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राय और ब्लॉग्स / वूमेंस वेब

अपने सपने पूरे करने का तुम्हें भी हक़ है…

फॉर्म पढ़ते ही आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उषा जी ने मुस्कुरा कर अपने पति को देखा, “आपको याद रहा इतने सालों बाद भी?” सारा दिन घड़ी देख देख उषा जी का

18 Jan 2021 4:45 pm
जब मैं थक जाया करती हूँ तो खुद से कहती हूँ…

अगर लगे कि सब बराबर है, तो फिर तो कोई गम ही नहीं, पर गर लगे कि मामला गड़बड़ है तो रास्ता बदलने में भी देर नहीं लगाती हूँ। जब मैं थक जाया करती हूँ तो खुद

17 Jan 2021 11:15 am
ये तुम्हारी इस गृहणी बीवी की बचत है जनाब…

“वाह, क्या बात है मेरे जन्मदिन पर मेरे पैसों से खरीदकर मुझे ही उपहार दिया जाएगा। और एहसान भी कि बचत पर मेरा अधिकार है”, रमन ने कहा। “कब से क्या ढूंढ र

12 Jan 2021 4:00 pm
बेटियाँ देंगी अपनी माँ को अंतिम विदाई…

जब मेरी माँ अकेली औरत होकर हम बहनों को बेटों की तरह पाल सकती है, तो हम बहनेंक्यूँ नहीं उनको अंतिम विदाई दे सकते हैं? सुबह के पांच बजे फ़ोन की आवाज़ से न

15 Dec 2020 5:35 pm
कौन कहता है फर्क नहीं पड़ता?

कौन कहता है शर्म नहीं आती पति के आगे हाथ फैलाने में? पूछो उस स्त्री से जिसने दो साड़ी में सालों साल बिताए हैं, नहीं हक़ उसका क्यूंकि… कौन कहता है पति क

27 Nov 2020 5:38 pm
बेशर्म दुल्हन होना मंजूर है लेकिन अपने सम्मान से समझौता करना नहीं…

तेरा दर्द मैं समझ सकती हूं लेकिन तुझे ही गाली देंगे। तेरे ही चरित्र पर उंगलियां उठाई जायेंगी। तू ये केस वापिस ले ले वरना… चेतावनी : इस कहानी में मैरिट

27 Nov 2020 5:21 pm
और एक मां को उसका सबसे बेहतरीन तोहफा मिल गया था…

रूपा को डर था कि राघव के हर डिमांड को बिना सोचे पूरा कर देते हैं ऐसे तो चीज़ों की वैल्यू उसे कभी समझ नहीं आयेगी लेकिन आज… दिवाली का त्यौहार पास जैसे जै

12 Nov 2020 5:15 pm
हर महिला है अपने जीवन की एक सशक्त-योद्धा…

भूमिका मैंने देखी बचपन से ही हर नारी की, स्वयं को समझ जब आई वास्तविक ज़िंदगानी की। हर महिलाजीवन करती हैं सिद्ध, पातीं हैं परमसिद्धि। भूमिका मैंने देखी

6 Nov 2020 7:00 pm
कहीं वो भी एक दो करवाचौथ के बाद उसी की तरह बदल तो नहीं जाएगा?

वो रखना भी चाहती थी व्रत, प्रेम के अभिभूत जो उसे मिल रहा था पर फिर विचार रुक जाता था। क्या वह उसके इस प्रेम तप के योग्य है? फिर से वही दिन आने वाला था

2 Nov 2020 3:00 pm
…और इस तरह सास बहु के इस रिश्ते को एक नया जीवन मिल जाएगा…

एक माँ सदा अच्छी है तो फिर सास क्यों बुरी है? एक बेटी सदा अच्छी है तो बहु ही क्यों बुरी है? जब दोनो ही करुणामई हैं, तो फिर सास बहु के रिश्ते से करुणा

25 Oct 2020 4:15 pm
लड़कियाँ लक्ष्मी ही क्यूँ कहलाती हैं? सरस्वती क्यूं नहीं?

तुम शक्ति हो ये बात छुपाई जाती है। पहले देवी बनाते हैं समाज वाले फिर उसकी औकात बताई जाती है। तुम पराया ‘धन’ हो, बस ये बात बताई जाती है। लड़कियाँ ‘लक्ष

25 Oct 2020 4:12 pm
बेटी से अपनी बहु की बुराई नहीं करते माँ…

धीरे धीरे माँ की बातों ने मोहनी की खूबसूरती की जगह उसकी बुराइयों ने लेना शुरू कर दिया। रूचि कुछ ज़वाब नहीं देती सिर्फ हाँ हूं कर फ़ोन रख देती। बचपन से अ

24 Oct 2020 4:00 pm
और आप तो कुछ बोलते ही नहीं हैं…

उसको लगता कि जब से उसकी जब से शादी हुई तब से आजादी खत्म हो गई थी। पति भी कभी कुछ नहीं बोलते लेकिन एक दिन ऐसा कुछ हुआ कि… “हर वक़्त के टोकाटाकी से मुझे

20 Oct 2020 4:02 pm
अब मैं अपना सपना ज़रूर पूरा करूँगी…

एक तो काजल अपने पिता की मौत को सहन नहीं कर पा रही थी, और पिता के जाते ही सब रिश्तेदारों ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया। आज काजल बहुत उदास है। उसके पिता जगद

19 Oct 2020 6:43 pm
और उसने जल्दी से कहा, “हस्बैंड जी स्पीक इन हिन्दी प्लीज़…”

शादी पास आती है तो लड़कियाँ पार्लर भागती है और ये रिद्धि ऊपर छत पर क्या पढ़ती रहती है। इतनी पढ़ाई तो इसने दसवीं और बारहवीं में भी नहीं करी। घर में भाग दौ

18 Oct 2020 4:00 pm
सात फेरों की विदाई का ये सफर…

बड़े नाज़ों से पाला हमने इसको, हो जाए भूल कभी तो, बेटी समझ के भुला देना, सच कहते हैं आसान नहीं है, किसी को अपने जिगर का टुकड़ा देना… जग ने हमारे ये रीत ब

15 Oct 2020 4:02 pm
सही मायनों में तो आज ही आयी थी इनके मिलन की बेला…

पिक्चर देकते हुए जब सुमित ने गुड्डन के हाथ को धीरे से छुआ तो गुड्डन ने अपना हाथ झटक दिया सुमित को बुरा तो लगा पर उसने कुछ कहा नहीं। गुड्डन-गुड्डन का श

7 Oct 2020 4:15 pm
माँ मुझको बंदूक दिला दे, मैं अपनी लाज बचाऊंगी!

कोई भी प्रदेश हो, सरकारें तो आती जाती रहेंगी, बेटियां भी यदि यूं ही जाती रहीं, तो एक दिन हर मां अपनी बेटी को बंदूक देकर ही घर से बाहर भेजेगी! माँ मुझक

5 Oct 2020 4:30 pm
नहीं मिलता जब तक इंसाफ, कोई चूल्हा नहीं जलेगा…

वहशी खुले घूम रहे, जब यूं गली गली, हमारे सम्मान की चिता, यहां हर रोज़ जली। कह दो जब तक, नहीं मिलता इंसाफ, कोई चूल्हा नहीं जलेगा। हमारा कोइ गुट नहीं है,

3 Oct 2020 4:30 pm
स्त्री हूँ स्त्री, नहीं मैं किसी की जमीन जायदात…

यह स्त्री की बात है, नहीं किसी की जमीन जायदात है, है अधिकार हमें भी गरिमा से जीने का, इसमें भीख मांगने वाली क्या बात? कानून किताबों का गहना है, लेकिन

2 Oct 2020 4:30 pm
एकलव्य से इस बेटी तक क्यों कुछ नहीं बदला?

ये कैसी संस्कृति है? एकलव्य से इस बेटी तक, कुछ नहीं बदला। तब उस का अंगूठा काटा, तो अब इस की जीभ? सदियों से कुछ नहीं बदला। एकलव्य से इस बेटी तक, कुछ नह

1 Oct 2020 4:15 pm
एक स्त्री की उदारता ऋण है तुम्हारे पर…

एक स्त्री की उदारता का मोल पुरुष कभी चुका नहीं पायेगा क्यूँकि वो इसे समझ नहीं सकता, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो स्त्री का अस्तित्व भूल जाए! तुम क्या

28 Sep 2020 4:15 pm