हिंदू मंदिरों के पैसे के प्रबंधन पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने जारी किए निर्देश
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक चंदा चोरी से जुड़े मामले में फ़ैसला दिया है, जिसमें दान की व्यवस्था को केंद्रीयकृत करने और मजबूत निगरानी की व्यवस्था बताई गई है.
Vande Mataram Politics: कर्नाटक सरकार का आदेश, सरकारी कार्यक्रमों में बस दो छंद!
कांग्रेस और बीजेपी के बीच राष्ट्रीय गीत को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच, कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने आदेश जारी किया है कि सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएं। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों और केंद्र सरकार के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के सभी छह पद गाए जाएंगे। इसे भी पढ़ें: भारत और भगवा का अपमान बर्दाश्त नहीं, Gerua Samman Yatra के दौरान राष्ट्रविरोधी तत्वों पर जमकर बरसे Suvendu Adhikari यह आदेश केंद्र सरकार के उस निर्देश के बीच आया है जिसमें सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सभी छह पद गाना अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य सरकार के अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए, कर्नाटक सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे गीत के केवल शुरुआती दो पदों को ही गाएं। जिस तरह सोनिया गांधी ने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान 'वंदे मातरम' के सभी छह पद गाए जाने पर आपत्ति जताई थी, ठीक उसी तरह उनके INDIA गठबंधन के सहयोगी, NC नेता फारूक अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, श्रीनगर में आयोजित पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पूरा गाना बजने के दौरान खड़े रहे। इसे भी पढ़ें: BRICS पर Chidambaram को BJP का करारा जवाब, कहा- कांग्रेस को हो रहा 'FOMO' और 'नाराज़ फूफा' जैसी बौखलाहट गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब्दुल्ला परिवार के सदस्य गाने के पूरे तीन मिनट 10 सेकंड के दौरान खड़े रहे। राष्ट्रीय गीत को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने इसके पूरे गायन पर आपत्ति जताई और साफ़ तौर पर नाराज़ दिखीं; जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि गायक पहले दो छंदों से आगे बढ़ गए हैं, उन्होंने इसे रोकने का इशारा किया। 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के एक प्रस्ताव के बाद गीत के छोटे संस्करण को अपनाया गया था, और पार्टी का कहना था कि ऐसा सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए किया गया था। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Marital Rape मामले पर Supreme Court में जबरदस्त घमासान, Parliament के पाले में आई गेंद!
वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग पर चल रही बहस अब सुप्रीम कोर्ट के सामने उस बुनियादी सवाल तक पहुंच गई है, जहां अदालत को यह तय करना है कि क्या वह मौजूदा आपराधिक कानून की स्पष्ट सीमा को बदलकर एक नया अपराध लागू कर सकती है। बुधवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसी सवाल पर गंभीर टिप्पणी की और केंद्र सरकार की इस दलील से सहमति जताई कि इस अत्यंत संवेदनशील और जटिल मुद्दे पर अंतिम फैसला संसद को करना चाहिए। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 20(1) का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब मौजूदा कानून किसी कृत्य को अपराध के रूप में परिभाषित ही नहीं करता, तो उसके लिए किसी व्यक्ति को आपराधिक रूप से दंडित कैसे किया जा सकता है। हम आपको बता दें कि अनुच्छेद 20(1) स्पष्ट करता है कि किसी व्यक्ति को उस समय लागू कानून के उल्लंघन के अलावा किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसे भी पढ़ें: Karnataka Case: 'सेक्स स्लेव' फैसले को चुनौती, Supreme Court में Personal Liberty पर बहस मौजूदा कानून में यही सबसे महत्वपूर्ण पेच है। भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में Exception 2 के तहत पत्नी के साथ पति द्वारा यौन संबंध को बलात्कार की परिभाषा से बाहर रखा गया था। पत्नी की उम्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 2017 के फैसले के बाद यह सीमा 18 वर्ष से संबंधित हो गई। अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63(2) में भी इसी प्रकार का अपवाद मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद अहम सवाल उठाया कि जब कानून ने किसी आचरण को अपराध की श्रेणी में रखा ही नहीं है, तो अदालत उसे अपराध मानकर अभियोजन की अनुमति कैसे दे सकती है? पिछली सुनवाई में भी पीठ ने पूछा था कि क्या संवैधानिक अदालतें खुद आपराधिक कानून को दोबारा लिखकर नया अपराध बना सकती हैं। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामला सामाजिक, कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत जटिल है और इसका समाधान संसद के स्तर पर होना चाहिए। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि यदि सरकार को लगता है कि मौजूदा कानून में समस्या है, तो उसे संसद की मंजूरी के साथ कानून को दोबारा तैयार करना चाहिए। यानी सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सीमा रेखा खींच दी है कि कानून की व्याख्या अदालत कर सकती है, लेकिन संसद द्वारा स्पष्ट रूप से बनाए गए आपराधिक प्रावधान को बदलकर नया अपराध बनाना अलग प्रश्न है। हालांकि अदालत ने महिलाओं की पीड़ा को किसी भी तरह कमतर नहीं आंका। पीठ ने साफ कहा कि पति द्वारा उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध के लिए मजबूर की गई महिला “निश्चित रूप से पीड़िता” है। असली सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में पति पर बलात्कार का मुकदमा चलाने का कानूनी आधार क्या होगा, जब वर्तमान कानून स्वयं वैवाहिक संबंध के लिए अपवाद प्रदान करता है। हम आपको बता दें कि कर्नाटक से जुड़े एक मामले ने इस बहस को और पेचीदा बना दिया है। वहां हाई कोर्ट ने ऐसे पति के खिलाफ अभियोजन की अनुमति दी थी जिस पर पत्नी के साथ लगभग “सेक्स स्लेव” जैसा व्यवहार करने का आरोप था। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले को पहले सुनने पर विचार कर रहा है, ताकि यह देखा जा सके कि मौजूदा कानून की व्याख्या के जरिए अभियोजन संभव है या नहीं। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि विवाह किसी महिला की शारीरिक स्वायत्तता और सहमति के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नुंडी ने कहा कि अदालत को नया अपराध बनाने की जरूरत नहीं है; बलात्कार पहले से परिभाषित अपराध है और सवाल केवल इतना है कि क्या पतियों को उससे संवैधानिक संरक्षण देना उचित है। उधर, केंद्र सरकार इसके विपरीत विवाह की भारतीय सामाजिक संरचना, आपराधिक कानून के संभावित दुरुपयोग और सबूत जुटाने की कठिनाइयों को प्रमुख आधार मान रही है। सरकार का तर्क है कि पति-पत्नी के बीच बंद दरवाजों के भीतर सहमति या असहमति साबित करना सामान्य यौन अपराधों की तुलना में अधिक जटिल होगा। वैवाहिक विवादों में गंभीर आपराधिक धाराओं के इस्तेमाल की आशंका भी सरकार की चिंता का हिस्सा है। केंद्र सरकार का यह भी कहना है कि पश्चिमी देशों के कानूनी मॉडल को भारत की सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। भारत में विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं, बल्कि व्यापक पारिवारिक और सामाजिक ढांचे से जुड़ी संस्था है। इसी आधार पर सरकार “पश्चिमी मॉडल की अंधी नकल” से बचने की बात करती है। वहीं बहस का एक वैचारिक पक्ष भी है। दरअसल वैवाहिक बलात्कार की पश्चिमी अवधारणा को भारतीय पारिवारिक व्यवस्था पर उसी रूप में लागू करने की कोशिश भारतीय विवाह संस्था को कमजोर कर सकती है। देखा जाये तो ऐसी अवधारणाएं भारतीय सामाजिक व्यवस्था को व्यक्तिगत अधिकारों की अत्यधिक कानूनी व्याख्या के जरिए छिन्न-भिन्न कर सकती हैं। दूसरी ओर, वैवाहिक बलात्कार को अपराध मानने की मांग के पीछे भारतीय महिलाओं के अधिकार और शारीरिक स्वायत्तता से जुड़े तर्क भी हैं। फिलहाल केंद्र का रुख स्पष्ट है कि घरेलू हिंसा, क्रूरता और शारीरिक हमले जैसी मौजूदा कानूनी धाराओं के तहत पीड़ित पत्नी को संरक्षण उपलब्ध है; बलात्कार की कानूनी परिभाषा में बदलाव करना हो तो वह व्यापक सामाजिक विमर्श, विशेषज्ञों से परामर्श और संसद में बहस के बाद होना चाहिए। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की है। इसलिए अब असली लड़ाई केवल “वैवाहिक बलात्कार अपराध है या नहीं” की नहीं, बल्कि इस बड़े संवैधानिक प्रश्न की है कि भारत में आपराधिक कानून की नई सीमा कौन तय करेगा, न्यायपालिका या संसद? -नीरज कुमार दुबे
बेल्लारी चलो विरोध मार्च: भाजपा बोली, कर्नाटक सरकार को सत्ता से हटाने तक संघर्ष जारी रहेगा
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100 दिन तो सिर्फ शुरुआत है, कर्नाटक के विकास की यात्रा अभी शुरू हुई : सीएम शिवकुमार
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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर अजीत भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत (anticipatory bail) के लिए अर्ज़ी दी है। उन पर चंद्रशेखर आज़ाद रावण के बारे में की गई टिप्पणियों को लेकर SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था और इस महीने की शुरुआत में एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। भारती ने दिल्ली की ट्रायल कोर्ट के 7 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उनकी अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी खारिज कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने भारती की अर्ज़ी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया (prima facie) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध के तत्व सामने आते हैं। इसे भी पढ़ें: Karnataka Case: 'सेक्स स्लेव' फैसले को चुनौती, Supreme Court में Personal Liberty पर बहस अदालत ने यह भी कहा कि SC/ST एक्ट की धारा 18 के तहत रोक लागू होती है और इसलिए, अग्रिम ज़मानत नहीं दी जा सकती। याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट ने कहा, ऊपर बताई गई वजहों से, यह अदालत मानती है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध के तत्व सामने आते हैं। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर ने नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के सिलसिले में 7 सितंबर को यह आदेश पारित किया था। यह मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कार्यक्रम के दौरान भारती द्वारा कथित तौर पर दिए गए बयानों से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कार्यक्रम के दौरान की गई कुछ टिप्पणियां जातिवादी थीं और अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों के प्रति अपमानजनक थीं। इसे भी पढ़ें: NIA का Engineer Rashid की Bail का कड़ा विरोध, High Court ने पूछा- क्या सशर्त रिहा करें? भारती ने गिरफ़्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए कहा था कि आरोपों से SC/ST एक्ट के तहत कोई अपराध नहीं बनता है। उनकी तरफ़ से यह तर्क दिया गया कि उनकी बातों को उनके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए और हिरासत में लेकर पूछताछ की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि मामले का आधार बनने वाली जानकारी पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। राज्य और शिकायतकर्ता ने उनकी अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी का विरोध किया था। FIR, ट्रांसक्रिप्ट और अदालत के सामने पेश की गई अन्य सामग्री की जांच करने के बाद, ट्रायल कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है और अर्ज़ी को खारिज कर दिया।
‘जारकीहोली पर ईडी की छापेमारी को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा’, कर्नाटक भाजपा का कांग्रेस पर हमला
Bengaluru, 9 सितंबर . कर्नाटक के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री सतीश जारकीहोली के आवास और अन्य ठिकानों पर Enforcement Directorate (ईडी) की छापेमारी को लेकर Wednesday को राज्य भाजपा ने कांग्रेस Government पर निशाना साधा. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ कांग्रेस इस कार्रवाई को बेवजह Political रंग देने की कोशिश कर रही ... Read more
'जारकीहोली पर ईडी की छापेमारी को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा', कर्नाटक भाजपा का कांग्रेस पर हमला
'जारकीहोली पर ईडी की छापेमारी को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा', कर्नाटक भाजपा का कांग्रेस पर हमला
पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र के बासमती प्रधान टोला के रहने वाले मंटू कुमार पाल की कर्नाटक में हत्या कर दी गई है। बुधवार को युवक का शव उसके गांव लाया गया, जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के परिजन हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। मंटू कुमार पाल के भाई हरे कृष्ण पाल ने बताया कि 30 साल का मंटू शादीशुदा था। वह 30 अगस्त को गांव के ही विजय पाल के कहने पर रोजगार के लिए ओडिशा जाने की बात कहकर कर्नाटक गया था। हरे कृष्ण पाल के मुताबिक, 2 सितंबर को कर्नाटक में रहने वाले कुछ लोगों ने बताया कि मंटू गायब है। इसके बाद परिवार को चिंता होने लगी। कुछ दिनों बाद कर्नाटक के सेदम पुलिस स्टेशन से खबर मिली कि मंटू कुमार पाल की हत्या कर दी गई है और परिवार आकर शव ले जाए। परिवार डर की वजह से सीधे कर्नाटक नहीं गया। उन्होंने अमड़ापाड़ा थाना में घटना की जानकारी दी। अमड़ापाड़ा पुलिस ने कर्नाटक के सेदम पुलिस स्टेशन से संपर्क कर पूरी जानकारी ली। कर्नाटक पुलिस ने बताया कि परिजनों के पहुंचने के बाद ही शव भेजा जाएगा। इसके बाद अमड़ापाड़ा थाना ने कर्नाटक पुलिस को ईमेल भेजा। बुधवार को मंटू का शव उसके गांव भेजा गया, जहां परिवार ने उसका अंतिम संस्कार किया। हरे कृष्ण पाल ने बताया कि उनके भाई की बेरहमी से हत्या की गई है। उन्होंने पुलिस से हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। मृतक के माता-पिता की मौत साल 2022 में हो चुकी है। मंटू की शादी 7 से 8 साल पहले हुई थी और उसका एक 5 साल का बेटा भी है।
कावेरी जल विवाद: 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के आदेश के खिलाफ Supreme Court जाएगी कर्नाटक सरकार
Bengaluru, 9 सितंबर . कर्नाटक Government ने कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के उस आदेश को Supreme Court में चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें राज्य को तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 6,000 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने का निर्देश दिया गया है. राज्य के जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ... Read more
कावेरी जल विवाद: 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी कर्नाटक सरकार
कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया...
घायल तेंदुए ने रेस्क्यू टीम पर किया हमला: कर्नाटक में हाईवे पर घायल पड़ा था, वीडियो में देंखे भीड़ के शोर से हुआ आक्रामक; कर्मचारी घायल
भाजपा विधायक का नाम सुनते ही भड़क गए कर्नाटक के मंत्री, गालियां दे बोले- चप्पल से पीटो
कुछ किसान सिंचाई के लिए पानी की मांग को लेकर कर्नाटक के मंत्री मल्लिकार्जुन हरिहर के पास पहुंचे, जहां उन्होंने बताया कि भाजपा विधायक ने मंत्री के पास जाने की सलाह दी है। इस पर वे भड़क गए और गालियां देते हुए कहा कि उन्हें चप्पल से पीटो।
कर्नाटक के मंत्री जरकीहोली के ठिकानों पर ईडी की रेड: सांसद बेटी के परिसर भी खंगाले; कार्रवाई की वजह क्या?ED raids satish jarkiholi priyanka jarkiholi karnataka
दक्षिण भारत में बदला मौसम, आंध्र में गरज-चमक, केरल में उमस के बाद बारिश; कर्नाटक में मौसम सामान्य |
दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है, जहां आंध्र प्रदेश में तेज हवाओं और आंधी-तूफान की चेतावनी है, वहीं केरल में उमसभरी गर्मी के बाद बारिश का अनुमान जताया गया है।
Siddhartha Vihar Trust मामले में Karnataka High Court ने निचली अदालत के आदेश पर जताई आपत्ति
बेंगलुरु, आठ सितंबर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक सत्र अदालत के उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार और सार्वजनिक पद के दुरुपयोग के आरोपों की जांच पर विचार करने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय जांच का निर्देश दिया गया था। इस ट्रस्ट के न्यासियों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, उनके बेटे और कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे और उनके रिश्तेदार शामिल हैं। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने बेंगलुरु के एक अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश के 11 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को आंशिक रूप से अनुमति देते हुए कहा कि अदालत से शिकायतकर्ता को एक गलत हलफनामे को ठीक करने का अवसर मिलना चाहिए था और इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175 के तहत आगे की कार्रवाई करनी चाहिए थी। उच्च न्यायालय ने हाल में जारी एक आदेश में कहा, ‘‘शिकायतकर्ता को कमी को दूर करने और अदालत के समक्ष ठीक से सत्यापित हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया जा सकता था। प्रक्रिया निस्संदेह न्याय की सहायक होती है; इसे न्याय की समाप्ति का कारण नहीं बनने दिया जा सकता।’’ यह आदेश मंगलवार को सार्वजनिक किया गया। अदालत ने माना कि हलफनामे में मौजूद कमी को ठीक किया जा सकता था और इसके कारण कार्यवाही को पूरी तरह से बीएनएसएस की धारा 223 के तहत जांच की ओर नहीं मोड़ा जाना चाहिए था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद शिकायत में जांच के लिए संदर्भ भेजे जाने की जरूरत है या नहीं, यह तय करना सत्र अदालत का काम है। यह मामला ‘लांचमुक्ता कर्नाटक वेदिके’ के अध्यक्ष विजयराघव मराठे की एक निजी शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि बैंगलोर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को नागरिक सुविधा वाली जमीनें आवंटित करने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है। शिकायत में बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत जांच का अनुरोध किया गया था। सत्र अदालत के आदेश में दर्ज शिकायत के अनुसार इस ट्रस्ट का गठन मूल रूप से 1994 में किया गया था और इसके पांच न्यासियों में मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल थे, जो राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। 2010 में एक पूरक ट्रस्ट दस्तावेज के जरिए राधाबाई एम. खरगे और उनके दो बेटों, राहुल खरगे और प्रियंक खरगे को न्यासी के तौर पर शामिल किया गया।
कांग्रेस सरकार ने वेल्लारी में भाजपा की रैली को नहीं दी अनुमति, कर्नाटक में गरमाई राजनीति
कर्नाटक के वेल्लारी में प्रशासनिक अधिकारियों ने यहां सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कालेज के मैदान में 10 सितंबर को भाजपा की जनसभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
Cauvery Dispute: Tamil Nadu को पानी देने के निर्देश के खिलाफ Supreme Court जाएगी कर्नाटक सरकार
बेंगलुरु, आठ सितंबर कर्नाटक सरकार कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के एक निर्देश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिसमें तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया है। कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चलुवरायस्वामी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कावेरी जल विनियमन समिति के उक्त आदेश को बेतुका बताया और इस पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में कावेरी नदी घाटी में पानी की आवक काफी कम हो गई है, जिससे कर्नाटक मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा है। कावेरी जल विनियमन समिति ने मंगलवार को सिफारिश की कि कर्नाटक 15 दिन तक तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करे। इसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इस निर्देश को मंजूरी दे दी। कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देशों के बाद और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक से पहले चलुवरायस्वामी ने पत्रकारों से कहा, हमारे अधिकारियों ने समिति की बैठक में जमीनी स्थिति के बारे में मजबूती से अपनी बात रखी। तमिलनाडु ने 17,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी। लेकिन पिछले एक सप्ताह में कावेरी बेसिन में पानी की आवक काफी कम हो गई है। ऐसी संकट की स्थिति में हमारे लिए 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ना भी संभव नहीं है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं कि बिल्कुल पानी न छोड़ा जाए। मंत्री ने दिल्ली से फैसले लेने वाली इन संस्थाओं के काम करने के तरीके की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं जमीनी स्थिति को समझने में सक्षम नहीं हैं। चलुवरायस्वामी ने कहा कि सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय जाने का फैसला करने से पहले सरकार मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। उन्होंने कहा, ...हम मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। सरकार उच्चतम न्यायालय में कल ही याचिका दायर करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
हरेकला हजब्बा को जारी नोटिस पर कर्नाटक सीईओ का स्पष्टीकरण, नाम की गड़बड़ी हुई दूर
Bengaluru, 8 सितंबर . कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने Tuesday को स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान पद्मश्री सम्मानित हरेकला हजब्बा को जारी किया गया नोटिस मतदाता अभिलेखों में उनके नाम से जुड़ी विसंगति के कारण भेजा गया था. उन्होंने कहा कि इस मामले का अब समाधान कर लिया गया ... Read more
जीएसएलवी-एफ17 मिशन की सफलता पर कर्नाटक सरकार ने इसरो टीम को सराहा
Bengaluru, 8 सितंबर . कर्नाटक के लघु सिंचाई और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अजय धर्म सिंह ने Tuesday को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन से मुलाकात की और हाल ही में सफल रहे जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन के लिए उन्हें बधाई दी. इसरो के वैज्ञानिकों इंजीनियरों और तकनीकी ... Read more
Video: घायल तेंदुए के पास पहुंचते ही बदला उसका मिजाज, अधिकारी पर झपटा जानवर, देखें पूरा वीडियो
कर्नाटक के दावणगेरे में एक घायल तेंदुए को बचाने पहुंची वन विभाग की टीम के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन उस वक्त मुश्किल हो गया, जब हालात अचानक उनके काबू से बाहर होते नजर आए। हाईवे पर कार की चपेट में आने के बाद तेंदुआ घायल मिला था और टीम उसे सुरक्षित तरीके से वहां से हटाने में जुटी थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अगले ही पल तेंदुए ने ऐसी हरकत कर दी, जिससे मौके पर मौजूद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें रेस्क्यू के दौरान हुआ पूरा वाकया देखा जा सकता है।दवा का असर होने से पहले ही हुआ हमलातेंदुए को काबू में करने के लिए टीम ने ट्रैंक्विलाइजर दिया, लेकिन दवा का असर पूरी तरह होने में अभी वक्त था। इसी दौरान जानवर अचानक सक्रिय हो गया और पास खड़े एक वन अधिकारी पर झपट पड़ा। तेंदुए के हमले से अधिकारी जमीन पर गिर गए। अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद टीम के सदस्य भी कुछ पल के लिए सकते में आ गए।साथियों ने तुरंत संभाली स्थितिइस घटना का वीडियो एक्स पर Nagarjun Dwarakanath नाम के यूजर ने शेयर किया है। फुटेज में तेंदुए को अधिकारी की ओर छलांग लगाते हुए देखा जा सकता है। अधिकारी के गिरते ही उनके साथी तुरंत मदद के लिए आगे बढ़े।उन्होंने डंडे की मदद से जानवर का ध्यान दूसरी तरफ करने की कोशिश की। मौका मिलते ही अधिकारी उठकर सुरक्षित स्थान की ओर चले गए। इसके बाद तेंदुआ भी सड़क किनारे घास वाले हिस्से की ओर चला गया। LEOPARD ATTACKS FOREST OFFICIAL DURING RESCUE OPERATION IN KARNATAKAA leopard that was hit by a car on a highway in Davangere attacked a Forest Department official during a rescue operation.Forest officials had reached the spot and tranquillised the animal. However, before… pic.twitter.com/fqqfC3uPVm— Nagarjun Dwarakanath (@nagarjund) September 8, 2026 ऑपरेशन को पूरा करने में जुटी रही टीमहमले के बाद भी वन विभाग के कर्मचारियों ने धैर्य बनाए रखा। स्थिति सामान्य होने पर उन्होंने दोबारा जानवर को सुरक्षित तरीके से संभाला और उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। तेंदुए को कार की टक्कर से चोटें आई थीं, इसलिए विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा है।कुछ सेकंड में बदल गया पूरा माहौलयह घटना बताती है कि जंगली जानवरों के साथ काम करने वाली टीमों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। घायल होने के बावजूद तेंदुआ पूरी तरह शांत नहीं था और दवा का असर पूरा होने से पहले उसकी प्रतिक्रिया ने खतरा बढ़ा दिया।नीलकुरिंजी के फूलों से बैंगनी हुईं मुन्नार की पहाड़ियां, 12 साल बाद क्यों खिलता है ये दुर्लभ फूल?
कर्नाटक पुलिस द्वारा बिहार के वैशाली से दो युवकों को बिना ट्रांजिट रिमांड के ले जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
भाजपा-जेडीएस विधायकों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी कर रही कर्नाटक सरकार: नारायणस्वामी
Bengaluru, 7 सितंबर . कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी ने Monday को कांग्रेस Government पर सूखा प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा में विपक्ष के प्रतिनिधित्व वाले विधानसभा क्षेत्रों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया. विधान सौधा के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे जेडी (एस) विधायक शरणगौड़ा कंदकुर को ... Read more
न डिग्री-न रजिस्ट्रेशन फिर भी इलाज, कर्नाटक में 582 फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई
कर्नाटक में 2024-2026 के बीच 582 फर्जी डॉक्टरों की पहचान की गई है, जिनमें कलबुर्गी में सर्वाधिक और बेंगलुरु में 16 मामले शामिल हैं।
भिवानी के बेटों ने कर्नाटक में आयोजित YAI यूथ एंड जूनियर मल्टीक्लास चैंपियनशिप 2026 में 2 मेडल जीते। भिवानी के गांव कसुंभी निवासी विनय ने गेम सेलिंग टेक्नो अंडर-15 प्रतियोगिता में भाग लिया और गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके अलावा अंडर-15 गेम सेलिंग टेक्नो प्रतियोगिता में भास्कर शर्मा ने सिल्वर मेडल जीता। दोनों युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो पदक अपने नाम किए है। मेडल जीतकर गांव और जिले का नाम रोशन किया। दोनों खिलाड़ी काफी अभ्यास करते हैं- कोच कोच नितिन ने कहा कि दोनों खिलाड़ी काफी अभ्यास करते हैं और पूरी लग्न व मेहनत के साथ सीखने के जज्बे के साथ लगे रहते हैं। इसी की बदौलत वे यहां इस स्तर तक पहुंच पाए है। उम्मीद है कि दोनों खिलाड़ी आगे भी इसी तरह अपने खेल का प्रदर्शन दिखाते रहेंगे और मेडल अपने नाम करते रहेंगे। दोनों का खेल के प्रति रुझान दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर अंकुरम पब्लिक स्कूल कसुंभी के डायरेक्टर कर्मवीर शर्मा ने कहा कि दोनों का खेल के प्रति खासा रुझान है। खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी अच्छे है। इस उपलब्धि के बाद खुशी का माहौल है। साथ ही सभी ने दोनों खिलाड़ियों के उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी पहले भी कई मेडल अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि विनय व भास्कर शर्मा आगे भी इसी तरह मेहनत के बल पर मेडल जीतते रहेंगे। हम चाहते है कि आसपास के और भी बच्चे इस गेम से जुड़े व अपने भविष्य को संवारे।
कांग्रेस हाईकमान ने रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का नया प्रभारी नियुक्त किया है, साथ ही वे कर्नाटक के प्रभारी भी बने रहेंगे। यह नियुक्ति कर्नाटक में उनकी सफल रणनीति और केंद्रीय नेतृत्व में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
कांग्रेस ने शनिवार को बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए कई राज्यों के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के नए प्रभारी नियुक्त किए हैं
Karnataka Minister Brasavaraj Rayareddy ने क्यों की Islam की तारीफ, बीजेपी ने मांग लिया इस्तीफा!
कर्नाटक में Basavaraj Rayareddy Statement को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री Basavaraj Rayareddy पर आरोप है कि उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान Islam को बाकी सभी धर्मों से श्रेष्ठ बताया और इसे वैज्ञानिक धर्म बताया
Karnataka Government ने RSS के पथ संचलन में शामिल दो Teachers को क्यों किया सस्पेंड? Priyank Kharge
कर्नाटक में RSS के पथ संचलन में शामिल होना दो सरकारी शिक्षकों को भारी पड़ गया है। शिक्षा विभाग ने RSS कार्यक्रम में शामिल होने को सरकारी सेवा के आचरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए दोनों शिक्षकों को विभागीय जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है।
Karnataka High Court ने क्यों कहा- Parents की सेवा करना बहू की जिम्मेदारी नहीं? Married Woman
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान शादीशुदा महिलाओं के अधिकारों को लेकर बेहद अहम टिप्पणियां की हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पति अपनी पत्नी को घर का काम करने या अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता और ना ही उस पर हुक्म चला सकता है।
Karnataka Teacher recruitment 2026: 900 पदों पर निकली भर्ती, इस तरह करें आवेदन
pc: kalingatv कर्नाटक के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य भर में सामान्य कन्नड़ टीचरों के 900 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए हैं। ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। चुने गए कैंडिडेट्स को अलग-अलग एजुकेशनल जिलों में क्लास 1 से 5 तक के प्राइमरी स्कूलों में स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए पोस्ट किया जाएगा। योग्य और इच्छुक कैंडिडेट्स को एप्लीकेशन जमा करने से पहले अपने जिले के लिए लागू नोटिफिकेशन देखना होगा। कर्नाटक टीचर भर्ती 2026 के लिए अप्लाई करने के लिए कैंडिडेट को ज़रूरी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना होगा। एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया एप्लीकेंट को प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स (PUC) में कम से कम 50 परसेंट मार्क्स लाने होंगे और कर्नाटक राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा आयोजित ज़रूरी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना होगा। एकेडमिक एलिजिबिलिटी ज़रूरतों के हिस्से के तौर पर, कैंडिडेट्स को प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स (PUC) में कम से कम 50 परसेंट मार्क्स लाने होंगे। कैंडिडेट के पास दो साल का डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (DElEd), चार साल का बैचलर ऑफ़ एलिमेंट्री एजुकेशन (BElEd) या दो साल का डिप्लोमा इन एजुकेशन इन स्पेशल एजुकेशन होना चाहिए। एलिजिबल एग्जाम में कर्नाटक टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (KARTET) और सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) शामिल हैं। कैंडिडेट को यह पक्का करना चाहिए कि वे तय एकेडमिक और प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन पूरी करने के साथ-साथ TET की ज़रूरत भी पूरी करते हों। कर्नाटक टीचर भर्ती 2026 के लिए अप्लाई कैसे करें स्कूल शिक्षा विभाग, कर्नाटक की ऑफिशियल वेबसाइट schooleducation.karnataka.gov.in पर जाएं या डिपार्टमेंट के पोर्टल schooleducation.karnataka.gov.in/cacell के CACELL सेक्शन में जाएं डिटेल्स को ध्यान से पढ़ने के लिए नोटिफिकेशन पर क्लिक करें जिले के हिसाब से नोटिफिकेशन के अनुसार एप्लीकेशन फॉर्म भरें, और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें अगर लागू हो तो एप्लीकेशन फीस दें एप्लीकेशन फॉर्म जमा करें जमा किया गया एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट ले लें।
कावेरी विवाद को लेकर SC पहुंचा तमिलनाडु, कर्नाटक ने जल संकट को बताया गंभीर
तमिलनाडु ने अदालत को बताया कि कर्नाटक ने सिंचाई के लिए पानी छोड़ना शुरू कर दिया है, लेकिन तमिलनाडु को अभी तक उसके हिस्से का पानी नहीं मिला है. इससे खेती-किसानी पर गंभीर असर पड़ रहा है.
मेरी जान तिरंगा है... आजादी के रंग में नहाया देश, कश्मीर से कर्नाटक तक जश्न
80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में जश्न की अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं. दिल्ली से लेकर कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर तक लोगों ने अपने-अपने अंदाज में आजादी का पर्व मनाया. इंडिया गेट तिरंगे के रंगों में रोशन हुआ, जबकि विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन किया गया.
Karnataka AI Education: कर्नाटक सरकार ने स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कोडिंग को शामिल करने की पहल की है।
Karnataka में RSS शाखाएं कैसे लगेंगी, कांग्रेस सरकार ला रही नया कानून। DK Shivakumar। Priyank Kharge
क्या कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं पर बैन लगने वाला है? मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने एक ऐसा बिल कैबिनेट से पास किया है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है
Teacher Vacancy: सरकारी स्कूलों में 15,000 टीचर पदों पर बंपर भर्ती, TET पास 18 अगस्त से करें आवेदन
Sarkari Teacher Bharti 2026: कर्नाटक में 15,000 ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन 18 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे हैं। योग्य उम्मीदवार schooleducation.karnataka.gov.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।
GPSTR Recruitment 2026: 15000 स्कूल टीचर पदों पर निकली भर्ती, जानें डिटेल्स और करें आवेदन
pc: Safety Course at NISHE कर्नाटक स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी डिपार्टमेंट ने 12 अगस्त को ग्रेजुएट प्राइमरी स्कूल टीचर जॉब्स के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। रिक्रूटमेंट के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस 18 अगस्त से शुरू होगा। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव में ग्रेजुएट प्राइमरी टीचर (GPT), असिस्टेंट मास्टर (AM), प्राइमरी स्कूल टीचर (PST), फिजिकल एजुकेशन टीचर (PET), कंप्यूटर साइंस टीचर (CST) पोस्ट के साथ 15,000 वैकेंसी शामिल हैं। इससे 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए सरकारी प्राइमरी और हाई स्कूलों के लिए टीचर्स की भर्ती की जाएगी। इंटरेस्टेड और एलिजिबल कैंडिडेट ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ सकते हैं, देख सकते हैं कि वे एलिजिबल हैं या नहीं और schooleducation.karnataka.gov.in पर 7 सितंबर तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। ज़रूरी तारीखें: नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख: 12 अगस्त एप्लीकेशन शुरू होने की तारीख: 18 अगस्त एप्लीकेशन खत्म होने की तारीख: 7 सितंबर एप्लीकेशन मोड: ऑनलाइन फीस पेमेंट की आखिरी तारीख: 10 सितंबर एडमिट कार्ड जारी होने की तारीख: अभी अनाउंस नहीं हुई है लिखित परीक्षा की तारीख: अभी अनाउंस नहीं हुई है वैकेंसी: कुल: 15,000 GPSTR: 8,500 असिस्टेंट मास्टर (AM): 4,500 प्राइमरी स्कूल टीचर (PST): 900 फिजिकल एजुकेशन टीचर (PET): 600 कंप्यूटर साइंस टीचर (CST): 500 एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया: कैंडिडेट के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या इंस्टीट्यूशन से 12वीं, डिप्लोमा, डिग्री, ग्रेजुएशन होना चाहिए। पोस्ट के हिसाब से सब्जेक्ट की क्वालिफिकेशन की ज़रूरत जानने के लिए schooleducation.karnataka.gov.in वेबसाइट पर ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ें। कैंडिडेट भारत का नागरिक होना चाहिए। उम्र सीमा: जनरल: 21-40 साल 2A, 2B, 3A, 3B: 3 साल की छूट (43 साल तक) SC/ST: 5 साल की छूट (45 साल तक) एप्लीकेशन फीस: जनरल और पिछड़ा वर्ग: Rs 750 SC, ST और PwD: Rs 500 सिलेक्शन प्रोसेस: कॉम्पिटिटिव रिटन एग्जाम (कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट) फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट / फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (फिजिकल एजुकेशन टीचर के लिए) डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स: एजुकेशनल क्वालिफिकेशन सर्टिफिकेट और मार्कशीट TET सर्टिफिकेट (अगर लागू हो) आधार कार्ड या कोई दूसरा वैलिड पहचान का सबूत तालुक/जिले का डोमिसाइल/रेजिडेंस सर्टिफिकेट जाति सर्टिफिकेट (अगर रिजर्व्ड कैटेगरी में अप्लाई कर रहे हैं) पासपोर्ट-साइज़ फोटो ऑफिशियल नोटिफिकेशन में बताया गया कोई दूसरा डॉक्यूमेंट अप्लाई कैसे करें: कर्नाटक स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं schooleducation.karnataka.gov.in. कर्नाटक टीचर रिक्रूटमेंट 2026 एप्लीकेशन लिंक ढूंढें। वैलिड मोबाइल नंबर और ईमेल ID का इस्तेमाल करके रजिस्ट्रेशन पूरा करें। लॉग इन करें और सभी पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स भरें। ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स, फोटोग्राफ और सिग्नेचर बताए गए फॉर्मेट में अपलोड करें। ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से एप्लीकेशन फीस भरें। फाइनल सबमिशन से पहले सभी भरी हुई डिटेल्स को ध्यान से देखें। एप्लीकेशन सबमिट करें और कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करें। आगे के रेफरेंस के लिए सबमिट किए गए एप्लीकेशन का प्रिंटआउट या सॉफ्ट कॉपी रखें।
साउथ स्टार यश की अपकमिंग फिल्म 'टॉक्सिक' कर्नाटक में किसी भी फिल्म के लिए अब तक की सबसे बड़ी थिएट्रिकल रिलीज़ के लिए तैयार है, जहां टीम का लक्ष्य राज्य के बॉक्स ऑफिस इतिहास की सबसे बड़ी ओपनिंग हासिल करना है। यह फिल्म पूरे राज्य में रिकॉर्ड तोड़ ...
फैक्ट चेक: राम मंदिर चंदा चोरी विवाद से जोड़कर शेयर किया गया कर्नाटक का वीडियो
बूम ने पाया वायरल फुटेज कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित गली अंजनेय स्वामी मंदिर में हुई हेराफेरी से जुड़ा है, जोकि साल 2024 में चर्चा में आया था.

