Cauvery Dispute: Tamil Nadu को पानी देने के निर्देश के खिलाफ Supreme Court जाएगी कर्नाटक सरकार
बेंगलुरु, आठ सितंबर कर्नाटक सरकार कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के एक निर्देश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिसमें तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया है। कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चलुवरायस्वामी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कावेरी जल विनियमन समिति के उक्त आदेश को बेतुका बताया और इस पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में कावेरी नदी घाटी में पानी की आवक काफी कम हो गई है, जिससे कर्नाटक मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा है। कावेरी जल विनियमन समिति ने मंगलवार को सिफारिश की कि कर्नाटक 15 दिन तक तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करे। इसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इस निर्देश को मंजूरी दे दी। कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देशों के बाद और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक से पहले चलुवरायस्वामी ने पत्रकारों से कहा, हमारे अधिकारियों ने समिति की बैठक में जमीनी स्थिति के बारे में मजबूती से अपनी बात रखी। तमिलनाडु ने 17,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी। लेकिन पिछले एक सप्ताह में कावेरी बेसिन में पानी की आवक काफी कम हो गई है। ऐसी संकट की स्थिति में हमारे लिए 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ना भी संभव नहीं है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं कि बिल्कुल पानी न छोड़ा जाए। मंत्री ने दिल्ली से फैसले लेने वाली इन संस्थाओं के काम करने के तरीके की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं जमीनी स्थिति को समझने में सक्षम नहीं हैं। चलुवरायस्वामी ने कहा कि सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय जाने का फैसला करने से पहले सरकार मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। उन्होंने कहा, ...हम मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। सरकार उच्चतम न्यायालय में कल ही याचिका दायर करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
Tamil Nadu के मुख्यमंत्री Joseph Vijay बोले- विधानसभा में जबड़े पर हाथ रखना अनजाने में हुआ
चेन्नई, आठ सितंबर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा में अपने जबड़े को छूने का उनका हाव-भाव जानबूझकर नहीं किया गया था और पूरी तरह अनजाने में हुआ। विजय ने सात सितंबर की विधानसभा की अपनी भाव-भंगिमा का जिक्र करते हुए कहा, “मेरी शारीरिक हाव-भाव की वह प्रतिक्रिया अनायास हुई थी। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि वह किसी भी तरह जानबूझकर नहीं की गई थी।”सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा, इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि इसे किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कृत्य के रूप में न देखा जाए। विजय का एक हाथ से जबड़े को पकड़ने का हावभाव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया था। कुछ लोगों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का मजाक उड़ा रहे थे, क्योंकि आपातकाल (1975-77) के दौरान हिरासत में रहने के दौरान स्टालिन के जबड़े में फ्रैक्चर हो गया था। इस मुद्दे पर माकपा के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने कहा कि आपातकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन को पुलिस ने बुरी तरह पीटा था और उनका जबड़ा टूट गया था। षणमुगम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, ‘‘बॉडी शेमिंग कोई भी करे, वह निंदनीय है। खुद मुख्यमंत्री का ऐसा करना गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है।’’माकपा नेता ने कहा कि विधानसभा को व्यक्तिगत हमलों के मंच में बदलना, जिसका जनकल्याण से कोई लेना-देना नहीं है या इसे केवल अपने नेता की प्रशंसा करने का मंच बना देना पूरी तरह अनैतिक कृत्य है। माकपा उन दलों में शामिल है जो टीवीके सरकार का समर्थन करते हैं और यह सरकार कांग्रेस, वाम दलों, आईयूएमएल और वीसीके के समर्थन पर टिकी है। विजय ने यह हाव-भाव उस समय किया था, जब वह 1970 के दशक की सरकरिया आयोग की रिपोर्ट और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर मुख्य विपक्षी दल द्रमुक पर कथित भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साध रहे थे। इस दौरान उन्होंने हाथ से अपना जबड़ा ऊपर उठाने और सिर को थोड़ा एक ओर झुकाने जैसा हाव-भाव किया था। इस पृष्ठभूमि में विजय ने स्पष्ट किया कि उनका यह हाव-भाव पूरी तरह अनजाने में हुआ था। पिछले कुछ वर्षों में अन्नाद्रमुक के कुछ नेताओं और समर्थकों ने दावा किया था कि आपातकाल के दौरान स्टालिन को मीसा (आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम) के तहत जेल नहीं भेजा गया था। हालांकि, उन्होंने स्टालिन के जेल जाने से इनकार नहीं किया था। स्टालिन ने 2019 में यह भी कहा था कि उनसे यह साबित करने के लिए कहा जाना कि उन्हें मीसा के तहत गिरफ्तार किया गया था, अपमानजनक था। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर चर्चा करना अनुचित है। अपनी आत्मकथा ‘उंगलिल ओरुवन’ (आप में से एक) में स्टालिन ने 1976 में अपनी गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए समय का उल्लेख किया है। उन्होंने संक्षेप में यह भी बताया है कि जेल को एक यातना कक्ष में बदल दिया गया था, जहां मौत की आवाजें गूंजती थीं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने मंगलवार को विधानसभा में किए गए अपने उस वायरल इशारे पर सफाई दी, जिसे DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन के टूटे हुए जबड़े का मज़ाक उड़ाने के तौर पर देखा गया था। उन्होंने कहा कि यह इशारा अचानक हुआ था और इसका मकसद किसी को दुख पहुँचाना नहीं था। विधानसभा में विपक्षी पार्टी के ख़िलाफ़ एक तीखे भाषण के दौरान, विजय ने अपने जबड़े को छूने वाला जो इशारा किया था, उसके लिए उनकी आलोचना हुई। इस इशारे को स्टालिन के शारीरिक रूप-रंग का मज़ाक उड़ाने के तौर पर देखा गया था। मुख्यमंत्री पर DMK प्रमुख का बॉडी-शेमिंग का आरोप लगा था। इसे भी पढ़ें: महिपाल ढांडा को ‘जाट समाज पर कलंक’ बताना ओछी और संकीर्ण राजनीति: शमशेर खरक विजय ने X पर लिखा कि मैं यह साफ़ करना चाहता हूँ कि 7 सितंबर 2026 को विधानसभा में पुलिस विभाग के लिए अनुदान की माँगों पर जवाब देते समय अनजाने में जो बॉडी लैंग्वेज दिखी, वह पूरी तरह से स्वाभाविक थी और उसका कोई छिपा हुआ मकसद नहीं था। इसलिए, मैं ईमानदारी से अनुरोध करता हूँ कि इसे किसी को व्यक्तिगत रूप से चोट पहुँचाने या नाराज़ करने की कोशिश के तौर पर न देखा जाए। यह बात तब सामने आई जब CPI(M) नेता पी. शनमुगम ने स्टालिन के बॉडी शेमिंग (शारीरिक बनावट का मज़ाक उड़ाने) के लिए विजय की आलोचना की और कहा कि विधानसभा को व्यक्तिगत हमलों का मंच नहीं बनना चाहिए। शनमुगम ने इमरजेंसी के दौर को याद किया, जब लोकतंत्र के बचाव में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और उसके बाद दमन और ज्यादतियां हुई थीं। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान स्टालिन पर हुए हमले का भी ज़िक्र किया, जब उन्हें 'मेंटेनेंस ऑफ़ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट' (MISA) के तहत हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा कि किसी के शारीरिक रूप-रंग का मज़ाक उड़ाना निंदनीय है, चाहे कोई भी ऐसा करे; खुद मुख्यमंत्री का ऐसा करना गैर-ज़िम्मेदाराना हरकत है। इसे भी पढ़ें: Rajasthan civic polls में गरमाई सियासत, BJP ने 41 बागी नेताओं को दिखाया बाहर का रास्ता विजय ने ED के एक दस्तावेज़ और दशकों पुरानी सरकारिया कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पिछली DMK सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए। विजय ने कहा कि सरकारिया कमीशन की रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि पर अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था। 1976 की जस्टिस सरकारिया कमीशन रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए, विजय ने दावा किया कि उसमें सरकारी कॉन्ट्रैक्ट देने के बदले पार्टी फंड की मांग करने के मामले दर्ज थे और तर्क दिया कि आज के समय में भी वैसी ही हरकतें हो रही हैं। उदयनिधि ने आरोपों का जवाब देने की अनुमति मांगी, लेकिन सदन में हंगामे के कारण स्पीकर ने तुरंत जवाब देने की इजाजत नहीं दी। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Tamil Nadu की 2 सीटों पर By-election 6 अक्टूबर को, TVK सरकार की पहली परीक्षा
चेन्नई, आठ सितंबर तमिलनाडु की दो विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव महज तीन महीने पहले राज्य के मुख्यमंत्री बने सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के लिए पहली महत्वपूर्ण चुनावी परीक्षा होगी। यह उपचुनाव मदुरंतकम और धारापुरम सीटों पर होगा। इस कड़े चुनावी मुकाबले में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या टीवीके अन्नाद्रमुक के उन पूर्व विधायकों को टिकट देगी जो अप्रैल में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद पद से इस्तीफा देकर तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए थे या फिर वह अपने किसी पुराने उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी। अन्नाद्रमुक के पूर्व विधायकों मरगथम कुमारवेल और पी सत्यभामा के क्रमश: मदुरंतकम और धारापुरम सीटों से इस्तीफा देने के बाद ये दोनों विधानसभा सीटें खाली हो गई थीं, जिसके बाद भारत निर्वाचन आयोग ने इन पर उपचुनाव कराने की घोषणा की है। दोनों ने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) छोड़ने के अपने फैसले की घोषणा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष जे सी डी प्रभाकर को अपना इस्तीफा सौंपने वाले दिन ही तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) पार्टी की सदस्यता ले ली थी। राज्य में उपचुनावों में सत्तारूढ़ दलों को बढ़त मिलने की परंपरा रही है लेकिन टीवीके के चुनाव प्रचार में उतरने के साथ ही उसे गठबंधन के भीतर मतभेद, आक्रामक विपक्ष और अहम विधायी समीकरणों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मई 2026 में विधानसभा चुनाव के बाद साधारण बहुमत से पीछे रहने के कारण टीवीके ने कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और वाम दलों के समर्थन से सरकार बनाई। अन्नाद्रमुक के 22 बागी विधायकों द्वारा की गई क्रॉस-वोटिंग की बदौलत विजय सरकार को कुल 144 विधायकों का समर्थन मिला जिसकी वजह से वह सदन में बहुमत साबित कर पाई। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके पास 107 सीट हैं और वह 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े के लिए बाहरी समर्थन पर निर्भर है। वहीं, अन्नाद्रमुक के लिए यह मुकाबला बेहद निजी होने की संभावना है, क्योंकि वह अपने सदस्यों के दलबदल के कारण खोई हुई सीटों पर फिर से कब्जा करने की कोशिश में है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, नौ से 16 सितंबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर को होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 19 सितंबर है। इन सीटों पर छह अक्टूबर को उपचुनाव होगा और नौ अक्टूबर को मतगणना की जाएगी।
Tamil Nadu FIR against former minister KN Nehru ₹1,020 crore scam; accused extortion name of party funds.
तमिलनाडु विधानसभा में मीसा पर महाभारत: स्पीकर के चेंबर के सामने बैठे डीएमके विधायक, मार्शल ने जबरन उठाया- Opposition uproar over MISA in Tamil Nadu Assembly DMK MLAs sat outside Speaker chamber were forcibly removed
Kaushambi News: तमिलनाडु से पटाखा लाकर नौशाद के जरिये कौशाम्बी में खपाता था शोएब
Shoaib used to source firecrackers from Tamil Nadu and sell them in Kaushambi through Naushad.
CM Vijay का DMK पर निशाना, कहा – ED Report में है Karur Gang के भ्रष्टाचार का सबूत
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सोमवार को DMK पर आरोप लगाया कि वे पार्टी फंड के नाम पर सरकारी ठेकेदारों से रिश्वत वसूलते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों को अपने कॉन्ट्रैक्ट की कीमत का एक हिस्सा किश्तों में देना पड़ता था, ठीक वैसे ही जैसे लोन की EMI चुकाई जाती है। विधानसभा में तीखा हमला करते हुए, विजय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक दस्तावेज का हवाला दिया और आरोप लगाया कि पिछली DMK सरकार के दौरान ठेकेदारों को कॉन्ट्रैक्ट की कीमत का 10 प्रतिशत तक पार्टी फंड के तौर पर देना पड़ता था। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Assembly में भारी हंगामा! कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के तेवरों के बीच बोले CM विजय- 'पुलिस को पावर सेंटर नहीं, रक्षक बनना चाहिए' विजय ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली शराब कंपनी 'टासमैक' (Tasmac) में कथित भ्रष्टाचार के मामले में ED द्वारा करूर गैंग का ज़िक्र किए जाने का भी हवाला दिया और कहा कि गैर-कानूनी काम भी सुनियोजित तरीके से किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि DMK सरकार के दौरान यह वैज्ञानिक भ्रष्टाचार जैसा था। भ्रष्टाचार के आरोपों को साबित करने के लिए विपक्ष की बार-बार सबूत मांगने की मांग पर कड़ा जवाब देते हुए विजय ने कहा कि ED के दस्तावेज़ में ही वे सबूत मौजूद हैं, जिनकी विपक्ष मांग कर रहा था। विजय ने कहा कि ED के दस्तावेज़ में कहा गया है कि पार्टी फंड के तौर पर 7.5% से 10% तक की रकम वसूली गई। यानी, उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट की दरों के हिस्से के तौर पर यह प्रतिशत मांगा और वसूला। इसमें यह भी कहा गया है कि यह रकम पार्टी फंड के नाम पर रिश्वत के तौर पर वसूली गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पैसा म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन एंड वॉटर सप्लाई (MAWS) डिपार्टमेंट के तहत काम करने वाले कॉन्ट्रैक्टरों से वसूला गया था। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu में पुलिसकर्मियों का कार्यभार घटाने और Welfare Schemes को सरकार देगी प्राथमिकता विजय ने ED के दस्तावेज़ से पढ़ते हुए कहा कि सरकारी कामों के लिए MAWS विभाग के ठेकेदारों से पार्टी फंड के तौर पर रिश्वत वसूली गई थी। विजय ने दस्तावेज का हवाला देते हुए आगे कहा, पार्टी फंड के तौर पर ली गई यह रिश्वत सत्ताधारी पार्टी के फायदे के लिए वसूली गई थी, जो तमिलनाडु सरकार चला रही है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 7 सितंबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और पहाड़ी राज्यों समेत देश के बड़े हिस्से में बारिश, आंधी-तूफान और बिजली कड़कने की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने बारिश के दौरान मैदानी इलाकों में जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (landslides) और अचानक बाढ़ (flash floods) की आशंका जताई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से मैदानी इलाकों में भी समस्याएँ हो सकती हैं। दिल्ली के मौसम का हाल: बारिश और तेज़ हवाओं की संभावना 7 सितंबर को दिल्ली में मौसम सुहावना और थोड़ा परेशानी भरा भी हो सकता है। राजधानी के कई हिस्सों में आंधी-तूफान के साथ मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ़्तार 50 किमी/घंटा तक पहुँच सकती है, जिससे कुछ इलाकों में ट्रैफ़िक और बाहरी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Assembly में भारी हंगामा! कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के तेवरों के बीच बोले CM विजय- 'पुलिस को पावर सेंटर नहीं, रक्षक बनना चाहिए' UP और बिहार में बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट उत्तर प्रदेश में अगले दो दिनों तक मौसम का असर बने रहने की उम्मीद है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 7 सितंबर को बारिश हो सकती है, जबकि राज्य के पूर्वी हिस्सों में 7 और 8 सितंबर को बारिश होने की संभावना है। कई इलाकों में आंधी-तूफान, तेज़ हवाएँ और बिजली गिरने की भी आशंका है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे आंधी-तूफान के दौरान सावधानी बरतें और अकेले खड़े पेड़ों के नीचे शरण लेने या खुली जगहों पर रहने से बचें। बिहार में भी 7 सितंबर को कई जगहों पर बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे बिजली कड़कने और तेज़ हवाओं के दौरान घर के अंदर ही रहें। पहाड़ी राज्यों में बारिश से मुश्किलें बढ़ सकती हैं उत्तराखंड में 7 सितंबर को बारिश होने की संभावना है, साथ ही 10 से 12 सितंबर के बीच बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने का एक और दौर हो सकता है। पहाड़ी राज्य में भारी बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है और पहाड़ी सड़कों पर ट्रैफ़िक बाधित हो सकता है। संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ (flash floods) का भी खतरा है। हिमाचल प्रदेश में भी 7 सितंबर को बारिश होने की उम्मीद है। मध्य भारत में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा मध्य प्रदेश पर सक्रिय मौसम प्रणाली का असर बने रहने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 7 सितंबर को बारिश हो सकती है, जबकि राज्य के पूर्वी हिस्सों में 7 और 8 सितंबर के साथ-साथ 11 और 12 सितंबर को भी बारिश होने की संभावना है। छत्तीसगढ़ में 8 से 12 सितंबर के बीच कई इलाकों में आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के साथ बारिश हो सकती है। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Secret Airbase बनाने में तेजी से जुटा है China, सैटेलाइट तस्वीरों ने Lop Nur में बन रहे खतरनाक मिलिट्री टेस्ट बेस का किया खुलासा गुजरात से गोवा तक बारिश की संभावना पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में भी बारिश होने की उम्मीद है। कोंकण और गोवा में 7 से 12 सितंबर के बीच कई जगहों पर बारिश हो सकती है। इसी दौरान गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी अलग-अलग जगहों पर बारिश होने की संभावना है। पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा पर IMD की नज़र मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में उत्तरी ओडिशा और झारखंड होते हुए पश्चिम बंगाल की ओर कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इस सिस्टम से पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है। पश्चिम बंगाल में 7 से 10 सितंबर के बीच बारिश होने की संभावना है। झारखंड में 8 से 11 सितंबर तक बारिश हो सकती है, जबकि ओडिशा में 10 से 12 सितंबर के बीच बारिश की उम्मीद है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 7 से 12 सितंबर के बीच बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में 7 और 8 सितंबर के साथ-साथ 11 और 12 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर भारत में बारिश जारी रहेगी पूर्वोत्तर में भी बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है। अरुणाचल प्रदेश में 7 से 12 सितंबर के बीच कई जगहों पर बारिश हो सकती है। इस दौरान नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी व्यापक बारिश होने की संभावना है। असम और मेघालय में 9 और 10 सितंबर को कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। दक्षिणी राज्यों में मानसून सक्रिय रहेगा 7 से 12 सितंबर के बीच कई दक्षिणी राज्य भी बारिश से प्रभावित हो सकते हैं। इस दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के अलग-अलग इलाकों में बारिश होने की उम्मीद है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 7 से 10 सितंबर के बीच आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना है। वहीं, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 11 और 12 सितंबर को कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है।
तमिलनाडु विधानसभा का सत्र सोमवार को हंगामेदार मोड़ के साथ शुरू हुआ। विपक्षी दल DMK के विधायकों ने राज्य में हाल ही में हुई हत्याओं और कथित तौर पर बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर जोरदार नारेबाजी की और तुरंत चर्चा की मांग की। सदन में हंगामे के बीच मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी सरकार के रुख का बचाव करते हुए पुलिसिंग व्यवस्था पर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग को जनता का रक्षक बनना चाहिए, न कि कोई स्वतंत्र 'पावर सेंटर' (सत्ता का केंद्र)। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि सत्ता का केंद्र बनना चाहिए। विजय ने ज़ोर देकर कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो। तमिलनाडु पुलिस के लिए CM विजय का संदेश विधानसभा को संबोधित करते हुए, विजय ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस विभाग की भूमिका पर ज़ोर दिया। CM विजय ने कहा, मैं इस सदन में एक महत्वपूर्ण बात रखना चाहता हूँ - जहाँ तक पुलिस विभाग का सवाल है, उसे अच्छे लोगों का दोस्त और बुरे लोगों का दुश्मन होना चाहिए। कानून सभी के लिए समान है। जो कोई भी अपराध करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पार्टी का हो। यही हमारी नीति है। मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को एक स्वतंत्र सत्ता केंद्र बनने देने के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि इसकी मुख्य ज़िम्मेदारी लोगों की सुरक्षा करना और जनता का भरोसा बनाए रखना होनी चाहिए। अपराध अचानक नहीं हुए: विजय पिछले तीन महीनों में हुई अपराधों की घटनाओं पर बात करते हुए, विजय ने कहा कि इन घटनाओं को एक ही बार में हुई अचानक घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इनमें से कई घटनाओं के पीछे पुरानी रंजिश और बदले की भावना जैसे कारणों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, पुलिस को सत्ता का केंद्र नहीं बनना चाहिए; उन्हें लोगों का रक्षक होना चाहिए। पिछले तीन महीनों में हुए अपराध अचानक नहीं हुए। ये सभी पुरानी दुश्मनी और बदले की भावना के कारण हुए। मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी आरोप लगाया कि वे सत्ताधारी सरकार को निशाना बनाने के लिए ऐसी घटनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अपराधों के कई अंतर्निहित कारण होते हैं। तमिलनाडु सरकार के लिए ड्रग्स की समस्या एक बड़ा मुद्दा विजय ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में ड्रग्स की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे एक प्राथमिकता वाला मुद्दा बताया, खासकर युवाओं के संदर्भ में। उन्होंने कोयंबटूर में एक कॉलेज छात्र की हत्या का भी ज़िक्र किया और कहा कि इस मामले में 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मैं पुलिस विभाग में एक नया बदलाव लाना चाहता हूँ। कोयंबटूर कॉलेज में एक छात्र की हत्या के मामले में 36 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। हर अपराध के पीछे कई कारण होते हैं। विपक्षी पार्टियाँ ऐसी स्थितियों का इस्तेमाल सत्ताधारी सरकार पर आरोप लगाने के लिए करती हैं। युवाओं के एक बड़े भाई के तौर पर, मैं तमिलनाडु में ड्रग कल्चर को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ, मुख्यमंत्री ने कहा। सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस का वादा किया मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार पर अपनी सरकार का रुख़ भी दोहराया और कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने युवाओं में ड्रग्स के इस्तेमाल के बढ़ने के पीछे साथियों के दबाव (पीयर प्रेशर) को एक कारण बताया और इसे रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। भ्रष्टाचार के प्रति हमारी ज़ीरो टॉलरेंस की नीति है। साथियों का दबाव तमिलनाडु में ड्रग कल्चर का एक कारण बन गया है। सभी 37 ज़िलों में एंटी-ड्रग स्क्वाड बनाए गए हैं। NDPS एक्ट के तहत, पिछले तीन महीनों में चेन्नई में 330 मामले दर्ज किए गए और 556 लोगों को गिरफ़्तार किया गया। महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ अपराधों के पीछे कई कारण होते हैं। हमारा मकसद अपराध होने से पहले ही उन्हें रोकना है। इस सरकार ने महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों को रोकने के लिए 'सिंगप्पेन स्पेशल फ़ोर्स' का गठन किया है, उन्होंने आगे कहा। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर फ़ोकस विजय ने अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ अपराधों को रोकने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं को निशाना बनाने वाले अपराधों के ख़िलाफ़ रोकथाम के उपायों को मज़बूत करने के प्रयासों के तहत 'सिंगप्पेन स्पेशल फ़ोर्स' की स्थापना की है। उनकी ये बातें सार्वजनिक सुरक्षा और राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विधानसभा में चल रही व्यापक बहस के दौरान सामने आईं। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया में तीन मुख्य क्षेत्रों पर ज़ोर दिया गया: कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना, ड्रग्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई को मज़बूत करना और समाज के कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा के लिए रोकथाम-आधारित पुलिसिंग पर ध्यान केंद्रित करना। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
South India Weather: आज Tamil Nadu समेत कई राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट|
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां चल रही हैं, जिसके तहत कई क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है।
Tamil Nadu में पुलिसकर्मियों का कार्यभार घटाने और Welfare Schemes को सरकार देगी प्राथमिकता
चेन्नई, छह सितंबर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने रविवार को ‘पुलिस दिवस’ के अवसर पर पुलिस बल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सरकार पुलिसकर्मियों का कार्यभार कम करने, आधुनिक प्रौद्योगिकी को पुलिस के कामकाज में शामिल करने और पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देगी। मुख्यमंत्री ने समाज में शांति बनाए रखने और कानून का शासन सुनिश्चित करने के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाले पुलिस बल के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे राज्य के पुलिसकर्मियों का साहस और त्याग सदैव सराहनीय रहा है। वे न केवल अपराधों की रोकथाम और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम करते हैं, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों के जीवन, संपत्ति और अधिकारों की रक्षा के लिए भी अग्रिम पंक्ति में बहादुरी से डटे रहते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार पुलिसकर्मियों के कार्यभार को कम करने, आधुनिक प्रौद्योगिकी सुविधाओं के माध्यम से उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने तथा पुलिस अधिकारियों एवं उनके परिवारों के लिए आवश्यक कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देगी।’’विजय ने शांतिपूर्ण और सुरक्षित तमिलनाडु के निर्माण के लिए जनता से पुलिस के साथ विश्वास और सद्भाव के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।
Mobiles Ban in Tamil Nadu temple: तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में मोबाइल बैन का एक हैरान करने वाला नतीजा सामने आया है। फोन पर रोक का असर अब युवा श्रद्धालुओं की संख्या पर दिखाई देने लगा है। 1 सितंबर से राज्य के 52 प्रमुख मंदिरों में स्मार्टफोन ले जाने पर बैनलगाया गया है। इसके बाद कांचीपुरम स्थित देवराजस्वामी मंदिर में युवाओं की संख्या कम होने और कुल श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 20 फीसदी तक गिरावट की बात सामने आई है। एक रिसर्च रिपोर्ट में एक बात सामने आई है कि सेल्फी और कॉन्टेंट क्रिएशन के लिए जाने वाले तमिलनाडु के युवाओं ने मंदिर जाना कम कर दिया है'दैनिक भास्कर' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर प्रशासन का कहना है कि वह अपनी ओर से कोई नया नियम लागू नहीं कर रहा। बल्कि मद्रास हाई कोर्ट के पुराने आदेश को लागू कर रहा है। मंदिर परिसर में मोबाइल फोन जमा कराने के लिए काउंटर बनाए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले जहां युवाओं की अच्छी संख्या नजर आती थी, अब बुजुर्ग श्रद्धालु ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।फोन बैन के बाद बदला मंदिर का नजाराकांचीपुरम के देवराजस्वामी मंदिर में पहले कई युवा दर्शन के साथ-साथ सेल्फी, वीडियो और सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाने आते थे। मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था लागू होने के बाद युवाओं की मौजूदगी कम दिखाई देने लगी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोबाइल जमा कराने वाले काउंटर पर शुरुआती दिनों में लंबी कतारें भी लगीं। हालांकि, अब वहां भी युवाओं की तुलना में बुजुर्ग श्रद्धालुओं की संख्या अधिक दिखाई दे रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 20 फीसदी तक कमी देखी गई है।'हाई कोर्ट के आदेश का कर रहे पालन'मंदिर प्रशासन के अधिकारी आर. गणेशन ने फोन बैन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में भक्तों की संख्या कम होने की एक वजह युवाओं का कम आना हो सकती है। लेकिन मंदिर की पवित्रता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, यह फैसला मंदिर प्रशासन ने अपनी तरफ से नहीं लिया है। मद्रास हाई कोर्ट के दिसंबर 2022 के आदेश के तहत मंदिरों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लागू की जा रही है।क्यों लगाया गया मोबाइल पर प्रतिबंध?मंदिरों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। खासतौर पर सेल्फी, फोटो, वीडियो और रील्स बनाने को लेकर मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं की आपत्तियां रही हैं। सरकार और मंदिर प्रशासन का तर्क है कि मोबाइल फोन की वजह से मंदिरों का आध्यात्मिक माहौल प्रभावित होता है। कई श्रद्धालु दर्शन के बजाय फोटो और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने में व्यस्त रहते हैं। इसी वजह से मंदिरों की पवित्रता और शांत वातावरण बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।23 साल के अरुण ने कहा- फोन के बिना अनुभव अधूराभास्कर की रिपोर्ट में 23 वर्षीय अरुण कुमार का उदाहरण दिया गया है। वह तीन दोस्तों के साथ मंदिर पहुंचे थे। उन्हें मंदिर में मोबाइल जमा कराने के नियम की जानकारी थी। लेकिन उन्होंने इसे लेकर असहमति जताई। अरुण के मुताबिक, मंदिर और परंपरा को समझने के लिए सिर्फ दर्शन ही काफी नहीं हैं।आज के दौर में लोग मंदिरों की वास्तुकला और माहौल की तस्वीरें लेकर उन्हें सोशल मीडिया परशेयर करते हैं। उनका कहना था कि फोन के बिना उन्हें मंदिर आने का अनुभव अधूरा लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर फोन रखने के लिए कुछ रुपये देने पड़ें और उसके बाद फोटो या रिकॉर्डिंग भी न कर सकें तो वे ऐसे मंदिर जाना पसंद करेंगे जहां मोबाइल को लेकर इतने सख्त नियम न हों।19 साल की प्रिया को भी हुई परेशानीरिपोर्ट में 19 वर्षीय प्रिया राजेश का भी जिक्र है। वह अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंची थीं। मोबाइल जमा कराने के लिए काउंटर पर देने के बाद वह मंदिर के अंदर चली गईं। प्रिया के मुताबिक, वह दर्शन के लिए आई थीं। लेकिन मंदिर के अंदर फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर फोन अंदर ले जाने की इजाजत होती तो वह मंदिर की तस्वीरें ले सकती थीं और बाद में उन्हें सोशल मीडिया परशेयर कर सकती थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर इतना सुंदर है तो उसकी तस्वीरें क्यों नहीं ली जा सकतीं? साथ ही उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवाओं को मंदिरों से जोड़ने के बजाय इस तरह के नियम उन्हें दूर कर सकते हैं।5 रुपये में जमा हो रहा है मोबाइल52 मंदिरों में मोबाइल लेकर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए जमा काउंटर बनाए गए हैं। कई जगह प्रति मोबाइल 5 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। हालांकि यह शुल्क हर मंदिर में अनिवार्य नहीं है। इसे लेकर मंदिरों को व्यवस्था के अनुसार निर्णय लेने की छूट दी गई है। मोबाइल फोन की सुरक्षा के लिए मंदिरों में लॉकर/डिपॉजिट काउंटर बनाए गए हैं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि मोबाइल जमा कराने या वापस लेने के लिए श्रद्धालुओं को बहुत देर तक कतार में न खड़ा होना पड़े।एक अहम छूट भी लागूमोबाइल बैन पूरी तरह हर तरह के फोन पर लागू नहीं है। बिना कैमरे वाले सामान्य मोबाइल फोन को लेकर अलग व्यवस्था है। ऐसे फोन अंदर ले जाने की अनुमति दी गई है। प्रतिबंध मुख्य रूप से कैमरा वाले स्मार्टफोन पर है। इसके अलावा बाद में तमिलनाडु के HR&CE मंत्री एस. रमेश ने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों को साथ लेकर चलने वाली महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। भारी भीड़ वाले त्योहारों के दिनों में भी मोबाइल जमा कराने को लेकर अलग व्यवस्था की जा सकती है।क्या दूसरे मंदिरों में भी दिखेगा असर?तमिलनाडु के कई बड़े मंदिरों में पहले से ही मोबाइल फोन पर प्रतिबंध या सीमाएं लागू थीं। अब 52 प्रमुख मंदिरों में इस व्यवस्था को लागू किया गया है। तिरुचि में भी श्रद्धालुओं ने नियम का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने अधिक डिपॉजिट काउंटर और बेहतर व्यवस्था की मांग की है। तमिलनाडु सरकार ने राज्य भर के 52 मंदिरों में भक्तों के स्मार्टफोन ले जाने पर रोक लगा दी है। यह रोक मंगलवार, 1 सितंबर से लागू हो गई है।ये भी पढ़ें-Iran-America War Update: अमेरिका-ईरान की जंग ने लिया खतरनाक मोड़! ईरानी सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी युद्धपोतों को बनाया निशानाक्यों लगाया गया बैन?हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने यह आदेश इसलिए जारी किया ताकि भक्त मंदिर परिसर के अंदर फोटो और वीडियो न ले सकें। HR&CE मंत्री रमेश ने पिछले सप्ताह इस रोक की घोषणा करते हुए कहा था कि जिन भक्तों को मंदिर के अंदर स्मार्टफोन ले जाने की जरूरत है, उन्हें प्रति फोन 5 रुपये काचार्ज देना होगा। जो भक्त अपने फोन जमा करना चाहेंगे, उनके लिए मंदिरों में लॉकर की सुविधा दी जाएगी। बिना कैमरे वाले फोन को बिना किसी रोक-टोक के मंदिर के अंदर ले जाने की अनुमति होगी।मंत्री के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भक्त शांति से प्रार्थना कर सकें। HR&CE विभाग ने साफ किया कि 5 रुपये का शुल्क कमाई करने के लिए नहीं है। बल्कि इसका इस्तेमाल लॉकर और उससे जुड़ी सुविधाओं के रखरखाव के लिए किया जाएगा। हालांकि, इस रोक से मंदिर के कर्मचारियों के मन में भक्तों द्वारा जमा किए गए फोन की सुरक्षा की जिम्मेदारी को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
Tamil Nadu CM Thalapathy Vijay Temple Rule: TVK सरकार के फैसले की चर्चा जोरों पर
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Tamil Nadu CM Vijay ने क्या मंदिरों से दानपेटी हटाने वाले फैसला लिया, Insta Reels का पूरा सच। TVK
Tamil Nadu CM Vijay ने क्या मंदिरों से दानपेटी हटाने वाले फैसले लिया, Insta Reels का पूरा सच। TVK तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं
CM Vijay Thalapathy की सरकार ने महिलाओं और किसानों के लिए किए बड़े ऐलान। Tamil Nadu Assembly
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मिलने वाले सालाना स्वास्थ्य बीमा कवर को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है
CM Thalapathy Vijay का फैसला, Vande Mataram से पहले Tamil Thai Valthu बजेगा। Tamil Nadu
CM Thalapathy Vijay का फैसला, Vande Mataram से पहले Tamil Thai Valthu बजेगा। Tamil Nadu
Tamil Nadu CM Vijay के खिलाफ Trisha को लेकर विपक्ष ने फिर कसा तंज। Udhayanidhi Stalin। AIADMK
तमिलनाडु की सियासत में अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर बयानबाजी का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। AIADMK के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए तृषा को लेकर तंज कसा, जिसके बाद उनके बयान पर विवाद शुरू हो गया। तृषा के फैन्स ने भी विरोध जताया और मदुरै में पोस्टर लगाए।
अभिनेत्री से नेता बनीं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत ने Gen Z (युवा पीढ़ी) पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर चौतरफा घिरने के बाद अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। जंतर-मंतर पर CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर विवादित बयान देने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहीं कंगना ने अब युवाओं की जमकर तारीफ की है और उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया है। ANI के अनुसार, कंगना ने इस बात को खारिज कर दिया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों का एक छोटा समूह पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। कंगना रनौत ने Gen Z पर अपना रुख बदला, उन्हें देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया। उन्होंने आगे कहा, हमारी सरकार इतने लंबे समय से Gen Z के जनादेश के कारण सत्ता में है... यह सच नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले केवल 10-15 लोग ही Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। आज, झारखंड में बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से व्यवहार कर रहे हैं। देश के कई युवा जो मेडल जीतकर लौटे हैं, उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री और देश को समर्पित किया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu CM Vijay Sanghita Divorce | विजय की पत्नी संगीता ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने मामले को किया निपटाया उन्होंने कहा, कुछ ही लोग हैं जो Gen Z की छवि खराब कर रहे हैं। Gen Z हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें अपनी पीढ़ी पर गर्व है। Gen Z पर टिप्पणी को लेकर कंगना रनौत को ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा। जानकारी के लिए बता दें कि 'तनु वेड्स मनु' की एक्ट्रेस ने हाल ही में CJP विरोध प्रदर्शन पर अपनी आपत्ति जताते हुए एक पोस्ट शेयर किया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसमें सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनकी फिल्मों में निभाए गए कुछ किरदारों के क्लिप शेयर किए। कंगना ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि लोग स्क्रीन पर उनके निभाए गए किरदारों की तुलना असल ज़िंदगी में युवाओं के व्यवहार से गलत तरीके से कर रहे थे। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच ऑनलाइन आलोचना तब शुरू हुई जब उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गंदगी, कचरा और बदसूरती का प्रदर्शन बताया था। कंगना रनौत का हालिया काम काम की बात करें तो, कंगना रनौत हाल ही में मनोज तापड़िया द्वारा निर्देशित 'भारत भाग्य विधाता' में नज़र आई थीं। यह फिल्म, जो 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी, आखिरकार अपनी OTT रिलीज़ की तारीख पा चुकी है। यह फ़िल्म 14 अगस्त, 2026 से Zee5 प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होगी। इसके बाद वह अपनी हिट फ़िल्म 'क्वीन' (जो 2014 में रिलीज़ हुई थी) के सीक्वल में नज़र आएँगी। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक के बहुचर्चित कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आया है। संगीता ने चेंगलपट्टू जिला अदालत में दाखिल अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली है। अर्जी वापस लिए जाने के बाद अदालत ने इस मामले का औपचारिक रूप से निपटारा कर दिया है। विजय और संगीता के तलाक के मामले से जुड़ी घटनाएँ संगीता ने फरवरी में तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। अपनी अर्जी में उन्होंने आरोप लगाया कि विजय का एक महिला अभिनेत्री के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (विवाह-बाहर संबंध) था, जिसके बारे में उन्हें 2021 में पता चला। अर्जी में यह भी कहा गया कि विजय के यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि वह रिश्ता खत्म कर देंगे, उन्होंने बिना किसी पछतावे के इसे जारी रखा। दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया कि विजय ने धीरे-धीरे संगीता को अपनी सामाजिक और पेशेवर ज़िंदगी से दूर कर दिया, जबकि वे उस अभिनेत्री के साथ विदेश यात्राएँ करते रहे और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। अर्जी में यह भी दावा किया गया कि इन मौकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर नियमित रूप से शेयर की जाती थीं, और विजय ने न तो उनसे इनकार किया और न ही उन पर कोई आपत्ति जताई। संगीता के अनुसार, इन पोस्ट्स की वजह से उन्हें और उनके दो बच्चों, जेसन संजय और दिव्या साशा को बार-बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने विजय पर उन्हें पहले मिलने वाली आर्थिक मदद और सुविधाओं को बंद करने और उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का भी आरोप लगाया, जिसमें उनकी घूमने-फिरने की आज़ादी पर रोक लगाना भी शामिल था। संगीता ने आगे आरोप लगाया कि विजय के लगातार व्यवहार और 2024 में सोशल मीडिया पर सामने आए विवादों के कारण उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा। उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी असल में टूट चुकी थी और सिर्फ़ कागज़ों पर ही बची थी। अपनी अर्जी में उन्होंने कहा कि रिश्ता अब सुधरने लायक नहीं रहा और इससे उन्हें मानसिक पीड़ा, अपमान, शर्मिंदगी और तकलीफ़ के अलावा कुछ नहीं मिला। तलाक की अर्जी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले दाखिल की गई थी। हालाँकि, चुनाव जीतने और मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय की पत्नी संगीता ने अर्जी वापस लेने का फ़ैसला किया। विजय और संगीता के तलाक के मामले के बारे में और जानकारी जून 2026 में, चेंगलपट्टू परिवार कल्याण अदालत ने विजय और संगीता के तलाक के मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद, अदालत ने मामले को 7 अगस्त तक के लिए टाल दिया था। सुनवाई से पहले के हफ़्तों में, ऐसी खबरें आई थीं कि शायद यह जोड़ा सुलह की ओर बढ़ रहा है। इस बात पर भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे कोर्ट में वर्चुअली पेश होंगे या खुद आएंगे। संगीता ने पारिवारिक घर में रहना जारी रखने की मांग की इस साल की शुरुआत में, संगीता ने चेंगलपट्टू की ज़िला अदालत में एक अर्ज़ी दायर की। इसमें उन्होंने चेन्नई के नीलांकरई में मौजूद अपने पारिवारिक घर में तब तक रहने की इजाज़त मांगी, जब तक कि तलाक की कार्यवाही पूरी न हो जाए। 22 फरवरी को दी गई यह अर्ज़ी, स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत दायर उनकी मुख्य तलाक की याचिका का हिस्सा थी। शादी खत्म करने की मांग के साथ-साथ, उन्होंने स्थायी गुजारा-भत्ता (एलिमनी) और नीलांकरई वाले घर में तब तक रहने का अधिकार भी मांगा, जब तक कि मामले का फैसला न हो जाए या उन्हें उसी स्तर का कोई दूसरा घर न मिल जाए। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच अपनी अर्ज़ी में संगीता ने कहा कि उनकी और विजय की शादी को 26 साल हो चुके हैं और उन्होंने अपना जीवन घर संभालने और अपने दो बच्चों - 25 साल के जेसन संजय और 20 साल की दिव्या साशा - की परवरिश में लगाया है। उन्होंने तर्क दिया कि शादी के दौरान वे विजय की जीवनशैली के हिसाब से रहीं और उनके पास ऐसा कोई दूसरा घर नहीं है जो उस जीवनशैली के स्तर का हो। याचिका में विजय की एक प्रमुख तमिल अभिनेता और भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के संस्थापक के तौर पर उनकी सार्वजनिक पहचान का भी ज़िक्र किया गया। संगीता के अनुसार, कोर्ट जाने से पहले उन्होंने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे कोशिशें नाकाम रहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजय के वकील ने उन्हें बताया कि अगर वे तलाक के लिए आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें नीलांकरई वाले घर में रहने की इजाज़त नहीं दी जाएगी, जिससे उन्हें अपना घर खोने की चिंता सताने लगी। इसे भी पढ़ें: The Odyssey India Box Office | क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' का जलवा कायम! तीसरे हफ्ते में बटोरे ₹29 करोड़, जल्द पार करेगी ₹200 करोड़ का आंकड़ा बायोमेडिकल साइंस में डिग्री रखने वालीं और यूके की नागरिक संगीता ने कहा कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए कोई उपयुक्त वैकल्पिक जगह नहीं है। इसलिए, उन्होंने एक अंतरिम आदेश की मांग की ताकि वे कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक सभी मौजूदा सुविधाओं के साथ नीलांकरई वाले घर में रह सकें। यह घर विजय के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से गहराई से जुड़ा होने के कारण भी महत्वपूर्ण है। विजय अभी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उनकी अक्सर साथ काम करने वालीं को-स्टार त्रिशा कृष्णन भावुक नज़र आईं। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi

