Tennis Union चुनाव में Mahesh Bhupathi और Sania Mirza की एंट्री, Paes बाहर
भारतीय टेनिस में अब खेल के मैदान के बाद प्रशासन में भी बड़े खिलाड़ियों की भूमिका बढ़ने की तैयारी है। इसी कड़ी में महेश भूपति और सानिया मिर्जा ने अखिल भारतीय टेनिस यूनियन में प्रतिनिधित्व पाने के लिए नामांकन दाखिल किया है। दोनों ने 7 नवंबर को होने वाले खेलों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले खिलाड़ियों के चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। हालांकि, भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस का नाम उम्मीदवारों की सूची में नहीं है, जिससे यूनियन के अध्यक्ष पद के लिए उनकी दावेदारी को बड़ा झटका लगा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, पेस की उम्मीदवारी को बंगाल टेनिस यूनियन का समर्थन मिला था। इसके बावजूद वह उत्कृष्ट खिलाड़ियों की श्रेणी के तहत होने वाले चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सके। इस श्रेणी में कुल 40 खिलाड़ियों की सूची है और पेस इसमें पहले स्तर पर रखे गए एकमात्र खिलाड़ी हैं। लेकिन केवल इस सूची में शामिल होना राष्ट्रीय यूनियन के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है। नए राष्ट्रीय खेल प्रशासन कानून और उसके नियमों के मुताबिक, किसी राष्ट्रीय खेल यूनियन में पदाधिकारी बनने के लिए उम्मीदवार को राज्य खेल यूनियन में कम से कम एक कार्यकाल तक पदाधिकारी के रूप में काम करना जरूरी है। पेस ने राज्य यूनियन में जरूरी अवधि पूरी नहीं की है। ऐसे में उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चुनाव के जरिए उन्हें राष्ट्रीय यूनियन में प्रतिनिधित्व पाने का रास्ता नहीं मिल सका। हालांकि, वह 27 नवंबर को होने वाले अखिल भारतीय टेनिस यूनियन के चुनाव में बंगाल का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, लेकिन मौजूदा नियमों के तहत इस रास्ते से अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। दूसरी ओर, महेश भूपति ने खेल प्रशासन में अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि हर खेल यूनियन में ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च स्तर पर खेला हो। उनके मुताबिक, ऐसे खिलाड़ी अपने अनुभव से खेल को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने बैडमिंटन में पुलेला गोपीचंद के योगदान का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके काम से इस खेल में बड़ा बदलाव आया है। भूपति और सानिया के अलावा 6 अन्य पूर्व खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट खिलाड़ियों की श्रेणी के चुनाव के लिए नामांकन किया है। इनमें अंकिता भांबरी, डेविस कप के मौजूदा कोच आशुतोष सिंह, गौरव नाटेकर, जानकी कृष्णमूर्ति, शालिनी ठाकुर चावला और बिली जीन किंग कप की मौजूदा कप्तान विशाल उप्पल शामिल हैं। इस तरह इस श्रेणी में कुल 8 पूर्व खिलाड़ी चुनावी मैदान में हैं। यूनियन की कार्यकारी समिति के लिए नामांकन दाखिल करने वालों में भूपति, सानिया, अंकिता, जानकी और विशाल उप्पल के नाम शामिल हैं। संशोधित संविधान के अनुसार, यूनियन की आम सभा में उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए 4 प्रतिनिधियों की जगह तय की गई है। इनमें 2 पुरुष और 2 महिलाएं होंगी। वहीं, 15 सदस्यों वाली कार्यकारी समिति में भी इस श्रेणी से 1 पुरुष और 1 महिला प्रतिनिधि चुने जाएंगे। गौरतलब है कि महेश भूपति युगल टेनिस में दुनिया के पूर्व नंबर 1 खिलाड़ी रहे हैं और उन्होंने कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। सानिया मिर्जा भी युगल में दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी रह चुकी हैं। उन्होंने महिला और मिक्स डबल्स में कुल 6 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। दोनों का प्रशासन में आने का प्रयास भारतीय टेनिस के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि खेल के नए नियमों का मकसद खिलाड़ियों को फैसले लेने की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देना है। अब 7 नवंबर के चुनाव और 27 नवंबर को होने वाले यूनियन के चुनावों पर नजर रहेगी, जिनसे भारतीय टेनिस के प्रशासन की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।
Naomi Osaka ने Retirement पर तोड़ी चुप्पी, Tennis करियर पर बेटी की खुशी को बताया अहम
जापान की स्टार टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका ने माना है कि वह एक बार फिर अपने पुराने शानदार खेल के करीब पहुंच रही हैं, लेकिन उनके मन में अब भी टेनिस से संन्यास लेने के विचार आते रहते हैं। 4 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुकीं ओसाका ने कहा कि कई बार वह अपने भविष्य के बारे में सोचती हैं और खुद से सवाल करती हैं कि आखिर वह कितने समय तक टेनिस खेलना जारी रखेंगी। उनकी वापसी के इस दौर में परिवार और बेटी की जरूरतें भी उनके फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। 29 वर्षीय ओसाका अगले सप्ताह टोक्यो में होने वाले पैन पैसिफिक ओपन में खेलती नजर आएंगी। इस टूर्नामेंट में उन्हें 7वीं वरीयता दी गई है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कभी-कभी वह अपने भविष्य को लेकर सोचती हैं कि उनका टेनिस करियर कितने समय तक चलेगा। उन्होंने साफ किया कि अगर उनकी बेटी उनसे कहती है कि वह नहीं चाहती कि उनकी मां इतनी यात्रा करें, तो वह उसकी बात को नजरअंदाज करने वाली इंसान नहीं हैं। गौरतलब है कि ओसाका ने बेटी के जन्म के बाद टेनिस से करीब 15 महीने का ब्रेक लिया था। इसके बाद उन्होंने 2024 में दोबारा कोर्ट पर वापसी की। मां बनने के बाद पेशेवर टेनिस में लौटना उनके लिए एक नई चुनौती रहा है, क्योंकि अब उन्हें खेल के साथ परिवार की जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखना पड़ता है। हालांकि, इस साल उनके प्रदर्शन में सुधार के संकेत मिले हैं। दुनिया की पूर्व नंबर 1 खिलाड़ी ओसाका विंबलडन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने शीर्ष वरीयता प्राप्त आर्यना सबालेंका को हराकर सबको चौंका दिया था। इसके अलावा फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन में भी वह अंतिम 16 खिलाड़ियों में जगह बनाने में सफल रहीं। वॉशिंगटन में उन्होंने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया, जबकि टोरंटो में क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं। वर्तमान में विश्व रैंकिंग में 19वें स्थान पर मौजूद ओसाका को भरोसा है कि वह बड़े खिताब जीतने की दौड़ में फिर शामिल हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वह अपने पुराने स्तर से बहुत दूर हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने अपने खेल की मजबूत नींव तैयार कर ली है और अब वह लगातार सीखने तथा टूर्नामेंट में आगे तक पहुंचने के लिए उत्साहित हैं। बता दें कि ओसाका ने अपने करियर में 4 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। उन्होंने 2018 और 2020 में यूएस ओपन तथा 2019 और 2021 में ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब अपने नाम किया था। उनकी आक्रामक खेल शैली और दबाव में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता ने उन्हें महिला टेनिस की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल किया है। टोक्यो में अपने अभियान की शुरुआत ओसाका इटली की जैस्मिन पाओलिनी के खिलाफ करेंगी। इस प्रतियोगिता में दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी एलेना रिबाकिना और फिलीपींस की एलेक्स एला भी हिस्सा लेंगी। घरेलू दर्शकों के सामने खेलने वाली ओसाका की नजर अब अपने अच्छे प्रदर्शन को जीत में बदलने और शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह मजबूत करने पर होगी।

