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राय और ब्लॉग्स / पोलखोल इंडिया

टेढ़ा है, पर मेरा है ! त्रिवेन्द्र सिंह ने बढ़ा दी दागी ओमप्रकाश की ताकत

देहरादून : उत्तराखंड के गठन के समय से ही यह परिपाटी बन गई थी, कि मुख्यमंत्री तक पहुंचने के लिए एक खास दरवाजा बना दिया जाए और इस दरवाजे पर अपने किसी खास अफसर को बैठा दिया जाए। नारायण दत्त तिवारी से लेकर हरीश रावत तक सभी मुख्यमंत्रियों के पसंदीदा अधिकारी सत्ता की धुरी बने ...

20 May 2017 3:25 pm
भारत के प्रधानमंत्री ने छिपाई मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बातें…

हम समझते है कि हमारे राजनेता खासकर जिम्मेदार पदों पर बैठें नेता अवाम को हर सच्चाई से अवगत करते है लेकिन हाल कि खबरों को आधार माने तो शायद यह सच न लगे। काबिलेगौर हो कि बीते दिनों जमियत उलमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद उस्मान मंसूरी की अगुआई में मुस्लिम बुद्धिजीवियों और धार्मिक नेताओं का ...

19 May 2017 1:53 pm
अब बीजेपी को रोकने के लिए कुछ भी करेगी सपा-बसपा, बानगी तो सदन में देखने को मिल गयी

   अनुराग शुक्ला लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के दौरान पहले विधानसभा सत्र में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जो सूबे में सियासत की शक्ल बदल सकते हैं। दरअसल सियासत में संकेत अहम हैं, और विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान संकेत चीख-चीख कर इशारा कर रहे थे। अभिभाषण के संयुक्त सत्र के ...

15 May 2017 6:52 pm
मोदी के तूफान में नीतीश ने पीछे खींचे पांव, नहीं है पूरे विपक्ष के पास कोई चुनौती

Vinod Kapoor पटना: साल 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को कड़ी टक्कर देने के विपक्ष के मंसूबे पर 15 मई को बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पानी फेर दिया। पिछले 15 साल से बिहार के सीएम पद पर विराजमान नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि वो अगले लोकसभा ...

15 May 2017 6:44 pm
सियासत में धर्म घुसाकर भारत अब पाकिस्तान बनने की राह पर है : डॉ. परि‍तोष मालवीय

जो 1977 में पाकिस्तान में ज़िया-उल-हक के नेतृत्‍व में शुरू हुआ था, वह अब भारत में दोहराया जा रहा है हम पहले कभी भी पाकिस्तान जैसे नहीं रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में होना शुरू हुए हैं. शरि‍या आधारि‍त इस्‍लाम को राजनीति‍ के साथ स्‍पष्‍ट रूप से मि‍श्रि‍त करने की पाकि‍स्‍तान की यात्रा 1977 ...

26 Apr 2017 5:20 am
मोदी की पहल से मिटेगा आम और खास का फर्क

सियाराम पांडेय ‘शांत’ लोकतंत्र में कौन आम है और कौन खास, यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन कब आम खास हो जाता है और कब खास आम, पता ही नहीं चलता। लोकतंत्र का पर्व आने पर ही पता चलता है कि जनता ही खास है। नेता तो उनके प्रतिनिधि भर हैं जिन्होंने अपने खास ...

21 Apr 2017 3:12 pm