श्रीलंका दौरे से पहले भारतीय टीम का शेड्यूल बदला, अब 3 दिन का होगा वॉर्म-अप मुकाबला
भारतीय क्रिकेट टीम जल्द ही श्रीलंका दौरे पर जाने वाली है, जहां वह 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। इस सीरीज से पहले एक वॉर्म-अप मैच भी खेला जाएगा। अब उस वॉर्म अप मैच के शेड्यूल में बड़ा बदलाव किया गया है।
CWG 2026: बॉक्सिंग रिंग में भारत का जलवा जैस्मीन और प्रीति ने जीते गोल्ड, जाने अपब कितनी हुई स्वर्ण पदकों की संख्या
CWG 2026: भारत की बेटियों का बॉक्सिंग में कमाल, प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया ने जीता गोल्ड मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शनिवार का दिन भारतीय मुक्केबाजी के लिए बेहद खास रहा, जहां प्रीति पवार और जैस्मिन लैंबोरिया ने गोल्ड मेडल पर निशाना साधा।
प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट सवाना डेलगाडो को शानदार तरीके से हराकर महिलाओं की 54 किग्रा बॉक्सिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। पूरे मुकाबले के दौरान शांत, संयमित और हावी रहने वाली प्रीति ने चैंपियनशिप जिताने वाला प्रदर्शन करते हुए CWG 2026 में भारत को एक और शानदार गोल्ड मेडल दिलाया। वहीं, जैस्मिन ने नॉर्दर्न आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीता। इसे भी पढ़ें: Taipei Open: तन्वी शर्मा का आक्रामक खेल, मात्र 33 मिनट में दर्ज की जीत, अब Thuy Linh Nguyen से होगी खिताबी भिड़ंत दिन में पहले प्रीति पवार की जीत के बाद, जैस्मिन ने शानदार और संयमित प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया और इस तरह भारत ने महिला बॉक्सिंग में 'गोल्डन डबल' पूरा किया। भारत ने पुरुषों की ट्रिपल जंप में यादगार डबल पोडियम फ़िनिश हासिल की; प्रवीण चित्रवेल ने 16.58 मीटर की बेहतरीन छलांग के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने 16.52 मीटर के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया। चित्रवेल ने 16.05 मीटर से लगातार सुधार करते हुए चौथे राउंड में मेडल दिलाने वाली छलांग लगाई और कुछ समय के लिए प्रतियोगिता में बढ़त भी बनाई। इसे भी पढ़ें: Commonwealth Games: भारत के 10 बॉक्सर गोल्ड मेडल के लिए उतरेंगे, इतिहास रचने को तैयार! वहीं, थिरुमारन ने 15.87 मीटर से 16.17 मीटर और फिर 16.43 मीटर तक का सफ़र तय किया और पांचवें राउंड में 16.52 मीटर की शानदार कोशिश के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल पक्का किया। हालांकि, महिलाओं की 10,000 मीटर रेस में भारत मेडल जीतने से चूक गया, क्योंकि प्रियंका 45:53.93 के समय के साथ चौथे स्थान पर रहीं। ऑस्ट्रेलिया का दबदबा रहा; जेमिमा मोंटाग ने 42:13.40 के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि एलिज़ाबेथ मैकमिलन (42:39.87) और रेबेका हेंडरसन (43:27.46) उनके बाद रहीं। रेस के दौरान कई बार चेतावनी मिलने के बाद भारत की रवीना को डिसक्वालिफ़ाई कर दिया गया। For more Sports News in Hindi Today please click here
CWG 2026: सिर्फ 30 मिनट में 2 गोल्ड, रिंग में प्रीति के बाद जैस्मिन ने दिखाया दमखम
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शनिवार को भारतीय महिला मुक्केबाजों ने महज 30 मिनट में 2 गोल्ड जीते। प्रीति पवार के बाद जैस्मिन लंबोरिया ने गोल्डन पंच लगाए। प्रीति ने महिलाओं की 54 किलोग्राम प्रतियोगिता में कनाडा की स्कार्लेट सवाना डेलगाडो के खिलाफ 5-0 से फाइनल बाउट जीती। वहीं, जैस्मिन ने महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग में नॉर्दन आयरलैंड की माइकेला वाल्श को 5-0 से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया।
ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आज 10वें दिन भारत की मुक्केबाज प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिए। पहले प्रीति ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराकर महिला 54 किग्रा वर्ग का खिताब अपने नाम किया उसके बाद जैस्मिन ने कमाल किया।
भारत की मुक्केबाज प्रीति पवार ने 54 किग्रा वर्ग में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो के खिलाफ शानदार जीत हासिल कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह इस कॉमनवेल्थ में भारत का छठा गोल्ड मेडल जीता था।
लद्दाख में खेल नीति 2026 पेश, खिलाड़ियों के लिए 1 करोड़ रुपये के इंसेंटिव की घोषणा
लेह, 1 अगस्त (आईएएनएस)। लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर वी. के. सक्सेना ने शनिवार को लद्दाख खले नीति 2026 को मंजूरी दी। खेल नीति के तहत एथलीटों को मासिक स्कॉलरशिप, एक बार के नकद पुरस्कार और लगातार वित्तीय मदद देने का वादा किया गया है। खेल नीति 2026 की घोषणा को इस केंद्र शासित प्रदेश को एक खेल ताकत के रूप में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का दमदार प्रदर्शन! प्रीति पवार ने फाइनल जीतकर दिलाया छठा गोल्ड मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का दमदार प्रदर्शन! प्रीति पवार ने फाइनल जीतकर दिलाया छठा गोल्ड मेडल
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की प्रीति पवार ने महिला 54 किग्रा बॉक्सिंग फाइनल में कनाडा की स्कार्लेट डेलगाडो को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। जूडो और एथलेटिक्स में भी भारत को कई पदकों की उम्मीद।
मैनचेस्टर सिटी क्लब का समर्थन देकर अच्छा लगा, मैं अब उनके लिए योगदान देना चाहता हूं: फिल फोडेन
नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। इंग्लिश फुटबॉलर फिल फोडेन का कहना है कि नए लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने के बाद वे मैनचेस्टर सिटी के उन पर दिखाए गए भरोसे को सही साबित करने के लिए तैयार हैं। इंग्लैंड के इस मिडफील्डर के लिए नए मैनेजर एन्जो मारेस्का का आना बहुत अच्छा मौका है। पिछले दो सीजन उनके लिए मुश्किल रहे थे, लेकिन अब वह फिर से शुरुआत करना चाहेंगे।
Commonwealth Games 2026 में 10वें दिन प्रीती पवार ने जीता गोल्ड, कनाडा के बॉक्सर को दी मात
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत अब तक 23 मेडल जीत चुका है। 1 अगस्त के मैच शेड्यूल को देखें तो आज बॉक्सिंग में भारतीय बॉक्सर्स को कई गोल्ड मेडल मिलने की उम्मीद है।
भारत के स्टार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा का मानना है कि राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जैवलिन थ्रो में रजत पदक जीतने के बाद भी वह अभी अपने सबसे अच्छे फॉर्म में लौटने से कुछ दूर हैं। उन्होंने यह बयान रजत पदक जीतने के बाद दिया है। पूरा पढ़िए क्या कहा है।
Commonwealth Games 2026 Live: भारत के मेडल इवेंट हुए शुरू, एथलीट लगाएंगे पदकों की झड़ी
Commonwealth Games 2026 Live: भारतीय एथलीट कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 10वें दिन आज पदकों की झड़ी लगा सकते हैं। शनिवार को भारतीय बॉक्सर 10 गोल्ड मेडल के लिए रिंग में होंगे।
युवा भारतीय शटलर तन्वी शर्मा ने शनिवार को यहां चीनी ताइपे की हुआंग यु सुन पर सीधे गेम में जीत दर्ज करके ताइपे ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल के फाइनल में प्रवेश किया।पिछले साल के यूएस ओपन सुपर 300 में उपविजेता रही पंजाब की 17 वर्षीय खिलाड़ी तन्वी ने सेमीफाइनल में यु सुन को केवल 33 मिनट में 21-17, 21-11 से पराजित किया। यहां फाइनल मुकाबला दो भारतीय खिलाड़ियों के बीच होने की संभावना थी लेकिन महिला एकल के दूसरे सेमीफाइनल में उन्नति हुडा को वियतनाम की विश्व में नंबर 21 थूई लिन्ह गुयेन से 15-21 18-21 से हार का सामना करना पड़ा। इस तरह से विश्व जूनियर चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता तन्वी रविवार को होने वाले फाइनल में वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी से भिड़ेंगी।तन्वी 2024 में बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में भारत की स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा थीं। उन्होंने पिछले दो वर्षों में काफी प्रगति की है।तन्वी ने 2025 में ओडिशा मास्टर्स सुपर 100 और गुवाहाटी मास्टर्स सुपर 100 में उपविजेता रहने के अलावा 2024 में बॉन इंटरनेशनल और 2025 में डेनमार्क चैलेंज जीता था। तन्वी ने शुरू से आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया तथा अपने तेज क्रॉस-कोर्ट स्मैश और पुश शॉट्स से हुआंग को बार-बार परेशान किया। पहले गेम में स्कोर 3-3 से बढ़कर 7-6 हो गया। तन्वी ने इसके बाद पूरे गेम में मामूली बढ़त बनाए रखी और 14-10 से 17-11 तक पहुंच गई।स्थानीय खिलाड़ी ने स्कोर को 15-17 तक कम कर दिया, जिसके बाद तन्वी ने आक्रामक खेल दिखाया और पहला गेम अपने नाम कर दिया।दूसरे गेम में हुआंग ने स्कोर 9-9 से बराबर कर दिया, लेकिन तन्वी इसके बाद हावी हो गई। उन्होंने बैक कोर्ट से सटीक शॉट लगाते हुए नेट पर चतुराई से ड्रॉप शॉट भी मारे। भारतीय खिलाड़ी ने आखिरी 14 में से 12 अंक अपने नाम किए और लगातार गेम में जीत दर्ज करके फाइनल में प्रवेश किया।
वर्ल्ड कप से पहले इस क्रिकेटर का बड़़ा फैसला, टीम की कप्तानी छोड़ी
वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका और बांग्लादेश जैसी टीमों को हराकर सुर्खियां बटोरने वाले डच कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स ने कप्तानी छोड़ दी है. करीब तीन साल तक टीम का नेतृत्व करने वाले स्कॉट एडवर्ड्स ने कहा कि अब वह बिना दबाव के बतौर प्लेयर टीम के लिए ज्यादा योगदान देना चाहते हैं.
ताइपे ओपन: तन्वी शर्मा ने कटाया फाइनल का टिकट, सेमीफाइनल में हुआंग यू-हसुन को हराया
तन्वी शर्मा ने ताइपे बैडमिंटन ओपन 2026 में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए महिला सिंगल्स के फाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने एकतरफा गेम में जीत हासिल की और बीडब्ल्यूएफ सुपर 300 टूर्नामेंट में भारत के खिताब जीतने की उम्मीदों को जिंदा रखा है।
छह मेडल एक दिन में जीतकर भी पीछे रहा भारत
नई दिल्ली, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 9वां दिन यादगार रहा। जूडो में भारत ने इतिहास रचते हुए पहली बार दो गोल्ड समेत तीन मेडल अपने नाम किए।
इंग्लैंड के दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज जोस बटलर अब टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बनने के काफी करीब पहुंच गए हैं, जिसमें वह वेस्टइंडीज के कायरन पोलार्ड को पीछे छोड़ेंगे।
Commonwealth Games: भारत के 10 बॉक्सर गोल्ड मेडल के लिए उतरेंगे, इतिहास रचने को तैयार!
शनिवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के शेड्यूल में बॉक्सिंग का दबदबा रहेगा, जिसमें टोक्यो ओलंपियन लवलीना बोरगोहेन समेत रिकॉर्ड 10 एथलीट अपने-अपने फ़ाइनल में हिस्सा लेंगे। सभी 10 मुक्केबाजों ने अपने सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले जीतकर कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है और अब वे गोल्ड मेडल जीतने की कोशिश करेंगे। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का अब तक का सबसे सफल बॉक्सिंग अभियान रहा है। इसे भी पढ़ें: Neeraj Chopra ने Commonwealth Games भालाफेंक में रजत पदक जीता, यशवीर को कांस्य Olympics.com के अनुसार, लवलीना बोरगोहेन (महिला 75kg), साक्षी चौधरी (महिला 51kg), प्रीति पवार (महिला 54kg), जैस्मिन लंबोरिया (महिला 57kg), प्रिया घांघस (महिला 60kg), अरुंधति चौधरी (महिला 70kg), जादुमनी सिंह मंडेन्गबाम (पुरुष 55kg), सचिन सिवाच (पुरुष 60kg), अंकुश पांघल (पुरुष 80kg) और नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90kg) SEC सेंटर में गोल्ड मेडल के लिए मुकाबला करेंगे। एथलेटिक्स में, गुलवीर सिंह पुरुषों की 5000 मीटर फ़ाइनल में हिस्सा लेंगे। वे ग्लासगो 2026 में 10,000 मीटर इवेंट में जीते गए सिल्वर मेडल के बाद एक और मेडल जीतने की कोशिश करेंगे। ट्रिपल जंपर प्रवीण चित्रवेल और सेल्वा प्रभु थिरुमारन भी मुकाबले में उतरेंगे। उन्हें उम्मीद है कि वे 2022 बर्मिंघम गेम्स में एल्डहॉस पॉल और अब्दुल्ला अबूबकर की तरह भारत के लिए 1-2 फ़िनिश (पहला और दूसरा स्थान हासिल करने) का यादगार कारनामा दोहरा पाएंगे। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा और कुलदीप कुमार पुरुषों के पोल वॉल्ट फ़ाइनल में हिस्सा लेंगे, जबकि भारत की मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम भी पोडियम पर जगह बनाने के लिए मुकाबला करेगी। ओलंपियन प्रियंका गोस्वामी रेस वॉक इवेंट में हिस्सा लेंगी और बर्मिंघम 2022 में जीते अपने सिल्वर मेडल से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी। इसे भी पढ़ें: Commonwealth Boxing: जादूमणि, अरुंधति और जैस्मीन समेत 6 भारतीय मुक्केबाज फाइनल में पहुंचे जूडो में, भारत ऐतिहासिक शुरुआती दिन के बाद अपनी शानदार शुरुआत को जारी रखने की कोशिश करेगा। शनिवार को उन्नति शर्मा (महिलाओं का 63 किग्रा), करनजीत सिंह मान (पुरुषों का 90 किग्रा), हर्ष टोकस (पुरुषों का 81 किग्रा) और इनुंगनबी तखेलंबम (महिलाओं का 70 किग्रा) मुकाबला करेंगे। यह सब शुक्रवार को अस्मिता डे और हर्ष सिंह द्वारा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए जूडो में पहला गोल्ड मेडल जीतने के बाद हो रहा है। बोल्स में, नवनीत सिंह और दिनेश कुमार पुरुषों के पेयर्स मैच में इंग्लैंड का सामना करेंगे, जिसमें जीतने वाली टीम सेमीफ़ाइनल में अपनी जगह पक्की करेगी। दिन के इवेंट्स के दौरान पैरा एथलेटिक्स और ट्रैक साइक्लिंग में भी भारत के पास मेडल जीतने के मौके होंगे। For more Sports News in Hindi Today please click here.
नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 9वां दिन ऐतिहासिक रहा। जूडो और डेकाथलॉन के खेल में भारत ने पहली बार मेडल जीता। वहीं, जैवलिन थ्रो में देश को दोहरी खुशी मिली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और गृह मंत्री अमित शाह ने मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
Asmita ने पिता का सपना किया पूरा, CWG में लहराया तिरंगा
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अस्मिता डे ने भारत के लिए जूडो का पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. सात महीने पहले पिता को खोने के बाद वह मानसिक रूप से टूट गई थीं, लेकिन हार नहीं मानी. कठिन परिस्थितियों से उबरकर उन्होंने फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया और यह ऐतिहासिक जीत अपने दिवंगत पिता, कोच और परिवार को समर्पित कर दी.
भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा जारी: सीडब्ल्यूजी 2026
ग्लासगो, ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन के साथ-साथ साक्षी और प्रिया ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले जीते और फाइनल के लिए क्वालिफाई किया, जिससे देश के लिए कम से कम तीन और सिल्वर मेडल पक्के हो गए।
मेडल जीतने की बहुत खुशी: यशवीर सिंह
ग्लासगो, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैवलिन थ्रो में यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर की थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल को अपने नाम किया।
CWG 2026: एक दिन में छह मेडल जीतकर भी 10वें स्थान पर भारत, ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत बरकरार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 9वां दिन यादगार रहा। जूडो में भारत ने इतिहास रचते हुए पहली बार दो गोल्ड समेत तीन मेडल अपने नाम किए। वहीं, जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज जीता। वहीं, डेकाथलॉन में तेजस्विन शंकर ने ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीता।
पाकिस्तानी कप्तान से गले मिली टीम इंडिया की स्टार, हैंडशेक भी किया
खेले गए द हंड्रेड विमेंस टूर्नामेंट में भारतीय बल्लेबाज जेमिमा रोड्रिग्स और पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना ने मैच खत्म होने के बाद एक-दूसरे को गले लगाकर खेल भावना की खूबसूरत मिसाल पेश की. दोनों खिलाड़ियों का यह पल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
सीडब्ल्यूजी 2026: एक दिन में छह मेडल जीतकर भी 10वें स्थान पर भारत, ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत बरकरार
नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 9वां दिन यादगार रहा। जूडो में भारत ने इतिहास रचते हुए पहली बार दो गोल्ड समेत तीन मेडल अपने नाम किए। वहीं, जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज जीता। वहीं, डेकाथलॉन में तेजस्विन शंकर ने ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीता।
हम हमेशा चाहते हैं कि राष्ट्रगान बजे, लेकिन…गोल्ड मेडल से चूकने पर नीरज चोपड़ा
कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने पर नीरज चोपड़ा ने कहा कि हम हमेशा चाहते हैं कि पदक वितरण समारोह हमारा राष्ट्रगान बजे लेकिन मैंने इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और वापसी के बाद में अपने प्रदर्शन से खुश हूं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा ने कांस्य विजेता यशवीर सिंह की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दबाव में यशवीर ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर भारतीय जैवलिन के उज्ज्वल भविष्य की झलक दिखाई।
आंखों में आंसू, गले में गोल्ड... अस्मिता ने दिवंगत पिता का सपना किया पूरा
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम जूडो वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. पिता के निधन के सात महीने बाद हासिल की गई यह जीत बेहद भावुक करने वाली रही.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन जैवलिन थ्रो में भारत की झोली में दो मेडल आए। नीरज चोपड़ा ने सीजन का अपना बेस्ट प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता, तो यशवीर सिंह ब्रॉन्ज पर कब्जा जमाने में सफल रहे। नीरज ने माना कि इंजरी से वापसी करने पर मन में थोड़ा डर रहता है। उन्होंने कहा कि वह थोड़ा और बेहतर कर सकते थे।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन जैवलिन थ्रो में भारत की झोली में दो मेडल आए। नीरज चोपड़ा ने सीजन का अपना बेस्ट प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता, तो यशवीर सिंह ब्रॉन्ज पर कब्जा जमाने में सफल रहे। नीरज ने माना कि इंजरी से वापसी करने पर मन में थोड़ा डर रहता है।
'पहला मेडल जीतने की बहुत खुशी है', सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन कर ब्रॉन्ज जीतने के बाद बोले यशवीर सिंह
ग्लासगो, 1 अगस्त (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैवलिन थ्रो में यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर की थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल को अपने नाम किया। यशवीर का यह अब तक का बेस्ट प्रदर्शन भी रहा। इंटरनेशनल स्टेज पर पहला मेडल जीतने पर यशवीर ने खुशी जताई है।
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीला से नारंगी किए जाने पर विवाद गहरा गया है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने इस पर आपत्ति जताते हुए फेडरेशन के अधिकारियों से लिखित जवाब मांगा है। उनका आरोप है कि यह फैसला एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी और उन्हें बिना बताए लिया गया। टिर्की ने बोर्ड सदस्यों को ईमेल भेजकर सवाल पूछे हैं। उन्होंने लिखा, 'मुझे नारंगी रंग से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन नेशनल टीम की पहचान से जुड़े इस बड़े फैसले पर चुनी हुई लीडरशिप से चर्चा जरूर होनी चाहिए थी। इस बीच, ओडिशा सरकार ने भी टिर्की से स्पष्टीकरण मांग लिया है। वहीं, गुरुवार को टिर्की ने बदलाव का बचाव किया था। उन्होंने लोगों से इसे राजनीतिक रंग न देने की अपील करते हुए कहा था कि यह पूरी तरह 'टेक्निकल' फैसला है। खिलाड़ियों से सलाह के दावे पर सवाल शुक्रवार को इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भारतीय टीम के एक खिलाड़ी के हवाले से कहा गया कि जर्सी में बदलाव को लेकर न तो उनसे राय ली गई और न ही सलाह मांगी गई। हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति के एक सदस्य ने भी दावा किया कि उन्हें जर्सी में बदलाव की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे ऐसी किसी आधिकारिक बैठक का हिस्सा नहीं रहे, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा हुई हो। जर्सी देखकर कोई प्रेरणा नहीं मिल रही- भास्करन इससे पहले, जर्सी के रंग को लेकर कई पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाए थे। 1980 ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान वासुदेवन भास्करन ने भी नाराजगी जताई थी। रासकिन्हा ने लिखा- टीम को भगवा रंग क्यों पहनाया भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रासकिन्हा ने इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि टीम को भगवा रंग पहनाया जाना शर्मनाक है। प्रियंका गांधी ने भी नई जर्सी आलोचना की कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से नारंगी किए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश की पहचान अहिंसा, सत्य और भाईचारे जैसे मूल्यों से जुड़ी है और इन्हें बदला नहीं जा सकता। जर्सी का रंग कैसे तय होता है, सवाल-जवाब के जरिए समझिए … सवाल: जर्सी का रंग किस आधार पर तय होता है? जवाब: जर्सी के रंग को लेकर कोई भी लिखित नियम नहीं है। कोई भी देश किसी भी रंग को चुन सकता है। लेकिन आमतौर किसी देश की टीम की जर्सी का रंग उसके राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीकों या राष्ट्रीय पहचान के आधार पर चुना जाता है। सवाल: भारतीय टीम की जर्सी नीली क्यों रखी गई थी? जवाब: हॉकी इतिहासकार के. अरुमुगम ने बताया कि भारतीय हॉकी टीम 1928 से ज्यादातर नीली और सफेद जर्सी में खेलती आई है। समय-समय पर जर्सी का डिजाइन बदला, लेकिन रंग नीला ही रहा। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट टीम ने 1992 में रंगीन जर्सी शुरू होने पर तिरंगे के अशोक चक्र का नीला रंग अपनाया। इसी वजह से भारतीय टीमों की पहचान 'मेन इन ब्लू' के तौर पर बन गई। सवाल: जर्सी का रंग ऑरेंज क्यों किया गया? जवाब: हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी अब नीले सिंथेटिक टर्फ पर खेली जाती है। ऐसे में मैदान और जर्सी दोनों नीले होने से खिलाड़ियों को तेज खेल के दौरान साथी खिलाड़ियों और गेंद को पहचानने में दिक्कत होती थी। भारत ने 1975 में वर्ल्ड कप जीता था FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 टूर्नामेंट का 16वां एडिशन होगा। इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) की ओर से आयोजित यह टूर्नामेंट 14 से 30 अगस्त 2026 तक बेल्जियम के वावरे और नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन में खेला जाएगा। भारत ने अपना आखिरी और इकलौता हॉकी वर्ल्ड कप खिताब 1975 में जीता था। टीम करीब 50 साल बाद फिर से वर्ल्ड चैंपिंयन बनने का सपना लेकर मैदान में उतरेगी।
Kuldeep Yadav ने Ben Stokes को आउट कर यॉर्कशर को दिलाई जीत, आशुतोष का कमाल
लंदन, एक अगस्त भारत के बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव ने इंग्लैंड के पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स को आउट किया और यॉर्कशर की वनडे कप में डरहम पर जीत में अहम भूमिका निभाई। कुलदीप ने स्टोक्स (12) को जॉर्ज हिल के हाथों कैच आउट कराने के बाद सीमित ओवरों की क्रिकेट के विशेषज्ञ कॉलिन एकरमैन (26) को भी आउट किया। कुलदीप ने 10 ओवर में 23 रन देकर दो विकेट लिए जिससे यॉर्कशर ने डरहम को 48.1 ओवरों में केवल 165 रन पर ढेर कर दिया। जेम्स व्हार्टन (नाबाद 68) और सैम व्हाइटमैन (नाबाद 52) ने अर्धशतक बनाए और यॉर्कशर ने 41 ओवर में लक्ष्य को हासिल कर लिया। एक अन्य मैच में भारतीय ऑलराउंडर आशुतोष शर्मा (51 रन देकर पांच विकेट) ने लिस्ट ए क्रिकेट में पहली बार पांच विकेट लेने का कारनामा किया, जिससे हैम्पशर ने एसेक्स को तीन विकेट से हरा दिया। आशुतोष की शानदार गेंदबाजी से हैम्पशर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी कर रही एसेक्स को 49 ओवर में 317 रन पर रोक दिया। इसके जवाब में जेम्स फुलर (नाबाद 58), कप्तान निक गुबिन्स (53) और टॉम प्रेस्ट (51) के अर्धशतकों की बदौलत हैम्पशर ने 47.4 ओवरों में लक्ष्य हासिल कर लिया।
भारतीय शटलर तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन सुपर 300 टूर्नामेंट के महिला सिंगल्स के फाइनल में जगह बना ली है। शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में 17 साल की तन्वी ने चीनी ताइपे की हुआंग यू-हसुन को सीधे गेम में मात दी। पंजाब की रहने वाली तन्वी ने यह मुकाबला 21-17, 21-11 से अपने नाम किया। यह एकतरफा सेमीफाइनल मैच महज 33 मिनट तक चला। तन्वी पिछले साल यूएस ओपन सुपर 300 में रनर-अप रही थीं। रविवार को होगा खिताबी मुकाबला जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट तन्वी शर्मा रविवार को होने वाले फाइनल में खिताबी जीत के लिए उतरेंगी। फाइनल में उनका मुकाबला हमवतन उन्नति हुड्डा या वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी गुयेन थुय लिन्ह में से किसी एक से होगा। पहले गेम में बढ़त बनाई, दूसरे में पूरी तरह हावी रहीं तन्वी ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। पहले गेम में हुआंग यू-ह्सुन ने कुछ समय तक मुकाबला किया, लेकिन तन्वी ने 21-17 से गेम अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने विपक्षी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने लगातार अंक जुटाते हुए 21-11 से जीत दर्ज की और सीधे गेम में फाइनल का टिकट पक्का कर लिया। -------------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… कॉमनवेल्थ में जूडो में 15 मिनट में अस्मिता-हर्ष गोल्ड जीते:जेवलिन में नीरज को सिल्वर और यशवीर को ब्रॉन्ज; भारत को कल 6 मेडल मिले कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। अस्मिता डे ने गेम्स के इतिहास में जूडो में देश को पहला गोल्ड दिलाया। इसके 15 मिनट बाद हर्ष सिंह ने दूसरा गोल्ड जीता। यामिनी मौर्य ने सिल्वर मेडल हासिल किया। जूडो में 3 मेडल आए। पूरी खबर
इंग्लैंड में गदर काट रहे कुलदीप यादव, बेन स्टोक्स भी फिरकी में घूम गए
इंग्लैंड में जारी मेट्रो बैंक वन-डे कप में भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. कुलदीप यादव ने बेन स्टोक्स का भी अहम विकेट चटकाया. कुलदीप ने 10 ओवर में सिर्फ 23 रन देकर 2 विकेट लिए और यॉर्कशायर को डरहम पर 7 विकेट की शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
स्पोर्ट्स बिजनेस का बदला ट्रेंड...:स्पॉन्सरशिप की जगह टीमों में हिस्सेदारी खरीदने पर फोकस बढ़ा
एशियाई रईस परिवारों और बड़े निवेशकों का खेलों के प्रति नजरिया अब तेजी से बदल रहा है। पहले वे सिर्फ टीमों की जर्सी पर अपना नाम छपवाने (स्पॉन्सरशिप) या चैरिटी आयोजनों तक सीमित रहते थे, लेकिन अब वे सीधे स्पोर्ट्स फ्रेंचाइजी, लीग और खेलों से जुड़ी तकनीक में अपनी हिस्सेदारी खरीद रहे हैं। निवेशकों को पूरा भरोसा है कि दर्शकों की लगातार बढ़ती संख्या और टीवी-डिजिटल राइट्स की आसमान छूती कीमतों से उन्हें लंबे समय में बहुत बड़ा मुनाफा मिलेगा। इस नए ट्रेंड की वजह से खेल जगत में निवेश के पुराने सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 13 जुलाई तक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्पोर्ट्स से जुड़ी डील 3.69 बिलियन डॉलर (करीब 35 हजार करोड़ रुपए) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। यह 1980 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है और पिछले साल के मुकाबले 12 गुना ज्यादा है। चूंकि किसी भी टीम का पूरा मालिकाना हक खरीदना बहुत महंगा और मुश्किल होता है, इसलिए ज्यादातर अमीर परिवार और निवेशक टीमों में थोड़ी हिस्सेदारी (माइनॉरिटी स्टेक) खरीदने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। भारत में इस बड़े बदलाव का सबसे सीधा असर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में देखने को मिल रहा है, जहां टीमों की कीमत लगातार आसमान छू रही है। सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ सुपर जायंट्स की मालिक गोयनका फैमिली करीब 19 हजार करोड़ रुपए की वैल्यूएशन पर अपनी 5 से 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है और विदेशी निवेशकों ने इसमें काफी दिलचस्पी दिखाई है। इसी तरह, इस साल की शुरुआत में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमों में हिस्सेदारी को लेकर भी बड़ी डील हो चुकी हैं। खेल जगत में हो रहे इस भारी निवेश के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि बड़े बैंक और निवेशक इसे ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ प्रूफ बिजनेस मान रहे हैं। इसका मतलब है कि तकनीक के बदलने या शेयर बाजार में मंदी आने का लाइव खेलों के रोमांच पर कोई खास असर नहीं पड़ता। स्पेनिश फुटबॉल क्लब वालेंसिया के मालिक किआट लिम का साफ मानना है कि आज के समय में दर्शकों का ध्यान ही सबसे कीमती चीज है। जितने ज्यादा लोग मैच देखेंगे, ब्रॉडकास्टर्स उतने ही ज्यादा पैसे देंगे, जिसका सीधा फायदा टीमों और उनमें पैसा लगाने वालों को मिलेगा। जानकारों का कहना है कि अब खेलों में पैसा लगाना सिर्फ अरबपतियों का शौक नहीं रह गया है, बल्कि यह मुनाफा कमाने की एक बेहद ठोस और सोची-समझी बिजनेस रणनीति बन चुका है। स्पोर्ट्स बिजनेस के निवेशक क्रिकेट के अलावा, अब जापान और दक्षिण कोरिया में बेसबॉल के साथ-साथ फॉर्मूला वन और यूरोपीय फुटबॉल में भी निवेश के नए मौके तलाश रहे हैं।
नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स (सीडब्ल्यूजी) 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन जारी है। भारत के सभी 10 मुक्केबाजों ने अपने सेमीफाइनल मैच जीतकर फाइनल का टिकट हासिल किया है। इन 10 में से 7 मुक्केबाज हरियाणा से हैं, जो शनिवार को देश की झोली में कम से कम सिल्वर मेडल डालेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के खिलाड़ियों को उनके शानदार प्रदर्शन पर बधाई दी है।
CWG 2026: तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल के साथ इतिहास रचा
तेजस्विन शंकर ने शुक्रवार देर रात (भारतीय समय के अनुसार) कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों के 'डेकाथलॉन' में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। हाई जंपर से डेकाथलीट बने तेजस्विन शंकर कॉमनवेल्थ गेम्स में दो अलग-अलग इवेंट्स में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। इससे पहले, उन्होंने बर्मिंघम में 2022 एडिशन में पुरुषों की हाई जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
यूपी पुलिस की दरोगा अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। यह मेडल जीतना अस्मिता का था उतना ही उनके पिता का भी था। वह इस जीत को अपने पापा से शेयर करना चाहती थीं लेकिन वह इस दुनिया में नहीं है। उनका 7 महीने पहले ब्रेन स्टोक के कारण निधन हो गया था। वह साइकिल मैकेनिक थे। अस्मिता ने भावुक होकर कहा- जब मेरे पिता का निधन हुआ, तो मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया, क्योंकि वही मेरा सबसे बड़ा सहारा थे। लेकिन इसके बाद मां ने जिम्मेदारी संभाली। अंतिम संस्कार के केवल 10 दिन बाद उन्होंने अस्मिता से दोबारा ट्रेनिंग शुरू करने को कहा। उन्होंने कहा- अगर मैं आज तुम्हें रोक दूंगी, तो तुम्हारे पिता सोचेंगे कि मैंने तुम्हारे सपने तोड़ दिए। इसके बाद अस्मिता अपना सामान लेकर भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र लौट गईं। गोल्ड जीतने के बाद अस्मिता डे ने कहा- मैं यूपी पुलिस में हूं। मैं सीएम योगी जी का धन्यवाद करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझे यूपी पुलिस में नौकरी दी। इस नौकरी से मुझे सहारा मिला। इसी की बदौलत मैं यहां तक पहुंची और गोल्ड मेडल जीत सकी। अस्मिता डे त्रिपुरा के एक गांव से हैं और यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं। शुरुआत में पिछड़ीं, फिर शानदार वापसी की फाइनल मुकाबले की शुरुआत अस्मिता डे के लिए आसान नहीं रही। कनाडा की हेडी क्वाच ने पहले ही युको अंक हासिल कर बढ़त बना ली। अस्मिता को एक शिदो पेनल्टी भी मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। निर्धारित समय तक कोई भी खिलाड़ी निर्णायक अंक नहीं बना सका, इसलिए मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंच गया। यहां अस्मिता ने सही मौके पर शानदार दांव लगाया और दूसरा युको अंक हासिल कर मैच के साथ-साथ गोल्ड मेडल भी जीत लिया। फाइनल में पहुंचने से पहले अस्मिता ने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग और समर शॉ को हराकर शानदार प्रदर्शन किया था। अस्मिता बोलीं- योगी जी के समर्थन से संबल मिला अस्मिता ने कहा- दिसंबर 2025 में उनके पिता का निधन हो गया था। मेरे पिता ने हमेशा मेरा साथ दिया। उनके जाने के बाद मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है। लेकिन दो महीने बाद एशियन गेम्स के ट्रायल्स हुए, जिसमें मैं नेशनल स्तर पर पहले स्थान पर रही। गोल्ड मेडल जीतने के बाद अस्मिता डे ने कहा- यह पदक मेरे लिए, मेरे राज्य और मेरे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मैं इसे अपने कोच और अपने पिता को समर्पित करती हूं। मैं इस गोल्ड मेडल से बहुत खुश हूं। यह उन सभी लोगों के लिए है, जिन्होंने मेरा साथ दिया। उन्होंने सीएम योगी का भी धन्यवाद जताया। 800 मीटर दौड़ छोड़ जूडो चुना त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता डे पहले 800 मीटर दौड़ की एथलीट थीं। जिला स्तरीय ट्रायल के दौरान उनकी रुचि जूडो में बढ़ी। इसके बाद उन्होंने एथलेटिक्स छोड़कर जूडो को अपना खेल बना लिया और लगातार मेहनत करती रहीं। अस्मिता ने भोपाल के भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) रीजनल सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी की देखरेख में प्रशिक्षण लिया। फिलहाल वह केंद्र सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के डेवलपमेंट ग्रुप का हिस्सा हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वजन बनाए रखने के लिए रहना पड़ा भूखा अस्मिता ने खिताबी मुकाबले से पहले रैंडम वेट-इन (वजन जांच) के संघर्ष को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह भूखा रहना पड़ा था। मैं ज्यादा कुछ नहीं खा सकती थी क्योंकि रैंडम वेट-इन में आपका वजन 50 किलो से कम होना चाहिए। जब मैं सुबह उठी, तो मेरा वजन 50 किलो 300 ग्राम था, इसलिए मैंने कुछ नहीं खाया। जब मेरा नाम रैंडम वेट-इन के लिए आया, तब जाकर मैंने औपचारिकता पूरी होने के बाद खाया-पिया और उसके एक घंटे बाद ही मेरी फाइट थी। डीजीपी बोले- अस्मिता ने बढ़ाया यूपी पुलिस और देश का गौरव यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने स्वर्ण पदक जीतने पर अस्मिता डे को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अस्मिता डे ने महिला 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में गोल्ड जीतकर यूपी पुलिस, प्रदेश और पूरे देश का नाम रोशन किया है। यह उनकी सफलता अनुशासन, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का बेहतरीन उदाहरण है। यह उपलब्धि सीएम योगी की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने की नीति का भी परिणाम है। खेल कोटे के जरिए खिलाड़ियों को यूपी पुलिस में नौकरी देने से उन्हें खेल और सेवा, दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका मिला है। ---------------------------ये खबर भी पढ़ें… यूपी में महिलाओं-बुजुर्गों को ₹1500 पेंशन; भाजपा का बड़ा दांव- चुनावी साल में 1.18 करोड़ लोगों को सीधा फायदा यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले योगी सरकार ने बड़ा सियासी दांव चला है। राज्य के 1.18 करोड़ से ज्यादा पेंशन लाभार्थियों को सरकार बड़ी राहत देने की तैयारी में है। इनमें वृद्ध, विधवा, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों को शामिल किया गया है। पढ़िए पूरी खबर
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन भी भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा जारी रहा। ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन के साथ-साथ साक्षी और प्रिया ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले जीते और फाइनल के लिए क्वालिफाई किया, जिससे देश के लिए कम से कम तीन और सिल्वर मेडल पक्के हो गए।
भारत का नया जैवलिन स्टार! ब्रॉन्ज जीतकर छाए यशवीर, नीरज भी बन गए फैन
कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के बावजूद नीरज चोपड़ा के चेहरे पर मुस्कान थी. नीरज चोपड़ा ने इस बार सिर्फ अपना पदक नहीं, बल्कि भारतीय जैवलिन थ्रो के उज्ज्वल भविष्य को भी पोडियम पर खड़े देखा.
Indian Team: श्रीलंका दौरे से पहले टीम के लिए अच्छी खबर, बुमराह हुए फिट,खेलेंगे दोनों टेस्ट मैच
इंटरनेट डेस्क। भारतीय टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार बुमराह ने बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपना फिटनेस टेस्ट सफलतापूर्वक पास कर लिया है और अब वह श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए पूरी तरह उपलब्ध रहेंगे। भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट की सीरीज 15 अगस्त से शुरू होनी है, फिर दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से खेला जाएगा। बुमराह को श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में फिटनेस क्लियरेंस की शर्त के साथ चुना गया था, लेकिन अब मेडिकल टीम ने उन्हें हरी झंडी दे दी है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बुमराह ने बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अनिवार्य फिटनेस टेस्ट सफलतापूर्वक पास कर लिया है। ऐसे में वह श्रीलंका के खिलाफ दोनों टेस्ट मैचों में भारत के तेज गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई करेंगे। इस चोट के कारण बुमराह लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे वनडे मुकाबले से बाहर हो गए थे। श्रीलंका दौरे का शेड्यूल 15-19 अगस्त- पहला टेस्ट, गॉल, सुबह 10 बजे से 23-27 अगस्त- दूसरा टेस्ट, कोलंबो, सुबह 10 बजे से pc- aaj tak
नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैवलिन थ्रो के मेडल इवेंट में सिल्वर पदक जीतने के बाद जहां अपने बयान में इसकी खुशी जाहिर की तो वहीं उन्होंने कांस्य पदक जीतने वाले यश वीर सिंह की भी जमकर तारीफ की।
Commonwealth Games 2026: नीरज चोपड़ा ने अपने नाम किया रजत पदक, गोल्ड का सपना रहा अधूरा
इंटरनेट डेस्क। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का स्वर्ण पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया है। हालांकि वह रजत पदक अपने नाम करने में सफल रहे। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीता। वहीं भारत के ही यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने 89.75 मीटर थ्रो के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। ग्लासगो ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में आठवें दिन भारत ने कुल 6 मेडल अपने नाम किए। इनमें 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। जूडो में अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीता। ये जूडो के इतिहास में भारत को पहला गोल्ड दिलाया। इसके 15 मिनट बाद हर्ष सिंह ने दूसरा स्वर्ण पदक आने नाम किया। यामिनी मौर्य सिल्वर मेडल जीतने में सफल रही। एथलेटिक्स में तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन इवेंट में ब्रॉन्ज जीता। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इस इवेंट में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने। pc- india tv hindi
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के नौवें दिन भारत के लिए मेडलों की बारिश की उम्मीद है। बॉक्सिंग में रिकॉर्ड 10 फाइनल, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा एथलेटिक्स, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स में भी भारतीय खिलाड़ी चुनौती पेश करेंगे।
Commonwealth Boxing: Lovlina Borgohain समेत भारतीय मुक्केबाज फाइनल में पहुंचे
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में कम से कम आठ पदक पक्के कर लिये जब ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन और विश्व चैम्पियन जैसमीन लंबोरिया समेत आठ मुक्केबाज शुक्रवार को फाइनल में पहुंच गए। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना ने तुवालू की तारोना खानम बादी पासोनी ताफाकी को 5 . 0 से हराया। अरुंधति चौधरी ने 70 किग्रा वर्ग में मौजूदा चैंपियन वेल्स की रोजी एक्लेस को हराकर बड़ा उलटफेर किया जबकि विश्व चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किलो), प्रिया घंघास (60 किलो) ,अंकुश पंघाल (80 किग्रा) , नरेंदर बेरवाल (प्लस 30 किलो) और जादूमणि सिंह (पुरुषों के 55 किग्रा) ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाते हुए भारत का दबदबा कायम किया। अरुंधति ने एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मुकाबले में रोजी एक्लेस को 4-0 के फैसले से हराया। भारतीय मुक्केबाज ने शुरुआती दो राउंड में अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखा और इसी दौरान रोजी को ‘स्टैंडिंग काउंट’ का सामना भी करना पड़ा। अरुंधति ने पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखा और प्रभावी पंच के दम पर गत चैंपियन पर बढ़त कायम रखी। वहीं, रोजी वापसी की कोशिश करती रहीं, लेकिन भारतीय मुक्केबाज की मजबूत रणनीति के सामने वह सफल नहीं हो सकीं। जैस्मीन सेमीफाइनल में एकतरफा प्रदर्शन करते हुए आरएससी (रेफरी द्वारा मुकाबला रोकना) से जीत दर्ज की। लेसोथो की रापेलांग मासेलेला की उनकी प्रतिद्वंद्वी को दूसरे राउंड के अंतिम क्षणों में तीसरी बार स्टैंडिंग काउंट मिलने के बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया। जैस्मीन ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और अपनी तेज पंच की बौछार कर से प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज पर दबाव बनाए रखा। जादूमणि ने सेमीफाइनल में नामीबिया के पी पी एम हाओसेब को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग के फाइनल में जगह बना ली। साक्षी ने महिलाओं के 51 किलोवर्ग में कनाडा की अम्बर जेन वाल को सर्वसम्मति से लिये गए फैसले में 5 . 0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। प्रिया ने इंग्लैंड की लूसी किंग्स व्हीटली को 60 किलो वर्ग में 5 . 0 से हराया। नरेंदर ने त्रिनिदाद और टोबैगो के नाइजेल पॉल को पुरूषों के प्लस 90 किलो मुकाबले में 5 . 0 से मात दी। भिवानी की एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता 22 वर्षीय प्रीति ने जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराया। उन्होंने मुकाबले के दौरान शुरू से अंत तक दबदबा बनाए रखा। उन्होंने बांयी ओर से सटीक पंच और प्रभावी जवाबी हमले के दम पर म्वापे को लगातार दबाव में रखा। फाइनल में प्रीति के सामने स्कारलेट डेलगाडो की चुनौती होगी। कनाडा की इस मुक्केबाज ने एक अन्य सेमीफाइनल में इंग्लैंड की लॉरेन मैकी को 4-1 से हराया। म्वापे पूरे मुकाबले में प्रभावी पंच लगाने के लिए जूझती रहीं, जबकि प्रीति के संयोजित पंच का उनके पास कोई जवाब नहीं था। पहले दो राउंड में जाम्बिया की मुक्केबाज को तीन बार ‘एट काउंट’ का सामना करना पड़ा, जो भारतीय मुक्केबाज के एकतरफा वर्चस्व का प्रमाण रहा। दूसरे राउंड में प्रीति के प्रदर्शन से प्रभावित सभी पांच निर्णायकों ने उन्हें 10-8 का स्कोर दिया। अंतिम राउंड में म्वापे मुकाबले में वापसी की कोशिश करने के बजाय प्रीति के आक्रामक हमलों से बचती नजर आईं। दूसरी ओर, अंकुश ने भी 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। शुरुआती दो राउंड में भारतीय मुक्केबाज के शानदार प्रदर्शन के सामने ओफोरी बार-बार ‘क्लिंचिंग’ (प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज को जकड़ कर मुकाबले की गति प्रभावित करने की कोशिश) का सहारा लेने को मजबूर हुए। दूसरे राउंड की शुरुआत में ओफोरी ने आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश की, लेकिन अंकुश ने संयम बनाए रखते हुए दबाव को आसानी से झेला और सटीक पंचों के संयोजन से जवाब देते हुए एकतरफा जीत दर्ज की।
Tejaswin Shankar ने Commonwealth Games डेकाथलन में कांस्य जीतकर इतिहास रचा
राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी तेजस्विन शंकर ने घुटने की चोट के बाद शानदार वापसी करते हुए इतिहास रच दिया जब वह राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य जीतकर डेकाथलन स्पर्धा में पदक हासिल करने वाले पहले भारतीय बन गए। तेजस्विन ने दस खेलों की इस स्पर्धा में 7976 अंक बनाये।लंबे समय से चली आ रही घुटने की समस्या के कारण उन्होंने ग्लास्गो खेलों की ऊंची कूद स्पर्धा से नाम वापिस ले लिया था। उन्होंने बर्मिंघम में 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में ऊंची कूद में कांस्य जीता था। इसके साथ ही वह दो राष्ट्रमंडल खेलों में अलग अलग स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले भी पहले भारतीय बन गए। हांगझोउ एशियाई खेल 2023 के रजत पदक विजेता 27 वर्ष के तेजस्विन कनाडा के डेमियन वार्नर से पिछड़ गए जिन्होंने 8036 अंक लेकर रजत पदक जीता। पेरिस ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंक लेकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। तेजस्विन ने नौवी स्पर्धा भालाफेंक के बाद तीसरा स्थान हासिल कर लिया था और 1500 मीटर में पांचवें स्थान पर रहने के बाद उसे बरकरार रखा।
Commonwealth Games: Neeraj Chopra ने जीता रजत, जूडो में भारत को दो ऐतिहासिक स्वर्ण
(अपराजिता उपाध्याय)ग्लास्गो, 31 जुलाई जूडो में पहली बार दो स्वर्ण पदक, भालाफेंक सुपरस्टार नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह को पदक और मुक्केबाजी रिंग में 10 भारतीयों के फाइनल में पहुंचने के साथ राष्ट्रमंडल खेलों में शुक्रवार को नौवां दिन भारत के लिये यादगार रहा।जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने इतिहास रच दिया जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में इस स्पर्धा में भारत की झोली में पहली बार पीले तमगे डाले। वहीं यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीतकर जूडो के लिये इन खेलों को अभूतपूर्व बना दिया।एथलेटिक्स में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को रजत से संतोष करना पड़ा जबकि पहली बार खेल रहे यशवीर ने आखिरी प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके कांस्य पदक जीता।राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी तेजस्विन शंकर राष्ट्रमंडल खेलों में डेकाथलन में कांस्य जीतकर पदक अपने नाम करने वाले पहले भारतीय बन गए।मुक्केबाजी में अरूंधति चौधरी, ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन और विश्व चैम्पियन जैस्मीन लंबोरिया समेत आठ भारतीय फाइनल में पहुंच गए।लॉन बॉल्स में भारत की युगल टीम ने अपराजेय अभियान बरकरार रखते हुए चौथी जीत दर्ज की जबकि साइकिलिंग में प्रदर्शन निराशाजनक रहा। जूडो में रचा इतिहास , दो स्वर्ण मिलेभारत ने जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता।हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता।पहली बार इन खेलों में उतरे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया। यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। एथलेटिक्स : नीरज और यशवीर को पदक, तेजस्विन ने रचा इतिहासभारतीय भालाफेंक सुपरस्टार नीरज चोपड़ा कठिन हालात में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके लेकिन रजत पदक जीता जबकि यशवीर सिंह ने आखिरी प्रयास में सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके कांस्य पदक अपने नाम किया।तोक्यो ओलंपिक चैम्पियन 28 वर्ष के नीरज ने दूसरे प्रयास में इस सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85 . 83 मीटर थ्रो फेंका। राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार उतरे 24 बरस के यशवीर ने छठे और आखिरी प्रयास में 85 . 41 मीटर थ्रो फेंककर सभी को चौंका दिया। इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83 . 72 मीटर था।श्रीलंका के स्टार रूमेश थरंगा पथिरागे ने अपेक्षा के अनुरूप 89 . 75 मीटर फेंककर स्वर्ण पदक जीता।राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी तेजस्विन शंकर ने घुटने की चोट के बाद शानदार वापसी करते हुए इतिहास रच दिया जब वह कांस्य जीतकर डेकाथलन स्पर्धा में पदक हासिल करने वाले पहले भारतीय बन गए।तेजस्विन ने दस खेलों की इस स्पर्धा में 7976 अंक बनाये। उन्होंने बर्मिंघम में 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में ऊंची कूद में कांस्य जीता था। इसके साथ ही वह दो राष्ट्रमंडल खेलों में अलग अलग स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले भी पहले भारतीय बन गए। मुक्केबाजी : दस भारतीय पहलवान फाइनल मेंभारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन बरकरार रखा और दस मुक्केबाज फाइनल में पहुंच गए।ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो) ने तुवालू की तारोना खानम बादी पासोनी ताफाकी को 5 . 0 से हराया। अरुंधति चौधरी ने 70 किग्रा वर्ग में मौजूदा चैंपियन वेल्स की रोजी एक्लेस को हराकर बड़ा उलटफेर किया जबकि विश्व चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किलो), प्रिया घंघास (60 किलो) ,अंकुश पंघाल (80 किग्रा) , नरेंदर बेरवाल (प्लस 30 किलो) और जादूमणि सिंह (पुरुषों के 55 किग्रा) ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाते हुए भारत का दबदबा कायम किया। लॉन बॉल्स में अपराजेय अभियान जारीभारत के नवनीत सिंह और दिनेश कुमार की जोड़ी ने लॉन बॉल्स पुरुष युगल वर्ग की सेक्शनल प्ले स्पर्धा में फॉकलैंड आइलैंड्स के खिलाफ सीधे सेटों में शानदार जीत दर्ज की।भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और फॉकलैंड आइलैंड्स के इयान बार्न्स और ऑलिवर थॉम्पसन को 6-3 और 10-1 के स्कोर से आसानी से हराया।इस जीत के साथ भारतीय जोड़ी ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना अजेय रिकॉर्ड बरकरार रखा है। टीम ने लगातार चार जीत दर्ज की हैं और अब उनका अगला मुकाबला इंग्लैंड के खिलाफ होगा जो ग्रुप का अंतिम अहम मैच होगा। साइकिलिंग में निराशाराष्ट्रमंडल खेलों की पुरुषों की 4000 मीटर व्यक्तिगत परस्यूट साइकिलिंग स्पर्धा में भारत की चुनौती क्वालीफिकेशन चरण में खत्म हो गई जब दिनेश कुमार और हर्षवीर सिंह सेखों तालिका में निचले पायदान पर रहने के बाद अगले दौरे के लिए आगे बढ़ने में नाकाम रहे।वहीं पुरुषों की कीरिन स्पर्धा में भारतीय साइकिलिस्टों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। इस प्रतियोगिता की शुरुआती हीट में भारतीय खिलाड़ी पीछे रह गए। देश के तीन खिलाड़ियों में डेविड बेकहम का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।बेकहम ने तीसरी हीट में हिस्सा लिया और पांचवें स्थान पर रहे।
Neeraj Chopra ने Commonwealth Games भालाफेंक में रजत पदक जीता, यशवीर को कांस्य
भारतीय भालाफेंक सुपरस्टार नीरज चोपड़ा कठिन हालात में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके लेकिन रजत पदक जीता जबकि यशवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में शुक्रवार को आखिरी प्रयास में सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके कांस्य पदक अपने नाम किया। तोक्यो ओलंपिक चैम्पियन 28 वर्ष के नीरज ने दूसरे प्रयास में इस सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85 . 83 मीटर थ्रो फेंका जो दूसरे स्थान पर रहने के लिये काफी था। वह 19 जून को दोहा डायमंड लीग में 85 . 69 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे थे। राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार उतरे 24 बरस के यशवीर ने छठे और आखिरी प्रयास में 85 . 41 मीटर थ्रो फेंककर सभी को चौंका दिया। इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83 . 72 मीटर था। वह पांचवें दौर के बाद 81 . 33 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास से सातवें स्थान पर थे लेकिन आखिरी प्रयास जबर्दस्त रहा। श्रीलंका के स्टार रूमेश थरंगा पथिरागे ने अपेक्षा के अनुरूप 89 . 75 मीटर फेंककर स्वर्ण पदक जीता। बेहद सर्दी और तेज हवाओं के प्रदर्शन उनका यह प्रदर्शन शानदार रहा।उन्होंन जून में रोम डायमंड लीग में 92 . 62 मीटर का थ्रो फेंका था। भारत के रोहित यादव 81 . 56 मीटर के थ्रो के साथ सातवें स्थान पर रहे। पाकिस्तान के गत चैम्पियन और मौजूदा ओलंपिक चैम्पियन अरशद नदीम 77 . 41 के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ तीन दौर के बाद बाहर हो गए। मौजूदा विश्व चैम्पियन त्रिनिदार और टोबैगो के केशोर्न वालकॉट छठे स्थान पर रहे।
नीरज चोपड़ा से टक्कर तो दूर, रोहित यादव से भी पीछे रहे अरशद नदीम
कॉमनवेल्थ गेम्स में खराब प्रदर्शन के बाद अब पाकिस्तान के अरशद नदीम की नजरें एशियन गेम्स पर होगी, जहां उन्हें एक बार फिर नीरज चोपड़ा और श्रीलंकाई स्टार रुमेश पथिरागे की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा. अरशद नदीम ने 2024 के पेरिस ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था.
अस्मिता डे के संघर्ष की कहानी; पिता के निधन के बाद टूट गईं थीं, अब CWG में रचा इतिहास
23 साल की अस्मिता ने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 48 किग्रा से कम के भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडो खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा, तो यह पदक जितना उनका था, उतना ही उनके पिता का भी था।
Commonwealth Games 2026: ऐसा हुआ तो भारत रच देगा इतिहास! जीत सकते है 10 गोल्ड मैडल,लवलीना समेत 10 बॉक्सर फाइनल में
कौन हैं रुमेश पथिरागे? नीरज चोपड़ा को हराकर बने CWG चैम्पियन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. रुमेश ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. उन्होंने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को भी पछाड़ दिया. रुमेश पहले एक क्रिकेटर थे, लेकिन कोच की सलाह पर उन्होंने जैवलिन को चुना.
बॉक्सिंग में 10 गोल्ड दाव पर, देखें CWG 2026 के 10वें दिन का भारत का शेड्यूल
कॉमनवेल्थ गेम्स में आज यानी 1 अगस्त का दिन भारत के लिए काफी बिजी रहने वाला है, बॉक्सिंग में 10 गोल्ड मेडल आज दाव पर होंगे। इसके अलावा भी कई मेडल इवेंट्स है। आईए एक नजर आज के शेड्यूल पर डालते हैं-
Commonwealth Games 2026: नीरज चोपड़ा को मिला सिल्वर, 8वें दिन भारत का शानदार प्रदर्शन, झटके 2 गोल्ड मेडल
भारत को इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो के इवेंट में दो मेडल जीतने में सफलता हासिल हुई, जिसमें नीरज चोपड़ा ने जहां सिल्वर पदक जीता तो वहीं 24 साल के यश वीर सिंह कांस्य पदक जीतने में कामयाब रहे।
ग्लासगो में शुक्रवार को भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। दक्षिण त्रिपुरा के छोटे से शहर बेलोनिया की साइकिल मैकेनिक की बेटी अस्मिता डे और दिल्ली के ककरोला इलाके में मजदूर परिवार से आने वाले हर्ष ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया। एक ने छह महीने पहले पिता को खोने का दर्द सहते हुए इतिहास रचा, तो दूसरे ने आर्थिक तंगी के बीच ऐसा मुकाम हासिल किया, जहां पहुंचने का सपना हर खिलाड़ी देखता है।सबसे पहले अस्मिता की कहानी... 10 साल की उम्र में टैलेंट हंट से हुई शुरुआत अस्मिता की प्रतिभा की पहचान साल 2014 में त्रिपुरा खेल विभाग के वार्षिक टैलेंट हंट कार्यक्रम में हुई। तब वह चौथी कक्षा में थीं और उनकी उम्र करीब 10 साल थी। इसके बाद उन्हें त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला मिला, जहां उन्होंने करीब पांच साल तक ट्रेनिंग ली। साल 2019 में वह भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचीं, जहां से उनके करियर को नई दिशा मिली। साल 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी मिली। इसके बाद से वह उत्तर प्रदेश की ओर से प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं। पिता के निधन के बाद भी नहीं टूटींअस्मिता की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी है। उनके पिता साइकिल मैकेनिक थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण थी। करीब छह महीने पहले ब्रेन स्ट्रोक से उनके पिता का निधन हो गया। इस सदमे के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला। नौकरी से पहले प्रतियोगिता के लिए थे कर्ज त्रिपुरा स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के एडिशन डायरेक्ट और शुरुआती कोच रहे डॉ. मिहिर शील बताते हैं कि आर्थिक तंगी के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए उन पर 4-5 लाख रुपए तक का कर्ज हो गया था। बाद में यूपी पुलिस में नौकरी मिलने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति कुछ बेहतर हुई। कोच बोले- सही सहयोग मिले तो इतिहास बन सकता है डॉ. मिहिर शील कहते हैं,'अस्मिता इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि अगर प्रतिभा को सही समय पर अवसर और सहयोग मिले तो वह इतिहास रच सकती है। साइकिल मैकेनिक के घर से निकलकर कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतना आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ी प्रेरणा है।' 800 मीटर दौड़ से जूडो तक का सफर अस्मिता ने खेल की शुरुआत 800 मीटर दौड़ से की थी, लेकिन त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में प्रशिक्षकों की सलाह पर उन्होंने जूडो अपनाया। बेलोनिया में बीना देबनाथ और बाद में त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल के कोच माणिक लाल देब ने उनकी प्रतिभा को निखारा। राष्ट्रीय स्कूल खेलों और खेलो इंडिया में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भोपाल स्थित SAI सेंटर में प्रशिक्षण का मौका मिला। वह भारतीय टीम में जगह बनाने वाली त्रिपुरा की पहली जूडो खिलाड़ी भी बनीं। ‘यह गोल्ड पिता और कोच को समर्पित’ महिलाओं के 48 किलोग्राम वेट कैटेगरी के फाइनल में उन्होंने कनाडा की हाइडी क्वाक को गोल्डन स्कोर में हराकर इतिहास रचा। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गईं। गोल्ड जीतने के बाद अस्मिता ने कहा, यह पदक मेरे लिए, मेरे राज्य और मेरे देश के लिए बहुत खास है। मैं इसे अपने कोच और अपने पिता को समर्पित करती हूं। पिता के निधन के बाद लगा था कि सब खत्म हो गया, लेकिन मैंने खुद को संभाला और आगे बढ़ी।' अब हर्ष सिंह की कहानी... चौथी कक्षा से शुरू किया जूडो दिल्ली के ककरोला गांव के पास रहने वाले हर्ष का सफर भी कम संघर्षभरा नहीं रहा। कोच हेमतं राठ ने बताया कि हर्ष के पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और मां हाउस वाइफ हैं। ये यूपी के रहने वाले हैं। चौथी कक्षा में हर्ष ने विक्ट्री जूडो क्लब से जूडो की शुरुआत की। इसके बाद लगातार मेहनत करते हुए वह राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। प्रैक्टिस के बाद दूध पीने के भी नहीं थे पैसे हर्ष के कोच हेमंत बताते हैं,'कई बार ऐसा होता था कि प्रैक्टिस के बाद घर जाकर भी उसे दूध नहीं मिलता था। तब हम लोग क्लब में ही उसे दूध पिलाते थे। मेरे साथी सत्यवान गहलोत बच्चों के लिए दूध और अंडों का खर्च खुद उठाते थे। हर्ष ने कभी हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ता रहा।' स्कूल नेशनल से कॉमनवेल्थ तक का सफर हर्ष ने स्कूल नेशनल, सीबीएसई नेशनल और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई बार सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार जीता। लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई। आज वह मिलिट्री पुलिस में सेवा दे रहे हैं और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया। कोच बोले- ओलिंपिक में भी मेडल जीतने का दम कोच हेमंत का मानना है कि हर्ष का सफर अभी और लंबा है। वह कहते हैं,'पहले वह हमारे लिए मेडल जीतता था, अब पूरे देश के लिए गोल्ड जीतकर आया है। मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन वह ओलंपिक में भी भारत के लिए मेडल जीतेगा। वह बेहद अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी है।'
ग्लासगो, 1 अगस्त (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन भी भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा जारी रहा। ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन के साथ-साथ साक्षी और प्रिया ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले जीते और फाइनल के लिए क्वालिफाई किया, जिससे देश के लिए कम से कम तीन और सिल्वर मेडल पक्के हो गए।
रहाणे का रिटायरमेंट बहाना... KKR को डुबो गई 2 साल पुरानी गलती!
अजिंक्य रहाणे के संन्यास के बाद KKR के सामने नए कप्तान की चुनौती खड़ी हो गई है. हालांकि टीम का नेतृत्व संकट रहाणे के रिटायरमेंट से नहीं, बल्कि IPL 2024 में खिताब जिताने वाले कप्तान श्रेयस अय्यर को टीम से अलग होने देने के फैसले से शुरू हुआ था.
CWG: भारतीय मुक्केबाजों का जलवा, लवलीना समेत 10 बॉक्सर फाइनल में
ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा जारी है. शुक्रवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में भारत के 10 मुक्केबाजों ने जीत दर्ज की. अब इन सभी 10 मुक्केबाजों से गोल्ड मेडल की आस है. भारतीय मुक्केबाजों ने सेमीफाइनल में जिस तरह प्रदर्शन किया, उससे साफ है कि टीम सिर्फ पदक जीतने नहीं, बल्कि बॉक्सिंग में स्वर्ण पदकों की झड़ी लगाने के इरादे से आई है.
भारत के जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 85.83 मीटर का थ्रो किया। भारत के ही यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता। श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने 89.75 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। ग्लासगो में चल रहे गेम्स के आठवें दिन भारत ने कुल 6 मेडल जीते। इनमें 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल रहे। जूडो में अस्मिता डे ने गेम्स के इतिहास में भारत को पहला गोल्ड दिलाया। इसके 15 मिनट बाद हर्ष सिंह ने दूसरा गोल्ड जीता।यामिनी मौर्य ने सिल्वर मेडल हासिल किया। एथलेटिक्स में तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन इवेंट में ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रचा। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इस इवेंट में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने। भारत मेडल टैली में 10वें नंबर पर है। टीम ने 5 गोल्ड, 12 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज सहित 23 मेडल जीते हैं। जेवलिन में भारत के दो मेडल, नीरज गोल्ड से चूके नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का बेस्ट थ्रो कर सिल्वर मेडल जीता। श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने 89.75 मीटर के साथ गोल्ड अपने नाम किया। मुकाबले का सबसे बड़ा सरप्राइज यशवीर सिंह रहे। उन्होंने आखिरी में 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। पाकिस्तान के ओलिंपिक चैंपियन अरशद नदीम टॉप-8 में भी जगह नहीं बना सके और तीन राउंड के बाद बाहर हो गए। नीचे नीरज और यश के अचीवमेंट्स के बारे में तेजस्विन ने डेकाथलॉन में रचा इतिहास तेजस्विन शंकर 7976 अंकों के साथ डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने। दो दिन तक चले इस इवेंट में उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया। इससे पहले तेजस्विन 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में हाई जंप का ब्रॉन्ज भी जीत चुके हैं। ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर (8096 अंक) ने गोल्ड और डेमियन वार्नर (8036 अंक) ने सिल्वर जीते। डेकाथलॉन में 10 अलग-अलग इवेंट्स होते हैं। हर इवेंट्स से मिले अंकों के आधार पर टोटल रैंकिंग बनती है। इस रैंकिंग के टॉप-3 प्लेयर्स को मेडल दिए जाते हैं। डेकाथलॉन में 100 मीटर दौड़, लॉन्ग जम्प, शॉटपुट, हाई जम्प, 400 मीटर दौड़, 110 मीटर हर्डल, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, जेवलिन थ्रो, 1500 मीटर दौड़ होते हैं। यहां से जूडो में मेडल जीतने वाले प्लेयर्स के बारे में 1. अस्मिता ने दिलाया भारत को पहला जूडो गोल्ड त्रिपुरा की 23 साल की अस्मिता डे ने फाइनल में शानदार वापसी करते हुए कनाडा की हेइडी क्वाच को हराया। मुकाबले की शुरुआत में उन्होंने एक अंक गंवाया और पेनल्टी भी मिली, लेकिन आक्रामक खेल जारी रखते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। गोल्डन स्कोर में अस्मिता ने निर्णायक अंक हासिल कर इतिहास रच दिया। 2. हर्ष ने 15 मिनट बाद दूसरा गोल्ड जीता 23 साल के हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को वाजा-अरी (10-0) से हराया। चार मिनट तक चले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों को अंक नहीं मिले, लेकिन अंतिम मिनट में हर्ष ने निर्णायक दांव खेलकर बढ़त बनाई और गोल्ड अपने नाम कर लिया। 3. यामिनी को सिल्वर मिला महिला 57 किग्रा वर्ग के फाइनल में यामिनी मौर्य को इंग्लैंड की एसेल्या टोपराक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। करीब सात मिनट तक चले मुकाबले में कोई भी खिलाड़ी अंक नहीं बना सकी। गोल्डन स्कोर में दोनों खिलाड़ियों पर दो-दो शिडो थे, लेकिन तीसरी वार्निंग मिलने के कारण यामिनी को हार झेलनी पड़ी और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। जूडो और कराते में अंतर बॉक्सिंग में भारत के 10 फाइनलिस्ट बॉक्सिंग में भारत के सभी 10 बॉक्सर फाइनल में पहुंच गए हैं। महिला वर्ग में प्रीति पवार (54 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), जैस्मीन लम्बोरिया (57 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), प्रिया घंघास (60 kg) और लवलीना बोरगोहेन (75 kg) ने फाइनल में जगह बनाई है। वहीं पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल (80 किग्रा), जादुमणि सिंह (55 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (90+ kg) गोल्ड मेडल मुकाबला खेलेंगे।
क्रिकेटर बनने का था सपना, अब कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर तेजस्विन शंकर ने रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 31 जुलाई का दिन काफी ऐतिहासिक रहा जिसमें डेकाथलॉन के इवेंट में तेजस्विन शंकर ने कांस्य पदक अपने नाम करने के साथ इतिहास रच दिया। इस इवेंट में तेजस्विन शंकर ने कुल 7976 अंक हासिल किए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन भारत की झोली में 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और इतने ही ब्रॉन्ज समेत कुल 6 मेडल आए। अब भारत के कुल मेडल की संख्या 23 हो गई है। मेडल टैली में भारत 10वें पायदान पर है।
Commonwealth Boxing: जादूमणि, अरुंधति और जैस्मीन समेत 6 भारतीय मुक्केबाज फाइनल में पहुंचे
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में कम से कम छह पदक पक्के कर लिये जब अरूंधति चौधरी और विश्व चैम्पियन जैसमीन लंबोरिया समेत छह मुक्केबाज शुक्रवार को फाइनल में पहुंच गए। अरुंधति चौधरी ने 70 किग्रा वर्ग में मौजूदा चैंपियन वेल्स की रोजी एक्लेस को हराकर बड़ा उलटफेर किया जबकि विश्व चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और जादूमणि सिंह (पुरुषों के 55 किग्रा) ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाते हुए भारत का दबदबा कायम किया। अरुंधति ने एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मुकाबले में रोजी एक्लेस को 4-0 के फैसले से हराया। भारतीय मुक्केबाज ने शुरुआती दो राउंड में अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखा और इसी दौरान रोजी को ‘स्टैंडिंग काउंट’ का सामना भी करना पड़ा। अरुंधति ने पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखा और प्रभावी पंच के दम पर गत चैंपियन पर बढ़त कायम रखी। वहीं, रोजी वापसी की कोशिश करती रहीं, लेकिन भारतीय मुक्केबाज की मजबूत रणनीति के सामने वह सफल नहीं हो सकीं। जैस्मीन सेमीफाइनल में एकतरफा प्रदर्शन करते हुए आरएससी (रेफरी द्वारा मुकाबला रोकना) से जीत दर्ज की। लेसोथो की रापेलांग मासेलेला की उनकी प्रतिद्वंद्वी को दूसरे राउंड के अंतिम क्षणों में तीसरी बार स्टैंडिंग काउंट मिलने के बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया। जैस्मीन ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और अपनी तेज पंच की बौछार कर से प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज पर दबाव बनाए रखा। जादूमणि ने सेमीफाइनल में नामीबिया के पी पी एम हाओसेब को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग के फाइनल में जगह बना ली। साक्षी ने महिलाओं के 51 किलोवर्ग में कनाडा की अम्बर जेन वाल को सर्वसम्मति से लिये गए फैसले में 5 . 0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। भिवानी की एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता 22 वर्षीय प्रीति ने जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराया। उन्होंने मुकाबले के दौरान शुरू से अंत तक दबदबा बनाए रखा। उन्होंने बांयी ओर से सटीक पंच और प्रभावी जवाबी हमले के दम पर म्वापे को लगातार दबाव में रखा। फाइनल में प्रीति के सामने स्कारलेट डेलगाडो की चुनौती होगी। कनाडा की इस मुक्केबाज ने एक अन्य सेमीफाइनल में इंग्लैंड की लॉरेन मैकी को 4-1 से हराया। म्वापे पूरे मुकाबले में प्रभावी पंच लगाने के लिए जूझती रहीं, जबकि प्रीति के संयोजित पंच का उनके पास कोई जवाब नहीं था। पहले दो राउंड में जाम्बिया की मुक्केबाज को तीन बार ‘एट काउंट’ का सामना करना पड़ा, जो भारतीय मुक्केबाज के एकतरफा वर्चस्व का प्रमाण रहा। दूसरे राउंड में प्रीति के प्रदर्शन से प्रभावित सभी पांच निर्णायकों ने उन्हें 10-8 का स्कोर दिया। अंतिम राउंड में म्वापे मुकाबले में वापसी की कोशिश करने के बजाय प्रीति के आक्रामक हमलों से बचती नजर आईं। दूसरी ओर, अंकुश ने भी 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। शुरुआती दो राउंड में भारतीय मुक्केबाज के शानदार प्रदर्शन के सामने ओफोरी बार-बार ‘क्लिंचिंग’ (प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज को जकड़ कर मुकाबले की गति प्रभावित करने की कोशिश) का सहारा लेने को मजबूर हुए। दूसरे राउंड की शुरुआत में ओफोरी ने आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश की, लेकिन अंकुश ने संयम बनाए रखते हुए दबाव को आसानी से झेला और सटीक पंचों के संयोजन से जवाब देते हुए एकतरफा जीत दर्ज की।
Commonwealth Games: लॉन बॉल्स में Navneet Singh और Dinesh Kumar ने दर्ज की चौथी जीत
भारत के नवनीत सिंह और दिनेश कुमार की जोड़ी ने शुक्रवार को राष्ट्रमंडल खेलों में लॉन बॉल्स पुरुष युगल वर्ग की सेक्शनल प्ले स्पर्धा में फॉकलैंड आइलैंड्स के खिलाफ सीधे सेटों में शानदार जीत दर्ज की। भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और फॉकलैंड आइलैंड्स के इयान बार्न्स और ऑलिवर थॉम्पसन को 6-3 और 10-1 के स्कोर से आसानी से हराया। इस जीत के साथ भारतीय जोड़ी ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना अजेय रिकॉर्ड बरकरार रखा है। टीम ने लगातार चार जीत दर्ज की हैं और अब उनका अगला मुकाबला इंग्लैंड के खिलाफ होगा जो ग्रुप का अंतिम अहम मैच होगा। इंग्लैंड ने भी अपने सारे मैच जीते हैं और अंकों के औसत के आधार पर शीर्ष पर है। पुरूष युगल वर्ग में चारों सेक्शन से शीर्ष दो दो टीमें क्वार्टर फाइनल खेलेंगी। महिला एकल सेक्शन सी के चौथे दौर में भारत की नयनमोनी सैकिया ने जाम्बिया की माइल्डरेड एम को 2 . 0 से हराया।
Commonwealth Games में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास
(अपराजिता उपाध्याय)(फोटो सहित)ग्लास्गो, 31 जुलाई भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने शुक्रवार को राष्ट्रमंडल खेलों में इतिहास रच दिया। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में भारत के लिए पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीते जबकि यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीतकर देश के सबसे सफल जूडो अभियान को पूरा किया। भारत ने इस प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारतीय जूडो खिलाड़ी हर बार पदक जीतते रहे थे, लेकिन पीला तमगा हासिल नहीं कर सके। त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता। त्रिपुरा की 23 वर्ष की अस्मिता शुरूआत में पिछड़ गई थी और उन्हें पेनल्टी भी लगी। उन्होंने हालांकि शानदार वापसी करते हुए स्कोर 1 . 1 से हराकर किया। चार मिनट के मुकाबले में दोनों में से किसी को निर्णायक स्कोर नहीं मिल सका जिससे मुकाबला गोल्डन स्कोर में गया। इसमें पहले स्कोर करने वाले को विजेता घोषित किया जाता है। अस्मिता ने सडन डैथ में आक्रामक प्रदर्शन करके जीत दर्ज की। हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता। पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रहे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया। शुरूआती चरण में कोई भी खिलाड़ी हावी होता नहीं दिख रहा था लेकिन आखिरी 41 मिनट में हर्ष ने आक्रामक खेल दिखाया। जोशुआ ओशियाना चैम्पियनशिप और आस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में कई बार जीत चुके हैं। उन्होंने बर्मिघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य जीता था और वह ओलंपियन भी हैं। हर्ष ने कहा, ‘‘मेरी वजह से इतने बड़े मंच पर राष्ट्रगान बजना बहुत खास अहसास है। मैं यह पदक अपनी मां को समर्पित करता हूं। ’’इन दोनों स्वर्ण पदकों ने भारतीय जूडो के लिए एक नया दौर शुरू किया और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक का 30 साल से अधिक पुराना इंतजार खत्म किया। यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 की रजत पदक विजेता और अनुभवी खिलाड़ी 28 वर्ष की टॉपराक के खिलाफ यामिनी ने बराबरी का खेल दिखाया। शुरुआत से ही दोनों खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया जिससे मुकाबला बेहद कड़ा रहा और इसका फैसला गोल्डन स्कोर में हुआ। टॉपराक ने यामिनी को जमीन पर गिराकर अंक हासिल करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने शानदार बचाव किया। टॉपराक के तेज हमलों से यामिनी पर दबाव बढ़ गया। इसी दौरान रेफरी ने यामिनी को एक पेनल्टी दे दी। कोई भी खिलाड़ी अंक नहीं बना सकी जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंचा। अतिरिक्त समय में दोनों के बीच कड़ा संघर्ष जारी रहा। आखिरकार करीब तीन मिनट तक चले गोल्डन स्कोर मुकाबले में टॉपराक के लगातार हमलों के कारण यामिनी से गलती हुई। टॉपराक ने इप्पोन के जरिए जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल किया। मध्यप्रदेश के सागर की रहने वाली यामिनी दो बार सीनियर राष्ट्रीय चैम्पियन रह चुकी हैं। उन्होंने 2022 से लगातार भारत के लिये खेला है और 2022 राष्ट्रीय खेल, 2025 हांगकांग एशियाई ओपन, 2026 डकार अफ्रीका ओपन में स्वर्ण पदक जीते। इससे पहले दिन में अस्मिता, हर्ष और यामिनी ने फाइनल में पहुंचकर भारत के लिए तीन पदक पक्के कर दिए थे। अस्मिता ने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को इप्पोन से हराया और फिर सेमीफाइनल में घरेलू खिलाड़ी समर शॉ को हराकर फाइनल में जगह बनाई। हर्ष ने पहले मुकाबले में मलावी के चिकोंडी कथेवेरा को इप्पोन से हराया, फिर वानुअतु के खिलाड़ी को मात दी और सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को हराकर फाइनल में पहुंचे। यामिनी ने घाना की फ्रेमा अग्येई और दक्षिण अफ्रीका की डोन्ने ब्रेटेनबाख को हराकर फाइनल में जगह बनाई। हालांकि भारत के श्रद्धा कदुबाल चोपड़े और रोहित बसीर मजगुल अपने-अपने रेपेचेज मुकाबले हारकर पदक की दौड़ से बाहर हो गए।
Yamini Maurya ने Glasgow में जीता रजत पदक, गोल्डन स्कोर में टॉपराक से हारीं
भारतीय जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम वर्ग के गोल्डन स्कोर तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। शुरुआत से ही दोनों खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया जिससे मुकाबला बेहद कड़ा रहा और इसका फैसला गोल्डन स्कोर में हुआ। टॉपराक ने यामिनी को जमीन पर गिराकर अंक हासिल करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने शानदार बचाव किया। टॉपराक के तेज हमलों से यामिनी पर दबाव बढ़ गया। इसी दौरान रेफरी ने यामिनी को एक पेनल्टी दे दी। कोई भी खिलाड़ी अंक नहीं बना सकी जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंचा। अतिरिक्त समय में दोनों के बीच कड़ा संघर्ष जारी रहा। आखिरकार करीब तीन मिनट तक चले गोल्डन स्कोर मुकाबले में टॉपराक के लगातार हमलों के कारण यामिनी से गलती हुई। टॉपराक ने इप्पोन के जरिए जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल किया।
Asmita Dey ने Commonwealth Games में रचा इतिहास, जूडो में जीता ऐतिहासिक स्वर्ण पदक
भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक जीतने की खबर सबसे पहले जिस व्यक्ति को देना चाहती थीं, वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। अस्मिता के पिता सात महीने पहले ‘ब्रेन स्ट्रोक’ के कारण चल बसे। वह साइकिल मैकेनिक थे और रोज करीब 300 रुपये कमाते थे। त्रिपुरा के एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। शुक्रवार को जब 23 साल की अस्मिता ने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 48 किग्रा से कम के भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडो खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा, तो यह पदक जितना उनका था, उतना ही उनके पिता का भी था। अस्मिता ने भावुक होकर कहा, ‘‘जब मेरे पिता का निधन हुआ, तो मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया, क्योंकि वही मेरा सबसे बड़ा सहारा थे। ’’कुछ पल के लिए जश्न की जगह उन यादों ने ले ली, जो उस व्यक्ति से जुड़ी थीं जिसने उनके सपने को तब से संजोया था जब वह भारत का सपना भी नहीं बना था। अस्मिता ने कहा, ‘‘मैं त्रिपुरा के एक बहुत छोटे गांव से हूं। वहां लोग इतने बड़े सपने नहीं देखते, लेकिन पापा ने हमेशा मेरा साथ दिया। ’’परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता साइकिल ठीक करके रोज करीब 300 रुपये कमाते थे जिससे घर का खर्च चलता था। परिवार साधारण मिट्टी के घर में रहता था, लेकिन उन्होंने कभी पैसों की कमी को बेटी के खेल के रास्ते में नहीं आने दिया। जब घुटने की चोट के कारण अस्मिता का करियर खतरे में पड़ गया तो उनके पिता उन्हें इलाज के लिए दिल्ली लेकर आए, दवाइयां खरीदीं और अपनी क्षमता के अनुसार हर मदद की। पिछले साल दिसंबर में पिता की अचानक मौत ने अस्मिता को तोड़ दिया। उन्हें लगा कि उनका सबसे बड़ा सहारा और उनका सपना दोनों खत्म हो गए हैं। लेकिन उनकी मां ने पति की जगह जिम्मेदारी संभाली। अंतिम संस्कार के केवल 10 दिन बाद उन्होंने अस्मिता से दोबारा ट्रेनिंग शुरू करने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं आज तुम्हें रोक दूंगी, तो तुम्हारे पिता सोचेंगे कि मैंने तुम्हारे सपने तोड़ दिए। ’’इसके बाद अस्मिता अपना सामान लेकर भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र लौट गईं। राष्ट्रमंडल खेलों से पहले वह काफी तनाव में थीं और कई रातों तक सो नहीं पाती थीं। उन्होंने कहा कि पदक जीतने से पहले वह मुकाबलों के बारे में सोचती रहती थीं और सुबह 5:30 बजे अभ्यास के लिए उठ जाती थीं। ग्लास्गो पहुंचने के बाद भी उनका डर कम नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सोच रही थी कि क्या होगा। बस मेरे दिमाग में यही था कि मुझे सबको हराकर जीतना है। ’’उनका लक्ष्य इतना मजबूत था कि उन्होंने अपनी पसंदीदा मिठाई लवंगलता भी नहीं खाई। उनके भाई द्वारा खरीदी गई मिठाई घर के फ्रिज में रखी रही। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि कई बार खाने का मन हुआ, लेकिन फिर खुद को रोक लिया। शुक्रवार को उनकी सारी मेहनत और त्याग सफल हो गया। इस स्वर्ण पदक के साथ अस्मिता डे ने भारतीय जूडो के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
Commonwealth Games: अरुंधति, प्रीति, जैस्मीन, अंकुश और जादूमणि फाइनल में पहुंचे
अरुंधति चौधरी ने 70 किग्रा वर्ग में मौजूदा चैंपियन वेल्स की रोजी एक्लेस को हराकर बड़ा उलटफेर किया जबकि विश्व चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और जादूमणि सिंह (पुरुषों के 55 किग्रा) ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाते हुए राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में भारत का दबदबा कायम किया। अरुंधति ने एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मुकाबले में रोजी एक्लेस को 4-0 के फैसले से हराया। भारतीय मुक्केबाज ने शुरुआती दो राउंड में अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखा और इसी दौरान रोजी को ‘स्टैंडिंग काउंट’ का सामना भी करना पड़ा। अरुंधति ने पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखा और प्रभावी पंच के दम पर गत चैंपियन पर बढ़त कायम रखी। वहीं, रोजी वापसी की कोशिश करती रहीं, लेकिन भारतीय मुक्केबाज की मजबूत रणनीति के सामने वह सफल नहीं हो सकीं। जैस्मीन सेमीफाइनल में एकतरफा प्रदर्शन करते हुए आरएससी (रेफरी द्वारा मुकाबला रोकना) से जीत दर्ज की। लेसोथो की रापेलांग मासेलेला की उनकी प्रतिद्वंद्वी को दूसरे राउंड के अंतिम क्षणों में तीसरी बार स्टैंडिंग काउंट मिलने के बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया। जैस्मीन ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और अपनी तेज पंच की बौछार कर से प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज पर दबाव बनाए रखा। जादूमणि ने सेमीफाइनल में नामीबिया के पी पी एम हाओसेब को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग के फाइनल में जगह बना ली। भिवानी की एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता 22 वर्षीय प्रीति ने जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराया। उन्होंने मुकाबले के दौरान शुरू से अंत तक दबदबा बनाए रखा। उन्होंने बांयी ओर से सटीक पंच और प्रभावी जवाबी हमले के दम पर म्वापे को लगातार दबाव में रखा। फाइनल में प्रीति के सामने स्कारलेट डेलगाडो की चुनौती होगी। कनाडा की इस मुक्केबाज ने एक अन्य सेमीफाइनल में इंग्लैंड की लॉरेन मैकी को 4-1 से हराया। प्रीति ने जीत के बाद पीटीआई से कहा, मैं बहुत खुश हूं कि जिस तरह की तैयारी की थी, उसे रिंग में उतारने में सफल रही। अब मेरा पूरा ध्यान स्वर्ण पदक जीतने पर है और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी।’’उन्होंने कहा, ‘‘ मैं किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हल्के में नहीं लेती। अपने कोच के साथ हर मुकाबले की पूरी तैयारी करती हूं और खुशी है कि उन योजनाओं को अमल में ला पा रही हूं।’’म्वापे पूरे मुकाबले में प्रभावी पंच लगाने के लिए जूझती रहीं, जबकि प्रीति के संयोजित पंच का उनके पास कोई जवाब नहीं था। पहले दो राउंड में जाम्बिया की मुक्केबाज को तीन बार ‘एट काउंट’ का सामना करना पड़ा, जो भारतीय मुक्केबाज के एकतरफा वर्चस्व का प्रमाण रहा। दूसरे राउंड में प्रीति के प्रदर्शन से प्रभावित सभी पांच निर्णायकों ने उन्हें 10-8 का स्कोर दिया। अंतिम राउंड में म्वापे मुकाबले में वापसी की कोशिश करने के बजाय प्रीति के आक्रामक हमलों से बचती नजर आईं। दूसरी ओर, अंकुश ने भी 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। शुरुआती दो राउंड में भारतीय मुक्केबाज के शानदार प्रदर्शन के सामने ओफोरी बार-बार ‘क्लिंचिंग’ (प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज को जकड़ कर मुकाबले की गति प्रभावित करने की कोशिश) का सहारा लेने को मजबूर हुए। दूसरे राउंड की शुरुआत में ओफोरी ने आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश की, लेकिन अंकुश ने संयम बनाए रखते हुए दबाव को आसानी से झेला और सटीक पंचों के संयोजन से जवाब देते हुए एकतरफा जीत दर्ज की।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने देश के लिए सिल्वर मेडल जीता है। नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए पदक तालिका में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इस कड़े मुकाबले में श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम तीन थ्रो के बाद ही प्रतियोगिता से बाहर हो गए। जैसे ही नीरज मेडल विनर बने, पानीपत के गांव खंडरा में उनके घर खुशियां मनाई गई। दैनिक भास्कर एप से फोन पर बातचीत के दौरान नीरज चोपड़ा के पिता सतीश चोपड़ा ने कहा कि बेटे ने एक बार फिर देश की झोली में मेडल डाला, इसकी बेहद ज्यादा खुशी है, लेकिन उम्मीद गोल्ड मेडल की थी। उन्होंने बेटे के गोल्ड मेडल से चूकने दो मुख्य वजहें बताई। इनमें पहली वजह वहां का तेज हवा वाला ठंडा मौसम रहा। उन्होंने कहा- तेज हवा के कारण जिस खिलाड़ी ने अपना पहला जो भी बेस्ट थ्रो किया, इसके बाद उससे आगे कोई नहीं जा सका। सभी पिछड़ते ही रहे। दूसरा कारण बीते दिनों नीरज को जो चोट लगी थी, वो भी कारण रहा है। मगर, हर बड़े मुकाबले में हर खिलाड़ी पर प्रेशर रहता ही है। इसके बावजूद बेटे को सिल्वर मेडल मिला, इसकी हमें बहुत खुशी है। पिता ने ये बताया कि परिवार के सभी लोग बाहर गए हुए हैं, इसी वजह इस बार मुकाबला इक्ट्ठा नहीं देख पाए। नीरज का मैच देखते उनके परिवार के PHOTOS… फाइनल में उतार-चढ़ाव वाला रहा नीरज का प्रदर्शन फाइनल मुकाबले के दौरान नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उनके पहले प्रयास में 80.97 मीटर, दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर, तीसरे प्रयास में 81.29 मीटर और चौथे प्रयास में 80.73 मीटर दूर भाला फेंका। अपने चौथे थ्रो के बाद नीरज खुद के प्रदर्शन से काफी असंतुष्ट दिखे। वहीं, पांचवें और छठे प्रयास में भाला 80 मीटर से कम दूरी पर गिरता देख उन्होंने अपने थ्रो रद्द कर दिए। दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर के थ्रो के आधार पर उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। दूसरे थ्रो से बजी तालिया, परिजनों ने कराया मुंह मीठा जब नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर का थ्रो किया, तो पूरे घर में तालियों की गूंज सुनाई दी और सभी चेहरे खिल उठे। सिल्वर मेडल पक्का होते ही देर रात घर पर मौजूद परिजनों और ग्रामीणों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाकर नीरज की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की और एक बार फिर देश का नाम रोशन करने के लिए उन्हें बधाई दी। चाचा भीम बोले- आने वाले समय में ज्वेलिन पर भारत का होगा दबदबा भतीजे नीरज चोपड़ा के सिल्वर मेडल जीतने के बाद चाचा भीम चोपड़ा ने कहा कि उन्हें इस मेडल की भी बहुत खुशी है। भारत की झोली में दो पदक आए, इससे खुशी और ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अब भारत में 80-85 मीटर तक भाला फेंकने वाले कई खिलाड़ी सामने आ गए हैं। इससे भविष्य की तस्वीर साफ है। जिस तरह पहले फिनलैंड का ज्वेलिन पर दबदबा होता था, आने वाले समय में भारत का दबदबा नजर आएगा। पानीपत के गांव खंडरा में जश्न, पिता और दादा नहीं थे मौजूद नीरज चोपड़ा के इस ऐतिहासिक फाइनल मुकाबले को देखने के लिए हरियाणा में उनके पैतृक गांव खंडरा (पानीपत) स्थित आवास पर देर रात ग्रामीणों का जमावड़ा लगा। नीरज के चाचा भीम चोपड़ा ने ग्रामीणों के साथ घर के वेटिंग एरिया में बैठकर पूरे मैच का आनंद लिया। हालांकि, उनके पिता सतीश चोपड़ा और दादा धर्म सिंह चोपड़ा इस बार मौजूद नहीं थे।
कॉमनवेल्थ गेम्स के नौवें दिन भारतीय मुक्केबाज 10 गोल्ड मेडल मैच में हिस्सा लेंगे। इनमें ओलिंपिक मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन भी शामिल हैं। शनिवार को भारतीय खिलाड़ी बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, पैरा एथलेटिक्स, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स में चुनौती पेश करेंगे। दिनभर में कुल 44 गोल्ड मेडल इवेंट्स होंगे। इनमें 19 एथलेटिक्स-पैरा एथलेटिक्स, 14 बॉक्सिंग, 6 ट्रैक-पैरा ट्रैक साइक्लिंग और 5 जूडो के फाइनल शामिल हैं। बॉक्सिंग में भारत के 10 मेडल पक्के भारत की शुरुआत दोपहर 3:30 बजे प्रीति पवार के महिला 54 kg फाइनल से होगी। इसके बाद 3:45 बजे जैस्मिन लांबोरिया (57 kg) और 4:15 बजे जदुमणि सिंह (55 kg) गोल्ड के लिए उतरेंगे। रात 9 बजे साक्षी चौधरी 51 kg, 9:15 बजे प्रिया घंघास 60 kg, 9:30 बजे अरुंधति चौधरी 70 kg, 10:15 बजे लवलीना बोरगोहेन 75 kg, 10:45 बजे सचिन सिवाच 60 kg, 11:15 बजे अंकुश पंघाल 80 kg और 11:45 बजे नरेंद्र बरवाल 90+ kg में अपने फाइनल मुकाबले खेलेंगे। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भी मेडल की उम्मीद दोपहर 2:35 बजे शुभम जुयाल और सोमन राणा पुरुष शॉटपुट एफ-57 फाइनल में उतरेंगे। इसके बाद 2:40 बजे प्रवीण चित्रावेल और सेल्वा प्रभु तिरुमारण पुरुष ट्रिपल जंप में हिस्सा लेंगे। फिर दोपहर 2:50 बजे रमेश शन्मुगम पुरुष 1500 मीटर टी-54 और 3 बजे प्रियंका गोस्वामी एंड रवीना गायकवाड़ महिला 10,000 मीटर रेस वॉक फाइनल खेलेंगी। रात 11:35 बजे देव मीणा और कुलदीप कुमार पुरुष पोल वॉल्ट फाइनल में उतरेंगे। इसके बाद 12:15 बजे गुलवीर सिंह पुरुष 5000 मीटर और 1:50 बजे भारत की मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम पदक के लिए चुनौती पेश करेगी। जूडो और ट्रैक साइक्लिंग में भी मुकाबले जूडो में उन्नति शर्मा, करणजीत सिंह मान, हर्ष तोकस और इनुंगानबी ताखेल्लामबम अपने-अपने शुरुआती मुकाबले खेलेंगे। जीत मिलने पर वे अगले दौर में पहुंचेंगे। ट्रैक साइक्लिंग में 4:19 बजे दिनेश कुमार और हर्षवीर सिंह सेखों पुरुष 10 किमी स्क्रैच रेस क्वालिफाइंग में उतरेंगे। क्वालिफाई करने पर दोनों रात 10:50 बजे फाइनल खेलेंगे। लॉन बॉल्स में इंग्लैंड से मुकाबला लॉन बॉल्स में 3:50 बजे नवनीत सिंह और दिनेश कुमार की भारतीय जोड़ी पुरुष पेयर्स सेक्शनल प्ले में इंग्लैंड का सामना करेगी। क्वालिफाई करने पर यही जोड़ी रात 11:45 बजे सेमीफाइनल खेलेगी। वहीं 10:20 बजे नयनमोनी सैकिया महिला सिंगल्स सेक्शनल प्ले में साउथ अफ्रीका की ब्रिजेट हर्सेलमैन के खिलाफ उतरेंगी।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में नया इतिहास रच दिया। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने स्वर्ण, जबकि यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीता। जानिए जूडो कैसे खेला जाता है, इसमें अंक कैसे मिलते हैं और भारत ने 34 साल का स्वर्ण पदक का इंतजार कैसे खत्म किया।
सीडब्ल्यूजी 2026: तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल के साथ इतिहास रचा
ग्लासगो, 1 अगस्त (आईएएनएस)। तेजस्विन शंकर ने शुक्रवार देर रात (भारतीय समय के अनुसार) कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों के 'डेकाथलॉन' में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। हाई जंपर से डेकाथलीट बने तेजस्विन शंकर कॉमनवेल्थ गेम्स में दो अलग-अलग इवेंट्स में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। इससे पहले, उन्होंने बर्मिंघम में 2022 एडिशन में पुरुषों की हाई जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
सीडब्ल्यूजी 2026: मेंस जैवलिन थ्रो में डबल धमाल, नीरज ने जीता सिल्वर, यशवीर के नाम ब्रॉन्ज
ग्लासगो, 1 अगस्त (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शुक्रवार देर रात (भारतीय समय के अनुसार) मेंस जैवलिन थ्रो इवेंट में देश को दो मेडल हाथ लगे। नीरज चोपड़ा ने (85.83 मीटर) ने सिल्वर जीता, जबकि यशवीर सिंह (85.41) ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज (89.75 मीटर) ने खिताब अपने नाम किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पुरुष वर्ग में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने।
नीरज चोपड़ा और यश वीर सिंह ने CWG 2026 में जैवलिन में दिखाया कमाल, सिल्वर और ब्रॉन्ज किया अपने नाम
भारत के स्टार जैवलिन थ्रो एथलीट नीरज चोपड़ा का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कमाल देखने को मिला है, जिसमें वह सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रहे हैं, जबकि यश वीर सिंह ने कांस्य पदक अपने नाम किया है।
पैर में चोट के कारण वह अपने पसंदीदा हाई जंप में भी नहीं उतर सके, लेकिन 10 कठिन स्पर्धाओं में संघर्ष करते हुए भारत को डेकाथलॉन का पहला राष्ट्रमंडल पदक दिलाकर नई मिसाल कायम कर दी।
पाकिस्तान के ओलंपिक 2024 और कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 चैंपियन अरशद नदीम ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के भाला फेंक फाइनल में बड़ा उलटफेर झेल गए।
भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए।
Glasgow Commonwealth Games Day 9 Live Updates :नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स का आज नौवां दिन है। आज कई बड़े मुकाबले खेले जाने हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वर्ण पदक विजेता अस्मिता डे और हर्ष सिंह को दी बधाई
नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। ग्लासगो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शुक्रवार के दिन भारत की झोली में जूडो में 2 स्वर्ण पदक आए। अस्मिता डे ने पहला स्वर्ण पदक जीता, जबकि दूसरा स्वर्ण पदक हर्ष सिंह ने जीता। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अस्मिता डे और हर्ष सिंह को उनकी ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी है।
मीराबाई चानू, शर्मिला धनखड़ और दिलीप गवित 'अहमदाबाद एक्सपीरियंस सेंटर' पहुंचे
ग्लासगो, 31 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय दल ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। शुक्रवार का दिन भारत के लिए विशेष रहा। जूडो में जहां दो स्वर्ण पदक और एक रजत पदक आया, तो 5 मुक्केबाजों ने फाइनल में जगह बनाकर कम-से-कम 5 रजत पदक पक्के कर दिए हैं। ग्लासगो में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद हैं। संघवी एथलीटों का हौसला बढ़ाने के साथ ही अहमदाबाद में होने वाले अगले कॉमनवेल्थ गेम्स के प्रचार-प्रसार में भी लगे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: यामिनी ने जूडो में जीता रजत पदक
ग्लासगो, 31 जुलाई (आईएएनएस)। ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को जूडो में महिलाओं के 57 किग्रा के फाइनल में यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीता। भारत का दिन का जूडो में यह तीसरा पदक था।
अस्मिता और हर्ष के ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने दी बधाई
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। ग्लासगो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शुक्रवार के दिन भारत के लिए स्वर्णिम रहा है। भारत की झोली में जूडो में 2 स्वर्ण पदक आए हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत को पहली हार जूडो में स्वर्ण पदक मिला है। अस्मिता डे ने पहला स्वर्ण पदक जीता, जबकि दूसरा स्वर्ण पदक हर्ष सिंह ने जीता।
Commonwealth Games: Asmita Day और Harsh Singh ने Judo में दिलाए दो Gold, PM Modi ने दी बधाई
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) 2026 में शुक्रवार को भारत के पदकों की संख्या और बढ़ गई, जब जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज़ को हराकर यह ऐतिहासिक गोल्ड मेडल हासिल किया। खास बात यह है कि उनकी जीत ठीक उस समय हुई जब अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर गोल्ड मेडल जीता। सिंह की जीत के साथ ही, चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के गोल्ड मेडल की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन! गोल्ड मेडल जीतने पर हर्ष सिंह को बधाई। उनके शानदार प्रदर्शन में उनका जुनून और लगन साफ झलकती है। भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं। इससे पहले अरुंधति चौधरी ने 70 किग्रा वर्ग में मौजूदा चैंपियन वेल्स की रोजी एक्लेस को हराकर बड़ा उलटफेर किया जबकि विश्व चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और जादूमणि सिंह (पुरुषों के 55 किग्रा) ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाते हुए राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में भारत का दबदबा कायम किया। अरुंधति ने एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मुकाबले में रोजी एक्लेस को 4-0 के फैसले से हराया।भारतीय मुक्केबाज ने शुरुआती दो राउंड में अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखा और इसी दौरान रोजी को ‘स्टैंडिंग काउंट’ का सामना भी करना पड़ा। अरुंधति ने पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखा और प्रभावी पंच के दम पर गत चैंपियन पर बढ़त कायम रखी। वहीं, रोजी वापसी की कोशिश करती रहीं, लेकिन भारतीय मुक्केबाज की मजबूत रणनीति के सामने वह सफल नहीं हो सकीं। जैस्मीन सेमीफाइनल में एकतरफा प्रदर्शन करते हुए आरएससी (रेफरी द्वारा मुकाबला रोकना) से जीत दर्ज की। लेसोथो की रापेलांग मासेलेला की उनकी प्रतिद्वंद्वी को दूसरे राउंड के अंतिम क्षणों में तीसरी बार स्टैंडिंग काउंट मिलने के बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया। जैस्मीन ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और अपनी तेज पंच की बौछार कर से प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज पर दबाव बनाए रखा। जादूमणि ने सेमीफाइनल में नामीबिया के पी पी एम हाओसेब को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग के फाइनल में जगह बना ली।
कॉमनवेल्थ में अस्मिता का इतिहास: भारत को मिला पहला जूडो स्वर्ण
अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अस्मिता कॉमनवेल्थ खेलों के इतिहास में भारत के लिए जूडो में पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली जूडोका बन गई हैं
ग्लासगो, 31 जुलाई (आईएएनएस)। अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अस्मिता कॉमनवेल्थ खेलों के इतिहास में भारत के लिए जूडो में पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली जूडोका बन गई हैं। शुक्रवार को हुए जूडो के फाइनल मुकाबले में अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 हराकर स्वर्ण पदक जीता। डे ने अपने पदक को उन लोगों को समर्पित किया है जो उनके साथ हमेशा खड़े रहे।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का गोल्डन डे, ऐसे रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. अस्मिता डे ने पहला स्वर्ण जीता, जबकि 30 मिनट बाद हर्ष सिंह ने दूसरा गोल्ड अपने नाम कर भारत का गौरव बढ़ाया. वीडियो में जानें कैसा रहा कॉमनवेल्थ गेम्स में इन प्लेयर्स का प्रदर्शन और भारत के पास अब तक कितने मेडल्स.

