अरुणाचल प्रदेश सिंघम स्टैक मॉर्निंग लॉटरी रिजल्ट: विजेता को मिले ₹26 लाख
लॉटरी आईडी 3285 के तहत शनिवार को ड्रॉ निकाला गया, जिसमें प्रथम पुरस्कार के साथ द्वितीय, तृतीय और सांत्वना पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की गई है।
अरुणाचल के राज्यपाल 15 से उदयपुर में
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक 15 से 18 अप्रैल तक उदयपुर प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे शहर में आयोजित स्थानीय कार्यक्रम में भाग लेंगे। राज्यपाल के दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जिला कलक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा कार्यक्रम के मद्देनजर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित की जाएं, ताकि दौरे के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज अरुणाचल प्रदेश और असम समेत 9 राज्यों में आंधी के साथ हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। हालांकि, देश के ज्यादातर हिस्सों में आज से मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गुरुवार को बारिश हुई। हिमाचल के कुमसैरी, कल्पा और केलांग में तापमान माइनस में पहुंच गया। वहीं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी समेत 7 जिलों में बारिश हुई। मध्य प्रदेश में आज से गर्मी बढ़ेगी। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान में 5 से 6 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, कुछ जिलों में बारिश, आंधी और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। दिल्ली-NCR में आसमान साफ रहेगा। दिन का तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। दिन में 20 से 30 किमी/घंटा की रफ्तार से उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलेंगी, जिससे हल्की ठंडक महसूस होगी। राजस्थान में अगले 4-5 दिन मौसम साफ रहेगा। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी बढ़ सकती है। पिछले 20 दिनों से बदले मौसम के कारण अप्रैल में भी ठंडक का एहसास बना हुआ है। इधर, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और गोवा में गर्मी के साथ उमस बनी रहीगा। मौसम की तीन तस्वीरें… 11 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी के साथ 30-40 किमी/घंटा की हवा चल सकती है। असम, मेघालय में बारिश हो सकती है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में गरज-चमक की संभावना। 12 अप्रैल: पश्चिम बंगाल और सिक्किम में हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट। अरुणाचल प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण कर्नाटक में भी गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित सूअर फार्म में इस वायरस के कारण 300 से अधिक सूअरों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने बची हुई करीब 150 सूअरों को भी जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी को प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया। इस वायरस से फार्म मालिक को करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। दरअसल सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम बड़ी संख्या में मुडपार गांव पहुंची थी। अधिकारी और डॉक्टर पीपीई किट पहनकर फार्म के अंदर गए और बचे हुए सूअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया। इसके बाद फार्म के पीछे सभी मृत सूअरों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया। फिलहाल पूरे फार्म को सील करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि मुडपार गांव सूअर पालन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर सूअर पालन किया जा रहा था। इस फार्म से न केवल दुर्ग-भिलाई, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी पोर्क (Pork) की सप्लाई की जाती थी। देखिए पहले ये तस्वीरें- रिपोर्ट के आने तक हो चुकी थी 300 सूअरों की मौत फार्म मालिक पीओ जॉय ने बताया कि उनके फार्म में कुल 300 से 400 सूअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया था, जबकि 1 अप्रैल से सूअरों की मौत शुरू हो गई। 6 अप्रैल तक करीब 300 सूअरों की मौत हो चुकी थी और बाकी को विभाग ने मार दिया। उन्होंने बताया कि एक सूअर की कीमत लगभग 30 हजार रुपए थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। फार्म में 133 गर्भवती सूअर और करीब 400 बच्चे भी थे। सोमवार को सभी को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया और फार्म के पीछे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। फॉर्म के मालिक ने दी थी विभाग को सूचना पीओ जॉय ने बताया कि उन्होंने खुद ही विभाग को सूचना देकर बुलाया था, ताकि बीमारी और अधिक न फैल सके। उन्होंने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक पुरानी और बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका अभी तक दुनिया में कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। यह बीमारी लगने के बाद लगभग सभी सूअरों की मौत हो जाती है। हालांकि यह केवल सूअरों में ही फैलती है और इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करती। प्रदेश में सूअर के मांस की सबसे ज्यादा खपत फार्म मालिक का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सूअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सूअर यहां लाए जाते हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह वायरस नोट और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि इस बीमारी का असर इंसानों पर नहीं होता, लेकिन संक्रमित सूअर का मांस खाने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि वायरस गर्मी में नष्ट हो जाता है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है। 24 घंटे के भीतर होनी चाहिए कार्रवाई फार्म मालिक ने कहा किऐसी गंभीर बीमारी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोका जा सके। यदि समय रहते कदम उठाए जाते, तो नुकसान कम हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने नुकसान से ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह बीमारी अन्य फार्म तक न फैले। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शुरू हुई कार्रवाई पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने बताया कि 2 अप्रैल को सूचना मिलने के बाद तुरंत सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजा गया था। सोमवार सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी गई। फिलहाल पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए फार्म को सील करने की कार्रवाई की जा रही है। जानिए क्या है यह वायरस और कितना खतरनाक है? अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 100% तक होती है। यानी यदि कोई सूअर इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसका बच पाना लगभग असंभव होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करता, लेकिन यह सूअर पालन उद्योग के लिए बेहद विनाशकारी साबित होता है और पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इस वायरस की उत्पत्ति अफ्रीका से हुई थी, लेकिन साल 2018 के बाद इसने चीन, वियतनाम और यूरोप के कई देशों में भारी तबाही मचाई। चीन में इस बीमारी के चलते करोड़ों सूअरों को मारना पड़ा, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। साल 2026 में भी पोलैंड और इटली जैसे देशों में इसके नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं। भारत में इस वायरस की पहली पुष्टि वर्ष 2020 में असम और अरुणाचल प्रदेश में हुई थी, जहां हजारों सूअरों की मौत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे यह वायरस पंजाब, केरल और अब छत्तीसगढ़ तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में यह संक्रमण बाहरी राज्यों से लाए गए संक्रमित सूअरों या दूषित मांस उत्पादों के जरिए पहुंचा हो सकता है। दुर्ग के अलावा बलौदा बाजार और महासमुंद के जंगली इलाकों में भी सूअरों की संदिग्ध मौतों के मामले सामने आए हैं, जिससे प्रशासन और पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। ………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बिलासपुर में बर्ड फ्लू, 47 हजार पक्षी-अंडे नष्ट किए: संक्रमण के बाद हुई पूरे संभाग में सप्लाई, कानन पेंडारी 7 दिन तक बंद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कोनी स्थित पोल्ट्री फार्म में बर्ड-फ्लू वायरस मिला है। यहां 5 हजार मुर्गियां की मौत के बाद 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली 22 हजार से ज्यादा पक्षी और 25 हजार अंडे नष्ट किए गए। पढ़ें पूरी खबर…
छत्तीसगढ़ में जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित सूअर फार्म में इस वायरस के कारण 300 से अधिक सूअरों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने बचे हुए करीब 150 सूअरों को भी जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी को प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया। इस वायरस से फार्म मालिक को करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। दरअसल सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम बड़ी संख्या में मुडपार गांव पहुंची थी। अधिकारी और डॉक्टर पीपीई किट पहनकर फार्म के अंदर गए और बचे हुए सूअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया। इसके बाद फार्म के पीछे सभी मृत सूअरों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया। फिलहाल पूरे फार्म को सील करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि मुडपार गांव सूअर पालन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर सूअर पालन किया जा रहा था। इस फार्म से न केवल दुर्ग-भिलाई, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी पोर्क (Pork, सूअर मांस) की सप्लाई की जाती थी। देखिए पहले ये तस्वीरें- रिपोर्ट के आने तक हो चुकी थी 300 सूअरों की मौत फार्म मालिक पीओ जॉय ने बताया कि उनके फार्म में कुल 300 से 400 सूअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया था, जबकि 1 अप्रैल से सूअरों की मौत शुरू हो गई। 6 अप्रैल तक करीब 300 सूअरों की मौत हो चुकी थी और बाकी को विभाग ने मार दिया। उन्होंने बताया कि एक सूअर की कीमत लगभग 30 हजार रुपए थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। फार्म में 133 गर्भवती सूअर और करीब 400 बच्चे भी थे। सोमवार को सभी को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया और फार्म के पीछे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। फॉर्म के मालिक ने दी थी विभाग को सूचना पीओ जॉय ने बताया कि उन्होंने खुद ही विभाग को सूचना देकर बुलाया था, ताकि बीमारी और अधिक न फैल सके। उन्होंने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक पुरानी और बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका अभी तक दुनिया में कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। यह बीमारी लगने के बाद लगभग सभी सूअरों की मौत हो जाती है। हालांकि यह केवल सूअरों में ही फैलती है और इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करती। प्रदेश में सूअर के मांस की सबसे ज्यादा खपत फार्म मालिक का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सूअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सूअर यहां लाए जाते हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह वायरस नोट और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि इस बीमारी का असर इंसानों पर नहीं होता, लेकिन संक्रमित सूअर का मांस खाने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि वायरस गर्मी में नष्ट हो जाता है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है। 24 घंटे के भीतर होनी चाहिए कार्रवाई फार्म मालिक ने कहा कि ऐसी गंभीर बीमारी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोका जा सके। समय रहते कदम उठाए जाते, तो नुकसान कम हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने नुकसान से ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह बीमारी अन्य फार्म तक न फैले। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शुरू हुई कार्रवाई पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने बताया कि 2 अप्रैल को सूचना मिलने के बाद तुरंत सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजा गया था। सोमवार सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी गई। फिलहाल पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए फार्म को सील करने की कार्रवाई की जा रही है। जानिए क्या है यह वायरस और कितना खतरनाक है? अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 100% तक होती है। यानी यदि कोई सूअर इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसका बच पाना लगभग असंभव होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करता, लेकिन यह सूअर पालन उद्योग के लिए बेहद विनाशकारी साबित होता है और पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इस वायरस की उत्पत्ति अफ्रीका से हुई थी, लेकिन साल 2018 के बाद इसने चीन, वियतनाम और यूरोप के कई देशों में भारी तबाही मचाई। चीन में इस बीमारी के चलते करोड़ों सूअरों को मारना पड़ा, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। साल 2026 में भी पोलैंड और इटली जैसे देशों में इसके नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं। भारत में इस वायरस की पहली पुष्टि वर्ष 2020 में असम और अरुणाचल प्रदेश में हुई थी, जहां हजारों सूअरों की मौत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे यह वायरस पंजाब, केरल और अब छत्तीसगढ़ तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में यह संक्रमण बाहरी राज्यों से लाए गए संक्रमित सूअरों या दूषित मांस उत्पादों के जरिए पहुंचा हो सकता है। दुर्ग के अलावा बलौदा बाजार और महासमुंद के जंगली इलाकों में भी सूअरों की संदिग्ध मौतों के मामले सामने आए हैं, जिससे प्रशासन और पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। ………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बिलासपुर में बर्ड फ्लू, 47 हजार पक्षी-अंडे नष्ट किए: संक्रमण के बाद हुई पूरे संभाग में सप्लाई, कानन पेंडारी 7 दिन तक बंद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कोनी स्थित पोल्ट्री फार्म में बर्ड-फ्लू वायरस मिला है। यहां 5 हजार मुर्गियां की मौत के बाद 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली 22 हजार से ज्यादा पक्षी और 25 हजार अंडे नष्ट किए गए। पढ़ें पूरी खबर…
ऑक्टेव फेस्टिवल की मेजबानी की दौड़ में उदयपुर, वेस्ट जोन ने शुरू की 2026-27 के कैलेंडर की तैयारी
देश की लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए शहर के पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (वेस्ट जोन) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के सांस्कृतिक कैलेंडर की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और केंद्र शासित प्रदेश दमन-दीव व दादरा-नगर हवेली में वर्षभर विभिन्न महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। केंद्र के अधिकारियों के अनुसार सभी कार्यक्रमों का प्रस्ताव राजभवन भेजा जाएगा, जहां इसमें आवश्यक बदलाव या नए आयोजन जोड़े जा सकते हैं। उदयपुर में हर साल की तरह 21 से 30 दिसंबर तक 10 दिवसीय शिल्पग्राम महोत्सव होगा, जिसमें देशभर के लोक कलाकार और शिल्पकार भाग लेंगे। इसके अलावा शिल्पदर्शन, रंगशाला, मल्हार और ऋतु बसंत जैसे कार्यक्रम भी वर्षभर होंगे। अन्य राज्यों में भी बड़े आयोजनों की योजना है। गोवा में ‘लोकोत्सव’ और गांधीनगर में ‘बसंत उत्सव’ आयोजित कर स्थानीय और राष्ट्रीय लोक कलाओं को मंच दिया जाएगा। शिल्पग्राम के बाद बड़ा आयोजन ऑक्टेव फेस्टिवल शिल्पग्राम महोत्सव के बाद केंद्र का दूसरा बड़ा आयोजन ‘ऑक्टेव फेस्टिवल’ है। पांच दिवसीय इस उत्सव में पूर्वोत्तर राज्यों-अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम की संस्कृति और लोक प्रस्तुतियां शामिल होती हैं। पिछले वर्ष इसका आयोजन महाराष्ट्र में हुआ था। केंद्र के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस बार ऑक्टेव फेस्टिवल के उदयपुर में आयोजित होने की प्रबल संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो शहरवासियों को पूर्वोत्तर भारत की विविध सांस्कृतिक झलक एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलेगा। शिल्पग्राम महोत्सव सहित कई आयोजन प्रस्तावित, 4 राज्यों में सालभर होंगे कार्यक्रम
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

