वाराणसी जनपद के करखियांव स्थित अमूल बनास डेयरी प्लांट में शनिवार को मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। वेतन कटौती और ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कथित शोषण के विरोध में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रमिकों ने प्लांट के मुख्य द्वार पर 'चक्का जाम' कर दिया। सुबह 8 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन में दोपहर की शिफ्ट के कर्मचारी भी शामिल हो गए, जिससे प्लांट का संचालन ठप हो गया है। इस हड़ताल से कंपनी को करीब 10 लाख रुपये से अधिक के आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। दूध की गाड़ियों को बाहर रोके रखे मजदूर आक्रोशित मजदूरों ने प्लांट के गेट पर धरना देते हुए दूध की आपूर्ति बाधित कर दी, जिससे दर्जनों टैंकर घंटों सड़क पर खड़े रहे। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन मजदूरों की नाराजगी के चलते बात नहीं बन पाई। बाद में इंस्पेक्टर फूलपुर अतुल कुमार सिंह और इंस्पेक्टर बड़ागांव प्रवीण सिंह भी पहुंचे। उनके द्वारा भी समझाया गया लेकिन मजदूर नहीं माने और टैंकर बाहर खड़े रहे। एडीसीपी के कहने पर टैंकर को दिए रास्ताहालात तनावपूर्ण होते देख एडीसीपी नृपेन्द्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने मजदूरों को आश्वस्त किया कि उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और श्रम विभाग के साथ मिलकर समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा। इस आश्वासन के बाद मजदूरों ने दूध की गाड़ियों को अंदर जाने का रास्ता तो दिया, लेकिन वे खुद काम पर नहीं लौटे और गेट पर ही खड़ा होकर शाम तक धरने पर बैठे रहे। मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर जारी किया पत्रमजदूरों द्वारा एक पत्र भी लिखा गया जिसमें उन्होंने मांग किया है कि ठेका प्रथा के नाम पर उनके साथ हो रहे अन्याय को रोका जाए तथा उनका शोषण बंद हो। उसमें उन्होंने यह भी लिखा है कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए न्यूनतम 15000 रुपए वेतन मिले और हर महीने चार छुट्टियां मिलनी चाहिए। इसके अलावा आश्रम कानून के तहत पीएफ और ईएसआई की सुविधा मिलनी चाहिए तथा कर्मचारियों को जॉइनिंग लेटर और सैलरी स्लिप व महिला कर्मचारियों को मासिक अवकाश भी मिले। कंपनी के अधिकारी अलोकमणी त्रिपाठी का कहना है कि श्रमिकों की नियुक्ति ठेकेदारों के माध्यम से होती है, इसलिए वेतन संबंधी विवाद की जिम्मेदारी ठेकेदारों की है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में प्रबंधन, ठेकेदारों और मजदूरों के प्रतिनिधियों से बात करके मामले का हल निकाले जाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि शाम तक मजदूर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और प्लांट में उत्पादन कार्य बाधित है।
किशनगढ़बास में श्री महावर वैश्य समाज का 30वां स्नेह मिलन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह गुरुवार देर शाम को हुआ। आयोजन खैरथल रोड स्थित महावर धर्मशाला में हुआ। समारोह में शिक्षा, खेल और सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। श्री महावर वैश्य नवयुग समिति के संगठन मंत्री लोकेश गुप्ता ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारा और प्रेरणा बढ़ाते हैं। सेवा समिति के अध्यक्ष सतीश महावर ने कहा कि शिक्षा ही सफलता की पहली सीढ़ी है और बच्चों व युवाओं को लक्ष्य के प्रति एकाग्र होकर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। समारोह में बच्चों, युवाओं और महिला मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इनमें नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियां शामिल थीं, जिनकी दर्शकों ने सराहना की। कार्यक्रम में एक लक्की ड्रॉ का भी आयोजन किया गया। यह आयोजन श्री महावर वैश्य सेवा समिति, महावर वैश्य नवयुवक समिति और महावर वैश्य महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसे सफल बनाने में सेवा समिति के अध्यक्ष सतीश महावर, सचिव रिंकेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष प्रह्लाद राय गुप्ता; नवयुवक समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता, सचिव मदन गुप्ता, कोषाध्यक्ष लोकेश कुचलिया; तथा महिला मंडल की अध्यक्ष पिस्ता गुप्ता, सचिव विनिता गुप्ता और कोषाध्यक्ष सुनीता गुप्ता सहित कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का योगदान रहा।
कैमूर जिले में 19 अप्रैल 2026 को मनाए जाने वाले भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव (अक्षय तृतीया) की तैयारियां तेज हो गई हैं। भभुआ के अखलाशपुर में राष्ट्रीय परशुराम सेना की एक महत्वपूर्ण बैठक में शोभा यात्रा और अन्य कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई। बैठक में परशुराम सेना के पदाधिकारियों ने भव्य शोभा यात्रा निकालने, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने और स्थानीय स्तर पर जागरूकता फैलाने की योजना बनाई। इसमें भगवान परशुराम की शिक्षाओं जैसे धर्म रक्षा, दुष्ट दमन और ब्राह्मण सम्मान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। सनातन संस्कृति और क्षत्रिय-ब्राह्मण परंपरा का प्रतीकपरशुराम सेना के अध्यक्ष विनोद तिवारी ने बताया, “परशुराम जन्मोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति और क्षत्रिय-ब्राह्मण परंपरा का प्रतीक है। हम पूरे जिले में भव्य शोभा यात्रा निकालेंगे ताकि युवा पीढ़ी को भगवान परशुराम के आदर्शों से जोड़ा जा सके।” परशुराम सेना के कार्यकर्ता अब विभिन्न गांवों और वार्डों में बैठकें कर रहे हैं। कार्यक्रम में भजन-कीर्तन, प्रवचन और सामूहिक पूजा का भी आयोजन किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जिले के धर्मप्रेमी नागरिक इस पर्व को भव्यता से मनाने के लिए उत्साहित हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक जागरण का माध्यम भी बनेगा।
उदयपुर के भारतीय लोक कला मंडल में मंगलवार की रात को हास्य कवि सम्मेलन देर रात तक जमा। कवियों ने भगवान महावीर से जुड़े संदेश कविताओं के जरिए दिए। आखिरी कवि लाफ्टर चैंपियन सुरेश अलबेला ने हंसाते हुए सबको लोट पोट कर दिया। गुरु कमल चंद्रोशन गौ सेवा ट्रस्ट एवं विद्यार्थी कल्याण संस्थान के साझे में भारतीय लोककला मंडल में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरूआत राजसमंद के केलवा से आई कवियित्री भावना लोहार ने सरस्वती वंदना से की। कवि लाफ्टर चैंपियन सुरेश अलबेला ने रात तक सबको हंसाया, उन्होंने कई किस्से सुनाते हुए जीवन से जुड़ी कई शिक्षा कविताओं के जरिए दी। इंदौर से आए मुकेश मौलवा ने राणा सांगा, बप्पारावल और भामाशाह के जीवन से जुड़ी कविताएं सुनाकर देशभक्ति के भाव भर दिए। कोटा से आए कवि राजेंद्र पंवार ने अपनी रचना फिक्र नहीं करते वीर कभी अपनी जान की ,गरिमा व महिमा बनीं रहे बस हिंदुस्तान की, अपनी वीरता से इतिहास नया गढ़ना बेटे अंतिम सांस तक, विश्व बनाकर लड़ना बेटे, कुर्बानियों पर गर्व करते हैं लोग शान से ,कोख धन्य होती है मां के पुत्र के बलिदान से... पर सुर्खियां बटोरी। कांकरोली से आए कवि सुनील व्यास ने धरा का सार है गौ में, प्रकृति की दिव्य ऊर्जा है,शून्य से पूर्ण की ओर, चलने की ये पूजा है, अमृत है पय में इसके, प्राण में ब्रह्मांड समाया,यही तो ब्रह्म का विग्रह, न कोई और दूजा है... सुनाई। सुनील ने भी खूब हंसाया। कपासन से आए कवि शंकर सुखवाल ने नारियों पे हो रहा है, देखो अत्याचार, बढ़ता ही जा रहा ,हिंसा का कारोबार... कविता पर श्रोताओं ने तालियों की दाद दी। चेचट से आए कवि अर्जुन अल्हड़ ने रचना धरो पुनः विराट स्वरूप, संग गीता का सार लो,पापा सिंधु में वसुधा डूबी, बन वराह वसुधा तार लो, वंश मिटा दो गौ हत्यारों का,संतों को पुनःउत्थान दो... कविता सुनाई। कार्यक्रम का संचालन करते हुए उदयपुर के राव अजातशत्रु ने हिंसा की चौखट पर दुनिया,दुनिया में अहिंसा की जय हो, हे महावीर तेरी जय हो तेरी जय हो जय निश्चय हो....सुनाकर भगवान महावीर के संदेश श्रोता तक पहुंचाए। उदयपुर के मावली के मनोज गुर्जर ने रचना मान जनक का जो ना करता, सुत दागी हो जाता हैं, सच कहता हूँ सुनो पाप का, वो भागी हो जाता हैं...प्रस्तुत कर पिता की महिमा को बताया। मुख्य अतिथि 108 गौशालाओं में 56 भोग के ब्रांड एंबेसेडर डॉ जिनेंद्र शास्त्री ने इस अभियान में अधिक जुड़ने का आह्वान किया मुख्य अतिथि प्रमुख पर्यावरणविद् इंदौर के अशोक मेहता ने की। सद्गुरु कमल चंद्ररोशन गोसेवा ट्रस्ट के संस्थापक संजय जैन ने स्वागत करते हुए बताया कि गुरुदेव कमल मुनि कमलेश की प्रेरणा व माता चंद्रकला एवं पिता रोशन लाल पोरवाल के आशीर्वाद से संचालित ट्रस्ट मुख्यतः गौ सेवा के लिये संकल्पित है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा तक 108 गौशालाओं में 50000 से ज्यादा गौ माता को छप्पन भोग धराया जायेगा।
तमिल त्योहार कारादाइयन नौम्बू क्यों मनाया जाता है?
karadaiyan nombu: कारादाइयन नौम्बू (सावित्री व्रतम) तमिल संस्कृति का एक पावन उत्सव है, जो वैवाहिक सुख और पति की दीर्घायु के संकल्प का प्रतीक है। यह पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करते हैं (मीन संक्रांति)। इस बार यह पर्व ...
“बुरा मानो होली है”– त्योहार की आड़ में छिपी हिंसा (त्यौहार, सहमती, गरिमा, आधिकार)
होली का दिन रंगों से खेलने के लिए मशहूर है, लेकिन कई लोग आज के दिन महिलाओं और लड़कियों, लड़कों के साथ रंग लगाने के बहाने छेड़छाड़ करते हैं। कई जगहों पर होली के नाम पर गोबर, कीचड़ आदि से भी होली खेली जाती है। “बुरा न मानो होली है” कहकर बहुत शर्मनाक व्यवहार करते ... Read more

