Tamil Nadu में अब शराब की दुकानों पर अब नहीं चलेगा मनमाना पहनावा, 15 नवंबर से वर्दी जरूरी
तमिलनाडु की सरकारी शराब दुकानों में काम करने वाले TASMAC कर्मचारियों को अब तय वर्दी पहननी होगी। सरकार के आदेश के मुताबिक 15 नवंबर 2026 से दुकान के कामकाज के दौरान निर्धारित वर्दी पहनना जरूरी होगा। इसका मकसद सभी दुकानों में कर्मचारियों का पहनावा एक जैसा और व्यवस्थित रखना है। सरकार ने हर कर्मचारी के लिए सालाना 6,000 रुपये का वर्दी भत्ता भी मंजूर किया है। इस रकम से कर्मचारियों को वर्दी के तीन जोड़े तैयार कराने होंगे। किस कर्मचारी के लिए कैसी होगी वर्दी? सरकारी आदेश के मुताबिक दुकान के पर्यवेक्षक हल्के नीले रंग की कमीज और गहरे नीले रंग की पैंट पहनेंगे। वहीं, बिक्री कर्मचारियों और सहायक बिक्री कर्मचारियों के लिए बेज रंग की कमीज और गहरे भूरे रंग की पैंट तय की गई है। एक वरिष्ठ TASMAC अधिकारी ने बताया, सभी कमीजों पर बाईं छाती की तरफ TASMAC का चिन्ह लगा होना जरूरी है। कमीज को पैंट के अंदर या बाहर, दोनों तरह से पहना जा सकता है। इसे भी पढ़ें: Chhatron Ki Goonj: इंदौर के मंच पर Rahul Gandhi ने ऐसा क्या किया, जिस पर BJP भड़क गई? 31 अक्टूबर तक कपड़ा खरीदना होगा सभी जिलों में वर्दी के रंग और कपड़े में एकरूपता रखने के लिए कर्मचारियों को तय कपड़ा ही खरीदना होगा। इसके लिए उन्हें अपने जिले के मुख्यालय में स्थित सरकारी कॉ-ऑप्टेक्स दुकानों से मंजूर कपड़ा खरीदने को कहा गया है। कर्मचारियों को 31 अक्टूबर 2026 तक कपड़ा खरीदना होगा, जबकि वर्दी की सिलाई 10 नवंबर 2026 तक पूरी करनी होगी। अधिकारी ने बताया, 15 नवंबर 2026 से काम के समय तय वर्दी पहनना अनिवार्य होगा। नियम नहीं माना तो होगी कार्रवाई TASMAC अधिकारियों के मुताबिक नवंबर के मध्य से दुकानों का निरीक्षण शुरू किया जाएगा। अगर कोई कर्मचारी वर्दी का भत्ता लेने के बाद बिना उचित वजह के वर्दी नहीं बनवाता या उसे नहीं पहनता है, तो उससे दी गई रकम वापस ली जा सकती है। इसके साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। इसे भी पढ़ें: DUSU Election में ABVP की जीत पर BJP का तंज, छात्रों ने खारिज की Rahul Gandhi की राजनीति TASMAC में 22,877 कर्मचारी शराबबंदी और आबकारी विभाग की वर्ष 2026-27 की नीति संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु राज्य विपणन निगम यानी TASMAC राज्य में 4,048 खुदरा शराब दुकानें चलाता है। इन दुकानों में पर्यवेक्षक, बिक्री कर्मचारी और सहायक बिक्री कर्मचारियों समेत कुल 22,877 कर्मचारी काम करते हैं। TASMAC तमिलनाडु सरकार की वह संस्था है जिसे राज्य में शराब की थोक और खुदरा बिक्री का काम सौंपा गया है।
Tamil Nadu Bypolls: CM Vijay और AIADMK प्रमुख Palaniswami करेंगे प्रचार
मदुरंतकम और धारापुरम में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी एससी-आरक्षित इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार करेंगे। अन्नाद्रमुक ने 2026 के विधानसभा चुनावों में इन दोनों सीट पर जीत हासिल की थी , लेकिन बाद में वहां के मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर सत्ताधारी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ पार्टी का दामन थाम लिया। पार्टी महासचिव पलानीस्वामी एक बार फिर दोनों सीटों पर जीत के लिये प्रयासरत हैं। टीवीके ने मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा को अपने ‘सीटी’ चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए नामित करने का फैसला किया है। ये दोनों 2026 के विधानसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक के टिकट पर चुनाव जीते थे। इस फैसले ने दल-बदल को उपचुनाव के प्रचार में एक अहम मुद्दा बना दिया है। अन्नाद्रमुक के पूर्व विधायक मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम) और पी. सत्यभामा (धारापुरम) के इस्तीफे के बाद ये दोनों सीटें खाली हो गईं। इन दोनों ने 2026 के विधानसभा चुनाव में “दो पत्ती” चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की थी, लेकिन जीत के एक महीने से भी कम समय में टीवीके में शामिल होने के लिए इस्तीफा दे दिया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पलानीस्वामी दोनों चुनाव क्षेत्रों में तीन-तीन दिन प्रचार करेंगे, जबकि विजय भी जल्द ही पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने की योजना बना रहे हैं। पलानीस्वामी मदुरंतकम में अपनी पार्टी की उम्मीदवार एस. कनिथा संपत और धारापुरम में के. भानुमति के लिए समर्थन जुटाएंगे। अन्नाद्रमुक का अभियान मुख्य रूप से उन उम्मीदवारों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है, जिन्होंने पाला बदलकर जनता के जनादेश के साथ “धोखा” किया है। विजय टीवीके उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे। टीवीके नेतृत्व द्वारा जल्द ही उनके प्रचार की तारीखों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है। मदुरंतकम में द्रमुक के आई. परंथमन और एस. सुगन्य, नाम तमिलर काची के उम्मीदवार के. जानकी रमन और एम. कार्तिका, और वामपंथी उम्मीदवार माकपा की पी. सुगंधी; तथा धारापुरम में माकपा के पी. लक्ष्मणन की मौजूदगी से छह अक्टूबर को इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में बहुकोणीय मुकाबला होगा।
MK Stalin के कार्यकाल में बने थे UK निवेश के आधार, TRB Rajaa ने TVK सरकार पर साधा निशाना
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री TRB राजा ने मुख्यमंत्री C जोसेफ विजय की हालिया यूनाइटेड किंगडम निवेश यात्रा के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इस यात्रा के दौरान साइन किए गए मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) असल में पिछली DMK सरकार द्वारा तैयार की गई निवेश पाइपलाइन का नतीजा थे। उन्होंने TVK के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा इन निवेशों को अपनी विदेशी आउटरीच का नतीजा बताने पर आपत्ति जताई। डीएमके नेता ने कहा कि CM के दौरे के दौरान घोषित निवेश में कुछ भी नया नहीं था और दावा किया कि कई समझौतों की नींव MK स्टालिन के कार्यकाल में ही रख दी गई थी। इसे भी पढ़ें: Kerala Student Election Result: SFI और KSU के प्रदर्शन पर Vijayan और Sunny Joseph ने दी बधाई तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि CM के छह दिन के UK दौरे से लगभग 15,300 करोड़ रुपये के निवेश का वादा मिला है, जिससे 10,000 से ज़्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा निवेश समझौता संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल और उसकी यूरोप और यूके स्थित जॉइंट-वेंचर कंपनियों के साथ हुआ, जिसमें लगभग 11,000 करोड़ रुपये शामिल थे। राजा ने उस समझौते का भी खास तौर पर ज़िक्र किया। पूर्व उद्योग मंत्री ने सवाल उठाया कि कंपनी के एक अपेक्षाकृत जूनियर लेवल के मार्केटिंग प्रतिनिधि की मौजूदगी में MoU पर साइन क्यों किए गए। राजा ने पूछा इसके लिए सीनियर लीडरशिप CM के साथ क्यों नहीं गई? इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Bypolls: CM Vijay और AIADMK प्रमुख Palaniswami करेंगे प्रचार उन्होंने यह भी कहा कि स्टालिन के विदेश दौरों में तमिल लोगों से बातचीत शामिल रही है, और उन्होंने इन मुलाकातों की तुलना विजय के दौरे के दौरान लोगों को हुई परेशानी से की। राजा ने दावा किया कि UK में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही, उन्होंने कहा कि तमिलनाडु एक बेहद मज़बूत राज्य है और तर्क दिया कि सत्ता में चाहे कोई भी राजनीतिक नेतृत्व हो, यह राज्य निवेश आकर्षित करता रहेगा।
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर सवालों की कड़ी बढ़ती जा रही है। अब इस प्रक्रिया के खिलाफ एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो गई है। जिस तरह दिल्ली में एसआईआर के तहत 47 लाख नाम हटाए गए और 33 लाख लोगों को नोटिस दिया गया। उसे लेकर विवाद छिड़ गया है। चुनाव आयोग सवालों से घिर गया। कोर्ट ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दे दी है। तो क्या फिर सवालों से घिरा चुनाव आयोग? वोटर लिस्ट का इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग कटघरे में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट में उसकी इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नई याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जहरी ने चुनाव आयोग पर नियमों का पालन ना करने के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि 33 लाख लोगों को चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस जारी किए जाने पर याचिकाकर्ता का दावा है कि यह नाम वेबसाइट पर नहीं दिखाए गए और उन्हें नोटिस की वजह भी नहीं बताई गई। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सामने याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में मतदाता सूची से करीब 47 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा 33 लाख लोगों को चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग ने उन लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं जिन्हें नोटिस भेजे गए हैं। साथ ही यह भी साफ नहीं किया गया कि किन आधारों पर उनके नामों पर सवाल उठाए गए। आयोग ने यह भी नहीं बताया कि किन मतदाताओं के रिकॉर्ड में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी यानी तार्किक विसंगतियां पाई गई और किन लोगों को अनमैप्ड की श्रेणी में रखा गया है। दरअसल दिल्ली में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के बाद 31 अगस्त को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया जिसमें पिछली बार के 1 करोड़ 45 लाख लोगों की सूची से करीब 47 लाख नाम काट दिए गए और अब लगभग 33 लाख लोगों को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी और अनमैप्ड के आधार पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। याचिका के मुताबिक, दिल्ली की 31 अगस्त की ड्राफ्ट सूची में 97,53,577 वोटर शामिल हैं। वहीं 47,56,722 नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। 13,79,785 वोटर्स को 'नो मैपिंग' और 19,33,134 को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज' के आधार पर नोटिस के लिए चिन्हित किया गया है। इसे भी पढ़ें: Haridwar Suicide Case: निठारी कांड के मुख्य आरोपी Surendra Koli ने क्यों बदली Identity? जांच में जुटी Police बेघर, ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्कर्स के लिए 23-24 सितंबर को स्पेशल कैंप एसआईआर के दौरान बेघर लोगों, ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्कर्स को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे। दिल्ली के 13 जिलों में ये कैंप 23 और 24 सितंबर को शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक डीयूएसआईबी के नाइट शेल्टर और दूसरे चिन्हित स्थानों पर लगाए जाएंगे। कैंप में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) भी मौजूद रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों को पहचान, पते और जरूरी डॉक्यूमेंट देने में कई बार परेशानी होती है। कुन्ने बोले- मैं जिंदा हूं, SIR ने बताया 'मृत' स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में एक और जीवित शख्स का नाम डेथ लिस्ट में डालने का मामला सामने आया है। लाल गुम्बद के रहने वाले कुन्ने लाल (60) ने विडियो जारी कर कहा है कि वो जीवित है। वह 50 साल से इसी इलाके में रह रहे हैं और पिछले चुनावों में वोट देते रहे हैं। कुन्ने लाल की नातिन अनीता ने बताया कि दादाजी ठीक हैं। परिवार में पिता-माता, भाई और उनकी पत्नी और बाकी सभी के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में हैं, सिर्फ दादा का नाम नहीं है। दो दिन पहले एनजीओ में काम करने वाली एक महिला ने परिवार को बताया कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। अनीता के मुताबिक, जब एन्युमरेशन फॉर्म भरे जा रहे थे, तब कुन्ने लाल गांव में थे। परिवार ने इसकी जानकारी दी थी। अधिकारी ने कहा था कि उनका फॉर्म बाद में भरवा लिया जाएगा लेकिन कोई फॉर्म भरवाने नहीं आया। अब पता चला कि उनका नाम डेथ लिस्ट में डाल दिया गया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Two Language Policy | तमिलनाडु में 'भाषा युद्ध' पार्ट-2! सुप्रीम कोर्ट की नसीहत के बाद भी दो-भाषा नीति पर अड़ी विजय सरकार, DMK-TVK आए साथ 16 दिन में मिले सिर्फ 68 हज़ार दावे दिल्ली में SIR के तहत क्लेम और ऑब्जेक्शन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए करीब 47.5 लाख वोटर्स की तुलना में नाम जुड़वाने के लिए आने वाले आवेदनों की रफ्तार अभी भी धीमी है। 31 अगस्त से 16 सितंबर तक 16 दिनों में कुल 68.043 लोगों ने फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है। क्लेम और ऑब्जेक्शन दर्ज कराने की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के 17 सितंबर के आआंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त तक 2,12,400 फॉर्म-6 प्राप्त हो चुके थे। इसके बाद 16 दिनो में 68,043 नए आवेदन आए है।
तमिलनाडु अपनी दो-भाषा नीति पर अड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के यह कहने के बावजूद कि राज्य को हिंदी के बारे में अपना नज़रिया बदलना चाहिए और वह यह रुख नहीं अपना सकता कि राज्य में यह भाषा नहीं पढ़ाई जाएगी, तमिलनाडु ने जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए ज़मीन देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री और TVK नेता राजमोहन अरुमुगम ने कहा कि तमिलनाडु अपनी दो-भाषा नीति पर कायम रहेगा और नवोदय स्कूलों के लिए ज़मीन नहीं देगा। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Two Language Policy | तमिलनाडु में 'भाषा युद्ध' पार्ट-2! सुप्रीम कोर्ट की नसीहत के बाद भी दो-भाषा नीति पर अड़ी विजय सरकार, DMK-TVK आए साथ सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए, राजमोहन ने राज्य में नवोदय स्कूल खोलने के लिए ज़मीन देने के बारे में कोर्ट की टिप्पणियों से जुड़े सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक तमिलनाडु की बात है — कल, आज और हमेशा — हमारा रुख़ साफ़ तौर पर 'दो-भाषा नीति' का है। इस पर कोई दूसरा मत नहीं है। यह साफ़ करते हुए कि कोर्ट की टिप्पणियां कोई अंतिम फ़ैसला नहीं थीं, उन्होंने कहा, पूरे सम्मान के साथ, हम हिंदी या किसी दूसरी भाषा के ख़िलाफ़ नहीं हैं। लेकिन हमारी ज़मीन और हमारे लोगों के लिए, तमिल को प्राथमिकता दी जाती है। कानूनी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन नीतिगत तौर पर हमारा रुख़ पक्का है। उन्होंने आगे कहा कि मॉडल स्कूलों में हम पहले से ही अच्छी क्वालिटी की शिक्षा दे रहे हैं और हम इस तरह के किसी भी CBSE सेंट्रल संस्थान के लिए ज़मीन नहीं देंगे। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी नवोदय स्कूल खोलने का विरोध किया और राज्य सरकार से अपील की कि अगर ज़रूरत हो तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर अपना रुख़ दोहराते हुए एक प्रस्ताव पास करे। उन्होंने बताया कि दो-भाषा नीति का पालन करने से राज्य के विकास में कभी कोई रुकावट नहीं आई। तीन-भाषा विवाद के कारण केंद्र सरकार द्वारा 'समग्र शिक्षा योजना' के तहत 3,548 करोड़ रुपये रोके जाने का ज़िक्र करते हुए, उदयनिधि ने राज्य से अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने पर ज़ोर दिया। इसे भी पढ़ें: Madurai के उसिलामपट्टी से CM Joseph Vijay शुरू करेंगे नवजात शिशुओं के लिए Gold Ring Scheme सुप्रीम कोर्ट की ये ताज़ा टिप्पणियाँ तब आईं जब कोर्ट तमिलनाडु की उस चुनौती पर सुनवाई कर रहा था जिसमें राज्य में नवोदय स्कूल खोलने के निर्देशों का विरोध किया गया था। बेंच ने स्कूलों के मामले में हिंदी के प्रति तमिलनाडु के विरोध पर सवाल उठाए और राज्य से अपनी स्थिति पर फिर से विचार करने को कहा। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने राज्य से अपनी सोच बदलने को कहा और टिप्पणी की कि राज्य यह रुख नहीं अपना सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अलग-अलग राज्य अलग देशों की तरह काम नहीं कर सकते।
टेक दिग्गज गूगल (Google) के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल 'जेमिनी' (Gemini) से जुड़ी एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के साइबर विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। एक सुरक्षा परीक्षण (Cybersecurity Test) के दौरान गूगल के जेमिनी मॉडल ने अनजाने में इंटरनेट का इस्तेमाल कर तीन असली बाहरी कंपनियों के सिस्टम को हैक कर लिया। हालांकि, इस घटना की सबसे दिलचस्प और हैरान कर देने वाली बात यह रही कि जैसे ही जेमिनी को यह एहसास हुआ कि वह किसी काल्पनिक सिस्टम के बजाय किसी असली कंपनी के नेटवर्क में घुस चुका है, वह खुद-ब-खुद (Autonomous) रुक गया और बाहर निकल आया। जानें पूरा मामला क्या है? वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मई में इज़राइली स्टार्टअप 'इरेगुलर' (Irregular) द्वारा किए गए साइबरसिक्योरिटी टेस्ट के दौरान गूगल के जेमिनी मॉडल ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया और तीन बाहरी कंपनियों को हैक किया। यह कंपनी के AI सिस्टम द्वारा खुद से ऐसा काम करने का पहला ज्ञात मामला है। 'इरेगुलर' एक AI स्टार्टअप है जो ऐसी ही घटनाओं से जुड़ा रहा है, जिसमें बदनाम 'ओपनAI हगिंग फेस' (OpenAI Hugging Face) ब्रीच भी शामिल है, जहां 700 से ज़्यादा गलत AI एजेंटों ने अमेरिकी कंपनी 'हगिंग फेस' के सिस्टम को हैक करने की कोशिश की थी। जेमिनी ने तीन कंपनियों को हैक किया गूगल के मुताबिक, ये घटनाएं 'इरेगुलर' के इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैप्चर द फ्लैग (capture the flag) एक्सरसाइज के दौरान गलत पहचान के कारण हुईं। जेमिनी को टेस्ट एनवायरनमेंट के अंदर एक काल्पनिक कंपनी द्वारा चलाए जा रहे सॉफ्टवेयर से जानकारी निकालने का काम सौंपा गया था, लेकिन उस काल्पनिक कंपनी का नाम एक असली कंपनी जैसा ही था। हालांकि मॉडल को इंटरनेट एक्सेस नहीं मिलना चाहिए था, लेकिन 'इरेगुलर' ने कहा कि गलती से इंटरनेट एक्सेस मिल गया। इससे जेमिनी असली कंपनी के सिस्टम तक पहुंच गया – एक मामले में उसने पासवर्ड का अंदाज़ा लगाकर ऐसा किया। लेकिन गूगल का कहना है कि जब AI को एहसास हुआ कि वह असली कंपनी के सिस्टम में घुस गया है, तो वह खुद ही रुक गया और बाहर निकल आया। दो अन्य बार, जेमिनी ने कंपनी के नाम का इस्तेमाल करके वेब पर सर्च किया और दो पब्लिक ऑनलाइन रिपॉजिटरी में क्रेडेंशियल (लॉगिन जानकारी) ढूंढे। फिर AI ने उन सिस्टम तक पहुंचने के लिए इन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल किया, लेकिन जब उसे एहसास हुआ कि कंपनियां असली हैं, तो वह रुक गया। गूगल का कहना है कि AI ने सही तरीके से काम किया क्योंकि वह खुद ही रुक गया गूगल ने कन्फर्म किया कि उसे इस साल जुलाई में इन घटनाओं के बारे में बताया गया था। लेकिन कंपनी ने उस समय इसका खुलासा नहीं किया। कंपनी ने WSJ को बताया कि उसे नहीं लगा कि इन मामलों को सार्वजनिक करने की ज़रूरत है क्योंकि मॉडल ने खुद ही घुसपैठ खत्म कर दी थी। गूगल की सिक्योरिटी इंजीनियरिंग की VP हीथर एडकिन्स ने एक बयान में कहा, यह घटना शक्तिशाली AI मॉडल को ज़िम्मेदारी से काम करने के लिए ट्रेन करने की अहमियत को दिखाती है। इस मामले में, मॉडल ने सही तरीके से काम किया। गूगल ने घटना के बारे में तीनों प्रभावित कंपनियों और सरकारी अधिकारियों को जानकारी दी। कंपनी ने उन कंपनियों के नाम बताने से इनकार कर दिया जो इससे प्रभावित हुई थीं। साथ ही, यह भी कहा कि हैकिंग में उनके सबसे नए मॉडल का इस्तेमाल नहीं हुआ, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि जेमिनी का कौन सा मॉडल इसमें शामिल था। कंपनी ने इस घटना को किसी नुकसानदायक सेंधमारी के बजाय 'बग बाउंटी प्रोग्राम' जैसा माना, जिसमें कमियों का पता लगाकर उनकी रिपोर्ट की जाती है। 'इरेगुलर' (Irregular) ने कहा कि गूगल का मामला भी वैसी ही घटनाओं जैसा था जैसी प्रमुख AI लैब्स के साथ पहले हो चुकी हैं, और यह कोई नई समस्या नहीं थी। 'इरेगुलर' के प्रवक्ता ने कहा, जुलाई के आखिर में सभी संबंधित लैब्स को सूचना दी गई थी और जांच के तहत प्रभावित संस्थाओं से संपर्क किया गया था। 'इरेगुलर' ने तुरंत कार्रवाई की और हमारी तरफ से सभी ज्ञात समस्याओं को हफ़्तों पहले ही ठीक कर लिया गया था। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Two Language Policy | तमिलनाडु में 'भाषा युद्ध' पार्ट-2! सुप्रीम कोर्ट की नसीहत के बाद भी दो-भाषा नीति पर अड़ी विजय सरकार, DMK-TVK आए साथ 'इरेगुलर' से जुड़ी ऐसी ही घटनाओं के बारे में OpenAI, Anthropic और Meta पहले ही जानकारी दे चुके हैं। हालांकि, गूगल का मामला एक अहम बात में अलग है – इसमें AI अपने आप रुक गया था। इससे पहले, Anthropic ने बताया था कि उसका Claude Opus 4.7 मॉडल ऐसी ही एक प्रक्रिया के दौरान रुका नहीं था, जबकि उसे पता चल गया था कि वह शायद किसी असली कंपनी के सिस्टम तक पहुँच गया है। वहीं, OpenAI ने बताया था कि उसका एक मॉडल यह मान बैठा था कि जिस असली कंपनी तक वह पहुँचा है, वह सिमुलेशन का ही हिस्सा है। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब AI की दुनिया में इसकी कार्यप्रणाली पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। हम AI के अनियंत्रित होने (rogue होने) के और मामले देख रहे हैं; AI रिसर्चर इसे इंसानों के लिए संभावित खतरा बता चुके हैं। AI रिसर्चर जैकब कॉक्सन के Anthropic से इस्तीफ़ा देने और ऐसे ही खतरों का ज़िक्र करने के बाद, AI की सुरक्षा बहस का मुख्य मुद्दा बन गई है। Anthropic के इवान हूबिंगर जैसे कुछ लोगों का तो यह भी अनुमान है कि अगले दशक में AI सभी इंसानों को खत्म कर सकता है। इसे भी पढ़ें: TMC Symbol Freeze: सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, EC के फैसले को बताया 'काला दिन', जानें क्या है नया नाम और चुनाव चिह्न वहीं दूसरी ओर, OpenAI और Anthropic AI के विकास की गति धीमी करने की वकालत कर रहे हैं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विचार को खारिज कर दिया है। Nvidia के जेन्सेन हुआंग और Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भी इसका विरोध किया है। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
Tamil nadu gold ring scheme: तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की सरकार ने राज्य में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को एक बहुमूल्य उपहार देने की घोषणा की है। सरकार नवजात शिशुओं के कल्याण के लिए उनके जन्म पर एक ग्राम सोने की अंगूठी देने की योजना शुरू कर रही है। सीएम विजय 28 सितंबर से इस योजना की शुरुआत करेंगे। राज्य सरकार ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं को मिलेगी अंगूठीइस योजना के तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले सभी बच्चों को एक ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। अंगूठियों के वितरण में सुरक्षा और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।सरकार ने खरीदीं 1.28 लाख सोने की अंगूठियांसरकार ने बताया कि पहली किस्त में वितरण के लिए 1.28 लाख सोने की अंगूठियां खरीदी जा चुकी हैं। सरकार के अनुसार, प्रत्येक सोने की अंगूठी पर एक विशेष सीरियल नंबर दर्ज होगा। इसे पूरी तरह सुरक्षित और छेड़छाड़-मुक्त (टैम्पर-प्रूफ) पैकेट में बंद करके दिया जाएगा।राज्य के स्थानीय निवासियों को मिलेगा लाभराज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। योजना का फायदा लेने के लिए लाभार्थियों का तमिलनाडु का स्थायी निवासी होना जरूरी है। केवल राज्य के स्थायी निवासियों के बच्चों को ही यह उपहार दिया जाएगा।Air India Express: टेस्ट में पास मगर नौकरी से बर्खास्त, जानें एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने 8 क्रू मेंबर्स पर क्यों की कार्रवाई
Tamil Nadu Businessman employed innocent victims then sexually exploited them several victims SC Act invoked.
पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा भूचाल आ गया है। चुनाव आयोग (EC) ने एक अंतरिम आदेश जारी कर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और उसके 28 साल पुराने मशहूर चुनाव चिह्न फूल और घास (Twin Flowers) के इस्तेमाल पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। पार्टी की संस्थापक और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC ने गुरुवार देर रात 11:36 बजे चुनाव आयोग को नए नामों और चुनाव चिह्नों के विकल्प भेज दिए हैं, लेकिन साथ ही आयोग के इस फैसले पर अपना कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है।इसे भी पढ़ें: Vanakkam Poorvottar: Supreme Court और Madras High Court की टिप्पणी Tamil Nadu की Vijay Govt के लिए बनी परेशानी का सबब EC ने TMC के दोनों गुटों से क्या कहा? गुरुवार रात जारी अंतरिम आदेश में, चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को लेकर चल रहे विवाद में शामिल दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और फूल और घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करें। साथ ही, EC ने उनसे शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न बताने को भी कहा। इसके अलावा, EC ने यह भी कहा कि प्रस्तावित नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' से मिलता-जुलता हो सकता है, और चुनाव चिह्न निर्दलीय उम्मीदवारों और रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए अधिसूचित 'फ्री' या उपलब्ध चुनाव चिह्नों की सूची में से चुना जाना चाहिए। रेजीनगर और नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं। अपने आदेश में, चुनाव आयोग ने कहा कि 'चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968' के पैरा 15 के तहत कार्यवाही पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था, लेकिन उसने आगामी उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की तात्कालिकता को ध्यान में रखा।इसे भी पढ़ें: Yemen War से लाखों लोग विस्थापित, जान बचाने के लिए जान को खतरे में डाल कर समुद्र पार कर रहे लोग EC का कहना है कि यह अंतरिम व्यवस्था सिर्फ उपचुनावों के लिए है इसके अलावा, EC ने कहा कि यह अंतरिम व्यवस्था विशेष रूप से आगामी उपचुनावों के लिए की गई है और यह तब तक लागू रहेगी जब तक कि 'चुनाव चिह्न आदेश' के पैरा 15 के तहत विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता। गौरतलब है कि EC का यह आदेश TMC विधायक दल में मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुई बगावत की पृष्ठभूमि में आया है, जो बाद में संसद तक फैल गई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए नेता रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता (LoP) चुना। जून में, 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी से निकाले गए नेता रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना और विधानसभा स्पीकर से मान्यता हासिल की। यह पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बार हुआ जब पार्टी में फूट पड़ी। पांच दिन बाद यह बगावत संसद तक पहुँच गई, जब सीनियर नेता काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 लोकसभा सांसदों ने कम जानी-मानी NCPI का साथ दिया और स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर BJP के नेतृत्व वाले NDA को एक अलग गुट के तौर पर समर्थन दिया, जिससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई। यह घटनाक्रम ममता के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC के बनने के बाद से ही उनके हाथ से बनाया गया चुनाव चिह्न पार्टी की पहचान का मुख्य आधार रहा है। दिलचस्प बात यह है कि फूल और घास वाला यह चिह्न पिछले 28 सालों से पार्टी की ज़मीनी पहचान का एक मज़बूत प्रतीक बन गया था। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
राज्यों में बारिश-आंधी के अलर्ट: तमिलनाडु-हिमाचल तक असर, 22 सितंबर तक मौसम के मिजाज पर आईएमडी का अनुमान क्या?IMD weather forecast up to September 22? Rain predicted regions ranging from Tamil Nadu and UP Punjab Himachal
Tamil Nadu CM Thalapathy Vijay Temple Rule: TVK सरकार के फैसले की चर्चा जोरों पर
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भगोने में कौन और क्यों पका रहा था लड़की के अंग? | Tamil Nadu Express | Agra | Apradh Lok S2 EP5
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Tamil Nadu CM Vijay ने क्या मंदिरों से दानपेटी हटाने वाले फैसला लिया, Insta Reels का पूरा सच। TVK
Tamil Nadu CM Vijay ने क्या मंदिरों से दानपेटी हटाने वाले फैसले लिया, Insta Reels का पूरा सच। TVK तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं
CM Vijay Thalapathy की सरकार ने महिलाओं और किसानों के लिए किए बड़े ऐलान। Tamil Nadu Assembly
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मिलने वाले सालाना स्वास्थ्य बीमा कवर को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है
Tamil Nadu CM Vijay के खिलाफ Trisha को लेकर विपक्ष ने फिर कसा तंज। Udhayanidhi Stalin। AIADMK
तमिलनाडु की सियासत में अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर बयानबाजी का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। AIADMK के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए तृषा को लेकर तंज कसा, जिसके बाद उनके बयान पर विवाद शुरू हो गया। तृषा के फैन्स ने भी विरोध जताया और मदुरै में पोस्टर लगाए।
अभिनेत्री से नेता बनीं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत ने Gen Z (युवा पीढ़ी) पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर चौतरफा घिरने के बाद अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। जंतर-मंतर पर CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर विवादित बयान देने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहीं कंगना ने अब युवाओं की जमकर तारीफ की है और उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया है। ANI के अनुसार, कंगना ने इस बात को खारिज कर दिया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों का एक छोटा समूह पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। कंगना रनौत ने Gen Z पर अपना रुख बदला, उन्हें देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया। उन्होंने आगे कहा, हमारी सरकार इतने लंबे समय से Gen Z के जनादेश के कारण सत्ता में है... यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। आज, झारखंड में बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से व्यवहार कर रहे हैं। देश के कई युवा जो मेडल जीतकर लौटे हैं, उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री और देश को समर्पित किया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu CM Vijay Sanghita Divorce | विजय की पत्नी संगीता ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने मामले को किया निपटाया उन्होंने कहा, कुछ ही लोग हैं जो Gen Z की छवि खराब कर रहे हैं। Gen Z हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें अपनी पीढ़ी पर गर्व है। Gen Z पर टिप्पणी को लेकर कंगना रनौत को ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा। जानकारी के लिए बता दें कि 'तनु वेड्स मनु' की एक्ट्रेस ने हाल ही में CJP विरोध प्रदर्शन पर अपनी आपत्ति जताते हुए एक पोस्ट शेयर किया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसमें सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनकी फिल्मों में निभाए गए कुछ किरदारों के क्लिप शेयर किए। कंगना ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि लोग स्क्रीन पर उनके निभाए गए किरदारों की तुलना असल ज़िंदगी में युवाओं के व्यवहार से गलत तरीके से कर रहे थे। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच ऑनलाइन आलोचना तब शुरू हुई जब उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गंदगी, कचरा और बदसूरती का प्रदर्शन बताया था। कंगना रनौत का हालिया काम काम की बात करें तो, कंगना रनौत हाल ही में मनोज तापड़िया द्वारा निर्देशित 'भारत भाग्य विधाता' में नज़र आई थीं। यह फिल्म, जो 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी, आखिरकार अपनी OTT रिलीज़ की तारीख पा चुकी है। यह फ़िल्म 14 अगस्त, 2026 से Zee5 प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होगी। इसके बाद वह अपनी हिट फ़िल्म 'क्वीन' (जो 2014 में रिलीज़ हुई थी) के सीक्वल में नज़र आएँगी। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक के बहुचर्चित कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आया है। संगीता ने चेंगलपट्टू जिला अदालत में दाखिल अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली है। अर्जी वापस लिए जाने के बाद अदालत ने इस मामले का औपचारिक रूप से निपटारा कर दिया है। विजय और संगीता के तलाक के मामले से जुड़ी घटनाएँ संगीता ने फरवरी में तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। अपनी अर्जी में उन्होंने आरोप लगाया कि विजय का एक महिला अभिनेत्री के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (विवाह-बाहर संबंध) था, जिसके बारे में उन्हें 2021 में पता चला। अर्जी में यह भी कहा गया कि विजय के यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि वह रिश्ता खत्म कर देंगे, उन्होंने बिना किसी पछतावे के इसे जारी रखा। दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया कि विजय ने धीरे-धीरे संगीता को अपनी सामाजिक और पेशेवर ज़िंदगी से दूर कर दिया, जबकि वे उस अभिनेत्री के साथ विदेश यात्राएँ करते रहे और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। अर्जी में यह भी दावा किया गया कि इन मौकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर नियमित रूप से शेयर की जाती थीं, और विजय ने न तो उनसे इनकार किया और न ही उन पर कोई आपत्ति जताई। संगीता के अनुसार, इन पोस्ट्स की वजह से उन्हें और उनके दो बच्चों, जेसन संजय और दिव्या साशा को बार-बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने विजय पर उन्हें पहले मिलने वाली आर्थिक मदद और सुविधाओं को बंद करने और उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का भी आरोप लगाया, जिसमें उनकी घूमने-फिरने की आज़ादी पर रोक लगाना भी शामिल था। संगीता ने आगे आरोप लगाया कि विजय के लगातार व्यवहार और 2024 में सोशल मीडिया पर सामने आए विवादों के कारण उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा। उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी असल में टूट चुकी थी और सिर्फ़ कागज़ों पर ही बची थी। अपनी अर्जी में उन्होंने कहा कि रिश्ता अब सुधरने लायक नहीं रहा और इससे उन्हें मानसिक पीड़ा, अपमान, शर्मिंदगी और तकलीफ़ के अलावा कुछ नहीं मिला। तलाक की अर्जी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले दाखिल की गई थी। हालाँकि, चुनाव जीतने और मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय की पत्नी संगीता ने अर्जी वापस लेने का फ़ैसला किया। विजय और संगीता के तलाक के मामले के बारे में और जानकारी जून 2026 में, चेंगलपट्टू परिवार कल्याण अदालत ने विजय और संगीता के तलाक के मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद, अदालत ने मामले को 7 अगस्त तक के लिए टाल दिया था। सुनवाई से पहले के हफ़्तों में, ऐसी खबरें आई थीं कि शायद यह जोड़ा सुलह की ओर बढ़ रहा है। इस बात पर भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे कोर्ट में वर्चुअली पेश होंगे या खुद आएंगे। संगीता ने पारिवारिक घर में रहना जारी रखने की मांग की इस साल की शुरुआत में, संगीता ने चेंगलपट्टू की ज़िला अदालत में एक अर्ज़ी दायर की। इसमें उन्होंने चेन्नई के नीलांकरई में मौजूद अपने पारिवारिक घर में तब तक रहने की इजाज़त मांगी, जब तक कि तलाक की कार्यवाही पूरी न हो जाए। 22 फरवरी को दी गई यह अर्ज़ी, स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत दायर उनकी मुख्य तलाक की याचिका का हिस्सा थी। शादी खत्म करने की मांग के साथ-साथ, उन्होंने स्थायी गुजारा-भत्ता (एलिमनी) और नीलांकरई वाले घर में तब तक रहने का अधिकार भी मांगा, जब तक कि मामले का फैसला न हो जाए या उन्हें उसी स्तर का कोई दूसरा घर न मिल जाए। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच अपनी अर्ज़ी में संगीता ने कहा कि उनकी और विजय की शादी को 26 साल हो चुके हैं और उन्होंने अपना जीवन घर संभालने और अपने दो बच्चों - 25 साल के जेसन संजय और 20 साल की दिव्या साशा - की परवरिश में लगाया है। उन्होंने तर्क दिया कि शादी के दौरान वे विजय की जीवनशैली के हिसाब से रहीं और उनके पास ऐसा कोई दूसरा घर नहीं है जो उस जीवनशैली के स्तर का हो। याचिका में विजय की एक प्रमुख तमिल अभिनेता और भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के संस्थापक के तौर पर उनकी सार्वजनिक पहचान का भी ज़िक्र किया गया। संगीता के अनुसार, कोर्ट जाने से पहले उन्होंने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे कोशिशें नाकाम रहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजय के वकील ने उन्हें बताया कि अगर वे तलाक के लिए आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें नीलांकरई वाले घर में रहने की इजाज़त नहीं दी जाएगी, जिससे उन्हें अपना घर खोने की चिंता सताने लगी। इसे भी पढ़ें: The Odyssey India Box Office | क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' का जलवा कायम! तीसरे हफ्ते में बटोरे ₹29 करोड़, जल्द पार करेगी ₹200 करोड़ का आंकड़ा बायोमेडिकल साइंस में डिग्री रखने वालीं और यूके की नागरिक संगीता ने कहा कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए कोई उपयुक्त वैकल्पिक जगह नहीं है। इसलिए, उन्होंने एक अंतरिम आदेश की मांग की ताकि वे कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक सभी मौजूदा सुविधाओं के साथ नीलांकरई वाले घर में रह सकें। यह घर विजय के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से गहराई से जुड़ा होने के कारण भी महत्वपूर्ण है। विजय अभी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उनकी अक्सर साथ काम करने वालीं को-स्टार त्रिशा कृष्णन भावुक नज़र आईं। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi

