Cauvery water: CWMA के आदेश पर Karnataka सरकार किसानों के हित में लेगी फैसला
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) द्वारा कर्नाटक को कावेरी नदी से तमिलनाडु के लिए अगले 15 दिनों तक रोजाना 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिए जाने बाद, जल संसाधन मंत्री एन चेलुवरायस्वामीने कहा कि कर्नाटक सरकार अपने राज्य और स्थानीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही आगे कोई फैसला लेगी। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने मंगलवार को कावेरी जल नियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की उस सिफारिश को बरकरार रखा, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। जल संसाधन मंत्री ने कहा, सीडब्ल्यूआरसी ने 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा था, इसी आदेश को सीडब्ल्यूएमए ने भी बरकरार रखा है। यह मामला अगले हफ्ते उच्चतम न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आने वाला है। हमने अपनी तकनीकी टीम के माध्यम से सीडब्ल्यूआरसी के समक्ष सभी प्रयास किए और 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने में आ रही कठिनाई को व्यक्त किया। लेकिन स्थिति और पानी की आवक को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह आदेश जारी किया है। यहां संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, देखते हैं। एक संघीय व्यवस्था में उच्चतम न्यायालय के आदेश, समिति के आदेशों और स्थानीय स्थिति पर विचार किया जाना चाहिए। लेकिन हमारी सरकार और विभाग यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेंगे कि हमारे किसानों और लोगों को कोई परेशानी न हो।
102 तालुकों में सूखे जैसे हालात, केंद्र को रिपोर्ट सौंपी जाएगी: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री
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Karnataka High Court ने क्यों कहा- Parents की सेवा करना बहू की जिम्मेदारी नहीं? Married Woman
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान शादीशुदा महिलाओं के अधिकारों को लेकर बेहद अहम टिप्पणियां की हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पति अपनी पत्नी को घर का काम करने या अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता और ना ही उस पर हुक्म चला सकता है।
केएमवीएसटीडीसीएल का फंड राहुल गांधी के घर भेजा गया, कर्नाटक भाजपा ने लगाया आरोप
कर्नाटक के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता बी. श्रीरामुलु ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड (केएमवीएसटीडीसीएल) से...
Voter List Crisis: DK Shivakumar ने CEC को लिखा पत्र, समय सीमा बढ़ाने की अपील
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान सत्यापन के लिए पर्याप्त समय देने और तय प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। इसे भी पढ़ें: आदिवासी हॉस्टलों पर Rahul Gandhi को BJP की चुनौती: पहले अपने राज्यों में देखें एक एक्स पोस्ट में मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक में SIR के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 1.08 करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं को ASDDO के तौर पर चिह्नित किया गया है और लगभग 43 लाख मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों के लिए नोटिस भेजे जाने हैं। शिवकुमार ने कहा मैंने CEC ज्ञानेश कुमार से निम्नलिखित कदम उठाने का अनुरोध किया है: दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाई जाए ताकि ड्राफ्ट सूची से छूटे हुए असली मतदाताओं को दावे दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके; CEO को निर्देश दिया जाए कि वे तय प्रक्रिया को पूरी तरह लागू करें, जिसमें ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभाएं और शहरी इलाकों में वार्ड समिति की बैठकें शामिल हों और इनका पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाए; साथ ही, तार्किक विसंगतियों और 2002 की मतदाता सूची से लिंक न होने के कारण नोटिस का सामना कर रहे मतदाताओं को दिया गया समय भी बढ़ाया जाए। इसे भी पढ़ें: Karnataka ने Amazon और Swiggy Instamart के खाद्य लाइसेंस निलंबित किए, धतूरा बेचने पर रोक उन्होंने कहा हर वोटर को जवाब देने और ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने के लिए कम से कम 3-4 हफ़्ते मिलने चाहिए। साथ ही, दावों, आपत्तियों और आवेदनों की भारी संख्या को संभालने और गलतियों या अनुचित तरीके से नाम हटाने से रोकने के लिए ERO और ज़रूरत पड़ने पर DEO की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। 25 अगस्त के पत्र में, मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के आंकड़ों पर गंभीरता से ध्यान देने की ज़रूरत है। शिवकुमार ने बताया कि 5.54 करोड़ वोटरों में से लगभग 1.08 करोड़ (यानी हर पांच में से लगभग एक) को 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट और अन्य' (ASDDO) श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा, 24 अगस्त को ड्राफ्ट रोल (प्रारूप मतदाता सूची) के प्रकाशन के बाद, लगभग 43.8 लाख वोटरों को 'तार्किक विसंगतियों' या 2002 की मतदाता सूची से लिंक न होने के कारण सत्यापन नोटिस जारी किए जाने की उम्मीद है।
अगर आप रोज-रोज एक ही तरह के पकौड़े या नमकीन खाकर बोर हो गए हैं, तो इस बार कर्नाटक के मशहूर मद्दुर वड़े को जरूर ट्राई करें।
थप्पड़कांड का VIDEO: कर्नाटक के मंदिर में दर्शन को लेकर बवाल, BJP विधायक की बेटी और महिला SI भिड़ी; CCTV वायरल---Karnataka BJP MLA's Daughter Accused of Slapping Woman Police Officer at Temple
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और यूनिफॉर्म की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट ने एक मुस्लिम छात्रा द्वारा स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ हिजाब (सिर पर स्कार्फ) पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का कोई 'अनिवार्य धार्मिक अभ्यास' (Essential Religious Practice) नहीं है, और न ही याचिकाकर्ता इसे साबित करने के लिए कोई ठोस धार्मिक ग्रंथ या कानूनी आधार पेश कर सकी है। 21 अगस्त को दिए गए फैसले में, जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रही कि क्लासरूम के अंदर सिर पर स्कार्फ पहनना एक ज़रूरी धार्मिक प्रथा है। 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी कहा कि कई हाई कोर्ट्स का यह मानना रहा है कि महिलाओं के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लामी आस्था का कोई ज़रूरी हिस्सा नहीं है। इसे भी पढ़ें: Karnataka ने Amazon और Swiggy Instamart के खाद्य लाइसेंस निलंबित किए, धतूरा बेचने पर रोक हिजाब पर कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट का वह फैसला, जिसमें शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर लगी रोक को सही ठहराया गया था, अभी भी अहम माना जा सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बंटे हुए फैसले के बाद अभी तक इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। कोर्ट ने कहा, अलग-अलग राय होने के कारण, मामले को सही बेंच बनाने के लिए माननीय मुख्य न्यायाधीश के सामने रखने का निर्देश दिया गया था। कर्नाटक फुल बेंच के फैसले से उठे मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है। हमारी राय है कि कर्नाटक फुल बेंच का फैसला, दूसरे कोर्ट्स की तरह ही, काफी अहमियत रखता है और हमारे पास इससे अलग राय रखने की कोई वजह नहीं है। इसे भी पढ़ें: Colombo Test Match India vs Sri Lanka | कोलंबो में भारत का दबदबा जारी, दूसरे दिन श्रीलंका को बैकफुट पर धकेला इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि सिर पर स्कार्फ पहनना एक ज़रूरी धार्मिक प्रथा है जिसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सुरक्षा मिली हुई है। कोर्ट ने कहा, रिकॉर्ड पर ऐसी कोई दलील या आधिकारिक धार्मिक ग्रंथ या सामग्री पेश नहीं की गई है, जो यह साबित करने के लिए काफी हो कि क्लासरूम के अंदर स्कार्फ पहनना अनिवार्य है और इसे न मानने से याचिकाकर्ता की आस्था का मूल स्वरूप बदल जाएगा। बेंच ने कहा संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देकर किया गया दावा सिर्फ़ कहने भर से स्वीकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके लिए ज़रूरी तथ्यात्मक और कानूनी आधार न हो। बेंच ने कहा, रिट याचिका को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने इस बारे में कोई दलील नहीं दी है, सिवाय इसके कि वह बचपन से ही ऐसा करती आ रही है और जब से उसने छठी कक्षा में स्कूल जॉइन किया है, तब से ऐसा कर रही है। स्कूल ड्रेस कोड पर कोर्ट कोर्ट ने आगे कहा कि जहां ड्रेस कोड एक जैसा (यूनिफॉर्म), सही नीयत वाला, बिना भेदभाव वाला और अनुशासन व संस्थान की पहचान बनाए रखने के मकसद से बनाया गया हो, वहां तय यूनिफॉर्म के बारे में फैसला मुख्य रूप से स्कूल के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह याचिका प्रयागराज के अत्तारसुइया स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल की एक छात्रा ने दायर की थी। उसने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने उसे 11वीं कक्षा में दाखिला देने से मना कर दिया क्योंकि वह सिर पर स्कार्फ (हिजाब) पहनकर आई थी। छात्रा ने कहा कि वह छठी कक्षा से ही हिजाब पहनती आ रही है। हालांकि, स्कूल का कहना था कि तय यूनिफॉर्म के साथ सिर पर स्कार्फ पहनना उसके ड्रेस कोड का उल्लंघन होगा। हाई कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि छात्रा के पहले बिना किसी आपत्ति के सिर पर स्कार्फ पहनने की वजह से उसे ऐसा करते रहने का कानूनी अधिकार मिल गया है। कोर्ट ने कहा कि पहले बिना किसी आपत्ति के सिर पर स्कार्फ पहनने की बात से ही कोई ऐसा पक्का अधिकार नहीं बन जाता जिसके लिए स्कूल को 11वीं कक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए अपनी यूनिफॉर्म पॉलिसी में बदलाव करना पड़े या उसमें ढील देनी पड़े। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
Karnataka ने Amazon और Swiggy Instamart के खाद्य लाइसेंस निलंबित किए, धतूरा बेचने पर रोक
कर्नाटक सरकार ने धतूरा के फल/बीज की ऑनलाइन बिक्री और वितरण को लेकर ई-कॉमर्स मंच अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के खाद्य लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित करने का निर्देश दिया है। सरकार ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया है। सरकार ने इन तीनों ऑनलाइन मंचों को उत्पाद उपलब्ध कराने वाले प्रतिष्ठानों और विक्रेताओं के लाइसेंस/पंजीकरण तत्काल निलंबित करने का भी आदेश दिया है। साथ ही, सभी संबंधित खाद्य कारोबार संचालकों को भोजन या मानव उपभोग के लिए धतूरा से संबंधित ‘लिस्टिंग’, विज्ञापन और प्रचार सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया है। अंग्रेजी में धतूरा को ‘थॉर्न एप्पल’ के नाम से जाना जाता है, जबकि तमिल में इसे ‘उमथाई’ कहा जाता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा इसके तहत बनाए गए नियमों/विनियमों के प्रावधानों के अनुसार, संबंधित सक्षम अधिकारियों को अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट जैसे ई-कॉमर्स मंच को जारी खाद्य लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने और तत्काल अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।’’विभाग ने कहा कि यह मामला उसके संज्ञान में तब आया, जब कुछ ऑनलाइन मंच पर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के लाइसेंस/पंजीकरण के तहत धतूरा के फल और बीज बिक्री के लिए प्रदर्शित पाए गए। विभाग ने कहा, ‘‘धतूरा के पौधे में विषैले गुण होते हैं और इसके फल तथा बीजों का सेवन मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।’’विभाग ने कहा कि अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के लाइसेंस का निलंबन अगले आदेश तक लागू रहेगा। अनुपालन रिपोर्ट मिलने के बाद, संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के पश्चात निलंबन हटाने के मुद्दे पर अलग से विचार किया जाएगा।
Karnataka News: कर्नाटक से लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है. भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद एक सरकारी अधिकारी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ अस्पताल के स्पेशल वार्ड में मिला है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के राज्यों के लिए अगले कुछ घंटों का तत्काल मौसम पूर्वानुमान ('नाउकास्ट' वॉर्निंग) जारी किया है। IMD ने दिल्ली के सभी इलाकों के लिए 'रेड वॉर्निंग' जारी की है, जबकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और केरल के विभिन्न जिलों के लिए 'ऑरेंज वॉर्निंग' जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं, आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के साथ 15 मिमी प्रति घंटे से अधिक की भारी बारिश की संभावना है। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने Devendra Fadnavis को लिखा पत्र, आदिवासी छात्रों की मांग उठाई दिल्ली के लिए रेड वॉर्निंग अगले कुछ घंटों के लिए दिल्ली के सभी 11 ज़िले रेड वॉर्निंग के दायरे में हैं: सेंट्रल दिल्ली ईस्ट दिल्ली नई दिल्ली नॉर्थ दिल्ली नॉर्थ ईस्ट दिल्ली नॉर्थ वेस्ट दिल्ली शाहदरा साउथ दिल्ली साउथ ईस्ट दिल्ली साउथ वेस्ट दिल्ली वेस्ट दिल्ली IMD ने बिजली कड़कने और आंधी-तूफान के साथ-साथ लगभग 60 किमी/घंटा की तेज़ हवाओं और 15 मिमी प्रति घंटे से ज़्यादा भारी बारिश की चेतावनी दी है। कई राज्यों में ऑरेंज वॉर्निंग आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के साथ-साथ 40 से 60 किमी/घंटा की तेज़ हवाओं और 5 से 15 मिमी प्रति घंटे की मध्यम बारिश के लिए ऑरेंज वॉर्निंग जारी की गई है। उत्तर प्रदेश: अंबेडकर नगर, अमेठी, अयोध्या, आज़मगढ़, बागपत, बलिया, बांदा, बस्ती, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, गाज़ीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हमीरपुर, जौनपुर, झांसी, कुशीनगर, महोबा, मऊ, मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर, प्रतापगढ़, संत कबीर नगर, शामली, सुल्तानपुर और वाराणसी। केरल: कन्नूर, कासरगोड, कोझिकोड, लक्षद्वीप, मलप्पुरम, त्रिशूर और वायनाड। मध्य प्रदेश: छतरपुर, दतिया, ग्वालियर, निवाड़ी, पन्ना, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली और टीकमगढ़। हरियाणा: पानीपत और सोनीपत। उत्तराखंड: बागेश्वर, चंपावत, देहरादून, पिथौरागढ़ और टिहरी गढ़वाल। IMD ने सुरक्षा के लिए सलाह जारी की प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे अलर्ट रहें और चेतावनी लागू रहने तक ज़रूरी सावधानी बरतें। IMD ने खास तौर पर लोगों को सलाह दी है कि वे पेड़ों या कमज़ोर ढांचों के नीचे शरण न लें। लोगों से यह भी कहा गया है कि वे सड़क और ट्रैफ़िक की स्थिति देख लें, बिना ज़रूरत यात्रा न करें और संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी किसी भी अतिरिक्त सलाह का पालन करें। भारी बारिश से दिल्ली में ट्रैफ़िक और उड़ानों पर असर पड़ा यह ताज़ा चेतावनी सोमवार को दिल्ली और आस-पास के इलाकों में हुई भारी बारिश के बाद आई है, जिससे NCR के कई हिस्सों में ट्रैफ़िक की आवाजाही प्रभावित हुई। बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव हो गया, जिससे सड़कों पर आने-जाने वालों की मुश्किलें बढ़ गईं। इसे भी पढ़ें: Karnataka में IPC करेगी ₹83,480 करोड़ का निवेश, बनेगा Data Centre बारिश से राजधानी में उड़ान सेवाओं पर भी असर पड़ा। भारी बारिश और जलभराव की वजह से इलाके के कई हिस्सों में आवाजाही प्रभावित हुई और खराब मौसम के कारण लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
DK Shivakumar-Adani meeting: दिग्गज उद्योगपति गौतम अदाणी ने रविवार 24 अगस्त को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस मुलाकात को एक शिष्टाचार भेंट बताया। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के साथ मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पर 'दोहरा मापदंड' अपनाने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा।सूत्रों के अनुसार, अदाणी 'आर्ट ऑफ लिविंग' गए थे। एयरपोर्ट लौटते समय सदाशिवनगर स्थित मुख्यमंत्री आवास पर शिवकुमार से मिले। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने भी इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया। यह मुलाकात हेब्बाल से सिल्क बोर्ड तक प्रस्तावित सुरंग सड़क परियोजना के बीच हुई है। सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है। हालांकि, टेंडर को अभी आधिकारिक रूप से अंतिम रूप नहीं दिया गया है।यह तत्काल पता नहीं चल सका कि शिवकुमार और अदाणी के बीच बातचीत में सुरंग सड़क परियोजना का मुद्दा उठा या मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित रही। शिवकुमार ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में कहा, मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली बार था जब वह (अदाणी) यहां मुझसे मिलने आना चाहते थे। वे यहां कई कारोबार कर रहे हैं। वह शिष्टाचारवश मुझसे मिलने आए थे।BJP हुई हमलावरइस बीच, BJP के वरिष्ठ नेता आर अशोक ने इस मुलाकात की आलोचना करते हुए सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शिवकुमार को अदाणी से मिलने की अनुमति दी थी। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अशोक ने कहा, कांग्रेस दिल्ली में अदाणी का विरोध करती है, जबकि कर्नाटक में उसके पक्ष में है। क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है? उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने अदाणी के लिए 'लाल कालीन बिछा दी' है।अशोक ने शिवकुमार से राहुल गांधी को यह बताने को कहा कि अदाणी एक कारोबारी हैं। वह केवल कारोबार कर रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर तंज कसते हुए अशोक ने उनसे बेंगलुरु आने और लालबाग या सैंकी टैंक में किसी पेड़ को गले लगाने को कहा जो प्रस्तावित सुरंग सड़क परियोजना से प्रभावित होंगे। BJP सुरंग सड़क परियोजना का विरोध कर रही है। भगवा पार्टी के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी इस मुद्दे को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया है।प्रियांक खड़गे की आई सफाईकर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सीएम डीके शिवकुमार की गौतम अदाणी के साथ हुई मीटिंग का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह उद्योगपति राज्य सरकार के लिए सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्टर है। टेंडर प्रोसेस पर कोई असर नहीं डाला गया है। खड़गे ने पत्रकारों से कहा, हमारे लिए अदाणी एक कॉन्ट्रैक्टर हैं। वे कुछ प्रोजेक्ट्स में सबसे कम बोली लगाने वाले हैं। ये कर्नाटक सरकार के लिए अहम प्रोजेक्ट्स हैं। हमने टेंडर प्रोसेस को प्रभावित नहीं किया है। कोई भी L1 बन सकता है।BJP से पूछा सवालउन्होंने कहा कि अदाणी ग्रुप पर कांग्रेस का राजनीतिक रुख नहीं बदला है। लेकिन साथ ही कहा कि राजनीतिक मतभेदों से यह तय नहीं हो सकता कि सरकारी टेंडर की प्रक्रिया कैसे होगी। खड़गे ने कहा, अगर अदाणी कानूनी तरीके से टेंडर हासिल करते हैं, तो ठीक है। उन्होंने टनल रोड प्रोजेक्ट पर बीजेपी के रुख पर भी सवाल उठाया। साथ ही पूछा कि क्या विपक्ष अब भी इसका विरोध करेगा, जब अदाणी ग्रुप की एक कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है।राज्य सरकार द्वारा बताई गई बोली की जानकारी के अनुसार, अदाणी एंटरप्राइजेज ने 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यह बोली सरकार की शुरुआती अनुमानित प्रोजेक्ट लागत 17,698 करोड़ रुपये से ज्यादा है।वहीं, शिवकुमार की अदाणी से मुलाकात पर कांग्रेस सांसद और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, हमने साफ तौर पर कहा है कि हम एकाधिकार के खिलाफ हैं। हम किसी उद्योगपति के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन हम हमेशा कहते हैं कि अगर किसी एक उद्योगपति का एकाधिकार हो जाए, तो यह देश के लिए अच्छा नहीं है।
बीना जीआरपी ने कर्नाटक एक्सप्रेस में यात्री का ट्रॉली बैग चोरी करने के मामले में विदिशा निवासी नितिन यादव (37) को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से चोरी का आईपैड और कुल 36 मोबाइल बरामद किए गए हैं।
Karnataka में IPC करेगी ₹83,480 करोड़ का निवेश, बनेगा Data Centre
कर्नाटक के भारी और मध्यम उद्योग मंत्री एम बी पाटिल ने सोमवार को कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में काम करने वाली लक्जमबर्ग स्थित कंपनी इनोवेशन प्लेटफॉर्म कैपिटल (आईपीसी) ने तीन चरणों में राज्य में 83,480 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने आईपीसी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार और चेयरमैन गुरशरण सिंह कुंदन के नेतृत्व में कंपनी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां चर्चा की। मंत्री ने एक बयान में कहा कि आईपीसी ने तीन चरणों में 2,250 मेगावाट के कुल आईटी लोड और 1,000 मेगावाट की हरित हाइड्रोजन क्षमता के साथ एक एकीकृत बेंगलुरु-तुमकुरु हरित हाइड्रोजन और हाइपरस्केल डेटा सेंटर मंच का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव पहले चरण को शामिल करता है, जिसमें 17,114 करोड़ रुपये का कुल निवेश शामिल है।
दर्शन में देरी पर भड़की विधायक की बेटी, लेडी सब-इंस्पेक्टर को जड़ा थप्पड़
Karnataka News: मांड्या के श्रीरंगपट्टनम स्थित आरती उक्कडा मंदिर में 12 अगस्त की रात उस समय हंगामा हो गया जब भीमा अमावस्या पर दर्शन करने पहुंचीं BJP विधायक बी. सुरेश गौड़ा की बेटी ऐश्वर्या की ऑन-ड्यूटी महिला PSI सविता पाटिल से बहस हो गई.
ऑनलाइन बेचा जा रहा था धतूरा, कर्नाटक में अमेजन, स्विगी और बिगबास्केट का फूड लाइसेंस सस्पेंड
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग ने अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई उनके प्लेटफॉर्म पर जहरीले धतूरे के फल और बीज बेचने के गंभीर आरोप में की गई है।
आम आदमी पार्टी ने अनिल झा को कर्नाटक का बनाया प्रभारी, विधायक ने जताया शीर्ष नेतृत्व का आभार
New Delhi, 24 अगस्त . आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली की किराड़ी विधानसभा सीट से विधायक अनिल झा को कर्नाटक प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है. पार्टी की ओर से की गई इस नियुक्ति को दक्षिण India में संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. नियुक्ति के बाद ... Read more
‘हनूर जंगल में हुई गोलीबारी पर सवाल’: कर्नाटक भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की
Bengaluru, 24 अगस्त . कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने Monday को आरोप लगाया कि चामराजनगर जिले में हनूर जंगल में हुई गोलीबारी की घटना को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं. इसमें कथित तौर पर तीन शिकारियों की मुठभेड़ में मौत हो गई थी. उन्होंने राज्य Government पर सच छिपाने की ... Read more
CJP का बड़ा ऐलान: सरकार पर 'धोखाधड़ी' का आरोप, 5 सितंबर को Delhi में मार्च
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकालने का देशव्यापी आह्वान किया है। पार्टी ने भारत सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने 25 जुलाई को युवाओं से किए गए वादों को पूरा नहीं किया। जबकि उन वादों के बाद ही युवाओं ने सद्भावना दिखाते हुए अपना देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया था। 5 सितंबर को होने वाला यह शांतिपूर्ण मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर जाएगा। इसे भी पढ़ें: BL Santosh का 'मिशन Punjab', BJP की चुनावी रणनीति पर मंथन; SAD-BJP गठबंधन की अटकलें तेज! इस मार्च का नेतृत्व NEET परीक्षा से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों और पुलिस की बर्बरता के शिकार लोगों के परिवार करेंगे। इसमें देश भर से छात्रों, युवा संगठनों और युवा नागरिकों के शामिल होने की उम्मीद है। इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिश के तहत प्रेशर ग्रुप से किए गए वादों को पूरा करे। ऑनलाइन ग्रुप से दबाव बनाने वाले समूह में बदले इस संगठन ने केंद्र पर देश के युवाओं को धोखा देने और उनका भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। CJP ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि हम सरकार को पूरी पीढ़ी का अपमान नहीं करने देंगे। सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन खत्म करने का वादा करती है और फिर जब सड़कें खाली हो जाती हैं, तो उन्हीं वादों से मुकरने की कोशिश करती है। भारत के युवाओं से किए गए वादे को अक्षरशः और उसकी मूल भावना के साथ पूरा किया जाना चाहिए। अपने बयान में CJP ने कहा कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए कोर्ट की बार-बार की गुजारिश के बावजूद, सरकार ने अभी तक कोई लिस्ट नहीं दी है। इसे भी पढ़ें: Hanur Firing Case: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर सस्पेंस क्यों? BY Vijayendra ने Karnataka Government से CBI जांच की मांग की बयान में कहा गया कि केंद्र सरकार ने इसे उपलब्ध कराने का कोई वादा नहीं किया था। इसके तुरंत बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में, CJP के सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने चेतावनी दी कि ऐसा लगता है कि सरकार देश की युवा पीढ़ी को धोखा देने की कोशिश कर रही है, जबकि उसने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए पक्के वादों के आधार पर हमारा आंदोलन वापस करवाया था। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के संभावित प्रधानमंत्री बनने की अटकलों को ज़्यादा अहमियत नहीं दी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए लोकसभा की 272 सीटें जीतना संवैधानिक रूप से ज़रूरी है। मणिकम टैगोर की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कि 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) के नेता विजय को फैन क्लब वाली सोच के साथ पेश कर रहे हैं, चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि भले ही पार्टी कार्यकर्ता अपने नेता का बहुत सम्मान करते हों, लेकिन ऐसी भावनाएं सार्वजनिक चर्चा पर असर नहीं डालतीं। इसे भी पढ़ें: Hanur Firing Case: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर सस्पेंस क्यों? BY Vijayendra ने Karnataka Government से CBI जांच की मांग की उन्होंने कहा कि मैं पूरी तरह मानता हूँ कि उन्हें अपनी पार्टी के नेताओं से बहुत प्यार, लगाव, उम्मीद और सम्मान है। यह उनकी पार्टी है। पार्टी के अंदर वे क्या कहते हैं, इससे आम लोगों की बातचीत या चर्चा पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता। आम चर्चा में तो आपको पॉलिसी और कानून के बारे में पूछना चाहिए। पार्टी के अंदर उनकी क्या इच्छाएँ हैं, इससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। चिदंबरम ने आगे कहा कि हर पार्टी के सपने, महत्वाकांक्षाएँ और इच्छाएँ होती हैं। उन्हें रोकने के लिए कानून नहीं बनाए जा सकते। हर कोई अपनी इच्छा ज़ाहिर करता है और अपनी पार्टी के पसंदीदा नेता के बारे में बात करता है। लेकिन हम जानते हैं कि राजनीतिक सच्चाई क्या है। 543 निर्वाचन क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार, जो भी गठबंधन 272 निर्वाचन क्षेत्रों में जीतता है, या जो भी पार्टी जीतती है, उसका नेता भारत का प्रधानमंत्री बनेगा। जो भी यह संख्या हासिल कर लेता है, वह प्रधानमंत्री बन सकता है, चाहे अकेले या मिलकर। आप और मैं दोनों जानते हैं कि राजनीतिक सच्चाई क्या है। तीसरे बच्चे के लिए प्रोत्साहन के तौर पर मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) को एक साल तक बढ़ाने की सरकारी पॉलिसी का चिदंबरम ने कड़ा विरोध किया और इसे पूरी तरह से गलत विचार बताया। इसे भी पढ़ें: P. Chidambaram का Rijiju पर पलटवार, पूछा- PM Modi ने विपक्ष को नहीं तो किसे कहा Dimagi Naxal? उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मैं इस बात को बिल्कुल नहीं मानता। 21वीं सदी में हमें एक स्वस्थ और अच्छी तरह से शिक्षित आबादी की ज़रूरत है; हमें सिर्फ़ संख्या बढ़ाने के लिए संख्या नहीं बढ़ानी चाहिए। तीसरे बच्चे के लिए प्रोत्साहन के तौर पर मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) देना कभी भी सरकारी योजना नहीं होनी चाहिए। हमें छोटे, अच्छी तरह से शिक्षित और स्वस्थ परिवारों की ज़रूरत है। आने वाली टेक्नोलॉजी के साथ, सिर्फ़ मैनपावर (काम करने वाले लोगों) की ज़रूरत कम हो जाएगी। इसलिए, सिर्फ़ संख्या बढ़ाने के लिए आबादी बढ़ाने वाली योजनाओं की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है। यह एक गलत सोच है। पूरी तरह से गलत सोच। सिर्फ़ मैटरनिटी लीव ही क्यों? पैटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) भी दी जानी चाहिए। बच्चों की देखभाल सिर्फ़ औरतें ही क्यों करें? पिता भी उनकी देखभाल करें। जहाँ तक मुझे पता है, पैटरनिटी लीव भी दी जानी चाहिए। लेकिन तीसरे बच्चे के लिए नहीं; यह पहले और दूसरे बच्चे तक ही सीमित होनी चाहिए। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने रविवार को कहा कि चामराजनगर ज़िले के हनूर रेंज में जंगल में आग लगने की घटना को लेकर दिन-ब-दिन कई संदेह पैदा हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मामले की सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है। विधान सौधा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि घटना की सच्चाई जानने के लिए बीजेपी ने पहले ही एक जांच समिति बनाई थी। एक विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा कि समिति द्वारा घटनास्थल का दौरा करने और जानकारी इकट्ठा करने के बाद, इस मामले को लेकर और भी गंभीर सवाल और संदेह पैदा हुए हैं। विजयेंद्र ने दावा किया कि हनूर मामले में शवों को जल्दबाजी में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था, लेकिन इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। विजयेंद्र ने कहा सरकार को यह बताना चाहिए कि रिपोर्ट क्यों जारी नहीं की जा रही है। इसे भी पढ़ें: N Biren Singh पहुंचे Delhi, Manipur के मौजूदा हालात पर BJP केंद्रीय नेतृत्व से होगी चर्चा उन्होंने सवाल किया पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट छिपाने की क्या ज़रूरत है? क्या लोगों को यह नहीं बताया जाना चाहिए कि रिपोर्ट में क्या है? रिपोर्ट जारी न करने से ही कई तरह के शक पैदा हो रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में घटना की तस्वीरें दिखाते हुए विजयेन्द्र ने आरोप लगाया कि तस्वीरों में मृतक के कंधे पर बंदूक रखी हुई और बहुत करीब से गोली चलाई गई दिख रही है। इसी तरह, उन्होंने गर्दन के पिछले हिस्से पर बहुत करीब से गोली चलने के निशान के बारे में भी सवाल उठाया। इसे भी पढ़ें: P. Chidambaram का Rijiju पर पलटवार, पूछा- PM Modi ने विपक्ष को नहीं तो किसे कहा Dimagi Naxal? विजयेन्द्र ने सवाल किया, विशेषज्ञों की राय के अनुसार, यह दूर से यानी लंबी दूरी से गोली चलने का मामला नहीं लगता। करीब से गोली चलने की संभावना है। ऐसी जानकारी है कि पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने भी रिपोर्ट में इस पहलू का ज़िक्र किया है। तो फिर सरकार उस रिपोर्ट का खुलासा क्यों नहीं कर रही है? इसे भी पढ़ें: Karnataka: Dalit Funds Scam पर सियासी संग्राम तेज, BJP का Nagendra के इस्तीफे तक धरना उन्होंने कहा जब इन सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जाती है, तो शक पैदा होता है कि क्या यह सामान्य एनकाउंटर का मामला है या इसके पीछे कोई और वजह है। विजयेन्द्र ने कहा कि एनकाउंटर में मारे गए लोग आदतन अपराधी या लगातार अपराधों में शामिल रहने वाले लोग नहीं थे। उन्होंने मांग की कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि महिमादास कहाँ है, जो जंगल गया था।
P. Chidambaram का Rijiju पर पलटवार, पूछा- PM Modi ने विपक्ष को नहीं तो किसे कहा Dimagi Naxal?
सीनियर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने 24 अगस्त को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की इस बात को खारिज करते हुए उनकी कड़ी आलोचना की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिमागी नक्सल वाली टिप्पणी विपक्ष के लिए नहीं थी। चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच, चिदंबरम ने इस शब्द के असल निशाने के बारे में स्पष्टीकरण की मांग की। ANI से बात करते हुए, चिदंबरम ने अपने उस वायरल सोशल मीडिया पोस्ट का बचाव किया जिसमें उन्होंने खुद को गर्व से दिमागी नक्सल बताया था। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी सरकार ने विपक्ष की आवाज़ों के खिलाफ बार-बार अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। इसे भी पढ़ें: Karnataka: Dalit Funds Scam पर सियासी संग्राम तेज, BJP का Nagendra के इस्तीफे तक धरना चिदंबरम ने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ क्या है? उन्हें इसे साफ़-साफ़ बताना चाहिए। किरेन रिजिजू ने एक कमज़ोर बहाना बनाया कि जब प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सल’ कहा, तो उनका इशारा विपक्ष की तरफ़ नहीं था। ठीक है, हम यह मान लेते हैं। तो फिर वे किसके बारे में बात कर रहे थे? उन्हें साफ़-साफ़ बताना चाहिए। वे किसे ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे थे? उन्होंने हमें ‘अर्बन नक्सल’ कहा। उन्होंने हमें ‘राष्ट्र-विरोधी’ कहा। उन्होंने हमें ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ कहा। वे हमें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। ‘अर्बन नक्सल’ कौन थे? ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ कौन था? ‘राष्ट्र-विरोधी’ कौन थे? ‘दिमागी नक्सल’ कौन थे? ये सब विपक्ष के लिए इस्तेमाल किए गए अलग-अलग शब्द हैं। वे सिर्फ़ विपक्षी पार्टियों और उनके नेताओं की बात कर रहे हैं। इसलिए, मैं विपक्षी पार्टी का सदस्य हूँ। मैंने कहा कि मुझे ‘अर्बन नक्सल’ होने पर गर्व है। इस देश में बहुत से लोगों को ‘बौद्धिक नक्सल’ होने पर गर्व है। कम से कम वे यह तो मानते हैं कि हम ‘बेवकूफ़’ नहीं हैं। पैलेट गन से लगी चोट के मामले में FIR दर्ज करने को लेकर संसद पुलिस स्टेशन पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर बात करते हुए, चिदंबरम ने गांधी के कदमों का समर्थन किया और प्रशासनिक देरी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री से सवाल पूछने में राहुल गांधी बिल्कुल सही थे। पीड़ित एक पुलिस स्टेशन से दूसरे पुलिस स्टेशन भटकता रहा, लेकिन कोई FIR दर्ज नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट का नियम है कि आपराधिक अपराध की हर शिकायत पर FIR दर्ज होनी चाहिए, और जब राहुल गांधी पीड़ित के साथ पुलिस स्टेशन गए, तो FIR दर्ज करने में उन्हें 7 घंटे लग गए। 30 दिन, और फिर FIR। इससे पता चलता है कि ऊपर से कोई पुलिस स्टेशन को निर्देश दे रहा है कि FIR दर्ज न करें। इसलिए, मुझे लगता है कि राहुल गांधी ने जो किया वह सही था और सत्याग्रह की जीत हुई। आखिरकार, उन्हें FIR दर्ज करनी ही पड़ी। इसे भी पढ़ें: Ayodhya Fish Feast पर सियासत गरम! Pawan Khera बोले, BJP ने 'पेपर लीक' से ध्यान भटकाने के लिए मुद्दा उछाला चिदंबरम ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया से जोड़कर उसे लागू करने में बनावटी बाधाएं पैदा करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने आगे कहा कि महिला आरक्षण का परिसीमन से क्या लेना-देना है? 106वां संविधान संशोधन बिल 2023 में पारित हुआ था, जो मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में महिलाओं के लिए आरक्षण की अनुमति देता है। वे इसे तुरंत लागू क्यों नहीं करते? वे महिला आरक्षण के लिए कोई दूसरा बिल क्यों लाना चाहते हैं? वे बेवजह और शरारतपूर्ण तरीके से महिला आरक्षण को इससे जोड़ रहे हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Karnataka Teacher recruitment 2026: 900 पदों पर निकली भर्ती, इस तरह करें आवेदन
pc: kalingatv कर्नाटक के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य भर में सामान्य कन्नड़ टीचरों के 900 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए हैं। ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। चुने गए कैंडिडेट्स को अलग-अलग एजुकेशनल जिलों में क्लास 1 से 5 तक के प्राइमरी स्कूलों में स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए पोस्ट किया जाएगा। योग्य और इच्छुक कैंडिडेट्स को एप्लीकेशन जमा करने से पहले अपने जिले के लिए लागू नोटिफिकेशन देखना होगा। कर्नाटक टीचर भर्ती 2026 के लिए अप्लाई करने के लिए कैंडिडेट को ज़रूरी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना होगा। एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया एप्लीकेंट को प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स (PUC) में कम से कम 50 परसेंट मार्क्स लाने होंगे और कर्नाटक राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा आयोजित ज़रूरी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना होगा। एकेडमिक एलिजिबिलिटी ज़रूरतों के हिस्से के तौर पर, कैंडिडेट्स को प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स (PUC) में कम से कम 50 परसेंट मार्क्स लाने होंगे। कैंडिडेट के पास दो साल का डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (DElEd), चार साल का बैचलर ऑफ़ एलिमेंट्री एजुकेशन (BElEd) या दो साल का डिप्लोमा इन एजुकेशन इन स्पेशल एजुकेशन होना चाहिए। एलिजिबल एग्जाम में कर्नाटक टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (KARTET) और सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) शामिल हैं। कैंडिडेट को यह पक्का करना चाहिए कि वे तय एकेडमिक और प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन पूरी करने के साथ-साथ TET की ज़रूरत भी पूरी करते हों। कर्नाटक टीचर भर्ती 2026 के लिए अप्लाई कैसे करें स्कूल शिक्षा विभाग, कर्नाटक की ऑफिशियल वेबसाइट schooleducation.karnataka.gov.in पर जाएं या डिपार्टमेंट के पोर्टल schooleducation.karnataka.gov.in/cacell के CACELL सेक्शन में जाएं डिटेल्स को ध्यान से पढ़ने के लिए नोटिफिकेशन पर क्लिक करें जिले के हिसाब से नोटिफिकेशन के अनुसार एप्लीकेशन फॉर्म भरें, और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें अगर लागू हो तो एप्लीकेशन फीस दें एप्लीकेशन फॉर्म जमा करें जमा किया गया एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट ले लें।
कर्नाटक: वाल्मीकि निगम घोटाले पर BJP का शक्ति प्रदर्शन, नागेंद्र के इस्तीफे पर अड़ी पार्टी; CT रवि हिरासत में---Karnataka BJP Protest Over Valmiki Corporation Scam, Demands Minister B Nagendra Resignation
प्रवर्तन निदेशालय ने KPSC भर्ती परीक्षा में कथित धांधली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और बरेली स्थित आवासों पर छापेमारी की है।
लखनऊ में अखिलेश यादव से मिले संजय सिंह, कर्नाटक में गौतम अडानी संग डीके शिवकुमार की बैठक; टॉप-5
आप सांसद संजय सिंह ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से लखनऊ में भेंट की, जिससे 2027 चुनाव से पहले गठबंधन की अटकलें तेज हो गईं। वहीं कर्नाटक में सीएम डीके शिवकुमार ने गौतम अडानी से मुलाकात की, जिसमें बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट पर चर्चा का अनुमान है। हालांकि शिवकुमार ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया।
डीके शिवकुमार से मिले गौतम अडानी, बंद कमरे में क्या हुई बात? कर्नाटक CM ने सब बताया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को अपने सदाशिवनगर स्थित आवास पर अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर सियासत तेज हो गई है। आइये जानते हैं कि मुख्यमंत्री ने इस पर क्या कहा...
Gautam Adani meets DK Shivakumar: अडानी ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार 23 अगस्त को राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) बेंगलुरु के 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) बनकर उभरी है।हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और अडानी ग्रुप की ओर से इस मुलाकात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सामने आए वीडियो में शिवकुमार को गौतम अडानी को विदा करते हुए देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, अडानी आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर की यात्रा के बाद एयरपोर्ट जाते समय मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे।टनल रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी है मुलाकात?गौतम अडानी और सीएम डीके शिवकुमार की मुलाकात का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिसंबर 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) की ओर से दिसंबर 2025 में खोली गई फाइनेंशियल बिड्स से पता चलता है कि AEL ने दोनों पैकेजों में L1 रही थी यानी सबसे कम बोली लगाई थी।राज्य सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये रखी थी। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज ने करीब 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यानी कंपनी की बोली सरकारी अनुमान से लगभग 4,600 करोड़ रुपये ज्यादा है। सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) B-SMILE ने 29 मई को राज्य सरकार को फाइल भेजी थी। उसी दिनराज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।अभी नहीं मिला है ठेकाहालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज के सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनने के बावजूद अभी तक उसे आधिकारिक तौर पर प्रोजेक्ट का ठेका नहीं दिया गया है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी 'मनीकंट्रोल' को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाली विशेष उद्देश्य कंपनी (SPV) B-SMILE ने 29 मई को संबंधित फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अडानी की बोली परियोजना के स्वीकृत अनुमान से निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण अब कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो गई है।शिवकुमार के लिए अहम है ये प्रोजेक्टबेंगलुरु का यह टनल रोड प्रोजेक्ट डीके शिवकुमार की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल माना जाता है। बेंगलुरु विकास मंत्री रहते हुए भी उन्होंने इसप्रोजेक्ट का लगातार समर्थन किया था। हालांकि, प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक संगठनों और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की ओर से विरोध भी सामने आया है। आलोचकों ने इसकी लागत,ट्रैफिक पर प्रभाव और बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।30 साल तक निजी कंपनी को मिलेगा संचालन अधिकारप्रस्तावित टनल रोड को संशोधित Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। इस मॉडल के तहत कर्नाटकसरकार प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप सेमुमकिन बनाने के लिए 'वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding)' देगी। सरकार प्रोजेक्ट की लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उठाएगी। जबकि प्राइवेट कंपनी लगभग 30 साल की अवधि में कंसेशन व्यवस्था के जरिए अपना निवेश वसूल करेगी।अडानी ग्रुप की कर्नाटक में मौजूदगीअडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से ही मजूत बिजनेस मौजूदगी है। ग्रुप की कंपनियों ने राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में निवेश किया है। इसके अलावा, अडानी ग्रुप उडुपी थर्मल पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करता है।राहुल गांधी के बयानोंसे बढ़ी नजरअडानी की शिवकुमार से मुलाकात राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार अडानी ग्रुप को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।सरकार पर उद्योग समूह को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। राहुल गांधी कई अडानी से जुड़े प्रोजेक्टों, जिनमें ग्रेट निकोबार परियोजना भी शामिल है,लेकिन आपत्ति जता चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और अडानी ग्रुप दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।ऐसे में अडानी की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात और बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट में उनकी कंपनी के L1 bidder बनने का घटनाक्रम अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खासा ध्यान खींच रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में टनल रोड प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा हुई या नहीं।गुजरात में जैन मंदिर पहुंचे थे अडानीइस मुलाकात से पहले गौतम अडानी गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ पहुंचे थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी भी थीं। अडानी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। Bengaluru, Karnataka: Adani Group Chairman Gautam Adani leaves the residence of Chief Minister DK Shivakumar after meeting him pic.twitter.com/z9gjSc5HHO— IANS (@ians_india) August 23, 2026 अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की जानकारीशेयर करते हुए कहा था कि उन्हें महुडी जैन तीर्थ के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा के संदेश का उल्लेख करते हुए सभी के शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब जैन समुदाय पर्युषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है। इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होगा।ये भी पढ़ें- Raksha Bandhan Gift: रक्षाबंधन पर यूपी की महिलाओं को सीएम योगी का बड़ा तोहफा, एक साथी के साथ दो दिन बस में फ्री सफर कर सकेंगी महिलाएं
IAS अधिकारी गंगवार के 'गायब' होने पर कर्नाटक के मंत्री ने खोला राज!
बीते दिनों KPSC घोटाले के बीच IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के गायब होने की खबरें आ रही थी. कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने बताया कि पिता की सेहत खराब होने के कारण गंगवार अपने घर गए हैं.
दूनघाटी और शिवालिक की पहाड़ियों में फूल की ऐसी प्रजाति मिली है, जो अभी तक केवल कर्नाटक में पाई जाती थी।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि “Homemaker” (गृह निर्माता) शब्द केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। अदालत के मुताबिक, जो भी व्यक्ति अपने परिवार की देखभाल करता है और घर की जिम्मेदारियां निभाता है, उसे गृह निर्माता माना जा सकता है। इसमें पुरुष, नौकरीपेशा लोग, पेशेवर और परिवार का खर्च […] The post Karnataka High Court का बड़ा फैसला: ‘Homemaker’ सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं, पुरुष और नौकरीपेशा लोग भी हो सकते हैं appeared first on https://rajsattaexpress.com .
कावेरी विवाद को लेकर SC पहुंचा तमिलनाडु, कर्नाटक ने जल संकट को बताया गंभीर
तमिलनाडु ने अदालत को बताया कि कर्नाटक ने सिंचाई के लिए पानी छोड़ना शुरू कर दिया है, लेकिन तमिलनाडु को अभी तक उसके हिस्से का पानी नहीं मिला है. इससे खेती-किसानी पर गंभीर असर पड़ रहा है.
मेरी जान तिरंगा है... आजादी के रंग में नहाया देश, कश्मीर से कर्नाटक तक जश्न
80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में जश्न की अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं. दिल्ली से लेकर कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर तक लोगों ने अपने-अपने अंदाज में आजादी का पर्व मनाया. इंडिया गेट तिरंगे के रंगों में रोशन हुआ, जबकि विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन किया गया.
Karnataka AI Education: कर्नाटक सरकार ने स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कोडिंग को शामिल करने की पहल की है।
Karnataka में RSS शाखाएं कैसे लगेंगी, कांग्रेस सरकार ला रही नया कानून। DK Shivakumar। Priyank Kharge
क्या कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं पर बैन लगने वाला है? मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने एक ऐसा बिल कैबिनेट से पास किया है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है
Teacher Vacancy: सरकारी स्कूलों में 15,000 टीचर पदों पर बंपर भर्ती, TET पास 18 अगस्त से करें आवेदन
Sarkari Teacher Bharti 2026: कर्नाटक में 15,000 ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन 18 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे हैं। योग्य उम्मीदवार schooleducation.karnataka.gov.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।
GPSTR Recruitment 2026: 15000 स्कूल टीचर पदों पर निकली भर्ती, जानें डिटेल्स और करें आवेदन
pc: Safety Course at NISHE कर्नाटक स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी डिपार्टमेंट ने 12 अगस्त को ग्रेजुएट प्राइमरी स्कूल टीचर जॉब्स के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। रिक्रूटमेंट के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस 18 अगस्त से शुरू होगा। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव में ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर (GPT), असिस्टेंट मास्टर (AM), प्राइमरी स्कूल टीचर (PST), फिजिकल एजुकेशन टीचर (PET), कंप्यूटर साइंस टीचर (CST) पोस्ट के साथ 15,000 वैकेंसी शामिल हैं। इससे 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए सरकारी प्राइमरी और हाई स्कूलों के लिए टीचर्स की भर्ती की जाएगी। इंटरेस्टेड और एलिजिबल कैंडिडेट ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ सकते हैं, देख सकते हैं कि वे एलिजिबल हैं या नहीं और schooleducation.karnataka.gov.in पर 7 सितंबर तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। ज़रूरी तारीखें: नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख: 12 अगस्त एप्लीकेशन शुरू होने की तारीख: 18 अगस्त एप्लीकेशन खत्म होने की तारीख: 7 सितंबर एप्लीकेशन मोड: ऑनलाइन फीस पेमेंट की आखिरी तारीख: 10 सितंबर एडमिट कार्ड जारी होने की तारीख: अभी अनाउंस नहीं हुई है लिखित परीक्षा की तारीख: अभी अनाउंस नहीं हुई है वैकेंसी: कुल: 15,000 GPSTR: 8,500 असिस्टेंट मास्टर (AM): 4,500 प्राइमरी स्कूल टीचर (PST): 900 फिजिकल एजुकेशन टीचर (PET): 600 कंप्यूटर साइंस टीचर (CST): 500 एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया: कैंडिडेट के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या इंस्टीट्यूशन से 12वीं, डिप्लोमा, डिग्री, ग्रेजुएशन होना चाहिए। पोस्ट के हिसाब से सब्जेक्ट की क्वालिफिकेशन की ज़रूरत जानने के लिए schooleducation.karnataka.gov.in वेबसाइट पर ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ें। कैंडिडेट भारत का नागरिक होना चाहिए। उम्र सीमा: जनरल: 21-40 साल 2A, 2B, 3A, 3B: 3 साल की छूट (43 साल तक) SC/ST: 5 साल की छूट (45 साल तक) एप्लीकेशन फीस: जनरल और पिछड़ा वर्ग: Rs 750 SC, ST और PwD: Rs 500 सिलेक्शन प्रोसेस: कॉम्पिटिटिव रिटन एग्जाम (कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट) फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट / फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (फिजिकल एजुकेशन टीचर के लिए) डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स: एजुकेशनल क्वालिफिकेशन सर्टिफिकेट और मार्कशीट TET सर्टिफिकेट (अगर लागू हो) आधार कार्ड या कोई दूसरा वैलिड पहचान का सबूत तालुक/जिले का डोमिसाइल/रेजिडेंस सर्टिफिकेट जाति सर्टिफिकेट (अगर रिजर्व्ड कैटेगरी में अप्लाई कर रहे हैं) पासपोर्ट-साइज़ फोटो ऑफिशियल नोटिफिकेशन में बताया गया कोई दूसरा डॉक्यूमेंट अप्लाई कैसे करें: कर्नाटक स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं schooleducation.karnataka.gov.in. कर्नाटक टीचर रिक्रूटमेंट 2026 एप्लीकेशन लिंक ढूंढें। वैलिड मोबाइल नंबर और ईमेल ID का इस्तेमाल करके रजिस्ट्रेशन पूरा करें। लॉग इन करें और सभी पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स भरें। ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स, फोटोग्राफ और सिग्नेचर बताए गए फॉर्मेट में अपलोड करें। ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से एप्लीकेशन फीस भरें। फाइनल सबमिशन से पहले सभी भरी हुई डिटेल्स को ध्यान से देखें। एप्लीकेशन सबमिट करें और कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करें। आगे के रेफरेंस के लिए सबमिट किए गए एप्लीकेशन का प्रिंटआउट या सॉफ्ट कॉपी रखें।
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