Tamil Nadu और पुडुचेरी की 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में 80% से ज्यादा वोटिंग
(फोटो के साथ)चेन्नई, छह अक्टूबर तमिलनाडु की दो और पुडुचेरी विधानसभा की एक सीट पर मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। तीनों सीट पर 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। इन उपचुनावों को तमिलनाडु में टीवीके और पुडुचेरी में एआईएनआरसी के नेतृत्व वाली सरकारों की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों की तुलना में तमिलनाडु और पुडुचेरी दोनों में मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों के लिए क्रमश: 86.26 प्रतिशत और 80.30 प्रतिशत मतदान हुआ। एक अधिकारी के अनुसार, अप्रैल 2026 में मदुरांतकम और धारापुरम में क्रमश: 92.28 प्रतिशत और 88.92 प्रतिशत मतदान हुआ था। उपचुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली चार महीने पुरानी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार के प्रति जनता की धारणा का पैमाना होंगे। विजय ने इस चुनावी मुकाबले में काफी दिलचस्पी दिखाई है। उन्होंने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक जनसभा को संबोधित किया और मदुरांतकम तथा धारापुरम में व्यापक रोड शो किए। पुडुचेरी की तत्तांचावडी विधानसभा सीट पर 80.81 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि इस साल अप्रैल में यहां 87.20 प्रतिशत मतदान हुआ था। केंद्र शासित प्रदेश में उपचुनाव को मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली चार महीने पुरानी राजग सरकार की लोकप्रियता की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। तत्तांचावडी से रंगासामी के इस्तीफा देने के कारण उपचुनाव कराना जरूरी हुआ। सुबह से ही लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मतदान केंद्रों पर उत्साह के साथ पहुंचे। दोपहर में मतदान की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी लेकिन बाद में फिर तेजी आई। मदुरांतकम से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) उम्मीदवार पी. सुगंती ने संवाददाताओं से कहा कि चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में युवाओं की भागीदारी स्पष्ट रूप से कम रही। सुबह सात बजे शुरू हुआ मतदान शाम छह बजे समाप्त हुआ और यह शांतिपूर्ण रहा। कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम में आई मामूली तकनीकी दिक्कतों को अधिकारियों ने तुरंत दूर कर दिया। तमिलनाडु और पुडुचेरी में मतदान के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से करीब 9,000 कर्मियों को तैनात किया गया था। मतदान समाप्त होने के बाद ईवीएम को सील कर शैक्षणिक संस्थानों में बनाए गए स्ट्रांग रूम में ले जाया गया। मतगणना नौ अक्टूबर को होगी। किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम-वीवीपैट उपकरणों में आई मामूली तकनीकी दिक्कतों को अधिकारियों ने तुरंत दूर कर दिया। मदुरांतकम में 27 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। प्रमुख उम्मीदवारों में सत्तारूढ़ टीवीके की मरगाथम कुमारवेल, द्रमुक के आई. पारंथामेन, अन्नाद्रमुक की कनिथा संपत, माकपा की पी. सुगंती और नाम तमिलर काची (एनटीके) के जानकीरमन शामिल हैं। धारापुरम में कुल 22 उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रमुख उम्मीदवारों में पी. सत्यबामा (टीवीके), एस. सुगन्या (द्रमुक), के. भानुमति (अन्नाद्रमुक), पी. लक्ष्मणन (भाकपा) और एम. कार्तिका (एनटीके) शामिल हैं। तत्तांचावडी में कुल 11 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला सत्तारूढ़ एआईएनआरसी नीत राजग, कांग्रेस और उसकी पूर्व सहयोगी द्रमुक के बीच त्रिकोणीय माना जा रहा है। उपचुनाव के लिए मुख्यमंत्री विजय, द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन, विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन और अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने जोरदार प्रचार किया। आम तौर पर उपचुनावों से पहले ऐसा प्रचार देखने को नहीं मिलता। मई में सरकार बनने के बाद ये विजय के नेतृत्व वाली अल्पमत टीवीके सरकार की पहली चुनावी परीक्षा है। बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने के लिए उसके लिए जीत महत्वपूर्ण है। उपचुनाव के नतीजे मुख्य विपक्षी द्रमुक के लिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि लंबे समय बाद स्टालिन के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और वाम दलों समेत अपने पूर्व सहयोगियों के समर्थन के बिना पहली बार चुनाव का सामना कर रही है। टीवीके ने कांग्रेस, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन तथा वाम दलों के बाहर से मिले समर्थन से पहली बार सरकार बनाई थी। वाम मोर्चा टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन या सरकार में शामिल नहीं हुआ था। उसने कई मुद्दों पर अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की और उपचुनावों में अपने उम्मीदवार उतारे। भाकपा और माकपा के पास चार विधायक हैं। दोनों दलों ने बार-बार कहा है कि वे बाहर से सरकार को समर्थन जारी रखेंगे। हालांकि, टीवीके और उसके शासन के मॉडल की लगातार आलोचना किए जाने से करीब पांच महीने पुरानी नयी सरकार की स्थिरता को लेकर सवाल उठे हैं। अन्नाद्रमुक ने तीन दशक से अधिक समय तक तमिलनाडु में शासन किया है, पर चुनावी वापसी करने का भारी दबाव है। टीवीके की जीत से उसे यह दावा करने का मौका मिलेगा कि जनादेश भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता और कई कल्याणकारी उपायों वाली उसकी सुशासन व्यवस्था का समर्थन है। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में विधायकों के इस्तीफे के बाद सात सीटें रिक्त हुई थीं। मुख्यमंत्री विजय ने पेरम्बूर सीट बरकरार रखी और तिरुचिरापल्ली (पूर्व) सीट से इस्तीफा दिया। वहीं, अन्नाद्रमुक के मरगाथम कुमारवेल (मदुरांतकम), सत्यबामा (धारापुरम), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई), एसाक्की सुबाया (अंबासमुद्रम), सी. विजयभास्कर (विरालिमलाई) और एम. आर. विजयभास्कर (करूर) ने अपनी सीटों से इस्तीफा दे दिया। वर्तमान में टीवीके के 107 विधायक (अध्यक्ष सहित), द्रमुक के 59, अन्नाद्रमुक के 41, कांग्रेस के पांच, पीएमके के चार, भाकपा और माकपा के दो-दो, वीसीके के दो और आईयूएमएल के दो विधायक हैं। भाजपा, डीएमडीके और एएमएमके का एक-एक विधायक है। सदन की प्रभावी सदस्य संख्या 227 है। निर्वाचन आयोग ने मदुरांतकम और धारापुरम के लिए उपचुनाव की घोषणा की थी क्योंकि विधायकों के इस्तीफे और इससे जुड़े मामले मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित थे।
Tamil Nadu और Puducherry की 3 विधानसभा सीटों पर By-election के लिए मतदान
चेन्नई, छह अक्टूबर तमिलनाडु की दो विधानसभा सीट और पुडुचेरी की एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान जारी है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। तमिलनाडु में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीट पर अपराह्न तीन बजे तक क्रमश: 70.31 प्रतिशत और 68.08 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, पुडुचेरी की थट्टांचावडी सीट पर इसी समय तक 68.91 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। तमिलनाडु में हो रहे इन उपचुनावों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका असर न केवल सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार पर पड़ सकता है, बल्कि मुख्य विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अन्नाद्रमुक के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है। अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। पुडुचेरी में उपचुनाव को मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली चार महीने पुरानी राजग सरकार की लोकप्रियता की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। रंगासामी के थट्टांचावडी सीट से इस्तीफा देने के कारण यहां उपचुनाव कराना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम-वीवीपैट उपकरणों में आई मामूली तकनीकी दिक्कतों को अधिकारियों ने तुरंत दूर कर दिया। मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और शाम छह बजे तक चलेगा। एक चुनाव अधिकारी ने बताया कि सुबह से ही दोनों विधानसभा क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर विभिन्न आयु वर्ग के मतदाताओं की लगातार आवाजाही बनी हुई है। मदुरांतकम में अपराह्न तीन बजे तक कुल 2,13,788 मतदाताओं में से 70.31 प्रतिशत ने मतदान किया। इनमें 1,04,926 पुरुष, 1,08,797 महिलाएं और तृतीय लिंग के 65 मतदाता हैं। मदुरांतकम में सुरक्षा के लिए राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के 3,000 से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया है। यहां 285 मतदान केंद्र हैं। मदुरांतकम में कुल 27 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। प्रमुख उम्मीदवारों में सत्तारूढ़ टीवीके की के. मरागाथम कुमारवेल, द्रमुक के आई. परंथामेन, अन्नाद्रमुक की कनिता संपत, माकपा की पी. सुगंती और एनटीके के जानकीरमन शामिल हैं। वामपंथी उम्मीदवार पी. सुगंती ने संवाददाताओं से कहा कि चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में युवाओं की भागीदारी स्पष्ट रूप से कम रही है। मतदान करने और अपने निर्वाचन क्षेत्र के कुछ मतदान केंद्रों का दौरा करने के बाद टीवीके की कुमारवेल ने दावा किया कि स्थानीय लोगों के साथ उनका मजबूत और व्यक्तिगत संबंध है तथा वह उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानती हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी द्रमुक उम्मीदवार परंथामेन ने दावा किया कि उन्हें मतदाताओं के ‘खुश चेहरे’ साफ नजर आ रहे हैं और उन्होंने इस बार विपक्षी दल के पक्ष में बदलाव लाने का फैसला किया है। धारापुरम में उपचुनाव में कुल 22 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें पी. सत्यभामा (टीवीके), एस. सुगन्या (द्रमुक), के. भानुमति (अन्नाद्रमुक), पी. लक्ष्मणन (भाकपा) और एम. कार्तिका (एनटीके) प्रमुख उम्मीदवार हैं। धारापुरम में कुल 2,23,306 मतदाता हैं, जिनमें 1,07,285 पुरुष, 1,16,013 महिलाएं और तृतीय लिंग के आठ मतदाता हैं। यहां भी 3,000 से अधिक पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात हैं और 320 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मई में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली अल्पमत टीवीके सरकार के लिए ये उपचुनाव पहला चुनावी परीक्षण हैं। मुख्य विपक्षी द्रमुक के लिए भी ये उपचुनाव महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि लंबे समय बाद पार्टी पहली बार कांग्रेस समेत अपने पुराने सहयोगियों के समर्थन के बिना चुनाव का सामना कर रही है। टीवीके ने कांग्रेस, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से अपनी पहली सरकार बनाई थी। इसके अलावा उसे वाम दलों का बाहर से समर्थन मिला था, लेकिन अब वाम दल विभिन्न मुद्दों पर मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना कर रहे हैं। वाम मोर्चा न तो टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हुआ और न ही सरकार का हिस्सा बना। उसने उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। अन्नाद्रमुक पर भी चुनावी वापसी करने का भारी दबाव है। यह दल तीन दशक से अधिक समय तक तमिलनाडु में सत्ता में रहा है। विपक्षी दलों-अन्नाद्रमुक, द्रमुक और वाम दलों के चुनाव प्रचार में दल-बदल और विश्वासघात के आरोप प्रमुख मुद्दे रहे। टीवीके की उम्मीदवार कुमारवेल और सत्यभामा ने एम. जी. रामचंद्रन द्वारा स्थापित इस प्रतिष्ठित पार्टी तथा विधायक पद से इस्तीफा देकर टीवीके का दामन थामा था। सत्तारूढ़ दल की जीत उसके नेतृत्व के लिए जनादेश मानी जाएगी, जबकि हार इसके विपरीत संकेत दे सकती है। मदुरांतकम के थंडराई मतदान केंद्र पर कुछ समय के लिए मतदान रोक दिया गया। द्रमुक एजेंटों ने आरोप लगाया कि टीवीके के ‘सीटी’ चुनाव चिह्न के बगल में ईवीएम के बटन पर अमिट स्याही के निशान थे। चुनाव अधिकारियों ने तुरंत मशीन की जांच की, समस्या दूर की और मतदान फिर शुरू करा दिया। मदुरांतकम के विल्वरायनल्लूर मतदान केंद्र पर द्रमुक कार्यकर्ताओं ने स्थानीय पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने सत्तारूढ़ टीवीके के कार्यकर्ताओं को निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता के तहत निर्धारित दूरी से बहुत ही कम दूरी पर मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के करीब खड़े होने की अनुमति दी। कुछ मतदान केंद्रों पर सुबह वीवीपैट या ईवीएम कनेक्शन संबंधी मामूली तकनीकी दिक्कतों के कारण मॉक पोल में थोड़ी देरी हुई, लेकिन अतिरिक्त इंजीनियरों ने इन्हें दूर कर दिया और आधिकारिक मतदान सुचारू रूप से शुरू हो गया। दोपहर में गर्मी बढ़ने के साथ मतदान की गति कुछ धीमी हुई, लेकिन बाद में इसमें फिर तेजी आई।
Tamil Nadu Bypolls: मदुरांतकम और धारापुरम में सुबह तेज मतदान, 49 प्रत्याशी मैदान में
चेन्नई, छह अक्टूबर तमिलनाडु की अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मंगलवार को मतदान जारी है और सुबह नौ बजे तक मदुरांतकम में 15.99 प्रतिशत तथा धारापुरम में 17.55 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग ने यह जानकारी दी। इन उपचुनावों का राजनीतिक महत्व काफी अधिक है। इन्हें तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) और विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। इन दोनों आरक्षित सीटों पर उपचुनाव अन्नाद्रमुक की तत्कालीन विधायकों के. मरगतम कुमारवेल (मदुरांतकम) और पी. सत्यबामा (धारापुरम) के इस्तीफे के कारण जरूरी हुए। बाद में दोनों सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो गईं। टीवीके ने दोनों पूर्व अन्नाद्रमुक नेताओं को क्रमश: मदुरांतकम और धारापुरम से फिर उम्मीदवार बनाया है। इन उपचुनावों में टीवीके, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, वाम दलों और नाम तमिलर काची (एनटीके) के बीच बहुकोणीय मुकाबला है। मदुरांतकम में 285 और धारापुरम में 320 मतदान केंद्रों पर सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ और शाम छह बजे तक जारी रहेगा। दोनों सीटों पर कुल 49 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
Madras High Court ने लगाई फटकार, Tamil Nadu के नए Secretariat प्रोजेक्ट पर PIL हुई खारिज
मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया। इस याचिका में तमिलनाडु सरकार को चेन्नई के फोरशोर एस्टेट में नया सचिवालय बनाने का प्रस्ताव छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने वकील आर.एस. तमिलवंदन की याचिका पर यह आदेश तब दिया, जब कोर्ट ने याचिका की स्वीकार्यता और ऐसे निर्देश की मांग करने के आधार पर सवाल उठाए। जब मामला सुनवाई के लिए आया, तो याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील सेंथिल कुमार ने कहा कि याचिकाकर्ता को अख़बार की रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य सरकार फ़ोरशोर एस्टेट में तमिलनाडु हाउसिंग अथॉरिटी की ज़मीन पर 1,200 करोड़ रुपये की लागत से नया सचिवालय बनाने की योजना बना रही है। इसे भी पढ़ें: UK नागरिकता छिपाकर UP से उठाई सैलरी-पेंशन, ED ने मदरसा शिक्षक की 53.46 लाख की संपत्ति की ज़ब्त उन्होंने तर्क दिया कि अगर सरकार नया सचिवालय बनाती है, तो जनता का पैसा बर्बाद होगा और उस इलाके में रहने वाले मछुआरों के हितों और कल्याण पर असर पड़ेगा। इस दौरान, बेंच ने वकील से पूछा कि कोर्ट के पास सरकार को किसी खास जगह पर इमारत न बनाने का निर्देश देने की क्या शक्ति है। जजों ने उनसे कहा कि आपको पता होना चाहिए कि जनहित याचिका (PIL) क्या होती है। कम से कम आपको थोड़ी तैयारी और रिसर्च तो करनी चाहिए। क्या आपने नए सचिवालय से जुड़े सरकारी आदेश (GO) को चुनौती दी है? बेंच ने यह भी कहा कि 2011 में सचिवालय को दूसरी जगह ले जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी; हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस आदेश को बरकरार रखा था। आपको यह बताना होगा कि इस सरकारी आदेश (GO) से जनता पर क्या असर पड़ता है और जनता का पैसा कैसे बर्बाद होता है। जनता पर इसका क्या असर होता है। इसे भी पढ़ें: Nirmala Sitharaman बोलीं, भारत 10 प्रतिशत से अधिक की Economic Growth हासिल कर सकता है जब कोर्ट ने संकेत दिया कि वह भारी जुर्माना लगा सकता है, तो याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की इजाज़त मांगी। इसके बाद बेंच ने याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया और मामला खत्म हो गया।
बिना लिखित परीक्षा पाएं सरकारी नौकरी! NHM में 4,724 स्टाफ नर्स पदों पर सीधी भर्ती, जानें आखिरी तारीख
pc: abplive नेशनल हेल्थ मिशन, तमिलनाडु (NHM-TN) ने तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत स्टाफ नर्स के 4,724 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। यह भर्ती राज्य के विभिन्न जिलों में संविदा (Contractual) आधार पर की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवारों को इसके लिए ऑफलाइन आवेदन जमा करना होगा। भर्ती से जुड़ी मुख्य बातें: कुल पद: 4,724 (स्टाफ नर्स) आवेदन की अंतिम तिथि: 25 सितंबर (शाम 5:00 बजे तक) आवेदन का तरीका: ऑफलाइन (जिला स्वास्थ्य कार्यालय या जिला स्वास्थ्य समिति में जमा करें) मासिक वेतन: ₹21,000 प्रति माह (संविदा आधार पर) चयन प्रक्रिया: बिना लिखित परीक्षा — शैक्षणिक अंक, अनुभव और मेरिट के आधार पर (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के साथ)। शैक्षणिक योग्यता व पात्रता: डिग्री/डिप्लोमा: मान्यता प्राप्त संस्थान (Indian Nursing Council से संबद्ध) से B.Sc Nursing या GNM होना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन: उम्मीदवार का Tamil Nadu Nurses and Midwives Council में वैध रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। किन विभागों/संस्थानों में होगी नियुक्ति? जिला स्तर पर पदों का आवंटन निम्नलिखित विभागों के अधीन आने वाले स्वास्थ्य संस्थानों में होगा: डायरेक्टरेट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड प्रिवेंटिव मेडिसिन डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एंड रूरल हेल्थ सर्विसेज डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ऑफलाइन आवेदन कैसे करें? फॉर्म डाउनलोड करें: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट nhm.tn.gov.in पर जाकर आवेदन फॉर्म और जिलावार वैकेंसी डिटेल्स डाउनलोड करें। दस्तावेज़ संलग्न करें: फॉर्म में सभी जरूरी जानकारी भरें। इसके साथ शैक्षणिक प्रमाण पत्र, नर्सिंग काउंसिल रजिस्ट्रेशन, फोटो और पहचान पत्र की कॉपियां अटैच करें। फॉर्म जमा करें: भरा हुआ आवेदन फॉर्म 25 सितंबर को शाम 5 बजे से पहले संबंधित जिले के District Health Officer (DHO) या District Health Society (DHS) के कार्यालय में पहुँचाएँ।
Tamil Nadu CM Vijay की स्कूली बच्चों को सौगात | Perunthalaivar Kamarajar Free Breakfast Scheme
Tamilnadu CM Vijay ने Govt School के बच्चों को दी सौगात | Perunthalaivar Kamarajar Free Breakfast Scheme अच्छी पढ़ाई के लिए सिर्फ स्कूल और किताबें ही जरूरी नहीं होतीं...
Tamil Nadu CM Vijay ने क्या मंदिरों से दानपेटी हटाने वाले फैसला लिया, Insta Reels का पूरा सच। TVK
Tamil Nadu CM Vijay ने क्या मंदिरों से दानपेटी हटाने वाले फैसले लिया, Insta Reels का पूरा सच। TVK तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं
CM Vijay Thalapathy की सरकार ने महिलाओं और किसानों के लिए किए बड़े ऐलान। Tamil Nadu Assembly
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मिलने वाले सालाना स्वास्थ्य बीमा कवर को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है
CM Thalapathy Vijay का फैसला, Vande Mataram से पहले Tamil Thai Valthu बजेगा। Tamil Nadu
CM Thalapathy Vijay का फैसला, Vande Mataram से पहले Tamil Thai Valthu बजेगा। Tamil Nadu
Tamil Nadu CM Vijay के खिलाफ Trisha को लेकर विपक्ष ने फिर कसा तंज। Udhayanidhi Stalin। AIADMK
तमिलनाडु की सियासत में अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर बयानबाजी का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। AIADMK के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए तृषा को लेकर तंज कसा, जिसके बाद उनके बयान पर विवाद शुरू हो गया। तृषा के फैन्स ने भी विरोध जताया और मदुरै में पोस्टर लगाए।
अभिनेत्री से नेता बनीं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत ने Gen Z (युवा पीढ़ी) पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर चौतरफा घिरने के बाद अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। जंतर-मंतर पर CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर विवादित बयान देने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहीं कंगना ने अब युवाओं की जमकर तारीफ की है और उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया है। ANI के अनुसार, कंगना ने इस बात को खारिज कर दिया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों का एक छोटा समूह पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। कंगना रनौत ने Gen Z पर अपना रुख बदला, उन्हें देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया। उन्होंने आगे कहा, हमारी सरकार इतने लंबे समय से Gen Z के जनादेश के कारण सत्ता में है... यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। आज, झारखंड में बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से व्यवहार कर रहे हैं। देश के कई युवा जो मेडल जीतकर लौटे हैं, उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री और देश को समर्पित किया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu CM Vijay Sanghita Divorce | विजय की पत्नी संगीता ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने मामले को किया निपटाया उन्होंने कहा, कुछ ही लोग हैं जो Gen Z की छवि खराब कर रहे हैं। Gen Z हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें अपनी पीढ़ी पर गर्व है। Gen Z पर टिप्पणी को लेकर कंगना रनौत को ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा। जानकारी के लिए बता दें कि 'तनु वेड्स मनु' की एक्ट्रेस ने हाल ही में CJP विरोध प्रदर्शन पर अपनी आपत्ति जताते हुए एक पोस्ट शेयर किया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसमें सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनकी फिल्मों में निभाए गए कुछ किरदारों के क्लिप शेयर किए। कंगना ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि लोग स्क्रीन पर उनके निभाए गए किरदारों की तुलना असल ज़िंदगी में युवाओं के व्यवहार से गलत तरीके से कर रहे थे। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच ऑनलाइन आलोचना तब शुरू हुई जब उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गंदगी, कचरा और बदसूरती का प्रदर्शन बताया था। कंगना रनौत का हालिया काम काम की बात करें तो, कंगना रनौत हाल ही में मनोज तापड़िया द्वारा निर्देशित 'भारत भाग्य विधाता' में नज़र आई थीं। यह फिल्म, जो 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी, आखिरकार अपनी OTT रिलीज़ की तारीख पा चुकी है। यह फ़िल्म 14 अगस्त, 2026 से Zee5 प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होगी। इसके बाद वह अपनी हिट फ़िल्म 'क्वीन' (जो 2014 में रिलीज़ हुई थी) के सीक्वल में नज़र आएँगी। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक के बहुचर्चित कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आया है। संगीता ने चेंगलपट्टू जिला अदालत में दाखिल अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली है। अर्जी वापस लिए जाने के बाद अदालत ने इस मामले का औपचारिक रूप से निपटारा कर दिया है। विजय और संगीता के तलाक के मामले से जुड़ी घटनाएँ संगीता ने फरवरी में तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। अपनी अर्जी में उन्होंने आरोप लगाया कि विजय का एक महिला अभिनेत्री के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (विवाह-बाहर संबंध) था, जिसके बारे में उन्हें 2021 में पता चला। अर्जी में यह भी कहा गया कि विजय के यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि वह रिश्ता खत्म कर देंगे, उन्होंने बिना किसी पछतावे के इसे जारी रखा। दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया कि विजय ने धीरे-धीरे संगीता को अपनी सामाजिक और पेशेवर ज़िंदगी से दूर कर दिया, जबकि वे उस अभिनेत्री के साथ विदेश यात्राएँ करते रहे और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। अर्जी में यह भी दावा किया गया कि इन मौकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर नियमित रूप से शेयर की जाती थीं, और विजय ने न तो उनसे इनकार किया और न ही उन पर कोई आपत्ति जताई। संगीता के अनुसार, इन पोस्ट्स की वजह से उन्हें और उनके दो बच्चों, जेसन संजय और दिव्या साशा को बार-बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने विजय पर उन्हें पहले मिलने वाली आर्थिक मदद और सुविधाओं को बंद करने और उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का भी आरोप लगाया, जिसमें उनकी घूमने-फिरने की आज़ादी पर रोक लगाना भी शामिल था। संगीता ने आगे आरोप लगाया कि विजय के लगातार व्यवहार और 2024 में सोशल मीडिया पर सामने आए विवादों के कारण उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा। उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी असल में टूट चुकी थी और सिर्फ़ कागज़ों पर ही बची थी। अपनी अर्जी में उन्होंने कहा कि रिश्ता अब सुधरने लायक नहीं रहा और इससे उन्हें मानसिक पीड़ा, अपमान, शर्मिंदगी और तकलीफ़ के अलावा कुछ नहीं मिला। तलाक की अर्जी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले दाखिल की गई थी। हालाँकि, चुनाव जीतने और मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय की पत्नी संगीता ने अर्जी वापस लेने का फ़ैसला किया। विजय और संगीता के तलाक के मामले के बारे में और जानकारी जून 2026 में, चेंगलपट्टू परिवार कल्याण अदालत ने विजय और संगीता के तलाक के मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद, अदालत ने मामले को 7 अगस्त तक के लिए टाल दिया था। सुनवाई से पहले के हफ़्तों में, ऐसी खबरें आई थीं कि शायद यह जोड़ा सुलह की ओर बढ़ रहा है। इस बात पर भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे कोर्ट में वर्चुअली पेश होंगे या खुद आएंगे। संगीता ने पारिवारिक घर में रहना जारी रखने की मांग की इस साल की शुरुआत में, संगीता ने चेंगलपट्टू की ज़िला अदालत में एक अर्ज़ी दायर की। इसमें उन्होंने चेन्नई के नीलांकरई में मौजूद अपने पारिवारिक घर में तब तक रहने की इजाज़त मांगी, जब तक कि तलाक की कार्यवाही पूरी न हो जाए। 22 फरवरी को दी गई यह अर्ज़ी, स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत दायर उनकी मुख्य तलाक की याचिका का हिस्सा थी। शादी खत्म करने की मांग के साथ-साथ, उन्होंने स्थायी गुजारा-भत्ता (एलिमनी) और नीलांकरई वाले घर में तब तक रहने का अधिकार भी मांगा, जब तक कि मामले का फैसला न हो जाए या उन्हें उसी स्तर का कोई दूसरा घर न मिल जाए। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच अपनी अर्ज़ी में संगीता ने कहा कि उनकी और विजय की शादी को 26 साल हो चुके हैं और उन्होंने अपना जीवन घर संभालने और अपने दो बच्चों - 25 साल के जेसन संजय और 20 साल की दिव्या साशा - की परवरिश में लगाया है। उन्होंने तर्क दिया कि शादी के दौरान वे विजय की जीवनशैली के हिसाब से रहीं और उनके पास ऐसा कोई दूसरा घर नहीं है जो उस जीवनशैली के स्तर का हो। याचिका में विजय की एक प्रमुख तमिल अभिनेता और भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के संस्थापक के तौर पर उनकी सार्वजनिक पहचान का भी ज़िक्र किया गया। संगीता के अनुसार, कोर्ट जाने से पहले उन्होंने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे कोशिशें नाकाम रहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजय के वकील ने उन्हें बताया कि अगर वे तलाक के लिए आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें नीलांकरई वाले घर में रहने की इजाज़त नहीं दी जाएगी, जिससे उन्हें अपना घर खोने की चिंता सताने लगी। इसे भी पढ़ें: The Odyssey India Box Office | क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' का जलवा कायम! तीसरे हफ्ते में बटोरे ₹29 करोड़, जल्द पार करेगी ₹200 करोड़ का आंकड़ा बायोमेडिकल साइंस में डिग्री रखने वालीं और यूके की नागरिक संगीता ने कहा कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए कोई उपयुक्त वैकल्पिक जगह नहीं है। इसलिए, उन्होंने एक अंतरिम आदेश की मांग की ताकि वे कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक सभी मौजूदा सुविधाओं के साथ नीलांकरई वाले घर में रह सकें। यह घर विजय के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से गहराई से जुड़ा होने के कारण भी महत्वपूर्ण है। विजय अभी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उनकी अक्सर साथ काम करने वालीं को-स्टार त्रिशा कृष्णन भावुक नज़र आईं। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi

