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Maternity Leave: Tamil Nadu

Maternity Leave:

वन इंडिया 18 Aug 2026 8:49 pm

Tamil Nadu CM Vijay और अभिनेत्री Trisha Krishnan को लेकर नया विवाद, DMK मुखपत्र Murasoli ने जो सवाल उठाये वो आपको भी सोचने पर मजबूर करेंगे

तमिलनाडु की सियासत में स्वतंत्रता दिवस का मंच इस बार राष्ट्रध्वज, विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दों से ज्यादा एक फिल्मी चेहरे और राजनीतिक तंज का अखाड़ा बन गया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के साथ अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन की मौजूदगी को लेकर डीएमके के मुखपत्र ‘मुरासोली’ ने ऐसा हमला बोला है, जिसने सत्ता और विपक्ष के बीच पहले से गर्म राजनीतिक माहौल में एक नया मसाला डाल दिया है। हम आपको बता दें कि चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान त्रिशा को पहली कतार में बैठाया गया था। वह विजय के माता-पिता एस.ए. चंद्रशेखर और शोभा चंद्रशेखर के साथ बैठी नजर आईं। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री जब आधिकारिक दायित्व निभाते हुए आगे बढ़े तो त्रिशा ने उन्हें सलामी दी और दोनों के बीच सलामी के आदान-प्रदान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बस फिर क्या था, डीएमके के राजनीतिक तीर सीधे मुख्यमंत्री की ओर चल पड़े। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu | विधानसभा में मंत्री से हुई चूक तो सामने आए मुख्यमंत्री विजय, करुणानिधि के अपमान पर खुद मांगी माफ़ी डीएमके के आधिकारिक मुखपत्र ‘मुरासोली’, जिसकी स्थापना पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने की थी, उसने सवाल उठाया कि क्या किसी आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक अभिनेत्री को इस तरह पहली पंक्ति में बैठाना और मुख्यमंत्री के साथ इस तरह सलामी का आदान-प्रदान करना उचित था। संपादकीय ने इसे लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि इस दृश्य को वे लोग भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, जिन्होंने विजय को वोट दिया था। ‘मुरासोली’ का तंज यहीं नहीं रुका। उसने सवाल किया कि आखिर ऐसी व्यवस्था को उचित ठहराने की जरूरत ही क्यों पड़ी? अखबार ने सोशल मीडिया पर कथित तौर पर चल रहे उन संदेशों का भी हवाला दिया, जिनमें लोग लिख रहे हैं, ‘हमने आपको वोट दिया था... अब हमें वोट देने का अफसोस है।’ डीएमके ने त्रिशा प्रकरण को विजय सरकार के शुरुआती तीन महीनों की कथित बेचैनी से भी जोड़ दिया। ‘मुरासोली’ ने मुख्यमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण के उस हिस्से को निशाना बनाया, जिसमें विजय ने जनता से सरकार का साथ बनाए रखने की अपील की थी। विजय ने कहा था कि सरकार का काम अभी खत्म नहीं हुआ है और जनता आगे भी सरकार के साथ बनी रहे, तभी वह उनके लिए अच्छी योजनाओं को लागू कर पाएंगे। डीएमके ने इसी अपील को पकड़कर सवाल दागा कि अगर सरकार को अपने काम पर इतना भरोसा है तो फिर जनता से इस तरह साथ बने रहने की अपील क्यों करनी पड़ रही है? हालांकि स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में विजय ने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और तमिलनाडु को रिश्वत तथा भ्रष्टाचार से बचाने को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने 376 वर्ष पुराने किले में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अवसर देने के लिए जनता का आभार भी जताया। हम आपको यह भी बता दें कि डीएमके के मुखपत्र ने विजय सरकार पर फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने को लेकर भी सवाल उठाए। संपादकीय में विजय की आखिरी फिल्म ‘जननायकन’ के निर्माता वेंकट नारायण, ‘बिगिल’ और ‘कोड’ की निर्माता अर्चना कल्पथी तथा ‘लियो’ के निर्माता जगदीश पलानीसामी जैसे नामों का उल्लेख किया गया। इसके अलावा सरकार पर मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के तरीके को लेकर भी हमला बोला गया। ‘मुरासोली’ ने एक विजय समर्थक द्वारा विधायक के खिलाफ की गई यौन शिकायत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता को ही पार्टी से बाहर कर दिया गया, जबकि संबंधित मंत्री को पुलिस सुरक्षा मिली। अखबार ने सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और अदालतों की ओर से प्रशासन की आलोचना का भी जिक्र किया। देखा जाये तो दिलचस्प बात यह है कि त्रिशा का नाम तमिलनाडु की राजनीति में पहली बार इस तरह नहीं उछला है। इसी महीने विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को त्रिशा को लेकर कथित दोहरे अर्थ वाले बयान के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उन पर अश्लील शब्दों के इस्तेमाल और महिला की गरिमा का अपमान करने समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। डीएमके ने हालांकि उस टिप्पणी को गलत ढंग से पेश किए जाने का दावा किया और कहा कि उसका संदर्भ सरकार के कामकाज से था, किसी व्यक्ति विशेष से नहीं। हम आपको बता दें कि विजय और त्रिशा की नजदीकियों को लेकर लंबे समय से सार्वजनिक अटकलें लगती रही हैं। मई में विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी त्रिशा मौजूद थीं और उस दौरान उनके भावुक होने की तस्वीरें चर्चा में आई थीं। विजय की पत्नी संगीता ने फरवरी में तलाक की याचिका दायर की थी, जिसमें मानसिक क्रूरता, भावनात्मक उपेक्षा, अलगाव और कथित विवाहेतर संबंध जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि उन्होंने इस महीने याचिका वापस ले ली। इन घटनाओं के बीच त्रिशा की सार्वजनिक मौजूदगी ने स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है। हालांकि इन निजी दावों और सार्वजनिक अटकलों को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल विजय की पार्टी टीवीके की ओर से ‘मुरासोली’ के इस तीखे हमले पर कोई जवाब सामने नहीं आया है। लेकिन संदेश साफ है कि डीएमके ने मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है और स्वतंत्रता दिवस के मंच पर हुई एक सलामी को उसने सरकार की नीयत, लोकप्रियता और राजनीतिक शैली पर सवाल उठाने का हथियार बना दिया है। बहरहाल, सियासत में प्रतीक कभी-कभी भाषण से ज्यादा बोलते हैं। इस बार एक सलामी ने वही काम किया है। अब देखना यह है कि विजय इसे महज विपक्ष का राजनीतिक प्रहार मानकर आगे बढ़ते हैं या इस विवाद का जवाब भी उसी धार से देते हैं, जिस धार से ‘मुरासोली’ ने हमला किया है।

प्रभासाक्षी 18 Aug 2026 5:01 pm

Tamil Nadu Assembly में गूंजा Karnataka Forest Dept की गोलीबारी का मुद्दा, CBI जांच की मांग

कर्नाटक वन विभाग की ओर से गोली चलाए जाने की घटना में तीन ‘‘तमिल लोगों की हत्या’’ का मुद्दा मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में गूंजा। विधानसभा सदस्यों ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए ‘‘ध्यानाकर्षण’’ प्रस्ताव पेश किया। मृतकों की पहचान एंथनी सामी, जॉन रोज पीटर और कुमार के रूप में हुई है। वे कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर तालुक के गांवों में रहते थे। आरोप है कि 15 अगस्त को तड़के कावेरी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में कर्नाटक वन विभाग के कर्मियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। घटना के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कथित तौर पर हुई इस हत्या की कड़ी निंदा की और कहा कि घटना को लेकर कर्नाटक वन विभाग की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण ‘‘स्वीकार्य नहीं है।’’मुख्यमंत्री ने रविवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि इस घटना की उच्चस्तरीय समिति से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। यह मुद्दा उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक नेता ई. के. पलानीस्वामी ने दावा किया कि पीड़ित परिवारों के अनुसार कर्नाटक वन विभाग ने कथित तौर पर तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल है और मैसूर के एक सरकारी अस्पताल में उसका इलाज हो रहा है। पलानीस्वामी ने कहा कि अधिकारियों का दावा है कि ये लोग हिरणों के अवैध शिकार में शामिल थे, लेकिन परिवारों का आरोप है कि यह एक साजिश है और मृतक निर्दोष नागरिक थे। उन्होंने मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि घटना स्थल दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को कर्नाटक सरकार द्वारा दिए गए पांच-पांच लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए तमिलनाडु सरकार से परिवारों को अतिरिक्त सहायता देने और कर्नाटक सरकार के साथ बातचीत कर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के मनोज पांडियन ने घटना को ‘‘फर्जी मुठभेड़’’ और ‘‘गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन’’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि मृतक किसान निहत्थे थे और केवल अपने मवेशियों की तलाश कर रहे थे। कांग्रेस सदस्य तराहई कथबर्ट ने भी घटना की कड़ी निंदा की और कर्नाटक सरकार द्वारा दिए गए मुआवजे को अपर्याप्त बताया। उन्होंने सीबीआई जांच और पीड़ित परिवारों को सहायता देने की मांग की। इसके जवाब में ऊर्जा, संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मौत की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश पहले ही दे दिए हैं और प्रभावित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की अंतरिम राहत देने की घोषणा की है। मंत्री ने कहा, ‘‘तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने घटना की कड़ी निंदा की है और उच्चस्तरीय समिति से निष्पक्ष जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री ने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि कर्नाटक सरकार की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण स्वीकार्य नहीं है।

प्रभासाक्षी 18 Aug 2026 12:01 pm

Tamil Nadu | विधानसभा में मंत्री से हुई चूक तो सामने आए मुख्यमंत्री विजय, करुणानिधि के अपमान पर खुद मांगी माफ़ी

तमिलनाडु की राजनीति और विधानसभा में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी सरकार के एक मंत्री की ओर से सदन के पटल पर सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी। मामला राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ राजनीति के दिग्गज दिवंगत एम. करुणानिधि का नाम बिना किसी औपचारिक या सम्मानजनक उपाधि के सीधे तौर पर पुकारे जाने से जुड़ा था, जिस पर मुख्य विपक्षी दल DMK ने कड़ा ऐतराज जताया था। इसे भी पढ़ें: Delhi Police ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन में अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को नकारा, 30,000 की भीड़ और हिंसा का दिया हवाला विजय ने तुरंत सदन को शांत कराया और कहा कि दिवंगत नेता को जिस तरह से संबोधित किया गया, वह गलत था। वन मंत्री आर.वी. रंजीत कुमार द्वारा कलैगनार या पूर्व मुख्यमंत्री जैसे शब्दों का इस्तेमाल किए बिना करुणानिधि का नाम लेने के बाद, 52 वर्षीय अभिनेता-राजनेता विजय ने कहा, मैं उनकी ओर से माफ़ी मांगता हूं। इसे भी पढ़ें: Bhind Road Accident | मध्य प्रदेश के भिंड में दर्दनाक सड़क हादसा! पिक-अप और ट्रक की टक्कर में UP के 8 मजदूरों की मौत, 30 से अधिक घायल यह मुद्दा स्वास्थ्य और राजस्व विभागों के लिए अनुदान की मांगों पर बहस के दौरान उठा। अपने भाषण में, रंजीत कुमार ने पहले वोट के बदले पैसे देने की प्रथाओं की आलोचना की, विवादित तिरुमंगलम फ़ॉर्मूले का ज़िक्र किया और दावा किया कि पिछले चुनावों में उनके कांचीपुरम निर्वाचन क्षेत्र में प्रति वोट 1,500 रुपये तक बांटे गए थे। उन चुनावों की तुलना मौजूदा प्रशासन से करते हुए, मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार वोट के लिए पैसे बांटे बिना सत्ता में आई है। हालांकि, अतीत की चुनावी चालों का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने DMK के वरिष्ठ नेता को सिर्फ़ करुणानिधि कहकर संबोधित किया। यह तमिलनाडु विधानसभा की लंबे समय से चली आ रही परंपरा के खिलाफ़ था, जहां सम्मानित नेताओं को औपचारिक प्रोटोकॉल उपाधियों के साथ संबोधित किया जाता है। इस बात पर पूर्व मंत्री के.के.एस.एस.आर. रामचंद्रन के नेतृत्व में DMK सदस्यों ने ज़ोरदार विरोध किया। तनाव बढ़ने पर, विजय ने मंत्री को भाषण के बीच में ही रोक दिया और माना कि करुणानिधि का इस तरह से ज़िक्र करना अनुचित था। उनके माफ़ी मांगने से तुरंत हो रहा हंगामा शांत हुआ और बहस फिर से पटरी पर आ गई।

प्रभासाक्षी 18 Aug 2026 11:23 am

जंगल में मुठभेड़ या कुछ और?: CM विजय के सवालों से घिरे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार; तमिलनाडु-कर्नाटक आमने-सामने

जंगल में मुठभेड़ या कुछ और?: CM विजय के सवालों से घिरे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार; तमिलनाडु-कर्नाटक आमने-सामने- CM Vijay questions regarding encounter Tamil Nadu poachers Karnataka forests CM Shivakumar gice clarification

अमर उजाला 17 Aug 2026 9:06 am

Supreme Court सोमवार को Cauvery water विवाद में तमिलनाडु की याचिका पर करेगा सुनवाई

उच्चतम न्यायालय तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा, जिसमें कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी नदी का जल तत्काल छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। उच्चतम न्यायालय की 17 अगस्त की वाद सूची के अनुसार, मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ करेगी। शीर्ष अदालत ने 12 अगस्त को कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु सरकार और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सहित अन्य पक्षों की ओर से दायर याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई की जाएगी। इसे भी पढ़ें: Political Conspiracy के खिलाफ ढाल बनेगी TVK Government: CM Vijay बोले- सोशल जस्टिस और ईमानदारी ही हमारी ताकत इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने कहा था कि बारिश की कमी वाले साल में राज्य को कावेरी नदी के पानी का अपना उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। जोसफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने तीन अगस्त को उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु के हिस्से का पानी तत्काल छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। राज्य सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) द्वारा तमिलनाडु के लिए निर्धारित जल की मात्रा और पड़ोसी राज्य कर्नाटक द्वारा छोड़ा गया पानी, दोनों ही तय हिस्से से काफी कम हैं। तमिलनाडु सरकार ने कहा कि 28 जुलाई को सीडब्ल्यूआरसी की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिन तक 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। उसने कहा कि हालांकि, 29 जुलाई से दो अगस्त के बीच बिलिगुंडलु में छोड़े गए पानी की मात्रा 158 से 550 क्यूसेक के बीच रही। तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि तीन अगस्त तक कर्नाटक में केआरएस, काबिनी, हरंगी और हेमावती जलाशयों में कुल मिलाकर 77.537 टीएमसी पानी उपलब्ध था। इसे भी पढ़ें: कावेरी जल विवाद पर Karnataka बंद के बीच प्रदर्शनकारियों ने Tamil Nadu के ट्रक ड्राइवरों को दिए गुलाब उसने कहा कि ऐसे में कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का पानी अनुपात के आधार पर छोड़ने में कोई कठिनाई नहीं होगी। इसमें कहा गया कि कर्नाटक में हाल में केआरएस और काबिनी बांधों के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद, बिलिगुंडलु में छोड़े जाने वाले पानी का अनुपातिक हिस्सा 26.954 टीएमसी होना चाहिए।

प्रभासाक्षी 16 Aug 2026 4:49 pm

Tamil Nadu CM Vijay के खिलाफ Trisha को लेकर विपक्ष ने फिर कसा तंज। Udhayanidhi Stalin। AIADMK

तमिलनाडु की सियासत में अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर बयानबाजी का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। AIADMK के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए तृषा को लेकर तंज कसा, जिसके बाद उनके बयान पर विवाद शुरू हो गया। तृषा के फैन्स ने भी विरोध जताया और मदुरै में पोस्टर लगाए।

लाइव हिन्दुस्तान 12 Aug 2026 1:24 pm

CJP Protest Remarks Controversy | आलोचना के बाद बदले कंगना रनौत के सुर, Gen Z को बताया 'देश की सबसे बड़ी ताकत'

अभिनेत्री से नेता बनीं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत ने Gen Z (युवा पीढ़ी) पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर चौतरफा घिरने के बाद अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। जंतर-मंतर पर CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर विवादित बयान देने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहीं कंगना ने अब युवाओं की जमकर तारीफ की है और उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया है। ANI के अनुसार, कंगना ने इस बात को खारिज कर दिया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों का एक छोटा समूह पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। कंगना रनौत ने Gen Z पर अपना रुख बदला, उन्हें देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया। उन्होंने आगे कहा, हमारी सरकार इतने लंबे समय से Gen Z के जनादेश के कारण सत्ता में है... यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। आज, झारखंड में बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से व्यवहार कर रहे हैं। देश के कई युवा जो मेडल जीतकर लौटे हैं, उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री और देश को समर्पित किया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu CM Vijay Sanghita Divorce | विजय की पत्नी संगीता ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने मामले को किया निपटाया उन्होंने कहा, कुछ ही लोग हैं जो Gen Z की छवि खराब कर रहे हैं। Gen Z हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें अपनी पीढ़ी पर गर्व है। Gen Z पर टिप्पणी को लेकर कंगना रनौत को ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा। जानकारी के लिए बता दें कि 'तनु वेड्स मनु' की एक्ट्रेस ने हाल ही में CJP विरोध प्रदर्शन पर अपनी आपत्ति जताते हुए एक पोस्ट शेयर किया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसमें सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनकी फिल्मों में निभाए गए कुछ किरदारों के क्लिप शेयर किए। कंगना ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि लोग स्क्रीन पर उनके निभाए गए किरदारों की तुलना असल ज़िंदगी में युवाओं के व्यवहार से गलत तरीके से कर रहे थे। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच ऑनलाइन आलोचना तब शुरू हुई जब उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गंदगी, कचरा और बदसूरती का प्रदर्शन बताया था। कंगना रनौत का हालिया काम काम की बात करें तो, कंगना रनौत हाल ही में मनोज तापड़िया द्वारा निर्देशित 'भारत भाग्य विधाता' में नज़र आई थीं। यह फिल्म, जो 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी, आखिरकार अपनी OTT रिलीज़ की तारीख पा चुकी है। यह फ़िल्म 14 अगस्त, 2026 से Zee5 प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होगी। इसके बाद वह अपनी हिट फ़िल्म 'क्वीन' (जो 2014 में रिलीज़ हुई थी) के सीक्वल में नज़र आएँगी। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 8 Aug 2026 9:42 am

Tamil Nadu CM Vijay Sanghita Divorce | विजय की पत्नी संगीता ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने मामले को किया निपटाया

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक के बहुचर्चित कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आया है। संगीता ने चेंगलपट्टू जिला अदालत में दाखिल अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली है। अर्जी वापस लिए जाने के बाद अदालत ने इस मामले का औपचारिक रूप से निपटारा कर दिया है। विजय और संगीता के तलाक के मामले से जुड़ी घटनाएँ संगीता ने फरवरी में तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। अपनी अर्जी में उन्होंने आरोप लगाया कि विजय का एक महिला अभिनेत्री के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (विवाह-बाहर संबंध) था, जिसके बारे में उन्हें 2021 में पता चला। अर्जी में यह भी कहा गया कि विजय के यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि वह रिश्ता खत्म कर देंगे, उन्होंने बिना किसी पछतावे के इसे जारी रखा। दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया कि विजय ने धीरे-धीरे संगीता को अपनी सामाजिक और पेशेवर ज़िंदगी से दूर कर दिया, जबकि वे उस अभिनेत्री के साथ विदेश यात्राएँ करते रहे और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। अर्जी में यह भी दावा किया गया कि इन मौकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर नियमित रूप से शेयर की जाती थीं, और विजय ने न तो उनसे इनकार किया और न ही उन पर कोई आपत्ति जताई। संगीता के अनुसार, इन पोस्ट्स की वजह से उन्हें और उनके दो बच्चों, जेसन संजय और दिव्या साशा को बार-बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने विजय पर उन्हें पहले मिलने वाली आर्थिक मदद और सुविधाओं को बंद करने और उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का भी आरोप लगाया, जिसमें उनकी घूमने-फिरने की आज़ादी पर रोक लगाना भी शामिल था। संगीता ने आगे आरोप लगाया कि विजय के लगातार व्यवहार और 2024 में सोशल मीडिया पर सामने आए विवादों के कारण उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा। उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी असल में टूट चुकी थी और सिर्फ़ कागज़ों पर ही बची थी। अपनी अर्जी में उन्होंने कहा कि रिश्ता अब सुधरने लायक नहीं रहा और इससे उन्हें मानसिक पीड़ा, अपमान, शर्मिंदगी और तकलीफ़ के अलावा कुछ नहीं मिला। तलाक की अर्जी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले दाखिल की गई थी। हालाँकि, चुनाव जीतने और मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय की पत्नी संगीता ने अर्जी वापस लेने का फ़ैसला किया। विजय और संगीता के तलाक के मामले के बारे में और जानकारी जून 2026 में, चेंगलपट्टू परिवार कल्याण अदालत ने विजय और संगीता के तलाक के मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद, अदालत ने मामले को 7 अगस्त तक के लिए टाल दिया था। सुनवाई से पहले के हफ़्तों में, ऐसी खबरें आई थीं कि शायद यह जोड़ा सुलह की ओर बढ़ रहा है। इस बात पर भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे कोर्ट में वर्चुअली पेश होंगे या खुद आएंगे। संगीता ने पारिवारिक घर में रहना जारी रखने की मांग की इस साल की शुरुआत में, संगीता ने चेंगलपट्टू की ज़िला अदालत में एक अर्ज़ी दायर की। इसमें उन्होंने चेन्नई के नीलांकरई में मौजूद अपने पारिवारिक घर में तब तक रहने की इजाज़त मांगी, जब तक कि तलाक की कार्यवाही पूरी न हो जाए। 22 फरवरी को दी गई यह अर्ज़ी, स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत दायर उनकी मुख्य तलाक की याचिका का हिस्सा थी। शादी खत्म करने की मांग के साथ-साथ, उन्होंने स्थायी गुजारा-भत्ता (एलिमनी) और नीलांकरई वाले घर में तब तक रहने का अधिकार भी मांगा, जब तक कि मामले का फैसला न हो जाए या उन्हें उसी स्तर का कोई दूसरा घर न मिल जाए। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच अपनी अर्ज़ी में संगीता ने कहा कि उनकी और विजय की शादी को 26 साल हो चुके हैं और उन्होंने अपना जीवन घर संभालने और अपने दो बच्चों - 25 साल के जेसन संजय और 20 साल की दिव्या साशा - की परवरिश में लगाया है। उन्होंने तर्क दिया कि शादी के दौरान वे विजय की जीवनशैली के हिसाब से रहीं और उनके पास ऐसा कोई दूसरा घर नहीं है जो उस जीवनशैली के स्तर का हो। याचिका में विजय की एक प्रमुख तमिल अभिनेता और भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के संस्थापक के तौर पर उनकी सार्वजनिक पहचान का भी ज़िक्र किया गया। संगीता के अनुसार, कोर्ट जाने से पहले उन्होंने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे कोशिशें नाकाम रहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजय के वकील ने उन्हें बताया कि अगर वे तलाक के लिए आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें नीलांकरई वाले घर में रहने की इजाज़त नहीं दी जाएगी, जिससे उन्हें अपना घर खोने की चिंता सताने लगी। इसे भी पढ़ें: The Odyssey India Box Office | क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' का जलवा कायम! तीसरे हफ्ते में बटोरे ₹29 करोड़, जल्द पार करेगी ₹200 करोड़ का आंकड़ा बायोमेडिकल साइंस में डिग्री रखने वालीं और यूके की नागरिक संगीता ने कहा कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए कोई उपयुक्त वैकल्पिक जगह नहीं है। इसलिए, उन्होंने एक अंतरिम आदेश की मांग की ताकि वे कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक सभी मौजूदा सुविधाओं के साथ नीलांकरई वाले घर में रह सकें। यह घर विजय के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से गहराई से जुड़ा होने के कारण भी महत्वपूर्ण है। विजय अभी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उनकी अक्सर साथ काम करने वालीं को-स्टार त्रिशा कृष्णन भावुक नज़र आईं। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 7 Aug 2026 4:28 pm