।#1 जनरेटिव एआई सर्च, करियर काउंसलिंग और आधुनिक शिक्षा प्रणाली का परिप्रेक्ष्यआज के डिजिटल और जनरेटिव एआई सर्च के युग में करियर से जुड़े ऐसे तकनीकी सवालों के सटीक जवाब ढूंढना छात्रों के लिए बेहद आसान हो गया है। गूगल और बिंग जैसे सर्च इंजनों पर 'Difference between NET SET and PhD', 'Is NET compulsory for assistant professor', 'Eligibility criteria for college professor in India' जैसे कीवर्ड्स लाखों बार सर्च किए जाते हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में छात्रों को यह सलाह दी जाती है कि वे ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष या पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान ही नेट और सेट जैसी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दें। अकादमिक उत्कृष्टता हासिल करने के लिए सही समय पर सही परीक्षा पास करना और साथ में शोध के प्रति रुचि विकसित करना ही एक उज्जवल भविष्य की सबसे मजबूत नींव साबित होता है।
फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे मुस्कान-साहिल, अदालत के फैसले को दी चुनौती
नीले ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाले मुस्कान और साहिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की है. दोनों ने मेरठ की अदालत के फैसले को चुनौती दी है.
अरुणाचल में Siang Project के विरोध में NHPC दफ्तर और थाने में लगाई आग, कई पुलिसकर्मी घायल
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना (एसयूएमपी) के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच उपद्रवियों ने ईस्ट सियांग जिले में नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (एनएचपीसी) के कार्यालय और एक पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सहित दो नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ भी की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। पासीघाट के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) टोनी तताक ने बताया कि प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। यह घटना जलविद्युत परियोजना के विरोध में बुलाए गए 12 घंटे के बंद के खत्म होने के बाद शुक्रवार रात करीब 11 बजे हुई। उपद्रवियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक कलिंग मोयोंग और पासीघाट पश्चिम के विधायक निनोंग एरिंग के आवासों में तोड़फोड़ की। इसके अलावा, पासीघाट में आदि जनजाति की सर्वोच्च संस्था आदि बाने केबांग के कार्यालय में भी तोड़फोड़ की गई। डीएसपी तताक ने बताया, ‘‘पासीघाट के ऊपरी इलाके में स्थित एनएचपीसी के कार्यालय को आग लगा दी गई, जबकि वहां के एक पुलिस थाने को भी फूंक दिया गया।’’ अधिकारियों द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। घटना में स्वयं घायल हुए डीएसपी ने बताया कि हिंसक प्रदर्शनकारी मेबो इलाके से आए थे। यह हिंसा सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में बुलाए गए 12 घंटे के बंद के खत्म होने के बाद भड़की। इससे पहले शुक्रवार को 12 घंटे के बंद के दौरान सियांग जिले में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई थीं, जिसके बाद सुरक्षा बलों को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 150 से 200 प्रदर्शनकारी कथित तौर पर ‘मचेट’ (धारदार हथियार), लाठी और गुलेल से लैस थे। उन्होंने अवरोधक तोड़ने और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तथा सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया।
दलित छात्र को बीफ खाने पर मिलते थे ताने, आत्महत्या के बाद 2 नाबालिग गिरफ्तार
तमिलनाडु के कोयंबटूर में 11वीं के एक 16 वर्षीय दलित छात्र की मौत के मामले में दो सहपाठियों को गिरफ्तार किया गया है. परिवार का आरोप है कि छात्र ने स्कूल में शिक्षकों से भी शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए. अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.
3 नवंबर को होगी स्पेशल TET की परीक्षा, कब जारी होगा एडमिट कार्ड?
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्पेशल टीईटी परीक्षा 2026 की एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर दी है. इसके लिए परीक्षा की तारीखों का ऐलान भी कर दिया गया है. हालांकि, अभी एडमिट आना बाकी है. तो चलिए जानते हैं, इसे लेकर सारी जानकारी.
5 साल का प्रीमियम... जीवनभर मिलेगी इनकम, LIC की गजब स्कीम!
एलआईसी की एक योजना के तहत आपको जीवनभर इनकम करने का मौका मिल सकता है. वह भी सिर्फ 5 साल की प्रीमियम आपको जमा करनी होती है. आप पांच साल का प्रीमियम जमा करके लाइफटाइम इनकम का लाभ उठा सकते हैं.
टाइगर श्रॉफ धोखाधड़ी मामले में आया नया मोड़: आरोपी सुमित की मां का बड़ा दावा और बेगुनाही की गुहार
बॉलीवुड के एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ से जुड़े करोड़ों रुपए के ठगी और धोखाधड़ी के हाई-प्रोफाइल मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में जब से पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया है, कई गिरफ्तारियां सामने आ चुकी हैं। इसी कड़ी में मुख्य आरोपियों में से एक बताए जा रहे सुमित की मां आशा देवी ने मीडिया के सामने आकर अपने बेटे की बेगुनाही का दावा किया है। मां का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पुलिस इस पूरे आर्थिक घोटाले के मास्टरमाइंड और वित्तीय लेनदेन के गहरे जाले को सुलझाने में जुटी है। सुमित की मां के इन दावों ने इस पूरे मामले को एक नया और बेहद भावनात्मक मोड़ दे दिया है, जिससे पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने भी नए सवाल खड़े हो गए हैं।#1 'भोला-भाला था मेरा बेटा, किसी ने बहला-फुसलाकर जाल में फंसाया'मीडिया से बातचीत करते हुए आरोपी सुमित की मां आशा का दर्द छलक उठा। उन्होंने रोते हुए कहा कि उनका बेटा इतना चालाक या अपराधी प्रवृत्ति का नहीं है जितना उसे इस मामले में दिखाया जा रहा है। मां ने दावा किया कि उनके बेटे को कुछ शातिर लोगों ने अपनी साजिश का मोहरा बनाया है और उसे बहला-फुसलाकर इस गैरकानूनी गतिविधि में धकेल दिया गया है। मां का कहना है कि सुमित सीधा-साधा इंसान है और वह कॉर्पोरेट जगत या फिल्मी हस्तियों के बीच चल रहे इस बड़े वित्तीय हेरफेर के जाल को समझ ही नहीं पाया। परिवार का यह भी आरोप है कि उनके बेटे को इस मामले में बलि का बकरा बनाया जा रहा है जबकि असली गुनहगार पर्दे के पीछे छिपकर बैठे हैं और इस पूरे सिंडिकेट का संचालन कर रहे हैं।#1 'खाटू श्याम जाने की बात कहकर घर से निकला था सुमित'घटना के उस खौफनाक दिन को याद करते हुए मां आशा ने बताया कि सुमित घर से यह कहकर निकला था कि वह राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटू श्याम के दर्शन के लिए जा रहा है। परिवार को यह बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि धार्मिक यात्रा का नाम कहकर घर से निकलने वाला उनका बेटा अचानक इस तरह की गंभीर कानूनी मुसीबत और पुलिस की गिरफ्त में आ जाएगा। जब पुलिस ने अचानक उनके घर पर दबिश दी और सुमित की संलिप्तता की बात सामने आई, तो पूरा परिवार अवाक रह गया। मां का कहना है कि अगर उन्हें जरा भी भनक होती कि उनका बेटा किसी विवादित या संदेहास्पद मामले में शामिल होने जा रहा है, तो वे उसे कभी घर से बाहर नहीं जाने देते।#1 टाइगर श्रॉफ केस और फाइनेंशियल फ्रॉड का पूरा ताना-बानायह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब टाइगर श्रॉफ और उनकी प्रबंधन टीम को वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी का अहसास हुआ। इसके बाद स्थानीय पुलिस थानों और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि कुछ लोगों ने फर्जी कंपनियों, झूठे निवेश प्रस्तावों और सेलिब्रिटी के नाम का दुरुपयोग करके भारी भरकम रकम ऐंठी है। पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि टाइगर श्रॉफ के नाम पर किस तरह से पैसों का ट्रांजैक्शन हुआ और इस पूरे सिंडिकेट में कौन-कौन लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। सुमित की भूमिका इस वित्तीय नेटवर्क में फंड ट्रांसफर या बिचौलिए के रूप में सामने आ रही है, जिसकी पुलिस रिमांड के दौरान कड़ी पूछताछ की जा रही है।#1 एआई सर्च और आधुनिक डिजिटल मीडिया के दौर में हाई-प्रोफाइल केस की गूंजआज के तकनीकी और जनरेटिव एआई सर्च के युग में किसी भी सेलिब्रिटी से जुड़े आर्थिक मामलों की खबरें सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल जाती हैं। गूगल, बिंग और विभिन्न सर्च इंजन पर इस समय 'Tiger Shroff fraud case', 'Sumit mother statement Tiger case', 'Khatu Shyam trip claim accused mother', 'Bollywood celebrity financial cheating case' जैसे कीवर्ड्स सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहे हैं। जनता और सोशल मीडिया यूजर्स इस मामले के हर एक पहलू पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। एक तरफ जहां टाइगर श्रॉफ के फैंस और कानून के जानकार आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोपियों के परिवारों द्वारा दिए जा रहे ऐसे भावनात्मक बयानों से इस केस में मानवीय और कानूनी दोनों पहलू आमने-सामने आ गए हैं।#1 आगे क्या हो सकता है इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी रुखकानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में पुलिस जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे कर सकती है। रिमांड के दौरान आरोपियों से मिलने वाले बयानों और बैंक खातों के डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर यह तय होगा कि इस धोखाधड़ी के तार और कहां-कहां तक जुड़े हैं। भले ही आरोपी की मां अपने बेटे को बेकसूर और भोला-भाला बता रही हो, लेकिन अदालतें और जांच एजेंसियां ठोस सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर ही फैसला लेंगी। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या सुमित की मां के इन दावों से पुलिस की जांच की दिशा में कोई नया मोड़ आता है या फिर यह मामला सिर्फ कानूनी कागजों और सबूतों की जंग बनकर रह जाता है।
NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की ...
क्रिकेटर को डेट कर रही हसीना! शरमाते हुए खोला सीक्रेट
फिलहाल उदिति के रिश्ते की सिर्फ चर्चा की जा सकती है. हकीकत में वो किसे डेट कर रही हैं. ये बात सिर्फ वही बता सकती हैं. एक वक्त पर वो टेलीविजन एक्टर करण वाही को डेट कर रही थीं. लेकिन दोनों का रिश्ता ज्यादा समय नहीं चला और इनका ब्रेकअप हो गया.
टाइगर श्रॉफ पर हमले की साजिश का इंदौर कनेक्शन, मुंबई क्राइम ब्रांच की रेड
Tiger Shroff Conspiracy News: एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हमले की साजिश मामले में इंदौर से इंजीनियर प्रांजल हिरासत में. मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन. पढ़ें पूरी खबर...
गुरुग्राम से नूंह-पंचकुला तक जगमगया, बिजली संकट हुई दूर, 2 दिन पावर कट से मच गया था हाहाकार
हरियाणा के औद्योगिक, आवासीय और प्रशासनिक केंद्रों में बीते दो दिनों से चला आ रहा गंभीर बिजली संकट आखिरकार खत्म हो गया है। साइबर सिटी गुरुग्राम, औद्योगिक केंद्र फरीदाबाद, मेवात के नूंह और राज्य की राजधानी से सटे पंचकुला तक फैली भीषण पावर कट की समस्या को बिजली निगम के इंजीनियरों और तकनीकी टीमों ने अथक प्रयास के बाद पूरी तरह हल कर लिया है। पिछले 48 घंटों के दौरान बिजली की भारी किल्लत के चलते राज्य के आधा दर्जन से अधिक प्रमुख जिलों में हाहाकार मचा हुआ था। भीषण गर्मी, अंधेरे और पानी की किल्लत से बेहाल लाखों नागरिकों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दफ्तरों और छोटे-बड़े उद्योगों ने अब राहत की बड़ी सांस ली है। बिजली ग्रिडों में आई खराबी को दुरुस्त करने के बाद शनिवार को बिजली आपूर्ति पूरी तरह सुचारू कर दी गई है, जिससे पूरे इलाके एक बार फिर जगमगा उठे हैं।#1 आखिर 2 दिनों तक क्यों मचा था पूरे राज्य में हाहाकार: पावर कट की मुख्य वजहबिजली कटौती के इस अप्रत्याशित संकट के पीछे मुख्य वजह उत्तरी क्षेत्रीय बिजली ग्रिड में आई अचानक तकनीकी खराबी और ट्रांसमिशन लाइनों पर अत्यधिक लोड का बढ़ना बताया जा रहा है। इसके साथ ही, हरियाणा पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के कुछ प्रमुख सब-स्टेशनों में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण बिजली की आपूर्ति अचानक ठप हो गई थी। गुरुग्राम के सोहना रोड, गोल्फ कोर्स रोड, साइबर सिटी, फरीदाबाद के बल्लभगढ़ औद्योगिक क्षेत्र, नूंह के ग्रामीण इलाकों और पंचकुला के रिहायशी सेक्टर्स में लगातार 12 से 18 घंटे के लंबे कट लगे। इसके चलते न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ, बल्कि वर्क फ्रॉम होम कर रहे आईटी पेशेवरों, अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और विनिर्माण इकाइयों का काम पूरी तरह से ठप पड़ गया था। इनवर्टर और जनरेटर के भी जवाब दे जाने के कारण कॉलोनियों में पानी की सप्लाई रुक गई थी, जिससे स्थिति और अधिक विकट हो गई थी।#1 बिजली निगम की ग्राउंड एक्शन रिपोर्ट: रात-दिन एक कर ऐसे सुधारी गई सप्लाईजैसे ही राज्य के प्रमुख जिलों से पावर कट और जन आक्रोश की खबरें सामने आईं, हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN और UHBVN) के आला अधिकारी तुरंत एक्शन मोड में आ गए। मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा मंत्रालय के सीधे निर्देशों के बाद बिजली निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और फील्ड इंजीनियरों की स्पेशल टीमों को अलर्ट पर रखा गया। प्रभावित सब-स्टेशनों और मुख्य ट्रांसमिशन लाइनों पर मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। अतिरिक्त बिजली कोटा हासिल करने के लिए केंद्रीय ग्रिड से भी संपर्क साधा गया। तकनीकी टीमों ने 36 घंटे से अधिक समय तक बिना रुके निरंतर काम किया और अंततः खराबी वाले ट्रांसफॉर्मरों और लाइनों को दुरुस्त कर दिया। शनिवार तड़के तक चरणबद्ध तरीके से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पंचकुला के सभी प्रभावित सेक्टर्स व गांवों में बिजली आपूर्ति 100 प्रतिशत बहाल कर दी गई।#1 स्थानीय निवासियों और उद्योग जगत ने ली राहत की सांस: स्थिति अब पूरी तरह सामान्यबिजली आपूर्ति सुचारू होने के बाद गुरुग्राम और फरीदाबाद के औद्योगिक संगठनों (Industrial Associations) ने सरकार और बिजली निगम के त्वरित प्रयासों की सराहना की है, हालांकि उन्होंने भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए बैकअप प्लान की भी मांग की है। स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWA) का कहना है कि 2 दिन के लंबे पावर कट के कारण पानी के टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई थी और जनरेटर के डीजल का खर्च आसमान छूने लगा था। अब बिजली वापस आने से जलापूर्ति भी सामान्य हो गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि अब पूरे राज्य में बिजली का कोई बड़ा संकट नहीं है और आने वाले दिनों में ग्रिड की क्षमता को और मजबूत करने के लिए नए सब-स्टेशन चालू किए जाएंगे ताकि दोबारा इस तरह के ब्लैकआउट की नौबत न आए।#1 जनरेटिव एआई सर्च, SEO और लोकल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से बड़ा अपडेटआज के आधुनिक सर्च इकोसिस्टम यानी गूगल डिस्कवर, बिंग एईओ (Answer Engine Optimization) और जनरेटिव एआई (AI Search) में स्थानीय बुनियादी ढांचे की खबरें काफी तेजी से ट्रेंड करती हैं। हरियाणा के साइबर हब और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) से जुड़ी बिजली कटौती की खबरें सीधे तौर पर लाखों प्रवासियों, कॉरपोरेट कंपनियों और स्थानीय नागरिकों से संबंधित हैं। गूगल सर्च डेटा और ट्रेंड्स के मुताबिक 'Gurugram power cut status', 'Haryana electricity crisis solved', 'Nuh Panchkula power supply update' और 'DHBVN power outage news' जैसे कीवर्ड्स पिछले 48 घंटों में सबसे ज्यादा सर्च किए गए हैं। इस खबर का रियल-टाइम और विस्तृत विश्लेषण एआई सर्च इंजनों को सटीक और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने में मदद करता है।
दुनिया भर में कश्मीर मुद्दा उठाकर हमारी हिफाजत कर रहा पाकिस्तान, फारूक अब्दुल्ला के विवादित बोल
जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जा और अनुच्छेद 370 की मांग की लेकर नेशनल कॉफ्रेंस ने फिर से आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है. इसी कड़ी में शनिवार को बारामुला में एक बड़ा सम्मेलन हुआ. जिसमें नेशनल कॉफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरियों को लेकर बड़ा विवादित बयान दिया है.
हरियाणा में वीआईपी कल्चर पर कड़ा प्रहार: स्मृति ईरानी के सुझाव से गरमाई सियासत
भारतीय जनता पार्टी के भीतर और देश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक के दौरान वरिष्ठ और कद्दावर भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी ने हरियाणा इकाई को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और क्रांतिकारी सुझाव दिया है। स्मृति ईरानी ने साफ शब्दों में कहा है कि पार्टी को जनता के बीच अपनी छवि और अधिक पारदर्शी तथा जमीनी बनाने के लिए हरियाणा में भाजपा के सभी जिला अध्यक्षों और स्थानीय पदाधिकारियों से मिलने वाली वीआईपी सुरक्षा या गनर कल्चर को पूरी तरह से समाप्त कर देना चाहिए। उनके इस बयान के सामने आने के बाद से ही हरियाणा के राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है और विपक्ष के साथ-साथ खुद पार्टी के भीतर भी इस पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।#1 जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच की दूरी मिटाने का बड़ा फॉर्मूलास्मृति ईरानी द्वारा दिए गए इस सुझाव के पीछे मुख्य उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच की दूरियों को कम करना है। अक्सर यह देखा जाता है कि चुनाव जीतने या पार्टी में बड़ा पद मिलने के बाद नेता जनता से कट जाते हैं और उनके चारों तरफ सुरक्षाकर्मियों का पहरा लग जाता है, जिससे आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर आसानी से उन तक नहीं पहुंच पाते हैं। स्मृति ईरानी ने इस बात पर जोर दिया है कि एक सच्चे जननेता को किसी सरकारी गनर या सुरक्षा की ढाल की जरूरत नहीं होनी चाहिए, बल्कि जनता का विश्वास और प्यार ही उसकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। यदि जमीनी स्तर के अध्यक्ष और नेता बिना सुरक्षा के आम जनता के बीच बेखौफ घूमेंगे, तो पार्टी का जनाधार और अधिक मजबूत होगा तथा आम जनता में भी एक सकारात्मक और सादगी भरा संदेश जाएगा।#1 हरियाणा की राजनीति पर क्या होगा इस फैसले का असरहरियाणा एक ऐसा राज्य रहा है जहां पारंपरिक रूप से राजनीतिक रसूख, लालबत्ती संस्कृति और वीआईपी कल्चर का एक अलग ही दबदबा देखने को मिलता रहा है। राज्य में चुनाव के बाद से ही भाजपा संगठन लगातार अपनी कार्यप्रणाली में सुधार और जनता से जुड़ाव बढ़ाने के नए तौर-तरीके तलाश रहा है। ऐसे में यदि केंद्रीय नेतृत्व की ओर से आए इस सुझाव को पूरी तरह से अमलीजामा पहनाया जाता है, तो यह हरियाणा की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से जहां एक तरफ विपक्ष के उस आरोप की हवा निकल जाएगी जिसमें वे सत्ता पक्ष पर तानाशाही और वीआईपी संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी कैडर के भीतर भी सादगी और मेहनत करने की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।#1 विपक्ष के तंज और पार्टी के भीतर मंथन का दौरजैसे ही स्मृति ईरानी के इस बयान की खबरें मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर आईं, विपक्षी दलों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी हैं। हालांकि विपक्षी दल इसे केवल एक राजनीतिक शिगूफा या चुनावी स्टंट बता रहे हैं, वहीं भाजपा संगठन के भीतर इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि वर्तमान समय में जब जनता सादगी पसंद नेताओं को ज्यादा पसंद करती है, तब इस तरह का कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है। हालांकि कुछ स्थानीय नेताओं का यह भी तर्क है कि मौजूदा सुरक्षा खतरों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पूरी तरह से सुरक्षा हटाना एक जोखिम भरा कदम हो सकता है, जिस पर प्रशासन को बहुत सोच-समझकर निर्णय लेना होगा।#1 जनरेटिव एआई सर्च और डिजिटल युग में वीआईपी कल्चर की डिबेटआज के डिजिटल और जनरेटिव एआई सर्च के दौर में जनता राजनेताओं के आचरण और जीवनशैली पर बहुत बारीक नजर रखती है। गूगल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न सर्च इंजन पर 'Smriti Irani statement on VIP culture', 'Haryana BJP leaders security removed', 'BJP district presidents security debate' जैसे कीवर्ड्स धड़ल्ले से सर्च किए जा रहे हैं। डिजिटल मीडिया के इस दौर में पारदर्शिता सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। जनता अब ऐसे नेताओं को देखना चाहती है जो जमीन से जुड़े हों और प्रोटोकॉल के दिखावे से दूर रहकर असल विकास के मुद्दों पर काम करें। स्मृति ईरानी का यह सुझाव इस आधुनिक राजनीतिक बदलाव की बयार को और तेज करने का काम कर रहा है।#1 आने वाले दिनों में क्या कड़े कदम उठा सकता है संगठनआने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या हरियाणा भाजपा सचमुच अपने जिला अध्यक्षों की सुरक्षा वापस लेने का कोई आधिकारिक फरमान जारी करती है या यह सुझाव केवल सांगठनिक बैठकों की चर्चा तक सीमित रह जाता है। यदि हरियाणा में यह पहल सफलतापूर्वक लागू हो जाती है, तो देश के अन्य राज्यों में भी भाजपा या अन्य दल इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। फिलहाल इस एक बयान ने हरियाणा की राजनीति का तापमान पूरी तरह से बढ़ा दिया है और हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या वाकई राज्य से वीआईपी कल्चर का यह वीवीआईपी साया हमेशा के लिए छंट जाएगा।
फर्जी वोटिंग के आरोप पर पंचायत चुनाव में बवाल, जमकर चली लाठियां-VIDEO
जयपुर जिले के दूदू स्थित मौजमाबाद में पंचायत चुनाव के दौरान फर्जी वोटिंग के आरोप पर बवाल हो गया. दो वार्ड पंचों के समर्थक आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-भाटा चले. घटना देशवाली मोहल्ले की है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात संभाले. फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य है और पुलिस का कड़ा पहरा है.
ऐश्वर्या ने की बेटी संग ट्विनिंग, मां की परछाई लगीं आराध्या
Aishwarya-Aradhya Twinning: ऐश्वर्या राय बच्चन बेटी आराध्या बच्चन के साथ अपने भतीजे शिवांश राय की जन्मदिन पार्टी में शामिल हुईं. इस दौरान ऐश्वर्या और आराध्या ने एक ही रंग के कपड़े पहने हुए थे.
औरंगाबाद में बेटे ने पिता की चाकू मारकर की हत्या, घर से देशी कट्टा और कारतूस भी बरामद
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. उसके घर से अवैध हथियार और कारतूस भी मिले.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जहां गीता समाप्त होती है, वहीं से जीवन का अभ्युदय प्रारंभ होता है। हमारे समाज के लिए एक आदर्श है भगवान श्री कृष्ण का पूरा जीवन। हम सब उनके जीवन से प्रतिदिन कुछ न कुछ सीखते ही हैं। उन्होंने अपना सारा जीवन ...
मुंबई में जमीन के नीचे चलेगी लोकल, चर्चगेट से विरार के बीच अंडरग्राउंड भरेगी रफ्तार!
Churchgate-Virar Underground Local Train Project: मुंबई लोकल ट्रेनों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पश्चिम रेलवे ने चर्चगेट से विरार तक एक अंडरग्राउंड सबअर्बन नेटवर्क बनाने की योजना बनाई है, जिसके तहत फिजिबिलिटी स्टडी के लिए रेलवे बोर्ड के फंड्स का इंतजार है. जानिए इस मेगा प्रोजेक्ट के प्रस्ताव, जमीनी चुनौतियों और इसके संभावित फायदों के बारे में.
दक्षिण भारतीय सिनेमा के भगवान कहे जाने वाले महानायक रजनीकांत (Rajinikanth) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बॉक्स ऑफिस पर उनका जलवा आज भी बरकरार है। उनकी हालिया रिलीज फिल्म 'जेलर 2' ने सिनेमाघरों में आते ही ऐसा गदर मचाया है कि बड़े-बड़े रिकॉर्ड पानी मांगते नजर आ रहे हैं। फिल्म ने रिलीज के महज 9 दिनों के भीतर ही बॉक्स ऑफिस पर कमाई के ऐसे आंकड़े छू लिए हैं, जिसने इंडस्ट्री के तमाम दिग्गजों को हैरान कर दिया है। न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने सफलता का एक नया अध्याय लिख दिया है। दर्शक सिनेमाघरों में सीटी बजाने और थलाइवा के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में उमड़ रहे हैं, जिससे टिकट खिड़की पर लगातार नए मील के पत्थर स्थापित हो रहे हैं।#1 सलमान खान की 'सुल्तान' और प्रभास की 'सालार' को पीछे छोड़ा'जेलर 2' की इस रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने महज नौ दिनों के अंदर बॉलीवुड और टॉलीवुड की कई दिग्गज फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। ट्रेड एनालिस्ट्स के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के मामले में सलमान खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सुल्तान' और प्रभास की एक्शन पैक्ड फिल्म 'सालार' के शुरुआती दिनों के रिकॉर्ड को बहुत पीछे छोड़ दिया है। इतना ही नहीं, इस लिस्ट में पांच बड़ी फिल्मों के नाम शामिल हैं जिनके लाइफटाइम या शुरुआती हफ्ता कलेक्शन के रिकॉर्ड को 'जेलर 2' ने चकनाचूर कर दिया है। फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता से यह साफ हो गया है कि आज भी मास एंटरटेनर फिल्मों के मामले में रजनीकांत का कोई मुकाबला नहीं है।#1 ओपनिंग वीकेंड से लेकर नौवें दिन तक का धमाकेदार सफरफिल्म की शुरुआत पहले दिन से ही रिकॉर्ड तोड़ रही थी, लेकिन वीकेंड के बाद वर्किंग डेज में भी जिस तरह से 'जेलर 2' के कलेक्शंस में मजबूती बनी रही, वह अपने आप में एक मिसाल है। समीक्षकों का मानना है कि फिल्म की मजबूत पटकथा, डायरेक्टर का सटीक निर्देशन, धमाकेदार एक्शन सीक्वेंस और रजनीकांत की स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म के गाने, बैकग्राउंड स्कोर और क्लाइमेक्स को लेकर सोशल मीडिया पर दर्शकों की तरफ से जबरदस्त पॉजिटिव रिव्यू मिल रहे हैं। माईग्रेशन और वर्ड-ऑफ-माउथ पब्लिसिटी के कारण सिनेमाघरों में ऑडियंस ऑक्यूपेंसी लगातार उच्च बनी हुई है, जिससे हर दिन बॉक्स ऑफिस के आंकड़े नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।#1 ट्रेड एनालिस्ट्स और एआई सर्च के नजरिए से फिल्म की सफलता का विश्लेषणआधुनिक डिजिटल युग और जनरेटिव एआई सर्च के दौर में किसी भी फिल्म की सफलता का पैमाना सिर्फ बॉक्स ऑफिस नंबर नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर उसकी रीच और चर्चा भी होती है। 'जेलर 2' को लेकर गूगल, बिंग और अन्य सर्च इंजन पर लगातार भारी ट्रैफिक देखा जा रहा है। दुनिया भर के सिनेप्रेमियों द्वारा 'Rajinikanth Jailer 2 box office collection', 'Jailer 2 breaks Salman Khan Sultan record' जैसे कीवर्ड्स धड़ल्ले से सर्च किए जा रहे हैं। ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि रजनीकांत की यह फिल्म आने वाले दिनों में कई और ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार है। जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों यानी ओवरसीज मार्केट में भी फिल्म शानदार प्रदर्शन कर रही है, उससे यह तय माना जा रहा है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शीर्ष स्थान हासिल कर लेगी।
क्या सीमेंट की भी होती है एक्सपायरी डेट? कैसे चेक करें क्वालिटी
क्या खाने- पीने की चीजों की तरह सीमेंट की भी एक्सपायरी डेट होती है? इस्तेमाल से पहले यह जानना बहुत जरूरी है. साथ ही हम यह भी जानेंगे कि कैसे सीमेंट की क्वालिटी चेक की जाती है.
सुभाष घई के सिनेमा में 50 साल: 'मान्या' का धमाकेदार ऐलान, श्रेयस तलपड़े का लुक पोस्टर आउट!
भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्म निर्माता, निर्देशक और स्क्रीनwriter सुभाष घई ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने करियर के 50 बेमिसाल साल पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि और अपने पांच दशक लंबे सिनेमाई सफर का जश्न मनाते हुए सुभाष घई और उनके प्रोडक्शन हाउस मुक्ता आर्ट्स (Mukta Arts) ने एक बेहद खास और बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट 'मान्या' (Maanya) की आधिकारिक घोषणा की है। इस खास मौके पर फिल्म का पहला लुक पोस्टर जारी किया गया है, जिसने रिलीज होते ही फिल्म प्रेमियों, फिल्म समीक्षकों और बॉलीवुड गलियारों में तहलका मचा दिया है। इस फिल्म में बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता श्रेयस तलपड़े मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं।#1 'मान्या' का पहला लुक पोस्टर जारी: श्रेयस तलपड़े के नए अवतार ने उड़ाए होश'मान्या' के फर्स्ट लुक पोस्टर में श्रेयस तलपड़े बेहद गंभीर, संवेदनशील और एक गहरे सामाजिक बदलाव की कहानी को दर्शाते हुए नजर आ रहे हैं। पोस्टर का बैकग्राउंड और श्रेयस का लुक इस बात का साफ इशारा करता है कि यह फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक गहरे सामाजिक मुद्दे को पर्दे पर जीवंत करेगी। सुभाष घई ने पोस्टर शेयर करते हुए लिखा कि अपने 50 साल के सिनेमाई सफर में उन्होंने हमेशा भारतीय समाज के उन पहलुओं को उजागर करने की कोशिश की है जो दर्शकों के दिलों को छू सकें। श्रेयस तलपड़े का यह नया रूप उनके करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस में से एक माना जा रहा है।#1 पांच दशकों का सिनेमाई सफर: 'कालीचरण' से लेकर 'मान्या' तक का स्वर्णिम इतिहाससुभाष घई, जिन्हें बॉलीवुड का असली 'शोमैन' कहा जाता है, ने अपने पांच दशक के करियर में भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। 1970 के दशक में 'कालीचरण' और 'विश्वनाथ' जैसी फिल्मों से अपने निर्देशन सफर की शुरुआत करने वाले घई ने 'कर्ज', 'हीरो', 'राम लखन', 'सौदागर', 'खलनायक', 'परदेस' और 'ताल' जैसी कालजयी फिल्में बनाई हैं। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता और कला से न केवल बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाए, बल्कि जैकी श्रॉफ, मीनाक्षी शेषाद्रि, माधुरी दीक्षित और महिमा चौधरी जैसे कई सुपरस्टारों को लॉन्च भी किया। अब अपने 50वें साल में 'मान्या' जैसी संवेदनशील फिल्म लाकर वे अपनी उसी सिनेमाई विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।#1 फिल्म 'मान्या' की कहानी और निर्माण दल: क्या खास होने वाला है इस प्रोजेक्ट मेंमीडिया रिपोर्ट्स और प्रोडक्शन हाउस से मिली जानकारी के अनुसार, फिल्म 'मान्या' एक वास्तविक या सामाजिक घटनाओं से प्रेरित ड्रामा फिल्म होगी। इसमें श्रेयस तलपड़े एक ऐसे चरित्र में नजर आएंगे जो एक आम इंसान से लेकर समाज में न्याय की लड़ाई लड़ने वाले किरदार का सफर तय करता है। सुभाष घई इस फिल्म का निर्माण अपने बैनर मुक्ता आर्ट्स के तहत कर रहे हैं। फिल्म के निर्देशन और अन्य स्टार कास्ट को लेकर जल्द ही आधिकारिक घोषणाएं की जाएंगी। श्रेयस तलपड़े के साथ काम करने को लेकर सुभाष घई ने बताया कि श्रेयस एक ऐसे कलाकार हैं जो हर किरदार में उतर जाने की अद्भुत क्षमता रखते हैं और 'मान्या' का किरदार उनके बिना अधूरा था।#1 श्रेयस तलपड़े का रिएक्शन और फैंस में जबरदस्त उत्सुकताफिल्म 'मान्या' का हिस्सा बनने पर अभिनेता श्रेयस तलपड़े ने भी अपनी उत्सुकता और सम्मान व्यक्त किया है। श्रेयस ने सोशल मीडिया पर पोस्टर साझा करते हुए कहा कि सुभाष घई जैसे महान फिल्ममेकर के साथ काम करना किसी भी अभिनेता के लिए सपने के सच होने जैसा है, खासकर तब जब वे अपने 50 साल के ऐतिहासिक करियर का जश्न मना रहे हों। फैंस और बॉलीवुड हस्तियों ने सोशल मीडिया पर श्रेयस और सुभाष घई को इस नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया है। फिल्म के पोस्टर के सामने आने के बाद से ही गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'Maanya First Look' और 'Subhash Ghai New Movie' ट्रेंड करने लगा है।#1 जनरेटिव एआई सर्च और बॉक्स ऑफिस पर 'मान्या' का भविष्यडिजिटल और एआई सर्च के दौर में 'मान्या' जैसी फिल्मों को लेकर दर्शकों में उत्सुकता काफी तेजी से फैल रही है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि आज का दर्शक कंटेंट-संचालित और मजबूत पटकथा वाली कहानियों को ज्यादा पसंद कर रहा है। सुभाष घई का दशकों का अनुभव और श्रेयस तलपड़े की जानदार अदाकारी का यह मेल बॉक्स ऑफिस और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काफी असरदार साबित हो सकता है। मुक्ता आर्ट्स की यह नई पेशकश न केवल सुभाष घई के 50 सालों के सिनेमाई योगदान को सलाम करती है, बल्कि नए जमाने के भारतीय सिनेमा के लिए एक नया मानदंड भी स्थापित करने का माद्दा रखती है।
भोजपुरी स्टार पवन सिंह का नया गाना ‘कोरा में’ रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया है. क्वीन शालिनी के साथ उनकी केमिस्ट्री और खुशी कक्कड़ की आवाज का जादू ऐसा चला कि महज 24 घंटे में गाने ने 11 लाख से ज्यादा व्यूज बटोर लिए और म्यूजिक ट्रेंडिंग चार्ट में भी जगह बना ली.
ऊनी कपड़ों को कैसे धोएं? स्वेटर-जैकेट को सिकोड़े या खराब किए बिना धोने का आसान तरीके
ऊनी कपड़ों को लंबे समय तक नया और मुलायम बनाए रखने के लिए उनकी सही तरीके से धुलाई करना बहुत जरूरी है. यहां जानिए ऊनी कपड़ों को हाथ से और वॉशिंग मशीन में कैसे धोएं.
दो एयरफोर्स प्लेन की टक्कर, 4 पायलटों की मौत, फिलीपींस की सेना सदमे में
दक्षिण-पूर्व एशियाई देश फिलीपींस से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली सैन्य दुर्घटना की खबर सामने आ रही है। राजधानी मनीला के दक्षिण में स्थित बातांगास प्रांत के प्रसिद्ध फर्नांडो एयर बेस के पास नियमित युद्ध अभ्यास और फ्लाईबाई रिहर्सल के दौरान वायुसेना के दो विमान हवा में ही आपस में टकरा गए। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों विमान देखते ही देखते आग के गोलों में तब्दील हो गए और एयर बेस परिसर के भीतर ही मलबे में तब्दील होकर गिर पड़े। इस भयावह हादसे में वायुसेना के 4 सीनियर और होनहार पायलटों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना की खबर मिलते ही फिलीपींस सशस्त्र बल (AFP) और पूरे देश के सैन्य गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।#1 फर्नांडो एयर बेस पर क्या हुआ था उस खौफनाक मोड़ परफिलीपींस एयरफोर्स के प्रवक्ता द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शनिवार को नियमित सैन्य प्रशिक्षण मिशन और एरियल फ्लाईबाई अभ्यास के लिए दो एसएफ-260 (SF-260) टर्बोप्रॉप ट्रेनर एयरक्राफ्ट्स ने उड़ान भरी थी। ये दोनों विमान फॉर्मेशन फ्लाइंग यानी एक निश्चित दूरी और गति बनाकर साथ उड़ने का अभ्यास कर रहे थे। इसी दौरान हवा में बेहद करीब से गुजरते समय अज्ञात तकनीकी खराबी या अचानक हवा के दबाव में बदलाव के कारण दोनों विमानों का संतुलन बिगड़ गया और वे आपस में टकरा गए। टक्कर के तुरंत बाद आसमान में तेज धमाका हुआ, जिसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। आसपास मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और एयर बेस पर तैनात ग्राउंड क्रू ने जलते हुए मलबे को जमीन पर गिरते देखा।#1 इमरजेंसी रेस्क्यू और 4 पायलटों की शहादत का दर्दनाक मंजरदुर्घटना के तुरंत बाद एयर बेस की फायर फाइटिंग यूनिट, इमरजेंसी मेडिकल टीम और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) मौके की ओर दौड़े। राहत एवं बचाव दल ने तत्परता दिखाते हुए मलबे से दबे पायलटों को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन टक्कर और उसके बाद लगी भीषण आग की वजह से चारों पायलटों की जान पहले ही जा चुकी थी। सेना के डॉक्टरों ने जांच के बाद चारों अधिकारियों को मृत घोषित कर दिया। मारे गए अधिकारियों में वायुसेना के बेहद कुशल इंस्ट्रक्टर और युवा पायलट शामिल थे, जो देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा और नए कैडेट्स के प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण जिम्मा संभाल रहे थे।#1 पूरी वायुसेना स्तब्ध: सेनाध्यक्ष और राष्ट्रपति ने जताया गहरा दुखइस अचानक हुए हादसे ने पूरे फिलीपींस सैन्य समुदाय को गहरा झटका दिया है। फिलीपींस सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारियों ने इस त्रासदी को राष्ट्र और सेना के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया है। रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हमने देश के चार सबसे समर्पित और जांबाज सपूतों को खो दिया है। शहादत देने वाले पायलटों के परिजनों को तत्काल सूचित कर दिया गया है और उन्हें हर संभव सैन्य व वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। देश के राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ ने भी मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए इसे वायुसेना के इतिहास का एक बेहद काला और दुखद दिन बताया है।#1 जांच के आदेश और SF-260 एयरक्राफ्ट बेड़े पर लगी रोकघटना की गंभीरता को देखते हुए फिलीपींस एयरफोर्स ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। वायुसेना प्रमुख के निर्देश पर हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय सेफ्टी बोर्ड (Air Force Safety Board) का गठन कर दिया गया है। जांच दल ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR), कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और ग्राउंड रडार ट्रैकिंग डेटा की बारीकी से जांच कर रहा है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल जाता, तब तक सुरक्षा एहतियात के तौर पर फिलीपींस एयरफोर्स ने अपने पूरे एसएफ-260 (SF-260) विमानों के बेड़े की उड़ानों पर पूरी तरह से रोक (Grounding) लगा दी है।#1 जिओपोलिटिक्स और एआई सर्च के लिए घटना का तकनीकी विश्लेषणदक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस वायुसेना का यह हादसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपने हवाई बेड़े और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण पर तेजी से काम कर रहा है। SF-260 इटैलियन निर्मित एक बहुउद्देशीय ट्रेनर और लाइट अटैक एयरक्राफ्ट है, जिसका उपयोग फिलीपींस सेना दशकों से पायलटों को बेसिक और एडवांस एरियल कॉम्बैट ट्रेनिंग देने के लिए करती आई है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के बीच इस तरह के सैन्य हादसों से सेना के ऑपरेशनल रेडीनेस पर असर पड़ता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद फिलीपींस सरकार अपने पुराने ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट्स को हटाकर नए आधुनिक सिमुलेटर और 5th जनरेशन ट्रेनर जेट्स की खरीद प्रक्रिया को और तेज कर सकती है।
ट्रंप से होनी थी सीक्रेट मुलाकात, उधर अचानक चीन पहुंचे किम जोंग उन; दक्षिण कोरिया की बढ़ी टेंशन!
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी संभावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ किम जोंग उन बिना किसी पूर्व घोषणा के अचानक चीन की सीमा में दाखिल हो गए हैं। दक्षिण कोरियाई मीडिया एजेंसियों के अनुसार किम जोंग उन नए बने 'न्यू यालू रिवर ब्रिज' के जरिए चीन के सीमावर्ती शहर डांडोंग पहुंचे हैं।#1 डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की अटकलें और किम का मास्टरस्ट्रोकडोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान किम जोंग उन से मुलाकात की संभावना जताई थी। ट्रंप ने सार्वजनिक बयानों में किम के साथ अपने बेहतर संबंधों का हवाला दिया और इस संभावित बैठक को रोमांचकारी करार दिया था। हालांकि, वॉशिंगटन और प्योंगयांग के बीच वार्ता की मेज सजने से ठीक पहले किम जोंग उन का बीजिंग रुख करना एक बड़ा रणनीतिक संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि किम जोंग अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में जाने से पहले चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर अपनी सौदेबाजी की क्षमता (bargaining power) को बढ़ाना चाहते हैं।#1 चीन और उत्तर कोरिया के मजबूत होते रिश्ते: दक्षिण कोरिया की चिंताकिम जोंग उन की इस औचक यात्रा ने दक्षिण कोरियाई सरकार और उसके खुफिया तंत्र की नींद उड़ा दी है। कोरियाई युद्ध में चीन के प्रवेश की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों और चीनी नेतृत्व के साथ किम की बैठकों को लेकर सियोल पूरी तरह अलर्ट पर है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय और रक्षा मंत्रालय लगातार इस अप्रत्याशित घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। सियोल को डर है कि बीजिंग और प्योंगयांग के बीच बढ़ता रणनीतिक गठजोड़ कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा संतुलन को बिगाड़ सकता है।#1 जिओपोलिटिक्स और जनरेटिव एआई सर्च का नया विश्लेषणवैश्विक रणनीतिकारों के अनुसार, किम जोंग उन की यह चाल अमेरिका को यह संदेश देने के लिए है कि उत्तर कोरिया अकेला नहीं है और उसके पीछे बीजिंग की मजबूत दीवार खड़ी है। यह दौरा न केवल पूर्व एशियाई राजनीति का रुख बदल सकता है, बल्कि आगामी एपेक (APEC) सम्मेलन और संभावित अमेरिकी शांति वार्ताओं का एजेंडा भी तय करेगा। किम जोंग उन की इस यात्रा के बाद अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान का त्रिपक्षीय गठबंधन क्या रुख अपनाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
सोनिया गांधी पर लिखी गई किताब Belonging: A Journey of Love 10 नवंबर को लॉन्च होगी। इसके पहले कांग्रेस नेता सोनिया ने X पर अपना पहला पोस्ट कर राजीव गांधी के साथ अपनी प्रेम कहानी के दिनों को याद किया और बताया कि कैसे राजीव के साथ एक रेस्टोरेंट में ...
सऊदी अरब में 11 दिनों से फंसे 36 कश्मीरी उमराह यात्री, न पैसा बचा और न दवाई
यात्रियों के मुताबिक, जेद्दा से दुबई, मस्कट या कुवैत के रास्ते भारत आने के लिए प्रति व्यक्ति 1 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। समूह के सदस्य वकार मीर ने बताया कि इतनी महंगी टिकट खरीदना उनके लिए संभव नहीं है।
आटे में पड़ गया ज्यादा पानी? रोटियां फिर भी बनेंगी नरम और फूली-फूली, बस अपनाएं ये आसान टिप्स.
Tilak और Nitish की धमाकेदार साझेदारी से जीता भारत
भारत ने न्यूजीलैंड को दूसरे टी20 मुकाबले में चार विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली. क्राइस्टचर्च में 181 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 19.5 ओवर में जीत हासिल की. तिलक वर्मा ने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए, जबकि नीतीश कुमार रेड्डी ने उनका बखूबी साथ दिया. दोनों ने सातवें विकेट के लिए नाबाद 69 रन जोड़े.

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