Noida में असम की युवती की हत्या का आरोपी Raman Raj गिरफ्तार, बिहार से ला रही पुलिस
गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा सेक्टर-49 थानाक्षेत्र के बरौला गांव में स्थित एक पीजी में असम की एक युवती की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी रमन राज को बुधवार को बिहार के कटिहार से गिरफ्तार किया। अपर पुलिस उपायुक्त मनीषा सिंह ने बताया कि आरोपी को बिहार से गिरफ्तार किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में धारदार हथियार से वार किए जाने और अधिक रक्तस्राव से मौत की पुष्टि हुई है। पुलिस आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर बिहार से नोएडा ला रही है। हत्या के बाद आरोपी बिहार में अपने गृह नगर भाग गया था। असम की बीपीओ कर्मी 19 वर्षीय महक अहमद का शव मंगलवार को बरौला गांव में पड़ोस में रहने वाले एक युवक के कमरे में मिला था। पुलिस के अनुसार, रमन बीटेक कर चुका है और पहले नोएडा की एक आईटी कंपनी में काम करता था। पूछताछ में उसने बताया कि उसकी महक से दोस्ती थी। घटना वाली रात दोनों बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान महक ने उसकी पूर्व प्रेमिका के बारे में कथित तौर पर कुछ अपशब्द कह दिए, जिससे वह आक्रोशित हो गया और धारदार हथियार से उस पर हमला कर दिया। महक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर धारदार हथियार के करीब 10 वार और अत्यधिक रक्तस्राव से मौत की पुष्टि हुई है। पुलिस हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद करने का प्रयास करेगी। महक करीब तीन सप्ताह पहले अपने माता-पिता को बिना बताए असम से अपनी सहेली के साथ नोएडा आई थी और एक कॉल सेंटर में काम कर रही थी।
देश के जाने-माने उद्योगपति अनंत अंबानी के वनतारा फाउंडेशन ने असम की बाढ़ में फंसे हाथियों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इसके लिए असम के सीएम हिमंता ने थैंक्यू भी कहा है।
Assam Flood: CM Sarma ने किया 1000 करोड़ के महापैकेज का ऐलान, पीड़ितों को हरसंभव मदद!
असम सरकार ने 19 जुलाई से ऊपरी असम के शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट ज़िलों में आई असामान्य बाढ़ के बाद राहत, सहायता और पुनर्वास कार्यों के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये देने का वादा किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि एक मोबाइल एप्लिकेशन के ज़रिए नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे किया जा रहा है। अब तक, 960 सर्वेक्षकों ने 8,325 परिवारों का सर्वे पूरा कर लिया है और दूसरा चरण चल रहा है। उम्मीद है कि सर्वे की प्रक्रिया 15 सितंबर तक पूरी हो जाएगी। इसे भी पढ़ें: Parliament में विपक्ष का हंगामा 'चर्चा से भागने' की साजिश, Nitin Nabin बोले- जनता जानती है कौन दोषी उन्होंने भरोसा दिलाया कि सर्वे पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से किया जाएगा और बाढ़ से प्रभावित लोग लाभार्थियों की विस्तृत सूची देख सकेंगे। जिन लोगों का नाम शुरू में छूट जाएगा, उन्हें सर्वे पूरा होने के बाद भी सूची में शामिल होने का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने उन इलाकों में 'मुख्यमंत्री राहत कोष' का इस्तेमाल करके हाउसिंग कॉलोनी बनाने की योजना का भी संकेत दिया, जहाँ बाढ़ से घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। उन्होंने बाढ़ से हुए नुकसान के लिए इंश्योरेंस से मुआवज़ा पाने के हकदार लोगों से अपने क्लेम फाइल करने को कहा और बैंक लोन चुकाने में छह महीने की मोहलत या समय बढ़ाने के लिए 30 अगस्त तक आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्कूलों को फिर से चालू करने की कोशिशें चल रही हैं और सरकार का लक्ष्य 15 अगस्त तक पढ़ाई-लिखाई की गतिविधियां शुरू करना है। इस काम में मदद के लिए 793 स्कूलों में से हर एक को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इसे भी पढ़ें: Mohan Yadav ने Rahul Gandhi पर बोला हमला, संसद की कार्यवाही बाधित करने का लगाया आरोप असम की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार पवित्र 'भादा' महीने के दौरान 'नाम प्रसंग' में मदद के लिए हर 'नामघर' को 1.50 लाख रुपये देने की योजना बना रही है। सरकार बाढ़ की स्थिति का फ़ायदा उठाकर पैसे कमाने या ऐतिहासिक रूप से एकजुट रहे असमिया समाज में फूट डालने वाली किसी भी नकारात्मक गतिविधि या टिप्पणी पर कड़ी नज़र रखेगी और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि 72 यूट्यूबर ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए फ़ंड इकट्ठा किया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर इस फ़ंड का इस्तेमाल सच में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए किया गया है, तो सरकार उनके प्रयासों को सम्मान देगी; इसे किसी जांच के बजाय उनके काम को मान्यता देने की प्रक्रिया माना जाएगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
असम में बाढ़ की स्थिति को 'डरावना' बताते हुए, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को पड़ोसी राज्य की इस संकट से निपटने में मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। अधिकारी ने कहा कि असम में बाढ़ से 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, और पश्चिम बंगाल का असम के साथ 'खास आध्यात्मिक संबंध' है। अधिकारी ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि पड़ोसी राज्य असम में स्थिति डरावनी है। असम के साथ हमारा खास आध्यात्मिक संबंध है। मणिपुर और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने असम को मदद देने की घोषणा की है। हम भी मुख्यमंत्री राहत कोष से असम को 10 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देंगे। इसे भी पढ़ें: West Bengal Voter List से नाम हटाने पर Supreme Court सख्त, ECI से मांगा SIR Tribunals का डिस्पोजल डेटा पुनर्वास के लिए 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की ज़रूरत हो सकती है: असम के CM इससे पहले दिन में, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि बाढ़ की हालिया लहर से बुरी तरह प्रभावित ज़िलों में संपत्तियों की मरम्मत और बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कम से कम 1,000 करोड़ रुपये की ज़रूरत होगी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुनर्वास प्रक्रिया में पूरी मदद का भरोसा दिया है। सरमा ने कहा स्थायी राहत देने के लिए 9 अगस्त को तेज़ी से राहत का आकलन करने का अभियान शुरू किया गया था। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, 8,000 से ज़्यादा परिवारों का आकलन किया गया है और 150 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। सरमा ने कहा कि यह सर्वे 30 अगस्त तक जारी रहेगा और उम्मीद है कि इसमें ऊपरी ज़िलों के 50,000-60,000 परिवार शामिल होंगे, जो हालिया बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सरमा ने कहा मेरा मानना है कि नुकसान की मरम्मत और पुनर्वास में 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च होंगे। PM ने भरोसा दिलाया है कि प्रभावित परिवारों को भुगतान करने में कोई दिक्कत नहीं है और हमसे कहा है कि बिना किसी चूक के आकलन करें। 72 YouTubers ने फंड इकट्ठा किया प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने के लिए अलग-अलग ग्रुप्स से मिले सहयोग को मानते हुए, उन्होंने कहा कि देश भर के 72 YouTubers ने इस काम के लिए फंड इकट्ठा किया है। उन्होंने कहा, उनमें से कई पहले से ही ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हैं और लोगों को राहत पहुँचा रहे हैं। हम इस बात पर कड़ी नज़र रख रहे हैं कि क्या वे बाढ़ से प्रभावित इलाकों के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं। सरमा ने ऊपरी असम में बाढ़ से क्षतिग्रस्त 494 आंगनवाड़ी केंद्रों के पुनर्निर्माण के लिए 11.3 करोड़ रुपये जारी किए। उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि ये केंद्र जल्द से जल्द फिर से शुरू हों ताकि सभी सेवाएँ दी जा सकें। इस अभियान में कुल 494 क्षतिग्रस्त आंगनवाड़ी केंद्रों का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने असम की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। गौरतलब है कि असम में बाढ़ की वजह से काफी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।
Kaziranga National Park: असम सरकार अगले दो महीनों में केंद्र सरकार से काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की मौजूदा 10 किलोमीटर की डिफॉल्ट सीमा को घटाकर 1 किलोमीटर करने की मांग करने की योजना बना रही है। 'असम ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि इस कदम का मकसद नेशनल पार्क के पास, जिसमें बोकाखाट भी शामिल है, विकास परियोजनाओं पर लगी उन पाबंदियों को हटाना है जिन्हें राज्य सरकार अनावश्यक मानती है।शर्मा ने कहा, बोकाखाट में विकास से जुड़ी कई चुनौतियां हैं जिन्हें हम हल करना चाहते हैं, जिनमें स्टेडियम का निर्माण, शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार और अन्य अहम प्रोजेक्ट शामिल हैं।उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर शुरुआती बातचीत पहले ही हो चुकी है। काजीरंगा को अंतिम ESZ नोटिफिकेशन मिलने के बाद राज्य सरकार केंद्र के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार करेगी।उन्होंने आगे कहा, चूंकि काजीरंगा के लिए अभी तक अंतिम नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए डिफॉल्ट रूप से इको-सेंसिटिव जोन 10 किलोमीटर का है। नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हम वैज्ञानिक रूप से तय 1 किलोमीटर के इको-सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव रखेंगे।शर्मा ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बदलाव से बोकाखाट में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और साथ ही काजीरंगा के वन्यजीवों और पर्यावरण का संरक्षण भी जारी रहेगा।पर्यावरणविदों ने राज्य सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया?वहीं, पर्यावरणविदों ने असम सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट, काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को कम करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि सुरक्षित बफर जोन को कम करने से पार्क पर दबाव बढ़ सकता है और वहां के वन्यजीवों पर बुरा असर पड़ सकता है।उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या पार्क और उसके वन्यजीवों की सुरक्षा की कीमत पर विकास की अनुमति दी जानी चाहिए।गोलाघाट के पर्यावरण कार्यकर्ता और पत्रकार अपूर्व बल्लभ गोस्वामी ने The Federal को बताया कि ESZ (इको-सेंसिटिव जोन) को कम करने से काजीरंगा में वन्यजीवों, खासकर एक सींग वाले गैंडे के लिए खतरा पैदा हो सकता है, जिसे असम का प्रतीक माना जाता है।धेकियाजुली के एक और पर्यावरण कार्यकर्ता दिलीप नाथ ने कहा कि प्रस्तावित कटौती इको-सेंसिटिव जोन पर सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के खिलाफ भी हो सकती है। नाथ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो अहम बातों पर आधारित था - जानवरों को प्रजनन के लिए पर्याप्त जगह देना और उन घास के मैदानों की रक्षा करना जो उनके लिए भोजन का स्रोत हैं।उन्होंने कहा, अगर सरकार ESZ का दायरा कम करती है, तो घास के मैदान कम हो जाएंगे और जानवरों की संख्या भी घट जाएगी। अगर वे इस कदम को आगे बढ़ाते हैं, तो हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।'दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते...'RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा, असम एक स्टेडियम और दूसरे विकास कार्यों के लिए काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन (पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र) को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करना चाहता है। लेकिन हर मॉनसून में बाढ़ के कारण हाथी और गैंडे इन्हीं रास्तों से ऊंचे इलाकों की ओर जाने को मजबूर होते हैं।उन्होंने कहा, आइए स्टेडियम कहीं और बनाएं, क्योंकि हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते। Assam wants to shrink Kaziranga’s eco-sensitive zone from 10km to 1km for a stadium and other development. Yet every monsoon floods force elephants and rhinos towards higher ground through these very corridors.Let’s build stadiums elsewhere as we cannot build another Kaziranga. pic.twitter.com/w9DREv9BLw— Harsh Goenka (@hvgoenka) August 11, 2026 बता दें कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन को लेकर लंबे समय से अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। मार्च में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भी कहा था कि असम सरकार की ओर से केंद्र को न तो ESZ की अंतिम अधिसूचना भेजी गई है और न ही इसका कोई ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा गया है। नतीजतन, 10 किलोमीटर के दायरे वाला नियम अभी भी लागू है।वहीं, असम सरकार का कहना है कि मौजूदा 10 किलोमीटर के जोन की वजह से बोकाखाट में इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास रुका हुआ है। इन पाबंदियों के कारण कई प्रोजेक्ट्स, जिनमें एक आधुनिक स्टेडियम और दूसरे नागरिक विकास के काम शामिल हैं, अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।यह भी पढ़ें:भारत ने बांग्लादेश के लिए बनाई खास ट्रेन, 19 LHB कोच की पहली खेप होगी रवाना, जानिए इसमें क्या है स्पेशल
पीजी में असम की 19 वर्षीय युवती की बेरहमी से हत्या, कमरे से मिला लहूलुहान शव
बरौला गांव स्थित बंसल मंदिर के पास एक पीजी में असम की 19 वर्षीय युवती की बेरहमी से हत्या कर दी गई
नोएडा : पीजी में असम की युवती का शव मिलने से सनसनी, हत्या की आशंका में जांच तेज
नोएडा। उत्तर प्रदेश में नोएडा सेक्टर-49 थाना क्षेत्र के बरौला स्थित एक पीजी के कमरे करीब 19 वर्षीय युवती का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मंगलवार को जानकारी देते हुए […] The post नोएडा : पीजी में असम की युवती का शव मिलने से सनसनी, हत्या की आशंका में जांच तेज appeared first on Sabguru News .
नोएडा में बीटेक इंजीनियर ने 19 साल की लड़की की हत्या कर दी। लाश हॉस्टल में अपने कमरे में छिपा दी। फिर बाहर से ताला लगाकर भाग गया। 2 दिन बाद बदबू आने पर मकान मालिक ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कमरे का ताला तोड़कर देखा, तो अंदर लाश पड़ी थी। उसके शरीर पर धारदार हथियार से कई बार हमला किया गया था। लड़की अपनी सहेली के साथ पेइंग गेस्ट (PG) में रह रही थी। वहीं, आरोपी बिहार का रहने वाला है। वह एक IT कंपनी में नौकरी करता था। लेकिन, अभी वह बेरोजगार है। वह भी उसी PG में किराए पर रहता था। 8 अगस्त को युवक से लड़की का कुछ झगड़ा हो गया था। वारदात सेक्टर-49 थाना क्षेत्र के बरौला गांव की है। पुलिस ने मंगलवार को वारदात का खुलासा किया। घरवालों को बिना बताए नोएडा आई थी लड़की मूलरूप से असम के डिब्रूगढ़ की रहने महक अहमद (19) ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। करीब तीन सप्ताह पहले वह अपने माता-पिता को बिना बताए नोएडा आ गई थी। यहां वह अपनी सहेली संजना के साथ बरौला गांव स्थित पीजी में रह रही थी। संजना भी असम की रहने वाली है। उसकी उम्र 18 साल है। उसने अभी 12वीं की पढ़ाई भी पूरी नहीं की है। दोनों लड़कियां तीन मंजिला मकान की पहली मंजिल पर रहती थीं और कॉल सेंटर में जॉब करती थीं। इसी मंजिल पर बिहार के कटिहार में रहने वाले रमन का कमरा भी था। आरोपी ने B.Tech किया है, IT कंपनी में काम करता था 8 अगस्त को संजना किसी काम से 2 दिन के लिए बाहर चली गई। रात में महक कमरे के बाहर लॉबी में टहल रही थी। इसी दौरान रमन अपने कमरे के बाहर बैठकर शराब पी रहा था। किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। 10 अगस्त को संजना लौटी, तो महक कमरे में नहीं मिली। उसने महक से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल बंद था। काफी तलाश के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला। इसके कुछ घंटे बाद ही मकान में रहने वाले लोगों को रमन के कमरे से बदबू आने लगी। कमरे में बाहर से ताला लगा था और रमन वहां नहीं था। बदबू बढ़ने पर किराएदारों को शक हुआ। उन्होंने यह बात मकान मालिक सार्थक बंसल को बताई। पुलिस ने ताला खुलवाकर देखा, तो महक की लाश मिली मकान मालिक ने 10 अगस्त की दोपहर करीब 12 बजे डायल-112 पर सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कमरे का ताला खुलवाकर अंदर घुसी। कमरे के अंदर महक का शव लहूलुहान हालत में पड़ा था। उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। ऐसा लग रहा था कि लड़की पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे। फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, मोबाइल भी जांच के लिए भेजा पुलिस ने शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम ने कमरे और उसके आसपास की जांच की। पुलिस ने महक का मोबाइल मोबाइल फोन भी जांच के लिए भेजा है। कॉल डिटेल, चैट और अन्य गतिविधियों की जांच की जा रही है। जिससे यह पता चल सके कि घटना से पहले महक किन लोगों के संपर्क में थी? साथ ही पुलिस मकान में रहने वाले अन्य लोगों से भी पूछताछ कर रही है। आरोपी रमन की तलाश के साथ उसकी गतिविधियों और महक के साथ हुए झगड़े से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया- लड़की के घरवालों को जानकारी दी गई है। अभी तक हत्या की सही वजह साफ नहीं हुई है। 8 अगस्त की रात महक और रमन के बीच हुई कहासुनी हुई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत का कारण, वार का तरीका और हत्या के समय से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। जल्द आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा। -------------------------- यह खबर भी पढ़िए- अतीक के करीबियों ने टोल गेट तोड़ा, दबंगई का CCTV, प्रयागराज में उमर के काफिले की गाड़ियों ने पुलिसवालों को कुचलना चाहा माफिया अतीक अहमद के बड़े बेटे उमर से जुड़ा एक और विवाद सुर्खियों में है। उमर के करीबियों ने टोल प्लाजा पर दबंगई और गुंडई दिखाई, जिसका CCTV सामने आया है। असल में अतीक के छोटे बेटे अबान की मौत के बाद सुपुर्द-ए-खाक में शामिल होने के लिए लखनऊ जेल से उमर को प्रयागराज लाया जा रहा था। पढ़ें पूरी खबर…
सिंगर गुरु रंधावा ने असम बाढ़ पीड़ितों के लिए मदद भिजवाई है। साथ ही सिंगर ने लाखों की मदद का योगदान भी दिया है। जानिए पूरा मामला।
असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच वर्षों से सुलग रहे सीमा विवाद ने सोमवार को एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया। देमाजी जिले के मिंगमंग-बस्ती इलाके में कथित अतिक्रमण और जमीन के स्वामित्व को लेकर शुरू हुआ विवाद अचानक गोलीबारी में बदल गया। अरुणाचल प्रदेश की ओर से आए लोगों द्वारा कथित तौर पर की गई अंधाधुंध फायरिंग में असम के 12 से 18 लोग घायल बताये जा रहे हैं। इनमें कई की हालत गंभीर बताई गई है। घटना ने सीमावर्ती गांवों में दहशत पैदा कर दी और दोनों राज्यों के बीच चल रही सुलह की प्रक्रिया के सामने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हम आपको बता दें कि यह घटना सोमवार सुबह गेरुकामुख थाना क्षेत्र के अंतर्गत गोगामुख राजस्व सर्किल के मिंगमंग इलाके की बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, असम की जमीन पर अरुणाचल प्रदेश की ओर से कथित अतिक्रमण को लेकर स्थानीय लोगों और दूसरी ओर से आए लोगों के बीच विवाद हुआ। देखते ही देखते विवाद टकराव में बदल गया और आरोप है कि दूसरी ओर से असम के ग्रामीणों को निशाना बनाकर फायरिंग की गई। इसे भी पढ़ें: Assam Flood विकराल: राज्य में मृतक संख्या 101 हुई, 1.26 लाख लोग प्रभावित घायल लोगों की पहचान दुर्गेश्वर पातिर, रोहित डोले, नागराज डोले, बिगेश्वर पातिर, पेम/पामा पेगू, संजय तायूंग, उत्पल डोले और जन डोले के रूप में हुई है। चार अन्य घायलों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। सभी घायलों को पहले गोगामुख ग्रामीण अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल सात लोगों को बाद में देमाजी सिविल अस्पताल रेफर किया गया, जबकि इनमें से चार को बेहतर इलाज के लिए असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया। घटना के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासन की बड़ी टुकड़ी मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। एक घायल ने अस्पताल में बताया कि गोली उसके नाक के पास लगी और वह बेहोश हो गया। एक अन्य घायल ने अरुणाचल प्रशासन से जुड़े लोगों पर फायरिंग में शामिल होने का आरोप लगाया। उसने दावा किया कि उसने लोअर सियांग जिले के उपायुक्त के बेटे और एक पुलिस अधिकारी को फायरिंग करते देखा। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना को ‘स्थानीय स्तर का संघर्ष’ बताते हुए कहा कि स्थिति को तेजी से नियंत्रण में ले लिया गया है और तनाव कम हो गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री रानोज पेगू को अरुणाचल प्रदेश सरकार से बातचीत के लिए भेजा गया है। असम के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी अरुणाचल प्रदेश के अपने समकक्षों के लगातार संपर्क में हैं। सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि असम अपनी जमीन को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने पुलिस को जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि असम की जमीन न जाए। देखा जाये तो यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महज कुछ दिन पहले यानि 1 अगस्त को असम के मुख्यमंत्री और अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मेन के बीच बैठक हुई थी। मेन ने बातचीत को ‘गर्मजोशी भरी और सार्थक’ बताते हुए दोनों राज्यों के बीच सहयोग और साझा विकास को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई थी। लेकिन सीमा पर हुई गोलीबारी ने दिखा दिया कि राजनीतिक स्तर पर रिश्तों में सुधार के बावजूद जमीन पर विवाद की जड़ें अब भी गहरी हैं। जहां तक सीमा विवाद की बात है तो आपको बता दें कि असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच करीब 804.1 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है और लगभग 1,200 बिंदुओं पर विवाद बताया जाता है। असम सरकार ने 29 जुलाई को विधानसभा में बताया था कि अरुणाचल प्रदेश ने असम की 16,144.01 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण किया है, जबकि अरुणाचल प्रदेश का दावा 858.91 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर है। यानी विवाद केवल गांवों की सीमाओं का नहीं, बल्कि बड़े भू-भाग और उसके प्रशासनिक अधिकार का है। हम आपको यह भी बता दें कि इस विवाद की जड़ें स्वतंत्रता के बाद के प्रशासनिक पुनर्गठन में हैं। आज का अरुणाचल प्रदेश स्वतंत्रता के बाद पहले केंद्र शासित प्रशासन वाला क्षेत्र था, फिर केंद्र शासित प्रदेश बना और अंततः 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। राज्य बनने के बाद एक त्रिपक्षीय समिति ने असम से कुछ क्षेत्रों को अरुणाचल प्रदेश में स्थानांतरित करने की सिफारिश की। असम ने इस सिफारिश को चुनौती दी और मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जहां विवाद अभी भी विचाराधीन है। हालांकि विवाद का समाधान बातचीत से निकालने की कोशिशें जारी हैं। दोनों राज्यों ने सीमा विवाद के निपटारे के लिए 12 क्षेत्रीय समितियां बनाई हैं। 15 जुलाई 2022 को हुए नमसाई घोषणा-पत्र के जरिए असम के उन 123 गांवों को लेकर समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई, जिन पर अरुणाचल प्रदेश दावा करता है। इसके बाद 20 अप्रैल 2023 को नई दिल्ली में दोनों मुख्यमंत्रियों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। अधिकारियों के मुताबिक 123 में से 71 गांवों का विवाद सुलझ चुका है, जबकि 52 गांवों को लेकर प्रक्रिया अभी जारी है। यही इस गोलीकांड की सबसे बड़ी विडंबना है क्योंकि जब बातचीत की मेज पर दशकों पुराने विवाद को सुलझाने की कोशिश चल रही है, उसी समय जमीन पर सीमा की अस्पष्टता स्थानीय लोगों के बीच टकराव और हिंसा को जन्म दे रही है। मिंगमंग की गोलीबारी इसलिए महज एक स्थानीय घटना नहीं है; यह चेतावनी है कि कागज पर खींची गई सीमाओं और जमीन पर मौजूद वास्तविक दावों के बीच की खाई अभी पूरी तरह नहीं भरी गई है। बहरहाल, दोनों सरकारों के बीच संवाद और प्रशासनिक समन्वय से तत्काल तनाव भले ही थम गया हो, लेकिन स्थायी समाधान तभी संभव है जब सीमा के विवादित हिस्सों का स्पष्ट निर्धारण, जमीन के दावों का निष्पक्ष निपटारा और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। वरना हर अगला अतिक्रमण का आरोप फिर वही पुराना सवाल खड़ा करेगा कि सीमा आखिर नक्शे पर है या जमीन पर?
Assam Flood विकराल: राज्य में मृतक संख्या 101 हुई, 1.26 लाख लोग प्रभावित
असम में बाढ़ की स्थिति सोमवार को भी गंभीर बनी रही और एक और व्यक्ति की मौत के साथ इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 101 हो गई। वहीं, 1.26 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की बुलेटिन के अनुसार, रविवार रात से एकमात्र मौत शिवसागर जिले के अमगुरी राजस्व मंडल में हुई। इसके साथ ही इस साल बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 101 हो गई है। बाढ़ संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, चराइदेव, दरांग, गोलाघाट, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, नगांव और शिवसागर जिलों में 1,26,431 लोग प्रभावित हुए हैं। गोलाघाट सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां 71,000 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके बाद शिवसागर में 21,000 से अधिक और जोरहाट में 13,000 से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। रविवार को राज्य के सात जिलों में 1.4 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित थे। एएसडीएमए ने बताया कि छह जिलों में प्रशासन 89 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चला रहा है, जहां करीब 24,000 लोगों की देखभाल की जा रही है। प्राधिकरण के अनुसार, वर्तमान में 458 गांव बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं और राज्यभर में 11,287.04 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। राज्य के विभिन्न जिलों में बाढ़ के पानी से तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
मां कामाख्या मंदिर का मुख्य द्वार…करीब 40-50 सीढ़ियां चढ़ने के बाद लगा कि अब मां के दर्शन होंगे। पंडित ने कहा- संभलकर पैर रखिएगा, सीढ़ियां फिसलन भरी हैं। संकरे से रास्ते पर अंधेरे में 10-11 सीढ़ियां उतरकर हम गुफा में पहुंचे। रोशनी के लिए बस एक दीये का सहारा था। सामने मूर्ति थी, पंडित ने कहा- दर्शन कीजिए। हमें लगा यही देवी मां हैं। पंडित ने चिल्लाते हुए कहा- घुटनों के बल बैठिए और हाथ नीचे गहराई में ले जाइए। फिर पूछा- जल स्पर्श हुआ, हाथ और नीचे ले जाइए। तभी जल स्पर्श हुआ। पंडित बोले- इसे माथे पर लगाइए, दर्शन हो गए। मां कामाख्या मंदिर आने वाले साधक इसी जल स्पर्श दर्शन पर मंडराते खतरे को लेकर डरे हुए हैं। दरअसल, असम सरकार ने मंदिर में कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है। साधकों को आशंका है कि कॉरिडोर बना, तो जिस प्राकृतिक जल धारा से मां के दर्शन हो रहे हैं, वो तबाह हो जाएगा। 15 दिसंबर, 2023 को कॉरिडोर के खिलाफ 13 साधकों ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन लगाई थी। इनमें असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा की बहन गीतिका भट्टाचार्य भी शामिल हैं। दूसरी याचिका मंदिर के पुजारी ने लगाई है। कोर्ट में याचिका पर सुनवाई हुई, कॉरिडोर के लिए सर्वे कराया गया, लेकिन साधकों को रिपोर्ट नहीं मिली और फैसला भी सरकार के पक्ष में आया। अब पिटीशनर्स सर्वे रिपोर्ट के लिए अगस्त के आखिर तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में इंटरलोकेटरी एप्लीकेशन (IA) फाइल करने की तैयारी में हैं। साथ ही असम PWD, NIH और IIT गुवाहाटी में RTI से जानकारी के लिए दोबारा अपील करेंगे। हम इनमें से 3 पिटीशनर्स से मिले। तीनों तंत्र विद्या के साधक हैं। आखिर कॉरिडोर बनने से साधक क्यों डरे हुए हैं… पिटीशनर नंबर-1हिमंता की बहन बोलीं- मां के अस्तित्व से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं CM हिमंता बिस्वा सरमा की बहन गीतिका भट्टाचार्य कहती हैं, ‘मां के अस्तित्व से छेड़छाड़ कोई भी करे, बर्दाश्त नहीं करूंगी। मैंने 8-9 साल की उम्र से मां को जानना शुरू किया था। मेरे लिए सबसे पहले मां हैं, फिर कोई और।‘ कॉरिडोर से नुकसान के सवाल पर पूछती हैं, ‘आपने मां के दर्शन किए क्योंकि इसके बिना आप हमारी चिंता नहीं समझ सकतीं। यहां देवी मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि जल की प्राकृतिक धारा के रूप में हैं। उनकी दसों महाविद्याएं भी इसी रूप में हैं। जल का स्पर्श ही मां का दर्शन है। इसके अलावा दूसरा कोई ऐसा मंदिर नहीं है।’ 'ये जल धारा कितने फीट नीचे से आ रही है, इसका मूल स्रोत कहां है, 10 महाविद्याओं में जो धारा जाती है, वो इंटरकनेक्टेड है या अलग-अलग, कोई नहीं जानता। इस पर आज तक कोई सर्वे या रिसर्च नहीं हुई।' ‘बिना सर्वे कराए इतने बड़े प्रोजेक्ट का टेंडर कैसे हुआ’ गीतिका आगे कहती हैं, ‘CM हिमंता ने कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया। कुछ महीने बाद ही एक कंपनी को टेंडर दे दिया गया। ये सब बिना किसी सर्वे या एक्सपर्ट की राय के हुआ।‘ ‘प्रोजेक्ट का जलधारा पर क्या असर पड़ेगा, ये जानने के लिए सरकार ने क्या किया, इसका पता लगाने के लिए हमने RTI के तहत कई बार जानकारी मांगी। हम एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट गए, लेकिन जवाब नहीं मिला।’ पिटीशनर नंबर-2‘मां के रूप से छेड़छाड़ और डीप कंस्ट्रक्शन के खिलाफ’ पश्चिम बंगाल के तंत्र साधक राजर्षि नंदी कहते हैं, 'हम कोई सोशल एक्टिविस्ट नहीं, सिर्फ साधक हैं। हमारा एक ही मकसद है कि मां का वास्तविक स्वरूप ना बिगड़े। पर्वत के रूप में मौजूद भगवान शिव को कोई नुकसान न पहुंचे। अगर तोड़फोड़ या खुदाई हुई, तो वहां प्रवाहित हो रही ऊर्जा डिस्टर्ब होगी।' इसे दो पॉइंट में समझिए… 1. शास्त्रों में मां कामाख्या को शिव के ऊपर रखे कमल पर बैठा दिखाया गया है, जबकि शिव खुद शेर पर लेटे हैं, यानी जिस नीलांचल पर्वत पर मां का स्थान है, वो शिव हैं। शिव के नीचे सिंह रूप में विष्णु और जिस कमल पर मां बैठी हैं, वो ब्रह्मा हैं। अब सोचिए पर्वत पर खुदाई और नया कंस्ट्रक्शन हुआ, तो क्या होगा। मैं नीलांचल पर्वत पर किसी भी तरह के डीप कंस्ट्रक्शन के खिलाफ हूं। 2. मां का अस्तित्व यहां जल के रूप में है। ये जल 10 जगह से प्रकट होता है। इसी के आधार पर इन्हें 10 महाविद्या कहा गया है। शास्त्र पढ़ने वाला साधक ही बता सकता है कि दसों जगह प्रकट जल धारा की प्रकृति में क्या अंतर है। यही जल पर्वत के नीचे भी बह रहा है। ऐसे में अगर कहीं ड्रिलिंग या ब्लास्टिंग हुई, तो जल स्रोत पर असर हो सकता है। दस में से कोई भी जल धारा बंद हो सकती है। देवप्रश्न के दौरान मां ने दिया आदेश- कोर्ट जाओ राजर्षि नंदी कहते हैं, 'हम कोर्ट जाने को लेकर दुविधा में थे। फिर सोचा मां से ही पूछ लेते हैं। आपको लगेगा कि मां से कैसे पूछेंगे। इसके लिए एक प्रक्रिया है, जिसे देवप्रश्न कहते हैं। दुनियाभर में 200-250 ऐसे साधक होंगे, जो देवप्रश्न यानी मां से सवाल कर सकते हैं। हमने केरल के दो साधकों को यहां आने के लिए राजी किया।' देवप्रश्न में हमारे दो सवाल थे: 1. हमें क्या करना चाहिए? 2. इस लड़ाई का नतीजा क्या निकलेगा? दोनों सवालों के जवाब मिले। जवाब 1. मां का आदेश मिला कि हमें कोर्ट जाना चाहिए। ये सामान्य लड़ाई नहीं होगी, बल्कि स्प्रिचुअल वर्ल्ड में लड़े जाने वाले धर्म युद्ध की तरह होगी। एक तरफ बेहद ताकतवर लोग होंगे, तो दूसरी तरफ तुम लोग। इसके लिए कठिन साधना करनी होगी, केस तभी आगे बढ़ेगा। जवाब 2. मां ने कहा कि लड़ाई का नतीजा सकारात्मक होगा। सरकार को रुकना पड़ेगा। पिटीशनर नंबर-3सरकार ने सर्वे एजेंसी चुनने का फैसला बार-बार क्यों बदला हरियाणा के योगेंद्र शर्मा 9 साल से मां कामाख्या के साधक हैं। वे कहते हैं, ‘कॉरिडोर के डिजाइन के मुताबिक, पहाड़ी पर बने मंदिर के लिए मल्टीलेवल पार्किंग और चौड़ी सड़कें बननी हैं। ये भूकंप वाला हाइली सेंसेटिव एरिया है। मल्टीलेवल पार्किंग के लिए नींव गहरी रखनी होगी, क्या ये संभव है।' उनके मुताबिक, 15 दिसंबर 2023 को 13 साधकों ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट भेजा, जिसने सर्वे का निर्देश दिया। सरकार ने पहले IIT गुवाहाटी के जरिए पार्सन्स नाम की कंपनी चुनी, लेकिन ये हाइड्रोलॉजी के बजाय वाटर हार्वेस्टिंग के एरिया में काम करती है। लिहाजा अगली सुनवाई से पहले सरकार ने इसे हटा दिया। वे आगे बताते हैं, इसके बाद हैदराबाद की नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI) को सर्वे का जिम्मा मिला और उसने 20 महीने का वक्त मांगा। सरकार ने उसे हटाकर रुड़की के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (NIH) को जिम्मा सौंपा, जिसने 6 से 8 महीने में सर्वे पूरा करने पर सहमति दी। इसे ठेका LT कंपनी के जरिए दिया गया। याचिकाकर्ताओं का सवाल है कि एक ही तरह के सर्वे के लिए दो संस्थानों के समय और प्रक्रिया में इतना अंतर क्यों। जनवरी 2026 में सरकार ने कोर्ट को बताया कि NIH ने रिपोर्ट सौंप दी है। IIT गुवाहाटी ने उसे मंजूरी भी दे दी है। इसके बाद 11 फरवरी 2026 को कोर्ट ने निर्माण शुरू करने की परमिशन दे दी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार कोर्ट में दिए अपने पहले भरोसे से पलट गई, जिसमें कहा था कि केस लंबित रहने तक निर्माण नहीं होगा।‘ योगेंद्र शर्मा का दावा है कि 14 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री के असम दौरे और कॉरिडोर प्रोजेक्ट के शुभारंभ की घोषणा से पहले ये कदम उठाया गया। पिटीशनर के वकील बोले…जिसे कॉरिडोर का टेंडर, उसी को सर्वे कराने का जिम्मा भी मिला कामाख्या कॉरिडोर को लेकर 13 साधकों की पिटीशन के अलावा एक और पिटीशन लगाई गई। ये मंदिर के पुजारी नबज्योति ने मई 2024 में लगाई थी। इनके एडवोकेट उपमन्यु हजारिका कहते हैं, ‘इस हाइड्रोलॉजिकल सर्वे के लिए सरकार ने LT को 78 लाख रु. का फंड सेंक्शन किया। फिर कंपनी ने सरकारी संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलोजी (NIH) रुड़की से सर्वे कराया।‘ ‘सवाल ये है कि सरकार ने खुद इस संस्था को सर्वे का जिम्मा क्यों नहीं दिया। बीच में प्राइवेट कंपनी लाने की क्या जरूरत थी। दरअसल LT को कॉरिडोर का टेंडर दिया जा चुका था इसलिए उसे शामिल किया गया। रिपोर्ट भी तभी छिपाई जा सकती थी, जब सर्वे किसी प्राइवेट कंपनी ने कराया हो।‘ सरकार ने सर्वे रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की हजारिका कहते हैं, ‘हमारे एक साथी ने जब सर्वे रिपोर्ट के लिए PWD, NIH और IIT गुवाहाटी में RTI डाली, तो NIH से जवाब आया कि प्राइवेट कंपनी ने कराया है। मालिकाना हक भी उसी का है। जब तक वो ना कहे, रिपोर्ट की जानकारी नहीं दे सकते। हम RTI के तहत सिर्फ सरकारी डेटा ही दे सकते हैं।‘ हजारिका कहते हैं, ‘जिसके पास कॉरिडोर बनाने का टेंडर है, उसी को सर्वे का जिम्मा दिया गया। जरा सोचिए, क्या कोई टेंडर रद्द होने देगा। शुरू में ये टेंडर 402 करोड़ का था। अब एसक्लेशन चार्ज के साथ 800-1000 करोड़ का हो गया होगा।’ हमने पूछा क्या आप नहीं चाहते कि कॉरिडोर बने? इसके जवाब में हजारिका कहते हैं, ‘कॉरिडोर बने, लेकिन कम से कम कंस्ट्रक्शन हो। अगर इसे बनाने में जल प्रवाह ही बंद हो गया, तो मंदिर की शक्ति खत्म हो जाएगी। ये बड़ा नुकसान होगा। जब आत्मा ही मर जाएगी, तो फिर मंदिर को संवारकर क्या मिलेगा।‘ पुजारी नबज्योति के वकील उपमन्यु हजारिका ने सर्वे रिपोर्ट के लिए हाईकोर्ट में इंटरलोकेटरी एप्लीकेशन फाइल की है। इस पर कोर्ट ने सरकार से 30 सितंबर 2026 तक रिपोर्ट न देने की लिखित वजह बताने का आदेश दिया है। हमने साधकों के आरोपों और सवालों को लेकर सरकार का पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला है। जवाब आने पर स्टोरी में अपडेट करेंगे। अब एक्सपर्ट्स की बात…जिस इंस्टीट्यूट ने सर्वे किया, उसके पूर्व डायरेक्टर ने दी थी सर्वे की सलाह इस मामले पर रुड़की के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के पूर्व निदेशक सुधीर कुमार से पिटीशनर्स ने राय मांगी थी। उन्होंने लिखित में सलाह दी, जो पिटीशन में भी अटैच है। सुधीर कहते हैं, ‘मां कामाख्या मंदिर एक अलग पहाड़ की चोटी पर स्थित है। ये समुद्र तल से 270 फीट ऊंची है और ग्रेनाइटिक नीस से बनी है। इसमें भूजल सिर्फ दरारों और जोड़ों के जरिए प्रवाहित होता है। कोई भी निर्माण जल के प्रवाह पर असर डाल सकता है। बहुमंजिला इमारत या बड़े कंस्ट्रक्शन को देखते हुए जरूरी है कि इस पहाड़ी की एक डिटेल जियो हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराई जाए।‘ ‘गर्भगृह क्षेत्र की जल धारा को संरक्षित करने के लिए स्टडी जरूरी है। सभी ऐसे मंदिर, जिनके गर्भगृह में जल है, उनके चारों ओर ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार (GPR) का इस्तेमाल करके सब सरफेस मैपिंग की जाए। इससे उन दरारों का पता लगाया जा सकेगा, जिनके जरिए पानी गर्भगृह में आ रहा और बाहर जा रहा है।‘ ‘पूरी पहाड़ी पर दरारें और जोड़ हैं, यही वजह है कि वहां जलाशय और कुंड भी हैं। इन कुंडों को भी दरारों और जोड़ों से ही पानी मिलता होगा, इसलिए इन कुंडों के आसपास भी GPR सर्वेक्षण कराना जरूरी है।‘ देश के चर्चित मंदिर कॉरिडोर और उनसे जुड़े विवाद… ……………………… ये खबर भी पढ़ें… सनातन धर्म के बड़े पद महामंडलेश्वर का सौदा ‘जो कहोगे, वही पद देंगे। महामंडलेश्वर बना देंगे। जगतगुरु भी बना सकते हैं। बस 20 लाख रुपए का व्यवहार करना होगा। आश्रम खोलना है, जमीन अखाड़े के नाम पर होगी। देखरेख और संचालन आप ही करना।’ ये ऑफर हमें देश के तीन बड़े अखाड़ों में ऊंचे पदों पर बैठे महंतों ने अलग-अलग मुलाकातों में दिया। पढ़िए पूरी खबर…
भास्कर अपडेट्स:अरुणाचल सीमा पर फायरिंग में असम के 12 लोग घायल, जमीन कब्जे पर विवाद
असम के धीमाजी जिले में सोमवार सुबह अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास फायरिंग में 12 लोग घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, जमीन पर कब्जे के विवाद के बाद यह घटना हुई। घटना गेरुकामुख थाने के गोगामुख राजस्व सर्किल में असम-अरुणाचल सीमा पर स्थित मिंगमंग बस्ती में हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सीमा पार से आए लोगों ने असम के ग्रामीणों को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग की। घायलों को पहले गोगामुख ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 7 लोगों को गंभीर हालत में धीमाजी सिविल अस्पताल भेजा गया, जबकि गंभीर रूप से घायल 4 लोगों को बेहतर इलाज के लिए असम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रेफर किया गया। आज की अन्य बड़ी खबरें… दीपके ने गांवों के स्कूल सुधार अभियान का ऐलान किया, 15 अगस्त से सरपंचों को जोड़ने की अपील कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने गांवों के सरकारी स्कूलों की सुविधाएं सुधारने के लिए देशव्यापी अभियान का ऐलान किया है। यह अभियान 15 अगस्त से शुरू होगा। उन्होंने ने अभिभावकों से स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं का सोशल ऑडिट करने और सरपंचों से सरकारी स्कूलों को सुधारने की जिम्मेदारी उठाने की अपील की। दीपके ने वीडियो जारी कर कहा कि वह महाराष्ट्र के अपने गांव हिंगोली से इस अभियान की शुरुआत करेंगे। अमेरिकी राजदूत ने विदेश सचिव मिश्री से मुलाकात की सोमवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिश्री से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने शिवसेना के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा से भी अलग बैठक की। दोनों बैठकों में भारत-अमेरिका संबंधों, व्यापार और निवेश पर चर्चा हुई। गोर ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर दोनों मुलाकातों की जानकारी साझा की। असम सरकार साइंस सिटी के लिए 100 करोड़ देगी, सीएम बोले- मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को कामरूप मेट्रो जिले के सोनापुर स्थित गुवाहाटी साइंस सिटी का दौरा किया। उन्होंने केंद्र में चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में साइंस सिटी के विकास के अगले चरण के लिए तय कामों की प्रगति की जानकारी ली गई। मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा कि साइंस सिटी का औपचारिक उद्घाटन पांच महीने पहले हुआ था। साइंस सिटी को लोगों के लिए ज्यादा आकर्षक और उपयोगी बनाने के लिए 100 करोड़ रुपए अतिरिक्त देगी।
छत्तीसगढ़ सरकार असम में आई भीषण बाढ़ के पीड़ितों को 5 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह घोषणा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ संकट की इस घड़ी में असम के लोगों के साथ खड़ा है। मुख्यमंत्री साय ने असम में बाढ़ से हुए जान-माल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस आपदा में सैकड़ों लोगों की जान गई है, जो अत्यंत दुखद है। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की। इस प्राकृतिक आपदा के कठिन समय में असम के लोगों के साथ पूरा देश खड़ा है। मल्लिकार्जुन खड़गे के एफसीआरए बयान पर भी प्रतिक्रिया इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एफसीआरए संबंधी बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अब मुद्दाविहीन हो गई है और इसी वजह से ऐसे विषयों पर राजनीति कर रही है। किसी भी नेता पर हमला गलत पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए हमले के सवाल पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी नेता पर हमला गलत है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि या नेता के साथ हिंसा स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
Weather Update : MP-राजस्थान में मूसलाधार बारिश, 15 राज्यों में अलर्ट; असम में बाढ़ से 100 की मौत
Weather Update 10 August : राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वोत्तर के कई इलाकों में सोमवार को भी बारिश का दौर जारी है। असम में बाढ़ से अब तक 100 से ज्यादा की मौत हो गई। मौसम विभाग ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश 15 राज्यों में भारी बारिश ...
हरिद्वार, 10 अगस्त . सावन के दूसरे Monday को देशभर के शिवालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु महादेव का जलाभिषेक कर रहे हैं. हरिद्वार के कनखल स्थित ऐतिहासिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है. भक्तों ने गंगा जल ले जाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक कर प्रार्थना की. मंदिर हर-हर महादेव के ... Read more
Assam Flood: असम में बाढ़ की स्थिति रविवार को भी गंभीर बनी रही, जिसवजह से राज्य में इस साल बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 हो गई। वहीं, कई इलाकों में अब भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है और सैकड़ों गांव इससे प्रभावित हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में बाढ़ से दो और लोगों की मौत हुई है। गोलाघाट में एक व्यक्ति की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हुई, जबकि कार्बी आंगलोंग में एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई।डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (DRIMS) के बुलेटिन के अनुसार, मरने वालों की कुल संख्या में 60 पुरुष, 23 महिलाएं और 18 बच्चे शामिल हैं। हालांकि, अधिकारियों ने शिवसागर के आंकड़ों में भी सुधार किया है, क्योंकि उन्हें पता चला कि एक ही व्यक्ति की मौत का रिकॉर्ड एक ही नाम से दो बार दर्ज हो गया था। इसके बाद जिले में मरने वालों की संख्या को 50 से घटाकर 49 कर दिया गया। इसके बाद कछार में 22, करीमगंज में 9 और गोलाघाट में 8 मौतें हुई हैं। धेमाजी, नागांव, उदलगुरी, सोनितपुर और कार्बी आंगलोंग से भी मौत की खबरें आई हैं।1.37 लाख से ज्यादा लोग प्रभावितASDMA के ताजा आकलन से पता चला है कि सात जिलों - चराइदेव, दरांग, गोलाघाट, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, नागांव और शिवसागर - में 1.37 लाख से ज्यादा लोग अभी बाढ़ से प्रभावित हैं।गोलाघाट सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बनकर उभरा है, जहां लगभग 70,000 लोग प्रभावित हुए हैं; इसके बाद शिवसागर का नंबर है, जहां करीब 40,000 निवासी बाढ़ का असर झेल रहे हैं। जोरहाट में भी 16,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।हालांकि, शनिवार की तुलना में स्थिति में थोड़ी सुधार हुआ है। उस समय आठ जिलों में लगभग 1.5 लाख लोगों के प्रभावित होने की खबर थी।अधिकारियों ने छह जिलों में 125 राहत कैंप और राहत वितरण केंद्र बनाए हैं, जहां अभी 49,000 से ज्यादा बाढ़ प्रभावित लोग शरण लिए हुए हैं।456 गांव पानी में डूबे, खेती की जमीन को नुकसानन्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, बाढ़ से 456 गांव जलमग्न हो गए हैं, जबकि लगभग 11,933 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है।इसके अलावा, इस बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों में तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुंचाया है। गोलाघाट और नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी और श्रीभूमि में कुशियारा नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।बाढ़ ने राज्य भर में 43,000 से ज्यादा पालतू जानवरों और पोल्ट्री को भी प्रभावित किया है, जिससे ग्रामीण समुदायों को होने वाला नुकसान और बढ़ गया है।बचाव, राहत और पुनर्वास का काम जारी हैजिला प्रशासन और राजस्व अधिकारी पानी के स्तर पर नजर रखे हुए हैं और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद कर रहे हैं। अधिकारी जरूरी सामान और मेडिकल मदद की सप्लाई बनाए रखने के लिए भी काम कर रहे हैं, क्योंकि प्रभावित इलाके धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।छत्तीसगढ़ ने 5 करोड़ रुपये की मदद का ऐलान कियालगातार जारी संकट के बीच, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को असम में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है।साय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात की और बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात का जायजा लिया। उम्मीद है कि इस मदद से प्रभावित समुदायों के लिए चलाए जा रहे राहत और पुनर्वास के कामों में मदद मिलेगी।यह भी पढ़ें:Jharkhand Student Protest: CGL परीक्षा को लेकर छात्र करेंगे झारखंड विधानसभा का घेराव, जानें प्रोटेस्ट से जुड़ी 10 बड़ी बातें
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रेल यात्री ध्यान दें! भारी बारिश के चलते असम जाने वाली कई ट्रेनों का रूट बदला, देखें पूरी लिस्ट
असम में भारी बारिश से पटरियों को नुकसान के कारण गोमतीनगर-डिब्रुगढ़ सहित कई ट्रेनें परिवर्तित मार्ग से चलेंगी।
देशभर में मौसम का कहर! असम बाढ़ में 98 मौतें, हिमाचल से पश्चिम बंगाल तक भारी बारिश का अलर्ट, जानें यूपी-बिहार का हाल
गोपालगंज के सिधवलिया रेलवे स्टेशन पर चलती ताप्ती गंगा एक्सप्रेस से उतरने की कोशिश में 36 वर्षीय राजेश यादव की मौत हो गई। वह असम से अपनी बीमार मां से मिलने गांव लौट रहे थे। ट्रेन का स्टेशन पर ठहराव नहीं था।
बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता पहुंचाने के बाद एक मिसाल पेश की है। राहत कार्य पूरा करने के बाद, रणदीप अपने लंबे समय से सहयोगी (हेल्पर) रहे सागर लिंबू के पैतृक गांव पहुंचे। यह गांव असम के गोलाघाट जिले के सरुपोथार क्षेत्र में स्थित है। रणदीप ने बताया कि जब वे बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए असम आए हुए थे, तब सागर ने उन्हें अपने पास के गांव के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने वहां जाने का फैसला किया। इसे भी पढ़ें: 'टीआरपी चाहिए तो इंसानियत को बेच दोगे?' रियलिटी शो के घिनौने कंटेंट पर फूटा Sourabh Raaj Jain का गुस्सा दौरे के दौरान 'इंडिया टुडे NE' से बात करते हुए हुड्डा ने उस इलाके को बहुत खूबसूरत बताया और कहा कि वहाँ के लोग खुशमिजाज़, मिलनसार और मेहमाननवाज़ हैं। उन्होंने बताया कि पिछली रात वह नागालैंड के लुकुटो गाँव में रुके थे और सागर के गाँव पहुँचने पर उन्हें लगा कि यह इलाका 'सच में धरती पर स्वर्ग' जैसा है। मज़ाक-मज़ाक में उन्होंने कहा कि अब वह नॉर्थ-ईस्ट के 'दामाद' बन गए हैं, क्योंकि लोग उन्हें यही कह रहे थे कि वह जहाँ भी जा रहे हैं। हुड्डा ने कहा कि वह पहले कभी इस इलाके में नहीं आए थे और उन्हें खुशी है कि उन्होंने यहाँ आने का फ़ैसला किया। उन्होंने कहा कि उन्हें स्थानीय लोगों और सागर के परिवार (जिसमें उनके चाचा भी शामिल थे) से मिलकर खुशी हुई और उन्होंने दोहराया कि यह जगह वाकई बहुत खूबसूरत है। इसे भी पढ़ें: Musafir Cafe Season 2 Announced Netflix | 'मुसाफ़िर कैफ़े' सीज़न 2 का आधिकारिक ऐलान! क्या चंदर, सुधा और प्रीति को मिलेगा उनका सही अंजाम? स्थानीय लोगों और पत्रकारों से बातचीत के दौरान हुड्डा को बताया गया कि यह गाँव मशहूर खिलाड़ियों से जुड़ा है, जिनमें ओलंपियन बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन और एथलीट नयनमोनी सैकिया शामिल हैं। यह जानकर उन्हें हैरानी हुई कि वे यहीं पैदा हुए थे। हुड्डा ने कहा कि यह खिलाड़ियों का गाँव लगता है और उन्हें हरियाणा की याद दिलाता है, जहाँ उनके अनुसार हर गाँव में खेल-कूद का ऐसा ही माहौल होता है। यह दौरा हुड्डा के अपर असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों (जैसे शिवसागर) में जाने के बाद हुआ। वहाँ उन्होंने 'ग्लोबल सिख' नाम की मानवीय संस्था के साथ मिलकर राहत कार्यों में हिस्सा लिया, प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, वॉलंटियर्स से बातचीत की और ज़रूरी सामान बाँटा। शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट और नगाँव जैसे ज़िले अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। सागर लिंबू के गाँव में अपनी यात्रा खत्म करते हुए हुड्डा ने वहाँ के लोगों का स्वागत के लिए शुक्रिया अदा किया और कहा कि उन्होंने उन्हें बहुत अच्छा महसूस कराया। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi View this post on Instagram A post shared by Global Sikhs (@theglobalsikhs) View this post on Instagram A post shared by Randeep Hooda (@randeephooda)
रणदीप हुड्डा बाढ़ त्रासदी के बीच असम पहुंचे, ग्लोबल सिख्स के राहत अभियान में हुए शामिल
Randeep Hooda Assam: अभिनेता, फिल्म निर्माता और समाजसेवी रणदीप हुड्डा एक बार फिर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। इस बार वह बाढ़ से प्रभावित असम पहुंचे, जहां उन्होंने राहत कार्यों में खुद हिस्सा लिया।
Devoleena Bhattacharjee On Assam Floods: इस समय भारी बारिश की वजह से असम में बाढ़ आ चुकी है और हालात काफी ज्यादा बिगड़ चुके हैं। जिसमें काफी सारे लोगों की जान भी गई है और काफी ऐसी भी लोग हैं जो
'370 की बिरयानी' विवाद के बाद पहली बार स्टेज पर लौटे Pranit More, फैंस का सपोर्ट देखकर हुए भावुक
स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने '370 की बिरयानी' विवाद के बाद पहली बार लाइव परफॉर्मेंस दी। लंबे समय बाद स्टेज पर लौटे प्रणित अपने फैंस का प्यार देखकर भावुक हो गए। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें इतनी मुश्किलों के बाद भी लोगों से इतना सपोर्ट मिलने की उम्मीद नहीं थी। स्टेज पर फैंस का किया धन्यवाद लाइव शो के दौरान प्रणित मोरे ने दर्शकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, जब मैं स्टेज पर आया और आप लोगों ने मेरा स्वागत किया, तब मेरे मन में यही सवाल था कि क्या लोग मुझे फिर से स्वीकार करेंगे? लेकिन आप सभी ने जिस तरह मेरा साथ दिया, उसके लिए मैं दिल से आपका शुक्रिया अदा करता हूं। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने कभी स्टैंडअप कॉमेडी सिर्फ पैसे या शोहरत के लिए नहीं शुरू की थी। उनका मकसद लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना था। प्रणित ने कहा, मैं नौकरी के साथ स्टैंडअप करता था क्योंकि इससे मुझे खुशी मिलती थी। हमेशा यही चाहता था कि मेरी वजह से दूसरे लोगों को भी खुशी मिले। जब ऐसा नहीं होता तो दुख जरूर होता है। इसे भी पढ़ें: Global Sikhs के साथ मिलकर Assam में राहत कार्य कर रहे हैं Randeep Hooda, गुरुद्वारे में की प्रार्थना मां की बात ने बढ़ाया हौसला शो के दौरान प्रणित ने अपनी मां की कही बात भी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी मां ने उनसे कहा, गलती सबसे होती है। अगर तुमने अपनी गलती मान ली है और माफी भी मांग ली है, तो आगे बढ़ो। अगर किसी को लगता है कि उसने कभी गलती नहीं की, तो वह बता दे। प्रणित ने कहा कि उनकी मां की इन बातों ने उन्हें हिम्मत दी और फिर से स्टेज पर लौटने का भरोसा भी दिया। क्यों हुआ था विवाद? कुछ समय पहले प्रणित मोरे के एक स्टैंडअप शो का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसमें एक लड़के द्वारा '370 की बिरयानी' के बदले एक लड़की से सेक्सुअल फेवर मांगने वाली बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा और उन्होंने माफी भी मांगी थी। इसे भी पढ़ें: Viral Post: जान्हवी कपूर ने बॉयफ्रेंड Shikhar Pahariya संग शेयर की रोमांटिक तस्वीरें, Family के साथ आए नजर वीडियो हो रहा वायरल अब विवाद के बाद प्रणित मोरे की पहली लाइव परफॉर्मेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह भावुक होकर अपने फैंस का धन्यवाद करते नजर आ रहे हैं। उनके इस अंदाज पर सोशल मीडिया पर कई लोग उनका समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स अभी भी इस पूरे विवाद पर अपनी अलग-अलग राय दे रहे हैं। This Clip Is from his Georgia Show (14th June) #PranitMore pic.twitter.com/NtTHGUhkB0 — Supreme (@DarshanShi67146) July 30, 2026
विचार: असम की भूमि को लीलती बाढ़
आने वाले दिनों में कम समय में अत्यधिक और तेज बरसात होना ही है। ऐसे में असम के अस्तित्व को बचाने के लिए उसके तटों की सुरक्षा के लिए दूरगामी योजना अनिवार्य है, जो यहां के जल और जन दोनों को बचा सके।
Global Sikhs के साथ मिलकर Assam में राहत कार्य कर रहे हैं Randeep Hooda, गुरुद्वारे में की प्रार्थना
बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा इस समय असम के शिवसागर जिले में हैं। वह एक एनजीओ के जरिए बाढ़ से परेशान लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के काम में हिस्सा ले रहे हैं। शनिवार को रणदीप ने 'ग्लोबल सिखों' संस्था के साथ मिलकर बाढ़ से प्रभावित लोगों को राशन और बाकी जरूरी सामान बांटा। आपको बता दें कि असम में बाढ़ की वजह से अब तक 82 लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। पानी भरा रहा तो बीमारियां फैलने का डर रविवार को शिवसागर में राहत काम के दौरान रणदीप हुड्डा ने बताया कि इलाके में पानी अभी भी बहुत गहरा है। बाढ़ आए 10 दिन हो चुके हैं, लेकिन कई परिवार अभी भी पानी में फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया, 'हमने जरूरी सामान बांटा है। दूर-दराज के इलाकों में लोग काफी परेशान हैं। कई घरों में कीचड़ भर गया है और अगर पानी जल्द नहीं निकला, तो बीमारियां फैलने का बड़ा खतरा है।' उन्होंने आगे बताया कि 'ग्लोबल सिखों' की टीम हफ्ते भर से यहां काम कर रही है। जिन लोगों के बर्तन और जरूरी चीजें बह गई हैं, उन्हें वे सामान पहुंचाए जा रहे हैं। #WATCH | Sivasagar, Assam: On flood relief work, Actor, Randeep Hooda says, ... The water is still very deep. It has been 10 days since the flood, but many families are still stranded in the water in several places. We distributed essential items and returned. Many people in… pic.twitter.com/ZBAwYZ8nfl — ANI (@ANI) August 2, 2026 इसे भी पढ़ें: Viral Post: जान्हवी कपूर ने बॉयफ्रेंड Shikhar Pahariya संग शेयर की रोमांटिक तस्वीरें, Family के साथ आए नजर रेलवे स्टेशन पर बांटी राहत सामग्री शनिवार को रणदीप हुड्डा ने शिवसागर रेलवे स्टेशन पर रह रहे बेघर लोगों को जरूरत का सामान दिया। इसके बाद उन्होंने शिवसागर के गुरुद्वारा साहिब जाकर असम के लोगों की सलामती और भलाई के लिए प्रार्थना भी की। इसे भी पढ़ें: Naseeruddin Shah ने Lifetime Achievement Award ठुकराने की बताई वजह, कहा- अभी मेरा काम पूरा नहीं हुआ इंसानियत सबसे ऊपर है रेलवे स्टेशन पर लंगर का खाना बांटते हुए रणदीप हुड्डा ने मीडिया से कहा कि पास के इलाकों से कई परेशान परिवार यहां आकर ठहरे हुए हैं। वे लोग खाना बनाकर पिछले सात दिनों से हर रोज यहां ला रहे हैं। रणदीप ने कहा, 'इंसानियत सबसे ऊपर है। मैं काफी समय से 'ग्लोबल सिखों' की टीम के साथ काम कर रहा हूं और उनका काम बहुत बेहतरीन है। मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे जरूरत मंदों की मदद के लिए आगे आएं। एक इंसान होने के नाते दूसरों की मदद करना हमारा फर्ज है।'
फैक्ट चेक: असम में आई बाढ़ से जोड़कर AI जनरेटेड और असंबंधित वीडियो हो रहे वायरल
बूम ने पाया वायरल हो रहा एक वीडियो AI की मदद से क्रिएट किया गया है, वहीं दूसरा वीडियो Simran SK नाम की एक क्रिएटर द्वारा बनाया गया नाटकीय वीडियो है.
सिंगर जुबीन गर्ग की मौत का सच गहराया, असम सरकार ने जांच के लिए गठित की एसआईटी
फेमस असमिया और बॉलीवुड सिंगर जुबीन गर्ग के अचानक निधन से उनके फैंस के बीच शोक की लहर है। जुबीन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में स्कूबा डाइविंग के दौरान निधन हो गया था। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के डीजीपी से जुबीन गर्ग ...
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
घर पर ताला लगाकर गायब हुए रणवीर अल्लाहबादिया, खाली हाथ लौटी मुंबई और असम पुलिस!
कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में माता-पिता पर भद्दा कमेंट करके यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया मुश्किलों में घिर चुके हैं। देश के कई राज्यों में रणवीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। वहीं यह मामला संसद तक उठ चुका है। अब खबर आ रही है कि ...
Ramen Baruah missing : मनोरंजन जगत से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। असम के प्रख्यात गायक, संगीतकार और निर्देशक रमन बरुआ तीन दिन से लापता हैं। रमन बरुआ बीते सोमवार गुवाहाटी के लतासिल इलाके में अपने घर से पास के मंदिर में दर्शन करने के लिए ...

