फरीदाबाद में आज (शनिवार को) देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सूरजकुंड पहुंच रहे हैं। वह यहां पर 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। वहीं, 15 फरवरी को समापन समारोह के दौरान राज्यपाल प्रोफेसर आशीष कुमार घोष मुख्य अतिथि होंगे। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल, हरियाणा पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा सहित सरकार के मंत्री एवं विधायक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। इसे लेकर प्रशासन की तरफ से सभी तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। पहली बार 1987 लगा था मेला बता दें कि, सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 1987 में शुरू हुआ था। यह मेला भारतीय लोक कला, हस्तशिल्प, संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक मंच देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। उस समय इसका उद्देश्य देश के कारीगरों को अपनी कला प्रदर्शित करने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था। यह मेला फरीदाबाद में अरावली की तलहटी में 10वीं शताब्दी के ऐतिहासिक सूरजकुंड के निकट आयोजित किया जाता है। सूरजकुंड का निर्माण 10वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने करवाया था। यह स्थल एक प्राचीन जलाशय के रूप में जाना जाता है और इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण मेले का नाम भी सूरजकुंड पड़ा। इस मेले की शुरुआत वर्ष 1987 में तत्कालीन सचिव पर्यटन, भारत सरकार एसके मिश्रा एवं तत्कालीन सचिव पर्यटन, हरियाणा एसके शर्मा के प्रयासों से हुई थी। 31 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा मेला मेला 31 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें 45 के करीब देशों से कलाकार और शिल्पकार भाग ले रहे है। इस बार मेले परिसर को बढ़ाकर 42.5 एकड़ किया गया है। मेला स्टॉल की संख्या को 1200 से बढ़ार 1300 कर दिया गया है। यूपी और मेघालय थीम स्टेट ,इजिप्ट पार्टनर कंट्री मेले में इस बार यूपी और मेघालय को थीम स्टेट बनाया गया है। वहीं, इजिप्ट को पार्टनर कंट्री बनाया गया है। साथ ही नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को कल्चरल पार्टनर बनाया गया है। मेले में देश-विदेश के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प और हाथ से बने उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री की जाएगी। साथ ही पार्टनर कंट्री और थीम स्टेट के विशेष फूड स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहेंगे। यूपी की शिल्प विरासत बनेगी केंद्र बिंदू थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के पवेलियन में फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां, कन्नौज की इत्र परंपरा, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और वाराणसी, लखनऊ व भदोही की जरी-जरदोजी कला को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। ओडीओपी योजना के तहत प्रदेश के 40 विशेष हस्तशिल्प स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। दिनभर सांस्कृतिक रंग, फैशन शो भी होंगे मेले में रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ तीन विशेष अवसरों पर फैशन शो भी होंगे, जिनमें पारंपरिक और आधुनिक परिधानों के साथ आभूषणों की झलक देखने को मिलेगी। क्यूआर कोड और फास्टैग से मिलेगी स्मार्ट सुविधा मेला परिसर के गेट पर विभिन्न जिलों की पहचान को दर्शाने वाले डिजाइन बनाए जाएंगे। हर शिल्प और जिले के लिए विशेष साइनेज और क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिनके जरिए पर्यटक शिल्प निर्माण प्रक्रिया और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की जानकारी ले सकेंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग शुल्क का भुगतान फास्टैग के जरिए भी किया जा सकेगा। नकद और अन्य डिजिटल भुगतान विकल्प भी उपलब्ध रहेंगे। प्रशासन ने पांच स्थानों पर पार्किंग स्थल विकसित किए हैं, जहां एक साथ हजारों वाहन खड़े किए जा सकेंगे। पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति की भी झलक इस बार सूरजकुंड मेले में पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति भी खास तौर पर प्रदर्शित की जाएगी। अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, असम के कामाख्या मंदिर और मेघालय की खासी हिल्स जैसे पर्यटन स्थलों की झलक के साथ-साथ आठों पूर्वोत्तर राज्यों की लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा और खानपान पर्यटकों को आकर्षित करेगा। सुरक्षा को लेकर 2000 कर्मचारी और 600 से अधिक सीसीटीवी मेले की सुरक्षा के लिए 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जबकि 17 एसीपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी तैनात रहेंगे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मेले को 6 पुलिस जोन में बांटा गया है। कुल 5 प्रवेश द्वार बनाए गए हैं, जिनमें VVIP गेट भी शामिल है। सभी प्रवेश द्वारों पर DFMD और HHMD लगाए गए हैं। मेला परिसर में 600 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा 12 मचान, 10 पिकेट, डॉग स्क्वायड, बम निरोधक दस्ता और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी रखी जाएगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए 11 सामान्य पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। इसके साथ ही 4 पीसीआर और 6 राइडर दिन-रात दो शिफ्टों में गश्त करेंगी। 120 से 150 रुपए तक का टिकट सूरजकुंड मेले को देखने जाने वालों को इस बार 120 से 150 रुपए में टिकट मिलेगा। वीकेंड पर टिकट थोड़ा महंगा रहेगा। वीकेंड पर आपक 150 से 200 रुपए के बीच टिकट मिलेगा। 5 साल से कम बच्चों की एंट्री फ्री रहेगी। 5 साल से ऊपर के बच्चों का टिकट 60 रुपए से 100 रुपए के बीच रहेगा। वहीं मेले के अंदर लगाए गए झूलों को अलग से टिकट लेना पड़ेगा।
अरुणाचल: भारतीय सेना और आईटीबीपी का संयुक्त अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’, युद्ध तैयारियों को मिली मजबूती
भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अरुणाचल प्रदेश में चार दिवसीय संयुक्त फायरिंग अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’ के दूसरे चरण (फेज-II) का सफल आयोजन किया
मेरठ के राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक एवं पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला ने भगवान परशुराम एकात्म विश्वविद्यालय की स्थापना के संबंध में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन धर्म और समसामयिक राष्ट्रीय विषयों पर भी चर्चा की गई। पंडित सुनील भराला ने मुख्यमंत्री के समक्ष भगवान परशुराम एकात्म विश्वविद्यालय, मेरठ की स्थापना का विस्तृत प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय को बागपत जनपद में स्थित श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थापित करने का विचार है, जो धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। शैक्षणिक और तीर्थ स्थल एक साथउन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और वैश्विक एकात्मता के सिद्धांत पर आधारित होगा, जहां भगवान परशुराम के जीवन दर्शन, उनके आध्यात्मिक-वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सनातन परंपराओं को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा। साथ ही देशभर में भगवान परशुराम से जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुंड, मध्य प्रदेश के जनापाव, भिंड के जमदार, जबलपुर, राजस्थान के कुंभलगढ़ और पाली को वैचारिक एवं शैक्षणिक रूप से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। इसके साथ साथ बैठक के दौरान शिक्षा, संस्कृति, साइंस-इनोवेशन-रिसर्च (SIR), अवकाश नीति, जगतगुरुओं से जुड़े विषयों और उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रस्ताव को गंभीरता से सुना और इसे सनातन संस्कृति व राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही एक समिति का गठन कर इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही आगामी 6 फरवरी से रिलीज़ होने जा रही फिल्म गोदान के मुख्य कलाकार एवं पंडित सुनील भराला के पुत्र उत्कर्ष सिंह भारद्वाज ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर फिल्म की सफलता के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।
फरीदाबाद जिले में आज हरियाणा पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा सूरजकुंड परिसर पहुंच रहे है। मंत्री यहां पर 31 जनवरी से शुरू हो रहे सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इससे पहले प्रशासन के अधिकारी भी तैयारियों को लेकर परिसर का दौरा कर चुके है। 31 जनवरी से शुरू होगा मेला सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का आयोजन 31 जनवरी से 15 फरवरी तक किया जाएगा। वर्ष 2013 में सूरजकुंड क्राफ्ट मेला को राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्नत किया गया और इसका नाम सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला रखा गया। उपराष्ट्रपति करेंगे मेले का उद्घाटन इस बार मेले का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के द्वारा किया जाएगा। उनके साथ हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल सहित हरियाणा सरकार के मंत्री एवं विधायक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। 42.5 एकड़ में फैले मेला परिसर इस बार मेला परिसर का दायरा बढ़ाया गया है। 42.5 एकड़ में फैले मेला परिसर में 1300 स्टॉल बनाई गई है। वर्ष 2025 के लगे 38वें मेले में 44 से अधिक देशों के 635 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा 15 लाख से अधिक पर्यटकों ने मेले का भ्रमण किया था। जबकि 1188 शिल्पकारों ने भाग लिया था। फास्टैग से मिलेगी स्मार्ट सुविधा मेला परिसर के पाथवे पर विभिन्न जिलों की पहचान को दर्शाने वाले डिजाइन बनाए जाएंगे। हर शिल्प और जिले के लिए विशेष साइनेज और क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिनके जरिए पर्यटक शिल्प निर्माण प्रक्रिया और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की जानकारी ले सकेंगे। पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति की भी झलक इस बार सूरजकुंड मेले में पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति भी खास तौर पर प्रदर्शित की जाएगी। अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, असम के कामाख्या मंदिर और मेघालय की खासी हिल्स जैसे पर्यटन स्थलों की झलक के साथ-साथ आठों पूर्वोत्तर राज्यों की लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा और खानपान पर्यटकों को आकर्षित करेगा। 600 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से निगरानी सुरक्षा व्यवस्था के तहत मेले को 6 पुलिस जोन में बांटा गया है। कुल 5 प्रवेश द्वार बनाए गए हैं, जिनमें VVIP गेट भी शामिल है। सभी प्रवेश द्वारों पर DFMD और HHMD लगाए गए हैं। मेला परिसर में 600 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा 12 मचान, 10 पिकेट, डॉग स्क्वायड, बम निरोधक दस्ता और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी रखी जाएगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए 11 सामान्य पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। पार्किंग और यातायात नियंत्रण के लिए यातायात पुलिस तैनात रहेगी। इसके साथ ही 4 पीसीआर और 6 राइडर दिन-रात दो शिफ्टों में गश्त करेंगी।
शहीद कुंदन यादव के परिवार को जमीन का इंतजार:गलवान झड़प के छह साल बाद भी सरकारी वादा अधूरा
सहरसा के सत्तरकटैया प्रखंड अंतर्गत आरण गांव निवासी शहीद कुंदन कुमार यादव की शहादत को छह वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उनके परिवार का संघर्ष आज भी जारी है। देश की सीमा की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर सपूत के परिजन अब भी सरकार द्वारा किए गए वादों के पूरा होने की राह देख रहे हैं। शहादत के बाद हुए बड़े-बड़े ऐलान जमीन पर उतरते नजर नहीं आ रहे, जिससे शहीद के परिवार को लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। देशसेवा का जज्बा, 2012 में सेना में भर्ती शहीद कुंदन कुमार यादव, निमेंद्र यादव के दो बेटों में सबसे छोटे थे। बचपन से ही उनमें देशसेवा का जुनून था। वर्ष 2012 में उन्होंने बिहार रेजीमेंट की 16वीं बटालियन में बतौर सिपाही भारतीय सेना ज्वाइन की। सेना में चयन के बाद गांव में खुशी का माहौल था। परिजनों को गर्व था कि उनका बेटा देश की सेवा करेगा। अरुणाचल से लद्दाख तक निभाई जिम्मेदारी सेना में शामिल होने के बाद कुंदन की पहली तैनाती अरुणाचल प्रदेश में हुई, जो दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर में भी अपनी सेवाएं दीं। देश की सुरक्षा के लिए उन्होंने लद्दाख जैसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण इलाके में भी ड्यूटी निभाई, जहां हर दिन जोखिम भरा होता है। साथी जवानों के अनुसार कुंदन बेहद अनुशासित और साहसी सैनिक थे। पैंगोंग त्सो में भारत-चीन झड़प, देश के लिए दी जान 15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र के नॉर्थ बैंक इलाके में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसी झड़प में कुंदन कुमार यादव वीरगति को प्राप्त हुए। इस घटना में भारत ने अपने कई जांबाज सपूत खो दिए थे। कुंदन की शहादत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम छा गया। हर आंख नम थी और हर जुबान पर शहीद कुंदन का नाम। शहादत के बाद किया गया जमीन देने का वादा शहीद कुंदन यादव की शहादत के बाद सरकार की ओर से उनके परिवार को पांच कट्ठा जमीन देने का वादा किया गया था। कहा गया था कि यह जमीन परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए दी जाएगी। उस वक्त परिजनों को उम्मीद बंधी थी कि सरकार उनके बलिदान को सम्मान देगी। छह साल बाद भी कागजों में अटका आश्वासन लेकिन शहादत के छह साल बीत जाने के बावजूद यह वादा अब तक पूरा नहीं हो सका है। शहीद के परिजन आज भी जिला मुख्यालय से लेकर पटना तक अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। कभी फाइल लंबित होने की बात कही जाती है, तो कभी प्रक्रिया पूरी न होने का हवाला दिया जाता है। परिजनों का कहना है कि हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीन अब तक नहीं मिली। पत्नी को नौकरी, लेकिन परिवार की मुश्किलें बरकरार सरकार की ओर से शहीद की पत्नी बेबी कुमारी को सहरसा के DCLR कार्यालय में लिपिक के पद पर नौकरी जरूर दी गई है। यह नौकरी परिवार के लिए एक सहारा बनी है, लेकिन इससे सभी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। बेबी कुमारी का कहना है कि नौकरी के साथ बच्चों की परवरिश और भविष्य की चिंता लगातार बनी रहती है। अगर जमीन का वादा पूरा हो जाता, तो परिवार को स्थायी सुरक्षा मिल सकती थी। दो मासूम बेटे, पिता की शहादत पर गर्व शहीद कुंदन यादव के दो छोटे बेटे हैं, 9 साल की रोशन और 6 साल का राणा। दोनों अपने पिता को कहानियों और तस्वीरों में देखते हैं। गांव के लोग और परिजन उन्हें बताते हैं कि उनके पिता देश के लिए शहीद हुए थे। बच्चे गर्व महसूस करते हैं, लेकिन पिता की कमी हर पल उन्हें और परिवार को खलती है। ग्रामीणों में नाराजगी, उठ रहे सवाल आरण गांव के लोग भी इस बात से नाराज हैं कि शहीद के नाम पर किए गए वादे पूरे नहीं हो रहे। ग्रामीणों का कहना है कि शहादत के समय नेता और अधिकारी पहुंचकर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन समय बीतते ही सब भूल जाते हैं। इससे शहीदों के परिवारों का मनोबल टूटता है। क्या शहीदों के वादे सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेंगे? देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद कुंदन कुमार यादव का परिवार आज भी सम्मान और हक की प्रतीक्षा में है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शहीदों के लिए किए गए सरकारी वादे कभी समय पर पूरे होंगे, या फिर ये आश्वासन भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएंगे। शहीद के परिजन चाहते हैं कि सरकार उनके साथ किया गया वादा जल्द पूरा करे, ताकि यह साबित हो सके कि देश अपने वीर सपूतों को सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी सम्मान देता है।
अरुणाचल प्रदेश में सेना और आईटीबीपी ने किया संयुक्त युद्ध अभ्यास
भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अरुणाचल प्रदेश में छह दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास 'अग्नि परीक्षा' का प्रथम चरण आयोजित किया, जिसका उद्देश्य अंतर-बल समन्वय और युद्ध की तैयारी को बढ़ाना था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अरुणाचल पर चीन का दावा भाजपा की गलती का नतीजा
चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति और हड़पने वाली नीयत का परिचय देते हुए फिर से अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया है
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

