केरलम, असम में रिकॉर्ड मतदान, जानिए पुडुचेरी में कितना रहा मतदान का प्रतिशत
चुनाव आयोग ने बताया कि असम और पुडुचेरी में गुरुवार को क्रमशः 85.38 प्रतिशत और 89.83 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो अब तक का सबसे उच्च मतदान प्रतिशत है। आयोग ने बताया कि इससे पहले असम और पुडुचेरी में मतदान में सबसे अधिक भागीदारी क्रमशः 84.67 प्रतिशत (2016 विधानसभा चुनाव) और 86.19 प्रतिशत (2011 विधानसभा चुनाव) थी। केरल, असम और पुडुचेरी में महिला मतदाताओं की भागीदारी अधिक रही। केरलम में पिछले 49 सालों में दूसरी सबसे ज्यादा वोटिंग हुई, यहां 78.01% वोट डाले गए। असम में जहां पुरुषों की भागीदारी 84.80 प्रतिशत रही, वहीं महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 85.96 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसी प्रकार केरल में पुरुषों की मतदान में भागीदारी 75.01 प्रतिशत थी, जबकि महिलाओं की भागीदारी 80.86 प्रतिशत रही। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 88.09 प्रतिशत पुरुष मतदाताओं ने मतदान किया, जबकि महिला मतदाताओं का प्रतिशत 91.33 प्रतिशत रहा। असम, केरल और पुडुचेरी की कुल 296 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें कुल 5.31 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल थे। इसके अलावा कर्नाटक, नगालैंड और त्रिपुरा की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी हुए। मतदान के संबंध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘असम, केरल और पुडुचेरी में 2026 के विधानसभा चुनाव न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे लोकतांत्रिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से, मैं असम, पुडुचेरी और केरल के प्रत्येक मतदाता को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं। Edited by : Sudhir Sharma
विधाानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे दीपक हुड्डा ने कांग्रेस पार्टी पर राज्यसभा चुनाव और किसान मुद्दों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। महम में मीडिया से बात करते हुए दीपक हुड्डा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की 5 अप्रैल को महम में हुई रैली का भी जिक्र किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि महम विधानसभा की ओर से सौंपी गई मांगों को प्राथमिकता से पूरा कराया जाएगा। राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में दीपक हुड्डा ने महम विधायक पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने अपने 'सातलों' (समर्थकों/पहलवानों) को पिटवाकर समझदारी नहीं दिखाई। हुड्डा ने कहा कि 'सातलों' को पीटना पहलवानों का काम है। 27 मई की रैली को लेकर अफवाह निराधार किसानों के मुद्दे पर हुड्डा ने बताया कि अनाज मंडियों में बायोमेट्रिक सुविधा शुरू की गई है। उन्होंने कांग्रेस पर इस मुद्दे पर भी किसानों को बहकाने का आरोप लगाया। हुड्डा ने कहा कि वे किसानों से सीधे बातचीत कर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराएंगे। दीपक हुड्डा ने यह भी जानकारी दी कि उनकी पार्टी संगठन ने असम चुनाव में ड्यूटी लगाई थी। उन्होंने 27 मई को होने वाली रैली के रद्द होने संबंधी सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को निराधार बताया। हुड्डा ने आश्वासन दिया कि असम चुनाव के बाद महम क्षेत्र में विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा।
किशनगंज। में कांग्रेस विधायक कमरूल हुदा ने गुरुवार को शहर के सर्किट हाउस में एक पत्रकार वार्ता की। इस दौरान उन्होंने पोठिया प्रखंड के बिजली उपभोक्ताओं की समस्या के समाधान के लिए उद्योग सह पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल का आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए आगामी पांच राज्यों के चुनावों में भाजपा की हार और कांग्रेस की सरकार बनने का दावा किया। विधायक हुदा ने बताया कि किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड की 22 पंचायतों के बिजली उपभोक्ताओं को अब छोटे-मोटे कार्यों के लिए बहादुरगंज विद्युत कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पहले उन्हें बहादुरगंज जाना पड़ता था, लेकिन अब पोठिया को किशनगंज विद्युत कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। यह पहल उनके द्वारा विधानसभा में समस्या उठाने और मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल को पत्र लिखने के बाद हुई है। पोठिया के उपभोक्ताओं को काफी लाभ मिलेगा कमरूल हुदा ने मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल का आभार जताते हुए कहा कि इस कदम से पोठिया के उपभोक्ताओं को काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने बिजली बिल में हुए बदलावों पर भी सरकार से विचार करने का आग्रह किया। हुदा ने कहा कि स्मार्ट मीटर के कारण उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हो रही है और बिल भी अधिक आ रहा है। इस दौरान, श्री हुदा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हार की बौखलाहट के कारण सरमा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं। ''पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में भाजपा को करारी हार मिलेगी'' विधायक हुदा ने दावा किया कि आगामी पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में भाजपा को करारी हार मिलेगी और कांग्रेस की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि देश को बांटने और हिंदू-मुसलमान की राजनीति करने वालों का सफाया हो जाएगा।इस अवसर पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष शाहबुल अख्तर, इमाम अली चिंटू, आजाद साहिल, जमशेद आलम, अरुण कुमार साह, सजल कुमार साहा, मोहम्मद लाल, मजहरुल हसन, इंदू हुसैन, शमशुल हक सहित कई अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
पटना में कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही है। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए 'पागल' और ‘सठियाया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इसे अपमानजनक, दलित विरोधी और शर्मनाक बताया है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में हिमंता बिस्वा सरमा का पुतला दहन किया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। राजेश राम बोले- दलितों का अपमान बर्द्शत नहीं करेंगे बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि यह बताते हुए काफी दुख हो रहा है कि हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जो दलित समाज से आते हैं, उनके खिलाफ असम के मुख्यमंत्री ने अपमानजनक टिप्पणियां दी है, जिससे पूरे देश के दलित आहत है। दलितों पर बीजेपी और आरएसएस अत्याचार करती है और कराती है। हिमंता बिस्वा सरमा जैसे पागल व्यक्ति ने जिस तरह से अभद्र टिप्पणियां की है, वह पूरे देश के दलित समाज को अपमानित करने वाला है। बिहार के दलितों ने इसे बहुत गंभीरता से लिया है। आज भी दलितों पर अत्याचार घोड़ी पर चढ़कर शादी करने की परंपरा से घृणित रहती है। आज भी दलितों के मूंछ रखने पर आरएसएस वालों को प्रॉब्लम होती है। मगर हमारे दलित समाज के लोग खड़गे जी के अपमान को कभी जाया नहीं होने देगी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के दलितों को मार्गदर्शन दिया है। यह सभी बातें कोई भी सभ्य समाज में तभी बोल सकता है जो मानसिक रोग से विक्षिप्त हो। अगर संविधान में शपथ लेने वाले लोग ऐसा बोलेंगे तो सोच लीजिए कि बीजेपी की मानसिकता क्या है। इसके अलावा जिस तरह से उन्होंने पवन खेड़ा पर टिप्पणी की उसकी भी चर्चा नहीं की जा सकती है। इसके अलावा राजेश राम ने ऐलान किया है कि इस मामले पर कल बिहार कांग्रेस पूरे जिले में असम के मुख्यमंत्री का पुतला दहन करके विरोध प्रदर्शन करेगी।
असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान जारी। शुरुआती घंटों में 18% से अधिक वोटिंग, हिमंत बिस्वा सरमा और गौरव गोगोई जैसे दिग्गजों की किस्मत दांव पर। पूरी रिपोर्ट।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल, असम और पुडुचेरी के मतदाताओं से की बढ़-चढ़कर मतदान की अपील
केरल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया सुबह 7 बजे से शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों राज्यों की जनता से मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है
“आज असम में चुनाव है। हम 50 से ज्यादा वोटर्स बिहार में फंसे हैं। पुलिस जाने नहीं दे रही है। वह अधिकारी के आदेश का इंतजार कर रही है। हम वोट नहीं दे पाए तो हमारे ऊपर बंग्लादेशी होने का ठप्पा लग जाएगा। हम असम से भी बाहर कर दिए जाएंगे। असम में रहना है तो वोट देना जरूरी है। अब समझ में नहीं आ रहा है क्या करें। कई बार पुलिस वालों से रिक्वेस्ट कर चुके हैं। हमें वोट करने से रोका क्यों जा रहा है। हम तो कहीं के नहीं रहे, बिहार में बेटियों पर खतरा है, असम में वोट नहीं किया तो वहां रहने की मुश्किल है।” यह बिहार के सहरसा में डर्टी फार्म हाउस कांड में फंसे 50 से अधिक असम के वोटर्स का दर्द है। फार्म हाउस पर पुलिस का ऐसा पहरा है कि वोटर्स वोट के लिए अपने प्रदेश नहीं जा पा रहे हैं। 29 मार्च को पुलिस ने सहरसा से JDU नेता ओवैस करनी उर्फ चुन्ना मियां के ईंट भट्ठे से 70 मजदूरों को रेस्क्यू किया था। इनमें 7 नाबालिगों ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। आरोपी JDU नेता पुलिस गिरफ्तर में है, लेकिन पुलिस ने जांच के नाम पर पीड़ित परिवारों को भी बिहार में रोक रखा है। उन पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए बिहार पुलिस के पहरे में कैद असम के वोटर्स की कहानी.. डर्टी फार्म हाउस के खुलासे के बाद पुलिस का पहरा 29 मार्च को सहरसा के नया टोला में डर्टी फार्म हाउस का खुलासा हुआ। यह फार्म हाउस JDU नेता ओवैस करनी का है। यहां से 14 से 16 साल की 7 लड़कियों को रेस्क्यू किया गया। जांच के दौरान लड़कियों ने JDU नेता पर यौन शोषण से लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। पुलिस ने आरोपी JDU नेता ओवैस के साथ उसके सहयोगी मुंशी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद फार्म हाउस में पुलिस की तैनाती कर दी गई। पुलिस असम के परिवारों पर नजर रख रही है, ताकि कोई बिहार से बाहर नहीं जा पाए। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सबसे पहली कड़ी ठेकेदार नजरुल का पता चला, जो असम से मजदूरों को फार्म हाउस पर लाया था। हमने वोटर्स से लेकर ठेकेदार और फार्म हाउस में पुलिस के पहरे तक की पड़ताल की है। असम के लोगों को बिहार में छोड़कर फरार होने वाले ठेकेदार को भी ढूंढ निकाला। बिहार से असम तक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार से लेकर असम तक पड़ताल की। हमें पता चला कि असम के धुबरी/गोलक गंज और गौरीपुर विधानसभा क्षेत्र के 50 से अधिक वोटर्स इस बार वोट नहीं कर पांएगे। विधानसभा 23 और 24 के इन वोटर्स के लिए वोट नहीं डालना बड़ी मुश्किल होगी। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम सबसे पहले असम के वोटर मोहम्मद अली से मिली। वह JDU नेता ओवैस करनी के फार्म हाउस और ईंट भट्ठे पर काम करता था। मोहम्मद अली की जुबानी वोट नहीं देने की पूरी कहानी जानिए। मोहम्मद अली ने बताया, “हम लोगों को ठेकेदार नजरुल पैसे का लालच देकर बिहार लाया था। शुरुआत में लगभग 60 लोग आए थे। अब लगभग 50 लोग बचे हैं, क्योंकि 10 लोग यहां से भागकर निकल गए हैं। अब काम बंद हो जाने के बाद भी कहा जा रहा है कि हम घर नहीं जा सकते हैं, नहीं तो समस्या हो जाएगी। हम भी जाना चाहते हैं, लेकिन हम लोगों को रोका जा रहा है। अगर हम वोट नहीं देंगे तो हमें डी-वोटर बना दिया जाएगा, यहां तक कि हमें बांग्लादेशी तक कह दिया जाता है। इसलिए वोट देना बहुत जरूरी है। अगर हम जिंदा हैं तो वोट देना ही होगा। हम लोग कलेक्टर के पास गए थे, उन्होंने कहा ठीक है, हम देख रहे हैं। इसके बाद एक अधिकारी आए और बोले कि आज गाड़ी लगवा देंगे। पिछले 12 दिनों से यही कहा जा रहा है। लेकिन वोटिंग है, तो हम शायद वोट नहीं दे पाएंगे। अगर देर रात पहुंचेंगे तो वोट कैसे दे पाएंगे।” JDU नेता जेल गया, पैसे कौन देगा भास्कर की पड़ताल में असम के वोटर्स ने बताया कि कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है कि हमारा वोट कैसे पड़ेगा। ठेकेदार ने JDU नेता को असम से लाकर आदमियों को सौंप दिया था। अब नेता जेल चला गया है। पैसे कौन देगा, इसका कोई जवाब नहीं दे रहा है। प्रशासन कोई जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। मोहम्मद अली ने अपना दर्द बताया, “हम लोग लगातार कह रहे हैं कि वोटिंग से पहले हमें भेज दिया जाए। हमें ईंट और मिट्टी का काम दिया गया था। 1000 ईंट पर खाने के लिए 120 से 130 रुपए मिलते थे। बाकी पैसा जमा रखा जाता था, जिसे आखिर में देने की बात कही गई थी। नजरुल नाम का आदमी, जो असम का रहने वाला है, वह अब भाग गया है। उस पर भी दबाव था और उसे मारा-पीटा जाता था। डर के कारण वह यहां से चला गया है। अब उसका कोई पता नहीं है। हम लोग किसी तरह घर जाना चाहते हैं। अगर गाड़ी मिल जाए तो हम तुरंत निकल जाएंगे, लेकिन अधिकारियों के चक्कर में ही हम लोग यहां फंस गए हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने वोटर्स की पूरी जानकारी निकालने के लिए असम तक अपना नेटवर्क एक्टिव किया। काफी पड़ताल और खोजबीन के बाद कई ऐसे कॉन्टेक्ट मिले जिन्होंने हमें बिहार में फंसे वोटर्स के परिवार वालों के मोबाइल नंबर मुहैया कराए। भास्कर रिपोर्टर ने बिहार में फंसे असम के वोटर्स के परिवार वालों से वीडियो कॉल पर बात की। रिपोर्टर - आपके कितने लोग फंसे हैं, जिन्हें वोट देना है?रिजवान - यहां से हमारे 72 परिवार बिहार में काम के लिए गए थे। रिपोर्टर - यहां पर आप लोगों को कौन लाया?रिजवान - कंपनी के आदमी ने ठेकेदार को फोन किया था, उसी से बात हुई, जिसके बाद हमारे लोग वहां गए। रिपोर्टर - चुनाव में उन्हें नहीं जाने दिया जा रहा है क्या?रिजवान - उन्हें आने नहीं दिया जा रहा है, सब लोग परिवार के साथ फंस गए हैं। रिपोर्टर - अब कैसे वोट कर पाएंगे?रिजवान - वही तो चिंता है, अगर वोट नहीं दिया तो डी-वोटर कहे जाएंगे। रिपोर्टर - आप लोगों ने अपने यहां प्रशासन से मांग नहीं की?रिजवान - सब तरह से कोशिश की है, कोई हल नहीं निकला। रिपोर्टर - वहां के जनप्रतिनिधि से बात नहीं की क्या आप लोगों ने?रिजवान - बात तो हुई है सबसे, लेकिन वहां हमारे लोग पुलिस के पहरे में फंसे हैं। JDU नेता ने ठेकेदार को बांधकर पीटा, बिजली का झटका दिया भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि JDU नेता ने असम से 70 से अधिक परिवारों को लाने वाले ठेकेदार को JCB से बांधकर पीटा था। बिजली का करंट भी लगाया था। इसकी वजह पता चली कि ठेकेदार नजरुल ने लड़कियों के लिए पैसे लिए थे, लेकिन वो JDU नेता की पसंद की लड़कियां नहीं लाया था। पता चला कि ठेकेदार असम का ही रहने वाला था, इसलिए वोटर्स के लिए परिवार वालों से हमारी टीम ने इसकी भी जानकारी ली। परिवार वालो ने भी इस घटना को सही बताया। रिजवान ने बताया ठेकेदार लड़कियों को नहीं ले गया थाा, इसलिए उसे बांधकर पीटा गया। इसके बाद ठेकेदार भागकर असम आ गया। रिपोर्टर - इस बार वोट नहीं देंगे तो अगली बार दे देंगे।रिजवान - नहीं-नहीं, वोट देना पड़ेगा, यहां सब लोग यही कह रहे हैं। रिपोर्टर - वहां आपके कौन लोग फंसे हैं?रिजवान - वहां मेरे परिवार के लोग हैं, मां-बाबा सब फंसे हैं। बहुत चिंता हो रही है। रिपोर्टर - उनके साथ और भी वोटर हैं?रिजवान - मोटा-मोटी मेरे गांव के 62 वोटर बिहार में फंसे हुए हैं। रिपोर्टर - अगर वो लोग वोट नहीं देंगे तो क्या होगा?रिजवान - असम में बहुत सख्ती है, सब डेटा ऊपर तक जाता है। रिपोर्टर - मतलब, वोट नहीं देगा तो नाम कट जाता है क्या?रिजवान - हां, डी-वोटर हो जाता है, फिर उसका सुधार कराने में परेशानी होती है। रिपोर्टर - मतलब 63 लोग अभी तक नहीं पहुंचे हैं?रिजवान - हां, मेरे भी परिवार के लोग उधर हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम की पड़ताल के दौरान असम के धूमरी विधानसभा के वोटर्स से बात हुई। इसमें वोट को लेकर मोहम्मद हसन काफी जागरुक दिखे। उन्हें वोट नहीं देने की बहुत तकलीफ है। उनका कहना है कि असम में बिहार जैसी स्थिति नहीं है। हमने वोट नहीं दिया तो हमारा नाम ही कट जाएगा। फिर असम में बोला जाएगा कि हम बांग्लादेशी हैं। जानिए वोटर मोहम्मद हसन ने क्या कहा। “एक अधिकारी आए और कहा कि आज गाड़ी लगवा देंगे। पिछले 12 दिनों से यही कहा जा रहा है। हमारे साथ तो धोखा ही हुआ है। ठेकेदार नजरुल लेकर आया और फंसाकर चला गया। हम सभी वोट देने के लिए जाना चाहते हैं, लेकिन यहां का प्रशासन हमारे साथ धोखा कर रहा है। अगर हम वोट नहीं देंगे तो हमारी सभी सुविधाएं खत्म हो जाएंगी। हमें डी-वोटर बना दिया जाएगा, यहां तक कि हमें बांग्लादेशी तक कहा जाएगा। हम लोग कलेक्टर के पास गए थे। उन्होंने कहा कि ठीक है, हम देख रहे हैं। इसके बाद एक अधिकारी आए और कहा कि आज गाड़ी लगवा देंगे। पिछले 12 दिनों से यही कहा जा रहा है, लेकिन अब तक कोई जिम्मेदारी से काम नहीं किया है। अब हम शायद वोट नहीं दे पाएंगे। हम लोग लगातार कह रहे हैं कि वोट से पहले हमें भेज दिया जाए। ठेकेदार नजरुल असम का है, लेकिन उसका भी कोई पता नहीं चल रहा है। वह अब भाग गया है, उस पर भी दबाव था और उसे मारा-पीटा जाता था। डर के कारण वह भाग गया। अगर गाड़ी मिल गई होती तो हम वोट देने घर जा सकते थे। अब तो पैसा भी नहीं है कि यहां से असम तक पहुंच पाएं।” भास्कर की पड़ताल में असम के विधानसभा नंबर 24 के वोटर्स से भी बात हुई। इसमें नसीमुद्दीन भी शामिल हैं, नसीमुद्दीन ने कहा हमारे पीछे पुलिस लगा दी गई है। फार्म हाउस से कहीं बाहर नहीं जाने दिया जाता है। ऐसे में हम असम कैसे जा सकते हैं। पढ़िए नसीमुद्दीन की जुबानी वोट नहीं देने का दर्द। “यहां हर तरफ से पुलिस लगी है, बोल रही है कि साहब का आदेश होगा तब ही जाना होगा। ऐसा लग रहा है कि हम लोग ही अपराधी हैं। हम वोट नहीं दे पाएंगे तो इनका क्या फायदा होगा। हम तो वोट के लिए पहले से ही काफी तैयारी किए थे। इस बीच कांड हो गया जिसके बाद पूरा मामला बिगड़ गया है। हमें यहां आए सात महीने हो गए हैं। आने से पहले कहा गया था कि 6 महीने काम करना है, लेकिन अब 7 महीने हो गए हैं और हमें जाने नहीं दिया जा रहा है। हमारे सरदार के साथ मारपीट की गई थी, जिसके बाद वह भाग गया और हम यहां फंसे हुए हैं। साहब लोग पिछले 5 दिनों से कह रहे हैं कि कल चले जाना, लेकिन जाने नहीं दिया जा रहा है। रोज आज कल किया जा रहा है। हमें एक वक्त बस सुबह का खाना मिलता है। रात में खाना भी नहीं मिलता, सुबह का बचा हुआ खाना ही थोड़ा-थोड़ा रात में दे दिया जाता है। यानी दिन का ही खाना रात में भी दिया जाता है। एक बच्चा भी बीमार हो गया है। लेबर को 1000 रुपए मिलते थे, अभी यहां पुलिस लगी है, जो कह रही है कि साहब का आदेश होगा तब ही जाने दिया जाएगा।” पड़ताल के दौरान रिपोर्टर की मुलाकात जहरुलहक से हुई। वह मजदूर हैं, लेकिन वोट को लेकर काफी गंभीर दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि हम सभी मजदूरों को हमारे ही जिले से करीब 50 की संख्या में यहां काम के लिए लाया गया था, अब वोट डालने के लिए भी नहीं जाने दिया जा रहा है। पढ़िए जहरुल हक के वोट नहीं दे पाने का दर्द। “यहां आए हुए 7 महीने हो चुके हैं। हालात दिन-ब-दिन और खराब होते जा रहे हैं। शुरुआत में हमें लालच देकर 40 हजार रुपए एडवांस दिए गए थे और कहा गया था कि 6 महीने काम करने के बाद पूरी मजदूरी देकर वोट डालने के लिए घर भेज दिया जाएगा। अब हम यहां ऐसे फंस गए हैं कि ना तो वोट डालने जा पा रहे हैं और ना ही यहां से निकलने की सोच पा रहे हैं। हमें यहां लेकर आने वाला ठेकेदार नजरूल फरार हो गया है। वह असम के गौरीपुर का रहने वाला है, लेकिन उससे कोई कॉन्टेक्ट नहीं हो पा रहा है। हम लोग भी उसी इलाके, गौरीपुर विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं। अब जब हमारे क्षेत्र में चुनाव हो रहा है तो हम सभी वोटर अपने घर जाकर मतदान करना चाहते हैं, लेकिन हमें जबरन रोका जा रहा है।” असम के वोटर्स को फंसाने वाले ठेकेदार को भास्कर ने ढूंढ निकाला बिहार में फंसे 50 से अधिक असम के वोटर्स से बात करने के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने उस ठेकेदार को भी ढूंढ निकाला। ठेकेदार की तलाश में भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को बिहार से लेकर असम की दो विधानसभा क्षेत्रों में अपना नेटवर्क एक्टिव करना पड़ा। पढ़िए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम कैसे पहुंची उस ठेकेदार के पास जिसने बिहार में असम के वोटर्स को फंसाया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को असम के वोटर्स से ठेकेदार नजरुल का इनपुट मिला। वोटर्स के पास ठेकेदार का जो मोबाइल नंबर था वह स्विच ऑफ था। ऐसे में ठेकेदार तक पहुंच पाना हमारे लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन मामला गंभीर था इसलिए नजरुल तक पहुंचना जरुरी था। नजरुल हक असम के गौरीपुर विधानसभा क्षेत्र का रहने वाला है, लेकिन वहां के सभी कॉन्टेक्ट खंगालने के बाद भी रिपोर्टर की बात ठेकेदार से नहीं हो पाई। ठेकेदार तक पहुंचने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने बिहार के 6 से अधिक ईंट भट्ठे पर संपर्क किया। इसके बाद गौरीपुर विधानसभा क्षेत्र के एक मुखिया का नंबर मिला। घंटों मशक्कत के बाद मुखिया ने ठेकेदार से वीडियो कॉल पर बात कराई। जानिए ठेकेदार नजरुल पिटाई के बाद कैसे असम के वोटर्स को बिहार में छोड़कर अपनी जान बचाकर भागा। नजरुल ने बताया, “हमारे लोग उधर से फोन कर रहे हैं। मैं भी वहां था, लेकिन मैं भागकर यहां आ गया। अगर नहीं आता तो JDU नेता हमारी हत्या कर देता। कितने दिन मैं बर्दाश्त कर पाता? जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो वहां से भाग आया। गांव वाले कह रहे हैं कि किसी तरह से उन्हें लेकर आओ। मैं तो लोगों को लेकर जाता हूं, लेकिन इतना लफड़ा पहली बार हुआ है। वहां हर तरह की गंदगी थी, लड़कियों के साथ गलत काम होता था। मालिक नेता था, बहुत बदमाश था। बात-बात में गोली मारने की धमकी देता था। एक आदमी को गोली मारी गई, पैर में गोली लगी थी। अब मैं जाऊं तो क्या होगा? JCB में बांधकर मारता था। जो मालिक है, अगर कोई लड़की उसे पसंद आ जाए, तो बुलाता है कि उसे हमारे पास लाओ। हम तो काम करने आए थे, लेकिन वह लड़कियों को अंदर बुला लेता था। हमारा तो ठेकेदार का काम है जगह-जगह ठेकेदारी करते हैं। आदमी पहुंचाते हैं, लेकिन यह नहीं पता था कि जहां आदमी पहुंचा रहे हैं वह इंसान नहीं राक्षस है। हम तो इतना डर गए हैं कि बिहार में जाने की हिम्मत नहीं है। वह देखेगा तो मार डालेगा क्योंकि उसकी पसंद की लड़की हम नहीं पहुंचा पाए हैं। वह हमसे हमेशा नॉर्थ ईस्ट की सुंदर लड़कियों की डिमांड करता था। इस बार 70 से अधिक परिवार दिए, लेकिन उसमें उसके पसंद की लड़कियां कम थीं, इसलिए वह गुस्सा हो गया। मुझे JCB में बांधकर पीटा, बिजली का करंट लगाया। भागा नहीं होताा तो लड़की के कारण मेरी जान ले लेता। अब जो लोग फंसे हैं,वह आ जाएं, हम बिहार दोबारा जाएंगे ही नहीं।” SP बोले- पुलिस ने किसी को नहीं रोका सहरसा SP सुबोध कुमार ने कहा, “पुलिस ने किसी को भी नहीं रोका है और थाने को भी ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। जिन लोगों का रेस्क्यू किया गया है, उन्हें सामान्य प्रक्रिया के तहत संरक्षण में रखा जाता है, ताकि उन पर किसी प्रकार का दबाव न पड़े।” ---------------- इससे जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… JDU नेता असम की लड़कियां होटलों में भेजता है:पीड़ित बोली- फार्महाउस में रातभर डांस कराया, टैबलेट खिलाईं; ओवैस की CM के साथ फोटो “हम लोगों को रात में होटल ले जाते थे। वहां घंटों जिस्म से खेला जाता था। नेताजी के गेस्ट वहां पहले से मौजूद रहते थे। जिसका जैसा मन करता था, वैसा करने लगता था। हम चाहकर भी विरोध नहीं कर पाते थे। गेस्ट हम लोगों को बहुत दर्द देते थे। रात में वापस घर भेज दिया जाता था। हम तो समझ भी नहीं पाते थे, हमारे साथ क्या हो रहा है। जाने के लिए मना करते तो वो लोग मारपीट करते थे। भगवान से यही मांगते थे कि रात न हो, क्योंकि हर रात ऐसे ही दर्द से गुजरना पड़ता था..।” यह दर्द 14 साल की उस मासूम का है, जिसके खुलासे के बाद सहरसा के JDU नेता ओवैस करणी उर्फ मुन्ना मुखिया तक पुलिस पहुंची। वह अकेली नहीं ऐसी ही पीड़ित 7 मासूमों ने मुन्ना मुखिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पूरी खबर पढ़िए स्वीमिंग पुल में नहाती लड़कियों को देखता था JDU नेता:पीड़ित बोली- पुलिस-VIP गेस्ट भी आते; एजेंट्स से नॉर्थ ईस्ट की लड़कियां मंगवाता “JDU नेता मुंशी से रोज रात को मेरी बेटी को बुलवाता था। बेटी बताती थी कि वहां एक स्वीमिंग पुल है। जिसमें कपड़े उताकर नहाने के लिए कहते थे। मालिक गार्डन में बैठकर हमें नहाते देखते थे। इधर-उधर टच करते थे। पुलिस और बड़ी-बड़ी गाड़ियों से लोग भी वहां आते थे।” ये कहना है 14 साल की नाबालिग लड़की की मां का, जिसे असम से JDU नेता ओवैस करनी उर्फ चुन्ना मियां के यहां मजदूरी के लिए लाया गया था। इनपुट के बाद भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम JDU नेता के फार्म हाउस पहुंची। ये बिल्कुल सुनसान जगह पर बना है। यहां हमें वो सब मिला जो पीड़ित लड़की की मां ने बताया था। पूरी खबर पढ़िए
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वा को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला है। सांसद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत विश्वा पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि धरती पर इतना चरित्रहीन इंसान नहीं देखा। हेमंत विश्वा को असम के पब्लिक का गद्दार तक कह दिया। एमपी ने कहा कि हेमंत विश्वा ने एक लाख करोड़ की चोरी की है। ये दुनिया के सबसे बड़े चोर है। तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत के इतिहास में इससे बड़ा डकैत कोई पैदा नहीं हुआ। सांसद पप्पू यादव ने असम के मुख्यमंत्री को चैलेंज करते हुए कहा कि अगर उन्हें हिम्मत है तो वे मुझे और गौरव गोगोई को गिरफ्तार करके दिखाएं। हाथ लगा कर दिखाएं। जिस दिन इन दोनों को हाथ लगाया गया, खून की नदियां बहेगी। वे इतने पर ही नहीं रुके, असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वा को पापी और गद्दार बताते हुए कहा कि वे गरीबों दलितों और बहू बेटियों के विरोधी हैं। कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता उनके खिलाफ जंग लड़ने को तैयार है। हेमंत विश्वा ने दलितों को दी गाली सांसद ने कहा कि जिस तरीके से हेमंत विश्वा ने हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष का अपमान किया है और उन्हें अपशब्द कहा है, वे कतई इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने देश की बहू बेटियों को गाली दिया है, उनके खिलाफ केस होना चाहिए। दलितों को पागल कहा और उन्हें गाली दी है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव मक्का और मखाना किसानों को लेकर बड़े आंदोलन का आह्वान किया है। मक्का और मखाना किसानों की समस्याओं को लेकर पप्पू यादव ने कहा कि भाजपा और नरेंद्र मोदी की सरकार ने मक्का और मखाना किसानों को अमेरिका के हाथों गिरवी रख दिया है। गुलाबबाग मंडी गेट पर सात दिनों का धरना प्रदर्शन सरकार के इस किसान विरोधी नेता के खिलाफ 13 अप्रैल से गुलाबबाग मंडी गेट पर सात दिनों का धरना प्रदर्शन किया जाएगा। ये आंदोलन किसानों के हक और उनकी समस्याओं को लेकर होगा। इसके जरिए एक बड़े आंदोलन और लड़ाई की शुरुआत होगी। बिहार में हो रही रेप, हत्या, हॉस्टल में बच्चियों के साथ हो रही यौन शोषण की घटनाओं को लेकर 18 अप्रैल के बाद एक आंदोलन किया जाएगा। वे सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। इस दौरान उन्होंने बिहार में हालिया में हुई रेप और हत्या की घटनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि बिहार में सरकार निरंकुश हो चुकी है। बेटियों को बलि नहीं चढ़ने देंगे।
असम दौरे से लौटने के बाद बुधवार को पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, असम की जनता ने नया असम बनाने का मन बना लिया है। जिस तरह से वहां काम हो रहा है, उससे साफ है कि जनता परिवर्तन चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि, इसी वजह से भाजपा के नेता बौखला गए हैं। उनके पास असम को देने के लिए कुछ नया नहीं बचा है। भूपेश बघेल ने धर्म स्वतंत्रता विधेयक, मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से मुलाकात और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी रायपुर एयरपोर्ट पर बयान दिया है। हिमंत बिस्वा सरमा पर साधा निशाना असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि, सार्वजनिक मंच से ऐसे अपशब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें वे बोल भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि, इस मामले में निर्वाचन आयोग को कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन आयोग चुप्पी साधे हुए है। धर्म स्वतंत्रता विधेयक पर सवाल राज्यपाल की तरफ से धर्म स्वतंत्रता विधेयक पर हस्ताक्षर किए जाने के मुद्दे पर बघेल ने कहा कि, पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में भी यह विधेयक राष्ट्रपति के पास से वापस आया था। उन्होंने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट में इस तरह के मामलों की सुनवाई चल रही है। इसलिए अलग-अलग जगह अलग निर्णय होना उचित नहीं होगा। PM से मुलाकात पर उठाए सवाल भूपेश बघेल मुख्यमंत्री साय और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुलाकात पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले बस्तर के गांवों को 1 करोड़ रुपए देने की बात कही थी। बघेल ने पूछा कि, क्या मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से इस राशि की मांग की या नहीं अगर नहीं की तो इस मुलाकात का कोई विशेष मतलब नहीं है। शिक्षा और खड़गे के बयान पर BJP को घेरा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर भाजपा के सवाल उठाने पर बघेल ने कहा कि, यह भाजपा के मानसिक दिवालियापन की पराकाष्ठा है। उन्होंने कहा कि केरल देश का सबसे साक्षर राज्य है। हमें सभी राज्यों को केरल और हिमाचल की तरह शिक्षित बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि, छत्तीसगढ़ में 10 हजार स्कूल बंद कर दिए गए हैं। भाजपा शासित राज्यों में पाठशालाएं बंद हो रही हैं, जबकि अन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ अभद्र भाषा के विरोध में रायपुर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का पुतला दहन किया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झूमाझटकी भी हुई, हालांकि कार्यकर्ता पुतला दहन करने में सफल रहे। यह प्रदर्शन बुधवार को राजीव गांधी चौक पर किया गया। जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझटकी पुतला दहन के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। रायपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री कुमार मेनन ने कहा कि, असम सरकार कांग्रेस नेताओं पर दबाव बनाने के लिए एफआईआर और छापेमारी जैसी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पवन खेड़ा के घर भी पुलिस ने रेड की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी दबाव से डरने वाली नहीं है। भाजपा पर साधा निशाना कांग्रेस नेता आकाश शर्मा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि, पार्टी के नेता पूरी तरह बौखला गए हैं। असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगे है। इन सभी बातों का विरोध करने से असम के सीएम कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।
कब मनाया जाएगा रोंगाली बिहू ; जानें असम के नव वर्ष के 7 चरणों की पूरी कहानी
असम में बोहाग बिहू 2026 का भव्य आयोजन, रोंगाली बिहू के सात चरणों सहित नए साल और फसल के उत्सव को दर्शाता है, जो राज्य की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक जीवनशैली का प्रतीक है।
राहुल गांधी ने खड़गे के खिलाफ टिप्पणी को लेकर असम के मुख्यमंत्री की आलोचना की
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा पर असम पुलिस की कार्रवाई और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR के विरोध में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान हिमंता बिस्वा सरमा का पुतला दहन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र और असम सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोर्ट जाएगी बिहार कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि जब हम लोगों ने अंग्रेजों को खदेड़ा है तो फिर इन एजेंटों से क्या डरेंगे। अगर वह सारे फोटो वीडियो AI जेनरेटेड है तो सरकार इसकी जांच करवा ले। इसलिए बिहार में कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता इस मामले का प्रतिकार करता है। कांग्रेस पार्टी ने आजादी की लड़ाई लड़ी है, तो इस लोकतंत्र को बचाने की भी लड़ाई लड़ेंगे। सीएम की पत्नी ने तीन देश की नागरिकता प्राप्त की है, लेकिन इससे सवाल हट करके गाली पर आ गई है। हिमंता बिस्वा सरमा को स्पष्टीकरण जनता के बीच रखना चाहिए।राजेश राम ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही है। कांग्रेस भाजपा के बदले की राजनीति का कड़ा विरोध करती उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा पर असम पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। भाजपा सरकारें विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही हैं। यह घटना लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास है। कांग्रेस पार्टी इस तरह की बदले की राजनीति का कड़ा विरोध करती है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट रखने के आरापों के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर असम पुलिस के छापे मारने के बाद सियासत गरमा गई है। राजस्थान कांग्रेस के बड़े नेता खुलकर पवन खेड़ा के समर्थन के उतर आए हैं। इसमें पूर्व सीएम अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने खेड़ा के घर असम पुलिस की छापेमारी के बाद बीजेपी पर निशाना साधा। तीनों ने इसे असम चुनाव में संभावित हार से उपजी बौखलाहट करार दिया। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर लिखा- असम चुनाव में हार के डर से भाजपा बौखला गई है। भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह लोकतंत्र के बजाय पुलिस और सरकारी एजेंसियों के पीछे छिपकर वार करती है। असम पुलिस ने जिस तरह कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा के आवास पर छापेमारी की, वह कायराना हरकत है। गहलोत ने लिखा- कांग्रेस को इन सब पैतरों से डराया नहीं जा सकता। असम पुलिस, सीबीआई, ईडी का डर दिखाने से कांग्रेस के दिलेर लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। असम की जनता सब देख रही है। वे जान चुके हैं कि भाजपा सिर्फ नफरत फैलाना और डराना जानती है। जल्द ही असम की जनता इस तानाशाही सरकार को माकूल जवाब देगी। डोटासरा बोले- भाजपा तानाशाही पर उतर आई कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- भाजपा की राजनीति सिर्फ और सिर्फ डराओ, धमकाओ और संस्थाओं के दुरुपयोग से विपक्षी दलों के नेताओं का दमन कर सच को छिपाने की रह गई है। असम पुलिस का AICC मीडिया व प्रचार विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा के खिलाफ फर्जी FIR दर्ज उनकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली आना और खोजबीन करना, साफ संदेश है कि भाजपा तानाशाही पर उतर चुकी है। डोटासरा ने लिखा- पवन खेड़ा ने हाल ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के भ्रष्टाचार और उनकी पत्नी के 3-3 पासपोर्ट का पर्दाफाश किया था। डोटासरा ने लिखा- कांग्रेस का हर कार्यकर्ता मजबूती से खड़ा है। जूली बोले- खेड़ा के घर असम पुलिस की छापेमारी कायराना हरकत नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एक्स पर लिखा- असम चुनाव में हार के डर से बौखलाई भाजपा अब पुलिस और सरकारी एजेंसियों के सहारे विपक्ष को दबाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा के आवास पर असम पुलिस की छापेमारी न सिर्फ कायराना हरकत है, बल्कि भाजपा की तानाशाही का प्रमाण है। जूली ने लिखा- जवाब देने के बजाय भाजपा फर्जी FIR, दमन और डराने-धमकाने की राजनीति में उतर आई है। कांग्रेस का हर कार्यकर्ता मजबूती से खड़ा है। असम की जनता सब देख रही है और समय आने पर भाजपा को इसका उत्तर देगी।
हिमंता बिस्वा सरमा का तीखा पलटवार ,पवन खेड़ा और खड़गे के बयान पर असम CM का तंज
पवन खेड़ा के घर असम पुलिस का छापा, हिमंता का दावा- हैदराबाद भागा
दिल्ली में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर मंगलवार को असम पुलिस ने छापा मारा। पवन खेड़ा इस समय घर पर मौजूद नहीं थे। इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिसवा सरमा ने दावा किया कि पवन खेड़ा हैदराबाद भाग गए हैं।
पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की छापेमारी, CM हिमंता की पत्नी के पासपोर्ट को लेकर लगाए थे आरोप
असम पुलिस की टीम पवन खेड़ा के आवास पर पहुंच गई है। दिल्ली पुलिस उनकी सहायता कर रही है.
सांसद ने असम में महा गठबंधन के प्रत्याशी के समर्थन में की जनसभा
लोहरदगा|लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने असम के ढेकियाजुली विधानसभा क्षेत्र में महा गठबंधन प्रत्याशी बटाश ओरंग के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि चाय बागान का पसीना बोलेगा आदिवासी अब हिसाब लेगा। उन्होंने लोगों से अपील किया कि वे अपने वोट की शक्ति को समझें और इसे सही दिशा में इस्तेमाल करें। उन्होंने झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के आदिवासी समाज को एकजुट बताते हुए कहा कि हर जगह एसटी समाज अपने हक और पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने बीजेपी पर चुनावी वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चाय बागान के मजदूरों और आदिवासियों को अब तक कोई ठोस लाभ नहीं मिला है। उन्होंने संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासी समाज बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान
24 साल के परदुम ताती डिब्रूगढ़ के चाय बागान में काम करते हैं। उनके माता-पिता भी यहीं काम करते थे। परदुम पुलिस में नौकरी करना चाहते थे, लेकिन परिवार के हालात ने बागान पहुंचा दिया। यहां मिलने वाली दिहाड़ी से खुश नहीं हैं। हालात पूछते ही भावुक हो जाते हैं। कम दिहाड़ी मिलने की शिकायत करने वाले वो अकेले नहीं हैं। असम में लगभग 8 लाख से ज्यादा वर्कर्स चाय बागान में काम करते हैं। दिहाड़ी के नाम पर उन्हें रोज के महज 280 रूपए मिलते हैं। पिछले 10 सालों में दिहाड़ी सिर्फ 130 रुपए बढ़ी है। महिलाएं बागान में टॉयलेट जैसी बेसिक सुविधा न होने की शिकायत करती हैं। वर्कर की नाराजगी टी ट्राइब्स को अनसूचित जाति (ST) में शामिल न करने को लेकर भी है। 126 विधानसभा सीटों वाले असम की लगभग 45 सीटों पर चाय बागान मजदूरों का सीधा असर है। असम की सत्ता का रास्ता इन्हीं बागानों से होकर निकलता है। 9 अप्रैल को यहां चुनाव हैं। ऐसे में चाय मजदूरों के क्या मुद्दे हैं, वे किन हालात में हैं, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम डिब्रूगढ़ के चाय बागान पहुंची। बागान से बाजार तक 24 घंटे में पहुंचती हैं पत्तियांडिब्रूगढ़ शहर से 20 किलोमीटर दूर हम ढलाजन सब डिवीजन के कनाई गांव पहुंचे। यहां मोकलबाड़ी टी एस्टेट कंपनी का चाय बागान है। सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक काम होता है। बड़े बागानों में लगभग 12 से 14 हेक्टेयर के करीब 14 सेक्शन होते हैं। एक सेक्शन में कुल 60 से 70 लोग काम करते हैं। महिला और पुरुषों के सेक्शन अलग हैं। ऐसे करीब एक बागान में कुल 800 मजदूर काम करते हैं। हर सेक्शन में मजदूरों से काम कराने वाली एक महिला और एक पुरुष केयरटेकर यानी सरदार होता है। करीब 24 घंटे में बागानों से निकली पत्तियां पैक होकर बिकने के लिए रेडी हो जाती हैं। मजदूरों की 3 मांगें- दिहाड़ी, जमीन का हक और ST दर्जा बाग में काम करते मिले परदुम कम दिहाड़ी मिलने से नाराज हैं। वे शिकायत करते हुए कहते हैं, ‘अगर पढ़ा-लिखा होता, तो कहीं और नौकरी करता। अभी दिहाड़ी 250 से बढ़ाकर 280 रुपए कर दी लेकिन फिर भी कम है। हमने डिब्रूगढ़ में आंदोलन करके 551 रुपए की मांग की थी, लेकिन पूरी नहीं हुई।‘ परदुम बीते 3 साल से चाय बागान में काम कर रहे हैं। 4 साल पहले मां गुजर गईं। बुजुर्ग पिता काम नहीं कर सकते इसीलिए वो घर में अकेले कमाने वाले हैं। चुनाव को लेकर परदुम साफ कहते हैं, ‘हमारी तीन मांगें हैं। दिहाड़ी बढ़ाई जाए, जमीन का हक मिले और ST का दर्जा दिया जाए। जो ये मांगें पूरी करेगा, हम उसी का समर्थन करेंगे।‘ प्लांटेशन लेबर एक्ट के तहत 1 अप्रैल से पहले मजदूरों को 250 रुपए दिहाड़ी मिलती थी। हिमंता सरकार ने 30 रुपए बढ़ाकर इसे 280 रुपए कर दिया। केरलम में भी 1 अप्रैल को टी वर्कर्स की दिहाड़ी 48 रुपए बढ़ाकर 546 रुपए कर दी गई है। ये असम के मुकाबले लगभग दोगुनी है। वर्कर्स की हालत पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और ग्लोबल लिविंग वेज कोलीशन (GLWC) नजर रखते हैं। GLWC की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, असम के चाय बागान वाले इलाकों में परिवार का पेट पालने के लिए एक मजदूर की मंथली इनकम कम से कम 15,000 रुपए होनी चाहिए, जबकि अभी ये करीब 8 हजार रुपए है। न बीमा-न कोई सुविधा, छतों से पानी टपकता है आकाश नायक बागान में काम करते हैं और असम चाय मजदूर संघ से भी जुड़े हैं। वे शिकायत करते हैं कि कंपनी ने कोई बीमा नहीं कराया और न ही कोई खास सुविधाएं दी हैं। रहने के लिए मिले क्वार्टर की हालत भी खराब है। छतों से पानी टपकता है और दीवारें फटी हुई हैं, लेकिन कंपनी मरम्मत नहीं करवाती। आकाश आने वाले चुनाव में 'चाय जनजाति' की मांग को सबसे जरूरी बताते हैं। असम के जंगलों को साफ करके अंग्रेजों ने यहां चाय के बागान लगाए और काम करने के लिए कुछ लोगों को लाकर बसाया था। इन्हें असम में टी ट्राइब या चाय जनजाति कहा जाता है। तब से इनकी पीढ़ियां यहीं रह रही हैं। राज्य में इनकी आबादी करीब 70 लाख है यानी करीब 20% हिस्सेदारी है। असम के 10 जिलों की 45 विधानसभा सीटों पर टी-ट्राइब हार-जीत तय करते हैं। असम चाय बागान यूनियन के असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी लखींद्र कुर्मी ST के दर्जे को सबसे बड़ी मांग बताते हैं। वे कहते हैं, ‘झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उरांव, मुंडा, संथाल और खड़िया जैसी हमारी जातियों को ST दर्जा हासिल है। असम के चाय बागानों में हम उसी स्थिति में रह रहे हैं। हम प्रकृति के पुजारी हैं। हमारी कुल 108 उप-जातियां हैं, जिनमें सिर्फ 36 को ST दर्जा मिला है।’ अब महिला वर्कर्स की बात… टॉयलेट नहीं, खुले में जाने को मजबूरअसम के बागानों में करीब 60% महिला वर्कर्स हैं। पत्तियां तोड़ने का काम उन्हीं के जिम्मे है। 52 साल की बुरुन ताती पिछले 10 साल से महिला मजदूरों की केयरटेकर हैं। वे बताती हैं, ‘बागान में 18 से 58 साल तक के मजदूर हैं। रिटायरमेंट के बाद हमारा काम बेटे या बहुओं को मिल जाता है। PF के लिए कटने वाला पैसा हमें मिल जाता है।‘ महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं पर वे कहती हैं, ‘बागान में टॉयलेट न होना सबसे बड़ी परेशानी है। सरकार ने हमारी बस्ती में घरों पर टॉयलेट बनवाए हैं, लेकिन यहां नहीं। हर बार काम बीच में छोड़कर घर जाना मुमकिन नहीं होता। मजबूरन खुले में जाना पड़ता है।‘ ‘प्रेग्नेंट महिलाओं का ध्यान रखा जाता हैं। उन्हें हल्का काम देते हैं। अगर काम करते हुए कोई बीमार पड़ जाए, तो कंपनी की गाड़ी उसे अस्पताल भी ले जाती है।‘ महंगाई में खर्च चलाना मुश्किल, दिहाड़ी बढ़े-जमीन का हक मिले25 साल की भानुमती ताती बीते 6 साल से बागान में काम कर रही हैं। पति राजमिस्त्री हैं और 5 साल का एक बच्चा है। वे बताती हैं, ‘महंगाई की वजह से दिक्कत बढ़ गई है। बच्चे की पढ़ाई और बीमारी में कम पैसों में मैनेज करना मुश्किल हो जाता है। जब मैनेजर से दिहाड़ी बढ़ाने को कहते हैं, तो काम करने की बात कहकर टाल देते हैं।’ 26 साल की सपना ताती पिछले 5 सालों से काम कर रही हैं। वे चुनाव पर कहती हैं, ’नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन लौटकर नहीं आते। इसलिए किसी पर कोई दबाव नहीं है, सब अपनी मर्जी से वोट देते हैं। हमारी बस यही मांग है कि दिहाड़ी बढ़ाई जाए, हमारे घर ठीक कराए जाएं और सबसे जरूरी, जमीन का मालिकाना हक मिले।’ स्टाफ भी नाखुश, बोला- सरकार के वादे अधूरे, अबकी जवाब देंगे 4 अप्रैल को जब हम गांव पहुंचे तब सभी वर्कर्स काम खत्म कर पेमेंट लेने पहुंचे थे। हर 15 दिन बाद शनिवार को उनकी पेमेंट मिलती है। सेंटर पर काफी भीड़ थी। पे स्लिप के साथ लोगों के नाम बोले जा रहे थे, तीन डेस्क पर करीब 12 लोग पेमेंट बांट रहे थे। यहीं हमें पेमेंट देने वाले 35 साल के संतोष गोला मिले। वे बागान के हालात पर कहते हैं, जो नियम और सुविधाएं होनी चाहिए, असल में वो नहीं हैं। 10-12 साल में यहां किसी स्टाफ का प्रमोशन नहीं हुआ। 10-12 पद खाली पड़े हैं, लेकिन भरे नहीं जा रहे। सिर्फ लोगों से काम निकाला जा रहा है। ‘हमारी सबसे बड़ी दिक्कत कम मेहनताना है। पत्तियां तोड़ने वालों से लेकर पढ़े-लिखे लोगों तक सबको रोज के 250 रूपए ही मिलते हैं। ये काम मजबूरी में कर रहे हैं, क्योंकि थोड़ा पढ़ा-लिखा होने के कारण दूसरा काम नहीं कर सकते।‘ चुनाव के बारे में पूछने पर संतोष मौजूदा सरकार पर नाराजगी जताते हैं। वे कहते हैं, ‘BJP ने बड़े-बड़े वादे किए थे कि जमीन देंगे, दिहाड़ी बढ़ाएंगे, लेकिन कुछ नहीं मिला। अबकी हमने मन बना लिया है कि अगर हमें सुविधाएं और हक नहीं मिला, तो सब मिलकर मौजूदा सरकार को हटाएंगे।‘ मैनेजर बोले- मजदूरों को कोई खास दिक्कत नहीं हम बागान के मैनेजर अमित सिंह से भी मिले। वे बताते हैं कि चाय की पत्तियां तोड़ने से लेकर पैकिंग तक सारा काम उनकी कंपनी ही करती है। वे प्रोडक्शन को लेकर कहते हैं, ‘एक सीजन में 14 से 15 लाख किलो चाय बनाते हैं। हमारी तीन फैक्ट्रियों से रोजाना औसतन 5,000 किलो चाय निकलती है। ये यूरोपियन यूनियन और जापान एक्सपोर्ट होती है। अरब देशों में भी जाती है। फिलहाल जंग के चलते ईरान में सप्लाई बंद है।‘ लोगों की समस्याओं पर वे दावा करते हैं, ‘सुविधाओं को लेकर कोई खास समस्या नहीं है। महिलाओं के लिए वॉशरूम को लेकर सरकारी अफसरों से बात कर रहे हैं। वे सालाना यूरिनल और बाथरूम मुहैया कराते हैं। हमने आवेदन किया है। कंपनी अपने बजट और प्रोजेक्ट्स में भी इसे शामिल रखती है।‘ एक्सपर्ट बोले- चाय बागान मजदूरों के हाथ में 45 सीटेंअपर असम के सीनियर जर्नलिस्ट इकबाल अहमद मानते हैं कि सरकार बनाने में चाय जनजाति की बड़ी और निर्णायक भूमिका होती है। इस चुनाव में ST का दर्जा बड़ा मुद्दा है। सिर्फ चाय जनजाति ही नहीं, बल्कि 5 अन्य कम्युनिटी की कुल 6 जनजातियां ST दर्जे की मांग कर रही हैं। पार्टियों ने वादे किए, लेकिन केंद्र को रिपोर्ट नहीं भेजी। इससे लोगों में निराशा है। डिब्रूगढ़ के जर्नलिस्ट अभिक चक्रवर्ती 15 सालों से अपर असम में एक्टिव हैं। वे बताते हैं, अपर असम में 40 से 45 सीटों पर बागान मजदूरों का सीधा असर रहता है। यहां की आबादी का करीब 75% हिस्सा इन्हीं मजदूरों का है। चुनावों में महिला मजदूर अहम रोल निभाती हैं क्योंकि उनकी संख्या ज्यादा है। वे कहते हैं कि एक समय था जब ये कम्युनिटी कांग्रेस का पक्का वोट बैंक हुआ करती थी। उनके बड़े नेता कम्युनिटी के लिए ठीक से काम नहीं कर पाए, जिससे 2016 ये वोट BJP के पास आ गया। हालांकि अभिक मानते हैं कि इस बार चुनाव के मैदान में ST दर्जे का मुद्दा उतना हावी नहीं, जितना लैंड पट्टा और दिहाड़ी है। BJP बोली: असम सरकार ST दर्जा दिलाकर रहेगीअसम BJP के राज्य महासचिव और असम पर्यटन विकास निगम (ATDC) के अध्यक्ष रितुपर्णा बरुआ कहते हैं, 'सिर्फ टी-ट्राइब्स ही नहीं, कुल 6 कम्युनिटीज ST दर्जा मांग रही हैं। सरकार ने इसके लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स बनाया है। सभी कम्युनिटी के लीडर्स से चार राउंड बातचीत हो चुकी है। GoM ने रिपोर्ट भी दे दी है। असम सरकार भी यही चाहती है कि इन सभी 6 कम्युनिटी को ST दर्जा मिले। हम उसके लिए काम कर रहे हैं।' मेहनताने को लेकर बरुआ कहते हैं कि अगले तीन सालों में इसे बढ़ाकर 500 करने का हमारा वादा है। इसे हर हाल में पूरा करेंगे। वहीं, कांग्रेस लीडर गोपाल शर्मा का कहना है कि इनकी ST दर्जे की मांग को लेकर पार्टी का स्टैंड बिल्कुल साफ है, जो लोग तय क्राइटेरिया पूरा करेंगे, उन्हें दर्जा दिया जाएगा। अगर हमारी सरकार बनती है तो मजदूरी बढ़ाने समेत बाकी मांगों पर भी विचार करेंगे। ………………. ये खबर भी पढ़ें… गांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
झारखंड के सीएम को असम के विकास से सीख लेनी चाहिए: हिमंत बिस्व सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का राज्य में स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें असम के तेज़ी से हुए विकास को देखने का मौका मिलेगा, खासकर चाय बागान क्षेत्रों में
सिंगर जुबीन गर्ग की मौत का सच गहराया, असम सरकार ने जांच के लिए गठित की एसआईटी
फेमस असमिया और बॉलीवुड सिंगर जुबीन गर्ग के अचानक निधन से उनके फैंस के बीच शोक की लहर है। जुबीन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में स्कूबा डाइविंग के दौरान निधन हो गया था। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के डीजीपी से जुबीन गर्ग ...
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
घर पर ताला लगाकर गायब हुए रणवीर अल्लाहबादिया, खाली हाथ लौटी मुंबई और असम पुलिस!
कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में माता-पिता पर भद्दा कमेंट करके यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया मुश्किलों में घिर चुके हैं। देश के कई राज्यों में रणवीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। वहीं यह मामला संसद तक उठ चुका है। अब खबर आ रही है कि ...
Ramen Baruah missing : मनोरंजन जगत से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। असम के प्रख्यात गायक, संगीतकार और निर्देशक रमन बरुआ तीन दिन से लापता हैं। रमन बरुआ बीते सोमवार गुवाहाटी के लतासिल इलाके में अपने घर से पास के मंदिर में दर्शन करने के लिए ...

