Tamil Nadu में पुलिसकर्मियों का कार्यभार घटाने और Welfare Schemes को सरकार देगी प्राथमिकता
चेन्नई, छह सितंबर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने रविवार को ‘पुलिस दिवस’ के अवसर पर पुलिस बल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सरकार पुलिसकर्मियों का कार्यभार कम करने, आधुनिक प्रौद्योगिकी को पुलिस के कामकाज में शामिल करने और पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देगी। मुख्यमंत्री ने समाज में शांति बनाए रखने और कानून का शासन सुनिश्चित करने के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाले पुलिस बल के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे राज्य के पुलिसकर्मियों का साहस और त्याग सदैव सराहनीय रहा है। वे न केवल अपराधों की रोकथाम और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम करते हैं, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों के जीवन, संपत्ति और अधिकारों की रक्षा के लिए भी अग्रिम पंक्ति में बहादुरी से डटे रहते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार पुलिसकर्मियों के कार्यभार को कम करने, आधुनिक प्रौद्योगिकी सुविधाओं के माध्यम से उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने तथा पुलिस अधिकारियों एवं उनके परिवारों के लिए आवश्यक कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देगी।’’विजय ने शांतिपूर्ण और सुरक्षित तमिलनाडु के निर्माण के लिए जनता से पुलिस के साथ विश्वास और सद्भाव के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।
Mobiles Ban in Tamil Nadu temple: तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में मोबाइल बैन का एक हैरान करने वाला नतीजा सामने आया है। फोन पर रोक का असर अब युवा श्रद्धालुओं की संख्या पर दिखाई देने लगा है। 1 सितंबर से राज्य के 52 प्रमुख मंदिरों में स्मार्टफोन ले जाने पर बैनलगाया गया है। इसके बाद कांचीपुरम स्थित देवराजस्वामी मंदिर में युवाओं की संख्या कम होने और कुल श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 20 फीसदी तक गिरावट की बात सामने आई है। एक रिसर्च रिपोर्ट में एक बात सामने आई है कि सेल्फी और कॉन्टेंट क्रिएशन के लिए जाने वाले तमिलनाडु के युवाओं ने मंदिर जाना कम कर दिया है'दैनिक भास्कर' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर प्रशासन का कहना है कि वह अपनी ओर से कोई नया नियम लागू नहीं कर रहा। बल्कि मद्रास हाई कोर्ट के पुराने आदेश को लागू कर रहा है। मंदिर परिसर में मोबाइल फोन जमा कराने के लिए काउंटर बनाए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले जहां युवाओं की अच्छी संख्या नजर आती थी, अब बुजुर्ग श्रद्धालु ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।फोन बैन के बाद बदला मंदिर का नजाराकांचीपुरम के देवराजस्वामी मंदिर में पहले कई युवा दर्शन के साथ-साथ सेल्फी, वीडियो और सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाने आते थे। मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था लागू होने के बाद युवाओं की मौजूदगी कम दिखाई देने लगी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोबाइल जमा कराने वाले काउंटर पर शुरुआती दिनों में लंबी कतारें भी लगीं। हालांकि, अब वहां भी युवाओं की तुलना में बुजुर्ग श्रद्धालुओं की संख्या अधिक दिखाई दे रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 20 फीसदी तक कमी देखी गई है।'हाई कोर्ट के आदेश का कर रहे पालन'मंदिर प्रशासन के अधिकारी आर. गणेशन ने फोन बैन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में भक्तों की संख्या कम होने की एक वजह युवाओं का कम आना हो सकती है। लेकिन मंदिर की पवित्रता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, यह फैसला मंदिर प्रशासन ने अपनी तरफ से नहीं लिया है। मद्रास हाई कोर्ट के दिसंबर 2022 के आदेश के तहत मंदिरों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लागू की जा रही है।क्यों लगाया गया मोबाइल पर प्रतिबंध?मंदिरों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। खासतौर पर सेल्फी, फोटो, वीडियो और रील्स बनाने को लेकर मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं की आपत्तियां रही हैं। सरकार और मंदिर प्रशासन का तर्क है कि मोबाइल फोन की वजह से मंदिरों का आध्यात्मिक माहौल प्रभावित होता है। कई श्रद्धालु दर्शन के बजाय फोटो और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने में व्यस्त रहते हैं। इसी वजह से मंदिरों की पवित्रता और शांत वातावरण बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।23 साल के अरुण ने कहा- फोन के बिना अनुभव अधूराभास्कर की रिपोर्ट में 23 वर्षीय अरुण कुमार का उदाहरण दिया गया है। वह तीन दोस्तों के साथ मंदिर पहुंचे थे। उन्हें मंदिर में मोबाइल जमा कराने के नियम की जानकारी थी। लेकिन उन्होंने इसे लेकर असहमति जताई। अरुण के मुताबिक, मंदिर और परंपरा को समझने के लिए सिर्फ दर्शन ही काफी नहीं हैं।आज के दौर में लोग मंदिरों की वास्तुकला और माहौल की तस्वीरें लेकर उन्हें सोशल मीडिया परशेयर करते हैं। उनका कहना था कि फोन के बिना उन्हें मंदिर आने का अनुभव अधूरा लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर फोन रखने के लिए कुछ रुपये देने पड़ें और उसके बाद फोटो या रिकॉर्डिंग भी न कर सकें तो वे ऐसे मंदिर जाना पसंद करेंगे जहां मोबाइल को लेकर इतने सख्त नियम न हों।19 साल की प्रिया को भी हुई परेशानीरिपोर्ट में 19 वर्षीय प्रिया राजेश का भी जिक्र है। वह अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंची थीं। मोबाइल जमा कराने के लिए काउंटर पर देने के बाद वह मंदिर के अंदर चली गईं। प्रिया के मुताबिक, वह दर्शन के लिए आई थीं। लेकिन मंदिर के अंदर फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर फोन अंदर ले जाने की इजाजत होती तो वह मंदिर की तस्वीरें ले सकती थीं और बाद में उन्हें सोशल मीडिया परशेयर कर सकती थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर इतना सुंदर है तो उसकी तस्वीरें क्यों नहीं ली जा सकतीं? साथ ही उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवाओं को मंदिरों से जोड़ने के बजाय इस तरह के नियम उन्हें दूर कर सकते हैं।5 रुपये में जमा हो रहा है मोबाइल52 मंदिरों में मोबाइल लेकर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए जमा काउंटर बनाए गए हैं। कई जगह प्रति मोबाइल 5 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। हालांकि यह शुल्क हर मंदिर में अनिवार्य नहीं है। इसे लेकर मंदिरों को व्यवस्था के अनुसार निर्णय लेने की छूट दी गई है। मोबाइल फोन की सुरक्षा के लिए मंदिरों में लॉकर/डिपॉजिट काउंटर बनाए गए हैं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि मोबाइल जमा कराने या वापस लेने के लिए श्रद्धालुओं को बहुत देर तक कतार में न खड़ा होना पड़े।एक अहम छूट भी लागूमोबाइल बैन पूरी तरह हर तरह के फोन पर लागू नहीं है। बिना कैमरे वाले सामान्य मोबाइल फोन को लेकर अलग व्यवस्था है। ऐसे फोन अंदर ले जाने की अनुमति दी गई है। प्रतिबंध मुख्य रूप से कैमरा वाले स्मार्टफोन पर है। इसके अलावा बाद में तमिलनाडु के HR&CE मंत्री एस. रमेश ने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों को साथ लेकर चलने वाली महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। भारी भीड़ वाले त्योहारों के दिनों में भी मोबाइल जमा कराने को लेकर अलग व्यवस्था की जा सकती है।क्या दूसरे मंदिरों में भी दिखेगा असर?तमिलनाडु के कई बड़े मंदिरों में पहले से ही मोबाइल फोन पर प्रतिबंध या सीमाएं लागू थीं। अब 52 प्रमुख मंदिरों में इस व्यवस्था को लागू किया गया है। तिरुचि में भी श्रद्धालुओं ने नियम का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने अधिक डिपॉजिट काउंटर और बेहतर व्यवस्था की मांग की है। तमिलनाडु सरकार ने राज्य भर के 52 मंदिरों में भक्तों के स्मार्टफोन ले जाने पर रोक लगा दी है। यह रोक मंगलवार, 1 सितंबर से लागू हो गई है।ये भी पढ़ें-Iran-America War Update: अमेरिका-ईरान की जंग ने लिया खतरनाक मोड़! ईरानी सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी युद्धपोतों को बनाया निशानाक्यों लगाया गया बैन?हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने यह आदेश इसलिए जारी किया ताकि भक्त मंदिर परिसर के अंदर फोटो और वीडियो न ले सकें। HR&CE मंत्री रमेश ने पिछले सप्ताह इस रोक की घोषणा करते हुए कहा था कि जिन भक्तों को मंदिर के अंदर स्मार्टफोन ले जाने की जरूरत है, उन्हें प्रति फोन 5 रुपये काचार्ज देना होगा। जो भक्त अपने फोन जमा करना चाहेंगे, उनके लिए मंदिरों में लॉकर की सुविधा दी जाएगी। बिना कैमरे वाले फोन को बिना किसी रोक-टोक के मंदिर के अंदर ले जाने की अनुमति होगी।मंत्री के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भक्त शांति से प्रार्थना कर सकें। HR&CE विभाग ने साफ किया कि 5 रुपये का शुल्क कमाई करने के लिए नहीं है। बल्कि इसका इस्तेमाल लॉकर और उससे जुड़ी सुविधाओं के रखरखाव के लिए किया जाएगा। हालांकि, इस रोक से मंदिर के कर्मचारियों के मन में भक्तों द्वारा जमा किए गए फोन की सुरक्षा की जिम्मेदारी को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
केरल के त्रिशूर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 66 (NH 66) पर शुक्रवार देर रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया। कैपमंगलम के पनम्बिकुन्नू में सड़क किनारे खड़ी एक लॉरी से कार की भीषण टक्कर में तमिलनाडु के आठ इंजीनियरिंग छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह घटना शुक्रवार रात करीब 11.40 बजे हुई। पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार देर रात जब यह हादसा हुआ, तब लॉरी कैपमंगलम के पनम्बिकुन्नू में नेशनल हाईवे (NH) 66 पर खड़ी थी। इसे भी पढ़ें: Madhya Pradesh में 30 करोड़ के विवाह सहायता घोटाले में पूर्व CEO Shobhit Tripathi गिरफ्तार उन्होंने बताया कि मरने वाले आठ लोग पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के हैं और माना जा रहा है कि वे स्टूडेंट्स थे। वे शायद गुरुवायूर से कोडुंगल्लूर की ओर जा रहे थे, तभी उनकी गाड़ी लॉरी से टकरा गई। इसे भी पढ़ें: Nepal Floods Update | 'ग्लोबल वार्मिंग का जिम्मेदार नेपाल नहीं, विकसित देश दें मुआवजा', पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली का बड़ा बयान हादसे के बाद, पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पीड़ितों को बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और अधिकारियों को अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए गाड़ी को काटना पड़ा। हालांकि, उन सभी की मौत हो गई थी। बाद में, उनके शवों को त्रिशूर मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में ले जाया गया, और जल्द ही पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। अधिकारियों ने अभी तक मरने वालों की पहचान नहीं बताई है, लेकिन एक बिना कन्फर्म मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये छात्र तमिलनाडु के डिंडीगुल में PSNA इंजीनियरिंग कॉलेज के थे। पुलिस ने कहा कि जांच के बाद और जानकारी दी जाएगी। प्राइवेट बस ने कई गाड़ियों को टक्कर मारी त्रिशूर जिले में तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले महीने भी ऐसा ही एक हादसा हुआ था जब त्रिशूर जिले के कुन्नमकुलम में एक प्राइवेट बस ने कई गाड़ियों को टक्कर मार दी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। यह हादसा गुरुवार दोपहर को हुआ जब बस ने दूसरी गाड़ी को ओवरटेक करने की कोशिश की लेकिन कंट्रोल खो दिया और कई दूसरी गाड़ियों से टकरा गई। पुलिस के मुताबिक, हादसे में एक कार, एक ऑटोरिक्शा और एक टू-व्हीलर बुरी तरह डैमेज हो गए। पुलिस ने कहा था, एक व्यक्ति की मौत हो गई है, और कई अन्य घायल हो गए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर है। लोकल टीवी चैनलों ने दिखाया था कि बस एक प्राइवेट प्रॉपर्टी के अंदर रुक गई, और फिर एक कंपाउंड की दीवार और गेट से टकरा गई। बस का अगला हिस्सा बुरी तरह डैमेज हो गया था। चश्मदीदों ने दावा किया था कि बस ड्राइवर तेज़ स्पीड में बस चला रहा था। बाद में, पुलिस ने जांच शुरू की थी। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi STORY | Eight killed as car rams into parked lorry in Keralam’s Thrissur Eight people, believed to be students from neighbouring Tamil Nadu, have been killed in a tragic road accident in central Keralam's Thrissur district, police said on Saturday. READ: https://t.co/PSaeLyLfQS … pic.twitter.com/q4p095dcCY — Press Trust of India (@PTI_News) September 5, 2026 #WATCH | Keralam: Eight people killed after a car rammed into the rear of a parked goods lorry on the National Highway at Kaipamangalam in Thrissur district. The accident occurred around midnight at Panambikunnu Centre. Visuals from the spot. pic.twitter.com/751qMvvGjC — ANI (@ANI) September 5, 2026
Mekedatu Dam प्रोजेक्ट के खिलाफ Tamil Nadu में 20 सितंबर से 5 दिवसीय आंदोलन करेंगे किसान
नयी दिल्ली/चेन्नई, चार सितंबर तमिलनाडु के सभी किसान संगठनों की समन्वय समिति ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे कर्नाटक सरकार द्वारा मेकेदातु में कावेरी नदी पर बांध बनाने की कोशिश के विरोध में 20 सितंबर से पांच दिन का राज्यव्यापी अभियान चलाएंगे। किसान संगठन के अध्यक्ष पी.आर. पांडियन ने यह घोषणा गुरुग्राम में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच पांच घंटे चली विस्तृत बैठक के बाद की। पांडियन ने कर्नाटक के राजनीतिक नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वे स्थानीय विरोध के बावजूद राजनीतिक फायदे के लिए मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूमपुहार से शुरू होने वाले इस अभियान के बाद, अगर ज़रूरत पड़ी तो किसान अपनी मांगों को रखने के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय मांगेंगे। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कावेरी नदी पर प्रस्तावित बांध का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कर्नाटक द्वारा केंद्रीय जल आयोग को सौंपी गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को ‘‘धोखा’’ और कानूनी रूप से अमान्य बताया। उन्होंने कहा कि डीपीआर में तमिलनाडु, पुडुचेरी और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की जरूरी मंज़ूरी नहीं है। केंद्र सरकार से इस परियोजना के लिए कोई भी पर्यावरण या वन मंज़ूरी न देने का आग्रह करते हुए पांडियन ने चेतावनी दी कि यह बांध तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों राज्यों के किसानों के लिए नुकसानदायक होगा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के किसान भी मानते हैं कि इस बांध से उन्हें कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि यह कृष्णराजासागर बांध के नीचे की ओर घने जंगलों वाले इलाके में स्थित है। उन्होंने कहा, ‘‘पानी की कमी के समय पीने के पानी की जरूरतों के बहाने मेकेदातु में पानी जमा करने के लिए बांध बनाना मंज़ूर नहीं है और इससे खेती बर्बाद हो जाएगी।’’विकल्प के तौर पर, पांडियन ने तमिलनाडु में रासिमानल में बांध बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने दावा किया कि 2024 में हुई एक संयुक्त बैठक में दोनों राज्यों के किसान रासिमानल के स्थान पर सहमत हुए थे, और उन्होंने केंद्र सरकार से इसके निर्माण की मंज़ूरी देने का आग्रह किया। खट्टर के साथ बातचीत के दौरान, पांडियन ने केंद्र सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाला कानून बनाने और इस संबंध में एम.एस. स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने विद्युत नियामक आयोग अधिनियम को वापस लेने, स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता खत्म करने और भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने की मांग की। पांडियन ने पत्रकारों को बताया कि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि इन मुद्दों पर संबंधित विभागों के साथ चर्चा की जाएगी और इन्हें प्रधानमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा। पांडियन ने संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) द्वारा दिल्ली की ओर मार्च निकाले जाने के दौरान हरियाणा सीमा पर पंजाब के किसानों को हाल ही में हिरासत में लिए जाने की भी कड़ी निंदा की।
Tamil Nadu CM Thalapathy Vijay Temple Rule: TVK सरकार के फैसले की चर्चा जोरों पर
Tamil Nadu CM Thalapathy Vijay Temple Rule: TVK सरकार के फैसले की चर्चा जोरों पर Add Live Hindustan as your preferred source on Google.
भगोने में कौन और क्यों पका रहा था लड़की के अंग? | Tamil Nadu Express | Agra | Apradh Lok S2 EP5
भगोने में कौन और क्यों पका रहा था लड़की के अंग? | Tamil Nadu Express | Agra | Apradh Lok S2 EP5
CM Vijay Thalapathy की सरकार ने महिलाओं और किसानों के लिए किए बड़े ऐलान। Tamil Nadu Assembly
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मिलने वाले सालाना स्वास्थ्य बीमा कवर को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है
CM Thalapathy Vijay का फैसला, Vande Mataram से पहले Tamil Thai Valthu बजेगा। Tamil Nadu
CM Thalapathy Vijay का फैसला, Vande Mataram से पहले Tamil Thai Valthu बजेगा। Tamil Nadu
Tamil Nadu CM Vijay के खिलाफ Trisha को लेकर विपक्ष ने फिर कसा तंज। Udhayanidhi Stalin। AIADMK
तमिलनाडु की सियासत में अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर बयानबाजी का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। AIADMK के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए तृषा को लेकर तंज कसा, जिसके बाद उनके बयान पर विवाद शुरू हो गया। तृषा के फैन्स ने भी विरोध जताया और मदुरै में पोस्टर लगाए।
अभिनेत्री से नेता बनीं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत ने Gen Z (युवा पीढ़ी) पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर चौतरफा घिरने के बाद अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। जंतर-मंतर पर CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर विवादित बयान देने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहीं कंगना ने अब युवाओं की जमकर तारीफ की है और उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया है। ANI के अनुसार, कंगना ने इस बात को खारिज कर दिया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों का एक छोटा समूह पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। कंगना रनौत ने Gen Z पर अपना रुख बदला, उन्हें देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया। उन्होंने आगे कहा, हमारी सरकार इतने लंबे समय से Gen Z के जनादेश के कारण सत्ता में है... यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। आज, झारखंड में बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से व्यवहार कर रहे हैं। देश के कई युवा जो मेडल जीतकर लौटे हैं, उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री और देश को समर्पित किया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu CM Vijay Sanghita Divorce | विजय की पत्नी संगीता ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने मामले को किया निपटाया उन्होंने कहा, कुछ ही लोग हैं जो Gen Z की छवि खराब कर रहे हैं। Gen Z हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें अपनी पीढ़ी पर गर्व है। Gen Z पर टिप्पणी को लेकर कंगना रनौत को ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा। जानकारी के लिए बता दें कि 'तनु वेड्स मनु' की एक्ट्रेस ने हाल ही में CJP विरोध प्रदर्शन पर अपनी आपत्ति जताते हुए एक पोस्ट शेयर किया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसमें सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनकी फिल्मों में निभाए गए कुछ किरदारों के क्लिप शेयर किए। कंगना ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि लोग स्क्रीन पर उनके निभाए गए किरदारों की तुलना असल ज़िंदगी में युवाओं के व्यवहार से गलत तरीके से कर रहे थे। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच ऑनलाइन आलोचना तब शुरू हुई जब उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गंदगी, कचरा और बदसूरती का प्रदर्शन बताया था। कंगना रनौत का हालिया काम काम की बात करें तो, कंगना रनौत हाल ही में मनोज तापड़िया द्वारा निर्देशित 'भारत भाग्य विधाता' में नज़र आई थीं। यह फिल्म, जो 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी, आखिरकार अपनी OTT रिलीज़ की तारीख पा चुकी है। यह फ़िल्म 14 अगस्त, 2026 से Zee5 प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होगी। इसके बाद वह अपनी हिट फ़िल्म 'क्वीन' (जो 2014 में रिलीज़ हुई थी) के सीक्वल में नज़र आएँगी। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक के बहुचर्चित कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आया है। संगीता ने चेंगलपट्टू जिला अदालत में दाखिल अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली है। अर्जी वापस लिए जाने के बाद अदालत ने इस मामले का औपचारिक रूप से निपटारा कर दिया है। विजय और संगीता के तलाक के मामले से जुड़ी घटनाएँ संगीता ने फरवरी में तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। अपनी अर्जी में उन्होंने आरोप लगाया कि विजय का एक महिला अभिनेत्री के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (विवाह-बाहर संबंध) था, जिसके बारे में उन्हें 2021 में पता चला। अर्जी में यह भी कहा गया कि विजय के यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि वह रिश्ता खत्म कर देंगे, उन्होंने बिना किसी पछतावे के इसे जारी रखा। दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया कि विजय ने धीरे-धीरे संगीता को अपनी सामाजिक और पेशेवर ज़िंदगी से दूर कर दिया, जबकि वे उस अभिनेत्री के साथ विदेश यात्राएँ करते रहे और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। अर्जी में यह भी दावा किया गया कि इन मौकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर नियमित रूप से शेयर की जाती थीं, और विजय ने न तो उनसे इनकार किया और न ही उन पर कोई आपत्ति जताई। संगीता के अनुसार, इन पोस्ट्स की वजह से उन्हें और उनके दो बच्चों, जेसन संजय और दिव्या साशा को बार-बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने विजय पर उन्हें पहले मिलने वाली आर्थिक मदद और सुविधाओं को बंद करने और उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का भी आरोप लगाया, जिसमें उनकी घूमने-फिरने की आज़ादी पर रोक लगाना भी शामिल था। संगीता ने आगे आरोप लगाया कि विजय के लगातार व्यवहार और 2024 में सोशल मीडिया पर सामने आए विवादों के कारण उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा। उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी असल में टूट चुकी थी और सिर्फ़ कागज़ों पर ही बची थी। अपनी अर्जी में उन्होंने कहा कि रिश्ता अब सुधरने लायक नहीं रहा और इससे उन्हें मानसिक पीड़ा, अपमान, शर्मिंदगी और तकलीफ़ के अलावा कुछ नहीं मिला। तलाक की अर्जी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले दाखिल की गई थी। हालाँकि, चुनाव जीतने और मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय की पत्नी संगीता ने अर्जी वापस लेने का फ़ैसला किया। विजय और संगीता के तलाक के मामले के बारे में और जानकारी जून 2026 में, चेंगलपट्टू परिवार कल्याण अदालत ने विजय और संगीता के तलाक के मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद, अदालत ने मामले को 7 अगस्त तक के लिए टाल दिया था। सुनवाई से पहले के हफ़्तों में, ऐसी खबरें आई थीं कि शायद यह जोड़ा सुलह की ओर बढ़ रहा है। इस बात पर भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे कोर्ट में वर्चुअली पेश होंगे या खुद आएंगे। संगीता ने पारिवारिक घर में रहना जारी रखने की मांग की इस साल की शुरुआत में, संगीता ने चेंगलपट्टू की ज़िला अदालत में एक अर्ज़ी दायर की। इसमें उन्होंने चेन्नई के नीलांकरई में मौजूद अपने पारिवारिक घर में तब तक रहने की इजाज़त मांगी, जब तक कि तलाक की कार्यवाही पूरी न हो जाए। 22 फरवरी को दी गई यह अर्ज़ी, स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत दायर उनकी मुख्य तलाक की याचिका का हिस्सा थी। शादी खत्म करने की मांग के साथ-साथ, उन्होंने स्थायी गुजारा-भत्ता (एलिमनी) और नीलांकरई वाले घर में तब तक रहने का अधिकार भी मांगा, जब तक कि मामले का फैसला न हो जाए या उन्हें उसी स्तर का कोई दूसरा घर न मिल जाए। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच अपनी अर्ज़ी में संगीता ने कहा कि उनकी और विजय की शादी को 26 साल हो चुके हैं और उन्होंने अपना जीवन घर संभालने और अपने दो बच्चों - 25 साल के जेसन संजय और 20 साल की दिव्या साशा - की परवरिश में लगाया है। उन्होंने तर्क दिया कि शादी के दौरान वे विजय की जीवनशैली के हिसाब से रहीं और उनके पास ऐसा कोई दूसरा घर नहीं है जो उस जीवनशैली के स्तर का हो। याचिका में विजय की एक प्रमुख तमिल अभिनेता और भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के संस्थापक के तौर पर उनकी सार्वजनिक पहचान का भी ज़िक्र किया गया। संगीता के अनुसार, कोर्ट जाने से पहले उन्होंने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे कोशिशें नाकाम रहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजय के वकील ने उन्हें बताया कि अगर वे तलाक के लिए आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें नीलांकरई वाले घर में रहने की इजाज़त नहीं दी जाएगी, जिससे उन्हें अपना घर खोने की चिंता सताने लगी। इसे भी पढ़ें: The Odyssey India Box Office | क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' का जलवा कायम! तीसरे हफ्ते में बटोरे ₹29 करोड़, जल्द पार करेगी ₹200 करोड़ का आंकड़ा बायोमेडिकल साइंस में डिग्री रखने वालीं और यूके की नागरिक संगीता ने कहा कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए कोई उपयुक्त वैकल्पिक जगह नहीं है। इसलिए, उन्होंने एक अंतरिम आदेश की मांग की ताकि वे कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक सभी मौजूदा सुविधाओं के साथ नीलांकरई वाले घर में रह सकें। यह घर विजय के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से गहराई से जुड़ा होने के कारण भी महत्वपूर्ण है। विजय अभी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उनकी अक्सर साथ काम करने वालीं को-स्टार त्रिशा कृष्णन भावुक नज़र आईं। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi

