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जिविका दीदियों को हस्तशिल्प कला का प्रशिक्षण मिला:मंसूरचक में उत्पादों को बाजार से जोड़ने और ऋण सुविधा की जानकारी दी गई

मंसूरचक प्रखंड की समसा एक पंचायत के वार्ड संख्या 7 स्थित समसा मठ परिसर में मंगलवार को जिविका दीदियों के लिए एक दिवसीय हस्तशिल्प कला प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का उद्देश्य दीदियों को अपनी कला को बाजार से जोड़ने और विकसित करने के तरीके सिखाना था। यह प्रशिक्षण हस्तशिल्प कला एवं कपड़ा मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित हुआ। इसमें प्रतिभागियों को फ्लिपकार्ट और अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, हस्तशिल्प के लिए उपलब्ध विभिन्न ऋण सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया। जिविका के सुधीर कुमार ने बताया कि जिविका दीदियां विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं, लेकिन उनके हस्तनिर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने दीदियों से अपने उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ने का आग्रह किया। बबलू कुमार ने इस अवसर पर कहा कि महिलाएं हस्तशिल्प कला में निपुण हो रही हैं और सरकार भी उन्हें आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुखिया दिनेश कुमार राय ने समसा मठ में जलकुंभी से बनी हस्तशिल्प कला सामग्री की विशेष सराहना की। उन्होंने जोर दिया कि इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि पंचायत और प्रखंड क्षेत्र की महिलाओं को इन संस्थानों से लाभ मिल सके। इस प्रशिक्षण शिविर में दर्जनों जिविका दीदियां उपस्थित थीं, जिन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया।

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 7:02 pm

श्री राणी भटियाणी मंदिर में छप्पन भोग और कन्या पूजन:अक्षय कुमार परिवार ने छप्पन भोग चढ़ाया, कन्या पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए

जसोल स्थित श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में सोमवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु जसोलधाम पहुंचे। मंदिर परिसर दिनभर जयकारों, भजन-कीर्तन और भक्तिमय माहौल से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी और श्री काला गौरा भेरुजी के मंदिरों में दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। मंदिर में छप्पन भोग सेवा का पुण्य लाभ अक्षय कुमार परिवार ने प्राप्त किया। अक्षय कुमार, कैलाश कुमार के पुत्र हैं और मूल रूप से जालौर जिले के बागोड़ा के निवासी हैं। वर्तमान में उनका परिवार हैदराबाद (तेलंगाना) और मदुरई (तमिलनाडु) में निवास करता है। उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन के शुभारंभ के उपलक्ष्य में भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया और नवदांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना की। कन्या पूजन के साथ निभाई सनातन परंपरा धार्मिक आयोजन के दौरान लाभार्थी परिवार ने सर्व समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन किया। कन्याओं को सम्मानपूर्वक फल, प्रसाद और अन्नपूर्णा प्रसादम् ग्रहण करवाया गया तथा दक्षिणा भी भेंट की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी कन्या पूजन की परंपरा में अपनी आस्था व्यक्त की और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। गैर नृत्य और दमामी वाद्य-वादन ने बढ़ाई आयोजन की भव्यता धार्मिक कार्यक्रम के साथ-साथ लोक संस्कृति की रंगारंग झलक भी देखने को मिली। पारंपरिक गैर नृत्य और स्थानीय दमामी कलाकारों के वाद्य-वादन ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। लोक संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा के इस अनूठे संगम का श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ आनंद लिया। छप्पन भोग के दर्शन के लिए दिनभर लगी रही श्रद्धालुओं की कतार मंदिर संस्थान की ओर से लाभार्थी परिवार को वैवाहिक जीवन के शुभारंभ पर शुभकामनाएं दी गईं। छप्पन भोग के दर्शन के लिए दिनभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भक्ति भाव से धर्मलाभ प्राप्त किया। जसोलधाम में प्रतिदिन देशभर से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या इस पावन धाम के प्रति लोगों की गहरी आस्था, लोकविश्वास और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती है।

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 6:55 pm

​दालमंडी के दुकानदारों की याचिका हाईकोर्ट से खारिज:काशी विश्वनाथ कॉरिडोर : हाईकोर्ट ने कहा- सार्वजनिक हित में धार्मिक स्थल का अधिग्रहण संभव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के समीप सड़क चौड़ीकरण और सुंदरीकरण परियोजना के खिलाफ दायर याचिका को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को जनहित और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किसी भी भूमि या धार्मिक संपत्ति का अधिग्रहण करने का संप्रभु अधिकार प्राप्त है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने सैयद रशीद अली व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य में अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी, एडिशनल सीएससी सुरेश सिंह, नगर निगम वाराणसी के अधिवक्ता विनीत संकल्प और वीडीए के अधिवक्ता को सुनकर दिया है। जानिये क्या है मामला दालमंडी मार्केट के छह दुकानदारों, जो किराएदार हैं ने याचिका में दालमंडी स्थित उनकी दुकानों और भवनों से मनमाने ढंग से बेदखल न करने, ​प्रशासन द्वारा बलपूर्वक बेदखली या पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जरिए किसी भी तरह का उत्पीड़न रोकने और ​क्षेत्र में स्थित छह प्राचीन मस्जिदों (अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद, मस्जिद रंगीले शाह, मस्जिद अली रज़ा खान, मस्जिद करीमुल्लाह बेग, मस्जिद निसारन और मस्जिद संगमरमर) को ढहाने या उनका स्वरूप बदलने से रोकने की मांग की थ। याचियों का तर्क था कि दालमंडी मुस्लिम बहुल और बेहद पुराना व्यस्त बाजार है। चौड़ीकरण के लोक निर्माण विभाग के 21,588.24 लाख के बजट वाले प्रोजेक्ट से हजारों लोगों की आजीविका छिन जाएगी। साथ ही उन्होंने 'पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 का हवाला देकर मस्जिदों के अधिग्रहण को अवैध बताया था। सुनवाई के बाद ​कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल किराएदार हैं और उनके पास रेंट एग्रीमेंट या बिजली बिल जैसी सीमित चीजें हैं। लंबे समय से व्यापार करने मात्र से उनका अधिकार मालिकाना हक में नहीं बदल जाता। भूमि अधिग्रहण कानून (अधिनियम 2013) के तहत मुख्य रूप से संपत्ति के वास्तविक मालिक को ही आपत्ति जताने या मुआवजे की बातचीत करने का अधिकार होता है। संपत्ति मालिकों ने इस परियोजना पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। धार्मिक स्थल को लेकर दलीलें याचिकाकर्ताओं के सबसे बड़े तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि 1991 का अधिनियम राज्य सरकार के भूमि अधिग्रहण के अधिकार को नहीं रोकता। इस अधिनियम का एकमात्र उद्देश्य किसी सार्वजनिक पूजा स्थल को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित होने से रोकना है। यह अधिनियम धर्मनिरपेक्ष और सार्वजनिक उद्देश्यों जैसे सड़क चौड़ीकरण या बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्य द्वारा किए जाने वाले वैध अधिग्रहण के खिलाफ कोई सुरक्षा कवच या ढाल नहीं है। ऐतिहासिक फैसलें का जिक्र हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा डॉ एम इस्माइल फारूकी बनाम भारत संघ (1994) मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का संदर्भ दिया, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद सहित कोई भी अचल संपत्ति राज्य द्वारा अधिग्रहित की जा सकती है। मस्जिद को अन्य धर्मों के पूजा स्थलों से अलग कोई विशेष संवैधानिक छूट प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संशोधित वक्फ अधिनियम की धारा 51 और 91 भी जनहित में वक्फ बोर्ड की सलाह से भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत संपत्तियों के अधिग्रहण की अनुमति देती है। मस्जिदों के प्रबंधन (मुतवल्ली) या वक्फ बोर्ड ने सीधे तौर पर इस पर आपत्ति नहीं जताई है इसलिए दुकानदारों द्वारा इस मुद्दे को उठाना प्रासंगिक नहीं है। ​सरकारी वकील ने पक्ष रखा सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता महेश चंद्र चतुर्वेदी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि प्रशासन किसी को अवैध रूप से बेदखल नहीं कर रहा है। आपसी सहमति के आधार पर सेल डीड निष्पादित कर जमीनें ली जा रही हैं, और जो लोग सहमत नहीं हैं उनके लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत धारा 11 की अधिसूचना जारी कर उचित मुआवजे और पुनर्वास की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं, जर्जर भवनों पर नगर निगम और वाराणसी विकास प्राधिकरण अपने नियमों के तहत कार्रवाई कर रहे हैं।

दैनिक भास्कर 3 Jul 2026 12:17 am

होली को छपरियों का त्योहार बताकर फंसीं फराह खान, दर्ज हुआ केस

फिल्ममेकर-कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों कुकिंग रियलिटी शो 'सेलिब्रिटी मास्टशेफ' को जज करती नजर आ रही हैं। हाल ही में शो के एक एपिसोड में फराह खान ने होली को 'छपरी लोगों का फेवरेट फेस्टिवल' बताया था। इसके बाद फराह मुश्किलों में घिर गई हैं। फराह खान ...

वेब दुनिया 22 Feb 2025 11:30 am