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राय और ब्लॉग्स / वूमेंस वेब

अब आवाज़ करो बुलंद क्यूंकि अकेली नहीं हो तुम…

एक बार तुम बुलंद तो करो अपने हक़-अधिकार और मान-सम्मान के खातिर अपनी आवाज…क्यूंकि अब अकेली नहीं हो तुम…अब अकेली नहीं हो तुम! उठो महिलाओं जागो अपने हक-अध

4 Aug 2020 4:35 pm
लड़के वाले आज भी लड़की वालों को लाचार और कमज़ोर क्यों मानते हैं?

वो जमाना गया जब लाचारी होती थी बेटी के पिता होने पर। अब वो घबराते, डरते और लाचार पिता नहीं मिलते। अब तो आप अपने बेटों की बोली लगानी बंद करें। “अजी सुन

28 Jul 2020 12:10 pm
आजकल के रिश्ते, ‘कॉरपोरेट’रिश्ते!

आजकल रिश्ते होते हैं, कॉरपोरेट जगत के जैसे औपचारिक! ये कहाँ, हमारी रुहानी बात समझते हैं? ये तो बस ऊपरी चकाचौंध में, चमकते हैं। जब कभी, दर्द का प्याला

28 Jul 2020 10:30 am
जिन्होंने देखा है अपनी मांओं को कदम फूक-फूक के रखते हुए वह जानती है हर पाई कि अहमियत…

जिन्होंने देखा है अपनी मांओं को ,सबसे आखिर में थाली लगाते, वे जानती हैं, चादर के आकार और पैरों को पसारने के बीच,सामंजस्य बैठाना,क्या अहमियत रखता है !

26 Jul 2020 12:30 pm
आखिर क्यों एक बेटी नहीं है हक़दार उसके मायके और ससुराल में सम्मान पाने की?

आखिर क्यों बेटियों को उनके घर में और ससुराल में उनके हक़ का प्यार और सम्मान नसीब नहीं होता? संजना की भी कुछ ऐसी ही बेबसी की कहानी थी। “आप तो ऐसे खुश हो

24 Jul 2020 12:45 pm
मेरा अभिमान है मेरी बेटी, और आपका?

मेरा अभिमान है मेरी बेटी, तो क्या हुआ अगर उसने ख़ुद अपना जीवनसाथी चुना है, उसने मुझसे ही तो सीखा है, इंसान की परख करना। मेरा अभिमान है, मेरी बेटी, तो

20 Jul 2020 10:36 am
क्यों समाज को नहीं स्वीकार निरंकुश और बेख़ौफ़ सी स्त्रियाँ?

स्त्रियों ने स्वयं ही ओढ़ लिए हैं सारे बंधन, कभी मर्यादा के नाम पर, तो कभी यूँ ही रस्मों रिवाजों के नाम पर लगा लिए हैं कड़े पहरे अपने निरंकुश विचारों

18 Jul 2020 10:30 am
‘अब तुम बूढ़ी हो गयी हो’, जब पत्नी ने ये सुना तो उसने क्या किया?

पसीने-पसीने हो रखी हो, बाल देखो सफेदी आने लगी है, आज शाम को पार्टी में जाना है। ऐसे जाओगी? सब बोलेंगे ये समीर के साथ बुढ़िया कौन है! “मेघा, मेघा कहां

16 Jul 2020 12:10 pm
बोलो, कौन देता है गवाही मेरी और इस लापरवाह समाज की?

बोलो कौन देता है गवाही बेशर्म से रसूखदारों के, मलिन इतिहास की? कौड़ियों में बिक रहे मज़बूर से अहसास की? बोलो कौन देता है गवाही? हर वर्ग की महिलाओं को सम

9 Jul 2020 10:30 am
शादी के बाद मुझे अपने माता-पिता का ख्याल रखने से रोका क्यों जाता है?

पापा मेरा आपके पास आना, आपका ध्यान रखना, आपके साथ वक्त बिताने से सबको दिक्कत होने लगी थी और इन सब में मेरे पति भी तो शामिल थे। आज की सुबह कुछ अलग है,

9 Jul 2020 10:20 am
क्यूंकि ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए राहें और भी हैं…

वैसे दोनो पुरुष हैं, एक के लिए उसका अहम सर्वोपरि है और एक है, जो बस जैसा है वैसा ही रह गया है कोई मिलावट नहीं, सौ प्रतिशत शुद्ध। फोन की घंटी लगातार बज

8 Jul 2020 10:00 am
करूँ मैं कैसे स्पष्ट, अपने और पराए और अच्छे-बुरे का स्पर्श?

कुछ स्पर्श मिर्ची से तीखे, कुछ स्पर्श बिजली के झटके! कुछ ऐसा जो तेरी कहानियों में न था, कुछ ऐसा मेरी-तेरी सोच से परे था…कुछ ऐसा था वो स्पर्श… ऐ माँ! त

7 Jul 2020 10:30 am
और मैं तैयार थी अपने आत्मसम्मान की इस जंग को जीतने के लिए…

उसने कहा था वो उतना ही सहेगी जितना सहने की ताकत रहेगी, जिस दिन वो ताकत खत्म होगी, उस दिन वो पता नहीं क्या करेगी और आज वो दिन आ गया था… “सुनिए मुझे पां

6 Jul 2020 12:30 pm
अपने सपनों के बीच अपनी उम्र के बंधन को ना आने दें…

शादी के वक़्त कई औरतें अपने सपने को बीच में ही रह जातेहैं, फिर घर-पति-बच्चों के बीच वे सपने कहीं दफ़न हो जाते हैं, लेकिन ये ना सोचें कि अब देर हो गयी… ग

5 Jul 2020 10:30 am
जो बचपन में किरदार सोचे थे मैंने, वो निभाए लेकिन…

बचपन में, अक्सर मैं सोचती, मैं आफिस जाऊंगी? या खाना पकाऊगीं? तय किया, आफिस जाऊंगी! तो बस, वहां जाती हूं, लेकिन…कुछ ऐसा भी करती हूँ… बचपन में,मां को खा

5 Jul 2020 10:15 am
हर महीने है बहता मेरे खून का वो कतरा, जिससे तुम्हें जन्म मिला…

वो एक खून का कतरा, उसी एक कतरे से दुनिया में अस्तित्व तुम्हारा होता है मानव, फिर भी तुमने स्त्री की उस पीड़ा को एक हौआ बना कर रख दिया है? वो एक खून का

4 Jul 2020 10:30 am
सच में मां बौरा सी जाती है…

छुट्टियों में बच्चों के आने की खबर पाकर मां बौरा सी जाती है, चटनी, पापड़, मर्तबान में सहेजती अक्सर, धूप-छांव के फेर में पड़कर, कुछ मुरझा सी जाती है… छ

4 Jul 2020 10:00 am
एक सवाल मेरे मन में अक्सर आता है….

एक सवाल मेरे हृदय को बार-बार चुभाता है कि क्यों नहीं, ये समाज उस बहू को समझ पाता जो चाहती परिवार संग अपनी एक पहचान बनाना? एक सवाल मेरे मन में अक्सर आत

1 Jul 2020 4:30 pm
बहुत चुभती हैं समाज की नज़र में…ये बेबाक सी लड़कियां…

नहीं करना चाहतीं वो हरगिज़ इबादत पिट कर, बेइज्जत होकर गालियां खाकर जो चाहते हैं पूजे जायें, ईश्वर कहे जाएँ, वे बिन अपराध के सजा झेलती जायें। बड़ी चुभती

29 Jun 2020 6:30 pm
शिकवा है कुछ लोगों को मुझसे, तुम हो गए हो बदले-बदले…

कुछ लोगों को शिकवा है मुझसे, तुम हो गए हो बदले बदले। जो पत्ते पेड़ से टूट गए, क्या अब भी वो रंग ना बदले? क्या अब भी वो रंग ना बदले? कुछ लोगों को शिकवा

28 Jun 2020 10:30 am
क्या बाहरी सुंदरता और शादी ही मेरे जीवन का अंतिम लक्ष्य है?

क्या पतला होना और शादी ही जीवन का अँतिम लक्ष्य है जो मुझे नहीं मिला तो मेरे जीवन ने खुशियाँ नहीं आयेंगी या मेरा जीना बेकार है? “आज कल की छोरियों को दे

28 Jun 2020 10:15 am
हर जगह अपना ‘वूमन कार्ड’खेलती हो तो कह दिया, लेकिन उसके बाद …

जो मर्द औरत से जलन रखता है वह मन ही मन बखूबी जानता है कि एक औरत बहुत सारे रोल को बखूबी और उससे ज़्यादा अच्छे से निभाती है। “नेहा .. नेहा जल्दी आओ, ये द

27 Jun 2020 10:30 am
शादी के लिए बेटे की पसंद ज़रूरी है या आपकी?

मोना को लगता था कि अगर रवि अपने पसंद की लड़की से शादी करेगा तो वो उनकी इज्जत नहीं करेगी और रवि भी सिर्फ अपनी पत्नी की सुनेगा। “रवि देख कितनी अच्छी लड़की

24 Jun 2020 10:30 am
हमारे मन चाहे कितने भी काले हों, पर बहु तो हमें गोरी ही चाहिए…

आखिर ऐसा क्या है जो हम गोरे रंग के ही पीछे भागते हैं? क्यों लड़कों की अपेक्षा लड़कियों को काली रंगत से ज्यादा अपमान सहन करना पड़ता है? “अरे! प्रिया तू अभ

23 Jun 2020 12:25 pm
कई बार दिलों में दूरी कम करने के लिए घरों में दूरी बनानी पड़ती है…

बिना पति के जीवन का इतना लम्बा सफर तय करना आसान नहीं था लेकिन अपनी दृढ़ता के कारण रूकमणि अपने बेटों को संस्कारी बनाने में सफल रही। “मां आप क्यों परेशान

23 Jun 2020 12:15 pm
आज मैं कहती हूँ तुझसे कि तू कोई एक चुन ले!

चौंक मत जाना, सिर्फ पहचान लेना, मेरा रास्ता तूने लिखा था ना…अपनी कलम से, तो क्यों मुझे कुचला गया यहाँ पे? अगर तू है, तो देख मुझे अगर सुनता है अभी भी,

22 Jun 2020 4:30 pm
और ऐसे मेरा ससुराल मेरा दूसरा मायका बन गया…

लंबी सांस लेते हुए नेहा की सास की आंखे नम हो गयीं, क्यूँकि ससुराल में कदम रखते ही उन्हें दहेज़ के इस घिनौने अभिशाप से झूझना पड़ा। नेहा अपनी माता पिता की

20 Jun 2020 12:15 am
तुम्हारे साथ गुज़ारी उन रातों के उपरांत…

तेरे हर दर्द को वो अपना दर्द समझ कर जकड़ लेती है खुद को और ढूंढती है तेरी आखों में हर पल उस प्यार को जो आवश्यकताओं से ऊपर हो। तुम्हारे साथ गुज़ारी उन रा

19 Jun 2020 12:15 pm
बहू-बेटी में ये अंतर क्यों?

बहू बेटी में अंतर क्यूं….दोनों की संरचना एक ही तो है, क्यों बेटी के नखरे तुम सह लेते हो, बहू की मन की इच्छा के लिए, बुरा भला तुम क्यूं कहते हो? बहू बे

1 Jun 2020 4:30 pm
और मैंने तय कर लिया कि क्या करना है….!

आज बहुत दिनों बाद अच्छी नींद आई क्यूंकि आज मैं सुबह का अलार्म बंद करके सोई थी और मैं अब वापस पीछे मुड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं थी। और मैंने तय कर लि

1 Jun 2020 4:00 pm
क्या मैं अब भी अपनी ‘बस वाली लड़की’को वापस पा सकता हूँ?

ऐसे ना जाने कितने ही काम हैं जो मैं कर सकता हूं पर मैं नहीं करता और वह इतने दिनों से सब कुछ संभाल रही है, हमारा घर, अपनी नौकरी, मेरी मां, मेरे बच्चों

31 May 2020 12:00 pm
स्त्री को पुरुष की दृष्टि से देखने की यह दीर्घकालिक परम्परा

तुमने उनके पंख छीन बचाया उन्हें उन खतरनाक उड़ानों से जो उन्हें हवा पे बिठा ले जा सकती थीं किसी दूसरी दुनिया में…यह दीर्घकालिक परम्परा! स्त्री को पुरुष

30 May 2020 12:40 am
आ अपने जीवन को जीवंत बनाने की ओर चलें…

जीवन जीने के नाम को ही कहते हैं, ज़िन्दगी में उड़ान भरो और उसको जीवंत कर दो, क्योंकि ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा, तो हर पल जिओ खुशिओं के साथ। जीवन को अपने क

30 May 2020 12:20 am
हम तो थे जैसे, हम वैसे रह गए…

पारुल और रोहित, दोनों प्यार के पंछी, घर और नौकरी में उलझे बड़ी मुश्किल से अपने लिए वक्त निकाल पाते थे, फिर वक्त की चाल बदली और…. पारुल और रोहित की शाद

29 May 2020 4:00 pm
अपनी बहु को सिर्फ दहेज़ कमाने का साधन न समझें!

सच कहा, एक पिता कभी नहीं जान पाता कि जिस घर मे वो अपनी बेटी को दे रहा है आगे चलकर उसकी बेटी के साथ क्या होगा, कैसा बर्ताव किया जाएगा। रिया बहू आजा राम

29 May 2020 3:30 pm
औरत : एक जीवित इंसान या एक आकृति?

क्यों औरत खुलकर अपनी भावनाओं को दूसरे के सामने नहीं कह पाती? क्यों वह सतायी हुई औरत कहलाना पसंद करती है? वह एक जीवित इंसान है या एक आकृति? घर के लोगों

28 May 2020 7:04 pm
खुद को नई सी लगने लगी हूँ…हाँ, अब मैं बदल गई हूं!

मैं अब पहले की तरह मरती नहीं हूं, जीती हूं मन ही मन, दुनिया की परवाह कर आँसू बहाती नहीं हूं, अब मैं बदल गई हूं…अब मैं बदल गई हूं! मैं अब पहले की तरह ख

28 May 2020 5:05 pm
गाँव की शादी और किस्सा एक ‘चटोरी चाची’का

गाँव की शादी में देसी गाने और देसी खाना! गांव में रहने वाले ताऊजी के बेटी की शादी थी तो पापा मम्मी और हम चारों भाई बहन भी शादी का मजा लेने चल पड़े। एक

28 May 2020 3:00 pm
अरी लड़कियों, ज़रा मेरी ये बात सुनो तो!

अरी लड़कियों इस में लॉकडाउन में ज़रा ये सब नया सीखने के साथ-साथ अपने घरवालों से कहो कि घर के लड़के भी कुछ नया अब तो सीख ही डालें! अरी लड़कियों, सुनो ! ला

27 May 2020 3:48 pm
सिर्फ मैं ही काफी हूं क्यूंकि…मैं हूं आज की नारी…

परिवार और कैरियर दोनों ही में तालमेल बैठाती नारी का कौशल, कामयाबी के कदम चूमे, आर्थिक और मानसिक रूप से बनी आज आत्मनिर्भर… मैं हूं आज की नारी पूर्ण रूप

26 May 2020 4:45 pm
ससुराल –कई रिश्तों की समझ हमें देर से क्यों आती है

अक्सर कहा जाता है कि मायका माँ के साथ ही, खत्म हो जाता है! सच कहूं तो, ससुराल भी सास के साथ ही खत्म हो जाता है, रह जाती हैं बस यादें अक्सर कहा जाता है

26 May 2020 12:25 pm
अगर दीवारों के कान होते हैं, तो बातों के पैर भी होते हैं!

“डोर बेल बज रही है…” “अरे सुबह सुबह कौन आ गया, शायद आज सफाईवाला जल्दी आ गया? अरे बहु देख तो कौन आया है?” शांता जी ने अपने कमरे में से कहा। शीला ने भाग

24 May 2020 4:15 pm
एक स्त्री जब खामोश होती है तो…

लेकिन जब तुम न समझ पाते हो, उन अनकही बातों को, न देख पाओ उन खामोश रातों को, न देख पाओ तुम्हारे रूखे बर्ताब से आये आँखों में छिपे आँसुओं को तो…. एक स्त

24 May 2020 4:00 pm