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3 पासपोर्ट विवाद से गरमाई असम की सियासत, सरमा परिवार का पवन खेड़ा को करारा जवाब

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के 3 पासपोर्ट संबंधी आरोपों के बाद असम की सियासत गरमा गई। भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह निराधार और फर्जी बताया। हिमंता और उनकी पत्नी ने भी इस मामले में कड़ी ...

वेब दुनिया 6 Apr 2026 10:06 am

क्या असम में चाय बागान मजदूर बिगाड़ेंगे BJP का खेल:10 साल में 154 रुपए बढ़ी दिहाड़ी, ST दर्जा नहीं, खतरे में 45 सीटें

24 साल के परदुम ताती डिब्रूगढ़ के चाय बागान में काम करते हैं। उनके माता-पिता भी यहीं काम करते थे। परदुम पुलिस में नौकरी करना चाहते थे, लेकिन परिवार के हालात ने बागान पहुंचा दिया। यहां मिलने वाली दिहाड़ी से खुश नहीं हैं। हालात पूछते ही भावुक हो जाते हैं। कम दिहाड़ी मिलने की शिकायत करने वाले वो अकेले नहीं हैं। असम में लगभग 8 लाख से ज्यादा वर्कर्स चाय बागान में काम करते हैं। दिहाड़ी के नाम पर उन्हें रोज के महज 280 रूपए मिलते हैं। पिछले 10 सालों में दिहाड़ी सिर्फ 130 रुपए बढ़ी है। महिलाएं बागान में टॉयलेट जैसी बेसिक सुविधा न होने की शिकायत करती हैं। वर्कर की नाराजगी टी ट्राइब्स को अनसूचित जाति (ST) में शामिल न करने को लेकर भी है। 126 विधानसभा सीटों वाले असम की लगभग 45 सीटों पर चाय बागान मजदूरों का सीधा असर है। असम की सत्ता का रास्ता इन्हीं बागानों से होकर निकलता है। 9 अप्रैल को यहां चुनाव हैं। ऐसे में चाय मजदूरों के क्या मुद्दे हैं, वे किन हालात में हैं, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम डिब्रूगढ़ के चाय बागान पहुंची। बागान से बाजार तक 24 घंटे में पहुंचती हैं पत्तियांडिब्रूगढ़ शहर से 20 किलोमीटर दूर हम ढलाजन सब डिवीजन के कनाई गांव पहुंचे। यहां मोकलबाड़ी टी एस्टेट कंपनी का चाय बागान है। सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक काम होता है। बड़े बागानों में लगभग 12 से 14 हेक्टेयर के करीब 14 सेक्शन होते हैं। एक सेक्शन में कुल 60 से 70 लोग काम करते हैं। महिला और पुरुषों के सेक्शन अलग हैं। ऐसे करीब एक बागान में कुल 800 मजदूर काम करते हैं। हर सेक्शन में मजदूरों से काम कराने वाली एक महिला और एक पुरुष केयरटेकर यानी सरदार होता है। करीब 24 घंटे में बागानों से निकली पत्तियां पैक होकर बिकने के लिए रेडी हो जाती हैं। मजदूरों की 3 मांगें- दिहाड़ी, जमीन का हक और ST दर्जा बाग में काम करते मिले परदुम कम दिहाड़ी मिलने से नाराज हैं। वे शिकायत करते हुए कहते हैं, ‘अगर पढ़ा-लिखा होता, तो कहीं और नौकरी करता। अभी दिहाड़ी 250 से बढ़ाकर 280 रुपए कर दी लेकिन फिर भी कम है। हमने डिब्रूगढ़ में आंदोलन करके 551 रुपए की मांग की थी, लेकिन पूरी नहीं हुई।‘ परदुम बीते 3 साल से चाय बागान में काम कर रहे हैं। 4 साल पहले मां गुजर गईं। बुजुर्ग पिता काम नहीं कर सकते इसीलिए वो घर में अकेले कमाने वाले हैं। चुनाव को लेकर परदुम साफ कहते हैं, ‘हमारी तीन मांगें हैं। दिहाड़ी बढ़ाई जाए, जमीन का हक मिले और ST का दर्जा दिया जाए। जो ये मांगें पूरी करेगा, हम उसी का समर्थन करेंगे।‘ प्लांटेशन लेबर एक्ट के तहत 1 अप्रैल से पहले मजदूरों को 250 रुपए दिहाड़ी मिलती थी। हिमंता सरकार ने 30 रुपए बढ़ाकर इसे 280 रुपए कर दिया। केरलम में भी 1 अप्रैल को टी वर्कर्स की दिहाड़ी 48 रुपए बढ़ाकर 546 रुपए कर दी गई है। ये असम के मुकाबले लगभग दोगुनी है। वर्कर्स की हालत पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और ग्लोबल लिविंग वेज कोलीशन (GLWC) नजर रखते हैं। GLWC की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, असम के चाय बागान वाले इलाकों में परिवार का पेट पालने के लिए एक मजदूर की मंथली इनकम कम से कम 15,000 रुपए होनी चाहिए, जबकि अभी ये करीब 8 हजार रुपए है। न बीमा-न कोई सुविधा, छतों से पानी टपकता है आकाश नायक बागान में काम करते हैं और असम चाय मजदूर संघ से भी जुड़े हैं। वे शिकायत करते हैं कि कंपनी ने कोई बीमा नहीं कराया और न ही कोई खास सुविधाएं दी हैं। रहने के लिए मिले क्वार्टर की हालत भी खराब है। छतों से पानी टपकता है और दीवारें फटी हुई हैं, लेकिन कंपनी मरम्मत नहीं करवाती। आकाश आने वाले चुनाव में 'चाय जनजाति' की मांग को सबसे जरूरी बताते हैं। असम के जंगलों को साफ करके अंग्रेजों ने यहां चाय के बागान लगाए और काम करने के लिए कुछ लोगों को लाकर बसाया था। इन्हें असम में टी ट्राइब या चाय जनजाति कहा जाता है। तब से इनकी पीढ़ियां यहीं रह रही हैं। राज्य में इनकी आबादी करीब 70 लाख है यानी करीब 20% हिस्सेदारी है। असम के 10 जिलों की 45 विधानसभा सीटों पर टी-ट्राइब हार-जीत तय करते हैं। असम चाय बागान यूनियन के असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी लखींद्र कुर्मी ST के दर्जे को सबसे बड़ी मांग बताते हैं। वे कहते हैं, ‘झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उरांव, मुंडा, संथाल और खड़िया जैसी हमारी जातियों को ST दर्जा हासिल है। असम के चाय बागानों में हम उसी स्थिति में रह रहे हैं। हम प्रकृति के पुजारी हैं। हमारी कुल 108 उप-जातियां हैं, जिनमें सिर्फ 36 को ST दर्जा मिला है।’ अब महिला वर्कर्स की बात… टॉयलेट नहीं, खुले में जाने को मजबूरअसम के बागानों में करीब 60% महिला वर्कर्स हैं। पत्तियां तोड़ने का काम उन्हीं के जिम्मे है। 52 साल की बुरुन ताती पिछले 10 साल से महिला मजदूरों की केयरटेकर हैं। वे बताती हैं, ‘बागान में 18 से 58 साल तक के मजदूर हैं। रिटायरमेंट के बाद हमारा काम बेटे या बहुओं को मिल जाता है। PF के लिए कटने वाला पैसा हमें मिल जाता है।‘ महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं पर वे कहती हैं, ‘बागान में टॉयलेट न होना सबसे बड़ी परेशानी है। सरकार ने हमारी बस्ती में घरों पर टॉयलेट बनवाए हैं, लेकिन यहां नहीं। हर बार काम बीच में छोड़कर घर जाना मुमकिन नहीं होता। मजबूरन खुले में जाना पड़ता है।‘ ‘प्रेग्नेंट महिलाओं का ध्यान रखा जाता हैं। उन्हें हल्का काम देते हैं। अगर काम करते हुए कोई बीमार पड़ जाए, तो कंपनी की गाड़ी उसे अस्पताल भी ले जाती है।‘ महंगाई में खर्च चलाना मुश्किल, दिहाड़ी बढ़े-जमीन का हक मिले25 साल की भानुमती ताती बीते 6 साल से बागान में काम कर रही हैं। पति राजमिस्त्री हैं और 5 साल का एक बच्चा है। वे बताती हैं, ‘महंगाई की वजह से दिक्कत बढ़ गई है। बच्चे की पढ़ाई और बीमारी में कम पैसों में मैनेज करना मुश्किल हो जाता है। जब मैनेजर से दिहाड़ी बढ़ाने को कहते हैं, तो काम करने की बात कहकर टाल देते हैं।’ 26 साल की सपना ताती पिछले 5 सालों से काम कर रही हैं। वे चुनाव पर कहती हैं, ’नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन लौटकर नहीं आते। इसलिए किसी पर कोई दबाव नहीं है, सब अपनी मर्जी से वोट देते हैं। हमारी बस यही मांग है कि दिहाड़ी बढ़ाई जाए, हमारे घर ठीक कराए जाएं और सबसे जरूरी, जमीन का मालिकाना हक मिले।’ स्टाफ भी नाखुश, बोला- सरकार के वादे अधूरे, अबकी जवाब देंगे 4 अप्रैल को जब हम गांव पहुंचे तब सभी वर्कर्स काम खत्म कर पेमेंट लेने पहुंचे थे। हर 15 दिन बाद शनिवार को उनकी पेमेंट मिलती है। सेंटर पर काफी भीड़ थी। पे स्लिप के साथ लोगों के नाम बोले जा रहे थे, तीन डेस्क पर करीब 12 लोग पेमेंट बांट रहे थे। यहीं हमें पेमेंट देने वाले 35 साल के संतोष गोला मिले। वे बागान के हालात पर कहते हैं, जो नियम और सुविधाएं होनी चाहिए, असल में वो नहीं हैं। 10-12 साल में यहां किसी स्टाफ का प्रमोशन नहीं हुआ। 10-12 पद खाली पड़े हैं, लेकिन भरे नहीं जा रहे। सिर्फ लोगों से काम निकाला जा रहा है। ‘हमारी सबसे बड़ी दिक्कत कम मेहनताना है। पत्तियां तोड़ने वालों से लेकर पढ़े-लिखे लोगों तक सबको रोज के 250 रूपए ही मिलते हैं। ये काम मजबूरी में कर रहे हैं, क्योंकि थोड़ा पढ़ा-लिखा होने के कारण दूसरा काम नहीं कर सकते।‘ चुनाव के बारे में पूछने पर संतोष मौजूदा सरकार पर नाराजगी जताते हैं। वे कहते हैं, ‘BJP ने बड़े-बड़े वादे किए थे कि जमीन देंगे, दिहाड़ी बढ़ाएंगे, लेकिन कुछ नहीं मिला। अबकी हमने मन बना लिया है कि अगर हमें सुविधाएं और हक नहीं मिला, तो सब मिलकर मौजूदा सरकार को हटाएंगे।‘ मैनेजर बोले- मजदूरों को कोई खास दिक्कत नहीं हम बागान के मैनेजर अमित सिंह से भी मिले। वे बताते हैं कि चाय की पत्तियां तोड़ने से लेकर पैकिंग तक सारा काम उनकी कंपनी ही करती है। वे प्रोडक्शन को लेकर कहते हैं, ‘एक सीजन में 14 से 15 लाख किलो चाय बनाते हैं। हमारी तीन फैक्ट्रियों से रोजाना औसतन 5,000 किलो चाय निकलती है। ये यूरोपियन यूनियन और जापान एक्सपोर्ट होती है। अरब देशों में भी जाती है। फिलहाल जंग के चलते ईरान में सप्लाई बंद है।‘ लोगों की समस्याओं पर वे दावा करते हैं, ‘सुविधाओं को लेकर कोई खास समस्या नहीं है। महिलाओं के लिए वॉशरूम को लेकर सरकारी अफसरों से बात कर रहे हैं। वे सालाना यूरिनल और बाथरूम मुहैया कराते हैं। हमने आवेदन किया है। कंपनी अपने बजट और प्रोजेक्ट्स में भी इसे शामिल रखती है।‘ एक्सपर्ट बोले- चाय बागान मजदूरों के हाथ में 45 सीटेंअपर असम के सीनियर जर्नलिस्ट इकबाल अहमद मानते हैं कि सरकार बनाने में चाय जनजाति की बड़ी और निर्णायक भूमिका होती है। इस चुनाव में ST का दर्जा बड़ा मुद्दा है। सिर्फ चाय जनजाति ही नहीं, बल्कि 5 अन्य कम्युनिटी की कुल 6 जनजातियां ST दर्जे की मांग कर रही हैं। पार्टियों ने वादे किए, लेकिन केंद्र को रिपोर्ट नहीं भेजी। इससे लोगों में निराशा है। डिब्रूगढ़ के जर्नलिस्ट अभिक चक्रवर्ती 15 सालों से अपर असम में एक्टिव हैं। वे बताते हैं, अपर असम में 40 से 45 सीटों पर बागान मजदूरों का सीधा असर रहता है। यहां की आबादी का करीब 75% हिस्सा इन्हीं मजदूरों का है। चुनावों में महिला मजदूर अहम रोल निभाती हैं क्योंकि उनकी संख्या ज्यादा है। वे कहते हैं कि एक समय था जब ये कम्युनिटी कांग्रेस का पक्का वोट बैंक हुआ करती थी। उनके बड़े नेता कम्युनिटी के लिए ठीक से काम नहीं कर पाए, जिससे 2016 ये वोट BJP के पास आ गया। हालांकि अभिक मानते हैं कि इस बार चुनाव के मैदान में ST दर्जे का मुद्दा उतना हावी नहीं, जितना लैंड पट्टा और दिहाड़ी है। BJP बोली: असम सरकार ST दर्जा दिलाकर रहेगीअसम BJP के राज्य महासचिव और असम पर्यटन विकास निगम (ATDC) के अध्यक्ष रितुपर्णा बरुआ कहते हैं, 'सिर्फ टी-ट्राइब्स ही नहीं, कुल 6 कम्युनिटीज ST दर्जा मांग रही हैं। सरकार ने इसके लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स बनाया है। सभी कम्युनिटी के लीडर्स से चार राउंड बातचीत हो चुकी है। GoM ने रिपोर्ट भी दे दी है। असम सरकार भी यही चाहती है कि इन सभी 6 कम्युनिटी को ST दर्जा मिले। हम उसके लिए काम कर रहे हैं।' मेहनताने को लेकर बरुआ कहते हैं कि अगले तीन सालों में इसे बढ़ाकर 500 करने का हमारा वादा है। इसे हर हाल में पूरा करेंगे। वहीं, कांग्रेस लीडर गोपाल शर्मा का कहना है कि इनकी ST दर्जे की मांग को लेकर पार्टी का स्टैंड बिल्कुल साफ है, जो लोग तय क्राइटेरिया पूरा करेंगे, उन्हें दर्जा दिया जाएगा। अगर हमारी सरकार बनती है तो मजदूरी बढ़ाने समेत बाकी मांगों पर भी विचार करेंगे। ………………. ये खबर भी पढ़ें… गांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 6 Apr 2026 5:05 am

झारखंड के सीएम को असम के विकास से सीख लेनी चाहिए: हिमंत बिस्व सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का राज्य में स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें असम के तेज़ी से हुए विकास को देखने का मौका मिलेगा, खासकर चाय बागान क्षेत्रों में

देशबन्धु 5 Apr 2026 3:20 am

मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर ठगी करने वाला गिरफ्तार:डिजिटल ट्रेकिंग से भीलवाड़ा पुलिस ने असम से पकड़ा

मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य को भीलवाड़ा पुलिस ने असम से गिरफ्तार किया है। गैंग के लोग साइबर ठगी करते थे। मामले में पुलिस ने डिब्रूगढ़ जिले के दीपू बोरगोहन (28) पुत्र मिलन बोरगोहन को पकड़ा है। करेड़ा थाना प्रभारी पूरणमल ने बताया कि 11 फरवरी 2025 में चितांबा में रहने वाले पारसमल गुर्जर ने एक रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसमें बताया कि उसके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने उसे बताया कि वो एयरटेल कंपनी से बोल रहा है और खेत में मोबाइल कंपनी का टावर लगाना है। इसकी चौकीदारी और नौकरी के 12 हजार और इस जमीन के 18 हजार रुपए किराया कुल मिलाकर 30 हजार महीना दिया जाएगा। डिजिटल ट्रेकिंग से आरोपी को पकड़ाफोन करने वाले व्यक्ति ने मेरे साथ में 12 लाख 78 हजार की धोखाधड़ी की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने टेक्निकल डेटा, कॉल डिटेल, डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर फोन करने वाले व्यक्ति की लोकेशन असम के अलग-अलग जिलों में पाई। गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने टीम का गठन किया और उसे असम भेजा। इस क्षेत्र में साइबर हॉटस्पॉट होने और जंगल में खेतों में छुपकर ठगी करने की वारदातों को ध्यान में रखकर 2 दिन तक पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को ठेंगाखत थाने के सहयोग से गिरफ्तार किया। फिलहाल पकड़े गए आरोपी से डिटेल इन्वेस्टिगेशन की जा रही है। ये रहे टीम में शामिलआरोपी को पकड़ने वाली टीम में करेड़ा थाना प्रभारी पूरणमल, एएसआई रेवत सिंह, कॉन्स्टेबल कृष्णा कुमार, कमलेश, राकेश और महेश शामिल रहे। मामले में फिलहाल गैंग से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

दैनिक भास्कर 4 Apr 2026 4:51 pm

भीलवाड़ा: मोबाइल टावर लगाने के नाम पर 12.78 लाख की ठगी करने वाला असम से गिरफ्तार

करेड़ा पुलिस ने एयरटेल का फर्जी अधिकारी बनकर ग्रामीणों को चूना लगाने वाले मास्टरमाइंड दीपू बोरगोहैन को असम के जंगलों से किया गिरफ्तार।

प्रातःकाल 4 Apr 2026 3:13 pm

योगी बोले-हमारे यहां सड़कों पर कोई नमाज नहीं पढ़ सकता:दंगाइयों की संपत्ति गरीबों में बांट देते हैं; असम में दो रैलियां कीं

'हम कहते थे कि रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। कांग्रेस ने कहा कि राम तो हुए ही नहीं। कांग्रेस के सहयोगियों ने राम के अस्तित्व को नकारने का काम किया। लेकिन, भाजपा की डबल इंजन की सरकार में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया। अब यूपी में कर्फ्यू नहीं लगता। नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा। सड़क पर कोई नमाज नहीं पढ़ सकता है। किसी धर्म से चिल्लाने की आवाज नहीं आती है। अगर किसी ने दंगा करने का दुस्साहस किया तो उसकी संपत्ति जब्त कर गरीबों और दलितों में बांट दी जाती है।' ये बातें सीएम योगी ने असम में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान शुक्रवार को कहीं। उन्होंने यहां दो रैलियां कीं। इनमें बरपेटा से एनडीए उम्मीदवार दीपक कुमार दास और बरछला सीट पर विटुबरन शर्मा के लिए वोट देने की अपील की। सीएम योगी की बड़ी बातें पढ़िए… 1. कांग्रेस के सहयोगियों ने राम के अस्तित्व को नकारायोगी ने कहा- डबल इंजन की सरकार विरासत का सम्मान करती है। यह केवल डबल इंजन सरकार ही कर सकती है। जहां-जहां भाजपा सरकार है, वहां काम कर के दिखाया है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के लिए आंदोलन चलता था, असम से भी लोग आते थे। हम कहते थे कि रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। कांग्रेस कहती थी कि राम तो हुए ही नहीं। कांग्रेस के सहयोगियों ने राम के अस्तित्व को नकारने का काम किया है। लेकिन, भाजपा की डबल इंजन की सरकार में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया है। 2. कांग्रेस-UDF की साजिश नाकाम करनी हैकांग्रेस और यूडीएफ ने असम की संस्कृति के साथ खिलवाड़ किया। घुसपैठियों की एंट्री करवाकर यहां की डेमोग्राफी को बिगाड़ने का काम किया। असम के लोगों के मकान, जमीन पर कब्जा कराने का प्रयास किया। विकास और विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है। असम में घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर कराने की व्यवस्था की जा रही है। यहां विकास के बड़े-बड़े काम देखने को मिल रहे हैं। एनडीए का संकल्प है कि असम को लैंड जिहाद और लव जिहाद की धरती नहीं बनने देंगे, यहां घुसपैठ नहीं होने देंगे। कांग्रेस और यूडीएफ की साजिश को सफल नहीं होने देंगे। 3. यूपी दंगा मुक्त, कर्फ्यू मुक्त और माफिया मुक्त है यूपी में बीते 9 साल में एक भी दंगा नहीं हुआ। आज यूपी दंगा मुक्त, कर्फ्यू मुक्त और माफिया मुक्त है। वहां विकास कार्य धड़ल्ले से हो रहा है। असम में पहले गरीब का राशन विदेशी घुसपैठिया खा जाते थे। ये घुसपैठ कांग्रेस कराती थी। कांग्रेस दंगा कराती थी, लेकिन भाजपा दंगाइयों को सबक सिखा रही। भाजपा की सरकार जहां भी आई है, ऐसी ही शांति, सुरक्षा और समृद्धि आई है। पहले यूपी में महीनों तक कर्फ्यू लगता था। जो काम 500 साल में नहीं हो पाया। आज देखिए अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है। 4. UDF असम में घुसपैठ की जननी हैकांग्रेस या यूडीएफ के लोगों को जब भी अवसर मिला, उन्होंने भारत और भारतीयता का लगातार अपमान किया है। यूडीएफ तो असम में घुसपैठ की जननी है। कांग्रेस उनके दम पर सरकार बनाना चाहती है। असम की संस्कृति को नष्ट करना चाहती है। लेकिन, एनडीए की डबल इंजन सरकार असम की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखने का काम कर रही है। 5. मोदी ने जो कहा, वो करके दिखाया देश के प्रधानमंत्री मोदी जी ने जो कहा करके दिखाया है, मोदी जितनी बार पूर्वोत्तर में आए हैं, कांग्रेस का कोई पीएम नहीं आया होगा। मोदी ने 36 यात्रा कीं, तब यहां सुशासन और सुरक्षा का माहौल बना है। ------------------------- अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 2:34 pm

EC ने बंगाल में BDO को सस्पेंड किया:नदिया में ट्रेनिंग के दौरान हिंसा हुई थी; असम में बुजुर्ग-दिव्यांगों के लिए घर बैठे वोटिंग सुविधा शुरू

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में चुनाव ट्रेनिंग के दौरान हुई हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई की है। EC ने हंसखाली ब्लॉक के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) सयंतन भट्टाचार्य को तुरंत सस्पेंड करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। यह घटना 27 मार्च को एक स्कूल में हुई थी, जहां एक शिक्षक के साथ मारपीट में वह घायल हो गए थे। शिक्षक ने आरोप लगाया कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद मुख्यमंत्री की तस्वीर वाला सरकारी विज्ञापन दिखाया जा रहा था, जिसका विरोध करने पर उन पर हमला किया गया। असम विधानसभा चुनाव 2026 में चुनाव आयोग ने वोट फ्रॉम होम सुविधा शुरू की है। इसके तहत 85 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता घर बैठे अपना वोट डाल सकेंगे। राज्य में 19,774 बुजुर्ग और 6,638 दिव्यांग मतदाताओं को यह सुविधा दी गई है। मतदान दल उनके घर जाकर वोट डलवा रहे हैं। यह प्रक्रिया 5 अप्रैल तक चलेगी, जबकि 126 सीटों पर मतदान 9 अप्रैल को और मतगणना 4 मई को होगी। चुनाव से जुड़े कल के 5 बड़े अपडेट्स:

दैनिक भास्कर 1 Apr 2026 5:03 am

सिंगर जुबीन गर्ग की मौत का सच गहराया, असम सरकार ने जांच के लिए गठित की एसआईटी

फेमस असमिया और बॉलीवुड सिंगर जुबीन गर्ग के अचानक निधन से उनके फैंस के बीच शोक की लहर है। जुबीन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में स्कूबा डाइविंग के दौरान निधन हो गया था। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के डीजीपी से जुबीन गर्ग ...

वेब दुनिया 25 Sep 2025 12:25 pm

कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी

असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...

वेब दुनिया 10 Jul 2025 2:39 pm

घर पर ताला लगाकर गायब हुए रणवीर अल्लाहबादिया, खाली हाथ लौटी मुंबई और असम पुलिस!

कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में माता-पिता पर भद्दा कमेंट करके यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया मुश्किलों में घिर चुके हैं। देश के कई राज्यों में रणवीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। वहीं यह मामला संसद तक उठ चुका है। अब खबर आ रही है कि ...

वेब दुनिया 15 Feb 2025 10:52 am

3 दिन से लापता असम के प्रख्यात संगीतकार रमन बरुआ, सीएम हिमंत बिस्वा ने दिया त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश

Ramen Baruah missing : मनोरंजन जगत से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। असम के प्रख्यात गायक, संगीतकार और निर्देशक रमन बरुआ तीन दिन से लापता हैं। रमन बरुआ बीते सोमवार गुवाहाटी के लतासिल इलाके में अपने घर से पास के मंदिर में दर्शन करने के ‍लिए ...

वेब दुनिया 24 Jul 2024 12:15 pm