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UPSC स्टूडेंट से 25 करोड़ का बैंक फ्रॉड:वाराणसी के ICICI बैंक में खोला करंट अकाउंट, फर्जी कंपनी दिखाकर लिया लोन

वाराणसी के रहने वाले UPSC छात्र के अकाउंट से साइबर ठगों ने 25 करोड़ का लोन निकाल लिया। छात्र का ICICI बैंक में सेविंग अकाउंट का था। ठगों ने छात्र के पैन का दुरुपयोग करते हुए इस अकाउंट को करंट अकाउंट में करा दिया। इसके बाद एक फर्जी फर्म दिखाकर 25 करोड़ का निगेटिव लियन (रिटर्न) ले लिया। निगेटिव लियन एक तरह का लोन होता है। जब छात्र ने ऑनलाइन पेमेंट किया तो पेमेंट नहीं हो सका। इसके बाद उसे फ्रॉड की जानकारी हुई। UPSC छात्र अनुराग मिश्रा का कहना है- कि मैं लखनऊ में रहकर UPSC की तैयारी करता हूं। जनवरी में मैं दिल्ली में था। 17 जनवरी को मैं लाइब्रेरी का पेमेंट कर रहा था, लेकिन पेमेंट नहीं हुआ। इसके बाद अकाउंट चेक किया तो 25,59,15,000 का निगेटिव लियन (लोन) दिखाने लगा। इसके बाद मैंने अपने घरवालों को बताया। लखनऊ की ICICI बैंक शाखा से धोखाधड़ी के बारे में पता चला। इसके बाद परिजनों ने 13 फरवरी को वाराणसी साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया। अब जानिए पूरा मामला…. लाइब्रेरी पेमेंट के समय हुई जानकारी UPSC छात्र अनुराग मिश्रा ने बताया - मैं 17 जनवरी 2026 को करोल बाग, नई दिल्ली स्थित लाइब्रेरी पर गूगल पे से पेमेंट कर रहा था। 3500 का पेमेंट बार-बार फेल हो रहा था। ऐसे में मैंने मोबाइल बैंकिंग के जरिए अकाउंट चेक किया। अकाउंट मेंं 25 करोड़ 56 लाख 15 हजार का निगेटिव लियन दिखाई देना लगा। इस पर मैंने आईसीआईसी के कस्टमर केयर को कॉल किया। उसे सारी बात बताई। उन्होंने मुझे बैंक की निकटतम शाखा जाने को कहा गया। इसके बाद 19 जनवरी को मैं हजरतगंज स्थिति ICICI बैंक की शाखा पर गया। यहां से मुझे जीएसटी ऑफिस भेजा गया। जीएसटी कर्मियों ने दी फ्रॉड की जानकारी अनुराग ने बताया- जीएसटी के अधिकारियों से मिला तो उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति ने धोखधड़ी करके मेरे पैन कार्ड का इस्तेमाल किया। वाराणसी की आईसीआईसी शाखा में एक करंट अकाउंट खोला है। इसके बाद उत्तरा इंटरप्राइजेज नामक कंपनी को दिखाकर यह लोन लिया। यह कंपनी सारनाथ रोड बी 54/4 अशोक विहार कॉलोनी के पते पर पंजीकृत है। राज्य जीएसटी विभाग में एक शिकायत के बाद निगेटिव लियन लगाया गया था। इस बात की जानकारी होने के बाद अनुराग के पिता कमलेश कुमार ने साइबर पुलिस वाराणसी से संपर्क किया है। साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुआ मुकदमा अनुराग के पिता कमलेश कुमार ने साइबर थाने में तहरीर देते हुए बताया- मेरे बेटे ने कभी कोई कंपनी नहीं खोली और न हो उसने करंट अकाउंट के लिए कोई एप्लिकेशन दी थी। उसके खाते का इस्तेमाल करके बड़ा फ्रॉड किया जा रहा है। ऐसे में बैंक की भी भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। फिलहाल कमलेश कुमार की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। अब जानिए निगेटिव रिटर्न (लियन) क्या है? और इससे किस तरह बचा जा सकता है?.. सबसे पहले समझें निगेटिव रिटर्न क्या होता है? जब आपको अपने निवेश पर महंगाई दर की तुलना में कम रिटर्न मिलता है तो इसे ही निगेटिव रिटर्न कहा जाता है। मान लीजिए आपने किसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई है, जिस पर आपको 5% का सालाना रिटर्न मिल रहा है, लेकिन रिटेल महंगाई दर 8% के करीब है। यानी महंगाई दर की तुलना में आपको अपने निवेश पर 3% कम रिटर्न मिल रहा है। निगेटिव रिटर्न से कम होती है पैसे की वैल्यू मान लीजिए आपने कहीं 100 रुपए निवेश किए हैं, जहां से आपको 5% रिटर्न मिलना है। ऐसे में अगर महंगाई दर 8% है तो आपके पैसे की वैल्यू सालाना तौर पर 3% घट जाएगी। यानी आपके 100 रुपए की वैल्यू 97 रुपए की रह जाएगी। अभी महंगाई दर 8% के करीब है। यानी जो वस्तु अभी 100 रुपए की है 1 साल बाद वो 108 रुपए की हो जाएगी। अगर आपको निवेश पर 5% रिटर्न मिलता है तो आपके 100 रुपए 1 साल बाद 105 रुपए ही हो पाएंगे। यानी आप 3 रुपए के नुकसान में रहेंगे। रूल ऑफ 70 आपको निगेटिव रिटर्न से बचने में करेगा मदद इस नियम के अनुसार 70 को मौजूदा महंगाई दर से भाग देकर ये पता कर सकते हैं कि आपके निवेश का मूल्य कितनी तेजी से घटकर आधा रह जाएगा। उदाहरण के लिए जैसे अभी महंगाई दर 8% है तो आपके पैसे का मूल्य करीब 8 साल 10 महीने में घटकर आधा रह जाएगा। यानी अगर आप अपने 100 रुपए की वैल्यू 100 रुपए बनाए रखना चाहते हैं तो आपको कहीं ऐसी जगह निवेश करना होगा जहां से आपको सालाना 8% रिटर्न मिले। निगेटिव रिटर्न से बचने के लिए कहां करें निवेश? बैंक और पोस्ट ऑफिस में कोई ऐसी स्कीम नहीं है जो आपको 8% का रिटर्न दे सके। ऐसे में अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम्स या स्टॉक मार्केट में सीधे निवेश कर सकते हैं। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें-- ब्राह्मण भाजपा नेता को गिफ्ट में मिला हाथी 'जात्रा सिंह':अरुणाचल प्रदेश से प्रतापगढ़ लाने में डेढ़ लाख लगे; बैंड बाजे से स्वागत प्रतापगढ़ में एक ब्राह्मण भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी को हाथी गिफ्ट में मिला है। उसका नाम 'जात्रा सिंह' और उम्र 8 साल है। अरुणाचल प्रदेश से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार होते हुए हाथी को प्रतापगढ़ लाया गया। हाथी ने करीब 2 हजार किमी की दूरी तय की और उसे यहां तक लाने में डेढ़ लाख रुपए खर्च हुए। पढ़ें पूरी खबर….

दैनिक भास्कर 14 Feb 2026 7:20 am

जब बागी हिमंता मिलने पहुंचे, राहुल कुत्ते से खेलते रहे:आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में बीजेपी सरकार; कांग्रेस कैसे उखड़ गई

2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी। आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। यानी, 2014 के मुकाबले 22 गुना ज्यादा विधायक और तीन गुना ज्यादा सांसद हैं। आज पीएम मोदी असम दौरे पर जा रहे हैं, तो एकबार फिर सवाल उठा- आखिर बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में इतना बड़ा उलटफेर कैसे किया? जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… हिमंता को सीएम बनाने वाले थे आजाद, राहुल ने रोका साल 2014, जून-जुलाई का महीना… कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद श्रीनगर में छुट्टियां बिता रहे थे। दोपहर 12 बजे, दिल्ली से अहमद पटेल ने आजाद को फोन किया- ‘मैडम आपसे बात करना चाहती हैं।’ अब टेलिफोन पर सोनिया गांधी थीं। उन्होंने आजाद से पूछा- आप कहां हो, मैं कब से ढूंढ रही हूं? आजाद ने जवाब दिया- श्रीनगर में हूं। सोनिया- आप अभी दिल्ली आ जाइए। अगर प्लेन नहीं मिल रहा हो, तो बोलिए मैं यहां से भेज देती हूं। आजाद- नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं है। यहां से हर घंटे दिल्ली के लिए प्लेन है। सोनिया- शाम 5 बजे हम बैठक करेंगे, लेकिन उसके पहले आपको दो काम करते हुए आना है। आजाद- क्या? सोनिया- असम में बहुत बड़ा संकट आ गया है। हिमंता बिस्व सरमा ने 40-50 विधायकों के साथ बगावत कर दी है। मैंने सुना है कि वो आपके करीब हैं। आप फोन करके बोलिए कि अभी वो अपना प्लान होल्ड पर रखें। राज्यपाल भी आपके करीबी हैं, उन्हें भी बोलिए कि अभी कुछ फैसला नहीं लें। शाम करीब 5 बजे आजाद, दिल्ली पहुंचे और सोनिया गांधी से मिले। सोनिया आजाद से बोलीं- आप असम जाइए और वहां लीडर चुनिए। आजाद- मैडम मैं वहां जाने से पहले यहीं पर एक्सरसाइज करना चाहता हूं। वहां जाकर अपने मन से किसी को मुख्यमंत्री बना दूंगा, तो आप कहोगे कि इसको नहीं बनाना था। सोनिया - प्लान लीक हो गया तो? आजाद- कोई प्लान लीक नहीं होगा। मैं इंदिराजी के जमाने से यही काम करता आ रहा हूं। इसके बाद आजाद ने हिमंता बिस्व सरमा को फोन किया और कहा कि वे अलग-अलग जहाजों से अपने विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचें। सरमा के साथ 40-50 विधायक दिल्ली पहुंचे। उन्हें दिल्ली में अलग-अलग होटलों में रखा गया। किसी को कहीं बयान देने से सख्त मना किया गया। आजाद ने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से कहा कि आपके समर्थन में जो विधायक हैं, उन्हें दिल्ली भेजिए। गोगोई ने 7 विधायकों को दिल्ली भेजा। 10 विधायक और दिल्ली आए, जिनका कहना था कि वे आलाकमान का फैसला मानेंगे। आजाद ने सभी आंकड़े नोट किए और जाकर सोनिया को बताया कि हिमंता बिस्व सरमा के पास बहुमत है। सोनिया आजाद से बोलीं- ठीक है…आप असम जाइए और वहां जो नेता चुना जाए, उसे सीएम बनाइए। आजाद को जिस रोज असम जाना था, उससे एक दिन पहले, रात के करीब 8 बजे राहुल गांधी ने उन्हें फोन किया। राहुल गांधी ने आजाद से कहा - मुझे पता चला है कि आप असम के मुख्यमंत्री को बदलने वाले हैं? आजाद- हां। राहुल- आप प्लान कैंसिल करिए। कोई असम नहीं जाएगा। इसके बाद आजाद, राहुल गांधी से मिलने उनके घर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि राहुल के साथ तरुण गोगोई और उनके बेटे गौरव गोगोई बैठे हैं। राहुल, आजाद से कहते हैं- मैंने सुना है आप लोग इन्हें तंग कर रहे हैं। आजाद- मैं क्यों तंग करूंगा। मुझे जो काम दिया गया, वो कर रहा हूं। हिमंता के पास बहुमत है। आप सोचकर बताइएगा क्या करना है। राहुल- सोचना क्या है… अभी जो मुख्यमंत्री है, वही रहेगा। आजाद- फिर हिमंता पार्टी छोड़ देगा। राहुल- जाने दो उसे RSS में। गुलाम नबी आजाद ने इस पूरे किस्से का जिक्र अपनी किताब ‘आजाद: एन ऑटोबायोग्राफी’ में किया है। हिमंता बिस्व सरमा, नॉर्थ-ईस्ट में कांग्रेस का बड़ा चेहरा थे। वे पूर्व सीएम तरुण गोगोई के करीबी माने जाते थे। 2001 से 2011 तक हिमंता लगातार 3 बार कांग्रेस से विधायक रहे। गोगोई ने कैबिनेट में उन्हें अहम मंत्रालय दिए थे। हिमंता और तरुण गोगोई के रिश्तों में दरार की शुरुआत हुई 2013 में, जब तरुण ने बेटे गौरव की पॉलिटिकल लॉन्चिंग की। 2014 में गौरव को कलियाबोर से लोकसभा का टिकट मिला और वे जीत भी गए। यहां से सरकार के कामकाज में भी गौरव की भूमिका रहने लगी। कहा जाता है कि 2014 से पहले ही हिमंता बिस्व सरमा, बीजेपी नेता राम माधव के संपर्क में थे। RSS से बीजेपी में आने वाले राम माधव तब असम के प्रभारी थे। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वे राम माधव, हिमंता को बीजेपी में लाने का ब्लू प्रिंट तैयार कर रहे थे। हिमंता बोले- बात करने के बजाय कुत्ते से खेलते रहे राहुल गांधी बीजेपी में शामिल होने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में हिमंता बिस्व सरमा ने बताया- '2014 की बात है। असम में क्राइसिस को लेकर मैं दिल्ली में राहुल गांधी से मिला। मेरे साथ असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और कांग्रेस नेता सीपी जोशी भी थे। थोड़ी देर बाद सीपी जोशी और गोगोई के बीच बहस हो गई, लेकिन राहुल ने उन पर ध्यान नहीं दिया। वे अपने कुत्ते के साथ खेलते रहे। इसी बीच कुत्ते ने टेबल पर प्लेट में रखे बिस्किट को जूठा कर दिया। मुझे लगा कि राहुल किसी को आवाज देकर बुलाएंगे और प्लेट चेंज करवाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोग उसी प्लेट से बिस्किट खाते रहे और उन्हें देखकर राहुल हंसते रहे। ये हम सब का अपमान था। उसी दिन मैं बीजेपी के राम माधव से मिला और फिर जो हुआ सबको पता है।' साल 2015 और तारीख 21 जुलाई। असम के बीजेपी नेता सर्बानंद सोनोवाल और केंद्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने एक बुकलेट जारी कर बताया कि लुईस बर्जर घोटाले में हिमंता बिस्व सरमा मुख्य संदिग्ध हैं। दरअसल, ED ने दावा किया था कि 2010 में वाटर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए असम और गोवा में भारतीय अधिकारियों को फर्जी कंपनियों ने रिश्वत दी है। कहा जाता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन यानी 22 जुलाई को हिमंता की बीजेपी जॉइन करने वाले थे, लेकिन घोटाले में नाम आने के बाद जॉइनिंग टाल दी गई। असम के बीजेपी अध्यक्ष रहे सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया- ‘सर्बानंद सोनोवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मैं, हिमंता के साथ दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिला और उन्हें बताया कि आरोप झूठे हैं। शाह ने कहा कि ये तो गलत हुआ। अब गलती सुधारिए।’ ठीक एक महीने बाद 23 अगस्त 2015 को हिमंता ने दिल्ली में शाह से मुलाकात की और उसी दिन बीजेपी जॉइन की। यहीं से उस पटकथा की शुरुआत हुई, जिसने बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट में कामयाबी दिलवाई… असम: हिमंता के बीजेपी में आने के 10 महीने बाद ही सरकार बनाई 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में तीन बड़े मुद्दों को उठाया था- बांग्लादेशी मुस्लिम को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजना, नेहरू-गांधी परिवार पर नॉर्थ-ईस्ट से भेदभाव का आरोप और करप्शन। इस चुनाव में बीजेपी को असम की 14 में से 7 सीटें और 36.6% वोट मिले। 2009 के लोकसभा चुनाव से 2 ज्यादा सीटें और करीब 20% ज्यादा वोट। एक सीट अरुणाचल प्रदेश में भी जीती। लेकिन बाकी के 6 राज्यों में बीजेपी का खाता तक नहीं खुला। पहली बार बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट में 25 में से 8 लोकसभा सीटें मिलीं। वहीं आम चुनावों के साथ अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव भी हुए। अरुणाचल में बीजेपी को 11 सीटें और 33% वोट मिले। जबकि सिक्किम में उसे कोई सीट नहीं मिली। करीब डेढ़ साल बाद 2016 में असम विधानसभा चुनाव हुए। 29 जनवरी 2016 को बीजेपी ने पुराने चेहरे को तवज्जो देते हुए सर्बानंद सोनोवाल को सीएम फेस बनाया। इसके अलावा बीजेपी ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी BPF और असम गणपरिषद के साथ अलायंस किया। BPF असम की बोडो जनजाति के अलग राज्य बोडोलैंड की मांग से निकली थी। 19 मई को नतीजे आए तो 126 सीटों में से 60 पर बीजेपी और 26 सीटों पर उसके सहयोगियों को जीत मिलीं। जबकि कांग्रेस 26 सीटों पर सिमट गई। पहली बार नॉर्थ-ईस्ट के किसी राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। 2021 में भी असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला। हालांकि, इस बार पार्टी ने चेहरा बदल दिया और हिमंता बिस्व सरमा मुख्यमंत्री बने। NDA की जगह NEDA, ताकि बीजेपी बाहरी पार्टी नहीं लगे नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी- उसकी बाहरी पार्टी की पहचान। RSS लंबे समय से वहां काम कर रहा था, उसके बाद भी बीजेपी के पास मजबूत कैडर नहीं था। इसकी काट निकालने के लिए 26 मई 2016 को नॉर्थ-ईस्ट की स्थानीय पार्टियों को मिलाकर एक नया गठबंधन ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ यानी, NEDA बना। हिमंता बिस्व सरमा को NEDA का संयोजक बनाया गया। बीजेपी के साथ नागा पीपुल्स फ्रंट, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल, असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट जैसी स्थानीय पार्टियां इसमें शामिल हुईं। सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और असम के मुख्यमंत्री इसके फाउंडिंग मेंबर बने। अरुणाचल प्रदेश: 33 विधायक तोड़कर बनाई सरकार 2014 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 11 सीटें मिलीं। दो साल बाद सितंबर 2016 में कांग्रेस के 43 विधायक ‘पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल’ में शामिल हो गए। फिर दिसंबर 2016 में इस पार्टी के 33 विधायक बीजेपी में चले गए। इस तरह अरुणाचल में बीजेपी की सरकार बन गई। पेमा खांडू मुख्यमंत्री बने, जो पहले कांग्रेस से पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में और फिर बीजेपी में आए थे। 2019 के विधानसभा में बीजेपी ने 60 सीटों में से 41 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई। पेमा खांडू एक बार फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2024 में बीजेपी ने 46 सीटें जीतीं और पेमा खांडू सीएम बने। मणिपुर: कांग्रेस बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सरकार बीजेपी ने बनाई 2017 में मणिपुर में चुनाव हुए। 60 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को 28 और बीजेपी को 21 सीटें मिलीं। 2011 के बाद पहली बार बीजेपी का मणिपुर में खाता खुला। पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 34% वोट शेयर बढ़ा। बीजेपी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी, नागा पीपुल्स फ्रंट और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ मिलकर मणिपुर में सरकार बनाई। एन वीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने, जो 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 32 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई। वीरेन सिंह को फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा होने लगी। वीरेन सिंह पर स्थिति न संभाल पाने के आरोप लगे। ऐसे में 9 फरवरी 2025 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और राष्ट्रपति शासन लग गया। एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को बीजेपी के युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री बने। त्रिपुरा: 25 साल पुराना लेफ्ट का किला ध्वस्त किया 2018 में त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव हुए। 3 मार्च को जब नतीजे आए, तो 60 में से 35 सीटें जीतकर बीजेपी ने न सिर्फ त्रिपुरा में पहली बार खाता खोला, बल्कि अपने दम पर सरकार बनाई। लेफ्ट का 25 साल पुराना किला ध्वस्त हो गया। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बिप्लव देब मुख्यमंत्री बने, लेकिन 4 साल बाद मई 2022 में उन्हें हटाकर माणिक साहा को सीएम बनाया गया। साहा 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। 2023 विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने 32 सीटें जीतकर यहां वापसी की। हालांकि, पिछले चुनाव के मुकाबले उसकी 3 सीटें कम हो गईं। वोट शेयर भी करीब 4% कम हुआ। सिक्किम: अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन खाता नहीं खुला 2019 के विधानसभा चुनाव में सिक्किम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कुल 5700 वोट मिले। एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन बाद में बीजेपी के पास 12 विधायक हो गए और सरकार में भी रही। दरअसल, चुनाव के बाद 3 विधायकों को इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि वे दो-दो सीटों से लड़े थे। इन पर उपचुनाव हुए, तो 2 सीटें बीजेपी ने जीत लीं। वहीं सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 15 में से 10 विधायक बीजेपी में चले गए। यानी सिक्किम में बीजेपी के 12 विधायक हो गए और वह गठबंधन की सरकार में शामिल हो गई। हालांकि, 2024 के चुनाव से पहले बीजेपी ने गठबंधन तोड़ लिया और जब नतीजे आए तो खाता भी नहीं खुला। नगालैंड: पांच साल में 11 विधायक बढ़े, गठबंधन की सरकार का हिस्सा 2018 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व सीएम केएल चिशी बीजेपी में शामिल हो गए। उनके साथ 12 नेता भी बीजेपी में गए। बीजेपी ने नागा पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन तोड़ा और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ चुनाव में उतर गई। तब बीजेपी को 12 सीटें मिलीं, यानी पिछले चुनाव से 11 ज्यादा। 2023 विधानसभा में भी बीजेपी को 12 सीटें मिलीं और इस बार भी वो गठबंधन की सरकार में शामिल हुई। मिजोरम: 2018 में पहली बार खाता खुला 2018 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी 39 सीटों पर लड़ी और एक सीट ही जीत सकी। यहां पहली बार बीजेपी का खाता खुला। पिछले चुनाव के मुकाबले उसका वोट शेयर भी करीब 8% बढ़ गया। 2023 चुनाव में बीजेपी को दो सीटें मिलीं। फिलहाल वो यहां विपक्ष में है। मेघालय: लगातार दो बार से गठबंधन की सरकार में मेघालय में बीजेपी को 2018 और 2013 दोनों ही विधानसभा चुनावों 2-2 सीटें मिलीं। दोनों ही बार वो गठबंधन की सरकार में शामिल हुई। बीजेपी के नॉर्थ-ईस्ट मेंकामयाब होने की 7 बड़ी वजह 1. मुस्लिम घुसपैठिए बनाम मूल निवासी 2014 में जब बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लोकसभा चुनाव में उतरी, तब नॉर्थ-ईस्ट में उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। लगभग हर रैली में मोदी ने इसका जिक्र किया। 24 फरवरी 2014 को असम के रामनगर की रैली में मोदी ने कहा- ‘कांग्रेस सरकार ने डिटेंशन सेंटर के नाम पर मानवाधिकारों का हनन किया। घुसपैठिए आपके अधिकार छीन रहे हैं। असम के नौजवान बेरोजगार हैं और बाहरी रोजी रोटी कमा रहे हैं। ये अन्याय है कि नहीं। दिल्ली में सरकार बना दीजिए, न्याय मिलने की शुरुआत हो जाएगी। सारे डिटेंशन सेंटर खत्म कर दूंगा।’ असम के साथ ही पूरे नॉर्थ-ईस्ट में मूल निवासी बनाम बाहरी का मुद्दा लंबे अरसे से रहा है। 1980 के दशक में इसको लेकर असम में खूब हिंसा हुई और 2 हजार से ज्यादा बांग्लादेशी प्रवासी मारे गए थे। 15 अगस्त 1985 को प्रधानमंत्री राजीव गांधी और छात्र संगठन आसू के बीच समझौता हुआ, जिसे असम अकॉर्ड कहा जाता है। इसके बाद नागरिकता कानून में बदलाव किया गया। जो लोग मार्च 1971 के बाद असम आए, उन्हें अवैध प्रवासी माना गया। 1980 के दशक से ही बीजेपी बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर भेजने की मांग करती रही है। हालांकि, बाद में बीजेपी ने अपना स्टैंड बदला और बांग्लादेशी हिंदुओं को नागरिकता देने और बांग्लादेशी मुस्लिमों को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजने की मांग करने लगी। 2. हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण नॉर्थ-ईस्ट के 8 राज्यों में से 4 राज्य- त्रिपुरा, असम, सिक्किम और मणिपुर हिंदू बहुल हैं। जबकि नगालैंड, मेघालय और मिजोरम में 80% से ज्यादा आबादी ईसाई है। असम में 34% मुस्लिम हैं, जो नॉर्थ-ईस्ट के अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। पूरे नॉर्थ-ईस्ट में 37% हिंदू, 42.3% ईसाई और 7.7% मुस्लिम आबादी है। बीजेपी के बड़े नेता नॉर्थ-ईस्ट में हिंदू-मुस्लिम मुद्दा उछालते रहे हैं। 2021 में हिमंता बिस्व सरमा ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था- 'मुझे मियां वोट्स नहीं चाहिए। मैं उनके पास वोट मांगने नहीं जाऊंगा और वे भी मेरे पास नहीं आएंगे।' बांग्लादेशी मुस्लिम प्रवासियों को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजने की बात हो या हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा करके बीजेपी नॉर्थ-ईस्ट में पोलराइजेशन को मुद्दा बनाने में कामयाब रही है। 24 फरवरी 2014 को असम के रामनगर की चुनावी रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा- ‘दुनिया के किसी देश में हिंदुओं को खदेड़ दिया जाएगा, तो उसके लिए एक ही जगह बची है, वो यहीं चला आएगा। हम नहीं चाहते कि बांग्लादेशी हिंदुओं का बोझ अकेले, असम उठाए। पूरे हिंदुस्तान को इसका बोझ उठाना चाहिए।’ 3. दूसरे दलों के बड़े नेता-विधायक बीजेपी में आए नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की कामयाबी के पीछे दूसरी पार्टियों के बड़े नेताओं का अहम रोल है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू सभी पहले कांग्रेसी या स्थानीय पार्टियों के बड़े नेता थे। इसके अलावा दूसरी पार्टियों से बड़ी संख्या में विधायक और नेता बीजेपी में शामिल हुए। 2015 में हिमंता अपने साथ 10 से ज्यादा विधायक लेकर बीजेपी में आए थे। 2016 में पेमा खांडू 33 विधायक लेकर बीजेपी में शामिल हुए। सिक्किम में तो बीजेपी ने स्थानीय पार्टी के 15 में से 10 विधायकों को पार्टी में शामिल करा लिया। इतना ही नहीं, नॉर्थ-ईस्ट के हर राज्य में बीजेपी का किसी न किसी पार्टी के साथ गठबंधन जरूर है। 4. केंद्र में बीजेपी की सरकार का होना आम तौर पर नॉर्थ-ईस्ट के लोग उसी पार्टी को प्राथमिकता देते हैं, जिनकी केंद्र में सरकार होती है। नॉर्थ-ईस्ट में लंबे समय से राजनीति को कवर कर रहे बिश्वेंदु भट्टाचार्य बताते हैं, 'नॉर्थ-ईस्ट में ज्यादातर दल छोटे-छोटे हैं। बड़े खर्चे के लिए सरकार के फंड और ग्रांट पर निर्भर रहना इनकी मजबूरी है। केंद्र सरकार में काबिज होने के बाद इन दलों को बीजेपी ने लुभाया, राज्य में उनकी सरकार बनी, तो उन्हें पद मिलेगा, मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। यहां के स्थानीय नेता ट्राइबल बेल्ट में जाकर बोलते थे, यदि कमल पर वोट दिया, तो हम मंत्री बनेंगे, आपका बेटा ये बनेगा। बीजेपी को इसका बहुत फायदा भी मिला।' 5. आजादी से पहले से नॉर्थ-ईस्ट में एक्टिव है RSS 6. कल्चरल स्ट्रैटजी नॉर्थ इंडिया में बीजेपी और संघ बीफ का खूब विरोध करते हैं, लेकिन नॉर्थ-ईस्ट में वे ऐसा नहीं करते। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले नगालैंड के बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम यानथुंगो पैटन ने कहा, नगालैंड में बीफ मुख्य भोजन है। बीजेपी, कांग्रेस या कोई भी नेशनल पार्टी हमारे खानपान में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। बीफ खाना नगालैंड के साथ ही पूरे नॉर्थ-ईस्ट में कोई इश्यू नहीं है। 7. पीएम मोदी 10 साल में 70 बार नॉर्थ-ईस्ट गए 2014 से 2024 के बीच 10 साल में पीएम मोदी ने करीब 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। मार्च 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वे बतौर प्रधानमंत्री 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। उनके मंत्री 10 सालों में 680 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। अभी तक सभी प्रधानमंत्री मिलकर जितनी बार नॉर्थ-ईस्ट गए होंगे, उससे कई गुना ज्यादा बार मैं अकेले गया हूं। -----------असम चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… असम में फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश, 2.43 लाख नाम हटे: राज्य में अब 2.49 करोड़ वोटर; बंगाल में फाइनल लिस्ट की तारीख 14 दिन बढ़ी चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को असम में हुए स्पेशल रिवीजन (SR) 2026 के तहत फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी। EC के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तुलना में 2.43 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। अब राज्य में कुल 2,49,58,139 वोटर्स रजिस्टर्ड हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 14 Feb 2026 5:23 am

MP-UP और छत्तीसगढ़ में दिन में गर्मी, तापमान 30°C पार:राजस्थान में फिर बारिश की संभावना, पहाड़ों पर 2 दिन बाद बर्फबारी

देश के पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 13 से 16 फरवरी तक दो विस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हैं। इससे अगले दो दिन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पहाड़ों पर बारिश-बर्फबारी के आसार हैं। वहीं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ में दिन का तापमान 30C के पार हो चुका है। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को 15 से ज्यादा शहरों में दिन का टेम्पेरेचर 30 डिग्री पार पहुंच चुका है। रात में भी पारा 10 डिग्री से ज्यादा है। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पारा 30C के पार हो चुका है। बांदा में अधिकतम तापमान 31.2C और प्रयागराज में 30.4C दर्ज किया गया। छत्तीसगढ़ में औसतन तापमान में 1 से 2 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का सबसे अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस जगदलपुर में दर्ज किया गया। राजस्थान के कई हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार को हल्के बादल छाने से न्यूनतम तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट दर्ज हुई। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में कड़ाके की ठंड का असर साफ दिख रहा है। प्रदेश के सात शहरों का न्यूनतम तापमान -10C से नीचे है। मुनस्यारी में सबसे कम पारा -26C, गंगोत्री में -21C और बद्रीनाथ में -19C दर्ज किया गया। झारखंड में पिछले 24 घंटों में चार जिलों का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम रिकॉर्ड किया गया। इसमें डाल्टेनगंज, खूंटी, लोहरदगा और गुमला शामिल है। जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में अभी हल्की बर्फबारी का दौर चल रहा है। कश्मीर को जम्मू से जोड़ने वाली मुगल रोड पर कई फीट बर्फ जमी है, इसके कारण यह अभी भी बंद है। मौसम की तस्वीरें… अगले दो दिन का मौसम… 15 फरवरी- हिमाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर घना कोहरा। अरुणाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर आंधी-तूफान के साथ बारिश की आशंका। 16 फरवरी- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बारिश-बर्फबारी की संभावना।

दैनिक भास्कर 14 Feb 2026 5:03 am

ब्राह्मण भाजपा नेता को गिफ्ट में मिला हाथी 'जात्रा सिंह':अरुणाचल प्रदेश से प्रतापगढ़ लाने में डेढ़ लाख लगे; बैंड बाजे से स्वागत

प्रतापगढ़ में एक ब्राह्मण भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी को हाथी गिफ्ट में मिला है। उसका नाम 'जात्रा सिंह' और उम्र 8 साल है। अरुणाचल प्रदेश से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार होते हुए हाथी को प्रतापगढ़ लाया गया। हाथी ने करीब 2 हजार किमी की दूरी तय की और उसे यहां तक लाने में डेढ़ लाख रुपए खर्च हुए। हाथी भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी को उनकी पिता की याद में मां केवल देवी को दिया गया। जब हाथी जात्रा सिंह गांव लाया गया तो ‘गणपति बप्पा मोरया’ के उद्घोष के साथ उसका स्वागत किया गया। बैंड-बाजे के साथ उसे ट्रक से उतारा गया। इसके बाद विधि-विधान से स्नान कराया गया। अशोक त्रिपाठी, उनकी मां और अन्य लोगों ने मंदिर परिसर में हाथी का तिलक किया। मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। प्रसाद का वितरण किया गया। हाथी देखने और पूजने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। हाथी के लिए गांव में बाड़ा भी तैयार कराया गया है। मामला रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के छींटपुर गांव का है। देखिए तीन फोटो… अब जानिए पूरा मामला… दरअसल, अशोक त्रिपाठी साल 2017 में सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। 2019 में सपा-बसपा गठबंधन से भी प्रत्याशी रहे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए। अशोक त्रिपाठी के पिता राम प्रकाश त्रिपाठी अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में प्रधानाचार्य रहे। उनके निधन के बाद उनकी स्मृति में अरुणाचल प्रदेश के नामसाई जनपद के लोगों ने मई 2023 में ‘जात्रा सिंह’ हाथी को दान स्वरूप अशोक की मां केवल देवी को भेंट किया था। तब से हाथी की देखरेख अरुणाचल प्रदेश में ही दो महावतों की निगरानी में की जा रही थी। इस दौरान भोजन और आवास की समुचित व्यवस्था अशोक त्रिपाठी ने ही कराई थी। डेढ़ साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद मिली अनुमति अक्टूबर 2024 में अशोक त्रिपाठी ने हाथी को प्रतापगढ़ लाने के लिए नियमानुसार आवेदन किया। सभी विधिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की गठित हाई पावर कमेटी (एचपीसी) की संस्तुति पर अरुणाचल प्रदेश वन विभाग द्वारा 6 फरवरी 2026 को हाथी को प्रतापगढ़ के ग्राम छींटपुर लाने की अनुमति प्रदान की गई। इसके बाद विधि-व्यवस्था के तहत 9 फरवरी 2026 को नामसाई (अरुणाचल प्रदेश) से हाथी को प्रतापगढ़ के लिए रवाना किया गया। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे ‘जात्रा सिंह’ प्रतापगढ़ पहुंचा। हाथी की खरीद-फरोख्त नहीं हो सकती कुत्ते-बिल्ली या घोड़ों की तरह हाथी की खरीद-फरोख्त नहीं हो सकती है। खरीद-फरोख्त वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन माना जाता है और कड़ी सजा का प्रावधान है। इसलिए इसकी कीमत तय नहीं होती है। अतीत में कुछ अवैध व्यापार के मामलों में हाथियों की कीमत 10 लाख से 1.5 करोड़ के बीच देखी गई है। केरल जैसे राज्यों में हाथियों को लंबी अवधि (जैसे 99 साल) के लिए लीज़ पर लिया जाता है, जिसका मूल्य 1 करोड़ से अधिक हो सकता है। भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी को दान देने वाला मूल परिवार अरुणाचल प्रदेश के नामसाई जिले का निवासी है। यह परिवार परंपरागत रूप से हाथी पालन से जुड़ा रहा है। उसी परिवार द्वारा यह हाथी दान स्वरूप प्रदान किया गया। हाथी के रहने के लिए लगभग 8 हजार से 10 हजार वर्गफीट का खुला क्षेत्र होना चाहिए। भाजपा नेता ने करीब इतना ही बड़ा बाड़ा बनवाया है। पानी की व्यवस्था की गई है। साथ ही एक फव्वारा भी लगाया गया है, ताकि गर्मी में राहत मिल सके। हाथी की देखभाल के लिए दो महावत वारिस खान और मुख्तार रखे गए हैं। हाथी के खाने में धान, गन्ना, चना, गुड़, पीपल और पाकड़ के पत्ते शामिल हैं। दैनिक भोजन की नियमित व्यवस्था की गई है। ट्रक से लाने में डेढ़ लाख हुए खर्चहाथी को अरुणाचल प्रदेश से प्रतापगढ़ तक ट्रक के माध्यम से लाया गया। परिवहन में डीजल, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं सहित लगभग 1.50 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें-- काशी-अयोध्या समेत 4 कोर्ट को उड़ाने की धमकी:कैंपस को खाली कराया, जज भी बाहर आए; ATS-STF जांच के लिए पहुंची वाराणसी, अयोध्या, मेरठ और मिर्जापुर कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सभी जगहों पर धमकी का ईमेल सरकारी मेल पर आया। इसका पता लगते ही हड़कंप मच गया। फिलहाल, चारों कोर्ट परिसरों को पुलिस ने खाली करा दिया है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 13 Feb 2026 7:51 pm

प्रदेश की बेटी ने किया 2500Km का सफर:नारी शक्ति का संदेश दे रही आशा, आर्मी डे पर शुरू की थी साइकल यात्रा

राजगढ़ जिले की रहने वाली साइक्लिस्ट आशा मालवीय ने अपनी भारत यात्रा के तहत लगभग 2550 किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया है। बीती रात वह जयपुर, राजस्थान से गुजरात यात्रा करते हुए पीथमपुर पहुंचीं, जहां उनका स्वागत किया गया। इसके बाद वे महू के लिए रवाना हुईं। आशा मालवीय ने यह यात्रा आर्मी डे 15 जनवरी के अवसर पर जयपुर से शुरू की थी। उनकी कुल यात्रा 7500 किलोमीटर की है, जो जयपुर से अरुणाचल प्रदेश तक जाएगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनकी इस साइकिल यात्रा का उद्देश्य नारी शक्ति, देशभक्ति और अदम्य साहस का संदेश देना है। मालवीय ने जानकारी दी कि वर्तमान यात्रा से पहले भी वह लगभग 60 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्राएं कर चुकी हैं। वह एक एथलीट भी रह चुकी हैं। पुलिस ने प्रोटोकॉल के तहत सीमा तक छोड़ा पीथमपुर के सेक्टर एक थाना क्षेत्र में संजय जलाशय चौकी प्रभारी अजय भदौरिया, सहायक उप निरीक्षक राजेश चौहान और हेड कांस्टेबल मंजीत सिंह ने आशा मालवीय की आगवानी की। सेक्टर एक थाना पुलिस ने उन्हें प्रोटोकॉल के तहत अपनी सीमा से विदा किया और उनके साहस की सराहना की। किशनगंज थाना पुलिस के उप निरीक्षक सखाराम जामोद, सहायक उप निरीक्षक सुरेश यादव और हेड कांस्टेबल आशीष पारिख ने उन्हें महू के लिए रवाना किया। जहां वो रात रुकेंगी।

दैनिक भास्कर 10 Feb 2026 7:35 am

भास्कर अपडेट्स:अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग में 3.1 तीव्रता का भूकंप

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिला में सोमवार रात 12.58 बजे 3.1 तीव्रता का भूकंप आया। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन में 10 किलोमीटर नीचे था। भूकंप से किसी तरह से जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। आज की अन्य बड़ी खबरें…

दैनिक भास्कर 10 Feb 2026 6:26 am

अरुणाचल पर चीन का दावा भाजपा की गलती का नतीजा

चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति और हड़पने वाली नीयत का परिचय देते हुए फिर से अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया है

देशबन्धु 27 Nov 2025 3:13 am

Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट

सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

वेब दुनिया 10 Jan 2025 2:40 pm