कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में पिस्तौल के बल पर मारपीट कर NRI की किडनेपिंग और लूटपाट करने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान सुखदेव सिंह निवासी कोटखेरा जिला अमृतसर पंजाब के रूप में हुई। इस मामले में पुलिस ने एक साल पहले हरदीप सिंह निवासी रायपुर खुर्द जिला अमृतसर को पकड़ा था। NRI सतविंदर सिंह निवासी धीन जिला अंबाला ने 25 फरवरी 2025 पुलिस को बताया था कि वह करीब 24 साल से इटली में रह रहा है। उसके पास इटली की नागरिकता है। यहां वह वैरोना शहर में खेती-बाड़ी का काम करता है। वह अपने गांव धीन में आता-जाता रहता है। वह 24 फरवरी को इटली से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा था। गांव के लिए टैक्सी बुक की अगली सुबह उसने दिल्ली एयरपोर्ट से अपने गांव धीन के लिए टैक्सी बुक की। दिल्ली से अपने गांव जाते हुए NH-44 पर धंतौड़ी गांव के पास पहुंचा, तो पीछे से आई गाड़ी ने उनकी कार का रास्ता रोक लिया। उनकी कार रुकी तो दूसरी गाड़ी से 5/6 युवक नीचे उतरे और ड्राइवर के साथ मारपीट करने लगे। उसे घसीट कर अपनी कार में डाला उन युवकों ने उसे कार से नीचे उतारकर पिस्तौल के बल पर उसे अपनी कार में बैठाकर अम्बाला की तरफ चल दिए। रास्ते में उन्होंने उसकी 2 सोने की चेन, 2 मोबाइल और कैश लूट लिया। उसके बाद आरोपी उसे इंडियन ऑयल डिपो अम्बाला कैंट के पास छोड़कर फरार हो गए। शिकायत पर थाना शाहाबाद में केस दर्ज कर जांच सीआईए-1 को सौंपी गई। 2 आरोपी पकड़े गए सीआईए-1 ने मामले की जांच करते हुए 2 मार्च 25 को आरोपी हरदीप को पकड़ा था। अब पुलिस टीम ने दूसरे आरोपी सुखदेव सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। साथ उसके साथियों की तलाश की जा रह है।
NRI मामा ने भरा 1 करोड़ का मायरा:51 लाख रुपए कैश, 21 लाख की ज्वेलरी के साथ कपड़े व गिफ्ट भी दिए
NRI (अप्रवासी भारतीय) मामा ने एक करोड़ का मायरा (भात) भरा है। 10 मार्च को निभाई गई रस्म के दौरान कैश के अलावा करीब 21 लाख की ज्वेलरी के साथ कपड़े और अन्य गिफ्ट भी दिए हैं। यह पूरा मामला सीकर के कुंडलपुर का है। रानोली क्षेत्र की भरथा वाली कोठी का यादव परिवार पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार बहन मोहिनी देवी के घर (कुंडलपुर) मायरा लेकर पहुंचा था। परिवार सहित दुबई रहने वाले कैलाश यादव ने मायरा भरा। इस दौरान कैलाश के बड़े भाई नारायण यादव और छोटे भाई छोटेलाल यादव भी मौजूद रहे। कुंडलपुर के रहने वाले डॉ. मनोज की शादी बाय (झुंझुनूं) की डॉ. अंजलि से 11 मार्च को हुई थी। डॉ. मनोज के तीन मामा (कैलाश, नारायण, छोटेलाल) हैं। 500-500 रुपए के नोट की 102 गड्डियां दींदूल्हे के मामा कैलाश यादव ने बताया- मायरे में 51 लाख रुपए नकद, करीब 21 लाख रुपए की ज्वेलरी के साथ कपड़े व अन्य गिफ्ट दिए गए। कुल मिलाकर एक करोड़ रुपए के आसपास मायरा भरा है। दूल्हे के पिता मदन खातोदिया की पलसाना में कपड़े की दुकान है। भात में 500-500 रुपए के नोट की 102 गड्डियां दी गईं। लोगों ने दूल्हे के मामा की सराहना कीडॉ. मनोज के मामा का परिवार रानोली की तन में भरथा वाली कोठी का रहने वाला है। सबसे बड़े मामा नारायण यादव और सबसे छोटे मामा छोटेलाल यादव गांव में रहते हैं। दूसरे नंबर के मामा कैलाश यादव परिवार सहित दुबई रहते हैं। कैलाश और छोटेलाल प्रॉपर्टी डीलर हैं। कैलाश जादम ने कहा- माता-पिता से वादा किया था कि बहनों के लिए क्षमता से ज्यादा सहयोग करेंगे। भांजे/भांजी की शादी में अच्छा मायरा भरना भाइयों की सामूहिक सोच थी। बहन मोहिनी देवी ने तीनों भाइयों को खूब स्नेह दिया। दूल्हे के पिता मदन खातोदिया ने कहा कि ये मामा-भांजे और बहन-भाई प्रेम का प्रतीक है। बदलते दौर में बहन-बेटियों को लड़कों से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। ये समाज के लिए पॉजिटिव सोच है। 'मायरा या भात' क्या है?बहन के बच्चों की शादी होने पर ननिहाल पक्ष की ओर से मायरा भरा जाता है। इसे आम बोलचाल की भाषा में भात भी कहते हैं। इस रस्म में ननिहाल पक्ष की ओर बहन के बच्चों के लिए कपड़े, गहने, रुपए और अन्य सामान दिया जाता है। इसमें बहन के ससुराल पक्ष के लोगों के लिए भी कपड़े और जेवरात आदि होते हैं। बुजुर्गों का मानना है कि 'मायरा या भात' को राजस्थानी संस्कृति में बहन-बेटी के घर में आयोजित होने वाले सबसे बड़े समारोह पर आर्थिक संबल देने से जोड़ा गया है। भले ही कानून ने आज बेटों और बेटियों को माता-पिता की जायदाद में बराबरी का हिस्सा दिया हुआ है, इसके बावजूद भी अधिकतर बहनें कभी इस पर अपना दावा नहीं करती है। उनके इसी स्वेच्छा से किए त्याग की भरपाई भाइयों द्वारा 'मायरे' में दी गई भेंट से भी करना बताया गया है। -------- मायरा भरने की यह खबर भी पढ़िए…. रिटायर्ड टीचर ने भरा 2 करोड़ का मायरा, 1 करोड़ कैश, गोल्ड ज्वेलरी और प्लॉट दिया नागौर में रिटायर्ड टीचर ने अपने दोहिते की शादी में दो करोड़ रुपए का मायरा (भात) भरा। 250 कारों के काफिले के साथ परिवार सभी रस्मों को निभाने पहुंचा। पढ़ें पूरी खबर...
तरनतारन के NRI दंपती की दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट में मौत हो गई। वह अमेरिका से अपने घर तरनतारन लौट रहे थे। उन्होंने दिल्ली एयरपोर्ट से टैक्सी किराए पर ली थी। जो पानीपत में मिडिल लेन में खड़े ट्रक के पीछे घुस गई। दंपती का अमेरिका में ट्रासंपोर्ट का कारोबार है। दंपती को पहले US से सीधे अमृतसर आना था लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध की वजह से उनकी टिकट कैंसिल हो गई थी। जिस वजह से वे वाया दिल्ली आ रहे थे। उनके इकलौते बेटे की भी कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। वहीं अब परिवार में उनकी बेटी रह गई है, जो अमेरिका में रहती है। अमेरिका से दिल्ली आए, टैक्सी से तरनतारन आ रहे थेजानकारी के मुताबिक रंजीत सिंह संधू (63) अमेरिका में ट्रांसपोर्ट का कारोबार करते हैं। बुधवार सुबह वह पत्नी सतिंदर कौर (61) के साथ दिल्ली एयरपोर्ट से घर लौट रहे थे। उन्होंने दिल्ली से तरनतारन के मरगिंदपुरा के लिए टैक्सी किराए पर ली थी। दिल्ली से चलकर वे जब सुबह करीब 5.40 बजे पानीपत पहुंचे तो वहां हाईवे पर घना कोहरा था। इस दौरान रोहतक बाइपास पर जियो पेट्रोल पंप के पास टैक्सी ड्राइवर को घने कोहरे के कारण बीच रोड पर खड़ा ट्रक नहीं दिखाई दिया। कार सीधे ट्रक में घुस गई। इससे टैक्सी के परखच्चे उड़ गए और दंपती बुरी तरह से जख्मी हो गए। जब तक उन्हें टैक्सी से निकाला जाता, दोनों की मौत हो चुकी थी। युद्ध के कारण बदली थी टिकटपरिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, दंपती की किस्मत उन्हें मौत के करीब खींच लाई। पहले उनकी सीधी US से अमृतसर के लिए फ्लाइट बुक थी, लेकिन अमेरिका-इजरायल के ईरान से युद्ध के कारण वह टिकट कैंसिल हो गई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लिए दोबारा टिकट बुक की और वहां से टैक्सी के जरिए घर जाने का फैसला किया, जो उनके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ। परिवार पर दुखों का पहाड़NRI दंपती के इकलौते बेटे की 6 साल पहले ही हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। अब हादसे के बाद अमेरिका में उनकी केवल एक बेटी रह गई है, जिसके सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। हादसे में टैक्सी ड्राइवर की जान चमत्कारिक रूप से बच गई है। पुलिस कार्रवाई और ड्राइवर फरारघटना के बाद आरोपी ट्रक ड्राइवर मौके पर ट्रक छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लिया। पुलिस ने पानीपत के सिविल अस्पताल में शवों का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। अज्ञात ट्रक ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से वाहन खड़ा करने और गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ट्रक नंबर के आधार पर मालिक और फरार ड्राइवर की तलाश कर रही है।
मोगा जिले में बाघापुराना पुलिस ने जमीन बिक्री से जुड़े धोखाधड़ी के एक मामले में धोलिया कला निवासी पिता-पुत्र के खिलाफ केस दर्ज किया है। बता दे कि यह कार्रवाई दो एनआरआई भाइयों की शिकायत पर जांच के बाद की गई है। मामले की जांच सहायक थानेदार जगतार सिंह कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कनाडा निवासी गगनदीप सिंह और संदीप सिंह गिल ने जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि बलजीत सिंह ने अपनी जमीन पहले उनके दादा गमदूर सिंह को बेची थी। इस जमीन सहित कुल 12 कनाल 10 मरले का इंतकाल (म्यूटेशन) 28 मार्च 2007 को उनके दादा के नाम पर हो गया था। जमीन की धोखाधड़ी का आरोप शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बलजीत सिंह ने धोखाधड़ी और बेईमानी से उक्त जमीन में से 18 कनाल 5 मरले जमीन अपने बेटे कुलदीप सिंह के नाम पर 29 जून 2022 को सब रजिस्ट्रार बाघापुराना के कार्यालय में तब्दील करवा दी। उन्होंने कहा कि पिता-पुत्र ने कथित मिलीभगत कर सब कुछ जानते हुए भी उनके साथ धोखाधड़ी की है, जिससे बलजीत सिंह के बेटे को लाभ हुआ। दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया कि उनके दादा द्वारा खरीदी गई जमीन पर बलजीत सिंह खेती करता था और उन्हें ठेका देता था। प्राइवेट अकाउंटेंट सुखविंदर कुमार ने अपने बयान में पुष्टि की है कि बलजीत सिंह पहले डेढ़ एकड़ जमीन का ठेका गमदूर सिंह और उनके परिवार को देता रहा है। जल्द होगी गिरफ्तारी जांच पूरी होने के बाद, थाना बाघापुराना में कथित आरोपी कुलदीप सिंह और उसके पिता बलजीत सिंह, निवासी धोलिया कला के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
पानीपत शहर में दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे पर रोहतक बाइपास स्थित जियो पेट्रोल पंप के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ। मंगलवार को कोहरे के कारण बीच सड़क (मिडल लेन) पर खड़े एक खराब ट्रक में तेज रफ्तार टैक्सी पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टैक्सी के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार एनआरआई (NRI) पति-पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई। अमेरिका से अमृतसर के लिए निकले थे मृतकों की पहचान रंजीत सिंह संधू (63) और उनकी पत्नी सतिंदर कौर (61) के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, दंपति अमेरिका में ट्रांसपोर्ट का बड़ा कारोबार चलाते थे। वे अमेरिका से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे और वहां से अमृतसर जाने के लिए उन्होंने टैक्सी किराए पर ली थी। सुबह करीब 5:40 बजे जब उनकी टैक्सी पानीपत पहुंची, तो घने कोहरे के कारण चालक को बीच सड़क पर खड़ा ट्रक दिखाई नहीं दिया और यह भीषण भिड़ंत हो गई। युद्ध के कारण बदली थी टिकट परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, दंपती की किस्मत उन्हें मौत के करीब खींच लाई। पहले उनकी सीधी अमृतसर के लिए फ्लाइट बुक थी, लेकिन अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण वह टिकट कैंसिल हो गई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लिए दोबारा टिकट बुक की और वहां से टैक्सी के जरिए घर जाने का फैसला किया, जो उनके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ। परिवार पर दुखों का पहाड़ इस परिवार की कहानी अत्यंत हृदयविदारक है। दंपती के इकलौते बेटे की महज 6 साल पहले ही हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। अब हादसे के बाद अमेरिका में उनकी केवल एक बेटी रह गई है, जिसके सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। हादसे में टैक्सी ड्राइवर की जान चमत्कारिक रूप से बच गई है। पुलिस कार्रवाई और ड्राइवर फरार घटना के बाद आरोपी ट्रक ड्राइवर मौके पर ट्रक छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लिया। पुलिस ने पानीपत के सिविल अस्पताल में शवों का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। अज्ञात ट्रक ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से वाहन खड़ा करने और गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ट्रक नंबर के आधार पर मालिक और फरार ड्राइवर की तलाश कर रही है।
प्रवासी भारतीय दिवस : गांधीजी की विरासत से वैश्विक भारत तक
इतिहास की कुछ तिथियां केवल अतीत की स्मृति नहीं, भविष्य की दिशा भी तय करती हैं

