7 घंटे या 8 घंटे? आखिर कितनी नींद है आपके लिए जरूरी, जानिए पूरी डिटेल
How Much Sleep Is Enough:अक्सर खूब सोने के बाद भी शरीर काफी थका-थका रहता है। ऐसे में लोगों को लगता है कि उनकी नींद पूरी नहीं हुई। पर, क्या आपको पता है कि आपके शरीर को कितनी नींद की जरूरत होती है, आइए इस लेख में जानते हैं।
योग टिप्स: पूरे दिन कुर्सी पर बैठे रहते हैं? शाम को सिर्फ 10 मिनट करें ये योगासन
Easy Stretches & Yoga for Desk Workers:आप चाहें तो ऑफिस से लौटने के बाद या वर्क फ्रॉम होम में काम खत्म करने के तुरंत बाद 10 मिनट निकाल सकते हैं। अभ्यास हमेशा आरामदायक तरीके से करें और शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें।
नजर कमजोर होने से पहले शरीर देता है ये संकेत, जानें कब कराएं आंखों की जांच
Symptoms of Weak Eyesight: कई बार ऐसा होता है कि जब हमारी आंखों की रोशनी काफी ज्यादा कमजोर हो जाती है, तब हमें इसका पता लगता है। जबकि इसके लक्षण पहले से दिखने लगते हैं. आइए इस बारे में जानते हैं।
मानसून फूड टिप्स: बारिश और पकौड़ों का क्या है कनेक्शन? जानिए क्यों बढ़ जाती है क्रेविंग
Rainy Season Recipes: चाय और पकौड़ों का कॉम्बिनेशन भारतीय मानसून कल्चर का हिस्सा बन चुका है। बचपन की यादों से लेकर परिवार के साथ बिताए बारिश के पलों तक, ये स्वाद भावनाओं से भी जुड़ जाता है। तो आखिर बारिश में पकौड़े इतने खास क्यों लगते हैं?
हेल्थ टिप: 35+ की उम्र में कैसी हो आपकी थाली? इन चीजों को करें डाइट में शामिल
Healthy diet: अगर आपकी उम्र 35 के पार हो गई है तो अपने खाने की थाली का खास ध्यान रखें। आइए आपको बताते हैं कि एक उम्र के बाद आपकी थाली में कौन सी चीजें अवश्य होनी चाहिए।
How to Buy Your First Health Policy for Parents in Their 60s
Most families arrive at this decision the same way. A parent retires, the employer coverage stops on the last working day, and nothing replaces it because nobody was ill that year.
वन हेल्थ अप्रोच क्या है? इंसान, जानवर और पर्यावरण को जोड़कर ऐसे रोकी जाती हैं बीमारियां
What Is One Health Approach : इस लेख में जानेंगे कि One Health Approach क्या है, जानवरों से इंसानों में बीमारियां कैसे फैलती हैं और मानव, पशु व पर्यावरण के स्वास्थ्य को साथ लेकर इनका बचाव कैसे किया जा सकता है।
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2026: सेहतमंद रहने के लिए डाइट में जरूर शामिल करें ये जरूरी पोषक तत्व
National Nutrition Week 2026: हर साल हम भारतीय 1 से लेकर 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाते हैं। इस दौरान लोगों को पोषणयुक्त खाने के लिए प्रेरित किया जाता है। अगर आपक इसकी जानकारी नहीं है, तो आइए जानते हैं इस बारे में।
सेहत की बात: साइनस को मामूली जुकाम समझना पड़ सकता है भारी, जानिए किन लोगों को ज्यादा खतरा
सर्दी-जुकाम आम समस्या है, लेकिन लंबे समय तक नाक बंद रहना, गाढ़ा बलगम, सिरदर्द और सूंघने की क्षमता कम होना साइनस संक्रमण के संकेत हो सकते हैं। एलर्जी, प्रदूषण और नाक की संरचनात्मक समस्याएं इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
घर की सफाई में सबसे थकाऊ और मुश्किल काम बाथरूम के फर्श और टाइल्स को चमकाना माना जाता है। लगातार पानी के इस्तेमाल, साबुन के झाग (Soap Scum), शैम्पू और खारे पानी में मौजूद मिनरल्स की वजह से बाथरूम के फर्श पर सफेद जिद्दी पपड़ी और टाइल्स के जोड़ों (Grouting) में काला-पीला मैल जम जाता है।अक्सर लोग महंगे केमिकल क्लीनर और एसिड का इस्तेमाल करते हैं, जिससे न केवल टाइल्स की प्राकृतिक चमक खराब हो जाती है बल्कि उनसे निकलने वाली तीखी गैस सांस और त्वचा के लिए भी नुकसानदेह होती है। यदि आप बिना घंटों रगड़े और बिना ज्यादा मेहनत के अपने बाथरूम के फर्श को बिल्कुल नए जैसा चमकाना चाहते हैं, तो रसोई में मौजूद चीजों से बने ये 5 आसान और असरदार घरेलू हैक्स आपके काम को चुटकियों में आसान बना देंगे।1. बेकिंग सोडा और सफेद सिरके का शक्तिशाली घोल (Baking Soda & White Vinegar)यह कॉम्बिनेशन फर्श पर जमी पुरानी से पुरानी मैल और खारे पानी के दागों को पिघलाने के लिए सबसे अचूक माना जाता है।इस्तेमाल का तरीका: सबसे पहले पूरे बाथरूम के फर्श पर हल्का पानी छिड़कें। इसके बाद टाइल्स और उनके जोड़ों पर अच्छी मात्रा में बेकिंग सोडा छिड़क दें। अब एक स्प्रे बोतल में सफेद सिरका (White Vinegar) भरकर बेकिंग सोडा के ऊपर स्प्रे करें। स्प्रे करते ही झाग (Fizzing Action) बनना शुरू हो जाएगा। इसे 15 से 20 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद पुराने टूथब्रश या प्लास्टिक वाइपर से हल्का रगड़कर गुनगुने पानी से धो लें।फायदा: सिरके का माइल्ड एसिड साबुन के मैल को काटता है और बेकिंग सोडा टाइल्स को बिना खरोंच पहुंचाए पॉलिश जैसा चमका देता है।2. नींबू का रस और नमक: खारे पानी के सफेद दागों का कालयदि आपके इलाके में बोरवेल या खारा पानी (Hard Water) आता है और फर्श पर सफेद-सफेद चूने की परत जम गई है, तो यह नुस्खा तुरंत असर दिखाता है।इस्तेमाल का तरीका: दो बड़े चम्मच मोटे नमक में 3 से 4 नींबुओं का रस मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को दाग वाली टाइल्स और कोनों पर अच्छी तरह लगा दें। 15 मिनट बाद नींबू के बचे हुए छिलके से ही दाग वाली जगह को गोलाई में रगड़ें और पानी से धो दें।फायदा: नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड खारे पानी के मिनरल डिपॉजिट्स को तुरंत तोड़ देता है और पूरे बाथरूम में ताजगी भरी खुशबू भी छोड़ता है।3. हाइड्रोजन पेरोक्साइड और डिशवॉश जेल: काली पड़ी ग्राउटिंग के लिएटाइल्स के बीच की सफेद सीमेंट वाली लाइनें (Grout Lines) समय के साथ फंगस और गंदगी की वजह से काली पड़ जाती हैं, जिन्हें सामान्य पोछे से साफ करना नामुमकिन होता है।इस्तेमाल का तरीका: एक कटोरी में आधा कप बेकिंग सोडा, एक चौथाई कप हाइड्रोजन पेरोक्साइड (3% Medical Grade) और 1 चम्मच लिक्विड डिशवॉश जेल मिलाएं। इस पेस्ट को टाइल्स की काली लाइनों पर लगाएं और 10 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद किसी सख्त ब्रश से हल्का सा स्क्रब करें। सारी जमी हुई काली फंगस और फफूंद तुरंत बाहर निकल आएगी।फायदा: हाइड्रोजन पेरोक्साइड एक सुरक्षित ब्लीचिंग एजेंट की तरह काम करता है जो फंगस और बैक्टीरिया का पूरी तरह खात्मा कर देता है।4. स्टीम और गर्म पानी का स्मार्ट ट्रिक: बिना मेहनत मैल ढीला करेंयदि फर्श पर चिपचिपापन बहुत ज्यादा है, तो सफाई शुरू करने से पहले 5 मिनट की एक छोटी सी ट्रिक आपकी आधी मेहनत बचा सकती है।इस्तेमाल का तरीका: सफाई शुरू करने से पहले बाथरूम के सारे दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दें। गीजर चालू करके बेहद गर्म पानी की एक बाल्टी फर्श पर बहा दें या शॉवर से गर्म पानी चलाकर 5 मिनट के लिए छोड़ दें। गर्म भाप (Steam) से टाइल्स पर जमा ग्रीस और साबुन का मैल तुरंत ढीला हो जाता है। इसके बाद जब आप कोई भी क्लीनर लगाते हैं, तो मैल बिना रगड़े आसानी से बह जाता है।5. ब्लीचिंग पाउडर से दूर करें फिसलन और काईबरसात या सीलन के मौसम में बाथरूम के फर्श पर अक्सर हरी या काली फिसलन भरी काई जम जाती है, जिससे फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है।इस्तेमाल का तरीका: एक बाल्टी गुनगुने पानी में 2 चम्मच ब्लीचिंग पाउडर घोलें और इसे फर्श पर फैला दें। 10 मिनट बाद झाड़ू या ब्रश से साफ करके पानी बहा दें।फायदा: यह काई को जड़ से खत्म करता है और कीटाणुओं को नष्ट करके बाथरूम को पूरी तरह सैनिटाइज कर देता है।बाथरूम को हमेशा चमकदार रखने के 3 गोल्डन रूल्सरोजाना वाइपर का इस्तेमाल: नहाने के तुरंत बाद फर्श पर जमा पानी को वाइपर से ड्रेन की तरफ निकाल दें। फर्श जितना सूखा रहेगा, खारे पानी के दाग उतने ही कम बनेंगे।सप्ताह में एक बार मेंटेनेंस स्प्रे: पानी और सिरके को बराबर मात्रा में मिलाकर एक स्प्रे बोतल में रख लें और हफ्ते में दो बार नहाने के बाद हल्का स्प्रे कर दें, इससे गहरी गंदगी कभी जमेगी ही नहीं।एसिड के अत्यधिक उपयोग से बचें: टॉयलेट क्लीनिंग एसिड को कभी भी फर्श की टाइल्स पर सीधे न डालें, यह टाइल्स की ऊपरी इनेमल को जला देता है जिससे बाद में गंदगी और तेजी से चिपकने लगती है।
भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों स्क्रीन पर काम करना, तनाव, धूप और पानी की कमी के चलते सिरदर्द (Headache) होना आज बेहद आम बात हो चुकी है। ज्यादातर लोग सिर में हल्का सा भारीपन या दर्द महसूस होते ही तुरंत पेनकिलर (दर्द निवारक गोलियां) खा लेते हैं। बार-बार पेनकिलर खाने से न केवल किडनी और लिवर पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि शरीर को इन दवाइयों की आदत भी पड़ जाती है।न्यूट्रिशनिस्ट्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, लगभग 70% मामलों में सिरदर्द का मुख्य कारण माइग्रेन या कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन होता है। ऐसे में बिना किसी केमिकल वाली दवा के, रसोई में मौजूद सिर्फ 1 चुटकी नमक से 5 मिनट के भीतर सिरदर्द से जादुई राहत पाई जा सकती है।सिरदर्द और शरीर में नमक (इलेक्ट्रोलाइट्स) का क्या कनेक्शन है?जब शरीर में पानी या मिनरल्स की कमी होती है, तो दिमाग की नसों में रक्त संचार (Blood Flow) और सोडियम-पोटेशियम का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण मस्तिष्क की नसें सिकुड़ने लगती हैं और सिर में तेज दर्द, भारीपन या चक्कर आने जैसा महसूस होता है।न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, जब आप सही तरीके से प्राकृतिक नमक का सेवन करते हैं, तो यह शरीर में तुरंत इलेक्ट्रोलाइट स्तर को संतुलित करता है, न्यूरोट्रांसमीटर्स को शांत करता है और दिमाग की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) में तनाव को कम करके कुछ ही मिनटों में दर्द से आराम दिलाता है।न्यूट्रिशनिस्ट का 1 चुटकी नमक वाला जादुई फॉर्मूला: कैसे करें इस्तेमाल?इस घरेलू नुस्खे को तैयार करना बेहद आसान है और इसके लिए आपको केवल घर में रखी 3 साधारण चीजों की जरूरत होती है:सामग्री: 1 चुटकी शुद्ध सेंधा नमक (Rock Salt) या हिमालयन पिंक सॉल्ट (Pink Salt), आधा नींबू का रस और 1 गिलास हल्का गुनगुना पानी।बनाने और लेने का तरीका: एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़ें और उसमें 1 चुटकी सेंधा नमक अच्छी तरह घोल लें। इसे घूंट-घूंट करके आराम से पिएं।दूसरा त्वरित तरीका: यदि आपको तुरंत तेज राहत चाहिए, तो जीभ के नीचे (Sublingually) एक चुटकी सेंधा नमक रखें और उसे धीरे-धीरे घुलने दें। उसके 1 मिनट बाद एक पूरा गिलास सादा पानी पी लें। जीभ के नीचे मौजूद बारीक नसें नमक के मिनरल्स को सीधे रक्तप्रवाह में पहुंचा देती हैं, जिससे 5 मिनट में राहत मिलती है।सादे सफेद नमक के बजाय 'सेंधा या पिंक सॉल्ट' ही क्यों चुनें?एक्सपर्ट्स साफ तौर पर सलाह देते हैं कि इस नुस्खे के लिए रिफाइंड टेबल सॉल्ट (सफेद नमक) का उपयोग न करें:84 जरूरी ट्रेस मिनरल्स: सेंधा नमक या हिमालयन पिंक सॉल्ट में सोडियम के अलावा मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम और जिंक जैसे 84 प्राकृतिक खनिज पाए जाते हैं।मैग्नीशियम का असर: मैग्नीशियम को प्राकृतिक 'मसल रिलैक्सेंट' माना जाता है, जो सिर और गर्दन की मांसपेशियों के तनाव को सेकंडों में शांत कर देता है।प्राकृतिक पीएच संतुलन: यह शरीर के एसिड-एल्कलाइन संतुलन को तुरंत रिसेट करने में मदद करता है।इन 4 बातों का भी रखें विशेष ध्यानहाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के मरीज सावधानी बरतें: यदि आपको हाई बीपी की समस्या है, तो नमक का यह नुस्खा आजमाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें या केवल सादा नींबू पानी पिएं।पर्याप्त पानी पिएं: नुस्खा लेने के बाद दिनभर में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी जरूर पिएं ताकि डिहाइड्रेशन दोबारा न हो।ठंडे या गर्म पानी की पट्टी: नुस्खा पीने के साथ-साथ माथे पर ठंडे पानी की पट्टी या गर्दन के पीछे आइस पैक रखने से सिरदर्द और तेजी से गायब होता है।डॉक्टर से संपर्क कब करें: यदि सिरदर्द के साथ आंखों के आगे अंधेरा छाना, उल्टी आना, बोलने में लड़खड़ाहट या गर्दन में तेज अकड़न जैसे लक्षण दिखें, तो यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है, ऐसे में तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या चिकित्सक से जांच कराएं।
लगातार बढ़ रही मेडिकल महंगाई (Medical Inflation) और गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच आज के समय में हर परिवार के पास एक मजबूत हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी (Health Insurance Policy) का होना अनिवार्य हो चुका है। अस्पताल में एक बार भर्ती होने पर लाखों रुपये का खर्च आपकी वर्षों की जमा-पूंजी को एक झटके में खत्म कर सकता है।अक्सर लोग हेल्थ पॉलिसी खरीदते समय केवल कम प्रीमियम (सस्ते दाम) या एजेंट की बातों पर भरोसा कर लेते हैं और पॉलिसी के बारीक नियमों व शर्तों (Fine Print) को पढ़ना भूल जाते हैं। नतीजा यह होता है कि जब वास्तव में मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम का एक बड़ा हिस्सा खारिज कर देती है या क्लेम पूरी तरह रिजेक्ट हो जाता है। ऐसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पॉलिसी का प्रीमियम भरने से पहले इन 6 सबसे महत्वपूर्ण बातों की पड़ताल करना बेहद जरूरी है।1. रूम रेंट कैपिंग (Room Rent Limit) और प्रोपोर्शनल डिडक्शन का खेलहेल्थ इंश्योरेंस में सबसे बड़ा वित्तीय झटका अक्सर रूम रेंट कैपिंग की वजह से लगता है। कई पुरानी या सस्ती पॉलिसियों में यह शर्त होती है कि आप सम इंश्योर्ड का केवल 1% (यानी ₹5 लाख की पॉलिसी पर ₹5,000 प्रतिदिन) का ही कमरा ले सकते हैं।प्रोपोर्शनल डिडक्शन का खतरा: यदि आप तय सीमा से महंगे कमरे (जैसे ₹8,000/दिन वाले प्राइवेट रूम) में भर्ती होते हैं, तो बीमा कंपनी न केवल कमरे का अतिरिक्त किराया काटती है, बल्कि डॉक्टर की फीस, ऑपरेशन और जांच खर्चों पर भी आनुपातिक कटौती (Proportional Deduction) लागू कर देती है।क्या करें: हमेशा ऐसी पॉलिसी चुनें जिसमें 'नो रूम रेंट कैपिंग' (No Room Rent Limit) या कम से कम 'सिंगल प्राइवेट एसी रूम' की स्पष्ट पात्रता हो।2. पहले से मौजूद बीमारियों का वेटिंग पीरियड (Pre-Existing Disease Waiting Period)यदि आपको पॉलिसी लेते समय पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या (जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉयड या अस्थमा) है, तो इसे प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज (PED) माना जाता है।बीमा कंपनियां इन बीमारियों और इनसे जुड़े इलाज के खर्च को तुरंत कवर नहीं करतीं। इसके लिए 1 से 3 साल का वेटिंग पीरियड निर्धारित होता है।पॉलिसी खरीदते समय हमेशा कम से कम वेटिंग पीरियड वाली पॉलिसी को प्राथमिकता दें।सबसे अहम बात यह है कि फॉर्म भरते समय अपनी किसी भी पुरानी बीमारी, सर्जरी या दवाइयों की हिस्ट्री को कभी न छुपाएं। यदि जांच में यह पाया गया कि आपने बीमारी छिपाई थी, तो कंपनी धोखाधड़ी के आधार पर क्लेम खारिज कर सकती है।3. को-पेमेंट (Co-Payment) और डिडक्टिबल क्लॉज की जांचको-पेमेंट का मतलब है कि अस्पताल के कुल बिल का एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 10%, 20% या 30%) आपको अपनी जेब से भरना होगा और बाकी बचा हुआ हिस्सा ही बीमा कंपनी देगी।कई कंपनियां प्रीमियम कम दिखाने के लिए पॉलिसी में चुपचाप 20% का को-पेमेंट जोड़ देती हैं। उदाहरण के लिए, यदि ₹5 लाख का बिल आता है, तो ₹1 लाख आपको खुद चुकाने होंगे।यदि आप वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए पॉलिसी नहीं ले रहे हैं, तो हमेशा शून्य को-पेमेंट (Zero Co-payment) वाली पॉलिसी ही चुनें।4. कैशलेस नेटवर्क हॉस्पिटल्स और रीस्टोरेशन बेनिफिटआपातकाल की स्थिति में जेब से पैसे लगाने और बाद में रिइंबर्समेंट के लिए क्लेम फाइल करने का झंझट बहुत तनावपूर्ण होता है।नेटवर्क अस्पताल: चेक करें कि आपके शहर और आपके घर के आसपास के प्रमुख मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल उस बीमा कंपनी के कैशलेस नेटवर्क में शामिल हैं या नहीं।रीस्टोरेशन / रीलोड बेनिफिट: यदि एक ही पॉलिसी वर्ष में पूरा सम इंश्योर्ड खर्च हो जाता है, तो क्या कंपनी बिना किसी अतिरिक्त प्रीमियम के आपका बीमा कवर दोबारा 100% रीस्टोर (Recharge) करती है? यह फीचर खासकर फैमिली फ्लोटर पॉलिसियों में परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए जीवनदान साबित होता है।5. क्लेम सेटलमेंट रेशियो (CSR) और इनकर्ड क्लेम रेशियो (ICR)बीमा कंपनी की विश्वसनीयता का पता लगाने के लिए भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़े जरूर देखें:क्लेम सेटलमेंट रेशियो (CSR): यह दर्शाता है कि कंपनी के पास आए कुल 100 क्लेम्स में से उसने कितने क्लेम्स पास किए। हमेशा 95% से अधिक क्लेम सेटलमेंट रेशियो और कम क्लेम रिजेक्शन रेट वाली कंपनी चुनें।क्लेम सेटलमेंट का समय: यह भी जांचें कि कंपनी कैशलेस क्लेम को अप्रूव करने में औसतन कितना समय (Turnaround Time) लेती है।6. नो-क्लेम बोनस (NCB) और डे-केयर प्रोसीजर्स का दायरानो-क्लेम बोनस (NCB): जिस साल आप कोई क्लेम नहीं लेते, उस साल कई कंपनियां आपके सम इंश्योर्ड को 10% से 50% तक (बिना प्रीमियम बढ़ाए) बढ़ा देती हैं। ऐसी पॉलिसी चुनें जिसमें 100% से 200% तक संचयी बोनस (Cumulative Bonus) मिलता हो।डे-केयर प्रोसीजर्स (Day Care Treatments): आधुनिक मेडिकल साइंस के कारण कई सर्जरी (जैसे मोतियाबिंद, कीमोथेरेपी, डायलिसिस या किडनी स्टोन लिथोट्रिप्सी) में 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती। सुनिश्चित करें कि आपकी पॉलिसी में सभी आधुनिक डे-केयर प्रोसीजर्स और रोबोटिक सर्जरी बिना किसी उप-सीमा (Sub-limit) के कवर हों।सही चयन ही देगा असली सुरक्षाहेल्थ इंश्योरेंस केवल टैक्स बचाने का दस्तावेज नहीं, बल्कि आपके परिवार की गाढ़ी कमाई और मानसिक शांति का सुरक्षा कवच है। पॉलिसी का चयन करते समय ₹500 या ₹1,000 का प्रीमियम बचाने के चक्कर में खराब शर्तों वाली पॉलिसी लेने से बचें। पॉलिसी डॉक्युमेंट को ध्यान से पढ़ें, सभी बीमारियों का सच बताएं और व्यापक कवरेज वाला प्लान चुनकर भविष्य को सुरक्षित करें।
Saree Draping Tips: साड़ी में Slim और Tall दिखने के लिए अपनाएं ये 3 आसान Fashion Hacks
हर भारतीय नारी साड़ी परिधान में बेहद खूबसूरत नजर आती है। साड़ी पहनने की चाहत हर किसी लड़की को होती है। ऐसे में लड़किया चाहती हैं कि वह साड़ी में लंबी और पतली नजर आएं। हालांकि हर बार साड़ी को गलत तरीके से पहनने के कारण लुक खराब हो जाता है। ऐसे में कई महिलाएं अच्छी-खासी हाइट होने के बावजूद वह छोटी नजर आती है। अब आप इन तरीकों से साड़ी पहनेंगे, तो आप पतली और लंबी नजर आएंगी। पल्लू को लंबा और सीधा रखें अक्सर कई महिलाओं को साड़ी खुले पल्लू के साथ कम पसंद होती है। वह प्लेट्स लगाकर साड़ी पहनना पंसद करती हैं। यदि आप इस तरह से साड़ी पहनना पसंद करती हैं, तो प्लेट्स को बहुत ज्यादा चौड़ी या लंबी न बनाएं। - इसके लिए पल्लू की प्लेट्स पतली और बराबर रखें, तो अच्छा है। - पल्लू का ज्यादा छोटा न रखें। - कंधे पर इसे अच्छी तरह पिन करें। - पल्लू को कमर पर ज्यादा फैलाएं नहीं। - पल्लू पर बना बॉर्डर भी सीधा रखें। पतली बॉर्डर वाली साड़ी का चयन करें जब आप साड़ी का पहनें, तो इसका सही चयन करना काफी जरुरी है। बहुत अधिक चौड़ी बॉर्डर वाली साड़ी में कितनी भी पतली प्लेट्स बना लें, बॉर्डर को मोडा नहीं जा सकता है, इसलिए पतली बॉर्डर वाली साड़ी का चयन करें। वहीं, पतली बॉर्डर वाली साड़ी में आप लंबी और पतली दिखाई देंगी। - ध्यान रखें कि बॉर्डर को प्लीट्स में ज्यादा मोड़ने से बचें। - वर्टिकल या लंबी डिजाइन वाली साड़ी में आप लंबी जरुर दिखेंगी। - छोटे और बिखरे हुए प्रिंट के बजाय स्ट्रेट पैटर्न ट्राई करें। पल्लू खुला रखना रहेगा बेस्ट अगर आप साड़ी में लंबी और पतली दिखना चाहती हैं, तो खुले पल्लू में साड़ी कैरी करना काफी फायदेमंद हो सकता है। - पल्लू की लंबाई घुटने के आसपास या उससे नीचे तक रखें। - कंधे पर पल्लू को हल्का पीछे की तरफ सेट कर लें। - सामने से पल्लू की सीधी लाइन बनी रहना जरुरी है।
रिलेशनशिप टिप्स: पार्टनर से इन 5 बातों पर न करें बहस, रिश्ते में बढ़ सकता है तनाव
किसी भी रिश्ते में असहमति होना असामान्य नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि मतभेद के दौरान दोनों एक-दूसरे के सम्मान और भावनाओं का ध्यान रखें।
सितंबर का समय किचन में देसी और सीज़नल स्वाद वापस लाने का अच्छा मौका हो सकता है। कद्दू, बाजरा, मूंग दाल, चना और मक्का जैसी सामान्य सामग्री से कई अलग-अलग रेसिपीज़ तैयार की जा सकती हैं।
समोसा-कचौड़ी के शौकीन हैं तो पढ़ लें ये खबर, रोज खाने से बढ़ सकती हैं ये परेशानियां
Health Risk: अगर आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें नाश्ते में समोसे और कचौड़ी ही खाना पसंद है तो ये खबर आपको अवश्य पढ़नी चाहिए। यहां हम आपको इसके नुकसान बताएंगे।
Health Risk: घरों से लेकर रेस्टोरेंटों तक में सब्जी काटने के लिए चॉपिंग बोर्ड का इस्तेमाल होता है। ये कितना खतरनाक है और आपके शरीर को क्या नुकसान पहुंचाता है, आइए जानते हैं इस बारे में।
बचपन में कैंसर का नाम सुनते ही हर माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है। आमतौर पर कैंसर को वयस्कों की बीमारी माना जाता है, जो अस्वस्थ खान-पान, धूम्रपान या जीवनशैली से जुड़ी होती है। हालांकि, बच्चों में कैंसर होने की प्रक्रिया और इसके कारण वयस्कों से पूरी तरह अलग होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में समय पर सही लक्षणों की पहचान और तत्काल इलाज शुरू होने से लगभग 80% से अधिक बाल कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में कैंसर के मुख्य कारणों, चेतावनी संकेतों और सही समय पर जांच के तरीकों को समझना बेहद जरूरी है।बच्चों में कैंसर होने के मुख्य कारण क्या हैं?वयस्कों में होने वाले कैंसर के विपरीत बच्चों में कैंसर खराब लाइफस्टाइल या खान-पान की वजह से नहीं होता। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:जेनेटिक और डीएनए म्यूटेशन (DNA Mutations): बच्चों में अधिकांश कैंसर कोशिकाओं के डीएनए में अचानक होने वाले बदलावों (म्यूटेशन) के कारण होते हैं। यह बदलाव कोशिकाओं को अनियंत्रित रूप से बढ़ने और ट्यूमर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।आनुवंशिक कारण (Inherited Genetic Conditions): लगभग 5 से 10 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी परिवार से विरासत में मिली आनुवंशिक विसंगतियों (जैसे डाउन सिंड्रोम, ली-फ्रामेनी सिंड्रोम) से जुड़ी होती है।गर्भावस्था या शुरुआती पर्यावरण जोखिम: कुछ दुर्लभ मामलों में जन्म से पूर्व रेडिएशन का अत्यधिक संपर्क या विशेष टॉक्सिन्स भी इसके कारक बन सकते हैं, हालांकि अधिकांश मामलों में कोई स्पष्ट बाहरी कारण नहीं मिलता।बच्चों में सबसे ज्यादा दिखने वाले कैंसर के प्रकारबच्चों में मुख्य रूप से ऐसे कैंसर होते हैं जो तेजी से विकसित हो रहे ऊतकों को प्रभावित करते हैं:ल्यूकेमिया (Leukemia): यह बच्चों में सबसे आम ब्लड कैंसर है, जो बोन मैरो में श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBCs) को प्रभावित करता है।ब्रेन और सीएनएस ट्यूमर (Brain Tumors): मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में विकसित होने वाले ट्यूमर।लिम्फोमा (Lymphoma): लसीका प्रणाली (Lymphatic System) को प्रभावित करने वाला कैंसर।न्यूरोब्लास्टोमा (Neuroblastoma): तंत्रिका कोशिकाओं का कैंसर, जो अक्सर एड्रिनल ग्लैंड या पेट में शुरू होता है।रेटिनोब्लास्टोमा (Retinoblastoma): आंख की पुतली (रेटिना) का कैंसर, जो 5 साल से छोटे बच्चों में अधिक दिखता है।विल्म्स ट्यूमर (Wilms Tumor): बच्चों के गुर्दे (किडनी) में होने वाला ट्यूमर।इन शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाजबच्चों में कैंसर के लक्षण अक्सर सामान्य बाल बीमारियों (जैसे फ्लू, सामान्य चोट या पेट की खराबी) से मिलते-जुलते होते हैं, जिसके कारण कई बार बीमारी पकड़ में आने में देरी हो जाती है। यदि निम्नलिखित लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से संपर्क करें:अस्पष्ट और लगातार बुखार: बिना किसी स्पष्ट संक्रमण के बार-बार बुखार आना या हफ्तों तक ठीक न होना।असामान्य गांठ या सूजन: गर्दन, कांख, पेट, कमर या अंडकोष में बिना दर्द वाली गांठ का उभरना और समय के साथ बढ़ना।अत्यधिक थकान और पीलापन: बच्चे का सुस्त रहना, ऊर्जा की भारी कमी और शरीर में खून (हीमोग्लोबिन) की कमी दिखना।आसानी से चोट लगना या ब्लीडिंग: बिना किसी बड़ी चोट के त्वचा पर नीले निशान (Bruises) पड़ना या मसूड़ों/नाक से खून बहना।हड्डियों और जोड़ों में तेज दर्द: बच्चे का लगातार टांगों या पीठ में दर्द की शिकायत करना, जो रात में अधिक बढ़ जाए या बच्चे को लंगड़ाने पर मजबूर करे।आंखों में सफेद चमक: कैमरे की फ्लैश लाइट या रोशनी में बच्चे की पुतली का बिल्ली की आंख जैसा सफेद दिखना या भेंगापन (Strabismus) आना।लगातार उल्टी और सिरदर्द: सुबह उठते ही सिरदर्द और बिना पेट खराब हुए लगातार उल्टियां होना (ब्रेन ट्यूमर का संभावित संकेत)।सही समय पर जांच और इलाज की दिशायदि माता-पिता को बच्चे में कोई भी असामान्य लक्षण लगातार 2 से 3 सप्ताह तक दिखाई दे, तो घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत योग्य डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। प्राथमिक जांचों में कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC), अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और जरूरत पड़ने पर एमआरआई या बायोप्सी की जाती है।आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों—जैसे कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, सर्जरी और इम्यूनोथेरेपी—ने बाल कैंसर के इलाज की सफलता दर को काफी बढ़ा दिया है। बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में कीमोथेरेपी को बेहतर तरीके से सहन कर लेता है और उनके ठीक होने की संभावना अधिक होती है। जागरूकता, समय पर पहचान और बिना देरी किया गया सही इलाज ही बाल कैंसर को हराने का सबसे कारगर उपाय है।
हेल्थ टिप्स: आपकी ये पसंदीदा चीजें लिवर के लिए हो सकती हैं जहर? समय रहते संभल जाएं
लिवर को नुकसान पहुंचाने के लिए सिर्फ शराब ही जिम्मेदार नहीं है। ज्यादा चीनी वाले पेय, तली-भुनी चीजें, फास्ट फूड और अधिक नमक वाले प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भी लिवर पर बुरा असर डाल सकते हैं।
मेडिकल साइंस की दुनिया में कई बार ऐसे अजीबोगरीब और हैरान करने वाले मामले सामने आते हैं जिन्हें सुनकर आम इंसान तो क्या, खुद डॉक्टर भी सोच में पड़ जाते हैं. हाल ही में एक ऐसा ही मेडिकल केस तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक महिला जब रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल पहुंची और उसे अपनी प्रेगनेंसी का पता चला, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. महिला का सबसे बड़ा और उलझन भरा सवाल यह था कि जब उसे हर महीने बिल्कुल समय पर और नियमित रूप से पीरियड्स (मासिक धर्म) आ रहे थे, तो फिर वह गर्भधारण कैसे कर सकती है. महिला का यह सवाल जितना अजीब लग रहा है, मेडिकल दृष्टिकोण से इसके पीछे कुछ बेहद दिलचस्प और तकनीकी कारण छिपे होते हैं जिन्हें हर महिला को जानना बेहद जरूरी है. अक्सर समाज में यह एक बहुत बड़ी और आम गलतफहमी फैली हुई है कि यदि किसी स्त्री को नियमित रूप से माहवारी आ रही है, तो इसका मतलब यह है कि वह गर्भवती नहीं हो सकती. लेकिन शरीर की आंतरिक क्रियाएं और हॉर्मोन्स का खेल कई बार इतने अलग तरीके से काम करता है कि महिला के मन में इस तरह की भ्रांतियां पैदा होना स्वाभाविक है. इस पूरी घटना के सामने आने के बाद से स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया है कि महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों और मेडिकल साइंस की वास्तविकिकताओं को भली-भांति समझना चाहिए ताकि किसी भी तरह के भ्रम या अनचाही स्थिति से बचा जा सके.मेडिकल साइंस की नजर में क्या पीरियड्स आने के बावजूद प्रेगनेंसी संभव हैइस अनोखे और पेचीदा मामले के तूल पकड़ने के बाद देश के जाने-माने स्त्री रोग विशेषज्ञों ने इस बात से पर्दा उठाया है कि मासिक धर्म और गर्भावस्था के बीच का गणित वास्तव में कैसे काम करता है. डॉक्टरों के अनुसार, हर महीने ब्लीडिंग होना हमेशा इस बात की गारंटी नहीं होता है कि वह सामान्य और पूर्ण मासिक धर्म ही है, क्योंकि कई बार प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों में होने वाली ब्लीडिंग या ब्लीडिंग जैसे अन्य ब्लीडिंग एपिसोड्स को महिलाएं गलती से अपने पीरियड्स समझ बैठती हैं. इसे मेडिकल भाषा में इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (Implantation Bleeding) कहा जाता है, जो तब होती है जब fertilized egg गर्भाशय की दीवार से चिपकता है, और इसका रंग या फ्लो सामान्य पीरियड्स से थोड़ा अलग हो सकता है. इसके अलावा, कुछ विशेष प्रकार के हार्मोनल असंतुलन या प्लेसेंटल ब्लीडिंग के कारण भी कई गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में हल्का रक्तस्राव महसूस होता रहता है, जिसे वे अपनी नियमित महावारी मानकर धोखा खा जाती हैं. यही कारण है कि महिला को यह भ्रम बना रहता है कि उसे तो हर महीने समय पर पीरियड्स आ रहे हैं, जबकि असलियत में उसके गर्भ में एक नए जीवन का विकास शुरू हो चुका होता है. इस वैज्ञानिक सच्चाई को जानने के बाद उस महिला के साथ-साथ कई अन्य लोगों की भी आँखें खुल गईं जो इस गलतफहमी में जी रहे थे कि रेगुलर पीरियड्स का मतलब शत-प्रतिशत नॉन-प्रेग्नेंट होना होता है.महिलाओं के बीच फैली इन आम गलतफहमियों और मिथकों को दूर करना क्यों है जरूरीहमारे समाज में महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रजनन प्रणाली (Reproductive System) और मासिक धर्म से जुड़ी कई प्रकार की दबी-छिपी बातें और भ्रामक जानकारियां आज भी मजबूती से फैली हुई हैं. बहुत सी युवतियां और महिलाएं यह मानती हैं कि यदि वे सुरक्षित दिनों (Safe Periods) का हिसाब रख रही हैं या उन्हें नियमित रूप से ब्लीडिंग हो रही है, तो उन्हें गर्भनिरोधक उपायों की कोई आवश्यकता नहीं है, जो कि एक बहुत बड़ा चिकित्सीय जोखिम साबित हो सकता है. स्त्री रोग विशेषज्ञों का यह साफ कहना है कि महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले जरा से भी बदलाव, असामान्य ब्लीडिंग या अन्य शारीरिक लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. इस तरह के मामले इस बात की तस्दीक करते हैं कि महिलाओं में सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ एजुकेशन की कितनी गहरी कमी है, जिसे दूर करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है. जब तक महिलाएं अपने शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली को वैज्ञानिक नजरिए से नहीं समझेंगी, तब तक इस तरह के भ्रम समाज में बने रहेंगे और वे अनचाही गर्भधारण जैसी समस्याओं से जूझती रहेंगी. डॉक्टरों ने यह भी सलाह दी है कि प्रेगनेंसी का पता लगाने के लिए केवल पीरियड्स के आने या न आने पर निर्भर रहने के बजाय, जब भी किसी प्रकार का असमंजस हो, तो होम प्रेगनेंसी टेस्ट किट का इस्तेमाल करना या डॉक्टर से अल्ट्रासाउंड कराना ही सबसे सुरक्षित और सटीक तरीका होता है.समय पर सही जानकारी और मेडिकल जांच से कैसे बचा जा सकता है ऐसी स्थितियों सेजिंदगी की भागदौड़ और आधुनिक जीवनशैली के बीच अक्सर लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो जाते हैं, और जब शरीर कोई असामान्य संकेत देता है तो वे उसे समझ नहीं पाते हैं. इस पूरी घटना ने एक बार फिर से इस बात पर मुहर लगा दी है कि महिलाओं को अपने शरीर की हर छोटी-बड़ी गतिविधि के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की चिकित्सीय शंका होने पर झिझक को छोड़कर डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए. मेडिकल साइंस ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि ब्लड टेस्ट (HCG Levels) और अल्ट्रासाउंड के जरिए शरीर के भीतर की हर स्थिति का चंद मिनटों में पता लगाया जा सकता है. डॉक्टर ने उस महिला की पूरी काउंसलिंग की और उसे समझाया कि उसके शरीर में हॉर्मोनल बदलाव किस तरह से काम कर रहे थे, जिसके बाद महिला की सारी उलझनें दूर हो गईं. यह मामला न केवल उस महिला के लिए बल्कि समाज की हर उस महिला के लिए एक बड़ा सबक है जो पारंपरिक और अधूरी जानकारियों के सहारे अपनी सेहत का आकलन करती हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अंत में यही संदेश है कि जागरूकता ही बचाव है, और जब बात मातृत्व और प्रजनन स्वास्थ्य की हो, तो किसी भी प्रकार का अनुमान लगाने के बजाय हमेशा वैज्ञानिक और चिकित्सकीय प्रमाणों पर ही भरोसा करना चाहिए.
कुकिंग टिप्स: पकौड़े कुरकुरे कैसे बनाएं? ये टिप्स हैं बड़े काम की
Crispy Pakoda Recipe: अगर आप भी बारिश में कुरकुरे पकौड़ों का मजा लेना चाहते हैं, लेकिन उन्हें बना नहीं पाते हैं तो ये लेख आपके काम का है। यहां हम आपको कुरकुरे पकौड़े बनाने की विधि बताएंगे।
Relationship Tips: इस लेख में जानें प्यार होने के बावजूद पार्टनर के बीच बातचीत क्यों कम हो जाती है। इन छोटी-छोटी आदतों को पहचानकर रिश्ते में बढ़ती दूरी को समय रहते कैसे कम करें।
जानना जरूरी: हर सुबह उठते ही होता है सिरदर्द? ये तकिया की गड़बड़ी है या किसी गंभीर बीमारी का संकेत
सुबह उठते ही सिरदर्द केवल तकिए या गलत सोने की मुद्रा की वजह से नहीं होता। नींद की कमी, पानी की कमी और स्लीप एपनिया भी कारण हो सकते हैं। बार-बार होने वाले सिरदर्द को नजरअंदाज न करें और साथ दिखने वाले दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान दें।
भारतीय रसोई की शान और दाल-सब्जी में तड़के का स्वाद बढ़ाने वाले करी पत्ते के बिना हर पकवान अधूरा सा लगता है, लेकिन अक्सर लोगों की यह शिकायत रहती है कि उनके घर में लगा करी पत्ते का पौधा या तो सूख जाता है या फिर उसकी ग्रोथ पूरी तरह से रुक जाती है। पौधे की पत्तियां पीली पड़कर गिरने लगती हैं और वह हरा-भरा और घना दिखने के बजाय एकदम मुरझाया हुआ नजर आता है। नर्सरी और बागवानी के जानकारों का मानना है कि करी पत्ते के पौधे (मीठी नीम) को सही देखभाल और उचित पोषण की जरूरत होती है। हाल ही में एक अनुभवी माली ने करी पत्ते के पौधे को हरा-भरा, घना और तेजी से बढ़ाने का एक ऐसा अचूक और फ्री का सीक्रेट तरीका बताया है, जिसे अपनाकर आप कुछ ही हफ्तों में अपने पौधे की कायापलट कर सकते हैं।करी पत्ते के पौधे के सूखने और खराब होने के असली कारणअपने घर के जीमेल या बालकनी में लगे करी पत्ते के पौधे को हरा-भरा रखना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है, बशर्ते आपको यह पता हो कि पौधा किन कारणों से खराब होता है। ज्यादातर मामलों में लोग पौधे में जरूरत से ज्यादा पानी डाल देते हैं, जिससे उसकी जड़ें सड़ने लगती हैं और पत्तियां पीली पड़कर गिरने लगती हैं। इसके अलावा, मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, धूप की उचित मात्रा न मिलना और गमले में जल निकासी (ड्रेनेज) की खराब व्यवस्था भी इस पौधे के मुरझाने के प्रमुख कारण हैं। माली का कहना है कि जब तक पौधे की मिट्टी को समय-समय पर पोषण नहीं मिलता, तब तक उसकी ग्रोथ रुक जाती है। इसलिए महंगे केमिकल फर्टिलाइजर खरीदने के बजाय घर की रसोई से निकलने वाली प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करना सबसे फायदेमंद होता है।माली द्वारा बताया गया फ्री का जादुई घोल और बनाने की विधिकरी पत्ते के पौधे को फिर से हरा-भरा और घना बनाने के लिए माली ने एक बेहद आसान और पूरी तरह से फ्री के घरेलू घोल का फॉर्मूला शेयर किया है। इस घोल को बनाने के लिए आपको बाजार से कोई महंगी खाद लाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बल्कि यह आपके घर में रोजाना फेंकी जाने वाली चीजों से तैयार हो जाता है। आपको करना यह है कि रसोई में इस्तेमाल होने वाले प्याज के छिलके और लहसुन के छिलकों को इकट्ठा करना है। प्याज और लहसुन के छिलकों में पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और कई अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो पौधों की ग्रोथ के लिए टॉनिक का काम करते हैं। इन छिलकों को एक लीटर पानी में भिगोकर 24 से 48 घंटे के लिए किसी बर्तन में ढककर रख दें। दो दिन बाद जब पानी का रंग पूरी तरह बदल जाए, तो छिलकों को छानकर अलग कर लें और जो तरल घोल आपके पास बचेगा, वही आपके पौधे के लिए अमृत समान है।पौधे में इस घोल को डालने का सही तरीका और नियममाली के बताए गए इस सीक्रेट घोल को पौधे में डालने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है ताकि पौधे को उसका पूरा लाभ मिल सके। सबसे पहले अपने गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई कर लें ताकि मिट्टी पोली हो जाए और हवा जड़ों तक आसानी से पहुंच सके। इसके बाद तैयार किए गए प्याज और लहसुन के छिलके वाले इस लिक्विड फर्टिलाइजर को पौधे की जड़ों में डाल दें। ध्यान रहे कि इस घोल को सीधे डालने के बजाय इसमें थोड़ा सा सादा पानी और मिला सकते हैं ताकि इसकी मात्रा संतुलित हो जाए। महीने में कम से कम दो बार इस प्रक्रिया को दोहराने से पौधे की मिट्टी की उर्वरता तेजी से बढ़ती है और जड़ों को वह सारा पोषण मिलता है जिसकी उसे तलाश होती है।करी पत्ते के पौधे को घना और हरा-भरा बनाने के अन्य आसान टिप्सलिक्विड फर्टिलाइजर डालने के साथ-साथ अगर आप कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो आपका करी पत्ता इतनी तेजी से फैलेगा कि उसकी शाखाएं घनी हो जाएंगी। सबसे पहली बात यह है कि करी पत्ते के पौधे को रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए क्योंकि यह धूप का बहुत शौकीन पौधा है। दूसरी बात, जब पौधा ऊपर की तरफ बढ़ने लगे तो उसकी ऊपर की टिप (शीर्ष भाग) की हल्की सी कटाई यानी प्रूनिंग (Pruning) कर दें। ऐसा करने से पौधा लंबा होने के बजाय बगल से नई शाखाएं निकालने लगता है और देखते ही देखते घना हो जाता है। इसके अलावा, महीने में एक बार मिट्टी में वर्मी कंपोस्ट या गोबर की पुरानी खाद मिलाने से भी पौधे की चमक बरकरार रहती है।इस आसान उपाय से कुछ ही हफ्तों में दिखेगा चमत्कारयदि आप माली के बताए गए इन सरल और प्राकृतिक उपायों को अपने घर पर आजमाते हैं, तो आपको बाजार से किसी भी प्रकार के महंगे रासायनिक खाद या कीटनाशक खरीदने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। कुछ ही हफ्तों के भीतर आपके मुरझाए हुए करी पत्ते के पौधे में नई-नई और चमकदार हरी पत्तियां फूटने लगेंगी, और पौधा इतना घना हो जाएगा कि आपको पड़ोसियों को भी बांटना पड़ेगा। घर की बालकनी या गार्डन में लगा यह हरा-भरा पौधा न केवल आपके घर की खूबसूरती को बढ़ाएगा बल्कि आपकी रसोई के स्वाद को भी तरोताजा रखेगा। तो देर किस बात की, आज ही इस फ्री के सीक्रेट घोल को तैयार करें और अपने करी पत्ते के पौधे को दें एक नई जिंदगी।
रोज योग नहीं कर पाते? हफ्ते में सिर्फ 3-4 दिन करने से भी मिलेंगे ये बड़े फायदे!
Daily Yoga vs Yoga 3-4 Days a Week: अगर किसी व्यक्ति के पास रोज 45-60 मिनट निकालने का समय नहीं है, तो सप्ताह में तीन या चार दिन योग करना भी एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है।
सौंफ सिर्फ माउथ फ्रेशनर नहीं, बल्कि फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर मसाला है। इसका पारंपरिक रूप से पाचन संबंधी परेशानियों में इस्तेमाल होता रहा है। ये वजन घटाने, डायबिटीज या आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी फायदेमंद पाया गया है।
हद से ज्यादा बढ़ जाए बैड कोलेस्ट्रॉल तो शरीर देता है ये 5 वॉर्निंग साइन, भूलकर भी न करें नजरअंदाज
शरीर में कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा चिपचिपा पदार्थ होता है, जो कोशिकाओं के निर्माण और हार्मोन्स के संतुलन के लिए जरूरी है। लेकिन जब गलत खानपान, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण खून में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तो यह धमनियों (Arteries) की दीवारों पर चिपककर प्लाक बनाने लगता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में 'एथेरोस्क्लेरोसिस' कहा जाता है। चूंकि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर शुरुआत में कोई तेज दर्द या बुखार नहीं होता, इसलिए इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। हालांकि, जब नसों में ब्लॉकेज गंभीर स्तर पर पहुंच जाती है, तो शरीर 5 खास शारीरिक संकेत देने लगता है।1. आंखों के आसपास पीले चकत्ते (ज़ैंथेलास्मा) और कॉर्निया पर रिंगजब खून में लिपिड और फैट का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो शरीर इसे त्वचा के नीचे जमा करना शुरू कर देता है। इसका सबसे पहला और स्पष्ट असर आंखों के आसपास दिखता है।ज़ैंथेलास्मा (Xanthelasma): ऊपरी और निचली पलकों के कोनों पर पीले रंग के छोटे-छोटे दाने या मोम जैसी गांठें उभरने लगती हैं।आर्कस सेनिलिस (Arcus Senilis): आंखों की पुतली (Cornea) के बाहरी किनारे पर एक सफेद या नीले-ग्रे रंग का गोल छल्ला नजर आने लगता है। यदि यह 45 वर्ष से कम उम्र में दिखे, तो यह हाई कोलेस्ट्रॉल का पुख्ता संकेत होता है।2. पैरों में दर्द, सुन्नपन और पेरीफेरल आर्टरी डिजीज (PAD)जब धमनियों में कोलेस्ट्रॉल प्लाक जमने से पैरों और पिंडलियों तक खून का प्रवाह कम होने लगता है, तो इसे पेरीफेरल आर्टरी डिजीज कहा जाता है।चलने पर पिंडलियों में तेज खिंचाव (Claudication): थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर पैरों की मांसपेशियों में तेज ऐंठन और दर्द होना, जो बैठते ही ठीक हो जाए।पैरों का हमेशा ठंडा रहना और सुन्न होना: बिना किसी मौसम के बदलाव के तलवों और उंगलियों में झनझनाहट, सुन्नपन या लगातार ठंडा महसूस होना।पैरों के नाखूनों और बालों का झड़ना: ब्लड सप्लाई कम होने से पैरों की त्वचा चमकदार और पतली हो जाती है व नाखूनों की ग्रोथ धीमी पड़ जाती है।3. सीने में हल्का भारीपन, जकड़न और एनजाइना (Angina)कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने पर दिल की कोरोनरी आर्टरीज संकरी हो जाती हैं, जिससे दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता।सामान्य काम करते समय, तेज चलते हुए या तनाव में सीने के बीचों-बीच भारी दबाव, निचोड़न या जलन महसूस होना।यह दर्द कई बार सीने से उठकर बाएं कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलने लगता है। इसे एनजाइना कहा जाता है, जो आने वाले हार्ट अटैक की सीधी पूर्व चेतावनी है।4. थोड़ी सी मेहनत में सांस फूलना और अत्यधिक थकानयदि बिना किसी भारी शारीरिक श्रम के, जैसे सिर्फ दो मंजिल सीढ़ियां चढ़ने या तेज चलने पर आपकी सांस बुरी तरह फूलने लगती है, तो यह दिल पर अतिरिक्त दबाव का संकेत है। कोरोनरी धमनियों में रुकावट के कारण जब हृदय पूरे शरीर में खून पंप करने के लिए ज्यादा जोर लगाता है, तो फेफड़ों और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को दिनभर बिना वजह कमजोरी, सुस्ती और भारी थकान महसूस होती रहती है।5. बार-बार हाथ-पैरों में झनझनाहट और चक्कर आनाधमनियों में फैट का थक्का जमने से जब नसों के जरिए नर्व्स (तंत्रिकाओं) तक सही मात्रा में पोषण और ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, तो हाथ और पैरों की उंगलियों में 'सुई चुभने' जैसी झनझनाहट (Tingling Sensation) होती है। इसके अलावा, जब गर्दन की कैरोटिड धमनियों (Carotid Arteries) में कोलेस्ट्रॉल जमा होता है, तो दिमाग को मिलने वाला ब्लड फ्लो बाधित होता है, जिससे अचानक आंखों के आगे अंधेरा छाना, सिर घूमना या संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं।लक्षण दिखने पर तुरंत क्या कदम उठाएं?लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट: 12 घंटे की फास्टिंग के बाद तुरंत लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं और टोटल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल (LDL), एचडीएल (HDL) और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर जांचें।डाइट में बदलाव: रिफाइंड तेल, ट्रांस फैट, डीप फ्राइड स्नैक्स, रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड को तुरंत बंद करें। डाइट में घुलनशील फाइबर (ओट्स, सेब, इसबगोल, हरी पत्तेदार सब्जियां) बढ़ाएं।नियमित कार्डियो वर्कआउट: रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट की तेज वॉक, जॉगिंग या साइकलिंग करें।डॉक्टर से परामर्श: यदि एलडीएल का स्तर 130 mg/dL या उससे अधिक है, तो कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर स्टेटिन (Statin) दवाइयां शुरू करने में देरी न करें।
कौन सी दाल किस समय खानी चाहिए? न्यूट्रिशनिस्ट से जानें लंच और डिनर के लिए सही दाल चुनने का नियम
भारतीय खानपान में दाल को प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड्स, डाइटरी फाइबर, आयरन और जिंक का सबसे प्रमुख स्रोत माना जाता है। शाकाहारी आहार में मांसपेशियों की मजबूती और शारीरिक ऊर्जा के लिए दालें सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। अक्सर लोग स्वाद के आधार पर किसी भी समय कोई भी दाल पकाकर खा लेते हैं, लेकिन मेडिकल न्यूट्रिशन और आयुर्वेद के अनुसार हर दाल की प्रकृति, तासीर और पचने का समय (Digestibility) अलग-अलग होता है। यदि आप भारी दाल रात में खाते हैं, तो इससे पेट में गैस, ब्लोटिंग, खट्टी डकार और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए यह समझना बेहद जरूरी है कि दोपहर के लंच में कौन सी दाल खानी चाहिए और रात के डिनर में किसका सेवन सबसे उत्तम है।दोपहर के भोजन (Lunch) में खाने के लिए सबसे उत्तम दालेंदोपहर के समय हमारे शरीर की पाचन अग्नि (Digestive Fire) सबसे तेज और सक्रिय होती है। इस समय भारी और कॉम्प्लेक्स प्रोटीन वाली दालों को पचाना शरीर के लिए आसान होता है।अरहर (तुअर) दाल: उत्तर और दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली अरहर की दाल पोषण से भरपूर होती है, लेकिन इसमें मौजूद कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट को पचने में अधिक समय लगता है। इसे हमेशा दोपहर के भोजन में ही खाना चाहिए।चना दाल: चना दाल प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है। चूंकि यह पचने में भारी होती है, इसलिए इसका सेवन दोपहर के लंच में करना सबसे सही है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती है।उड़द दाल: उड़द की दाल (चाहे काली हो या धुली) तासीर में भारी और कफ-पित्त को बढ़ाने वाली मानी जाती है। इसका सेवन कभी भी रात के समय नहीं करना चाहिए। इसे दोपहर में ही हींग, अदरक और जीरे के तड़के के साथ खाएं।राजमा और छोले: हालांकि ये फलियों (Legumes) की श्रेणी में आते हैं, लेकिन भारी प्रोटीन होने की वजह से इन्हें केवल लंच में ही शामिल करें ताकि दिनभर की शारीरिक गतिविधि में ये आसानी से पच सकें।रात के डिनर (Dinner) में कौन सी दाल खाना सबसे सुरक्षित है?रात के समय हमारा मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और पेट के डाइजेस्टिव एंजाइम्स का स्राव कम होने लगता है। ऐसे में डिनर में हमेशा हल्की, सुपाच्य और वात-शामक दालों का ही चयन करना चाहिए।मूंग दाल (पीली धुली या हरी छिलके वाली): मूंग दाल को सभी दालों की 'रानी' और सबसे सुपाच्य दाल माना जाता है। इसमें भारीपन नहीं होता और यह आंतों पर बिल्कुल दबाव नहीं डालती। रात के खाने में मूंग दाल या मूंग दाल की पतली खिचड़ी खाना पेट, आंतों और गहरी नींद के लिए सबसे उत्तम विकल्प है।लाल मसूर दाल: मसूर दाल बहुत जल्दी गलती है और आसानी से पच जाती है। इसमें आयरन और फोलेट प्रचुर मात्रा में होते हैं। यदि आपको रात में हल्की दाल खानी है, तो मसूर दाल का एक बाउल सूप या पतली दाल रोटी के साथ ले सकते हैं।दालों से गैस और एसिडिटी न हो, इसके लिए अपनाएं ये 3 जरूरी नियमबहुत से लोगों को दाल खाते ही पेट फूलने या यूरिक एसिड बढ़ने का डर रहता है। न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार दाल बनाने की सही विधि अपनाकर इन समस्याओं से पूरी तरह बचा जा सकता है:दाल को पहले भिगोना (Soaking): किसी भी दाल को पकाने से पहले कम से कम 30 मिनट से 2 घंटे तक (चने और राजमा को 6-8 घंटे) पानी में जरूर भिगोएं। भिगोने से दाल में मौजूद फाइटिक एसिड (Phytic Acid) और एंटी-न्यूट्रिएंट्स निकल जाते हैं, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ जाता है और गैस नहीं बनती।झाग निकालना (Skimming): कुकर या खुले बर्तन में उबालते समय दाल के ऊपर जो सफेद फेन/झाग बनता है, उसे चम्मच से निकालकर फेंक दें। यह प्यूरीन और अतिरिक्त स्टार्च होता है, जो जोड़ों के दर्द और गैस का कारण बनता है।पाचक मसालों का तड़का: दाल में हमेशा हींग, जीरा, लहसुन, कद्दूकस किया हुआ अदरक और थोड़ी सी हल्दी का तड़का लगाएं। ये सामग्रियां दाल की वायुवर्धक प्रकृति को शांत करती हैं।किस बीमारी में कौन सी दाल से करें परहेज?हाई यूरिक एसिड / गाउट: यदि खून में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, तो साबुत उड़द, गाढ़ी चना दाल और अत्यधिक राजमा का सेवन सीमित करें। डॉक्टर की सलाह पर हल्की मूंग दाल लें।किडनी रोग (CKD): किडनी के मरीजों में पोटैशियम और फास्फोरस का स्तर बढ़ जाता है, इसलिए उन्हें बिना नेफ्रोलॉजिस्ट की सलाह के हाई-प्रोटीन गाढ़ी दालों का सेवन नहीं करना चाहिए।आईबीएस (IBS) या कमजोर पाचन: कमजोर पाचन वाले लोगों को रात में केवल छिलके वाली मूंग दाल का पानी या पतली दाल ही लेनी चाहिए।
आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली के कारण अधिकांश लोगों के भोजन का समय पूरी तरह बिगड़ चुका है। ऑफिस से देर से लौटना, स्क्रीन पर समय बिताना और रात 10 से 11 बजे के बाद डिनर करना आम बात हो गई है। हालांकि, मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों के अनुसार, रात का खाना खाने का सबसे सही और आदर्श समय शाम 7:00 बजे से लेकर रात 8:00 बजे के बीच (या सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले) माना गया है। यदि आप रात 10:30 या 11:00 बजे सोते हैं, तो शाम 8:00 बजे तक अपना डिनर पूरा कर लेना आपके पाचन तंत्र, मेटाबॉलिज्म और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए सबसे उत्तम होता है।सोने और डिनर के बीच 3 घंटे का गैप क्यों है अनिवार्य?गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और फिजिशियन बताते हैं कि जब हम खाना खाते हैं, तो हमारे आमाशय (Stomach) को भोजन को बारीक टुकड़ों में तोड़ने और एसिड व एंजाइम्स के जरिए पचाने में कम से कम 2 से 3 घंटे का समय लगता है।एसिड रिफ्लक्स और जीईआरडी (GERD) से बचाव: यदि आप खाना खाते ही तुरंत बिस्तर पर लेट जाते हैं, तो ग्रैविटी (गुरुत्वाकर्षण) का सहारा न मिलने के कारण पेट का गैस्ट्रिक एसिड भोजन नली (Food Pipe) में ऊपर चढ़ने लगता है। इससे सीने में जलन (Heartburn), खट्टी डकारें और जीईआरडी की बीमारी हो जाती है।पाचन अंगों को आराम: समय पर डिनर करने से जब आप सोने जाते हैं, तब शरीर के आंतरिक अंग पाचन में उलझे रहने के बजाय सेल्स की रिपेयरिंग, हीलिंग और डिटॉक्सिफिकेशन पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।सर्केडियन रिदम और धीमी पड़ती पाचन अग्नि का विज्ञानहमारा शरीर एक आंतरिक जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) के अनुसार काम करता है। सूरज ढलने के बाद हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म स्वाभाविक रूप से धीमा होने लगता है और पाचन एंजाइम्स का स्राव कम हो जाता है। इसके साथ ही, जैसे-जैसे रात होती है, नींद लाने वाला हार्मोन 'मेलाटोनिन' (Melatonin) बढ़ने लगता है और इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है। जब कोई व्यक्ति देर रात भारी भोजन करता है, तो शरीर उस भोजन से निकलने वाले ग्लूकोज को तेजी से प्रोसेस नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है और अतिरिक्त कैलोरी सीधे पेट की चर्बी (Visceral Fat) के रूप में जमा होने लगती है।देर रात खाना खाने से शरीर को होने वाले 4 बड़े नुकसानवजन बढ़ना और मोटापा: देर रात खाया गया भोजन तुरंत बर्न नहीं होता। शारीरिक गतिविधि शून्य होने के कारण यह सीधे फैट में बदल जाता है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है।डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा: रात के समय इंसुलिन संवेदनशीलता कमजोर होती है। लेट-नाइट डिनर से फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c लेवल बिगड़ने लगता है।नींद की खराब गुणवत्ता (Insomnia): पेट में भारीपन, गैस और एसिडिटी के कारण गहरी नींद (Deep Sleep / REM Sleep) नहीं आ पाती, जिससे सुबह उठने पर सिरदर्द, थकान और चिड़चिड़ापन रहता है।हार्ट हेल्थ पर असर और हाई ब्लड प्रेशर: देर रात भारी और ऑयली खाने से रात में ब्लड प्रेशर सामान्य रूप से ड्रॉप नहीं होता (Non-dipping BP), जिससे हृदय रोगों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।रात के खाने में क्या खाएं और क्या न खाएं?स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि भोजन की प्रकृति भी महत्वपूर्ण है:क्या खाएं (हल्का और सुपाच्य): मूंग दाल की खिचड़ी, उबली या भुनी हुई हरी सब्जियां, वेज सूप, पनीर या टोफू का हल्का सलाद, ज्वार या रागी की 1-2 पतली रोटियां।क्या न खाएं: अत्यधिक तला-भुना, मैदा, लाल मांस (Red Meat), भारी पनीर, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत ज्यादा मीठी चीजें।शतपावली (Waking Habit): रात के खाने के तुरंत बाद लेटने के बजाय कम से कम 100 से 500 कदम धीमी गति से टहलें और वज्रासन में 10 मिनट बैठें।
FSSAI की सख्त कार्रवाई के बाद कंपनी ने वापस लिए भ्रामक हेल्थ क्लेम और विज्ञापन
भारत में बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास के नाम पर बेचे जाने वाले पॉपुलर ड्रिंक 'बोर्नविटा' (Bournvita) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा भ्रामक विज्ञापनों और पैकेजिंग लेबल्स पर सख्त रुख अपनाए जाने के बाद, बोर्नविटा की निर्माता कंपनी 'मॉन्डलेज इंडिया' (Mondelez India) ने अपने प्रॉडक्ट से जुड़े कई बड़े हेल्थ क्लेम और पोषक तुलनात्मक दावों (Nutrient-comparison claims) को वापस ले लिया है। इसके साथ ही कंपनी ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन रिटेल माध्यमों से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों को भी पूरी तरह हटा दिया है।भ्रामक पोषण और तुलनात्मक दावों पर लगामFSSAI ने हाल ही में देश के प्रमुख फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) की गहन जांच की थी, जिसमें पाया गया कि कई कंपनियां अपने उत्पादों को लेकर ऐसे दावे कर रही हैं जो वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं हैं या उपभोक्ताओं को गलत धारणा में डालते हैं। बोर्नविटा के विज्ञापनों और पैकेजिंग पर पोषक तत्वों की तुलना और बच्चों की इम्युनिटी व मानसिक-शारीरिक विकास से जुड़े दावे किए जा रहे थे। नियामक संस्था ने इसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम का उल्लंघन माना और कंपनी को नोटिस जारी किया। नोटिस के बाद कंपनी ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाते हुए इन दावों और विज्ञापनों को वापस लेने का फैसला किया।चीनी की मात्रा को लेकर पहले भी विवादों में रहा है बोर्नविटायह पहली बार नहीं है जब बोर्नविटा की पोषण गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। इससे पहले सोशल मीडिया और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा बोर्नविटा में मौजूद उच्च चीनी (Added Sugar) के स्तर को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई थी। बाल रोग विशेषज्ञों और न्यूट्रिशनिस्ट्स ने चिंता जताई थी कि बच्चों को हेल्दी ड्रिंक के नाम पर अत्यधिक चीनी पिलाई जा रही है, जिससे बचपन में मोटापा (Childhood Obesity), दांतों की सड़न और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और FSSAI ने भी पहले सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे बोर्नविटा और अन्य पेय पदार्थों को 'हेल्थ ड्रिंक' या 'एनर्जी ड्रिंक' की श्रेणी से हटाएं, क्योंकि भारतीय खाद्य कानूनों के तहत 'हेल्थ ड्रिंक' की कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है।एफएसएसएआई का राष्ट्रव्यापी अभियान: 150 से अधिक कंपनियों पर शिकंजाबोर्नविटा पर हुई यह कार्रवाई FSSAI के एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है। खाद्य नियामक ने भ्रामक मार्केटिंग, गलत लेबिलिंग और '100% शुद्ध' जैसे अतिशयोक्तिपूर्ण दावों को लेकर 150 से अधिक प्रमुख खाद्य कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें पेप्सिको, कोका-कोला, एबॉट, रेड बुल, डैनोन और एमवे जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। नियामक ने साफ कर दिया है कि किसी भी उत्पाद पर ऐसा कोई दावा नहीं लिखा जा सकता जो उपभोक्ता को धोखे में रखे या भ्रामक स्वास्थ्य लाभ का वादा करे।माता-पिता के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जरूरी सलाहपीडियाट्रिशियन और पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता को पैकेज्ड पेय पदार्थों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय उनके पोषण लेबल (Nutrition Fact Label) को ध्यान से पढ़ना चाहिए।एडेड शुगर की जांच करें: उत्पाद में प्रति 100 ग्राम कितनी रिफाइंड शुगर या माल्टोडेक्सट्रिन है, इसकी मात्रा जरूर देखें।प्राकृतिक पोषण को प्राथमिकता दें: बच्चों के शारीरिक विकास के लिए सादा गुनगुना दूध, घर का बना बादाम पाउडर, भुने चने, मौसमी फल, हरी सब्जियां, उबले अंडे और दालें सबसे सुरक्षित और बेहतरीन स्रोत हैं।विज्ञापनों की अतिशयोक्ति से बचें: किसी भी पैकेज्ड पाउडर से बच्चों की लंबाई या याददाश्त रातों-रात नहीं बढ़ती, इसके लिए संतुलित आहार और नियमित खेलकूद आवश्यक है।
भारतीय भोजन की थाली में जब तक कोई चटपटी और मसालेदार साइड डिश न हो, तब तक खाने का असली मजा अधूरा सा लगता है। खासकर राजस्थान के पारंपरिक व्यंजनों की बात ही कुछ और है, जहां के तीखे और अनोखे स्वाद देश भर में बेहद पसंद किए जाते हैं। भागदौड़ भरी इस आधुनिक जीवनशैली में जब लोगों के पास घंटों रसोई में खड़े रहकर जटिल पकवान बनाने का समय नहीं होता, तब कुछ झटपट और स्वादिष्ट तैयार करने की चाहत हर किसी की होती है। इसी बीच कुकिंग और होम रेसिपी की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकीं रश्मि जैन ने एक ऐसी शानदार और झटपट बनने वाली राजस्थानी दही मिर्ची की रेसिपी साझा की है, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। रश्मि जैन का दावा है कि इस रेसिपी की मदद से कोई भी व्यक्ति मात्र 10 मिनट के भीतर बिल्कुल पारंपरिक स्वाद वाली ढाबा स्टाइल दही मिर्ची की सब्जी घर पर तैयार कर सकता है। इस अनोखी और बेहद आसान रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बहुत कम सामग्रियों का इस्तेमाल होता है और इसका चटपटा स्वाद खाने के स्वाद को दोगुना कर देता है। आइए आज के इस विस्तृत आलेख में हम आपको इस लोकप्रिय राजस्थानी रेसिपी की पूरी प्रक्रिया, जरूरी सामग्री और इसे बनाने के खास टिप्स के बारे में विस्तार से बताते हैं।राजस्थानी खानपान की विशेषता और दही मिर्ची का इतिहासराजस्थान की संस्कृति जितनी रंगबिरंगी और समृद्ध है, वहां का खानपान भी उतना ही अनूठा और गहरा प्रभाव छोड़ने वाला है। मरुधरा की इस धरती पर पानी की कमी और भौगोलिक परिस्थितियों के चलते ऐसे व्यंजनों को विकसित किया गया जो लंबे समय तक टिक सकें और कम सामग्री में भी भरपूर स्वाद दे सकें। इनमें से सूखी मिर्च, बेसन, छाछ और दही का इस्तेमाल करके बनाई जाने वाली डिशेज का स्थान हमेशा से ऊपर रहा है। राजस्थानी घरों में जब कभी घर पर कोई खास सब्जी उपलब्ध न हो या फिर बोरिंग खाने को एक नया जायका देना हो, तो दही वाली मिर्ची की सब्जी को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है। रश्मि जैन ने अपनी इस रेसिपी के जरिए उसी पुरानी और पारंपरिक माटी की खुशबू को आधुनिक रसोईघरों तक पहुंचाने का एक बेहतरीन प्रयास किया है, जिसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं।इस रेसिपी को बनाने के लिए जरूरी सामग्री की सूची10 मिनट में तैयार होने वाली इस स्वादिष्ट राजस्थानी दही मिर्ची की सब्जी को बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा भारी-भरकम या महंगे सामान की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। इसके लिए आपको केवल उन बुनियादी चीजों की जरूरत होगी जो आसानी से आपकी रसोई के डिब्बों में मिल जाती हैं। मुख्य सामग्री के रूप में आपको लगभग 250 ग्राम मोटी वाली हरी मिर्च (जो कम तीखी होती हैं) चाहिए, एक कप ताजा और गाढ़ा दही, थोड़ा सा बेसन जो ग्रेवी को एक बेहतरीन बाइंडिंग और टेक्सचर देता है, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, सौंफ का पाउडर जो राजस्थानी स्वाद की जान है, जीरा, राई, हींग, स्वादानुसार नमक, और पकाने के लिए शुद्ध सरसों का तेल या देसी घी। इन सभी सामग्रियों का सही संयोजन ही इस साधारण सी मिर्च को एक शाही और जायकेदार डिश में बदल देता है।स्टेप-बाय-स्टेप राजस्थानी दही मिर्ची बनाने की आसान विधिइस झटपट रेसिपी को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है और इसे कोई भी नौसिखिया रसोइया आसानी से फॉलो कर सकता है। सबसे पहले ताजी हरी मिर्च को अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें और कपड़े से पोंछ लें ताकि उसमें नमी न रहे। अब इन मिर्चों को बीच में से चीरा (slit) लगा लें ताकि मसाले अंदर तक अच्छी तरह समा सकें। यदि आपको बहुत ज्यादा तीखा पसंद नहीं है, तो आप इसके अंदर के कुछ बीज निकाल भी सकते हैं। इसके बाद एक कटोरी में ताजा दही लें और उसमें हल्दी, धनिया, और सौंफ का पाउडर डालकर अच्छी तरह फेंट लें ताकि एक चिकना पेस्ट बन जाए। अब एक कढ़ाई में थोड़ा सा सरसों का तेल गर्म करें और उसमें जीरा, राई तथा चुटकी भर हींग का तड़का लगाएं। तड़का चटकने के बाद कटी हुई हरी मिर्च को कढ़ाई में डालें और मध्यम आंच पर 2 से 3 मिनट तक भूनें ताकि मिर्च का कच्चापन निकल जाए।दही और बेसन के मिश्रण से तैयार करें लाजवाब ग्रेवीजब मिर्च हल्की नरम हो जाए, तब गैस की आंच को बिल्कुल धीमा कर दें ताकि दही फटे नहीं। अब तैयार किया हुआ दही और मसालों का मिश्रण कढ़ाई में डालें और लगातार करछी से चलाते रहें। इसके साथ ही इसमें थोड़ा सा भुना हुआ बेसन भी मिला दें, जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ा देगा। धीमी आंच पर इस मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक कि दही से तेल अलग न होने लगे और ग्रेवी अच्छी तरह से गाढ़ी न हो जाए। अंत में अपने स्वादानुसार नमक डालकर इसे अच्छे से मिला लें। ध्यान रहे कि नमक हमेशा दही पकने के बाद ही डालें ताकि दही फटने का कोई जोखिम न रहे। इस पूरी प्रक्रिया में केवल 8 से 10 मिनट का समय लगता है और आपकी महकती हुई राजस्थानी दही मिर्ची की सब्जी बनकर तैयार हो जाती है।परोसने के तरीके और इस डिश की लोकप्रियताइस चटपटी और शानदार दही मिर्ची की सब्जी को आप गरमागरम पराठों, मिस्सी रोटी, बाजरे की रोटी या फिर सादे उबले हुए चावल और दाल के साथ परोस सकते हैं। इसका खट्टा-मीठा और तीखा स्वाद मुंह का जायका पूरी तरह से बदल देता है। रश्मि जैन द्वारा बताई गई इस आसान रेसिपी ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है और लोग इसे अपने घरों में ट्राई करके इसकी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। यदि आपके घर में अचानक मेहमान आ जाएं या आपके पास सब्जी बनाने के लिए ज्यादा वक्त न हो, तो यह 10 मिनट की रेसिपी आपके लिए एक परफेक्ट विकल्प साबित होगी।
भारतीय संस्कृति में त्योहारों और उत्सवों का माहौल जब तक मिठाइयों की मिठास के साथ न जुड़े, तब तक हर जश्न अधूरा सा लगता है। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह को समर्पित रक्षाबंधन का पावन पर्व जैसे-जैसे नजदीक आता है, वैसे-वैसे हर घर की रसोई में कुछ खास और मीठा बनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाजार में मिलने वाली मिठाइयों में आजकल मिलावट का खतरा और उनकी आसमान छूती कीमतें आम आदमी के बजट को बिगाड़ देती हैं, ऐसे में कुछ नया और किफायती करने की चाहत हर किसी के मन में होती है। इसी बीच सोशल मीडिया और कुकिंग जगत में अपने अनोखे अंदाज के लिए मशहूर एक सरफिरा बावर्ची ने रक्षाबंधन के इस खास मौके पर एक ऐसी शानदार और झटपट रेसिपी शेयर की है, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। उस बावर्ची का दावा है कि अब आपको बाजार से महंगी और मिलावटी मिठाइयां खरीदने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि आप घर में ही बेहद कम लागत और सिर्फ सूजी का इस्तेमाल करके हलवाई जैसी स्वादिष्ट मिठाई तैयार कर सकते हैं। इस आसान रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय में बनती है और इसका स्वाद बड़े-बड़े होटलों की मिठाइयों को भी मात दे देता है। आइए आज के इस विस्तृत आलेख में हम आपको उस सरफिरा बावर्ची द्वारा बताई गई इस जादुई और बेहद आसान सूजी की मिठाई की पूरी रेसिपी के बारे में विस्तार से बताते हैं।रक्षाबंधन पर बजट फ्रेंडली और शुद्ध मिठाई की बढ़ती मांगआज के इस दौर में जब हर चीज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, त्योहारों के दिनों में शुद्ध मावा या खोए से बनी मिठाइयां खरीदना आम आदमी के बजट से बाहर होता जा रहा है। बाजार में मिलने वाली अधिकांश मिठाइयां या तो मिलावटी होती हैं या फिर उनमें केमिकल और सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। ऐसे में माताएं और बहनें हमेशा ऐसी रेसिपी की तलाश में रहती हैं जो घर की बुनियादी सामग्री से आसानी से तैयार हो जाए और खाने में भी उतनी ही लजीज लगे। सरफिरा बावर्ची ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सूजी (Semolina) को अपने प्रयोग का मुख्य आधार बनाया है। सूजी हर भारतीय रसोई में बहुत ही आसानी से उपलब्ध होने वाला एक ऐसा अनाज है, जिसका इस्तेमाल हलवा, उपमा और कई तरह के नमकीन पकवान बनाने में किया जाता है, लेकिन इसे इस अंदाज में इस्तेमाल करके एक शाही मिठाई तैयार करना वाकई में एक अनोखा और सराहनीय कदम है।सूजी की इस विशेष मिठाई को बनाने के लिए जरूरी सामग्रीइस लाजवाब और कम बजट वाली मिठाई को बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा भारी-भरकम सामान की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। सरफिरा बावर्ची द्वारा बताई गई इस रेसिपी के अनुसार आपको केवल कुछ सामान्य चीजों की जरूरत होगी, जो आपके किचन के डिब्बों में हमेशा मौजूद रहती हैं। मुख्य सामग्री के रूप में आपको एक कटोरी सूजी (रवा), लगभग दो कप ताजा दूध, एक कटोरी चीनी (मिठास के अनुसार), शुद्ध देसी घी जो मिठाई को एक रिच और शाही फ्लेवर देगा, थोड़ा सा मिल्क पाउडर जो इसमें मावे जैसा गाढ़ापन और स्वाद जोड़ेगा, इलायची पाउडर खुशबू के लिए, और सजावट के लिए कुछ कटे हुए बादाम तथा पिस्ता चाहिए। इन सभी सामग्रियों का सही संतुलन ही इस मिठाई को एकदम दानेदार, मुलायम और मुंह में घुल जाने वाला बनाता है। इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल या कृत्रिम एसेंस का उपयोग नहीं किया जाता है, जिससे यह बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।स्टेप-बाय-स्टेप मिठाई तैयार करने की बेहद आसान प्रक्रियाइस शानदार सूजी की मिठाई को बनाने की प्रक्रिया इतनी सरल है कि एक नौसिखिया रसोइया या बच्चा भी इसे पहली बार में ही बिल्कुल परफेक्ट बना सकता है। सबसे पहले एक भारी तले की कढ़ाई में दो चम्मच शुद्ध देसी घी गर्म करें और उसमें एक कटोरी सूजी डालकर मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। ध्यान रहे कि सूजी का रंग ज्यादा भूरा नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे तब तक भूनना है जब तक कि उसमें से एक सौंधी-सौंधी खुशबू आने लगे। जब सूजी अच्छे से भून जाए, तब इसमें धीरे-धीरे ताजा दूध मिलाते जाएं और लगातार चलाते रहें ताकि गांठें (Lumps) न पड़ें। इसके बाद इसमें मिल्क पाउडर और चीनी मिला दें। मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक कि वह कढ़ाई छोड़ने लगे और एक डो (Dough) के फॉर्म में आ जाए। अंत में इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें और गैस बंद कर दें।परफेक्ट शेप देने और सजावट का पारंपरिक अंदाजकढ़ाई से इस तैयार मिश्रण को बाहर निकालने के बाद, एक थाली या ट्रे में चारों तरफ थोड़ा सा देसी घी लगाकर उसे अच्छी तरह से चिकना कर लें। अब उस सूजी के मिश्रण को उस थाली में समान रूप से फैला दें और किसी कटोरी या स्पेचुला की मदद से चिकना कर लें। इसके ऊपर बारीक कटे हुए बादाम, पिस्ता और यदि आपके पास चांदी का वर्क हो तो उसे सजावट के लिए लगा सकते हैं, जो इसे देखने में बिल्कुल बाजार जैसी शाही मिठाई का लुक देगा। अब इस थाली को लगभग आधे से एक घंटे के लिए सामान्य तापमान पर या फ्रिज में सेट होने के लिए रख दें। जब यह अच्छी तरह से ठंडी होकर जम जाए, तो चाकू की मदद से इसे अपनी मनपसंद चौकोर या डायमंड शेप में काट लें। इस तरह से आपकी बिना मावे की शुद्ध और स्वादिष्ट सूजी की बर्फी या कलाकंद जैसी मिठाई झटपट तैयार हो जाती है।सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस रेसिपी की लोकप्रियतासरफिरा बावर्ची का यह अंदाज और उनकी यह अनोखी रेसिपी सोशल मीडिया पर आते ही आग की तरह फैल गई है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लाखों लोगों ने इस वीडियो को देखा है और इस पर अपनी बेहद सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दी हैं। लोगों का कहना है कि जहां एक तरफ बाजार में मिलावटी सामान बिक रहा है, वहीं इस तरह की घरेलू और आसान रेसिपी लोगों को शुद्धता और बचत दोनों का तोहफा दे रही है। रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर जब भाई अपनी बहन को यह घर की बनी शुद्ध मिठाई खिलाएंगे, तो उस रिश्ते की मिठास और भी अधिक बढ़ जाएगी। इस प्रकार की रचनात्मक और उपयोगी रेसिपी यह साबित करती है कि अगर आपके पास थोड़ा सा हुनर और सही जानकारी हो, तो आप कम खर्च में भी अपने परिवार के हर जश्न को बेहद खास और यादगार बना सकते हैं।
भारतीय त्योहारों, खास अवसरों और मीठे पकवानों की बात जब भी आती है, तो कलाकंद का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाना बेहद स्वाभाविक है। दूध और खोए से बनने वाली यह पारंपरिक मिठाई अपने दानेदार और मुंह में घुल जाने वाले स्वाद के लिए पूरे देश में बेहद पसंद की जाती है। लेकिन आधुनिक और भागदौड़ भरी इस जीवनशैली में जब लोगों के पास घंटों रसोई में खड़े रहकर दूध उबालने और मावा तैयार करने का समय नहीं होता, तब कुछ मीठा खाने की इच्छा अधूरी रह जाती है। इसी समस्या का एक बेहद आसान और शानदार समाधान अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बिना गैस जलाए केवल 10 मिनट के भीतर बिल्कुल बाजार जैसी दानेदार कलाकंद मिठाई घर पर ही तैयार की जा सकती है। इस अनोखी और झटपट रेसिपी में न तो आपको घंटों गैस के सामने पसीना बहाने की जरूरत है और न ही महंगे मावे की आवश्यकता पड़ती है। आइए आज के इस लेख में हम आपको इस बेहद आसान, स्वादिष्ट और कम समय में बनने वाली कलाकंद की रेसिपी के बारे में विस्तार से बताते हैं, जिसे पढ़कर आप भी आज ही अपने घर पर इसे आसानी से बना सकेंगे।बिना गैस और मावा के कलाकंद बनाने की खास विधिपारंपरिक रूप से कलाकंद बनाने की प्रक्रिया बहुत लंबी और थका देने वाली होती है, जिसमें दूध को घंटों तक धीमी आंच पर लगातार चलाना पड़ता है ताकि उसका मावा या छैना तैयार हो सके। लेकिन इस आधुनिक और आसान रेसिपी में हम कुछ बेहद सामान्य सामग्री का इस्तेमाल करते हैं जो आसानी से हर घर की रसोई में मिल जाती हैं। इस विधि की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आपको आग या गैस जलाने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं पड़ती है, जिससे यह बच्चों और नौसिखिए कुक के लिए भी बेहद सुरक्षित और आसान बन जाती है। मिक्सी जार या एक बड़े बर्तन में सही मात्रा में सामग्री को मिलाकर इसे मिनटों में तैयार किया जा सकता है। इस रेसिपी को अपनाने के बाद आपको बाजार से मिलावटी मिठाइयां खरीदने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि आप अपने ही हाथों से साफ-सुथरे तरीके से शुद्ध मिठाई तैयार कर सकेंगे।कलाकंद बनाने के लिए जरूरी सामग्री की सूचीबिना गैस जलाए इस लाजवाब कलाकंद को बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इसके लिए आपको केवल कुछ बुनियादी चीजों की आवश्यकता होगी, जैसे कि पनीर या छैना (ताजा पिसा हुआ), मिल्कमेड (कंडेंस्ड मिल्क) जो मिठाई में प्राकृतिक मिठास और क्रीमी टेक्सचर लाता है, मिल्क पाउडर जो इसे हलवाई जैसा रिच स्वाद देता है, थोड़ा सा इलायची पाउडर खुशबू और बेहतरीन फ्लेवर के लिए, और गार्निशिंग के लिए बारीक कटे हुए बादाम तथा पिस्ता। इन सभी सामग्रियों का सही अनुपात ही आपकी मिठाई को एकदम परफेक्ट और दानेदार बनाता है। यदि आपके पास ताजा पनीर उपलब्ध नहीं है, तो आप बाजार में मिलने वाले पनीर को कद्दूकस करके भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सामग्री न केवल आसानी से उपलब्ध है बल्कि बजट के लिहाज से भी बेहद किफायती है।स्टेप-बाय-स्टेप कलाकंद तैयार करने की पूरी प्रक्रियाइस झटपट कलाकंद को बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बाउल में ताजा और नरम पनीर लें और उसे अपने हाथों से अच्छी तरह से मैश कर लें ताकि उसका दानेदार रूप बरकरार रहे। अब इस मैश किए हुए पनीर में जरूरत के अनुसार मिल्क पाउडर और कंडेंस्ड मिल्क (मिल्कमेड) को एक साथ मिला लें। इस मिश्रण को तब तक हल्के हाथों से मिलाएं जब तक कि यह एक सार और अच्छे मिश्रण का रूप न ले ले, ध्यान रहे कि इसे बहुत ज्यादा जोर से नहीं फेटना है क्योंकि कलाकंद का असली मजा उसके दानेदार टेक्सचर में ही होता है। अब इसमें इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें ताकि इसकी महक बहुत ही शानदार आए। इसके बाद एक ट्रे या थाली में थोड़ा सा घी लगाकर उसे चिकना कर लें और इस तैयार मिश्रण को उसमें समान रूप से फैला दें। ऊपर से बारीक कटे हुए पिस्ता और बादाम छिड़ककर इसे हल्के हाथों से दबा दें ताकि वे अच्छे से चिपक जाएं।फ्रिज में सेट करने का सही तरीका और परोसने के टिप्समिश्रण को ट्रे में फैलाने के बाद इसे सही आकार और कड़कपन देने के लिए फ्रिज (Refrigerator) में लगभग आधे से एक घंटे के लिए सेट होने के लिए रख देना बहुत जरूरी है। फ्रिज की ठंडक से यह मिश्रण अच्छी तरह से जम जाता है और जब आप इसके चाकू की मदद से चौकोर टुकड़े काटेंगे, तो वे बिल्कुल हलवाई की दुकान की तरह परफेक्ट शेप में बाहर आएंगे। टुकड़ों में काटने के बाद आप इन्हें एक सुंदर प्लेट में सजाकर अपने परिवार और मेहमानों को परोस सकते हैं। इस आसान रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह खाने में उतनी ही स्वादिष्ट और मुंह में घुल जाने वाली होती है जितनी कि पारंपरिक तरीके से घंटों मेहनत करके बनाई गई कलाकंद। अचानक मेहमानों के आ जाने पर या किसी छोटे-मोटे पारिवारिक समारोह में आप इस रेसिपी को झटपट बनाकर सबका दिल जीत सकते हैं।घर पर मिठाई बनाने के फायदे और स्वास्थ्य का ध्यानबाजार में मिलने वाली मिठाइयों में अक्सर मिलावट और अत्यधिक चीनी का खतरा रहता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। लेकिन जब आप अपने घर पर इस तरह की शुद्ध और साफ-सुथरे तरीके से बनी कलाकंद तैयार करते हैं, तो आपको पूरी तरह से गुणवत्ता की संतुष्टि मिलती है। आप इसमें अपनी पसंद के अनुसार चीनी या कंडेंस्ड मिल्क की मात्रा को नियंत्रित भी कर सकते हैं। यह रेसिपी उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो कुकिंग के शौकीन तो हैं लेकिन समय की कमी के कारण जटिल पकवान नहीं बना पाते। तो फिर देर किस बात की, आज ही अपनी रसोई में इस आसान सी ट्रिक को आजमाएं और बिना गैस जलाए इस लाजवाब कलाकंद का आनंद अपने पूरे परिवार के साथ लें।
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5 Gift Ideas for Sister: अगर आप भी अपनी बहन के लिए तोहफा लाना भूल गए हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं हैं. यहां हम आपको तोहफों के कुछ विकल्प बताएंगे।
घर के वॉशबेसिन या बाथरूम में जब साबुन का इस्तेमाल करते-करते वह छोटा सा टुकड़ा बच जाता है, तो अक्सर हम उसे बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि साबुन के यही छोटे-छोटे बचे हुए टुकड़े (Soap Scraps) आपके होम गार्डन और बालकनी में लगे पौधों के लिए एक जादुई समाधान बन सकते हैं? जीरो-वेस्ट और इको-फ्रेंडली गार्डनिंग के इस दौर में बेकार पड़ी साबुन की टिकिया से आप न केवल पौधों को हानिकारक कीड़ों से बचा सकते हैं, बल्कि अपने बगीचे की हरियाली और चमक को भी कई गुना बढ़ा सकते हैं।यदि आप भी अपने पौधों को बिना महंगे रसायनों के लहलहाता और चमकदार देखना चाहते हैं, तो बची हुई साबुन की टिकिया से जुड़े ये 5 स्मार्ट और आसान गार्डनिंग हैक्स जरूर आजमाएं:1. एफिड्स और मिलीबग्स के लिए बनाएं होममेड इंसेक्टिसाइड स्प्रेगुलाब, गुड़हल, मिर्च और टमाटर के पौधों पर अक्सर सफेद मिलीबग्स (Mealybugs), माहू (Aphids) और स्पाइडर माइट्स का हमला हो जाता है, जो पत्तियों का रस चूसकर पौधे को सुखा देते हैं।हैक्स: बची हुई साबुन की टिकिया को कद्दूकस (Grate) कर लें या छोटे टुकड़ों में काटकर 1 लीटर गुनगुने पानी में अच्छी तरह घोल लें।इस्तेमाल का तरीका: इस हल्के साबुन के घोल को एक स्प्रे बोतल में भरें और प्रभावित पत्तियों व तनों पर अच्छी तरह छिड़कें। साबुन का झाग नरम शरीर वाले कीड़ों के बाहरी सुरक्षा कवच को तोड़कर उन्हें प्राकृतिक रूप से खत्म कर देता है।सावधानी: ध्यान रहे कि तेज धूप में छिड़काव न करें; सुबह या शाम के समय ही स्प्रे करें।2. गिलहरियों, चूहों और जंगली जानवरों को दूर रखने का गंध-बैरियरअक्सर बगीचे में लगे खूबसूरत फूलों, हरी सब्जियों या फलों को गिलहरियां, चूहे और आवारा जानवर कुतर कर बर्बाद कर देते हैं।हैक्स: बची हुई तेज खुशबू वाली साबुन की टिकिया (जैसे मिंट, नीम या हर्बल सोप) के टुकड़ों को किसी पतली जालीदार पोटली (Mesh Bag) या पुराने मोजे में बांध लें।इस्तेमाल का तरीका: इन पोटलियों को गमलों के पास, क्यारियों की बाड़ (Fencing) पर या पौधों की शाखाओं पर लटका दें। साबुन की तीखी और अपरिचित गंध से जानवर और चूहे पौधों के पास फटकने से बचते हैं।3. मिट्टी और पत्थरों पर फिसलने वाले घोंघे (Slugs) और चींटियों की रोकथामबरसात या अधिक नमी के मौसम में गमलों के आसपास रेंगने वाले घोंघे (Snails/Slugs) और चींटियां पौधों की जड़ों व पत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाती हैं।हैक्स: बची हुई साबुन की थोड़ी सी नम टिकिया को गमले के बाहरी किनारों, स्टैंड के पैरों और क्यारियों की बाउंड्री पर एक लाइन की तरह रगड़ (Rub) दें।फायदा: साबुन की फिसलन भरी और क्षारीय परत एक प्राकृतिक लक्ष्मण रेखा का काम करती है। घोंघे और चींटियां इस सूखी परत को पार नहीं कर पाते और पौधे सुरक्षित रहते हैं।4. गार्डनिंग टूल्स को जंग (Rust) से बचाएं और धारदार रखेंखुरपी, प्रूनर (कटर), कैंची और ट्रॉवेल जैसे बागवानी के औजारों पर बार-बार गीली मिट्टी लगने से वे जल्दी जंग खा जाते हैं या जाम हो जाते हैं।हैक्स: गार्डनिंग के बाद अपने लोहे और स्टील के औजारों को धोकर सुखा लें, फिर बची हुई साबुन की सूखी टिकिया को औजारों के ब्लेड्स और जोड़ों (Hinges) पर रगड़ दें।फायदा: साबुन धातु की सतह पर नमी रोधी एक पतली सुरक्षात्मक परत बना देता है, जिससे औजारों में जंग नहीं लगता और अगली बार इस्तेमाल करते समय उन पर मिट्टी भी नहीं चिपकती।5. गार्डनिंग के बाद नाखूनों में जमी जिद्दी मिट्टी से छुटकारागमलों की गुड़ाई करने या पौधों की कटाई-छंटाई के दौरान उंगलियों के नाखूनों के अंदर काली मिट्टी और मैल गहराई तक जम जाती है, जिसे बाद में साफ करना बेहद मुश्किल होता है।हैक्स: मिट्टी का काम शुरू करने से ठीक पहले बची हुई साबुन की हल्की नम टिकिया पर अपने नाखूनों को अंदर की तरफ खुरचें (Scrape), जिससे साबुन का थोड़ा हिस्सा नाखूनों के खाली गैप में भर जाए।फायदा: इससे मिट्टी के लिए नाखूनों के अंदर जाने की जगह नहीं बचती। गार्डनिंग पूरी करने के बाद जब आप हाथ धोएंगे, तो साबुन पानी के साथ तुरंत घुल जाएगा और आपके नाखून बिना किसी अतिरिक्त रगड़ के पूरी तरह साफ और चमकदार निकलेंगे।
बच्चों की परवरिश के दौरान लगभग हर माता-पिता को उनके जिद्दी रवैये (Stubborn Behavior) का सामना करना पड़ता है। कभी खिलौनों के लिए जमीन पर लेट जाना, कभी खाना खाने से इनकार करना तो कभी मोबाइल फोन न मिलने पर रोना-धोना। ऐसे हालात में अक्सर पेरेंट्स अपना आपा खो देते हैं और बच्चों पर चिल्लाने या हाथ उठाने जैसी गलतियां कर बैठते हैं। बाल मनोवैज्ञानिकों (Child Psychologists) के अनुसार, गुस्सा या मारपीट बच्चे की जिद को खत्म करने के बजाय उसे और अधिक विद्रोही और आक्रामक बना देती है।यदि आप बिना गुस्सा किए और बिना तनाव लिए अपने बच्चे की इस अड़ियल आदत को बदलना चाहते हैं, तो ये 4 आसान और आजमाई हुई पेरेंटिंग ट्रिक्स आपके लिए बेहद मददगार साबित होंगी:1. हुक्म (Order) देने के बजाय सीमित विकल्प (Limited Choices) देंजिद्दी बच्चे अपनी मर्जी और नियंत्रण (Control) चाहते हैं। जब आप उन्हें सीधे आदेश देते हैं कि चलो तुरंत दूध पियो या अभी के अभी पढ़ाई करो, तो उनका पहला स्वाभाविक रिएक्शन 'ना' कहना होता है।ट्रिक: बच्चे को ऑर्डर देने के बजाय हमेशा 2 सीमित विकल्प पेश करें। उदाहरण के लिए— आप दूध पीले वाले कप में पियोगे या नीले वाले कप में? या आप पहले मैथ्स का होमवर्क करोगे या ड्राइंग बनाओगे?।फायदा: इससे बच्चे को लगता है कि फैसला उसने खुद लिया है और वह बिना किसी बहस या जिद के आपकी बात मान लेता है।2. बच्चे की बात को ध्यान से सुनें और 'कनेक्शन' बनाएं (Listen & Connect First)बच्चे अक्सर तब ज्यादा जिद करते हैं जब उन्हें लगता है कि उनकी बात या भावनाओं को कोई समझ नहीं रहा है।ट्रिक: जब बच्चा किसी बात पर अड़ जाए, तो तुरंत उसे डांटने के बजाय उसके आई-लेवल (आंखों के स्तर) पर झुककर बैठें। शांत आवाज में कहें, मैं समझ रहा हूं कि आपका यह खिलौना लेने का बहुत मन है, लेकिन आज हम इसे नहीं खरीद सकते।फायदा: जब बच्चे को यह एहसास होता है कि उसके माता-पिता उसकी बात सुन रहे हैं और उसकी भावना की कद्र कर रहे हैं, तो उसका गुस्सा और डिफेंसिव रवैया अपने आप शांत हो जाता है।3. 'रिएक्शन' देने के बजाय उस पल को नॉर्मल होने दें (Don't Fuel the Fire)जिद्दी बच्चों को अक्सर यह समझ आ जाता है कि रोने या चिल्लाने से पेरेंट्स परेशान होकर उनकी मांग मान लेते हैं।ट्रिक: जब बच्चा जिद में टेंट्रम (Tantrum) थ्रो कर रहा हो, तो उस समय बहस करने, समझाने या गुस्सा दिखाने से बचें। बस एक शांत और तटस्थ चेहरा बनाकर पास खड़े रहें ताकि वह सुरक्षित महसूस करे। जब उसका रोना और गुस्सा पूरी तरह शांत हो जाए, तब प्यार से गले लगाकर उसे सही और गलत का अंतर समझाएं।फायदा: इससे बच्चे को यह स्पष्ट संदेश जाता है कि जिद या गुस्से के दम पर वह अपनी कोई भी अनुचित मांग पूरी नहीं करवा सकता।4. सकारात्मक व्यवहार की तुरंत तारीफ करें (Positive Reinforcement)अक्सर माता-पिता बच्चे की गलतियों और जिद पर तुरंत डांटते हैं, लेकिन जब वह कोई अच्छा काम करता है या बिना कहे बात मान लेता है, तो उस पर ध्यान नहीं देते।ट्रिक: जब भी बच्चा बिना जिद किए समय पर खाना खाए, खिलौने समेटे या आपकी बात माने, तो तुरंत उसकी खुलकर तारीफ करें। आप कह सकते हैं— आज आपने बहुत समझदारी दिखाई, मुझे आप पर गर्व है।फायदा: बच्चों को अपने माता-पिता से सकारात्मक ध्यान (Attention) पाना बहुत पसंद होता है। जब उन्हें अच्छे व्यवहार के लिए शाबाशी मिलती है, तो वे अनजाने में ही अपनी जिद छोड़कर अच्छी आदतें दोहराने लगते हैं।
रक्षाबंधन 2026: भाभी की कलाई पर क्यों बांधी जाती है लुंबा राखी? जानिए इसके पीछे की खास परंपरा और वजह
Lumba Rakhi For Bhabhi : लुंबा राखी का डिजाइन आमतौर पर ऐसा होता है कि इसे कलाई पर बांधने के बजाय चूड़ियों या कंगन के साथ सजाया जा सके। इसमें मोतियों, लटकन, कुंदन, धागे और अन्य सजावटी तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है।
हैप्पी रक्षाबंधन: रक्षाबंधन पर भाई के लिए लिखें ये खास मैसेज, ये शुभकामनाएं जीत लेंगी उसका दिल
अगर आप इस रक्षा बंधन पर अपने भाई को दिल छू लेने वाली शुभकामनाएं भेजना चाहते हैं, तो यहां आपकोरक्षाबंधन की शुभकामनाएं, स्टेट्स, शायरी और कविताएं और फोटो कैप्शन मिलेंगे।
रक्षाबंधन के मौके पर भाई-बहन साथ किसी प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन का प्लान भी बना सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तरह साथ में पूजा-पाठ और प्रार्थना करना रिश्ते में प्रेम और सकारात्मकता का भाव बढ़ा सकता है।
रक्षाबंधन पर एथनिक फैशन गोल्स दे रही हैं शालिनी पांडे, देखें उनके 5 सबसे खूबसूरत लुक्स
अगर आप भी इस रक्षाबंधन अपने स्टाइल को खास बनाना चाहती हैं, तो शालिनी पांडे के ये खूबसूरत एथनिक लुक्स आपके लिए परफेक्ट इंस्पिरेशन साबित हो सकते हैं। साड़ियों से लेकर खूबसूरत ट्रेडिशनल आउटफिट्स तक, शालिनी ने कई बार साबित किया है कि एथनिक फैशन में उनका अंदाज़ सबसे अलग और बेहद आकर्षक है।
महिला जीवन का सबसे खूबसूरत, संवेदनशील और बदलाव से भरा दौर यदि कोई होता है, तो वह निश्चित रूप से मातृत्व यानी प्रेग्नेंसी का समय होता है। जब कोई महिला गर्भवती होती है, तो उसके शरीर और मन दोनों स्तर पर कई प्रकार के बड़े और गहरे बदलाव हो रहे होते हैं। इस दौरान होने वाली मां को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए परिवार के बुजुर्गों, दोस्तों और रिश्तेदारों द्वारा तरह-तरह की सलाह और नसीहतों का दौर शुरू हो जाता है। सदियों से हमारे समाज में प्रेग्नेंसी को लेकर कई तरह की लोक-कथाएं, दबी-छिपी मान्यताएं और पारंपरिक बातें चली आ रही हैं, जिन्हें लोग बिना किसी वैज्ञानिक पुष्टि के आँख मूंदकर सच मान लेते हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) और स्त्री रोग विशेषज्ञों का मानना है कि मातृत्व के इस सफर में इन झूठी बातों या मिथकों पर भरोसा करना भावी मां और उसके आने वाले बच्चे दोनों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि हम सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों और डॉक्टर की सलाह पर अमल करें।पहला और सबसे बड़ा मिथक: गर्भवती महिला को हमेशा दो लोगों के बराबर खाना चाहिएप्रेग्नेंसी के दौरान हमारे समाज में सबसे ज्यादा जो बात सुनने को मिलती है, वह यह है कि अब से होने वाली मां को दो लोगों के बराबर यानी सामान्य से दोगुना भोजन खाना चाहिए, ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे का सही पोषण हो सके। यह एक ऐसा सबसे बड़ा और प्रचलित मिथक है जिसे लोग सबसे ज्यादा सच मानते हैं। डॉक्टरों और डाइटीशियन का साफ तौर पर कहना है कि गर्भावस्था के दौरान शरीर को निश्चित रूप से अधिक कैलोरी और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि आप जरूरत से ज्यादा और भारी खाना खाना शुरू कर दें। जरूरत से ज्यादा खाने से महिला का वजन तेजी से बढ़ सकता है, जिससे जेस्टेशनल डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और नॉर्मल डिलीवरी में जटिलताएं आने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। भोजन की मात्रा दोगुनी करने के बजाय आहार की गुणवत्ता (Quality of Food) पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिंस और फोलिक एसिड से भरपूर संतुलित चीजें शामिल हों।दूसरा मिथक: गर्भावस्था में व्यायाम या शारीरिक गतिविधियां करना है हानिकारकएक और बेहद आम भ्रांति यह फैली हुई है कि गर्भवती महिलाओं को नौ महीने तक पूरी तरह से आराम करना चाहिए और बिस्तर से उठकर किसी भी प्रकार का शारीरिक श्रम या व्यायाम (Exercise) नहीं करना चाहिए। लोगों का ऐसा मानना होता है कि हिलने-डुलने या कसरत करने से गर्भ में पल रहे बच्चे को चोट पहुंच सकती है या मिसकैरेज का खतरा हो सकता है। जबकि स्त्री रोग विशेषज्ञों का यह तर्क है कि यदि प्रेग्नेंसी पूरी तरह से सामान्य और स्वस्थ (Normal Pregnancy) है, तो हल्के व्यायाम, वॉक और योगासन करना मां और बच्चे दोनों के लिए वरदान साबित होते हैं। नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि करने से शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है, मांसपेशियों की जकड़न दूर होती है, प्रसव के दौरान होने वाला दर्द सहन करने की क्षमता बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। हां, किसी भी प्रकार का भारी वजन उठाने या कठिन कसरत करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना और उनकी देखरेख में ही योग करना अनिवार्य होता है।तीसरा मिथक: प्रेग्नेंसी के दौरान सफर करना पूरी तरह से है असुरक्षितअक्सर परिवार के बुजुर्ग महिलाओं को सलाह देते हैं कि गर्भधारण करने के बाद से लेकर बच्चे के जन्म तक घर से बाहर कदम नहीं रखना चाहिए और किसी भी तरह के सफर (Travel) से पूरी तरह से बचना चाहिए। यह डर फैला रहता है कि कार, बस या ट्रेन के झटकों से गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है। इस बात में थोड़ी बहुत सच्चाई केवल शुरुआती तीन महीनों और अंतिम चरण के कुछ हफ्तों के लिए हो सकती है, जब शरीर अत्यधिक संवेदनशील होता है, लेकिन पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान यात्रा करना प्रतिबंधित नहीं है। डॉक्टर मानते हैं कि प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही (Second Trimester) यानी चौथे से छठे महीने के बीच का समय यात्रा करने के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। इस दौरान महिलाएं सावधानी बरतते हुए और डॉक्टर की अनुमति लेकर आरामदायक सफर कर सकती हैं, बशर्ते उन्हें किसी प्रकार की गंभीर चिकित्सीय जटिलता या ब्लीडिंग जैसी समस्या न हो।चौथा और पांचवां मिथक: घी खाने से होती है नॉर्मल डिलीवरी और पेट के आकार से तय होता है लिंगप्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में गर्भवती महिलाओं को जमकर घी खाने की सलाह दी जाती है, इस अंधविश्वास के साथ कि इससे पेट चिकना हो जाता है और डिलीवरी बहुत आसानी से यानी नॉर्मल हो जाती है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार घी खाने का बच्चे के जन्म के रास्ते या नॉर्मल डिलीवरी की प्रक्रिया से दूर-दूर तक कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। अत्यधिक घी खाने से केवल महिला का वजन और कोलेस्ट्रॉल ही बढ़ता है। इसके अलावा, एक और अजीब मिथक यह है कि महिला के पेट का आकार देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि गर्भ में बेटा है या बेटी। यह पूरी तरह से बेबुनियाद है, क्योंकि पेट का आकार महिला की रीढ़ की हड्डी की बनावट, बच्चे की पोजीशन और गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा पर निर्भर करता है। इसलिए इन सभी मिथकों से दूर रहें और एक स्वस्थ मातृत्व का आनंद लें।
खूबसूरत और बेदाग निखार पाना हर किसी की ख्वाहिश होती है, और इसके लिए ज्यादातर महिलाएं व युवतियां बिना सोचे-समझे अपने नजदीकी ब्यूटी पार्लर का रुख कर लेती हैं। पार्लर जाते ही हम अक्सर अपनी 'पार्लर वाली दीदी' की मीठी बातों और उनके सुझावों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं, और वे हमारे चेहरे पर बिना यह जाने कि हमारी स्किन टाइप क्या है, कोई भी क्रीम या पैक थोप देती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि पार्लर से फेशियल करवाकर घर लौटने के बाद कई बार चेहरे पर ग्लो आने के बजाय छोटे-छोटे पिंपल्स, एलर्जी या रैशेज क्यों उभर आते हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह यह होती है कि हम फेशियल करवाने से पहले ब्यूटीशियन से बुनियादी और जरूरी सवाल नहीं पूछते हैं। यदि आप भी अपने चेहरे की प्राकृतिक सुंदरता और त्वचा के स्वास्थ्य को लेकर जरा भी फिक्रमंद हैं, तो अगली बार पार्लर जाने से पहले कुछ खास बातों की स्पष्ट जानकारी लेना बेहद आवश्यक है।पहला और सबसे अहम सवाल: मेरी स्किन टाइप के लिए कौन सा फेशियल है सहीब्यूटी पार्लर में फेशियल की शुरुआत करने से पहले सबसे पहला और जरूरी सवाल आपको अपनी पार्लर वाली दीदी से यह पूछना चाहिए कि आपकी त्वचा का वास्तविक प्रकार (Skin Type) क्या है। हर इंसान की स्किन ड्राई, ऑयली, सेंसिटिव या कॉम्बिनेशन हो सकती है, और हर स्किन पर एक ही तरह के प्रोडक्ट्स या केमिकल सूट नहीं करते हैं। कई बार पार्लर में स्टॉक में पड़ी किसी पुरानी या महंगी क्रीम को खत्म करने के चक्कर में वे हर ग्राहक पर एक ही फेशियल किट इस्तेमाल कर देती हैं, जिससे नाजुक त्वचा को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए, अपनी स्किन की प्रकृति को समझकर ही कोई फेशियल या क्लींजिंग ट्रीटमेंट चुनें, ताकि चेहरे की नमी बरकरार रहे और किसी भी तरह के साइड इफेक्ट्स से बचा जा सके।प्रोडक्ट्स की क्वालिटी और एक्सपायरी डेट को लेकर करें सवालफेशियल के दौरान इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता (Quality) सीधे तौर पर आपके चेहरे की सेहत को प्रभावित करती है। अक्सर पार्लर वाले बड़े जार या लोकल ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनके अंदर मौजूद केमिकल्स या कृत्रिम खुशबू त्वचा की अंदरूनी परतों को जला सकती है या समय से पहले झुर्रियां पैदा कर सकती है। आपको पार्लर में फेशियल करवाने से पहले यह साफ तौर पर पूछना चाहिए कि वे जो फेशियल किट या स्क्रब इस्तेमाल कर रही हैं, उसकी एक्सपायरी डेट क्या है और क्या वह किसी प्रतिष्ठित या डर्मेटोलॉजिस्ट-प्रूव्ड ब्रांड का है या नहीं। यदि प्रोडक्ट्स घटिया क्वालिटी के हैं या उनकी एक्सपायरी निकल चुकी है, तो तुरंत उस फेशियल को करवाने से मना कर देना ही समझदारी है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही आपकी खूबसूरत त्वचा को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है।चेहरे पर फेशियल मसाज के दौरान रखें इन खास बातों का ध्यानचेहरे की चमक बढ़ाने के लिए फेशियल के स्टेप्स में मसाज सबसे अहम हिस्सा मानी जाती है, लेकिन अगर मसाज का तरीका गलत हो या हाथ का दबाव बहुत ज्यादा तेज हो, तो इसके भयानक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पार्लर वाली दीदी से यह जरूर पूछें कि वे मसाज करते वक्त किन स्ट्रोक्स का इस्तेमाल कर रही हैं और क्या उनके हाथों के दबाव से चेहरे की मांसपेशियां या टिश्यूज को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचेगा। जिन महिलाओं की स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव या एक्ने-प्रोन होती है, उन्हें रफ मसाज से बचना चाहिए क्योंकि इससे चेहरे के दाने फूट सकते हैं और पूरे चेहरे पर संक्रमण फैल सकता है। इसके अलावा, फेशियल के तुरंत बाद धूप में निकलने से बचना चाहिए और पार्लर में इस्तेमाल होने वाले स्पंज या तौलिये की हाइजीन (Hygiene) पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए, ताकि बैक्टीरिया से होने वाले स्किन इन्फेक्शन से सुरक्षा मिल सके।
होम डेकोर: दीवार से झड़ने लगा है प्लास्टर और पेंट? एक आसान तरीके से करें ठीक, नया जैसा दिखेगा घर
How To Repair Damaged Wall At Home: अगर आपके घर की दीवार का प्लास्टर या पेंट झड़ने लगा है तोसिर्फ उसके ऊपर नया पेंट कर देना सही समाधान नहीं है। आइए जानते हैं कि कैसे पुरानी टूटी और खराब हो रही दीवार का मरम्मत घऱ पर खुद से करें।
How Much Health Insurance Cover Do You Actually Need in 2026?
Choosing the right health insurance cover in 2026 requires more than picking a large sum insured
Side Effects of Long Sitting: जो भी लोग दफ्तर में काम करते हैं, उनके लिए लगातार कुर्सी पर घंटों बैठना आम बात है। ऐसा करने से आपके दिल की सेहत पर क्या असर पड़ता है, आज हम उसी बारे में जानते हैं।
दही या योगर्ट: सेहत के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद? जानें इसके सभी फायदे
Yogurt and Curd Which is Better: आजकल लोग दही की जगह योगर्ट लेना पसंद करते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को इसका अंतर ही नहीं पता। यहां हम आपको इसी बारे में बताएंगे और ये भी बताएंगे कि दोनों में से क्या बेहतर है।
रक्षाबंधन हेल्थ स्पेशल: रक्षाबंधन पर गुड़ की मिठाई खाना सही या चीनी वाली? जानें एक्सपर्ट की राय
Raksha Bandhan 2026: इस लेख में जानते हैं कि रक्षाबंधन पर गर्मी के मौसम में चीनी की जगह गुड़ से बनी मिठाई खाना कितना सही है और फिटनेस व डायबिटीज में किन बातों का ध्यान रखें।
सावधान! युवाओं में बढ़ रहा इन बीमारियों का खतरा, खराब लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह
Common Health Problems in Youths: आजकल के समय में युवा अपने जीवन में इस कदर व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें अपनी सेहत के बारे में भी याद नहीं रहता। ऐसे में कुछ बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं। यहां हम आपसे इसी बारे में बात करेंगे।
onam wishes 2026: ओणमपर अपने परिजनों और दोस्तों को शुभकामनाएं दें।अगर आप भी इस ओणम पर अपनों को खास अंदाज में बधाई देना चाहते हैं, तो यहां दिए गए खूबसूरत संदेश, ग्रीटिंग और कविताएं आपके काम आ सकते हैं।
ईद ए मिलाद उन नबी: मोहब्बत और रहमत का पैगाम... ईद मिलाद पर अपनों को भेजें ये खूबसूरत संदेश
Eid Milad Wishes: आइए, इस मुबारक मौके पर अपने प्रियजनों को दिल से बधाई दें और उनके जीवन में सुख, शांति, बरकत और खुशियों की दुआ करें। ईद मिलाद-उन-नबी मुबारक!
युवाओं में लंबे समय तक कंप्यूटर और मोबाइल इस्तेमाल, गलत पॉश्चर, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण गर्दन के दर्द की समस्या बढ़ सकती है।
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Choosing a present for someone special can be surprisingly tricky.
Women Health: पीरियड्स मिस होने के पीछे प्रेग्नेंसी के अलावा क्या कारण हो सकते हैं?
Reason For Delayed Period: अक्सर महिलाएं इस बात से परेशान रहती हैं कि उनके पीरियड मिस हो गए हैं। पर, क्या आप जानती हैं कि इसके पीछे की वजह सिर्फ प्रेग्नेंसी नहीं हो सकती। यहां हम आपको इसके कुछ कारण बताएंगे।
Sleep After Eating: खाने के तुरंत बाद सोने से शरीर पर क्या पड़ता है असर?
Is it Bad to Sleep After a Meal: अक्सर आपने लोगों को खाने के तुरंत बाद सोते देखा होगा। ये कितना सही आज हम इसी बारे में आपसे बात करेंगे। हम आपको बताएंगे कि खाना खान के तुरंत बाद सोना चाहिए या नहीं।
Flu Prevention Tips: खांसी-जुकाम और फ्लू से बचने के लिए कब जरूरी है मास्क?
Health Tips: दिल्ली में लगातार स्वाइन फ्लू और वायरल के मामले फैल रहे हैं। ऐसे में मास्क आपको कब लगाना चाहिए, आइए जानते हैं।
Eid Milad 2026: अगर आप ईद मिलाद के मौके पर नमाज और इबादत के लिए दिल्ली की किसी बड़ी मस्जिद में जाना चाहते हैं, तो पुरानी दिल्ली की जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और शाही ईदगाह प्रमुख विकल्पों में शामिल हैं।
Rakhi Gift: मिठाई की जगह दें ये हेल्दी स्वीट्स और स्नैक्स, भाई-बहन की सेहत का भी रखें ख्याल
Healthiest Sweet Snacks: अगर आप राखी के त्योहार पर मिठाई का विकल्प खोज रहे हैं तो ये लेख आपके काम का हो सकता है। यहां हम आपको बताएंगे मिठाई के हेल्दी विकल्प...
Onam 2026: अवियल से पायसम, ओणम पर बनाएं ये 3 स्वादिष्ट केरल के पकवान
Onam Special Recipes: आप कुछ आसान और पारंपरिक व्यंजनों से घर पर ही ओणम सेलिब्रेशन को खास बना सकते हैं। नारियल, दही, सब्जियों और मसालों से तैयार होने वाले केरल के व्यंजनों का स्वाद बेहद अलग और खास होता है।
Anemia Risks: क्या रोज भीगी किशमिश खाने से एनीमिया ठीक हो सकता है? समझिए पूरा सच
भीगी किशमिश में आयरन होता है, इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है, तो क्या किशमिश खाने से एनीमिया ठीक हो सकता है?
दिल्ली-एनसीआर में मौसम में बदलाव और मानसूनी नमी के बीच श्वसन संक्रमण (Respiratory Infections) के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है। अस्पतालों की ओपीडी और निजी क्लीनिकों में पहुंचने वाले अधिकांश मरीजों में इन्फ्लूएंजा-ए यानी स्वाइन फ्लू (H1N1) की पुष्टि हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार, इस बार स्वाइन फ्लू के फैलने का तरीका काफी हद तक कोविड-19 के ट्रांसमिशन पैटर्न से मेल खा रहा है—जहां घर में केवल एक सदस्य के संक्रमित होने पर अगले 48 से 72 घंटों के भीतर पूरा परिवार एक के बाद एक तेज बुखार और खांसी की चपेट में आ रहा है।क्या है स्वाइन फ्लू का 3 दिन वाला 'सीरियल इंटरवल'?एपिडेमियोलॉजी (महामारी विज्ञान) में 'सीरियल इंटरवल' (Serial Interval) उस समय अवधि को कहा जाता है, जो पहले संक्रमित व्यक्ति (प्राइमरी केस) में लक्षण दिखने और उसके द्वारा संक्रमित किए गए दूसरे व्यक्ति (सेकेंडरी केस) में लक्षण उभरने के बीच लगती है।तेज संक्रमण चक्र: एच1एन1 स्वाइन फ्लू का सीरियल इंटरवल आमतौर पर महज 2 से 3 दिन का होता है।लक्षण आने से पहले ही प्रसार: संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार या गले में खराश जैसे स्पष्ट लक्षण दिखने से 24 घंटे पहले ही उसके खांसने, छींकने या सांस छोड़ने से वायरस हवा में फैलना शुरू हो जाता है।क्लस्टर इन्फेक्शन: बंद कमरों, एसी वाले घरों और दफ्तरों में वेंटिलेशन कम होने के कारण यह एयरोसोल के जरिए 3 दिन के भीतर परिवार के बाकी सदस्यों में फैलकर पूरे घर को एक साथ बीमार कर देता है।सामान्य मौसमी फ्लू से कैसे अलग हैं इसके लक्षण?हालांकि सामान्य वायरल फ्लू और स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण मिलते-जुलते होते हैं, लेकिन एच1एन1 का प्रभाव शरीर पर कहीं अधिक गंभीर और अचानक होता है:अचानक तेज बुखार: तापमान 102F से 104F तक पहुंच जाना और साधारण पैरासिटामोल से आसानी से न उतरना।असहनीय बदन दर्द और थकान: मांसपेशियों में तेज खिंचाव, सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी महसूस होना।सूखी व लगातार खांसी: गले में तेज जलन, खराश और सांस लेने में हल्की तकलीफ।पेट से जुड़ी समस्याएं: कुछ मामलों में मरीजों को दस्त (Loose Motions) और उल्टी की शिकायत भी देखने को मिल रही है।किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा और क्या हैं बचाव के उपाय?वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, स्वस्थ वयस्कों में यह संक्रमण 5 से 7 दिनों के भीतर ठीक हो जाता है, लेकिन हाई-रिस्क ग्रुप के लिए यह जानलेवा निमोनिया का रूप ले सकता है:संवेदनशील वर्ग: 5 वर्ष से छोटे बच्चे, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से डायबिटीज, अस्थमा, किडनी या हृदय रोग से पीड़ित मरीज।सेल्फ-मेडिकेशन से बचें: बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक्स न लें, क्योंकि स्वाइन फ्लू एक वायरल बीमारी है जिस पर एंटीबायोटिक बेअसर होती हैं। गंभीर मामलों में लक्षण दिखने के 48 घंटे के भीतर एंटीवायरल दवाएं (जैसे Oseltamivir) शुरू करना सबसे प्रभावी होता है।मास्क और आइसोलेशन: परिवार में किसी को भी फ्लू के लक्षण दिखते ही उसे तुरंत अलग कमरे में आइसोलेट करें, मास्क का उपयोग करें और बार-बार हाथ धोने के कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें।फ्लू वैक्सीन (Annual Flu Shot): विशेष रूप से बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को सालाना इन्फ्लूएंजा का टीका जरूर लगवाना चाहिए।यदि तेज बुखार के साथ सांस फूलने, छाती में दर्द या होंठ नीले पड़ने जैसी समस्या दिखे, तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
Raksha Bandhan Health Tips: रक्षाबंधन ऐसा त्योहार है, जिसमें लोग खूब बढ़-चढ़कर मिठाई खाते हैं। पर, आजकल बाजार में मिलावट वाली मिठाई मिलती है। ऐसे में मिठाई खाते समय कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें।
Breast Cancer Kyu Hota Hai: जब भी किसी महिला के ब्रेस्ट में दर्द होता है तो उन्हें लगता है कि ये ब्रेस्ट कैंसर की वजह से है, पर इस बात में कितनी सच्चाई है, आइए जानते हैं।
Home Remedies: अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते हैं, तो हम यहां आपको कफ से लेकर पेट दर्द तक के लिए दादी-नानी के जमाने के नुस्खे बताएंगे।
Raksha Bandhan 2026: मिठास भी रहेगी, सेहत भी! रक्षाबंधन पर बनाएं ये 4 बिना चीनी की मिठाइयां
Sugar-Free Sweet Recipes: इस रक्षाबंधन स्वाद के साथ सेहत का ख्याल रखना है तो घर पर बिना चीनी की हेल्दी मिठाइयां बना सकते हैं। इन मिठाइयों में प्राकृतिक मिठास के लिए खजूर, अंजीर, केला या किशमिश जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Diet Chart for Diabetic Patients: अगर आपके घर में कोई डायबिटीज का मरीज है, तो उसके लिए यहां हम आपको एक डाइट चार्ट देंगे, जो आपके बेहद काम का होने वाला है।
Yoga Tips: कमर दर्द से परेशान हैं? रोज करें ये आसान योगासन, मिल सकती है राहत
Yoga Poses for Back Pain: लंबे समय तक या गलत पोस्चर में बैठना और कम शारीरिक गतिविधि बढ़ा सकती है बैक पेन, जानिए कमर को स्ट्रेच और मजबूत करने वाले आसान योगासन।
Raksha Bandhan Sweets: रक्षाबंधन पर बनाएं ये 4 हेल्दी मिठाइयां, स्वाद के साथ सेहत का भी रखें ध्यान
अगर आप मीठा खाने के शौकीन हैं, लेकिन आपको अपनी डाइट का भी ध्यान रखना है तो ये लेख आपके काम का है। हम आपको कुछ ऐसी मिठाईयों के बारे में बताएंगे, जिन्हें खाकर आप त्योहार भी सेलिब्रेट कर सकेंगे और अपनी सेहत का ध्यान भी रख सकेंगे।
क्या ज्यादा चाय-कॉफी पीने से महिलाओं के हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं? कैफीन का पीरियड्स, फर्टिलिटी और प्रेग्नेंसी पर कितना असर पड़ता है? जानिए दिन में कितनी चाय-कॉफी सुरक्षित मानी जाती है
Kajari Teej 2026: कजरी तीज पर यहां करें शिव-पार्वती के दर्शन, पूरी होती है मनोकामना!
5 Famous Shiva Temples: कजरी तीज पर मंदिर जाकर पूजा करने की योजना बना रहे हैं, तो 5 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जानना आपके लिए उपयोगी हो सकता है। यहां दर्शन और पूजा के साथ-साथ त्योहार की आध्यात्मिक अनुभूति भी खास हो सकती है।
Raksha Bandhan 2026: इस रक्षाबंधन घर पर बनाएं ताजी दूध की मिठाई, बेहद आसान है तरीका
Homemade Milk Mithai Recipe: घर पर बनी मिठाई का स्वाद तो खास होता ही है। दूध, चीनी और कुछ सामान्य सामग्री की मदद से आप परिवार के लिए स्वादिष्ट मिठाई तैयार कर सकते हैं। इसे बनाने में बहुत ज्यादा समय और मेहनत भी नहीं लगती।
विटामिन-डी को आमतौर पर हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन इसका संबंध मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य से भी देखा गया है। इसकी कमी कुछ लोगों में थकान, नींद की परेशानी, चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।
Healthy Diet Chart: आज के समय में लाइफस्टाइल इतनी व्यस्त है कि आपको अपनी डाइट अच्छी रखने की बेहद जरूरत है। यहां हम आपको इसी बारे में जानकारी देंगे।
Causes Of Hair Fall: अगर आपके बाल भी अचानक तेजी से झड़ रहे हैं तो हो सकता है कि ये किसी गंभीर बीमारी के कारण हो। आइए इस बारे में जानते हैं डिटेल में।
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर भाई का मुंह मीठा कराएं घर की बनी रस मलाई से, जानें आसान रेसिपी
Rasmalai Recipe: रक्षाबंधन पर भाई-बहन और परिवार के साथ डिनर के बाद ठंडी-ठंडी रस मलाई सर्व करें। घर की बनी इस मिठाई का स्वाद मेहमानों को जरूर पसंद आएगा। तो इस राखी पर नोट कर लें रस मलाई बनाने की आसान रेसिपी।
Symptoms of High BP: बढ़ रहा हाई BP का साइलेंट खतरा! शरीर में दिखें ये 6 लक्षण तो तुरंत कराएं जांच
Symptoms of High Blood Pressure: अक्सर हम हाई ब्लड प्रेशर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपको इनके बारे में जानकारी नहीं है, तो इस लेख को आखिर तक पढ़ें।
Relationships Tips: रिश्ता बचाना है तो भूलकर भी न पूछें ये सवाल, सामने वाला हो सकता है नाराज
अगर आप अपने रिश्तों में भरोसा, सम्मान और सहजता बनाए रखना चाहते हैं, तो कुछ सवालों से दूरी बनाना बेहतर है। छोटी-सी संवेदनशीलता और सामने वाले की सीमाओं का सम्मान बातचीत को बेहतर बना सकता है और रिश्तों में अनावश्यक तनाव से भी बचा सकता है।
Habits for Good Health: सुबह उठकर जरूर करें ये 3 काम, सेहत और मूड दोनों रहेंगे बेहतर
3 Habits for Good Health: अगर आप पूरा दिन एनर्जेटिक और हेल्दी रहना चाहते हैं तो अपने दिन की शुरुआत तीन अच्छी आदतों से करें। इससे आपके जीवन में काफी बदलाव देखने को मिलेगा।
बिना चिल्लाए या सजा दिए बच्चों का गुस्सा करें शांत: अपनाएं ये 8 असरदार पेरेंटिंग टिप्स
बच्चों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और टैंट्रम्स (Tantrums) दिखाना एक सामान्य भावनात्मक प्रक्रिया है, लेकिन जब यह बार-बार होने लगे, तो माता-पिता अक्सर अपना आपा खो बैठते हैं। कई बार पैरेंट्स गुस्से में बच्चों पर चिल्लाने लगते हैं या उन्हें कड़ी सजा दे देते हैं। बाल मनोवैज्ञानिकों (Child Psychologists) के अनुसार, डांट-फटकार और शारीरिक सजा से बच्चे का गुस्सा शांत होने के बजाय उसका स्वभाव अधिक जिद्दी, विद्रोही और आक्रामक बन सकता है। आधुनिक सकारात्मक पेरेंटिंग (Positive Parenting) यह सिखाती है कि बच्चों की भावनाओं को समझे बिना केवल व्यवहार को दबाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। यदि आप शांत दिमाग और सही मनोवैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग करें, तो बिना किसी सजा या चीख-पुकार के बच्चों के गुस्से को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।1. पहले खुद को पूरी तरह शांत रखें (Mirroring Technique)जब बच्चा गुस्से में चीख रहा हो, तो माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया भी चिल्लाने की होती है। मनोविज्ञान में इसे 'इमोशनल कंटेजियन' कहा जाता है। बच्चे अपने माता-पिता के चेहरे के हाव-भाव और आवाज की टोन को तुरंत कॉपी करते हैं। यदि आप खुद शांत रहेंगे और अपनी आवाज को धीमा व गंभीर रखेंगे, तो बच्चे का उत्तेजित नर्वस सिस्टम धीरे-धीरे शांत होने लगेगा। गुस्से का जवाब शांति से देना बच्चे को सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में संयम कैसे बनाए रखा जाता है।2. भावनाओं को नाम देना और उन्हें स्वीकार करना (Validate Feelings)अक्सर माता-पिता कहते हैं, इतनी सी बात पर रोने की क्या जरूरत है? ऐसा कहने से बच्चा समझता है कि उसकी भावनाओं की कोई कद्र नहीं है। इसके बजाय उसकी भावना को स्वीकार करें और बोलें, मैं समझ सकता हूं कि खिलौना टूटने से तुम्हें बहुत बुरा लग रहा है और गुस्सा आ रहा है। जब बच्चे को लगता है कि उसकी बात और दर्द को समझा जा रहा है, तो उसका आंतरिक तनाव और गुस्सा खुद-ब-खुद 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है।3. डीप ब्रीदिंग और '5-4-3-2-1' ग्राउंडिंग तकनीकजब बच्चा अत्यधिक गुस्से में हो, तो उसे तुरंत डांटने के बजाय गहरी सांस लेने का अभ्यास कराएं। आप इसे एक खेल की तरह बना सकते हैं, जैसे चलो एक मोमबत्ती बुझाते हैं और एक फूल की खुशबू सूंघते हैं। इसके अलावा 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक का उपयोग करें, जिसमें बच्चे से पूछें कि उसे कमरे में कौन सी 5 चीजें दिख रही हैं और 4 चीजें कौन सी छूने में महसूस हो रही हैं। यह प्रक्रिया बच्चे के दिमाग को गुस्से वाले ट्रिगर से हटाकर वर्तमान पर केंद्रित कर देती है।4. 'टाइम-आउट' के बजाय 'टाइम-इन' का उपयोग करेंपारंपरिक पेरेंटिंग में बच्चों को गलती करने पर अकेले कमरे में 'टाइम-आउट' दे दिया जाता है, जिससे बच्चे उपेक्षित और अलग-थलग महसूस करते हैं। इसके स्थान पर 'टाइम-इन' का तरीका अपनाएं। इसका मतलब है कि गुस्से के समय बच्चे के पास बैठें, उसे एक सुरक्षित स्थान दें और कहें, मैं यहीं तुम्हारे साथ बैठा हूं, जब तुम बात करने के लिए तैयार होगे, हम बात करेंगे। यह बच्चे को सुरक्षा का अहसास कराता है और अकेलापन दूर करता है।5. बच्चे को हग (जादू की झप्पी) देंशारीरिक स्पर्श में अत्यधिक चिकित्सीय शक्ति होती है। जब बच्चा अत्यधिक उत्तेजित हो, तो धीरे से उससे पूछें, क्या तुम्हें एक हग चाहिए? गले लगाने से शरीर में 'ऑक्सीटोसिन' (प्यार और शांति का हार्मोन) रिलीज होता है और 'कोर्टिसोल' (तनाव हार्मोन) का स्तर तुरंत गिर जाता है। यह स्पर्श बच्चे के उग्र व्यवहार को पल भर में पिघलाने की क्षमता रखता है।6. ध्यान भटकाने और रचनात्मक विकल्प देने की रणनीतिगुस्से के चरम पर तार्किक बातचीत काम नहीं करती। उस समय बच्चे का ध्यान किसी दूसरी सकारात्मक गतिविधि की ओर मोड़ना सबसे समझदारी भरा कदम होता है। यदि बच्चा किसी बात पर अड़ गया है, तो उसे डांटने के बजाय पानी पीने के लिए दें, बाहर बालकनी में पक्षी दिखाने ले जाएं या उसका पसंदीदा संगीत चला दें। ध्यान भटकने के बाद उसका दिमाग तार्किक रूप से सोचने की स्थिति में आ जाता है।7. शांत होने के बाद समाधान पर चर्चा करें (Problem Solving)जब बच्चे का गुस्सा पूरी तरह ठंडा हो जाए, तब उससे प्यार से बात करें। उससे पूछें कि किस बात से उसे बुरा लगा था और अगली बार जब ऐसा महसूस हो, तो वह चिल्लाने या चीजें फेंकने के बजाय बोलकर कैसे समझा सकता है। बच्चे को यह स्पष्ट सिखाएं कि गुस्सा आना गलत नहीं है, लेकिन गुस्से में गलत व्यवहार करना, चीजें तोड़ना या दूसरों को चोट पहुंचाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।8. अच्छे और शांत व्यवहार की खुलकर तारीफ करेंसकारात्मक सुदृढ़ीकरण (Positive Reinforcement) बच्चों के व्यवहार सुधार का सबसे मजबूत हथियार है। जब भी बच्चा किसी तनावपूर्ण स्थिति में बिना गुस्सा किए संयम से पेश आए या अपनी बात शांति से समझाए, तो उसकी खुलकर प्रशंसा करें। उसे बताएं कि आपको उसका यह शांत तरीका कितना पसंद आया। जब बच्चे को अच्छे व्यवहार के लिए सराहना मिलती है, तो वह भविष्य में भी वैसा ही आचरण दोहराने का प्रयास करता है।
मानसून में बुखार आने पर पेनकिलर लेने की भूल पड़ सकती है भारी, किडनी पर पड़ता है गंभीर असर
मानसून का मौसम अपने साथ सुहाना मौसम और राहत लेकर आता है, लेकिन इसके साथ ही यह अपने साथ कई तरह की मौसमी बीमारियां, वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और बदन दर्द जैसी समस्याएं भी लाता है। ऐसे में थोड़ी सी भी तकलीफ होने पर लोग अक्सर खुद डॉक्टर बनकर मेडिकल स्टोर से ओवर-द-काउंटर पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) खरीदकर खा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मानसून के दौरान बुखार में पेनकिलर लेना आपकी सेहत, खासकर आपकी किडनी के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है?डिहाइड्रेशन और पेनकिलर का खतरनाक कॉम्बिनेशननेफ्रोप्लस के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. जाविद ताहिर के अनुसार, मानसून के दिनों में वायरल बुखार, उल्टी-दस्त और कम पानी पीने की वजह से शरीर अक्सर डिहाइड्रेटेड (Dehydrated) हो जाता है। ऐसे में जब कोई व्यक्ति पेनकिलर का सेवन करता है, तो यह शरीर और किडनी पर अत्यधिक दबाव डालता है। खासकर जब डेंगू, मलेरिया या अन्य वायरल संक्रमणों का खतरा चरम पर हो, तो बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेना किडनी के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाइयां (NSAIDs) हैं नुकसानदायकइबुप्रोफेन (Ibuprofen), डाइक्लोफेनाक (Diclofenac), नेप्रोक्सेन (Naproxen) और एस्पिरिन जैसी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाइयां (NSAIDs) शरीर के दर्द को तो तुरंत कम कर देती हैं, लेकिन ये किडनी में रक्त के प्रवाह (Blood Flow) को धीमा कर देती हैं, जिससे किडनी के ऊतकों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, डेंगू जैसी बीमारियों में इन दवाओं के सेवन से ब्लीडिंग (खून बहने) का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है।पैरासिटामोल लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?आकाश हेल्थकेयर मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल (द्वारका) के नेफ्रोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. अनुपम रॉय का कहना है कि डॉक्टरों द्वारा सामान्यतः बुखार और बदन दर्द में पैरासिटामोल (Paracetamol) लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसमें भी सही खुराक (Dosage) का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।अन्य दवाओं से सावधानी: कई बार लोग सर्दी-जुकाम की कंबाइंड दवाइयां लेते हैं, जिनमें पहले से ही पैरासिटामोल मौजूद होता है। ऐसे में दोबारा अलग से पैरासिटामोल लेने से ओवरडोज का खतरा हो जाता है।पुरानी बीमारियां: जिन लोगों को पहले से ही डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या कोई क्रॉनिक किडनी डिसीज (CKD) है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी पेनकिलर नहीं खानी चाहिए।पर्याप्त पानी पिएं: दवा लेने के साथ-साथ शरीर में पानी की कमी न होने दें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें।किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?यदि बुखार के दौरान शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो भूलकर भी पेनकिलर न लें और तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से परामर्श करें:यूरिन (पेशाब) का बहुत कम आनाचेहरे या शरीर पर सूजन आना, साथ में उल्टी होनाअत्यधिक गंभीर थकान और कमजोरी महसूस होनाচक्कर आना या भ्रम की स्थिति पैदा होनासांस लेने में तकलीफ होना
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Women Skin Care Tips: अगर आप भी स्किन के अनचाहे बालों को हटाने के लिए रेजर का इस्तेमाल करती हैं तो ये खबर अवश्य पढ़ें। हम आपको इसके नुकसान बताएंगे।
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Raksha Bandhan 2026: अगर मेहमान ज्यादा हैं तो ऐसी रेसिपीज को चुनें जिन्हें पहले से तैयार किया जा सके। आइए जानते हैं रक्षाबंधन पर घर में ऐसा फेस्टिव मेन्यू कैसे तैयार करें, जिससे त्योहार का स्वाद भी बढ़े और रसोई में आपका पूरा दिन भी न निकल जाए।
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Reason of Finger Cracking: आपने अक्सर लोगों को खाली बैठे उंगलियां चटकाते देखा होगा। क्या ये किसी शारीरिक समस्या की वजह से होता है ? आज हम इसी बारे में आपसे बात करेंगे।
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World Mosquito Day: आज विश्व मच्छर दिवस के मौके पर हम आप आपको बताएंगे कि मच्छर के काटने के बाद अगर आपकी थोड़ी सी तबीयत भी खराब लगती है तो तुरंत क्या करना चाहिए और हम आपको कुछ ऐसे नुस्खे भी बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप मच्छरों से बच सकते हैं।
यादों में बीकेएस अयंगर : दुनिया ने जिन्हें माना योग गुरु, कभी बीमारी और कुपोषण का किया था सामना
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। 20 अगस्त… सिर्फ कैलेंडर में दर्ज एक तारीख नहीं बल्कि एक महान योग गुरु की पुण्यतिथि है, जिसने अपनी साधना से न सिर्फ खुद की जिंदगी बदली बल्कि पूरी दुनिया को योग के करीब ला दिया। जिस शख्स ने लाखों लोगों को शरीर और मन को मजबूत बनाने का रास्ता दिखाया, खुद उसका बचपन बीमारियों और कमजोरी से भरा हुआ था।
आज के भागदौड़ भरे जीवन में बालों का झड़ना एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन जब यह समस्या सामान्य सीमा को पार कर जाए तो यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकती है। उत्तर भारत के ऐतिहासिक और प्रमुख शहर अंबाला में इन दिनों जिस तेजी से हेयर फॉल के मामले सामने आ रहे हैं, उसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों दोनों को ही चिंता में डाल दिया है। अंबाला के स्थानीय क्लीनिकों और डर्मेटोलॉजी सेंटर्स में इन दिनों युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की लंबी कतारें सिर्फ इसलिए लग रही हैं क्योंकि उनके बाल तेजी से बेजान होकर झड़ रहे हैं। पहले लोग इसे केवल मौसम में बदलाव या पानी के बदलते स्वाद का असर मानकर नजरअंदाज कर रहे थे, लेकिन जब यह समस्या विकराल रूप लेने लगी तो मेडिकल जांच में कुछ ऐसे चौंकाने वाले कारण सामने आए जिन्होंने सबको हैरान कर दिया। यदि आपके बाल भी अचानक से झड़ने लगे हैं और आप महंगे शैंपू व सीरम बदलकर थक चुके हैं, तो आपको इसके पीछे छिपी असली वजहों को गहराई से समझना होगा। आइए अंबाला के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के आधार पर जानते हैं कि आखिर बाल क्यों झड़ रहे हैं और इस नई मुसीबत से बचाव का सही तरीका क्या है।थायराइड असंतुलन और बालों का गहरा कनेक्शनअंबाला के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, इन दिनों हेयर फॉल के मामलों में सबसे बड़ा और मुख्य कारण शरीर में थायराइड हार्मोन का असंतुलन पाया जा रहा है। थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) हमारे मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है और जब यह हॉर्मोन कम या ज्यादा मात्रा में रिलीज होने लगता है, तो पूरे शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। जब किसी व्यक्ति को हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म की शिकायत होती है, तो सिर की स्कैल्प तक जरूरी पोषक तत्वों और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप बाल अपनी जड़ें कमजोर करने लगते हैं और कंघी करते वक्त या नहाते समय गुच्छे के रूप में बाहर आने लगते हैं। अंबाला क्षेत्र के लोगों में बदलती जीवनशैली, खानपान की अनियमित आदतें और अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण थायराइड की समस्या तेजी से घर कर रही है, जिसका सीधा असर उनके बालों की सेहत पर पड़ रहा है।शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का बालों पर असरबालों के झड़ने के पीछे एक अन्य बड़ा कारण शरीर के अंदर होने वाला डिहाइड्रेशन यानी पानी की गंभीर कमी है। आधुनिक दौर में लोग पानी पीने की अपनी दैनिक मात्रा को बहुत कम कर चुके हैं, जिसकी वजह से उनके शरीर की कोशिकाएं अंदर से सूखने लगती हैं। हमारे बाल लगभग एक चौथाई पानी से बने होते हैं और इन्हें जीवित व मजबूत रहने के लिए पर्याप्त हाइड्रेशन की सख्त जरूरत होती है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो स्कैल्प का प्राकृतिक तेल सूख जाता है, जिससे बाल अत्यधिक रूखे, बेजान, कमजोर और दो-मुंहे हो जाते हैं। अंबाला के मौसम में उतार-चढ़ाव और ठंडे-मीठे आर्टिफिशियल ड्रिंक्स के अधिक सेवन के कारण लोग सादा पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे यह समस्या और अधिक गंभीर होती जा रही है और बाल तेजी से टूटने लगते हैं।पोषक तत्वों की भारी कमी और खराब खानपानभागदौड़ भरी इस जिंदगी में ज्यादातर लोग फास्ट फूड, जंक फूड और मैदे से बनी चीजों का धड़ल्ले से सेवन कर रहे हैं, जिनमें शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स, मिनरल्स और प्रोटीन्स का नामोनिशान तक नहीं होता है। बालों की सेहत के लिए बायोटिन, आयरन, जिंक, विटामिन डी और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। जब हमारे शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है, तो शरीर सबसे पहले बालों जैसे अंगों को मिलने वाली ऊर्जा को कम कर देता है क्योंकि शरीर के लिए आंतरिक अंग ज्यादा जरूरी होते हैं। अंबाला के युवाओं में अनहेल्दी डाइट लेने का यह चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी वजह से कम उम्र में ही लोगों के बाल झड़ने लगे हैं और वे गंजेपन का शिकार हो रहे हैं।अंबाला में तेजी से पैर पसार रही इस मुसीबत के अन्य कारणथायराइड और डिहाइड्रेशन के अलावा कुछ अन्य वातावरणीय और आंतरिक कारक भी हैं जो अंबाला और आसपास के इलाकों में बालों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी और पानी में मौजूद खनिजों की अत्यधिक मात्रा यानी हार्ड वॉटर का इस्तेमाल है। जब बालों पर खारा पानी पड़ता है, तो बालों के रोमछिद्र (Hair Follicles) बंद हो जाते हैं और बालों की पकड़ कमजोर हो जाती है। इसके अलावा अत्यधिक रासायनिक रंगों, हेयर डाई, हीटिंग टूल्स और घटिया क्वालिटी के हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी बालों को अंदर से जला देता है। मानसिक तनाव, एंग्जायटी और पूरी नींद न लेना भी कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाता है, जो हेयर फॉल का एक बहुत बड़ा ट्रिगर प्वाइंट माना जाता है।बाल झड़ने से रोकने और बचाने के अचूक उपाययदि आप भी अंबाला या किसी अन्य शहर में रहते हैं और इस बढ़ती हुई हेयर फॉल की समस्या से परेशान हैं, तो कुछ आसान और वैज्ञानिक आदतों को अपनी दिनचर्या में तुरंत शामिल करना चाहिए। सबसे पहले अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें और रोजाना कम से कम 8 से 10 गिलास सादा पानी जरूर पिएं ताकि बॉडी हाइड्रेटेड रहे। अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, नट्स, पनीर, अंडे और दालों को शामिल करें ताकि आपके बालों को पर्याप्त प्रोटीन और विटामिन्स मिल सकें। अपने बालों को धोने के लिए हमेशा माइल्ड और सल्फेट-फ्री शैंपू का इस्तेमाल करें तथा खारे पानी से बचाव के लिए फिल्टर का उपयोग करें। यदि समस्या बहुत ज्यादा गंभीर हो चुकी है, तो घर पर नुस्खे आजमाने के बजाय किसी अच्छे डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलकर अपने थायराइड और ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं ताकि बीमारी की असल जड़ का समय रहते सटीक इलाज किया जा सके।
त्वचा पर हल्की सी खुजली या रैश होते ही हम में से अधिकांश लोगों की पहली आदत यही होती है कि हम तुरंत मेडिकल स्टोर जाते हैं या घर में रखी पुरानी एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड क्रीम उठाकर अपनी स्किन पर लगा लेते हैं। शुरुआत में यह तरीका बहुत असरदार लगता है और चंद मिनटों में ही खुजली या लालिमा गायब हो जाती है, जिससे हमें लगता है कि हमारी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी लापरवाही और बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मिलने वाली ओवर-द-काउंटर (OTC) क्रीम का धड़ल्ले से इस्तेमाल आपकी त्वचा को अंदर ही अंदर पूरी तरह से बर्बाद कर सकता है? डर्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में बिकने वाली ज्यादातर सामान्य क्रीमों में तेज स्टेरॉयड (Steroids) मिले होते हैं, जो कुछ समय के लिए राहत तो देते हैं लेकिन बाद में खतरनाक साइड इफेक्ट्स छोड़ जाते हैं। आज के इस विस्तृत और महत्वपूर्ण लेख में हम आपको बताएंगे कि बिना डॉक्टर की सलाह के खुजली पर कोई भी क्रीम लगाना क्यों खतरनाक है, इसके क्या-क्या गंभीर नुकसान हो सकते हैं, और त्वचा की किसी भी समस्या से निपटने का सही और वैज्ञानिक तरीका क्या है।मेडिकल स्टोर से मिलने वाली स्टेरॉयड क्रीमों का खतरनाक सचआजकल बिना प्रिस्क्रिप्शन के किसी भी मेडिकल स्टोर से आसानी से मिलने वाली कई एंटी-फंगल और एंटी-इचिंग क्रीम्स में कॉर्टिकोस्टेरॉयड (Corticosteroids) की भारी मात्रा होती है। जब कोई व्यक्ति फंगल इन्फेक्शन, एक्जिमा या सामान्य खुजली पर ऐसी क्रीम सीधे लगाता है, तो त्वचा की रोग प्रतिरोधक क्षमता उस जगह पर कमजोर हो जाती है। शुरुआत में त्वचा को ठंडक मिलती है और इन्फेक्शन दबा हुआ प्रतीत होता है, जिसे देखकर मरीज बार-बार उसी क्रीम का इस्तेमाल करने लगता है। लेकिन जैसे ही क्रीम लगाना बंद किया जाता है, वह इन्फेक्शन और भी ज्यादा भयानक रूप में वापस लौट आता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'टौपिकल स्टेरॉयड डैमेज्ड फेस' या 'स्टेरॉयड एडिक्शन' कहा जाता है। लगातार ऐसी क्रीम लगाने से त्वचा इतनी पतली और संवेदनशील हो जाती है कि उस पर सूरज की हल्की सी धूप या साधारण पानी भी जलन पैदा करने लगता है।त्वचा को होते हैं ये गंभीर और स्थायी नुकसानबिना सोचे-समझे और लंबे समय तक स्टेरॉयड युक्त क्रीमों का इस्तेमाल करने से त्वचा को अपूरणीय क्षति पहुंचती है। सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि आपकी स्किन की नेचुरल लेयर यानी एपिडर्मिस बेहद पतली और पारदर्शी हो जाने लगती है, जिससे चेहरे की नसें (Capillaries) साफ-साफ बाहर दिखाई देने लगती हैं। इसके अलावा चेहरे या प्रभावित हिस्से पर परमानेंट लालिमा, जिद्दी पिंपल्स, गहरे काले धब्बे और अनचाहे बाल उगने की समस्या शुरू हो जाती है। फंगल इन्फेक्शन के मामले में यदि स्टेरॉयड क्रीम लगा दी जाए, तो फंगस अंदर ही अंदर और ज्यादा फैल जाता है और वह उस क्रीम को खाकर और भी अधिक ताकतवर हो जाता है, जिससे बाद में उसे ठीक करना डॉक्टरों के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यही कारण है कि चिकित्सा जगत में इस तरह की क्रीमों के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर लगातार चेतावनी दी जाती है।खुजली होने पर तुरंत डॉक्टर के पास क्यों जाना चाहिए?त्वचा हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है, और हर प्रकार की खुजली या रैश का कारण एक जैसा नहीं होता है। खुजली होने के पीछे कई अलग-अलग वजहें हो सकती हैं जैसे कि फंगल इन्फेक्शन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन, एलर्जी, सोरायसिस, स्कैबीज (खाज), या फिर शरीर के भीतर किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत। जब आप बिना डॉक्टर के खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं और किसी भी मेडिकल स्टोर वाले की सलाह पर ट्यूब ले आते हैं, तो आप बीमारी के असली कारण का इलाज करने के बजाय केवल उसके लक्षणों को अस्थायी रूप से दबा रहे होते हैं। एक योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट आपकी त्वचा की बारीकी से जांच करके यह पता लगाता है कि खुजली की असल जड़ क्या है, और उसी के अनुसार सटीक दवा या सुरक्षित मॉइस्चराइजर प्रिसक्राइब करता है, जिससे बीमारी जड़ से खत्म होती है।घरेलू नुस्खों और सुनी-सुनाई बातों से बनाएं पूरी तरह दूरीजब शरीर पर खुजली शुरू होती है, तो लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय सोशल मीडिया, इंटरनेट या पड़ोसियों के बताए गए घरेलू नुस्खों पर आंख मूंदकर भरोसा करने लगते हैं। कई लोग खुजली वाली जगह पर नींबू का रस, कच्चा लहसुन, हार्श साबुन, डिटर्जेंट, या तरह-तरह के केमिकल युक्त तेल रगड़ने लगते हैं। यह सारे नुस्खे आपकी त्वचा के लिए आग में घी का काम करते हैं। ऐसा करने से त्वचा की ऊपरी परत छिल जाती है, जिससे बैक्टीरिया को अंदर घुसने का खुला मौका मिल जाता है और मामूली सी खुजली गंभीर और दर्दनाक छाले या घाव में बदल सकती है। इसलिए किसी भी तरह के देसी या अजीबोगरीब नुस्खों को अपनी स्किन पर आजमाने से हमेशा बचना चाहिए।सुरक्षित तरीके से खुजली से राहत पाने के आसान उपाययदि आपको अचानक खुजली या रैश की समस्या परेशान कर रही है, तो डॉक्टर के पास जाने से पहले कुछ सुरक्षित और प्राथमिक सावधानियां अपनानी चाहिए। सबसे पहले प्रभावित हिस्से को किसी भी हार्श या खुशबूदार साबुन से धोने के बजाय केवल सादे गुनगुने पानी से साफ करें और सूती तौलिए से हल्के हाथों से सुखाएं। अपनी त्वचा को हमेशा अच्छी तरह हाइड्रेटेड रखें और किसी अच्छी क्वालिटी का खुशबू रहित माइल्ड मॉइस्चराइजर या लोशन लगाएं ताकि सूखापन दूर हो सके। खुजली होने पर उस जगह पर जोर-जोर से नाखून से बिल्कुल न खुजाएं, क्योंकि इससे इन्फेक्शन और ज्यादा फैल सकता है। यदि खुजली बहुत ज्यादा परेशान कर रही है, तो तुरंत किसी अच्छे चर्म रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) से मिलकर उचित सलाह लें।

