किडनी के मरीज आज ही दूरी बना लें इन 5 चीजों से, पोटैशियम की अधिक मात्रा बढ़ा सकती है गंभीर खतरा
शरीर को स्वस्थ रखने में किडनी (गुर्दा) की भूमिका सबसे अहम होती है, जो खून को साफ करने और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है। लेकिन जब किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है, तो शरीर में कुछ खास पोषक तत्वों, विशेषकर पोटैशियम को फिल्टर करना मुश्किल हो जाता है। रक्त में पोटैशियम का स्तर बढ़ना (हाइपरकलेमिया) किडनी के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, जिससे दिल की धड़कन अनियंत्रित होने का खतरा रहता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 तरह के फूड्स के बारे में जिन्हें किडनी की बीमारी में तुरंत अपनी डाइट से बाहर कर देना चाहिए।1. केला और एवोकैडो जैसे हाई-पोटैशियम फलआम तौर पर फलों को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन किडनी के मरीजों के लिए कुछ फल जहर के समान काम कर सकते हैं। केले में पोटैशियम की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके अलावा एवोकैडो, कीवी, संतरा और खुबानी (एप्रिकॉट) भी पोटैशियम के बड़े स्रोत हैं। अगर आपकी किडनी सही से काम नहीं कर रही है, तो इन फलों का सेवन करने से बचें। इनकी जगह डॉक्टर की सलाह पर सेब, पपीता या अमरूद का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।2. हरी पत्तेदार सब्जियां और पालकपालक, ब्रोकली और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां वैसे तो आयरन और विटामिन्स से भरपूर होती हैं, लेकिन इनमें पोटैशियम भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। पकाने के बाद भी इनमें पोटैशियम की डेंसिटी बनी रहती है। किडनी के मरीजों को कच्चा सलाद या पालक का सूप पीने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। सब्जियों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें 'लीचिंग' प्रक्रिया (काटकर गर्म पानी में कुछ देर उबालकर पानी फेंक देना) से गुजारना बेहतर होता है, जिससे पोटैशियम की मात्रा कुछ हद तक कम हो जाती है।3. आलू, शकरकंद और जमीन के नीचे उगने वाली कंदभारतीय रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला आलू और सर्दियों में चाव से खाया जाने वाला शकरकंद (स्वीट पोटैटो) भी पोटैशियम का खजाना हैं। इसके साथ ही अरबी और जिमीकंद जैसी कंद वाली सब्जियों में भी यह तत्व बहुत ज्यादा होता है। किडनी की गंभीर समस्याओं (CKD) से जूझ रहे लोगों को आलू या शकरकंद का अत्यधिक सेवन करने से सख्त मना किया जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर क्रिएटिनिन और पोटैशियम के स्तर को बिगाड़ सकता है।4. टमाटर और उससे बनी प्यूरी या सॉससब्जी का स्वाद बढ़ाने वाला टमाटर भी किडनी रोगियों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। एक कप टमाटर की प्यूरी में बहुत अधिक मात्रा में पोटैशियम होता है। बाजार में मिलने वाले टोमैटो केचप, सॉस और रेडी-टू-ईट कढ़ी या सूप का सेवन करने से किडनी पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। डाइट एक्सपर्ट्स के अनुसार, किडनी के मरीजों को अपनी सब्जियों में टमाटर की ग्रेवी का उपयोग न्यूनतम या बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।5. सूखे मेवे, नट्स और साबुत अनाजबादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता और किशमिश जैसे कड़क और सूखे मेवे सेहत के लिए जितने अच्छे हैं, किडनी के लिए उतने ही भारी पड़ सकते हैं। नट्स और बीजों में पोटैशियम के साथ-साथ फास्फोरस भी बहुत ज्यादा होता है, जो कमजोर किडनी के लिए फिल्टर करना नामुमकिन हो जाता है। इसके अलावा सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस और होल व्हीट (साबुत अनाज) में पोटैशियम का स्तर अधिक होता है, इसलिए डॉक्टर किडनी के मरीजों को रिफाइंड अनाज का सीमित सेवन करने की सलाह देते हैं।
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जब भी बालों की नेचुरल केयर की बात होती है, तो सबसे पहले तेल लगाने का ख्याल ही दिमाग में आता है। सदियों से दादी-नानी सिल्की, स्मूथ व मजबूत बालों के लिए तेल लगाने की सलाह देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोगों के बाल तेल लगाने के बाद और ज्यादा चिपचिपे, बेजान या कमजोर क्यों दिखने लगते हैं? यह हम सभी ने कभी ना कभी जरूर अनुभव किया है। सच तो यह है कि तेल लगाना हर किसी के लिए एक जैसा काम नहीं करता। जिस चीज़ से किसी के बालों को फायदा मिलता है, वही दूसरे व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। तो चलिए जानते हैं कि आपको भी बालों में तेल लगाने के बाद मिल कोई फायदा क्यों नहीं मिल रहा है- इसे भी पढ़ें: बस 3 चीजों से घर पर बनाएं यह Natural Hair Toner, पाएं Super Shiny बाल स्कैल्प का नेचर अलग होना जिस तरह हर किसी की स्किन अलग होती है, ठीक वैसे ही स्कैल्प भी अलग होती है। जहां कुछ लोगों की स्कैल्प पहले से ही काफी ऑयली होती है। ऐसे में बार-बार तेल लगाने से स्कैल्प पर अतिरिक्त तेल जमा हो सकता है। जिससे बालों को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है। इससे कभी-कभी खुजली या डैंड्रफ जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ज्यादा देर तक तेल लगा रहना तेल लगाने से बालों को फायदा होता है तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप रात भर या दो-दो दिन तक बालों में तेल लगाए रखें। कुछ लोगों में लंबे समय तक तेल लगा रहने से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं, जिससे स्कैल्प में भारीपन का अहसास होने लगता है। खासकर गर्मियों और उमस वाले मौसम में यह समस्या और भी ज्यादा हो सकती है। गलत तेल का इस्तेमाल करना बालों में तेल लगाते समय इस बात का ख्याल भी रखना चाहिए कि आप कौन सा तेल लग रहे हैं। हर तेल हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता। जहां किसी व्यक्ति को नारियल तेल सूट करता है, तो किसी के लिए बादाम या आर्गन ऑयल ज्यादा अच्छा रहता है। इसलिए, अगर तेल लगाने के बाद खुजली, रेडनेस या ज्यादा हेयर फॉल हो रहा हो, तो हो सकता है कि वह तेल आपके लिए सही न हो। ऑयलिंग का तरीका सही ना होना बालों में तेल लगाते समय आपको उसके तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए। कुछ लोग ऑयलिंग करते हुए बहुत ज्यादा जोर से मसाज करते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा रगड़ने से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं, जिससे बालों को नुकसान हो सकता है। तो क्या तेल लगाना बंद कर देना चाहिए? बालों में तेल लगाना नुकसानदायक नहीं है। आप बालों को मुलायम रखने, ड्राइनेस कम करने और रिलैक्स महसूस कराने में मदद करता है। बस जरूरी है कि आप अपने बालों और स्कैल्प की जरूरत को समझें और उसके अनुसार सही तेल व तरीका अपनाएं। - मिताली जैन
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