हल्दीघाटी की ऐतिहासिक धरोहर पर अतिक्रमण और प्रशासनिक उपेक्षा की मार
राजस्थान उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद भी खमनोर में अधूरा अतिक्रमण हटाओ अभियान, स्थानीय प्रशासन और पर्यटन माफिया की मिलीभगत के गंभीर आरोप।
पंजाबी हिंदू बिरादरी का वैशाखी पर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रम 12 को
रांची | पंजाबी हिंदू बिरादरी इस साल भी वैशाखी पर्व को उत्साह के साथ मनाने जा रही है। कार्यक्रम रांची क्लब के सेलिब्रेशन हॉल में 12 अप्रैल को आयोजित होगा। आयोजकों के अनुसार संध्या 6 बजे से सांस्कृतिक संध्या शुरू होगी, जिसमें कोलकाता के कलाकार भांगड़ा और गिद्दा की प्रस्तुतियां देंगे। अध्यक्ष सुधीर उग्गल और चेयरमैन राकेश गिरधर ने बताया कि इस बार सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बिरादरी के सदस्यों को निशुल्क स्टॉल दिए जाएंगे, ताकि वे अपने उत्पादों का प्रचार-प्रसार कर सकें।
वाराणसी जनपद के करखियांव स्थित अमूल बनास डेयरी प्लांट में शनिवार को मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। वेतन कटौती और ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कथित शोषण के विरोध में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रमिकों ने प्लांट के मुख्य द्वार पर 'चक्का जाम' कर दिया। सुबह 8 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन में दोपहर की शिफ्ट के कर्मचारी भी शामिल हो गए, जिससे प्लांट का संचालन ठप हो गया है। इस हड़ताल से कंपनी को करीब 10 लाख रुपये से अधिक के आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। दूध की गाड़ियों को बाहर रोके रखे मजदूर आक्रोशित मजदूरों ने प्लांट के गेट पर धरना देते हुए दूध की आपूर्ति बाधित कर दी, जिससे दर्जनों टैंकर घंटों सड़क पर खड़े रहे। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन मजदूरों की नाराजगी के चलते बात नहीं बन पाई। बाद में इंस्पेक्टर फूलपुर अतुल कुमार सिंह और इंस्पेक्टर बड़ागांव प्रवीण सिंह भी पहुंचे। उनके द्वारा भी समझाया गया लेकिन मजदूर नहीं माने और टैंकर बाहर खड़े रहे। एडीसीपी के कहने पर टैंकर को दिए रास्ताहालात तनावपूर्ण होते देख एडीसीपी नृपेन्द्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने मजदूरों को आश्वस्त किया कि उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और श्रम विभाग के साथ मिलकर समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा। इस आश्वासन के बाद मजदूरों ने दूध की गाड़ियों को अंदर जाने का रास्ता तो दिया, लेकिन वे खुद काम पर नहीं लौटे और गेट पर ही खड़ा होकर शाम तक धरने पर बैठे रहे। मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर जारी किया पत्रमजदूरों द्वारा एक पत्र भी लिखा गया जिसमें उन्होंने मांग किया है कि ठेका प्रथा के नाम पर उनके साथ हो रहे अन्याय को रोका जाए तथा उनका शोषण बंद हो। उसमें उन्होंने यह भी लिखा है कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए न्यूनतम 15000 रुपए वेतन मिले और हर महीने चार छुट्टियां मिलनी चाहिए। इसके अलावा आश्रम कानून के तहत पीएफ और ईएसआई की सुविधा मिलनी चाहिए तथा कर्मचारियों को जॉइनिंग लेटर और सैलरी स्लिप व महिला कर्मचारियों को मासिक अवकाश भी मिले। कंपनी के अधिकारी अलोकमणी त्रिपाठी का कहना है कि श्रमिकों की नियुक्ति ठेकेदारों के माध्यम से होती है, इसलिए वेतन संबंधी विवाद की जिम्मेदारी ठेकेदारों की है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में प्रबंधन, ठेकेदारों और मजदूरों के प्रतिनिधियों से बात करके मामले का हल निकाले जाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि शाम तक मजदूर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और प्लांट में उत्पादन कार्य बाधित है।
किशनगढ़बास में श्री महावर वैश्य समाज का 30वां स्नेह मिलन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह गुरुवार देर शाम को हुआ। आयोजन खैरथल रोड स्थित महावर धर्मशाला में हुआ। समारोह में शिक्षा, खेल और सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। श्री महावर वैश्य नवयुग समिति के संगठन मंत्री लोकेश गुप्ता ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारा और प्रेरणा बढ़ाते हैं। सेवा समिति के अध्यक्ष सतीश महावर ने कहा कि शिक्षा ही सफलता की पहली सीढ़ी है और बच्चों व युवाओं को लक्ष्य के प्रति एकाग्र होकर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। समारोह में बच्चों, युवाओं और महिला मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इनमें नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियां शामिल थीं, जिनकी दर्शकों ने सराहना की। कार्यक्रम में एक लक्की ड्रॉ का भी आयोजन किया गया। यह आयोजन श्री महावर वैश्य सेवा समिति, महावर वैश्य नवयुवक समिति और महावर वैश्य महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसे सफल बनाने में सेवा समिति के अध्यक्ष सतीश महावर, सचिव रिंकेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष प्रह्लाद राय गुप्ता; नवयुवक समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता, सचिव मदन गुप्ता, कोषाध्यक्ष लोकेश कुचलिया; तथा महिला मंडल की अध्यक्ष पिस्ता गुप्ता, सचिव विनिता गुप्ता और कोषाध्यक्ष सुनीता गुप्ता सहित कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का योगदान रहा।
तमिल त्योहार कारादाइयन नौम्बू क्यों मनाया जाता है?
karadaiyan nombu: कारादाइयन नौम्बू (सावित्री व्रतम) तमिल संस्कृति का एक पावन उत्सव है, जो वैवाहिक सुख और पति की दीर्घायु के संकल्प का प्रतीक है। यह पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करते हैं (मीन संक्रांति)। इस बार यह पर्व ...
“बुरा मानो होली है”– त्योहार की आड़ में छिपी हिंसा (त्यौहार, सहमती, गरिमा, आधिकार)
होली का दिन रंगों से खेलने के लिए मशहूर है, लेकिन कई लोग आज के दिन महिलाओं और लड़कियों, लड़कों के साथ रंग लगाने के बहाने छेड़छाड़ करते हैं। कई जगहों पर होली के नाम पर गोबर, कीचड़ आदि से भी होली खेली जाती है। “बुरा न मानो होली है” कहकर बहुत शर्मनाक व्यवहार करते ... Read more

