8 घंटे की पूछताछ में पवन खेड़ा ने उगले राज? असम पुलिस ने अब इस बड़े कांग्रेसी नेता को भेजा समन
असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पवन खेड़ा विवाद में अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला को समन भेजा है। सुरजेवाला को 23 मई को गुवाहाटी में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
चंडीगढ़ में केंद्र सरकार द्वारा नया किराया कानून लागू करने का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या तहसीलदार और अतिरिक्त उपायुक्त जैसे प्रशासनिक अधिकारियों को अदालत जैसी शक्तियां सौंपी जा सकती हैं। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद इसे रोस्टर के अनुसार उपयुक्त बेंच के पास भेजने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। दरअसल, केंद्र सरकार ने 6 मई को अधिसूचना जारी कर चंडीगढ़ में लंबे समय से लागू ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट-1949 को हटाकर असम टेनेंसी एक्ट-2021 लागू कर दिया था। इस फैसले को हाईकोर्ट और डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशनों ने चुनौती दी है। जानिए याचिकाकर्ता अदालत में क्या दलील दी याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि नए कानून के तहत ‘रेंट अथॉरिटी’ की शक्तियां तहसीलदार जैसे राजस्व अधिकारियों को दे दी गई हैं, जबकि अपील सुनने का अधिकार डिप्टी कमिश्नर को सौंपा गया है। उनका कहना है कि किराया विवादों का निपटारा हमेशा न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जाता रहा है और प्रशासनिक अधिकारियों को ऐसी शक्तियां देना न्यायिक व्यवस्था की स्वतंत्रता पर असर डालता है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट और संविधान पीठ के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि न्यायिक प्रकृति के अधिकार केवल न्यायिक प्रशिक्षण रखने वाले स्वतंत्र अधिकारियों के पास होने चाहिए। ऐसे में कार्यपालिका के अधिकारियों को अदालत जैसी शक्तियां देना स्थापित संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। याचिका में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या केंद्र सरकार किसी दूसरे राज्य का कानून सीधे चंडीगढ़ पर लागू कर सकती है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि चंडीगढ़ की शहरी व्यवस्था, भवन संरचना और सामाजिक परिस्थितियां असम से पूरी तरह अलग हैं। ऐसे में बिना स्थानीय जरूरतों को समझे यह कानून लागू करना सही नहीं है। बार एसोसिएशनों ने नए कानून के व्यावहारिक पहलुओं पर भी चिंता जताई। अदालत को बताया गया कि मौजूदा ढांचे में न तो पर्याप्त न्यायिक आधारभूत सुविधाएं हैं और न ही पक्षकारों को अदालत जैसी सुरक्षा मिल पाएगी। याचिका के अनुसार नए कानून से किरायेदारों की सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। मकान मालिक आसान प्रक्रिया के जरिए बेदखली की कार्रवाई शुरू कर सकता है, जबकि विवाद लंबा चलने पर किरायेदार पर बढ़ते दंडात्मक किराए का बोझ भी डाला जा सकता है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि गृहमंत्री बताएं कि “बस्तर 2.0” का ब्लूप्रिंट क्या है। दीपक बैज के इस सवाल पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने पलटवार किया। दीपक बैज का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करते हुए कांग्रेस पर बस्तर और जवानों की शहादत को लेकर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया। दीपक बैज को बस्तर के ब्लूप्रिंट की चिंता हो रही पंकज झा ने लिखा कि, आज दीपक बैज को बस्तर के ब्लूप्रिंट की चिंता हो रही है, लेकिन टेकलगुड़ा हमले के समय उनकी प्राथमिकता कुछ और थी। उस नक्सली हमले में 22 जवान शहीद हुए थे और 30 से ज्यादा घायल हुए थे। उस समय दीपक बैज बस्तर से सांसद थे और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ असम में चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। पंकज झा ने आरोप लगाया कि हमले के कई घंटे बाद दीपक बैज ने मुख्यमंत्री के साथ रेस्तरां में डिनर करते हुए फेसबुक पोस्ट शेयर किया था। वहीं दूसरी ओर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह असम से अपना कार्यक्रम रद्द कर छत्तीसगढ़ पहुंचे थे। हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे पंकज झा ने कहा कि अमित शाह ने छत्तीसगढ़ आकर हाई लेवल बैठक की थी और घायल जवानों से मिलकर इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया था। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसी कांग्रेस और दीपक बैज को बस्तर की चिंता करने की जरूरत नहीं है। जिसने बस्तर को नक्सल मुक्त बनाया है, वही उसे संवारेगा भी। हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे।
खोल वादन व कथक प्रस्तुति के जरिएदिखी असम की सांस्कृतिक विरासत
सिटी रिपोर्टर }घुंघरुओं की लय, खोल की गूंज और कथक की घूमती मुद्राओं के बीच राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर का मंच शुक्रवार शाम असम की सांस्कृतिक रंगत से भर उठा। ‘कलर्स ऑफ असम-कथक एंड परकशन’ में कथक, सत्रीय परंपरा और लाइव परकशन का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत असम के खो़ल कलाकार मनोज कुमार दास की गुरु वंदना और पारंपरिक खो़ल वादन से हुई। उन्होंने ‘भंगी’, 42 मात्रा वाले ‘मांझती ताल’, ‘कृष्ण श्लोक’ और ‘धेमाली’ के जरिए सत्रीय परंपरा की लय और आध्यात्मिक पक्ष को मंच पर उभारा। ‘भंगी’ में श्रीकृष्ण की बाललीला और बरगीत के माध्यम से श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद प्रस्तुत किया गया। बरपेटा से आए मनोज कुमार दास पिछले 32 वर्षों से खो़ल वादन से जुड़े हैं। उनके मुताबिक खो़ल असम की वैष्णव और सत्रीय संस्कृति की आध्यात्मिक पहचान है। कथक में दिखीं हंस गामिनी लखनऊ घराने की कथक नृत्यांगना रूपारानी दास बोरा ने गणेश वंदना और तीनताल की पारंपरिक बंदिशों से प्रस्तुति दी। हंस गामिनी, मयूर गामिनी, गज गामिनी और तलवार की गत के जरिए उन्होंने कथक की विभिन्न शैलियां मंच पर उभारीं। जयपुर में प्रस्तुति होने के कारण उन्होंने योद्धाओं की तलवार चाल को भी कथक मूवमेंट्स में शामिल किया। ‘कलर्स ऑफ असम’ थीम के तहत रूपारानी ने डॉ. भूपेन हजारिका के असमी गीत पर कथक अभिनय प्रस्तुत किया। वहीं सूफी अंग में “मोहे रंग दे अपने ही रंग में” प्रस्तुति भी दर्शकों को खूब पसंद आई। उन्होंने कहा कि कथक और सत्रिया की शैली अलग होने के बावजूद ताल, अभिनय और चक्कर जैसी समानताएं दोनों में मौजूद हैं।
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 31 मई 2026 तक आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा Central Armed Police Forces (CAPFs), SSF तथा Assam Rifles में Rifleman (GD) पदों के लिए कंप्यूटर आधारित मोड में ली जाएगी। जिले में परीक्षा का आयोजन प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, स्टेट हाईवे-7, विधानसभा रोड स्थित मुरा बंगोली परीक्षा केंद्र में किया जाएगा। परीक्षा को लेकर प्रशासन द्वारा आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। परीक्षा के सुचारू संचालन और व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए अतिरिक्त तहसीलदार खरोरा सूर्यकांत कुम्भकार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने अभ्यर्थियों से समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने और सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखने की अपील की है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सिर्फ 38 साल के भाई प्रतीक का बुधवार सुबह निधन हो गया। उनकी अचानक हुई मौत के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर उनकी तबीयत कब बिगड़ी? आखिरी रात ऐसा क्या हुआ? उस समय घर में कौन-कौन मौजूद था? पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, पत्नी अपर्णा यादव असम में थीं, लेकिन वह रातभर घरवालों के टच में रहीं। उन्होंने किसी ज्योतिषी से भी फोन पर बात की थी। यह भी बताया जा रहा है कि प्रतीक ने मंगलवार शाम को ड्रिंक किया था। प्रतीक यादव की आखिरी रात की कहानी पर पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट… अपर्णा के कहने पर ज्योतिषी लेते रहे हालचाल सूत्रों से पता चला है कि अपर्णा यादव पति प्रतीक के स्वास्थ्य को लेकर काफी परेशान थीं। वह असम में थीं, लेकिन समय-समय पर उनके स्वास्थ्य के बारे में इनपुट ले रही थीं। मंगलवार शाम करीब 5 बजे अपर्णा ने परिवार के एक करीबी एस्ट्रोलॉजर जोशी को फोन किया था। उनसे कहा था कि एक बार घर जाकर प्रतीक की स्थिति देख लें। एस्ट्रोलॉजर खुद नहीं जा सके, लेकिन उन्होंने घर पर मौजूद एक स्टाफ (राकेश) से फोन पर संपर्क किया था। जवाब मिला था कि प्रतीक अपने कमरे में आराम कर रहे हैं। प्रतीक ने मंगलवार शाम ड्रिंक किया था परिवार से जुड़े लोगों के मुताबिक, पिछले 3-4 दिन से प्रतीक यादव घर पर ही थे। 30 अप्रैल को बाएं पैर की सर्जरी की वजह से उनका बाहर आना-जाना बंद था। पैर में काफी स्वैलिंग (सूजन) थी। मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की डॉक्टर रचिता शर्मा की निगरानी में प्रतीक का इलाज चल रहा था। यह भी सामने आया है कि ऑपरेशन के बाद से उनका रूटीन काफी बदला हुआ था। वह बाहरी लोगों से बिल्कुल नहीं मिलते थे, अपने कमरे में ही रहते थे। इस दौरान प्रतीक कई बार 24-24 घंटे के लिए मेदांता में एडमिट हुए थे। डॉ. रचिता और ICU की टीम उनका इलाज कर रही थी। सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार शाम प्रतीक के ड्रिंक लेने की बात भी सामने आई है। उन्होंने कुछ भी खाया नहीं था। रात 11:30 बजे तबीयत बिगड़ी, सिविल अस्पताल ले जाया गया प्रतीक के जिम से जुड़े उनके साथी सर्वेश पांडेय बताते हैं कि मंगलवार रात करीब 11:30 बजे अचानक प्रतीक की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद ड्राइवर और स्टाफ की मदद से उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया। सूत्र बताते हैं कि वहां करीब एक घंटे इलाज चला, फिर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। हालांकि, सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टर इस बात से इनकार कर रहे हैं कि उन्हें अस्पताल लाया गया था। प्रतीक हॉस्पिटल गए थे या नहीं? यही सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। जब उनकी तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं थी, तो डिस्चार्ज क्यों किया गया? क्या उस समय उनकी हालत को डॉक्टरों ने सही तरीके से नहीं आंका? घर में सिर्फ नौकर और दोनों बेटियां थीं सूत्रों के अनुसार, मंगलवार रात घर के अंदर सिर्फ प्रतीक, उनकी दोनों बेटियां प्रथमा-प्रतीक्षा और नौकर ही थे। बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात थे। अपर्णा यादव असम सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में गई थीं। इसके चलते उनके परिवार का कोई सदस्य घर पर नहीं था। ड्राइवर-गार्ड और स्टाफ से पूछताछ हुई लखनऊ पुलिस ने प्रतीक के ड्राइवर, सिक्योरिटी गार्ड और घरेलू नौकर से घटना के बारे में पूछताछ की। किस समय किसने क्या देखा? किसने अस्पताल ले जाने का फैसला लिया? रास्ते में क्या हुआ? इन सभी बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, घर से कुछ दवाएं, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सामान भी मिले हैं। घर के किचन में प्रतीक बेहोशी की हालत में मिले थे यह भी बताया जा रहा है कि प्रतीक अपने घर के किचन में बेहोशी की हालत में मिले थे। इसके बाद घरवालों और स्टाफ की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच के लिए लखनऊ पुलिस अब उनके घर जाकर पूरे घटना की पड़ताल करेगी। यह जानने की कोशिश करेगी कि उस समय घर के अंदर क्या परिस्थितियां थीं? प्रतीक किन हालात में थे? अब जानिए डॉक्टर ने क्या कहा? मृत अवस्था में लाए गए थे अस्पताल लखनऊ के सिविल अस्पताल के CMS डॉ. डीसी पांडेय के मुताबिक, प्रतीक यादव को सुबह 6:55 बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। प्रतीक के साथ उनके रिश्तेदार भी मौजूद थे। डॉक्टरों ने देखा, तो उनके शरीर मे कोई हरकत नहीं हो रही थी। हार्ट और विसरा सुरक्षित रखा गया प्रतीक के पोस्टमॉर्टम के दौरान हार्ट और विसरा सुरक्षित रखा गया है। विसरा सुरक्षित रखने का उद्देश्य यह है कि जांच में यह साफ किया जा सके कि कहीं किसी प्रकार का जहर तो नहीं दिया गया था। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कार्डियक अरेस्ट से मौत की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर के निचले हिस्से से ऊपरी हिस्से की ओर खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) पहुंच गया था। इससे धमनियों (आर्टरी) और फेफड़ों (लंग्स) पर असर पड़ा, जिससे इंफेक्शन (संक्रमण) की स्थिति बनी और कार्डियक अरेस्ट के कारण मौत हो गई। शरीर पर किसी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। नाखून और शरीर के कुछ हिस्सों का नीला पड़ना हाल ही में हुई सर्जरी से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, करीब 2 हफ्ते पहले प्रतीक ने लेफ्ट पैर की सर्जरी कराई थी। प्रतीक 30 अप्रैल को मेदांता अस्पताल में भर्ती हुए थे 30 अप्रैल को प्रतीक यादव को गंभीर हालत में लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 3 दिन बाद उनकी हालत में सुधार हो गया। इसके बाद वह अस्पताल से बिना छुट्टी लिए घर चले गए थे। मेदांता अस्पताल में जब अखिलेश यादव भाजपा नेता अनुपमा जायसवाल को देखने गए थे, तो वहां प्रतीक से भी मिले थे, जहां उनका इलाज चल रहा था। लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे प्रतीक डॉक्टरों के मुताबिक, प्रतीक फेफड़े की गंभीर बीमारी पल्मोनरी एम्बोलिज्म की चपेट में थे। वह लंबे समय से इस बीमारी से जूझ रहे थे। उनके फेफड़ों में खून का थक्का (क्लॉट) था। इसके अलावा वे डिप्रेशन की समस्या से भी पीड़ित थे। क्या है पल्मोनरी एम्बोलिज्म, जिससे प्रतीक की मौत हुई? डॉक्टरों के मुताबिक, प्रतीक यादव पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। पल्मोनरी एम्बोलिज्म, एक जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें फेफड़ों की धमनियों में खून का थक्का जम जाता है। यह थक्का अक्सर पैरों की नसों में बनने वाले डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) से फेफड़ों तक पहुंचता है। इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक सांस फूलना, सीने में तेज दर्द, बेचैनी और खांसी के साथ खून आना शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो जाती है। जानिए कौन थे प्रतीक यादव? प्रतीक यादव सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। प्रतीक का जन्म 7 जुलाई, 1987 को लखनऊ में हुआ था। मुलायम सिंह के बेटे होने की वजह से प्रतीक की राजनीति में एंट्री बहुत आसान थी, लेकिन उन्होंने शुरू से ही दूसरी राह चुनी। प्रतीक सफल बिजनेसमैन, फिटनेस फ्रीक बने और राजनीति से बराबर दूरी बनाए रखी। 2011 में प्रतीक और अपर्णा ने लव मैरिज की थी। ………….. ये खबर भी पढ़ें… लग्जरी कारें, बॉडी बिल्डिंग और तन्हाई, ऐसे थे प्रतीक यादव:राजनीति से दूरी, अपर्णा से लव मैरिज, फिर विवाद; मौत की वजह भी रहस्य सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। महज 38 साल की उम्र में उनकी मौत की खबर से लोग हैरान हैं। प्रतीक की जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। यादव परिवार से होने के बावजूद प्रतीक को राजनीति पसंद नहीं थी। वह कभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आते थे। न ही मीडिया में कभी कोई बयान देते थे। वह अपनी कहानी सिर्फ सोशल मीडिया से बयां करते थे। पढ़िए पूरी खबर…
सिंगर जुबीन गर्ग की मौत का सच गहराया, असम सरकार ने जांच के लिए गठित की एसआईटी
फेमस असमिया और बॉलीवुड सिंगर जुबीन गर्ग के अचानक निधन से उनके फैंस के बीच शोक की लहर है। जुबीन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में स्कूबा डाइविंग के दौरान निधन हो गया था। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के डीजीपी से जुबीन गर्ग ...
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असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
घर पर ताला लगाकर गायब हुए रणवीर अल्लाहबादिया, खाली हाथ लौटी मुंबई और असम पुलिस!
कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में माता-पिता पर भद्दा कमेंट करके यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया मुश्किलों में घिर चुके हैं। देश के कई राज्यों में रणवीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। वहीं यह मामला संसद तक उठ चुका है। अब खबर आ रही है कि ...
Ramen Baruah missing : मनोरंजन जगत से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। असम के प्रख्यात गायक, संगीतकार और निर्देशक रमन बरुआ तीन दिन से लापता हैं। रमन बरुआ बीते सोमवार गुवाहाटी के लतासिल इलाके में अपने घर से पास के मंदिर में दर्शन करने के लिए ...

