राय और ब्लॉग्स / जागरण
अगर संस्थाएं अपनी नैतिक आभा के साथ नहीं बची रहीं तो यह लोकतंत्र की सेहत के लिए शुभ नहीं होगा।
एक राजनेता के रूप में मोदी इसलिए सफल हैं, क्योंकि सेवा उनका मूलमंत्र है और यही लोगों को उनसे जोड़ती है।
ध्यान रहे कि देश के साथ विदेश के भी कारोबारी टैक्स संबंधी नियमों को सरल और सुगम बनाने की मांग करते ही रहते हैं। यह मांग पूरी होनी चाहिए, क्योंकि इससे
जब दवाएं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आती हैं तो फिर एमआरपी की छद्म-आधारित मूल्य व्यवस्था क्यों ही बनी हुई है?
यह देखकर मन अत्यंत आनंदित होता है कि विगत एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने हमारे राष्ट्रीय जीवन के कितने ही विविध आयामों को छुआ है।
इसी के साथ उन्होंने अपनी विदेश नीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का मान भी बढ़ाया। इसी कारण वे पिछले एक दशक से अधिक समय से विश्व के लोकप्रिय
आतंकी घटना टालने वाले स्मित मच्छर पर चुप रहने वाले भी आतंक से लड़ाई में बाधक हैं।
'विकसित भारत' का मतलब विकसित भूटान भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में अपने पड़ोसी देशों को हमेशा प्राथमिकता दी है।
इस आशंका को दूर करना सुप्रीम कोर्ट का भी काम है और चुनाव आयोग का भी। एसआईआर के मामले में यह भी समय की मांग है कि सभी राजनीतिक दल चुनाव आयोग का सहयोग क
परीक्षा में वैकल्पिक विषय को खत्म करके और उम्र सीमा को घटाकर यूपीएससी को कुछ सुधार तुरंत करने की जरूरत है।
यदि लोगों का सरकार से मोहभंग हो भी रहा है तो उसे प्रकट करने के लिए उनके सामने विकल्प क्या हैं?
यह ठीक नहीं कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध संबंधी कानून कठोर किए जाने के बाद भी ऐसे अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, इस
एक समाज जो अपने अतीत में केवल पराजय देखता है, वह भविष्य में भी केवल अनुकरणजीवी बनता है।
जीएसटी की बढ़ती परिपक्वता हमें सुधारों के अगले चरण के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करती है।
विपक्षी दल इसकी जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं कि चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति को लेकर जो नैरेटिव खड़ा किया गया था, वह भोथरा पड़ चुका है।
अशोक सिंघल एक निष्काम कर्मयोगी थे, जिन्होंने भारत के आत्मगौरव और राम जन्मभूमि आंदोलन को मजबूत करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था
अल नीनो और बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण दुनिया भर में अप्रत्याशित मौसम पैटर्न भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले के डेयरी व्हाइटनर को घटिया पाया, जिससे उसकी बिक्री पर रोक लगी और खाद्य गुणवत्ता पर गंभीर सवा
भारतीय पायलट कैप्टन स्मित ने फ्लाई दुबई की उड़ान में सह-पायलट के हमले को नाकाम कर एक बड़े विमान हादसे को टाल दिया
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी के आधारों की लिखित सूचना को मौलिक अधिकार बताया है, जिसमें कहा गया है कि यह जानकारी आरोपी को अपनी भाषा में और जल्द से जल्द द
विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध कर रहा है, जबकि आयोग छूटे हुए मतदाताओं को शामिल करने की तैयारी में है
आज लोभासक्त उपभोगमय जीवन की दुर्दांत स्थिति से सारी दुनिया छटपटाती हुई कराह रही है तो जरूरी हो रहा है कि हम अपने भ्रमों को तोड़ने की हिम्मत करें। गांध
कुल मिलाकर भारतीय राजनीतिक परिदृश्य इस समय एक नाजुक स्थिति में है। यह और नाजुक न बने, उससे बचने के लिए आवश्यक होगा कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की आड़
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की उड़ान में ओमानी सह पायलट ने भारतीय मुख्य पायलट स्मित मछार पर हमला कर विमान गिराने की कोशिश की। स्मित मछार ने साह
राजनीतिक दलों को सामान्य वर्ग की बेचैनी का भी अहसास करना चाहिए, जो वर्ग भिन्न-कारणों से चिंतित दिख रहा है।
जब एआई और अधिक शक्तिशाली होगी, तब यह सुनिश्चित करना होगा कि हम उसे परखने में भी उतने ही सक्षम बन सकें।
पाकिस्तान को यह आभास लगातार कराते रहना होगा कि वह यदि भारत विरोधी हरकतें नहीं छोड़ता तो उसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना अभियान तेज कर रहा है
पाकिस्तान इस समय राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और बिगड़ती आंतरिक सुरक्षा जैसी कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, जिसमें टीटीपी और बीएलए का बढ़ता आतंकव
सुप्रीम कोर्ट ने महंगी दवाओं, खासकर कैंसर की दवाओं की मनमानी कीमतों पर कड़ी आपत्ति जताई है, इसे 'सामूहिक संहार' और 'दिनदहाड़े डकैती' बताया
अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर जबरन श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लगा रखा है, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 10 प्रतिशत और हो गए हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में से सबसे अधिक राजनीतिक सरगर्मी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रही है।
आखिर जब पाठ्यक्रम एक है तो स्कूली और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों का स्तर अलग-अलग क्यों? निःसंदेह यह अंतर इसलिए आया, क्योंकि शिक्षा बोर्डों का उद्
एआई एक शक्तिशाली तकनीक है जो भारत के लिए वरदान साबित हो सकती है, बावजूद इसके कि इसके साथ कुछ डर और चुनौतियां जुड़ी हैं।
एआई अब हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है, लेकिन इसके दुरुपयोग, स्वायत्तता और गलत सूचना के प्रसार से जुड़े संभावित खतरे भी हैं।
अशोक सिंहल जी ने हर क्षण इस महान राष्ट्र के उत्कर्ष का ही स्वप्न देखा था। हम उनके सपनों को साकार करने के संकल्प को फिर दोहराएं।
संरक्षण गृह एक ऐसी जगह होनी चाहिए, जो बच्चे को उसके कठिन अतीत से निकालकर एक बेहतर भविष्य तक पहुंचाए।
यह ध्यान रहे कि चाहे अतिवृष्टि हो या अल्पवृष्टि, दोनों ही खाद्य सुरक्षा को संकट में डालने का काम करती हैं और खाद्य सुरक्षा के समक्ष संकट पैदा होने से
किसी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान मतभेद होना स्वाभाविक हैं। इन्हें तूल देने का कोई औचित्य नहीं बनता, लेकिन ऐसा ही किया गया।
वैसे तो तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक और उसके बाद जारी बयान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छेड़े गए विपक्ष के अभियान की हवा निकाल दी है, लेकिन यह तय है
भारत भविष्य की तकनीकों, जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग, फोटोनिक्स, आप्टोइलेक्ट्रानिक्स और एआइ के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए चिप्स के क्षेत्र में भी अपनी
दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई हो और आरोप असत्य या दुर्भावनापूर्ण सिद्ध होने पर निर्दोष व्यक्ति का सम्मान लौटाया जाए।
चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा की रक्षा करना और उसे अपुष्ट-अनर्गल आरोपों से बचाना अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी नहीं। यह जिम्मेदारी दोनों चुनाव आयुक
मुख्तार अब्बास नकवी का यह लेख भारतीय चुनाव प्रणाली के 1952 के पहले आम चुनाव से वर्तमान तक के सफर को दर्शाता है।
भारतीय परंपरा में इसका उत्तर केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म में निहित है। सेवा की शुरुआत किसी दूसरे के लिए कुछ करने से होती है, लेकिन उसका अंतिम उद्
यह राजनीति के भारतीयकरण का ही परिणाम है कि भाजपा की अगुआई में आज देश आगे बढ़ रहा है। 1952 के लोकसभा चुनाव में दूसरा और तीसरा स्थान पाने वाली कम्युनिस्
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिश
यह विचित्र है कि विपक्षी दल एक ओर मतदाता सूचियों में गलतियों की शिकायत करते हैं और दूसरी ओर उन्हें दुरुस्त करने वाली एसआईआर प्रक्रिया का विरोध भी करते
असली सवाल शुल्क की दर से ज्यादा उसकी वजह का है। यूपीआई पर हर साल करीब ₹20,000 करोड़ रुपये खर्च सिर्फ सर्वर, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ढांचे पर आता है।
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।

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