कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा उठाए गए सवालों का समर्थन किया है। दिग्विजय ने कहा कि संघ जैसे बड़े संगठन को भी अपने आय-व्यय, फंडिंग और कर अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। लोकतंत्र में कोई भी संस्था सवालों और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती। खरगे की बातों का समर्थन किया दिग्विजय सिंह ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि प्रियांक खरगे ने जिन मुद्दों को उठाया है, वे वही प्रश्न हैं जिन्हें वह पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक रूप से उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 22 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर RSS की वित्तीय गतिविधियों की जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की थी। पत्र में उन्होंने नागपुर के आरटीआई कार्यकर्ता मोहनीश जबलपुरे के हवाले से कहा था कि कोविड काल के दौरान RSS ने सात करोड़ से अधिक भोजन पैकेट और एक करोड़ से अधिक राशन किट वितरित करने का दावा किया था। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इस कार्य के लिए धन कहां से आया और उसका लेखा-जोखा क्या है। उन्होंने यह भी मांग की थी कि संघ के चंदे, आय-व्यय और फंडिंग स्रोतों की जांच कराई जाए तथा यदि संगठन को किसी प्रकार की कर छूट प्राप्त है तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जाए। दिग्विजय ने नवंबर 2025 में भागवत को लिखा था पत्र दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसके बाद 12 नवंबर 2025 को उन्होंने सरसंघचालक मोहन भागवत को एक और पत्र लिखा था। यह पत्र उस बयान के संदर्भ में था जिसमें मोहन भागवत ने संघ के अपंजीकृत होने की तुलना हिंदू धर्म से की थी। दिग्विजय ने अपने पत्र में कहा था कि सनातन धर्म और RSS की तुलना नहीं की जा सकती तथा कोई भी संगठन हिंदू धर्म का पर्याय नहीं हो सकता। उन्होंने पत्र में सवाल उठाया था कि देश में लाखों सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संस्थाएं कानून के तहत पंजीकृत हैं और अपने आय-व्यय का हिसाब देती हैं, फिर RSS अब तक औपचारिक रूप से पंजीकृत क्यों नहीं है। उन्होंने संघ के वित्तीय स्रोतों, संगठनात्मक ढांचे, कर दायित्वों और खर्चों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी की थी। दिग्विजय बोले: खरगे ने जो मुद्दे उठाए वो मैं कई साल से उठा रहा हूं दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रियांक खरगे ने हाल ही में मोहन भागवत को लिखे पत्र में भी लगभग यही प्रश्न उठाए हैं। खरगे ने संघ से उसकी कानूनी और संगठनात्मक स्थिति स्पष्ट करने, पदाधिकारियों और अधिकृत प्रतिनिधियों की जानकारी सार्वजनिक करने, दान और अन्य आय के स्रोत बताने, व्यय और परिसंपत्तियों का विवरण देने तथा यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या संगठन लागू कर कानूनों का पालन कर रहा है। उन्होंने यह भी पूछा है कि यदि RSS किसी कानूनी इकाई के रूप में पंजीकृत नहीं है तो वह किस संवैधानिक और कानूनी आधार पर देशभर में इतनी व्यापक गतिविधियां संचालित कर रहा है। खरगे ने अपने पत्र में सार्वजनिक कार्यक्रमों, पथ संचलनों और बड़े आयोजनों के लिए प्राप्त अनुमतियों तथा अनुपालन तंत्र की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि जिस संगठन का देशभर में इतना बड़ा प्रभाव और नेटवर्क हो, उसे पारदर्शिता और जवाबदेही के सर्वोच्च मानकों का पालन करना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह किसी संगठन के विरोध का मामला नहीं है, बल्कि संविधान के समक्ष समानता और कानून के शासन का प्रश्न है। जब देश के ट्रस्ट, धार्मिक संस्थाएं, गैर सरकारी संगठन, कंपनियां और राजनीतिक दल अपने वित्तीय स्रोतों तथा आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक करते हैं तो RSS से भी ऐसी ही अपेक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने संघ से अपनी कानूनी स्थिति, संगठनात्मक संरचना, फंडिंग, आय-व्यय और कर अनुपालन संबंधी जानकारी सार्वजनिक कर पारदर्शिता का उदाहरण प्रस्तुत करने की अपील की।
लोकायुक्त के छापों में कर्नाटक के 8 अधिकारियों से 31.11 करोड़ रुपए की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा
बेंगलूरु। कर्नाटक में एक बड़े राज्यव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में, लोकायुक्त पुलिस ने राज्य में समन्वित छापे मारे, जिसमें आठ सरकारी अधिकारियों की 31.11 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति का पता चला है। यह अभियान बेंगलूरु शहर, बेंगलूरु ग्रामीण, दावणगेरे, कलबुर्गी और चिकमगलूर सहित कई जिलों में चलाया गया। करीब 35 से अधिक […] The post लोकायुक्त के छापों में कर्नाटक के 8 अधिकारियों से 31.11 करोड़ रुपए की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा appeared first on Sabguru News .
नूंह जिले से करोड़ों रुपए की सुपारी लेकर गायब हुए कंटेनर ड्राइवर के मामले में पुलिस ने 16 घंटे के भीतर राजस्थान के चोपानकी क्षेत्र से खाली कंटेनर बरामद कर लिया है। हालांकि, कंटेनर में भरी करीब 2 करोड़ 13 लाख 51 हजार 750 रुपए मूल्य की सुपारी का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बिग स्टॉक लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के ट्रैफिक इंचार्ज विनोद जोशी ने जयसिंहपुर चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कर्नाटक के सिमोगा-सिरसी क्षेत्र से डीएस ग्रुप, नोएडा के लिए सुपारी से भरा एक कंटेनर रवाना किया गया था। ड्राइवर और वाहन का संपर्क टूटा इस कंटेनर को अंतिम बार दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे स्थित उजीना टोल प्लाजा पर ट्रेस किया गया था। इसके बाद ड्राइवर नासिर और वाहन दोनों से संपर्क टूट गया था। विनोद जोशी पानीपत के पुराना चांदनी बाग के निवासी हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने ड्राइवर नासिर सहित चार लोगों के खिलाफ गबन और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी निगरानी और लगातार छानबीन के बाद पुलिस ने राजस्थान के चोपानकी क्षेत्र से कंटेनर बरामद कर लिया। वाहन खाली मिला और उसमें लदी करोड़ों रुपये की सुपारी गायब थी। पुलिस कर रही आरोपियों की तलाश चौकी जयसिंहपुर प्रभारी सूबे सिंह ने बताया कि शिकायत मिलते ही पुलिस टीम गठित कर कंटेनर की तलाश शुरू कर की गई। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता और विभिन्न स्थानों पर जांच के आधार पर कंटेनर बरामद किया गया। सुपारी और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सुपारी को कहीं और ठिकाने लगाया है। मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा। पुलिस विभिन्न संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
लापता करण-अर्जुन की मां को आया फोन, कर्नाटक के अस्पताल में हैं बच्चे
धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता दो भाई करण और अर्जुन का 12 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बच्चों की मां डॉली देवी लगातार उनकी तलाश में भटक रही हैं और पुलिस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रही हैं। इसी बीच शुक्रवार रात करीब आठ बजे 9505487735 नंबर से एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को कर्नाटक से बताते हुए कहा कि बच्चों का एक्सीडेंट हो गया है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। इस सूचना के बाद पूरा परिवार परेशान है। पुलिस उस मोबाइल नंबर की जांच कर रही है। डॉली देवी का कहना है कि उनके दोनों बेटे 12 दिनों से लापता हैं, लेकिन अब तक पुलिस उन्हें ढूंढ़ने में सफल नहीं हो सकी है। उनका आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई और उन्हें खुद बच्चों की तलाश करने की बात कही। अखबारों में खबर छपने के बाद ही पुलिस ने कुछ सक्रियता दिखाई। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने धुर्वा और जगन्नाथपुर क्षेत्र से लापता बच्चों करण, अर्जुन और शिवा के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आदित्य साहू ने कहा कि परिजनों के बयान और थाने में दर्ज प्राथमिकी के विवरण में विरोधाभास दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि लापता बच्चों की बरामदगी की मांग को लेकर भाजपा ने शनिवार शाम छह बजे मशाल जुलूस निकालने का आह्वान किया है। पार्टी का कहना है कि यदि इसके बाद भी बच्चों का पता नहीं चलता है तो आगे की आंदोलनात्मक रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा नेता परिजनों से मिले, बरामद करने की मांग पर आज मशाल जुलूस
झारखंड के गढ़वा से दुर्ग के लिए चलने वाली रायल बस में सवार 17 लड़कियों एवं तीन लड़कों को ह्यूमन ट्रेफिकिंग की आशंका पर अंबिकापुर के बस स्टैंड में आईसीपीएस, चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम ने रोक लिया। इनमें से कम से कम पांच नाबालिग लड़कियां शामिल हैं। सभी ने कर्नाटक में काम करने के लिए जाना बताया है, हालांकि वे यह नहीं बता सके कि उन्हें जाना कहां था। सभी से पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, गढ़वा से अंबिकापुर के लिए चलने वाली रॉयल बस में बीती रात 17 लड़कियां एवं तीन लड़के सवार होकर अंबिकापुर आ रहे थे। इनमें से कई नाबालिग लड़कियां भी शामिल हैं। लड़कियों की गतिविधि एवं बातचीत संदिग्ध लगने पर बस के एक सवार ने एमएसएसव्हीपी संस्था के मनोज भारती को इसकी सूचना दी। संयुक्त टीम ने बस से उतारा, सभी से पूछताछ ह्यूमन ट्रेफिकिंग की आशंका पर जिला बाल संरक्षण ईकाई से विक्रमांत, चाइल्ड लाइन दिलीप जगते सहित कोआर्डिनेटर, एमएसएसव्हीपी के मनोज भारती की टीम पुलिस बल के साथ बस स्टैंड पहुंच गई। बस स्टैंड में बस के पहुंचते ही टीम ने बस में चढ़कर सवार लड़कियों से बात की और सभी को अंबिकापुर में उतार लिया गया। बस में सवार एक युवक ने बताया कि वह कर्नाटक में पहले भी काम करने जा चुका है। इस बार वह जींस कंपनी में पैकिंग का काम करने जा रहे हैं। युवक ने बताया कि वह पहली बार जींस कंपनी में काम करने जा रहा है। दूसरी कंपनी में उसे काम करने के प्रतिदिन उन्हें 500 रुपये मिलते थे। टीम में सिर्फ एक महिला मिली जो ज्यादा उम्र की है। वह अपने बेटे व बेटी के साथ कर्नाटक जा रही थी। अन्य 15 लड़कियों में कम से कम पांच नाबालिग हैं। दूसरे व्यक्ति ने कटाया टिकट पूछताछ में लड़कियां यह भी नहीं बता सकीं कि वे कर्नाटक के किस शहर में काम करने जा रही हैं। कुछ लड़कियों ने कहा कि वे निजी घरों में काम करने जा रही हैं। उन्हें काम के बदले अच्छी पगार दिलाने का आश्वासन दिया गया है। लड़कियों और उनके परिजनों से जिन लोगों ने बात की है, उनका पता नहीं चला। वे बस में सवार नहीं मिले। सभी ने बताया कि उनकी टिकट भी दूसरे युवक ने कटवाई थी। वह भी बस में सवार नहीं हुआ। सभी को रायपुर से कर्नाटक के लिए निकलना था। सभी से की जा रही पूछताछ-प्रधान जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी जेआर प्रधान ने बताया कि बस में कुल 20 लोग सवार थे। इनमें तीन लड़के, एक महिला और 16 लड़कियां शामिल हैं। आधार कार्ड के हिसाब से कम से कम पांच लड़कियां नाबालिग हैं। अन्य के उम्र की तस्दीक की जा रही है। जेआर प्रधान ने कहा कि चूंकि उन्हें ले जाने वाले का भी पता नहीं हैं। इस कारण चाइल्ड लाइन की टीम सभी से जानकारी एकत्र कर रही है। यह प्रकरण पुलिस में जाएगा तो पता चलेगा कि वे गिरोह के माध्यम से जा रहे थे या स्वेच्छा से जा रहे थे।
तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के वन विभाग 7 और 8 मार्च को नीलगिरी क्षेत्र में एक समन्वित गिद्ध गणना करेंगे

