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क्या NEET पर वाकई बैन लगा सकती है तमिलाडु सरकार? जानें विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने का मतलब

Tamil Nadu NEET Ban Resolution : विधानसभा में किसी प्रस्ताव का पारित होना और कानून बनाकर किसी परीक्षा को खत्म करना दो अलग-अलग बातें हैं. प्रस्ताव के जरिए सदन अपनी नीतिगत राय जाहिर करता है और केंद्र सरकार से किसी मुद्दे पर कार्रवाई की मांग कर सकता है.

NDTV इंडिया 13 Aug 2026 1:34 pm

कावेरी जल विवाद पर Karnataka बंद के बीच प्रदर्शनकारियों ने Tamil Nadu के ट्रक ड्राइवरों को दिए गुलाब

कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच तनाव एक बार फिर सड़कों तक पहुंच गया है। कावेरी जल छोड़ने के मुद्दे पर गुरुवार को कर्नाटक में राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया गया। इस दौरान अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन हुए , लेकिन कोप्पल में विरोध का तरीका थोड़ा अलग रहा। यहां प्रदर्शनकारियों ने तमिलनाडु नंबर वाले ट्रकों को रोका , लेकिन ट्रक चालकों से बहस या झड़प करने के बजाय उन्हें गुलाब के फूल थमा दिए। प्रदर्शनकारियों ने फूल देते हुए ट्रक चालकों से कहा कि वे कावेरी पानी के मुद्दे पर कर्नाटक को ' उकसाने ' की कोशिश न करें। इस पूरे घटनाक्रम का संदेश साफ था—विरोध जरूर है , लेकिन इसे टकराव में बदलने से बचने की कोशिश भी की जा रही है। ट्रक रोके , ड्राइवरों को गुलाब दिए कोप्पल तालुक के हिटलनाल टोल गेट पर यह प्रदर्शन हुआ। यह इलाका राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ता है और बंद के दौरान यहां कर्नाटक के अलग-अलग संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता जुटे थे। केरावे युवा सेना के नेता विजयकुमार के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने तमिलनाडु नंबर वाले ट्रकों को रोका। आमतौर पर ऐसे विवादों के बीच वाहनों को रोकना तनाव का कारण बन सकता है , लेकिन यहां प्रदर्शनकारियों ने अलग तरीका अपनाया। उन्होंने ट्रक चालकों को गुलाब दिए और उनसे शांति बनाए रखने की अपील की। विजयकुमार ने चालकों से कहा कि कर्नाटक के लोग शांतिप्रिय हैं और उन्हें किसी तरह से भड़काने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान तमिलनाडु सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। उनका एक नारा खास तौर पर चर्चा में रहा— ' फूल ले लो , पानी मत मांगो। ' हालांकि प्रदर्शन कुछ देर बाद तब बदल गया जब पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शन के आयोजकों को हिरासत में ले लिया और उन्हें अपने साथ ले गई। इसे भी पढ़ें: Karnataka bandh: Cauvery water विवाद पर मांड्या में प्रदर्शन, बड़े शहरों में जनजीवन सामान्य कर्नाटक में बंद का मुख्य कारण कावेरी जल विनियमन समिति यानी सीडब्ल्यूआरसी के उस निर्देश का विरोध है , जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया है। कर्नाटक के प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि राज्य खुद पानी की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का फैसला कर्नाटक के किसानों और आम लोगों की जरूरतों को प्रभावित कर सकता है। इसी मुद्दे को लेकर कर्नाटक ओक्कुटा ने 13 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया। कोप्पल जिला इकाई की ओर से जारी पत्र के अनुसार , बंद का नेतृत्व संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वाटाल नागराज कर रहे थे। वहीं , कर्नाटक रक्षणा वेदिके युवा शाखा के प्रदेश अध्यक्ष बीजन्ना राजन्ना और सुवर्ण कर्नाटक युवा सेना के प्रदेश अध्यक्ष टीके नायक को प्रदर्शन के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई थी। गठनों ने सुबह 6 बजे से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन करने की अपील की थी। टोल गेट , राष्ट्रीय राजमार्ग और दूसरे प्रमुख रास्तों को प्रदर्शन के लिए चुना गया था। ' कर्नाटक की अपनी पानी की जरूरतें भी हैं ' बंद बुलाने वाले संगठनों का तर्क है कि कावेरी के पानी पर फैसला लेते समय कर्नाटक की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। खासकर उन इलाकों में जहां पीने के पानी और सिंचाई की जरूरत पहले से ही चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि कन्नड़ संगठनों ने राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए बंद का रास्ता अपनाया। उनका कहना है कि किसानों और राज्य की जल जरूरतों को नजरअंदाज करके तमिलनाडु के लिए लगातार पानी छोड़ना उचित नहीं है। इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar बोले: Cauvery water छोड़ेंगे, पर किसानों के हित भी सुरक्षित रहेंगे बेंगलुरु में सुरक्षा बढ़ाई गई , बसों की आवाजाही जारी राज्यव्यापी बंद को देखते हुए बेंगलुरु समेत कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। पुलिस की कोशिश रही कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचे। इस बीच तमिलनाडु से कर्नाटक आने वाली सरकारी बसों की आवाजाही भी पूरी तरह थमी नहीं। मेकेदातु बांध के मुद्दे और कावेरी विवाद को लेकर कन्नड़ संगठनों के बंद के बावजूद तमिलनाडु की सरकारी बसें होसुर के रास्ते कर्नाटक में प्रवेश करती रहीं। इससे साफ है कि बंद और विरोध के बीच दोनों राज्यों के बीच सामान्य परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह रोकना आसान नहीं है। आखिर क्यों बार-बार गरमाता है कावेरी का मुद्दा ? कावेरी नदी कर्नाटक से निकलती है , तमिलनाडु से होकर गुजरती है और आखिर में बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। नदी के पानी पर दोनों राज्यों की निर्भरता काफी ज्यादा है। यही वजह है कि पानी के बंटवारे को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और उससे जुड़े तंत्र के जरिए दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे और जलाशयों की स्थिति के आधार पर निर्देश दिए जाने लगे। लेकिन समस्या तब फिर सामने आती है जब बारिश उम्मीद से कम होती है या कर्नाटक के जलाशयों में पानी का स्तर नीचे चला जाता है। ऐसी स्थिति में कर्नाटक अपनी जरूरतों को प्राथमिकता देने की मांग करता है , जबकि तमिलनाडु अपने हिस्से का पानी मिलने पर जोर देता है। यही खींचतान इस बार भी सड़क से लेकर राजनीति और अदालत तक पहुंचती दिखाई दे रही है। तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले के बाद अब मामले का अगला रुख कानूनी प्रक्रिया और दोनों राज्यों के रवैये पर निर्भर करेगा। इसे भी पढ़ें: Cauvery Issue: TN CM विजय बोले- तमिलनाडु के हित में कर्नाटक से बातचीत का रखा था प्रस्ताव कावेरी विवाद पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पहले ही सर्वदलीय बैठक कर चुके हैं। बैठक में उन्होंने कहा था कि सरकार राज्य के किसानों और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शिवकुमार के मुताबिक , कर्नाटक अभी भी कम बारिश जैसी स्थिति से जूझ रहा है। राज्य में अनुमानित बारिश की तुलना में करीब 30 से 35 फीसदी ही बारिश होने की बात उन्होंने कही थी। ऐसे में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता स्वाभाविक है। उन्होंने किसानों से अपील की थी कि सरकार की ओर से दिशा-निर्देश जारी होने तक धैर्य बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया था कि सीडब्ल्यूआरसी और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से कर्नाटक को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने जलाशयों की स्थिति की जानकारी देते हुए कहा था कि कबिनी में करीब 24 हजार क्यूसेक और कृष्णा राजा सागर यानी केआरएस में करीब 22 हजार क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी। उनके मुताबिक , बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी पानी छोड़ा गया था। शिवकुमार ने दावा किया था कि सर्वदलीय बैठक में सरकार के फैसले को सभी दलों का समर्थन मिला। भाजपा नेताओं के केआरएस बांध का दौरा करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्होंने भी मौके की स्थिति को समझा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि वह कन्नड़ संगठनों से बातचीत करेंगे और उनसे बंद का आयोजन नहीं करने की अपील की थी। फिलहाल कावेरी का पानी एक बार फिर कर्नाटक और तमिलनाडु की राजनीति के बीच बड़ा मुद्दा बन गया है। कोप्पल में गुलाब देकर किया गया विरोध भले ही अपने तरीके में शांत दिखा हो , लेकिन उसके पीछे राज्य में पानी को लेकर बढ़ती बेचैनी और किसानों की चिंता साफ दिखाई देती है।

प्रभासाक्षी 13 Aug 2026 11:38 am

जले हुए नोटों के मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा पर तीनों आरोप साबित, समिति की फाइनल रिपोर्ट में जानें क्या-क्या

संसदीय जांच समिति ने दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ़ लगे तीनों आरोपों को सही पाया है। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि उनके सरकारी आवास पर भारी मात्रा में बिना हिसाब-किताब वाला कैश मिला, सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं रखा गया और इस घटना के बारे में उनके स्पष्टीकरण टालमटोल भरे और असंतोषजनक थे। समिति के ये निष्कर्ष 14 मार्च, 2025 को दिल्ली में 30 तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद वहां के एक स्टोररूम में मिले कैश से जुड़े हैं। हालांकि, पैनल ने यह नहीं कहा कि आपराधिक कानून के नज़रिए से वह पैसा निजी तौर पर जस्टिस वर्मा का था। पैनल ने पाया कि उनके अधिकार वाले परिसर में बड़ी मात्रा में ऐसी नकदी मिली जिसका कोई स्पष्ट हिसाब-किताब नहीं था, और वह इसकी मौजूदगी, स्रोत या मालिकाना हक के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए। इसे भी पढ़ें: Delimitation पर Centre को Tamil Nadu की चुनौती: Lok Sabha सीटें 543 पर रहें, विधानसभा में आया प्रस्ताव जांच में क्या पता चला? समिति ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ तीन औपचारिक आरोपों की जांच की। आसान शब्दों में कहें तो, ये वे खास आरोप थे जिनकी जांच के दौरान पड़ताल की जानी थी। इसे भी पढ़ें: TN Assembly का ऐतिहासिक फैसला, NEET Resolution पास कर विजय सरकार ने Social Justice की ओर बढ़ाया कदम सरकारी आवास पर बिना हिसाब-किताब वाली नकदी कमेटी ने पाया कि आग लगने के बाद स्टोररूम में 500 रुपये के नोटों की बड़ी मात्रा मौजूद थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सबूतों से पता चला कि वहां कुछ इक्का-दुक्का नोट नहीं, बल्कि करेंसी के बंडल, ढेर और कतारें थीं। पैनल ने कहा कि जस्टिस वर्मा यह संतोषजनक ढंग से नहीं बता पाए कि कैश कहां से आया, किसका था या स्टोररूम में क्यों रखा था।अदालत ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि स्टोररूम पूरी तरह से उनके नियंत्रण से बाहर था; अदालत का मानना ​​था कि यह उनके आधिकारिक रिहायशी परिसर का हिस्सा था और उनके संस्थागत नियंत्रण में था।

प्रभासाक्षी 12 Aug 2026 4:13 pm

Tamil Nadu CM Vijay के खिलाफ Trisha को लेकर विपक्ष ने फिर कसा तंज। Udhayanidhi Stalin। AIADMK

तमिलनाडु की सियासत में अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर बयानबाजी का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। AIADMK के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए तृषा को लेकर तंज कसा, जिसके बाद उनके बयान पर विवाद शुरू हो गया। तृषा के फैन्स ने भी विरोध जताया और मदुरै में पोस्टर लगाए।

लाइव हिन्दुस्तान 12 Aug 2026 1:24 pm

Delimitation पर Centre को Tamil Nadu की चुनौती: Lok Sabha सीटें 543 पर रहें, विधानसभा में आया प्रस्ताव

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में केंद्र की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि लोकसभा सीटों की संख्या 543 ही बनी रहे और इसी संख्या के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाए। विधानसभा में बोलते हुए विजय ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 543 निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनावों में ही लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने में और देरी नहीं होनी चाहिए और ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना कोई रियायत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का मामला है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu CM Joseph Vijay लोकसभा सीट 543 रखने का प्रस्ताव पेश करेंगे विजय ने कहा कि मौजूदा 543 निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर, 2029 के लोकसभा चुनावों में ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। महिलाओं के लिए 33% आरक्षण में और देरी नहीं होनी चाहिए। तमिलनाडु में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं ने मतदान किया है। महिलाओं को आरक्षण देना कोई रियायत नहीं है; यह सामाजिक न्याय का मामला है। महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को बिना किसी और देरी के लागू किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव का मकसद दक्षिणी राज्यों, खासकर तमिलनाडु के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा करना है। इसमें तर्क दिया गया है कि जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को लागू करने में उनकी सफलता के कारण संसद में उनके प्रतिनिधित्व या राजनीतिक आवाज़ में कमी नहीं आनी चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि तमिलनाडु समेत सभी राज्यों की जनसंख्या, और साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों और चुने हुए प्रतिनिधियों की गिनती 50 से ज़्यादा सालों से नहीं हुई है। इसमें बताया गया कि अगली जनगणना 2026 में होनी है और तर्क दिया गया कि चूंकि पिछले पांच दशकों से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं हुआ है, इसलिए यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना पर आधारित होनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar बोले: Cauvery water छोड़ेंगे, पर किसानों के हित भी सुरक्षित रहेंगे प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया कि संविधान संशोधन के ज़रिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सदस्यों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 कर दी जानी चाहिए। इसमें कहा गया कि इसके लिए संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाना होगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर

प्रभासाक्षी 12 Aug 2026 12:41 pm

Tamil Nadu CM Joseph Vijay लोकसभा सीट 543 रखने का प्रस्ताव पेश करेंगे

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय लोकसभा की सदस्य संख्या को स्थायी रूप से 543 बनाए रखने की अपील करते हुए राज्य विधानसभा में बुधवार को एक प्रस्ताव पेश करेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। विजय कांग्रेस सहित सरकार में शामिल सभी दलों और बाहर से समर्थन देने वाली पार्टियों (जैसे वामपंथी दल) के साथ बैठक करने के कुछ दिनों बाद सदन में एक प्रस्ताव पेश करेंगे। इस प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से मांग की जाएगी कि वह लोकसभा और राज्यसभा के बीच 2.2:1 का अनुपात बनाए रखे। सूत्रों ने बताया कि प्रबल संभावना है कि प्रस्ताव में केंद्र से अपील की जाएगी कि वह आगामी 2029 आम चुनाव के लिए लोकसभा की मौजूदा 543 सीट पर ही महिलाओं के लिए तत्काल 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार दलील देगी कि अगर केंद्र 1971 के बाद हुई किसी भी जनगणना के आधार पर परिसीमन करता है, तो तमिलनाडु समेत उन दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व स्थायी रूप से प्रभावित होगा जिन्होंने अपनी आबादी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया है। विजय ने आठ अगस्त को अपने सहयोगी दलों की बैठक बुलाई थी जिसमें केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का पूरी तरह से विरोध करने का निर्णय लिया गया था। विजय की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक का मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक)और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने बहिष्कार किया।

प्रभासाक्षी 12 Aug 2026 10:53 am

Tamil Nadu: विधानसभा में आज परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव लाएंगे सीएम विजय, लोकसभा सीटें 543 बरकरार रखने की मांग

Tamil Nadu: विधानसभा में आज परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश करेंगे सीएम विजय, लोकसभा की सीटें 543 पर बरकरार रखने की मांग

अमर उजाला 12 Aug 2026 9:49 am

Abhijeet Dipke का सरकारों से सवाल: राजनीतिक पार्टियों पर क्यों नहीं आंसू गैस, छात्रों पर जुल्म क्यों?

मंगलवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के फाउंडर अभिजीत दिपके ने झारखंड पब्लिक सर्विस एग्ज़ाम में गड़बड़ियों को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे स्टूडेंट लीडर देवेंद्र नाथ महतो को प्रेरणा की आवाज़ बताया। दिपके ने महतो से फ़ोन पर बात की। महतो कई दिनों से भूख हड़ताल पर होने के बावजूद सोमवार को झारखंड विधानसभा तक निकाले गए मार्च में शामिल हुए थे। महतो ने सोमवार रात X (पहले ट्विटर) पर लिखा कि देर रात हमारी बातचीत CJP के फाउंडर अभिजीत दिपक से हुई। उन्होंने हमसे बात की, हमारी सेहत के बारे में पूछा और अपना पूरा समर्थन देने की बात कही। इसे भी पढ़ें: ‘इस बार वोट हाथी को, अपने पुराने साथी को', आकाश आनंद के नये नारे ने उड़ा दी UP में सारे राजनीतिक दलों की नींद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि जब राजनीतिक पार्टियां विरोध-प्रदर्शन करती हैं, तो आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता? सिर्फ़ छात्रों के ख़िलाफ़ ही इसका इस्तेमाल क्यों हो रहा है? मैंने देवेंद्र महतो से बात की, जिन्होंने मुझे बताया कि पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया, जबकि वे पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर थे। देश की सभी सरकारों को सोचना चाहिए कि छात्रों पर ज़ुल्म करके उन्हें क्या हासिल हो रहा है। ऐसी बर्बरता नहीं होनी चाहिए। हमने देवेंद्र महतो को अपना समर्थन देने का भरोसा दिलाया। झारखंड में हमारी टीम छात्रों के साथ मिलकर काम कर रही है। छात्र आंदोलनों के बीच यह एकजुटता ऐसे समय में देखने को मिल रही है जब सत्ताधारी BJP ने झारखंड में JMM के नेतृत्व वाली सरकार (जिसमें कांग्रेस भी गठबंधन सहयोगी है) के खिलाफ़ आक्रामक रुख अपना लिया है। यह विरोध राज्य लोक सेवा परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज के इस्तेमाल को लेकर है। मंगलवार को संसद के मुख्य गेट पर सत्ताधारी NDA और विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसद आमने-सामने आ गए। उन्होंने झारखंड में नौकरी के उम्मीदवारों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया और जवाबी नारे लगाए। इसे भी पढ़ें: सामाजिक न्याय के लिए Tamil Nadu का संकल्प, NEET के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास जहां NDA सांसदों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश भर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर बहस से भाग रहे हैं, वहीं INDIA गठबंधन के सांसदों ने 20 जुलाई को पेपर लीक को लेकर हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग की। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 11 Aug 2026 2:19 pm

Tamil Nadu Assembly: TVK सरकार ने FCRA Bill के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश कर केंद्र सरकार से ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को वापस लेने की मांग की। स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने सदन में प्रस्ताव पेश किया। इसमें कहा गया कि एफसीआरए संशोधन विधेयक के प्रावधान परमार्थ संगठनों की स्वायत्तता और विशेष रूप से अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जा रहे शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण संस्थानों के कामकाज पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संशोधन में नैसर्गिक न्याय, समानता के अधिकार, संपत्ति के अधिकारों की सुरक्षा, वैध अधिकारों और संघवाद का ध्यान रखा जाना चाहिए। सदन में पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, ‘‘विदेशी अंशदान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ, कानूनी रूप से काम करने वाले परमार्थ, शैक्षिक, चिकित्सा, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कल्याण संगठनों के अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिए।’’विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने विधायकों को इस प्रस्ताव पर अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया। देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) की प्रमुख प्रेमलता विजयकांत ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात रखी।

प्रभासाक्षी 11 Aug 2026 2:08 pm

TN Assembly का ऐतिहासिक फैसला, NEET Resolution पास कर विजय सरकार ने Social Justice की ओर बढ़ाया कदम

तमिलनाडु विधानसभा ने NEET के अस्तित्व के ख़िलाफ़ एक प्रस्ताव पास किया। NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा है जो पेपर लीक विवाद के केंद्र में रही है; इस विवाद और 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम के युवा संगठन के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण पिछले महीने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था। सत्ताधारी टीवीके और कांग्रेस समेत उसके सहयोगियों के अलावा, मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके, एआईएडीएमके और अन्य दलों ने भी NEET-विरोधी प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि BJP के एकमात्र विधायक ने सदन से वॉकआउट किया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) को खत्म करने की मांग की गई है। इसे भी पढ़ें: सामाजिक न्याय के लिए Tamil Nadu का संकल्प, NEET के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास अरुणराज ने कहा कि NEET ने छात्रों का ध्यान स्कूल के सिलेबस से हटाकर सिर्फ़ कोचिंग पर केंद्रित कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे भारी-भरकम फीस वसूलने वाले कोचिंग सेंटरों की बाढ़ आ गई है। सीएम जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके के वरिष्ठ नेता अरुणराज ने आगे तर्क दिया, यह टेस्ट ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा के अवसरों को बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में अलग-अलग सरकारों ने लगातार इस बात पर ज़ोर दिया है कि NEET सामाजिक न्याय, समानता और राज्यों के अधिकारों के खिलाफ़ है। NEET नहीं तो क्या? इस प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि वह संबंधित केंद्रीय कानूनों में संशोधन करे और अंडरग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के लिए एकसमान NEET व्यवस्था को खत्म करे। विजयन सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि राज्य में मेडिकल कोर्स में एडमिशन 12वीं कक्षा की परीक्षा के अंकों के आधार पर हों। यह वही रुख है जो पिछली DMK सरकार ने भी अपनाया था। इसे भी पढ़ें: Ahmedabad में FIR दर्ज: PM Modi के होर्डिंग पर चिपकाए गए विवादित स्टिकर प्रस्ताव के मुख्य तर्क प्रस्ताव में बताया गया है कि तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से 2021 का बिल नंबर 43 पास किया था, जिसमें अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए राज्य को NEET से छूट देने की मांग की गई थी। हालांकि, इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति की मंज़ूरी न मिलने के कारण वह बिल अभी भी लंबित है। इस तर्क के केंद्र में, अन्य बातों के अलावा, दो मुख्य बिंदु हैं: प्रस्ताव में तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि NEET सिस्टम का असर उन छात्रों पर बहुत ज़्यादा पड़ता है जो तमिल माध्यम से पढ़ाई करते हैं, और साथ ही उन छात्रों पर भी जो ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े बैकग्राउंड से आते हैं और मेडिकल शिक्षा हासिल करना चाहते हैं। इसमें महंगे कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता और छात्रों की स्कूली शिक्षा पर परीक्षा के असर को लेकर भी चिंता जताई गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि NEET के लिए बहुत ज़्यादा फ़ीस वसूलने वाले अनियंत्रित कोचिंग सेंटर बढ़ गए हैं, जिससे छात्र स्कूल के सिलेबस से अपना ध्यान हटाकर मुख्य रूप से NEET की तैयारी पर ध्यान देने को मजबूर हो रहे हैं।

प्रभासाक्षी 11 Aug 2026 1:30 pm

Jharkhand में Student Protest जारी! JPSC-JSSC पर बेनतीजा वार्ता से भड़का आक्रोश, BJP का बंद

मंगलवार को रांची में कई जगहों पर BJP कार्यकर्ताओं ने टायर जलाए और सड़कें जाम कर दीं। पार्टी ने एक दिन पहले राज्य विधानसभा की ओर मार्च कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद बुलाया था। जब प्रदर्शनकारी पुरानी विधानसभा बिल्डिंग से नई विधानसभा परिसर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी ले लिया। पुलिस के मुताबिक, BJP कार्यकर्ताओं ने कांके रोड पर CMPDI गेट के पास और किशोरगंज, अरगोरा और कांके इलाकों में सड़कें जाम कर दीं। इसे भी पढ़ें: सामाजिक न्याय के लिए Tamil Nadu का संकल्प, NEET के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास वहीं, न्यूक्लियस मॉल, हरमू चौक और किशोरगंज चौक के पास टायर जलाए गए, जिससे ट्रैफिक बाधित हुआ और आम जनजीवन पर असर पड़ा। विरोध प्रदर्शन वाली जगहों के दृश्यों में पुलिसकर्मियों और BJP कार्यकर्ताओं के बीच मामूली झड़प भी दिखाई दी। जैसे-जैसे बंद का असर बढ़ा, पुलिस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं को पुरानी विधानसभा बिल्डिंग से नई विधानसभा परिसर तक उनके तय मार्च के दौरान हिरासत में ले लिया। जब पुलिस उन्हें बसों में ले जाने की कोशिश कर रही थी, तो प्रदर्शनकारी ज़मीन पर बैठ गए और नारेबाज़ी करने लगे; इसके बाद पुलिस ने उन्हें घेर लिया और पुलिस वैन में ले गई। झारखंड के रामगढ़ ज़िले में, BJP कार्यकर्ताओं ने रांची-पटना हाईवे (NH-33) को जाम कर दिया। सुबह-सुबह सैकड़ों BJP कार्यकर्ता चार-लेन वाले हाईवे पर जमा हुए, सड़क पर बैठ गए और हेमंत सोरेन की सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की। 25 जुलाई से विरोध कर रहे छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में सुधार, कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और CBI या राज्य के बाहर के रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के पैनल से स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: 'क्या PMO से आया था झूठ फैलाने का आदेश?' Harbhajan Singh के Video पर Kejriwal ने BJP को घेरा छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी हैं, जिनमें से दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रविवार को JPSC-JSSC मंच के तहत झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का छठा दौर भी बेनतीजा रहा; दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर इस मुद्दे को सुलझाने में गंभीरता न दिखाने का आरोप लगाया। सरकारी पैनल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिकारियों द्वारा उनकी 98 प्रतिशत मांगें मान लेने के बावजूद छात्रों ने अपना आंदोलन जारी रखा। प्रदर्शनकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया और अपनी मांगें बनाए रखीं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 11 Aug 2026 1:13 pm

सामाजिक न्याय के लिए Tamil Nadu का संकल्प, NEET के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास

मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा ने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) को खत्म करने के लिए एक अहम प्रस्ताव पास किया। यह राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। छात्रों पर इसके असर और इस अहम परीक्षा पर राज्य की स्वायत्तता को लेकर फैली चिंताओं के कारण यह कदम उठाया गया। यह घटनाक्रम तब हुआ जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) सरकार ने राज्य विधानसभा में NEET के खिलाफ एक अहम प्रस्ताव पेश किया। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Assembly: O Panneerselvam और सेंगोट्टैयन में बहस हुई, वादों पर घेरा तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री और TVK नेता के. अरुणराज ने विधानसभा में NEET को खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि NEET सामाजिक न्याय, समानता और राज्य के अधिकारों के खिलाफ है। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई विधायकों ने प्रेजेंटेशन के दौरान सदन से वॉकआउट किया। अरुणराज ने छात्रों की चिंताओं को उजागर करते हुए पेपर लीक, युवाओं की जान जाने और छात्रों का भरोसा टूटने का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की उच्च शिक्षा का फ़ैसला 12 साल की स्कूली शिक्षा के बजाय एक दिन की NEET परीक्षा से होता है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), ऑल-इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK), पट्टली मक्कल काची (PMK) और कई वामपंथी दलों ने NEET-विरोधी प्रस्ताव का समर्थन किया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का NEET का विरोध, उनके पूर्ववर्ती और DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के लंबे समय से चले आ रहे रुख से काफी मिलता-जुलता है, जिन्होंने लगातार इस परीक्षा को खत्म करने की मांग की है। इसे भी पढ़ें: Sharad Pawar के बाद MK Stalin भी आएंगे PM Modi के साथ! भारत का चुनावी गणित बदलने की तैयारी लगभग पूरी यह घटनाक्रम हाल ही में हुए देशव्यापी आंदोलन के बीच सामने आया है – जिसका नेतृत्व 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने किया था – और जो NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ मिलकर किए गए इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत जून के आखिर में हुई थी और ये 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुए; प्रदर्शनकारी छात्रों की यह एक मुख्य मांग थी। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 11 Aug 2026 12:57 pm

Tamil Nadu Assembly: O Panneerselvam और सेंगोट्टैयन में बहस हुई, वादों पर घेरा

गठबंधन बदलने के मुद्दे पर तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस हुई तथा सदस्यों ने एक-दूसरे पर व्यक्तिगत टिप्पणियां भी कीं। विधानसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए पन्नीरसेल्वम ने आरोप लगाया कि टीवीके सरकार अपने प्रमुख चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने खासतौर पर महिलाओं को दी जाने वाली बढ़ी हुई मासिक वित्तीय सहायता और हर साल छह मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने के वादे का उल्लेख किया। पन्नीरसेल्वम ने कहा, ‘‘जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया था, लेकिन उसे भारी निराशा हाथ लगी है। चुनावी घोषणापत्र में किए गए इन वादों को प्रमुख योजनाओं के रूप में लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ऐसा करने में विफल रही।’’पूर्व अन्नाद्रमुक नेता पन्नीरसेल्वम ने दावा किया कि सरकार के प्रति जनता की भावना बदल गई है। पन्नीरसेल्वम ने विधानसभा चुनाव से पहले द्रमुक का दामन थाम लिया था। सत्ता पक्ष की ओर से, सदन के नेता के ए सेंगोट्टैयन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार के पास अपने वादे पूरे करने के लिए पांच साल का जनादेश है। इसके बाद बहस जल्द ही व्यक्तिगत टिप्पणियों में बदल गई और नेताओं ने राजनीतिक निष्ठाएं बदलने को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। सेंगोट्टैयन ने पन्नीरसेल्वम पर तंज करते हुए कहा, ‘‘जैसा कि आपने खुद कभी कहा था कि केवल तीन महीने में इतिहास नहीं बनाया जा सकता। अगर आपने अपने कार्यकाल में ऐसा कर दिखाया था तो हमें भी बताइए।’’उन्होंने कहा कि जब आम लोग सरकार के कामकाज की सराहना कर रहे हैं, तब बजट को निराशाजनक बताना अजीब है। विपक्षी नेता के हालिया राजनीतिक बदलाव पर कटाक्ष करते हुए सेंगोट्टैयन ने कहा, ‘‘सिर्फ गठबंधन बदल लेने का मतलब यह नहीं है कि आप अपने नए नेता की प्रशंसा में गीत गाने लगें।’’इस पर पन्नीरसेल्वम ने पलटवार करते हुए कहा कि सेंगोट्टैयन भी अन्नाद्रमुक से मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके में शामिल हुए थे। देखते-देखते बहस ‘‘तस्वीरों और निष्ठा’’ तक पहुंच गई। स्कूल शिक्षा मंत्री ए राजमोहन ने सेंगोट्टैयन की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह अब भी अपनी शर्ट की जेब में दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की तस्वीर रखते हैं, लेकिन पन्नीरसेल्वम ने न केवल अपना स्थान बदला है बल्कि अपने दिल के करीब रखी तस्वीर भी बदल ली है। लोक निर्माण और खेल मंत्री आधव अर्जुन ने भी सेंगोट्टैयन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी बदलने के बावजूद दिवंगत नेता की तस्वीर अपने पास रखी है। पन्नीरसेल्वम ने कहा कि पेरियार, अन्ना, एम करुणानिधि, एम जी रामचंद्रन और जे जयललिता जैसे नेता उनके दिल में बसे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम जनता को गुमराह करने के लिए दिखावा करने में विश्वास नहीं रखते।’’ उन्होंने अपने मौजूदा रुख का बचाव करते हुए कहा कि वह द्रविड़ आंदोलन के प्रति प्रतिबद्ध हैं और पिछले पांच वर्षों में राज्य के अधिकारों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के संघर्ष से जुड़े रहे हैं। पन्नीरसेल्वम ने कहा, ‘‘मैं उनकी तस्वीर उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए रखता हूं।’’सेंगोट्टैयन ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी की निजी तस्वीर रखने पर सवाल नहीं उठा रहे थे, बल्कि विपक्षी नेता द्वारा बजट को लेकर की गई टिप्पणियों को अपमानजनक मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने अम्मा (जयललिता) के नेतृत्व में तीन बार मुख्यमंत्री के रूप में काम किया है। जनता आज उनके बयानों को ध्यान से देख रही है।’’बहस जारी रहने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया और कुछ टिप्पणियों को आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने दोनों पक्षों से चर्चा को गरिमा के अनुरूप आगे बढ़ाने की अपील की।

प्रभासाक्षी 11 Aug 2026 12:45 pm

तमिलनाडु विधानसभा में CM विजय का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास, DMK, AIADMK, BJP, कांग्रेस का भी समर्थन

Tamil Nadu News: तमिलनाडु में अब हर सरकारी कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्थु' गाना अनिवार्य होगा. राज्य की विधानसभा में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गया है.

NDTV इंडिया 10 Aug 2026 2:42 pm

CWMA के आदेश पर Cauvery Water Release का मुद्दा गरमाया, Supreme Court में सुनवाई के लिए याचिका सूचीबद्ध

सुप्रीम कोर्ट, जोसेफ विजय की अगुवाई वाली तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है जिसमें कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के उस फैसले का पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिसके तहत काबिनी और कृष्ण राज सागर जलाशयों से 15 दिनों तक हर दिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पानी के बंटवारे का विवाद दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक टकराव का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। तमिलनाडु ने तर्क दिया कि नदी अधिकारियों के बार-बार निर्देश देने के बावजूद कर्नाटक कावेरी का ज़रूरी पानी छोड़ने में नाकाम रहा। तमिलनाडु की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सीएस वैद्यनाथन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के सामने इस मामले का ज़िक्र किया, जिन्होंने इसे गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। इस विवाद की मुख्य वजह कर्नाटक (जो नदी के ऊपरी हिस्से में है) और तमिलनाडु (जो निचले हिस्से में है) के बीच का टकराव है। कर्नाटक अपनी बढ़ती खेती और शहरी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ज़्यादा पानी अपने पास रखना चाहता है, जबकि तमिलनाडु का तर्क है कि पानी के पुराने बहाव में किसी भी तरह की कटौती से सिंचाई के लिए नदी पर निर्भर लाखों किसानों पर बुरा असर पड़ेगा। केरल भी नदी के किनारे बसा राज्य है, क्योंकि कावेरी बेसिन का कुछ हिस्सा इस राज्य में भी आता है, इसलिए नदी के पानी में उसका भी हिस्सा बनता है। इसे भी पढ़ें: Delimitation Row: DMK का CM Vijay की बैठक से Boycott, कहा- TVK पहले अपना रुख स्पष्ट करे तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सूखे वाले साल के लिए तय पानी के आवंटन के हिसाब से भी उसे हर दिन 22 मिलियन लीटर (MLD) से ज़्यादा पानी कम मिल रहा है। जब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या यह याचिका केरल के खिलाफ है, तो राज्य ने साफ़ किया कि उसकी याचिका कर्नाटक के खिलाफ है। तमिलनाडु ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और CWMA के 30 जुलाई के उस फ़ैसले को लागू करने की मांग की, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक रोज़ाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। राज्य ने 15 दिनों तक रोज़ाना 3,500 क्यूसेक की दर से कुल 4.536 TMC पानी 12 अगस्त या उससे पहले छोड़ने की मांग की है। तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी DMK ने भी इसी तरह की अर्ज़ी दाखिल की है। इसे भी पढ़ें: Cyber Crime के खिलाफ Tamil Nadu पुलिस का 48 घंटे का अभियान, 837 गिरफ्तार CWMA के फ़ैसले के तहत कर्नाटक को तमिलनाडु की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काबिनी और कृष्ण राज सागर जलाशयों से पानी छोड़ना होगा। कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों ही राज्यों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है, क्योंकि इस साल दोनों राज्यों में मॉनसून कमज़ोर रहा है। जहाँ कर्नाटक अपनी ज़रूरतों, ख़ासकर बेंगलुरु की ज़रूरतों के लिए ज़्यादा पानी अपने पास रखने पर ज़ोर दे रहा है, वहीं तमिलनाडु ज़्यादा पानी छोड़े जाने की मांग कर रहा है। यह मुद्दा तब और बढ़ गया जब विजय ने बेंगलुरु में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मिलने की योजना बनाई; इस कदम का कर्नाटक के कई समूहों ने कड़ा विरोध किया।

प्रभासाक्षी 10 Aug 2026 12:52 pm

CJP Protest Remarks Controversy | आलोचना के बाद बदले कंगना रनौत के सुर, Gen Z को बताया 'देश की सबसे बड़ी ताकत'

अभिनेत्री से नेता बनीं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत ने Gen Z (युवा पीढ़ी) पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर चौतरफा घिरने के बाद अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। जंतर-मंतर पर CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर विवादित बयान देने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहीं कंगना ने अब युवाओं की जमकर तारीफ की है और उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया है। ANI के अनुसार, कंगना ने इस बात को खारिज कर दिया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों का एक छोटा समूह पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। कंगना रनौत ने Gen Z पर अपना रुख बदला, उन्हें देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया। उन्होंने आगे कहा, हमारी सरकार इतने लंबे समय से Gen Z के जनादेश के कारण सत्ता में है... यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। आज, झारखंड में बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से व्यवहार कर रहे हैं। देश के कई युवा जो मेडल जीतकर लौटे हैं, उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री और देश को समर्पित किया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu CM Vijay Sanghita Divorce | विजय की पत्नी संगीता ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने मामले को किया निपटाया उन्होंने कहा, कुछ ही लोग हैं जो Gen Z की छवि खराब कर रहे हैं। Gen Z हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें अपनी पीढ़ी पर गर्व है। Gen Z पर टिप्पणी को लेकर कंगना रनौत को ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा। जानकारी के लिए बता दें कि 'तनु वेड्स मनु' की एक्ट्रेस ने हाल ही में CJP विरोध प्रदर्शन पर अपनी आपत्ति जताते हुए एक पोस्ट शेयर किया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसमें सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनकी फिल्मों में निभाए गए कुछ किरदारों के क्लिप शेयर किए। कंगना ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि लोग स्क्रीन पर उनके निभाए गए किरदारों की तुलना असल ज़िंदगी में युवाओं के व्यवहार से गलत तरीके से कर रहे थे। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच ऑनलाइन आलोचना तब शुरू हुई जब उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गंदगी, कचरा और बदसूरती का प्रदर्शन बताया था। कंगना रनौत का हालिया काम काम की बात करें तो, कंगना रनौत हाल ही में मनोज तापड़िया द्वारा निर्देशित 'भारत भाग्य विधाता' में नज़र आई थीं। यह फिल्म, जो 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी, आखिरकार अपनी OTT रिलीज़ की तारीख पा चुकी है। यह फ़िल्म 14 अगस्त, 2026 से Zee5 प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होगी। इसके बाद वह अपनी हिट फ़िल्म 'क्वीन' (जो 2014 में रिलीज़ हुई थी) के सीक्वल में नज़र आएँगी। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 8 Aug 2026 9:42 am

Tamil Nadu CM Vijay Sanghita Divorce | विजय की पत्नी संगीता ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने मामले को किया निपटाया

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक के बहुचर्चित कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आया है। संगीता ने चेंगलपट्टू जिला अदालत में दाखिल अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली है। अर्जी वापस लिए जाने के बाद अदालत ने इस मामले का औपचारिक रूप से निपटारा कर दिया है। विजय और संगीता के तलाक के मामले से जुड़ी घटनाएँ संगीता ने फरवरी में तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। अपनी अर्जी में उन्होंने आरोप लगाया कि विजय का एक महिला अभिनेत्री के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (विवाह-बाहर संबंध) था, जिसके बारे में उन्हें 2021 में पता चला। अर्जी में यह भी कहा गया कि विजय के यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि वह रिश्ता खत्म कर देंगे, उन्होंने बिना किसी पछतावे के इसे जारी रखा। दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया कि विजय ने धीरे-धीरे संगीता को अपनी सामाजिक और पेशेवर ज़िंदगी से दूर कर दिया, जबकि वे उस अभिनेत्री के साथ विदेश यात्राएँ करते रहे और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। अर्जी में यह भी दावा किया गया कि इन मौकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर नियमित रूप से शेयर की जाती थीं, और विजय ने न तो उनसे इनकार किया और न ही उन पर कोई आपत्ति जताई। संगीता के अनुसार, इन पोस्ट्स की वजह से उन्हें और उनके दो बच्चों, जेसन संजय और दिव्या साशा को बार-बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने विजय पर उन्हें पहले मिलने वाली आर्थिक मदद और सुविधाओं को बंद करने और उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का भी आरोप लगाया, जिसमें उनकी घूमने-फिरने की आज़ादी पर रोक लगाना भी शामिल था। संगीता ने आगे आरोप लगाया कि विजय के लगातार व्यवहार और 2024 में सोशल मीडिया पर सामने आए विवादों के कारण उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा। उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी असल में टूट चुकी थी और सिर्फ़ कागज़ों पर ही बची थी। अपनी अर्जी में उन्होंने कहा कि रिश्ता अब सुधरने लायक नहीं रहा और इससे उन्हें मानसिक पीड़ा, अपमान, शर्मिंदगी और तकलीफ़ के अलावा कुछ नहीं मिला। तलाक की अर्जी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले दाखिल की गई थी। हालाँकि, चुनाव जीतने और मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय की पत्नी संगीता ने अर्जी वापस लेने का फ़ैसला किया। विजय और संगीता के तलाक के मामले के बारे में और जानकारी जून 2026 में, चेंगलपट्टू परिवार कल्याण अदालत ने विजय और संगीता के तलाक के मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद, अदालत ने मामले को 7 अगस्त तक के लिए टाल दिया था। सुनवाई से पहले के हफ़्तों में, ऐसी खबरें आई थीं कि शायद यह जोड़ा सुलह की ओर बढ़ रहा है। इस बात पर भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे कोर्ट में वर्चुअली पेश होंगे या खुद आएंगे। संगीता ने पारिवारिक घर में रहना जारी रखने की मांग की इस साल की शुरुआत में, संगीता ने चेंगलपट्टू की ज़िला अदालत में एक अर्ज़ी दायर की। इसमें उन्होंने चेन्नई के नीलांकरई में मौजूद अपने पारिवारिक घर में तब तक रहने की इजाज़त मांगी, जब तक कि तलाक की कार्यवाही पूरी न हो जाए। 22 फरवरी को दी गई यह अर्ज़ी, स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत दायर उनकी मुख्य तलाक की याचिका का हिस्सा थी। शादी खत्म करने की मांग के साथ-साथ, उन्होंने स्थायी गुजारा-भत्ता (एलिमनी) और नीलांकरई वाले घर में तब तक रहने का अधिकार भी मांगा, जब तक कि मामले का फैसला न हो जाए या उन्हें उसी स्तर का कोई दूसरा घर न मिल जाए। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच अपनी अर्ज़ी में संगीता ने कहा कि उनकी और विजय की शादी को 26 साल हो चुके हैं और उन्होंने अपना जीवन घर संभालने और अपने दो बच्चों - 25 साल के जेसन संजय और 20 साल की दिव्या साशा - की परवरिश में लगाया है। उन्होंने तर्क दिया कि शादी के दौरान वे विजय की जीवनशैली के हिसाब से रहीं और उनके पास ऐसा कोई दूसरा घर नहीं है जो उस जीवनशैली के स्तर का हो। याचिका में विजय की एक प्रमुख तमिल अभिनेता और भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के संस्थापक के तौर पर उनकी सार्वजनिक पहचान का भी ज़िक्र किया गया। संगीता के अनुसार, कोर्ट जाने से पहले उन्होंने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे कोशिशें नाकाम रहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजय के वकील ने उन्हें बताया कि अगर वे तलाक के लिए आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें नीलांकरई वाले घर में रहने की इजाज़त नहीं दी जाएगी, जिससे उन्हें अपना घर खोने की चिंता सताने लगी। इसे भी पढ़ें: The Odyssey India Box Office | क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' का जलवा कायम! तीसरे हफ्ते में बटोरे ₹29 करोड़, जल्द पार करेगी ₹200 करोड़ का आंकड़ा बायोमेडिकल साइंस में डिग्री रखने वालीं और यूके की नागरिक संगीता ने कहा कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए कोई उपयुक्त वैकल्पिक जगह नहीं है। इसलिए, उन्होंने एक अंतरिम आदेश की मांग की ताकि वे कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक सभी मौजूदा सुविधाओं के साथ नीलांकरई वाले घर में रह सकें। यह घर विजय के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से गहराई से जुड़ा होने के कारण भी महत्वपूर्ण है। विजय अभी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उनकी अक्सर साथ काम करने वालीं को-स्टार त्रिशा कृष्णन भावुक नज़र आईं। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 7 Aug 2026 4:28 pm