क्रिकेट इतिहास की अनोखी हार! खराब प्रिंटर की वजह से मैच हार गई टीम
क्रिकेट में अक्सर आपने सुना होगा कि मैदान पर बल्लेबाज, गेंदबाज या फिर बारिश की वजह से मैच का नतीजा बदल जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि प्रिंटर खराब होने की वजह से एक टीम हार गई। नॉर्दर्न आयरलैंड में एक मैच का फैसला बेहद अनोखी वजह से हुआ। मैदान पर खेल शुरू होने के बाद बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा था। इसके बाद DLS नियम के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। इसी दौरान सामने आई एक छोटी सी तकनीकी खराबीकी वजह से मुकाबले का फैसला हो गया। इस फैसले की काफी चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामलाकिस टीम के बीच था ये मुकाबलानॉर्दर्न आयरलैंड में एक क्रिकेट मैच का नतीजा बेहद अजीब तरीके से सामने आया। नॉर्थ वेस्ट क्रिकेट यूनियन प्रीमियर लीग में शनिवार को बैलीस्पैलन और एग्लिंटन के बीच मुकाबला खेला गया। एग्लिंटन की टीम 48.1 ओवर में 159 रन बनाकर ऑलआउट हो गई, जिसके बाद बैलीस्पैलन टारगेट का पीछा करने उतरी। टीम ने दो ओवर में 19 रन बना लिए थे, लेकिन तभी बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा। इसकी वजह से मैच को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। इसके बाद जो घटनाक्रम हुआ, उसने इस मुकाबले को क्रिकेट की बेहद अनोखी हार में बदल दिया।DLS शीट नहीं कर पाई प्रिंटबारिश के कारण मैच के ओवर कम करने पड़े। इसके बाद अंपायरों ने DLS नियम के तहत नया लक्ष्य तय करने का फैसला किया। लेकिन इसी समय ये मामला दिलचस्प हो गया। बैलीस्पैलन की टीम जरूरी DLS शीट प्रिंट नहीं कर सकी। टीम का प्रिंटर खराब था, इसलिए जरूरी कागज तैयार नहीं हो पाए। नियमों के मुताबिक, इन कागजों के बिना मैच फिर से शुरू नहीं किया जा सकता था। बारिश रुकने के बाद भी खेल शुरू नहीं हुआ और एग्लिंटन को विजेता घोषित कर दिया गया। इस तरह सिर्फ प्रिंटर खराब होने की वजह से बैलीस्पैलन को मैच हारना पड़ा।कैसे लिया गया फैसलानियमों के मुताबिक, अगर दोनों टीमों और अंपायरों को DLS की जरूरी शीट नहीं मिलती है तो घरेलू टीम के खिलाफ फैसला किया जा सकता है। इसके लिए मेजबान क्लब की जिम्मेदारी होती है कि वह मैच के दौरान जरूरी तकनीकी सुविधाएं तैयार रखे। बैलीस्पैलेन इस मैच की मेजबान टीम थी। क्लब के पास DLS चलाने के लिए उपयुक्त सॉफ्टवेयर वाला कंप्यूटर, पर्याप्त कागज और स्याही वाला सही प्रिंटर होना चाहिए। इसके साथ ही प्रिंटर चलाने के लिए एक ऐसा व्यक्ति भी मौजूद होना जरूरी है, जो इस काम को ठीक से संभाल सके।दोबारा नहीं शुरू हुआ मैचनॉर्थ वेस्ट क्रिकेट यूनियन के नियमों के अनुसार, मैच शुरू होने से पहले मेजबान टीम को यह सुनिश्चित करना होता है कि DLS से जुड़ा पूरा सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा हो। बैलीस्पैलन की टीम इस जरूरी व्यवस्था को तैयार रखने में नाकाम रही। इसी तकनीकी कमी का उसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा और बारिश से रुका मैच दोबारा शुरू नहीं हो सका। आखिरकार नियमों के तहत विरोधी टीम को जीत दे दी गई।
मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने की संभावना है,क्योंकि आज के कारोबार में GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं,जबकि वॉल स्ट्रीट में कल गिरावट रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।सुबह करीब 8.10 बजे GIFT निफ्टी 24,166 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इसमें पिछले दिन की क्लोजिंग से 60 अंक या 0.25 प्रतिशत नीचे कारोबार हो रहा था। पिछले सेशन में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 307.68 अंक या 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,956.83 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ था।मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मिले-जुले बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ से मिलने वाले कुछ सपोर्ट को बेअसर कर सकती हैं। साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाए रख सकता है। इससे उभरते बाजारों में रिस्क लेने की इच्छा पर असर पड़ सकता है।US-Iran के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने से तेल की कीमत $91 के पारमंगलवार को मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं है। ब्रेंट क्रूड 0.7% बढ़कर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है,जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $86.55 प्रति बैरल हो गया है। US और ईरान के बीच लगभग एक महीने में पहली बार हमले हुए है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हमले किए।एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुखआज मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल है। निवेशक जियोपॉलिटिकल चिंताओं और क्षेत्रीय बाजारो में मजबूती के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। ताइवान के शेयरों की अगुवाई में MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा है। हांगकांग का Hang Seng 0.7 प्रतिशत गिरा है। जबकि Shanghai Composite में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।Stock Market live Updates: GIFT निफ्टी से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, अमेरिकी बाजार गिरे, एशियाई बाजारों में बढ़तमहंगाई की चिंताओं के कारण वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ हुआ बंदसोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.70 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर आ गया,जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 7,686.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 0.12 प्रतिशत गिरकर 26,370.89 पर आ गया।हाल के संकेतों से पता चलता है कि पॉलिसी मेकर्स महंगाई को काबू में रखने पर फोकस रहे हैं। US जॉब्स रिपोर्ट अगला अहम ग्लोबल ट्रिगर होगा। निवेशक इसमें फेड की पॉलिसी की दिशा,ट्रेज़री यील्ड और जोखिम लेने की इच्छा से जुड़े संकेत तलाशेंगे।भारत की मज़बूत GDP ग्रोथ से घरेलू बाजार को सपोर्टघरेलू मोर्चे पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और बाज़ार की उम्मीदों,दोनों से बेहतर है।एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है। उन्हें उम्मीद है कि ग्रोथ के ये आंकड़े भारतीय इक्विटी मार्केट के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेंगे।डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Noida News:राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए नोएडा अथॉरिटी ने एक अहम योजना तैयार की है। नोएडा सेक्टर-148 और सेक्टर-150 को जोड़ने के लिए करीब 500 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इसप्रोजेक्ट पर लगभग 85 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य एक्सप्रेसवे के दोनों ओर स्थित सेक्टरों के बीच आवाजाही आसान करना और मौजूदा संकरे अंडरपास पर वाहनों का दबाव कम करना है।148 से 150 के बीच बनेगा 500 मीटर का फ्लाईओवरनोएडा अथॉरिटी एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित सेक्टर-148, 149, 150, 151, 152 और 153 के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने की तैयारी में है। प्रस्तावित फ्लाईओवर करीब 500 मीटर लंबा होगा और मुख्य रूप से सेक्टर-148 तथा सेक्टर-150 को आपस में जोड़ेगा। अथॉरिटीने इस परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 85 करोड़ रुपये बताई गई है।मौजूदा अंडरपास बना परेशानी का कारणफिलहाल, इस एक्सप्रेसवे के नीचे बने अंडरपास के जरिए आसपास के सेक्टरों के लोग एक तरफ से दूसरी तरफ आते-जाते हैं। लेकिन यह अंडरपासकाफी संकरा है। खासकर सुबह और शाम के पीक आवर्स में यहां वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है।समस्या सिर्फ जाम तक सीमित नहीं है। मानसून के दौरान अंडरपास में पानी भरने से आवाजाही और ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे में फ्लाईओवर बनने के बाद स्थानीय वाहन चालकों को अंडरपास पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही एक्सप्रेसवे के दोनों ओर आने-जाने के लिए एक वैकल्पिक और सीधा रास्ता उपलब्ध होगा।करीब 2 लाख लोगों को होगा फायदाअथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना से आसपास के सेक्टरों में रहने वाले करीब दो लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा आसपास के करीब 20 गांवों के लोगों के लिए भी स्थानीय आवागमन आसान होगा। फ्लाईओवर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्थानीय ट्रैफिक को एक्सप्रेसवे के नीचे बने संकरे अंडरपास से गुजरने की मजबूरी कम होगी। इससे पीक आवर्स में जाम की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।स्पोर्ट्स सिटी में बढ़ने वाली गतिविधियों को ध्यान में रखकर फैसलानोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टर-150 में स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यहां खेल सुविधाओं और अन्य परियोजनाओं के विकसित होने के साथ ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए अथॉरिटी ने अभी से कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना बनाई है। नोएडा अथॉरिटी केजनरल मैनेजर ए.के. अरोड़ा ने बताया कि क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास को ध्यान में रखते हुए सेक्टर-148 और सेक्टर-150 को जोड़ने वाला फ्लाईओवर बनाने का निर्णय लिया गया है।स्पोर्ट्स सिटी की परियोजनाओं को भी मिली राहतइसी बीच नोएडाजनरल मैनेजरबोर्ड ने स्पोर्ट्स सिटी के संशोधित लेआउट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वर्ष 2022 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं पर लगाया गया व्यापक प्रतिबंध भी हटा दिया गया है।इस फैसले से लंबे समय से अटके प्रोजेक्टों में फंसे करीब 20,000 होमबायर्स को अपने फ्लैटों का कब्जा और रजिस्ट्री मिलने की उम्मीद जगी है।यह कदम नवंबर 2025 में जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में उठाया गया है।इससे उन परियोजनाओं से जुड़े नक्शे की मंजूरी, बिल्डिंग प्लान के दोबारा सत्यापन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाओं का रास्ता साफ हुआ है, जो लंबे समय से अटकी हुई थीं।एक्सप्रेसवे पर पहले से हैं दो प्रमुख फ्लाईओवरनोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल महामाया फ्लाईओवर और सेक्टर-128 का फ्लाईओवर प्रमुख क्रॉस-एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी देते हैं। प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के आसपासट्रैफिक व्यवस्था बेहतर करने के लिए कई अंडरपास भी बनाए हैं। इनमें सेक्टर-94, कोंडली गांव, एडवांट और सेक्टर-148 के अंडरपास शामिल हैं। इसके अलावा झट्टा और सुल्तानपुर गांव में भी अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा है।फ्लाईओवर से स्थानीय ट्रैफिक को मिलेगा सीधा रास्तानए फ्लाईओवर के बनने के बाद नोएडा के प्रमुख सेक्टर-148 और 150 के बीच आने-जाने वालेगाड़ियों को मौजूदा संकरे अंडरपास से होकर गुजरने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे जाम, मानसून में जलभराव और पीक आवर्स मेंट्रैफिक दबाव जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। नोएडा में एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से हो रहे आवासीय औरकमर्शियल डेवलपमेंट केबीच यह फ्लाईओवर भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक को देखते हुए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साबित हो सकता है।ये भी पढ़ें- रूसी सेना में भर्ती 227 भारतीयों में से 51 की यूक्रेन युद्ध में मौत, 139 लौटे घर; बाकी की रिहाई के लिए बातचीत जारी
Silver Price Today: 1 सितंबर 2026 चांदी खरीदने वालों के लिए आज के भाव जानना बेहद जरूरी है। वैश्विक बाजार में जारी हलचल के बीच चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। घरेलू बाजार में भी चांदी के भाव अलग-अलग प्लेटफॉर्म और शहरों के हिसाब से अलग नजर आ रहे हैं। MCX पर चांदी के वायदा भाव में आज मामूली तेजी दर्ज की गई है, जबकि सर्राफा बाजार और बुलियन्स में इसके दाम अलग स्तर पर हैं। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि आज चांदी किस भाव पर मिल रही है और पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले इसमें कितना बदलाव आया है।अगर आप भी आज चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं या कीमतों पर नजर रख रहे हैं, तो यहां जानिएMCX से लेकर देश के प्रमुख शहरों तक चांदी के ताजा भाव, साथ ही अलग-अलग शुद्धता वाली चांदी की कीमतें।MCX पर चांदी का वायदा भाव कितना बढ़ा?MCX पर सुबह तक चांदी का वायदा भाव 0.06 फीसदी यानी 136 रुपये की बढ़त के साथ 2,33,977 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में चांदी का वायदा भाव 2,33,841 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था।यानी शुरुआती कारोबार में चांदी की कीमत में मामूली सुधार देखने को मिला है। हालांकि, हाल के कारोबारी सत्रों में कीमती धातु की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है।बुलियन्स के अनुसार चांदी का आज का भावबुलियन्स के आंकड़ों के मुताबिक, 999 फाइन चांदी का भाव बढ़कर 2,39,800 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। वहीं, चांदी की अलग-अलग शुद्धता के हिसाब से कीमतें इस प्रकार हैं:चांदी की शुद्धता 1 किलो भाव999 फाइन चांदी ₹2,39,800925 स्टर्लिंग चांदी ₹2,21,815900 कॉइन चांदी ₹2,15,820800 जर्मन चांदी ₹1,91,840अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों पर नजरवैश्विक बाजार में भी चांदी की कीमत में हलचल जारी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 57.86 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है। वैश्विक बाजार की चाल का असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिलता है।दिल्ली के सर्राफा बाजार में क्या है चांदी का रेट?दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2,45,500 रुपये प्रति किलोग्राम, सभी टैक्स समेत, बताई गई है। वहीं, गुडरिटर्न्स के अनुसार दिल्ली में चांदी का भाव 2,55,000 रुपये प्रति किलो है। दोनों आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि अलग-अलग स्रोत कीमत तय करने के लिए अलग बाजार, टैक्स और मूल्य निर्धारण के आधार इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से अंतिम कीमत जरूर कन्फर्म करनी चाहिए।देश के प्रमुख शहरों में आज चांदी कितने की?गुडरिटर्न्स के मुताबिक, 1 सितंबर को देश के ज्यादातर प्रमुख शहरों में चांदी का भाव 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं कुछ शहरों में यह कीमत 2,60,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।दिल्ली: ₹2,55,000मुंबई: ₹2,55,000कोलकाता: ₹2,55,000चेन्नई: ₹2,60,000पटना: ₹2,55,000लखनऊ: ₹2,55,000मेरठ: ₹2,55,000अयोध्या: ₹2,55,000कानपुर: ₹2,55,000गाजियाबाद: ₹2,55,000नोएडा: ₹2,55,000गुरुग्राम: ₹2,55,000चंडीगढ़: ₹2,55,000जयपुर: ₹2,55,000अहमदाबाद: ₹2,55,000पुणे: ₹2,55,000लुधियाना: ₹2,55,000गुवाहाटी: ₹2,55,000इंदौर: ₹2,55,000सूरत: ₹2,55,000नागपुर: ₹2,55,000नासिक: ₹2,55,000बैंगलोर: ₹2,55,000वडोदरा: ₹2,55,000भुवनेश्वर: ₹2,60,000रायपुर: ₹2,55,000हैदराबाद: ₹2,60,000पिछले कारोबारी दिन सर्राफा बाजार में क्या रहा भाव?कारोबारियों के अनुसार, पिछले कारोबारी दिन दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी 2,45,500 रुपये प्रति किलोग्राम, सभी टैक्स समेत, पर स्थिर रही। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी में करीब एक फीसदी की तेजी दर्ज की गई और कीमत 66.97 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।इससे संकेत मिलता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की चाल एक जैसी नहीं रही और दोनों बाजारों में अलग-अलग स्तर पर उतार-चढ़ाव देखने को मिला।पिछले दिन वायदा बाजार में चांदी क्यों गिरी?इससे पहले सोमवार को कमजोर हाजिर मांग और कारोबारियों की ओर से सौदों का आकार घटाए जाने के कारण चांदी के वायदा भाव में गिरावट आई थी। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 1,955 रुपये यानी 0.81 फीसदी गिरकर 2,40,489 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई थी।वैश्विक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। न्यूयॉर्क में चांदी की कीमत 1.04 फीसदी की गिरावट के साथ 68.22 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी।क्यों महत्वपूर्ण है चांदी की मौजूदा चाल?चांदी की कीमत पर घरेलू मांग के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा, डॉलर की चाल, निवेशकों की धारणा और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर पड़ता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच कीमती धातुओं में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।LPG Price Hike: 1 सितंबर से गैस सिलेंडर हुआ महंगा, ₹10.50 तक बढ़े दाम
CNG-PNG Price Hike: गाड़ी चलाना और खाना पकाना हुआ महंगा, महानगर गैस ने बढ़ाए रेट
महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कीमतों में 1 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इसके पीछे कंपनी ने मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण इनपुट लागत (कच्चे माल की लागत) में बढ़ोतरी का तर्क दिया है। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में CNG की नई कीमत 88 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। यह 1 सितंबर 2026 की आधी रात से लागू होगी।बयान के मुताबिक, CNG की काफी मांग है और CNG सेगमेंट के लिए इनपुट गैस का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्टेड स्पॉट RLNG (रीगैसिफाइड लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के जरिए पूरा किया जा रहा है, जिसकी कीमतें अधिक हैं। महानगर गैस ने कहा कि CNG की कीमतों में बढ़ोतरी से इनपुट गैस की बढ़ती लागत की आंशिक रूप से भरपाई होगी और ग्राहकों को CNG की लगातार और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।MGL की कहां-कहां सप्लाईमहाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, लातूर, धाराशिव और कर्नाटक के चित्रदुर्ग और दावणगेरे में लगभग 13 लाख CNG व्हीकल महानगर गैस लिमिटेड के सप्लाई नेटवर्क पर निर्भर हैं। घरेलू PNG के मामले में, इनपुट लागत में बढ़ोतरी के कारण 30 लाख घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कीमत में 1 रुपये प्रति SCM की बढ़ोतरी की गई है।इससे पहले इंद्रप्रस्थ गैस ने CNG की कीमतों में 3.89 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी करके उन्हें 86.98 रुपये प्रति किलो करने की घोषणा की थी। इंद्रप्रस्थ गैस, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सेवा देती है। इसने भी रेट बढ़ाने के पीछे इनपुट लागत में बढ़ोतरी का हवाला दिया था।LPG Price Hike: 1 सितंबर से गैस सिलेंडर हुआ महंगा, ₹10.50 तक बढ़े दामकमर्शियल LPG महंगी1 सितंबर से देश में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम 10.50 रुपये तक बढ़ गए हैं। इसके बाद दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 2747.50 रुपये हो गई है। मुंबई में इस सिलेंडर की कीमत अब 2701 रुपये, चेन्नई में 2916.50 रुपये हो गई है। कमर्शियल LPG सिलेंडर का इस्तेमाल होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में होता है। इसके अलावा बाजार मूल्य वाले 5 किलो के नॉन डोमेस्टिक LPG सिलेंडर की कीमत भी 2 रुपये बढ़ाकर 764 रुपये कर दी गई है।
सिंगापुर में इंडिया एनर्जी शोकेस: भारत के तेल एवं गैस क्षेत्र में भारी निवेश के अवसरों पर मंथन
गुरदीप सिंहसिंगापुर, एक सितंबर वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों और निवेशकों ने सोमवार को सिंगापुर में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ में भारत के तेल और गैस क्षेत्र में मौजूद अरबों डॉलर के निवेश के अवसरों और उन्हें बढ़ावा देने वाले सुधारों पर चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने की। इसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। सिंगापुर में भारत की उप उच्चायुक्त सुधि चौधरी ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत-सिंगापुर सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने तेल और गैस की पूरी मूल्य श्रृंखला में भारत और सिंगापुर की कंपनियों के बीच और करीबी साझेदारी की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के जरिए तेल एवं गैस अन्वेषण के लिए बोली प्रक्रिया, भारत में बीपी समूह के अनुभव और ‘इंडिया एनर्जी वीक 2027’ की जानकारी दी गई। सचिव नीरज मित्तल के नेतृत्व में हुई प्रस्तुति में तेल और गैस क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में बड़े निवेश अवसरों की जानकारी दी गई। इसमें सरकार के ‘समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण मिशन’ के तहत तेल-गैस की खोज और उत्पादन, ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विनिर्माण, रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स एवं गैस संबंधी बुनियादी ढांचा तथा रणनीतिक भंडारण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कार्यक्रम में बताया गया कि भारत की ऊर्जा मांग वैश्विक औसत की तुलना में तीन से चार गुना तेज गति से बढ़ रही है। साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी के लिए इक्विटी निवेश, संयुक्त उपक्रम, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों जैसे विकल्पों की जानकारी दी गई। हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) के महानिदेशक श्रीकांत नागुलापल्ली ने भारत की हाइड्रोकार्बन संसाधन क्षमता और सरकार द्वारा किए जा रहे अन्वेषण संबंधी सुधारों की जानकारी दी। इनमें ‘समुद्र मंथन’ भी शामिल है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने 31 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण मिशन को मंजूरी दी थी, जिसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक 8.85 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाएंगे। कार्यक्रम में निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल नियामक व्यवस्था तैयार करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा किए जा रहे अन्वेषण एवं उत्पादन संबंधी सुधारों को भी प्रमुखता से बताया गया। प्रस्तुति में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और भारतीय हितधारकों के बीच लगातार सहयोग के महत्व को रेखांकित किया गया। इसमें कहा गया कि भारत के भविष्य को ध्यान में रखकर किए जा रहे सुधार देश में लगातार निवेश के प्रमुख कारणों में से एक हैं। मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और निवेशकों से जुड़ने, भारत के नीतिगत एवं नियामकीय सुधारों को सामने रखने और देश के ऊर्जा क्षेत्र में उभर रहे निवेश अवसरों को रेखांकित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। मंत्रालय ने कहा कि कार्यक्रम ने साझेदारी को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों के साथ सहयोग मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम का समापन सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के लिए लगातार सहयोग और संवाद जारी रखने पर जोर के साथ हुआ। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (अन्वेषण) विनोद शेषन ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
1 सितंबर से कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा हो गया है, जिसमें 19-किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 11.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी व्यवसायों की लागत बढ़ाएगी और विभिन्न शहरों में नए रेट लागू हो गए हैं, जिसमें पटना में सबसे महंगा LPG है।
गैस... दूध से कारें तक महंगी, आज से देश में लागू हुए ये 5 बड़े बदलाव
Rule Change From 1st September: देश में सितंबर महीने की शुरुआत कई बड़े बदलावों के साथ हुई है और खासतौर पर मुंबई में पहली तारीख को महंगाई का चौतरफा अटैक देखने को मिला है, यहां ऑटो का किराया भी बढ़ गया है.
Mumbai Auto-Taxi Fare Hike: अब ऑटो-टैक्सी का सफर हुआ महंगा, जानें कितना बढ़ा किराया
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ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड का ₹700 करोड़ का IPO 124.02 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हो चुका है। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 232.79 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 185.21 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 40.27 गुना और एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व हिस्सा 12.37 गुना भरा। अब 1 सितंबर को अलॉटमेंट फाइनल होने का इंतजार है। इसके बाद कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 3 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं।जिन लोगों ने Lumino Industries IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार Bigshare Services Pvt Ltd और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है...BSE पर कैसे करें चेक https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं। इश्यू का टाइप 'इक्विटी' चुनें। ड्रॉपडाउन मेन्यू से Lumino Industries IPO चुनें। एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें। 'कैप्चा' डालें। 'Submit' बटन पर क्लिक करें। Bigshare Services की साइट से https://www.bigshareonline.com/ipo_allotment.html पर जाएं। 3 सर्वर्स में से किसी एक को चुनें। कंपनी में Lumino Industries सिलेक्ट करें। एप्लीकेशन नंबर/PAN/बेनिफीशियरी ID में से किसी एक को सिलेक्ट कर डिटेल एंटर करें। 'कैप्चा' डालें। 'सर्च' बटन पर क्लिक करें। IPO की ओपनिंग से पहले ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज ने एंकर इनवेस्टर्स से 207 करोड़ रुपये जुटाए थे। इश्यू में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹78-₹82 प्रति शेयर था। लॉट साइज 182 शेयर है। IPO में करीब ₹500 करोड़ के 6.10 करोड़ नए शेयर जारी हुए। साथ ही लगभग ₹200 करोड़ के 2.44 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। OFS में कंपनी के प्रमोटर देवेंद्र गोयल और जय गोयल ने शेयरों को बिक्री के लिए रखा।NSE IPO: NSE के आईपीओ से पहले SBI का बड़ा ऐलान! ₹30000 करोड़ के मेगा इश्यू में बेचेगा अपनी हिस्सेदारीक्या करती है Lumino Industriesल्यूमिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक इंटीग्रेटेड इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी है। यह अपने प्रोडक्ट भारत की बड़ी EPC कंपनियों को सप्लाई करती है और इंटरनेशनल ग्राहकों को भी सेवाएं देती है। इसका फोकस पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए कंडक्टर, पावर केबल, इलेक्ट्रिकल वायर और खास तरह के प्रोडक्ट बनाने और उनकी सप्लाई करने पर है। कंपनी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-टेंपरेचर लो-सैग (HTLS) कंडक्टर भी बनाती है।इसके मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में एल्युमीनियम कंडक्टर, पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर शामिल हैं। वहीं EPC बिजनेस में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, HTLS री-कंडक्टरिंग, EHV सबस्टेशन, सोलर पावर प्रोजेक्ट और वॉटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शामिल हैं।IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमालकंपनी अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों में से एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। इसके अलावा मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए उपकरणों और मशीनरी की खरीद, सिविल वर्क और इंटीरियर डेवलप करने के लिए भी इन पैसों का इस्तेमाल होगा। बाकी बचे पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए रहेंगे। ग्रे मार्केट में ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज का शेयर अभी 58.54 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 7 प्रतिशत बढ़कर ₹2,089.31 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹160 करोड़ रहा। एक साल पहले रेवेन्यू ₹1,946.68 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹124.59 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹384.16 करोड़ की उधारी थी।Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
ENG vs PAK Test at London: इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो शर्मनाक हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव किया गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने तीसरे टेस्ट से पहले 7 खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर वापस पाकिस्तान भेजने का फैसला किया है। इनमें तीन प्रमुख बल्लेबाज सलमान अली आगा, मोहम्मद रिजवान और इमाम-उल-हक भी शामिल हैं। इसके साथ ही हेड कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी वापस बुला लिया गया है। अब इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के तीसरे और आखिरी टेस्ट में व्हाइट-बॉल कोच माइक हेसन टीम की कमान संभालेंगे।इन 7 खिलाड़ियों को भेजा गया घरPCB के फैसले के मुताबिक सलमान अली आगा, मोहम्मद रिजवान और इमाम-उल-हक के अलावा अली उस्मान, आमेर जमाल, अवैस जफर और खुर्रम शहजाद भी पाकिस्तान लौटेंगे। तीसरा टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन, बर्मिंघम में खेला जाना है।दो टेस्ट हार के बाद बड़ा फैसलापाकिस्तान की टीम इंग्लैंड दौरे पर बेहद खराब प्रदर्शन कर रही है। पहले टेस्ट में लीड्स में उसे एक पारी और 103 रन से करारी हार मिली थी। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी पाकिस्तान को 194 रन से हार का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान की बल्लेबाजी रही। टीम दोनों टेस्ट के चारों पारियों में 200 रन का आंकड़ा तक पार नहीं कर सकी।लगातार दो हार के बाद PCB पर टीम के प्रदर्शन को लेकर दबाव बढ़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी (जो पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं) को अपनी राजनीतिक नेतृत्व की ओर से भी टीम के प्रदर्शन को लेकर दबाव का सामना करना पड़ रहा है।रिजवान के प्रदर्शन पर उठे सवालमोहम्मद रिजवान के लिए भी इंग्लैंड दौरा बेहद खराब रहा। उन्होंने दो टेस्ट मैचों में कुल 61 रन बनाए। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इसके बावजूद वह पाकिस्तान के लिए सीरीज में चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। रिजवान के शॉट चयन और बल्लेबाजी के तरीके की जमकर आलोचना हुई। इसके बाद तीसरे टेस्ट से पहले उन्हें टीम से वापस भेजने का फैसला किया गया है।इमाम-उल-हक को लेकर भी विवादइमाम-उल-हक का मामला और भी ज्यादा चर्चा में रहा। लॉर्ड्स टेस्ट में वह बल्लेबाजी करने नहीं उतरे। PCB के आधिकारिक बयान के अनुसार, पहली पारी में फील्डिंग के दौरान उनके पिंडली में चोट (calf strain) लगी थी। हालांकि, इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज और कमेंटेटर स्टुअर्ट ब्रॉड ने इमाम की चोट पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई थी कि वह मैदान पर लंगड़ाने का नाटक कर रहे थे।चौथे दिन सुबह थ्रोडाउन लेते समय उनके चलने के तरीके को लेकर भी ब्रॉड ने टिप्पणी की थी। इसके बाद इमाम की पुरानी चोटों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच पाकिस्तान में होगी। खास बात यह है कि इमाम के तीसरे टेस्ट तक फिट होने की संभावना बताई जा रही थी। फिर भी उन्हें वापस भेज दिया गया।सलमान आगा भी टीम से बाहरव्हाइट-बॉल टीम के कप्तान सलमान अली आगा भी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें इंग्लैंड से वापस बुलाया गया है। उन्होंने बाबर आजम की गैरमौजूदगी में पहले टेस्ट में पाकिस्तान की कप्तानी की थी। हालांकि दूसरे टेस्ट में वह टीम का हिस्सा नहीं थे। अब उन्हें भी तीसरे टेस्ट से पहले वापस पाकिस्तान भेजने का फैसला किया गया है।दो नए बल्लेबाजों की टीम में एंट्रीपाकिस्तान ने तीसरे टेस्ट के लिए साइम अयूब और अब्दुल्ला फजल को टीम में बुलाया है। दोनों जल्द इंग्लैंड के लिए रवाना होंगे। इसके अलावा पांच ऐसे खिलाड़ियों को भी इंग्लैंड भेजने की तैयारी है, जिन्होंने अभी तक टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू नहीं किया है। इनमें अराफात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बैग, मोहम्मद इमरान रंधावा और रज़ाउल्लाह शामिल हैं। हालांकि इन खिलाड़ियों की इंग्लैंड यात्रा उनके यूके वीजा समय पर मिलने पर निर्भर करेगी।माइक हेसन संभालेंगे टीमपाकिस्तान ने कोचिंग स्टाफ में भी बड़ा बदलाव किया है। हेड कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल की जगह माइक हेसन फाइनल टेस्ट में टीम के साथ काम करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक हेसन पहले ही टीम के साथ जुड़ चुके हैं। अब वहबर्मिंघम टेस्ट की तैयारी में जुट गए हैं। लगातार दो बड़ी हार के बाद पाकिस्तान ने तीसरे टेस्ट से पहले टीम के साथ-साथ कोचिंग स्टाफ में भी बड़ा फेरबदल कर दिया है। अब देखना होगा कि बर्मिंघम में होने वाला तीसरा टेस्ट पाकिस्तान को वापसी दिलाता है या इंग्लैंड के खिलाफ उसकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।ये भी पढ़ें- रूसी सेना में भर्ती 227 भारतीयों में से 51 की यूक्रेन युद्ध में मौत, 139 लौटे घर; बाकी की रिहाई के लिए बातचीत जारीतीसरे टेस्ट के लिए पाकिस्तान की नई टीम इस प्रकार है:-बाबर आजम (कप्तान), अब्दुल्ला फजल, अराफात मिन्हास, अजान अवैस, मोहम्मद अब्बास, मोहम्मद अली, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद इमरान जूनियर, मुहम्मद गाजी घोरी (विकेटकीपर), रज़ाउल्लाह, साद बैग (विकेटकीपर), साइम अयूब, साजिद खान, सऊद शकील, शान मसूद और उबैद शाह।
ऑटो सेल्स डेटा: मारुति-टाटा की रफ्तार पर टिकी नजर, आज इन शेयरों में दिखेगी बड़ी हलचल
Auto companies are releasing August wholesale dispatch data today.
Stock Market live Updates : GIFT निफ्टी से मिल रहे संकेतों को देखते हुए लगता है कि 1 सितंबर को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत सपाट या गिरावट के साथ हो सकती है। शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी मामूली गिरावट के साथ लगभग 24,206.50 पर ट्रेड कर रहा था। उधर खराब ग्लोबल संकेतों के चलते 31 अगस्त को बाजार में दबाव देखने को मिला। बाजार निचले स्तर से सुधरने के बाद भी लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार के अंत में निफ्टी 95 प्वाइंट गिरकर 24,080 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 307 प्वाइंट गिरकर 76,957 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी 529 प्वाइंट चढ़कर 58,025 पर बंद हुआ। मिडकैप 155 प्वाइंट चढ़कर 64,225 पर बंद हुआ।
Shukra Gochar 2026: शुक्र का स्वराशि तुला में गोचर कल, मालव्य राजयोग बनने से 7 राशियां होंगी मालामाल
Shukra Gochar 2026: प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधा के कारक शुक्र ग्रह का गोचर ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ग्रह 2 सितंबर 2026 को अपनी स्वराशि तुला में गोचर कर रहा है। शुक्र का अपनी ही राशि में प्रवेश करना ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है। शुक्र के अपनी स्वराशि तुला में आने से 'मालव्य महापुरुष राजयोग' बन रहा है।यह योग भौतिक सुख-सुविधाओं, आकर्षण, ऐश्वर्य और धन में वृद्धि कराता है। कला, मीडिया, फैशन, डिजाइनिंग, व्यापार और पार्टनरशिप में काम कर रहे लोगों को इस अवधि में विशेष सफलता मिलेगी। शुक्र के इस गोचर से मेष, तुला और मकर सहित 7 राशियों के जातकों को करियर में तरक्की और आर्थिक मजबूती के विशेष अवसर मिलेंगे।इन राशियों को मिलेगा लाभमेष राशि : इस राशि वालों के लिए शुक्र का गोचर करियर और आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या बेहतर ऑफर मिल सकता है। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी कोई अच्छा विकल्प मिल सकता है।कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों के लिए यह गोचर सकारात्मक परिणाम दे सकता है। कार्यक्षेत्र में आपके काम की सराहना हो सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। कारोबार से जुड़े लोगों को नई डील या प्रोजेक्ट मिलने की संभावना है। परिवार का माहौल भी सुखद रहेगा।कन्या राशि : कन्या राशि वालों को शुक्र गोचर के दौरान आर्थिक राहत मिल सकती है। लंबे समय से अटके काम गति पकड़ सकते हैं। कमाई का कोई नया जरिया सामने आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या नौकरी बदलने का अवसर मिल सकता है।तुला राशि : शुक्र का प्रवेश तुला राशि में ही होने वाला है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह गोचर विशेष माना जा रहा है। आत्मविश्वास बढ़ेगा, व्यक्तित्व में निखार आएगा, नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के नए मौके मिल सकते हैं। लंबे समय से अटके आर्थिक मामलों में गति आएगी।कुंभ राशि : कुंभ राशि के लोगों के लिए शुक्र गोचर आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद रह सकता है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं। नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ तरक्की का रास्ता खुल सकता है। कारोबारियों को नया काम शुरू करने या निवेश का अवसर मिल सकता है।मकर राशि : मकर राशि वालों को इस गोचर के दौरान करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। कारोबारियों को नए प्रोजेक्ट से फायदा होने की संभावना है। पुराने अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं। इस अवधि में किसी बड़ी वस्तु की खरीदारी पर खर्च हो सकता है, लेकि।धनु राशि : धनु राशि वालों के लिए शुक्र का गोचर आर्थिक और प्रेम जीवन दोनों के लिहाज से अच्छा रह सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। पहले किए गए किसी निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। पैसों से जुड़ी पुरानी चिंता कम हो सकती है। प्रेम संबंधों में नजदीकियां बढ़ेंगी।Mangal Nakshatra Gochar 2026: ग्रहों के सेनापति करेंगे आर्थिक तरक्की के नक्षत्र पुनर्वसु में गोचर, मंगल और गुरु की युति से चमकेगा 5 राशियों का भाग्य
एक्सप्लेनर: क्या गंदे-फटे नोटों से मिलेगा छुटकारा, कितनी सच है प्लास्टिक करेंसी में जानवरों की चर्बी वाली बात?
Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भावये रहे 01 सितंबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेटनई दिल्ली:पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।मुंबई:पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।कोलकाता:पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।चेन्नई:पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।गुरुग्राम:पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।नोएडा:पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।बेंगलुरु:पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।भुवनेश्वर:पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।चंडीगढ़:पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।हैदराबाद:पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।जयपुर:पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।लखनऊ:पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।पटना:पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।तिरुवनंतपुरम:पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें? कच्चे तेल की कीमतें: पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपया: भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है। सरकारी टैक्स और शुल्क: केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है। रिफाइनिंग की लागत: कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है। मांग और आपूर्ति का संतुलन: बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।
LPG Price Hike: 1 सितंबर से गैस सिलेंडर हुआ महंगा, ₹10.50 तक बढ़े दाम
सितंबर के पहले दिन तगड़ा झटका मिला है। 1 सितंबर से देश में LPG सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं। हालांकि कीमत में बढ़ोतरी 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर तक ही सीमित है। दाम 10.50 रुपये तक बढ़ा है। इसके बाद दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 2747.50 रुपये हो गई है। मुंबई में इस सिलेंडर की कीमत अब 2701 रुपये, चेन्नई में 2916.50 रुपये हो गई है।कमर्शियल LPG सिलेंडर का इस्तेमाल होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में होता है। इसके अलावा बाजार मूल्य वाले 5 किलो के नॉन डोमेस्टिक LPG सिलेंडर की कीमत भी 2 रुपये बढ़ाकर 764 रुपये कर दी गई है।अगस्त और जुलाई में सस्ता हुआ था कमर्शियल सिलेंडरइससे पहले अगस्त और जुलाई में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम घटे थे। अगस्त में कटौती 209 रुपये तक और जुलाई में 183.5 रुपये तक की रही थी। उससे पहले इस साल जनवरी से लेकर जून तक कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम लगातार 7 बार बढ़े थे। मार्च महीने में 2 बार बढ़ोतरी की गई थी। इसकी वजह पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से ग्लोबल LPG मार्केट में सप्लाई में आई रुकावट और चिंताएं थीं।घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं14.2 kg के घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसकी कीमत में आखिरी बार बदलाव 7 जून 2026 को हुआ था। दाम 29 रुपये बढ़ा था। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की वेबसाइट के अनुसार, बिना सब्सिडी वाले 14.2 kg के घरेलू इंडेन LPG सिलेंडर की कीमत वर्तमान में दिल्ली में 942 रुपये है। मुंबई में कीमत 941 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये है। लोकल सेल्स टैक्स या VAT के आधार पर रेट अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होते हैं। सामान्य 5 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर आौर XTRALITE का रेट भी स्थिर है।Gold Price Today: 1 सितंबर को लगातार दूसरे दिन गिरा भाव, 18 कैरेट की गोल्ड ज्वेलरी इस शहर में बनवाना अब भी महंगा
सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट: 1 सितंबर को जानें अपने शहर में 22K और 24K के ताजा रेट
Gold prices have dropped significantly today. 1
Gold Rate Today in India: हालिया तेजी के बाद अब मुनाफावसूली ने गोल्ड पर दबाव बनाया है तो इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी से चांदी पर दबाव दिखा। गोल्ड की बात करें तो एक दिन की स्थिरता के बाद लगातार दो दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट वाला गोल्ड ₹1480 और 22 कैरट वाला ₹1360 सस्ता हुआ है। अब आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरट और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 कम हुआ है। चांदी की बात करें तो आज इसकी भी चमक फीकी हुई है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। एक किलो चांदी आज ₹100 सस्ती हुई है।सिटीवाइज गोल्ड के भावदेश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं... शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव दिल्ली ₹1,56,910 ₹1,43,840 ₹1,17,720 मुंबई ₹1,56,760 ₹1,43,690 ₹1,17,570 कोलकाता ₹1,56,760 ₹1,43,690 ₹1,17,570 चेन्नई ₹1,56,760 ₹1,43,690 ₹1,21,390 बेंगलुरू ₹1,56,760 ₹1,43,690 ₹1,17,570 हैदराबाद ₹1,56,760 ₹1,43,690 ₹1,17,570 लखनऊ ₹1,56,910 ₹1,43,840 ₹1,17,720 पटना ₹1,56,810 ₹1,43,740 ₹1,17,620 जयपुर ₹1,56,910 ₹1,43,840 ₹1,17,720 अहमदाबाद ₹1,56,810 ₹1,43,740 ₹1,17,620 तीन दिनों की स्थिरता के बाद फिसली चांदीचांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव कम हुए हैं। इन तीन दिनों की स्थिरता से पहले 28 अगस्त को लगातार छह दिनों की स्थिरता के बाद एक किलो चांदी ₹5000 सस्ती हुई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,54,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,59,900 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।क्या कहना है एक्सपर्ट कालेमन मार्केट डेस्क में रिसर्च हेड गौरव गर्ग का कहना है कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद सोने की कीमतों पर दबाव दिख रहा है। उन्होंने 28 अगस्त को जैक्सन होल में अपनी स्पीच में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी के संकेत दिए। इससे सितंबर में फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है। इसने सोने-चांदी जैसे प्रेशस मेटल्स पर दबाव बनाया। गौरव के मुताबिक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने भी दबाव बनाया। इसके अलावा अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने पर कच्चा तेल उबला तो इसने भी दबाव बनाया।₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कितने की करनी होगी मंथली SIP? जानिए 15, 20 और 25 साल का पूरा कैलकुलेशनडिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Indians in the Russian Army: भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी सेना में भर्ती किए गए भारतीय नागरिकों को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, रूसी सेना में भर्ती 227 भारतीय नागरिकों में से अब तक 51 की मौत हो चुकी है। जबकि 139 भारतीयों को रूसी सेना से डिस्चार्ज कर दिया गया है। वे भारत लौटने की प्रक्रिया में हैं। बाकी भारतीय नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए भारत लगातार रूस के संपर्क में है।विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा को लेकर हुई ब्रीफिंग के दौरान भारतीय नागरिकों से जुड़ी ये ताजा जानकारी शेयर की। उन्होंने बताया कि भारत इस मामले को रूस के सामने लगातार उठा रहा है। मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति पर नियमित रूप से नजर रख रहा है।विक्रम मिस्री ने कहा कि भारतीय नागरिकों की रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती का मुद्दा भारत और रूस के बीच कई स्तरों पर कई मौकों पर उठाया गया है। भारत की कोशिश है कि जो भारतीय अभी भी रूसी सेना में हैं, उन्हें जल्द से जल्द वहां से मुक्त कराया जाए और उनके परिवारों तक वापस पहुंचाया जाए।227 भारतीयों में 51 की मौतविदेश सचिव ने आंकड़ों की जानकारी देते हुए कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार 227 भारतीय नागरिक रूसी सेना में भर्ती किए गए थे। इनमें से 139 को अब तक डिस्चार्ज किया जा चुका है। हालांकि, उन्होंने इस मामले का सबसे गंभीर पहलू बताते हुए कहा कि 51 भारतीय नागरिकों के मारे जाने की जानकारी भारत को मिली है। उन्होंने कहा कि रूस की सेना में शामिल बाकी भारतीयों की स्थिति को लेकर भी भारत लगातार काम कर रहा है और उनकी जल्द रिहाई सुनिश्चित करने के लिए रूसी पक्ष के साथ सक्रिय बातचीत जारी है।रूस से लगातार संपर्क में भारतभारत का कहना है कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास इस पूरे मामले की लगातार निगरानी कर रहा है। दूतावास का प्रयास है कि रूसी सेना में अभी भी मौजूद भारतीय नागरिकों की पहचान, स्थिति और उनकी रिहाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। विदेश सचिव ने कहा कि भारत की कोशिश है कि बाकी मामलों का जल्द से जल्द समाधान हो और इन भारतीय नागरिकों को उनके परिवारों के पास वापस भेजा जा सके।PM मोदी और पुतिन की मुलाकात के बीच आया अपडेटये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी उनकी मुलाकात हुई। पीएम मोदी ने सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता की। दोनों नेताओं ने व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग समेत द्विपक्षीय संबंधों के कई अहम पहलुओं पर चर्चा की। यह बैठक किर्गिस्तान की राजधानी में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सालाना शिखर सम्मेलन से इतर हुई। #WATCH | Bishkek, Kyrgyzstan: Responding to ANI's question on Indians serving in the Russian army, Foreign Secretary Vikram Misri says, The issue of our nationals and citizens being recruited into the Russian armed forces has been discussed between India and Russia at various… pic.twitter.com/W4VQf9Ajyc— ANI (@ANI) August 31, 2026 यह वार्ता पुतिन के सालाना ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आने से एक हफ्ते से भी कुछ समय पहले हुई। बैठक से पहले, अधिकारियों ने बताया था कि बातचीत में भारत-रूस के बीच सहयोग के पारंपरिक क्षेत्रों, जैसे रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और निवेश पर चर्चा होगी। दोनों पक्षों के बीच रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया संकट पर भी चर्चा होने की संभावना जताई गई थी।ये भी पढ़ें- 5000 अमेरिकी सैनिकों की एंट्री से पहले थाईलैंड के पटाया में हड़कंप! जानिए प्रॉस्टिट्यूशन पर पुलिस ने क्यों शुरू किया बड़ा क्रैकडाउन
Trading Idea : खराब ग्लोबल संकेतों के चलते 31 अगस्त को बाजार में दबाव देखने को मिला। बाजार निचले स्तर से सुधरने के बाद भी लाल निशान में बंद हुआ। मिडकैप इंडेक्स बढ़त पर बंद हुए। निफ्टी बैंक इंडेक्स करीब 1% की बढ़त पर बंद हुआ। फार्मा और तेल-गैस इंडेक्स भी बढ़त पर बंद हुए। मेटल,FMCG,इंफ्रा और रियल्टी शेयरों में दबाव दिखा। कारोबार के अंत में निफ्टी 95 प्वाइंट गिरकर 24,080 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 307 प्वाइंट गिरकर 76,957 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी 529 प्वाइंट चढ़कर 58,025 पर बंद हुआ। मिडकैप 155 प्वाइंट चढ़कर 64,225 पर बंद हुआ।आज बाजार में कहां रहे नजर?मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए ट्रेडर और मार्केट एक्सपर्ट के अमित सेठ ने कहा कि मार्केट्स में पिछले तीन चार दिनों से ट्रेंड थोड़ा साइडवेज टू नेगेटिव रहा है । हालांकि कोई बहुत बड़ी बिकवाली नहीं आई है। लेकिन अंत में बाजार दिन के निचले स्तर पर बंद होता है। कल का सेशन एक अपवाद है जहां हमें नीचे के लेवल से रिकवरी देखने को मिली। लेकिन एक बात साफ है कि मार्केट ट्रेंड इस समय साइडवेज टू नेगेटिव है। निफ्टी के लिए 24,000 का लेवल एक अहम मेक ऑर ब्रेक लेवल है। मार्केट इस लेवल को पिछले सात-आठ सेशन से डिफेंड करने की कोशिश कर रहा है और सक्सेसफुली कर भी रहा है। लेकिन अगर 24,000 का सपोर्ट टूटा तो फिर नीचे 23,900 23,850 तक के लेवल्स खुलेंगे। फिलहाल यह मान कर चल रहे हैं कि 24,000 पर अच्छा सपोर्ट है। वहीं, ऊपर की तरफ 24200 एक पर रेजिस्टेंस है। बाजार थोड़ा सा साइडवेज टू नेगेटिव लेकिन एक रेंज में काम कर रहा है। अभी हमें निफ्टी से ज्यादा स्टॉक्स पर फोकस करना चाहिए। अभी निफ्टी में कोई क्लियर ट्रेंड नहीं है। अगर 24000 का सपोर्ट टूट जाता है तो हम शॉर्ट साइड के ट्रेड पर फोकस करेंगे।बैंक निफ्टी व्यूबैंक निफ्टी की बात करें तो यह निफ्टी की तुलना में थोड़ा सा बेटर प्लेस्ड है। यह अभी भी अपने अहम मूविंग एवरेजेज के ऊपर ट्रेड कर रहा है। लेकिन ध्यान रखने की बात है कि बैंक निफ्टी में कल जो मूव आया वो लास्ट 15 मिनट के सेशन में ही आया। बैंक निफ्टी का सपोर्ट 57300 57400 के आसपास है। अगर कल का कैश का मूव आज अर्ली मॉर्निंग में एडजस्ट होता है तो 57400-57500 का लेवल बैंक निफ्टी में एंटर करने के लिए अच्छा रहेगा। इसके लिए 100-150 पॉइंट का स्टॉप लॉस रखने की सलाह होगी। अगर इस बाजार में हमें इंडेक्स में कोई कंपल्सिव ट्रेडिंग करनी ही है तो निफ्टी बैंक ज्यादा बेहतर विकल्प रहेगा।अमित सेठ की टॉप पिकअमित सेठ ने कहा कि उनको बजाज ऑटो पसंद है। कल इस शेयर में एक फ्रेश ब्रेकआउट देखने को मिला है। इस स्टॉक में लगातार स्ट्रेंथ बनी हुई है। पिछले 101 दिनों के कंसोलिडेशन के बाद कल एक फ्रेश रेंज ब्रेकआउट फ्लैग पैटर्न का ब्रेकआउट दिखा है। इस ब्रेकआउट में वॉल्यूम्स भी काफी अच्छे रहे थे। इस शेयर में 12,000 रुपए का स्टॉप लॉस रहेगा और 12,400 तक के टारगेट्स रहेंगे। 12130 रुपए के आसपास मिलने में इसमें खरीदारी करें।Market cues : 24000 का सपोर्ट लेवल भी खतरे में, यह लेवल टूटने पर 23800 तक गिर सकता है निफ्टीडिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
IOB SO Recruitment 2026: बैंकिंग क्षेत्र में काम करने के इच्छुक लोगों के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक में बड़ा और अच्छा मौका है। इस बैंक में जनरलिस्ट और स्पेशलिस्ट ऑफिसर के बंपर पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 29 अगस्त से शुरू हो चुकी है और इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 15 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।आवेदन फॉर्म ऑफिशियल वेबसाइट iob.bank.in पर जाकर भरना है। इसके तहत कुल 291 पदों पर भर्ती होगी। यह भर्ती जीएसआई I, एमएमजीएस II और एमएमजीएस III स्केल्स पर होगी। बैंक ने उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से देखने की सलाह दी है।कौन कर सकता है इन पदों के लिए आवेदन?शैक्षणिक योग्यता : मैनेजर (ब्रांच मैनेजमेंट) पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास ग्रेजुएशन की डिग्री और संबंधित बैंकिंग अनुभव होना चाहिए।आईटी से जुड़े पदों के लिए संबंधित विषयों में B.E./B.Tech, MCA या कंप्यूटर साइंस/IT में M.Sc जैसी योग्यता और संबंधित अनुभव की आवश्यकता होती है।क्रेडिट और रिस्क पदों के लिए पद के अनुसार खास योग्यताएं चाहिए होती हैं, जैसे फाइनेंस में MBA/PGDM, CA, CMA या अन्य संबंधित प्रोफेशनल योग्यताएं।आयु सीमा : आयु सीमा इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस पद के लिए आवेदन कर रहे हैं। आयु सीमा की गणना 1 अगस्त, 2026 के आधार पर की जाएगी। अधिकतम आयु सीमा में छूट तय नियमों के अनुसार दी जाएगी।आईओबी एसओ भर्ती 2026: कैसे करें आवेदन ? इंडियन ओवरसीज बैंक के आधिकारिक भर्ती पोर्टल पर जाएं। अगर रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, तो ‘New Registration’ पर क्लिक करें। जरूरी लॉगिन जानकारी का इस्तेमाल करके रजिस्टर करें और आवेदन फॉर्म भरें। जरूरी दस्तावेज जैसे फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें। आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। आवेदन फॉर्म सबमिट करें और भविष्य के लिए इसे सेव कर लें। आवेदन शुल्क : उम्मीदवारों को इंडियन ओवरसीज बैंक एसओ भर्ती 2026 के लिए जरूरी आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। आवेदन पर तभी विचार किया जाएगा जब शुल्क का भुगतान कर दिया जाएगा। एससी/एसटी/दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 175 रुपये हैं। जबकि, ओबीसी/इडब्लूएस और अनारक्षित वर्ग के लिए 1000 रुपये है।Bihar ASHA Worker Bharti 2026: बिहार में 21000 आशा कार्यकर्ता भर्ती का नोटिफिकेशन जल्द, स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को दिया निर्देश
आरबीआई का खुलासा: बैंकों में 75 प्रतिशत से अधिक व्यक्तिगत जमा 40 साल से ऊपर के लोगों की
इस साल जून तक देश के बैंकों में व्यक्तिगत जमाओं का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का रहा जबकि 25 से 40 साल की उम्र वाले लोगों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से कुछ कम रही। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सोमवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। नीति-निर्माता पहले ही कह चुके हैं कि युवा वर्ग अपने उम्रदराज जमाकर्ताओं की तुलना में शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे पूंजी बाजार साधनों को अधिक तरजीह दे रहा है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि जून 2026 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की कुल जमा सालाना आधार पर 11.6 प्रतिशत बढ़ी। निजी बैंकों की जमा 13.8 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की जमा 10.3 प्रतिशत बढ़ी। घरेलू क्षेत्र का कुल जमा में सबसे बड़ा योगदान रहा। जून 2026 के अंत में कुल जमा में उसकी हिस्सेदारी 58.8 प्रतिशत थी और तिमाही के दौरान बढ़ी जमा में उसकी हिस्सेदारी 98.9 प्रतिशत रही। जमा राशि की वृद्धि में सावधि जमा की मुख्य भूमिका रही। जून में सावधि जमा 12.9 प्रतिशत बढ़ी, जबकि चालू जमा में 5.3 प्रतिशत और बचत जमा में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एक करोड़ रुपये और उससे अधिक की सावधि जमाओं की कुल सावधि जमा में हिस्सेदारी 47.3 प्रतिशत रही। वहीं, पांच करोड़ रुपये और उससे अधिक की जमाओं की हिस्सेदारी 35.7 प्रतिशत थी। बैंक ऋण की वृद्धि भी जून में तेज होकर 16.5 प्रतिशत हो गई, जो एक साल पहले 9.9 प्रतिशत थी। इसमें कॉरपोरेट क्षेत्र को दिए गए कर्ज की 21.1 प्रतिशत वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा। महिला व्यक्तिगत कर्जदारों को दिया गया ऋण भी जून माह में 19.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जून 2025 में इसमें 12.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। आरबीआई के मुताबिक, नौ प्रतिशत से कम ब्याज दर वाले ऋणों की हिस्सेदारी जून 2026 में बढ़कर करीब दो-तिहाई हो गई, जो एक साल पहले 54.1 प्रतिशत थी। बकाया ऋण पर भारित औसत उधारी दर (डब्ल्यूएएलआर) 0.45 प्रतिशत अंक घटकर 9.26 प्रतिशत रह गई।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी
भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यह अमेरिका-ईरान युद्ध और उससे उपजी वैश्विक अनिश्चितता के कारण घरेलू आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे मौजूदा हालात में ‘असाधारण उपलब्धि’ बताया है। सरकार की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। हालांकि, यह जनवरी-मार्च तिमाही के 8.6 प्रतिशत से कम है, लेकिन एक साल पहले की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। वृद्धि दर तिमाही के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सात प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक रही, जो बढ़े हुए भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने जीडीपी आंकड़े जारी होने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की ‘उल्लेखनीय’ जीडीपी वृद्धि एक ‘असाधारण उपलब्धि’ है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तेल कीमतों के झटकों और आपूर्ति शृंखला की समस्याओं के बावजूद भारतीयों की सामूहिक ताकत ने यह वृद्धि सुनिश्चित की। मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि ‘निराशावादी फिर निराश हुए और भारत एक बार फिर आगे बढ़ा।’वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह आंकड़ा राजग सरकार द्वारा किए गए सुधारों और अर्थव्यवस्था के चुस्त प्रबंधन के परिणामों को दर्शाता है। उन्होंने अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि का श्रेय देश के लोगों और उनकी मेहनत को दिया। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी जून तिमाही में 81.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 75.46 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, मौजूदा कीमतों पर जीडीपी 10.3 प्रतिशत बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 80 लाख करोड़ रुपये थी। जून तिमाही में आधार कीमतों पर सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 8.2 प्रतिशत बढ़कर 73.82 लाख करोड़ रुपये हो गया। विनिर्माण क्षेत्र का जीवीए 9.2 प्रतिशत बढ़ा जबकि कृषि, पशुधन, वानिकी और मत्स्य क्षेत्र में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। खनन एवं संबद्ध क्षेत्र में 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेश की स्थिति बताने वाला सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) पहली तिमाही में 11.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 5.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार निकट अवधि में मजबूत है लेकिन वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ब्याज दरों, ऊर्जा जिंसों की आपूर्ति और खाद्य कीमतों को लेकर जोखिम बने हुए हैं। नागेश्वरन ने कहा कि फिलहाल घरेलू आर्थिक गतिविधियों और निर्यात प्रदर्शन ने मिलकर मजबूत वृद्धि दर्ज कराने में मदद की है। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रमों का आगे चलकर देश की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद पहली तिमाही में वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही। यह अर्थव्यवस्था के मजबूत घरेलू पहलुओं और अनिश्चित दौर से निकल पाने की क्षमता को दर्शाता है। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि आने वाली तिमाहियों में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है और भू-राजनीतिक तनाव तथा व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताएं आर्थिक परिदृश्य पर असर डाल सकती हैं।
बालों को घना और हेल्दी रखने का डिंपल कपाड़िया वाला तरीका, आप भी जानें
डिंपल कपाड़िया के घने, बाउंसी और खूबसूरत बाल हमेशा से उनके लुक की खास पहचान रहे हैं। हाल ही में ‘दिल चाहता है’ के रीयूनियन में भी उनके बालों ने लोगों का ध्यान खींचा। उम्र के साथ भी उनके बालों की चमक और वॉल्यूम देखकर यह जानने का मन करता है कि आखिर वह अपने बालों की देखभाल कैसे करती हैं। डिंपल कपाड़िया ने एक इंटरव्यू में अपनी हेयरकेयर रूटीन से जुड़ी कई बातें शेयर की थीं, जिसमें घरेलू नुस्खों से लेकर तेल और हेयर मास्क तक शामिल हैं।वह अपने रूटीन में बालों की ग्रोथ के लिए हेयर मास्क और उन्हें अंदर से मजबूत और शाइनी रखने के लिए ऑयल ब्लेंड का इस्तेमाल करती हैं। इन सभी घरेलू चीजों को सीधे बालों पर इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। उनकी रूटीन से इंस्पिरेशन लेकर आप ऐसे हेयरकेयर प्रोडक्ट्स चुन सकते हैं, जो बालों को हेल्दी, सॉफ्ट, शाइनी और बाउंसी बनाए रखने में मदद करें। प्याज के अर्क से बालों की देखभालडिंपल कपाड़िया अपने हेयरकेयर रूटीन में प्याज के रस का इस्तेमाल करती है। उन्होंने बताया था कि एक बार ट्रैवल के दौरान उन्होंने बालों में प्याज का रस लगाया था, लेकिन इसकी तेज गंध को हटाना आसान नहीं था। आप भी प्याज को हेयरकेयर में शामिल करना चाहती हैं, तो कच्चे प्याज के रस की जगह प्याज के अर्क वाला हेयर ऑयल इस्तेमाल कर सकती हैं। इसे स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करें। तेल की मसाज से पोषणडिंपल हेयरकेयर रूटीन में रेगुलर ऑयलिंग करती है। उन्होंने बताया था कि बचपन से तेल लगाने की आदत ने उनके घने, मोटे और रूखे बालों को संभालने में मदद की। उनके बताए ऑयल ब्लेंड में बादाम और चंदन का तेल बेस के तौर पर था, जिसमें रोजमेरी, जेरेनियम और लैवेंडर एसेंशियल ऑयल मिलाए जाते थे। फ्लैट बालों में लाएं बाउंस और वॉल्यूमडिंपल कपाड़िया के बाउंसी और घने दिखने वाले बालों में जेनेटिक्स, नैचुरल टेक्सचर और प्रोफेशनल स्टाइलिंग का भी रोल है। आपके बाल फ्लैट या चिपके हुए नजर आते हैं, तो वॉल्यूमाइजिंग सीरम उन्हें ज्यादा भरा हुआ और बाउंसी दिखाने में मदद कर सकता है। ड्राई बालों को दें भरपूर मॉइस्चरडिंपल कपाड़िया ने एक DIY हेयर मास्क बताया है, जिसमें पांच अंडे की सफेदी, एक पूरा अंडा और एक केला मिलाकर बालों पर लगाया जाता था। आपको बालों में अंडा या केला लगाना पसंद नहीं है, तो रेडी-मेड हेयर मास्क इस्तेमाल कर सकती हैं। रूखे और ड्राई बालों के लिए इंटेंस मॉइस्चर हेयर मास्क जैसा नरिशिंग मास्क अच्छा ऑप्शन हो सकता है। इसे बालों की लंबाई पर लगाएं और इस्तेमाल के लिए पैक पर दिए इंस्ट्रक्शन को फॉलो करें। फ्रिजी बालों को दें स्मूद और शाइनी लुकडिंपल कपाड़िया ने शैंपू और कंडीशनर के बाद ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने की बात बताई है, जो बालों को टेक्सचर और चमकदार फिनिश देने में मदद करे। बाल रूखे, उलझे या फ्रिजी रहते हैं, तो स्मूदिंग सीरम उन्हें ज्यादा मैनेजेबल और शाइनी दिखा सकता है। सीरम की थोड़ी मात्रा लेकर इसे बालों की लंबाई और सिरों पर लगाएं। पतले बालों में ज्यादा सीरम लगाने से बचें, वरना बाल चिपचिपे दिख सकते हैं। बालों की सेहत के लिए डाइट भी है जरूरीबालों की देखभाल सिर्फ बाहर से नहीं, बल्कि खान-पान से भी जुड़ी होती है। डिंपल कपाड़िया ने प्रोटीन वाली चीजों, मछली, बीज और नट्स को डाइट में शामिल करने की बात कही है। लेकिन कोई एक चीज या प्रोडक्ट बालों को रातों-रात घना नहीं बना सकता। जेनेटिक्स, उम्र, हार्मोनल चेंज, पोषण और हेयर स्टाइलिंग जैसी कई चीजें बालों की सेहत को प्रभावित करती हैं, इसलिए बैलेंस डाइट और रेगुलर हेयरकेयर रूटीन पर ध्यान देना बेहतर है।
Hal Shashthi 2026 Date: 3 शुभ योग में होगी हल षष्ठि, जानें तारीख, मुहूर्त, राहुकाल और भद्रा का समय
Hal Shashthi 2026 Date: हल षष्ठी का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। बलराम जी का मुख्य शस्त्र 'हल' है, इसलिए इस पर्व को हल षष्ठी, हलछठ, ललही छठ या तिनछठी भी कहा जाता है।इस दिन हल से जोतकर उगाए गए किसी भी अनाज (जैसे गेहूं, चावल आदि) का सेवन नहीं किया जाता है। इस दिन व्रत करने वाली माताएं केवल बिना जुताई के पैदा होने वाले अनाज या फल खाती हैं, जैसे— तिन्नी/पसही का चावल, नारी का साग, मखाना, सिंघाड़ा, महुआ आदि। इस पूजा और व्रत में गाय के दूध, दही या घी का इस्तेमाल वर्जित होता है। केवल भैंस के दूध, दही और घी का उपयोग किया जाता है। महिलाएं इस दिन हल से जुते हुए खेतों में पैर नहीं रखती हैं।हल छठ 2026 तारीख हल षष्ठीवैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर को सुबह 6 बजकर 12 मिनट पर प्रारंभ होगी और 3 सितंबर को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगी। उदयातिथि के अनुसार, हल छठ या हल षष्ठी 2 सितंबर बुधवार को है।हल छठ पर बन रहे 3 शुभ योगहल छठ के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं सबसे पहले ध्रुव योग प्रात:काल से लेकर रात 09 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से व्याघात योग बनेगा और पूरी रात तक रहेगा। वहीं, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग मध्य रात्रि 01:43 ए एम से लेकर 3 सितंबर को सुबह 06:00 ए एम तक रहेगा। हल छठ पर भरणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 3 सितंबर को 01:43 ए एम तक है।हल छठ 2026 मुहूर्तहल छठ का ब्रह्म मुहूर्त 04:29 ए एम से 05:14 ए एम तक है, लेकिन उस दिन कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है1 हल छठ की पूजा प्रदोष काल में यानि सूर्यास्त के बाद की जाती है, लेकिन स्थान विशेष के आधार पर अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं हो सकती हैं, उसका पालन करें। हल छठ पर सूर्यास्त 06:42 पी एम पर होगा। उसके तुरंत बाद प्रदोष काल प्रारंभ हो जाएगा।लाभ-उन्नति मुहूर्त : 05:59 ए एम से 07:35 ए एमअमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : 07:35 ए एम से 09:10 ए एमशुभ-उत्तम मुहूर्त : 10:45 ए एम से 12:21 पी एमचर-सामान्य मुहूर्त : 03:31 पी एम से 05:06 पी एमलाभ-उन्नति मुहूर्त : 05:06 पी एम से 06:42 पी एमहल छठ पर भद्रा और राहुकालहल छठ के दिन राहुकाल दोपहर में 12:21 पी एम से 01:56 पी एम तक रहेगा, वहीं भद्रा 3 सितंबर को 04:25 ए एम से लेकर 06:00 ए एम तक रहेगी। इसका वास स्वर्ग में होगा। इसलिए पूजा-पाठ में इसका कोई प्रभाव नहीं होगा।पूजा विधिघर के आंगन या पूजा स्थल को साफ करके वहां गोबर से छोटा सा तालाब (गड्ढा) बनाया जाता है।इस तालाब में कुश, पलाश (ढाक) और झरबेरी की टहनियां गाड़ी जाती हैं।हल षष्ठी माता और बलराम जी का ध्यान करके रोली, अक्षत, महुआ, चना, और 6 या 7 प्रकार के भुने हुए अनाज (सतनाजा) अर्पित किए जाते हैं।हल षष्ठी व्रत की कथा सुनी जाती है। पूजा समाप्त होने के बाद शाम को चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।Janmashtami 2026 Date: 4 या 5 सितंबर, कब मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व, जानें तारीख, मुहूर्त, निशित काल और पारण समय
Market cues : 24000 का सपोर्ट लेवल भी खतरे में, यह लेवल टूटने पर 23800 तक गिर सकता है निफ्टी
Trade setup for today : 31 अगस्त को निफ्टी इंट्राडे में 24,000 के लेवल से नीचे जाने के बाद भी क्लोजिंग के समय इसे बचाने में कामयाब रहा और 95 अंकों की गिरावट के साथ दिन के निचले स्तर से ऊपर बंद हुआ। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से शुरू हुई झड़पों के बीच मोमेंटम इंडिकेटर मंदी के रुझान में बढ़ोतरी का संकेत दे रहे हैं। जबकि इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में अपने सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है,जो सावधानी बरतने का संकेत है।मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना कि अब निफ्टी के लिए 24000 का सपोर्ट लेवल भी खतरे में दिख रहा है। अगर निफ्टी इस लेवल के नीचे जाता है और उसके नीचे ही बना रहता है तो 23,800 की तरफ गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता। ऊपर की तरफ इसके लिए 24,200-24,300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस एरिया का काम कर सकता हैयहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।निफ्टी 50 (24080) के लिए अहम लेवलपिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,016, 23,984 और 23,932पिवट प्वांइट पर आधारित रेजिस्टेंस :24,119, 24,151 और 24,203स्पेशल फॉर्मेशन : डेली चार्ट पर निफ्टी ने लॉन्ग लोअर शैडो (lower shadow) वाली एक बेयरिश कैंडल बनाई है,जो हैमर जैसे कैंडलस्टिक पैटर्न की तरह दिखती है। हालांकि यह पूरी तरह से क्लासिकल हैमर पैटर्न नहीं है। हैमर को आम तौर पर एक बुलिश रिवर्सल पैटर्न माना जाता है,लेकिन इसके लिए अगले सेशन में कन्फर्मेशन की जरूरत होती है,जिसमें इंडेक्स को कैंडल के हाई से ऊपर वापस चढ़ना होता है। इंडेक्स अपने सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा, जबकि 20-डे EMA नीचे की ओर जा रहा था। 43.7 पर RSI ने अपना नेगेटिव क्रॉसओवर बनाए रखा,जबकि MACD जीरो लाइन से नीचे रहा और एक दिन हल्का पड़ने के बाद हिस्टोग्राम का रंग और गहरा लाल हो गया। कुल मिलाकर,ये इंडिकेटर लगातार बनी कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं और बताते हैं कि बेयरिश मोमेंटम बढ़ रहा है।बैंक निफ्टी (58025) के लिए अहम लेवलपिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,066, 58,263 और 58,583पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,426, 57,228 और 56,908फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,137, 58,706फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,135, 56,870स्पेशल फॉर्मेशन : बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक लंबी बुलिश कैंडल बनाई,जिसकी मुख्य वजह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के दौरान आई 1 प्रतिशत की तेजी थी, जिसने इंडेक्स को 58,000 के स्तर से थोड़ा ऊपर पहुंचा दिया। हालांकि,आने वाले सेशन में इस तेजी के बने रहने पर नजर रखना जरूरी होगा। इंडेक्स साफ तौर पर अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर आ गया है। फिर भी,ओवरऑल मोमेंटम इंडिकेटर मजबूत तेजी की पुष्टि करने के बजाय सुधार के संकेत दे रहे हैं।RSI बढ़कर 56.89 पर आ गया और इसमें पॉजिटिव क्रॉसओवर दिखा। लेकिन यह अभी भी एक दायरे में ही बना हुआ है। MACD में भी बुलिश क्रॉसओवर दिखा और हिस्टोग्राम पॉजिटिव हो गया। हालांकि, यह इंडिकेटर कई सेशन से कंसोलिडेशन के दौर में है। कुल मिलाकर,इंडिकेटर्स मोमेंटम में सुधार के संकेत दे रहे हैं। लेकिन बड़ा ट्रेंड अभी भी कंसोलिडेशन वाला है,इसलिए 58,000 के लेवल के ऊपर लगातार मजबूती की पुष्टि जरूरी है।एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में) इंडिया VIXफियर इंडेक्स यानी इंडिया VIX कल 4.78% बढ़कर 11.19 पर पहुंच गया,जो थोड़ी सावधानी का संकेत है। हालांकि,यह अभी भी अपने सभी शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज और 12 के लेवल से नीचे बना हुआ है,जिससे पता चलता है कि इससे तेजड़ियों के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है।पुट कॉल रेशियोबाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 31 अगस्त को बढ़कर 0.91 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 0.89 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉकF&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहींएफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: LIC हाउसिंग फाइनेंस, सेल (SAIL)एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहींStocks to Watch: 1 सितंबर को एनसीसी, मिल्की मिस्ट डेयरी, PVR INOX सहित इन शेयरों में दिख सकती है हलचलडिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
एमएससीआई सूचकांक में फेरबदल से शेयरों में हलचल: लॉरस लैब्स समेत चार नए शेयर; किसमें आएगी सबसे ज्यादा पूंजी?
Bank Holidays In September: सितंबर 2026 में भारतीय बैंक कुल 14 दिनों के लिए बंद रहेंगे, जिनमें साप्ताहिक अवकाश और विभिन्न त्योहार शामिल हैं।
Rule Chaning from 1st September: सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। इनमें कार और दूध के दाम बढ़ना, मुंबई में ऑटो-टैक्सी किराया बढ़ना शामिल है, जबकि विदेश यात्रा अब आसान हो गई है।
सुभाष चंद्रा के दिवाला मामले में NCLT ने बनाई पांच सदस्यीय विशेष पीठ
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने सोमवार को एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला मामले में पुनर्भुगतान योजना पर फैसला करने के लिए पांच सदस्यीय पीठ का गठन किया। यह मामला 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के दावों से जुड़ा है। दो सदस्यीय पीठ के बहुमत के फैसले पर नहीं पहुंच पाने के बाद यह कदम उठाया गया। दो सदस्यीय पीठ ने तीसरे न्यायाधीश को मामला भेजे जाने के बावजूद प्रस्तावित 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना पर बहुमत से सहमति नहीं बन पाने के बाद एस्सेल समूह के चेयरमैन के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के पास भेज दिया था। न्यायाधिकरण के इतिहास में पहली बार गठित पांच सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल करेंगे। पीठ के अन्य सदस्य बचु वेंकट बालाराम दास, महेंद्र खंडेलवाल, अतुल चतुर्वेदी और रवींद्र चतुर्वेदी हैं। पीठ मंगलवार पूर्वाह्न सवा दस बजे न्यायाधिकरण की प्रधान पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई शुरू करेगी। इससे पहले दो-सदस्यीय पीठ सोमवार को भी बहुमत की राय पर नहीं पहुंच सकी। इस वजह से मामले में अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हो पाया। न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी की पीठ ने बहुमत न बन पाने की स्थिति में मामले को एनसीएलटी अध्यक्ष के पास भेज दिया। चार साल से चल रहे मामले को मूल पीठ के दोनों सदस्यों के बीच मतभेद के बाद इसे तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा के पास भेजा गया था। शर्मा ने 25 अगस्त को 144 पन्नों के अपने आदेश में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के ऋणदाताओं के दावों के मुकाबले चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान योजना के तहत 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दी थी। इस तरह कर्जदाताओं को बकाया राशि का करीब 99.97 प्रतिशत नुकसान (हेयरकट) उठाना था। नियम के तहत तीसरे सदस्य की राय को मूल पीठ के पास औपचारिक आदेश के लिए भेजा गया था। हालांकि, सोमवार को मूल पीठ ने कहा कि तीसरे सदस्य ने दोनों सदस्यों से अलग स्वतंत्र राय दी है और इस कारण मामले में कोई बहुमत की राय नहीं बन सकी। पीठ ने कहा कि तकनीकी सदस्य ने समाधान योजना को खारिज किया था, जबकि न्यायिक सदस्य ने इसकी मंजूरी को केवल उन ऋणदाताओं तक सीमित रखा था जिन्होंने इसे स्वीकार किया था और असहमत ऋणदाताओं को चंद्रा से अपनी रकम वसूलने की स्वतंत्रता दी थी। पीठ ने कहा कि तीसरे सदस्य ने सभी ऋणदाताओं पर दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 115(1) समान रूप से लागू करते हुए योजना को मंजूरी दी और सभी ऋणदाताओं के दावों को समाप्त कर दिया। मामले में मतभेद आईबीसी की धारा 79(2)(जी) की व्याख्या और इसे धारा 115(1) के साथ पढ़े जाने को लेकर है। धारा 115(1) ऋणदाताओं द्वारा पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया से संबंधित है। चंद्रा की समाधान योजना में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले ऋणदाताओं को 6.25 करोड़ रुपये लौटाने और प्रक्रियागत खर्च के लिए 25 लाख रुपये देने का प्रस्ताव है। तीसरे सदस्य शर्मा ने योजना को मंजूरी देते हुए कहा था कि चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति का मूल्य योजना के तहत प्रस्तावित राशि से भी कम है और योजना खारिज होने की स्थिति में ऋणदाताओं के लिए अधिक वसूली की संभावना नहीं रह जाएगी।
1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले बदलाव डिजिटल सुविधाओं और कड़े अनुशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। समय रहते नियमों के प्रति सचेत न रहने पर गैस सब्सिडी रुकने, जीएसटी पंजीकरण निलंबित होने और आईटीआर पर भारी जुर्माना लगने जैसे वित्तीय झटके लग सकते हैं।
1 सितंबर को इस कंपनी में होने वाली है बड़ी छंटनी, सुबह 6 बजे आ सकता है 'नौकरी गई' का मेल
ओरेकल में 1 सितंबर तक बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका है, जिससे कर्मचारी चिंतित हैं और सुबह 6 बजे ईमेल का इंतजार कर रहे हैं। कंपनी ने वेतन खर्च कम करने के लिए मैनेजरों से प्रभावित कर्मचारियों की सूची मांगी है।
सरकार विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों को उदार बनाने पर विचार कर रही है। इसका लक्ष्य 2029 तक सालाना 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का निर्यात हासिल करना है।
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‘युद्ध का हर दिन इंसानियत को पीछे धकेलता है’; पीएम मोदी ने पुतिन से लड़ाई खत्म करने की अपील की
PM Modi Putin Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के बीच “लगातार युद्ध” की जगह “युद्ध खत्म करने” की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, इन संघर्षों का वैश्विक भू-राजनीति पर भी बड़ा असर पड़ रहा है।बता दें कि अला-आर्चा स्टेट रेजिडेंस में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से गले मिलकर एक-दूसरे का स्वागत किया। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने अक्साकल मीटिंग रूम में मोदी का स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ रूसी अधिकारियों और मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था।पुतिन ने दी मुझे यूक्रेन के बारे में जानकारी दी- पीएम मोदीबैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि पुतिन ने उन्हें यूक्रेन के हालात के बारे में जानकारी दी और शांति की कोशिशों के लिए भारत का समर्थन दोहराया।मोदी ने कहा, आपने मुझे यूक्रेन के हालात के बारे में जानकारी दी। भारत शांति की सभी कोशिशों का समर्थन करता है। युद्ध में बीता हर दिन इंसानियत को पीछे धकेलता है। वहीं, शांति की ओर एक कदम उम्मीद जगाता है। हमें कभी न खत्म होने वाले युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ना होगा, जो इंसानियत के हित में है। सभी मुद्दों को जल्द सुलझाया जाना चाहिए।मोदी ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के मजबूत होने पर भी जोर दिया और कहा कि राष्ट्रीय हित दोनों देशों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है।पुतिन से मिलकर खुशी हुईमोदी ने कहा, मुझे पुतिन से मिलकर बहुत खुशी हुई। पिछले साल पुतिन का भारत दौरा बहुत सफल रहा था। आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिली है।भारत और रूस के बीचव्यापार का कुल मूल्य 2% से ज्यादा बढ़ाइस बीच, पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग में सकारात्मक रुझान दिख रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार का कुल मूल्य 2% से ज्यादा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मोदी के व्यक्तिगत ध्यान की वजह से दोनों देशों के संबंध और मजबूत हो रहे हैं।रूसी राष्ट्रपति ने पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि 2025 में भारत और रूस के बीच पर्यटकों की आवाजाही में 16% की बढ़ोतरी हुई।यह बैठक भारत के लिए एक अहम मोड़ पर हो रही है, क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई में रुकावट आ रही है और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है। ये बातचीत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि एक तरफ नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर रहते हुए अपनी ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित करना चाहती है, तो दूसरी तरफ मॉस्को अपने तेल निर्यात से होने वाली कमाई को सुरक्षित रखना चाहता है।यूक्रेन युद्ध पर भारत ने फिर साफ किया रुखबता दें कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद से ही भारत ने इस मामले में सावधानी भरा रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने बार-बार शांति और संघर्ष खत्म करने की अपील की है, लेकिन क्रेमलिन की सीधे तौर पर आलोचना करने से परहेज किया है।गौरतलब है कि रूस भारत का एक अहम साझेदार बना हुआ है, खासकर ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्र में। वित्त वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। अब दोनों देशों की नजर इस दशक के अंत तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर है।यह भी पढ़ें:टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत
जनरेटर से लेकर बॉडी बैग तक: नेपाल को किस तरह की मदद की ज़रूरत है? - BBC
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भारत मोबाइल फोन के बाद अब सेमीकंडक्टर निर्माण में बड़ा निर्माता बनने जा रहा है, जिसके लिए सेमीकॉन 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पहल देश में चिप उत्पादन का एक आत्मनिर्भर इकोसिस्टम तैयार करेगी और हजारों रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
Child Safety पर Meta का $17 Billion का बड़ा समझौता, YouTube और Snapchat के लिए बढ़ी बड़ी Tension
अमेरिका में मेटा के खिलाफ हुआ बड़ा समझौता सिर्फ इंस्टाग्राम और फेसबुक तक सीमित मामला नहीं रह गया है। इसके बाद दूसरी बड़ी सामाजिक माध्यम कंपनियों पर भी बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ सकता है। टिकटॉक, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी कंपनियों को भी अब अपने मंचों की कार्यप्रणाली और युवाओं पर उसके असर को लेकर जवाब देना पड़ सकता है। बता दें कि बुधवार को मेटा ने अमेरिका के कई राज्यों के साथ एक समझौता किया है। इसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने इंस्टाग्राम और फेसबुक को इस तरह तैयार किया कि कम उम्र के यूजर्स लंबे समय तक इनसे जुड़े रहें। इसके अलावा बच्चों से संबंधित जानकारी जुटाने और मंचों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों के बारे में जनता को गुमराह करने के आरोप भी लगाए गए थे। मेटा ने इन आरोपों में किसी तरह की गलती स्वीकार नहीं की है। इस समझौते की सबसे अहम बात इसकी आर्थिक राशि से ज्यादा इसका संभावित कानूनी असर है। मेटा को अधिकतम करीब 1,700 करोड़ डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है। कंपनी का बाजार मूल्य करीब 1,500 अरब डॉलर और सालाना आय लगभग 200 अरब डॉलर है, इसलिए निवेशकों ने इस समझौते को लेकर खास चिंता नहीं दिखाई। बुधवार को मेटा के शेयरों में करीब एक प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई है। गौरतलब है कि अमेरिका में बच्चों, परिवारों और विद्यालयी जिलों की ओर से सामाजिक माध्यम कंपनियों के खिलाफ हजारों मामले पहले से चल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मेटा का समझौता इन मामलों में एक उदाहरण बन सकता है। पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय की विपणन विशेषज्ञ वनिता स्वामीनाथन के मुताबिक इसके बाद दूसरे मामलों में भी समझौते की संभावना बढ़ सकती है। इस मामले में कानूनी रणनीति भी महत्वपूर्ण है। राज्यों ने केवल मंचों पर मौजूद सामग्री को निशाना बनाने के बजाय कंपनियों की अपनी कारोबारी नीतियों और मंच तैयार करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। कैलिफोर्निया के कानूनी विशेषज्ञ विंसेंट जोरालेमोन का मानना है कि भविष्य में सामाजिक माध्यमों के नियमन का रास्ता इसी तरह के मुकदमों और समझौतों से निकल सकता है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने बताया कि राज्य पहले से टिकटॉक समेत दूसरी कंपनियों के खिलाफ समान चिंताओं पर कार्रवाई कर रहे हैं। हवाई की अटॉर्नी जनरलऐनी लोपेज ने भी स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब से मेटा की तरह समझौता करने की अपील की है। मौजूद जानकारी के अनुसार, समझौते के समय मेटा के सामने अदालत में बढ़ती जांच भी एक महत्वपूर्ण स्थिति थी। इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी से पूछताछ चल रही थी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग के भी बयान देने की संभावना थी। मोसेरी ने स्वीकार किया था कि किशोरों की सुरक्षा से जुड़े कुछ उपायों के शुरुआती परीक्षणों में अपेक्षित भागीदारी नहीं रही थी। हालांकि यह समझौता मेटा के खिलाफ चल रहे सभी मामलों को खत्म नहीं करता है। लॉस एंजिलिस के एक मामले में मेटा और यूट्यूब को एक युवती को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था और उसे 60 लाख डॉलर का हर्जाना दिया गया था। दोनों कंपनियां इस फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी में हैं। ऐसे में मेटा का समझौता सोशल मीडिया उद्योग के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि टिकटॉक, यूट्यूब और स्नैपचैट इसी तरह के समझौतों की राह चुनते हैं या अदालतों में कानूनी लड़ाई जारी रखते हैं।
Apple Investors की बंपर कमाई: Tim Cook के कार्यकाल में 25 गुना उछला Share Price और Market Value
अगस्त 2011 में जॉब्स की तबीयत बिगड़ने के बीच कुक को मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया था। उस समय उन्हें शानदार संचालन और आपूर्ति व्यवस्था संभालने वाले प्रबंधक के तौर पर देखा जाता था, जबकि एप्पल की पहचान नए उत्पादों और तकनीकी नवाचार के लिए थी। डेढ़ दशक बाद एप्पल का सफर बताता है कि कुक ने कंपनी को सिर्फ संभाला ही नहीं, बल्कि उसका आकार भी कई गुना बढ़ाया है। कुक के पद संभालने के समय एप्पल का बाजार मूल्य करीब 350 अरब डॉलर था, जो अब लगभग चार हजार अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है। कंपनी के शेयर में भी करीब 25 गुना की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वर्ष 2011 में करीब 13 डॉलर का शेयर अब 319 डॉलर से ऊपर कारोबार कर चुका है। कंपनी की सालाना आय भी करीब 108 अरब डॉलर से बढ़कर 400 अरब डॉलर से अधिक हो गई है। गौरतलब है कि इस विस्तार में आईफोन की मजबूत मांग के साथ सेवाओं के कारोबार की बढ़ती भूमिका अहम रही है। ऐप स्टोर, एप्पल म्यूजिक और एप्पल पे जैसी सेवाएं अब कंपनी के लिए बड़ा कमाई का जरिया बन चुकी हैं। सेवाओं से सालाना 100 अरब डॉलर से अधिक की आय होने का अनुमान है और इसका लाभ मार्जिन भी उपकरण कारोबार की तुलना में बेहतर है। कुक के कार्यकाल में एप्पल ने अपने कंप्यूटरों के लिए चिप बनाने की रणनीति भी बदल दी। कंपनी ने इंटेल पर निर्भरता कम करते हुए अपने स्वयं के प्रोसेसर विकसित किए। इससे एप्पल को उपकरण, सॉफ्टवेयर और चिप के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिली। नए उत्पादों के स्तर पर भी कुक के कार्यकाल को अहम माना जाता है। 2015 में एप्पल वॉच और अगले साल एयरपॉड्स बाजार में आए। दोनों उत्पादों ने कंपनी के कारोबार का दायरा बढ़ाया और पहनने योग्य तकनीक को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। हालांकि हर फैसला सफल नहीं रहा। 2012 में पेश किए गए एप्पल मैप्स को शुरुआती दौर में गलत और अधूरी जानकारी के कारण आलोचना झेलनी पड़ी। 2023 में आया विजन प्रो भी महंगी कीमत और सीमित स्वीकार्यता के कारण अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका। इसके अलावा एप्पल ने वर्षों की मेहनत और भारी निवेश के बाद अपनी इलेक्ट्रिक और स्वचालित कार परियोजना भी बंद कर दी। अब एप्पल के सामने सबसे बड़ी चुनौती एआई की है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और ओपनएआई इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ चुके हैं। एप्पल ने निजता, उपकरण के भीतर प्रोसेसिंग और अपने सॉफ्टवेयर तंत्र पर ज्यादा जोर दिया है। यही रणनीति आने वाले समय में कुक के बाद कंपनी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। मौजूद जानकारी के अनुसार, कुक के बाद जॉन टर्नस का नाम नेतृत्व की अगली कड़ी के रूप में सामने आया है। कुक के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यही मानी जाएगी कि उन्होंने एप्पल को स्टीव जॉब्स के दौर की विरासत से आगे निकालकर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल किया है।
Lionel Messi Retirement: दुनिया के महानतम फुटबॉलरों में शुमार लियोनेल मेसी ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। मेसी ने अर्जेंटीना के लिए अपना आखिरी मैच 2026 फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल में खेला, जहां अर्जेंटीना को 1-0 से हार का सामना करना पड़ा।अपने एक भावुक बयान में मेसी ने कहा कि उन्होंने फाइनल के दो दिन बाद ही रिटायर होने का फैसला कर लिया था और उनके पिता जॉर्ज के गुजर जाने के बाद उन्हें अपने इस फैसले पर और भी ज्यादा यकीन हो गया।क्लब फुटबॉल के दिग्गज मेसी, 18 साल की उम्र में 17 अगस्त 2005 को हंगरी के खिलाफ एक फ्रेंडली मैच में डेब्यू करने के बाद से ही अर्जेंटीना की पहचान, शान और उम्मीद रहे हैं। उन्होंने कतर में हुए 2022 फीफा वर्ल्ड कप में नेशनल टीम को जीत दिलाई और अपना दूसरा गोल्डन बॉल भी जीता।मेसी ने 2021 और 2024 में लगातार कोपा अमेरिका चैंपियनशिप जीतीं, साथ ही इटली के खिलाफ 2022 की फाइनलिसीमा ट्रॉफी भी अपने नाम की। उन्होंने 2008 बीजिंग गेम्स में ओलंपिक गोल्ड मेडल और 2005 FIFA U-20 वर्ल्ड कप भी जीता। कुल मिलाकर, 207 मैचों में उन्होंने 125 गोल किए और 65 गोल करने में मदद की।हालांकि, मेसी इंटर मियामी के लिए खेलना जारी रखेंगे।रिटायरमेंट पर मेसी का पूरा बयान“फाइनल के बाद इतना समय बीतने और इस बारे में काफी सोचने के बाद, मैं सभी को बताना चाहता हूं कि मैं नेशनल टीम से रिटायर हो रहा हूं... यह एक ऐसा फैसला था जिससे मुझे बहुत दुख हुआ और अब भी अंदर तक दुख होता है, लेकिन मैं समझता हूं कि यही सही समय है।“मैं कसम खाता हूं कि मैंने हमेशा अपना सब कुछ दिया, न सिर्फ इन कुछ सालों में जब हमने सब कुछ जीता, बल्कि उससे पहले भी। मैंने हमेशा इस जर्सी के लिए संघर्ष किया और अपना सब कुछ दिया, ताकि आपको खुशी दे सकूं और फुटबॉल के जरिए आपको अर्जेंटीना का होने पर गर्व महसूस करा सकूं।“अब ज्यादा समय नहीं बचा है, और जिंदगी के अलग-अलग अध्याय खत्म हो रहे हैं। यह एक ऐसा अध्याय है जो मुझे बहुत दुखी करता है। मुझे नेशनल टीम का हिस्सा बने रहना पसंद है, पसंद था और हमेशा पसंद रहेगा। मैंने अपना सब कुछ दे दिया, और अब मेरे पास देने के लिए कुछ और नहीं बचा है।इसके अलावा, कई बेहतरीन युवा खिलाड़ी भी आ रहे हैं जो यहां होने के हकदार हैं।“इन 20 सालों में मिले सारे प्यार के लिए शुक्रिया। मुझे मैदान के अंदर से आपकी आवाज सुनना बहुत याद आएगा। अब मैं भी आपमें से ही एक हो जाऊंगा और हमेशा बाहर से आपका साथ दूंगा—चाहे अच्छे पल हों या बुरे, बुरे समय में तो और भी ज्यादा।“मेरे परिवार का शुक्रिया कि वे हमेशा मेरे साथ रहे और इस खूबसूरत लेकिन मुश्किल सफर में मेरा साथ दिया। उन सभी कोच, टीम के साथियों और डायरेक्टर का भी शुक्रिया जिनके साथ मुझे यह सफर तय करने का मौका मिला। मैं अपने साथ कभी न भूलने वाली यादें और पल लेकर जा रहा हूं। मैं सुकून और गर्व के साथ जा रहा हूं, यह जानते हुए कि मैंने अपनी टीम के साथियों के साथ मिलकर आपको वे पल दिए जिनका हमने कभी सपना देखा था। आप सबके साथ यह सब अनुभव करना अद्भुत था। मैं आप सभी से बहुत प्यार करता हूं!“मुझे अर्जेंटीना का नागरिक बनाने के लिए भगवान का शुक्रिया। वामोस अर्जेंटीना! मैंने ये शब्द 21 जुलाई को, फाइनल के दो दिन बाद लिखे थे। आज, मेरे पिता के साथ जो हुआ, उसके बाद मुझे अपने इस फैसले पर पहले से कहीं ज्यादा यकीन हो गया है।”यह भी पढ़ें:Dhoni: धोनी ने मांगी थी CSK में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी? सीईओ ने तोड़ी चुप्पी
पंजाब नेशनल बैंक की ओर से PNB AI समिट 2026 आयोजित किया गया, जिसमें बड़े-बड़े दिग्गज शामिल हुए। समिट में पीएनबी के MD और CEO अशोक चंद्र ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने के PNB के विजन पर प्रकाश डाला।
HDFC Bank में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, Kaizad Bharucha बन सकते हैं नए प्रमुख, RBI की मंजूरी अहम
एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती दिख रही है। बैंक के मौजूदा प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन के अक्टूबर में पद से हटने के बाद उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा प्रमुख आंतरिक दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। मामले से परिचित दो लोगों के अनुसार बैंक उनके नाम को संभावित विकल्पों में रख सकता है। मौजूद जानकारी के अनुसार एचडीएफसी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों को ध्यान में रखते हुए एक बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश कर रहा है। केंद्रीय बैंक के नियमों के तहत बैंकों को मुख्य कार्यकारी पद के लिए एक से अधिक नाम प्रस्तावित करने होते हैं। अंतिम नियुक्ति पर फैसला भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बाद ही होगा। कैजाद भरूचा एचडीएफसी बैंक में लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। वह खुदरा और थोक बैंकिंग कारोबार की देखरेख करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं। उनके अनुभव और बैंक के विभिन्न कारोबारों की समझ को देखते हुए उन्हें आंतरिक विकल्प के तौर पर मजबूत माना जा रहा है। बता दें कि भरूचा के 2029 तक पद पर बने रहने की संभावना है। तब तक वह पूर्णकालिक निदेशक के तौर पर 15 साल की अवधि पूरी करेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक पूर्णकालिक निदेशक के कार्यकाल की अधिकतम अवधि 15 वर्ष होती है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी है। एचडीएफसी बैंक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तलाश ऐसे समय हो रही है, जब पिछले करीब छह महीनों में बैंक को नेतृत्व से जुड़े कई घटनाक्रमों का सामना करना पड़ा है। शशिधर जगदीशन ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वह अपने दूसरे कार्यकाल के बाद दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल अक्टूबर में समाप्त हो रहा है और बैंक के मुताबिक वह 26 अक्टूबर 2026 को कामकाज से सेवानिवृत्त होंगे। गौरतलब है कि एचडीएफसी बैंक के तत्कालीन पार्ट टाइम अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से जुड़े मतभेदों का हवाला दिया था। इसके बाद बैंक के संचालन और प्रशासन को लेकर कई सवाल उठे। हालांकि, बाद में कराई गई बाहरी कानूनी समीक्षा में चक्रवर्ती की ओर से उठाई गई प्रशासन संबंधी चिंताओं की पुष्टि करने वाला कोई प्रमाण नहीं मिला था। इसी बीच पिछले महीने बैंक ने शशिधर जगदीशन और दो अन्य अधिकारियों पर बड़े जमा खातों की कीमत तय करने से जुड़े एक अलग मामले में जुर्माना लगाया था। बैंक ने उस समय मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। इन घटनाक्रमों का असर बैंक के शेयरों पर भी पड़ा है। जून के अंत तक बैंक में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों के पास थी और इस साल शेयर का मूल्य लगभग 27 प्रतिशत नीचे आ चुका है। अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद गिरावट और तेज हुई है। निवेशकों की एक बड़ी चिंता 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड के एचडीएफसी बैंक में विलय के बाद अपेक्षित लाभ नहीं मिलने को लेकर भी है। शशिधर जगदीशन के नेतृत्व में हुए इस बड़े विलय ने बैंक का आकार काफी बढ़ाया, लेकिन इसके बाद ऊंची वित्तीय लागत और कारोबार को एकीकृत करने की चुनौतियां भी सामने आईं। अब नए मुख्य कार्यकारी की नियुक्ति बैंक के लिए सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि निवेशकों का भरोसा मजबूत करने की अहम परीक्षा भी होगी।
स्मार्टफोन नहीं है? फिर भी कर सकेंगे UPI पेमेंट, PhonePe ने शुरू की खास सुविधा
PhonePe ने एक नई UPI सर्विस शुरू की है, जिसका मकसद फीचर फोन पर डिजिटल पेमेंट की सुविधा देना है। यह सर्विस यूजर्स को कम्पैटिबल हैंडसेट पर जरूरी UPI फंक्शन इस्तेमाल करने की सुविधा देती है, जिससे पेमेंट प्लेटफॉर्म का दायरा स्मार्टफोन से आगे बढ़ता है। इसे कई मैन्युफैक्चरर्स के फीचर फोन मॉडल के जरिए पेश किया जा रहा है और आने वाले महीनों में और भी डिवाइस पर यह सर्विस मिलने की उम्मीद है। इस लॉन्च से उन यूजर्स के लिए भी नए विकल्प खुलते हैं जो रोजाना बातचीत के लिए फीचर फोन पर निर्भर हैं और जिनके पास स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है।PhonePe ने फीचर फोन के लिए शुरू की बिना इंटरनेट UPI पेमेंट सुविधाPhonePe ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि उसकी UPI 123Pay सर्विस अब पूरे भारत में सपोर्टेड फीचर फोन पर उपलब्ध है। यह सर्विस बिना इंटरनेट कनेक्शन के काम करती है और ट्रांजैक्शन (जैसे पैसे भेजना और मर्चेंट पेमेंट) के लिए SMS का इस्तेमाल करती है। इसे ऐसे इलाकों में भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है जहां 2G कनेक्टिविटी कमजोर है, और यह भारत के 20 करोड़ से ज्यादा फीचर फोन यूजर्स तक UPI सर्विस पहुंचाती है।UPI 123Pay सर्विस में पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर, मर्चेंट पेमेंट, बैंक बैलेंस चेक और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री जैसी सुविधाएं मिलती हैं। आने वाले अपडेट्स में PhonePe इस सर्विस में बिल पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज और आधार के जरिए UPI रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएं भी जोड़ने की योजना बना रहा है।HMD ने कई फीचर फोन मॉडल्स में PhonePe UPI 123Pay का सपोर्ट मिलने की पुष्टि की है। इनमें HMD 105 2G, HMD 110 2G, Nokia 105 Classic, Nokia 105 Single SIM, Nokia 105 Dual SIM, Nokia 106 और Nokia 123 Shield शामिल हैं। आने वाले समय में HMD और Nokia के कुछ और फीचर फोन में भी यह सुविधा मिल सकती है।PhonePe ने यूजर्स की मदद के लिए AI बेस्ड वॉइस हेल्पलाइन भी शुरू की है। इसके जरिए यूजर्स आसानी से इस सर्विस को सेटअप कर सकेंगे। यह हेल्पलाइन अंग्रेजी के साथ 12 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करती है। इसमें सर्विस एक्टिवेट करने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप जानकारी दी जाती है और UPI से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब भी मिलते हैं।यूजर्स कम्पैटिबल फीचर फोन पर पहले से इंस्टॉल PhonePe ऐप के ज़रिए सर्विस सेट अप कर सकते हैं। उन्हें नियम और शर्तें स्वीकार करनी होंगी, अपना बैंक चुनना होगा, अपने डेबिट कार्ड के आखिरी छह अंक और उसकी एक्सपायरी डेट डालनी होगी, और एक UPI PIN बनाना होगा।रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद यूजर्स कॉन्टैक्ट, मोबाइल नंबर या UPI ID के जरिए पेमेंट कर सकेंगे। जिन फीचर फोन में कैमरा है, उनमें QR कोड स्कैन करके भी भुगतान किया जा सकेगा।पेमेंट करने से पहले यूजर्स को प्राप्तकर्ता की जानकारी चेक करनी होगी। इसके बाद पेमेंट की रकम दर्ज करके UPI PIN डालना होगा और फिर पेमेंट कन्फर्म करना होगा।फिलहाल PhonePe UPI 123Pay की सुविधा HMD, Nokia, Lava International और Itel Mobile के चुनिंदा फीचर फोन मॉडल्स पर उपलब्ध है। PhonePe आने वाले महीनों में इसे और ज्यादा फीचर फोन मॉडल्स तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है।यह भी पढ़ें:Poco X8 5G और X8 Power 5G की भारत में जल्द होगी एंट्री, जानें लॉन्च डेट और फीचर्स
ONGC crude oil trading: ओएनजीसी इस साल के अंत तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक ट्रेडिंग में कदम रखने जा रही है, जिससे सालाना 1 अरब डॉलर का अतिरिक्त मुनाफा होने की उम्मीद है।
क्या भाई-बहन मिलकर खरीद सकते हैं घर? जानिए फायदे और परेशानी
Home Buy Tips: घर खरीदने से पहले ही यह तय कर लेना बेहतर है कि प्रॉपर्टी में किसका कितना हिस्सा होगा, डाउन पेमेंट और EMI में कौन कितना योगदान देगा और अगर भविष्य में कोई इस व्यवस्था से बाहर निकलना चाहे तो क्या प्रक्रिया होगी.
सोनिया गांधी की किताब से भारत के 'सबसे ताक़तवर राजनीतिक परिवार' के बारे में क्या पता चलेगा? - BBC
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सुभाष चंद्रा की समाधान योजना पर NCLT के फैसले को बैंकों ने NCLAT में दी चुनौती
एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया से असहमत बैंकों ने सोमवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में याचिका दायर की। याचिका में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी गयी है, जिसमें करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के बैंकों दावों के मुकाबले चंद्रा को 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान की योजना को मंजूरी दी गई है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार सुबह कार्यवाहक चेयरपर्सन न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली अपीलीय न्यायाधिकरण की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। मेहता ने केनरा बैंक और यूनियन बैंक की ओर से भी पेश होते हुए कहा कि यदि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश को जारी रहने दिया गया तो यह दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के मूल उद्देश्य को विफल कर देगा। उन्होंने दोपहर दो बजे मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया। हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। इससे पहले सोमवार को एनसीएलटी की विशेष पीठ ने औपचारिक आदेश पारित कर दिया। इसमें तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा के फैसले को शामिल किया गया, जिन्होंने न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी के बीच मतभेद वाले फैसले के बाद चंद्रा की भुगतान योजना के पक्ष में फैसला दिया था। एनसीएलटी का अंतिम आदेश अभी न्यायाधिकरण के पोर्टल पर नहीं डाला गया है। शर्मा ने पिछले मंगलवार को तीसरे सदस्य के रूप में फैसला देते हुए आईबीसी की धारा 114 के तहत योजना को मंजूरी दी थी। उन्होंने वित्तीय संस्थानों की उस आपत्ति को खारिज कर दिया था कि प्रस्तावित वसूली इतनी कम है कि योजना को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। शर्मा ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के नेतृत्व वाले असहमत वित्तीय संस्थानों के दावों को भी खारिज कर दिया। बैंकों ने योजना को ‘अव्यावहारिक और गैरकानूनी’ बताते हुए आपत्ति जताई थी। वित्तीय संस्थानों ने दलील में कहा था कि करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले भुगतान योजना में वित्तीय संस्थानों को केवल 6.25 करोड़ रुपये और प्रक्रिया की लागत के लिए 25 लाख रुपये देने का प्रस्ताव है। एनसीएलटी के आदेश में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की दलील दर्ज करते हुए कहा गया कि उसके 1,322.39 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावे के मुकाबले प्रस्तावित भुगतान केवल 38,09,294 रुपये, यानी उसके बकाया का करीब 0.028 प्रतिशत है। फैसले पर असहमति जताने वाले वित्तीय संस्थानों ने यह भी आरोप लगाया कि एस्सेल समूह के चेयरमैन चंद्रा के परिवार से जुड़ी पांच इकाइयों के पास कुल मतदान अधिकार का 61.78 प्रतिशत हिस्सा है। उन्होंने चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान योजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योजना में केवल 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रस्ताव है। वित्तीय संस्थानों का तर्क था कि ये पांचों संस्थाएं चंद्रा के सहयोगी या संबंधित पक्ष हैं और उन्हें पुनर्भुगतान योजना पर मतदान से रोकना चाहिए था। उनके मतों से कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) में योजना को कुल 80.814 प्रतिशत मंजूरी मिली थी। ये पांच इकाइयां वीणा इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लि., डायरेक्ट मीडिया डिस्ट्रिब्यूशन वेंचर्स प्राइवेट लि., वर्ल्ड क्रेस्ट एडवाइजर्स एलएलपी, लेमोनेड कैपिटल एडवाइजर्स एलएलपी और कॉर्पकॉल कैपिटल एडवाइजर्स एलएलपी हैं। एचडीएफसी बैंक और आईडीबीआई ट्रस्टीशिप सर्विसेज के नेतृत्व वाले असहमत कर्जदाताओं ने एडेलवाइस और फ्रैंकलिन टेम्पलटन फंड के माध्यम से दलील दी कि ये पांचों इकाइयां आईबीसी में दी गई ‘सहयोगी’ (एसोसिएट) की परिके दायरे में आती हैं और उनके मतों को नहीं गिना जाना चाहिए था। केनरा बैंक ने फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की थी, लेकिन उसकी अल्पमत हिस्सेदारी के कारण यह अनुमति नहीं दी जा सकी। हालांकि, शर्मा ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि किसी इकाई को ‘एसोसिएट’ तभी माना जा सकता है जब कर्जदार के पास उसकी शेयर पूंजी का 51 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा हो या वह सीधे उसके निदेशक मंडल को नियंत्रित करता हो। उन्होंने कहा, ‘‘चंद्रा के पास इन पांचों इकाइयों में प्रत्यक्ष रूप से कोई शेयर नहीं था, इसलिए यह शर्त पूरी नहीं होती...।’’अपने आदेश में शर्मा ने कहा कि समाधान पेशेवर के मूल्यांकन के अनुसार, चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति का मूल्य योजना के तहत पेश की गई राशि से काफी कम थी। योजना को खारिज करने की स्थिति में ऋणदाताओं को अधिक वसूली की संभावना नहीं थी।
नाबालिग के साथ गैंगरेप के केस में दिल्ली पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ़्तार - BBC
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‘आज की कमाई नहीं, कल की ताकत भी देखिए’, विकसित भारत कैसे बनेगा... गौतम अदानी से सुनिए
अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी केयर एज रेटिंग्स इंफ्रास्ट्रक्चर लैंडस्केप कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 'विकसित भारत' के विजन को साझा करते हुए कहा कि भारत को कम क्रेडिट स्टैंडर्ड्स की नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन करने के लिए 'व्यापक नजरिए' की जरूरत है।
अगस्त का महीना खत्म होने जा रहा है। सितंबर की शुरुआत हो रही है। अगस्त का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं रहा। बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई। अगस्त में सेंसेक्स 1.46 फीसदी यानी 1,137 अंक गिरा। निफ्टी इस दौरान 1.24 फीसदी यानी 303 अंक नीचे आया। इनवेस्टर्स की नजरें अब सितंबर में बाजार के प्रदर्शन पर लगी हैं।सितंबर महीने के पहले दिन यानी 1 सितंबर को कई शेयरों में हलचल दिख सकती है। हालांकि, घरेलू शेयर बाजारों पर अमेरिकी बाजारों में 31 अगस्त की क्लोजिंग और क्रूड ऑयल की कीमतों का भी असर पड़ेगा। मध्यपूर्व में फिर से तनाव बढ़ता दिख रहा है। 1 सितंबर को जिन शेयरों में हलचल दिख सकती है उनमें NCC, E2E Networks, Milky Mist Dairy, ICICI Bank और Cipla शामिल हैं।इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी NCC ने 31 अगस्त को बताया कि उसे अगस्त में कुल 430 करोड़ रुपये के तीन ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डर का संबंध कंपनी के बिल्डिंग डिविजन से है। कंपनी ने यह भी कहा है कि जो प्रोजेक्ट्स मिले हैं, उनसे कंपनी को प्रमोटर्स, प्रमोटर ग्रुप और ग्रुप कंपनियों के हित नहीं जुड़े हैं। ये ऑर्डर रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन के तहत भी नहीं आते। NCC के शेयरों पर इसका असर 1 सितंबर को दिख सकता है। एनसीसी का शेयर 31 अगस्त को 0.067 फीसदी चढ़कर 148.50 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 30 फीसदी गिरा है।मिल्की मिस्ट डेयरी फूड ने 31 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का एलान किया। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 829 फीसदी बढ़कर 65 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी का प्रॉफिट सिर्फ 7 करोड़ रुपये था। कंपनी का रेवेन्यू भी जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 43.6 फीसदी बढ़कर 973.4 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के शेयरों पर 1 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का असर दिखेगा।मल्टीप्लेक्स चेन ऑपरेटर PVR INOX ने 31 अगस्त को शेयर बायबैक प्लान को मंजूरी दे दी। इसके तहत कंपनी प्रति शेयर 1,450 रुपये के भाव पर 20,68,965 तक शेयर खरीदेगी। इस पर 300 करोड़ रुपये तक खर्च होने की उम्मीद है। कंपनी के बोर्ड ने बायबैक के लिए 4 सितंबर, 2026 रिकॉर्ड डेट तय की है। इसका असर 1 सितंबर को कंपनी के शेयरों पर दिखेगा। 31 अगस्त को कंपनी का शेयर 1.22 फीसदी गिरकर 1,206 रुपये पर बंद हुआ।ICICI Bank और HDFC Bank की वैल्यूएशन के बीच का फर्क घटा है। अब दोनों बैंकों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में सिर्फ 49,167 करोड़ रुपये का फर्क रह गया है। अभी एचडीएफसी बैंक की वैल्यूएशन 10,92,648 करोड़ रुपये है, जबकि ICICI Bank की वैल्यूएशन 10,43,481 करोड़ रुपये है। इस साल ICICI Bank का शेयर करीब 8 फीसदी चढ़ा है, जबकि एचडीएफसी बैंक के शेयर में 28 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। 1 सितंबर को ICICI Bank के शेयर पर इसका असर दिख सकता है।
भारत में महंगी कार खरीदने वाले अमीर ग्राहकों के बीच इलेक्ट्रिक कारों का चलन बाकी कार बाजार के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ रहा है। 2026 के पहले छह महीनों में भारत में बिकने वाली हर चार BMW कारों में से एक इलेक्ट्रिक कार थी। इससे BMW की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री करीब 25% रही, जो पूरे पैसेंजर व्हीकल बाजार के मुकाबले लगभग तीन गुना है। इस दौरान देश में कुल कार बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी करीब 8-9% रही।यह बदलाव Mercedes-Benz में भी साफ तौर पर दिख रहा है, खासकर इसके सबसे अमीर ग्राहकों के बीच। इन्हीं छह महीनों के दौरान, कंपनी ने अपने 'टॉप-एंड' सेगमेंट - जिसमें 1.4 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले मॉडल शामिल हैं - से लगभग हर तीन घंटे में एक बैटरी इलेक्ट्रिक गाड़ी (BEV) बेची। इसकी CLA BEV, जिसकी शुरुआती कीमत 57 लाख रुपये है, का 2026 का कोटा पहले ही खत्म हो चुका है, जिससे नए खरीदारों को डिलीवरी के लिए अगले साल तक इंतजार करना पड़ेगाआम भारतीय कार खरीदारों को इलेक्ट्रिक कार खरीदने से जो दिक्कतें होती हैं, जैसे चार्जिंग की सुविधा, कार की रेंज को लेकर चिंता और ज्यादा कीमत, अमीर परिवारों के लिए ये समस्याएं काफी कम हो जाती हैं।LVP फोरकास्टिंग मोबिलिटी ग्लोबल के एसोसिएट डायरेक्टर गौरव वंगाल ने कहा, लग्जरी सेगमेंट में EV को अपनाने की दर ज्यादा है क्योंकि इसके रास्ते में कोई रुकावट नहीं है। इन खरीदारों के पास घर पर चार्जर के साथ कवर्ड पार्किंग होती है, इसलिए चार्जिंग कभी कोई समस्या नहीं बनती।उन्होंने आगे कहा, EV शायद ही कभी उनकी एकमात्र कार होती है, इसलिए रेंज की चिंता कभी नहीं होती। और पेट्रोल या डीजल वाली लग्जरी कार की तुलना में इलेक्ट्रिक कार पर टैक्स बहुत कम लगता है, इसलिए कीमत का वह अंतर जो ज्यादातर खरीदारों को रोकता है, यहां मौजूद ही नहीं है।मालिक होने की स्थितियों में यह अंतर बिक्री के आंकड़ों में साफ तौर पर दिख रहा है। जहां पारंपरिक लग्जरी कारों की बिक्री में बढ़ोतरी धीमी हुई है, वहीं EV से BMW और मर्सिडीज-बेंज को तेजी से बढ़ते ग्राहक मिल रहे हैं।2026 के पहले छह महीनों में, BEV को छोड़कर Mercedes-Benz की बिक्री में सिर्फ 2.3% की बढ़ोतरी हुई, जबकि BMW की नॉन-BEV बिक्री में 5% की बढ़ोतरी हुई। जब इलेक्ट्रिक कारों को भी शामिल किया जाता है, तो Mercedes की कुल बढ़ोतरी 9% और BMW की 17% हो जाती है।इसलिए, इलेक्ट्रिक गाड़ियां अब लग्जरी मार्केट में सिर्फ एक अतिरिक्त पावरट्रेन नहीं रह गई हैं। वे अतिरिक्त बढ़ोतरी का एक अहम जरिया बन रही हैं।BMW ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और CEO, हरदीप सिंह बरार ने कहा कि इसकी अपील सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी बातों से कहीं ज्यादा है।बरार ने कहा, EVs न सिर्फ जीरो-एमिशन वाली गाड़ियां हैं, बल्कि ये परफॉर्मेंस से कोई समझौता किए बिना सस्टेनेबल मोबिलिटी भी देती हैं, और साथ ही इनकी रनिंग, मेंटेनेंस और टैक्स की लागत भी काफी कम होती है।यह बात उन कीमतों पर भी असरदार साबित हो रही है जहां ईंधन की बचत शायद ही यह तय करती हो कि कोई ग्राहक कार खरीदेगा या नहीं।मर्सिडीज़-बेंज़ के टॉप-एंड इलेक्ट्रिक पोर्टफ़ोलियो - जिसमें लगभग 1.4 करोड़ रुपये की EQS SUV, 2.4 करोड़ रुपये की EQS मेबैक SUV और 3.1 करोड़ रुपये की G580 शामिल हैं - ने जून 2026 को खत्म हुए छह महीनों में साल-दर-साल 27 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की।लक्ज़री मार्केट के ज़्यादा किफायती सेगमेंट में, मर्सिडीज़ ने CLA BEV का अपना 2026 का पूरा कोटा पहले ही बेच दिया है।Mercedes-Benz इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, संतोष अय्यर ने कहा, CLA BEV का पूरी तरह बिक जाना, खासकर 61 लाख रुपये वाले टॉप-एंड 250+ वेरिएंट्स का, लक्जरी EV ग्राहकों की बढ़ती समझ को दिखाता है। ये ग्राहक अब सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और वैल्यू-बेस्ड लक्जरी मोबिलिटी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।रुकावटें दूर हो रही हैंलग्जरी कार खरीदने वालों की प्रोफाइल से यह समझने में मदद मिलती है कि EV को अपनाने की रफ्तार आम बाजार के मुकाबले इतनी तेज क्यों है।जो परिवार अपनी इकलौती कार खरीद रहा है, उसके लिए इलेक्ट्रिक कार अपनाने में कई समझौते करने पड़ सकते हैं। अपार्टमेंट में रहने वाले खरीदार के पास शायद अपना पर्सनल चार्जर न हो, और लंबी यात्राओं के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर योजना बनानी पड़ती है। EV की शुरुआती ज्यादा कीमत की तुलना कई सालों में होने वाली ईंधन की बचत से भी करनी पड़ती है।कई अमीर परिवारों के लिए, ये हिसाब-किताब काफी अलग होते हैं।इन परिवारों के पास आमतौर पर अपनी पार्किंग की जगह होती है, इसलिए घर पर चार्जर लगाना आसान होता है। वे रातभर अपनी कार चार्ज कर सकते हैं और उन्हें पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ता।सबसे बड़ी बात यह है कि अमीर परिवारों में EV अक्सर इकलौती कार नहीं होती। उनके पास एक से ज्यादा गाड़ियां होती हैं।इसका मतलब है कि EV को परिवार की हर तरह की यात्रा की जरूरत पूरी करने की जरूरत नहीं होती। इलेक्ट्रिक कार रोजाना शहर में आने-जाने के काम आ सकती है, जबकि लंबी दूरी की यात्रा के लिए परिवार के पास पेट्रोल या डीजल कार का विकल्प मौजूद रहता है।भारत का टैक्स सिस्टम इस बात को और मज़बूत करता है।इलेक्ट्रिक कारों पर 5% GST लगता है, जबकि बड़ी पेट्रोल और डीजल कारों पर 28% GST और साथ में कंपनसेशन सेस भी लगता है। लग्जरी कारों की कीमतों के मामले में, यह अंतर बैटरी टेक्नोलॉजी की ज्यादा लागत को काफी हद तक कम कर सकता है और इलेक्ट्रिक व इंटरनल-कंबशन मॉडल के बीच कीमत के अंतर को घटा सकता है।EVs में अब ऐसी खूबियां भी तेज़ी से आ रही हैं जो लग्ज़री ड्राइविंग के लिए एकदम सही हैं। इलेक्ट्रिक मोटर तुरंत टॉर्क देती है, जिससे कार तेजी से पिकअप लेती है। वहीं, पेट्रोल या डीजल इंजन नहीं होने के कारण EV काफी शांत और स्मूद ड्राइविंग अनुभव देती है। प्रीमियम कार कंपनियां भी अपनी लग्जरी कारों में इसी तरह की शांति और आराम देने के लिए काफी पैसा खर्च करती हैं।इसलिए, हाई-एंड मार्केट के खरीदारों के लिए, इलेक्ट्रिक गाड़ियां कम टैक्स और कम रनिंग कॉस्ट के साथ-साथ परफॉर्मेंस, टेक्नोलॉजी और नई खूबियों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन हो सकती हैं।विकल्प तेजी से बढ़ रहे हैंएक और बड़ा बदलाव यह है कि अमीर भारतीय अब कई तरह की इलेक्ट्रिक कारें खरीद सकते हैं।FY25 से, भारत के लग्जरी सेगमेंट में 13 नई BEV लॉन्च हुई हैं, जिनमें Porsche, Volvo, Rolls-Royce, Ferrari और Lexus के मॉडल शामिल हैं। इनकी सबसे ज्यादा कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये तक है।इस विस्तार से EV अपनाने में आने वाली एक और रुकावट धीरे-धीरे दूर हो रही है: विकल्पों की कमी।शुरुआत में लग्जरी EV खरीदने वालों के पास इलेक्ट्रिक मॉडल्स के कुछ ही विकल्प होते थे, जबकि पेट्रोल और डीजल मार्केट में कई तरह की सेडान, SUV और परफॉर्मेंस कारें उपलब्ध थीं। अब ग्राहक अपनी पसंद की बॉडी स्टाइल, परफॉर्मेंस कैटेगरी या लग्जरी ब्रांड को छोड़े बिना आसानी से पावरट्रेन बदल सकते हैं।इसका असर इंडस्ट्री के आंकड़ों में साफ दिखता है।FY26 में भारत में बिकने वाली कुल पैसेंजर व्हीकल्स में लग्जरी कारों की हिस्सेदारी सिर्फ 1.1-1.2% रही। लेकिन देश में बिकने वाली कुल इलेक्ट्रिक कारों (BEV) में लग्जरी कारों की हिस्सेदारी करीब 2.5-2.7% रही। यानी पूरे पैसेंजर व्हीकल बाजार में लग्जरी कारों की हिस्सेदारी के मुकाबले इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में इनकी हिस्सेदारी दोगुने से भी ज्यादा है।इस बदलाव का सबसे साफ उदाहरण BMW है। कंपनी ने जून 2026 को खत्म हुए छह महीनों में 2,359 EV बेचीं, जिससे भारत में उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का हिस्सा लगभग एक-चौथाई हो गया। इसी दौरान Mercedes-Benz ने 859 BEV बेचीं।फिर भी, Tesla का अनुभव बताता है कि इस तेजी का फायदा हर प्रीमियम EV बनाने वाली कंपनी को बिक्री के तौर पर नहीं मिलता।इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में ग्लोबल पहचान होने के बावजूद, भारत में अपने पहले साल (जो जून 2026 में खत्म हुआ) में Tesla ने सिर्फ 450 के आस-पास कारें बेचीं।इसकी सीमित प्रोडक्ट रेंज एक रुकावट है। टेस्ला अभी भारत में सिर्फ 'मॉडल Y' बेचती है, जिससे यह कई ऐसे सेगमेंट में मौजूद नहीं है जहां पहले से मौजूद लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियां ग्राहकों को सेडान, SUV और परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड मॉडल ऑफर कर सकती हैं।इसकी एक और चुनौती कीमत भी रही है। टेस्ला ने बेस 'मॉडल Y' को 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) में लॉन्च किया था, और बाद में मई 2026 में इसकी कीमत घटाकर 50.89 लाख रुपये कर दी। कीमत कम करने के बाद भी, पूरी तरह से इम्पोर्ट किया गया यह मॉडल उन कंपनियों से मुकाबला करता है जिनके पास ज्यादा बड़े पोर्टफोलियो और पहले से स्थापित सेल्स और सर्विस नेटवर्क हैं। यह अंतर दिखाता है कि भारत का लग्जरी EV मार्केट किस तरह बदल रहा है।आम कार खरीदारों के लिए EV खरीदने पर अभी भी चार्जिंग, ड्राइविंग रेंज, ज्यादा शुरुआती कीमत और सिर्फ एक कार पर निर्भर रहने जैसी कई परेशानियां हो सकती हैं। लेकिन अमीर परिवारों के लिए इनमें से कई दिक्कतों को आसानी से दूर किया जा सकता है। वे घर पर चार्जर लगवा सकते हैं, लंबी दूरी की यात्रा के लिए दूसरी कार का इस्तेमाल कर सकते हैं और EV पर कम टैक्स लगने से इलेक्ट्रिक कार खरीदना उनके लिए अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है।इन वजहों से अमीर भारतीय परिवारों में इलेक्ट्रिक लग्जरी कार अब सिर्फ महंगा प्रयोग नहीं रह गई है। यह धीरे-धीरे उनकी गैराज में एक आम और पसंदीदा विकल्प बनती जा रही है।BMW और Mercedes-Benz के लिए यह बदलाव एक कदम और आगे बढ़ चुका है। भारत में EV अब सिर्फ उनके भविष्य के प्रोडक्ट प्लान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आज ही उनकी बिक्री और ग्रोथ को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।यह भी पढ़ें:₹99,999 में लॉन्च Ather का नया स्कूटर, Konark की मार्केट में इनसे होगी भिड़ंत
पंकज ने 10 लाख में ली जमीन, अमन ने लिया फ्लैट... 20 साल में कौन ज्यादा अमीर?
दो भाई पंकज और अमन, दोनों को पिता से 10-10 लाख रुपये मिले, एक ने गांव में जमीन खरीद ली, दूसरे ने शहर में जाकर फ्लैट. 20 साल के बाद कौन ज्यादा अमीर होगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि गाँव की जमीन और शहर के फ्लैट की लोकेशन कैसी है.
Gold Silver Prices Today: सोने में लगातार चौथे सत्र गिरावट जारी, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं
दिल्ली सर्राफा बाजार में 31 अगस्त को सोने में लगातार चौथे सत्र गिरावट देखने को मिली। यह 1,500 रुपये गिरकर 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में गिरावट का असर घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर पड़ा। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ।ट्रेडर्स ने बताया कि बीते कुछ हफ्तों में सोने की कीमतों में अच्छी तेजी दिखी थी। अब लगातार मुनाफावसूली हो रही है, जिसका असर कीमतों पर पड़ रहा है। ट्रेडर्स सोने में इस लिए भी पोजीशन घटा रहे हैं, क्योंकि सोने में तेजी का ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहने में नाकाम रहा। चांदी की कीमतें 31 अगस्त को 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रही।लेमन मार्केट डेस्क में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद सोने की कीमतों पर दबाव दिख रहा है। उन्होंने 28 अगस्त को जैक्सन होल में अपनी स्पीच में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी के संकेत दिए। इससे सितंबर में फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।उन्होंने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ा। डॉलर में मजबूती का सोने की कीमतों पर खराब असर पड़ता है, क्योंकि इससे दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में कमजोरी दिखी। यह 0.35 फीसदी गिरकर 4,436 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी हल्की मजबूती के साथ 66.97 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बुलियन मार्केट्स पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का भी असर पड़ा, क्योंकि इससे क्रूड की कीमतें एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही हैं।ब्रेंट क्रूड का भाव अगर 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है तो इससे अमेरिकी सहित दुनियाभर में महंगाई बढ़ेगी। महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंकों पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का दबाव बढ़ जाएगा। फेडरल रिजर्व सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ाकर इसकी शुरुआत कर सकता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने वाले माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।
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अक्षय ओबेरॉय-हेली दारूवाला की केमिस्ट्री ने जीता दिल, ‘लव लॉटरी’ का गाना ‘नजर लग जाएगी’ हुआ रिलीज
अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला स्टारर कोर्टरूम सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘लव लॉटरी’ का रोमांटिक गाना ‘नजर लग जाएगी’ रिलीज हो गया है। जावेद अली और राधिका भिड़े की आवाज में सजे इस खूबसूरत गाने का म्यीजिक वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे ने तैयार किया है, जबकि इसके बोल अरविंद पांडे ने लिखे हैं। गाने में अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला के बीच खूबसूरत केमिस्ट्री देखने को मिलती है।उत्तराखंड की खूबसूरत लोकेशंस पर फिल्माया गया ‘नजर लग जाएगी’ कहानी के किरदारों के रिश्ते के इमोशनल और रोमांटिक पहलू को सामने लाता है। पहाड़ों की खूबसूरती, शांत माहौल और प्रकृति के बीच फिल्माए गए रोमांटिक पल अक्षय और हेली की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को और निखारते हैं। दोनों की मौजूदगी गाने को बिना किसी बनावटीपन के एक स्वाभाविक और खूबसूरत एहसास देती है। गाने की सिनेमैटोग्राफी नवीन वी. मिश्रा ने की है, जबकि इसकी कोरियोग्राफी देवेंद्र चतुर्वेदी ‘डेविड’ ने की है।गाने और फ़िल्म को लेकर निर्देशक एवं संगीत निर्देशक अरविंद पांडे ने कहा- “नजर लग जाएगी के जरिए हम अपने किरदारों के रिश्ते के इमोशनल और रोमांटिक पहलू को बहुत सहज तरीके से दिखाना चाहते थे। उत्तराखंड की खूबसूरती ने हमें इसके लिए बिल्कुल सही माहौल दिया। फ़िल्म के निर्माता कुलदीप भार्गव कहते हैं कि लव लॉटरी का विषय नाजुक है और हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी कि इसे संतुलन और समझदारी के साथ दर्शकों के सामने रखा जाए। फिल्म इस बात को तलाशती है कि प्यार, भरोसा और शादी का रिश्ता कभी-कभी किस तरह एक अप्रत्याशित मोड़ ले सकता है।जावेद अली और राधिका भिड़े की आवाज इस रोमांटिक गाना के एहसास को और गहराई देती है। वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे के संगीत तथा अरविंद पांडे के बोलों के साथ तैयार यह गाना किरदारों के बीच की नज़दीकियों और उनके रिश्ते की भावनात्मक परत को सामने लाता है।सिनेमा गंज फिल्म्स के बैनर तले कुलदीप भार्गव ‘तुषार’ द्वारा निर्मित ‘लव लॉटरी’ का निर्देशन अरविंद पांडे ने किया है और इसकी कहानी व लेखन अंकुर खत्री का है। फ़िल्म में अक्षय ओबेरॉय, हेली दारूवाला और कबीर दुहन सिंह प्रमुख भूमिकाओं में हैं, जबकि विजयांत कोहली, संतोष शुक्ला, हेमंत पांडे, इंदिरा कृष्णन, अग्नि अय्यारी, विक्रम शर्मा, कुमार सौरभ, अश्वंत लोधी और अर्शदीप संधू सहित कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।
यह लेख भारत के 5 प्रमुख बाजारों के बारे में बताता है जो सस्ते कपड़ों के लिए प्रसिद्ध हैं। इन बाजारों में मुंबई का मंगलदास और दिल्ली का सरोजिनी बाजार शामिल हैं, जहाँ कपड़े ₹50-₹100 जैसी कम कीमतों पर मिलते हैं।
Indus Waters Treaty Update: सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। भारत ने सोमवार को तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) द्वारा अंतरिम उपायों और सिंधु जल संधि की स्थिति को लेकर जारी किए गए फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को ही गैर-कानूनी रूप से गठित बताते हुए साफ कहा है कि इस मंच का भारत पर कोई क्षेत्राधिकार नहीं है।भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वर्ल्ड बैंक द्वारा इस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का गठन सिंधु जल संधि की शर्तों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करके किया गया था। भारत ने इस निकाय द्वारा जारी हालिया फैसले के साथ-साथ इसके सभी पिछले बयानों और आदेशों को भी स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।गैर-कानूनी निकाय को भारत ने कभी मान्यता नहीं दी- विदेश मंत्रालयविदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि भारत ने कानूनी रूप से इस गैर-कानूनी और तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के अस्तित्व को कभी स्वीकार नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस मध्यस्थता निकाय की स्थापना स्वयं सिंधु जल संधि का एक गंभीर उल्लंघन है। भारत ने साफ किया कि वह इस निकाय के समक्ष कभी भी पेश नहीं हुआ है और उसने इसके किसी भी पिछले फैसलों या घोषणाओं का संज्ञान लेने से भी हमेशा इनकार किया है।भारत की संप्रभुता और परियोजनाओं पर नहीं पड़ेगा कोई असरविदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के पास भारत के संप्रभु निर्णयों पर फैसला सुनाने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है। भारत द्वारा शुरू की जा रही या चलाई जा रही परियोजनाओं से जुड़े कदमों पर इस निकाय के वर्तमान या भविष्य के किसी भी फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही भारत सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला पूरी तरह से लागू रहेगा और प्रभाव में बना रहेगा।आपको बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता को स्थगित करने का फैसला किया था। इसके बाद ही पाकिस्तान लगातार इसे लेकर धमकी देने के साथ तमाम तरह के पैंतरे दिखा रहा है। इसी क्रम में अब इसे लेकर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले और खुद कोर्ट को ही खारिज कर भारत ने पाकिस्तान को एक और तगड़ा झटका दे दिया है।
NCR Satellite Towns Real Estate Boom: मेरठ के रहने वाले प्रदीप चौधरी जब करीब ढाई साल पहले अपने शहर की एक पॉश कॉलोनी में 150 वर्ग गज के घर की जानकारी लेने गए थे, तब उसकी कीमत लगभग ₹1.1 करोड़ थी। हाल ही में उन्होंने वही प्रॉपर्टी ₹2.5 करोड़ में खरीदी।प्रदीप बताते हैं, 'अगर मैं ऐसा ही घर नोएडा में खरीदता तो ₹4-5 करोड़ लगते, और गुरुग्राम में तो रेट इससे भी कहीं ज्यादा हैं। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूं, लेकिन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नमो भारत (RRTS) आने के बाद अब मेरठ से दिल्ली पहुंचने में सिर्फ 50 मिनट लगते हैं। यह सफर नोएडा या गुरुग्राम के कुछ इलाकों से भी ज्यादा आसान और तेज है। फिर मैं करोड़ों रुपये ज्यादा क्यों खर्च करूं?'प्रदीप की यह कहानी अकेले उनकी नहीं है। यह दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट में आ रहे एक ऐतिहासिक बदलाव की बानगी है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नमो भारत (RRTS), गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने दूरी और समय को इतना घटा दिया है कि लोग अब नोएडा, दिल्ली या गुरुग्राम जाने के बजाय मेरठ और नौगांव जैसे उभरते शहरों में घर और जमीन खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।मेरठ का रियल एस्टेट मार्केट: सिर्फ 2-3 साल में दोगुनी हुईं कीमतेंमेरठ इस इंफ्रास्ट्रक्चर बूम का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। नमो भारत/RRTS और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी ने मेरठ को दिल्ली-एनसीआर का एक प्रैक्टिकल 'कम्यूटर हब' बना दिया है।रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ मेरठ (REDAM) के अध्यक्ष अशोक गर्ग के मुताबिक, 'पहले दिल्ली से दूरी और जाम मेरठ की सबसे बड़ी कमजोरी थी, लेकिन अब इंफ्रास्ट्रक्चर ने बाजी पलट दी है। पिछले 2 से 3 सालों में मेरठ में जमीन के रेट 100 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। दिल्ली-नोएडा की तुलना में मेरठ में रहने का खर्च बहुत कम है, इसलिए लोग यहां रहकर दिल्ली में आराम से नौकरी कर रहे हैं।'सरकार मोदीपुरम के पास एक विशेष विकास क्षेत्र विकसित कर रही है, जिससे यहां कमर्शियल और बिजनेस एक्टिविटीज को और बड़ा बूस्ट मिलेगा। मेरठ के पॉश इलाके साकेत में ढाई साल पहले जमीन ₹80,000 से ₹90,000 प्रति वर्ग गज थी, जो आज बढ़कर ₹2 लाख से ₹2.25 लाख प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई है।दिल्ली-NCR के मुकाबले क्यों लोगों की पसंद बन रहे हैं मेरठ जैसे शहर?पहले जहां लोग नौकरी के सिलसिले में दिल्ली, नोएडा या गुरुग्राम में बसने का सपना देखते थे, वहीं अब महंगी प्रॉपर्टी और रोज के ट्रैफिक जाम के कारण वे अपने फैसले पर पुनर्विचार कर रहे हैं। दरअसल, मेरठ जैसे उभरते सैटेलाइट शहरों में ₹1.5 से ₹2.5 करोड़ में बड़ा विला या स्वतंत्र मकान मिल जाता है, जबकि नोएडा-गुरुग्राम में छोटे फ्लैट्स के लिए भी ₹4 से ₹6 करोड़ तक चुकाने पड़ते हैं।इसके अलावा, एक्सप्रेसवे और नमो भारत (RRTS) की बदौलत अब मेरठ से दिल्ली का सफर ट्रैफिक जाम से बचकर महज 50 मिनट से 1 घंटे में पूरा हो जाता है, जो नोएडा या गुरुग्राम के कई इलाकों से भी तेज है। कम रहने का खर्च और बेहतर स्पेस मिलने की वजह से ही लोग अब इन नए शहरों का रुख कर रहे हैं।नौगांव और बड़ौदा मेव: फार्महाउस और रिजॉर्ट्स का बूमअगर मेरठ रोज की भागदौड़ और नौकरीपेशा लोगों की पहली पसंद बन रहा है, तो राजस्थान के अलवर क्षेत्र में स्थित नौगांव और बड़ौदा मेव वीकेंड होम्स और फार्महाउस के लिए हॉटस्पॉट बन चुके हैं।दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ने इन इलाकों को गुरुग्राम और दिल्ली के बेहद करीब ला खड़ा किया है। स्थानीय डीलरों के अनुसार, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बनने के बाद नौगांव और बड़ौदा मेव के अर्बन लोकल बॉडी इलाकों में जमीनों के दाम 30 से 40 फीसदी तक चढ़ चुके हैं।राम रतन ग्रुप के चेयरमैन विजय राम रतन बताते हैं कि एक्सप्रेसवे ने दिल्ली-गुरुग्राम के लोगों के लिए वीकेंड ट्रैवल को बहुत आसान बना दिया है। नौगांव के आसपास होटल, फार्महाउस रिजॉर्ट्स और ग्लैंपिंग की बुकिंग्स में भारी उछाल आया है।डेवलपर्स की नई रणनीति: हाइवे किनारे होर्डिंग्स की भरमारदिल्ली-एनसीआर के बड़े बिल्डर्स अब पारंपरिक हब्स को छोड़कर इन नए रूटों का रुख कर रहे हैं। डेवलपर्स को इन नए इलाकों में बड़े भूखंड काफी सस्ते दामों पर मिल रहे हैं। दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के पास बागपत और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास नौगांव में बड़े बिल्डर्स प्लॉट्स, लग्जरी विला और गेटेड फार्म कम्युनिटीज ला रहे हैं।हाइवे किनारे लगे बड़े-बड़े बिलबोर्ड्स इस बात का सबूत हैं कि अब दूरी किलोमीटर से नहीं, बल्कि 'मिनटों' से नापी जा रही है।कनेक्टिविटी ने पलट दिया पूरा गेम?मेरठ और नौगांव भले ही दो अलग-अलग तरह के रियल एस्टेट मार्केट हों जहां मेरठ रोजाना दिल्ली आकर नौकरी करने वालों का नया ठिकाना बन रहा है, वहीं नौगांव वीकेंड गेटवे और लाइफस्टाइल फार्महाउस के रूप में उभर रहा है। लेकिन दोनों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी। बेहतर कनेक्टिविटी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सफर आसान हो, तो महंगे एनसीआर हब्स में करोड़ों रुपये फंसाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
OTT Releases This Week: सितंबर की शुरुआत कई तरह की दिलचस्प स्ट्रीमिंग फिल्मों और सीरीज के साथ हो रही है। इनमें एक मां की अपने खोए हुए बच्चे की तलाश और इंटरनेशनल गैंग वॉर, घटनाओं की जांच और कोल्ड वॉर के समय के सर्वाइवल एडवेंचर तक शामिल हैं। तापसी पन्नू 'गंधारी' में एक ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो अपनी बेटी को खोजने की बेताब कोशिश में बच्चों की तस्करी करने वाले नेटवर्क की जड़ोंतक पहुंच जाती है।वहीं, अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी 'धमाल 4' में खजाने की तलाश के मजेदार हंगामे के लिए फिर से साथ आ रहे हैं। साथ ही, थियो जेम्स और काया स्कोडेलेरियो 'द जेंटलमैन' के दूसरे सीज़न में हॉर्नमैन-ग्लास क्रिमिनल नेटवर्क को ब्रिटेन से बाहर ले जा रहे हैं।पीरियड रोमांस और कोर्टरूम ड्रामा से लेकर कर्नाटक संगीत, हॉरर-कॉमेडी और डॉक्यूमेंट्री तक, यहां 1 सितंबर से 6 सितंबर के बीच रिलीज़ होने वाली प्रमुख OTT फिल्में और सीरीज दी गई हैं।'गंधारी'- नेटफ्लिक्स, 3 सितंबरतापसी पन्नू इस डार्क एक्शन थ्रिलर में बानी का किरदार निभा रही हैं, जो एक ऐसी मां है जिसकी लाइफ तब तहस-नहस हो जाती है जब उसकी छोटी बेटी अचानक एक भीड़ भरे रेलवे स्टेशन से गायब हो जाती है। बच्ची को ढूंढने की उसकी बेताब कोशिशें तब और भी खौफनाक मोड़ ले लेती हैं। पन्नू के साथ इशवाक सिंह, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी, मीता वशिष्ठ और जतिन सरना अहम भूमिकाओं में हैं।धमाल 4 – नेटफ्लिक्स, 4 सितंबरखजाना वापस आ गया है, और जाहिर है, उसे खोजने के लिए पागलपन से भरे लोग भी वापस आ गए हैं। इंद्र कुमार की स्लैपस्टिक फ़्रैंचाइज़ी अपनी चौथी किस्त के साथ लौट रही है, जिसमें गुड्डू, लल्लन, आदि और मानव एक बार फिर रातों-रात अमीर बनने की उम्मीद में उलझते-भटकते नजर आएंगे। 'टोटल धमाल' के बाद अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी फिर से एक साथ आ रहे हैं, साथ ही रवि किशन, संजय मिश्रा, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद भी इस बड़ी स्टार कास्ट का हिस्सा हैं।द जेंटलमैन सीजन 2 – नेटफ्लिक्स, 3 सितंबररे विंस्टन, डैनियल इंग्स, जोली रिचर्डसन, विनी जोन्स, जियानकार्लो एस्पोसिटो, जैस्मीन ब्लैकबोरो और पियर्स क्विगली की वापसी हो रही है। इस बढ़ते हुए क्रिमिनल यूनिवर्स में ह्यू बॉनविले, बेंजामिन क्लेमेंटाइन, बेनेडेट्टा पोरोकारोली, मिशेल मोरोन, सर्जियो कास्टेलिटो और अमरा मल्लासी भी शामिल हो रहे हैं, साथ ही बॉक्सर क्रिस यूबैंक जूनियर और टेलीविज़न प्रेजेंटर माया जामा भी नजर आएंगे।लवसिक – नेटफ्लिक्स, 2 सितंबर1910 के दशक में सेट इस सात-एपिसोड वाले मैक्सिकन पीरियड ड्रामा मेंउलझनों के बीच रोमांस की कहानी दिखाई गई है। रेनाटा वाका ने वियोलेटा का किरदार निभाया है, जो एक ताकतवर परिवार में पैदा हुईयंग महिला है। उसके सामाजिक रुतबे के साथ वफादारी, शादी और भविष्य को लेकर कुछ तय उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।बिग बॉस 20- JioHotstar, 6 सितंबर 2026सलमान खान के होस्ट वाला पॉपुलर रियलिटी शो बिग बॉस 20 अपने नए सीजन के साथ कमबैक कर रहा है। शो में नए कंटेस्टेंट्स, टास्क, विवाद और अलग-अलग गेम डायनामिक्स देखने को मिलने वाले हैं।
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पेट्रोल पंप के नोजल पर एथेनॉल की मात्रा लिखने की मांग खारिज, वीडियो में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सक्षम अथॉरिटी के पास जाएं
नोमुरा ने दी इस दिग्गज ऑटो कंपनी के शेयर खरीदने की सलाह, एक साल में 29% चढ़ा स्टॉक
इस शेयर ने बीते एक साल में निवेशकों का करीब 29 फीसदी रिटर्न दिया है। इस दौरान शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न निगेटिव रहा है। हम बात कर रहे हैं दोपहिया बनाने वाली दिग्गज कंपनी टीवीएस मोटर की। यह कंपनी स्कूटी, मोटरसाइकिल और थ्री-व्हीलर्स बनाती है। यह इलेक्ट्रिक दो-पहिया और थ्री-व्हीलर्स भी बनाती है।विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने TVS Motor के शेयरों को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। उसने पेमन कारगर की डायरेक्टर एवं सीईओ पद पर नियुक्ति के बाद शेयर पर अपनी बाय रेटिंग बनाए रखी है। कारगर की नियुक्ति 27 जनवरी, 2027 से प्रभावी होगी। वह केएन राधाकृष्णन की जगह लेंगे, जो जनवरी के आखिर तक अपने पद पर बने रहेंगे। उसके बाद वह जुलाई 2027 में कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) तक कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर रहेंगे।केएन राधाकृष्णन ने 2004 में टीवीएस मोटर में नौकरी शुरू की थी। वह 2008 में कंपनी के प्रेसिडेंट बन गए। वह 2018 में डायरेक्टर और सीईओ बने। उनके कार्यकाल में टीवीएस मोटर का रेवेन्यू सीएजीआर 16 फीसदी और टैक्स बाद प्रॉफिट का सीएजीआर 30 फीसदी रहा। FY08 में कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 8.3 अरब रुपये था। यह 28 अगस्त को बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपये हो गया।कारगर ने टीवीएस मोटर में बतौर प्रेसिडेंट (इंटरनेशनल बिजनेस) अप्रैल 2025 में नौकरी शुरू की थी। उन्हें दुनिया के कई देशों में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। इनमें यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट शामिल हैं। टीवीएस मोटर में आने से पहले वह Infiniti के ग्लोबल चेयरमैन एवं प्रेसिडेंट थे। यह निसान का लग्जरी ब्रांड है।ब्रोकरेज फर्म ने बताया है कि नॉर्टन की जल्द लॉन्चिंग से प्रीमियम सेगमेंट में एग्जिक्यूशन पर नजरें होंगी। उसने कहा है कि नए सीईओ के तहत कंपनी के प्रीमियम और ग्लोबल सेगमेंट पर ज्यादा फोकस होगा। इसकी वजह यह हहै कि कारगर को लग्जरी और ग्लोबल ब्रांड्स का व्यापक अनुभव है।TVS Motor का शेयर 31 अगस्त को 0.41 फीसदी चढ़कर 4,322 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.39 फीसदी यानी 95 अंक गिरकर 24,080 पर रहा। सेंसेक्स 0.40 फीसदी यानी 307 अंक गिरकर 76,957 पर क्लोज हुआ। हांलांकि, बैंक निफ्टी हरे निशान में बंद हुआ।
कॉर्पोरेट जगत से इस समय चौंकाने वाली खबर आ रही है। एक तरफ करीब 22 हजार करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले महज 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना, दूसरी तरफ विपक्ष के तीखे हमले और इसे ‘‘99.97 प्रतिशत हेयरकट’’ बताकर उठाए जा रहे सवाल। लेकिन इसी बीच Essel Group के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर ऐसा पक्ष रखा है, जिसने बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुभाष चंद्रा ने वास्तव में हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लिया था? या फिर मामला व्यक्तिगत गारंटी का है, जिसे राजनीतिक बहस में सीधे ‘लोन माफी’ के रूप में पेश किया जा रहा है? हम आपको बता दें कि डॉ. सुभाष चंद्रा ने आज Instagram पर लाइव आकर अपने व्यक्तिगत दिवाला मामले से जुड़े आंकड़े और अपना पक्ष सार्वजनिक किया। उनका साफ कहना था कि उन्होंने अपने नाम पर एक भी रुपये का कर्ज नहीं लिया। उनके मुताबिक, वे कई कंपनियों द्वारा लिए गए ऋणों में केवल व्यक्तिगत गारंटर थे। उन्होंने बताया कि वह करीब 18 से 20 कंपनियों के लिए गारंटर बने थे और ये सभी कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से Essel Group से जुड़ी थीं। इसे भी पढ़ें: पिनरायी विजयन ने NCLT आदेश पर उठाए सवाल, बड़े कॉर्पोरेट और BJP के बीच लगाया मिलीभगत का आरोप यहीं से इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल पैदा होता है कि क्या उधारकर्ता और गारंटर को एक ही तराजू पर तौला जा सकता है? डॉ. चंद्रा के मुताबिक, उधारकर्ता वह होता है जो पैसा लेता है, जबकि गारंटर वह व्यक्ति होता है जो ऋणदाता को भुगतान की गारंटी देता है। उनका दावा है कि कंपनियों ने विस्तार, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों के लिए कर्ज लिया था, न कि उनके निजी इस्तेमाल के लिए। हालांकि, डॉ. चंद्रा ने गारंटी देने के अपने फैसले को सही ठहराने की बजाय उसे अपनी “सबसे बड़ी गलती” तक बताया। उनका कहना था कि शायद यही निर्णय उन्हें आज इस स्थिति तक ले आया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों और कंपनियों के लिए उन्होंने गारंटी दी, वे उनके परिचित थे। कुछ परिवार से जुड़े थे तो कुछ करीबी लोग थे। लेकिन विवाद सिर्फ गारंटी और उधारकर्ता के अंतर तक सीमित नहीं है। NCLT ने 25 अगस्त को Insolvency and Bankruptcy Code के तहत डॉ. चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी, जिसके अनुसार 6.25 करोड़ रुपये लेनदारों को और 25 लाख रुपये दिवाला प्रक्रिया की लागत के लिए, यानी कुल 6.5 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। दूसरी ओर, स्वीकृत दावों की राशि 22,006.57 करोड़ रुपये बताई गई है। यही आंकड़ा विपक्ष के हमलों का आधार बन गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे लेकर तीखा हमला बोला और NCLT को लेकर कटाक्ष किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इसे साधारण ‘हेयरकट’ नहीं बल्कि ‘‘मुंडन’’ तक करार दिया। विपक्ष का सवाल है कि जब आम किसान छोटी रकम नहीं चुका पाता तो उसकी संपत्ति पर कार्रवाई होती है, तब इतने बड़े वित्तीय दावों के मामले में इतनी कम राशि वाली योजना कैसे स्वीकार की जा सकती है? लेकिन डॉ. चंद्रा का जवाब अलग तस्वीर पेश करता है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में उनके खिलाफ वास्तविक दावा 22 हजार करोड़ नहीं, बल्कि 3,992 करोड़ रुपये का है और इस राशि के लिए भी वह उधारकर्ता नहीं बल्कि व्यक्तिगत गारंटर हैं। उनके अनुसार, करीब 620 करोड़ रुपये के दावों का पहले ही निस्तारण हो चुका है, जबकि उधार लेने वाली इकाइयों ने 1,063 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान करने की पेशकश की है। उनका दावा यह भी है कि जिन कंपनियों के लिए उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे अब तक 43 हजार करोड़ रुपये चुका चुकी हैं और यदि कोई राशि शेष है तो उसके निपटान का आश्वासन दिया गया है। तो फिर असली सवाल क्या है? क्या 22,006 करोड़ रुपये का आंकड़ा व्यक्तिगत देनदारी का है या उसमें उन दावों और गारंटियों का भी व्यापक मूल्यांकन शामिल है, जिन्हें लेकर कानूनी विवाद जारी है? क्या 3,992 करोड़ और 22,006 करोड़ के बीच का अंतर ही इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ है? और क्या सोशल मीडिया तथा राजनीतिक बयानबाजी में ‘लोन लेने’ और ‘गारंटी देने’ के कानूनी अंतर को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है? उधर, मामला अब और दिलचस्प हो गया है क्योंकि LIC Housing Finance, HDFC Bank और Union Bank of India समेत कई लेनदारों ने NCLT की मंजूरी को चुनौती दी है। NCLAT ने इस चुनौती पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। HDFC Bank समेत कई बैंकों ने योजना का विरोध किया है। ऐसे में अंतिम कानूनी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, डॉ. चंद्रा ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैंकों ने कोई लोन माफ नहीं किया है और जो भी वैध बकाया है, उसका निपटान किया जाएगा। उन्होंने अपनी निजी संपत्ति को लेकर भी कहा कि चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में उन्होंने कभी करीब 39 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी, जो अब लगभग 31 करोड़ रुपये है। सबसे अहम बात यह है कि व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया के बावजूद डॉ. चंद्रा ने नया स्टार्टअप शुरू करने की योजना भी जाहिर की है। उनका कहना है कि वह कानून के दायरे में रहकर कुछ दोस्तों और साझेदारों के साथ नया उद्यम शुरू करेंगे। बहरहाल, फिलहाल सुभाष चंद्रा का मामला केवल एक कारोबारी की दिवाला प्रक्रिया नहीं रह गया है। यह अब कानून, बैंकिंग व्यवस्था, व्यक्तिगत गारंटी, कॉरपोरेट कर्ज और राजनीतिक आरोपों के बीच एक बड़ी बहस बन चुका है। सवाल बहुत हैं और जवाब अब NCLAT की सुनवाई तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया से और स्पष्ट होंगे। लेकिन इतना तय है कि इस मामले को केवल “22 हजार करोड़ का कर्ज और 6.5 करोड़ की वापसी” कहकर समझना शायद पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। असली बहस इस बात पर है कि कर्ज किसने लिया, गारंटी किसने दी, वास्तविक व्यक्तिगत देनदारी कितनी है और कानून के तहत गारंटर की जिम्मेदारी आखिर कितनी दूर तक जाती है?
SBI में 211 दिनों की FD में कितना मिलेगा ब्याज, अधिकतम कितने रुपये कर सकते हैं निवेश
भारतीय स्टेट बैंक अपने ग्राहकों को एफडी खातों पर न्यूनतम 3.05 प्रतिशत और अधिकतम 7.15 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है।
Monthly SIP For ₹1 Crore Retirement Corpus: अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के सुकून से जीने के लिए एक बड़ा फंड होना बेहद जरूरी है। आज के दौर में महंगाई और जीवनशैली के खर्चों को देखते हुए कम से कम ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट गोल एक बुनियादी जरूरत बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि इस ₹1 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने कितना निवेश करना होगा?म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए रेगुलर निवेश करके आप आसानी से ₹1 करोड़ का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड इक्विटी स्कीम्स ने लंबी अवधि में औसतन 12% का सीएजीआर रिटर्न दिया है। आइए समझते हैं कि 15, 20 और 25 साल की समय सीमा के हिसाब से आपको हर महीने कितने रुपये की SIP शुरू करनी होगी।1. 15 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशनअगर आपकी उम्र 40-45 साल के करीब है और आपके पास रिटायरमेंट के लिए केवल 15 साल का समय बचा है, तो आपको कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए थोड़ी बड़ी रकम निवेश करनी होगी: लक्ष्य: ₹1 करोड़ समय अवधि: 15 साल (180 महीने) अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12% जरूरी मंथली SIP: ₹20,017 (करीब ₹20,000 प्रति महीने) गणित का पूरा हिसाब:कुल निवेश: ₹36,03,060अनुमानित वेल्थ गेन: ₹63,96,940कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,0002. 20 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशनअगर आप 35-40 साल की उम्र में अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और आपके पास 20 साल का समय है, तो आपका मंथली SIP अमाउंट काफी घटकर आधा रह जाता है: जरूरी मंथली SIP: ₹10,009 (करीब ₹10,000 प्रति महीने) कुल निवेश: ₹24,02,160 अनुमानित वेल्थ गेन: ₹75,97,840 कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000 3. 25 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशनअगर आपकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है और आप अपने करियर की शुरुआत में ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग (Chakravridhi) का जादू सबसे बेहतरीन काम करता है: जरूरी मंथली SIP: ₹5,270 (करीब ₹5,300 प्रति महीने) कुल निवेश: ₹15,81,000 अनुमानित वेल्थ गेन: ₹84,19,000 कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000 ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित स्मार्ट टिप: Step-Up SIP से आसान होगी राहअगर आप शुरुआत में ही ₹10,000 या ₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं कर सकते, तो आप Step-Up SIP का सहारा ले सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी या आमदनी बढ़ने के साथ अपनी SIP रकम में 10% का इजाफा कर सकते हैं। ऐसा करने पर आप बहुत छोटी मंथली रकम (जैसे- ₹2,500 - ₹3,000) से शुरुआत करके भी समय से पहले 1 करोड़ रुपये का गोल हासिल कर सकते हैं।एक्सपर्ट्स की माने तो रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे महत्वपूर्ण कारक आपकी उम्र और समय है। जितना जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, जेब पर उतना ही कम बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। अगर आप भी 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड्स में SIP की शुरुआत करें।Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
एकीकृत सोना और चांदी मंच ऑगमोंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड का शेयर सोमवार को 788 रुपये के निर्गम मूल्य के मुकाबले 15 प्रतिशत से अधिक बढ़त के साथ बंद हुआ। बीएसई पर कंपनी शेयर 956 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो निर्गम मूल्य से 21.31 प्रतिशत अधिक है। कारोबार के दौरान यह 29.31 प्रतिशत बढ़कर 1,019 रुपये तक पहुंच गया। इसे भी पढ़ें: वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल से सेंसेक्स 307 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरा अंत में यह 15.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 907.75 रुपये पर बंद हुआ। एनएसई पर कंपनी का शेयर 961 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो निर्गम मूल्य से 21.95 प्रतिशत अधिक है। अंत में यह 15.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 908.15 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का बाजार मूल्यांकन 8,294.43 करोड़ रुपये रहा। ऑगमोंट एंटरप्राइजेज के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को मंगलवार को बोली के अंतिम दिन 105.78 गुना अभिदान मिला था। कंपनी के 825 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मूल्य दायरा 750 से 788 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। इसे भी पढ़ें: शुरुआती कारोबार में Sensex 226 अंक और Nifty 120 अंक गिरा, वैश्विक बाजार में कमजोरी का दिखा असर आईपीओ में 620 करोड़ रुपये मूल्य के नए शेयर जारी किए गए थे, जबकि 205 करोड़ रुपये की बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल थी।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल में उछाल से Sensex 307 अंक टूटा, Nifty 24080 के स्तर पर आया
घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को गिरावट आई। आईटी और दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में बिकवाली और पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ने से मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 307 अंक के नुकसान में रहा जबकि एनएसई निफ्टी 95 अंक टूटा। विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल के दाम में तेजी, वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और विदेशी पूंजी की निकासी से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 307.24 अंक यानी 0.40 प्रतिशत टूटकर 76,957.27 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 513.19 अंक तक नीचे आ गया था। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 नुकसान में रहे जबकि 10 में तेजी रही। इसे भी पढ़ें: शुरुआती कारोबार में Sensex 226 अंक और Nifty 120 अंक गिरा, वैश्विक बाजार में कमजोरी का दिखा असर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 95.25 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,080.40 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स की कंपनियों में से अदाणी पोर्ट्स में सर्वाधिक 4.11 प्रतिशत की गिरावट आई। सूचकांक में मजबूत हिस्सेदारी रखने वाला एचडीएफसी बैंक 1.53 प्रतिशत नुकसान में रहा। एचडीएफसी बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक शशिधर जगदीशन ने घोषणा की है कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद पुनर्नियुक्ति का विकल्प नहीं चुनेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है। इसके अलावा, आईटीसी, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर प्रमुख रूप से गिरावट में रहे। दूसरी ओर, लाभ में रहने वाले शेयरों में सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3.63 प्रतिशत बढ़कर 91.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इसे भी पढ़ें: Sensex की 7 दिग्गज कंपनियों का Market Cap 1.13 लाख करोड़ घटा, Airtel और Reliance को सर्वाधिक नुकसान कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि से ऊर्जा की अगुवाई में मुद्रास्फीति बढ़ने और ऊंची ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे कंपनियों की आय प्रभावित हो सकती है।’’ उन्होंने कहा कि जैक्सन होल संबोधन के बाद फेडरल रिजर्व के चेयरमैन की हाल की टिप्पणियों से सितंबर में संभावित ब्याज दर वृद्धि की संभावना बढ़ी है। इससे वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल ऊंचा बना हुआ है और उभरते बाजारों में निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा, ‘‘महीने के आखिरी कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी माह के निचले स्तर पर आ गया। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल कई साल के उच्चस्तर पर पहुंच गया। इसे भी पढ़ें: Sensex में 331 अंक की तेजी लौटी, Nifty 85 अंक बढ़कर 24,175 पर पहुंचा इससे यह चिंता बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दर को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखना पड़ सकता है।’’ छोटी कंपनियों से जुड़ा बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.40 प्रतिशत और मझोली कंपनियों मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.12 प्रतिशत नुकसान में रहे। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का शंघाई एसएसई कम्पोजिट बढ़त में रहे, जबकि जापान का निक्की और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ बंद हुआ। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में ज्यादातर में गिरावट का रुख था। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को घरेलू बाजार में 5,039.80 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। सेंसेक्स शुक्रवार को 330.92 अंक बढ़कर 77,264.51 अंक और निफ्टी 84.80 अंक की बढ़त के साथ 24,175.65 अंक पर बंद हुआ था।
Zomato ने 'एनालॉग डिश' पर कसा शिकंजा, नियमों का पालन न करने वाले रेस्टोरेंट्स होंगे डीलिस्ट
Zomato: फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने सोमवार को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट्स के लिए एनालॉग चीज, पनीर या दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने का ऐलान किया है। कंपनी ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट बेचने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी।Zomato ने साफ किया है कि अगर कोई रेस्टोरेंट इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो कंपनी उसे अपने प्लेटफॉर्म से हटा सकती है (डीलिस्ट कर सकती है)।'एनालॉग' डिश में पारंपरिक सामग्री की जगह सस्ती या वैकल्पिक चीजों (जैसे असली दूध या चीज की जगह वनस्पति तेल) का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इनका रूप-रंग और स्वाद वैसा ही रहता है।महाराष्ट्र की कार्रवाई का असरबता दें कि यह कदम महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की राज्य-व्यापी कार्रवाई और दिल्ली के फाइव-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की जांच के बाद खाद्य सुरक्षा पर फिर से ध्यान दिए जाने के बीच उठाया गया है।प्लेटफॉर्म से डीलिस्ट होंगे रेस्टोरेंट पार्टनरZomato ने कहा कि जिन डिश में 'एनालॉग डेयरी' होने की बात रेस्टोरेंट पार्टनर ने बताई है, उन्हें तुरंत प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।Zomato ने आगे कहा कि जो रेस्टोरेंट पार्टनर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा।सोमवार को प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड व्यापारियों को भेजे गए एक मैसेज में Zomato ने कहा, हमारी प्राथमिकता यह पक्का करना है कि ग्राहकों को ऐसा खाना मिले जो सही जानकारी वाला हो, सुरक्षित हो और उम्मीद के मुताबिक क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता हो।एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर जीरो टॉलरेंसZomato ने कहा, इसीलिए, हम अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर और दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाले खाने के सामान की लिस्टिंग और सप्लाई को लेकर 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' लागू कर रहे हैं।फूड डिलीवरी एग्रीगेटर ने कहा कि यह कदम फूड सेफ्टी और रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक, अपने ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए उठाया जा रहा है।Zomato ने कहा, जिन रेस्टोरेंट ने पहले ही अपने मेन्यू में एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर या दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल की जानकारी दी है, उनके ऐसे आइटम तुरंत प्लेटफॉर्म से हटा दिए जाएंगे।इसने रेस्टोरेंट पार्टनर्स से तुरंत कुछ कदम उठाने को कहा है, जैसे: असली डेयरी प्रोडक्ट्स अपनाना; जिन मामलों में तुरंत बदलाव मुमकिन न हो, वहां अपने मेन्यू से एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाली चीजें हटाना; और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच करने और Zomato पर लिस्टेड प्रोडक्ट्स की सही जानकारी पक्का करने के लिए रेस्टोरेंट सप्लायर्स द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी का रिव्यू करना।Zomato ने रेस्टोरेंट को दी सख्तचेतावनीZomato ने कहा, अगर कोई रेस्टोरेंट नियमों का पालन नहीं करता पाया जाता है, तो Zomato के पास ऐसे रेस्टोरेंट को प्लेटफॉर्म से हटाने का अधिकार है। इसके अलावा, हम अपनी पॉलिसी और लागू कानूनों के तहत कोई भी दूसरी कार्रवाई भी कर सकते हैं।कंपनी ने यह भी कहा कि अगर नियमों का पालन न करने वाले प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं, तो इससे होने वाले किसी भी नुकसान, लागत, डैमेज या खर्च की भरपाई करने का अधिकार भी Zomato के पास है।CEO ने क्या कहा?Zomato के CEO आदित्य मंगला ने कहा: omato में हमारा मुख्य मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। इसका मतलब है ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखना और हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर्स द्वारा लिस्ट और सर्व किए जाने वाले खाने के लिए साफ स्टैंडर्ड बनाए रखना। यह पॉलिसी उसी कमिटमेंट को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी ऐसी ही है।यह भी पढ़ें:Ganga River Flood Varanasi: वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप! 84 घाट डूबे, नमस्ते’ प्रतिमा भी पानी में समाई, NDRF अलर्ट पर
GATE 2027 Registration: ग्रैजुएट एप्टिट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) 2027 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों की परेशानी अब तक खत्म नहीं हुई है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (IIT), मद्रास अब तक गेट 2027 के लिए पंजीकरण शुरू नहीं कर सका है। दो बार पंजीरण शुरू होने की तारीख टलने के बाद अब उम्मीदवार नई तारीख घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं। समझा जा रहा है कि आईआईटी मद्रास जल्द ही गेट 2027 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकता है। रजिस्ट्रेशन की बदली हुई तारीखें आने वाले दिनों में ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी होने की उम्मीद है।पहले जारी किए गए शेड्यूल के अनुसार, गेट 2027 आवेदन प्रक्रिया 14 अगस्त, 2026 को शुरू होने वाली थी। हालांकि, इसे बदलकर 27 अगस्त, 2026 कर दिया गया। लेकिन 27 अगस्त से भी पंजीकरण शुरू नहीं हो चका है। उम्मीदवार अब तक दो बार टल चुकी गेट 2027 पंजीकरण प्रक्रिया के जल्द शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस की बदली हुई तारीखें जल्द ही ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध होंगी।गेट 2027 रजिस्ट्रेशन कब शुरू होगा?ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध शेड्यूल के अनुसार, छात्रों के लिए गेट 2027 आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 27 सितंबर, 2026 है। यह देखते हुए कि कंडक्टिंग बॉडी छात्रों को प्रवेश परीक्षा के लिए पंजीकरण करने के लिए कम से कम एक महीने का समय देती हैं, इस बात की बहुत संभावना है कि गेट 2027 रजिस्ट्रेशन प्रोसेस सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में कभी भी शुरू हो जाएगा। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि आईआईटी मद्रास ने गेट 2027 रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोलने में देरी का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।गेट 2027 जरूरी तारीखेंगेट 2027 पंजीकरण प्रक्रिया रद्द होने के बाद, कैंडिडेट अब रजिस्ट्रेशन और एप्लीकेशन प्रोसेस की नई तारीखों का इंतजार कर रहे हैं। नीचे दी गई जरूरी तारीखें देखेंएक्टिविटी तारीखगेट ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेसिंग सिस्टम (GOAPS) शुरू होने की तारीख : 14 अगस्त 2026, 27 अगस्त 2026, TBAरेगुलर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (बिना लेट फीस के) खत्म होने की तारीख : 21 सितंबर 2026, 27 सितंबर, 2026एक्सटेंडेड ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (लेट फीस के साथ) खत्म होने की तारीख : 30 सितंबर 2026, 5 अक्टूबर, 2026गेट 2027 एप्लीकेशन में सुधार शुरू होने की तारीख : 14 अक्टूबर, 2026गेट 2027 एप्लीकेशन में सुधार खत्म होने की तारीख : 21 अक्टूबर, 2026सिटी अलॉटमेंट नोटिफिकेशन : 4 जनवरी, 2027एडमिट कार्ड डाउनलोड : TBAगेट 2027 एग्जाम : फरवरी 6, 2027, फरवरी 7, 2027, फरवरी 13, 2027, फरवरी 14, 2027, फरवरी 20, 2027, फरवरी 21, 2027रिजल्ट की घोषणा : मार्च 19, 2027गेट 2027 रजिस्ट्रेशन के लिए DigiLocker क्रेडेंशियल जरूरीगेट 2027 रजिस्ट्रेशन विंडो जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। इस साल गेट के लिए रजिस्टर करने के लिए, छात्रों के पास वैलिड DigiLocker क्रेडेंशियल होना जरूरी है। कैंडिडेट्स को गेट 2027 के लिए अप्लाई करने से पहले अपने वेरिफाइड DigiLocker अकाउंट बनाने या अपडेट करने होंगे। DigiLocker के जरिए गेट 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन सभी भारतीय नागरिकों के लिए जरूरी है।गेट 2027 के लिए रजिस्टर करने के स्टेप्सजीओएपीएस पोर्टल पर गेट 2027 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया खुलने के बाद, योग्य उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने और आवेदन शुल्क जमा करने से पहले रजिस्ट्रेशन लिंक में सभी जरूरी क्रेडेंशियल डालने होंगे। गेट 2027 के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। गेट 2027 GOAPS पोर्टल पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। सभी जरूरी डिटेल्स डालें। एप्लीकेशन फॉर्म भरने के लिए लॉगिन करें। गेट 2027 एप्लीकेशन फीस जमा करें। सेव करें और सबमिट पर क्लिक करें। RPSC APO Admit Card 2026: आरपीएससी ने जारी किया 02 सितंबर को होने वाली एपीओ 2026 भर्ती का एडमिट कार्ड, आधिकारिक वेबसाइट से करें डाउनलोड
Q1 GDP Data: भारतीय अर्थव्यवस्था की शानदार छलांग, 7.8% Growth Rate ने विशेषज्ञों को चौंकाया
अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी। इससे ईरान युद्ध के कारण विकास दर में भारी गिरावट की आशंका कम हुई और एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की मज़बूती भी साबित हुई। सोमवार को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला कि अप्रैल में शुरू हुए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में पिछले साल के मुकाबले 7.8% की बढ़ोतरी हुई। यह ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों के सर्वे में लगाए गए 7.3% के अनुमान से ज़्यादा था, लेकिन पिछली तिमाही में हुई 7.8% की बढ़ोतरी के बराबर है। इसे भी पढ़ें: Shree Cement का Q1 Results: पहली तिमाही में शुद्ध लाभ 17.48% घटकर 531 करोड़ रुपये रहा भारतीय रिज़र्व बैंक ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए 7% की ग्रोथ का अनुमान लगाया था और उसे उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 6.7% बढ़ेगी। बेहतर प्रदर्शन से ग्लोबल निवेशकों के सामने सरकार की हालिया बात को और बल मिलता है कि भारत बाहरी झटकों का सामना कर सकता है। यह दक्षिण एशियाई देश होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से खास तौर पर प्रभावित हो सकता है, जो तेल की सप्लाई के लिए एक अहम रास्ता है; यह देश अपना लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसे भी पढ़ें: SpaceX को पहली तिमाही में 54.1 करोड़ डॉलर का घाटा, बढ़ा राजस्व भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, लेकिन इसकी रफ़्तार उस 9.25% सालाना ग्रोथ से कम है, जिसे सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य को पाने के लिए ज़रूरी मानती है। तेज़ ग्रोथ से ब्याज दरों को लेकर हालात मुश्किल हो सकते हैं। RBI ने अगस्त में अपनी बेंचमार्क दर को 5.25% पर ही बनाए रखा, हालांकि पॉलिसी बनाने वालों ने संकेत दिया है कि अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो इस साल के आखिर में दरों में बढ़ोतरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
India Weather Update: देश भर के अलग-अलग इलाकों में इस वक्त जोरदार बारिश और इसकी वजह से खासकर पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 सितंबर के लिए मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान जारी करते हुए कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता की वजह से उत्तर, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में एक सितंबर को मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार 1 सितंबर को 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बारिश और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है।छत्तीसगढ़ में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्टमौसम विभाग के अलर्ट के मुताबिक 1 सितंबर को छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। IMD ने छत्तीसगढ़ में कई जगहों पर गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की है।यूपी, बिहार, झारखंड और MP में बहुत भारी बारिश की चेतावनीउत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए भी 1 सितंबर का दिन काफी संभलकर रहने वाला है। IMD के बुलेटिन के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश और ओडिशा में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार हैं।दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी राज्यों का मौसमदिल्ली समेत आसपास के मैदानी और पहाड़ी राज्यों में भी मानसूनी बारिश का असर बना रहेगा। IMD के मुताबिक हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 1 सितंबर को गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है जबकि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत में मौसम की स्थितिपूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी एक सितंबर को बारिश की रफ्तार तेज रहेगी। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है जबकि असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश होने के आसार हैं। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तेलंगाना और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बिजली कड़कने और तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। समुद्री क्षेत्र की बात करें तो 1 सितंबर को अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य और उत्तर-पूर्वी अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। मछुआरों और तटीय क्षेत्रों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।ये भी पढ़ें- 5000 अमरीकी सैनिकों की एंट्री से पहले थाईलैंड के पटाया में हड़कंप! जानिए प्रॉस्टिट्यूशन पर पुलिस ने क्यों शुरू किया बड़ा क्रैकडाउन
Hy-Tech Engineers IPO GMP & Listing: प्राइमरी मार्केट में धमाल मचाने के बाद हाई-टेक इंजीनियर्स का आईपीओ कल यानी 1 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने जा रहा है। 244 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुए इस आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में जबरदस्त क्रेज है और इसका जीएमपी लगभग 80 फीसदी के करीब पहुंच चुका है।जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर अलॉट हुए हैं, उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कल लिस्टिंग वाले दिन क्या करें, मुनाफा वसूल कर निकल जाएं या लॉन्ग टर्म के लिए होल्ड रखें? आइए जानते हैं लिस्टिंग से पहले GMP, सब्सक्रिप्शन डेटा, ब्रोकरेज की राय और कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़ी पूरी डिटेल्स।244 गुना से ज्यादा हुआ था सब्सक्राइब24 अगस्त से 27 अगस्त के बीच खुले इस ₹135.73 करोड़ के आईपीओ में निवेशकों ने रिकॉर्डतोड़ बोलियां लगाई थीं। कुल 1.84 करोड़ उपलब्ध शेयरों के मुकाबले 443.49 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। गैर-संस्थागत निवेशक(NII) कैटेगरी में सबसे ज्यादा 402.29 गुना आवेदन आए। QIB का हिस्सा 255.77 गुना भरा। वहीं खुदरा निवेशकों का कोटा 170.58 गुना सब्सक्राइब हुआ।कितनी मजबूत है बैलेंस शीट?हाइड्रॉलिक्स इंडस्ट्री में 40 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाली हाई-टेक इंजीनियर्स मुख्य रूप से कंस्ट्रक्शन मशीनरी, ऑटोमोबाइल, कृषि उपकरण और इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनों के लिए हाइड्रॉलिक फिटिंग्स बनाती है। 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹189.40 करोड़ रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹22.59 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹19.62 करोड़ था।पब्लिक इश्यू खुलने से पहले कंपनी ने व्हाइटओक कैपिटल जैसे दिग्गजों सहित एंकर निवेशकों से ₹40.72 करोड़ जुटाए थे।80% लिस्टिंग गेन का इशाराग्रे मार्केट पर नजर रखने वाली वेबसाइट InvestorGain के अनुसार, 31 अगस्त को Hy-Tech Engineers का GMP ₹42 प्रति शेयर चल रहा है। इसका इश्यू प्राइस ₹53 था। इस हिसाब से इसका संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹53 + ₹42 = ₹95 प्रति शेयर रह सकता है। निवेशकों को लिस्टिंग के दिन करीब 80% का बंपर मुनाफे की उम्मीद है।Buy, Sell या Hold? ब्रोकरेज हाउसेज की क्या है राय?कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज: ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी ने पिछले 2 सालों में 17.28% की रेवेन्यू CAGR दर्ज की है और EBIDTA मार्जिन 22% के आसपास बनाए रखा है। कंपनी का डोमेस्टिक मार्केट शेयर मजबूत है। ब्रोकरेज ने कहा, 'कंपनी लंबे समय में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकती है। कल अच्छे लिस्टिंग गेन की उम्मीद है। जिन्हें अलॉटमेंट मिला है, वे इसे मीडियम से लॉन्ग टर्म के लिए HOLD रख सकते हैं।'आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स: आनंद राठी ने कंपनी के 11,000 से ज्यादा SKUs, 170 सीधे क्लाइंट्स और रेलवे-डिफेंस में मौजूदगी की तारीफ की। अपर प्राइस बैंड पर FY26 P/E मल्टीपल 22.25x है जो वाजिब वैल्युएशन दिखाता है। इन्होंने भी इस इश्यू को 'Subscribe - Long Term' की रेटिंग दी थी।निवेशकों के लिए फाइनल स्ट्रैटेजीजिन्हें केवल शॉर्ट-टर्म मुनाफा चाहिए, वे कल बंपर ओपनिंग के बाद अपना प्रॉफिट बुक करके निकल सकते हैं या स्टॉप-लॉस लगाकर चल सकते हैं। वहीं लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स जिन्हें शेयर अलॉट हुए हैं और वे कंपनी के फंडामेंटल्स व हाइड्रॉलिक्स सेक्टर की ग्रोथ पर भरोसा रखते हैं, वे एक्सपर्ट्स की सलाह के मुताबिक इसे अपने पोर्टफोलियो में होल्ड कर सकते हैं।Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप! 84 घाट डूबे, नमस्ते’ प्रतिमा भी पानी में समाई, NDRF अलर्ट पर
Varanasi Flood: सोमवार को वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ता रहा, जिससे सभी 84 घाट डूब गए और कई निचले इलाकों में पानी भर गया। वहीं, नदी का जलस्तर करीब 69.40 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है।गंगा का पानी लगातार बढ़ने से घाटों के किनारे मौजूद कई प्रसिद्ध जगहें भी डूब गई है। नमो घाट पर लगी मशहूर ‘नमस्ते’ प्रतिमा भी लगभग पूरी तरह पानी में समा गई है। कई घाटों पर पानी भरने से वहां आवाजाही प्रभावित हुई है। वहीं, लगातार हो रही भारी बारिश के बीच रिवर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में भी पानी घुस गया है।गंगा का जलस्तर करीब 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर नावों के संचालन पर रोक लगा दी है।रविवार को भी गंगा का पानी लगातार बढ़ा था। इसके चलते वरुणा नदी में पानी का बहाव उल्टा हो गया, जिससे नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में पानी घुसने लगा। हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोग अब सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं।बाढ़ के खतरे के बीच प्रशासन ने तैयारियां तेज कींबाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। वाराणसी में कुल 61 बाढ़ राहत कैंपों की पहचान की गई है, जहां रहने, खाने, पीने के पानी, साफ-सफाई, रोशनी और मेडिकल मदद का इंतजाम किया गया है।बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में पानी के स्तर और हालात पर नज़र रखने के लिए 21 बाढ़ चौकियां भी बनाई गई हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए 198 नावें तैनात की गई हैं।आपातकालीन कार्यों के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), वॉटर पुलिस और प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।अगर बाढ़ की स्थिति और बिगड़ती है, तो प्रशासन ने पशुओं के लिए भी जरूरी इंतजाम किए हैं। इनमें चारा, पीने का पानी और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था शामिल है।यह भी पढ़ें:‘8 अरब लोगों के लिए लैपटॉप खरीदने लायक काला धन मौजूद’, ग्लोबल मनी लॉन्ड्रिंग पर बोले CJI सूर्यकांत
नौकरी, परिवार या रिटायरमेंट, जानें किस उम्र के लिए कौन सा शहर है बेस्ट
रहने के लिए सबसे अच्छा भारतीय शहर आपकी बदलती प्राथमिकताओं के साथ बदल सकता है, जैसे 20 की उम्र में करियर में तरक्की और खर्च करने की क्षमता से लेकर 50 की उम्र में सुरक्षा, हेल्थकेयर और किफायतीपन तक.
Mirzapur The Movie Advance Booking: 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' के लिए काउंटडाउन आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। टीज़र और ट्रेलर से उत्साह बढ़ाने के बाद, मेकर्स ने अब घोषणा की है कि इस बहुप्रतीक्षित फ़िल्म की एडवांस बुकिंग 31 अगस्त से शुरू हो चुकी है। एक्सेल एंटरटेनमेंट और अमेज़न MGM स्टूडियोज़ द्वारा समर्थित, 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' के साथ बेहद लोकप्रिय मिर्ज़ापुर फ़्रैंचाइज़ी पहली बार स्ट्रीमिंग स्पेस से बड़े पर्दे पर आएगी।थिएटर में रिलीज़ होने में बस सात दिन बचे हैं, ऐसे में एडवांस बुकिंग की घोषणा से फ़िल्म को लेकर और भी चर्चा बढ़ने की उम्मीद है। सालों से, मिर्ज़ापुर ने अपनी दमदार दुनिया, यादगार किरदारों और ज़बरदस्त कहानी के ज़रिए बड़ी संख्या में फ़ैन बनाए हैं। आने वाली फ़िल्म अब दर्शकों को पहली बार बड़े पर्दे पर उस दुनिया का अनुभव करने का मौका देगी।फिल्म को लेकर बढ़ती एक्साइटमेंट के बीच हाल ही में डायरेक्टर गुरमीत सिंह से पूछा गया कि इतने सालों से इन किरदारों को विकसित होते देखने और उनके सफर का हिस्सा बनने के बाद क्या फिल्म में किसी खास किरदार की कहानी ने उन्हें एक फिल्ममेकर के तौर पर ‘मिर्जापुर’ की दुनिया को अलग नजरिए से देखने पर मजबूर किया। इस पर उन्होंने बताया कि फिल्म ने उन्हें किरदारों के नए पहलुओं को एक्सप्लोर करने के साथ-साथ ‘मिर्जापुर’ की दुनिया की नई परतें खोजने का मौका दिया। View this post on Instagram A post shared by Excel Entertainment (@excelmovies) डायरेक्टर गुरमीत ने कहा, “फिल्म ने हमें एक खास मौका दिया कि हम अपने मुख्य किरदारों की नई परतें सामने लाएं और उनकी कुछ कहानियों को अलग तरीके से पेश करें। हमें उनके ऐसे पहलू देखने को मिलेंगे, जो शो में पहले कभी नहीं दिखे। इन नए पहलुओं से हम उन्हें और बेहतर समझ पाएंगे, उनके साथ जुड़ पाएंगे, उनसे सहानुभूति रख पाएंगे या शायद उन्हें पहले से ज्यादा नापसंद भी कर पाएंगे। हम बाबलू और गुड्डू को देखेंगे, जिनके मन में हमेशा इस हिंसा की दुनिया से बाहर निकलने का एक प्लान था। फिल्म में कालीन भैया और मुन्ना के अतीत से जुड़ी एक रहस्यमयी घटना भी सामने आएगी, जो उनके रिश्ते को परिभाषित करती है। साथ ही, हम बीना की कहानी की शुरुआत भी देखेंगे, जो झूठ और बलिदान से भरी एक ऐसी हलचल पैदा करेगी, जिससे बहुत कुछ बदल जाएगा।”फिल्म की बड़ी स्टारकास्ट में अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, मोहित मालिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, प्रमोद पाठक, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता शेखर गौर, श्वेता त्रिपाठी और सोनल एस चौहान भी शामिल हैं। ये सभी कलाकार ‘मिर्जापुर’ की दुनिया के एक ऐसे अनकहे अध्याय को पर्दे पर लेकर आ रहे हैं, जिसकी कहानी पहले कभी नहीं दिखाई गई।अमेजन एमजीएम स्टूडियोज और एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि इसकी कहानी पुनीत कृष्णा ने लिखी है। फिल्म को एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर ने प्रोड्यूस किया है। कासिम जगमगिया और विशाल रामचंदानी इसके को-प्रोड्यूसर हैं। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
भारत की GDP 7.8% बढ़ी, ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद Q1 FY27 में अनुमानों को छोड़ा पीछे
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8% की वृद्धि दर्ज की, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से कहीं अधिक है। घरेलू गतिविधियों में तेजी के कारण वैश्विक चुनौतियों और बाहरी दबावों के बावजूद यह विकास दर मजबूत बनी रही।
JSW MG मोटर इंडिया ने पार्थ जिंदल को तत्काल प्रभाव से अपना नया चेयरमैन नियुक्त किया है।
US Military in Thailand: अमेरिकी नौसेना का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) इस सप्ताह थाईलैंड पहुंचने वाला है। उसके आगमन से पटाया सिटी के पर्यटन और मनोरंजन कारोबार को कुछ समय के लिए बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। लेकिन इसके साथ ही शहर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। खास तौर पर सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से प्रॉस्टिट्यूशन के लिए ग्राहकों को आकर्षित करने और अन्य कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर पुलिस की नजर है।न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक तैनात रहने के बाद, अमेरिकी नौसेना का यह एयरक्राफ्ट कैरियर इसहफ्ते थाईलैंड के रिजॉर्ट शहर पटाया (Thailand's resort city of Pattaya) में रुकेगा। इससे आर्थिक फायदे की उम्मीदें जगी हैं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने सेक्स-टूरिज्म वाले इलाकों पर सख्ती भी की है।USS Abraham Lincoln के 2 सितंबर को पटाया के पास लाम चाबांग पोर्ट पहुंचने काशेड्यूल है। यह पोत 6 सितंबर तक थाईलैंड में रहेगा। इसके साथ अमेरिकी नौसेना के दो अन्य जहाज भी होंगे। करीब 5,000 अमेरिकी नौसैनिकों और मरीन के तट पर आने की उम्मीद है। ये जवान 200 दिनों से ज्यादा समय समुद्र में रहने के बाद शोर लीव पर शहर में जा सकेंगे।पटाया में क्यों बढ़ाई गई पुलिस की निगरानी?अमेरिकी सैनिकों के बड़ी संख्या में पटाया पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की तैयारियां बढ़ा दी हैं। पटाया बीच, सेकंड रोड और प्रमुख नाइटलाइफ इलाकों में अतिरिक्त गश्त और जांच की जा रही है। 29 अगस्त को पटाया सिटी पुलिस, टूरिस्ट पुलिस, इमिग्रेशन और सामाजिक विकास से जुड़ी एजेंसियों के 20 से ज्यादा अधिकारियों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में जांच अभियान चलाया।25 को हिरासत में लिया गया रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक स्थानों पर वेश्यावृत्ति के संदेह में 25 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें 18 थाई नागरिक, 5 लाओस के नागरिक और 2 युगांडा के नागरिक बताए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी नौसैनिकों के आने के दौरान भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। पुलिस बच्चों और युवाओं की सुरक्षा, भीख मांगने तथा सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े दूसरे मामलों पर भी नजर रखेगी।थाईलैंड में वेश्यावृत्ति गैरकानूनी, फिर भी पटाया में नहीं है कोई रोकथाईलैंड में वेश्यावृत्ति कानूनन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद पटाया शहर जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों और बैंकॉक के कुछ इलाकों में सेक्स इंडस्ट्री लंबे समय से काफी दिखाई देती रही है। पटाया पुलिस प्रमुख अनेक श्रीथोंगयू ने सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को ग्राहकों को आकर्षित करने से रोकने की मुश्किल को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। लेकिन इस गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगाना आसान नहीं है।अधिकारियों ने बताया कि इसके आने से पहले, पुलिस पटाया के मुख्य बीच-फ्रंट और नाइटलाइफ वाले इलाके में अतिरिक्त गश्त की तैयारी कर रही है।पटाया का स्थानीय कारोबार अमेरिकी नौसैनिकों के आने को कम पर्यटन वाले दौर में एक बड़े अवसर के तौर पर देख रहा है।पटाया के मेयर पोरामासे नगामपिचेस के मुताबिक, एक अमेरिकी सैन्यकर्मी शहर में अपनी यात्रा के दौरान प्रतिदिन करीब 1,000 से 3,000 Thai Baht (लगभग 30 से 91 डॉलर) खर्च कर सकता है। हालांकि. करीब 5,000 जवान एक साथ शहर में नहीं आएंगे। उनकी शोर लीव अलग-अलग समय पर होगी। फिर भी होटल, रेस्तरां, दुकानों और मनोरंजन क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को उम्मीद है कि अमेरिकी जहाजों का यह दौरा शहर में ग्राहकों और पर्यटकों की संख्या बढ़ाएगा।200 दिनों से ज्यादा लंबी तैनाती के बाद पहुंच रहा है विमानवाहक पोतUSS Abraham Lincoln की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब जहाज के चालक दल ने लंबे समय तक समुद्र में तैनाती पूरी की है। पोत नवंबर में सैन डिएगो से रवाना हुआ था। बाद में उसे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों के समर्थन के लिए भेजा गया। इसकी तैनाती 200 दिनों से अधिक लगातार चली है। अमेरिकी सांसदों ने इतनी लंबी तैनाती को असामान्य बताया है। अगस्त में सैन्य मामलों पर नजर रखने वाले मीडिया में जहाज पर कर्मियों के मनोबल में गिरावट और आत्महत्या के प्रयासों को लेकर भी रिपोर्टें सामने आई थीं।सुरक्षा और पर्यटन के बीच संतुलन की चुनौतीअब पटाया प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ अमेरिकी नौसैनिकों की मौजूदगी से पर्यटन और स्थानीय कारोबार को फायदा पहुंचाना। वहीं. दूसरी तरफ शहर में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना। अमेरिकी पोत और उसके साथ आने वाले जहाजों के मद्देनजर पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है। खास तौर पर सार्वजनिक स्थानों पर अवैध गतिविधियों, बच्चों की सुरक्षा और पर्यटकों से जुड़े अपराधों पर नजर रखने की तैयारी की गई है।ये भी पढ़ें- Delhi Gangrape: ग्रेटर नोएडा से कश्मीरी गेट तक 16 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप, स्लीपर बस के अंदर 47 KM तक हैवानियत, दिल्ली पुलिस ने क्या बताया?
अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर बढ़कर 7.8 प्रतिशत हुई
भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत थी। सोमवार को सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 81.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसे भी पढ़ें: Small Car Market में आएगी तेजी, GST Rate Cut से Economy और Auto Industry को मिली रफ्तार वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में यह 75.46 लाख करोड़ रुपये था। मंत्रालय ने कहा, ‘‘वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में वृद्धि की गति बनाए रखी है।’’ वहीं, मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में 88.27 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 80 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह मौजूदा कीमतों पर जीडीपी में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
अमेरिकी US Dollar के मुकाबले शुरुआती गिरावट से उबरकर 26 पैसे चढ़ा Rupee, 95.17 के स्तर पर बंद
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सोमवार को शुरुआती गिरावट से उबरते हुए 26 पैसे की बढ़त के साथ 95.17 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण स्थानीय मुद्रा पर दबाव के बीच यह तेजी संभावित रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप के कारण आई। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना बढ़ने के बाद अमेरिकी बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ा और डॉलर में व्यापक मजबूती आई। ऐसा हो सकता है कि आरबीआई ने रुपये को समर्थन देने के लिए निचले स्तर पर हस्तक्षेप किया हो। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.56 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 95.11 से 95.56 के दायरे में रहा। अंत में यह 95.17 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 26 पैसे की बढ़त है। इसे भी पढ़ें: Crude Oil में तेजी और वैश्विक तनाव से रुपया 13 पैसे टूटकर 95.56 प्रति डॉलर पर पहुंचा रुपया शुक्रवार को दो पैसे की मामूली बढ़त के साथ 95.43 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि डॉलर सूचकांक में शुक्रवार को आई तेजी और फेडरल रिजर्व के प्रमुख की सख्त रुख वाली टिप्पणियों के बाद शुरुआती गिरावट के बावजूद रुपये ने दो दिन में मजबूत वापसी की और पांच अगस्त के बाद के अपने सबसे मजबूत स्तर पर रहा। उन्होंने कहा कि इस सुधार में आरबीआई के समय पर किए गए संभावित हस्तक्षेप के साथ-साथ एमएससीआई पुनर्संतुलन और विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) योजनाओं से जुड़े डॉलर प्रवाह की अहम भूमिका रही। इसे भी पढ़ें: US Dollar के मुकाबले Rupee 2 पैसे सुधरकर 95.43 के स्तर पर बंद हुआ, शेयर बाजार में रही तेजी इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.52 पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 3.70 प्रतिशत बढ़कर 91.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि रुपये में बड़ी गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। इसके अलावा, एफसीएनआर (बी) योजना के तहत उम्मीद से बेहतर विदेशी मुद्रा प्रवाह से भी निवेशकों की धारणा मजबूत हुई। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 307.24 अंक की गिरावट के साथ 76,957.27 अंक पर और निफ्टी 95.25 अंक टूटकर 24,080.40 अंक पर बंद हुआ। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 5,039.80 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इसे भी पढ़ें: Rupee में कमजोरी: US Dollar के मुकाबले 10 पैसे टूटकर 95.55 पर पहुंचा भाव आरबीआई ने शुक्रवार को कहा कि 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 12.422 अरब डॉलर बढ़कर 729.32 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
GDP Growth: जून तिमाही में 7.8% रही भारत की जीडीपी ग्रोथ, सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादा
GDP Growth:इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अच्छा रहा है। जून तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह एनालिस्ट्स और इकोनॉमिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा है। खास बात यह है कि जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ तब 7.8 फीसदी रही, जब वैश्विक स्थितियां काफी चैलेंजिंग थीं।मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदीइस साल मार्च तिमाही में भारत में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी थी। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन (MoSPI) ने 31 अगस्त को जून तिमाही के जीडीपी के डेटा जारी किए। जीडीपी की ग्रोथ अनुमान से ज्यादा रही। मनीकंट्रोल के पोल में इकोनॉमिस्ट्स ने जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।जून तिमाही में जीवीए 8.2 फीसदी रहाजून तिमाही में ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) 8.2 फीसदी रहा। मार्च तिमाही में यह 8.7 फीसदी था। जीवीए का मतलब इकोनॉमी में उत्पादित गुड्स और सर्विसेज की कुल वैल्यू से है। इसमें नेट इनडायरेक्ट टैक्स शामिल नहीं होता है। जून तिमाही में अर्थव्यवस्था के शानदार प्रदर्शन में सर्विसेज और इनवेस्टमेंट का बड़ा हाथ है।पहली तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादाजून तिमाही में सर्विसेज का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। इसकी ग्रोथ 10 फीसदी रही। एक साल पहले की समान अवधि में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ 8 फीसदी थी। मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 9.2 फीसदी रही। कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ 7.7 फीसदी रही। ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग से संबंधित सर्विसेज सेगमेंट की ग्रोथ 8.5 फीसदी रही।पहली तीमाही में मध्यपूर्व में लड़ाई का असर इकोनॉमी परजून तिमाही का मतलब अप्रैल, मई और जून के महीनों से है। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को लड़ाई शुरू हुई थी। जून तिमाही में ज्यादातर समय ईरान को अमेरिकी हमले का सामना करना पड़ा। ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए।क्रूड ऑयल की कीमतें काफी समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहींइस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्रूड ऑयल सहित दूसरी कमोडिटीज की सप्लाई पर काफी ज्यादा असर पड़ा। क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। लेकिन, सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर जारी रखने से आर्थिक गतिविधियों को काफी सपोर्ट मिला।
Bank of Baroda ने 20 राज्यों में 2,482 पदों पर निकाली भर्ती, स्थानीय भाषा के जानकारों का होगा चयन
बैंक ऑफ बड़ौदा ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय भाषाओं में दक्ष 2,482 अधिकारियों की भर्ती करने की सोमवार को घोषणा की। बैंक कर्मचारियों की स्थानीय भाषाओं में ग्राहकों से संवाद करने की क्षमता को लेकर जताई जा रही चिंता के बीच कनिष्ठ प्रबंधन श्रेणी में ‘स्थानीय बैंक अधिकारियों’ की भर्ती की जा रहा है। बयान के अनुसार, इसमें यह सुनिश्चित करने का प्रावधान है कि उम्मीदवार अपनी सेवा के पहले 12 साल उसी राज्य में काम करें, जहां उनकी भर्ती हुई है। इसे भी पढ़ें: Banking Jobs 2024: इंडियन बैंक में 2500 पदों पर होगी भर्ती, 100 नई Branches खोलकर बैंक बढ़ाएगा अपनी मौजूदगी साथ ही वे पदानुक्रम में एक निश्चित स्तर तक पदोन्नति होने तक उसी राज्य में तैनात रहें। यह घोषणा मुंबई के आसपास स्थानीय में बातचीत करने में असमर्थ बैंक कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा की कुछ घटनाओं के बीच की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नवंबर, 2025 में बैंकों को इस मुद्दे के प्रति संवेदनशील रहने और जरूरत पड़ने पर अपनी मानव संसाधन (एचआर) नीतियों में बदलाव करने का निर्देश दिया था। बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने कहा कि 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा शामिल हैं। राज्य-आधारित तैनाती से बैंक को स्थानीय में दक्षता, सांस्कृतिक समझ और स्थानीय बाजारों की जानकारी रखने वाला कार्यबल तैयार करने में मदद मिलेगी जिससे ग्राहकों के साथ संबंध और मजबूत होंगे। बैंक के कार्यकारी निदेशक लाल सिंह ने कहा, ‘‘इस पहल से स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर करियर बनाने के अवसर मिलेंगे और वे अपने संबंधित राज्यों की आर्थिक वृद्धि में योगदान दे सकेंगे। इसे भी पढ़ें: Bihar Daroga Recruitment: BPSSC ने टाली PET और शारीरिक परीक्षा, 1799 पदों के लिए नई Date का इंतजार यह समावेशी विकास को बढ़ावा देने और टिकाऊ रोजगार के अवसर पैदा करने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के रूप में हमारी व्यापक भूमिका के अनुरूप है।’’ बैंक ने कहा कि उम्मीदवार किसी भी विषय में स्नातक होना चाहिए और किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में अधिकारी के रूप में कम से कम एक वर्ष काम करने का अनुभव होना चाहिए। उम्मीदवारों की आयु 21 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
Poco X8 5G और X8 Power 5G की भारत में जल्द होगी एंट्री, जानें लॉन्च डेट और फीचर्स
Poco भारत में अपने दो नए स्मार्टफोन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने पुष्टि की है कि Poco X8 5G और Poco X8 Power 5G को भारत में 4 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च इवेंट दोपहर 12 बजे शुरू होगा। पोको ने यह भी बताया है कि दोनों स्मार्टफोन की बिक्री Flipkart के जरिए की जाएगी। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इन दोनों फोन के लिए अलग-अलग पेज भी लाइव हो चुके हैं।Poco X8 सीरीज भारत में लॉन्च होने वाली है: क्या उम्मीद करेंलॉन्च से पहले, Poco ने टीजर वीडियो शेयर किए हैं जिनमें फोन और उनके कुछ खास फीचर्स की झलक दिखाई गई है। Poco X8 5G में 9,000mAh की बड़ी बैटरी होगी। Poco का दावा है कि यह फोन एक बार चार्ज करने पर 3.2 दिन तक की बैटरी लाइफ दे सकता है। इसके अलावा, इसमें 67W वायर्ड चार्जिंग और 22.5W रिवर्स चार्जिंग का भी सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जिससे यूजर्स दूसरे कम्पैटिबल डिवाइस को चार्ज कर सकेंगे।वहीं, ज्यादा पावरफुल Poco X8 Power 5G में 10,000mAh की बैटरी होगी। कंपनी का कहना है कि यह 3.5 दिन तक का प्लेबैक टाइम दे सकता है। इसमें 100W वायर्ड चार्जिंग और 27W वायर्ड रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिल सकता है।डिजाइन की बात करें तो Poco के टीजर में X8 5G को ऑरेंज और व्हाइट कलर में दिखाया गया है। फोन के पीछे ऊपर की तरफ वर्टिकल डुअल-कैमरा सेटअप नजर आ रहा है। Game, stream, and create for days without checkingyour percentage once.The POCO X8 & POCO X8 Power are here to change the game, and to POWERMAXXXX!#POCOX8 #POCOX8Power #Powermaxxing#POCOIndia pic.twitter.com/jvIF57XuGP— POCO India (@IndiaPOCO) August 30, 2026 वहीं, X8 Power 5G को येलो कलर में दिखाया गया है। इसके पीछे ब्लैक कलर का गोल किनारों वाला चौकोर कैमरा मॉड्यूल दिया गया है, जिसमें दो कैमरा सेंसर साफ दिखाई दे रहे हैं।दोनों स्मार्टफोन में 6.83 इंच का डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है। वहीं, Poco X8 Power 5G में 1.5K रेजॉल्यूशन वाला AMOLED पैनल दिया जा सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। इसमें Snapdragon 6 Gen 5 प्रोसेसर मिलने की संभावना है। फोन में LPDDR5X RAM और UFS 4.0 स्टोरेज भी दिया जा सकता है।कैमरे की बात करें तो Poco X8 Power 5G में OIS सपोर्ट के साथ 50MP का मेन कैमरा, 8MP का अल्ट्रावाइड कैमरा और 32MP का फ्रंट कैमरा मिल सकता है।वहीं, Poco X8 5G में Snapdragon 6s Gen 4 चिपसेट दिए जाने की उम्मीद है। इसमें 6.83 इंच का AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है, जो 3,500 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट कर सकता है। कैमरे के तौर पर फोन में 50MP का रियर कैमरा और 16MP का फ्रंट कैमरा मिल सकता है।यह भी पढ़ें:Apple Big Reveal: 9 सितंबर को आ रहा है अब तक का सबसे धांसू iPhone! लॉन्च से पहले लीक हुए फीचर्स उड़ा देंगे होश, जानें प्राइस
ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्स मोटर्स के शेयरहोल्डर्स को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड मिलने वाला है। रिकॉर्ड डेट 9 सितंबर है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे। इस डिविडेंड की घोषणा अप्रैल महीने में की गई थी।16 सितंबर को कंपनी की सालाना आम बैठक में फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद 30 दिनों के अंदर इसका पेमेंट किया जाएगा। फोर्स मोटर्स ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था। कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है।फोर्स मोटर्स का शेयर 31 अगस्त को BSE पर 17550 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 22800 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 26,485.95 रुपये और एडजस्टेड लो 14,911.45 रुपये है।Force Motors का शेयर 5 साल में 1100 प्रतिशत चढ़ाफोर्स मोटर्स का शेयर 2 साल में निवेशकों का पैसा डबल कर चुका है। 3 साल में कीमत 411 प्रतिशत मजबूत हुई है। 5 साल में शेयर 1100 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देख चुका है। वहीं 6 महीनों में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज कर चुका है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 61.63 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।Ather Energy Share Price: 'कोणार्क' के दम पर एथर ने भरा फर्राटा, शेयर 6% तक भागा; ब्रोकरेज बुलिशकंपनी की वित्तीय सेहतफोर्स मोटर्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 2,439.89 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 212 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 160.95 करोड़ रुपये रही। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 9,056.54 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 1,211.26 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 919.28 करोड़ रुपये दर्ज की गई।Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
नेपाल में मंडराया एक और बड़ा खतरा! ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों से बड़ा खुलासा, बिहार-यूपी तक कैसा असर?
Nepal Update: नेपाल में आई हालिया तबाही के बाद अब एक और बड़े खतरे की घंटी बज गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों से एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में आए फ्लैश फ्लड के पीछे सिर्फ बारिश या कोई हिमस्खलन नहीं था। इसके मुताबिक रसुवा जिले में भूस्खलन के मलबे ने नदियों का रास्ता रोक दिया है। इससे वहां दो विशाल आर्टिफिशियल झीलें बन गई हैं। इसरो की तस्वीरों से मिली ये जानकारी भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश राज्यों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि ये उफान मारती नदियां अंततः बहकर कोसी और गंडक नदियों में मिलती हैं।ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला राजइसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) द्वारा ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि लांगटांग लिरुंग माउंटन रेंज में एक भयंकर बर्फ-चट्टान हिमस्खलन हुआ। इसके चलते भारी मात्रा में मलबा नीचे आ गिरा और उसने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित कर दिया। रास्ता बंद होने से नेपाल के रसुवा जिले में पानी की दो बड़ी झीलें बन गईं। इनमें से एक झील लगभग 19 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है। दूसरी झील का दायरा करीब 11 हेक्टेयर है। इनमें से एक झील की लंबाई लगभग 944 मीटर यानी करीब 1 किलोमीटर लंबी है।बिहार और यूपी पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?ISRO द्वारा चिन्हित की गई लगभग 944 मीटर लंबी यह कृत्रिम झील सबसे बड़ी चिंता की वजह बनी हुई है। मलबे के वजह से बनी ऐसी झीलें अचानक टूट सकती हैं और बिना किसी बड़ी चेतावनी के निचले इलाकों की तरफ भारी मात्रा में पानी छोड़ सकती हैं। कोसी और गंडक नदियां बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपनी विनाशकारी बाढ़ के इतिहास के लिए कुख्यात हैं। ये दोनों इसी हिमालयी बेल्ट से निकलती हैं, इसलिए नेपाल में अपस्ट्रीम में किसी भी झील का टूटना सैकड़ों किलोमीटर दूर नदियों के किनारे बसे यूपी और बिहार के गांवों व कस्बों के लिए बाढ़ का खतरा पैदा कर सकता है। अगर इनमें से कोई भी झील टूटती है तो पानी का तेज बहाव सीधे कोसी और गंडक में पहुंचेगा और जलस्तर को अचानक बढ़ा देगा।ISRO ने कैसे लगाया इस खतरे का पता?NRSC ने आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्र और मलबे के फैलाव का पूरा मैप तैयार करने के लिए Cartosat-3 MX और Resourcesat-2A सैटेलाइट्स की तस्वीरों का डीप एनालिसिस किया। इन तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि लांगटांग क्षेत्र से हिमस्खलन का मलबा नीचे निचले इलाकों तक बहकर आया और उसने नदी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया। जब रुका हुआ पानी भारी मात्रा में जमा हो गया और बाद में तेजी से आगे बढ़ा तो उसने नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी।अब तक कितना नुकसान पहुंचा चुका है यह मलबा?मलबे की वजह से आई इस बाढ़ ने लांगटांग क्षेत्र में नदियों के रास्तों को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है और इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसकी वजह से त्रिशूली बांध और एक नए बने पुल को भारी नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक तबाही का असर रसुवा से लेकर नुवाकोट तक फैला नजर आया।हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रहा है जुड़ा हुआ खतराISRO के इस विश्लेषण ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में एक व्यापक और गंभीर पैटर्न की ओर इशारा किया है। ग्लेशियर का पिघलना, हिमस्खलन, मलबे से अवरुद्ध नदियां और अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड अब आपस में जुड़ी हुई एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का रूप ले रहे हैं। NRSC का कहना है कि भविष्य में इस तरह की आर्टिफिशियल झीलों और अवरुद्ध हुए जलमार्गों की लगातार निगरानी करना बहुत जरूरी हो गया है।
मेजर ऋषभ सिंह संब्याल को सोशल मीडिया पर शायद ही कोई भूल पाया हो। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC रहते हुए उनकी तस्वीरें और वीडियो अक्सर इंटरनेट पर वायरल होते थे। उनकी शख्सियत और राष्ट्रपति के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूदगी ने उन्हें सोशल मीडिया पर खासा लोकप्रिय बना दिया था। लोग मजाकिया अंदाज में उन्हें भारत का ‘नेशनल क्रश’ तक कहने लगे थे। लेकिन अब संब्याल एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब 12 साल तक भारतीय सेना में सेवा देने के बाद उन्होंने समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली है।राष्ट्रपति भवन में आखिरी दौर के बाद लिया रिटायरमेंटसंब्याल के रिटायरमेंट की जानकारी राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक डिजिटल फोटो लाइब्रेरी में उन्हें ‘रिटायर्ड फॉर्मर ADC’ के तौर पर सूचीबद्ध किए जाने के बाद सामने आई। सेना से विदाई के बाद उन्होंने 21 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात भी की। उन्होंने इस मुलाकात की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए आभार जताया।उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की सीख और आशीर्वाद ने उन्हें एक बेहतर इंसान बनने में मदद की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति के परिवार से दोबारा मिलने की खुशी भी जाहिर की।जम्मू-कश्मीर से हैं गहरे रिश्तेमेजर ऋषभ सिंह संब्याल का संबंध जम्मू-कश्मीर से जुड़े डोगरा राजपूत परिवार से बताया जाता है। सेना में जाने की उनकी यात्रा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी NDA से शुरू हुई। उन्होंने 2013 में NDA की परीक्षा पास की और 2014 में 133वें NDA कोर्स में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंध और मामलों में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। 2017 में वह भारतीय सैन्य अकादमी पहुंचे, जहां उन्होंने सैन्य अध्ययन और रक्षा प्रबंधन से जुड़ी पढ़ाई की।गणतंत्र दिवस परेड ने दिलाई पहली बड़ी पहचानसंब्याल को पहली बड़ी पहचान 2021 में मिली। उस समय वह कैप्टन के पद पर जाट रेजिमेंट में तैनात थे और उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में रेजिमेंट के दल का नेतृत्व किया। उनकी अगुवाई में इस दल ने प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल की ट्रॉफी अपने नाम की। इस उपलब्धि ने उनके सैन्य करियर में एक अहम पहचान बनाई।स्पेशल फोर्सेज का भी हिस्सा रहेसंब्याल ने सेना की एलीट 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में भी सेवा दी। इस यूनिट को ‘डैगर्स’ के नाम से भी जाना जाता है। स्पेशल फोर्सेज में सेवा के दौरान उन्हें बलिदान बैज भी मिला। यह पैराशूट रेजिमेंट की स्पेशल फोर्सेज से जुड़ा एक खास सम्मान है।राष्ट्रपति के ADC बने तो बढ़ी सोशल मीडिया पर लोकप्रियतामार्च 2023 में संब्याल को राष्ट्रपति के ADC पद के लिए चुना गया। इसके बाद वह राष्ट्रपति के साथ कई आधिकारिक कार्यक्रमों, समारोहों और विदेशी दौरों में नजर आने लगे। इस जिम्मेदारी ने उन्हें आम लोगों के बीच भी पहचान दिलाई। राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर होने लगे और देखते ही देखते वह इंटरनेट पर चर्चित चेहरा बन गए।अपने लिंक्डइन प्रोफाइल में संब्याल ने खुद को 12 साल के सैन्य अनुभव वाला पेशेवर बताया है। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम का नेतृत्व करने, रणनीतिक योजना बनाने और अलग-अलग एजेंसियों के साथ काम करने का अनुभव भी साझा किया है।PMO से लेकर विदेशी दौरों तक का अनुभवअपने प्रोफाइल के मुताबिक, संब्याल ने प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेशी प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ भी काम किया। उन्होंने राष्ट्रपति से जुड़े आधिकारिक राजनयिक दौरों के दौरान आठ देशों की यात्राओं में भी जिम्मेदारियां निभाईं। इस दौरान उन्हें अलग-अलग संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ काम करने का मौका मिला। View this post on Instagram A post shared by Major Rishabh Singh Sambyal (@major_rs_sambyal) आखिर क्यों लिया समय से पहले रिटायरमेंट?करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद संब्याल के समय से पहले रिटायरमेंट लेने की वजह को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। रिपोर्ट्स में उनके इंस्टाग्राम लाइव का हवाला देते हुए बताया गया है कि व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण उनके इस फैसले के पीछे हो सकते हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि जिंदगी में कुछ परिस्थितियां और अनुभव इंसान की दिशा बदल देते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि फिलहाल शादी करने की उनकी कोई तत्काल योजना नहीं है।सेना से विदाई, लेकिन सफर यहीं खत्म नहींलेफ्टिनेंट से कैप्टन और फिर मेजर तक का सफर तय करने के बाद संब्याल ने सेना को अलविदा कह दिया है। राष्ट्रपति के ADC के तौर पर मिली पहचान ने उनके सैन्य करियर को एक अलग तरह की सार्वजनिक पहचान भी दी।अब सेना की वर्दी में उनकी तस्वीरें भले ही कम नजर आएं, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता और 12 साल के सैन्य अनुभव के बाद आगे की उनकी नई पारी को लेकर लोगों की नजर बनी हुई है।छह चूजों ने बदल दी पूरी जिंदगी! Amazon से निकली महिला ने ऐसे शुरू किया अपना नया करियर
Mirzapur The Movie: पंकज त्रिपाठी स्टारर 'मिर्जापुर: द मूवी' 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। इस पॉपुलर वेब सीरीज के फ़ैन्स 'मिर्ज़ापुर' की दुनिया को बड़े पर्दे पर देखने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। फ़िल्म को CBFC से 'A' सर्टिफ़िकेट मिला है और इसकी लंबाई 197.19 मिनट (यानी 3 घंटे 17 मिनट) है।सिनेमाघरों में रिलीज़ से पहले, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) की तरफ़ से फ़िल्म में किए जाने वाले कट और बदलावों की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेकर्स से फ़िल्म में कई बदलाव करने को कहा गया था, जिसमें इंटीमेट सीन को काटना और कुछ डायलॉग्स में बदलाव करना शामिल है।CBFC ने मेकर्स से डायलॉग्स में बदलाव करने को कहाफिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट देने से पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने कई बदलाव करने को कहा। बॉलीवुड हंगामा के अनुसार, फिल्म में चार जगहों पर अपशब्दों (गालियों) को म्यूट कर दिया गया। वहीं, 6 अन्य जगहों पर अपशब्दों की जगह ज़्यादा सही शब्दों का इस्तेमाल किया गया।CBFC के निर्देशों के बाद एक डायलॉग में भी बदलाव किया गया।बोर्ड ने फिल्म के अलग-अलग हिस्सों में कुछ शब्दों और संदर्भों पर भी आपत्ति जताई। पहले हाफ में, एक शब्द को बदलकर कमर कर दिया गया। दूसरे हाफ में, लान्थ शब्द (जिसका मतलब बेवकूफ होता है) को बदल दिया गया। जाति से जुड़े एक संदर्भ को भी बदलने के लिए कहा गया।35 सेकंड के इंटीमेट सीन हटाए गएफिल्म में विज़ुअल बदलाव भी किए गए। CBFC ने मेकर्स को निर्देश दिया कि वे विज़ुअल और साउंड में ज़रूरी बदलाव करके इंटीमेट सीन को 50% तक कम करें। ये बदलाव दो सीन में किए गए—एक इंटरवल से पहले और दूसरा उसके बाद। नतीजतन, फिल्म से कुल 35 सेकंड का इंटीमेट कंटेंट हटा दिया गया। CBFC की वेबसाइट पर दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार: मिर्ज़ापुर की गद्दी के लिए लड़ाई और तेज़ हो जाती है क्योंकि पुराने दुश्मन फिर से सामने आते हैं और नए खतरे पैदा होते हैं। खून का बदला चुकाना ज़रूरी है, जबकि सत्ता के भूखे दावेदार शहर की हिंसक अंडरवर्ल्ड दुनिया पर कब्ज़ा करने के लिए लड़ते हैं।अली फ़ज़ल एक बार फिर गुड्डू पंडित का किरदार निभा रहे हैं, जबकि पंकज त्रिपाठी फिर से कालीन भैया बने हैं। दिव्येंदु भी मुन्ना त्रिपाठी के रोल में लौट रहे हैं। अभिषेक बनर्जी कंपाउंडर के तौर पर, हर्षिता गौर डिंपी पंडित के रोल में, श्रिया पिलगांवकर स्वीटी गुप्ता के रोल में, श्वेता त्रिपाठी गोलू गुप्ता के रोल में और रसिका दुगल बीना त्रिपाठी के रोल में वापसी कर रही हैं। मोहित मलिक, सोनल चौहान और रवि किशन भी कास्ट का हिस्सा हैं।हालांकि, एक बड़ा बदलाव है। जितेंद्र कुमार फिल्म में बबलू पंडित का किरदार निभाएंगे, जो पहले सीज़न में विक्रांत मैसी ने निभाया था। यह फिल्म 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

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