'नौकरी में कन्नड़ युवाओं को प्राथमिकता दें', कर्नाटक सीएम शिवकुमार ने कंपनियों से की अपील
'कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी' से जुड़े एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुशल युवाओं को भर्ती करने की इच्छुक कंपनियां सरकार से संपर्क कर सकती हैं। सरकार उन्हें सुविधा मुहैया कराएगी।
दीपावली पर कर्नाटक सरकार की दोहरी सौगात, कर्मचारियों का डीए 18 प्रतिशत और किसानों को सूखा राहत
Bengaluru, 5 नवंबर . कर्नाटक Government ने राज्य Government के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) 15.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. यह…
दीपावली से पहले कर्नाटक सरकार ने किसानों को दी सूखा राहत की पहली किस्त, दूसरी किस्त भी जल्द होगी जारी
अमेरिका में अब्दुल अल-सैयद के पहले मुस्लिम सीनेटर चुने जाने का जश्न भारत के कर्नाटक के भटकल में भी मनाया जा रहा है, जहां उनकी पत्नी सारा का परिवार रहता है।
Bengaluru, 5 नवंबर . BJP MP तेजस्वी सूर्या ने Thursday को गृह लक्ष्मी योजना के तहत 2025 में दो महीने की किस्तों का भुगतान नहीं होने को लेकर…
'गृह लक्ष्मी योजना' के बकाया पर तेजस्वी सूर्या का कर्नाटक सरकार पर हमला, 'सर्वर नहीं, सरकार की जेब खाली'
गारंटी योजनाओं की लागत से 10 गुना ज्यादा वसूल रही है कर्नाटक सरकार: प्रल्हाद जोशी
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुफ्त गारंटी देने का दावा करते हुए बार-बार मूल्य वृद्धि करके सरकार कभी...
दिवाली से पहले कर्नाटक ने आरटीसी बसों का किराया बढ़ाया, बढ़ी हुई दरें आधी रात से लागू
Bengaluru, 4 नवंबर . कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने Wednesday को राज्य द्वारा संचालित सभी चार सड़क परिवहन निगमों (बीएमटीसी, केएसआरटीसी, एनडब्ल्यूकेआरटीसी और केकेआरटीसी) के टिकट…
मिस्र से रिश्ता, कर्नाटक का दामाद, ट्रंप की नींद उड़ाने वाले अमेरिका के अब्दुल की कहानी!
अमेरिका ने अपना पहला मुस्लिम सीनेटर चुना है। डेमोक्रेट अब्दुल अल-सैयद ने 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों में मिशिगन सीनेट सीट जीतकर इतिहास रच दिया है। इन चुनावों में पूरे देश में 'ब्लू वेव' (डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर) देखने को मिली। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका कर्नाटक से भी संबंध है। उनकी पत्नी, डॉ. सारा जुकाकू, पूर्व मैसूर राज्य सरकार के एक पूर्व मंत्री की पोती हैं। सारा का परिवार कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल से ताल्लुक रखता है, जो मंगलुरु से लगभग 140 किमी उत्तर में स्थित एक तटीय शहर है। उनके दादा, जे.एच. शम्सुद्दीन जुकाकू, एक जाने-माने वकील, शिक्षाविद और राजनेता थे। उन्होंने 1950 के दशक में तत्कालीन मैसूर राज्य सरकार में उप-वित्त मंत्री के रूप में काम किया था। संदर्भ के लिए, मैसूर राज्य का गठन तब हुआ था जब 1950 में मैसूर साम्राज्य को भारतीय गणराज्य में शामिल किया गया था। 1 नवंबर 1956 को 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम' (States Reorganisation Act) के तहत इसका विस्तार किया गया और नवंबर 1973 में आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया। इसे भी पढ़ें: US ने फिर हमले किए तो Middle East में और व्यापक होगा युद्ध, Iran की कड़ी चेतावनी जे.एच. शम्सुद्दीन जुकाकू कौन थे? जे.एच. शम्सुद्दीन जुकाकू भटकल के एक जाने-माने वकील और सार्वजनिक हस्ती थे, जो नवायात मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते थे। यह एक प्राचीन मुस्लिम व्यापारी समुदाय है, जो मुख्य रूप से अरब प्रायद्वीप, ईरान और इराक से आया था और पिछले 600 वर्षों के दौरान दक्षिण भारत के तटीय शहरों में बस गया। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, शम्सुद्दीन अपने समुदाय के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की और बाद में मंत्री चुने गए। वे 1946 में बॉम्बे लेजिस्लेटिव असेंबली (विधान सभा) के लिए चुने गए थे। बाद में, उन्होंने मैसूर लेजिस्लेटिव असेंबली में होन्नावर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 1957 तथा 1962 के चुनाव जीते। 1958 में, वे मुख्यमंत्री बी.डी. जत्ती के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त उप-मंत्री बने। इसके बाद, उन्होंने मुख्यमंत्री एस. निजलिंगप्पा के कार्यकाल में बिजली उप-मंत्री के रूप में भी काम किया। 10 अक्टूबर को अमेरिकन बाज़ार में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, शम्सुद्दीन के गृहनगर भटकल के लोगों का मानना है कि भटकल और उसके आस-पास के इलाकों में बिजली और अन्य ज़रूरी बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने में उनका बड़ा योगदान था। वे 'अंजुमन हामी-ए-मुस्लिमीन' नामक एक चैरिटेबल ट्रस्ट से भी गहराई से जुड़े हुए थे, जो इस शहर में शिक्षण संस्थान चलाता है। भटकल के रहने वाले इंजीनियर मोहम्मद तनवीर कसरकोड़, जो इस परिवार के इतिहास के बारे में जानते हैं, ने 'अमेरिकन बाज़ार' को बताया कि शम्सुद्दीन उस दौर में वकील बने थे, जब शिक्षा तक पहुँच बहुत सीमित थी। कई दशकों तक, भटकल का एक प्रमुख चौराहा 'शम्सुद्दीन सर्कल' के नाम से जाना जाता था, जो उन्हीं के नाम पर रखा गया था। हालाँकि, सड़क विकास कार्य के दौरान इस चौराहे पर बनी संरचना को बाद में हटा दिया गया, लेकिन इसका नाम आज भी पूर्व मंत्री के साथ जुड़ा हुआ है। 52 वर्ष की आयु में शम्सुद्दीन का निधन हो गया। उनके परिवार में छह बेटियाँ और चार बेटे थे। बाद में उनका परिवार भारत के अलग-अलग हिस्सों में चला गया, जिनमें से कई सदस्य बेंगलुरु में बस गए। इसे भी पढ़ें: Cabinet ने सांख्यिकी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए VISTAR योजना को दी मंजूरी भटकल से अमेरिका तक शम्सुद्दीन के बेटों में से एक, डॉ. जुकाकू एस. तैयब, उन लोगों में शामिल थे जो बेहतर मौकों की तलाश में भटकल से बाहर चले गए थे। नेफ्रोलॉजिस्ट (गुर्दा रोग विशेषज्ञ) तैयब ने 1976 में बैंगलोर मेडिकल कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। 'द अमेरिकन बाज़ार' के अनुसार, 1980 के दशक में अमेरिका जाने से पहले उन्होंने सऊदी अरब में काम किया था। उन्होंने 1984 से 1987 के बीच मिशिगन के बॉन सेकर्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन में अपनी रेजीडेंसी पूरी की, और उसके बाद 1987 से 1989 तक हेनरी फोर्ड अस्पताल में नेफरोलॉजी फेलोशिप की। इसके बाद उन्होंने डेट्रॉइट इलाके में अपनी मेडिकल प्रैक्टिस शुरू की। सारा का जन्म और पालन-पोषण मिशिगन में एक भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ था। भले ही वह अमेरिका में पली-बढ़ीं, लेकिन उनके पिता ने यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की कि उनके बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहें; इसके लिए वे उन्हें बेंगलुरु और भटकल लेकर जाते थे। 'द अमेरिकन बाज़ार' के अनुसार, परिवार का कूर्ग से भी जुड़ाव रहा, जबकि उनके परिवार के कई अन्य सदस्य बाद में बेंगलुरु में बस गए। इसे भी पढ़ें: Kanika Kapoor का बड़ा फैसला, पति Gautam Hathiramani से शादी के चार साल बाद हुईं अलग सारा जुकाकू और अब्दुल अल-सैयद की मुलाकात कैसे हुई? सारा ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में पढ़ाई की, जहाँ उनकी मुलाकात अल-सैयद से हुई। दोनों यूनिवर्सिटी के 'मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन' से जुड़े हुए थे और मई 2006 में उन्होंने शादी कर ली। 'द अमेरिकन बाज़ार' के अनुसार, जब सारा और अल-सैयद की शादी हुई, तब सारा 19 साल की थीं और अल-सैयद 21 साल के थे। सारा ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी आगे की पढ़ाई की और 2015 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 'वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स' से मेडिकल की डिग्री हासिल की। इस प्रकाशन के अनुसार, बाद में उन्होंने मनोरोग विज्ञान (साइकियाट्री) के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और 'यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन हेल्थ' में मनोरोग विभाग में एक नेतृत्वकारी पद पर भी रहीं। अल-सैयद ने अपनी पत्नी की भारतीय विरासत से अपने जुड़ाव के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की है।
New Delhi, 4 नवंबर . दीपावली का त्योहार आते ही घरों से लेकर मंदिरों तक मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. इस दिन लोग…
सिद्धारमैया स्टिंग प्रकरण का असर 2028 के चुनावों में भी कांग्रेस पर पड़ेगा : कर्नाटक भाजपा
Bengaluru, 4 नवंबर . वरिष्ठ भाजपा नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने Wednesday को दावा किया कि पूर्व Chief Minister सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन…
पीएम सूर्य घर योजना: कर्नाटक के लाभार्थी ने बिजली बिल शून्य आने पर आभार जताया
पीएम सूर्य घर योजना: कर्नाटक के लाभार्थी ने बिजली बिल शून्य आने पर आभार जताया
Ranji Trophy: KV Aneesh के शतक से कर्नाटक मजबूत, असम के खिलाफ 361 रन की बढ़त
गुवाहाटी, तीन नवंबर केवी अनीश के नाबाद 142 रन की शानदार पारी की बदौलत कर्नाटक ने मंगलवार को यहां रणजी ट्रॉफी एलीट ग्रुप बी मुकाबले के दूसरे दिन अपनी पहली पारी में पांच विकेट पर 496 रन बना लिए और असम पर 361 रन की विशाल बढ़त हासिल कर ली। अनीश ने 248 गेंदों पर 10 चौकों और दो छक्कों की मदद से कर्नाटक की पारी को मजबूती दी। अब मेहमान टीम की नजरें असम को पारी से हराने पर होंगी। कर्नाटक की ओर से मयंक अग्रवाल (72), अनीश्वर गौतम (83) और मनवंत कुमार (नाबाद 53) ने भी अर्धशतकीय पारियां खेलीं। असम की टीम पहले दिन अपनी पहली पारी में महज 135 रन पर सिमट गई थी। इसके जवाब में कर्नाटक ने दूसरे दिन दो विकेट पर 180 रन से आगे खेलना शुरू किया। एक अन्य मुकाबले में मेजबान त्रिपुरा ने पूर्व चैंपियन सौराष्ट्र के खिलाफ पहली पारी में 150 रन की बढ़त हासिल करने के बाद दूसरी पारी में चार विकेट पर 54 रन बना लिए। त्रिपुरा के पहली पारी में 268 रन के जवाब में सौराष्ट्र की टीम महज 118 रन पर आउट हो गई। त्रिपुरा की ओर से परवेज सुल्तान ने 25 रन देकर पांच विकेट झटके, जबकि संदीप सरकार ने 48 रन देकर चार विकेट हासिल किए। गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत त्रिपुरा ने दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक कुल 204 रन की बढ़त बना ली थी। आंध्र ने एक अन्य मुकाबले में पंजाब के नौ विकेट पर 529 रन के स्कोर पर पारी घोषित करने के बाद पहली पारी में बिना किसी नुकसान के 20 रन बना लिए थे। पंजाब के विशेषज्ञ बल्लेबाजों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सलिल अरोड़ा ने 144, सनवीर सिंह ने 205 और इमनजोत सिंह चहल ने 122 रन की शानदार पारियां खेलीं। एक अन्य मुकाबले में छत्तीसगढ़ के पहली पारी में 284 रन के जवाब में हैदराबाद ने पहली पारी में नौ विकेट पर 275 रन बना लिए।
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने कर्नाटक पुलिस को जनता का भरोसा खोने के प्रति किया आगाह
Bengaluru, 3 नवंबर . केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने Tuesday को Police को आगाह किया कि वे जनता का भरोसा न खोएं. उन्होंने आरोप…
कांग्रेस ने अपमानजनक टिप्पणी मामले में कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ चलाया पोस्टर अभियान
Bengaluru, 3 नवंबर . कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने Tuesday को कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बीवाई. विजयेंद्र को निशाना बनाते हुए पोस्टर अभियान शुरू किया है. उन्होंने कांग्रेस नेताओं…
‘2028 में कर्नाटक में भाजपा सरकार बनाने का लक्ष्य’, कांग्रेस पर जमकर बरसे हरीश द्विवेदी
Bengaluru, 3 नवंबर . कर्नाटक भाजपा प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी ने Tuesday को कहा कि भाजपा 2028 में राज्य में एक बार फिर Government बनाने के…
'2028 में कर्नाटक में भाजपा सरकार बनाने का लक्ष्य', कांग्रेस पर जमकर बरसे हरीश द्विवेदी
'2028 में कर्नाटक में भाजपा सरकार बनाने का लक्ष्य', कांग्रेस पर जमकर बरसे हरीश द्विवेदी
“मनीष अक्सर मुझे फोन करता था। संतोष घर पर नहीं भी रहते थे, तब भी मेरी मनीष से बात होती थी। वह कहता था कि मुझसे बात करके उसका मन बहुत खुश रहता है। संतोष को यह बात पसंद नहीं थी। मनीष ने कई बार धमकी दी थी कि अगर मैंने उससे बात करना बंद नहीं किया तो वह संतोष की हत्या कर देगा। घर पर कर्ज बहुत था, इसलिए मैंने ही संतोष को कमाने के लिए कर्नाटक भेजा था। मुझे नहीं पता था कि वहां उसकी हत्या कर दी जाएगी।” यह कहना है सहरसा नगर निगम की रहने वाली मृतक संतोष की पत्नी लक्ष्मी देवी का। 26 साल के संतोष की 20 अक्टूबर को कर्नाटक के कोप्पल में मौत हो गई थी। 31 अक्टूबर को उनका शव एंबुलेंस से सहरसा लाया गया। संतोष के परिवार ने उनके दोस्त मनीष यादव पर हत्या का आरोप लगाया है। संतोष कर्नाटक में मजदूरी करने क्यों गए थे और वापस लौटने के बाद वहां जाने से क्यों मना कर रहे थे? मनीष और संतोष के बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ और 20 अक्टूबर की शाम क्या हुआ? संतोष की पत्नी और बड़े भाई ने मनीष पर क्या आरोप लगाए, पढ़िए पूरी रिपोर्ट पहले घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें.. अब सिलसिलेवार पढ़िए, पूरी खबर… संतोष कुमार सहरसा नगर निगम के धमसैनी वार्ड नंबर 46 के रहने वाले थे। वह सत्यनारायण ठाकुर के चार बेटों में सबसे छोटे थे। उनके परिवार में पत्नी लक्ष्मी देवी, दो बेटे और एक बेटी हैं। संतोष के बड़े भाई रंजीत ठाकुर के मुताबिक, संतोष की वार्ड में रहने वाले मनीष यादव और राजकिशोर यादव से दोस्ती थी। करीब डेढ़-दो साल पहले मनीष संतोष को मजदूरी कराने के लिए कर्नाटक की एक कंपनी में ले गया था। वहां काम करने के बाद संतोष सितंबर 2026 में वापस गांव लौट आए। इसके बाद वह दोबारा कर्नाटक जाने के लिए तैयार नहीं थे। रंजीत के मुताबिक, संतोष गांव में ही एक ठेला लेकर चाउमीन और बर्गर बेचने का काम शुरू करना चाहते थे। परिवार के मुताबिक, घर पर काफी कर्ज था। इसी वजह से पत्नी लक्ष्मी देवी चाहती थीं कि संतोष दोबारा कर्नाटक जाकर काम करें। मनीष भी उसी कंपनी में काम करता था, जहां संतोष पहले काम कर चुके थे। संतोष और मनीष की नजदीकी के कारण मनीष अक्सर उनके घर भी आता-जाता था। 9 अक्टूबर को दोबारा कर्नाटक गए थे संतोष परिवार के मुताबिक, संतोष 9 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के कोप्पल स्थित एक कंपनी में काम करने के लिए गए थे। वहां पहुंचने के बाद 19 अक्टूबर तक उनकी परिवार के लोगों से फोन पर बातचीत होती रही। 20 अक्टूबर के बाद संतोष से संपर्क नहीं हो पाया। संतोष के बड़े भाई गौतम ने उनकी तलाश शुरू की। उन्होंने इंटरनेट पर भी जानकारी जुटाई और अपने एक मित्र की मदद से संतोष की लोकेशन का पता किया। परिवार को जानकारी मिली कि संतोष की आखिरी लोकेशन 20 अक्टूबर को कर्नाटक के कोप्पल में थी। इसके बाद परिवार ने कंपनी के मालिक का नंबर पता किया और वहां संपर्क किया। 23 अक्टूबर को कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास से संतोष के बारे में बात हुई। परिवार ने उनसे पूछा कि संतोष कहां हैं और कई दिनों से उनसे संपर्क क्यों नहीं हो पा रहा है। सुपरवाइजर ने बताया कि संतोष पिछले पांच दिनों से काम पर नहीं आ रहे थे। इसके बाद परिवार ने उनसे संतोष के बारे में पता लगाने को कहा। परिवार के मुताबिक, संतोष वहां अपने दोस्तों के साथ रहते थे, इसलिए उनके साथियों से पूछताछ करने की बात कही गई। राजकिशोर ने सुपरवाइजर को बताई हत्या की कहानी परिवार के मुताबिक, कंपनी सुपरवाइजर अमिताभ दास ने संतोष के साथ रहने वाले मनीष और राजकिशोर से पूछताछ की। रंजीत ठाकुर का कहना है कि पूछताछ शुरू होने से पहले ही मनीष वहां से भाग गया। वहीं, राजकिशोर को सुपरवाइजर ने पकड़ लिया और उससे पूछताछ की। परिवार के अनुसार, राजकिशोर ने सुपरवाइजर को बताया कि संतोष और मनीष के बीच लक्ष्मी देवी से बातचीत को लेकर विवाद था। राजकिशोर के मुताबिक, मनीष को संतोष का इस बातचीत पर आपत्ति जताना पसंद नहीं था। इसी वजह से मनीष ने संतोष की हत्या की योजना बनाई और इसमें राजकिशोर से भी साथ देने को कहा। राजकिशोर ने सुपरवाइजर को बताया कि 20 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे मनीष और वह संतोष को कंपनी के पास स्थित एक पहाड़ी पर ले गए थे। वहां मनीष शराब की बोतल लेकर आया था। तीनों ने शराब पी। इसके बाद मनीष ने संतोष से रील बनाने के लिए पोज देने को कहा। राजकिशोर ने बताया कि संतोष ने गले में गमछा डालकर रील बनाने के लिए पोज दिया। इसी दौरान मनीष ने गमछे से उनका गला घोंटना शुरू कर दिया। राजकिशोर का दावा है कि उसने संतोष के दोनों हाथ पकड़ रखे थे। गला घोंटने से संतोष की मौत हो गई। संतोष की पहचान छिपाने के लिए मनीष ने उनके सिर के पीछे पत्थर से वार किया। इसके बाद दोनों ने शव को पास के एक गड्ढे में डाल दिया और वहां से चले गए। राजकिशोर के मुताबिक, मनीष ने उसे इस घटना के बारे में किसी को कुछ भी बताने से मना किया था। उसने धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को बताया तो उसकी भी हत्या कर देगा। इसी डर से वह अब तक चुप रहा। यह जानकारी राजकिशोर ने कंपनी सुपरवाइजर को दी थी। परिवार के मुताबिक, इसके बाद सुपरवाइजर ने कोप्पल थाने की पुलिस को बुलाया और मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई। राजकिशोर को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पत्नी बोलीं- मनीष फोन पर मुझसे करता था बात संतोष की पत्नी लक्ष्मी देवी ने भी मनीष पर हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मनीष अक्सर उनसे फोन पर बातचीत करता था। संतोष को यह बात पसंद नहीं थी। लक्ष्मी के मुताबिक, मनीष ने कई बार संतोष को धमकी दी थी कि अगर उसने उन्हें मनीष से बात करने से रोका तो वह उसकी हत्या कर देगा। लक्ष्मी ने बताया कि संतोष घर पर नहीं रहते थे, तब भी मनीष से उनकी बातचीत होती थी। मनीष उनसे कहता था कि उनसे बात करके उसका मन बहुत खुश होता है। लक्ष्मी के मुताबिक, संतोष के सामने भी मनीष के फोन आते थे और वह उससे बात करती थीं। लक्ष्मी ने यह भी बताया कि वह चाहती थीं कि संतोष कर्नाटक जाकर कमाएं, क्योंकि परिवार पर कर्ज था। संतोष गांव में चाउमीन का ठेला लगाकर काम करना चाहते थे। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने ही संतोष को कर्नाटक जाने के लिए कहा था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वहां उनकी हत्या कर दी जाएगी। 2 अक्टूबर को घर से चली गई थी लक्ष्मी लक्ष्मी देवी के मुताबिक, 2 अक्टूबर को वह घर से चली गई थीं और 7 अक्टूबर को वापस लौटी थीं। उनका कहना है कि संतोष ने उनके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद गुस्से में वह घर छोड़कर चली गई थीं। उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्होंने स्टेशन पर रात बिताई और फिर घर लौट आईं। वहीं, संतोष के बड़े भाई रंजीत ठाकुर का दावा है कि उस समय मनीष गांव में ही था और लक्ष्मी मनीष के साथ घर से गई थीं। रंजीत के मुताबिक, लक्ष्मी 7 अक्टूबर को वापस लौटी थीं। इस मामले में लक्ष्मी और रंजीत के बयान अलग-अलग हैं। 31 अक्टूबर को सहरसा पहुंचा संतोष का शव कंपनी सुपरवाइजर से संतोष की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग शव लेने के लिए 27 अक्टूबर को सहरसा से कर्नाटक रवाना हुए। परिवार के सदस्य हवाई जहाज से वहां पहुंचे। इसके बाद 31 अक्टूबर को संतोष का शव एंबुलेंस से सड़क मार्ग के जरिए सहरसा लाया गया। संतोष के बड़े बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार ने मनीष पर हत्या का आरोप लगाया है। कोप्पल रूरल थाना के एसएचओ बिरेश कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान कहा कि पुलिस ने राजकिशोर यादव को गिरफ्तार किया है, साथ ही राकेश यादव, राजेश यादव, रोहित यादव समेत एक अन्य युवक को डिटेन किया है। घटना का मुख्य आरोपी मनीष यादव फिलहाल फरार है। कर्नाटक पुलिस सहरसा पुलिस की मदद से उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
सहरसा के 26 वर्षीय मजदूर संतोष ठाकुर की 20 अक्टूबर को कर्नाटक में हत्या कर दी गई। शनिवार को कर्नाटक पुलिस एंबुलेंस से उनका शव सहरसा लेकर पहुंची। परिजनों ने पत्नी के दूसरे व्यक्ति से संबंध को हत्या की वजह बताया है। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि दूसरा फरार बताया जा रहा है। संतोष सहरसा नगर निगम के धमसैनी वार्ड नंबर 46 के रहने वाले थे। वह सत्यनारायण ठाकुर के बेटे और चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। 9 अक्टूबर को काम के लिए कर्नाटक गए थे संतोष संतोष करीब डेढ़ साल से कर्नाटक के कोप्पल थाना क्षेत्र की एक फैक्ट्री में मजदूरी कर रहे थे। उनके बड़े भाई गौतम कुमार ने बताया कि संतोष 9 अक्टूबर को काम के लिए कर्नाटक गए थे। परिवार से उनकी आखिरी बार 19 अक्टूबर को बात हुई थी। गौतम के मुताबिक, 20 अक्टूबर से संतोष का फोन नहीं लग रहा था। उन्होंने फोन की लोकेशन पता की, जो कर्नाटक के कोप्पल में दिख रही थी। इसके बाद उन्होंने कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास से संपर्क किया। सुपरवाइजर ने बताया कि संतोष पांच दिनों से काम पर नहीं आ रहे थे। सुपरवाइजर से पूछताछ में सामने आई हत्या की बात गौतम ने बताया कि कंपनी के सुपरवाइजर ने संतोष के दोस्तों राजकिशोर और मनीष से पूछताछ की। इस दौरान राजकिशोर ने कथित तौर पर बताया कि फैक्ट्री में काम करने के दौरान मनीष का संतोष की पत्नी से संबंध हो गया था। इसकी जानकारी संतोष को मिलने पर दोनों के बीच विवाद हुआ था। राजकिशोर के मुताबिक, मनीष को लगता था कि संतोष उनके संबंधों में रुकावट बन रहे हैं। इसी वजह से वह संतोष से नाराज था और उसने उनकी हत्या की योजना बनाई। राजकिशोर ने बताया कि मनीष ने इस काम में उससे भी सहयोग मांगा था। गमछे से गला घोंटा, पत्थर से सिर पर किए वार राजकिशोर ने सुपरवाइजर को कथित तौर पर बताया कि 20 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे वह और मनीष संतोष को फैक्ट्री के पास स्थित एक पहाड़ी पर ले गए। वहां मनीष ने संतोष के गले में गमछा डालकर उनका गला घोंट दिया, जबकि राजकिशोर ने उनके दोनों हाथ पीछे से पकड़ रखे थे। इसके बाद मनीष ने वहां पड़े पत्थर से संतोष के सिर पर कई वार किए। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। राजकिशोर के अनुसार, हत्या के बाद दोनों शव को पास के एक गड्ढे में डालकर वहां से भाग गए। उसने यह भी बताया कि मनीष ने घटना की जानकारी किसी को देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी। इसी डर से उसने अब तक किसी को कुछ नहीं बताया था। एक आरोपी पुलिस के हवाले, दूसरा फरार कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास ने घटना की जानकारी कोप्पल पुलिस को दी। इसके बाद राजकिशोर को कंपनी के सुपरवाइजर ने पुलिस के हवाले कर दिया, जबकि मनीष फरार हो गया। संतोष की मौत की खबर मिलने के बाद उनके बड़े भाई गौतम समेत परिवार के अन्य सदस्य 27 अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचे। शव की पहचान और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 अक्टूबर को वे संतोष का शव लेकर सहरसा पहुंचे। इसके बाद उनके बेटे ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की संतोष के भाई रंजीत ठाकुर ने बताया कि हत्या में सहरसा नगर निगम के वार्ड नंबर 46 के रहने वाले राजकिशोर यादव और मनीष यादव शामिल हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। सहरसा सदर थानाध्यक्ष अजय पासवान ने बताया कि घटना दूसरे राज्य की है। आरोपी सहरसा क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
MLC Election Results: Varanasi, Nagpur में BJP-RSS को झटका, Karnataka में Congress क्यों हारी?
कर्नाटक की लक्ष्मीबाई कही जाने वाली रानी चेन्नम्मा का 23 अक्टूबर को जन्म हुआ था। उनको घुड़सवारी, तीरंदाजी और तलवारबाजी आदि का शौक था। उन्होंने हर एक कला को मन लगाकर सीखा और रानी चेन्नम्मा को अपनी धरती से गहरा लगाव था। हालांकि उन्होंने अपनी जीवन में बहुत दुख देखे, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने जनता के हितों को सर्वोपरि रखा। कित्तूर की रानी चेनम्मा ने साल 1824 में अंग्रेजों से लोहा लिया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर कित्तूर की रानी चेन्नम्मा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... जन्म और परिवार कर्नाटक के काकती नाम के गांव में 23 अक्टूबर 1778 को रानी चेन्नम्मा का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम धुलप्पा गौड़ देसाई और माता का नाम पद्मावती था। रानी चेन्नम्मा ने उस जमाने में तीरंदाजी, तलवारबाजी और घुड़सवारी करती थीं, जब लड़कियों को इस तरह के प्रशिक्षण नहीं दिए जाते थे। इसे भी पढ़ें: R K Narayan Birth Anniversary: अंग्रेजी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे R K Narayan, अंग्रेजी में हो गए थे फेल विवाह चेन्नम्मा का विवाह कित्तूर के राजा मल्लसर्ज से हुआ। विवाह के बाद वह कित्तूर की रानी चेन्नम्मा बनीं और राज परिवार व राज्य के कामकाजों को देखने और समझने लगीं। रानी चेन्नम्मा सिर्फ महल तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वह लोगों की समस्याओं को सुनती और उसका समाधान करने का प्रयास करती थीं। रानी चेन्नम्मा ने अपने राज्य में व्यवस्था औऱ न्याय को महत्व दिया था। पति और बेटे की मौत रानी चेन्नम्मा के जीवन में कई दुख आए, उनके पति राजा मल्लसर्ज का निधन हो गया और बेटे की मृत्यु से रानी को गहरा आघात पहुंचा। जब राज्य के सामने उत्तराधिकारी का सवाल उठा, तो उन्होंने शिवलिंगप्पा नाम के बालक को गोद लिया और उसको राज्य का उत्तराधिकारी माना। वहीं उस दौरान अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी भारत के अनेक राज्यों पर अपना कंट्रोल ले रही थी। वहीं ईस्ट इंडिया कंपनी ने शिवलिंगप्पा को कित्तूर का वैध उत्तराधिकारी मानने से मना कर दिया और अंग्रेजों ने कित्तूर पर अधिकार जमाने का प्रयास किया। अंग्रेजों को दिया दो टूक जवाब रानी चेन्नम्मा का अंग्रेजों को साफ संदेश था कि कित्तूर की सत्ता और उसके भविष्य का फैसला कित्तूर के लोग और उनका राज परिवार करेगा। रानी चेन्नम्मा ने अपने राज्य को बचाने के प्रयास में अधिकारियों से बातचीक की कोशिश की। लेकिन अंग्रेजों ने उनकी बात को नहीं माना। हार मानने की जगह पर रानी चेन्नम्मा ने अपने सैनिकों को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा किया। उनके साथ राज्य के सरदार, सहयोगी और सेनापति खड़े हुए। आसान नहीं था कित्तूर संघर्ष साल 1824 में अंग्रेजी सेना ने कित्तूर पर हमला कर दिया। रानी चेन्नम्मा ने अपनी सेना का नेतृत्व किया और युद्ध के मैदान में डटी रहीं। वहीं रानी चेन्नम्मा के सैनिकों ने साहस के साथ अंग्रेजी सेना का मुकाबला किया। शुरूआती संघर्ष में कित्तूर की सेना ने अंग्रेजी सेना को कड़ी चुनौती दी और अंग्रेजी सेना के एक अधिकारी, सेंट जॉन ठाकरे को मार गिराया। इससे अंग्रेजों को बड़ा झटका लगा। अंग्रेजी सेना ने अधिक सैनिक और हथियार जुटाए और कित्तूर को चारों ओर से घेर लिया। रानी और उनके सहयोगियों ने कई दिनों कर इसका अंतर था वहीं, रानी के सैनिकों और साधनों में भी अंतर था। हालांकि उन्होंने कित्तूर की राज्य का रक्षा के लिए पूरी शक्ति लगा दी। मृत्यु लंबे संघर्ष के बाद कित्तूर पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया और रानी चेन्नम्मा को गिरफ्तार कर बेलहोंगल के किले में रखा गया। रानी चेन्नम्मा कई वर्षों तक कैद में रहीं। वहीं 21 फरवरी 1829 को कित्तूर की रानी चेन्नम्मा का निधन हो गया।
कर्नाटक के कटील में स्थित श्री दुर्गा परमेश्वरी मंदिर अपनी अनूठी पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर पवित्र नंदिनी नदी के बीच एक द्वीप पर बना है, जहां देवी दुर्गा के प्रकट होने की कहानी जुड़ी है।
आतंकी लिंक, हथियार और पाकिस्तान कनेक्शन... कर्नाटक में BBA छात्र गिरफ्तार
कर्नाटक के बीदर में पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित संगठन और अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क से कथित संपर्क के आरोप में 24 वर्षीय विशाल कुमार मेट्रे को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, उसके मोबाइल में पाकिस्तान स्थित कुछ लोगों और WhatsApp चैनलों से संपर्क मिला. मामले में UAPA और BNS की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.
Karnataka Minister Brasavaraj Rayareddy ने क्यों की Islam की तारीफ, बीजेपी ने मांग लिया इस्तीफा!
कर्नाटक में Basavaraj Rayareddy Statement को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री Basavaraj Rayareddy पर आरोप है कि उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान Islam को बाकी सभी धर्मों से श्रेष्ठ बताया और इसे वैज्ञानिक धर्म बताया
Karnataka Government ने RSS के पथ संचलन में शामिल दो Teachers को क्यों किया सस्पेंड? Priyank Kharge
कर्नाटक में RSS के पथ संचलन में शामिल होना दो सरकारी शिक्षकों को भारी पड़ गया है। शिक्षा विभाग ने RSS कार्यक्रम में शामिल होने को सरकारी सेवा के आचरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए दोनों शिक्षकों को विभागीय जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है।
Karnataka High Court ने क्यों कहा- Parents की सेवा करना बहू की जिम्मेदारी नहीं? Married Woman
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान शादीशुदा महिलाओं के अधिकारों को लेकर बेहद अहम टिप्पणियां की हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पति अपनी पत्नी को घर का काम करने या अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता और ना ही उस पर हुक्म चला सकता है।
कावेरी विवाद को लेकर SC पहुंचा तमिलनाडु, कर्नाटक ने जल संकट को बताया गंभीर
तमिलनाडु ने अदालत को बताया कि कर्नाटक ने सिंचाई के लिए पानी छोड़ना शुरू कर दिया है, लेकिन तमिलनाडु को अभी तक उसके हिस्से का पानी नहीं मिला है. इससे खेती-किसानी पर गंभीर असर पड़ रहा है.
मेरी जान तिरंगा है... आजादी के रंग में नहाया देश, कश्मीर से कर्नाटक तक जश्न
80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में जश्न की अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं. दिल्ली से लेकर कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर तक लोगों ने अपने-अपने अंदाज में आजादी का पर्व मनाया. इंडिया गेट तिरंगे के रंगों में रोशन हुआ, जबकि विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन किया गया.
Karnataka में RSS शाखाएं कैसे लगेंगी, कांग्रेस सरकार ला रही नया कानून। DK Shivakumar। Priyank Kharge
क्या कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं पर बैन लगने वाला है? मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने एक ऐसा बिल कैबिनेट से पास किया है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है
साउथ स्टार यश की अपकमिंग फिल्म 'टॉक्सिक' कर्नाटक में किसी भी फिल्म के लिए अब तक की सबसे बड़ी थिएट्रिकल रिलीज़ के लिए तैयार है, जहां टीम का लक्ष्य राज्य के बॉक्स ऑफिस इतिहास की सबसे बड़ी ओपनिंग हासिल करना है। यह फिल्म पूरे राज्य में रिकॉर्ड तोड़ ...

