राय और ब्लॉग्स / जागरण
जब भारत विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, तब महत्वाकांक्षा केवल बड़ी अर्थव्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे के नेटवर्क या अधिक सक्षम शासन-व्यवस्था के निर्माण
पीसा रिपोर्ट के रुझानों से भारत भी अछूता नहीं है। इसलिए हमारे नीति-नियंताओं को भी इस पर विचार करना चाहिए।
ध्यान रहे कि आनलाइन भुगतान की भारतीय प्रणाली की सराहना दुनिया भर में होती है। इस प्रणाली का और अधिक विस्तार हो, इसके लिए हरसंभव उपाय किए जाने चाहिए।
वह इकोसिस्टम हावी है, जो किसी मुद्दे को तूल देकर या उसकी अनदेखी कर लोगों के सोचने के तरीके को प्रभावित करता है
धार्मिक उत्सवों-आयोजनों में सुधार की जिम्मेदारी सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती और न ही यह आशा की जा सकती है कि अपने आप कोई नई संस्कृति जन्म लेगी
केंद्र सरकार की पहल पर छह राज्यों - उत्तराखंड, हिमाचल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा - ने महत्वाकांक्षी किशाऊ बांध परियोजना पर सहमति जताई
पंजाब आतंकवाद की अंधेरी सुरंग से तो निकल आया है, लेकिन अभी भी अनेक विघ्नसंतोषी तत्व फिर माहौल बिगाड़ने के खतरनाक मंसूबे पाले हुए हैं, जिन्हें नाकाम कर
इस क्रम में सात वर्ष बाद शी चिनफिंग की भारत यात्रा, मोदी से बातचीत, सीमा पर चीनी सैन्य तैनाती में कमी और विभिन्न संवाद तंत्रों की सक्रियता इसके संकेत
पाकिस्तान में पनप रहा आतंकवाद वैश्विक जिहाद को खाद-पानी दे रहा है और यह जिहाद अमेरिका के लिए भी खतरा बन सकता है।
भारत में युवाओं में कौशल की कमी उन्हें बेरोजगार और कम वेतन वाली नौकरियों में फंसा रही है, जिससे उत्पादकता और आर्थिक विकास बाधित हो रहा है।
डिग्री दुनिया को यह बताती है कि आपने क्या पढ़ा है, जबकि हुनर यह दिखाता है कि आप उस पढ़ाई से क्या कर सकते हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सहयोग की भावना के साथ संपन्न हुआ, जिसमें भारत ने सदस्य देशों के बीच संतुलन साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
लगभग 77 वर्ष बाद यह चेतावनी एक नए सवाल के साथ हमारे सामने है
हिंदी सिनेमा ने भाषा को अकादमिक बोझ से मुक्त कर जन-जन तक पहुंचाया, उसे बोलचाल और भावनाओं की भाषा बनाया
भारत ने ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र पर सदस्य देशों, विशेषकर ईरान, सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेदों के बावजूद सहमति बनाकर अपनी कूटनीतिक कुशलता का प्र
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने से छात्रों की मौत ने शहरी विकास की खामियों और अनियोजित निर्माण पर सवाल उठाए हैं
ब्रिक्स सम्मेलन का सबसे संवेदनशील पहलू भारत-चीन-रूस त्रिकोण होगा। भारत दोनों के साथ संबंध रखता है, लेकिन दोनों से अलग-अलग चुनौतियां भी हैं।
लोकतांत्रिक राज्य को असहमति सहनी चाहिए, लेकिन अराजकता के सामने आत्मसमर्पण नहीं। पुलिस संयमित हो, लेकिन पंगु नहीं, प्रशासन जवाबदेह हो, लेकिन असहाय नहीं
देखना यह है कि दिल्ली में आयोजित बिक्स सम्मेलन में सदस्य और सहयोगी देश अपने मतभेदों को भुलाकर आपसी व्यापार को कितना आगे ले जाने की कोई ठोस रूपरेखा बना
आतंक के खिलाफ कोरी बातें ही उसे ताकत प्रदान कर रही हैं। आज सबसे आवश्यक यह है कि आतंकवाद को संयुक्त राष्ट्र की ओर से परिभाषित किया जाए और आतंक के पोषक
रंपरागत रूप से पाकिस्तान में सेनाध्यक्ष ही सत्ता के सबसे ताकतवर चेहरे रहे हैं, जिनका रसूख निर्वाचित सरकार और उसके मुखिया से कहीं अधिक होता है।
ध्यान रहे इसके बावजूद मुस्लिम लीग अलगाववादी एजेंडे पर चलती रही और देश के विभाजन का कारण बनी। आखिर कांग्रेस आज भी मुस्लिम लीग की आपत्तियों को महत्व क्य
भारत की अध्यक्षता ब्रिक्स को संप्रभु राष्ट्रों के एक स्वतंत्र मंच के रूप में अक्षुण्ण रखते हुए व्यावहारिक सहयोग के एक अधिक प्रभावी माध्यम के तौर पर स्
शासन-प्रशासन में अनुभव, समझ और संयम का महत्व तो सदैव रहेगा, मगर भारत के भविष्य को गढ़ने में भावी पीढ़ी की भूमिका तय होनी ही चाहिए।
जापान, चीन और यूरोपीय देश न जाने कब से प्रमुख मार्गों पर बुलेट ट्रेन चला रहे हैं। इसी तरह एक सच्चाई यह भी है कि इन देशों में सामान्य ट्रेनों की औसत गत
अफसोस कि यह पहली बार नहीं, जब सरकार या फिर सुप्रीम कोर्ट या फिर दोनों, किसी समूह के अराजक व्यवहार के सामने घुटने टेकते दिखे हों। नागरिकता संशोधन कानून
हाइब्रिड आतंकवाद से निपटने में आम नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी सुरक्षा एजेंसियों की। अगर कोई डिजिटल मीडिया पर संदिग्ध किस्म का क
अच्छा हो कि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर कोई ऐसा साझा तंत्र बनाए, जो राजमार्गों में आवागमन को सुरक्षित कर सके। राज्य सरकारों को
देशभर के लगभग 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्र 8.9 करोड़ से अधिक बच्चों, महिलाओं और किशोरियों तक पहुंच रहे हैं, और इन्हें चलाने वाली 25.2 लाख कार्यकर्ता एवं सह
शिक्षकों की कमी का पहला असर कक्षा पर पड़ता है। उपलब्ध शिक्षकों को अधिक कक्षाएं और अधिक प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं।
मुख्य न्यायाधीश बनने की वरिष्ठता-परंपरा में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का नाम है। उनके बाद बीवी नागरत्ना का नाम है।
यह ठीक नहीं कि आज जब देश को विकसित बनाने की बातें हो रही हैं, तब वैसी घटनाएं हो रही है, जैसी कई निर्धन देशों में भी नहीं होतीं।
भारत में उपभोक्ताओं की कमी नहीं है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि उनके द्वारा खर्च किए गए प्रत्येक रुपये से अधिक से अधिक आय का निर्माण हो
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8% आर्थिक वृद्धि दर एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह देश की पूरी आर्थिक स्थिति का एकमात्र पैमाना नहीं ह
दिल्ली के सत्य निकेतन में जर्जर इमारत ढहने से व्यवस्था की पोल खुल गई, जो पुरानी इमारतों की निगरानी और अवैध निर्माण रोकने में विफल है
जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं की आवृत्ति बढ़ रही है
आजादी के पहले के तीन दशक तक किसी परीक्षार्थी का पेपर लीक या सॉल्वर जैसे शब्दों से कोई परिचय नहीं था, लेकिन आज पेपर लीक को झेलना युवाओं की नियति बन गया
भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प में शिक्षकों की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया गया है, जो ज्ञान के साथ विवेक और चरित्र का निर्माण करते हैं।
शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति ने शिक्षकों को सम्मानित किया, वहीं प्रधानमंत्री ने उनसे छात्रों की ड्रग और मोबाइल लत पर ध्यान देने का आग्रह किया
भारत ने पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर्ज की, जिससे वह विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया
केवल विद्यार्थी के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षक के रूप में भी, ताकि वे भारत को जान सकें और समय आने पर उसका नेतृत्व कर सकें।
विकसित देशों में भी डबल डिफ्लेशन पद्धति अपनाने पर इस तरह के परिणाम सामने आए हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी तै
इस अंतरिक्ष एजेंसी के लिए यह भी आवश्यक है कि वह हर मामले में आत्मनिर्भर बने और अपनी उत्कृष्टता सिद्ध करती रहे, क्योंकि आने वाले समय में प्रतिस्पर्धा ब
एक तरफ चैरिटी की बातें की जाती हैं और यह कहा जाता है कि हम सब बराबर हैं, मगर अफसोस है कि मुनाफे के लिए हर तरह की तरकीबें अपनाई जा रही हैं और लोगों की
देश को इतिहासबोध, आत्मसमीक्षा और संविधान में अटूट निष्ठा की आवश्यकता है। सभ्यतागत आत्मविश्वास अतीत पर शर्मिंदा होने में नहीं, बल्कि उसे समझकर आगे बढ़न
यह सही समय है कि उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को ध्यान में रखकर शुरू की गई ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड संबंधी परियोजना क
न्यूयार्क की स्थानीय राजनीति, एक्टिविस्ट संगठनों, भारत विरोधी अभियानों और धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर सक्रिय संस्थाओं के बीच एक ऐसा वैचारिक इकोसिस्टम
ऐसे में अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि निजी निवेश और नई नौकरियां विकास के इंजन बनें। भारत ने साबित किया कि वह वैश्विक संकट के बीच भ
राम मंदिर उन आदर्शों का प्रकाशपुंज बनना चाहिए, जिनके लिए श्रीराम जाने और पूजे जाते हैं। वैसे तो संत समाज की यह मांग रही है कि राम मंदिर का संचालन उनके
यह एक तथ्य है कि जनभागीदारी वाले कई सामाजिक अभियान महज मोदी सरकार के अभियान बनकर रह गए हैं। यह स्थिति तब है, जब देश में कई समस्याएं ऐसी हैं, जिनका समा

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