राय और ब्लॉग्स / जागरण
सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देना और उन्हें पूर्व-चेतावनी नेटवर्क से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
आज समय की मांग है कि वे गलतियां न दोहराई जाएं, जो 1947, 1977 या 2011-12 में हुईं। राजनीतिक दलों को गंभीर चिंतन करना होगा कि किस प्रकार राष्ट्र के प्रत
भारत को इस दिशा में सक्रिय होना चाहिए कि कैसे चीन, नेपाल, भूटान के सहयोग से एक ऐसे साझा तंत्र का निर्माण हो, जो हिमालय की चोटियों में होने वाले बदलाव
हमारे अपने ही जिगर के टुकड़े, हमारे बच्चे हैं। स्वाभाविक है कि उनकी हर बात हमेशा सही नहीं होगी, ठीक वैसे ही जैसे हमारी भी हर बात अपने समय में सही नहीं
वैश्विक उदाहरणों को देखें तो 87 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान होने के बावजूद इंडोनेशिया ने अपने उन प्राचीन प्रतीकों को पूर्ण सम्मान दिया है, जो हिंदू धर्म
लोकतांत्रिक मर्यादा की रक्षा केवल नेताओं के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। नागरिक किस प्रकार की राजनीतिक भाषा को महत्व देते हैं, इससे भी सार्वजनिक जीवन की
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अप
किसी भी व्यवस्था की समीक्षा में कोई हर्ज नहीं, यदि उसका उद्देश्य उसे और प्रभावी-बेहतर बनाना हो। पता नहीं इससे क्यों बचा जा रहा है। जितना यह सच है कि अ
भारत जैसे उदार देश में संविधान के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अभी तक समान नागरिक कानून नहीं बना, क्योंकि उलेमा विरोध करते हैं। समान कानून के लिए तसलीमा न
इस अंतर को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के लिए नीति आयोग के इस सुझाव पर यथाशीघ्र अमल किया जाए कि स्कूल से लेकर कालेज स्तर तक रोजगार और उद्यमिता से ज
सदन के बाहर लगाए गए नारे, सदन के भीतर की तर्क-प्रस्तुति की जगह नहीं ले सकते। नुक्कड़ नाटक संसदीय जिम्मेदारी की जगह नहीं ले सकते।
खाद्य संकट बनाए रखने के कारणों में यह एक प्रमुख कारण है। यदि जैविक ईंधन के लिए अनाज के प्रयोग को खुली छूट दे दी जाती है तो भारत में भूख का संकट गहरा स
सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना होगा कि साइबर अपराधों की छानबीन करने वाली पुलिस और अन्य एजेंसियां तकनीकी कौशल में कहीं अधिक समर्थ बनें। अभी वे डा
मोदी ने तंत्र में छिपे जिन लोगों के लिए इस शब्द का प्रयोग किया, उनसे अधिक आहत तो कांग्रेस के कई नेता हो गए।
मजहबी मुद्दों पर गजब की एकजुटता वाला मुस्लिम समुदाय ब्रिटेन में भी भारत की तरह ही एकतरफा वोट करता है और उनकी आबादी भी सबसे तेजी से बढ़ रही है
केंद्र सरकार को चीनी के बाद प्याज की बढ़ती कीमतों पर चिंता करनी चाहिए, जो बरसात में आपूर्ति की कमी और जमाखोरी के कारण बढ़ रही हैं।
संसद में वंदे मातरम् के सभी पदों के गायन को कानूनी स्वीकृति मिलने के बावजूद कांग्रेस द्वारा केवल दो पद गाने पर अड़े रहने से विवाद गहरा गया है
सरकारी विद्यालयों की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी के कारण छात्र निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं
चीनी के बढ़ते मूल्यों पर सरकार ने खराब मौसम और अंतरराष्ट्रीय दामों को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि विपक्ष एथनॉल नीति को कारण बता रहा है
राष्ट्रीय राजनीति में जनता पार्टी से लेकर असम में आसू और आम आदमी पार्टी के उदाहरणों में देखा गया कि छात्र-युवा अंततः पेशेवर नेताओं द्वारा ही मुख्य रूप
हिमालय में लगातार हो रहे सुरंग हादसों से निर्माण एजेंसियों की लापरवाही और भूगर्भीय अनदेखी उजागर हुई है
परिवार नामक संस्था भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता रही है। उसे बचाने और मजबूत करने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आदि संगठन ‘कुटुंब प्रबोधन’
दोनों सदनों के लगभग साढ़े सात सौ सांसदों के वेतन-भत्तों और सुख-सुविधाओं पर भी तो करदाताओं की गाढ़ी कमाई ही खर्च होती है।
किसी भीड़ को संसद या विधानसभा की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस कितना बल प्रयोग करे, इसे किसी समिति के लिए तय कर पाना कठिन है, भले ही वह कितनी भी उच्चा
चूंकि केरलम में मुस्लिम लीग के साथ कांग्रेस चुनाव लड़ती है और वह सरकार में शामिल है, इसलिए वहां राष्ट्रीय गीत का गायन नहीं हुआ। कर्नाटक, तेलंगाना और ह
पिछले 30 वर्षों से हो रही अन्यायपूर्ण अनदेखी को समाप्त करना समय की जरूरत है। बिहार सहित गंगा बेसिन पर निर्भर सभी राज्यों की 2050 तक की जल आवश्यकताओं क
यह सही है कि सुधारों का सिलसिला सदैव कायम ही रहता है, लेकिन जो सुधार बहुत पहले हो जाने चाहिए थे, उनका भी लंबित रहना अफसोस और चिंता की बात है।
किसी सत्तारुढ़ दल के संगठन का काम तब आसान होता है, जब उसकी सरकार सुशासन के हर मोर्चे पर मजबूत दिखे
भारतीय ज्ञान की खोज हमें औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करने के साथ ही विकसित भारत के लिए ज्ञान-लोक गढ़ने वाली भी है।
रक्षा मंत्रालय ने 400 से अधिक सैन्य सामग्री के स्वदेशी निर्माण की छठी सूची जारी की, जिसमें उन्नत हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमान शामिल हैं।
नए बंगाल को आधुनिक बनना है, लेकिन अपनी जड़ों को छोड़कर नहीं। सौ दिन मंजिल नहीं, शुरुआत हैं।
समग्रता में देखें तो हर किसी सेवा-सुविधा के साथ कुछ शुल्क तो जुड़ा ही रहता है। अगर यह शुल्क स्पष्ट है तो उसमें ईमानदारी का भाव रहेगा, लेकिन दबे-छिपे र
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम मेंयुवाओं और अनुभवी लोगों में संतुलन बैठाने के साथ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचने की कोशिश की गई है और युवाओं एवं मह
प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत के सपने के बावजूद, जेन-जी और जेन-अल्फा युवा बेरोजगारी, पेपर लीक और कोचिंग संस्कृति जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं
स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में संपूर्ण वंदे मातरम् के गायन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का समझौते से पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की स्थिति मजबूत हो सकती है, जिससे भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता
भारत में तेजी से बढ़ते डेटा सेंटरों की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है, लेकिन बिजली, पानी और पर्यावरण पर उनके बढ़ते दबाव को
संसद का मानसून सत्र नीट पेपर लीक और विपक्षी हंगामे के कारण बाधित रहा, जिससे जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं हो पाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से विकसित भारत के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और 'सप्तधारा' का खाका प्रस्तुत किया। इसमें एक करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्ष
स्वतंत्रता सभ्य समाज का सर्वोत्तम आविष्कार है, जो देश से जुड़ने की प्रवृत्ति है न कि केवल व्यक्तिगत भोग। औपनिवेशिक सोच से मुक्ति और युवा पीढ़ी को सही
जंतर-मंतर पर जेन-जी आंदोलन के दौरान भाषा के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की गई है। लेख डिजिटल संस्कृति के प्रभाव और लोकतांत्रिक मर्यादा के क्षरण पर प्रक
स्वतंत्रता दिवस हमें आजादी के संघर्ष और विकसित भारत के लक्ष्य की याद दिलाता है। अनुशासन, एकजुटता और सकारात्मकता के साथ नागरिक कर्तव्य निभाना ही सशक्त
पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में जो खटास आई है, उसकी शुरुआत ढाका से हुई। भारत ने बातचीत और कूटनीति को बराबर महत्व दिया और मित्रता का हाथ
यह डर विपक्ष को फिर से मानसून सत्र की तरह ही व्यवहार करने को मजबूर कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह लोकतंत्र की असफलता होगी।
संसद लोकतंत्र का एक अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण मंच है। इस मंच का निरतंर क्षरण लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा राजकोषीय घाटे का नियंत्रण और मुद्रास्फीति को संतुलित सीमा में रखना जरूरी है।
नई पीढ़ी के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है। यदि नई पीढ़ी स्वयं लोकतांत्रिक मूल्यों का उदाहरण बनेगी तो बदलाव भी आएगा और लोकतंत्र भी मजबूत होगा और शायद य
इसे देखते हुए एफसीआरए में उपयुक्त संशोधन किए ही जाने चाहिए। इसलिए और भी, क्योंकि संप्रभु देश को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि विदेशी धन का दुरुपयो
देश में ऐसे सरकारी विभागों की कमी नहीं, जो जिस काम के लिए बने हैं, वही कर पाने में बुरी तरह नाकाम हैं। परिणाम यह है कि गुणवत्ता के मानकों की हर कहीं अ
डाटा सिक्योरिटी काउंसिल आफ इंडिया यानी डीएससीआइ द्वारा समय-समय पर साइबर क्राइम की जांच-पड़ताल से संबंधित पुस्तक प्रकाशित की गई है, जो काफी उपयोगी है।

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