झारखंड के पहले गैलेंट्री अवॉर्डी वायु योद्धा सुनील कुमार सेवानिवृत्त:चार दशकों से अधिक समय तक देश की सीमाओं की रक्षा की, ऑपरेशन ब्रासटैक के रहे हैं हिस्सा

झारखंड के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल अपने समय के नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बन जाते हैं। भारतीय वायुसेना के गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित जांबाज अधिकारी सुनील कुमार सिंह भी ऐसे ही एक विलक्षण व्यक्तित्व के हैं। झारखंड के गठन के बाद वे राज्य के पहले गैलेंट्री अवॉर्डी वायुसेना अधिकारी बने और अब 41 वर्षों की गौरवपूर्ण, साहसिक एवं निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर एक स्वर्णिम अध्याय पूर्ण कर चुके हैं। दसवीं और 12वीं की पढ़ाई हरिहरपुर हाईस्कूल से कीमूल रूप से गढवा (झारखंड) के हरिहरपुर के रहने वाले सुनील कुमार सिंह ने दसवीं और 12वीं की पढ़ाई हरिहरपुर हाईस्कूल से की है। पिता का नाम विक्रमा सिंह और माता का नाम अनूप राज देवी है। सुनील की वायुसेना में पोस्टिंग ताम्बरम (चेन्नई), गांधीनगर (गुजरात), सुलूर (कोयंबटूर, तमिलनाडु), मोहनबाड़ी (असम), भठिंडा (पंजाब), श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), हिंडन (गाजियाबाद) आदि स्थानों पर रही है। वह यूएन मिशन सूडान में भी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में परिवार दिल्ली में सेटल है। सुनील कुमार सिंह का जीवन केवल एक सैन्य करियर नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन, कर्तव्य और मानवता की जीवंत मिसाल है। उन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक देश की सीमाओं की रक्षा ही नहीं की, बल्कि संकट की हर घड़ी में देशवासियों के लिए देवदूत बनकर आकाश से सहायता पहुंचाई। युद्धभूमि में अदम्य शौर्य देश के निर्णायक क्षणों में वे सदैव अग्रिम पंक्ति में रहे। कारगिल विजय जैसे ऐतिहासिक अभियान में उनकी भूमिका ने यह सिद्ध किया कि कठिनतम परिस्थितियों में भी भारतीय वायुसेना का साहस अडिग रहता है। ऊंचे पर्वतों, सीमित दृश्यता और शत्रु की चुनौती के बीच उन्होंने सैनिकों तक रसद पहुंचाने, घायलों को सुरक्षित निकालने और रणनीतिक अभियानों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऑपरेशन ब्रासटैक जैसे बड़े सैन्य अभ्यासों में उनकी भागीदारी उनकी तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और अनुकरणीय अनुशासन का प्रमाण रही। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत सूडान में सेवा देते हुए उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत की शांति-प्रिय, जिम्मेदार और मानवीय छवि को सुदृढ़ किया। संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में सीमित संसाधनों और अत्यधिक जोखिम के बीच उनकी सेवाएं अंतरराष्ट्रीय सराहना का विषय बनीं। आपदाओं में जीवनरक्षक भूमिका जहां युद्ध में वे योद्धा थे, वहीं आपदाओं में वे मानवता के प्रहरी बने। सुनामी, अरुणाचल प्रदेश एवं श्रीनगर की बाढ़, तमिलनाडु और गुजरात में राहत अभियानों के दौरान उन्होंने अनगिनत लोगों की जान बचाई। सियाचिन ग्लेशियर जैसे विश्व के सबसे दुर्गम और खतरनाक क्षेत्रों में फँसे जवानों और नागरिकों को सुरक्षित निकालना उनके साहस और संवेदनशीलता का अद्भुत उदाहरण है। वायुसेना में ऐतिहासिक उपलब्धियां सुनील कुमार सिंह भारतीय वायुसेना के एक्सामिनर रहे, जहां उन्होंने उड़ान सुरक्षा और प्रशिक्षण मानकों को नई ऊंचाइयां दीं। वे पहले MI-17 V5 हेलीकॉप्टर के फ्लाइट गनर लीडर रहे, जो अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। उनके नाम 5,500 घंटे की उड़ान दर्ज है। राष्ट्र के सर्वोच्च पदों के साथ उड़ान प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और राज्य प्रमुखों के साथ उड़ान भरते हुए उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया। यह जिम्मेदारी केवल कौशल नहीं, बल्कि सर्वोच्च विश्वास का प्रतीक होती है, जिसे उन्होंने गरिमा के साथ निभाया। राष्ट्रीय गौरव के क्षण 8 अक्टूबर (वायुसेना दिवस) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के अवसर पर कई बार राष्ट्रीय ध्वज के साथ फ्लाइंग पास्ट में शामिल होकर उन्होंने आकाश में देशभक्ति की भावना को सजीव किया। मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पाकिस्तान से सरबजीत सिंह के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक भारत लाने के मिशन में उनकी प्रमुख भूमिका ने यह सिद्ध किया कि उनके लिए राष्ट्रसेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि भावनात्मक उत्तरदायित्व भी है। इसके अतिरिक्त, श्रीलंका मिशन सहित कई संवेदनशील अभियानों में उनकी सहभागिता उल्लेखनीय रही। कैबिनेट सचिवालय में सेवा उन्होंने कैबिनेट सचिवालय, दिल्ली में 10 वर्षों तक सेवा देकर राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। जहां अनुशासन, गोपनीयता और राष्ट्रहित सर्वोपरि होते हैं। इस शौर्य के पीछे एक मौन शक्ति इतनी लंबी, जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण सेवा-यात्रा केवल एक व्यक्ति की नहीं होती। इसके पीछे एक अडिग, निःस्वार्थ और त्यागमयी शक्ति खड़ी रहती है और वह हैं उनकी धर्मपत्नी मीना सिंह। हर ऑपरेशन के पीछे उनकी पत्नी का मौन त्याग, परिवार की जिम्मेदारी का एकाकी वहन और देश को सर्वोपरि रखने की भावना छिपी रही। उन्होंने सिद्ध किया कि हर वीर सैनिक के पीछे उसकी पत्नी का भी उतना ही बड़ा बलिदान होता है, जो परिवार से अधिक देश को प्राथमिकता देती है।

दैनिक भास्कर 31 Jan 2026 6:36 pm

फरीदाबाद में 39वें अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले की शुरुआत आज से:उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन करेंगे उद्घाटन, सीएम सैनी भी पहुंचेंगे, 15 फरवरी को समापन

फरीदाबाद में आज (शनिवार को) देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सूरजकुंड पहुंच रहे हैं। वह यहां पर 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। वहीं, 15 फरवरी को समापन समारोह के दौरान राज्यपाल प्रोफेसर आशीष कुमार घोष मुख्य अतिथि होंगे। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल, हरियाणा पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा सहित सरकार के मंत्री एवं विधायक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। इसे लेकर प्रशासन की तरफ से सभी तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। पहली बार 1987 लगा था मेला बता दें कि, सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 1987 में शुरू हुआ था। यह मेला भारतीय लोक कला, हस्तशिल्प, संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक मंच देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। उस समय इसका उद्देश्य देश के कारीगरों को अपनी कला प्रदर्शित करने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था। यह मेला फरीदाबाद में अरावली की तलहटी में 10वीं शताब्दी के ऐतिहासिक सूरजकुंड के निकट आयोजित किया जाता है। सूरजकुंड का निर्माण 10वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने करवाया था। यह स्थल एक प्राचीन जलाशय के रूप में जाना जाता है और इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण मेले का नाम भी सूरजकुंड पड़ा। इस मेले की शुरुआत वर्ष 1987 में तत्कालीन सचिव पर्यटन, भारत सरकार एसके मिश्रा एवं तत्कालीन सचिव पर्यटन, हरियाणा एसके शर्मा के प्रयासों से हुई थी। 31 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा मेला मेला 31 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें 45 के करीब देशों से कलाकार और शिल्पकार भाग ले रहे है। इस बार मेले परिसर को बढ़ाकर 42.5 एकड़ किया गया है। मेला स्टॉल की संख्या को 1200 से बढ़ार 1300 कर दिया गया है। यूपी और मेघालय थीम स्टेट ,इजिप्ट पार्टनर कंट्री मेले में इस बार यूपी और मेघालय को थीम स्टेट बनाया गया है। वहीं, इजिप्ट को पार्टनर कंट्री बनाया गया है। साथ ही नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को कल्चरल पार्टनर बनाया गया है। मेले में देश-विदेश के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प और हाथ से बने उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री की जाएगी। साथ ही पार्टनर कंट्री और थीम स्टेट के विशेष फूड स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहेंगे। यूपी की शिल्प विरासत बनेगी केंद्र बिंदू थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के पवेलियन में फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां, कन्नौज की इत्र परंपरा, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और वाराणसी, लखनऊ व भदोही की जरी-जरदोजी कला को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। ओडीओपी योजना के तहत प्रदेश के 40 विशेष हस्तशिल्प स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। दिनभर सांस्कृतिक रंग, फैशन शो भी होंगे मेले में रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ तीन विशेष अवसरों पर फैशन शो भी होंगे, जिनमें पारंपरिक और आधुनिक परिधानों के साथ आभूषणों की झलक देखने को मिलेगी। क्यूआर कोड और फास्टैग से मिलेगी स्मार्ट सुविधा मेला परिसर के गेट पर विभिन्न जिलों की पहचान को दर्शाने वाले डिजाइन बनाए जाएंगे। हर शिल्प और जिले के लिए विशेष साइनेज और क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिनके जरिए पर्यटक शिल्प निर्माण प्रक्रिया और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की जानकारी ले सकेंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग शुल्क का भुगतान फास्टैग के जरिए भी किया जा सकेगा। नकद और अन्य डिजिटल भुगतान विकल्प भी उपलब्ध रहेंगे। प्रशासन ने पांच स्थानों पर पार्किंग स्थल विकसित किए हैं, जहां एक साथ हजारों वाहन खड़े किए जा सकेंगे। पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति की भी झलक इस बार सूरजकुंड मेले में पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति भी खास तौर पर प्रदर्शित की जाएगी। अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, असम के कामाख्या मंदिर और मेघालय की खासी हिल्स जैसे पर्यटन स्थलों की झलक के साथ-साथ आठों पूर्वोत्तर राज्यों की लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा और खानपान पर्यटकों को आकर्षित करेगा। सुरक्षा को लेकर 2000 कर्मचारी और 600 से अधिक सीसीटीवी मेले की सुरक्षा के लिए 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जबकि 17 एसीपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी तैनात रहेंगे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मेले को 6 पुलिस जोन में बांटा गया है। कुल 5 प्रवेश द्वार बनाए गए हैं, जिनमें VVIP गेट भी शामिल है। सभी प्रवेश द्वारों पर DFMD और HHMD लगाए गए हैं। मेला परिसर में 600 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा 12 मचान, 10 पिकेट, डॉग स्क्वायड, बम निरोधक दस्ता और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी रखी जाएगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए 11 सामान्य पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। इसके साथ ही 4 पीसीआर और 6 राइडर दिन-रात दो शिफ्टों में गश्त करेंगी। 120 से 150 रुपए तक का टिकट सूरजकुंड मेले को देखने जाने वालों को इस बार 120 से 150 रुपए में टिकट मिलेगा। वीकेंड पर टिकट थोड़ा महंगा रहेगा। वीकेंड पर आपक 150 से 200 रुपए के बीच टिकट मिलेगा। 5 साल से कम बच्चों की एंट्री फ्री रहेगी। 5 साल से ऊपर के बच्चों का टिकट 60 रुपए से 100 रुपए के बीच रहेगा। वहीं मेले के अंदर लगाए गए झूलों को अलग से टिकट लेना पड़ेगा।

दैनिक भास्कर 31 Jan 2026 5:12 am

अरुणाचल: भारतीय सेना और आईटीबीपी का संयुक्त अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’, युद्ध तैयारियों को मिली मजबूती

भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अरुणाचल प्रदेश में चार दिवसीय संयुक्त फायरिंग अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’ के दूसरे चरण (फेज-II) का सफल आयोजन किया

देशबन्धु 30 Jan 2026 11:40 pm

पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात:भगवान परशुराम एकात्म विश्वविद्यालय की स्थापना का रखा प्रस्ताव

मेरठ के राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक एवं पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला ने भगवान परशुराम एकात्म विश्वविद्यालय की स्थापना के संबंध में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन धर्म और समसामयिक राष्ट्रीय विषयों पर भी चर्चा की गई। पंडित सुनील भराला ने मुख्यमंत्री के समक्ष भगवान परशुराम एकात्म विश्वविद्यालय, मेरठ की स्थापना का विस्तृत प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय को बागपत जनपद में स्थित श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थापित करने का विचार है, जो धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। शैक्षणिक और तीर्थ स्थल एक साथउन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और वैश्विक एकात्मता के सिद्धांत पर आधारित होगा, जहां भगवान परशुराम के जीवन दर्शन, उनके आध्यात्मिक-वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सनातन परंपराओं को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा। साथ ही देशभर में भगवान परशुराम से जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुंड, मध्य प्रदेश के जनापाव, भिंड के जमदार, जबलपुर, राजस्थान के कुंभलगढ़ और पाली को वैचारिक एवं शैक्षणिक रूप से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। इसके साथ साथ बैठक के दौरान शिक्षा, संस्कृति, साइंस-इनोवेशन-रिसर्च (SIR), अवकाश नीति, जगतगुरुओं से जुड़े विषयों और उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रस्ताव को गंभीरता से सुना और इसे सनातन संस्कृति व राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही एक समिति का गठन कर इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही आगामी 6 फरवरी से रिलीज़ होने जा रही फिल्म गोदान के मुख्य कलाकार एवं पंडित सुनील भराला के पुत्र उत्कर्ष सिंह भारद्वाज ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर फिल्म की सफलता के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।

दैनिक भास्कर 30 Jan 2026 10:41 pm

फरीदाबाद में पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा आज:सूरजकुंड मेले की तैयारियों की होगी समीक्षा, 31 जनवरी को उपराष्ट्रपति करेंगे उद्घाटन

फरीदाबाद जिले में आज हरियाणा पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा सूरजकुंड परिसर पहुंच रहे है। मंत्री यहां पर 31 जनवरी से शुरू हो रहे सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इससे पहले प्रशासन के अधिकारी भी तैयारियों को लेकर परिसर का दौरा कर चुके है। 31 जनवरी से शुरू होगा मेला सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का आयोजन 31 जनवरी से 15 फरवरी तक किया जाएगा। वर्ष 2013 में सूरजकुंड क्राफ्ट मेला को राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्नत किया गया और इसका नाम सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला रखा गया। उपराष्ट्रपति करेंगे मेले का उद्घाटन इस बार मेले का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के द्वारा किया जाएगा। उनके साथ हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल सहित हरियाणा सरकार के मंत्री एवं विधायक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। 42.5 एकड़ में फैले मेला परिसर इस बार मेला परिसर का दायरा बढ़ाया गया है। 42.5 एकड़ में फैले मेला परिसर में 1300 स्टॉल बनाई गई है। वर्ष 2025 के लगे 38वें मेले में 44 से अधिक देशों के 635 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा 15 लाख से अधिक पर्यटकों ने मेले का भ्रमण किया था। जबकि 1188 शिल्पकारों ने भाग लिया था। फास्टैग से मिलेगी स्मार्ट सुविधा मेला परिसर के पाथवे पर विभिन्न जिलों की पहचान को दर्शाने वाले डिजाइन बनाए जाएंगे। हर शिल्प और जिले के लिए विशेष साइनेज और क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिनके जरिए पर्यटक शिल्प निर्माण प्रक्रिया और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की जानकारी ले सकेंगे। पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति की भी झलक इस बार सूरजकुंड मेले में पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति भी खास तौर पर प्रदर्शित की जाएगी। अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, असम के कामाख्या मंदिर और मेघालय की खासी हिल्स जैसे पर्यटन स्थलों की झलक के साथ-साथ आठों पूर्वोत्तर राज्यों की लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा और खानपान पर्यटकों को आकर्षित करेगा। 600 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से निगरानी सुरक्षा व्यवस्था के तहत मेले को 6 पुलिस जोन में बांटा गया है। कुल 5 प्रवेश द्वार बनाए गए हैं, जिनमें VVIP गेट भी शामिल है। सभी प्रवेश द्वारों पर DFMD और HHMD लगाए गए हैं। मेला परिसर में 600 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा 12 मचान, 10 पिकेट, डॉग स्क्वायड, बम निरोधक दस्ता और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी रखी जाएगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए 11 सामान्य पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। पार्किंग और यातायात नियंत्रण के लिए यातायात पुलिस तैनात रहेगी। इसके साथ ही 4 पीसीआर और 6 राइडर दिन-रात दो शिफ्टों में गश्त करेंगी।

दैनिक भास्कर 30 Jan 2026 8:41 am

अरुणाचल पर चीन का दावा भाजपा की गलती का नतीजा

चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति और हड़पने वाली नीयत का परिचय देते हुए फिर से अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया है

देशबन्धु 27 Nov 2025 3:13 am